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बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक उपेंद्र पासवान के घर के समीप शुक्रवार की रात अज्ञात अपराधियों ने गोलीबारी कर दी। इस घटना में विधायक तो बाल-बाल बच गए परंतु उनसे बात कर रहे एक व्यक्ति गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की रात विधायक गढ़पुरा थाना के कुम्हारसो गांव स्थित अपने आवास के पास कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक बाइक पर सवार दो बदमाशों ने विधायक को निशाना बनाते हुए दो गोली चला दी। इस घटना में विधायक बच गए, परंतु एक व्यक्ति घायल हो गया। घायल व्यक्ति को तत्काल इलाज के लिए बेगूसराय अस्पताल भेजा गया है जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी से राष्ट्रीय जनता दल विधायक उपेंद्र पासवान के घर के समीप शुक्रवार की रात अज्ञात अपराधियों ने गोलीबारी कर दी। इस घटना में विधायक तो बाल-बाल बच गए परंतु उनसे बात कर रहे एक व्यक्ति गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की रात विधायक गढ़पुरा थाना के कुम्हारसो गांव स्थित अपने आवास के पास कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक बाइक पर सवार दो बदमाशों ने विधायक को निशाना बनाते हुए दो गोली चला दी। इस घटना में विधायक बच गए, परंतु एक व्यक्ति घायल हो गया। घायल व्यक्ति को तत्काल इलाज के लिए बेगूसराय अस्पताल भेजा गया है जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
(स) एवं प्रकार का दर्जी होता है जा शरीर के ऊवह-खाबड भवयवों की नजीक जावर, घयपूवक परीक्षा करता है और प्रत्येक माय म बठने लायक सुन्दर कुत्ता तयार कर देता है और एक दूसरे तरह का दर्जी होता है, जो कम परिश्रम और ज्या क्ल्पना करक एक लम्बा चौडा भून तैयार कर देता है, जो प्रत्येक आदमी को ढक सकता है । कामायनी का रवि दूसरी श्रेणी का है।" (ग) हिन्दी म बुद्ध ऐसी मी रचनाए हुई है जिनमे जीवन-वृत्त तो पूण लिया गया है, पर महाकाय की भाति वस्तु का विस्तार नहीं दिखाई देता । ऐमी रचना में जीवन का कोई एक हो पक्ष विस्तार से प्रदर्शित किया जाता है । इहें 'एकाथकाव्य' कहना अधिक उपयुक्त होगा। २ प्रिय - प्रवास, साकेत, वैदेही- वनवास कामायनी आदि इसी प्रकार की रचनाए ३ ● (घ) "रीतिकाल म भनेक विस्तृत काव्य लिखे गये, किन्तु उनका उद्देश्य प्रशस्ति मात्र था और उनमे से कोई भी महाकाव्य की गरिमा प्राप्त न कर सका । वर्तमान शताब्दी के हि दो महाकाव्यो म कतिपय उत्कृष्ट रचनाश्रा की गणना होती है जसे- प्रिय प्रवास, साकेत, कामायनी, कृष्णायन उमिला महाकाव्य इत्यादि । इन सभी रचनामा की निजी विशेषताएं हैं यद्यपि इनमें से अधिकाश प्राचीन स्वीकृत मानण्ड से खरे नहीं निक्लेंगे । लक्षण-प्रथो मे काव्य ( एकाथ काव्य ) नामक एक भे* बताया गया है जो महाकाव्य मोर खण्डकाव्य से मिन है । १० विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने एकाथकाव्य का उल्लेख किया है जिसका विस्तार महाकाव्य से अधिक होता है किंतु जिसने महाकाव्य की गरिमा नहीं होती । प्रियप्रवास, माक्त श्रादि को हम इस कोटि म रख सकते हैं । '४ इसके अतिरिक्त कतिपय विद्वाना का इसके महाकाव्यत्व के विषय में मौन साधन भी सामान्य पाठकों के लिए ही नहीं, जिज्ञासु मध्येताम्रो के लिए भी एक समस्या उत्पन्न करता है। उदाहरणाय प्राचाय रामचंद्र शुक्ल को लिया जा मक्ता है। उन्होंने इसे प्रवचाय तो अवश्य कहा है पर इसे प्रबकाय की किस कॉंटिम रखा जा सकता है, इस विषय में उन्होंने कोई घोषणा नहीं की। वे निरखते हैं ● किसी एक विशाल भावना को रूप देने की ओर भी मत मे प्रसाद जी ने ध्यान दिया, जिसका परिणाम है 'कामायनी' । इसमें उन्होने अपने प्रिय मान दवाद' और उनकी कविता (मानव) पृ० २२६ १- आवाय हजारीमा से उद्धृत । भाषा विभाषा नियमात् काय सग समुत्थितम् । एकाथ प्रवर्ण पद्य संधिसामग्र वजितम् । ( सा० दपरा ) ३- डा० दशरथ भोझा समीक्षा शास्त्र तृतीय स० पृ० ४५ ॥ Yडा० राममवध द्विवेदो, साहित्य रूप ( प्र० स० ) १० २३२-२३३ ।
एवं प्रकार का दर्जी होता है जा शरीर के ऊवह-खाबड भवयवों की नजीक जावर, घयपूवक परीक्षा करता है और प्रत्येक माय म बठने लायक सुन्दर कुत्ता तयार कर देता है और एक दूसरे तरह का दर्जी होता है, जो कम परिश्रम और ज्या क्ल्पना करक एक लम्बा चौडा भून तैयार कर देता है, जो प्रत्येक आदमी को ढक सकता है । कामायनी का रवि दूसरी श्रेणी का है।" हिन्दी म बुद्ध ऐसी मी रचनाए हुई है जिनमे जीवन-वृत्त तो पूण लिया गया है, पर महाकाय की भाति वस्तु का विस्तार नहीं दिखाई देता । ऐमी रचना में जीवन का कोई एक हो पक्ष विस्तार से प्रदर्शित किया जाता है । इहें 'एकाथकाव्य' कहना अधिक उपयुक्त होगा। दो प्रिय - प्रवास, साकेत, वैदेही- वनवास कामायनी आदि इसी प्रकार की रचनाए तीन ● "रीतिकाल म भनेक विस्तृत काव्य लिखे गये, किन्तु उनका उद्देश्य प्रशस्ति मात्र था और उनमे से कोई भी महाकाव्य की गरिमा प्राप्त न कर सका । वर्तमान शताब्दी के हि दो महाकाव्यो म कतिपय उत्कृष्ट रचनाश्रा की गणना होती है जसे- प्रिय प्रवास, साकेत, कामायनी, कृष्णायन उमिला महाकाव्य इत्यादि । इन सभी रचनामा की निजी विशेषताएं हैं यद्यपि इनमें से अधिकाश प्राचीन स्वीकृत मानण्ड से खरे नहीं निक्लेंगे । लक्षण-प्रथो मे काव्य नामक एक भे* बताया गया है जो महाकाव्य मोर खण्डकाव्य से मिन है । दस विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने एकाथकाव्य का उल्लेख किया है जिसका विस्तार महाकाव्य से अधिक होता है किंतु जिसने महाकाव्य की गरिमा नहीं होती । प्रियप्रवास, माक्त श्रादि को हम इस कोटि म रख सकते हैं । 'चार इसके अतिरिक्त कतिपय विद्वाना का इसके महाकाव्यत्व के विषय में मौन साधन भी सामान्य पाठकों के लिए ही नहीं, जिज्ञासु मध्येताम्रो के लिए भी एक समस्या उत्पन्न करता है। उदाहरणाय प्राचाय रामचंद्र शुक्ल को लिया जा मक्ता है। उन्होंने इसे प्रवचाय तो अवश्य कहा है पर इसे प्रबकाय की किस कॉंटिम रखा जा सकता है, इस विषय में उन्होंने कोई घोषणा नहीं की। वे निरखते हैं ● किसी एक विशाल भावना को रूप देने की ओर भी मत मे प्रसाद जी ने ध्यान दिया, जिसका परिणाम है 'कामायनी' । इसमें उन्होने अपने प्रिय मान दवाद' और उनकी कविता पृशून्य दो सौ छब्बीस एक- आवाय हजारीमा से उद्धृत । भाषा विभाषा नियमात् काय सग समुत्थितम् । एकाथ प्रवर्ण पद्य संधिसामग्र वजितम् । तीन- डाशून्य दशरथ भोझा समीक्षा शास्त्र तृतीय सशून्य पृशून्य पैंतालीस ॥ Yडाशून्य राममवध द्विवेदो, साहित्य रूप दस दो सौ बत्तीस-दो सौ तैंतीस ।
बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत शेखपुर समोधा ग्राम सभा के गजियापुर मजरे में कच्चा घर गिरने से महिला घायल हो गई। विदित हो कि पीड़ित हरिप्रसाद पुत्र देवतादीन (उम्र लगभग 55 वर्ष) ने बताया कि वह अपनी पत्नी, तीन बेटियों और दो बेटों के साथ मजदूरी करता है। शनिवार रात अपने दोनों बेटों के साथ विकास क्षेत्र के मदाखेड़ा में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में कारीगरों के साथ मजदूरी करने गया था। उसी समय मकान गिरने की जानकारी हुई। वह आनन-फानन में अपने घर पहुंचा और देखा तो उसकी पत्नी बुरी तरह जख्मी हो गई है। हरि प्रसाद ने यह भी बताया कि मैंने कई बार आवास के लिए संबंधित ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारी को अपनी समस्या से अवगत कराया इसके बाद भी मकान नहीं मिला। ग्रामीणों की मदद से घायल हरि प्रसाद की पत्नी को सीएचसी बछरावां पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत शेखपुर समोधा ग्राम सभा के गजियापुर मजरे में कच्चा घर गिरने से महिला घायल हो गई। विदित हो कि पीड़ित हरिप्रसाद पुत्र देवतादीन ने बताया कि वह अपनी पत्नी, तीन बेटियों और दो बेटों के साथ मजदूरी करता है। शनिवार रात अपने दोनों बेटों के साथ विकास क्षेत्र के मदाखेड़ा में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में कारीगरों के साथ मजदूरी करने गया था। उसी समय मकान गिरने की जानकारी हुई। वह आनन-फानन में अपने घर पहुंचा और देखा तो उसकी पत्नी बुरी तरह जख्मी हो गई है। हरि प्रसाद ने यह भी बताया कि मैंने कई बार आवास के लिए संबंधित ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारी को अपनी समस्या से अवगत कराया इसके बाद भी मकान नहीं मिला। ग्रामीणों की मदद से घायल हरि प्रसाद की पत्नी को सीएचसी बछरावां पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इकरार उल हसन (Iqrar Ul Hassan) के खिलाफ ट्विटर पर अभियान छेड़ा गया और लोगों ने उनसे माफी मांगने को कहा. लेकिन शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) सहित कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया है. पाकिस्तान (Pakistan) के रहने वाले एक न्यूज एंकर इकरार उल हसन (Iqrar Ul Hassan) इस समय अपने ही देशवासियों के निशाने पर आ गए हैं. इसके पीछे की वजह ये है कि उन्होंने कई मामलों में पाकिस्तान की तुलना भारत से ही और लगातार ट्वीट करते हुए भारत की खूब तारीफ भी की है. उन्होंने जहां अपने एक ट्वीट में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता बताया है तो वहीं एक अन्य ट्वीट में भारत की परिवहन व्यवस्था की तारीफ की है. सर-ए-आम नामक टेलीविजन शो को होस्ट करने वाले हसन को उनके ही देश के लोग देशद्रोही कह रहे हैं. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के सार्वजिनक वाहनों की तस्वीर भी ट्विटर पर शेयर की है. जिसमें पाकिस्तान का वाहन बेहद ही जर्जर अवस्था में दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही उन्होंने अपने अन्य ट्वीट में पाकिस्तान के पासपोर्ट और मुद्रा को लेकर भी अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मुद्रा की कीमत कई दक्षिण एशियाई देशों से भी कम हो गई है. साथ ही पाकिस्तानी पासपोर्ट को लेकर कहा कि इसकी उतनी ही अहमियत है जितनी सोमालिया या अफगानिस्तान के पासपोर्ट की होती है. इकरार उल हसन ने बांग्लादेश की मुद्रा की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा कि बांग्लादेश के 1 रुपये की कीमत पाकिस्तान का 1.90 रुपये है. जबकि 1 भारतीय रुपये की कीमत पाकिस्तान का 2.20 रुपये है. अपने ट्वीट में वह लिखते हैं, 'खुदा हमें पाकिस्तान को सही अर्थ में जिंदाबाद पाकिस्तान बनाने की क्षमता दे.' हसन के इन ट्वीट्स के बाद लोगों ने उनसे माफी मांगने को कहा है. इन लोगों ने कहा कि हसन ने पड़ोसी देश भारत की तारीफ कर देश के खिलाफ बोला है. कई लोगों ने उन्हें 'गद्दार' तक कहा है. बहुत से लोग हसन के समर्थन में भी उतरे हैं. पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर ने लिखा है, 'किसी को कोसने से पहले ये देख लेना चाहिए कि वो कह क्या रहा है. हमारे प्यारे देश पाकिस्तान के प्रति इकरार उल हसन के प्यार और समर्पण पर शक करने की कोई बात ही नहीं है.' एक अन्य क्रिकेटर कामरान अकमल ने कहा, 'हम महज पोस्ट से देश के प्रति उनके प्यार और समर्पण को जज नहीं कर सकते. वो उनकी अपनी मर्जी है कि वह अपने देश के लोगों और अपने खुद के देश के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था चाहते हैं. इसमें कुछ गलत नहीं है.' इनके अलावा गायक अली जफर और अभिनेता इमरान अशरफ ने भी हसन का समर्थन किया है.
इकरार उल हसन के खिलाफ ट्विटर पर अभियान छेड़ा गया और लोगों ने उनसे माफी मांगने को कहा. लेकिन शोएब अख्तर सहित कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया है. पाकिस्तान के रहने वाले एक न्यूज एंकर इकरार उल हसन इस समय अपने ही देशवासियों के निशाने पर आ गए हैं. इसके पीछे की वजह ये है कि उन्होंने कई मामलों में पाकिस्तान की तुलना भारत से ही और लगातार ट्वीट करते हुए भारत की खूब तारीफ भी की है. उन्होंने जहां अपने एक ट्वीट में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता बताया है तो वहीं एक अन्य ट्वीट में भारत की परिवहन व्यवस्था की तारीफ की है. सर-ए-आम नामक टेलीविजन शो को होस्ट करने वाले हसन को उनके ही देश के लोग देशद्रोही कह रहे हैं. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के सार्वजिनक वाहनों की तस्वीर भी ट्विटर पर शेयर की है. जिसमें पाकिस्तान का वाहन बेहद ही जर्जर अवस्था में दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही उन्होंने अपने अन्य ट्वीट में पाकिस्तान के पासपोर्ट और मुद्रा को लेकर भी अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मुद्रा की कीमत कई दक्षिण एशियाई देशों से भी कम हो गई है. साथ ही पाकिस्तानी पासपोर्ट को लेकर कहा कि इसकी उतनी ही अहमियत है जितनी सोमालिया या अफगानिस्तान के पासपोर्ट की होती है. इकरार उल हसन ने बांग्लादेश की मुद्रा की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा कि बांग्लादेश के एक रुपयापये की कीमत पाकिस्तान का एक दशमलव नब्बे रुपयापये है. जबकि एक भारतीय रुपये की कीमत पाकिस्तान का दो दशमलव बीस रुपयापये है. अपने ट्वीट में वह लिखते हैं, 'खुदा हमें पाकिस्तान को सही अर्थ में जिंदाबाद पाकिस्तान बनाने की क्षमता दे.' हसन के इन ट्वीट्स के बाद लोगों ने उनसे माफी मांगने को कहा है. इन लोगों ने कहा कि हसन ने पड़ोसी देश भारत की तारीफ कर देश के खिलाफ बोला है. कई लोगों ने उन्हें 'गद्दार' तक कहा है. बहुत से लोग हसन के समर्थन में भी उतरे हैं. पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर ने लिखा है, 'किसी को कोसने से पहले ये देख लेना चाहिए कि वो कह क्या रहा है. हमारे प्यारे देश पाकिस्तान के प्रति इकरार उल हसन के प्यार और समर्पण पर शक करने की कोई बात ही नहीं है.' एक अन्य क्रिकेटर कामरान अकमल ने कहा, 'हम महज पोस्ट से देश के प्रति उनके प्यार और समर्पण को जज नहीं कर सकते. वो उनकी अपनी मर्जी है कि वह अपने देश के लोगों और अपने खुद के देश के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था चाहते हैं. इसमें कुछ गलत नहीं है.' इनके अलावा गायक अली जफर और अभिनेता इमरान अशरफ ने भी हसन का समर्थन किया है.
काम किया हो । मैं इतना निष्ठुर नहीं हूँ कि एक अपराध के लिए गदमी को नीची निगाह से देसू । रा. -नहीं, अवश्य नहीं, टर्वाल्ड । नमर- बहुत से प्रादमियों का पुनरुद्धार हो सकता है, यदि वे अपने अपसे । स्वीकार करें तथा उसकी सजा ग्रहण करें । रा- अपराध ? नमर - किन्तु कोगस्टाड ने ऐसा नहीं किया। उसने चालाकियों से से काम लिया, इसी से उसका पतन हुश्रा । ।रा - क्या तुम ऐसा समझते हो ? उमर - जरा सोचो, विवेक पर इतना बड़ा वोझ उठाते हुए एक आदमी रेगा, वह हमेशा डींग मारेगा तथा ढोंग रचेगा। अपनी स्त्री तथा बच्चों ने भी वह एक चेहरा लगाये रहेगा नोरा, यह बच्चों के हक में सबसे होता है । क्यों ? लमर क्योंकि झूठों का ऐसा वातावरण घर के तमाम वायु मण्डल पाक्त कर देता है । लड़के जो श्वास लेते हैं, उसमें बुराई के कीटाण हते है । लमर के घर में एक डाक्टर रेक प्राते जाते हैं, जो तपेदिक मे पीड़ित हैं, तल करके वे निश्चित मृत्यु की ओर अग्रसर हो रहे है। रैक का पिता रित्र था, उसको सजा रेक को मिल रही है। वे नोरा से कह रहे हैं स्थत लोग बहुत जल्दी भुला दिये जाते है । रा-क्या ग्राप ऐसा समझते है ? क - लोग नया वन्धन पैदा कर लेते हैं, और फिर रा- कौन नये बन्धन पैदा करते हैं ? क - जब में मर जाऊँगा तो तुम और हेलमर नये बन्धन पैदा कर लोगो । तुम उस समय को अगवानी कर रही हो । कल वह श्रीमती लिंडेन यहाँ र रही थीं ? तेरा - प्रच्छा तो ग्राप ख्रिस्टीना से ईर्ष्या कर रहे है ? क--प्रवश्य, मेरे बाद वही इस घर में मेरी जाँ-नशीन होगी, जब मे चला , तब शायद यही श्रीरत...... तेरा मन में कल्पना करती है कि इस रैक से इपये लेकर उस दुष्ट के दे दिए जायें । तदनुसार वह प्रस्ताव भी करती है - डॉक्टर रंक प्राप
काम किया हो । मैं इतना निष्ठुर नहीं हूँ कि एक अपराध के लिए गदमी को नीची निगाह से देसू । रा. -नहीं, अवश्य नहीं, टर्वाल्ड । नमर- बहुत से प्रादमियों का पुनरुद्धार हो सकता है, यदि वे अपने अपसे । स्वीकार करें तथा उसकी सजा ग्रहण करें । रा- अपराध ? नमर - किन्तु कोगस्टाड ने ऐसा नहीं किया। उसने चालाकियों से से काम लिया, इसी से उसका पतन हुश्रा । ।रा - क्या तुम ऐसा समझते हो ? उमर - जरा सोचो, विवेक पर इतना बड़ा वोझ उठाते हुए एक आदमी रेगा, वह हमेशा डींग मारेगा तथा ढोंग रचेगा। अपनी स्त्री तथा बच्चों ने भी वह एक चेहरा लगाये रहेगा नोरा, यह बच्चों के हक में सबसे होता है । क्यों ? लमर क्योंकि झूठों का ऐसा वातावरण घर के तमाम वायु मण्डल पाक्त कर देता है । लड़के जो श्वास लेते हैं, उसमें बुराई के कीटाण हते है । लमर के घर में एक डाक्टर रेक प्राते जाते हैं, जो तपेदिक मे पीड़ित हैं, तल करके वे निश्चित मृत्यु की ओर अग्रसर हो रहे है। रैक का पिता रित्र था, उसको सजा रेक को मिल रही है। वे नोरा से कह रहे हैं स्थत लोग बहुत जल्दी भुला दिये जाते है । रा-क्या ग्राप ऐसा समझते है ? क - लोग नया वन्धन पैदा कर लेते हैं, और फिर रा- कौन नये बन्धन पैदा करते हैं ? क - जब में मर जाऊँगा तो तुम और हेलमर नये बन्धन पैदा कर लोगो । तुम उस समय को अगवानी कर रही हो । कल वह श्रीमती लिंडेन यहाँ र रही थीं ? तेरा - प्रच्छा तो ग्राप ख्रिस्टीना से ईर्ष्या कर रहे है ? क--प्रवश्य, मेरे बाद वही इस घर में मेरी जाँ-नशीन होगी, जब मे चला , तब शायद यही श्रीरत...... तेरा मन में कल्पना करती है कि इस रैक से इपये लेकर उस दुष्ट के दे दिए जायें । तदनुसार वह प्रस्ताव भी करती है - डॉक्टर रंक प्राप
दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन ने मिलिशिया (Militias) द्वारा चलाए जा रहे जहाजों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है. फिलीपींस ने इस पर आपत्ति जताई है. दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में 'ड्रैगन' की दादागिरी जारी है. फिलीपींस (Philippines) ने कहा है कि दक्षिण चीन सागर में मिलिशिया (Militias) द्वारा चलाए जा रहे सैकड़ों चीनी जहाज बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में फैल गए हैं. इस तरह चीन ने अपने जहाजों के बेड़े को इस क्षेत्र से हटाने की फिलीपींस की मांग को ठुकरा दिया है. फिलीपींस ने व्हिटसन रीफ (Whitsun Reef) में अपने 200 मील के विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीनी नावों की मौजूदगी को झुंड और धमकी करार दिया है. कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और अन्य देशों ने इस क्षेत्र में की जा रही गतिविधियों को लेकर चीन के इरादे पर संदेह जताया है. इस पर बौखलाए चीन ने इन देशों को फटकार लगाई. चीनी राजनयिकों ने कहा है कि नौकाएं अशांत समुद्र से पनाह ले रही हैं और उनमें कोई मिलिशिया सवार नहीं है. दक्षिण चीन सागर पर फिलीपींस के टास्क फोर्स ने एक बयान जारी कर चीनी समुद्री मिलिशिया की निरंतर गैरकानूनी उपस्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की. इस समुद्री बेड़े को अभी तक यहां से हटाया नहीं गया है. टास्क फोर्स ने कहा, दक्षिण चीन सागर में चीन की तथाकथित निर्विवाद एकीकृत संप्रभुता के दावे को न तो फिलीपींस और न ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी कभी स्वीकार करेगी. इसने चीन से कहा कि वह अपने जहाजों को जल्द से जल्द यहां से हटाए. 2016 में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के सत्ता संभालने के बाद से चीन से फिलीपींस की दोस्ती बढ़ी है. इसे लेकर विपक्षी नेताओं का कहना है कि वह देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं. यही वजह है कि दुतेर्ते की सरकार पर दबाव है कि वह चीन के प्रति सख्त रवैया दिखाए. फिलीपींस की टास्क फोर्स ने अपने खुफिया सूत्रों के जरिए इकट्ठा की गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि 44 जहाज अभी भी व्हिटसन रीफ में थे और लगभग 200 अन्य स्प्रैटली द्वीपों के चारों ओर फैले हुए थे. इसके अलावा चीन के सैन्यकृत मानव निर्मित द्वीपों के पास भी जहाज मौजूद हैं. यहां पर चीन की चार नावें देखी गई हैं. राजधानी मनीला में चीन के दूतावास ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
दक्षिण चीन सागर में चीन ने मिलिशिया द्वारा चलाए जा रहे जहाजों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है. फिलीपींस ने इस पर आपत्ति जताई है. दक्षिण चीन सागर में 'ड्रैगन' की दादागिरी जारी है. फिलीपींस ने कहा है कि दक्षिण चीन सागर में मिलिशिया द्वारा चलाए जा रहे सैकड़ों चीनी जहाज बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में फैल गए हैं. इस तरह चीन ने अपने जहाजों के बेड़े को इस क्षेत्र से हटाने की फिलीपींस की मांग को ठुकरा दिया है. फिलीपींस ने व्हिटसन रीफ में अपने दो सौ मील के विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीनी नावों की मौजूदगी को झुंड और धमकी करार दिया है. कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और अन्य देशों ने इस क्षेत्र में की जा रही गतिविधियों को लेकर चीन के इरादे पर संदेह जताया है. इस पर बौखलाए चीन ने इन देशों को फटकार लगाई. चीनी राजनयिकों ने कहा है कि नौकाएं अशांत समुद्र से पनाह ले रही हैं और उनमें कोई मिलिशिया सवार नहीं है. दक्षिण चीन सागर पर फिलीपींस के टास्क फोर्स ने एक बयान जारी कर चीनी समुद्री मिलिशिया की निरंतर गैरकानूनी उपस्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की. इस समुद्री बेड़े को अभी तक यहां से हटाया नहीं गया है. टास्क फोर्स ने कहा, दक्षिण चीन सागर में चीन की तथाकथित निर्विवाद एकीकृत संप्रभुता के दावे को न तो फिलीपींस और न ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी कभी स्वीकार करेगी. इसने चीन से कहा कि वह अपने जहाजों को जल्द से जल्द यहां से हटाए. दो हज़ार सोलह में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के सत्ता संभालने के बाद से चीन से फिलीपींस की दोस्ती बढ़ी है. इसे लेकर विपक्षी नेताओं का कहना है कि वह देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं. यही वजह है कि दुतेर्ते की सरकार पर दबाव है कि वह चीन के प्रति सख्त रवैया दिखाए. फिलीपींस की टास्क फोर्स ने अपने खुफिया सूत्रों के जरिए इकट्ठा की गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि चौंतालीस जहाज अभी भी व्हिटसन रीफ में थे और लगभग दो सौ अन्य स्प्रैटली द्वीपों के चारों ओर फैले हुए थे. इसके अलावा चीन के सैन्यकृत मानव निर्मित द्वीपों के पास भी जहाज मौजूद हैं. यहां पर चीन की चार नावें देखी गई हैं. राजधानी मनीला में चीन के दूतावास ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. 4 - गत रोज आदिवासी बहुल मेलघाट में एक छोटे बच्चे के पेट पर लोहे की गर्म सलाख से दाग देते हुए उसका इलाज करने का अघोरी व अमानवीय मामला सामने आया है. जिसमें इस बच्चे की स्थिति काफी गंभीर हो गयी है. ऐसे में इस तरह का अघोरी इलाज करनेवाले लोगों पर कार्रवाई करने के साथ ही भविष्य में ऐसे मामले दुबारा घटित न हो, इस हेतु मेलघाट में लगातार जनजागृति कार्यक्रम चलाया जाये. इस आशय का निर्देश राज्य की महिला व बालकल्याण मंत्री तथा जिला पालकमंत्री यशोमति ठाकुर ने स्वास्थ्य प्रशासन को दिये है. बता दें कि, चिखलदरा तहसील अंतर्गत खटकाली गांव निवासी राजरत्न जामुनकर नामक तीन वर्षीय बच्चा विगत एक सप्ताह से बीमार था और उसके माता-पिता ने धामणगांव गढी निवासी निजी डॉक्टर के यहां उसका इलाज करवाया. किंतु इसके बावजूद स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर बच्चे के माता-पिता उसे भूमका यानी तांत्रिक के पास ले गये और इस भूमका ने इलाज के नाम पर इस बच्चे के पेट पर गर्म लोहे से दाग दिया. जिससे बच्चे के पेट पर गंभीर जख्म होने के साथ ही उसकी स्थिति और भी अधिक बिगड गई तथा इस बच्चे को जिला सामान्य अस्पताल के अतिदक्षता विभाग में इलाज हेतु भरती कराया गया. इस घटना की जानकारी मिलते ही पालकमंत्री यशोमति ठाकुर तुरंत इर्विन अस्पताल पहुंची और उन्होंने बच्चे का हालचाल जानने के साथ ही उसके माता-पिता व डॉक्टरों से भी संवाद साधा. इस समय पालकमंत्री यशोमति ठाकुर ने कहा कि, इस घटना हेतु जवाबदार व्यक्तियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाये. साथ ही मेलघाट के आदिवासियों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाये, ताकि वे अंधश्रध्दा के मकडजाल से बाहर निकले. इसके अलावा मेलघाट के विभिन्न गांवों में रहनेवाले भूमका बाबाओं के खिलाफ भी प्रभावी अभियान चलाया जाये.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. चार - गत रोज आदिवासी बहुल मेलघाट में एक छोटे बच्चे के पेट पर लोहे की गर्म सलाख से दाग देते हुए उसका इलाज करने का अघोरी व अमानवीय मामला सामने आया है. जिसमें इस बच्चे की स्थिति काफी गंभीर हो गयी है. ऐसे में इस तरह का अघोरी इलाज करनेवाले लोगों पर कार्रवाई करने के साथ ही भविष्य में ऐसे मामले दुबारा घटित न हो, इस हेतु मेलघाट में लगातार जनजागृति कार्यक्रम चलाया जाये. इस आशय का निर्देश राज्य की महिला व बालकल्याण मंत्री तथा जिला पालकमंत्री यशोमति ठाकुर ने स्वास्थ्य प्रशासन को दिये है. बता दें कि, चिखलदरा तहसील अंतर्गत खटकाली गांव निवासी राजरत्न जामुनकर नामक तीन वर्षीय बच्चा विगत एक सप्ताह से बीमार था और उसके माता-पिता ने धामणगांव गढी निवासी निजी डॉक्टर के यहां उसका इलाज करवाया. किंतु इसके बावजूद स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर बच्चे के माता-पिता उसे भूमका यानी तांत्रिक के पास ले गये और इस भूमका ने इलाज के नाम पर इस बच्चे के पेट पर गर्म लोहे से दाग दिया. जिससे बच्चे के पेट पर गंभीर जख्म होने के साथ ही उसकी स्थिति और भी अधिक बिगड गई तथा इस बच्चे को जिला सामान्य अस्पताल के अतिदक्षता विभाग में इलाज हेतु भरती कराया गया. इस घटना की जानकारी मिलते ही पालकमंत्री यशोमति ठाकुर तुरंत इर्विन अस्पताल पहुंची और उन्होंने बच्चे का हालचाल जानने के साथ ही उसके माता-पिता व डॉक्टरों से भी संवाद साधा. इस समय पालकमंत्री यशोमति ठाकुर ने कहा कि, इस घटना हेतु जवाबदार व्यक्तियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाये. साथ ही मेलघाट के आदिवासियों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाये, ताकि वे अंधश्रध्दा के मकडजाल से बाहर निकले. इसके अलावा मेलघाट के विभिन्न गांवों में रहनेवाले भूमका बाबाओं के खिलाफ भी प्रभावी अभियान चलाया जाये.
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS)) नई दिल्लीः इस साल सामान्य मॉनसून रहने से बढ़ती महंगाई को झेल रहे लोगों को हल्की राहत मिल सकती है। अच्छी बारिश का असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ता है, जिससे कुछ खास खाद्य पदार्थो के दाम घट सकते हैं। चावल, बाजरा, रागी, अरहर, मूंगफली, कपास, मक्का, सोयाबीन आदि खरीफ फसलें हैं और इनका उत्पादन अधिकतर अच्छे मानसून पर निर्भर करता है। इनकी बुवाई जून-जुलाई से शुरू होती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उपजे आपूर्ति संकट से वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं, ईंधन, उर्वरक और अन्य कमोडिटी के दामों में आग लगी हुई है। ऐसे में मानसून के दौरान अच्छी बारिश खरीफ फसलों के उत्पादन को बढ़ा सकती है, जिससे महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकता। भारतीय मौसम विभाग के गुरुवार को और निजी एजेंसी स्काईमेट ने मंगलवार को दक्षिण पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान जारी किया। दोनों ने इस साल मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग अपना पहला पूर्वानुमान अप्रैल में और दूसरा पूर्वानुमान मई के अंतिम सप्ताह में जारी करता है। मौसम विभाग के मुताबिक, देश में 96 प्रतिशत से 104 प्रतिशत बारिश का अनुमान है, जो सामान्य है। बारिश का 96 प्रतिशत से कम होना सामान्य से कम और 104 प्रतिशत से अधिक होना सामान्य से अधिक होना माना जाता है। इस साल मार्च में खुदरा महंगाई दर करीब सात प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे थे कि आरबीआई इस पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। मॉनसून के पूर्वानुमान ने लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को सुधरने का मौका दिया है। अच्छी बारिश न सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए जरूरी है, बल्कि इससे उद्योग जगत में भी बहार आती है। अच्छी बारिश के कारण कृषि मांग में तेजी आती है, जिससे उद्योग जगत को गति मिलती है। देश में पिछले तीन साल से अच्छी बारिश हो रही है। एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि सामान्य मानसून खाद्य पदार्थो की बढ़ती कीमत पर लगाम लगााएगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थो के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। गत माह खुदरा महंगाई दर 7. 68 प्रतिशत की तेजी से बढ़ी, जबकि फरवरी में इसकी दर 5. 85 प्रतिशत और मार्च 2021 में 4. 87 प्रतिशत थी। एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य विश्लेषण अधिकारी सुमन चौधुरी ने कहा कि अगर मानसून का पूर्वानुमान सही साबित होता है तो लगातार चौथे साल देश में मानसून अनुकूल रहेगा, जो कृषि क्षेत्र के लिये अच्छी बात है। जून-जुलाई के शुरुआती समय में अच्छी बारिश से फलों और सब्जियों के दाम में कमी आएगी। इसका खाद्य कीमतों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि वित्तवर्ष 22 के अंत के समय खाद्य पदार्थो की कीमतें फिर बढ़ने लगी थीं। इसी कारण मार्च में महंगाई दर 16 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में तेजी से कृषि क्षेत्र की लागत बढ़ी रहेगी, लेकिन अच्छे मानसून से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च के विश्लेषक पारस जसराई ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में कृषि क्षेत्र की संभावनायें बेहतर हैं। हालांकि डीजल और उर्वरक के दाम में तेजी से कृषि क्षेत्र की विकास की गति बाधित हो सकती है। उन्होंने चालू वित्तवर्ष में कृषि क्षेत्र के तीन प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान जताया। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सामान्य मानसून का पूर्वानुमान और जलाशयों में पानी के पर्याप्त भंडार खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सकारात्मक है, लेकिन इससे उन वस्तुओं जैसे खाद्य तेलों आदि के दाम नियंत्रित नहीं किए जा सकते, जो देश में खाद्य पदार्थो की महंगाई को बढ़ा रहे हैं। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
) नई दिल्लीः इस साल सामान्य मॉनसून रहने से बढ़ती महंगाई को झेल रहे लोगों को हल्की राहत मिल सकती है। अच्छी बारिश का असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ता है, जिससे कुछ खास खाद्य पदार्थो के दाम घट सकते हैं। चावल, बाजरा, रागी, अरहर, मूंगफली, कपास, मक्का, सोयाबीन आदि खरीफ फसलें हैं और इनका उत्पादन अधिकतर अच्छे मानसून पर निर्भर करता है। इनकी बुवाई जून-जुलाई से शुरू होती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उपजे आपूर्ति संकट से वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं, ईंधन, उर्वरक और अन्य कमोडिटी के दामों में आग लगी हुई है। ऐसे में मानसून के दौरान अच्छी बारिश खरीफ फसलों के उत्पादन को बढ़ा सकती है, जिससे महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकता। भारतीय मौसम विभाग के गुरुवार को और निजी एजेंसी स्काईमेट ने मंगलवार को दक्षिण पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान जारी किया। दोनों ने इस साल मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग अपना पहला पूर्वानुमान अप्रैल में और दूसरा पूर्वानुमान मई के अंतिम सप्ताह में जारी करता है। मौसम विभाग के मुताबिक, देश में छियानवे प्रतिशत से एक सौ चार प्रतिशत बारिश का अनुमान है, जो सामान्य है। बारिश का छियानवे प्रतिशत से कम होना सामान्य से कम और एक सौ चार प्रतिशत से अधिक होना सामान्य से अधिक होना माना जाता है। इस साल मार्च में खुदरा महंगाई दर करीब सात प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे थे कि आरबीआई इस पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। मॉनसून के पूर्वानुमान ने लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को सुधरने का मौका दिया है। अच्छी बारिश न सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए जरूरी है, बल्कि इससे उद्योग जगत में भी बहार आती है। अच्छी बारिश के कारण कृषि मांग में तेजी आती है, जिससे उद्योग जगत को गति मिलती है। देश में पिछले तीन साल से अच्छी बारिश हो रही है। एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि सामान्य मानसून खाद्य पदार्थो की बढ़ती कीमत पर लगाम लगााएगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थो के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। गत माह खुदरा महंगाई दर सात. अड़सठ प्रतिशत की तेजी से बढ़ी, जबकि फरवरी में इसकी दर पाँच. पचासी प्रतिशत और मार्च दो हज़ार इक्कीस में चार. सत्तासी प्रतिशत थी। एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य विश्लेषण अधिकारी सुमन चौधुरी ने कहा कि अगर मानसून का पूर्वानुमान सही साबित होता है तो लगातार चौथे साल देश में मानसून अनुकूल रहेगा, जो कृषि क्षेत्र के लिये अच्छी बात है। जून-जुलाई के शुरुआती समय में अच्छी बारिश से फलों और सब्जियों के दाम में कमी आएगी। इसका खाद्य कीमतों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि वित्तवर्ष बाईस के अंत के समय खाद्य पदार्थो की कीमतें फिर बढ़ने लगी थीं। इसी कारण मार्च में महंगाई दर सोलह माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में तेजी से कृषि क्षेत्र की लागत बढ़ी रहेगी, लेकिन अच्छे मानसून से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च के विश्लेषक पारस जसराई ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में कृषि क्षेत्र की संभावनायें बेहतर हैं। हालांकि डीजल और उर्वरक के दाम में तेजी से कृषि क्षेत्र की विकास की गति बाधित हो सकती है। उन्होंने चालू वित्तवर्ष में कृषि क्षेत्र के तीन प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान जताया। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सामान्य मानसून का पूर्वानुमान और जलाशयों में पानी के पर्याप्त भंडार खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सकारात्मक है, लेकिन इससे उन वस्तुओं जैसे खाद्य तेलों आदि के दाम नियंत्रित नहीं किए जा सकते, जो देश में खाद्य पदार्थो की महंगाई को बढ़ा रहे हैं। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
साल 2022 के 365 दिनों में चंद्रपुर की जनता के लिए सिर्फ 29 दिन ही प्रदूषण मुक्त रहे हैं। तो 336 दिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और महाराष्ट्र प्रदूषण बोर्ड द्वारा प्रतिदिन 24 घंटे की जाने वाली वायु गुणवत्ता की निगरानी से ये आंकड़े सामने आए हैं। इस बीच साफ है कि साल 2021 के मुकाबले साल 2022 में प्रदूषण बढ़ा है। 2021 में 365 दिनों में से कुल 234 दिन प्रदूषित और 102 दिन स्वस्थ रहे, जबकि चंद्रपुर में वर्ष 2022 में 365 दिन 336 दिन प्रदूषित और केवल 29 दिन स्वस्थ रहे। 164 दिन मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में, 150 दिन मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में, 20 दिन अति प्रदूषित की श्रेणी में और दो दिन हानिकारक प्रदूषण की श्रेणी में हैं। शहर में प्रदूषण की कोई खतरनाक श्रेणी नहीं बताई गई है। चंद्रपुर जिले के साथ ही शहर व औद्योगिक क्षेत्र खुटाला में दो स्थानों पर लगातार वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से वायु प्रदूषण पर नजर रखी जा रही है।उक्त आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सिटी सेंटर के हैं। हालांकि सुरेश चोपाने ने कहा कि यह सरकारी तंत्र द्वारा लिया गया रिकॉर्ड है,लेकिन कई जगहों पर प्रदूषण इससे भी ज्यादा है। पर्यावरण विशेषज्ञ और ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. चंद्रपुर के मुताबिक जिले के चार औद्योगिक क्षेत्रों में घुग्गस और राजुरा में प्रदूषण अधिक है। चंद्रपुर जिले में सतत विकास के लिए प्रो. सुरेश चोपने ने कहा कि फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई के गर्मी के महीनों में भी अधिक प्रदूषण पाया गया। फरवरी माह के 28 दिनों में से 28 दिन प्रदूषित होते हैं। मार्च में 31 में से 31 दिन, अप्रैल में 30 में से 30 दिन और मई में 31 में से 31 दिन। नतीजतन, गर्मियों में कुल 120 दिनों का प्रदूषण होता है। प्रशासन को न केवल एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए बल्कि जमीन पर तत्काल प्रदूषण निवारण योजना लागू करनी चाहिए। धनंजय मुंडे की कार का एक्सीडेंट, उनकी छाती पर लगी चोट, खतरे से बाहर!
साल दो हज़ार बाईस के तीन सौ पैंसठ दिनों में चंद्रपुर की जनता के लिए सिर्फ उनतीस दिन ही प्रदूषण मुक्त रहे हैं। तो तीन सौ छत्तीस दिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और महाराष्ट्र प्रदूषण बोर्ड द्वारा प्रतिदिन चौबीस घंटाटे की जाने वाली वायु गुणवत्ता की निगरानी से ये आंकड़े सामने आए हैं। इस बीच साफ है कि साल दो हज़ार इक्कीस के मुकाबले साल दो हज़ार बाईस में प्रदूषण बढ़ा है। दो हज़ार इक्कीस में तीन सौ पैंसठ दिनों में से कुल दो सौ चौंतीस दिन प्रदूषित और एक सौ दो दिन स्वस्थ रहे, जबकि चंद्रपुर में वर्ष दो हज़ार बाईस में तीन सौ पैंसठ दिन तीन सौ छत्तीस दिन प्रदूषित और केवल उनतीस दिन स्वस्थ रहे। एक सौ चौंसठ दिन मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में, एक सौ पचास दिन मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में, बीस दिन अति प्रदूषित की श्रेणी में और दो दिन हानिकारक प्रदूषण की श्रेणी में हैं। शहर में प्रदूषण की कोई खतरनाक श्रेणी नहीं बताई गई है। चंद्रपुर जिले के साथ ही शहर व औद्योगिक क्षेत्र खुटाला में दो स्थानों पर लगातार वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से वायु प्रदूषण पर नजर रखी जा रही है।उक्त आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सिटी सेंटर के हैं। हालांकि सुरेश चोपाने ने कहा कि यह सरकारी तंत्र द्वारा लिया गया रिकॉर्ड है,लेकिन कई जगहों पर प्रदूषण इससे भी ज्यादा है। पर्यावरण विशेषज्ञ और ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. चंद्रपुर के मुताबिक जिले के चार औद्योगिक क्षेत्रों में घुग्गस और राजुरा में प्रदूषण अधिक है। चंद्रपुर जिले में सतत विकास के लिए प्रो. सुरेश चोपने ने कहा कि फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई के गर्मी के महीनों में भी अधिक प्रदूषण पाया गया। फरवरी माह के अट्ठाईस दिनों में से अट्ठाईस दिन प्रदूषित होते हैं। मार्च में इकतीस में से इकतीस दिन, अप्रैल में तीस में से तीस दिन और मई में इकतीस में से इकतीस दिन। नतीजतन, गर्मियों में कुल एक सौ बीस दिनों का प्रदूषण होता है। प्रशासन को न केवल एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए बल्कि जमीन पर तत्काल प्रदूषण निवारण योजना लागू करनी चाहिए। धनंजय मुंडे की कार का एक्सीडेंट, उनकी छाती पर लगी चोट, खतरे से बाहर!
(इंडिया न्यूज़): बॉलीवुड की धक-धक गर्ल कौन हैं? शायद आज इस सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं रह गई है. एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित अपनी जबरदस्त एक्टिंग और अदाओं से दुनियाभर के लोगों को दीवाना बना चुकी हैं. पिछले कुछ वक्त से एक्ट्रेस को कम ही प्रोजेक्ट्स में देखा जा रहा है. हालांकि वह अपने लुक्स की वजह से काफी चर्चा में रहने लगी हैं. अब फिर से माधुरी का नया फोटोशूट काफी वायरल हो रहा है. माधुरी अपने दुनियाभर के फैंस के साथ जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहने लगी हैं. ऐसे में वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की झलक फैंस को दिखाती रहती हैं. अब माधुरी ने फिर से अपने लेटेस्ट फोटोशूट से लोगों का दिल जीत लिया है. इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीरों में एक्ट्रेस एथनिक लुक में दिखाई दे रही हैं. यहां एक्ट्रेस सफेद रंग की साड़ी पहने नजर आ रही हैं. इसके साथ माधुरी ने स्टाइलिश ब्लाउज कैरी किया है. उन्होंने अपने इस लुक को न्यूड मेकअप और ओपन हेयर स्टाइल से कंप्लीट किया है. साथ ही उन्होंने कानों में हैंगिंग इयररिंग्स पेयर किए हैं. माधुरी इस लुक में बहुत खूबसूरत दिख रही हैं. माधुरी की अदाओं ने खींचा ध्यान अब फैंस के बीच उनके इस एथनिक लुक को काफी पसंद किया जा रहा है. लोग एक्ट्रेस की तारीफें करते थक रहे हैं. माधुरी का नया लुक तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कुछ मिनटों में ही माधुरी की तस्वीरों पर हजारों लाइक्स आ गए हैं. माधुरी दीक्षित के वर्क फ्रंट की बात करें तो पिछली बार उन्हें फिल्म 'मजा मा' में देखा गया था. इस फिल्म में पहली बार एक्ट्रेस को एक लेस्बियन महिला का किरदार निभाते हुए देखा गया था. इन दिनों माधुरी डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा 10' में जज की कुर्सी संभालते हुए देखा जा रहा है. शो में उनके साथ नोरा फतेही और करण जौहर भी जज की भूमिका में नजर आ रहे हैं.
: बॉलीवुड की धक-धक गर्ल कौन हैं? शायद आज इस सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं रह गई है. एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित अपनी जबरदस्त एक्टिंग और अदाओं से दुनियाभर के लोगों को दीवाना बना चुकी हैं. पिछले कुछ वक्त से एक्ट्रेस को कम ही प्रोजेक्ट्स में देखा जा रहा है. हालांकि वह अपने लुक्स की वजह से काफी चर्चा में रहने लगी हैं. अब फिर से माधुरी का नया फोटोशूट काफी वायरल हो रहा है. माधुरी अपने दुनियाभर के फैंस के साथ जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहने लगी हैं. ऐसे में वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की झलक फैंस को दिखाती रहती हैं. अब माधुरी ने फिर से अपने लेटेस्ट फोटोशूट से लोगों का दिल जीत लिया है. इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीरों में एक्ट्रेस एथनिक लुक में दिखाई दे रही हैं. यहां एक्ट्रेस सफेद रंग की साड़ी पहने नजर आ रही हैं. इसके साथ माधुरी ने स्टाइलिश ब्लाउज कैरी किया है. उन्होंने अपने इस लुक को न्यूड मेकअप और ओपन हेयर स्टाइल से कंप्लीट किया है. साथ ही उन्होंने कानों में हैंगिंग इयररिंग्स पेयर किए हैं. माधुरी इस लुक में बहुत खूबसूरत दिख रही हैं. माधुरी की अदाओं ने खींचा ध्यान अब फैंस के बीच उनके इस एथनिक लुक को काफी पसंद किया जा रहा है. लोग एक्ट्रेस की तारीफें करते थक रहे हैं. माधुरी का नया लुक तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कुछ मिनटों में ही माधुरी की तस्वीरों पर हजारों लाइक्स आ गए हैं. माधुरी दीक्षित के वर्क फ्रंट की बात करें तो पिछली बार उन्हें फिल्म 'मजा मा' में देखा गया था. इस फिल्म में पहली बार एक्ट्रेस को एक लेस्बियन महिला का किरदार निभाते हुए देखा गया था. इन दिनों माधुरी डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा दस' में जज की कुर्सी संभालते हुए देखा जा रहा है. शो में उनके साथ नोरा फतेही और करण जौहर भी जज की भूमिका में नजर आ रहे हैं.
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की। इसके द्वारा मरीज और डॉक्टर अपने रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि यह मिशन ऐतिहासिक है और इसके तहत हर नागरिक के पास एक हेल्थ आईडी होगी। उन्होंने कहा कि देखने में यह कार्ड आधार कार्ड ही जैसा होगा,लेकिन पूरी तरह यह डिजिटल होगा। क्रांतिकारी परिवर्तनः इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि बीते सात वर्षों में, देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का जो अभियान चल रहा है, वो आज से एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। आज एक ऐसे मिशन की शुरुआत हो रही है, जिसमें भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की ताकत है। पीएम नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया अभियान बारे में बताते हुए कहा कि इसने देश के सामान्य नागरिक की ताकत बढ़ा दी है। आज हमारे देश के पास 130 करोड़ आधार नंबर, 118 करोड़ मोबाइल यूजर, 80 करोड़ इंटरनेट यूजर, 43 करोड़ जनधन बैंक खाते हैं। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं है। आज राशन से लेकर प्रशासन तक सब डिजिटल हो गया है। पीएम मोदी ने कहा कि आरोग्य सेतु ऐप से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिली, इसके साथ ही भारत सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन दे रहा है। अबतक 90 करोड़ वैक्सीन लग पाई हैं और इसमें को-विन का बहुत बड़ा रोल है। फाइल से मिलेगा छुटकारः https://healthid. ndhm. gov. in/register पर खुद के रिकॉर्ड्स रजिस्टर करा कर भी आप अपनी हेल्थ आईडी बना सकते हैं। यूनिक हेल्थ कार्ड बन जाने के बाद मरीज को डॉक्टर से दिखाने के लिए फाइल ले जाने से छुटकार मिलेगा। डॉक्टर या अस्पताल रोगी का यूनिक हेल्थ आईडी देखकर उसका पूरा डेटा निकालेंगे और सभी बातें जान सकेंगे। इसी आधार पर आगे का इलाज शुरू हो सकेगा। यह कार्ड ये भी बताएगा कि उस व्यक्ति को किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। जानकारी के अनुसार अब जिस भी व्यक्ति का हेल्थ कार्ड बनेगा उससे मोबाईल आधार कॉर्ड का नंबर लिया जायेगा।
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की। इसके द्वारा मरीज और डॉक्टर अपने रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि यह मिशन ऐतिहासिक है और इसके तहत हर नागरिक के पास एक हेल्थ आईडी होगी। उन्होंने कहा कि देखने में यह कार्ड आधार कार्ड ही जैसा होगा,लेकिन पूरी तरह यह डिजिटल होगा। क्रांतिकारी परिवर्तनः इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि बीते सात वर्षों में, देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का जो अभियान चल रहा है, वो आज से एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। आज एक ऐसे मिशन की शुरुआत हो रही है, जिसमें भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की ताकत है। पीएम नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया अभियान बारे में बताते हुए कहा कि इसने देश के सामान्य नागरिक की ताकत बढ़ा दी है। आज हमारे देश के पास एक सौ तीस करोड़ आधार नंबर, एक सौ अट्ठारह करोड़ मोबाइल यूजर, अस्सी करोड़ इंटरनेट यूजर, तैंतालीस करोड़ जनधन बैंक खाते हैं। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं है। आज राशन से लेकर प्रशासन तक सब डिजिटल हो गया है। पीएम मोदी ने कहा कि आरोग्य सेतु ऐप से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिली, इसके साथ ही भारत सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन दे रहा है। अबतक नब्बे करोड़ वैक्सीन लग पाई हैं और इसमें को-विन का बहुत बड़ा रोल है। फाइल से मिलेगा छुटकारः https://healthid. ndhm. gov. in/register पर खुद के रिकॉर्ड्स रजिस्टर करा कर भी आप अपनी हेल्थ आईडी बना सकते हैं। यूनिक हेल्थ कार्ड बन जाने के बाद मरीज को डॉक्टर से दिखाने के लिए फाइल ले जाने से छुटकार मिलेगा। डॉक्टर या अस्पताल रोगी का यूनिक हेल्थ आईडी देखकर उसका पूरा डेटा निकालेंगे और सभी बातें जान सकेंगे। इसी आधार पर आगे का इलाज शुरू हो सकेगा। यह कार्ड ये भी बताएगा कि उस व्यक्ति को किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। जानकारी के अनुसार अब जिस भी व्यक्ति का हेल्थ कार्ड बनेगा उससे मोबाईल आधार कॉर्ड का नंबर लिया जायेगा।
कैथल पुलिस को मिली शिकायत में बताया कि कुरुक्षेत्र के गांव निवासी अजरानी निवासी सुनीता और उसके पति सरदूल ने उसकी पत्नी सुदेश से रिश्ता जाेड़ कर दस लाख रुपये ठगे हैं। सुनीता का उनके घर पर आना जाना था। कैथल, जागरण संवाददाता। कैथल में एक महिला से ननद-भाभी का रिश्ता बनाकर उसके पति से दस लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। नानकपुरी कालोनी निवासी सतीश कुमार ने सिटी थाना में शिकायत दी है। शिकायत में बताया कि कुरुक्षेत्र के गांव निवासी अजरानी निवासी सुनीता और उसके पति सरदूल ने उसकी पत्नी सुदेश से रिश्ता जाेड़ कर दस लाख रुपये ठगे हैं। सुनीता का उनके घर पर आना जाना था। एक दिन आरोपित महिला उसकी पत्नी को बोली कि उसका इस दुनिया में कोई नहीं है और ना ही कोई भाई है। उसका पति भी कोई काम नहीं करता है। ऐसे में उसे तो मरना ही पड़ेगा। आरोपिता ने उसकी पत्नी को भावुक करके बातों में उलझा लिया और उससे मुंह बोली भाभी का रिश्ता बना लिया। कुछ दिन बाद ही वह उनके घर आकर रोने लगी और बोली उसके पति को काम शुरू करने के लिए दो लाख रुपये की जरूरत है। उसने 13 जनवरी 2020 को सुनीता को दो लाख रुपये दे दिए। पांच फरवरी को 50 हजार रुपये ले गई। कुछ दिन बाद महिला का पति सरदूल आया और बोला कि उसे अपने गांव की जमीन की लिमिट बनवानी है। उसके लिए उसे पैसे भरने पड़ेंगे। 15 जून को उसने आरोपित को ढाई लाख रुपये दे दिए। एक सितंबर 2021 को महिला आई और बोली की उनके खेत की लिमिट नहीं हुई है। उसकी मां के नाम कैथल बुध कुंड के पास 208 वर्ग गज का प्लाट है। वह इस प्लाट को बेचना चाहती है और उसकी रजिस्ट्री उनके नाम करवा देगी। उसने दो फरवरी 2022 को अपने भाई से पांच लाख रुपये उधार लेकर आरोपितों को दे दिए। कुछ दिन बाद आरोपितों ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया। उसे बाद में पता चला कि दोनों आरोपित अपने गांव अजरानी वापस चले गए हैं। वह कुछ लोगों को साथ लेकर आरोपितों के घर पहुंची तो वहां उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया। आरोपित महिला ने धमकी दी कि उनकी प्रशासन में अच्छी जान पहचान है। अगर उसे परेशान किया तो किसी झूठे केस में फंसवा देगी। आरोपित सरदूल ने जेब से देसी कट्टा निकाल कर उस पर तान दिया और बोला कि हमने तो कई लोगों को ऐसे ही ठगा है। दोबारा पैसे मांगने आए तो जान से मार देंगे। जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर विजय कुमार ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपित महिला सुनीता और उसके पति सरदूल पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैथल पुलिस को मिली शिकायत में बताया कि कुरुक्षेत्र के गांव निवासी अजरानी निवासी सुनीता और उसके पति सरदूल ने उसकी पत्नी सुदेश से रिश्ता जाेड़ कर दस लाख रुपये ठगे हैं। सुनीता का उनके घर पर आना जाना था। कैथल, जागरण संवाददाता। कैथल में एक महिला से ननद-भाभी का रिश्ता बनाकर उसके पति से दस लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। नानकपुरी कालोनी निवासी सतीश कुमार ने सिटी थाना में शिकायत दी है। शिकायत में बताया कि कुरुक्षेत्र के गांव निवासी अजरानी निवासी सुनीता और उसके पति सरदूल ने उसकी पत्नी सुदेश से रिश्ता जाेड़ कर दस लाख रुपये ठगे हैं। सुनीता का उनके घर पर आना जाना था। एक दिन आरोपित महिला उसकी पत्नी को बोली कि उसका इस दुनिया में कोई नहीं है और ना ही कोई भाई है। उसका पति भी कोई काम नहीं करता है। ऐसे में उसे तो मरना ही पड़ेगा। आरोपिता ने उसकी पत्नी को भावुक करके बातों में उलझा लिया और उससे मुंह बोली भाभी का रिश्ता बना लिया। कुछ दिन बाद ही वह उनके घर आकर रोने लगी और बोली उसके पति को काम शुरू करने के लिए दो लाख रुपये की जरूरत है। उसने तेरह जनवरी दो हज़ार बीस को सुनीता को दो लाख रुपये दे दिए। पांच फरवरी को पचास हजार रुपये ले गई। कुछ दिन बाद महिला का पति सरदूल आया और बोला कि उसे अपने गांव की जमीन की लिमिट बनवानी है। उसके लिए उसे पैसे भरने पड़ेंगे। पंद्रह जून को उसने आरोपित को ढाई लाख रुपये दे दिए। एक सितंबर दो हज़ार इक्कीस को महिला आई और बोली की उनके खेत की लिमिट नहीं हुई है। उसकी मां के नाम कैथल बुध कुंड के पास दो सौ आठ वर्ग गज का प्लाट है। वह इस प्लाट को बेचना चाहती है और उसकी रजिस्ट्री उनके नाम करवा देगी। उसने दो फरवरी दो हज़ार बाईस को अपने भाई से पांच लाख रुपये उधार लेकर आरोपितों को दे दिए। कुछ दिन बाद आरोपितों ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया। उसे बाद में पता चला कि दोनों आरोपित अपने गांव अजरानी वापस चले गए हैं। वह कुछ लोगों को साथ लेकर आरोपितों के घर पहुंची तो वहां उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया। आरोपित महिला ने धमकी दी कि उनकी प्रशासन में अच्छी जान पहचान है। अगर उसे परेशान किया तो किसी झूठे केस में फंसवा देगी। आरोपित सरदूल ने जेब से देसी कट्टा निकाल कर उस पर तान दिया और बोला कि हमने तो कई लोगों को ऐसे ही ठगा है। दोबारा पैसे मांगने आए तो जान से मार देंगे। जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर विजय कुमार ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपित महिला सुनीता और उसके पति सरदूल पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
द्रौपदी ~ ( सहसोत्याय । ) कहण संभावेमि अज्जवि चिदासमीवम् । ( कथं न संभावयाम्यद्यापि चितासमीपम् । ) युधिष्ठिरः -- कः कोऽत्र भोः । सनिपङ्गं धनुरुपतय । कथं न क रिजनः । भवतु । वाहुयुद्धेन दुरात्मान गाढमालिङ्ग ज्वलनमभिपातयामि । ( परिकरं वनाति । कंचुकी - देवि पाण्डुस्तुषे, संयम्यन्तामिदानों नयनपथावरोधिनीं दुःशासनावकृष्टा' मूर्वजाः । अस्तमिता सम्प्रति प्रतीकाराशा । द्रुतं चितासमीप सम्भावय । युधिष्ठिरः- कृष्णे, न खल्वनिहते तस्मिन्दुरात्मनि दुर्योधनहतके संहर्तव्याः केशाः । भीमलेनः - पाञ्चालिन खलु मयि जीवति संहर्तव्या दुःशासनविलुलिता वेणिरात्मपाणिस्याम् । तिष्ठतु तिष्ठतु । स्वयमेवाहं संहरामि । सनिषङ्गम् - सतूणीरम्, ज्वलनम् अग्निम्, परिकरः =गात्रिकाबन्ध । संवम्यन्ताम् वध्यन्ताम्, नयनोपरोधिन. = नत्राच्छादिनः दु शासनात्रकृष्टाः = दुःशासनेनाकृष्टाः मूर्द्धजाः = केशाः । कुतः स्वहस्तेनैव संयम्यन्तामित्याह मस्तमिति । प्रतीकाराशा = शत्रुकृतपराभवनिवारणतृष्णा, सम्प्रति, अस्नम् = विनाशम, सम्भावय - प्रापय, आत्मानमिति शेषः । अनिहते = अमारिते, दुर्योधनहनके दुष्टदुर्योधने, संहर्तव्याः = वन्यनीयाः । मधि = भोमे, दु.शासनविलुलिता = दुःशासन सञ्चालिता वेणिः आत्मपाणिभ्याम् = स्वहस्ताभ्याम् । द्रौपदी-(एकाएक उठकर ) अब भी चिता के समीप क्यों नहीं पहुंच रहा हूँ ? युधिष्ठिर -कौन है कोई यहाँ है ? तृणार के साथ मेरा धनुष ला दे । क्यों कोई मृत्यु नहीं है । अच्छा, बाहुयुद्ध से गाढ़ आन करके हाथ-पैर तोड़कर निता को जलनी हुई आग में झोंक दूंगा। (फेंटा बाँधते हैं ) कंचुकी ~ महारानी पाण्डु की पतोहू ! नेत्रों की दृष्टि के बाधक केशों को, जो दुरशासन के द्वारा खींचे गये है, बाँध डालिए । अब बदला चुकने की आशा जाती रही । शघ्र हो चिता के समीप गमन कीजिए । युधिष्ठिरं - द्रौपदी ! उस दुरात्मा दुर्योधन के संहार हुए बिना केशों को न बाँधिए । भीमसेन~-पात्रालपुत्रि ! मेरे जीवित रहते हुए दुरशासन के द्वारा विगाड़ी हुई वो को अपने हाथ से न वाँधिए । ठहरिए, ठहरिए ! मैं स्वयं ही सुधारता हूँ ।
द्रौपदी ~ कहण संभावेमि अज्जवि चिदासमीवम् । युधिष्ठिरः -- कः कोऽत्र भोः । सनिपङ्गं धनुरुपतय । कथं न क रिजनः । भवतु । वाहुयुद्धेन दुरात्मान गाढमालिङ्ग ज्वलनमभिपातयामि । अब भी चिता के समीप क्यों नहीं पहुंच रहा हूँ ? युधिष्ठिर -कौन है कोई यहाँ है ? तृणार के साथ मेरा धनुष ला दे । क्यों कोई मृत्यु नहीं है । अच्छा, बाहुयुद्ध से गाढ़ आन करके हाथ-पैर तोड़कर निता को जलनी हुई आग में झोंक दूंगा। कंचुकी ~ महारानी पाण्डु की पतोहू ! नेत्रों की दृष्टि के बाधक केशों को, जो दुरशासन के द्वारा खींचे गये है, बाँध डालिए । अब बदला चुकने की आशा जाती रही । शघ्र हो चिता के समीप गमन कीजिए । युधिष्ठिरं - द्रौपदी ! उस दुरात्मा दुर्योधन के संहार हुए बिना केशों को न बाँधिए । भीमसेन~-पात्रालपुत्रि ! मेरे जीवित रहते हुए दुरशासन के द्वारा विगाड़ी हुई वो को अपने हाथ से न वाँधिए । ठहरिए, ठहरिए ! मैं स्वयं ही सुधारता हूँ ।
Near Earth Asteroid: उल्कापिंड हमेशा से एक खतरा रहा है। उल्कापिंड ही था जिसने डायनासोर को खत्म कर दिया। पृथ्वी के करीब से सोमवार को दो उल्कापिंड गुजरने वाले है। हालांकि इस उल्कापिंड से हमें कोई खतरा नहीं है। ये उल्कापिंड पृथ्वी से 50 लाख किमी की दूरी तक हो सकते हैं।
Near Earth Asteroid: उल्कापिंड हमेशा से एक खतरा रहा है। उल्कापिंड ही था जिसने डायनासोर को खत्म कर दिया। पृथ्वी के करीब से सोमवार को दो उल्कापिंड गुजरने वाले है। हालांकि इस उल्कापिंड से हमें कोई खतरा नहीं है। ये उल्कापिंड पृथ्वी से पचास लाख किमी की दूरी तक हो सकते हैं।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आज केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(CBSE) ने 12 वी के परिणाम घोषित कर दिये हैं। जिसमें हंसिका शुक्ला(Hansika shukla) और करिश्माअरोड़ा( karishma arora) ने टॉप किया है। इसके अलावा कुल 83. 4 प्रतिशत छात्रों को सफलता और मिली है । दरअसल यह रिजल्ट(result) अचानक आये थे जिसका अनुमान छात्र और अभिवावक दोनों को ही नहीं था। जिस लिहाज से छात्र परिणामों को लेकर संतुष्ट दिखे। रिजल्ज आने का बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गयी थी। जिसमें कुछ छात्र सोशल मीडिया(social media) में अपने परिणामों को लेकर काफी खुश नजर आये तो वही कुछ छात्र थोड़े नाराज भी नजर आ रहे थे मगर इन सबसे अलग सोशल मीडिया पर ऐसे छात्रों की भी भरमार देखने को मिली जो हर जगह मजे ढूढ़ लेते हैं । ऐसे छात्रों की प्रतिक्रियां देख आप अपनी हंसी नहीं रोक पायेंगे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आज केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारह वी के परिणाम घोषित कर दिये हैं। जिसमें हंसिका शुक्ला और करिश्माअरोड़ा ने टॉप किया है। इसके अलावा कुल तिरासी. चार प्रतिशत छात्रों को सफलता और मिली है । दरअसल यह रिजल्ट अचानक आये थे जिसका अनुमान छात्र और अभिवावक दोनों को ही नहीं था। जिस लिहाज से छात्र परिणामों को लेकर संतुष्ट दिखे। रिजल्ज आने का बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गयी थी। जिसमें कुछ छात्र सोशल मीडिया में अपने परिणामों को लेकर काफी खुश नजर आये तो वही कुछ छात्र थोड़े नाराज भी नजर आ रहे थे मगर इन सबसे अलग सोशल मीडिया पर ऐसे छात्रों की भी भरमार देखने को मिली जो हर जगह मजे ढूढ़ लेते हैं । ऐसे छात्रों की प्रतिक्रियां देख आप अपनी हंसी नहीं रोक पायेंगे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक युवक को इसलिए जिंदा जला कर मार दिया गया क्योंकि उसने 10 रुपए देने से मना कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसके दोस्तों ने कथित तौर पर उससे 10 रुपए मांगे थे जो उसने देने से इनकार कर दिया था इसके बाद दोनों ने मिलकर उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया। ये घटना उज्जैन के नानाखेड़ा इलाके के 22 फरवरी की है। आग से जलने के बाद वह गंभीर रुप से घायल हो गया था जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां 6 दिनों तक उसका इलाज चलता रहा। अंत में शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया। पीड़ित की पहचान गणेश के तौर पर हुई है। गणेश को इलाज के लिए उज्जैन के बाद इंदौर ट्रांसफर कर दिया गया था जहां पर उसकी आखिरकार मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी सूरज और शुभम ने गणेश से 10 रुपए मांगे थे। जब गणेश ने उन्हें पैसे देने से इनकार कर दिए तो दोनों में से एक आरोपी ने उस पर पेट्रोल छिड़क कर उसपर माचिस की तीली जलाकर फेंक दी। इसके बाद वह पल भर में ही गंभीर रुप से जल गया। कुछ ही सेकेंड में गणेश आग की लपटों से जूझने लगा। ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसमें दोनों आरोपी शुभम और सूरज को आग लगाते हुए देखा जा सकता है। फुटेज के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों के खिलाफ ढेर सारे सूबूत हैं सीसीटीवी फुटेज से पता चलते हैं।
नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक युवक को इसलिए जिंदा जला कर मार दिया गया क्योंकि उसने दस रुपयापए देने से मना कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसके दोस्तों ने कथित तौर पर उससे दस रुपयापए मांगे थे जो उसने देने से इनकार कर दिया था इसके बाद दोनों ने मिलकर उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया। ये घटना उज्जैन के नानाखेड़ा इलाके के बाईस फरवरी की है। आग से जलने के बाद वह गंभीर रुप से घायल हो गया था जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां छः दिनों तक उसका इलाज चलता रहा। अंत में शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया। पीड़ित की पहचान गणेश के तौर पर हुई है। गणेश को इलाज के लिए उज्जैन के बाद इंदौर ट्रांसफर कर दिया गया था जहां पर उसकी आखिरकार मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी सूरज और शुभम ने गणेश से दस रुपयापए मांगे थे। जब गणेश ने उन्हें पैसे देने से इनकार कर दिए तो दोनों में से एक आरोपी ने उस पर पेट्रोल छिड़क कर उसपर माचिस की तीली जलाकर फेंक दी। इसके बाद वह पल भर में ही गंभीर रुप से जल गया। कुछ ही सेकेंड में गणेश आग की लपटों से जूझने लगा। ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसमें दोनों आरोपी शुभम और सूरज को आग लगाते हुए देखा जा सकता है। फुटेज के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों के खिलाफ ढेर सारे सूबूत हैं सीसीटीवी फुटेज से पता चलते हैं।
और कमजोरियों को उसने थोड़े ही काल में अच्छी तरह समझ लिया था । संचालकों के प्रति उसकी धृष्टता की कई एक इतिहासकारों ने निन्दा की है। महत्त्वाकांक्षा की मात्रा उसमें कितनी अधिक थी, यह उसके कार्यों ही से प्रकट है । परन्तु इसमें व्यक्तिगत लाभ का उस पर दोष नहीं लगाया जा सकता। हाँ, अपने भाइयों की उसको अवश्य बड़ी चिन्ता रहती थी । यश और मान की उसमें एक बड़ी भारी कमज़ोरी थी। अपने पद का ध्यान रखते हुए उपाधियों पर सन्तोष प्रकट करना उसके लिए शोभा न देता था । वह अपने को एक व्यापारिक संस्था का सेवक न समझता था । उसको भारतवर्ष के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य के शासक होने का अभिमान था । अपने बोल-चाल, रहन-सहन, सभी में वह इस बात के दिखलाने की चेष्टा करता था । तड़क-भड़क को वह बहुत पसन्द करता था । उसको लोग "सुलतानी अँगरेज़" कहा करते थे । साहित्य से उसको बहुत प्रेम था । अँगरेज़ी भाषा लिखने में वह बड़ा निपुण था । अपनी बात के समर्थन में वह दलोलों की भरमार करता था । बोलने-चालने में उसका मुकाबला करना सहज न था । व्यंग और हास्य की भी उसमें कमी न थी । स्वास्थ्य ठीक न रहने पर भी वह काम से कभी घबड़ाता न था। उसका कहना था कि काम करने में मुझे कुछ कठिनाई अवश्य होती है, पर ये कठिनाइयां ही मेरे प्रतिदिन का भोजन हैं, जिनसे मेरे शरीर का पालन होता है । " उसका ध्यान सभी थोर रहता था। भारतवर्ष के पशु-पक्षियों का अध्ययन करने के लिए उसने डाक्टर चुकानन को नियुक्त किया था। उसी की सहायता के लिए बारिकपुर में पशुओं का धजाकलकत्ता नगर की शोभा बढ़ाने के लिए वेलेजली शहर की सफाई और सड़कों के प्रवन्ध के लिए उसने एक योजना तैयार की थी। कलकत्ता का विशाल और सुन्दर 'सरकारी भवन? नमी. का बनवाया हुआ है । इंग्लैंड जाकर वह बहुत दिनों तक जीवित रहा। उस पर भो अभियोग चलाने का प्रयल किया गया, पर सफ१ हटन, वेलेजली, १० १९६ ।
और कमजोरियों को उसने थोड़े ही काल में अच्छी तरह समझ लिया था । संचालकों के प्रति उसकी धृष्टता की कई एक इतिहासकारों ने निन्दा की है। महत्त्वाकांक्षा की मात्रा उसमें कितनी अधिक थी, यह उसके कार्यों ही से प्रकट है । परन्तु इसमें व्यक्तिगत लाभ का उस पर दोष नहीं लगाया जा सकता। हाँ, अपने भाइयों की उसको अवश्य बड़ी चिन्ता रहती थी । यश और मान की उसमें एक बड़ी भारी कमज़ोरी थी। अपने पद का ध्यान रखते हुए उपाधियों पर सन्तोष प्रकट करना उसके लिए शोभा न देता था । वह अपने को एक व्यापारिक संस्था का सेवक न समझता था । उसको भारतवर्ष के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य के शासक होने का अभिमान था । अपने बोल-चाल, रहन-सहन, सभी में वह इस बात के दिखलाने की चेष्टा करता था । तड़क-भड़क को वह बहुत पसन्द करता था । उसको लोग "सुलतानी अँगरेज़" कहा करते थे । साहित्य से उसको बहुत प्रेम था । अँगरेज़ी भाषा लिखने में वह बड़ा निपुण था । अपनी बात के समर्थन में वह दलोलों की भरमार करता था । बोलने-चालने में उसका मुकाबला करना सहज न था । व्यंग और हास्य की भी उसमें कमी न थी । स्वास्थ्य ठीक न रहने पर भी वह काम से कभी घबड़ाता न था। उसका कहना था कि काम करने में मुझे कुछ कठिनाई अवश्य होती है, पर ये कठिनाइयां ही मेरे प्रतिदिन का भोजन हैं, जिनसे मेरे शरीर का पालन होता है । " उसका ध्यान सभी थोर रहता था। भारतवर्ष के पशु-पक्षियों का अध्ययन करने के लिए उसने डाक्टर चुकानन को नियुक्त किया था। उसी की सहायता के लिए बारिकपुर में पशुओं का धजाकलकत्ता नगर की शोभा बढ़ाने के लिए वेलेजली शहर की सफाई और सड़कों के प्रवन्ध के लिए उसने एक योजना तैयार की थी। कलकत्ता का विशाल और सुन्दर 'सरकारी भवन? नमी. का बनवाया हुआ है । इंग्लैंड जाकर वह बहुत दिनों तक जीवित रहा। उस पर भो अभियोग चलाने का प्रयल किया गया, पर सफएक हटन, वेलेजली, दस एक सौ छियानवे ।
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और कद्दावर सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को आड़े हाथों लिया है। दरअसल, हाल ही में इन दोनों क्रिकेटरों ने एक पान मसाला के एड में काम किया था। यही बात गंभीर को नागवार गुजरी है। गंभीर के मुताबिक लोग आपको आपके काम के मुताबिक जानते हैं। इसलिए ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए। गंभीर ने आलोचना करते हुए बोला है कि केवल पैसा कमाना ही हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए। पैसे बनाने के और भी ढंग हैं। जरुरी नहीं कि पान मसाले का प्रचार ही किया जाए।
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और कद्दावर सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को आड़े हाथों लिया है। दरअसल, हाल ही में इन दोनों क्रिकेटरों ने एक पान मसाला के एड में काम किया था। यही बात गंभीर को नागवार गुजरी है। गंभीर के मुताबिक लोग आपको आपके काम के मुताबिक जानते हैं। इसलिए ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए। गंभीर ने आलोचना करते हुए बोला है कि केवल पैसा कमाना ही हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए। पैसे बनाने के और भी ढंग हैं। जरुरी नहीं कि पान मसाले का प्रचार ही किया जाए।
कुछ याद आया क्या ? कहा नहीं याद आया चलो हम बताते है. साल था 2014 समय था लोकसभा चुनाव का देश परेशान था कोंग्रेस के कुशासन से और महंगाई दिन दुगुनी और रात चौगुनी होती जा रही थी. ऐसे में भारत की जनता की आस बंधी थी NDA और नरेंद्र मोदी से. ये दो वादे ऐसे थे जिन्होंने मोदी को सीधे सीधे जनता से जोड़ दिया. और नतीज़ा 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐसी दुर्गति जैसी शायद बीजेपी ने भी नहीं सोची थी. 60 साल से ज्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेस महज 44 सीट पर सिमट गयी. बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई और इसी के साथ लौटी लोगों की उम्मीद अच्छे दिन आने की. धीरे धीरे समय बीतता रहा और एक साल हो गया. अगर एक साल में देखे तो बीजेपी सरकार की एक मात्र उपलब्धि ये रही कि कोई बड़ा घोटाला या भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया. विदेश मामलों एवं अन्य क्षेत्रों में ये सरकार कुछ हद तक सफल भी रही है पर जिस क्षेत्र में ये सरकार सबसे ज्यादा असफल रही है वो वही क्षेत्र है जिसके बारे में वादे और सब्जबाग दिखा कर ये पार्टी सरकार में आई थी.
