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शैतानी प उन दोनोंने हेलनकी बातपर काम ही न दिया और मठरी मोटरी उठाकर चलनेको तैयार हुए । हेलनने अपने आप जाकर लिरोके दरवाजेकी रस्सी खींची। भीतरसे आवाज आयी- चली आओ । हेलनने कमरेमें प्रवेश किया। भीतर बिल्कुल अघकार छा रहा था। उसने बत्ती जलाकर देखा कि लिये अपने लिख नेकें टेबुलके पास कुर्सीपर मन मारे बैठे हुए हैं । कमरेकी चीजें इधर उधर बिखरी हुई है। मालूम होता था, कि पुलीसकी तलाशी के बाद घरमें झाडू नहीं पड़ी है। हेलनने लिरोके निकट जाकर देखा तो उनका चेहरा बिल्कुल बदला हुआ था। बाल बिखरे हुए, मानों कितने ही दिनोंसे उनपर कंधी ही न फिरी हो । आंखों में खुमारी छायी हुई थी । थोड़ा बिसकुट और शराब टेबुलपर रखी हुई है। हेलन सहानुभूतिपूर्ण गद्गद् कण्ठसे बोली- क्या लिरो ! तुम मुझसे बोलना नहीं चाहते ? लिरो- क्या तुमसे मेरी दुश्मनी है ? किन्तु - हेलनने जोर देकर कहा - हां, देखती तो हूं। तुम दिन दिन गम्भीर होते जा रहे हो। तुम्हारी इस एकान्तप्रियता को देखकर सचमुच, मुझे डर हो रहा है। अभी तुमने इन नौकरोंको जवाब क्यों दे दिया है ? लिरोने उदास भावसे कहा- जाने दो, कोई जरूरत नहीं ! मैं उन्हें नहीं चाहता। तुम कुछ भी चिन्ता न करो, मुझे कोई तकलीफ न होगी। हेलन-नहीं, तुम ऐसा पागलपन न करो। मैं सलाह देती हू' ? तुम कुछ दिनके लिये इस घरको छोड़ दो । लिरो - कभी नहीं, मैं इस जगहसे कहीं भी न हटूंगा। मैं प्रति मुहूर्त्त हीराके आगमनकी प्रतीक्षा कर रहा हूं। न जाने किस घड़ी वह आ जाय । इतना कहकर उन्होंने घड़ीकी सूईसे दिनके अवसानका अनुमानकर एक लम्बी आह भरी ! हेलनने भी मुख फेरकर वैसा ही किया और बोली-गार्न हमको मैं भेज देती हूं। वह कमरा साफ कर देगा। आज तुम हम लोगोंके साथ ही भोजन करोगे । क्यों ठीक है न ? लिरो - -नहीं नहीं, कोई जरूरत नहीं। मैं तुम्हें तकलीफ देना - हेलन बीच ही में आदेशके ढगपर बोल उठी-बस, मैं अभी गर्नहामको भेजती हूं! घर झाड़-बुहार कर साफ कर दे । तबतक तुम भोजनके लिये तैयार हो लो । इस समय हेनरी लिरो एक हाथ टेबुलपर रखे हुए लजासे फर्शकी ओर दृष्टि गड़ाये बैठे थे। बहुत दिनोंसे उन्हें किसी चीजका अभाव अनुभव हो रहा था । संसारमें उन्होंने अपने पौरुषसे, विद्या बुद्धिसे पर्याप्त उन्नति की थी। इस समय वह धन-मान और यशसे गौरवान्वित हो रहे थे। तथापि इन सब चीजोंके होते हुए उनके अन्तःकरणको पूर्ण शान्ति और सन्तोष ६) शैतानी - पञ्ज नहीं मिलता था । पारिवारिक सुख उनका बिलकुल दिखावटी था। दाम्पत्य प्रेम लालसामय और कापट्यपूर्ण का रूपांतर था। उन्होंने पहले यह समझने की चेष्टा की थी कि मेरी प्रकृति निर्जनता प्रिय है। इस विश्वासके वशवर्त्ती होकर उन्होंने अपना व्याह ऐसी युवतीले किया जो उनसे कुछ भी प्रत्याशा न रखे, जो अपने सुख-दुख आराम-चैनका अपने आप प्रबन्ध कर ले । थोड़े ही दिनों में उन्हें यह अनुभव हुआ कि नहीं मैं अपनी स्त्री को प्यार करता हूं। इस विश्वासके कारण कभी कभी उन्हें उसकी खबर न मिलनेपर उत्कण्ठा भी कम न होती थी परन्तु पीछे उनकी धारणा और विश्वासमें एक अपूर्व परिवर्त्तन हो गया। उन्हें अपनी भाबुकता और चिन्ताप्रणालीपर पूरा सन्दह होने लगा। उनके मनमें अब यह प्रश्न उठने लगा कि, मेरो मानसिक उदासीनताका कारण यशोलिप्सा तो न थी ? क्योंकि 'मार्टिन जिदाका चरित्रचित्रण करनेमें माथापच्ची करते हुए मैंने अपनी सारी जीवन-धाराको ही मार्टिन जिदा की तरह काल्पनिक और निःसार बना डालने की चेष्टाकी है । यही कारण मेरी मानसिक अशान्तिका तो नहीं है ? फिर कभी कभी उनके मनमें प्रश्न उठता- मेरी प्रकृति और मनोवृत्ति ही में तो कोई ऐसा अभाव नहीं है जिसको यह धन सम्पत्ति समााजिक गौरव और स्त्री इनमेंसे कोई भी पूरा नहीं कर सकता ? हेलन कम्बरलीके स्वर में आज कुछ नवीनता थी। इतने दिनके परिचित स्वरसे यह स्वर बिल्कुल भिन्न था। उसने
शैतानी प उन दोनोंने हेलनकी बातपर काम ही न दिया और मठरी मोटरी उठाकर चलनेको तैयार हुए । हेलनने अपने आप जाकर लिरोके दरवाजेकी रस्सी खींची। भीतरसे आवाज आयी- चली आओ । हेलनने कमरेमें प्रवेश किया। भीतर बिल्कुल अघकार छा रहा था। उसने बत्ती जलाकर देखा कि लिये अपने लिख नेकें टेबुलके पास कुर्सीपर मन मारे बैठे हुए हैं । कमरेकी चीजें इधर उधर बिखरी हुई है। मालूम होता था, कि पुलीसकी तलाशी के बाद घरमें झाडू नहीं पड़ी है। हेलनने लिरोके निकट जाकर देखा तो उनका चेहरा बिल्कुल बदला हुआ था। बाल बिखरे हुए, मानों कितने ही दिनोंसे उनपर कंधी ही न फिरी हो । आंखों में खुमारी छायी हुई थी । थोड़ा बिसकुट और शराब टेबुलपर रखी हुई है। हेलन सहानुभूतिपूर्ण गद्गद् कण्ठसे बोली- क्या लिरो ! तुम मुझसे बोलना नहीं चाहते ? लिरो- क्या तुमसे मेरी दुश्मनी है ? किन्तु - हेलनने जोर देकर कहा - हां, देखती तो हूं। तुम दिन दिन गम्भीर होते जा रहे हो। तुम्हारी इस एकान्तप्रियता को देखकर सचमुच, मुझे डर हो रहा है। अभी तुमने इन नौकरोंको जवाब क्यों दे दिया है ? लिरोने उदास भावसे कहा- जाने दो, कोई जरूरत नहीं ! मैं उन्हें नहीं चाहता। तुम कुछ भी चिन्ता न करो, मुझे कोई तकलीफ न होगी। हेलन-नहीं, तुम ऐसा पागलपन न करो। मैं सलाह देती हू' ? तुम कुछ दिनके लिये इस घरको छोड़ दो । लिरो - कभी नहीं, मैं इस जगहसे कहीं भी न हटूंगा। मैं प्रति मुहूर्त्त हीराके आगमनकी प्रतीक्षा कर रहा हूं। न जाने किस घड़ी वह आ जाय । इतना कहकर उन्होंने घड़ीकी सूईसे दिनके अवसानका अनुमानकर एक लम्बी आह भरी ! हेलनने भी मुख फेरकर वैसा ही किया और बोली-गार्न हमको मैं भेज देती हूं। वह कमरा साफ कर देगा। आज तुम हम लोगोंके साथ ही भोजन करोगे । क्यों ठीक है न ? लिरो - -नहीं नहीं, कोई जरूरत नहीं। मैं तुम्हें तकलीफ देना - हेलन बीच ही में आदेशके ढगपर बोल उठी-बस, मैं अभी गर्नहामको भेजती हूं! घर झाड़-बुहार कर साफ कर दे । तबतक तुम भोजनके लिये तैयार हो लो । इस समय हेनरी लिरो एक हाथ टेबुलपर रखे हुए लजासे फर्शकी ओर दृष्टि गड़ाये बैठे थे। बहुत दिनोंसे उन्हें किसी चीजका अभाव अनुभव हो रहा था । संसारमें उन्होंने अपने पौरुषसे, विद्या बुद्धिसे पर्याप्त उन्नति की थी। इस समय वह धन-मान और यशसे गौरवान्वित हो रहे थे। तथापि इन सब चीजोंके होते हुए उनके अन्तःकरणको पूर्ण शान्ति और सन्तोष छः) शैतानी - पञ्ज नहीं मिलता था । पारिवारिक सुख उनका बिलकुल दिखावटी था। दाम्पत्य प्रेम लालसामय और कापट्यपूर्ण का रूपांतर था। उन्होंने पहले यह समझने की चेष्टा की थी कि मेरी प्रकृति निर्जनता प्रिय है। इस विश्वासके वशवर्त्ती होकर उन्होंने अपना व्याह ऐसी युवतीले किया जो उनसे कुछ भी प्रत्याशा न रखे, जो अपने सुख-दुख आराम-चैनका अपने आप प्रबन्ध कर ले । थोड़े ही दिनों में उन्हें यह अनुभव हुआ कि नहीं मैं अपनी स्त्री को प्यार करता हूं। इस विश्वासके कारण कभी कभी उन्हें उसकी खबर न मिलनेपर उत्कण्ठा भी कम न होती थी परन्तु पीछे उनकी धारणा और विश्वासमें एक अपूर्व परिवर्त्तन हो गया। उन्हें अपनी भाबुकता और चिन्ताप्रणालीपर पूरा सन्दह होने लगा। उनके मनमें अब यह प्रश्न उठने लगा कि, मेरो मानसिक उदासीनताका कारण यशोलिप्सा तो न थी ? क्योंकि 'मार्टिन जिदाका चरित्रचित्रण करनेमें माथापच्ची करते हुए मैंने अपनी सारी जीवन-धाराको ही मार्टिन जिदा की तरह काल्पनिक और निःसार बना डालने की चेष्टाकी है । यही कारण मेरी मानसिक अशान्तिका तो नहीं है ? फिर कभी कभी उनके मनमें प्रश्न उठता- मेरी प्रकृति और मनोवृत्ति ही में तो कोई ऐसा अभाव नहीं है जिसको यह धन सम्पत्ति समााजिक गौरव और स्त्री इनमेंसे कोई भी पूरा नहीं कर सकता ? हेलन कम्बरलीके स्वर में आज कुछ नवीनता थी। इतने दिनके परिचित स्वरसे यह स्वर बिल्कुल भिन्न था। उसने
पंजाब में आए दिन सड़क हादसे में मौत होने की खबर सुनने को मिल रही हैं। जानकारी के अनुसार गत रात्रि संधवा के पास एक भयानक सड़क हादसा हो गया। जयपुर में रिंग रोड पर हुए भयानक हादसे में तीन लड़कियों समेत चार की मौत हो गई। ऑडी कार में सवार दो युवकों की हालत अब भी गंभीर है। झारखंड के गुमला जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां 5 साल की मासूम की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। फतेहगढ़ साहिब में एक भीषण हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें 2 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई है, जबकि सेना के 4 जवान घायल बताए जा रहे हैं। जिस कारण हर रोज हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था और वहां सड़क धंसने के आसार उत्पन्न हो गए थे। दसूहा के बलगान रोड पर आज दोपहर अचानक एक इंडिका कार में आग लग गई। कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
पंजाब में आए दिन सड़क हादसे में मौत होने की खबर सुनने को मिल रही हैं। जानकारी के अनुसार गत रात्रि संधवा के पास एक भयानक सड़क हादसा हो गया। जयपुर में रिंग रोड पर हुए भयानक हादसे में तीन लड़कियों समेत चार की मौत हो गई। ऑडी कार में सवार दो युवकों की हालत अब भी गंभीर है। झारखंड के गुमला जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां पाँच साल की मासूम की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। फतेहगढ़ साहिब में एक भीषण हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें दो पुलिस कर्मियों की मौत हो गई है, जबकि सेना के चार जवान घायल बताए जा रहे हैं। जिस कारण हर रोज हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था और वहां सड़क धंसने के आसार उत्पन्न हो गए थे। दसूहा के बलगान रोड पर आज दोपहर अचानक एक इंडिका कार में आग लग गई। कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
Ranchi : राज्य के खनिज बहुल क्षेत्रों में हो रहे अवैध माइनिंग एवं ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की कवायद राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. इस बाबत एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने खनिज बहुल इलाकों में चल रहे परिवहन वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. सरकार का मानना है कि इससे एक ही परिवहन चालान पर दुबारा खनिज की ढुलाई करने की गतिविधियों पर रोक लग सकेगा. सरकारी निर्देश मिलते ही खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी परिवहन वाहनों पर आगामी 15 नवंबर तक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. ऐसा नहीं करने वाले संबंधित वाहन खनिज बहुल क्षेत्रों से खनिजों की ढुलाई नहीं कर सकेंगे. बीते 25 अक्टूबर को खान निदेशक द्वारा राज्य के सभी खनन और सहायक खनन पदाधिकारी को पत्र जारी कर वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. यह प्रणाली राज्य स्तर पर एक डिवाइस से जुड़ा रहेगा, जो कि वाहन के पूर्व निर्धारित मार्ग की ट्रैकिंग भी करेगा. इससे एक वाहन चालान पर दोबारा खनिज की ढुलाई नहीं की जा सकेगी. साथ ही वाहन में निर्धारित से अधिक वजन होने पर डिवाइस द्वारा स्वतः संकेत मिलने लगेगा. बता दें कि झारखंड खनिज प्रीवेशन ऑफ इनलीगल माइनिंग, परिवहन व भंडारण नियम 2017 के तहत सभी खनिज परिवहन वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लगाने का प्रावधान किया गया था. लेकिन इसे अभी तक प्रभावी नहीं किया गया है. अब खान निदेशक ने सभी जिला और सहायक खनन पदाधिकारी को निर्देश जारी कर कहा है, कि आगामी 15 नवंबर तक वे अपने जिलान्तर्गत अधिक से अधिक खनिज ढुलाई वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लगाया जाना सुनिश्चित करें. खान निदेशालय के पत्र के आलोक में अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए कई जिलों में जिला खनन पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. इसमें संथाल परगना, पलामू जैसे जिले शामिल हैं. सभी जिला खनन पदाधिकारी ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के परियोजना पदाधिकारी के साथ सभी खनन पट्टाधारियों, लाइसेंसी डीलर, क्रशर संचालकों, बालू भंडारकर्ताओं को पत्र भेज कर खनिजों की ढुलाई में लगे वाहनों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया है. जिला खनन पदाधिकारी के मुताबिक, इससे अवैध खनन और परिवहन पर रोक के साथ राजस्व की क्षति को रोका जा सकेगा.
Ranchi : राज्य के खनिज बहुल क्षेत्रों में हो रहे अवैध माइनिंग एवं ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की कवायद राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. इस बाबत एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने खनिज बहुल इलाकों में चल रहे परिवहन वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. सरकार का मानना है कि इससे एक ही परिवहन चालान पर दुबारा खनिज की ढुलाई करने की गतिविधियों पर रोक लग सकेगा. सरकारी निर्देश मिलते ही खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी परिवहन वाहनों पर आगामी पंद्रह नवंबर तक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. ऐसा नहीं करने वाले संबंधित वाहन खनिज बहुल क्षेत्रों से खनिजों की ढुलाई नहीं कर सकेंगे. बीते पच्चीस अक्टूबर को खान निदेशक द्वारा राज्य के सभी खनन और सहायक खनन पदाधिकारी को पत्र जारी कर वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है. यह प्रणाली राज्य स्तर पर एक डिवाइस से जुड़ा रहेगा, जो कि वाहन के पूर्व निर्धारित मार्ग की ट्रैकिंग भी करेगा. इससे एक वाहन चालान पर दोबारा खनिज की ढुलाई नहीं की जा सकेगी. साथ ही वाहन में निर्धारित से अधिक वजन होने पर डिवाइस द्वारा स्वतः संकेत मिलने लगेगा. बता दें कि झारखंड खनिज प्रीवेशन ऑफ इनलीगल माइनिंग, परिवहन व भंडारण नियम दो हज़ार सत्रह के तहत सभी खनिज परिवहन वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लगाने का प्रावधान किया गया था. लेकिन इसे अभी तक प्रभावी नहीं किया गया है. अब खान निदेशक ने सभी जिला और सहायक खनन पदाधिकारी को निर्देश जारी कर कहा है, कि आगामी पंद्रह नवंबर तक वे अपने जिलान्तर्गत अधिक से अधिक खनिज ढुलाई वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लगाया जाना सुनिश्चित करें. खान निदेशालय के पत्र के आलोक में अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए कई जिलों में जिला खनन पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. इसमें संथाल परगना, पलामू जैसे जिले शामिल हैं. सभी जिला खनन पदाधिकारी ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के परियोजना पदाधिकारी के साथ सभी खनन पट्टाधारियों, लाइसेंसी डीलर, क्रशर संचालकों, बालू भंडारकर्ताओं को पत्र भेज कर खनिजों की ढुलाई में लगे वाहनों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया है. जिला खनन पदाधिकारी के मुताबिक, इससे अवैध खनन और परिवहन पर रोक के साथ राजस्व की क्षति को रोका जा सकेगा.
सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में 'नैतिक' में नैतिक का किरदार निभाने वाले एक्टर करण मेहरा पिछले लंबे समय से अपनी पत्नी निशा रावल के साथ विवादों को लेकर चर्चा में हैं। करण और निशा दोनों अब अलग-अलग रह रहे हैं। करण मेहरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि उनकी जान को खतरा है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे की कस्टडी के लिए लड़ते रहेंगे। करण ने बताया किनिशा सिंगल मदर की इमेज बना रही हैं और दिखा रही हैं कि वह सब अकेले कर रही हैं लेकिन वह मेरे 4. 5 बीएचके में रह रही हैं। उनके पास मेरा बिजनस है और मेरा पैसा लेकर केस लड़ रही हैं। मेरे डॉक्यूमेंट्स, पैसा, लैपटॉप सब कुछ उस घर में है। मुझे मेरे ही घर में जाने की इजाजत नहीं है। मुझे एक सूटकेस में बस 5 जोड़ी कपड़े दे दिए गए हैं। रोहित सेठिया ने मुझे धमकाने के लिए पॉलिटिकल पार्टीज के कुछ लोगों से मदद ली। एक्टर ने आगे बताया कि हर किसी को लगता है मर्द है तो गलत होगा, लेकिन अगर मैंने ये सच्चाई नहीं बताई तो हमेशा मुझे गलत समझा जाएगा। निशा और रोहित सटिया की तरफ से मुझे और मेरी पूरी फैमिली को जान से मारने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं। मैं ये सच आपको इसलिए बता रहा हूं ताकि कल को अगर मुझे कुछ हो गया तो आपको सच्चाई मालूम होनी चाहिए। करण ने आगे कहा कि मैं अपने बेटे की कस्टडी के लिए लड़ रहा हूं जो निशा और रोहित के साथ रह रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे तक मेरी कोई पहुंच नहीं है। मैं अपने बेटे से आखरी बार 2 नबंवर को मिला था। एक पिता के रूप में मैं क्या कर सकता हूं? यही कारण है कि मैं अपने बच्चे की कस्टडी के लिए लड़ रहा हूं। रोहित सेठिया शराब भी पीते हैं, चेन स्मोकर भी हैं, गुटखा-पान जैसी चीजें कुछ खाते हैं जिसपर मेरा 5 साल के बेटा काविश रिएक्ट करता है, और इसीलिए काविश मुझे चाहिए, वे मेरे साथ रहें, जब तक चीजें सॉल्व नहीं होतीं मुझे उसके पैरंटल राइट्स चाहिए। काविश का एक्सेस नहीं है मेरे पास, लेकिन हां रोहित सेठिया के पास जरूर है। रहित साठिया की भी 7 साल की बच्ची है, वाइफ है। कल को हम इन बच्चों को क्या कहेंगे। उन्हें हम क्या फ्यूचर दे रहे हैं। दो फैमिली में निशा और रोहित के अलावा बाकी के मेंबर्स के लिए तो तकलीफ है न। हाल ही में एक्टर ने खुलासा किया था कि 14 महीने से मेरे घर में निशा के साथ रोहित सेठिया नाम का शख्स रह रहा है। इस व्यक्ति के साथ निशा का एक्स्ट्रा मटेरियल अफेयर चल रहा है। रोहित वो शख्स है, जो निशा का मुंह बोला भाई है, जिसने निशा का कन्यादान भी किया था। पिछले 14 साल से मैंने देखा है कि वह निशा से राखियां बंधवाते आया है, लेकिन आज वह दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में हैं। रोहित खुद पहले से ही शादीशुदा है और उसकी एक 7 साल की एक बेटी भी है।
सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में 'नैतिक' में नैतिक का किरदार निभाने वाले एक्टर करण मेहरा पिछले लंबे समय से अपनी पत्नी निशा रावल के साथ विवादों को लेकर चर्चा में हैं। करण और निशा दोनों अब अलग-अलग रह रहे हैं। करण मेहरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि उनकी जान को खतरा है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे की कस्टडी के लिए लड़ते रहेंगे। करण ने बताया किनिशा सिंगल मदर की इमेज बना रही हैं और दिखा रही हैं कि वह सब अकेले कर रही हैं लेकिन वह मेरे चार. पाँच बीएचके में रह रही हैं। उनके पास मेरा बिजनस है और मेरा पैसा लेकर केस लड़ रही हैं। मेरे डॉक्यूमेंट्स, पैसा, लैपटॉप सब कुछ उस घर में है। मुझे मेरे ही घर में जाने की इजाजत नहीं है। मुझे एक सूटकेस में बस पाँच जोड़ी कपड़े दे दिए गए हैं। रोहित सेठिया ने मुझे धमकाने के लिए पॉलिटिकल पार्टीज के कुछ लोगों से मदद ली। एक्टर ने आगे बताया कि हर किसी को लगता है मर्द है तो गलत होगा, लेकिन अगर मैंने ये सच्चाई नहीं बताई तो हमेशा मुझे गलत समझा जाएगा। निशा और रोहित सटिया की तरफ से मुझे और मेरी पूरी फैमिली को जान से मारने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं। मैं ये सच आपको इसलिए बता रहा हूं ताकि कल को अगर मुझे कुछ हो गया तो आपको सच्चाई मालूम होनी चाहिए। करण ने आगे कहा कि मैं अपने बेटे की कस्टडी के लिए लड़ रहा हूं जो निशा और रोहित के साथ रह रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे तक मेरी कोई पहुंच नहीं है। मैं अपने बेटे से आखरी बार दो नबंवर को मिला था। एक पिता के रूप में मैं क्या कर सकता हूं? यही कारण है कि मैं अपने बच्चे की कस्टडी के लिए लड़ रहा हूं। रोहित सेठिया शराब भी पीते हैं, चेन स्मोकर भी हैं, गुटखा-पान जैसी चीजें कुछ खाते हैं जिसपर मेरा पाँच साल के बेटा काविश रिएक्ट करता है, और इसीलिए काविश मुझे चाहिए, वे मेरे साथ रहें, जब तक चीजें सॉल्व नहीं होतीं मुझे उसके पैरंटल राइट्स चाहिए। काविश का एक्सेस नहीं है मेरे पास, लेकिन हां रोहित सेठिया के पास जरूर है। रहित साठिया की भी सात साल की बच्ची है, वाइफ है। कल को हम इन बच्चों को क्या कहेंगे। उन्हें हम क्या फ्यूचर दे रहे हैं। दो फैमिली में निशा और रोहित के अलावा बाकी के मेंबर्स के लिए तो तकलीफ है न। हाल ही में एक्टर ने खुलासा किया था कि चौदह महीने से मेरे घर में निशा के साथ रोहित सेठिया नाम का शख्स रह रहा है। इस व्यक्ति के साथ निशा का एक्स्ट्रा मटेरियल अफेयर चल रहा है। रोहित वो शख्स है, जो निशा का मुंह बोला भाई है, जिसने निशा का कन्यादान भी किया था। पिछले चौदह साल से मैंने देखा है कि वह निशा से राखियां बंधवाते आया है, लेकिन आज वह दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में हैं। रोहित खुद पहले से ही शादीशुदा है और उसकी एक सात साल की एक बेटी भी है।
उलझन एक गंभीर समस्या है जो भाषण को मुश्किल बनाती है। यह एक अप्रचलित आम लोक शब्द है, जो उच्चारण के दोषों को दर्शाता है। यह क्या है? बोलने वाला जीभ भाषण की कमी हैव्यक्तिगत ध्वनियों के गलत उच्चारण में प्रकट हुआ। मानव रोगविज्ञान के विकास की चरम डिग्री के साथ समझना लगभग असंभव है। भाषण एक बचपन के बच्चे की तरह, गैरकानूनी हो जाता है। मध्यम विकास के साथ, दोष, निश्चित रूप से, कान के लिए एक अप्रिय छाया बनाता है, लेकिन यह काफी समझ में आता है। उलझन एक अप्रिय समस्या है। इस दोष के कई सामान्य रूप हैंः - मोनोफॉर्मेड जीभ से बंधे भाषण में एक या एक से अधिक अक्षरों के उच्चारण के साथ एक समस्या है जो कि उसके और घूमने के स्तर से है। - पॉलीफार्म जीभ से बंधे - एक ही समय में विभिन्न समूहों से कई अक्षरों के उच्चारण के साथ समस्या। - 5 साल से कम आयु के बच्चों में शारीरिक कठोरता देखी जाती है और भाषण तंत्र के विकास की अपर्याप्त डिग्री से जुड़ा हुआ है। उम्र के साथ, समस्या आमतौर पर अपने आप से गुजरती है। - कार्यात्मक रूप भाषण तंत्र के संचालन में गड़बड़ी की अनुपस्थिति की विशेषता है। भाषण के दोष केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, श्रवण सहायता और अभिव्यक्ति के साथ समस्याओं के कारण होते हैं। - कार्बनिक रूप जन्मजात, आनुवंशिक या अभिव्यक्ति के अधिग्रहीत दोषों के प्रभाव का एक परिणाम है। जीभ छेड़छाड़ की समस्या का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए, इसके कारणों को समझना महत्वपूर्ण है। यहां सबसे आम कारक हैंः - दीर्घकालिक पुरानी बीमारियां (उदाहरण के लिए, एक ठंडा या पाचन तंत्र विकार) जो शरीर की एक तंत्रिका विज्ञान और शारीरिक कमजोर पड़ती है; - शैक्षिक उपेक्षा, जब माता-पिता व्यक्तिगत आवाजों के बच्चे के उच्चारण की शुद्धता पर उचित ध्यान नहीं देते हैं और सकारात्मक उदाहरण प्रदर्शित करने की कोशिश नहीं करते हैं; - एक बहुभाषी परिवार, उदाहरण के लिए, पिता रूसी बोलते हैं, और मां - इतालवी में (इस मामले में बच्चा अपने भाषण में विभिन्न ध्वन्यात्मक मानदंड जमा करता है); - किसी ऐसे व्यक्ति की नकल जो गलत भाषण के पैटर्न का प्रतिनिधित्व करती है (यह एक अभिभावक, शिक्षक, वरिष्ठ मित्र या कोई अन्य व्यक्ति हो सकता है जिसके साथ बच्चा अक्सर संपर्क करता है); - ध्वन्यात्मक सुनवाई का उल्लंघन; - जीभ, मसूड़ों, दांतों और भाषण तंत्र के अन्य तत्वों की अनियमित संरचना; - वंशानुगत कारक जो पीढ़ी से पीढ़ी तक फैलते हैं (वक्र या स्पैस दांत, उन्नत जबड़े और अन्य दोष); - जन्मजात विकार जो इंट्रायूटरिन विकास की अवधि के दौरान बनाए गए थे; - अधिग्रहीत दोष, जो पूरे जीवन में लगातार चोटों के कारण उत्पन्न हो सकता था। बात कर रहे भाषाः कैसे छुटकारा पाएं? दोष स्वयं व्यक्ति को कई समस्याएं प्रदान करते हैं,साथ ही उन लोगों के बारे में जो जानकारी को सटीक रूप से समझ नहीं सकते हैं या अनुचित उच्चारण से नाराज हैं। सुधार की विधि समस्या के कारणों के अनुसार निर्धारित की जाती है। किसी भी मामले में, अनुकूल परिणाम की संभावना बचपन में बहुत अधिक है। इस मामले में जब जीभ टाई एक परिणाम हैगलत भाषण शिक्षा, एक दोष एक भाषण चिकित्सक के साथ रोजगार को सही करने में मदद करेगा। लेकिन यदि समस्या भाषण तंत्र की संरचना में निहित है, तो विशेष कृत्रिम अंगों (ऑर्थोडोंटिक ताले) का उपयोग किया जा सकता है। सबसे गंभीर मामलों में, सर्जिकल हस्तक्षेप किया जाता है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, शब्द "जीभ से बंधे"लोक अभिव्यक्तियों को संदर्भित करता है। चिकित्सा अभ्यास में, यह शब्द "डिस्लिया" जैसा लगता है। फिर भी, हर रोज संचार में कोई व्यर्थ शब्दों की पूरी श्रृंखला सुन सकता है जो विचाराधीन अवधारणा के समानार्थी हैं। यह गैरकानूनीता, अस्पष्टता, अस्पष्टता, अतुल्यता, भाषा की कमी और अन्य शब्दों की है जो उच्चारण की समस्याओं को दर्शाती है।
उलझन एक गंभीर समस्या है जो भाषण को मुश्किल बनाती है। यह एक अप्रचलित आम लोक शब्द है, जो उच्चारण के दोषों को दर्शाता है। यह क्या है? बोलने वाला जीभ भाषण की कमी हैव्यक्तिगत ध्वनियों के गलत उच्चारण में प्रकट हुआ। मानव रोगविज्ञान के विकास की चरम डिग्री के साथ समझना लगभग असंभव है। भाषण एक बचपन के बच्चे की तरह, गैरकानूनी हो जाता है। मध्यम विकास के साथ, दोष, निश्चित रूप से, कान के लिए एक अप्रिय छाया बनाता है, लेकिन यह काफी समझ में आता है। उलझन एक अप्रिय समस्या है। इस दोष के कई सामान्य रूप हैंः - मोनोफॉर्मेड जीभ से बंधे भाषण में एक या एक से अधिक अक्षरों के उच्चारण के साथ एक समस्या है जो कि उसके और घूमने के स्तर से है। - पॉलीफार्म जीभ से बंधे - एक ही समय में विभिन्न समूहों से कई अक्षरों के उच्चारण के साथ समस्या। - पाँच साल से कम आयु के बच्चों में शारीरिक कठोरता देखी जाती है और भाषण तंत्र के विकास की अपर्याप्त डिग्री से जुड़ा हुआ है। उम्र के साथ, समस्या आमतौर पर अपने आप से गुजरती है। - कार्यात्मक रूप भाषण तंत्र के संचालन में गड़बड़ी की अनुपस्थिति की विशेषता है। भाषण के दोष केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, श्रवण सहायता और अभिव्यक्ति के साथ समस्याओं के कारण होते हैं। - कार्बनिक रूप जन्मजात, आनुवंशिक या अभिव्यक्ति के अधिग्रहीत दोषों के प्रभाव का एक परिणाम है। जीभ छेड़छाड़ की समस्या का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए, इसके कारणों को समझना महत्वपूर्ण है। यहां सबसे आम कारक हैंः - दीर्घकालिक पुरानी बीमारियां जो शरीर की एक तंत्रिका विज्ञान और शारीरिक कमजोर पड़ती है; - शैक्षिक उपेक्षा, जब माता-पिता व्यक्तिगत आवाजों के बच्चे के उच्चारण की शुद्धता पर उचित ध्यान नहीं देते हैं और सकारात्मक उदाहरण प्रदर्शित करने की कोशिश नहीं करते हैं; - एक बहुभाषी परिवार, उदाहरण के लिए, पिता रूसी बोलते हैं, और मां - इतालवी में ; - किसी ऐसे व्यक्ति की नकल जो गलत भाषण के पैटर्न का प्रतिनिधित्व करती है ; - ध्वन्यात्मक सुनवाई का उल्लंघन; - जीभ, मसूड़ों, दांतों और भाषण तंत्र के अन्य तत्वों की अनियमित संरचना; - वंशानुगत कारक जो पीढ़ी से पीढ़ी तक फैलते हैं ; - जन्मजात विकार जो इंट्रायूटरिन विकास की अवधि के दौरान बनाए गए थे; - अधिग्रहीत दोष, जो पूरे जीवन में लगातार चोटों के कारण उत्पन्न हो सकता था। बात कर रहे भाषाः कैसे छुटकारा पाएं? दोष स्वयं व्यक्ति को कई समस्याएं प्रदान करते हैं,साथ ही उन लोगों के बारे में जो जानकारी को सटीक रूप से समझ नहीं सकते हैं या अनुचित उच्चारण से नाराज हैं। सुधार की विधि समस्या के कारणों के अनुसार निर्धारित की जाती है। किसी भी मामले में, अनुकूल परिणाम की संभावना बचपन में बहुत अधिक है। इस मामले में जब जीभ टाई एक परिणाम हैगलत भाषण शिक्षा, एक दोष एक भाषण चिकित्सक के साथ रोजगार को सही करने में मदद करेगा। लेकिन यदि समस्या भाषण तंत्र की संरचना में निहित है, तो विशेष कृत्रिम अंगों का उपयोग किया जा सकता है। सबसे गंभीर मामलों में, सर्जिकल हस्तक्षेप किया जाता है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, शब्द "जीभ से बंधे"लोक अभिव्यक्तियों को संदर्भित करता है। चिकित्सा अभ्यास में, यह शब्द "डिस्लिया" जैसा लगता है। फिर भी, हर रोज संचार में कोई व्यर्थ शब्दों की पूरी श्रृंखला सुन सकता है जो विचाराधीन अवधारणा के समानार्थी हैं। यह गैरकानूनीता, अस्पष्टता, अस्पष्टता, अतुल्यता, भाषा की कमी और अन्य शब्दों की है जो उच्चारण की समस्याओं को दर्शाती है।
- मात्रको रक्षा में सावधान रहते हैं। बुद्धिपूर्वक कोई ऐसा व्यवहार, व्यापार व आरम्भ नहीं करते हैं जिससे किसी एक स्थावर व त्रसके प्राण पीड़े जायें। इसलिये वे गृहारम्भोंके व परिग्रहोंक त्यागी होते हैं । वे प्राणीमात्रकी रक्षार्थ निरंतर यह भावना भाते है कि हमारे वचन ऐसे न निकल पड़ें कि जिनसे किसीके प्राण 'पीड़े नायें, हमारे मनमें भी किसी को कष्ट पहुंचानेका भाव न आजावे, हम चार हाथ भूमि आगे देखकर दिनमें रौदे हुए मार्गपर चलें, कोई जंतु पगके नीचे मर न जावे, हम पीछी, कमण्डल, शरीर, पुस्तक देखके घरे व उठावें कि जिससे कोई छोटा प्राणी भी दबकर व कुचलकर कष्ट न पावें, हम भोजनपान देखकर करें जिससे किसी जन्तुके गिरकर पड़कर मरजानेकी संभावना न हो । 'ऐसी पांच भावनाओं को भाते हुए ये साधु महात्मा सर्व जीवोंको मित्रके समान देखते हैं । इस प्रकार द्रव्य अहिंसाको पालते हैं । द्रव्य अहिंसा और भाव अहिंसाको पालते हुए साधुजन वास्तवमें बड़े दयालु, बड़े भारी रक्षक व बड़े भारी परोपकारी होते हैं । सत्यभावसे अहिंसाव्रतका पालन स्वपर हितकारी होता है । यह हिंसात सर्व अन्य व्रतकी जड़ है । इसके पालक साधु परम शांतिके समुद्र होते हैं, इस तरह व्यवहार नयसे अहिंसाव्रतकी गावना करता हुआ अब वह निश्चयनय से विचारता है तो क्या देखता है कि मैं आत्माराम स्वयं अहिंसा स्वरूप हूँ । न मेरे आत्मप्रदेशका कभी कोई घात होसकता है, न मेरे ज्ञान दर्शन सुख, वीर्य, सम्यक्त, चारित्र आदि गुणोंका कोई नाश होसक्ता है। मैं अमूर्तिक हूं, मेरा कोई खण्ड नहीं कर सक्ता है। मेरेको कोई मला नहीं सक्ता है, मैं बीतराग हं, मेरेमें कोई रागद्वेप नोट पैदा नहीं कर सक्ता है। मेरेको अगुरुलघुगुण है जिससे न दूसरे द्रव्यका गुण मेरेमें आसक्ता है न मेरा गुण दूसरे में जासक्ता है, न दूसरेको मेरेसे बाधा पहुंच सक्ती है, न मुझे दुसरेसे बाघा पहुंच सक्ती है । मेरे प्रदेश प्रदेशमें वीतरागताका शुद्ध वर्णन है। मैं अहिंसक, मेरे सर्व गुण अहिंसक, मेरी सर्व पर्यायें असक । मैं परमानन्दमई द्रव्य सदा नित्य और स्वाधीन हूं, मैं अपने स्वाभाविक सर्व गुणोंकी रक्षा अपने निश्चय चारित्रके चलते कर रहा हूं । दूसरे द्रव्योंसे मेरा कोई सम्बन्ध ही नहीं है जो उनको मेरे द्वारा कोई भय हो । मेरी तरफसे सबको अभयदान है। मैं एकाकी अपनी त्रिगुप्तिमई शांत गुफा में विश्राम करता हुआ तथा रत्नत्रयमई आभूषणसे शोभता हुआ, शुद्धोपयोगके पवित्र वस्त्रोंको पहरे हुए, स्वानुभूति तिया के साथ एक आसनपर विराजमान होकर, अहिंसा महाव्रतका मुकुट लगाए हुए अपने अटूट भण्डारसे आनन्दामृतको लेता हूं। आप भी पीता हूं व स्वानुमृति तियाको भी पिलाता हूं । वास्तव में यही भावना अहिंसाव्रतकी ज्योति है । सृत्य महावृत्त । यह ज्ञानी ऐलक मुनिधर्मकी भावना भाता हुआ, आज दूसरे सत्य महाव्रतकी भावना कर रहा है । यह समझता है कि वस्तुका जो खरा स्वरूप है वह सत्य है । उसमें असत्यका प्रवेश नहीं है होसता है । सत्य पदार्थको सत्य ही विचारना व सत्य ही कहना उचित है व सत्य ही उसका व्यवहार करना उचित है । वास्तव सत्यव्रत भी अहिंसाव्रतकी रक्षार्थ है । असत्य कथन अपने स्वार्थः साधनके लिये व परकी हानि करनेके लिये ही किया जाता है जहां असत्य है वहां हिंसा है, जहां सत्य है वहां अहिंसा है साधुनन परम वैरागी सर्व जीवमात्रके प्रेमी होते हैं। इसलिये वे कभी भी अपने स्वार्थ हेतु किसी जीवको कष्ट नहीं देते हैं । वे कषाय भावके त्यागी हैं। वे निरंतर भावना भाते हैं कि मैं क्रोधके वश न होनाऊं क्योंकि क्रोधभाव बुद्धिको अन्धा कर देता है तब यह अन्य प्राणी शास्त्रविरुद्ध हिंसाकारी कठोर वचन बोल देता है । मैं लोभके वशीभूत न होजाऊं। मैं कभी किसी अपने शरीरके हितके लिये कोई असत्य वात व मायाचारी की बात न कह घं। मैं भय कभी न करूं, मेरे आत्माको कोई काट नहीं सक्ता । शरीर नाशवंत है । इसका मुझे मोह नहीं, इसलिये मैं किसीकी मारका व किसीके दुर्वचनका कुछ भी भय नहीं रखता हूँ । यदि प्रमादसे कोई भूल होजाये तो मुझे अपने गुरु के सामने स्पष्ट कह देना उचित है, कभी छिपाना नहीं चाहिये। मैं कभी हास्यके वश न होऊं, हास्य करना समयका व शक्तिका दुरुपयोग है, असत्य भापणका प्रेरक है । मैं सदा शास्त्रकी पद्धतिके विरुद्ध किंचित् भी वचन न कहूँ । इसतरह व्यवहार नबसे सत्य व्रतकी भावना भाता हुआ अब यह निश्चयनयपर आरूढ़ होता है तो क्या देखता है कि मेरे आत्मामें मन ही नहीं है जो सत्य या असत्यका विचार करे, न मेरे पास वचन है जो असत्य व सत्य कहे, न मेरे पास कान है जो सत्य या असत्य वर्तन करे। मैं आप अकेला हूँ, सर्व आत्माओसे भी निराला हूँ व अन्य सर्व अनात्मा द्रव्योंसे भिन्न हूँ। मैं
- मात्रको रक्षा में सावधान रहते हैं। बुद्धिपूर्वक कोई ऐसा व्यवहार, व्यापार व आरम्भ नहीं करते हैं जिससे किसी एक स्थावर व त्रसके प्राण पीड़े जायें। इसलिये वे गृहारम्भोंके व परिग्रहोंक त्यागी होते हैं । वे प्राणीमात्रकी रक्षार्थ निरंतर यह भावना भाते है कि हमारे वचन ऐसे न निकल पड़ें कि जिनसे किसीके प्राण 'पीड़े नायें, हमारे मनमें भी किसी को कष्ट पहुंचानेका भाव न आजावे, हम चार हाथ भूमि आगे देखकर दिनमें रौदे हुए मार्गपर चलें, कोई जंतु पगके नीचे मर न जावे, हम पीछी, कमण्डल, शरीर, पुस्तक देखके घरे व उठावें कि जिससे कोई छोटा प्राणी भी दबकर व कुचलकर कष्ट न पावें, हम भोजनपान देखकर करें जिससे किसी जन्तुके गिरकर पड़कर मरजानेकी संभावना न हो । 'ऐसी पांच भावनाओं को भाते हुए ये साधु महात्मा सर्व जीवोंको मित्रके समान देखते हैं । इस प्रकार द्रव्य अहिंसाको पालते हैं । द्रव्य अहिंसा और भाव अहिंसाको पालते हुए साधुजन वास्तवमें बड़े दयालु, बड़े भारी रक्षक व बड़े भारी परोपकारी होते हैं । सत्यभावसे अहिंसाव्रतका पालन स्वपर हितकारी होता है । यह हिंसात सर्व अन्य व्रतकी जड़ है । इसके पालक साधु परम शांतिके समुद्र होते हैं, इस तरह व्यवहार नयसे अहिंसाव्रतकी गावना करता हुआ अब वह निश्चयनय से विचारता है तो क्या देखता है कि मैं आत्माराम स्वयं अहिंसा स्वरूप हूँ । न मेरे आत्मप्रदेशका कभी कोई घात होसकता है, न मेरे ज्ञान दर्शन सुख, वीर्य, सम्यक्त, चारित्र आदि गुणोंका कोई नाश होसक्ता है। मैं अमूर्तिक हूं, मेरा कोई खण्ड नहीं कर सक्ता है। मेरेको कोई मला नहीं सक्ता है, मैं बीतराग हं, मेरेमें कोई रागद्वेप नोट पैदा नहीं कर सक्ता है। मेरेको अगुरुलघुगुण है जिससे न दूसरे द्रव्यका गुण मेरेमें आसक्ता है न मेरा गुण दूसरे में जासक्ता है, न दूसरेको मेरेसे बाधा पहुंच सक्ती है, न मुझे दुसरेसे बाघा पहुंच सक्ती है । मेरे प्रदेश प्रदेशमें वीतरागताका शुद्ध वर्णन है। मैं अहिंसक, मेरे सर्व गुण अहिंसक, मेरी सर्व पर्यायें असक । मैं परमानन्दमई द्रव्य सदा नित्य और स्वाधीन हूं, मैं अपने स्वाभाविक सर्व गुणोंकी रक्षा अपने निश्चय चारित्रके चलते कर रहा हूं । दूसरे द्रव्योंसे मेरा कोई सम्बन्ध ही नहीं है जो उनको मेरे द्वारा कोई भय हो । मेरी तरफसे सबको अभयदान है। मैं एकाकी अपनी त्रिगुप्तिमई शांत गुफा में विश्राम करता हुआ तथा रत्नत्रयमई आभूषणसे शोभता हुआ, शुद्धोपयोगके पवित्र वस्त्रोंको पहरे हुए, स्वानुभूति तिया के साथ एक आसनपर विराजमान होकर, अहिंसा महाव्रतका मुकुट लगाए हुए अपने अटूट भण्डारसे आनन्दामृतको लेता हूं। आप भी पीता हूं व स्वानुमृति तियाको भी पिलाता हूं । वास्तव में यही भावना अहिंसाव्रतकी ज्योति है । सृत्य महावृत्त । यह ज्ञानी ऐलक मुनिधर्मकी भावना भाता हुआ, आज दूसरे सत्य महाव्रतकी भावना कर रहा है । यह समझता है कि वस्तुका जो खरा स्वरूप है वह सत्य है । उसमें असत्यका प्रवेश नहीं है होसता है । सत्य पदार्थको सत्य ही विचारना व सत्य ही कहना उचित है व सत्य ही उसका व्यवहार करना उचित है । वास्तव सत्यव्रत भी अहिंसाव्रतकी रक्षार्थ है । असत्य कथन अपने स्वार्थः साधनके लिये व परकी हानि करनेके लिये ही किया जाता है जहां असत्य है वहां हिंसा है, जहां सत्य है वहां अहिंसा है साधुनन परम वैरागी सर्व जीवमात्रके प्रेमी होते हैं। इसलिये वे कभी भी अपने स्वार्थ हेतु किसी जीवको कष्ट नहीं देते हैं । वे कषाय भावके त्यागी हैं। वे निरंतर भावना भाते हैं कि मैं क्रोधके वश न होनाऊं क्योंकि क्रोधभाव बुद्धिको अन्धा कर देता है तब यह अन्य प्राणी शास्त्रविरुद्ध हिंसाकारी कठोर वचन बोल देता है । मैं लोभके वशीभूत न होजाऊं। मैं कभी किसी अपने शरीरके हितके लिये कोई असत्य वात व मायाचारी की बात न कह घं। मैं भय कभी न करूं, मेरे आत्माको कोई काट नहीं सक्ता । शरीर नाशवंत है । इसका मुझे मोह नहीं, इसलिये मैं किसीकी मारका व किसीके दुर्वचनका कुछ भी भय नहीं रखता हूँ । यदि प्रमादसे कोई भूल होजाये तो मुझे अपने गुरु के सामने स्पष्ट कह देना उचित है, कभी छिपाना नहीं चाहिये। मैं कभी हास्यके वश न होऊं, हास्य करना समयका व शक्तिका दुरुपयोग है, असत्य भापणका प्रेरक है । मैं सदा शास्त्रकी पद्धतिके विरुद्ध किंचित् भी वचन न कहूँ । इसतरह व्यवहार नबसे सत्य व्रतकी भावना भाता हुआ अब यह निश्चयनयपर आरूढ़ होता है तो क्या देखता है कि मेरे आत्मामें मन ही नहीं है जो सत्य या असत्यका विचार करे, न मेरे पास वचन है जो असत्य व सत्य कहे, न मेरे पास कान है जो सत्य या असत्य वर्तन करे। मैं आप अकेला हूँ, सर्व आत्माओसे भी निराला हूँ व अन्य सर्व अनात्मा द्रव्योंसे भिन्न हूँ। मैं
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के सभी सांसदों को स्वस्थ रहने का मंत्र देते हुए मिलेट्स अर्थात मोटा अनाज खाने की सलाह देते हुए लोगों के बीच भी इसे बढ़ावा देने की सलाह दी है। मंगलवार को संसद भवन परिसर में भाजपा संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए मिलेट्स के भोजन को जन आंदोलन बनाने की सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पोषण अभियान को बढ़ावा मिल सकता है। संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई नसीहत की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाने का विषय रखते हुए कहा कि मिलेट्स से पोषण अभियान को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत में जी-20 की अध्यक्षता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए लाखों लोग भारत आएंगे और जहां भी संभव होगा उनके भोजन में कुछ मिलेट्स से बना खाना भी रखा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को मिलेट्स खाने और लोगों को भी इसे खाने के लिए प्रोत्साहित करने की नसीहत देते हुए मिलेट्स को लेकर स्कूल-कॉलेजों में चर्चा और देश भर में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन करने का आह्वान करते हुए इसे एक जनांदोलन बनाने की भी बात कही। स्वस्थ रहने और लोगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मोटे अनाज के साथ-साथ शारीरिक श्रम पर आधारित खेलों को भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने और लगातार सांसद खेल स्पर्धा आयोजित करने की भी सलाह दी। संसदीय दल की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जी 20 को लेकर प्रेजेंटेशन भी दिया। आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, मिलेट्स की मांग और स्वीकार्यता बढ़ाने के उद्देश्य से इसके विषय में जागरूकता के प्रसार के लिए अनेक कदम उठा रहा है। इन्ही कोशिशों के तहत कृषि मंत्रालय ने आज सांसदों को मिलेट्स यानी ज्वार, बाजरा, रागी जैसे पोषक मोटे अनाज से तैयार व्यंजनों के लंच पर आमंत्रित किया है।
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के सभी सांसदों को स्वस्थ रहने का मंत्र देते हुए मिलेट्स अर्थात मोटा अनाज खाने की सलाह देते हुए लोगों के बीच भी इसे बढ़ावा देने की सलाह दी है। मंगलवार को संसद भवन परिसर में भाजपा संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए मिलेट्स के भोजन को जन आंदोलन बनाने की सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पोषण अभियान को बढ़ावा मिल सकता है। संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई नसीहत की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वर्ष दो हज़ार तेईस को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाने का विषय रखते हुए कहा कि मिलेट्स से पोषण अभियान को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत में जी-बीस की अध्यक्षता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए लाखों लोग भारत आएंगे और जहां भी संभव होगा उनके भोजन में कुछ मिलेट्स से बना खाना भी रखा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को मिलेट्स खाने और लोगों को भी इसे खाने के लिए प्रोत्साहित करने की नसीहत देते हुए मिलेट्स को लेकर स्कूल-कॉलेजों में चर्चा और देश भर में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन करने का आह्वान करते हुए इसे एक जनांदोलन बनाने की भी बात कही। स्वस्थ रहने और लोगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मोटे अनाज के साथ-साथ शारीरिक श्रम पर आधारित खेलों को भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने और लगातार सांसद खेल स्पर्धा आयोजित करने की भी सलाह दी। संसदीय दल की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जी बीस को लेकर प्रेजेंटेशन भी दिया। आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष दो हज़ार तेईस को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, मिलेट्स की मांग और स्वीकार्यता बढ़ाने के उद्देश्य से इसके विषय में जागरूकता के प्रसार के लिए अनेक कदम उठा रहा है। इन्ही कोशिशों के तहत कृषि मंत्रालय ने आज सांसदों को मिलेट्स यानी ज्वार, बाजरा, रागी जैसे पोषक मोटे अनाज से तैयार व्यंजनों के लंच पर आमंत्रित किया है।
छुट्टी के दिन बर्फबारी हुई तो गाड़ियों का रैला मजे लेने निकल पड़ा। इस सीजन में नैनीताल में तीसरी बार बर्फबारी हुई। बर्फबारी की खबर मिलते ही लोग हिमालय दर्शन किलबरी रोड की और चल पड़े। नैनीताल में गणतंत्र दिवस के दिन तीसरी बार बर्फबारी हुई। यहां हिमालय दर्शन किलबरी रोड, स्नोव्यू समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गणतंत्र दिवस की छुट्टी पर नैनीताल पहुंचे पर्यटक बर्फबारी देख खुश हो गए और खूब एन्जॉय किया। मालरोड समेत बाजार में भी बर्फबारी हुई, लेकिन वह कुछ देर में पिघल गई। दोपहर करीब 12 बजे के करीब बर्फबारी शुरू हुई जो आधे घंटे बाद थम गई थी। वही उधर यूपी के कानपुर समेत तमाम शहरों में शुक्रवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि के बाद से ठंड और बढ़ गयी है। ऐसे में सीएसए मौमस विभाग ने 31 जनवरी तक कानपुर शहर समेत प्रदेश के कई शहरों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है. जानकारी के लिए बता दें ठंड के इस सीजन में पहली बार मौसम में बड़ा बदलाव आया। तेज हवा के साथ गलन भी बढ़ गयी है। दिन के तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
छुट्टी के दिन बर्फबारी हुई तो गाड़ियों का रैला मजे लेने निकल पड़ा। इस सीजन में नैनीताल में तीसरी बार बर्फबारी हुई। बर्फबारी की खबर मिलते ही लोग हिमालय दर्शन किलबरी रोड की और चल पड़े। नैनीताल में गणतंत्र दिवस के दिन तीसरी बार बर्फबारी हुई। यहां हिमालय दर्शन किलबरी रोड, स्नोव्यू समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गणतंत्र दिवस की छुट्टी पर नैनीताल पहुंचे पर्यटक बर्फबारी देख खुश हो गए और खूब एन्जॉय किया। मालरोड समेत बाजार में भी बर्फबारी हुई, लेकिन वह कुछ देर में पिघल गई। दोपहर करीब बारह बजे के करीब बर्फबारी शुरू हुई जो आधे घंटे बाद थम गई थी। वही उधर यूपी के कानपुर समेत तमाम शहरों में शुक्रवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि के बाद से ठंड और बढ़ गयी है। ऐसे में सीएसए मौमस विभाग ने इकतीस जनवरी तक कानपुर शहर समेत प्रदेश के कई शहरों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है. जानकारी के लिए बता दें ठंड के इस सीजन में पहली बार मौसम में बड़ा बदलाव आया। तेज हवा के साथ गलन भी बढ़ गयी है। दिन के तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
नई दिल्लीः Apple Watch Discount offer: अगर आप Apple Watch खरीदना चाहते हैं। लेकिन आपका उतना बजट नहीं है तो अब आप टेंशन फ्री हो जाइए, क्योंकि आपको Apple Watch Series 8 सस्ते में खरीदने का मौका मिल रहा है। जिसमें काफी सारे डिस्काउंट भी दिए जा रहे है। जिसे आप ग्राहक आसानी से खरीद सकते है। इस एप्पल वॉच के डिजाइन से लेकर फीचर बेहद ही कमाल के है। तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते है। इस एप्पल वॉच के सीरीज में 1.9 इंच की OLED डिस्प्ले दी गई है। जिसका रेजोल्यूशन 484×396 पिक्सल है, साथ ही इस सीरीज में 1000 nits पीक ब्राइटनेस भी मिलती है। एप्पल की इस स्मार्टवॉच को IP6X वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंट दिया गया है। Apple Watch Series 8 स्मार्टवॉच में Apple S8 चिपसेट दिया गया है। साथ ही ये स्मार्टवॉच WatchOS 9.0 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करती है। वहीं इस स्मार्टवॉच में 32GB की इंटरनल स्टोरेज दी गई है। एप्पल ने इस स्मार्टवॉच में कैमरा नहीं दिया। Apple Watch Series 8 स्मार्टवॉच में साउंड के लिए लाउडस्पीकर दिया है। एप्पल की इस स्मार्ट वॉच में WiFi, ब्लूटूथ, GPS, GLONASS, GALILED,एक्सीलीमीटर, Gyro, हार्ट रेटिंग, बैरोमीटर, कंपास और SpO2 मीटर आदि दिया गया है। पावर के लिए Apple Watch Series 8 में 308mAh की नॉट रिमूवेबल बैटरी उपलब्ध कराई गई है। जिससे ये स्मार्टवॉच वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। 46,400 रूपये में croma पर लिस्टेड की गई है। वहीं अगर आप इसे HDFC कार्ड से पेमेंट करते है तो आपको 3000 रूपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। जिसके बाद आप ग्राहक इसे 43,400 रूपये में खरीद सकते है। यहां तक कि croma शॉपिंग वेबसाइट पर इस साल में जितनी भी एप्पल स्मार्टवॉच लॉन्च हुई है। इन सब पर 5,500 रूपये तक की भारी छूट दी जा रही हैं। साथ ही बैंक ऑफर्स का भी फायदा दिया जा रहा हैं।
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कारणवस्था कहलाती है । जब वह, जीव मौर जगत् की साधारण प्रकट अवस्था रूपी देह से युक्त है तब ब्रह्म को कार्यावस्था कहलाती है।' मानते हैं वे यह नहीं कह सकते कि कार्य कारण से अमिन्न है, जगत्, जो मिथ्या है वह ब्रह्म से जो सत्य है, अभिझ नही हो सकता । बलपूर्वक इस सुझाव का निषेध करते हैं कि सन्मात्र रूप कोई ऐसी वस्तु, जीव और जगत् की सूक्ष्मावस्था रूप देह वाले नियता कारण ईश्वर से, अंततः अधिक सत्य है, क्योंकि वे इसे भी स्वीकार करते हैं कि ईश्वर को केवल सन्मात्र माना जाय, क्योंकि ईश्वर सबंदा, सवज्ञता, सर्व शक्तिमत्ता, इत्यादि मनन्त श्रेष्ठ गुणों से युक्त हैं । रामानुज इस प्रकार, ईश्वर के प्रश रूप, जड और जीव के द्विविभक्त सिद्धान्त को पकड़े रहते हैं, जो ईश्वर इन अशों का निरन्तर अंतर्यामी हैं। वे निश्चय रूप से सरकार्यवादिनु हैं किन्तु उनका सरकार्यवाद, वेदान्त के सत्कार्यवाद से, जो शंकर ने माना है अधिक साख्य की राह पर है । कार्य, कारण की केवल बदली हुई अवस्था है और इसलिये जड और जीव रूप से प्रकट जगत्, जो ईश्वर की देह है, इसे केवल इसलिये कार्य माना है कि यह कार्य रूप से प्रकटावस्था के पूर्व, ईश्वर में सूक्ष्म और निर्मल अवस्था में विद्यमान था। किन्तु, ईश्वर मे यह जड़ और जीव का भेद हमेशा से विद्यमान था और उसमें कोई ऐसा अंश नहीं है जो इससे अधिक सत्य और चरम हो । यहा पर रामानुज भास्कर का पूर्णतः साथ छोड़ देते हैं। क्योंकि भास्कर के अनुसार, जो कि कार्य रूप से ईश्वर जड और जीवमय प्रकट सृष्टि रूप से विद्यमान था, तो भी कारण रूप से ईश्वर की सत्ता भी थी, जो नितान्त व्यक्त और निविशेष रूप से सन्मात्र था । ईश्वर, इसलिये, सर्वथा जड़, जीव और उसके प्रतर्यामी, के त्रिविध रूप से विद्यमान था, और प्राकृत या कारणावस्था और प्रलयावस्था का पर्थ, जड पौर जीव की व्यक्तावस्था से भिन्न सूक्ष्म और निर्मल अवस्था से है। किन्तु रामानुज आग्रह करते हैं कि जैसे मनुष्य में देह और आत्मा के बीच भेद है, और जैसे देह की कमी भोर दोष आत्मा को प्रभावित नहीं करते, उसी प्रकार परम श्रतर्यामी ईश्वर और उसका शरीर, जीव और जड़ जगत् रूपी के बीच, स्पष्ट रूप से भेद है औौर जगत् के दोष ब्रह्म को इसलिये प्रभावित नहीं कर सकते। इस प्रकार, यद्यपि ब्रह्म के शरीर है तो भी वह प्रखण्ड (निरवय ) है और कर्म से सर्वदा रहित है : क्योकि उसको निश्चयात्मक चेष्टाएं महतुकी हैं। वह, इसलिये सभी दोषो के प्रभाव से रहित है और अपने में, अनन्त हितकारी गुण धारण करता हुआ, शुद्ध और पूर्ण है। रामानुज का यह प्राक्षेपयुक्तियुक्त नहीं है, क्योंकि इसके अनुसार कार्य के अन्तस्थ सत्ता कारण से एक रूप है। किन्तु इस आक्षेप में भी यह सच्चाई है कि कार्यकारण की अभिनता के सिद्धान्त को शंकर के मत के योग्य बनाने के लिये, वक्रार्थ देना श्रावश्यक हो जाता है। रामानुज, पपने 'वेदार्थ संग्रह' और 'वेदान्त दीप' में यह बताने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार, शकर के मतवाद को दूर करके, उन्हें भास्कर के सिद्धान्त और अपने पूर्वगामी गुरु यादव प्रकाश के सिद्धान्त से भी, हट कर रहना पड़ा। वे भास्कर का साथ न दे सके, क्योंकि भास्कर मानते थे कि ब्रह्म उन मर्यादानों पर सीमाग्रो से सम्बन्धित है जिनसे वह बंधन में पड़ता है और जिनके निवारण से वह मुक्त होता है । घे यादव प्रकाश से भी सहमत न हो सके, जो मानते थे कि ब्रह्म एक ओर शुद्ध है और दूसरी भोर, स्वय नाना रूप जगत् में परिणमित होता है । इन दोनों मतो की उपनिषद् के पाठ से सगति नहीं बैठती । वेंकटनाथ का प्रमाण-निरूपण जिस प्रकार शून्यवादी बौद्ध या माध्यमिक किसी भी तथ्य या प्रतिज्ञा की न्याययुक्त सत्ता का निषेध प्रतिपादित करते हैं, उसी प्रकार शंकर मतवादी उक्त प्रश्नो पर अपना निर्णय दे सकने में असमर्थ है। खण्डन खण्डखारा के पूर्व पक्ष में इस प्रश्न के उत्तर मे कि सारे विवादों (कक्षाओं) को लक्ष्य करने वाले तथ्यो और प्रतिज्ञाओं की पहले ही सिद्धि और प्रसिद्धि मान लेनी चाहिये अथवा नहीं, इसका उल्लेख करते हुए भी श्री हर्ष कहते हैं कि ऐसी कोई मान्यता अनिवार्य नहीं है, क्योंकि विवाद, दो प्रतिस्पर्धी पुरुषो की मापस की स्वीकृति से ही, यह मानकर किया जा सकता है कि, वे विवाद का किसी एक मध्यस्थ द्वारा निश्चित किये गये कुछ सिद्धान्तो की सच्चाई या मिथ्यापन के प्राधार पर उनकी प्रतिम सच्चाई का प्रश्न खडे किये बिना, सम्मान करें । यदि कुछ सिद्धान्तो, तथ्यों का प्रतिशाओंों की सिद्धि या प्रसिद्धि मान भी ली जाय, तब भी, प्रतिस्पर्धी विवाद करने वालो के बीच मध्यस्थ द्वारा शासित किये गये, यह या अन्य सिद्धान्तों के बारे की स्वीकृति, समस्त विवाद के लिये प्रारम्भिक प्रावश्यकता होगी।" रामानुज संप्रदाय के विख्यात दार्शनिक वेकटनाथ, इन मतो के विरोध में, सत्य या हेतु या शेय विषय की खोज की प्रारम्भिक अवस्था के तौर से, कुछ प्रतिज्ञाम्रो या तथ्यों में स्वाभाविक धर्म के रूप में प्रामाण्य या प्रप्रामाण्य मानना भावश्यक है या नहीं इसे निश्चित करना चाहते हैं। मगर प्रामाण्य या मप्रमाण्य प्रतिज्ञाओं का भेद नही माना जाय तो कोई भी प्रबध ( प्रतिज्ञा ) सिद्ध नहीं की जा सकती और न कोई व्यवहार ही सम्भव है। यद्यपि सामान्य लोगो की स्वीकृति के आधार पर प्रमाण न च प्रमाणादिनां सत्तापि इत्थम् एव ताभ्याम् अंगीकुतुम् उचिता, तादृश व्यवहारनियममात्रेरणव कथा प्रवृत्युषपत्तेः । प्रमाणादिसत्ताम् ग्रभ्युपेत्यापि तथा व्यवहार नियम व्यतिरेके कथा- प्रवृत्ति बिना सत्व-निरर्णयस्य जयस्य वा प्रमिलसितस्य कथ कयोरपर्यवसानातू, इत्यादि ।
कारणवस्था कहलाती है । जब वह, जीव मौर जगत् की साधारण प्रकट अवस्था रूपी देह से युक्त है तब ब्रह्म को कार्यावस्था कहलाती है।' मानते हैं वे यह नहीं कह सकते कि कार्य कारण से अमिन्न है, जगत्, जो मिथ्या है वह ब्रह्म से जो सत्य है, अभिझ नही हो सकता । बलपूर्वक इस सुझाव का निषेध करते हैं कि सन्मात्र रूप कोई ऐसी वस्तु, जीव और जगत् की सूक्ष्मावस्था रूप देह वाले नियता कारण ईश्वर से, अंततः अधिक सत्य है, क्योंकि वे इसे भी स्वीकार करते हैं कि ईश्वर को केवल सन्मात्र माना जाय, क्योंकि ईश्वर सबंदा, सवज्ञता, सर्व शक्तिमत्ता, इत्यादि मनन्त श्रेष्ठ गुणों से युक्त हैं । रामानुज इस प्रकार, ईश्वर के प्रश रूप, जड और जीव के द्विविभक्त सिद्धान्त को पकड़े रहते हैं, जो ईश्वर इन अशों का निरन्तर अंतर्यामी हैं। वे निश्चय रूप से सरकार्यवादिनु हैं किन्तु उनका सरकार्यवाद, वेदान्त के सत्कार्यवाद से, जो शंकर ने माना है अधिक साख्य की राह पर है । कार्य, कारण की केवल बदली हुई अवस्था है और इसलिये जड और जीव रूप से प्रकट जगत्, जो ईश्वर की देह है, इसे केवल इसलिये कार्य माना है कि यह कार्य रूप से प्रकटावस्था के पूर्व, ईश्वर में सूक्ष्म और निर्मल अवस्था में विद्यमान था। किन्तु, ईश्वर मे यह जड़ और जीव का भेद हमेशा से विद्यमान था और उसमें कोई ऐसा अंश नहीं है जो इससे अधिक सत्य और चरम हो । यहा पर रामानुज भास्कर का पूर्णतः साथ छोड़ देते हैं। क्योंकि भास्कर के अनुसार, जो कि कार्य रूप से ईश्वर जड और जीवमय प्रकट सृष्टि रूप से विद्यमान था, तो भी कारण रूप से ईश्वर की सत्ता भी थी, जो नितान्त व्यक्त और निविशेष रूप से सन्मात्र था । ईश्वर, इसलिये, सर्वथा जड़, जीव और उसके प्रतर्यामी, के त्रिविध रूप से विद्यमान था, और प्राकृत या कारणावस्था और प्रलयावस्था का पर्थ, जड पौर जीव की व्यक्तावस्था से भिन्न सूक्ष्म और निर्मल अवस्था से है। किन्तु रामानुज आग्रह करते हैं कि जैसे मनुष्य में देह और आत्मा के बीच भेद है, और जैसे देह की कमी भोर दोष आत्मा को प्रभावित नहीं करते, उसी प्रकार परम श्रतर्यामी ईश्वर और उसका शरीर, जीव और जड़ जगत् रूपी के बीच, स्पष्ट रूप से भेद है औौर जगत् के दोष ब्रह्म को इसलिये प्रभावित नहीं कर सकते। इस प्रकार, यद्यपि ब्रह्म के शरीर है तो भी वह प्रखण्ड है और कर्म से सर्वदा रहित है : क्योकि उसको निश्चयात्मक चेष्टाएं महतुकी हैं। वह, इसलिये सभी दोषो के प्रभाव से रहित है और अपने में, अनन्त हितकारी गुण धारण करता हुआ, शुद्ध और पूर्ण है। रामानुज का यह प्राक्षेपयुक्तियुक्त नहीं है, क्योंकि इसके अनुसार कार्य के अन्तस्थ सत्ता कारण से एक रूप है। किन्तु इस आक्षेप में भी यह सच्चाई है कि कार्यकारण की अभिनता के सिद्धान्त को शंकर के मत के योग्य बनाने के लिये, वक्रार्थ देना श्रावश्यक हो जाता है। रामानुज, पपने 'वेदार्थ संग्रह' और 'वेदान्त दीप' में यह बताने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार, शकर के मतवाद को दूर करके, उन्हें भास्कर के सिद्धान्त और अपने पूर्वगामी गुरु यादव प्रकाश के सिद्धान्त से भी, हट कर रहना पड़ा। वे भास्कर का साथ न दे सके, क्योंकि भास्कर मानते थे कि ब्रह्म उन मर्यादानों पर सीमाग्रो से सम्बन्धित है जिनसे वह बंधन में पड़ता है और जिनके निवारण से वह मुक्त होता है । घे यादव प्रकाश से भी सहमत न हो सके, जो मानते थे कि ब्रह्म एक ओर शुद्ध है और दूसरी भोर, स्वय नाना रूप जगत् में परिणमित होता है । इन दोनों मतो की उपनिषद् के पाठ से सगति नहीं बैठती । वेंकटनाथ का प्रमाण-निरूपण जिस प्रकार शून्यवादी बौद्ध या माध्यमिक किसी भी तथ्य या प्रतिज्ञा की न्याययुक्त सत्ता का निषेध प्रतिपादित करते हैं, उसी प्रकार शंकर मतवादी उक्त प्रश्नो पर अपना निर्णय दे सकने में असमर्थ है। खण्डन खण्डखारा के पूर्व पक्ष में इस प्रश्न के उत्तर मे कि सारे विवादों को लक्ष्य करने वाले तथ्यो और प्रतिज्ञाओं की पहले ही सिद्धि और प्रसिद्धि मान लेनी चाहिये अथवा नहीं, इसका उल्लेख करते हुए भी श्री हर्ष कहते हैं कि ऐसी कोई मान्यता अनिवार्य नहीं है, क्योंकि विवाद, दो प्रतिस्पर्धी पुरुषो की मापस की स्वीकृति से ही, यह मानकर किया जा सकता है कि, वे विवाद का किसी एक मध्यस्थ द्वारा निश्चित किये गये कुछ सिद्धान्तो की सच्चाई या मिथ्यापन के प्राधार पर उनकी प्रतिम सच्चाई का प्रश्न खडे किये बिना, सम्मान करें । यदि कुछ सिद्धान्तो, तथ्यों का प्रतिशाओंों की सिद्धि या प्रसिद्धि मान भी ली जाय, तब भी, प्रतिस्पर्धी विवाद करने वालो के बीच मध्यस्थ द्वारा शासित किये गये, यह या अन्य सिद्धान्तों के बारे की स्वीकृति, समस्त विवाद के लिये प्रारम्भिक प्रावश्यकता होगी।" रामानुज संप्रदाय के विख्यात दार्शनिक वेकटनाथ, इन मतो के विरोध में, सत्य या हेतु या शेय विषय की खोज की प्रारम्भिक अवस्था के तौर से, कुछ प्रतिज्ञाम्रो या तथ्यों में स्वाभाविक धर्म के रूप में प्रामाण्य या प्रप्रामाण्य मानना भावश्यक है या नहीं इसे निश्चित करना चाहते हैं। मगर प्रामाण्य या मप्रमाण्य प्रतिज्ञाओं का भेद नही माना जाय तो कोई भी प्रबध सिद्ध नहीं की जा सकती और न कोई व्यवहार ही सम्भव है। यद्यपि सामान्य लोगो की स्वीकृति के आधार पर प्रमाण न च प्रमाणादिनां सत्तापि इत्थम् एव ताभ्याम् अंगीकुतुम् उचिता, तादृश व्यवहारनियममात्रेरणव कथा प्रवृत्युषपत्तेः । प्रमाणादिसत्ताम् ग्रभ्युपेत्यापि तथा व्यवहार नियम व्यतिरेके कथा- प्रवृत्ति बिना सत्व-निरर्णयस्य जयस्य वा प्रमिलसितस्य कथ कयोरपर्यवसानातू, इत्यादि ।
मलप्पुरम के कलेक्टर के गोपालकृष्णन ने बताया "अब तक मलप्पुरम और कोझिकोड के अलग-अलग अस्पतालों से 49 लोगों को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन अभी भी 14 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. बाकी 109 लोगों का इलाज चल रहा है." मलप्पुरम के जिला कलेक्टर के गोपालकृष्णन ने कहा कि एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) विमान हादसे (Kozhikode Plane Crash) में अभी भी 14 लोगों की हालत गंभीर है. इससे पहले विमान के पायलट-इन-कमांड, कैप्टन दीपक साठे (Deepak Vasant Sathe) का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर को एक विमान से मुंबई लाया गया. एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने PTI को बताया कि 58 साल के साठे मुंबई के चंदीवली में रहते थे और मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार होगा. उन्होंने बताया कि साठे के दो बेटों में से एक सोमवार रात को अमेरिका से भारत पहुंचेगा. बता दें कि शुक्रवार रात 8 बजे, वंदे भारत मिशन (Vande Bharat Mission) के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरा, लेकिन लैंडिंग के दौरान फिसलने की वजह से यह हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में दीपक साठे और 32 वर्षीय अखिलेश शर्मा दोनों ही पायलट की मौत हो गई. दोनों पायलट्स समेत इस हादसे में 19 लोगों की जान गई है. विमान में 190 यात्री सवार थे.
मलप्पुरम के कलेक्टर के गोपालकृष्णन ने बताया "अब तक मलप्पुरम और कोझिकोड के अलग-अलग अस्पतालों से उनचास लोगों को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन अभी भी चौदह लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. बाकी एक सौ नौ लोगों का इलाज चल रहा है." मलप्पुरम के जिला कलेक्टर के गोपालकृष्णन ने कहा कि एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान हादसे में अभी भी चौदह लोगों की हालत गंभीर है. इससे पहले विमान के पायलट-इन-कमांड, कैप्टन दीपक साठे का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर को एक विमान से मुंबई लाया गया. एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने PTI को बताया कि अट्ठावन साल के साठे मुंबई के चंदीवली में रहते थे और मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार होगा. उन्होंने बताया कि साठे के दो बेटों में से एक सोमवार रात को अमेरिका से भारत पहुंचेगा. बता दें कि शुक्रवार रात आठ बजे, वंदे भारत मिशन के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरा, लेकिन लैंडिंग के दौरान फिसलने की वजह से यह हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में दीपक साठे और बत्तीस वर्षीय अखिलेश शर्मा दोनों ही पायलट की मौत हो गई. दोनों पायलट्स समेत इस हादसे में उन्नीस लोगों की जान गई है. विमान में एक सौ नब्बे यात्री सवार थे.
