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जो चीज़ इंसान के पास न हो, उसका फ़रोख़्त करना ( 3504) हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (बिन अलआस) (*) से से रिवायत है, रसूलुल्लाह () ने फ़रमायाः 'उधार और बैअ और एक बैअ में दो शर्तें हलाल नहीं हैं, और باب في الرجل يبيع ماليس ( 3503) हज़रत हकीम बिन हिज़ाम ($) से रिवायत है, वह कहते हैं, मैंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल! (5) एक आदमी मेरे पास आता है और मुझसे ऐसी चीज़ ख़रीदना चाहता है जो मेरे पास नहीं होती, तो क्या मैं उसके लिये बाज़ार से ख़रीद लूं? आपने फ़रमायाः 'जो तेरे पास नहीं है वह मत बेच।' (3503) तख़रीज : (सनद हसन) तिर्मिज़ी, हदीस़ः 1232, इब्ने माजा, हदीस़ः 2187, नसाई, हदीसः 4617, इब्ने जारूद, हदीस़ः 602. तौज़ीह : (1) दुकानदार बाज़ औक़ात अपने ग्राहकों की कई मतलूबा चीजें जो उनके पास नहीं होतीं उसी वक़्त बाज़ार से मंगवा कर देते हैं और मक़सद ये होता है कि ये ग्राहक बस उन्हीं से मुताल्लिक़ रहे, ये सूरत जायज़ नहीं । वही सौदा बेचना चाहिए जो मौजूद हो। मगर ये कि ग्राहक ख़ूद से दुकानदार से चीज़ मंगवाकर देने का मुतालबा करे। (2) कोई जानवर जो भाग गया हो उसे फ़रोख़्त कर देना, या कोई माल फ़रीक़ैन में मुतनाज़ा हो, तो फ़ैसला और क़ब्ज़ा होने से पहले ही फरोख्त कर देना जायज़ नहीं। (3) कोई चीज़ ख़रीद रखी हो मगर वसूल न की हो और क़ब्ज़े में न आयी हो, तो उसको बेचना नाजायज़ है। ख़्याल रहे कि मारूफ़ तिजारती तरीक़ पर बैसे सलफ़ (सलम) का मामला जायज़ है जिसकी तफ़्स़ील पहले गुज़र चुकी है । حدثنا مسدد، حدثنا أبو عوانة، عن بشر، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن قال يا رسول الله يأتيني الرجل فيريد مني البيع ليس عندي أفأبتاعه له من الشوق فقال " لا تبع ما ليس عندك" حدثنا زهير بن حرب، حدثنا إسماعيل، عن أيوب، حدثني عمرو بن شعيب، حدثني أبي، عن أبيه، عن أبيه، حتى ذكر عبد
जो चीज़ इंसान के पास न हो, उसका फ़रोख़्त करना हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र से से रिवायत है, रसूलुल्लाह ने फ़रमायाः 'उधार और बैअ और एक बैअ में दो शर्तें हलाल नहीं हैं, और باب في الرجل يبيع ماليس हज़रत हकीम बिन हिज़ाम से रिवायत है, वह कहते हैं, मैंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल! एक आदमी मेरे पास आता है और मुझसे ऐसी चीज़ ख़रीदना चाहता है जो मेरे पास नहीं होती, तो क्या मैं उसके लिये बाज़ार से ख़रीद लूं? आपने फ़रमायाः 'जो तेरे पास नहीं है वह मत बेच।' तख़रीज : तिर्मिज़ी, हदीस़ः एक हज़ार दो सौ बत्तीस, इब्ने माजा, हदीस़ः दो हज़ार एक सौ सत्तासी, नसाई, हदीसः चार हज़ार छः सौ सत्रह, इब्ने जारूद, हदीस़ः छः सौ दो. तौज़ीह : दुकानदार बाज़ औक़ात अपने ग्राहकों की कई मतलूबा चीजें जो उनके पास नहीं होतीं उसी वक़्त बाज़ार से मंगवा कर देते हैं और मक़सद ये होता है कि ये ग्राहक बस उन्हीं से मुताल्लिक़ रहे, ये सूरत जायज़ नहीं । वही सौदा बेचना चाहिए जो मौजूद हो। मगर ये कि ग्राहक ख़ूद से दुकानदार से चीज़ मंगवाकर देने का मुतालबा करे। कोई जानवर जो भाग गया हो उसे फ़रोख़्त कर देना, या कोई माल फ़रीक़ैन में मुतनाज़ा हो, तो फ़ैसला और क़ब्ज़ा होने से पहले ही फरोख्त कर देना जायज़ नहीं। कोई चीज़ ख़रीद रखी हो मगर वसूल न की हो और क़ब्ज़े में न आयी हो, तो उसको बेचना नाजायज़ है। ख़्याल रहे कि मारूफ़ तिजारती तरीक़ पर बैसे सलफ़ का मामला जायज़ है जिसकी तफ़्स़ील पहले गुज़र चुकी है । حدثنا مسدد، حدثنا أبو عوانة، عن بشر، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن قال يا رسول الله يأتيني الرجل فيريد مني البيع ليس عندي أفأبتاعه له من الشوق فقال " لا تبع ما ليس عندك" حدثنا زهير بن حرب، حدثنا إسماعيل، عن أيوب، حدثني عمرو بن شعيب، حدثني أبي، عن أبيه، عن أبيه، حتى ذكر عبد
सुधारने के लिये एक ऐसे पूछमराड़ सतो की टोली की आवश्यकता दर्शाते रहे हैं जो प्रत्येक समाज मे जाकर समाज के हेशानुसार व्यवस्था ठाक करे । वहा पर डेरे तब तक जमाय रहे जब तक कि जनता को यह न ज्ञात हो जावे कि आर्य समाज उस चारद वारी अथवा स्कूल, कालेज सस्था, पाठशाला अथवा व्यक्ति का नाम नहीं है कि जिसको हर सूरत शकल म वे आर्यसमाज के नाम से पुकारते रद्द हैं। आर्यसमाज इनसे भी ऊ ची कोई चाज्र है। हप है कि वीतराग श्री स्वामी सर्वदानन्द जी महाराज न भा अपना आशा की पुकार में निराशा के इकरार वाल लख में एक ऐसी ही टोली की सुधार के लिये आवश्यकता दशाई है । फर्क इतना ही है कि पूज्य स्वामीजी महाराज पैन्शनयापता लोगों को इस काम के लिये निकालन चाहते है और हम श्री स्वामीजा जैसे सव मान्य नताओ की टाली का दयानन्द की खेती की निराई के लिये निकल पडना उचित समझत हैं । हमारे अनाथालय प० भद्रसेनजी प्राचार्य ' विरजानन्द वद विद्यालय अजमेर 'हमारे अनाथालय' शार्षक म लिखने हुए इस उद्देश्य को मामन रखकर कि आर्यसमाज का अनाथा लयो से अधिकाधिक सख्या म सुयग्य कार्यकर्त्ता और प्रचारक इ यादि प्राप्त हा, नानलया मे निम्न परिवर्तन सुझाते है । ( १ ) सच बालको तथा वालिकाओं को अर्यभाषा, धर्मशिक्ष तथा शिल्पविद्या अनिवार्य रूप स पढाई तथा सिखाई जाय । ( २ ) उनमे जो अधिक होनहार, बुद्धिम न् तथा सुशील हो, उनको ऋषि दयानन्द की शिक्षा प्रणाला के अनुसार पूर्ण शिक्षा दी जाय । साथ - सत्र धर्मो का तुलनात्मक अध्ययन भी कराया जाय । विद्यर्थियो की साप्तहिक सभ एँ कराकर उन्हे व्याख्यान देन तथा शास्त्रार्थ करान का भी अभ्यास कराया जाय उपयुक्त शिक्षा के साथ • यदि थोड़ा इंगलिश पढ़ाने का भी प्रबन्ध हो ता बहुत उत्तम है । जिसस कि कुछ युवक विदेशो मे भी जाकर प्रचार कर सकें। इस महत्व पूर्ण कार्य सम्पादन के लिये एक सुयोग्य, सदाचारी वैदिक धर्म प्रचारम पूरी लगन रखन वाला विद्वान् रखा जाय । तथा उपयुक्त गुणों से युक्त ही एक इग्लश का अध्यापक भी रखा जाय । यदि आचाय ही स्वय इग्लिश पढ़ा सके तो बहुत ही उत्तम है। ( ३ अनथालय के सच बालो का रहनसहन तथा खान-रान ब्रह्मचर्याश्रम के समान हा । इसके लिए एक सुयाग्य, सदाचारा तथा सुनबन्धक अधिष्ठता रखा जाय, जो कि विद्यार्थियों के स्वानपान तथा रहन सहन का सुप्रबन्ध ब्रह्मचर्याश्रम क अनुसर भली प्रकार कर सके । विद्य थियो को पिता के समान अपन कण्ट्रोल में रखकर ब्रह्मवर्गाश्रम के सब नियम पालन करा सके यदि किसी अनाथालय में बालको की सरया कम हा तो वहा पाचाय ही अधिष्ठता का भी काम करे । उपयुक्त व्यवस्था करने स मुझे पूर्ण भाशा है कि हमारे अनाथालय अन उद्देश्य मे अवश्य सफल होगे और आर्यसमाज को इस संस्था से थोड़े हा खर्च तथा परिश्रम से वे अमूल्य रत्न मिलेगे कि जिनका लाखो रूपय खर्च कर क भी समाज दूसरा सस्थाओ से प्राप्त नहीं कर सका। आशा है कि प्रायजनता, विशेषकर अनाथालयोके सचालक महोदय मेरे इस निवेदनपर अवश्य ध्यान देंगे तथा मेरे इन विचारो को क्रियात्मक रुप देकर यश के भागी बनेगे ।
सुधारने के लिये एक ऐसे पूछमराड़ सतो की टोली की आवश्यकता दर्शाते रहे हैं जो प्रत्येक समाज मे जाकर समाज के हेशानुसार व्यवस्था ठाक करे । वहा पर डेरे तब तक जमाय रहे जब तक कि जनता को यह न ज्ञात हो जावे कि आर्य समाज उस चारद वारी अथवा स्कूल, कालेज सस्था, पाठशाला अथवा व्यक्ति का नाम नहीं है कि जिसको हर सूरत शकल म वे आर्यसमाज के नाम से पुकारते रद्द हैं। आर्यसमाज इनसे भी ऊ ची कोई चाज्र है। हप है कि वीतराग श्री स्वामी सर्वदानन्द जी महाराज न भा अपना आशा की पुकार में निराशा के इकरार वाल लख में एक ऐसी ही टोली की सुधार के लिये आवश्यकता दशाई है । फर्क इतना ही है कि पूज्य स्वामीजी महाराज पैन्शनयापता लोगों को इस काम के लिये निकालन चाहते है और हम श्री स्वामीजा जैसे सव मान्य नताओ की टाली का दयानन्द की खेती की निराई के लिये निकल पडना उचित समझत हैं । हमारे अनाथालय पशून्य भद्रसेनजी प्राचार्य ' विरजानन्द वद विद्यालय अजमेर 'हमारे अनाथालय' शार्षक म लिखने हुए इस उद्देश्य को मामन रखकर कि आर्यसमाज का अनाथा लयो से अधिकाधिक सख्या म सुयग्य कार्यकर्त्ता और प्रचारक इ यादि प्राप्त हा, नानलया मे निम्न परिवर्तन सुझाते है । सच बालको तथा वालिकाओं को अर्यभाषा, धर्मशिक्ष तथा शिल्पविद्या अनिवार्य रूप स पढाई तथा सिखाई जाय । उनमे जो अधिक होनहार, बुद्धिम न् तथा सुशील हो, उनको ऋषि दयानन्द की शिक्षा प्रणाला के अनुसार पूर्ण शिक्षा दी जाय । साथ - सत्र धर्मो का तुलनात्मक अध्ययन भी कराया जाय । विद्यर्थियो की साप्तहिक सभ एँ कराकर उन्हे व्याख्यान देन तथा शास्त्रार्थ करान का भी अभ्यास कराया जाय उपयुक्त शिक्षा के साथ • यदि थोड़ा इंगलिश पढ़ाने का भी प्रबन्ध हो ता बहुत उत्तम है । जिसस कि कुछ युवक विदेशो मे भी जाकर प्रचार कर सकें। इस महत्व पूर्ण कार्य सम्पादन के लिये एक सुयोग्य, सदाचारी वैदिक धर्म प्रचारम पूरी लगन रखन वाला विद्वान् रखा जाय । तथा उपयुक्त गुणों से युक्त ही एक इग्लश का अध्यापक भी रखा जाय । यदि आचाय ही स्वय इग्लिश पढ़ा सके तो बहुत ही उत्तम है। ( तीन अनथालय के सच बालो का रहनसहन तथा खान-रान ब्रह्मचर्याश्रम के समान हा । इसके लिए एक सुयाग्य, सदाचारा तथा सुनबन्धक अधिष्ठता रखा जाय, जो कि विद्यार्थियों के स्वानपान तथा रहन सहन का सुप्रबन्ध ब्रह्मचर्याश्रम क अनुसर भली प्रकार कर सके । विद्य थियो को पिता के समान अपन कण्ट्रोल में रखकर ब्रह्मवर्गाश्रम के सब नियम पालन करा सके यदि किसी अनाथालय में बालको की सरया कम हा तो वहा पाचाय ही अधिष्ठता का भी काम करे । उपयुक्त व्यवस्था करने स मुझे पूर्ण भाशा है कि हमारे अनाथालय अन उद्देश्य मे अवश्य सफल होगे और आर्यसमाज को इस संस्था से थोड़े हा खर्च तथा परिश्रम से वे अमूल्य रत्न मिलेगे कि जिनका लाखो रूपय खर्च कर क भी समाज दूसरा सस्थाओ से प्राप्त नहीं कर सका। आशा है कि प्रायजनता, विशेषकर अनाथालयोके सचालक महोदय मेरे इस निवेदनपर अवश्य ध्यान देंगे तथा मेरे इन विचारो को क्रियात्मक रुप देकर यश के भागी बनेगे ।
शिवपुरी। ठाकुर बाबा मित्र मंडल का संभाग स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट के तीसरे दिन स्थानीय प्लेग्राउण्ड में तीन मैच खेले गए पहले मैच में नरवर एवं डबरा के बीच खेला गया। जिसमें नरवर ने पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और 207 रन बनाए गए वहीं डबरा ने 130 रनों पर ऑल आउट हो गई। जिसमें नरवर ने 77 रनों से जीत दर्ज कराई। वहीं दूसरे मैच ईसागढ़ एवं चामुण्डा क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। जिसमें पहले ईसागढ़ ने बल्लेबाजी कर 138 रन का स्कॉर खड़ा किया वहीं चामुण्डा क्रिकेट क्लब ने 44 रन बनाए। जिसमें ईसागढ़ ने 93 रन से शानदार जीत हांसिल की। तीसरे मैच में नरवर और ईसागढ़ के बीच मुकाबला हुआ जिसमें पहले नरवर ने बल्लेबाजी की और 165 रनों का स्कॉर खड़ा किया। जिसके बाद ईसागढ़ ने बल्लेबाजी करते हुए 155 रन बनाए। जिसमें 9 रन से नरवर ने जीत दर्ज कराकर सेमी फाईनल में जगह बनाई। इस मैच का मैन ऑफ द मैच मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विजय चौकसे एवं विजय बिंदास के द्वारा दानिश खांन नरवर को दिया प्रदान किया गया। मैच की एम्पाईरिंग सुजीत करौसिया एवं साहिर खांन द्वारा की गई। कॉमेन्ट्री गिरीश मिश्रा मामा एवं कमल सिंह बाथम शेरा द्वारा की गई। मैच में नरवर मंगल सिंह खिलाड़ी को तीन छक्के लगाने पर सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एशोसियेशन के द्वारा 500 रूपए का नगद पुरूस्कार दिया गया। वहीं तीन चौके लगाने पर विजय बिंदास की ओर से 101 नगद पुरूस्कार दिया गया। ठाकुर बाबा मित्र मंडल क्रिकेट टूर्नामेंट कमेटी में जगमोहन सिंह सेंगर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, वासिद अली, जीतू ठाकुर, वीरेन्द्र शर्मा, पत्रकार प्रदीप सिंह तोमर मोन्टू, मीडिया प्रभारी लालू शर्मा, मंगल सिंह, शिवा धाकड़, संदीप सिंह तोमर, शरीफ राईन, साबिर बाबूजी, दीपक शर्मा, नीरज शर्मा सूबेदार, वासूदेव राठौर, वासूदेव पाठक सहित अनेक लोग शामिल हैं।
शिवपुरी। ठाकुर बाबा मित्र मंडल का संभाग स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट के तीसरे दिन स्थानीय प्लेग्राउण्ड में तीन मैच खेले गए पहले मैच में नरवर एवं डबरा के बीच खेला गया। जिसमें नरवर ने पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और दो सौ सात रन बनाए गए वहीं डबरा ने एक सौ तीस रनों पर ऑल आउट हो गई। जिसमें नरवर ने सतहत्तर रनों से जीत दर्ज कराई। वहीं दूसरे मैच ईसागढ़ एवं चामुण्डा क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। जिसमें पहले ईसागढ़ ने बल्लेबाजी कर एक सौ अड़तीस रन का स्कॉर खड़ा किया वहीं चामुण्डा क्रिकेट क्लब ने चौंतालीस रन बनाए। जिसमें ईसागढ़ ने तिरानवे रन से शानदार जीत हांसिल की। तीसरे मैच में नरवर और ईसागढ़ के बीच मुकाबला हुआ जिसमें पहले नरवर ने बल्लेबाजी की और एक सौ पैंसठ रनों का स्कॉर खड़ा किया। जिसके बाद ईसागढ़ ने बल्लेबाजी करते हुए एक सौ पचपन रन बनाए। जिसमें नौ रन से नरवर ने जीत दर्ज कराकर सेमी फाईनल में जगह बनाई। इस मैच का मैन ऑफ द मैच मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विजय चौकसे एवं विजय बिंदास के द्वारा दानिश खांन नरवर को दिया प्रदान किया गया। मैच की एम्पाईरिंग सुजीत करौसिया एवं साहिर खांन द्वारा की गई। कॉमेन्ट्री गिरीश मिश्रा मामा एवं कमल सिंह बाथम शेरा द्वारा की गई। मैच में नरवर मंगल सिंह खिलाड़ी को तीन छक्के लगाने पर सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एशोसियेशन के द्वारा पाँच सौ रूपए का नगद पुरूस्कार दिया गया। वहीं तीन चौके लगाने पर विजय बिंदास की ओर से एक सौ एक नगद पुरूस्कार दिया गया। ठाकुर बाबा मित्र मंडल क्रिकेट टूर्नामेंट कमेटी में जगमोहन सिंह सेंगर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, वासिद अली, जीतू ठाकुर, वीरेन्द्र शर्मा, पत्रकार प्रदीप सिंह तोमर मोन्टू, मीडिया प्रभारी लालू शर्मा, मंगल सिंह, शिवा धाकड़, संदीप सिंह तोमर, शरीफ राईन, साबिर बाबूजी, दीपक शर्मा, नीरज शर्मा सूबेदार, वासूदेव राठौर, वासूदेव पाठक सहित अनेक लोग शामिल हैं।
एंड टीवी के फेमस शो 'भाबीजी घर पर हैं! ' ने लोगों की बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। शो का हर किरदार चाहे वह अंगूरी भाबी हो या फिर मनमोहन तिवारी, गोरी मेम हो या फिर अम्माजी, सभी की कॉमिक टाइमिंग और अंदाज फैन्स को काफी पसंद आ रहा है। हाल ही में 'भाबीजी घर पर हैं! ' शो में 'मनमोहन तिवारी' का किरदार निभाने वाले एक्टर रोहिताश गौड़ ने अपने इंस्टाग्राम से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक्टर 'मनमोहन तिवारी' के गेटअप में 'अम्माजी' यानी सोमा राठौड़ से पूछते नजर आ रहे हैं कि हमारे पिताजी का क्या नाम है। अम्माजी की बात सुनकर मनमोहन तिवारी हैरान रह जाते हैं और वह रोते हुए कहते हैं, "अब ये परम आनंद कौन है यार? " इस फनी वीडियो को शेयर करते हुए रोहिताश गौड़ ने लिखा, "असली पिताजी का मसला बड़ा पैचिदा है, का करें भैया? आपके पास कुछ उपाय है का? " तिवारी जी और अम्माजी के इस वीडियो पर लोग खूब मजेदार कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। असल जिंदगी में तिवारी से छोटी हैं अम्माजीः 'अम्माजी' का किरदार निभाने वाली सोमा राठौड़, शो में भले ही मनमोहन तिवारी यानी रोहिताश गौड़ की मां बनी हैं। लेकिन असल जिंदगी में सोमा रोहिताश से 9 साल छोटी हैं। दरअसल, सोमा का जन्म 1980 में हुआ था, तो वहीं रोहिताश गौड़ का जन्म 1971 में हुआ था। बता दें कि अपनी बहू 'अंगूरी' से भी रियल लाइफ में सोमा छोटी हैं।
एंड टीवी के फेमस शो 'भाबीजी घर पर हैं! ' ने लोगों की बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। शो का हर किरदार चाहे वह अंगूरी भाबी हो या फिर मनमोहन तिवारी, गोरी मेम हो या फिर अम्माजी, सभी की कॉमिक टाइमिंग और अंदाज फैन्स को काफी पसंद आ रहा है। हाल ही में 'भाबीजी घर पर हैं! ' शो में 'मनमोहन तिवारी' का किरदार निभाने वाले एक्टर रोहिताश गौड़ ने अपने इंस्टाग्राम से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक्टर 'मनमोहन तिवारी' के गेटअप में 'अम्माजी' यानी सोमा राठौड़ से पूछते नजर आ रहे हैं कि हमारे पिताजी का क्या नाम है। अम्माजी की बात सुनकर मनमोहन तिवारी हैरान रह जाते हैं और वह रोते हुए कहते हैं, "अब ये परम आनंद कौन है यार? " इस फनी वीडियो को शेयर करते हुए रोहिताश गौड़ ने लिखा, "असली पिताजी का मसला बड़ा पैचिदा है, का करें भैया? आपके पास कुछ उपाय है का? " तिवारी जी और अम्माजी के इस वीडियो पर लोग खूब मजेदार कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। असल जिंदगी में तिवारी से छोटी हैं अम्माजीः 'अम्माजी' का किरदार निभाने वाली सोमा राठौड़, शो में भले ही मनमोहन तिवारी यानी रोहिताश गौड़ की मां बनी हैं। लेकिन असल जिंदगी में सोमा रोहिताश से नौ साल छोटी हैं। दरअसल, सोमा का जन्म एक हज़ार नौ सौ अस्सी में हुआ था, तो वहीं रोहिताश गौड़ का जन्म एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में हुआ था। बता दें कि अपनी बहू 'अंगूरी' से भी रियल लाइफ में सोमा छोटी हैं।
इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली : Instagram New Features 2021 : इंस्टाग्राम समय-समय पर अपने यूजर के लिए नए नए फीचर्स ले कर आता रहता है। कंपनी ने हाल हे में अपना नया फीचर Instagram Video जोड़ा था । जिसमे कंपनी ने यह दावा किया था कि इस फीचर की मदद से वीडियो देखने का मजा दोगुना हो जाएगा। इसके साथ ही Instagram ने IGTV और फीड वीडियो को बंद कर दिया है और इन दोनों फीचर को मर्ज करके एक नया Instagram Video फीचर जोड़ा था। वहीं अब ऐसी खबरे सामने आ रही है की इंस्टाग्राम अपने नए फीचर के तौर पर प्रोफाइल एम्बेड फीचर को जल्द ही जोड़ सकता है। यूजर्स यहां अपने प्रोफाइल मिनिएचर वर्जन पा सकेंगे जिसे वे थर्ड पार्टी वेबसाइट में एम्बेड कर सकेंगे या दूसरे यूजर्स के प्रोफाइल पर लिंक कर सकेंगे। आइये जानते है इन फीचर्स के बारे में। (Instagram Features 2021) प्लेबैक मोड जल्द होगा शुरु (Instagram New Features 2021) नए साल की शुरुआत से पहले इंस्टाग्राम अपने स्टोरीज और रील्स विजुअल के रिप्लाई के लिए प्लेबैक मोड भी शुरू कर सकता है। इस प्लेबैक फीचर की मदद से यूजर अपने फॉलोअर्स से 10 स्टोरीज की कंप्लाइलेशन शेयर कर पाएंगे और साथ ही वे फ्लैशबैक का आनंद ले सकें। रील विजुअल रिप्लाई आपको 60 सेकेंड के रील वीडियो के साथ कमेंट करने की सुविधा देता है। (Instagram Features 2021) वहीं इंस्टाग्राम फ्रोफाइल एम्बेड का ऐलान शुक्रवार को एडम मोसेरी ने अपने ट्विटर पर किया था । ट्वीट में उन्होने कहा कि कंपनी इंस्टाग्रोम फोटो और वीडियो एम्बेड फीचर को जा;डी ही जारी कर सकती है। इसकी मदद से यूजर्स अब अपनी वेबसाइट पर प्रोफाइल का मिनिएचर वर्जन को ऐड कर सकेगा। थर्ड पार्टी वेबसाइट पर प्रोफाइल कर सकेंगे हाइलाइट (Instagram New Features 2021) इंस्टाग्राम के इस लेटेस्ट फीचर में किसी खास इंस्टाग्राम हैंडल की झलक ली जा सकेगी खास तोर पर थर्ड पार्टी हैंडल पर भी कर सकेंगे। यह फीचर फिलहाल अमेरिका के यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इस फीचर के जरिये क्रिएटर, ब्रांड, बिजनेस अकाउंट होल्डर थर्ड पार्टी वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल हाइलाइट कर सकेंगे। फ़िलहाल कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि नए फीचर कब शुरू होंगे।
इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली : Instagram New Features दो हज़ार इक्कीस : इंस्टाग्राम समय-समय पर अपने यूजर के लिए नए नए फीचर्स ले कर आता रहता है। कंपनी ने हाल हे में अपना नया फीचर Instagram Video जोड़ा था । जिसमे कंपनी ने यह दावा किया था कि इस फीचर की मदद से वीडियो देखने का मजा दोगुना हो जाएगा। इसके साथ ही Instagram ने IGTV और फीड वीडियो को बंद कर दिया है और इन दोनों फीचर को मर्ज करके एक नया Instagram Video फीचर जोड़ा था। वहीं अब ऐसी खबरे सामने आ रही है की इंस्टाग्राम अपने नए फीचर के तौर पर प्रोफाइल एम्बेड फीचर को जल्द ही जोड़ सकता है। यूजर्स यहां अपने प्रोफाइल मिनिएचर वर्जन पा सकेंगे जिसे वे थर्ड पार्टी वेबसाइट में एम्बेड कर सकेंगे या दूसरे यूजर्स के प्रोफाइल पर लिंक कर सकेंगे। आइये जानते है इन फीचर्स के बारे में। प्लेबैक मोड जल्द होगा शुरु नए साल की शुरुआत से पहले इंस्टाग्राम अपने स्टोरीज और रील्स विजुअल के रिप्लाई के लिए प्लेबैक मोड भी शुरू कर सकता है। इस प्लेबैक फीचर की मदद से यूजर अपने फॉलोअर्स से दस स्टोरीज की कंप्लाइलेशन शेयर कर पाएंगे और साथ ही वे फ्लैशबैक का आनंद ले सकें। रील विजुअल रिप्लाई आपको साठ सेकेंड के रील वीडियो के साथ कमेंट करने की सुविधा देता है। वहीं इंस्टाग्राम फ्रोफाइल एम्बेड का ऐलान शुक्रवार को एडम मोसेरी ने अपने ट्विटर पर किया था । ट्वीट में उन्होने कहा कि कंपनी इंस्टाग्रोम फोटो और वीडियो एम्बेड फीचर को जा;डी ही जारी कर सकती है। इसकी मदद से यूजर्स अब अपनी वेबसाइट पर प्रोफाइल का मिनिएचर वर्जन को ऐड कर सकेगा। थर्ड पार्टी वेबसाइट पर प्रोफाइल कर सकेंगे हाइलाइट इंस्टाग्राम के इस लेटेस्ट फीचर में किसी खास इंस्टाग्राम हैंडल की झलक ली जा सकेगी खास तोर पर थर्ड पार्टी हैंडल पर भी कर सकेंगे। यह फीचर फिलहाल अमेरिका के यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इस फीचर के जरिये क्रिएटर, ब्रांड, बिजनेस अकाउंट होल्डर थर्ड पार्टी वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल हाइलाइट कर सकेंगे। फ़िलहाल कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि नए फीचर कब शुरू होंगे।
जालौनः यूपी में तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए जालौन के उरई मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में साइबर क्राइम से संबंधित कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अपराध की रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई। जिसकी अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने की। देश में लगातार साइबर क्राइम बढ़ रहा है। ऐसे में वह लोग ठगी को ज्यादा शिकार हो रहे हैं। जिनकों इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रहती हैं। ऐसे लोगों को सक्रिय करने के लिए डीजीपी के निर्देश पर जालौन के उरई मेडिकल कालेज के ऑडिटोरियम में साइबर क्राइम कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें डॉ रक्षित टंडन द्वारा लोगों को साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में वर्चुअल तरीके से उत्तर प्रदेश के एडीजी लाइन आर्डर प्रशांत कुमार का साथ कानपुर धाम के एडीजी झांसी डीआईजी देख रहे थे। जिनकी मौजूदगी में ऑडिटोरियम में मौजूद स्कूली बच्चों के साथ पुलिस जवानों को साइबर क्राइम से जुड़े मामलों के बारे में जानकारी दी गई। कि किस तरीके से साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं और इसको किस तरीके से रोका जा सकता है। डॉक्टर रक्षित टंडन द्वारा इसकी विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला का आयोजन होने के बाद एसपी रवि कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराध को रोकने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हुए हैं, जिनको जानकारियां उपलब्ध कराई, क्योंकि स्कूली बच्चों के माध्यम से ही लोगों को जागरूक किया जा सकता है और साइबर अपराध से बचाया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस कार्यशाला तो डॉक्टर रक्षित टंडन द्वारा क्या हुआ था जिन्होंने सरवर अपराध पर गहन अध्ययन किया है और लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। जिसमें कानपुर जॉन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ-साथ यूपी के एडीजी लाइन आर्डर प्रशांत कुमार भी जुड़े हुए थे, जिन्होंने भी मार्गदर्शन किया।
जालौनः यूपी में तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए जालौन के उरई मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में साइबर क्राइम से संबंधित कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अपराध की रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई। जिसकी अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने की। देश में लगातार साइबर क्राइम बढ़ रहा है। ऐसे में वह लोग ठगी को ज्यादा शिकार हो रहे हैं। जिनकों इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रहती हैं। ऐसे लोगों को सक्रिय करने के लिए डीजीपी के निर्देश पर जालौन के उरई मेडिकल कालेज के ऑडिटोरियम में साइबर क्राइम कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें डॉ रक्षित टंडन द्वारा लोगों को साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में वर्चुअल तरीके से उत्तर प्रदेश के एडीजी लाइन आर्डर प्रशांत कुमार का साथ कानपुर धाम के एडीजी झांसी डीआईजी देख रहे थे। जिनकी मौजूदगी में ऑडिटोरियम में मौजूद स्कूली बच्चों के साथ पुलिस जवानों को साइबर क्राइम से जुड़े मामलों के बारे में जानकारी दी गई। कि किस तरीके से साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं और इसको किस तरीके से रोका जा सकता है। डॉक्टर रक्षित टंडन द्वारा इसकी विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला का आयोजन होने के बाद एसपी रवि कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराध को रोकने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हुए हैं, जिनको जानकारियां उपलब्ध कराई, क्योंकि स्कूली बच्चों के माध्यम से ही लोगों को जागरूक किया जा सकता है और साइबर अपराध से बचाया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस कार्यशाला तो डॉक्टर रक्षित टंडन द्वारा क्या हुआ था जिन्होंने सरवर अपराध पर गहन अध्ययन किया है और लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। जिसमें कानपुर जॉन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ-साथ यूपी के एडीजी लाइन आर्डर प्रशांत कुमार भी जुड़े हुए थे, जिन्होंने भी मार्गदर्शन किया।
मेलबर्न में खेले गए तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया पर जीत के बाद टीम इंडिया जोश में दिखाई दे रही है। वह सीरीज में 2-1 से आगे चल रही है। दूसरे और ऑस्ट्रेलियाई टीम हार के बाद बहुत निराश है। 3 जनवरी से सिडनी में होने वाले चौथे टेस्ट मैच के लिए ऑस्ट्रेलिया ने मार्नस लाबुसचग्ने को टीम में शामिल किया गया है। पर्थ में जीत के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टीम पेन ने शेष दोनों मैचों के लिए 13 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी थी। हालांकि मेलबोर्न में बल्लेबाजों के दोनों ही पारियों में विफल रहने के बाद लाबुसचग्ने के विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। एरोन फिंच और मिशेल मार्श के खराब प्रदर्शन को देखते हुए चौथे टेस्ट में उन्हें टीम में खेलाया जा सकता है। लाबुसचग्ने यूएई में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए दोनों टेस्ट मैचों में भी टीम में शामिल थे। उन्होंने अपने करियर में 2 मैचों में 20. 25 की औसत से 41 रन बनाए हैं। लाबुसचग्ने एक बेहतरीन लेग स्पिनर भी है। उन्होंने यूएई में ऑस्ट्रेलिया के लिए 7 विकट भी हासिल किए थे। सिडनी के विकेट को देखते हुए मेजबान टीम के लिए वह इस मैच में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए याद किए जाते हैं मार्नस लाबुसचग्ने : मार्नस के साथ क्रिकेट का एक रोचक वाक्या भी जुड़ा हुआ है। क्वीन्सलैंड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन के बीच मैच चल रहा था। पारी के 27वें ओवर की पहली गेंद पर बल्लेबाज परम उप्पल ने गेंद को कवर और मिड ऑफ के बीच से खेला। कवर पर फील्डिंग कर रहे लाबुसचग्ने ने दाईं तरफ डाइव लगाई और गेंद को रोकने की पूरी कोशिश की हालांकि गेंद उनसे नहीं रूकी। इस बीच उन्होंने ऐसा बर्ताव किया कि उन्होंने गेंद को पकड़ लिया है और विकेटकीपर की ओर थ्रो भी कर दिया। बल्लेबाज परम इसे देख कुछ समझ ही नहीं पाए और वापस बैटिंग क्रीज की ओर आने लगे लेकिन तभी उन्होंने देखा कि गेंद लॉग ऑफ की ओर जा रही है फिर उन्होंने रन पूरे किए। मार्नस के इस फेक फील्डिंग के बाद दोनों अंपायर ने आपस में बात की और नए नियम के तहत पांच रन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन को मिल गए।
मेलबर्न में खेले गए तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया पर जीत के बाद टीम इंडिया जोश में दिखाई दे रही है। वह सीरीज में दो-एक से आगे चल रही है। दूसरे और ऑस्ट्रेलियाई टीम हार के बाद बहुत निराश है। तीन जनवरी से सिडनी में होने वाले चौथे टेस्ट मैच के लिए ऑस्ट्रेलिया ने मार्नस लाबुसचग्ने को टीम में शामिल किया गया है। पर्थ में जीत के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टीम पेन ने शेष दोनों मैचों के लिए तेरह सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी थी। हालांकि मेलबोर्न में बल्लेबाजों के दोनों ही पारियों में विफल रहने के बाद लाबुसचग्ने के विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। एरोन फिंच और मिशेल मार्श के खराब प्रदर्शन को देखते हुए चौथे टेस्ट में उन्हें टीम में खेलाया जा सकता है। लाबुसचग्ने यूएई में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए दोनों टेस्ट मैचों में भी टीम में शामिल थे। उन्होंने अपने करियर में दो मैचों में बीस. पच्चीस की औसत से इकतालीस रन बनाए हैं। लाबुसचग्ने एक बेहतरीन लेग स्पिनर भी है। उन्होंने यूएई में ऑस्ट्रेलिया के लिए सात विकट भी हासिल किए थे। सिडनी के विकेट को देखते हुए मेजबान टीम के लिए वह इस मैच में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए याद किए जाते हैं मार्नस लाबुसचग्ने : मार्नस के साथ क्रिकेट का एक रोचक वाक्या भी जुड़ा हुआ है। क्वीन्सलैंड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन के बीच मैच चल रहा था। पारी के सत्ताईसवें ओवर की पहली गेंद पर बल्लेबाज परम उप्पल ने गेंद को कवर और मिड ऑफ के बीच से खेला। कवर पर फील्डिंग कर रहे लाबुसचग्ने ने दाईं तरफ डाइव लगाई और गेंद को रोकने की पूरी कोशिश की हालांकि गेंद उनसे नहीं रूकी। इस बीच उन्होंने ऐसा बर्ताव किया कि उन्होंने गेंद को पकड़ लिया है और विकेटकीपर की ओर थ्रो भी कर दिया। बल्लेबाज परम इसे देख कुछ समझ ही नहीं पाए और वापस बैटिंग क्रीज की ओर आने लगे लेकिन तभी उन्होंने देखा कि गेंद लॉग ऑफ की ओर जा रही है फिर उन्होंने रन पूरे किए। मार्नस के इस फेक फील्डिंग के बाद दोनों अंपायर ने आपस में बात की और नए नियम के तहत पांच रन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन को मिल गए।
5 चीजें सफल व्यापार प्रस्ताव हमेशा प्रदान करते हैंआपके छोटे व्यवसायिक जीवन में कई बार हो सकता है जब आपकी कंपनी को बड़े निगम या सरकारी संपर्क से व्यवसाय प्राप्त करने के लिए एक व्यावसायिक प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। लेकिन वास्तव में एक व्यापार प्रस्ताव क्या है और क्या शामिल किया जाना चाहिए? एक व्यापार योजना के विपरीत, जो आपकी कंपनी को चलाने और पूंजी जुटाने के लिए लिखा गया है, एक व्यापार प्रस्ताव व्यवसाय के लिए एक बोली है। दो प्राथमिक प्रकार के व्यावसायिक प्रस्ताव जो आपकी कंपनी को बढ़ाने के लिए अपना व्यवसाय जीत सकते हैं, वे अनुरोधित और अनचाहे प्रस्ताव हैं। एक सशक्त व्यापार प्रस्ताव वह है जिसे संभावित ग्राहक या व्यापारिक भागीदार द्वारा अनुरोध किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक निगम या सरकारी निकाय जो किसी परियोजना को पूरा करने या कार्य पूरा करने के लिए बाहरी कंपनी की तलाश कर रहा है, वह कंपनियों को व्यवसाय के लिए बोली लगाने की अनुमति दे सकता है। इस प्रकार, बाजार पर रखी गई खुली बोली (उदाहरण के लिए, प्रस्ताव या आरएफपी के लिए अनुरोध) के जवाब में आपके व्यापार प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा सकता है जिसके लिए अन्य कंपनियां अनुबंध जीतने के अवसर के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। सॉलिसिटेड बिजनेस प्रस्ताव केवल कंपनियों के चयन समूह या शायद आप के लिए उपलब्ध कराए गए व्यवसाय को जीतने का अवसर भी बंद कर सकते हैं। अनचाहे व्यापार प्रस्ताव, दूसरी तरफ, ऐसे प्रस्ताव हैं जिन्हें विशेष रूप से अनुरोध नहीं किया गया था। किसी बिंदु पर, आपका छोटा व्यवसाय एक बड़ी कंपनी के साथ व्यापार करना चाहता है या संयुक्त उद्यम बनाना चाहता है। एक अच्छी तरह से लिखित व्यावसायिक प्रस्ताव आपके लक्षित दर्शकों के दिलों और दिमाग जीत सकता है। यदि आपको बोली जीतने के लिए व्यावसायिक प्रस्ताव लिखना है या किसी संभावित ग्राहक या व्यापार भागीदार को अपना व्यवसाय पिच करना है , तो आपको यह जानना होगा कि क्या संबोधित किया जाना चाहिए और कैसे। सुनिश्चित करें कि आपका प्रस्ताव निम्नलिखित पांच तत्वों को शामिल करके खड़ा हैः - समाधानः कंपनी की जरूरतों और समस्याओं पर एक लीड पैराग्राफ लिखने के बाद, एक ठोस प्रस्तुति के साथ पालन करें कि आपका व्यवसाय समाधान कैसे प्रदान कर सकता है। यहां दी गई कुंजी उन समाधानों को बढ़ावा देना है जिन्हें आप वितरित कर सकते हैं। - लाभः सभी विजेता व्यवसाय प्रस्ताव स्पष्ट रूप से आपके साथ व्यवसाय करने के लाभों की रूपरेखा तैयार करते हैं। यदि आपका छोटा व्यवसाय पूर्ण गोपनीयता प्रदान कर सकता है और तंग समय सीमा को पूरा कर सकता है, उदाहरण के लिए, इसे अपने लाभ अनुभाग में स्पष्ट रूप से बताएं। - विश्वसनीयताः यह अक्सर एक व्यापार प्रस्ताव का अनदेखा हिस्सा होता है लेकिन सभी विजेता प्रस्ताव विश्वसनीयता के साथ चमकते हैं। यदि आपने एक ही क्षेत्र में ग्राहकों के साथ काम किया है या पुरस्कार विजेता व्यवसाय है, तो केस स्टडीज या तृतीय-पक्ष के समर्थन विश्वसनीयता बनाएंगे। - नमूनेः जीतने की बोली प्राप्त करने के लिए नमूनों और वितरण की आपकी क्षमता के साक्ष्य के साथ एक व्यावसायिक प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। आपके काम का एक छोटा नमूना नौकरी करने की आपकी क्षमता दिखा सकता है। - लक्षित भाषाः एक विजेता व्यवसाय प्रस्ताव संचार के बारे में है। अपने इच्छित दर्शकों द्वारा बोली जाने वाली भाषा में बोलें। यदि प्रस्ताव मूल्यांकनकर्ता इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि या वित्तीय विभाग से हैं, तो वे भाषा का उपयोग करें जो वे समझेंगे। अंत में, आप सभी बोलियां नहीं जीत सकते हैं। लेकिन एक महान व्यापार प्रस्ताव के साथ जो आपके संभावित ग्राहक की अपेक्षाओं को पूरा करता है और उससे अधिक है, आपको ऐसे व्यवसाय को जीतना चाहिए जो आपकी कंपनी के प्रस्तावों को संभावित व्यापार से मेल खाता है, जो कि शामिल सभी पार्टियों के लिए जीत-जीत है।
पाँच चीजें सफल व्यापार प्रस्ताव हमेशा प्रदान करते हैंआपके छोटे व्यवसायिक जीवन में कई बार हो सकता है जब आपकी कंपनी को बड़े निगम या सरकारी संपर्क से व्यवसाय प्राप्त करने के लिए एक व्यावसायिक प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। लेकिन वास्तव में एक व्यापार प्रस्ताव क्या है और क्या शामिल किया जाना चाहिए? एक व्यापार योजना के विपरीत, जो आपकी कंपनी को चलाने और पूंजी जुटाने के लिए लिखा गया है, एक व्यापार प्रस्ताव व्यवसाय के लिए एक बोली है। दो प्राथमिक प्रकार के व्यावसायिक प्रस्ताव जो आपकी कंपनी को बढ़ाने के लिए अपना व्यवसाय जीत सकते हैं, वे अनुरोधित और अनचाहे प्रस्ताव हैं। एक सशक्त व्यापार प्रस्ताव वह है जिसे संभावित ग्राहक या व्यापारिक भागीदार द्वारा अनुरोध किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक निगम या सरकारी निकाय जो किसी परियोजना को पूरा करने या कार्य पूरा करने के लिए बाहरी कंपनी की तलाश कर रहा है, वह कंपनियों को व्यवसाय के लिए बोली लगाने की अनुमति दे सकता है। इस प्रकार, बाजार पर रखी गई खुली बोली के जवाब में आपके व्यापार प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा सकता है जिसके लिए अन्य कंपनियां अनुबंध जीतने के अवसर के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। सॉलिसिटेड बिजनेस प्रस्ताव केवल कंपनियों के चयन समूह या शायद आप के लिए उपलब्ध कराए गए व्यवसाय को जीतने का अवसर भी बंद कर सकते हैं। अनचाहे व्यापार प्रस्ताव, दूसरी तरफ, ऐसे प्रस्ताव हैं जिन्हें विशेष रूप से अनुरोध नहीं किया गया था। किसी बिंदु पर, आपका छोटा व्यवसाय एक बड़ी कंपनी के साथ व्यापार करना चाहता है या संयुक्त उद्यम बनाना चाहता है। एक अच्छी तरह से लिखित व्यावसायिक प्रस्ताव आपके लक्षित दर्शकों के दिलों और दिमाग जीत सकता है। यदि आपको बोली जीतने के लिए व्यावसायिक प्रस्ताव लिखना है या किसी संभावित ग्राहक या व्यापार भागीदार को अपना व्यवसाय पिच करना है , तो आपको यह जानना होगा कि क्या संबोधित किया जाना चाहिए और कैसे। सुनिश्चित करें कि आपका प्रस्ताव निम्नलिखित पांच तत्वों को शामिल करके खड़ा हैः - समाधानः कंपनी की जरूरतों और समस्याओं पर एक लीड पैराग्राफ लिखने के बाद, एक ठोस प्रस्तुति के साथ पालन करें कि आपका व्यवसाय समाधान कैसे प्रदान कर सकता है। यहां दी गई कुंजी उन समाधानों को बढ़ावा देना है जिन्हें आप वितरित कर सकते हैं। - लाभः सभी विजेता व्यवसाय प्रस्ताव स्पष्ट रूप से आपके साथ व्यवसाय करने के लाभों की रूपरेखा तैयार करते हैं। यदि आपका छोटा व्यवसाय पूर्ण गोपनीयता प्रदान कर सकता है और तंग समय सीमा को पूरा कर सकता है, उदाहरण के लिए, इसे अपने लाभ अनुभाग में स्पष्ट रूप से बताएं। - विश्वसनीयताः यह अक्सर एक व्यापार प्रस्ताव का अनदेखा हिस्सा होता है लेकिन सभी विजेता प्रस्ताव विश्वसनीयता के साथ चमकते हैं। यदि आपने एक ही क्षेत्र में ग्राहकों के साथ काम किया है या पुरस्कार विजेता व्यवसाय है, तो केस स्टडीज या तृतीय-पक्ष के समर्थन विश्वसनीयता बनाएंगे। - नमूनेः जीतने की बोली प्राप्त करने के लिए नमूनों और वितरण की आपकी क्षमता के साक्ष्य के साथ एक व्यावसायिक प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। आपके काम का एक छोटा नमूना नौकरी करने की आपकी क्षमता दिखा सकता है। - लक्षित भाषाः एक विजेता व्यवसाय प्रस्ताव संचार के बारे में है। अपने इच्छित दर्शकों द्वारा बोली जाने वाली भाषा में बोलें। यदि प्रस्ताव मूल्यांकनकर्ता इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि या वित्तीय विभाग से हैं, तो वे भाषा का उपयोग करें जो वे समझेंगे। अंत में, आप सभी बोलियां नहीं जीत सकते हैं। लेकिन एक महान व्यापार प्रस्ताव के साथ जो आपके संभावित ग्राहक की अपेक्षाओं को पूरा करता है और उससे अधिक है, आपको ऐसे व्यवसाय को जीतना चाहिए जो आपकी कंपनी के प्रस्तावों को संभावित व्यापार से मेल खाता है, जो कि शामिल सभी पार्टियों के लिए जीत-जीत है।
आप सभी जानते ही होंगे मानव शरीर अपनी आवश्यकता अनुसार ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है। जी हाँ और कुछ कोशिकाओं का एक ऐसा समूह होता है जो कि अनियंत्रित रूप से बढ़ता है और विकसित होता है। ऐसे में उनकी बढ़त नियंत्रित नहीं होती है। इन कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाएं कहते हैं। कई बार हमारा लिवर भी कैंसर का शिकार हो जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं लिवर कैंसर के लक्षण, लिवर कैंसर के कारण और घरेलू इलाज। अचानक से वजन में कमी आना। असामान्य थकान महसूस होन। पीठ के ऊपरी हिस्से में, दायें कंधे के जोड़ (शोल्डर ब्लेड) के आसपास पीड़ा होना। पीलिया होना। पेट (Abdomen) के ऊपरी दाएँ हिस्से में असहजता का अहसास (Uncomfortable Feeling) होना। पेट के दाएँ हिस्से में, पंजर (Rib Cage) के नीचे एक कठोर गांठ का महसूस होना। पेट में सूजन होना। भूख की कमी और/या मितली आना। ज्यादा व लगातार शराब पीना, विशेष रूप से हैपेटाइटिस बी और डी के साथ वायरल हैपेटाइटिस, परजीवी (Parasite) द्वारा संक्रमण जैसे लिवर फ्लूक, चिरकालिक हैपेटाइटिस बी इंफ़ेक्शन, चिरकालिक हैपेटाइटिस सी इंफ़ेक्शन, हैपेटाइटिस बी और लिवर कैंसर दोनों का पारिवारिक इतिहास होना, लिवर का सिरोसिस (Cirrhosis), स्थूलता (Obesity), * डाइट या खान-पान की आदत बदले। पानी लिवर को साफ और सेहतमंद रखता है। पानी खूब पीएं। इसके अलावा रेड मीट और अल्कोहल न खाए-पिए। ज्यादा कैलोरी वाले भोजन करें , क्योंकि लिवर कैंसर में भूख कम लगती है, इसलिए जब खाने का मन करे तो जिस भोजन में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो वही खाएं। फल, सब्जी के साथ लहसुन, मौसमी, ग्रीन टी, एवाकाडो, हल्दी, अखरोट, पपीता समेत ऐसे सभी फल और सब्जी शामिल हो जो लिवर को सेहतमंद बनाते हैं खाएं। * दो संतरे का रस खाली पेट लेने से लिवर सुरक्षित रहता है। इसके अलावा एक बैंगन कच्चा खाने से लिवर की बीमारियां ठीक होती है। * डाभ (नारियल) का पानी पीएं। * जौ का पानी पीएं। * छाछ का नियमित सेवन करें। * गाजर-टमाटर का सेवन नियमित करें। गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक पीना हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए क्यों?
आप सभी जानते ही होंगे मानव शरीर अपनी आवश्यकता अनुसार ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है। जी हाँ और कुछ कोशिकाओं का एक ऐसा समूह होता है जो कि अनियंत्रित रूप से बढ़ता है और विकसित होता है। ऐसे में उनकी बढ़त नियंत्रित नहीं होती है। इन कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाएं कहते हैं। कई बार हमारा लिवर भी कैंसर का शिकार हो जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं लिवर कैंसर के लक्षण, लिवर कैंसर के कारण और घरेलू इलाज। अचानक से वजन में कमी आना। असामान्य थकान महसूस होन। पीठ के ऊपरी हिस्से में, दायें कंधे के जोड़ के आसपास पीड़ा होना। पीलिया होना। पेट के ऊपरी दाएँ हिस्से में असहजता का अहसास होना। पेट के दाएँ हिस्से में, पंजर के नीचे एक कठोर गांठ का महसूस होना। पेट में सूजन होना। भूख की कमी और/या मितली आना। ज्यादा व लगातार शराब पीना, विशेष रूप से हैपेटाइटिस बी और डी के साथ वायरल हैपेटाइटिस, परजीवी द्वारा संक्रमण जैसे लिवर फ्लूक, चिरकालिक हैपेटाइटिस बी इंफ़ेक्शन, चिरकालिक हैपेटाइटिस सी इंफ़ेक्शन, हैपेटाइटिस बी और लिवर कैंसर दोनों का पारिवारिक इतिहास होना, लिवर का सिरोसिस , स्थूलता , * डाइट या खान-पान की आदत बदले। पानी लिवर को साफ और सेहतमंद रखता है। पानी खूब पीएं। इसके अलावा रेड मीट और अल्कोहल न खाए-पिए। ज्यादा कैलोरी वाले भोजन करें , क्योंकि लिवर कैंसर में भूख कम लगती है, इसलिए जब खाने का मन करे तो जिस भोजन में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो वही खाएं। फल, सब्जी के साथ लहसुन, मौसमी, ग्रीन टी, एवाकाडो, हल्दी, अखरोट, पपीता समेत ऐसे सभी फल और सब्जी शामिल हो जो लिवर को सेहतमंद बनाते हैं खाएं। * दो संतरे का रस खाली पेट लेने से लिवर सुरक्षित रहता है। इसके अलावा एक बैंगन कच्चा खाने से लिवर की बीमारियां ठीक होती है। * डाभ का पानी पीएं। * जौ का पानी पीएं। * छाछ का नियमित सेवन करें। * गाजर-टमाटर का सेवन नियमित करें। गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक पीना हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए क्यों?