कुछ याद आया क्या ? कहा नहीं याद आया चलो हम बताते है. साल था दो हज़ार चौदह समय था लोकसभा चुनाव का देश परेशान था कोंग्रेस के कुशासन से और महंगाई दिन दुगुनी और रात चौगुनी होती जा रही थी. ऐसे में भारत की जनता की आस बंधी थी NDA और नरेंद्र मोदी से. ये दो वादे ऐसे थे जिन्होंने मोदी को सीधे सीधे जनता से जोड़ दिया. और नतीज़ा दो हज़ार चौदह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐसी दुर्गति जैसी शायद बीजेपी ने भी नहीं सोची थी. साठ साल से ज्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेस महज चौंतालीस सीट पर सिमट गयी. बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई और इसी के साथ लौटी लोगों की उम्मीद अच्छे दिन आने की. धीरे धीरे समय बीतता रहा और एक साल हो गया. अगर एक साल में देखे तो बीजेपी सरकार की एक मात्र उपलब्धि ये रही कि कोई बड़ा घोटाला या भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया. विदेश मामलों एवं अन्य क्षेत्रों में ये सरकार कुछ हद तक सफल भी रही है पर जिस क्षेत्र में ये सरकार सबसे ज्यादा असफल रही है वो वही क्षेत्र है जिसके बारे में वादे और सब्जबाग दिखा कर ये पार्टी सरकार में आई थी.
शिवपुरी। बस स्टैंड से आगे पोहरी रोड स्थित रेलवे फाटक पर 17 जून को रेलवे विभाग मेंटेनेंस कराने जा रहा है। इसलिए रेलवे फाटक कल पूरे दिन बंद रहेगा। रेलवे की तरफ से ट्रैफिक थाना पुलिस को लेटर जारी किया है, ताकि ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। मेंटेनेंस कार्य सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इस बीच फाटक बंद रहेगा। ऐसे में ट्रैफिक पिपरसमा रोड से फतेहपुर और मनियर-इटमा रोड पर शिफ्ट होगा। पोहरी तरफ से आने वाले वाहन सिंह निवास पुल से फोरलेन होते हुए उक्त दोनों वैकल्पिक मांगों से आ जा सकेंगे।
शिवपुरी। बस स्टैंड से आगे पोहरी रोड स्थित रेलवे फाटक पर सत्रह जून को रेलवे विभाग मेंटेनेंस कराने जा रहा है। इसलिए रेलवे फाटक कल पूरे दिन बंद रहेगा। रेलवे की तरफ से ट्रैफिक थाना पुलिस को लेटर जारी किया है, ताकि ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। मेंटेनेंस कार्य सुबह आठ बजे से शाम पाँच बजे तक चलेगा। इस बीच फाटक बंद रहेगा। ऐसे में ट्रैफिक पिपरसमा रोड से फतेहपुर और मनियर-इटमा रोड पर शिफ्ट होगा। पोहरी तरफ से आने वाले वाहन सिंह निवास पुल से फोरलेन होते हुए उक्त दोनों वैकल्पिक मांगों से आ जा सकेंगे।
सबगुरु न्यूज़ उदयपुर। उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा जिले के श्री गोविन्द गुरु राजकीय महाविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दर्शन अछपाल ने बताया कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पद पर सीधा मुकाबला है। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए कुल चार बालेश्वर निनामा, दिनेश कुमार निनामा, जसवंत सिंह भाभोर और संतोषीलाल गरासिया, उपाध्यक्ष पद के लिए कुल तीन जगमाल, कांतिलाल निनामा और रोहित परमार, महासचिव पद के लिए कुल चार भानुप्रसाद, मनीष कुमार पारगी, सीमा कटारा और सुशीला कुमारी तम्बोलिया तथा संयुक्त सचिव पद के लिए कुल तीन अजय कुमार यादव, मुकेश कुमार और तौलसिंह अड़ उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा प्रतिनिधि में विभिन्न कक्षाओं के कुल सात उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हंै। छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान 4 सितम्बर को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा। निर्वाचन मण्डल के अध्यक्ष डॉ. आर. के. मेनारिया ने महाविद्यालय के नियमित विद्यार्थियों से कहा है कि वे अपने परिचय पत्र अनिवार्यतः साथ में लेकर आएं। परिचय पत्र के अभाव में 4 सितम्बर-2017 को मतदान में किसी भी स्थिति में भाग लेना संभव नहीं होगा।
सबगुरु न्यूज़ उदयपुर। उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा जिले के श्री गोविन्द गुरु राजकीय महाविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दर्शन अछपाल ने बताया कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पद पर सीधा मुकाबला है। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए कुल चार बालेश्वर निनामा, दिनेश कुमार निनामा, जसवंत सिंह भाभोर और संतोषीलाल गरासिया, उपाध्यक्ष पद के लिए कुल तीन जगमाल, कांतिलाल निनामा और रोहित परमार, महासचिव पद के लिए कुल चार भानुप्रसाद, मनीष कुमार पारगी, सीमा कटारा और सुशीला कुमारी तम्बोलिया तथा संयुक्त सचिव पद के लिए कुल तीन अजय कुमार यादव, मुकेश कुमार और तौलसिंह अड़ उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा प्रतिनिधि में विभिन्न कक्षाओं के कुल सात उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हंै। छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान चार सितम्बर को सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक होगा। निर्वाचन मण्डल के अध्यक्ष डॉ. आर. के. मेनारिया ने महाविद्यालय के नियमित विद्यार्थियों से कहा है कि वे अपने परिचय पत्र अनिवार्यतः साथ में लेकर आएं। परिचय पत्र के अभाव में चार सितम्बर-दो हज़ार सत्रह को मतदान में किसी भी स्थिति में भाग लेना संभव नहीं होगा।
AURANGABAD : अब तक ऐसा माना जाता रहा हैं कि सेव की खेती केवल ठंडे प्रदेशों में ही संभव हैं। लेकिन अब यह बात मिथ्या साबित हो रही हैं। बिहार के औरंगाबाद ज़िले में भी कृषि विभाग के पहल से सेव की खेती शुरू कर दिया गया है। फिलहाल इसकी खेती ज़िले के देव प्रखंड के हसौली पंचायत अंतर्गत खखड़ा गांव में शुरू किया गया है। जहां प्रगतिशील किसान श्रीकांत सिंह के द्वारा इसकी बागवानी किया जा रहा हैं। किसान श्रीकांत सिंह ने वर्तमान में लगभग 125 सेब का पौधा लगाएं है। जिन्हें लगाये हुए करीब एक साल गुजर गए हैं। प्रगतिशील किसान के द्वारा विशेष तकनीक पर आधारित सेव की खेती की जा रही हैं। इस खेती के लिए कृषि विभाग के द्वारा सभी योजनाओं के अंतर्गत कृषक को सहायता अनुदान राशि उपलब्ध कराया गया है। जिसमें किसान को 90 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई पद्धति का लाभ दिया गया है। जिसका इस्तेमाल फल एवं सब्जी की खेती में किया जा रहा है। कृषक के द्वारा उपरोक्त खेती जैविक विधि से किया जा रहा है। जिसके लिए वर्मी कंपोस्ट का यूनिट भी लगाया गया है। श्रीकांत सिंह की पहल को देखकर अब जिले के कई किसानों ने भी सेव की खेती करने में रूचि दिखाई है।
AURANGABAD : अब तक ऐसा माना जाता रहा हैं कि सेव की खेती केवल ठंडे प्रदेशों में ही संभव हैं। लेकिन अब यह बात मिथ्या साबित हो रही हैं। बिहार के औरंगाबाद ज़िले में भी कृषि विभाग के पहल से सेव की खेती शुरू कर दिया गया है। फिलहाल इसकी खेती ज़िले के देव प्रखंड के हसौली पंचायत अंतर्गत खखड़ा गांव में शुरू किया गया है। जहां प्रगतिशील किसान श्रीकांत सिंह के द्वारा इसकी बागवानी किया जा रहा हैं। किसान श्रीकांत सिंह ने वर्तमान में लगभग एक सौ पच्चीस सेब का पौधा लगाएं है। जिन्हें लगाये हुए करीब एक साल गुजर गए हैं। प्रगतिशील किसान के द्वारा विशेष तकनीक पर आधारित सेव की खेती की जा रही हैं। इस खेती के लिए कृषि विभाग के द्वारा सभी योजनाओं के अंतर्गत कृषक को सहायता अनुदान राशि उपलब्ध कराया गया है। जिसमें किसान को नब्बे प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई पद्धति का लाभ दिया गया है। जिसका इस्तेमाल फल एवं सब्जी की खेती में किया जा रहा है। कृषक के द्वारा उपरोक्त खेती जैविक विधि से किया जा रहा है। जिसके लिए वर्मी कंपोस्ट का यूनिट भी लगाया गया है। श्रीकांत सिंह की पहल को देखकर अब जिले के कई किसानों ने भी सेव की खेती करने में रूचि दिखाई है।
मेष राशि के लोगों को आज अजनबी लोगों का सहयोग मिल सकता है। हालांकि, आज आपको अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। साथ ही आज आपके सक्रिय हुए विरोधी परास्त हो जाएंगे। आज शाम के समय आपको कोई शुभ समाचार मिलेगी जो आपका उत्साह बढ़ाएगा। वृष राशि के लोगों के लिए आज आर्थिक और पारिवारिक मामलों में दबाव महसूस कर सकते हैं। अधिक उत्साह और तत्परता से कार्य बिगड़ सकता है। आपका सलाह है कि पैसे कमाने के लिए कोई गलत रास्ता न अपनाएं। हालांकि, आज आपको कोई शुभ संदेश भी मिलेगा और आपकी मुलाकात पुराने मित्रों से हो सकती है। मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन अप्रत्याशित लाभ दिलाने वाला रहेगा। साथ ही आज आपके मान सम्मान में भी बढ़ोतरी होगी। आपको सलाह है कि आज आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरते। आपके द्वारा किए गए कार्यों का विरोध होगा। साथ भी आज परिवार की समस्याओं के संबंध में कोई गलत निर्णय लेना कठिन होगा। कर्क राशि वाले लोगों को आज उनकी मेहनत का फल मिलेगा। आज आपको अपने परिश्रम का वांछित लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं आज आपको दूर की यात्रा करनी पड़ सकती है। मानसिक परेशानी के चलते मन परेशान रहेगा। साथ ही आपको कुछ अधूरे कार्य निपटाने होंगे। सुख व दुःख को समान समझकर सब कुछ भाग्य पर छोड़ दें। सिंह राशि के लोगों के आज सहज ही सभी काम समय पर बनते नजर आएंगे। इतना ही नहीं आपके अच्छे दिनों का संयोग मन को प्रफुल्लित करेगा। साथ ही आपको सलाह है कि आज धन खर्च करते समय नियंत्रण रखे। आज आपको व्यापार और व्यवसाय से संबंधित कई अनुभव होंगे। साथ ही आज व्यापार और व्यवसाय से जुड़े जातकों की विभिन्न क्षेत्रों में साख बढ़ेगी। कन्या राशि के लोगों को आज उत्सव और त्योहार में शामिल होने के अवसर प्राप्त होंगे। इतना ही नहीं आज आपको अच्छे भोजन से स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। शुभ समाचार का आना लगातार जारी रहेगा। इसलिए वहीं कार्य करें जिसके बनने की आपको उम्मीद हो। संतान के करियर को लेकर रहेगी चिंतित पर समझदारी से काम लें। तुला राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक मोर्चे पर अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी साथ ही आपके एक के बाद एक सभी आर्थिक मामले सुलझते चले जाएंगे। हालांकि, आपको आंख में परेशानी के कारण कार्यक्षेत्र में अस्थिरता रहेगी। समय के अनुसार, चलने से आपको उन्नति मिलेगी। वरना समय आपको पीछे छोड़ा देगा। वृश्चिक राशि के लोगों के दांपत्य सुख में आज वृद्धि होगी। साथ ही आज कठिन कार्य आसान हो जाएंगे। आज मानसिक उलझनों के कारण आपको सिरदर्द हो सकता है। साथ ही आज आपको संतान पक्ष की चिंता रह सकती है। पड़ोसियों के कारण आपको कुछ परेशानी हो सकती है। धनु राशि के लोगों को आज वाहन और आवास संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती है। शुभ संदेश आने से उत्साह बढ़ेगा और मित्रों का सहयोग भी प्राप्त होगा। आज आपके हाथ में पर्याप्त धन रहेगा लेकिन फिर भी आपको कुछ पारिवारिक अशांति हो सकती है। इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय सोच समझकर लें। मकर राशि के लोगों के लिए संपत्ति के मामले में दिन अच्छा रहेगा। पिछले कुछ दिनों से जो संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाह चले आ रहे हैं उन्हें निपटाना आज बेहद जरुरी होगा। साथ ही आज आपके सोचे हुए कार्य सफल होंगे और मित्रों द्वारा किए जा रहे विरोध में भी कमी आएगी। कुंभ राशि के लोगों को आज किसी पर व्यर्थ के संदेह और तर्क वितर्क करने में बर्बाद नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपका समय को बर्बाद होगा ही साथ ही आपको धन की हानि होगी। साथ ही नियोजित कार्यक्रम सफल होंगे। इतना ही नहीं आपको लाभ के अच्छा खासे अवसर भी मिलेंगे। मातुल पक्ष से लाभ की आशा रहेगी। मीन राशि के जातकों के लिए यह लाभकारी समय है, इस दौरान आप युक्ति और व्यवहार से सब कुछ पा सकते हैं। आज आपकी जटिलताएं खत्म होंगी और विरोधी भी परास्त होंगे। हालांकि, जीवनसाथी से आर्थिक कारणों से दूरी रहेगी लेकिन प्रेम यथावत बना रहेगा।
मेष राशि के लोगों को आज अजनबी लोगों का सहयोग मिल सकता है। हालांकि, आज आपको अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। साथ ही आज आपके सक्रिय हुए विरोधी परास्त हो जाएंगे। आज शाम के समय आपको कोई शुभ समाचार मिलेगी जो आपका उत्साह बढ़ाएगा। वृष राशि के लोगों के लिए आज आर्थिक और पारिवारिक मामलों में दबाव महसूस कर सकते हैं। अधिक उत्साह और तत्परता से कार्य बिगड़ सकता है। आपका सलाह है कि पैसे कमाने के लिए कोई गलत रास्ता न अपनाएं। हालांकि, आज आपको कोई शुभ संदेश भी मिलेगा और आपकी मुलाकात पुराने मित्रों से हो सकती है। मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन अप्रत्याशित लाभ दिलाने वाला रहेगा। साथ ही आज आपके मान सम्मान में भी बढ़ोतरी होगी। आपको सलाह है कि आज आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरते। आपके द्वारा किए गए कार्यों का विरोध होगा। साथ भी आज परिवार की समस्याओं के संबंध में कोई गलत निर्णय लेना कठिन होगा। कर्क राशि वाले लोगों को आज उनकी मेहनत का फल मिलेगा। आज आपको अपने परिश्रम का वांछित लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं आज आपको दूर की यात्रा करनी पड़ सकती है। मानसिक परेशानी के चलते मन परेशान रहेगा। साथ ही आपको कुछ अधूरे कार्य निपटाने होंगे। सुख व दुःख को समान समझकर सब कुछ भाग्य पर छोड़ दें। सिंह राशि के लोगों के आज सहज ही सभी काम समय पर बनते नजर आएंगे। इतना ही नहीं आपके अच्छे दिनों का संयोग मन को प्रफुल्लित करेगा। साथ ही आपको सलाह है कि आज धन खर्च करते समय नियंत्रण रखे। आज आपको व्यापार और व्यवसाय से संबंधित कई अनुभव होंगे। साथ ही आज व्यापार और व्यवसाय से जुड़े जातकों की विभिन्न क्षेत्रों में साख बढ़ेगी। कन्या राशि के लोगों को आज उत्सव और त्योहार में शामिल होने के अवसर प्राप्त होंगे। इतना ही नहीं आज आपको अच्छे भोजन से स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। शुभ समाचार का आना लगातार जारी रहेगा। इसलिए वहीं कार्य करें जिसके बनने की आपको उम्मीद हो। संतान के करियर को लेकर रहेगी चिंतित पर समझदारी से काम लें। तुला राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक मोर्चे पर अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी साथ ही आपके एक के बाद एक सभी आर्थिक मामले सुलझते चले जाएंगे। हालांकि, आपको आंख में परेशानी के कारण कार्यक्षेत्र में अस्थिरता रहेगी। समय के अनुसार, चलने से आपको उन्नति मिलेगी। वरना समय आपको पीछे छोड़ा देगा। वृश्चिक राशि के लोगों के दांपत्य सुख में आज वृद्धि होगी। साथ ही आज कठिन कार्य आसान हो जाएंगे। आज मानसिक उलझनों के कारण आपको सिरदर्द हो सकता है। साथ ही आज आपको संतान पक्ष की चिंता रह सकती है। पड़ोसियों के कारण आपको कुछ परेशानी हो सकती है। धनु राशि के लोगों को आज वाहन और आवास संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती है। शुभ संदेश आने से उत्साह बढ़ेगा और मित्रों का सहयोग भी प्राप्त होगा। आज आपके हाथ में पर्याप्त धन रहेगा लेकिन फिर भी आपको कुछ पारिवारिक अशांति हो सकती है। इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय सोच समझकर लें। मकर राशि के लोगों के लिए संपत्ति के मामले में दिन अच्छा रहेगा। पिछले कुछ दिनों से जो संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाह चले आ रहे हैं उन्हें निपटाना आज बेहद जरुरी होगा। साथ ही आज आपके सोचे हुए कार्य सफल होंगे और मित्रों द्वारा किए जा रहे विरोध में भी कमी आएगी। कुंभ राशि के लोगों को आज किसी पर व्यर्थ के संदेह और तर्क वितर्क करने में बर्बाद नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपका समय को बर्बाद होगा ही साथ ही आपको धन की हानि होगी। साथ ही नियोजित कार्यक्रम सफल होंगे। इतना ही नहीं आपको लाभ के अच्छा खासे अवसर भी मिलेंगे। मातुल पक्ष से लाभ की आशा रहेगी। मीन राशि के जातकों के लिए यह लाभकारी समय है, इस दौरान आप युक्ति और व्यवहार से सब कुछ पा सकते हैं। आज आपकी जटिलताएं खत्म होंगी और विरोधी भी परास्त होंगे। हालांकि, जीवनसाथी से आर्थिक कारणों से दूरी रहेगी लेकिन प्रेम यथावत बना रहेगा।
नई दिल्ली : आम्रपाली भोजीवुड की जान कहलाती हैं. उनकी हर फिल्म दर्शकों के मन में गज़ब का उत्साह पैदा कर देती है. कई फिल्मों में अम्रपाली के अलग-अलग लुक देखने को मिले हैं. आपने भी आम्रपाली को कई किरदारों में देखा होगा लेकिन क्या आपने आम्रपाली दुबे का प्रेग्नन्सी लुक देखा है? हाल ही में उन्होंने जो तस्वीरें शेयर की हैं उसमें वह प्रेग्नेंट नज़र आ रही हैं. आइए देखें उनकी ये तस्वीरें. दरअसल हाल ही में अभिनेत्री ने अपनी कुछ तस्वीरें साझा की हैं. इन तस्वीरों में वह प्रेग्नेंट दिखाई दे रही हैं. वह अपना बेबी बंप दिखा रही हैं. उन्होने इस दौरान काले रंग का सलवार सूट पहना है जिसमें वह काफी खूबसूरत भी नज़र आ रही हैं. ब्लैक रंग के इस फ्लोरल प्रिंटेड सूट में उनकी खूबसूरती देखने वाली है. वह किसी तस्वीर में अपने बेबी बंप पर हाथ रखकर केवल मुस्कुरा रही हैं तो किसी तस्वीर में कैमरे से आँख मिला रही हैं. इस दौरान उन्होंने बालों को खुला रखा है. इतना ही नहीं इन तस्वीरों में इनका मंगलसूत्र भी दिखाई दे रहा है और हाथों में चूड़ी भी देखी जा सकती है. इसके अलावा उनकी मांग में सिन्दूर भी दिखाई दे रहा है. इन तस्वीरों के साथ उन्होंने कैप्शन दिया है 'मेरी आगामी फिल्म से मेरा लुक'. जाहिर सी बात है कि ये लुक उनकी आने वाली फिल्म से है. अब यह फिल्म क्या है इस बात का खुलासा उन्होंने नहीं किया है. आम्रपाली दुबे को भी इंडस्ट्री में कई साल हो गए हैं. उनका भी काफी नाम है. आम्रपाली ने फिल्म 'निरहुआ हिंदुस्तानी' से अपना डेब्यू करते हुए फैंस का दिल जीत लिया था. तब से आज तक उन्होंने कभी पीछे नहीं देखा. जानकारी के अनुसार आम्रपाली एक फिल्म के लिए 8 से 10 लाख रुपये चार्ज करती हैं. उनकी कुल संपत्ति 14 करोड़ की है.
नई दिल्ली : आम्रपाली भोजीवुड की जान कहलाती हैं. उनकी हर फिल्म दर्शकों के मन में गज़ब का उत्साह पैदा कर देती है. कई फिल्मों में अम्रपाली के अलग-अलग लुक देखने को मिले हैं. आपने भी आम्रपाली को कई किरदारों में देखा होगा लेकिन क्या आपने आम्रपाली दुबे का प्रेग्नन्सी लुक देखा है? हाल ही में उन्होंने जो तस्वीरें शेयर की हैं उसमें वह प्रेग्नेंट नज़र आ रही हैं. आइए देखें उनकी ये तस्वीरें. दरअसल हाल ही में अभिनेत्री ने अपनी कुछ तस्वीरें साझा की हैं. इन तस्वीरों में वह प्रेग्नेंट दिखाई दे रही हैं. वह अपना बेबी बंप दिखा रही हैं. उन्होने इस दौरान काले रंग का सलवार सूट पहना है जिसमें वह काफी खूबसूरत भी नज़र आ रही हैं. ब्लैक रंग के इस फ्लोरल प्रिंटेड सूट में उनकी खूबसूरती देखने वाली है. वह किसी तस्वीर में अपने बेबी बंप पर हाथ रखकर केवल मुस्कुरा रही हैं तो किसी तस्वीर में कैमरे से आँख मिला रही हैं. इस दौरान उन्होंने बालों को खुला रखा है. इतना ही नहीं इन तस्वीरों में इनका मंगलसूत्र भी दिखाई दे रहा है और हाथों में चूड़ी भी देखी जा सकती है. इसके अलावा उनकी मांग में सिन्दूर भी दिखाई दे रहा है. इन तस्वीरों के साथ उन्होंने कैप्शन दिया है 'मेरी आगामी फिल्म से मेरा लुक'. जाहिर सी बात है कि ये लुक उनकी आने वाली फिल्म से है. अब यह फिल्म क्या है इस बात का खुलासा उन्होंने नहीं किया है. आम्रपाली दुबे को भी इंडस्ट्री में कई साल हो गए हैं. उनका भी काफी नाम है. आम्रपाली ने फिल्म 'निरहुआ हिंदुस्तानी' से अपना डेब्यू करते हुए फैंस का दिल जीत लिया था. तब से आज तक उन्होंने कभी पीछे नहीं देखा. जानकारी के अनुसार आम्रपाली एक फिल्म के लिए आठ से दस लाख रुपये चार्ज करती हैं. उनकी कुल संपत्ति चौदह करोड़ की है.
Meerut । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा के बाद शहरों में 24 घंटे, तहसीलों में 22 घंटे और गांवों में 18 घंटे पावर सप्लाई को लेकर पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह ने बुधवार को पश्चिमांचल के अफसरों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में एमडी ने 24 घंटे सप्लाई को लेकर आ रही परेशानियों के बारे में अफसरों से पूछा। पीवीवीएनएल मुख्यालय ऊर्जा भवन में बुधवार को एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह ने शनिवार को मेरठ समेत पश्चिमांचल के सभी 14 जनपदों के अफसरों की बैठक बुलाई। बैठक में एमडी ने अफसरों से विजन-2016 के अंतर्गत बन रहे बिजली घरों की प्रोग्रेस रिपोर्ट पूछी। एमडी ने कहा कि चेतावनी के बाद भी यदि कार्यो में उदासीनता बरती गई तो कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर डायरेक्टर टेक्नीकल अनिल कुमार, चीफ इंजीनियर जोन पंकज कुमार, आईपी गुप्ता, एसई आरके राणा, वीएन सिंह व योगेश कुमार आदि मौजूद रहे। मेरठ। सपा नेताअतुल प्रधान बुधवार को अपने समर्थकों के साथ पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह से मिले। अतुल ने एमडी के समक्ष सरधना क्षेत्र में पेंडिंग पड़े बिजली योजनाओं के कामों को जल्द पूर्ण करने की बात कही। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में लाइन स्ट्रेथनिंग व पुराने ट्रांसफार्मरों को जल्द बदले जाने की बात कही। एमडी ने सपा नेता की बात को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।
Meerut । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा के बाद शहरों में चौबीस घंटाटे, तहसीलों में बाईस घंटाटे और गांवों में अट्ठारह घंटाटे पावर सप्लाई को लेकर पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह ने बुधवार को पश्चिमांचल के अफसरों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में एमडी ने चौबीस घंटाटे सप्लाई को लेकर आ रही परेशानियों के बारे में अफसरों से पूछा। पीवीवीएनएल मुख्यालय ऊर्जा भवन में बुधवार को एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह ने शनिवार को मेरठ समेत पश्चिमांचल के सभी चौदह जनपदों के अफसरों की बैठक बुलाई। बैठक में एमडी ने अफसरों से विजन-दो हज़ार सोलह के अंतर्गत बन रहे बिजली घरों की प्रोग्रेस रिपोर्ट पूछी। एमडी ने कहा कि चेतावनी के बाद भी यदि कार्यो में उदासीनता बरती गई तो कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर डायरेक्टर टेक्नीकल अनिल कुमार, चीफ इंजीनियर जोन पंकज कुमार, आईपी गुप्ता, एसई आरके राणा, वीएन सिंह व योगेश कुमार आदि मौजूद रहे। मेरठ। सपा नेताअतुल प्रधान बुधवार को अपने समर्थकों के साथ पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश सिंह से मिले। अतुल ने एमडी के समक्ष सरधना क्षेत्र में पेंडिंग पड़े बिजली योजनाओं के कामों को जल्द पूर्ण करने की बात कही। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में लाइन स्ट्रेथनिंग व पुराने ट्रांसफार्मरों को जल्द बदले जाने की बात कही। एमडी ने सपा नेता की बात को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत लोकसभा चुनाव 2019 में जोधपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी पत्नी हिमांशी भी उनके साथ मंदिर-मंदिर भगवान से जीत की प्रार्थनाएं कर रही हैं. हिमांशी की वैभव से 2005 में शादी हुई थी. यानी करीब 14 साल पहले हिमांशी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पुत्रवधू बनीं. हिमांशी ने राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत से राजनीति तो नहीं सीखी लेकिन जो सीखा उसके बारे में खुलकर कहती है. हिमांशी कहती हैं कि, 'मैंने पापाजी से 3 बातें सीखी हैं. जीवन में सब्र रखना, इंतजार करना और शांति बनाए रखना. ' वो कहती हैं कि यदि इन तीन बातों को जीवन में उतार लिया जाए तो ईश्वर हमेशा मेहरबान रहते हैं. हाल ही हिमांशी कैंसर के ट्रीटमेंट के चलते अपने बाल गंवा चुकी लड़कियों के लिए हेयर डोनेशन कैंपेन के चलते चर्चा में रहीं. पिछले साल ये तस्वीर हिमांशी ने फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा था कि कैसे उन्होंने जाल में फंसे दो पक्षियों को बचाया. टिकट मिलने के बाद पहली बार जोधपुर पहुंचे वैभव गहलोत के साथ गणपति के दरबार उनके साथ पहुंची हिमांशी और काश्विनी.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस में जोधपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी पत्नी हिमांशी भी उनके साथ मंदिर-मंदिर भगवान से जीत की प्रार्थनाएं कर रही हैं. हिमांशी की वैभव से दो हज़ार पाँच में शादी हुई थी. यानी करीब चौदह साल पहले हिमांशी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पुत्रवधू बनीं. हिमांशी ने राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत से राजनीति तो नहीं सीखी लेकिन जो सीखा उसके बारे में खुलकर कहती है. हिमांशी कहती हैं कि, 'मैंने पापाजी से तीन बातें सीखी हैं. जीवन में सब्र रखना, इंतजार करना और शांति बनाए रखना. ' वो कहती हैं कि यदि इन तीन बातों को जीवन में उतार लिया जाए तो ईश्वर हमेशा मेहरबान रहते हैं. हाल ही हिमांशी कैंसर के ट्रीटमेंट के चलते अपने बाल गंवा चुकी लड़कियों के लिए हेयर डोनेशन कैंपेन के चलते चर्चा में रहीं. पिछले साल ये तस्वीर हिमांशी ने फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा था कि कैसे उन्होंने जाल में फंसे दो पक्षियों को बचाया. टिकट मिलने के बाद पहली बार जोधपुर पहुंचे वैभव गहलोत के साथ गणपति के दरबार उनके साथ पहुंची हिमांशी और काश्विनी.
अमेरिकी वैक्सीन की कीमत- 1500 रुपए , रूसी वैक्सीन व चीनी वैक्सीन की कीमत -750 रुपए प्रति डोज है। नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग के बीच 1 मई से वैक्सीनेशन का दायर बढ़ने के साथ ही सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की दर तय कर दी गई है। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन के एक डोज की कीमत तय कर दी है। अब कोविशील्ड की एक खुराक प्राइवेट अस्पताल में जहां 600 रुपए में मिलेगी, वहीं सरकारी अस्पताल में इसकी कीमत 400 रुपए होगी। यानी सरकारी अस्पताल में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग 400 रुपए देकर तो प्राइवेट अस्पताल में 600 रुपए देकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने आगे कहा कि कंपनी वैक्सीन की कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत भारत सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम को देगी और शेष 50 फीसदी वैक्सीन राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए होगी। बता दें कि अब तक सिर्फ भारत सरकार ही टीका खरीद रही थी, मगर अब राज्य सरकार भी टीके को खरीद सकेगी। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया द्वारा जो ऐलान किया गया है, उसके मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन की एक खुराक का दाम राज्य सरकार के लिए (सरकारी अस्पतालों में) 400 रुपये होगा, जबकि प्राइवेट अस्पतालों को 600 रुपए में एक खुराक मिलेगी। सीरम ने दावा किया है कि उसकी वैक्सीन की कीमत अन्य विदेशी वैक्सीन की कीमत के मुकाबले कम है। उसने अन्य वैक्सीन की कीमत भी बताई है। अमेरिकी वैक्सीन की कीमत- 1500 रुपए , रूसी वैक्सीन व चीनी वैक्सीन की कीमत -750 रुपए प्रति डोज है।
अमेरिकी वैक्सीन की कीमत- एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए , रूसी वैक्सीन व चीनी वैक्सीन की कीमत -सात सौ पचास रुपयापए प्रति डोज है। नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग के बीच एक मई से वैक्सीनेशन का दायर बढ़ने के साथ ही सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की दर तय कर दी गई है। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन के एक डोज की कीमत तय कर दी है। अब कोविशील्ड की एक खुराक प्राइवेट अस्पताल में जहां छः सौ रुपयापए में मिलेगी, वहीं सरकारी अस्पताल में इसकी कीमत चार सौ रुपयापए होगी। यानी सरकारी अस्पताल में अट्ठारह वर्ष से अधिक उम्र के लोग चार सौ रुपयापए देकर तो प्राइवेट अस्पताल में छः सौ रुपयापए देकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने आगे कहा कि कंपनी वैक्सीन की कुल उत्पादन का पचास प्रतिशत भारत सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम को देगी और शेष पचास फीसदी वैक्सीन राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए होगी। बता दें कि अब तक सिर्फ भारत सरकार ही टीका खरीद रही थी, मगर अब राज्य सरकार भी टीके को खरीद सकेगी। सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया द्वारा जो ऐलान किया गया है, उसके मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन की एक खुराक का दाम राज्य सरकार के लिए चार सौ रुपयापये होगा, जबकि प्राइवेट अस्पतालों को छः सौ रुपयापए में एक खुराक मिलेगी। सीरम ने दावा किया है कि उसकी वैक्सीन की कीमत अन्य विदेशी वैक्सीन की कीमत के मुकाबले कम है। उसने अन्य वैक्सीन की कीमत भी बताई है। अमेरिकी वैक्सीन की कीमत- एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए , रूसी वैक्सीन व चीनी वैक्सीन की कीमत -सात सौ पचास रुपयापए प्रति डोज है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्णय की सोमवार (16 दिसंबर) को आलोचना की है। मामले में धनखड़ ने सीएम को सलाह देते हुए कहा कि वह 'असंवैधानिक एवं भड़काऊ' कार्य करने से बचें। धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य में स्थिति बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, जहां पिछले तीन दिनों से कानून को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया है। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ एक रैली में हिस्सा लेने वाली हैं। उन्होंने लोगों से भी रैली में शामिल होने की अपील की है। राज्य भर में ममता करेंगी विरोध रैलीः मामले में तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री नागरिकता संशोधन कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन दिनों तक राज्य भर में विरोध रैली करेंगी। बनर्जी ने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि वह इसे बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। बता दें कि ममता मोदी सरकार कई और बिल का पहले भी विरोध कर चुकी हैं।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्णय की सोमवार को आलोचना की है। मामले में धनखड़ ने सीएम को सलाह देते हुए कहा कि वह 'असंवैधानिक एवं भड़काऊ' कार्य करने से बचें। धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य में स्थिति बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, जहां पिछले तीन दिनों से कानून को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया है। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ एक रैली में हिस्सा लेने वाली हैं। उन्होंने लोगों से भी रैली में शामिल होने की अपील की है। राज्य भर में ममता करेंगी विरोध रैलीः मामले में तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री नागरिकता संशोधन कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन दिनों तक राज्य भर में विरोध रैली करेंगी। बनर्जी ने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि वह इसे बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। बता दें कि ममता मोदी सरकार कई और बिल का पहले भी विरोध कर चुकी हैं।
गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में सैकड़ों किसानों के लिए इस वर्ष गोहटा ताल में रेगुलेटर लगने से घरों में काफी मात्रा में गेहूं आने पर खुशी भी आई है। किसानों का कहना है कि लगभग 15 साल बाद ऐसा मौका आया है कि गोहटा ताल से गेहूं की उपज हमारे घरों में पहुंची है। गोहटा ताल के मुद्दे को लेकर कई वर्षों तक राजनीति जारी रही। किसानों का कहना है कि विपक्ष के स्थानीय नेताओं ने लगातार किसानों की समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन धरना दिया और लड़ाई लड़ी। 2017 में बीजेपी प्रचण्ड बहुमत से जीती। तत्कालीन विधायक संगीता यादव से किसानों ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने पहल कर सरकार से गोहटा ताल पर रेग्युलेटर लगवाया। गौरतलब है कि गोहटा ताल का पानी गोर्रा नदी में बोहाबार घाट के चला जाता था। बोहाबार पुल बनने के बाद अप्रोच मार्ग व अतिक्रमण के कारण गोहटा ताल का पानी गोर्रा में न जाने के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो जाती थी। इस वर्ष किसानों को गेहूं की पैदावार मिली है। जिससे किसान काफी खुश हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में सैकड़ों किसानों के लिए इस वर्ष गोहटा ताल में रेगुलेटर लगने से घरों में काफी मात्रा में गेहूं आने पर खुशी भी आई है। किसानों का कहना है कि लगभग पंद्रह साल बाद ऐसा मौका आया है कि गोहटा ताल से गेहूं की उपज हमारे घरों में पहुंची है। गोहटा ताल के मुद्दे को लेकर कई वर्षों तक राजनीति जारी रही। किसानों का कहना है कि विपक्ष के स्थानीय नेताओं ने लगातार किसानों की समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन धरना दिया और लड़ाई लड़ी। दो हज़ार सत्रह में बीजेपी प्रचण्ड बहुमत से जीती। तत्कालीन विधायक संगीता यादव से किसानों ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने पहल कर सरकार से गोहटा ताल पर रेग्युलेटर लगवाया। गौरतलब है कि गोहटा ताल का पानी गोर्रा नदी में बोहाबार घाट के चला जाता था। बोहाबार पुल बनने के बाद अप्रोच मार्ग व अतिक्रमण के कारण गोहटा ताल का पानी गोर्रा में न जाने के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो जाती थी। इस वर्ष किसानों को गेहूं की पैदावार मिली है। जिससे किसान काफी खुश हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत को एक और नया हथियार मिलने जा रहा है। यह एक गोली होगी जिसे देने से मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने और मौत को खतरे को कम किया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक फाइजर की गोली पैक्सलोविड में अभी कुछ समय लग सकता है। दो दवाओं के आने से काफी असर पड़ेगी। यह महामारी में लड़ने में टीकाकरण से ज्यादा प्रभावी होंगी। कोविड स्ट्रैटजी ग्रुप, सीएसआईआर के अध्यक्ष डॉ राम विश्वकर्मा के मुताबिक मोलमनुपिरवीर जल्द ही उपलब्ध हो जाएगी। पांच ऐसी कंपनियां है जो दवा निर्माता के साथ मिलकर काम कर रही हैं। मुझे लगता है कि ऐसे में कभी भी हमें इसे इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है। दूसरी तरफ फाइजर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि उनकी दवा पैक्सलोविड कोमजोर मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने या मौत के जोखिम को 89 प्रतिशत तक कम करती है। कोविड स्ट्रैटजी ग्रुप, सीएसआईआर के अध्यक्ष डॉ राम विश्वकर्मा ने कहा कि यह दवा उन लोगों के लिए है, जिन्हें गंभीर कोविड-19 या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा है। दवाओं को "विज्ञान द्वारा वायरस के ताबूत में अंतिम कील" बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मोलनुपिरवीर हमारे लिए जल्द ही उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में इसके उपयोग को अनुमति मिलने के बाद एसईसी इस पर निगरानी रखे हुए हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि वे इसके लिए जल्द ही अनुमति प्राप्त कर लेंगे। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले एक महीने के भीतर मर्क की दवा के लिए अनुमति देने पर निर्णय हो सकता है। बता दें कि फाइजर ने बयान जारी करते हुए कहा है कि क्लिनिकल परीक्षण के अनुसार उनकी पैक्सलोविड गोली कमजोर मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु के जोखिम को 89 प्रतिशत तक कम करती है। मर्क ने पहले ही पांच कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है। जिस तरह से मर्क ने कई कंपनियों को यह लाइसेंस दिया है, फाइजर भी ऐसा ही करेगा क्योंकि फाइजर दवा के वैश्विक उपयोग के लिए भारतीय क्षमता का इस्तेमाल करना चाहेगी। उन्होंने कहा कि इसकी लागत अमेरिका में मर्क वैक्सीन के लिए अनुमानित 700 डॉलर से बहुत कम होगी। क्योंकि अमेरिका में यह कई अन्य कारणों से महंगी है, न कि निर्माण लागत की वजह से। मुझे लगता है कि जब भारत सरकार इस पर काम करेगी, तो वे इन कंपनियों से थोक में दवाई खरीदेगी और निश्चित रूप से उनके पास दो तरह की व अलग-अलग मूल्य प्रणाली होगी। शुरू में इसकी कीमत 2000 से 3000 हजार या 4000 रुपये पूरे उपचार का खर्च हो सकती है। हालांकि बाद में यह कीमत 500 से 600 रुपये या 1,000 रुपये तक आ जाएगी। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
कोरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत को एक और नया हथियार मिलने जा रहा है। यह एक गोली होगी जिसे देने से मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने और मौत को खतरे को कम किया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक फाइजर की गोली पैक्सलोविड में अभी कुछ समय लग सकता है। दो दवाओं के आने से काफी असर पड़ेगी। यह महामारी में लड़ने में टीकाकरण से ज्यादा प्रभावी होंगी। कोविड स्ट्रैटजी ग्रुप, सीएसआईआर के अध्यक्ष डॉ राम विश्वकर्मा के मुताबिक मोलमनुपिरवीर जल्द ही उपलब्ध हो जाएगी। पांच ऐसी कंपनियां है जो दवा निर्माता के साथ मिलकर काम कर रही हैं। मुझे लगता है कि ऐसे में कभी भी हमें इसे इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है। दूसरी तरफ फाइजर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि उनकी दवा पैक्सलोविड कोमजोर मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने या मौत के जोखिम को नवासी प्रतिशत तक कम करती है। कोविड स्ट्रैटजी ग्रुप, सीएसआईआर के अध्यक्ष डॉ राम विश्वकर्मा ने कहा कि यह दवा उन लोगों के लिए है, जिन्हें गंभीर कोविड-उन्नीस या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा है। दवाओं को "विज्ञान द्वारा वायरस के ताबूत में अंतिम कील" बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मोलनुपिरवीर हमारे लिए जल्द ही उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में इसके उपयोग को अनुमति मिलने के बाद एसईसी इस पर निगरानी रखे हुए हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि वे इसके लिए जल्द ही अनुमति प्राप्त कर लेंगे। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले एक महीने के भीतर मर्क की दवा के लिए अनुमति देने पर निर्णय हो सकता है। बता दें कि फाइजर ने बयान जारी करते हुए कहा है कि क्लिनिकल परीक्षण के अनुसार उनकी पैक्सलोविड गोली कमजोर मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु के जोखिम को नवासी प्रतिशत तक कम करती है। मर्क ने पहले ही पांच कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है। जिस तरह से मर्क ने कई कंपनियों को यह लाइसेंस दिया है, फाइजर भी ऐसा ही करेगा क्योंकि फाइजर दवा के वैश्विक उपयोग के लिए भारतीय क्षमता का इस्तेमाल करना चाहेगी। उन्होंने कहा कि इसकी लागत अमेरिका में मर्क वैक्सीन के लिए अनुमानित सात सौ डॉलर से बहुत कम होगी। क्योंकि अमेरिका में यह कई अन्य कारणों से महंगी है, न कि निर्माण लागत की वजह से। मुझे लगता है कि जब भारत सरकार इस पर काम करेगी, तो वे इन कंपनियों से थोक में दवाई खरीदेगी और निश्चित रूप से उनके पास दो तरह की व अलग-अलग मूल्य प्रणाली होगी। शुरू में इसकी कीमत दो हज़ार से तीन हज़ार हजार या चार हज़ार रुपयापये पूरे उपचार का खर्च हो सकती है। हालांकि बाद में यह कीमत पाँच सौ से छः सौ रुपयापये या एक,शून्य रुपयापये तक आ जाएगी। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
रिहाना (Rihanna) ने अपनी एक टॉपलेस तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है. इस तस्वीर में रिहाना ने भगवान गणेश का लॉकेट पहना हुआ है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पॉप सिंगर रिहाना (Rihanna) अपने गाने और फैशन सेंस के चलते सुर्खियों में रहती हैं. कुछ समय पहले उन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर ट्वीट किया था, जिसकी वजह से वो सुर्खियों में रहीं. एक बार फिर से रिहाना चर्चा में हैं. इस बार वो अपने एक फोटोशूट की वजह से लाइमलाइट में हैं. रिहाना ने अपनी एक टॉपलेस तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है. इस तस्वीर में रिहाना ने भगवान गणेश का लॉकेट पहना हुआ है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, रिहाना ने एक लॉन्जरी ब्रांड के लिए फोटोशूट कराया है, जिसमें वो टॉपलेस पोज दे रही हैं. फोटो में उन्होंने गले में भगवान गणेश का पेंडेंट (Pendant) भी पहना है, जिसकी वजह से वो लोगों के भी निशाने पर आ गई हैं. सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है. रिहाना पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लग रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग रिहाना पर भड़के हुए हैं. कई लोगों ने उन्हें हिंदू धर्म की भावनाएं आहत करने के लिए जमकर खरी-खोटी सुनाई. वहीं कुछ लोगों ने इसे कंट्रोवर्सी और पब्लिसिटी स्टंट बताया. ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग ना सिर्फ रिहाना से इन फोटो को हटाने और ऐसे आपत्तिजनक पोज़ में भगवान गणेश का नेकलेस पहनने के लिए माफी मांगने की भी डिमांड कर रहे हैं. the way no one is talking abt how rihanna's necklace has ganesha on it, an important sacred god to hinduism as he plays a big role in like providing protection, is really disappointing to me. i love rihanna but this isn't okay. I lost all my respect for Rihanna ✋? how can you wear the Ganesha necklace and think it's ok to pose like that? Lol. Why use ganesha necklace when he is worshipped in Hindu religion?
रिहाना ने अपनी एक टॉपलेस तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है. इस तस्वीर में रिहाना ने भगवान गणेश का लॉकेट पहना हुआ है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पॉप सिंगर रिहाना अपने गाने और फैशन सेंस के चलते सुर्खियों में रहती हैं. कुछ समय पहले उन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर ट्वीट किया था, जिसकी वजह से वो सुर्खियों में रहीं. एक बार फिर से रिहाना चर्चा में हैं. इस बार वो अपने एक फोटोशूट की वजह से लाइमलाइट में हैं. रिहाना ने अपनी एक टॉपलेस तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है. इस तस्वीर में रिहाना ने भगवान गणेश का लॉकेट पहना हुआ है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, रिहाना ने एक लॉन्जरी ब्रांड के लिए फोटोशूट कराया है, जिसमें वो टॉपलेस पोज दे रही हैं. फोटो में उन्होंने गले में भगवान गणेश का पेंडेंट भी पहना है, जिसकी वजह से वो लोगों के भी निशाने पर आ गई हैं. सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है. रिहाना पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लग रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग रिहाना पर भड़के हुए हैं. कई लोगों ने उन्हें हिंदू धर्म की भावनाएं आहत करने के लिए जमकर खरी-खोटी सुनाई. वहीं कुछ लोगों ने इसे कंट्रोवर्सी और पब्लिसिटी स्टंट बताया. ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग ना सिर्फ रिहाना से इन फोटो को हटाने और ऐसे आपत्तिजनक पोज़ में भगवान गणेश का नेकलेस पहनने के लिए माफी मांगने की भी डिमांड कर रहे हैं. the way no one is talking abt how rihanna's necklace has ganesha on it, an important sacred god to hinduism as he plays a big role in like providing protection, is really disappointing to me. i love rihanna but this isn't okay. I lost all my respect for Rihanna ✋? how can you wear the Ganesha necklace and think it's ok to pose like that? Lol. Why use ganesha necklace when he is worshipped in Hindu religion?
अगर आपको चाट और आम पसंद है, तो यह मैंगो चाट एक ऐसी डिश है जो इन दोनों तरह की क्रेविंग को पूरा करने के लिए परफेक्ट है. कच्चे आम के साथ बनाया गया, प्याज, टमाटर, सेव और मुरमुरे के साथ टॉस किया गया, मसालों के साथ टॉप किया गया, यह स्नैक रेसिपी आपको जरूर पसंद आएगी. यह कुछ सामान के साथ बनाया गया है, यह एक आसान रेसिपी है जिसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता नहीं होगी. यह एक चटपटी चाट रेसिपी है जो आम के तीखे स्वाद को बेहद चटपटा बनाती है और किटी पार्टी या गेम नाइट्स जैसे अवसरों पर इसका आनंद लिया जा सकता है. एक पैन को मध्यम आंच पर रखें और उसमें मूंगफली के साथ मुरमुरे डालें. लगभग 5-10 मिनट तक भूनें जब तक वे कुरकुरे न हो जाएं. आंच से उतारें और ठंडा होने दें. एक बड़ा बाउल लें और उसमें बारीक कटा हुआ कच्चा आम, मसला हुआ उबला आलू, बारीक कटा प्याज और टमाटर डालें. सभी सामग्री को अच्छे से मिला लें. इसके बाद इसमें कटी हुई हरी मिर्च, भुने हुए मूंगफली के दाने, क्रश किए हुए नाचोज़ और भुने मुरमुरे डालें. मिक्स करने के लिए सामग्री को टॉस करें. अब चना मसाला, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और अपने स्वादानुसार काला नमक छिड़कें. मसाले के साथ सभी सामग्री को समान रूप से कोट करने के लिए मिश्रण को टॉस करें. ऊपर से नींबू का रस डालें और फिर से अच्छी तरह मिलाएं. इसे एक सर्विंग बाउल में निकाल लें और उस पर कटे हुए हरे धनिये के साथ सेव डालें. आनंद लेने के लिए तुरंत परोसें.
अगर आपको चाट और आम पसंद है, तो यह मैंगो चाट एक ऐसी डिश है जो इन दोनों तरह की क्रेविंग को पूरा करने के लिए परफेक्ट है. कच्चे आम के साथ बनाया गया, प्याज, टमाटर, सेव और मुरमुरे के साथ टॉस किया गया, मसालों के साथ टॉप किया गया, यह स्नैक रेसिपी आपको जरूर पसंद आएगी. यह कुछ सामान के साथ बनाया गया है, यह एक आसान रेसिपी है जिसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता नहीं होगी. यह एक चटपटी चाट रेसिपी है जो आम के तीखे स्वाद को बेहद चटपटा बनाती है और किटी पार्टी या गेम नाइट्स जैसे अवसरों पर इसका आनंद लिया जा सकता है. एक पैन को मध्यम आंच पर रखें और उसमें मूंगफली के साथ मुरमुरे डालें. लगभग पाँच-दस मिनट तक भूनें जब तक वे कुरकुरे न हो जाएं. आंच से उतारें और ठंडा होने दें. एक बड़ा बाउल लें और उसमें बारीक कटा हुआ कच्चा आम, मसला हुआ उबला आलू, बारीक कटा प्याज और टमाटर डालें. सभी सामग्री को अच्छे से मिला लें. इसके बाद इसमें कटी हुई हरी मिर्च, भुने हुए मूंगफली के दाने, क्रश किए हुए नाचोज़ और भुने मुरमुरे डालें. मिक्स करने के लिए सामग्री को टॉस करें. अब चना मसाला, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और अपने स्वादानुसार काला नमक छिड़कें. मसाले के साथ सभी सामग्री को समान रूप से कोट करने के लिए मिश्रण को टॉस करें. ऊपर से नींबू का रस डालें और फिर से अच्छी तरह मिलाएं. इसे एक सर्विंग बाउल में निकाल लें और उस पर कटे हुए हरे धनिये के साथ सेव डालें. आनंद लेने के लिए तुरंत परोसें.
बेहद रोमांटिक होती हैं इन 7 राशियों की लड़कियां, देखें क्या आपकी गर्लफ्रेंड भी है इनमें एक? गुस्सा और प्यार, ये दो इमोशन सिंह राशि की लड़कियों में बहुतायत में होते हैं। लड़कियों की अक्सर से डिमांड होती है कि उनका पार्टनर रोमांटिक जरूर होना चाहिए। वो छोटे-छोटे सरप्राइज देकर उन्हें खुश करे और उनका दिन बना दे। आजकल लड़कों की भी कुछ ऐसी ही मांग है। वे भी चाहते हैं कि उनकी पार्टनर रोमांटिक हो और खुद आगे बढ़कर अपने प्यार को जाहिर करे। लेकिन कैसे जानें कि आपकी पार्टनर रोमांटिक है या नहीं? या फिर अगर आप अभी सिंगल हैं और पार्टनर की तलाश में हैं तो क्या करें ताकि आपको रोमांटिक पार्टनर मिले? इसके लिए एस्ट्रोलॉजी की मदद लें, आगे जानें सबसे रोमांटिक से कम रोमांटिक तक की 7 राशियों के बारे में। इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि किस राशि की लड़की कितनी रोमांटिक होती है। मीन राशि (Piseces) रोमांस की बात करें तो शायद ये एक खूबी मीन राशियों की लड़कियों की नस-नस में बसी है। ये बखूबी जानती हैं कि इनके पार्टनर को क्या पसंद है। पार्टनर को रोमांटिक गाने डेडीकेट करना, रोमांटिक वॉक करना, ये इनकी रोमांटिक लिस्ट में शामिल होता है। कर्क राशि (Cancer) बेहद इमोशनल होते हैं कर्क राशि के लोग इसलिए ये जानते हैं कि प्यार में रोमांस की क्या एहमियत होती है। इस राशि की लड़कियां अपने साथी को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। कन्या राशि (Virgo) इस राशि की लड़कियां अगर सच्चे दिल से किसी से प्यार कर लें तो वो शख्स इनकी दुनिया बन जाता है। उस शख्स से बात करने से लेकर मुलाक़ात तक, ये हर मोमेंट को रोमांस से भर देती हैं। इनके लिए उसे मिलना ही किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। धनु राशि (Sagittarius) हर छोटी बात में भी रोमांस खोज निकालना, धनु राशि की लड़कियों की ये क्वालिटी रिलेशनशिप में मिठास को भरे रखती हैं। इनका पार्टनर इन्हें कोई बड़ा सरप्राइज दी या छोटी-सी कोशिश ही क्यों ना करे, इनके लिए पार्टनर की हर हरकत रोमांटिक है। और ये खुद भी उसे खुश करने के लिए कुछ ना कुछ ट्राई करती रहती हैं। सिंह राशि (Leo) गुस्सा और प्यार, ये दो इमोशन सिंह राशि के लोग कभी छिपा नहीं पाते हैं। रोमांस की बात आए तो सिंह राशि की लड़कियां इसे अलग अंदाज में जाहिर करती हैं। पार्टनर को हेड मसाज देना, गरमा गर्म कॉफ़ी या टेस्टी फूड से शाम को मूड चिल करना, ये इनके रोमांस करने के तरीके हैं। मेष राशि (Aries) मेष राशि की लड़कियों के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि ये अकडू होती हैं और कभी खुद किसी के पास नहीं जाती। लोग इनकी ओर आकर्षित हों, इनमें इन्हें खुशी मिलती है। लेकिन अगर ये किसी से प्यार करें तो अपने रोमांस को जताने से पहले सोचती नहीं हैं। वृषभ राशि (Taurus) सच्चे प्यार और गहरी भावनाओं पर ही इस राशि की लड़कियों का रिश्ता टिका होता है। और अपने प्यार या रोमांस को जाहिर करने के लिए ये महंगे गिफ्ट्स या बड़े सरप्राइज पर निर्भर नहीं रहती हैं। पार्टनर को प्यार से 'किस' करना, बालों में हाथ फेरना, ये इनके रोमांस करने के तरीके हैं।
बेहद रोमांटिक होती हैं इन सात राशियों की लड़कियां, देखें क्या आपकी गर्लफ्रेंड भी है इनमें एक? गुस्सा और प्यार, ये दो इमोशन सिंह राशि की लड़कियों में बहुतायत में होते हैं। लड़कियों की अक्सर से डिमांड होती है कि उनका पार्टनर रोमांटिक जरूर होना चाहिए। वो छोटे-छोटे सरप्राइज देकर उन्हें खुश करे और उनका दिन बना दे। आजकल लड़कों की भी कुछ ऐसी ही मांग है। वे भी चाहते हैं कि उनकी पार्टनर रोमांटिक हो और खुद आगे बढ़कर अपने प्यार को जाहिर करे। लेकिन कैसे जानें कि आपकी पार्टनर रोमांटिक है या नहीं? या फिर अगर आप अभी सिंगल हैं और पार्टनर की तलाश में हैं तो क्या करें ताकि आपको रोमांटिक पार्टनर मिले? इसके लिए एस्ट्रोलॉजी की मदद लें, आगे जानें सबसे रोमांटिक से कम रोमांटिक तक की सात राशियों के बारे में। इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि किस राशि की लड़की कितनी रोमांटिक होती है। मीन राशि रोमांस की बात करें तो शायद ये एक खूबी मीन राशियों की लड़कियों की नस-नस में बसी है। ये बखूबी जानती हैं कि इनके पार्टनर को क्या पसंद है। पार्टनर को रोमांटिक गाने डेडीकेट करना, रोमांटिक वॉक करना, ये इनकी रोमांटिक लिस्ट में शामिल होता है। कर्क राशि बेहद इमोशनल होते हैं कर्क राशि के लोग इसलिए ये जानते हैं कि प्यार में रोमांस की क्या एहमियत होती है। इस राशि की लड़कियां अपने साथी को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। कन्या राशि इस राशि की लड़कियां अगर सच्चे दिल से किसी से प्यार कर लें तो वो शख्स इनकी दुनिया बन जाता है। उस शख्स से बात करने से लेकर मुलाक़ात तक, ये हर मोमेंट को रोमांस से भर देती हैं। इनके लिए उसे मिलना ही किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। धनु राशि हर छोटी बात में भी रोमांस खोज निकालना, धनु राशि की लड़कियों की ये क्वालिटी रिलेशनशिप में मिठास को भरे रखती हैं। इनका पार्टनर इन्हें कोई बड़ा सरप्राइज दी या छोटी-सी कोशिश ही क्यों ना करे, इनके लिए पार्टनर की हर हरकत रोमांटिक है। और ये खुद भी उसे खुश करने के लिए कुछ ना कुछ ट्राई करती रहती हैं। सिंह राशि गुस्सा और प्यार, ये दो इमोशन सिंह राशि के लोग कभी छिपा नहीं पाते हैं। रोमांस की बात आए तो सिंह राशि की लड़कियां इसे अलग अंदाज में जाहिर करती हैं। पार्टनर को हेड मसाज देना, गरमा गर्म कॉफ़ी या टेस्टी फूड से शाम को मूड चिल करना, ये इनके रोमांस करने के तरीके हैं। मेष राशि मेष राशि की लड़कियों के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि ये अकडू होती हैं और कभी खुद किसी के पास नहीं जाती। लोग इनकी ओर आकर्षित हों, इनमें इन्हें खुशी मिलती है। लेकिन अगर ये किसी से प्यार करें तो अपने रोमांस को जताने से पहले सोचती नहीं हैं। वृषभ राशि सच्चे प्यार और गहरी भावनाओं पर ही इस राशि की लड़कियों का रिश्ता टिका होता है। और अपने प्यार या रोमांस को जाहिर करने के लिए ये महंगे गिफ्ट्स या बड़े सरप्राइज पर निर्भर नहीं रहती हैं। पार्टनर को प्यार से 'किस' करना, बालों में हाथ फेरना, ये इनके रोमांस करने के तरीके हैं।
Ranchi: कोविड-19 को देखते हुए रांची पैथोलॉजी सेंटर एक बार फिर से 17 मई से जेनेरल ओपीडी सेवा शुरू करने जा रहा है. जानकारी देते हुए बताया गया कि कश्मीर वस्त्रालय के सामने स्थित अनवर ऑर्केड के पहले तल्ले पर डॉक्टर्स क्लिनिक सोमवार से कार्यरत रहेगी. ओपीडी सुविधा सुबह 8:30 बजे से शुरू होगी. इसमें कई डॉक्टर्स नियमित रूप से मरीजों को अपनी सेवाए देंगे. इसके अलावा इस क्लिनिक में कोविड-19 के प्रोटोकॉल के अनुसार, ऑनलाइन चिकित्सक परामर्श भी दिया जाएगा. जांच के लिए रांची पैथोलॉजी सेंटर जाने की जानकारी दी गयी. जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से रांची पैथोलॉजी सेंटर और डॉक्टर्स क्लिनिक बंद था. कोविड-19 में परिस्थितियों को देखते हुए ओपीडी सेवा फिर से शुरु की जा रही है. रांची पैथोलॉजी सेंटर के निदेशक सैयद फ़राज अब्बास ने अपील किया है कि डॉक्टर्स को दिखाने या किसी जांच करवाने आयें तो नियमित रूप से मास्क और सेनिटाइजर का उपयोग करें. भीड़ न लगाएं. मरीज के साथ 1 या 2 लोग ही आएं. वैक्सीन जरूर लगवाएं और सावधानी बरतें. सैयद फराज ने बताया कि किसी भी जानकरी के लिए 9708762201 या 7024941114 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है.
Ranchi: कोविड-उन्नीस को देखते हुए रांची पैथोलॉजी सेंटर एक बार फिर से सत्रह मई से जेनेरल ओपीडी सेवा शुरू करने जा रहा है. जानकारी देते हुए बताया गया कि कश्मीर वस्त्रालय के सामने स्थित अनवर ऑर्केड के पहले तल्ले पर डॉक्टर्स क्लिनिक सोमवार से कार्यरत रहेगी. ओपीडी सुविधा सुबह आठ:तीस बजे से शुरू होगी. इसमें कई डॉक्टर्स नियमित रूप से मरीजों को अपनी सेवाए देंगे. इसके अलावा इस क्लिनिक में कोविड-उन्नीस के प्रोटोकॉल के अनुसार, ऑनलाइन चिकित्सक परामर्श भी दिया जाएगा. जांच के लिए रांची पैथोलॉजी सेंटर जाने की जानकारी दी गयी. जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से रांची पैथोलॉजी सेंटर और डॉक्टर्स क्लिनिक बंद था. कोविड-उन्नीस में परिस्थितियों को देखते हुए ओपीडी सेवा फिर से शुरु की जा रही है. रांची पैथोलॉजी सेंटर के निदेशक सैयद फ़राज अब्बास ने अपील किया है कि डॉक्टर्स को दिखाने या किसी जांच करवाने आयें तो नियमित रूप से मास्क और सेनिटाइजर का उपयोग करें. भीड़ न लगाएं. मरीज के साथ एक या दो लोग ही आएं. वैक्सीन जरूर लगवाएं और सावधानी बरतें. सैयद फराज ने बताया कि किसी भी जानकरी के लिए नौ सात शून्य आठ सात छः दो दो शून्य एक या सात शून्य दो चार नौ चार एक एक एक चार नंबर पर संपर्क किया जा सकता है.