खुशखबरीः गीता उनियाल के कैंसर का ऑपरेशन रहा सफल,पोस्ट कर जानकारी की साझा। एक बार फिर नताशा शाह हुई ट्रोलिंग का शिकार, बुरी तरह लताड़ रहे लोग। Geeta Uniyal का पहाड़ी लुक हुआ वायरल, फोटोज़ में दिखा गढ़ कुमाऊं का पहनावा। प्रियंका महर ने पेश की मिसाल,गाँव पहुंचकर जरुरतमंदों की कर रही मदद।
खुशखबरीः गीता उनियाल के कैंसर का ऑपरेशन रहा सफल,पोस्ट कर जानकारी की साझा। एक बार फिर नताशा शाह हुई ट्रोलिंग का शिकार, बुरी तरह लताड़ रहे लोग। Geeta Uniyal का पहाड़ी लुक हुआ वायरल, फोटोज़ में दिखा गढ़ कुमाऊं का पहनावा। प्रियंका महर ने पेश की मिसाल,गाँव पहुंचकर जरुरतमंदों की कर रही मदद।
"पूर्वी मुझे उम्मीद नहीं है कि, स्थिति जल्दी ठीक होने वाली है। क्यों न तुम कुछ दिन के लिए अपने घर चली जाओ? मैं भी गाँव चला जाता हूं, वहां खेती..." पूर्वी ने बात काट दी "वहां खेती करोगे ?" "समझने की कोशिश करो पूर्वी, नौकरी के बिना यहां रहना संभव नहीं है। मुझे उम्मीद नहीं है, ऐसे हालात में मुझे कहीं नौकरी मिलेगी। तुम्हे अपने साथ लेकर जाना,मुझे ठीक नहीं लग रहा।" पूर्वी उदास होकर बोली "क्या मैं इतनीं कमजोर हूँ कि आपके साथ गाँव में नहीं रह सकती?" "बात कमजोर होने या न होने की नहीं है। तुम्हे वहां रहने की आदत नहीं है और तुम साथ रहोगी तो मेरा पूरा ध्यान तुम्हारी तरफ होगा। मैं वहां जाकर घर की हालत ठीक करता हूं, फिर तुम भी अा जाना।" "मैं समझती हूं प्रशांत, जैसा तुम ठीक समझो। हिम्मत रखो, ये समय भी निकल जाएगा। प्रशांत, महानगर में एक अच्छी कम्पनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। नौकरी लगते ही उसने, अपने कॉलेज की दोस्त पूर्वी से शादी कर ली। सब अच्छा चल रहा था पर, अचानक आई वैश्विक महामारी के चलते कंपनी का सारा काम बंद हो गया। बहुत सारे लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। प्रशांत को समझ अा गया था कि, नौकरी के बिना महानगर में रहना संभव नहीं है।उसने गांव जाने का निर्णय लिया। पूर्वी को उसके मायके छोड़कर, प्रशांत अपने गांव अा गया। गांव में प्रशांत के काका काकी रहते थे। प्रशांत के माता पिता के गुजरने के बाद,काका ने ही उसका पालन पोषण किया था। वहां प्रशांत की थोड़ी बहुत खेती थी, जिसकी देखभाल भी काका ही करते थे। गांव जाते हुए प्रशांत पूरे रास्ते सोचता रहा - "काका ने कितना किया है मेरे लिए, अब फिर से उनके ऊपर बोझ बनकर रहना। जीवन मैं ऐसा समय भी आएगा इसकी कल्पना नहीं की थी।" गांव आकार प्रशांत ने अपने घर की हालत ठीक की।काका से मिलकर उन्हें सारी स्थिति के विषय में बताया। काका से बात करके पता चला कि, गांव में पिछले दो साल से बारिश नहीं हुई। सूखे की स्थिति है। खेती की हालत खराब है। गांव वाले किसी तरह गुजारा कर पा रहे हैं। प्रशांत की सारी रात सोचते हुए निकली, एक उम्मीद थी, वह भी ख़तम होती दिख रही है। कोई रास्ता समझ नहीं अा रहा। जीवन कहां ले जाएगा। सुबह काका ने प्रशांत को उदास देखकर समझाया - "बेटा तुम थोड़ी सी विपदा में ही हिम्मत हार बैठे। इन ग्रामवासियों को देखो, दो साल से बारिश नहीं हुई है, फिर भी हिम्मत नहीं हारे। जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। संघर्ष ही जीवन है। भगवान की कृपा रही, तो इस साल बारिश अच्छी होगी। तुम जब तक यहां हो, कुछ ऐसा करो जिससे ग्रामवासियों को भी तुम्हारी शिक्षा का लाभ हो। जहां चाह वहां राह, प्रशांत को भी काका की बात ठीक लगी। अपनी पढ़ाई और नौकरी के अनुभव का उपयोग वह यहां भी कर सकता है। उसने खेती के बारे में और अधिक जानकारी लेना प्रारंभ किया। किस तकनीक से खेती की जाए, कौन सी फसल ग्राम की जलवायु के अनुकूल है। कम लागत में ज्यादा पैदावार कैसे की जाए ऐसे अनेक विषय थे, जिन्होंने प्रशांत को सोचने की एक दिशा दी। खेती को भी लाभदायक व्यापार में कैसे बदला जाए प्रशांत को समझ अा गया था। अब प्रतीक्षा थी बारिश की। ईश्वर की कृपा से नभ में मेघों की छटा दिखाई देने लगी। बारिश ने पूरे गांव में उत्साह भर दिया है। प्रशांत सोचने लगा, ग्रीष्म ऋतु में यही स्थान कितना निर्जन प्रतीत होता था। बारिश होते ही, जैसे जीवन का संचार हो गया है। निर्जन हो चुकी शाख में, कोंपल अंकुरित हो रही है। भूमि हरित त्रणो से आच्छादित है। इन्द्रधनुष अपने रंग बिखेर रहा है। मयूर नृत्य कर रहे हैं। पक्षियों का कलरव अत्यंत मधुर है। विभिन्न प्रकार के जीव जंतु दृष्टिगोचर होने लगे हैं। प्रकृति नव सृजन कर रही है। जीवन संचारित हो रहा है। भूमि वर्षा जल से अपनी क्षुधा शांत कर स्वयं हरित होकर, समस्त आश्रित जीवों का पालन पोषण कर रही है। सुख - दुःख, दिन - रात्रि, धूप - छांव। संपूर्ण जीवन का रहस्य तो इस बारिश में ही छिपा है। वृक्ष ग्रीष्म,शीत सहकर भी अपने स्थान पर अडिग है। मैं क्यों हतोत्साहित था जीवन से। जब मूक वृक्ष, पशु ,पक्षी, समस्त जीव तथा मेरे ग्रामवासी बारिश की प्रतीक्षा कर सकते हैं और अपने कर्म का त्याग नहीं करते, तब मैं कैसे पराजित होकर, एक ओर बैठ सकता हूं। सूर्य का ताप, भूमि जल को शोषित न करे, तो बारिश होना संभव नहीं है।इसी प्रकार जीवन में संघर्ष न आए, तो जीवन का विकास संभव नहीं है। प्रशांत ,पूर्वी को लेने चल पड़ा है। एक नवीन उत्साह के साथ एक नवीन जीवन की ओर...।
"पूर्वी मुझे उम्मीद नहीं है कि, स्थिति जल्दी ठीक होने वाली है। क्यों न तुम कुछ दिन के लिए अपने घर चली जाओ? मैं भी गाँव चला जाता हूं, वहां खेती..." पूर्वी ने बात काट दी "वहां खेती करोगे ?" "समझने की कोशिश करो पूर्वी, नौकरी के बिना यहां रहना संभव नहीं है। मुझे उम्मीद नहीं है, ऐसे हालात में मुझे कहीं नौकरी मिलेगी। तुम्हे अपने साथ लेकर जाना,मुझे ठीक नहीं लग रहा।" पूर्वी उदास होकर बोली "क्या मैं इतनीं कमजोर हूँ कि आपके साथ गाँव में नहीं रह सकती?" "बात कमजोर होने या न होने की नहीं है। तुम्हे वहां रहने की आदत नहीं है और तुम साथ रहोगी तो मेरा पूरा ध्यान तुम्हारी तरफ होगा। मैं वहां जाकर घर की हालत ठीक करता हूं, फिर तुम भी अा जाना।" "मैं समझती हूं प्रशांत, जैसा तुम ठीक समझो। हिम्मत रखो, ये समय भी निकल जाएगा। प्रशांत, महानगर में एक अच्छी कम्पनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। नौकरी लगते ही उसने, अपने कॉलेज की दोस्त पूर्वी से शादी कर ली। सब अच्छा चल रहा था पर, अचानक आई वैश्विक महामारी के चलते कंपनी का सारा काम बंद हो गया। बहुत सारे लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। प्रशांत को समझ अा गया था कि, नौकरी के बिना महानगर में रहना संभव नहीं है।उसने गांव जाने का निर्णय लिया। पूर्वी को उसके मायके छोड़कर, प्रशांत अपने गांव अा गया। गांव में प्रशांत के काका काकी रहते थे। प्रशांत के माता पिता के गुजरने के बाद,काका ने ही उसका पालन पोषण किया था। वहां प्रशांत की थोड़ी बहुत खेती थी, जिसकी देखभाल भी काका ही करते थे। गांव जाते हुए प्रशांत पूरे रास्ते सोचता रहा - "काका ने कितना किया है मेरे लिए, अब फिर से उनके ऊपर बोझ बनकर रहना। जीवन मैं ऐसा समय भी आएगा इसकी कल्पना नहीं की थी।" गांव आकार प्रशांत ने अपने घर की हालत ठीक की।काका से मिलकर उन्हें सारी स्थिति के विषय में बताया। काका से बात करके पता चला कि, गांव में पिछले दो साल से बारिश नहीं हुई। सूखे की स्थिति है। खेती की हालत खराब है। गांव वाले किसी तरह गुजारा कर पा रहे हैं। प्रशांत की सारी रात सोचते हुए निकली, एक उम्मीद थी, वह भी ख़तम होती दिख रही है। कोई रास्ता समझ नहीं अा रहा। जीवन कहां ले जाएगा। सुबह काका ने प्रशांत को उदास देखकर समझाया - "बेटा तुम थोड़ी सी विपदा में ही हिम्मत हार बैठे। इन ग्रामवासियों को देखो, दो साल से बारिश नहीं हुई है, फिर भी हिम्मत नहीं हारे। जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। संघर्ष ही जीवन है। भगवान की कृपा रही, तो इस साल बारिश अच्छी होगी। तुम जब तक यहां हो, कुछ ऐसा करो जिससे ग्रामवासियों को भी तुम्हारी शिक्षा का लाभ हो। जहां चाह वहां राह, प्रशांत को भी काका की बात ठीक लगी। अपनी पढ़ाई और नौकरी के अनुभव का उपयोग वह यहां भी कर सकता है। उसने खेती के बारे में और अधिक जानकारी लेना प्रारंभ किया। किस तकनीक से खेती की जाए, कौन सी फसल ग्राम की जलवायु के अनुकूल है। कम लागत में ज्यादा पैदावार कैसे की जाए ऐसे अनेक विषय थे, जिन्होंने प्रशांत को सोचने की एक दिशा दी। खेती को भी लाभदायक व्यापार में कैसे बदला जाए प्रशांत को समझ अा गया था। अब प्रतीक्षा थी बारिश की। ईश्वर की कृपा से नभ में मेघों की छटा दिखाई देने लगी। बारिश ने पूरे गांव में उत्साह भर दिया है। प्रशांत सोचने लगा, ग्रीष्म ऋतु में यही स्थान कितना निर्जन प्रतीत होता था। बारिश होते ही, जैसे जीवन का संचार हो गया है। निर्जन हो चुकी शाख में, कोंपल अंकुरित हो रही है। भूमि हरित त्रणो से आच्छादित है। इन्द्रधनुष अपने रंग बिखेर रहा है। मयूर नृत्य कर रहे हैं। पक्षियों का कलरव अत्यंत मधुर है। विभिन्न प्रकार के जीव जंतु दृष्टिगोचर होने लगे हैं। प्रकृति नव सृजन कर रही है। जीवन संचारित हो रहा है। भूमि वर्षा जल से अपनी क्षुधा शांत कर स्वयं हरित होकर, समस्त आश्रित जीवों का पालन पोषण कर रही है। सुख - दुःख, दिन - रात्रि, धूप - छांव। संपूर्ण जीवन का रहस्य तो इस बारिश में ही छिपा है। वृक्ष ग्रीष्म,शीत सहकर भी अपने स्थान पर अडिग है। मैं क्यों हतोत्साहित था जीवन से। जब मूक वृक्ष, पशु ,पक्षी, समस्त जीव तथा मेरे ग्रामवासी बारिश की प्रतीक्षा कर सकते हैं और अपने कर्म का त्याग नहीं करते, तब मैं कैसे पराजित होकर, एक ओर बैठ सकता हूं। सूर्य का ताप, भूमि जल को शोषित न करे, तो बारिश होना संभव नहीं है।इसी प्रकार जीवन में संघर्ष न आए, तो जीवन का विकास संभव नहीं है। प्रशांत ,पूर्वी को लेने चल पड़ा है। एक नवीन उत्साह के साथ एक नवीन जीवन की ओर...।
पंजाब में पिछले तीन दिन से हो रही बारिश के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आ गई है पुलिस ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी आपात स्थिति में वह 112 पर संपर्क करें तुरंत पुलिस उनकी सेवा में हाजिर होगी। इतना ही नहीं अगर किसी को कहीं नुकसान होने की आशंका है तो इस बारे में भी पुलिस को सूचित किया जा सकता है। भीषण बारिश की वजह से पंजाब सरकार ने 13 जुलाई तक सभी सरकारी, निजी एडेड और मान्यता प्राप्त स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि बारिश को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने लोगों से बारिश में घरों से न निकले की अपील की है। पंजाब में हो रही तेज बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हैं। ऐसे में विद्यार्थियों व उनके परिजनों की असुविधा को ध्यान रखते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड(पीएसईबी) ने कक्षा 5वीं और 8वीं की रि-अपीयर की परीक्षाएं गुरुवार तक स्थगित कर दी है। परीक्षा नियंत्रक जनक राज महरोक ने बताया कि अगले निर्णय तक परीक्षाएं स्थगित की गई हैं। परीक्षाओं की नई डेटशीट बाद में जारी की जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों को हिदायत दी है कि वह बोर्ड की वेबसाइट देखते रहे। पीएसईबी की वेबसाइट www. pseb. ac. in से जानकारी हासिल की जा सकती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पंजाब में पिछले तीन दिन से हो रही बारिश के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आ गई है पुलिस ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी आपात स्थिति में वह एक सौ बारह पर संपर्क करें तुरंत पुलिस उनकी सेवा में हाजिर होगी। इतना ही नहीं अगर किसी को कहीं नुकसान होने की आशंका है तो इस बारे में भी पुलिस को सूचित किया जा सकता है। भीषण बारिश की वजह से पंजाब सरकार ने तेरह जुलाई तक सभी सरकारी, निजी एडेड और मान्यता प्राप्त स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि बारिश को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने लोगों से बारिश में घरों से न निकले की अपील की है। पंजाब में हो रही तेज बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हैं। ऐसे में विद्यार्थियों व उनके परिजनों की असुविधा को ध्यान रखते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कक्षा पाँचवीं और आठवीं की रि-अपीयर की परीक्षाएं गुरुवार तक स्थगित कर दी है। परीक्षा नियंत्रक जनक राज महरोक ने बताया कि अगले निर्णय तक परीक्षाएं स्थगित की गई हैं। परीक्षाओं की नई डेटशीट बाद में जारी की जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों को हिदायत दी है कि वह बोर्ड की वेबसाइट देखते रहे। पीएसईबी की वेबसाइट www. pseb. ac. in से जानकारी हासिल की जा सकती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
९. अनादेयनामकर्म -- इस कर्म के उदय से जीव का वचन ग्रहण करने योग्य एवं युक्तियुक्त होता हुआ भी लोगों द्वारा मान्य नहीं होता । १०. अयशः कीर्तिनामकर्म - इस कर्म के उदय से जीव को अपयश एवं अपकीर्ति प्राप्त होते हैं । जो अच्छा काम करने पर भी कई वार अपयश मिल जाता है - वह इसी कर्म का विशेष उदय समझना चाहिए । प्रश्न २० - नामकर्म के सारे कितने भेद हो गए ? उत्तर - चौदह पिण्डप्रकृतियों के अवान्तर भेद ६५ हैं, प्रत्येक के ८, त्रस आदि के १० एवं स्यावर आदि के १० - ऐसे सव मिलाने से नामकर्म - के ६३ भेद वनते हैं तथा वंधननामकर्म के १५ भेद गिनें तो १०८ हो जाते हैं । यदि बंधन और संघातनामकर्म की १० प्रकृतियों का समावेश शरीरनामकर्म की प्रकृतियों में कर लिया जाए तथा वर्ण-रस-गंध-स्पर्श की २० प्रकृतियां न गिनकर सामान्य रूप से चार प्रकृतियां ही गिन ली जाएं तो [ नामकर्म की ( १३ से २६ निकल जाने से ) बंध की अपेक्षा ६७ प्रकृतियां रह जाती हैं क्योंकि वर्ण-गंध-रस-स्पर्श की एक समय में एक हा प्रकृति वंधती है । प्रश्न २१-नामकर्म कैसे बंधता है ? उत्तर - नामकर्म दो प्रकार का है - शुभ और अशुभ । शुभनामकर्म चार कारणों से बंधता है - १ (१) काया की सरलता से, ( २ ) भाव की सरलता से, ( ३ ) भाषा की सरलता से, (४) अविसंवादनयोग से ( कथनीकरणी में समानता रखने को अविसंवादनयोग कहते हैं । ) मन-वचन काया की सरलता और अविसंवादनयोग का अन्तर वतलाते हुए भगवती-टीकाकार ने लिखा है कि मन-वचन-काया की सरलता वर्तमानकाल की अपेक्षा से है तथा अविसंवादनयोग वर्तमान और अतीत काल की अपेक्षा से है । १. भगवती शुभनामकर्म में एक तीर्थंकरनाम भी है। तीर्थंकरनामकर्म बांधने के ज्ञाता० अं० ८ में वीस कारण बतलाए हैं। (उनका विवेचन लोकप्रकाश ४।१३ में किया जा चुका है । ) अशुभनामकर्म चार कारणों से वंधता है - (१) काया की वकता से, ( २ ) भाव की वक्रता से, (३) भाषा की वक्रता से, (४) विसंवादनयोग से । (कहना कुछ और करना कुछ इस प्रकार का व्यवहार विसंवादनयोग कहलाता है । ) प्रश्न २२ - नामकर्म का अनुभाव ( फलभोग ) कितने प्रकार का है उत्तर - शुभनामकर्म के उदय से जीव शरीरसम्बन्धी एवं वचनसम्बन्धी उत्कर्ष - - उत्कृष्टता पाता है और अशुभनामकर्म के उदय से अपकर्ष अर्थात् निकृष्टता - हीनता पाता है । शुभनामकर्म के १४ अनुभाव हैं यानी उसके उदय से १४ वस्तुओं की प्राप्ति होती है - (१) इष्टशब्द, ( २ ) इष्टरूप, (३) इष्टगन्ध, (२) (४) इष्टरस, (५) इ॰टस्पर्श, (६) इष्टगति, (७) इष्टस्थिति, (८) इष्टलावण्य, (६) इण्टयशः कीर्ति, (१०) इष्टउत्थान-कर्म-बल-वीर्यपुरुषकार - पराक्रम', (११) इण्टस्वरता, (१२) कान्तस्वरता, (१३) प्रियस्वरता, (१४) मनोज्ञस्वरता । अशुभनामकर्म का अनुभाव भी १४ प्रकार का है - वह उपर्युक्त प्रकारों से विपरीत समझना चाहिए । जैसेअनिष्टशब्द, अनिष्ट रूप यावत् अमनोज्ञस्वरता । २. उत्थानादि का अर्थ इस प्रकार है - (१) उत्यांन-चेष्टा विशेष, ( २ ) कर्म - भ्रमणादि क्रिया, (३) वल - शरीर का सामर्थ्य, (४) वीर्य - शरीर से उत्पन्न होनेवाली एक शक्ति, ( ५ ) पुरुषकार - अभिमानविशेष, (६) पराक्रम--- आत्माभिमान की रक्षा करने का प्रयत्नविशेष ।
नौ. अनादेयनामकर्म -- इस कर्म के उदय से जीव का वचन ग्रहण करने योग्य एवं युक्तियुक्त होता हुआ भी लोगों द्वारा मान्य नहीं होता । दस. अयशः कीर्तिनामकर्म - इस कर्म के उदय से जीव को अपयश एवं अपकीर्ति प्राप्त होते हैं । जो अच्छा काम करने पर भी कई वार अपयश मिल जाता है - वह इसी कर्म का विशेष उदय समझना चाहिए । प्रश्न बीस - नामकर्म के सारे कितने भेद हो गए ? उत्तर - चौदह पिण्डप्रकृतियों के अवान्तर भेद पैंसठ हैं, प्रत्येक के आठ, त्रस आदि के दस एवं स्यावर आदि के दस - ऐसे सव मिलाने से नामकर्म - के तिरेसठ भेद वनते हैं तथा वंधननामकर्म के पंद्रह भेद गिनें तो एक सौ आठ हो जाते हैं । यदि बंधन और संघातनामकर्म की दस प्रकृतियों का समावेश शरीरनामकर्म की प्रकृतियों में कर लिया जाए तथा वर्ण-रस-गंध-स्पर्श की बीस प्रकृतियां न गिनकर सामान्य रूप से चार प्रकृतियां ही गिन ली जाएं तो [ नामकर्म की बंध की अपेक्षा सरसठ प्रकृतियां रह जाती हैं क्योंकि वर्ण-गंध-रस-स्पर्श की एक समय में एक हा प्रकृति वंधती है । प्रश्न इक्कीस-नामकर्म कैसे बंधता है ? उत्तर - नामकर्म दो प्रकार का है - शुभ और अशुभ । शुभनामकर्म चार कारणों से बंधता है - एक काया की सरलता से, भाव की सरलता से, भाषा की सरलता से, अविसंवादनयोग से मन-वचन काया की सरलता और अविसंवादनयोग का अन्तर वतलाते हुए भगवती-टीकाकार ने लिखा है कि मन-वचन-काया की सरलता वर्तमानकाल की अपेक्षा से है तथा अविसंवादनयोग वर्तमान और अतीत काल की अपेक्षा से है । एक. भगवती शुभनामकर्म में एक तीर्थंकरनाम भी है। तीर्थंकरनामकर्म बांधने के ज्ञाताशून्य अंशून्य आठ में वीस कारण बतलाए हैं। अशुभनामकर्म चार कारणों से वंधता है - काया की वकता से, भाव की वक्रता से, भाषा की वक्रता से, विसंवादनयोग से । प्रश्न बाईस - नामकर्म का अनुभाव कितने प्रकार का है उत्तर - शुभनामकर्म के उदय से जीव शरीरसम्बन्धी एवं वचनसम्बन्धी उत्कर्ष - - उत्कृष्टता पाता है और अशुभनामकर्म के उदय से अपकर्ष अर्थात् निकृष्टता - हीनता पाता है । शुभनामकर्म के चौदह अनुभाव हैं यानी उसके उदय से चौदह वस्तुओं की प्राप्ति होती है - इष्टशब्द, इष्टरूप, इष्टगन्ध, इष्टरस, इ॰टस्पर्श, इष्टगति, इष्टस्थिति, इष्टलावण्य, इण्टयशः कीर्ति, इष्टउत्थान-कर्म-बल-वीर्यपुरुषकार - पराक्रम', इण्टस्वरता, कान्तस्वरता, प्रियस्वरता, मनोज्ञस्वरता । अशुभनामकर्म का अनुभाव भी चौदह प्रकार का है - वह उपर्युक्त प्रकारों से विपरीत समझना चाहिए । जैसेअनिष्टशब्द, अनिष्ट रूप यावत् अमनोज्ञस्वरता । दो. उत्थानादि का अर्थ इस प्रकार है - उत्यांन-चेष्टा विशेष, कर्म - भ्रमणादि क्रिया, वल - शरीर का सामर्थ्य, वीर्य - शरीर से उत्पन्न होनेवाली एक शक्ति, पुरुषकार - अभिमानविशेष, पराक्रम--- आत्माभिमान की रक्षा करने का प्रयत्नविशेष ।
खुद वकील भी यूपी में अपने लिए आवाज नहीं उठा सकते। ऐसे में आम लोगों की बात ही दूसरी है। शनिवार को आसाम रोड कल्पीपारा निवासी फातिमा के साथ ऐसा ही एक वाकया हुआ। फातिमा सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। वह दिल्ली से कुछ सामान मिनी ट्रक पर लादकर बहराइच लौट रही थीं। तिकोनीबाग चौराहे पर सिपाही और होमगार्ड ने ट्रक को आगे नो इंट्री होने की बात कहकर जाने के लिए पैसा मांगा। ट्रक में सवार महिला वकील और पति ने विरोध किया तो चौकी से कुछ सिपाही और होमगार्ड मौके पर पहुंच गए। वह सभी अधिवक्ता और पति को चौकी में ले गए। यहां अभद्रता कर हाथापाई की। वकील के पति और चालक के विरोध करने पर पीटा। वकील ने चौंकी इंचार्ज को नामजद करते हुए कोतवाली देहात में तहरीर दी है।
खुद वकील भी यूपी में अपने लिए आवाज नहीं उठा सकते। ऐसे में आम लोगों की बात ही दूसरी है। शनिवार को आसाम रोड कल्पीपारा निवासी फातिमा के साथ ऐसा ही एक वाकया हुआ। फातिमा सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। वह दिल्ली से कुछ सामान मिनी ट्रक पर लादकर बहराइच लौट रही थीं। तिकोनीबाग चौराहे पर सिपाही और होमगार्ड ने ट्रक को आगे नो इंट्री होने की बात कहकर जाने के लिए पैसा मांगा। ट्रक में सवार महिला वकील और पति ने विरोध किया तो चौकी से कुछ सिपाही और होमगार्ड मौके पर पहुंच गए। वह सभी अधिवक्ता और पति को चौकी में ले गए। यहां अभद्रता कर हाथापाई की। वकील के पति और चालक के विरोध करने पर पीटा। वकील ने चौंकी इंचार्ज को नामजद करते हुए कोतवाली देहात में तहरीर दी है।
नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में पावर कट की परेशानी काफी बढ़ जाती है। इस परेशानी से निपटने के लोग घर में इनवर्टर का उपयोग करते हैं, लेकिन कई बार पावर होने के कारण इन्वर्टर की बैटरी ठीक से चार्ज नहीं हो पाती है, जिससे घर में रोशनी की परेशानी तो हो ही जाती है। इसके अतिरिक्त अपने कई डिवाइस भी चार्ज नहीं कर पाते हैं। इनमें मोबाइल, लैपटॉप और इन्वर्टर बैटरी भी शामिल हैं हैं। इन डिवाइस के चार्ज न होने पर आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी लाइट कट होने के दौरान अपनी इन्वर्टर बैटरी को चार्ज करना चाहते हैं, तो आज हम आपको कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सहायता से आप इसे पावर कट के दौरान भी चार्ज कर सकते हैं। दरअसल, इन दिनों कई ऐसे प्रोडक्ट बाजार में आ गए हैं, जो पावर कट के दौरान आपको बिजली सप्लाई करते हैं। इनमें सोलर पैनल, जनरेटार और हैंड-क्रैंक्ड चार्जर शामिल हैं। पावर कट के दौरान अपने इन्वर्टर आदि को चार्ज करने के लिए आप हैंड-क्रैंक्ड चार्जर का उपयोग कर सकते हैं। यह एक पोर्टेबल डिवाइस होता है, जिसका उपयोग हाथ से क्रैंक करके बिजली जनरेट करने के लिए किया जाता है। बिजली न होने पर इसका इस्तेमाल करके आप अपने डिवाइसों को चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके पास जनरेटर है, तो आप इसका इस्तेमाल बिजली जनरेट करने और अपने होम एप्लायंस को बिजली देने के लिए कर सकते हैं। जनरेटर का उपयोग करके आप अपना लैपटॉप और टेलीफोन भी चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके घर में सोलर पैनल है, तो आप इसका उपयोग अपने इन्वर्टर बैटरी को चार्ज करने के लिए कर सकते हैं। इसके लिए महत्वपूर्ण है कि सौर पैनल आपकी इन्वर्टर बैटरी के अनुकूल हो। इन्वर्टर की बैटरी चार्ज करने के बाद आप अपने डिवाइसों को यूज कर सकते हैं। अगर आपके पास बैटरी चार्जर है, तो आप इसकी सहायता से अपनी इन्वर्टर बैटरी को चार्ज कर सकते हैं। इसके लिए आपको चार्जर के पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनलों को इन्वर्टर बैटरी के टर्मिनलों से कनेक्ट करना होगा। उल्लेखनीय है कि आप ऐसे बैटरी चार्जर का इस्तेमाल करें जो आपकी इन्वर्टर बैटरी के अनुकूल हो।
नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में पावर कट की परेशानी काफी बढ़ जाती है। इस परेशानी से निपटने के लोग घर में इनवर्टर का उपयोग करते हैं, लेकिन कई बार पावर होने के कारण इन्वर्टर की बैटरी ठीक से चार्ज नहीं हो पाती है, जिससे घर में रोशनी की परेशानी तो हो ही जाती है। इसके अतिरिक्त अपने कई डिवाइस भी चार्ज नहीं कर पाते हैं। इनमें मोबाइल, लैपटॉप और इन्वर्टर बैटरी भी शामिल हैं हैं। इन डिवाइस के चार्ज न होने पर आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी लाइट कट होने के दौरान अपनी इन्वर्टर बैटरी को चार्ज करना चाहते हैं, तो आज हम आपको कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सहायता से आप इसे पावर कट के दौरान भी चार्ज कर सकते हैं। दरअसल, इन दिनों कई ऐसे प्रोडक्ट बाजार में आ गए हैं, जो पावर कट के दौरान आपको बिजली सप्लाई करते हैं। इनमें सोलर पैनल, जनरेटार और हैंड-क्रैंक्ड चार्जर शामिल हैं। पावर कट के दौरान अपने इन्वर्टर आदि को चार्ज करने के लिए आप हैंड-क्रैंक्ड चार्जर का उपयोग कर सकते हैं। यह एक पोर्टेबल डिवाइस होता है, जिसका उपयोग हाथ से क्रैंक करके बिजली जनरेट करने के लिए किया जाता है। बिजली न होने पर इसका इस्तेमाल करके आप अपने डिवाइसों को चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके पास जनरेटर है, तो आप इसका इस्तेमाल बिजली जनरेट करने और अपने होम एप्लायंस को बिजली देने के लिए कर सकते हैं। जनरेटर का उपयोग करके आप अपना लैपटॉप और टेलीफोन भी चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके घर में सोलर पैनल है, तो आप इसका उपयोग अपने इन्वर्टर बैटरी को चार्ज करने के लिए कर सकते हैं। इसके लिए महत्वपूर्ण है कि सौर पैनल आपकी इन्वर्टर बैटरी के अनुकूल हो। इन्वर्टर की बैटरी चार्ज करने के बाद आप अपने डिवाइसों को यूज कर सकते हैं। अगर आपके पास बैटरी चार्जर है, तो आप इसकी सहायता से अपनी इन्वर्टर बैटरी को चार्ज कर सकते हैं। इसके लिए आपको चार्जर के पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनलों को इन्वर्टर बैटरी के टर्मिनलों से कनेक्ट करना होगा। उल्लेखनीय है कि आप ऐसे बैटरी चार्जर का इस्तेमाल करें जो आपकी इन्वर्टर बैटरी के अनुकूल हो।
पंचकूला/चंडीगढ़ (नस) : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रंजीता मेहता बरवाला में किसानों के धरना प्रदर्शन में पहुंची। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जोर-जबरदस्ती से भाजपा सरकार यह काला कानून ला रही है। राज्यसभा में हुआ हंगामा इस बात का सबूत है। उन्होंने कहा कि कृषि अध्यादेश देश को एक बार फिर गुलामी की ओर ले जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस सेवा दल, पंचकूला जिला अध्यक्ष सुभाष निषाद, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश सिरसवाल, कमलेश शर्मा, करन दिवाकर, अनिल चौहान अनिल शर्मा भरेली भी मौजूद थे। उधर, किसानों के आंदोलन के चलते पंचकूला पुलिस ने विशेष प्रबंध किए थे। जिले की सीमाओं पर दिनभर पुलिस फोर्स तैनात रही। जिला पचंकूला के कालका, पिंजौर, रायपुररानी तथा बरवाला क्षेत्रों में अलग-अलग टीम तैनात की गईं। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
पंचकूला/चंडीगढ़ : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रंजीता मेहता बरवाला में किसानों के धरना प्रदर्शन में पहुंची। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जोर-जबरदस्ती से भाजपा सरकार यह काला कानून ला रही है। राज्यसभा में हुआ हंगामा इस बात का सबूत है। उन्होंने कहा कि कृषि अध्यादेश देश को एक बार फिर गुलामी की ओर ले जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस सेवा दल, पंचकूला जिला अध्यक्ष सुभाष निषाद, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश सिरसवाल, कमलेश शर्मा, करन दिवाकर, अनिल चौहान अनिल शर्मा भरेली भी मौजूद थे। उधर, किसानों के आंदोलन के चलते पंचकूला पुलिस ने विशेष प्रबंध किए थे। जिले की सीमाओं पर दिनभर पुलिस फोर्स तैनात रही। जिला पचंकूला के कालका, पिंजौर, रायपुररानी तथा बरवाला क्षेत्रों में अलग-अलग टीम तैनात की गईं। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
वह प्राकृत का पार गीति-भाण्डार आज उपलब्ध होता तो सचमुच ही संस्कृत गीतियों को भी सहृदय जन उनके फीकी समझते । किसी भाषा में प्रभूत साहित्य की, रचना हुए बिना यह प्रौढ़ता नहीं सकती, यह अनु मान सहज ही किया जा सकता है । प्राकृत के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर महाकवि वाक्पतिराज ने संस्कृत प्राकृत दोनों की परस्परोपकारिता को परिलक्षित करके इस उक्ति द्वारा प्राकृत के सहज सौन्दर्य की प्रशंसा की है - उम्मिलइ लावणं पययच्छायाएँ सक्कयं वयाणं । सक्कय-सक्कारुक्करिसोरण पययस्सवि पहावो । --गौड०, कवि- प्रशंसा, ६५ । प्राकृत की छाया से संस्कृत पदों का लावण्य उन्मीलित होता है और संस्कृत के संस्कारोत्कर्ष से प्राकृत की भी प्रभाव-वृद्धि होती है ।' ने ध्वन्यालोक जैसे प्रौढ़ लङ्कार-ग्रन्थ की 'लोचन' नाम्नी जो टीका प्रस्तुत की, वह सामान्य टीका-ग्रन्थ न होकर प्रौढ़ मौलिक अलङ्कार-ग्रन्थ हो गया। इसका और महत्व है जो व्याकरण-क्षेत्र में महर्षि पतञ्जलि के महाभाष्य को प्राप्त है। उन्होंने नूतन रस सिद्धान्त की स्थापना की है । 'लोचन' नाम्नी टीका में उन्होंने प्राकृत की ऐसी गीतियाँ दी हैं जो मूलग्रन्थ में नहीं हैं । वक्रोक्ति जीवित में प्राकृत गीतियाँ आलोचना-शास्त्र के प्रौढ़ ग्रन्थ-निर्माताओं में प्राचार्य का स्थान ऊँचा है। आचार्य नन्दवर्धन - प्रवर्तित ध्वनि-सिद्धान्त के ये प्रबल विरोधी थे । इन्होंने ध्वनि-सिद्धान्त का खण्डन करके वक्रोक्तिसिद्धान्त की स्थापना की है। आचार्य भामह ने पहले ही अपने 'काव्यालङ्कार' नामक ग्रन्थ में 'वक्रोक्ति' को सभी लङ्कारों का मूल माना था, उसी प्राचीन मान्यता की भित्ति पर कुन्तक ने अपने सिद्धान्त वा सम्प्रदाय का नए सिरे से विद्वत्तापूर्ण प्रवर्तन किया । उनके ग्रन्थ में कुल चार उन्मेष हैं, जिनमें काव्य १. सैषा सर्वैव वक्रोक्तिरनयाऽर्थो विभाव्यते । यत्नोऽस्यां कविता कार्यः कोइलङ्कारोऽनया विना । - काव्यालंकार, परि० २१८५ ।
वह प्राकृत का पार गीति-भाण्डार आज उपलब्ध होता तो सचमुच ही संस्कृत गीतियों को भी सहृदय जन उनके फीकी समझते । किसी भाषा में प्रभूत साहित्य की, रचना हुए बिना यह प्रौढ़ता नहीं सकती, यह अनु मान सहज ही किया जा सकता है । प्राकृत के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर महाकवि वाक्पतिराज ने संस्कृत प्राकृत दोनों की परस्परोपकारिता को परिलक्षित करके इस उक्ति द्वारा प्राकृत के सहज सौन्दर्य की प्रशंसा की है - उम्मिलइ लावणं पययच्छायाएँ सक्कयं वयाणं । सक्कय-सक्कारुक्करिसोरण पययस्सवि पहावो । --गौडशून्य, कवि- प्रशंसा, पैंसठ । प्राकृत की छाया से संस्कृत पदों का लावण्य उन्मीलित होता है और संस्कृत के संस्कारोत्कर्ष से प्राकृत की भी प्रभाव-वृद्धि होती है ।' ने ध्वन्यालोक जैसे प्रौढ़ लङ्कार-ग्रन्थ की 'लोचन' नाम्नी जो टीका प्रस्तुत की, वह सामान्य टीका-ग्रन्थ न होकर प्रौढ़ मौलिक अलङ्कार-ग्रन्थ हो गया। इसका और महत्व है जो व्याकरण-क्षेत्र में महर्षि पतञ्जलि के महाभाष्य को प्राप्त है। उन्होंने नूतन रस सिद्धान्त की स्थापना की है । 'लोचन' नाम्नी टीका में उन्होंने प्राकृत की ऐसी गीतियाँ दी हैं जो मूलग्रन्थ में नहीं हैं । वक्रोक्ति जीवित में प्राकृत गीतियाँ आलोचना-शास्त्र के प्रौढ़ ग्रन्थ-निर्माताओं में प्राचार्य का स्थान ऊँचा है। आचार्य नन्दवर्धन - प्रवर्तित ध्वनि-सिद्धान्त के ये प्रबल विरोधी थे । इन्होंने ध्वनि-सिद्धान्त का खण्डन करके वक्रोक्तिसिद्धान्त की स्थापना की है। आचार्य भामह ने पहले ही अपने 'काव्यालङ्कार' नामक ग्रन्थ में 'वक्रोक्ति' को सभी लङ्कारों का मूल माना था, उसी प्राचीन मान्यता की भित्ति पर कुन्तक ने अपने सिद्धान्त वा सम्प्रदाय का नए सिरे से विद्वत्तापूर्ण प्रवर्तन किया । उनके ग्रन्थ में कुल चार उन्मेष हैं, जिनमें काव्य एक. सैषा सर्वैव वक्रोक्तिरनयाऽर्थो विभाव्यते । यत्नोऽस्यां कविता कार्यः कोइलङ्कारोऽनया विना । - काव्यालंकार, परिशून्य दो हज़ार एक सौ पचासी ।
Weather Forecast News Update On 13 August: मौसम विभाग का कहना है कि नए लो प्रेशर एरिया के बनने के कारण अगले दो दिनों तक ओडिशा में मूसलाधार बारिश हो सकती है। विभाग ने राज्य में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली बाढ़ नियंत्रण विभाग का कहना है कि भारी बारिश के कारण यमुना नदी का जलस्तर 205. 33 मीटर के खतरे के निशान को पार कर गया है। शाम 4 बजे तक नदी का जलस्तर 205. 38 मीटर था। भारत मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच दिनों के दौरान भारत के मध्य भागों में सक्रिय मानसून की स्थिति रहेगी। वहीं, दूसरी ओर अगले दो-तीन दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग की जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार से कुछ दिन तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के अधिकतर हिस्सों में आगामी पांच दिनों तक तेज बारिश की चेतावनी जारी की गयी है। वहीं, कई जिलों में तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में 13 अगस्त से बनने वाले एक और नए कम दबाव के प्रभाव से राज्य में 15 अगस्त 2022 से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। विभाग ने जोधपुर, बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में और जयपुर, भरतपुर, और अजमेर संभाग के अधिकतर हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने अपने मौसम बुलेटिन में कहा कि 14 अगस्त को पश्चिम मध्य प्रदेश में भारी बारिश और गरज की संभावना है। झारखंड में कई स्थानों पर भारी बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक बिहार में 14 अगस्त को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि 15 अगस्त तक राज्य में अच्छी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 24 घंटों में छत्तीसगढ़ में लोगों को लगातार हो रही बारिश थोड़ी राहत मिल सकती है। अब मानसून का सिस्टम कमजोर पड़ रहा है, जिससे कम बारिश होगी। स्काईमेट वेदर के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, गंगीय पश्चिम बंगाल और तटीय महाराष्ट्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश संभव है। वहीं, दक्षिण उत्तर प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक और हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
Weather Forecast News Update On तेरह अगस्तust: मौसम विभाग का कहना है कि नए लो प्रेशर एरिया के बनने के कारण अगले दो दिनों तक ओडिशा में मूसलाधार बारिश हो सकती है। विभाग ने राज्य में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली बाढ़ नियंत्रण विभाग का कहना है कि भारी बारिश के कारण यमुना नदी का जलस्तर दो सौ पाँच. तैंतीस मीटर के खतरे के निशान को पार कर गया है। शाम चार बजे तक नदी का जलस्तर दो सौ पाँच. अड़तीस मीटर था। भारत मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच दिनों के दौरान भारत के मध्य भागों में सक्रिय मानसून की स्थिति रहेगी। वहीं, दूसरी ओर अगले दो-तीन दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग की जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में शनिवार से कुछ दिन तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के अधिकतर हिस्सों में आगामी पांच दिनों तक तेज बारिश की चेतावनी जारी की गयी है। वहीं, कई जिलों में तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में तेरह अगस्त से बनने वाले एक और नए कम दबाव के प्रभाव से राज्य में पंद्रह अगस्त दो हज़ार बाईस से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। विभाग ने जोधपुर, बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में और जयपुर, भरतपुर, और अजमेर संभाग के अधिकतर हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने अपने मौसम बुलेटिन में कहा कि चौदह अगस्त को पश्चिम मध्य प्रदेश में भारी बारिश और गरज की संभावना है। झारखंड में कई स्थानों पर भारी बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक बिहार में चौदह अगस्त को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि पंद्रह अगस्त तक राज्य में अच्छी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी चौबीस घंटाटों में छत्तीसगढ़ में लोगों को लगातार हो रही बारिश थोड़ी राहत मिल सकती है। अब मानसून का सिस्टम कमजोर पड़ रहा है, जिससे कम बारिश होगी। स्काईमेट वेदर के अनुसार, अगले चौबीस घंटाटों के दौरान, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, गंगीय पश्चिम बंगाल और तटीय महाराष्ट्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक या दो स्थानों पर भारी बारिश संभव है। वहीं, दक्षिण उत्तर प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक और हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
पूर्व दिग्गज खिलाड़ी के निधन पर इरफान पठान ने शोक जताते हुए कहा,' भारतीय टेस्ट टीम के सितारे चेतन चौहान की मौत से काफी दुखी हूं। परिवार के प्रति मेरी संवेदनायें। ' वहीं भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी चेतन शर्मा ने उनकी मौत पर शोक जताते हुये कहा,' इस दुखद खबर के लिये मेरे पास कोई शब्द नहीं है, एक शानदार आदमी, आप हमेशा याद किये जायेंगे। ' वहीं भारतीय बल्लेबाज एस बद्रीनाथ ने उनके निधन पर लिखा,' बेहद दुखी कर देने वाली खबर, इस दिग्गज सलामी बल्लेबाज के साथ कभी खेल पाने का मौका नहीं मिल सका, पर हमेशा इनके बारे में कई शानदार बातें सुनी। भगवान आत्मा को मुक्ति प्रदान करे। ओम शांति। '
पूर्व दिग्गज खिलाड़ी के निधन पर इरफान पठान ने शोक जताते हुए कहा,' भारतीय टेस्ट टीम के सितारे चेतन चौहान की मौत से काफी दुखी हूं। परिवार के प्रति मेरी संवेदनायें। ' वहीं भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी चेतन शर्मा ने उनकी मौत पर शोक जताते हुये कहा,' इस दुखद खबर के लिये मेरे पास कोई शब्द नहीं है, एक शानदार आदमी, आप हमेशा याद किये जायेंगे। ' वहीं भारतीय बल्लेबाज एस बद्रीनाथ ने उनके निधन पर लिखा,' बेहद दुखी कर देने वाली खबर, इस दिग्गज सलामी बल्लेबाज के साथ कभी खेल पाने का मौका नहीं मिल सका, पर हमेशा इनके बारे में कई शानदार बातें सुनी। भगवान आत्मा को मुक्ति प्रदान करे। ओम शांति। '
वाणिज्यिक बैंक वित्तीय सेवाओं की दुनिया के डिपार्टमेंट स्टोर्स हैं। थ्रिफ्ट संस्थान और क्रेडिट यूनियन विशेषता दुकानों की तरह अधिक हैं, जो समय के साथ, बाजार हिस्सेदारी के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा करने के लिए व्यवसाय की अपनी लाइनों का विस्तार कर चुके हैं। जबकि क्रेडिट यूनियनों को कभी-कभी बहाव संस्थान माना जाता है, वहां एक महत्वपूर्ण भेद होता हैः डिपॉजिटरी बीमा। थ्रिफ्ट और वाणिज्यिक बैंक एफडीआईसी द्वारा कवर किए जाते हैं, क्रेडिट यूनियनों को एनसीयूए द्वारा कवर किया जाता है, हालांकि दोनों वित्तीय संस्थानों की समान सीमा तक कवर होते हैं। एक थ्रिफ्ट संस्थान मुख्य रूप से उपभोक्ता जमा स्वीकार करने और गृह बंधक बनाने के लिए गठित एक वित्तीय संस्था है। थ्रिफ्ट आम तौर पर छोटे, स्थानीय संस्थान होते हैं और उनके पास एक बड़े राष्ट्रीय बैंक की पहुंच या संसाधन नहीं होते हैं। प्राथमिक प्रकार के बहाव संस्थान आपसी बैंक और बचत और ऋण संघ हैं। पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की तुलना में बहाव संस्थान अक्सर लाभांश (ब्याज) में अधिक भुगतान करते हैं और संघीय गृह ऋण बैंकों जैसे संगठनों से कम लागत वाले फंड तक पहुंच प्राप्त करते हैं। थ्रिफ्ट संस्थान अन्य प्रकार के वित्तीय संस्थानों की तुलना में अधिक समुदाय केंद्रित हैं और व्यवसायों की तुलना में उपभोक्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। कानून के अनुसार, उपभोक्ताओं के ऋण में बंधे अपने उधार पोर्टफोलियो का 65% होना चाहिए। चूंकि वित्तीय सेवाएं तेजी से विनियमित हो गई हैं, इसलिए बहाव संस्थान व्यवसायों को और सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं। थ्रिफ्ट ग्राहकों को कई बैंकों को प्रदान करता है जो आप बैंक में प्राप्त कर सकते हैं, जैसे खाते, बचत खाते और जमा प्रमाणपत्र, साथ ही घर और ऑटो ऋण और क्रेडिट कार्ड जैसे क्रेडिट उत्पाद। औद्योगिक क्रांति के आर्थिक परिवर्तन और सामाजिक उथल-पुथल के बीच पहली बार बहाव संस्थान खोले गए। लाभ उनकी प्राथमिक चिंता नहीं थी। उनका मुख्य लक्ष्य कामकाजी लोगों को "बरसात के दिन" के लिए कुछ पैसे अलग करने के लिए एक सुरक्षित स्थान देना था। अधिकांश लोगों को सार्वजनिक रूप से उत्साहित नागरिकों द्वारा स्थापित और प्रबंधित किया गया था जो वित्त के तरीकों को समझते थे और मजदूर वर्ग के लोगों की मदद करने के लिए उत्सुक थे । बाद के युग में लाखों अमेरिकियों ने घरों को थ्रोफ्ट से ऋण के साथ खरीदा; बाद की अवधि में एक बिंदु पर, वे अमेरिका में बहुसंख्यक बंधक बना रहे थे, जो वित्तीय सेवाओं उद्योग के विनियमन के साथ बदल गए, इसके बाद 1 9 80 के दशक में असफलताओं की लहर हुई। एक उपभोक्ता परिप्रेक्ष्य से, बैंकों पर थ्रेट्स का बड़ा फायदा होता हैः ग्राहकों की बचत पर उच्च रुचि। इन दिनों, थ्रिफ्ट और पारंपरिक बैंकों के बीच की रेखाएं धुंधली हुई हैं। बचत और ऋण संघ वाणिज्यिक उधार और निर्माण में आगे बढ़ रहे हैं, और बढ़ती संख्या पारंपरिक बैंकों में परिवर्तित हो रही है। इसके अलावा, कम कठोर विनियमन समेत कई लाभों को प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कई फायदे, हाल ही में डोड-फ्रैंक वित्तीय सुधार कानून द्वारा समाप्त कर दिए गए हैं। यह कुल मिलाकर तेजी से समेकित उद्योग है। भविष्य में खोजना मुश्किल हो सकता है।
वाणिज्यिक बैंक वित्तीय सेवाओं की दुनिया के डिपार्टमेंट स्टोर्स हैं। थ्रिफ्ट संस्थान और क्रेडिट यूनियन विशेषता दुकानों की तरह अधिक हैं, जो समय के साथ, बाजार हिस्सेदारी के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा करने के लिए व्यवसाय की अपनी लाइनों का विस्तार कर चुके हैं। जबकि क्रेडिट यूनियनों को कभी-कभी बहाव संस्थान माना जाता है, वहां एक महत्वपूर्ण भेद होता हैः डिपॉजिटरी बीमा। थ्रिफ्ट और वाणिज्यिक बैंक एफडीआईसी द्वारा कवर किए जाते हैं, क्रेडिट यूनियनों को एनसीयूए द्वारा कवर किया जाता है, हालांकि दोनों वित्तीय संस्थानों की समान सीमा तक कवर होते हैं। एक थ्रिफ्ट संस्थान मुख्य रूप से उपभोक्ता जमा स्वीकार करने और गृह बंधक बनाने के लिए गठित एक वित्तीय संस्था है। थ्रिफ्ट आम तौर पर छोटे, स्थानीय संस्थान होते हैं और उनके पास एक बड़े राष्ट्रीय बैंक की पहुंच या संसाधन नहीं होते हैं। प्राथमिक प्रकार के बहाव संस्थान आपसी बैंक और बचत और ऋण संघ हैं। पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की तुलना में बहाव संस्थान अक्सर लाभांश में अधिक भुगतान करते हैं और संघीय गृह ऋण बैंकों जैसे संगठनों से कम लागत वाले फंड तक पहुंच प्राप्त करते हैं। थ्रिफ्ट संस्थान अन्य प्रकार के वित्तीय संस्थानों की तुलना में अधिक समुदाय केंद्रित हैं और व्यवसायों की तुलना में उपभोक्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। कानून के अनुसार, उपभोक्ताओं के ऋण में बंधे अपने उधार पोर्टफोलियो का पैंसठ% होना चाहिए। चूंकि वित्तीय सेवाएं तेजी से विनियमित हो गई हैं, इसलिए बहाव संस्थान व्यवसायों को और सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं। थ्रिफ्ट ग्राहकों को कई बैंकों को प्रदान करता है जो आप बैंक में प्राप्त कर सकते हैं, जैसे खाते, बचत खाते और जमा प्रमाणपत्र, साथ ही घर और ऑटो ऋण और क्रेडिट कार्ड जैसे क्रेडिट उत्पाद। औद्योगिक क्रांति के आर्थिक परिवर्तन और सामाजिक उथल-पुथल के बीच पहली बार बहाव संस्थान खोले गए। लाभ उनकी प्राथमिक चिंता नहीं थी। उनका मुख्य लक्ष्य कामकाजी लोगों को "बरसात के दिन" के लिए कुछ पैसे अलग करने के लिए एक सुरक्षित स्थान देना था। अधिकांश लोगों को सार्वजनिक रूप से उत्साहित नागरिकों द्वारा स्थापित और प्रबंधित किया गया था जो वित्त के तरीकों को समझते थे और मजदूर वर्ग के लोगों की मदद करने के लिए उत्सुक थे । बाद के युग में लाखों अमेरिकियों ने घरों को थ्रोफ्ट से ऋण के साथ खरीदा; बाद की अवधि में एक बिंदु पर, वे अमेरिका में बहुसंख्यक बंधक बना रहे थे, जो वित्तीय सेवाओं उद्योग के विनियमन के साथ बदल गए, इसके बाद एक नौ अस्सी के दशक में असफलताओं की लहर हुई। एक उपभोक्ता परिप्रेक्ष्य से, बैंकों पर थ्रेट्स का बड़ा फायदा होता हैः ग्राहकों की बचत पर उच्च रुचि। इन दिनों, थ्रिफ्ट और पारंपरिक बैंकों के बीच की रेखाएं धुंधली हुई हैं। बचत और ऋण संघ वाणिज्यिक उधार और निर्माण में आगे बढ़ रहे हैं, और बढ़ती संख्या पारंपरिक बैंकों में परिवर्तित हो रही है। इसके अलावा, कम कठोर विनियमन समेत कई लाभों को प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कई फायदे, हाल ही में डोड-फ्रैंक वित्तीय सुधार कानून द्वारा समाप्त कर दिए गए हैं। यह कुल मिलाकर तेजी से समेकित उद्योग है। भविष्य में खोजना मुश्किल हो सकता है।
सरकार के इस फैसले से शिक्षकों और छात्रों की मुसीबत बढ़ गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि अगले शैक्षिक सत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में करवाई जाएगी। सरकार के इस फैसले से शिक्षक और छात्रों की समस्या बढ़ गई है। शिक्षक और छात्र अब हिंदी में इंजीनियरिंग की किताबें खोज रहे हैं। हालांकि सरकार ने ये अच्छा काम किया है कि प्रवेश परीक्षा के दौरान हिंदी और अंग्रेजी दोनों का ऑप्शन दिया है। यह फैसला मंगलवार को राजीव गांधी प्राद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) की एक बैठक में लिया गया।
सरकार के इस फैसले से शिक्षकों और छात्रों की मुसीबत बढ़ गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि अगले शैक्षिक सत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में करवाई जाएगी। सरकार के इस फैसले से शिक्षक और छात्रों की समस्या बढ़ गई है। शिक्षक और छात्र अब हिंदी में इंजीनियरिंग की किताबें खोज रहे हैं। हालांकि सरकार ने ये अच्छा काम किया है कि प्रवेश परीक्षा के दौरान हिंदी और अंग्रेजी दोनों का ऑप्शन दिया है। यह फैसला मंगलवार को राजीव गांधी प्राद्योगिकी विश्वविद्यालय की एक बैठक में लिया गया।
रायबरेली। जिले में बेमौसम हुई बारिश व तेज हवा ने करीब चार लाख किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सोमवार रात और फिर मंगलवार सुबह 10 बजे तक हुई बारिश से धान की फसल खेतों में बिछ गई है। मटर-सरसों की बोई गई फसल भी चौपट हो गई। खेतों में पानी भरने से धान की फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी बारिश से करीब पांच फीसदी फसल के नुकसान की आशंका जता रहे हैं। सोमवर देर रात अचानक बेमौसम बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ ही तेज हवा भी चलने लगी। इससे धान की फसल खेतों में बिछ गई। अभी हाल में ही किसानों ने मटर, सरसों की फसल बोआई की थी। खेतों में पानी भरने के कारण फसल चौपट हो गई। अब दोबारा किसानों को सरसों, मटर की फसल की बोआई करनी होगी। जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश का कहना है कि किसानों का कितना नुकसान हुआ है, इसका सर्वे कराया जाएगा। फिलहाल पांच फीसदी फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। बछरावां। भारी बारिश से धान, मटर, सरसों की फसलें चौपट हो गईं। खेती पर निर्भर किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई। सेंहगो निवासी अतुल कुमार के खेत में एक बीघा धान की फसल लगी थी। तीन दिन बाद धान की फसल काटी जानी थी, लेकिन भारी बारिश के कारण धान गिर गए। इसी गांव के रमेश, सूरज के भी धान के खेतों में भारी नुकसान हुआ। किसानों का कहना है कि पके धान गिर गए हैं। समय पर नहीं कटेंगे तो इनका रंग बदल जाएगा। बाजार में सस्ते रेट पर बिकेंगे। साथ ही में पराली बेकार हो जाएगी। खेतों में बोआई किया गया। मटर व सरसों को नुकसान हुआ। किसान विकास पटेल का कहना है कि बारिश की वजह से मिट्टी का रिसाव बढ़ जाएगा, जिससे बीज का जमाव कम होगा। जगतपुर/ऊंचाहार। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के भीख गांव निवासी राजेंद्र प्रताप सिंह, जिगना निवासी राम विष्णु चौधरी, तिवारीपुर निवासी शिवेंद्र यादव, रोझइया निवासी रामेंद्र त्रिवेदी, इब्राहिमपुर निवासी बद्री विशाल द्विवेदी, जगतपुर निवासी जैनम, बीबी मैंनहा निवासी राधेश्याम साहू, भीख निवासी राज कुमार अवस्थी, रामकुमार, सिद्धौर निवासी शिव प्रताप सिंह, कोडिय़ा निवासी सुल्तान सिंह, मान सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि धान की अगेती पकी फसल गिर जाने से नुकसान हुआ। उधर, ऊंचाहार क्षेत्र के किसान दिनेश सिंह, प्रदीप सिंह, राम औतार, मेवालाल ने बताया कि अगर मौसम साफ न हुआ तो धान की फसल सड़ जाएगी। अगेती आलू की बोई गई फसल को भी नुकसान हुआ है।
रायबरेली। जिले में बेमौसम हुई बारिश व तेज हवा ने करीब चार लाख किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सोमवार रात और फिर मंगलवार सुबह दस बजे तक हुई बारिश से धान की फसल खेतों में बिछ गई है। मटर-सरसों की बोई गई फसल भी चौपट हो गई। खेतों में पानी भरने से धान की फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी बारिश से करीब पांच फीसदी फसल के नुकसान की आशंका जता रहे हैं। सोमवर देर रात अचानक बेमौसम बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ ही तेज हवा भी चलने लगी। इससे धान की फसल खेतों में बिछ गई। अभी हाल में ही किसानों ने मटर, सरसों की फसल बोआई की थी। खेतों में पानी भरने के कारण फसल चौपट हो गई। अब दोबारा किसानों को सरसों, मटर की फसल की बोआई करनी होगी। जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश का कहना है कि किसानों का कितना नुकसान हुआ है, इसका सर्वे कराया जाएगा। फिलहाल पांच फीसदी फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। बछरावां। भारी बारिश से धान, मटर, सरसों की फसलें चौपट हो गईं। खेती पर निर्भर किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई। सेंहगो निवासी अतुल कुमार के खेत में एक बीघा धान की फसल लगी थी। तीन दिन बाद धान की फसल काटी जानी थी, लेकिन भारी बारिश के कारण धान गिर गए। इसी गांव के रमेश, सूरज के भी धान के खेतों में भारी नुकसान हुआ। किसानों का कहना है कि पके धान गिर गए हैं। समय पर नहीं कटेंगे तो इनका रंग बदल जाएगा। बाजार में सस्ते रेट पर बिकेंगे। साथ ही में पराली बेकार हो जाएगी। खेतों में बोआई किया गया। मटर व सरसों को नुकसान हुआ। किसान विकास पटेल का कहना है कि बारिश की वजह से मिट्टी का रिसाव बढ़ जाएगा, जिससे बीज का जमाव कम होगा। जगतपुर/ऊंचाहार। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के भीख गांव निवासी राजेंद्र प्रताप सिंह, जिगना निवासी राम विष्णु चौधरी, तिवारीपुर निवासी शिवेंद्र यादव, रोझइया निवासी रामेंद्र त्रिवेदी, इब्राहिमपुर निवासी बद्री विशाल द्विवेदी, जगतपुर निवासी जैनम, बीबी मैंनहा निवासी राधेश्याम साहू, भीख निवासी राज कुमार अवस्थी, रामकुमार, सिद्धौर निवासी शिव प्रताप सिंह, कोडिय़ा निवासी सुल्तान सिंह, मान सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि धान की अगेती पकी फसल गिर जाने से नुकसान हुआ। उधर, ऊंचाहार क्षेत्र के किसान दिनेश सिंह, प्रदीप सिंह, राम औतार, मेवालाल ने बताया कि अगर मौसम साफ न हुआ तो धान की फसल सड़ जाएगी। अगेती आलू की बोई गई फसल को भी नुकसान हुआ है।
लखनऊ। सियासी रसूख और अफसरों से साठगांठ से राजधानी का सीएमएस स्कूल प्रबंधन अपनी कारगुजारियों से हमेशा सुर्खियों में रहता है। अभिभावकों के प्रति प्रबंधन की तानाशाही का आलम यह है कि उनकी जायज शिकायतों पर भी कार्रवाई करना तो दूर उल्टे धमकी देता है। ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आया है, जिसमें स्कूल में हो रहे बिल्डिंग निर्माण के दौरान हादसे का शिकार हुई एक बच्ची के घायल होने पर उसके अभिभावक व उसके समर्थन में गए लोगों की शिकायत को स्कूल प्रबंधन ने फर्जी करार दिया। हालांकि दबाव के बाद लखनऊ जनकल्याण महासमिति की शिकायत पर जांच का आश्वासन दिया है। ताजा मामला लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विशाल खंड सीएमएस स्कूल का है। जहां पांचवीं क्लास में पढ़ने वाली छात्रा आराध्या शुक्ला पुत्री ज्ञानेंद्र शुक्ला स्कूल में हो रहे निर्माण कार्य के दौरान मलबा गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके सिर में चोट आई हैं। मौके पर मौजूद समाजसेवी उमाशंकर दुबे ने घायल बच्ची को तत्काल अस्पताल पहुंचाया और इलाज कराया। इसके बाद उन्होंने स्कूल प्रबंधन से मामले की शिकायत की। वहां मौजूद प्रिंसिपल ने पहले मिलने से मना कर दिया, बाद में मामला बढ़ता देख अपना पल्ला झाड़ा। लापरवाही का आलम यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रबंधन तंत्र की नींद नहीं टूटी और आज फिर निर्माण कार्य के दौरान एक छात्रा के हाथ में फ्रैक्चर हो गया। इस मामले में स्कूल प्रबंधन और प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। स्कूल प्रबंधन पर न केवल आयकर में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप है। वहीं प्रबंधन ने राजधानी के दर्जनों स्थानों पर सरकारी जमीनों पर कब्जा भी कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि जानकारी के बावजूद संबंधित विभाग के अफसर कोई भी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। क्योंकि प्रबंधन बेहद चालाकी से सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री को अपने कार्यक्रम में बुुलाता है ताकि अफसरों को संदेश चला जाए। यही नहीं अफसरों और जजों को भी मैनेज करने के लिए वह अपने यहां उनके बच्चों को फ्री में पढ़ाता है। इन्हीं हथकंडों के जरिए वह न केवल अभिभावकों को दोनों हाथों से लूटता है, बल्कि उनकी शिकायतों को दरकिनार कर धमकी देने पर भी उतर आता है। लखनऊ। बहुत ही स्तब्ध करने वाली खबर है। युवा पत्रकार हिमांशु चौहान हम सबके बीच नहीं रहे। लखनऊ के सिविल अस्पताल में उनका आज निधन हो गया। हिमांशु चौहान अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। बताया जाता है कि उन्हें लू लग गई थी। यूरिन इंफेक्शन और लूज मोशन भी हो रहा था। फिलहाल पिछले कुछ दिनों से हिमांशु अस्पताल में भर्ती थे, उनका इलाज चल रहा था। बता दें कि इसी साल उनकी दादी और माताजी का भी निधन हो गया था। हिमांशु बहुत ही मिलनसार और सौम्य स्वभाव का था। हिमांशु के निधन पर राजधानी के पत्रकारों ने उनके परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की बात कही है।
लखनऊ। सियासी रसूख और अफसरों से साठगांठ से राजधानी का सीएमएस स्कूल प्रबंधन अपनी कारगुजारियों से हमेशा सुर्खियों में रहता है। अभिभावकों के प्रति प्रबंधन की तानाशाही का आलम यह है कि उनकी जायज शिकायतों पर भी कार्रवाई करना तो दूर उल्टे धमकी देता है। ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आया है, जिसमें स्कूल में हो रहे बिल्डिंग निर्माण के दौरान हादसे का शिकार हुई एक बच्ची के घायल होने पर उसके अभिभावक व उसके समर्थन में गए लोगों की शिकायत को स्कूल प्रबंधन ने फर्जी करार दिया। हालांकि दबाव के बाद लखनऊ जनकल्याण महासमिति की शिकायत पर जांच का आश्वासन दिया है। ताजा मामला लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विशाल खंड सीएमएस स्कूल का है। जहां पांचवीं क्लास में पढ़ने वाली छात्रा आराध्या शुक्ला पुत्री ज्ञानेंद्र शुक्ला स्कूल में हो रहे निर्माण कार्य के दौरान मलबा गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके सिर में चोट आई हैं। मौके पर मौजूद समाजसेवी उमाशंकर दुबे ने घायल बच्ची को तत्काल अस्पताल पहुंचाया और इलाज कराया। इसके बाद उन्होंने स्कूल प्रबंधन से मामले की शिकायत की। वहां मौजूद प्रिंसिपल ने पहले मिलने से मना कर दिया, बाद में मामला बढ़ता देख अपना पल्ला झाड़ा। लापरवाही का आलम यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रबंधन तंत्र की नींद नहीं टूटी और आज फिर निर्माण कार्य के दौरान एक छात्रा के हाथ में फ्रैक्चर हो गया। इस मामले में स्कूल प्रबंधन और प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। स्कूल प्रबंधन पर न केवल आयकर में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप है। वहीं प्रबंधन ने राजधानी के दर्जनों स्थानों पर सरकारी जमीनों पर कब्जा भी कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि जानकारी के बावजूद संबंधित विभाग के अफसर कोई भी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। क्योंकि प्रबंधन बेहद चालाकी से सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री को अपने कार्यक्रम में बुुलाता है ताकि अफसरों को संदेश चला जाए। यही नहीं अफसरों और जजों को भी मैनेज करने के लिए वह अपने यहां उनके बच्चों को फ्री में पढ़ाता है। इन्हीं हथकंडों के जरिए वह न केवल अभिभावकों को दोनों हाथों से लूटता है, बल्कि उनकी शिकायतों को दरकिनार कर धमकी देने पर भी उतर आता है। लखनऊ। बहुत ही स्तब्ध करने वाली खबर है। युवा पत्रकार हिमांशु चौहान हम सबके बीच नहीं रहे। लखनऊ के सिविल अस्पताल में उनका आज निधन हो गया। हिमांशु चौहान अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। बताया जाता है कि उन्हें लू लग गई थी। यूरिन इंफेक्शन और लूज मोशन भी हो रहा था। फिलहाल पिछले कुछ दिनों से हिमांशु अस्पताल में भर्ती थे, उनका इलाज चल रहा था। बता दें कि इसी साल उनकी दादी और माताजी का भी निधन हो गया था। हिमांशु बहुत ही मिलनसार और सौम्य स्वभाव का था। हिमांशु के निधन पर राजधानी के पत्रकारों ने उनके परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की बात कही है।
Changes From 1st January 2023: नया साल यानी 2023 आ गया है. घरों में लगे पुराने कैलेंडर बदलकर अगले 365 दिनों वाला नया पंचांग लग गया है. लेकिन सिर्फ कैलेंडर नहीं बदला बल्कि आपकी जरूरतों वाली चीज़ों के दाम भी बदल गए हैं. इसके अलावा कुछ अच्छे बदलाव भी हुए हैं जिससे आपको थोड़ा फायदा जरूर होगा। नए साल में सरकार ने जनता को महंगाई का तोहफा दे डाला है. अब से समोसा, कचोरी, जलेबी जैसे नाश्ते वाली चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं क्योंकि कमेरिशियल LPG गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं. वो भी पूरे 25 रुपए। नए साल में बाइक या कार खरीदने का प्लान है? तो थोड़े ज़्यादा पैसे खर्च करने होंगे। Hyundai की गाड़यां 30 हज़ार तक, Kia की 50 हज़ार, MG की कारें 90 हज़ार तक बढ़ गई है. बढ़ी तो मारुती और रेनॉ की भी हैं लेकिन कंपनी ने बताया नहीं कितना। एक जनवरी से बैंक लॉकर के नियम बदल गए हैं. जिन लोगों ने बैंक में लॉकर लिया है उनके नए साल में सबसे पहले बैंक जाकर New Bank Locker Agreement साइन करना पड़ेगा। अच्छी बात ये है कि अब आपके सामान की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी, और अब बैंक बिना बताए आपके सामान की जब्ती भी नहीं कर सकता है.
Changes From एक जनवरीuary दो हज़ार तेईस: नया साल यानी दो हज़ार तेईस आ गया है. घरों में लगे पुराने कैलेंडर बदलकर अगले तीन सौ पैंसठ दिनों वाला नया पंचांग लग गया है. लेकिन सिर्फ कैलेंडर नहीं बदला बल्कि आपकी जरूरतों वाली चीज़ों के दाम भी बदल गए हैं. इसके अलावा कुछ अच्छे बदलाव भी हुए हैं जिससे आपको थोड़ा फायदा जरूर होगा। नए साल में सरकार ने जनता को महंगाई का तोहफा दे डाला है. अब से समोसा, कचोरी, जलेबी जैसे नाश्ते वाली चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं क्योंकि कमेरिशियल LPG गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं. वो भी पूरे पच्चीस रुपयापए। नए साल में बाइक या कार खरीदने का प्लान है? तो थोड़े ज़्यादा पैसे खर्च करने होंगे। Hyundai की गाड़यां तीस हज़ार तक, Kia की पचास हज़ार, MG की कारें नब्बे हज़ार तक बढ़ गई है. बढ़ी तो मारुती और रेनॉ की भी हैं लेकिन कंपनी ने बताया नहीं कितना। एक जनवरी से बैंक लॉकर के नियम बदल गए हैं. जिन लोगों ने बैंक में लॉकर लिया है उनके नए साल में सबसे पहले बैंक जाकर New Bank Locker Agreement साइन करना पड़ेगा। अच्छी बात ये है कि अब आपके सामान की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी, और अब बैंक बिना बताए आपके सामान की जब्ती भी नहीं कर सकता है.
हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। यह शहर तुंगभद्रा नदी के तट पर है, जिसे अब हम्पी के नाम से जाना जाता है। यह शहर अब बस खंडहरों का शहर रह गया है। हर साल यहां बहुत सारे टूरीस्ट और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी गोल चट्टानों के टीलों के जैसा दिखता है। यहां लगभग पाँच सौ से भी अधिक इमारतें हैं जैसे मंदिर, महल, पुराने बाज़ार, खंडहर और भी बहुत कुछ। हम्पी में विठाला मंदिर सबसे फेमस इमारतों में से एक है। यहां के राजाओं को अनाज, सोने और रुपयों से तौला जाता था और उसे गरीब लोगों में बाँट दिया जाता था। हम्पी उत्सव की हिस्ट्रीः हम्पी फेस्टीवल या विजया उत्सव कर्नाटक का बहुत ही अनोखा फेस्टीवल है। यह एक कल्चरल फेस्टीवल है जिसे विजयनगर राज के समय सेलिब्रेट किया जाता था। इस फेस्टीवल को बहुत ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है और सारा माहौल बहुत ही लाइवली और कलरफुल हो जाता है। इस फेस्टीवल में तरह-तरह की चिज़ें होती हैं जैसे डान्स, म्युज़िक, ड्रामा, पपेट शोज़ और फायरवर्क। हम्पी उत्सव लगभग तीन दिनों तक सेलिब्रेट किया जाता है, मगर इस साल यह 9 जनवरी से 11 जनवरी तक सेलिब्रट किया जाएगा। जिन लोगों के लिए डान्स, म्युज़िक और ड्रामा पैशन है, वह दुनिया के कोने-कोने से इस फेस्टीवल को देखने आते हैं। कर्नाटका के अलावा भी बहुत सारे जगह से लोग आते हैं इस फेस्टीवल में प्रर्दशन करने। कल्चर प्रोग्राम के अलावा भी बहुत सारी चीज़े होती हैं जैसे वाटर स्पोर्ट, काइट फेस्टीवल, फूड कोर्ट और पेटिंग कॅाम्पटिशन। इस फेस्टिवल के दौरान पूरे शहर को साफ किया जाता है, बाथरुम की सुविधा की जाती है और पीने के पानी की सुविधा भी कि जाती है। यह बहुत ही फेमस टेम्पल है और भगवान शिव के नाम डेडीकेट किया गया है। यह टेम्पल तुंगभद्र नदी से बहुत ही पास है। हम्पी का एक बहुत ही पुराना मंदिर है। इस टेम्पल को बहुत ही मेन्टेन करके रखा गया है और लाइट्स से भी सजाया गया है। यह टेम्पल रॅायल लेडिज़ द्वारा यूज़ किया जाता था ताकि वह आराम कर सके। हम्पी बाज़ार, विरूपक्ष टेम्पल के पाल स्थित है। यह बाज़ार लगभग 1 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यहां सोने को खुले में बेचा जाता है, लेकिन अभी तक इस बात का कोई भी प्रूफ नहीं मिला है।
हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। यह शहर तुंगभद्रा नदी के तट पर है, जिसे अब हम्पी के नाम से जाना जाता है। यह शहर अब बस खंडहरों का शहर रह गया है। हर साल यहां बहुत सारे टूरीस्ट और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी गोल चट्टानों के टीलों के जैसा दिखता है। यहां लगभग पाँच सौ से भी अधिक इमारतें हैं जैसे मंदिर, महल, पुराने बाज़ार, खंडहर और भी बहुत कुछ। हम्पी में विठाला मंदिर सबसे फेमस इमारतों में से एक है। यहां के राजाओं को अनाज, सोने और रुपयों से तौला जाता था और उसे गरीब लोगों में बाँट दिया जाता था। हम्पी उत्सव की हिस्ट्रीः हम्पी फेस्टीवल या विजया उत्सव कर्नाटक का बहुत ही अनोखा फेस्टीवल है। यह एक कल्चरल फेस्टीवल है जिसे विजयनगर राज के समय सेलिब्रेट किया जाता था। इस फेस्टीवल को बहुत ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है और सारा माहौल बहुत ही लाइवली और कलरफुल हो जाता है। इस फेस्टीवल में तरह-तरह की चिज़ें होती हैं जैसे डान्स, म्युज़िक, ड्रामा, पपेट शोज़ और फायरवर्क। हम्पी उत्सव लगभग तीन दिनों तक सेलिब्रेट किया जाता है, मगर इस साल यह नौ जनवरी से ग्यारह जनवरी तक सेलिब्रट किया जाएगा। जिन लोगों के लिए डान्स, म्युज़िक और ड्रामा पैशन है, वह दुनिया के कोने-कोने से इस फेस्टीवल को देखने आते हैं। कर्नाटका के अलावा भी बहुत सारे जगह से लोग आते हैं इस फेस्टीवल में प्रर्दशन करने। कल्चर प्रोग्राम के अलावा भी बहुत सारी चीज़े होती हैं जैसे वाटर स्पोर्ट, काइट फेस्टीवल, फूड कोर्ट और पेटिंग कॅाम्पटिशन। इस फेस्टिवल के दौरान पूरे शहर को साफ किया जाता है, बाथरुम की सुविधा की जाती है और पीने के पानी की सुविधा भी कि जाती है। यह बहुत ही फेमस टेम्पल है और भगवान शिव के नाम डेडीकेट किया गया है। यह टेम्पल तुंगभद्र नदी से बहुत ही पास है। हम्पी का एक बहुत ही पुराना मंदिर है। इस टेम्पल को बहुत ही मेन्टेन करके रखा गया है और लाइट्स से भी सजाया गया है। यह टेम्पल रॅायल लेडिज़ द्वारा यूज़ किया जाता था ताकि वह आराम कर सके। हम्पी बाज़ार, विरूपक्ष टेम्पल के पाल स्थित है। यह बाज़ार लगभग एक किलोग्राममीटर तक फैला हुआ है। यहां सोने को खुले में बेचा जाता है, लेकिन अभी तक इस बात का कोई भी प्रूफ नहीं मिला है।
मेडागास्कर राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल पुनीत के बहल, कमांडेंट, आई.एन.ए. द्वारा नौसेना ओरिएंटेशन पाठ्यक्रम के दौर से गुजर रहे मेडागास्कर कैडेटों के लिए 25 जून 2022 को एक 'हाई टी' की मेजबानी की गई। समारोह में सभी अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षुओं की उपस्थिति में औपचारिक केक कटिंग भी शामिल थी। आई.एन.ए. में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षुओं के राष्ट्रीय/स्वतंत्रता दिवस का उत्सव अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक और मददगार होता है।
मेडागास्कर राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल पुनीत के बहल, कमांडेंट, आई.एन.ए. द्वारा नौसेना ओरिएंटेशन पाठ्यक्रम के दौर से गुजर रहे मेडागास्कर कैडेटों के लिए पच्चीस जून दो हज़ार बाईस को एक 'हाई टी' की मेजबानी की गई। समारोह में सभी अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षुओं की उपस्थिति में औपचारिक केक कटिंग भी शामिल थी। आई.एन.ए. में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षुओं के राष्ट्रीय/स्वतंत्रता दिवस का उत्सव अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक और मददगार होता है।
Spike NLOS Missile: स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल को राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम ने तैयार किया है. यह 30 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है. जानिए इसकी खूबियां. दुश्मनों की चाल को नाकाम करने के लिए इजरायल ने भारत को स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल दी हैं. इन एंटी टैंक मिसाइलों की पहली खेप भारतीय वायुसेना तक पहुंची है. जल्द ही इनका परीक्षण किया जाएगा. इन्हें वायुसेना के एमआई-17 और अपाचे हेलीकॉप्टर में लगाया जाएगा. इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा. चीन और पाकिस्तान की सीमा पर इसकी तैनाती की जा सकेगी. इस मिसाइल के अपने कई फायदे है. इसके पुराने वर्जन को कंधे पर रखकर दागा जाता था, लेकिन इसका जो नया वर्जन है उसे हैलिकॉप्टर से दागा जा सकता है, जो सीधे टार्गेट का पीछा करके उसे ध्वस्त कर देता है. जानिए कितनी पावरफुल है भारतीय वायु सेना को मिली एंटी टैंक मिसाइल. - 30 किमी तक तबाह करती है दुश्मन के ठिकानेः इस स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल को राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम ने तैयार किया है. यह 30 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है. - कई तरह से कर सकते हैं लॉन्चः इसे जवान उठा सकते हैं. इसे बाईपॉड या ट्राईपॉड से दागा जा सकता है. वाहन से लॉन्च कर सकते हैं और हेलिकॉप्टर से भी फायर की जा सकती है. इसलिए यह सेना के लिए बहुत काम की मिसाइल साबित होगी. - छोटी और घातक मिसाइलः इस मिसाइल का वजन 70 किलो है. यह बेशक छोटी मिसाइल है, लेकिन इसे घातक माना जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के साथ सीमा विवाद के समय भारत ने इजरायल से इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए कम संख्या में इन्हें मंगाया था. - किन देशों के पास हैः वर्तमान में यह मिसाइल भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया के पास है. दुनिया के करीब 35 देशों के पास इसके अलग-अलग वेरिएंट्स हैं. अब तक इसके तीन वैरिएंट्स तैयार हुए हैं. ईराक, अफगानिस्तान और आर्मीनिया की जंग में इसका इस्तेमाल किया गया है. - अंधेरे में भी लगेगा निशानाः स्पाइक एनएलओएस में इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर का इस्तेमाल किया गया है जो अंधेरे और खराब मौसम में भी टार्गेट को खोजकर उसे निशाना बना सकता है. आमतौर इसकी लम्बाई 3 फीट और 11 इंच होती है. हालांकि, इसके अलग-अलग वेरिएंट में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है. भारत ने इसे क्यों खरीदा? दुनिया के कई देशों के पास इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट हैं. हालांकि, ईरान समेत कुछ देशों ने इसमें बदलाव करके एक नया वेरिएंट तैयार किया. भारत में इसके स्पाइक एनएलओएस वेरिएंट को खरीदा है. यह स्पाइक एनएलओएसका एडवांस और लम्बी दूरी तरक मार करने वाला वेरिएंट है. दुनियाभर में एंटी टैंक मिसाइल के मामले में यह सबसे अधिक रेंज वाला हथियार है. इससे हवा से जमीन पर भी मार की जा सकती है. यही वजह है कि इसे भारत ने खरीदकर वायु सेना की ताकत को बढ़ाया है. इसे चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर तैनात किया जा सकता है. यह भी पढ़ेंः क्यों गिरती या फंसती है लिफ्ट, जिससे नोएडा में महिला की मौत हुई?