लिए ही प्राणघातक नहीं रहा है ; प्रत्युत अब उसका नर-संहारकारी प्रभाव विश्वव्यापी हो गया है। यहाँ तक कि तटस्थ राष्ट्र भी युद्ध के दुष्प्रभाव से अछूते नहीं रह सकते। ऐसी परिस्थिति में युद्ध के प्रति जन-समाज में घृणा होना स्वाभाविक है। संसार के अनन्य शान्तिवादी भारत ने अपने सम्राट अशोक द्वारा आज से दो सहस्र वर्ष पूर्व जो संदेश दिया, वह इतिहास में एक अमर घटना है। कलिंग-विजय के पश्चात् सम्राट् अशोक को युद्ध की निस्सारता का ऐसा कटु अनुभव हुआ कि उसे देश-विजय से विरक्ति हो गई । कलिंग - विजय के बाद अशोक ने देश-विजय की लिप्सा का परित्याग कर धर्म-विजय द्वारा अपने साम्राज्य का विस्तार किया। सैन्यशस्त्र द्वारा देश-विजय को छोड़कर धर्म-द्वारा संसार के हृदय पर शासन किया। यह कितने आश्चर्य की बात है कि नर-संहारी युद्ध का विनाश कर उसके स्थान में शान्ति और प्रेम का राज्य स्थापित किया। अशोक न केवल भारतीय जनता को ; किन्तु सम्पूर्ण मानव जाति को अपना पुत्र समझता था । विश्व प्रेम का इससे अच्छा उदाहरण और कहाँ मिलेगा ? यह विश्व शान्ति की भावना उस समय उदय हुई, जब पश्चिमी जगत् अपनी सभ्यता के शैशव-काल में था। महात्मा ईसा के दो शताब्दी पूर्व विश्व को शान्ति का संदेश दे रहा था । यूरोप में हम शान्ति की भावना का क्रमशः विकास पाते हैं। यह प्राकृतिक नियम है कि संघर्ष के उपरान्त शान्ति का उदय होता आया है। यूरोप में तीस वर्षीय युद्ध और लुई चतुर्दश के युद्धों के बाद अन्तर्राष्ट्रीय विधान की भावना तथा शक्ति साम्य के सिद्धान्तों का विकास हुआ । इसी प्रकार उन्नीसवीं शताब्दी में नेपोलियन के युद्धावसान के बाद पवित्र संघ ( Holv Alliance) का जन्म हुआ तथा यूरोपीय एकता के लिए प्रयत्न होने लगा । सन् १८६६ और १९०७
लिए ही प्राणघातक नहीं रहा है ; प्रत्युत अब उसका नर-संहारकारी प्रभाव विश्वव्यापी हो गया है। यहाँ तक कि तटस्थ राष्ट्र भी युद्ध के दुष्प्रभाव से अछूते नहीं रह सकते। ऐसी परिस्थिति में युद्ध के प्रति जन-समाज में घृणा होना स्वाभाविक है। संसार के अनन्य शान्तिवादी भारत ने अपने सम्राट अशोक द्वारा आज से दो सहस्र वर्ष पूर्व जो संदेश दिया, वह इतिहास में एक अमर घटना है। कलिंग-विजय के पश्चात् सम्राट् अशोक को युद्ध की निस्सारता का ऐसा कटु अनुभव हुआ कि उसे देश-विजय से विरक्ति हो गई । कलिंग - विजय के बाद अशोक ने देश-विजय की लिप्सा का परित्याग कर धर्म-विजय द्वारा अपने साम्राज्य का विस्तार किया। सैन्यशस्त्र द्वारा देश-विजय को छोड़कर धर्म-द्वारा संसार के हृदय पर शासन किया। यह कितने आश्चर्य की बात है कि नर-संहारी युद्ध का विनाश कर उसके स्थान में शान्ति और प्रेम का राज्य स्थापित किया। अशोक न केवल भारतीय जनता को ; किन्तु सम्पूर्ण मानव जाति को अपना पुत्र समझता था । विश्व प्रेम का इससे अच्छा उदाहरण और कहाँ मिलेगा ? यह विश्व शान्ति की भावना उस समय उदय हुई, जब पश्चिमी जगत् अपनी सभ्यता के शैशव-काल में था। महात्मा ईसा के दो शताब्दी पूर्व विश्व को शान्ति का संदेश दे रहा था । यूरोप में हम शान्ति की भावना का क्रमशः विकास पाते हैं। यह प्राकृतिक नियम है कि संघर्ष के उपरान्त शान्ति का उदय होता आया है। यूरोप में तीस वर्षीय युद्ध और लुई चतुर्दश के युद्धों के बाद अन्तर्राष्ट्रीय विधान की भावना तथा शक्ति साम्य के सिद्धान्तों का विकास हुआ । इसी प्रकार उन्नीसवीं शताब्दी में नेपोलियन के युद्धावसान के बाद पवित्र संघ का जन्म हुआ तथा यूरोपीय एकता के लिए प्रयत्न होने लगा । सन् एक हज़ार आठ सौ छयासठ और एक हज़ार नौ सौ सात
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि कीवी जैसे विदेशी फल का उत्पादन करने की दिशा में नागालैंड एवं अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कीवी उत्पादन से यहां के किसानों की आय बढ़ने के साथ ही बागवानी के क्षेत्र में विस्तार हुआ है और राज्य की अर्थ व्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं कृषि मंत्रालय को नागालैंड को 'कीवी स्टेट' का दर्जा मिले इस दिशा में कार्य करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर बुधवार को केंद्रीय बागवानी संस्थान, नागालैंड द्वारा आयोजित कीवी के लिए वेल्यू चैन निर्माण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि यह अवसर सभी को प्रसन्न करने वाला है, जब उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड के किसानों ने कीवी फल के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है। इससे नागालैंड के कृषि क्षेत्र में नया आयाम जुड़ा है इसका लाभ वहां के किसानों को जरूर मिलेगा। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए कृषि शुरू से ही प्राथमिकता का विषय रहा है। किसानों की आय बढ़े, उपज उत्पादन में वृद्धि, फसलों का विविधिकरण, खाद्य प्रसंस्करण और किसान महंगी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो इस दिशा में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विगत साढ़े 6 वर्षों से सतत कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में कृषि अवसरंचना कोष, कृषक उत्पादक संगठन जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ की है। श्री तोमर ने कहा कि आत्म निर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में 10 हज़ार करोड़ रूपये की धनराशी का प्रावधान किया है। अब आवश्यकता इस बात है कि केंद्र, राज्य व संबंधित संस्थाएं मिलकर इन सारी योजनाओं का लाभ किसान तक पहुंचाने के लिए कार्य करे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के मूल में भी कृषि एवं ग्रामीण अर्थ व्यवस्था है। वोकल फार लोकल सिर्फ नारा नहीं है, यह भारतीय उत्पादों के उन्नयन का अभियान है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने किसानों की दशा व दिशा बदलने के लिए सारे प्रबंध किए हैं, अब इसका लाभ नीचे तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्य कुछ कारणों से पिछड़ते रहे है। उत्तर-पूर्व के राज्यों को लेकर कृषि, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहां की विशेष जलवायु एवं उत्पादकता का लाभ लेकर वहां विशेष प्रजाति की उपज की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कीवी फल के लिए नागालैंड में अलग से कृषक उत्पादक संगठन बनाने पर भी बल दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि आज नागालैंड के किसान देश के बड़े शहरों के व्यापारियों के साथ कीवी की मार्केटिंग कर रहे हैं, यह एक सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि विदेशी फल हमारे यहां उत्पादित हों और उनका आयात कम हो यह भी आत्मनिर्भर भारत अभियान की ही दिशा में एक कदम है। इस अवसर पर खाद्य एवं सार्वजानिक वितरण मंत्रालय के सचिव श्री सुधांशु पाण्डेय, अपर सचिव-कृषि डा. अभिलक्ष लिखी एवं आयुक्त-बागवानी श्री बी.एन.एस मूर्ति ने कीवी फल उत्पादन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में हो रहे कार्य की जानकारी दी। कार्यक्रम में नागालैंड के किसानों एवं विपणन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि कीवी जैसे विदेशी फल का उत्पादन करने की दिशा में नागालैंड एवं अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कीवी उत्पादन से यहां के किसानों की आय बढ़ने के साथ ही बागवानी के क्षेत्र में विस्तार हुआ है और राज्य की अर्थ व्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं कृषि मंत्रालय को नागालैंड को 'कीवी स्टेट' का दर्जा मिले इस दिशा में कार्य करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर बुधवार को केंद्रीय बागवानी संस्थान, नागालैंड द्वारा आयोजित कीवी के लिए वेल्यू चैन निर्माण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि यह अवसर सभी को प्रसन्न करने वाला है, जब उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड के किसानों ने कीवी फल के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है। इससे नागालैंड के कृषि क्षेत्र में नया आयाम जुड़ा है इसका लाभ वहां के किसानों को जरूर मिलेगा। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए कृषि शुरू से ही प्राथमिकता का विषय रहा है। किसानों की आय बढ़े, उपज उत्पादन में वृद्धि, फसलों का विविधिकरण, खाद्य प्रसंस्करण और किसान महंगी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो इस दिशा में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विगत साढ़े छः वर्षों से सतत कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में कृषि अवसरंचना कोष, कृषक उत्पादक संगठन जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ की है। श्री तोमर ने कहा कि आत्म निर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में दस हज़ार करोड़ रूपये की धनराशी का प्रावधान किया है। अब आवश्यकता इस बात है कि केंद्र, राज्य व संबंधित संस्थाएं मिलकर इन सारी योजनाओं का लाभ किसान तक पहुंचाने के लिए कार्य करे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के मूल में भी कृषि एवं ग्रामीण अर्थ व्यवस्था है। वोकल फार लोकल सिर्फ नारा नहीं है, यह भारतीय उत्पादों के उन्नयन का अभियान है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने किसानों की दशा व दिशा बदलने के लिए सारे प्रबंध किए हैं, अब इसका लाभ नीचे तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्य कुछ कारणों से पिछड़ते रहे है। उत्तर-पूर्व के राज्यों को लेकर कृषि, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहां की विशेष जलवायु एवं उत्पादकता का लाभ लेकर वहां विशेष प्रजाति की उपज की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कीवी फल के लिए नागालैंड में अलग से कृषक उत्पादक संगठन बनाने पर भी बल दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि आज नागालैंड के किसान देश के बड़े शहरों के व्यापारियों के साथ कीवी की मार्केटिंग कर रहे हैं, यह एक सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि विदेशी फल हमारे यहां उत्पादित हों और उनका आयात कम हो यह भी आत्मनिर्भर भारत अभियान की ही दिशा में एक कदम है। इस अवसर पर खाद्य एवं सार्वजानिक वितरण मंत्रालय के सचिव श्री सुधांशु पाण्डेय, अपर सचिव-कृषि डा. अभिलक्ष लिखी एवं आयुक्त-बागवानी श्री बी.एन.एस मूर्ति ने कीवी फल उत्पादन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में हो रहे कार्य की जानकारी दी। कार्यक्रम में नागालैंड के किसानों एवं विपणन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
आज से सिर्फ 79 साल यानी 2100 में भारत के 12 तटीय शहर करीब 3 फीट पानी में डूब जाएंगे। लगातार बढ़ती गर्मी से ध्रुवों पर जमा बर्फ पिघल रही है जिससें समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। इसके चलते चेन्नई, कोच्चि, भावनगर जैसे शहरों का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा। क्योंकि किसी भी तटीय इलाके में तीन फीट पानी बढ़ने का मतलब है, काफी बड़े इलाके में तबाही। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने सी लेवल प्रोजेक्शन टूल बनाया है। जिसका आधार है इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की हाल ही में आई रिपोर्ट। इस रिपोर्ट में कहा भी गया है कि 2100 तक दुनिया प्रचंड गर्मी बर्दाश्त करेगी। कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण नहीं रोका गया तो तापमान में औसत 4. 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दशकों में ही तापमान 1. 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. जब इतना तापमान बढ़ेगा, तो जाहिर सी बात है कि ग्लेशियर पिघलेंगे। उसका पानी मैदानी और समुद्री इलाकों में तबाही लेकर आएगा। नासा के प्रोजेक्शन टूल में दुनियाभर का नक्शा बनाकर दिखाया गया है कि किस साल दुनिया के किस हिस्से में कितना समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। आईपीसीसी हर 5 से 7 साल में दुनियाभर में पर्यावरण की स्थिति की रिपोर्ट देता है। इस बार की रिपोर्ट बहुत भयावह है। यह पहली बार है जब नासा ने पूरी दुनिया में अगले कुछ दशकों में बढ़ने वाले जलस्तर को मापने का नया टूल बनाया है। यह टूल दुनिया के उन सभी देशों के में समुद्री जलस्तर को माप सकता है, जिनके पास तट हैं। भारत के जिन 12 शहर साल 2100 तक आधा फीट से लेकर करीब पौने तीन फीट समुद्री जल में समा जाएंगे। क्योंकि तब तक इतनी गर्मी बढ़ेगी कि समुद्र का जलस्तर भी बढ़ेगा। सबसे ज्यादा जिन शहरों को खतरा है, वो हैं- भावनगरः यहां 2100 तक समुद्र का जलस्तर 2. 69 फीट ऊपर आ जाएगा, जो कि पिछले साल तक 3. 54 इंच ऊपर उठा था। कोच्चिः यहां समुद्री पानी 2. 32 फीट ऊपर आ जाएगा, जो पिछले साल तक 2. 36 इंच ऊपर उठा था। मोरमुगाओः यहां पर समुद्री जलस्तर 2. 06 फीट तक बढ़ जाएगा, जो कि पिछले साल तक 1. 96 इंच ऊपर उठा था। जिन शहरों को ज्यादा खतरा है, वो हैं- ओखा (1. 96 फीट), तूतीकोरीन (1. 93 फीट), पारादीप (1. 93 फीट), मुंबई (1. 90 फीट), ओखा (1. 87 फीट), मैंगलोर (1. 87 फीट), चेन्नई (1. 87 फीट) और विशाखापट्टनम (1. 77 फीट)। यहां पर पश्चिम बंगाल का किडरोपोर इलाका जहां पिछले साल तक समुद्री जलस्तर के बढ़ने का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। वहां पर भी साल 2100 तक आधा फीट पानी बढ़ जाएगा. जो कि परेशान करने वाली बात है। क्योंकि इन सभी तटीय इलाकों में कई स्थानों पर प्रमुख बंदरगाह है। व्यापारिक केंद्र हैं। मछलियों और तेल का कारोबार होता है। समुद्री जलस्तर बढ़ने से आर्थिक व्यवस्था को करारा नुकसान पहुंचेगा। अगले दस सालों में इन 12 जगहों पर समुद्री जलस्तर कितना बढेगा। यह अंदाजा भी आसानी से लगाया जा सकता है। कांडला, ओखा और मोरमुगाओ में 3. 54 इंच, भावनगर में 6. 29 इंच, मुंबई 3. 14 इंच, कोच्चि में 4. 33 इंच, तूतीकोरीन, चेन्नई, पारादीप और मैंगलोर में 2. 75 इंच और विशाखापट्टनम में 2. 36 इंच। किडरपोर में अगले दस साल तक खतरा नहीं है। लेकिन भविष्य में बढ़ते जलस्तर का नुकसान इस तटीय इलाके को भी उठाना होगा। अगले 20 साल में धरती का तापमान निश्चित तौर पर 1. 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। ऐसा जलवायु परिवर्तन की वजह से होगा। IPCC की नई रिपोर्ट में 195 देशों से जुटाए गए मौसम और प्रचंड गर्मी से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जो प्रचंड गर्मी (Extreme Heatwave) पहले 50 सालों में एक बार आती थी, अब वो हर दस साल में आ रही है। यह धरती के गर्म होने की शुरुआत है। IPCC की इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा है कि पिछले 40 सालों से गर्मी जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी गर्मी 1850 के बाद के चार दशकों में नहीं बढ़ी थी। साथ ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी भी दी है कि अगर हमनें प्रदूषण पर विराम नहीं लगाया तो प्रचंड गर्मी, बढ़ते तापमान और अनियंत्रित मौसमों से सामाना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक फ्रेडरिके ओट्टो ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि अभी की दिक्कत है। यह पूरी दुनिया के हर कोने पर असर डाल रही है। भविष्य में तो और भी भयानक स्थिति बन जाएगी अगर ऐसा ही पर्यावरण रहा तो। फ्रेडरिको ओट्टो ने कहा कि लगातार तापमान बढ़ने से कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के जंगलों में लगी आग की घटनाओं में कमी नहीं आएगी। ऐसा आग को संभालना मुश्किल हो जाएगा। अगर बर्फ खत्म हो जाए और जंगल जल कर खाक हो जाएं तो आपके सामने पानी और हवा दोनों की दिक्कत हो जाएगी। कितने दिन आप इस स्थिति में जीने की उम्मीद कर सकते हैं। ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी तो समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। कई देश तो यूं ही डूब जाएंगे जो समुद्र के जलस्तर से कुछ ही इंच ऊपर हैं। जंगलों में लगी आग से निकले धुएं की वजह से उस देश में और आसपास के देशों में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। हर साल दुनिया भर से 4000 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। यह उत्सर्जन धरती पर मौजूद इंसानों की वजह से हो रहा है। अगर इसे हमने 2050 तक घटाकर 500 करोड़ टन तक नहीं किया तो यह हमारे लिए घातक साबित हो जाएगा। लेकिन वर्तमान गति से चलते रहे तो साल 2050 तक प्रदूषण, प्रचंड गर्मी, बाढ़ जैसी दिक्कतों का आना दोगुना ज्यादा हो जाएगा। इसे रोकना जरूरी है, नहीं तो अगली पीढ़ियों को एक बर्बाद धरती मिलेगी। IPCC की रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि पहले 50 सालों कैलिफोर्निया और कनाडा जैसी प्रचंड गर्मी की घटनाएं होती थी। लेकिन अब तो हर दस साल में ऐसी एक घटना देखने को मिल रही है। चाहे वह कैलिफोर्निया के जंगलों में आग लगना हो, या ऑस्ट्रेलिया में। तुर्की के जंगलों का जल जाना हो या कनाडा के एक पूरे गांव का गर्मी की वजह से भष्म हो जाना। 1900 की तुलना के बाद से बाढ़ 1. 3 गुना ज्यादा खतरनाक हो चुके हैं। 6. 7 गुना ज्यादा पानी का बहाव होता है यानी ज्यादा बाढ़। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि नासा का यह सी लेवल प्रोजेक्शन टूल दुनियाभर के नेताओं, वैज्ञानिकों को यह बताने के लिए काफी है कि अगली सदी तक हमारे कई देश जमीनी क्षेत्रफल में छोटे हो जाएंगे। क्योंकि समुद्र का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ेगा, उसे संभाल पाना मुश्किल होगा। हमें पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास करना होगा. नहीं तो उदाहरण सबके सामने हैं। कई द्वीप डूब चुके हैं, कई अन्य द्वीपों को समुद्र अपनी लहरों में निगल जाएगा। आज से सिर्फ 79 साल यानी 2100 में भारत के 12 तटीय शहर करीब 3 फीट पानी में डूब जाएंगे। लगातार बढ़ती गर्मी से ध्रुवों पर जमा बर्फ पिघल रही है जिससें समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। इसके चलते चेन्नई, कोच्चि, भावनगर जैसे शहरों का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा। क्योंकि किसी भी तटीय इलाके में तीन फीट पानी बढ़ने का मतलब है, काफी बड़े इलाके में तबाही।
आज से सिर्फ उन्यासी साल यानी दो हज़ार एक सौ में भारत के बारह तटीय शहर करीब तीन फीट पानी में डूब जाएंगे। लगातार बढ़ती गर्मी से ध्रुवों पर जमा बर्फ पिघल रही है जिससें समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। इसके चलते चेन्नई, कोच्चि, भावनगर जैसे शहरों का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा। क्योंकि किसी भी तटीय इलाके में तीन फीट पानी बढ़ने का मतलब है, काफी बड़े इलाके में तबाही। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सी लेवल प्रोजेक्शन टूल बनाया है। जिसका आधार है इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज की हाल ही में आई रिपोर्ट। इस रिपोर्ट में कहा भी गया है कि दो हज़ार एक सौ तक दुनिया प्रचंड गर्मी बर्दाश्त करेगी। कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण नहीं रोका गया तो तापमान में औसत चार. चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दशकों में ही तापमान एक. पाँच डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. जब इतना तापमान बढ़ेगा, तो जाहिर सी बात है कि ग्लेशियर पिघलेंगे। उसका पानी मैदानी और समुद्री इलाकों में तबाही लेकर आएगा। नासा के प्रोजेक्शन टूल में दुनियाभर का नक्शा बनाकर दिखाया गया है कि किस साल दुनिया के किस हिस्से में कितना समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। आईपीसीसी हर पाँच से सात साल में दुनियाभर में पर्यावरण की स्थिति की रिपोर्ट देता है। इस बार की रिपोर्ट बहुत भयावह है। यह पहली बार है जब नासा ने पूरी दुनिया में अगले कुछ दशकों में बढ़ने वाले जलस्तर को मापने का नया टूल बनाया है। यह टूल दुनिया के उन सभी देशों के में समुद्री जलस्तर को माप सकता है, जिनके पास तट हैं। भारत के जिन बारह शहर साल दो हज़ार एक सौ तक आधा फीट से लेकर करीब पौने तीन फीट समुद्री जल में समा जाएंगे। क्योंकि तब तक इतनी गर्मी बढ़ेगी कि समुद्र का जलस्तर भी बढ़ेगा। सबसे ज्यादा जिन शहरों को खतरा है, वो हैं- भावनगरः यहां दो हज़ार एक सौ तक समुद्र का जलस्तर दो. उनहत्तर फीट ऊपर आ जाएगा, जो कि पिछले साल तक तीन. चौवन इंच ऊपर उठा था। कोच्चिः यहां समुद्री पानी दो. बत्तीस फीट ऊपर आ जाएगा, जो पिछले साल तक दो. छत्तीस इंच ऊपर उठा था। मोरमुगाओः यहां पर समुद्री जलस्तर दो. छः फीट तक बढ़ जाएगा, जो कि पिछले साल तक एक. छियानवे इंच ऊपर उठा था। जिन शहरों को ज्यादा खतरा है, वो हैं- ओखा , तूतीकोरीन , पारादीप , मुंबई , ओखा , मैंगलोर , चेन्नई और विशाखापट्टनम । यहां पर पश्चिम बंगाल का किडरोपोर इलाका जहां पिछले साल तक समुद्री जलस्तर के बढ़ने का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। वहां पर भी साल दो हज़ार एक सौ तक आधा फीट पानी बढ़ जाएगा. जो कि परेशान करने वाली बात है। क्योंकि इन सभी तटीय इलाकों में कई स्थानों पर प्रमुख बंदरगाह है। व्यापारिक केंद्र हैं। मछलियों और तेल का कारोबार होता है। समुद्री जलस्तर बढ़ने से आर्थिक व्यवस्था को करारा नुकसान पहुंचेगा। अगले दस सालों में इन बारह जगहों पर समुद्री जलस्तर कितना बढेगा। यह अंदाजा भी आसानी से लगाया जा सकता है। कांडला, ओखा और मोरमुगाओ में तीन. चौवन इंच, भावनगर में छः. उनतीस इंच, मुंबई तीन. चौदह इंच, कोच्चि में चार. तैंतीस इंच, तूतीकोरीन, चेन्नई, पारादीप और मैंगलोर में दो. पचहत्तर इंच और विशाखापट्टनम में दो. छत्तीस इंच। किडरपोर में अगले दस साल तक खतरा नहीं है। लेकिन भविष्य में बढ़ते जलस्तर का नुकसान इस तटीय इलाके को भी उठाना होगा। अगले बीस साल में धरती का तापमान निश्चित तौर पर एक. पाँच डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। ऐसा जलवायु परिवर्तन की वजह से होगा। IPCC की नई रिपोर्ट में एक सौ पचानवे देशों से जुटाए गए मौसम और प्रचंड गर्मी से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जो प्रचंड गर्मी पहले पचास सालों में एक बार आती थी, अब वो हर दस साल में आ रही है। यह धरती के गर्म होने की शुरुआत है। IPCC की इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा है कि पिछले चालीस सालों से गर्मी जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी गर्मी एक हज़ार आठ सौ पचास के बाद के चार दशकों में नहीं बढ़ी थी। साथ ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी भी दी है कि अगर हमनें प्रदूषण पर विराम नहीं लगाया तो प्रचंड गर्मी, बढ़ते तापमान और अनियंत्रित मौसमों से सामाना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक फ्रेडरिके ओट्टो ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि अभी की दिक्कत है। यह पूरी दुनिया के हर कोने पर असर डाल रही है। भविष्य में तो और भी भयानक स्थिति बन जाएगी अगर ऐसा ही पर्यावरण रहा तो। फ्रेडरिको ओट्टो ने कहा कि लगातार तापमान बढ़ने से कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के जंगलों में लगी आग की घटनाओं में कमी नहीं आएगी। ऐसा आग को संभालना मुश्किल हो जाएगा। अगर बर्फ खत्म हो जाए और जंगल जल कर खाक हो जाएं तो आपके सामने पानी और हवा दोनों की दिक्कत हो जाएगी। कितने दिन आप इस स्थिति में जीने की उम्मीद कर सकते हैं। ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी तो समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। कई देश तो यूं ही डूब जाएंगे जो समुद्र के जलस्तर से कुछ ही इंच ऊपर हैं। जंगलों में लगी आग से निकले धुएं की वजह से उस देश में और आसपास के देशों में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। हर साल दुनिया भर से चार हज़ार करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। यह उत्सर्जन धरती पर मौजूद इंसानों की वजह से हो रहा है। अगर इसे हमने दो हज़ार पचास तक घटाकर पाँच सौ करोड़ टन तक नहीं किया तो यह हमारे लिए घातक साबित हो जाएगा। लेकिन वर्तमान गति से चलते रहे तो साल दो हज़ार पचास तक प्रदूषण, प्रचंड गर्मी, बाढ़ जैसी दिक्कतों का आना दोगुना ज्यादा हो जाएगा। इसे रोकना जरूरी है, नहीं तो अगली पीढ़ियों को एक बर्बाद धरती मिलेगी। IPCC की रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि पहले पचास सालों कैलिफोर्निया और कनाडा जैसी प्रचंड गर्मी की घटनाएं होती थी। लेकिन अब तो हर दस साल में ऐसी एक घटना देखने को मिल रही है। चाहे वह कैलिफोर्निया के जंगलों में आग लगना हो, या ऑस्ट्रेलिया में। तुर्की के जंगलों का जल जाना हो या कनाडा के एक पूरे गांव का गर्मी की वजह से भष्म हो जाना। एक हज़ार नौ सौ की तुलना के बाद से बाढ़ एक. तीन गुना ज्यादा खतरनाक हो चुके हैं। छः. सात गुना ज्यादा पानी का बहाव होता है यानी ज्यादा बाढ़। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि नासा का यह सी लेवल प्रोजेक्शन टूल दुनियाभर के नेताओं, वैज्ञानिकों को यह बताने के लिए काफी है कि अगली सदी तक हमारे कई देश जमीनी क्षेत्रफल में छोटे हो जाएंगे। क्योंकि समुद्र का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ेगा, उसे संभाल पाना मुश्किल होगा। हमें पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास करना होगा. नहीं तो उदाहरण सबके सामने हैं। कई द्वीप डूब चुके हैं, कई अन्य द्वीपों को समुद्र अपनी लहरों में निगल जाएगा। आज से सिर्फ उन्यासी साल यानी दो हज़ार एक सौ में भारत के बारह तटीय शहर करीब तीन फीट पानी में डूब जाएंगे। लगातार बढ़ती गर्मी से ध्रुवों पर जमा बर्फ पिघल रही है जिससें समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। इसके चलते चेन्नई, कोच्चि, भावनगर जैसे शहरों का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा। क्योंकि किसी भी तटीय इलाके में तीन फीट पानी बढ़ने का मतलब है, काफी बड़े इलाके में तबाही।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को उनके देश के साथ ही विदेशी खिलाड़ी भी पसंद नहीं करते। इसकी वजह उनका खेल नहीं बल्की सोशल मीडिया या फिर इंटरव्यू में दिए उनके बेतुके बयान हैं। भारत ही नहीं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य किसी के बारे में वह बिना सोचे कुछ भी बयान दे देते हैं या फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। विश्व कप के दौरान इंग्लैंड की दो हार के बाद उन्होंने टीम की काफी आलोचना की। इसके बाद टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज जॉनी बैरेस्टो ने बिना नाम लिए उन्हें करारी जवाब भी दिया। वह इसी तरह भारतीय फैंस को बार- बार चिढ़ाने की कोशिश करते हैं। पिछले साल भारत को इंग्लैंड पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए लोग उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे थे। वनडे सीरीज के अंतिम मैच में भारत की हार के बाद वॉन ने भारतीय फैंस को चिढ़ाते हुए गुड इवनिंग इंडिया लिखा था। इन्हीं वजहों से लोग उन्हें काफी नापसंद करते हैं।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को उनके देश के साथ ही विदेशी खिलाड़ी भी पसंद नहीं करते। इसकी वजह उनका खेल नहीं बल्की सोशल मीडिया या फिर इंटरव्यू में दिए उनके बेतुके बयान हैं। भारत ही नहीं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य किसी के बारे में वह बिना सोचे कुछ भी बयान दे देते हैं या फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। विश्व कप के दौरान इंग्लैंड की दो हार के बाद उन्होंने टीम की काफी आलोचना की। इसके बाद टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज जॉनी बैरेस्टो ने बिना नाम लिए उन्हें करारी जवाब भी दिया। वह इसी तरह भारतीय फैंस को बार- बार चिढ़ाने की कोशिश करते हैं। पिछले साल भारत को इंग्लैंड पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए लोग उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे थे। वनडे सीरीज के अंतिम मैच में भारत की हार के बाद वॉन ने भारतीय फैंस को चिढ़ाते हुए गुड इवनिंग इंडिया लिखा था। इन्हीं वजहों से लोग उन्हें काफी नापसंद करते हैं।
करीब एक घंटे बाद जब शाम का धुँधलका गहरा हो चुका था, गाँव से लोग दौड़े-दौड़े आए। दूस्या वहीं पड़ी हुई थी । बिलकुल बेहोश-सी, वह न रोने की हालत में थी, न बोल सकती थी, न सोच सकती थी, बस भिंचे हुए दाँतों के बीच में से कभी-कभार कराह रही थी । मिट्टी लगने के कारण उसका चेहरा मैला और भयानक दिखाई दे रहा था । लोगों ने उठाकर उसकी कनपटी को रगड़ा। उसे ढाढ़स देने लगे, समझायाबुझाया और घर लाए। दूस्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था - वह उनको अपनी बड़ी-बड़ी सूजी हुई आँखों से देखे जा रही थी। उसे जीवन रात की तरह लग रहा था । जब उसे बहन के घर लाए तो वह चारपाई पर लुढ़क पड़ी मुश्किल से वहाँ तक पहुँची और उसी क्षण उसे नींद आ गई । अगले दिन मास्को जाने की तैयारी लगभग पूरी करके उसने अन्तिम बार अपनी बहन के साथ बैठकर चाय पी । वह प्रसन्न दिखाई दे रही थी । अपने मास्को के फ्लैट और उसकी सुविधाओं की तारीफ कर रही थी । इस तरह वह चली गई। प्रसन्न और शान्त, मीशा को दस रूबल भी देती गई। दो हफ्ते बाद बूढ़ी माँ के मकान को खोला गया । फ़र्श धोया गया, सामान लाया गया और उसमें नए लोगों ने रहना शुरू कर दिया । साभार : यूरी कज़ाकोव - जापाख़ ख़्ल्येवा (रोटी की गंध) मास्को, 1965. 26 / आधुनिक रूसी कहानी
करीब एक घंटे बाद जब शाम का धुँधलका गहरा हो चुका था, गाँव से लोग दौड़े-दौड़े आए। दूस्या वहीं पड़ी हुई थी । बिलकुल बेहोश-सी, वह न रोने की हालत में थी, न बोल सकती थी, न सोच सकती थी, बस भिंचे हुए दाँतों के बीच में से कभी-कभार कराह रही थी । मिट्टी लगने के कारण उसका चेहरा मैला और भयानक दिखाई दे रहा था । लोगों ने उठाकर उसकी कनपटी को रगड़ा। उसे ढाढ़स देने लगे, समझायाबुझाया और घर लाए। दूस्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था - वह उनको अपनी बड़ी-बड़ी सूजी हुई आँखों से देखे जा रही थी। उसे जीवन रात की तरह लग रहा था । जब उसे बहन के घर लाए तो वह चारपाई पर लुढ़क पड़ी मुश्किल से वहाँ तक पहुँची और उसी क्षण उसे नींद आ गई । अगले दिन मास्को जाने की तैयारी लगभग पूरी करके उसने अन्तिम बार अपनी बहन के साथ बैठकर चाय पी । वह प्रसन्न दिखाई दे रही थी । अपने मास्को के फ्लैट और उसकी सुविधाओं की तारीफ कर रही थी । इस तरह वह चली गई। प्रसन्न और शान्त, मीशा को दस रूबल भी देती गई। दो हफ्ते बाद बूढ़ी माँ के मकान को खोला गया । फ़र्श धोया गया, सामान लाया गया और उसमें नए लोगों ने रहना शुरू कर दिया । साभार : यूरी कज़ाकोव - जापाख़ ख़्ल्येवा मास्को, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ. छब्बीस / आधुनिक रूसी कहानी
योगी आदित्यनाथ के दुबारा सीएम बनने के बाद हर जिले में माफियाओं, हिस्ट्रीशीटरों व गैंगेस्टर की नई सूची तैयार हो रही है। इसी क्रम में उनके गृह जनपद गोरखपुर जोन व रेंज में भी नई सूची तैयार कर ली गई है। पुलिस की टीमें अब उन माफियाओं, गैंगेस्टरों की संपत्ति की जानकारी कर रही हैं। इसके लिए पुलिस रजिस्ट्री कार्यालय, तहसील, नगर निगम, आरटीओ व आयकर डिपार्टमेंट का चक्कर लगा रही है। ताकि एक-एक बदमाश की संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली जाए। इनमें कई ऐसे बदमाश हैं जिनपर 10 साल पहले भी गैंगेस्टर लगा था लेकिन संपत्ति जब्त होने से बच गए थे। वहीं ऐसे माफिया व गैंगेस्टर भी हैं जिनकी सूची नई तैयार हुई है। संपत्ति की जानकारी होने के बाद ही जल्द की जब्तीकरण व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी। रेंज के चार जिलों देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर व गोरखपुर में करीब 300 बदमाशों को चिन्हित किया गया है। जिनकी संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द की इनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलेगा। डीआईजी जे रविंदर गौड़ ने जिलों की पुलिस से आपसी सामंजस्य बिठाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यानि अगर कोई बदमाश गोरखपुर का रहने वाला है और वह कुशीनगर में अपराध करता है तो उसके मुकदमे की डिटेल वहां की पुलिस गोरखपुर की पुलिस को देगी। जिसके बाद गैंगेस्टर एक्ट के तहत उसकी पैतृक संपति जब्त की जाएगी। अभी तक ये होता है कि बदमाश जिस जनपद में अपराध करता है वहां उसकी संपत्ति न होने से जब्तीकरण नहीं हो पाता था। 10 साल के आंकड़ों की मानें तो 679 बदमाश बाहर से आकर गोरखपुर में अपराध किए। देवरिया में 365 बदमाश बाहर से आकर अपराध किए। कुशीनगर में 144 और महराजगंज में 78 बदमाश बाहर से आकर अपराध किए हैं। जो दूसरे जनपदों के रहने वाले थे। गोरखपुर रेंज के चार जिलों में 35 से ज्यादा नए गैंग पंजीकृत हुए हैं। जिनमें अधिकांश लूट, चोरी व पशु तस्करी के आरोपी हैं। डीआईजी का मानना है कि ये अपराध लोगों के मन में डर पैदा करते हैं और इस अपराध में लिप्त आरोपी कभी इस काम को छोड़ता नहीं है। अब जब उनपर गैंगेस्टर लगाकर संपत्ति जब्त होगी तो वे अपराध से तौबा कर लेंगे। अकेले गोरखपुर जिले में ही 12 नए गैंग पंजीकृत हुए हैं। इन गिरोह में 100 से ज्यादा बदमाश शामिल हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई इसलिए की है कि बदमाशों को जमानत न मिल सके और उनकी संपत्ति कुर्क की जा सके। 12 नए गैंग पंजीकृत होने के बाद अब गोरखपुर में गैंग की संख्या 97 हो गई है। बेलघाट में दो नए बदमाशों पर गैंगेस्टर लगाया गया है। पुलिस भू माफिया ओमप्रकाश पांडेय की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रही है। उसके खिलाफ पहले 20 के करीब मुूकदमे थे। सीएम के निर्देश पर उसपर एक माह पूर्व गैंगेस्टर लगा था। अब पुलिस उसपर एक और गैंगेस्टर लगाएगी। क्योंकि गैंगेस्टर लगने के बाद उसपर 15 नए केस दर्ज हुए है। पुलिस ओमप्रकाश की संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। इसके अलावा माफिया व हिस्ट्रीशीटर विनोद उपाध्याय, गैंगेस्टर पवन सिंह, सत्यव्रत राय समेत कई बदमाशों पर बाबा का बुलडोजर चल सकता है। इनके संपत्ति को नए सिरे से खंगाला जा रहा है। जिले में वर्तमान में 125 हिस्ट्रीशीटर है जो जेल में बंद हैं इनपर भी गैंगेस्टर की कार्रवाई हुई है। इनमें सत्यव्रत, प्रदीप सिंह आदि शामिल हैं। पुलिस हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट भी खोलने का काम कर रही है। वहीं रामगढ़ताल में हुए अंकुर शुक्ला हत्याकांड के आरोपियों पर भी गैंगेस्टर लगाया गया है। गोरखपुर के कैंट में सबसे ज्यादा 14 गैंग पंजीकृत हैं, जिसमें 74 बदमाश शामिल हैं। कोतवाली में दो गैंग के 12, राजघाट में 5 गैंग के 27, तिवारीपुर 4 गैंग 18 बदमाश, खोराबार 7 गैंग 33 बदमाश,रामगढ़ताल में सात गैंग के 33 बदमाश,गोरखनाथ में चार गैंग के 15 बदमाश,शाहपुर में दस गैंग के 15 बदमाश,कैंपियरगंज में दो गैंग के पांच बदमाश,पीपीगंज में तीन गैंग आठ बदमाश,सहजनवां में चार गैंग के 14 सदस्य बदमाश,चिलुआताल में चार गैंग 14 बदमाश,गीडा में एक गैंग के तीन बदमाश,चौरीचौरा में चार गैंग के दस बदमाश,झंगहा में तीन गैंग के 11,पिपराइच में चार गैंग के 12,गुलरिहा में चार गैंग के 12,बांसगांव में दो गैंग के आठ,गगहा में दो गैंग के सात,बेलीपार में दो गैंग के 15,गोला में तीन गैंग के 15,बड़हलगंज चार गैंग के 18, उरुवा बाजार में एक गैंग के पांच,बेलघाट में दो गैंग के 13,खजनी में तीन गैंग के 14 और हरपुर बुदहट में एक गैंग के दो बदमाश हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
योगी आदित्यनाथ के दुबारा सीएम बनने के बाद हर जिले में माफियाओं, हिस्ट्रीशीटरों व गैंगेस्टर की नई सूची तैयार हो रही है। इसी क्रम में उनके गृह जनपद गोरखपुर जोन व रेंज में भी नई सूची तैयार कर ली गई है। पुलिस की टीमें अब उन माफियाओं, गैंगेस्टरों की संपत्ति की जानकारी कर रही हैं। इसके लिए पुलिस रजिस्ट्री कार्यालय, तहसील, नगर निगम, आरटीओ व आयकर डिपार्टमेंट का चक्कर लगा रही है। ताकि एक-एक बदमाश की संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली जाए। इनमें कई ऐसे बदमाश हैं जिनपर दस साल पहले भी गैंगेस्टर लगा था लेकिन संपत्ति जब्त होने से बच गए थे। वहीं ऐसे माफिया व गैंगेस्टर भी हैं जिनकी सूची नई तैयार हुई है। संपत्ति की जानकारी होने के बाद ही जल्द की जब्तीकरण व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी। रेंज के चार जिलों देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर व गोरखपुर में करीब तीन सौ बदमाशों को चिन्हित किया गया है। जिनकी संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द की इनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलेगा। डीआईजी जे रविंदर गौड़ ने जिलों की पुलिस से आपसी सामंजस्य बिठाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यानि अगर कोई बदमाश गोरखपुर का रहने वाला है और वह कुशीनगर में अपराध करता है तो उसके मुकदमे की डिटेल वहां की पुलिस गोरखपुर की पुलिस को देगी। जिसके बाद गैंगेस्टर एक्ट के तहत उसकी पैतृक संपति जब्त की जाएगी। अभी तक ये होता है कि बदमाश जिस जनपद में अपराध करता है वहां उसकी संपत्ति न होने से जब्तीकरण नहीं हो पाता था। दस साल के आंकड़ों की मानें तो छः सौ उन्यासी बदमाश बाहर से आकर गोरखपुर में अपराध किए। देवरिया में तीन सौ पैंसठ बदमाश बाहर से आकर अपराध किए। कुशीनगर में एक सौ चौंतालीस और महराजगंज में अठहत्तर बदमाश बाहर से आकर अपराध किए हैं। जो दूसरे जनपदों के रहने वाले थे। गोरखपुर रेंज के चार जिलों में पैंतीस से ज्यादा नए गैंग पंजीकृत हुए हैं। जिनमें अधिकांश लूट, चोरी व पशु तस्करी के आरोपी हैं। डीआईजी का मानना है कि ये अपराध लोगों के मन में डर पैदा करते हैं और इस अपराध में लिप्त आरोपी कभी इस काम को छोड़ता नहीं है। अब जब उनपर गैंगेस्टर लगाकर संपत्ति जब्त होगी तो वे अपराध से तौबा कर लेंगे। अकेले गोरखपुर जिले में ही बारह नए गैंग पंजीकृत हुए हैं। इन गिरोह में एक सौ से ज्यादा बदमाश शामिल हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई इसलिए की है कि बदमाशों को जमानत न मिल सके और उनकी संपत्ति कुर्क की जा सके। बारह नए गैंग पंजीकृत होने के बाद अब गोरखपुर में गैंग की संख्या सत्तानवे हो गई है। बेलघाट में दो नए बदमाशों पर गैंगेस्टर लगाया गया है। पुलिस भू माफिया ओमप्रकाश पांडेय की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रही है। उसके खिलाफ पहले बीस के करीब मुूकदमे थे। सीएम के निर्देश पर उसपर एक माह पूर्व गैंगेस्टर लगा था। अब पुलिस उसपर एक और गैंगेस्टर लगाएगी। क्योंकि गैंगेस्टर लगने के बाद उसपर पंद्रह नए केस दर्ज हुए है। पुलिस ओमप्रकाश की संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। इसके अलावा माफिया व हिस्ट्रीशीटर विनोद उपाध्याय, गैंगेस्टर पवन सिंह, सत्यव्रत राय समेत कई बदमाशों पर बाबा का बुलडोजर चल सकता है। इनके संपत्ति को नए सिरे से खंगाला जा रहा है। जिले में वर्तमान में एक सौ पच्चीस हिस्ट्रीशीटर है जो जेल में बंद हैं इनपर भी गैंगेस्टर की कार्रवाई हुई है। इनमें सत्यव्रत, प्रदीप सिंह आदि शामिल हैं। पुलिस हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट भी खोलने का काम कर रही है। वहीं रामगढ़ताल में हुए अंकुर शुक्ला हत्याकांड के आरोपियों पर भी गैंगेस्टर लगाया गया है। गोरखपुर के कैंट में सबसे ज्यादा चौदह गैंग पंजीकृत हैं, जिसमें चौहत्तर बदमाश शामिल हैं। कोतवाली में दो गैंग के बारह, राजघाट में पाँच गैंग के सत्ताईस, तिवारीपुर चार गैंग अट्ठारह बदमाश, खोराबार सात गैंग तैंतीस बदमाश,रामगढ़ताल में सात गैंग के तैंतीस बदमाश,गोरखनाथ में चार गैंग के पंद्रह बदमाश,शाहपुर में दस गैंग के पंद्रह बदमाश,कैंपियरगंज में दो गैंग के पांच बदमाश,पीपीगंज में तीन गैंग आठ बदमाश,सहजनवां में चार गैंग के चौदह सदस्य बदमाश,चिलुआताल में चार गैंग चौदह बदमाश,गीडा में एक गैंग के तीन बदमाश,चौरीचौरा में चार गैंग के दस बदमाश,झंगहा में तीन गैंग के ग्यारह,पिपराइच में चार गैंग के बारह,गुलरिहा में चार गैंग के बारह,बांसगांव में दो गैंग के आठ,गगहा में दो गैंग के सात,बेलीपार में दो गैंग के पंद्रह,गोला में तीन गैंग के पंद्रह,बड़हलगंज चार गैंग के अट्ठारह, उरुवा बाजार में एक गैंग के पांच,बेलघाट में दो गैंग के तेरह,खजनी में तीन गैंग के चौदह और हरपुर बुदहट में एक गैंग के दो बदमाश हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
न्यूयॉर्क :ब्रिटेन आधारित अतिवादी इस्लामी धर्मगुरू अबू हमजा के फरमान पर अमरीका में अलकायदा का प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने का प्रयास करने को लेकर भारतीय मूल के 41 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक को 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है। गुजराती मूल के ब्रिटिश नागरिक हारून अस्वत ने इसी साल मार्च में आतंकवाद संबंधी आरोपों को लेकर अपना गुनाह कुबूल कर लिया था और वह पहले से ही 11 साल जेल की सजा काट रहा है। वह उत्तरी इंग्लैंड के वेस्ट यॉर्कशायर से ताल्लुक रखने वाला है। मैनहैटन संघीय अदालत की आेर से सजा सुनाए जाने के बाद सादर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क तथा सहायक एटॉर्नी जनरल जॉन कॉर्लिन ने कहा, "अस्वत को अमरीका में आतंकी प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने संबंधी आतंकवाद के मामले में 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है। " अस्वत ने स्वीकार किया था कि उसने 15 साल पहले आेरेगन में आतंकी शिविर स्थापित करने के लिए अबू हमजा अल मसरी के साथ मिलकर साजिश रची। हमजा को मई, 2014 को अमरीका में दोषी करार दिया गया था और उसे जनवरी महीने में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
न्यूयॉर्क :ब्रिटेन आधारित अतिवादी इस्लामी धर्मगुरू अबू हमजा के फरमान पर अमरीका में अलकायदा का प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने का प्रयास करने को लेकर भारतीय मूल के इकतालीस वर्षीय ब्रिटिश नागरिक को बीस साल जेल की सजा सुनाई गई है। गुजराती मूल के ब्रिटिश नागरिक हारून अस्वत ने इसी साल मार्च में आतंकवाद संबंधी आरोपों को लेकर अपना गुनाह कुबूल कर लिया था और वह पहले से ही ग्यारह साल जेल की सजा काट रहा है। वह उत्तरी इंग्लैंड के वेस्ट यॉर्कशायर से ताल्लुक रखने वाला है। मैनहैटन संघीय अदालत की आेर से सजा सुनाए जाने के बाद सादर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क तथा सहायक एटॉर्नी जनरल जॉन कॉर्लिन ने कहा, "अस्वत को अमरीका में आतंकी प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने संबंधी आतंकवाद के मामले में बीस साल जेल की सजा सुनाई गई है। " अस्वत ने स्वीकार किया था कि उसने पंद्रह साल पहले आेरेगन में आतंकी शिविर स्थापित करने के लिए अबू हमजा अल मसरी के साथ मिलकर साजिश रची। हमजा को मई, दो हज़ार चौदह को अमरीका में दोषी करार दिया गया था और उसे जनवरी महीने में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
Don't Miss! [बॉक्स ऑफिस] फिल्म रिलीज होने के साथ ही लोगों को इंतजार रहता है फिल्म की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट का। और जब सलमान खान की फिल्म हो तो बात कुछ और ही हो जाती है। ताजा रिलीज 'प्रेम रतन धन पायो' ने अपने ओपनिंग डे से धमाका कर दिया है। बता दें, फिल्म की ओपनिंग कमाल की रही है। फिल्म ने पहले दिन 40.35 करोड़ का कलेक्शन किया है। जबकि तमिल और तेलुगु भाषाओं में फिल्म की कमाई अब तक सामने नहीं आई है। बहरहाल, फिल्म को ब्लॉकबस्टर तो करार दे ही दिया गया है। MUST READ: 'प्रेम रतन धन पायो' ब्लॉकबस्टर.. उड़ गई इन सितारों की नींद! सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी 'प्रेम रतन धन पायो' साल 2015 की सबसे बड़ी ओपनर बन गई है। इसके पहले सलमान खान की ही फिल्म 'बजरंगी भाईजान' 27 करोड़ की ओपनिंग के साथ नंबर 1 पर थी। 2015 में रिलीज फिल्मों की लिस्ट देखी जाए तो इक्के- दुक्के फिल्मों ने ही कमाल दिखाया है। जबकि बॉम्बे वेलवेट और शानदार जैसी ज्यादातर बिग बजट फिल्में औंधे मुंह गिर गई है। ऐसे में सलमान खान, शाहरूख खान की फिल्में ही बॉक्स ऑफिस को राहत दे सकती हैं।
Don't Miss! [बॉक्स ऑफिस] फिल्म रिलीज होने के साथ ही लोगों को इंतजार रहता है फिल्म की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट का। और जब सलमान खान की फिल्म हो तो बात कुछ और ही हो जाती है। ताजा रिलीज 'प्रेम रतन धन पायो' ने अपने ओपनिंग डे से धमाका कर दिया है। बता दें, फिल्म की ओपनिंग कमाल की रही है। फिल्म ने पहले दिन चालीस.पैंतीस करोड़ का कलेक्शन किया है। जबकि तमिल और तेलुगु भाषाओं में फिल्म की कमाई अब तक सामने नहीं आई है। बहरहाल, फिल्म को ब्लॉकबस्टर तो करार दे ही दिया गया है। MUST READ: 'प्रेम रतन धन पायो' ब्लॉकबस्टर.. उड़ गई इन सितारों की नींद! सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी 'प्रेम रतन धन पायो' साल दो हज़ार पंद्रह की सबसे बड़ी ओपनर बन गई है। इसके पहले सलमान खान की ही फिल्म 'बजरंगी भाईजान' सत्ताईस करोड़ की ओपनिंग के साथ नंबर एक पर थी। दो हज़ार पंद्रह में रिलीज फिल्मों की लिस्ट देखी जाए तो इक्के- दुक्के फिल्मों ने ही कमाल दिखाया है। जबकि बॉम्बे वेलवेट और शानदार जैसी ज्यादातर बिग बजट फिल्में औंधे मुंह गिर गई है। ऐसे में सलमान खान, शाहरूख खान की फिल्में ही बॉक्स ऑफिस को राहत दे सकती हैं।
महेश बाबू का बॉलीवुड को लेकर दिया गया बयान इस समय काफी चर्चा में है। इसी बीच शाहरुख खान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों का कहना है कि महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखना चाहिए। साउथ स्टार महेश बाबू का बॉलीवुड को लेकर दिया गया बयान इस समय काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड उन्हें अफोर्ड नहीं कर सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी। महेश बाबू के बयान को लेकर तमाम सेलिब्रिटीज रिएक्शन दे रहे हैं। इसी बीच शाहरुख खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखना चाहिए। दरअसल, साल 2008 में शाहरुख खान बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे थे और यहां पर एक प्रेस कॉन्फेंस में उनसे सवाल किया गया कि आप बॉलीवुड के बड़े स्टार हैं, क्या आपने कभी हॉलीवुड के बारे में सोचा है, क्या आप हॉलीवुड की ड्रीम फैक्ट्री में काम करना चाहते हैं? इस पर शाहरुख खान ने जवाब देते हुए कहा, 'मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं है। हो सकता है वहां मुझे ऐसा रोल मिले, जहां मुझे बोलने का मौका ना मिले। मैं मॉडेस्ट बनने की कोशिश नहीं कर रहा हूं। मुझे लगता है कि मैं 42 साल का हो गया हूं और मेरा रंग थोड़ा ब्राउनिश सा है। बतौर एक्टर मेरे अंदर कोई यूएसपी नहीं है, मुझमें स्पेशैलिटी नहीं है। मुझे कुंग फू नहीं आता, मैं लैटिन सालसा पर डांस नहीं कर सकता, मैं ज्यादा लंबा भी नहीं हूं। मुझे ऐसा लगता है कि ड्रीम फैक्ट्री में मेरे लिए कोई स्पेस नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं उतना टैलेंटेड नहीं हूं। मैं इंडियन फिल्मों में ही काम करना चाहता हूं और चाहता हूं कि उन फिल्मों को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाना चाहता हूं।' महेश बाबू ने हाल ही में बॉलीवुड डेब्यू के सवाल पर कहा था, 'मैं हमेशा से तेलुगु फिल्में करना चाहता था और चाहता था कि पूरे भारत के लोग इसे देखें। और अब जब ऐसा हो रहा है तो मैं बहुत खुश हूं। मेरी हमेशा से ये मजबूत राय थी कि मेरी ताकत तेलुगु फिल्में हैं और जो इमोशन मैं समझता हूं वो तेलुगु फिल्म का इमोशन है। मैं अहंकारी लग सकता हूं, मुझे हिंदी में बहुत ऑफर्स मिले हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे मुझे अफोर्ड नहीं कर सकते। मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। तेलुगू सिनेमा में मुझे यहां जो स्टारडम और प्यार मिला है, मैंने कभी दूसरी इंडस्ट्री में जाने के बारे में नहीं सोचा। मैंने हमेशा सोचा था कि मैं यहां फिल्में करूंगा और वे बड़ी हो जाएंगी, और मेरा विश्वास अब एक वास्तविकता में बदल रहा है। मैं इससे ज्यादा खुश नहीं हो सकता।' वर्क फ्रंट की बात करें तो वह फिल्म 'पठान' में जॉन अब्राहम, दीपिका पादकोण को साथ नजर आएंगे। ये फिल्म अगले साल 2023 में रिलीज होगी। वहीं, वह एटली की एक फिल्म में नयनतारा के साथ काम करते दिखाई देंगे। डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने हाल ही में शाहरुख खान के साथ फिल्म 'डंकी' करने की घोषणा की थी। इस फिल्म में तापसी पन्नू भी हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
महेश बाबू का बॉलीवुड को लेकर दिया गया बयान इस समय काफी चर्चा में है। इसी बीच शाहरुख खान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों का कहना है कि महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखना चाहिए। साउथ स्टार महेश बाबू का बॉलीवुड को लेकर दिया गया बयान इस समय काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड उन्हें अफोर्ड नहीं कर सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी। महेश बाबू के बयान को लेकर तमाम सेलिब्रिटीज रिएक्शन दे रहे हैं। इसी बीच शाहरुख खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि महेश बाबू को शाहरुख खान से सीखना चाहिए। दरअसल, साल दो हज़ार आठ में शाहरुख खान बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे थे और यहां पर एक प्रेस कॉन्फेंस में उनसे सवाल किया गया कि आप बॉलीवुड के बड़े स्टार हैं, क्या आपने कभी हॉलीवुड के बारे में सोचा है, क्या आप हॉलीवुड की ड्रीम फैक्ट्री में काम करना चाहते हैं? इस पर शाहरुख खान ने जवाब देते हुए कहा, 'मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं है। हो सकता है वहां मुझे ऐसा रोल मिले, जहां मुझे बोलने का मौका ना मिले। मैं मॉडेस्ट बनने की कोशिश नहीं कर रहा हूं। मुझे लगता है कि मैं बयालीस साल का हो गया हूं और मेरा रंग थोड़ा ब्राउनिश सा है। बतौर एक्टर मेरे अंदर कोई यूएसपी नहीं है, मुझमें स्पेशैलिटी नहीं है। मुझे कुंग फू नहीं आता, मैं लैटिन सालसा पर डांस नहीं कर सकता, मैं ज्यादा लंबा भी नहीं हूं। मुझे ऐसा लगता है कि ड्रीम फैक्ट्री में मेरे लिए कोई स्पेस नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं उतना टैलेंटेड नहीं हूं। मैं इंडियन फिल्मों में ही काम करना चाहता हूं और चाहता हूं कि उन फिल्मों को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाना चाहता हूं।' महेश बाबू ने हाल ही में बॉलीवुड डेब्यू के सवाल पर कहा था, 'मैं हमेशा से तेलुगु फिल्में करना चाहता था और चाहता था कि पूरे भारत के लोग इसे देखें। और अब जब ऐसा हो रहा है तो मैं बहुत खुश हूं। मेरी हमेशा से ये मजबूत राय थी कि मेरी ताकत तेलुगु फिल्में हैं और जो इमोशन मैं समझता हूं वो तेलुगु फिल्म का इमोशन है। मैं अहंकारी लग सकता हूं, मुझे हिंदी में बहुत ऑफर्स मिले हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे मुझे अफोर्ड नहीं कर सकते। मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। तेलुगू सिनेमा में मुझे यहां जो स्टारडम और प्यार मिला है, मैंने कभी दूसरी इंडस्ट्री में जाने के बारे में नहीं सोचा। मैंने हमेशा सोचा था कि मैं यहां फिल्में करूंगा और वे बड़ी हो जाएंगी, और मेरा विश्वास अब एक वास्तविकता में बदल रहा है। मैं इससे ज्यादा खुश नहीं हो सकता।' वर्क फ्रंट की बात करें तो वह फिल्म 'पठान' में जॉन अब्राहम, दीपिका पादकोण को साथ नजर आएंगे। ये फिल्म अगले साल दो हज़ार तेईस में रिलीज होगी। वहीं, वह एटली की एक फिल्म में नयनतारा के साथ काम करते दिखाई देंगे। डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने हाल ही में शाहरुख खान के साथ फिल्म 'डंकी' करने की घोषणा की थी। इस फिल्म में तापसी पन्नू भी हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
उपर्युक्त पदों के लिए पात्रता मानदंड नीचे दिए गए हैंः - उम्मीदवारों के पास भारतीय राष्ट्रीयता होनी चाहिए। - उपयोगकर्ताओं की न्यूनतम आयु कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। - विभिन्न पदों के लिए शैक्षिक योग्यता नीचे दी गई हैः कुल 93 पद जारी किए गए हैं जिन्हें आगे विभिन्न पदों और श्रेणियों में विभाजित किया गया है। नीचे तालिका है जो पद के साथ-साथ जातिवार रिक्तियां प्रदान करेगीः भारतीय सेना एमटीएस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? यह पैराग्राफ उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्हें आवेदन प्रक्रिया को समझने में कठिनाई हो रही है। आवेदन पत्र भरने के ये चरण हैंः - अब आपको प्रमाणीकरण के बाद संबंधित एप्लिकेशन लिंक ढूंढना चाहिए और उस पर टैप करना चाहिए। - पीडीएफ फाइल खुल जाएगी और इसमें आवेदन फॉर्म होगा। इसका प्रिंटआउट ले लें। - उसके बाद, आवेदन पत्र में पूछे गए विवरण को सावधानीपूर्वक दर्ज करें और आगे बढ़ें। - नीचे दिए गए ब्लॉक में उल्लिखित दस्तावेजों को संलग्न करें और फॉर्म को एक फोल्डर में रख लें। - अंत में, निम्नलिखित पते पर आवेदन पत्र जमा करके प्रक्रिया पूरी करेंः आवेदन प्रक्रिया में आवेदन पत्र में मांगे गए दस्तावेजों को संलग्न करने का चरण भी शामिल है। आवश्यक दस्तावेजों की केवल फोटोकॉपी संलग्न की जानी चाहिए। उम्मीदवारों को मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की सूची नीचे दी गई हैः - श्रेणी/जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) - 2 स्वपता लिखा लिफाफा जिस पर 5 रुपये का स्टाम्प लगा हो। - किसी भी मौजूदा संगठन से अनापत्ति प्रमाण पत्र जिसमें वे काम कर रहे हैं। आवेदक भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आसानी से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस लेख में एक सीधा आवेदन लिंक भी उपलब्ध है। भारतीय सेना एमटीएस 2023 भर्ती के लिए आवेदन शुल्क क्या है? अधिकारियों ने भर्ती अधिसूचना में आवेदन शुल्क से संबंधित किसी भी विवरण का उल्लेख नहीं किया है। हम विस्तृत अधिसूचना में विवरण प्राप्त कर सकते हैं जो 18 फरवरी 2023 को जारी की जाएगी। इंडियन आर्मी एमटीएस भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया क्या है? अनुभाग प्रक्रिया लिखित परीक्षा से शुरू होगी। सभी पंजीकृत उम्मीदवारों को इसके लिए उपस्थित होना होगा, जिसके बाद प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की जाएगी और फिर अंतिम चयन किया जाएगा।
उपर्युक्त पदों के लिए पात्रता मानदंड नीचे दिए गए हैंः - उम्मीदवारों के पास भारतीय राष्ट्रीयता होनी चाहिए। - उपयोगकर्ताओं की न्यूनतम आयु कम से कम अट्ठारह वर्ष और अधिकतम आयु पच्चीस वर्ष होनी चाहिए। - विभिन्न पदों के लिए शैक्षिक योग्यता नीचे दी गई हैः कुल तिरानवे पद जारी किए गए हैं जिन्हें आगे विभिन्न पदों और श्रेणियों में विभाजित किया गया है। नीचे तालिका है जो पद के साथ-साथ जातिवार रिक्तियां प्रदान करेगीः भारतीय सेना एमटीएस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? यह पैराग्राफ उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्हें आवेदन प्रक्रिया को समझने में कठिनाई हो रही है। आवेदन पत्र भरने के ये चरण हैंः - अब आपको प्रमाणीकरण के बाद संबंधित एप्लिकेशन लिंक ढूंढना चाहिए और उस पर टैप करना चाहिए। - पीडीएफ फाइल खुल जाएगी और इसमें आवेदन फॉर्म होगा। इसका प्रिंटआउट ले लें। - उसके बाद, आवेदन पत्र में पूछे गए विवरण को सावधानीपूर्वक दर्ज करें और आगे बढ़ें। - नीचे दिए गए ब्लॉक में उल्लिखित दस्तावेजों को संलग्न करें और फॉर्म को एक फोल्डर में रख लें। - अंत में, निम्नलिखित पते पर आवेदन पत्र जमा करके प्रक्रिया पूरी करेंः आवेदन प्रक्रिया में आवेदन पत्र में मांगे गए दस्तावेजों को संलग्न करने का चरण भी शामिल है। आवश्यक दस्तावेजों की केवल फोटोकॉपी संलग्न की जानी चाहिए। उम्मीदवारों को मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की सूची नीचे दी गई हैः - श्रेणी/जाति प्रमाण पत्र - दो स्वपता लिखा लिफाफा जिस पर पाँच रुपयापये का स्टाम्प लगा हो। - किसी भी मौजूदा संगठन से अनापत्ति प्रमाण पत्र जिसमें वे काम कर रहे हैं। आवेदक भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आसानी से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस लेख में एक सीधा आवेदन लिंक भी उपलब्ध है। भारतीय सेना एमटीएस दो हज़ार तेईस भर्ती के लिए आवेदन शुल्क क्या है? अधिकारियों ने भर्ती अधिसूचना में आवेदन शुल्क से संबंधित किसी भी विवरण का उल्लेख नहीं किया है। हम विस्तृत अधिसूचना में विवरण प्राप्त कर सकते हैं जो अट्ठारह फरवरी दो हज़ार तेईस को जारी की जाएगी। इंडियन आर्मी एमटीएस भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया क्या है? अनुभाग प्रक्रिया लिखित परीक्षा से शुरू होगी। सभी पंजीकृत उम्मीदवारों को इसके लिए उपस्थित होना होगा, जिसके बाद प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की जाएगी और फिर अंतिम चयन किया जाएगा।
रक्षाबंधन (Rakshabandhan) के त्योहार की रौनक हर तरफ छाई हुई है. देश के सभी बड़े बाजारों (Markets) में लोगों की भीड़, दुकानदारों का उत्साह भी देखते ही बनता है. दरअसल, बीते दो सालों तक कोरोना (Covid-19) के साये के चलते रक्षाबंधन प्रतिबंधों और सावधानी के बीच मना. संक्रमण बढ़ने का बुरा असर राखी के कारोबार पर दिखाई दिया. लेकिन इस बार यह उद्योग लंबी छलांग लगाने को तैयार है. Corona के बढ़ते प्रकोप के बीच बीते दो साल इस कारोबार में लगे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. राखी के कारोबारियों के मुताबिक, पिछले साल 3,500 से 4,500 करोड़ रुपये की राखियों का करोबार हुआ था. जबकि इस साल ये आंकड़ा बढ़कर 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, इस साल भी कच्चा माल महंगा होने से बाजारों में राखियां महंगी (Rakhi Price Hike) मिल रही हैं. इसके बावजूद बिक्री पिछले साल से ज्यादा है. राखी बनाने वालों का कहना है कि दाम बढ़ने के बावजूद इस बार 30 से 50 फीसदी से ज्यादा राखियां बिकने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि कुल लागत करीब 30 फीसदी बढ़ी है, लेकिन कीमत 20 से 25 फीसदी ही बढ़ाई गई है. इससे राखी के कारोबार से जुड़े लोगों का मुनाफा (Rakhi Business Profit) घट गया है. कारोबारियों की मानें तो इस बार मोती, धागे, मनके से लेकर पैकेजिंग मैटेरियल तक के दाम काफी बढ़ गए हैं. पैकेजिंग वाले बॉक्स के दाम 50 रुपये से बढ़कर 70 रुपये हो गए हैं. राखी की प्रिंटिंग 25 फीसदी महंगी हुई है. राखी बनाने में इस्तेमाल होने वाली पन्नी 300 रुपये से बढ़कर 400 से 450 रुपये की हो गई है. मोती क्वालिटी के हिसाब से 300 से 2,500 रुपये किलो मिल रहे हैं. ये बड़े कारण हैं जिनके चलते एक दर्जन राखियों का 180 रुपये में मिलने वाला पैकेट 240 रुपये का हो गया है. देश में दिल्ली के अलावा पश्चिम बंगाल भी राखी निर्माण का सबसे बड़े केंद्रों में से एक है. देश में कुल कारोबार में 50 से 60 फीसदी हिस्सा बंगाल का है. इसके बाद गुजरात, मुंबई, दिल्ली, राजस्थान में बड़े पैमाने पर राखियां बनती हैं. राखी बनाने में लगने वाले फैंसी पार्ट, पन्नी, फोम, सजावटी सामान, स्टोन जैसे सामान चीन से आते हैं. राखी बनाने में इस्तेमाल होने वाला 1,000 से 1200 करोड़ का कच्चा माल चीन से आयात होता है. इसके अलावा रक्षा बंधन पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी इस बार महंगाई का साया छाया हुआ है. दूध, रिफाइंड, डालडा घी के दाम बढ़ने से मिठाइयों के दाम बढ़ गए हैं. इस वजह से काजू की बर्फी 900 रुपये किलो पर पहुंच गई है. सस्ती मिठाइयां जैसे कि बेसन के लड्डू 400 और बूंदी के लड्डू 260 रुपये किलो के भाव पर मिलने लगे हैं. कपड़ों की बात करें तो महंगाई के असर से डिजाइनर सिल्क का कुर्ता पहले 1500 से 2000 की रेंज में था, वही अब 2500 से तीन हजार रुपये तक में बिक रहा है. ऑनलाइन कपड़ा बाजार में ऑफर्स के चलते भी दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही उम्मीद से कम है. वहीं कपड़ा बाजार को महंगाई की वजह से त्योहार फीका होने का डर सता रहा है. पिछले साल के मुकाबले इस बार साड़ी और सूट महंगे हुए हैं. इसके अलावा व्यापारियों को एक डर इस बात का भी है कि कहीं शुरुआत में आई तेजी जो अब सुस्ती में बदल गई है उसकी वजह से कहीं पेमेंट ना फंस जाए. व्यापारियों ने ज्यादा बिक्री की उम्मीद में माल भी ज्यादा मंगा लिया, लेकिन बिक्री बढ़ने के बावजूद अनुमान से कम है.