[भाग II - खण्ड 3(i)] SECOND PAPER Field astronomy: Astronomical terms; determination of frue bearing by equal altitude method; Gyro theodolite; principle and determination of Gyro north, astronomical triangle; conversion of time systems and precise determination of azimuth by astronomical methods. National grid: Map projection - Cassini, Lambert's polyconic, and universal transfers mercator; transformation of coordinates; vertical projections; mine models. Geodesy: Geod, spheroid and ellipsoid, geocentric; geodetic and astronomical coordinates; orthometric and dynamic height. Photogrammetry: Introduction; Scale of a vertical photograph, photographs versus maps, application of photogrammetry and remote sensing in mining. Correlation: Methods of correlation surface and underground including Gyro-Laser combination. Theory of errors and adjustments: Causes and classification of errors; indices of precision; laws of weight; propagation and adjustment of errors; adjustment of triangulation figures. Survey of flat, moderately and steeply inclined and vertical workings; control of direction and gradient in drifts and roadways; traversing along steep working with or without auxiliary telescopes; Area and volume calculation; different methods and their limitations; earthwork and building estimation; laying out of rail curves on surface and underground; measurements of depths of incline roadways and shafts; determination of azimuth, latitude and longitude. Borehole surveying and calculations; dip, strike, outcrop and fault problems. Types of plans; their preparation, care, storage and preservation; legislation concerning mine plans and sections; duties and responsibilities of surveyors. Geological map reading. Application of computers in mine surveying and preparation of mine plans; 3D laser profiling of surfaces and bench walls. [No. Board/Coal/939/2009] M. M. SHARMA, Director Gerneral of Mines Safety & Chairman, Board of Mining Examination (Coal) धनबाद, 4 मई, 2009 सा.का.नि. 68, कोयला खान विनियम, 1957 के विनियम 13 (4) के प्रावधानों के अनुसरण में ओवरमैन सक्षमता परीक्षा के संचालन एवं प्रमाण पत्र प्रदान किये जाने से संबंधित उपनियमों, जहाँ तक उनका संबंध परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम (परिशिष्ट-I) से है, को एतद्वारा निम्नवत प्रतिस्थापित किया जाता है :1665 GIỚ ओवरवैन सक्षमता प्रमाण-पत्र परीक्षा का पाठ्यक्रम ( कोयला खान विनियम, 1957 के अन्तर्गत) ( क ) सामान्य सुरक्षा एवं विधान श्रमिकों, सक्षम व्यक्तियों एवं अधिकारियों के दायित्व एवं कर्तव्य (प्रबंधक सहायक प्रबंधक को छोड़कर) श्रमिकों में अनुशासन एवं कर्मचारी नियंत्रण । कोयला खान विनियम, 1957 के खनन कार्यस्थलों, विस्फोटक एवं विस्फोटन, हॉलेज एवं संवातन से संबंधित प्रावधान, जल, अग्नि, धूल एवं गैस के खतरों के विरूद्ध सावधानियाँ तथा अन्य नियमों के प्रावधान जिनको लागू कराना और अनुपालन ओवरमैन का दायित्व है। विनियम के अन्तर्गत ओवरमैन द्वारा अपेक्षित प्रतिवेदनों का लेखन । खानों में खतरनाक घटनाएँ तथा उनके समाधान, दुर्घटनाएँ, उनके कारण और रोकथाम, दुर्घटना स्थल को यथास्थिति रखना । खान बचाव, खान गैसों को शारीरिकी प्रभाव, बचाव उपकरण एवं प्राथमिक उपचार । स्वच्छता एवं स्वास्थ्य, खनिकों में होने वाली बीमारियाँ, उनके लक्षण एवं रोकथाम । ( ख ) कार्य पद्धतियाँ : कोयला सीमों के पाए जाने की प्रकृति, जिओलोजीकल विक्षोभ एवं खनन परिस्थितियों पर उनका प्रभाव, मैं गर्भीय कारणों से अशांत क्षेत्रों के समीप जाने के दौरान उत्पन्न खतरे एवं उनसे सावधानी के उपाय 1. खानों में बोर होलों का उद्देश्य एवं उनकी उपयोगिता, शाफ्ट सिकिंग, सुरक्षा के उपाधान, सिन्किंग एवं वर्किंग शॉफ्ट में अस्थायी एवं स्थायी सपोर्ट, शॉफ्ट एवं आउटलेट्स की जाँच पोखरिया खनन विधियाँ, यांत्रिक एवं हस्तकृत पद्धतियाँ, डीप होल ड्रिलिंग एवं ब्लास्टिंग, शॉवेल एवं डम्पर, ड्रैग लाइन, बकेट व्हील एक्सकेवेटर, सरफेस (कन्टीन्यूअस) माईनर बैंचिंग, हाल रोडों का रख-रखाव, विकसित पिलरों के उत्खनन के दौरान बरती जाने. वाली एंव अन्य सुरक्षा सावधानियाँ, खननोपरान्त भूमि सुधार की विधियाँ, डम्प प्रबधंन हाईवाल माइनिंग । बोर्ड ऐंड पिलर एवं लौंगवाल पद्धतियों के सामान्य सिद्धांत, मल्टीसेक्शन वर्किंग, विविध दशाओं में डिपिलरिंग पद्धतियाँ मेकेनाइज्ड पिलर निष्कर्षण, जल पूर्ण क्षेत्रों के समीप या नीचे कार्य करने के दौरान बरती जानेवाली सावधानियाँ, रूफ कन्वर्जेस एवं कन्वर्जेस मापी यंत्र आदि, स्टोन ड्रिफ्टिंग । छत नियंत्रण के घटक, रूफ स्ट्राटार की रॉक मास रेटिंग (आर. एम. आर. ) रूफ बोल्टिंग के सिद्धांत, रोडवे सपोर्ट, फेस सपोर्ट एवं उनके प्रकार, निर्धारण, लगाना, जाँच एवं निकालना, सिस्टमेंटक सपोर्ट रूल, पेकिंग एवं स्टोइंग, भूतल स्थित संरचनाओं की सुरक्षा, विधि द्वारा. निषिद्ध क्षेत्रों एवं भूतल स्थित संरचनाओं के नीचे खनन कार्य । गैसीय एवं अगैसीय खानों में कोयला एवं पत्थर में विस्फोटकों का सुरक्षित रख-रखाव एवं उपयोग, समकालिक शॉट फायरिंग, पोखरिया खानों में अग्नि क्षेत्रों में विस्फोट, सुरक्षा सावधानियाँ । THE GAZETTE OF INDIA: MAY 16, 2009 /VAISAKHA26, 1931 कार्यस्थलों का निरीक्षण, दुलाई एवं आवागमन पथों का निरीक्षण एवं रख-रखाव, मेन राइडिंग सिस्टम एवं रिटर्न एयरवेज, फाटक एवं घेराबन्दियाँ आदि । सांविधिक नक्शों को पढ़ना । (ग) संवातन, विस्फोट, अग्नि एवं जल-प्लावन के विरुद्ध सावधानियाँ : प्रकृतिक एवं यंत्रीकृत संवातन, हेडिंग्स एवं सिंकिंग शॉफ्टों में संवातन, सहायक एवं बूस्टर पंखों को लिये स्थान का चयन, खानों में वायु का संवितरण, मापन एवं नियंत्रण आवश्यक वायुमात्रा का प्राक्कलन, वायुमार्गीकरण की विधियाँ, वायुमापी यंत्र, आद्रतामापी यंत्र (हाइग्रोमीटर), संवातन साधनों का रख-रखाव । वायु का प्रदूषण, खानों में गैसों का समाक्रमण/उत्पत्ति, गैसों के गुण, फायर डैम्प एवं अप्राण वायु की उपस्थिति का पता लगाना एवं मापन, एयर सॅपलिंग, परिवेशी दशाओं की जाँच-माप, संवातन के मानदण्ड । लौ एवं विद्युत सुरक्षा बत्ती की डिजाईन एवं बनावट, उनका प्रयोग, जाँच एवं रख-रखाव कोयला धूलि का उपचार एवं दमन, स्टोन डस्ट की उपयुक्तता, कोल डस्ट का सैम्पलिंग एवं विश्लेषण फायर डैम्प एवं कोयला धूल विस्फोट के कारणों एवं रोकथाम का आधारभूत ज्ञान, फायर डैम्प की ज्वलनशीलता की सीमाएँ । आग एवं स्वतः दहन खानों में आग का निरोध, पता लगाना एवं नियंत्रण, अग्नि क्षेत्रों को सीलबन्द करना, फायर स्टोपिंग एवं उनकी जाँच, भूतल पर लगनेवाली आग के विरुद्ध सावधानियाँ, भूतल एवं भूमिगत अग्नि शमन । पुराने खनन स्थलों को निरीक्षण । भूतल एवं भूमिगत जल से खतरों के स्रोत, जल-प्लावन एवं जल- समाक्रमण की रोकथाम हेतु सावधानियाँ, परित्यक्त एवं जल- पूर्ण क्षेत्रों के समीप पहुंचने के दौरान सावधानियां, अन्वेषण कार्य के लिए बोरिंग मशीन, जलबाँध, वाटर डेन्जर प्लान । जल-प्लावन, आग एवं विस्फोट के उपरान्त खानों का पुनरुद्धार, खानों से जल निकासी एवं पुनः चालू करने के दौरान सावधानियाँ । (घ) खनन मशीनरी के घटक : सुरक्षा के पहलू और भूमिगत एवं खुली खानों में प्रयुक्त विभिन्न मशीनों का सुरक्षित प्रयोग, ब्लास्ट हॉल ड्रिल, रिपर, स्क्रैपर, शॉवेल, ड्रैगलाइन, डम्पर, रोड ग्रेडर, डोजर, व्हील लोडर, बकेट व्हील एक्सकेवेटर, स्प्रेडर, सर्फेस कन्टीन्यूअस माईनर, ब्रेक (सर्विस एवं पार्किंग ब्रेक) सहित, खानों में वाष्प एवं आन्तरिक दहन इंजनों का प्रयोग । खानों में विद्युत का उपयोग, सुरक्षा हेतु सावधानियाँ । [PART II - SEC. 3(i)] वाइन्डिंग उपकरण, रोप एवं गाइड, सिग्नलिंग एवं डेकिंग की व्यवस्था, सुरक्षा के साधन, वाइन्डिंग उपकरण एवं शॉफ्ट फिटिंग की जाँच । हॉलेज एवं ट्रांसपोर्ट, हॉलेज के प्रकार, रोप हॉलेज एवं लोकोमोटिव, सेल्फ एक्टिंग इन्क्लाइन, भूमिगत एवं पोखरिया खनन स्थलों में हॉलेज रोड, रेल एवं ट्रैक, उनका रख-रखाव एवं निरीक्षण, टब, सिग्नलिंग, सुरक्षा के साधन, व्यवहार संहिता नियम, यातायात नियम, असुरक्षित प्रयोग, डिरेलमेंट । विभिन्न प्रकार के पंप, साइफन के सिद्धान्त एवं प्रयोग, ड्रेनेज एवं जल संग्रह । भूमिगत एवं पोखरिया खानों में प्रयुक्त मशीनों के परिवहन,. संस्थापन, प्रयोग एवं प्रतिस्थान के लिये व्यवहार संहिताएं । बेल्ट कन्वेयर एवं सुरक्षा के साधन । एम. एम. शर्मा, खान सुरक्षा महानिदेशक एवं अध्यक्ष, खनन परीक्षा बोर्ड (कोयला ) G.S.R. 68.- In pursuance of the provisions of Regulation 13 (4) of the Coal Mines Regulations, 1957, the bye-laws for the conduct of examination and grant of Overman Certificates of Competency so far as they relate to Syllabus for Overman Certificate Examination (Appendix-I) is being substituted by the following - SYLLABUS FOR THE EXAMINATION FOR OVERMAN'S CERTIFICATE OF COMPETENCY. (Under Coal Mines Regulations, 1957) (a) General Safety and Legislaiton Duties and responsibilities of workmen, competent persons and officials (excluding managers, assistant managers); discipline amongst workers and control of staff. Provisions of the Coal Mines Regulations, 1957 relating to mine workings; explosives and shotfiring; haulage; ventilation; precautions against danger from dust, gas and water and of other provisions and Rules; the enforcement of and compliance with which is the responsibility of overman. Writing of reports required to be made by overman under the regulations. Dangerous occurrences in mines and dealing with the same; accidents, their causes and prevention; accident .reports; not disturbing the place of accident. Mine rescue; physiological effect of mine gases; rescue equipment and First Aid.
[भाग II - खण्ड तीन] SECOND PAPER Field astronomy: Astronomical terms; determination of frue bearing by equal altitude method; Gyro theodolite; principle and determination of Gyro north, astronomical triangle; conversion of time systems and precise determination of azimuth by astronomical methods. National grid: Map projection - Cassini, Lambert's polyconic, and universal transfers mercator; transformation of coordinates; vertical projections; mine models. Geodesy: Geod, spheroid and ellipsoid, geocentric; geodetic and astronomical coordinates; orthometric and dynamic height. Photogrammetry: Introduction; Scale of a vertical photograph, photographs versus maps, application of photogrammetry and remote sensing in mining. Correlation: Methods of correlation surface and underground including Gyro-Laser combination. Theory of errors and adjustments: Causes and classification of errors; indices of precision; laws of weight; propagation and adjustment of errors; adjustment of triangulation figures. Survey of flat, moderately and steeply inclined and vertical workings; control of direction and gradient in drifts and roadways; traversing along steep working with or without auxiliary telescopes; Area and volume calculation; different methods and their limitations; earthwork and building estimation; laying out of rail curves on surface and underground; measurements of depths of incline roadways and shafts; determination of azimuth, latitude and longitude. Borehole surveying and calculations; dip, strike, outcrop and fault problems. Types of plans; their preparation, care, storage and preservation; legislation concerning mine plans and sections; duties and responsibilities of surveyors. Geological map reading. Application of computers in mine surveying and preparation of mine plans; तीनD laser profiling of surfaces and bench walls. [No. Board/Coal/नौ सौ उनतालीस/दो हज़ार नौ] M. M. SHARMA, Director Gerneral of Mines Safety & Chairman, Board of Mining Examination धनबाद, चार मई, दो हज़ार नौ सा.का.नि. अड़सठ, कोयला खान विनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियम तेरह के प्रावधानों के अनुसरण में ओवरमैन सक्षमता परीक्षा के संचालन एवं प्रमाण पत्र प्रदान किये जाने से संबंधित उपनियमों, जहाँ तक उनका संबंध परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम से है, को एतद्वारा निम्नवत प्रतिस्थापित किया जाता है :एक हज़ार छः सौ पैंसठ GIỚ ओवरवैन सक्षमता प्रमाण-पत्र परीक्षा का पाठ्यक्रम सामान्य सुरक्षा एवं विधान श्रमिकों, सक्षम व्यक्तियों एवं अधिकारियों के दायित्व एवं कर्तव्य श्रमिकों में अनुशासन एवं कर्मचारी नियंत्रण । कोयला खान विनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के खनन कार्यस्थलों, विस्फोटक एवं विस्फोटन, हॉलेज एवं संवातन से संबंधित प्रावधान, जल, अग्नि, धूल एवं गैस के खतरों के विरूद्ध सावधानियाँ तथा अन्य नियमों के प्रावधान जिनको लागू कराना और अनुपालन ओवरमैन का दायित्व है। विनियम के अन्तर्गत ओवरमैन द्वारा अपेक्षित प्रतिवेदनों का लेखन । खानों में खतरनाक घटनाएँ तथा उनके समाधान, दुर्घटनाएँ, उनके कारण और रोकथाम, दुर्घटना स्थल को यथास्थिति रखना । खान बचाव, खान गैसों को शारीरिकी प्रभाव, बचाव उपकरण एवं प्राथमिक उपचार । स्वच्छता एवं स्वास्थ्य, खनिकों में होने वाली बीमारियाँ, उनके लक्षण एवं रोकथाम । कार्य पद्धतियाँ : कोयला सीमों के पाए जाने की प्रकृति, जिओलोजीकल विक्षोभ एवं खनन परिस्थितियों पर उनका प्रभाव, मैं गर्भीय कारणों से अशांत क्षेत्रों के समीप जाने के दौरान उत्पन्न खतरे एवं उनसे सावधानी के उपाय एक. खानों में बोर होलों का उद्देश्य एवं उनकी उपयोगिता, शाफ्ट सिकिंग, सुरक्षा के उपाधान, सिन्किंग एवं वर्किंग शॉफ्ट में अस्थायी एवं स्थायी सपोर्ट, शॉफ्ट एवं आउटलेट्स की जाँच पोखरिया खनन विधियाँ, यांत्रिक एवं हस्तकृत पद्धतियाँ, डीप होल ड्रिलिंग एवं ब्लास्टिंग, शॉवेल एवं डम्पर, ड्रैग लाइन, बकेट व्हील एक्सकेवेटर, सरफेस माईनर बैंचिंग, हाल रोडों का रख-रखाव, विकसित पिलरों के उत्खनन के दौरान बरती जाने. वाली एंव अन्य सुरक्षा सावधानियाँ, खननोपरान्त भूमि सुधार की विधियाँ, डम्प प्रबधंन हाईवाल माइनिंग । बोर्ड ऐंड पिलर एवं लौंगवाल पद्धतियों के सामान्य सिद्धांत, मल्टीसेक्शन वर्किंग, विविध दशाओं में डिपिलरिंग पद्धतियाँ मेकेनाइज्ड पिलर निष्कर्षण, जल पूर्ण क्षेत्रों के समीप या नीचे कार्य करने के दौरान बरती जानेवाली सावधानियाँ, रूफ कन्वर्जेस एवं कन्वर्जेस मापी यंत्र आदि, स्टोन ड्रिफ्टिंग । छत नियंत्रण के घटक, रूफ स्ट्राटार की रॉक मास रेटिंग रूफ बोल्टिंग के सिद्धांत, रोडवे सपोर्ट, फेस सपोर्ट एवं उनके प्रकार, निर्धारण, लगाना, जाँच एवं निकालना, सिस्टमेंटक सपोर्ट रूल, पेकिंग एवं स्टोइंग, भूतल स्थित संरचनाओं की सुरक्षा, विधि द्वारा. निषिद्ध क्षेत्रों एवं भूतल स्थित संरचनाओं के नीचे खनन कार्य । गैसीय एवं अगैसीय खानों में कोयला एवं पत्थर में विस्फोटकों का सुरक्षित रख-रखाव एवं उपयोग, समकालिक शॉट फायरिंग, पोखरिया खानों में अग्नि क्षेत्रों में विस्फोट, सुरक्षा सावधानियाँ । THE GAZETTE OF INDIA: MAY सोलह, दो हज़ार नौ /VAISAKHAछब्बीस, एक हज़ार नौ सौ इकतीस कार्यस्थलों का निरीक्षण, दुलाई एवं आवागमन पथों का निरीक्षण एवं रख-रखाव, मेन राइडिंग सिस्टम एवं रिटर्न एयरवेज, फाटक एवं घेराबन्दियाँ आदि । सांविधिक नक्शों को पढ़ना । संवातन, विस्फोट, अग्नि एवं जल-प्लावन के विरुद्ध सावधानियाँ : प्रकृतिक एवं यंत्रीकृत संवातन, हेडिंग्स एवं सिंकिंग शॉफ्टों में संवातन, सहायक एवं बूस्टर पंखों को लिये स्थान का चयन, खानों में वायु का संवितरण, मापन एवं नियंत्रण आवश्यक वायुमात्रा का प्राक्कलन, वायुमार्गीकरण की विधियाँ, वायुमापी यंत्र, आद्रतामापी यंत्र , संवातन साधनों का रख-रखाव । वायु का प्रदूषण, खानों में गैसों का समाक्रमण/उत्पत्ति, गैसों के गुण, फायर डैम्प एवं अप्राण वायु की उपस्थिति का पता लगाना एवं मापन, एयर सॅपलिंग, परिवेशी दशाओं की जाँच-माप, संवातन के मानदण्ड । लौ एवं विद्युत सुरक्षा बत्ती की डिजाईन एवं बनावट, उनका प्रयोग, जाँच एवं रख-रखाव कोयला धूलि का उपचार एवं दमन, स्टोन डस्ट की उपयुक्तता, कोल डस्ट का सैम्पलिंग एवं विश्लेषण फायर डैम्प एवं कोयला धूल विस्फोट के कारणों एवं रोकथाम का आधारभूत ज्ञान, फायर डैम्प की ज्वलनशीलता की सीमाएँ । आग एवं स्वतः दहन खानों में आग का निरोध, पता लगाना एवं नियंत्रण, अग्नि क्षेत्रों को सीलबन्द करना, फायर स्टोपिंग एवं उनकी जाँच, भूतल पर लगनेवाली आग के विरुद्ध सावधानियाँ, भूतल एवं भूमिगत अग्नि शमन । पुराने खनन स्थलों को निरीक्षण । भूतल एवं भूमिगत जल से खतरों के स्रोत, जल-प्लावन एवं जल- समाक्रमण की रोकथाम हेतु सावधानियाँ, परित्यक्त एवं जल- पूर्ण क्षेत्रों के समीप पहुंचने के दौरान सावधानियां, अन्वेषण कार्य के लिए बोरिंग मशीन, जलबाँध, वाटर डेन्जर प्लान । जल-प्लावन, आग एवं विस्फोट के उपरान्त खानों का पुनरुद्धार, खानों से जल निकासी एवं पुनः चालू करने के दौरान सावधानियाँ । खनन मशीनरी के घटक : सुरक्षा के पहलू और भूमिगत एवं खुली खानों में प्रयुक्त विभिन्न मशीनों का सुरक्षित प्रयोग, ब्लास्ट हॉल ड्रिल, रिपर, स्क्रैपर, शॉवेल, ड्रैगलाइन, डम्पर, रोड ग्रेडर, डोजर, व्हील लोडर, बकेट व्हील एक्सकेवेटर, स्प्रेडर, सर्फेस कन्टीन्यूअस माईनर, ब्रेक सहित, खानों में वाष्प एवं आन्तरिक दहन इंजनों का प्रयोग । खानों में विद्युत का उपयोग, सुरक्षा हेतु सावधानियाँ । [PART II - SEC. तीन] वाइन्डिंग उपकरण, रोप एवं गाइड, सिग्नलिंग एवं डेकिंग की व्यवस्था, सुरक्षा के साधन, वाइन्डिंग उपकरण एवं शॉफ्ट फिटिंग की जाँच । हॉलेज एवं ट्रांसपोर्ट, हॉलेज के प्रकार, रोप हॉलेज एवं लोकोमोटिव, सेल्फ एक्टिंग इन्क्लाइन, भूमिगत एवं पोखरिया खनन स्थलों में हॉलेज रोड, रेल एवं ट्रैक, उनका रख-रखाव एवं निरीक्षण, टब, सिग्नलिंग, सुरक्षा के साधन, व्यवहार संहिता नियम, यातायात नियम, असुरक्षित प्रयोग, डिरेलमेंट । विभिन्न प्रकार के पंप, साइफन के सिद्धान्त एवं प्रयोग, ड्रेनेज एवं जल संग्रह । भूमिगत एवं पोखरिया खानों में प्रयुक्त मशीनों के परिवहन,. संस्थापन, प्रयोग एवं प्रतिस्थान के लिये व्यवहार संहिताएं । बेल्ट कन्वेयर एवं सुरक्षा के साधन । एम. एम. शर्मा, खान सुरक्षा महानिदेशक एवं अध्यक्ष, खनन परीक्षा बोर्ड G.S.R. अड़सठ.- In pursuance of the provisions of Regulation तेरह of the Coal Mines Regulations, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन, the bye-laws for the conduct of examination and grant of Overman Certificates of Competency so far as they relate to Syllabus for Overman Certificate Examination is being substituted by the following - SYLLABUS FOR THE EXAMINATION FOR OVERMAN'S CERTIFICATE OF COMPETENCY. General Safety and Legislaiton Duties and responsibilities of workmen, competent persons and officials ; discipline amongst workers and control of staff. Provisions of the Coal Mines Regulations, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन relating to mine workings; explosives and shotfiring; haulage; ventilation; precautions against danger from dust, gas and water and of other provisions and Rules; the enforcement of and compliance with which is the responsibility of overman. Writing of reports required to be made by overman under the regulations. Dangerous occurrences in mines and dealing with the same; accidents, their causes and prevention; accident .reports; not disturbing the place of accident. Mine rescue; physiological effect of mine gases; rescue equipment and First Aid.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी रविवार को शपथ लेंगे। राजभवन शिमला में आयोजित होने वाले गरिमापूर्ण कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा एल नारायण स्वामी को हिमाचल हाईकोर्ट के 25वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई जाएगी। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की संस्तुति के बाद उनके नाम की अधिसूचना जारी की है। हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे वी रामासुब्रमनियन सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं। इनके जाने के बाद पद खाली था। अभी वरिष्ठ न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी को प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी रविवार को शपथ लेंगे। राजभवन शिमला में आयोजित होने वाले गरिमापूर्ण कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा एल नारायण स्वामी को हिमाचल हाईकोर्ट के पच्चीसवें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई जाएगी। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की संस्तुति के बाद उनके नाम की अधिसूचना जारी की है। हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे वी रामासुब्रमनियन सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं। इनके जाने के बाद पद खाली था। अभी वरिष्ठ न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी को प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।
वास्तव में एक अनूठे शहर बार्सिलोना है जगहें, जिनमें से यात्रा पत्रिकाओं के पन्नों को सजाना, तस्वीरें कैटलोनिया की भूमि का दौरा करने का संकेत देते हैं और किसी भी व्यक्ति जो इस जगह पर नसीब हो सकते हैं, अपने इतिहास के बारे में जितना संभव हो सके सीखने की एक अनूठा इच्छा है। और यह, यह ध्यान दिया जाना चाहिए, सबसे अमीर! रोमनों, बार्सिलोना (स्पेन, कैटलोनिया) के तहत अभी भी स्थापित है और अब अपने विकास के सभी युग के निशान रखता है। शहर की उपस्थिति पर एक अमिट छाप छोड़ दियाईसाई धर्म की संस्कृति के अस्तित्व की कई शताब्दियों बार्सिलोना के आकर्षण बहुत विविध हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा हित है, पुराने चर्च और शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित मंदिर हैं। गोथिक क्वार्टर धार्मिक जीवन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है, बार्सिलोना में मंदिर - कैथेड्रल, जिसका बानगी कुछ कलहंस का एक झुंड के प्रवेश द्वार के पास चराई, सेंट Eulalia, चर्च के संरक्षक संत के शुद्धता का प्रतीक है। अद्वितीय इंटीरियर पर्यटकों के ध्यान को आकर्षित करता है जो सांता मारिया डेल मार्च की बासीलीक है, नेविगेशन के सुनहरे दिनों में बनाया गया है। शहर में कहीं से एक और पंथ चर्च दिखाई दे रहा है - सेक्रेड हार्ट का मंदिर, माउंट टिबिडाबो के शीर्ष पर बनाया गया बार्सिलोना, डाटा संरचनाओं के लिए धन्यवाद, हर साल हजारों वास्तुकला के प्रेमियों के आकर्षित करती है, लेकिन दुनिया भर से पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक शहर के मुख्य खजाना देखने के लिए यहां बटोरता - पवित्र परिवार के चर्च, जिसका निर्माण 19 वीं सदी में शुरू हुआ और आज भी जारी है। लाखों लोगों ने एंटोनियो गौडी की नायाब शैली की प्रशंसा करने के लिए कई वर्षों से बार्सिलोना का दौरा किया है। 1874 में एक चर्च बनाने का विचार उभर आयाअप्रत्याशित रूप से, पैसे की एक बड़ी राशि के दान के कारण पहले से ही 1881 में, बार्सिलोना से कुछ किलोमीटर तक निर्माण के लिए जमीन खरीदी गई थी हाँ, मूल रूप से एक मंदिर शहर के बाहर बनाया गया था, यह बाद में बार्सिलोना ताकि Sagrada Familia अब सबसे अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्र में स्थित है हो गई थी। मार्च 1882 में, आर्किटेक्ट एफ। डेल वेलर के नेतृत्व में, उन्होंने इमारत की नींव रखना शुरू कर दिया। हालांकि, पैन की बड़ी संख्या और निर्माण के लिए धन की उपलब्धता के बावजूद, 1882 के अंत में वास्तुकार के निर्माण में भाग लेने से इनकार कर दिया है, उसे और ग्राहक के बीच समझौते की कमी के कारण। शायद अब यह, इस परिमाण के बार्सिलोना के आकर्षण नहीं होती है, परियोजना डेल विल्लर मामले उत्साह और ऊर्जा वास्तुकार एंटोनी गॉडी से भरा से जुड़ा नहीं है पर काम के हटाने के बाद। उनके विचार के मुताबिक, कला नोव्यू शैली में, एक वेब के समान, मंदिर बहुत खुला होना चाहिए था। यह मान लिया गया है कि निर्माण को भागने कई टावरों के साथ बिखरे किया जाएगा, और अन्य आंतरिक और बाह्य सजावट सुसमाचार के अलग-अलग तत्वों को प्रतिबिंबित करेगा, अर्थात्, जन्म, सूली पर चढ़ाये जाने, मसीह के जी उठने, या कैथोलिक चर्च के अन्य संस्कार। गौड़ी, चर्च एक रेत महल, उन है कि वे जलाशय के तट पर बैठना अच्छा लगता है, बच्चों का निर्माण करने के लिए इसी तरह की तरह होना ही था। इसका अर्थ था कि क्रॉस के रूप में एक चर्च के केंद्रीय शिखर 170 मीटर, (बार्सिलोना के नगर में पहाड़ों) Montjuic की ऊंचाई से नीचे एक मीटर की ऊंचाई होगा - एक मंदिर भगवान का सही निर्माण से अधिक नहीं था। बार्सिलोना का इतिहास समानांतर था,सागरदा फ़मिलिया कैसे बनाया गया था, क्योंकि इमारत के मुखौटे को चालीस वर्षों से अधिक समय तक बनाया गया था। इस समय शहर बढ़ गया, आत्मविश्वास से औद्योगिक युग में विलय हो गया और तेजी से विकसित होना शुरू कर दिया। एंटोनियो गौड़ी द्वारा प्रत्येक टावर की सजावट ने करीब ध्यान दिया। अपने विचारों के अवतार के ऊपर उन्होंने दर्दनाक रूप से काम किया और खुद को नहीं छोड़ा, और कई समझ में नहीं आये कि क्यों एक वास्तुकार निर्माण पर इतना पैसा, समय और प्रयास खर्च करता है, क्योंकि टावरों के शीर्ष भी जमीन से नहीं देखे जा सकते थे। गौड़ी ने जवाब दियाः "यदि लोग नहीं देखते हैं, तो स्वर्गदूत देखेंगे।" बार्सिलोना बढ़ रहा था। मंदिर इसके साथ बढ़ गया। यह तीन facades बनाने के लिए कल्पना की गई थीः जुनून, क्रिसमस और मसीह की महिमा। वास्तुकार को पता था कि इस तरह की एक छोटी अवधि मानव जीवन के रूप में भव्य विचार को समझने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उसे तय करना था कि तीन वास्तुकला तत्वों में से कौन सा खड़ा होना है। और उन्होंने क्रिसमस के मुखौटे के पक्ष में एक विकल्प बनाया, क्योंकि मसीह के क्रूस पर चढ़ाई के कुछ दृश्य निवासियों को डरा सकते थे, और उनकी राय बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि निर्माण केवल दान पर आयोजित किया गया था। 1 9 0 9 -10 के वर्षों के दौरान। चर्च में फिर गौड़ी के विचार पर एक चर्च-पैरिश स्कूल बनाया। प्रारंभ में, इसे एक अस्थायी इमारत के रूप में बनाया गया था, इसलिए इसमें लोड-असर वाली दीवारें नहीं थीं, और आंतरिक विभाजन आसानी से हटा दिए गए थे, जो आसानी से अंतरिक्ष के लेआउट को बदल सकते थे। दुर्भाग्यवश, हमारे दिनों तक, स्कूल की सटीक छवि को संरक्षित नहीं किया गया है। 30 नवंबर, 1 9 25 मुखौटा का निर्माणक्रिसमस खत्म हो गया था, गौड़ी बाकी इमारत का निर्माण शुरू करने जा रहा था। वास्तुकार के काम के वर्षों के दौरान बार्सिलोना द्वारा एक अनूठा आकर्षण प्राप्त किया गया - चर्च कैथोलिक कैथोलिक मूर्तियों और प्रतीकों, liturgies और सुसमाचार से ग्रंथों के साथ सजाया गया था। सबकुछ 7 जून, 1 9 26 को बीमार दिन के ऊपर उल्टा हो गया। जब वह सेवा के लिए चर्च गए तो 73 वर्षीय एंटोनियो गौड़ी ने एक ट्राम को गोली मार दी। वास्तुकार बहुत खराब कपड़े पहने हुए थे, उन्हें एक ट्रम्प के लिए गलत माना गया था और उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए भी परेशान नहीं था। 10 जून, 1 9 26, 74 वीं वर्षगांठ पर पहुंचने से थोड़ा पहले, गौड़ी की मृत्यु हो गई। एक महान आदमी बार्सिलोना खो गया! अपने हाथों से बनाई गई सवारी, आज लाखों लोगों की यात्रा करना चाहती है, उनके बिना शहर की कल्पना करना असंभव है। और यह न केवल सगारदा परिवार है, हालांकि, यह वास्तुकार का मुख्य निर्माण है। यहां उन्हें दफनाया गया - गौड़ी को सगारदा फ़मिलिया की अभी भी अधूरा इमारत में दफनाया गया था। मास्टर की मृत्यु के बाद चर्च का निर्माण नहीं हैरुक गया, उन्होंने आर्किटेक्ट के प्रतिभाशाली छात्र - डोमेनेच सुप्रानस को जारी रखा, जिन्होंने 1 9 02 से गौड़ी के साथ काम किया। 1 9 30 के दशक तक अन्य दो मुखौटे बनाए गए थे, वे पहले की तरह चित्रों, पवित्र शास्त्रों और मूर्तियों के ग्रंथों से सजाए गए थे। लेकिन आगे कठिन समय का पालन किया। धन दान की कमी, आने वाली दुनिया और नागरिक युद्धों ने इस तथ्य को जन्म दिया कि 1 9 52 तक मंदिर का निर्माण लगभग बंद कर दिया गया था। फिर इमारत का निर्माण शुरू हो गया, लेकिन, इस तथ्य के बावजूद कि कई दशकों तक काम लगातार चल रहा है, योजना के अंतिम समापन तक, एंटोनी गौड़ी अभी भी बहुत दूर है। सुसमाचार प्रचारक मार्क, जॉन, मैथ्यू और ल्यूक को समर्पित चार 120 मीटर टावरों को पूरा करना आवश्यक है। आर्किटेक्ट के विचार के अनुसार, मसीह के 170 मीटर के टावर पर, एक क्रॉस स्थापित करना, और शेष चार - अंगूर के क्लस्टर, सैक्रामेंट के प्रतीक के रूप में आवश्यक है। यदि कोई अप्रत्याशित परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होती हैं, और 2026 तक योजना के अनुसार निर्माण किया जाएगा, जो आखिरकार सदी में भी अस्तित्व में शुरू हुआ था, तो सबसे बड़ा निर्माण अंततः पूरा हो जाएगा। भव्य निर्माण का अंत न केवल बार्सिलोना के लिए इंतजार कर रहा है। मंदिर दुनिया भर के लोगों को बनाने में मदद करता है, दोनों ईसाईयों और अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों द्वारा दान किया जाता है। तो, हाल ही में जापान से पैसे का एक महत्वपूर्ण प्रवाह रहा है। बार्सिलोना वास्तव में अद्वितीय हैआकर्षण। विश्व नाम वाले फोटोग्राफर उत्कृष्ट वास्तुकला के साथ प्राचीन और आधुनिक दोनों शहर को पकड़ने के लिए यहां आते हैं। हालांकि, कैटलोनिया की राजधानी के बारे में पूरी तरह से प्रस्तुतिकरण करना संभव नहीं होगा, अगर आप माउंट टिबिडाबो पर चढ़ते नहीं हैं और अवलोकन डेक से शहर के शानदार दृश्यों का आनंद नहीं लेते हैं। यह यहां है कि पवित्र हृदय का मंदिर बनाया गया है, और इसके ऊपर से पूरी दुनिया को गले लगाने वाली हथियारों के साथ मसीह की आकृति है। लैटिन से अनुवादित, तिब्दाबो माउंटेन ध्वनियों का नामजैसा कि "मैं आपको देता हूं।" यदि आप पौराणिक कथाओं पर विश्वास करते हैं, तो यह यीशु मसीह के इस पहाड़ के शीर्ष से था कि शैतान का लुत्फ उठाया गया था, जो सभी सांसारिक सुंदरियों को दिखा रहा था। मसीह के दिल का एक्सपीरेटरी मंदिर तिब्दाबो के बहुत ऊपर है, इसलिए यह बार्सिलोना के हर कोने से दिखाई देता है। चर्च को 1 9 02 में आर्किटेक्ट एनरिक सैग्नियर द्वारा डिजाइन और बनाया गया था। 1 9 61 में चर्च का निर्माण उनके बेटे जोसेप ने पूरा किया था। पवित्र दिल का मंदिर रोमनस्क्यू में सजाया गया है औरगोथिक शैलियों। और लम्बी त्रिकोणीय पोर्टिको सामने वाला हिस्सा और प्रवेश द्वार के ऊपर गुलाब, और मूल खिड़कियों और मेहराब - सजावट वास्तु के रुझान के इन सभी गुण होते हैं। निचले क्रिप्ट में एलीप्सोडाइड एपिस के साथ पांच नवे होते हैं, वे ऊपरी कमरे के लिए एक मंच के रूप में भी काम करते हैं, जहां दो ठोस सीढ़ियों का नेतृत्व होता है। चर्च के इंटीरियर की असली सजावट एक बहुआयामी मोज़ेक है - बीजान्टिन कला की परंपराओं के लिए श्रद्धांजलि। मंदिर के प्रतीकों में, स्पेन के नवीनतम इतिहास से साजिश रेखाओं का पता लगाया जा सकता है, उन पर सभी लोगों को आधुनिक कपड़े में दर्शाया जाता है। गोथिक तत्वों - संकीर्ण खिड़की, आकाश बुर्ज में घूर, मेहराब बताया, पतली ट्रिम नक़्क़ाशीदार - चर्च भारहीनता और भव्यता देने के लिए, लेकिन मूर्तियां राजसी गंभीरता का मूड बना सकते हैं। संतों जेम्स और जॉर्ज की मूर्तियों, साथ ही परमेश्वर की माँ, और चर्च के ऊपरी भाग एक और कुशल मूर्तिकार जोसफ Miret की रचनाओं का प्रतिनिधित्व करती है - फसाड संरचना कैटलन मास्टर Eusebi Arnau के हाथों का काम करता है के साथ सजाया गया है। चर्च के केंद्रीय शिखर को क्राइस्ट डी क्राइनेरो में विश्व प्रसिद्ध रिडीमर स्मारक के समान मसीह की सुनहरी मूर्ति के साथ ताज पहनाया गया है। मूर्तिकला के आधार पर में अंतहीन भूमध्य सागर के लुभावने दृश्य के साथ बार्सिलोना अवलोकन डेक उच्चतम और कैटलन उसकी पूंजी की कोमल लहरों से धोया है। शहर के आकर्षण का मानचित्रबार्सिलोना के कैथेड्रल भी शामिल है, जिसका दूसरा नाम पवित्र क्रॉस और सेंट युलियाया का कैथेड्रल है। इस राजसी मंदिर में पूरी दुनिया के तीर्थयात्री अपने कदम भेजते हैं, क्योंकि इसमें यह है कि बार्सिलोना के पवित्र शहीद इवलिया के अवशेष, जो मसीह की जन्म से 304 में 13 वर्ष की उम्र में निधन हो गए थे, बाकी हैं। चौथी शताब्दी में, जब युलियाया रहता था, तो कैटलोनिया की भूमि में मूर्तिपूजा थी, लेकिन लड़की ने यीशु में विश्वास किया, जिसके लिए उसे जला दिया गया था। मृत्यु से पहले शहीद के मुंह से एक कबूतर उड़ गया, और साथ ही बर्फ पर निष्पादक पर बर्फ गिर गया। कई शताब्दियों को पारित किया गया, और युलियाया को संतों में स्थान दिया गया और गोथिक क्वार्टर के केंद्र में उनके सम्मान में बार्सिलोना की संरक्षा का नाम दिया गया, शहर के मुख्य कैथेड्रल का निर्माण किया गया था। Catedral डी बार्सिलोना (नीचे फोटो)ऐतिहासिक और धार्मिक मूल्यों के कई अवशेषों से भरा है। जब उन्होंने चैपल बनाया तो इसका क्षेत्र 1268 से अपना वर्तमान फॉर्म लेना शुरू कर दिया। 15 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध से यह शहर की एक निर्विवाद सजावट है। मंदिर का निर्माण 122 वर्षों तक चला, इमारत रोमन बेसिलिका के खंडहरों पर सीधे बनाई गई थी। उदाहरण के लिए, व्यक्तिगत तत्व, स्पिर, बहुत बाद में किए गए थे। आज, बार्सिलोना पहुंचने वाले पर्यटक संरचना की महानता और हर विवरण के निष्पादन की पूर्णता की सराहना कर सकते हैं। सफेद हंस कैथेड्रल के आस-पास के आंतरिक आंगन के चारों ओर घूम रहे हैं - यह Yevlalia की शुद्धता का प्रतीक है। इमारत के अंदर ईसाई पवित्र वस्तुएं हैंः पवित्र के अवशेष, कर्कश में आराम करना, और लेपैंटो की लड़ाई में भाग लेने वाले जहाज से यीशु की छवि। बार्सिलोना कैथेड्रल राष्ट्रीय महत्व के कला और इतिहास का एक स्मारक है। सेंट युलियाया दोनों कैथोलिक और रूढ़िवादी द्वारा सम्मानित है, इसलिए मंदिर दोनों संप्रदायों के प्रतिनिधियों के लिए उल्लेखनीय है। इसके अलावा, Catedral डी बार्सिलोना बार्सिलोना के आर्कबिशप के निवास के रूप में कार्य करता है। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक इमारतकैटलोनिया की राजधानी में कैथेड्रल के बाद, सांता मारिया डेल मार्च का बेसिलिका पहचाना जाता है। यह ऐतिहासिक बंदरगाह क्षेत्र, रिबेरा जिले में स्थित है, जहां नाविक, व्यापारियों और noblemen व्यापार के दिन के दौरान रहते थे। उनके सम्मान में, मध्ययुगीन संकीर्ण सड़कों की भूलभुलैया पर, एक चर्च बनाया गया था। आर्किटेक्ट Berenguer डी Montagut के निर्माण की नींव 1329 में रखी गई थी, और पहले से ही 1383 में निर्माण पूरा हो गया था। इससे पहले, जब प्राकृतिक जमा के कारण समुद्र अभी तक नहीं पहुंच पाया था, तो बेसिलिका पानी के पास खड़ी थी। पोर्टिको के तपेदिक पर, हम तथाकथित देवता - सिंहासन पर बैठे मसीह की आकृति को पहचान सकते हैं, जिस पर मैरी और जॉन घुटने टेक रहे हैं। 1 9 36 में हुई आग ने कई मूर्तिकला रचनाओं को नष्ट कर दिया, और इन आंकड़ों को छोड़कर, केवल पौलुस और पीटर की मूर्तियां बच गईं। वॉल्ट के पत्थरों को सजाने वाली लाक्षणिक छवियां बहुत ही रोचक हैं। सबसे पहले, यह मुख्य वेदी के ऊपर मैरी (मैडोना) की मूर्ति है, जिसके पैरों पर एक सेलबोट की एक मूर्ति है, जो बेसिलिका के वास्तुकार का एक रूपरेखात्मक आकृति है। एक छोटे से वर्ग में चर्च के अधिकार के लिए एक स्मारक एक एम्फीथिएटर के रूप में बनाया गया था। दीवारों पर, एक समर्पण कैटलान को समर्पित था, जो 1714 में फिलिप वी की सेना के साथ युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई थी।
वास्तव में एक अनूठे शहर बार्सिलोना है जगहें, जिनमें से यात्रा पत्रिकाओं के पन्नों को सजाना, तस्वीरें कैटलोनिया की भूमि का दौरा करने का संकेत देते हैं और किसी भी व्यक्ति जो इस जगह पर नसीब हो सकते हैं, अपने इतिहास के बारे में जितना संभव हो सके सीखने की एक अनूठा इच्छा है। और यह, यह ध्यान दिया जाना चाहिए, सबसे अमीर! रोमनों, बार्सिलोना के तहत अभी भी स्थापित है और अब अपने विकास के सभी युग के निशान रखता है। शहर की उपस्थिति पर एक अमिट छाप छोड़ दियाईसाई धर्म की संस्कृति के अस्तित्व की कई शताब्दियों बार्सिलोना के आकर्षण बहुत विविध हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा हित है, पुराने चर्च और शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित मंदिर हैं। गोथिक क्वार्टर धार्मिक जीवन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है, बार्सिलोना में मंदिर - कैथेड्रल, जिसका बानगी कुछ कलहंस का एक झुंड के प्रवेश द्वार के पास चराई, सेंट Eulalia, चर्च के संरक्षक संत के शुद्धता का प्रतीक है। अद्वितीय इंटीरियर पर्यटकों के ध्यान को आकर्षित करता है जो सांता मारिया डेल मार्च की बासीलीक है, नेविगेशन के सुनहरे दिनों में बनाया गया है। शहर में कहीं से एक और पंथ चर्च दिखाई दे रहा है - सेक्रेड हार्ट का मंदिर, माउंट टिबिडाबो के शीर्ष पर बनाया गया बार्सिलोना, डाटा संरचनाओं के लिए धन्यवाद, हर साल हजारों वास्तुकला के प्रेमियों के आकर्षित करती है, लेकिन दुनिया भर से पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक शहर के मुख्य खजाना देखने के लिए यहां बटोरता - पवित्र परिवार के चर्च, जिसका निर्माण उन्नीस वीं सदी में शुरू हुआ और आज भी जारी है। लाखों लोगों ने एंटोनियो गौडी की नायाब शैली की प्रशंसा करने के लिए कई वर्षों से बार्सिलोना का दौरा किया है। एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर में एक चर्च बनाने का विचार उभर आयाअप्रत्याशित रूप से, पैसे की एक बड़ी राशि के दान के कारण पहले से ही एक हज़ार आठ सौ इक्यासी में, बार्सिलोना से कुछ किलोमीटर तक निर्माण के लिए जमीन खरीदी गई थी हाँ, मूल रूप से एक मंदिर शहर के बाहर बनाया गया था, यह बाद में बार्सिलोना ताकि Sagrada Familia अब सबसे अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्र में स्थित है हो गई थी। मार्च एक हज़ार आठ सौ बयासी में, आर्किटेक्ट एफ। डेल वेलर के नेतृत्व में, उन्होंने इमारत की नींव रखना शुरू कर दिया। हालांकि, पैन की बड़ी संख्या और निर्माण के लिए धन की उपलब्धता के बावजूद, एक हज़ार आठ सौ बयासी के अंत में वास्तुकार के निर्माण में भाग लेने से इनकार कर दिया है, उसे और ग्राहक के बीच समझौते की कमी के कारण। शायद अब यह, इस परिमाण के बार्सिलोना के आकर्षण नहीं होती है, परियोजना डेल विल्लर मामले उत्साह और ऊर्जा वास्तुकार एंटोनी गॉडी से भरा से जुड़ा नहीं है पर काम के हटाने के बाद। उनके विचार के मुताबिक, कला नोव्यू शैली में, एक वेब के समान, मंदिर बहुत खुला होना चाहिए था। यह मान लिया गया है कि निर्माण को भागने कई टावरों के साथ बिखरे किया जाएगा, और अन्य आंतरिक और बाह्य सजावट सुसमाचार के अलग-अलग तत्वों को प्रतिबिंबित करेगा, अर्थात्, जन्म, सूली पर चढ़ाये जाने, मसीह के जी उठने, या कैथोलिक चर्च के अन्य संस्कार। गौड़ी, चर्च एक रेत महल, उन है कि वे जलाशय के तट पर बैठना अच्छा लगता है, बच्चों का निर्माण करने के लिए इसी तरह की तरह होना ही था। इसका अर्थ था कि क्रॉस के रूप में एक चर्च के केंद्रीय शिखर एक सौ सत्तर मीटर, Montjuic की ऊंचाई से नीचे एक मीटर की ऊंचाई होगा - एक मंदिर भगवान का सही निर्माण से अधिक नहीं था। बार्सिलोना का इतिहास समानांतर था,सागरदा फ़मिलिया कैसे बनाया गया था, क्योंकि इमारत के मुखौटे को चालीस वर्षों से अधिक समय तक बनाया गया था। इस समय शहर बढ़ गया, आत्मविश्वास से औद्योगिक युग में विलय हो गया और तेजी से विकसित होना शुरू कर दिया। एंटोनियो गौड़ी द्वारा प्रत्येक टावर की सजावट ने करीब ध्यान दिया। अपने विचारों के अवतार के ऊपर उन्होंने दर्दनाक रूप से काम किया और खुद को नहीं छोड़ा, और कई समझ में नहीं आये कि क्यों एक वास्तुकार निर्माण पर इतना पैसा, समय और प्रयास खर्च करता है, क्योंकि टावरों के शीर्ष भी जमीन से नहीं देखे जा सकते थे। गौड़ी ने जवाब दियाः "यदि लोग नहीं देखते हैं, तो स्वर्गदूत देखेंगे।" बार्सिलोना बढ़ रहा था। मंदिर इसके साथ बढ़ गया। यह तीन facades बनाने के लिए कल्पना की गई थीः जुनून, क्रिसमस और मसीह की महिमा। वास्तुकार को पता था कि इस तरह की एक छोटी अवधि मानव जीवन के रूप में भव्य विचार को समझने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उसे तय करना था कि तीन वास्तुकला तत्वों में से कौन सा खड़ा होना है। और उन्होंने क्रिसमस के मुखौटे के पक्ष में एक विकल्प बनाया, क्योंकि मसीह के क्रूस पर चढ़ाई के कुछ दृश्य निवासियों को डरा सकते थे, और उनकी राय बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि निर्माण केवल दान पर आयोजित किया गया था। एक नौ शून्य नौ -दस के वर्षों के दौरान। चर्च में फिर गौड़ी के विचार पर एक चर्च-पैरिश स्कूल बनाया। प्रारंभ में, इसे एक अस्थायी इमारत के रूप में बनाया गया था, इसलिए इसमें लोड-असर वाली दीवारें नहीं थीं, और आंतरिक विभाजन आसानी से हटा दिए गए थे, जो आसानी से अंतरिक्ष के लेआउट को बदल सकते थे। दुर्भाग्यवश, हमारे दिनों तक, स्कूल की सटीक छवि को संरक्षित नहीं किया गया है। तीस नवंबर, एक नौ पच्चीस मुखौटा का निर्माणक्रिसमस खत्म हो गया था, गौड़ी बाकी इमारत का निर्माण शुरू करने जा रहा था। वास्तुकार के काम के वर्षों के दौरान बार्सिलोना द्वारा एक अनूठा आकर्षण प्राप्त किया गया - चर्च कैथोलिक कैथोलिक मूर्तियों और प्रतीकों, liturgies और सुसमाचार से ग्रंथों के साथ सजाया गया था। सबकुछ सात जून, एक नौ छब्बीस को बीमार दिन के ऊपर उल्टा हो गया। जब वह सेवा के लिए चर्च गए तो तिहत्तर वर्षीय एंटोनियो गौड़ी ने एक ट्राम को गोली मार दी। वास्तुकार बहुत खराब कपड़े पहने हुए थे, उन्हें एक ट्रम्प के लिए गलत माना गया था और उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए भी परेशान नहीं था। दस जून, एक नौ छब्बीस, चौहत्तर वीं वर्षगांठ पर पहुंचने से थोड़ा पहले, गौड़ी की मृत्यु हो गई। एक महान आदमी बार्सिलोना खो गया! अपने हाथों से बनाई गई सवारी, आज लाखों लोगों की यात्रा करना चाहती है, उनके बिना शहर की कल्पना करना असंभव है। और यह न केवल सगारदा परिवार है, हालांकि, यह वास्तुकार का मुख्य निर्माण है। यहां उन्हें दफनाया गया - गौड़ी को सगारदा फ़मिलिया की अभी भी अधूरा इमारत में दफनाया गया था। मास्टर की मृत्यु के बाद चर्च का निर्माण नहीं हैरुक गया, उन्होंने आर्किटेक्ट के प्रतिभाशाली छात्र - डोमेनेच सुप्रानस को जारी रखा, जिन्होंने एक नौ दो से गौड़ी के साथ काम किया। एक नौ तीस के दशक तक अन्य दो मुखौटे बनाए गए थे, वे पहले की तरह चित्रों, पवित्र शास्त्रों और मूर्तियों के ग्रंथों से सजाए गए थे। लेकिन आगे कठिन समय का पालन किया। धन दान की कमी, आने वाली दुनिया और नागरिक युद्धों ने इस तथ्य को जन्म दिया कि एक नौ बावन तक मंदिर का निर्माण लगभग बंद कर दिया गया था। फिर इमारत का निर्माण शुरू हो गया, लेकिन, इस तथ्य के बावजूद कि कई दशकों तक काम लगातार चल रहा है, योजना के अंतिम समापन तक, एंटोनी गौड़ी अभी भी बहुत दूर है। सुसमाचार प्रचारक मार्क, जॉन, मैथ्यू और ल्यूक को समर्पित चार एक सौ बीस मीटर टावरों को पूरा करना आवश्यक है। आर्किटेक्ट के विचार के अनुसार, मसीह के एक सौ सत्तर मीटर के टावर पर, एक क्रॉस स्थापित करना, और शेष चार - अंगूर के क्लस्टर, सैक्रामेंट के प्रतीक के रूप में आवश्यक है। यदि कोई अप्रत्याशित परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होती हैं, और दो हज़ार छब्बीस तक योजना के अनुसार निर्माण किया जाएगा, जो आखिरकार सदी में भी अस्तित्व में शुरू हुआ था, तो सबसे बड़ा निर्माण अंततः पूरा हो जाएगा। भव्य निर्माण का अंत न केवल बार्सिलोना के लिए इंतजार कर रहा है। मंदिर दुनिया भर के लोगों को बनाने में मदद करता है, दोनों ईसाईयों और अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों द्वारा दान किया जाता है। तो, हाल ही में जापान से पैसे का एक महत्वपूर्ण प्रवाह रहा है। बार्सिलोना वास्तव में अद्वितीय हैआकर्षण। विश्व नाम वाले फोटोग्राफर उत्कृष्ट वास्तुकला के साथ प्राचीन और आधुनिक दोनों शहर को पकड़ने के लिए यहां आते हैं। हालांकि, कैटलोनिया की राजधानी के बारे में पूरी तरह से प्रस्तुतिकरण करना संभव नहीं होगा, अगर आप माउंट टिबिडाबो पर चढ़ते नहीं हैं और अवलोकन डेक से शहर के शानदार दृश्यों का आनंद नहीं लेते हैं। यह यहां है कि पवित्र हृदय का मंदिर बनाया गया है, और इसके ऊपर से पूरी दुनिया को गले लगाने वाली हथियारों के साथ मसीह की आकृति है। लैटिन से अनुवादित, तिब्दाबो माउंटेन ध्वनियों का नामजैसा कि "मैं आपको देता हूं।" यदि आप पौराणिक कथाओं पर विश्वास करते हैं, तो यह यीशु मसीह के इस पहाड़ के शीर्ष से था कि शैतान का लुत्फ उठाया गया था, जो सभी सांसारिक सुंदरियों को दिखा रहा था। मसीह के दिल का एक्सपीरेटरी मंदिर तिब्दाबो के बहुत ऊपर है, इसलिए यह बार्सिलोना के हर कोने से दिखाई देता है। चर्च को एक नौ दो में आर्किटेक्ट एनरिक सैग्नियर द्वारा डिजाइन और बनाया गया था। एक नौ इकसठ में चर्च का निर्माण उनके बेटे जोसेप ने पूरा किया था। पवित्र दिल का मंदिर रोमनस्क्यू में सजाया गया है औरगोथिक शैलियों। और लम्बी त्रिकोणीय पोर्टिको सामने वाला हिस्सा और प्रवेश द्वार के ऊपर गुलाब, और मूल खिड़कियों और मेहराब - सजावट वास्तु के रुझान के इन सभी गुण होते हैं। निचले क्रिप्ट में एलीप्सोडाइड एपिस के साथ पांच नवे होते हैं, वे ऊपरी कमरे के लिए एक मंच के रूप में भी काम करते हैं, जहां दो ठोस सीढ़ियों का नेतृत्व होता है। चर्च के इंटीरियर की असली सजावट एक बहुआयामी मोज़ेक है - बीजान्टिन कला की परंपराओं के लिए श्रद्धांजलि। मंदिर के प्रतीकों में, स्पेन के नवीनतम इतिहास से साजिश रेखाओं का पता लगाया जा सकता है, उन पर सभी लोगों को आधुनिक कपड़े में दर्शाया जाता है। गोथिक तत्वों - संकीर्ण खिड़की, आकाश बुर्ज में घूर, मेहराब बताया, पतली ट्रिम नक़्क़ाशीदार - चर्च भारहीनता और भव्यता देने के लिए, लेकिन मूर्तियां राजसी गंभीरता का मूड बना सकते हैं। संतों जेम्स और जॉर्ज की मूर्तियों, साथ ही परमेश्वर की माँ, और चर्च के ऊपरी भाग एक और कुशल मूर्तिकार जोसफ Miret की रचनाओं का प्रतिनिधित्व करती है - फसाड संरचना कैटलन मास्टर Eusebi Arnau के हाथों का काम करता है के साथ सजाया गया है। चर्च के केंद्रीय शिखर को क्राइस्ट डी क्राइनेरो में विश्व प्रसिद्ध रिडीमर स्मारक के समान मसीह की सुनहरी मूर्ति के साथ ताज पहनाया गया है। मूर्तिकला के आधार पर में अंतहीन भूमध्य सागर के लुभावने दृश्य के साथ बार्सिलोना अवलोकन डेक उच्चतम और कैटलन उसकी पूंजी की कोमल लहरों से धोया है। शहर के आकर्षण का मानचित्रबार्सिलोना के कैथेड्रल भी शामिल है, जिसका दूसरा नाम पवित्र क्रॉस और सेंट युलियाया का कैथेड्रल है। इस राजसी मंदिर में पूरी दुनिया के तीर्थयात्री अपने कदम भेजते हैं, क्योंकि इसमें यह है कि बार्सिलोना के पवित्र शहीद इवलिया के अवशेष, जो मसीह की जन्म से तीन सौ चार में तेरह वर्ष की उम्र में निधन हो गए थे, बाकी हैं। चौथी शताब्दी में, जब युलियाया रहता था, तो कैटलोनिया की भूमि में मूर्तिपूजा थी, लेकिन लड़की ने यीशु में विश्वास किया, जिसके लिए उसे जला दिया गया था। मृत्यु से पहले शहीद के मुंह से एक कबूतर उड़ गया, और साथ ही बर्फ पर निष्पादक पर बर्फ गिर गया। कई शताब्दियों को पारित किया गया, और युलियाया को संतों में स्थान दिया गया और गोथिक क्वार्टर के केंद्र में उनके सम्मान में बार्सिलोना की संरक्षा का नाम दिया गया, शहर के मुख्य कैथेड्रल का निर्माण किया गया था। Catedral डी बार्सिलोना ऐतिहासिक और धार्मिक मूल्यों के कई अवशेषों से भरा है। जब उन्होंने चैपल बनाया तो इसका क्षेत्र एक हज़ार दो सौ अड़सठ से अपना वर्तमान फॉर्म लेना शुरू कर दिया। पंद्रह वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध से यह शहर की एक निर्विवाद सजावट है। मंदिर का निर्माण एक सौ बाईस वर्षों तक चला, इमारत रोमन बेसिलिका के खंडहरों पर सीधे बनाई गई थी। उदाहरण के लिए, व्यक्तिगत तत्व, स्पिर, बहुत बाद में किए गए थे। आज, बार्सिलोना पहुंचने वाले पर्यटक संरचना की महानता और हर विवरण के निष्पादन की पूर्णता की सराहना कर सकते हैं। सफेद हंस कैथेड्रल के आस-पास के आंतरिक आंगन के चारों ओर घूम रहे हैं - यह Yevlalia की शुद्धता का प्रतीक है। इमारत के अंदर ईसाई पवित्र वस्तुएं हैंः पवित्र के अवशेष, कर्कश में आराम करना, और लेपैंटो की लड़ाई में भाग लेने वाले जहाज से यीशु की छवि। बार्सिलोना कैथेड्रल राष्ट्रीय महत्व के कला और इतिहास का एक स्मारक है। सेंट युलियाया दोनों कैथोलिक और रूढ़िवादी द्वारा सम्मानित है, इसलिए मंदिर दोनों संप्रदायों के प्रतिनिधियों के लिए उल्लेखनीय है। इसके अलावा, Catedral डी बार्सिलोना बार्सिलोना के आर्कबिशप के निवास के रूप में कार्य करता है। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक इमारतकैटलोनिया की राजधानी में कैथेड्रल के बाद, सांता मारिया डेल मार्च का बेसिलिका पहचाना जाता है। यह ऐतिहासिक बंदरगाह क्षेत्र, रिबेरा जिले में स्थित है, जहां नाविक, व्यापारियों और noblemen व्यापार के दिन के दौरान रहते थे। उनके सम्मान में, मध्ययुगीन संकीर्ण सड़कों की भूलभुलैया पर, एक चर्च बनाया गया था। आर्किटेक्ट Berenguer डी Montagut के निर्माण की नींव एक हज़ार तीन सौ उनतीस में रखी गई थी, और पहले से ही एक हज़ार तीन सौ तिरासी में निर्माण पूरा हो गया था। इससे पहले, जब प्राकृतिक जमा के कारण समुद्र अभी तक नहीं पहुंच पाया था, तो बेसिलिका पानी के पास खड़ी थी। पोर्टिको के तपेदिक पर, हम तथाकथित देवता - सिंहासन पर बैठे मसीह की आकृति को पहचान सकते हैं, जिस पर मैरी और जॉन घुटने टेक रहे हैं। एक नौ छत्तीस में हुई आग ने कई मूर्तिकला रचनाओं को नष्ट कर दिया, और इन आंकड़ों को छोड़कर, केवल पौलुस और पीटर की मूर्तियां बच गईं। वॉल्ट के पत्थरों को सजाने वाली लाक्षणिक छवियां बहुत ही रोचक हैं। सबसे पहले, यह मुख्य वेदी के ऊपर मैरी की मूर्ति है, जिसके पैरों पर एक सेलबोट की एक मूर्ति है, जो बेसिलिका के वास्तुकार का एक रूपरेखात्मक आकृति है। एक छोटे से वर्ग में चर्च के अधिकार के लिए एक स्मारक एक एम्फीथिएटर के रूप में बनाया गया था। दीवारों पर, एक समर्पण कैटलान को समर्पित था, जो एक हज़ार सात सौ चौदह में फिलिप वी की सेना के साथ युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई थी।