Spike NLOS Missile: स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल को राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम ने तैयार किया है. यह तीस किलोग्राममीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है. जानिए इसकी खूबियां. दुश्मनों की चाल को नाकाम करने के लिए इजरायल ने भारत को स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल दी हैं. इन एंटी टैंक मिसाइलों की पहली खेप भारतीय वायुसेना तक पहुंची है. जल्द ही इनका परीक्षण किया जाएगा. इन्हें वायुसेना के एमआई-सत्रह और अपाचे हेलीकॉप्टर में लगाया जाएगा. इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा. चीन और पाकिस्तान की सीमा पर इसकी तैनाती की जा सकेगी. इस मिसाइल के अपने कई फायदे है. इसके पुराने वर्जन को कंधे पर रखकर दागा जाता था, लेकिन इसका जो नया वर्जन है उसे हैलिकॉप्टर से दागा जा सकता है, जो सीधे टार्गेट का पीछा करके उसे ध्वस्त कर देता है. जानिए कितनी पावरफुल है भारतीय वायु सेना को मिली एंटी टैंक मिसाइल. - तीस किमी तक तबाह करती है दुश्मन के ठिकानेः इस स्पाइक एंटी टैंक NLOS गाइडेड मिसाइल को राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम ने तैयार किया है. यह तीस किलोग्राममीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है. - कई तरह से कर सकते हैं लॉन्चः इसे जवान उठा सकते हैं. इसे बाईपॉड या ट्राईपॉड से दागा जा सकता है. वाहन से लॉन्च कर सकते हैं और हेलिकॉप्टर से भी फायर की जा सकती है. इसलिए यह सेना के लिए बहुत काम की मिसाइल साबित होगी. - छोटी और घातक मिसाइलः इस मिसाइल का वजन सत्तर किलो है. यह बेशक छोटी मिसाइल है, लेकिन इसे घातक माना जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के साथ सीमा विवाद के समय भारत ने इजरायल से इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए कम संख्या में इन्हें मंगाया था. - किन देशों के पास हैः वर्तमान में यह मिसाइल भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया के पास है. दुनिया के करीब पैंतीस देशों के पास इसके अलग-अलग वेरिएंट्स हैं. अब तक इसके तीन वैरिएंट्स तैयार हुए हैं. ईराक, अफगानिस्तान और आर्मीनिया की जंग में इसका इस्तेमाल किया गया है. - अंधेरे में भी लगेगा निशानाः स्पाइक एनएलओएस में इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर का इस्तेमाल किया गया है जो अंधेरे और खराब मौसम में भी टार्गेट को खोजकर उसे निशाना बना सकता है. आमतौर इसकी लम्बाई तीन फीट और ग्यारह इंच होती है. हालांकि, इसके अलग-अलग वेरिएंट में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है. भारत ने इसे क्यों खरीदा? दुनिया के कई देशों के पास इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट हैं. हालांकि, ईरान समेत कुछ देशों ने इसमें बदलाव करके एक नया वेरिएंट तैयार किया. भारत में इसके स्पाइक एनएलओएस वेरिएंट को खरीदा है. यह स्पाइक एनएलओएसका एडवांस और लम्बी दूरी तरक मार करने वाला वेरिएंट है. दुनियाभर में एंटी टैंक मिसाइल के मामले में यह सबसे अधिक रेंज वाला हथियार है. इससे हवा से जमीन पर भी मार की जा सकती है. यही वजह है कि इसे भारत ने खरीदकर वायु सेना की ताकत को बढ़ाया है. इसे चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर तैनात किया जा सकता है. यह भी पढ़ेंः क्यों गिरती या फंसती है लिफ्ट, जिससे नोएडा में महिला की मौत हुई?
तेज प्रताप ने एक बार फिर से जगदानंद सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि जगदानंद सिंह बार-बार पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और मुझे पिता के साथ प्रचार करने से रोक दिया है। लालू यादव के पटना लौटने के बावजूद बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। तेज प्रताप ने एक बार फिर से जगदानंद सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि जगदानंद सिंह बार-बार पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और मुझे पिता के साथ प्रचार करने से रोक दिया है। बता दें कि विरासत की लड़ाई को लेकर लालू परिवार में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। तेज प्रताप यादव, जगदानंद सिंह को हटाने के लिए हर संभव कोशिश में लगे हैं। 24 अक्तूबर को लालू प्रसाद के पटना लौटने के बाद उन्होंने कहा था कि जगदानंद सिंह को जब तक पार्टी से नहीं निकालेंगे, तब तक हमें राजद से कोई मतलब नहीं है। तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि पटना एयरपोर्ट पर जगदानंद ने उन्हें धक्का दिया। राजद छात्र युवा के गुंडों के द्वारा भी हमें धक्का दिया गया। जगदानंद सिंह आरएसएस का आदमी है। हम एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। तेज प्रताप ने साफ कर दिया है कि वह जल्दी ही बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले, तेज प्रताप यादव तीन साल बाद पटना लौटे अपने पिता लालू से मिलने मां के आवास 10, सर्कुलर रोड पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया। तब वह कुछ सौ मीटर दूर अपने आवास पर लौट गए। कुछ देर बाद वह अपने समर्थकों के साथ आए और धरने पर बैठ गए। उनके समर्थकों के हाथों में 'छात्र जनशक्ति परिषद' के झंडे थे। तेज प्रताप ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग मुझे मेरे पिता के साथ समय नहीं व्यतीत करने देना चाहते हैं। इसी को लेकर लालू यादव के पटना लौटने के कुछ समय बाद ही तेज प्रताप अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने लालू यादव के आवास के बाहर भी ये कहते हुए प्रदर्शन किया कि आरएसएस के एजेंट मुझे पिता से मिलने नहीं दे रहे हैं। जिसके बाद लालू यादव ने उनसे मुलाकात की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
तेज प्रताप ने एक बार फिर से जगदानंद सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि जगदानंद सिंह बार-बार पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और मुझे पिता के साथ प्रचार करने से रोक दिया है। लालू यादव के पटना लौटने के बावजूद बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। तेज प्रताप ने एक बार फिर से जगदानंद सिंह पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि जगदानंद सिंह बार-बार पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और मुझे पिता के साथ प्रचार करने से रोक दिया है। बता दें कि विरासत की लड़ाई को लेकर लालू परिवार में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। तेज प्रताप यादव, जगदानंद सिंह को हटाने के लिए हर संभव कोशिश में लगे हैं। चौबीस अक्तूबर को लालू प्रसाद के पटना लौटने के बाद उन्होंने कहा था कि जगदानंद सिंह को जब तक पार्टी से नहीं निकालेंगे, तब तक हमें राजद से कोई मतलब नहीं है। तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि पटना एयरपोर्ट पर जगदानंद ने उन्हें धक्का दिया। राजद छात्र युवा के गुंडों के द्वारा भी हमें धक्का दिया गया। जगदानंद सिंह आरएसएस का आदमी है। हम एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। तेज प्रताप ने साफ कर दिया है कि वह जल्दी ही बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले, तेज प्रताप यादव तीन साल बाद पटना लौटे अपने पिता लालू से मिलने मां के आवास दस, सर्कुलर रोड पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया। तब वह कुछ सौ मीटर दूर अपने आवास पर लौट गए। कुछ देर बाद वह अपने समर्थकों के साथ आए और धरने पर बैठ गए। उनके समर्थकों के हाथों में 'छात्र जनशक्ति परिषद' के झंडे थे। तेज प्रताप ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग मुझे मेरे पिता के साथ समय नहीं व्यतीत करने देना चाहते हैं। इसी को लेकर लालू यादव के पटना लौटने के कुछ समय बाद ही तेज प्रताप अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने लालू यादव के आवास के बाहर भी ये कहते हुए प्रदर्शन किया कि आरएसएस के एजेंट मुझे पिता से मिलने नहीं दे रहे हैं। जिसके बाद लालू यादव ने उनसे मुलाकात की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
कौशांबी (उत्तर प्रदेश), 29 मार्च कौशांबी जिले के सैनी क्षेत्र में ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो लोगों की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि सैनी थाना क्षेत्र के अझुवा नगर पंचायत निवासी मुन्ना (35) अपने साथियों पिंटू (28) और जितेंद्र (25) के साथ रविवार देर रात सैनी की ओर जा रहा था। रास्ते में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो पर एक ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। उन्होंने बताया कि इस हादसे में मुन्ना और पिंटू की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जितेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक हादसे के बाद ट्रक चालक भाग गया। उसकी तलाश की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कौशांबी , उनतीस मार्च कौशांबी जिले के सैनी क्षेत्र में ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो लोगों की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि सैनी थाना क्षेत्र के अझुवा नगर पंचायत निवासी मुन्ना अपने साथियों पिंटू और जितेंद्र के साथ रविवार देर रात सैनी की ओर जा रहा था। रास्ते में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो पर एक ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। उन्होंने बताया कि इस हादसे में मुन्ना और पिंटू की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जितेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक हादसे के बाद ट्रक चालक भाग गया। उसकी तलाश की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Results for " प्रेम विवाह" युवती के पिता को सदमा लगा और पुलिस स्टेशन के बाहर ही उनकी हालत बिगड़ गई। थाने के बाहर से बेहोशी की हालात में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। आदिवासी समुदाय से संबंध रखने वाली द्रौपदी मुर्मू के रूप में भारत को 15वीं राष्ट्रपति मिल चुकी है। यह इतिहास में पहला अवसर है जब एक आदिवासी समुदाय से संबंध रखने वाली महिला इतने बड़े सर्वोच्च पद पर पहुंची हो। उन्होंने खिड़की से देखा तो श्रुति फंदे से झूल रही थी। घटना की सूचना मिलने पर मायका पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। गीता देवी के पति मोहर सिंह का कहना है कि उसने भी गीता के साथ अस्पताल जाने की बात कही थी, लेकिन उसने मना कर दिया और अकेले ही अस्पताल चली गई। देवर ने बताया कि उसकी भाभी ने पहले भी ग्राम पंचायत में प्रधान और पंचों के समक्ष उसके भाई पर कई आरोप लगाए थे, जिसके बाद से वह अपने मायके चली गई थी। यह मामला प्रेम प्रसंग का है। युवक और सुसाइड करने वाली महिला एक ही गांव के रहने वाले थे। इन दोनों का काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण और राधा का भी विवाह हुआ था। उनका विवाह भांडीरवन में हुआ था और उनकी शादी को स्वयं ब्रह्माजी ने संपूर्ण करवाया था। उत्तर प्रदेश में कई महिलाएं मिलकर एक महिला को रस्सी से बांधकर कर पिटाई करती हुई नजर आ रही हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
Results for " प्रेम विवाह" युवती के पिता को सदमा लगा और पुलिस स्टेशन के बाहर ही उनकी हालत बिगड़ गई। थाने के बाहर से बेहोशी की हालात में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। आदिवासी समुदाय से संबंध रखने वाली द्रौपदी मुर्मू के रूप में भारत को पंद्रहवीं राष्ट्रपति मिल चुकी है। यह इतिहास में पहला अवसर है जब एक आदिवासी समुदाय से संबंध रखने वाली महिला इतने बड़े सर्वोच्च पद पर पहुंची हो। उन्होंने खिड़की से देखा तो श्रुति फंदे से झूल रही थी। घटना की सूचना मिलने पर मायका पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। गीता देवी के पति मोहर सिंह का कहना है कि उसने भी गीता के साथ अस्पताल जाने की बात कही थी, लेकिन उसने मना कर दिया और अकेले ही अस्पताल चली गई। देवर ने बताया कि उसकी भाभी ने पहले भी ग्राम पंचायत में प्रधान और पंचों के समक्ष उसके भाई पर कई आरोप लगाए थे, जिसके बाद से वह अपने मायके चली गई थी। यह मामला प्रेम प्रसंग का है। युवक और सुसाइड करने वाली महिला एक ही गांव के रहने वाले थे। इन दोनों का काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण और राधा का भी विवाह हुआ था। उनका विवाह भांडीरवन में हुआ था और उनकी शादी को स्वयं ब्रह्माजी ने संपूर्ण करवाया था। उत्तर प्रदेश में कई महिलाएं मिलकर एक महिला को रस्सी से बांधकर कर पिटाई करती हुई नजर आ रही हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
आबकारी विभाग जिले की 30 पंचायतों के एतराज के बावजूद 29 गांवों में शराब के ठेके खोलने पर आमादा है। विभाग ने इसके पीछे इन गांवों में अवैध शराब के मामले पकड़े जाने के नियमों का हवाला देते हुए पंचायतों के प्रस्ताव मानने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर विभिन्न गांवों की पंचायतें इस मामले को उच्चाधिकारियों के पास ले जाने के तैयारी में हैं। विभाग की इस कार्यवाही से गांवों की पंचायतों में असंतोष की स्थिति है। जिला आबकारी एवं कराधान नियंत्रक डॉ. आनंद सिंह ने इसकी पुष्टि की है। जिले में 258 पंचायतें हैं। इन में कई पंचायतों के साथ एक से अधिक गांव भी पड़ते हैं। गांव में शराब पीकर हुड़दंग मचाने एवं अवैध शराब की बिक्री के कारण आपसी भाईचारा बिगड़ने की कई शिकायतें पुलिस प्रशासन को मिलती रहती हैं। ग्रामीणों की मांग के चलते फैसला लिया था कि जो ग्राम पंचायत सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर गांव में शराब का ठेका या खुर्दा बंद करवाना चाहेगी, उस गांव में विभाग शराब का ठेका नहीं खोलेगा। सरकार के आदेशों पर जिले की तीस ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर संबंधित विभाग को दे दिए। ये प्रस्ताव आबकारी विभाग के कमिश्नर के पास चंडीगढ़ भेजे गए, जहां लिखित रूप में इन प्रस्तावों को इस टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया कि 30 में से 29 गांवों में पंचायत पिछले दो सालों से अवैध शराब की बिक्री तक नहीं रोक सकी। बाकायदा इसमें पुलिस में आबकारी अधिनियम के तहत कई केस दर्ज हैं। अगर इन गांवों में ठेके नहीं खोले गए तो यह अवैध शराब की तस्करी के नए अड्डे बन जाएंगे। जब तक पंचायतें पूरे गांव में ऐसे तत्वों पर नकेल नहीं कसती, तब तक इन गांवों में शराब के ठेके औपचारिक रूप से बंद नहीं किए जा सकते। जबकि मुख्य रूप से एक गांव का कमिश्नर ने जिक्र किया कि जाखल के गांव चुहड़पुर में शराब का ठेका नहीं खुलेगा क्योंकि इस गांव में पिछले दो सालों में आबकारी अधिनियम का कोई केस नहीं आया और ना ही कोई शिकायत मिली। इसलिए इस गांव में शराब का ठेका ना खोलने के पंचायत के प्रस्ताव को मंजूर कर दिया गया। आबकारी विभाग के अनुसार, गांव बहबदहलपुर, मूसाखेड़ा, मानावाली, चुहड़पुर, अलालवास, खुंबर, मोचीवाली, ठरवी, नाढोड़ी, हंसेवाला, शक्करपुरा, बनावाली, अलीका, पालसर, नढ़ैल, रतनगढ़, बनगांव, एमपी रोही, धांगड़, डांगरा, काजलहेड़ी, धारनियां, भोडाहोशनाक, ढाणी भोजराज, ढाणी सांचला, डुल्ट, टिब्बी, जाखल गांव, गोरखपुर, शेखुपुर ढड़ौली की पंचायतों ने शराब के ठेके ना खोलने का प्रस्ताव आबकारी विभाग को दिया था, जिसमें विभाग ने महज चूहड़पुर को छोड़कर बाकी सभी पंचायतों के प्रस्ताव रद्द कर दिए। तीस ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव शराबबंदी के लिए आए थे, जिसे चंडीगढ़ भेज दिया गया था। लेकिन वहां से एतराज लगने के बाद 29 पंचायतों के प्रस्ताव को नियमों के चलते रद्द कर दिया गया, क्योंकि इन गांवों में पंचायतें अवैध शराब पर नकेल नहीं कस पाई थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
आबकारी विभाग जिले की तीस पंचायतों के एतराज के बावजूद उनतीस गांवों में शराब के ठेके खोलने पर आमादा है। विभाग ने इसके पीछे इन गांवों में अवैध शराब के मामले पकड़े जाने के नियमों का हवाला देते हुए पंचायतों के प्रस्ताव मानने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर विभिन्न गांवों की पंचायतें इस मामले को उच्चाधिकारियों के पास ले जाने के तैयारी में हैं। विभाग की इस कार्यवाही से गांवों की पंचायतों में असंतोष की स्थिति है। जिला आबकारी एवं कराधान नियंत्रक डॉ. आनंद सिंह ने इसकी पुष्टि की है। जिले में दो सौ अट्ठावन पंचायतें हैं। इन में कई पंचायतों के साथ एक से अधिक गांव भी पड़ते हैं। गांव में शराब पीकर हुड़दंग मचाने एवं अवैध शराब की बिक्री के कारण आपसी भाईचारा बिगड़ने की कई शिकायतें पुलिस प्रशासन को मिलती रहती हैं। ग्रामीणों की मांग के चलते फैसला लिया था कि जो ग्राम पंचायत सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर गांव में शराब का ठेका या खुर्दा बंद करवाना चाहेगी, उस गांव में विभाग शराब का ठेका नहीं खोलेगा। सरकार के आदेशों पर जिले की तीस ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर संबंधित विभाग को दे दिए। ये प्रस्ताव आबकारी विभाग के कमिश्नर के पास चंडीगढ़ भेजे गए, जहां लिखित रूप में इन प्रस्तावों को इस टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया कि तीस में से उनतीस गांवों में पंचायत पिछले दो सालों से अवैध शराब की बिक्री तक नहीं रोक सकी। बाकायदा इसमें पुलिस में आबकारी अधिनियम के तहत कई केस दर्ज हैं। अगर इन गांवों में ठेके नहीं खोले गए तो यह अवैध शराब की तस्करी के नए अड्डे बन जाएंगे। जब तक पंचायतें पूरे गांव में ऐसे तत्वों पर नकेल नहीं कसती, तब तक इन गांवों में शराब के ठेके औपचारिक रूप से बंद नहीं किए जा सकते। जबकि मुख्य रूप से एक गांव का कमिश्नर ने जिक्र किया कि जाखल के गांव चुहड़पुर में शराब का ठेका नहीं खुलेगा क्योंकि इस गांव में पिछले दो सालों में आबकारी अधिनियम का कोई केस नहीं आया और ना ही कोई शिकायत मिली। इसलिए इस गांव में शराब का ठेका ना खोलने के पंचायत के प्रस्ताव को मंजूर कर दिया गया। आबकारी विभाग के अनुसार, गांव बहबदहलपुर, मूसाखेड़ा, मानावाली, चुहड़पुर, अलालवास, खुंबर, मोचीवाली, ठरवी, नाढोड़ी, हंसेवाला, शक्करपुरा, बनावाली, अलीका, पालसर, नढ़ैल, रतनगढ़, बनगांव, एमपी रोही, धांगड़, डांगरा, काजलहेड़ी, धारनियां, भोडाहोशनाक, ढाणी भोजराज, ढाणी सांचला, डुल्ट, टिब्बी, जाखल गांव, गोरखपुर, शेखुपुर ढड़ौली की पंचायतों ने शराब के ठेके ना खोलने का प्रस्ताव आबकारी विभाग को दिया था, जिसमें विभाग ने महज चूहड़पुर को छोड़कर बाकी सभी पंचायतों के प्रस्ताव रद्द कर दिए। तीस ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव शराबबंदी के लिए आए थे, जिसे चंडीगढ़ भेज दिया गया था। लेकिन वहां से एतराज लगने के बाद उनतीस पंचायतों के प्रस्ताव को नियमों के चलते रद्द कर दिया गया, क्योंकि इन गांवों में पंचायतें अवैध शराब पर नकेल नहीं कस पाई थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Health: इन फूड्स के सेवन से महिलाएं भूल जाएंगी मेनोपॉज का दर्द, बुढ़ापे तक मजबूत रहेंगी हड्डियां, ये है तरीका. . Warm Water Benefits: क्या गर्म पानी शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण. . इंडियन नेवी के इस फैसले से भारत के दुश्मन थर थर कांपेंगे! अगर आप खुद को नीचा देखती हैं तो अपने पति को ऐसे सिखाएं! ये 5 राशि वाले शैक्षणिक क्षेत्र में हासिल करेंगे बड़ी उपलब्धि!
Health: इन फूड्स के सेवन से महिलाएं भूल जाएंगी मेनोपॉज का दर्द, बुढ़ापे तक मजबूत रहेंगी हड्डियां, ये है तरीका. . Warm Water Benefits: क्या गर्म पानी शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण. . इंडियन नेवी के इस फैसले से भारत के दुश्मन थर थर कांपेंगे! अगर आप खुद को नीचा देखती हैं तो अपने पति को ऐसे सिखाएं! ये पाँच राशि वाले शैक्षणिक क्षेत्र में हासिल करेंगे बड़ी उपलब्धि!
न्यूजीलैंड के बल्लेबाज माइकल ब्रेसवेल ने सातवें नंबर पर आकर जिस तरह से बल्लेबाजी की उससे भारतीय टीम की जान भी मानो हलक में अटकी थी. 29 ओवर के खात्मे तक न्यूजीलैंड के 131 पर 6 विकेट चटकाने के बाद जो जीत आसान नजर आ रही थी, डेथ ओवर तक वह उतनी ही कठिनाई बन गई. ब्रेसवेल ने मिचेल सेंटनर के साथ मिलकर 102 गेंदों में 162 की तूफानी साझेदारी की. टीम इण्डिया 350 रन का टारगेट देने के बावजूद अपनी जमीन पर केवल 12 रन से जीत दर्ज कर सकी. खास बात यह रही कि इसके लिए भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने किसी भी गेंदबाज को गुनहगार नहीं ठहराया. उन्होंने कीवी बल्लेबाज की प्रशंसा की और ओस की परेशानी के चलते बाद में गेंदबाजी करने की दिक्कतों को सामने रखा. ब्रेसवेल ने अपनी इस पारी में 78 गेंदों में 140 रन ठोके और वह अतिथि टीम के आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज थे. लेकिन उनपर शुभमन गिल की डबल सेंचुरी भारी पड़ी. उन्होंने अपने वनडे करियर के तीसरे शतक को बड़े स्टाइल में बैक टू बैक 3 छक्के लगाकर दोहरे शतक में बदल दिया. भारतीय युवा सलामी बल्लेबाज ने इस मैच में वनडे इतिहास का 10वां दोहरा शतक लगा दिया. यह किसी भारतीय बल्लेबाज की ओर से लगने वाला सातवां दोहरा शतक है. 23 वर्ष के गिल इस माइलस्टोन के साथ सबसे कम उम्र में दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बने. ब्रेसवेल और सेंटनर की जोड़ी ने मिलकर 350 के टारगेट का पीछा करते हुए 45. 4 ओवर तक न्यूजीलैंड के टोटल को 293 तक पहुंचा दिया तब जाकर ये साझेदारी टूटी. कीवी टीम की पारी के 46वें ओवर में तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हिंदुस्तान को मैच में वापस लेकर आए. उन्होंने बैक टू बैक दो विकेट चटकाए और और फिसलती जीत को भारतीय टीम की गोदी में डाल दिया. सिराज ने हैदराबाद की फ्लैट पिच पर ड्यू फैक्टर का सामना करते हुए 10 ओवर में 46 रन देकर 4 विकेट अपने नाम किए. सिराज के मैच जिताऊ प्रदर्शन पर रोहित ने कहा, "सिराज कुछ दिनों से खेल के हर फॉर्मेट में बहुत बढ़िया गेंदबाजी कर रहे हैं. वह पूरी ताकत लगाते हैं और उन्हें पूरी तरह से पता है कि वह क्या करना चाहते हैं. यह देखना दिलचस्प है कि वह किसी भी हालात में शॉर्ट बॉल ट्राई करने से भी नहीं हिचकते.
न्यूजीलैंड के बल्लेबाज माइकल ब्रेसवेल ने सातवें नंबर पर आकर जिस तरह से बल्लेबाजी की उससे भारतीय टीम की जान भी मानो हलक में अटकी थी. उनतीस ओवर के खात्मे तक न्यूजीलैंड के एक सौ इकतीस पर छः विकेट चटकाने के बाद जो जीत आसान नजर आ रही थी, डेथ ओवर तक वह उतनी ही कठिनाई बन गई. ब्रेसवेल ने मिचेल सेंटनर के साथ मिलकर एक सौ दो गेंदों में एक सौ बासठ की तूफानी साझेदारी की. टीम इण्डिया तीन सौ पचास रन का टारगेट देने के बावजूद अपनी जमीन पर केवल बारह रन से जीत दर्ज कर सकी. खास बात यह रही कि इसके लिए भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने किसी भी गेंदबाज को गुनहगार नहीं ठहराया. उन्होंने कीवी बल्लेबाज की प्रशंसा की और ओस की परेशानी के चलते बाद में गेंदबाजी करने की दिक्कतों को सामने रखा. ब्रेसवेल ने अपनी इस पारी में अठहत्तर गेंदों में एक सौ चालीस रन ठोके और वह अतिथि टीम के आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज थे. लेकिन उनपर शुभमन गिल की डबल सेंचुरी भारी पड़ी. उन्होंने अपने वनडे करियर के तीसरे शतक को बड़े स्टाइल में बैक टू बैक तीन छक्के लगाकर दोहरे शतक में बदल दिया. भारतीय युवा सलामी बल्लेबाज ने इस मैच में वनडे इतिहास का दसवां दोहरा शतक लगा दिया. यह किसी भारतीय बल्लेबाज की ओर से लगने वाला सातवां दोहरा शतक है. तेईस वर्ष के गिल इस माइलस्टोन के साथ सबसे कम उम्र में दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बने. ब्रेसवेल और सेंटनर की जोड़ी ने मिलकर तीन सौ पचास के टारगेट का पीछा करते हुए पैंतालीस. चार ओवर तक न्यूजीलैंड के टोटल को दो सौ तिरानवे तक पहुंचा दिया तब जाकर ये साझेदारी टूटी. कीवी टीम की पारी के छियालीसवें ओवर में तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हिंदुस्तान को मैच में वापस लेकर आए. उन्होंने बैक टू बैक दो विकेट चटकाए और और फिसलती जीत को भारतीय टीम की गोदी में डाल दिया. सिराज ने हैदराबाद की फ्लैट पिच पर ड्यू फैक्टर का सामना करते हुए दस ओवर में छियालीस रन देकर चार विकेट अपने नाम किए. सिराज के मैच जिताऊ प्रदर्शन पर रोहित ने कहा, "सिराज कुछ दिनों से खेल के हर फॉर्मेट में बहुत बढ़िया गेंदबाजी कर रहे हैं. वह पूरी ताकत लगाते हैं और उन्हें पूरी तरह से पता है कि वह क्या करना चाहते हैं. यह देखना दिलचस्प है कि वह किसी भी हालात में शॉर्ट बॉल ट्राई करने से भी नहीं हिचकते.
स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा का वास होता है . स्वस्थ रहने के लिए हमे हेल्थी डाइट और व्यायाम की आवश्यकता होती है . इसके साथ ही व्यक्ति को अपने रेग्यूलर चेकअप जरूर कराने चाहिए क्यूंकि इससे शुरुआत में ही बीमारी का पता लग जाता है और जल्द ही इलाज करने से वह आसानी से ठीक भी हो जाती है . आज हम आपको एक ऐसे टेस्ट के बारे में बताने जा रहे है जिसे आप घर बैठे बड़ी आसानी से कर सकते है और घर बैठे ही अपनी बिमारियों के बारे में पता लगा सकते है . जी हाँ इस टेस्ट का नाम है 'चम्मच टेस्ट' इसके लिए किसी खास प्रक्रिया की जरूरत नहीं है बस आपको एक आसान सा काम करना है . दरअसल यह टेस्ट आप सुबह-सुबह कर सकते हैं . इस टेस्ट को करने के लिए आपको खाली पेट रहना होगा . यहां तक कि आपको पानी भी नही पीना है . इसको करने के लिए सबसे पहले आपको एक स्टील का धुला हुआ चम्मच लेना है और इसकी पूरी सतह को अपनी जीभ से रगड़ें . इसे जीभ से इस तरह से गीला कर लें कि आपकी स्लाइवा इसमें अच्छे से लग जाए . आपको बता दें कि इस चम्मच को एक प्लास्टिक के बैग में रखकर इसे सूरज की रौशनी में रखना है . इसके बाद इस चम्मच को प्लास्टिक के बैग से बाहर निकालें और इस पर हाथ लगाएं बिना जानें आपको कौन सी बीमारी है . जी हाँ ये चम्मच आपको आपकी शरीर की बिमारियों के लक्षणों के बारे में बताएगा . यदि आपके चम्मच में कोई बदबू नहीं आ रही है या फिर इसमें कोई निशान नहीं पड़ा है तो आपके शरीर के सभी ऑर्गन अच्छी स्थिति में हैं लेकिन यदि इस चम्मच से बदबू आ रही है या इस पर कोई निशान बना हुआ है तो ऊपर दी गयी विडियो द्वारा जानिए कि आपको कौन सी बीमारी होने के लक्षण है .
स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा का वास होता है . स्वस्थ रहने के लिए हमे हेल्थी डाइट और व्यायाम की आवश्यकता होती है . इसके साथ ही व्यक्ति को अपने रेग्यूलर चेकअप जरूर कराने चाहिए क्यूंकि इससे शुरुआत में ही बीमारी का पता लग जाता है और जल्द ही इलाज करने से वह आसानी से ठीक भी हो जाती है . आज हम आपको एक ऐसे टेस्ट के बारे में बताने जा रहे है जिसे आप घर बैठे बड़ी आसानी से कर सकते है और घर बैठे ही अपनी बिमारियों के बारे में पता लगा सकते है . जी हाँ इस टेस्ट का नाम है 'चम्मच टेस्ट' इसके लिए किसी खास प्रक्रिया की जरूरत नहीं है बस आपको एक आसान सा काम करना है . दरअसल यह टेस्ट आप सुबह-सुबह कर सकते हैं . इस टेस्ट को करने के लिए आपको खाली पेट रहना होगा . यहां तक कि आपको पानी भी नही पीना है . इसको करने के लिए सबसे पहले आपको एक स्टील का धुला हुआ चम्मच लेना है और इसकी पूरी सतह को अपनी जीभ से रगड़ें . इसे जीभ से इस तरह से गीला कर लें कि आपकी स्लाइवा इसमें अच्छे से लग जाए . आपको बता दें कि इस चम्मच को एक प्लास्टिक के बैग में रखकर इसे सूरज की रौशनी में रखना है . इसके बाद इस चम्मच को प्लास्टिक के बैग से बाहर निकालें और इस पर हाथ लगाएं बिना जानें आपको कौन सी बीमारी है . जी हाँ ये चम्मच आपको आपकी शरीर की बिमारियों के लक्षणों के बारे में बताएगा . यदि आपके चम्मच में कोई बदबू नहीं आ रही है या फिर इसमें कोई निशान नहीं पड़ा है तो आपके शरीर के सभी ऑर्गन अच्छी स्थिति में हैं लेकिन यदि इस चम्मच से बदबू आ रही है या इस पर कोई निशान बना हुआ है तो ऊपर दी गयी विडियो द्वारा जानिए कि आपको कौन सी बीमारी होने के लक्षण है .
पंजाब के लुधियाना में अमोनिया गैस से भरे टैंकर में बलास्ट के बाद हुए रिसाव ने 6 जिंदगियां छीन लीं। करीब 100 लोग बेहोश हो गए। देखिए तस्वीरें। हादसा देर रात लुधियाना से 25 किलोमीटर दूर दोराहा रोड पर हुआ। गैस रिसाव के कारण 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। 5 किलोमीटर तक के एरिया में गैस रिसाव का असर देखा गया। लोगों सांस लेने में और आंखों में जलन की परेशानी हुई। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर बिग्रेड ने मौके पर पहुंच कर बचाव अभियान चलाया। इलाके को खाली कराया। पुलिस ने शवों को लुधियाना के अस्पताल भेजा और बेहोश लोगों को दोराहा, खन्ना और लुधियाना के कुछ अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इलाके के प्रभावित लोगों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, अमोनिया गैस से भरा टैंकर गुजरात की ओर जा रहा था। देर रात दोराहा फ्लाईओवर के पास टैंकर में धमाका हो गया और गैस का रिसाव होने लगा। देखते-देखते आसपास लोगों की हालत बिगड़ने लगी। सुरक्षा प्रबंधों की कमी के कारण कोई भी टैंकर तक नहीं पहुंच पाया। ऐसे में फायर बिग्रेड की गाड़ियां मंगवाकर गैस रिसाव पर काबू पाया गया। फायर बिग्रेड के कर्मी टैंकर को धकेल तुरंत सुनसान जगह पर ले गए और रिसाव रोकने का प्रयास करने लगे।
पंजाब के लुधियाना में अमोनिया गैस से भरे टैंकर में बलास्ट के बाद हुए रिसाव ने छः जिंदगियां छीन लीं। करीब एक सौ लोग बेहोश हो गए। देखिए तस्वीरें। हादसा देर रात लुधियाना से पच्चीस किलोग्राममीटर दूर दोराहा रोड पर हुआ। गैस रिसाव के कारण छः लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पाँच किलोग्राममीटर तक के एरिया में गैस रिसाव का असर देखा गया। लोगों सांस लेने में और आंखों में जलन की परेशानी हुई। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर बिग्रेड ने मौके पर पहुंच कर बचाव अभियान चलाया। इलाके को खाली कराया। पुलिस ने शवों को लुधियाना के अस्पताल भेजा और बेहोश लोगों को दोराहा, खन्ना और लुधियाना के कुछ अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इलाके के प्रभावित लोगों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, अमोनिया गैस से भरा टैंकर गुजरात की ओर जा रहा था। देर रात दोराहा फ्लाईओवर के पास टैंकर में धमाका हो गया और गैस का रिसाव होने लगा। देखते-देखते आसपास लोगों की हालत बिगड़ने लगी। सुरक्षा प्रबंधों की कमी के कारण कोई भी टैंकर तक नहीं पहुंच पाया। ऐसे में फायर बिग्रेड की गाड़ियां मंगवाकर गैस रिसाव पर काबू पाया गया। फायर बिग्रेड के कर्मी टैंकर को धकेल तुरंत सुनसान जगह पर ले गए और रिसाव रोकने का प्रयास करने लगे।
उन्होंने कहा," मैं गेल को इस बात को साबित करने के लिए प्रेरित करूंगा कि वह दुनिया में सर्वाधिक रन बनाने वाले टी 20 बल्लेबाज हैं। मैं अब सीपीएल 2020 का और इंतजार नहीं कर सकता। मुझे उम्मीद है कि कोरोनावायरस पर हम काबू पा लेंगे और हम एक शानदार टी 20 टूर्नामेंट का आनंद ले सकेंगे। " अब तक प्रदेश भर में 288 देशी विदेशी तबलीगी गिरफ्तार किए गए हैं। लॉकडाउन और वीजा नियमों का उल्लंघन करने के चलते इन्हें जेल की हवा खानी पड़ी है। योगी सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि पुलिस और पैरामेडिकल स्टाफ पर हमला करने वाले भी अस्थाई जेलों में डाले जाएंगे। कोरोनावायरस महामारी से ग्रसित लोगों का वैश्विक आंकड़ा एक लाख 83 हजार से अधिक मौत हो गई है। इसी के साथ कोरोनावायरस महामारी से ग्रस्त लोगों का आंकड़ा 26 लाख के पार हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फैरेल ने कहा कि पीएम मोदी कोविड-19 के बाद स्थिति सामान्य करने में विश्व का नेतृत्व करने की खातिर जी-20 को महत्वपूर्ण इकाई के रूप में आकार देने की अग्रणी आवाजों में से भी एक हैं। आदर पूनावाला जो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, उनका कहना है कि, दो हफ्ते के बाद हम एक महीने में 5 मिलियन डोज़ बनाने में कामयाब होंगे, जिसके बाद इसकी रफ्तार एक महीने में 10 मिलियन डोज़ तक पहुंचा पाएंगे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती दो मरीज संदिग्ध हालातों में गायब हो गये। इनमें से एक मरीज स्पेन का रहने वाला है। पिछले काफी दिनों से खबरें आ रही थी कि शाहरुख खान अपने दफ्तर को इस कोरोना काल में मदद का हाथ आगे बढ़ाते हुए बीएमसी को सौंप रहे हैं। क्वारंटाइन जोन बनाने के लिए हाल ही में गौरी खान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आदित्य रंजन ने भी बैंकों में नोट, चेक और ड्राट को विसंक्रमित (कोरोनावायरस के संक्रमण से मुक्त ) करने की मशीन विकसित की है।
उन्होंने कहा," मैं गेल को इस बात को साबित करने के लिए प्रेरित करूंगा कि वह दुनिया में सर्वाधिक रन बनाने वाले टी बीस बल्लेबाज हैं। मैं अब सीपीएल दो हज़ार बीस का और इंतजार नहीं कर सकता। मुझे उम्मीद है कि कोरोनावायरस पर हम काबू पा लेंगे और हम एक शानदार टी बीस टूर्नामेंट का आनंद ले सकेंगे। " अब तक प्रदेश भर में दो सौ अठासी देशी विदेशी तबलीगी गिरफ्तार किए गए हैं। लॉकडाउन और वीजा नियमों का उल्लंघन करने के चलते इन्हें जेल की हवा खानी पड़ी है। योगी सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि पुलिस और पैरामेडिकल स्टाफ पर हमला करने वाले भी अस्थाई जेलों में डाले जाएंगे। कोरोनावायरस महामारी से ग्रसित लोगों का वैश्विक आंकड़ा एक लाख तिरासी हजार से अधिक मौत हो गई है। इसी के साथ कोरोनावायरस महामारी से ग्रस्त लोगों का आंकड़ा छब्बीस लाख के पार हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फैरेल ने कहा कि पीएम मोदी कोविड-उन्नीस के बाद स्थिति सामान्य करने में विश्व का नेतृत्व करने की खातिर जी-बीस को महत्वपूर्ण इकाई के रूप में आकार देने की अग्रणी आवाजों में से भी एक हैं। आदर पूनावाला जो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, उनका कहना है कि, दो हफ्ते के बाद हम एक महीने में पाँच मिलियन डोज़ बनाने में कामयाब होंगे, जिसके बाद इसकी रफ्तार एक महीने में दस मिलियन डोज़ तक पहुंचा पाएंगे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के कोविड-उन्नीस वार्ड में भर्ती दो मरीज संदिग्ध हालातों में गायब हो गये। इनमें से एक मरीज स्पेन का रहने वाला है। पिछले काफी दिनों से खबरें आ रही थी कि शाहरुख खान अपने दफ्तर को इस कोरोना काल में मदद का हाथ आगे बढ़ाते हुए बीएमसी को सौंप रहे हैं। क्वारंटाइन जोन बनाने के लिए हाल ही में गौरी खान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आदित्य रंजन ने भी बैंकों में नोट, चेक और ड्राट को विसंक्रमित करने की मशीन विकसित की है।
क्रमानुसार उचित समय पर शरीर की शुद्धि के अर्थ स्त्रियों के विभिन्न संस्कार बिना मंत्रों के ही कर देने चाहिये । क्यों ? इसलिये कि वे कन्याओं का विशेष सम्मान करते हैं, उनके संस्कारों के लिये उन्हें मंत्रोच्चारण की प्रतीक्षा कराना अभीष्ठ नहीं । इस उपर्युक्त मेरे प्रकट किये हुये विचार के अनुकूल यदि इस श्लोक का अभिप्राय है तो मैं इसे मनु का वचन मानने को तैयार हूँ अन्यथा तुलसीराम जी स्वामी ने ६६ और ६७ दोनों ही श्लोकों को प्रक्षिप्त माना है। क्योंकि वे संगति लगाते हैंःकेशान्तः षोड्षे वर्षे ब्राह्मणस्य विधीयते । राजन्य बन्धोर्द्वाविंशे वैश्यस्य द्व्यधिके ततः ॥ मनु० २०६५ एष प्रोक्तो द्विजातीनामौपनायनिको विधिः । उत्पत्ति व्यंजकः पुण्यः कर्मयोगंनिबोधत ।। इन दोनों श्लोकों और इसके अन्तर्गत आये हुए ६६, ६७ श्लोकों के विषय में तुलसीराम जी स्वामी लिखते हैंः- "६६वें श्लोक का यह कहना तो ठीक है कि स्त्रियों के भी गर्भाधान से लेकर केशान्त संस्कार पर्यन्त सब संस्कार करने चाहिये । परन्तु इसके लिये किसी पृथक् विधान की आवश्यकता नहीं। क्योंकि तीनों वर्गों के जो-जो संस्कार पूर्व कह आये हैं, वे सब कन्या और पुत्र दोनों ही के हैं। पुल्लिङ्ग निर्देश अविवक्षित है, अर्थात् वक्ता का तात्पर्य वर्ण-मात्र में है, चाहे कन्या हो, वा पुत्र । जैसे कोई कहे कि - "योत्राऽऽगमिष्यति स मृत्युमाप्स्यति" =जो यहाँ आवेगा वह मर जायगा - इस दशा में यद्यपि पुल्लिङ्ग का निर्देश है, परन्तु कहने वाले का तात्पर्य स्त्री-पुरुष दोनों से है, अथवा वैद्यकशास्त्र में पुल्लिङ्ग निर्देश करते हुये जो सामान्य विधि निषेध किये हैं, वे सब स्त्री पुरुषों के एक से और एक ही विधि-वाक्य से विदित समझने चाहिये, और कन्याओं के विवाह संस्कार को छोड़कर अन्य संस्कारों में वेद-मंत्र पढ़ने का निषेध भी प्रक्षित है, जहाँ तक हमने देखा और विचारा है वहाँ तक वेदों में कहीं यह निषेध नहीं पाया जाता । इसलिये ६६-६७ श्लोक स्त्री जाति के विद्वेषी अन्य मतों के संसर्ग से प्रक्षिप्त जान पड़ते हैं तथा ६५ श्लोक को ६८वें से मिला कर पढ़िये तो ठीक सम्बन्ध चला आता है - " केशान्त संस्कार ब्राह्मण (ब्राह्मणी) का सोलहवें वर्ष में करे और क्षत्रिय (क्षत्रिया) का २२ वें तथा उससे अधिक ( २४ वर्ष ) में वैश्य ( वैश्या ) का करे। ( यह केशान्त संस्कार समावर्तन संस्कार है) यह ब्राह्मण ( ब्राह्मणी ) क्षत्रिय ( क्षत्रिया ) वैश्य ( वैश्या ) को उपनयन सम्बन्धी विधि कही। यह विधि जन्म की जतलाने वाली और पवित्रकारक है, (कर्तव्य को सुनो) ।" यह एक उदाहरण हुआ जिसे हमने उद्धृत करके यह बनाने का प्रयन्न किया है कि मनु में प्रक्षिप्त हैं। इन्हीं प्रक्षिप्तों के सहारे हमारे आधुनिक सुधारवादी मनु की धज्जियाँ उड़ाने की सोचते हैं । परन्तु उनका ऐसा सोचना निरर्थक है । इसलिये कि "वेदवाह्याः स्मृतयः याश्च काश्च कुप्रयः" कह कर वे अपना मार्ग चाफ कर देते हैं । अतः मनु के प्रति कुवाक्य कहना अथवा शंका उठाना ही निर्मूल है । उनका अपना कथन वेद के आधार पर है। फिर संपूर्ण मनुस्मृति मनु कथित है, यह • समझ लेना भी लोगों की प्रत्यक्ष भूल है। मेरा दृष्टिकोण यह कहता है कि इसमें नमक मिर्च मिलाया गया है। इस पद्धति का चित्र प्रायः संसार में देखने को मिलता है। हमारी यह धारणा इन उद्धरणों से स्पष्ट हो जाती है, जो हमें स्थान-स्थान पर
क्रमानुसार उचित समय पर शरीर की शुद्धि के अर्थ स्त्रियों के विभिन्न संस्कार बिना मंत्रों के ही कर देने चाहिये । क्यों ? इसलिये कि वे कन्याओं का विशेष सम्मान करते हैं, उनके संस्कारों के लिये उन्हें मंत्रोच्चारण की प्रतीक्षा कराना अभीष्ठ नहीं । इस उपर्युक्त मेरे प्रकट किये हुये विचार के अनुकूल यदि इस श्लोक का अभिप्राय है तो मैं इसे मनु का वचन मानने को तैयार हूँ अन्यथा तुलसीराम जी स्वामी ने छयासठ और सरसठ दोनों ही श्लोकों को प्रक्षिप्त माना है। क्योंकि वे संगति लगाते हैंःकेशान्तः षोड्षे वर्षे ब्राह्मणस्य विधीयते । राजन्य बन्धोर्द्वाविंशे वैश्यस्य द्व्यधिके ततः ॥ मनुशून्य दो हज़ार पैंसठ एष प्रोक्तो द्विजातीनामौपनायनिको विधिः । उत्पत्ति व्यंजकः पुण्यः कर्मयोगंनिबोधत ।। इन दोनों श्लोकों और इसके अन्तर्गत आये हुए छयासठ, सरसठ श्लोकों के विषय में तुलसीराम जी स्वामी लिखते हैंः- "छयासठवें श्लोक का यह कहना तो ठीक है कि स्त्रियों के भी गर्भाधान से लेकर केशान्त संस्कार पर्यन्त सब संस्कार करने चाहिये । परन्तु इसके लिये किसी पृथक् विधान की आवश्यकता नहीं। क्योंकि तीनों वर्गों के जो-जो संस्कार पूर्व कह आये हैं, वे सब कन्या और पुत्र दोनों ही के हैं। पुल्लिङ्ग निर्देश अविवक्षित है, अर्थात् वक्ता का तात्पर्य वर्ण-मात्र में है, चाहे कन्या हो, वा पुत्र । जैसे कोई कहे कि - "योत्राऽऽगमिष्यति स मृत्युमाप्स्यति" =जो यहाँ आवेगा वह मर जायगा - इस दशा में यद्यपि पुल्लिङ्ग का निर्देश है, परन्तु कहने वाले का तात्पर्य स्त्री-पुरुष दोनों से है, अथवा वैद्यकशास्त्र में पुल्लिङ्ग निर्देश करते हुये जो सामान्य विधि निषेध किये हैं, वे सब स्त्री पुरुषों के एक से और एक ही विधि-वाक्य से विदित समझने चाहिये, और कन्याओं के विवाह संस्कार को छोड़कर अन्य संस्कारों में वेद-मंत्र पढ़ने का निषेध भी प्रक्षित है, जहाँ तक हमने देखा और विचारा है वहाँ तक वेदों में कहीं यह निषेध नहीं पाया जाता । इसलिये छयासठ-सरसठ श्लोक स्त्री जाति के विद्वेषी अन्य मतों के संसर्ग से प्रक्षिप्त जान पड़ते हैं तथा पैंसठ श्लोक को अड़सठवें से मिला कर पढ़िये तो ठीक सम्बन्ध चला आता है - " केशान्त संस्कार ब्राह्मण का सोलहवें वर्ष में करे और क्षत्रिय का बाईस वें तथा उससे अधिक में वैश्य का करे। यह ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य को उपनयन सम्बन्धी विधि कही। यह विधि जन्म की जतलाने वाली और पवित्रकारक है, ।" यह एक उदाहरण हुआ जिसे हमने उद्धृत करके यह बनाने का प्रयन्न किया है कि मनु में प्रक्षिप्त हैं। इन्हीं प्रक्षिप्तों के सहारे हमारे आधुनिक सुधारवादी मनु की धज्जियाँ उड़ाने की सोचते हैं । परन्तु उनका ऐसा सोचना निरर्थक है । इसलिये कि "वेदवाह्याः स्मृतयः याश्च काश्च कुप्रयः" कह कर वे अपना मार्ग चाफ कर देते हैं । अतः मनु के प्रति कुवाक्य कहना अथवा शंका उठाना ही निर्मूल है । उनका अपना कथन वेद के आधार पर है। फिर संपूर्ण मनुस्मृति मनु कथित है, यह • समझ लेना भी लोगों की प्रत्यक्ष भूल है। मेरा दृष्टिकोण यह कहता है कि इसमें नमक मिर्च मिलाया गया है। इस पद्धति का चित्र प्रायः संसार में देखने को मिलता है। हमारी यह धारणा इन उद्धरणों से स्पष्ट हो जाती है, जो हमें स्थान-स्थान पर
आईटीवी नेटवर्क (iTV Network) ने अपने अखबार दैनिक 'आज समाज', अम्बाला के संपादक अमित गुप्ता को प्रमोट किया है। देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार 'आईटीवी नेटवर्क' (iTV Network) ने अपनी सेल्स टीम को मजबूती दी है। आईटीवी नेटवर्क से पहले दीपक अरोड़ा जनता टीवी में बतौर सीईओ अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। रोहित विश्वकर्मा ने कुछ महीने पहले ही 'एबीपी नेटवर्क' के साथ बतौर एडिटोरियल कंसल्टेंट अपनी पारी की शुरुआत की थी। ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे (15 अक्टूबर) मनाने और कोविड-19 के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए 'आईटीवी फाउंडेशन'की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी(CSR) विंग ने सराहनीय पहल शुरू की है। वरिष्ठ पत्रकार रोहित विश्वकर्मा ने 'एबीपी नेटवर्क' (ABP Network) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। करीब 66 वर्षीय शारदा शुक्ल ने लखनऊ के अपोलो अस्पताल में बुधवार की दोपहर अंतिम सांस ली। नेटवर्क की ओर से हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया न्यूज' और अंग्रेजी न्यूज चैनल 'न्यूजएक्स' के अलावा छह रीजनल न्यूज चैनल्स का संचालन किया जाता है। देश-दुनिया में इन दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप फैला हुआ है। आए दिन लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। कोरोना वायरस से निपटना दुनियाभर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
आईटीवी नेटवर्क ने अपने अखबार दैनिक 'आज समाज', अम्बाला के संपादक अमित गुप्ता को प्रमोट किया है। देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार 'आईटीवी नेटवर्क' ने अपनी सेल्स टीम को मजबूती दी है। आईटीवी नेटवर्क से पहले दीपक अरोड़ा जनता टीवी में बतौर सीईओ अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। रोहित विश्वकर्मा ने कुछ महीने पहले ही 'एबीपी नेटवर्क' के साथ बतौर एडिटोरियल कंसल्टेंट अपनी पारी की शुरुआत की थी। ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे मनाने और कोविड-उन्नीस के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए 'आईटीवी फाउंडेशन'की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी विंग ने सराहनीय पहल शुरू की है। वरिष्ठ पत्रकार रोहित विश्वकर्मा ने 'एबीपी नेटवर्क' के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। करीब छयासठ वर्षीय शारदा शुक्ल ने लखनऊ के अपोलो अस्पताल में बुधवार की दोपहर अंतिम सांस ली। नेटवर्क की ओर से हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया न्यूज' और अंग्रेजी न्यूज चैनल 'न्यूजएक्स' के अलावा छह रीजनल न्यूज चैनल्स का संचालन किया जाता है। देश-दुनिया में इन दिनों कोरोनावायरस का प्रकोप फैला हुआ है। आए दिन लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। कोरोना वायरस से निपटना दुनियाभर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
Rihanna Boyfriend Released: 4.19 करोड़ रुपये की जमानत पर जेल से रिहा हुआ रिहाना का बॉयफ्रेंड रॉकी, जानिए क्या था मामला? 2019 में, रॉकी को स्वीडन में एक सड़क विवाद के बाद तकरीबन एक महीने तक हिरासत में रखा गया था. उन्हें हमले का दोषी पाया गया और उन्हें "सशर्त सजा" दी गई थी. रैपर A$AP रॉकी, (A$AP Rocky) जिसे हाल ही में नवंबर 2021 की शूटिंग के सिलसिले में पुलिस हिरासत में लिया गया था, उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, रैपर को बुधवार सुबह गिरफ्तार किया गया और दोपहर में 550,000 डॉलर (₹4.19 करोड़) की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया. अपनी प्रेमिका, गायिका रिहाना के साथ बारबाडोस से आने के बाद उन्हें लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था. लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट ने बुधवार को एक बयान में कहा कि कलाकार, जिसका असली नाम रकीम मेयर्स है, को घातक हथियार से हमला करने के संदेह में हिरासत में लिया गया था. अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि विवाद बढ़ने के बाद वो छह नवंबर को हुई गोलीबारी के सिलसिले में वॉन्टेड था. पुलिस ने कहा कि उस पर एक परिचित पर पिस्तौल तानने का आरोप है, जिसे मामूली चोट आई और बाद में उसने ट्रीटमेंट की मांग की. ET ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, A$AP रॉकी पर हमला करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था और उसे रिहा कर दिया गया था. ET ने लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट के जन सूचना अधिकारी ली के हवाले से कहा कि, "हां, उसे रिहा कर दिया गया,". मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बुक होने से पहले उन्हें सुबह 8.20 बजे गिरफ्तार किया गया और एलएपीडी रॉबरी होमिसाइड डिवीजन में उनका इंटरव्यू लिया गया. रैपर को दोपहर 3.27 बजे रिहा किया गया. LAX सुपीरियर कोर्टहाउस में 17 अगस्त को रैपर के लिए कोर्ट की तारीख तय की गई है. ET ऑनलाइन ने LA डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस के हवाले से कहा कि, "एक मामला पेश किया गया है और उसकी समीक्षा की जा रही है." उसकी गिरफ्तारी के बाद रैपर के लॉस एंजेलिस स्थित घर में तलाशी ली गई. कुछ दिनों पहले रैपर रिहाना के साथ बारबाडोस में नजर आए थे. इस साल जनवरी में सेलिब्रिटी जोड़े ने घोषणा की कि वो एक साथ अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे थे. 2019 में, A$AP रॉकी को स्वीडन में एक सड़क विवाद के बाद तकरीबन एक महीने तक हिरासत में रखा गया था. उन्हें हमले का दोषी पाया गया और उन्हें "सशर्त सजा" दी गई, जिसका मतलब था कि जेल में कोई एक्सट्रा समय नहीं था. रैपर और उसके क्रू के दो सदस्यों को एक तर्क के बाद एक 19 वर्षीय व्यक्ति की पिटाई और लात मारने का दोषी ठहराया गया था.
Rihanna Boyfriend Released: चार.उन्नीस करोड़ रुपये की जमानत पर जेल से रिहा हुआ रिहाना का बॉयफ्रेंड रॉकी, जानिए क्या था मामला? दो हज़ार उन्नीस में, रॉकी को स्वीडन में एक सड़क विवाद के बाद तकरीबन एक महीने तक हिरासत में रखा गया था. उन्हें हमले का दोषी पाया गया और उन्हें "सशर्त सजा" दी गई थी. रैपर A$AP रॉकी, जिसे हाल ही में नवंबर दो हज़ार इक्कीस की शूटिंग के सिलसिले में पुलिस हिरासत में लिया गया था, उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, रैपर को बुधवार सुबह गिरफ्तार किया गया और दोपहर में पाँच सौ पचास,शून्य डॉलर की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया. अपनी प्रेमिका, गायिका रिहाना के साथ बारबाडोस से आने के बाद उन्हें लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था. लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट ने बुधवार को एक बयान में कहा कि कलाकार, जिसका असली नाम रकीम मेयर्स है, को घातक हथियार से हमला करने के संदेह में हिरासत में लिया गया था. अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि विवाद बढ़ने के बाद वो छह नवंबर को हुई गोलीबारी के सिलसिले में वॉन्टेड था. पुलिस ने कहा कि उस पर एक परिचित पर पिस्तौल तानने का आरोप है, जिसे मामूली चोट आई और बाद में उसने ट्रीटमेंट की मांग की. ET ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, A$AP रॉकी पर हमला करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था और उसे रिहा कर दिया गया था. ET ने लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट के जन सूचना अधिकारी ली के हवाले से कहा कि, "हां, उसे रिहा कर दिया गया,". मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बुक होने से पहले उन्हें सुबह आठ.बीस बजे गिरफ्तार किया गया और एलएपीडी रॉबरी होमिसाइड डिवीजन में उनका इंटरव्यू लिया गया. रैपर को दोपहर तीन.सत्ताईस बजे रिहा किया गया. LAX सुपीरियर कोर्टहाउस में सत्रह अगस्त को रैपर के लिए कोर्ट की तारीख तय की गई है. ET ऑनलाइन ने LA डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस के हवाले से कहा कि, "एक मामला पेश किया गया है और उसकी समीक्षा की जा रही है." उसकी गिरफ्तारी के बाद रैपर के लॉस एंजेलिस स्थित घर में तलाशी ली गई. कुछ दिनों पहले रैपर रिहाना के साथ बारबाडोस में नजर आए थे. इस साल जनवरी में सेलिब्रिटी जोड़े ने घोषणा की कि वो एक साथ अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे थे. दो हज़ार उन्नीस में, A$AP रॉकी को स्वीडन में एक सड़क विवाद के बाद तकरीबन एक महीने तक हिरासत में रखा गया था. उन्हें हमले का दोषी पाया गया और उन्हें "सशर्त सजा" दी गई, जिसका मतलब था कि जेल में कोई एक्सट्रा समय नहीं था. रैपर और उसके क्रू के दो सदस्यों को एक तर्क के बाद एक उन्नीस वर्षीय व्यक्ति की पिटाई और लात मारने का दोषी ठहराया गया था.