रक्षाबंधन के त्योहार की रौनक हर तरफ छाई हुई है. देश के सभी बड़े बाजारों में लोगों की भीड़, दुकानदारों का उत्साह भी देखते ही बनता है. दरअसल, बीते दो सालों तक कोरोना के साये के चलते रक्षाबंधन प्रतिबंधों और सावधानी के बीच मना. संक्रमण बढ़ने का बुरा असर राखी के कारोबार पर दिखाई दिया. लेकिन इस बार यह उद्योग लंबी छलांग लगाने को तैयार है. Corona के बढ़ते प्रकोप के बीच बीते दो साल इस कारोबार में लगे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. राखी के कारोबारियों के मुताबिक, पिछले साल तीन,पाँच सौ से चार,पाँच सौ करोड़ रुपये की राखियों का करोबार हुआ था. जबकि इस साल ये आंकड़ा बढ़कर पाँच,शून्य से छः,शून्य करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, इस साल भी कच्चा माल महंगा होने से बाजारों में राखियां महंगी मिल रही हैं. इसके बावजूद बिक्री पिछले साल से ज्यादा है. राखी बनाने वालों का कहना है कि दाम बढ़ने के बावजूद इस बार तीस से पचास फीसदी से ज्यादा राखियां बिकने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि कुल लागत करीब तीस फीसदी बढ़ी है, लेकिन कीमत बीस से पच्चीस फीसदी ही बढ़ाई गई है. इससे राखी के कारोबार से जुड़े लोगों का मुनाफा घट गया है. कारोबारियों की मानें तो इस बार मोती, धागे, मनके से लेकर पैकेजिंग मैटेरियल तक के दाम काफी बढ़ गए हैं. पैकेजिंग वाले बॉक्स के दाम पचास रुपयापये से बढ़कर सत्तर रुपयापये हो गए हैं. राखी की प्रिंटिंग पच्चीस फीसदी महंगी हुई है. राखी बनाने में इस्तेमाल होने वाली पन्नी तीन सौ रुपयापये से बढ़कर चार सौ से चार सौ पचास रुपयापये की हो गई है. मोती क्वालिटी के हिसाब से तीन सौ से दो,पाँच सौ रुपयापये किलो मिल रहे हैं. ये बड़े कारण हैं जिनके चलते एक दर्जन राखियों का एक सौ अस्सी रुपयापये में मिलने वाला पैकेट दो सौ चालीस रुपयापये का हो गया है. देश में दिल्ली के अलावा पश्चिम बंगाल भी राखी निर्माण का सबसे बड़े केंद्रों में से एक है. देश में कुल कारोबार में पचास से साठ फीसदी हिस्सा बंगाल का है. इसके बाद गुजरात, मुंबई, दिल्ली, राजस्थान में बड़े पैमाने पर राखियां बनती हैं. राखी बनाने में लगने वाले फैंसी पार्ट, पन्नी, फोम, सजावटी सामान, स्टोन जैसे सामान चीन से आते हैं. राखी बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक,शून्य से एक हज़ार दो सौ करोड़ का कच्चा माल चीन से आयात होता है. इसके अलावा रक्षा बंधन पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी इस बार महंगाई का साया छाया हुआ है. दूध, रिफाइंड, डालडा घी के दाम बढ़ने से मिठाइयों के दाम बढ़ गए हैं. इस वजह से काजू की बर्फी नौ सौ रुपयापये किलो पर पहुंच गई है. सस्ती मिठाइयां जैसे कि बेसन के लड्डू चार सौ और बूंदी के लड्डू दो सौ साठ रुपयापये किलो के भाव पर मिलने लगे हैं. कपड़ों की बात करें तो महंगाई के असर से डिजाइनर सिल्क का कुर्ता पहले एक हज़ार पाँच सौ से दो हज़ार की रेंज में था, वही अब दो हज़ार पाँच सौ से तीन हजार रुपये तक में बिक रहा है. ऑनलाइन कपड़ा बाजार में ऑफर्स के चलते भी दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही उम्मीद से कम है. वहीं कपड़ा बाजार को महंगाई की वजह से त्योहार फीका होने का डर सता रहा है. पिछले साल के मुकाबले इस बार साड़ी और सूट महंगे हुए हैं. इसके अलावा व्यापारियों को एक डर इस बात का भी है कि कहीं शुरुआत में आई तेजी जो अब सुस्ती में बदल गई है उसकी वजह से कहीं पेमेंट ना फंस जाए. व्यापारियों ने ज्यादा बिक्री की उम्मीद में माल भी ज्यादा मंगा लिया, लेकिन बिक्री बढ़ने के बावजूद अनुमान से कम है.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादीलाल मीणा ने मंगलवार को लालसोट शहर में बाजारों का दौरा कर दीपोत्सव के अवसर पर लोगों से रामा-श्यामा की। मंत्री ने क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, जनप्रतिनिधियों तथा आमजन से दीपावली का राम-राम कर शुभकामनाएं दीं। चिकित्सा मंत्री ने महात्मा ज्योतिबा फूले सर्किल से परशुराम सर्किल, बस स्टैंड, आजाद चौक, बोली का बाजार, सदर बाजार व त्रिपोलिया बाजार का दौरा कर लोगों को दीपावली की बधाई दी। इस दौरान चिकित्सा मंत्री के साथ लोगों की भीड़ लगी रही। इस दौरान मंत्री के साथ पूर्व चैयरमैन दिनेश मिश्र, पार्षद जीतू बढ़ाया, अंकित दास स्वामी, राजेश सैनी, रमेश चंद मानोलिया, डॉ रामफूल सैनी, चंद्रशेखर जांगिड़, सिराज मोहम्मद सहित कई लोग मौजूद थे। इसी तरह भाजपा के पूर्व चेयरमैन जगदीश सैनी ने भी शहर में घूमकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। वहीं मंडावरी कस्बे में भाजपा नेता रामविलास मीणा डूंगरपुर व मुकेश मीणा रामगढ़ ने बाजारों में घूमकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादीलाल मीणा ने मंगलवार को लालसोट शहर में बाजारों का दौरा कर दीपोत्सव के अवसर पर लोगों से रामा-श्यामा की। मंत्री ने क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, जनप्रतिनिधियों तथा आमजन से दीपावली का राम-राम कर शुभकामनाएं दीं। चिकित्सा मंत्री ने महात्मा ज्योतिबा फूले सर्किल से परशुराम सर्किल, बस स्टैंड, आजाद चौक, बोली का बाजार, सदर बाजार व त्रिपोलिया बाजार का दौरा कर लोगों को दीपावली की बधाई दी। इस दौरान चिकित्सा मंत्री के साथ लोगों की भीड़ लगी रही। इस दौरान मंत्री के साथ पूर्व चैयरमैन दिनेश मिश्र, पार्षद जीतू बढ़ाया, अंकित दास स्वामी, राजेश सैनी, रमेश चंद मानोलिया, डॉ रामफूल सैनी, चंद्रशेखर जांगिड़, सिराज मोहम्मद सहित कई लोग मौजूद थे। इसी तरह भाजपा के पूर्व चेयरमैन जगदीश सैनी ने भी शहर में घूमकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। वहीं मंडावरी कस्बे में भाजपा नेता रामविलास मीणा डूंगरपुर व मुकेश मीणा रामगढ़ ने बाजारों में घूमकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
काठगोदाम रेलवे स्टेशन से कई क्षेत्रों के लिए पदयात्रा की थी। उनके विचारों के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए देव भूमि ट्रस्ट के संस्थापक और स्वामी विवेकानंद स्मृति यात्रा की ओर से भी यात्रा आरंभ की गई है। उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर से 25 दिसंबर तक स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सहयोगियों के साथ यात्रा की। इस दौरान पाया कि विवेकानंद जी के यात्रा पड़ावों में काठगोदाम रेलवे स्टेशन, धारी, पहाड़पानी, मोरनौला, धूनाघाट, अद्वैत आश्रम, मायावती, लोहाघाट का संरक्षण और संवर्धन जरूरी है। ये यात्रा 12 जनवरी 2021 तक चलेगी। आचार्य विपिन जोशी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों श्रीमद्भगवत गीता के कर्म योग के सिद्धांत को अपनाकर उत्तराखंड के युवा और मातृ शक्ति बदल सकते हैं। यात्रा के दौरान संस्था सदस्य उत्तराखंड के युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से जोड़ने, उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार और रिवर्स पलायन के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही यात्रा के पड़ावों में औषधिय पौधों का रोपण भी किया जा रहा है। ऐसे स्थानों पर स्वामी विवेकानंद जी के उस पड़ाव पर रुकने की जानकारी देने वाले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं। अब दूसरे चरण की यात्रा गढ़वाल के हिस्से में आरंभ कर दी गई है। 12 जनवरी 2021 तक देहरादून, जोनसार और गढ़वाल में विभिन्न आयोजन होंगे। अभियान में कार्यक्रम के सूत्रधार आध्यात्मिक गुरु आचार्य बिपिन जोशी, हरेंद्र विष्ट, विकास किरोला, शांति बिष्ट, कमल किशोर शर्मा, विनोद नवानी, त्रिवेणी सिंह बर्गली, सुनील लोहनी, मनीष ओली, योगेश पांडे आदि का विशेष सहयोग रहा। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
काठगोदाम रेलवे स्टेशन से कई क्षेत्रों के लिए पदयात्रा की थी। उनके विचारों के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए देव भूमि ट्रस्ट के संस्थापक और स्वामी विवेकानंद स्मृति यात्रा की ओर से भी यात्रा आरंभ की गई है। उन्होंने बताया कि इक्कीस दिसंबर से पच्चीस दिसंबर तक स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सहयोगियों के साथ यात्रा की। इस दौरान पाया कि विवेकानंद जी के यात्रा पड़ावों में काठगोदाम रेलवे स्टेशन, धारी, पहाड़पानी, मोरनौला, धूनाघाट, अद्वैत आश्रम, मायावती, लोहाघाट का संरक्षण और संवर्धन जरूरी है। ये यात्रा बारह जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक चलेगी। आचार्य विपिन जोशी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों श्रीमद्भगवत गीता के कर्म योग के सिद्धांत को अपनाकर उत्तराखंड के युवा और मातृ शक्ति बदल सकते हैं। यात्रा के दौरान संस्था सदस्य उत्तराखंड के युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से जोड़ने, उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार और रिवर्स पलायन के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही यात्रा के पड़ावों में औषधिय पौधों का रोपण भी किया जा रहा है। ऐसे स्थानों पर स्वामी विवेकानंद जी के उस पड़ाव पर रुकने की जानकारी देने वाले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं। अब दूसरे चरण की यात्रा गढ़वाल के हिस्से में आरंभ कर दी गई है। बारह जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक देहरादून, जोनसार और गढ़वाल में विभिन्न आयोजन होंगे। अभियान में कार्यक्रम के सूत्रधार आध्यात्मिक गुरु आचार्य बिपिन जोशी, हरेंद्र विष्ट, विकास किरोला, शांति बिष्ट, कमल किशोर शर्मा, विनोद नवानी, त्रिवेणी सिंह बर्गली, सुनील लोहनी, मनीष ओली, योगेश पांडे आदि का विशेष सहयोग रहा। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
अमृतांशी जोशी, भोपाल। छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सली हमले के बाद मध्यप्रदेश भी अलर्ट हो गया है। एमपी के नक्सल प्रभावित जिलों में हॉक फोर्स और पुलिस को निगरानी मोड पर रखा गया है। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने तीनों जिलों में हॉक फोर्स को विशेष निगरानी के निर्देश दिए है। बालाघाट में हाल ही में दो इनामी महिला नक्सलियों को मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस को आशंका है कि नक्सली बदले की भावना से किसी वारदात को अंजाम न दें, नक्सलियों के एमपी के सीमावर्ती जिलों में घुसने का भी डर है। बता दें कि बुधवार को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। नक्सली हमले में 11 जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों ने घात लगाकर जवान के वाहन को बम से उड़ा दिया था। इस वारदात के बाद प्रदेश में फिर से नक्सलियों की घातक गतिविधियां सामने आई है।
अमृतांशी जोशी, भोपाल। छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सली हमले के बाद मध्यप्रदेश भी अलर्ट हो गया है। एमपी के नक्सल प्रभावित जिलों में हॉक फोर्स और पुलिस को निगरानी मोड पर रखा गया है। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने तीनों जिलों में हॉक फोर्स को विशेष निगरानी के निर्देश दिए है। बालाघाट में हाल ही में दो इनामी महिला नक्सलियों को मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस को आशंका है कि नक्सली बदले की भावना से किसी वारदात को अंजाम न दें, नक्सलियों के एमपी के सीमावर्ती जिलों में घुसने का भी डर है। बता दें कि बुधवार को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। नक्सली हमले में ग्यारह जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों ने घात लगाकर जवान के वाहन को बम से उड़ा दिया था। इस वारदात के बाद प्रदेश में फिर से नक्सलियों की घातक गतिविधियां सामने आई है।
शाहबाद, 14 अक्तूबर (बृज मोहन) एसडीएम कपिल शर्मा ने कहा कि फसल अवशेषों को आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए सभी ग्राम सचिवों और पटवारियों को अलर्ट मोड में रहना होगा। इतना ही नहीं जो भी व्यक्ति फानो में आग लगाए, उस पर नियमानुसार जुर्माना भी किया जाए। एसडीएम कपिल शर्मा लोक निर्माण विभाग में ग्राम सचिवों व पटवारियों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले एसडीएम कपिल शर्मा ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पटवारी और ग्राम सचिवों से फानो का प्रबंधन करने तथा फानो में आग लगाने से संबंधित मामलों के बारे में फीडबैक ली। एसडीएम ने कहा कि सभी अधिकारी आपसी तालमेल बनाएं रखेंगे और किसी भी घटना के घटने पर तुरंत कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर गांव-गांव में जाकर पराली का प्रबंधन करने से संबंधित योजनाओं की जानकारी देंगे। इस मौके पर बीडीपीओ सुमित बख्शी, नायब तहसीलदार भारती, खंड कृषि अधिकारी संतोष कुमार सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।
शाहबाद, चौदह अक्तूबर एसडीएम कपिल शर्मा ने कहा कि फसल अवशेषों को आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए सभी ग्राम सचिवों और पटवारियों को अलर्ट मोड में रहना होगा। इतना ही नहीं जो भी व्यक्ति फानो में आग लगाए, उस पर नियमानुसार जुर्माना भी किया जाए। एसडीएम कपिल शर्मा लोक निर्माण विभाग में ग्राम सचिवों व पटवारियों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले एसडीएम कपिल शर्मा ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पटवारी और ग्राम सचिवों से फानो का प्रबंधन करने तथा फानो में आग लगाने से संबंधित मामलों के बारे में फीडबैक ली। एसडीएम ने कहा कि सभी अधिकारी आपसी तालमेल बनाएं रखेंगे और किसी भी घटना के घटने पर तुरंत कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर गांव-गांव में जाकर पराली का प्रबंधन करने से संबंधित योजनाओं की जानकारी देंगे। इस मौके पर बीडीपीओ सुमित बख्शी, नायब तहसीलदार भारती, खंड कृषि अधिकारी संतोष कुमार सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।
एसीबी के कार्यवाहक महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि एसीबी की विशेष अनुसंधान इकाई जयपुर को परिवादी ने शिकायत दी थी। इसमें बताया कि उसके विरूद्ध मादक पदार्थ तस्करी के मामले में गिरफ्तार नहीं करने और मदद करने की एवज में एएसपी दिव्या मित्तल ने दलाल सुमीत कुमार के माध्यम से दो करोड़ रुपए मांगकर परेशान किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया कि एसओजी एएसपी दिव्या मित्तल के दलाल ने फोन पर उदयपुर बुलाया। वहां दिव्या मित्तल के रिसोर्ट और फार्म हाउस में दलाल ने डरा धमकाकर दो करोड़ रुपए मांगे। इस मामले में जयपुर के एएसपी बजरंग सिंह शेखावत के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन किया गया। इसमें दिव्या मित्तल और दलाल सुमीत के दो करोड़ रुपए मांगने की बात सत्यापित हुई। बातचीत में परिवादी के अनुनय विनय करने पर पहले एक करोड़ रुपए और फिर 50 लाख रुपए देने पर सहमति बनी। 25 लाख रुपए पहली किश्त अभी और दूसरी किश्त परिवादी की बहन की शादी के बाद देने की बात हुई। एसीबी की कार्रवाई की भनक लगने पर आरोपियों ने रिश्वत की राशि ग्रहण नहीं की। इसके बाद एसीबी में शिकायत की गई थी। इसके बाद एसीबी की टीम दिव्या मित्तल के घर पहुंची। शिकायत का वेरिफिकेशन करवाया गया। दलाल पैसे लेने के लिए आ भी गया था, लेकिन ट्रेप की कार्रवाई नहीं हो सकी। कोर्ट से वारंट लेने के बाद 5 जगहों पर कार्रवाई की जा रही है। एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में आरोपी से पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों की संलीप्तता के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। शिकायतकर्ता ने बताया- दिव्या मित्तल के लिए दलाल को पहली किस्त 25 लाख रुपए देने गया था। जो शक होने के कारण फरार हो गया था। इधर, एसीबी ने रंगे हाथों पकड़ने के लिए ट्रैप का इंतजाम भी कर लिया था, लेकिन फेल हो गया। एसीबी को घूस की डिमांड की बात सही होने की जानकारी मिली तो कोर्ट के आदेश से सर्च वारंट जारी करवाया। अजमेर में जयपुर रोड पर स्थित एआरजी सोसायटी में दिव्या के फ्लैट में खुद दिव्या के सामने सर्च कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अजमेर के अलावा जयपुर, उदयपुर और झुंझुनूं में 5 जगहों पर छापा चल रहा है। आपको बता दें कि कि मई 2021 में दिव्या मित्तल ने कुल 16 करोड़ रुपए से ज्यादा की नशीली दवाइयां पकड़ी थीं। इसमें जयपुर में 5. 5 करोड़ और अजमेर में दो बार कार्रवाई कर 11 करोड़ की दवाइयां जब्त की जा चुकी हैं। यह सभी दवाइयां विभिन्न ब्रांड की थी, लेकिन अधिकांश में साल्ट ट्रामोडोल है।
एसीबी के कार्यवाहक महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि एसीबी की विशेष अनुसंधान इकाई जयपुर को परिवादी ने शिकायत दी थी। इसमें बताया कि उसके विरूद्ध मादक पदार्थ तस्करी के मामले में गिरफ्तार नहीं करने और मदद करने की एवज में एएसपी दिव्या मित्तल ने दलाल सुमीत कुमार के माध्यम से दो करोड़ रुपए मांगकर परेशान किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया कि एसओजी एएसपी दिव्या मित्तल के दलाल ने फोन पर उदयपुर बुलाया। वहां दिव्या मित्तल के रिसोर्ट और फार्म हाउस में दलाल ने डरा धमकाकर दो करोड़ रुपए मांगे। इस मामले में जयपुर के एएसपी बजरंग सिंह शेखावत के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन किया गया। इसमें दिव्या मित्तल और दलाल सुमीत के दो करोड़ रुपए मांगने की बात सत्यापित हुई। बातचीत में परिवादी के अनुनय विनय करने पर पहले एक करोड़ रुपए और फिर पचास लाख रुपए देने पर सहमति बनी। पच्चीस लाख रुपए पहली किश्त अभी और दूसरी किश्त परिवादी की बहन की शादी के बाद देने की बात हुई। एसीबी की कार्रवाई की भनक लगने पर आरोपियों ने रिश्वत की राशि ग्रहण नहीं की। इसके बाद एसीबी में शिकायत की गई थी। इसके बाद एसीबी की टीम दिव्या मित्तल के घर पहुंची। शिकायत का वेरिफिकेशन करवाया गया। दलाल पैसे लेने के लिए आ भी गया था, लेकिन ट्रेप की कार्रवाई नहीं हो सकी। कोर्ट से वारंट लेने के बाद पाँच जगहों पर कार्रवाई की जा रही है। एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में आरोपी से पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों की संलीप्तता के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। शिकायतकर्ता ने बताया- दिव्या मित्तल के लिए दलाल को पहली किस्त पच्चीस लाख रुपए देने गया था। जो शक होने के कारण फरार हो गया था। इधर, एसीबी ने रंगे हाथों पकड़ने के लिए ट्रैप का इंतजाम भी कर लिया था, लेकिन फेल हो गया। एसीबी को घूस की डिमांड की बात सही होने की जानकारी मिली तो कोर्ट के आदेश से सर्च वारंट जारी करवाया। अजमेर में जयपुर रोड पर स्थित एआरजी सोसायटी में दिव्या के फ्लैट में खुद दिव्या के सामने सर्च कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अजमेर के अलावा जयपुर, उदयपुर और झुंझुनूं में पाँच जगहों पर छापा चल रहा है। आपको बता दें कि कि मई दो हज़ार इक्कीस में दिव्या मित्तल ने कुल सोलह करोड़ रुपए से ज्यादा की नशीली दवाइयां पकड़ी थीं। इसमें जयपुर में पाँच. पाँच करोड़ और अजमेर में दो बार कार्रवाई कर ग्यारह करोड़ की दवाइयां जब्त की जा चुकी हैं। यह सभी दवाइयां विभिन्न ब्रांड की थी, लेकिन अधिकांश में साल्ट ट्रामोडोल है।
हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh) में मानसून की बारिश (Rain) ने इन दिनों जमकर कहर बरपाया है। राज्य के कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है और इससे खासा नुकसान भी हो रहा है। हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh) में मानसून की बारिश (Rain) ने इन दिनों जमकर कहर बरपाया है। राज्य के कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है और इससे खासा नुकसान भी हो रहा है। सोलन जिले (Solan district) की बात करें तो यहां पर कई जगहों पर भूस्खलन (Landslide) हुआ है। लैंडस्लाइड के चलते कई सड़क बंद हैं। कालका-शिमला NH-5 पर बुधवार सुबह के समय कंडाघाट के पास अचानक पहाड़ी दरक गई। अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। गनीमत यह रही इस इस दौरान कोई वाहन नहीं आ-जा रहा था। पहाड़ी दरकने से शिमला-सोलन मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई है। इन दिनों कंडाघाट के साथ लगते डेढ़घराट में फोरलेन निर्माण का कार्य चला हुआ है। पहाड़ी की कटिंग के दौरान फोरलेन निर्माता कंपनी के कर्मचारी और पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद हैं। फिलहाल वाहनों के एक तरफ से निकाला जा रहा है, ताकि जाम को खोला जा सके। करीब एक घंटे के बाद फोरलेन निर्माता कम्पनी के कर्मचारियों ने सड़क से मलबा हटाकर दोनों ओर से ट्रैफिक खोलना शुरू कर दिया है। फिलहाल दोनों तरफ से गाड़ियों को निकालने की कोशिश की जा रही है। बारिश के मौसम को देखते हुए अभी भी यहां पहाड़ी के दरकने की संभावना बनी हुई है। वहीं, डीसी सोलन कृतिका कुल्हारी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को सड़क के बाधित होने पर इसे जल्दी बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। उधर मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग ने चंबा, कांगड़ा शिमला, सोलन, हमीरपुर, मंडी, सिरमौर जिलों भारी बारिश की आशंका जताई है। इन जिलों में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश ने इन दिनों जमकर कहर बरपाया है। राज्य के कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है और इससे खासा नुकसान भी हो रहा है। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश ने इन दिनों जमकर कहर बरपाया है। राज्य के कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है और इससे खासा नुकसान भी हो रहा है। सोलन जिले की बात करें तो यहां पर कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। लैंडस्लाइड के चलते कई सड़क बंद हैं। कालका-शिमला NH-पाँच पर बुधवार सुबह के समय कंडाघाट के पास अचानक पहाड़ी दरक गई। अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। गनीमत यह रही इस इस दौरान कोई वाहन नहीं आ-जा रहा था। पहाड़ी दरकने से शिमला-सोलन मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई है। इन दिनों कंडाघाट के साथ लगते डेढ़घराट में फोरलेन निर्माण का कार्य चला हुआ है। पहाड़ी की कटिंग के दौरान फोरलेन निर्माता कंपनी के कर्मचारी और पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद हैं। फिलहाल वाहनों के एक तरफ से निकाला जा रहा है, ताकि जाम को खोला जा सके। करीब एक घंटे के बाद फोरलेन निर्माता कम्पनी के कर्मचारियों ने सड़क से मलबा हटाकर दोनों ओर से ट्रैफिक खोलना शुरू कर दिया है। फिलहाल दोनों तरफ से गाड़ियों को निकालने की कोशिश की जा रही है। बारिश के मौसम को देखते हुए अभी भी यहां पहाड़ी के दरकने की संभावना बनी हुई है। वहीं, डीसी सोलन कृतिका कुल्हारी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को सड़क के बाधित होने पर इसे जल्दी बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। उधर मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग ने चंबा, कांगड़ा शिमला, सोलन, हमीरपुर, मंडी, सिरमौर जिलों भारी बारिश की आशंका जताई है। इन जिलों में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया।
टॉप अदाकारा अनुष्का शर्मा की त्वचा देखने में मलाई जैसी लगती है। वह अपने शरीर को भी काफी फिट रखती हैं। उनकी त्वचा बहुत ग्लोइंग नजर आती है। अनुष्का जो खास ब्यूटी रिजीम फॉलो करती हैं, वह है अपनी त्वचा को ठीक ढंग से क्लिंज करना। वह सनस्क्रीन लोशन भी लगाती हैं। इतना ही नहीं, अनुष्का नीम फेस पैक भी लगाती हैं, जिससे रोजाना बाहर आने-जाने से त्वचा को धूल-गंदगी और कीटाणु से होने वाले नुकसान, मुंहासों आदि से बचा जा सके। आलिया भट्ट की त्वचा बहुत ही सॉफ्ट और स्मूद नजर आती है। आपको बता दें, उनका ब्यूटी रिजीम बहुत साधारण है। आलिया को मुल्तानी मिट्टी से बना फेस पैक लगाना पसंद है। वह सोकर उठने के बाद अपनी सूजी आंखों पर कुछ देर बर्फ के टुकड़े से सिकाई करती हैं। कैटरीना कैफ कितनी भी शूटिंग से थकी हुई क्यों ना हों, लेकिन वह अपनी त्वचा की केयर करना कभी नहीं मिस करती हैं। बिजी होने के बाद भी वह चेहरे से मेकअप हटाकर ही सोती हैं। रात में सोने से पहले कैट चेहरे की क्लीनिंग करती हैं। अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए कैट रोजाना 6-8 गिलास पानी जरूर पीती हैं। करीना कपूर भी अपनी त्वचा का खास ख्याल रखने के लिए घरेलू नुस्खे ही अपनाती हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर कुछ टिप्स शेयर किए हैं। बेबो की फ्लॉलेस स्किन का राज है, होममेड ब्यूटी फेस मास्क। आप भी करीना का यह गोपनीय फेस मास्क ट्राई कर सकते हैं। इसके लिए आपको चंदन, विटामिन ई, हल्दी पाउडर, दूध चाहिए होगा। इन सभी को एक साथ मिलाकर चेहरे पर 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर चेहरे को पानी से धो लें। आपका चेहरा चमक उठेगा।
टॉप अदाकारा अनुष्का शर्मा की त्वचा देखने में मलाई जैसी लगती है। वह अपने शरीर को भी काफी फिट रखती हैं। उनकी त्वचा बहुत ग्लोइंग नजर आती है। अनुष्का जो खास ब्यूटी रिजीम फॉलो करती हैं, वह है अपनी त्वचा को ठीक ढंग से क्लिंज करना। वह सनस्क्रीन लोशन भी लगाती हैं। इतना ही नहीं, अनुष्का नीम फेस पैक भी लगाती हैं, जिससे रोजाना बाहर आने-जाने से त्वचा को धूल-गंदगी और कीटाणु से होने वाले नुकसान, मुंहासों आदि से बचा जा सके। आलिया भट्ट की त्वचा बहुत ही सॉफ्ट और स्मूद नजर आती है। आपको बता दें, उनका ब्यूटी रिजीम बहुत साधारण है। आलिया को मुल्तानी मिट्टी से बना फेस पैक लगाना पसंद है। वह सोकर उठने के बाद अपनी सूजी आंखों पर कुछ देर बर्फ के टुकड़े से सिकाई करती हैं। कैटरीना कैफ कितनी भी शूटिंग से थकी हुई क्यों ना हों, लेकिन वह अपनी त्वचा की केयर करना कभी नहीं मिस करती हैं। बिजी होने के बाद भी वह चेहरे से मेकअप हटाकर ही सोती हैं। रात में सोने से पहले कैट चेहरे की क्लीनिंग करती हैं। अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए कैट रोजाना छः-आठ गिलास पानी जरूर पीती हैं। करीना कपूर भी अपनी त्वचा का खास ख्याल रखने के लिए घरेलू नुस्खे ही अपनाती हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर कुछ टिप्स शेयर किए हैं। बेबो की फ्लॉलेस स्किन का राज है, होममेड ब्यूटी फेस मास्क। आप भी करीना का यह गोपनीय फेस मास्क ट्राई कर सकते हैं। इसके लिए आपको चंदन, विटामिन ई, हल्दी पाउडर, दूध चाहिए होगा। इन सभी को एक साथ मिलाकर चेहरे पर पंद्रह-बीस मिनट के लिए छोड़ दें। फिर चेहरे को पानी से धो लें। आपका चेहरा चमक उठेगा।
भरतपुरः राजस्थान के भरतपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 2 महीने से एक किराये के मकान में रहने वाले शख्स ने खुद को फर्जी IAS के तौर पर पेश किया और मकान मालिक से रुपए भी ठग लिए। इसके अलावा इस शख्स ने मकान मालिक से उसकी बेटी का शादी के लिए हाथ भी मांगा। जब मकान मालिक को शक हुआ तो उसने शिकायत दर्ज करवाई और फिर ये फर्जी IAS पकड़ा गया। इस फर्जी IAS का 13 अप्रैल को भरतपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन भी स्वागत कर चुके हैं। ये शख्स शहर में 2 महीने से किराए के मकान में था और IAS बनने का झांसा देकर मकान मालिक की लड़की से शादी करना चाहता था। भरतपुर की मथुरा गेट थाना पुलिस ने इस फर्जी IAS को गिरफ्तार कर लिया है। इस फर्जी IAS अधिकारी की पहचान सुरजीत सिंह के रूप में हुई है। उसकी उम्र 27 साल है और वह धौलपुर जिले के बाड़ी थाना इलाके में खेमरी गांव का रहने वाला है। सुरजीत भरतपुर के एक मोहल्ले में करीब 2 महीने से किराए पर रह रहा था। 15 दिन पहले सुरजीत सिंह ने मकान मालिक को कहा कि उसका IAS में चयन हो गया है और वह कलेक्टर बन गया है। जिसके बाद उसने मालिक मालिक को बताया कि वह उनकी लड़की से शादी करना चाहता है। इसी दौरान 13 अप्रैल को मोहल्ले में बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में UIT सचिव कमल राम मीणा, कलेक्टर आलोक रंजन, मेयर अभिजीत मौजूद थे। कार्यक्रम में कलेक्टर आलोक रंजन ने फर्जी IAS का स्वागत भी किया। जिसके बाद मकान मालिक को सुरजीत सिंह पर शक हुआ और उसने उसके चयन होने के कागजों के बारे में पूछा, लेकिन सुरजीत सिंह मकान मालिक को स्पष्ट जबाब नहीं दे पाया। मकान मालिक का शक गहराता गया और उसने सुरजीत के गांव में पता करवाया तो सामने आया कि सुरजीत पूरी तरह फर्जी है। जिसके बाद मकान मालिक ने मथुरा गेट थाने में फर्जी IAS के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस ने मकान मालिक के घर से ही फर्जी IAS को गिरफ्तार कर लिया। मकान मालिक ने बताया कि सुरजीत ने IAS में चयन होने की बात कहकर उससे 2 लाख 75 हजार रुपए भी हड़प लिए। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। (भरतपुर से कपिल चीमा की रिपोर्ट) ये भी पढ़ेंः
भरतपुरः राजस्थान के भरतपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो महीने से एक किराये के मकान में रहने वाले शख्स ने खुद को फर्जी IAS के तौर पर पेश किया और मकान मालिक से रुपए भी ठग लिए। इसके अलावा इस शख्स ने मकान मालिक से उसकी बेटी का शादी के लिए हाथ भी मांगा। जब मकान मालिक को शक हुआ तो उसने शिकायत दर्ज करवाई और फिर ये फर्जी IAS पकड़ा गया। इस फर्जी IAS का तेरह अप्रैल को भरतपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन भी स्वागत कर चुके हैं। ये शख्स शहर में दो महीने से किराए के मकान में था और IAS बनने का झांसा देकर मकान मालिक की लड़की से शादी करना चाहता था। भरतपुर की मथुरा गेट थाना पुलिस ने इस फर्जी IAS को गिरफ्तार कर लिया है। इस फर्जी IAS अधिकारी की पहचान सुरजीत सिंह के रूप में हुई है। उसकी उम्र सत्ताईस साल है और वह धौलपुर जिले के बाड़ी थाना इलाके में खेमरी गांव का रहने वाला है। सुरजीत भरतपुर के एक मोहल्ले में करीब दो महीने से किराए पर रह रहा था। पंद्रह दिन पहले सुरजीत सिंह ने मकान मालिक को कहा कि उसका IAS में चयन हो गया है और वह कलेक्टर बन गया है। जिसके बाद उसने मालिक मालिक को बताया कि वह उनकी लड़की से शादी करना चाहता है। इसी दौरान तेरह अप्रैल को मोहल्ले में बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में UIT सचिव कमल राम मीणा, कलेक्टर आलोक रंजन, मेयर अभिजीत मौजूद थे। कार्यक्रम में कलेक्टर आलोक रंजन ने फर्जी IAS का स्वागत भी किया। जिसके बाद मकान मालिक को सुरजीत सिंह पर शक हुआ और उसने उसके चयन होने के कागजों के बारे में पूछा, लेकिन सुरजीत सिंह मकान मालिक को स्पष्ट जबाब नहीं दे पाया। मकान मालिक का शक गहराता गया और उसने सुरजीत के गांव में पता करवाया तो सामने आया कि सुरजीत पूरी तरह फर्जी है। जिसके बाद मकान मालिक ने मथुरा गेट थाने में फर्जी IAS के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस ने मकान मालिक के घर से ही फर्जी IAS को गिरफ्तार कर लिया। मकान मालिक ने बताया कि सुरजीत ने IAS में चयन होने की बात कहकर उससे दो लाख पचहत्तर हजार रुपए भी हड़प लिए। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। ये भी पढ़ेंः
यह मेरी मौलिक रचना नहीं है....... किन्तु मुझे बहुत अच्छा लगा इसलिए मैं आपसब से शेयर करना चाहूँगा....... सैमसन की कहानी तो आपने सुनी होगी. अगर नहीं सुनी तो अब सुनिए और सोचिए ये आपको किसकी याद दिलाती है. मन्नतों के बाद पैदा हुआ ये हीरो कईयों के लिए भगवान समान था. परम शक्तिशाली योद्धा जो सिर्फ हाथों से शेरों का संहार कर सकता था. ईश्वर ने एक शर्त पर उसे ये ताकत दी कि सैमसन कभी भी अपने बालों को नहीं काटेगा. सैमसन भगवान के बताए रास्ते पर चलता रहा. वो एक बार में सैकड़ों दुश्मनों को धूल चटा देता. युद्ध की अनूठी रणनीति से गांव के गांव तबाह कर देता. फिर उसे डिलाइला नाम की एक लड़की से प्यार हो गया और जल्द ही दोनों ने शादी कर ली. पर दुश्मनों ने उसकी पत्नी को सिक्कों से खरीद लिया और काम दिया सैमसन की अकूत शक्ति का राज़ जानने का. पहले कुछ दिन तो सैमसन अपनी पत्नी को टालता रहा पर बहुत मान मनौव्वल के बाद उसने सच बता दिया. उस रात डिलाइला ने सैमसन के सारे बाल मुंडवा दिए. सैमसन की पूरी शक्ति खत्म हो गई और उसे कैद कर लिया गया. सैमसन ने प्रायश्चित्त किया. अपने बाल दोबारा उगाए और फिर ईश्वर से बस एक बार के लिए अपनी शक्ति वापस मांग ली.
यह मेरी मौलिक रचना नहीं है....... किन्तु मुझे बहुत अच्छा लगा इसलिए मैं आपसब से शेयर करना चाहूँगा....... सैमसन की कहानी तो आपने सुनी होगी. अगर नहीं सुनी तो अब सुनिए और सोचिए ये आपको किसकी याद दिलाती है. मन्नतों के बाद पैदा हुआ ये हीरो कईयों के लिए भगवान समान था. परम शक्तिशाली योद्धा जो सिर्फ हाथों से शेरों का संहार कर सकता था. ईश्वर ने एक शर्त पर उसे ये ताकत दी कि सैमसन कभी भी अपने बालों को नहीं काटेगा. सैमसन भगवान के बताए रास्ते पर चलता रहा. वो एक बार में सैकड़ों दुश्मनों को धूल चटा देता. युद्ध की अनूठी रणनीति से गांव के गांव तबाह कर देता. फिर उसे डिलाइला नाम की एक लड़की से प्यार हो गया और जल्द ही दोनों ने शादी कर ली. पर दुश्मनों ने उसकी पत्नी को सिक्कों से खरीद लिया और काम दिया सैमसन की अकूत शक्ति का राज़ जानने का. पहले कुछ दिन तो सैमसन अपनी पत्नी को टालता रहा पर बहुत मान मनौव्वल के बाद उसने सच बता दिया. उस रात डिलाइला ने सैमसन के सारे बाल मुंडवा दिए. सैमसन की पूरी शक्ति खत्म हो गई और उसे कैद कर लिया गया. सैमसन ने प्रायश्चित्त किया. अपने बाल दोबारा उगाए और फिर ईश्वर से बस एक बार के लिए अपनी शक्ति वापस मांग ली.
धर्म डेस्कः वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में बहुत अधिक प्रभाव डालता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति वास्तु शास्त्र का पालन करता है। उसके जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती है। अगर परिवार में क्लेश बढ़ गए हैं या धन की कमी हो रही है तो वास्तु शास्त्र के उपाय मददगार सिद्ध होते हैं। हर समस्या में वास्तुशास्त्र आपका मददगार साबित हो सकता है। - जानिए, आखिर एक रात को क्यों जिंदा हो गए थे कुरुक्षेत्र में मारे गए शुरवीर? वास्तुशास्त्र में हमारे जीवन से सबंधित कई ऐसे बातें बताई है। जिनका पालन करने से आपके घर में सभी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है। जो कि हमें सही दिशा में जीवन जीने की दिशा प्रदान करती है। ऐसे ही कुछ नियम शारीरिक संबंध को लेकर बताएंगे। पति-पति के बीच संबंध बुरे नहीं हैं, अपितु पवित्र माने गए हैं। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र ने इन्हें विशेष नियमों में बांधा है। जानिए वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसी कौन सी जगह है। जहां पर शारिरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए, नहीं तो आपके लिए नुकसानदेय सबादित हो सकते है। जानिए ऐसी जगहों के बारें में। शास्त्रों के अनुसार कभी भी नहीं के पास संबंध नहीं बनाना चाहिए, नहीं तो ये झगड़े की वजह बन जाती है। इसका उदाहर आपको ऋषि पराशर एवं सत्यवती के रिश्ते से समझ आ जाएगी। जिसने महाभारत युद्ध को जन्म दिया था। कभी भी अग्नि के पास शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। अग्नि को देवता माना गया है। जो कि सबसे पवित्र मानी जाती है। इसके करीब संबंध बनाना महापाप माना गया है।
धर्म डेस्कः वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में बहुत अधिक प्रभाव डालता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति वास्तु शास्त्र का पालन करता है। उसके जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती है। अगर परिवार में क्लेश बढ़ गए हैं या धन की कमी हो रही है तो वास्तु शास्त्र के उपाय मददगार सिद्ध होते हैं। हर समस्या में वास्तुशास्त्र आपका मददगार साबित हो सकता है। - जानिए, आखिर एक रात को क्यों जिंदा हो गए थे कुरुक्षेत्र में मारे गए शुरवीर? वास्तुशास्त्र में हमारे जीवन से सबंधित कई ऐसे बातें बताई है। जिनका पालन करने से आपके घर में सभी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है। जो कि हमें सही दिशा में जीवन जीने की दिशा प्रदान करती है। ऐसे ही कुछ नियम शारीरिक संबंध को लेकर बताएंगे। पति-पति के बीच संबंध बुरे नहीं हैं, अपितु पवित्र माने गए हैं। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र ने इन्हें विशेष नियमों में बांधा है। जानिए वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसी कौन सी जगह है। जहां पर शारिरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए, नहीं तो आपके लिए नुकसानदेय सबादित हो सकते है। जानिए ऐसी जगहों के बारें में। शास्त्रों के अनुसार कभी भी नहीं के पास संबंध नहीं बनाना चाहिए, नहीं तो ये झगड़े की वजह बन जाती है। इसका उदाहर आपको ऋषि पराशर एवं सत्यवती के रिश्ते से समझ आ जाएगी। जिसने महाभारत युद्ध को जन्म दिया था। कभी भी अग्नि के पास शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। अग्नि को देवता माना गया है। जो कि सबसे पवित्र मानी जाती है। इसके करीब संबंध बनाना महापाप माना गया है।
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जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र के अंतर्गत बिजली बिल की राशि आरटीजीएस करने में हुई धांधली में प्रबंधन ने मैदानी अमले से रिपोर्ट तलब की है। तीन दिन में पूरी जानकारी मांगी गई है। हालांकि अधिकारी भी अपना जवाब बनाने में जुटे हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि अधिकारी पूरे मामले में अनजान बने हुए हैं। सतना में मामला उजागर होने के कई दिन बाद भी गड़बड़ी किस वजह से हुई यह भी नहीं साफ हो पाया है। इधर, कंपनी स्तर पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है। ज्ञात हो कि सतना में 54 उपभोक्ताओं ने आटीजीएस के जरिए बिल भुगतान किया। जिसका यूटीआर नंबर कई ऐसे उपभोक्ताओं ने अपने बिल जमा करने में किया जिन्होंने आरटीजीएस किया ही नहीं था। यह मामला जब सामने आया तो जांच शुरू हुई। कंपनी के अफसरों का दावा है कि आनलाइन पूरी प्रक्रिया होने से गड़बड़ी होने की संभावना नहीं है, जबकि असल उपभोक्ता की बजाय बिना पैसे भरे ही कुछ उपभोक्ताओं के बिल पर यूटीआर नंबर पंच हुआ है। कियोस्क पर भी संदेह- कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि कामन सर्विस सेंटर से भी यूटीआर नंबर लीक हुआ है। कई कियोस्क में आरटीजीएस के जरिए बिल जमा करने की सुविधा है। आशंका जाहिर की जा रही है कि कियोस्क संचालकों ने आरटीजीएस की प्रक्रिया के बाद यूटीआर नंबर उपभोक्ता को दिया और बाद में उस नंबर को अन्य उपभोक्ता के बिल जमा करने में उपयोग किया। आरटीजीएस गड़बड़ी मामले की जांच अब केवल सतना तक ही सीमित नहीं रह गई है। बिजली भुगतान में अब पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र के अंतर्गत सभी भुगतान की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसलिए पूरे कंपनी क्षेत्र के डेटा को बुलाया गया है। कंपनी प्रबंधन को संदेश है कि सतना की तरह ही अन्य जिलों में भी आरटीजीएस से बिल जमा करने में धांधली हुई है। जानकारी के अनुसार बिजली कंपनी आरटीजीएस भुगतान प्रोसेस में बदलाव करने की योजना है। अब इस प्रणाली से भुगतान के लिए उपभोक्ताओं को स्वयं भुगतान करने के विकल्प को जोड़ दिया गया है ताकि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियों से बचा जा सके। उपभोक्ता बैंक में भुगतान के बाद स्वयं ही बैंक की जानकारी को आन प्रोसेस में भर सकेंगे। इसको लेकर बिजली अधिकारियों की बुधवार को एक बैठक में हुई। इसमें बहुत सी जानकारियां दी गई।
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र के अंतर्गत बिजली बिल की राशि आरटीजीएस करने में हुई धांधली में प्रबंधन ने मैदानी अमले से रिपोर्ट तलब की है। तीन दिन में पूरी जानकारी मांगी गई है। हालांकि अधिकारी भी अपना जवाब बनाने में जुटे हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि अधिकारी पूरे मामले में अनजान बने हुए हैं। सतना में मामला उजागर होने के कई दिन बाद भी गड़बड़ी किस वजह से हुई यह भी नहीं साफ हो पाया है। इधर, कंपनी स्तर पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है। ज्ञात हो कि सतना में चौवन उपभोक्ताओं ने आटीजीएस के जरिए बिल भुगतान किया। जिसका यूटीआर नंबर कई ऐसे उपभोक्ताओं ने अपने बिल जमा करने में किया जिन्होंने आरटीजीएस किया ही नहीं था। यह मामला जब सामने आया तो जांच शुरू हुई। कंपनी के अफसरों का दावा है कि आनलाइन पूरी प्रक्रिया होने से गड़बड़ी होने की संभावना नहीं है, जबकि असल उपभोक्ता की बजाय बिना पैसे भरे ही कुछ उपभोक्ताओं के बिल पर यूटीआर नंबर पंच हुआ है। कियोस्क पर भी संदेह- कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि कामन सर्विस सेंटर से भी यूटीआर नंबर लीक हुआ है। कई कियोस्क में आरटीजीएस के जरिए बिल जमा करने की सुविधा है। आशंका जाहिर की जा रही है कि कियोस्क संचालकों ने आरटीजीएस की प्रक्रिया के बाद यूटीआर नंबर उपभोक्ता को दिया और बाद में उस नंबर को अन्य उपभोक्ता के बिल जमा करने में उपयोग किया। आरटीजीएस गड़बड़ी मामले की जांच अब केवल सतना तक ही सीमित नहीं रह गई है। बिजली भुगतान में अब पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र के अंतर्गत सभी भुगतान की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसलिए पूरे कंपनी क्षेत्र के डेटा को बुलाया गया है। कंपनी प्रबंधन को संदेश है कि सतना की तरह ही अन्य जिलों में भी आरटीजीएस से बिल जमा करने में धांधली हुई है। जानकारी के अनुसार बिजली कंपनी आरटीजीएस भुगतान प्रोसेस में बदलाव करने की योजना है। अब इस प्रणाली से भुगतान के लिए उपभोक्ताओं को स्वयं भुगतान करने के विकल्प को जोड़ दिया गया है ताकि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ियों से बचा जा सके। उपभोक्ता बैंक में भुगतान के बाद स्वयं ही बैंक की जानकारी को आन प्रोसेस में भर सकेंगे। इसको लेकर बिजली अधिकारियों की बुधवार को एक बैठक में हुई। इसमें बहुत सी जानकारियां दी गई।
तिहाड़ जेल में बंद जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्र नेता सफूरा जरगर शाहीनबाग दिल्ली दंगों के मामले मे बंद हैं। बीते दिनों सफूरा जरगर की प्रेगनेंसी की बात करते हुए एक विशेष वर्ग ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उसके बाद सफूरा जरगर के बारे में ट्विटर यूजर डॉक्टर जेली ने ट्वीट किया कि उन्हें किसने कहा था कि वो कंडोम के बिना सेक्स करें? इसके बाद से जेली के इनबॉक्स में अपशब्दों की बाढ़ सी गई। बता दें कि सलमान निजामी ने सफूरा जरगर को एक्टिविस्ट बताते हुए ट्वीट किया था कि वो प्रेगनेंसी के दौरान और रमजान के महीने में जेल में हैं जबकि कपिल मिश्रा जैसे 'घृणा फैलाने वाले लोग' खुले घूम रहे हैं। उन्होंने लिखा था कि भारत में मुस्लिम होना ही अपराध है, सरकार को कुछ तो शर्म करना चाहिए। सलमान निजामी सहित अन्य इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी सफूरा जरगर को जेल से रिहा करने की माँग की थी। इस पर डॉक्टर जेली ने पूछा था कि उन्होंने बिना कंडोम का प्रयोग किए सेक्स किया ही क्यों? उनके इस ट्वीट के बाद भारत में इसके बाद खेल शुरू हुआ फिर उनके इस्लामी कट्टरपंथी घुस आए। मिली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कादरी नायड नामक व्यक्ति ने अपशब्द भी कह डाले तो मोहम्मद मुहीउद्दीन नामक यूज़र ने ने लिखा कि तुम डॉक्टर बनने लायक नहीं हो। अज़हरुद्दीन ने तो यहाँ तक लिख दिया कि काश आपके पैरेन्ट्स ने भी सेक्स करते वक़्त कंडोम का प्रयोग किया होता। हालांकि यह सब सोशल मीडिया में वायरल पोस्ट है पर एक महिला की निजी जीवन की चीजों को इस तरह प्रसारित और प्रचारित नहीं करना चाहिए यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
तिहाड़ जेल में बंद जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्र नेता सफूरा जरगर शाहीनबाग दिल्ली दंगों के मामले मे बंद हैं। बीते दिनों सफूरा जरगर की प्रेगनेंसी की बात करते हुए एक विशेष वर्ग ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उसके बाद सफूरा जरगर के बारे में ट्विटर यूजर डॉक्टर जेली ने ट्वीट किया कि उन्हें किसने कहा था कि वो कंडोम के बिना सेक्स करें? इसके बाद से जेली के इनबॉक्स में अपशब्दों की बाढ़ सी गई। बता दें कि सलमान निजामी ने सफूरा जरगर को एक्टिविस्ट बताते हुए ट्वीट किया था कि वो प्रेगनेंसी के दौरान और रमजान के महीने में जेल में हैं जबकि कपिल मिश्रा जैसे 'घृणा फैलाने वाले लोग' खुले घूम रहे हैं। उन्होंने लिखा था कि भारत में मुस्लिम होना ही अपराध है, सरकार को कुछ तो शर्म करना चाहिए। सलमान निजामी सहित अन्य इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी सफूरा जरगर को जेल से रिहा करने की माँग की थी। इस पर डॉक्टर जेली ने पूछा था कि उन्होंने बिना कंडोम का प्रयोग किए सेक्स किया ही क्यों? उनके इस ट्वीट के बाद भारत में इसके बाद खेल शुरू हुआ फिर उनके इस्लामी कट्टरपंथी घुस आए। मिली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कादरी नायड नामक व्यक्ति ने अपशब्द भी कह डाले तो मोहम्मद मुहीउद्दीन नामक यूज़र ने ने लिखा कि तुम डॉक्टर बनने लायक नहीं हो। अज़हरुद्दीन ने तो यहाँ तक लिख दिया कि काश आपके पैरेन्ट्स ने भी सेक्स करते वक़्त कंडोम का प्रयोग किया होता। हालांकि यह सब सोशल मीडिया में वायरल पोस्ट है पर एक महिला की निजी जीवन की चीजों को इस तरह प्रसारित और प्रचारित नहीं करना चाहिए यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
Coal scam case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी (33) मध्य दिल्ली के जाम नगर हाउस स्थित केन्द्रीय एजेंसी के कार्यालय पहुंचे। Coal scam case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कोयला घोटाला मामले में सोमवार को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। ईडी अभिषेक बनर्जी से मनी लॉन्ड्रिंग के केस में पूछताछ कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को उनकी पत्नी रुजीरा के साथ एक कथित कोयला घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। हालांकि, रुजीरा ने ईडी से कोलकाता में अधिकारियों के सामने पेश होने की अनुमति देने का आग्रह किया, क्योंकि उन्होंने कोविड -19 के कारण राष्ट्रीय राजधानी की यात्रा करने की अनिच्छा व्यक्त की थी। अभिषेक बनर्जी ने रविवार को कहा था कि अगर कोई केंद्रीय एजेंसी किसी भी अवैध लेनदेन में उनकी संलिप्तता को सामने ला सकती है तो वह खुद को फांसी पर लटका लेंगे। पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए उन्हें 6 सितंबर को नई दिल्ली में मामले के जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तलब किया गया है। पश्चिम बंगाल में स्थानीय कोयला संचालक अनूप मांझी उर्फ लाला इस अवैध लेन-देन में प्रमुख आरोपी है। ईडी ने दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी इस अवैध लेद-देन से प्राप्त धन के लाभार्थी थे। ईडी ने मामले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उनमें से एक तृणमूल कांग्रेस युवा शाखा के नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा शामिल हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि विनय मिश्रा कुछ समय पहले देश से बाहर चला गया और उसने संभवतः देश की नागरिकता भी त्याग दी है। इसके अलावा इस मामले में निदेशालय ने बांकुड़ा थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्रा को इस साल की शुरुआत में गिरफ्तार किया था। ईडी ने दावा किया था कि मिश्रा बंधुओं ने इस मामले में " कुछ प्रभावशाली लोगों के लिए और खुद के लिए 730 करोड़ रुपये की राशि" प्राप्त की। इस मामले में अनुमानित 1,352 करोड़ रुपये शामिल थे। निदेशालय ने मामले में इस साल मई में आरोप पत्र दाखिल किया था।
Coal scam case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी मध्य दिल्ली के जाम नगर हाउस स्थित केन्द्रीय एजेंसी के कार्यालय पहुंचे। Coal scam case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कोयला घोटाला मामले में सोमवार को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुए। ईडी अभिषेक बनर्जी से मनी लॉन्ड्रिंग के केस में पूछताछ कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को उनकी पत्नी रुजीरा के साथ एक कथित कोयला घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। हालांकि, रुजीरा ने ईडी से कोलकाता में अधिकारियों के सामने पेश होने की अनुमति देने का आग्रह किया, क्योंकि उन्होंने कोविड -उन्नीस के कारण राष्ट्रीय राजधानी की यात्रा करने की अनिच्छा व्यक्त की थी। अभिषेक बनर्जी ने रविवार को कहा था कि अगर कोई केंद्रीय एजेंसी किसी भी अवैध लेनदेन में उनकी संलिप्तता को सामने ला सकती है तो वह खुद को फांसी पर लटका लेंगे। पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए उन्हें छः सितंबर को नई दिल्ली में मामले के जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तलब किया गया है। पश्चिम बंगाल में स्थानीय कोयला संचालक अनूप मांझी उर्फ लाला इस अवैध लेन-देन में प्रमुख आरोपी है। ईडी ने दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी इस अवैध लेद-देन से प्राप्त धन के लाभार्थी थे। ईडी ने मामले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उनमें से एक तृणमूल कांग्रेस युवा शाखा के नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा शामिल हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि विनय मिश्रा कुछ समय पहले देश से बाहर चला गया और उसने संभवतः देश की नागरिकता भी त्याग दी है। इसके अलावा इस मामले में निदेशालय ने बांकुड़ा थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्रा को इस साल की शुरुआत में गिरफ्तार किया था। ईडी ने दावा किया था कि मिश्रा बंधुओं ने इस मामले में " कुछ प्रभावशाली लोगों के लिए और खुद के लिए सात सौ तीस करोड़ रुपये की राशि" प्राप्त की। इस मामले में अनुमानित एक,तीन सौ बावन करोड़ रुपये शामिल थे। निदेशालय ने मामले में इस साल मई में आरोप पत्र दाखिल किया था।
फर्रुखाबाद में संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला की मौत हो गई। उसका शव कमरे में फांसी के फंदे से लटकता मिला। बताया जा रहा है कि महिला का पति बाहर रहता है। घर पर वह अपने ससुर के साथ रहती थी। शुक्रवार शाम को ससुर किसी काम से बाहर गया था। जब वह वापस लौटा तो महिला का शव फांसी के फंदे से लटक रहा था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। शहर के मोहल्ला महलाई में पूजा (25) पत्नी अनूप कुमार ससुर के साथ रहती थी। उसका पति दिल्ली में नौकरी करता है। आस-पड़ोस के लोगों ने बताया शुक्रवार की देर शाम पूजा घर पर अकेली थी। शाम के समय पूजा के साथ ससुर किसी कार्य से बाजार गए थे। वापस लौटने पर काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला इस पर छत से झांक कर देखा तो कमरे में पूजा फांसी के फंदे पर लटक रही थी। उन्होंने बताया दरवाजा तोड़कर उसे फंदे से नीचे उतारा और मामले की जानकारी थाना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। वही पूजा के मायके फिरोजाबाद जनपद के मक्खनपुर थाना क्षेत्र के बिल्सी गढ़ निवास भाई शिवनंदन को दी है। थानाध्यक्ष मऊ दरवाजा ने बताया महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। गले में रस्सी के निशान मिले हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अगर कोई तहरीर मिलेगी तो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। पूजा के भाई शिवनंदन ने फोन पर बताया कि उसकी बहन मानसिक रूप से कमजोर है। इसमें ससुराली जनों का कोई दोष नहीं है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
फर्रुखाबाद में संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला की मौत हो गई। उसका शव कमरे में फांसी के फंदे से लटकता मिला। बताया जा रहा है कि महिला का पति बाहर रहता है। घर पर वह अपने ससुर के साथ रहती थी। शुक्रवार शाम को ससुर किसी काम से बाहर गया था। जब वह वापस लौटा तो महिला का शव फांसी के फंदे से लटक रहा था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। शहर के मोहल्ला महलाई में पूजा पत्नी अनूप कुमार ससुर के साथ रहती थी। उसका पति दिल्ली में नौकरी करता है। आस-पड़ोस के लोगों ने बताया शुक्रवार की देर शाम पूजा घर पर अकेली थी। शाम के समय पूजा के साथ ससुर किसी कार्य से बाजार गए थे। वापस लौटने पर काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला इस पर छत से झांक कर देखा तो कमरे में पूजा फांसी के फंदे पर लटक रही थी। उन्होंने बताया दरवाजा तोड़कर उसे फंदे से नीचे उतारा और मामले की जानकारी थाना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। वही पूजा के मायके फिरोजाबाद जनपद के मक्खनपुर थाना क्षेत्र के बिल्सी गढ़ निवास भाई शिवनंदन को दी है। थानाध्यक्ष मऊ दरवाजा ने बताया महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। गले में रस्सी के निशान मिले हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अगर कोई तहरीर मिलेगी तो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। पूजा के भाई शिवनंदन ने फोन पर बताया कि उसकी बहन मानसिक रूप से कमजोर है। इसमें ससुराली जनों का कोई दोष नहीं है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
IAS Officer Arti Dogra: सफलता किसी की गुलाम नहीं है, इसे कोई भी हासिल कर सकता है, चाहे वो अमीर हो, ग़रीब हो या फिर शारीरिक रूप से असक्षम. वहीं, इतिहास गवाह है कि कठीन परिस्थितियों के बावजूद इंसानों के हैरान करने वाले काम करके दिखाए. अगर आप विश्व के सबसे धनी और सफल इंसानों का इतिहास खंगाले, तो आपको उनकी विषम परिस्थितियों के बारे में भी पता चलेगा, जिनकी सामना कर वो आगे बढ़ें. आइये, अब विस्तार से जानते हैं IAS Officer Arti Dogra के बारे में. IAS Officer Arti Dogra: आरती डोगरा 2006 बैच के राजस्थान कैडर की एक महिला आईएएस ऑफ़िसर हैं. आरती उत्तराखंड के देहरादून शहर से संबंध रखती हैं. उनके पिता का नाम कर्नल राजेंद्र डोगरा है और माता का नाम कुमकुम डोगरा. जानकारी के अनुसार, आरती डोगरा की माता एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं. वहीं, आरती डोगरा अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं. आईएएस आरती डोगरा उन बच्चों से अलग रही हैं, जिनकी हाइट उम्र के साथ सामान्य रूप से बढ़ती है. उनकी हाइट बढ़ नहीं पाई. उनकी हाइट 3-5 फ़ुट बताई जाती है. जन्म के समय डॉक्टर ने उनके माता-पिता को बता दिया था कि आरती की हाइट ज़्यादा नहीं बढ़ पाएगी. कम हाइट की वजह से कई बार लोगों ने उनका मजाक भी बनाया, लेकिन उनके माता-पिता ने अपनी बेटी के पालन-पोषण और शिक्षा में कोई कमी नहीं रखी. आरती डोगरा भी लोगों की बात को नज़रअंदाज़ कर दिया करती थीं. IAS Officer Arti Dogra: मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो जब आरती ग्रेजुएशन के बाद वापस अपने शहर देहरादून आ गईं थी, तो उनकी मुलाक़ात आईएएस ऑफ़िसर मनीषा पवार से हुई थी. आरती उनसे काफ़ी प्रभावित हुई और उन्होंने आईएएस बनने का ठान लिया. उन्होंने 2005 में अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परिक्षा पास की उनकी AIR 56 थी. 2006-2007 की IAS Training के बाद आरती ने सबसे पहले उदयपुर में एडीएम का पदल संभाला. इसके बाद वो अलवर और अजमेर में एसडीम रहीं. इसके बाद उन्होंने 2010 में बूंदी में ज़िला कलेक्टर का पद संभाला. वहीं, इसके बाद वो बीकानेर और अजमेर की ज़िला कलेक्टर रहीं. साथ ही आरती डोगरा जोधपुर डिस्कॉम की प्रबंध निदेशक भी रह चुकी हैं. IAS Officer Arti Dogra: जब आरती डोगरा बीकानेर की ज़िला कलेक्टर थी, तो उन्होंने क़रीब 195 गांवों में 'बंको बिकाणो' अभियान चलाया था, जिसके तहत खुले में शौच न करने की लोगों को प्रेरित किया गया और गांव में पक्के शौचालयों का निर्माण करवाया गया. वहीं, इन शौचालयों की मॉनिटरिंग एक मोबाइल सॉफ़्टवेयर के ज़रिये हुआ करती थी. बता दें कि उन्हें राष्ट्रपति के हाथों से सम्मानित किया जा चुका है.
IAS Officer Arti Dogra: सफलता किसी की गुलाम नहीं है, इसे कोई भी हासिल कर सकता है, चाहे वो अमीर हो, ग़रीब हो या फिर शारीरिक रूप से असक्षम. वहीं, इतिहास गवाह है कि कठीन परिस्थितियों के बावजूद इंसानों के हैरान करने वाले काम करके दिखाए. अगर आप विश्व के सबसे धनी और सफल इंसानों का इतिहास खंगाले, तो आपको उनकी विषम परिस्थितियों के बारे में भी पता चलेगा, जिनकी सामना कर वो आगे बढ़ें. आइये, अब विस्तार से जानते हैं IAS Officer Arti Dogra के बारे में. IAS Officer Arti Dogra: आरती डोगरा दो हज़ार छः बैच के राजस्थान कैडर की एक महिला आईएएस ऑफ़िसर हैं. आरती उत्तराखंड के देहरादून शहर से संबंध रखती हैं. उनके पिता का नाम कर्नल राजेंद्र डोगरा है और माता का नाम कुमकुम डोगरा. जानकारी के अनुसार, आरती डोगरा की माता एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं. वहीं, आरती डोगरा अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं. आईएएस आरती डोगरा उन बच्चों से अलग रही हैं, जिनकी हाइट उम्र के साथ सामान्य रूप से बढ़ती है. उनकी हाइट बढ़ नहीं पाई. उनकी हाइट तीन-पाँच फ़ुट बताई जाती है. जन्म के समय डॉक्टर ने उनके माता-पिता को बता दिया था कि आरती की हाइट ज़्यादा नहीं बढ़ पाएगी. कम हाइट की वजह से कई बार लोगों ने उनका मजाक भी बनाया, लेकिन उनके माता-पिता ने अपनी बेटी के पालन-पोषण और शिक्षा में कोई कमी नहीं रखी. आरती डोगरा भी लोगों की बात को नज़रअंदाज़ कर दिया करती थीं. IAS Officer Arti Dogra: मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो जब आरती ग्रेजुएशन के बाद वापस अपने शहर देहरादून आ गईं थी, तो उनकी मुलाक़ात आईएएस ऑफ़िसर मनीषा पवार से हुई थी. आरती उनसे काफ़ी प्रभावित हुई और उन्होंने आईएएस बनने का ठान लिया. उन्होंने दो हज़ार पाँच में अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परिक्षा पास की उनकी AIR छप्पन थी. दो हज़ार छः-दो हज़ार सात की IAS Training के बाद आरती ने सबसे पहले उदयपुर में एडीएम का पदल संभाला. इसके बाद वो अलवर और अजमेर में एसडीम रहीं. इसके बाद उन्होंने दो हज़ार दस में बूंदी में ज़िला कलेक्टर का पद संभाला. वहीं, इसके बाद वो बीकानेर और अजमेर की ज़िला कलेक्टर रहीं. साथ ही आरती डोगरा जोधपुर डिस्कॉम की प्रबंध निदेशक भी रह चुकी हैं. IAS Officer Arti Dogra: जब आरती डोगरा बीकानेर की ज़िला कलेक्टर थी, तो उन्होंने क़रीब एक सौ पचानवे गांवों में 'बंको बिकाणो' अभियान चलाया था, जिसके तहत खुले में शौच न करने की लोगों को प्रेरित किया गया और गांव में पक्के शौचालयों का निर्माण करवाया गया. वहीं, इन शौचालयों की मॉनिटरिंग एक मोबाइल सॉफ़्टवेयर के ज़रिये हुआ करती थी. बता दें कि उन्हें राष्ट्रपति के हाथों से सम्मानित किया जा चुका है.
ईसाई धर्म में तो प्रभु ईसा ने पग पग पर प्रार्थना के द्वारा ही शक्ति प्राप्त करने का मार्ग बतलाया है। हम किसी कार्य के प्रारम्भ में ईश्वर की प्रार्थना के द्वारा उसकी पूर्ति के लिए शक्ति मांगे, कार्य के अंत में उसका धन्यवाद दें । अपने में त्रुटि का अनुभव करते हुये भी प्रार्थना द्वारा भगवान् से शक्ति पाकर जीवन सफल करें - स्वार्थ के लिये नहीं वरन त्रुटि में शक्ति संचय और भगवान की ही इच्छा पूर्ति के लिए । भगवान् ही हमारा सब कुछ है और हम प्रार्थना द्वारा उसकी कृपा प्राप्त करें । महाभारत के भार से भ्रम में पड़ा हुआ अर्जुन भगवान् की प्रार्थना करता है । त्वमेव माताश्च पिता त्वमेव । त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव ।। त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वम् मम देव देव ।। *:६- सदाचार हमने जननी जन्मभूमि, गुरु, समाज और ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य देखे । इन कर्तव्यों का ठीक २ पालने ही जीवन का उद्देश्य है । उद्देश्य एक कार्य है और कर्तव्यों का पालन कारण है। जिस प्रकार मिट्टी के बने हुये घड़े के कण २ में मिट्टी का अंश रहता है, इसी प्रकार कार्य में कारणों का भी समावेश होता है। कार्य कारण से परे कोई वस्तु भिन्न नहीं है वरन कारण का ही एक अभिन्न रूप है । कार्य परिणाम है और कारण साधन है। यदि साधन ठीक हैं तो परिणाम की चिंता निरर्थक है। यदि हमारे कर्तव्य ठीक है तो उद्देश्य के ठीक होने में कोई आशंका नहीं । साधनों का उत्तम होना परिणाम की उत्तमता का द्योतक है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि इसका उल्टा भी ठीक हो । अतएव ऐसा विचार हमें भ्रम में डालने वाला है कि हम परिणाम ठीक करले चाहे उसके साधन कैसे भी हों । एक विद्यार्थी ने किसो वर्ष नकुल करके परीक्षा में सफलता माप्त करली । साधन अच्छा नहीं था परन्तु परिणाम अच्छा हुआ । उसने समझा परिणाम ही मुख्य है चाहे साधन जैसा भी हो । यह उसका भ्रम था। दूसरे वर्ष वही विद्यार्थी नकल करते हुये पकड़ा गया और दो वर्ष के लिए परीक्षा से उसने समझा कि बुरे साधनों का परिणाम कभी अच्छा हो ही नहीं सकता । कर्तव्य पथ से विचलित होने पर हमारी जीवन यात्रा ऐसे स्थान पर रुकेगी जहाँ निराशा और दुःख के अतिरिक्त कुछ नहीं । बालपन में कुछ कारण आ जाते हैं जो हमें कर्तव्य से कर देते हैं। कभी-कभी तो हमें ऐसे लोगों का संग मिल जाता है जो हमारी सुटुत्तियों को बदल देता है और हम सतमार्ग छोड़ कर कुमार्ग पर चलने लगते हैं। मित्रों के चुनने में बड़ी ही सावधानी करनी चाहिए। पाठशालाओं में बहुत अंश तक चरित्र भ्रष्टता कुलङ्ग का ही परिणाम होता है। कुसङ्ग से बढ़ कर कोई दुःख नहीं और सतसङ्ग से बढ़ कर कोई सुख नहीं । तुलसी दास जी लिखते हैं । बरु भल वास नरक कर ताता। दुष्ट सङ्ग जनि देय विधाता ॥ "सात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला इक सङ्ग । तुलै न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसङ्ग॥" सङ्ग के अतिरिक्त अनेक कारण हैं जो हमें कर्तव्य पथ से अलग करना चाहते हैं । इन कारणों से बचने के लिए इम में बल होना चाहिए और इस बल के लिए हमें प्रतिदिन भगवान् पर विश्वास रखते हुए उससे मार्थना करनी चाहिए । पग-पग पर हमारे लिए संसार की चकाचौंध एक परीक्षा है और हमें उस परीक्षा में उतीर्ण होना है। ईसा ने भगवान् से प्रार्थना की है " हे मभ के परीक्षा
ईसाई धर्म में तो प्रभु ईसा ने पग पग पर प्रार्थना के द्वारा ही शक्ति प्राप्त करने का मार्ग बतलाया है। हम किसी कार्य के प्रारम्भ में ईश्वर की प्रार्थना के द्वारा उसकी पूर्ति के लिए शक्ति मांगे, कार्य के अंत में उसका धन्यवाद दें । अपने में त्रुटि का अनुभव करते हुये भी प्रार्थना द्वारा भगवान् से शक्ति पाकर जीवन सफल करें - स्वार्थ के लिये नहीं वरन त्रुटि में शक्ति संचय और भगवान की ही इच्छा पूर्ति के लिए । भगवान् ही हमारा सब कुछ है और हम प्रार्थना द्वारा उसकी कृपा प्राप्त करें । महाभारत के भार से भ्रम में पड़ा हुआ अर्जुन भगवान् की प्रार्थना करता है । त्वमेव माताश्च पिता त्वमेव । त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव ।। त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वम् मम देव देव ।। *:छः- सदाचार हमने जननी जन्मभूमि, गुरु, समाज और ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य देखे । इन कर्तव्यों का ठीक दो पालने ही जीवन का उद्देश्य है । उद्देश्य एक कार्य है और कर्तव्यों का पालन कारण है। जिस प्रकार मिट्टी के बने हुये घड़े के कण दो में मिट्टी का अंश रहता है, इसी प्रकार कार्य में कारणों का भी समावेश होता है। कार्य कारण से परे कोई वस्तु भिन्न नहीं है वरन कारण का ही एक अभिन्न रूप है । कार्य परिणाम है और कारण साधन है। यदि साधन ठीक हैं तो परिणाम की चिंता निरर्थक है। यदि हमारे कर्तव्य ठीक है तो उद्देश्य के ठीक होने में कोई आशंका नहीं । साधनों का उत्तम होना परिणाम की उत्तमता का द्योतक है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि इसका उल्टा भी ठीक हो । अतएव ऐसा विचार हमें भ्रम में डालने वाला है कि हम परिणाम ठीक करले चाहे उसके साधन कैसे भी हों । एक विद्यार्थी ने किसो वर्ष नकुल करके परीक्षा में सफलता माप्त करली । साधन अच्छा नहीं था परन्तु परिणाम अच्छा हुआ । उसने समझा परिणाम ही मुख्य है चाहे साधन जैसा भी हो । यह उसका भ्रम था। दूसरे वर्ष वही विद्यार्थी नकल करते हुये पकड़ा गया और दो वर्ष के लिए परीक्षा से उसने समझा कि बुरे साधनों का परिणाम कभी अच्छा हो ही नहीं सकता । कर्तव्य पथ से विचलित होने पर हमारी जीवन यात्रा ऐसे स्थान पर रुकेगी जहाँ निराशा और दुःख के अतिरिक्त कुछ नहीं । बालपन में कुछ कारण आ जाते हैं जो हमें कर्तव्य से कर देते हैं। कभी-कभी तो हमें ऐसे लोगों का संग मिल जाता है जो हमारी सुटुत्तियों को बदल देता है और हम सतमार्ग छोड़ कर कुमार्ग पर चलने लगते हैं। मित्रों के चुनने में बड़ी ही सावधानी करनी चाहिए। पाठशालाओं में बहुत अंश तक चरित्र भ्रष्टता कुलङ्ग का ही परिणाम होता है। कुसङ्ग से बढ़ कर कोई दुःख नहीं और सतसङ्ग से बढ़ कर कोई सुख नहीं । तुलसी दास जी लिखते हैं । बरु भल वास नरक कर ताता। दुष्ट सङ्ग जनि देय विधाता ॥ "सात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला इक सङ्ग । तुलै न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसङ्ग॥" सङ्ग के अतिरिक्त अनेक कारण हैं जो हमें कर्तव्य पथ से अलग करना चाहते हैं । इन कारणों से बचने के लिए इम में बल होना चाहिए और इस बल के लिए हमें प्रतिदिन भगवान् पर विश्वास रखते हुए उससे मार्थना करनी चाहिए । पग-पग पर हमारे लिए संसार की चकाचौंध एक परीक्षा है और हमें उस परीक्षा में उतीर्ण होना है। ईसा ने भगवान् से प्रार्थना की है " हे मभ के परीक्षा
भारत भ्रमण, तीसरा खण्ड, दसवां अध्याय । यह खबर पाकर अंगरेजी सेना ने तीन ओर से मनीपुर पर चढ़ाई की; एक कोहिमा होकर, दूसरी तम्म स्थान होकर और तीसरी सिलचर होकर । लग भग ३० अपरैल को गनीपुरी सेना कुछ मुकाविला करने के पश्चात् परास्त होकर भागी। अंगरेजी सेना ने राजधानी पर अपना अधिकार कर लिया। किन्टन साहव आदि कई एक मृत अंगरेजों के सिर राजभवन के आँगन में गड़ें हुए मिले, जो मरने के ३८ दिन बाद दफन किए गए । अंगरेजों ने महाराज के देव मन्दिर और राजमहल का बड़ा माग तोड़ दिया। युवराज कुलचन्द्रसिंह, सेनापति टिकेंद्रजितसिंह इत्यादि प्रधान लोग कम क्रम से पकड़े गए । विचार करने के लिये मनीपुर में एक कमीशन बैठा। सेनापति 'टिकेंद्रजितसिंह' नायव सेनापति, बूढ़ा तोंगल जेनरल और बहुतेरे अन्य राज कर्मचारी फांसी दिए गए और युवराज कलचंद्रसिंह, उन के भाई अंगसिंह इत्यादि बहुतेरे लोग कालापानी भेजे गए। इन के लड़के वाले मनीपुर से निकाल दिए गए। राजवंश का एक छोटा लड़का मनीपुर का राजा बनाया गया। राज्य का प्रबंध अगरेजी अफसर द्वारा होने लगा । दसवा अध्याय । (आसाम देश में ) तेजपुर, नवगांव, शिवसागर, कोहिमा, डिब्रुगढ़, और परशुरामकुण्ड । तेजपुर । गौहाटी से लगभग ८० मील पूर्वोत्तर आसाम प्रवेश में ब्रह्मपुत्र नदी के दहिने अर्थात् उत्तर किनारे पर ( २६ अन्श, ३७ कला, १५ विकला, उत्तर अक्षांश और ९२ अन्श, ५३ कला, ५ विकला, पूर्व देशांतर में) दरंग जिले का प्रधान कसवा और सदर स्थान तेजपुर है। तेजपुर के निकट भैरवी नदी ब्रह्मपुत्र में मिली है। पहाड़ियों के दो सिलसिलों के बीच के मैदान में तेजपुर वसा हैं। सन १८८१ को मनुष्य-गणना के समय इसमें २९१० मनुष्य थे 1
भारत भ्रमण, तीसरा खण्ड, दसवां अध्याय । यह खबर पाकर अंगरेजी सेना ने तीन ओर से मनीपुर पर चढ़ाई की; एक कोहिमा होकर, दूसरी तम्म स्थान होकर और तीसरी सिलचर होकर । लग भग तीस अपरैल को गनीपुरी सेना कुछ मुकाविला करने के पश्चात् परास्त होकर भागी। अंगरेजी सेना ने राजधानी पर अपना अधिकार कर लिया। किन्टन साहव आदि कई एक मृत अंगरेजों के सिर राजभवन के आँगन में गड़ें हुए मिले, जो मरने के अड़तीस दिन बाद दफन किए गए । अंगरेजों ने महाराज के देव मन्दिर और राजमहल का बड़ा माग तोड़ दिया। युवराज कुलचन्द्रसिंह, सेनापति टिकेंद्रजितसिंह इत्यादि प्रधान लोग कम क्रम से पकड़े गए । विचार करने के लिये मनीपुर में एक कमीशन बैठा। सेनापति 'टिकेंद्रजितसिंह' नायव सेनापति, बूढ़ा तोंगल जेनरल और बहुतेरे अन्य राज कर्मचारी फांसी दिए गए और युवराज कलचंद्रसिंह, उन के भाई अंगसिंह इत्यादि बहुतेरे लोग कालापानी भेजे गए। इन के लड़के वाले मनीपुर से निकाल दिए गए। राजवंश का एक छोटा लड़का मनीपुर का राजा बनाया गया। राज्य का प्रबंध अगरेजी अफसर द्वारा होने लगा । दसवा अध्याय । तेजपुर, नवगांव, शिवसागर, कोहिमा, डिब्रुगढ़, और परशुरामकुण्ड । तेजपुर । गौहाटी से लगभग अस्सी मील पूर्वोत्तर आसाम प्रवेश में ब्रह्मपुत्र नदी के दहिने अर्थात् उत्तर किनारे पर दरंग जिले का प्रधान कसवा और सदर स्थान तेजपुर है। तेजपुर के निकट भैरवी नदी ब्रह्मपुत्र में मिली है। पहाड़ियों के दो सिलसिलों के बीच के मैदान में तेजपुर वसा हैं। सन एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को मनुष्य-गणना के समय इसमें दो हज़ार नौ सौ दस मनुष्य थे एक
आज फिल्म वन्स उपौन आ टाइम इन मुंबई दर्शकों के सामने पर्दे पर आई है.फिल्म का निर्देशन अच्छा है,मिलन लूथरिया के द्वारा ये1970-80 के अंडरवर्ल्ड के उपर रखकर बनाई गयी कहानी है,फिल्म मे डाइलॉग डेलिवरी अच्छी है,म्यूज़िक थोड़ी मिलावटी लगी,अजय देवगन और कंगना रानौत की जोड़ी अच्छी है,सुल्तान मिर्ज़ा के रोल मे अजय ने एक अलग ही छाप छोड़ी है,इसमे इमरान ने थोड़ा निराश किया,वो इस रोल मे पूरी तरह फिट नही बैठ रहे थे, इमरान अजय देवगन के मजबूत और दृढ़ एक्टिंग के आगे फीके पड़ते दिखाई दिए,प्राची देसाई की एक्टिंग मे निखार दिखा,उनकी टाइमिंग बिल्कुल सही समय पर रही,रणदीप हुड्डा ने एक्टिंग से प्रभावित किया है,गौहर ख़ान ने अपने आइटम नंबर पर खूब तालियाँ बटोरी,उनकी सेक्सी छवि शायद आगे उन्हे फिल्म दिला दे,फिल्म के गाने अच्छे लगे ,प्रीतम का संगीत अच्छा है,मगर बॅकग्राउंड म्यूज़िक मे भी मिलावटीपन नज़र आया, कुल मिलाकर फिल्म देखने लायक है,दर्शकों के मनोरंजन के आसार दिखते नज़र आ रहे हैं,मगर एक बात ख़टकती है,वो ये है की आख़िर क्या सिर्फ़ अब दिखाने को हमारे पास अंडॅर्वर्ल्ड की दुनिया ही रह गयी है?,क्या हमारे पास एक अच्छे पटकथा लेखक की कमी पड़ गई है ?,फिल्म का अंत भी कुछ खास समझ मे नही आता है. वो कौन है जो आज भी विदेश मे रहकर मुंबई पर राज कर रहा है?,लोगों को इससे अच्छा मैसेज नही जाता,अगर आप सिर्फ़ मनोरंजन के नज़रिए से फिल्म देखने जाते हैं तब तो ठीक है,मगर कोई मैसेज ढूँढने की कोशिश करना बेमानी होगी,मेरे हिसाब से इस फिल्म को***1/2,आपकी बहुमुल्य राय क्या है?