झारखंड से निकलने वाली सभी नदियाँ यहाँ की पठारी भूभाग से निकलतीं हैं। यहाँ की नदियां बरसाती नदियां हैं। अर्थात ये नदियाँ बरसात के महीनों में पानी से भरी रहती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में सूख जाती हैं। ये नदियां पानी के लिए मानसून पर निर्भर करती है। कठोर चट्टानी क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होने के कारण झारखंड की नदियाँ नाव चलाने के लिए उपयोगी नहीं है। मयूराक्षी नदी झारखंड की एकमात्र नदी है, जिसमें वर्षा ऋतु में नावें चला करती हैं। झारखंड राज्य की बेसीन प्रणाली को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है । झारखंड की प्रमुख नदियों में दामोदर, उत्तरी कोयल, दक्षिणी कोयल, स्वर्णरेखा, शंख , अजय तथा मयूराक्षी है। उत्तरी कोयल तथा दामोदर प्रथम वर्ग में शामिल नदियाँ है। जबकि स्वर्णरेखा, शंख ,दक्षिणी कोयल दूसरे वर्ग में शामिल नदियाँ है। इन दोनों प्रवाह प्रणाली के बीच स्थित जल विभाजक झारखंड के लगभग मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर फैला है। झारखंड से निकलने वाली सबसे बड़ी और लंबी नदी दामोदर नदी है। इसका उद्गम स्थल छोटा नागपुर का पठार है। यह लातेहार जिला के टोरी नामक स्थान से निकलती है। दामोदर नदी को बंगाल का शोक भी कहते हैं। दामोदर नदी देवनद या देवनदी के नाम से भी प्रचलित है। साहित्य पौराणिक कथाओं में देवनंद के नाम से भी इसका उल्लेख है। दामोदर नदी लातेहार जिले से निकलकर हजारीबाग, मानभूम, गिरिडीह, धनबाद होते हुए बंगाल में प्रवेश कर बाँकुड़ा होती हुई हुगली के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। दामोदर नदी की लंबाई 290 किलोमीटर है। वैसे इसकी कुल लम्बाई 524 km है।इसकी सहायक नदियों में कोनार, बोकारो,जमुनिया, कतरी और बराकर प्रमुख है। दामोदर नदी रामगढ़ जिला के रजरप्पा में भैरवी नदी से मिलकर जलप्रपात बनाती है यहाँ माँ छिन्नमस्तिके सिद्धपीठ है। यह झारखंड के एक प्रमुख पर्यटक स्थल भी हैं । दामोदर नदी का अपवाह क्षेत्र 12,800 वर्ग किमी है जो हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, लातेहार, रांची, लोहरदगा है। स्वर्णरेखा नदी छोटानागपुर पठार में रांची जिले के नगड़ी नामक गांव से निकलती है। यहां से बहती हुई यह नदी पूर्वी सिंहभूम जिले में प्रवेश करती है,यहां से उड़ीसा राज्य में चली जाती है। पठारी चट्टानों वाली प्रदेश से प्रवाहित होने के कारण स्वर्णरेखा नदी तथा इसकी सहायक नदियां, गहरी घाटियां तथा जलप्रपात का निर्माण करती है। यह रांची से 28 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में हुंडरू जलप्रपात बनाती है, जहां से यह 320 फीट की ऊंचाई से गिरती है। यह झारखंड के दूसरे सबसे ऊंचा जलप्रपात है। स्वर्णरेखा मुख्यता बरसाती नदी है, वर्षा काल में इस में पानी भरा रहता है, परन्तु गर्मी में सूख जाता है। इस नदी के सुनहरे रेत में सोना मिलने की संभावना के कारण इसे स्वर्ण रेखा नदी कहा जाता है लेकिन सोना फिलहाल प्राप्त नहीं होता है, क्योंकि यह रेत के कणों में बहुत ही कम मात्रा में होता है। राढू इसकी सहायक नदी है, यह नदी मार्ग में जोन्हा के पास एक जलप्रपात का निर्माण करती है जो 150 फीट की ऊंचाई पर है यह जलप्रपात गौतम धारा जलप्रपात के नाम से जाना जाता है। स्वर्णरेखा नदी की एक विशेषता यह है कि उद्गम स्थान से लेकर सागर में मिलने तक यह किसी की सहायक नदी नहीं बनती है। यह सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके तीन प्रमुख सहायक नदियां हैं राढू ,काँची और खरकई है। पूरब से बहती हु़ई इसमें आ मिलती है । बराकर नदी भी एक बरसाती नदी है, छोटानागपुर के पठार से निकलकर हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद और मानभूम में जाकर दामोदर नदी में मिल जाती है। यह बरसात में उमड़ कर बहती है, फिर धीमी गति से अपना अस्तित्व बनाए रहती है। इस नदी पर दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत मैथन बांध बनाया गया है जिससे बिजली का उत्पादन किया जाता है। इस नदी का उल्लेख बौद्ध एवं जैन धार्मिक ग्रंथों में हुआ है।गिरिडीह के निकट इस नदी के तट पर बराकर नामक स्थान है, जहां जैन मंदिर है। मैथन के निकट बराकर नदी के तट पर कल्याणेश्वरी नामक देवी मंदिर है। उत्तरी कोयल नदी राँची पठार के मध्य भाग से निकलकर पाट क्षेत्रों में ढालों पर बहती हुए उत्तर की ओर प्रवाहित होती हैं। यह औरंगा और अमानत नदियों को भी अपने में विलीन कर लेती है तथा साथ ही कई छोटी नदियां को अपने में विलीन करते हुए 255 किलोमीटर की पहाड़ी और मैदानी दूरी तय कर सोन नदी में मिल जाती है। औरंगा और अमानत नदी इसकी सहायक नदियां हैं। यह नदी गर्मी के मौसम में सूख जाती है,लेकिन बरसात के दिनों में बाढ़ के साथ उमड़ कर बहने लगती है। बूढ़ा नदी महुआटांड क्षेत्र से निकलकर सेरेंगदाग पाट के दक्षिण में इससे मिलती है, यह दोनों नदियों के मिलन का महत्व बूढ़ा घाघ जलप्रपात के कारण का बढ़ जाता है। दक्षिणी कोयल नदी रांची के पास नगड़ी गांव की पहाड़ी से पश्चिम में बहती हुई लोहरदगा पहुंचती है फिर उत्तर पूर्वी होकर दक्षिण दिशा में हो जाती है। फिर यह गुमला जिले से होकर सिंहभूम के रास्ते शंख नदी में जा मिलती है। लोहरदगा से 8 किलोमीटर उत्तर पूर्व में या दक्षिण दिशा की ओर मुड़ जाती है और यह लोहरदगा तथा गुमला जिले से होते हुए सिंहभूम में प्रवेश करती है। अंत में यह नदी गंगापुर के निकट नदी में समा जाती है, इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी कारो है, इसी स्थान पर कोयलाकारो परियोजना का निर्माण किया गया है। यह आगे चल कर शंख नदी मे मिल जाती है। इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी "कारों" नदी है। इसी पे "कोयलाकारों परियोजना" का निर्माण किया गया है । मुहानाः शंख नदी (उड़ीसा) कन्हार नदी राज्य के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में पलामू के सरगुजा से निकलती है और पलामू के दक्षिणी-पश्चिमी सीमा का निर्माण करती हुई उत्तर की ओर बहती है। कन्हार नदी सरगुजा को पलामू से 80 किलोमीटर तक बाँटती है। यह नदी गढ़वा में भंडारित प्रखंड प्रवेश करती है यह रंका प्रखंड की पश्चिमी सीमा से होते हुए धुरकी प्रखंड में प्रवेश करती हैं। फल्गु नदी भी छोटा नागपुर पठार के उत्तरी भाग से निकलती है। अनेक छोटी-छोटी सरिताओं के मिलने से इस नदी की मुख्यधारा बनती है,जिससे निरंजना भी कहते हैं। इसको अंतत सलिला या लीलाजन भी कहते हैं, बोधगया के पास मोहना नामक सहायक नदी से मिलकर या विशाल रूप धारण कर लेती है। गया के निकट इसकी चौड़ाई सबसे अधिक पाई जाती है। पितृपक्ष के समय देश के विभिन्न भागों से लोग फल्गु नदी में स्नान करने के लिए आते हैं और पिंडदान करते हैं। सकरी नदी भी छोटानागपुर से निकलकर हजारीबाग, पटना, गया और मुंगेर जिले से होकर प्रवाहित होती है। झारखंड से निकलकर या उत्तर पूर्व की ओर बहती हुई कियूल और मनोहर नदियों के साथ मिलकर गंगा के ताल क्षेत्रों में बिखर जाती हैं। रामायण में इस नदी को सुमागधी के नाम से पुकारा गया है उस काल में यह नदी राजगीर के पास से प्रवाहित होती थी, यह नदी अपने मार्ग बदलने के लिए प्रसिद्ध है। पुनपुन नदी झारखंड में पुनपुन एवं उसकी सहायक नदियों का उद्भव हजारीबाग के पठार वह पलामू के उत्तरी क्षेत्रों में क्षेत्रों से होता है। यह नदी तथा उसकी सहायक नदियां उत्तरी कोयल प्रवाह क्षेत्र के उत्तर से निकलकर सोन के समांतर बहती है। पुनपुन का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है। इस नदी को पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है, पुनपुन नदी को कीकट नदी भी कहा जाता है,लेकिन इससे कहीं-कहीं बमागधी भी कहा जाता है। गंगा में मिलने के पूर्व इसमें दरधा और मनोहर नामक सहायक नदियां भी आ मिलते हैं। चानन नदी को पंचाने भी कहा जाता है, वास्तव में इसका नाम पंचानन है जो कालांतर में चानन बन गया है। यह नदी 5 धाराओं के मेल से विकसित हुई, इसलिए इससे पंचानन कहा गया है। "पंचाने नदी" भी कह्ते है । छोटा नागपुर पठार से इस की सभी धाराएं निकलती है। शंख नदी नेतरहाट पठार के पश्चिमी छोर में उत्तरी कोयल के विपरीत बहती है। पाट क्षेत्र के दक्षिणी छोर से इसका उद्गम होता है, यह गुमला जिले के रायडी के दक्षिण में प्रारंभ होती है। यह नदी शुरू में काफी सँकरी और गहरी खाई का निर्माण करती है। मार्ग में राजा डेरा के पास 200 फीट ऊंचा जलप्रपात बनाती है, जो सदनीघाघ जलप्रपात के नाम से प्रसिद्ध है। यह नदी शुुुुरु मे काफी सँकरी और गहरी खाईं बनाती है ।यह राजाडोरा के पास 200 feet ऊँचा जलप्रपात बनाती है जो " सदनघाघ जलप्रपात " केे नाम सेे जाना जाता है । शंख नदीः उदगम - चैनपुर प्रखंड (गुमला जिला) अजय नदी का उद्गम क्षेत्र मुंगेर है, जहां से प्रवाहित होते हुए यह देवघर जिले में प्रवेश करती है। यहाँ से यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बढ़ती हुए प्रवाहित होती है, पश्चिम से आकर इसमें पथरो नदी मिलती है। आगे चलकर इसमें जयंती नदी मिलती है यह दोनों सहायक नदियां हजारीबाग, गिरिडीह जिले से निकलती हैं। अजय नदी जामताड़ा में कजरा के निकट प्रवेश करती है, संथाल परगना के दक्षिणी छोर में यह नदी कुशबेदिया से अफजलपुर तक प्रवाहित होती है। यह झारखंड मे देवघर तथा जमतारा मे बहती है। इसकी 2 सहायक नदी पथरो तथा जयन्ती नदी है जो हजारीबाग तथ गिरिडीह से निकलती है । देवघर के पुनासी मे इस नदी पे पुनासी जल परियोजना के तह्त पुनासी डैम का निर्माण किया जा रहा है। मयूराक्षी नदी देवघर जिले के उत्तर-पूर्वी किनारे पर स्थित त्रिकुट पहाड़ से निकलती है। यह दुमका जिले के उत्तर-पश्चिमी भाग में प्रवेश करती है, यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती हुई आमजोड़ा के निकट दुमका से अलग होती है। झारखंड से निकलकर यह बंगाल में सैंथिया रेलवे स्टेशन के निकट गंगा में मिल जाती है। यह नदी अपने ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में मोतिहारी के नाम से भी जानी जाती है, यह भुरभुरी नदी के साथ मिलकर मोर के नाम से पुकारी जाती है, इसका दूसरा नाम मयूराक्षी है। इसकी सहायक नदियों में टिपरा, पुसरो,भामरी , दौना,धोवइ आदि प्रमुख है। इस नदी पर कनाडा के सहयोग से मसानजोर डैम का निर्माण किया गया है, इस डैम को कनाडा डैम भी कहा जाता है। मोर या मयूराक्षी नदीः-इस नदी के ऊपरी प्र्वाह क्षेत्र मे "मोतीहारी" के नाम से जाना जाता है। यह भुरभुरी नदी से मिलकर "मोर" के नाम से पुकारी जाती है। मुहानाः गंगा ( पश्चिम बंगाल ) यह नदी मैकाल पर्वत के अमरकटक पठार से निकलती है । इसकी लंबाई 780 -784 कि. मी. है । यह नदी पटना के पास गंगा नदी मे मिल जाती है। यह नदी झारखंड के 45 km की सीमा बनाती है यह पलामू की उतरी सीमा बनाते हुए प्रवाहित होती है। क्षेत्र विशेष में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है जैसे :-सोनभद्र ,हिरन्यवाह / हिरण्यवाह। इसकी सहायक नदी उत्तरी कोयल है। इसका अपवाह क्षेत्र पलामू और गढ़वा है। ब्राह्मनि नदी उद्गम दुमका जिले के दुधवा पहाड़ी से निकलकर पश्चिम बंगाल में गंगा से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदी है गुमरो और एरो नदी। बांसलोइ नदी गोड्डा जिला के पास बाँस पहाड़ी से निकलकर मुराइ के पास गंगा नदी मे मिल जाती है । गुमनी नदी राजमहल के पहाड़ी से निकलती है और झारखंड कि सीमा को पार कर गंगा मे मिल जाती है । इसका अपवाह क्षेत्र 1313 वर्ग km है। औरंग नदी लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड के उम्दाग गाँव निकलती है। यह उतरी कोयल की सहायक नदी है। इसकी सहायक नदी घाघरी, गोवा , नाला, धधारी, सुकरी है । बूढ़ा नदी महुआटाँडा से निकल कर सरेंदाग पाट के दक्षिण मे उतरी कोयल से मिल जाती है । झारखंड क सबसे ऊँचा जलप्रपात "बूढ़ाघाघ जलप्रपात" इसी नदी पर स्तिथ है । अमानत नदी का उद्गम स्थल चतरा है। यह करीब 100 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर के कोयल नदी मे मिल जाती है । इसकी प्रमुख्य सहायक नदियां जिजोइ, माइला, जनुमिया, खेरा, चाको, सलाही, पाटन है । हरमु नदी राँची के नगाड़ी प्रखंड के पास से निकल कर कुल 14 किलोमीटर कि यात्रा तय क्र नमकुम मे स्वर्णरेखा नदी मे जा मिलती है। काँची नदी राँची जिले के तमाड़ इलाके से निकलती है। सिल्ली होते हुए ये स्वर्णरेखा नदी मे जा मिलती है। तजना नदी बुंडू-तमाड़ इलाके से निकलती है ।यह आगे जा के खूँटी जिले से होते हुए "कारो नदी" मेे मिल जाती है। गंगा नदी झारखंड की सीमा मे सबसे पहले संथाल परगना के साहेबगंज जिला मे तेलियागड़ी से कुछ दूर पश्चिम में छूती है और पुरब दिशा मे बहती है। यह नदी साहेबगंज जिला मे 80 कि. मी. की दूरी तय करती हैै।
झारखंड से निकलने वाली सभी नदियाँ यहाँ की पठारी भूभाग से निकलतीं हैं। यहाँ की नदियां बरसाती नदियां हैं। अर्थात ये नदियाँ बरसात के महीनों में पानी से भरी रहती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में सूख जाती हैं। ये नदियां पानी के लिए मानसून पर निर्भर करती है। कठोर चट्टानी क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होने के कारण झारखंड की नदियाँ नाव चलाने के लिए उपयोगी नहीं है। मयूराक्षी नदी झारखंड की एकमात्र नदी है, जिसमें वर्षा ऋतु में नावें चला करती हैं। झारखंड राज्य की बेसीन प्रणाली को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है । झारखंड की प्रमुख नदियों में दामोदर, उत्तरी कोयल, दक्षिणी कोयल, स्वर्णरेखा, शंख , अजय तथा मयूराक्षी है। उत्तरी कोयल तथा दामोदर प्रथम वर्ग में शामिल नदियाँ है। जबकि स्वर्णरेखा, शंख ,दक्षिणी कोयल दूसरे वर्ग में शामिल नदियाँ है। इन दोनों प्रवाह प्रणाली के बीच स्थित जल विभाजक झारखंड के लगभग मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर फैला है। झारखंड से निकलने वाली सबसे बड़ी और लंबी नदी दामोदर नदी है। इसका उद्गम स्थल छोटा नागपुर का पठार है। यह लातेहार जिला के टोरी नामक स्थान से निकलती है। दामोदर नदी को बंगाल का शोक भी कहते हैं। दामोदर नदी देवनद या देवनदी के नाम से भी प्रचलित है। साहित्य पौराणिक कथाओं में देवनंद के नाम से भी इसका उल्लेख है। दामोदर नदी लातेहार जिले से निकलकर हजारीबाग, मानभूम, गिरिडीह, धनबाद होते हुए बंगाल में प्रवेश कर बाँकुड़ा होती हुई हुगली के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। दामोदर नदी की लंबाई दो सौ नब्बे किलोग्राममीटर है। वैसे इसकी कुल लम्बाई पाँच सौ चौबीस किलोमीटर है।इसकी सहायक नदियों में कोनार, बोकारो,जमुनिया, कतरी और बराकर प्रमुख है। दामोदर नदी रामगढ़ जिला के रजरप्पा में भैरवी नदी से मिलकर जलप्रपात बनाती है यहाँ माँ छिन्नमस्तिके सिद्धपीठ है। यह झारखंड के एक प्रमुख पर्यटक स्थल भी हैं । दामोदर नदी का अपवाह क्षेत्र बारह,आठ सौ वर्ग किमी है जो हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, लातेहार, रांची, लोहरदगा है। स्वर्णरेखा नदी छोटानागपुर पठार में रांची जिले के नगड़ी नामक गांव से निकलती है। यहां से बहती हुई यह नदी पूर्वी सिंहभूम जिले में प्रवेश करती है,यहां से उड़ीसा राज्य में चली जाती है। पठारी चट्टानों वाली प्रदेश से प्रवाहित होने के कारण स्वर्णरेखा नदी तथा इसकी सहायक नदियां, गहरी घाटियां तथा जलप्रपात का निर्माण करती है। यह रांची से अट्ठाईस किलोग्राममीटर उत्तर-पूर्व दिशा में हुंडरू जलप्रपात बनाती है, जहां से यह तीन सौ बीस फीट की ऊंचाई से गिरती है। यह झारखंड के दूसरे सबसे ऊंचा जलप्रपात है। स्वर्णरेखा मुख्यता बरसाती नदी है, वर्षा काल में इस में पानी भरा रहता है, परन्तु गर्मी में सूख जाता है। इस नदी के सुनहरे रेत में सोना मिलने की संभावना के कारण इसे स्वर्ण रेखा नदी कहा जाता है लेकिन सोना फिलहाल प्राप्त नहीं होता है, क्योंकि यह रेत के कणों में बहुत ही कम मात्रा में होता है। राढू इसकी सहायक नदी है, यह नदी मार्ग में जोन्हा के पास एक जलप्रपात का निर्माण करती है जो एक सौ पचास फीट की ऊंचाई पर है यह जलप्रपात गौतम धारा जलप्रपात के नाम से जाना जाता है। स्वर्णरेखा नदी की एक विशेषता यह है कि उद्गम स्थान से लेकर सागर में मिलने तक यह किसी की सहायक नदी नहीं बनती है। यह सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके तीन प्रमुख सहायक नदियां हैं राढू ,काँची और खरकई है। पूरब से बहती हु़ई इसमें आ मिलती है । बराकर नदी भी एक बरसाती नदी है, छोटानागपुर के पठार से निकलकर हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद और मानभूम में जाकर दामोदर नदी में मिल जाती है। यह बरसात में उमड़ कर बहती है, फिर धीमी गति से अपना अस्तित्व बनाए रहती है। इस नदी पर दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत मैथन बांध बनाया गया है जिससे बिजली का उत्पादन किया जाता है। इस नदी का उल्लेख बौद्ध एवं जैन धार्मिक ग्रंथों में हुआ है।गिरिडीह के निकट इस नदी के तट पर बराकर नामक स्थान है, जहां जैन मंदिर है। मैथन के निकट बराकर नदी के तट पर कल्याणेश्वरी नामक देवी मंदिर है। उत्तरी कोयल नदी राँची पठार के मध्य भाग से निकलकर पाट क्षेत्रों में ढालों पर बहती हुए उत्तर की ओर प्रवाहित होती हैं। यह औरंगा और अमानत नदियों को भी अपने में विलीन कर लेती है तथा साथ ही कई छोटी नदियां को अपने में विलीन करते हुए दो सौ पचपन किलोग्राममीटर की पहाड़ी और मैदानी दूरी तय कर सोन नदी में मिल जाती है। औरंगा और अमानत नदी इसकी सहायक नदियां हैं। यह नदी गर्मी के मौसम में सूख जाती है,लेकिन बरसात के दिनों में बाढ़ के साथ उमड़ कर बहने लगती है। बूढ़ा नदी महुआटांड क्षेत्र से निकलकर सेरेंगदाग पाट के दक्षिण में इससे मिलती है, यह दोनों नदियों के मिलन का महत्व बूढ़ा घाघ जलप्रपात के कारण का बढ़ जाता है। दक्षिणी कोयल नदी रांची के पास नगड़ी गांव की पहाड़ी से पश्चिम में बहती हुई लोहरदगा पहुंचती है फिर उत्तर पूर्वी होकर दक्षिण दिशा में हो जाती है। फिर यह गुमला जिले से होकर सिंहभूम के रास्ते शंख नदी में जा मिलती है। लोहरदगा से आठ किलोग्राममीटर उत्तर पूर्व में या दक्षिण दिशा की ओर मुड़ जाती है और यह लोहरदगा तथा गुमला जिले से होते हुए सिंहभूम में प्रवेश करती है। अंत में यह नदी गंगापुर के निकट नदी में समा जाती है, इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी कारो है, इसी स्थान पर कोयलाकारो परियोजना का निर्माण किया गया है। यह आगे चल कर शंख नदी मे मिल जाती है। इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी "कारों" नदी है। इसी पे "कोयलाकारों परियोजना" का निर्माण किया गया है । मुहानाः शंख नदी कन्हार नदी राज्य के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में पलामू के सरगुजा से निकलती है और पलामू के दक्षिणी-पश्चिमी सीमा का निर्माण करती हुई उत्तर की ओर बहती है। कन्हार नदी सरगुजा को पलामू से अस्सी किलोग्राममीटर तक बाँटती है। यह नदी गढ़वा में भंडारित प्रखंड प्रवेश करती है यह रंका प्रखंड की पश्चिमी सीमा से होते हुए धुरकी प्रखंड में प्रवेश करती हैं। फल्गु नदी भी छोटा नागपुर पठार के उत्तरी भाग से निकलती है। अनेक छोटी-छोटी सरिताओं के मिलने से इस नदी की मुख्यधारा बनती है,जिससे निरंजना भी कहते हैं। इसको अंतत सलिला या लीलाजन भी कहते हैं, बोधगया के पास मोहना नामक सहायक नदी से मिलकर या विशाल रूप धारण कर लेती है। गया के निकट इसकी चौड़ाई सबसे अधिक पाई जाती है। पितृपक्ष के समय देश के विभिन्न भागों से लोग फल्गु नदी में स्नान करने के लिए आते हैं और पिंडदान करते हैं। सकरी नदी भी छोटानागपुर से निकलकर हजारीबाग, पटना, गया और मुंगेर जिले से होकर प्रवाहित होती है। झारखंड से निकलकर या उत्तर पूर्व की ओर बहती हुई कियूल और मनोहर नदियों के साथ मिलकर गंगा के ताल क्षेत्रों में बिखर जाती हैं। रामायण में इस नदी को सुमागधी के नाम से पुकारा गया है उस काल में यह नदी राजगीर के पास से प्रवाहित होती थी, यह नदी अपने मार्ग बदलने के लिए प्रसिद्ध है। पुनपुन नदी झारखंड में पुनपुन एवं उसकी सहायक नदियों का उद्भव हजारीबाग के पठार वह पलामू के उत्तरी क्षेत्रों में क्षेत्रों से होता है। यह नदी तथा उसकी सहायक नदियां उत्तरी कोयल प्रवाह क्षेत्र के उत्तर से निकलकर सोन के समांतर बहती है। पुनपुन का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है। इस नदी को पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है, पुनपुन नदी को कीकट नदी भी कहा जाता है,लेकिन इससे कहीं-कहीं बमागधी भी कहा जाता है। गंगा में मिलने के पूर्व इसमें दरधा और मनोहर नामक सहायक नदियां भी आ मिलते हैं। चानन नदी को पंचाने भी कहा जाता है, वास्तव में इसका नाम पंचानन है जो कालांतर में चानन बन गया है। यह नदी पाँच धाराओं के मेल से विकसित हुई, इसलिए इससे पंचानन कहा गया है। "पंचाने नदी" भी कह्ते है । छोटा नागपुर पठार से इस की सभी धाराएं निकलती है। शंख नदी नेतरहाट पठार के पश्चिमी छोर में उत्तरी कोयल के विपरीत बहती है। पाट क्षेत्र के दक्षिणी छोर से इसका उद्गम होता है, यह गुमला जिले के रायडी के दक्षिण में प्रारंभ होती है। यह नदी शुरू में काफी सँकरी और गहरी खाई का निर्माण करती है। मार्ग में राजा डेरा के पास दो सौ फीट ऊंचा जलप्रपात बनाती है, जो सदनीघाघ जलप्रपात के नाम से प्रसिद्ध है। यह नदी शुुुुरु मे काफी सँकरी और गहरी खाईं बनाती है ।यह राजाडोरा के पास दो सौ feet ऊँचा जलप्रपात बनाती है जो " सदनघाघ जलप्रपात " केे नाम सेे जाना जाता है । शंख नदीः उदगम - चैनपुर प्रखंड अजय नदी का उद्गम क्षेत्र मुंगेर है, जहां से प्रवाहित होते हुए यह देवघर जिले में प्रवेश करती है। यहाँ से यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बढ़ती हुए प्रवाहित होती है, पश्चिम से आकर इसमें पथरो नदी मिलती है। आगे चलकर इसमें जयंती नदी मिलती है यह दोनों सहायक नदियां हजारीबाग, गिरिडीह जिले से निकलती हैं। अजय नदी जामताड़ा में कजरा के निकट प्रवेश करती है, संथाल परगना के दक्षिणी छोर में यह नदी कुशबेदिया से अफजलपुर तक प्रवाहित होती है। यह झारखंड मे देवघर तथा जमतारा मे बहती है। इसकी दो सहायक नदी पथरो तथा जयन्ती नदी है जो हजारीबाग तथ गिरिडीह से निकलती है । देवघर के पुनासी मे इस नदी पे पुनासी जल परियोजना के तह्त पुनासी डैम का निर्माण किया जा रहा है। मयूराक्षी नदी देवघर जिले के उत्तर-पूर्वी किनारे पर स्थित त्रिकुट पहाड़ से निकलती है। यह दुमका जिले के उत्तर-पश्चिमी भाग में प्रवेश करती है, यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती हुई आमजोड़ा के निकट दुमका से अलग होती है। झारखंड से निकलकर यह बंगाल में सैंथिया रेलवे स्टेशन के निकट गंगा में मिल जाती है। यह नदी अपने ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में मोतिहारी के नाम से भी जानी जाती है, यह भुरभुरी नदी के साथ मिलकर मोर के नाम से पुकारी जाती है, इसका दूसरा नाम मयूराक्षी है। इसकी सहायक नदियों में टिपरा, पुसरो,भामरी , दौना,धोवइ आदि प्रमुख है। इस नदी पर कनाडा के सहयोग से मसानजोर डैम का निर्माण किया गया है, इस डैम को कनाडा डैम भी कहा जाता है। मोर या मयूराक्षी नदीः-इस नदी के ऊपरी प्र्वाह क्षेत्र मे "मोतीहारी" के नाम से जाना जाता है। यह भुरभुरी नदी से मिलकर "मोर" के नाम से पुकारी जाती है। मुहानाः गंगा यह नदी मैकाल पर्वत के अमरकटक पठार से निकलती है । इसकी लंबाई सात सौ अस्सी -सात सौ चौरासी कि. मी. है । यह नदी पटना के पास गंगा नदी मे मिल जाती है। यह नदी झारखंड के पैंतालीस किलोमीटर की सीमा बनाती है यह पलामू की उतरी सीमा बनाते हुए प्रवाहित होती है। क्षेत्र विशेष में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है जैसे :-सोनभद्र ,हिरन्यवाह / हिरण्यवाह। इसकी सहायक नदी उत्तरी कोयल है। इसका अपवाह क्षेत्र पलामू और गढ़वा है। ब्राह्मनि नदी उद्गम दुमका जिले के दुधवा पहाड़ी से निकलकर पश्चिम बंगाल में गंगा से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदी है गुमरो और एरो नदी। बांसलोइ नदी गोड्डा जिला के पास बाँस पहाड़ी से निकलकर मुराइ के पास गंगा नदी मे मिल जाती है । गुमनी नदी राजमहल के पहाड़ी से निकलती है और झारखंड कि सीमा को पार कर गंगा मे मिल जाती है । इसका अपवाह क्षेत्र एक हज़ार तीन सौ तेरह वर्ग km है। औरंग नदी लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड के उम्दाग गाँव निकलती है। यह उतरी कोयल की सहायक नदी है। इसकी सहायक नदी घाघरी, गोवा , नाला, धधारी, सुकरी है । बूढ़ा नदी महुआटाँडा से निकल कर सरेंदाग पाट के दक्षिण मे उतरी कोयल से मिल जाती है । झारखंड क सबसे ऊँचा जलप्रपात "बूढ़ाघाघ जलप्रपात" इसी नदी पर स्तिथ है । अमानत नदी का उद्गम स्थल चतरा है। यह करीब एक सौ किलोग्राममीटर की लंबी दूरी तय कर के कोयल नदी मे मिल जाती है । इसकी प्रमुख्य सहायक नदियां जिजोइ, माइला, जनुमिया, खेरा, चाको, सलाही, पाटन है । हरमु नदी राँची के नगाड़ी प्रखंड के पास से निकल कर कुल चौदह किलोग्राममीटर कि यात्रा तय क्र नमकुम मे स्वर्णरेखा नदी मे जा मिलती है। काँची नदी राँची जिले के तमाड़ इलाके से निकलती है। सिल्ली होते हुए ये स्वर्णरेखा नदी मे जा मिलती है। तजना नदी बुंडू-तमाड़ इलाके से निकलती है ।यह आगे जा के खूँटी जिले से होते हुए "कारो नदी" मेे मिल जाती है। गंगा नदी झारखंड की सीमा मे सबसे पहले संथाल परगना के साहेबगंज जिला मे तेलियागड़ी से कुछ दूर पश्चिम में छूती है और पुरब दिशा मे बहती है। यह नदी साहेबगंज जिला मे अस्सी कि. मी. की दूरी तय करती हैै।
सिद्धार्थनगर जिले के मिठवल में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में पहुंचे मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मणों की हत्यारी है। गोरखपुर, जागरण संवाददाता : सिद्धार्थनगर में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में पहुंचे मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मणों की हत्यारी है। चुन-चुनकर उनकी हत्याएं की जा रही हैं। सपा शासन काल में भी ब्राह्मण हासिए पर था। बसपा सरकार में बहनजी ने इस समाज को हर प्रमुख पदों पर आसीन कर उन्हें पूरा सम्मान देने का कार्य किया है। सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि गोष्ठियों का कार्यक्रम 23 जुलाई से अयोध्या में रामलला का दर्शन करने के बाद से शुरू किया गया। कुल 72 जिलों में प्रबुद्ध संगोष्ठी का आयोजन होगा। अंतिम आयोजन लखनऊ में होगा, जिसमें बहनजी मौजूद रहेंगी। सपा कार्यकाल में दलित और ब्राह्मण समाज सरकार के निशाने पर थे। ब्राह्मण समाज का नाम भी कोई मंच से नहीं लेता था। बहनजी ने हमें मौका दिया कि जाओ समाज की आवाज उठाओ। समाज की एकता आज बहुत जरूरी है। नारा दिया जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी। आज बड़ा तबका हमारे साथ है। पिछले चुनावों में ब्राह्मण समाज ने अपना धर्म निभाया है। विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री नकुल दूबे ने कहा कि यूपी में ब्राह्मण 16 फीसद हैं। यह इकट्ठा होकर समाज और राजनीति की दिशा बदल सकते हैं। भाजपा कदम कदम पर ब्राह्मण समाज का अपमान करती आ रही है। समय आ गया है कि समाज को दिशा देने वाला समाज भाजपा का बोरिया बिस्तर बंधवा कर उत्तराखंड पहुंचा दे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजकुमार आर्य व संचालन ओपी त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में चिल्लूपार विधायक विनय शंकर तिवारी, भगवान दास, केके गौतम, कुलदीप मणि मिश्र, संजीव चौबे, कुलदीप मणि मिश्र, दिनेश चंद्र, डा. वीएन त्रिपाठी, राकेश दत्त त्रिपाठी, विपुल द्विवेदी, शमीम अहमद आदि मौजूद थे।
सिद्धार्थनगर जिले के मिठवल में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में पहुंचे मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मणों की हत्यारी है। गोरखपुर, जागरण संवाददाता : सिद्धार्थनगर में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में पहुंचे मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मणों की हत्यारी है। चुन-चुनकर उनकी हत्याएं की जा रही हैं। सपा शासन काल में भी ब्राह्मण हासिए पर था। बसपा सरकार में बहनजी ने इस समाज को हर प्रमुख पदों पर आसीन कर उन्हें पूरा सम्मान देने का कार्य किया है। सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि गोष्ठियों का कार्यक्रम तेईस जुलाई से अयोध्या में रामलला का दर्शन करने के बाद से शुरू किया गया। कुल बहत्तर जिलों में प्रबुद्ध संगोष्ठी का आयोजन होगा। अंतिम आयोजन लखनऊ में होगा, जिसमें बहनजी मौजूद रहेंगी। सपा कार्यकाल में दलित और ब्राह्मण समाज सरकार के निशाने पर थे। ब्राह्मण समाज का नाम भी कोई मंच से नहीं लेता था। बहनजी ने हमें मौका दिया कि जाओ समाज की आवाज उठाओ। समाज की एकता आज बहुत जरूरी है। नारा दिया जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी। आज बड़ा तबका हमारे साथ है। पिछले चुनावों में ब्राह्मण समाज ने अपना धर्म निभाया है। विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री नकुल दूबे ने कहा कि यूपी में ब्राह्मण सोलह फीसद हैं। यह इकट्ठा होकर समाज और राजनीति की दिशा बदल सकते हैं। भाजपा कदम कदम पर ब्राह्मण समाज का अपमान करती आ रही है। समय आ गया है कि समाज को दिशा देने वाला समाज भाजपा का बोरिया बिस्तर बंधवा कर उत्तराखंड पहुंचा दे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजकुमार आर्य व संचालन ओपी त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में चिल्लूपार विधायक विनय शंकर तिवारी, भगवान दास, केके गौतम, कुलदीप मणि मिश्र, संजीव चौबे, कुलदीप मणि मिश्र, दिनेश चंद्र, डा. वीएन त्रिपाठी, राकेश दत्त त्रिपाठी, विपुल द्विवेदी, शमीम अहमद आदि मौजूद थे।
अहमदाबादः पाकिस्तान से एक लड़का अनजाने में भारत की सीमा में घुस आया, और जब उसने BSF के जवानों को देखा तो रोना शुरू कर दिया। हालांकि इसके बाद BSF के जवानों ने जो किया वह इंसानियत को लेकर आपके भरोसे को और मजबूत कर देगा। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान से अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए 8 साल के एक लड़के को उसने पाकिस्तानी रेंजर्स को सौंप दिया है। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को राजस्थान के बाड़मेर सेक्टर में सोमरार सीमा जांच चौकी के समीप यह लड़का भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया था। घटना के बारे में बताते हुए BSF ने एक बयान में कहा, 'सद्भावना के तौर पर बीएसएफ ने शुक्रवार को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ फ्लैग मीटिंग में इस पाकिस्तानी नाबालिग को सौंपा। 2 अप्रैल को करीब 8 साल का करीम अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में घुस गया था और वह बाड़मेर सेक्टर के सोमरार सीमा जांच चौकी के समीप सीमा सुरक्षा बाड़ के पास तक पहुंच गया था। ' बीएसएफ ने बताया कि चौकन्ना जवानों ने लड़के को देखा और उसे वापस जाने को कहा। बीएसएफ के मुताबिक, वर्दी में जवानों को देखकर लड़के ने रोना शुरू कर दिया लेकिन जवानों ने उसे चुप कराया तथा उसे खाना और पानी दिया।
अहमदाबादः पाकिस्तान से एक लड़का अनजाने में भारत की सीमा में घुस आया, और जब उसने BSF के जवानों को देखा तो रोना शुरू कर दिया। हालांकि इसके बाद BSF के जवानों ने जो किया वह इंसानियत को लेकर आपके भरोसे को और मजबूत कर देगा। सीमा सुरक्षा बल ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान से अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गए आठ साल के एक लड़के को उसने पाकिस्तानी रेंजर्स को सौंप दिया है। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को राजस्थान के बाड़मेर सेक्टर में सोमरार सीमा जांच चौकी के समीप यह लड़का भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया था। घटना के बारे में बताते हुए BSF ने एक बयान में कहा, 'सद्भावना के तौर पर बीएसएफ ने शुक्रवार को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ फ्लैग मीटिंग में इस पाकिस्तानी नाबालिग को सौंपा। दो अप्रैल को करीब आठ साल का करीम अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में घुस गया था और वह बाड़मेर सेक्टर के सोमरार सीमा जांच चौकी के समीप सीमा सुरक्षा बाड़ के पास तक पहुंच गया था। ' बीएसएफ ने बताया कि चौकन्ना जवानों ने लड़के को देखा और उसे वापस जाने को कहा। बीएसएफ के मुताबिक, वर्दी में जवानों को देखकर लड़के ने रोना शुरू कर दिया लेकिन जवानों ने उसे चुप कराया तथा उसे खाना और पानी दिया।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने मंगलवार को इंदिरा के लॉयर्स कलेक्टिव के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन को लेकर छह माह के लिए इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया। पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा एनजीओ की संस्थापक-सचिव व उनके पति आनंद ग्रोवर इसके अध्यक्ष हैं। वह पत्रकार राणा अयूब की लिखी किताब 'गुजरात फाइल्स : द अनैटमी ऑफ अ कवर अप' के विमोचन का जिक्र कर रही थीं, जो 2002 के गुजरात दंगों के बारे में है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने मंगलवार को इंदिरा के लॉयर्स कलेक्टिव के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट के कथित उल्लंघन को लेकर छह माह के लिए इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया। पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा एनजीओ की संस्थापक-सचिव व उनके पति आनंद ग्रोवर इसके अध्यक्ष हैं। वह पत्रकार राणा अयूब की लिखी किताब 'गुजरात फाइल्स : द अनैटमी ऑफ अ कवर अप' के विमोचन का जिक्र कर रही थीं, जो दो हज़ार दो के गुजरात दंगों के बारे में है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
रेवाड़ी, 30 जून (हप्र) बावल न्यायालय में सहायक जिला न्यायवादी (एडीए) के पद पर कार्यरत रोहतक की इंदू ने हरियाणा रोडवेज के चालक के खिलाफ लापरवाही से बस चलाने पर गंभीर रूप से घायल करने का केस दर्ज कराया है। रोहड़ाई थाना पुलिस को दी शिकायत में इंदू ने बताया कि वह न्यायालय से दो दिन की छुट्टी लेकर रोहतक गई हुई थी। जब वह 27 जून को रोहतक से हरियाणा रोडवेज की बस में सवार होकर ड्यूटी के लिए बावल आ रही थी तो चालक बस को बहुत तेजी से भगा रहा था। उसे बस धीरे चलाने के लिए सवारियों ने भी कहा। लेकिन वह इस बात को अनसुना कर बस को तेज गति से भगाता रहा। जिसके कारण टायर के ऊपर की लोहे की चद्दर उखड़कर उसके पैरों में घुस गई। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे रोहतक दाखिल कराया गया है। उसने अपनी शिकायत बृहस्पतिवार को रोहड़ाई थाना को देकर बस चालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
रेवाड़ी, तीस जून बावल न्यायालय में सहायक जिला न्यायवादी के पद पर कार्यरत रोहतक की इंदू ने हरियाणा रोडवेज के चालक के खिलाफ लापरवाही से बस चलाने पर गंभीर रूप से घायल करने का केस दर्ज कराया है। रोहड़ाई थाना पुलिस को दी शिकायत में इंदू ने बताया कि वह न्यायालय से दो दिन की छुट्टी लेकर रोहतक गई हुई थी। जब वह सत्ताईस जून को रोहतक से हरियाणा रोडवेज की बस में सवार होकर ड्यूटी के लिए बावल आ रही थी तो चालक बस को बहुत तेजी से भगा रहा था। उसे बस धीरे चलाने के लिए सवारियों ने भी कहा। लेकिन वह इस बात को अनसुना कर बस को तेज गति से भगाता रहा। जिसके कारण टायर के ऊपर की लोहे की चद्दर उखड़कर उसके पैरों में घुस गई। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे रोहतक दाखिल कराया गया है। उसने अपनी शिकायत बृहस्पतिवार को रोहड़ाई थाना को देकर बस चालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज केदार जाधव ने लंबे समय के बाद नेशनल टीम में वापसी की। और वापसी के साथ ही बल्लेबाजी तो नहीं लेकिन गेंदबाजी में कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। केदार जाधव वैसे तो स्पेशलिस्ट बल्लेबाज हैं, लेकिन इनसे भारतीय टीम में पार्ट टाइम गेंदबाजी भी करवायी जाती है। भले ही केदार जाधव के साथ नाम तो पार्ट टाइम गेंदबाज का है लेकिन ये एक स्पेशलिस्ट गेंदबाज की तरह टीम को सफलता दिला रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप में बुधवार को केदार जाधव ने जबरदस्त गेंदबाजी कर 3 पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पैवेलियन की राह दिखायी। अब तो हर कोई ये जरूर सोचता होगा कि जो खिलाड़ी एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज होने के साथ ही विकेटकीपिंग भी करता हो वो आखिर गेंदबाज कैसे बन बैठा तो केदार जाधव को गेंदबाज बनाने के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का हाथ है। ये हम नहीं बल्कि खुद केदार जाधव ने खुलासा किया है कि उनको गेंदबाज बनाने का श्रेय धोनी को जाता है। अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज केदार जाधव ने लंबे समय के बाद नेशनल टीम में वापसी की। और वापसी के साथ ही बल्लेबाजी तो नहीं लेकिन गेंदबाजी में कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। केदार जाधव वैसे तो स्पेशलिस्ट बल्लेबाज हैं, लेकिन इनसे भारतीय टीम में पार्ट टाइम गेंदबाजी भी करवायी जाती है। भले ही केदार जाधव के साथ नाम तो पार्ट टाइम गेंदबाज का है लेकिन ये एक स्पेशलिस्ट गेंदबाज की तरह टीम को सफलता दिला रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप में बुधवार को केदार जाधव ने जबरदस्त गेंदबाजी कर तीन पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पैवेलियन की राह दिखायी। अब तो हर कोई ये जरूर सोचता होगा कि जो खिलाड़ी एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज होने के साथ ही विकेटकीपिंग भी करता हो वो आखिर गेंदबाज कैसे बन बैठा तो केदार जाधव को गेंदबाज बनाने के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का हाथ है। ये हम नहीं बल्कि खुद केदार जाधव ने खुलासा किया है कि उनको गेंदबाज बनाने का श्रेय धोनी को जाता है। अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
DR. SHRIKANT EKNATH SHINDE: Sir, the Government aims to double farmers' income but we have seen doubling of farmers' suicides in Maharashtra. As per an RTI reply, in October 2019, out of a total of 15,356 farmers' suicides from 2013 till 2019, 396 cases were reported between 1st January, 2019 to 20th February, 2019. NABARD is All India Rural Financial Inclusion Survey released in August 2018 shows that the average agricultural household income was a mere Rs.8,931 per month in 2016-17. The income of farm household has increased by just Rs. 2,505 per month which is calculated by comparing the NABARD report with a 2012-13 study by National Sample Survey Organisation. Another government body estimated the average monthly income of farm household at Rs.6,426. The ambitious scheme of doubling farmers' income by 2022 requires innovative thinking. One of the focus areas of report on doubling income talks about shift of farm to non-farm occupation. One such way of implementing it is to turn farm waste into fuel instead of burning it. This farm waste had an adverse impact on Delhi's pollution recently. According to the Ministry of Earth Sciences, 44 per cent of Delhi pollution was because of stubble burning. So, we have to think about converting this waste into bio-fuel which will bring commercial farming to low income rural household and encourage small enterprises to collect, process and extract bio-fuel. Has the Government thought about such a method? If yes, what has been done to achieve this? श्री कैलाश चौधरी : महोदय, माननीय सदस्य जी ने किसानों की डबल इनकम विषय से संबंधित प्रश्न पूछा है । मैं माननीय सदस्य जी को बताना चाहूँगा कि नेशनल सैंपल सर्वे संगठन के द्वारा वर्ष 2013 के अंदर जो सर्वे किया गया था, उसके अनुसार किसान की आमदनी प्रति परिवार 6,426 रुपये थी । उसके बाद हमारे विभाग के द्वारा जो अंतर-मंत्रालयी कमेटी बनी, उस कमेटी के अनुसार, जैसा कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि हमारा लक्ष्य वर्ष 2022 तक हमारे किसानों की आमदनी दोगुना करना है, उसको लेकर हमने उस समय एक सर्वे किया । उसके आधार पर किसानों की फार्मिंग इनकम और नॉन फार्मिंग इनकम को जिस तरह से माना है, उसमें प्रति परिवार 8,166 रुपये प्रति माह माना गया । इस लक्ष्य को हम आगे पूरा करने वाले हैं । किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे हो, उसके लिए सरकार ने बिल्कुल योजनाबद्ध तरीके से एक कमेटी गठित की और उस कमेटी ने टारगेट्स तय किए । जो सात महत्वपूर्ण टारगेट्स तय किए गए, उनमें यह था कि उनके फसल की उत्पादकता कैसे बढ़े, पशुधन की उत्पादकता कैसे बढ़े, लागत में कमी कैसे आए, उसमें बचत कैसे हो, क्रॉप इंटेन्सिटी में वृद्धि कैसे हो, हाई वैल्यू क्रॉप्स के साथ-साथ वास्तविक मूल्यों में सुधार कैसे हो । साथ ही कृषि व्यवसायों का गैर कृषि व्यवसायों में परिवर्तन कैसे हो, इसके ऊपर सरकार के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं । इसके लिए हमारी सरकार ने जो योजना बनाई है, उसमें किसानों की आमदनी बढ़ानी है। उसके लिए सरकार की जो कमेटी बनी है, उस कमेटी के ऊपर निरन्तर मॉनीटरिंग हो रही है । उस मॉनीटरिंग कमेटी के माध्यम से सरकार की तरफ से आगे की जो प्लानिंग की गई है, उसके अन्दर हमारी सरकार ने ऐसी योजना बनाई है कि किसानों की आमदनी बढ़े । उसके लिए सॉयल हेल्थ कार्ड्स बना रहे हैं । इसके साथ ही पर-ड्रॉप-मोर-क्रॉप के अनुसार इसे किया गया है । साथ ही, हमारी परम्परागत कृषि विकास योजनाएं हैं । इसके साथ ही ई-एन.ए. एम. पोर्टल भी तैयार किया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य मिल सकें । सरकार के द्वारा फसल बीमा योजना भी की गई है,
DR. SHRIKANT EKNATH SHINDE: Sir, the Government aims to double farmers' income but we have seen doubling of farmers' suicides in Maharashtra. As per an RTI reply, in October दो हज़ार उन्नीस, out of a total of पंद्रह,तीन सौ छप्पन farmers' suicides from दो हज़ार तेरह till दो हज़ार उन्नीस, तीन सौ छियानवे cases were reported between एक जनवरीuary, दो हज़ार उन्नीस to बीस फ़रवरीruary, दो हज़ार उन्नीस. NABARD is All India Rural Financial Inclusion Survey released in August दो हज़ार अट्ठारह shows that the average agricultural household income was a mere Rs.आठ,नौ सौ इकतीस per month in दो हज़ार सोलह-सत्रह. The income of farm household has increased by just Rs. दो,पाँच सौ पाँच per month which is calculated by comparing the NABARD report with a दो हज़ार बारह-तेरह study by National Sample Survey Organisation. Another government body estimated the average monthly income of farm household at Rs.छः,चार सौ छब्बीस. The ambitious scheme of doubling farmers' income by दो हज़ार बाईस requires innovative thinking. One of the focus areas of report on doubling income talks about shift of farm to non-farm occupation. One such way of implementing it is to turn farm waste into fuel instead of burning it. This farm waste had an adverse impact on Delhi's pollution recently. According to the Ministry of Earth Sciences, चौंतालीस per cent of Delhi pollution was because of stubble burning. So, we have to think about converting this waste into bio-fuel which will bring commercial farming to low income rural household and encourage small enterprises to collect, process and extract bio-fuel. Has the Government thought about such a method? If yes, what has been done to achieve this? श्री कैलाश चौधरी : महोदय, माननीय सदस्य जी ने किसानों की डबल इनकम विषय से संबंधित प्रश्न पूछा है । मैं माननीय सदस्य जी को बताना चाहूँगा कि नेशनल सैंपल सर्वे संगठन के द्वारा वर्ष दो हज़ार तेरह के अंदर जो सर्वे किया गया था, उसके अनुसार किसान की आमदनी प्रति परिवार छः,चार सौ छब्बीस रुपयापये थी । उसके बाद हमारे विभाग के द्वारा जो अंतर-मंत्रालयी कमेटी बनी, उस कमेटी के अनुसार, जैसा कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि हमारा लक्ष्य वर्ष दो हज़ार बाईस तक हमारे किसानों की आमदनी दोगुना करना है, उसको लेकर हमने उस समय एक सर्वे किया । उसके आधार पर किसानों की फार्मिंग इनकम और नॉन फार्मिंग इनकम को जिस तरह से माना है, उसमें प्रति परिवार आठ,एक सौ छयासठ रुपयापये प्रति माह माना गया । इस लक्ष्य को हम आगे पूरा करने वाले हैं । किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे हो, उसके लिए सरकार ने बिल्कुल योजनाबद्ध तरीके से एक कमेटी गठित की और उस कमेटी ने टारगेट्स तय किए । जो सात महत्वपूर्ण टारगेट्स तय किए गए, उनमें यह था कि उनके फसल की उत्पादकता कैसे बढ़े, पशुधन की उत्पादकता कैसे बढ़े, लागत में कमी कैसे आए, उसमें बचत कैसे हो, क्रॉप इंटेन्सिटी में वृद्धि कैसे हो, हाई वैल्यू क्रॉप्स के साथ-साथ वास्तविक मूल्यों में सुधार कैसे हो । साथ ही कृषि व्यवसायों का गैर कृषि व्यवसायों में परिवर्तन कैसे हो, इसके ऊपर सरकार के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं । इसके लिए हमारी सरकार ने जो योजना बनाई है, उसमें किसानों की आमदनी बढ़ानी है। उसके लिए सरकार की जो कमेटी बनी है, उस कमेटी के ऊपर निरन्तर मॉनीटरिंग हो रही है । उस मॉनीटरिंग कमेटी के माध्यम से सरकार की तरफ से आगे की जो प्लानिंग की गई है, उसके अन्दर हमारी सरकार ने ऐसी योजना बनाई है कि किसानों की आमदनी बढ़े । उसके लिए सॉयल हेल्थ कार्ड्स बना रहे हैं । इसके साथ ही पर-ड्रॉप-मोर-क्रॉप के अनुसार इसे किया गया है । साथ ही, हमारी परम्परागत कृषि विकास योजनाएं हैं । इसके साथ ही ई-एन.ए. एम. पोर्टल भी तैयार किया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य मिल सकें । सरकार के द्वारा फसल बीमा योजना भी की गई है,
पतंजलि के प्रोडेक्ट का इस्तेमाल करेंगे लालू, रामदेव ने गालों पर क्रीम से की मसाज! 10 वीं की छात्रा हुई गर्भवती तो प्रेमी छोड़कर भागा .... ? स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, नीतीश को नहीं मानते हैं सरकार का मुखिया !
पतंजलि के प्रोडेक्ट का इस्तेमाल करेंगे लालू, रामदेव ने गालों पर क्रीम से की मसाज! दस वीं की छात्रा हुई गर्भवती तो प्रेमी छोड़कर भागा .... ? स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, नीतीश को नहीं मानते हैं सरकार का मुखिया !
Dulhan Entry Video: दुल्हन अपनी शादी के दिन गाड़ी से मंडप में एंट्री ले रही होती है। तभी वह धाकड़ अंदाज में गाड़ी का सनरूफ खोलती है और उससे बाहर निकल आती है। इसके बाद अपने दोनों हाथ ऊपर कर डांस करने लगती है। यह नजारा घराती और बराती दोनों देखते रह जाते हैं। दुल्हन का धमाकेदार डांस (इंस्टाग्राम) PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
Dulhan Entry Video: दुल्हन अपनी शादी के दिन गाड़ी से मंडप में एंट्री ले रही होती है। तभी वह धाकड़ अंदाज में गाड़ी का सनरूफ खोलती है और उससे बाहर निकल आती है। इसके बाद अपने दोनों हाथ ऊपर कर डांस करने लगती है। यह नजारा घराती और बराती दोनों देखते रह जाते हैं। दुल्हन का धमाकेदार डांस PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार बार साबित करते हैं कि उनका सीना 56 इंच का है लेकिन लोग बार बार भूल जाते हैं, पहले उड़ी हमला हुआ तो लोग बोले कि मोदी का सीना 56 इंच का नहीं है, उसके बाद मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक करवाकर साबित किया कि उनका सीना 56 इंच का है, कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना ने पूंछ जिले की कृष्णा घाटी सेक्टर में दो भारतीय सैनिकों का सर काट लिया तो फिर से लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मोदी सीना 56 का नहीं है लेकिन मोदी ने आज फिर से साबित कर दिया कि उनका सीना 56 इंच का है. दो भारतीय सैनिकों का सर काटे जाने के बाद सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की बहुत आलोचना हुई लेकिन अब सीमा पर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना ने अब अपनी ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, भारत ने कल पाकिस्तान के कई टैंकों को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से उड़ा दिया, इन मिसाइलों से भारतीय सेना ने एक किलोमीटर दूर बैठे बैठे निशाना साधा और देखते ही देखते पाकिस्तानी टैंकों के चीथड़े उड़ गए. सबसे ख़ुशी की बात है कि सिख रेजिमेंट के सैनिकों के सर काटे गए थे तो बदला भी सिख रेजिमेंट ने लिया है. जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिन पहले पूंछ जिले की कृष्णा घाटी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन किया, दो भारतीय सैनिकों को गोली मारने के बाद पाकिस्तानी सेना के कुछ जवान भारतीय सीमा में घुस गए और दोनों सैनिकों का सर काटकर अपने साथ ले गए, इस घटना के बाद भारत के लोग बहुत गुस्सा हुए और भारत सरकार से बदला लेने की मांग करने लगे. मोदी सरकार और भारतीय सेना ने देशवासियों को मायूश नहीं होने दिया और बॉर्डर पर मिसाइलों को तैनात कर दिया, बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के पास स्वदेशी तकनीक से विकसित एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल हैं जो GPRS से चलती हैं, इन मिसाइलों से कई किलोमीटर दूर बैठकर सटीक निशाना लगाया जा सकता है और दुश्मन को तबाह किया जा सकता है. कल भारतीय सेना ने इन्हीं मिसाइलों का इस्तेमाल किया, इससे पहले भारत ने अंडमान निकोबार में मिसाइलों का परीक्षण भी किया था, पाकिस्तान ने सोचा नहीं होगा कि भारत हम पर दागने के लिए ही इस मिसाइल का परीक्षण कर रहा है, कल भारतीय सेना ने सच में पाकिस्तान में कई मिसाइलों को दागकर कम से कम 20 पाकिस्तानी सैनिकों का काम तमाम कर दिया है. भारतीय सेना का कहना है कि ये तो अभी ट्रायल है, अभी पाकिस्तान को और कीमत चुकानी है, उसने हमारे सैनिकों का सर काटकर जो गुस्ताखी की है उसकी कड़ी सजा भुगतनी ही पड़ेगी. सबूत के तौर पर ये VIDEO देखिये जिसे खुद सेना के पूर्व मेजर गौरव आर्या ने ट्वीट किया है. यह VIDEO देखकर हर भारतीय का सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. सबूत के तौर पर ये VIDEO देखिये जिसे खुद सेना के पूर्व मेजर गौरव आर्या ने ट्वीट किया है. यह VIDEO देखकर हर भारतीय का सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा.
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार बार साबित करते हैं कि उनका सीना छप्पन इंच का है लेकिन लोग बार बार भूल जाते हैं, पहले उड़ी हमला हुआ तो लोग बोले कि मोदी का सीना छप्पन इंच का नहीं है, उसके बाद मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक करवाकर साबित किया कि उनका सीना छप्पन इंच का है, कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना ने पूंछ जिले की कृष्णा घाटी सेक्टर में दो भारतीय सैनिकों का सर काट लिया तो फिर से लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मोदी सीना छप्पन का नहीं है लेकिन मोदी ने आज फिर से साबित कर दिया कि उनका सीना छप्पन इंच का है. दो भारतीय सैनिकों का सर काटे जाने के बाद सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की बहुत आलोचना हुई लेकिन अब सीमा पर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना ने अब अपनी ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, भारत ने कल पाकिस्तान के कई टैंकों को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से उड़ा दिया, इन मिसाइलों से भारतीय सेना ने एक किलोमीटर दूर बैठे बैठे निशाना साधा और देखते ही देखते पाकिस्तानी टैंकों के चीथड़े उड़ गए. सबसे ख़ुशी की बात है कि सिख रेजिमेंट के सैनिकों के सर काटे गए थे तो बदला भी सिख रेजिमेंट ने लिया है. जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिन पहले पूंछ जिले की कृष्णा घाटी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन किया, दो भारतीय सैनिकों को गोली मारने के बाद पाकिस्तानी सेना के कुछ जवान भारतीय सीमा में घुस गए और दोनों सैनिकों का सर काटकर अपने साथ ले गए, इस घटना के बाद भारत के लोग बहुत गुस्सा हुए और भारत सरकार से बदला लेने की मांग करने लगे. मोदी सरकार और भारतीय सेना ने देशवासियों को मायूश नहीं होने दिया और बॉर्डर पर मिसाइलों को तैनात कर दिया, बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के पास स्वदेशी तकनीक से विकसित एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल हैं जो GPRS से चलती हैं, इन मिसाइलों से कई किलोमीटर दूर बैठकर सटीक निशाना लगाया जा सकता है और दुश्मन को तबाह किया जा सकता है. कल भारतीय सेना ने इन्हीं मिसाइलों का इस्तेमाल किया, इससे पहले भारत ने अंडमान निकोबार में मिसाइलों का परीक्षण भी किया था, पाकिस्तान ने सोचा नहीं होगा कि भारत हम पर दागने के लिए ही इस मिसाइल का परीक्षण कर रहा है, कल भारतीय सेना ने सच में पाकिस्तान में कई मिसाइलों को दागकर कम से कम बीस पाकिस्तानी सैनिकों का काम तमाम कर दिया है. भारतीय सेना का कहना है कि ये तो अभी ट्रायल है, अभी पाकिस्तान को और कीमत चुकानी है, उसने हमारे सैनिकों का सर काटकर जो गुस्ताखी की है उसकी कड़ी सजा भुगतनी ही पड़ेगी. सबूत के तौर पर ये VIDEO देखिये जिसे खुद सेना के पूर्व मेजर गौरव आर्या ने ट्वीट किया है. यह VIDEO देखकर हर भारतीय का सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. सबूत के तौर पर ये VIDEO देखिये जिसे खुद सेना के पूर्व मेजर गौरव आर्या ने ट्वीट किया है. यह VIDEO देखकर हर भारतीय का सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा.