नलिनी ने व्यक्तिगत रूप से अपने मामले में पैरवी करते हुए अपनी दलील में कहा कि हर दोषी दो साल की जेल की सजा के बाद एक महीने की साधारण छुट्टी का हकदार होता है, जबकि उसने पिछले 27 सालों में एक बार भी छुट्टी नहीं ली। चेन्नईः मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों में से एक एस. नलिनी को शुक्रवार को एक महीने की पैरोल दे दी है। दरअसल, नलिनी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसे अपनी बेटी की शादी के लिए इंतजाम करने हैं। इसके लिए उसे छह महीने की पैरोल चाहिए। नलिनी ने व्यक्तिगत रूप से अपने मामले में पैरवी करते हुए अपनी दलील में कहा कि हर दोषी दो साल की जेल की सजा के बाद एक महीने की साधारण छुट्टी का हकदार होता है, जबकि उसने पिछले 27 सालों में एक बार भी छुट्टी नहीं ली। इसके बाद कोर्ट ने उसे पैरोल दे दी। बता दें कि नलिनी के पति वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, ए. जी. पेरारिवलन, टी. सुतेन्द्रराज उर्फ संथान, जयकुमार, रॉबर्ट पायस और रविचंद्रन वो दोषी हैं, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के जुर्म में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। मगर बाद में इसे उम्रकैद में बदल दिया गया। यह सभी साल 1991 से जेल में कैद हैं।
नलिनी ने व्यक्तिगत रूप से अपने मामले में पैरवी करते हुए अपनी दलील में कहा कि हर दोषी दो साल की जेल की सजा के बाद एक महीने की साधारण छुट्टी का हकदार होता है, जबकि उसने पिछले सत्ताईस सालों में एक बार भी छुट्टी नहीं ली। चेन्नईः मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों में से एक एस. नलिनी को शुक्रवार को एक महीने की पैरोल दे दी है। दरअसल, नलिनी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसे अपनी बेटी की शादी के लिए इंतजाम करने हैं। इसके लिए उसे छह महीने की पैरोल चाहिए। नलिनी ने व्यक्तिगत रूप से अपने मामले में पैरवी करते हुए अपनी दलील में कहा कि हर दोषी दो साल की जेल की सजा के बाद एक महीने की साधारण छुट्टी का हकदार होता है, जबकि उसने पिछले सत्ताईस सालों में एक बार भी छुट्टी नहीं ली। इसके बाद कोर्ट ने उसे पैरोल दे दी। बता दें कि नलिनी के पति वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, ए. जी. पेरारिवलन, टी. सुतेन्द्रराज उर्फ संथान, जयकुमार, रॉबर्ट पायस और रविचंद्रन वो दोषी हैं, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के जुर्म में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। मगर बाद में इसे उम्रकैद में बदल दिया गया। यह सभी साल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से जेल में कैद हैं।
चेन्नई. अक्टूबर-नवंबर में दक्षिण भारत(South India) के कुछ राज्यों में भारी बारिश ने 100 साल तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लोग उसे भयंकर मंजर को अभी भूले भी नहीं कि गुरुवार को फिर से तमिलनाडु पानी-पानी हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, 3 जनवरी, 2022 तक भारी बारिश(Heavy rain) हो सकती है। मौसम विभाग ने चेन्नई सहित तमिलनाडु के चार जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का संकेत देने वाला रेड अलर्ट जारी किया गया। स्थानीय मौसम विज्ञान के उप महानिदेशक एस बालचंद्रन ने द हिंदू को बताया कि 3 जनवरी 2022 तक बारिश जारी रह सकती है। वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री केकेएसएसआर रामचंद्रन ने कहा कि चेन्नई से तीन मौतों की सूचना मिली है। सभी की मौत बिजली के झटके से हुई है। मौसम विभाग के अनुसार भारी बारिश के मद्देनजर चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और चिंगलपुट सहित तमिलनाडु के चार जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार की बारिश ने एक बार फिर लोगों को नवंबर याद दिला दिया। चेन्नई में सड़कों और सबवे में पानी भर गया। ट्रैफिक जाम हो गया। हालत यहां तक बदतर हो गए कि पुलिस को तीन सबवे में पानी घुसने के बाद बंद करना पड़ा। चेन्नई नगर निकाय ने सड़कों से पानी निकालने 15 पंप लगाए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चेन्नई के एमआरसी नगर में सबसे अधिक 17. 65 सेमी बारिश दर्ज की गई। अक्टूबर में चेन्नई में 215 मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से 22% कम थी। लेकिन नवंबर में चेन्नई में 79 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। हालात यह हुए कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार देर रात शहर के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश के साथ राहत और बचाव कार्यों को देखने खुद मैदान में उतरना पड़ा। उन्होंने ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दौरा करके समीक्षा की। ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन के कमिश्नर गगनदीप सिंह बेदी (Gagandeep Singh Bedi) के अनुसार, चेन्नई में पेड़ गिरने के 27 मामले सामने आए हैं। यहां पानी निकालने के लिए 145 से अधिक पंप लगाए गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में तटीय आंध्र प्रदेश में अलग-थलग और भारी बारिश होगी। भारी बारिश के चलते सड़कें ऐसे पानी में डूब गईं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन नजर बनाए हुए है।
चेन्नई. अक्टूबर-नवंबर में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भारी बारिश ने एक सौ साल तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लोग उसे भयंकर मंजर को अभी भूले भी नहीं कि गुरुवार को फिर से तमिलनाडु पानी-पानी हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, तीन जनवरी, दो हज़ार बाईस तक भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने चेन्नई सहित तमिलनाडु के चार जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का संकेत देने वाला रेड अलर्ट जारी किया गया। स्थानीय मौसम विज्ञान के उप महानिदेशक एस बालचंद्रन ने द हिंदू को बताया कि तीन जनवरी दो हज़ार बाईस तक बारिश जारी रह सकती है। वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री केकेएसएसआर रामचंद्रन ने कहा कि चेन्नई से तीन मौतों की सूचना मिली है। सभी की मौत बिजली के झटके से हुई है। मौसम विभाग के अनुसार भारी बारिश के मद्देनजर चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और चिंगलपुट सहित तमिलनाडु के चार जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार की बारिश ने एक बार फिर लोगों को नवंबर याद दिला दिया। चेन्नई में सड़कों और सबवे में पानी भर गया। ट्रैफिक जाम हो गया। हालत यहां तक बदतर हो गए कि पुलिस को तीन सबवे में पानी घुसने के बाद बंद करना पड़ा। चेन्नई नगर निकाय ने सड़कों से पानी निकालने पंद्रह पंप लगाए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चेन्नई के एमआरसी नगर में सबसे अधिक सत्रह. पैंसठ सेमी बारिश दर्ज की गई। अक्टूबर में चेन्नई में दो सौ पंद्रह मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से बाईस% कम थी। लेकिन नवंबर में चेन्नई में उन्यासी फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। हालात यह हुए कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार देर रात शहर के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश के साथ राहत और बचाव कार्यों को देखने खुद मैदान में उतरना पड़ा। उन्होंने ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दौरा करके समीक्षा की। ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन के कमिश्नर गगनदीप सिंह बेदी के अनुसार, चेन्नई में पेड़ गिरने के सत्ताईस मामले सामने आए हैं। यहां पानी निकालने के लिए एक सौ पैंतालीस से अधिक पंप लगाए गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में तटीय आंध्र प्रदेश में अलग-थलग और भारी बारिश होगी। भारी बारिश के चलते सड़कें ऐसे पानी में डूब गईं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन नजर बनाए हुए है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) को चेतावनी दी है कि अगले 30 दिनों में अगर वह कोई बड़ा सुधार नहीं करता है तो उसकी फंडिंग और टाली जा सकती है। ट्रम्प ने डब्ल्यूएचओ प्रमुख तेद्रोस अधानोम गेब्रयेसियस को लिखे पत्र को अपने ट्वीटर एकाउन्ट पर भी अपलोड किया है। उन्होंने डब्ल्यूएचओ को कोरोना वायरस (कोविड 19) की महामारी पर रोकथाम को लेकर कार्रवाई में विफलता के लिए जवाबदेह ठहराया और कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो अमेरिका संगठन में अपनी सदस्यता को लेकर फिर से विचार करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस (कोविड 19) पर डब्ल्यूएचओ की कार्रवाई के समीक्षा के बाद गत अप्रैल में एजेंसी की फंडिंग रोक दी थी। ट्रम्प की यह चेतावनी ऐसे समय आयी है , जब अमेरिका को विश्व भर में कोरोना के प्रकोप से सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या अब तक 15,08,291 हो गयी जबकि 90,340 लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइटहाउस में एक बयान देकर सबको हैरान कर दिया है। उनका कहना है कि वे रोज हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सेवन करते है, जबकि स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें चेताया है कि ये सुरक्षित नहीं है। वाइटहाउस में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि वे इस दवा का सेवन बीते कई हफ्तों से कर रहे हैं। इससे उनकी सेहत पर कोई खराब असर नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि एंटी मलेरिया दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना से लड़ने में सक्षम है, इसका अभी तक कोई क्लीनिकल टेस्ट सामने नहीं आया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को चेतावनी दी है कि अगले तीस दिनों में अगर वह कोई बड़ा सुधार नहीं करता है तो उसकी फंडिंग और टाली जा सकती है। ट्रम्प ने डब्ल्यूएचओ प्रमुख तेद्रोस अधानोम गेब्रयेसियस को लिखे पत्र को अपने ट्वीटर एकाउन्ट पर भी अपलोड किया है। उन्होंने डब्ल्यूएचओ को कोरोना वायरस की महामारी पर रोकथाम को लेकर कार्रवाई में विफलता के लिए जवाबदेह ठहराया और कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो अमेरिका संगठन में अपनी सदस्यता को लेकर फिर से विचार करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस पर डब्ल्यूएचओ की कार्रवाई के समीक्षा के बाद गत अप्रैल में एजेंसी की फंडिंग रोक दी थी। ट्रम्प की यह चेतावनी ऐसे समय आयी है , जब अमेरिका को विश्व भर में कोरोना के प्रकोप से सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या अब तक पंद्रह,आठ,दो सौ इक्यानवे हो गयी जबकि नब्बे,तीन सौ चालीस लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइटहाउस में एक बयान देकर सबको हैरान कर दिया है। उनका कहना है कि वे रोज हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सेवन करते है, जबकि स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें चेताया है कि ये सुरक्षित नहीं है। वाइटहाउस में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि वे इस दवा का सेवन बीते कई हफ्तों से कर रहे हैं। इससे उनकी सेहत पर कोई खराब असर नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि एंटी मलेरिया दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना से लड़ने में सक्षम है, इसका अभी तक कोई क्लीनिकल टेस्ट सामने नहीं आया है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को धमकी दी है। पन्नू ने बठिंडा में विभिन्न जगहों पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखवा दिए हैं। पन्नू ने सीएम मान को धमकी दी है कि अगर वह 26 जनवरी को तिरंगा फहराएंगे तोह उनपर RPG अटैक होगा। SFJ के गुरपतवंत पन्नू ने एक वीडियो रिलीज करके सीएम मान के नाम धमकी जारी की है। इतना ही नहीं, बठिंडा में जिस स्थान पर सीएम मान ने तिरंगा फहराना है, उस मैदान की दीवारों पर खालिस्तान के पक्ष में नारे लिखवा दिए हैं। इसके अलावा CISF कैंपस बठिंडा, NFL बठिंडा और रणजीत सिंह टेक्निकल यूनिवर्सिटी के बाहर भी खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे गए हैं। पन्नू ने धमकी देते हुए कहा है कि अगर सीएम मान 26 जनवरी को तिरंगा फहराएंगे तो उन पर RPG हमला होगा। जो हाथ यह नारे लिख सकते हैं, वे RPG चलाना भी जानते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि तिरंगा फहराने ना आएं। आतंकी पन्नू ने अपनी वीडियो में हिंदुओं को केंद्र और पंजाब सरकार में पीसने से मना किया है। आतंकी का कहना है कि हिंदू भी 26 जनवरी के कार्यक्रम में आने से बचें। यह हमला उन पर भी हो सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को धमकी दी है। पन्नू ने बठिंडा में विभिन्न जगहों पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखवा दिए हैं। पन्नू ने सीएम मान को धमकी दी है कि अगर वह छब्बीस जनवरी को तिरंगा फहराएंगे तोह उनपर RPG अटैक होगा। SFJ के गुरपतवंत पन्नू ने एक वीडियो रिलीज करके सीएम मान के नाम धमकी जारी की है। इतना ही नहीं, बठिंडा में जिस स्थान पर सीएम मान ने तिरंगा फहराना है, उस मैदान की दीवारों पर खालिस्तान के पक्ष में नारे लिखवा दिए हैं। इसके अलावा CISF कैंपस बठिंडा, NFL बठिंडा और रणजीत सिंह टेक्निकल यूनिवर्सिटी के बाहर भी खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे गए हैं। पन्नू ने धमकी देते हुए कहा है कि अगर सीएम मान छब्बीस जनवरी को तिरंगा फहराएंगे तो उन पर RPG हमला होगा। जो हाथ यह नारे लिख सकते हैं, वे RPG चलाना भी जानते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि तिरंगा फहराने ना आएं। आतंकी पन्नू ने अपनी वीडियो में हिंदुओं को केंद्र और पंजाब सरकार में पीसने से मना किया है। आतंकी का कहना है कि हिंदू भी छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम में आने से बचें। यह हमला उन पर भी हो सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के लिए योगी को बहुत उपयोगी बताया था। अब भाजपा ने इसी बोल पर आधारित गीत को लॉन्च किया है। यह संयोग था कि उसी समय योगी आदित्यनाथ ने सरकार के पांच वर्ष का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। योगी आदित्यनाथ ने भाजपा द्वारा लॉन्च गीत पर स्वयं कुछ नहीं कहा। लेकिन उनका रिपोर्टकार्ड गाने के बोल को सार्थक करने वाले है। योगी अदित्यनाथ ने कहा कि पांच वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास हुआ है। इस अवधि में यूपी ने देश के छठवीं नम्बर की अर्थव्यवस्था से आज दूसरे नम्बर की यात्रा तय की है। अब अगले पांच साल में उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाने के साथ-साथ देश में विकास के हर मानक पर नम्बर एक बनाने के लक्ष्य के साथ काम होगा। गोरखपुर में नामांकन की पूर्व संध्या पर योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इस प्रकार योगी ने रिपोर्ट कार्ड जारी रखने की अपनी परम्परा को कायम रखा। सरकार के सौ दिन,छह माह,एक वर्ष,दो वर्ष, तीन वर्ष, चार वर्ष फिर साढ़े चार वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया था। रिपोर्ट कार्ड प्रदेश की जनता के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें सत्ता पक्ष का चुनावी मंसूबा परिलक्षित है। मतदाताओं के सामने भी स्थिति बहुत स्पष्ट है। इसके पहले बसपा और सपा को पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने का अवसर मिला। इस प्रकार तीनों सरकारों की उपलब्धियों का तुलनात्मक आकलन करना आसान है। इसी आधार पर भविष्य के संबन्ध में निर्णय लिया जा सकता है। पांच वर्षों में विकास अनेक कीर्तिमान स्थापित हुए है। पांच वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश की राजनीति सपा और बसपा में सिमटी थी। एक पार्टी से मतदाता नाराज हुए तो दूसरी पार्टी को ले आये। उससे नाराज हुए तो फिर बदलाव कर दिया। सरकारें बदलती थी। व्यवस्था में बदलाव नहीं होता था। मतलब जन आकांशा पूरी नही होती थी। फिर भी विकल्प हीनता की स्थिति थी। साढ़े चार वर्ष पहले मतदाताओं ने विकल्प के रूप में भाजपा को मौका दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जानते थे कि केवल सरकार का बदलना पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने सबसे पहले व्यवस्था में बदलाव व सुधार किया। निवेश व विकास के अनुकूल माहौल बनाया गया। इसके सकारात्मक परिणाम मिलने लगे है। बयालीस विकास योजनाओं में उत्तर प्रदेश नम्बर वन पर है। कई योजनाओं में योगी सरकार की उपलब्धि सत्तर वर्षों पर भारी है। उपलब्धियों के नाम पर सरकार के लिए गिनवाने के लिए बहुत कुछ है। इस आधार पर पिछली सरकारें इसकी बराबरी नहीं कर सकती। पांच वर्ष पहले यूपी बीमारू प्रदेश माना जाता था। निवेशकों की उत्तर प्रदेश में कोई दिलचस्पी नहीं थी। योगी के प्रयासों से निवेश का सर्वाधिक आकर्षक प्रदेश बन गया है। पांच वर्ष पहले बेरोजगारी दर सत्रह प्रतिशत थी। अब चार प्रतिशत है। योगी के कोरोना आपदा प्रबंधन की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन व नीति आयोग ने की है। पहले उत्तर प्रदेश साम्प्रदायिक दंगों की चपेट में था। पांच वर्ष में प्रदेश दंगों से मुक्त रहा। अपराधियों माफिया के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल किया गया। हजारों करोड़ रुपये की अवैध सम्पत्ति जब्त की गई। रिपोर्ट कार्ड जारी करते समय योगी आदित्यनाथ आंकड़ों व तथ्यों के साथ तैयार थे। पिछली सपा व बसपा की सरकारों के मुकाबले का उनमें जज्बा दिखाई दिया। अपनी उपलब्धियां गिनाने के दौरान स्वभाविक रूप से पिछली सरकारें निशाने पर आ गई। क्योंकि आज ये पार्टियां विपक्ष में है। सत्तापक्ष का आरोप रहा है कि ये पार्टियां केवल ट्विटर पर सक्रिय है। इनके पास मुद्दों का नितांत अभाव है। इसीलिए वह नकारात्मक राजनीति कर रहे है। इन्वेस्टर्स समिट पहले भी होती थी, लेकिन उद्योगपति निवेश को उत्सुक नहीं थे। एक एक्सप्रेस वे बना कर अपनी खूब वाहवाही कर ली,अब पांच एक्सप्रेस वे पर काम चल रहा है। प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राज्य के रूप में आगे बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त हुआ है। यह समर्थ और सक्षम राज्य की ओर बढ़ाने का कालखंड रहा है। उद्योगों के लिए माहौल बनाया गया। जहां कोई आना नहीं चाहता था अब वहां लोग निवेश कर रहे हैं। आज यहां सकारात्मक माहौल है। निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इसी का परिणाम है कि यूपी में प्रतिव्यक्ति आय दोगुनी से अधिक पहुंच गई है। नए भारत के नए यूपी के रूप में उभारने में सफलता प्राप्त की है। चार साल पहले किसान सरकारों की प्राथमिकता से बाहर था लेकिन आज वह राजनीति के एजेंडे में शामिल है। किसानों के उत्थान के लिए उनकी आय में दोगुना वृद्धि के लिए लगातार कार्य किए गए हैं। सरकार ने अब तक तीन लाख करोड़ से अधिक का निवेश हासिल करने में सफलता पाई है। सरकार ने दो करोड़ इकसठ लाख शौचालय बनाकर तैयार किए जिसका लाभ दस करोड़ लोगों को मिला है। जिला मुख्यालयों में दस घंटे बिजली और तहसील मुख्यालय पर बाइस घंटे बिजली की सुविधा दी जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अठारह घंटे बिजली पहुंचाने का काम सरकार कर रही है। केंद्र सरकार ने इस दौरान अभूतपूर्व व ऐतिहासिक निर्णय लिए है,जिनके पर अन्य कोई पार्टी कभी कल्पना तक नहीं कर सकती थी। अयोध्या जन्मभूमि पर श्री राम मंदिर का निर्मांण अनुच्छेद तीन सौ सत्तर,तीन तलाक की समाप्ति नागरिकता संशोधन कांनून,कृषि कानून आत्मनिर्भर भारत अभियान,कोरोना संकट में प्रभावी आपदा प्रबंधन,किसान सम्मान निधि,अस्सी करोड़ गरीबों को छह माह तक राशन,भरण पोषण भत्ता,करोड़ों निर्धन आवास,शौचालय आदि अनेक अभूतपूर्व उपलब्धियां सत्ता पार्टी को उत्साहित करने वाली है। इस आधार पर भी योगी सपा बसपा सरकारों के सभी कार्यकालों को चुनौती देने को तैयार है। किसान व गरीब कल्याण,लाखों करोड़ का निवेश अवस्थसपना सुविधाओं का विस्तार आदि सभी क्षेत्रों में पिछली सरकारों के रिकार्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया है। जबकि पिछला करीब दो वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना में व्यतीत हुआ। इसके बाद भी योगी आदित्यनाथ ने विकास की गति कम नहीं होने दी। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना पर अमल चल रहा है। राज्य सरकार की कार्यपद्धति में बदलाव से आय बढ़ी है। मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता सूची में योगी आदित्यनाथ नम्बर वन है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री माना गया है। कोरोना काल में उनके आपदा प्रबंधन की दुनिया में चर्चा हुई। विकसित देश भी योगी मॉडल से प्रभावित हुए थे। पंचबपहले यह ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में चौदाहवें स्थान पर था। व्यापार का वातावरण बनाया गया। इससे प्रदेश ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। प्रदेश में तेजी के साथ निजी निवेश हो रहा है। निजी क्षेत्र में अब तक तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है। इसके माध्यम से पैंतीस लाख युवाओं को रोजगार व नौकरी के साथ जोड़ा गया है। जीएसटी के तहत उनचास हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था,जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपए हो गया है। आबकारी में पहले करीब बारह हजार करोड़ रुपए राजस्व मिलता था,अब छत्तीस हजार करोड़ रुपए मिल रहा है। स्टाम्प एवं निबंधन में नौ से दस हजार करोड़ रुपए मिलता था,जो अब पच्चीस हजार करोड़ मिलता है। मंडी शुल्क में छह से आठ सौ करोड़ रुपए मिलता था,अब दो हजार करोड़ रुपए प्राप्त होता है। पूर्व में माइनिंग से उत्तर प्रदेश को करीब तेरह सौ करोड़ रुपए की आय ही होती थी,जो अब बढ़कर बयालीस करोड़ रुपये तक हो गयी है। यह चुस्त प्रशासन सही नीयत तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश का परिणाम है। सुशासन से यहां ईज आफ लिविंग बेहतर हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के लिए योगी को बहुत उपयोगी बताया था। अब भाजपा ने इसी बोल पर आधारित गीत को लॉन्च किया है। यह संयोग था कि उसी समय योगी आदित्यनाथ ने सरकार के पांच वर्ष का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। योगी आदित्यनाथ ने भाजपा द्वारा लॉन्च गीत पर स्वयं कुछ नहीं कहा। लेकिन उनका रिपोर्टकार्ड गाने के बोल को सार्थक करने वाले है। योगी अदित्यनाथ ने कहा कि पांच वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास हुआ है। इस अवधि में यूपी ने देश के छठवीं नम्बर की अर्थव्यवस्था से आज दूसरे नम्बर की यात्रा तय की है। अब अगले पांच साल में उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाने के साथ-साथ देश में विकास के हर मानक पर नम्बर एक बनाने के लक्ष्य के साथ काम होगा। गोरखपुर में नामांकन की पूर्व संध्या पर योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इस प्रकार योगी ने रिपोर्ट कार्ड जारी रखने की अपनी परम्परा को कायम रखा। सरकार के सौ दिन,छह माह,एक वर्ष,दो वर्ष, तीन वर्ष, चार वर्ष फिर साढ़े चार वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया था। रिपोर्ट कार्ड प्रदेश की जनता के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें सत्ता पक्ष का चुनावी मंसूबा परिलक्षित है। मतदाताओं के सामने भी स्थिति बहुत स्पष्ट है। इसके पहले बसपा और सपा को पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने का अवसर मिला। इस प्रकार तीनों सरकारों की उपलब्धियों का तुलनात्मक आकलन करना आसान है। इसी आधार पर भविष्य के संबन्ध में निर्णय लिया जा सकता है। पांच वर्षों में विकास अनेक कीर्तिमान स्थापित हुए है। पांच वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश की राजनीति सपा और बसपा में सिमटी थी। एक पार्टी से मतदाता नाराज हुए तो दूसरी पार्टी को ले आये। उससे नाराज हुए तो फिर बदलाव कर दिया। सरकारें बदलती थी। व्यवस्था में बदलाव नहीं होता था। मतलब जन आकांशा पूरी नही होती थी। फिर भी विकल्प हीनता की स्थिति थी। साढ़े चार वर्ष पहले मतदाताओं ने विकल्प के रूप में भाजपा को मौका दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जानते थे कि केवल सरकार का बदलना पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने सबसे पहले व्यवस्था में बदलाव व सुधार किया। निवेश व विकास के अनुकूल माहौल बनाया गया। इसके सकारात्मक परिणाम मिलने लगे है। बयालीस विकास योजनाओं में उत्तर प्रदेश नम्बर वन पर है। कई योजनाओं में योगी सरकार की उपलब्धि सत्तर वर्षों पर भारी है। उपलब्धियों के नाम पर सरकार के लिए गिनवाने के लिए बहुत कुछ है। इस आधार पर पिछली सरकारें इसकी बराबरी नहीं कर सकती। पांच वर्ष पहले यूपी बीमारू प्रदेश माना जाता था। निवेशकों की उत्तर प्रदेश में कोई दिलचस्पी नहीं थी। योगी के प्रयासों से निवेश का सर्वाधिक आकर्षक प्रदेश बन गया है। पांच वर्ष पहले बेरोजगारी दर सत्रह प्रतिशत थी। अब चार प्रतिशत है। योगी के कोरोना आपदा प्रबंधन की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन व नीति आयोग ने की है। पहले उत्तर प्रदेश साम्प्रदायिक दंगों की चपेट में था। पांच वर्ष में प्रदेश दंगों से मुक्त रहा। अपराधियों माफिया के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल किया गया। हजारों करोड़ रुपये की अवैध सम्पत्ति जब्त की गई। रिपोर्ट कार्ड जारी करते समय योगी आदित्यनाथ आंकड़ों व तथ्यों के साथ तैयार थे। पिछली सपा व बसपा की सरकारों के मुकाबले का उनमें जज्बा दिखाई दिया। अपनी उपलब्धियां गिनाने के दौरान स्वभाविक रूप से पिछली सरकारें निशाने पर आ गई। क्योंकि आज ये पार्टियां विपक्ष में है। सत्तापक्ष का आरोप रहा है कि ये पार्टियां केवल ट्विटर पर सक्रिय है। इनके पास मुद्दों का नितांत अभाव है। इसीलिए वह नकारात्मक राजनीति कर रहे है। इन्वेस्टर्स समिट पहले भी होती थी, लेकिन उद्योगपति निवेश को उत्सुक नहीं थे। एक एक्सप्रेस वे बना कर अपनी खूब वाहवाही कर ली,अब पांच एक्सप्रेस वे पर काम चल रहा है। प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राज्य के रूप में आगे बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त हुआ है। यह समर्थ और सक्षम राज्य की ओर बढ़ाने का कालखंड रहा है। उद्योगों के लिए माहौल बनाया गया। जहां कोई आना नहीं चाहता था अब वहां लोग निवेश कर रहे हैं। आज यहां सकारात्मक माहौल है। निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इसी का परिणाम है कि यूपी में प्रतिव्यक्ति आय दोगुनी से अधिक पहुंच गई है। नए भारत के नए यूपी के रूप में उभारने में सफलता प्राप्त की है। चार साल पहले किसान सरकारों की प्राथमिकता से बाहर था लेकिन आज वह राजनीति के एजेंडे में शामिल है। किसानों के उत्थान के लिए उनकी आय में दोगुना वृद्धि के लिए लगातार कार्य किए गए हैं। सरकार ने अब तक तीन लाख करोड़ से अधिक का निवेश हासिल करने में सफलता पाई है। सरकार ने दो करोड़ इकसठ लाख शौचालय बनाकर तैयार किए जिसका लाभ दस करोड़ लोगों को मिला है। जिला मुख्यालयों में दस घंटे बिजली और तहसील मुख्यालय पर बाइस घंटे बिजली की सुविधा दी जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अठारह घंटे बिजली पहुंचाने का काम सरकार कर रही है। केंद्र सरकार ने इस दौरान अभूतपूर्व व ऐतिहासिक निर्णय लिए है,जिनके पर अन्य कोई पार्टी कभी कल्पना तक नहीं कर सकती थी। अयोध्या जन्मभूमि पर श्री राम मंदिर का निर्मांण अनुच्छेद तीन सौ सत्तर,तीन तलाक की समाप्ति नागरिकता संशोधन कांनून,कृषि कानून आत्मनिर्भर भारत अभियान,कोरोना संकट में प्रभावी आपदा प्रबंधन,किसान सम्मान निधि,अस्सी करोड़ गरीबों को छह माह तक राशन,भरण पोषण भत्ता,करोड़ों निर्धन आवास,शौचालय आदि अनेक अभूतपूर्व उपलब्धियां सत्ता पार्टी को उत्साहित करने वाली है। इस आधार पर भी योगी सपा बसपा सरकारों के सभी कार्यकालों को चुनौती देने को तैयार है। किसान व गरीब कल्याण,लाखों करोड़ का निवेश अवस्थसपना सुविधाओं का विस्तार आदि सभी क्षेत्रों में पिछली सरकारों के रिकार्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया है। जबकि पिछला करीब दो वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना में व्यतीत हुआ। इसके बाद भी योगी आदित्यनाथ ने विकास की गति कम नहीं होने दी। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना पर अमल चल रहा है। राज्य सरकार की कार्यपद्धति में बदलाव से आय बढ़ी है। मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता सूची में योगी आदित्यनाथ नम्बर वन है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री माना गया है। कोरोना काल में उनके आपदा प्रबंधन की दुनिया में चर्चा हुई। विकसित देश भी योगी मॉडल से प्रभावित हुए थे। पंचबपहले यह ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में चौदाहवें स्थान पर था। व्यापार का वातावरण बनाया गया। इससे प्रदेश ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। प्रदेश में तेजी के साथ निजी निवेश हो रहा है। निजी क्षेत्र में अब तक तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है। इसके माध्यम से पैंतीस लाख युवाओं को रोजगार व नौकरी के साथ जोड़ा गया है। जीएसटी के तहत उनचास हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था,जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपए हो गया है। आबकारी में पहले करीब बारह हजार करोड़ रुपए राजस्व मिलता था,अब छत्तीस हजार करोड़ रुपए मिल रहा है। स्टाम्प एवं निबंधन में नौ से दस हजार करोड़ रुपए मिलता था,जो अब पच्चीस हजार करोड़ मिलता है। मंडी शुल्क में छह से आठ सौ करोड़ रुपए मिलता था,अब दो हजार करोड़ रुपए प्राप्त होता है। पूर्व में माइनिंग से उत्तर प्रदेश को करीब तेरह सौ करोड़ रुपए की आय ही होती थी,जो अब बढ़कर बयालीस करोड़ रुपये तक हो गयी है। यह चुस्त प्रशासन सही नीयत तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश का परिणाम है। सुशासन से यहां ईज आफ लिविंग बेहतर हुई है।
गृह मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कई राज्यों की पुलिस के लिए चेतावनी जारी की है. गृह मंत्रालय ने ड्रोन और हवा से होने वाले संभावित हमलों को लेकर सुरक्षा चेतावनी जारी की है और पुलिस को आगाह किया है. राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा को लेकर खासतौर पर आगाह किया गया है. गृह मंत्रालय ने इस बाबत दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पुलिस प्रमुखों और चीफ सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखकर अलर्ट किया है. पुलिस को जारी की गई चेतावनी में कहा गया है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ड्रोन और हवाई आर्टिकल से खतरा हो सकता है. चेतावनी में पुलिस को बताया गया है कि जहां-जहां भी छोटे एयरप्लेन उतरने की जगह है, वहां की सुरक्षा बढ़ाई जाए और उन जगहों की सुरक्षा इंतजाम की समीक्षा की जाए. दिल्ली में राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा को लेकर विशेष तौर पर आगाह किया गया है. अलर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति भवन के 300 मीटर के दायरे में कोई भी हवाई आर्टिकल, ड्रोन, माइक्रो/लाइट एयरक्राफ्ट उड़ता नहीं दिखाई देना चाहिए.
गृह मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कई राज्यों की पुलिस के लिए चेतावनी जारी की है. गृह मंत्रालय ने ड्रोन और हवा से होने वाले संभावित हमलों को लेकर सुरक्षा चेतावनी जारी की है और पुलिस को आगाह किया है. राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा को लेकर खासतौर पर आगाह किया गया है. गृह मंत्रालय ने इस बाबत दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पुलिस प्रमुखों और चीफ सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखकर अलर्ट किया है. पुलिस को जारी की गई चेतावनी में कहा गया है कि छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ड्रोन और हवाई आर्टिकल से खतरा हो सकता है. चेतावनी में पुलिस को बताया गया है कि जहां-जहां भी छोटे एयरप्लेन उतरने की जगह है, वहां की सुरक्षा बढ़ाई जाए और उन जगहों की सुरक्षा इंतजाम की समीक्षा की जाए. दिल्ली में राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा को लेकर विशेष तौर पर आगाह किया गया है. अलर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति भवन के तीन सौ मीटर के दायरे में कोई भी हवाई आर्टिकल, ड्रोन, माइक्रो/लाइट एयरक्राफ्ट उड़ता नहीं दिखाई देना चाहिए.
शिवाजीपार्क के पास महापौर निवास स्थान शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के स्मारक के लिए दिये जाने के बाद महापौर बंगले को रानी बाग में बनाए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन रानीबाग में महापौर निवास के इस सुझाव का खुद महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर ने विरोध किया है। रानीबाग की जगह मलबार हिल के अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान के जगह पर अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान पर महापौर के निवास स्थान की व्यवस्था की जाए। महापौर ने इसकी मांग महापालिका आयुक्त अजॉय मेहता से की है। महापौर का कहना है की रानीबाग को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। शांत क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में शाम 6 बजे के बाद आवाजाही पर प्रतिबंध है। महापौर होने के कारण उनके निवास स्थान पर कई लोग मिलने आते है। आनेवालों की संख्या को देखते हुए ये जगह उन्हे सही नहीं लगती। साथ ही रानीबाग में वाहनों को खड़े करने के लिए भी जगह कम पड़ेगी। जिसको देखते हुए महापौर ने मालाबार हिल में अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान पर ही महापौर निसाव बनाने की मांग की है।
शिवाजीपार्क के पास महापौर निवास स्थान शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के स्मारक के लिए दिये जाने के बाद महापौर बंगले को रानी बाग में बनाए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन रानीबाग में महापौर निवास के इस सुझाव का खुद महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर ने विरोध किया है। रानीबाग की जगह मलबार हिल के अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान के जगह पर अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान पर महापौर के निवास स्थान की व्यवस्था की जाए। महापौर ने इसकी मांग महापालिका आयुक्त अजॉय मेहता से की है। महापौर का कहना है की रानीबाग को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। शांत क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में शाम छः बजे के बाद आवाजाही पर प्रतिबंध है। महापौर होने के कारण उनके निवास स्थान पर कई लोग मिलने आते है। आनेवालों की संख्या को देखते हुए ये जगह उन्हे सही नहीं लगती। साथ ही रानीबाग में वाहनों को खड़े करने के लिए भी जगह कम पड़ेगी। जिसको देखते हुए महापौर ने मालाबार हिल में अतिरिक्त आयुक्त के निवास स्थान पर ही महापौर निसाव बनाने की मांग की है।
RANCHI : रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद यादव की तबीयत फिर से बिगड गयी है. लालू यादव से आज रिम्स में मुलाकात के बाद राजद के नेता जगदानंद सिंह ने ये आरोप लगाया है. जगदानंद सिंह ने रिम्स पर लालू प्रसाद यादव के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. राजद नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद यादव की तबीयत लगातार खराब हो रही है. लेकिन रिम्स प्रशासन मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं कर रहा है. पिछले कई सप्ताह से लालू प्रसाद की तबीयत पर मेडिकल बुलेटिन नहीं जारी किया जा रहा है. इससे लोगों को ये पता नहीं चल पा रहा है कि लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य की क्या स्थिति है. जगदानंद सिंह ने कहा कि मुलाकात के दौरान लालू प्रसाद यादव की तबीयत खराब लग रही थी. राजद सूत्रों के मुताबिक जगदानंद सिंह फिलहाल राजद के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं. लालू प्रसाद यादव से उनकी मुलाकात के दौरान बिहार के साथ साथ झारखंड चुनाव में राजद की रणनीति पर चर्चा हुई. दोनों राजनेताओं के बीच बातचीत में अमित शाह के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें अमित शाह ने नीतीश के नेतृत्व में बिहार में चुनाव लडने की बात कही थी. राजद को उम्मीद थी कि बीजेपी और जदयू में गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं चल पायेगा. लेकिन अमित शाह के बयान के बाद ये उम्मीद टूट चुकी है. नयी परिस्थिति में राजद की रणनीति पर भी लालू ने जगदानंद से चर्चा की. वहीं, बिहार में पांच विधानसभा और लोकसभा की एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में भी कांग्रेस-राजद गठबंधन की स्थिति पर भी बात हुई.
RANCHI : रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद यादव की तबीयत फिर से बिगड गयी है. लालू यादव से आज रिम्स में मुलाकात के बाद राजद के नेता जगदानंद सिंह ने ये आरोप लगाया है. जगदानंद सिंह ने रिम्स पर लालू प्रसाद यादव के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. राजद नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद यादव की तबीयत लगातार खराब हो रही है. लेकिन रिम्स प्रशासन मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं कर रहा है. पिछले कई सप्ताह से लालू प्रसाद की तबीयत पर मेडिकल बुलेटिन नहीं जारी किया जा रहा है. इससे लोगों को ये पता नहीं चल पा रहा है कि लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य की क्या स्थिति है. जगदानंद सिंह ने कहा कि मुलाकात के दौरान लालू प्रसाद यादव की तबीयत खराब लग रही थी. राजद सूत्रों के मुताबिक जगदानंद सिंह फिलहाल राजद के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं. लालू प्रसाद यादव से उनकी मुलाकात के दौरान बिहार के साथ साथ झारखंड चुनाव में राजद की रणनीति पर चर्चा हुई. दोनों राजनेताओं के बीच बातचीत में अमित शाह के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें अमित शाह ने नीतीश के नेतृत्व में बिहार में चुनाव लडने की बात कही थी. राजद को उम्मीद थी कि बीजेपी और जदयू में गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं चल पायेगा. लेकिन अमित शाह के बयान के बाद ये उम्मीद टूट चुकी है. नयी परिस्थिति में राजद की रणनीति पर भी लालू ने जगदानंद से चर्चा की. वहीं, बिहार में पांच विधानसभा और लोकसभा की एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में भी कांग्रेस-राजद गठबंधन की स्थिति पर भी बात हुई.
उनकी कथनी और करनी में अन्तर नहीं होना चाहिये। उनके विषय में लाग क्या विचार करत है इस बात का भी विचार नहीं छावा । सुसाधु घो उनका क्या कर्तव्य है इस बात का ध्यान रखते हैं और परभव में सुख प्राप्ति के लिथ वेश और आचरण में काई अन्तर नहीं फ़रत । शुद्ध माचरण बिना तोवरजन बोधिवृक्ष के लिये कुल्हाडा है और ससार-समुद्र में पढ़ना है लोकसत्कृतिनमस्करणार्चनाये, रे मुग्ध तुष्यसि विनापि विशुद्धयोगान् ।कृतम् भवान्धुपतने तव यत्प्रमादो, योधिद्रुमाश्रयमिमानि करोति पशुम् ॥७॥ अर्थ - तरे त्रिकरण बाग विशुद्ध नहीं, वय भी लाग तेरा आदर फरत है, तुम नमस्कार करत और पूजा करते हैं। अत इ मूर्ख तू क्यों सम्वोप मारता है ? इस ससार समुद्र में पढ़त हुए का आधार ल यह बाधित है। और इस वृक्ष को काटने में नमस्कार आदि से सन्तोप मानना आदि प्रमाद पुन्हा का काम करता है । भाषार्थ - हे मूर्ख । तरे मन, वचन और पाया वश में नहीं है फिर भी लाग तरा मान, यन्दन और पूजा करते हैं और तू प्रसान होता है, यह यहाँ तक टाक है । यह ससार एक समुद्र है इसमें सम्यक्त्वर ५ पाधि वृक्ष है। यदि यह पाधि वृत हाथ का जावे सा मनुष्य दिर जावे। कि इस याचिका अपन मिथिलाचार तथा प्रसाद के होते हुए भी लागेका वन्दना साकार कर स वाप मानता है ता तू इम बोधिवृत्त का इस्दाई से फाटता है। ऐसा दना में तुझे ससार समुद्र से विरने का फाई आलम्पन नहीं। बिना गुण लाफ-सुसार प्राप्त करने वाले को गति गुणस्तराधिय नमन्त्यमी जना, ददत्युपध्यालयमैक्ष्य शिष्यकान् । विना गुणान् वेपम्पेर्षिमर्पि चेत्, तनष्ठकानां तव भाविनी गति ॥८॥ ध - और शिष्य देते हैं । यदि तुम में गुग्गा नहीं और तूने वेश मात्र धारण कर रखा है तो तेरी ढंग के समान गवि होगी ॥८॥ भावार्थ :- सच्चा मुनि तो मन में कभी बुरे विचार नहीं लाता और उसका चारित्र भी बहुत शुद्ध होता है। ऐसे मुनि की कल्पना कर भावक लांग अति भावभक्ति पूर्वक मुनि महाराज की सेवा करते हैं। पर यदि वह मुनि पाखराठी सिद्ध हो जाये तो उसकी गति बुरी होती है। यतिपना में सुख और कर्तव्य नाजीविकाप्रणयिनीतनयादिचिन्ता, नो राजमीश्च भगवत्समयं च वेत्सि । शुद्ध तथापि चरणे यतसे न मिझो, तत्ते परिग्रहमरो नरकार्यमेव ॥६॥ अर्थ :- तुझे आजीविका, स्त्री, पुत्र आदि की चिन्ता नहीं । राज्य का भय भी नहीं तू भगवान् के सिद्धान्तों का जानकार है अथवा सिद्धान्त की पुस्तकें तेरे पास है तय भी है यति ! तू शुद्ध चारित्र के लिए यत्न नहीं करता। अतः तेरे पास की वस्तुओं का बोझ (परिग्रह) नरक के वास्ते हो है ॥९॥ भावार्थ :- ससारी मनुष्य को आजीविका, स्त्री, पुत्र, धन, यश आदि अनेक यातों की चिन्ता होती है, परन्तु साधु इन सब बातों से मुक्त है। इसके सिवाय वह धर्म के रहस्य को भी जानता है। इतना होते हुए भी यदि वह अपने चरित्र में ढीला है तो साधु के उपकरण आदि सब भार स्वरूप हैं और ने उसे नरक में ले जाने वाले हैं। ज्ञानी भी प्रभादवश हो जाते हैं - उसके दो कारण शास्त्रज्ञोऽपि धृतव्रतोऽपि गृहिणीपुत्रादिवन्धोज्तिोऽप्यनी यद्यतते प्रमादवशगो न प्रेत्यसौख्यश्रिये । त॑न्मोइद्विपतस्त्रिलोकजयिनः काचित्परा दुष्टता, बद्धायुष्कतया स वा नरपशुर्नूनं गमी दुर्गतौ ॥१०॥ अर्थ - शास्त्र का जानकार हो, प्रत लिया हुआ हो, और स्त्री, पुत्र आदि यधनों में मुक्त हा, तब भी प्रमादवश होने के कारण वह प्राणी पारलौकिक सुख रूप लक्ष्मी (रक्षा) के वास्ते कोई यत्न नहीं करता । इसमें तीन लोकों का जीतने वाले माह नाम के शत्रु की अप्रकट दुष्टता हो कारण होना चाहिए। अपना उसको प्रथम भव से सबद्ध आयुष्य घघन ही कारण है जो उसे दुर्गति में लाने वाला होना चाहिए ।।१०।। यति सावद्य त्याग उच्चारण करे उसमें भी झूठ का दोष उच्चारयस्यनुदिनं न करोमि सर्व, सावधमित्यसकृतदेतदयो करोपि । नित्यं भृपोक्ति जिनवचनमारितात्तत् सावयतो नरकमेष विमावये ते ॥११॥ अर्थ -- तू प्रत्येक दिवस और रात में जो बार 'करेमि भते' का पाठ घालता है और कहता है कि मैं सर्वथा सावध कार्य का त्याग करता हूँ फिर भी वही कार्य चारपार करता है। तू इन सावध कर्मों के करने से झूठ बोल कर प्रमु को भी धोखा देने वाला हुआ और इस पाप के भार से तू नरकगामी होगा, ऐसा में विचार करता हूँ ।११॥ भावार्थ करोमि भत समाइअ सच्चे सावज जोग पञ्चक्रामि जावज्जीवाएं विविध तिविहेण इत्यादि । इस प्रकार प्रतिनमरण तथा पोरिसी करते समय थाल कर सारे जोवन में मन, वचन तथा काया से सावध कार्यों का त्याग स्वय करने का, दूसरे से कराने का और दूसरे करने वाले का अच्छा मानने का त्याग करता है, पर तू उसके विपरात पैसा ही काय करता है । यह तो एकदम अनुचित है। इस प्रकार तू दो पाप करता है, एक तो सावध क्रिया का पाप और दूसरा असत्य वचन का पाप । अतएव बोलना, उपदेश देना और करना एकसा होना चाहिये। जिन पुरुषों के व्यवहार में इन तीनों में अवर है उनका परमव में महा भयकर मानसिक, शारीरिक पीड़ाएँ सहनी पड़वी है। विद्वानों ने कहाःयथा चिछ तथा वाचो, यथा वाचस्तथा क्रियाः । चित्त घाचि क्रियायां च साधूनामकरूपता ॥ अर्थात् साधु जैसा विचार करें वैसा ही बोलें और जैमा बोले पैसा ही आचरण करें। अन्यथा वे महान् पाप के भागी होते हैं। यति सावद्य प्राचरे इस परवचना का दोप वेषोपदेशाद्युपधिप्रतारिता, ददत्य मोष्टानृजवोऽधुना जनाः । भु'क्षे च शेपे च सुख विचेष्टसे, भवान्तरे ज्ञास्यसि तत्फलं पुनः ॥ १२॥ अर्थ : - वेश, उपदेश और कपट से मोहित हुए भद्रीक लोग तुम को सभी इच्छित वस्तुएँ देते हैं, तू सुम्ब से उन्हें साता है, सोता है और फिरता है, पर अगले भव में इसका क्या फल होगा, तू यह भी जानता है ? ॥१२॥ भावार्थः- ऊपर बताया जा चुका है कि श्रावक लोग तुझे गुणवान् समझ कर अच्छी से अच्छी वस्तु खाने को देते हैं और रहने को स्थान देते हैं। यदि तू साधु का चारित्र ठीक तरह नहीं पालता तो तुझे इन उत्तमोत्तम वस्तुओं को ग्रहण करने का क्या अधिकार है ? विना अधिकार के कोई वस्तु प्राप्त करने से महा दुर्गति में जाना पड़ता है। दस करने वाले को दंभ छिपाने के लिए अनेक झूठे उपाय तथा झूठ बोलना पड़ता है तथा हरदम झूठ प्रगट होने का डर रहता है। अतं. वह इस लोक में और परलोक में कहीं भी सुखी नहीं रह सकता । संयम में यत्न नही करने वाले को उपदेश आजीविकादिविविधार्तिभृशानिशार्ताः, कृच्छ्रण केऽपि महतैव सृजन्ति धर्मान् । तेभ्योऽपि निर्दय जिक्षसि सर्वमिष्ट, नो संयमे च यतसे भविता कथं ही ॥१३॥ अर्थ - महान् कष्ट उठाकर गृहस्थ लोग आजीविका कमाते हैं और राव दिन दुख उठाकर और हैरान होकर भी धर्म कार्य करते है। ऐसे लोगों से अपनी सब इच्छित वस्तुएँ प्राप्त करने की इच्छा करता है पर सयम नहीं रखता तो हे निर्दयो यति । बता तरा क्या हाल होगा १ ॥१३॥ निगु रण मुनि को भक्ति से भक्तों को कोई फल नहीं होवा आराधितो वा गुणवान् स्वय तरन् भवाविमस्मानपि तारयिष्यति । श्रयन्ति ये त्वामिति मूरिभक्तिमिः फल तवैषां च किमस्ति निर्गुण । ।।१४।। मर्थ - ये (साधु) गुणवान् है, ये भव समुद्र से तरेंगे, अपने को भा वार देंगे ऐसा मानकर बहुत से मनुष्य भक्ति से तेरा आश्रय लत है। इससे निर्गुण । तुझे और इनका क्या लाभ ? भावार्थ - हे साधु । तू गुणवान् है यह समझ कर बहुत से श्रावक भक्ति से तुझे सब वस्तु बहराते हैं। इससे उनको पुण्य हागा और इस पुण्य का कारणभूव तू है यह समझ कर तुझे भी पुराय सध हागा यह समझना वरी भूल है। फारण तुझ में कोई ऐसा गुण नहीं जिससे तू विरे और तरे अवलम्बन से वे भी तिर जायें। परन्तु तुझमें गुण न हान से तू तो अवश्य पाप बध करता है । निगुण मुनि को उलटा पाप वध होता है स्वयं प्रमादै र्निपतन् भवाम्बुधौ, कथं स्वमकानपि सारयिष्यसि । प्रतारयन् स्वार्थमृजून शिवार्थिन स्वतोऽन्यतचैव विलुप्यसेंऽइसा ॥ १५॥ अर्थ - जब तू स्वयं प्रमादवश ससार समुद्र में गिरता है वा अपने भक्तों का कैसे वारेगा ? बचारे मात्र क इच्छुक सरल प्राणियों को तू अपने स्वार्थ के लिये घोबा देकर अपने किये पापों तथा अन्य (भक्तों) द्वारा किये पापों के कारण हवता है मोत की इच्छा करने वाले भद्रीक पुरुप संसार-समुद्र से पार होने के लिये तेरा आश्रय लेते हैं और तेरे उपदेश के अनुसार कार्य करते हैं, परन्तु तू उनको अनुचित उपदेश देकर जो इनसे कार्य कराता है अतः उनके पाप का भागी तू है । यह "अन्य द्वारा पाप हुआ" और तू पञ्चक्खाण ( महानव ) लेकर विषय-कपायादि प्रमाद सेवन कर महाव्रत का भग करता है इस पाप का भी तू भागो हुआ । इस प्रकार दोहरे पाप का भागी तू है। इस प्रकार हे मुनि ! तू निर्गुणी होने से तुझे लाभ तो कोई हांवा नहीं, इसमें संदेह नहीं । तू यह समझता हो कि तुके लोग अन्न-वन्त्र बहराकर पुण्य उपार्जन करते हैं उसका जो लाभ उनको मिलता है उसका निमित्त तू है इस प्रकार तुझे भी लाभ मिलता है यह धारणा भी अनुचित है, क्योंकि तू निर्गुणी और दमी है । तुझे तो इन कारणों से उल्टा पाप ही प्राप्त होगा, और तू गले में पत्थर बाँध कर भव-समुद्र में हूब जायगा । निर्गुणी का ऋरण और उसका परिणाम गृहासि शय्याहृतिपुस्तकोपधीन् सदा परेभ्यस्तपसस्त्वियं स्थितिः । तत्ते प्रमादाद्भरितात्प्रति हैऋ णा मनस्य परत्र का गतिः ॥१६॥ अर्थः-तू दूसरों से उपाश्रय, आहार, पुस्तक और उपाधि ( उपकरण ) लेता है यह स्थिति तपस्वियों (शुद्ध चारित्र वालों ) की है, परन्तु तू तो इन वस्तुओं को लेकर प्रसाद में पड़ जाता है। अतः जिस तरह बड़ा कर्जदार हूबता है उसी तरह परभव में तेरी गति होगी ।।१६।। भावार्थ :-प्रन्थकार कहते हैं कि हे मुनि ! तू प्रमाद करता है तो दोहरे कर्ज से हवता है। एक तो चारित्र ग्रहण कर प्रसाद करता है और दूसरा शुद्ध चारित्र पाले बिना आहार आदि ग्रहण करता है। इस प्रकार दो कजों में डूवता है और जिस तरह ऋणी मनुष्य का सिर ऊँचा नहीं होता उसी प्रकार तेरी भी गवि होगी अर्थात् कमी ऊँचा नहीं उठेगा ।
उनकी कथनी और करनी में अन्तर नहीं होना चाहिये। उनके विषय में लाग क्या विचार करत है इस बात का भी विचार नहीं छावा । सुसाधु घो उनका क्या कर्तव्य है इस बात का ध्यान रखते हैं और परभव में सुख प्राप्ति के लिथ वेश और आचरण में काई अन्तर नहीं फ़रत । शुद्ध माचरण बिना तोवरजन बोधिवृक्ष के लिये कुल्हाडा है और ससार-समुद्र में पढ़ना है लोकसत्कृतिनमस्करणार्चनाये, रे मुग्ध तुष्यसि विनापि विशुद्धयोगान् ।कृतम् भवान्धुपतने तव यत्प्रमादो, योधिद्रुमाश्रयमिमानि करोति पशुम् ॥सात॥ अर्थ - तरे त्रिकरण बाग विशुद्ध नहीं, वय भी लाग तेरा आदर फरत है, तुम नमस्कार करत और पूजा करते हैं। अत इ मूर्ख तू क्यों सम्वोप मारता है ? इस ससार समुद्र में पढ़त हुए का आधार ल यह बाधित है। और इस वृक्ष को काटने में नमस्कार आदि से सन्तोप मानना आदि प्रमाद पुन्हा का काम करता है । भाषार्थ - हे मूर्ख । तरे मन, वचन और पाया वश में नहीं है फिर भी लाग तरा मान, यन्दन और पूजा करते हैं और तू प्रसान होता है, यह यहाँ तक टाक है । यह ससार एक समुद्र है इसमें सम्यक्त्वर पाँच पाधि वृक्ष है। यदि यह पाधि वृत हाथ का जावे सा मनुष्य दिर जावे। कि इस याचिका अपन मिथिलाचार तथा प्रसाद के होते हुए भी लागेका वन्दना साकार कर स वाप मानता है ता तू इम बोधिवृत्त का इस्दाई से फाटता है। ऐसा दना में तुझे ससार समुद्र से विरने का फाई आलम्पन नहीं। बिना गुण लाफ-सुसार प्राप्त करने वाले को गति गुणस्तराधिय नमन्त्यमी जना, ददत्युपध्यालयमैक्ष्य शिष्यकान् । विना गुणान् वेपम्पेर्षिमर्पि चेत्, तनष्ठकानां तव भाविनी गति ॥आठ॥ ध - और शिष्य देते हैं । यदि तुम में गुग्गा नहीं और तूने वेश मात्र धारण कर रखा है तो तेरी ढंग के समान गवि होगी ॥आठ॥ भावार्थ :- सच्चा मुनि तो मन में कभी बुरे विचार नहीं लाता और उसका चारित्र भी बहुत शुद्ध होता है। ऐसे मुनि की कल्पना कर भावक लांग अति भावभक्ति पूर्वक मुनि महाराज की सेवा करते हैं। पर यदि वह मुनि पाखराठी सिद्ध हो जाये तो उसकी गति बुरी होती है। यतिपना में सुख और कर्तव्य नाजीविकाप्रणयिनीतनयादिचिन्ता, नो राजमीश्च भगवत्समयं च वेत्सि । शुद्ध तथापि चरणे यतसे न मिझो, तत्ते परिग्रहमरो नरकार्यमेव ॥छः॥ अर्थ :- तुझे आजीविका, स्त्री, पुत्र आदि की चिन्ता नहीं । राज्य का भय भी नहीं तू भगवान् के सिद्धान्तों का जानकार है अथवा सिद्धान्त की पुस्तकें तेरे पास है तय भी है यति ! तू शुद्ध चारित्र के लिए यत्न नहीं करता। अतः तेरे पास की वस्तुओं का बोझ नरक के वास्ते हो है ॥नौ॥ भावार्थ :- ससारी मनुष्य को आजीविका, स्त्री, पुत्र, धन, यश आदि अनेक यातों की चिन्ता होती है, परन्तु साधु इन सब बातों से मुक्त है। इसके सिवाय वह धर्म के रहस्य को भी जानता है। इतना होते हुए भी यदि वह अपने चरित्र में ढीला है तो साधु के उपकरण आदि सब भार स्वरूप हैं और ने उसे नरक में ले जाने वाले हैं। ज्ञानी भी प्रभादवश हो जाते हैं - उसके दो कारण शास्त्रज्ञोऽपि धृतव्रतोऽपि गृहिणीपुत्रादिवन्धोज्तिोऽप्यनी यद्यतते प्रमादवशगो न प्रेत्यसौख्यश्रिये । त॑न्मोइद्विपतस्त्रिलोकजयिनः काचित्परा दुष्टता, बद्धायुष्कतया स वा नरपशुर्नूनं गमी दुर्गतौ ॥दस॥ अर्थ - शास्त्र का जानकार हो, प्रत लिया हुआ हो, और स्त्री, पुत्र आदि यधनों में मुक्त हा, तब भी प्रमादवश होने के कारण वह प्राणी पारलौकिक सुख रूप लक्ष्मी के वास्ते कोई यत्न नहीं करता । इसमें तीन लोकों का जीतने वाले माह नाम के शत्रु की अप्रकट दुष्टता हो कारण होना चाहिए। अपना उसको प्रथम भव से सबद्ध आयुष्य घघन ही कारण है जो उसे दुर्गति में लाने वाला होना चाहिए ।।दस।। यति सावद्य त्याग उच्चारण करे उसमें भी झूठ का दोष उच्चारयस्यनुदिनं न करोमि सर्व, सावधमित्यसकृतदेतदयो करोपि । नित्यं भृपोक्ति जिनवचनमारितात्तत् सावयतो नरकमेष विमावये ते ॥ग्यारह॥ अर्थ -- तू प्रत्येक दिवस और रात में जो बार 'करेमि भते' का पाठ घालता है और कहता है कि मैं सर्वथा सावध कार्य का त्याग करता हूँ फिर भी वही कार्य चारपार करता है। तू इन सावध कर्मों के करने से झूठ बोल कर प्रमु को भी धोखा देने वाला हुआ और इस पाप के भार से तू नरकगामी होगा, ऐसा में विचार करता हूँ ।ग्यारह॥ भावार्थ करोमि भत समाइअ सच्चे सावज जोग पञ्चक्रामि जावज्जीवाएं विविध तिविहेण इत्यादि । इस प्रकार प्रतिनमरण तथा पोरिसी करते समय थाल कर सारे जोवन में मन, वचन तथा काया से सावध कार्यों का त्याग स्वय करने का, दूसरे से कराने का और दूसरे करने वाले का अच्छा मानने का त्याग करता है, पर तू उसके विपरात पैसा ही काय करता है । यह तो एकदम अनुचित है। इस प्रकार तू दो पाप करता है, एक तो सावध क्रिया का पाप और दूसरा असत्य वचन का पाप । अतएव बोलना, उपदेश देना और करना एकसा होना चाहिये। जिन पुरुषों के व्यवहार में इन तीनों में अवर है उनका परमव में महा भयकर मानसिक, शारीरिक पीड़ाएँ सहनी पड़वी है। विद्वानों ने कहाःयथा चिछ तथा वाचो, यथा वाचस्तथा क्रियाः । चित्त घाचि क्रियायां च साधूनामकरूपता ॥ अर्थात् साधु जैसा विचार करें वैसा ही बोलें और जैमा बोले पैसा ही आचरण करें। अन्यथा वे महान् पाप के भागी होते हैं। यति सावद्य प्राचरे इस परवचना का दोप वेषोपदेशाद्युपधिप्रतारिता, ददत्य मोष्टानृजवोऽधुना जनाः । भु'क्षे च शेपे च सुख विचेष्टसे, भवान्तरे ज्ञास्यसि तत्फलं पुनः ॥ बारह॥ अर्थ : - वेश, उपदेश और कपट से मोहित हुए भद्रीक लोग तुम को सभी इच्छित वस्तुएँ देते हैं, तू सुम्ब से उन्हें साता है, सोता है और फिरता है, पर अगले भव में इसका क्या फल होगा, तू यह भी जानता है ? ॥बारह॥ भावार्थः- ऊपर बताया जा चुका है कि श्रावक लोग तुझे गुणवान् समझ कर अच्छी से अच्छी वस्तु खाने को देते हैं और रहने को स्थान देते हैं। यदि तू साधु का चारित्र ठीक तरह नहीं पालता तो तुझे इन उत्तमोत्तम वस्तुओं को ग्रहण करने का क्या अधिकार है ? विना अधिकार के कोई वस्तु प्राप्त करने से महा दुर्गति में जाना पड़ता है। दस करने वाले को दंभ छिपाने के लिए अनेक झूठे उपाय तथा झूठ बोलना पड़ता है तथा हरदम झूठ प्रगट होने का डर रहता है। अतं. वह इस लोक में और परलोक में कहीं भी सुखी नहीं रह सकता । संयम में यत्न नही करने वाले को उपदेश आजीविकादिविविधार्तिभृशानिशार्ताः, कृच्छ्रण केऽपि महतैव सृजन्ति धर्मान् । तेभ्योऽपि निर्दय जिक्षसि सर्वमिष्ट, नो संयमे च यतसे भविता कथं ही ॥तेरह॥ अर्थ - महान् कष्ट उठाकर गृहस्थ लोग आजीविका कमाते हैं और राव दिन दुख उठाकर और हैरान होकर भी धर्म कार्य करते है। ऐसे लोगों से अपनी सब इच्छित वस्तुएँ प्राप्त करने की इच्छा करता है पर सयम नहीं रखता तो हे निर्दयो यति । बता तरा क्या हाल होगा एक ॥तेरह॥ निगु रण मुनि को भक्ति से भक्तों को कोई फल नहीं होवा आराधितो वा गुणवान् स्वय तरन् भवाविमस्मानपि तारयिष्यति । श्रयन्ति ये त्वामिति मूरिभक्तिमिः फल तवैषां च किमस्ति निर्गुण । ।।चौदह।। मर्थ - ये गुणवान् है, ये भव समुद्र से तरेंगे, अपने को भा वार देंगे ऐसा मानकर बहुत से मनुष्य भक्ति से तेरा आश्रय लत है। इससे निर्गुण । तुझे और इनका क्या लाभ ? भावार्थ - हे साधु । तू गुणवान् है यह समझ कर बहुत से श्रावक भक्ति से तुझे सब वस्तु बहराते हैं। इससे उनको पुण्य हागा और इस पुण्य का कारणभूव तू है यह समझ कर तुझे भी पुराय सध हागा यह समझना वरी भूल है। फारण तुझ में कोई ऐसा गुण नहीं जिससे तू विरे और तरे अवलम्बन से वे भी तिर जायें। परन्तु तुझमें गुण न हान से तू तो अवश्य पाप बध करता है । निगुण मुनि को उलटा पाप वध होता है स्वयं प्रमादै र्निपतन् भवाम्बुधौ, कथं स्वमकानपि सारयिष्यसि । प्रतारयन् स्वार्थमृजून शिवार्थिन स्वतोऽन्यतचैव विलुप्यसेंऽइसा ॥ पंद्रह॥ अर्थ - जब तू स्वयं प्रमादवश ससार समुद्र में गिरता है वा अपने भक्तों का कैसे वारेगा ? बचारे मात्र क इच्छुक सरल प्राणियों को तू अपने स्वार्थ के लिये घोबा देकर अपने किये पापों तथा अन्य द्वारा किये पापों के कारण हवता है मोत की इच्छा करने वाले भद्रीक पुरुप संसार-समुद्र से पार होने के लिये तेरा आश्रय लेते हैं और तेरे उपदेश के अनुसार कार्य करते हैं, परन्तु तू उनको अनुचित उपदेश देकर जो इनसे कार्य कराता है अतः उनके पाप का भागी तू है । यह "अन्य द्वारा पाप हुआ" और तू पञ्चक्खाण लेकर विषय-कपायादि प्रमाद सेवन कर महाव्रत का भग करता है इस पाप का भी तू भागो हुआ । इस प्रकार दोहरे पाप का भागी तू है। इस प्रकार हे मुनि ! तू निर्गुणी होने से तुझे लाभ तो कोई हांवा नहीं, इसमें संदेह नहीं । तू यह समझता हो कि तुके लोग अन्न-वन्त्र बहराकर पुण्य उपार्जन करते हैं उसका जो लाभ उनको मिलता है उसका निमित्त तू है इस प्रकार तुझे भी लाभ मिलता है यह धारणा भी अनुचित है, क्योंकि तू निर्गुणी और दमी है । तुझे तो इन कारणों से उल्टा पाप ही प्राप्त होगा, और तू गले में पत्थर बाँध कर भव-समुद्र में हूब जायगा । निर्गुणी का ऋरण और उसका परिणाम गृहासि शय्याहृतिपुस्तकोपधीन् सदा परेभ्यस्तपसस्त्वियं स्थितिः । तत्ते प्रमादाद्भरितात्प्रति हैऋ णा मनस्य परत्र का गतिः ॥सोलह॥ अर्थः-तू दूसरों से उपाश्रय, आहार, पुस्तक और उपाधि लेता है यह स्थिति तपस्वियों की है, परन्तु तू तो इन वस्तुओं को लेकर प्रसाद में पड़ जाता है। अतः जिस तरह बड़ा कर्जदार हूबता है उसी तरह परभव में तेरी गति होगी ।।सोलह।। भावार्थ :-प्रन्थकार कहते हैं कि हे मुनि ! तू प्रमाद करता है तो दोहरे कर्ज से हवता है। एक तो चारित्र ग्रहण कर प्रसाद करता है और दूसरा शुद्ध चारित्र पाले बिना आहार आदि ग्रहण करता है। इस प्रकार दो कजों में डूवता है और जिस तरह ऋणी मनुष्य का सिर ऊँचा नहीं होता उसी प्रकार तेरी भी गवि होगी अर्थात् कमी ऊँचा नहीं उठेगा ।
मानव flatulentsiey कहा जाता है आंत से बक। यह शब्द हर किसी के लिए परिचित नहीं है। यह लेख आपको बता देंगे पेट फूलना है क्या। कारण और लोक उपचार के उपचार के नीचे वर्णित हैं। तुम भी दवा के साथ इस हालत को दूर करने के तरीकों के बारे में सीखना होगा। पेट फूलना क्या है? कारण और बच्चों और वयस्कों में लोक उपचार के उपचार के अलग हो सकता है। वर्तमान में दवाइयों निर्माताओं ग्राहकों सुधार के लिए रचनाओं की एक विस्तृत विविधता प्रदान करते हैं। उनमें से जड़ी बूटी है कि उपयोग के लिए अनुमोदित कर रहे हैं, यहां तक कि बच्चों को कर रहे हैं। तुम भी रासायनिक घटकों से युक्त दवाओं चुन सकते हैं। वे और अधिक प्रभावी है, लेकिन कम सुरक्षित साधन हैं। पेट फूलना क्या है? इस हालत की विशेषता है एक वृद्धि की गैस गठन आंत में। आम तौर पर, मानव शरीर में गैस की 0. 9 लीटर करने के लिए प्रस्तुत है। हालांकि, पेट फूलना, तो यह संख्या तीन गुना बढ़ाया जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि सबसे अधिक पेट फूलना बच्चों और बुजुर्गों को पेश आ रही लायक है। यह मध्यम आयु में लक्षणों की उपस्थिति रोकता नहीं है। पैथोलॉजी या आदर्श? इससे पहले कि आप यह पता लगाने क्या वयस्कों कारणों और लोक उपचार के उपचार में पेट फूलना है, यह कहा जाना चाहिए कि लक्षण सामान्य या विकृति का संकेत हो सकता है। पहले मामले में, सुधार की आवश्यकता नहीं है। आंतों अतिरिक्त गैस संचय के रिहा करने के बाद, अप्रिय भावनाओं गायब हो जाते हैं। जब जरूरत पड़ने पर, मरीज सूजन से छुटकारा पाने के आंतों में मदद करने के दवा ले सकते हैं। वयस्कों और बच्चों में पेट फूलना के कारणों रोग की स्थिति की स्थिति में कवर कर रहे हैं, तो यह जितनी जल्दी हो सके उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक है। यह दवा या लोक हो सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि सुधार के दूसरे प्रकार के काफी खतरनाक हो सकता लायक है। यह अपने स्वयं के विकृति से निपटने के लिए आवश्यक नहीं है। यह भावना एक डॉक्टर से परामर्श और उचित गंतव्य प्राप्त करने के लिए बनाता है। इससे पहले कि आप कहते हैं कि क्या पेट फूलना कारण और लोक उपचार के उपचार है, यह इस हालत के लक्षण के बारे में उल्लेख करने के लिए आवश्यक है। निम्नलिखित लक्षणों उन के बीच प्रतिष्ठित किया जा सकताः - ऐंठन। बढ़ती गैस गठन के साथ, एक मजबूत आंतों की दीवारों की खींच। यह कब्ज परिग्रहण के मामले में संयोजन होता है। आदमी आवधिक ऐंठन, जो कई घंटे तक चल सकता है लगता है। - पेट में वृद्धि हुई है। पेट फूलना आंतों फैला है, और अगर आस-पास के अंगों से थोड़ा स्थानांतरित किया जा सकता है। यह पेरिटोनियम में बढोतरी करती है। अक्सर एक व्यक्ति को लगता है कि वह मेरी हमेशा की तरह कपड़े में नहीं मिल सकता है। - Burping या नाराज़गी। पेट फूलना दबाव जो पेट पर कार्य करता है उठता है। नतीजतन, यह मतली, उबकाई एक अप्रिय स्वाद के साथ साथ शुरू होता है। - उदर गुहा में गड़गड़ाहट। वृद्धि हुई गैस गठन और तरल मल के संचय पर rumbling हो सकती है। यह भटक गैसों, जो मल के साथ मिश्रित कर रहे हैं से उठता है। - अतिसार (दस्त) या कब्ज। अक्सर कुर्सी के पेट फूलना उल्लंघन के साथ होगा। इस व्यक्ति को दोनों कब्ज और दस्त के साथ आ सकता है। यह सब लक्षण के कारण पर निर्भर करता है। - Flatulentsiya। आंत्र से गैस के लिए सीधी पहुँच, एक अद्वितीय ध्वनि और एक बुरा गंध के साथ होगा। पेट फूलनाः कारण और उपचार लोक उपचार की (एक रिश्ता है कि क्या वहाँ? ) मैं वृद्धि हुई पेट फूलना को समायोजित करने की जरूरत है? बेशक, हाँ, उस स्थिति में, जब यह बेचैनी देता है। flatulentsiya स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से होता है, तो सुधार नहीं किया जा सकता है। लक्षण और इसी सर्किट द्वारा उत्पादित लोक उपचार के उपचार सूजन है क्या पर निर्भर करता है। विकृति कुर्सी का उल्लंघन करते हुए प्रकट होता है, तो कुछ व्यंजनों में इस्तेमाल किया। यह दर्द की बात आती है, अन्य तरीकों मदद करते हैं। डॉक्टरों ध्यान दें कि लोक उपचार के बहुमत गंभीर विकृतियों के साथ सामना नहीं कर सकते। कभी कभी सूजन यह कैंसर का कारण हो सकता है। इस मामले में रोगी तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। आवेदन दादी के व्यंजनों केवल स्थिति ख़राब और बाद में उपचार को मुश्किल कर सकते हैं। विचार करें कि पेट फूलना कारण और लोक उपचार के विभिन्न विकृतियों भी नीचे वर्णित किया जाना चाहिए के उपचार हो सकता है। क्या बच्चों grudnichkovogo उम्र में पेट फूलना के कारणों हो सकता है? जब एक बच्चा पैदा होता है, उसके पेट बाँझ है। जब आप पाचन तंत्र में पहली बिजली बैक्टीरिया की एक किस्म में आते हैं। उनमें से कुछ उपयोगी होते हैं और सही माइक्रोफ्लोरा बनाने के लिए मदद करते हैं। दूसरों किण्वन और गैस गठन होता है। यह ध्यान देने योग्य है कि बच्चों के बहुमत, इस प्रक्रिया को दर्द और बेचैनी के साथ है लायक है। इस हालत के उपचार आमतौर पर लोक उपचार किया जाता है। तो, पेट का दर्द से निपटने में गर्म मदद करता है। एक हीटिंग पैड ले लो या डायपर लोहा लौह। उसके बाद, बच्चे के पेट के लिए डिवाइस देते हैं। कई मिनट बाद, टुकड़ों बहुत आसान हो जाएगा। के रूप में एक नर्सिंग माँ अपने आहार की निगरानी करनी चाहिए और नहीं खाते गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ। उन्होंने यह भी बक को मजबूत बनाने भड़काने कर सकते हैं। पेट फूलनाः कारण और लोक उपचार के उपचार (डेज़ी) लगभग सभी मामलों में आंत में भड़काऊ प्रक्रिया पेट फूलना होता है। इस आत्म में जटिलताएं पैदा कर सकते हैं। अगर आप लोक उपचार के सुधार के बाहर ले जाने के लिए जा रहे हैं याद रखना महत्वपूर्ण है। सबसे लोकप्रिय विरोधी भड़काऊ दवा एक डेज़ी है। संयंत्र के सूखे फूलों पाचन तंत्र में बैक्टीरिया को हटाने और वायरस के उन्मूलन के लिए योगदान करते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ रोगियों जड़ी बूटियों के साथ इलाज के लिए contraindicated जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस तरह के कैंसर के रोगियों के तरीकों के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ संपर्क किया जाना चाहिए। निम्नलिखित तरीके से तैयार आंतों के उपचार के लिए कैमोमाइल। सूखे पुष्पक्रम के दो बड़े चम्मच ले लो और उन्हें उबलते पानी की 300 मिलीलीटर के साथ भरने। शोरबा 15-20 मिनट के लिए खड़े करने के लिए है, तो तनाव की अनुमति दें। शहद की जिसके परिणामस्वरूप तरल एक चम्मच जोड़ें और अच्छी तरह से मिश्रण। पीना-मिश्रण भोजन से पहले 100 मिलीलीटर तीन बार दैनिक। यदि आप एक आंत्र सूजन है, तो लोक उपचार के उपचार के आहार का उपयोग शामिल कर सकते हैं। अक्सर गैसों के उत्पादन में वृद्धि फाइबर की बड़ी मात्रा का उपयोग होता है। यह चोकर, कच्चे सब्जियों और फलों, जड़ी बूटी हो सकता है। इसके अलावा गोभी और सेम के साथ पकवान पेट फूलना के लिए सीसा। सोडा, सफेद ब्रेड और अन्य खमीर पेस्ट्री वृद्धि हुई गैस उत्पादन हो सकता है। शराब एक ही तरीके से कार्य करते हैं। मैं पारंपरिक तरीकों के इस राज्य कैसे सही कर सकते हैं? आहार का पालन करें। यदि वर्णन करने के लिए राज्य दस्त शामिल होते हैं तो चावल के व्यंजन, सूप kiseleobraznym, मजबूत चाय और बिस्कुट को वरीयता देना चाहिए। कब्ज, अपने आहार सूप और पीने के पानी की काफी भिन्न करने की कोशिश करते हैं। इस मामले में, इसके बाद के संस्करण उत्पादों के आहार से खत्म करने, पेट फूलना के लिए अग्रणी। गंभीर स्थितियों में इस तरह के "Duphalac", "Senade", "Gutasil" के रूप में कुछ हर्बल तैयारी, ले जाना चाहिए। पेट फूलना के लिए हमेशा आंत में ट्यूमर प्रक्रियाओं में परिणाम। लोक उपचार के उपचार दृढ़ता से इन मामलों में प्रोत्साहित किया। हालांकि, कुछ रोगियों का कहना है कि कैंसर के इलाज में उन्हें एक प्रकार का पौधा, लहसुन या कुछ अन्य चमत्कार लोक चिकित्सा में मदद मिली है। पेट फूलना के कारण होता है मल पत्थर, इस मामले में एनीमा का एक प्रभावी का मतलब होगा। इसके अलावा, इसके दायरे दो लीटर से कम नहीं होना चाहिए। याद रखें कि केवल इन दवाओं का उपयोग करने के, जब आप विश्लेषण की सटीकता में विश्वास कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, आंत्र रुकावट klizmirovaniya के लिए एक सीधा विपरीत संकेत है। इन यौगिकों पेट फूलना मुकाबला करने के लिए के अलावा, कुछ अन्य प्रभावी लोक उपचार कर रहे हैं। उनमें से निम्नलिखित हैं। - जीरा और चक्र फूल के बीज। इन यौगिकों किण्वन और हटाने दर्द को रोकने में मदद। प्रत्येक भोजन के बाद बस ने कहा कि बीज की कुछ राशि चबाना, और उसके बाद अवशेष थूक से बाहर। - नद्यपान और टकसाल। इन जड़ी बूटियों काढ़ा चाय वरीय की। ऐसा करने के लिए, सूखे जड़ी बूटी लेने के लिए और उबलते पानी डालना। चलो यह काढ़ा शोरबा, और फिर एक दिन में तीन बार करने के लिए एक कप तक लगते हैं। - डिल या सौंफ़। इन फार्मेसी जड़ी बूटियों भी पेय तैयार करने के लिए उपयोग किया जाता है। संयंत्र पेट और आंतों में गैसों की दरार को बढ़ावा देता है, और यह भी ऐंठन निकाल देता है। डिल और सौंफ़ हैं वातहर। यदि आवश्यक हो, आप प्राकृतिक घास तेल है, जो लगभग हर दवा की दुकान में बेचा जाता है बदल सकते हैं। स्वस्थ रहो!
मानव flatulentsiey कहा जाता है आंत से बक। यह शब्द हर किसी के लिए परिचित नहीं है। यह लेख आपको बता देंगे पेट फूलना है क्या। कारण और लोक उपचार के उपचार के नीचे वर्णित हैं। तुम भी दवा के साथ इस हालत को दूर करने के तरीकों के बारे में सीखना होगा। पेट फूलना क्या है? कारण और बच्चों और वयस्कों में लोक उपचार के उपचार के अलग हो सकता है। वर्तमान में दवाइयों निर्माताओं ग्राहकों सुधार के लिए रचनाओं की एक विस्तृत विविधता प्रदान करते हैं। उनमें से जड़ी बूटी है कि उपयोग के लिए अनुमोदित कर रहे हैं, यहां तक कि बच्चों को कर रहे हैं। तुम भी रासायनिक घटकों से युक्त दवाओं चुन सकते हैं। वे और अधिक प्रभावी है, लेकिन कम सुरक्षित साधन हैं। पेट फूलना क्या है? इस हालत की विशेषता है एक वृद्धि की गैस गठन आंत में। आम तौर पर, मानव शरीर में गैस की शून्य. नौ लीटरटर करने के लिए प्रस्तुत है। हालांकि, पेट फूलना, तो यह संख्या तीन गुना बढ़ाया जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि सबसे अधिक पेट फूलना बच्चों और बुजुर्गों को पेश आ रही लायक है। यह मध्यम आयु में लक्षणों की उपस्थिति रोकता नहीं है। पैथोलॉजी या आदर्श? इससे पहले कि आप यह पता लगाने क्या वयस्कों कारणों और लोक उपचार के उपचार में पेट फूलना है, यह कहा जाना चाहिए कि लक्षण सामान्य या विकृति का संकेत हो सकता है। पहले मामले में, सुधार की आवश्यकता नहीं है। आंतों अतिरिक्त गैस संचय के रिहा करने के बाद, अप्रिय भावनाओं गायब हो जाते हैं। जब जरूरत पड़ने पर, मरीज सूजन से छुटकारा पाने के आंतों में मदद करने के दवा ले सकते हैं। वयस्कों और बच्चों में पेट फूलना के कारणों रोग की स्थिति की स्थिति में कवर कर रहे हैं, तो यह जितनी जल्दी हो सके उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक है। यह दवा या लोक हो सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि सुधार के दूसरे प्रकार के काफी खतरनाक हो सकता लायक है। यह अपने स्वयं के विकृति से निपटने के लिए आवश्यक नहीं है। यह भावना एक डॉक्टर से परामर्श और उचित गंतव्य प्राप्त करने के लिए बनाता है। इससे पहले कि आप कहते हैं कि क्या पेट फूलना कारण और लोक उपचार के उपचार है, यह इस हालत के लक्षण के बारे में उल्लेख करने के लिए आवश्यक है। निम्नलिखित लक्षणों उन के बीच प्रतिष्ठित किया जा सकताः - ऐंठन। बढ़ती गैस गठन के साथ, एक मजबूत आंतों की दीवारों की खींच। यह कब्ज परिग्रहण के मामले में संयोजन होता है। आदमी आवधिक ऐंठन, जो कई घंटे तक चल सकता है लगता है। - पेट में वृद्धि हुई है। पेट फूलना आंतों फैला है, और अगर आस-पास के अंगों से थोड़ा स्थानांतरित किया जा सकता है। यह पेरिटोनियम में बढोतरी करती है। अक्सर एक व्यक्ति को लगता है कि वह मेरी हमेशा की तरह कपड़े में नहीं मिल सकता है। - Burping या नाराज़गी। पेट फूलना दबाव जो पेट पर कार्य करता है उठता है। नतीजतन, यह मतली, उबकाई एक अप्रिय स्वाद के साथ साथ शुरू होता है। - उदर गुहा में गड़गड़ाहट। वृद्धि हुई गैस गठन और तरल मल के संचय पर rumbling हो सकती है। यह भटक गैसों, जो मल के साथ मिश्रित कर रहे हैं से उठता है। - अतिसार या कब्ज। अक्सर कुर्सी के पेट फूलना उल्लंघन के साथ होगा। इस व्यक्ति को दोनों कब्ज और दस्त के साथ आ सकता है। यह सब लक्षण के कारण पर निर्भर करता है। - Flatulentsiya। आंत्र से गैस के लिए सीधी पहुँच, एक अद्वितीय ध्वनि और एक बुरा गंध के साथ होगा। पेट फूलनाः कारण और उपचार लोक उपचार की मैं वृद्धि हुई पेट फूलना को समायोजित करने की जरूरत है? बेशक, हाँ, उस स्थिति में, जब यह बेचैनी देता है। flatulentsiya स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से होता है, तो सुधार नहीं किया जा सकता है। लक्षण और इसी सर्किट द्वारा उत्पादित लोक उपचार के उपचार सूजन है क्या पर निर्भर करता है। विकृति कुर्सी का उल्लंघन करते हुए प्रकट होता है, तो कुछ व्यंजनों में इस्तेमाल किया। यह दर्द की बात आती है, अन्य तरीकों मदद करते हैं। डॉक्टरों ध्यान दें कि लोक उपचार के बहुमत गंभीर विकृतियों के साथ सामना नहीं कर सकते। कभी कभी सूजन यह कैंसर का कारण हो सकता है। इस मामले में रोगी तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। आवेदन दादी के व्यंजनों केवल स्थिति ख़राब और बाद में उपचार को मुश्किल कर सकते हैं। विचार करें कि पेट फूलना कारण और लोक उपचार के विभिन्न विकृतियों भी नीचे वर्णित किया जाना चाहिए के उपचार हो सकता है। क्या बच्चों grudnichkovogo उम्र में पेट फूलना के कारणों हो सकता है? जब एक बच्चा पैदा होता है, उसके पेट बाँझ है। जब आप पाचन तंत्र में पहली बिजली बैक्टीरिया की एक किस्म में आते हैं। उनमें से कुछ उपयोगी होते हैं और सही माइक्रोफ्लोरा बनाने के लिए मदद करते हैं। दूसरों किण्वन और गैस गठन होता है। यह ध्यान देने योग्य है कि बच्चों के बहुमत, इस प्रक्रिया को दर्द और बेचैनी के साथ है लायक है। इस हालत के उपचार आमतौर पर लोक उपचार किया जाता है। तो, पेट का दर्द से निपटने में गर्म मदद करता है। एक हीटिंग पैड ले लो या डायपर लोहा लौह। उसके बाद, बच्चे के पेट के लिए डिवाइस देते हैं। कई मिनट बाद, टुकड़ों बहुत आसान हो जाएगा। के रूप में एक नर्सिंग माँ अपने आहार की निगरानी करनी चाहिए और नहीं खाते गैस उत्पादक खाद्य पदार्थ। उन्होंने यह भी बक को मजबूत बनाने भड़काने कर सकते हैं। पेट फूलनाः कारण और लोक उपचार के उपचार लगभग सभी मामलों में आंत में भड़काऊ प्रक्रिया पेट फूलना होता है। इस आत्म में जटिलताएं पैदा कर सकते हैं। अगर आप लोक उपचार के सुधार के बाहर ले जाने के लिए जा रहे हैं याद रखना महत्वपूर्ण है। सबसे लोकप्रिय विरोधी भड़काऊ दवा एक डेज़ी है। संयंत्र के सूखे फूलों पाचन तंत्र में बैक्टीरिया को हटाने और वायरस के उन्मूलन के लिए योगदान करते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ रोगियों जड़ी बूटियों के साथ इलाज के लिए contraindicated जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस तरह के कैंसर के रोगियों के तरीकों के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ संपर्क किया जाना चाहिए। निम्नलिखित तरीके से तैयार आंतों के उपचार के लिए कैमोमाइल। सूखे पुष्पक्रम के दो बड़े चम्मच ले लो और उन्हें उबलते पानी की तीन सौ मिलीलीटर के साथ भरने। शोरबा पंद्रह-बीस मिनट के लिए खड़े करने के लिए है, तो तनाव की अनुमति दें। शहद की जिसके परिणामस्वरूप तरल एक चम्मच जोड़ें और अच्छी तरह से मिश्रण। पीना-मिश्रण भोजन से पहले एक सौ मिलीलीटर तीन बार दैनिक। यदि आप एक आंत्र सूजन है, तो लोक उपचार के उपचार के आहार का उपयोग शामिल कर सकते हैं। अक्सर गैसों के उत्पादन में वृद्धि फाइबर की बड़ी मात्रा का उपयोग होता है। यह चोकर, कच्चे सब्जियों और फलों, जड़ी बूटी हो सकता है। इसके अलावा गोभी और सेम के साथ पकवान पेट फूलना के लिए सीसा। सोडा, सफेद ब्रेड और अन्य खमीर पेस्ट्री वृद्धि हुई गैस उत्पादन हो सकता है। शराब एक ही तरीके से कार्य करते हैं। मैं पारंपरिक तरीकों के इस राज्य कैसे सही कर सकते हैं? आहार का पालन करें। यदि वर्णन करने के लिए राज्य दस्त शामिल होते हैं तो चावल के व्यंजन, सूप kiseleobraznym, मजबूत चाय और बिस्कुट को वरीयता देना चाहिए। कब्ज, अपने आहार सूप और पीने के पानी की काफी भिन्न करने की कोशिश करते हैं। इस मामले में, इसके बाद के संस्करण उत्पादों के आहार से खत्म करने, पेट फूलना के लिए अग्रणी। गंभीर स्थितियों में इस तरह के "Duphalac", "Senade", "Gutasil" के रूप में कुछ हर्बल तैयारी, ले जाना चाहिए। पेट फूलना के लिए हमेशा आंत में ट्यूमर प्रक्रियाओं में परिणाम। लोक उपचार के उपचार दृढ़ता से इन मामलों में प्रोत्साहित किया। हालांकि, कुछ रोगियों का कहना है कि कैंसर के इलाज में उन्हें एक प्रकार का पौधा, लहसुन या कुछ अन्य चमत्कार लोक चिकित्सा में मदद मिली है। पेट फूलना के कारण होता है मल पत्थर, इस मामले में एनीमा का एक प्रभावी का मतलब होगा। इसके अलावा, इसके दायरे दो लीटर से कम नहीं होना चाहिए। याद रखें कि केवल इन दवाओं का उपयोग करने के, जब आप विश्लेषण की सटीकता में विश्वास कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, आंत्र रुकावट klizmirovaniya के लिए एक सीधा विपरीत संकेत है। इन यौगिकों पेट फूलना मुकाबला करने के लिए के अलावा, कुछ अन्य प्रभावी लोक उपचार कर रहे हैं। उनमें से निम्नलिखित हैं। - जीरा और चक्र फूल के बीज। इन यौगिकों किण्वन और हटाने दर्द को रोकने में मदद। प्रत्येक भोजन के बाद बस ने कहा कि बीज की कुछ राशि चबाना, और उसके बाद अवशेष थूक से बाहर। - नद्यपान और टकसाल। इन जड़ी बूटियों काढ़ा चाय वरीय की। ऐसा करने के लिए, सूखे जड़ी बूटी लेने के लिए और उबलते पानी डालना। चलो यह काढ़ा शोरबा, और फिर एक दिन में तीन बार करने के लिए एक कप तक लगते हैं। - डिल या सौंफ़। इन फार्मेसी जड़ी बूटियों भी पेय तैयार करने के लिए उपयोग किया जाता है। संयंत्र पेट और आंतों में गैसों की दरार को बढ़ावा देता है, और यह भी ऐंठन निकाल देता है। डिल और सौंफ़ हैं वातहर। यदि आवश्यक हो, आप प्राकृतिक घास तेल है, जो लगभग हर दवा की दुकान में बेचा जाता है बदल सकते हैं। स्वस्थ रहो!