आज फिल्म वन्स उपौन आ टाइम इन मुंबई दर्शकों के सामने पर्दे पर आई है.फिल्म का निर्देशन अच्छा है,मिलन लूथरिया के द्वारा येएक हज़ार नौ सौ सत्तर-अस्सी के अंडरवर्ल्ड के उपर रखकर बनाई गयी कहानी है,फिल्म मे डाइलॉग डेलिवरी अच्छी है,म्यूज़िक थोड़ी मिलावटी लगी,अजय देवगन और कंगना रानौत की जोड़ी अच्छी है,सुल्तान मिर्ज़ा के रोल मे अजय ने एक अलग ही छाप छोड़ी है,इसमे इमरान ने थोड़ा निराश किया,वो इस रोल मे पूरी तरह फिट नही बैठ रहे थे, इमरान अजय देवगन के मजबूत और दृढ़ एक्टिंग के आगे फीके पड़ते दिखाई दिए,प्राची देसाई की एक्टिंग मे निखार दिखा,उनकी टाइमिंग बिल्कुल सही समय पर रही,रणदीप हुड्डा ने एक्टिंग से प्रभावित किया है,गौहर ख़ान ने अपने आइटम नंबर पर खूब तालियाँ बटोरी,उनकी सेक्सी छवि शायद आगे उन्हे फिल्म दिला दे,फिल्म के गाने अच्छे लगे ,प्रीतम का संगीत अच्छा है,मगर बॅकग्राउंड म्यूज़िक मे भी मिलावटीपन नज़र आया, कुल मिलाकर फिल्म देखने लायक है,दर्शकों के मनोरंजन के आसार दिखते नज़र आ रहे हैं,मगर एक बात ख़टकती है,वो ये है की आख़िर क्या सिर्फ़ अब दिखाने को हमारे पास अंडॅर्वर्ल्ड की दुनिया ही रह गयी है?,क्या हमारे पास एक अच्छे पटकथा लेखक की कमी पड़ गई है ?,फिल्म का अंत भी कुछ खास समझ मे नही आता है. वो कौन है जो आज भी विदेश मे रहकर मुंबई पर राज कर रहा है?,लोगों को इससे अच्छा मैसेज नही जाता,अगर आप सिर्फ़ मनोरंजन के नज़रिए से फिल्म देखने जाते हैं तब तो ठीक है,मगर कोई मैसेज ढूँढने की कोशिश करना बेमानी होगी,मेरे हिसाब से इस फिल्म को***एक/दो,आपकी बहुमुल्य राय क्या है?
हिमाचल में बारिश के साथ बर्फबारी भी शुरू हो गई है। रविवार को लाहौल स्पीति की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। शनिवार से लगातार हो रही बारिश के चलते यहां तापमान में गिरावट आ गई है। जिस कारण यहां पहाड़ियों में बर्फबारी हो रही है। हालांकि मार्ग में बर्फ की परत जमी नहीं पाई है, लेकिन सड़क के दोनों ओर बर्फ की परतें जम गई हैं। लेह से लाहौल के दारचा तक मार्ग बहाल है। जिस कारण अभी दारचा और लेह के बीच वाहनों की आवाजाही जारी है। लेह और जांस्कर वैली की ओर से दारचा पहुंचे लोगों ने बताया कि वह जांस्कर वैली की ओर से स्कॉर्पियों में आए हैं। हालांकि रास्ता ठीक है, लेकिन टॉप पर बर्फबारी हो रही है। लाहौल स्पीति पुलिस और लेह पुलिस मौसम को लेकर आपस में संपर्क बनाए हुए हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अभी इस मार्ग में सफर करने से बचें। जानकारी के अनुसार लेह और जांस्कर मार्ग में ऊंचे दर्राओं में बर्फबारी हो रही है। जिसमें जिंगजिंग वार, बारालाचा दर्रा सहित अन्य कई टॉप हैं। यहां सीजन से पहले हुई बर्फबारी के चलते ठंड बढ़नी शुरू हो गई है। बताया जा रहा कि अगर मौसम एक दो दिन और ऐसा रहता है तो यहां के दर्रा में हैवी स्नोफॉल हो सकता है जिससे मनाली-लेह की बीच आवाजाही में रूकावट पैदा हो सकती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल में बारिश के साथ बर्फबारी भी शुरू हो गई है। रविवार को लाहौल स्पीति की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। शनिवार से लगातार हो रही बारिश के चलते यहां तापमान में गिरावट आ गई है। जिस कारण यहां पहाड़ियों में बर्फबारी हो रही है। हालांकि मार्ग में बर्फ की परत जमी नहीं पाई है, लेकिन सड़क के दोनों ओर बर्फ की परतें जम गई हैं। लेह से लाहौल के दारचा तक मार्ग बहाल है। जिस कारण अभी दारचा और लेह के बीच वाहनों की आवाजाही जारी है। लेह और जांस्कर वैली की ओर से दारचा पहुंचे लोगों ने बताया कि वह जांस्कर वैली की ओर से स्कॉर्पियों में आए हैं। हालांकि रास्ता ठीक है, लेकिन टॉप पर बर्फबारी हो रही है। लाहौल स्पीति पुलिस और लेह पुलिस मौसम को लेकर आपस में संपर्क बनाए हुए हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अभी इस मार्ग में सफर करने से बचें। जानकारी के अनुसार लेह और जांस्कर मार्ग में ऊंचे दर्राओं में बर्फबारी हो रही है। जिसमें जिंगजिंग वार, बारालाचा दर्रा सहित अन्य कई टॉप हैं। यहां सीजन से पहले हुई बर्फबारी के चलते ठंड बढ़नी शुरू हो गई है। बताया जा रहा कि अगर मौसम एक दो दिन और ऐसा रहता है तो यहां के दर्रा में हैवी स्नोफॉल हो सकता है जिससे मनाली-लेह की बीच आवाजाही में रूकावट पैदा हो सकती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! सनी लियोन दिल जीतने में कभी पीछे नहीं रहतीं। भले ही उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा धमाल ना कर रही हों. . लेकिन रियल लाइफ में उन्होंने फैंस को सुपरहिट सरप्राइज दिया है। सनी लियोन ने सोशल मीडिया पर अपने दो बेटों की तस्वीर शेयर की है। दो जबरदस्त स्टार्स. . और पहली झलक ही है शानदार. . एकदम सुपरहिट! बॉलीवुड की हॉट एंड ग्लैमरस एक्ट्रेस सनी लियोन ने एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि उनके परिवार में दो बेटे जुड़ गए हैं। इनका नाम अशर सिंह वेबर और नोहा सिंह वेबर रखा गया है। इस तस्वीर में सनी, उनके पति डैनियल और तीनों बच्चे नजर आ रहे हैं। याद दिला दें, पिछले साल ही सनी लियोन ने एक बच्ची को गोद लिया था, जिसका नाम है निशा कौर वेबर। सनी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि इतना खूबसूरत और बड़ा परिवार पाकर मैं और मेरे पति डेनियल बेहद खुश हैं। निशा को गोद लेने के बाद सनी कई बार मीडिया के सामने अपनी बेटी के साथ नजर आईं। उन्होंने बताया भी कि निशा के आने से उनकी जिंदगी काफी बदल गई है। उसके साथ हर पल एन्जॉय करती हैं और ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश करती हैं। इस प्यारे से परिवार के लिए हमारी ओर से भी सनी को ढ़ेरों बधाई। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! सनी लियोन दिल जीतने में कभी पीछे नहीं रहतीं। भले ही उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा धमाल ना कर रही हों. . लेकिन रियल लाइफ में उन्होंने फैंस को सुपरहिट सरप्राइज दिया है। सनी लियोन ने सोशल मीडिया पर अपने दो बेटों की तस्वीर शेयर की है। दो जबरदस्त स्टार्स. . और पहली झलक ही है शानदार. . एकदम सुपरहिट! बॉलीवुड की हॉट एंड ग्लैमरस एक्ट्रेस सनी लियोन ने एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि उनके परिवार में दो बेटे जुड़ गए हैं। इनका नाम अशर सिंह वेबर और नोहा सिंह वेबर रखा गया है। इस तस्वीर में सनी, उनके पति डैनियल और तीनों बच्चे नजर आ रहे हैं। याद दिला दें, पिछले साल ही सनी लियोन ने एक बच्ची को गोद लिया था, जिसका नाम है निशा कौर वेबर। सनी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि इतना खूबसूरत और बड़ा परिवार पाकर मैं और मेरे पति डेनियल बेहद खुश हैं। निशा को गोद लेने के बाद सनी कई बार मीडिया के सामने अपनी बेटी के साथ नजर आईं। उन्होंने बताया भी कि निशा के आने से उनकी जिंदगी काफी बदल गई है। उसके साथ हर पल एन्जॉय करती हैं और ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश करती हैं। इस प्यारे से परिवार के लिए हमारी ओर से भी सनी को ढ़ेरों बधाई। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली में पूछताछ कर रहा है। मीड़िया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूछताछ जम्मू कश्मीर बैंक केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले को लेकर है. . महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि फोन टैपिंग केस में मुंबई पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 160 के तहत एक नोटिस भेजा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित दो दर्जन कार्यकर्ताओं पर श्यामला हिल्स पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। ये कार्रवाई शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना देने पर की गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली में पूछताछ कर रहा है। मीड़िया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूछताछ जम्मू कश्मीर बैंक केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले को लेकर है. . महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि फोन टैपिंग केस में मुंबई पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा एक सौ साठ के तहत एक नोटिस भेजा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित दो दर्जन कार्यकर्ताओं पर श्यामला हिल्स पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। ये कार्रवाई शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना देने पर की गई है।
झांसी 04 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश नगर निकाय निर्वाचन -2023 के तहत झांसी जिले में आज सुबह सात बजे से मतदान की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई। लोगों में मतदान को लेकर खासा उत्साह नजर आया और सुबह से ही लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों की ओर जाते हुए दिखायी दिये। बुर्जुग लोगों में मतदान को लेकर उत्साह व जिम्मेदारी का एहसास दिखायी दिया और सुबह सवेरे ही उन्होंने बूथों पर जाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जिला निर्वाचन अधिकारी रविंद्र कुमार ने सुबह छह बजे ही व्यवस्थाओं का जायजा लेने के तहत कंट्रोल रूम में मॉक पोल कार्रवाई का अपडेट भी लिया। महानगर में कुछ स्थानों पर ईवीएम में को लेकर समस्याएं आयीं । कुछ बूथों में ईवीएम में खराबी की जानकारी मिलते ही उन्हें तुरंत बदलवाकर मतदान शुरू कराया गया। किसी बूथ पर ईवीएम को लेकरकोई दिक्कत न आये इसके लिए प्रत्येक बूथ पर अतिरिक्त मशीनों के साथ विशेषज्ञ भी तैनात किये गये हैं ताकि मतदान में कोई अवरोध न हो। जिले में झांसी नगर निगम, सात नगर पालिका परिषद और पांच नगर पंचायत में चुनाव होना है। सभी जगहों पर मतदान व्यवस्थापूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से हो सके लिए इसके लिए प्रशासन और पुलिस ने पूरे इंतजाम किये हैं। जनपद में 03लाख 44 हजार 705 पुरुष मतदाता एवं 03लाख 13 हजार 054 महिला मतदाता कुल 06 लाख 57 हजार 759 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। जनपद में चुनाव में महिलाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी के लिए जनपद में 14 पिंक बूथ बनाए गए हैं। इन बूथों पर समस्त पोलिंग पार्टियों में महिलाएं शामिल हैं ताकि महिलाएं सरलता से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। पूरे चुनाव क्षेत्र को 20 जोन और 56 सेक्टरों में बांटा गया है। करीब छह अन्य जिलों से भी पुलिस बल मंगाये गये हैं। करीब छह कंपनी पीएसी,सीआईएसएफ और पैरामिलिट्री तथा सिविल फोर्स को निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए लगाया गया है। प्रत्येक बूथ पर करीबन पांच पुलिस के जवान तैनात रहेंगे । बडे बूथों जिसमें छह सेंटर है वहां 21पुलिसकर्मियों और संवेदनशील बूथों पर 30 पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं। संवेदनशील,अति संवेदनशील, तथा अति संवेदनशील प्लस मतदान केन्द्र पर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी करायी जा रही है। हर थाने में दो दो क्यूआरटी लगायी गयी हैं। इसके साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ सेक्टर पुलिसअधिकारी और ज़ोनल मजिस्ट्रेट के साथ में ज़ोनल अधिकारी तैनात किये गये हैं। बूथों और सेंटरों के अलावा पर्याप्त संख्या में मोबाइल पार्टियां भी लगायी गयी हैं।
झांसी चार मई उत्तर प्रदेश नगर निकाय निर्वाचन -दो हज़ार तेईस के तहत झांसी जिले में आज सुबह सात बजे से मतदान की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई। लोगों में मतदान को लेकर खासा उत्साह नजर आया और सुबह से ही लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों की ओर जाते हुए दिखायी दिये। बुर्जुग लोगों में मतदान को लेकर उत्साह व जिम्मेदारी का एहसास दिखायी दिया और सुबह सवेरे ही उन्होंने बूथों पर जाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जिला निर्वाचन अधिकारी रविंद्र कुमार ने सुबह छह बजे ही व्यवस्थाओं का जायजा लेने के तहत कंट्रोल रूम में मॉक पोल कार्रवाई का अपडेट भी लिया। महानगर में कुछ स्थानों पर ईवीएम में को लेकर समस्याएं आयीं । कुछ बूथों में ईवीएम में खराबी की जानकारी मिलते ही उन्हें तुरंत बदलवाकर मतदान शुरू कराया गया। किसी बूथ पर ईवीएम को लेकरकोई दिक्कत न आये इसके लिए प्रत्येक बूथ पर अतिरिक्त मशीनों के साथ विशेषज्ञ भी तैनात किये गये हैं ताकि मतदान में कोई अवरोध न हो। जिले में झांसी नगर निगम, सात नगर पालिका परिषद और पांच नगर पंचायत में चुनाव होना है। सभी जगहों पर मतदान व्यवस्थापूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से हो सके लिए इसके लिए प्रशासन और पुलिस ने पूरे इंतजाम किये हैं। जनपद में तीनलाख चौंतालीस हजार सात सौ पाँच पुरुष मतदाता एवं तीनलाख तेरह हजार चौवन महिला मतदाता कुल छः लाख सत्तावन हजार सात सौ उनसठ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। जनपद में चुनाव में महिलाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी के लिए जनपद में चौदह पिंक बूथ बनाए गए हैं। इन बूथों पर समस्त पोलिंग पार्टियों में महिलाएं शामिल हैं ताकि महिलाएं सरलता से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। पूरे चुनाव क्षेत्र को बीस जोन और छप्पन सेक्टरों में बांटा गया है। करीब छह अन्य जिलों से भी पुलिस बल मंगाये गये हैं। करीब छह कंपनी पीएसी,सीआईएसएफ और पैरामिलिट्री तथा सिविल फोर्स को निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए लगाया गया है। प्रत्येक बूथ पर करीबन पांच पुलिस के जवान तैनात रहेंगे । बडे बूथों जिसमें छह सेंटर है वहां इक्कीसपुलिसकर्मियों और संवेदनशील बूथों पर तीस पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं। संवेदनशील,अति संवेदनशील, तथा अति संवेदनशील प्लस मतदान केन्द्र पर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी करायी जा रही है। हर थाने में दो दो क्यूआरटी लगायी गयी हैं। इसके साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ सेक्टर पुलिसअधिकारी और ज़ोनल मजिस्ट्रेट के साथ में ज़ोनल अधिकारी तैनात किये गये हैं। बूथों और सेंटरों के अलावा पर्याप्त संख्या में मोबाइल पार्टियां भी लगायी गयी हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
"JavaScript is a standard programming language that is included to provide interactive features, Kindly enable Javascript in your browser. For details visit help page" मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (https://www.indiacode.nic.in) सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति (एससीएलएससी) नोडल अधिकारी (एनएचआरसी) नोडल अधिकारी (सिविल और पुलिस) शुद्धि पत्र- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में परामर्शदाताओं की नियुक्ति। शुद्धि पत्र- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में परामर्शदाताओं की नियुक्ति।
"JavaScript is a standard programming language that is included to provide interactive features, Kindly enable Javascript in your browser. For details visit help page" मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति नोडल अधिकारी नोडल अधिकारी शुद्धि पत्र- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में परामर्शदाताओं की नियुक्ति। शुद्धि पत्र- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में परामर्शदाताओं की नियुक्ति।
Makar Sankranti Punya kaal 2023: मकर संक्रांति के दिन महापुण्यकाल की अवधि में दान-स्नान करना अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में दान-स्नान करना अति लाभकारी होता है। Makar Sankranti Punyakalam 2023 Duration: मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी 2023, रविवार को है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होंगे। इसलिए कुछ जगहों पर इस त्योहार को उत्तरायणी भी कहा जाता है। यूं तो मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश रात 08 बजे के बाद करेंगे, ऐसे में उदयातिथि में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। सूर्य जिस भी राशि में प्रवेश करते हैं उसी राशि के नाम की संक्रांति का नाम पड़ जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और फिर दान की परपंरा है। मान्यता है कि इस दिन दान व स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति का पुण्य काल कब तक है? मकर संक्रांति पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शाम 05 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अवधि 10 घंटे 31 मिनट की है। मकर संक्रांति महा पुण्यकाल का समय 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 09 बजे तक रहेगा। अवधि 01 घंटा 45 मिनट की है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के पुण्य और महापुण्य काल में गंगा स्नान-दान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मुक्ति पाता है।
Makar Sankranti Punya kaal दो हज़ार तेईस: मकर संक्रांति के दिन महापुण्यकाल की अवधि में दान-स्नान करना अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में दान-स्नान करना अति लाभकारी होता है। Makar Sankranti Punyakalam दो हज़ार तेईस Duration: मकर संक्रांति पर्व पंद्रह जनवरी दो हज़ार तेईस, रविवार को है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होंगे। इसलिए कुछ जगहों पर इस त्योहार को उत्तरायणी भी कहा जाता है। यूं तो मकर संक्रांति का त्योहार चौदह जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश रात आठ बजे के बाद करेंगे, ऐसे में उदयातिथि में मकर संक्रांति पंद्रह जनवरी को मनाई जाएगी। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। सूर्य जिस भी राशि में प्रवेश करते हैं उसी राशि के नाम की संक्रांति का नाम पड़ जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और फिर दान की परपंरा है। मान्यता है कि इस दिन दान व स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति का पुण्य काल कब तक है? मकर संक्रांति पुण्य काल पंद्रह जनवरी को सुबह सात बजकर पंद्रह मिनट से शाम पाँच बजकर छियालीस मिनट तक रहेगा। अवधि दस घंटाटे इकतीस मिनट की है। मकर संक्रांति महा पुण्यकाल का समय पंद्रह जनवरी को सुबह सात बजकर पंद्रह मिनट से सुबह नौ बजे तक रहेगा। अवधि एक घंटाटा पैंतालीस मिनट की है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के पुण्य और महापुण्य काल में गंगा स्नान-दान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मुक्ति पाता है।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में महाराष्ट्र में कांग्रेस के सभी सहयोगी दलों के नेता शामिल हो रहे है। शुक्रवार को शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की है। एक दिन पहले एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाण ने पदयात्रा में हिस्सा लिया। Bharat Jodo Yatra joined by Aaditya Thackeray: राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे भारत जोड़ो यात्रा ने शुक्रवार को 65वें दिन में प्रवेश किया। दो महीना से अधिक समय हो गए इस यात्रा ने बीते दिनों महाराष्ट्र में प्रवेश किया था। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी शुक्रवार को 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल होकर पदयात्रा किया। ठाकरे, हिंगोली के कलामनुरी में पदयात्रा के दौरान पहुंचे। भारत जोड़ो यात्रा, शुक्रवार को नांदेड़ जिला से हिंगोली में प्रवेश किया। हिंगोली के कलामनुरी पहुंचने पर शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे भी पहुंचे। यहां राहुल गांधी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता आत्मीय ढंग से गले मिले। बातचीत के साथ साथ यात्रा भी चलती रही। इस पदयात्रा में आदित्य ठाकरे के सहयोगी शिवसेना नेता अंबादास दानवे, पूर्व विधायक सचिन अहीर भी शामिल हुए। दानवे, विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे काफी देर तक एक साथ यात्रा में साथ साथ चले। दोनों नेता पहली बार एक साथ पदयात्रा कर रहे हैं। दोनों नेताओं को देखकर लोगों और समर्थकों में भी भारी उत्साह देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर भारी भीड़ दोनों नेताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन कर रही थी। दोनों से हाथ मिला रही थी और जमकर नारेबाजी होती रही। नांदेड़ के अर्धपुर तालुका के सेनी गांव में भारत जोड़ो यात्रा के पहुंचते ही फूल बरसाए गए। यात्रा ने चोरम्बा फाटा में हिंगोली जिले में प्रवेश किया है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चों ने स्वागत किया और फूल मालाओं से नेताओं को लाद दिया। स्वागत में हाथी को सजाकर लाया गया था। हिंगोली में पूर्व सैनिकों का समूह भी राहुल गांधी से मिलने पहुंचा था। 22 की संख्या में पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से 'वन रैंक वन पेंशन' (ओआरओ) को लागू करने संबंधी अपनी मांगपत्र को सौंपा। पूर्व सैनिक साहेबराव ने कहा कि हमें लगता है कि कांग्रेस इस मांग (ओआरओपी) को पूरा कर सकती है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में महाराष्ट्र में कांग्रेस के सभी सहयोगी दलों के नेता शामिल हो रहे है। शुक्रवार को शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की है। एक दिन पहले एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाण ने पदयात्रा में हिस्सा लिया। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार स्वास्थ्य कारणों से भारत जोड़ो हिस्सा में नहीं पहुंच सके हैं। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे भी शामिल हो सकते हैं। यह भी पढ़ेंः
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में महाराष्ट्र में कांग्रेस के सभी सहयोगी दलों के नेता शामिल हो रहे है। शुक्रवार को शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की है। एक दिन पहले एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाण ने पदयात्रा में हिस्सा लिया। Bharat Jodo Yatra joined by Aaditya Thackeray: राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे भारत जोड़ो यात्रा ने शुक्रवार को पैंसठवें दिन में प्रवेश किया। दो महीना से अधिक समय हो गए इस यात्रा ने बीते दिनों महाराष्ट्र में प्रवेश किया था। शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे ने भी शुक्रवार को 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल होकर पदयात्रा किया। ठाकरे, हिंगोली के कलामनुरी में पदयात्रा के दौरान पहुंचे। भारत जोड़ो यात्रा, शुक्रवार को नांदेड़ जिला से हिंगोली में प्रवेश किया। हिंगोली के कलामनुरी पहुंचने पर शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे भी पहुंचे। यहां राहुल गांधी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता आत्मीय ढंग से गले मिले। बातचीत के साथ साथ यात्रा भी चलती रही। इस पदयात्रा में आदित्य ठाकरे के सहयोगी शिवसेना नेता अंबादास दानवे, पूर्व विधायक सचिन अहीर भी शामिल हुए। दानवे, विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे काफी देर तक एक साथ यात्रा में साथ साथ चले। दोनों नेता पहली बार एक साथ पदयात्रा कर रहे हैं। दोनों नेताओं को देखकर लोगों और समर्थकों में भी भारी उत्साह देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर भारी भीड़ दोनों नेताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन कर रही थी। दोनों से हाथ मिला रही थी और जमकर नारेबाजी होती रही। नांदेड़ के अर्धपुर तालुका के सेनी गांव में भारत जोड़ो यात्रा के पहुंचते ही फूल बरसाए गए। यात्रा ने चोरम्बा फाटा में हिंगोली जिले में प्रवेश किया है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चों ने स्वागत किया और फूल मालाओं से नेताओं को लाद दिया। स्वागत में हाथी को सजाकर लाया गया था। हिंगोली में पूर्व सैनिकों का समूह भी राहुल गांधी से मिलने पहुंचा था। बाईस की संख्या में पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से 'वन रैंक वन पेंशन' को लागू करने संबंधी अपनी मांगपत्र को सौंपा। पूर्व सैनिक साहेबराव ने कहा कि हमें लगता है कि कांग्रेस इस मांग को पूरा कर सकती है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में महाराष्ट्र में कांग्रेस के सभी सहयोगी दलों के नेता शामिल हो रहे है। शुक्रवार को शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की है। एक दिन पहले एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाण ने पदयात्रा में हिस्सा लिया। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार स्वास्थ्य कारणों से भारत जोड़ो हिस्सा में नहीं पहुंच सके हैं। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे भी शामिल हो सकते हैं। यह भी पढ़ेंः
जिन्दगी के पूरे समयतक मोह की पुरिया पूरता है । १० मिनिटवाद कुछ भी तो नहीं रहेगा किन्तु यह चाहता है कि उम पोते को मेरे सामने दिखा तो दो कि मेरी छाती ठंडी होजाय । अरे ! १० मिनिट के बाद तो तेरी छाती पूरी ठंडीहोजायेगी । औौर गमखाले जैसे जैसे सब छोड़कर ग्रागे जाना है। जरा २-४ वर्ष बाद कि उस सबसे निराला में ज्ञान मात्र हूं । परिग्रह की तृष्णा का सम्बन्ध तो अनर्थ ही करने वाला है । परव्यासक्तिको अनर्थकारिताः - भैया जैसे बच्चेलोग रेतीलो जमीन पर वर्षात के समय घर बनाने का खेल करते हैं। पैर के ऊपर मिट्टो थपथपाकधीरे धीरे अपने पैर कोनिकाल लेते हैं। उनका घर बन जाता है उन्हें घर बनाने में भी देर नहीं लगती और एक लात मारे तो घर मिट गया सो लो, मिटने में भी कुछ देर नहीं लगती। जब घर बनाया तो कुछ खुशी हुई और मिट गया तो जराभी विपाद उनके निर्दोष हृदय में नहीं । हमारा स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए कि जगतका जो वैभव प्राता है वह मेरी जरूरत से तिगुना है जिसके पास जो सम्पत्ति है उसको उसकी जरूरत से दुगना तिगुना है लेकिन तृष्णा लगा रखी है कि जो वैभव मिला है। उसमें भी सुखी नहीं रहता और समझता है कि यह बहुत कम है, मेरी जरूरतंपूर्णही नहीं हो पाती । कदाचित् अपना प्राधा धन किसी प्रकार से अलग हो जाय जैसे कोई डाकू किसीको पकड़कर ले जाय तो वहाँ पर बैठे बैठे १० हजार १५ हजार रुपए माँग लें, किसी भी प्रकार आधा द्रव्य निकल जाय तो उसमें भी आपको गुजर करनी पड़ती है या फाँसी लगाकर मर जाना होता है। जैसे और लोगों के आपसेभी कम धन है तो क्या उनकी उस थोड़े धन से गुजर नहीं होती ? होती है । मनुष्यभवका प्रयोजनधर्म सावनः- भैया जरा दिल से सोचो यह मनुष्यं जीवन धन कमाने के लिए नहीं मिला है। यह जीवन धर्म साधना के लिए मिला है । यह नहीं सोचते तो आपके दुःखी होने के कोई होने नहीं आयेगा । एक राजाथा । जंगल में गया। एक दिगम्बर साधु मिला । गर्मीके दिनथे। राजा उस साधु केपास जाकर बोला कि महाराज आपको ऊपर से गर्मी लगती है और नीचे से भी गंर्मी लगती है। अगर आप चाहे तो जूते बनवा दूं, कम से कम नीचे से तो गर्मी नहीं लगेगी । साधू बोला अच्छा जूते वनवा देना । पर यहतो बताओ कि अगर जूते वनवादिए तो ऊपर की गर्मी जो सताती है उसका क्या करें । राजा बोला कि वढ़ियाछतरी हम मंगा देगे आपके लिए, फिर साधू बोला कि नीचे जूते हैं, ऊपर छतरी है और
जिन्दगी के पूरे समयतक मोह की पुरिया पूरता है । दस मिनिटवाद कुछ भी तो नहीं रहेगा किन्तु यह चाहता है कि उम पोते को मेरे सामने दिखा तो दो कि मेरी छाती ठंडी होजाय । अरे ! दस मिनिट के बाद तो तेरी छाती पूरी ठंडीहोजायेगी । औौर गमखाले जैसे जैसे सब छोड़कर ग्रागे जाना है। जरा दो-चार वर्ष बाद कि उस सबसे निराला में ज्ञान मात्र हूं । परिग्रह की तृष्णा का सम्बन्ध तो अनर्थ ही करने वाला है । परव्यासक्तिको अनर्थकारिताः - भैया जैसे बच्चेलोग रेतीलो जमीन पर वर्षात के समय घर बनाने का खेल करते हैं। पैर के ऊपर मिट्टो थपथपाकधीरे धीरे अपने पैर कोनिकाल लेते हैं। उनका घर बन जाता है उन्हें घर बनाने में भी देर नहीं लगती और एक लात मारे तो घर मिट गया सो लो, मिटने में भी कुछ देर नहीं लगती। जब घर बनाया तो कुछ खुशी हुई और मिट गया तो जराभी विपाद उनके निर्दोष हृदय में नहीं । हमारा स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए कि जगतका जो वैभव प्राता है वह मेरी जरूरत से तिगुना है जिसके पास जो सम्पत्ति है उसको उसकी जरूरत से दुगना तिगुना है लेकिन तृष्णा लगा रखी है कि जो वैभव मिला है। उसमें भी सुखी नहीं रहता और समझता है कि यह बहुत कम है, मेरी जरूरतंपूर्णही नहीं हो पाती । कदाचित् अपना प्राधा धन किसी प्रकार से अलग हो जाय जैसे कोई डाकू किसीको पकड़कर ले जाय तो वहाँ पर बैठे बैठे दस हजार पंद्रह हजार रुपए माँग लें, किसी भी प्रकार आधा द्रव्य निकल जाय तो उसमें भी आपको गुजर करनी पड़ती है या फाँसी लगाकर मर जाना होता है। जैसे और लोगों के आपसेभी कम धन है तो क्या उनकी उस थोड़े धन से गुजर नहीं होती ? होती है । मनुष्यभवका प्रयोजनधर्म सावनः- भैया जरा दिल से सोचो यह मनुष्यं जीवन धन कमाने के लिए नहीं मिला है। यह जीवन धर्म साधना के लिए मिला है । यह नहीं सोचते तो आपके दुःखी होने के कोई होने नहीं आयेगा । एक राजाथा । जंगल में गया। एक दिगम्बर साधु मिला । गर्मीके दिनथे। राजा उस साधु केपास जाकर बोला कि महाराज आपको ऊपर से गर्मी लगती है और नीचे से भी गंर्मी लगती है। अगर आप चाहे तो जूते बनवा दूं, कम से कम नीचे से तो गर्मी नहीं लगेगी । साधू बोला अच्छा जूते वनवा देना । पर यहतो बताओ कि अगर जूते वनवादिए तो ऊपर की गर्मी जो सताती है उसका क्या करें । राजा बोला कि वढ़ियाछतरी हम मंगा देगे आपके लिए, फिर साधू बोला कि नीचे जूते हैं, ऊपर छतरी है और
भी संदेश द्रव्य का वाचक न होकर याग वर्म वा वाद है। इसकी पागार्थवाचकता " यथा वैदशो दुरादानमान्ते एवमयं द्विषन्तम् भ्रातृष्यं निपत्त्यादत्ते हरु अर्थवाद वाक्य से भी सिद्ध होती है । यहाँ पर उपमान-संदेश द्रव्य द्वारा उपमेय संदेश याग कर्म की पपा बैo" आदि सादृश्यवाचक पदों से स्तुति की गई है । अतः जिस प्रकार संदेश कठिनाई से पकड़ने योग्य तप्तलौहपिण्ड आदि को पकड़ लेता है वैसे ही यह संदेश याग कठिनाई से प्राप्त होने वाले शत्रुओं को सरलता से पकड़ लेना है "यह वाक्यार्थ प्राप्त होता है। इस अर्थवादवाक्य से दुरादान के साधान के रूप में प्रसिद्ध संदेश द्रव्य से पाग की स्तुति की गई है । अतः संदंश पद तदयपदेश न्याय से याग का वाचक सिद्ध होता भवाऽभिवरन् * वाक्यगत "गो" पद भी तद्वयपदेशन्याय से ही यागकर्म का नामधेय है ।30 "भवाभिवरन् यजेत वाक्य का गोपद भी गो पशु का षड़चक न होकर गो संज्ञक याग का वाचक है । "गो" शब्द के कर्मनामधेयता भी व्यथा गावो गोपायन्ति इस अर्थवाद के सादृश्य वाचक पदों की सहायता से प्रसिद्ध गो पशु द्वारा गो संज्ञक यागर्म की स्तुति होने से सिद्ध है। जैसे गाय अपने बहडे की हिंसक पशु से रक्षा करती है, वैसे ही यह गो संज्ञक याग भी यजमान की असुरों ओर करता है यह वाक्पार्थ यहाँ प्राप्त होता है। अतः गो" पद पशुद्रव्य की नहीं अपितु याग की संज्ञा 1- संदेशशब्दश्च सदश्यते पारर्बद्रये निपीप दुरादेयं परिगृह्यते अनेनेति व्युत्पत्त्या ।" कतिपय वादी विद्वानों का जो यह मत है कि अर्थवादगत इसेनादि पद जाति निमित्तक होने से याग रूप अर्थ को कहने में समर्थ नहीं है, वह ठीक नहीं है, क्योंकि भिन्न पदार्थ में स्थित सादृश्य की सहायता से ये पाग की स्तुति करते हुए यागार्थ का कथन करने में समर्थ होते है । अतः जैसे- शोक में "सिंहो देवदत्त : आदि वाक्यो में बल के सादृश्य से देवदत्त को ही सिंह कहकर स्तुति की जाती है वैसे ही यहाँ भी सादृश्य से याग की स्तुति सिद्ध होती है। अतः विधिवाक्यगत श्येन, संदेश तथा गो आदिपद सद्यपदेशन्पाय से याग की संज्ञा हैं । यहाँ पर यह आम नहीं कियाजा सकता कि वेदोक्त होने से अभिवार कर्म भी कर्तव्य के रूप में प्राप्त है, अतः इन कर्मों में भी पुरुष प्रवृत्त होंगे। क्योंकि भले ही यह कर्म वेद में बहे गये हैं किन्तु फ्लरूप होने से ये वेदविहित नहीं है फ्लं न विधेम किंतु फ्लमुद्दिश्य तत्साधानत्वेन कर्मैव विम्" इस न्याय से अभिचार कर्म शत्रुमारण अनिष्ट फल नरकादि । के जनक होने से वेदविहित नहीं है। इसलिये शत्रुहंसा रूप अभिवार कर्मों में वैदिक पुरुषों की प्रवृत्ति नहीं होगी ऐसा मीमांसा सिद्धान्त है। ।" यत्तु जातिशब्दा इमे न यागमभिवदन्तीति । सादृश्य व्यपदेशाद अभिवदिष्यति । -वस्मात् वर्मनामधेयम् । " सूत्र 1/4/5 TO OHTO हूँ वाजपेपेन स्वाराज्यकामा० आदि वाक्यों में प्रयुक्त वाजपेयादि शब्द भी तत्परूपन्याय से पाग की संज्ञा सिद्ध होते है *दाजपेयेन स्वाराज्यकामो यजेत इस वाक्य में प्रयुक्त "वाजपेय शब्द गुण की संज्ञा न होकर यागकर्म की मंशा है । क्योकि यदि इसे गुण का विधायक मद मानेंगे तो वाजमन्नपैयो इस व्युत्पत्ति के अनुसार वाजपेय द्रष्प शस्य जाति से युक्त होगा बोकि दर्शपूर्णमासकर्म की प्रकृति है । सम्पूर्णमाग सक्ल इष्टि, पशु एवं सौम इन तीन भागों में विभक्त है। इनमें वाजपेय याग सोम जाति का है । अतः यदि • वाजपेय पद द्वारा यवागू आदि रूप अन्नयुक्त पेय गुण का विधान करते हैं तो वाजपेय याग दृष्टि जातीय हो जायेगा ।। अतः "वाजपेयेन वाक्य को गुण-विधि मानने पर वाजपेय और दर्शपूर्णमास दोनों यागा की समान प्रकृति हो जायेगी । इसलिये वाजपेय को पाग की संज्ञा मानना ही अधिक उचित है यहाँ गुणविधि मानने में एक दोष यह भी है कि इस वाक्य से वाजपेय गुण एवं स्वाराज्य पल दोनों का एक साथ विधान मानने पर वाक्यमेद्र दोष भी प्राप्त होगा । क्योंकि याग का गुण के साथ अन्वय करने पर " वाजपेयेन यारों भावयेत् यह वाक्यार्थ प्राप्त होगा * और स्वाराज्य फ्ल के साथ अन्वय करने पर पागेन स्वाराज्य भावयेत् यह वाक्यार्थ मानना होगा । वाक्य में एक बार उच्चरित "यज" के धात्वर्य से साध्य कर्मत्व एवं साधारण दोनों रूपों सहित 1"एक्शवेपरार्थवतु " जैसू० 1/4/1 2- विशेष - "वाजपेय" शब्द को गुण मानने में एक दोष यह भी है कि ऐसी दशा में वाजपेय याग के भी ज्योतिष्टोम की भांति सोमयाग हो जाने से सप्तदशदी क्षो वाजपेयः, सप्तदशोपसत्को वाजपेयः "आदि वाक्य द्वारा अगभूत दीक्षा एवं उपसद का अनुवाद करके संख्या का विधान नहीं हो सकेगा । अतः वाजपेय को कर्म की संज्ञा मानना ही युक्त है।
भी संदेश द्रव्य का वाचक न होकर याग वर्म वा वाद है। इसकी पागार्थवाचकता " यथा वैदशो दुरादानमान्ते एवमयं द्विषन्तम् भ्रातृष्यं निपत्त्यादत्ते हरु अर्थवाद वाक्य से भी सिद्ध होती है । यहाँ पर उपमान-संदेश द्रव्य द्वारा उपमेय संदेश याग कर्म की पपा बैo" आदि सादृश्यवाचक पदों से स्तुति की गई है । अतः जिस प्रकार संदेश कठिनाई से पकड़ने योग्य तप्तलौहपिण्ड आदि को पकड़ लेता है वैसे ही यह संदेश याग कठिनाई से प्राप्त होने वाले शत्रुओं को सरलता से पकड़ लेना है "यह वाक्यार्थ प्राप्त होता है। इस अर्थवादवाक्य से दुरादान के साधान के रूप में प्रसिद्ध संदेश द्रव्य से पाग की स्तुति की गई है । अतः संदंश पद तदयपदेश न्याय से याग का वाचक सिद्ध होता भवाऽभिवरन् * वाक्यगत "गो" पद भी तद्वयपदेशन्याय से ही यागकर्म का नामधेय है ।तीस "भवाभिवरन् यजेत वाक्य का गोपद भी गो पशु का षड़चक न होकर गो संज्ञक याग का वाचक है । "गो" शब्द के कर्मनामधेयता भी व्यथा गावो गोपायन्ति इस अर्थवाद के सादृश्य वाचक पदों की सहायता से प्रसिद्ध गो पशु द्वारा गो संज्ञक यागर्म की स्तुति होने से सिद्ध है। जैसे गाय अपने बहडे की हिंसक पशु से रक्षा करती है, वैसे ही यह गो संज्ञक याग भी यजमान की असुरों ओर करता है यह वाक्पार्थ यहाँ प्राप्त होता है। अतः गो" पद पशुद्रव्य की नहीं अपितु याग की संज्ञा एक- संदेशशब्दश्च सदश्यते पारर्बद्रये निपीप दुरादेयं परिगृह्यते अनेनेति व्युत्पत्त्या ।" कतिपय वादी विद्वानों का जो यह मत है कि अर्थवादगत इसेनादि पद जाति निमित्तक होने से याग रूप अर्थ को कहने में समर्थ नहीं है, वह ठीक नहीं है, क्योंकि भिन्न पदार्थ में स्थित सादृश्य की सहायता से ये पाग की स्तुति करते हुए यागार्थ का कथन करने में समर्थ होते है । अतः जैसे- शोक में "सिंहो देवदत्त : आदि वाक्यो में बल के सादृश्य से देवदत्त को ही सिंह कहकर स्तुति की जाती है वैसे ही यहाँ भी सादृश्य से याग की स्तुति सिद्ध होती है। अतः विधिवाक्यगत श्येन, संदेश तथा गो आदिपद सद्यपदेशन्पाय से याग की संज्ञा हैं । यहाँ पर यह आम नहीं कियाजा सकता कि वेदोक्त होने से अभिवार कर्म भी कर्तव्य के रूप में प्राप्त है, अतः इन कर्मों में भी पुरुष प्रवृत्त होंगे। क्योंकि भले ही यह कर्म वेद में बहे गये हैं किन्तु फ्लरूप होने से ये वेदविहित नहीं है फ्लं न विधेम किंतु फ्लमुद्दिश्य तत्साधानत्वेन कर्मैव विम्" इस न्याय से अभिचार कर्म शत्रुमारण अनिष्ट फल नरकादि । के जनक होने से वेदविहित नहीं है। इसलिये शत्रुहंसा रूप अभिवार कर्मों में वैदिक पुरुषों की प्रवृत्ति नहीं होगी ऐसा मीमांसा सिद्धान्त है। ।" यत्तु जातिशब्दा इमे न यागमभिवदन्तीति । सादृश्य व्यपदेशाद अभिवदिष्यति । -वस्मात् वर्मनामधेयम् । " सूत्र एक/चार/पाँच TO OHTO हूँ वाजपेपेन स्वाराज्यकामाशून्य आदि वाक्यों में प्रयुक्त वाजपेयादि शब्द भी तत्परूपन्याय से पाग की संज्ञा सिद्ध होते है *दाजपेयेन स्वाराज्यकामो यजेत इस वाक्य में प्रयुक्त "वाजपेय शब्द गुण की संज्ञा न होकर यागकर्म की मंशा है । क्योकि यदि इसे गुण का विधायक मद मानेंगे तो वाजमन्नपैयो इस व्युत्पत्ति के अनुसार वाजपेय द्रष्प शस्य जाति से युक्त होगा बोकि दर्शपूर्णमासकर्म की प्रकृति है । सम्पूर्णमाग सक्ल इष्टि, पशु एवं सौम इन तीन भागों में विभक्त है। इनमें वाजपेय याग सोम जाति का है । अतः यदि • वाजपेय पद द्वारा यवागू आदि रूप अन्नयुक्त पेय गुण का विधान करते हैं तो वाजपेय याग दृष्टि जातीय हो जायेगा ।। अतः "वाजपेयेन वाक्य को गुण-विधि मानने पर वाजपेय और दर्शपूर्णमास दोनों यागा की समान प्रकृति हो जायेगी । इसलिये वाजपेय को पाग की संज्ञा मानना ही अधिक उचित है यहाँ गुणविधि मानने में एक दोष यह भी है कि इस वाक्य से वाजपेय गुण एवं स्वाराज्य पल दोनों का एक साथ विधान मानने पर वाक्यमेद्र दोष भी प्राप्त होगा । क्योंकि याग का गुण के साथ अन्वय करने पर " वाजपेयेन यारों भावयेत् यह वाक्यार्थ प्राप्त होगा * और स्वाराज्य फ्ल के साथ अन्वय करने पर पागेन स्वाराज्य भावयेत् यह वाक्यार्थ मानना होगा । वाक्य में एक बार उच्चरित "यज" के धात्वर्य से साध्य कर्मत्व एवं साधारण दोनों रूपों सहित एक"एक्शवेपरार्थवतु " जैसूशून्य एक/चार/एक दो- विशेष - "वाजपेय" शब्द को गुण मानने में एक दोष यह भी है कि ऐसी दशा में वाजपेय याग के भी ज्योतिष्टोम की भांति सोमयाग हो जाने से सप्तदशदी क्षो वाजपेयः, सप्तदशोपसत्को वाजपेयः "आदि वाक्य द्वारा अगभूत दीक्षा एवं उपसद का अनुवाद करके संख्या का विधान नहीं हो सकेगा । अतः वाजपेय को कर्म की संज्ञा मानना ही युक्त है।
Gopashtami 2021: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, 11 नवंबर गुरुवार के दिन गोपाष्टमी का त्याैहार मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण अष्टमी तिथि गुरुवार को मनाई जाएगी। यह गायों की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित एक त्यौहार है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 नवंबर, गुरुवार को सुबह 6:50 मिनट से होगा व 12 नवंबर शुक्रवार सुबह 5:51 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन, लोग गाय व बछड़े को सजाते हैं और गायों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करते हैं, जिन्हें जीवन देने वाला माना जाता है। हिंदू संस्कृति में, गायों को 'गौ माता' कहा जाता है और उनकी देवी की तरह पूजा की जाती है। जब श्री कृष्ण ने बछड़े की बजाय गाय को चराना शुरू किया, उस दिन माता ने अपने कान्हा को बहुत सुन्दर तैयार किया था। वह दिन गोपाष्टमी का था। गोपाष्टमी पूजा कैसे करेःं सुबह ही गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार किया जाता है। उसका श्रृंगार किया जाता हैं, पैरों में घुंघरू व अन्य आभूषण पहनाए जाते हैं। गौ माता के सींगो पर चुनरी बांधी जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करके गाय के चरण स्पर्श किए जाते हैं। सुबह गायों की परिक्रमा कर उन्हें चराने बाहर ले जाते हैं। शाम को जब गाय घर लौटती हैं, तब फिर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें अच्छा भोजन दिया जाता है। खासतौर पर इस दिन गाय को हरा चारा व गुड़ खिलाया जाता है। जिनके घरों में गाय नहीं होती है, वे लोग गाेशाला जाकर गाय की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा जल, फूल चढ़ाते हैं, दिया जलाकर गुड़ खिलाते है। गाेशाला में खाना और अन्य समान का दान भी करते हैं। इस दिन कृष्ण जी की पूजा भी की जाती है।
Gopashtami दो हज़ार इक्कीस: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, ग्यारह नवंबर गुरुवार के दिन गोपाष्टमी का त्याैहार मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण अष्टमी तिथि गुरुवार को मनाई जाएगी। यह गायों की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित एक त्यौहार है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ ग्यारह नवंबर, गुरुवार को सुबह छः:पचास मिनट से होगा व बारह नवंबर शुक्रवार सुबह पाँच:इक्यावन मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन, लोग गाय व बछड़े को सजाते हैं और गायों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करते हैं, जिन्हें जीवन देने वाला माना जाता है। हिंदू संस्कृति में, गायों को 'गौ माता' कहा जाता है और उनकी देवी की तरह पूजा की जाती है। जब श्री कृष्ण ने बछड़े की बजाय गाय को चराना शुरू किया, उस दिन माता ने अपने कान्हा को बहुत सुन्दर तैयार किया था। वह दिन गोपाष्टमी का था। गोपाष्टमी पूजा कैसे करेःं सुबह ही गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार किया जाता है। उसका श्रृंगार किया जाता हैं, पैरों में घुंघरू व अन्य आभूषण पहनाए जाते हैं। गौ माता के सींगो पर चुनरी बांधी जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करके गाय के चरण स्पर्श किए जाते हैं। सुबह गायों की परिक्रमा कर उन्हें चराने बाहर ले जाते हैं। शाम को जब गाय घर लौटती हैं, तब फिर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें अच्छा भोजन दिया जाता है। खासतौर पर इस दिन गाय को हरा चारा व गुड़ खिलाया जाता है। जिनके घरों में गाय नहीं होती है, वे लोग गाेशाला जाकर गाय की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा जल, फूल चढ़ाते हैं, दिया जलाकर गुड़ खिलाते है। गाेशाला में खाना और अन्य समान का दान भी करते हैं। इस दिन कृष्ण जी की पूजा भी की जाती है।
गर्मी में होने वाली फुंसियों और हीट रैशेज से कैसे पाएं निजात ? कुछ लोगों की स्किन बहुत संवेदनशील होती है। गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा ऐसी ही त्वचा वाले लोगों को अधिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। देर तक धूप में रह कर काम करने से हीट रैशेज, फुंसियां आदि स्किन पर निकल आना, इन दिनों एक कॉमन प्रॉब्लम है। चुभती गर्मी में फुंसियों के क्या कारण हैं? गर्म और नमीयुक्त वातावरण, तंग या सख्त कपड़े, सिंथेटिक कपड़े, शारीरिक श्रम के कारण अधिक पसीना और तेज बुखार आदि गर्मियों में फुंसियों और हीट रैशेज के कारण होते हैं। ये दाने स्वेद ग्रंथि के अवरुद्ध हो जाने के कारण निकलते हैं जिस कारण त्वचा की परतों के अंदर ही पसीना रिस जाता है। हीट रैशेज का खतरा किसे अधिक होता है? नवजात शिशु, जिसकी स्वेद ग्रंथियां अपरिपक्व रहती हैं और इसलिए उसे विशेष तौर पर चुभती गर्मी में परेशानी होती है। बीमार या अस्पताल में भर्ती मरीज, शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर, सेना और पुलिस के जवानों को भी इस स्थिति का अधिक खतरा रहता है, क्योंकि उन्हें तेज गर्मी और तंग कपड़ों में काम करना पड़ता है। हीट रैशेज के क्या लक्षण हैं? हीट रैशेज के कारण खुजली के साथ त्वचा की रंगत बदल जाती है। कई बार इन छोटे-छोटे दानों में पानी भर आता है या पीठ, छाती और गर्दन के पिछले हिस्से जैसे बंद हिस्सों में फुंसियां निकल आती हैं। बहुत कम ऐसा होता है कि इनमें पस नजर आता हो। हीट रैश का इलाज क्या है? कैलामाइन और मेंथल मिश्रित लोशन लगाने से त्वचा को बड़ी राहत मिलती है। लेनोलिन वाले लोशन या क्रीम लगाने से स्वेद ग्रंथियां अवरुद्ध नहीं हो पाती हैं। आपके डर्मेटोलॉजिस्ट कई बार आपको एंटी-इचिंग टैबलेट का सेवन करने के साथ-साथ मल्टी-एंटीइनफ्लेमेटरी क्रीम भी लगाने की सलाह दे सकते हैं। - ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा होगा कि गर्मी में बहुत ज्यादा घर से बाहर निकलने से बचें। - जब तेज धूप रहे तो घर के ठंडे वातावरण में ही रहना बेहतर है। - ढीले-ढाले सूती कपड़े ही पहनना चाहिए। - गर्मियों के दौरान बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से भी बचें। Total Wellness is now just a click away.
गर्मी में होने वाली फुंसियों और हीट रैशेज से कैसे पाएं निजात ? कुछ लोगों की स्किन बहुत संवेदनशील होती है। गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा ऐसी ही त्वचा वाले लोगों को अधिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। देर तक धूप में रह कर काम करने से हीट रैशेज, फुंसियां आदि स्किन पर निकल आना, इन दिनों एक कॉमन प्रॉब्लम है। चुभती गर्मी में फुंसियों के क्या कारण हैं? गर्म और नमीयुक्त वातावरण, तंग या सख्त कपड़े, सिंथेटिक कपड़े, शारीरिक श्रम के कारण अधिक पसीना और तेज बुखार आदि गर्मियों में फुंसियों और हीट रैशेज के कारण होते हैं। ये दाने स्वेद ग्रंथि के अवरुद्ध हो जाने के कारण निकलते हैं जिस कारण त्वचा की परतों के अंदर ही पसीना रिस जाता है। हीट रैशेज का खतरा किसे अधिक होता है? नवजात शिशु, जिसकी स्वेद ग्रंथियां अपरिपक्व रहती हैं और इसलिए उसे विशेष तौर पर चुभती गर्मी में परेशानी होती है। बीमार या अस्पताल में भर्ती मरीज, शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर, सेना और पुलिस के जवानों को भी इस स्थिति का अधिक खतरा रहता है, क्योंकि उन्हें तेज गर्मी और तंग कपड़ों में काम करना पड़ता है। हीट रैशेज के क्या लक्षण हैं? हीट रैशेज के कारण खुजली के साथ त्वचा की रंगत बदल जाती है। कई बार इन छोटे-छोटे दानों में पानी भर आता है या पीठ, छाती और गर्दन के पिछले हिस्से जैसे बंद हिस्सों में फुंसियां निकल आती हैं। बहुत कम ऐसा होता है कि इनमें पस नजर आता हो। हीट रैश का इलाज क्या है? कैलामाइन और मेंथल मिश्रित लोशन लगाने से त्वचा को बड़ी राहत मिलती है। लेनोलिन वाले लोशन या क्रीम लगाने से स्वेद ग्रंथियां अवरुद्ध नहीं हो पाती हैं। आपके डर्मेटोलॉजिस्ट कई बार आपको एंटी-इचिंग टैबलेट का सेवन करने के साथ-साथ मल्टी-एंटीइनफ्लेमेटरी क्रीम भी लगाने की सलाह दे सकते हैं। - ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा होगा कि गर्मी में बहुत ज्यादा घर से बाहर निकलने से बचें। - जब तेज धूप रहे तो घर के ठंडे वातावरण में ही रहना बेहतर है। - ढीले-ढाले सूती कपड़े ही पहनना चाहिए। - गर्मियों के दौरान बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से भी बचें। Total Wellness is now just a click away.
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया, जहां जिले के सारंडी गांव में बिजली का करंट लगने से 4 लोगों की मौत हो गई. चारों युवक कुएं में लगे मोटर पंप को ठीक करने के लिए कुएं में उतरे थे. Bikaner: क्या आपने देखा है चलता फिरता बाजार? मार्केट से आधी कीमत पर मिलता है सामान!
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया, जहां जिले के सारंडी गांव में बिजली का करंट लगने से चार लोगों की मौत हो गई. चारों युवक कुएं में लगे मोटर पंप को ठीक करने के लिए कुएं में उतरे थे. Bikaner: क्या आपने देखा है चलता फिरता बाजार? मार्केट से आधी कीमत पर मिलता है सामान!
जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री की ओर से वर्षा जल संचयन को लेकर संचालित जल शक्ति अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। देशवासियों को जल संरक्षण कर भविष्य को सुरक्षित रखने का संदेश दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के संदेश को हर गांव में चौपाल लगाकर बजरिए टेलीविजन-एलइडी दिखाया व सुनाया जाएगा। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जागरुकता संबंधी अन्य कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। रविवार को पूर्व संध्या पर इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। मुख्य विकास अधिकारी भानुप्रताप सिंह ने खंड विकास अधिकारियों व एडीओ पंचायत को ग्राम चौपाल की तैयारी करने का निर्देश दिया है। चौपाल में अधिकारी भी प्रतिभाग करेंगे। इस दौरान ग्रामवासियों को जल संरक्षण संबंधी शपथ भी दिलाई जाएगी। - मैं पानी बचाने और उसके विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ लेता-लेती हूं। मैं यह भी शपथ लेता-लेती हूं कि मैं जल का समुचित उपयोग करूंगा-करूंगी। पानी की हर एक बूंद का संचयन कर 'कैच द रेन' अभियान को बढ़ावा देने में पूरा सहयोग करूंगा-करूंगी। मैं पानी को एक अनमोल संपदा मानते हुए इसका उपयोग करूंगा-करूंगी। मैं शपथ लेता हूं की अपने स्वजनों, मित्रों, पड़ोसियों को भी इसके विवेकपूर्ण उपयोग और उसे व्यर्थ न करने के लिए प्रेरित करूंगा-करूंगी। यह ग्रह हमारा है और हम ही इसे बचा सकते हैं और अपना भविष्य सुरक्षित रख सकते हैं। - विश्व जल दिवस पर ग्रामीणों के बीच एवं शिक्षण संस्थानों में निबंध, वाद विवाद, चित्रकला, स्लोगन राइटिग की प्रतियोगिता संपन्न कराई जाएगी। गांव व नगरों में कठपुतली का प्रदर्शन, लोकनृत्य, नुक्कड नाटक के जरिए तथा पदयात्रा, रैली, संगोष्ठियों के जरिए भी जल संरक्षण व संचयन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर : विश्व जल दिवस बाईस मार्च को मनाया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री की ओर से वर्षा जल संचयन को लेकर संचालित जल शक्ति अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। देशवासियों को जल संरक्षण कर भविष्य को सुरक्षित रखने का संदेश दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के संदेश को हर गांव में चौपाल लगाकर बजरिए टेलीविजन-एलइडी दिखाया व सुनाया जाएगा। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जागरुकता संबंधी अन्य कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। रविवार को पूर्व संध्या पर इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। मुख्य विकास अधिकारी भानुप्रताप सिंह ने खंड विकास अधिकारियों व एडीओ पंचायत को ग्राम चौपाल की तैयारी करने का निर्देश दिया है। चौपाल में अधिकारी भी प्रतिभाग करेंगे। इस दौरान ग्रामवासियों को जल संरक्षण संबंधी शपथ भी दिलाई जाएगी। - मैं पानी बचाने और उसके विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ लेता-लेती हूं। मैं यह भी शपथ लेता-लेती हूं कि मैं जल का समुचित उपयोग करूंगा-करूंगी। पानी की हर एक बूंद का संचयन कर 'कैच द रेन' अभियान को बढ़ावा देने में पूरा सहयोग करूंगा-करूंगी। मैं पानी को एक अनमोल संपदा मानते हुए इसका उपयोग करूंगा-करूंगी। मैं शपथ लेता हूं की अपने स्वजनों, मित्रों, पड़ोसियों को भी इसके विवेकपूर्ण उपयोग और उसे व्यर्थ न करने के लिए प्रेरित करूंगा-करूंगी। यह ग्रह हमारा है और हम ही इसे बचा सकते हैं और अपना भविष्य सुरक्षित रख सकते हैं। - विश्व जल दिवस पर ग्रामीणों के बीच एवं शिक्षण संस्थानों में निबंध, वाद विवाद, चित्रकला, स्लोगन राइटिग की प्रतियोगिता संपन्न कराई जाएगी। गांव व नगरों में कठपुतली का प्रदर्शन, लोकनृत्य, नुक्कड नाटक के जरिए तथा पदयात्रा, रैली, संगोष्ठियों के जरिए भी जल संरक्षण व संचयन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज बीमारी ने अब दोबारा दस्तक दे दी है। इन दिनों उत्तराखंड में लंपी स्किन डिजीज खूब कहर बरपा रही है। उत्तराखंड के साथ लगते हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में भी लंपी स्किन डिजीज गाोवंश को तेजी से अपनी चपेट में ले ली रही है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2022 में लंपी चमड़ी रोग ने खूब कहर बरपाया था। जिला ऊना भी इससे अछूता नहीं रहा था। जिला ऊना में 11280 पशु लंपी स्किन डिजीज बीमारी से ग्रसित हुए थे। इनमें 1209 गोवंश की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि पशुपालन विभाग व पशुपालकों के प्रयासों से 10071 पशुओं को बचाया गया था। इस रोग को देखते हुए पशुपालन विभाग ने युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया और 52406 पशुओं का टीकाकरण किया गया। बताते चलें कि 10 माह बाद फिर से लंपी स्किन डिजीज की दस्तक से पशुपालकों के हाथ पांव फूल गए हैं। गत वर्ष सैकड़ोंं पशु इस बीमारी की चपेट में आकर मौत का ग्रास बन गए थे। अभी पशुपालकों के पिछले जख्म भरे भी नहीं थे, कि यह बीमारी फिर से लौट आई है। हालांकि अभी प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस बीमारी से पशु ग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन यह वायरस तेजी से फैलता है। इसी के चलते पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। पशुपालन विभाग के अधिकारी पशुपालकों को समय रहते अपने मवेशियों को रोग प्रतिरोधक टीकाकरण करवाने की सलाह दे रहे है। विभाग द्वारा जिला ऊना के समस्त पशु औषधालयों में पशुओं में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को स्किन डिजीज से प्रभावित पशुओं की खरीद फ्रोख्त न करने की भी हिदायत जारी की गई है। अगर किसी पशु में तेज बुखार, भूख न लगना, दूध में गिरावट, शरीर पर मोटी-मोटी गांठे बनने जैसे लक्ष्ण दिखे तो पशुपालकों को नजदीकी पशु चिकित्सालय या औषाधालय में संपर्क करें। पशुपालक विभाग ने लोगों के लिए कुछ विशेष हिदायतें जारी की हैं। विभाग के अनुसार पशुओं के आसपास के वातावरण को साफ सूथरा रखें। पशुओं के आसपास मक्खी-मच्छर न पनपने दें। अगर कोई पशु बीमारी की चपेट में आ जाता है तो घबराएं नहीं, उसकी सूचना अपने पशुपालन विभाग को दें। पशु को अन्य पशुओं से अलग बांध दें। बीमार पशु का दूध अच्छी तरह उबाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है। पशुपालन विभाग लंपी बीमारी को लेकर सकर्त हो गया है। विभाग ने पशुपालकों को एडवाइजरी जारी कर दी है। पशुपालक अपने नजदीकी पशु औषधालयों में पशुओं का टीकाकरण करवा लें। टीकाकरण पूरी तरह से निःशुल्क है। अगर किसी पशु में बीमारी से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं, तो नजदीकी औषधालयों में संपर्क करें।
हिमाचल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज बीमारी ने अब दोबारा दस्तक दे दी है। इन दिनों उत्तराखंड में लंपी स्किन डिजीज खूब कहर बरपा रही है। उत्तराखंड के साथ लगते हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में भी लंपी स्किन डिजीज गाोवंश को तेजी से अपनी चपेट में ले ली रही है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष दो हज़ार बाईस में लंपी चमड़ी रोग ने खूब कहर बरपाया था। जिला ऊना भी इससे अछूता नहीं रहा था। जिला ऊना में ग्यारह हज़ार दो सौ अस्सी पशु लंपी स्किन डिजीज बीमारी से ग्रसित हुए थे। इनमें एक हज़ार दो सौ नौ गोवंश की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि पशुपालन विभाग व पशुपालकों के प्रयासों से दस हज़ार इकहत्तर पशुओं को बचाया गया था। इस रोग को देखते हुए पशुपालन विभाग ने युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया और बावन हज़ार चार सौ छः पशुओं का टीकाकरण किया गया। बताते चलें कि दस माह बाद फिर से लंपी स्किन डिजीज की दस्तक से पशुपालकों के हाथ पांव फूल गए हैं। गत वर्ष सैकड़ोंं पशु इस बीमारी की चपेट में आकर मौत का ग्रास बन गए थे। अभी पशुपालकों के पिछले जख्म भरे भी नहीं थे, कि यह बीमारी फिर से लौट आई है। हालांकि अभी प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस बीमारी से पशु ग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन यह वायरस तेजी से फैलता है। इसी के चलते पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। पशुपालन विभाग के अधिकारी पशुपालकों को समय रहते अपने मवेशियों को रोग प्रतिरोधक टीकाकरण करवाने की सलाह दे रहे है। विभाग द्वारा जिला ऊना के समस्त पशु औषधालयों में पशुओं में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को स्किन डिजीज से प्रभावित पशुओं की खरीद फ्रोख्त न करने की भी हिदायत जारी की गई है। अगर किसी पशु में तेज बुखार, भूख न लगना, दूध में गिरावट, शरीर पर मोटी-मोटी गांठे बनने जैसे लक्ष्ण दिखे तो पशुपालकों को नजदीकी पशु चिकित्सालय या औषाधालय में संपर्क करें। पशुपालक विभाग ने लोगों के लिए कुछ विशेष हिदायतें जारी की हैं। विभाग के अनुसार पशुओं के आसपास के वातावरण को साफ सूथरा रखें। पशुओं के आसपास मक्खी-मच्छर न पनपने दें। अगर कोई पशु बीमारी की चपेट में आ जाता है तो घबराएं नहीं, उसकी सूचना अपने पशुपालन विभाग को दें। पशु को अन्य पशुओं से अलग बांध दें। बीमार पशु का दूध अच्छी तरह उबाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है। पशुपालन विभाग लंपी बीमारी को लेकर सकर्त हो गया है। विभाग ने पशुपालकों को एडवाइजरी जारी कर दी है। पशुपालक अपने नजदीकी पशु औषधालयों में पशुओं का टीकाकरण करवा लें। टीकाकरण पूरी तरह से निःशुल्क है। अगर किसी पशु में बीमारी से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं, तो नजदीकी औषधालयों में संपर्क करें।
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसकी एक सप्ताह की मियाद सोमवार को खत्म हो गई। जिसके बाद सख्त रुख दिखाते हुए कांग्रेस हाईकमान उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। उन्हें नोटिस भेजने वाले कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि सुनील जाखड़ को एक हफ्ते का वक्त दिया था। यह समय बीत चुका है। एक-दो दिन के अंदर अनुशासन समिति की मीटिंग होगी। जो भी संवैधानिक परंपरा है, उस हिसाब से उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उनका कांग्रेस से निलंबन, निष्कासन या नोटिस होगा, इसका अंतिम फैसला कमेटी लेगी। जाखड़ को दिल्ली भी तलब किया जा सकता है। हालांकि पार्टी के रवैये से खिन्न जाखड़ पार्टी भी छोड़ सकते हैं। सक्रिय पॉलिटिक्स से वह पहले ही किनारा कर चुके हैं। जाखड़ को पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी के बारे में विवादित टिप्पणी को लेकर नोटिस जारी हुआ था। जाखड़ की कांग्रेस हाईकमान से ज्यादा उनके दूतों से नाराजगी है। जिन्होंने हाईकमान को गलत फीडबैक देकर पिछले चुनाव में कांग्रेस का बंटाधार करवा दिया। पहले नवजोत सिद्धू को प्रधान बनाने के लिए अचानक उन्हें कुर्सी से हटा दिया। इसके लिए कोई वजह तक नहीं बताई गई। इसके बाद कैप्टन को हटा उन्हें CM बनाने की बारी आई तो सिख-हिंदू कार्ड खेल दिया गया। कांग्रेस ने पंजाब में फिर सिख-हिंदू के सियासी संतुलन के लिए भारत भूषण आशु पर दांव खेला है। लुधियाना के दिग्गज हिंदू नेता और सरकार में मंत्री रहे आशू को वर्किंग प्रधान बनाया गया है। वह पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ काम करेंगे। हालांकि आशू को भी जाखड़ ग्रुप का ही माना जाता है। उनको राहुल गांधी तक प्रमोट कर मंत्री पद पर पहुंचाने के पीछे जाखड़ को ही माना जाता है। पंजाब में कार्रवाई पर कांग्रेस हाईकमान की बेबसी साफ नजर आती है। चुनाव के वक्त पटियाला से कांग्रेसी सांसद परनीत कौर को भी नोटिस जारी हुआ था। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले पति कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए खुलकर प्रचार किया। हालांकि कांग्रेस हाईकमान उन पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं दिखा सका। इसी तरह कपूरथला से विधायक और मंत्री रहे राणा गुरजीत के बेटे राणा इंद्रप्रताप ने सुल्तानपुर लोधी से कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बदले भी कांग्रेस कार्रवाई नहीं कर सकी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसकी एक सप्ताह की मियाद सोमवार को खत्म हो गई। जिसके बाद सख्त रुख दिखाते हुए कांग्रेस हाईकमान उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। उन्हें नोटिस भेजने वाले कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि सुनील जाखड़ को एक हफ्ते का वक्त दिया था। यह समय बीत चुका है। एक-दो दिन के अंदर अनुशासन समिति की मीटिंग होगी। जो भी संवैधानिक परंपरा है, उस हिसाब से उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उनका कांग्रेस से निलंबन, निष्कासन या नोटिस होगा, इसका अंतिम फैसला कमेटी लेगी। जाखड़ को दिल्ली भी तलब किया जा सकता है। हालांकि पार्टी के रवैये से खिन्न जाखड़ पार्टी भी छोड़ सकते हैं। सक्रिय पॉलिटिक्स से वह पहले ही किनारा कर चुके हैं। जाखड़ को पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी के बारे में विवादित टिप्पणी को लेकर नोटिस जारी हुआ था। जाखड़ की कांग्रेस हाईकमान से ज्यादा उनके दूतों से नाराजगी है। जिन्होंने हाईकमान को गलत फीडबैक देकर पिछले चुनाव में कांग्रेस का बंटाधार करवा दिया। पहले नवजोत सिद्धू को प्रधान बनाने के लिए अचानक उन्हें कुर्सी से हटा दिया। इसके लिए कोई वजह तक नहीं बताई गई। इसके बाद कैप्टन को हटा उन्हें CM बनाने की बारी आई तो सिख-हिंदू कार्ड खेल दिया गया। कांग्रेस ने पंजाब में फिर सिख-हिंदू के सियासी संतुलन के लिए भारत भूषण आशु पर दांव खेला है। लुधियाना के दिग्गज हिंदू नेता और सरकार में मंत्री रहे आशू को वर्किंग प्रधान बनाया गया है। वह पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ काम करेंगे। हालांकि आशू को भी जाखड़ ग्रुप का ही माना जाता है। उनको राहुल गांधी तक प्रमोट कर मंत्री पद पर पहुंचाने के पीछे जाखड़ को ही माना जाता है। पंजाब में कार्रवाई पर कांग्रेस हाईकमान की बेबसी साफ नजर आती है। चुनाव के वक्त पटियाला से कांग्रेसी सांसद परनीत कौर को भी नोटिस जारी हुआ था। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले पति कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए खुलकर प्रचार किया। हालांकि कांग्रेस हाईकमान उन पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं दिखा सका। इसी तरह कपूरथला से विधायक और मंत्री रहे राणा गुरजीत के बेटे राणा इंद्रप्रताप ने सुल्तानपुर लोधी से कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बदले भी कांग्रेस कार्रवाई नहीं कर सकी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद का कुनबा बिखर चुका है. अतीक अहमद और उसका बेटा असद अब इस दुनिया में नहीं है. बेटे को एनकाउंटर में STF ने मार गिराया, जबकि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई. पिछले एक हफ्ते में ही माफिया अतीक समेत परिवार के तीन लोग मारे जा चुके हैं. बाकी लोग या तो जेल में हैं, या फिर फरार हैं. अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन के पांच बेटे हैं. बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है. दूसरा बेटा अली प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है. तीसरा बेटा असद 13 अप्रैल को मुठभेड़ में एसटीएफ के हाथों मारा गया. अतीक के बाकी दो बेटे अभी नाबालिग हैं, जो बालसुधार गृह में हैं. कहा जाता है कि एक समय प्रयागराज में अतीक अहमद की तूती बोलती थी, और आज घर में सन्नाटा पसरा है. जिस संपत्ति और शोहरत के लिए अतीक ने अपराध का रास्ता चुना, उसे आज कोई देखने वाला नहीं है. हालांकि अतीक अहमद ने पिछले तीन दशक में खूब संपत्तियां बनाईं, जो बेनामी क्यों न हो? आज हम आपको बताएंगे कि अतीक अहमद के पास कितनी नामी और बेनामी संपत्ति थी. क्योंकि उसने अधिकतर संपत्ति हड़पकर अपने नाम की थी. अब उसकी ये अथाह संपत्ति किसे मिलेगी, ये एक बड़ा सवाल है. सबसे पहले बताते हैं, कि अतीक अहमद के पास घोषित कितनी संपत्ति थी. अतीक अहमद ने साल 2019 में वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था. उसने अपने चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति 25 करोड़ रुपये बताई थी. हलफनामे से खुलासा हुआ था कि अतीक अहमद के एक दर्जन से अधिक बैंक खाते थे. कागजी संपत्ति को छोड़ दें, तो अतीक अहमद ने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति बनाई थी. हालांकि पिछले 2 साल में अतीक अहमद की अधिकतर अवैध संपत्ति या तो कुर्क की जा चुकी है, या फिर उसपर बुलडोजर चला दिया गया है. पिछले हफ्ते प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अतीक अहमद की करीब 1169 करोड़ रुपये की संपत्ति पर या तो बुलडोजर चल गया है, या फिर उसे जब्त कर लिया गया है. इसमें से 417 करोड़ की संपत्ति को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है, और करीब 752 करोड़ की संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक ने पिछले करीब तीन दशक में करीब 1200 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का साम्राज्य खड़ा किया था. अभी भी अतीक की अवैध संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. बता दें, ईडी ने अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर से पहले अतीक और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापे मारे थे. ईडी को तब 15 ठिकानों से 100 से ज्यादा अवैध और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे. इस दौरान ये खुलासा भी हुआ था कि उसने लखनऊ और प्रयागराज के पॉश इलाकों में कई संपत्तियां खरीदी हैं. ये संपत्तियां या तो अतीक के नाम पर हैं या उसके परिवारवालों के नाम पर हैं. इसी दौरान ED को अतीक के नाम दर्ज लखनऊ में 47 लाख रुपये की कीमत के 5900 Sqmt में बने मकान के सबूत भी मिले. अतीक अहमद ने साल 2013 में लखनऊ के गोमतीनगर का प्लॉट सिर्फ 29 लाख रुपये में लिखवा लिया था, जबकि सर्किल रेट के आधार पर इसकी कीमत 47 लाख रुपये थी. अतीक की संपत्ति का कौन दावेदार? अतीक की मौत के बाद ये सवाल सबसे बड़ा है, कि क्या उसकी पत्नी और उसके दोनों बेटों को काली कमाई की पूरी जानकारी है? खबरों के मुताबिक अतीक और अशरफ के जेल जाने के बाद शाइस्ता ने जमीन से जुड़े अवैध कारोबार को अपने हाथों में ले लिया. उमेश पाल की हत्या के पीछे शाइस्ता की बड़ी भूमिका बताई जा रही है. उमेश पाल की हत्या में नाम आने के बाद से ही वह फरार है. यही नहीं, मारे जाने से पहले अतीक ने पुलिस को 14 ऐसे लोगों के नाम बताए थे, जो उसे फंडिंग किया करते थे. ये रकम शाइस्ता परवीन तक पहुंचाई जाती थी. इसलिए पुलिस ने शाइस्ता की तलाश तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, अतीक अहमद ने पुलिस की पूछताछ में ऐसी 200 से अधिक फर्जी कंपनियों के बारे में बताया है, जिससे उसकी काली कमाई का कनेक्शन है. शाइस्ता परवीन आखिरी बार तभी दिखी थी, जब प्रयागराज में उसके घर को गिराया जा रहा था. तब अपनी ननद यानी अतीक की बहन के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आई शाइस्ता ने अतीक की जान को खतरा बताया था. सूत्रों के मुताबिक असद का नाम सामने आने के बाद शाइस्ता परवीन ने पहले असद को बचाने के लिए नेपाल भेजने की कोशिश की. लेकिन एसटीएफ की सख्ती की वजह से ऐसा नहीं हो सका. इसके बाद शाइस्ता ने शूटर गुलाम को असद के साथ ही रहने को कहा. इसी बीच शाइस्ता ने असद के लिए फंडिंग का इंतजाम भी शुरू कर दिया. खबर है कि शाइस्ता किसी तरह असद को देश से निकालकर खाड़ी के किसी देश में शिफ्ट करने की भी कोशिश कर रही थी. लेकिन पासपोर्ट और दूसरे दस्तावेजों की दिक्कत के कारण ऐसा नहीं हो सका. सूत्रों के मुताबिक पुलिस को ये भी पता चला कि असद को छिपाने के लिए जब शाइस्ता ने पैसे की जरूरत बताई तो अतीक के कहने पर लखनऊ के एक बिल्डर मुस्लिम खान ने शाइस्ता के पास 80 लाख रुपये की खेप पहुंचाई थी. हालांकि बाद में जब अतीक अहमद के ठिकानों पर छापे पड़े तो खबर है कि पुलिस को वहां हथियार और कारतूसों के अलावा 75 लाख रुपये और 50 शेल कंपनियों के दस्तावेज भी मिले थे. अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था. अतीक के पिता हाजी फिरोज तांगा चलाते थे. अतीक का पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगता था, वो 10वीं में फेल हो गया. इसके बाद वो इलाके के बदमाशों की संगत में आ गया. पैसों की खातिर उसकी जुर्म की दुनिया में एंट्री हुई. इसके साथ ही वह मारपीट, अपहरण और रंगदागरी वसूलने जैसे काम करने लगा. जब अतीक अहमद सिर्फ 17 साल का था तो उस पर हत्या का आरोप लगा था.
पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद का कुनबा बिखर चुका है. अतीक अहमद और उसका बेटा असद अब इस दुनिया में नहीं है. बेटे को एनकाउंटर में STF ने मार गिराया, जबकि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई. पिछले एक हफ्ते में ही माफिया अतीक समेत परिवार के तीन लोग मारे जा चुके हैं. बाकी लोग या तो जेल में हैं, या फिर फरार हैं. अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन के पांच बेटे हैं. बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है. दूसरा बेटा अली प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है. तीसरा बेटा असद तेरह अप्रैल को मुठभेड़ में एसटीएफ के हाथों मारा गया. अतीक के बाकी दो बेटे अभी नाबालिग हैं, जो बालसुधार गृह में हैं. कहा जाता है कि एक समय प्रयागराज में अतीक अहमद की तूती बोलती थी, और आज घर में सन्नाटा पसरा है. जिस संपत्ति और शोहरत के लिए अतीक ने अपराध का रास्ता चुना, उसे आज कोई देखने वाला नहीं है. हालांकि अतीक अहमद ने पिछले तीन दशक में खूब संपत्तियां बनाईं, जो बेनामी क्यों न हो? आज हम आपको बताएंगे कि अतीक अहमद के पास कितनी नामी और बेनामी संपत्ति थी. क्योंकि उसने अधिकतर संपत्ति हड़पकर अपने नाम की थी. अब उसकी ये अथाह संपत्ति किसे मिलेगी, ये एक बड़ा सवाल है. सबसे पहले बताते हैं, कि अतीक अहमद के पास घोषित कितनी संपत्ति थी. अतीक अहमद ने साल दो हज़ार उन्नीस में वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था. उसने अपने चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति पच्चीस करोड़ रुपये बताई थी. हलफनामे से खुलासा हुआ था कि अतीक अहमद के एक दर्जन से अधिक बैंक खाते थे. कागजी संपत्ति को छोड़ दें, तो अतीक अहमद ने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति बनाई थी. हालांकि पिछले दो साल में अतीक अहमद की अधिकतर अवैध संपत्ति या तो कुर्क की जा चुकी है, या फिर उसपर बुलडोजर चला दिया गया है. पिछले हफ्ते प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अतीक अहमद की करीब एक हज़ार एक सौ उनहत्तर करोड़ रुपये की संपत्ति पर या तो बुलडोजर चल गया है, या फिर उसे जब्त कर लिया गया है. इसमें से चार सौ सत्रह करोड़ की संपत्ति को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है, और करीब सात सौ बावन करोड़ की संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक ने पिछले करीब तीन दशक में करीब एक हज़ार दो सौ करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का साम्राज्य खड़ा किया था. अभी भी अतीक की अवैध संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. बता दें, ईडी ने अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर से पहले अतीक और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापे मारे थे. ईडी को तब पंद्रह ठिकानों से एक सौ से ज्यादा अवैध और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे. इस दौरान ये खुलासा भी हुआ था कि उसने लखनऊ और प्रयागराज के पॉश इलाकों में कई संपत्तियां खरीदी हैं. ये संपत्तियां या तो अतीक के नाम पर हैं या उसके परिवारवालों के नाम पर हैं. इसी दौरान ED को अतीक के नाम दर्ज लखनऊ में सैंतालीस लाख रुपये की कीमत के पाँच हज़ार नौ सौ Sqmt में बने मकान के सबूत भी मिले. अतीक अहमद ने साल दो हज़ार तेरह में लखनऊ के गोमतीनगर का प्लॉट सिर्फ उनतीस लाख रुपये में लिखवा लिया था, जबकि सर्किल रेट के आधार पर इसकी कीमत सैंतालीस लाख रुपये थी. अतीक की संपत्ति का कौन दावेदार? अतीक की मौत के बाद ये सवाल सबसे बड़ा है, कि क्या उसकी पत्नी और उसके दोनों बेटों को काली कमाई की पूरी जानकारी है? खबरों के मुताबिक अतीक और अशरफ के जेल जाने के बाद शाइस्ता ने जमीन से जुड़े अवैध कारोबार को अपने हाथों में ले लिया. उमेश पाल की हत्या के पीछे शाइस्ता की बड़ी भूमिका बताई जा रही है. उमेश पाल की हत्या में नाम आने के बाद से ही वह फरार है. यही नहीं, मारे जाने से पहले अतीक ने पुलिस को चौदह ऐसे लोगों के नाम बताए थे, जो उसे फंडिंग किया करते थे. ये रकम शाइस्ता परवीन तक पहुंचाई जाती थी. इसलिए पुलिस ने शाइस्ता की तलाश तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, अतीक अहमद ने पुलिस की पूछताछ में ऐसी दो सौ से अधिक फर्जी कंपनियों के बारे में बताया है, जिससे उसकी काली कमाई का कनेक्शन है. शाइस्ता परवीन आखिरी बार तभी दिखी थी, जब प्रयागराज में उसके घर को गिराया जा रहा था. तब अपनी ननद यानी अतीक की बहन के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आई शाइस्ता ने अतीक की जान को खतरा बताया था. सूत्रों के मुताबिक असद का नाम सामने आने के बाद शाइस्ता परवीन ने पहले असद को बचाने के लिए नेपाल भेजने की कोशिश की. लेकिन एसटीएफ की सख्ती की वजह से ऐसा नहीं हो सका. इसके बाद शाइस्ता ने शूटर गुलाम को असद के साथ ही रहने को कहा. इसी बीच शाइस्ता ने असद के लिए फंडिंग का इंतजाम भी शुरू कर दिया. खबर है कि शाइस्ता किसी तरह असद को देश से निकालकर खाड़ी के किसी देश में शिफ्ट करने की भी कोशिश कर रही थी. लेकिन पासपोर्ट और दूसरे दस्तावेजों की दिक्कत के कारण ऐसा नहीं हो सका. सूत्रों के मुताबिक पुलिस को ये भी पता चला कि असद को छिपाने के लिए जब शाइस्ता ने पैसे की जरूरत बताई तो अतीक के कहने पर लखनऊ के एक बिल्डर मुस्लिम खान ने शाइस्ता के पास अस्सी लाख रुपये की खेप पहुंचाई थी. हालांकि बाद में जब अतीक अहमद के ठिकानों पर छापे पड़े तो खबर है कि पुलिस को वहां हथियार और कारतूसों के अलावा पचहत्तर लाख रुपये और पचास शेल कंपनियों के दस्तावेज भी मिले थे. अतीक अहमद का जन्म दस अगस्त एक हज़ार नौ सौ बासठ को हुआ था. अतीक के पिता हाजी फिरोज तांगा चलाते थे. अतीक का पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगता था, वो दसवीं में फेल हो गया. इसके बाद वो इलाके के बदमाशों की संगत में आ गया. पैसों की खातिर उसकी जुर्म की दुनिया में एंट्री हुई. इसके साथ ही वह मारपीट, अपहरण और रंगदागरी वसूलने जैसे काम करने लगा. जब अतीक अहमद सिर्फ सत्रह साल का था तो उस पर हत्या का आरोप लगा था.
सबगुरु न्यूज -शिवगंज। किसान बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत् आल्पा गांव में विधायक संयम लोढा ने किसानो को सम्बोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने किसानो की भलाई के नाम पर तीन ऐसे कानून पास किये है जिसमें पूंजीपति अपनी मर्जी से चाहेे जितना माल अपने गौदाम में इकट्ठा कर सकेंगंे। इससे बाजार में जब माल कम होने से दाम बढ जायेंगे तब वे बेचकर भारी मुनाफा कमायेंगे। आल्पा के मुख्य चौराहे पर शिवगंज ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित किसान बचाओ देश बचाओ राष्ट्रीय अभियान के तहत् आयोजित किसान सभा में लोढ़ा ने आरोप लगाया कि इसी तरह पूंजीपति जब किसान से फसल का इकरार करेंगा और विवाद होगा तो किसान न्याय के लिये न्यायिक अदालत का दरवाजा नहीं खटा सकेेंगे। उन्होने कहा जब भाजपा यह दावा कर रही है कि वो किसानो की भलाई के लिये कानून लाई है तो किसानो को कम से कम इतना पैसा तो मिलेगा ही यह बात कानून में शामिल करने पर भाजपा को एतराज क्यो हैं? उन्होने कहा कि इतनी कडाके की ठंड एवं बरसात में दो लाख किसान दिल्ली की सीमा पर बैठे हुये है, तीस किसान अपनी जिन्दगी खो चुके है भाजपा सरकार किसानो को आतंकवादी बता रही है, उन पर आसु गैस के गोले छोडे जा रहे है, लाठिया बरसाई जा रही है। आज नहीं तो कल भाजपा के इस जुल्मी हुकुमत के खिलाफ देश का जन-जन उठ खडा होगा। लोढा ने कहा कि संविधान में किसी भी विषय पर कानून बनाने के स्पष्ट प्रावधान है। कृषि राज्य सूची में है लेकिन इसके बावजूद संसद ने हो-हल्ले के बीच बिना चर्चा के ये काले कानून पारित कर संविधान की आत्मा को रौंद दिया हैं। इसमें सर्वोच्च न्यायालय को दायर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करनी चाहिए। <span;> प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नव निर्वाचित सचिव निम्बाराम गरासिया, पूर्व जिला प्रमुख अन्नाराम बोराणा, ब्लाॅक अध्यक्ष हरीश राठौड, यूथ कांगे्रेस विधानसभा अध्यक्ष प्रकाशराज मीना, छैलसिंह देवडा, परबतसिंह, आल्पा सरपंच नारायण रावल, पूर्व सरपंच रताराम देवासी, मानाराम मीणा एवं अन्य वक्ताओं ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर लोढा का गांव पहुॅचने पर ग्रामवासियों ने स्वागत किया। फसल को नुकसान होने पर ग्रामीणो ने लोढा को अवगत कराया कि हिम गिरने से अरण्डी की फसल को काफी नुकसान हुआ है इस पर लोढा ने जिला कलक्टर भगवती प्रसाद को फोन पर बात कर फसल को हुये नुुकसान का सर्वे करवाना को कहा। लोढा ने उपखण्ड अधिकारी भागीरथराम चौधरी से भी फोन पर बात की। ग्रामीणो ने आल्पा में माईक्रो एनीकट का निर्माण जल संशाधन विभाग से करवाने के लिये ज्ञापन दिया जिस पर उन्होेने सहायक अभियंता जीवनसिंह से फोन पर बात कर प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने के निर्देश दिये। इस मौके पर गणेशराम मीना, रूखाडा सरपंच तेजाराम, मानसिंह, चैलाराम, नारायणसिंह जोयला, महेन्द्र माली केराल, केशरसिंह देवडा, पूर्व सरपंच शंकर मेघवाल, फौजाराम त्रिगर इत्यादि मौजूद थे।
सबगुरु न्यूज -शिवगंज। किसान बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत् आल्पा गांव में विधायक संयम लोढा ने किसानो को सम्बोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने किसानो की भलाई के नाम पर तीन ऐसे कानून पास किये है जिसमें पूंजीपति अपनी मर्जी से चाहेे जितना माल अपने गौदाम में इकट्ठा कर सकेंगंे। इससे बाजार में जब माल कम होने से दाम बढ जायेंगे तब वे बेचकर भारी मुनाफा कमायेंगे। आल्पा के मुख्य चौराहे पर शिवगंज ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित किसान बचाओ देश बचाओ राष्ट्रीय अभियान के तहत् आयोजित किसान सभा में लोढ़ा ने आरोप लगाया कि इसी तरह पूंजीपति जब किसान से फसल का इकरार करेंगा और विवाद होगा तो किसान न्याय के लिये न्यायिक अदालत का दरवाजा नहीं खटा सकेेंगे। उन्होने कहा जब भाजपा यह दावा कर रही है कि वो किसानो की भलाई के लिये कानून लाई है तो किसानो को कम से कम इतना पैसा तो मिलेगा ही यह बात कानून में शामिल करने पर भाजपा को एतराज क्यो हैं? उन्होने कहा कि इतनी कडाके की ठंड एवं बरसात में दो लाख किसान दिल्ली की सीमा पर बैठे हुये है, तीस किसान अपनी जिन्दगी खो चुके है भाजपा सरकार किसानो को आतंकवादी बता रही है, उन पर आसु गैस के गोले छोडे जा रहे है, लाठिया बरसाई जा रही है। आज नहीं तो कल भाजपा के इस जुल्मी हुकुमत के खिलाफ देश का जन-जन उठ खडा होगा। लोढा ने कहा कि संविधान में किसी भी विषय पर कानून बनाने के स्पष्ट प्रावधान है। कृषि राज्य सूची में है लेकिन इसके बावजूद संसद ने हो-हल्ले के बीच बिना चर्चा के ये काले कानून पारित कर संविधान की आत्मा को रौंद दिया हैं। इसमें सर्वोच्च न्यायालय को दायर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करनी चाहिए। <span;> प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नव निर्वाचित सचिव निम्बाराम गरासिया, पूर्व जिला प्रमुख अन्नाराम बोराणा, ब्लाॅक अध्यक्ष हरीश राठौड, यूथ कांगे्रेस विधानसभा अध्यक्ष प्रकाशराज मीना, छैलसिंह देवडा, परबतसिंह, आल्पा सरपंच नारायण रावल, पूर्व सरपंच रताराम देवासी, मानाराम मीणा एवं अन्य वक्ताओं ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर लोढा का गांव पहुॅचने पर ग्रामवासियों ने स्वागत किया। फसल को नुकसान होने पर ग्रामीणो ने लोढा को अवगत कराया कि हिम गिरने से अरण्डी की फसल को काफी नुकसान हुआ है इस पर लोढा ने जिला कलक्टर भगवती प्रसाद को फोन पर बात कर फसल को हुये नुुकसान का सर्वे करवाना को कहा। लोढा ने उपखण्ड अधिकारी भागीरथराम चौधरी से भी फोन पर बात की। ग्रामीणो ने आल्पा में माईक्रो एनीकट का निर्माण जल संशाधन विभाग से करवाने के लिये ज्ञापन दिया जिस पर उन्होेने सहायक अभियंता जीवनसिंह से फोन पर बात कर प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने के निर्देश दिये। इस मौके पर गणेशराम मीना, रूखाडा सरपंच तेजाराम, मानसिंह, चैलाराम, नारायणसिंह जोयला, महेन्द्र माली केराल, केशरसिंह देवडा, पूर्व सरपंच शंकर मेघवाल, फौजाराम त्रिगर इत्यादि मौजूद थे।
Manohar Murder Case मनोहर हत्याकांड मामले में तीन आरोपितों को चंबा न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मनोहर हत्याकांड के बाद पुलिस ने मामले की जांच के दौरान एक-एक करके कुल 11 लोगों को जांच के दायरे में लिया था। बाद में छह लोगों के नाम मामला दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। चंबा, संवाद सहयोगी। जिला चंबा के उपमंडल सलूणी की ग्राम पंचायत भांदल में बीते छह जून को हुए मनोहर हत्याकांड मामले में तीन आरोपितों को चंबा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में आरोपित नाबालिगों की ओर से जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे न्यायालय ने खारिज करते हुए उन्हें बाल सुधार गृह ऊना भेज दिया है। मनोहर हत्याकांड के आरोपित मुसाफिर हुसैन, उसकी पत्नी फरीदा और शब्बीर को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कर्म प्रताप सिंह ठाकुर की अदालत से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। तीनों आरोपितों की न्यायिक हिरासत खत्म होने पर शनिवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत मिली है। वहीं किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा में मनोहर हत्याकांड के तीन नाबालिग आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। शनिवार को तीनों आरोपितों को किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किशोर निरीक्षण गृह ऊना से पेश किया गया। दोपहर बाद जमानत याचिका पर फैसला होने के बाद उन्हें वापस किशोर निरीक्षण गृह ऊना भेज दिया गया। मनोहर हत्याकांड सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच के दौरान एक-एक करके कुल 11 लोगों को जांच के दायरे में लिया था। बाद में छह लोगों के नाम मामला दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार छह आरोपितों में तीन व्यस्क और तीन 18 साल से कम आयु के आरोपित हैं। बता दें कि गत छह जून को मनोहर लापता हो गया था। नौ जून को मनोहर का शव सात टुकड़ों में नाले में बोरी में बंद मिला था। पुलिस अधीक्षक चंबा अभिषेक यादव ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपित सहित कुल तीन आरोपितों को फिर से न्यायिक हिरासत मिली है। वहीं, नाबालिग आरोपितों को वर्चुअल तरीके से किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा के समक्ष पेश किया गया। उन्हें बाल सुधार गृह ऊना भेज दिया गया है।
Manohar Murder Case मनोहर हत्याकांड मामले में तीन आरोपितों को चंबा न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मनोहर हत्याकांड के बाद पुलिस ने मामले की जांच के दौरान एक-एक करके कुल ग्यारह लोगों को जांच के दायरे में लिया था। बाद में छह लोगों के नाम मामला दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। चंबा, संवाद सहयोगी। जिला चंबा के उपमंडल सलूणी की ग्राम पंचायत भांदल में बीते छह जून को हुए मनोहर हत्याकांड मामले में तीन आरोपितों को चंबा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में आरोपित नाबालिगों की ओर से जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे न्यायालय ने खारिज करते हुए उन्हें बाल सुधार गृह ऊना भेज दिया है। मनोहर हत्याकांड के आरोपित मुसाफिर हुसैन, उसकी पत्नी फरीदा और शब्बीर को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कर्म प्रताप सिंह ठाकुर की अदालत से चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। तीनों आरोपितों की न्यायिक हिरासत खत्म होने पर शनिवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत मिली है। वहीं किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा में मनोहर हत्याकांड के तीन नाबालिग आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। शनिवार को तीनों आरोपितों को किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किशोर निरीक्षण गृह ऊना से पेश किया गया। दोपहर बाद जमानत याचिका पर फैसला होने के बाद उन्हें वापस किशोर निरीक्षण गृह ऊना भेज दिया गया। मनोहर हत्याकांड सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच के दौरान एक-एक करके कुल ग्यारह लोगों को जांच के दायरे में लिया था। बाद में छह लोगों के नाम मामला दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार छह आरोपितों में तीन व्यस्क और तीन अट्ठारह साल से कम आयु के आरोपित हैं। बता दें कि गत छह जून को मनोहर लापता हो गया था। नौ जून को मनोहर का शव सात टुकड़ों में नाले में बोरी में बंद मिला था। पुलिस अधीक्षक चंबा अभिषेक यादव ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपित सहित कुल तीन आरोपितों को फिर से न्यायिक हिरासत मिली है। वहीं, नाबालिग आरोपितों को वर्चुअल तरीके से किशोर न्याय बोर्ड चंबा/तीसा के समक्ष पेश किया गया। उन्हें बाल सुधार गृह ऊना भेज दिया गया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसको देखकर आप भी चौंक जाएंगे. एक लड़के ने फ्लाइट के अंदर सीट के पीछे कई बार मुक्के मारे. उस सीट पर एक महिला बैठी थी. ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों का एक वीडियो ट्विटर पर वायरल हो रहा है. 1 मिनट 45 सेकंड की लंबी क्लिप एक ट्विटर यूजर @AmicaAli द्वारा साझा किया गया है. देखा जा सकता है कि एक महिला वीडियो रिकॉर्ड कर रही हैं और पीछे एक आदमी उनकी सीट पर लगातार मुक्के मार रहा है। बता दें कि सीट पर जो महिला बैठी थी, उनका नाम वेंडी है. उन्होंने भी ट्वीट कर अपनी पीड़ा जाहिर की. उन्होंने लिखा था कि फ्लाइट में एक लड़का उनको परेशान कर रहा है। ट्विटर पर इस वीडियो के अब तक 50 हजार से ज्यादा व्यूज हो चुके हैं। कुछ यूजर्स महिला को सपोर्ट कर रहे हैं तो कोई लड़के का साथ दे रहा है. एक यूजर ने लिखा, "लड़का प्लेन के पीछे की सीट पर बैठा है और महिला ने अपनी सीट को पीछे की तरफ किया हुआ है. जिससे उसे परेशानी हुई. इसलिए उसको गुस्सा आ गया और ऐसा किया. " वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, "लड़का बहुत बचकानी हरकत कर रहा है. ऐसा नहीं करना चाहिए था।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसको देखकर आप भी चौंक जाएंगे. एक लड़के ने फ्लाइट के अंदर सीट के पीछे कई बार मुक्के मारे. उस सीट पर एक महिला बैठी थी. ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में दो यात्रियों का एक वीडियो ट्विटर पर वायरल हो रहा है. एक मिनट पैंतालीस सेकंड की लंबी क्लिप एक ट्विटर यूजर @AmicaAli द्वारा साझा किया गया है. देखा जा सकता है कि एक महिला वीडियो रिकॉर्ड कर रही हैं और पीछे एक आदमी उनकी सीट पर लगातार मुक्के मार रहा है। बता दें कि सीट पर जो महिला बैठी थी, उनका नाम वेंडी है. उन्होंने भी ट्वीट कर अपनी पीड़ा जाहिर की. उन्होंने लिखा था कि फ्लाइट में एक लड़का उनको परेशान कर रहा है। ट्विटर पर इस वीडियो के अब तक पचास हजार से ज्यादा व्यूज हो चुके हैं। कुछ यूजर्स महिला को सपोर्ट कर रहे हैं तो कोई लड़के का साथ दे रहा है. एक यूजर ने लिखा, "लड़का प्लेन के पीछे की सीट पर बैठा है और महिला ने अपनी सीट को पीछे की तरफ किया हुआ है. जिससे उसे परेशानी हुई. इसलिए उसको गुस्सा आ गया और ऐसा किया. " वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, "लड़का बहुत बचकानी हरकत कर रहा है. ऐसा नहीं करना चाहिए था।
चेन्नई, 29 अगस्त (आईएएनएस)। कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना (केएनपीपी) की 1,000 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई में ईंधन भरने का काम पूरा हो जाने के बाद मंगलवार से विद्युत उत्पादन फिर से शुरू हो गया। एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, 1,000 मेगावाट परमाणु विद्युत क्षमता वाली पहली इकाई को आज (मंगलवार) 6.30 से सात बजे के बीच ग्रिड से जोड़ दिया गया। फिलहाल लगभग 300 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। उन्होंने बताया कि चूंकि ईंधन फिर से भरा गया है, इसलिए कुछ परीक्षण और किए जाने हैं। बिजली उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। पहली इकाई को 13 अप्रैल को सलाना रख-रखाव व ईंधन भरने के लिए बंद कर दिया गया था। हर साल रिएक्टर के 163 ईंधन बंडलों में से 54 बंडलों को बदल दिया जाता है। पहली इकाई में दूसरी बार ईंधन भरा गया है। इस बीच, 1,000 मेगावाट की दूसरी इकाई को चार अगस्त को इसलिए बंद कर दिया गया था, क्योंकि उसके स्टेटर में हाइड्रोजन सांद्रता की समस्या पैदा हो गई थी। इस इकाई को फिर से चालू किया जाना बाकी है। नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप 2023 होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से 3.5 गुना अधिक तेज है। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी। रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 61.7 एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल 30.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया 17.7 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में 5जी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की 5जी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से 25.5 फीसदी अधिक रही। जियो की औसत 5जी डाउनलोड स्पीड 344.5 एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल 274.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी 5जी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 के मैच देश के 10 स्टेडियमों में होंगे। इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे। क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड 6.6 एमबीपीएस तो जियो की 6.3 एमबीपीएस मापी गई। वोडाफोन आइडिया 5.8 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत 5जी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड 26.3 एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की 21.6 एमबीपीएस रही। ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर 5जी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा 5जी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में 5G उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा। जियो के उपभोक्त 53% से अधिक समय 5जी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र 20.7% वक्त ही 5जी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के 5जी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से 2.6 गुना अधिक दर्ज की गई। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
चेन्नई, उनतीस अगस्त । कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना की एक,शून्य मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई में ईंधन भरने का काम पूरा हो जाने के बाद मंगलवार से विद्युत उत्पादन फिर से शुरू हो गया। एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, एक,शून्य मेगावाट परमाणु विद्युत क्षमता वाली पहली इकाई को आज छः.तीस से सात बजे के बीच ग्रिड से जोड़ दिया गया। फिलहाल लगभग तीन सौ मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। उन्होंने बताया कि चूंकि ईंधन फिर से भरा गया है, इसलिए कुछ परीक्षण और किए जाने हैं। बिजली उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। पहली इकाई को तेरह अप्रैल को सलाना रख-रखाव व ईंधन भरने के लिए बंद कर दिया गया था। हर साल रिएक्टर के एक सौ तिरेसठ ईंधन बंडलों में से चौवन बंडलों को बदल दिया जाता है। पहली इकाई में दूसरी बार ईंधन भरा गया है। इस बीच, एक,शून्य मेगावाट की दूसरी इकाई को चार अगस्त को इसलिए बंद कर दिया गया था, क्योंकि उसके स्टेटर में हाइड्रोजन सांद्रता की समस्या पैदा हो गई थी। इस इकाई को फिर से चालू किया जाना बाकी है। नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप दो हज़ार तेईस होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से तीन.पाँच गुना अधिक तेज है। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी। रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड इकसठ.सात एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल तीस.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया सत्रह.सात एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में पाँचजी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की पाँचजी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से पच्चीस.पाँच फीसदी अधिक रही। जियो की औसत पाँचजी डाउनलोड स्पीड तीन सौ चौंतालीस.पाँच एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल दो सौ चौहत्तर.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी पाँचजी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के मैच देश के दस स्टेडियमों में होंगे। इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे। क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड छः.छः एमबीपीएस तो जियो की छः.तीन एमबीपीएस मापी गई। वोडाफोन आइडिया पाँच.आठ एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत पाँचजी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड छब्बीस.तीन एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की इक्कीस.छः एमबीपीएस रही। ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर पाँचजी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा पाँचजी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में पाँचG उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा। जियो के उपभोक्त तिरेपन% से अधिक समय पाँचजी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र बीस.सात% वक्त ही पाँचजी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के पाँचजी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से दो.छः गुना अधिक दर्ज की गई। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को देवास जिले की बागली विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। उदयनगर में खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर जमकर तंज कसे। कांग्रेसियों के भाजपा में शामिल होने के सिलसिले की चर्चा करते हुए उन्होंने कह दिया कि बाकियों को तो मैं रोक रहा हूं कि भैया अब नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कमलनाथ को भी घेरा। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस में कमलनाथ ही सब कुछ हैं। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, स्टार प्रचारक- सब कुछ कमलनाथ ही हैं। युवाओं के नेता उनके बेटे नकुलनाथ हैं। बाकी कांग्रेस अनाथ हो गई है। लोग ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहते। शिवराज ने कहा कि विधायक मनोज चौधरी और सचिन बिरला बीजेपी में आ गए। बाकी लोगों को वो रोक रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को देवास जिले की बागली विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। उदयनगर में खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर जमकर तंज कसे। कांग्रेसियों के भाजपा में शामिल होने के सिलसिले की चर्चा करते हुए उन्होंने कह दिया कि बाकियों को तो मैं रोक रहा हूं कि भैया अब नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कमलनाथ को भी घेरा। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस में कमलनाथ ही सब कुछ हैं। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, स्टार प्रचारक- सब कुछ कमलनाथ ही हैं। युवाओं के नेता उनके बेटे नकुलनाथ हैं। बाकी कांग्रेस अनाथ हो गई है। लोग ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहते। शिवराज ने कहा कि विधायक मनोज चौधरी और सचिन बिरला बीजेपी में आ गए। बाकी लोगों को वो रोक रहे हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
बीएसएफ सूत्रों के हवाले से यह ख़बर मिली है कि बीएसएफ़ ने उन 42 ऐप की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। नई दिल्ली। बीएसएफ़ ने 42 ऐसे ऐप की पहचान की है, जिनके इस्तेमाल से जवानों को हनीट्रैप से बचाया जा सकता है। BSF के जवानों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिनमें हनीट्रैप से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बीएसएफ सूत्रों के हवाले से यह ख़बर मिली है कि बीएसएफ़ ने उन 42 ऐप की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आपको बता दें कि पिछ्ले महीनों में फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया के जरिये आईएसआई ने कई जवानों को हनीट्रैप करने की कोशिश की है।
बीएसएफ सूत्रों के हवाले से यह ख़बर मिली है कि बीएसएफ़ ने उन बयालीस ऐप की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। नई दिल्ली। बीएसएफ़ ने बयालीस ऐसे ऐप की पहचान की है, जिनके इस्तेमाल से जवानों को हनीट्रैप से बचाया जा सकता है। BSF के जवानों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिनमें हनीट्रैप से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बीएसएफ सूत्रों के हवाले से यह ख़बर मिली है कि बीएसएफ़ ने उन बयालीस ऐप की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आपको बता दें कि पिछ्ले महीनों में फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया के जरिये आईएसआई ने कई जवानों को हनीट्रैप करने की कोशिश की है।
यह बहुत स्वादिष्ट होगा यदि आप पोर्क और बीफ़ से बने कीमा बनाया हुआ मांस लेते हैं। मांस गेंदों का एक बड़ा हिस्सा बनाने के लिए, लेः - 500 ग्राम कीमा बनाया हुआ मांस; - 1 चिकन अंडा; - आधा बल्ब प्याज; - मांस के लिए मसाले। जैसा कि आप देख सकते हैं, सूप के लिए मीटबॉल के लिए नुस्खा की आवश्यकता हैहमारे सभी उत्पादों के लिए परिचित है। और यहां तक कि शुरुआत की परिचारिका खाना पकाने में महारत हासिल कर सकती है। सबसे पहले, कीमा बनाया हुआ मांस बनाओः एक मोटे grater पर प्याज को बारीक रूप से पीस लें और मांस में जोड़ें, एक ही अंडे को तोड़ें, मसाले के साथ छिड़कें और अच्छी तरह मिलाएं। आपके पास एक घने मांस द्रव्यमान होना चाहिए, जो मॉडलिंग के दौरान फैलता नहीं है। इससे आपको एक बड़े अखरोट के आकार के मीटबॉल बनाने की आवश्यकता होती है। यदि मांस हाथों से चिपक जाता है, तो उन्हें वनस्पति तेल या अंडे की सफेदी से गीला कर दें। तुरंत गेंदों का एक बड़ा हिस्सा बनाना सबसे अच्छा है और, जैसा कि हमने पहले ही सलाह दी है, उनमें से भाग को फ्रीज करने के लिएः उन्हें ट्रे या चॉपिंग बोर्ड पर रखें, उन्हें कई घंटों के लिए फ्रीजर में भेजें, फिर 15-20 टुकड़ों के प्लास्टिक बैग में निकालें और पैक करें। मीटबॉल को पकाने के लिए नुस्खा, ऊपर वर्णित है, एक बार में कई सर्विंग्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए अगली बार जब आप एक स्वादिष्ट सूप पकाना चाहते हैं, तो मांस के गोले पकाने से आपको उन्हें रेफ्रिजरेटर से बाहर निकालने में एक मिनट नहीं लगेगा। परंपरागत रूप से, पकवान बीफ़ या पोर्क से तैयार किया जाता है, लेकिन सफेद पोल्ट्री मांस पकवान को अधिक निविदा और असामान्य बना देगा। इस विकल्प को आज़माएं। उसके लिए आपको आवश्यकता होगीः - 250 ग्राम चिकन पट्टिका या 1 चिकन स्तन; - एक अंडे का प्रोटीन; - स्वाद के लिए मसाले। - डेढ़ लीटर पानी; - 1 मध्यम आकार का गाजर; - 1 चिकन अंडे की जर्दी; - स्वाद के लिए नमक और ताजा जड़ी बूटी।
यह बहुत स्वादिष्ट होगा यदि आप पोर्क और बीफ़ से बने कीमा बनाया हुआ मांस लेते हैं। मांस गेंदों का एक बड़ा हिस्सा बनाने के लिए, लेः - पाँच सौ ग्राम कीमा बनाया हुआ मांस; - एक चिकन अंडा; - आधा बल्ब प्याज; - मांस के लिए मसाले। जैसा कि आप देख सकते हैं, सूप के लिए मीटबॉल के लिए नुस्खा की आवश्यकता हैहमारे सभी उत्पादों के लिए परिचित है। और यहां तक कि शुरुआत की परिचारिका खाना पकाने में महारत हासिल कर सकती है। सबसे पहले, कीमा बनाया हुआ मांस बनाओः एक मोटे grater पर प्याज को बारीक रूप से पीस लें और मांस में जोड़ें, एक ही अंडे को तोड़ें, मसाले के साथ छिड़कें और अच्छी तरह मिलाएं। आपके पास एक घने मांस द्रव्यमान होना चाहिए, जो मॉडलिंग के दौरान फैलता नहीं है। इससे आपको एक बड़े अखरोट के आकार के मीटबॉल बनाने की आवश्यकता होती है। यदि मांस हाथों से चिपक जाता है, तो उन्हें वनस्पति तेल या अंडे की सफेदी से गीला कर दें। तुरंत गेंदों का एक बड़ा हिस्सा बनाना सबसे अच्छा है और, जैसा कि हमने पहले ही सलाह दी है, उनमें से भाग को फ्रीज करने के लिएः उन्हें ट्रे या चॉपिंग बोर्ड पर रखें, उन्हें कई घंटों के लिए फ्रीजर में भेजें, फिर पंद्रह-बीस टुकड़ों के प्लास्टिक बैग में निकालें और पैक करें। मीटबॉल को पकाने के लिए नुस्खा, ऊपर वर्णित है, एक बार में कई सर्विंग्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए अगली बार जब आप एक स्वादिष्ट सूप पकाना चाहते हैं, तो मांस के गोले पकाने से आपको उन्हें रेफ्रिजरेटर से बाहर निकालने में एक मिनट नहीं लगेगा। परंपरागत रूप से, पकवान बीफ़ या पोर्क से तैयार किया जाता है, लेकिन सफेद पोल्ट्री मांस पकवान को अधिक निविदा और असामान्य बना देगा। इस विकल्प को आज़माएं। उसके लिए आपको आवश्यकता होगीः - दो सौ पचास ग्राम चिकन पट्टिका या एक चिकन स्तन; - एक अंडे का प्रोटीन; - स्वाद के लिए मसाले। - डेढ़ लीटर पानी; - एक मध्यम आकार का गाजर; - एक चिकन अंडे की जर्दी; - स्वाद के लिए नमक और ताजा जड़ी बूटी।
विधायक विश्राम गृह के इस परिसर से प्यारे मियां अखबार का दफ्तर संचालित करता था। भोपाल पुलिस ने जिस प्यारे मियां को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किया है, उसका दामन और इतिहास दोनों ही दागदार है। फिलहाल उसे कई नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वो पिछले कई दिनों से फरार था और भोपाल पुलिस उसके हर संभावित ठिकाने पर छापामारी कर रही थी। हालांकि श्रीनगर से गिरफ्तारी पर यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस की सख्ती के बावजूद वो राज्य से बाहर कैसे निकल गया। श्रीनगर तक पहुंचने में कैसे सफल हो गया? बहरहाल, मध्यप्रदेश पुलिस ने प्यारे के भोपाल और इंदौर स्थित ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। भोपाल में उसका मैरिज हॉल भी ढहा दिया गया है। लेकिन यह सब काफी देर से हुई कार्रवाई है। राज्य शासन ने उसे आवंटित सरकारी बंगला भी खाली करवा लिया, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि उसे सरकारी आवास आवंटित ही कैसे हुआ था। जबकि साल 2002 में मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उससे काफी जद्दोजहद के बाद अपना एक वीआईपी परिसर खाली करवाया था। प्यारे मियां लगभग 5000 वर्गफीट क्षेत्र में बने विधायक विश्राम गृह के दो भवनों में रह रहा था और कई बार नोटिस देने के बावजूद उसे खाली नहीं कर रहा था। यह परिसर उसे तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा साल 1990 में एक वर्कशॉप संचालित करने के लिए अस्थायी रूप से आवंटित किया गया था। लेकिन उसने इस भवन को अपना आलीशान घर बना लिया था। सबसे पहले उसने यहां एक अंग्रेजी अखबार के दफ्तर का बोर्ड लगाया और बाद में दैनिक अफकार नाम के अखबार का बोर्ड टांग लिया। लेकिन यहां उसकी दो पत्नियां और उनके बच्चे रहते थे। विधानसभा सचिवालय ने जब प्यारे मियां को परिसर खाली करने का नोटिस भेजा तो उसने अदालत की शरण ली। हालांकि अदालत ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया। लेकिन सत्ता शीर्ष तक पहुंच की वजह से सचिवालय को यह परिसर खाली कराने में काफी वक्त लग गया। अंततः तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष और सदस्य सुविधा शाखा ने मामले को गंभीरता से लिया और विधानसभा के सुरक्षा विभाग (मार्शल) तथा पुलिस के साझा ऑपरेशन से परिसर को खाली करवाया गया। इस दौरान परिसर से लगभग 40 पेटी विदेशी शराब तथा आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए थे। परिसर खाली करवाने की यह कार्रवाई सुबह पांच बजे अंजाम दी गई थी। हालांकि इस कार्रवाई को मीडिया में तवज्जो नहीं दी गई और बात आई-गई हो गई। इसके कुछ ही वर्ष बाद प्यारे मियां को पुराना भोपाल इलाके में एक बंगला आवंटित कर दिया गया था, जिसे खाली करने का आदेश हाल ही में राज्य सरकार ने जारी किया है। जिस परिसर पर प्यारे ने पत्रकार और अखबार के नाम पर कब्जा किया था, वो वीआईपी क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी जमीन है। यह भोपाल के मुख्य बाजार न्यू मार्केट, राजभवन, बिड़ला मंदिर, विधानसभा और मंत्रालय के बीचों बीच स्थित है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
विधायक विश्राम गृह के इस परिसर से प्यारे मियां अखबार का दफ्तर संचालित करता था। भोपाल पुलिस ने जिस प्यारे मियां को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किया है, उसका दामन और इतिहास दोनों ही दागदार है। फिलहाल उसे कई नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वो पिछले कई दिनों से फरार था और भोपाल पुलिस उसके हर संभावित ठिकाने पर छापामारी कर रही थी। हालांकि श्रीनगर से गिरफ्तारी पर यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस की सख्ती के बावजूद वो राज्य से बाहर कैसे निकल गया। श्रीनगर तक पहुंचने में कैसे सफल हो गया? बहरहाल, मध्यप्रदेश पुलिस ने प्यारे के भोपाल और इंदौर स्थित ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। भोपाल में उसका मैरिज हॉल भी ढहा दिया गया है। लेकिन यह सब काफी देर से हुई कार्रवाई है। राज्य शासन ने उसे आवंटित सरकारी बंगला भी खाली करवा लिया, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि उसे सरकारी आवास आवंटित ही कैसे हुआ था। जबकि साल दो हज़ार दो में मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उससे काफी जद्दोजहद के बाद अपना एक वीआईपी परिसर खाली करवाया था। प्यारे मियां लगभग पाँच हज़ार वर्गफीट क्षेत्र में बने विधायक विश्राम गृह के दो भवनों में रह रहा था और कई बार नोटिस देने के बावजूद उसे खाली नहीं कर रहा था। यह परिसर उसे तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में एक वर्कशॉप संचालित करने के लिए अस्थायी रूप से आवंटित किया गया था। लेकिन उसने इस भवन को अपना आलीशान घर बना लिया था। सबसे पहले उसने यहां एक अंग्रेजी अखबार के दफ्तर का बोर्ड लगाया और बाद में दैनिक अफकार नाम के अखबार का बोर्ड टांग लिया। लेकिन यहां उसकी दो पत्नियां और उनके बच्चे रहते थे। विधानसभा सचिवालय ने जब प्यारे मियां को परिसर खाली करने का नोटिस भेजा तो उसने अदालत की शरण ली। हालांकि अदालत ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया। लेकिन सत्ता शीर्ष तक पहुंच की वजह से सचिवालय को यह परिसर खाली कराने में काफी वक्त लग गया। अंततः तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष और सदस्य सुविधा शाखा ने मामले को गंभीरता से लिया और विधानसभा के सुरक्षा विभाग तथा पुलिस के साझा ऑपरेशन से परिसर को खाली करवाया गया। इस दौरान परिसर से लगभग चालीस पेटी विदेशी शराब तथा आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए थे। परिसर खाली करवाने की यह कार्रवाई सुबह पांच बजे अंजाम दी गई थी। हालांकि इस कार्रवाई को मीडिया में तवज्जो नहीं दी गई और बात आई-गई हो गई। इसके कुछ ही वर्ष बाद प्यारे मियां को पुराना भोपाल इलाके में एक बंगला आवंटित कर दिया गया था, जिसे खाली करने का आदेश हाल ही में राज्य सरकार ने जारी किया है। जिस परिसर पर प्यारे ने पत्रकार और अखबार के नाम पर कब्जा किया था, वो वीआईपी क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी जमीन है। यह भोपाल के मुख्य बाजार न्यू मार्केट, राजभवन, बिड़ला मंदिर, विधानसभा और मंत्रालय के बीचों बीच स्थित है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
।शिल्पकारों के प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत अखिल भारतीय व्यापार परीक्षण (एआईटीटी) -2021 में भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं के नियमित बैचों को एक बार छूट। (आदेश संख्या 17) ।वार्षिक प्रणाली के बचे हुए और पूरक प्रशिक्षुओं की सीबीटी और प्रैक्टिकल / ईडी परीक्षा। (आदेश संख्या 16)
।शिल्पकारों के प्रशिक्षण योजना के तहत अखिल भारतीय व्यापार परीक्षण -दो हज़ार इक्कीस में भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं के नियमित बैचों को एक बार छूट। ।वार्षिक प्रणाली के बचे हुए और पूरक प्रशिक्षुओं की सीबीटी और प्रैक्टिकल / ईडी परीक्षा।
विकास खंड कौंधियारा के ग्राम सभा करमा के रहने वाले लक्ष्मी शंकर यादव की पत्नी पूनम यादव पिछले कई वर्षों से मतदान करती आ रही हैं। इस बार वह करमा से ग्राम प्रधान के पद के लिए चुनाव प्रचार भी कर रही थी। मतदाता सूची आने पर उनका नाम सूची से गायब है। इस बात को लेकर उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। उनके पति लक्ष्मी शंकर यादव का कहना है कि मतदाता सूची में अगर उनकी पत्नी का नाम नहीं जोड़ा गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह कर लेंगे। मतदाता सूची में गड़बड़ी की बात को लेकर उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के यहां शिकायत भी की है। कुछ वर्ष पहले लक्ष्मी शंकर स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ी को लेकर अपनी बात मनवाने के लिए नए यमुना पुल के टॉवर पर भी चढ़ चुके हैं।
विकास खंड कौंधियारा के ग्राम सभा करमा के रहने वाले लक्ष्मी शंकर यादव की पत्नी पूनम यादव पिछले कई वर्षों से मतदान करती आ रही हैं। इस बार वह करमा से ग्राम प्रधान के पद के लिए चुनाव प्रचार भी कर रही थी। मतदाता सूची आने पर उनका नाम सूची से गायब है। इस बात को लेकर उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। उनके पति लक्ष्मी शंकर यादव का कहना है कि मतदाता सूची में अगर उनकी पत्नी का नाम नहीं जोड़ा गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह कर लेंगे। मतदाता सूची में गड़बड़ी की बात को लेकर उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के यहां शिकायत भी की है। कुछ वर्ष पहले लक्ष्मी शंकर स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ी को लेकर अपनी बात मनवाने के लिए नए यमुना पुल के टॉवर पर भी चढ़ चुके हैं।
Nigrain Lite डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। माइग्रेन के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। Nigrain Lite को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इनके अलावा Nigrain Lite के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। सामान्य तौर पर Nigrain Lite के साइड इफेक्ट लंबे समय तक बने नहीं रहते हैं और एक बार जब इलाज खत्म हो जाता है तो ये भी ठीक हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Nigrain Lite का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए अज्ञात है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव अज्ञात है। इसके अतिरिक्त Nigrain Lite का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Nigrain Lite से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। डिप्रेशन, पार्किंसन रोग इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Nigrain Lite लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। Nigrain Lite को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इन प्रतिक्रियाओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Nigrain Lite लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Nigrain Lite की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Nigrain Lite की खुराक अलग हो सकती है। क्या Nigrain Lite का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती महिलाओं पर Nigrain Lite का असर क्या होगा इस बारे में कोई रिसर्च नहीं की गई है। इसलिए इसकी सही जानकारी मौजूद नही है। क्या Nigrain Lite का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर Nigrain Lite के क्या प्रभाव होंगे। इस बारे में शोध कार्य न हो पान के चलते कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल इसको लेने से पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है। Nigrain Lite का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? किडनी पर Nigrain Lite के खराब प्रभावों को जाने बिना भी आप इसका सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इसका हानिकारक प्रभाव बेहद कम है। Nigrain Lite का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Nigrain Lite से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है। क्या ह्रदय पर Nigrain Lite का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर Nigrain Lite के साइड इफेक्ट दिखाई दे सकते हैं। क्या Nigrain Lite आदत या लत बन सकती है? नहीं, Nigrain Lite को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है। क्या Nigrain Lite को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Nigrain Lite लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Nigrain Lite को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Nigrain Lite का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Nigrain Lite इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों के लिए Nigrain Lite को लेने से कोई फायदा नहीं हो पाता। क्या Nigrain Lite को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Nigrain Lite व खाने को साथ में लेने से क्या प्रभाव होंगे इस बारे में शोध न हो पाने के कारण आंकड़े मौजूद नहीं हैं। जब Nigrain Lite ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने के कारण Nigrain Lite के नुकसान के विषय में पूर्ण जानकारी मौजूद नहीं है। अतः डॉक्टर की सलाह पर ही इसको लें।
Nigrain Lite डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। माइग्रेन के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। Nigrain Lite को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इनके अलावा Nigrain Lite के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। सामान्य तौर पर Nigrain Lite के साइड इफेक्ट लंबे समय तक बने नहीं रहते हैं और एक बार जब इलाज खत्म हो जाता है तो ये भी ठीक हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Nigrain Lite का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए अज्ञात है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव अज्ञात है। इसके अतिरिक्त Nigrain Lite का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Nigrain Lite से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। डिप्रेशन, पार्किंसन रोग इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Nigrain Lite लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। Nigrain Lite को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इन प्रतिक्रियाओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Nigrain Lite लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Nigrain Lite की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Nigrain Lite की खुराक अलग हो सकती है। क्या Nigrain Lite का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती महिलाओं पर Nigrain Lite का असर क्या होगा इस बारे में कोई रिसर्च नहीं की गई है। इसलिए इसकी सही जानकारी मौजूद नही है। क्या Nigrain Lite का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर Nigrain Lite के क्या प्रभाव होंगे। इस बारे में शोध कार्य न हो पान के चलते कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल इसको लेने से पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है। Nigrain Lite का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? किडनी पर Nigrain Lite के खराब प्रभावों को जाने बिना भी आप इसका सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इसका हानिकारक प्रभाव बेहद कम है। Nigrain Lite का जिगर पर क्या असर होता है? Nigrain Lite से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है। क्या ह्रदय पर Nigrain Lite का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर Nigrain Lite के साइड इफेक्ट दिखाई दे सकते हैं। क्या Nigrain Lite आदत या लत बन सकती है? नहीं, Nigrain Lite को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है। क्या Nigrain Lite को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Nigrain Lite लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Nigrain Lite को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Nigrain Lite का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Nigrain Lite इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों के लिए Nigrain Lite को लेने से कोई फायदा नहीं हो पाता। क्या Nigrain Lite को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Nigrain Lite व खाने को साथ में लेने से क्या प्रभाव होंगे इस बारे में शोध न हो पाने के कारण आंकड़े मौजूद नहीं हैं। जब Nigrain Lite ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने के कारण Nigrain Lite के नुकसान के विषय में पूर्ण जानकारी मौजूद नहीं है। अतः डॉक्टर की सलाह पर ही इसको लें।