नई दिल्ली। अभिनेता अक्षय कुमार के इस action-packed फिल्म सूर्यवंशी का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म में इस बार सिंघम और सिंबा का भी तड़का देखने को मिलेगा। वहीं कैटरीना कैफ संग अक्षय की केमिस्ट्री एक बार फिर पर्दे पर नजर आएगी। ट्रेलर में सूर्यवंशी की कहानी की झलक दिखाई गई है। इसमें अक्षय एक एंटी टेररिज्म स्क्वाड कॉप है। जो देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। सूर्यवंशी रोहित की कॉप सीरीज की चौथी फिल्म होगी इससे पहले वह सिंघम सिंघम 2 और सिंबा बना चुके हैं। सिंघम और सिंघम 2 में रोहित ने अजय देवगन के साथ और सिंबा में रणवीर सिंह के साथ काम किया है। सूर्यवंशी में रोहित फिर वही कमाल दिखाने को एक बार फिर तैयार है। टेलर के अंत में रणवीर की एंट्री होती है पर यही एक सरप्राइज़ नहीं है उनकी एंट्री के बाद सिंघम यानी अजय की धमाकेदार एंट्री होती है।
नई दिल्ली। अभिनेता अक्षय कुमार के इस action-packed फिल्म सूर्यवंशी का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म में इस बार सिंघम और सिंबा का भी तड़का देखने को मिलेगा। वहीं कैटरीना कैफ संग अक्षय की केमिस्ट्री एक बार फिर पर्दे पर नजर आएगी। ट्रेलर में सूर्यवंशी की कहानी की झलक दिखाई गई है। इसमें अक्षय एक एंटी टेररिज्म स्क्वाड कॉप है। जो देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। सूर्यवंशी रोहित की कॉप सीरीज की चौथी फिल्म होगी इससे पहले वह सिंघम सिंघम दो और सिंबा बना चुके हैं। सिंघम और सिंघम दो में रोहित ने अजय देवगन के साथ और सिंबा में रणवीर सिंह के साथ काम किया है। सूर्यवंशी में रोहित फिर वही कमाल दिखाने को एक बार फिर तैयार है। टेलर के अंत में रणवीर की एंट्री होती है पर यही एक सरप्राइज़ नहीं है उनकी एंट्री के बाद सिंघम यानी अजय की धमाकेदार एंट्री होती है।
हीगल की पुस्तकें पढ़नेवालों के सिर में दर्द होने लगता है । कांट की 'क्रिटीक ऑफ़ प्योर रीज़न' को पढ़ते समय ऐसा प्रतीत होता है कि लिखते समय लेखक के कंधों पर कई सौ मन का बोझ रक्खा था, जिस के कारण वह साफ़ बोल नहीं सकता था । कांट के 'ट्रांसेंडेंटल डिडक्शन' जैसे कठिन विषयों को भारतीय दार्शनिकों ने जैसे हँसते-हँसते व्यक्त कर डाला है । दुर्भाग्यवश नव्य-न्याय के प्रभाव ने हमारे दर्शन को स्वाभाविकता को भी नष्ट कर डाला । परंतु भारतीय दर्शन का भविष्य ऐसे नैयायिकों के हाथ में नहीं है । आइए, हम लोग कोशिश करके फिर दर्शनशास्त्र को साधारण जनता की चीज़ बना दें । हमारे यहाँ मंगलाचरण के साथ पुस्तक प्रारंभ करने का नियम था । नीचे हम प्राचीन मंगलाचरणों में से कुछ उद्धरण देकर भूमिका समाप्त करेंगे। यह उद्धरण भारतीय दर्शन के संगीतमय होने की साक्षी भी देंगे । नृतजड विरोधिरूपमंतत्रयमलबंधनदुःखता विरुद्धम् । अति निकटम विक्रियं मुरारेः परमपदं प्रणयादभिष्टवीमि ।। ( संक्षेप शारीरक ) अर्थः- जोत और जड़ से भिन्न अर्थात् सत्य र चैतन्य स्वरूप है, जो देश, काल और वस्तु के परिच्छेद (सीमा) से रहित है, जिसमें दुःख और विकास नहीं है, मुरारि कृष्ण के उस परमपद को, सदैव पास ही वर्तमान है, मैं प्रेम-पूर्वक नमस्कार करता हूँ । निःश्वसितमस्य वेदा वीक्षितमेतस्य पञ्चभूतानि । स्मितमेतस्य चराचरमस्य च सुतं महाप्रलयः ।। ( वाचस्पति की भामतो ) अर्थः - वेद उसका निःश्वास है; पाँच महाभूत उस की दृष्टि का विलास; यह चराचर जगत् उस की मुसकान है; महाप्रलय उसकी गहरी नींद है ।
हीगल की पुस्तकें पढ़नेवालों के सिर में दर्द होने लगता है । कांट की 'क्रिटीक ऑफ़ प्योर रीज़न' को पढ़ते समय ऐसा प्रतीत होता है कि लिखते समय लेखक के कंधों पर कई सौ मन का बोझ रक्खा था, जिस के कारण वह साफ़ बोल नहीं सकता था । कांट के 'ट्रांसेंडेंटल डिडक्शन' जैसे कठिन विषयों को भारतीय दार्शनिकों ने जैसे हँसते-हँसते व्यक्त कर डाला है । दुर्भाग्यवश नव्य-न्याय के प्रभाव ने हमारे दर्शन को स्वाभाविकता को भी नष्ट कर डाला । परंतु भारतीय दर्शन का भविष्य ऐसे नैयायिकों के हाथ में नहीं है । आइए, हम लोग कोशिश करके फिर दर्शनशास्त्र को साधारण जनता की चीज़ बना दें । हमारे यहाँ मंगलाचरण के साथ पुस्तक प्रारंभ करने का नियम था । नीचे हम प्राचीन मंगलाचरणों में से कुछ उद्धरण देकर भूमिका समाप्त करेंगे। यह उद्धरण भारतीय दर्शन के संगीतमय होने की साक्षी भी देंगे । नृतजड विरोधिरूपमंतत्रयमलबंधनदुःखता विरुद्धम् । अति निकटम विक्रियं मुरारेः परमपदं प्रणयादभिष्टवीमि ।। अर्थः- जोत और जड़ से भिन्न अर्थात् सत्य र चैतन्य स्वरूप है, जो देश, काल और वस्तु के परिच्छेद से रहित है, जिसमें दुःख और विकास नहीं है, मुरारि कृष्ण के उस परमपद को, सदैव पास ही वर्तमान है, मैं प्रेम-पूर्वक नमस्कार करता हूँ । निःश्वसितमस्य वेदा वीक्षितमेतस्य पञ्चभूतानि । स्मितमेतस्य चराचरमस्य च सुतं महाप्रलयः ।। अर्थः - वेद उसका निःश्वास है; पाँच महाभूत उस की दृष्टि का विलास; यह चराचर जगत् उस की मुसकान है; महाप्रलय उसकी गहरी नींद है ।
खेल गतिविधियों और छुट्टियों बालवाड़ी में शैक्षिक काम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्य बात - पता है कि कैसे उन्हें व्यवस्थित करने के लिए। कैसे, उदाहरण के लिए, बड़े समूह में एक खेल अवकाश होना चाहिए? तुम क्या जरूरत है? याद रखें कि बड़े समूह में खेल अवकाश बहुत मजेदार हो सकता है, और अपने माता पिता के साथ। तो अधिक। यह वयस्कों कनेक्ट करने के लिए आवश्यक है? बड़े समूह में आराम खेल और अधिक माता-पिता की भागीदारी के साथ दिलचस्प हो जाता है। यह सिर्फ बच्चों के एक मनोरंजन नहीं है। यह वास्तव में मजेदार है। इस मामले में, बच्चों सीखना होगा, और माता-पिता कैसे विभिन्न बाहरी गेम खेलने के लिए याद है। इसके अलावा, दोनों पीढ़ियों को विकसित करने और अपने सटीकता, गति, चपलता और समन्वय प्रशिक्षित करने के लिए सक्षम हो जाएगा। और, बेशक, प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों को एक साथ एक दोस्ताना रवैया लाया। तो, क्रम में। बड़े समूह में आराम खेल एक ग्रीटिंग के साथ शुरू करना चाहिए। शिक्षकों बच्चों और छुट्टी मेहमानों के साथ बधाई, वयस्कों है कि उन लोगों के साथ साझा करने के लिए अपने अनुभव चाहते हैं को सूचित करें। भौतिक गुणों (चपलता, गति, शक्ति), कैसे खेल उपकरण, संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के सक्रियण के साथ काम करने के लिए सीखने का विकास - घटना का उद्देश्य। संयुक्त समारोह, मनोरंजन और अवकाश सहयोग और शिक्षकों के साथ साझेदारी के लिए माता-पिता परिचित करने के उद्देश्य से। प्रतिभागियों को खेल जोर से तालियां के साथ एक दूसरे को बधाई। मेंटर सब एक साथ है। यह नरम संगीत के तहत सबसे अच्छा है। कुंजी शब्द द्वारा पीछा किया। यह कविता में हो सकता है। उदाहरण के लिएः हम आपको देखने के लिए बहुत खुश हैं, गुड मॉर्निंग, दोस्तों। हम एक दूसरे को बधाई। सब कुछ केवल आप हथियार ठीक? हमें और आप को देखने के लिए खुशी है कि, शुभ दिन, माता-पिता! आज यह नहीं चाहते हैं? कार्यक्रम का मुख्य खंड के बगल में। के बालवाड़ी अद्भुत किस्म के पुराने समूह में आराम खेल बाधा। यह नौकरियों के सभी प्रकार के शामिल कर सकते हैं। आदेश दो कॉलम एक के बाद एक में बनाया जाता है। वे (शंकु के आसपास टहलने के साँप) "कूद टुस्सोक से दलदल टुस्सोक करने के लिए" (घेरा से कूद घेरा) "prolazili गुफा के माध्यम से" (गेट के तहत क्रीप), "पुल पर चलना" (आयोजित "घने जंगल के माध्यम से पारित" होगा, व्यायाम बेंच पर)। बालवाड़ी के पुराने समूह में आराम खेल विभिन्न उपकरणों की आवश्यकता है। और, बेशक, गेंदों बिना नहीं कर सकते। उदाहरण के लिए, एक खेल। प्रतिभागियों को एक बड़ा सर्कल में खड़े हैं। किसी ने अपने हाथ में एक गेंद पकड़े। यह संगीत के लिए हाथों से एक दूसरे से पारित कर दिया है। जैसे ही संगीत बंद हो जाता है के रूप में, गेंद संचारण बंद कर दिया। संगीत फिर से लग रहा है। गेंद भी विपरीत दिशा में फिर से स्थानांतरित कर रहा है, हालांकि इस बार। कुछ समय के बाद, खेल और अधिक जटिल हो जाता है। दूसरा गोल जोड़ा गया, और बाद में एक तिहाई हो सकता है। मास्टर कि प्रतिभागियों गेंदों के हाथों में आज्ञाकारी कहते हैं, लेकिन वह अलग अलग दिशाओं में हर समय बिखराव है। अग्रणी scatters मंजिल पर एक बड़ा बैग के कई छोटी-छोटी गोलियां। प्रतिभागियों को जोड़े (बच्चे और वयस्क) में विभाजित हैं। वयस्क जगह में बने हुए हैं, बैठे। के आदेश पर "एक दो-तीन" बच्चों गेंदों को इकट्ठा करने और उन्हें एक उनकी जोड़ी आवंटित करने के लिए शुरू करते हैं। माता-पिता के कार्य - के रूप में कई गेंदों रखने के लिए। और उन्हें संभव रखने केवल हाथ से। समर्थन पैर निषिद्ध है। खेल के अंत में एकत्र गेंदों की संख्या गणना कर रहे हैं। यह पता चला इन गेंदों भी भाग लेने वालों की बात सुनी। अब वे गेंद स्कूल को हिट करने के लिए तैयार हैं। बड़े समूह में अवकाश खेल परिदृश्य, आप एक बहुत ही मूल और असामान्य बना सकते हैं। इस प्रकार, प्रतिभागियों स्कूल गेंद के लिए भेजा जाता है। वे फिर से जोड़े (बच्चे और वयस्क) में विभाजित हैं। युगल कक्ष में किसी भी स्थान पर कब्जा। मुख्य बात यह है कि हर किसी को सहज और मुक्त था। लीड अभ्यास दिखाई देगा, और प्रतिभागियों को देखने और उसके बाद दोहराने चाहिए। शुरू में अभ्यास फेंकता है। पहले व्यायाम - गेंदों के नीचे से एक दूसरे को हाथ फेंक दिया जाता है। दूसरा व्यायाम - गेंदों छाती के फर्श पर एक धमाके के साथ एक दूसरे के लिए ले जाया जाता है। तो फिर तुम बच्चों के वॉलीबॉल में खेल सकते हैं। हॉल फैला रस्सी। प्रतिभागियों को जोड़े में फिर से विभाजित हैं। बच्चों - केवल अब, एक हाथ से एक लाइन में वयस्कों, और अन्य बन जाते हैं। बॉल्स बच्चों के लिए दिया जाता है। वे अपने वयस्क रस्सी के माध्यम से ले जाया जा रहा है। उन गेंदों को पकड़ लिया और रस्सी के तहत वापस लुढ़का कर रहे हैं। फिर इसके विपरीत। अगला खेल - "डॉजबॉल"। मंजिल पर हॉल में एक विशेष लेआउट है। "आग" के लिए प्रतिभागियों क्षेत्र पर प्रकाश डाला। दोनों पक्षों पर बच्चे और वयस्क पर हैं। बॉल्स बच्चों के लिए दिया जाता है। वे उन्हें क्षेत्र में फेंक, ऐसे खिलाड़ी जो देखते हैं चोट करने की कोशिश कर। जिन्हें में गेंद को हिट, खेल से बाहर। यह जारी है जब तक सभी की है "बाहर निकाल। " सीमा गेंदों की वयस्क ही अपनी पढ़ाई छोड़ नहीं है। वे केवल बच्चों को सुधारात्मक कार्रवाई (सेवा की गेंदों, पकड़, प्रत्यक्ष)। माता पिता के साथ बड़े समूह में आराम खेल वर्ष के किसी भी समय में आयोजित किया जा सकता है। विचार करें कि आप सर्दियों में कर सकते हैं। घटना हॉल में आयोजित किया जाता है। माता पिता के अंदर बच्चों के साथ मुलाकात की। बच्चे हंसमुख सर्दियों गीत के नीचे हॉल दर्ज करें। ग्रीटिंग शिक्षकः प्रिय बच्चों! एक पहेली पकड़ोः बर्फ में नदी, बर्फ में गोल्फ, हवा चल रही है, जब ऐसा होता है? बच्चों के बाद शिक्षक जारी है जवाब। उदाहरण के लिए, इस तरहः उज्ज्वल शुरू छुट्टी, हमारे सर्दियों आपका स्वागत है! वहाँ शीतकालीन सूट में एक दूसरे देखभालकर्ता है। उसने सभी को बधाई दी और एक रील प्रदान करता है। किसी को भी वैकल्पिक संगीत निर्देशक। सर्दी का कहना हैः मज़े और खेलते हैं। सबसे कुशल बनना चाहते हैं, मजबूत, चुस्त, बहुत बहादुर? मुख्य बात - दिल खोना नहीं, बढ़ाव ढलान तेजी से भीड़, स्नोबॉल साथ उद्देश्य गिर जाते हैं, कैसे सुंदर - देखो! ठीक है, तुम हाय FizKult! इस सर्दी के बाद दो टीमों में प्रतिभागियों को विभाजित करेगा। उनमें से एक "बर्फ़" कहा जाता है, दूसरा - "हिमलंब"। और वह कहते हैंः मैं अपने बागे से दूर ले, प्रतियोगिता के शुरू करें! सर्दी अपने सूट को ले जाता है। कि नीचे खेल का एक रूप है। तो वहाँ एक खेल प्रस्तोता में अपने परिवर्तन है। उसके बाद जूरी के सदस्यों की नियुक्ति करती है। जजों में से एक घोषणा करता है कि प्रत्येक टीम icicles या बर्फ के टुकड़े प्राप्त होगा जीतने के लिए। जीत टीम है कि और अधिक चिप्स स्कोर होगा। आगे क्या? अग्रणी घोषणा की बड़े समूह में अवकाश खेलः मेरे देशी बालवाड़ी! एक साथ सभी मस्ती के साथ। लेकिन पहले, आप लोग, लगता-का रिडलः यही कारण है कि उल्टा लटका? (हिमलंब) यह शुरू होता है-रिले "हिमलंब" के साथ प्रतिस्पर्धा। आप पेंट कर सकते हैं यह बेटन लगता है। रिले के बाद टीमों "हॉकी" में खेलने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। चल कपास गेंदों ( "स्नोबॉल") चिपक जाता है। भालू दिखाई देता है। उनके शब्दोंः मैं ब्रुइन भालू, आप एकत्र किया है। दो टोकरी प्रस्तुत की। प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया "टोकरी में प्राप्त करें। " टीम जीत रहा है एक साथ स्क्रैप की गई, एक बड़े शंकु। अचानक, हंसमुख संगीत के तहत स्नोमैन चलाता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को बधाई दी और snegovichkov इकट्ठा करने के लिए प्रदान करता है। इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक टीम के प्रत्येक सदस्य को कागज के एक भाग के लिए जारी किया जाता है। यह आवश्यक है के रूप में यह तेजी से एक पूर्ण आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए संभव है। बच्चों के बाइक पर बच्चे पेंगुइन सूट सवार है। उन्होंने कहा कि एक प्रमुदित धुन पर अपने नृत्य प्रदर्शन करती है। संचालकः आओ और हमारे साथ खेलने, पेंगुइन, अच्छा ग्रोज्नी निवासी तैरती चादरें! यह एक प्रतियोगिता का आयोजन किया "कौन तेजी से अपने पैरों के बीच बर्फ के साथ doskachet। " बर्फ एक गेंद या एक गुब्बारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता। बड़े समूह में शीतकालीन खेल अवकाश जूरी के अधिनिर्णय पूरा किया। प्रतियोगिता के परिणामों संक्षेप। माना जाता है अर्जित चिप्स। लोगों के लिए अंत में हंसमुख सर्दियों गीत लग रहा था। लेकिन यही सब कुछ नहीं है। कैसे सर्दियों में बड़े समूह में अवकाश खेल है - यह स्पष्ट है। लेकिन आप गिरावट में एक प्रतियोगिता कैसे व्यवस्थित करते हैं? आप उन दोनों को कमरे में और अदालत यार्ड पर पकड़ कर सकते हैं। यह सब मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। नौकरियां क्षमताओं और विद्यार्थियों के समूह के कौशल पर निर्भर करता है, एक किस्म की पेशकश कर सकते हैं। यह हमेशा की तरह, शुरू होता है, एक शुभकामना के साथ। उदाहरण के लिएः मैं तुम लोगों को आमंत्रित करने, खेल मैदान पर। नहीं खिलौने के डिब्बे में, छिपाने के लिए और की तलाश नहीं। हम सक्रिय रूप से रहते हैं। एक चक्र और बंद में अग्रसर बच्चे। मेंटर फिर से, इस कार्यक्रम का नाम की घोषणा की, खेल खेलने के लिए अपने आपको समर्पित मजा और सब कुछ वे कर सकते दिखाने के लिए दिन में बच्चों प्रदान करता है। पहली बात आप कर सकते हैं - यह गर्म है। संभवतः, मानक जो पहले से ही समय तीन साल के लिए बच्चों को आदत हो पड़ा है। और आप एक विशेष व्यायाम पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कूदने के लिए। यही कारण है कि बच्चों को एक ही स्थान पर चला जाएगा, है, लेकिन उसे चारों ओर घुमाया; कूद, बारी-बारी से एक साथ और अलग पैर रखने; आगे और पीछे कूद; एक सर्कल में एक के बाद एक। यह आगे "मिलने कूद" कहा जाता है जुआ खेलने के व्यायाम का प्रस्ताव है। यह दो कूद रस्सियों एक दूसरे के लिए एक ही स्तर समानांतर पर अनुभूत की आवश्यकता होगी। तुम भी अतिरिक्त रस्सी का उपयोग कर सकते, यह अलग चौड़ाई की "धाराओं"। बच्चे, जिसके माध्यम से एक कूद, या उनमें से प्रत्येक पर कूद बारी में, चुन सकते हैं। मैं और क्या कहना चाहिए? रिले के बिना शरद ऋतु में खुली हवा में बड़े समूह में आराम खेल बस असंभव है। इन कार्यों को करने के लिए, बच्चों को दो बराबर टीमों में विभाजित किया जा करने की जरूरत है। शेयरिंग किसी भी तरह से हो सकता है। पहले रिले "कूद" कहा जाता है। बच्चों को घेरा, टीम चल पर लौटने के लिए घेरा से कूद करने की जरूरत है। मेजबान की हथेली पर लाठी कपास हथेलियों पारित कर दिया। एक दूसरा रिले - "हम एथलीटों कर रहे हैं। " विकल्प अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक रस्सी भर में एक चल शुरुआत के साथ कूद करने की जरूरत है, वापस टीम के लिए भाग गया और लाठी पारित करने के लिए। प्रत्येक रिले के अंत के बाद भूल जाते हैं दोनों टीमों की प्रशंसा करने के लिए नहीं करना चाहिए। बच्चों है कि वे महान हैं बताने के लिए सुनिश्चित करें। आप के साथ कर सकते हैं प्रत्येक मशाल विशेष रूप से आविष्कार किया है कविताओं। उदाहरण के लिएः प्रत्येक डॉजर्स। जल्दी बताना, टीम पुरस्कार ले आओ। और "कंगारू" कहा जाता है रिले की घोषणा की। इसके कार्यान्वयन के लिए उसके पेट पर उसके कपड़े के नीचे गेंद को छिपाने के लिए की जरूरत है। गेंद हाथ पकड़ते और एक ही समय आगे पर कूद, पिन झालर लिए आवश्यक है। टीम वापस सामान्य रूप से चलाने के लिए, लाठी पॉप गुजर। सभी कार्य के पूरा होने पर आप बच्चों को किसी भी मोबाइल खेल में खेलने की पेशकश कर सकते हैं। या, बस कुछ खेल। बच्चों के विवेक पर। इस प्रकार, स्कूल पूर्व में अवकाश खेल को व्यवस्थित करने के बड़े समूह में मुश्किल नहीं है। हम केवल अलविदा कहने का निश्चित रूप से सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार दे सकते हैं और,,। उदाहरण के लिएः यह बोल्ड और उज्ज्वल था, सबसे अच्छा पक्ष पर। पुरस्कार आप का इंतजार है! हंसमुख संगीत के तहत अपने बच्चों की घटनाओं को छोड़कर, सम्मान की कि गोद से पहले हो रही है। एक शब्द में, मज़ा के आसपास होने के लिएः दोनों बच्चों और वयस्कों। और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह महान स्वास्थ्य लाभ के साथ किया जा करने के लिए समय है।
खेल गतिविधियों और छुट्टियों बालवाड़ी में शैक्षिक काम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्य बात - पता है कि कैसे उन्हें व्यवस्थित करने के लिए। कैसे, उदाहरण के लिए, बड़े समूह में एक खेल अवकाश होना चाहिए? तुम क्या जरूरत है? याद रखें कि बड़े समूह में खेल अवकाश बहुत मजेदार हो सकता है, और अपने माता पिता के साथ। तो अधिक। यह वयस्कों कनेक्ट करने के लिए आवश्यक है? बड़े समूह में आराम खेल और अधिक माता-पिता की भागीदारी के साथ दिलचस्प हो जाता है। यह सिर्फ बच्चों के एक मनोरंजन नहीं है। यह वास्तव में मजेदार है। इस मामले में, बच्चों सीखना होगा, और माता-पिता कैसे विभिन्न बाहरी गेम खेलने के लिए याद है। इसके अलावा, दोनों पीढ़ियों को विकसित करने और अपने सटीकता, गति, चपलता और समन्वय प्रशिक्षित करने के लिए सक्षम हो जाएगा। और, बेशक, प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों को एक साथ एक दोस्ताना रवैया लाया। तो, क्रम में। बड़े समूह में आराम खेल एक ग्रीटिंग के साथ शुरू करना चाहिए। शिक्षकों बच्चों और छुट्टी मेहमानों के साथ बधाई, वयस्कों है कि उन लोगों के साथ साझा करने के लिए अपने अनुभव चाहते हैं को सूचित करें। भौतिक गुणों , कैसे खेल उपकरण, संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के सक्रियण के साथ काम करने के लिए सीखने का विकास - घटना का उद्देश्य। संयुक्त समारोह, मनोरंजन और अवकाश सहयोग और शिक्षकों के साथ साझेदारी के लिए माता-पिता परिचित करने के उद्देश्य से। प्रतिभागियों को खेल जोर से तालियां के साथ एक दूसरे को बधाई। मेंटर सब एक साथ है। यह नरम संगीत के तहत सबसे अच्छा है। कुंजी शब्द द्वारा पीछा किया। यह कविता में हो सकता है। उदाहरण के लिएः हम आपको देखने के लिए बहुत खुश हैं, गुड मॉर्निंग, दोस्तों। हम एक दूसरे को बधाई। सब कुछ केवल आप हथियार ठीक? हमें और आप को देखने के लिए खुशी है कि, शुभ दिन, माता-पिता! आज यह नहीं चाहते हैं? कार्यक्रम का मुख्य खंड के बगल में। के बालवाड़ी अद्भुत किस्म के पुराने समूह में आराम खेल बाधा। यह नौकरियों के सभी प्रकार के शामिल कर सकते हैं। आदेश दो कॉलम एक के बाद एक में बनाया जाता है। वे "कूद टुस्सोक से दलदल टुस्सोक करने के लिए" "prolazili गुफा के माध्यम से" , "पुल पर चलना" । बालवाड़ी के पुराने समूह में आराम खेल विभिन्न उपकरणों की आवश्यकता है। और, बेशक, गेंदों बिना नहीं कर सकते। उदाहरण के लिए, एक खेल। प्रतिभागियों को एक बड़ा सर्कल में खड़े हैं। किसी ने अपने हाथ में एक गेंद पकड़े। यह संगीत के लिए हाथों से एक दूसरे से पारित कर दिया है। जैसे ही संगीत बंद हो जाता है के रूप में, गेंद संचारण बंद कर दिया। संगीत फिर से लग रहा है। गेंद भी विपरीत दिशा में फिर से स्थानांतरित कर रहा है, हालांकि इस बार। कुछ समय के बाद, खेल और अधिक जटिल हो जाता है। दूसरा गोल जोड़ा गया, और बाद में एक तिहाई हो सकता है। मास्टर कि प्रतिभागियों गेंदों के हाथों में आज्ञाकारी कहते हैं, लेकिन वह अलग अलग दिशाओं में हर समय बिखराव है। अग्रणी scatters मंजिल पर एक बड़ा बैग के कई छोटी-छोटी गोलियां। प्रतिभागियों को जोड़े में विभाजित हैं। वयस्क जगह में बने हुए हैं, बैठे। के आदेश पर "एक दो-तीन" बच्चों गेंदों को इकट्ठा करने और उन्हें एक उनकी जोड़ी आवंटित करने के लिए शुरू करते हैं। माता-पिता के कार्य - के रूप में कई गेंदों रखने के लिए। और उन्हें संभव रखने केवल हाथ से। समर्थन पैर निषिद्ध है। खेल के अंत में एकत्र गेंदों की संख्या गणना कर रहे हैं। यह पता चला इन गेंदों भी भाग लेने वालों की बात सुनी। अब वे गेंद स्कूल को हिट करने के लिए तैयार हैं। बड़े समूह में अवकाश खेल परिदृश्य, आप एक बहुत ही मूल और असामान्य बना सकते हैं। इस प्रकार, प्रतिभागियों स्कूल गेंद के लिए भेजा जाता है। वे फिर से जोड़े में विभाजित हैं। युगल कक्ष में किसी भी स्थान पर कब्जा। मुख्य बात यह है कि हर किसी को सहज और मुक्त था। लीड अभ्यास दिखाई देगा, और प्रतिभागियों को देखने और उसके बाद दोहराने चाहिए। शुरू में अभ्यास फेंकता है। पहले व्यायाम - गेंदों के नीचे से एक दूसरे को हाथ फेंक दिया जाता है। दूसरा व्यायाम - गेंदों छाती के फर्श पर एक धमाके के साथ एक दूसरे के लिए ले जाया जाता है। तो फिर तुम बच्चों के वॉलीबॉल में खेल सकते हैं। हॉल फैला रस्सी। प्रतिभागियों को जोड़े में फिर से विभाजित हैं। बच्चों - केवल अब, एक हाथ से एक लाइन में वयस्कों, और अन्य बन जाते हैं। बॉल्स बच्चों के लिए दिया जाता है। वे अपने वयस्क रस्सी के माध्यम से ले जाया जा रहा है। उन गेंदों को पकड़ लिया और रस्सी के तहत वापस लुढ़का कर रहे हैं। फिर इसके विपरीत। अगला खेल - "डॉजबॉल"। मंजिल पर हॉल में एक विशेष लेआउट है। "आग" के लिए प्रतिभागियों क्षेत्र पर प्रकाश डाला। दोनों पक्षों पर बच्चे और वयस्क पर हैं। बॉल्स बच्चों के लिए दिया जाता है। वे उन्हें क्षेत्र में फेंक, ऐसे खिलाड़ी जो देखते हैं चोट करने की कोशिश कर। जिन्हें में गेंद को हिट, खेल से बाहर। यह जारी है जब तक सभी की है "बाहर निकाल। " सीमा गेंदों की वयस्क ही अपनी पढ़ाई छोड़ नहीं है। वे केवल बच्चों को सुधारात्मक कार्रवाई । माता पिता के साथ बड़े समूह में आराम खेल वर्ष के किसी भी समय में आयोजित किया जा सकता है। विचार करें कि आप सर्दियों में कर सकते हैं। घटना हॉल में आयोजित किया जाता है। माता पिता के अंदर बच्चों के साथ मुलाकात की। बच्चे हंसमुख सर्दियों गीत के नीचे हॉल दर्ज करें। ग्रीटिंग शिक्षकः प्रिय बच्चों! एक पहेली पकड़ोः बर्फ में नदी, बर्फ में गोल्फ, हवा चल रही है, जब ऐसा होता है? बच्चों के बाद शिक्षक जारी है जवाब। उदाहरण के लिए, इस तरहः उज्ज्वल शुरू छुट्टी, हमारे सर्दियों आपका स्वागत है! वहाँ शीतकालीन सूट में एक दूसरे देखभालकर्ता है। उसने सभी को बधाई दी और एक रील प्रदान करता है। किसी को भी वैकल्पिक संगीत निर्देशक। सर्दी का कहना हैः मज़े और खेलते हैं। सबसे कुशल बनना चाहते हैं, मजबूत, चुस्त, बहुत बहादुर? मुख्य बात - दिल खोना नहीं, बढ़ाव ढलान तेजी से भीड़, स्नोबॉल साथ उद्देश्य गिर जाते हैं, कैसे सुंदर - देखो! ठीक है, तुम हाय FizKult! इस सर्दी के बाद दो टीमों में प्रतिभागियों को विभाजित करेगा। उनमें से एक "बर्फ़" कहा जाता है, दूसरा - "हिमलंब"। और वह कहते हैंः मैं अपने बागे से दूर ले, प्रतियोगिता के शुरू करें! सर्दी अपने सूट को ले जाता है। कि नीचे खेल का एक रूप है। तो वहाँ एक खेल प्रस्तोता में अपने परिवर्तन है। उसके बाद जूरी के सदस्यों की नियुक्ति करती है। जजों में से एक घोषणा करता है कि प्रत्येक टीम icicles या बर्फ के टुकड़े प्राप्त होगा जीतने के लिए। जीत टीम है कि और अधिक चिप्स स्कोर होगा। आगे क्या? अग्रणी घोषणा की बड़े समूह में अवकाश खेलः मेरे देशी बालवाड़ी! एक साथ सभी मस्ती के साथ। लेकिन पहले, आप लोग, लगता-का रिडलः यही कारण है कि उल्टा लटका? यह शुरू होता है-रिले "हिमलंब" के साथ प्रतिस्पर्धा। आप पेंट कर सकते हैं यह बेटन लगता है। रिले के बाद टीमों "हॉकी" में खेलने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। चल कपास गेंदों चिपक जाता है। भालू दिखाई देता है। उनके शब्दोंः मैं ब्रुइन भालू, आप एकत्र किया है। दो टोकरी प्रस्तुत की। प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किया "टोकरी में प्राप्त करें। " टीम जीत रहा है एक साथ स्क्रैप की गई, एक बड़े शंकु। अचानक, हंसमुख संगीत के तहत स्नोमैन चलाता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को बधाई दी और snegovichkov इकट्ठा करने के लिए प्रदान करता है। इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक टीम के प्रत्येक सदस्य को कागज के एक भाग के लिए जारी किया जाता है। यह आवश्यक है के रूप में यह तेजी से एक पूर्ण आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए संभव है। बच्चों के बाइक पर बच्चे पेंगुइन सूट सवार है। उन्होंने कहा कि एक प्रमुदित धुन पर अपने नृत्य प्रदर्शन करती है। संचालकः आओ और हमारे साथ खेलने, पेंगुइन, अच्छा ग्रोज्नी निवासी तैरती चादरें! यह एक प्रतियोगिता का आयोजन किया "कौन तेजी से अपने पैरों के बीच बर्फ के साथ doskachet। " बर्फ एक गेंद या एक गुब्बारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता। बड़े समूह में शीतकालीन खेल अवकाश जूरी के अधिनिर्णय पूरा किया। प्रतियोगिता के परिणामों संक्षेप। माना जाता है अर्जित चिप्स। लोगों के लिए अंत में हंसमुख सर्दियों गीत लग रहा था। लेकिन यही सब कुछ नहीं है। कैसे सर्दियों में बड़े समूह में अवकाश खेल है - यह स्पष्ट है। लेकिन आप गिरावट में एक प्रतियोगिता कैसे व्यवस्थित करते हैं? आप उन दोनों को कमरे में और अदालत यार्ड पर पकड़ कर सकते हैं। यह सब मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। नौकरियां क्षमताओं और विद्यार्थियों के समूह के कौशल पर निर्भर करता है, एक किस्म की पेशकश कर सकते हैं। यह हमेशा की तरह, शुरू होता है, एक शुभकामना के साथ। उदाहरण के लिएः मैं तुम लोगों को आमंत्रित करने, खेल मैदान पर। नहीं खिलौने के डिब्बे में, छिपाने के लिए और की तलाश नहीं। हम सक्रिय रूप से रहते हैं। एक चक्र और बंद में अग्रसर बच्चे। मेंटर फिर से, इस कार्यक्रम का नाम की घोषणा की, खेल खेलने के लिए अपने आपको समर्पित मजा और सब कुछ वे कर सकते दिखाने के लिए दिन में बच्चों प्रदान करता है। पहली बात आप कर सकते हैं - यह गर्म है। संभवतः, मानक जो पहले से ही समय तीन साल के लिए बच्चों को आदत हो पड़ा है। और आप एक विशेष व्यायाम पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कूदने के लिए। यही कारण है कि बच्चों को एक ही स्थान पर चला जाएगा, है, लेकिन उसे चारों ओर घुमाया; कूद, बारी-बारी से एक साथ और अलग पैर रखने; आगे और पीछे कूद; एक सर्कल में एक के बाद एक। यह आगे "मिलने कूद" कहा जाता है जुआ खेलने के व्यायाम का प्रस्ताव है। यह दो कूद रस्सियों एक दूसरे के लिए एक ही स्तर समानांतर पर अनुभूत की आवश्यकता होगी। तुम भी अतिरिक्त रस्सी का उपयोग कर सकते, यह अलग चौड़ाई की "धाराओं"। बच्चे, जिसके माध्यम से एक कूद, या उनमें से प्रत्येक पर कूद बारी में, चुन सकते हैं। मैं और क्या कहना चाहिए? रिले के बिना शरद ऋतु में खुली हवा में बड़े समूह में आराम खेल बस असंभव है। इन कार्यों को करने के लिए, बच्चों को दो बराबर टीमों में विभाजित किया जा करने की जरूरत है। शेयरिंग किसी भी तरह से हो सकता है। पहले रिले "कूद" कहा जाता है। बच्चों को घेरा, टीम चल पर लौटने के लिए घेरा से कूद करने की जरूरत है। मेजबान की हथेली पर लाठी कपास हथेलियों पारित कर दिया। एक दूसरा रिले - "हम एथलीटों कर रहे हैं। " विकल्प अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक रस्सी भर में एक चल शुरुआत के साथ कूद करने की जरूरत है, वापस टीम के लिए भाग गया और लाठी पारित करने के लिए। प्रत्येक रिले के अंत के बाद भूल जाते हैं दोनों टीमों की प्रशंसा करने के लिए नहीं करना चाहिए। बच्चों है कि वे महान हैं बताने के लिए सुनिश्चित करें। आप के साथ कर सकते हैं प्रत्येक मशाल विशेष रूप से आविष्कार किया है कविताओं। उदाहरण के लिएः प्रत्येक डॉजर्स। जल्दी बताना, टीम पुरस्कार ले आओ। और "कंगारू" कहा जाता है रिले की घोषणा की। इसके कार्यान्वयन के लिए उसके पेट पर उसके कपड़े के नीचे गेंद को छिपाने के लिए की जरूरत है। गेंद हाथ पकड़ते और एक ही समय आगे पर कूद, पिन झालर लिए आवश्यक है। टीम वापस सामान्य रूप से चलाने के लिए, लाठी पॉप गुजर। सभी कार्य के पूरा होने पर आप बच्चों को किसी भी मोबाइल खेल में खेलने की पेशकश कर सकते हैं। या, बस कुछ खेल। बच्चों के विवेक पर। इस प्रकार, स्कूल पूर्व में अवकाश खेल को व्यवस्थित करने के बड़े समूह में मुश्किल नहीं है। हम केवल अलविदा कहने का निश्चित रूप से सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार दे सकते हैं और,,। उदाहरण के लिएः यह बोल्ड और उज्ज्वल था, सबसे अच्छा पक्ष पर। पुरस्कार आप का इंतजार है! हंसमुख संगीत के तहत अपने बच्चों की घटनाओं को छोड़कर, सम्मान की कि गोद से पहले हो रही है। एक शब्द में, मज़ा के आसपास होने के लिएः दोनों बच्चों और वयस्कों। और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह महान स्वास्थ्य लाभ के साथ किया जा करने के लिए समय है।
काठमांडू, 12 जुलाई नेपाल ने अपने पूर्वी हिस्से में 679 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए भारत की सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) के साथ 1. 3 अरब डॉलर का समझौता किया है, जो पड़ोसी देश में भारत द्वारा शुरू किया गया दूसरा बड़ा उद्यम होगा। निवेश बोर्ड नेपाल द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2017 की लागत अनुमानों के आधार पर सबसे बड़ी विदेशी निवेश वाली परियोजना पूर्वी नेपाल में संखुवासभा और भोजपुर जिलों के बीच स्थित है। कुल 679 मेगावाट क्षमता वाली लोवर अरुण जलविद्युत परियोजना भारत द्वारा शुरू की गई दूसरी बड़ी परियोजना है। इससे पहले भारत ने 1. 04 अरब अमेरिकी डॉलर लागत वाली 900 मेगावाट क्षमता की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना शुरू की थी। निवेश बोर्ड नेपाल के अनुसार रविवार को काठमांडू में निवेश बोर्ड नेपाल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील भट्ट और एसजेवीएन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने परियोजना के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना को बनाओ, रखो, चलाओ और सौंपो (बीओओटी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
काठमांडू, बारह जुलाई नेपाल ने अपने पूर्वी हिस्से में छः सौ उन्यासी मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए भारत की सतलुज जल विद्युत निगम के साथ एक. तीन अरब डॉलर का समझौता किया है, जो पड़ोसी देश में भारत द्वारा शुरू किया गया दूसरा बड़ा उद्यम होगा। निवेश बोर्ड नेपाल द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दो हज़ार सत्रह की लागत अनुमानों के आधार पर सबसे बड़ी विदेशी निवेश वाली परियोजना पूर्वी नेपाल में संखुवासभा और भोजपुर जिलों के बीच स्थित है। कुल छः सौ उन्यासी मेगावाट क्षमता वाली लोवर अरुण जलविद्युत परियोजना भारत द्वारा शुरू की गई दूसरी बड़ी परियोजना है। इससे पहले भारत ने एक. चार अरब अमेरिकी डॉलर लागत वाली नौ सौ मेगावाट क्षमता की अरुण-तीन जलविद्युत परियोजना शुरू की थी। निवेश बोर्ड नेपाल के अनुसार रविवार को काठमांडू में निवेश बोर्ड नेपाल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील भट्ट और एसजेवीएन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने परियोजना के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना को बनाओ, रखो, चलाओ और सौंपो मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
लखनऊः उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी में कल हिंसा के दौरान 4 किसान, 3 भाजपा कार्यकर्ता एक पत्रकार की मृत्यु हो गई। जिसके बाद से यूपी राजनितिक सियासत का केंद्र बना हुआ है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने सीतापुर में हिरासत के दौरान यूपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई वर्ग विरोध में आवाज उठाता है तो वहां कानून व्यवस्था का बहाना बनाया जाता है। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि यूपी पुलिस ने ने उनके साथ ठीक बर्ताव नहीं किया था और जबरन साथ लेकर जाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, 'अगर वो मुझ पर 24 घंटे के भीतर सेक्शन 151 के तहत आरोप नहीं लगाते हैं, तो मैं आजाद हूं। लेकिन मैं अपने वकीलों से बात नहीं कर पा रही हूं। मुझे बताया गया है कि मेरे पास अधिकार है। ' कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि मंत्री पुत्र को अभी तक पुलिस ने गिरफ्तार क्यों नहीं किया है? साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि मैं गिरफ्तार हूं, लेकिन मंत्री का बेटा आजाद है। बता दें कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर लखीमपुर जिले में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कार से रौंदने का आरोप लगा है।
लखनऊः उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी में कल हिंसा के दौरान चार किसान, तीन भाजपा कार्यकर्ता एक पत्रकार की मृत्यु हो गई। जिसके बाद से यूपी राजनितिक सियासत का केंद्र बना हुआ है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने सीतापुर में हिरासत के दौरान यूपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई वर्ग विरोध में आवाज उठाता है तो वहां कानून व्यवस्था का बहाना बनाया जाता है। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि यूपी पुलिस ने ने उनके साथ ठीक बर्ताव नहीं किया था और जबरन साथ लेकर जाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, 'अगर वो मुझ पर चौबीस घंटाटे के भीतर सेक्शन एक सौ इक्यावन के तहत आरोप नहीं लगाते हैं, तो मैं आजाद हूं। लेकिन मैं अपने वकीलों से बात नहीं कर पा रही हूं। मुझे बताया गया है कि मेरे पास अधिकार है। ' कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि मंत्री पुत्र को अभी तक पुलिस ने गिरफ्तार क्यों नहीं किया है? साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि मैं गिरफ्तार हूं, लेकिन मंत्री का बेटा आजाद है। बता दें कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर लखीमपुर जिले में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कार से रौंदने का आरोप लगा है।
हिमाचल के किन्नौर हादसे पर सीएम जयराम ठाकुर का बयान भी सामने आया है. सीएम ने कहा कि अब तक 13 लोगों के शव बरामद किए गए हैं. हालांकि, कितने लोग लापता हैं. इसका सही से अंदाजा नहीं लग पा रहा है. बस में कितने लोग सवार थे. यह अनुमान लगाना कठीन है. वहीं, शिमला से सीएम जयराम का हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया है, क्योंकि यहां लगातार मौसम खराब बना हुआ है. सीएम ने कहा कि दोपहर तक हालात सही होने की उम्मीद है. सेना की तरफ से मदद के लिए चॉपर का ऑफर दिया गया है, लेकिन मौसम खराब और ऐसे में मौसम साफ हुआ तो सेना का चॉपर को रेसक्यू ऑपरेशन में शामिल किया जाएगा. सीएम ने कहा कि मैं भी किन्नौर जाने की तैयारी कर रहा हूं.
हिमाचल के किन्नौर हादसे पर सीएम जयराम ठाकुर का बयान भी सामने आया है. सीएम ने कहा कि अब तक तेरह लोगों के शव बरामद किए गए हैं. हालांकि, कितने लोग लापता हैं. इसका सही से अंदाजा नहीं लग पा रहा है. बस में कितने लोग सवार थे. यह अनुमान लगाना कठीन है. वहीं, शिमला से सीएम जयराम का हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया है, क्योंकि यहां लगातार मौसम खराब बना हुआ है. सीएम ने कहा कि दोपहर तक हालात सही होने की उम्मीद है. सेना की तरफ से मदद के लिए चॉपर का ऑफर दिया गया है, लेकिन मौसम खराब और ऐसे में मौसम साफ हुआ तो सेना का चॉपर को रेसक्यू ऑपरेशन में शामिल किया जाएगा. सीएम ने कहा कि मैं भी किन्नौर जाने की तैयारी कर रहा हूं.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. २६ - करीब 8 लाख की जनसंख्यावाले अमरावती शहर में विगत दस माह के दौरान लगभग 6 हजार 314 नागरिकों की मौत हुई है. इस दौरान अमरावती शहर में रोजाना औसतन 22 मौतें हुई, ऐसा मनपा के पास दर्ज जानकारी को देखते हुए कहा जा सकता है. यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, बीते दस माह के दौरान अमरावती जिले में कोरोना की वजह से कुल 372 मौतें हुई. जिसमें से 251 संक्रमित मरीज अमरावती शहर परिसर के निवासी थे. यदि बीतें तीन वर्षों के आंकडों को देखा जाये तो सन 2018 में 5 हजार 10 तथा 2019 में 5 हजार 252 लोगों की मृत्यु हुई, लेकिन जारी वर्ष में केवल दस माह के दौरान ही 6 हजार 314 लोगों की मौत हुई है. इस बार अप्रैल माह से अमरावती शहर में कोरोना का संक्रमण फैलना शुरू हुआ और जिले में अब तक 17 हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज पाये जा चुके है. जिसमें अमरावती मनपा क्षेत्र में रहनेवाले 12 हजार से अधिक नागरिकों का समावेश है. इन कोरोना संक्रमितोें में से अब तक 2. 10 फीसदी मरीजों की मौत हो चुकी है. इस वजह से भी इस बार मौत के आंकडे अधिक रहे, ऐसा कहा जा सकता है. मनपा द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकडों को देखते हुए कहा जा सकता है कि, इस बार सर्वाधिक 920 मौतें सितंबर माह में हुई है. इस महिने में रोजाना औसतन 31 लोगों की मौतें हुई. जिनमें कोरोना संक्रमण सहित विभिन्न बीमारियों एवं नैसर्गिक वजहों के चलते होनेवाली मौतों का समावेश रहा. वहीं अक्तूबर माह में भी 876 नागरिकों की मौतें हुई है. इस महिने रोजाना औसत 28 मौतें हुई. विगत दो वर्षों की तुलना में इस बार मृत्यु संख्या कुछ प्रमाण में बढी है. जिसके लिए केवल कोरोना ही नहीं बल्कि अन्य वजहें भी जिम्मेदार है. जिनकी कारणमिमांसा की जा रही है.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. छब्बीस - करीब आठ लाख की जनसंख्यावाले अमरावती शहर में विगत दस माह के दौरान लगभग छः हजार तीन सौ चौदह नागरिकों की मौत हुई है. इस दौरान अमरावती शहर में रोजाना औसतन बाईस मौतें हुई, ऐसा मनपा के पास दर्ज जानकारी को देखते हुए कहा जा सकता है. यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, बीते दस माह के दौरान अमरावती जिले में कोरोना की वजह से कुल तीन सौ बहत्तर मौतें हुई. जिसमें से दो सौ इक्यावन संक्रमित मरीज अमरावती शहर परिसर के निवासी थे. यदि बीतें तीन वर्षों के आंकडों को देखा जाये तो सन दो हज़ार अट्ठारह में पाँच हजार दस तथा दो हज़ार उन्नीस में पाँच हजार दो सौ बावन लोगों की मृत्यु हुई, लेकिन जारी वर्ष में केवल दस माह के दौरान ही छः हजार तीन सौ चौदह लोगों की मौत हुई है. इस बार अप्रैल माह से अमरावती शहर में कोरोना का संक्रमण फैलना शुरू हुआ और जिले में अब तक सत्रह हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज पाये जा चुके है. जिसमें अमरावती मनपा क्षेत्र में रहनेवाले बारह हजार से अधिक नागरिकों का समावेश है. इन कोरोना संक्रमितोें में से अब तक दो. दस फीसदी मरीजों की मौत हो चुकी है. इस वजह से भी इस बार मौत के आंकडे अधिक रहे, ऐसा कहा जा सकता है. मनपा द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकडों को देखते हुए कहा जा सकता है कि, इस बार सर्वाधिक नौ सौ बीस मौतें सितंबर माह में हुई है. इस महिने में रोजाना औसतन इकतीस लोगों की मौतें हुई. जिनमें कोरोना संक्रमण सहित विभिन्न बीमारियों एवं नैसर्गिक वजहों के चलते होनेवाली मौतों का समावेश रहा. वहीं अक्तूबर माह में भी आठ सौ छिहत्तर नागरिकों की मौतें हुई है. इस महिने रोजाना औसत अट्ठाईस मौतें हुई. विगत दो वर्षों की तुलना में इस बार मृत्यु संख्या कुछ प्रमाण में बढी है. जिसके लिए केवल कोरोना ही नहीं बल्कि अन्य वजहें भी जिम्मेदार है. जिनकी कारणमिमांसा की जा रही है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
आधुनिक गुणगान जिगेनबाग को 'भारत और भारत के बाहर तमिल जनों और उनकी संस्कृति के उत्थान में उनकी उत्प्रेरक भूमिका के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय तमिल पहचान सृजित करने में अग्रणी के रूप में प्रदर्शित करता है। भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन काल में लुथेरन संकल्पना सन 1919 में, तमिल लुथेरन इवैंजेलिकल चर्च (टी.एल.ई.सी.) का गठन किया गया। इसके बिशप जोहानेस सैण्डिग्रेन 1946 में महात्मा गाँधी से मिले थे। गाँधी ने उनसे कहा था कि अगर उनके पास कानून बनाने की शक्ति होती तो वे सभी धर्मान्तरण गतिविधियों को रोक देते । 12 सैण्डिग्रेन ने हिन्दू समाज में सामाजिक सुधार और भारत में ईसाई धर्मान्तरण गतिविधियों के प्रति गाँधी के रुख की आलोचना की। वे सनातनी और पन्थ-निरपेक्ष हिन्दुओं के बीच गठजोड़ से भयभीत थे, और अछूत जातियों को सामाजिक ढाँचे में एकीकृत करने के डॉ. अम्बेडकर के प्रयासों को अपने मिशन के लिए एक समस्या के रूप में देखते थे। सैण्डिग्रेन ने लिखा कि एक वर्णव्यवस्था उतनी ही ईसाई है जितना कि समाज का एक व्यक्तिवादी या साम्यवादी स्वरूप। उन्होंने 1946 में आशा व्यक्त की थी कि अम्बेडकर प्रोटेस्टेंट ईसाइयत का चयन करेंगे, लेकिन अम्बेडकर ने ईसाइयत को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे ईसाई चर्चों के अन्दर वर्ण संघर्ष के प्रति सचेत थे, और साथ ही वर्ण-व्यवस्था को स्वीकार करने वाले लुथेरन मिशन की सामान्य स्थिति की भी जानकारी उन्हें थी । भारत के प्रति लुथेरन संकल्पना बाइबल की श्रेणियों से निकाली गयी थी और बाद में ये संघर्ष और ईसाई धर्मान्तरण के लिए दरारें बन गयीं। सेडरलोफ स्पष्ट करते हैं कि सैण्डिग्रेन की रचनाएँ : अपने अर्थ उत्तर यूरोपीय राष्ट्रवाद और एक लोक-चर्च के अलग-अलग और आपस में जुड़ते सन्दर्भों से निकालते हैं। इस पर ध्यान देना विशेष रूप से रुचिकर होगा कि किस तरह ब्रितानी भारत में स्वीडन के मिशनरियों ने स्वयं को विदेशी सरीखा महसूस किया । उनकी 'जर्मन-समर्थित सहानुभूतियाँ' ब्रिटेन के शत्रु राष्ट्र से साथ पारिवारिक सम्बन्धों से अधिक थीं। इसी सन्दर्भ से जनसमूह और राष्ट्र की अवधारणा- भारत में तमिल लोक-चर्च को भी समझा जा सकता है, जहाँ चर्च आत्मा थी जिसने राष्ट्रों को साथ लेकर एक बड़ी एकता बनायी। उस सीमा तक, 'तमिल ईसाई राष्ट्र' को बहुधा 'भारतीय धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र' के साथ संघर्षरत रूप में देखा जाता था। 14 लुथेरन मिशन ने स्वतन्त्र भारत राष्ट्र को 'खतरा उपस्थित करने वाले प्रतियोगी और लुथेरन ईसाइयत के लिए मुक्ति, दोनों रूपों में देखा' तथा 1940 के दशक में भी लुथेरन मिशनरी अनिर्णय की स्थिति में थे कि वे कौन-सा मार्ग अपनायें। स्वतन्त्रता के बाद भारत में लुथेरन चर्च आज भारत में कई लुथेरन संगठन सक्रिय हैं। सन 1975 में, यूनाइटेड इवेंजेलिकल लुथेरन चर्च (यू. ई. एल. सी.) की स्थापना की गयी। उनके महत्वपूर्ण घटकों में टी.ई.एल.सी., आंध्र इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, गॉस्नर इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, जयपुर [उड़ीसा] इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, नॉर्दर्न इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, इण्डिया इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, आर्कट इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, साउथ आंध्र इवैंजेलिकल लुथैरन चर्च, और इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च ऑफ मध्य प्रदेश शामिल हैं। दक्षिण भारत में काम कर रहे लुथेरन संगठनों में सर्वाधिक सक्रिय है गुरुकुल लुथेरन थियोलॉजिकल कॉलेज एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई।" यह आधिकारिक रूप से स्वयं को 'ईसा मसीह के मुक्ति देने वाले धर्मोपदेशों को बताने वाले एक सार्वभौमिक धर्मशास्त्रीय समुदाय' के रूप में परिभाषित करता है। 7 उसकी इस भूमिका में द्रविड़ पहचान को एक विशेष रूप देना भी शामिल है। इसके निदेशक आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित द्रविड़ विश्वविद्यालय की कार्य समिति के सदस्य हैं। गुरुकुल लुथेरन दलितों को उनकी पहचान को एक विशेष स्वरूप देने के लिए उनके साथ काम भी करता है ताकि उसे बाइबल के मिथक में सटीक बैठाया जा सके। उनके धर्मशास्त्रियों में से एक दलितों की पहचान बाइबल के एबल से करते हैं, जिनकी हत्या कर दी गयी थी, और जिन्हें वे 'प्रथम शहीद दलित' बताते हैं। इसे स्पष्ट करते हुए वे कहते हैं कि ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि एबल मवेशियों से जुड़े थे, जो सब-के-सब, इन धर्मशास्त्री के अनुसार, भारतीय वर्ण-व्यवस्था के भीतर प्रदूषित करने वाले या प्रदूषित माना जाता है। 19 इस प्रकार दलित विरासत को, जो विविध रूपों में और अपने ही मिथकों और देवताओं से सम्पन्न है, मिटा दिया गया और उसकी जगह अब्राहम से जुड़ी एक पहचान सामने लायी गयी, जो ऐतिहासिक रूप से विभाजनकारी है । गुरुकुल लुथेरन द्रविड़वादी-दलित विभाजन को पाटने के लिए भी कार्य करता है, ताकि हिन्दू धर्म के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बनाया जा सके। इस उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में, यह दलित नेता तिरुमावलवन को प्रोत्साहित करता है, जो दलित नस्लवाद को द्रविड़वाद से जोड़ते हैं और सामाजिक न्याय की वेश-भूषा में अलगाववाद को आगे बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए, वे प्रस्ताव देते हैं कि विदुथलाई चिरथईगल (लिबरेशन पैंथर्स) के पास 'तमिल राष्ट्रवाद नामक हथियार उठाने के अलावा कोई मार्ग नहीं है' । 20 सन 2009 में गुरुकुल लुथेरन ने तिरुमावलवन को 'डॉक्टर ऑफ डिविनिटी' का सम्मान दिया, 21 इसके बावजूद कि उसी वर्ष सम्पूर्ण राज्य में पोस्टर चिपकाये गये थे जिसमें उन्हें लिट्टे के दिवंगत नेता प्रभाकरण के साथ दिखाया गया था।
आधुनिक गुणगान जिगेनबाग को 'भारत और भारत के बाहर तमिल जनों और उनकी संस्कृति के उत्थान में उनकी उत्प्रेरक भूमिका के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय तमिल पहचान सृजित करने में अग्रणी के रूप में प्रदर्शित करता है। भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन काल में लुथेरन संकल्पना सन एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में, तमिल लुथेरन इवैंजेलिकल चर्च का गठन किया गया। इसके बिशप जोहानेस सैण्डिग्रेन एक हज़ार नौ सौ छियालीस में महात्मा गाँधी से मिले थे। गाँधी ने उनसे कहा था कि अगर उनके पास कानून बनाने की शक्ति होती तो वे सभी धर्मान्तरण गतिविधियों को रोक देते । बारह सैण्डिग्रेन ने हिन्दू समाज में सामाजिक सुधार और भारत में ईसाई धर्मान्तरण गतिविधियों के प्रति गाँधी के रुख की आलोचना की। वे सनातनी और पन्थ-निरपेक्ष हिन्दुओं के बीच गठजोड़ से भयभीत थे, और अछूत जातियों को सामाजिक ढाँचे में एकीकृत करने के डॉ. अम्बेडकर के प्रयासों को अपने मिशन के लिए एक समस्या के रूप में देखते थे। सैण्डिग्रेन ने लिखा कि एक वर्णव्यवस्था उतनी ही ईसाई है जितना कि समाज का एक व्यक्तिवादी या साम्यवादी स्वरूप। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियालीस में आशा व्यक्त की थी कि अम्बेडकर प्रोटेस्टेंट ईसाइयत का चयन करेंगे, लेकिन अम्बेडकर ने ईसाइयत को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे ईसाई चर्चों के अन्दर वर्ण संघर्ष के प्रति सचेत थे, और साथ ही वर्ण-व्यवस्था को स्वीकार करने वाले लुथेरन मिशन की सामान्य स्थिति की भी जानकारी उन्हें थी । भारत के प्रति लुथेरन संकल्पना बाइबल की श्रेणियों से निकाली गयी थी और बाद में ये संघर्ष और ईसाई धर्मान्तरण के लिए दरारें बन गयीं। सेडरलोफ स्पष्ट करते हैं कि सैण्डिग्रेन की रचनाएँ : अपने अर्थ उत्तर यूरोपीय राष्ट्रवाद और एक लोक-चर्च के अलग-अलग और आपस में जुड़ते सन्दर्भों से निकालते हैं। इस पर ध्यान देना विशेष रूप से रुचिकर होगा कि किस तरह ब्रितानी भारत में स्वीडन के मिशनरियों ने स्वयं को विदेशी सरीखा महसूस किया । उनकी 'जर्मन-समर्थित सहानुभूतियाँ' ब्रिटेन के शत्रु राष्ट्र से साथ पारिवारिक सम्बन्धों से अधिक थीं। इसी सन्दर्भ से जनसमूह और राष्ट्र की अवधारणा- भारत में तमिल लोक-चर्च को भी समझा जा सकता है, जहाँ चर्च आत्मा थी जिसने राष्ट्रों को साथ लेकर एक बड़ी एकता बनायी। उस सीमा तक, 'तमिल ईसाई राष्ट्र' को बहुधा 'भारतीय धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र' के साथ संघर्षरत रूप में देखा जाता था। चौदह लुथेरन मिशन ने स्वतन्त्र भारत राष्ट्र को 'खतरा उपस्थित करने वाले प्रतियोगी और लुथेरन ईसाइयत के लिए मुक्ति, दोनों रूपों में देखा' तथा एक हज़ार नौ सौ चालीस के दशक में भी लुथेरन मिशनरी अनिर्णय की स्थिति में थे कि वे कौन-सा मार्ग अपनायें। स्वतन्त्रता के बाद भारत में लुथेरन चर्च आज भारत में कई लुथेरन संगठन सक्रिय हैं। सन एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में, यूनाइटेड इवेंजेलिकल लुथेरन चर्च की स्थापना की गयी। उनके महत्वपूर्ण घटकों में टी.ई.एल.सी., आंध्र इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, गॉस्नर इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, जयपुर [उड़ीसा] इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, नॉर्दर्न इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, इण्डिया इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, आर्कट इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च, साउथ आंध्र इवैंजेलिकल लुथैरन चर्च, और इवैंजेलिकल लुथेरन चर्च ऑफ मध्य प्रदेश शामिल हैं। दक्षिण भारत में काम कर रहे लुथेरन संगठनों में सर्वाधिक सक्रिय है गुरुकुल लुथेरन थियोलॉजिकल कॉलेज एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई।" यह आधिकारिक रूप से स्वयं को 'ईसा मसीह के मुक्ति देने वाले धर्मोपदेशों को बताने वाले एक सार्वभौमिक धर्मशास्त्रीय समुदाय' के रूप में परिभाषित करता है। सात उसकी इस भूमिका में द्रविड़ पहचान को एक विशेष रूप देना भी शामिल है। इसके निदेशक आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित द्रविड़ विश्वविद्यालय की कार्य समिति के सदस्य हैं। गुरुकुल लुथेरन दलितों को उनकी पहचान को एक विशेष स्वरूप देने के लिए उनके साथ काम भी करता है ताकि उसे बाइबल के मिथक में सटीक बैठाया जा सके। उनके धर्मशास्त्रियों में से एक दलितों की पहचान बाइबल के एबल से करते हैं, जिनकी हत्या कर दी गयी थी, और जिन्हें वे 'प्रथम शहीद दलित' बताते हैं। इसे स्पष्ट करते हुए वे कहते हैं कि ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि एबल मवेशियों से जुड़े थे, जो सब-के-सब, इन धर्मशास्त्री के अनुसार, भारतीय वर्ण-व्यवस्था के भीतर प्रदूषित करने वाले या प्रदूषित माना जाता है। उन्नीस इस प्रकार दलित विरासत को, जो विविध रूपों में और अपने ही मिथकों और देवताओं से सम्पन्न है, मिटा दिया गया और उसकी जगह अब्राहम से जुड़ी एक पहचान सामने लायी गयी, जो ऐतिहासिक रूप से विभाजनकारी है । गुरुकुल लुथेरन द्रविड़वादी-दलित विभाजन को पाटने के लिए भी कार्य करता है, ताकि हिन्दू धर्म के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बनाया जा सके। इस उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में, यह दलित नेता तिरुमावलवन को प्रोत्साहित करता है, जो दलित नस्लवाद को द्रविड़वाद से जोड़ते हैं और सामाजिक न्याय की वेश-भूषा में अलगाववाद को आगे बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए, वे प्रस्ताव देते हैं कि विदुथलाई चिरथईगल के पास 'तमिल राष्ट्रवाद नामक हथियार उठाने के अलावा कोई मार्ग नहीं है' । बीस सन दो हज़ार नौ में गुरुकुल लुथेरन ने तिरुमावलवन को 'डॉक्टर ऑफ डिविनिटी' का सम्मान दिया, इक्कीस इसके बावजूद कि उसी वर्ष सम्पूर्ण राज्य में पोस्टर चिपकाये गये थे जिसमें उन्हें लिट्टे के दिवंगत नेता प्रभाकरण के साथ दिखाया गया था।
आईपीएल 2022 के मेगा ऑक्शन (IPL 2022 Mega Auction) के दौरान घरेलू और विदेशी प्लेयर्स के लिए जमकर बोली लगी। इस दौरान कई ऐसे खिलाड़ी रहे जिनके हाथ बहुत बड़ी रकम आई। कई नए चेहरों को भी फ्रेंचाइजियों ने चुना और कुछ पुराने चेहरों की भी वापसी हुई है। हालांकि इस दौरान कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे जिनको कोई खरीददार नहीं मिला। आईपीएल में अनसोल्ड रहने वाले प्लेयर्स को लेकर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट्ट ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि दुनिया भर के कई दिग्गज खिलाड़ी ऐसे थे जो आईपीएल में अनसोल्ड रहे। इस साल की आईपीएल नीलामी में कुल 590 खिलाड़ियों को चुना गया था लेकिन इनमें से मात्र 204 खिलाड़ियों के लिए ही बोली लगी। कई ऐसे बड़े नाम और अनकैप्ड खिलाड़ी रहे जिन्हें कोई खरीददार नहीं मिला। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच, टी20 में लंबे समय तक नंबर वन बल्लेबाज रहने वाले डेविड मलान, साउथ अफ्रीका के दिग्गज तबरेज शम्सी और सुरेश रैना जैसे दिग्गजों को कोई खरीददार ही नहीं मिला। दुनिया भर के दिग्गज प्लेयर्स के अनसोल्ड रहने को लेकर सलमान बट्ट ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने यू-ट्यूब चैनल पर कहा "कई सारे दिग्गज हैं जो इस बार आईपीएल में नहीं चुने गए। डेविड मलान लंबे समय तक दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज थे लेकिन वो किसी टीम में नहीं हैं। आरोन फिंच और इयोन मोर्गन भी नहीं हैं। पिछले साल मोर्गन केकेआर के कप्तान थे लेकिन इस साल वो निकोलस पूरन जितने लकी नहीं थे क्योंकि दोनों की परफॉर्मेंस लगभग एक जैसी थी। तबरेज शम्सी को भी कोई खरीददार नहीं मिला। कई प्लेयर्स को इससे काफी बुरा लगा होगा लेकिन ऑक्शन का ये नेचर है और ऐसी चीजें होती रहती हैं। "
आईपीएल दो हज़ार बाईस के मेगा ऑक्शन के दौरान घरेलू और विदेशी प्लेयर्स के लिए जमकर बोली लगी। इस दौरान कई ऐसे खिलाड़ी रहे जिनके हाथ बहुत बड़ी रकम आई। कई नए चेहरों को भी फ्रेंचाइजियों ने चुना और कुछ पुराने चेहरों की भी वापसी हुई है। हालांकि इस दौरान कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे जिनको कोई खरीददार नहीं मिला। आईपीएल में अनसोल्ड रहने वाले प्लेयर्स को लेकर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट्ट ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि दुनिया भर के कई दिग्गज खिलाड़ी ऐसे थे जो आईपीएल में अनसोल्ड रहे। इस साल की आईपीएल नीलामी में कुल पाँच सौ नब्बे खिलाड़ियों को चुना गया था लेकिन इनमें से मात्र दो सौ चार खिलाड़ियों के लिए ही बोली लगी। कई ऐसे बड़े नाम और अनकैप्ड खिलाड़ी रहे जिन्हें कोई खरीददार नहीं मिला। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच, टीबीस में लंबे समय तक नंबर वन बल्लेबाज रहने वाले डेविड मलान, साउथ अफ्रीका के दिग्गज तबरेज शम्सी और सुरेश रैना जैसे दिग्गजों को कोई खरीददार ही नहीं मिला। दुनिया भर के दिग्गज प्लेयर्स के अनसोल्ड रहने को लेकर सलमान बट्ट ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने यू-ट्यूब चैनल पर कहा "कई सारे दिग्गज हैं जो इस बार आईपीएल में नहीं चुने गए। डेविड मलान लंबे समय तक दुनिया के नंबर एक टीबीस बल्लेबाज थे लेकिन वो किसी टीम में नहीं हैं। आरोन फिंच और इयोन मोर्गन भी नहीं हैं। पिछले साल मोर्गन केकेआर के कप्तान थे लेकिन इस साल वो निकोलस पूरन जितने लकी नहीं थे क्योंकि दोनों की परफॉर्मेंस लगभग एक जैसी थी। तबरेज शम्सी को भी कोई खरीददार नहीं मिला। कई प्लेयर्स को इससे काफी बुरा लगा होगा लेकिन ऑक्शन का ये नेचर है और ऐसी चीजें होती रहती हैं। "
Aaj Ka Rashifal,25 मई 2023: आज तारीख है 25 मई 2023 दिन गुरुवार और आप अपना दैनिक राशिफल जानना चाहेंगे कि आपका आज का दिन आपकी राशि के अनुसार कैसा रहने वाला हैं. मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) बाहर जाने से बचे क्योंकि दुर्घटना होने की संभावना है. यदि किसी कारणवश बाहर जाना ही पड़े तो सार्वजानिक वाहन से ही यात्रा करे. यात्रा मनोरंजक रहेगी. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा. कारोबार में वृद्धि के योग हैं. व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित होगा. वृष (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) पारिवारिक जीवन में दो-चार छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं. घर में किसी सदस्य के साथ आपकी बहस भी संभव हैं. छात्रों को आज के दिन संभलकर काम करने की आवश्यकता हैं. यात्रा मनोरंजक रहेगी. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा. कारोबार में वृद्धि के योग हैं. व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित होगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) समाज में आपका कद ऊँचा होगा और सभी के बीच मान-सम्मान में वृद्धि होगी. घर में भी किसी चीज़ को लेकर प्रशंसा के पात्र बनेंगे. जल्दबाजी से चोट लग सकती है. दूर से शोक समाचार मिल सकता है. वाणी पर नियंत्रण रखें. किसी अपने ही व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है. थकान व कमजोरी रह सकती है. स्वास्थ्य पर खर्च होगा. कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) सरकारी नौकरी कर रहे लोगों को अपने से उच्च अधिकारियों का पूर्ण सहयोग मिलेगा जो उनके बहुत काम आएगा. कृषि में सफलता मिलेगी. कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी. थकान व कमजोरी रह सकती है. जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा. निवेश में जल्दबाजी न करें. नौकरी में शांति रहेगी. सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) धर्म-कर्म के कार्यों में रुचि बढ़ेगी और आपका झुकाव आध्यात्म की ओर रहेगा. घर में कोई मांगलिक कार्य भी संपन्न हो सकता हैं. पुराना रोग उभर सकता है. दूर से दुःखद समाचार मिल सकता है. व्यर्थ भागदौड़ रहेगी. किसी व्यक्ति के व्यवहार से अप्रसन्नता रहेगी. अपेक्षित कार्य विलंब से होंगे. प्रयास अधिक करना पड़ेंगे. कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. घर के किसी सदस्य की तबियत भी बिगड़ सकती है. ऐसे में पूरी सावधानी बरते और सतर्क रहे. जल्दबाजी न करें. कोई समस्या खड़ी हो सकती है. शरीर शिथिल हो सकता है. लेन-देन में जल्दबाजी न करें. भूमि व भवन इत्यादि की खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी. नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा. तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज का दिन आपके लिए शुभ हैं और किसी शुभ कार्य में ही धन खर्च होने की भी संभावना हैं. किसी के साथ द्वेष हो सकता हैं लेकिन वह कुछ समय के लिए ही रहेगा. धनहानि संभव है, सावधानी रखें. किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. विवाद से बचें. शत्रु शांत रहेंगे. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) कोई नयी चीज़ सीखने को मिलेगी और आपको उसमे आनंद भी आएगा. नौकरी में कुछ अड़चन जरुर आएगी लेकिन अपने सहकर्मियों का भरपूर सहयोग मिलेगा. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें. बात बढ़ सकती है. परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. तनाव रहेगा. पुराना रोग उभर सकता है. लेन-देन में सावधानी रखें. धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) किसी के साथ पुराना कोई रिश्ता था जो टूट गया था, आज उनसे पुनः बातचीत हो सकती है जो आपकी पुरानी यादो को एक बार फिर से ताजा कर देंगे. शत्रु सक्रिय रहेंगे. शारीरिक कष्ट संभव है. दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा. निवेश मनोनुकूल लाभ देगा. मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन व्यवसाय या नौकरी में उन्नति के लिए श्रेष्ठ समय है. यदि कोई विचार मन में हैं तो आज के दिन उसे अमली जामा पहना दे. धन प्राप्ति सुगम तरीके से होगी. नई योजना बनेगी. तत्काल लाभ नहीं होगा. कार्यप्रणाली में सुधार होगा. सामाजिक कार्य करने में रुझान रहेगा. मान-सम्मान मिलेगा. शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से मनोनुकूल लाभ होगा. कुंभ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन जीवन में कुछ उथल-पुथल मचेगी और बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं. संयम से काम लेंगे तो कम नुकसान होगा. पूजा-पाठ में मन लगेगा. किसी साधु-संत का आशीवार्द मिल सकता है. कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेंगे. नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी. मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) यदि आपको मधुमेह की बीमारी हैं तो आज के दिन अपने खानपान पर नियंत्रण रखें. शाम के समय कुछ अनहोनी घटित हो सकती है. घर में अतिथियों का आगमन होगा. व्यय होगा. दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे. व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा. नौकरी में संतोष रहेगा. निवेश शुभ रहेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी.