ये सब जिस किसी भी साधन द्वारा प्राप्त हो सके उस साधन की प्राप्ति के लिये अपने प्रयत्न तथा पुरुषार्थ का उपयोग करता है। और ये वस्तुये झूठ बोलकर, धोखा देकर, बेईमानी करके, किसी की हत्या करके, सगठन करके, किसी के हृदय में माघात पहुँचा करके, एव किसी के साथ अन्याय करके भी यदि प्राप्त हो सकती हो तो कोई परवाह नही है और यदि ऐसा करने में किसी प्रकार की हानि होती भी है तो होने दो, क्योकि पद प्राप्त करने पर, शक्तिशाली वनने पर, बनवान् हो जाने पर, एव अधिक सुख, अविक भोगादि सुख सामग्री, अधिक आदर, अधिक प्रभाव, समाज में अधिक सम्मान, ससार में अधिकाधिक भ्रमण, तथा सन्तान और दूसरे सम्वन्धियो को अधिक से अधिक उन्नति करने का अवसर और अधिकाधिक स्त्रियो तथा वैदेशिको के साथ ससर्ग इन्ही पूर्वोक्त कारणो से होता है। आज साधन की पवित्रता और औचित्य के ऊपर ध्यान न देकर साध्य की प्राप्ति ही लक्ष्य हो गयी है। आत्म प्रचसा, अपने कल्पित एव दिखावटी गुणो का प्रचार, झूठे वायदे, गुट्टबाजी, झूठ, धोखा, पक्षपात, साम, दाम, दण्ड, भेद का सर्वत्र प्रयोग, सर्व प्रियता, ये सव आजकल लक्ष्य प्राप्ति के आवश्यक तथा अग्रहणीय साधन समझे जाते हैं। पुराने समय में मास भक्षण प्राय निन्य समझा जाता था, और मानसिक शान्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिये बावक भी समझा जाता था। इस वैज्ञानिक युग में लोगो को यह धारणा हो गयी है कि मास, मछली और अण्डा मनुष्य के उपयुक्त एव उचित आहार हैं। भारत में भी दिन प्रतिदिन मास भक्षण की वृद्धि ही होती जा रही है। और आजकल जनवृद्धि होने के कारण, तथा वाणस्पतिक खाद्य की कमी होने के नाते मास, मत्स्य और अडे खाने का प्रचार भी किया जा रहा है। मास को स्वादिष्ट भोजन समझकर कुछ लोग नरमास को खाना भी निन्य नहीं समझते । वास्तव में कोई भी प्राणी ऐसा नहीं है कि जिसका मास कही न कही, कोई न कोई न खाता हो। मास खाने की अधिक से अधिक प्रवृत्ति होने के कारण किसी साधन को अपना लक्ष्य सिद्धि करने के लिये गर्हित नहीं समझा जाता । आज किसी भी प्राणी का प्राण ले लेना तया नृशसतापूर्ण ढंग से हत्या कर देना बुरा नही माना जाता है। यहाँ तक कि महात्मा गाँधी जैसे मनुष्य की भी हत्या करना कुछ लोगो में कोई पाप न समझा गया जिनका कि समस्त जीवन भाई-चारे के प्रचार मे बीता, और जो सदा अधिक से अधिक अहिंसक रहे वे ही हिंसा के शिकार बने । जीवन के सम्बन्ध मे हैयह धारणा बन गई है कि मनुष्य भी एक दृष्टि से पशु ही है। उसका विकास पशु जीवन से ही हुआ है । और प्रकृति में चारो ओर वाणम्पतिक, पाशविक, एव मानवीय जीवन में संघर्ष के कारण ही उन्नति होती है । और सघर्प के अन्दर जिसका जीवन जितना बलवान् होता है, तथा अधिक सुसगठित होता है वही सफल एव जीवित रहता है। आजकल के वैज्ञानिक इतिहास ने भी यही पाठ पढ़ाया है कि युद्ध में विजय उमी की होती है जिसके पास अधिक और अच्छे
ये सब जिस किसी भी साधन द्वारा प्राप्त हो सके उस साधन की प्राप्ति के लिये अपने प्रयत्न तथा पुरुषार्थ का उपयोग करता है। और ये वस्तुये झूठ बोलकर, धोखा देकर, बेईमानी करके, किसी की हत्या करके, सगठन करके, किसी के हृदय में माघात पहुँचा करके, एव किसी के साथ अन्याय करके भी यदि प्राप्त हो सकती हो तो कोई परवाह नही है और यदि ऐसा करने में किसी प्रकार की हानि होती भी है तो होने दो, क्योकि पद प्राप्त करने पर, शक्तिशाली वनने पर, बनवान् हो जाने पर, एव अधिक सुख, अविक भोगादि सुख सामग्री, अधिक आदर, अधिक प्रभाव, समाज में अधिक सम्मान, ससार में अधिकाधिक भ्रमण, तथा सन्तान और दूसरे सम्वन्धियो को अधिक से अधिक उन्नति करने का अवसर और अधिकाधिक स्त्रियो तथा वैदेशिको के साथ ससर्ग इन्ही पूर्वोक्त कारणो से होता है। आज साधन की पवित्रता और औचित्य के ऊपर ध्यान न देकर साध्य की प्राप्ति ही लक्ष्य हो गयी है। आत्म प्रचसा, अपने कल्पित एव दिखावटी गुणो का प्रचार, झूठे वायदे, गुट्टबाजी, झूठ, धोखा, पक्षपात, साम, दाम, दण्ड, भेद का सर्वत्र प्रयोग, सर्व प्रियता, ये सव आजकल लक्ष्य प्राप्ति के आवश्यक तथा अग्रहणीय साधन समझे जाते हैं। पुराने समय में मास भक्षण प्राय निन्य समझा जाता था, और मानसिक शान्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिये बावक भी समझा जाता था। इस वैज्ञानिक युग में लोगो को यह धारणा हो गयी है कि मास, मछली और अण्डा मनुष्य के उपयुक्त एव उचित आहार हैं। भारत में भी दिन प्रतिदिन मास भक्षण की वृद्धि ही होती जा रही है। और आजकल जनवृद्धि होने के कारण, तथा वाणस्पतिक खाद्य की कमी होने के नाते मास, मत्स्य और अडे खाने का प्रचार भी किया जा रहा है। मास को स्वादिष्ट भोजन समझकर कुछ लोग नरमास को खाना भी निन्य नहीं समझते । वास्तव में कोई भी प्राणी ऐसा नहीं है कि जिसका मास कही न कही, कोई न कोई न खाता हो। मास खाने की अधिक से अधिक प्रवृत्ति होने के कारण किसी साधन को अपना लक्ष्य सिद्धि करने के लिये गर्हित नहीं समझा जाता । आज किसी भी प्राणी का प्राण ले लेना तया नृशसतापूर्ण ढंग से हत्या कर देना बुरा नही माना जाता है। यहाँ तक कि महात्मा गाँधी जैसे मनुष्य की भी हत्या करना कुछ लोगो में कोई पाप न समझा गया जिनका कि समस्त जीवन भाई-चारे के प्रचार मे बीता, और जो सदा अधिक से अधिक अहिंसक रहे वे ही हिंसा के शिकार बने । जीवन के सम्बन्ध मे हैयह धारणा बन गई है कि मनुष्य भी एक दृष्टि से पशु ही है। उसका विकास पशु जीवन से ही हुआ है । और प्रकृति में चारो ओर वाणम्पतिक, पाशविक, एव मानवीय जीवन में संघर्ष के कारण ही उन्नति होती है । और सघर्प के अन्दर जिसका जीवन जितना बलवान् होता है, तथा अधिक सुसगठित होता है वही सफल एव जीवित रहता है। आजकल के वैज्ञानिक इतिहास ने भी यही पाठ पढ़ाया है कि युद्ध में विजय उमी की होती है जिसके पास अधिक और अच्छे
राजस्थान में अजमेर के एसपी राजेश मीणा, थानेदारों को मनचाहा थाना आवंटित करने के बदले रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया गया है.यह गिरफ्तारी एंटी करप्शन ब्यूरो ने किया है.इस मामले में बताया जा रहा है कि एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने एक दलाल रामदेव ठठेरा को भी गिरफ्तार कर लिया है. इस खबर ने राजस्थान के पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा दी है.बताया जा रहा है कि विभाग ने कुछ दस्तावेज और डायरियां भी बरामद की है. खबर के मुताबिक इनमें थानों से वसूली की जानकारियां सांकेतिक भाषा में दर्ज किये गये हैं. माना जा रहा है कि इन डायरियों की मदद से कुछ और गंभीर खुलासे हो सकते हैं. पिछले अक्टूबर महीने में चंड़ीगढ़ के सिटी एसपी देश राज को चार लाख रुपये लेते हुए सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था. इन दस्तावेजों के मिलने से जिले के सभी 32 थानों के थाना प्रभारी पर भी शामत आ सकती है और इसके बाद वो भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. राजेश मीणा पर एंटी क्रप्शन ब्यूरो की नजर में इसलिए चढे कि वह मात्र 15 महीनों से अजमेर में एसपी के पद पर तैनात थे.इस दौरान उन्होंने 800 से ज्यादा ट्रांसफर ऑर्डर निकाले लेकिन कुछ ही दिनों में 300 ट्रांसफर निरस्त भी कर दिए. फिलहाल एंटी करप्शन की टीम मीणा को गिरफ्तार कर जयपुर ले गई है.मीणा की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी खतरा मंडराने लगा है.
राजस्थान में अजमेर के एसपी राजेश मीणा, थानेदारों को मनचाहा थाना आवंटित करने के बदले रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया गया है.यह गिरफ्तारी एंटी करप्शन ब्यूरो ने किया है.इस मामले में बताया जा रहा है कि एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने एक दलाल रामदेव ठठेरा को भी गिरफ्तार कर लिया है. इस खबर ने राजस्थान के पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा दी है.बताया जा रहा है कि विभाग ने कुछ दस्तावेज और डायरियां भी बरामद की है. खबर के मुताबिक इनमें थानों से वसूली की जानकारियां सांकेतिक भाषा में दर्ज किये गये हैं. माना जा रहा है कि इन डायरियों की मदद से कुछ और गंभीर खुलासे हो सकते हैं. पिछले अक्टूबर महीने में चंड़ीगढ़ के सिटी एसपी देश राज को चार लाख रुपये लेते हुए सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था. इन दस्तावेजों के मिलने से जिले के सभी बत्तीस थानों के थाना प्रभारी पर भी शामत आ सकती है और इसके बाद वो भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. राजेश मीणा पर एंटी क्रप्शन ब्यूरो की नजर में इसलिए चढे कि वह मात्र पंद्रह महीनों से अजमेर में एसपी के पद पर तैनात थे.इस दौरान उन्होंने आठ सौ से ज्यादा ट्रांसफर ऑर्डर निकाले लेकिन कुछ ही दिनों में तीन सौ ट्रांसफर निरस्त भी कर दिए. फिलहाल एंटी करप्शन की टीम मीणा को गिरफ्तार कर जयपुर ले गई है.मीणा की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी खतरा मंडराने लगा है.
अतिशयोक्ति से काम नहीं लिया । उसने केवल एक सत्य का प्रकाशन किया । सत्य की ही छत्रछाया में तो सब सुखी रह सकते हैं। यदि जीवन में सत्य नहीं, तो कुछ भी नहीं । सत्य का ही प्रेम वास्तविक प्रेम है । जब ईसा ने कहा, "लिखी बात ही घातक होती है" तो उसने मानवता के हित के लिए एक बात कही। जितने धार्मिक ग्रन्थ वर्त्तमान हैं, वे सब मानव के लिए अहितकर सिद्ध हो रहे हैं । वेद, क़ुरान शरीफ़, इञ्जील आदि-आदि में लिखित बातें मानव के लिए दुःख का कारण बन रही हैं। इन पुस्तकों ने मानव से स्वतंत्र विचार करने के अधिकार को छीन लिया है। मानो वे मानव से कहती हैं, "जो कुछ विचार करना था वह हम में भरा है। तुम अपना विचार करना छोड़कर हमारे अनुभव को मानो। इसी में तुम्हारा कल्याण है !" ईसा ने केवल एक बात का प्रचार किया, "तुझे केवल प्रेम करने का अधिकार है।" " अपने पड़ोसी को अपने समान ही चाहो," अर्थात् स्वार्थ भावना का त्याग करो। किसी वस्तु को अपने लिए मत चाहो, बल्कि त्याग करना सीखो। ईसा की यह शिक्षा उपनिषद् के मन्त्र 'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मागृधः कस्यस्विद्धनम्' के समकक्ष है। इस शिक्षा द्वारा ईसा ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का आदर्श सामने रक्खा। यही आदर्श समझदार व्यक्तियों को आज दिन मान्य हो रहा है । त्याग की साधना को ध्यान में रखकर ईसा ने अपने अनुयायियों से कहा, "त्याग द्वारा ही तुमको मिला है, त्याग द्वारा ही उसका भोग करो।" "मेरे साथ चलो, या अकेले जहाँ जाओ, कुछ भी लेकर न जाओ - न पैसा, न खाना, न थैला, और न कपड़ा । पूर्ण त्याग ( Poverty ) की साधना करो। आतिथ्य पर जीवन निर्वाह करो।" "जब तुमको क़ैद किया जाय और तुम्हारा मुकदमा हो, तो कोई प्रमाण मत दो। अपनी रक्षा का कोई प्रबन्ध मत करो।" "जब तक तुम मानव के पुत्र न हो जाओ, तब तक इज़राइल के नगरों में पर्यटन करते रहो।" उसने कहा, "मैं जानता हूँ तुम मैमने हो और मैं तुम्हें भेड़ियों के बीच में भेज रहा हूँ ।" "तुम पर मन्दिरों में कोड़े पड़ेंगे और तुम जेलों में सड़ोगे। भाई भाई की मृत्यु का कारण बनेगा और पिता पुत्र की मृत्यु का ।" "जब तुम्हें एक देश में दुःख मिले, तुम दूसरे देश के लिए प्रयाण कर दो।" "भय मत करो यदि तुम्हारे शरीर को कष्ट मिले, क्योंकि तुम्हारी आत्मा अमर है ।" "जो बात सच्ची हो, उसको सबके सामने स्पष्ट कहो ।" "सत्य के लिए माता, पिता, स्त्री, बच्चे, भाई और बहिन सबको छोड़ दो।" "जो मेरे लिए ( सत्य के लिए ) सर्वस्व का त्याग नहीं कर सकता, वह मेरा शिष्य नहीं हो सकता । वह मुझको (सत्य को) नहीं पा सकता । " "जो मेरा शिष्य बनना स्वीकार करे, वह मुझमें विलीन हो जावे । जो मुझसे ( सत्य से) अपने संसारी मातापिता से प्रेम करता है, वह मेरे योग्य नहीं, और जो अपने पुत्र अथवा पुत्री को मुझसे प्यार करता है, वह भी मेरे योग्य नहीं। जो अपने जीवन की रक्षा करेगा, वह उस जीवन से हाथ धो बैठेगा, और जो मेरे लिए और सुखसंवाद के लिए जीवन उत्सर्ग करेगा, उसे जीवनदान मिलेगा । आत्मा को खोकर यदि जीवन मिला भी, तो किस काम का ?" कभी-कभी ईसा आवेश में आकर बहुत ही निष्ठुर प्रतीत होता था। एक समय ईसा ने एक व्यक्ति से कहा - "मेरे पीछे-पीछे श्रो।" उसने उत्तर दिया - "प्रभु, मुझे दो कि अपने पिता को समाधिस्थ कर आऊँ ।" ईसा ने कहा - "मुझे मृतकों से क्या वास्ता ? जा ईश्वर के राज्य की घोषणा कर ।" यह कथानक इस बात का प्रमाण है कि ईसा में अपने कार्य (Mission ) का कितना जोश भरा था ! उसको कितना आत्मविश्वास था ! बहुधा जो श्रम वह कहता था - "आा, मेरे पास आओ तुम, करते हो, और भारी बोझों से दबे जाते हो। मैं तुम्हें आराम पहुँचाऊँगा । तुम मुझमें विश्वास करो, और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं विनम्र हूँ। तुम्हारी श्रात्मा को शान्ति मिलेगी। मुझमें विश्वास करना अत्यंत सरल है ।" प्रारम्भ में तो ईसा की शिक्षाओं के प्रति कोई विरोध नहीं हुआ, यद्यपि ईसा ने अधिकारियों को प्रसन्न करने के लिए कोई कसर उठा नहीं रक्खी थी। अन्ती (Antipas ) के विरोध में कई बार उसने कह-सुन डाला था । तीस को भी ईसा की खबर लग चुकी थी। उसके अद्भुत कार्यों ( miracles ) के बारे में वह सुन चुका था। उसने उससे मिलने की इच्छा भी प्रकट की, पर ईसा उससे दूर ही रहा । एक बार किसी ने यह समाचार फैला दिया कि ईसा यहुन्ना के अतिरिक्त और कोई नहीं है। यहुन्ना पुनर्जीवित हो गया है। अन्तीस घबराया और बहुत बेचैन हो गया। वह ईसा को अपने राज्य से दूर रखने के उपाय सोचने लगा। कुछ कुलीन यहूदियों (Pharisees) ने ईसा से कह दिया कि अन्तीपस तुम्हें मार डालने की फ़िक्र में है। पर ईसा ने कोई परवाह न की। नाज़रथ में ही, जो ईसा की जन्मभूमि थी, उसका कोई आदर नहीं था । न तो
अतिशयोक्ति से काम नहीं लिया । उसने केवल एक सत्य का प्रकाशन किया । सत्य की ही छत्रछाया में तो सब सुखी रह सकते हैं। यदि जीवन में सत्य नहीं, तो कुछ भी नहीं । सत्य का ही प्रेम वास्तविक प्रेम है । जब ईसा ने कहा, "लिखी बात ही घातक होती है" तो उसने मानवता के हित के लिए एक बात कही। जितने धार्मिक ग्रन्थ वर्त्तमान हैं, वे सब मानव के लिए अहितकर सिद्ध हो रहे हैं । वेद, क़ुरान शरीफ़, इञ्जील आदि-आदि में लिखित बातें मानव के लिए दुःख का कारण बन रही हैं। इन पुस्तकों ने मानव से स्वतंत्र विचार करने के अधिकार को छीन लिया है। मानो वे मानव से कहती हैं, "जो कुछ विचार करना था वह हम में भरा है। तुम अपना विचार करना छोड़कर हमारे अनुभव को मानो। इसी में तुम्हारा कल्याण है !" ईसा ने केवल एक बात का प्रचार किया, "तुझे केवल प्रेम करने का अधिकार है।" " अपने पड़ोसी को अपने समान ही चाहो," अर्थात् स्वार्थ भावना का त्याग करो। किसी वस्तु को अपने लिए मत चाहो, बल्कि त्याग करना सीखो। ईसा की यह शिक्षा उपनिषद् के मन्त्र 'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मागृधः कस्यस्विद्धनम्' के समकक्ष है। इस शिक्षा द्वारा ईसा ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का आदर्श सामने रक्खा। यही आदर्श समझदार व्यक्तियों को आज दिन मान्य हो रहा है । त्याग की साधना को ध्यान में रखकर ईसा ने अपने अनुयायियों से कहा, "त्याग द्वारा ही तुमको मिला है, त्याग द्वारा ही उसका भोग करो।" "मेरे साथ चलो, या अकेले जहाँ जाओ, कुछ भी लेकर न जाओ - न पैसा, न खाना, न थैला, और न कपड़ा । पूर्ण त्याग की साधना करो। आतिथ्य पर जीवन निर्वाह करो।" "जब तुमको क़ैद किया जाय और तुम्हारा मुकदमा हो, तो कोई प्रमाण मत दो। अपनी रक्षा का कोई प्रबन्ध मत करो।" "जब तक तुम मानव के पुत्र न हो जाओ, तब तक इज़राइल के नगरों में पर्यटन करते रहो।" उसने कहा, "मैं जानता हूँ तुम मैमने हो और मैं तुम्हें भेड़ियों के बीच में भेज रहा हूँ ।" "तुम पर मन्दिरों में कोड़े पड़ेंगे और तुम जेलों में सड़ोगे। भाई भाई की मृत्यु का कारण बनेगा और पिता पुत्र की मृत्यु का ।" "जब तुम्हें एक देश में दुःख मिले, तुम दूसरे देश के लिए प्रयाण कर दो।" "भय मत करो यदि तुम्हारे शरीर को कष्ट मिले, क्योंकि तुम्हारी आत्मा अमर है ।" "जो बात सच्ची हो, उसको सबके सामने स्पष्ट कहो ।" "सत्य के लिए माता, पिता, स्त्री, बच्चे, भाई और बहिन सबको छोड़ दो।" "जो मेरे लिए सर्वस्व का त्याग नहीं कर सकता, वह मेरा शिष्य नहीं हो सकता । वह मुझको नहीं पा सकता । " "जो मेरा शिष्य बनना स्वीकार करे, वह मुझमें विलीन हो जावे । जो मुझसे अपने संसारी मातापिता से प्रेम करता है, वह मेरे योग्य नहीं, और जो अपने पुत्र अथवा पुत्री को मुझसे प्यार करता है, वह भी मेरे योग्य नहीं। जो अपने जीवन की रक्षा करेगा, वह उस जीवन से हाथ धो बैठेगा, और जो मेरे लिए और सुखसंवाद के लिए जीवन उत्सर्ग करेगा, उसे जीवनदान मिलेगा । आत्मा को खोकर यदि जीवन मिला भी, तो किस काम का ?" कभी-कभी ईसा आवेश में आकर बहुत ही निष्ठुर प्रतीत होता था। एक समय ईसा ने एक व्यक्ति से कहा - "मेरे पीछे-पीछे श्रो।" उसने उत्तर दिया - "प्रभु, मुझे दो कि अपने पिता को समाधिस्थ कर आऊँ ।" ईसा ने कहा - "मुझे मृतकों से क्या वास्ता ? जा ईश्वर के राज्य की घोषणा कर ।" यह कथानक इस बात का प्रमाण है कि ईसा में अपने कार्य का कितना जोश भरा था ! उसको कितना आत्मविश्वास था ! बहुधा जो श्रम वह कहता था - "आा, मेरे पास आओ तुम, करते हो, और भारी बोझों से दबे जाते हो। मैं तुम्हें आराम पहुँचाऊँगा । तुम मुझमें विश्वास करो, और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं विनम्र हूँ। तुम्हारी श्रात्मा को शान्ति मिलेगी। मुझमें विश्वास करना अत्यंत सरल है ।" प्रारम्भ में तो ईसा की शिक्षाओं के प्रति कोई विरोध नहीं हुआ, यद्यपि ईसा ने अधिकारियों को प्रसन्न करने के लिए कोई कसर उठा नहीं रक्खी थी। अन्ती के विरोध में कई बार उसने कह-सुन डाला था । तीस को भी ईसा की खबर लग चुकी थी। उसके अद्भुत कार्यों के बारे में वह सुन चुका था। उसने उससे मिलने की इच्छा भी प्रकट की, पर ईसा उससे दूर ही रहा । एक बार किसी ने यह समाचार फैला दिया कि ईसा यहुन्ना के अतिरिक्त और कोई नहीं है। यहुन्ना पुनर्जीवित हो गया है। अन्तीस घबराया और बहुत बेचैन हो गया। वह ईसा को अपने राज्य से दूर रखने के उपाय सोचने लगा। कुछ कुलीन यहूदियों ने ईसा से कह दिया कि अन्तीपस तुम्हें मार डालने की फ़िक्र में है। पर ईसा ने कोई परवाह न की। नाज़रथ में ही, जो ईसा की जन्मभूमि थी, उसका कोई आदर नहीं था । न तो
नैनोटेक्नोलॉजी उन सामग्रियों और संरचनाओं के साथ काम करती है जिनके परिमाण को नैनोमीटर में मापा जाता है, जो एक मीटर के अरबवें हिस्से के बराबर है। एक नैनोमीटर में कम से कम एक आयाम में एक माइक्रोमीटर के दसवें से छोटे आकार के गुण होते हैं; दूसरे शब्दों में, यह देखते हुए कि सामग्री की ऊंचाई, चौड़ाई और लंबाई होनी चाहिए, इन तीन आयामों में से एक 1 मीटर से विभाजित मीटर के दसवें से कम है। यह लागू विज्ञान परमाणुओं और अणुओं के स्तर पर विकसित होता है। रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के कुछ क्षेत्र हैं, जो विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए एक आशा के रूप में प्रकट होता है। नैनोटेक्नोलॉजी के विकास के पहले चरणों में से एक डीएनए की समझ है जो शरीर की प्रक्रियाओं के नियमन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में है। अतः, अणु जीवन प्रक्रियाओं में निर्धारक सिद्ध होते हैं। दूसरी ओर, नैनोमेडिसिन, दवा की एक शाखा है जो स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रक्रियाओं में नैनो तकनीक के ज्ञान का लाभ उठाती है। इस संदर्भ में, इसके संभावित अनुप्रयोगों में से एक नैनोमीटर-स्केल रोबोट का विकास है, जो मानव शरीर में प्रवेश करने और कैंसर कोशिकाओं की खोज और विनाश या दरारें की मरम्मत जैसी विभिन्न गतिविधियों को पूरा करने में सक्षम थे। हड्डी के ऊतक। इसे नैनोसिस्टम्स की इंजीनियरिंग के लिए उन्नत नैनो टेक्नोलॉजी के रूप में जाना जाता है जो आणविक पैमाने पर काम करती है। यह अनुशासन परमाणुओं की एक निश्चित व्यवस्था से निर्मित उत्पादों के साथ काम करता है। नैनोटेक्नोलॉजी के आलोचकों ने उनके विकास से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया है, जैसे कि नैनोसैंट्स के नए वर्ग की संभावित विषाक्तता या एक तथाकथित ग्रे कीट की संभावित उपस्थिति (जहां नैनोरोबोट्स नियंत्रण के बिना आत्म-प्रतिकृति करेंगे जब तक वे ग्रह पर सभी जीवित सामग्री का उपभोग नहीं करते) । यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नैनोटेक्नोलॉजी को ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कि रसायन विज्ञान, आणविक जीव विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान और चिकित्सा सहित अन्य विज्ञानों की भागीदारी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक एक सिद्धांत और व्यावहारिक कार्य को आवश्यक रूप से योगदान देता है ताकि दूसरे को आधार से शुरू किया जा सके जिस पर अनुसंधान और विकास हो सकता है, यही कारण है कि इस तकनीक को अभिसरण कहा जाता है । दूसरे शब्दों में, नैनो तकनीक की बदौलत वैज्ञानिक ज्ञान को विभाजित करने वाले अवरोधों को ध्वस्त कर दिया जाता है, जिससे परिणामों की जटिलता बढ़ जाती है। कई देश जिनकी अर्थव्यवस्था पूर्ण आर्थिक विकास से गुजर रही है, वे काफी आर्थिक संसाधनों और कुशल श्रम को नैनो तकनीक के संभावित अनुप्रयोगों की जांच में निवेश करते हैं। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, नैनोमेडिसिन मानव को लुभावने अवसर प्रदान करता है, खासकर जब यह माना जाता है कि यह विभिन्न प्रथाओं और प्रक्रियाओं में सुधार कर सकता है, जैसे कि निदान, इलाज, दवा प्रशासन और सर्जरी। दुनिया भर में, इस प्रकार की प्रौद्योगिकी के अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण प्रतिशत आवंटित करने वाली प्रयोगशालाओं की संख्या चालीस के आसपास है। दूसरी ओर, लगभग तीन सौ कंपनियां अपने नामों में नैनो उपसर्ग ले जाती हैं, हालांकि यह बाजार में उपलब्ध उत्पादों के प्रस्तावों में परिलक्षित नहीं होता है। कंप्यूटर विज्ञान के संबंध में, यह ज्ञात है कि आईबीएम, इंटेल और एनईसी की पसंद के अन्य लोगों के बीच, अपने वार्षिक अनुसंधान और विकास विभागों में लाखों का निवेश करते हैं, जो उनके द्वारा निर्मित घटकों की विशेषताओं को प्रभावित करता है। इसके अलावा, सबसे विकसित देशों की सरकारें नैनो प्रौद्योगिकी में बहुत रुचि दिखाती हैं, और उनके मौद्रिक दांव उन दसियों से अधिक हैं जो उपरोक्त कंपनियों को बना सकते हैं। लेकिन नैनो-टेक्नोलॉजी कुछ पारंपरिक उद्योगों के कई पहलुओं को सुधार सकती है, जो लोग हमेशा शब्द प्रौद्योगिकी से संबंधित नहीं होते हैं; इस तरह के कपड़ा और जूते की दुनिया, और भोजन, स्वच्छता, मोटर वाहन और निर्माण क्षेत्रों का मामला है।
नैनोटेक्नोलॉजी उन सामग्रियों और संरचनाओं के साथ काम करती है जिनके परिमाण को नैनोमीटर में मापा जाता है, जो एक मीटर के अरबवें हिस्से के बराबर है। एक नैनोमीटर में कम से कम एक आयाम में एक माइक्रोमीटर के दसवें से छोटे आकार के गुण होते हैं; दूसरे शब्दों में, यह देखते हुए कि सामग्री की ऊंचाई, चौड़ाई और लंबाई होनी चाहिए, इन तीन आयामों में से एक एक मीटर से विभाजित मीटर के दसवें से कम है। यह लागू विज्ञान परमाणुओं और अणुओं के स्तर पर विकसित होता है। रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के कुछ क्षेत्र हैं, जो विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए एक आशा के रूप में प्रकट होता है। नैनोटेक्नोलॉजी के विकास के पहले चरणों में से एक डीएनए की समझ है जो शरीर की प्रक्रियाओं के नियमन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में है। अतः, अणु जीवन प्रक्रियाओं में निर्धारक सिद्ध होते हैं। दूसरी ओर, नैनोमेडिसिन, दवा की एक शाखा है जो स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रक्रियाओं में नैनो तकनीक के ज्ञान का लाभ उठाती है। इस संदर्भ में, इसके संभावित अनुप्रयोगों में से एक नैनोमीटर-स्केल रोबोट का विकास है, जो मानव शरीर में प्रवेश करने और कैंसर कोशिकाओं की खोज और विनाश या दरारें की मरम्मत जैसी विभिन्न गतिविधियों को पूरा करने में सक्षम थे। हड्डी के ऊतक। इसे नैनोसिस्टम्स की इंजीनियरिंग के लिए उन्नत नैनो टेक्नोलॉजी के रूप में जाना जाता है जो आणविक पैमाने पर काम करती है। यह अनुशासन परमाणुओं की एक निश्चित व्यवस्था से निर्मित उत्पादों के साथ काम करता है। नैनोटेक्नोलॉजी के आलोचकों ने उनके विकास से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया है, जैसे कि नैनोसैंट्स के नए वर्ग की संभावित विषाक्तता या एक तथाकथित ग्रे कीट की संभावित उपस्थिति । यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नैनोटेक्नोलॉजी को ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कि रसायन विज्ञान, आणविक जीव विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान और चिकित्सा सहित अन्य विज्ञानों की भागीदारी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक एक सिद्धांत और व्यावहारिक कार्य को आवश्यक रूप से योगदान देता है ताकि दूसरे को आधार से शुरू किया जा सके जिस पर अनुसंधान और विकास हो सकता है, यही कारण है कि इस तकनीक को अभिसरण कहा जाता है । दूसरे शब्दों में, नैनो तकनीक की बदौलत वैज्ञानिक ज्ञान को विभाजित करने वाले अवरोधों को ध्वस्त कर दिया जाता है, जिससे परिणामों की जटिलता बढ़ जाती है। कई देश जिनकी अर्थव्यवस्था पूर्ण आर्थिक विकास से गुजर रही है, वे काफी आर्थिक संसाधनों और कुशल श्रम को नैनो तकनीक के संभावित अनुप्रयोगों की जांच में निवेश करते हैं। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, नैनोमेडिसिन मानव को लुभावने अवसर प्रदान करता है, खासकर जब यह माना जाता है कि यह विभिन्न प्रथाओं और प्रक्रियाओं में सुधार कर सकता है, जैसे कि निदान, इलाज, दवा प्रशासन और सर्जरी। दुनिया भर में, इस प्रकार की प्रौद्योगिकी के अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण प्रतिशत आवंटित करने वाली प्रयोगशालाओं की संख्या चालीस के आसपास है। दूसरी ओर, लगभग तीन सौ कंपनियां अपने नामों में नैनो उपसर्ग ले जाती हैं, हालांकि यह बाजार में उपलब्ध उत्पादों के प्रस्तावों में परिलक्षित नहीं होता है। कंप्यूटर विज्ञान के संबंध में, यह ज्ञात है कि आईबीएम, इंटेल और एनईसी की पसंद के अन्य लोगों के बीच, अपने वार्षिक अनुसंधान और विकास विभागों में लाखों का निवेश करते हैं, जो उनके द्वारा निर्मित घटकों की विशेषताओं को प्रभावित करता है। इसके अलावा, सबसे विकसित देशों की सरकारें नैनो प्रौद्योगिकी में बहुत रुचि दिखाती हैं, और उनके मौद्रिक दांव उन दसियों से अधिक हैं जो उपरोक्त कंपनियों को बना सकते हैं। लेकिन नैनो-टेक्नोलॉजी कुछ पारंपरिक उद्योगों के कई पहलुओं को सुधार सकती है, जो लोग हमेशा शब्द प्रौद्योगिकी से संबंधित नहीं होते हैं; इस तरह के कपड़ा और जूते की दुनिया, और भोजन, स्वच्छता, मोटर वाहन और निर्माण क्षेत्रों का मामला है।
दर्शकों को अगले हफ्ते से इंग्लैंड में कुछ खेल प्रतियोगिताओं के लिये स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति दी जायेगी। इंग्लैंड की योजना अक्टूबर में स्टेडियमों को व्यापक रूप खोलने की है लेकिन उससे पहले वह चाहता है कि कोरोना वायरस को रोकने के लिये उठाये गये कदमों का परीक्षण किया जाये। मार्च के बाद 26 और 27 जुलाई को घरेलू क्रिकेट पहली खेल स्पर्धा होगा जिसमें दर्शकों को स्टेडियम में जाने की अनुमति दी जायेगी। 31 जुलाई से शेफील्ड में विश्व स्नूकर चैम्पियनशिप शुरू होगी जो एक अगस्त को ग्लोरियस गुडवुड घोड़ा रेस महोत्सव के साथ सरकार की प्रशंसकों की वापसी की योजना का हिस्सा है। हालांकि सरकार को महामारी के बारे में सलाह देने वाले प्रोफेसर सुसान मिशी को डर है कि प्रशसंको के लिये खेलों को खोलने से - विशेषकर इंडोर स्थलों को - वायरस संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं और इससे एक और लॉकडाउन भी लगाना पड़ सकता है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "हम बहुत जल्दी ही यह कदम उठा रहे हैं। " स्टेडियम की क्षमता पर अब भी प्रतिबंध लगा होगा। स्टेडियम में प्रवेश के लिये सामाजिक दूरी और वन-वे प्रणाली जरूरी होगी। खाना, सामान खरीदने या सट्टेबाजी के लिये जहां सामाजिक दूरी बरकरार नहीं रखी जा सकती, वहां बैरियर या स्क्रीन लगायी जायेंगी। खेल मंत्री नाइजेल हडलस्टोन ने कहा कि स्टेडियमों के पूरा भरने से पहले यह कुछ समय के लिये ऐसा ही रहेगा।
दर्शकों को अगले हफ्ते से इंग्लैंड में कुछ खेल प्रतियोगिताओं के लिये स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति दी जायेगी। इंग्लैंड की योजना अक्टूबर में स्टेडियमों को व्यापक रूप खोलने की है लेकिन उससे पहले वह चाहता है कि कोरोना वायरस को रोकने के लिये उठाये गये कदमों का परीक्षण किया जाये। मार्च के बाद छब्बीस और सत्ताईस जुलाई को घरेलू क्रिकेट पहली खेल स्पर्धा होगा जिसमें दर्शकों को स्टेडियम में जाने की अनुमति दी जायेगी। इकतीस जुलाई से शेफील्ड में विश्व स्नूकर चैम्पियनशिप शुरू होगी जो एक अगस्त को ग्लोरियस गुडवुड घोड़ा रेस महोत्सव के साथ सरकार की प्रशंसकों की वापसी की योजना का हिस्सा है। हालांकि सरकार को महामारी के बारे में सलाह देने वाले प्रोफेसर सुसान मिशी को डर है कि प्रशसंको के लिये खेलों को खोलने से - विशेषकर इंडोर स्थलों को - वायरस संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं और इससे एक और लॉकडाउन भी लगाना पड़ सकता है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "हम बहुत जल्दी ही यह कदम उठा रहे हैं। " स्टेडियम की क्षमता पर अब भी प्रतिबंध लगा होगा। स्टेडियम में प्रवेश के लिये सामाजिक दूरी और वन-वे प्रणाली जरूरी होगी। खाना, सामान खरीदने या सट्टेबाजी के लिये जहां सामाजिक दूरी बरकरार नहीं रखी जा सकती, वहां बैरियर या स्क्रीन लगायी जायेंगी। खेल मंत्री नाइजेल हडलस्टोन ने कहा कि स्टेडियमों के पूरा भरने से पहले यह कुछ समय के लिये ऐसा ही रहेगा।
अब मुगलसराय की तरफ जानेवालों गाड़ी का समय हो रहा था। धीरे धीरे मुसाफिर खाने में आदमियों की संख्या बढ़ रही थी। कालीचरण ने कहा- "मोघोशरण अच्छा है हम लोग अपराध क्यों लें। अपनी इस पतोहू को रामनगर वापस भेज दो। इसके माँ बाप के जी में जो आएगा करेंगे। हम लोगों से क्या मतलब ?" अन्त में सब लोगों की राय से यह निश्चय हुआ कि माधो-. शरण विम्याच देवी का दर्शन करते हुए सब को लेकर सिरसा चले जायँ और इस बात का पता लगाएँ कि श्याम सुन्दर कहाँ गया तथा कालीचरण जिस पस्ते से आए थे उसी से होकर चन्द्रकला को उसके पिता के घर रामनगर पहुंचा आए । इस तमाम बात चीत के बीच में अब्दुल्ला अपने एक साथी को लेकर इधर उधर टहल रहा था कि ये लोग इस नवीना दुलहिन को छोड़ दें तो वह उसे ले जाकर अप घर बसावे । अब्दुल्ला जब नमाज़ पढ़ने जाता था तो यही जपता था कि या खुदा मुझे एक दुलहिन दे। उसने समझा कि खुदा ने उसकी बिनती सुनली है और घर बैठे उसे एक दुलहिन भेज दी है। उसके श्रानन्द का ठिकाना नहीं था। पर जब पंडित मंडली में इस प्रकार का निश्चय हुआ तो उसकी आशा पर पानी फिर गया। उसका चेहरा बुझे हुए भाड़ की तरह शान्त हो गया और वह अपने साथी से कहने लगा- "यार इतने पर भी मेरे दिन नहीं लौटे तो अब शायद कभी न छौटेंगे। दुलहिन क्या है सोने की चिड़िया है। पिंजड़े भाकर निकल गई ।" उसका साथी बोला- "सन्न करो अब्दुल्ला ! तुम्हारे दिन छोटैगे। मैं पंडितों की श्रदतों से खूब वाकिफ हूँ। देख लेना आज नहीं तो दस दिन बात इस औरत को ये लोग तुम्हारे घर पहुंचा जायँगे ।" अब्दुल्ला अकड़ कर इधर उधर घूमने लगा और गुन गुनाने लगा देखा जो हुस्न यार का तबीयत मचल गई। आँखों का था कसूर छुरी दिल पै चल गई ।
अब मुगलसराय की तरफ जानेवालों गाड़ी का समय हो रहा था। धीरे धीरे मुसाफिर खाने में आदमियों की संख्या बढ़ रही थी। कालीचरण ने कहा- "मोघोशरण अच्छा है हम लोग अपराध क्यों लें। अपनी इस पतोहू को रामनगर वापस भेज दो। इसके माँ बाप के जी में जो आएगा करेंगे। हम लोगों से क्या मतलब ?" अन्त में सब लोगों की राय से यह निश्चय हुआ कि माधो-. शरण विम्याच देवी का दर्शन करते हुए सब को लेकर सिरसा चले जायँ और इस बात का पता लगाएँ कि श्याम सुन्दर कहाँ गया तथा कालीचरण जिस पस्ते से आए थे उसी से होकर चन्द्रकला को उसके पिता के घर रामनगर पहुंचा आए । इस तमाम बात चीत के बीच में अब्दुल्ला अपने एक साथी को लेकर इधर उधर टहल रहा था कि ये लोग इस नवीना दुलहिन को छोड़ दें तो वह उसे ले जाकर अप घर बसावे । अब्दुल्ला जब नमाज़ पढ़ने जाता था तो यही जपता था कि या खुदा मुझे एक दुलहिन दे। उसने समझा कि खुदा ने उसकी बिनती सुनली है और घर बैठे उसे एक दुलहिन भेज दी है। उसके श्रानन्द का ठिकाना नहीं था। पर जब पंडित मंडली में इस प्रकार का निश्चय हुआ तो उसकी आशा पर पानी फिर गया। उसका चेहरा बुझे हुए भाड़ की तरह शान्त हो गया और वह अपने साथी से कहने लगा- "यार इतने पर भी मेरे दिन नहीं लौटे तो अब शायद कभी न छौटेंगे। दुलहिन क्या है सोने की चिड़िया है। पिंजड़े भाकर निकल गई ।" उसका साथी बोला- "सन्न करो अब्दुल्ला ! तुम्हारे दिन छोटैगे। मैं पंडितों की श्रदतों से खूब वाकिफ हूँ। देख लेना आज नहीं तो दस दिन बात इस औरत को ये लोग तुम्हारे घर पहुंचा जायँगे ।" अब्दुल्ला अकड़ कर इधर उधर घूमने लगा और गुन गुनाने लगा देखा जो हुस्न यार का तबीयत मचल गई। आँखों का था कसूर छुरी दिल पै चल गई ।
नयी दिल्ली : कोझिकोड में कारीपुर हवाईअड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस के विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है जिसे विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा आगे की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा. डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (सीवीआर) मिलकर विमान का 'ब्लैक बॉक्स' बनाते हैं. दुबई से 190 लोगों को लेकर आ रहा एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान शुक्रवार शाम सात बजकर 40 मिनट पर भारी बारिश के बीच कोझिकोड हवाईअड्डे पर उतरने के दौरान हवाईपट्टी से फिसलने के बाद 35 फुट गहरी खाई में जा गिरा था और उसके दो टुकड़े हो गए थे. इस हादसे में घायल हुए एक और व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद मृतक संख्या शनिवार को बढ़कर 18 हो गई. डीएफडीआर विमान की हवाई गति, ऊंचाई और ईंधन आदि से संबंधित आंकड़ों को रिकॉर्ड करता है. अच्छी गुणवत्ता का डीएफडीआर 25 घंटे तक का उड़ान डेटा दर्ज कर सकता है. सीवीआर विमान के कॉकपिट में होने वाली सभी बातचीत की रिकॉर्डिंग रखता है. विमान हादसे के बाद मिले ब्लैक बॉक्स से जांचकर्ताओं को उड़ान का विस्तृत डेटा और वॉइस रिकॉर्डिंग मिलती है ताकि दुर्घटना के कारणों का पता चल सके.
नयी दिल्ली : कोझिकोड में कारीपुर हवाईअड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस के विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है जिसे विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो द्वारा आगे की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा. डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर मिलकर विमान का 'ब्लैक बॉक्स' बनाते हैं. दुबई से एक सौ नब्बे लोगों को लेकर आ रहा एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान शुक्रवार शाम सात बजकर चालीस मिनट पर भारी बारिश के बीच कोझिकोड हवाईअड्डे पर उतरने के दौरान हवाईपट्टी से फिसलने के बाद पैंतीस फुट गहरी खाई में जा गिरा था और उसके दो टुकड़े हो गए थे. इस हादसे में घायल हुए एक और व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद मृतक संख्या शनिवार को बढ़कर अट्ठारह हो गई. डीएफडीआर विमान की हवाई गति, ऊंचाई और ईंधन आदि से संबंधित आंकड़ों को रिकॉर्ड करता है. अच्छी गुणवत्ता का डीएफडीआर पच्चीस घंटाटे तक का उड़ान डेटा दर्ज कर सकता है. सीवीआर विमान के कॉकपिट में होने वाली सभी बातचीत की रिकॉर्डिंग रखता है. विमान हादसे के बाद मिले ब्लैक बॉक्स से जांचकर्ताओं को उड़ान का विस्तृत डेटा और वॉइस रिकॉर्डिंग मिलती है ताकि दुर्घटना के कारणों का पता चल सके.
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कलेक्टर का एक मामले में ऐसा इंसाफ सामने आया है जिसे सुनकर लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। कटनी( Madhya Pradesh). मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कलेक्टर का एक मामले में ऐसा इंसाफ सामने आया है जिसे सुनकर लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। कटनी के कलेक्टर अवि प्रसाद ने एक वृद्धा को न्याय दिलाने के लिए कुछ ऐसा किया कि लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। वहीं वृद्धा उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थक रही है। मामला कटनी जिले के बहोरीबंद के बचैया ग्राम पंचायत का है। जहां बुजुर्ग इतिया बाई को पंचायत के रोजगार सहायक ने कागजातों में मृत घोषित कर दिया था। जिससे बुजुर्ग महिला की अक्टूबर 2021 से पेंशन बंद हो गई थी। मामले की जानकारी लगते ही कलेक्टर अवि प्रसाद ने इतिया बाई से मुलाकात करते हुए पंचायत के रिकॉर्ड को दुरुस्त करवाया। कलेक्टर के आदेश पर दोबारा बुजुर्ग महिला की पेंशन लगवाई गई। कलेक्टर अवि प्रसाद ने इतिया बाई से मुलाकात करते हुए पंचायत के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के साथ ही रोजगार सहायक अंबुक यादव की पेमेंट से बुजुर्ग महिला को 14 महीने की पेंशन देने के निर्देश दिए। ग़ौरतलब है कि इतिया बाई को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन मिलती थी, लेकिन रोजगार सहायक अंजुब यादव की लापरवाही के चलते हितग्राही पोर्टल से महिला को मृत बताते हुए उसका नाम लिस्ट से काट दिया था, जिसके बाद साल 2021 के अक्टूबर महीने से पेंशन आना बंद हो गई थी। महिला अपनी शिकायत लेकर साल भर से ज्यादा वक्त तक भटकती रही। इसी बीच महिला ने कलेक्टर अवि प्रसाद से मिलकर शिकायत दी, जिस पर कलेक्टर ने लापरवाह रोजगार सहायक को फटकार लगाते हुए फिर कभी इस तरह की गलती न करने की बात कहते हुए दोषी रोजगार को सजा के तौर पर उसकी पेमेंट से बुजुर्ग महिला को 14 महीने की पेंशन देने के निर्देश दिए। पेंशन मिलने के बाद इतिया बाई ने बेहद खुश हुई और उसने कलेक्टर अवि प्रसाद का आभार व्यक्त किया।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कलेक्टर का एक मामले में ऐसा इंसाफ सामने आया है जिसे सुनकर लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। कटनी. मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कलेक्टर का एक मामले में ऐसा इंसाफ सामने आया है जिसे सुनकर लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। कटनी के कलेक्टर अवि प्रसाद ने एक वृद्धा को न्याय दिलाने के लिए कुछ ऐसा किया कि लोग उनकी खूब वाहवाही कर रहे हैं। वहीं वृद्धा उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थक रही है। मामला कटनी जिले के बहोरीबंद के बचैया ग्राम पंचायत का है। जहां बुजुर्ग इतिया बाई को पंचायत के रोजगार सहायक ने कागजातों में मृत घोषित कर दिया था। जिससे बुजुर्ग महिला की अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस से पेंशन बंद हो गई थी। मामले की जानकारी लगते ही कलेक्टर अवि प्रसाद ने इतिया बाई से मुलाकात करते हुए पंचायत के रिकॉर्ड को दुरुस्त करवाया। कलेक्टर के आदेश पर दोबारा बुजुर्ग महिला की पेंशन लगवाई गई। कलेक्टर अवि प्रसाद ने इतिया बाई से मुलाकात करते हुए पंचायत के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के साथ ही रोजगार सहायक अंबुक यादव की पेमेंट से बुजुर्ग महिला को चौदह महीने की पेंशन देने के निर्देश दिए। ग़ौरतलब है कि इतिया बाई को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन मिलती थी, लेकिन रोजगार सहायक अंजुब यादव की लापरवाही के चलते हितग्राही पोर्टल से महिला को मृत बताते हुए उसका नाम लिस्ट से काट दिया था, जिसके बाद साल दो हज़ार इक्कीस के अक्टूबर महीने से पेंशन आना बंद हो गई थी। महिला अपनी शिकायत लेकर साल भर से ज्यादा वक्त तक भटकती रही। इसी बीच महिला ने कलेक्टर अवि प्रसाद से मिलकर शिकायत दी, जिस पर कलेक्टर ने लापरवाह रोजगार सहायक को फटकार लगाते हुए फिर कभी इस तरह की गलती न करने की बात कहते हुए दोषी रोजगार को सजा के तौर पर उसकी पेमेंट से बुजुर्ग महिला को चौदह महीने की पेंशन देने के निर्देश दिए। पेंशन मिलने के बाद इतिया बाई ने बेहद खुश हुई और उसने कलेक्टर अवि प्रसाद का आभार व्यक्त किया।
विपक्ष की बैठक में हमने बैठे हुए राहुल के कंधे पर ममता की हथेली देखी । कुछ समझाते हुए ममता। राहुल का मान बढ़ रहा है। कल तक जिस राहुल का कोई मान नहीं था, आज वे चाहे अनचाहे सबकी नजरों के तारे हैं । यह कैसे हो गया। यह चमत्कार है ! जीवन में कई चीजें कई बार आपको फंसा देती हैं और कई चीजें और कई बातें ऐसी भी होती हैं जो आपको बांध देती हैं। ऐसा भी होता है कि प्रेम, करुणा, दया जैसे मूल्य आपमें चामत्कारिक रूप से परिवर्तन लाते हैं। ऐसा लगता है कि एक यात्रा ने राहुल गांधी की सारी अकड़ और हेकड़ी निकाल कर फेंक दी है। जब मुहब्बत हावी होती है तो उसकी पहली और अबूझ शर्त ही यह होती है कि या तो मैं या मेरे दुश्मन। मुहब्बत से लबरेज राहुल के पास अन्यत्र कोई चारा नहीं है। परिवर्तन होना ही था, जो हम देख रहे हैं। मैंने राहुल गांधी को केवल राजनीति की ही नजर से नहीं देखा बल्कि पहले एक इंसान की नजर से देखा। जिसमें न भारत की कोई गहरी समझ, न राजनीति की चतुराई बल्कि हेकड़ी भरा एक लौंडापन ही ज्यादा नजर आया। उस समय राहुल गांधी का मतलब सिर्फ गांधी परिवार का होना मात्र था। आरएसएस के दिग्गज कांग्रेसियों की इसी कमजोरी से वाकिफ थे इसीलिए राहुल गांधी को 'पप्पू' के रूप में टारगेट किया जो देश भर में सफल कार्यक्रम बना। जो राहुल गांधी आज हमें बदले हुए नजर आते हैं वे उस बड़ी जमात में आज भी पप्पू ही हैं जो सोचने समझने में स्वयं से लाचार है। बहरहाल, चार हजार किमी की पैदल यात्रा ने गजब किया और सबसे ज्यादा उथले व्यक्तित्व को धोया उस नारे ने - नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान। जब आप हर जगह और हर बार यह नारा दोहराएंगे तो आपको यात्रा के दौरान के वे दृश्य तो नजर आएंगे ही जो देश के हर वर्ग ने आपकी छाती से चिपट कर बनाए थे। यहीं से राहुल गांधी में लड़कपन छूटा और व्यक्तित्व व व्यवहार में स्थायित्व आया। 2019 के चुनावों में जब प्रचार के दौरान अपरिपक्व राहुल गांधी की तूती बोल रही थी तब के परिणामों से मिले झटके से पहला सबक यही था कि गांधी परिवार से अलग अध्यक्ष का चुनाव और खुद को पीछे खींचने की जिद । यह परिवर्तन का पहला कदम था, जो सराहनीय था लेकिन जो कांग्रेसियों को शायद पसंद नहीं आया था पर जो राहुल की जिद के आगे बेबस थे । वहां से विपक्ष की अब की बैठक तक राहुल गांधी हमें एक भीतर ही भीतर परिपक्व होते नेता के रूप में दिखते हैं जिसमें फालतू की अकड़ और हठीलापन काफूर है और लचीलापन मौजूद है। यह परिवर्तन कांग्रेस की बेहतर राह मुकम्मल करेगा ऐसा दिखता है। बड़ा दल होने के बावजूद खुद को पीछे करके चलना यह बड़प्पन न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि विपक्ष की एकता के लिए जरूरी था जो राहुल और कांग्रेस ने दिखाया है। उम्मीदें इसी नीति से बंधी हैं और आगे भी जारी रहेंगी ही , ऐसा प्रतीत होता है। इस रूप में मान कर चलिए कि राहुल आज के तो नहीं लेकिन भविष्य में भारत के सफल नेता जरूर साबित होंगे। इस बात को दोहराने के बावजूद कि मैं शुरु से राहुल गांधी का कट्टर आलोचक अंत तक रहा हूं अगर यात्रा से गुल न खिलते तो शायद न जाने कब तक रहता ही । इस बार अभय दुबे शो इंटरनेट फेल होने की वजह से कब शुरु होकर कब खत्म हो गया पता भी नहीं चला। फिर भी जितना सुना पसंद आया। संतोष भारतीय जी बीच बीच में कुछ और वीडियो भी डालते रहते हैं। कल रात ही वीपी सिंह को याद करते हुए अखिलेंद्र प्रताप सिंह से रोचक बातचीत की । इससे पहले एक वीडियो उन्होंने मोदी की बेवकूफी भरे उद्बोधन पर किया था। मोदी का कहना था कि जब जब भारत पर आफत आई है तब तब अमरीका साथ खड़ा हुआ है। मोदी कब झूठ बोलें, कब बेवकूफी भरी बातें करें और कब किसी के लिए अपशब्द बोल दें कोई नयी बात नहीं। संतोष जी ने अमरीका की मदद वाली बात पर जो वीडियो प्रस्तुत किया वह बड़ा तार्किक था। सत्यता के लिए वह देखा जाना चाहिए। अमिताभ श्रीवास्तव 'सिनेमा संवाद' में बड़े मौजूं विषय उठाते हैं। इस बार इमरजेंसी को विषय बनाते हुए फिल्मों पर उसके प्रभाव पर बात की । पैनल जोरदार था। लेकिन अंधविश्वासी या कहिए दक्षिण पंथ के रुझान वाले कमलेश पांडेय को इस दौर में किसी भी प्रकार से 'अघोषित इमरजेंसी' नजर नहीं आती, हैरत कर देने वाली बात लगी । एक बार पहले भी अंधविश्वास को बढ़ाने वाली बातें वे कर चुके हैं। वे हिंदी सिनेमा के बड़े राइटर हैं । ? इस पूरी बातचीत में किसी ने भी कंगना रनौत की आने वाली फिल्म 'इमरजेंसी' का जिक्र नहीं किया। वह न भी हो पर किसी ने इस ओर भी किसी ने इशारा नहीं किया कि जो फिल्में बन रही हैं वे समाज को किस तरह प्रभावित कर रही हैं । 'केरला स्टोरी' और 'कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों से समाज को कैसे उकसाया जाता है छः प्रबुद्ध विद्वानों ने इस दिशा में कैसी भी बात नहीं की । ये फिल्में बनाई ही इसीलिए जाती हैं। बल्कि इस दौर में खासतौर पर बनाई जा रही हैं। कंगना की 'इमरजेंसी' भी एकदम नयी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली फिल्म है। अमिताभ के प्रयास अच्छे हैं। कम से कम रविवार को राजनीति से अलग स्वाद तो मिलता है। 'ताना बाना' इस बार बड़ा धनी कार्यक्रम था। बहस में अपूर्वानंद और ओम थानवी थे । बहस भी रोचक विषय पर थी - 'हिंदी को हिंसक कौन और क्यों बना रहा है' । इस बहस को देखिए। साथ में हिंदी यूनिवर्सिटी की अर्जुमंद आरा भी हैं। आजकल 'नमस्कार की लंबी तान' नहीं सुनाई पड़ रही है। कानों को बड़ा सुकून है। आशुतोष विदेश में छुट्टी मना रहे हैं। वे पैनलिस्ट ही अच्छे । उनकी एवज में आशुतोष की बात शरत प्रधान अच्छा कर रहे हैं। आलोक जोशी आजकल भड़कने लगे हैं। चिढ़ाने वाले लोग तो हर जगह मिलेंगे आलोक जी। सवाल जवाब वाले कार्यक्रम में आपका अचानक तैश में आ जाना बहुत नहीं भाया। पर सत्य हिंदी में तो सभी गर्म मिजाज़ के हैं ज्यादातर। क्या आशुतोष, क्या आलोक जोशी, क्या अंबरीष। मुकेश जी भी कभी कभी चिढ़ जाते हैं। रवीश कुमार और आरफा खानम शेरवानी को जितना ट्रोल किया जाता है उतना तो शायद किसी और को ट्रोल नहीं किया जाता होगा। फिर भी उनमें 'अपेक्षित' सौम्यता है। खैर अपना अपना मिजाज़ है। हमें तो कुल मिलाकर यह चाहिए कि मोदी को 2024 में रुखसत किया जाए । बाकी बातें बाद में देखी जाएंगी। हिंदुस्तान दसों दिशाओं से न केवल बरबाद हो रहा है बल्कि जीवन निकृष्ट होता जा रहा है। राहुल और लचीलापन, क्या मायने हैं इसके .... . विपक्ष की बैठक में हमने बैठे हुए राहुल के कंधे पर ममता की हथेली देखी । कुछ समझाते हुए ममता। राहुल का मान बढ़ रहा है। कल तक जिस राहुल का कोई मान नहीं था, आज वे चाहे अनचाहे सबकी नजरों के तारे हैं । यह कैसे हो गया। यह चमत्कार है ! जीवन में कई चीजें कई बार आपको फंसा देती हैं और कई चीजें और कई बातें ऐसी भी होती हैं जो आपको बांध देती हैं। ऐसा भी होता है कि प्रेम, करुणा, दया जैसे मूल्य आपमें चामत्कारिक रूप से परिवर्तन लाते हैं। ऐसा लगता है कि एक यात्रा ने राहुल गांधी की सारी अकड़ और हेकड़ी निकाल कर फेंक दी है। जब मुहब्बत हावी होती है तो उसकी पहली और अबूझ शर्त ही यह होती है कि या तो मैं या मेरे दुश्मन। मुहब्बत से लबरेज राहुल के पास अन्यत्र कोई चारा नहीं है। परिवर्तन होना ही था, जो हम देख रहे हैं।
विपक्ष की बैठक में हमने बैठे हुए राहुल के कंधे पर ममता की हथेली देखी । कुछ समझाते हुए ममता। राहुल का मान बढ़ रहा है। कल तक जिस राहुल का कोई मान नहीं था, आज वे चाहे अनचाहे सबकी नजरों के तारे हैं । यह कैसे हो गया। यह चमत्कार है ! जीवन में कई चीजें कई बार आपको फंसा देती हैं और कई चीजें और कई बातें ऐसी भी होती हैं जो आपको बांध देती हैं। ऐसा भी होता है कि प्रेम, करुणा, दया जैसे मूल्य आपमें चामत्कारिक रूप से परिवर्तन लाते हैं। ऐसा लगता है कि एक यात्रा ने राहुल गांधी की सारी अकड़ और हेकड़ी निकाल कर फेंक दी है। जब मुहब्बत हावी होती है तो उसकी पहली और अबूझ शर्त ही यह होती है कि या तो मैं या मेरे दुश्मन। मुहब्बत से लबरेज राहुल के पास अन्यत्र कोई चारा नहीं है। परिवर्तन होना ही था, जो हम देख रहे हैं। मैंने राहुल गांधी को केवल राजनीति की ही नजर से नहीं देखा बल्कि पहले एक इंसान की नजर से देखा। जिसमें न भारत की कोई गहरी समझ, न राजनीति की चतुराई बल्कि हेकड़ी भरा एक लौंडापन ही ज्यादा नजर आया। उस समय राहुल गांधी का मतलब सिर्फ गांधी परिवार का होना मात्र था। आरएसएस के दिग्गज कांग्रेसियों की इसी कमजोरी से वाकिफ थे इसीलिए राहुल गांधी को 'पप्पू' के रूप में टारगेट किया जो देश भर में सफल कार्यक्रम बना। जो राहुल गांधी आज हमें बदले हुए नजर आते हैं वे उस बड़ी जमात में आज भी पप्पू ही हैं जो सोचने समझने में स्वयं से लाचार है। बहरहाल, चार हजार किमी की पैदल यात्रा ने गजब किया और सबसे ज्यादा उथले व्यक्तित्व को धोया उस नारे ने - नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान। जब आप हर जगह और हर बार यह नारा दोहराएंगे तो आपको यात्रा के दौरान के वे दृश्य तो नजर आएंगे ही जो देश के हर वर्ग ने आपकी छाती से चिपट कर बनाए थे। यहीं से राहुल गांधी में लड़कपन छूटा और व्यक्तित्व व व्यवहार में स्थायित्व आया। दो हज़ार उन्नीस के चुनावों में जब प्रचार के दौरान अपरिपक्व राहुल गांधी की तूती बोल रही थी तब के परिणामों से मिले झटके से पहला सबक यही था कि गांधी परिवार से अलग अध्यक्ष का चुनाव और खुद को पीछे खींचने की जिद । यह परिवर्तन का पहला कदम था, जो सराहनीय था लेकिन जो कांग्रेसियों को शायद पसंद नहीं आया था पर जो राहुल की जिद के आगे बेबस थे । वहां से विपक्ष की अब की बैठक तक राहुल गांधी हमें एक भीतर ही भीतर परिपक्व होते नेता के रूप में दिखते हैं जिसमें फालतू की अकड़ और हठीलापन काफूर है और लचीलापन मौजूद है। यह परिवर्तन कांग्रेस की बेहतर राह मुकम्मल करेगा ऐसा दिखता है। बड़ा दल होने के बावजूद खुद को पीछे करके चलना यह बड़प्पन न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि विपक्ष की एकता के लिए जरूरी था जो राहुल और कांग्रेस ने दिखाया है। उम्मीदें इसी नीति से बंधी हैं और आगे भी जारी रहेंगी ही , ऐसा प्रतीत होता है। इस रूप में मान कर चलिए कि राहुल आज के तो नहीं लेकिन भविष्य में भारत के सफल नेता जरूर साबित होंगे। इस बात को दोहराने के बावजूद कि मैं शुरु से राहुल गांधी का कट्टर आलोचक अंत तक रहा हूं अगर यात्रा से गुल न खिलते तो शायद न जाने कब तक रहता ही । इस बार अभय दुबे शो इंटरनेट फेल होने की वजह से कब शुरु होकर कब खत्म हो गया पता भी नहीं चला। फिर भी जितना सुना पसंद आया। संतोष भारतीय जी बीच बीच में कुछ और वीडियो भी डालते रहते हैं। कल रात ही वीपी सिंह को याद करते हुए अखिलेंद्र प्रताप सिंह से रोचक बातचीत की । इससे पहले एक वीडियो उन्होंने मोदी की बेवकूफी भरे उद्बोधन पर किया था। मोदी का कहना था कि जब जब भारत पर आफत आई है तब तब अमरीका साथ खड़ा हुआ है। मोदी कब झूठ बोलें, कब बेवकूफी भरी बातें करें और कब किसी के लिए अपशब्द बोल दें कोई नयी बात नहीं। संतोष जी ने अमरीका की मदद वाली बात पर जो वीडियो प्रस्तुत किया वह बड़ा तार्किक था। सत्यता के लिए वह देखा जाना चाहिए। अमिताभ श्रीवास्तव 'सिनेमा संवाद' में बड़े मौजूं विषय उठाते हैं। इस बार इमरजेंसी को विषय बनाते हुए फिल्मों पर उसके प्रभाव पर बात की । पैनल जोरदार था। लेकिन अंधविश्वासी या कहिए दक्षिण पंथ के रुझान वाले कमलेश पांडेय को इस दौर में किसी भी प्रकार से 'अघोषित इमरजेंसी' नजर नहीं आती, हैरत कर देने वाली बात लगी । एक बार पहले भी अंधविश्वास को बढ़ाने वाली बातें वे कर चुके हैं। वे हिंदी सिनेमा के बड़े राइटर हैं । ? इस पूरी बातचीत में किसी ने भी कंगना रनौत की आने वाली फिल्म 'इमरजेंसी' का जिक्र नहीं किया। वह न भी हो पर किसी ने इस ओर भी किसी ने इशारा नहीं किया कि जो फिल्में बन रही हैं वे समाज को किस तरह प्रभावित कर रही हैं । 'केरला स्टोरी' और 'कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों से समाज को कैसे उकसाया जाता है छः प्रबुद्ध विद्वानों ने इस दिशा में कैसी भी बात नहीं की । ये फिल्में बनाई ही इसीलिए जाती हैं। बल्कि इस दौर में खासतौर पर बनाई जा रही हैं। कंगना की 'इमरजेंसी' भी एकदम नयी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली फिल्म है। अमिताभ के प्रयास अच्छे हैं। कम से कम रविवार को राजनीति से अलग स्वाद तो मिलता है। 'ताना बाना' इस बार बड़ा धनी कार्यक्रम था। बहस में अपूर्वानंद और ओम थानवी थे । बहस भी रोचक विषय पर थी - 'हिंदी को हिंसक कौन और क्यों बना रहा है' । इस बहस को देखिए। साथ में हिंदी यूनिवर्सिटी की अर्जुमंद आरा भी हैं। आजकल 'नमस्कार की लंबी तान' नहीं सुनाई पड़ रही है। कानों को बड़ा सुकून है। आशुतोष विदेश में छुट्टी मना रहे हैं। वे पैनलिस्ट ही अच्छे । उनकी एवज में आशुतोष की बात शरत प्रधान अच्छा कर रहे हैं। आलोक जोशी आजकल भड़कने लगे हैं। चिढ़ाने वाले लोग तो हर जगह मिलेंगे आलोक जी। सवाल जवाब वाले कार्यक्रम में आपका अचानक तैश में आ जाना बहुत नहीं भाया। पर सत्य हिंदी में तो सभी गर्म मिजाज़ के हैं ज्यादातर। क्या आशुतोष, क्या आलोक जोशी, क्या अंबरीष। मुकेश जी भी कभी कभी चिढ़ जाते हैं। रवीश कुमार और आरफा खानम शेरवानी को जितना ट्रोल किया जाता है उतना तो शायद किसी और को ट्रोल नहीं किया जाता होगा। फिर भी उनमें 'अपेक्षित' सौम्यता है। खैर अपना अपना मिजाज़ है। हमें तो कुल मिलाकर यह चाहिए कि मोदी को दो हज़ार चौबीस में रुखसत किया जाए । बाकी बातें बाद में देखी जाएंगी। हिंदुस्तान दसों दिशाओं से न केवल बरबाद हो रहा है बल्कि जीवन निकृष्ट होता जा रहा है। राहुल और लचीलापन, क्या मायने हैं इसके .... . विपक्ष की बैठक में हमने बैठे हुए राहुल के कंधे पर ममता की हथेली देखी । कुछ समझाते हुए ममता। राहुल का मान बढ़ रहा है। कल तक जिस राहुल का कोई मान नहीं था, आज वे चाहे अनचाहे सबकी नजरों के तारे हैं । यह कैसे हो गया। यह चमत्कार है ! जीवन में कई चीजें कई बार आपको फंसा देती हैं और कई चीजें और कई बातें ऐसी भी होती हैं जो आपको बांध देती हैं। ऐसा भी होता है कि प्रेम, करुणा, दया जैसे मूल्य आपमें चामत्कारिक रूप से परिवर्तन लाते हैं। ऐसा लगता है कि एक यात्रा ने राहुल गांधी की सारी अकड़ और हेकड़ी निकाल कर फेंक दी है। जब मुहब्बत हावी होती है तो उसकी पहली और अबूझ शर्त ही यह होती है कि या तो मैं या मेरे दुश्मन। मुहब्बत से लबरेज राहुल के पास अन्यत्र कोई चारा नहीं है। परिवर्तन होना ही था, जो हम देख रहे हैं।
समाज में शान्ति बनाए रखने और सभी को न्याय देने के लिए भारतीय संविधान ने पुलिस को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया हुआ हैं. हालाँकि पुलिस किसे गिरफ्तार कर सकती हैं, कब कर सकती हैं और इस स्थिति में एक आम नागरिक क्या कर सकता हैं इस संबंध में भी अकी सारे नियम हैं. इन नियमों का मुख्य उद्देश्य ये हैं कि पुलिस और आम नागरिक दोनों में एक सुचारू व्यवस्था के तहत तालमेल बैठाया जा सके. जब पुलिस एक बार किसी को गिरफ्तार कर लेती हैं तो उसके बेक़सूर या कसूरवार होने का फैसला कोर्ट तय करता हैं. अधिकतर लोगो को जीवन में जाने या अंजाने में पुलिस का सामना करना ही पड़ता हैं. एक स्थिति ये भी होती हैं कि आप ने तो कोई अपराध नहीं किया हैं लेकिन आपके किसी रिश्तेदार या जान पहचान वाले को पुलिस उठा के ले जाती हैं. कई बार गलत आरोप के चलते भी थाने के चक्कर लगाने पड़ जाते हैं. इन सभी स्थितियों से निपटने के लिए हम आपको कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं. व्यक्ति द्वारा कोई अपराध करने, ठोस सबूत मिलने, भरोसेमंद शिकायत मिलने की स्थिति में पुलिस को इसे गिरफ्तार करने का हक़ होता हैं. इसके अतिरिक्त चोरी की प्रापर्टी या सामान मिलने, अपराध में लीन होने या अपराधिक बैकग्राउंड के आधार पर भी पुलिस संदिग्ध व्यक्ति को अरेस्ट कर सकती हैं. इसके साथ ही पुलिस को अपनी ड्यूटी करने से रोकने, चेकिंग से बचने की कोशिश करने की स्थिति में भी आपको गिरफ्तार करने का हक़ पुलिस को होता हैं. - अरेस्ट हुआ व्यक्ति पूछताछ के समय अपनी पसंद के वकील से मिल सकता हैं. - आपको अरेस्ट करने वाले पुलिस की ड्रेस में होना चाहिए, हालाँकि CBI और RAW वाले सादी वर्दी में भी गिरफ्तार कर सकते हैं. - अरेस्ट होने पर आपको अपनी गिरफ़्तारी की वजह और जमानत से संबंधित जानकारी जानने का हक़ हैं. - अरेस्ट हुए व्यक्ति को पुलिस को 24 घंटो के अंदर कोर्ट में पेश करना होता हैं. - पुलिस गिरफ्तार करते समय एक अरेस्ट मेमो बनाती हैं जिसमे आरोपी, पुलिस अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति के सिग्नेचर होते हैं. यदि पुलिस अरेस्ट मेमो नहीं बनाती तो गिरफ्तार व्यक्ति को इसकी मांग करने का अधिकार हैं. - गिरफ्तार करने के पूर्व पुलिस व्यक्ति को अरेस्ट वारंट दिखाती हैं. बिना वारंट गिरफ्तार करने पर उसे व्यक्ति को अरेस्ट करने का कारण बताना जरूरी होता हैं. - गिरफ़्तारी के 12 घंटों के अंदर पुलिस को आपके परिचित को सूचित कर ये बताना होता हैं कि आप किस थाने में हैं. - महिला आरोपी को एक महिला कांस्टेबल ही अरेस्ट कर सकती हैं. सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता हैं. हालाँकि यदि महिला का आरोप गंभीर हैं या वो भाग सकती हैं तो पुलिस कोर्ट से इसकी परमिशन ला सकती हैं. - यदि अपराधी 24 घंटे से ज्यादा कस्टडी में हैं तो उसके परिजन एसपी ऑफिस जाकर शिकायत कर सकते हैं कि उसे अभी तक कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया. - यदि अपराधी नाबालिग हैं तो उसे बिना वर्दी में पुलिस को अरेस्ट करना होता हैं. साथ ही पुलिस उससे कोई बुरा बर्ताव नहीं कर सकती हैं.