मुंबई :- मंगलवार को मुंबई के भिवंडी स्थित राजलक्ष्मी कॉम्प्लेक्स के गोदाम में आग लग गई। जिस वजह से चारो ओर अफरा तफरी का माहौल बन गया। आग लगने का पता चलते ही अग्निशमन की गाड़िया घटनास्थल पर पहुंची और आग पर काबू पाने की कोशिश में लग गई । घटना ठाणे की है जहां गोदाम में अचानक आग लगने से यह हादसा हुआ। हालांकि इस घटना में अब तक किसी तरह के जनहानि की बात सामने नहीं आई है। बता दे कि, यह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की दूसरी घटना है। इससे पहले सोमवार को मुंबई के अँधेरी स्थित कामगार अस्पताल में आग लगने की घटना घटी थी। जिसमें एक ५ महीने की बच्ची सहित ९ लोगो की मृत्यु हो गई और अन्य १७६ लोग घायल हो गए थे। केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को १०-१० लाख का मुआवजा देने का एलान किया है।
मुंबई :- मंगलवार को मुंबई के भिवंडी स्थित राजलक्ष्मी कॉम्प्लेक्स के गोदाम में आग लग गई। जिस वजह से चारो ओर अफरा तफरी का माहौल बन गया। आग लगने का पता चलते ही अग्निशमन की गाड़िया घटनास्थल पर पहुंची और आग पर काबू पाने की कोशिश में लग गई । घटना ठाणे की है जहां गोदाम में अचानक आग लगने से यह हादसा हुआ। हालांकि इस घटना में अब तक किसी तरह के जनहानि की बात सामने नहीं आई है। बता दे कि, यह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की दूसरी घटना है। इससे पहले सोमवार को मुंबई के अँधेरी स्थित कामगार अस्पताल में आग लगने की घटना घटी थी। जिसमें एक पाँच महीने की बच्ची सहित नौ लोगो की मृत्यु हो गई और अन्य एक सौ छिहत्तर लोग घायल हो गए थे। केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख का मुआवजा देने का एलान किया है।
अलीगढ़ में किडनैप सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान को 48 घंटे बाद पुलिस ने देह व्यापार के चंगुल से मुक्त कराया है। जवान श्रीनगर में तैनात है। गैंग के सदस्य उस पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए परेशान कर रहे थे। साथ ही परिवार से कॉल कर पहले 20 हजार रुपए, उसके बाद 2 लाख रुपए की रंगदारी मांग रहे थे। पुलिस ने गैंग के तीन सदस्यों को अरेस्ट कर लिया है। जिसमें एक महिला भी शामिल है। मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि गभाना थाना में 29 दिसंबर को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हैड कांस्टेबल के परिवार की ओर से केस दर्ज कराया गया। जिसमें बताया गया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) जवान का अपहरण हो गया है। अब अपहरणकताओं की ओर से फोन कर फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर जिस फोन से फिरौती मांगी जा रही थी, उसको ट्रैस करना शुरू कर दिया। नम्बर ट्रेस करते करते पुलिस अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क क्षेत्र में आ पहुंची। यहां शक के आधार पर पुलिस ने धनीपुर ब्लॉक स्थित एक मकान पर छापा मारा। छापा लगते ही मकान में हड़कंप मच गया। मकान में बंधक बना गए जवान के अलावा अन्य कई लोग मिले। पुलिस को देखते ही चार से पांच लोग मौके से फरार हो गये। जबकि दो पुरुष व एक महिला को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने जवान को फैमिली के सुपुर्द करते हुए पकडे गये लोगों से पूछताछ की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने बताया कि वह देह व्यापार का धंधा चलाते है। उन्होंने कबूल किया कि 29 नवंबर को सीमा सुरक्षा बल (BSF) जवान को अलीगढ़ बस स्टैंड के पास से लड़की का लालच देकर अगवा किया गया था। जवान का वीडियो बनाकर परिजनों से फिरौती मांगी जा रही थी। इतना ही नहीं, उसको दुष्कर्म के फर्जी आरोप में फंसाने की चेतावनी भी दी जा रही थी। पुलिस ने आरोपी शीशपाल पुत्र हनुमान सिंह निवासी गोपालपुर थाना जवां, अलीगढ़, भूपेन्द्र उर्फ रैडर पुत्र ओमप्रकाश सिंह निवासी गोपालपुर थाना जवां, अलीगढ़ व गौरी पत्नी दुरिया निवासी अमरपुर नैना थाना लोधा, अलीगढ़ वर्तमान पता जलालपुर डेरी वाली गली देहलीगेट, फिलहाल पुलिस ने अपराधियों के विरुद्ध 342/388/389/386/506 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया। गैंग के अन्य मिम्बर्स की तलाश की जा रही है।
अलीगढ़ में किडनैप सीमा सुरक्षा बल के एक जवान को अड़तालीस घंटाटे बाद पुलिस ने देह व्यापार के चंगुल से मुक्त कराया है। जवान श्रीनगर में तैनात है। गैंग के सदस्य उस पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए परेशान कर रहे थे। साथ ही परिवार से कॉल कर पहले बीस हजार रुपए, उसके बाद दो लाख रुपए की रंगदारी मांग रहे थे। पुलिस ने गैंग के तीन सदस्यों को अरेस्ट कर लिया है। जिसमें एक महिला भी शामिल है। मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि गभाना थाना में उनतीस दिसंबर को सीमा सुरक्षा बल के हैड कांस्टेबल के परिवार की ओर से केस दर्ज कराया गया। जिसमें बताया गया कि सीमा सुरक्षा बल जवान का अपहरण हो गया है। अब अपहरणकताओं की ओर से फोन कर फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर जिस फोन से फिरौती मांगी जा रही थी, उसको ट्रैस करना शुरू कर दिया। नम्बर ट्रेस करते करते पुलिस अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क क्षेत्र में आ पहुंची। यहां शक के आधार पर पुलिस ने धनीपुर ब्लॉक स्थित एक मकान पर छापा मारा। छापा लगते ही मकान में हड़कंप मच गया। मकान में बंधक बना गए जवान के अलावा अन्य कई लोग मिले। पुलिस को देखते ही चार से पांच लोग मौके से फरार हो गये। जबकि दो पुरुष व एक महिला को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने जवान को फैमिली के सुपुर्द करते हुए पकडे गये लोगों से पूछताछ की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने बताया कि वह देह व्यापार का धंधा चलाते है। उन्होंने कबूल किया कि उनतीस नवंबर को सीमा सुरक्षा बल जवान को अलीगढ़ बस स्टैंड के पास से लड़की का लालच देकर अगवा किया गया था। जवान का वीडियो बनाकर परिजनों से फिरौती मांगी जा रही थी। इतना ही नहीं, उसको दुष्कर्म के फर्जी आरोप में फंसाने की चेतावनी भी दी जा रही थी। पुलिस ने आरोपी शीशपाल पुत्र हनुमान सिंह निवासी गोपालपुर थाना जवां, अलीगढ़, भूपेन्द्र उर्फ रैडर पुत्र ओमप्रकाश सिंह निवासी गोपालपुर थाना जवां, अलीगढ़ व गौरी पत्नी दुरिया निवासी अमरपुर नैना थाना लोधा, अलीगढ़ वर्तमान पता जलालपुर डेरी वाली गली देहलीगेट, फिलहाल पुलिस ने अपराधियों के विरुद्ध तीन सौ बयालीस/तीन सौ अठासी/तीन सौ नवासी/तीन सौ छियासी/पाँच सौ छः समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया। गैंग के अन्य मिम्बर्स की तलाश की जा रही है।
Earth Day special on 22 April: आज धरती विनाश के कगार पर है। मानवीय स्वार्थ ने पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण पर जो दुष्प्रभाव डाला है, उससे पृथ्वी बची रह पायेगी, आज यही मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। शोध और अध्ययन सबूत हैं कि अभी तक छह बार धरती का विनाश हो चुका है और अब धरती एक बार फिर सामूहिक विनाश की ओर बढ़ रही है। यदि बीते 500 सालों के इतिहास पर नजर डालें तो धरती पर तकरीब 13 फीसदी से ज्यादा प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और हजारों की तादाद में प्रजातियां विलुप्ति की ओर अग्रसर हैं। यह जैव विविधता के गिरावट के भयावह संकट का संकेत है। इसका सबसे बडा़ कारण प्रकृति का बेतहाशा दोहन, शोषण और बढ़ता प्रदूषण है। जलवायु परिवर्तन ने इसमें अहम भूमिका निबाही है। यह कहना है वरिष्ठ पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत का। उक्त विचार रावत ने विश्व पृथ्वी दिवस की पूर्व संध्या पर बातचीत के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीव - जंतुओं की हजारों प्रजातियों, प्राकृतिक स्रोतों और वनस्पतियों की तेजी से हो रही विलुप्ति के चलते पृथ्वी दिन-ब-दिन असंतुलित हो रही है। आधुनिकीकरण के मोहपाश के बंधन के चलते दिनोंदिन बढ़ता तापमान, बेतहाशा हो रही प्रदूषण वृद्धि, पर्यावरण और ओजोन परत का बढ़ता ह्वास, प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन, ग्रीन हाउस गैसों का दुष्प्रभाव, तेजी से जहरीली और बंजर होती जा रही जमीन, वनस्पतियों की बढ़ती विषाक्तता आदि यह सब हमारी जीवनशैली में हो रहे बदलाव का भीषण दुष्परिणाम है। सच कहा जाये तो इसमें जनसंख्या वृद्धि के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। इसने पर्यावरण, प्रकृति और हमारी धरती के लिए भीषण खतरा पैदा कर दिया है। दुखदायी बात यह है कि हम यह नहीं सोचते कि यदि प्राकृतिक संसाधन और हमारी जैव संपदा ही खत्म हो गयी तब क्या होगा? जैव विविधता के ह्वास की दिशा में यदि हम वैश्विक स्तर पर नजर डालें तो लैटिन अमरीका और कैरेबियन क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हैं। क्योंकि 52 फीसदी कृषि उत्पादन से जुडी़ भूमि विकृत हो चुकी है, 70 फीसदी जैविक नुकसान में खाद्य उत्पादन से जुडे़ कारक जिम्मेवार हैं। 28 फीसदी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए खाद्य प्रणाली जिम्मेवार है। 80 फीसदी वैश्विक वनों की कटाई के लिए हमारी कृषि जिम्मेवार है और 50 फीसदी मीठे पानी की प्रजातियों के नुकसान के लिए खाद्य उत्पादन से जुडे़ कारक जिम्मेवार हैं। यदि अब भी हम अपनी जैव विविधता को संरक्षित करने में नाकाम रहे और मानवीय गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो मनुष्य का स्वास्थ्य तो प्रभावित होगा ही, विस्थापन बढे़गा, गरीब इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, तकरीब 85 फीसदी आद्र भूमि का खात्मा हो जायेगा, कीट-पतंगों के साथ बडे़ प्राणियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडराने लगेगा और प्राकृतिक संपदा में 40 फीसदी से ज्यादा की कमी आ जायेगी। इसलिए समय की मांग है कि हम अपनी जीवन शैली में बदलाव लाएं, प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करें, सुविधावाद को तिलांजलि दे बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाएं अन्यथा मानव सभ्यता बची रह पायेगी, इसकी आशा बेमानी होगी।
Earth Day special on बाईस अप्रैलil: आज धरती विनाश के कगार पर है। मानवीय स्वार्थ ने पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण पर जो दुष्प्रभाव डाला है, उससे पृथ्वी बची रह पायेगी, आज यही मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। शोध और अध्ययन सबूत हैं कि अभी तक छह बार धरती का विनाश हो चुका है और अब धरती एक बार फिर सामूहिक विनाश की ओर बढ़ रही है। यदि बीते पाँच सौ सालों के इतिहास पर नजर डालें तो धरती पर तकरीब तेरह फीसदी से ज्यादा प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और हजारों की तादाद में प्रजातियां विलुप्ति की ओर अग्रसर हैं। यह जैव विविधता के गिरावट के भयावह संकट का संकेत है। इसका सबसे बडा़ कारण प्रकृति का बेतहाशा दोहन, शोषण और बढ़ता प्रदूषण है। जलवायु परिवर्तन ने इसमें अहम भूमिका निबाही है। यह कहना है वरिष्ठ पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत का। उक्त विचार रावत ने विश्व पृथ्वी दिवस की पूर्व संध्या पर बातचीत के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीव - जंतुओं की हजारों प्रजातियों, प्राकृतिक स्रोतों और वनस्पतियों की तेजी से हो रही विलुप्ति के चलते पृथ्वी दिन-ब-दिन असंतुलित हो रही है। आधुनिकीकरण के मोहपाश के बंधन के चलते दिनोंदिन बढ़ता तापमान, बेतहाशा हो रही प्रदूषण वृद्धि, पर्यावरण और ओजोन परत का बढ़ता ह्वास, प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन, ग्रीन हाउस गैसों का दुष्प्रभाव, तेजी से जहरीली और बंजर होती जा रही जमीन, वनस्पतियों की बढ़ती विषाक्तता आदि यह सब हमारी जीवनशैली में हो रहे बदलाव का भीषण दुष्परिणाम है। सच कहा जाये तो इसमें जनसंख्या वृद्धि के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। इसने पर्यावरण, प्रकृति और हमारी धरती के लिए भीषण खतरा पैदा कर दिया है। दुखदायी बात यह है कि हम यह नहीं सोचते कि यदि प्राकृतिक संसाधन और हमारी जैव संपदा ही खत्म हो गयी तब क्या होगा? जैव विविधता के ह्वास की दिशा में यदि हम वैश्विक स्तर पर नजर डालें तो लैटिन अमरीका और कैरेबियन क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हैं। क्योंकि बावन फीसदी कृषि उत्पादन से जुडी़ भूमि विकृत हो चुकी है, सत्तर फीसदी जैविक नुकसान में खाद्य उत्पादन से जुडे़ कारक जिम्मेवार हैं। अट्ठाईस फीसदी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए खाद्य प्रणाली जिम्मेवार है। अस्सी फीसदी वैश्विक वनों की कटाई के लिए हमारी कृषि जिम्मेवार है और पचास फीसदी मीठे पानी की प्रजातियों के नुकसान के लिए खाद्य उत्पादन से जुडे़ कारक जिम्मेवार हैं। यदि अब भी हम अपनी जैव विविधता को संरक्षित करने में नाकाम रहे और मानवीय गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो मनुष्य का स्वास्थ्य तो प्रभावित होगा ही, विस्थापन बढे़गा, गरीब इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, तकरीब पचासी फीसदी आद्र भूमि का खात्मा हो जायेगा, कीट-पतंगों के साथ बडे़ प्राणियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडराने लगेगा और प्राकृतिक संपदा में चालीस फीसदी से ज्यादा की कमी आ जायेगी। इसलिए समय की मांग है कि हम अपनी जीवन शैली में बदलाव लाएं, प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करें, सुविधावाद को तिलांजलि दे बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाएं अन्यथा मानव सभ्यता बची रह पायेगी, इसकी आशा बेमानी होगी।
उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत द्वारा बुधवार को यूनिवर्सिटी के ही एक कर्मचारी के थप्पड़ मारे जाने से माहौल गर्मा गया। इससे नाराज यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी कार्य बहिष्कार करते हुए धरने पर बैठ गए। कर्मचारी छ़़ात्रसंघ अध्यक्ष और उसके साथ आए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। इधर, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराने की कोशिश की। प्रतापनगर थाना पुलिस शिकायत के बाद पूछताछ के लिए कर्मचारी नागेन्द्र और छ़ात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप को थाने ले गई। घटना के वक्त कुलपति और रजिस्ट्रार यूनिवर्सिटी बास्केटबॉल प्रतियोगिता में व्यस्त थे। वे वहां से कुछ देर बाद यूनिवर्सिटी पहुंचे, फिर कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी के आश्वासन के बाद कर्मचारी काम लौटे। यूनिवर्सिटी शैक्षणिक कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय भटनागर ने बताया कि स्थापना शाखा में नागेन्द्र नाम का कर्मचारी काम कर रहा था। उससे एक व्यक्ति यूनिवर्सिटी की योजना में ई-रिक्शा के लिए नियुक्ति पत्र लेने आया। उसके नियुक्ति पत्र पर कुलपति-रजिस्ट्रार के साइन बाकी थे। आदेश तैयार हो चुके थे लेकिन वह व्यक्ति हाल ही हाल आदेश मांगने लगा, नहीं मिलने पर उसने तुरंत यूनिवर्सिटी अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत को फोन करके बुला लिया। कुलदीप ने आते ही गुस्से में नागेन्द्र के थप्पड़ जड़ दिए। अध्यक्ष भटनागर ने बताया कि ये गलत और अशोभनीय है। इस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी कुलपति प्रो. त्रिवेदी ने कुछ दिन पहले यूनिवर्सिटी कैम्पस में ई-रिक्शा शुरू करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय छ़ात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत द्वारा मांग के बाद लिया गया। इसकी औपचारिक शुरुआत कर दी गई थी। इसका उद्देश्य था कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से लेकर कॉलेज और प्रशासनिक भवन में स्टूडेंट्स को आने-जाने में आसानी रहे। इसके लिए नगर निगम द्वारा दो ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करके जल्द शुरू करने की तैयारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत द्वारा बुधवार को यूनिवर्सिटी के ही एक कर्मचारी के थप्पड़ मारे जाने से माहौल गर्मा गया। इससे नाराज यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी कार्य बहिष्कार करते हुए धरने पर बैठ गए। कर्मचारी छ़़ात्रसंघ अध्यक्ष और उसके साथ आए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। इधर, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराने की कोशिश की। प्रतापनगर थाना पुलिस शिकायत के बाद पूछताछ के लिए कर्मचारी नागेन्द्र और छ़ात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप को थाने ले गई। घटना के वक्त कुलपति और रजिस्ट्रार यूनिवर्सिटी बास्केटबॉल प्रतियोगिता में व्यस्त थे। वे वहां से कुछ देर बाद यूनिवर्सिटी पहुंचे, फिर कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी के आश्वासन के बाद कर्मचारी काम लौटे। यूनिवर्सिटी शैक्षणिक कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय भटनागर ने बताया कि स्थापना शाखा में नागेन्द्र नाम का कर्मचारी काम कर रहा था। उससे एक व्यक्ति यूनिवर्सिटी की योजना में ई-रिक्शा के लिए नियुक्ति पत्र लेने आया। उसके नियुक्ति पत्र पर कुलपति-रजिस्ट्रार के साइन बाकी थे। आदेश तैयार हो चुके थे लेकिन वह व्यक्ति हाल ही हाल आदेश मांगने लगा, नहीं मिलने पर उसने तुरंत यूनिवर्सिटी अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत को फोन करके बुला लिया। कुलदीप ने आते ही गुस्से में नागेन्द्र के थप्पड़ जड़ दिए। अध्यक्ष भटनागर ने बताया कि ये गलत और अशोभनीय है। इस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी कुलपति प्रो. त्रिवेदी ने कुछ दिन पहले यूनिवर्सिटी कैम्पस में ई-रिक्शा शुरू करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय छ़ात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह सुवावत द्वारा मांग के बाद लिया गया। इसकी औपचारिक शुरुआत कर दी गई थी। इसका उद्देश्य था कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से लेकर कॉलेज और प्रशासनिक भवन में स्टूडेंट्स को आने-जाने में आसानी रहे। इसके लिए नगर निगम द्वारा दो ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करके जल्द शुरू करने की तैयारी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली थी कि शैलेन्द्र जैन उर्फ शैलू लंगड़ा सहित उनके साथी पिछले कुछ दिनों से महंगे शौक कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने इन पर निगरानी रखना शुरू किया। कुछ दिनों बाद पुलिस को सूचना मिली कि सेवाश्रम पुलिया के नीचे सभी एक साथ चोरी की वारदात करने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस ने दबिश देकर चारों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद गहनता से पूछताछ की तो पूर्व में की गई आधे दर्जन से भी ज्यादा चोरी और नकबजनी की वारदातों को करना कबूल किया। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद डिप्टी भगवत सिंह हिंगड ने बताया कि शैलेन्द्र जैन और उसके साथियों ने अब तक लाखों रूपये की चोरियों की वारदातों को अंजाम दिया है। अब पुलिस इनसे कडाई से पूछताछ कर रही है ताकि जहां पर माल बेचा गया है उनसे भी पूछताछ की जा सके और माल बरामदगी के प्रयास कर माल बरामद किया जा सके।
मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली थी कि शैलेन्द्र जैन उर्फ शैलू लंगड़ा सहित उनके साथी पिछले कुछ दिनों से महंगे शौक कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने इन पर निगरानी रखना शुरू किया। कुछ दिनों बाद पुलिस को सूचना मिली कि सेवाश्रम पुलिया के नीचे सभी एक साथ चोरी की वारदात करने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस ने दबिश देकर चारों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद गहनता से पूछताछ की तो पूर्व में की गई आधे दर्जन से भी ज्यादा चोरी और नकबजनी की वारदातों को करना कबूल किया। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद डिप्टी भगवत सिंह हिंगड ने बताया कि शैलेन्द्र जैन और उसके साथियों ने अब तक लाखों रूपये की चोरियों की वारदातों को अंजाम दिया है। अब पुलिस इनसे कडाई से पूछताछ कर रही है ताकि जहां पर माल बेचा गया है उनसे भी पूछताछ की जा सके और माल बरामदगी के प्रयास कर माल बरामद किया जा सके।
प्रयागराज से कोलकाता की सीधी उड़ान की तैयारी हो गई है। अब तीन जुलाई से प्रयागराज एयरपोर्ट से कोलकाता के लिए फ्लाइट मिल सकेगी। विमानन कंपनी एलायंस एयर यह उड़ान सोमवार से शुरू कर रही है। सोमवार को कोलकाता उड़ान का टाइम शेड्यूल जारी कर दिया गया। कोलकाता उड़ान को नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। एलायंस एयर की कोलकाता उड़ान हर सोमवार और शुक्रवार को संचालित होगी। प्रयागराज एयरपोर्ट से यह विमान तीन जुलाई को दोपहर 12. 25 बजे उड़ान भरेगा। दोपहर 2. 10 बजे कोलकाता पहुंच जाएगा। यहां से कोलकाता पहुंचने में यह विमान 1. 45 घंटे का समय लेगा। पहले प्रयागराज से इंडिगो कंपनी कोलकाता के लिए फ्लाइट का संचालन कर रही थी। बाद में यह फ्लाइट बंद कर दी गई। काफी दिनों से कोलकाता के लिए उड़ान की मांग उठ रही थी। एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में सांसद केशरी देवी पटेल कोलकाता उड़ान की मांग उठाई थी। कोलकाता से दोपहर 2. 35 बजे यह विमान प्रयागराज के लिए उड़ान भरेगा। यहां शाम 4. 15 बजे इसका आगमन होगा। प्रयागराज एयरपोर्ट से यही विमान शाम 4. 40 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। एलायंस एयर ने इसका न्यूनतम किराया 4215 रुपये रखा है। एटीआर श्रेणी के इस विमान में कुल 72 सीटें रहेंगी।
प्रयागराज से कोलकाता की सीधी उड़ान की तैयारी हो गई है। अब तीन जुलाई से प्रयागराज एयरपोर्ट से कोलकाता के लिए फ्लाइट मिल सकेगी। विमानन कंपनी एलायंस एयर यह उड़ान सोमवार से शुरू कर रही है। सोमवार को कोलकाता उड़ान का टाइम शेड्यूल जारी कर दिया गया। कोलकाता उड़ान को नागर विमानन निदेशालय से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। एलायंस एयर की कोलकाता उड़ान हर सोमवार और शुक्रवार को संचालित होगी। प्रयागराज एयरपोर्ट से यह विमान तीन जुलाई को दोपहर बारह. पच्चीस बजे उड़ान भरेगा। दोपहर दो. दस बजे कोलकाता पहुंच जाएगा। यहां से कोलकाता पहुंचने में यह विमान एक. पैंतालीस घंटाटे का समय लेगा। पहले प्रयागराज से इंडिगो कंपनी कोलकाता के लिए फ्लाइट का संचालन कर रही थी। बाद में यह फ्लाइट बंद कर दी गई। काफी दिनों से कोलकाता के लिए उड़ान की मांग उठ रही थी। एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में सांसद केशरी देवी पटेल कोलकाता उड़ान की मांग उठाई थी। कोलकाता से दोपहर दो. पैंतीस बजे यह विमान प्रयागराज के लिए उड़ान भरेगा। यहां शाम चार. पंद्रह बजे इसका आगमन होगा। प्रयागराज एयरपोर्ट से यही विमान शाम चार. चालीस बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। एलायंस एयर ने इसका न्यूनतम किराया चार हज़ार दो सौ पंद्रह रुपयापये रखा है। एटीआर श्रेणी के इस विमान में कुल बहत्तर सीटें रहेंगी।
साथ चले जायेंगे, " ऐसा कहा जाता हम अक्सर ही सुनते हैं। लेकिन क्या संयुक्त मोर्चा किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों, मेहनतकश बुद्धिजीवियों के लिए सतरे का सूचक है ? नही, संयुक्त मोर्चा बड़े पूंजीपतियों, धनकुबेरों, सामंतों और अन्य शोषकों के लिए सतरा है, जिनकी हुकूमत इन तबकों को एकदम तहसनहस कर देती है । कुछ सामाजिक-जनवादी नेता कहते हैंः "सामाजिक-जनवाद जनतंत्र का समर्थक है, कम्युनिस्ट अधिनायकत्व के समर्थक हैं। इसलिए हम कम्युनिस्टों के साथ संयुक्त मोर्चा नहीं बना सकते ।" लेकिन क्या हम इस समय आपके सामने सर्वहारा के अधिनायकत्व की उद्घोषणा करने के उद्देश्य से संयुक्त मोर्चे की पेशकश कर रहे हैं ? इस समय हम कोई ऐसा प्रस्ताव नही रख रहे हैं। "पहले कम्युनिस्ट जनवाद को स्वीकार करलें, इसके समर्थन में आगे आयेँ, तब हम संयुक्त मोर्चे के लिए तत्पर होंगे।" इसके जवाब में हम कहते हैंः हम सोवियत जनवाद के, मेहनतकश जनता के जनतंत्र के हिमायती हैं, जो संसार का सबसे सुसंगत जनवाद है। लेकिन पूंजीवादी देशों में हम उन पूंजीवादीजनवादी आजादियों की एक-एक इंच रक्षा करते हैं और रक्षा करते रहेंगे, जिन पर फासिज्म और पूंजीवादी प्रतिक्रियावाद द्वारा हमला किया जा रहा है, क्योकि सर्वहारा के वर्ग संघर्ष के हितों का यही आदेश है । ग्रेट ब्रिटेन के लेबर नेता, मसलन, यह कहते हैंः "लेकिन क्या लेबर पार्टी द्वारा बनाये गये संयुक्त मोर्चे में शरीक होकर छोटी-छोटो कम्युनिस्ट पार्टियां कोई योगदान कर सकती है ?" याद कीजिए कि किस तरह ऑस्ट्रियाई सामाजिक-जनवादी नेता यही बात छोटी-सी ऑस्ट्रियाई कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में कहते थे । और घटनाओं ने क्या दिखाया ? ऑस्ट्रियाई सामाजिक जनवादी पार्टी सही नही सिद्ध हुई जिसका नेतृत्व, ओटो बॉयर और रेनर कर रहे थे, बल्कि छोटी-सी ऑस्ट्रियाई कम्युनिस्ट पार्टी सही सिद्ध हुई जिसने सही समय पर ऑस्ट्रिया में फासिस्ट खतरे की चेतावनी दी थी और मजदूरों का आह्वान किया था कि वे उसके खिलाफ संघर्ष करें। मजदूर आन्दोलन के समूचे अनुभव ने सिद्ध कर दिया है कि अपनी अपेक्षाकृत अल्प संख्या के बावजूद कम्युनिस्ट सर्वहारा की जुझारू गतिविधि की प्रेरक शक्ति होते हैं। साथ ही यह नहीं भूलना होगा कि ऑस्ट्रिया या ग्रेट ब्रिटेन को कम्युनिस्ट पार्टियां महज वह दसियों हजार मजदूर नहीं हैं जो पार्टी के अनुयायी हैं बल्कि वे विश्व कम्युनिस्ट आन्दोलन के हिस्से हैं, उस कम्युनिस्ट इन्टरनेशनल के अंग हैं, जिसको अग्रणी पार्टी उस सर्वहारा की पार्टी है जो पहले ही विजय प्राप्त कर चुका है और भूमंडल के छठे भार्ग पर शासन कर रहा है।
साथ चले जायेंगे, " ऐसा कहा जाता हम अक्सर ही सुनते हैं। लेकिन क्या संयुक्त मोर्चा किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों, मेहनतकश बुद्धिजीवियों के लिए सतरे का सूचक है ? नही, संयुक्त मोर्चा बड़े पूंजीपतियों, धनकुबेरों, सामंतों और अन्य शोषकों के लिए सतरा है, जिनकी हुकूमत इन तबकों को एकदम तहसनहस कर देती है । कुछ सामाजिक-जनवादी नेता कहते हैंः "सामाजिक-जनवाद जनतंत्र का समर्थक है, कम्युनिस्ट अधिनायकत्व के समर्थक हैं। इसलिए हम कम्युनिस्टों के साथ संयुक्त मोर्चा नहीं बना सकते ।" लेकिन क्या हम इस समय आपके सामने सर्वहारा के अधिनायकत्व की उद्घोषणा करने के उद्देश्य से संयुक्त मोर्चे की पेशकश कर रहे हैं ? इस समय हम कोई ऐसा प्रस्ताव नही रख रहे हैं। "पहले कम्युनिस्ट जनवाद को स्वीकार करलें, इसके समर्थन में आगे आयेँ, तब हम संयुक्त मोर्चे के लिए तत्पर होंगे।" इसके जवाब में हम कहते हैंः हम सोवियत जनवाद के, मेहनतकश जनता के जनतंत्र के हिमायती हैं, जो संसार का सबसे सुसंगत जनवाद है। लेकिन पूंजीवादी देशों में हम उन पूंजीवादीजनवादी आजादियों की एक-एक इंच रक्षा करते हैं और रक्षा करते रहेंगे, जिन पर फासिज्म और पूंजीवादी प्रतिक्रियावाद द्वारा हमला किया जा रहा है, क्योकि सर्वहारा के वर्ग संघर्ष के हितों का यही आदेश है । ग्रेट ब्रिटेन के लेबर नेता, मसलन, यह कहते हैंः "लेकिन क्या लेबर पार्टी द्वारा बनाये गये संयुक्त मोर्चे में शरीक होकर छोटी-छोटो कम्युनिस्ट पार्टियां कोई योगदान कर सकती है ?" याद कीजिए कि किस तरह ऑस्ट्रियाई सामाजिक-जनवादी नेता यही बात छोटी-सी ऑस्ट्रियाई कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में कहते थे । और घटनाओं ने क्या दिखाया ? ऑस्ट्रियाई सामाजिक जनवादी पार्टी सही नही सिद्ध हुई जिसका नेतृत्व, ओटो बॉयर और रेनर कर रहे थे, बल्कि छोटी-सी ऑस्ट्रियाई कम्युनिस्ट पार्टी सही सिद्ध हुई जिसने सही समय पर ऑस्ट्रिया में फासिस्ट खतरे की चेतावनी दी थी और मजदूरों का आह्वान किया था कि वे उसके खिलाफ संघर्ष करें। मजदूर आन्दोलन के समूचे अनुभव ने सिद्ध कर दिया है कि अपनी अपेक्षाकृत अल्प संख्या के बावजूद कम्युनिस्ट सर्वहारा की जुझारू गतिविधि की प्रेरक शक्ति होते हैं। साथ ही यह नहीं भूलना होगा कि ऑस्ट्रिया या ग्रेट ब्रिटेन को कम्युनिस्ट पार्टियां महज वह दसियों हजार मजदूर नहीं हैं जो पार्टी के अनुयायी हैं बल्कि वे विश्व कम्युनिस्ट आन्दोलन के हिस्से हैं, उस कम्युनिस्ट इन्टरनेशनल के अंग हैं, जिसको अग्रणी पार्टी उस सर्वहारा की पार्टी है जो पहले ही विजय प्राप्त कर चुका है और भूमंडल के छठे भार्ग पर शासन कर रहा है।
जो भगवान, त्रिलोकन और त्रिकालज्ञ हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि मिट्टी के बर्तन किस प्रकार बनते हैं ? वे, सब-कुछ जानते थे - उनसे कोई बात छिपी हुई नही थी -- लेकिन उद्देश्य की सिद्धि के लिये भागवान ने, सकडालपुत्र के मुख से ही यह कहलाना उचित समझा, कि ये वर्तन किस प्रकार बने हैं ? भगवान के प्रश्न के उत्तर में, सकडालपुत्र ने कहा कि भगवान, इन वर्तनों को बनाने के लिये पहले मिट्टी लाई गई । उस मिट्टी में, राख आदि मिलाई गई और पानी से भिगो कर वह खूब रौंदी गई। जब मिट्टी, बर्तन बनाने के योग्य हो गई, तब उसे चाक पर रखकर ये बर्तन वनाये गये । भगवान ने, सकडालपुत्र से पूछा कि - सकडालपुत्र, ये मिट्टी के वर्तन, पुरुपार्थ से बने हैं, या बिना पुरुपार्थ ही बने हैं? भगवान का यह प्रश्न सुनकर सकडालपुत्र को अपनी मान्यता का ध्यान आगया । वह समझ गया कि, भगवान मद्दावीर, मेरे गुरु के सिद्धान्त के स्थान पर अपना सिद्धान्त सिद्ध करना चाहते हैं। वह, भगवान के प्रश्न के उत्तर मे कहने लगा कि - भगवान, जो कुछ भी होता है, वह सत्र होनहार से ही होता है, पुरुषार्थ से कुछ नहीं होता। मिट्टी के बर्तन बनाने में हमने जो कुछ किया है, वह सब होनहार के वश होकर इस लिये, ये मिट्टी के बर्तन, पुरुषार्थ के अभाव और होनहार के सद्भाव में घने है । सफडालपुत्र से भगवान फिर कहने लगे कि -सकडालपुत्र, तृ ने अभी जो कुछ कहा है, उससे तो पुरुषार्थ की ही सिद्धि होती है । ये मिट्टी के घर्तन, पहले नहीं थे, किन्तु बनाने से बने हैं, और जय बनाने से बने हैं, तो इनके बनाने में किया अवश्य ही की गई है । किया है, वो फर्त्ता भो अवश्य है । क्योंकि, विना कता के क्रिया नहीं हो सकती और बिना क्रिया के, कर्म नहीं होता किया, कर्चा के पुरुषार्थ से ही होती है, पुरुषार्थ के भाव में मिया नहीं होती । इस प्रकार इन वर्तनों के धनने में पुरूषार्म की दी प्रधानता है। कारण के होने पर कत्ता के पुरुपार्य से ही कार्य होता है। प्रत्येक कार्य में कारण और कर्ता की आवश्यकता है। इन घर्तनों को बनाने के लिये जो मिट्टी लाई गई पद मिट्टी वर्तनों फा-उपादान शरण है। फिर मिट्टी में राय आदि मिलाई गई, तथा पानी डाल पर रौंदी गई । इस दर्तन पनाने के लिए तैयार मिट्टी पो 'दर्तन' नहीं कह सकते, हो, पानी रास आदि पर्तन के निमित्त - पारस मिट्टी को प्याक पर रखकर, पर्चाद्वशेष प्रकार की क्रिया पनपने में भी निर्मित-गरण रहा। इस एवार स्वापान-पारण, तिमिन-वारण तथा पर्चा मे होने से वर्तन हैं और पद्वारा की गई पतंग की जो भगवान, त्रिलोकज्ञ और त्रिकालज्ञ हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि मिट्टी के बर्तन किस प्रकार बनते हैं ? वे, सब-कुछ जानते थे - उनसे कोई बात छिपी हुई नहीं थो - लेकिन उद्देश्य की सिद्धि के लिये भागवान ने, सकडालपुत्र के मुख से ही यह कहलाना उचित समझा, कि ये बर्तन किस प्रकार बने हैं ? भगवान के प्रश्न के उत्तर में, सकडालपुत्र ने कहा कि भगवान, इन बर्तनो को बनाने के लिये पहले मिट्टी लाई गई । उस मिट्टी में, राख आदि मिलाई गई और पानी से भिगो कर वह खूब रौंदी गई । जब मिट्टी, वर्तन बनाने के योग्य हो गई, तब उसे चाक पर रखकर ये बर्तन बनाये गये भगवान ने, सकडालपुत्र से पूछा किसकडालपुत्र, ये मिट्टी के बर्तन, पुरुषार्थ से बने हैं, या बिना पुरुपार्थ ही बने हैं? भगवान का यह प्रश्न सुनकर सकडालपुत्र को अपनी मान्यता का ध्यान आगया । वह समझ गया कि, भगवान महावीर, मेरे गुरु के सिद्धान्त के स्थान पर, अपना सिद्धान्त सिद्ध करना चाहते हैं। वह, भगवान के प्रश्न के उत्तर मे कहने लगा कि भगवान, जो कुछ भी होता है, वह सब होनहार से ही होता है, पुरुषार्थ से कुछ नहीं होता । मिट्टी के बर्तन बनाने में हमने जो कुछ किया है, वह सब होनहार के वश होकर । इस लिये, ये मिट्टी के वर्तन, पुरुषार्थ के अभाव और होनहार के
जो भगवान, त्रिलोकन और त्रिकालज्ञ हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि मिट्टी के बर्तन किस प्रकार बनते हैं ? वे, सब-कुछ जानते थे - उनसे कोई बात छिपी हुई नही थी -- लेकिन उद्देश्य की सिद्धि के लिये भागवान ने, सकडालपुत्र के मुख से ही यह कहलाना उचित समझा, कि ये वर्तन किस प्रकार बने हैं ? भगवान के प्रश्न के उत्तर में, सकडालपुत्र ने कहा कि भगवान, इन वर्तनों को बनाने के लिये पहले मिट्टी लाई गई । उस मिट्टी में, राख आदि मिलाई गई और पानी से भिगो कर वह खूब रौंदी गई। जब मिट्टी, बर्तन बनाने के योग्य हो गई, तब उसे चाक पर रखकर ये बर्तन वनाये गये । भगवान ने, सकडालपुत्र से पूछा कि - सकडालपुत्र, ये मिट्टी के वर्तन, पुरुपार्थ से बने हैं, या बिना पुरुपार्थ ही बने हैं? भगवान का यह प्रश्न सुनकर सकडालपुत्र को अपनी मान्यता का ध्यान आगया । वह समझ गया कि, भगवान मद्दावीर, मेरे गुरु के सिद्धान्त के स्थान पर अपना सिद्धान्त सिद्ध करना चाहते हैं। वह, भगवान के प्रश्न के उत्तर मे कहने लगा कि - भगवान, जो कुछ भी होता है, वह सत्र होनहार से ही होता है, पुरुषार्थ से कुछ नहीं होता। मिट्टी के बर्तन बनाने में हमने जो कुछ किया है, वह सब होनहार के वश होकर इस लिये, ये मिट्टी के बर्तन, पुरुषार्थ के अभाव और होनहार के सद्भाव में घने है । सफडालपुत्र से भगवान फिर कहने लगे कि -सकडालपुत्र, तृ ने अभी जो कुछ कहा है, उससे तो पुरुषार्थ की ही सिद्धि होती है । ये मिट्टी के घर्तन, पहले नहीं थे, किन्तु बनाने से बने हैं, और जय बनाने से बने हैं, तो इनके बनाने में किया अवश्य ही की गई है । किया है, वो फर्त्ता भो अवश्य है । क्योंकि, विना कता के क्रिया नहीं हो सकती और बिना क्रिया के, कर्म नहीं होता किया, कर्चा के पुरुषार्थ से ही होती है, पुरुषार्थ के भाव में मिया नहीं होती । इस प्रकार इन वर्तनों के धनने में पुरूषार्म की दी प्रधानता है। कारण के होने पर कत्ता के पुरुपार्य से ही कार्य होता है। प्रत्येक कार्य में कारण और कर्ता की आवश्यकता है। इन घर्तनों को बनाने के लिये जो मिट्टी लाई गई पद मिट्टी वर्तनों फा-उपादान शरण है। फिर मिट्टी में राय आदि मिलाई गई, तथा पानी डाल पर रौंदी गई । इस दर्तन पनाने के लिए तैयार मिट्टी पो 'दर्तन' नहीं कह सकते, हो, पानी रास आदि पर्तन के निमित्त - पारस मिट्टी को प्याक पर रखकर, पर्चाद्वशेष प्रकार की क्रिया पनपने में भी निर्मित-गरण रहा। इस एवार स्वापान-पारण, तिमिन-वारण तथा पर्चा मे होने से वर्तन हैं और पद्वारा की गई पतंग की जो भगवान, त्रिलोकज्ञ और त्रिकालज्ञ हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि मिट्टी के बर्तन किस प्रकार बनते हैं ? वे, सब-कुछ जानते थे - उनसे कोई बात छिपी हुई नहीं थो - लेकिन उद्देश्य की सिद्धि के लिये भागवान ने, सकडालपुत्र के मुख से ही यह कहलाना उचित समझा, कि ये बर्तन किस प्रकार बने हैं ? भगवान के प्रश्न के उत्तर में, सकडालपुत्र ने कहा कि भगवान, इन बर्तनो को बनाने के लिये पहले मिट्टी लाई गई । उस मिट्टी में, राख आदि मिलाई गई और पानी से भिगो कर वह खूब रौंदी गई । जब मिट्टी, वर्तन बनाने के योग्य हो गई, तब उसे चाक पर रखकर ये बर्तन बनाये गये भगवान ने, सकडालपुत्र से पूछा किसकडालपुत्र, ये मिट्टी के बर्तन, पुरुषार्थ से बने हैं, या बिना पुरुपार्थ ही बने हैं? भगवान का यह प्रश्न सुनकर सकडालपुत्र को अपनी मान्यता का ध्यान आगया । वह समझ गया कि, भगवान महावीर, मेरे गुरु के सिद्धान्त के स्थान पर, अपना सिद्धान्त सिद्ध करना चाहते हैं। वह, भगवान के प्रश्न के उत्तर मे कहने लगा कि भगवान, जो कुछ भी होता है, वह सब होनहार से ही होता है, पुरुषार्थ से कुछ नहीं होता । मिट्टी के बर्तन बनाने में हमने जो कुछ किया है, वह सब होनहार के वश होकर । इस लिये, ये मिट्टी के वर्तन, पुरुषार्थ के अभाव और होनहार के
कोरोना मामले में उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ पाकिस्तान के बड़े अखबार द डॉन के संपादक ने की है। नई दिल्लीःउत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के काम की चर्चा अब हिंदुस्तान के बॉर्डर के उस पार पाकिस्तान में भी होने लगी है। पाकिस्तान के बड़े मीडिया समूह द डॉन के संपादक फहद हुसैन ने ट्वीट कर योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है। टीओआई की मानें तो अपने ट्वीट में फहद हुसैन ने योगी के काम को इमरान सरकार से बेहतर बताया है। फहद ने ट्वीट में लिखा कि सावधानी से इस ग्राफ को देखें। पाकिस्तान का प्रति किलोमीटर जनसंख्या घनत्व यूपी से कम और प्रतिव्यक्ति आय ज्यादा है। यूपी ने लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराया, जबकि हम (पाकिस्तान) नहीं कर सके। लिहाजा, मृत्यु दर में अंतर साफ देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस संक्रमण से आठ और लोग की मौत होने के साथ ही कोविड-19 से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर 283 हो गयी है। प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में अभी तक कुल 283 लोग की मौत कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से प्रदेश में हुई है जबकि 6,344 लोग उपचार के बाद संक्रमण मुक्त होकर अस्पतालों से छुटटी पा चुके हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश व पाकिस्तान की आबादी लगभग बराबर है, लेकिन कोरोना के ग्राफ में भारी अंतर है। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की आबादी 23. 15 करोड़ है और यहां सिर्फ 0. 0045 फीसदी संक्रमित हैं। अब तक यूपी में 10536 लोग संक्रमित हो चुके हैं। जबकि, पाकिस्तान में 98 हजार 943 लोग इस महामारी की जद में आ चुके हैं। पाकिस्तान में 2002 की मौत हुई है, यूपी में अब तक कुल 283 लोगों की मौतें हुईं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और मौजूदा रेलमंत्री शेख रशीद अहमद के सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की प्रवक्ता मरयम औरंगजेब ने 61 वर्षीय अब्बासी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि अब्बासी पीएमएल-एन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं और पार्टी नेता नवाज शरीफ को अदालत द्वारा प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद वह अगस्त 2017 से मई 2018 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सोमवार को कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब्बासी गृह पृथकवास में चले गए हैं। पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने अब्बासी के जल्द ठीक होने की कामना की है। रेलमंत्री शेख रशीद अहमद भी कोरोना पॉजिटिव हैं।
कोरोना मामले में उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ पाकिस्तान के बड़े अखबार द डॉन के संपादक ने की है। नई दिल्लीःउत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के काम की चर्चा अब हिंदुस्तान के बॉर्डर के उस पार पाकिस्तान में भी होने लगी है। पाकिस्तान के बड़े मीडिया समूह द डॉन के संपादक फहद हुसैन ने ट्वीट कर योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है। टीओआई की मानें तो अपने ट्वीट में फहद हुसैन ने योगी के काम को इमरान सरकार से बेहतर बताया है। फहद ने ट्वीट में लिखा कि सावधानी से इस ग्राफ को देखें। पाकिस्तान का प्रति किलोमीटर जनसंख्या घनत्व यूपी से कम और प्रतिव्यक्ति आय ज्यादा है। यूपी ने लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराया, जबकि हम नहीं कर सके। लिहाजा, मृत्यु दर में अंतर साफ देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस संक्रमण से आठ और लोग की मौत होने के साथ ही कोविड-उन्नीस से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर दो सौ तिरासी हो गयी है। प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में अभी तक कुल दो सौ तिरासी लोग की मौत कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से प्रदेश में हुई है जबकि छः,तीन सौ चौंतालीस लोग उपचार के बाद संक्रमण मुक्त होकर अस्पतालों से छुटटी पा चुके हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश व पाकिस्तान की आबादी लगभग बराबर है, लेकिन कोरोना के ग्राफ में भारी अंतर है। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की आबादी तेईस. पंद्रह करोड़ है और यहां सिर्फ शून्य. पैंतालीस फीसदी संक्रमित हैं। अब तक यूपी में दस हज़ार पाँच सौ छत्तीस लोग संक्रमित हो चुके हैं। जबकि, पाकिस्तान में अट्ठानवे हजार नौ सौ तैंतालीस लोग इस महामारी की जद में आ चुके हैं। पाकिस्तान में दो हज़ार दो की मौत हुई है, यूपी में अब तक कुल दो सौ तिरासी लोगों की मौतें हुईं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और मौजूदा रेलमंत्री शेख रशीद अहमद के सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की प्रवक्ता मरयम औरंगजेब ने इकसठ वर्षीय अब्बासी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि अब्बासी पीएमएल-एन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं और पार्टी नेता नवाज शरीफ को अदालत द्वारा प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद वह अगस्त दो हज़ार सत्रह से मई दो हज़ार अट्ठारह तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सोमवार को कोविड-उन्नीस रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब्बासी गृह पृथकवास में चले गए हैं। पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने अब्बासी के जल्द ठीक होने की कामना की है। रेलमंत्री शेख रशीद अहमद भी कोरोना पॉजिटिव हैं।
चर्चा में क्यों? काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 75 प्रतिशत से अधिक ज़िले चक्रवात, बाढ़, सूखा, हीट वेव और कोल्ड वेव जैसी चरम जलवायु घटनाओं के मुख्य हॉटस्पॉट हैं। - यह रिपोर्ट 'प्रिपेयरिंग इंडिया फॉर एक्सट्रीम क्लाइमेट इवेंट्स' के नाम से प्रकाशित की गई है। - यह पहली बार है जब देश में चरम जलवायु घटनाओं के हॉटस्पॉट का मानचित्रण किया गया है। - CEEW सभी प्रकार के संसाधनों के उपयोग, पुनरुपयोग और दुरुपयोग को प्रभावित करने वाले सभी विषयों पर अनुसंधान हेतु समर्पित एक स्वतंत्र और गैर-लाभकारी नीति अनुसंधान संस्थान है। - यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की उत्सर्जन गैप रिपोर्ट, 2020 के बाद जारी की गई है, ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि विश्व मौजूदा सदी में 3°C से अधिक तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। - बीते दशकों में चरम जलवायु घटनाएँ जैसे- बाढ़ और सूखा आदि की आवृत्ति, तीव्रता और अप्रत्याशितता काफी तेज़ी से बढ़ी हैं। - जहाँ एक ओर भारत में वर्ष 1970-2005 के बीच 35 वर्षों में 250 चरम जलवायु घटनाएँ दर्ज की गईं, वहीं वर्ष 2005-2020 के बीच मात्र 15 वर्षों में इस तरह की 310 घटनाएँ दर्ज की गईं। - वर्ष 2005 के बाद से चरम जलवायु घटनाओं में हुई वृद्धि के कारण भारत के 75 प्रतिशत से अधिक ज़िलों को संपत्ति, आजीविका और जीवन के नुकसान के साथ-साथ माइक्रो-क्लाइमेट में होने वाले बदलावों को वहन करना पड़ रहा है। - यह पैटर्न वैश्विक परिवर्तन को भी प्रदर्शित करता है। - जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप चरम जलवायु घटनाओं के चलते वर्ष 1999-2018 के बीच विश्व भर में 4,95,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। - रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान संपूर्ण विश्व में 12000 से अधिक चरम जलवायु घटनाएँ दर्ज की गईं और इसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को 3.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर (क्रय शक्ति समता या PPP के संदर्भ में) के नुकसान का सामना करना पड़ा। - मौजूदा भयावह जलवायु परिवर्तन घटनाएँ बीते 100 वर्षों में केवल 0.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि का परिणाम हैं, इस तरह यदि भविष्य में तापमान में और अधिक वृद्धि होती है तो हमें इससे भी भयानक घटनाएँ देखने को मिल सकती हैं। - भारत पहले से ही चरम जलवायु घटनाओं के मामले में वैश्विक स्तर पर 5वाँ सबसे संवेदनशील देश है। - आँकड़ों के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि वर्ष 2005 के बाद से चक्रवातों से प्रभावित ज़िलों की वार्षिक औसत संख्या तथा चक्रवातों की आवृत्ति तकरीबन दोगुनी हो गई है। - बीते एक दशक में पूर्वी तट के लगभग 258 ज़िले चक्रवात से प्रभावित हुए हैं। - पूर्वी तट में लगातार गर्म होते क्षेत्रीय माइक्रो-क्लाइमेट, भूमि-उपयोग में परिवर्तन और निर्वनीकरण ने चक्रवातों की संख्या में बढ़ोतरी करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। - वर्ष 2000-2009 के बीच भीषण बाढ़ और उससे संबंधित अन्य घटनाओं में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई और इस दौरान बाढ़ के कारण तकरीबन 473 ज़िले प्रभावित हुए। - बाढ़ से संबंधित अन्य घटनाओं जैसे- भूस्खलन, भारी वर्षा, ओलावृष्टि, गरज और बादल फटने आदि घटनाओं में 20 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। - भूस्खलन, 'अर्बन हीट लैंड' और हिमनदों के पिघलने के कारण समुद्र स्तर में हो रही वृद्धि के प्रभावस्वरूप बाढ़ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। - 'अर्बन हीट लैंड' वह सघन जनसंख्या वाला नगरीय क्षेत्र होता है, जिसका तापमान उपनगरीय या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 2°C अधिक होता है। - जहाँ एक ओर मानसून के दौरान वर्षा वाले दिनों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर चरम वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे बाढ़ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। - पिछले एक दशक में भारत के आठ सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित ज़िलों में से छह ज़िले (बारपेटा, दारंग, धेमाजी, गोवालपारा, गोलाघाट और शिवसागर) अकेले असम में स्थित हैं। - रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2005 के बाद सूखा प्रभावित ज़िलों का वार्षिक औसत 13 गुना अधिक बढ़ गया है। - वर्ष 2005 तक भारत में सूखे से प्रभावित ज़िलों की संख्या मात्र छह थी, जो कि वर्ष 2005 के बाद से बढ़कर 79 हो गई है। - यद्यपि सूखे के कारण होने वाले जनजीवन के नुकसान में काफी कमी आई है, किंतु इस प्रकार की घटनाओं के चलते कृषि और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। - पिछले एक दशक में भारत के सूखा प्रभावित ज़िलों में अहमदनगर, औरंगाबाद (दोनों महाराष्ट्र), अनंतपुर, चित्तूर (दोनों आंध्र प्रदेश), बागलकोट, बीजापुर, चिक्काबल्लापुर, गुलबर्गा, और हासन (सभी कर्नाटक) आदि शामिल हैं। - विश्लेषण से माइक्रो-तापमान में वृद्धि और मानसून के कमज़ोर होने के संबंध का पता चलता है। - इस तथ्य की पुष्टि इस बात से की जा सकती है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को वर्ष 2015 में भीषण गर्मी और कमज़ोर मानसून के कारण पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। - इस अध्ययन के दौरान चरम जलवायु घटनाओं के पैटर्न में बदलाव भी पाया गया है, उदाहरण के लिये भारत के 40 प्रतिशत बाढ़-ग्रस्त ज़िलों की स्थिति अब सूखाग्रस्त है, जबकि सूखाग्रस्त ज़िलों के बाढ़-ग्रस्त होने की जानकारी मिल रही है। - कुछ मामलों में जिन ज़िलों में बाढ़ की आशंका थी, वे अब सूखाग्रस्त हो रहे हैं और जहाँ सूखे की आशंका थी वे अब बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। - वहीं भारत के कई ज़िलों को बाढ़ और सूखा दोनों ही घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह प्रवृत्ति काफी गंभीर है और इस विषय पर आगे अनुसंधान किये जाने की आवश्यकता है। - भारत के तटीय दक्षिणी राज्यों में सूखे की घटनाएँ काफी तेज़ी से दर्ज की जा रही हैं। - इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के कई ज़िलों में बाढ़ और सूखे की स्थिति एक ही मौसम के दौरान दर्ज जा रही है। - अर्बन हीट स्ट्रेस, जल तनाव और जैव विविधता के नुकसान जैसी महत्त्वपूर्ण सुभेद्यताओं का प्रतिचित्रण करने के लिये एक जलवायु जोखिम एटलस (Develop a Climate Risk Atlas) विकसित किया जाना चाहिये। - आपात स्थितियों के प्रति व्यवस्थित और निरंतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिये एक एकीकृत आपातकालीन निगरानी प्रणाली विकसित की जानी चाहिये। - स्थानीय, क्षेत्रीय, मैक्रो और माइक्रो-क्लाइमैटिक स्तर सहित सभी स्तरों पर जोखिम मूल्यांकन किया जाना चाहिये। - जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया में सभी हितधारकों की भागीदारी अनिवार्य हो। - स्थानीय, उप-राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं में जोखिम मूल्यांकन को एकीकृत किया जाना चाहिये। - माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन का आशय ऐसे क्षेत्र से है, जहाँ का मौसम आस-पास के क्षेत्रों से भिन्न होता है। भारत के अलग-अलग ज़िलों में माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है। - माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन में बदलाव के कारण संपूर्ण क्षेत्र में व्यवधान पैदा हो सकता है। - उदाहरण के लिये वार्षिक औसत तापमान में मात्र 2 डिग्री सेल्सियस वृद्धि के कारण कृषि उत्पादकता में 15-20 प्रतिशत की कमी आ सकती है। - कारणः इसके कारणों में भूमि उपयोग में बदलाव, निर्वनीकरण, अतिक्रमण के कारण आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों को होने वाला नुकसान और अर्बन हीट लैंड आदि शामिल हैं।
चर्चा में क्यों? काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वाटर द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पचहत्तर प्रतिशत से अधिक ज़िले चक्रवात, बाढ़, सूखा, हीट वेव और कोल्ड वेव जैसी चरम जलवायु घटनाओं के मुख्य हॉटस्पॉट हैं। - यह रिपोर्ट 'प्रिपेयरिंग इंडिया फॉर एक्सट्रीम क्लाइमेट इवेंट्स' के नाम से प्रकाशित की गई है। - यह पहली बार है जब देश में चरम जलवायु घटनाओं के हॉटस्पॉट का मानचित्रण किया गया है। - CEEW सभी प्रकार के संसाधनों के उपयोग, पुनरुपयोग और दुरुपयोग को प्रभावित करने वाले सभी विषयों पर अनुसंधान हेतु समर्पित एक स्वतंत्र और गैर-लाभकारी नीति अनुसंधान संस्थान है। - यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की उत्सर्जन गैप रिपोर्ट, दो हज़ार बीस के बाद जारी की गई है, ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि विश्व मौजूदा सदी में तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। - बीते दशकों में चरम जलवायु घटनाएँ जैसे- बाढ़ और सूखा आदि की आवृत्ति, तीव्रता और अप्रत्याशितता काफी तेज़ी से बढ़ी हैं। - जहाँ एक ओर भारत में वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तर-दो हज़ार पाँच के बीच पैंतीस वर्षों में दो सौ पचास चरम जलवायु घटनाएँ दर्ज की गईं, वहीं वर्ष दो हज़ार पाँच-दो हज़ार बीस के बीच मात्र पंद्रह वर्षों में इस तरह की तीन सौ दस घटनाएँ दर्ज की गईं। - वर्ष दो हज़ार पाँच के बाद से चरम जलवायु घटनाओं में हुई वृद्धि के कारण भारत के पचहत्तर प्रतिशत से अधिक ज़िलों को संपत्ति, आजीविका और जीवन के नुकसान के साथ-साथ माइक्रो-क्लाइमेट में होने वाले बदलावों को वहन करना पड़ रहा है। - यह पैटर्न वैश्विक परिवर्तन को भी प्रदर्शित करता है। - जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप चरम जलवायु घटनाओं के चलते वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे-दो हज़ार अट्ठारह के बीच विश्व भर में चार,पचानवे,शून्य से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। - रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान संपूर्ण विश्व में बारह हज़ार से अधिक चरम जलवायु घटनाएँ दर्ज की गईं और इसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को तीन.चौवन बिलियन अमेरिकी डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ा। - मौजूदा भयावह जलवायु परिवर्तन घटनाएँ बीते एक सौ वर्षों में केवल शून्य दशमलव छः डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि का परिणाम हैं, इस तरह यदि भविष्य में तापमान में और अधिक वृद्धि होती है तो हमें इससे भी भयानक घटनाएँ देखने को मिल सकती हैं। - भारत पहले से ही चरम जलवायु घटनाओं के मामले में वैश्विक स्तर पर पाँचवाँ सबसे संवेदनशील देश है। - आँकड़ों के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि वर्ष दो हज़ार पाँच के बाद से चक्रवातों से प्रभावित ज़िलों की वार्षिक औसत संख्या तथा चक्रवातों की आवृत्ति तकरीबन दोगुनी हो गई है। - बीते एक दशक में पूर्वी तट के लगभग दो सौ अट्ठावन ज़िले चक्रवात से प्रभावित हुए हैं। - पूर्वी तट में लगातार गर्म होते क्षेत्रीय माइक्रो-क्लाइमेट, भूमि-उपयोग में परिवर्तन और निर्वनीकरण ने चक्रवातों की संख्या में बढ़ोतरी करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। - वर्ष दो हज़ार-दो हज़ार नौ के बीच भीषण बाढ़ और उससे संबंधित अन्य घटनाओं में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई और इस दौरान बाढ़ के कारण तकरीबन चार सौ तिहत्तर ज़िले प्रभावित हुए। - बाढ़ से संबंधित अन्य घटनाओं जैसे- भूस्खलन, भारी वर्षा, ओलावृष्टि, गरज और बादल फटने आदि घटनाओं में बीस गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। - भूस्खलन, 'अर्बन हीट लैंड' और हिमनदों के पिघलने के कारण समुद्र स्तर में हो रही वृद्धि के प्रभावस्वरूप बाढ़ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। - 'अर्बन हीट लैंड' वह सघन जनसंख्या वाला नगरीय क्षेत्र होता है, जिसका तापमान उपनगरीय या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दो डिग्री सेल्सियस अधिक होता है। - जहाँ एक ओर मानसून के दौरान वर्षा वाले दिनों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर चरम वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे बाढ़ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। - पिछले एक दशक में भारत के आठ सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित ज़िलों में से छह ज़िले अकेले असम में स्थित हैं। - रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष दो हज़ार पाँच के बाद सूखा प्रभावित ज़िलों का वार्षिक औसत तेरह गुना अधिक बढ़ गया है। - वर्ष दो हज़ार पाँच तक भारत में सूखे से प्रभावित ज़िलों की संख्या मात्र छह थी, जो कि वर्ष दो हज़ार पाँच के बाद से बढ़कर उन्यासी हो गई है। - यद्यपि सूखे के कारण होने वाले जनजीवन के नुकसान में काफी कमी आई है, किंतु इस प्रकार की घटनाओं के चलते कृषि और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। - पिछले एक दशक में भारत के सूखा प्रभावित ज़िलों में अहमदनगर, औरंगाबाद , अनंतपुर, चित्तूर , बागलकोट, बीजापुर, चिक्काबल्लापुर, गुलबर्गा, और हासन आदि शामिल हैं। - विश्लेषण से माइक्रो-तापमान में वृद्धि और मानसून के कमज़ोर होने के संबंध का पता चलता है। - इस तथ्य की पुष्टि इस बात से की जा सकती है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को वर्ष दो हज़ार पंद्रह में भीषण गर्मी और कमज़ोर मानसून के कारण पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। - इस अध्ययन के दौरान चरम जलवायु घटनाओं के पैटर्न में बदलाव भी पाया गया है, उदाहरण के लिये भारत के चालीस प्रतिशत बाढ़-ग्रस्त ज़िलों की स्थिति अब सूखाग्रस्त है, जबकि सूखाग्रस्त ज़िलों के बाढ़-ग्रस्त होने की जानकारी मिल रही है। - कुछ मामलों में जिन ज़िलों में बाढ़ की आशंका थी, वे अब सूखाग्रस्त हो रहे हैं और जहाँ सूखे की आशंका थी वे अब बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। - वहीं भारत के कई ज़िलों को बाढ़ और सूखा दोनों ही घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह प्रवृत्ति काफी गंभीर है और इस विषय पर आगे अनुसंधान किये जाने की आवश्यकता है। - भारत के तटीय दक्षिणी राज्यों में सूखे की घटनाएँ काफी तेज़ी से दर्ज की जा रही हैं। - इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के कई ज़िलों में बाढ़ और सूखे की स्थिति एक ही मौसम के दौरान दर्ज जा रही है। - अर्बन हीट स्ट्रेस, जल तनाव और जैव विविधता के नुकसान जैसी महत्त्वपूर्ण सुभेद्यताओं का प्रतिचित्रण करने के लिये एक जलवायु जोखिम एटलस विकसित किया जाना चाहिये। - आपात स्थितियों के प्रति व्यवस्थित और निरंतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिये एक एकीकृत आपातकालीन निगरानी प्रणाली विकसित की जानी चाहिये। - स्थानीय, क्षेत्रीय, मैक्रो और माइक्रो-क्लाइमैटिक स्तर सहित सभी स्तरों पर जोखिम मूल्यांकन किया जाना चाहिये। - जोखिम मूल्यांकन प्रक्रिया में सभी हितधारकों की भागीदारी अनिवार्य हो। - स्थानीय, उप-राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं में जोखिम मूल्यांकन को एकीकृत किया जाना चाहिये। - माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन का आशय ऐसे क्षेत्र से है, जहाँ का मौसम आस-पास के क्षेत्रों से भिन्न होता है। भारत के अलग-अलग ज़िलों में माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है। - माइक्रो-क्लाइमैटिक ज़ोन में बदलाव के कारण संपूर्ण क्षेत्र में व्यवधान पैदा हो सकता है। - उदाहरण के लिये वार्षिक औसत तापमान में मात्र दो डिग्री सेल्सियस वृद्धि के कारण कृषि उत्पादकता में पंद्रह-बीस प्रतिशत की कमी आ सकती है। - कारणः इसके कारणों में भूमि उपयोग में बदलाव, निर्वनीकरण, अतिक्रमण के कारण आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों को होने वाला नुकसान और अर्बन हीट लैंड आदि शामिल हैं।
नोएडाः उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) स्थित ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी में रहने वाले कथित गालीबाज नेता श्रीकांत त्यागी (Shrikant Tyagi) के पुलिस की गिरफ्त में आते ही सुर बदल गए हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर की ओर से श्रीकांत की गिरफ्तारी के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद श्रीकांत ने मीडिया से कहा कि 'वह तो मेरी बहन जैसी है, मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने और बदनाम करने की साजिश है। वहीं कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। खुद को नेता कहने वाले श्रीकांत त्यागी को नोएडा पुलिस ने मंगलवार को उनकी हाउसिंग सोसाइटी में एक महिला के साथ अभद्रता और मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके सुर बदले-बदले नजर आए हैं। जबकि सोशल मीडियो पर वायरल हुए श्रीकांत के वीडियो में उनके सुर कुछ और ही थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया पर श्रीकांत त्यागी खुद को भाजपा के किसान मोर्चा का राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य के रूप में बताता था। श्रीकांत त्यागी ने मंगलवार को अदालत जाते समय मीडिया से कहा कि 'मैं घटना पर खेद व्यक्त करता हूं। वह (महिला) मेरी बहन की तरह है, यह घटना राजनीतिक है और मुझे राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए की गई है। ' आपको बता दें कि श्रीकांत की गिरफ्तारी से पहले नोएडा के सेक्टर-93बी में ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में उनके घर के बाहर अवैध निर्माण को प्रशासन ने बुल्डोजर से गिरा दिया था। वहीं नोएडा पुलिस ने कहा कि श्रीकांत त्यागी अपने वाहन पर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा दिए गए वीवीआईपी स्टिकर का उपयोग कर रहा था। वहीं नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार सिंह ने मंगलवार को कहा कि श्रीकांत त्यागी की कार पर मिले स्टिकर लोगों में खुद का भय पैदा करने के लिए लगाए गए थे। आपको बता दें कि खुद को कथित तौर पर नेता कहने वाले श्रीकांत त्यागी पर नोएडा पुलिस ने ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी परिसर में रहने वाली एक महिला के साथ गाली-गलौज करने और मारपीट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। महिला ने श्रीकांत द्वारा सोसायटी में अतिक्रमण करने का विरोध किया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आया, लेकिन श्रीकांत त्यागी तभी से फरार है। जानकारी के मुताबिक श्रीकांत नोएडा के भंगेल का रहने वाला है। उसे मंगलवार को नोएडा पुलिस और एसटीएफ ने मेरठ से गिरफ्तार किया है।
नोएडाः उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी में रहने वाले कथित गालीबाज नेता श्रीकांत त्यागी के पुलिस की गिरफ्त में आते ही सुर बदल गए हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर की ओर से श्रीकांत की गिरफ्तारी के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद श्रीकांत ने मीडिया से कहा कि 'वह तो मेरी बहन जैसी है, मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने और बदनाम करने की साजिश है। वहीं कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें चौदह दिन न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। खुद को नेता कहने वाले श्रीकांत त्यागी को नोएडा पुलिस ने मंगलवार को उनकी हाउसिंग सोसाइटी में एक महिला के साथ अभद्रता और मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके सुर बदले-बदले नजर आए हैं। जबकि सोशल मीडियो पर वायरल हुए श्रीकांत के वीडियो में उनके सुर कुछ और ही थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया पर श्रीकांत त्यागी खुद को भाजपा के किसान मोर्चा का राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य के रूप में बताता था। श्रीकांत त्यागी ने मंगलवार को अदालत जाते समय मीडिया से कहा कि 'मैं घटना पर खेद व्यक्त करता हूं। वह मेरी बहन की तरह है, यह घटना राजनीतिक है और मुझे राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए की गई है। ' आपको बता दें कि श्रीकांत की गिरफ्तारी से पहले नोएडा के सेक्टर-तिरानवेबी में ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में उनके घर के बाहर अवैध निर्माण को प्रशासन ने बुल्डोजर से गिरा दिया था। वहीं नोएडा पुलिस ने कहा कि श्रीकांत त्यागी अपने वाहन पर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा दिए गए वीवीआईपी स्टिकर का उपयोग कर रहा था। वहीं नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार सिंह ने मंगलवार को कहा कि श्रीकांत त्यागी की कार पर मिले स्टिकर लोगों में खुद का भय पैदा करने के लिए लगाए गए थे। आपको बता दें कि खुद को कथित तौर पर नेता कहने वाले श्रीकांत त्यागी पर नोएडा पुलिस ने ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी परिसर में रहने वाली एक महिला के साथ गाली-गलौज करने और मारपीट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। महिला ने श्रीकांत द्वारा सोसायटी में अतिक्रमण करने का विरोध किया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आया, लेकिन श्रीकांत त्यागी तभी से फरार है। जानकारी के मुताबिक श्रीकांत नोएडा के भंगेल का रहने वाला है। उसे मंगलवार को नोएडा पुलिस और एसटीएफ ने मेरठ से गिरफ्तार किया है।
अतः मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक/एफ5-1-99-पन्द्रह-1-सी, भोपाल, दिनांक 26 जुलाई, 1999 के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए उर्वशी कामगार सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा-69 (2) के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारा70 (1) के अंतर्गत श्री रमेश पेंढारकर, सहकारी निरीक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. कार्यालयीन कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक/परिसमापन/2015-16/90, धार, दिनांक 20 जनवरी, 2015 के अनुसार माँ दुर्गा आजीविका बीज उत्पादक सहकारी संस्था मर्या., गुलरझिरी, तहसील धार, जिला धार, जिसका पंजीयन क्रमांक 1300, दिनांक 27 दिसम्बर, 2011 है, को मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा-69 (3) के अंतर्गत कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था एवं निर्धारित समयावधि में जवाब मय साक्ष्य चाहा गया था. तामिली हेतु श्री आर. के. यादव स. नि./ सहकारिता विस्तार अधिकारी, धार को दिया गया था. उन्होंने सूचित किया गया कि संस्था पंजीकृत पते पर संस्था पदाधिकारी नहीं पाये जाने से सूचना - पत्र तामिल नहीं हो सका. सहायक आयुक्त (अंकेक्षण) सहकारिता, जिला धार द्वारा भी संस्था अकार्यशील होने से परिसमापन में लाने की अनुसंशा की गई है. संस्था मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं नियम 1962 तथा पंजीकृत उपविधियों के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रही है एवं विगत वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट में भी "डी " वर्ग देने से स्पष्ट होता है कि संस्था अकार्यशील होकर अपने उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है. मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक / एफ5-1-99-पन्द्रह-1-सी, भोपाल, दिनांक 26 जुलाई, 1999 के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए माँ दुर्गा आजीविका बीज उत्पादक सहकारी संस्था मर्या., गुलरझिरी, तहसील धार, जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा-69 (2) के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारा-70 (1) के अंतर्गत श्री रमेश पेंढारकर, सहकारी निरीक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. कार्यालयीन कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक / परिसमापन/2015-16/94, धार, दिनांक 20 जनवरी, 2015 के अनुसार शासकीय महाविद्यालय कर्मचारी परस्पर साख सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार, जिसका पंजीयन क्रमांक 344, दिनांक 01 सितम्बर, 1969 है, को मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा-69 (3) के अंतर्गत कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था एवं निर्धारित समयावधि में जवाब मय साक्ष्य चाहा गया था. तामिली हेतु श्री आर. के. यादव स. नि./ सहकारिता विस्तार अधिकारी, धार को दिया गया था. उन्होंने सूचित किया गया कि संस्था पंजीकृत पते पर संस्था पदाधिकारी नहीं पाये जाने से सूचना पत्र तामिल नहीं हो सका. सहायक आयुक्त (अंकेक्षण) सहकारिता, जिला धार द्वारा भी संस्था अकार्यशील होने से परिसमापन में लाने की अनुसंशा की गई है. संस्था मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 एवं नियम 1962 तथा पंजीकृत उपविधियों के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रही है एवं विगत वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट में भी "डी " वर्ग देने से स्पष्ट होता है कि संस्था अकार्यशील होकर अपने उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है. अतः मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक/एफ5-1-99-पन्द्रह-1-सी, भोपाल, दिनांक 26 जुलाई, 1999 के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए के शासकीय महाविद्यालय कर्मचारी परस्पर साख सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा-69 (2) के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारा-70 (1) के अंतर्गत श्री प्रदीप पाठक, उप- अंकेक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार. कार्यालय उप पंजीयक, सहकारी समितियाँ, जिला सतना सतना, दिनांक 27 मई, 2015 [ मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 धारा-69 (2) के अन्तर्गत ] क्र./ परि./15/626. - इंदिरा महिला साख सहकारी समिति मर्या., धवारी सतना, पंजीयन क्रमांक 283, दिनांक 05 फरवरी, 1998 है के आदेश क्रमांक 1193, दिनांक 10 दिसम्बर, 2014 से परिसमापन में लाया जाकर श्री आर. के. गुप्ता, सह. निरी. को परिसमापक नियुक्त किया गया था परिसमापन में लाये जाने का कारण संस्था की अकार्यशीलता थी.