Aaj Ka Rashifal,पच्चीस मई दो हज़ार तेईस: आज तारीख है पच्चीस मई दो हज़ार तेईस दिन गुरुवार और आप अपना दैनिक राशिफल जानना चाहेंगे कि आपका आज का दिन आपकी राशि के अनुसार कैसा रहने वाला हैं. मेष बाहर जाने से बचे क्योंकि दुर्घटना होने की संभावना है. यदि किसी कारणवश बाहर जाना ही पड़े तो सार्वजानिक वाहन से ही यात्रा करे. यात्रा मनोरंजक रहेगी. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा. कारोबार में वृद्धि के योग हैं. व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित होगा. वृष पारिवारिक जीवन में दो-चार छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं. घर में किसी सदस्य के साथ आपकी बहस भी संभव हैं. छात्रों को आज के दिन संभलकर काम करने की आवश्यकता हैं. यात्रा मनोरंजक रहेगी. स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा. विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा. कारोबार में वृद्धि के योग हैं. व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित होगा. धन प्राप्ति सुगम होगी. मिथुन समाज में आपका कद ऊँचा होगा और सभी के बीच मान-सम्मान में वृद्धि होगी. घर में भी किसी चीज़ को लेकर प्रशंसा के पात्र बनेंगे. जल्दबाजी से चोट लग सकती है. दूर से शोक समाचार मिल सकता है. वाणी पर नियंत्रण रखें. किसी अपने ही व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है. थकान व कमजोरी रह सकती है. स्वास्थ्य पर खर्च होगा. कर्क सरकारी नौकरी कर रहे लोगों को अपने से उच्च अधिकारियों का पूर्ण सहयोग मिलेगा जो उनके बहुत काम आएगा. कृषि में सफलता मिलेगी. कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी. थकान व कमजोरी रह सकती है. जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा. निवेश में जल्दबाजी न करें. नौकरी में शांति रहेगी. सिंह धर्म-कर्म के कार्यों में रुचि बढ़ेगी और आपका झुकाव आध्यात्म की ओर रहेगा. घर में कोई मांगलिक कार्य भी संपन्न हो सकता हैं. पुराना रोग उभर सकता है. दूर से दुःखद समाचार मिल सकता है. व्यर्थ भागदौड़ रहेगी. किसी व्यक्ति के व्यवहार से अप्रसन्नता रहेगी. अपेक्षित कार्य विलंब से होंगे. प्रयास अधिक करना पड़ेंगे. कन्या स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. घर के किसी सदस्य की तबियत भी बिगड़ सकती है. ऐसे में पूरी सावधानी बरते और सतर्क रहे. जल्दबाजी न करें. कोई समस्या खड़ी हो सकती है. शरीर शिथिल हो सकता है. लेन-देन में जल्दबाजी न करें. भूमि व भवन इत्यादि की खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी. नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा. तुला आज का दिन आपके लिए शुभ हैं और किसी शुभ कार्य में ही धन खर्च होने की भी संभावना हैं. किसी के साथ द्वेष हो सकता हैं लेकिन वह कुछ समय के लिए ही रहेगा. धनहानि संभव है, सावधानी रखें. किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. विवाद से बचें. शत्रु शांत रहेंगे. बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे. वृश्चिक कोई नयी चीज़ सीखने को मिलेगी और आपको उसमे आनंद भी आएगा. नौकरी में कुछ अड़चन जरुर आएगी लेकिन अपने सहकर्मियों का भरपूर सहयोग मिलेगा. अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे. वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें. बात बढ़ सकती है. परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. तनाव रहेगा. पुराना रोग उभर सकता है. लेन-देन में सावधानी रखें. धनु किसी के साथ पुराना कोई रिश्ता था जो टूट गया था, आज उनसे पुनः बातचीत हो सकती है जो आपकी पुरानी यादो को एक बार फिर से ताजा कर देंगे. शत्रु सक्रिय रहेंगे. शारीरिक कष्ट संभव है. दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें. व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी. अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा. निवेश मनोनुकूल लाभ देगा. मकर आज का दिन व्यवसाय या नौकरी में उन्नति के लिए श्रेष्ठ समय है. यदि कोई विचार मन में हैं तो आज के दिन उसे अमली जामा पहना दे. धन प्राप्ति सुगम तरीके से होगी. नई योजना बनेगी. तत्काल लाभ नहीं होगा. कार्यप्रणाली में सुधार होगा. सामाजिक कार्य करने में रुझान रहेगा. मान-सम्मान मिलेगा. शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से मनोनुकूल लाभ होगा. कुंभ आज के दिन जीवन में कुछ उथल-पुथल मचेगी और बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं. संयम से काम लेंगे तो कम नुकसान होगा. पूजा-पाठ में मन लगेगा. किसी साधु-संत का आशीवार्द मिल सकता है. कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे. व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेंगे. नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी. मीन यदि आपको मधुमेह की बीमारी हैं तो आज के दिन अपने खानपान पर नियंत्रण रखें. शाम के समय कुछ अनहोनी घटित हो सकती है. घर में अतिथियों का आगमन होगा. व्यय होगा. दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे. व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा. नौकरी में संतोष रहेगा. निवेश शुभ रहेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
- दीपिका पादुकोण की फिल्म 11 फरवरी को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है। - एम एक्स प्लेयर की रोमांचक सीरीज में से एक रक्तांचल का दूसरा सीजन 11 फरवरी से आएगा। - राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर की बधाई दो 11 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। गहराईयां (Gehraiyaan) दीपिका पादुकोण, सिद्धांत चतुर्वेदी और अनन्या पांडे की 'गहराईयां' का प्रमोशन इन दिनों खूब किया जा रहा है। इस फिल्म से दीपिका पादुकोण डिजिटल डेब्यू यानि ओटीटी डेब्यू कर रही हैं। इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जो काफी पसंद किया जा रहा है। फिल्म में दीपिका ने सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ अनगिनत किसिंग सीन दिए हैं। यह फिल्म 11 फरवरी को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है। रक्तांचल 2 (Rakatanchal 2) एम एक्स प्लेयर की रोमांचक सीरीज में से एक रक्तांचल का दूसरा सीजन 11 फरवरी से आएगा। रक्तांचल 2 की कहानी निकितिन धीर के किरदार वसीम खान और क्रांति प्रकाश झा के विजय सिंह पर आधारित होगी। पूर्वांचल का माफिया वसीम अवैध असलहे का किरदार करता है। वहीं आईएएस बनने की चाहत रखने वाला विजय सिंह वसीम से अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहता था। दूसरे सीजन में सियासी जंग देखने को मिलेगी। इसकी कहानी सर्वेश उपाध्याय ने लिखी है जबिक निर्देशन रीतम श्रीवास्तव ने किया। बधाई दो (Badhai do) लंबे समय से चर्चा में बनी राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर की बधाई दो भी 11 फरवरी को रिलीज होगी। खासबात ये है कि बधाई दो ओटीटी पर नहीं बल्कि सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिससे फिल्म की कहानी पता चल जाती है। फिल्म में भूमि पेडनेकर लेस्बियन और राजकुमार राव गे बने हैं। दोनों शादी भी करते हैं। 11 फरवरी को नेटफ्लिक्स पर अमेरिकन ड्रामा मिनी सीरीज इनवेंटिंग एना रिलीज होगी। इस सीरीज में जूलिया गारनर लीड रोल में हैं। 9 फरवरी को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर कोरियन ड्रामा सीरीज स्नोड्रॉप का पहला एपिसोड रिलीज होगा। इसके बाद हर हफ्ते इसका नया एपिसोड आएगा। 12 फरवरी को नेटफ्लिक्स पर कोरियन ड्रामा सीरीज ट्वेंटी फाइव ट्वेंटी वन आएगी। इस सीरीज का निर्देशन जुंग जी-ह्यून ने किया है।
- दीपिका पादुकोण की फिल्म ग्यारह फरवरी को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है। - एम एक्स प्लेयर की रोमांचक सीरीज में से एक रक्तांचल का दूसरा सीजन ग्यारह फरवरी से आएगा। - राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर की बधाई दो ग्यारह फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। गहराईयां दीपिका पादुकोण, सिद्धांत चतुर्वेदी और अनन्या पांडे की 'गहराईयां' का प्रमोशन इन दिनों खूब किया जा रहा है। इस फिल्म से दीपिका पादुकोण डिजिटल डेब्यू यानि ओटीटी डेब्यू कर रही हैं। इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जो काफी पसंद किया जा रहा है। फिल्म में दीपिका ने सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ अनगिनत किसिंग सीन दिए हैं। यह फिल्म ग्यारह फरवरी को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है। रक्तांचल दो एम एक्स प्लेयर की रोमांचक सीरीज में से एक रक्तांचल का दूसरा सीजन ग्यारह फरवरी से आएगा। रक्तांचल दो की कहानी निकितिन धीर के किरदार वसीम खान और क्रांति प्रकाश झा के विजय सिंह पर आधारित होगी। पूर्वांचल का माफिया वसीम अवैध असलहे का किरदार करता है। वहीं आईएएस बनने की चाहत रखने वाला विजय सिंह वसीम से अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहता था। दूसरे सीजन में सियासी जंग देखने को मिलेगी। इसकी कहानी सर्वेश उपाध्याय ने लिखी है जबिक निर्देशन रीतम श्रीवास्तव ने किया। बधाई दो लंबे समय से चर्चा में बनी राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर की बधाई दो भी ग्यारह फरवरी को रिलीज होगी। खासबात ये है कि बधाई दो ओटीटी पर नहीं बल्कि सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिससे फिल्म की कहानी पता चल जाती है। फिल्म में भूमि पेडनेकर लेस्बियन और राजकुमार राव गे बने हैं। दोनों शादी भी करते हैं। ग्यारह फरवरी को नेटफ्लिक्स पर अमेरिकन ड्रामा मिनी सीरीज इनवेंटिंग एना रिलीज होगी। इस सीरीज में जूलिया गारनर लीड रोल में हैं। नौ फरवरी को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर कोरियन ड्रामा सीरीज स्नोड्रॉप का पहला एपिसोड रिलीज होगा। इसके बाद हर हफ्ते इसका नया एपिसोड आएगा। बारह फरवरी को नेटफ्लिक्स पर कोरियन ड्रामा सीरीज ट्वेंटी फाइव ट्वेंटी वन आएगी। इस सीरीज का निर्देशन जुंग जी-ह्यून ने किया है।
स्त्रीशरीर प्राप्त करनेसे मुक्त नहीं होती ॥ ४६ ॥ इसलिये सर्वप्रयत्नपूर्वक मन, वाणी और कर्मसे जीवितावस्थामें अपने पतिकी सदा सेवा करनी चाहिये और मरनेपर उसका अनुगमन करना चाहिये। पतिके मरनेपर जो स्त्री अग्निमें आरोहण करती है, वह (महर्षि वसिष्ठकी पत्नी) अरुन्धतीके समान होकर स्वर्गलोकमें सम्मानित होती है ॥ ४७-४८ ॥ स्तूयमाना उप्सरोगणैः । रमते पतिना सार्धं यावदिन्द्राश्चतुर्दश ॥ ४९ ॥ मातृकं पैतृकं चैव यत्र सा च प्रदीयते । कुलत्रयं पुनात्यत्र भर्तारं याऽनुगच्छति ॥ ५० ॥ वहाँ वह पतिपरायणा नारी अप्सरागणोंके द्वारा स्तूयमान होकर चौदह इन्द्रोंके राज्यकालपर्यन्त अर्थात् एक कल्प' तक अपने पतिके साथ स्वर्गलोकमें रमण करती है ॥ ४९ ॥ जो सती अपने भर्ताका अनुगमन करती है, वह अपने मातृकुल, पितृकुल और पतिकुल- इन तीनों कुलोंको पवित्र कर देती है ॥ ५० ॥ तिस्रः कोट्योऽर्द्धकोटी च यानि रोमाणि मानुषे । तावत्कालं वसेत्स्वर्गे पतिना सह मोदते ॥ ५१ ॥ विमाने सूर्यसंकाशे क्रीडते रमणेन सा । यावदादित्यचन्द्रौ च भर्तृलोके चिरं वसेत् ॥ ५२ ॥ पुनश्चिरायुः सा भूत्वा जायते विमले कुले । पतिव्रता तु या नारी तमेव लभते पतिम् ॥ ५३ ॥ १. चौदह मनुओंका राज्यकाल एक कल्प कहलाता है। यही ब्रह्माजीका एक दिन है। इसमें एक हजार बार चारों युग आ जाते हैं। स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, सूर्यसावर्णि, दक्षसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, धर्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, रौच्य तथा भौत्यये चौदह मनु कहे गये हैं।
स्त्रीशरीर प्राप्त करनेसे मुक्त नहीं होती ॥ छियालीस ॥ इसलिये सर्वप्रयत्नपूर्वक मन, वाणी और कर्मसे जीवितावस्थामें अपने पतिकी सदा सेवा करनी चाहिये और मरनेपर उसका अनुगमन करना चाहिये। पतिके मरनेपर जो स्त्री अग्निमें आरोहण करती है, वह अरुन्धतीके समान होकर स्वर्गलोकमें सम्मानित होती है ॥ सैंतालीस-अड़तालीस ॥ स्तूयमाना उप्सरोगणैः । रमते पतिना सार्धं यावदिन्द्राश्चतुर्दश ॥ उनचास ॥ मातृकं पैतृकं चैव यत्र सा च प्रदीयते । कुलत्रयं पुनात्यत्र भर्तारं याऽनुगच्छति ॥ पचास ॥ वहाँ वह पतिपरायणा नारी अप्सरागणोंके द्वारा स्तूयमान होकर चौदह इन्द्रोंके राज्यकालपर्यन्त अर्थात् एक कल्प' तक अपने पतिके साथ स्वर्गलोकमें रमण करती है ॥ उनचास ॥ जो सती अपने भर्ताका अनुगमन करती है, वह अपने मातृकुल, पितृकुल और पतिकुल- इन तीनों कुलोंको पवित्र कर देती है ॥ पचास ॥ तिस्रः कोट्योऽर्द्धकोटी च यानि रोमाणि मानुषे । तावत्कालं वसेत्स्वर्गे पतिना सह मोदते ॥ इक्यावन ॥ विमाने सूर्यसंकाशे क्रीडते रमणेन सा । यावदादित्यचन्द्रौ च भर्तृलोके चिरं वसेत् ॥ बावन ॥ पुनश्चिरायुः सा भूत्वा जायते विमले कुले । पतिव्रता तु या नारी तमेव लभते पतिम् ॥ तिरेपन ॥ एक. चौदह मनुओंका राज्यकाल एक कल्प कहलाता है। यही ब्रह्माजीका एक दिन है। इसमें एक हजार बार चारों युग आ जाते हैं। स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, सूर्यसावर्णि, दक्षसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, धर्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, रौच्य तथा भौत्यये चौदह मनु कहे गये हैं।
यह संपादकीय विश्लेषण Migration in India and the impact of the lockdown on migrants लेख पर आधारित है जिसे 10 जून 2020 को PRS Blog में प्रकाशित किया गया था। यह भारत में प्रवासन और प्रवासियों पर लॉकडाउन के प्रभाव का विश्लेषण करता है। भारत ने 25 मार्च, 2020 से लॉकडाउन लगाया था। इस समय के दौरान, आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं आपूर्ति में योगदान नहीं देने वाली गतिविधियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर दिया गया था। यात्री ट्रेनों और उड़ानों को बंद कर दिया गया। लॉकडाउन ने प्रवासियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों के बंद होने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और अपने मूल स्थानों से बाहर फँसे हुए हैं जो वापस जाना चाहते हैं। तब से, सरकार ने प्रवासियों के लिये राहत उपायों की घोषणा की है और प्रवासियों को अपने मूल स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की है। सर्वोच्च न्यायालय ने, देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे प्रवासियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार द्वारा की गई परिवहन एवं राहत व्यवस्था की समीक्षा की। 9 जून को, न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को शेष फँसे हुए प्रवासियों के लिये परिवहन व्यवस्था और प्रवासियों के लिये रोज़गार उपलब्ध कराने के लिये राहत उपायों के विस्तार का निर्देश दिया। अपने सामान्य स्थान से दूर आंतरिक (देश के भीतर) अथवा अंतर्राष्ट्रीय (विभिन्न देशों में) सीमाओं के पार लोगों की आवाजाही को प्रवासन कहते हैं। प्रवासन पर नवीनतम सरकारी आँकड़े वर्ष 2011 की जनगणना में है। वर्ष 2001 में 31.5 करोड़ प्रवासियों की तुलना में (जनसंख्या का 31 %) वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 45.6 करोड़ प्रवासी थे (जनसंख्या का 38%)। वर्ष 2001 एवं वर्ष 2011 के मध्य जनसंख्या में 18% की वृद्धि हुई जबकि प्रवासियों की संख्या में 45% की वृद्धि हुई। वर्ष 2011 में, कुल प्रवासन का 99% हिस्सा आंतरिक प्रवासन का था एवं 1% अप्रवासियों (अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों) का था। आंतरिक प्रवासन को मूल एवं गंतव्य के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। एक प्रकार का वर्गीकरण हैः i) ग्रामीण-ग्रामीण, ii) ग्रामीण-शहरी, iii) शहरी-ग्रामीण और iv) शहरी-शहरी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 21 करोड़ ग्रामीण-ग्रामीण प्रवासी थे जो आतंरिक प्रवासन का 54% था (जनगणना में 5.3 करोड़ लोगों को ग्रामीण या शहरी मूल क्षेत्रों से होने के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया था)। ग्रामीण-शहरी और शहरी-शहरी प्रवासन, प्रत्येक में लगभग 8 करोड़ प्रवासी थे। लगभग 3 करोड़ शहरी-ग्रामीण प्रवासी ( आंतरिक प्रवासन का 7%) थे। प्रवासन को वर्गीकृत करने का दूसरा तरीका हैः (i) अंतर-राज्य, और (ii) आतंरिक-राज्य। वर्ष 2011 में, अंतर-राज्य प्रवासन कुल आंतरिक प्रवासन का लगभग 88% हिस्सा (39.6 करोड़ व्यक्ति) था। अंतर-राज्य प्रवासन के संदर्भ में राज्यों में भिन्नता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 5.4 करोड़ अंतर-राज्य प्रवासी थे। वर्ष 2011 तक, उत्तर प्रदेश और बिहार अंतर-राज्य प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत थे, जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली प्रवासियों के सबसे बड़े अभिग्राही राज्य थे। उत्तर प्रदेश के लगभग 83 लाख एवं बिहार के 63 लाख निवासी या तो अस्थायी अथवा स्थायी रूप से अन्य राज्यों में चले गये थे। संपूर्ण भारत के लगभग 60 लाख लोग वर्ष 2011 तक महाराष्ट्र में चले गए थे। चित्र 1: अंतर-राज्य प्रवासन (लाख में) नोटः एक नेट आउट-माइग्रेंट राज्य वह राज्य होता है जहाँ राज्य में प्रवासन करने से अधिक लोग राज्य के बाहर पलायन करते हैं। बाहर जाने वाले प्रवासियों की तुलना में आने वाले प्रवासियों की संख्या अधिक होने पर नेट इन-माइग्रेशन होता है। वर्ष 2011 तक, अधिकांश अंतर-राज्य प्रवास (70%) विवाह एवं परिवार के कारणों से था, जिसमें पुरुष और महिला प्रवासियों के बीच भिन्नता थी। 83% महिलाओं ने विवाह और परिवार के कारण प्रवासन किया वहीं पुरुषों के संगत प्रवासन का आँकड़ा 39% था। कुल 8% लोगों ने रोज़गार के लिये राज्य के अंदर पलायन किया (21% पुरुष प्रवासी और 2% महिला प्रवासी)। अंतर-राज्य प्रवासियों में रोज़गार के लिये प्रवासन अधिक था- 50% पुरुष और 5% महिला अंतर-राज्य प्रवासी थे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 4.5 करोड़ प्रवासी श्रमिक थे। हालाँकि, प्रवासन पर कार्य समूह की रिपोर्ट के अनुसार, जनगणना में प्रवासी श्रमिक आबादी को कम आँका गया है। महिला प्रवासन में परिवार को प्राथमिक कारण के रूप में दर्ज़ किया गया है। हालाँकि, कई महिलाएँ प्रवासन के बाद रोज़गार की गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं जो काम से संबंधित कारणों से प्रवासित महिलाओं की संख्या में दर्ज़ नहीं होता है। आर्थिक सर्वेक्षण, 2016-17 के अनुसार, जनगणना के आँकड़े अस्थायी प्रवासी श्रमिक प्रवासन को भी कम आँकते हैं। वर्ष 2007-08 में, NSSO ने भारत के प्रवासी श्रम का आकार सात करोड़ (कार्यबल का 29%) अनुमानित किया। आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 ने वर्ष 2001 से वर्ष 2011 के मध्य छह करोड़ अंतर-राज्य श्रम प्रवासियों का अनुमान लगाया। आर्थिक सर्वेक्षण ने यह भी अनुमान लगाया कि वर्ष 2011-2016 के मध्य प्रत्येक वर्ष, औसतन 90 लाख लोगों ने काम के लिये यात्रा की। संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (घ), सभी भारतीय नागरिकों को भारत के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने के अधिकार की गारंटी प्रदान करता है, जो आम जनता के हित में या किसी अनुसूचित जनजाति के संरक्षण में उचित प्रतिबंधों के अधीन है। हालाँकि, काम के लिये पलायन करने वाले लोग प्रमुख चुनौतियों का सामना करते हैं जिनमें शामिल हैंः i) सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ का अभाव और न्यूनतम सुरक्षा मानकों के कानून का खराब कार्यान्वयन, ii) राज्य द्वारा प्रदान किये गये लाभों विशेष रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से प्रदान किये जाने वाली खाद्य सामग्री के लिये सुवाह्यता की कमी और iii) शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच का अभाव। आईएसएमडब्ल्यू अधिनियम अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों के लिये कुछ संरक्षणों का प्रावधान करता है। प्रवासियों को नियुक्त करने वाले श्रम ठेकेदारों को आवश्यक हैः (i) लाइसेंस प्राप्त करना, (ii) प्रवासी श्रमिकों को सरकारी प्राधिकरणों के साथ पंजीकृत करना और (iii) श्रमिक को उनकी पहचान करने के लिये पासबुक जारी करने की व्यवस्था करना। ठेकेदार द्वारा प्रदान की जाने वाली मज़दूरी और सुरक्षा (आवास, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, सुरक्षात्मक वस्त्र सहित) से संबंधित दिशा निर्देश भी कानून में उल्लिखित हैं। दिसंबर 2011 में, श्रमिकों पर स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में पाया गया कि आईएसएमडब्ल्यू अधिनियम के तहत श्रमिकों का पंजीकरण कम था और अधिनियम में उल्लिखित संरक्षण का कार्यान्वयन खराब था। रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिये कोई ठोस और सार्थक प्रयास नहीं किया है कि ठेकेदार और नियोक्ता अनिवार्य रूप से उनके साथ काम करने वाले श्रमिकों को अधिनियम के तहत लाभ तक पहुँच बनाने के लिये पंजीकृत करें। एक स्थान पर लाभ तक पहुँच प्राप्त करने वाले पंजीकृत प्रवासी एक अलग स्थान पर प्रवास करके इस पहुँच को खो देते हैं। पीडीएस के तहत लाभ प्राप्त करने के लिये आवश्यक राशन कार्ड राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है और राज्यों में सुवाह्य नहीं होता है। यह प्रणाली पीडीएस से अंतर-राज्य प्रवासियों को बाहर कर देती है जब तक कि वे गृह राज्य को अपना कार्ड वापस नहीं करते हैं और मेजबान राज्य से एक नया कार्ड प्राप्त नहीं करते हैं। शहरी आबादी में प्रवासियों का अनुपात 47% है । वर्ष 2015 में, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में प्रवासियों की बड़ी संख्या में पहचान की जिन्हें शहरों में आवास आवश्यकता थी। कम आय वालों के लिये आवास स्वामित्व और किराये के आवास विकल्पों की अपर्याप्त आपूर्ति है। इससे अनौपचारिक बस्तियों और मलिन बस्तियों का प्रसार होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग और कम आय वाले वर्गों की आवास तक पहुँच बनाने के लिये केंद्र सरकार की एक सहायता योजना है। इस योजना के तहत सहायता में शामिल हैंः i) मलिन बस्ती पुनर्वास, ii) आवास के लिये रियायती ऋण, iii) नए घर बनाने या अपने घर को विस्तृत करने के लिये 1.5 लाख रुपए तक की सब्सिडी iv) निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के द्वारा किफायती आवास इकाइयों की उपलब्धता में वृद्धि । चूँकि आवास राज्य सूची का विषय है, इसलिये किफायती आवास की ओर राज्यों के दृष्टिकोण में भिन्नता है। परिवहनः 28 मार्च को केंद्र सरकार ने राज्यों को प्रवासियों को आवास प्रदान करने के लिये राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष का उपयोग करने के लिये अधिकृत किया। राज्यों को सलाह दी गई कि वे चिकित्सा सुविधाओं के साथ राजमार्गों पर राहत शिविर स्थापित करें और जब तक लॉकडाउन स्थिति बनी रहे तब तक इन शिविरों में लोगों का ठहराना सुनिश्चित करें। 29 अप्रैल को जारी एक आदेश में, गृह मंत्रालय ने राज्यों को बसों का उपयोग कर प्रवासियों को परिवहन के लिये व्यक्तिगत रूप से समन्वय करने की अनुमति दी। 1 मई को, भारतीय रेल ने अपने गृह राज्य के बाहर फँसे प्रवासियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिये श्रमिक विशेष ट्रेनों के साथ (22 मार्च के बाद पहली बार) यात्री परिवहन पुनः शुरू किया। 1 मई से 3 जून के मध्य, भारतीय रेल ने 58 लाख से अधिक प्रवासियों के परिवहन के लिये 4,197 श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया। शीर्ष राज्य जहाँ से श्रमिक ट्रेन शुरू हुईं, वे गुजरात और महाराष्ट्र हैं और जिन राज्यों में ट्रेनें समाप्त हुई हैं, वे उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। खाद्य वितरणः 1 अप्रैल को, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य सरकारों को भोजन, स्वच्छता और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था के साथ प्रवासी श्रमिकों के लिये राहत शिविर संचालित करने का निर्देश दिया। 14 मई को, आत्मनिर्भर भारत अभियान की दूसरी श्रृंखला के तहत, वित्त मंत्री ने घोषणा की कि उन प्रवासी श्रमिकों को दो महीने मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इस उपाय से आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लाभान्वित होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीडीएस के तहत सुवाह्यता का लाभ प्रदान करने के लिये मार्च 2021 तक वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू की जाएगी। यह भारत में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राशन तक पहुँच प्रदान करेगा। आवासः पीएमएवाई के तहत किफायती किराये की आवास इकाइयाँ उपलब्ध कराने के लिये आत्मनिर्भर भारत अभियान ने प्रवासी श्रमिकों एवं शहरी गरीबों के लिये किफायती किराए के आवास परिसरों के लिये एक योजना शुरू की। योजना में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन (JNNURM) के तहत मौज़ूदा आवास स्टॉक का उपयोग करने का प्रस्ताव है, साथ ही सार्वजनिक और निजी एजेंसियों को किराए के लिये नई सस्ती इकाइयों के निर्माण के लिये प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मध्य आय वर्ग के लिये पीएमएवाई के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना के लिये अतिरिक्त धन आवंटित किया गया है। वित्तीय सहायताः कुछ राज्य सरकारों (जैसे बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश) ने प्रवासी श्रमिकों को भेजने के लिये एकमुश्त नकद हस्तांतरण की घोषणा की। उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रवासियों के लिये 1,000 रुपए का गुजारा भत्ते का प्रावधान करने की घोषणा की जिन्हें क्वारंटाइन होने की आवश्यकता थी। - सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे प्रवासी मज़दूरों की स्थिति की समीक्षा की और स्थिति की प्रतिक्रिया में अपर्याप्तता और सरकारी की खामियों को देखा। - 26 मई को,सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को एक आदेश जारी किया कि वे प्रवासी मज़दूरों के लिये संबंधित सरकारों द्वारा उठाए गए सभी उपायों के बारे में विस्तार से जवाब प्रस्तुत करें। - 28 मई को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवासी श्रमिकों को राहत सुनिश्चित करने के लिये केंद्र और राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश सरकारों को अंतरिम दिशा-निर्देश प्रदान कियेः i) प्रवासी श्रमिकों से ट्रेन या बस का कोई किराया नहीं लिया जाना चाहिये, ii) फँसे हुए प्रवासियों को संबंधित राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा मुफ्त भोजन प्रदान किया जाना चाहिये और इस जानकारी को प्रचारित किया जाना चाहिये, iii) राज्यों को परिवहन के लिये प्रवासियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और तीव्र करना चाहिये और जो पंजीकृत हैं उन्हें जल्द से जल्द परिवहन प्रदान किया जाना चाहिये और iv) प्रवासन अभिग्राही राज्य को अंतिम मील परिवहन, हेल्थ स्क्रीनिंग एवं अन्य सुविधाएँ मुफ्त प्रदान करनी चाहिये। मुख्य परीक्षा प्रश्नः भारत में प्रवासन और प्रवासियों पर लॉकडाउन के प्रभाव का विश्लेषण कीजिये तथा इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक मूल्याङ्कन करते हुए अन्य समाधान प्रस्तुत कीजिये।
यह संपादकीय विश्लेषण Migration in India and the impact of the lockdown on migrants लेख पर आधारित है जिसे दस जून दो हज़ार बीस को PRS Blog में प्रकाशित किया गया था। यह भारत में प्रवासन और प्रवासियों पर लॉकडाउन के प्रभाव का विश्लेषण करता है। भारत ने पच्चीस मार्च, दो हज़ार बीस से लॉकडाउन लगाया था। इस समय के दौरान, आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं आपूर्ति में योगदान नहीं देने वाली गतिविधियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर दिया गया था। यात्री ट्रेनों और उड़ानों को बंद कर दिया गया। लॉकडाउन ने प्रवासियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिनमें से कई उद्योगों के बंद होने के कारण अपनी नौकरी खो चुके हैं और अपने मूल स्थानों से बाहर फँसे हुए हैं जो वापस जाना चाहते हैं। तब से, सरकार ने प्रवासियों के लिये राहत उपायों की घोषणा की है और प्रवासियों को अपने मूल स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की है। सर्वोच्च न्यायालय ने, देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे प्रवासियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार द्वारा की गई परिवहन एवं राहत व्यवस्था की समीक्षा की। नौ जून को, न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को शेष फँसे हुए प्रवासियों के लिये परिवहन व्यवस्था और प्रवासियों के लिये रोज़गार उपलब्ध कराने के लिये राहत उपायों के विस्तार का निर्देश दिया। अपने सामान्य स्थान से दूर आंतरिक अथवा अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार लोगों की आवाजाही को प्रवासन कहते हैं। प्रवासन पर नवीनतम सरकारी आँकड़े वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना में है। वर्ष दो हज़ार एक में इकतीस.पाँच करोड़ प्रवासियों की तुलना में वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार, भारत में पैंतालीस.छः करोड़ प्रवासी थे । वर्ष दो हज़ार एक एवं वर्ष दो हज़ार ग्यारह के मध्य जनसंख्या में अट्ठारह% की वृद्धि हुई जबकि प्रवासियों की संख्या में पैंतालीस% की वृद्धि हुई। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में, कुल प्रवासन का निन्यानवे% हिस्सा आंतरिक प्रवासन का था एवं एक% अप्रवासियों का था। आंतरिक प्रवासन को मूल एवं गंतव्य के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। एक प्रकार का वर्गीकरण हैः i) ग्रामीण-ग्रामीण, ii) ग्रामीण-शहरी, iii) शहरी-ग्रामीण और iv) शहरी-शहरी। वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार, इक्कीस करोड़ ग्रामीण-ग्रामीण प्रवासी थे जो आतंरिक प्रवासन का चौवन% था । ग्रामीण-शहरी और शहरी-शहरी प्रवासन, प्रत्येक में लगभग आठ करोड़ प्रवासी थे। लगभग तीन करोड़ शहरी-ग्रामीण प्रवासी थे। प्रवासन को वर्गीकृत करने का दूसरा तरीका हैः अंतर-राज्य, और आतंरिक-राज्य। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में, अंतर-राज्य प्रवासन कुल आंतरिक प्रवासन का लगभग अठासी% हिस्सा था। अंतर-राज्य प्रवासन के संदर्भ में राज्यों में भिन्नता है। वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार, पाँच.चार करोड़ अंतर-राज्य प्रवासी थे। वर्ष दो हज़ार ग्यारह तक, उत्तर प्रदेश और बिहार अंतर-राज्य प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत थे, जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली प्रवासियों के सबसे बड़े अभिग्राही राज्य थे। उत्तर प्रदेश के लगभग तिरासी लाख एवं बिहार के तिरेसठ लाख निवासी या तो अस्थायी अथवा स्थायी रूप से अन्य राज्यों में चले गये थे। संपूर्ण भारत के लगभग साठ लाख लोग वर्ष दो हज़ार ग्यारह तक महाराष्ट्र में चले गए थे। चित्र एक: अंतर-राज्य प्रवासन नोटः एक नेट आउट-माइग्रेंट राज्य वह राज्य होता है जहाँ राज्य में प्रवासन करने से अधिक लोग राज्य के बाहर पलायन करते हैं। बाहर जाने वाले प्रवासियों की तुलना में आने वाले प्रवासियों की संख्या अधिक होने पर नेट इन-माइग्रेशन होता है। वर्ष दो हज़ार ग्यारह तक, अधिकांश अंतर-राज्य प्रवास विवाह एवं परिवार के कारणों से था, जिसमें पुरुष और महिला प्रवासियों के बीच भिन्नता थी। तिरासी% महिलाओं ने विवाह और परिवार के कारण प्रवासन किया वहीं पुरुषों के संगत प्रवासन का आँकड़ा उनतालीस% था। कुल आठ% लोगों ने रोज़गार के लिये राज्य के अंदर पलायन किया । अंतर-राज्य प्रवासियों में रोज़गार के लिये प्रवासन अधिक था- पचास% पुरुष और पाँच% महिला अंतर-राज्य प्रवासी थे। वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार चार.पाँच करोड़ प्रवासी श्रमिक थे। हालाँकि, प्रवासन पर कार्य समूह की रिपोर्ट के अनुसार, जनगणना में प्रवासी श्रमिक आबादी को कम आँका गया है। महिला प्रवासन में परिवार को प्राथमिक कारण के रूप में दर्ज़ किया गया है। हालाँकि, कई महिलाएँ प्रवासन के बाद रोज़गार की गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं जो काम से संबंधित कारणों से प्रवासित महिलाओं की संख्या में दर्ज़ नहीं होता है। आर्थिक सर्वेक्षण, दो हज़ार सोलह-सत्रह के अनुसार, जनगणना के आँकड़े अस्थायी प्रवासी श्रमिक प्रवासन को भी कम आँकते हैं। वर्ष दो हज़ार सात-आठ में, NSSO ने भारत के प्रवासी श्रम का आकार सात करोड़ अनुमानित किया। आर्थिक सर्वेक्षण दो हज़ार सोलह-सत्रह ने वर्ष दो हज़ार एक से वर्ष दो हज़ार ग्यारह के मध्य छह करोड़ अंतर-राज्य श्रम प्रवासियों का अनुमान लगाया। आर्थिक सर्वेक्षण ने यह भी अनुमान लगाया कि वर्ष दो हज़ार ग्यारह-दो हज़ार सोलह के मध्य प्रत्येक वर्ष, औसतन नब्बे लाख लोगों ने काम के लिये यात्रा की। संविधान का अनुच्छेद उन्नीस , सभी भारतीय नागरिकों को भारत के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने के अधिकार की गारंटी प्रदान करता है, जो आम जनता के हित में या किसी अनुसूचित जनजाति के संरक्षण में उचित प्रतिबंधों के अधीन है। हालाँकि, काम के लिये पलायन करने वाले लोग प्रमुख चुनौतियों का सामना करते हैं जिनमें शामिल हैंः i) सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ का अभाव और न्यूनतम सुरक्षा मानकों के कानून का खराब कार्यान्वयन, ii) राज्य द्वारा प्रदान किये गये लाभों विशेष रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रदान किये जाने वाली खाद्य सामग्री के लिये सुवाह्यता की कमी और iii) शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच का अभाव। आईएसएमडब्ल्यू अधिनियम अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों के लिये कुछ संरक्षणों का प्रावधान करता है। प्रवासियों को नियुक्त करने वाले श्रम ठेकेदारों को आवश्यक हैः लाइसेंस प्राप्त करना, प्रवासी श्रमिकों को सरकारी प्राधिकरणों के साथ पंजीकृत करना और श्रमिक को उनकी पहचान करने के लिये पासबुक जारी करने की व्यवस्था करना। ठेकेदार द्वारा प्रदान की जाने वाली मज़दूरी और सुरक्षा से संबंधित दिशा निर्देश भी कानून में उल्लिखित हैं। दिसंबर दो हज़ार ग्यारह में, श्रमिकों पर स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में पाया गया कि आईएसएमडब्ल्यू अधिनियम के तहत श्रमिकों का पंजीकरण कम था और अधिनियम में उल्लिखित संरक्षण का कार्यान्वयन खराब था। रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिये कोई ठोस और सार्थक प्रयास नहीं किया है कि ठेकेदार और नियोक्ता अनिवार्य रूप से उनके साथ काम करने वाले श्रमिकों को अधिनियम के तहत लाभ तक पहुँच बनाने के लिये पंजीकृत करें। एक स्थान पर लाभ तक पहुँच प्राप्त करने वाले पंजीकृत प्रवासी एक अलग स्थान पर प्रवास करके इस पहुँच को खो देते हैं। पीडीएस के तहत लाभ प्राप्त करने के लिये आवश्यक राशन कार्ड राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है और राज्यों में सुवाह्य नहीं होता है। यह प्रणाली पीडीएस से अंतर-राज्य प्रवासियों को बाहर कर देती है जब तक कि वे गृह राज्य को अपना कार्ड वापस नहीं करते हैं और मेजबान राज्य से एक नया कार्ड प्राप्त नहीं करते हैं। शहरी आबादी में प्रवासियों का अनुपात सैंतालीस% है । वर्ष दो हज़ार पंद्रह में, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में प्रवासियों की बड़ी संख्या में पहचान की जिन्हें शहरों में आवास आवश्यकता थी। कम आय वालों के लिये आवास स्वामित्व और किराये के आवास विकल्पों की अपर्याप्त आपूर्ति है। इससे अनौपचारिक बस्तियों और मलिन बस्तियों का प्रसार होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग और कम आय वाले वर्गों की आवास तक पहुँच बनाने के लिये केंद्र सरकार की एक सहायता योजना है। इस योजना के तहत सहायता में शामिल हैंः i) मलिन बस्ती पुनर्वास, ii) आवास के लिये रियायती ऋण, iii) नए घर बनाने या अपने घर को विस्तृत करने के लिये एक.पाँच लाख रुपए तक की सब्सिडी iv) निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के द्वारा किफायती आवास इकाइयों की उपलब्धता में वृद्धि । चूँकि आवास राज्य सूची का विषय है, इसलिये किफायती आवास की ओर राज्यों के दृष्टिकोण में भिन्नता है। परिवहनः अट्ठाईस मार्च को केंद्र सरकार ने राज्यों को प्रवासियों को आवास प्रदान करने के लिये राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष का उपयोग करने के लिये अधिकृत किया। राज्यों को सलाह दी गई कि वे चिकित्सा सुविधाओं के साथ राजमार्गों पर राहत शिविर स्थापित करें और जब तक लॉकडाउन स्थिति बनी रहे तब तक इन शिविरों में लोगों का ठहराना सुनिश्चित करें। उनतीस अप्रैल को जारी एक आदेश में, गृह मंत्रालय ने राज्यों को बसों का उपयोग कर प्रवासियों को परिवहन के लिये व्यक्तिगत रूप से समन्वय करने की अनुमति दी। एक मई को, भारतीय रेल ने अपने गृह राज्य के बाहर फँसे प्रवासियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिये श्रमिक विशेष ट्रेनों के साथ यात्री परिवहन पुनः शुरू किया। एक मई से तीन जून के मध्य, भारतीय रेल ने अट्ठावन लाख से अधिक प्रवासियों के परिवहन के लिये चार,एक सौ सत्तानवे श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया। शीर्ष राज्य जहाँ से श्रमिक ट्रेन शुरू हुईं, वे गुजरात और महाराष्ट्र हैं और जिन राज्यों में ट्रेनें समाप्त हुई हैं, वे उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। खाद्य वितरणः एक अप्रैल को, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य सरकारों को भोजन, स्वच्छता और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था के साथ प्रवासी श्रमिकों के लिये राहत शिविर संचालित करने का निर्देश दिया। चौदह मई को, आत्मनिर्भर भारत अभियान की दूसरी श्रृंखला के तहत, वित्त मंत्री ने घोषणा की कि उन प्रवासी श्रमिकों को दो महीने मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इस उपाय से आठ करोड़ प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लाभान्वित होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीडीएस के तहत सुवाह्यता का लाभ प्रदान करने के लिये मार्च दो हज़ार इक्कीस तक वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू की जाएगी। यह भारत में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राशन तक पहुँच प्रदान करेगा। आवासः पीएमएवाई के तहत किफायती किराये की आवास इकाइयाँ उपलब्ध कराने के लिये आत्मनिर्भर भारत अभियान ने प्रवासी श्रमिकों एवं शहरी गरीबों के लिये किफायती किराए के आवास परिसरों के लिये एक योजना शुरू की। योजना में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन के तहत मौज़ूदा आवास स्टॉक का उपयोग करने का प्रस्ताव है, साथ ही सार्वजनिक और निजी एजेंसियों को किराए के लिये नई सस्ती इकाइयों के निर्माण के लिये प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मध्य आय वर्ग के लिये पीएमएवाई के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना के लिये अतिरिक्त धन आवंटित किया गया है। वित्तीय सहायताः कुछ राज्य सरकारों ने प्रवासी श्रमिकों को भेजने के लिये एकमुश्त नकद हस्तांतरण की घोषणा की। उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रवासियों के लिये एक,शून्य रुपयापए का गुजारा भत्ते का प्रावधान करने की घोषणा की जिन्हें क्वारंटाइन होने की आवश्यकता थी। - सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे प्रवासी मज़दूरों की स्थिति की समीक्षा की और स्थिति की प्रतिक्रिया में अपर्याप्तता और सरकारी की खामियों को देखा। - छब्बीस मई को,सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को एक आदेश जारी किया कि वे प्रवासी मज़दूरों के लिये संबंधित सरकारों द्वारा उठाए गए सभी उपायों के बारे में विस्तार से जवाब प्रस्तुत करें। - अट्ठाईस मई को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवासी श्रमिकों को राहत सुनिश्चित करने के लिये केंद्र और राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश सरकारों को अंतरिम दिशा-निर्देश प्रदान कियेः i) प्रवासी श्रमिकों से ट्रेन या बस का कोई किराया नहीं लिया जाना चाहिये, ii) फँसे हुए प्रवासियों को संबंधित राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा मुफ्त भोजन प्रदान किया जाना चाहिये और इस जानकारी को प्रचारित किया जाना चाहिये, iii) राज्यों को परिवहन के लिये प्रवासियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और तीव्र करना चाहिये और जो पंजीकृत हैं उन्हें जल्द से जल्द परिवहन प्रदान किया जाना चाहिये और iv) प्रवासन अभिग्राही राज्य को अंतिम मील परिवहन, हेल्थ स्क्रीनिंग एवं अन्य सुविधाएँ मुफ्त प्रदान करनी चाहिये। मुख्य परीक्षा प्रश्नः भारत में प्रवासन और प्रवासियों पर लॉकडाउन के प्रभाव का विश्लेषण कीजिये तथा इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक मूल्याङ्कन करते हुए अन्य समाधान प्रस्तुत कीजिये।
ट्वीटर पर कुछ टाइम से बॉयकाट का ट्रेंड आया हुआ है। हाल ही में ट्वीटर पर आमिर खान की मच अवेटेड फिल्म लाल सिंह चड्ढा को बॉयकाट करने का ट्रेंड चल रहा था। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने अब इस मुद्दे पर बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। आमिर ने एक इंटरव्यू में बताया कि लोगों को लगता है उन्हें इस मुल्क से प्यार नहीं है इसलिए लोग उनकी फिल्म को बॉयकाट कर रहे हैं। इसके साथ ही आमिर ने साउथ फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता और ओटीटी प्लेटफार्म पर खुलकर बात की। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में आमिर बोले कि- "कुछ लोगों को लगता है कि मैं भारत को पसंद नहीं करता हूं, मुझे काफी दुख होता है जब लोग मेरी फिल्म का इस तरह से बहिष्कार करते हैं। लेकिन मैं उन्हें ये बताना चाहता हूं जो वो सोच रहे हैं वो एक दम गलत है। मेरा उनसे अनुरोध है कि मेरी फिल्म को बॉयकॉट न करें और कृपया कर के उसे देखने जरूर जाएं। " आमिर ने कहा- एक फिल्म बनाने में बहुत मेहनत लगती है। एक एक्टर ही नहीं, बल्कि कितने लोगों के इमोशन्स जुड़े होते हैं। फिल्म देखने के बाद आप उसे पसंद कर सकते हैं और उसे नापसंद करने का भी पूरा अधिकार आपके पास है। लाल सिंह चड्ढा एक्टर बोले ऐसी बात नहीं है, फिल्में चली भी हैं। गंगूबाई, भूल भूलैया 2, कश्मीर फाइल्स, पुष्पा चली हैं। पुष्पा ने तो वर्ड ऑफ माउथ से फिल्म ने कमाल कर दिया था। ऑडियंस को फिल्म पसंद आएगी तो चलेगी ही। मुझे लगता है कि कोविड की वजह से फिल्में थोड़ी जल्दी आने लगी हैं ओटीटी पर। लोगों को लगता है कि अगर मैं थोड़ा और रूक जाऊंगा, तो घर में देख लूंगा। हालांकि मेरी फिल्मों के साथ ऐसा नहीं होता है। मेरी फिल्म 6-6 महीने तक ओटीटी पर नहीं आती हैं। आगे आमिर ने कहा कि लाल सिंह चड्ढा मैंने थिएटर के लिए बनाई है। मैं चाहता हूं कि लोग थिएटर जाकर फिल्म देखें। ओटीटी के लिए जब कुछ बनाना होगा और मौका मिलेगा, तो मैं जरूर करूंगा। वहीं साउथ सिनेमा से कंपीटशन पर आमिर बोले- हर आर्टिस्ट चाहता है कि उसकी फिल्म देशभर में लोग देखें। हम कई समय से अपनी फिल्म तमिल, तेलुगू में डब करते आ रहे हैं। अच्छे खासे रिएक्शन भी हमें मिलते रहे हैं। लेकिन जिस तरह साउथ की फिल्मों ने क्रॉसओवर किया है हिंदी फिल्मों पर, वैसे हम हिंदी फिल्म वाले नहीं पहुंच पाए हैं। वो बहुत टाइम से नहीं हो पाया है। उम्मीद है कि इस दफा हो और वही कोशिश जारी है।
ट्वीटर पर कुछ टाइम से बॉयकाट का ट्रेंड आया हुआ है। हाल ही में ट्वीटर पर आमिर खान की मच अवेटेड फिल्म लाल सिंह चड्ढा को बॉयकाट करने का ट्रेंड चल रहा था। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने अब इस मुद्दे पर बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। आमिर ने एक इंटरव्यू में बताया कि लोगों को लगता है उन्हें इस मुल्क से प्यार नहीं है इसलिए लोग उनकी फिल्म को बॉयकाट कर रहे हैं। इसके साथ ही आमिर ने साउथ फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता और ओटीटी प्लेटफार्म पर खुलकर बात की। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में आमिर बोले कि- "कुछ लोगों को लगता है कि मैं भारत को पसंद नहीं करता हूं, मुझे काफी दुख होता है जब लोग मेरी फिल्म का इस तरह से बहिष्कार करते हैं। लेकिन मैं उन्हें ये बताना चाहता हूं जो वो सोच रहे हैं वो एक दम गलत है। मेरा उनसे अनुरोध है कि मेरी फिल्म को बॉयकॉट न करें और कृपया कर के उसे देखने जरूर जाएं। " आमिर ने कहा- एक फिल्म बनाने में बहुत मेहनत लगती है। एक एक्टर ही नहीं, बल्कि कितने लोगों के इमोशन्स जुड़े होते हैं। फिल्म देखने के बाद आप उसे पसंद कर सकते हैं और उसे नापसंद करने का भी पूरा अधिकार आपके पास है। लाल सिंह चड्ढा एक्टर बोले ऐसी बात नहीं है, फिल्में चली भी हैं। गंगूबाई, भूल भूलैया दो, कश्मीर फाइल्स, पुष्पा चली हैं। पुष्पा ने तो वर्ड ऑफ माउथ से फिल्म ने कमाल कर दिया था। ऑडियंस को फिल्म पसंद आएगी तो चलेगी ही। मुझे लगता है कि कोविड की वजह से फिल्में थोड़ी जल्दी आने लगी हैं ओटीटी पर। लोगों को लगता है कि अगर मैं थोड़ा और रूक जाऊंगा, तो घर में देख लूंगा। हालांकि मेरी फिल्मों के साथ ऐसा नहीं होता है। मेरी फिल्म छः-छः महीने तक ओटीटी पर नहीं आती हैं। आगे आमिर ने कहा कि लाल सिंह चड्ढा मैंने थिएटर के लिए बनाई है। मैं चाहता हूं कि लोग थिएटर जाकर फिल्म देखें। ओटीटी के लिए जब कुछ बनाना होगा और मौका मिलेगा, तो मैं जरूर करूंगा। वहीं साउथ सिनेमा से कंपीटशन पर आमिर बोले- हर आर्टिस्ट चाहता है कि उसकी फिल्म देशभर में लोग देखें। हम कई समय से अपनी फिल्म तमिल, तेलुगू में डब करते आ रहे हैं। अच्छे खासे रिएक्शन भी हमें मिलते रहे हैं। लेकिन जिस तरह साउथ की फिल्मों ने क्रॉसओवर किया है हिंदी फिल्मों पर, वैसे हम हिंदी फिल्म वाले नहीं पहुंच पाए हैं। वो बहुत टाइम से नहीं हो पाया है। उम्मीद है कि इस दफा हो और वही कोशिश जारी है।
एटीएस के आईजी बीजू जॉर्ज जोसफ ने बताया कि एटीएस को पुरानी नकदी ले जाने की सूचना मिली थी। इस पर एक टीम बनाकर कार्रवाई कर तीनों को पकड़ कर उनके पास मिले बैग की तलाशी ली गई। बैग में पुरानी करेंसी के 500 और 1000 के नोट बरामद हुए। जहां एटीएस ने संजय जैन, रामप्रसाद सैनी और भगवान सिंह को हिरासत में ले लिया। एटीएस तीनों से पूछताछ कर रही है कि नकदी किस की है और कहां ले जा रहे थे।
एटीएस के आईजी बीजू जॉर्ज जोसफ ने बताया कि एटीएस को पुरानी नकदी ले जाने की सूचना मिली थी। इस पर एक टीम बनाकर कार्रवाई कर तीनों को पकड़ कर उनके पास मिले बैग की तलाशी ली गई। बैग में पुरानी करेंसी के पाँच सौ और एक हज़ार के नोट बरामद हुए। जहां एटीएस ने संजय जैन, रामप्रसाद सैनी और भगवान सिंह को हिरासत में ले लिया। एटीएस तीनों से पूछताछ कर रही है कि नकदी किस की है और कहां ले जा रहे थे।
थे । उसकी गरदन पर 'गूइलोटीन' के गिरते ही आवाज़ उठीं"प्रजातन्त्र चिरञ्जीवी हो ।" "प्रजातन्त्र चिरञ्जीवी हो ।" लुइस का वध सुनकर योरुप के सभी राजाओं को जान के लाले पड़ गये । प्रजातन्त्र के भाव को विनष्ट करने क लिए सारे राजाओं ने फिर सन्धि की । इँग्लेण्ड, आस्ट्रिया, जर्मनी, हालेण्ड, पुर्तुगाल, सार्डिनिया, टस्कनी, नेपल्स, और पवित्र रोमन साम्राज्य के राजाओं ने मिलकर एक भारी सेना तैयार की और फ्रांस को चारों ओर से घेर लेने का निश्चय किया। फ्रांस को अब एक ओर तो भीतरी शत्रुओं तथा द्रहियों को दबाना था और दूसरी ओर बाहरी आक्रमणकारियों से युद्ध करना । यह क्रान्तिकारियों की परीक्षा का समय था । इस समय उनके लिए स्वतन्त्रता को स्थिर रखना स्वतन्त्रता को प्राप्त करने से अधिक कठिन हो गया । भीतरी शत्रुओं का नाश करने के लिए एक क्रान्तिकारी अदालत बनाई गई । यह अदालत क्या थी, अत्याचार को एक कानूनी रूप देने का ढङ्ग था। ऐसे अवसरों पर प्रायः ऐसे न्यायालय बना लिये जाते हैं, जहाँ न्याय के नाम से अन्याय किया जाता है। असली उद्देश तो द्रोहियों को नष्ट करना और विरोधी आन्दोलन को दबाना अत्याचारी भी खुलमखुल्ला घोर त्रास राज्य (१७३३-१७१४) क्रान्तिकारी प्रदा होता है। परन्तु
थे । उसकी गरदन पर 'गूइलोटीन' के गिरते ही आवाज़ उठीं"प्रजातन्त्र चिरञ्जीवी हो ।" "प्रजातन्त्र चिरञ्जीवी हो ।" लुइस का वध सुनकर योरुप के सभी राजाओं को जान के लाले पड़ गये । प्रजातन्त्र के भाव को विनष्ट करने क लिए सारे राजाओं ने फिर सन्धि की । इँग्लेण्ड, आस्ट्रिया, जर्मनी, हालेण्ड, पुर्तुगाल, सार्डिनिया, टस्कनी, नेपल्स, और पवित्र रोमन साम्राज्य के राजाओं ने मिलकर एक भारी सेना तैयार की और फ्रांस को चारों ओर से घेर लेने का निश्चय किया। फ्रांस को अब एक ओर तो भीतरी शत्रुओं तथा द्रहियों को दबाना था और दूसरी ओर बाहरी आक्रमणकारियों से युद्ध करना । यह क्रान्तिकारियों की परीक्षा का समय था । इस समय उनके लिए स्वतन्त्रता को स्थिर रखना स्वतन्त्रता को प्राप्त करने से अधिक कठिन हो गया । भीतरी शत्रुओं का नाश करने के लिए एक क्रान्तिकारी अदालत बनाई गई । यह अदालत क्या थी, अत्याचार को एक कानूनी रूप देने का ढङ्ग था। ऐसे अवसरों पर प्रायः ऐसे न्यायालय बना लिये जाते हैं, जहाँ न्याय के नाम से अन्याय किया जाता है। असली उद्देश तो द्रोहियों को नष्ट करना और विरोधी आन्दोलन को दबाना अत्याचारी भी खुलमखुल्ला घोर त्रास राज्य क्रान्तिकारी प्रदा होता है। परन्तु
टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल टी20 वर्ल्ड कप 2021 के बाद खत्म हो रहा है। रवि शास्त्री खुद अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना चाहते हैं। बीसीसीआई जल्द नए कोच के लिए आवेदन मंगाने वाला है। लेकिन नए काेच के तौर पर किसी भारतीय को ही जिम्मेदारी दी जाएगी, किसी विदेशी को टीम इंडिया का कोच नहीं बनाया जाएगा यह बात साफ हो गई है। शास्त्री की कोचिंग में टीम इंडिया ने विदेशों में कमाल का प्रदर्शन किया है, लेकिन टीम अब तक एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत सकी है। बीसीसीआई ने रवि शास्त्री की जगह भारतीय कोच लाने की ओर इशारा किया है। बीसीसीआई के शीर्ष सूत्र ने खुलासा किया है कि भारत का कोई पूर्व खिलाड़ी ही टीम इंडिया का अगला कोच बनेगा। अनिल कुंबले और वीवीएस लक्ष्मण सहित कई नामों पर चर्चा हो रही है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों ने कुंबले के कोच बनने पर इनकार किया है। आईपीएल की बात की जाए तो 8 में से 7 टीमों के कोच विदेशी हैं। सिर्फ पंजाब किंग्स की जिम्मेदारी पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले के पास है। आईपीएल के सफल विदेशी कोच ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और श्रीलंका के महेला जयवर्धने टीम इंडिया के कोच बनने इनकार कर दिया है। पोंटिंग दिल्ली के जबकि जयवर्धने मुंबई के कोच हैं। भारतीय टीम के विदेशी कोच की बात की जाए तो अब तक जॉन राइट, ग्रेग चैपल, गैरी कर्स्टन और डंकन फ्लेचर को यह जिम्मेदारी मिल चुकी है। हालांकि ग्रेप चैपल का 2 साल का कार्यकाल काफी विवादों में रहा था। इस कारण टीम 2007 वनडे वर्ल्ड कप से जल्द बाहर हो गई थी। इसके बाद कर्स्टन के कार्यकाल में टीम ने एमएस धोनी के नेतृत्व में 2 बड़े खिताब जीते। प्लेचर का कार्यकाल भी संतोषजनक रहा था।
टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस के बाद खत्म हो रहा है। रवि शास्त्री खुद अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना चाहते हैं। बीसीसीआई जल्द नए कोच के लिए आवेदन मंगाने वाला है। लेकिन नए काेच के तौर पर किसी भारतीय को ही जिम्मेदारी दी जाएगी, किसी विदेशी को टीम इंडिया का कोच नहीं बनाया जाएगा यह बात साफ हो गई है। शास्त्री की कोचिंग में टीम इंडिया ने विदेशों में कमाल का प्रदर्शन किया है, लेकिन टीम अब तक एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत सकी है। बीसीसीआई ने रवि शास्त्री की जगह भारतीय कोच लाने की ओर इशारा किया है। बीसीसीआई के शीर्ष सूत्र ने खुलासा किया है कि भारत का कोई पूर्व खिलाड़ी ही टीम इंडिया का अगला कोच बनेगा। अनिल कुंबले और वीवीएस लक्ष्मण सहित कई नामों पर चर्चा हो रही है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों ने कुंबले के कोच बनने पर इनकार किया है। आईपीएल की बात की जाए तो आठ में से सात टीमों के कोच विदेशी हैं। सिर्फ पंजाब किंग्स की जिम्मेदारी पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले के पास है। आईपीएल के सफल विदेशी कोच ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और श्रीलंका के महेला जयवर्धने टीम इंडिया के कोच बनने इनकार कर दिया है। पोंटिंग दिल्ली के जबकि जयवर्धने मुंबई के कोच हैं। भारतीय टीम के विदेशी कोच की बात की जाए तो अब तक जॉन राइट, ग्रेग चैपल, गैरी कर्स्टन और डंकन फ्लेचर को यह जिम्मेदारी मिल चुकी है। हालांकि ग्रेप चैपल का दो साल का कार्यकाल काफी विवादों में रहा था। इस कारण टीम दो हज़ार सात वनडे वर्ल्ड कप से जल्द बाहर हो गई थी। इसके बाद कर्स्टन के कार्यकाल में टीम ने एमएस धोनी के नेतृत्व में दो बड़े खिताब जीते। प्लेचर का कार्यकाल भी संतोषजनक रहा था।
Firozabad: जिले के शिकोहाबाद नगर से सटे गांव दिखतौली में आलू की पैदावार को देखते हुए आलू चिप्स फैक्ट्री खोलकर महिलाओं को स्वाबलंबी बनी थी, लेकिन अब फैक्ट्री कई महीनों से बंद पड़ी। Firozabad News: जिले के शिकोहाबाद नगर से सटे गांव दिखतौली में आलू की पैदावार को देखते हुए आलू चिप्स फैक्ट्री खोलकर खूब प्रचार-प्रसार किया गया। आलू को अब बाहर भेजने की जरूरत नहीं होगी। आलू से चिप्स बनेगा और पैक होकर बाहर भेजा जाएगा। उम्मीदों के सपने बड़े सारा कारोबार महिलाओं के समूह को सौप दिया गया। कहा महिलाओं को स्वाबलंबी बनाया जा रहा है। उद्घाटन तत्तकालीन प्रभारी मंत्री मोती सिंह (Former minister Moti Singh) द्वारा किया गया। खूब प्रचार प्रसार किया गया फैक्ट्री कुछ समय चली अब कई महीनों से बंद पड़ी है। जब कोई अधिकारी नेता मंत्री आते है तो फैक्ट्री खोल दी जाती है कार्य करने वालों को बुलाया जाता है जिले का नाम रोशन करने वाली महिलाओं के समूह वाली चिप्स फैक्ट्री खूब कागजी घोड़ा दौड़ा रही। ग्राम प्रधान सुरेश चंद्र (Village head Suresh Chandra) ने बताया कि फैक्ट्री कई महीनों से बन्द पड़ी है। महिलाओं के स्वावलंबी रोजगार को बनी थी, लेकिन बंद पड़ी।
Firozabad: जिले के शिकोहाबाद नगर से सटे गांव दिखतौली में आलू की पैदावार को देखते हुए आलू चिप्स फैक्ट्री खोलकर महिलाओं को स्वाबलंबी बनी थी, लेकिन अब फैक्ट्री कई महीनों से बंद पड़ी। Firozabad News: जिले के शिकोहाबाद नगर से सटे गांव दिखतौली में आलू की पैदावार को देखते हुए आलू चिप्स फैक्ट्री खोलकर खूब प्रचार-प्रसार किया गया। आलू को अब बाहर भेजने की जरूरत नहीं होगी। आलू से चिप्स बनेगा और पैक होकर बाहर भेजा जाएगा। उम्मीदों के सपने बड़े सारा कारोबार महिलाओं के समूह को सौप दिया गया। कहा महिलाओं को स्वाबलंबी बनाया जा रहा है। उद्घाटन तत्तकालीन प्रभारी मंत्री मोती सिंह द्वारा किया गया। खूब प्रचार प्रसार किया गया फैक्ट्री कुछ समय चली अब कई महीनों से बंद पड़ी है। जब कोई अधिकारी नेता मंत्री आते है तो फैक्ट्री खोल दी जाती है कार्य करने वालों को बुलाया जाता है जिले का नाम रोशन करने वाली महिलाओं के समूह वाली चिप्स फैक्ट्री खूब कागजी घोड़ा दौड़ा रही। ग्राम प्रधान सुरेश चंद्र ने बताया कि फैक्ट्री कई महीनों से बन्द पड़ी है। महिलाओं के स्वावलंबी रोजगार को बनी थी, लेकिन बंद पड़ी।
व्यावसायिक संगठन की व्यावसायिक गतिविधिगुणात्मक और मात्रात्मक संकेतकों की एक प्रणाली का उपयोग करके मापा गया व्यावसायिक गतिविधि के गुणांक के लिए धन्यवाद, यह विश्लेषण करना संभव है कि एंटरप्राइज़ स्वयं द्वारा कितनी प्रभावी रूप से उपयोग किया जाता है। विश्लेषण गतिशीलता और कारोबार के वित्तीय अनुपात के स्तर के अध्ययन के रूप में समझा जाता है। व्यवसाय के मात्रात्मक संकेतक के रूप मेंरिश्तेदार और पूर्ण सूचकांक आवंटित किए जाते हैं। ये मात्रात्मक मापदंडों को गतिशीलताओं की तुलना में कई अवधियों में किया जाना चाहिए। सभी गुणांक समय पर व्यक्त किए जाते हैं, और दिन में कारोबार की अवधि। संगठन के लिए, ये संकेतक बहुत महत्वपूर्ण हैं वार्षिक कारोबार की मात्रा सालाना कारोबार के आकार पर निर्भर करती है। उत्पादन लागत का सापेक्ष परिमाण टर्नओवर के साथ जुड़ा हुआ है। किसी भी कंपनी की वित्तीय स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि परिसंपत्तियों में निवेश किए जाने वाले धन को कितनी जल्दी वास्तविक मौद्रिक संपत्ति में बदल दिया जाएगा? फर्म की व्यावसायिक गतिविधि अनुमान के दो समूहों के उपयोग के माध्यम से अनुमानित हैः कारोबार का सामान्य संकेतक, साथ ही परिसंपत्ति प्रबंधन के संकेतक। आकलन कैसे प्रभावी रूप से एक उद्यमइसके संसाधनों का उपयोग किया जाता है, उनकी प्राप्ति के स्रोतों की परवाह किए बिना, तथाकथित परिसंपत्ति कारोबार अनुपात का उपयोग किया जाता है इसकी सहायता से, संपूर्ण उत्पादन और रूपांतरण चक्र की संख्या को चिह्नित करना संभव है जिसके लिए एक उद्यम लाभ ले सकता है। आरंभ करने के लिए, आपको एक लेखांकन भरना होगाफॉर्म नंबर 1 में कंपनी का संतुलन 1 और 2 रिपोर्टिंग अनुभाग का उपयोग करके कारोबार का विश्लेषण किया जाता है। अमूर्त संपत्ति, प्रगति पर निर्माण, अचल संपत्ति, आविष्कार, निवेश, कच्चे माल, प्राप्तियां और नकदी के बारे में जानकारी को प्रदर्शित करना आवश्यक है। अब आपको 1 9 0 और 2 9 0 लाइनों को जोड़ना चाहिए, और फिर राशि दें और परिसंपत्ति का संतुलन रेखा 300 में दिखाई देगा। इसके बाद, आपको लाभ और हानि कथन उत्पन्न करना चाहिए।फार्म संख्या 2 के तहत उद्यमों के नुकसान परिसंपत्ति कारोबार अनुपात की गणना रेखा 010 से मूल्य का उपयोग करके की जाएगी, जिसमें उत्पादों की बिक्री, कार्य के प्रदर्शन और सेवाओं के प्रावधान से कंपनी के राजस्व के बारे में जानकारी शामिल है। खातों पर क्रेडिट की राशि के रूप में लेखांकन के आधार पर इस लाइन का गठन किया जाता हैः 90.1 "राजस्व", खाता 90.3 "वैट" पर डेबिट, और 90.4 "एक्साइज" को ध्यान में रखते हुए। अब आप टर्नओवर रेशियो प्राप्त कर सकते हैंसंपत्ति, इसे माल की बिक्री से कंपनी की परिसंपत्तियों की कुल कीमत के अनुपात के रूप में गणना की जा सकती है इसका नतीजा एक अनुपात होगा जो बेची गई वस्तुओं की इकाइयों की संख्या दर्शाता है, जो कि परिसंपत्तियों की प्रति इकाई है। नतीजे का विश्लेषण करने के बाद, आप उद्यम के लिए उपलब्ध धन के कारोबार की प्रकृति का निर्धारण कर सकते हैं। इस सूचक जितना अधिक होगा, परिसंपत्ति मूल्य के प्रत्येक इकाई से ज्यादा उद्यम लाभ प्राप्त करेगा। प्रत्येक रिपोर्टिंग अवधि के लिए इस गुणांक की गणना करना सर्वोत्तम है, फिर तुलनात्मक विश्लेषण करने के लिए।
व्यावसायिक संगठन की व्यावसायिक गतिविधिगुणात्मक और मात्रात्मक संकेतकों की एक प्रणाली का उपयोग करके मापा गया व्यावसायिक गतिविधि के गुणांक के लिए धन्यवाद, यह विश्लेषण करना संभव है कि एंटरप्राइज़ स्वयं द्वारा कितनी प्रभावी रूप से उपयोग किया जाता है। विश्लेषण गतिशीलता और कारोबार के वित्तीय अनुपात के स्तर के अध्ययन के रूप में समझा जाता है। व्यवसाय के मात्रात्मक संकेतक के रूप मेंरिश्तेदार और पूर्ण सूचकांक आवंटित किए जाते हैं। ये मात्रात्मक मापदंडों को गतिशीलताओं की तुलना में कई अवधियों में किया जाना चाहिए। सभी गुणांक समय पर व्यक्त किए जाते हैं, और दिन में कारोबार की अवधि। संगठन के लिए, ये संकेतक बहुत महत्वपूर्ण हैं वार्षिक कारोबार की मात्रा सालाना कारोबार के आकार पर निर्भर करती है। उत्पादन लागत का सापेक्ष परिमाण टर्नओवर के साथ जुड़ा हुआ है। किसी भी कंपनी की वित्तीय स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि परिसंपत्तियों में निवेश किए जाने वाले धन को कितनी जल्दी वास्तविक मौद्रिक संपत्ति में बदल दिया जाएगा? फर्म की व्यावसायिक गतिविधि अनुमान के दो समूहों के उपयोग के माध्यम से अनुमानित हैः कारोबार का सामान्य संकेतक, साथ ही परिसंपत्ति प्रबंधन के संकेतक। आकलन कैसे प्रभावी रूप से एक उद्यमइसके संसाधनों का उपयोग किया जाता है, उनकी प्राप्ति के स्रोतों की परवाह किए बिना, तथाकथित परिसंपत्ति कारोबार अनुपात का उपयोग किया जाता है इसकी सहायता से, संपूर्ण उत्पादन और रूपांतरण चक्र की संख्या को चिह्नित करना संभव है जिसके लिए एक उद्यम लाभ ले सकता है। आरंभ करने के लिए, आपको एक लेखांकन भरना होगाफॉर्म नंबर एक में कंपनी का संतुलन एक और दो रिपोर्टिंग अनुभाग का उपयोग करके कारोबार का विश्लेषण किया जाता है। अमूर्त संपत्ति, प्रगति पर निर्माण, अचल संपत्ति, आविष्कार, निवेश, कच्चे माल, प्राप्तियां और नकदी के बारे में जानकारी को प्रदर्शित करना आवश्यक है। अब आपको एक नौ शून्य और दो नौ शून्य लाइनों को जोड़ना चाहिए, और फिर राशि दें और परिसंपत्ति का संतुलन रेखा तीन सौ में दिखाई देगा। इसके बाद, आपको लाभ और हानि कथन उत्पन्न करना चाहिए।फार्म संख्या दो के तहत उद्यमों के नुकसान परिसंपत्ति कारोबार अनुपात की गणना रेखा दस से मूल्य का उपयोग करके की जाएगी, जिसमें उत्पादों की बिक्री, कार्य के प्रदर्शन और सेवाओं के प्रावधान से कंपनी के राजस्व के बारे में जानकारी शामिल है। खातों पर क्रेडिट की राशि के रूप में लेखांकन के आधार पर इस लाइन का गठन किया जाता हैः नब्बे.एक "राजस्व", खाता नब्बे.तीन "वैट" पर डेबिट, और नब्बे.चार "एक्साइज" को ध्यान में रखते हुए। अब आप टर्नओवर रेशियो प्राप्त कर सकते हैंसंपत्ति, इसे माल की बिक्री से कंपनी की परिसंपत्तियों की कुल कीमत के अनुपात के रूप में गणना की जा सकती है इसका नतीजा एक अनुपात होगा जो बेची गई वस्तुओं की इकाइयों की संख्या दर्शाता है, जो कि परिसंपत्तियों की प्रति इकाई है। नतीजे का विश्लेषण करने के बाद, आप उद्यम के लिए उपलब्ध धन के कारोबार की प्रकृति का निर्धारण कर सकते हैं। इस सूचक जितना अधिक होगा, परिसंपत्ति मूल्य के प्रत्येक इकाई से ज्यादा उद्यम लाभ प्राप्त करेगा। प्रत्येक रिपोर्टिंग अवधि के लिए इस गुणांक की गणना करना सर्वोत्तम है, फिर तुलनात्मक विश्लेषण करने के लिए।
रायपुर। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सुकमा जिले के मरईगुड़ा लिङ्गलपल्ली सीआरपीएफ कैम्प में घायल जवानों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आज रायपुर के नारायणा और रामकृष्ण अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती घायल जवानों से मिलकर उनसे बातचीत की और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से भी घायल जवानों के संबंध में चर्चा की। उन्होंने घायल जवानों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं करने और हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सुकमा जिले के मरईगुड़ा लिङ्गलपल्ली सीआरपीएफ कैम्प में 4 जवानों की मृत्यु पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के बेहतर इलाज के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए पुलिस अधिकारियों को ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल पर जाने के निर्देश दिए हैं। गृहमंत्री श्री साहू ने कहा है कि जवानों को तनावमुक्त करने की दिशा में लगातार काम किये जा रहे हैं। उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। योगाभ्यास कराया जा रहा है और उन्हें अवकाश प्रदान करने के साथ मनोरंजन के लिए टीवी की सुविधा भी प्रदान की गई है। जवान द्वारा किन कारणों से घटना को अंजाम दिया गया है, यह जांच का विषय है। वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देशन में यह पता लगाया जा रहा है। जो भी तथ्य सामने आएगा, आगे कदम उठाया जाएगा।
रायपुर। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सुकमा जिले के मरईगुड़ा लिङ्गलपल्ली सीआरपीएफ कैम्प में घायल जवानों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आज रायपुर के नारायणा और रामकृष्ण अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती घायल जवानों से मिलकर उनसे बातचीत की और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से भी घायल जवानों के संबंध में चर्चा की। उन्होंने घायल जवानों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं करने और हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सुकमा जिले के मरईगुड़ा लिङ्गलपल्ली सीआरपीएफ कैम्प में चार जवानों की मृत्यु पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के बेहतर इलाज के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए पुलिस अधिकारियों को ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल पर जाने के निर्देश दिए हैं। गृहमंत्री श्री साहू ने कहा है कि जवानों को तनावमुक्त करने की दिशा में लगातार काम किये जा रहे हैं। उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। योगाभ्यास कराया जा रहा है और उन्हें अवकाश प्रदान करने के साथ मनोरंजन के लिए टीवी की सुविधा भी प्रदान की गई है। जवान द्वारा किन कारणों से घटना को अंजाम दिया गया है, यह जांच का विषय है। वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देशन में यह पता लगाया जा रहा है। जो भी तथ्य सामने आएगा, आगे कदम उठाया जाएगा।
सपना चौधरी (Photo Credit: सोशल मीडिया) नई दिल्लीः सपना चौधरी. . . हरियाणा क्या अब तो वो देशभर में पॉपुलर हैं. उनके गाने और वीडियो खूब देखे और पसंद किए जाते हैं. अब तक आपने उन्हें सूट-सलवार में हरियाणवी गानों पर नाचते देखा होगा. . . एल्बम सॉन्ग्स में ठुमके लगाते देखा होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने वाले हैं जो आपके लिए बिल्कुल नया होगा. . . जी हां शर्त लगा लीजिए आपको सपना को इस अंदाज में पहले कभी नहीं देखा होगा. लुक तो उनका वही पुराना है. . . लेकिन उनकी एक्टिंग और जो गाना उन्होंने चुना वह उनके स्टाइल से बिल्कुल अलग और हटके है. इस वीडियो को देखकर उनके फैन्स और फॉलोअर्स भी काफी पसंद कर रहे हैं और आगे भी ऐसे ही वीडियो बनाने की सलाह दे रहे हैं. इस वीडियो में क्या है खास ? इस वीडियो में सपना चौधरी नीले सूट में एक पार्क में बैठी नजर आ रही हैं. उनके आस-पास फूल बिखरे हुए हैं. इस वीडियो में सपना 'वादा कर ले साजना' पर परफॉर्म करती दिख रही हैं. इस वीडियो को इतनी खूबसूरती से शूट किया गया है और इसमें सपना ने जो हावभाव दिखाए हैं उसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं. इस वीडियो के बाद सपना के फैन्स की लिस्ट में कई नए नाम जुड़ गए हैं. रूही ने लिखा, वाह. . . ऐसे ही वीडियो बनाया करो सपना. भूमि ने लिखा, सुपर्ब. सविता ने लिखा, आपका सबसे अच्छा वीडियो है ये. राजेश ने लिखा, बेहद सुंदर. सागर चौधरी ने लिखा, सुंदर कलेक्शन. . . आपके एक्सप्रेशन और परफॉर्मेंस शानदार है. बहुत बढ़िया सपना ऐसे ही काम करो. बता दें कि सपना ने यह वीडियो 30 अप्रैल को शेयर किया था. इसे अब तक दो लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं और लोग अब भी इस पर खूब प्यार लुटा रहे हैं. क्या है ताजा अपडेट ? ताजा प्रोजेक्ट्स की बात करें तो हाल में सपना का गाना 'हीर' रिलीज हुआ है. फिलहाल वह अपने इंस्टाग्राम के जरिए इसी गाने को प्रमोट करने में लगी हुई हैं.
सपना चौधरी नई दिल्लीः सपना चौधरी. . . हरियाणा क्या अब तो वो देशभर में पॉपुलर हैं. उनके गाने और वीडियो खूब देखे और पसंद किए जाते हैं. अब तक आपने उन्हें सूट-सलवार में हरियाणवी गानों पर नाचते देखा होगा. . . एल्बम सॉन्ग्स में ठुमके लगाते देखा होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने वाले हैं जो आपके लिए बिल्कुल नया होगा. . . जी हां शर्त लगा लीजिए आपको सपना को इस अंदाज में पहले कभी नहीं देखा होगा. लुक तो उनका वही पुराना है. . . लेकिन उनकी एक्टिंग और जो गाना उन्होंने चुना वह उनके स्टाइल से बिल्कुल अलग और हटके है. इस वीडियो को देखकर उनके फैन्स और फॉलोअर्स भी काफी पसंद कर रहे हैं और आगे भी ऐसे ही वीडियो बनाने की सलाह दे रहे हैं. इस वीडियो में क्या है खास ? इस वीडियो में सपना चौधरी नीले सूट में एक पार्क में बैठी नजर आ रही हैं. उनके आस-पास फूल बिखरे हुए हैं. इस वीडियो में सपना 'वादा कर ले साजना' पर परफॉर्म करती दिख रही हैं. इस वीडियो को इतनी खूबसूरती से शूट किया गया है और इसमें सपना ने जो हावभाव दिखाए हैं उसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं. इस वीडियो के बाद सपना के फैन्स की लिस्ट में कई नए नाम जुड़ गए हैं. रूही ने लिखा, वाह. . . ऐसे ही वीडियो बनाया करो सपना. भूमि ने लिखा, सुपर्ब. सविता ने लिखा, आपका सबसे अच्छा वीडियो है ये. राजेश ने लिखा, बेहद सुंदर. सागर चौधरी ने लिखा, सुंदर कलेक्शन. . . आपके एक्सप्रेशन और परफॉर्मेंस शानदार है. बहुत बढ़िया सपना ऐसे ही काम करो. बता दें कि सपना ने यह वीडियो तीस अप्रैल को शेयर किया था. इसे अब तक दो लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं और लोग अब भी इस पर खूब प्यार लुटा रहे हैं. क्या है ताजा अपडेट ? ताजा प्रोजेक्ट्स की बात करें तो हाल में सपना का गाना 'हीर' रिलीज हुआ है. फिलहाल वह अपने इंस्टाग्राम के जरिए इसी गाने को प्रमोट करने में लगी हुई हैं.