समाज में शान्ति बनाए रखने और सभी को न्याय देने के लिए भारतीय संविधान ने पुलिस को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया हुआ हैं. हालाँकि पुलिस किसे गिरफ्तार कर सकती हैं, कब कर सकती हैं और इस स्थिति में एक आम नागरिक क्या कर सकता हैं इस संबंध में भी अकी सारे नियम हैं. इन नियमों का मुख्य उद्देश्य ये हैं कि पुलिस और आम नागरिक दोनों में एक सुचारू व्यवस्था के तहत तालमेल बैठाया जा सके. जब पुलिस एक बार किसी को गिरफ्तार कर लेती हैं तो उसके बेक़सूर या कसूरवार होने का फैसला कोर्ट तय करता हैं. अधिकतर लोगो को जीवन में जाने या अंजाने में पुलिस का सामना करना ही पड़ता हैं. एक स्थिति ये भी होती हैं कि आप ने तो कोई अपराध नहीं किया हैं लेकिन आपके किसी रिश्तेदार या जान पहचान वाले को पुलिस उठा के ले जाती हैं. कई बार गलत आरोप के चलते भी थाने के चक्कर लगाने पड़ जाते हैं. इन सभी स्थितियों से निपटने के लिए हम आपको कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं. व्यक्ति द्वारा कोई अपराध करने, ठोस सबूत मिलने, भरोसेमंद शिकायत मिलने की स्थिति में पुलिस को इसे गिरफ्तार करने का हक़ होता हैं. इसके अतिरिक्त चोरी की प्रापर्टी या सामान मिलने, अपराध में लीन होने या अपराधिक बैकग्राउंड के आधार पर भी पुलिस संदिग्ध व्यक्ति को अरेस्ट कर सकती हैं. इसके साथ ही पुलिस को अपनी ड्यूटी करने से रोकने, चेकिंग से बचने की कोशिश करने की स्थिति में भी आपको गिरफ्तार करने का हक़ पुलिस को होता हैं. - अरेस्ट हुआ व्यक्ति पूछताछ के समय अपनी पसंद के वकील से मिल सकता हैं. - आपको अरेस्ट करने वाले पुलिस की ड्रेस में होना चाहिए, हालाँकि CBI और RAW वाले सादी वर्दी में भी गिरफ्तार कर सकते हैं. - अरेस्ट होने पर आपको अपनी गिरफ़्तारी की वजह और जमानत से संबंधित जानकारी जानने का हक़ हैं. - अरेस्ट हुए व्यक्ति को पुलिस को चौबीस घंटाटो के अंदर कोर्ट में पेश करना होता हैं. - पुलिस गिरफ्तार करते समय एक अरेस्ट मेमो बनाती हैं जिसमे आरोपी, पुलिस अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति के सिग्नेचर होते हैं. यदि पुलिस अरेस्ट मेमो नहीं बनाती तो गिरफ्तार व्यक्ति को इसकी मांग करने का अधिकार हैं. - गिरफ्तार करने के पूर्व पुलिस व्यक्ति को अरेस्ट वारंट दिखाती हैं. बिना वारंट गिरफ्तार करने पर उसे व्यक्ति को अरेस्ट करने का कारण बताना जरूरी होता हैं. - गिरफ़्तारी के बारह घंटाटों के अंदर पुलिस को आपके परिचित को सूचित कर ये बताना होता हैं कि आप किस थाने में हैं. - महिला आरोपी को एक महिला कांस्टेबल ही अरेस्ट कर सकती हैं. सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता हैं. हालाँकि यदि महिला का आरोप गंभीर हैं या वो भाग सकती हैं तो पुलिस कोर्ट से इसकी परमिशन ला सकती हैं. - यदि अपराधी चौबीस घंटाटे से ज्यादा कस्टडी में हैं तो उसके परिजन एसपी ऑफिस जाकर शिकायत कर सकते हैं कि उसे अभी तक कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया. - यदि अपराधी नाबालिग हैं तो उसे बिना वर्दी में पुलिस को अरेस्ट करना होता हैं. साथ ही पुलिस उससे कोई बुरा बर्ताव नहीं कर सकती हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, स्पेनिश अखबार La Vanguardia ने 9 अक्टूबर को अपने सप्लीमेंट Dinero (Money) के फ्रंट पेज पर इस कार्टून को प्रकाशित किया है। इस कार्टून की हेडिंग 'The hour of the Indian economy' (भारतीय अर्थव्यवस्था का वक्त) दी गई है। कार्टून के ऊपर लिखा है कि एशियाई महाद्वीप का यह देश एक उभरती हुई शक्ति के रूप में चीन से आगे बढ़ रहा है। इस कार्टून को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है, जिसमें बीजेपी सांसद पीसी मोहन भी शामिल हैं। बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने कार्टून को ट्वीट करते हुए लिखा कि 'भारतीय अर्थव्यवस्था का वक्त' एक स्पेनिश साप्ताहिक की टॉप स्टोरी है। जब भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल रही है, तब आजादी के दशकों बाद भी हमारी छवि को सपेरों के रूप में चित्रित करना सरासर मूर्खता है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मानसिकता को बदलना एक मुश्किल काम है। ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने भी इस अखबार के कार्टून को शेयर करते हुए आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि एक प्रमुख स्पेनिश प्रकाशन La Vanguardia भारतीय अर्थव्यवस्था का समय बता रहा है। यह बहुत अच्छा है कि दुनिया नोटिस कर रही है, लेकिन भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सपेरे का इस्तेमाल करना अपमान है। आश्चर्य है कि इसे रोकने में क्या कर सकते हैं, शायर वैश्विक भारतीय उत्पाद इसकी तोड़ है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्पेनिश अखबार La Vanguardia ने नौ अक्टूबर को अपने सप्लीमेंट Dinero के फ्रंट पेज पर इस कार्टून को प्रकाशित किया है। इस कार्टून की हेडिंग 'The hour of the Indian economy' दी गई है। कार्टून के ऊपर लिखा है कि एशियाई महाद्वीप का यह देश एक उभरती हुई शक्ति के रूप में चीन से आगे बढ़ रहा है। इस कार्टून को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है, जिसमें बीजेपी सांसद पीसी मोहन भी शामिल हैं। बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने कार्टून को ट्वीट करते हुए लिखा कि 'भारतीय अर्थव्यवस्था का वक्त' एक स्पेनिश साप्ताहिक की टॉप स्टोरी है। जब भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल रही है, तब आजादी के दशकों बाद भी हमारी छवि को सपेरों के रूप में चित्रित करना सरासर मूर्खता है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मानसिकता को बदलना एक मुश्किल काम है। ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने भी इस अखबार के कार्टून को शेयर करते हुए आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि एक प्रमुख स्पेनिश प्रकाशन La Vanguardia भारतीय अर्थव्यवस्था का समय बता रहा है। यह बहुत अच्छा है कि दुनिया नोटिस कर रही है, लेकिन भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सपेरे का इस्तेमाल करना अपमान है। आश्चर्य है कि इसे रोकने में क्या कर सकते हैं, शायर वैश्विक भारतीय उत्पाद इसकी तोड़ है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! 1 सर्दियों में आप मैदे से बने बिस्किट, कुकीज, केक की जगह आप गुड़ और मूंगफली का सेवन करें। इससे बने गुड़ की पट्टी, लड्डू खाएं। गुड़ खाने से आपके शरीर में खून की कमी (Jaggery benefits) नहीं होगी। 2 गुड़ और मूंगफली के कॉम्बो में विटामिंस, पॉलीफेनॉल्स, माइक्रो-मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। 3 इन दोनों में आवश्यक फैट होते हैं, जो हड्डियों और दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। खासकर, गुड़ की पट्टी या चिक्की बच्चों, एथलेटिक्स को जरूर खाना चाहिए। 4 इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। मूंगफली गुड़ की चिक्की बच्चों को जरूर खिलाएं। खासकर उन बच्चों को जो फलों का सेवन नहीं करना चाहते हैं। 5 गुड़ और मूंगफली से बनी पट्टी या लड्डू मिनरल्स और विटामिन बी से भरपूर होते हैं, जो महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द, क्रैम्प की समस्या को दूर करते हैं। 6 मूंगफली में सेलेनियम और गुड़ में मैग्नीशियम, आयरन अधिक होने के कारण प्रजनन संबंधी समस्याओं (Fertility related problems) को दूर करते हैं। 7 गुड़-मूंगफली का यह डेडली कॉम्बो हीमोग्लोबिन लेवल को शरीर में बेहतर (Moongphali Gud ki Chikki benefits) बनाता है। शरीर में खून की कमी को दूर करता है। एनीमिया से बचाता है। साथ ही, दोनों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट रक्त को शुद्ध करता है। 8 इनमें कैल्शियम भी अधिक होता है, जो हड्डियों को मजबूती देता है। साथ ही पोटैशियम, फाइबर और जिंक से भरपूर गुड़-मूंगफली इम्यूनिटी को भी बढ़ावा देने में मदद करते हैं। हालांकि, गुड़-मूंगफली के इस कॉम्बो (Peanut Chikki) को अधिक खाने से भी बचें, क्योंकि इससे आपको कब्ज की समस्या (Moongphali gud khane ke fayde) हो सकती है। आपको चाहिए मूंगफली, गुड़ और पानी। मूंगफली के दानों को हल्का भूनकर छिलका उतार लें। दानों को हल्का दरदरा कर लें ताकि ये साबुत ना रहें। अब एक पैन में छोटे-छोटे टुकड़े किए हुए गुड़ डालें। इसे चलाती रहें। हल्का सा पानी डालकर पिघलने दें। धीरे-धीरे गुड़ पूरा पिघल जाएगा। एक कटोरी में पानी डालकर इसमें थोड़ा सा गुड़ डालें। अगर गुड़ टूट रहा है, तो चाशनी तैयार (Moongphali Gud ki Chikki Recipe) हो चुका है। अब इसमें मूंगफली डालें और चलाती रहें। आंच बंद कर दें। किसी ट्रे या प्लेट में हल्का सा घी लगाएं। अब मूंगफली-गुड़ का मिश्रण डालकर बेलन की मदद से फैलाते हुए गोल या चौकोर शेप दें। इसे आप छोटे-छोटे शेप भी दे सकती हैं। क्रिस्पी गुड़-मूंगफली की चिक्की (Peanut Chikki) तैयार है।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! एक सर्दियों में आप मैदे से बने बिस्किट, कुकीज, केक की जगह आप गुड़ और मूंगफली का सेवन करें। इससे बने गुड़ की पट्टी, लड्डू खाएं। गुड़ खाने से आपके शरीर में खून की कमी नहीं होगी। दो गुड़ और मूंगफली के कॉम्बो में विटामिंस, पॉलीफेनॉल्स, माइक्रो-मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। तीन इन दोनों में आवश्यक फैट होते हैं, जो हड्डियों और दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। खासकर, गुड़ की पट्टी या चिक्की बच्चों, एथलेटिक्स को जरूर खाना चाहिए। चार इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। मूंगफली गुड़ की चिक्की बच्चों को जरूर खिलाएं। खासकर उन बच्चों को जो फलों का सेवन नहीं करना चाहते हैं। पाँच गुड़ और मूंगफली से बनी पट्टी या लड्डू मिनरल्स और विटामिन बी से भरपूर होते हैं, जो महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द, क्रैम्प की समस्या को दूर करते हैं। छः मूंगफली में सेलेनियम और गुड़ में मैग्नीशियम, आयरन अधिक होने के कारण प्रजनन संबंधी समस्याओं को दूर करते हैं। सात गुड़-मूंगफली का यह डेडली कॉम्बो हीमोग्लोबिन लेवल को शरीर में बेहतर बनाता है। शरीर में खून की कमी को दूर करता है। एनीमिया से बचाता है। साथ ही, दोनों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट रक्त को शुद्ध करता है। आठ इनमें कैल्शियम भी अधिक होता है, जो हड्डियों को मजबूती देता है। साथ ही पोटैशियम, फाइबर और जिंक से भरपूर गुड़-मूंगफली इम्यूनिटी को भी बढ़ावा देने में मदद करते हैं। हालांकि, गुड़-मूंगफली के इस कॉम्बो को अधिक खाने से भी बचें, क्योंकि इससे आपको कब्ज की समस्या हो सकती है। आपको चाहिए मूंगफली, गुड़ और पानी। मूंगफली के दानों को हल्का भूनकर छिलका उतार लें। दानों को हल्का दरदरा कर लें ताकि ये साबुत ना रहें। अब एक पैन में छोटे-छोटे टुकड़े किए हुए गुड़ डालें। इसे चलाती रहें। हल्का सा पानी डालकर पिघलने दें। धीरे-धीरे गुड़ पूरा पिघल जाएगा। एक कटोरी में पानी डालकर इसमें थोड़ा सा गुड़ डालें। अगर गुड़ टूट रहा है, तो चाशनी तैयार हो चुका है। अब इसमें मूंगफली डालें और चलाती रहें। आंच बंद कर दें। किसी ट्रे या प्लेट में हल्का सा घी लगाएं। अब मूंगफली-गुड़ का मिश्रण डालकर बेलन की मदद से फैलाते हुए गोल या चौकोर शेप दें। इसे आप छोटे-छोटे शेप भी दे सकती हैं। क्रिस्पी गुड़-मूंगफली की चिक्की तैयार है।
जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस ने बुधवार को ही आला अफसरों को रिपोर्ट भेजी थी कि रामपुर जेल में आजम खान के रहने से कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है। मुकदमा विधायक अब्दुल्ला आजम के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा है। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने जनवरी 2019 में अब्दुल्ला पर धोखाधड़ी से दो-दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने, इसके लिए आजम खान और उनकी पत्नी ने शपथपत्र देकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर लिखाई थी। पुलिस ने अप्रैल 2019 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। तभी से अदालत में मुकदमा विचाराधीन है। सांसद आजम खान के खिलाफ अब तक करीब 80 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। आजम खान कल अपने परिवार के साथ एडीजे 6 धीरेंद्र कुमार की अदालत में पेश हुए थे। बता दें कि न्यायालय ने इससे पहले आजम खान उनकी पत्नी विधायक तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम को कई मामलों में अरेस्ट वारंट जारी किया था। रामपुर की विशेष अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह को 2 मार्च के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से उन्हें सीतापुर के जेल शिफ्ट किया गया है। आजम खान के अदालत में सरेंडर के दौरान कोर्ट में पेश होने के दौरान भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में एसपी समर्थक भी वहां मौजूद रहे। इससे पहले अदालत में गैर हाजिर रहने पर विशेष न्यायधीश एडीजे 6 की कोर्ट ने सांसद आजम खान, विधायक तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ 18 दिसंबर को धारा-82 के तहत कुर्की नोटिस देने का आदेश दिया था। पुलिस ने उनके रामपुर स्थित आवास पर दबिश दी, नहीं मिलने पर उनके घर के बाहर धारा-82 के तहत पुलिस ने तीन कुर्की के नोटिस चस्पा कर दिए थे। इसके अलावा रिक्शे पर माइक रखकर आजम खान की संपत्ति कुर्की की घोषणा भी रामपुर में कराई गई थी। ढोलक पर मुनादी भी कराई गई थी।
जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस ने बुधवार को ही आला अफसरों को रिपोर्ट भेजी थी कि रामपुर जेल में आजम खान के रहने से कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है। मुकदमा विधायक अब्दुल्ला आजम के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा है। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने जनवरी दो हज़ार उन्नीस में अब्दुल्ला पर धोखाधड़ी से दो-दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने, इसके लिए आजम खान और उनकी पत्नी ने शपथपत्र देकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर लिखाई थी। पुलिस ने अप्रैल दो हज़ार उन्नीस में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। तभी से अदालत में मुकदमा विचाराधीन है। सांसद आजम खान के खिलाफ अब तक करीब अस्सी मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। आजम खान कल अपने परिवार के साथ एडीजे छः धीरेंद्र कुमार की अदालत में पेश हुए थे। बता दें कि न्यायालय ने इससे पहले आजम खान उनकी पत्नी विधायक तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम को कई मामलों में अरेस्ट वारंट जारी किया था। रामपुर की विशेष अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह को दो मार्च के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से उन्हें सीतापुर के जेल शिफ्ट किया गया है। आजम खान के अदालत में सरेंडर के दौरान कोर्ट में पेश होने के दौरान भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में एसपी समर्थक भी वहां मौजूद रहे। इससे पहले अदालत में गैर हाजिर रहने पर विशेष न्यायधीश एडीजे छः की कोर्ट ने सांसद आजम खान, विधायक तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ अट्ठारह दिसंबर को धारा-बयासी के तहत कुर्की नोटिस देने का आदेश दिया था। पुलिस ने उनके रामपुर स्थित आवास पर दबिश दी, नहीं मिलने पर उनके घर के बाहर धारा-बयासी के तहत पुलिस ने तीन कुर्की के नोटिस चस्पा कर दिए थे। इसके अलावा रिक्शे पर माइक रखकर आजम खान की संपत्ति कुर्की की घोषणा भी रामपुर में कराई गई थी। ढोलक पर मुनादी भी कराई गई थी।
बुद्धि विहार सेक्टर-सात में बने तालाब से जल निकासी का पर्यावरण इकोलॉजिकल उत्थान समिति ने विरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से इस तालाब का सुंदरीकरण कराकर इस क्षेत्र को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। इसी को लेकर रविवार समिति के तमाम लोगों ने तालाब बचाने को धरना दिया। दिल्ली रोड पर सर्किट हाउस के पीछे बुद्धि विहार सेक्टर-7 बी में जमीन के एक टुकड़े में पानी भरा है। बुद्धि विहार के पर्यावरण इकोलॉजिकज उत्थान समिति के राम सिंह बिष्ट ने कहा कि कई साल से यहां तालाब है। आवास विकास ने कभी इस जगह की कोई सुध नहीं ली, लेकिन अब तालाब को पाटने की तैयारी की जा रही है। जिसे किसी भी हालत में समिति पूरा नहीं होने देगी। तालाब बचाने को अगर आंदोलन भी करना पड़ा तो करेंगे। डीएम को भी इस तालाब को संरक्षित कराने को पत्र भेजा है। रविवार को तालाब बचाने को समिति पदाधिकारियों ने तालाब स्थल के पास धरना देकर विरोध जताया। धरने पर बैठने वालों में पीके अग्रवाल, यशपाल सिंह, मोहित शर्मा, महेश चंद्र शर्मा, रामसरन, नैपाल सिंह पाल, तुषार रस्तोगी, नकुल दिवाकर, एचबी देव, रोहित सिंह, उत्कर्ष बिष्ट, शिखिर बिष्ट, नारायण सिंह नेगी, शिखर सुमन आदि मौजूद रहे।
बुद्धि विहार सेक्टर-सात में बने तालाब से जल निकासी का पर्यावरण इकोलॉजिकल उत्थान समिति ने विरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से इस तालाब का सुंदरीकरण कराकर इस क्षेत्र को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। इसी को लेकर रविवार समिति के तमाम लोगों ने तालाब बचाने को धरना दिया। दिल्ली रोड पर सर्किट हाउस के पीछे बुद्धि विहार सेक्टर-सात बी में जमीन के एक टुकड़े में पानी भरा है। बुद्धि विहार के पर्यावरण इकोलॉजिकज उत्थान समिति के राम सिंह बिष्ट ने कहा कि कई साल से यहां तालाब है। आवास विकास ने कभी इस जगह की कोई सुध नहीं ली, लेकिन अब तालाब को पाटने की तैयारी की जा रही है। जिसे किसी भी हालत में समिति पूरा नहीं होने देगी। तालाब बचाने को अगर आंदोलन भी करना पड़ा तो करेंगे। डीएम को भी इस तालाब को संरक्षित कराने को पत्र भेजा है। रविवार को तालाब बचाने को समिति पदाधिकारियों ने तालाब स्थल के पास धरना देकर विरोध जताया। धरने पर बैठने वालों में पीके अग्रवाल, यशपाल सिंह, मोहित शर्मा, महेश चंद्र शर्मा, रामसरन, नैपाल सिंह पाल, तुषार रस्तोगी, नकुल दिवाकर, एचबी देव, रोहित सिंह, उत्कर्ष बिष्ट, शिखिर बिष्ट, नारायण सिंह नेगी, शिखर सुमन आदि मौजूद रहे।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को कहा कि शिवपाल सिंह यादव के समर्थन के बावजूद मैनपुरी सीट पर सपा की पराजय निश्चित है। उन्होंने दावा किया है कि सुभासपा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व बसपा को पीछे धकेल कर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। मनियर क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में राजभर ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में मैनपुरी सीट पर मुलायम सिंह यादव 95 हजार मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। उन्होंने कहा कि अगर इसमें से बसपा समर्थक मतों को निकाल दें तो सपा की स्थिति का आंकड़ा स्पष्ट हो जाता है। शिवपाल सिंह यादव द्वारा सपा का समर्थन करने से जुड़े सवाल पर राजभर ने पलट कर सवाल दागा कि "वह सपा से कब अलग रहे हैं"' सुभासपा अध्यक्ष ने तंज कसा कि शिवपाल ने पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में भी सपा का सहयोग किया था और फिर कर रहे हैं।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को कहा कि शिवपाल सिंह यादव के समर्थन के बावजूद मैनपुरी सीट पर सपा की पराजय निश्चित है। उन्होंने दावा किया है कि सुभासपा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व बसपा को पीछे धकेल कर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। मनियर क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में राजभर ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में मैनपुरी सीट पर मुलायम सिंह यादव पचानवे हजार मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। उन्होंने कहा कि अगर इसमें से बसपा समर्थक मतों को निकाल दें तो सपा की स्थिति का आंकड़ा स्पष्ट हो जाता है। शिवपाल सिंह यादव द्वारा सपा का समर्थन करने से जुड़े सवाल पर राजभर ने पलट कर सवाल दागा कि "वह सपा से कब अलग रहे हैं"' सुभासपा अध्यक्ष ने तंज कसा कि शिवपाल ने पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में भी सपा का सहयोग किया था और फिर कर रहे हैं।
से सवार भेज दिए । संगत अभी उसी स्थान पर पहुंची ही थी कि अचानक घेरा डल गया । घुल्लू को भी खबर मिल गई । सोचने लगा कि क्या किया जाए। इतने में महलों से उसकी पत्नी को बुलावा आ गया। जब मेहताब ज़ैना के पास गई, तब ज़ैना ने बताया कि बहन! अब और आपत्ति आ खड़ी हुई है पहली बात तो मुश्किल से भूली थी, आज एक अन्य नेक आत्मा को पकड़ लिया गया है यह महिला त्रिलोक बाई नामक एक कुशल वीणा वादक है, जिसका विवाह 'राधा रत्न' नामक गायक से हुआ था। राधा रत्न का तो देहांत हो चुका है और यह स्त्री अपना शेष जीवन सतसंग में बिताने के लिए आनन्दपुर जा रही थी, कि आज इसे नवाब साहब ने पकड़वा लिया है। शेष संगत को सवारों ने ज़बरदस्ती कई कोस दूर खदेड़ दिया है। मेहताब - यह क्यों ? अनोखी बात है। बेगम-अनोखी नहीं, यह त्रिलोक बाई बहुत कुशल दीखती है। जब संगत को पकड़ा गया और इसे पता चला कि इसकी ख़ातिर सभी पकड़े गए हैं। तब इसने संगत से चोरी यह कहला भेजा कि सारी संगत को कुछ न कहिए, मैं अपने आप आ जाती हूं और मेरे कारण किसी भी सिख का बाल बांका न हो। तब मैं नहीं आऊंगी और हम सारे चुपचाप बैठे रहेंगे और जो अत्याचार हम पर होगा हम उसे सहन करें अपनी अपनी जानों पर खेल जाएंगे। इस पर नवाब साहब ने सारी संगत को सुरक्षित भेज दिया। वे जाने के लिए तैयार नहीं थे, पर नवाब ने सेना की शक्ति उपयोग करके उन्हें कई कोस तक खदेड़ दिया और त्रिलोक बाई को मेरे पास भेज दिया है। अब देखते हैं, रात को क्या होता है ? मेहताब - त्रिलोक बाई ने सच्चे सिंहों वाली कुरबानी की है। उसने अपने आपको कष्ट में डालकर संगत को बचा लिया । पर दीदी ! जब उसके धर्म पर मुसीबत आ बनेगी, तब वह क्या करेगी? क्या धर्म को बेचकर संगत को बचाएगी? यह काम तो सिख कर ही नहीं सकते । बेगम - जब मैंने पूछा तो कहने लगी, "मैं धर्म पर कभी भी नहीं खेलूंगी, मैं अपनी जान पर खेलूंगी । नवाब क्या वस्तु है? शैतान । वह मेरे धर्म का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता । मेरे अंदर कल्पीधर जी का निवास है, वे सदैव अमर हैं, मैं भी उनके चरणों में समाकर अमर हुई हूं। यह शरीर क्या वस्तु है? यदि सिर पर आ बनी तो आंख के झपकने में इसे खत्म कर दूंगी । " पर मेरा विचार है कि नवाब ने इसे गायन वादन के कारण पकड़ा है, रूप के लिए नहीं। चाहे अब इसकी उम्र पचास वर्ष के लगभग होगी, पर अभी इसका रूप प्यारा लगता है और स्थिर पानी की भांति विशुद्ध झरता है। न जाने शराब पीकर नवाब की बुद्धि भ्रष्ट हो जाए, पर जो कुछ मुझे पता है वह यह
से सवार भेज दिए । संगत अभी उसी स्थान पर पहुंची ही थी कि अचानक घेरा डल गया । घुल्लू को भी खबर मिल गई । सोचने लगा कि क्या किया जाए। इतने में महलों से उसकी पत्नी को बुलावा आ गया। जब मेहताब ज़ैना के पास गई, तब ज़ैना ने बताया कि बहन! अब और आपत्ति आ खड़ी हुई है पहली बात तो मुश्किल से भूली थी, आज एक अन्य नेक आत्मा को पकड़ लिया गया है यह महिला त्रिलोक बाई नामक एक कुशल वीणा वादक है, जिसका विवाह 'राधा रत्न' नामक गायक से हुआ था। राधा रत्न का तो देहांत हो चुका है और यह स्त्री अपना शेष जीवन सतसंग में बिताने के लिए आनन्दपुर जा रही थी, कि आज इसे नवाब साहब ने पकड़वा लिया है। शेष संगत को सवारों ने ज़बरदस्ती कई कोस दूर खदेड़ दिया है। मेहताब - यह क्यों ? अनोखी बात है। बेगम-अनोखी नहीं, यह त्रिलोक बाई बहुत कुशल दीखती है। जब संगत को पकड़ा गया और इसे पता चला कि इसकी ख़ातिर सभी पकड़े गए हैं। तब इसने संगत से चोरी यह कहला भेजा कि सारी संगत को कुछ न कहिए, मैं अपने आप आ जाती हूं और मेरे कारण किसी भी सिख का बाल बांका न हो। तब मैं नहीं आऊंगी और हम सारे चुपचाप बैठे रहेंगे और जो अत्याचार हम पर होगा हम उसे सहन करें अपनी अपनी जानों पर खेल जाएंगे। इस पर नवाब साहब ने सारी संगत को सुरक्षित भेज दिया। वे जाने के लिए तैयार नहीं थे, पर नवाब ने सेना की शक्ति उपयोग करके उन्हें कई कोस तक खदेड़ दिया और त्रिलोक बाई को मेरे पास भेज दिया है। अब देखते हैं, रात को क्या होता है ? मेहताब - त्रिलोक बाई ने सच्चे सिंहों वाली कुरबानी की है। उसने अपने आपको कष्ट में डालकर संगत को बचा लिया । पर दीदी ! जब उसके धर्म पर मुसीबत आ बनेगी, तब वह क्या करेगी? क्या धर्म को बेचकर संगत को बचाएगी? यह काम तो सिख कर ही नहीं सकते । बेगम - जब मैंने पूछा तो कहने लगी, "मैं धर्म पर कभी भी नहीं खेलूंगी, मैं अपनी जान पर खेलूंगी । नवाब क्या वस्तु है? शैतान । वह मेरे धर्म का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता । मेरे अंदर कल्पीधर जी का निवास है, वे सदैव अमर हैं, मैं भी उनके चरणों में समाकर अमर हुई हूं। यह शरीर क्या वस्तु है? यदि सिर पर आ बनी तो आंख के झपकने में इसे खत्म कर दूंगी । " पर मेरा विचार है कि नवाब ने इसे गायन वादन के कारण पकड़ा है, रूप के लिए नहीं। चाहे अब इसकी उम्र पचास वर्ष के लगभग होगी, पर अभी इसका रूप प्यारा लगता है और स्थिर पानी की भांति विशुद्ध झरता है। न जाने शराब पीकर नवाब की बुद्धि भ्रष्ट हो जाए, पर जो कुछ मुझे पता है वह यह
Weekly Horoscope 18 To 24 September 2023: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर मनुष्य का जन्म किसी ना किसी राशिकाल में होता है और राशियां ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से प्रभावित होती हैं. ग्रह और नक्षत्रों की चाल हर वक्त हर समय बदलती रहती है और जिसका सीधा असर राशियों के जातकों पर पड़ता है. तो आइए आपको बताते हैं इस सप्ताह यानी 18 से 24 सितंबर तक आपका राशिफल कैसा रहेगा. किस राशि के जातकों को संभल कर रहना होगा और किसके बनेंगे बिगड़े काम. तो देखते हैं नौकरी, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रेम संबंधों को लेकर इस हफ्ते आपके सितारे क्या भविष्यवाणी कर रहे हैं.
Weekly Horoscope अट्ठारह To चौबीस सितंबरtember दो हज़ार तेईस: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर मनुष्य का जन्म किसी ना किसी राशिकाल में होता है और राशियां ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से प्रभावित होती हैं. ग्रह और नक्षत्रों की चाल हर वक्त हर समय बदलती रहती है और जिसका सीधा असर राशियों के जातकों पर पड़ता है. तो आइए आपको बताते हैं इस सप्ताह यानी अट्ठारह से चौबीस सितंबर तक आपका राशिफल कैसा रहेगा. किस राशि के जातकों को संभल कर रहना होगा और किसके बनेंगे बिगड़े काम. तो देखते हैं नौकरी, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रेम संबंधों को लेकर इस हफ्ते आपके सितारे क्या भविष्यवाणी कर रहे हैं.
नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र के 5 गर्ल्स स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया गया है। अब इन स्कूलों में बालिका को नए सत्र से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाएगी। नाथद्वारा के गुड़ला में भामाशाह द्वारा बनवाए स्कूल के लोकार्पण कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के समक्ष सभा में स्थानीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने क्षेत्र में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने की मांग की थी। जोशी की मांग पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की और शिक्षा मंत्री ने जयपुर जाते ही आदेश जारी करवा दिए। शासन उप सचिव-प्रथम भारतेंद्र जैन ने आदेश जारी कर माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर निदेशक को आदेश जारी कर नाथद्वारा के 5 स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया। नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र की नाथद्वारा राजकीय बालिका माध्यमिक स्कूल, खमनोर की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल, देलवाड़ा की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल, रेलमगरा की नई आबादी राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल और कोठारिया की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया गया है। नए क्रमोन्नत स्कूल में नए सत्र 2021-22 से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाएगी। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष और नाथद्वारा विधायक डॉ. सीपी जोशी क्षेत्र की लड़कियों को शिक्षित करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। जोशी जब भी क्षेत्र के दौरे पर आते हैं तो ग्रामीणों को बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समझाइश करते हैं। वे अपने हर भाषण में कहते हैं कि अगर एक बेटी पढ़ेगी तो दो घर का नाम रोशन करेगी। क्षेत्र की बालिकाओं के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खुलने पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक का आभार जताया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र के पाँच गर्ल्स स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया गया है। अब इन स्कूलों में बालिका को नए सत्र से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाएगी। नाथद्वारा के गुड़ला में भामाशाह द्वारा बनवाए स्कूल के लोकार्पण कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के समक्ष सभा में स्थानीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने क्षेत्र में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने की मांग की थी। जोशी की मांग पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की और शिक्षा मंत्री ने जयपुर जाते ही आदेश जारी करवा दिए। शासन उप सचिव-प्रथम भारतेंद्र जैन ने आदेश जारी कर माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर निदेशक को आदेश जारी कर नाथद्वारा के पाँच स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया। नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र की नाथद्वारा राजकीय बालिका माध्यमिक स्कूल, खमनोर की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल, देलवाड़ा की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल, रेलमगरा की नई आबादी राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल और कोठारिया की राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में क्रमोन्नत किया गया है। नए क्रमोन्नत स्कूल में नए सत्र दो हज़ार इक्कीस-बाईस से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाएगी। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष और नाथद्वारा विधायक डॉ. सीपी जोशी क्षेत्र की लड़कियों को शिक्षित करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। जोशी जब भी क्षेत्र के दौरे पर आते हैं तो ग्रामीणों को बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समझाइश करते हैं। वे अपने हर भाषण में कहते हैं कि अगर एक बेटी पढ़ेगी तो दो घर का नाम रोशन करेगी। क्षेत्र की बालिकाओं के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खुलने पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक का आभार जताया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
एलर्जिक फूड न लें : हाइपर- थायराइडिज्म के कारण कई नाजुक बीमारियां होती हैं. यह ऑटो-इम्यून डिजीज है और खाने से होने वाली एलर्जी से इस प्रकार की बीमारियों के लक्षण बढ़ सकते हैं. इसलिए इस तरह के खाने से परहेज करें जिससे आपको एलर्जी है. साधारण तौर पर एलर्जी लैक्टोज सहन नहीं होना दूध, मूंगफली एलर्जी, गेहूं एलर्जी आदि है, एलर्जिक रिएक्शन उस भोजन पर ज्यादा आश्रित होने से होती है.
एलर्जिक फूड न लें : हाइपर- थायराइडिज्म के कारण कई नाजुक बीमारियां होती हैं. यह ऑटो-इम्यून डिजीज है और खाने से होने वाली एलर्जी से इस प्रकार की बीमारियों के लक्षण बढ़ सकते हैं. इसलिए इस तरह के खाने से परहेज करें जिससे आपको एलर्जी है. साधारण तौर पर एलर्जी लैक्टोज सहन नहीं होना दूध, मूंगफली एलर्जी, गेहूं एलर्जी आदि है, एलर्जिक रिएक्शन उस भोजन पर ज्यादा आश्रित होने से होती है.
परामर्श ठीक हो जानेपर, दुर्योधन ने अपने पिता अन्धराज धृतराष्ट्रको भी राजी कर, जुआ खेलनेके लिये युधिष्ठिरके पास निमन्त्रण भेजवाया। दुर्भाग्यवश राजा युधिष्ठिरने यह अनुचित आमन्त्रण स्वीकार कर लिया और यह जानते हुए भी, कि जुआका दुर्व्यसन अत्यन्त गर्हित है, हस्तिनापुर जाकर जुआ खेलने लगे । इसका परिणाम यह हुआ कि समस्त धनधान्य और राजपाट हार गये ! यहांतक, कि मूर्खतावश भाइयोंको और अन्त में द्रौपदीको भी दांवपर रख दिया। दुर्योधनकी ओरसे धूर्त्तधुरन्धर शकुनी पासा फेंक रहा था। उसने छलसे सब बाजो जीत ली। युधिष्ठिर अपना सर्वस्व खोकर चुपचाप बैठ गये ! राजा युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञके समय, मय दानव की बनाई हुई सभामें, दुर्योधन भ्रमवश जलको स्थल और स्थलको जल समझकर गिर पड़ा था। उस समय भीमसेन आदिने उसकी खूब हँसो उड़ाई थी। द्रौपदीने तो यहांतक कह डाला था, कि अन्धेकी सन्तान भी अन्धी ही होती है। दुर्योधन अपने उस अपमानको भूला न था । इस समय बदला लेनेका अच्छा अवसर देखकर उसने भरी सभामें द्रौपदीको घसीट लानेकी आज्ञा दी और जहां तक बन पड़ा, अपने अपमानका खूब बदला लिया। द्रौपदी की लाञ्छना देखकर भीमसेन आदिको बड़ा क्रोध हुआ। परन्तु युधिष्ठिरके रोकनेसे ये कुछ भी न कर सके। अन्तमें निश्चय हुआ, कि इस हारके बदले युधिष्ठिर आदि बारह वर्ष
परामर्श ठीक हो जानेपर, दुर्योधन ने अपने पिता अन्धराज धृतराष्ट्रको भी राजी कर, जुआ खेलनेके लिये युधिष्ठिरके पास निमन्त्रण भेजवाया। दुर्भाग्यवश राजा युधिष्ठिरने यह अनुचित आमन्त्रण स्वीकार कर लिया और यह जानते हुए भी, कि जुआका दुर्व्यसन अत्यन्त गर्हित है, हस्तिनापुर जाकर जुआ खेलने लगे । इसका परिणाम यह हुआ कि समस्त धनधान्य और राजपाट हार गये ! यहांतक, कि मूर्खतावश भाइयोंको और अन्त में द्रौपदीको भी दांवपर रख दिया। दुर्योधनकी ओरसे धूर्त्तधुरन्धर शकुनी पासा फेंक रहा था। उसने छलसे सब बाजो जीत ली। युधिष्ठिर अपना सर्वस्व खोकर चुपचाप बैठ गये ! राजा युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञके समय, मय दानव की बनाई हुई सभामें, दुर्योधन भ्रमवश जलको स्थल और स्थलको जल समझकर गिर पड़ा था। उस समय भीमसेन आदिने उसकी खूब हँसो उड़ाई थी। द्रौपदीने तो यहांतक कह डाला था, कि अन्धेकी सन्तान भी अन्धी ही होती है। दुर्योधन अपने उस अपमानको भूला न था । इस समय बदला लेनेका अच्छा अवसर देखकर उसने भरी सभामें द्रौपदीको घसीट लानेकी आज्ञा दी और जहां तक बन पड़ा, अपने अपमानका खूब बदला लिया। द्रौपदी की लाञ्छना देखकर भीमसेन आदिको बड़ा क्रोध हुआ। परन्तु युधिष्ठिरके रोकनेसे ये कुछ भी न कर सके। अन्तमें निश्चय हुआ, कि इस हारके बदले युधिष्ठिर आदि बारह वर्ष
बाहरी कर्ज चुकाने के चलते पाकिस्तान का मुद्रा भंडार भी खत्म होने के कगार पर है। इसके अलावा, पाकिस्तान में महीनों से जारी राजनीतिक अराजकता ने संभावित विदेशी निवेश को भी डरा दिया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने शुक्रवार को 14. 5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (लगभग 50. 5 बिलियन डॉलर) का बजट पेश किया। इस बजट में से आधे से अधिक 7. 3 ट्रिलियन रुपये को कर्ज चुकाने के लिए अलग रखा गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तंगहाली के दौर से गुजर रही है जहां उसके पास दूसरे देशों का कर्ज चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं। क्या बोले वित्त मंत्री? वित्त मंत्री इशाक डार ने नेशनल असेंबली के पटल पर वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) का बजट पेश किया। भाषण के दौरान, मंत्री ने कहा कि सरकार आगामी वर्ष के लिए कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है। डार ने कहा कि अगले साल के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 3. 5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट "चुनावी बजट नहीं है" और "वास्तविक अर्थव्यवस्था" को दर्शाता है। डार ने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस बजट में इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके बाद उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए किए गए कुछ विशेष उपायों की सूची बताई, जिनमें प्रमुख कृषि ऋण को 1. 8 ट्रिलियन रुपये से बढ़ाकर 2. 25 ट्रिलियन रुपये करना शामिल है। बाहरी कर्ज चुकाने के चलते पाकिस्तान का मुद्रा भंडार भी खत्म होने के कगार पर है। इसके अलावा, पाकिस्तान में महीनों से जारी राजनीतिक अराजकता ने संभावित विदेशी निवेश को भी डरा दिया है। पाकिस्तान में उथल-पुथल के चलते बाहरी निवेश आना लगभग बंद हो चुका है। महंगाई चरम है। पाकिस्तानी रुपया लगभग हर रोज गिर रहा है। देश अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह बाहर से कुछ भी आयात नहीं कर सकता है। यही वजह है कि औद्योगिक उत्पादन में भारी गिरावट आई है। - आवश्यक वस्तुओं के आयात पर शुल्क में कोई वृद्धि नहीं। - आगामी वर्ष के लिए कोई नया टैक्स नहीं। - कृषि क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के वास्ते बुवाई के लिए बीजों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट। - कैफे, भोजन (आइसक्रीम सहित), पार्लर, कॉफी हाउस, कॉफी शॉप, डेरा, फूड हट, भोजनालय, रिसॉर्ट और इसी तरह के पके, तैयार या रेडी-टू-ईट फूड सर्विस आउटलेट आदि सहित रेस्तरां द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर 5 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। - न्यूनतम वेतन 32,000 रुपये प्रस्तावित; ग्रेड 1-16 और ग्रेड 17-22 के सरकारी कर्मचारियों के वेतन में क्रमशः 35 फीसदी और 30 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट में 950 अरब रुपये वोट हासिल करने वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। पाकिस्तान में इसी साल के अंत में आम चुनाव होने वाले हैं। अन्य लोकलुभावन वादों में 35 प्रतिशत तक सिविल सेवा वेतन वृद्धि और सराकीर कर्मचारियों की पेंशन के लिए 17. 5 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। शुक्रवार को नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए, वित्त मंत्री इशाक डार ने जोर देकर कहा कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "देश में जल्द ही आम चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इसके बावजूद अगले वित्तीय वर्ष का बजट चुनावी बजट के बजाय एक जिम्मेदार बजट के रूप में तैयार किया गया है। " प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने पूर्ववर्ती इमरान खान को दोषी ठहराते हुए कहा कि उनकी वजह से देश की आर्थव्यवस्था दलदल में है। उन्होंने कहा, "हमारी पिछली सरकार ने अर्थव्यवस्था को पस्त कर दिया है। "
बाहरी कर्ज चुकाने के चलते पाकिस्तान का मुद्रा भंडार भी खत्म होने के कगार पर है। इसके अलावा, पाकिस्तान में महीनों से जारी राजनीतिक अराजकता ने संभावित विदेशी निवेश को भी डरा दिया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने शुक्रवार को चौदह. पाँच ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का बजट पेश किया। इस बजट में से आधे से अधिक सात. तीन ट्रिलियन रुपये को कर्ज चुकाने के लिए अलग रखा गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तंगहाली के दौर से गुजर रही है जहां उसके पास दूसरे देशों का कर्ज चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं। क्या बोले वित्त मंत्री? वित्त मंत्री इशाक डार ने नेशनल असेंबली के पटल पर वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस का बजट पेश किया। भाषण के दौरान, मंत्री ने कहा कि सरकार आगामी वर्ष के लिए कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है। डार ने कहा कि अगले साल के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर तीन. पाँच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट "चुनावी बजट नहीं है" और "वास्तविक अर्थव्यवस्था" को दर्शाता है। डार ने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस बजट में इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके बाद उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए किए गए कुछ विशेष उपायों की सूची बताई, जिनमें प्रमुख कृषि ऋण को एक. आठ ट्रिलियन रुपये से बढ़ाकर दो. पच्चीस ट्रिलियन रुपये करना शामिल है। बाहरी कर्ज चुकाने के चलते पाकिस्तान का मुद्रा भंडार भी खत्म होने के कगार पर है। इसके अलावा, पाकिस्तान में महीनों से जारी राजनीतिक अराजकता ने संभावित विदेशी निवेश को भी डरा दिया है। पाकिस्तान में उथल-पुथल के चलते बाहरी निवेश आना लगभग बंद हो चुका है। महंगाई चरम है। पाकिस्तानी रुपया लगभग हर रोज गिर रहा है। देश अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह बाहर से कुछ भी आयात नहीं कर सकता है। यही वजह है कि औद्योगिक उत्पादन में भारी गिरावट आई है। - आवश्यक वस्तुओं के आयात पर शुल्क में कोई वृद्धि नहीं। - आगामी वर्ष के लिए कोई नया टैक्स नहीं। - कृषि क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के वास्ते बुवाई के लिए बीजों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट। - कैफे, भोजन , पार्लर, कॉफी हाउस, कॉफी शॉप, डेरा, फूड हट, भोजनालय, रिसॉर्ट और इसी तरह के पके, तैयार या रेडी-टू-ईट फूड सर्विस आउटलेट आदि सहित रेस्तरां द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर पाँच फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। - न्यूनतम वेतन बत्तीस,शून्य रुपयापये प्रस्तावित; ग्रेड एक-सोलह और ग्रेड सत्रह-बाईस के सरकारी कर्मचारियों के वेतन में क्रमशः पैंतीस फीसदी और तीस फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट में नौ सौ पचास अरब रुपये वोट हासिल करने वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। पाकिस्तान में इसी साल के अंत में आम चुनाव होने वाले हैं। अन्य लोकलुभावन वादों में पैंतीस प्रतिशत तक सिविल सेवा वेतन वृद्धि और सराकीर कर्मचारियों की पेंशन के लिए सत्रह. पाँच प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। शुक्रवार को नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए, वित्त मंत्री इशाक डार ने जोर देकर कहा कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "देश में जल्द ही आम चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इसके बावजूद अगले वित्तीय वर्ष का बजट चुनावी बजट के बजाय एक जिम्मेदार बजट के रूप में तैयार किया गया है। " प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने पूर्ववर्ती इमरान खान को दोषी ठहराते हुए कहा कि उनकी वजह से देश की आर्थव्यवस्था दलदल में है। उन्होंने कहा, "हमारी पिछली सरकार ने अर्थव्यवस्था को पस्त कर दिया है। "
मुरादाबादः उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक रिसेप्शन पार्टी में चोरी करने का मामला सामने आया है, दरअसल, कटघर थाना क्षेत्र में गाड़ी खाना निवासी प्रमोद कुमार यादव का जीरो प्वाइंट के पास राज किरण डिग्री कॉलेज है। उनके बेटे अखिल IT कंपनी में इंजीनियर हैं। परिवार का कहना है कि 14 जून की रात कटघर थाना क्षेत्र में ही रामपुर रोड पर होटल क्लार्क इन में शादी की रिसेप्शन पार्टी थी। पार्टी में उनके दोस्त और रिश्तेदार शामिल हुए थे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि 10-12 लोग एक टेबल पर दूल्हा- दुल्हन के साथ खाना खा रहे थे। खाने के दौरान दुल्हन ने अपना बैग टेबल पर ही रख लिया था। इसके बाद वहां बैग गायब हो गए। काफी पूछताछ की उसके बाद भी कही पता नहीं चला उन्होंने होटल मैनेजर को मामले की जानकारी दी। परिजनों ने आशंका जताई है कि वेटर ने इस घटना को अंजाम दिया है। बता दें कि कटघर थाना क्षेत्र में गाड़ी खाना निवासी प्रमोद कुमार यादव की शादी के बाद जिले के ही एक होटल में रिसेप्शन पार्टी थी। पार्टी के दौरान दुल्हन का बैग और कैस चोरो ने उड़ा दिए। दुल्हन को तब इसकी जानकारी हुआ उसने देखा कि जिस टेबल पर उसने बैग रखे थे वहां पर बैग था ही नहीं। उन्होंने आप- पास घूम रहे वेटर पर चोरी का संदेह जताया है। उन्होंने बताया कि बैग में सोने की 0 2 अंगूठी, सोने की एक चेन, 50 हजार रुपए, एक घड़ी और गिफ्ट में मिले कुछ लिफाफे समेत अन्य कुछ सामान था। हालांकि इस मामले में पीड़ित परिजनों ने एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस होटल में लगे सीसीटीवी की मदद से आरोपी की पहचान करने में जुटी है। वहीं पीड़ित परिवार ने कहा कि होटल प्रबंधन से इस मामले की शिकायत की थी। तब होटल प्रबंधन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। लेकिन होटल प्रबंधन की ओर से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि जब डीआईजी से गुहार लगाई फिर मामले में केस दर्ज किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुरादाबादः उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक रिसेप्शन पार्टी में चोरी करने का मामला सामने आया है, दरअसल, कटघर थाना क्षेत्र में गाड़ी खाना निवासी प्रमोद कुमार यादव का जीरो प्वाइंट के पास राज किरण डिग्री कॉलेज है। उनके बेटे अखिल IT कंपनी में इंजीनियर हैं। परिवार का कहना है कि चौदह जून की रात कटघर थाना क्षेत्र में ही रामपुर रोड पर होटल क्लार्क इन में शादी की रिसेप्शन पार्टी थी। पार्टी में उनके दोस्त और रिश्तेदार शामिल हुए थे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दस-बारह लोग एक टेबल पर दूल्हा- दुल्हन के साथ खाना खा रहे थे। खाने के दौरान दुल्हन ने अपना बैग टेबल पर ही रख लिया था। इसके बाद वहां बैग गायब हो गए। काफी पूछताछ की उसके बाद भी कही पता नहीं चला उन्होंने होटल मैनेजर को मामले की जानकारी दी। परिजनों ने आशंका जताई है कि वेटर ने इस घटना को अंजाम दिया है। बता दें कि कटघर थाना क्षेत्र में गाड़ी खाना निवासी प्रमोद कुमार यादव की शादी के बाद जिले के ही एक होटल में रिसेप्शन पार्टी थी। पार्टी के दौरान दुल्हन का बैग और कैस चोरो ने उड़ा दिए। दुल्हन को तब इसकी जानकारी हुआ उसने देखा कि जिस टेबल पर उसने बैग रखे थे वहां पर बैग था ही नहीं। उन्होंने आप- पास घूम रहे वेटर पर चोरी का संदेह जताया है। उन्होंने बताया कि बैग में सोने की शून्य दो अंगूठी, सोने की एक चेन, पचास हजार रुपए, एक घड़ी और गिफ्ट में मिले कुछ लिफाफे समेत अन्य कुछ सामान था। हालांकि इस मामले में पीड़ित परिजनों ने एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस होटल में लगे सीसीटीवी की मदद से आरोपी की पहचान करने में जुटी है। वहीं पीड़ित परिवार ने कहा कि होटल प्रबंधन से इस मामले की शिकायत की थी। तब होटल प्रबंधन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। लेकिन होटल प्रबंधन की ओर से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि जब डीआईजी से गुहार लगाई फिर मामले में केस दर्ज किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
125. परन्तु जिन के दिलों में (द्विधा) का रोग है तो उस ने उन की गंन्दगी ओर अधिक बढ़ा दी। और वह काफ़िर रहते हुये ही मर गये। 126. क्या वह नहीं देखते कि उन की परीक्षा प्रत्येक वर्ष एक बार अथवा दो बार ली जाती है? फिर भी वह तौबा (क्षमा याचना ) नहीं करते, और न शिक्षा ग्रहण करते हैं ? 127. और जब कोई सूरह उतारी जाये, तो वह एक दूसरे की ओर देखते हैं कि तुम्हें कोई देख तो नहीं रहा है? फिर मुँह फेर कर चल देते हैं। अल्लाह ने उन के दिलों को (ईमान से) [2] फेर दिया है। इस कारण कि वह समझ बूझ नहीं रखते। 128. (हे ईमान वालो!) तुम्हारे पास तुम्हीं में से अल्लाह का एक रसूल आ गया है। उस को वह बात भारी लगती है जिस से तुम्हें दुःख हो। वह तुम्हारी सफलता की लालसा रखते हैं। और ईमान वालों के लिये करुणामय दयावान् हैं। 129. (हे नबी!) फिर भी यदि वह आप से मुँह फेरते हों तो उन से कह दो कि मेरे लिये अल्लाह ( का सहारा) बस है। उस के अतिरिक्त कोई हक़ीक़ी पूज्य नहीं । और वही महा सिंहासन का मालिक (स्वामी) है। وأما الذين في قلوبهم مرض فزادتهم رجسا إلى رجيم وماتوا وهم نفرون 0 اولا يرون أنهم يفتنون في كل عام مرة أو مرتين ثم لايتوبون ولاهم واذاما انزلت سورة تظر بعضهم إلى بعض هل تريكو من أحدثة انصرفوامرن الله قلوبهم بأنهم قوم لايفقهون ول من أنفكر عزیز لقد جاءكم رسول من انفیک عليه ماعنتم حريص عليكم بالمؤمنين رون رجي فإن تول عليه توكلت وهو رب العرش العظيمة 1 अर्थात उन पर आपदा आती है तथा अपमानित किये जाते हैं। (इब्ने कसीर) 2 इस से अभिप्राय मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। सूरह यूनुस यह सूरह मक्की है, इस में 109 आयतें हैं। अलिफ़, लाम, रा। यह तत्वज्ञता से परिपूर्ण पुस्तक (कुआन) की आयतें हैं। क्या मानव के लिये आश्चर्य की बात है कि हम ने उन्हीं में से एक पुरुष पर[1] प्रकाशना भेजी है कि आप मानवगण को सावधान कर दें। और जो ईमान लायें उन्हें शुभ सूचना सुना दें कि उन्हीं के लिये उन के पालनहार के पास सत्य सम्मान है? तो काफ़िरों ने कह दिया कि यह खुला जादूगर है। 3. वास्तव में तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है जिस नें आकाशों तथा धरती को छः दिनों में उत्पन्न किया, फिर अर्श (राज सिंहासन) पर स्थिर हो गया। वही विश्व की व्यवस्था कर रहा है। कोई उस के पास अनुशंसा (सिफ़ारिश) नहीं कर सकता, परन्तु उस की अनुमति के पश्चात। वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, अतः سورة يونس ر الله الرحمن الرحيم المتلك ايت الكتب التحكيم اكان الناس عجباان اوحينا إلى رجل منهم ان انذر الناس وتشر الذين امنوا لهم قدم صدق عند ربهم قال الكفرون ان هنالسحر ان رتبه الله الذي خلق السموات والأرض في سة ايام ثم استوى على العرش يدبرالأمر مامن شفيع إلا من بعد اذنه ذلكم الله ربكم فاعبدوة اقلاتذكرون 1 सत्य सम्मान से अभिप्रेत स्वर्ग है। अर्थात उन के सत्कर्मों का फल उन्हें अल्लाह की ओर से मिलेगा। उसी की इबादत (वंदना )[1] करो। क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते? 4. उसी की ओर तुम सब को लौटना है। यह अल्लाह का सत्य वचन है। वही उत्पत्ति का आरंभ करता है। फिर वही पुनः उत्पन्न करेगा ताकि उन्हें न्याय के साथ प्रतिफल प्रदान[2] करे। जो ईमान लाये और सदाचार किये, और जो काफ़िर हो गये उन के लिये खौलता पेय तथा दुःखदायी यातना है। उस अविश्वास के बदले जो कर रहे थे । 5. उसी ने सूर्य को ज्योति तथा चाँद को प्रकाश बनाया है। और उस (चाँद) के गंतव्य स्थान निर्धारित कर दिये, ताकि तुम वर्षों की गिनती तथा हिसाब का ज्ञान कर लो। इन की उत्पत्ति अल्लाह ने नहीं की है परन्तु सत्य के साथ । वह उन लोगों के लिये निशानियों (लक्षणों) का वर्णन कर रहा है, जो ज्ञान रखते हों। 6. निःसंदेह रात्रि तथा दिवस के एक दूसरे के पीछे आने में, और जो कुछ अल्लाह ने आकाशों तथा धरती में उत्पन्न किया है उन लोगों के लिये निशानियाँ हैं जो अल्लाह से डरते हों। 7. वास्तव में जो लोग (प्रलय के दिन ) إليه مرجعكم جميعا وعداللہ حقاته يبدوا الخلقت بعيدة ليجزى الذين امنوا وعملوا الصيحت بالقسط والذين كفروالهم شراب من حمير وعذاب الیم بما كانوا يكفرون والذي جعل الشمس ضياء والقبرنورا وقدرة منازل لتعلمواعدد السنين والحساب اخلق الله ذلك إلا بالحق يفضل الأيت لقوم تعلمون ان في اختلاف اليل والنهار وماخلق الله في السموات والارض لايت لقوم تتقون إن الذين لا يرجون لقاءنا ورضوا بالحيوة 1 भावार्थ यह है कि जब विश्व की व्यवस्था वही अकेला कर रहा है तो पूज्य भी वही अकेला होना चाहिये। 2 भावार्थ यह है कि यह दूसरा परलोक का जीवन इस लिये आवश्यक है कि कर्मों के फल का नियम यह चाहता है कि जब एक जीवन कर्म के लिये है तो दूसरा कर्मों के प्रतिफल के लिये होना चाहिये ।
एक सौ पच्चीस. परन्तु जिन के दिलों में का रोग है तो उस ने उन की गंन्दगी ओर अधिक बढ़ा दी। और वह काफ़िर रहते हुये ही मर गये। एक सौ छब्बीस. क्या वह नहीं देखते कि उन की परीक्षा प्रत्येक वर्ष एक बार अथवा दो बार ली जाती है? फिर भी वह तौबा नहीं करते, और न शिक्षा ग्रहण करते हैं ? एक सौ सत्ताईस. और जब कोई सूरह उतारी जाये, तो वह एक दूसरे की ओर देखते हैं कि तुम्हें कोई देख तो नहीं रहा है? फिर मुँह फेर कर चल देते हैं। अल्लाह ने उन के दिलों को [दो] फेर दिया है। इस कारण कि वह समझ बूझ नहीं रखते। एक सौ अट्ठाईस. तुम्हारे पास तुम्हीं में से अल्लाह का एक रसूल आ गया है। उस को वह बात भारी लगती है जिस से तुम्हें दुःख हो। वह तुम्हारी सफलता की लालसा रखते हैं। और ईमान वालों के लिये करुणामय दयावान् हैं। एक सौ उनतीस. फिर भी यदि वह आप से मुँह फेरते हों तो उन से कह दो कि मेरे लिये अल्लाह बस है। उस के अतिरिक्त कोई हक़ीक़ी पूज्य नहीं । और वही महा सिंहासन का मालिक है। وأما الذين في قلوبهم مرض فزادتهم رجسا إلى رجيم وماتوا وهم نفرون शून्य اولا يرون أنهم يفتنون في كل عام مرة أو مرتين ثم لايتوبون ولاهم واذاما انزلت سورة تظر بعضهم إلى بعض هل تريكو من أحدثة انصرفوامرن الله قلوبهم بأنهم قوم لايفقهون ول من أنفكر عزیز لقد جاءكم رسول من انفیک عليه ماعنتم حريص عليكم بالمؤمنين رون رجي فإن تول عليه توكلت وهو رب العرش العظيمة एक अर्थात उन पर आपदा आती है तथा अपमानित किये जाते हैं। दो इस से अभिप्राय मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। सूरह यूनुस यह सूरह मक्की है, इस में एक सौ नौ आयतें हैं। अलिफ़, लाम, रा। यह तत्वज्ञता से परिपूर्ण पुस्तक की आयतें हैं। क्या मानव के लिये आश्चर्य की बात है कि हम ने उन्हीं में से एक पुरुष पर[एक] प्रकाशना भेजी है कि आप मानवगण को सावधान कर दें। और जो ईमान लायें उन्हें शुभ सूचना सुना दें कि उन्हीं के लिये उन के पालनहार के पास सत्य सम्मान है? तो काफ़िरों ने कह दिया कि यह खुला जादूगर है। तीन. वास्तव में तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है जिस नें आकाशों तथा धरती को छः दिनों में उत्पन्न किया, फिर अर्श पर स्थिर हो गया। वही विश्व की व्यवस्था कर रहा है। कोई उस के पास अनुशंसा नहीं कर सकता, परन्तु उस की अनुमति के पश्चात। वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, अतः سورة يونس ر الله الرحمن الرحيم المتلك ايت الكتب التحكيم اكان الناس عجباان اوحينا إلى رجل منهم ان انذر الناس وتشر الذين امنوا لهم قدم صدق عند ربهم قال الكفرون ان هنالسحر ان رتبه الله الذي خلق السموات والأرض في سة ايام ثم استوى على العرش يدبرالأمر مامن شفيع إلا من بعد اذنه ذلكم الله ربكم فاعبدوة اقلاتذكرون एक सत्य सम्मान से अभिप्रेत स्वर्ग है। अर्थात उन के सत्कर्मों का फल उन्हें अल्लाह की ओर से मिलेगा। उसी की इबादत [एक] करो। क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते? चार. उसी की ओर तुम सब को लौटना है। यह अल्लाह का सत्य वचन है। वही उत्पत्ति का आरंभ करता है। फिर वही पुनः उत्पन्न करेगा ताकि उन्हें न्याय के साथ प्रतिफल प्रदान[दो] करे। जो ईमान लाये और सदाचार किये, और जो काफ़िर हो गये उन के लिये खौलता पेय तथा दुःखदायी यातना है। उस अविश्वास के बदले जो कर रहे थे । पाँच. उसी ने सूर्य को ज्योति तथा चाँद को प्रकाश बनाया है। और उस के गंतव्य स्थान निर्धारित कर दिये, ताकि तुम वर्षों की गिनती तथा हिसाब का ज्ञान कर लो। इन की उत्पत्ति अल्लाह ने नहीं की है परन्तु सत्य के साथ । वह उन लोगों के लिये निशानियों का वर्णन कर रहा है, जो ज्ञान रखते हों। छः. निःसंदेह रात्रि तथा दिवस के एक दूसरे के पीछे आने में, और जो कुछ अल्लाह ने आकाशों तथा धरती में उत्पन्न किया है उन लोगों के लिये निशानियाँ हैं जो अल्लाह से डरते हों। सात. वास्तव में जो लोग إليه مرجعكم جميعا وعداللہ حقاته يبدوا الخلقت بعيدة ليجزى الذين امنوا وعملوا الصيحت بالقسط والذين كفروالهم شراب من حمير وعذاب الیم بما كانوا يكفرون والذي جعل الشمس ضياء والقبرنورا وقدرة منازل لتعلمواعدد السنين والحساب اخلق الله ذلك إلا بالحق يفضل الأيت لقوم تعلمون ان في اختلاف اليل والنهار وماخلق الله في السموات والارض لايت لقوم تتقون إن الذين لا يرجون لقاءنا ورضوا بالحيوة एक भावार्थ यह है कि जब विश्व की व्यवस्था वही अकेला कर रहा है तो पूज्य भी वही अकेला होना चाहिये। दो भावार्थ यह है कि यह दूसरा परलोक का जीवन इस लिये आवश्यक है कि कर्मों के फल का नियम यह चाहता है कि जब एक जीवन कर्म के लिये है तो दूसरा कर्मों के प्रतिफल के लिये होना चाहिये ।
UP News: कानपुर से लखनऊ जाने के लिए रोडवेज की बस में सवार दो लड़कियां बीच रास्ते में ही गायब हो गईं। UP News: उत्तर प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में लड़कियां सुरक्षित नजर नहीं हैं। आए दिन महिला अपराध से जुड़ीं घटनाएं सामने आती रहती है। महिला सुरक्षा को लेकर यूपी पुलिस द्वारा उठाए गए कई कदमों के बावजूद उनकी आवाजाही सेफ नहीं हो सकी है। कभी किसी स्कूल, कॉलेज जाने वाली छात्राओं के साथ घटना होती है तो कभी बस या ट्रेन में सफर कर रहीं महिलाओं के साथ अभद्रता करने का मामला सामने आता है। ऐसे ही एक मामले ने इन दिनों यूपी पुलिस की नींद उड़ा रखी है। जानकारी के मुताबिक, कानपुर से लखनऊ जाने के लिए रोडवेज की बस में सवार दो लड़कियां बीच रास्ते में ही गायब हो गईं। दोनों के बारे में कुछ किसी के पास कोई सूचना नहीं है। खबर सामने आने के बाद कानपुर से लेकर राजधानी लखनऊ तक पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इस रूट पर मौजूद सभी पुलिस थानों को घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, लड़कियों ने बस में बैठने के बाद एक वीडियो बना कर भेजा था। वीडियो में बस पूरी खाली थी और केवल कंडक्टर नजर आ रहा था। वीडियो भेजने के बाद जब परिवार वालों ने लड़कियों से संपर्क करना चाहा तो उनका फोन बंद आने लगा। इसके बाद उनकी बेचैनी बढ़ गई। दोनों लड़कियां बाबा गुरूनानक के पाठ में शामिल होने के लिए कानपुर गईं थी जहां से वो वापस आ रही थीं। इसी दौरान दोनों बीच रास्ते में गायब हो गईं। घटना के बाद से परिवार में परेशान है। घरवालों को किसी अनहोनी का डर सताने लगा है। दोनों लड़कियां लखनऊ के कृष्णानगर निवासी थीं। परिजनों ने कृष्णा नगर थाने में तहरीर दी है। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लड़कियों की आखिरी लोकेशन उन्नाव जिले के अजगैन में मिली थी। रूट के सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया। जल्द ही पुलिस उस बस के चालक और कंडक्टर से भी पूछताछ करेगी, जिसमें दोनों लड़कियां सवार थीं।
UP News: कानपुर से लखनऊ जाने के लिए रोडवेज की बस में सवार दो लड़कियां बीच रास्ते में ही गायब हो गईं। UP News: उत्तर प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में लड़कियां सुरक्षित नजर नहीं हैं। आए दिन महिला अपराध से जुड़ीं घटनाएं सामने आती रहती है। महिला सुरक्षा को लेकर यूपी पुलिस द्वारा उठाए गए कई कदमों के बावजूद उनकी आवाजाही सेफ नहीं हो सकी है। कभी किसी स्कूल, कॉलेज जाने वाली छात्राओं के साथ घटना होती है तो कभी बस या ट्रेन में सफर कर रहीं महिलाओं के साथ अभद्रता करने का मामला सामने आता है। ऐसे ही एक मामले ने इन दिनों यूपी पुलिस की नींद उड़ा रखी है। जानकारी के मुताबिक, कानपुर से लखनऊ जाने के लिए रोडवेज की बस में सवार दो लड़कियां बीच रास्ते में ही गायब हो गईं। दोनों के बारे में कुछ किसी के पास कोई सूचना नहीं है। खबर सामने आने के बाद कानपुर से लेकर राजधानी लखनऊ तक पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इस रूट पर मौजूद सभी पुलिस थानों को घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, लड़कियों ने बस में बैठने के बाद एक वीडियो बना कर भेजा था। वीडियो में बस पूरी खाली थी और केवल कंडक्टर नजर आ रहा था। वीडियो भेजने के बाद जब परिवार वालों ने लड़कियों से संपर्क करना चाहा तो उनका फोन बंद आने लगा। इसके बाद उनकी बेचैनी बढ़ गई। दोनों लड़कियां बाबा गुरूनानक के पाठ में शामिल होने के लिए कानपुर गईं थी जहां से वो वापस आ रही थीं। इसी दौरान दोनों बीच रास्ते में गायब हो गईं। घटना के बाद से परिवार में परेशान है। घरवालों को किसी अनहोनी का डर सताने लगा है। दोनों लड़कियां लखनऊ के कृष्णानगर निवासी थीं। परिजनों ने कृष्णा नगर थाने में तहरीर दी है। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लड़कियों की आखिरी लोकेशन उन्नाव जिले के अजगैन में मिली थी। रूट के सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया। जल्द ही पुलिस उस बस के चालक और कंडक्टर से भी पूछताछ करेगी, जिसमें दोनों लड़कियां सवार थीं।
उत्तर प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पदों पर बंपर भर्तियां निकल हैं। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के कुल 5500 पदों को भरा जाएगा। इन पदों के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट upnrhm. gov. in के माद्यम से 9 अगस्त 2022 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी की अधिकतम उम्र 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं, ओडिशा लोक सेवा आयोग ने सहायक कृषि अधिकारी के पदों पर भर्तियों निकाली है। इच्छुक उम्मीदवार 29 जुलाई 2022 से इन पदों पर आवेदन कर सकेंगे। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट opsc. gov. in के जरिए 29 अगस्त 2022 तक इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर में डिग्री होनी चाहिए। Latest Government Jobs 2022 (सरकारी नौकरी) Results: दिल्ली, यूपी और बिहार समेत देश के कई राज्यों में सरकारी नौकरी निकली है। उम्मीदवार इस ब्लॉग के जरिए सरकारी नौकरी और सरकारी रिजल्ट से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने ट्रेनी इंजीनियर और प्रोजेक्ट इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bel-india. in पर 3 अगस्त 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भारतीय सेना के तहत आर्मी एयर डिफेंस सेंटर ने लोअर डिविजन क्लर्क (LDC) पदों पर भर्ती के लिए रोजगार समाचार में विज्ञापन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को वेतन मैट्रिक्स लेवल 2 के तहत 19900 रुपए से 63200 रुपए महीने तक का वेतन दिया जाएगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने कई पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट aai. aero पर 29 जुलाई 2022 तक या उससे पहले अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए 1000 रुपए आवेदन शुल्क भी जमा करना होगा। भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट recruitment. itbpolice. nic. in पर 14 अगस्त 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए 200 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC Limited) ने एग्जीक्यूटिव के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट careers. ntpc. co. in पर 29 जुलाई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर 31 जुलाई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई से शुरू की गई है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने गाइनोकोलॉजिस्ट पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट mppsc. mp. gov. in पर 8 अगस्त 2022 से 1 सितंबर 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने स्पेशलिस्ट ग्रेड- II जूनियर स्केल के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार 26 जुलाई तक आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। सेक्शन अधिकारिक के रिक्त पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अप्लाई करने की लास्ट डेट 4 अगस्त 2022 है। अभ्यर्थी पंजाब लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अप्लाई कर सकते हैं। भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट recruitment. itbpolice. nic. in पर 14 अगस्त 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए 200 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। सिटिजन क्रेडिट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने नया भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट citizencreditbank. com पर 2 अगस्त 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रोबेशनरी ऑफिसर और प्रोबेशनरी एसोसिएट पदों पर भर्ती की जाएगी। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने स्टेनोग्राफर सहित 89 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। इसके लिए उम्मीदवार की आयु 18 साल से 27 साल के बीच होनी चाहिए। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर 31 जुलाई 2022 तक अप्लाई कर सकते हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने असिस्टेंट सहित अन्य कई पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट greentribunal. gov. in पर नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन और अन्य आवश्यक दस्तावेज नोटिफिकेशन में दिए गए पते पर 25 जुलाई 2022 की शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार 8 अगस्त 2022 तक अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए 1000 रुपए शुल्क जमा करना होगा। नवोदय विद्यालय समिति ने शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार 22 जुलाई 2022 तक आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वैदिक साइंसेज ने रिसर्च ऑफिसर और फार्मासिस्ट सहित अन्य 38 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार 14 अगस्त 2022 तक आवेदन कर सकते हैं। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार 16 अगस्त 2022 तक ऑनलाइन मोड में आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से 46 पदों पर भर्ती की जाएगी। APSSB CGL Recruitment 2022: आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के जरिए किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी आधिकारिक नोटिस को चेक कर सकते हैं। APSSB CGL Recruitment 2022: अपर डिवीजन क्लर्क और जूनियर इंस्पेक्टर पदों पर भर्तियां निकाली हैं। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट apssb. nic. in के जरिए 16 अगस्त 2022 आवेदन कर सकते हैं। PPSC Recruitment 2022: इन पदों पर आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिए किया जाएगा। परीक्षा की तिथि और एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। OPSC Recruitment 2022: इन पदों पर चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए संपन्न होगी। अभी परीक्षा की तिथि नहीं घोषित की गई है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को चेक कर सकते हैं। OPSC AAO Recruitment 2022: अभ्यर्थी की अधिकतम उम्र 38 वर्ष होनी चाहिए। एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट भी दी गई है। ESIC Recruitment 2022: उम्मीदवारों का चयन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा, जो चयन बोर्ड द्वारा आयोजित किया जाएगा। बता दें कि साक्षात्कार का परिणाम ईएसआई निगम की वेबसाइट http://www. esic. nic. in पर प्रकाशित की जाएगी। ESIC Recruitment 2022: उम्मीदवारों को 500 रुपये के आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। इसमें अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूडी / विभागीय उम्मीदवारों (ईएसआईसी कर्मचारी), महिला उम्मीदवारों और पूर्व सैनिकों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। ESIC Recruitment 2022: इस भर्ती अभियान के माध्यम से 28 पदों को भरा जाएगा। इन पदों के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 26 जुलाई 2022 को 45 वर्ष होनी चाहिए। Latest Government Jobs 2022 (सरकारी नौकरी) Results: उत्तर प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और ओडिशा लोक सेवा आयोग में सहायक कृषि अधिकारी के पदों पर भर्ती निकली है। इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से उम्मीदवार सरकारी नौकरी से संबंधित अपडेट्स देख सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पदों पर बंपर भर्तियां निकल हैं। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के कुल पाँच हज़ार पाँच सौ पदों को भरा जाएगा। इन पदों के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट upnrhm. gov. in के माद्यम से नौ अगस्त दो हज़ार बाईस तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी की अधिकतम उम्र पैंतीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं, ओडिशा लोक सेवा आयोग ने सहायक कृषि अधिकारी के पदों पर भर्तियों निकाली है। इच्छुक उम्मीदवार उनतीस जुलाई दो हज़ार बाईस से इन पदों पर आवेदन कर सकेंगे। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट opsc. gov. in के जरिए उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस तक इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर में डिग्री होनी चाहिए। Latest Government Jobs दो हज़ार बाईस Results: दिल्ली, यूपी और बिहार समेत देश के कई राज्यों में सरकारी नौकरी निकली है। उम्मीदवार इस ब्लॉग के जरिए सरकारी नौकरी और सरकारी रिजल्ट से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने ट्रेनी इंजीनियर और प्रोजेक्ट इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bel-india. in पर तीन अगस्त दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भारतीय सेना के तहत आर्मी एयर डिफेंस सेंटर ने लोअर डिविजन क्लर्क पदों पर भर्ती के लिए रोजगार समाचार में विज्ञापन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को वेतन मैट्रिक्स लेवल दो के तहत उन्नीस हज़ार नौ सौ रुपयापए से तिरेसठ हज़ार दो सौ रुपयापए महीने तक का वेतन दिया जाएगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कई पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट aai. aero पर उनतीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक या उससे पहले अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए एक हज़ार रुपयापए आवेदन शुल्क भी जमा करना होगा। भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट recruitment. itbpolice. nic. in पर चौदह अगस्त दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए दो सौ रुपयापए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने एग्जीक्यूटिव के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट careers. ntpc. co. in पर उनतीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर इकतीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया सात जुलाई से शुरू की गई है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने गाइनोकोलॉजिस्ट पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट mppsc. mp. gov. in पर आठ अगस्त दो हज़ार बाईस से एक सितंबर दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने स्पेशलिस्ट ग्रेड- II जूनियर स्केल के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार छब्बीस जुलाई तक आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। सेक्शन अधिकारिक के रिक्त पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अप्लाई करने की लास्ट डेट चार अगस्त दो हज़ार बाईस है। अभ्यर्थी पंजाब लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अप्लाई कर सकते हैं। भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने सब इंस्पेक्टर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट recruitment. itbpolice. nic. in पर चौदह अगस्त दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए दो सौ रुपयापए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। सिटिजन क्रेडिट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने नया भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट citizencreditbank. com पर दो अगस्त दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रोबेशनरी ऑफिसर और प्रोबेशनरी एसोसिएट पदों पर भर्ती की जाएगी। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने स्टेनोग्राफर सहित नवासी पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। इसके लिए उम्मीदवार की आयु अट्ठारह साल से सत्ताईस साल के बीच होनी चाहिए। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर इकतीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक अप्लाई कर सकते हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने असिस्टेंट सहित अन्य कई पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट greentribunal. gov. in पर नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन और अन्य आवश्यक दस्तावेज नोटिफिकेशन में दिए गए पते पर पच्चीस जुलाई दो हज़ार बाईस की शाम पाँच बजे तक भेज सकते हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार आठ अगस्त दो हज़ार बाईस तक अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए एक हज़ार रुपयापए शुल्क जमा करना होगा। नवोदय विद्यालय समिति ने शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार बाईस जुलाई दो हज़ार बाईस तक आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वैदिक साइंसेज ने रिसर्च ऑफिसर और फार्मासिस्ट सहित अन्य अड़तीस पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। उम्मीदवार चौदह अगस्त दो हज़ार बाईस तक आवेदन कर सकते हैं। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। योग्य उम्मीदवार सोलह अगस्त दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन मोड में आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से छियालीस पदों पर भर्ती की जाएगी। APSSB CGL Recruitment दो हज़ार बाईस: आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के जरिए किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी आधिकारिक नोटिस को चेक कर सकते हैं। APSSB CGL Recruitment दो हज़ार बाईस: अपर डिवीजन क्लर्क और जूनियर इंस्पेक्टर पदों पर भर्तियां निकाली हैं। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट apssb. nic. in के जरिए सोलह अगस्त दो हज़ार बाईस आवेदन कर सकते हैं। PPSC Recruitment दो हज़ार बाईस: इन पदों पर आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिए किया जाएगा। परीक्षा की तिथि और एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। OPSC Recruitment दो हज़ार बाईस: इन पदों पर चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए संपन्न होगी। अभी परीक्षा की तिथि नहीं घोषित की गई है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को चेक कर सकते हैं। OPSC AAO Recruitment दो हज़ार बाईस: अभ्यर्थी की अधिकतम उम्र अड़तीस वर्ष होनी चाहिए। एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट भी दी गई है। ESIC Recruitment दो हज़ार बाईस: उम्मीदवारों का चयन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा, जो चयन बोर्ड द्वारा आयोजित किया जाएगा। बता दें कि साक्षात्कार का परिणाम ईएसआई निगम की वेबसाइट http://www. esic. nic. in पर प्रकाशित की जाएगी। ESIC Recruitment दो हज़ार बाईस: उम्मीदवारों को पाँच सौ रुपयापये के आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। इसमें अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूडी / विभागीय उम्मीदवारों , महिला उम्मीदवारों और पूर्व सैनिकों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। ESIC Recruitment दो हज़ार बाईस: इस भर्ती अभियान के माध्यम से अट्ठाईस पदों को भरा जाएगा। इन पदों के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु छब्बीस जुलाई दो हज़ार बाईस को पैंतालीस वर्ष होनी चाहिए। Latest Government Jobs दो हज़ार बाईस Results: उत्तर प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और ओडिशा लोक सेवा आयोग में सहायक कृषि अधिकारी के पदों पर भर्ती निकली है। इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से उम्मीदवार सरकारी नौकरी से संबंधित अपडेट्स देख सकते हैं।