अतः मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक/एफपाँच जनवरी निन्यानवे-पन्द्रह-एक-सी, भोपाल, दिनांक छब्बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए उर्वशी कामगार सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ की धारा-उनहत्तर के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारासत्तर के अंतर्गत श्री रमेश पेंढारकर, सहकारी निरीक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. कार्यालयीन कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक/परिसमापन/नब्बे सोलह दो हज़ार पंद्रह, धार, दिनांक बीस जनवरी, दो हज़ार पंद्रह के अनुसार माँ दुर्गा आजीविका बीज उत्पादक सहकारी संस्था मर्या., गुलरझिरी, तहसील धार, जिला धार, जिसका पंजीयन क्रमांक एक हज़ार तीन सौ, दिनांक सत्ताईस दिसम्बर, दो हज़ार ग्यारह है, को मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ की धारा-उनहत्तर के अंतर्गत कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था एवं निर्धारित समयावधि में जवाब मय साक्ष्य चाहा गया था. तामिली हेतु श्री आर. के. यादव स. नि./ सहकारिता विस्तार अधिकारी, धार को दिया गया था. उन्होंने सूचित किया गया कि संस्था पंजीकृत पते पर संस्था पदाधिकारी नहीं पाये जाने से सूचना - पत्र तामिल नहीं हो सका. सहायक आयुक्त सहकारिता, जिला धार द्वारा भी संस्था अकार्यशील होने से परिसमापन में लाने की अनुसंशा की गई है. संस्था मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम एक हज़ार नौ सौ साठ एवं नियम एक हज़ार नौ सौ बासठ तथा पंजीकृत उपविधियों के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रही है एवं विगत वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट में भी "डी " वर्ग देने से स्पष्ट होता है कि संस्था अकार्यशील होकर अपने उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है. मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक / एफपाँच जनवरी निन्यानवे-पन्द्रह-एक-सी, भोपाल, दिनांक छब्बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए माँ दुर्गा आजीविका बीज उत्पादक सहकारी संस्था मर्या., गुलरझिरी, तहसील धार, जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ की धारा-उनहत्तर के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारा-सत्तर के अंतर्गत श्री रमेश पेंढारकर, सहकारी निरीक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. कार्यालयीन कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक / परिसमापन/चौरानवे सोलह दो हज़ार पंद्रह, धार, दिनांक बीस जनवरी, दो हज़ार पंद्रह के अनुसार शासकीय महाविद्यालय कर्मचारी परस्पर साख सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार, जिसका पंजीयन क्रमांक तीन सौ चौंतालीस, दिनांक एक सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर है, को मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ की धारा-उनहत्तर के अंतर्गत कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था एवं निर्धारित समयावधि में जवाब मय साक्ष्य चाहा गया था. तामिली हेतु श्री आर. के. यादव स. नि./ सहकारिता विस्तार अधिकारी, धार को दिया गया था. उन्होंने सूचित किया गया कि संस्था पंजीकृत पते पर संस्था पदाधिकारी नहीं पाये जाने से सूचना पत्र तामिल नहीं हो सका. सहायक आयुक्त सहकारिता, जिला धार द्वारा भी संस्था अकार्यशील होने से परिसमापन में लाने की अनुसंशा की गई है. संस्था मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ एवं नियम एक हज़ार नौ सौ बासठ तथा पंजीकृत उपविधियों के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रही है एवं विगत वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट में भी "डी " वर्ग देने से स्पष्ट होता है कि संस्था अकार्यशील होकर अपने उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है. अतः मैं, ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार, सहकारी सोसायटी, जिला धार, मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग की अधिसूचना क्रमांक/एफपाँच जनवरी निन्यानवे-पन्द्रह-एक-सी, भोपाल, दिनांक छब्बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के द्वारा प्रदत्त पंजीयक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए के शासकीय महाविद्यालय कर्मचारी परस्पर साख सहकारी संस्था मर्या., धार, तहसील व जिला धार को मध्यप्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ की धारा-उनहत्तर के अंतर्गत परिसमापन में लाते हुए धारा-सत्तर के अंतर्गत श्री प्रदीप पाठक, उप- अंकेक्षक को परिसमापक नियुक्त करता हूँ. ओ. पी. गुप्ता, उप-रजिस्ट्रार. कार्यालय उप पंजीयक, सहकारी समितियाँ, जिला सतना सतना, दिनांक सत्ताईस मई, दो हज़ार पंद्रह [ मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ साठ धारा-उनहत्तर के अन्तर्गत ] क्र./ परि./पंद्रह/छः सौ छब्बीस. - इंदिरा महिला साख सहकारी समिति मर्या., धवारी सतना, पंजीयन क्रमांक दो सौ तिरासी, दिनांक पाँच फरवरी, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे है के आदेश क्रमांक एक हज़ार एक सौ तिरानवे, दिनांक दस दिसम्बर, दो हज़ार चौदह से परिसमापन में लाया जाकर श्री आर. के. गुप्ता, सह. निरी. को परिसमापक नियुक्त किया गया था परिसमापन में लाये जाने का कारण संस्था की अकार्यशीलता थी.
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रो. भीम सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। श्री मोदी ने कहा कि प्रो. भीम सिंह जी को एक जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहाः "प्रो. भीम सिंह जी को एक जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे बहुत पढ़े-लिखे और विद्वान थे। मैं उनके साथ अपनी बातचीत को हमेशा याद रखूंगा। उनके निधन से दुःखी हूं। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।" Read this release in:
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रो. भीम सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। श्री मोदी ने कहा कि प्रो. भीम सिंह जी को एक जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहाः "प्रो. भीम सिंह जी को एक जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे बहुत पढ़े-लिखे और विद्वान थे। मैं उनके साथ अपनी बातचीत को हमेशा याद रखूंगा। उनके निधन से दुःखी हूं। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।" Read this release in:
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में 17वीं हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में उद्घाटन भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज, किसी भी देश के विकास के लिए संवाद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संवाद बेहतर भविष्य की नींव रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार 'सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास' मंत्र के साथ वर्तमान चुनौतियों और समस्याओं पर काम कर रही है। सरकार द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों के बारे प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के लोगों को आशा की एक नई किरण मिली है। मुस्लिम महिलाएं अब तीन तलाक की परंपरा से मुक्त हैं, अवैध कॉलोनियों पर फैसले से 40 लाख लोगों को लाभ मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बेहतर कल के लिए, एक नये भारत के लिए ऐसे कई निर्णय लिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अब उन जिलों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है जो स्वास्थ, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के कई संकेतकों में पीछे छूट गये थे। उन्होंने कहा कि 112 जिलों को विकास और शासन के प्रत्येक मानदंड के आधार पर, अकांक्षी जिलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इन जिलों में कुपोषण, बैंकिंग सुविधाओं, बीमा, बिजली और अन्य सुविधाओं के लिए विभिन्न मानकों पर रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रही है। उन्होंने कहा कि इन 112 जिलों का बेहतर भविष्य देश के लिए बेहतर कल को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने जल जीवन मिशन के बारे में उल्लेख किया और कहा कि सरकार 15 करोड़ घरों को पाइप जलापूर्ति से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार एक सक्षम, मददगार और प्रोत्साहक के रूप में काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई आर्थिक सुधार जैसे ऐतिहासिक बैंक मर्जर, श्रम कानूनों की संहिता बनाना, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, कॉरपोरेट करों में कमी जैसे कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि इजी ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत की रैकिंग में 79 रैंकिंग का सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए 25 हजार करोड़ का फंड बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार 100 लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत कर रही है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि भारत का यात्रा एवं पर्यटन प्रतियोगितात्मकता सूचकांक में 34 वां स्थान है। उन्होंने बताया कि पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के अवसरों का सृजन होगा, खासकर गरीबों के लिए। उन्होंने मानव संसाधन को रूपांतरित करने के लिए की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार परिणाम आधारित, परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है और सेवाओं के समयबद्ध वितरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का रोडमैप "सही इरादा, सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी और 130 करोड़ भारतीयों के बेहतर भविष्य के लिए प्रभावी कार्यान्वयन" है।
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में सत्रहवीं हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में उद्घाटन भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज, किसी भी देश के विकास के लिए संवाद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संवाद बेहतर भविष्य की नींव रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार 'सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास' मंत्र के साथ वर्तमान चुनौतियों और समस्याओं पर काम कर रही है। सरकार द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों के बारे प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को निरस्त करने से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के लोगों को आशा की एक नई किरण मिली है। मुस्लिम महिलाएं अब तीन तलाक की परंपरा से मुक्त हैं, अवैध कॉलोनियों पर फैसले से चालीस लाख लोगों को लाभ मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बेहतर कल के लिए, एक नये भारत के लिए ऐसे कई निर्णय लिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अब उन जिलों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है जो स्वास्थ, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के कई संकेतकों में पीछे छूट गये थे। उन्होंने कहा कि एक सौ बारह जिलों को विकास और शासन के प्रत्येक मानदंड के आधार पर, अकांक्षी जिलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इन जिलों में कुपोषण, बैंकिंग सुविधाओं, बीमा, बिजली और अन्य सुविधाओं के लिए विभिन्न मानकों पर रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रही है। उन्होंने कहा कि इन एक सौ बारह जिलों का बेहतर भविष्य देश के लिए बेहतर कल को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने जल जीवन मिशन के बारे में उल्लेख किया और कहा कि सरकार पंद्रह करोड़ घरों को पाइप जलापूर्ति से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार एक सक्षम, मददगार और प्रोत्साहक के रूप में काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई आर्थिक सुधार जैसे ऐतिहासिक बैंक मर्जर, श्रम कानूनों की संहिता बनाना, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, कॉरपोरेट करों में कमी जैसे कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि इजी ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत की रैकिंग में उन्यासी रैंकिंग का सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए पच्चीस हजार करोड़ का फंड बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक सौ लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत कर रही है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि भारत का यात्रा एवं पर्यटन प्रतियोगितात्मकता सूचकांक में चौंतीस वां स्थान है। उन्होंने बताया कि पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के अवसरों का सृजन होगा, खासकर गरीबों के लिए। उन्होंने मानव संसाधन को रूपांतरित करने के लिए की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार परिणाम आधारित, परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है और सेवाओं के समयबद्ध वितरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का रोडमैप "सही इरादा, सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी और एक सौ तीस करोड़ भारतीयों के बेहतर भविष्य के लिए प्रभावी कार्यान्वयन" है।
नागालैंड के मुख्यमंत्री टी. आर. जेलियांग ने आज अपने मंत्रिमंडल में छः नये मंत्रियों को शामिल किया। कोहिमा स्थित राजभवन में राज्यपाल पी बी आचार्य ने सभी नये मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल में एस आई जमीर, पी लोंगोन, कुत्रुलुत्रो नीनू, सी एल जोन, पी पाइवांग कोंयक और वाई विखेहो स्वू शामिल किये गये हैं। शपथ समारोह के बाद श्री जेलियांग ने कहा कि आज या कल सभी नये मंत्रियों के विभाग निर्धारित कर दिये जाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंत्रियों के विभाग या संसदीय सचिवों को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 24X7 नई खबरों से अवगत रहने के लिए क्लिक करे।
नागालैंड के मुख्यमंत्री टी. आर. जेलियांग ने आज अपने मंत्रिमंडल में छः नये मंत्रियों को शामिल किया। कोहिमा स्थित राजभवन में राज्यपाल पी बी आचार्य ने सभी नये मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल में एस आई जमीर, पी लोंगोन, कुत्रुलुत्रो नीनू, सी एल जोन, पी पाइवांग कोंयक और वाई विखेहो स्वू शामिल किये गये हैं। शपथ समारोह के बाद श्री जेलियांग ने कहा कि आज या कल सभी नये मंत्रियों के विभाग निर्धारित कर दिये जाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंत्रियों के विभाग या संसदीय सचिवों को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। चौबीसXसात नई खबरों से अवगत रहने के लिए क्लिक करे।
खम्भ दो दो एक बृहत कमरे के चारों ओर अटारियाँ हैं । साथ जुड़े हुए हैं । इस स्थानमें सम्राट अशोकर्क रायकालका निर्मित एक ३५ फौट ऊँचा लाट है, जिस पर अशोकका अनुशासन खुदा हुआ है । सम्राट समुद्रगुप्त को विजयवार्ता भी आगे उसौ लाट पर खोदी गयौ । किलेक अन्दर अक्षय बट है, जिस पर हिन्दुओंका चित्त आर्कषित होता है । सन् ईसवीको सातवीं सदीमें' 'चीनदं शौ परिव्राजकने गङ्गा यमुना सङ्गम, प्रयाग । प्रयागमें अक्षय वट देखा था । परिव्राजक लेखसे विदित होता है कि नगर के मध्यस्थलमें हिन्दुओंका मन्दिर था और उसके सामने अक्षयवट था । वह नगर अब अकबर बादशाह के उक्त टुर्ग के नीचे दबा हुआ है। इसलिये दु के नौचे सौढ़ियों से उतर कर दौयेकौ रोशनौसे अन्यवट के दर्शन कराये जात है। जिस वृक्षके दर्शन कराये जाते हैं, वह अब जीवित नहीं है। किसी वृक्षकौ सूखी हुई मोटो पेड़ो ही अक्षयवट बतलायी जाती है। जहाँ इस "अक्षयवट" के दर्शन कराये जाते हैं, उस स्थान का नाम "पातालपुरी" बतलाया जाता है।
खम्भ दो दो एक बृहत कमरे के चारों ओर अटारियाँ हैं । साथ जुड़े हुए हैं । इस स्थानमें सम्राट अशोकर्क रायकालका निर्मित एक पैंतीस फौट ऊँचा लाट है, जिस पर अशोकका अनुशासन खुदा हुआ है । सम्राट समुद्रगुप्त को विजयवार्ता भी आगे उसौ लाट पर खोदी गयौ । किलेक अन्दर अक्षय बट है, जिस पर हिन्दुओंका चित्त आर्कषित होता है । सन् ईसवीको सातवीं सदीमें' 'चीनदं शौ परिव्राजकने गङ्गा यमुना सङ्गम, प्रयाग । प्रयागमें अक्षय वट देखा था । परिव्राजक लेखसे विदित होता है कि नगर के मध्यस्थलमें हिन्दुओंका मन्दिर था और उसके सामने अक्षयवट था । वह नगर अब अकबर बादशाह के उक्त टुर्ग के नीचे दबा हुआ है। इसलिये दु के नौचे सौढ़ियों से उतर कर दौयेकौ रोशनौसे अन्यवट के दर्शन कराये जात है। जिस वृक्षके दर्शन कराये जाते हैं, वह अब जीवित नहीं है। किसी वृक्षकौ सूखी हुई मोटो पेड़ो ही अक्षयवट बतलायी जाती है। जहाँ इस "अक्षयवट" के दर्शन कराये जाते हैं, उस स्थान का नाम "पातालपुरी" बतलाया जाता है।
जनवरी 28 पर, सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर जार्ज पॉल्तावेंको ने निकिता अलेक्जेंड्रोव को पदक प्रदान किया। 2013 में, अलेक्जेंड्रोव ने सेंट पीटर्सबर्ग की युवा नीति पर समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, लेकिन सहमति के कारण इस्तीफा दे दिया। अधिकारी के अनुसार, चिकित्सा परीक्षा के दौरान वह फिट पाया गया, हालांकि पहले स्वास्थ्य कारणों के कारण उसे देरी हुई थी। पश्चिमी मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट नोटों की प्रेस सेवा, "पश्चिमी गणराज्य के 2013 संघ राज्यों और रूसी संघ के सामरिक कमांड-एंड-स्टाफ अभ्यास में भागीदारी के दौरान दिखाई गई एक उचित पहल, सतर्कता और व्यक्तिगत साहस के लिए निजी अलेक्जेंड्रोव को सम्मानित किया गया। " "मुझे लगता है कि यह क्या हुआ का एक जटिल हैः सेवा के लिए जाने का निर्णय, सेना में सेवा करने से इनकार करने के लिए तर्कों की तलाश नहीं करने का निर्णय, या" रसीद ", जैसा कि आम लोग कहते हैं। मुझे लगता है कि यह भी एक भूमिका निभाई, "अलेक्जेंड्रोव उद्धरण। "Voennoe. rf".
जनवरी अट्ठाईस पर, सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर जार्ज पॉल्तावेंको ने निकिता अलेक्जेंड्रोव को पदक प्रदान किया। दो हज़ार तेरह में, अलेक्जेंड्रोव ने सेंट पीटर्सबर्ग की युवा नीति पर समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, लेकिन सहमति के कारण इस्तीफा दे दिया। अधिकारी के अनुसार, चिकित्सा परीक्षा के दौरान वह फिट पाया गया, हालांकि पहले स्वास्थ्य कारणों के कारण उसे देरी हुई थी। पश्चिमी मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट नोटों की प्रेस सेवा, "पश्चिमी गणराज्य के दो हज़ार तेरह संघ राज्यों और रूसी संघ के सामरिक कमांड-एंड-स्टाफ अभ्यास में भागीदारी के दौरान दिखाई गई एक उचित पहल, सतर्कता और व्यक्तिगत साहस के लिए निजी अलेक्जेंड्रोव को सम्मानित किया गया। " "मुझे लगता है कि यह क्या हुआ का एक जटिल हैः सेवा के लिए जाने का निर्णय, सेना में सेवा करने से इनकार करने के लिए तर्कों की तलाश नहीं करने का निर्णय, या" रसीद ", जैसा कि आम लोग कहते हैं। मुझे लगता है कि यह भी एक भूमिका निभाई, "अलेक्जेंड्रोव उद्धरण। "Voennoe. rf".
गुवाहाटी, विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले इस गायक-अभिनेता-निर्माता ने एक प्रतिबंधित संगठन को लिखा पत्र, और शांति का आह्वान किया है। असमिया गायक ज़ुबिन गर्ग ने प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने शांति का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या से कुछ भी हासिल नहीं होगा। विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले इस गायक-अभिनेता-निर्माता ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि भय पैदा करने से राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता है, बल्कि मेहनत और कड़ा परिश्रम करने से ही यह साकार हो सकता है। ज़ुबिन ने इस पोस्ट में कहा, "उल्फा से कहना चाहता हूं, मुझे एक क्रांति की आवश्यकता है। मुझे बदलाव की क्रांति की आवश्यकता है। निर्दोष लोगों को मारने से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भय किसी राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता। श्रम कर सकता है। कठिन परिश्रम कर सकता है। " इस पोस्ट को 2,200 बार शेयर किया गया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद उन अधिकारों को कोई मायने नहीं दे सकता, जिसके लिए परेश बरुआ के नेतृत्व वाला संगठन लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह काम "शिक्षा कर सकती है। विकास कर सकता है। प्रगति कर सकती है। "बालीवुड में कई सुपरहिट गाने देने वाले इस गायक ने कहा, "हमारे बच्चों को सिखाएं कि कैसे खेती करें। उन्हें अभाव में भी बीज उगाना सिखाएं। उन्हें अपने सपनों को आकार देना सिखाएं। " ज़ुबिन ने कहा कि अगर वे कुछ बनाना चाहते हैं, तो वे माजुली का निर्माण कर सकते हैं और अगर वे कुछ खत्म करना चाहते हैं, तो वे काजीरंगा पर मंडराने वाले खतरों को खत्म कर सकते हैं। माजुली जिले पर भू-कटान से प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनकी यह पोस्ट ऐसे समय में आयी है जब इससे पहले 15 मई को गुवाहाटी में जू रोड पर हुये ग्रेनेड विस्फोट में 12 लोग घायल हो गये थे। परेश बरुआ ने तब स्थानीय टेलीविजन चैनलों से कहा था कि यह क्षेत्र में गश्ती कर रहे सुरक्षा कर्मियों को निशाना बना कर किया गया था। इससे पहले गर्ग ने इसी प्रकार का पत्र विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी लिखा था।
गुवाहाटी, विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले इस गायक-अभिनेता-निर्माता ने एक प्रतिबंधित संगठन को लिखा पत्र, और शांति का आह्वान किया है। असमिया गायक ज़ुबिन गर्ग ने प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने शांति का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या से कुछ भी हासिल नहीं होगा। विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले इस गायक-अभिनेता-निर्माता ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि भय पैदा करने से राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता है, बल्कि मेहनत और कड़ा परिश्रम करने से ही यह साकार हो सकता है। ज़ुबिन ने इस पोस्ट में कहा, "उल्फा से कहना चाहता हूं, मुझे एक क्रांति की आवश्यकता है। मुझे बदलाव की क्रांति की आवश्यकता है। निर्दोष लोगों को मारने से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भय किसी राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता। श्रम कर सकता है। कठिन परिश्रम कर सकता है। " इस पोस्ट को दो,दो सौ बार शेयर किया गया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद उन अधिकारों को कोई मायने नहीं दे सकता, जिसके लिए परेश बरुआ के नेतृत्व वाला संगठन लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह काम "शिक्षा कर सकती है। विकास कर सकता है। प्रगति कर सकती है। "बालीवुड में कई सुपरहिट गाने देने वाले इस गायक ने कहा, "हमारे बच्चों को सिखाएं कि कैसे खेती करें। उन्हें अभाव में भी बीज उगाना सिखाएं। उन्हें अपने सपनों को आकार देना सिखाएं। " ज़ुबिन ने कहा कि अगर वे कुछ बनाना चाहते हैं, तो वे माजुली का निर्माण कर सकते हैं और अगर वे कुछ खत्म करना चाहते हैं, तो वे काजीरंगा पर मंडराने वाले खतरों को खत्म कर सकते हैं। माजुली जिले पर भू-कटान से प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनकी यह पोस्ट ऐसे समय में आयी है जब इससे पहले पंद्रह मई को गुवाहाटी में जू रोड पर हुये ग्रेनेड विस्फोट में बारह लोग घायल हो गये थे। परेश बरुआ ने तब स्थानीय टेलीविजन चैनलों से कहा था कि यह क्षेत्र में गश्ती कर रहे सुरक्षा कर्मियों को निशाना बना कर किया गया था। इससे पहले गर्ग ने इसी प्रकार का पत्र विवादित नागरिकता विधेयक के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी लिखा था।
मां बनना किसी भी स्त्री के लिए सबसे सुखद अहसास माना जाता है। कई अभिनेत्रियों ने अपने मां बनने के इस कमाल के अहसास ोक फैंस के साथ शेयर भी किया। कुछ एक्ट्रेसेज ऐसी रहीं जिन्होंने काफी देर से मां बनने का फैसला किया तो वहीं कुछ अभिनेत्रियां बालिग होने से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं। आइए डालें ऐसी ही कुछ एक्ट्रेसेज पर एक नजरः मां बनना किसी भी स्त्री के लिए सबसे सुखद अहसास माना जाता है। कई अभिनेत्रियों ने अपने मां बनने के इस कमाल के अहसास ोक फैंस के साथ शेयर भी किया। कुछ एक्ट्रेसेज ऐसी रहीं जिन्होंने काफी देर से मां बनने का फैसला किया तो वहीं कुछ अभिनेत्रियां बालिग होने से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं। आइए डालें ऐसी ही कुछ एक्ट्रेसेज पर एक नजरः फिल्म मैंने प्यार किया से बॉलीवुड डेब्यू करने वालीं अभिनेत्री भाग्यश्री 90 दशक की बॉलीवुड की बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक थीं। भाग्यश्री 17 साल की उम्र में ही मां बन गई थीं। भाग्यश्री ने साल 1990 में हिमालय दासानी से शादी की थी। 17 साल की उम्र में भाग्यश्री ने पहले बच्चे को जन्म दिया। आज भाग्यश्री 2 बच्चों की मां हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हिमालय दासानी से शादी से पहले ही भाग्यश्री गर्भवती थीं। एकता कपूर के शो कसौटी जिंदगी की में कोमलिका का किरदार निभा घर-घर में लोकप्रिय होने वाली उर्वशी ढोलकिया भी बहुत कम उम्र में मां बन गई थीं। मात्र 15 साल की उम्र में उर्वशी ढोलकिया की शादी हो गयी थी और 16 साल की उम्र में वो जुड़वां बच्चों सागर व क्षितिज की मां बन गई थीं। बताया जाता है, कि शादी के डेढ़ वर्ष बाद ही वे पति से अलग हो गई थीं। जिसके बाद उन्होंने सिंगल माँ बनकर दोनों बच्चों की परवरिश की है। राजेश खन्ना ने साल 1972 में खुद से करीब 14 साल छोटी डिंपल कपाड़िया से शादी रचाई थी। तब डिंपल की उम्र महज 15 साल थी। 16 साल की उम्र में डिंपल कपाड़िया प्रेग्नेंट हो गई थीं और अपनी पहली फिल्म बॉबी के रिलीज के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने ट्विंकल खन्ना को जन्म दिया था।
मां बनना किसी भी स्त्री के लिए सबसे सुखद अहसास माना जाता है। कई अभिनेत्रियों ने अपने मां बनने के इस कमाल के अहसास ोक फैंस के साथ शेयर भी किया। कुछ एक्ट्रेसेज ऐसी रहीं जिन्होंने काफी देर से मां बनने का फैसला किया तो वहीं कुछ अभिनेत्रियां बालिग होने से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं। आइए डालें ऐसी ही कुछ एक्ट्रेसेज पर एक नजरः मां बनना किसी भी स्त्री के लिए सबसे सुखद अहसास माना जाता है। कई अभिनेत्रियों ने अपने मां बनने के इस कमाल के अहसास ोक फैंस के साथ शेयर भी किया। कुछ एक्ट्रेसेज ऐसी रहीं जिन्होंने काफी देर से मां बनने का फैसला किया तो वहीं कुछ अभिनेत्रियां बालिग होने से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं। आइए डालें ऐसी ही कुछ एक्ट्रेसेज पर एक नजरः फिल्म मैंने प्यार किया से बॉलीवुड डेब्यू करने वालीं अभिनेत्री भाग्यश्री नब्बे दशक की बॉलीवुड की बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक थीं। भाग्यश्री सत्रह साल की उम्र में ही मां बन गई थीं। भाग्यश्री ने साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में हिमालय दासानी से शादी की थी। सत्रह साल की उम्र में भाग्यश्री ने पहले बच्चे को जन्म दिया। आज भाग्यश्री दो बच्चों की मां हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हिमालय दासानी से शादी से पहले ही भाग्यश्री गर्भवती थीं। एकता कपूर के शो कसौटी जिंदगी की में कोमलिका का किरदार निभा घर-घर में लोकप्रिय होने वाली उर्वशी ढोलकिया भी बहुत कम उम्र में मां बन गई थीं। मात्र पंद्रह साल की उम्र में उर्वशी ढोलकिया की शादी हो गयी थी और सोलह साल की उम्र में वो जुड़वां बच्चों सागर व क्षितिज की मां बन गई थीं। बताया जाता है, कि शादी के डेढ़ वर्ष बाद ही वे पति से अलग हो गई थीं। जिसके बाद उन्होंने सिंगल माँ बनकर दोनों बच्चों की परवरिश की है। राजेश खन्ना ने साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में खुद से करीब चौदह साल छोटी डिंपल कपाड़िया से शादी रचाई थी। तब डिंपल की उम्र महज पंद्रह साल थी। सोलह साल की उम्र में डिंपल कपाड़िया प्रेग्नेंट हो गई थीं और अपनी पहली फिल्म बॉबी के रिलीज के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने ट्विंकल खन्ना को जन्म दिया था।
आखिरकर लोकपाल बिल पर राहुल गांधी की चुप्पी संसद में जाकर टूटी। राहुल के भाषण पर कांग्रेसी नेताओं और मंत्रियों की प्रतिक्रियाएं ये संकेत दे रही हैं कि कांग्रेस युवराज को प्रधानमंत्री पद पर सुषोभित करने की तैयारियों को 'फाइनल टच' दे रही है। जिस जोरदार तरीके से राहुल ने संसद में लोकपाल कानून पर सरकार और पार्टी का पक्ष रखा, वो युवराज को पीएम बनाने की योजना के तहत एक ओर कदम ही था। कांग्रेस की खास रणनीतिकारों और सोनिया-राहुल के मुंहलगे नेताओं और मंत्रियों ने साजिशन एक सप्ताह तक टीम अन्ना से बातचीत नहीं की। जब राहुल की भूमिका निर्धारित हो गयी तो सरकार ने मीटिंग और वार्ता का दरवाजा खोल दिया। रणनीति के तहत ही युवराज ने संसद में बड़े ही असरकारी तरीके से लोकपाल बिल पर अपने विचार रखे। और कहीं न कहीं सरकार और कांग्रेस पार्टी राहुल के एकदम पीछे खड़े दिखाई दिये। जब देश की जनता गर्म पानी पी-पीकर सरकार को कोस रही थी, ऐसे विरोधी माहौल में पीएम और दिग्गज कांग्रेसी नेताओं और मंत्रियों के स्थान पर युवा राहुल का आगे बढ़कर सरकार का पक्ष रखना ये संकेत देता है कि युवराज पीएम की कुर्सी की ओर तेज कदमों से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब देश की जनता सड़कों पर उतरकर जन लोकपाल बिल की मांग कर रही थी, उस समय एक भी जिम्मेदार नेता, मंत्री या अधिकारी सामने नहीं आया। संप्रग सरकार की मुखिया सोनिया ईलाज के लिये विदेश में हैं और उनके रिमोट से चलने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी अपने चिर परिचत 'साइलेंस मोड' में दिखे। यह सच्चाई है कि सोनिया की गैर मौजूदगी में राहुल सरकार में सबसे पावरफुल पोजीशन में हैं। कांग्रेसियों ने सरकार विरोधी माहौल को भी अपने पक्ष में करने के लिए राहुल की ताजपोशी की तैयारी का खाका खींच डाला। राहुल का संसद में लोकपाल बिल पर सरकार और पार्टी का स्टैण्ड रखना ये दर्षाता है कि राहुल पार्टी के सभी धड़ों द्वारा स्वीकार्य हो चुके हैं और अब वो दिन दूर नहीं जब कांग्रेस देश और जनहित का हवाला देते हुए मनमोहन की बलि देगी और राहुल को पीएम बनाकर देश की जनता को यह मैसेज देगी कि कांग्रेस के लिए देश और जनता सर्वोपरि है। जन लोकपाल बिल पर सरकार की चुप्पी और अड़ियल रवैये ने अन्ना के समर्थन में भारी भीड़ जुटाई इस सच्चाई से इंकार नहीं किया सकता है। अन्ना का अनशन अपने उफान पर था लेकिन दूर-दूर तक आषा की कोई मद्वम सी किरण भी दिखाई नहीं दे रही थी। असमंजस और निराषा के वातावरण में एकाएक कांग्रेस के युवा सांसद राहुल गांधी संसद में रटा-रटाया भाषण देकर ये जताने की कोशिश करते हैं कि भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए उनकी पार्टी और सरकार कितनी सीरियस है। अपने भाषण के दौरान कांग्रेसी युवराज कई आधारहीन और बेतुके सवाल देश की जनता की ओर उछाल कर झूठी वाहवाही बटोरने की नाकाम कोशिश करते दिखे। युवराज को ऐसा लगता है कि जैसे देश की जनता बेवकूफ है और उनका भाषण और सुझाव पर अमल करते ही देश में राम राज्य की स्थापना हो जाएगी। असल में कांग्रेस यह स्थापित करना चाहती है कि देश की जटिल समस्याओं का हल केवल कांग्रेस के पास है और राहुल गांधी वो नेता है जो जनता के दुख-दर्दे और आवाज को सुनता है। अगर देखा जाए तो राहुल को गद्दी पर बिठाने का इससे बढ़िया अवसर कांग्रेस को शायद आने वाले दिनों में दुबारा इतने आसानी से नहीं मिल पाएगा। जनता के मन में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ गुस्सा गले तक भरा है। देश में एन्टी कांग्रेस और सरकार का माहौल है। कांग्रेस जनता के गुस्से को शांत करने के लिए मनमोहन की विदाई कर राहुल को पीएम की कुर्सी पर बिठाएगी। राहुल के पीएम बनने की खुशी में सरकार लोकपाल और नया भूमि अधिग्रहण कानून का तोहफा देश की जनता को दे सकती है। असल में पिछले कई सालों से राहुल देशभर में घूम-घूमकर पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि राहुल को फैमिली बैकग्राउंड की वजह से ही हर जगह तवज्जो मिलती है। राहुल के देशभ्रमण से युवाओं का कांग्रेस की ओर जुड़ाव तो हुआ है लेकिन राहुल को जिस तरह से पूरी कांग्रेस प्रोजेक्ट करती थी राहुल वैसा कोई चमत्कार पार्टी के लिये नहीं कर पाये। पिछले साल कई राज्यों में हुये विधानसभा चुनावों और 2009 के आम चुनावों में राहुल फैक्टर कोई खास असर नहीं दिखा पाया। राहुल की किसानों, दलितों और अल्पसंख्यकों को लिए जताई जा रही हमदर्दी के पीछे छिपी राजनीति भी देश के सामने एक्सपोज हो चुकी है। उम्र के हिसाब से राहुल युवा जरूर है लेकिन उनकी राजनीतिक कार्यषैली और व्यवहार पुराने घिसे-पिटे और स्वार्थी नेताओं जैसा ही है। गांधी खानदान का लेबल लगाकर राहुल देशभर में घूम तो सकते है लेकिन उनको देखने के लिए उमड़ने वाली भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो पाती हैं। कांग्रेस पिछले कई सालों से किसी न किसी मंच से अनेक तरीकों से राहुल को प्रधानमंत्री बनाने की बात कर चुकी है। राहुल को पीएम की पोस्ट दिलाने के लिए कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा पिछले कई सालों से सक्रिय है। सोनिया का खुद प्रधानमंत्री बनने की बजाय डमी उम्मीदवार मनमोहन को पीएम की कुर्सी सौंपना ये साबित करता है कि खुद सोनिया भी राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है, इंतजार है तो केवल सही वक्त का। और अन्ना के आंदोलन ने देश में ऐसे हालात बना दिये हैं कि सप्रंग सरकार कोई बड़ा फेरबदल देश की जनता को दिखाने के लिये करे और इसके राहुल को पीएम बनाने से बेहतर और बढ़िया विकल्प कांग्रेस के पास कोई दूसरा नहीं है। कांड़ों, घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मनमोहन सरकार को बदलकर सरकार देश के सामने ईमानदारी, वफादारी और सच्चाई का वो नमूना पेश करेगी कि जनता को ऐसा आभास होगा कि कांग्रेस पार्टी और संप्रग सरकार ऊपर से नीचे तक दूध की धुली और बेदाग है। कांग्रेस ने इस देश पर पांच दशकों से अधिक समय तक राज किया है। कांग्रेस में कूटनीतिकों ओर जड़ीले नेताओं की भरमार है। कांग्रेस अपनी कमियों को छुपाने और छीछालेदार को भी एक नये मौके और अवसर की भांति उपयोग करने में महारत रखती है। आज जब देश में कांग्रेस और संप्रग सरकार की थू-थू हो रही है, ऐसे विरोधी वातावरण में भी कांग्रेसियों का एक बड़ा धड़ा अन्ना के अनशन से बैकफुट पर आयी संप्रग सरकार को फ्रंटफुट पर लाने का सबसे असरदार और मजबूत तरीका राहुल को पीएम की गद्दी पर बैठाने का सुझा रहे हैं। जानकार तो यहां तक मानते हैं कि सरकार और सिविल सोसायटी के बीच पिछले कई दिनों से बनी ऊहापोह की स्थिति से निबटने की बजाय सरकार के आला मंत्री इस बात के लिए अधिक चिंतित थे कि इस नाकामी को कामयाबी में कैसे बदला जाए और राहुल के लिए गद्दी का रास्ता कैसे साफ किया जाए। किसी खास रणनीति के तहत ही राहुल ने संसद में पूरी लय और जोश के साथ लोकपाल बिल पर अपनी पार्टी के विचार रखे। राहुल के भाषण के पीछे पूरी कांग्रेस पार्टी खड़ी दिखाई दी। एक से एक महारथी और सीनियर नेताओं की मौजूदगी में राजनीतिक के ट्रेनी राहुल का लोकपाल जैसे गंभीर मुद्दे पर दमदार तरीके से मैदान में दम ठोंकना ये साबित करता है कि कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने राहुल के नेतृत्व में काम करने का मन बना लिया है।
आखिरकर लोकपाल बिल पर राहुल गांधी की चुप्पी संसद में जाकर टूटी। राहुल के भाषण पर कांग्रेसी नेताओं और मंत्रियों की प्रतिक्रियाएं ये संकेत दे रही हैं कि कांग्रेस युवराज को प्रधानमंत्री पद पर सुषोभित करने की तैयारियों को 'फाइनल टच' दे रही है। जिस जोरदार तरीके से राहुल ने संसद में लोकपाल कानून पर सरकार और पार्टी का पक्ष रखा, वो युवराज को पीएम बनाने की योजना के तहत एक ओर कदम ही था। कांग्रेस की खास रणनीतिकारों और सोनिया-राहुल के मुंहलगे नेताओं और मंत्रियों ने साजिशन एक सप्ताह तक टीम अन्ना से बातचीत नहीं की। जब राहुल की भूमिका निर्धारित हो गयी तो सरकार ने मीटिंग और वार्ता का दरवाजा खोल दिया। रणनीति के तहत ही युवराज ने संसद में बड़े ही असरकारी तरीके से लोकपाल बिल पर अपने विचार रखे। और कहीं न कहीं सरकार और कांग्रेस पार्टी राहुल के एकदम पीछे खड़े दिखाई दिये। जब देश की जनता गर्म पानी पी-पीकर सरकार को कोस रही थी, ऐसे विरोधी माहौल में पीएम और दिग्गज कांग्रेसी नेताओं और मंत्रियों के स्थान पर युवा राहुल का आगे बढ़कर सरकार का पक्ष रखना ये संकेत देता है कि युवराज पीएम की कुर्सी की ओर तेज कदमों से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब देश की जनता सड़कों पर उतरकर जन लोकपाल बिल की मांग कर रही थी, उस समय एक भी जिम्मेदार नेता, मंत्री या अधिकारी सामने नहीं आया। संप्रग सरकार की मुखिया सोनिया ईलाज के लिये विदेश में हैं और उनके रिमोट से चलने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी अपने चिर परिचत 'साइलेंस मोड' में दिखे। यह सच्चाई है कि सोनिया की गैर मौजूदगी में राहुल सरकार में सबसे पावरफुल पोजीशन में हैं। कांग्रेसियों ने सरकार विरोधी माहौल को भी अपने पक्ष में करने के लिए राहुल की ताजपोशी की तैयारी का खाका खींच डाला। राहुल का संसद में लोकपाल बिल पर सरकार और पार्टी का स्टैण्ड रखना ये दर्षाता है कि राहुल पार्टी के सभी धड़ों द्वारा स्वीकार्य हो चुके हैं और अब वो दिन दूर नहीं जब कांग्रेस देश और जनहित का हवाला देते हुए मनमोहन की बलि देगी और राहुल को पीएम बनाकर देश की जनता को यह मैसेज देगी कि कांग्रेस के लिए देश और जनता सर्वोपरि है। जन लोकपाल बिल पर सरकार की चुप्पी और अड़ियल रवैये ने अन्ना के समर्थन में भारी भीड़ जुटाई इस सच्चाई से इंकार नहीं किया सकता है। अन्ना का अनशन अपने उफान पर था लेकिन दूर-दूर तक आषा की कोई मद्वम सी किरण भी दिखाई नहीं दे रही थी। असमंजस और निराषा के वातावरण में एकाएक कांग्रेस के युवा सांसद राहुल गांधी संसद में रटा-रटाया भाषण देकर ये जताने की कोशिश करते हैं कि भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए उनकी पार्टी और सरकार कितनी सीरियस है। अपने भाषण के दौरान कांग्रेसी युवराज कई आधारहीन और बेतुके सवाल देश की जनता की ओर उछाल कर झूठी वाहवाही बटोरने की नाकाम कोशिश करते दिखे। युवराज को ऐसा लगता है कि जैसे देश की जनता बेवकूफ है और उनका भाषण और सुझाव पर अमल करते ही देश में राम राज्य की स्थापना हो जाएगी। असल में कांग्रेस यह स्थापित करना चाहती है कि देश की जटिल समस्याओं का हल केवल कांग्रेस के पास है और राहुल गांधी वो नेता है जो जनता के दुख-दर्दे और आवाज को सुनता है। अगर देखा जाए तो राहुल को गद्दी पर बिठाने का इससे बढ़िया अवसर कांग्रेस को शायद आने वाले दिनों में दुबारा इतने आसानी से नहीं मिल पाएगा। जनता के मन में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ गुस्सा गले तक भरा है। देश में एन्टी कांग्रेस और सरकार का माहौल है। कांग्रेस जनता के गुस्से को शांत करने के लिए मनमोहन की विदाई कर राहुल को पीएम की कुर्सी पर बिठाएगी। राहुल के पीएम बनने की खुशी में सरकार लोकपाल और नया भूमि अधिग्रहण कानून का तोहफा देश की जनता को दे सकती है। असल में पिछले कई सालों से राहुल देशभर में घूम-घूमकर पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि राहुल को फैमिली बैकग्राउंड की वजह से ही हर जगह तवज्जो मिलती है। राहुल के देशभ्रमण से युवाओं का कांग्रेस की ओर जुड़ाव तो हुआ है लेकिन राहुल को जिस तरह से पूरी कांग्रेस प्रोजेक्ट करती थी राहुल वैसा कोई चमत्कार पार्टी के लिये नहीं कर पाये। पिछले साल कई राज्यों में हुये विधानसभा चुनावों और दो हज़ार नौ के आम चुनावों में राहुल फैक्टर कोई खास असर नहीं दिखा पाया। राहुल की किसानों, दलितों और अल्पसंख्यकों को लिए जताई जा रही हमदर्दी के पीछे छिपी राजनीति भी देश के सामने एक्सपोज हो चुकी है। उम्र के हिसाब से राहुल युवा जरूर है लेकिन उनकी राजनीतिक कार्यषैली और व्यवहार पुराने घिसे-पिटे और स्वार्थी नेताओं जैसा ही है। गांधी खानदान का लेबल लगाकर राहुल देशभर में घूम तो सकते है लेकिन उनको देखने के लिए उमड़ने वाली भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो पाती हैं। कांग्रेस पिछले कई सालों से किसी न किसी मंच से अनेक तरीकों से राहुल को प्रधानमंत्री बनाने की बात कर चुकी है। राहुल को पीएम की पोस्ट दिलाने के लिए कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा पिछले कई सालों से सक्रिय है। सोनिया का खुद प्रधानमंत्री बनने की बजाय डमी उम्मीदवार मनमोहन को पीएम की कुर्सी सौंपना ये साबित करता है कि खुद सोनिया भी राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है, इंतजार है तो केवल सही वक्त का। और अन्ना के आंदोलन ने देश में ऐसे हालात बना दिये हैं कि सप्रंग सरकार कोई बड़ा फेरबदल देश की जनता को दिखाने के लिये करे और इसके राहुल को पीएम बनाने से बेहतर और बढ़िया विकल्प कांग्रेस के पास कोई दूसरा नहीं है। कांड़ों, घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मनमोहन सरकार को बदलकर सरकार देश के सामने ईमानदारी, वफादारी और सच्चाई का वो नमूना पेश करेगी कि जनता को ऐसा आभास होगा कि कांग्रेस पार्टी और संप्रग सरकार ऊपर से नीचे तक दूध की धुली और बेदाग है। कांग्रेस ने इस देश पर पांच दशकों से अधिक समय तक राज किया है। कांग्रेस में कूटनीतिकों ओर जड़ीले नेताओं की भरमार है। कांग्रेस अपनी कमियों को छुपाने और छीछालेदार को भी एक नये मौके और अवसर की भांति उपयोग करने में महारत रखती है। आज जब देश में कांग्रेस और संप्रग सरकार की थू-थू हो रही है, ऐसे विरोधी वातावरण में भी कांग्रेसियों का एक बड़ा धड़ा अन्ना के अनशन से बैकफुट पर आयी संप्रग सरकार को फ्रंटफुट पर लाने का सबसे असरदार और मजबूत तरीका राहुल को पीएम की गद्दी पर बैठाने का सुझा रहे हैं। जानकार तो यहां तक मानते हैं कि सरकार और सिविल सोसायटी के बीच पिछले कई दिनों से बनी ऊहापोह की स्थिति से निबटने की बजाय सरकार के आला मंत्री इस बात के लिए अधिक चिंतित थे कि इस नाकामी को कामयाबी में कैसे बदला जाए और राहुल के लिए गद्दी का रास्ता कैसे साफ किया जाए। किसी खास रणनीति के तहत ही राहुल ने संसद में पूरी लय और जोश के साथ लोकपाल बिल पर अपनी पार्टी के विचार रखे। राहुल के भाषण के पीछे पूरी कांग्रेस पार्टी खड़ी दिखाई दी। एक से एक महारथी और सीनियर नेताओं की मौजूदगी में राजनीतिक के ट्रेनी राहुल का लोकपाल जैसे गंभीर मुद्दे पर दमदार तरीके से मैदान में दम ठोंकना ये साबित करता है कि कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने राहुल के नेतृत्व में काम करने का मन बना लिया है।
भगवान का सर्वश्रेष्ठ नाम कौन-सा है ? भगवान भक्त का 'प्रेम' ही चाहते हैं, बस प्रेम से उन्हें पुकारने, उनका नित्य स्मरण करने और उनके वियोग में विकल रहने की आवश्यकता है, उन्हें रीझते देर नहीं लगती, कोई पुकार करके तो देखे । यदि मनुष्य उनसे सच्चा प्रेम करें, तो वे अवश्य उसके हो जायेंगे फिर उसका जीवन ही धन्य हो जायेगा । एक प्रसिद्ध कहावत है कि 'स्त्रियों के पेट में कोई बात नहीं पचती है । ' यह केवल कहावत नहीं है वरन् सच्चाई है जिसका वर्णन महाभारत के शान्तिपर्व में है । भगवान जगन्नाथजी का रथयात्रा उत्सव क्यों मनाया जाता है ? भगवान जगन्नाथजी मानव-धर्म, मानव-संस्कृति और विराट विश्व-चेतना के साक्षात् मूर्तिमान रूप हैं । समस्त मानव जाति को दर्शन देने, दुःखी मनुष्यों का कल्याण करने व अज्ञानी और अविश्वासी लोगों का भगवान पर विश्वास बनाये रखने के लिए भगवान वर्ष में एक बार अपने साथ बड़े भाई और बहिन सुभद्रा को लेकर रथयात्रा करते हैं । एक बार महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्यजी पुरी आये तो प्रसाद में उनकी निष्ठा की परीक्षा करने के लिए किसी ने एकादशी के दिन मन्दिर में ही महाप्रसाद दे दिया । श्रीवल्लभाचार्यजी ने महाप्रसाद हाथ में लेकर उसका स्तवन करना शुरु कर दिया और एकादशी के पूरे दिन तथा रात्रि में महाप्रसाद का स्तवन करते रहे । दूसरे दिन द्वादशी में स्तवन समाप्त करके उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया । कब है गीता का अध्ययन सार्थक ? गीता भगवान श्रीकृष्ण का संसार को दिया गया प्रसाद है । गीता को समझने के लिए सिर्फ और सिर्फ आवश्यक है श्रीकृष्ण की शरणागति । इसीलिए गीता में शरणागति की बात मुख्य रूप से आई है । गीता शरणागति से ही शुरु होती है और शरणागति में ही समाप्त हो जाती है । एक बार राजा पृथु ने यज्ञ का आयोजन किया । यज्ञ में देवराज इन्द्र को हवि का भाग देने के लिए सोम-रस निचोड़ा जा रहा था कि यज्ञ कराने वाले ऋषियों की गलती से इन्द्र के हवि में बृहस्पति का हवि (आहुति) मिल गया और उसे ही इन्द्र को अर्पण कर दिया गया । इसी हवि से अत्यन्त तेजस्वी सूतजी की उत्पत्ति हुई । गाय के साथ भूलकर भी न करें ये गलतियां - गाय साक्षात् जगदम्बा है अतः कभी भूल कर भी गाय को जूठी वस्तु न खिलाएं । गाय को कभी लांघना नहीं चाहिए । गाय यदि घर पर रखी है तो कभी भी उसे भूखा प्यासा न रखें, न ही उसे धूप में बांधे । गाय के लिए पर्याप्त चारे, पानी व सर्दी-गर्मी से बचाव का ध्यान रखना चाहिए । गौओं को लात व लाठी से न मारें । गौओं को जो लाठी से पीटते हैं उन्हें बिना हाथ का होकर यमलोक जाना पड़ता है ।
भगवान का सर्वश्रेष्ठ नाम कौन-सा है ? भगवान भक्त का 'प्रेम' ही चाहते हैं, बस प्रेम से उन्हें पुकारने, उनका नित्य स्मरण करने और उनके वियोग में विकल रहने की आवश्यकता है, उन्हें रीझते देर नहीं लगती, कोई पुकार करके तो देखे । यदि मनुष्य उनसे सच्चा प्रेम करें, तो वे अवश्य उसके हो जायेंगे फिर उसका जीवन ही धन्य हो जायेगा । एक प्रसिद्ध कहावत है कि 'स्त्रियों के पेट में कोई बात नहीं पचती है । ' यह केवल कहावत नहीं है वरन् सच्चाई है जिसका वर्णन महाभारत के शान्तिपर्व में है । भगवान जगन्नाथजी का रथयात्रा उत्सव क्यों मनाया जाता है ? भगवान जगन्नाथजी मानव-धर्म, मानव-संस्कृति और विराट विश्व-चेतना के साक्षात् मूर्तिमान रूप हैं । समस्त मानव जाति को दर्शन देने, दुःखी मनुष्यों का कल्याण करने व अज्ञानी और अविश्वासी लोगों का भगवान पर विश्वास बनाये रखने के लिए भगवान वर्ष में एक बार अपने साथ बड़े भाई और बहिन सुभद्रा को लेकर रथयात्रा करते हैं । एक बार महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्यजी पुरी आये तो प्रसाद में उनकी निष्ठा की परीक्षा करने के लिए किसी ने एकादशी के दिन मन्दिर में ही महाप्रसाद दे दिया । श्रीवल्लभाचार्यजी ने महाप्रसाद हाथ में लेकर उसका स्तवन करना शुरु कर दिया और एकादशी के पूरे दिन तथा रात्रि में महाप्रसाद का स्तवन करते रहे । दूसरे दिन द्वादशी में स्तवन समाप्त करके उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया । कब है गीता का अध्ययन सार्थक ? गीता भगवान श्रीकृष्ण का संसार को दिया गया प्रसाद है । गीता को समझने के लिए सिर्फ और सिर्फ आवश्यक है श्रीकृष्ण की शरणागति । इसीलिए गीता में शरणागति की बात मुख्य रूप से आई है । गीता शरणागति से ही शुरु होती है और शरणागति में ही समाप्त हो जाती है । एक बार राजा पृथु ने यज्ञ का आयोजन किया । यज्ञ में देवराज इन्द्र को हवि का भाग देने के लिए सोम-रस निचोड़ा जा रहा था कि यज्ञ कराने वाले ऋषियों की गलती से इन्द्र के हवि में बृहस्पति का हवि मिल गया और उसे ही इन्द्र को अर्पण कर दिया गया । इसी हवि से अत्यन्त तेजस्वी सूतजी की उत्पत्ति हुई । गाय के साथ भूलकर भी न करें ये गलतियां - गाय साक्षात् जगदम्बा है अतः कभी भूल कर भी गाय को जूठी वस्तु न खिलाएं । गाय को कभी लांघना नहीं चाहिए । गाय यदि घर पर रखी है तो कभी भी उसे भूखा प्यासा न रखें, न ही उसे धूप में बांधे । गाय के लिए पर्याप्त चारे, पानी व सर्दी-गर्मी से बचाव का ध्यान रखना चाहिए । गौओं को लात व लाठी से न मारें । गौओं को जो लाठी से पीटते हैं उन्हें बिना हाथ का होकर यमलोक जाना पड़ता है ।
शरीर का सांस लेना, भोजन को पचाना, ब्लड सर्कुलेशन, बॉडी को मूव करने के लिए ऊर्जा देना मेटाबॉलिज्म का काम है. आइए जानते हैं कि नेचुरल तरीके से मेटाबॉलिज्म कैसे बूस्ट करें. Boost Your Metabolism: मेटाबॉलिज्म शरीर में होने वाली एक ऐसा केमिकल रिएक्शन है, जो हमारे शरीर में ऊर्जा देने का काम करती है. इससे जीवित रहने में मदद मिलती है. मेटाबॉलिज्म ही हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को ऊर्जा में बदलता है. आपको ये भी बता दें कि शरीर में होने वाले सारे फंक्शन हमारे मेटाबॉलिज्म पर ही निर्भर करते हैं. शरीर का सांस लेना, भोजन को पचाना, ब्लड सर्कुलेशन, बॉडी को मूव करने के लिए ऊर्जा देना मेटाबॉलिज्म का काम है. आइए जानते हैं कि नेचुरल तरीके से मेटाबॉलिज्म कैसे बूस्ट करें. अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटाबोलिज्म को बूस्ट करने के लिए प्रोटीन वाली डाइट को शामिल करें. इससे हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में ऊर्जा मिलती है. अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ते मुताबिक, 17 औंस यानी 0.5 लीटर पानी पीने से एक घंटे में 30 फीसदी तक मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से हमारा शरीर डिहाइड्रेट नहीं होता है. हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग में बहुत ज्यादा हैवी वर्क आउट शामिल है. अगर इस तरह का वर्कआउट आपके लिए सुरक्षित है, तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर फैट बर्न करने में मदद मिलेगी. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, पर्याप्त मात्रा में ली गई नींद भी आपके मेटाबॉलिज्स को बढ़ाने में मदद मिलती है. कम नींद लेने से मेटाबॉलिज्म का स्तर गिरता है. ग्रीन टी में कैफीन और कैटेचिन पाया जाता है, जिससे हमारे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. कैफीन से कैलोरी बर्न होती है और कैटेचिन फैट को ब्रेक करता है. ऐसी तमाम रिसर्च सामने आ गई हैं, जिनमें ये सामने आया है कि मसालों वाला भोजन खाने से हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. तो आप भी अपने खानें में मसालों का प्रयोग जरूर करें. मांसपेशियों का निर्माण आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे आपको आराम करने पर भी हर दिन अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है.
शरीर का सांस लेना, भोजन को पचाना, ब्लड सर्कुलेशन, बॉडी को मूव करने के लिए ऊर्जा देना मेटाबॉलिज्म का काम है. आइए जानते हैं कि नेचुरल तरीके से मेटाबॉलिज्म कैसे बूस्ट करें. Boost Your Metabolism: मेटाबॉलिज्म शरीर में होने वाली एक ऐसा केमिकल रिएक्शन है, जो हमारे शरीर में ऊर्जा देने का काम करती है. इससे जीवित रहने में मदद मिलती है. मेटाबॉलिज्म ही हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को ऊर्जा में बदलता है. आपको ये भी बता दें कि शरीर में होने वाले सारे फंक्शन हमारे मेटाबॉलिज्म पर ही निर्भर करते हैं. शरीर का सांस लेना, भोजन को पचाना, ब्लड सर्कुलेशन, बॉडी को मूव करने के लिए ऊर्जा देना मेटाबॉलिज्म का काम है. आइए जानते हैं कि नेचुरल तरीके से मेटाबॉलिज्म कैसे बूस्ट करें. अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटाबोलिज्म को बूस्ट करने के लिए प्रोटीन वाली डाइट को शामिल करें. इससे हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में ऊर्जा मिलती है. अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ते मुताबिक, सत्रह औंस यानी शून्य दशमलव पाँच लीटरटर पानी पीने से एक घंटे में तीस फीसदी तक मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से हमारा शरीर डिहाइड्रेट नहीं होता है. हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग में बहुत ज्यादा हैवी वर्क आउट शामिल है. अगर इस तरह का वर्कआउट आपके लिए सुरक्षित है, तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर फैट बर्न करने में मदद मिलेगी. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, पर्याप्त मात्रा में ली गई नींद भी आपके मेटाबॉलिज्स को बढ़ाने में मदद मिलती है. कम नींद लेने से मेटाबॉलिज्म का स्तर गिरता है. ग्रीन टी में कैफीन और कैटेचिन पाया जाता है, जिससे हमारे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. कैफीन से कैलोरी बर्न होती है और कैटेचिन फैट को ब्रेक करता है. ऐसी तमाम रिसर्च सामने आ गई हैं, जिनमें ये सामने आया है कि मसालों वाला भोजन खाने से हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. तो आप भी अपने खानें में मसालों का प्रयोग जरूर करें. मांसपेशियों का निर्माण आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे आपको आराम करने पर भी हर दिन अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है.
एक ओर जहां ख्वाजा गरीब नवाज के सालाना उर्स में आने वाले पाकिस्तानी जायरीन जत्थे की सुरक्षा सहित अन्य इंतजामात को युद्धस्तर पर पुख्ता किया जा रहा है, वहीं इस्लामाबाद से खबर है कि पाकिस्तान ने कहा है कि भारत ने उसे सलाह दी है कि सुरक्षा कारणों से ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के लिए अजमेर जाने वाले पाकिस्तानी जायरीनों की यात्रा को रद्द कर दिया जाए। अर्थात स्थानीय स्तर पर हो रहे जबरदस्त विरोध के चलते पाक जायरीन का आना अब भी संदिग्ध है। ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान में भारतीय कैदी सरबजीत की हत्या के बाद पूरे देश सहित अजमेर में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा है। राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित अनेक संगठनों व भाजपा नेताओं ने पाक जायरीन के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। उन्हें व्यापारियों का भी सहयोग मिल रहा है। कुल मिला कर उन्होंने कड़ा विरोध करने के लिए कमर कस ली है। इसी सिलसिले में उन्हें मनाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद भी की, मगर वह कामयाब नहीं हो पाई। दूसरी ओर ऊपर के निर्देशों पर प्रशासन पाक जायरीन के आगमन की जरूरी तैयारियां भी कर रहा है। संभावना है कि गरीब नवाज के 801 वें उर्स में भाग लेने के लिए पाकिस्तानी जायरीन का जत्था 13 या 14 मई को अजमेर पहुंचेगा और 19 या 20 मई को प्रस्थान करेगा। पाक जायरीन को हर साल की तरह पुरानी मंडी मार्ग स्थित सेंट्रल गल्र्स स्कूल में ठहराया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से जायरीन की व्यवस्था के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सेंट्रल गल्र्स स्कूल में रंग रोगन व सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। विभिन्न संगठनों के विरोध के बीच जिला कलेक्टर वैभव गालरिया व एसपी गौरव श्रीवास्तव ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पाक जायरीन की विशेष सुरक्षा रहेगी। स्कूल से लेकर दरगाह जाने और आने तक हर पाक जायरीन को सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो। जानकारी ये भी है कि पाक जायरीन की सुरक्षा के लिए दिल्ली से सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कुमुक भेजी जा रही है। दूसरी ओर इस्लामाबाद से खबर है कि पाकिस्तानी विदेश विभाग के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उप-उच्चायुक्त गोपाल बागले ने यहां के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशियाई मामलों के महानिदेशक के साथ मुलाकात के दौरान भारत की अनुशंसा से अवगत कराया। बयान के अनुसार बागले ने कहा कि हालिया द्विपक्षीय घटनाओं के मद्देनजर भारत में जो सुरक्षा माहौल बना है, उसकी वजह से भारत सरकार पाकिस्तानी जायरीनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की स्थिति में नहीं होगी। बयान में कहा गया है, भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से सिफारिश की है कि जायरीनों के अजमेर दौरे को रद्द किया जाए। राजनयिक सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारतीय कैदी सरबजीत सिंह और पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रंजय की मौत के बाद उपजे तनाव के कारण भारत की ओर से यह अनुशंसा की गई है। पाकिस्तानी विदेश विभाग ने कहा कि अजमेर दौरे को लेकर धार्मिक मामलों के मंत्रालय को जरूरी सलाह दे दी गई है। इस प्रकार विरोधाभासी समाचारों के चलते अब भी पाक जायरीन के आने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
एक ओर जहां ख्वाजा गरीब नवाज के सालाना उर्स में आने वाले पाकिस्तानी जायरीन जत्थे की सुरक्षा सहित अन्य इंतजामात को युद्धस्तर पर पुख्ता किया जा रहा है, वहीं इस्लामाबाद से खबर है कि पाकिस्तान ने कहा है कि भारत ने उसे सलाह दी है कि सुरक्षा कारणों से ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के लिए अजमेर जाने वाले पाकिस्तानी जायरीनों की यात्रा को रद्द कर दिया जाए। अर्थात स्थानीय स्तर पर हो रहे जबरदस्त विरोध के चलते पाक जायरीन का आना अब भी संदिग्ध है। ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान में भारतीय कैदी सरबजीत की हत्या के बाद पूरे देश सहित अजमेर में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा है। राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित अनेक संगठनों व भाजपा नेताओं ने पाक जायरीन के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। उन्हें व्यापारियों का भी सहयोग मिल रहा है। कुल मिला कर उन्होंने कड़ा विरोध करने के लिए कमर कस ली है। इसी सिलसिले में उन्हें मनाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद भी की, मगर वह कामयाब नहीं हो पाई। दूसरी ओर ऊपर के निर्देशों पर प्रशासन पाक जायरीन के आगमन की जरूरी तैयारियां भी कर रहा है। संभावना है कि गरीब नवाज के आठ सौ एक वें उर्स में भाग लेने के लिए पाकिस्तानी जायरीन का जत्था तेरह या चौदह मई को अजमेर पहुंचेगा और उन्नीस या बीस मई को प्रस्थान करेगा। पाक जायरीन को हर साल की तरह पुरानी मंडी मार्ग स्थित सेंट्रल गल्र्स स्कूल में ठहराया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से जायरीन की व्यवस्था के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सेंट्रल गल्र्स स्कूल में रंग रोगन व सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। विभिन्न संगठनों के विरोध के बीच जिला कलेक्टर वैभव गालरिया व एसपी गौरव श्रीवास्तव ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पाक जायरीन की विशेष सुरक्षा रहेगी। स्कूल से लेकर दरगाह जाने और आने तक हर पाक जायरीन को सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो। जानकारी ये भी है कि पाक जायरीन की सुरक्षा के लिए दिल्ली से सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कुमुक भेजी जा रही है। दूसरी ओर इस्लामाबाद से खबर है कि पाकिस्तानी विदेश विभाग के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उप-उच्चायुक्त गोपाल बागले ने यहां के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशियाई मामलों के महानिदेशक के साथ मुलाकात के दौरान भारत की अनुशंसा से अवगत कराया। बयान के अनुसार बागले ने कहा कि हालिया द्विपक्षीय घटनाओं के मद्देनजर भारत में जो सुरक्षा माहौल बना है, उसकी वजह से भारत सरकार पाकिस्तानी जायरीनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की स्थिति में नहीं होगी। बयान में कहा गया है, भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से सिफारिश की है कि जायरीनों के अजमेर दौरे को रद्द किया जाए। राजनयिक सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारतीय कैदी सरबजीत सिंह और पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रंजय की मौत के बाद उपजे तनाव के कारण भारत की ओर से यह अनुशंसा की गई है। पाकिस्तानी विदेश विभाग ने कहा कि अजमेर दौरे को लेकर धार्मिक मामलों के मंत्रालय को जरूरी सलाह दे दी गई है। इस प्रकार विरोधाभासी समाचारों के चलते अब भी पाक जायरीन के आने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
Karnataka Election 2023: कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द हो सकता है। ऐसे में सभी पार्टियां जोर-शोर से प्रचार में जुटी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोरता में गोरता शहीद स्मारक और सरदार वल्लभभाई पटेल स्मारक के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने 103 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराया। अमित शाह ने कहा कि कभी बीदर के इस क्षेत्र में तिरंगा लहराने पर हैदराबाद के निजाम ने लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। साथ ही उन्होंने एक दिन पहले खत्म किए चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के कदम को भी जायज ठहराया। शाह ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाए। बीते शुक्रवार को कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार ने मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को समाप्त कर दिया और इसे दो प्रमुख समुदायों वीरशैवा-लिंगायत और वोक्कलिगास में बांट दिया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि कल ही भाजपा सरकार ने आरक्षण में बदलाव करने का फैसला लिया। कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक को खुश करने के लिए 4% अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था, उसको हटा कर हमने 2% वोगललिग्गा और 2% वीरशैव और लिंगायत को आरक्षण देने का काम किया है। अमित शाह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था। वोट बैंक के लालच में उन्होंने कभी भी उन लोगों को याद नहीं किया जिन्होंने हैदराबाद की आजादी के बलिदान किया था। शाह ने सरदार पटेल को याद करते हुए कहा कि अगर वे नहीं होते तो हैदराबाद कभी भी भारत का अंग नहीं होता। शाह ने गोराता गांववासियों के बलिदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निजाम की क्रूर सेना ने 2. 5-फीट ऊंचे तिरंगे को फहराने वालों को मौत के घाट उतार दिया था। आज मैं गर्व से कहता हूं कि उसी भूमि पर हमने एक 103-फीट लंबा तिरंगा फहराया है, जिसे किसी से छिपाया नहीं जा सकता है।
Karnataka Election दो हज़ार तेईस: कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द हो सकता है। ऐसे में सभी पार्टियां जोर-शोर से प्रचार में जुटी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोरता में गोरता शहीद स्मारक और सरदार वल्लभभाई पटेल स्मारक के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने एक सौ तीन फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराया। अमित शाह ने कहा कि कभी बीदर के इस क्षेत्र में तिरंगा लहराने पर हैदराबाद के निजाम ने लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। साथ ही उन्होंने एक दिन पहले खत्म किए चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के कदम को भी जायज ठहराया। शाह ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाए। बीते शुक्रवार को कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार ने मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को समाप्त कर दिया और इसे दो प्रमुख समुदायों वीरशैवा-लिंगायत और वोक्कलिगास में बांट दिया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि कल ही भाजपा सरकार ने आरक्षण में बदलाव करने का फैसला लिया। कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक को खुश करने के लिए चार% अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था, उसको हटा कर हमने दो% वोगललिग्गा और दो% वीरशैव और लिंगायत को आरक्षण देने का काम किया है। अमित शाह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था। वोट बैंक के लालच में उन्होंने कभी भी उन लोगों को याद नहीं किया जिन्होंने हैदराबाद की आजादी के बलिदान किया था। शाह ने सरदार पटेल को याद करते हुए कहा कि अगर वे नहीं होते तो हैदराबाद कभी भी भारत का अंग नहीं होता। शाह ने गोराता गांववासियों के बलिदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निजाम की क्रूर सेना ने दो. पाँच-फीट ऊंचे तिरंगे को फहराने वालों को मौत के घाट उतार दिया था। आज मैं गर्व से कहता हूं कि उसी भूमि पर हमने एक एक सौ तीन-फीट लंबा तिरंगा फहराया है, जिसे किसी से छिपाया नहीं जा सकता है।
गंध के साथ सफेद निर्वहन सबसे अक्सर हैकारण यह है कि एक स्त्री रोग विशेषज्ञ ने निष्पक्ष सेक्स का दौरा किया है क्या यह प्रक्रिया सामान्य है या क्या यह संकेत है कि महिला के शरीर में सब कुछ उतना सुरक्षित नहीं है जितना पहली नज़र में लगता है? रोग का निर्वहन का परिणाम हैजननांगों के रोग, सबसे अधिक बार वे प्रकृति में संक्रामक होते हैं और सूजन के रूप में होते। इस मामले में यह उनकी तत्काल उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक है। गंध के साथ व्हाइट मुक्ति ट्यूमर जननांग endometriosis, dysbiosis, हार्मोनल पृष्ठभूमि में अवरोधों, और कई अन्य बीमारियों का संकेत हो सकता। रोगविहीन निर्वचनों को दो समूहों में बांटा गया हैः पहला समूह निम्नलिखित विशेषताओं की विशेषता हैः दूसरे समूह की आवंटन विशेषता इस प्रकार हैः मुझे चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए?