यह निर्माता का दूसरा बच्चा और पहला बेटा है। जाने-माने निर्माता दिल राजू को आज सुबह एक बच्चे का आशीर्वाद मिला है। फिल्म निर्माता ने 2020 में 10 मई को व्यघा रेड्डी के साथ शादी के बंधन में बंध गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मां और बच्चा दोनों अच्छा कर रहे हैं। दिल राजू पिछले कुछ दिनों से दुबई में थे। वह आज तड़के देश वापस आए। इक्का-दुक्का निर्माता परिवार के इस नए सदस्य के आने से उत्साहित हैं। यह निर्माता का दूसरा बच्चा और पहला बेटा है। नीचे दी गई पोस्ट देखेंः
यह निर्माता का दूसरा बच्चा और पहला बेटा है। जाने-माने निर्माता दिल राजू को आज सुबह एक बच्चे का आशीर्वाद मिला है। फिल्म निर्माता ने दो हज़ार बीस में दस मई को व्यघा रेड्डी के साथ शादी के बंधन में बंध गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मां और बच्चा दोनों अच्छा कर रहे हैं। दिल राजू पिछले कुछ दिनों से दुबई में थे। वह आज तड़के देश वापस आए। इक्का-दुक्का निर्माता परिवार के इस नए सदस्य के आने से उत्साहित हैं। यह निर्माता का दूसरा बच्चा और पहला बेटा है। नीचे दी गई पोस्ट देखेंः
शिवपुरी। जल संकट का असर अब मनुष्यो के साथ पशु पक्षीयों और जानवरो पर भी पडऩे लगा है। जाधव सागर से नपा द्वारा निर्मित बनाऐ गए गणेश कुण्ड में बीती रात्रि एक 6 फीट ल बे मगर मच्छ के आ जाने से दहशत का वातावरण व्याप्त हो गया। मगर रात भर से लेकर सुबह तक गणेश कुण्ड में जमा रहा। उसे देखने के लिए सैकड़ों तमाशबीनों की भीड़ उमड़ आई। वन विभाग को भी सूचना दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि में जाधव सागर से एक मगर बाहर निकल आया वहां पड़ी मिट्टी के सहारे गणेश कुण्ड तक पहुंच गया और कुण्ड में गिर गया। हालांकि कुण्ड में पानी नहीं था जिस कारण मगर वहां से नहीं निकल पाया। यह घटना वहां मौजूद चौकीदार पप्पन ने देखी। लेकिन रात्रि होने के कारण वह किसी को सूचना नहीं दे सका। लेकिन आज सुबह लगभग 7 बजे मगर होने की सूचना वन टीम को दी। बताया जा रहा है कि दोपहर में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगर को काबू में कर वापस जाधव सागर में छोड़ दिया।
शिवपुरी। जल संकट का असर अब मनुष्यो के साथ पशु पक्षीयों और जानवरो पर भी पडऩे लगा है। जाधव सागर से नपा द्वारा निर्मित बनाऐ गए गणेश कुण्ड में बीती रात्रि एक छः फीट ल बे मगर मच्छ के आ जाने से दहशत का वातावरण व्याप्त हो गया। मगर रात भर से लेकर सुबह तक गणेश कुण्ड में जमा रहा। उसे देखने के लिए सैकड़ों तमाशबीनों की भीड़ उमड़ आई। वन विभाग को भी सूचना दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि में जाधव सागर से एक मगर बाहर निकल आया वहां पड़ी मिट्टी के सहारे गणेश कुण्ड तक पहुंच गया और कुण्ड में गिर गया। हालांकि कुण्ड में पानी नहीं था जिस कारण मगर वहां से नहीं निकल पाया। यह घटना वहां मौजूद चौकीदार पप्पन ने देखी। लेकिन रात्रि होने के कारण वह किसी को सूचना नहीं दे सका। लेकिन आज सुबह लगभग सात बजे मगर होने की सूचना वन टीम को दी। बताया जा रहा है कि दोपहर में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगर को काबू में कर वापस जाधव सागर में छोड़ दिया।
अजब-गजब॥ सूर्य उपासना के महापर्व़ छठ पूजा की तैयारी चल रही है। चंडीगढ़ में सेक्टर-42 स्थित न्यू लेक पर जगमग रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। लेक के चारों तरफ लड़ियां लगाने का काम एक-दो दिनों में शुरू हो जाएगा। खरना की रात तक लड़ियां लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। लेक की सफाई कर दी गई है। दो ट्यूबवेलों से न्यू लेक में पानी भरने का काम शुरू हो चुका है। पहले गंदा पानी निकालकर लेक की सफाई की गई। भारी संख्या में लेक पर लोगों के पहुंचने को देखते हुए दो और चार पहिया वाहन की पार्किंग का इंतजाम किया गया है। व्रती पहले सुखना लेक पर छठ पूजा के लिए जाते थे। सुखना लेक में प्रशासन की ओर से छठ पूजा की मनाही के बाद प्रशासन ने 2008 में न्यू लेक का निर्माण किया। छठ पूजा का आयोजन पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से किया जाता है। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डीके सिंह ने बताया कि हजारों व्रती सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचेंगे। 2 नवंबर को ढलते सूर्य और 3 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। न्यू लेक पर 13 घाट बने हैं। चारों तरफ सीढ़ियां बनाई गई हैं। छठ महापर्व़ नहाय खाय के साथ 31 अक्तूबर से शुरू होगा। व्रती सुबह स्नान कर शुद्ध मन से चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी बनाकर भगवान का भोग लगाकर ग्रहण करेंगे। इसमें सेधा नमक का प्रयोग किया जाता है। छठ पूजा समितियों की ओर से कृत्रिम सरोवर बनाए जाएंगे। गांव रायपुर, बहलाना, हल्लोमाजरा, मलोया, रामदरबार सहित अन्य भागों में छठ पूजा का आयोजन होगा। एक नवंबर को खरना होगा। इसमें पूरा दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए शाम में खीर व फलों का प्रसाद ग्रहण करेंगी। खरना के बाद व्रती 24 घंटे का अखंड उपवास करती हैं। लेक पर लगे बोर्ड में हिदायत दी गई है कि झील पर नहाना, तैरना, कपड़े धोना सख्त मना है। आदेश की उल्लंघना करने पर पांच सौ रुपये का जुर्माना किया जाएगा। यह आदेश चंडीगढ़ प्रशासन का है। इसके अलावा गंदगी न फैलाने की सलाह दी गई है। इसके लिए न्यू लेक पर सिक्योरिटी गार्ड लगाया गया है। गार्ड पर लोगों से हर दिन कहासुनी होती रहती है। पूजा व अन्य सामग्री न्यू लेक में प्रवाहित करने के लिए आते हैं। जब मना करते हैं तो झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। सीनियर डिप्टी मेयर और एरिया पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला का कहना है कि न्यू लेक पर छठ पूजा पर आने वाले व्रतियों के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। इसके लिए प्रशासन और नगर निगम को सूचित कर दिया गया है। साफ सफाई की पूरी व्यवस्था की गई है। न्यू लेक पर दोनों ओर दो-दो टॉयलेट बनाए गए हैं। इसके अलावा जो भी जरूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डीके सिंह का कहना है कि प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
अजब-गजब॥ सूर्य उपासना के महापर्व़ छठ पूजा की तैयारी चल रही है। चंडीगढ़ में सेक्टर-बयालीस स्थित न्यू लेक पर जगमग रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। लेक के चारों तरफ लड़ियां लगाने का काम एक-दो दिनों में शुरू हो जाएगा। खरना की रात तक लड़ियां लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। लेक की सफाई कर दी गई है। दो ट्यूबवेलों से न्यू लेक में पानी भरने का काम शुरू हो चुका है। पहले गंदा पानी निकालकर लेक की सफाई की गई। भारी संख्या में लेक पर लोगों के पहुंचने को देखते हुए दो और चार पहिया वाहन की पार्किंग का इंतजाम किया गया है। व्रती पहले सुखना लेक पर छठ पूजा के लिए जाते थे। सुखना लेक में प्रशासन की ओर से छठ पूजा की मनाही के बाद प्रशासन ने दो हज़ार आठ में न्यू लेक का निर्माण किया। छठ पूजा का आयोजन पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से किया जाता है। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डीके सिंह ने बताया कि हजारों व्रती सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचेंगे। दो नवंबर को ढलते सूर्य और तीन नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। न्यू लेक पर तेरह घाट बने हैं। चारों तरफ सीढ़ियां बनाई गई हैं। छठ महापर्व़ नहाय खाय के साथ इकतीस अक्तूबर से शुरू होगा। व्रती सुबह स्नान कर शुद्ध मन से चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी बनाकर भगवान का भोग लगाकर ग्रहण करेंगे। इसमें सेधा नमक का प्रयोग किया जाता है। छठ पूजा समितियों की ओर से कृत्रिम सरोवर बनाए जाएंगे। गांव रायपुर, बहलाना, हल्लोमाजरा, मलोया, रामदरबार सहित अन्य भागों में छठ पूजा का आयोजन होगा। एक नवंबर को खरना होगा। इसमें पूरा दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए शाम में खीर व फलों का प्रसाद ग्रहण करेंगी। खरना के बाद व्रती चौबीस घंटाटे का अखंड उपवास करती हैं। लेक पर लगे बोर्ड में हिदायत दी गई है कि झील पर नहाना, तैरना, कपड़े धोना सख्त मना है। आदेश की उल्लंघना करने पर पांच सौ रुपये का जुर्माना किया जाएगा। यह आदेश चंडीगढ़ प्रशासन का है। इसके अलावा गंदगी न फैलाने की सलाह दी गई है। इसके लिए न्यू लेक पर सिक्योरिटी गार्ड लगाया गया है। गार्ड पर लोगों से हर दिन कहासुनी होती रहती है। पूजा व अन्य सामग्री न्यू लेक में प्रवाहित करने के लिए आते हैं। जब मना करते हैं तो झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। सीनियर डिप्टी मेयर और एरिया पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला का कहना है कि न्यू लेक पर छठ पूजा पर आने वाले व्रतियों के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। इसके लिए प्रशासन और नगर निगम को सूचित कर दिया गया है। साफ सफाई की पूरी व्यवस्था की गई है। न्यू लेक पर दोनों ओर दो-दो टॉयलेट बनाए गए हैं। इसके अलावा जो भी जरूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डीके सिंह का कहना है कि प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
3) श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) भारतीय क्रिकेट टीम के आक्रामक बल्लेबाज़ और दिल्ली कैपिटल्स के पूर्व कप्तान श्रेयस अय्यर को इस बार आईपीएल मेगा ऑक्शन 2022 (IPL Mega Auction 2022) में अपनी नई आईपीएल टीम मिल गई है और इसी के साथ ये उम्मीद भी की जा रही है कि उनकी नई आईपीएल फ्रेंचाइजी उन्हें कप्तानी की भूमिका भी सौंपना चाहती है. शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने श्रेयस अय्यर को 12 . 25 करोड़ रूपये में खरीदा, जोकि इस बार के मेगा नीलामी में तीसरे महंगे खिलाड़ी बन गए. अय्यर का बेस प्राइस ऑक्शन (IPL Mega Auction 2022) के लिए 2 करोड़ ही था. इसमें कोई दोहराय नहीं कि इस बार उम्मीद की जा रही थी कि श्रेयस अय्यर पर तगड़ी बोली लगने वाली है. क्योंकि अय्यर ने पिछले कुछ सालों में जो काम दिल्ली कैपिटल्स के लिए किया है, वो तारीफ के काबिल है. जब इनका नाम बिग स्क्रीन पर आया तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने इनमें सबसे ज़्यादा रूचि दिखाई, ग़ौरतलब है कि अय्यर की पूर्व फ्रेंचाइजी भी इनके पीछे 9. 50 करोड़ तक भागी, लेकिन अंत में सबसे बड़ा हाथ श्रेयस पर केकेआर ने ही मारा. जिसके चलते अय्यर आगामी आईपीएल एडिशन में केकेआर की ओर से खेलते और शायद कप्तानी करते हुए भी नज़र आएंगे.
तीन) श्रेयस अय्यर भारतीय क्रिकेट टीम के आक्रामक बल्लेबाज़ और दिल्ली कैपिटल्स के पूर्व कप्तान श्रेयस अय्यर को इस बार आईपीएल मेगा ऑक्शन दो हज़ार बाईस में अपनी नई आईपीएल टीम मिल गई है और इसी के साथ ये उम्मीद भी की जा रही है कि उनकी नई आईपीएल फ्रेंचाइजी उन्हें कप्तानी की भूमिका भी सौंपना चाहती है. शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने श्रेयस अय्यर को बारह . पच्चीस करोड़ रूपये में खरीदा, जोकि इस बार के मेगा नीलामी में तीसरे महंगे खिलाड़ी बन गए. अय्यर का बेस प्राइस ऑक्शन के लिए दो करोड़ ही था. इसमें कोई दोहराय नहीं कि इस बार उम्मीद की जा रही थी कि श्रेयस अय्यर पर तगड़ी बोली लगने वाली है. क्योंकि अय्यर ने पिछले कुछ सालों में जो काम दिल्ली कैपिटल्स के लिए किया है, वो तारीफ के काबिल है. जब इनका नाम बिग स्क्रीन पर आया तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने इनमें सबसे ज़्यादा रूचि दिखाई, ग़ौरतलब है कि अय्यर की पूर्व फ्रेंचाइजी भी इनके पीछे नौ. पचास करोड़ तक भागी, लेकिन अंत में सबसे बड़ा हाथ श्रेयस पर केकेआर ने ही मारा. जिसके चलते अय्यर आगामी आईपीएल एडिशन में केकेआर की ओर से खेलते और शायद कप्तानी करते हुए भी नज़र आएंगे.
के लेख में जो वंशावली दी गयी है उसमें श्रुतवर्मन् को मूल कहा गया है और उसी ने अपने देश को फूनान से मुक्त कराया । उसके पुत्र श्रेष्ठवर्मन् की राजधानी श्रेष्ठपुर थी जिसका उल्लेख पहले हो चुका है । भववर्मन् का इस वंश से कोई सम्बन्ध न था। इसका पितामह सार्वभौम शासक रहा हो; जैसा कि उसके नाम से प्रतीत होता है, पर इसमें सन्देह है । " उसका पुत्र वीरवर्मन्, जो भववर्मन् का पिता था, एक साधारण व्यक्ति था और उसने अपनी कन्या का विवाह शर्वशर्मन् से किया था । भववर्मन् ने अपने पुरुषार्थ से अपने राज्य का निर्माण किया। उसके लेखों के मिलने के स्थान से पता चलता है कि वे बटम-वंग के पश्चिम में पोंग चगवें, त्रग छड़ों से ३० मील उतर पश्चिम, मेकांग नदी के पूर्व में कोपोंग सिएम तथा स्तुग त्रांग प्रान्तों में मिले । कम्बुज देश के मध्य भाग में भववर्मन् ने अपने राज्य का निर्माण कर लिया था। इसके उत्तर पूर्व में श्रेष्ठवर्मन् का राज्य था जिसकी राजधानी श्रेष्ठपुर लाओस के वसाक के निकट थी । १९. भववर्मन् के पिता वीरवर्मन् को किसी लेख में राजकीय उपाधि नहीं दी गयी है। सिडो के मतानुसार उसका नाम श्री था और सार्वभौम से उसकी राजनीतिक सत्ता का संकेत होता है (बु० इ० फ्रा० भाग २२,१०५८-५९ ) । गुप्त वंश के स्थापक श्री गुप्त का नाम श्री था और गुप्त से उसके वंश का संकेत होता है। भववर्मन् के अपने तथा अन्य सम्बन्धित लेखों से प्रतीत होता है कि उसने स्वभुज-बल से अपने राज्य का निर्माण किया । अतः इस विषय पर निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि श्री सार्वभौम भी कहीं का शासक था अथवा वह कोई सामान्य व्यक्ति था । २०. सिडो के मतानुसार भववर्मन् और उसके भाई चित्रसेन ने फूनान पर आक्रमण किया और पूर्व में मेकांग पर ऋते, मुन और उग्रक के बीच बुरिअम, पश्चिम में विशाल झील के आगे भोंगोल बोराई तक अपना राज्य विस्तृत किया। दक्षिण में फूनान की राजधानी टू-मो ( व्याधपुर अथवा बो-नोम) से न-फुत्र ( नर्वनगर ) ले जायी गयी (ए० हि०, पृ० ११९ ), सिडो, बु० इ० फ्रा०, भाग ४३, पृ० ३-४। हन-ये के लेख में भववर्मन् को महाराजाधिराज कहा गया है । मजुमदार के अनुसार इस लेख का सम्बन्ध भववर्मन् द्वितीय से है। (कम्बुज देश, पृ० ५३ ) । म्बुज देश का प्रारम्भिक इतिहास ता प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् के बाद कम्बुज राजलक्ष्मी और दूसरे पद में भववर्मन् का उल्लेख मिलता है और अंग- चुमनिक के लेख में रुद्रवर्मन् के बाद भववर्मन् का नाम आता है । अतः यह प्रतीत होता है कि पहले भववर्मन् ने उत्तर-पूर्व में श्रुतवर्मन् के राज्य पर अधिकार किया और कदाचित् कम्बुज लक्ष्मी से विवाह कर वह अधिकृत रूप से वहां का शासक बन बैठा और फिर वह दक्षिण की ओर बढ़ा । " इस वंश का फूनान पर सम्पूर्ण अधिकार ईशानवर्मन् के समय में हुआ था, जिसने ६१७ ई० में एक राजदूत चीन भेजा। फूनान की ओर से अन्तिम शासक रुद्रवर्मन् ने ५३९ ई० में अपना दूत चीन भेजा था । अतः ५३९६१७ ई० =-७८ वर्ष के काल में हम रुद्रवर्मन् तथा फूनान के अन्त, भववर्मन्, महेन्द्रवर्मन् अथवा चित्रसेन और ईशानवर्मन् के प्रारम्भिक काल को रख सकते हैं। अंग- चुमनिक लेख में भिषज्-कुल की कई पीढ़ियों का उल्लेख है। ब्रह्मदत्त तथा उसके भाई ब्रह्मसिंह रुद्रवर्मन् के भिषज् थे। इससे प्रतीत होता है कि रुद्र वर्मन् का राज्यकाल लम्बा था । अतः लगभग ५५० ई० तक उसका राज्य काल रखा जा सकता है। ब्रह्मदत्त के भागिनेय धर्मदेव और सिंहदेव तथा उसके भाई भववर्मन् और महेन्द्रवर्मन् के वैद्य थे । धर्मदेव का पुत्र सिंहवीर ईशानवर्मन् का मंत्री था और उसका पुत्र सिंहदत्त जयवर्मन् की ओर से आढयपुर का शासक था । यदि ईशानवर्मन् के अभिषेक की तिथि ६०० ई० मानें और भववर्मन् तथा उसके भाई महेन्द्रवर्मन् का लगभग ३० और २० वर्ष का राज्यकाल निर्धारित करे, तो भववर्मन् ने लगभग ५५० से ५८० तक और उसके भाई महेन्द्रवर्मन् ने लगभग ५८० से ६०० तक राज्य किया । २१. ता - प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् को सूर्यवंशज और भववर्मन् को चन्द्रवंशज कहा गया है। वकसेई- चंक्रोम लेख में कम्बुस्वयंभु के वंशजों ने सूर्य और चन्द्र कुलों का एकीकरण किया। इसके अतिरिक्त ता-प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् और भववर्मन् के बीच में कम्बुज राजलक्ष्मी का उल्लेख है । मजुमदार के मतानुसार यह प्रतीत होता है कि भववर्मन् ने कम्बुज राजलक्ष्मी से, जो कदाचित् श्रेष्ठवर्मन् ने की पुत्री थी, विवाह कर दोनों वंशों को एक में मिलाया और उसका सम्पूर्ण कम्बुज पर अधिकार हो गया ।
के लेख में जो वंशावली दी गयी है उसमें श्रुतवर्मन् को मूल कहा गया है और उसी ने अपने देश को फूनान से मुक्त कराया । उसके पुत्र श्रेष्ठवर्मन् की राजधानी श्रेष्ठपुर थी जिसका उल्लेख पहले हो चुका है । भववर्मन् का इस वंश से कोई सम्बन्ध न था। इसका पितामह सार्वभौम शासक रहा हो; जैसा कि उसके नाम से प्रतीत होता है, पर इसमें सन्देह है । " उसका पुत्र वीरवर्मन्, जो भववर्मन् का पिता था, एक साधारण व्यक्ति था और उसने अपनी कन्या का विवाह शर्वशर्मन् से किया था । भववर्मन् ने अपने पुरुषार्थ से अपने राज्य का निर्माण किया। उसके लेखों के मिलने के स्थान से पता चलता है कि वे बटम-वंग के पश्चिम में पोंग चगवें, त्रग छड़ों से तीस मील उतर पश्चिम, मेकांग नदी के पूर्व में कोपोंग सिएम तथा स्तुग त्रांग प्रान्तों में मिले । कम्बुज देश के मध्य भाग में भववर्मन् ने अपने राज्य का निर्माण कर लिया था। इसके उत्तर पूर्व में श्रेष्ठवर्मन् का राज्य था जिसकी राजधानी श्रेष्ठपुर लाओस के वसाक के निकट थी । उन्नीस. भववर्मन् के पिता वीरवर्मन् को किसी लेख में राजकीय उपाधि नहीं दी गयी है। सिडो के मतानुसार उसका नाम श्री था और सार्वभौम से उसकी राजनीतिक सत्ता का संकेत होता है । गुप्त वंश के स्थापक श्री गुप्त का नाम श्री था और गुप्त से उसके वंश का संकेत होता है। भववर्मन् के अपने तथा अन्य सम्बन्धित लेखों से प्रतीत होता है कि उसने स्वभुज-बल से अपने राज्य का निर्माण किया । अतः इस विषय पर निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि श्री सार्वभौम भी कहीं का शासक था अथवा वह कोई सामान्य व्यक्ति था । बीस. सिडो के मतानुसार भववर्मन् और उसके भाई चित्रसेन ने फूनान पर आक्रमण किया और पूर्व में मेकांग पर ऋते, मुन और उग्रक के बीच बुरिअम, पश्चिम में विशाल झील के आगे भोंगोल बोराई तक अपना राज्य विस्तृत किया। दक्षिण में फूनान की राजधानी टू-मो से न-फुत्र ले जायी गयी , सिडो, बुशून्य इशून्य फ्राशून्य, भाग तैंतालीस, पृशून्य तीन-चार। हन-ये के लेख में भववर्मन् को महाराजाधिराज कहा गया है । मजुमदार के अनुसार इस लेख का सम्बन्ध भववर्मन् द्वितीय से है। । म्बुज देश का प्रारम्भिक इतिहास ता प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् के बाद कम्बुज राजलक्ष्मी और दूसरे पद में भववर्मन् का उल्लेख मिलता है और अंग- चुमनिक के लेख में रुद्रवर्मन् के बाद भववर्मन् का नाम आता है । अतः यह प्रतीत होता है कि पहले भववर्मन् ने उत्तर-पूर्व में श्रुतवर्मन् के राज्य पर अधिकार किया और कदाचित् कम्बुज लक्ष्मी से विवाह कर वह अधिकृत रूप से वहां का शासक बन बैठा और फिर वह दक्षिण की ओर बढ़ा । " इस वंश का फूनान पर सम्पूर्ण अधिकार ईशानवर्मन् के समय में हुआ था, जिसने छः सौ सत्रह ईशून्य में एक राजदूत चीन भेजा। फूनान की ओर से अन्तिम शासक रुद्रवर्मन् ने पाँच सौ उनतालीस ईशून्य में अपना दूत चीन भेजा था । अतः पाँच लाख उनतालीस हज़ार छः सौ सत्रह ईशून्य =-अठहत्तर वर्ष के काल में हम रुद्रवर्मन् तथा फूनान के अन्त, भववर्मन्, महेन्द्रवर्मन् अथवा चित्रसेन और ईशानवर्मन् के प्रारम्भिक काल को रख सकते हैं। अंग- चुमनिक लेख में भिषज्-कुल की कई पीढ़ियों का उल्लेख है। ब्रह्मदत्त तथा उसके भाई ब्रह्मसिंह रुद्रवर्मन् के भिषज् थे। इससे प्रतीत होता है कि रुद्र वर्मन् का राज्यकाल लम्बा था । अतः लगभग पाँच सौ पचास ईशून्य तक उसका राज्य काल रखा जा सकता है। ब्रह्मदत्त के भागिनेय धर्मदेव और सिंहदेव तथा उसके भाई भववर्मन् और महेन्द्रवर्मन् के वैद्य थे । धर्मदेव का पुत्र सिंहवीर ईशानवर्मन् का मंत्री था और उसका पुत्र सिंहदत्त जयवर्मन् की ओर से आढयपुर का शासक था । यदि ईशानवर्मन् के अभिषेक की तिथि छः सौ ईशून्य मानें और भववर्मन् तथा उसके भाई महेन्द्रवर्मन् का लगभग तीस और बीस वर्ष का राज्यकाल निर्धारित करे, तो भववर्मन् ने लगभग पाँच सौ पचास से पाँच सौ अस्सी तक और उसके भाई महेन्द्रवर्मन् ने लगभग पाँच सौ अस्सी से छः सौ तक राज्य किया । इक्कीस. ता - प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् को सूर्यवंशज और भववर्मन् को चन्द्रवंशज कहा गया है। वकसेई- चंक्रोम लेख में कम्बुस्वयंभु के वंशजों ने सूर्य और चन्द्र कुलों का एकीकरण किया। इसके अतिरिक्त ता-प्रोम के लेख में श्रेष्ठवर्मन् और भववर्मन् के बीच में कम्बुज राजलक्ष्मी का उल्लेख है । मजुमदार के मतानुसार यह प्रतीत होता है कि भववर्मन् ने कम्बुज राजलक्ष्मी से, जो कदाचित् श्रेष्ठवर्मन् ने की पुत्री थी, विवाह कर दोनों वंशों को एक में मिलाया और उसका सम्पूर्ण कम्बुज पर अधिकार हो गया ।
लंदन, ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को लोगों ने लॉकडाउन के विरोध में प्रदर्शन किया और शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन किया। पुलिस ने इस दौरान 19 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक लोग लॉकडाउन के नियमों के खिलाफ हाइड पार्क में प्रदर्शन कर रहे थे और इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करते हुए लोगों का एक समूह काफी नजदीक आ गया जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लंदन के पुलिस उपायुक्त लॉरेंस टेलर ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने हाइड पार्क में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की लेकिन लोग नहीं माने और इस दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 10 लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में 13 मई से लॉकडाउन के नियमों में कुछ ढील देते हुए लोगों को पार्कों में जाने की इजाजत दी गयी थी लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अभी भी पाबंदी है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) से गंभीर रूप से जूझ रहे ब्रिटेन में इसके संक्रमण से अब तक 34,546 लोगों की मौत हो चुकी है।
लंदन, ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को लोगों ने लॉकडाउन के विरोध में प्रदर्शन किया और शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन किया। पुलिस ने इस दौरान उन्नीस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक लोग लॉकडाउन के नियमों के खिलाफ हाइड पार्क में प्रदर्शन कर रहे थे और इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करते हुए लोगों का एक समूह काफी नजदीक आ गया जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लंदन के पुलिस उपायुक्त लॉरेंस टेलर ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने हाइड पार्क में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की लेकिन लोग नहीं माने और इस दौरान उन्नीस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा दस लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में तेरह मई से लॉकडाउन के नियमों में कुछ ढील देते हुए लोगों को पार्कों में जाने की इजाजत दी गयी थी लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अभी भी पाबंदी है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से गंभीर रूप से जूझ रहे ब्रिटेन में इसके संक्रमण से अब तक चौंतीस,पाँच सौ छियालीस लोगों की मौत हो चुकी है।
Faridabad/Alive News : एनएच-3 स्थित डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में गत वर्षो की तरह ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमे कालेज रैडक्रॉस यूनिट के नेतृत्व में महाविद्यालय के अन्य सभाओं एवं इकाईयो-एन. एस. एस. , राजनीति शास्त्र संघ, महिला प्रकोष्ठ एवं रैड रिब्बन क्लब के अन्र्तगत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ. सतीश आहूजा ने की और सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन कॉलेज के रैडक्रॉस सलाहकार प्रो. दिनेश चन्द्र कुमेड़ी ने किया। विभिन्न खण्डों में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह मिनी आडी मे लोकतत्र, मतदाता की शक्ति, वोट का महत्व, प्रजातन्त्र में जनता के अधिकार, संविधान एवं न्यायपालिका द्वारा जनता के अधिकारों का सरक्षण भारत में प्रजातंत्र की स्थिति, नागरिकों के कर्तव्य एवं अधिकार एवं मतदान में जनता का दायित्व आदि विषयों पर कालेज के विभिन्न प्रकोष्ठो एवं इकाईयों के छात्र-छात्राओं ने भाषण प्रतियोगिता, स्लोगन राइटिंग, रंगोली द्वारा विचारों की अभिव्यित आदि प्रतियोगिताओं में भाग लिया। प्राचार्य डॉ. आहूजा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्रों को जाति, धर्म, सम्प्रदाय, भाषा, क्षेत्र, आदि को नकारकर आदर्श उम्मीदवार को अपना बहमूल्य वोट देकर समाज के विकास एवं राष्ट्र निर्माण में युवा अपना योगदान दे और वोट के मूल्य को समझे। लोगों के बहकाये में न आये। कॉलेज के यूथ रैडक्रॉस सलाहकार प्रो. दिनेश चन्द्र कुमेड़ी ने युवा छात्र-छात्राओं को संविधान निर्माण, भारत की स्वतन्त्रता संग्राम, चुनाव आयोग, न्यायपालिका की भूमिका और जनता के मत के महत्व पर सम्बोधित किया। यह कार्यक्रम डीएवी कॉलेज द्वारा हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग एवं हरियाणा ऐडस नियंत्रण सोसाइटी के निर्देशों के अन्र्तगत युवा छात्र-छात्राओं को जागरुक करने हेतू किया गया।
Faridabad/Alive News : एनएच-तीन स्थित डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में गत वर्षो की तरह ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमे कालेज रैडक्रॉस यूनिट के नेतृत्व में महाविद्यालय के अन्य सभाओं एवं इकाईयो-एन. एस. एस. , राजनीति शास्त्र संघ, महिला प्रकोष्ठ एवं रैड रिब्बन क्लब के अन्र्तगत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ. सतीश आहूजा ने की और सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन कॉलेज के रैडक्रॉस सलाहकार प्रो. दिनेश चन्द्र कुमेड़ी ने किया। विभिन्न खण्डों में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह मिनी आडी मे लोकतत्र, मतदाता की शक्ति, वोट का महत्व, प्रजातन्त्र में जनता के अधिकार, संविधान एवं न्यायपालिका द्वारा जनता के अधिकारों का सरक्षण भारत में प्रजातंत्र की स्थिति, नागरिकों के कर्तव्य एवं अधिकार एवं मतदान में जनता का दायित्व आदि विषयों पर कालेज के विभिन्न प्रकोष्ठो एवं इकाईयों के छात्र-छात्राओं ने भाषण प्रतियोगिता, स्लोगन राइटिंग, रंगोली द्वारा विचारों की अभिव्यित आदि प्रतियोगिताओं में भाग लिया। प्राचार्य डॉ. आहूजा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्रों को जाति, धर्म, सम्प्रदाय, भाषा, क्षेत्र, आदि को नकारकर आदर्श उम्मीदवार को अपना बहमूल्य वोट देकर समाज के विकास एवं राष्ट्र निर्माण में युवा अपना योगदान दे और वोट के मूल्य को समझे। लोगों के बहकाये में न आये। कॉलेज के यूथ रैडक्रॉस सलाहकार प्रो. दिनेश चन्द्र कुमेड़ी ने युवा छात्र-छात्राओं को संविधान निर्माण, भारत की स्वतन्त्रता संग्राम, चुनाव आयोग, न्यायपालिका की भूमिका और जनता के मत के महत्व पर सम्बोधित किया। यह कार्यक्रम डीएवी कॉलेज द्वारा हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग एवं हरियाणा ऐडस नियंत्रण सोसाइटी के निर्देशों के अन्र्तगत युवा छात्र-छात्राओं को जागरुक करने हेतू किया गया।
पाकिस्तान सरकार ने सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को सेवा विस्तार के मामले में गुरुवार को एकबार फिर याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से 28 नवंबर के फैसले पर स्थगन आदेश देने का आग्रह किया है। इस हाई प्रोफाइल केस में सरकार की तरफ से दूसरी बार ऐसी याचिका दायर की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि 'न्याय के हित' में वह 28 नवंबर 2०19 के अपने फैसले पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी करे। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय देते समय कई अहम सांविधानिक और कानूनी बिंदुओं का संज्ञान नहीं लिया है। साथ ही यह भी दलील दी गई है कि सेना प्रमुख के सेवा विस्तार मामले पर विचार करते समय शीर्ष अदालत ने जजों का कार्यकाल बढ़ाए जाने से जुड़े अपने ही फैसले को आधार नहीं बनाया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 28 नवंबर को जनरल बाजवा को छह महीने का सेवा विस्तार दिया था। यह विस्तार इस शर्त के साथ दिया गया था कि सरकार छह माह की अवधि में सेना प्रमुख को सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति देने के लिए संसद में एक कानून पारित कराएगी। यह फैसला उस समय दिया गया था, जब जनरल बाजवा 28 नवंबर की आधी रात को ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने अगस्त में जनरल बाजवा को अगले तीन साल के लिए सेवा विस्तार दे दिया था, जिसे 26 नवंबर को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था। आज दायर की गई याचिका में कहा गया है, 'जब तक इस सिविल पुनरीक्षण याचिका के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर रोक लगानी चाहिए। अगर इस पर कोई रोक नहीं लगाई जाती है तो याचिकाकताओं को गंभीर नुकसान होगा और मुख्य न्यायाधीश को पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के लिए पांच न्यायधीशों की एक पीठ का गठन करनी चाहिए। इससे पहली याचिका में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कार्यवाही कैमरे के सामने कराए जाने का आग्रह किया था। इसमें कहा गया था कि अपने फैसले में 'अहम संवैधानिक और कानूनी' बिंदुओं को शामिल नहीं किया था और सुप्रीम कोर्ट अतिरिक्त और तदर्थ न्यायधीशों को स्वयं ही सेवा विस्तार दे रहा है और यह इस मामले में सरकार अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकती है। गौरतलब है कि संघीय मंत्रिमंडल की आपातकालीन बैठक में सेना कानून में संशोधन को मंजूरी दी गई थी, जिसमें कहा गया है कि सभी सेना प्रमुखों के कार्यकाल में विस्तार की शक्ति प्रधानमंत्री के पास होगी। इस संबंध में संशोधन के लिए राष्ट्रीय असेम्बली में शुक्रवार को एक विधेयक पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर को अपने एक संक्षिप्त फैसले में संघीय सरकार को सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को छह माह का सेवा विस्तार करने की अनुमति दी थी और 16 दिसंबर को सेवा विस्तार मामले में विस्तृत फैसला सुनाया था।
पाकिस्तान सरकार ने सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को सेवा विस्तार के मामले में गुरुवार को एकबार फिर याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से अट्ठाईस नवंबर के फैसले पर स्थगन आदेश देने का आग्रह किया है। इस हाई प्रोफाइल केस में सरकार की तरफ से दूसरी बार ऐसी याचिका दायर की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि 'न्याय के हित' में वह अट्ठाईस नवंबर दो हज़ार उन्नीस के अपने फैसले पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी करे। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय देते समय कई अहम सांविधानिक और कानूनी बिंदुओं का संज्ञान नहीं लिया है। साथ ही यह भी दलील दी गई है कि सेना प्रमुख के सेवा विस्तार मामले पर विचार करते समय शीर्ष अदालत ने जजों का कार्यकाल बढ़ाए जाने से जुड़े अपने ही फैसले को आधार नहीं बनाया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अट्ठाईस नवंबर को जनरल बाजवा को छह महीने का सेवा विस्तार दिया था। यह विस्तार इस शर्त के साथ दिया गया था कि सरकार छह माह की अवधि में सेना प्रमुख को सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति देने के लिए संसद में एक कानून पारित कराएगी। यह फैसला उस समय दिया गया था, जब जनरल बाजवा अट्ठाईस नवंबर की आधी रात को ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने अगस्त में जनरल बाजवा को अगले तीन साल के लिए सेवा विस्तार दे दिया था, जिसे छब्बीस नवंबर को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था। आज दायर की गई याचिका में कहा गया है, 'जब तक इस सिविल पुनरीक्षण याचिका के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर रोक लगानी चाहिए। अगर इस पर कोई रोक नहीं लगाई जाती है तो याचिकाकताओं को गंभीर नुकसान होगा और मुख्य न्यायाधीश को पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के लिए पांच न्यायधीशों की एक पीठ का गठन करनी चाहिए। इससे पहली याचिका में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कार्यवाही कैमरे के सामने कराए जाने का आग्रह किया था। इसमें कहा गया था कि अपने फैसले में 'अहम संवैधानिक और कानूनी' बिंदुओं को शामिल नहीं किया था और सुप्रीम कोर्ट अतिरिक्त और तदर्थ न्यायधीशों को स्वयं ही सेवा विस्तार दे रहा है और यह इस मामले में सरकार अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकती है। गौरतलब है कि संघीय मंत्रिमंडल की आपातकालीन बैठक में सेना कानून में संशोधन को मंजूरी दी गई थी, जिसमें कहा गया है कि सभी सेना प्रमुखों के कार्यकाल में विस्तार की शक्ति प्रधानमंत्री के पास होगी। इस संबंध में संशोधन के लिए राष्ट्रीय असेम्बली में शुक्रवार को एक विधेयक पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अट्ठाईस नवंबर को अपने एक संक्षिप्त फैसले में संघीय सरकार को सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को छह माह का सेवा विस्तार करने की अनुमति दी थी और सोलह दिसंबर को सेवा विस्तार मामले में विस्तृत फैसला सुनाया था।
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Ryan Tremblay. रयान ट्रेमब्ले एक बास्केटबॉल कोच और National Sports ID and STACK Basketball के मालिक हैं। 30 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, रयान बास्केटबॉल कोचिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और वेबसाइट डिज़ाइन में माहिर हैं। रयान ने National Sports ID को युवा एथलीटों की आयु/ग्रेड को सत्यापित करने के लिए और युवा एथलीटों को मेच्योर व्यक्तियों और बास्केटबॉल खिलाड़ियों में विकसित होने के लिए प्रेरित करने के लिए STACK Basketball बनाया। रयान Bergen County में एक फर्स्ट टीम ऑल-डिकेड बास्केटबॉल खिलाड़ी थे और 1,730 अंकों के साथ काउंटी के इतिहास में शीर्ष 20 सर्वकालिक अग्रणी स्कोरर में पूरा किया। ये बास्केटबॉल छात्रवृत्ति पर कैल्डवेल विश्वविद्यालय गए जहां वे तीन चैंपियनशिप टीमों का हिस्सा थे। रयान दो बार ऑल-मेट्रोपॉलिटन, ऑल-स्टेट, और ऑल-कॉन्फ्रेंस पॉइंट गार्ड और स्कूल के इतिहास में ऑल-टाइम थ्री-पॉइंट लीडर थे, इन्हें काल्डवेल यूनिवर्सिटी एथलेटिक हॉल ऑफ फ़ेम में उतारा। यहाँ पर 28 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल २,८४१ बार देखा गया है। क्या आप एक बेहतर बास्केटबॉल प्लेयर बनना चाहते हैं? भले आप अभी बिगिनर हैं या फिर अभी गेम को खेलना शुरू करने की उम्मीद ही कर रहे हैं, ऐसे कई सारे तरीके हैं, जिनके जरिए आप अपनी बास्केटबॉल स्किल्स में सुधार कर सकते हैं। आखिरकार, यहाँ तक कि सबसे ज्यादा कॉम्पटिटिव प्लेयर्स भी हर दिन जोरदार मेहनत करके ही खुद को इस मुकाम पर लेकर आते हैं! अपनी पोजीशन को डेवलप करने की कोशिश करें या फिर बेहतर तरीके से ड्रिबल (dribble) करना सीखें और आप बस आप भी अपनी नेशनल बास्केटबॉल टीम में शामिल होने की ओर बढ़ जाएंगे। ड्रिबलिंग एक्सरसाइज (बेसिक) - एक अच्छी ड्रिबलिंग एक्सरसाइज की शुरुआत आपके दाएँ हाथ से एक साथ लगातार 20 ड्रिबल से और फिर हाथ को बदलकर, अपने बाएँ हाथ से लगातार एक-साथ 20 ड्रिबल करने से होती है। आप जब आपके बास्केटबॉल रूटीन को शुरू करें, तब और रूटीन के आखिर में इसके तीन सेट करें। - शुरुआत में स्थिर बने रहें, लेकिन मूव होते रहने के लिए अपने घुटनों को झुकाए रखें और अपने पैर की उँगलियों के ऊपर बाउंस करें। जब आप एक स्टेशनरी पोजीशन से ड्रिबल करने में कम्फ़र्टेबल हो जाएँ, फिर चलते समय इस एक्सरसाइज को करें। जब आप चलते समय कम्फ़र्टेबल हो जाएँ, फिर दौड़ना शुरू कर दें। 5लगातार ड्रिबल करेंः बॉल हर समय जहां भी जाए, उसे 'फील' करना सीखें, उस पर कंट्रोल बनाएँ और फिर आप उसके साथ में जो भी कर सकें, उसे ही पूरी काबिलियत के साथ करना सीखें। - आपके पास में मौजूद फ्री टाइम को बास्केटबॉल को ड्रिबल करने में बिताएँ। कोर्ट में या फिर आप जहां भी प्रैक्टिस कर रहे हैं, वहाँ ऊपर और नीचे ड्रिबल करें। जब आप स्कूल के लिए जाएँ या फिर फ्रेंड के घर जाएँ, तब रास्ते में ड्रिबल करते जाएँ। आपके लिए जितना हो सके, उतनी ज्यादा प्रैक्टिस करने बहुत जरूरी होता है। ड्रिबलिंग एक्सरसाइज (एडवांस) 1अपना पावर ड्रिबल (power-dribbling) डेवलप करेंः[७] X रिसर्च सोर्स पावर ड्रिबलिंग को क्रॉल-वॉक-रन (क्रॉल करें-चलें-दौड़ें) अप्रोच में "रन" जैसा समझें। जब आप पहली बार शुरुआत कर रहे हों, तब आपका सबसे बड़ा कंसर्न इस बात की पुष्टि करना होना चाहिए कि बॉल वापस आपके हाथ के करीब लौटकर आए, लेकिन बाद में आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि बॉल आपके हाथ तक जितनी हो सके, उतनी तेजी से और साथ ही जितना हो सके, उतने ज्यादा फोर्स और कंट्रोल के साथ में वापस आए। - ये पूरा खेल आपकी कलाई का है। पावर ड्रिबल को डेवलप करने के लिए, बॉल को हमेशा की तरह आल्टर्नेट बाउंस करते रहें और फिर बाद में थोड़े और ज्यादा पावर के साथ में करें। इसे इतनी तेजी से मत बाउंस करें कि आपका उस पर से कंट्रोल ही चला जाएः बॉल को वापस ड्रिबल करते समय अपनी आर्म को बीच में आने दिए बिना, इसे कई बार लगातार दृढ़ता से बाउंस करें, फिर वापस केजुअल ड्रिबल की तरह आल्टर्नेट करें। - धूल में ड्रिबलिंग करें।[८] X रिसर्च सोर्स यहाँ पर आपको बॉल को उसकी हमेशा वाली स्पीड से वापस पाने के लिए आपको उसे थोड़ा ज़ोर से बाउंस करना होगा। जब आपको इसकी आदत लग जाए, फिर अंदर जाएँ और ठीक उसी तरह से ड्रिंबल करें, जैसे कि आप पहले से करते आ रहे हैं। 2आपके पावर क्रॉसओवर की प्रैक्टिस करेंः[९] X रिसर्च सोर्स क्रॉसओवर एक ड्रिबल है, जिसमें बॉल हाथों के बीच में आल्टर्नेट होती है। एक क्विक क्रॉसओवर डिफेंडर के लिए बॉल को छीनना या फिर आपके मूवमेंट को फोर्स कर पाना मुश्किल बना देता है। लेट 90s में, Allen Iverson को उसके बहुत तेज और पावरफुल क्रॉसओवर के लिए जाना जाता था। - आपके दाएँ हाथ से चार बार पावर ड्रिबलिंग करके शुरुआत करें और पांचवे ड्रिबल को आपके बाएँ हाथ से एक हार्ड क्रॉसओवर तैयार करें। आपके बाएँ हाथ से भी ठीक ऐसा ही करें। फिर, क्रॉसओवर के पहले इसे तीन, फिर दो, आखिर में कुछ बार अपने पावर ड्रिबल के साथ हाथों के बीच में बदलना शुरू करें, फिर इसे फिर से शुरू करें। 3ड्रिबल स्प्रिंट्स (Dribbling sprints) करेंः[१०] X रिसर्च सोर्स पावर ड्रिबलिंग के साथ सुसाइड स्प्रिंट्स (suicide sprints) दौड़ें। बेस लाइन से लेकर फ्री-थ्रो लाइन तक ड्रिबल करें और वापस आएँ, फिर थ्री-पॉइंट लाइन पर ड्रिबल करें और वापस आएँ, फिर पूरे कोर्ट पर ड्रिबल करें। हर बार जब भी आप एक पॉइंट पर पहुंचे, तब लाइन को टच करें। शूटिंग एक्सरसाइज (मेकेनिक्स) - B=बैलेंस (Balance): शूट करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप बैलेंस में हैं। आपके पैरों को कंधे के बराबर चौड़ाई पर रखें, अपने घुटनों को झुकाए रखें और कूदने के लिए तैयार रहें। - E=आँखें (Eyes): शूट करते समय अपनी आँखों को बास्केट के ऊपर रखें। ऐसा इमेजिन करें, जैसे रिम के सामने एक सिक्का बैलेंस हो रहा है और आप आपके शूट से उसे गिराने की कोशिश कर रहे हैं। - E=कोहनी (Elbow): शूट करते समय आपकी शूटिंग-एल्बो को आपके शरीर के अंदर की ओर दबाए रखें। - F=फॉलो थ्रो (Follow Through): सुनिश्चित करें कि आप आपके शॉट के साथ फॉलो थ्रो कर रहे हैं; आपके शूटिंग हैंड में एक आर्क शेप बनना चाहिए। - C=कोन्संट्रेशन/ध्यानः ये शूटिंग का सबसे जरूरी पार्ट होता है। बॉल जहां भी जाए, उसी पर फोकस करें। जैसे ही आप शूट करने का फैसला कर लें, फिर उसके साथ ही बने रहें और अपने शॉट को करने के ऊपर ध्यान दें। - अपनी उँगलियों के पैड का इस्तेमाल करें और बॉल को इस तरह से पकड़ें, ताकि आपको आपकी सारी उँगलियों से रौशनी नजर आ सके। जब आप शूट करें, तब बॉल को आपके पीछे की ओर रोल करते हुए बॉल को आपके टार्गेट की ओर धकेलें। इसे "इंग्लिश (English)" या "स्पिन (spin)" कहते हैं। - इसे लेटकर करने की प्रैक्टिस करेंः आपकी बास्केटबॉल को सीधे हवा में शूट करें, ताकि ये वापस आपके हाथ में लौटकर आए। आप ऐसा कई घंटों तक, म्यूजिक सुनकर या फिर नींद नहीं आने पर कर सकते हैं। बॉल को हूप की ओर बढते हुए आपकी आर्म के एक हिस्से की तरह फील होना चाहिए। 3दोनों साइड्स से ले-अप्स (lay-ups) प्रैक्टिस करेंः एक ले-अप सीधे तौर पर ड्रिबलिंग, मेकेनिक्स और अप्रोच से जुड़ा है।[१४] X रिसर्च सोर्स सही फॉर्म का यूज करके, आपको हर बार एक ले-अप करना चाहिए। ले-अप्स को खासतौर से अपने नॉन-राइटिंग हैंड (जिससे आप लिखते नहीं हैं) से करना खुद को एक ज्यादा वर्स्टाइल प्लेयर बनाने का एक अच्छा तरीका है। - थ्री-पॉइंट लाइन से एक डाइगोनल पर बास्केट की ओर ड्रिबल करें। जब आप लेन लाइन पर जाएँ, तब आप हूप से केवल दो ही कदम दूर रहेंगे। अगर आप आपके दाएँ पर हैं, तो जब आप आपके दाएँ पैर से लेन लाइन पर स्टेप करते हुए एक लास्ट ड्रिबल करें और अपने बाएँ पैर से कूदें। अगर आप आपके बाएँ पैर पर हैं, तो इसका अपोजिट करें। - आपके राइट साइड पर, आपके दाएँ हाथ को बॉल के साथ ऊपर लेकर आएँ और साथ में आपके दाएँ घुटने को भी ऊपर लेकर आएँ। ऐसा इमेजिन करें कि आपकी कोहनी एक धागे के साथ आपके घुटने से जुडी है। बॉल को रिम के पीछे के बॉक्स के ऊपरी दाएँ कोने पर लक्षित करके डालें। उसे फोर्स के साथ बाउंस करने की कोशिश न करें--अंदर और ऊपर आने वाली आपकी मोमेंटम या स्पीड सबसे बड़ा काम रहेगा। शूटिंग एक्सरसाइज (एक्यूरेसी) - एक ले-अप शूट करने के साथ शुरुआत करें। लेन लाइन और थ्री पॉइंट लाइन के बीच में एक पॉइंट पर तुरंत बेसलाइन पर दौड़ लगाएँ। आपके फ्रेंड से बॉल को पास करने का और वहीं से तब तक शूट करने का कहें, जब तक कि आप इसे कर नहीं लेते। यहाँ से, लेन के कॉर्नर और बेसलाइन के एक पॉइंट के बीच में दौड़ें और एक बार फिर से शॉट करें। फिर कॉर्नर पर मूव करें, फिर फ्री-थ्रो लाइन पर जाएँ। अब जब तक कि आप आपका रास्ता नहीं बना लेते, तब तक इसी तरह से आगे बढते रहें। - जब आप लाइन में लगातार शॉट्स करते जाएँ, तब थ्री-पॉइंट लाइन पर एक ही पॉइंट्स को शामिल करते हुए बढ़ाएँ। - देखें आप एक साथ कितने फ्री थ्रो हिट कर सकते हैं। - जब आप शांत और जब पूरी तरह से थके हों या आपको साँस लेने में मुश्किल हो, तब फ्री-थ्रो शूट करने की प्रैक्टिस करें। अगर आप लाइंस में दौड़ने या फिर ड्रिबलिंग ड्रिल्स करने के बाद हैवी साँस लेते हुए लगातार फ्री-थ्रो कर सकते हैं, तो आप गेम के लिए एक सही शेप में आ चुके होंगे। 3डिफ़ेंड करते हुए फेड-अवेज (fade-aways), हुक शॉट्स (hook-shots), दूसरी क्लोज-रेंज टेक्निक्स की प्रैक्टिस करेंः[१७] X रिसर्च सोर्स एक क्लीन शॉट कर पाना कभी भी आसान नहीं होगा। अगर आप अकेले ही प्रैक्टिस करते आ रहे हैं और सभी दूरी से सभी तरह के शॉट्स कर रहे हैं, तो आपके लिए गेम में जाना और बस लोगों से टकराने की बजाय और कुछ नहीं कर पाना शायद एक शॉक की तरह लगेगा। एक डिफ़ेंडर आपके पीछे रहेगा, आपके चेहरे के सामने आएगा और आप से बॉल छीनने या आपके शॉट को ब्लॉक करने की कोशिश करेगा। - आपको आपकी आर्म के साथ पीछे की ओर जाने के लिए एक क्विक टर्न-अराउंड शॉट या फेड-अवे शॉट की जरूरत पड़ेगी।[१८] X रिसर्च सोर्स आप आपके पैरों को धकेलने पर मिली स्ट्रेंथ को खोने लग जाएँगे। 4"हॉर्स (Horse)" खेलेंः ये प्लेग्राउंड गेम आपके लिए कोर्ट के सभी कॉर्नर से सही तरीके से शॉट करने की आदत बनाने में मदद के लिए परफेक्ट होता है।[१९] X रिसर्च सोर्स जब आप आपके शॉट्स करते हैं, तब आपके मन में सबसे आसान शॉट करने का ख्याल आ सकता है, लेकिन जब आपके सामने आपके शॉट्स को पकड़ने के लायक किसी को पाते हैं, तब चीजें थोड़ी ज्यादा इंट्रेस्टिंग हो जाती हैं। डिफेंस की प्रैक्टिस करना (Practicing Defense) 1अपने डिफ़ेंसिव स्टांस या मुद्रा को बनाएँः[२०] X रिसर्च सोर्स एक ऑल-अराउंड गुड बास्केटबॉल प्लेयर बनने के लिए, आपको न केवल थ्री-पॉइंटर करते आना चाहिए, बल्कि डिफेंस में भी जाना और एक शॉट को ब्लॉक भी करते आना चाहिए। अपने डिफेंस गेम को डेवलप करने का पहला स्टेप आपकी मुद्रा को बनाने के साथ शुरू होता है। - अपने पैरों के बॉल पर खड़े होकर अपने शरीर के साथ एक चौड़ा बेस बनाकर रखें। अपने बट (butt) को नीचे और आपके हिप्स को पीछे रखें। - आपकी आर्म्स को ऊपर और बाहर रहना चाहिए। अफेंसिव प्लेयर तक जाने या उसे टच करने की बहुत ज्यादा कोशिश मत करें, नहीं तो आपके लिए फ़ाउल कॉल हो जाएगा। उनका इस्तेमाल प्लेयर को डिसट्रेक्ट करने के लिए करें और पास और शॉट्स को ब्लॉक करने की कोशिश करें। - ध्यान रखें कि आप सामने वाले प्लेयर के पेट या पैरों के ऊपर फोकस नहीं कर रहे हैं। अगर आप ऐसा करेंगे, तो आपके ऐसा करने पर हर बार वो आपको बास्केट तक ले ही जाएगा। 2अपने शफल स्टेप (shuffle step) प्रैक्टिस करेंः एक कॉमन बास्केटबॉल ड्रिल में कोर्ट में और वापस शफल स्टेपिंग (साइडवेज में तेजी से मूव करना) शामिल होगी।[२२] X रिसर्च सोर्स एक टीममेट से लेफ्ट और राइट ड्रिबल करा के डाइरैक्शन बदलने की प्रैक्टिस करें। मूवमेंट्स की कॉपी करके एक डिफ़ेंसिव स्टांस में पीछे और सामने मूव करें। 3अफेंसिव प्लेयर को अपने पैर से रोक लेंः आपके लीड फुट को अफेंसिव प्लेयर की हूप की लेन के बीच में रखकर, उसको साइडलाइन की ओर धकेलने की कोशिश करें। तो, अगर वो मिडिल में आ रहा है, तो उसे आपके लीडिंग राइट फुट से लेफ्ट में धकेलें। आपको लेन और बास्केट तक की पहुँच को रोकने की जरूरत है, इसलिए अफेंसिव प्लेयर को साइड की तरफ धक्का देने की कोशिश करना, उसके अफेंसिव प्लान को खराब कर देगा। - एक टीममेट को कोर्ट में एक बेसलाइन से दूसरे बेसलाइन तक ड्रिबल करने के लिए रखें। अपने हाथों को अपने पीछे रखकर, आपके पैरों से ड्रिबलर को उसकी डाइरैक्शन को चेंज करने के लिए फोर्स करके डिफ़ेंसिव खेलें। आपको आगे बने रहने के लिए और उसे बॉल के साथ डाइरैक्ट करने के लिए आपके स्टेप्स को तेजी से शफल करने की जरूरत होगी। टीमवर्क को बेहतर बनाना (Improving Teamwork) - एक फास्ट ब्रेक करें। 5 के एक ग्रुप में, बॉल को ड्रिबल किए बिना, बॉल को ग्राउंड से टच करके या फिर बॉल के आपके हाथों में आने पर अपने पैरों को मूव करके पूरे कोर्ट में चक्कर लगाएँ। - हॉट पोटेटो (hot potato) खेलेंः बैकग्राउंड में चल रहे म्यूजिक पर कंट्रोल करने और अचानक से उसे पॉज करने के लिए किसी को रखें। म्यूजिक के रुकने पर जिस किसी के भी हाथ में बॉल होगी, वो आउट हो जाएगा। आपको बहुत तेजी से स्मूदली बॉल को ड्रिबल किए बिना पास करना होगा। जब आपको बॉल मिले, फिर उसे पास करने के लिए किसी को ढूंढें। 2अपनी पोजीशन के रोल को समझेंः अगर आप टीम के लिए खेलते हैं, तो आपका एक ऐसा खास रोल होगा, जिसे आपको गेम में खेलना होगा। भले आपके लिए हर बार आपके हाथ बॉल से टच होने पर एक थ्री पॉइंटर पर ड्रॉप बैक करना मजेदार लगेगा, लेकिन असल में सेंटर में केवल यही एक काम करने का नहीं होता। अपने टीममेट्स और आपके कोच से बात करके गेम के दौरान आपकी रहने वाली पोजीशन के बारे में पता करें। - पॉइंट गार्ड (point guard) कोर्ट जनरल होता है। इस पोजीशन पर, आपको कोर्ट को देखना होता है और ओफ़ेन्स को सेट करना होता है। आपको एक सेल्फलेस (अपने बारे में सोचे बिना) पास करना और एक अच्छा शूटर बनना होगा। इसके साथ ही आपकी बॉल और कोर्ट के विजन के ऊपर एक अच्छी पकड़ रहनी चाहिए। - शूटिंग गार्ड (shooting guard) पॉइंट गार्ड का एक बैकअप होता है। आमतौर पर, ये टीम का बेस्ट शूटर या अफेंसिव प्लेयर होता है। - स्माल फॉरवर्ड (small forward) सबसे ज्यादा वर्स्टाइल होता है। इसके लिए आपको ओफ़ेन्स या डिफेंस में रीबाउंड्स के लिए जाने की क्षमता के साथ एक अच्छा शूटर होना पड़ेगा और साथ ही एक बार फिर से ओफ़ेन्स तैयार करने के लिए आपको बॉल को वापस गार्ड्स के पास में किक करने लायक होना चाहिए। - पावर फॉरवर्ड (power forward) एक अच्छा डिफ़ेंसिव प्लेयर होता है और लेन में भी एक शानदार प्लेयर होता है। ये शायद टीम का सबसे बड़ा फिजिकल प्लेयर भी होता है। - सेंटर (बाकी चीजों में से) शायद टीम का सबसे लंबा प्लेयर होता है। आपको ओफ़ेन्स में लेन के गेम को कंट्रोल करने की काबिलियत के साथ में एक शानदार रीबाउंडर और पासर भी होना होगा। - इन्स्पिरेशन के लिए दूसरे प्लेयर्स का इस्तेमाल करें। जब आप नेशनल गेम या कॉलेज गेम देखें, खासतौर से उस प्लेयर को देखें, जो ठीक उसी पोजीशन पर खेलता है, जिस पर आप भी खेलते हैं। जब शूटिंग गार्ड एक थ्री पॉइंट का शॉट लेता है, तब पावर फॉरवर्ड कहाँ पर रहता है? जब सेंटर ओफ़ेन्स पर रीबाउंड के लिए जाता है, तब गार्ड क्या करता है? 3क्लीन पिक्स या स्क्रीन सेट करना सीखेंः एक पिक को तब सेट किया जाता है, जब आप ओफ़ेन्स में होते हैं और डिफ़ेंसिव प्लेयर को अपने शरीर से ब्लॉक करके अपने टीममेट्स को बॉल के लिए एक क्लियर लेन देते हैं।[२६] X रिसर्च सोर्स इसमें आपको अपने पैरों को सफाई के साथ सेट करना और स्टेटिक रखना होता है, नहीं तो इसे एक फ़ाउल कह दिया जाएगा। इसमें अपने टीममेट के साथ में बहुत अच्छे तरह से कम्यूनिकेशन की जरूरत होती है, जो आपको प्लेयर में ड्राइव करने की बजाय, डिफ़ेंसिव प्लेयर को पिक में ड्राइव करेगा। - सीधे और स्ट्रेट खड़े रहें, अपने हाथों को कम के लेवल पर अपने सामने रखें और अपने पैरों को फर्श पर रखें। आपके टीममेट को आपके आसपास का भार संभालने दें। स्ट्रॉंग रहें और अपने किसी भी झटके को सहने के लिए तैयार रहें। 4ऐसे क्रिएटिव प्ले तैयार करें, जिसमें आपकी टीम की स्ट्रेंथ का इस्तेमाल हो सकेः इसमें डिफेंस को तोड़ने का और बॉल को शॉट के लिए किसी ओपन प्लेयर के पास भेजने का मकसद होना चाहिए।[२७] X रिसर्च सोर्स बेसिक पिक पेटर्न नेम दें और पॉइंट गार्ड को उन्हें ओफ़ेन्स में लेकर जाने दें। डिफ़ेंडर के लिए इसे कोन के साथ में प्रैक्टिस करें और अपनी टाइमिंग में सुधार करें। - बेस्ट बेसिक प्ले फॉरवर्ड में से किसी एक के लिए बाहर आना और गार्ड के लिए एक पिक सेट करना होगा। गार्ड फिर लेन के अंदर ड्राइव करेगा और उसे वापस फॉरवर्ड किक करेगा, जिसे या तो ओपन रहना चाहिए या फिर गार्ड को असल में गार्ड कर रहे शॉर्टर डिफ़ेंडर के साथ मैच (शायद) करना चाहिए। मेंटल और फिजिकल स्टैमिना डेवलप करें (Developing Mental and Physical Stamina) 1रेगुलरली दौड़ लगाएँः बास्केटबॉल के एक फुल-कोर्ट गेम में काफी ज्यादा दौड़ लगाना होती है। ऐसे प्लेयर्स जिन्हें दौड़ने की आदत नहीं रहती, वो बहुत तेजी से थक जाते हैं। अगर आप कोर्ट में आपके विरोधियों का आखिरी तक सामना कर सकते हैं, तो आपका एक बेस्ट डिफ़ेंडर या शूटर बनने की कोई जरूरत नहीं रहेगी। यहाँ पर अपना स्टैमिना बढ़ाने के लिए कुछ रनिंग ड्रिल्स दी हुई हैंः - सुपरमैन ड्रिल (Superman Drill): कोर्ट में, एक बेसलाइन से स्टार्ट करें और सबसे करीबी फ्री थ्रो लाइन तक दौड़ें। अपनी फिंगरटिप्स पर 5 पुशअप्स करें, फिर खड़े हों और वापस ओरिजिनल बेसलाइन तक दौड़ें, फिर थ्री-पॉइंट लाइन तक दौड़ें, ड्रॉप करें और 10 पुश-अप्स करें और कोर्ट की हर एक लाइन पर, पीछे और सामने तब तक इसी तरह से आगे बढ़ें, जब तक कि आप पहली लाइन पर वापस नहीं आ जाते। जब आप थके हों, तब ड्रिल के बाद में कम से कम 10 फ्री थ्रो करें। - "किल ड्रिल (Kill Drill)": ये एक फुल कोर्ट, डाउन और बैक टाइम ड्रिल है। अगर आप आपके शेप में नहीं हैं, तो बस 1 मिनट 8 सेकंड (बेसलाइन से शुरू करके, दूसरे तक दौना और वापस ओरिजिनल पर आना) 4 से 6 "डाउन एंड बैक" के साथ शुरुआत करें। ये शायद 160 feet (48.8 m) तक दौड़ने के लिए काफी समय लग रहा होगा। जब आपका थोड़ा स्टैमिना बन जाए, फिर 13 डाउन और बैक को 68 सेकंड में करके देखें। फिर से, थके होने पर कम से कम 10 फ्री थ्रो शूट करें। 2गेम के बारे में आप से जितना हो सके, उतना सीखेंः[२८] X रिसर्च सोर्स स्मार्ट खेलना, सही तरीके से खेलने के जितना ही जरूरी होता है। बास्केटबॉल के नेशनल गेम के नियम आपको ऑनलाइन मिल जाएंगे, इसलिए अच्छा होगा अगर आप गेम शुरू करने के पहले ही उन्हें देख, और समझ लें। उसमें आपको ऐसी कोई बात भी स्पष्ट रूप से समझ आ जाएगी, जिसे आपने शायद गलत समझ लिया। - दूसरे प्लेयर्स से बात करें, वेबसाइट्स चेक करें, कोच से उनकी सलाह के लिए पूछें। कुछ हिस्टोरिकल रूल्स के बारे में जानकारी होना भी मदद करता है। पुराने गेम्स देखें, स्ट्रीटबॉल गेम्स देखें, बास्केटबॉल के इन्वेन्शन के बारे में पढ़ें। 3हमेशा एक टीम प्लेयर बनेंः ओपन प्लेयर की तलाश करें और बॉल को पास करें। बॉल जब आपके हाथ में हो, तब उसे अपने पास ही न रखें और कोशिश करें कि ऐसे शॉट्स करने से बचने की कोशिश करें , जिनसे आपके टीम के पॉइंट बर्बाद होने की उम्मीद हो। - रस्सी कूदने की कोशिश करें। रस्सी को जितना हो सके, उतना फास्ट, लंबा और हार्ड कूदें। आप इसे जितना बेहतर करेंगे, कोर्ट में आपका फुटवर्क उतना ही तेज हो जाएगा। 5काफी सारे पुश-अप्स, खासकर फिंगरटिप पुश-अप्स (fingertip push-ups) करेंः अगर आपकी उँगलियाँ स्ट्रॉंग होंगी, तो आप आपकी हथेली की बॉल पर बेहतर पकड़ को देखकर सरप्राइज़ हो जाएंगे। भले आपको लगता है कि आपके हाथ इतने बड़े नहीं कि आपकी हथेली में बॉल आ सके, फिर भी अगर आपकी उँगलियाँ स्ट्रॉंग हुई, तो इसे किया जा सकता है। 6आपकी कोर स्ट्रेंथ के ऊपर काम करेंः[३०] X विश्वसनीय स्त्रोत Mayo Clinic स्त्रोत (source) पर जायें एब्डोमिनल क्रंचेस (abdominal crunches), लेग लिफ्ट्स (leg lifts), प्लैंक (plank) और लोअर बैक एक्सटैन्शन ( lower back extensions)। अगर आपके कोर स्ट्रॉंग होंगे, तो आप बखूबी हिट कर सकेंगे और रिम तक पूरा भी खेल पाएंगे। - अपने स्टैमिना को बढ़ाने के लिए दौड़ें। ये गेम के दौरान आपकी मदद करेगा। - अपने पैरों के लिए हमेशा स्क्वेट्स (squats) जैसे वर्कआउट करें। - लगातार बास्केट शूट करें, मजबूत उँगलियों के लिए फिंगर पुश अप्स करें, ताकि आप बॉल को आसानी से हैंडल कर पाएँ। - नारियल पानी पीकर हाइड्रेटेड रहें। इससे आपको काफी पोटेशियम मिलेगा और इसमें किसी स्पोर्ट्स ड्रिंक से काफी कम शुगर होगी। - डिफेंस के लिए, अपनी आर्म्स को फैलाकर वॉल सिट्स (wall sits) करें। - जब भी आप गेम के पहले नर्वस फील करें, म्यूजिक सुनें और अपने जोन में आएँ। - खेल के दौरान ज्वेलरी न पहनें। गेम के बीच में ज्वेलरी से चोट लगना आपकी सोच से भी कहीं ज्यादा दर्द पहुंचा सकता है। - हर जगह, चाहे आपका बेडरूम हो या जिम, अपने शफल स्टेप्स की प्रैक्टिस करें। - जब आप शूट करें, आपकी कोहनी को अपने हाथ के नीचे रखें। अपनी कोहनी को बार रख के शूट न करें। - BEEF फॉलो करें। Beef का मतलब बैलेंस (Balance), कोहनी (Elbow) आँखें (Eyes) और फॉलो थ्रो (Follow through) होता है। - अपने कोच की बात सुनें। अगर आपको लगता है कि चीजों को केवल "आप ही के तरीके" से किया जा सकता है, तो आपके लिए सुधार करना मुश्किल होगा। इसलिए अपने कोच की बात सुनें और उन्हीं से सीखें। ज़्यादातर कोच को काफी एक्सपीरियंस रहता है और उनसे सीखना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा।