रुई के दाम घटने से इसके चलते सूती चादर की कीमत में गिरावट आना लाजिमी है। पिलखुवा निर्मित चादर की दिल्ली महाराष्ट्र चेन्नई सहित अरबी देशों में डिमांड रहती है। उद्यमियों का यह भी मानना है कि रुस-यूक्रेन युद्ध का असर है। पिलखुवा/ हापुड़, जागरण संवाददाता। रुई के दाम घटने के चलते हैंडलूम नगरी के रूप में विख्यात पिलखुवा सहित देशभर में सूती चादर के कारोबारी चिंतित हैं। दीपावली पर्व के दौरान अक्सर सूती चादर के दामों में इजाफा होता है और डिमांड बढ़ती थी। लेकिन, इस बार रुई के दाम घटने और डिमांड नाममात्र रहने के चलते सूती चादर के दामों में गिरावट हुई है। त्योहार के मद्देनजर पहले से मोटी लागत लगाकर स्टाक करने वाले व्यापारियों के सामने मूलधन तक निकलना मुश्किल हो रहा है। सूती चादर निर्माताओं का कहना है कि रुई का कारोबार सोने की तरह प्रतिदिन सट्टा बाजार में बढ़ता और घटता है। एक सप्ताह पहले तक 356 किलो की बोरी के दाम 90 से 95 हजार रुपये थे। वर्तमान में वह दाम घटकर 70 से 75 हजार रुपये रह गए है। रुई के दाम घटने से इसके चलते सूती चादर की कीमत में गिरावट आना लाजिमी है। पिलखुवा निर्मित चादर की दिल्ली, महाराष्ट्र, चेन्नई सहित अरबी देशों में डिमांड रहती है। उद्यमियों का यह भी मानना है कि रुस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ रही महंगाई को काबू करने के लिए विश्वभर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दर में बढ़ोत्तरी करना शुरू कर दिया है। जिस कारण बाजार सहम गया है। इसी के चलते लोहा, सोना, चांदी आदि के साथ रुई के दाम भी अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में काफी गिर चुके हैं। पिलखुवा क्षेत्र में छोटी-बड़ी मिलाकर 15 सौ से अधिक चादर निर्मित करने वाली फैक्ट्रियां है। इन फैक्ट्रियों दस हजार से अधिक कामगार है। चादर कारोबारियों की मानें तो एक चादर चौदह हाथों से निकलने के बाद तैयार होती है। बड़ी संख्या परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए है। क्या कहते हैं कारोबारी : रुई का रेट घटता और बढ़ता रहता है। यह बाजार और सट्टेबाजाें पर निर्धारित है। पिछले दिनों में रुई के दाम में भारी गिरावट है। चादर की डिमांड भी काफी घटी है। इसके चलते इस बार दीपावली पर बाजार मेंं मंदी है। लागत लगाकर स्टाक करने वाले व्यापारी ग्राहक का इंतजार कर रहे है। हरिओम सिंह, पूर्व अध्यक्ष, वस्त्र व्यापारी संघरुई के दाम घटने के कारण भी चादर कारोबारी चिंतित है। जिला गाजियाबाद के मुरादनगर से प्लेन चादर पिलखुवा में आती है। रंगाई और छपाई के बाद आगे बिकती है। पहले माल की आपूर्ति करना मुश्किल हो जाता है। माल तक नहीं मिल पाता है। इस बार ऐसा नहीं है। डिमांड नहीं होने के कारण माल गोदामों में रखा है।
रुई के दाम घटने से इसके चलते सूती चादर की कीमत में गिरावट आना लाजिमी है। पिलखुवा निर्मित चादर की दिल्ली महाराष्ट्र चेन्नई सहित अरबी देशों में डिमांड रहती है। उद्यमियों का यह भी मानना है कि रुस-यूक्रेन युद्ध का असर है। पिलखुवा/ हापुड़, जागरण संवाददाता। रुई के दाम घटने के चलते हैंडलूम नगरी के रूप में विख्यात पिलखुवा सहित देशभर में सूती चादर के कारोबारी चिंतित हैं। दीपावली पर्व के दौरान अक्सर सूती चादर के दामों में इजाफा होता है और डिमांड बढ़ती थी। लेकिन, इस बार रुई के दाम घटने और डिमांड नाममात्र रहने के चलते सूती चादर के दामों में गिरावट हुई है। त्योहार के मद्देनजर पहले से मोटी लागत लगाकर स्टाक करने वाले व्यापारियों के सामने मूलधन तक निकलना मुश्किल हो रहा है। सूती चादर निर्माताओं का कहना है कि रुई का कारोबार सोने की तरह प्रतिदिन सट्टा बाजार में बढ़ता और घटता है। एक सप्ताह पहले तक तीन सौ छप्पन किलो की बोरी के दाम नब्बे से पचानवे हजार रुपये थे। वर्तमान में वह दाम घटकर सत्तर से पचहत्तर हजार रुपये रह गए है। रुई के दाम घटने से इसके चलते सूती चादर की कीमत में गिरावट आना लाजिमी है। पिलखुवा निर्मित चादर की दिल्ली, महाराष्ट्र, चेन्नई सहित अरबी देशों में डिमांड रहती है। उद्यमियों का यह भी मानना है कि रुस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ रही महंगाई को काबू करने के लिए विश्वभर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दर में बढ़ोत्तरी करना शुरू कर दिया है। जिस कारण बाजार सहम गया है। इसी के चलते लोहा, सोना, चांदी आदि के साथ रुई के दाम भी अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में काफी गिर चुके हैं। पिलखुवा क्षेत्र में छोटी-बड़ी मिलाकर पंद्रह सौ से अधिक चादर निर्मित करने वाली फैक्ट्रियां है। इन फैक्ट्रियों दस हजार से अधिक कामगार है। चादर कारोबारियों की मानें तो एक चादर चौदह हाथों से निकलने के बाद तैयार होती है। बड़ी संख्या परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए है। क्या कहते हैं कारोबारी : रुई का रेट घटता और बढ़ता रहता है। यह बाजार और सट्टेबाजाें पर निर्धारित है। पिछले दिनों में रुई के दाम में भारी गिरावट है। चादर की डिमांड भी काफी घटी है। इसके चलते इस बार दीपावली पर बाजार मेंं मंदी है। लागत लगाकर स्टाक करने वाले व्यापारी ग्राहक का इंतजार कर रहे है। हरिओम सिंह, पूर्व अध्यक्ष, वस्त्र व्यापारी संघरुई के दाम घटने के कारण भी चादर कारोबारी चिंतित है। जिला गाजियाबाद के मुरादनगर से प्लेन चादर पिलखुवा में आती है। रंगाई और छपाई के बाद आगे बिकती है। पहले माल की आपूर्ति करना मुश्किल हो जाता है। माल तक नहीं मिल पाता है। इस बार ऐसा नहीं है। डिमांड नहीं होने के कारण माल गोदामों में रखा है।
लड़कों को Bra खोलना इतना मुश्किल क्यों लगता है ? शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे ब्रा खोलना बहुत आसान लगा हो। सबसे पहले तो आपको बता दें कि लड़कियां ब्रा खोलने में माहिर हो जाती हैं क्योंकि वे हर दिन एक ब्रा पहनती हैं। यानी यहां अनुभव का बहुत काम है। सामान्य-सी बात है कि लड़के ब्रा नहीं पहनते, इसलिए वह आसानी से ब्रा नहीं खोल पाते। साथ ही, सभी ब्रा एक जैसी नहीं होती हैं। यानी जब आपको लगेगा कि आप ब्रा खोलने में माहिर हैं तो बाजार में कोई नई ब्रा आ जाती है जिसे आप खोल नहीं पाते हैं। - बाजार में जो सामान्य ब्रा आती हैं उसमें पीछे बांधने के लिए 2 फीते बने होते हैं। एक फीते में आपको हुक दिखेंगे तो दूसरे में कुछ छिद्र होते हैं, जिससे ब्रा बांधी जाती है। जो हुक होते हैं उनको छिद्रों में डालना होता है जिससे ब्रा बंध जाती है। अगर आप इस तरह की ब्रा को खोलना चाहते हैं तो आपको ब्रा के किनारों को पहले दबाकर पकड़ना होगा। इसके बाद हुकों को छिद्रों से बाहर निकालने की कोशिश करनी होगी। जिससे ब्रा खुल जाएगी। - बाजार में कई ऐसी भी ब्रा आती हैं जिसमें सिर्फ एक हुक होता है और एक ही छिद्र होता है। यह ब्रा खोलना आसान भी हो सकता है। कई ब्रा में 5 हुक और 5 छिद्र भी होते हैं। जिसे खोलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अनुभव के साथ आप सीख जाएंगे। - सबसे पहले तो आपको पता होना चाहिए कि क्लैप्स कहां मौजूद हैं? कई महिलाएं बैक क्लैप्स ब्रा पहनती हैं तो कई महिलाएं फ्रंट क्लैप्स वाली ब्रा पहनती हैं। हालांकि, बैक क्लैप्स वाली ब्रा पहनना आम है। ज्यादातर महिलाएं बैक क्लैप्स वाली ब्रा पहनती हैं। - दूसरी ओर, फ्रंट क्लैप ब्रा के साथ, क्लैप ब्रा के बीच स्थित होता है और एक कठिन प्रकार का लॉक लगाया जाता है जो दोनों कपों को जगह देता है। बाजार में इस तरह की ब्रा बहुत ज्यादा उपलब्ध नहीं होती हैं बावजूद इसके कुछ महिलाएं इस तरह की ब्रा पहनना पसंद करती हैं। जब आप अपने पार्टनर की ब्रा खोलने की कोशिश कर रहे हैं और पीछे बटन मौजूद नहीं हैं, तो आपको आगे की तरफ देखना चाहिए। आपको आगे की तरफ हुक दिख जाएगा। - ठीक है, आइए बारीकियों में आते हैं। आप जानते हैं कि आपको तनाव मुक्त होने की आवश्यकता है, लेकिन भूलों से बचने के लिए, दोनों हाथों का उपयोग करना सबसे अच्छा है, विशेष रूप से पीछे की ओर। इसे पूरा करने के लिए, एक हाथ का उपयोग पट्टी के शीर्ष भाग को पिन करने के लिए करें जहां हुक लगे होते हैं और दूसरे हाथ का उपयोग नीचे के हिस्से को रखने के लिए करते हैं। - याद रखें कि ब्रा की पट्टियां आमतौर पर लोचदार होती हैं, इसलिए आपको शीर्ष पट्टी जो टोपी के ऊपर टिकी हुई होती है, को दूसरे की ओर तब तक खींचने की ज़रूरत है जब तक कि आप हुक स्नैप को सुराख़ लूप से छुड़ा न दें। आप देखेंगे कि ब्रा आसानी से खुल गई है। आप किसी से ब्रा उधार लें और प्रैक्टिस करें। तनाव के लिए आप इसे आसानी से कुर्सी के पीछे लगा सकते हैं और फिर स्वयं कुछ अभ्यास कर सकते हैं। - लड़कियां इस स्टाइल में माहिर होती हैं, लेकिन यह आपके लिए ज्यादा चैलेंजिंग होने वाला है। अनुभव ही आपको बेहतर बनाएगा। जब तक आप आत्मविश्वास महसूस न करें तब तक टू-हैंड मेथड से चिपके रहें और फिर वन-हैंडेड 'शो ऑफ' मेथड को आजमाएं। - ऐसा करने के लिए, उस क्षेत्र को पिंच करें जहां हुक और सुराख़ का लूप आपके अंगूठे और दूसरी उंगली से मिलती हैं। उसी सिद्धांत का उपयोग करते हुए जो उन्हें जगह पर रखता है, हुक को सुराख़ लूप से मुक्त होने देने के लिए कपड़े को उसके शरीर से ऊपर और दूर पिंच करके तनाव मुक्त करें। इससे महिला की ब्रा खुल जाएगी। आपको ये थोड़ा मुश्किल लग रहा होगा लेकिन फिर से, अभ्यास करने के लिए एक कुर्सी और एक अतिरिक्त ब्रा का उपयोग करें। इससे आप एक हाथ से ब्रा खोलने में माहिर हो जाएंगे।
लड़कों को Bra खोलना इतना मुश्किल क्यों लगता है ? शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे ब्रा खोलना बहुत आसान लगा हो। सबसे पहले तो आपको बता दें कि लड़कियां ब्रा खोलने में माहिर हो जाती हैं क्योंकि वे हर दिन एक ब्रा पहनती हैं। यानी यहां अनुभव का बहुत काम है। सामान्य-सी बात है कि लड़के ब्रा नहीं पहनते, इसलिए वह आसानी से ब्रा नहीं खोल पाते। साथ ही, सभी ब्रा एक जैसी नहीं होती हैं। यानी जब आपको लगेगा कि आप ब्रा खोलने में माहिर हैं तो बाजार में कोई नई ब्रा आ जाती है जिसे आप खोल नहीं पाते हैं। - बाजार में जो सामान्य ब्रा आती हैं उसमें पीछे बांधने के लिए दो फीते बने होते हैं। एक फीते में आपको हुक दिखेंगे तो दूसरे में कुछ छिद्र होते हैं, जिससे ब्रा बांधी जाती है। जो हुक होते हैं उनको छिद्रों में डालना होता है जिससे ब्रा बंध जाती है। अगर आप इस तरह की ब्रा को खोलना चाहते हैं तो आपको ब्रा के किनारों को पहले दबाकर पकड़ना होगा। इसके बाद हुकों को छिद्रों से बाहर निकालने की कोशिश करनी होगी। जिससे ब्रा खुल जाएगी। - बाजार में कई ऐसी भी ब्रा आती हैं जिसमें सिर्फ एक हुक होता है और एक ही छिद्र होता है। यह ब्रा खोलना आसान भी हो सकता है। कई ब्रा में पाँच हुक और पाँच छिद्र भी होते हैं। जिसे खोलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अनुभव के साथ आप सीख जाएंगे। - सबसे पहले तो आपको पता होना चाहिए कि क्लैप्स कहां मौजूद हैं? कई महिलाएं बैक क्लैप्स ब्रा पहनती हैं तो कई महिलाएं फ्रंट क्लैप्स वाली ब्रा पहनती हैं। हालांकि, बैक क्लैप्स वाली ब्रा पहनना आम है। ज्यादातर महिलाएं बैक क्लैप्स वाली ब्रा पहनती हैं। - दूसरी ओर, फ्रंट क्लैप ब्रा के साथ, क्लैप ब्रा के बीच स्थित होता है और एक कठिन प्रकार का लॉक लगाया जाता है जो दोनों कपों को जगह देता है। बाजार में इस तरह की ब्रा बहुत ज्यादा उपलब्ध नहीं होती हैं बावजूद इसके कुछ महिलाएं इस तरह की ब्रा पहनना पसंद करती हैं। जब आप अपने पार्टनर की ब्रा खोलने की कोशिश कर रहे हैं और पीछे बटन मौजूद नहीं हैं, तो आपको आगे की तरफ देखना चाहिए। आपको आगे की तरफ हुक दिख जाएगा। - ठीक है, आइए बारीकियों में आते हैं। आप जानते हैं कि आपको तनाव मुक्त होने की आवश्यकता है, लेकिन भूलों से बचने के लिए, दोनों हाथों का उपयोग करना सबसे अच्छा है, विशेष रूप से पीछे की ओर। इसे पूरा करने के लिए, एक हाथ का उपयोग पट्टी के शीर्ष भाग को पिन करने के लिए करें जहां हुक लगे होते हैं और दूसरे हाथ का उपयोग नीचे के हिस्से को रखने के लिए करते हैं। - याद रखें कि ब्रा की पट्टियां आमतौर पर लोचदार होती हैं, इसलिए आपको शीर्ष पट्टी जो टोपी के ऊपर टिकी हुई होती है, को दूसरे की ओर तब तक खींचने की ज़रूरत है जब तक कि आप हुक स्नैप को सुराख़ लूप से छुड़ा न दें। आप देखेंगे कि ब्रा आसानी से खुल गई है। आप किसी से ब्रा उधार लें और प्रैक्टिस करें। तनाव के लिए आप इसे आसानी से कुर्सी के पीछे लगा सकते हैं और फिर स्वयं कुछ अभ्यास कर सकते हैं। - लड़कियां इस स्टाइल में माहिर होती हैं, लेकिन यह आपके लिए ज्यादा चैलेंजिंग होने वाला है। अनुभव ही आपको बेहतर बनाएगा। जब तक आप आत्मविश्वास महसूस न करें तब तक टू-हैंड मेथड से चिपके रहें और फिर वन-हैंडेड 'शो ऑफ' मेथड को आजमाएं। - ऐसा करने के लिए, उस क्षेत्र को पिंच करें जहां हुक और सुराख़ का लूप आपके अंगूठे और दूसरी उंगली से मिलती हैं। उसी सिद्धांत का उपयोग करते हुए जो उन्हें जगह पर रखता है, हुक को सुराख़ लूप से मुक्त होने देने के लिए कपड़े को उसके शरीर से ऊपर और दूर पिंच करके तनाव मुक्त करें। इससे महिला की ब्रा खुल जाएगी। आपको ये थोड़ा मुश्किल लग रहा होगा लेकिन फिर से, अभ्यास करने के लिए एक कुर्सी और एक अतिरिक्त ब्रा का उपयोग करें। इससे आप एक हाथ से ब्रा खोलने में माहिर हो जाएंगे।
केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री( स्वतंत्र प्रभार) , प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जीतेंद्र सिंह कल यहां भारत में सक्षम सरकारी सेवाएं देने में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता तथा क्षमताओं का लाभ उठाने के बारे में सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे । सम्मेलन का आयोजन फिक्की के सहयोग से प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा किया जा रहा है । सम्मेलन में प्रधान श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए ई-गवर्नेंस युग लाने के बारे में विचारों का आदान- प्रदान होगा । उद्घाटन सत्र के बाद तीन विषयों- (1) भारत में ई-गवर्नेंस की सफलता की कहानियां(2) अगले स्तर का गवर्नेंस सुधार- सरकारी सेवाओं के लिए सफल ई-कामर्स और (3) सरकारी क्षेत्र और ई-कामर्स क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत बनाने- पर पैनल विमर्श किया जाएगा । सम्मेलन में डीएआरपीजी के सचिव श्री देवेंद्र चौधरी , डीएआरपीजी की अपर सचिव श्रीमती उषा शर्मा, ट्राई के अध्यक्ष श्री आर एस शर्मा, जन वितरण विभाग , विदेश मंत्रालय , कर्नाटक सरकार तथा नासकॉम के प्रतिनिधि और निजी क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे ।
केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री , प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जीतेंद्र सिंह कल यहां भारत में सक्षम सरकारी सेवाएं देने में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता तथा क्षमताओं का लाभ उठाने के बारे में सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे । सम्मेलन का आयोजन फिक्की के सहयोग से प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा किया जा रहा है । सम्मेलन में प्रधान श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए ई-गवर्नेंस युग लाने के बारे में विचारों का आदान- प्रदान होगा । उद्घाटन सत्र के बाद तीन विषयों- भारत में ई-गवर्नेंस की सफलता की कहानियां अगले स्तर का गवर्नेंस सुधार- सरकारी सेवाओं के लिए सफल ई-कामर्स और सरकारी क्षेत्र और ई-कामर्स क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत बनाने- पर पैनल विमर्श किया जाएगा । सम्मेलन में डीएआरपीजी के सचिव श्री देवेंद्र चौधरी , डीएआरपीजी की अपर सचिव श्रीमती उषा शर्मा, ट्राई के अध्यक्ष श्री आर एस शर्मा, जन वितरण विभाग , विदेश मंत्रालय , कर्नाटक सरकार तथा नासकॉम के प्रतिनिधि और निजी क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे ।
Meerut। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच शनिवार को सीसीएसयू ने कैंपस और संबंधित निजी कॉलेजों में सभी हॉस्टल बंद 2 अप्रैल तक बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि शासन की ओर से पहले ही सभी निजी व सरकारी यूनिवर्सिटीज व संबंधित कॉलेजों में हॉस्टलों को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। निर्देशानुसार इस दौरान शिक्षक और शिक्षिकाओं को भी नहीं बुलाया जाएगा मगर जरुरत पड़ने पर उन्हें यूनिवर्सिटी में आना होगा। साथ ही इन निर्देशों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2 अप्रैल तक सभी कॉलेजों में हॉस्टल रहेंगे बंद। आदेश न मानने वालों पर होगी कार्रवाई। यूनिवर्सिटी की इमरजेंसी सर्विस चालू रहेगी। मुख्य परीक्षाएं पहले ही स्थगित कर दी गई है। परीक्षाओं को लेकर नया कार्यक्रम भी जारी हो चुका है। 4 अप्रैल से शुरू होंगी स्थगित की गई परीक्षाएं। कर्मचारियों को अलटरनेट डेज में कार्यालय बुलाएं, लेकिन कार्य में व्यवधान उत्पन्न न हो। 2 अप्रैल तक सभी विभाग ऐसी व्यवस्था करें कि 50 प्रतिशत कर्मचारी तो कार्यालय में रहकर कार्य करें और 50 प्रतिशत घर से कार्य करें। कार्यालय में आने का समय तीन पालियों में निर्धारित कर दिया जाए। पहली पाली सुबह 9 से 5, दूसरी पाली में 10 से 6 और तीसरी पाली में 11 से 7 बजे तक हो। सभी कर्मचारी इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से यूनिवर्सिटी व कॉलेजों से जुड़े रहेंगे। शासन की ओर से जारी किए गए यह निर्देश 4 अप्रैल तक लागू हैं। यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को शनिवार शाम पांच बजे तक हॉस्टल खाली कर घर वापस जाने की बात कही थी। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने दोपहर बाद से हॉस्टल खाली करना शुरू कर दिया था।
Meerut। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच शनिवार को सीसीएसयू ने कैंपस और संबंधित निजी कॉलेजों में सभी हॉस्टल बंद दो अप्रैल तक बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि शासन की ओर से पहले ही सभी निजी व सरकारी यूनिवर्सिटीज व संबंधित कॉलेजों में हॉस्टलों को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। निर्देशानुसार इस दौरान शिक्षक और शिक्षिकाओं को भी नहीं बुलाया जाएगा मगर जरुरत पड़ने पर उन्हें यूनिवर्सिटी में आना होगा। साथ ही इन निर्देशों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दो अप्रैल तक सभी कॉलेजों में हॉस्टल रहेंगे बंद। आदेश न मानने वालों पर होगी कार्रवाई। यूनिवर्सिटी की इमरजेंसी सर्विस चालू रहेगी। मुख्य परीक्षाएं पहले ही स्थगित कर दी गई है। परीक्षाओं को लेकर नया कार्यक्रम भी जारी हो चुका है। चार अप्रैल से शुरू होंगी स्थगित की गई परीक्षाएं। कर्मचारियों को अलटरनेट डेज में कार्यालय बुलाएं, लेकिन कार्य में व्यवधान उत्पन्न न हो। दो अप्रैल तक सभी विभाग ऐसी व्यवस्था करें कि पचास प्रतिशत कर्मचारी तो कार्यालय में रहकर कार्य करें और पचास प्रतिशत घर से कार्य करें। कार्यालय में आने का समय तीन पालियों में निर्धारित कर दिया जाए। पहली पाली सुबह नौ से पाँच, दूसरी पाली में दस से छः और तीसरी पाली में ग्यारह से सात बजे तक हो। सभी कर्मचारी इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से यूनिवर्सिटी व कॉलेजों से जुड़े रहेंगे। शासन की ओर से जारी किए गए यह निर्देश चार अप्रैल तक लागू हैं। यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को शनिवार शाम पांच बजे तक हॉस्टल खाली कर घर वापस जाने की बात कही थी। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने दोपहर बाद से हॉस्टल खाली करना शुरू कर दिया था।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। काकड़ या कांकड़ (Barking Deer) एक छोटा हिरन होता है। यह हिरनों में शायद सबसे पुराना है, जो इस धरती में १५०-३५० लाख वर्ष पूर्व देखा गया और जिसके जीवाश्म फ्रा़ंस, जर्मनी और पोलैंड में पाये गये हैं। आज की जीवित प्रजाति दक्षिणी एशिया की मूल निवासी है और भारत से लेकर श्रीलंका, चीन, दक्षिण पूर्वी एशिया (इंडोचाइना और मलय प्रायद्वीप के उत्तरी इलाके)। यह कम आबादी में पूर्वी हिमालय और म्यानमार में भी पाया जाता है। ऊष्णकटिबंधीय इलाकों में रहने के कारण इसका कोई समागम मौसम नहीं होता है और वर्ष के किसी भी समय में यह समागम कर लेते हैं; यही बात उस आबादी पर भी लागू होती है जिसे शीतोष्णकटिबन्धीय इलाकों में दाख़िल किया गया है। नर के दोबारा उग सकने वाले सींग होते हैं, हालांकि इलाके की लड़ाई में वह अपने लंबे श्वानदंतों (Canine teeth) का इस्तेमाल करते हैं। काकड़ क्रम विकास के अध्ययन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि इनकी विभिन्न प्रजातियों के गुणसूत्र में काफ़ी घटबढ़ देखी गयी है। जहाँ भारतीय काकड़ में सबसे कम गुणसूत्र पाये जाते हैंः नर में ७ तथा मादा में सिर्फ़ ६, वहीं चीनी कांकड़ में ४६ गुणसूत्र होते हैं। . बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान (कन्नड़ भाषाःಬಂಡೀಪುರ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಉದ್ಯಾನ) दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सन् १९७३ में एक टाइगर रिज़र्व के रूप में स्थापित किया गया था। एक समय यह मैसूर राज्य के महाराजा की निजी आरक्षित शिकारगाह थी। बांदीपुर अपने वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ कई प्रकार के बायोम हैं, लेकिन इनमें शुष्क पर्णपाती वन प्रमुख है। उद्यान ८७४ वर्ग किलोमीटर (३३७ वर्ग मील) के क्षेत्र में फैला हुआ है और भारत के लुप्तप्राय वन्य जीवन की कई प्रजातियों का संरक्षण स्थल है। आसपास के नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (६४३ वर्ग किलोमीटर (२४८ वर्ग मील)), मुदुमलाइ राष्ट्रीय उद्यान (320 वर्ग किलोमीटर (120 वर्ग मील)) और वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (344 वर्ग किलोमीटर (133 वर्ग मील)) के साथ कुल मिलाकर 2183 वर्ग किलोमीटर (843 वर्ग मील) का यह नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है जिससे यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र बन जाता है। बांदीपुर चामराजनगर जिले के गुण्द्लुपेट तालुके में स्थित है। यह मैसूर शहर से ८० किलोमीटर (५० मील) की दूरी पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल ऊटी जाने के मार्ग पर स्थित है। इसकी वजह से बहुत से पर्यटन यातायात बांदीपुर से होकर गुज़रते हैं और वर्ष इन वाहनों से हुई टक्कर के कारण कई वन्य प्राणियों की मृत्यु हो जाती है। इन हादसों को कम करने की दृश्टि से सरकार ने गोधुलि वेला से भोर तक बांदीपुर से गुज़रने वाले यातायात पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। . काकड़ और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): भारत, सोनकुत्ता। भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . सोनकुत्ता या वनजुक्कुर (Cuon alpinus) कुत्तों के कुल का जंगली प्राणी है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित प्राणी है जो कि कुत्तों से दंतावली और स्तनाग्रों में अलग है। अब यह अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा विलुप्तप्राय प्रजाति घोषित हो गई है क्योंकि इनके आवासीय क्षेत्र में कमी, शिकार की कमी, अन्य शिकारियों से स्पर्धा और शायद घरेलू या जंगली कुत्तों से बीमारी सरने के कारण इनकी संख्या तेज़ी से घट रही है। यह एक निहायत सामाजिक प्राणी है जो कि बड़े कुटुम्बों में रहता है जो कि अक्सर शिकार के लिए छोटे टुकड़ों में बँट जाते हैं।Fox, M. W. (1984), The Whistling Hunters: Field Studies of the Indian Wild Dog (Cuon Alpinus), Steven Simpson Books, ISBN 0-9524390-6-9, p-85 अफ्री़की जंगली कुत्तों की भांति और अन्य कुत्तों के विपरीत ढोल शिकार के बाद अपने शावकों को पहले खाने देता है। हालाँकि ढोल मनुष्यों से डरता है, लेकिन इनके झुण्ड बड़े और खतरनाक प्राणियों, जैसे जंगली शूकर, जंगली भैंसा तथा बाघ पर भी आक्रमण करने से नहीं हिचकिचाते हैं। . काकड़ 33 संबंध है और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान 28 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 3.28% है = 2 / (33 + 28)। यह लेख काकड़ और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। काकड़ या कांकड़ एक छोटा हिरन होता है। यह हिरनों में शायद सबसे पुराना है, जो इस धरती में एक सौ पचास-तीन सौ पचास लाख वर्ष पूर्व देखा गया और जिसके जीवाश्म फ्रा़ंस, जर्मनी और पोलैंड में पाये गये हैं। आज की जीवित प्रजाति दक्षिणी एशिया की मूल निवासी है और भारत से लेकर श्रीलंका, चीन, दक्षिण पूर्वी एशिया । यह कम आबादी में पूर्वी हिमालय और म्यानमार में भी पाया जाता है। ऊष्णकटिबंधीय इलाकों में रहने के कारण इसका कोई समागम मौसम नहीं होता है और वर्ष के किसी भी समय में यह समागम कर लेते हैं; यही बात उस आबादी पर भी लागू होती है जिसे शीतोष्णकटिबन्धीय इलाकों में दाख़िल किया गया है। नर के दोबारा उग सकने वाले सींग होते हैं, हालांकि इलाके की लड़ाई में वह अपने लंबे श्वानदंतों का इस्तेमाल करते हैं। काकड़ क्रम विकास के अध्ययन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि इनकी विभिन्न प्रजातियों के गुणसूत्र में काफ़ी घटबढ़ देखी गयी है। जहाँ भारतीय काकड़ में सबसे कम गुणसूत्र पाये जाते हैंः नर में सात तथा मादा में सिर्फ़ छः, वहीं चीनी कांकड़ में छियालीस गुणसूत्र होते हैं। . बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सन् एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में एक टाइगर रिज़र्व के रूप में स्थापित किया गया था। एक समय यह मैसूर राज्य के महाराजा की निजी आरक्षित शिकारगाह थी। बांदीपुर अपने वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ कई प्रकार के बायोम हैं, लेकिन इनमें शुष्क पर्णपाती वन प्रमुख है। उद्यान आठ सौ चौहत्तर वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और भारत के लुप्तप्राय वन्य जीवन की कई प्रजातियों का संरक्षण स्थल है। आसपास के नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान ), मुदुमलाइ राष्ट्रीय उद्यान ) और वायनाड वन्यजीव अभयारण्य ) के साथ कुल मिलाकर दो हज़ार एक सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर का यह नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है जिससे यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र बन जाता है। बांदीपुर चामराजनगर जिले के गुण्द्लुपेट तालुके में स्थित है। यह मैसूर शहर से अस्सी किलोग्राममीटर की दूरी पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल ऊटी जाने के मार्ग पर स्थित है। इसकी वजह से बहुत से पर्यटन यातायात बांदीपुर से होकर गुज़रते हैं और वर्ष इन वाहनों से हुई टक्कर के कारण कई वन्य प्राणियों की मृत्यु हो जाती है। इन हादसों को कम करने की दृश्टि से सरकार ने गोधुलि वेला से भोर तक बांदीपुर से गुज़रने वाले यातायात पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। . काकड़ और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान आम में दो बातें हैं : भारत, सोनकुत्ता। भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . सोनकुत्ता या वनजुक्कुर कुत्तों के कुल का जंगली प्राणी है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित प्राणी है जो कि कुत्तों से दंतावली और स्तनाग्रों में अलग है। अब यह अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा विलुप्तप्राय प्रजाति घोषित हो गई है क्योंकि इनके आवासीय क्षेत्र में कमी, शिकार की कमी, अन्य शिकारियों से स्पर्धा और शायद घरेलू या जंगली कुत्तों से बीमारी सरने के कारण इनकी संख्या तेज़ी से घट रही है। यह एक निहायत सामाजिक प्राणी है जो कि बड़े कुटुम्बों में रहता है जो कि अक्सर शिकार के लिए छोटे टुकड़ों में बँट जाते हैं।Fox, M. W. , The Whistling Hunters: Field Studies of the Indian Wild Dog , Steven Simpson Books, ISBN शून्य-नौ सौ बावननौ जून चार हज़ार तीन सौ नब्बे, p-पचासी अफ्री़की जंगली कुत्तों की भांति और अन्य कुत्तों के विपरीत ढोल शिकार के बाद अपने शावकों को पहले खाने देता है। हालाँकि ढोल मनुष्यों से डरता है, लेकिन इनके झुण्ड बड़े और खतरनाक प्राणियों, जैसे जंगली शूकर, जंगली भैंसा तथा बाघ पर भी आक्रमण करने से नहीं हिचकिचाते हैं। . काकड़ तैंतीस संबंध है और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान अट्ठाईस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक तीन.अट्ठाईस% है = दो / । यह लेख काकड़ और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
नाहन शहर के सामाजिक सरोकारों से जुड़े संगठन लायंस क्लब नाहन ने क्लब के गठन के 28 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर चार्टर व जनरल हाउस का आयोजन किया, जिसमें क्लब के फाउंडर मेंबर लायन अनिल मल्होत्रा व लायन राजीव बंसल को वर्तमान लायंस क्लब के प्रेजिडेंट विनित सिंघल द्वारा लायंस पिन व बुके देकर सम्मानित किया गया। क्लब के पीआरओ राजीव बंसल ने बताया कि 27 दिसंबर, 1994 को नाहन शहर में सामाजिक सरोकारों से जुड़े क्लब की शुरुआत हुई थी। जिसमें शुरुआती दौर में 20 सदस्यों से क्लब का कार्य शुरू हुआ। वहीं समय के साथ जहां 18 सदस्य क्लब को त्याग कर चले गए। वहीं वर्तमान में लायंस क्लब नाहन में एक बार फिर 30 सक्रिय सदस्य हैं। वहीं 28 वर्षों से लगातार लायंस क्लब द्वारा गरीब, असहाय व जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। जबकि क्लब जरूरतमंद विद्यार्थियों, गरीब कन्या के विवाह, मरीजों व रोगियों की आर्थिक मदद के अलावा विद्यालयों में सामान मुहैया करवाने के अलावा सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों व आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। क्लब प्रेजिडेंट ने बताया कि लायंस क्लब को 28 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस मौके पर चार्टर नाईट कार्यक्रम के आयोजन किया गया है, जिसमें तत्त्कालीन सक्रिय दो फाउंडर सदस्यों को सम्मानित किया गया है।
नाहन शहर के सामाजिक सरोकारों से जुड़े संगठन लायंस क्लब नाहन ने क्लब के गठन के अट्ठाईस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर चार्टर व जनरल हाउस का आयोजन किया, जिसमें क्लब के फाउंडर मेंबर लायन अनिल मल्होत्रा व लायन राजीव बंसल को वर्तमान लायंस क्लब के प्रेजिडेंट विनित सिंघल द्वारा लायंस पिन व बुके देकर सम्मानित किया गया। क्लब के पीआरओ राजीव बंसल ने बताया कि सत्ताईस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे को नाहन शहर में सामाजिक सरोकारों से जुड़े क्लब की शुरुआत हुई थी। जिसमें शुरुआती दौर में बीस सदस्यों से क्लब का कार्य शुरू हुआ। वहीं समय के साथ जहां अट्ठारह सदस्य क्लब को त्याग कर चले गए। वहीं वर्तमान में लायंस क्लब नाहन में एक बार फिर तीस सक्रिय सदस्य हैं। वहीं अट्ठाईस वर्षों से लगातार लायंस क्लब द्वारा गरीब, असहाय व जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। जबकि क्लब जरूरतमंद विद्यार्थियों, गरीब कन्या के विवाह, मरीजों व रोगियों की आर्थिक मदद के अलावा विद्यालयों में सामान मुहैया करवाने के अलावा सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों व आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। क्लब प्रेजिडेंट ने बताया कि लायंस क्लब को अट्ठाईस वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इस मौके पर चार्टर नाईट कार्यक्रम के आयोजन किया गया है, जिसमें तत्त्कालीन सक्रिय दो फाउंडर सदस्यों को सम्मानित किया गया है।
स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों के नाम पर पुलिस ने शहर के ट्रैफिक पर चार दिन तक जो मंथन किया, उसमें 'अमृत' कम लेकिन 'विष' ज्यादा निकला। गोल-गोल घुमाकर पुलिस ने न सिर्फ पब्लिक का तेल निकाला बल्कि हर वर्ग को आर्थिक चोट पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। वक्त की बर्बादी अलग हुई। हालांकि, पुलिस कप्तान अरुण मोहन जोशी इस ट्रायल को सफल मान रहे व उनका मानना है कि स्मार्ट सिटी के तहत किए जाने वाले निर्माण कार्य के वक्त इससे बेहतर दूसरा विकल्प नहीं होगा। यह दीगर बात है कि, तमाम विरोध और पब्लिक की चक्कर-घिन्नी बनाने के बाद पुलिस ने यह ट्रायल पूरा कर लिया। अब देखना होगा कि जब शहर में निर्माण कार्य शुरू होंगे, पुलिस तब ट्रैफिक को कितना सुगम संचालित कर पाएगी। फिलहाल, इन चार दिनों में ट्रैफिक प्लान की पड़ताल में जो सामने आया, चंद केस आपके सामने हैं। केस-एकः शिमला बाइपास निवासी डा. सरिता मलिक रायपुर स्थित एनडब्लूटी में प्रोफेसर हैं। सुबह वह अपने घर से कालेज के लिए निकलीं। शिमला बाइपास तिराहे से पांच नंबर का विक्रम सर्वे चौक तक पकड़ा मगर पुलिस ने विक्रम तहसील चौक से ही वापस मोड दिया। रायपुर रूट के विक्रम भी आजकल सर्वे चौक से चल रहे हैं, इसलिए डा. सरिता ने तहसील से सर्वे चौक तक के लिए ऑटो करना चाहा। ऑटो वाले ने ढाई सौ रुपये मांगे। जिस पर डा. सरिता करीब दो किमी पैदल चलकर सर्वे चौक पहुंची व वहां से विक्रम पकड़कर रायपुर गईं। उनका कहना है कि अगर स्मार्ट सिटी के नाम पर पुलिस को लोगों को परेशान ही करना है तो नहीं चाहिए ऐसी स्मार्ट सिटी। केस-दोः नेशविला रोड निवासी प्रथम पंत रोजाना अपनी कार से जाखन में स्थित एक संस्थान जाते हैं। दोपहर में वह वापस आते हैं तो हमेशा एस्लेहाल तिराहे से यू-टर्न लेते हैं और सीधे नेशविला रोड निकल जाते हैं। . . लेकिन पिछले चार दिनों से वह एस्लेहाल से मुडने के बजाए कनक चौक से लैंसडोन चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर, राजपुर रोड का करीब ढाई किमी लंबा चक्कर नेशविला रोड जा रहे। प्रथम ने बताया कि अगर इसी तरह रोजाना जाना पड़े तो उनका सिर्फ वक्त ही खराब नहीं हो रहा, बल्कि पेट्रोल दोगुना खर्च होगा। केस-तीनः राजपुर रोड निवासी यशपाल शर्मा हमेशा अपनी कार में यूनिवर्सल पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल भराते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को जब वे पेट्रोल भराने आए तो पुलिस ने सेंट जोजेफ्स कट भी बंद कर रखा था। वहां से जीजीआइसी राजपुर रोड से वे यू-टर्न लेकर एस्लेहाल आए व वहां से पुलिस ने उन्हें कनक चौक की ओर भेज दिया। फिर लैंसडोन चौक, दर्शनलाल चौक से घंटाघर होते हुए वे यूनिवर्सल पेट्रोल पंप पहुंचे। इस दौरान एक घंटे जाम में फंसे रहे वो अलग। यानी, 500 रुपये का तेल भराने के उनका 100 रुपये का तेल अलग खर्च हो गया। केस-चारः कनाट प्लेस निवासी अधिवक्ता गौरव शर्मा रोजाना अपनी कार से कोर्ट जाते हैं। वे घंटाघर से सीधे दर्शनलाल चौक होते हुए कोर्ट रोड से जाते हैं। यह दूरी सामान्य दिनों में महज एक किमी है, लेकिन उन्होंने बताया कि पुलिस के ट्रायल में वह ढाई से तीन किमी लंबा चक्कर लगा लैंसडोन चौक होकर जा रहे। जाम में भी फंस रहे व वक्त भी बर्बाद कर रहे। उन्होंने बताया कि प्लान बिना व्यवहारिकता के लागू किया गया था। घंटाघर से दर्शनलाल चौक की सौ मीटर की दूरी को पुलिस ने तीन किमी की दूरी बना दिया, जो बिलकुल समझ से परे था। केस-पांचः पौड़ी निवासी गुणानंद चमोली सोमवार को मैक्सी कैब से परिवार के साथ दून पहुंचे। रिश्तेदार के घर यमुना कालोनी जाना था। रिस्पना पुल से विक्रम में बैठकर आ तो गए, मगर पुलिस ने विक्रम तहसील चौक से वापस घुमा दिया। गुणानंद पहले केवल एक बार दून आए थे, लिहाजा उन्हें यही पता था कि दर्शनलाल चौक पर उतर जाना है। परिवार व सामान के साथ परेशान गुणानंद पूछते-ताछते पैदल दर्शनलाल चौक पहुंचे, लेकिन वहां से चकराता रोड वाली सिटी बस नहीं मिली। फिर, जैसे-जैसे वह पैदल प्रभात सिनेमा तक पहुंचे और विक्रम पकड़कर यमुना कालोनी गए। उन्होंने कान पकड़ लिए कि अब देहरादून नहीं आएंगे।
स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों के नाम पर पुलिस ने शहर के ट्रैफिक पर चार दिन तक जो मंथन किया, उसमें 'अमृत' कम लेकिन 'विष' ज्यादा निकला। गोल-गोल घुमाकर पुलिस ने न सिर्फ पब्लिक का तेल निकाला बल्कि हर वर्ग को आर्थिक चोट पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। वक्त की बर्बादी अलग हुई। हालांकि, पुलिस कप्तान अरुण मोहन जोशी इस ट्रायल को सफल मान रहे व उनका मानना है कि स्मार्ट सिटी के तहत किए जाने वाले निर्माण कार्य के वक्त इससे बेहतर दूसरा विकल्प नहीं होगा। यह दीगर बात है कि, तमाम विरोध और पब्लिक की चक्कर-घिन्नी बनाने के बाद पुलिस ने यह ट्रायल पूरा कर लिया। अब देखना होगा कि जब शहर में निर्माण कार्य शुरू होंगे, पुलिस तब ट्रैफिक को कितना सुगम संचालित कर पाएगी। फिलहाल, इन चार दिनों में ट्रैफिक प्लान की पड़ताल में जो सामने आया, चंद केस आपके सामने हैं। केस-एकः शिमला बाइपास निवासी डा. सरिता मलिक रायपुर स्थित एनडब्लूटी में प्रोफेसर हैं। सुबह वह अपने घर से कालेज के लिए निकलीं। शिमला बाइपास तिराहे से पांच नंबर का विक्रम सर्वे चौक तक पकड़ा मगर पुलिस ने विक्रम तहसील चौक से ही वापस मोड दिया। रायपुर रूट के विक्रम भी आजकल सर्वे चौक से चल रहे हैं, इसलिए डा. सरिता ने तहसील से सर्वे चौक तक के लिए ऑटो करना चाहा। ऑटो वाले ने ढाई सौ रुपये मांगे। जिस पर डा. सरिता करीब दो किमी पैदल चलकर सर्वे चौक पहुंची व वहां से विक्रम पकड़कर रायपुर गईं। उनका कहना है कि अगर स्मार्ट सिटी के नाम पर पुलिस को लोगों को परेशान ही करना है तो नहीं चाहिए ऐसी स्मार्ट सिटी। केस-दोः नेशविला रोड निवासी प्रथम पंत रोजाना अपनी कार से जाखन में स्थित एक संस्थान जाते हैं। दोपहर में वह वापस आते हैं तो हमेशा एस्लेहाल तिराहे से यू-टर्न लेते हैं और सीधे नेशविला रोड निकल जाते हैं। . . लेकिन पिछले चार दिनों से वह एस्लेहाल से मुडने के बजाए कनक चौक से लैंसडोन चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर, राजपुर रोड का करीब ढाई किमी लंबा चक्कर नेशविला रोड जा रहे। प्रथम ने बताया कि अगर इसी तरह रोजाना जाना पड़े तो उनका सिर्फ वक्त ही खराब नहीं हो रहा, बल्कि पेट्रोल दोगुना खर्च होगा। केस-तीनः राजपुर रोड निवासी यशपाल शर्मा हमेशा अपनी कार में यूनिवर्सल पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल भराते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को जब वे पेट्रोल भराने आए तो पुलिस ने सेंट जोजेफ्स कट भी बंद कर रखा था। वहां से जीजीआइसी राजपुर रोड से वे यू-टर्न लेकर एस्लेहाल आए व वहां से पुलिस ने उन्हें कनक चौक की ओर भेज दिया। फिर लैंसडोन चौक, दर्शनलाल चौक से घंटाघर होते हुए वे यूनिवर्सल पेट्रोल पंप पहुंचे। इस दौरान एक घंटे जाम में फंसे रहे वो अलग। यानी, पाँच सौ रुपयापये का तेल भराने के उनका एक सौ रुपयापये का तेल अलग खर्च हो गया। केस-चारः कनाट प्लेस निवासी अधिवक्ता गौरव शर्मा रोजाना अपनी कार से कोर्ट जाते हैं। वे घंटाघर से सीधे दर्शनलाल चौक होते हुए कोर्ट रोड से जाते हैं। यह दूरी सामान्य दिनों में महज एक किमी है, लेकिन उन्होंने बताया कि पुलिस के ट्रायल में वह ढाई से तीन किमी लंबा चक्कर लगा लैंसडोन चौक होकर जा रहे। जाम में भी फंस रहे व वक्त भी बर्बाद कर रहे। उन्होंने बताया कि प्लान बिना व्यवहारिकता के लागू किया गया था। घंटाघर से दर्शनलाल चौक की सौ मीटर की दूरी को पुलिस ने तीन किमी की दूरी बना दिया, जो बिलकुल समझ से परे था। केस-पांचः पौड़ी निवासी गुणानंद चमोली सोमवार को मैक्सी कैब से परिवार के साथ दून पहुंचे। रिश्तेदार के घर यमुना कालोनी जाना था। रिस्पना पुल से विक्रम में बैठकर आ तो गए, मगर पुलिस ने विक्रम तहसील चौक से वापस घुमा दिया। गुणानंद पहले केवल एक बार दून आए थे, लिहाजा उन्हें यही पता था कि दर्शनलाल चौक पर उतर जाना है। परिवार व सामान के साथ परेशान गुणानंद पूछते-ताछते पैदल दर्शनलाल चौक पहुंचे, लेकिन वहां से चकराता रोड वाली सिटी बस नहीं मिली। फिर, जैसे-जैसे वह पैदल प्रभात सिनेमा तक पहुंचे और विक्रम पकड़कर यमुना कालोनी गए। उन्होंने कान पकड़ लिए कि अब देहरादून नहीं आएंगे।
से और अर्व भाग वर्णक्रम (U.) के लाल प्रकाश से आलोकित होता है और दोनों अर्थ भाग एक दूसरे से लम्त्र कोण पर ध्रुवीयित होते हैं । इस दृश्य क्षेत्र को निकोल प्रिज्म विश्लेषक (B) के सामने लाते हैं । यदि विश्लेषक ध्रुवीयण समतल से ४५° के कोण पर हो और U, एवं U, समान आलोकित हों तो दृश्य क्षेत्र समान रूप से प्रकाशित दिखाई देगा। यदि वे समान रूप से आलोकित न हों तो क्षेत्र का एक [ चित्र १४ चैनर प्रकाशीय उत्तापमापक ] अर्व भाग दूसरे अर्व भाग से अधिक प्रकाशित होगा । विश्लेषक (B) को घुमाने से दोनों उजाले एक समान किये जा सकते हैं । विश्लेषक में एक मापदण्ड इस प्रकार अंकित होता है कि तप्त पदार्थ का ताप सीवा ही पढ़ लिया जा सके । केम्ब्रिज प्रकाशोय उत्तापमापक यह यंत्र एक प्रकार का दीप्तिमापी है । तप्त पदार्थ की एकवणिक विशिष्ट प्रकाशरश्मि को विद्युत वत्व की उसी प्रकार को प्रकाशरश्मि की तीव्रता के वरावर संलग्न किया जाता है । इसमें वर्णों की तुलना अनावश्यक होने के कारण, वर्णान्व पुरुष भी सही ताप पढ़ सकता है । ७००° ० से अधिक ताप के लिए यह यंत्र अत्यन्त उपयुक्त है। इस यंत्र में, उत्तापमापक के सामनेवाले भाग में पीछे दो छिद्र होते हैं । एक छिद्र से गरम पदार्थ का प्रकाश और दूसरे छिद्र से विद्युत वल्व का प्रकाश गमन करता है । दोनों प्रकाश रश्मियाँ कई लेना एवं प्रिज्मों की प्रणाली में गमन करती हैं और विरुद्ध समतलों में ध्रुवीयित होती हैं तथा उपनेत्र में लाल कांच द्वारा एकणिक हो जाती हैं । अन्त में दोनों प्रकाश रश्मियाँ एक अकेले उपनेत्र से होकर गमन करती हैं 1 दृष्टिक्षेत्र में एक प्रकाशित वृत्त दिखाई देता है जो कि दो अर्ववृत्तों में विभाजित होता है । एक अर्ववृत्त में तप्त पदार्थ का प्रतिविम्व होता है और दूसरा अर्धवृत्त विद्युत वल्व से एक समान प्रकाशित होता है । उपनेत्र को घुमाकर दोनों अर्धवृत्तों में एक समान तीव्रता की जाती है । उपनेत्र गरम पदार्थ के तापों को सीधे पढ़ने के लिए अंगित रहता है । विद्युत वल्व के प्रकाश को नियत अंपियरमात्रक को विद्युतबारा द्वारा प्रतिरोध नियमित कर, स्थिर रखा जाता है । फिलामेंट पुराना होने के कारण, 1. Photometer 2. Eye piece 3. Monochromatic 4. Calibrated विद्युत वल्व की वत्ति शक्ति को स्थिर रखने के लिए, बल्व को समय-समय पर प्रामाणिक एमाइल एसीटेट दीप के प्रति अंशित कर लिया जाता है । इस उत्तापमापक के विद्युत वल्व को प्रकाशित करने के लिए ४ वोल्ट के संचायक की आवश्यकता होती है । प्रकाशीय उत्तापमापकों में भी पूर्ण विकिरण- उत्तापमापकों की भाँति "काले पदार्थ" के नियम लागू होते हैं । इनसे एक बार में एक स्थान का ताप मापा जा सकता है, पर ये अंकन के लिए प्रयोग में नहीं लाये जा सकते । परन्तु ये सस्ते होते हैं और उन परिस्थितियों में भी प्रयोग में आ सकते हैं जहाँ कि अन्य उत्तापमापक प्रयोग में नहीं लाये जा सकते । कोलक प्रकाशीय उत्तापमापक यह एक पीतल की नली होती है जिसमें एक छोटी दूरवीन लगी रहती है । दूरबीन का लेन्स तप्त पदार्थ के प्रतिबिंव को नली के अन्दर स्थित गतिशील प्रिज्मपर फोकस करता है । नली में एक तरफ स्थित आक्षुरित सिर द्वारा प्रिज्म दृश्य क्षेत्र में ऊपर नीचे किया जा सकता है। ऊपर से नीचे तक काँच का प्रिज्म क्रम से गहरे से हलके रंग में अंशांकित होता है । साधारण तप्त पदार्थ प्रिज्म के हलके रंग के भाग से दृष्टिगोचर होता है परन्तु गहरे रंग के भाग से अदृश्य हो जाता है । इस प्रकार प्रिज्म में एक ऐसा विन्दु होता है जहाँ कि तप्त पदार्थ से उत्सर्जित' प्रकाश, दृष्टि से ठीक ओझल हो जाता है । जव गरम पदार्थ का ताप ज्ञात करना होता है, तो प्रिज्म के हलके रंगवाले भाग को दृष्टिक्षेत्र में व्यवस्थित करते हैं । आक्षुरित सिर को घुमाने से, एक विन्दु पर गरम पदार्थ दृष्टि से ओझल हो जाता है । इस आक्षुरित सिर को ऐसा अंशित किया जाता है कि उससे गरम पदार्थ के ताप ज्ञात हो सकें । इस प्रकार का उत्तापमापक बहुत ही सस्ता होता है और शीघ्र विगड़ता भी नहीं है । यह ताप को काफी सही मापता है और कोई भी श्रमिक इसका प्रयोग कर सकता है । 1. Candle power 2. Wedge स्फान, पच्चर 3. Milled 4. Graduated 5. Emitted 6. Calibrated दसवाँ अध्याय ऊष्मसह पदार्थ काँचद्रावण भट्ठियों, नालियों, पात्रों इत्यादि के निर्माण या काँच-निर्माण के औज़ारों के रूप में प्रयोग में जाते हैं । ये तीव्र ऊष्मा होते हुए भी काँच, काँच-निर्माण के पदार्थों, धूलि एवं गैसों की रासायनिक एवं संक्षारण क्रिया का प्रतिरोध करते हैं । ये अचानक ताप परिवर्तन, अत्यधिक दबाव एवं तनाव को सहन कर सकते हैं । द्रव्यों, रासायनिक स्थितियों और विशिष्ट ताप सहन करने की क्षमता पर हो विशिष्ट ऊष्मसह पदार्थ का चुनाव निर्भर करता है । काँच उद्योग में कई प्रकार के ऊप्मसहों का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि द्रुत काँच में सिलिका एवं अल्यूमिना भो घुल जाते हैं, लतः पात्र या कुण्ड-भट्ठी' के लिए ऊष्मसहों का प्रश्न अत्यन्त जटिल होता है । ऊष्मसह पदार्थों का वर्गीकरण इस तरह किया जाता है(१) उदासीन ऊप्सह, ( २ ) भास्मिक ऊष्मसह, (३) अम्लीय ऊप्मसह । (१) उदासीन ऊष्मसह (क) लोहा एवं इस्पात - इनका प्रयोग साँचों, घमनाडों (ब्लो पाइप्स) और काटने एवं बाकार देनेवाले लौजारों के लिए होता है । ( ख ) ग्रेफाइट - यह कभी कभी पात्र निर्माण और लेपी साँचों के लिए लेपी के - प्रयोग में जाता है । (ग)इटम लोह अयस्क ( Cr. O3 FeO ) - इसकी इंटे, चूना और केओलिन को मिलाकर बनायी जाती हैं । यह अत्यन्त ऊष्मऩह है और इस पर वातुमल या सिलिका का कोई प्रभाव नहीं I. A pot or a taak furnace 2. Slag पड़ता । इसका प्रयोग काँच-भट्ठियों में नहीं किया जाता । शुद्ध क्रोमाइट का द्रवणांक २१८० सें० है । (घ) कार्बोरण्डम या सिलिकन कार्बाइड ( SiC ) - यह उच्च ताप पर विच्छेदित होनेवाला, अत्यन्त कठोर, उत्तम ऊष्माचालक, निम्न प्रसार, गुणांकीय, उच्च ताप पर उत्तम यांत्रिक शक्तिवाला और स्पर्शित गैस तथा ज्वालाओं का प्रतिरोधक है । काँच के द्रवणांक पर द्रुत सोडियम कार्बोनेट, द्रुत क्षारीय सलफेटों, द्रुत सोहागा तथा चूना और मैगनीशिया की इस पर प्रतिक्रिया होती है, अतः काँच द्रवण में द्रुत काँच के स्पर्श के में लिए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता । काँच भट्ठियों में कुछ पुनराप्त्र नलियाँ और पुनर्जनित्र पट्टियाँ कार्वोरण्डम से बनायी जाती हैं। इससे वनी ईटें अचानक ताप-परिवर्तनों से नष्ट नहीं होतीं । अवगुंठी भट्ठियों एवं सर्व प्रकार की भट्ठियों के लिए जो परोक्ष रूप से तापित की जाती हैं, कार्बोरण्डम ऊष्मसह अति श्रेष्ठ है । विद्युत भट्ठियों में 'दीप्त छड़ें" सिलिकन कार्बाइड से, जिसमें मिट्टी का बंध होता है, निर्माण की जाती है । (ङ) जिरकोनिया (ZrO, ) - यह उत्तम श्रेणी का ऊष्मसह है। यह घट्यता रहित है । एक प्रतिशत स्टार्च और कुछ मात्रा मैगनीशिया या अग्नि-मिट्टी मिश्रण कर शिलाएँ (ब्लॉक) वनायी जाती हैं । २०००° सें• ताप पर प्रयोग करने के लिए १ प्रतिशत अल्यूमिना मिलाना चाहिए । अग्नि-मिट्टी मिलाने से इसकी ऊष्मसहता कम हो जाती है और तव इसका १७००° सें० से निम्न ताप पर ही प्रयोग किया जा सकता है । प्राकृतिक ज़िरकोनिया का द्रवणांक प्रायः २५६० सें० है । अशुद्धि के रूप में सिलिका की उपस्थिति हानिकारक नहीं है, क्योंकि ३३ प्रतिशत तक सिलिका मिलाने से इसकी द्रावकता दूर हो जाती है और उत्पाद उच्च तापों पर उतना ही ऊष्मसह हो जाता है जितना कि शुद्ध जिरकोनिया होता है । इसके प्रसार गुणांक की दर अति निम्न है । इसकी वनी घरियाएँ ' रक्तोष्ण अवस्था में, जल में डाली जा सकती हैं और उन्हें 1. Recuperative tubes 2. Muffle furnaces 3. Glow bars 4. Plasticity 5. Crucibles कोई हानि नहीं पहुँचती । इसकी ऊष्मचालकता भी अति निम्न है । यह अम्लों, द्रुत क्षारों, द्रुत क्वार्ट्ज़ या द्रुत काँच का अति प्रतिरोधक है । परन्तु यह काँच में घुल जाता है । उच्च तापों पर नाइट्रोजन और कार्बन के संयोजन से यह क्रमशः नाइट्राइड और कार्वाइट वनाता है । कार्बाइड यद्यपि अति कठोर और ऊष्मसह होता है, परन्तु जिरकोनिया जैसे मूल्यवान् गुण इसमें नहीं होते। ज़िरकोनिया को पीसकर उसमें जलपिप्ट अति सूक्ष्म जिरकोनिया, चूना या जल काँच के वन्ध का प्रयोग कर, ईटें बनायी जाती हैं । यदि वन्य पदार्थ के रूप में अग्नि-मिट्टी का प्रयोग किया जाय तो ईटें १६५०° सें० तक अच्छी तरह ताप सहन कर लेंगी । अच्छा तो यह है कि किसी पदार्थ को जितना ताप सहन करना है उससे अधिक ताप पर वह पदार्थ पकाया जाय । जिरकोनिया का प्रयोग विद्युत वल्व के भीतरी उत्ताप दीप्त तारों और प्रयोगशालाओं के पात्रों के लिए भी होता है । द्रुत सिलका में, इसकी कुछ मात्रा का योग करने से विकाचरण' रोका जा सकता । (च) एसबेसटस ( CaO, 3Mg (Fe) O, 4SiOg) - यह चादर या धागों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है । यह ऊष्मा का निम्न चालक है । अग्निमिट्टी मिलाकर इसकी ईंटें बनायी जाती हैं । ईटें हलकी और सरन्ध्र होती हैं तथा उन स्थानों के लिए उपयुक्त हैं जहाँ उच्च ताप तो सहन - करना आवश्यक है, परन्तु धातुमलों या अपघर्पण का प्रतिरोध नहीं है । अग्नि-मिट्टी, मैगनीशिया, ग्रेफाइट और जलकाँच मिलाकर एसवेसटस को घरियाँ वनायी जाती हैं । (२) भास्मिक ऊष्मसह चना, लोह अयस्क, डोलोमाइट और मैगनेसाइट भास्मिक ऊप्मसह हैं, परन्तु काँच-निर्माण में इनका बहुत कम उपयोग होता है । अल्यूमिना - शुद्ध अल्यूमिना अत्यधिक ऊष्मसह है, परन्तु इसमें सुघट्यता नहीं है । ऊष्मसहों के निर्माण में वाक्साइट ( Al O3, 2H O) जो कि अल्यूमिना का एक साधारण रूप है, प्रयोग में आता है । 1. Devitrification 2. Porous 3. Abrasion
से और अर्व भाग वर्णक्रम के लाल प्रकाश से आलोकित होता है और दोनों अर्थ भाग एक दूसरे से लम्त्र कोण पर ध्रुवीयित होते हैं । इस दृश्य क्षेत्र को निकोल प्रिज्म विश्लेषक के सामने लाते हैं । यदि विश्लेषक ध्रुवीयण समतल से पैंतालीस° के कोण पर हो और U, एवं U, समान आलोकित हों तो दृश्य क्षेत्र समान रूप से प्रकाशित दिखाई देगा। यदि वे समान रूप से आलोकित न हों तो क्षेत्र का एक [ चित्र चौदह चैनर प्रकाशीय उत्तापमापक ] अर्व भाग दूसरे अर्व भाग से अधिक प्रकाशित होगा । विश्लेषक को घुमाने से दोनों उजाले एक समान किये जा सकते हैं । विश्लेषक में एक मापदण्ड इस प्रकार अंकित होता है कि तप्त पदार्थ का ताप सीवा ही पढ़ लिया जा सके । केम्ब्रिज प्रकाशोय उत्तापमापक यह यंत्र एक प्रकार का दीप्तिमापी है । तप्त पदार्थ की एकवणिक विशिष्ट प्रकाशरश्मि को विद्युत वत्व की उसी प्रकार को प्रकाशरश्मि की तीव्रता के वरावर संलग्न किया जाता है । इसमें वर्णों की तुलना अनावश्यक होने के कारण, वर्णान्व पुरुष भी सही ताप पढ़ सकता है । सात सौ° शून्य से अधिक ताप के लिए यह यंत्र अत्यन्त उपयुक्त है। इस यंत्र में, उत्तापमापक के सामनेवाले भाग में पीछे दो छिद्र होते हैं । एक छिद्र से गरम पदार्थ का प्रकाश और दूसरे छिद्र से विद्युत वल्व का प्रकाश गमन करता है । दोनों प्रकाश रश्मियाँ कई लेना एवं प्रिज्मों की प्रणाली में गमन करती हैं और विरुद्ध समतलों में ध्रुवीयित होती हैं तथा उपनेत्र में लाल कांच द्वारा एकणिक हो जाती हैं । अन्त में दोनों प्रकाश रश्मियाँ एक अकेले उपनेत्र से होकर गमन करती हैं एक दृष्टिक्षेत्र में एक प्रकाशित वृत्त दिखाई देता है जो कि दो अर्ववृत्तों में विभाजित होता है । एक अर्ववृत्त में तप्त पदार्थ का प्रतिविम्व होता है और दूसरा अर्धवृत्त विद्युत वल्व से एक समान प्रकाशित होता है । उपनेत्र को घुमाकर दोनों अर्धवृत्तों में एक समान तीव्रता की जाती है । उपनेत्र गरम पदार्थ के तापों को सीधे पढ़ने के लिए अंगित रहता है । विद्युत वल्व के प्रकाश को नियत अंपियरमात्रक को विद्युतबारा द्वारा प्रतिरोध नियमित कर, स्थिर रखा जाता है । फिलामेंट पुराना होने के कारण, एक. Photometer दो. Eye piece तीन. Monochromatic चार. Calibrated विद्युत वल्व की वत्ति शक्ति को स्थिर रखने के लिए, बल्व को समय-समय पर प्रामाणिक एमाइल एसीटेट दीप के प्रति अंशित कर लिया जाता है । इस उत्तापमापक के विद्युत वल्व को प्रकाशित करने के लिए चार वोल्ट के संचायक की आवश्यकता होती है । प्रकाशीय उत्तापमापकों में भी पूर्ण विकिरण- उत्तापमापकों की भाँति "काले पदार्थ" के नियम लागू होते हैं । इनसे एक बार में एक स्थान का ताप मापा जा सकता है, पर ये अंकन के लिए प्रयोग में नहीं लाये जा सकते । परन्तु ये सस्ते होते हैं और उन परिस्थितियों में भी प्रयोग में आ सकते हैं जहाँ कि अन्य उत्तापमापक प्रयोग में नहीं लाये जा सकते । कोलक प्रकाशीय उत्तापमापक यह एक पीतल की नली होती है जिसमें एक छोटी दूरवीन लगी रहती है । दूरबीन का लेन्स तप्त पदार्थ के प्रतिबिंव को नली के अन्दर स्थित गतिशील प्रिज्मपर फोकस करता है । नली में एक तरफ स्थित आक्षुरित सिर द्वारा प्रिज्म दृश्य क्षेत्र में ऊपर नीचे किया जा सकता है। ऊपर से नीचे तक काँच का प्रिज्म क्रम से गहरे से हलके रंग में अंशांकित होता है । साधारण तप्त पदार्थ प्रिज्म के हलके रंग के भाग से दृष्टिगोचर होता है परन्तु गहरे रंग के भाग से अदृश्य हो जाता है । इस प्रकार प्रिज्म में एक ऐसा विन्दु होता है जहाँ कि तप्त पदार्थ से उत्सर्जित' प्रकाश, दृष्टि से ठीक ओझल हो जाता है । जव गरम पदार्थ का ताप ज्ञात करना होता है, तो प्रिज्म के हलके रंगवाले भाग को दृष्टिक्षेत्र में व्यवस्थित करते हैं । आक्षुरित सिर को घुमाने से, एक विन्दु पर गरम पदार्थ दृष्टि से ओझल हो जाता है । इस आक्षुरित सिर को ऐसा अंशित किया जाता है कि उससे गरम पदार्थ के ताप ज्ञात हो सकें । इस प्रकार का उत्तापमापक बहुत ही सस्ता होता है और शीघ्र विगड़ता भी नहीं है । यह ताप को काफी सही मापता है और कोई भी श्रमिक इसका प्रयोग कर सकता है । एक. Candle power दो. Wedge स्फान, पच्चर तीन. Milled चार. Graduated पाँच. Emitted छः. Calibrated दसवाँ अध्याय ऊष्मसह पदार्थ काँचद्रावण भट्ठियों, नालियों, पात्रों इत्यादि के निर्माण या काँच-निर्माण के औज़ारों के रूप में प्रयोग में जाते हैं । ये तीव्र ऊष्मा होते हुए भी काँच, काँच-निर्माण के पदार्थों, धूलि एवं गैसों की रासायनिक एवं संक्षारण क्रिया का प्रतिरोध करते हैं । ये अचानक ताप परिवर्तन, अत्यधिक दबाव एवं तनाव को सहन कर सकते हैं । द्रव्यों, रासायनिक स्थितियों और विशिष्ट ताप सहन करने की क्षमता पर हो विशिष्ट ऊष्मसह पदार्थ का चुनाव निर्भर करता है । काँच उद्योग में कई प्रकार के ऊप्मसहों का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि द्रुत काँच में सिलिका एवं अल्यूमिना भो घुल जाते हैं, लतः पात्र या कुण्ड-भट्ठी' के लिए ऊष्मसहों का प्रश्न अत्यन्त जटिल होता है । ऊष्मसह पदार्थों का वर्गीकरण इस तरह किया जाता है उदासीन ऊप्सह, भास्मिक ऊष्मसह, अम्लीय ऊप्मसह । उदासीन ऊष्मसह लोहा एवं इस्पात - इनका प्रयोग साँचों, घमनाडों और काटने एवं बाकार देनेवाले लौजारों के लिए होता है । ग्रेफाइट - यह कभी कभी पात्र निर्माण और लेपी साँचों के लिए लेपी के - प्रयोग में जाता है । इटम लोह अयस्क - इसकी इंटे, चूना और केओलिन को मिलाकर बनायी जाती हैं । यह अत्यन्त ऊष्मऩह है और इस पर वातुमल या सिलिका का कोई प्रभाव नहीं I. A pot or a taak furnace दो. Slag पड़ता । इसका प्रयोग काँच-भट्ठियों में नहीं किया जाता । शुद्ध क्रोमाइट का द्रवणांक दो हज़ार एक सौ अस्सी सेंशून्य है । कार्बोरण्डम या सिलिकन कार्बाइड - यह उच्च ताप पर विच्छेदित होनेवाला, अत्यन्त कठोर, उत्तम ऊष्माचालक, निम्न प्रसार, गुणांकीय, उच्च ताप पर उत्तम यांत्रिक शक्तिवाला और स्पर्शित गैस तथा ज्वालाओं का प्रतिरोधक है । काँच के द्रवणांक पर द्रुत सोडियम कार्बोनेट, द्रुत क्षारीय सलफेटों, द्रुत सोहागा तथा चूना और मैगनीशिया की इस पर प्रतिक्रिया होती है, अतः काँच द्रवण में द्रुत काँच के स्पर्श के में लिए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता । काँच भट्ठियों में कुछ पुनराप्त्र नलियाँ और पुनर्जनित्र पट्टियाँ कार्वोरण्डम से बनायी जाती हैं। इससे वनी ईटें अचानक ताप-परिवर्तनों से नष्ट नहीं होतीं । अवगुंठी भट्ठियों एवं सर्व प्रकार की भट्ठियों के लिए जो परोक्ष रूप से तापित की जाती हैं, कार्बोरण्डम ऊष्मसह अति श्रेष्ठ है । विद्युत भट्ठियों में 'दीप्त छड़ें" सिलिकन कार्बाइड से, जिसमें मिट्टी का बंध होता है, निर्माण की जाती है । जिरकोनिया - यह उत्तम श्रेणी का ऊष्मसह है। यह घट्यता रहित है । एक प्रतिशत स्टार्च और कुछ मात्रा मैगनीशिया या अग्नि-मिट्टी मिश्रण कर शिलाएँ वनायी जाती हैं । दो हज़ार° सें• ताप पर प्रयोग करने के लिए एक प्रतिशत अल्यूमिना मिलाना चाहिए । अग्नि-मिट्टी मिलाने से इसकी ऊष्मसहता कम हो जाती है और तव इसका एक हज़ार सात सौ° सेंशून्य से निम्न ताप पर ही प्रयोग किया जा सकता है । प्राकृतिक ज़िरकोनिया का द्रवणांक प्रायः दो हज़ार पाँच सौ साठ सेंशून्य है । अशुद्धि के रूप में सिलिका की उपस्थिति हानिकारक नहीं है, क्योंकि तैंतीस प्रतिशत तक सिलिका मिलाने से इसकी द्रावकता दूर हो जाती है और उत्पाद उच्च तापों पर उतना ही ऊष्मसह हो जाता है जितना कि शुद्ध जिरकोनिया होता है । इसके प्रसार गुणांक की दर अति निम्न है । इसकी वनी घरियाएँ ' रक्तोष्ण अवस्था में, जल में डाली जा सकती हैं और उन्हें एक. Recuperative tubes दो. Muffle furnaces तीन. Glow bars चार. Plasticity पाँच. Crucibles कोई हानि नहीं पहुँचती । इसकी ऊष्मचालकता भी अति निम्न है । यह अम्लों, द्रुत क्षारों, द्रुत क्वार्ट्ज़ या द्रुत काँच का अति प्रतिरोधक है । परन्तु यह काँच में घुल जाता है । उच्च तापों पर नाइट्रोजन और कार्बन के संयोजन से यह क्रमशः नाइट्राइड और कार्वाइट वनाता है । कार्बाइड यद्यपि अति कठोर और ऊष्मसह होता है, परन्तु जिरकोनिया जैसे मूल्यवान् गुण इसमें नहीं होते। ज़िरकोनिया को पीसकर उसमें जलपिप्ट अति सूक्ष्म जिरकोनिया, चूना या जल काँच के वन्ध का प्रयोग कर, ईटें बनायी जाती हैं । यदि वन्य पदार्थ के रूप में अग्नि-मिट्टी का प्रयोग किया जाय तो ईटें एक हज़ार छः सौ पचास° सेंशून्य तक अच्छी तरह ताप सहन कर लेंगी । अच्छा तो यह है कि किसी पदार्थ को जितना ताप सहन करना है उससे अधिक ताप पर वह पदार्थ पकाया जाय । जिरकोनिया का प्रयोग विद्युत वल्व के भीतरी उत्ताप दीप्त तारों और प्रयोगशालाओं के पात्रों के लिए भी होता है । द्रुत सिलका में, इसकी कुछ मात्रा का योग करने से विकाचरण' रोका जा सकता । एसबेसटस O, चारSiOg) - यह चादर या धागों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है । यह ऊष्मा का निम्न चालक है । अग्निमिट्टी मिलाकर इसकी ईंटें बनायी जाती हैं । ईटें हलकी और सरन्ध्र होती हैं तथा उन स्थानों के लिए उपयुक्त हैं जहाँ उच्च ताप तो सहन - करना आवश्यक है, परन्तु धातुमलों या अपघर्पण का प्रतिरोध नहीं है । अग्नि-मिट्टी, मैगनीशिया, ग्रेफाइट और जलकाँच मिलाकर एसवेसटस को घरियाँ वनायी जाती हैं । भास्मिक ऊष्मसह चना, लोह अयस्क, डोलोमाइट और मैगनेसाइट भास्मिक ऊप्मसह हैं, परन्तु काँच-निर्माण में इनका बहुत कम उपयोग होता है । अल्यूमिना - शुद्ध अल्यूमिना अत्यधिक ऊष्मसह है, परन्तु इसमें सुघट्यता नहीं है । ऊष्मसहों के निर्माण में वाक्साइट जो कि अल्यूमिना का एक साधारण रूप है, प्रयोग में आता है । एक. Devitrification दो. Porous तीन. Abrasion
हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर मेनका गांधी ने कहा- 'जो भी हुआ बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए' मेनका गांधी ने कहा कि अगर कानून की प्रक्रिया से पहले ही आप किसी को मार डालते हैं तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्या मतलब रह जाता है। हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के शुक्रवार सुबह पुलिस की ओर से एनकाउंटर किए जाने पर बीजेपी नेता और सांसद मेनका गांधी ने कहा है कि जो भी हुआ है वह बहुत भयानक हुआ है। मेनका गांधी ने साथ ही कहा कि आप केवल इसलिए लोगों को नहीं मार सकते कि आप ऐसा करना चाहते हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार मेनका गांधी ने कहा, 'जो भी हुआ बहुत भयानक हुआ है इस देश के लिए। आप लोगों को केवल इसलिए नहीं मार सकते कि आप ऐसा करना चाहते हैं। आप काननू को अपने हाथ में नहीं ले सकते। आरोपियों को कोर्ट की ओर से लटकाया जाना चाहिए था। ' मेनका गांधी ने साथ ही कहा कि अगर कानून की प्रक्रिया से पहले ही आप किसी को मार डालते हैं तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्या मतलब रह जाता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कहा- देर आये, दुरुस्त आये. . देर आये बहुत देर आये। वहीं, आरजेडी नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि हैदराबाद में पुलिस ने जो किया वह स्वाग्त करने योग्य है। आरडेजी नेता ने साथ ही कहा बिहार में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं और राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही है।
हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर मेनका गांधी ने कहा- 'जो भी हुआ बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए' मेनका गांधी ने कहा कि अगर कानून की प्रक्रिया से पहले ही आप किसी को मार डालते हैं तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्या मतलब रह जाता है। हैदराबाद गैंगरेप के आरोपियों के शुक्रवार सुबह पुलिस की ओर से एनकाउंटर किए जाने पर बीजेपी नेता और सांसद मेनका गांधी ने कहा है कि जो भी हुआ है वह बहुत भयानक हुआ है। मेनका गांधी ने साथ ही कहा कि आप केवल इसलिए लोगों को नहीं मार सकते कि आप ऐसा करना चाहते हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार मेनका गांधी ने कहा, 'जो भी हुआ बहुत भयानक हुआ है इस देश के लिए। आप लोगों को केवल इसलिए नहीं मार सकते कि आप ऐसा करना चाहते हैं। आप काननू को अपने हाथ में नहीं ले सकते। आरोपियों को कोर्ट की ओर से लटकाया जाना चाहिए था। ' मेनका गांधी ने साथ ही कहा कि अगर कानून की प्रक्रिया से पहले ही आप किसी को मार डालते हैं तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्या मतलब रह जाता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कहा- देर आये, दुरुस्त आये. . देर आये बहुत देर आये। वहीं, आरजेडी नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि हैदराबाद में पुलिस ने जो किया वह स्वाग्त करने योग्य है। आरडेजी नेता ने साथ ही कहा बिहार में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं और राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही है।
PATNA : अपनी मर्जी से भागकर प्रेमी जोड़े को शादी करना महंगा पड़ गया है. बताया जा रहा है की दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर चुके हैं. इस मामले को लेकर लड़की के परिजनों ने परसा थाने में मामला दर्ज कराया है. थाने को दिए गए आवेदन में परिजनों ने युवक पर शादी की नीयत से लड़की अगवा करने का आरोप लगाया है. बताया जा रहा है की दीपक और मीना दोनो बालिग हैं और अपनी मर्जी से घर से भाग कर शादी कर चुके हैं. अब दोनों थाना और कोर्ट का चक्कर लगा रहे है. दोनों ने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. अब वे पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं.