गंध के साथ सफेद निर्वहन सबसे अक्सर हैकारण यह है कि एक स्त्री रोग विशेषज्ञ ने निष्पक्ष सेक्स का दौरा किया है क्या यह प्रक्रिया सामान्य है या क्या यह संकेत है कि महिला के शरीर में सब कुछ उतना सुरक्षित नहीं है जितना पहली नज़र में लगता है? रोग का निर्वहन का परिणाम हैजननांगों के रोग, सबसे अधिक बार वे प्रकृति में संक्रामक होते हैं और सूजन के रूप में होते। इस मामले में यह उनकी तत्काल उपचार शुरू करने के लिए आवश्यक है। गंध के साथ व्हाइट मुक्ति ट्यूमर जननांग endometriosis, dysbiosis, हार्मोनल पृष्ठभूमि में अवरोधों, और कई अन्य बीमारियों का संकेत हो सकता। रोगविहीन निर्वचनों को दो समूहों में बांटा गया हैः पहला समूह निम्नलिखित विशेषताओं की विशेषता हैः दूसरे समूह की आवंटन विशेषता इस प्रकार हैः मुझे चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए?
मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? सर्वोच्च न्यायालय ने भारत में वर्चुअल करेंसी (Virtual Currencies-VC) के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अप्रैल 2018 में एक आदेश के माध्यम से अधिरोपित किया गया था। - न्यायालय ने अपने आदेश में वर्चुअल करेंसी (VC) पर लगे प्रतिबंध को असंगत बताते हुए कहा कि RBI ने स्वयं वर्चुअल करेंसी (VC) के व्यापार के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव या नुकसान को स्पष्ट नहीं किया है। - ध्यातव्य है कि अप्रैल 2018 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक परिपत्र जारी किया था, जिसके माध्यम से सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर वर्चुअल करेंसी (जिसमें क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है) से संबंधित व्यापार सुविधाएँ प्रदान करने पर रोक लगा दी गई थीं। - RBI ने अपने आदेश के माध्यम से भारत में सभी वर्चुअल करेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके पश्चात् इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने RBI के इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी। क्या था RBI का आदेश? - RBI ने 2018 के अपने आदेश में कहा था कि रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित सभी इकाइयाँ वर्चुअल करेंसी में लेन-देन नहीं करेंगी तथा किसी व्यक्ति या इकाई को वर्चुअल करेंसी में लेन-देन के लिये भी सुविधा प्रदान नहीं करेंगी। - RBI ने आदेश में कहा था कि वर्चुअल करेंसी के व्यापार में शामिल सभी विनियमित संस्थाओं को परिपत्र की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी कार्य समाप्त करने होंगे। - वर्चुअल करेंसी से संबंधित विशेषज्ञों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है। हालाँकि यह विषय अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि अभी विधायी कार्यवाही शेष है। - विदित हो कि सरकार ने बीते वर्ष क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा नियमन विधेयक, 2019 का मसौदा तैयार किया था। यह विधेयक क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। - जब तक क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंध करने वाले मसौदे को इसके मौजूदा स्वरूप से नहीं बदला जाएगा तब तक देश में क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापार को शुरू नहीं किया जा सकेगा। - साधारण शब्दों में कहें तो वर्चुअल करेंसी एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा होती है। ध्यातव्य है कि वर्चुअल करेंसी एक वैध मुद्रा नहीं होती है, जिसका अर्थ है कि यह देश के केंद्रीय बैंक (भारत की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा समर्थित नहीं होती है। - क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) वर्चुअल करेंसी का एक रूप है जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा संरक्षित है। क्रिप्टोग्राफी मूल रूप से एक ग्रीक शब्द है, जो 'गुप्त' और 'लिखावट' का मिला-जुला अर्थ रूप है। यह एक प्रकार का कूट-लेखन (Encode) है, जिसमें भेजे गए संदेश या जानकारी को सांकेतिक शब्दों में बदल दिया जाता है। इसे भेजने वाला या पाने वाला ही पढ़ सकता या खोल सकता है। - क्रिप्टोग्राफी का संबंध डेटा की सुरक्षा और उससे संबंधित विषयों, विशेषकर एनक्रिप्शन से होता है। - बिटकॉइन और एथेरम जैसी डिजिटल करेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर निर्भर करती हैं। - जिस प्रकार हज़ारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का आविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डेटा ब्लॉकों (आँकड़ों) की लंबी श्रृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन नाम दिया गया है। - ब्लॉकचेन तकनीक में तीन अलग-अलग तकनीकों का समायोजन है, जिसमें इंटरनेट, पर्सनल 'की' (निजी कुंजी) की क्रिप्टोग्राफी अर्थात् जानकारी को गुप्त रखना और प्रोटोकॉल पर नियंत्रण रखना शामिल है। - ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिससे बिटकॉइन तथा अन्य क्रिप्टो-करेंसियों का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल 'सार्वजनिक बही-खाता' (Public Ledger) है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड दर्ज़ होता है। - ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन के दर्ज होने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है। - ब्लॉकचेन के कारण लेन-देन के लिये एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी जैसे-बैंक की आवश्यकता नहीं पड़ती। - नेटवर्क से जुड़े उपकरणों (मुख्यतः कंप्यूटर की श्रृंखलाओं, जिन्हें नोड्स कहा जाता है) द्वारा सत्यापित होने के बाद इसके अंतर्गत किया गया प्रत्येक लेन-देन का विवरण बही-खाते में रिकॉर्ड होता है। - क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये लेन-देन के दौरान छद्म नाम (Pseudonym) एवं पहचान बताई जाती है। ऐसे में अपनी निजता को लेकर अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तियों को यह माध्यम सर्वाधिक उपयुक्त जान पड़ता है। - क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन संबंधी लागत अत्यंत ही कम होती है। घरेलू हो या अंतर्राष्ट्रीय किसी भी लेन-देन की लागत एक समान ही होती है। - क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये होने वाले लेन-देन में 'थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन' (Third Party Certification) की आवश्यकता नहीं होती। अतः धन एवं समय दोनों की बचत होती है। - क्रिप्टोकरेंसी की संपूर्ण व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण इसकी सुरक्षा कमज़ोर हो जाती है और इसके हैक होने का खतरा बना रहता है। - क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी समस्या है इसका ऑनलाइन होना और यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी को एक असुरक्षित मुद्रा माना जा रहा है। - गौरतलब है कि प्रत्येक बिटकॉइन लेन-देन के लिये लगभग 237 किलोवाट बिजली की खपत होती है और इससे प्रतिघंटा लगभग 92 किलो कार्बन उत्सर्जन होता है। मुद्रा के आविष्कार से पूर्व वस्तु विनिमय प्रणाली के ज़रिये वस्तुओं का लेन-देन किया जाता था किंतु जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होती गई व्यापार के तरीकों में भी बदलाव आता गया। वर्चुअल करेंसी का लगातार बढ़ रहा प्रचलन 21वीं सदी के सबसे महत्त्वपूर्ण बदलावों में से एक है। न्यायालय के हालिया निर्देश से भारत ने भी इस ओर एक कदम बढ़ा दिया है। हालाँकि डिजिटल मुद्रा को लेकर अभी भी कई चिंताएँ मौजूद हैं, जिनका समाधान जल्द-से-जल्द किया जाया जाना आवश्यक है।
मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? सर्वोच्च न्यायालय ने भारत में वर्चुअल करेंसी के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह में एक आदेश के माध्यम से अधिरोपित किया गया था। - न्यायालय ने अपने आदेश में वर्चुअल करेंसी पर लगे प्रतिबंध को असंगत बताते हुए कहा कि RBI ने स्वयं वर्चुअल करेंसी के व्यापार के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव या नुकसान को स्पष्ट नहीं किया है। - ध्यातव्य है कि अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक परिपत्र जारी किया था, जिसके माध्यम से सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर वर्चुअल करेंसी से संबंधित व्यापार सुविधाएँ प्रदान करने पर रोक लगा दी गई थीं। - RBI ने अपने आदेश के माध्यम से भारत में सभी वर्चुअल करेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके पश्चात् इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने RBI के इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी। क्या था RBI का आदेश? - RBI ने दो हज़ार अट्ठारह के अपने आदेश में कहा था कि रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित सभी इकाइयाँ वर्चुअल करेंसी में लेन-देन नहीं करेंगी तथा किसी व्यक्ति या इकाई को वर्चुअल करेंसी में लेन-देन के लिये भी सुविधा प्रदान नहीं करेंगी। - RBI ने आदेश में कहा था कि वर्चुअल करेंसी के व्यापार में शामिल सभी विनियमित संस्थाओं को परिपत्र की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी कार्य समाप्त करने होंगे। - वर्चुअल करेंसी से संबंधित विशेषज्ञों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है। हालाँकि यह विषय अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि अभी विधायी कार्यवाही शेष है। - विदित हो कि सरकार ने बीते वर्ष क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा नियमन विधेयक, दो हज़ार उन्नीस का मसौदा तैयार किया था। यह विधेयक क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। - जब तक क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंध करने वाले मसौदे को इसके मौजूदा स्वरूप से नहीं बदला जाएगा तब तक देश में क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापार को शुरू नहीं किया जा सकेगा। - साधारण शब्दों में कहें तो वर्चुअल करेंसी एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा होती है। ध्यातव्य है कि वर्चुअल करेंसी एक वैध मुद्रा नहीं होती है, जिसका अर्थ है कि यह देश के केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित नहीं होती है। - क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल करेंसी का एक रूप है जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा संरक्षित है। क्रिप्टोग्राफी मूल रूप से एक ग्रीक शब्द है, जो 'गुप्त' और 'लिखावट' का मिला-जुला अर्थ रूप है। यह एक प्रकार का कूट-लेखन है, जिसमें भेजे गए संदेश या जानकारी को सांकेतिक शब्दों में बदल दिया जाता है। इसे भेजने वाला या पाने वाला ही पढ़ सकता या खोल सकता है। - क्रिप्टोग्राफी का संबंध डेटा की सुरक्षा और उससे संबंधित विषयों, विशेषकर एनक्रिप्शन से होता है। - बिटकॉइन और एथेरम जैसी डिजिटल करेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर निर्भर करती हैं। - जिस प्रकार हज़ारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का आविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डेटा ब्लॉकों की लंबी श्रृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन नाम दिया गया है। - ब्लॉकचेन तकनीक में तीन अलग-अलग तकनीकों का समायोजन है, जिसमें इंटरनेट, पर्सनल 'की' की क्रिप्टोग्राफी अर्थात् जानकारी को गुप्त रखना और प्रोटोकॉल पर नियंत्रण रखना शामिल है। - ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिससे बिटकॉइन तथा अन्य क्रिप्टो-करेंसियों का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल 'सार्वजनिक बही-खाता' है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड दर्ज़ होता है। - ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन के दर्ज होने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है। - ब्लॉकचेन के कारण लेन-देन के लिये एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी जैसे-बैंक की आवश्यकता नहीं पड़ती। - नेटवर्क से जुड़े उपकरणों द्वारा सत्यापित होने के बाद इसके अंतर्गत किया गया प्रत्येक लेन-देन का विवरण बही-खाते में रिकॉर्ड होता है। - क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये लेन-देन के दौरान छद्म नाम एवं पहचान बताई जाती है। ऐसे में अपनी निजता को लेकर अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तियों को यह माध्यम सर्वाधिक उपयुक्त जान पड़ता है। - क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन संबंधी लागत अत्यंत ही कम होती है। घरेलू हो या अंतर्राष्ट्रीय किसी भी लेन-देन की लागत एक समान ही होती है। - क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये होने वाले लेन-देन में 'थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन' की आवश्यकता नहीं होती। अतः धन एवं समय दोनों की बचत होती है। - क्रिप्टोकरेंसी की संपूर्ण व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण इसकी सुरक्षा कमज़ोर हो जाती है और इसके हैक होने का खतरा बना रहता है। - क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी समस्या है इसका ऑनलाइन होना और यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी को एक असुरक्षित मुद्रा माना जा रहा है। - गौरतलब है कि प्रत्येक बिटकॉइन लेन-देन के लिये लगभग दो सौ सैंतीस किलोग्रामवाट बिजली की खपत होती है और इससे प्रतिघंटा लगभग बानवे किलो कार्बन उत्सर्जन होता है। मुद्रा के आविष्कार से पूर्व वस्तु विनिमय प्रणाली के ज़रिये वस्तुओं का लेन-देन किया जाता था किंतु जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होती गई व्यापार के तरीकों में भी बदलाव आता गया। वर्चुअल करेंसी का लगातार बढ़ रहा प्रचलन इक्कीसवीं सदी के सबसे महत्त्वपूर्ण बदलावों में से एक है। न्यायालय के हालिया निर्देश से भारत ने भी इस ओर एक कदम बढ़ा दिया है। हालाँकि डिजिटल मुद्रा को लेकर अभी भी कई चिंताएँ मौजूद हैं, जिनका समाधान जल्द-से-जल्द किया जाया जाना आवश्यक है।
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने अवैध तरीके से सऊदी अरब भेजने वाले दो ट्रैवल एजेंट शाम लाल और मुकेश शर्मा को दोषी करार दिया है। दोषियों को 21 मई को सजा सुनाई जाएगी। इन दोनों दोषियों के खिलाफ सीबीआई ने सात साल पहले एफआईआर दर्ज की थी लेकिन दोनों एजेंट उस समय सीबीआई की जूडीशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट से बरी हो गए थे। इसके बाद सीबीआई ने 2021 में सीबीआई की निचली अदालत के फैसले को विशेष अदालत में चुनौती दी थी। सीबीआई के सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि दोषियों ने फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर इमिग्रेशन क्लीयरेंस हासिल की थी। इसके बाद लोगों को काम करने के लिए अवैध तरीके से सऊदी अरब भेज दिया। वीजा में यहां से भेजे गए कर्मचारियों की जॉब प्रोफाइल कुछ और दिखाई थी जबकि सऊदी अरब में उनसे काम कुछ और लिया जा रहा था। सीबीआई ने साल 2014 में सेक्टर-9 स्थित प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स के ऑफिस में तलाशी ली थी। वहां से सीबीआई को 82 ऐसे लोगों के दस्तावेज मिले, जिन्हें गलत तरीके से विदेश भेजा गया था। इस मामले में दोषियों ने अकुशल कर्मचारियों को फर्जी तरीके से कुशल दिखा कर उनको इमिग्रेशन क्लीयरेंस दिलवाई और विदेश भेज दिया। सीबीआई ने जांच में पाया कि दोषियों ने विदेश भेजने के लिए किसी को पेंटर, किसी को इलेक्ट्रिशियन और किसी को ऑटो मैकेनिक दिखाया, लेकिन इनमें से कोई भी यह काम नहीं जानता था। इन्हें गैरकानूनी तरीके से विदेश भेज कर इनसे कुछ और काम करवाया जा रहा था।
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने अवैध तरीके से सऊदी अरब भेजने वाले दो ट्रैवल एजेंट शाम लाल और मुकेश शर्मा को दोषी करार दिया है। दोषियों को इक्कीस मई को सजा सुनाई जाएगी। इन दोनों दोषियों के खिलाफ सीबीआई ने सात साल पहले एफआईआर दर्ज की थी लेकिन दोनों एजेंट उस समय सीबीआई की जूडीशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट से बरी हो गए थे। इसके बाद सीबीआई ने दो हज़ार इक्कीस में सीबीआई की निचली अदालत के फैसले को विशेष अदालत में चुनौती दी थी। सीबीआई के सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि दोषियों ने फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर इमिग्रेशन क्लीयरेंस हासिल की थी। इसके बाद लोगों को काम करने के लिए अवैध तरीके से सऊदी अरब भेज दिया। वीजा में यहां से भेजे गए कर्मचारियों की जॉब प्रोफाइल कुछ और दिखाई थी जबकि सऊदी अरब में उनसे काम कुछ और लिया जा रहा था। सीबीआई ने साल दो हज़ार चौदह में सेक्टर-नौ स्थित प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स के ऑफिस में तलाशी ली थी। वहां से सीबीआई को बयासी ऐसे लोगों के दस्तावेज मिले, जिन्हें गलत तरीके से विदेश भेजा गया था। इस मामले में दोषियों ने अकुशल कर्मचारियों को फर्जी तरीके से कुशल दिखा कर उनको इमिग्रेशन क्लीयरेंस दिलवाई और विदेश भेज दिया। सीबीआई ने जांच में पाया कि दोषियों ने विदेश भेजने के लिए किसी को पेंटर, किसी को इलेक्ट्रिशियन और किसी को ऑटो मैकेनिक दिखाया, लेकिन इनमें से कोई भी यह काम नहीं जानता था। इन्हें गैरकानूनी तरीके से विदेश भेज कर इनसे कुछ और काम करवाया जा रहा था।
(३) गर्ने ज० उ० तीन पल्योपमकि स्थिति उत्पन्न होवे परिमाण १-१-३.३० संख्याते जीव उत्पन्न होते है । अगाहाना पूर्ववत् भव ज० दोय ३० दोय भव करे काल ज० अन्तर महुर्त और तीन पल्योपम उ० तीन पस्योपम और फोडपूर्व । ( ४-१-६ ) इस तीन गमाकि ऋद्धि तीच पांचेन्द्रिय जो पृथ्वी काय में गया था उस माफीक भव जं० दोयभव उ० आठ भव करे काल चोथे गर्ने अन्तरमहुर्त कोडपूर्व उ० च्यारः अन्तर महुर्त और प्यार कोडपूर्व, पांचवे गर्ने न० दोय, अन्तरमहुर्त उ० भाठ अन्तरमहुर्त, छटे गमें कोडपूर्व और, मन्तरमहुर्त उ० च्यार कोडपूर्व और प्यार अन्तरमहुवे । (७) सातवे गर्ने ज० उ० कोटपूर्ववाला जावे भव ज उ० दोय करे काल ज० कोडपूर्व और अन्तरमहुर्त ३० तीन पश्योपम और फोडपूर्व । (८) गर्ने भव न० दोय० उ० माठ भव काल ज० कोड पूर्व अन्तरमहुर्त उ० च्यार फोडपूर्व और प्यार अंतरमहूर्त । (९) गर्ने परिमाण स्थिति अनुबंध तीसरे गर्ने कि माफीक भव म० उ० दोयभव करे काल तीन पल्योपम और कोडपूर्व उ० तीन पत्योपम और कोडपूर्व । तथा असंख्याते वपके ठोयच गुगळीये होते हे वास्ते बह मरके तीयंचमें नहीं जाते हैं उन्होंकि गति केवल देवतोंकि ही है वास्ते यहा उत्पात नहीं है । इति मनुष्य संज्ञी तथा असंज्ञी दो प्रकारके होते है जिसमें असंज्ञी मनुष्य गरके तीच पांचेन्द्रियमें न० अंतरमद्भुत उ कोडपूर्वकि स्थिति उत्पन्न होता है ऋद्धिके २० द्वार पृथ्वी काय में उत्पन्न समय कहा था इसी माफीक । भव तथा काल और गमा असंज्ञी तीर्यचर्मे कहा इस माफीक समझना । संज्ञी मनुष्य संख्याते वर्षके आयुष्यवाला (कर्मभूमि) मरके जीच पांचंद्रिय में ज० अन्तरमहुर्त उ० कोडपूर्वकि स्थितिमें उत्पन्न होते है. ऋद्धि जेसे मनुष्य पृथ्वी कायमें उत्पन्न समय कही थी इसी माफीक समझना । भव तथा काल नौ ग़मा द्वारा बतलाते है । (१) गर्मे भव ज० उ० २ भव काल ज० दोय अंतरमहुर्त उ० तीन पल्योपम और कोडपूर्व । (२) गर्मे भव ज० दोय उ० माटं भव काल ज० दोय अन्तरमहुर्त उ० च्यार कोडपूर्व और च्यार अन्तरमहुर्ते । (३) गर्मे भव ज० उ० दोय भव, काल ज० प्रत्यक मास और तीन पल्यो० उ० तीन पल्यो • और कोडपूर्व । परन्तु यहा ऋद्धिमें अवगाहाना ज० प्रत्यक अंगुल उ० पांचसो धनुष्य और स्थिति ज० प्रत्यक मास उ० कोडपूर्व कि समझना । ( ४ - ५ - ६) गर्ने संज्ञी तीर्येच पांचेन्द्रिय सादृश परन्तु परिमाण १-२-३. उ० संख्याते समझना । (७) गर्मे० भव ज० उ० दोय, काल कोडपूर्व अन्तरमहुर्त उ० तीन पल्योपम प्रत्यक कोडपूर्वाधिक ऋद्धिमें अवगाहाना ज० उ० पांचसो धनुष्य स्थिति ज० उ० कोडपूर्व कि शेष प्रथमं गमावत् (८) गमें सातवावत् परंतु भव ज० २ उ० आठ भव काल झ० अंतरमहुर्त कोडपूर्व उ० च्यार कोडपूर्व च्यार अंतरमहुर्त । (९) गर्ने, पूर्ववत परंतु भव ज० उ० दोय काल ज तीन पो० कोडपूर्व एवं उत्कृष्ट भी समझना । असंख्याते वर्षका मनुष्य देवोंमें जाते हैं। वास्ते यह नहीं कहा है। दश मुवनपति अंतर ज्योतीपी सौ धर्म देवलोकसे यावत् सहस्त्रदेव लोक तक देवता चक्के तीयंच पांचेन्द्रियमें ज० अंतर महुर्त उ० कोडपूर्वकि स्थिति में उत्पन्न होते है। जीनोकि ऋद्धि जेसे असुर कुमारके देव पृथ्वीकाय में उत्पन्न समय को थी इसी माफीक समझना, भव तथा काल नौ गमा हारे कहते है । भव नौ गमामें ज० दोय उ० आठ माल । (१) गर्ने १०००० वर्ष अन्तर० ३०४ सागरों० सा० ४ फोड (२) गये. ४० हजार वर्ष ४ अन्तर ४ सा० स० ४ कोड० (४) गर्ने ४० हजार० (५) गर्मे १. कोड० अन्तर ४ अंतर (६) गंमे ४ कोट० (७) गर्ने स१० सा० अन्तर ४ सा० सा० ४ कोड ० (९) गर्ने यह अनुरकुमार और वीर्यनके माफीक अपनी अपनी ४ सा० सा० ४ अंतर ४ सा० सा० ४ कोड ० नौ गमा कहा है इसी पांचेन्द्रियकि स्थिति गमा हमा देना ऋद्धिमें अरगाहाना तथा देश्या और स्थिति अनुबन्ध अपने अपने हो सो कहना यह सबको मृगम है वास्ते नहीं दिसा है स्वउपयोग कहना इति २४-२० । (२१) मनुष्यका उद्देशा - मनुष्यके दंडक में संज्ञी, असो, संख्याते वर्षवाले, असंख्याते वर्षवाले यह सत्र मनुष्य के दंडक में हि गिने जाते है । छे नरक दश भुवनपति व्यन्तर, ज्योतीपी, वारह देवलोक, नौग्रीचें पांच अनुत्तरवेमान, तीन स्थावर, तीन वैकलेन्द्रिय, तीर्थचपांचेद्रिय और मनुष्य, इतने स्थानके जीव मरके, मनुष्य में ज० अन्तरमहूर्त टं० तीन पल्योपमकि स्थिति उत्पन्न होते है । " यथासंभव " जिस्मे । रत्नप्रमा नरकसे मरके जीव मनुष्य में ज० प्रत्यकमास उ कोंड पूर्व कि स्थिति उत्पन्न होते है । ऋद्धिके १० द्वार जेसे -रत्नप्रमासे तीर्थच पांचेन्द्रियमे उत्पन्न समय कही थी इसी माफोक समझना परन्तु यहा परिमाणमे १-२-३. उ० संख्याते उत्पन्न होते है क्युकि असंज्ञी मनुष्य में तो नारकी उत्पन्न होवे नही और संज्ञी मनुष्य में संख्याते से ज्यादे स्थान हे नही और गमामें मनुष्यका जघन्यकाल प्रत्यक मासका केहना कारण प्रत्यक माससे कम स्थिति में उत्पन्न नहीं होते हैं। वास्ते गमा प्रत्यक माससे केहना । इसी माफीक शार्कर प्रमा- यावत् तमप्रम भी समझना, परन्तु यहांसे साया हुवा जीव मनुष्य जयन्य स्मिति प्रत्यक वर्षसे कम नहीं पावेगा वास्ते गमामे मनुष्यकि ज० स्थिति प्रत्यक वर्ष कि कहना शेष ऋद्धि में अवगहाना लेश्या आयुष्य अनुबन्धादि स्व स्वस्था नसे स्वउपयोगसे कहना "सांतवी नरकका अमाव" पृथ्वीकाय मरके, मनुष्य में ज० अन्वर महुर्त उ० कोडपूर्व कि स्थिति में उत्पन्न होते है । ऋ२० द्वारा और नौगमा पूर्व पृथ्वीकाय तीर्थच चेन्द्रिय उत्पन्न समय कहा था इसी माफीक कहना परन्तु तीसरे उटे नौ गमा परिमाण १.२. ९ ३० संख्यात समझना और थम गय अपने अन्य काढमें अध्यवसाय प्रतस्थ असं दोनों होते है दुसरेगमे अप्रसस्य औीसरे गर्ने प्रसस्य शेष तीन शंचेन्द्रिय माफोक है एवं अपकाय वनास्पतिकाय वेन्द्रिय तेन्द्रि, चरिन्द्रिय, असंज्ञी वीर्येच यांचेन्द्रिय संज्ञी तीच पांचेन्द्रिय असंज्ञो मनुष्य संज्ञो मनुष्य यहः सर जैसे तीर्थ यांचेन्द्रिय के दंडक में उत्पन्न समय ऋद्धि तथा गमा कहा था इसी माफीक स्थिति अनुबन्धादि अपने अपने स्थानसे कहना । "असुर कुमार के देव पत्रके मनुष्य में म० प्रत्यक मास उ कोडपूर्वक स्थिति उत्पन्न होते है ऋद्धिके २० द्वार जैसे चन्द्रिय उत्पन्न समय कहा था इसी माफक कहना परन्तु परिमाणमें १-२-३३० संख्याते कहना । और गमामें तीर्थचका महा जवन्य अन्तर महूर्तका, काल, कहा था वह यहाँ ( मनुष्य ) प्रत्यक मासका कालसे मा वहना । एवं दश मुखनपति व्यस्तर ज्योतीषी सौधर्म शान देवलोक तक और तीजे देवलोक नौ ग्रीषे तके देव मनुष्य में म० प्रत्यक वर्ष और कोटपूर्व में उत्पन्न होते है ऋद्धिके २० द्वार स्वउपयोग से कहना कारण घुडकवण्ठस्य करनेवालोको बहुत ही सुगम है वास्ते यहां नहीं लिखा है नाणन्ते और गमा तथा मनके लिये प्रथम थोक हेमें वार लिल आये है। इतना ध्यान रखना कि नौमी वैगमें अवगाहाना तथा संस्थान एक मत्र धारणी है समृदयात सद्धा
गर्ने जशून्य उशून्य तीन पल्योपमकि स्थिति उत्पन्न होवे परिमाण एक-एक-तीन.तीस संख्याते जीव उत्पन्न होते है । अगाहाना पूर्ववत् भव जशून्य दोय तीस दोय भव करे काल जशून्य अन्तर महुर्त और तीन पल्योपम उशून्य तीन पस्योपम और फोडपूर्व । इस तीन गमाकि ऋद्धि तीच पांचेन्द्रिय जो पृथ्वी काय में गया था उस माफीक भव जंशून्य दोयभव उशून्य आठ भव करे काल चोथे गर्ने अन्तरमहुर्त कोडपूर्व उशून्य च्यारः अन्तर महुर्त और प्यार कोडपूर्व, पांचवे गर्ने नशून्य दोय, अन्तरमहुर्त उशून्य भाठ अन्तरमहुर्त, छटे गमें कोडपूर्व और, मन्तरमहुर्त उशून्य च्यार कोडपूर्व और प्यार अन्तरमहुवे । सातवे गर्ने जशून्य उशून्य कोटपूर्ववाला जावे भव ज उशून्य दोय करे काल जशून्य कोडपूर्व और अन्तरमहुर्त तीस तीन पश्योपम और फोडपूर्व । गर्ने भव नशून्य दोयशून्य उशून्य माठ भव काल जशून्य कोड पूर्व अन्तरमहुर्त उशून्य च्यार फोडपूर्व और प्यार अंतरमहूर्त । गर्ने परिमाण स्थिति अनुबंध तीसरे गर्ने कि माफीक भव मशून्य उशून्य दोयभव करे काल तीन पल्योपम और कोडपूर्व उशून्य तीन पत्योपम और कोडपूर्व । तथा असंख्याते वपके ठोयच गुगळीये होते हे वास्ते बह मरके तीयंचमें नहीं जाते हैं उन्होंकि गति केवल देवतोंकि ही है वास्ते यहा उत्पात नहीं है । इति मनुष्य संज्ञी तथा असंज्ञी दो प्रकारके होते है जिसमें असंज्ञी मनुष्य गरके तीच पांचेन्द्रियमें नशून्य अंतरमद्भुत उ कोडपूर्वकि स्थिति उत्पन्न होता है ऋद्धिके बीस द्वार पृथ्वी काय में उत्पन्न समय कहा था इसी माफीक । भव तथा काल और गमा असंज्ञी तीर्यचर्मे कहा इस माफीक समझना । संज्ञी मनुष्य संख्याते वर्षके आयुष्यवाला मरके जीच पांचंद्रिय में जशून्य अन्तरमहुर्त उशून्य कोडपूर्वकि स्थितिमें उत्पन्न होते है. ऋद्धि जेसे मनुष्य पृथ्वी कायमें उत्पन्न समय कही थी इसी माफीक समझना । भव तथा काल नौ ग़मा द्वारा बतलाते है । गर्मे भव जशून्य उशून्य दो भव काल जशून्य दोय अंतरमहुर्त उशून्य तीन पल्योपम और कोडपूर्व । गर्मे भव जशून्य दोय उशून्य माटं भव काल जशून्य दोय अन्तरमहुर्त उशून्य च्यार कोडपूर्व और च्यार अन्तरमहुर्ते । गर्मे भव जशून्य उशून्य दोय भव, काल जशून्य प्रत्यक मास और तीन पल्योशून्य उशून्य तीन पल्यो • और कोडपूर्व । परन्तु यहा ऋद्धिमें अवगाहाना जशून्य प्रत्यक अंगुल उशून्य पांचसो धनुष्य और स्थिति जशून्य प्रत्यक मास उशून्य कोडपूर्व कि समझना । गर्ने संज्ञी तीर्येच पांचेन्द्रिय सादृश परन्तु परिमाण एक-दो-तीन. उशून्य संख्याते समझना । गर्मेशून्य भव जशून्य उशून्य दोय, काल कोडपूर्व अन्तरमहुर्त उशून्य तीन पल्योपम प्रत्यक कोडपूर्वाधिक ऋद्धिमें अवगाहाना जशून्य उशून्य पांचसो धनुष्य स्थिति जशून्य उशून्य कोडपूर्व कि शेष प्रथमं गमावत् गमें सातवावत् परंतु भव जशून्य दो उशून्य आठ भव काल झशून्य अंतरमहुर्त कोडपूर्व उशून्य च्यार कोडपूर्व च्यार अंतरमहुर्त । गर्ने, पूर्ववत परंतु भव जशून्य उशून्य दोय काल ज तीन पोशून्य कोडपूर्व एवं उत्कृष्ट भी समझना । असंख्याते वर्षका मनुष्य देवोंमें जाते हैं। वास्ते यह नहीं कहा है। दश मुवनपति अंतर ज्योतीपी सौ धर्म देवलोकसे यावत् सहस्त्रदेव लोक तक देवता चक्के तीयंच पांचेन्द्रियमें जशून्य अंतर महुर्त उशून्य कोडपूर्वकि स्थिति में उत्पन्न होते है। जीनोकि ऋद्धि जेसे असुर कुमारके देव पृथ्वीकाय में उत्पन्न समय को थी इसी माफीक समझना, भव तथा काल नौ गमा हारे कहते है । भव नौ गमामें जशून्य दोय उशून्य आठ माल । गर्ने दस हज़ार वर्ष अन्तरशून्य तीन सौ चार सागरोंशून्य साशून्य चार फोड गये. चालीस हजार वर्ष चार अन्तर चार साशून्य सशून्य चार कोडशून्य गर्ने चालीस हजारशून्य गर्मे एक. कोडशून्य अन्तर चार अंतर गंमे चार कोटशून्य गर्ने सदस साशून्य अन्तर चार साशून्य साशून्य चार कोड शून्य गर्ने यह अनुरकुमार और वीर्यनके माफीक अपनी अपनी चार साशून्य साशून्य चार अंतर चार साशून्य साशून्य चार कोड शून्य नौ गमा कहा है इसी पांचेन्द्रियकि स्थिति गमा हमा देना ऋद्धिमें अरगाहाना तथा देश्या और स्थिति अनुबन्ध अपने अपने हो सो कहना यह सबको मृगम है वास्ते नहीं दिसा है स्वउपयोग कहना इति चौबीस-बीस । मनुष्यका उद्देशा - मनुष्यके दंडक में संज्ञी, असो, संख्याते वर्षवाले, असंख्याते वर्षवाले यह सत्र मनुष्य के दंडक में हि गिने जाते है । छे नरक दश भुवनपति व्यन्तर, ज्योतीपी, वारह देवलोक, नौग्रीचें पांच अनुत्तरवेमान, तीन स्थावर, तीन वैकलेन्द्रिय, तीर्थचपांचेद्रिय और मनुष्य, इतने स्थानके जीव मरके, मनुष्य में जशून्य अन्तरमहूर्त टंशून्य तीन पल्योपमकि स्थिति उत्पन्न होते है । " यथासंभव " जिस्मे । रत्नप्रमा नरकसे मरके जीव मनुष्य में जशून्य प्रत्यकमास उ कोंड पूर्व कि स्थिति उत्पन्न होते है । ऋद्धिके दस द्वार जेसे -रत्नप्रमासे तीर्थच पांचेन्द्रियमे उत्पन्न समय कही थी इसी माफोक समझना परन्तु यहा परिमाणमे एक-दो-तीन. उशून्य संख्याते उत्पन्न होते है क्युकि असंज्ञी मनुष्य में तो नारकी उत्पन्न होवे नही और संज्ञी मनुष्य में संख्याते से ज्यादे स्थान हे नही और गमामें मनुष्यका जघन्यकाल प्रत्यक मासका केहना कारण प्रत्यक माससे कम स्थिति में उत्पन्न नहीं होते हैं। वास्ते गमा प्रत्यक माससे केहना । इसी माफीक शार्कर प्रमा- यावत् तमप्रम भी समझना, परन्तु यहांसे साया हुवा जीव मनुष्य जयन्य स्मिति प्रत्यक वर्षसे कम नहीं पावेगा वास्ते गमामे मनुष्यकि जशून्य स्थिति प्रत्यक वर्ष कि कहना शेष ऋद्धि में अवगहाना लेश्या आयुष्य अनुबन्धादि स्व स्वस्था नसे स्वउपयोगसे कहना "सांतवी नरकका अमाव" पृथ्वीकाय मरके, मनुष्य में जशून्य अन्वर महुर्त उशून्य कोडपूर्व कि स्थिति में उत्पन्न होते है । ऋबीस द्वारा और नौगमा पूर्व पृथ्वीकाय तीर्थच चेन्द्रिय उत्पन्न समय कहा था इसी माफीक कहना परन्तु तीसरे उटे नौ गमा परिमाण एक.दो. नौ तीस संख्यात समझना और थम गय अपने अन्य काढमें अध्यवसाय प्रतस्थ असं दोनों होते है दुसरेगमे अप्रसस्य औीसरे गर्ने प्रसस्य शेष तीन शंचेन्द्रिय माफोक है एवं अपकाय वनास्पतिकाय वेन्द्रिय तेन्द्रि, चरिन्द्रिय, असंज्ञी वीर्येच यांचेन्द्रिय संज्ञी तीच पांचेन्द्रिय असंज्ञो मनुष्य संज्ञो मनुष्य यहः सर जैसे तीर्थ यांचेन्द्रिय के दंडक में उत्पन्न समय ऋद्धि तथा गमा कहा था इसी माफीक स्थिति अनुबन्धादि अपने अपने स्थानसे कहना । "असुर कुमार के देव पत्रके मनुष्य में मशून्य प्रत्यक मास उ कोडपूर्वक स्थिति उत्पन्न होते है ऋद्धिके बीस द्वार जैसे चन्द्रिय उत्पन्न समय कहा था इसी माफक कहना परन्तु परिमाणमें एक फ़रवरी तीन सौ तीस संख्याते कहना । और गमामें तीर्थचका महा जवन्य अन्तर महूर्तका, काल, कहा था वह यहाँ प्रत्यक मासका कालसे मा वहना । एवं दश मुखनपति व्यस्तर ज्योतीषी सौधर्म शान देवलोक तक और तीजे देवलोक नौ ग्रीषे तके देव मनुष्य में मशून्य प्रत्यक वर्ष और कोटपूर्व में उत्पन्न होते है ऋद्धिके बीस द्वार स्वउपयोग से कहना कारण घुडकवण्ठस्य करनेवालोको बहुत ही सुगम है वास्ते यहां नहीं लिखा है नाणन्ते और गमा तथा मनके लिये प्रथम थोक हेमें वार लिल आये है। इतना ध्यान रखना कि नौमी वैगमें अवगाहाना तथा संस्थान एक मत्र धारणी है समृदयात सद्धा
किसानों के विरोध के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर से हरियाणा और पंजाब में धान खरीद शुरू करने का फैसला लिया है। हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री अश्वनी चौबे से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी दी। फैसले के बाद किसानों ने भी अपना विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया है। खट्टर ने कहा कि केंद्र सरकार ने धान की खरीद 11 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की थी। हरियाणा की मंडियों में धान आ चुका है और किसान जल्द खरीद की मांग कर रहे थे। इसलिए केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि जल्द धान की खरीद शुरू हो। केंद्र ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है। अब रविवार को हरियाणा के साथ-साथ पंजाब में भी धान की खरीद शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि किसानों की तकलीफ स्वाभाविक थी, इसलिए रविवार से खरीद का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री भी शामिल थे। सरकार के फैसले के बाद किसानों ने विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर धान खरीदी की तारीख आगे बढ़ाने के फैसले को वापस लेने की मांग की थी। इससे पहले किसानों ने फसल खरीद में देरी के विरोध में शनिवार को विधायकों-सांसदों के आवास पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पंचकूला में किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। किसान धान से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में BJP नेता ज्ञान चंद गुप्ता के घर का घेराव करने पहुंचे थे। उन्हें रोकने की कोशिश की तो वो बैरिकेड तोड़कर लगातार आगे बढ़ते रहे। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और कुछ किसानों को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। करनाल में गुस्साए किसानों ने शनिवार दोपहर 12:30 बजे CM आवास का घेराव किया। इस दौरान सुरक्षा बलों और किसानों में झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उनके खिलाफ वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसान CM आवास के सामने सड़क पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। किसानों ने दोनों राज्यों के उप मुख्यमंत्रियों के आवास का भी घेराव किया। उधर, अमृतसर में पंजाब के डिप्टी CM ओपी सोनी और जालंधर कैंट में शिक्षा और खेल मंत्री परगट सिंह के घर का घेराव किया। इस दौरान वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जब मंत्री परगट सिंह घर पर नहीं मिले तो किसान उनका घेराव करने सर्किट हाउस पहुंचे। वहां परगट सिंह की बैठक होनी थी। वहां पर भी किसानों ने रोष प्रदर्शन किया। परगट सिंह ने कहा कि धान की खरीद में देरी केंद्र सरकार कर रही है। पंजाब सरकार ने मंडियों में पूरे बंदोबस्त किए हैं और बारदाने की भी कोई कमी नहीं है। हिसार में किसानों ने डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला समेत भाजपा और जजपा के विधायकों के घरों का घेराव कर प्रदर्शन किया। फसल खरीद में देरी के विरोध में किसानों ने विधायकों के घरों पर कपास, बाजरा और धान की फसल के अवशेष फेंके। गौरतलब है कि किसान प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान की खरीद 11 अक्टूबर से करने के सरकार के फैसले से नाराज हैं। फैसले के विरोध में किसानों ने सभी विधायकों और सांसदों का घेराव करने का ऐलान किया है। सबसे पहले किसान CM मनोहर लाल के आवास के बाहर धान से भरी ट्रॉलियां लेकर पहुंचे। भाजपा विधायक असीम गोयल के घर के बाहर भी शनिवार को भारी संख्या में प्रदर्शनकारी किसान इकट्ठा हुए। हिसार में डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, राज्यमंत्री अनूप धाणक, बरवाला से विधायक जोगीराम सिहाग, हांसी से विधायक विनोद भ्याणा, भाजपा विधायक डॉ कमल गुप्ता, फतेहाबाद में विधायक दूड़ाराम, विधायक देवेंद्र बबली के घरों का घेराव किया। हांसी में तो किसानों ने विधायक विनोद भ्याणा के घर के बाहर किसान धरने पर बैठ गए हैं। फतेहाबाद में भी विधायक के घर के बाहर किसान डटे हुए हैं। हिसार में जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने कहा कि किसानों की मांग जायज है। मैं खुद चाहता हूं कि किसान अपनी मांग उठाएं। इस पर किसानों ने पूछा कि क्या वो भी उनके साथ आकर मंडी में धरना देने के लिए तैयार हैं। इस पर विधायक जोगीराम सिहाग ने किसानों से कहा कि वह तो उनको घर पर आकर चाय पीने का निमंत्रण देने आए हैं। किसान चाय पीने के लिए राजी भी हो गए लेकिन जैसे ही किसान आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आगे बढ़ने से रोक दिया। उधर जींद जिले के नरवाना में किसानों ने जजपा विधायक रामनिवास सुरजा खेड़ा के आवास के बाहर डेरा डाल दिया। किसानों ने कहा कि सरकार ने धान खरीद 1 तारीख से शुरू करनी थी लेकिन इसे स्थगित कर 11 अक्टूबर कर दिया। हरियाणा सरकार हाल ही में हुई बरसात के कारण नमी और फसल के सही से पकी न होने का हवाला दे रही है। सरकार धान में नमी मिलने पर कटौती कर सकती है लेकिन खरीद शुरू करे। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाएगी विधायक निवास पर उनका धरना जारी रहेगा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एएसपी पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उधर, करनाल में किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने CM आवास के दोनों ओर 500-500 मीटर दूर बैरिकेड्स लगाए हुए थे। पैरामिल्ट्री फोर्स तैनात की गई थी। किसानों ने एक ओर से आकर पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन किसानों को आगे बढ़ने से नहीं रोक सके। सरकार प्रदेश में 200 केंद्रों पर धान की खरीद करने की तैयारी में है। इसके लिए तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। करीब 2 लाख 90 हजार किसानों ने धान को बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। धान की खरीद पहले 1 अक्टूबर से की जानी थी, लेकिन अब 11 अक्टूबर से की जानी है। सरकार ने कॉमन धान को 1940 रुपए और ग्रेड-ए के धान के लिए 1960 रुपए समर्थन मूल्य तय किया है। भाकियू जिला महामंत्री जगदीप औलख ने कहा कि किसानों ने हर बार सरकार और प्रशासन की चेतावनी को स्वीकार किया है। अब किसानों ने सीएम आवास का घेराव किया है। आज तक सात साल में सीएम आवास का घेराव करने तो बहुत सारी यूनियन और संस्थाएं आईं, पर कोई भी घर के सामने नहीं पहुंच सका। ऐसा किसानों ने आज पहली बार करनाल के इतिहास में किया है। जब सीएम आवास के दरवाजे पर किसानों के मैट बिछे हैं। भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि धान की ट्रॉली लेकर करनाल में सीएम आवास का घेराव करने का आह्वान किया गया है। शांतिपूर्वक ढंग से प्रदर्शन करते हुए विरोध जताएंगे। उनकी मांग है कि पहले की तरह प्रति एकड़ 33 क्विंटल धान की खरीद हो। चढूनी ने कहा कि खरीद की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से शुरू करवाया जाए। जब तक खरीद नहीं होगी, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आज के घेराव के दौरान ही अन्य किसान नेताओं से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। क्योंकि सरकार ने धान की खरीद का समय 25 सितंबर से 1 अक्टूबर और 1 से 11 अक्टूबर तक बढ़ाकर किसानों के साथ नाइंसाफी की है। चढूनी ने कहा कि 15 सितंबर से किसानों की फसलें पक चुकी हैं। ऊपर से बारिश हो रही है। कुछ किसान मंडियों में अपने धान को लेकर पहुंचे हुए हैं। बारिश के कारण धान खेत और मंडियों में सड़ रहा है। उनसे किसान की बर्बादी देखी नहीं जाती। ऐसे में सरकार को रोजाना नया फरमान जारी हो रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
किसानों के विरोध के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तीन अक्टूबर से हरियाणा और पंजाब में धान खरीद शुरू करने का फैसला लिया है। हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री अश्वनी चौबे से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी दी। फैसले के बाद किसानों ने भी अपना विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया है। खट्टर ने कहा कि केंद्र सरकार ने धान की खरीद ग्यारह अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की थी। हरियाणा की मंडियों में धान आ चुका है और किसान जल्द खरीद की मांग कर रहे थे। इसलिए केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि जल्द धान की खरीद शुरू हो। केंद्र ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है। अब रविवार को हरियाणा के साथ-साथ पंजाब में भी धान की खरीद शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि किसानों की तकलीफ स्वाभाविक थी, इसलिए रविवार से खरीद का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री भी शामिल थे। सरकार के फैसले के बाद किसानों ने विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर धान खरीदी की तारीख आगे बढ़ाने के फैसले को वापस लेने की मांग की थी। इससे पहले किसानों ने फसल खरीद में देरी के विरोध में शनिवार को विधायकों-सांसदों के आवास पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पंचकूला में किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। किसान धान से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में BJP नेता ज्ञान चंद गुप्ता के घर का घेराव करने पहुंचे थे। उन्हें रोकने की कोशिश की तो वो बैरिकेड तोड़कर लगातार आगे बढ़ते रहे। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और कुछ किसानों को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। करनाल में गुस्साए किसानों ने शनिवार दोपहर बारह:तीस बजे CM आवास का घेराव किया। इस दौरान सुरक्षा बलों और किसानों में झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उनके खिलाफ वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसान CM आवास के सामने सड़क पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। किसानों ने दोनों राज्यों के उप मुख्यमंत्रियों के आवास का भी घेराव किया। उधर, अमृतसर में पंजाब के डिप्टी CM ओपी सोनी और जालंधर कैंट में शिक्षा और खेल मंत्री परगट सिंह के घर का घेराव किया। इस दौरान वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जब मंत्री परगट सिंह घर पर नहीं मिले तो किसान उनका घेराव करने सर्किट हाउस पहुंचे। वहां परगट सिंह की बैठक होनी थी। वहां पर भी किसानों ने रोष प्रदर्शन किया। परगट सिंह ने कहा कि धान की खरीद में देरी केंद्र सरकार कर रही है। पंजाब सरकार ने मंडियों में पूरे बंदोबस्त किए हैं और बारदाने की भी कोई कमी नहीं है। हिसार में किसानों ने डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला समेत भाजपा और जजपा के विधायकों के घरों का घेराव कर प्रदर्शन किया। फसल खरीद में देरी के विरोध में किसानों ने विधायकों के घरों पर कपास, बाजरा और धान की फसल के अवशेष फेंके। गौरतलब है कि किसान प्रति एकड़ पच्चीस क्विंटल धान की खरीद ग्यारह अक्टूबर से करने के सरकार के फैसले से नाराज हैं। फैसले के विरोध में किसानों ने सभी विधायकों और सांसदों का घेराव करने का ऐलान किया है। सबसे पहले किसान CM मनोहर लाल के आवास के बाहर धान से भरी ट्रॉलियां लेकर पहुंचे। भाजपा विधायक असीम गोयल के घर के बाहर भी शनिवार को भारी संख्या में प्रदर्शनकारी किसान इकट्ठा हुए। हिसार में डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, राज्यमंत्री अनूप धाणक, बरवाला से विधायक जोगीराम सिहाग, हांसी से विधायक विनोद भ्याणा, भाजपा विधायक डॉ कमल गुप्ता, फतेहाबाद में विधायक दूड़ाराम, विधायक देवेंद्र बबली के घरों का घेराव किया। हांसी में तो किसानों ने विधायक विनोद भ्याणा के घर के बाहर किसान धरने पर बैठ गए हैं। फतेहाबाद में भी विधायक के घर के बाहर किसान डटे हुए हैं। हिसार में जजपा विधायक जोगीराम सिहाग ने कहा कि किसानों की मांग जायज है। मैं खुद चाहता हूं कि किसान अपनी मांग उठाएं। इस पर किसानों ने पूछा कि क्या वो भी उनके साथ आकर मंडी में धरना देने के लिए तैयार हैं। इस पर विधायक जोगीराम सिहाग ने किसानों से कहा कि वह तो उनको घर पर आकर चाय पीने का निमंत्रण देने आए हैं। किसान चाय पीने के लिए राजी भी हो गए लेकिन जैसे ही किसान आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आगे बढ़ने से रोक दिया। उधर जींद जिले के नरवाना में किसानों ने जजपा विधायक रामनिवास सुरजा खेड़ा के आवास के बाहर डेरा डाल दिया। किसानों ने कहा कि सरकार ने धान खरीद एक तारीख से शुरू करनी थी लेकिन इसे स्थगित कर ग्यारह अक्टूबर कर दिया। हरियाणा सरकार हाल ही में हुई बरसात के कारण नमी और फसल के सही से पकी न होने का हवाला दे रही है। सरकार धान में नमी मिलने पर कटौती कर सकती है लेकिन खरीद शुरू करे। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाएगी विधायक निवास पर उनका धरना जारी रहेगा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एएसपी पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उधर, करनाल में किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने CM आवास के दोनों ओर पाँच सौ-पाँच सौ मीटर दूर बैरिकेड्स लगाए हुए थे। पैरामिल्ट्री फोर्स तैनात की गई थी। किसानों ने एक ओर से आकर पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन किसानों को आगे बढ़ने से नहीं रोक सके। सरकार प्रदेश में दो सौ केंद्रों पर धान की खरीद करने की तैयारी में है। इसके लिए तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। करीब दो लाख नब्बे हजार किसानों ने धान को बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। धान की खरीद पहले एक अक्टूबर से की जानी थी, लेकिन अब ग्यारह अक्टूबर से की जानी है। सरकार ने कॉमन धान को एक हज़ार नौ सौ चालीस रुपयापए और ग्रेड-ए के धान के लिए एक हज़ार नौ सौ साठ रुपयापए समर्थन मूल्य तय किया है। भाकियू जिला महामंत्री जगदीप औलख ने कहा कि किसानों ने हर बार सरकार और प्रशासन की चेतावनी को स्वीकार किया है। अब किसानों ने सीएम आवास का घेराव किया है। आज तक सात साल में सीएम आवास का घेराव करने तो बहुत सारी यूनियन और संस्थाएं आईं, पर कोई भी घर के सामने नहीं पहुंच सका। ऐसा किसानों ने आज पहली बार करनाल के इतिहास में किया है। जब सीएम आवास के दरवाजे पर किसानों के मैट बिछे हैं। भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि धान की ट्रॉली लेकर करनाल में सीएम आवास का घेराव करने का आह्वान किया गया है। शांतिपूर्वक ढंग से प्रदर्शन करते हुए विरोध जताएंगे। उनकी मांग है कि पहले की तरह प्रति एकड़ तैंतीस क्विंटल धान की खरीद हो। चढूनी ने कहा कि खरीद की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से शुरू करवाया जाए। जब तक खरीद नहीं होगी, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आज के घेराव के दौरान ही अन्य किसान नेताओं से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। क्योंकि सरकार ने धान की खरीद का समय पच्चीस सितंबर से एक अक्टूबर और एक से ग्यारह अक्टूबर तक बढ़ाकर किसानों के साथ नाइंसाफी की है। चढूनी ने कहा कि पंद्रह सितंबर से किसानों की फसलें पक चुकी हैं। ऊपर से बारिश हो रही है। कुछ किसान मंडियों में अपने धान को लेकर पहुंचे हुए हैं। बारिश के कारण धान खेत और मंडियों में सड़ रहा है। उनसे किसान की बर्बादी देखी नहीं जाती। ऐसे में सरकार को रोजाना नया फरमान जारी हो रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Quick links: Hill Stations Trip: घूमना किसे पसंद नहीं होता? तनाव दूर करने के लिए घूमने से बेहतर और कुछ नहीं। कई लोग फ्रेंड्स, फैमिली के साथ वीकेंड पर ट्रिप पर जाना काफी पसंद करते हैं और अगर वे नेचर लवर हैं तो हिल स्टेशन पर जाना उनकी पहली पसंद होगी। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो आप काफी खुशनसीब हैं। जी हां, दरअसल, दिल्ली और यहां से सटे शहरों के आस-पास कई ऐसे हिल स्टेशन हैं जो नेचर और सुकून दोनों के लिहाज से बेहद अच्छे हैं। ये हिल स्टेशन वीकेंड ट्रिप के लिए एकदम परफेक्ट हैं। आप यहां फैमिली, फ्रेंड्स या लव्ड वन्स के साथ जा सकते हैं साथ ही आप सोलो ट्रिप के लिए भी इन जगहों का दीदार कर सकते हैं। चलिए जानते हैं कि ये हिल स्टेशन कौन से हैं। मोरनी हिल्स हरियाणा में स्थित है। ये हिल स्टेशन फरीदाबाद और दिल्ली दोनों से काफी पास है। यहां की खूबसूरती आपका दिल जीत लेगी। मोरनी हिल्स में चारों तरफ हरियाली, एडवेंर पार्क, मोरनी किला, करोह पीक और टिक्कल लाल जैसी जगह हैं, जहां आप सुकून भरा वक्त बिता सकते हैं। चायल की खूबसूरती बेहद कमाल की है। अगर आपको शांति-सुकून चाहिए तो आपको एक बार जरूर इस जगह घूमने जाना चाहिए। चायल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित है। चायल की खास बात ये है कि ये चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां आप नेचर को बेहद नजदीक से महसूस कर पाएंगे। उत्तराखंड में स्थित मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। गर्मी के मौसम में यहां भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मसूरी में आपको सुकून के साथ-साथ हरियाली भी देखने को मिलेगी। यहां के ऊंचे पहाड़ बेहद विशाल और खूबसूरत हैं। अगर आप मसूरी जाएं तो मसूरी झील, जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, क्राइस्ट चर्च और मसूरी हेरिटेज सेंटर का दीदार करना बिल्कुल न भूलें।
Quick links: Hill Stations Trip: घूमना किसे पसंद नहीं होता? तनाव दूर करने के लिए घूमने से बेहतर और कुछ नहीं। कई लोग फ्रेंड्स, फैमिली के साथ वीकेंड पर ट्रिप पर जाना काफी पसंद करते हैं और अगर वे नेचर लवर हैं तो हिल स्टेशन पर जाना उनकी पहली पसंद होगी। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो आप काफी खुशनसीब हैं। जी हां, दरअसल, दिल्ली और यहां से सटे शहरों के आस-पास कई ऐसे हिल स्टेशन हैं जो नेचर और सुकून दोनों के लिहाज से बेहद अच्छे हैं। ये हिल स्टेशन वीकेंड ट्रिप के लिए एकदम परफेक्ट हैं। आप यहां फैमिली, फ्रेंड्स या लव्ड वन्स के साथ जा सकते हैं साथ ही आप सोलो ट्रिप के लिए भी इन जगहों का दीदार कर सकते हैं। चलिए जानते हैं कि ये हिल स्टेशन कौन से हैं। मोरनी हिल्स हरियाणा में स्थित है। ये हिल स्टेशन फरीदाबाद और दिल्ली दोनों से काफी पास है। यहां की खूबसूरती आपका दिल जीत लेगी। मोरनी हिल्स में चारों तरफ हरियाली, एडवेंर पार्क, मोरनी किला, करोह पीक और टिक्कल लाल जैसी जगह हैं, जहां आप सुकून भरा वक्त बिता सकते हैं। चायल की खूबसूरती बेहद कमाल की है। अगर आपको शांति-सुकून चाहिए तो आपको एक बार जरूर इस जगह घूमने जाना चाहिए। चायल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित है। चायल की खास बात ये है कि ये चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां आप नेचर को बेहद नजदीक से महसूस कर पाएंगे। उत्तराखंड में स्थित मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। गर्मी के मौसम में यहां भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मसूरी में आपको सुकून के साथ-साथ हरियाली भी देखने को मिलेगी। यहां के ऊंचे पहाड़ बेहद विशाल और खूबसूरत हैं। अगर आप मसूरी जाएं तो मसूरी झील, जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, क्राइस्ट चर्च और मसूरी हेरिटेज सेंटर का दीदार करना बिल्कुल न भूलें।
गुप्तकाल की ईटों से बने मंदिर कम मिलते हैं। बभनियॉंव का यह मंदिर उनमें से एक है। इसका अरघा एक वर्ग मीटर का है। गर्भगृह दो वर्ग मीटर से बड़ा है। "ज्ञानवापी मस्जिद पहले भगवान शिव का मंदिर था जिसे मुगल आक्रमणकारियों ने ध्वस्त कर मस्जिद बना दिया था, इसलिए हम हिंदुओं को उनके धार्मिक आस्था एवं राग भोग, पूजा-पाठ, दर्शन, परिक्रमा, इतिहास, अधिकारों को संरक्षित करने हेतु अनुमति दी जाए। " पीएम ने बीएचयू में एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया। 430 बेड वाला ये अस्पताल 21 महीनों में बन कर तैयार हुआ है। सीएए और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फ़ैसलों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। लम्बे समय से स्थगन का शिकार ज्ञानवापी मस्जिद मामला कोर्ट में कानूनी लड़ाई के लिए वापस आ गया है। वामपंथियों को सूजन होने के आसार क्योंकि दूसरे पक्ष की याचिका हुई खारिज। "ज्ञानवापी में सतयुग से ही भगवान विश्वेश्वर विराजमान हैं, एएसआई के सर्वे के बाद इस मामले में सच्चाई समाने आ जाएगी। परिसर के मालिक भी भगवान विश्वेश्वर ही हैं। एक मंडप को तोड़ कर औरंगज़ेब ने मस्जिद खड़ी कर दी थी। " साल 2017 में पहली बार कराची जाने के समय राशिद को अपनी कजन से प्यार हो गया और साल 2018 में जब दूसरी बार वो कराची गया तो उसकी मुलाकात ISI एजेंटों से हुई। जिसके बाद उसने बतौर एजेंट काम कर शुरू किया। BHU के कुलपति राकेश भटनागर JNU के पूर्व प्रोफ़ेसर हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि वीसी हिन्दी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। यहाँ तक कि भर्ती प्रक्रिया में वह अपने JNU के छात्रों को वरीयता दे रहे हैं। उन पर BHU का कुलपति रहते हुए अधिकांश नियुक्तियों में JNU, वामपंथ और अँग्रेजी को वरीयता देने जैसे कई गंभीर आरोप छात्रों ने पहले भी लगाए हैं। काशी विद्वत परिषद के रामनारायण द्विवेदी ने ऑपइंडिया को बताया कि परिषद की बैठक में ये प्रस्ताव रखा गया था कि सुबह की आरती और दर्शन के समय जो लोग शिवलिंग का स्पर्श दर्शन करना चाहते हैं या फिर स्पर्श कर के पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए ड्रेस कोड तय किए जाएँ। आज़मगढ़ में उपद्रव करने वाले 11 लोगों को चिह्नित कर धर-दबोचा गया। जमीयत-उल-अशरफिया के छात्रों ने उपद्रव किया था, जिसके बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की। पुलिस सोशल मीडिया पर भी पैनी नज़र रख रही है। सांसदों-विधायकों तक को भी पुलिस उठा कर ले गई।
गुप्तकाल की ईटों से बने मंदिर कम मिलते हैं। बभनियॉंव का यह मंदिर उनमें से एक है। इसका अरघा एक वर्ग मीटर का है। गर्भगृह दो वर्ग मीटर से बड़ा है। "ज्ञानवापी मस्जिद पहले भगवान शिव का मंदिर था जिसे मुगल आक्रमणकारियों ने ध्वस्त कर मस्जिद बना दिया था, इसलिए हम हिंदुओं को उनके धार्मिक आस्था एवं राग भोग, पूजा-पाठ, दर्शन, परिक्रमा, इतिहास, अधिकारों को संरक्षित करने हेतु अनुमति दी जाए। " पीएम ने बीएचयू में एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया। चार सौ तीस बेड वाला ये अस्पताल इक्कीस महीनों में बन कर तैयार हुआ है। सीएए और अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के प्रावधानों को निरस्त करने के फ़ैसलों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। लम्बे समय से स्थगन का शिकार ज्ञानवापी मस्जिद मामला कोर्ट में कानूनी लड़ाई के लिए वापस आ गया है। वामपंथियों को सूजन होने के आसार क्योंकि दूसरे पक्ष की याचिका हुई खारिज। "ज्ञानवापी में सतयुग से ही भगवान विश्वेश्वर विराजमान हैं, एएसआई के सर्वे के बाद इस मामले में सच्चाई समाने आ जाएगी। परिसर के मालिक भी भगवान विश्वेश्वर ही हैं। एक मंडप को तोड़ कर औरंगज़ेब ने मस्जिद खड़ी कर दी थी। " साल दो हज़ार सत्रह में पहली बार कराची जाने के समय राशिद को अपनी कजन से प्यार हो गया और साल दो हज़ार अट्ठारह में जब दूसरी बार वो कराची गया तो उसकी मुलाकात ISI एजेंटों से हुई। जिसके बाद उसने बतौर एजेंट काम कर शुरू किया। BHU के कुलपति राकेश भटनागर JNU के पूर्व प्रोफ़ेसर हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि वीसी हिन्दी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। यहाँ तक कि भर्ती प्रक्रिया में वह अपने JNU के छात्रों को वरीयता दे रहे हैं। उन पर BHU का कुलपति रहते हुए अधिकांश नियुक्तियों में JNU, वामपंथ और अँग्रेजी को वरीयता देने जैसे कई गंभीर आरोप छात्रों ने पहले भी लगाए हैं। काशी विद्वत परिषद के रामनारायण द्विवेदी ने ऑपइंडिया को बताया कि परिषद की बैठक में ये प्रस्ताव रखा गया था कि सुबह की आरती और दर्शन के समय जो लोग शिवलिंग का स्पर्श दर्शन करना चाहते हैं या फिर स्पर्श कर के पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए ड्रेस कोड तय किए जाएँ। आज़मगढ़ में उपद्रव करने वाले ग्यारह लोगों को चिह्नित कर धर-दबोचा गया। जमीयत-उल-अशरफिया के छात्रों ने उपद्रव किया था, जिसके बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की। पुलिस सोशल मीडिया पर भी पैनी नज़र रख रही है। सांसदों-विधायकों तक को भी पुलिस उठा कर ले गई।
सुल्तानपुर : गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. हार्दिक ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब नहीं देंगे. यह भी पढ़ें : पटेल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने सीआरपीएफ के जवानों को मिलने वाली पेंशन बंद कर दी. सीआरपीएफ के जवानों को शहीद का दर्जा नहीं मिलता. उसे अर्द्धसैनिक बल की जगह पूर्ण सैनिक बल का दर्जा मिलना चाहिये. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
सुल्तानपुर : गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. हार्दिक ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब नहीं देंगे. यह भी पढ़ें : पटेल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने सीआरपीएफ के जवानों को मिलने वाली पेंशन बंद कर दी. सीआरपीएफ के जवानों को शहीद का दर्जा नहीं मिलता. उसे अर्द्धसैनिक बल की जगह पूर्ण सैनिक बल का दर्जा मिलना चाहिये. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.