PATNA : अपनी मर्जी से भागकर प्रेमी जोड़े को शादी करना महंगा पड़ गया है. बताया जा रहा है की दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर चुके हैं. इस मामले को लेकर लड़की के परिजनों ने परसा थाने में मामला दर्ज कराया है. थाने को दिए गए आवेदन में परिजनों ने युवक पर शादी की नीयत से लड़की अगवा करने का आरोप लगाया है. बताया जा रहा है की दीपक और मीना दोनो बालिग हैं और अपनी मर्जी से घर से भाग कर शादी कर चुके हैं. अब दोनों थाना और कोर्ट का चक्कर लगा रहे है. दोनों ने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. अब वे पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं.
फिल्म 'तान्हाजी' में छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले करने वाले एक्टर शरद केलकर ने हाल ही में अपनी बेटी केशा का 8वां बर्थडे सेलिब्रेट किया। ऐसे में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मुंबई. फिल्म 'तान्हाजी' में छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले करने वाले एक्टर शरद केलकर ने हाल ही में अपनी बेटी केशा का 8वां बर्थडे सेलिब्रेट किया। ऐसे में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखने के लिए मिल रहा है कि शरद बेटी के बर्थडे पर डॉल वाला केक काट रहे हैं। एक्टर बेटी का हाथ पकड़कर केक कटवाते नजर आ रहे हैं और साथ में उनकी पत्नी भी दिखाई दे रही हैं। केक काटने के बाद केशा दोस्तों के साथ केक सेलिब्रेट करती हैं और दोस्तों के साथ मस्ती करती नजर आती हैं। वीडियो से पहले शरद केलकर की पार्टी की कुछ फोटोज भी सामने आए थे, इसमें रितेश देशमुख, जय भानुशाली और टीवी बॉलीवुड के तमाम स्टार्स पत्नी और बच्चों के साथ मस्ती करते नजर आए थे।
फिल्म 'तान्हाजी' में छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले करने वाले एक्टर शरद केलकर ने हाल ही में अपनी बेटी केशा का आठवां बर्थडे सेलिब्रेट किया। ऐसे में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मुंबई. फिल्म 'तान्हाजी' में छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले करने वाले एक्टर शरद केलकर ने हाल ही में अपनी बेटी केशा का आठवां बर्थडे सेलिब्रेट किया। ऐसे में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखने के लिए मिल रहा है कि शरद बेटी के बर्थडे पर डॉल वाला केक काट रहे हैं। एक्टर बेटी का हाथ पकड़कर केक कटवाते नजर आ रहे हैं और साथ में उनकी पत्नी भी दिखाई दे रही हैं। केक काटने के बाद केशा दोस्तों के साथ केक सेलिब्रेट करती हैं और दोस्तों के साथ मस्ती करती नजर आती हैं। वीडियो से पहले शरद केलकर की पार्टी की कुछ फोटोज भी सामने आए थे, इसमें रितेश देशमुख, जय भानुशाली और टीवी बॉलीवुड के तमाम स्टार्स पत्नी और बच्चों के साथ मस्ती करते नजर आए थे।
एक सज्जन अपने मित्र से मेरा परिचय करा रहे थे-यह परसाईजी हैं। बहुत अच्छे लेखक हैं। ही राइट्स फनी थिंग्स। एक मेरे पाठक(अब मित्रनुमा) मुझे दूर से देखते ही इस तरह हँसी की तिड़तिड़ाहट करके मेरी तरफ बढ़ते हैं,जैसे दिवाली पर बच्चे'तिड़तिड़ी' को पत्थर पर रगड़कर फेंक देते हैं और वह थोड़ी देर तिड़तिड़ करती उछलती रहती है। पास आकर अपने हाथों में मेरा हाथ ले लेते हैं। मजा आ गया। उन्होंने कभी कोई चीज मेरी पढ़ी होगी। अभी सालों से कोई चीज नहीं पढ़ी ,यह मैं जानता हूँ। एक सज्जन जब भी सड़क पर मिल जाते हैं,दूर से ही चिल्लाते हैं-'परसाईजी नमस्कार!मेरा पथ-प्रदर्शक पाखाना!' बात यह है कि किसी दूसरे आदमी ने कई साल पहले स्थानीय साप्ताहिक में एक मजाकिया लेख लिखा था,'मेरा पथ-प्रदर्शक पाखाना।' पर उन्होंने ऐसी सारी चीजों के लिये मुझे जिम्मेदार मान लिया है। मैंने भी नहीं बताया कि वह लेख मैंने नहीं लिखा था। बस,वे जहाँ मिलते हैं-'मेरा पथ प्रदर्शक पाखाना कहकर मेरा अभिवादन करते हैं। कुछ पाठक समझते हैं कि मैं हमेशा उचक्केपन और हल्केपन के मूड में रहता हूँ। वे चिट्ठी में मखौल करने की कोशिश करते हैं! कुछ पाठक समझते हैं कि मैं हमेशा उचक्केपन और हल्केपन के मूड में रहता हूँ। वे चिट्ठी में मखौल करने की कोशिश करते हैं! एक पत्र मेरे सामने है। लिखा है- कहिये जनाब बरसात का मजा ले रहे हैं न! मेढकों की जलतरंग सुन रहे होंगे। इस पर भी लिख डालिये न कुछ। बिहार के किसी कस्बे से एक आदमी ने लिखा कि तुमने मेरे मामा का, जो फारेस्ट अफसर है,मजाक उड़ाया है। उसकी बदनामी की है। मैं तुम्हारे खानदान का नाश कर दूँगा। मुझे शनि सिद्ध है। कुछ लोग इस उम्मीद से मिलने आते हैं कि मैं उन्हें ठिलठिलाता ,कुलाँचे मारता,उछलता मिलूँगा और उनके मिलते ही जो मजाक शुरू करूँगा तो सारा दिन दाँत निकालते गुजार देंगे। मुझे वे गम्भीर और कम बोलने वाला पाते हैं। किसी गम्भीर विषय पर मैं बात छेड़ देता हूँ। वे निराश होते हैं। काफी लोगों का यह मत है कि मैं निहायत मनहूस आदमी हूँ। एक पाठिका ने एक दिन कहा-आप मनुष्यता की भावना की कहानियाँ क्यों नहींलिखते? और एक मित्र मुझे उस दिन सलाह दे रहे थे- तुम्हें अब गम्भीर हो जाना चाहिये। इट इज़ हाई टाइम! व्यंग्य लिखने वाले की ट्रेजिडी कोई एक नहीं हैं। 'फ़नी' से लेकर उसे मनुष्यता की भावना से हीन तक समझा जाता है।'मजा आ गया' से लेकर 'गम्भीर हो जाओ' तक की प्रतिक्रयायें उसे सुननी पढ़ती हैं। फिर लोग अपने या अपने मामा,काका के चेहरे देख लेते हैं और दुश्मन बढ़ते जाते हैं। एक बहुत बड़े वयोवृद्ध गाँधी-भक्त साहित्यकार मुझे अनैतिक लेखक समझते हैं। नैतिकता का अर्थ उनके लिये शायद गबद्दूपन होता है। लेकिन इसके बावजूद ऐसे पाठकों का एक बड़ा वर्ग है,जो व्यंग्य में निहित सामाजिक-राजनीतिक अर्थ संकेत को समझते हैं। वे जब मिलते हैं या लिखते हैं तो मजाक के मूड में नहीं। वे उन स्थितियों की बात करते हैं,जिन पर मैंने व्यंग्य किया है,वे उस रचना के तीखे वाक्य बनाते हैं। वे हालातों के प्रति चिन्तित होते हैं। आलोचकों की स्थिति कठिनाई की है। गम्भीर कहानियों के बारे में तो वे कह सकते हैं कि संवेदना कैसे पिछलती आ रही है,समस्या कैसे प्रस्तुत की गयी -वगैरह। व्यंग्य के बारे में वह क्या कहे?अक्सर वह कहता है-हिंदी में शिष्ट हास्य का अभाव है।(हम सब हास्य और व्यंग्य के लेखक लिखते-लिखते मर जायेंगे,तब भी लेखकों के बेटे से इन आलोचकों के बेटे कहेंगे कि हिंदी में हास्य -व्यंग्य का अभाव है),हां वे यह और कहते हैं-विद्रूप का उद्घाटन कर दिया,परदाफाश कर दिया है,करारी चोट की है,गहरी मार की है, झकझोर दिया है। आलोचक बेचारा और क्या करे?जीवन बोध,व्यंग्यकार की दृष्टि, व्यंग्यकार की आस्था,विश्वास आदि बातें समझ और मेहनत की मांग करती हैं। किसे पड़ी है? -अच्छा, तो तुम लोग व्यंग्यकार क्या अपने 'प्राफे़ट' को समझते हो? 'फनी' कहने पर बुरा मानते हो।खुद हँसाते हो और लोग हँसकर कहते हैं-मजा आ गया,तो बुरा मानते हो और कहते हो-सिर्फ मजा आ गया? तुम नहीं जानते कि इस तरह की रचनायें हल्की मानी जाती हैं और दो घड़ी के लिये पढ़ी जाती हैं। [यह बात मैं अपने-आपसे कहता हूँ,अपने-आपसे ही सवाल करता हूँ।] विसंगति की क्या अहमियत है ,वह जीवन में किस हद तक महत्वपूर्ण है,वह कितनी व्यापक है, उसका प्रभाव कितना है-ये सब बातें विचारणीय हैं। दाँत निकाल देना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। -जवाबः हँसना अच्छी बात है। पकौड़े जैसी नाक को देखकर भी हँसा जाता है,आदमी कुत्ते -जैसे भौंके तो भी लोग हँसते हैं। साइकिल पर डबल सवार गिरें ,तो भी लोग हँसते हैं। संगति के कुछ मान बजे हुये होते हैं- जैसे इतने बड़े शरीर में इतनी बड़ी नाक होनी चाहिये। उससे बड़ी होती है ,तो हँसी आती है। आदमी आदमी की ही बोली बोले,ऐसी संगति मानी हुई है। वह कुत्ते-जैसा भौंके तो यह विसंगति हुई और हंसी का कारण। असामंजस्य,अनुपातहीनता,विसंगति हमारी चेतना को छोड़ देते हैं। तब हँसी भी आ सकती है और हँसी नहीं भी आ सकती-चेतना पर आघात पड़ सकता है। मगर विसंगतियों के भी स्तर होते हैं। आदमी कुत्ते की बोली बोले -यह एक विसंगति है। और वनमहोत्सव का आयोजन करने के लिये पेड़ काटकर साफ किये जायें,जहाँ मन्त्री महोदय गुलाब के 'वृक्ष' की कलम रोपें -यह भी एक विसंगति है। दोनों में भेद है,गो दोनों से हँसी आती है। मेरा मतलब है-विसंगति की क्या अहमियत है ,वह जीवन में किस हद तक महत्वपूर्ण है,वह कितनी व्यापक है, उसका प्रभाव कितना है-ये सब बातें विचारणीय हैं। दाँत निकाल देना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। -लेकिन यार,इस बात से क्यों कतराते हो कि इस तरह का साहित्य हल्का ही माना जाता है?-माना जाता है तो मैं क्या करूँ? भारतेन्दु युग में प्रतापनारायण मिश्र और बालमुकुन्द गुप्त जो व्यंग्य लिखते थे ,वह कितनी पीडा़ से लिखा जाता था। देश की दुर्दशा पर वे किसी भी कौम के रहनुमा से ज्यादा रोते थे। हाँ,यह सही है कि इसके बाद रुचि कुछ ऐसी हुई कि हास्य का लेखक विदूषक बनने को मजबूर हुआ । 'मदारी और डमरू','टुनटुन'जैसे पत्र निकले और हास्यरस के कवियों ने 'चोंच' और 'काग' जैसे उपनाम रखे। याने हास्य के लिये रचनाकार को हास्यास्पद होना पड़ा। अभी भी यही मजबूरी बची है। तभी कुंजबिहारी पाण्डे को 'कुत्ता' शब्द आने पर मंच पर भौंककर बताना पड़ता है और काका हाथरसी को अपनी पुस्तक के कवर पर अपना कार्टून छपाना पड़ता है। बात यह है कि हिन्दी-उर्दू की मिश्रित हास्य-व्यंग्य परम्परा कुछ साल चली,जिसने हास्य रस को भडौ़आ बनाया। इसमें बहुत कुछ हल्का है। यह सीधी सामन्ती वर्ग के मनोरंजन की जरूरत से पैदा हुई थी। शौकत थानवी की एक पुस्तक का नाम ही 'कुतिया' है। अज़ीमबेग चुग़ताई नौकरानी की लड़की से 'फ्लर्ट' करने की तरकीबें बताते हैं! कोई अचरज नहीं कि हास्य-व्यंग्य के लेखकों को लोगों ने हल्के ,गैरजिम्मेदार और हास्यास्पद मान लिया हो। हमारे समाज में कुचले हुये का उपहास किया जाता है। स्त्री आर्थिक रूप से गुलाम रही ,उसका कोई व्यक्तित्व नहीं बनने दिया गया,वह अशिक्षित रही,ऐसी रही-तब उसकी हीनता का मजाक करना 'सेफ' हो गया। -और 'पत्नीवाद' वाला हास्यरस! वह तो स्वस्थ है ? उसमें पारिवारिक-सम्बन्धों की निर्मल आत्मीयता होती है?-स्त्री से मजाक एक बात है और स्त्री का उपहास दूसरी बात। हमारे समाज में कुचले हुये का उपहास किया जाता है। स्त्री आर्थिक रूप से गुलाम रही ,उसका कोई व्यक्तित्व नहीं बनने दिया गया,वह अशिक्षित रही,ऐसी रही-तब उसकी हीनता का मजाक करना 'सेफ' हो गया। पत्नी के पक्ष के सब लोग हीन और उपहास के पात्र हो गये-खासकर साला,गो हर आदमी किसी न किसी का साला होता है। इसी तरह घर का नौकर सामन्ती परिवारों में मनोरंजन का माध्यम होता है। उत्तर भारत के सामन्ती परिवारों की परदानशीन दमित रईस-जादियों का मनोरंजन घर के नौकर का उपहास करके होता है। जो जितना मूर्ख , सनकी और पौरुषहीन हो ,वह नौकर उतना ही दिलचस्प होता है। इसलिये सिकन्दर मियाँ चाहे काफी बुद्धिमान हों,मगर जानबूझकर बेवकूफ बन जाते हैं क्योंकि उनका ऐसा होना नौकरी को सुरक्षित रखता है। सलमा सिद्धीकी ने सिकन्दरनामा में ऐसे ही पारिवारिक नौकर की कहानी लिखी है। मैं सोचता हूँ सिकन्दर मियाँ अपनी नजर से उस परिवार की कहानी कहें,तो और अच्छा हो। -तो क्या पत्नी,साला,नौकर,नौकरानी आदि को हास्य का विषय बनाना अशिष्टता है?-'वल्गर' है। इतने व्यापक सामाजिक जीवन में इतनी विसंगतियाँ हैं। उन्हें न देखकर बीबी की मूर्खता बयान करना बडी़ संकीर्णता है। इतने व्यापक सामाजिक जीवन में इतनी विसंगतियाँ हैं। उन्हें न देखकर बीबी की मूर्खता बयान करना बडी़ संकीर्णता है। -और 'शिष्ट' और 'अशिष्ट' क्या है?-अक्सर 'शिष्ट' हास्य की माँग वे करते हैं,जो शिकार होते हैं। भ्रष्टाचारी तो यही चाहेगा कि आप मुंशी की या साले की मजाक का शिष्ट हास्य करते रहें और उस पर चोट न करें। हमारे यहाँ तो हत्यारे'भ्रष्टाचारी' पीड़क से भी 'शिष्टता' बरतने की माँग की जाती है-'अगर जनाब बुरा न माने तो अर्ज है कि भ्रष्टाचार न किया करें। बड़ी कृपा होगी सेवक पर।' व्यंग्य में चोट होती ही है। जिन पर होती है वह कहते हैं-'इसमें कटुता आ गयी। शिष्ट हास्य लिखा करिये।' मार्क ट्वेन की वे रचनायें नये संकलनों में नहीं आतीं,जिनमें उसने अमेरिकी शासन और मोनोपोली के बखिये उधेड़े हैं। वह उसे केवल शिष्ट हास्य का मनोरंजन देने वाला लेखक बताना चाहते हैं- 'ही डिलाइटेड मिलियन्स'। इतने मार्क ट्वेन की वे रचनायें नये संकलनों में नहीं आतीं,जिनमें उसने अमेरिकी शासन और मोनोपोली के बखिये उधेड़े हैं। वह उसे केवल शिष्ट हास्य का मनोरंजन देने वाला लेखक बताना चाहते हैं -तो तुम्हारा मतलब यह है कि मनोरंजन के साथ व्यंग्य में समाज की समीक्षा भी होती है?-हाँ,व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार कराता है,जीवन की आलोचना करता है,विसंगतियों, मिथ्याचारों और पाखण्डों का परदाफाश करता है। -यह नारा हो गया।-नारा नहीं है। मैं यह कह रहा हूँ कि जीवन के प्रति व्यंग्यकार की उतनी ही निष्ठा होती है ,जितनी गम्भीर रचनाकार की- बल्कि ज्यादा ही,वह जीवन के पति दायित्व का अनुभव करता है। व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार कराता है,जीवन की आलोचना करता है,विसंगतियों, मिथ्याचारों और पाखण्डों का परदाफाश करता है। -लेकिन वह शायद मनुष्य के बारे में आशा खो चुका होता है। निराशावादी हो जाता है। उसे मनुष्य की बुराई ही दीखती है। तुम्हारी रचनाओं में देखो-सब चरित्र बुरे ही हैं।-यह कहना तो इसी तरह हुआ कि डाक्टर से कहा जाये कि तुम रुग्ण मनोवृत्ति के आदमी हो। तुम्हें रोग ही रोग दीखते हैं। मनुष्य के बारे में आशा न होती ,तो हम उसकी कमजिरियों पर क्यों रोते? क्यों उससे कहते कि यार तू जरा कम बेवकूफ ,विवेकशील,सच्चा और न्यायी हो जा। जिंदगी बहुत जटिल चीज है। इसमें खालिस हँसना या खालिस रोना-जैसी चीज नहीं होती। बहुत सी हास्य रचनाओं में करुणा की अन्तर्धारा होती है। -तो तुम लोग रोते भी हो। मेरा तो ख्याल था कि तुम सब पर हँसते हो।- जिंदगी बहुत जटिल चीज है। इसमें खालिस हँसना या खालिस रोना-जैसी चीज नहीं होती। बहुत सी हास्य रचनाओं में करुणा की अन्तर्धारा होती है। चेखव की कहानी' क्लर्क की मौत' क्या हँसी की कहानी है? उसका व्यंग्य कितना गहरा,ट्रेजिक और करुणामय है। चेखव की ही एक कम प्रसिद्ध कहानी है-'किरायेदार।' इसका नायक 'जोरू का गुलाम' है-बीबी के होटल का प्रबन्ध करता है। अपनी नौकरी छोड़ आया है। अब बीबी का गुलाम उपहास का पात्र होता है न! मगर इस कहानी में यह बीबी का गुलाम अन्त में बड़ी करुणा पैदा करता है। अच्छा व्यंग्य सहानुभूति का सबसे उत्कृष्ट रूप होता है। अच्छा व्यंग्य सहानुभूति का सबसे उत्कृष्ट रूप होता है। -अच्छा यार, तुम्हें आत्म-प्रचार का मौका दिया गया था। पर तुम अपना कुछ न कहकर जनरल ही बोलते जा रहे हो। तुम्हारी रचनाओम को पढ़कर कुछ बातें पूछी जा सकती हैं। क्या तुम सुधारक हो?तुममें आर्य समाजी-वृत्ति देखी जाती है।-कोई सुधर जाये तो मुझे क्या एतराज है। वैसे मैं सुधार के लिये नहीं,बदलने के लिये लिखना चाहता हूँ। याने कोशिश करता हूँ-चेतना में हलचल हो जाये,कोई विसंगति नजर के सामने आ जाये।इतना काफी है। सुधरने वाले खुद अपनी चेतना से सुधरते हैं। मेरी एक कहानी है-'सदाचार का तावीज'। इसमें कोई सुधारवादी संकेत नहीं हैं। कुल इतना है कि तावीज बाँधकर आदमी को ईमानदार बनाने की कोशिश की जा रही है,(भाषणों और उपदेशों से)। सदाचार का तावीज बाँधे बाबू दूसरी तारीख को घूस लेने से इंकार कर देता है मगर २९ तारीख को ले लेता है-'उसकी तन्ख्वाह खत्म हो गयी । तावीज बंधा है, मगर जेब खाली है।' संकेत मैं यह करना चाहता हूँ कि बिना व्यवस्था परिवर्तन किये,भ्रष्टाचार के मौके को खत्म किये और कर्मचारियों को बिना आर्थिक सुरक्षा दिये, भाषणों ,सर्कुलरों, उपदेशों,सदाचार समितियों,निगरानी आयोगों के द्वारा कर्मचारी सदाचारी नहीं होगा। इसमें कोई उपदेश नहीं है। उपदेश का चार्ज वे लोग लगाते हैं, जो किसी के प्रति दायित्व का कोई अनुभव नहीं करते। वह सिर्फ अपने को मनुष्य मानते हैं और सोचते हैं कि हम कीड़ों के बीच रहने को अभिशप्त हैं। यह लोग तो कुत्ते की दुम में पटाखे की लड़ी बाँधकर उसमें आग लगाकर कुत्ते के मृत्यु-भय पर भी ठहाका लगा लेते हैं। मैं सुधार के लिये नहीं,बदलने के लिये लिखना चाहता हूँ। याने कोशिश करता हूँ-चेतना में हलचल हो जाये,कोई विसंगति नजर के सामने आ जाये।इतना काफी है। सुधरने वाले खुद अपनी चेतना से सुधरते हैं। -अच्छा यार, बातें तो और भी बहुत -सी करनी थीं। पर पाठक बोर हो जायेंगे। बस एक बात बताओ-तुम इतना राजनीतिक व्यंग्य क्यों लिखते हो?-इसलिये कि राजनीति बहुत बड़ी निर्णायक शक्ति हो गयी है। वह जीवन से बिल्कुल मिली हुई है। वियतनाम की जनता पर बम क्यों बरस रहे हैं? क्या उस जनता की कुछ अपनी जिम्मेदारी है? यह राजनीतिक दाँव-पेंच के बम हैं। शहर में अनाज और तेल पर मुनाफाखोरी कम नहीं हो सकती,क्योंकि व्यापरियों के क्षेत्र से अमुक-अमुक को चुनकर जाना है।राजनीति -सिद्धान्त और व्यवहार की- हमारे जीवन का एक अंग है। उससे नफरत करना बेवकूफी है। राजनीति से लेखक को दूर रखने की बात वही करते हैं,जिनके निहित स्वार्थ हैं,जो डरते हैं कि कहीं लोग हमें समझ न जायें। मैंने पहले भी कहा है कि राजनीति को नकारना भी एक राजनीति है। राजनीति को नकारना भी एक राजनीति है। -अच्छा तो बात को यहीं खत्म करें! तुम अब राजनीति पर चर्चा करने लगे । इससे लेबिल चिपकते हैं। -लेबिल का क्या डर! दूसरों को देशद्रोही कहने वाले,पाकिस्तान को भूखे बंगाल का चावल 'स्मगल' करते हैं। ये सारे रहस्य मुझे समझ में आते हैं। मुझे डराने की कोशिश मत करो।
एक सज्जन अपने मित्र से मेरा परिचय करा रहे थे-यह परसाईजी हैं। बहुत अच्छे लेखक हैं। ही राइट्स फनी थिंग्स। एक मेरे पाठक मुझे दूर से देखते ही इस तरह हँसी की तिड़तिड़ाहट करके मेरी तरफ बढ़ते हैं,जैसे दिवाली पर बच्चे'तिड़तिड़ी' को पत्थर पर रगड़कर फेंक देते हैं और वह थोड़ी देर तिड़तिड़ करती उछलती रहती है। पास आकर अपने हाथों में मेरा हाथ ले लेते हैं। मजा आ गया। उन्होंने कभी कोई चीज मेरी पढ़ी होगी। अभी सालों से कोई चीज नहीं पढ़ी ,यह मैं जानता हूँ। एक सज्जन जब भी सड़क पर मिल जाते हैं,दूर से ही चिल्लाते हैं-'परसाईजी नमस्कार!मेरा पथ-प्रदर्शक पाखाना!' बात यह है कि किसी दूसरे आदमी ने कई साल पहले स्थानीय साप्ताहिक में एक मजाकिया लेख लिखा था,'मेरा पथ-प्रदर्शक पाखाना।' पर उन्होंने ऐसी सारी चीजों के लिये मुझे जिम्मेदार मान लिया है। मैंने भी नहीं बताया कि वह लेख मैंने नहीं लिखा था। बस,वे जहाँ मिलते हैं-'मेरा पथ प्रदर्शक पाखाना कहकर मेरा अभिवादन करते हैं। कुछ पाठक समझते हैं कि मैं हमेशा उचक्केपन और हल्केपन के मूड में रहता हूँ। वे चिट्ठी में मखौल करने की कोशिश करते हैं! कुछ पाठक समझते हैं कि मैं हमेशा उचक्केपन और हल्केपन के मूड में रहता हूँ। वे चिट्ठी में मखौल करने की कोशिश करते हैं! एक पत्र मेरे सामने है। लिखा है- कहिये जनाब बरसात का मजा ले रहे हैं न! मेढकों की जलतरंग सुन रहे होंगे। इस पर भी लिख डालिये न कुछ। बिहार के किसी कस्बे से एक आदमी ने लिखा कि तुमने मेरे मामा का, जो फारेस्ट अफसर है,मजाक उड़ाया है। उसकी बदनामी की है। मैं तुम्हारे खानदान का नाश कर दूँगा। मुझे शनि सिद्ध है। कुछ लोग इस उम्मीद से मिलने आते हैं कि मैं उन्हें ठिलठिलाता ,कुलाँचे मारता,उछलता मिलूँगा और उनके मिलते ही जो मजाक शुरू करूँगा तो सारा दिन दाँत निकालते गुजार देंगे। मुझे वे गम्भीर और कम बोलने वाला पाते हैं। किसी गम्भीर विषय पर मैं बात छेड़ देता हूँ। वे निराश होते हैं। काफी लोगों का यह मत है कि मैं निहायत मनहूस आदमी हूँ। एक पाठिका ने एक दिन कहा-आप मनुष्यता की भावना की कहानियाँ क्यों नहींलिखते? और एक मित्र मुझे उस दिन सलाह दे रहे थे- तुम्हें अब गम्भीर हो जाना चाहिये। इट इज़ हाई टाइम! व्यंग्य लिखने वाले की ट्रेजिडी कोई एक नहीं हैं। 'फ़नी' से लेकर उसे मनुष्यता की भावना से हीन तक समझा जाता है।'मजा आ गया' से लेकर 'गम्भीर हो जाओ' तक की प्रतिक्रयायें उसे सुननी पढ़ती हैं। फिर लोग अपने या अपने मामा,काका के चेहरे देख लेते हैं और दुश्मन बढ़ते जाते हैं। एक बहुत बड़े वयोवृद्ध गाँधी-भक्त साहित्यकार मुझे अनैतिक लेखक समझते हैं। नैतिकता का अर्थ उनके लिये शायद गबद्दूपन होता है। लेकिन इसके बावजूद ऐसे पाठकों का एक बड़ा वर्ग है,जो व्यंग्य में निहित सामाजिक-राजनीतिक अर्थ संकेत को समझते हैं। वे जब मिलते हैं या लिखते हैं तो मजाक के मूड में नहीं। वे उन स्थितियों की बात करते हैं,जिन पर मैंने व्यंग्य किया है,वे उस रचना के तीखे वाक्य बनाते हैं। वे हालातों के प्रति चिन्तित होते हैं। आलोचकों की स्थिति कठिनाई की है। गम्भीर कहानियों के बारे में तो वे कह सकते हैं कि संवेदना कैसे पिछलती आ रही है,समस्या कैसे प्रस्तुत की गयी -वगैरह। व्यंग्य के बारे में वह क्या कहे?अक्सर वह कहता है-हिंदी में शिष्ट हास्य का अभाव है।,हां वे यह और कहते हैं-विद्रूप का उद्घाटन कर दिया,परदाफाश कर दिया है,करारी चोट की है,गहरी मार की है, झकझोर दिया है। आलोचक बेचारा और क्या करे?जीवन बोध,व्यंग्यकार की दृष्टि, व्यंग्यकार की आस्था,विश्वास आदि बातें समझ और मेहनत की मांग करती हैं। किसे पड़ी है? -अच्छा, तो तुम लोग व्यंग्यकार क्या अपने 'प्राफे़ट' को समझते हो? 'फनी' कहने पर बुरा मानते हो।खुद हँसाते हो और लोग हँसकर कहते हैं-मजा आ गया,तो बुरा मानते हो और कहते हो-सिर्फ मजा आ गया? तुम नहीं जानते कि इस तरह की रचनायें हल्की मानी जाती हैं और दो घड़ी के लिये पढ़ी जाती हैं। [यह बात मैं अपने-आपसे कहता हूँ,अपने-आपसे ही सवाल करता हूँ।] विसंगति की क्या अहमियत है ,वह जीवन में किस हद तक महत्वपूर्ण है,वह कितनी व्यापक है, उसका प्रभाव कितना है-ये सब बातें विचारणीय हैं। दाँत निकाल देना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। -जवाबः हँसना अच्छी बात है। पकौड़े जैसी नाक को देखकर भी हँसा जाता है,आदमी कुत्ते -जैसे भौंके तो भी लोग हँसते हैं। साइकिल पर डबल सवार गिरें ,तो भी लोग हँसते हैं। संगति के कुछ मान बजे हुये होते हैं- जैसे इतने बड़े शरीर में इतनी बड़ी नाक होनी चाहिये। उससे बड़ी होती है ,तो हँसी आती है। आदमी आदमी की ही बोली बोले,ऐसी संगति मानी हुई है। वह कुत्ते-जैसा भौंके तो यह विसंगति हुई और हंसी का कारण। असामंजस्य,अनुपातहीनता,विसंगति हमारी चेतना को छोड़ देते हैं। तब हँसी भी आ सकती है और हँसी नहीं भी आ सकती-चेतना पर आघात पड़ सकता है। मगर विसंगतियों के भी स्तर होते हैं। आदमी कुत्ते की बोली बोले -यह एक विसंगति है। और वनमहोत्सव का आयोजन करने के लिये पेड़ काटकर साफ किये जायें,जहाँ मन्त्री महोदय गुलाब के 'वृक्ष' की कलम रोपें -यह भी एक विसंगति है। दोनों में भेद है,गो दोनों से हँसी आती है। मेरा मतलब है-विसंगति की क्या अहमियत है ,वह जीवन में किस हद तक महत्वपूर्ण है,वह कितनी व्यापक है, उसका प्रभाव कितना है-ये सब बातें विचारणीय हैं। दाँत निकाल देना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। -लेकिन यार,इस बात से क्यों कतराते हो कि इस तरह का साहित्य हल्का ही माना जाता है?-माना जाता है तो मैं क्या करूँ? भारतेन्दु युग में प्रतापनारायण मिश्र और बालमुकुन्द गुप्त जो व्यंग्य लिखते थे ,वह कितनी पीडा़ से लिखा जाता था। देश की दुर्दशा पर वे किसी भी कौम के रहनुमा से ज्यादा रोते थे। हाँ,यह सही है कि इसके बाद रुचि कुछ ऐसी हुई कि हास्य का लेखक विदूषक बनने को मजबूर हुआ । 'मदारी और डमरू','टुनटुन'जैसे पत्र निकले और हास्यरस के कवियों ने 'चोंच' और 'काग' जैसे उपनाम रखे। याने हास्य के लिये रचनाकार को हास्यास्पद होना पड़ा। अभी भी यही मजबूरी बची है। तभी कुंजबिहारी पाण्डे को 'कुत्ता' शब्द आने पर मंच पर भौंककर बताना पड़ता है और काका हाथरसी को अपनी पुस्तक के कवर पर अपना कार्टून छपाना पड़ता है। बात यह है कि हिन्दी-उर्दू की मिश्रित हास्य-व्यंग्य परम्परा कुछ साल चली,जिसने हास्य रस को भडौ़आ बनाया। इसमें बहुत कुछ हल्का है। यह सीधी सामन्ती वर्ग के मनोरंजन की जरूरत से पैदा हुई थी। शौकत थानवी की एक पुस्तक का नाम ही 'कुतिया' है। अज़ीमबेग चुग़ताई नौकरानी की लड़की से 'फ्लर्ट' करने की तरकीबें बताते हैं! कोई अचरज नहीं कि हास्य-व्यंग्य के लेखकों को लोगों ने हल्के ,गैरजिम्मेदार और हास्यास्पद मान लिया हो। हमारे समाज में कुचले हुये का उपहास किया जाता है। स्त्री आर्थिक रूप से गुलाम रही ,उसका कोई व्यक्तित्व नहीं बनने दिया गया,वह अशिक्षित रही,ऐसी रही-तब उसकी हीनता का मजाक करना 'सेफ' हो गया। -और 'पत्नीवाद' वाला हास्यरस! वह तो स्वस्थ है ? उसमें पारिवारिक-सम्बन्धों की निर्मल आत्मीयता होती है?-स्त्री से मजाक एक बात है और स्त्री का उपहास दूसरी बात। हमारे समाज में कुचले हुये का उपहास किया जाता है। स्त्री आर्थिक रूप से गुलाम रही ,उसका कोई व्यक्तित्व नहीं बनने दिया गया,वह अशिक्षित रही,ऐसी रही-तब उसकी हीनता का मजाक करना 'सेफ' हो गया। पत्नी के पक्ष के सब लोग हीन और उपहास के पात्र हो गये-खासकर साला,गो हर आदमी किसी न किसी का साला होता है। इसी तरह घर का नौकर सामन्ती परिवारों में मनोरंजन का माध्यम होता है। उत्तर भारत के सामन्ती परिवारों की परदानशीन दमित रईस-जादियों का मनोरंजन घर के नौकर का उपहास करके होता है। जो जितना मूर्ख , सनकी और पौरुषहीन हो ,वह नौकर उतना ही दिलचस्प होता है। इसलिये सिकन्दर मियाँ चाहे काफी बुद्धिमान हों,मगर जानबूझकर बेवकूफ बन जाते हैं क्योंकि उनका ऐसा होना नौकरी को सुरक्षित रखता है। सलमा सिद्धीकी ने सिकन्दरनामा में ऐसे ही पारिवारिक नौकर की कहानी लिखी है। मैं सोचता हूँ सिकन्दर मियाँ अपनी नजर से उस परिवार की कहानी कहें,तो और अच्छा हो। -तो क्या पत्नी,साला,नौकर,नौकरानी आदि को हास्य का विषय बनाना अशिष्टता है?-'वल्गर' है। इतने व्यापक सामाजिक जीवन में इतनी विसंगतियाँ हैं। उन्हें न देखकर बीबी की मूर्खता बयान करना बडी़ संकीर्णता है। इतने व्यापक सामाजिक जीवन में इतनी विसंगतियाँ हैं। उन्हें न देखकर बीबी की मूर्खता बयान करना बडी़ संकीर्णता है। -और 'शिष्ट' और 'अशिष्ट' क्या है?-अक्सर 'शिष्ट' हास्य की माँग वे करते हैं,जो शिकार होते हैं। भ्रष्टाचारी तो यही चाहेगा कि आप मुंशी की या साले की मजाक का शिष्ट हास्य करते रहें और उस पर चोट न करें। हमारे यहाँ तो हत्यारे'भ्रष्टाचारी' पीड़क से भी 'शिष्टता' बरतने की माँग की जाती है-'अगर जनाब बुरा न माने तो अर्ज है कि भ्रष्टाचार न किया करें। बड़ी कृपा होगी सेवक पर।' व्यंग्य में चोट होती ही है। जिन पर होती है वह कहते हैं-'इसमें कटुता आ गयी। शिष्ट हास्य लिखा करिये।' मार्क ट्वेन की वे रचनायें नये संकलनों में नहीं आतीं,जिनमें उसने अमेरिकी शासन और मोनोपोली के बखिये उधेड़े हैं। वह उसे केवल शिष्ट हास्य का मनोरंजन देने वाला लेखक बताना चाहते हैं- 'ही डिलाइटेड मिलियन्स'। इतने मार्क ट्वेन की वे रचनायें नये संकलनों में नहीं आतीं,जिनमें उसने अमेरिकी शासन और मोनोपोली के बखिये उधेड़े हैं। वह उसे केवल शिष्ट हास्य का मनोरंजन देने वाला लेखक बताना चाहते हैं -तो तुम्हारा मतलब यह है कि मनोरंजन के साथ व्यंग्य में समाज की समीक्षा भी होती है?-हाँ,व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार कराता है,जीवन की आलोचना करता है,विसंगतियों, मिथ्याचारों और पाखण्डों का परदाफाश करता है। -यह नारा हो गया।-नारा नहीं है। मैं यह कह रहा हूँ कि जीवन के प्रति व्यंग्यकार की उतनी ही निष्ठा होती है ,जितनी गम्भीर रचनाकार की- बल्कि ज्यादा ही,वह जीवन के पति दायित्व का अनुभव करता है। व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार कराता है,जीवन की आलोचना करता है,विसंगतियों, मिथ्याचारों और पाखण्डों का परदाफाश करता है। -लेकिन वह शायद मनुष्य के बारे में आशा खो चुका होता है। निराशावादी हो जाता है। उसे मनुष्य की बुराई ही दीखती है। तुम्हारी रचनाओं में देखो-सब चरित्र बुरे ही हैं।-यह कहना तो इसी तरह हुआ कि डाक्टर से कहा जाये कि तुम रुग्ण मनोवृत्ति के आदमी हो। तुम्हें रोग ही रोग दीखते हैं। मनुष्य के बारे में आशा न होती ,तो हम उसकी कमजिरियों पर क्यों रोते? क्यों उससे कहते कि यार तू जरा कम बेवकूफ ,विवेकशील,सच्चा और न्यायी हो जा। जिंदगी बहुत जटिल चीज है। इसमें खालिस हँसना या खालिस रोना-जैसी चीज नहीं होती। बहुत सी हास्य रचनाओं में करुणा की अन्तर्धारा होती है। -तो तुम लोग रोते भी हो। मेरा तो ख्याल था कि तुम सब पर हँसते हो।- जिंदगी बहुत जटिल चीज है। इसमें खालिस हँसना या खालिस रोना-जैसी चीज नहीं होती। बहुत सी हास्य रचनाओं में करुणा की अन्तर्धारा होती है। चेखव की कहानी' क्लर्क की मौत' क्या हँसी की कहानी है? उसका व्यंग्य कितना गहरा,ट्रेजिक और करुणामय है। चेखव की ही एक कम प्रसिद्ध कहानी है-'किरायेदार।' इसका नायक 'जोरू का गुलाम' है-बीबी के होटल का प्रबन्ध करता है। अपनी नौकरी छोड़ आया है। अब बीबी का गुलाम उपहास का पात्र होता है न! मगर इस कहानी में यह बीबी का गुलाम अन्त में बड़ी करुणा पैदा करता है। अच्छा व्यंग्य सहानुभूति का सबसे उत्कृष्ट रूप होता है। अच्छा व्यंग्य सहानुभूति का सबसे उत्कृष्ट रूप होता है। -अच्छा यार, तुम्हें आत्म-प्रचार का मौका दिया गया था। पर तुम अपना कुछ न कहकर जनरल ही बोलते जा रहे हो। तुम्हारी रचनाओम को पढ़कर कुछ बातें पूछी जा सकती हैं। क्या तुम सुधारक हो?तुममें आर्य समाजी-वृत्ति देखी जाती है।-कोई सुधर जाये तो मुझे क्या एतराज है। वैसे मैं सुधार के लिये नहीं,बदलने के लिये लिखना चाहता हूँ। याने कोशिश करता हूँ-चेतना में हलचल हो जाये,कोई विसंगति नजर के सामने आ जाये।इतना काफी है। सुधरने वाले खुद अपनी चेतना से सुधरते हैं। मेरी एक कहानी है-'सदाचार का तावीज'। इसमें कोई सुधारवादी संकेत नहीं हैं। कुल इतना है कि तावीज बाँधकर आदमी को ईमानदार बनाने की कोशिश की जा रही है,। सदाचार का तावीज बाँधे बाबू दूसरी तारीख को घूस लेने से इंकार कर देता है मगर उनतीस तारीख को ले लेता है-'उसकी तन्ख्वाह खत्म हो गयी । तावीज बंधा है, मगर जेब खाली है।' संकेत मैं यह करना चाहता हूँ कि बिना व्यवस्था परिवर्तन किये,भ्रष्टाचार के मौके को खत्म किये और कर्मचारियों को बिना आर्थिक सुरक्षा दिये, भाषणों ,सर्कुलरों, उपदेशों,सदाचार समितियों,निगरानी आयोगों के द्वारा कर्मचारी सदाचारी नहीं होगा। इसमें कोई उपदेश नहीं है। उपदेश का चार्ज वे लोग लगाते हैं, जो किसी के प्रति दायित्व का कोई अनुभव नहीं करते। वह सिर्फ अपने को मनुष्य मानते हैं और सोचते हैं कि हम कीड़ों के बीच रहने को अभिशप्त हैं। यह लोग तो कुत्ते की दुम में पटाखे की लड़ी बाँधकर उसमें आग लगाकर कुत्ते के मृत्यु-भय पर भी ठहाका लगा लेते हैं। मैं सुधार के लिये नहीं,बदलने के लिये लिखना चाहता हूँ। याने कोशिश करता हूँ-चेतना में हलचल हो जाये,कोई विसंगति नजर के सामने आ जाये।इतना काफी है। सुधरने वाले खुद अपनी चेतना से सुधरते हैं। -अच्छा यार, बातें तो और भी बहुत -सी करनी थीं। पर पाठक बोर हो जायेंगे। बस एक बात बताओ-तुम इतना राजनीतिक व्यंग्य क्यों लिखते हो?-इसलिये कि राजनीति बहुत बड़ी निर्णायक शक्ति हो गयी है। वह जीवन से बिल्कुल मिली हुई है। वियतनाम की जनता पर बम क्यों बरस रहे हैं? क्या उस जनता की कुछ अपनी जिम्मेदारी है? यह राजनीतिक दाँव-पेंच के बम हैं। शहर में अनाज और तेल पर मुनाफाखोरी कम नहीं हो सकती,क्योंकि व्यापरियों के क्षेत्र से अमुक-अमुक को चुनकर जाना है।राजनीति -सिद्धान्त और व्यवहार की- हमारे जीवन का एक अंग है। उससे नफरत करना बेवकूफी है। राजनीति से लेखक को दूर रखने की बात वही करते हैं,जिनके निहित स्वार्थ हैं,जो डरते हैं कि कहीं लोग हमें समझ न जायें। मैंने पहले भी कहा है कि राजनीति को नकारना भी एक राजनीति है। राजनीति को नकारना भी एक राजनीति है। -अच्छा तो बात को यहीं खत्म करें! तुम अब राजनीति पर चर्चा करने लगे । इससे लेबिल चिपकते हैं। -लेबिल का क्या डर! दूसरों को देशद्रोही कहने वाले,पाकिस्तान को भूखे बंगाल का चावल 'स्मगल' करते हैं। ये सारे रहस्य मुझे समझ में आते हैं। मुझे डराने की कोशिश मत करो।
जबलपुर, यशभारत। गोसलपुर के मझौली जनपद के कंजई पंचायत भवन में देर रात कुछ तत्वों ने पंचायत भवन की खिड़की से कैमिकल डालकर आग लगा दी। जिसमें एक पाइप और दो कुर्सियां जल गईं। दरअसल कल विजयी हुए सरपंच को शपथ लेना है, इससे पहले विरोधियों ने साजिश कर यह खेल खेला है। पुलिस ने मामला कायम कर जांच में लिया है। जानकारी अनुसार पुलिस ने बताया कि पंचायत भवन की पीछे की खिड़की से कैमिलक डालकर तत्वों ने आग लगा दी। इसमें पाइप और कुर्सियां आग की चद में आते ही खाक हो गईं। बताया जा रहा है कि राजनैतिक द्वेष के चलते इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया है। बहरहाल पुलिस की जाचं जारी है।
जबलपुर, यशभारत। गोसलपुर के मझौली जनपद के कंजई पंचायत भवन में देर रात कुछ तत्वों ने पंचायत भवन की खिड़की से कैमिकल डालकर आग लगा दी। जिसमें एक पाइप और दो कुर्सियां जल गईं। दरअसल कल विजयी हुए सरपंच को शपथ लेना है, इससे पहले विरोधियों ने साजिश कर यह खेल खेला है। पुलिस ने मामला कायम कर जांच में लिया है। जानकारी अनुसार पुलिस ने बताया कि पंचायत भवन की पीछे की खिड़की से कैमिलक डालकर तत्वों ने आग लगा दी। इसमें पाइप और कुर्सियां आग की चद में आते ही खाक हो गईं। बताया जा रहा है कि राजनैतिक द्वेष के चलते इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया है। बहरहाल पुलिस की जाचं जारी है।
मॉस्कोः क्रेमलिन ने आज कहा कि जासूसी विवाद को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा बड़े पैमाने पर रूसी राजनयिकों को निष्कासित किये जाने के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। (इन कारणों के चलते प्लास्टिक की बोतलों पर टैक्स लगाएगा ब्रिटेन ) पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेसको ने संवाददाताओं से कहा, " यह अमेरिकी पक्ष पर निर्भर करता है लेकिन रूसी पक्ष अब भी खुला है। " पेसको ने कहा कि रूसी पक्ष अमेरिका सहित सभी देशों के साथ पारस्परिक हित और भरोसेमंद रिश्ते को लेकर तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस के 60 से अधिक राजनयिकों को निष्कासित किये जाने के वाशिंगटन के फैसले के बाद ट्रंप बैठक के लिए तैयार हैं या नहीं, इसकी जानकारी क्रेमलिन को नहीं है।
मॉस्कोः क्रेमलिन ने आज कहा कि जासूसी विवाद को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा बड़े पैमाने पर रूसी राजनयिकों को निष्कासित किये जाने के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेसको ने संवाददाताओं से कहा, " यह अमेरिकी पक्ष पर निर्भर करता है लेकिन रूसी पक्ष अब भी खुला है। " पेसको ने कहा कि रूसी पक्ष अमेरिका सहित सभी देशों के साथ पारस्परिक हित और भरोसेमंद रिश्ते को लेकर तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस के साठ से अधिक राजनयिकों को निष्कासित किये जाने के वाशिंगटन के फैसले के बाद ट्रंप बैठक के लिए तैयार हैं या नहीं, इसकी जानकारी क्रेमलिन को नहीं है।
नवा दृष्य [ स्थान -- मेवाड के ग्राम का मार्ग । समय - दिन । एक वृद्ध किसान पेड़ की छाया मे विश्राम कर रहा है। एक पथिक उधर आता है। पथिक बहुत थका हुआ है । मेवाड़ी नही मालूम पड़ता । पहाडी मार्ग चलने के कारण उसका दम फूल रहा है । ] पथिक --- बाबा, थोड़ा जल पिलाओगे किसान - लो, पियो । ( झारी से जल पिलाता है । पथिक --- बड़ा मीठा और शीतल जल है, बाबा । किसान - पहाड़ी करने का है । पथिक --- आप कौन है । किसान ---- मै भील हूँ । पथिक - एक बात पूछ सकता हूँ किसान - पूछो। पथिक -- मै दक्षिण से आ रहा हूँ। यहाँ मैंने आकर देखा कि गाँवों मे त्रियॉ ही स्त्रियाँ हैं । आदमो कही नहीं दिखाई पड़ते । किसान - आपका अनुमान सच है। श्राज कल गाव आद मियों से खाली हो गये है । पथिक - किस लिये ? किसान --- वृद्ध और बालकों को छोड़ कर आज गावों में आदमी नहीं मिलेंगे। सब महाराणा की सेवा में गये हैं। पथिक - एक साथ ही ? किसान - महाराणा भुगलों से युद्ध करके उन्हें भारत से निकालना चाहते है । इसीलिये सबकी सैनिक सेवाओं की दरकार है । पथिक - यहाँ सभी सैनिक हैं ? किसान - यह मेवाड़ है, भैया । यहो का बच्चा वच्चा युद्ध करना जानता है । यहाँ योद्धा ही पैदा होते है । पथिक - वीर भूमि मेवाड़ धन्य है । किसान --- शान्ति के समय हम लोग कृषि, व्यवसाय, व्यापार सभी कुछ करते हैं । युद्ध के समय सब काम बन्द करके तलवार से खेलते है । ( वृक्ष की डाल मे लटक रही तलवार उतार कर घुमाता है, और हॉफने लगता है । ) भैया, अब मै वृद्ध हो गया हू। अब दम नहीं है । पथिक - रहने दो, वाचा । यह बताओ, यह युद्ध कत्र होने वाला है किसान - शीघ्र ही। पथिक - कहो
नवा दृष्य [ स्थान -- मेवाड के ग्राम का मार्ग । समय - दिन । एक वृद्ध किसान पेड़ की छाया मे विश्राम कर रहा है। एक पथिक उधर आता है। पथिक बहुत थका हुआ है । मेवाड़ी नही मालूम पड़ता । पहाडी मार्ग चलने के कारण उसका दम फूल रहा है । ] पथिक --- बाबा, थोड़ा जल पिलाओगे किसान - लो, पियो । भैया, अब मै वृद्ध हो गया हू। अब दम नहीं है । पथिक - रहने दो, वाचा । यह बताओ, यह युद्ध कत्र होने वाला है किसान - शीघ्र ही। पथिक - कहो
पुणे : DY Patil school principal Alexander beaten up : शहर के तालेगांव दाभाड़े इलाके से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है। डी वाई पाटिल स्कूल के प्रिंसिपल अलेक्जेंडर कोट्स पर कथित तौर पर छात्रों को ईसाई प्राथनाएं पढ़ने और लड़कियों के शौचालय के बाहरी परिसर के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए कहने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब अभिभावकों की कई शिकायतों के बाद कई बजरंग दल के कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे और स्कूल परिसर में प्रिंसिपल के साथ मारपीट की। DY Patil school principal Alexander beaten up : कथित मारपीट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है। खबरों के मुताबिक, इस मामले में तालेगांव दाभाड़े स्थित डीवाई पाटिल हाई स्कूल के प्रिंसिपल अलेक्जेंडर कोट्स पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। DY Patil school principal Alexander beaten up : स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि, स्कूल अधिकारी उनके बच्चों को यीशु मसीह की प्रार्थना करने के लिए कह रहे हैं और छात्रों को हिंदू त्योहारों पर छुट्टी नहीं दी जाती है। इसके अलावा गर्ल्स टॉयलेट के अंदर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जब हम इसका विरोध करने आये तो हमने देखा कि सभी शिकायतें सही थीं" एक कार्यकर्ता ने कहा।
पुणे : DY Patil school principal Alexander beaten up : शहर के तालेगांव दाभाड़े इलाके से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है। डी वाई पाटिल स्कूल के प्रिंसिपल अलेक्जेंडर कोट्स पर कथित तौर पर छात्रों को ईसाई प्राथनाएं पढ़ने और लड़कियों के शौचालय के बाहरी परिसर के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए कहने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब अभिभावकों की कई शिकायतों के बाद कई बजरंग दल के कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे और स्कूल परिसर में प्रिंसिपल के साथ मारपीट की। DY Patil school principal Alexander beaten up : कथित मारपीट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है। खबरों के मुताबिक, इस मामले में तालेगांव दाभाड़े स्थित डीवाई पाटिल हाई स्कूल के प्रिंसिपल अलेक्जेंडर कोट्स पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। DY Patil school principal Alexander beaten up : स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि, स्कूल अधिकारी उनके बच्चों को यीशु मसीह की प्रार्थना करने के लिए कह रहे हैं और छात्रों को हिंदू त्योहारों पर छुट्टी नहीं दी जाती है। इसके अलावा गर्ल्स टॉयलेट के अंदर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जब हम इसका विरोध करने आये तो हमने देखा कि सभी शिकायतें सही थीं" एक कार्यकर्ता ने कहा।
नेटो के विस्तार की आर में अमरीका अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। आजकल जब यूक्रेन द्वारा नेटो की सदस्यता के मुद्दे को लेकर एक वैश्विक संकट आरंभ हो चुका है इसी बीच ब्रिटेन ने विश्वव्यापी नेटो के गठन की बात कही है। नेटो के सदस्यों की ग़ैर आधिकारिक बैठक में ब्रिटेन की विदेशमंत्री लिज़ ट्रस ने कहा है कि नेटो की खुले दरवाजें की नीति को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इस संगठन में फिनलैण्ड और स्वीडन की सदस्यता से यूरोप में सुरक्षा मज़बूत होगी। ब्रिटेन की विदेशमंत्री के अनुसार इसके बावजूद वर्तमान हालात में हमें बहुत ही सावधान रहने की ज़रूरत है। ब्रिटेन एसी स्थति में नेटो के विस्तार की मांग कर रहा है कि जब रूस और चीन पहले ही इसका खुलकर विरोध कर चुके हैं। उनका मानना है कि इससे विश्व की सुरक्षा कमज़ोर होगी। सभी की सुरक्षा के लक्ष्य से 1940 में वाशिग्टन डीसी में नेटो का गठन किया गया था। इसके सदस्य देशों ने यह तय किया था कि नेटो के किसी भी सदस्य पर हमला पूरे संगठन पर हमले के रूप में देखा जाएगा और उसका हम मिलकर मुक़ाबला करेंगे। वास्तव में नेटो एक प्रकार से अमरीकी हितों की सुरक्षा के हथकण्डे में बदल चुका है। नेटो ने अब पूर्वी यूरोप की ओर विस्तार को अपनी रणनीति में शामिल कर लिया है। टीकाकारों के अनुसार इस प्रकार से वह क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसी संदर्भ में पोलैण्ड, हंगरी और चेक गणराज्य ने नेटो की सदस्यता हासिल की। यह एक वास्तविकता है कि हालिया कुछ दशकों के दौरान नेटो, यूरोप और अमरीका के सैन्य बाज़ू के रूप में परिवर्तित हो चुका है। वर्तमान समय में वह पश्चिम विशेषकर अमरीका के विस्तारवादी हितों की पूर्ति के परिप्रेक्ष्य में काम कर रहा है। अब एसा लगने लगा है कि केवल पूर्वी यूरोप की ओर नेटो का विस्तार पर्याप्त नहीं है इसीलिए अब इसके वैश्विक फैलाव के बारे में बात की जाने लगी है। एसा लग रहा है कि नेटो के यूरोपीय सदस्य, इस प्रयास में हैं कि अमरीका के साथ मिलकर रूस के ख़तरे को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाए ताकि नेटो के वैश्विक विस्तार की भूमिका प्रशस्त हो सके। नेटो के महासचिव पहले ही यह बात कह चुके हैं कि नार्थ अटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाइज़ेशन, नेटो ने कभी भी यह वचन नहीं दिया था कि उसका विस्तार नहीं होगा। वर्तमान परिस्थतियों को देखते हुए एसा प्रतीत होता है कि यूरोप के साथ सहयोग करते हुए अमरीकी अधिकारियों ने नेटो के वैश्विक विस्तार का फैसला कर लिया है। यह वह परियोजना है जिससे पूरे विश्व में अमरीका की सैन्य शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। हालांकि यह बात भी उल्लेखनीय है कि क्या विश्व के अन्य देश इस अमरीकी फार्मूले का समर्थन करेंगे? हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
नेटो के विस्तार की आर में अमरीका अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। आजकल जब यूक्रेन द्वारा नेटो की सदस्यता के मुद्दे को लेकर एक वैश्विक संकट आरंभ हो चुका है इसी बीच ब्रिटेन ने विश्वव्यापी नेटो के गठन की बात कही है। नेटो के सदस्यों की ग़ैर आधिकारिक बैठक में ब्रिटेन की विदेशमंत्री लिज़ ट्रस ने कहा है कि नेटो की खुले दरवाजें की नीति को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इस संगठन में फिनलैण्ड और स्वीडन की सदस्यता से यूरोप में सुरक्षा मज़बूत होगी। ब्रिटेन की विदेशमंत्री के अनुसार इसके बावजूद वर्तमान हालात में हमें बहुत ही सावधान रहने की ज़रूरत है। ब्रिटेन एसी स्थति में नेटो के विस्तार की मांग कर रहा है कि जब रूस और चीन पहले ही इसका खुलकर विरोध कर चुके हैं। उनका मानना है कि इससे विश्व की सुरक्षा कमज़ोर होगी। सभी की सुरक्षा के लक्ष्य से एक हज़ार नौ सौ चालीस में वाशिग्टन डीसी में नेटो का गठन किया गया था। इसके सदस्य देशों ने यह तय किया था कि नेटो के किसी भी सदस्य पर हमला पूरे संगठन पर हमले के रूप में देखा जाएगा और उसका हम मिलकर मुक़ाबला करेंगे। वास्तव में नेटो एक प्रकार से अमरीकी हितों की सुरक्षा के हथकण्डे में बदल चुका है। नेटो ने अब पूर्वी यूरोप की ओर विस्तार को अपनी रणनीति में शामिल कर लिया है। टीकाकारों के अनुसार इस प्रकार से वह क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसी संदर्भ में पोलैण्ड, हंगरी और चेक गणराज्य ने नेटो की सदस्यता हासिल की। यह एक वास्तविकता है कि हालिया कुछ दशकों के दौरान नेटो, यूरोप और अमरीका के सैन्य बाज़ू के रूप में परिवर्तित हो चुका है। वर्तमान समय में वह पश्चिम विशेषकर अमरीका के विस्तारवादी हितों की पूर्ति के परिप्रेक्ष्य में काम कर रहा है। अब एसा लगने लगा है कि केवल पूर्वी यूरोप की ओर नेटो का विस्तार पर्याप्त नहीं है इसीलिए अब इसके वैश्विक फैलाव के बारे में बात की जाने लगी है। एसा लग रहा है कि नेटो के यूरोपीय सदस्य, इस प्रयास में हैं कि अमरीका के साथ मिलकर रूस के ख़तरे को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाए ताकि नेटो के वैश्विक विस्तार की भूमिका प्रशस्त हो सके। नेटो के महासचिव पहले ही यह बात कह चुके हैं कि नार्थ अटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाइज़ेशन, नेटो ने कभी भी यह वचन नहीं दिया था कि उसका विस्तार नहीं होगा। वर्तमान परिस्थतियों को देखते हुए एसा प्रतीत होता है कि यूरोप के साथ सहयोग करते हुए अमरीकी अधिकारियों ने नेटो के वैश्विक विस्तार का फैसला कर लिया है। यह वह परियोजना है जिससे पूरे विश्व में अमरीका की सैन्य शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। हालांकि यह बात भी उल्लेखनीय है कि क्या विश्व के अन्य देश इस अमरीकी फार्मूले का समर्थन करेंगे? हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
- 1 hr ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! त्योहारों के समय बॉलीवुड भी पूरे जुनून में दिखाई देता है और वो सितारे भी नज़र आते हैं जो काफी समय से कैमरों से दूर रहते हैं। दुर्गा पूजा 2022 के मौके पर राजकुमार राव की पत्नी पत्रलेखा भी दुर्गा पूजा पंडाल में दिखाई दीं। नॉर्थ बॉम्बे के दुर्गा पूजा पंडाल पर पत्रलेखा नवमी पूजा में शामिल होने पहुंची। इस मौके पर पत्रलेखा ने कैमरों के लिए पोज़ भी दिया। वहीं वो रानी मुखर्जी और तनूजा के साथ तस्वीरें खिंचवाती भी नज़र आईं। पत्रलेखा, काफी मुश्किल से ही कैमरों में कैद होती हैं। या तो वो अपने किसी प्रोजेक्ट में व्यस्त होती हैं। पत्रलेखा, दुर्गा पूजा के मौके पर हरे रंग की प्यारी सी साड़ी में नज़र आईं। शादी के बाद वो अपनी तस्वीरों और वीडियो के लिए काफी वायरल हुई थीं। वहीं शादी के बाद, पत्रलेखा की एक तस्वीर शेयर करने के लिए राजकुमार राव को काफी ज़्यादा ट्रोल किया गया था। इस ट्रोल के बाद राजकुमार राव ने पत्रलेखा की तस्वीर भी डिलीट कर दी थी। बात करें दुर्गा पूजा की तो बॉलीवुड इस समय ज़ोर शोर से नवरात्रि और दुर्गा पूजा का त्योहार मना रहे हैं। जहां स्टार्स लगातार, पंडाल के दर्शन करते दिखाई दे जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ, उन्हें डांडिया खेलते भी देखा जा सकता है। कल, ज़्यादातर स्टार्स सिंदूर खेला का उत्सव खेलते दिख जाएंगे। Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
- एक hr ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! त्योहारों के समय बॉलीवुड भी पूरे जुनून में दिखाई देता है और वो सितारे भी नज़र आते हैं जो काफी समय से कैमरों से दूर रहते हैं। दुर्गा पूजा दो हज़ार बाईस के मौके पर राजकुमार राव की पत्नी पत्रलेखा भी दुर्गा पूजा पंडाल में दिखाई दीं। नॉर्थ बॉम्बे के दुर्गा पूजा पंडाल पर पत्रलेखा नवमी पूजा में शामिल होने पहुंची। इस मौके पर पत्रलेखा ने कैमरों के लिए पोज़ भी दिया। वहीं वो रानी मुखर्जी और तनूजा के साथ तस्वीरें खिंचवाती भी नज़र आईं। पत्रलेखा, काफी मुश्किल से ही कैमरों में कैद होती हैं। या तो वो अपने किसी प्रोजेक्ट में व्यस्त होती हैं। पत्रलेखा, दुर्गा पूजा के मौके पर हरे रंग की प्यारी सी साड़ी में नज़र आईं। शादी के बाद वो अपनी तस्वीरों और वीडियो के लिए काफी वायरल हुई थीं। वहीं शादी के बाद, पत्रलेखा की एक तस्वीर शेयर करने के लिए राजकुमार राव को काफी ज़्यादा ट्रोल किया गया था। इस ट्रोल के बाद राजकुमार राव ने पत्रलेखा की तस्वीर भी डिलीट कर दी थी। बात करें दुर्गा पूजा की तो बॉलीवुड इस समय ज़ोर शोर से नवरात्रि और दुर्गा पूजा का त्योहार मना रहे हैं। जहां स्टार्स लगातार, पंडाल के दर्शन करते दिखाई दे जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ, उन्हें डांडिया खेलते भी देखा जा सकता है। कल, ज़्यादातर स्टार्स सिंदूर खेला का उत्सव खेलते दिख जाएंगे। Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
पणजी, 15 जनवरी जनता के दबाव के सामने झुकते हुए गोवा की सरकार ने शुक्रवार को कहा कि सत्तारी तालुका के शेल मेलौलिम गांव में प्रस्तावित आईआईटी परिसर का निर्माण अब दूसरी जगह कराया जाएगा। परिसर निर्माण के प्रस्ताव का स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया और आईआईटी के लिए अपनी जमीन देने से साफ इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बृहस्पतिवार की शाम को अपने सरकारी आवास पर सत्तारी तालुका के जिला पंचायत सदस्यों और सरपंचों के साथ बैठक की। इस दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और वलपोई से विधायक विश्वजीत राणे भी उपस्थित थे। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा लगातार विरोध किए जाने के बाद सरकार ने परिसर को सत्तारी से हटाकर दूसरी जगह ले जाने का फैसला किया है। सरकार ने हालांकि अभी तक यह तय नहीं किया है कि आईआईटी परिसर अब कहां बनेगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
पणजी, पंद्रह जनवरी जनता के दबाव के सामने झुकते हुए गोवा की सरकार ने शुक्रवार को कहा कि सत्तारी तालुका के शेल मेलौलिम गांव में प्रस्तावित आईआईटी परिसर का निर्माण अब दूसरी जगह कराया जाएगा। परिसर निर्माण के प्रस्ताव का स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया और आईआईटी के लिए अपनी जमीन देने से साफ इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बृहस्पतिवार की शाम को अपने सरकारी आवास पर सत्तारी तालुका के जिला पंचायत सदस्यों और सरपंचों के साथ बैठक की। इस दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और वलपोई से विधायक विश्वजीत राणे भी उपस्थित थे। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा लगातार विरोध किए जाने के बाद सरकार ने परिसर को सत्तारी से हटाकर दूसरी जगह ले जाने का फैसला किया है। सरकार ने हालांकि अभी तक यह तय नहीं किया है कि आईआईटी परिसर अब कहां बनेगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
इस बार देश-दुनिया के पर्यटकों को रोहतांग दर्रे का दीदार एक-डेढ़ महीने देरी से होंगे। बीआरओ के पास लाहुल की तरफ से बर्फ हटाने का कार्य शेष बचा है। वहीं, जैसे दोनों छोर जुड़ेंगे। इसके बाद मार्ग को खुला करने का कार्य शुरू होगा। जब पर्यटकों के लिए हर सुविधा का प्रावधान होगा। इसके बाद पर्यटकों को रोहतांग जाने की अनुमति होगी। हालांकि मनाली की तरफ से बीआरओ की 70 आरसीसी की टीम मार्ग बहाल करते हुए रोहतांग पहुंच गई है, जबकि लाहुल की तरफ से बीआरओ की 94 आरसीसी की टीम के पास मार्ग से बर्फ हटानी रह गई है। हालांकि बीते शनिवार को सीमा सडक़ संगठन 94 की टीम रोहतांग दर्रा से 21 मीटर पीछे थी, जबकि रविवार को भी टीम का बर्फ हटाने का मिशन जारी रहा। मौसम की अनुकूल परिस्थितियां ठीक रही तो बीआरओ ने पांच जून तक लाहुल की तरफ से भी मार्ग को बहाल करने की उम्मीद रखी है, लेकिन पर्यटकों को रोहतांग आने की अनुमति नहीं है। पर्यटकों को रोहतांग आने के लिए इंतजार करना होगा। एसडीएम मनाली और बीआरओ के अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण भी किया है। बीआरओ 94 आरसीसी के सहायक अभियंता (सिविल) बीडी धीमान ने बताया कि मौसम अनुकूल रहा तो पांच जून शाम तक लाहुल की तरफ से भी बीरआरओ की टीम बहाल मार्ग करते हुए रोहतांग टॉप पहुंच सकती है।
इस बार देश-दुनिया के पर्यटकों को रोहतांग दर्रे का दीदार एक-डेढ़ महीने देरी से होंगे। बीआरओ के पास लाहुल की तरफ से बर्फ हटाने का कार्य शेष बचा है। वहीं, जैसे दोनों छोर जुड़ेंगे। इसके बाद मार्ग को खुला करने का कार्य शुरू होगा। जब पर्यटकों के लिए हर सुविधा का प्रावधान होगा। इसके बाद पर्यटकों को रोहतांग जाने की अनुमति होगी। हालांकि मनाली की तरफ से बीआरओ की सत्तर आरसीसी की टीम मार्ग बहाल करते हुए रोहतांग पहुंच गई है, जबकि लाहुल की तरफ से बीआरओ की चौरानवे आरसीसी की टीम के पास मार्ग से बर्फ हटानी रह गई है। हालांकि बीते शनिवार को सीमा सडक़ संगठन चौरानवे की टीम रोहतांग दर्रा से इक्कीस मीटर पीछे थी, जबकि रविवार को भी टीम का बर्फ हटाने का मिशन जारी रहा। मौसम की अनुकूल परिस्थितियां ठीक रही तो बीआरओ ने पांच जून तक लाहुल की तरफ से भी मार्ग को बहाल करने की उम्मीद रखी है, लेकिन पर्यटकों को रोहतांग आने की अनुमति नहीं है। पर्यटकों को रोहतांग आने के लिए इंतजार करना होगा। एसडीएम मनाली और बीआरओ के अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण भी किया है। बीआरओ चौरानवे आरसीसी के सहायक अभियंता बीडी धीमान ने बताया कि मौसम अनुकूल रहा तो पांच जून शाम तक लाहुल की तरफ से भी बीरआरओ की टीम बहाल मार्ग करते हुए रोहतांग टॉप पहुंच सकती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में सुशासन और अनुशासन को स्थापित करने के लिए कड़े फैसले लेते दिख रहे हैं। योगी सरकार 2.0 के कई फैसले चर्चा में हैं। इसमें से बुलडोजर सबसे ज्यादा चर्चा में चल रहा है। इसे लेकर योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी गरीब की झोपड़ी पर बुलडोजर नहीं चलेगा। वहीं, इससे पहले सीएम योगी के निर्देश के बाद प्रतापगढ़ के डिप्टी एसपी रहे नवनीत नायक को शासन ने पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। और अब सीएम योगी ने एक ऐसा निर्देश दे दिया है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। सीएम योगी ने सरकारी कर्मचारियों के लंच ब्रेक का समय 30 मिनट कर दिया है। दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने आवास पर टीम-9 की बैठक की। बैठक में सीएम योगी ने कहा कि हमें अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लंबे लंच ब्रेक लेने की शिकायतें मिली हैं। जिससे कार्यालयों में काम प्रभावित हो रहा है। इसलिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के लंच ब्रेक को घटाकर आधे घंटे कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि लंच ब्रेक 30 मिनट से अधिक न हो। सरकारी कर्मचारियों के लिए दोपहर 1.30 बजे लंच ब्रेक लेना एक सामान्य प्रथा रही है और फिर वे दोपहर 3.30 बजे या शाम 4 बजे के आसपास काम पर लौटते हैं। यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारी जो दोपहर के भोजन के लिए घर जाते हैं, तीन घंटे तक का ब्रेक लेते हैं। मगर सीएम ने अब सख्त निर्देश दे दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में सुशासन और अनुशासन को स्थापित करने के लिए कड़े फैसले लेते दिख रहे हैं। योगी सरकार दो.शून्य के कई फैसले चर्चा में हैं। इसमें से बुलडोजर सबसे ज्यादा चर्चा में चल रहा है। इसे लेकर योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी गरीब की झोपड़ी पर बुलडोजर नहीं चलेगा। वहीं, इससे पहले सीएम योगी के निर्देश के बाद प्रतापगढ़ के डिप्टी एसपी रहे नवनीत नायक को शासन ने पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। और अब सीएम योगी ने एक ऐसा निर्देश दे दिया है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। सीएम योगी ने सरकारी कर्मचारियों के लंच ब्रेक का समय तीस मिनट कर दिया है। दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने आवास पर टीम-नौ की बैठक की। बैठक में सीएम योगी ने कहा कि हमें अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लंबे लंच ब्रेक लेने की शिकायतें मिली हैं। जिससे कार्यालयों में काम प्रभावित हो रहा है। इसलिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के लंच ब्रेक को घटाकर आधे घंटे कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि लंच ब्रेक तीस मिनट से अधिक न हो। सरकारी कर्मचारियों के लिए दोपहर एक.तीस बजे लंच ब्रेक लेना एक सामान्य प्रथा रही है और फिर वे दोपहर तीन.तीस बजे या शाम चार बजे के आसपास काम पर लौटते हैं। यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारी जो दोपहर के भोजन के लिए घर जाते हैं, तीन घंटे तक का ब्रेक लेते हैं। मगर सीएम ने अब सख्त निर्देश दे दिए हैं।
चाय (tea) सभी की लाइफ में अहम होती है. इसके बिना रहने की लोग सोच भी नहीं सकते. चाहे कुछ न हो लेकिन सभी चाय तो चाहिए ही होती है. कुछ लोगों को चाय (tea) की इतनी अधिक लत होती है वो दिन भर में न जाने कितने कप चाय पी जाते हैं. जहाँ कुछ लोगों का मानना है कि चाय (tea) पीना स्वास्थ्य के लिये सही होता हैं वहीँ कुछ लोग मानते हैं कि अधिक चाय की लत हमें कई तरह से नुकसान पहुंचाती है. तो आपको ये जान लेना चाहिए कि एक दिन में कितने कप चाय पीना चाहिए. एक न्यूट्रीशनिस्ट के अनुसार, अगर आप एक दिन में सिर्फ 3-4 कप चाय पीते हैं तो यह आपके स्वास्थ्य के लिये बिलकुल सही है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेरीलैंड मेडिकल सेंटर द्वारा प्रकाशित एक जर्नल के अनुसार, एक दिन में 4 कप चाय पीने से आपके शरीर को स्वस्थ रखने वाले कई यौगिकों की उचित मात्रा आपको मिल जाती है. लेकिन एक दिन में 4 कप से ज्यादा चाय पीना आपके शरीर को प्रभावित कर सकता है. अगर आपको कैफीन से एलर्जी है तो ज्यादा चाय पीने से आपको अनिद्रा, दिल में जलन, नर्वसनेस और चक्कर आने जैसे समस्याएं हो सकती हैं. अधिक चाय का सेवन आपके शरीर को डिहाइड्रेट भी कर सकती है. लम्बे समय तक बहुत अधिक चाय के सेवन से आपकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं. चाय में पाये जाने वाला यौगिक टैनिन, फोलिक एसिड के अवशोषण में कमी लाता है, जो जन्म दोष में कमी लाने वाला विटामिन है. इसलिये अगर आप गर्भवती हैं तो चाय की कम से कम मात्रा लें. चाय, शरीर में आयरन के अवशोषण को भी प्रभावित करती है. इसलिये कोशिश करें कि भोजन के साथ चाय का सेवन न करें.
चाय सभी की लाइफ में अहम होती है. इसके बिना रहने की लोग सोच भी नहीं सकते. चाहे कुछ न हो लेकिन सभी चाय तो चाहिए ही होती है. कुछ लोगों को चाय की इतनी अधिक लत होती है वो दिन भर में न जाने कितने कप चाय पी जाते हैं. जहाँ कुछ लोगों का मानना है कि चाय पीना स्वास्थ्य के लिये सही होता हैं वहीँ कुछ लोग मानते हैं कि अधिक चाय की लत हमें कई तरह से नुकसान पहुंचाती है. तो आपको ये जान लेना चाहिए कि एक दिन में कितने कप चाय पीना चाहिए. एक न्यूट्रीशनिस्ट के अनुसार, अगर आप एक दिन में सिर्फ तीन-चार कप चाय पीते हैं तो यह आपके स्वास्थ्य के लिये बिलकुल सही है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेरीलैंड मेडिकल सेंटर द्वारा प्रकाशित एक जर्नल के अनुसार, एक दिन में चार कप चाय पीने से आपके शरीर को स्वस्थ रखने वाले कई यौगिकों की उचित मात्रा आपको मिल जाती है. लेकिन एक दिन में चार कप से ज्यादा चाय पीना आपके शरीर को प्रभावित कर सकता है. अगर आपको कैफीन से एलर्जी है तो ज्यादा चाय पीने से आपको अनिद्रा, दिल में जलन, नर्वसनेस और चक्कर आने जैसे समस्याएं हो सकती हैं. अधिक चाय का सेवन आपके शरीर को डिहाइड्रेट भी कर सकती है. लम्बे समय तक बहुत अधिक चाय के सेवन से आपकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं. चाय में पाये जाने वाला यौगिक टैनिन, फोलिक एसिड के अवशोषण में कमी लाता है, जो जन्म दोष में कमी लाने वाला विटामिन है. इसलिये अगर आप गर्भवती हैं तो चाय की कम से कम मात्रा लें. चाय, शरीर में आयरन के अवशोषण को भी प्रभावित करती है. इसलिये कोशिश करें कि भोजन के साथ चाय का सेवन न करें.