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Ryan Tremblay. रयान ट्रेमब्ले एक बास्केटबॉल कोच और National Sports ID and STACK Basketball के मालिक हैं। तीस से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, रयान बास्केटबॉल कोचिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और वेबसाइट डिज़ाइन में माहिर हैं। रयान ने National Sports ID को युवा एथलीटों की आयु/ग्रेड को सत्यापित करने के लिए और युवा एथलीटों को मेच्योर व्यक्तियों और बास्केटबॉल खिलाड़ियों में विकसित होने के लिए प्रेरित करने के लिए STACK Basketball बनाया। रयान Bergen County में एक फर्स्ट टीम ऑल-डिकेड बास्केटबॉल खिलाड़ी थे और एक,सात सौ तीस अंकों के साथ काउंटी के इतिहास में शीर्ष बीस सर्वकालिक अग्रणी स्कोरर में पूरा किया। ये बास्केटबॉल छात्रवृत्ति पर कैल्डवेल विश्वविद्यालय गए जहां वे तीन चैंपियनशिप टीमों का हिस्सा थे। रयान दो बार ऑल-मेट्रोपॉलिटन, ऑल-स्टेट, और ऑल-कॉन्फ्रेंस पॉइंट गार्ड और स्कूल के इतिहास में ऑल-टाइम थ्री-पॉइंट लीडर थे, इन्हें काल्डवेल यूनिवर्सिटी एथलेटिक हॉल ऑफ फ़ेम में उतारा। यहाँ पर अट्ठाईस रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल दो,आठ सौ इकतालीस बार देखा गया है। क्या आप एक बेहतर बास्केटबॉल प्लेयर बनना चाहते हैं? भले आप अभी बिगिनर हैं या फिर अभी गेम को खेलना शुरू करने की उम्मीद ही कर रहे हैं, ऐसे कई सारे तरीके हैं, जिनके जरिए आप अपनी बास्केटबॉल स्किल्स में सुधार कर सकते हैं। आखिरकार, यहाँ तक कि सबसे ज्यादा कॉम्पटिटिव प्लेयर्स भी हर दिन जोरदार मेहनत करके ही खुद को इस मुकाम पर लेकर आते हैं! अपनी पोजीशन को डेवलप करने की कोशिश करें या फिर बेहतर तरीके से ड्रिबल करना सीखें और आप बस आप भी अपनी नेशनल बास्केटबॉल टीम में शामिल होने की ओर बढ़ जाएंगे। ड्रिबलिंग एक्सरसाइज - एक अच्छी ड्रिबलिंग एक्सरसाइज की शुरुआत आपके दाएँ हाथ से एक साथ लगातार बीस ड्रिबल से और फिर हाथ को बदलकर, अपने बाएँ हाथ से लगातार एक-साथ बीस ड्रिबल करने से होती है। आप जब आपके बास्केटबॉल रूटीन को शुरू करें, तब और रूटीन के आखिर में इसके तीन सेट करें। - शुरुआत में स्थिर बने रहें, लेकिन मूव होते रहने के लिए अपने घुटनों को झुकाए रखें और अपने पैर की उँगलियों के ऊपर बाउंस करें। जब आप एक स्टेशनरी पोजीशन से ड्रिबल करने में कम्फ़र्टेबल हो जाएँ, फिर चलते समय इस एक्सरसाइज को करें। जब आप चलते समय कम्फ़र्टेबल हो जाएँ, फिर दौड़ना शुरू कर दें। पाँचलगातार ड्रिबल करेंः बॉल हर समय जहां भी जाए, उसे 'फील' करना सीखें, उस पर कंट्रोल बनाएँ और फिर आप उसके साथ में जो भी कर सकें, उसे ही पूरी काबिलियत के साथ करना सीखें। - आपके पास में मौजूद फ्री टाइम को बास्केटबॉल को ड्रिबल करने में बिताएँ। कोर्ट में या फिर आप जहां भी प्रैक्टिस कर रहे हैं, वहाँ ऊपर और नीचे ड्रिबल करें। जब आप स्कूल के लिए जाएँ या फिर फ्रेंड के घर जाएँ, तब रास्ते में ड्रिबल करते जाएँ। आपके लिए जितना हो सके, उतनी ज्यादा प्रैक्टिस करने बहुत जरूरी होता है। ड्रिबलिंग एक्सरसाइज एकअपना पावर ड्रिबल डेवलप करेंः[सात] X रिसर्च सोर्स पावर ड्रिबलिंग को क्रॉल-वॉक-रन अप्रोच में "रन" जैसा समझें। जब आप पहली बार शुरुआत कर रहे हों, तब आपका सबसे बड़ा कंसर्न इस बात की पुष्टि करना होना चाहिए कि बॉल वापस आपके हाथ के करीब लौटकर आए, लेकिन बाद में आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि बॉल आपके हाथ तक जितनी हो सके, उतनी तेजी से और साथ ही जितना हो सके, उतने ज्यादा फोर्स और कंट्रोल के साथ में वापस आए। - ये पूरा खेल आपकी कलाई का है। पावर ड्रिबल को डेवलप करने के लिए, बॉल को हमेशा की तरह आल्टर्नेट बाउंस करते रहें और फिर बाद में थोड़े और ज्यादा पावर के साथ में करें। इसे इतनी तेजी से मत बाउंस करें कि आपका उस पर से कंट्रोल ही चला जाएः बॉल को वापस ड्रिबल करते समय अपनी आर्म को बीच में आने दिए बिना, इसे कई बार लगातार दृढ़ता से बाउंस करें, फिर वापस केजुअल ड्रिबल की तरह आल्टर्नेट करें। - धूल में ड्रिबलिंग करें।[आठ] X रिसर्च सोर्स यहाँ पर आपको बॉल को उसकी हमेशा वाली स्पीड से वापस पाने के लिए आपको उसे थोड़ा ज़ोर से बाउंस करना होगा। जब आपको इसकी आदत लग जाए, फिर अंदर जाएँ और ठीक उसी तरह से ड्रिंबल करें, जैसे कि आप पहले से करते आ रहे हैं। दोआपके पावर क्रॉसओवर की प्रैक्टिस करेंः[नौ] X रिसर्च सोर्स क्रॉसओवर एक ड्रिबल है, जिसमें बॉल हाथों के बीच में आल्टर्नेट होती है। एक क्विक क्रॉसओवर डिफेंडर के लिए बॉल को छीनना या फिर आपके मूवमेंट को फोर्स कर पाना मुश्किल बना देता है। लेट नब्बे सेकंड में, Allen Iverson को उसके बहुत तेज और पावरफुल क्रॉसओवर के लिए जाना जाता था। - आपके दाएँ हाथ से चार बार पावर ड्रिबलिंग करके शुरुआत करें और पांचवे ड्रिबल को आपके बाएँ हाथ से एक हार्ड क्रॉसओवर तैयार करें। आपके बाएँ हाथ से भी ठीक ऐसा ही करें। फिर, क्रॉसओवर के पहले इसे तीन, फिर दो, आखिर में कुछ बार अपने पावर ड्रिबल के साथ हाथों के बीच में बदलना शुरू करें, फिर इसे फिर से शुरू करें। तीनड्रिबल स्प्रिंट्स करेंः[दस] X रिसर्च सोर्स पावर ड्रिबलिंग के साथ सुसाइड स्प्रिंट्स दौड़ें। बेस लाइन से लेकर फ्री-थ्रो लाइन तक ड्रिबल करें और वापस आएँ, फिर थ्री-पॉइंट लाइन पर ड्रिबल करें और वापस आएँ, फिर पूरे कोर्ट पर ड्रिबल करें। हर बार जब भी आप एक पॉइंट पर पहुंचे, तब लाइन को टच करें। शूटिंग एक्सरसाइज - B=बैलेंस : शूट करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप बैलेंस में हैं। आपके पैरों को कंधे के बराबर चौड़ाई पर रखें, अपने घुटनों को झुकाए रखें और कूदने के लिए तैयार रहें। - E=आँखें : शूट करते समय अपनी आँखों को बास्केट के ऊपर रखें। ऐसा इमेजिन करें, जैसे रिम के सामने एक सिक्का बैलेंस हो रहा है और आप आपके शूट से उसे गिराने की कोशिश कर रहे हैं। - E=कोहनी : शूट करते समय आपकी शूटिंग-एल्बो को आपके शरीर के अंदर की ओर दबाए रखें। - F=फॉलो थ्रो : सुनिश्चित करें कि आप आपके शॉट के साथ फॉलो थ्रो कर रहे हैं; आपके शूटिंग हैंड में एक आर्क शेप बनना चाहिए। - C=कोन्संट्रेशन/ध्यानः ये शूटिंग का सबसे जरूरी पार्ट होता है। बॉल जहां भी जाए, उसी पर फोकस करें। जैसे ही आप शूट करने का फैसला कर लें, फिर उसके साथ ही बने रहें और अपने शॉट को करने के ऊपर ध्यान दें। - अपनी उँगलियों के पैड का इस्तेमाल करें और बॉल को इस तरह से पकड़ें, ताकि आपको आपकी सारी उँगलियों से रौशनी नजर आ सके। जब आप शूट करें, तब बॉल को आपके पीछे की ओर रोल करते हुए बॉल को आपके टार्गेट की ओर धकेलें। इसे "इंग्लिश " या "स्पिन " कहते हैं। - इसे लेटकर करने की प्रैक्टिस करेंः आपकी बास्केटबॉल को सीधे हवा में शूट करें, ताकि ये वापस आपके हाथ में लौटकर आए। आप ऐसा कई घंटों तक, म्यूजिक सुनकर या फिर नींद नहीं आने पर कर सकते हैं। बॉल को हूप की ओर बढते हुए आपकी आर्म के एक हिस्से की तरह फील होना चाहिए। तीनदोनों साइड्स से ले-अप्स प्रैक्टिस करेंः एक ले-अप सीधे तौर पर ड्रिबलिंग, मेकेनिक्स और अप्रोच से जुड़ा है।[चौदह] X रिसर्च सोर्स सही फॉर्म का यूज करके, आपको हर बार एक ले-अप करना चाहिए। ले-अप्स को खासतौर से अपने नॉन-राइटिंग हैंड से करना खुद को एक ज्यादा वर्स्टाइल प्लेयर बनाने का एक अच्छा तरीका है। - थ्री-पॉइंट लाइन से एक डाइगोनल पर बास्केट की ओर ड्रिबल करें। जब आप लेन लाइन पर जाएँ, तब आप हूप से केवल दो ही कदम दूर रहेंगे। अगर आप आपके दाएँ पर हैं, तो जब आप आपके दाएँ पैर से लेन लाइन पर स्टेप करते हुए एक लास्ट ड्रिबल करें और अपने बाएँ पैर से कूदें। अगर आप आपके बाएँ पैर पर हैं, तो इसका अपोजिट करें। - आपके राइट साइड पर, आपके दाएँ हाथ को बॉल के साथ ऊपर लेकर आएँ और साथ में आपके दाएँ घुटने को भी ऊपर लेकर आएँ। ऐसा इमेजिन करें कि आपकी कोहनी एक धागे के साथ आपके घुटने से जुडी है। बॉल को रिम के पीछे के बॉक्स के ऊपरी दाएँ कोने पर लक्षित करके डालें। उसे फोर्स के साथ बाउंस करने की कोशिश न करें--अंदर और ऊपर आने वाली आपकी मोमेंटम या स्पीड सबसे बड़ा काम रहेगा। शूटिंग एक्सरसाइज - एक ले-अप शूट करने के साथ शुरुआत करें। लेन लाइन और थ्री पॉइंट लाइन के बीच में एक पॉइंट पर तुरंत बेसलाइन पर दौड़ लगाएँ। आपके फ्रेंड से बॉल को पास करने का और वहीं से तब तक शूट करने का कहें, जब तक कि आप इसे कर नहीं लेते। यहाँ से, लेन के कॉर्नर और बेसलाइन के एक पॉइंट के बीच में दौड़ें और एक बार फिर से शॉट करें। फिर कॉर्नर पर मूव करें, फिर फ्री-थ्रो लाइन पर जाएँ। अब जब तक कि आप आपका रास्ता नहीं बना लेते, तब तक इसी तरह से आगे बढते रहें। - जब आप लाइन में लगातार शॉट्स करते जाएँ, तब थ्री-पॉइंट लाइन पर एक ही पॉइंट्स को शामिल करते हुए बढ़ाएँ। - देखें आप एक साथ कितने फ्री थ्रो हिट कर सकते हैं। - जब आप शांत और जब पूरी तरह से थके हों या आपको साँस लेने में मुश्किल हो, तब फ्री-थ्रो शूट करने की प्रैक्टिस करें। अगर आप लाइंस में दौड़ने या फिर ड्रिबलिंग ड्रिल्स करने के बाद हैवी साँस लेते हुए लगातार फ्री-थ्रो कर सकते हैं, तो आप गेम के लिए एक सही शेप में आ चुके होंगे। तीनडिफ़ेंड करते हुए फेड-अवेज , हुक शॉट्स , दूसरी क्लोज-रेंज टेक्निक्स की प्रैक्टिस करेंः[सत्रह] X रिसर्च सोर्स एक क्लीन शॉट कर पाना कभी भी आसान नहीं होगा। अगर आप अकेले ही प्रैक्टिस करते आ रहे हैं और सभी दूरी से सभी तरह के शॉट्स कर रहे हैं, तो आपके लिए गेम में जाना और बस लोगों से टकराने की बजाय और कुछ नहीं कर पाना शायद एक शॉक की तरह लगेगा। एक डिफ़ेंडर आपके पीछे रहेगा, आपके चेहरे के सामने आएगा और आप से बॉल छीनने या आपके शॉट को ब्लॉक करने की कोशिश करेगा। - आपको आपकी आर्म के साथ पीछे की ओर जाने के लिए एक क्विक टर्न-अराउंड शॉट या फेड-अवे शॉट की जरूरत पड़ेगी।[अट्ठारह] X रिसर्च सोर्स आप आपके पैरों को धकेलने पर मिली स्ट्रेंथ को खोने लग जाएँगे। चार"हॉर्स " खेलेंः ये प्लेग्राउंड गेम आपके लिए कोर्ट के सभी कॉर्नर से सही तरीके से शॉट करने की आदत बनाने में मदद के लिए परफेक्ट होता है।[उन्नीस] X रिसर्च सोर्स जब आप आपके शॉट्स करते हैं, तब आपके मन में सबसे आसान शॉट करने का ख्याल आ सकता है, लेकिन जब आपके सामने आपके शॉट्स को पकड़ने के लायक किसी को पाते हैं, तब चीजें थोड़ी ज्यादा इंट्रेस्टिंग हो जाती हैं। डिफेंस की प्रैक्टिस करना एकअपने डिफ़ेंसिव स्टांस या मुद्रा को बनाएँः[बीस] X रिसर्च सोर्स एक ऑल-अराउंड गुड बास्केटबॉल प्लेयर बनने के लिए, आपको न केवल थ्री-पॉइंटर करते आना चाहिए, बल्कि डिफेंस में भी जाना और एक शॉट को ब्लॉक भी करते आना चाहिए। अपने डिफेंस गेम को डेवलप करने का पहला स्टेप आपकी मुद्रा को बनाने के साथ शुरू होता है। - अपने पैरों के बॉल पर खड़े होकर अपने शरीर के साथ एक चौड़ा बेस बनाकर रखें। अपने बट को नीचे और आपके हिप्स को पीछे रखें। - आपकी आर्म्स को ऊपर और बाहर रहना चाहिए। अफेंसिव प्लेयर तक जाने या उसे टच करने की बहुत ज्यादा कोशिश मत करें, नहीं तो आपके लिए फ़ाउल कॉल हो जाएगा। उनका इस्तेमाल प्लेयर को डिसट्रेक्ट करने के लिए करें और पास और शॉट्स को ब्लॉक करने की कोशिश करें। - ध्यान रखें कि आप सामने वाले प्लेयर के पेट या पैरों के ऊपर फोकस नहीं कर रहे हैं। अगर आप ऐसा करेंगे, तो आपके ऐसा करने पर हर बार वो आपको बास्केट तक ले ही जाएगा। दोअपने शफल स्टेप प्रैक्टिस करेंः एक कॉमन बास्केटबॉल ड्रिल में कोर्ट में और वापस शफल स्टेपिंग शामिल होगी।[बाईस] X रिसर्च सोर्स एक टीममेट से लेफ्ट और राइट ड्रिबल करा के डाइरैक्शन बदलने की प्रैक्टिस करें। मूवमेंट्स की कॉपी करके एक डिफ़ेंसिव स्टांस में पीछे और सामने मूव करें। तीनअफेंसिव प्लेयर को अपने पैर से रोक लेंः आपके लीड फुट को अफेंसिव प्लेयर की हूप की लेन के बीच में रखकर, उसको साइडलाइन की ओर धकेलने की कोशिश करें। तो, अगर वो मिडिल में आ रहा है, तो उसे आपके लीडिंग राइट फुट से लेफ्ट में धकेलें। आपको लेन और बास्केट तक की पहुँच को रोकने की जरूरत है, इसलिए अफेंसिव प्लेयर को साइड की तरफ धक्का देने की कोशिश करना, उसके अफेंसिव प्लान को खराब कर देगा। - एक टीममेट को कोर्ट में एक बेसलाइन से दूसरे बेसलाइन तक ड्रिबल करने के लिए रखें। अपने हाथों को अपने पीछे रखकर, आपके पैरों से ड्रिबलर को उसकी डाइरैक्शन को चेंज करने के लिए फोर्स करके डिफ़ेंसिव खेलें। आपको आगे बने रहने के लिए और उसे बॉल के साथ डाइरैक्ट करने के लिए आपके स्टेप्स को तेजी से शफल करने की जरूरत होगी। टीमवर्क को बेहतर बनाना - एक फास्ट ब्रेक करें। पाँच के एक ग्रुप में, बॉल को ड्रिबल किए बिना, बॉल को ग्राउंड से टच करके या फिर बॉल के आपके हाथों में आने पर अपने पैरों को मूव करके पूरे कोर्ट में चक्कर लगाएँ। - हॉट पोटेटो खेलेंः बैकग्राउंड में चल रहे म्यूजिक पर कंट्रोल करने और अचानक से उसे पॉज करने के लिए किसी को रखें। म्यूजिक के रुकने पर जिस किसी के भी हाथ में बॉल होगी, वो आउट हो जाएगा। आपको बहुत तेजी से स्मूदली बॉल को ड्रिबल किए बिना पास करना होगा। जब आपको बॉल मिले, फिर उसे पास करने के लिए किसी को ढूंढें। दोअपनी पोजीशन के रोल को समझेंः अगर आप टीम के लिए खेलते हैं, तो आपका एक ऐसा खास रोल होगा, जिसे आपको गेम में खेलना होगा। भले आपके लिए हर बार आपके हाथ बॉल से टच होने पर एक थ्री पॉइंटर पर ड्रॉप बैक करना मजेदार लगेगा, लेकिन असल में सेंटर में केवल यही एक काम करने का नहीं होता। अपने टीममेट्स और आपके कोच से बात करके गेम के दौरान आपकी रहने वाली पोजीशन के बारे में पता करें। - पॉइंट गार्ड कोर्ट जनरल होता है। इस पोजीशन पर, आपको कोर्ट को देखना होता है और ओफ़ेन्स को सेट करना होता है। आपको एक सेल्फलेस पास करना और एक अच्छा शूटर बनना होगा। इसके साथ ही आपकी बॉल और कोर्ट के विजन के ऊपर एक अच्छी पकड़ रहनी चाहिए। - शूटिंग गार्ड पॉइंट गार्ड का एक बैकअप होता है। आमतौर पर, ये टीम का बेस्ट शूटर या अफेंसिव प्लेयर होता है। - स्माल फॉरवर्ड सबसे ज्यादा वर्स्टाइल होता है। इसके लिए आपको ओफ़ेन्स या डिफेंस में रीबाउंड्स के लिए जाने की क्षमता के साथ एक अच्छा शूटर होना पड़ेगा और साथ ही एक बार फिर से ओफ़ेन्स तैयार करने के लिए आपको बॉल को वापस गार्ड्स के पास में किक करने लायक होना चाहिए। - पावर फॉरवर्ड एक अच्छा डिफ़ेंसिव प्लेयर होता है और लेन में भी एक शानदार प्लेयर होता है। ये शायद टीम का सबसे बड़ा फिजिकल प्लेयर भी होता है। - सेंटर शायद टीम का सबसे लंबा प्लेयर होता है। आपको ओफ़ेन्स में लेन के गेम को कंट्रोल करने की काबिलियत के साथ में एक शानदार रीबाउंडर और पासर भी होना होगा। - इन्स्पिरेशन के लिए दूसरे प्लेयर्स का इस्तेमाल करें। जब आप नेशनल गेम या कॉलेज गेम देखें, खासतौर से उस प्लेयर को देखें, जो ठीक उसी पोजीशन पर खेलता है, जिस पर आप भी खेलते हैं। जब शूटिंग गार्ड एक थ्री पॉइंट का शॉट लेता है, तब पावर फॉरवर्ड कहाँ पर रहता है? जब सेंटर ओफ़ेन्स पर रीबाउंड के लिए जाता है, तब गार्ड क्या करता है? तीनक्लीन पिक्स या स्क्रीन सेट करना सीखेंः एक पिक को तब सेट किया जाता है, जब आप ओफ़ेन्स में होते हैं और डिफ़ेंसिव प्लेयर को अपने शरीर से ब्लॉक करके अपने टीममेट्स को बॉल के लिए एक क्लियर लेन देते हैं।[छब्बीस] X रिसर्च सोर्स इसमें आपको अपने पैरों को सफाई के साथ सेट करना और स्टेटिक रखना होता है, नहीं तो इसे एक फ़ाउल कह दिया जाएगा। इसमें अपने टीममेट के साथ में बहुत अच्छे तरह से कम्यूनिकेशन की जरूरत होती है, जो आपको प्लेयर में ड्राइव करने की बजाय, डिफ़ेंसिव प्लेयर को पिक में ड्राइव करेगा। - सीधे और स्ट्रेट खड़े रहें, अपने हाथों को कम के लेवल पर अपने सामने रखें और अपने पैरों को फर्श पर रखें। आपके टीममेट को आपके आसपास का भार संभालने दें। स्ट्रॉंग रहें और अपने किसी भी झटके को सहने के लिए तैयार रहें। चारऐसे क्रिएटिव प्ले तैयार करें, जिसमें आपकी टीम की स्ट्रेंथ का इस्तेमाल हो सकेः इसमें डिफेंस को तोड़ने का और बॉल को शॉट के लिए किसी ओपन प्लेयर के पास भेजने का मकसद होना चाहिए।[सत्ताईस] X रिसर्च सोर्स बेसिक पिक पेटर्न नेम दें और पॉइंट गार्ड को उन्हें ओफ़ेन्स में लेकर जाने दें। डिफ़ेंडर के लिए इसे कोन के साथ में प्रैक्टिस करें और अपनी टाइमिंग में सुधार करें। - बेस्ट बेसिक प्ले फॉरवर्ड में से किसी एक के लिए बाहर आना और गार्ड के लिए एक पिक सेट करना होगा। गार्ड फिर लेन के अंदर ड्राइव करेगा और उसे वापस फॉरवर्ड किक करेगा, जिसे या तो ओपन रहना चाहिए या फिर गार्ड को असल में गार्ड कर रहे शॉर्टर डिफ़ेंडर के साथ मैच करना चाहिए। मेंटल और फिजिकल स्टैमिना डेवलप करें एकरेगुलरली दौड़ लगाएँः बास्केटबॉल के एक फुल-कोर्ट गेम में काफी ज्यादा दौड़ लगाना होती है। ऐसे प्लेयर्स जिन्हें दौड़ने की आदत नहीं रहती, वो बहुत तेजी से थक जाते हैं। अगर आप कोर्ट में आपके विरोधियों का आखिरी तक सामना कर सकते हैं, तो आपका एक बेस्ट डिफ़ेंडर या शूटर बनने की कोई जरूरत नहीं रहेगी। यहाँ पर अपना स्टैमिना बढ़ाने के लिए कुछ रनिंग ड्रिल्स दी हुई हैंः - सुपरमैन ड्रिल : कोर्ट में, एक बेसलाइन से स्टार्ट करें और सबसे करीबी फ्री थ्रो लाइन तक दौड़ें। अपनी फिंगरटिप्स पर पाँच पुशअप्स करें, फिर खड़े हों और वापस ओरिजिनल बेसलाइन तक दौड़ें, फिर थ्री-पॉइंट लाइन तक दौड़ें, ड्रॉप करें और दस पुश-अप्स करें और कोर्ट की हर एक लाइन पर, पीछे और सामने तब तक इसी तरह से आगे बढ़ें, जब तक कि आप पहली लाइन पर वापस नहीं आ जाते। जब आप थके हों, तब ड्रिल के बाद में कम से कम दस फ्री थ्रो करें। - "किल ड्रिल ": ये एक फुल कोर्ट, डाउन और बैक टाइम ड्रिल है। अगर आप आपके शेप में नहीं हैं, तो बस एक मिनट आठ सेकंड चार से छः "डाउन एंड बैक" के साथ शुरुआत करें। ये शायद एक सौ साठ feet तक दौड़ने के लिए काफी समय लग रहा होगा। जब आपका थोड़ा स्टैमिना बन जाए, फिर तेरह डाउन और बैक को अड़सठ सेकंड में करके देखें। फिर से, थके होने पर कम से कम दस फ्री थ्रो शूट करें। दोगेम के बारे में आप से जितना हो सके, उतना सीखेंः[अट्ठाईस] X रिसर्च सोर्स स्मार्ट खेलना, सही तरीके से खेलने के जितना ही जरूरी होता है। बास्केटबॉल के नेशनल गेम के नियम आपको ऑनलाइन मिल जाएंगे, इसलिए अच्छा होगा अगर आप गेम शुरू करने के पहले ही उन्हें देख, और समझ लें। उसमें आपको ऐसी कोई बात भी स्पष्ट रूप से समझ आ जाएगी, जिसे आपने शायद गलत समझ लिया। - दूसरे प्लेयर्स से बात करें, वेबसाइट्स चेक करें, कोच से उनकी सलाह के लिए पूछें। कुछ हिस्टोरिकल रूल्स के बारे में जानकारी होना भी मदद करता है। पुराने गेम्स देखें, स्ट्रीटबॉल गेम्स देखें, बास्केटबॉल के इन्वेन्शन के बारे में पढ़ें। तीनहमेशा एक टीम प्लेयर बनेंः ओपन प्लेयर की तलाश करें और बॉल को पास करें। बॉल जब आपके हाथ में हो, तब उसे अपने पास ही न रखें और कोशिश करें कि ऐसे शॉट्स करने से बचने की कोशिश करें , जिनसे आपके टीम के पॉइंट बर्बाद होने की उम्मीद हो। - रस्सी कूदने की कोशिश करें। रस्सी को जितना हो सके, उतना फास्ट, लंबा और हार्ड कूदें। आप इसे जितना बेहतर करेंगे, कोर्ट में आपका फुटवर्क उतना ही तेज हो जाएगा। पाँचकाफी सारे पुश-अप्स, खासकर फिंगरटिप पुश-अप्स करेंः अगर आपकी उँगलियाँ स्ट्रॉंग होंगी, तो आप आपकी हथेली की बॉल पर बेहतर पकड़ को देखकर सरप्राइज़ हो जाएंगे। भले आपको लगता है कि आपके हाथ इतने बड़े नहीं कि आपकी हथेली में बॉल आ सके, फिर भी अगर आपकी उँगलियाँ स्ट्रॉंग हुई, तो इसे किया जा सकता है। छःआपकी कोर स्ट्रेंथ के ऊपर काम करेंः[तीस] X विश्वसनीय स्त्रोत Mayo Clinic स्त्रोत पर जायें एब्डोमिनल क्रंचेस , लेग लिफ्ट्स , प्लैंक और लोअर बैक एक्सटैन्शन । अगर आपके कोर स्ट्रॉंग होंगे, तो आप बखूबी हिट कर सकेंगे और रिम तक पूरा भी खेल पाएंगे। - अपने स्टैमिना को बढ़ाने के लिए दौड़ें। ये गेम के दौरान आपकी मदद करेगा। - अपने पैरों के लिए हमेशा स्क्वेट्स जैसे वर्कआउट करें। - लगातार बास्केट शूट करें, मजबूत उँगलियों के लिए फिंगर पुश अप्स करें, ताकि आप बॉल को आसानी से हैंडल कर पाएँ। - नारियल पानी पीकर हाइड्रेटेड रहें। इससे आपको काफी पोटेशियम मिलेगा और इसमें किसी स्पोर्ट्स ड्रिंक से काफी कम शुगर होगी। - डिफेंस के लिए, अपनी आर्म्स को फैलाकर वॉल सिट्स करें। - जब भी आप गेम के पहले नर्वस फील करें, म्यूजिक सुनें और अपने जोन में आएँ। - खेल के दौरान ज्वेलरी न पहनें। गेम के बीच में ज्वेलरी से चोट लगना आपकी सोच से भी कहीं ज्यादा दर्द पहुंचा सकता है। - हर जगह, चाहे आपका बेडरूम हो या जिम, अपने शफल स्टेप्स की प्रैक्टिस करें। - जब आप शूट करें, आपकी कोहनी को अपने हाथ के नीचे रखें। अपनी कोहनी को बार रख के शूट न करें। - BEEF फॉलो करें। Beef का मतलब बैलेंस , कोहनी आँखें और फॉलो थ्रो होता है। - अपने कोच की बात सुनें। अगर आपको लगता है कि चीजों को केवल "आप ही के तरीके" से किया जा सकता है, तो आपके लिए सुधार करना मुश्किल होगा। इसलिए अपने कोच की बात सुनें और उन्हीं से सीखें। ज़्यादातर कोच को काफी एक्सपीरियंस रहता है और उनसे सीखना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा।
रूस के कमचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट पर गुरुवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। गुरुवार देर रात 2:51 बजे (भारतीय समयानुसार) यहां 6. 1 तीव्रता के भूकंप के झटके आए। अभी तक किसी प्रकार के जान - माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।
रूस के कमचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट पर गुरुवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। गुरुवार देर रात दो:इक्यावन बजे यहां छः. एक तीव्रता के भूकंप के झटके आए। अभी तक किसी प्रकार के जान - माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।
क्या आपने कभी केले के पकौड़े खाए हैं, जी हां केले के पकौड़े भी बनाए जाते हैं, जो बहुत स्वादिष्ट होते हैं. अगर आप नॉर्मल मैगी खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार आप मैगी के स्टफ्ड रोल बनाकर खा सकते हैं. ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं. कौन सिर में दर्द के साथ जागना चाहेगा? लेकिन यहां बताया गया है कि इससे मतली क्यों हो सकती है और इसे कैसे रोका जाए। अब तक आपने बनारसी पान के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन आज हम आपको बनारसी हलवे के बारे में बताने जा रहे हैं. मदर्स डे पर मां के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देखने के लिए इस दिन उन्हें काम से छुट्टी दें और रात के खाने में कुछ खास बनाएं।
क्या आपने कभी केले के पकौड़े खाए हैं, जी हां केले के पकौड़े भी बनाए जाते हैं, जो बहुत स्वादिष्ट होते हैं. अगर आप नॉर्मल मैगी खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार आप मैगी के स्टफ्ड रोल बनाकर खा सकते हैं. ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं. कौन सिर में दर्द के साथ जागना चाहेगा? लेकिन यहां बताया गया है कि इससे मतली क्यों हो सकती है और इसे कैसे रोका जाए। अब तक आपने बनारसी पान के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन आज हम आपको बनारसी हलवे के बारे में बताने जा रहे हैं. मदर्स डे पर मां के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देखने के लिए इस दिन उन्हें काम से छुट्टी दें और रात के खाने में कुछ खास बनाएं।
बेंगलुरू। शेयर्ड मोबिलिटी सेगमेन्ट में उपभोक्ताओं को और बेहतर एवं किफायती सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास में कैब एग्रीगेटर ओला ने 'शेयर एक्सप्रेस' को लॉन्च किया है। नए फीचर को 100 से अधिक मार्गो के लिए शुरू किया है। शेयर एक्सप्रेस के इस्तेमाल से किराए में करीब 30 फीसदी की कमी आएगी। कंपनी ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि शेयर एक्सप्रेस, ओला शेयर राईड की कीमतों में 30 फीसदी तक कमी लाकर राईड शेयरिंग के अनुभव को कई गुना बेहतर एवं किफायती बनाती है। - शेयर एक्सप्रेस फीचर को शहर के कुछ लोकप्रिय निर्धारित मार्ग पर शुरू किया गया है। - वे उपभोक्ता जिनकी पिक-अप एवं ड्रॉप-ऑफ लोकेशन आपस में मेल खाती है। - वे ओला ऐप के शेयर आइकन पर जाकर अपने लिए राईड बुक कर सकते हैं। - निकट भविष्य में ओला 10 शहरों के 300 से अधिक मार्गों पर शेयर एक्सप्रेस की सेवाओं को विस्तारित करने की योजना बना रही है। ओला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और श्रेणी प्रमुख रघुवेश सरूप ने कहा, "ओला सड़कों पर प्रदूषण एवं जाम की समस्याओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। शेयर्ड राईड के लिए हमारा नया फीचर 'शेयर एक्सप्रेस' ओला शेयर को और अधिक किफायती बनाता है। - इसके साथ राईड की कीमत 4 किलोमीटर के लिए मात्र 30 रुपये हो जाती है। - अत्याधुनिक एल्गोरिदम उन उपभोक्ताओं का मिलान करती है जो एक ही रूट पर यात्रा करना चाहते हैं।
बेंगलुरू। शेयर्ड मोबिलिटी सेगमेन्ट में उपभोक्ताओं को और बेहतर एवं किफायती सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास में कैब एग्रीगेटर ओला ने 'शेयर एक्सप्रेस' को लॉन्च किया है। नए फीचर को एक सौ से अधिक मार्गो के लिए शुरू किया है। शेयर एक्सप्रेस के इस्तेमाल से किराए में करीब तीस फीसदी की कमी आएगी। कंपनी ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि शेयर एक्सप्रेस, ओला शेयर राईड की कीमतों में तीस फीसदी तक कमी लाकर राईड शेयरिंग के अनुभव को कई गुना बेहतर एवं किफायती बनाती है। - शेयर एक्सप्रेस फीचर को शहर के कुछ लोकप्रिय निर्धारित मार्ग पर शुरू किया गया है। - वे उपभोक्ता जिनकी पिक-अप एवं ड्रॉप-ऑफ लोकेशन आपस में मेल खाती है। - वे ओला ऐप के शेयर आइकन पर जाकर अपने लिए राईड बुक कर सकते हैं। - निकट भविष्य में ओला दस शहरों के तीन सौ से अधिक मार्गों पर शेयर एक्सप्रेस की सेवाओं को विस्तारित करने की योजना बना रही है। ओला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और श्रेणी प्रमुख रघुवेश सरूप ने कहा, "ओला सड़कों पर प्रदूषण एवं जाम की समस्याओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। शेयर्ड राईड के लिए हमारा नया फीचर 'शेयर एक्सप्रेस' ओला शेयर को और अधिक किफायती बनाता है। - इसके साथ राईड की कीमत चार किलोग्राममीटर के लिए मात्र तीस रुपयापये हो जाती है। - अत्याधुनिक एल्गोरिदम उन उपभोक्ताओं का मिलान करती है जो एक ही रूट पर यात्रा करना चाहते हैं।
दिल्ली में एक महिला से टैक्सी में कथित बलात्कार के मामले में पुलिस ने कैब ड्राइवर को गिरफ़्तार करने का दावा किया है. घटना शुक्रवार रात की है जब 27 वर्षीय महिला देर रात वसंत विहार से किराए की कार से अपने घर सराय रोहिल्ला आ रही थी. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कैब ड्राइवर को मथुरा से गिरफ़्तार किया गया है. इससे पहले, दिल्ली के पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि महिला ने उस टैक्सी ड्राइवर के ख़िलाफ़ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसे उन्होंने वसंत विहार से सराय रोहिल्ला अपने घर लौटने के लिए किराए पर लिया था. मधुर वर्मा ने बताया, "महिला ने शुक्रवार की रात करीब साढ़े 10 बजे उबर से किराए की टैक्सी मंगाई थी. ड्राइवर ने जब महिला से कार में रेप करने की कोशिश की तो महिला ने विरोध किया. " उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने धमकी देकर महिला से बलात्कार किया. मधुर वर्मा ने बताया, "महिला ने संयम बरतते हुए ड्राइवर से घर के पास तक छोड़ देने का आग्रह किया. जब ड्राइवर ने उन्हें छोड़ा तो उन्होंने मोबाइल से कार की फोटो खींच ली. " पुलिस के अनुसार वारदात में इस्तेमाल कार मथुरा के पास बरामद कर ली गई है. उबर ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हें इस घटना के बारे में शनिवार की सुबह पता चला और वह पुलिस की सहायता कर रहे हैं. इसमें पुलिस को कार और ड्राइवर के बारे में पूरी जानकारी देना शामिल है. सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए जा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष का कहना है कि ये मामला एक फिर बताता है कि निर्भया केस के बाद आई जागरुकता के बावजूद दिल्ली अब भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है.
दिल्ली में एक महिला से टैक्सी में कथित बलात्कार के मामले में पुलिस ने कैब ड्राइवर को गिरफ़्तार करने का दावा किया है. घटना शुक्रवार रात की है जब सत्ताईस वर्षीय महिला देर रात वसंत विहार से किराए की कार से अपने घर सराय रोहिल्ला आ रही थी. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कैब ड्राइवर को मथुरा से गिरफ़्तार किया गया है. इससे पहले, दिल्ली के पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि महिला ने उस टैक्सी ड्राइवर के ख़िलाफ़ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसे उन्होंने वसंत विहार से सराय रोहिल्ला अपने घर लौटने के लिए किराए पर लिया था. मधुर वर्मा ने बताया, "महिला ने शुक्रवार की रात करीब साढ़े दस बजे उबर से किराए की टैक्सी मंगाई थी. ड्राइवर ने जब महिला से कार में रेप करने की कोशिश की तो महिला ने विरोध किया. " उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने धमकी देकर महिला से बलात्कार किया. मधुर वर्मा ने बताया, "महिला ने संयम बरतते हुए ड्राइवर से घर के पास तक छोड़ देने का आग्रह किया. जब ड्राइवर ने उन्हें छोड़ा तो उन्होंने मोबाइल से कार की फोटो खींच ली. " पुलिस के अनुसार वारदात में इस्तेमाल कार मथुरा के पास बरामद कर ली गई है. उबर ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हें इस घटना के बारे में शनिवार की सुबह पता चला और वह पुलिस की सहायता कर रहे हैं. इसमें पुलिस को कार और ड्राइवर के बारे में पूरी जानकारी देना शामिल है. सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए जा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष का कहना है कि ये मामला एक फिर बताता है कि निर्भया केस के बाद आई जागरुकता के बावजूद दिल्ली अब भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है.
जानी-मानी हॉलीवुड एक्ट्रेस जेनिफर लोपेज अपने लुक्स को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। वे न केवल अभिनेत्री हैं बल्कि सिंगर, रेकॉर्ड निर्माता, डांसर, फैशन डिजाइनर, टेलीविजन प्रोड्यूसर भी हैं। फोब्र्स जैसी प्रतिष्ठित मैग्जीन उन्हें हॉलीवुड में लैटिन अमरीकी मूल की सबसे अमीर व्यक्ति की सूची में शामिल कर चुकी है। एक्ट्रेस अपने अलग-अलग लुक की तस्वीरें फैंस के साथ भी शेयर करती रहती हैं। हाल ही एक्ट्रेस ने अपनी कुछ हॉट तस्वीरें शेयर की हैं, जो सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। एनाकोंडा फेम जेनिफर लोपेज इन फोटोज में प्रिंटेड स्काई ब्लू आउटफिट में नजर आ रही हैं, जिसे एक्ट्रेस ने व्हाइट लॉन्ग कोट के साथ टीम-अप किया हुआ है। साथ ही उन्होंने हील पहनी हुई हैं। न्यूड मेकअप और ओपन हेयर्स से एक्ट्रेस ने अपने लुक को कम्पलीट किया हुआ है। एक्ट्रेस ने हाथ में पर्स कैरी किया हुआ है। इस लुक में जेनिफर हॉट लग रही हैं। लोपेज सीढिय़ों पर बैठ कर शानदार पोज दे रही हंै। उनकी इन तस्वीरों को देख कर फैंस क्रेजी हो गए हैं। फैंस इन तस्वीरों को खूब लाइक्स-कमेंट्स दे रहे हैं। जे लो के नाम से मशहूर जेनिफर जल्द ही फिल्म मैरी मी में नजर आने वाली हैं। ये फिल्म 2022 में रिलीज होगी।
जानी-मानी हॉलीवुड एक्ट्रेस जेनिफर लोपेज अपने लुक्स को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। वे न केवल अभिनेत्री हैं बल्कि सिंगर, रेकॉर्ड निर्माता, डांसर, फैशन डिजाइनर, टेलीविजन प्रोड्यूसर भी हैं। फोब्र्स जैसी प्रतिष्ठित मैग्जीन उन्हें हॉलीवुड में लैटिन अमरीकी मूल की सबसे अमीर व्यक्ति की सूची में शामिल कर चुकी है। एक्ट्रेस अपने अलग-अलग लुक की तस्वीरें फैंस के साथ भी शेयर करती रहती हैं। हाल ही एक्ट्रेस ने अपनी कुछ हॉट तस्वीरें शेयर की हैं, जो सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। एनाकोंडा फेम जेनिफर लोपेज इन फोटोज में प्रिंटेड स्काई ब्लू आउटफिट में नजर आ रही हैं, जिसे एक्ट्रेस ने व्हाइट लॉन्ग कोट के साथ टीम-अप किया हुआ है। साथ ही उन्होंने हील पहनी हुई हैं। न्यूड मेकअप और ओपन हेयर्स से एक्ट्रेस ने अपने लुक को कम्पलीट किया हुआ है। एक्ट्रेस ने हाथ में पर्स कैरी किया हुआ है। इस लुक में जेनिफर हॉट लग रही हैं। लोपेज सीढिय़ों पर बैठ कर शानदार पोज दे रही हंै। उनकी इन तस्वीरों को देख कर फैंस क्रेजी हो गए हैं। फैंस इन तस्वीरों को खूब लाइक्स-कमेंट्स दे रहे हैं। जे लो के नाम से मशहूर जेनिफर जल्द ही फिल्म मैरी मी में नजर आने वाली हैं। ये फिल्म दो हज़ार बाईस में रिलीज होगी।
उत्तर प्रदेश में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले सबसे अधिक लंबित हैं. (ग्राफिक इमेज) नई दिल्ली. देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों के 67,200 मामले लंबित हैं, जो सभी राज्यों से सबसे अधिक है. प्रदेश में लंबित मामले यौन अपराधों से बच्चों के कड़े संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज सभी मामलों का लगभग 28 फीसदी हैं. हालांकि पीड़ित बच्चों को अदालती कार्रवाई की उत्पीड़न से बचने के लिए विशेष रूप से फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से जल्द मुकदमों को पूरा करने का प्रावधान है. पॉक्सो अधिनियम में बदवाल करके सरकार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हर जिले में कम से कम एक फास्ट ट्रैक कोर्ट है. लेकिन साल 2016 से लेकर अब तक लंबित मामलों में 170 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. साल 2016 में 90,205 लंबित मामले थे. जबकि 2023, जनवरी में ये बढ़कर 2 लाख 43 हजार 237 हो गया. वहीं महाराष्ट्र में 33,000 लंबित मामले हैं. इसके बाद 22,100 लंबित मामलों के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे नंबर पर है. जबकि बिहार में 16,000, ओडिशा में 12,000 और तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 10,000 लंबित मामले हैं. वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉक्सो के 9,108 लंबित मामलों हैं. राजस्थान में 8,921, असम में 6,875, हरियाणा में 4,688 और झारखंड में 4,408 लंबित मामले हैं. केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में संपन्न बजट सत्र में एक सवाल के जवाब में संसद को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने के लिए जांच और परीक्षण के लिए प्रत्येक दो महीने की समय सीमा निर्धारित की गई है. पॉक्सो और बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए केंद्रीय वित्त पोषण के साथ 764 विशेष एफटीसी (फास्ट ट्रैक कोर्ट) स्थापित किए गए हैं, जिसमें पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए विशेष रूप से समर्पित 411 विशेष एफटीसी शामिल हैं. ये अदालतें साल में 1. 4 लाख मामलों का निपटारा कर रही हैं. .
उत्तर प्रदेश में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले सबसे अधिक लंबित हैं. नई दिल्ली. देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों के सरसठ,दो सौ मामले लंबित हैं, जो सभी राज्यों से सबसे अधिक है. प्रदेश में लंबित मामले यौन अपराधों से बच्चों के कड़े संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज सभी मामलों का लगभग अट्ठाईस फीसदी हैं. हालांकि पीड़ित बच्चों को अदालती कार्रवाई की उत्पीड़न से बचने के लिए विशेष रूप से फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से जल्द मुकदमों को पूरा करने का प्रावधान है. पॉक्सो अधिनियम में बदवाल करके सरकार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हर जिले में कम से कम एक फास्ट ट्रैक कोर्ट है. लेकिन साल दो हज़ार सोलह से लेकर अब तक लंबित मामलों में एक सौ सत्तर फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. साल दो हज़ार सोलह में नब्बे,दो सौ पाँच लंबित मामले थे. जबकि दो हज़ार तेईस, जनवरी में ये बढ़कर दो लाख तैंतालीस हजार दो सौ सैंतीस हो गया. वहीं महाराष्ट्र में तैंतीस,शून्य लंबित मामले हैं. इसके बाद बाईस,एक सौ लंबित मामलों के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे नंबर पर है. जबकि बिहार में सोलह,शून्य, ओडिशा में बारह,शून्य और तेलंगाना और मध्य प्रदेश में दस,शून्य लंबित मामले हैं. वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉक्सो के नौ,एक सौ आठ लंबित मामलों हैं. राजस्थान में आठ,नौ सौ इक्कीस, असम में छः,आठ सौ पचहत्तर, हरियाणा में चार,छः सौ अठासी और झारखंड में चार,चार सौ आठ लंबित मामले हैं. केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में संपन्न बजट सत्र में एक सवाल के जवाब में संसद को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने के लिए जांच और परीक्षण के लिए प्रत्येक दो महीने की समय सीमा निर्धारित की गई है. पॉक्सो और बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए केंद्रीय वित्त पोषण के साथ सात सौ चौंसठ विशेष एफटीसी स्थापित किए गए हैं, जिसमें पॉक्सो अधिनियम के मामलों के लिए विशेष रूप से समर्पित चार सौ ग्यारह विशेष एफटीसी शामिल हैं. ये अदालतें साल में एक. चार लाख मामलों का निपटारा कर रही हैं. .
दोस्तों को स्लैम डंक्स के वीडियो पसंद हैं, यही कारण है कि हमने हाल ही में जॉर्डन ब्रांड "फर्स्ट टू फ्लाई" डंक प्रतियोगिता से इस क्लिप को बार-बार देखा है। अपने दिमाग उड़ाए जाने के लिए तैयार करेंः वीडियो में, मिसिसिपी हाई स्कूल के सीनियर शेल्बी मैकवान ने एक आश्चर्यजनक बाएं हाथ के डंक को खींच लिया एफ ** राजा मुक्त फेंक लाइन के पीछे। मैकईवान पेंट के ऊपर अनुग्रह के साथ उड़ता है, स्लैम को पकड़ता है और इसे एक स्लिम उत्सव नृत्य के साथ बंद कर देता है। यह हमने कभी देखा है कि सबसे अविश्वसनीय चीजों में से एक है। 6'3 ", 150 पाउंड गार्ड को 2015 की कक्षा के लिए शीर्ष 150 संभावनाओं की प्रतिद्वंद्वियों की सूची में भी स्थान नहीं दिया गया है, लेकिन अजीब उपलब्धि के लिए धन्यवाद, हम निश्चित रूप से अब उसका नाम जानते हैं। अपने रिक-लीग पिक-अप गेम में मैकवान के कदम को अनुकरण करने की कोशिश करना चाहते हैं? ओह, वसा मौका। परन्तु आप कर सकते हैं जिम में अपनी अधिकतम कूद बढ़ाने पर काम करें। गेंद को केवल 3 सप्ताह में डंक करने के लिए इस योजना का पालन करें-और शायद यूट्यूब को अपने आप उड़ाएं।
दोस्तों को स्लैम डंक्स के वीडियो पसंद हैं, यही कारण है कि हमने हाल ही में जॉर्डन ब्रांड "फर्स्ट टू फ्लाई" डंक प्रतियोगिता से इस क्लिप को बार-बार देखा है। अपने दिमाग उड़ाए जाने के लिए तैयार करेंः वीडियो में, मिसिसिपी हाई स्कूल के सीनियर शेल्बी मैकवान ने एक आश्चर्यजनक बाएं हाथ के डंक को खींच लिया एफ ** राजा मुक्त फेंक लाइन के पीछे। मैकईवान पेंट के ऊपर अनुग्रह के साथ उड़ता है, स्लैम को पकड़ता है और इसे एक स्लिम उत्सव नृत्य के साथ बंद कर देता है। यह हमने कभी देखा है कि सबसे अविश्वसनीय चीजों में से एक है। छः'तीन ", एक सौ पचास पाउंड गार्ड को दो हज़ार पंद्रह की कक्षा के लिए शीर्ष एक सौ पचास संभावनाओं की प्रतिद्वंद्वियों की सूची में भी स्थान नहीं दिया गया है, लेकिन अजीब उपलब्धि के लिए धन्यवाद, हम निश्चित रूप से अब उसका नाम जानते हैं। अपने रिक-लीग पिक-अप गेम में मैकवान के कदम को अनुकरण करने की कोशिश करना चाहते हैं? ओह, वसा मौका। परन्तु आप कर सकते हैं जिम में अपनी अधिकतम कूद बढ़ाने पर काम करें। गेंद को केवल तीन सप्ताह में डंक करने के लिए इस योजना का पालन करें-और शायद यूट्यूब को अपने आप उड़ाएं।
नयी दिल्ली, 25 जनवरी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उज्बेकिस्तान के अपने समकक्ष अब्दुल अजीज कामिलोव के साथ बुधवार को वार्ता की जिसमें रक्षा, सम्पर्क और कारोबार सहित द्विपक्षीय संबंधों के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई । दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति पर भी विचारों का आदान- प्रदान किया । उन्होंने कहा कि हमने अफगानिस्तान की स्थिति पर भी विचारों का आदान- प्रदान किया और अपने बहुआयामी सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, पच्चीस जनवरी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उज्बेकिस्तान के अपने समकक्ष अब्दुल अजीज कामिलोव के साथ बुधवार को वार्ता की जिसमें रक्षा, सम्पर्क और कारोबार सहित द्विपक्षीय संबंधों के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई । दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति पर भी विचारों का आदान- प्रदान किया । उन्होंने कहा कि हमने अफगानिस्तान की स्थिति पर भी विचारों का आदान- प्रदान किया और अपने बहुआयामी सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
ब्रुशेल्समें निर्वासित ( १८४५-४८ ई० ) वह उस वक्त कर रहा था, उसके कारण मार्क्स इस सन्देहको महत्व नहीं देता था। इस पत्रमें मार्क्स और एगेल्सके कई महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित होते रहे । भारतमें भी हिन्दू या मुसलमान समाजवादके गीत गानेवालोका प्रभाव नही है । उनका यह प्रयत्न समाजवादके हित नहीं, अहितके लिए ही जाने या अनजाने होता है। कोलोदसे निकलनेवाले 'राइनिशर व्योवाख्तेर' पत्रने भी ईसाई समाजबादका पुन गाते हुये साम्यवाद ( कम्युनिज्म) को अनावश्यक बतलाया था, जिसका जवाब देते हुए मार्क्सने लिखा था- 'ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्तोंके प्रयोग के लिए अठारह सौ वर्ष मिले थे, जिनमें उन्हें विकसित किया जा सकता था, अब उन्हें प्रशियन धार्मिक कमिश्नरोके हाथो आगे विकसित होनेकी आवश्यकता नहीं है। ईसाइयत ( हिन्दू धर्म और इस्लामको भी ले लीजिये ) के सामाजिक सिद्धान्त पुराने युगमे दास प्रथाको उचित बतलाते थे, मध्ययुगमे वह किसानोंकी अर्घदासताकी प्रशसा करते थे और आवश्यकता पडनेपर आज भी वह सर्वहाराके उत्पीड़नको उचित कहनेके लिये बिल्कुल तैयार हैं।... ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त शासक और उत्पीडित वर्गको कायम रहना आवश्यक बतलाते हैं, और उत्पीडित वर्गको वह जो कुछ दे सकते हैं वह यही कि शासक वर्गको उनके प्रति दया दिखलानी चाहिये। ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त सभी पापोंकी क्षतिपूर्तिको स्वर्गराज्यमे स्थानातरित करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वीपर इन पापोंके बने रहनेको उचित बतलाते है । ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त घोषित करते हैं, कि उत्पीडितोके विरुद्ध उत्पीड़कोंके सारे आततायी कृत्य या तो मूल या किसी दूसरे पापके उचित दड हैं, या ईश्वर अपनी अंगम बुद्धिसे वैसा दुःख देना पसन्द करता है। ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त कायरता, कमीनेपन, त्याग, आत्मसमर्पण और वशंबदता - संक्षेपमे आततायीके सभी गुणोंका उपदेश करते हैं, लेकिन सर्वहारा आततायीके तौरपर अपने साथ व्यवहार होने देनेके लिए तैयार नहीं हैं, और उसे अपनी राजकी रोटीसे भी अधिक साहस, आत्म-विश्वास, स्वाभिमान और स्वतन्त्रताकी आवश्यकता है। ईसाइयतका सामाजिक सिद्धान्त वचना और पाखण्डसे भरे हुए हैं, जब कि सर्वहारा क्रान्तिकारी है।'
ब्रुशेल्समें निर्वासित वह उस वक्त कर रहा था, उसके कारण मार्क्स इस सन्देहको महत्व नहीं देता था। इस पत्रमें मार्क्स और एगेल्सके कई महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित होते रहे । भारतमें भी हिन्दू या मुसलमान समाजवादके गीत गानेवालोका प्रभाव नही है । उनका यह प्रयत्न समाजवादके हित नहीं, अहितके लिए ही जाने या अनजाने होता है। कोलोदसे निकलनेवाले 'राइनिशर व्योवाख्तेर' पत्रने भी ईसाई समाजबादका पुन गाते हुये साम्यवाद को अनावश्यक बतलाया था, जिसका जवाब देते हुए मार्क्सने लिखा था- 'ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्तोंके प्रयोग के लिए अठारह सौ वर्ष मिले थे, जिनमें उन्हें विकसित किया जा सकता था, अब उन्हें प्रशियन धार्मिक कमिश्नरोके हाथो आगे विकसित होनेकी आवश्यकता नहीं है। ईसाइयत के सामाजिक सिद्धान्त पुराने युगमे दास प्रथाको उचित बतलाते थे, मध्ययुगमे वह किसानोंकी अर्घदासताकी प्रशसा करते थे और आवश्यकता पडनेपर आज भी वह सर्वहाराके उत्पीड़नको उचित कहनेके लिये बिल्कुल तैयार हैं।... ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त शासक और उत्पीडित वर्गको कायम रहना आवश्यक बतलाते हैं, और उत्पीडित वर्गको वह जो कुछ दे सकते हैं वह यही कि शासक वर्गको उनके प्रति दया दिखलानी चाहिये। ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त सभी पापोंकी क्षतिपूर्तिको स्वर्गराज्यमे स्थानातरित करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वीपर इन पापोंके बने रहनेको उचित बतलाते है । ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त घोषित करते हैं, कि उत्पीडितोके विरुद्ध उत्पीड़कोंके सारे आततायी कृत्य या तो मूल या किसी दूसरे पापके उचित दड हैं, या ईश्वर अपनी अंगम बुद्धिसे वैसा दुःख देना पसन्द करता है। ईसाइयतके सामाजिक सिद्धान्त कायरता, कमीनेपन, त्याग, आत्मसमर्पण और वशंबदता - संक्षेपमे आततायीके सभी गुणोंका उपदेश करते हैं, लेकिन सर्वहारा आततायीके तौरपर अपने साथ व्यवहार होने देनेके लिए तैयार नहीं हैं, और उसे अपनी राजकी रोटीसे भी अधिक साहस, आत्म-विश्वास, स्वाभिमान और स्वतन्त्रताकी आवश्यकता है। ईसाइयतका सामाजिक सिद्धान्त वचना और पाखण्डसे भरे हुए हैं, जब कि सर्वहारा क्रान्तिकारी है।'
रवशामक के लिए नलिका न केवल बनाएगीकार को एक आदर्श रूप देने के लिए, क्योंकि कुछ कार मालिक विशेष रेजोनाटर का उपयोग करते हैं, जिसके साथ कार की आवाज़ तब बदल जाती है जब उनसे निकलता है, नलिका विशेष clamps का उपयोग कर तय कर रहे हैंया बोल्ट हालांकि, मजबूत कंपन से, ऐसे फास्टनरों कमजोर होते हैं, और रवशामक को संलग्नक अक्सर खो जाते हैं। संलग्न करने का सबसे अच्छा तरीका वेल्डिंग है हार्ड फिक्सिंग एक विशेषता की उपस्थिति की जांच करने की आवश्यकता को समाप्त करती है इस मामले में, एक सुंदर सहायक खोना लगभग असंभव है। इससे पहले कि आप बीएमडब्ल्यू मफलर पर एक नोजल खरीदते हैं,यह उनके निष्पादन पर ध्यान देना आवश्यक है। आखिरकार, प्रत्येक सहायक को कार की उपस्थिति से मेल खाना चाहिए, अन्यथा आप समग्र चित्र को खराब कर सकते हैं। नोजल को मजबूत स्टेनलेस स्टील का बनाया जाना चाहिए, जो थोड़ी सी भी प्रभाव पर ख़राब न हो। क्रोम-मढ़वाया विशेषताओं को खरीदने की सलाह दी जाती है, इससे उन्हें संभावित क्षति से बचाने होंगे। आज, रवशामक के लिए संलग्नक बहुत से बने होते हैंकंपनियां, तथापि, सबसे अधिक सक्षम जर्मन और रूसी निर्माताओं हैं आप इंटरनेट पर एक ऑर्डर कर सकते हैं वैश्विक नेटवर्क में हर स्वाद और विभिन्न व्यास के लिए नलिका का विस्तृत विकल्प होता है। एक नियम के रूप में, नलिका एक विशाल का उपयोग करते हैंयुवा लोगों के बीच लोकप्रियता, पुरानी, स्वाभाविक रूप से अप्रिय कारों के मालिक कार के प्रति उत्साही वाहन को सक्रिय रूप से ट्यूनिंग करना शुरू कर रहे हैं, कुछ सरलतम से शुरुआत करते हैं - मफलर पर एक नोजल खरीदते हैं। दूसरे मोड़ में, प्रमाणन के लिए ध्यान दिया जाना चाहिए, यह लेबल पर प्रदर्शित होता है और वर्तमान GOSTs का पालन करना चाहिए। अयोग्य निर्मातामुलायम धातुओं से बने नलिकाएं इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस तरह की वस्तु दुर्घटना में बहुत जल्दी आती है नोजल की मोटाई इष्टतम होनी चाहिए। गौण को बहुत भारी नहीं चुना जाना चाहिए, और एक लंबे समय से ऐसा उत्पाद अपनी फैक्ट्री चमक को नहीं खोता है और कई वर्षों तक काम करता है। एक नम कपड़े से समय-समय पर नोजल को पोंछने के लिए पर्याप्त है। यदि इसके साथ विशेषता को ठीक करने का निर्णय लिया गया हैclamps और बोल्ट का उपयोग करते हुए, आपको समय-समय पर फास्टनरों को कसने करना होगा, क्योंकि कंपन से भूमि का टुकड़ा कमजोर होता है। सक्रिय ड्राइविंग के साथ, फास्टनर को हर दिन की जांच करनी चाहिए।
रवशामक के लिए नलिका न केवल बनाएगीकार को एक आदर्श रूप देने के लिए, क्योंकि कुछ कार मालिक विशेष रेजोनाटर का उपयोग करते हैं, जिसके साथ कार की आवाज़ तब बदल जाती है जब उनसे निकलता है, नलिका विशेष clamps का उपयोग कर तय कर रहे हैंया बोल्ट हालांकि, मजबूत कंपन से, ऐसे फास्टनरों कमजोर होते हैं, और रवशामक को संलग्नक अक्सर खो जाते हैं। संलग्न करने का सबसे अच्छा तरीका वेल्डिंग है हार्ड फिक्सिंग एक विशेषता की उपस्थिति की जांच करने की आवश्यकता को समाप्त करती है इस मामले में, एक सुंदर सहायक खोना लगभग असंभव है। इससे पहले कि आप बीएमडब्ल्यू मफलर पर एक नोजल खरीदते हैं,यह उनके निष्पादन पर ध्यान देना आवश्यक है। आखिरकार, प्रत्येक सहायक को कार की उपस्थिति से मेल खाना चाहिए, अन्यथा आप समग्र चित्र को खराब कर सकते हैं। नोजल को मजबूत स्टेनलेस स्टील का बनाया जाना चाहिए, जो थोड़ी सी भी प्रभाव पर ख़राब न हो। क्रोम-मढ़वाया विशेषताओं को खरीदने की सलाह दी जाती है, इससे उन्हें संभावित क्षति से बचाने होंगे। आज, रवशामक के लिए संलग्नक बहुत से बने होते हैंकंपनियां, तथापि, सबसे अधिक सक्षम जर्मन और रूसी निर्माताओं हैं आप इंटरनेट पर एक ऑर्डर कर सकते हैं वैश्विक नेटवर्क में हर स्वाद और विभिन्न व्यास के लिए नलिका का विस्तृत विकल्प होता है। एक नियम के रूप में, नलिका एक विशाल का उपयोग करते हैंयुवा लोगों के बीच लोकप्रियता, पुरानी, स्वाभाविक रूप से अप्रिय कारों के मालिक कार के प्रति उत्साही वाहन को सक्रिय रूप से ट्यूनिंग करना शुरू कर रहे हैं, कुछ सरलतम से शुरुआत करते हैं - मफलर पर एक नोजल खरीदते हैं। दूसरे मोड़ में, प्रमाणन के लिए ध्यान दिया जाना चाहिए, यह लेबल पर प्रदर्शित होता है और वर्तमान GOSTs का पालन करना चाहिए। अयोग्य निर्मातामुलायम धातुओं से बने नलिकाएं इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस तरह की वस्तु दुर्घटना में बहुत जल्दी आती है नोजल की मोटाई इष्टतम होनी चाहिए। गौण को बहुत भारी नहीं चुना जाना चाहिए, और एक लंबे समय से ऐसा उत्पाद अपनी फैक्ट्री चमक को नहीं खोता है और कई वर्षों तक काम करता है। एक नम कपड़े से समय-समय पर नोजल को पोंछने के लिए पर्याप्त है। यदि इसके साथ विशेषता को ठीक करने का निर्णय लिया गया हैclamps और बोल्ट का उपयोग करते हुए, आपको समय-समय पर फास्टनरों को कसने करना होगा, क्योंकि कंपन से भूमि का टुकड़ा कमजोर होता है। सक्रिय ड्राइविंग के साथ, फास्टनर को हर दिन की जांच करनी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने हनी ट्रैप में कैलाश विजयवर्गीय और जीतू जिराती को घसीटा. इंदौर. मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप मामले (Honey Trap case) को लेकर सियासत तेज होती जा रही है और अब मामले के तार महाराष्ट्र से भी जुड़ गए हैं. इंदौर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती (Jitu Jirati) थे, तब हनी ट्रैप मामले में आरोपी श्वेता विजय जैन महामंत्री थीं. इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संभाजी पाटिल निलंगेकर ( Minister Sambhaji Patil Nilangekar) पर भी इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है. जबकि दूसरी ओर दिग्विजय के इन आरोपों को बीजेपी उपाध्यक्ष जीतू जिराती ने नकारते हुए कहा है कि वह जांच की दिशा घुमाने की कोशिश कर रहे हैं. इंदौर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने हनी ट्रैप मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब जीतू जिराती युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष थे, तब श्वेता विजय जैन युवा मोर्चा की महामंत्री थीं ये पता लगा लें. जबकि उन्होंने (दिग्विजय) ये भी कहा कि उस वक्त महाराष्ट्र युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संभाजी पाटिल निलंगेकर थे, जो फिलहाल फडणवीस सरकार में मंत्री हैं. जब श्वेता जैन का वीडियो वायरल हुआ तो वो महाराष्ट्र में किसके साथ थीं. दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि पता लगाएं मध्य प्रदेश के एक कलाकार सागर में विजय जैन की दुकान का उद्घाटन करने गए थे कि नहीं. बीजेपी का कलाकार कौन है ये सभी को पता है. उनका इशारा कैलाश विजयवर्गीय की ओर था. .
दिग्विजय सिंह ने हनी ट्रैप में कैलाश विजयवर्गीय और जीतू जिराती को घसीटा. इंदौर. मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप मामले को लेकर सियासत तेज होती जा रही है और अब मामले के तार महाराष्ट्र से भी जुड़ गए हैं. इंदौर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती थे, तब हनी ट्रैप मामले में आरोपी श्वेता विजय जैन महामंत्री थीं. इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संभाजी पाटिल निलंगेकर पर भी इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है. जबकि दूसरी ओर दिग्विजय के इन आरोपों को बीजेपी उपाध्यक्ष जीतू जिराती ने नकारते हुए कहा है कि वह जांच की दिशा घुमाने की कोशिश कर रहे हैं. इंदौर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने हनी ट्रैप मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब जीतू जिराती युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष थे, तब श्वेता विजय जैन युवा मोर्चा की महामंत्री थीं ये पता लगा लें. जबकि उन्होंने ये भी कहा कि उस वक्त महाराष्ट्र युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संभाजी पाटिल निलंगेकर थे, जो फिलहाल फडणवीस सरकार में मंत्री हैं. जब श्वेता जैन का वीडियो वायरल हुआ तो वो महाराष्ट्र में किसके साथ थीं. दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि पता लगाएं मध्य प्रदेश के एक कलाकार सागर में विजय जैन की दुकान का उद्घाटन करने गए थे कि नहीं. बीजेपी का कलाकार कौन है ये सभी को पता है. उनका इशारा कैलाश विजयवर्गीय की ओर था. .
यूपी के चंदौली में दो गांवों के लोगों के बीच खूनी संघर्ष, एक युवक की निर्मम हत्या। Uttar Pradesh Crime News : उत्तर प्रदेश के चंदौली ( Chandauli Crime News ) में शनिवार की सुबह युवक की रॉड और डंडे से पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से इलाके में स्थिति बेहद गंभीर हो गया है। तनाव की स्थिति है और भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया है। चंदौली के एसपी अंकुर अग्रवाल ग्रामीणों को समझाने में जुटे हैं। इसी बीच मुग़लसराय विधायिका साधना सिंह मौके पर पहुंचीं और मृतक के परिजन से मामले के बाबत जानकारी ली। जानकारी के मुताबिक शनिवार की सुबह सिकटिया और दुसधान के ग्रामीणों को बीच किसी बात को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस संघर्ष में एक युवक को मौत के घाट उतार दिया गया। मृतक विशाल पासवान दुसधाने मुहल्ले के निवासी है। घटना के वाद मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे और इंसाफ की मांग करने लगे। इसी बीच मौके पर पहुंची मुग़लसराय विधायिका साधना सिंह ने मृतक की बहन से वादा किया कि वह अपराधियों को सख्त जवाब देंगी। ताजा अपडेट के मुताबिक दो लोगों के बीच हुआ विवाद चंदौली जिले के जिला और पुलिस प्रशासन ( Chandauli police ) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 3 थानों की फोर्स मौके पर बुला ली है। ग्रामीण भी मौके पर भारी संख्या में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार सिकटिया चौराहे पर बबलू पासवान (Bablu Paswan ) अपनी चाय पान की दुकान और कमला यादव अपने मिठाई की गुमटी लगाकर रोजी रोजगार चलाते थे। बबलू और कमला के बीच किसी बात को लेकर आपस में विवाद हुआ है। उसी से यह मामला बढ़ने लगा है। दोनों गुटों में लड़ाई आरोप लगाया जा रहा है कि कमला यादव और उनके परिवार के कुछ लोगों ने बुधवार की रात में बबलू पासवान ( Bablu Paswan) की गुमटी में आग लगा दी थी। इसके बाद गुरुवार को दोनों पक्ष अलीनगर थाने भी पहुंचे थे, लेकिन अलीनगर पुलिस ने मामले में लापरवाही बरती और बिना ठोस कार्यवाही के मामले को रफा-दफा कर दिया। इसके बाद लोगों का आक्रोश ठंडा नहीं हुआ और शुक्रवार की रात कमला यादव की गुमटी में भी आग लगा दी गई। इसके बाद जैसे ही शनिवार की सुबह हुई तो तारनपुर दुसधान बस्ती के दो युवक जैसे ही सिकटिया चौराहे पर पहुंचे वहां पर पहले से मौजूद लोग दोनों पर टूट पड़े।
यूपी के चंदौली में दो गांवों के लोगों के बीच खूनी संघर्ष, एक युवक की निर्मम हत्या। Uttar Pradesh Crime News : उत्तर प्रदेश के चंदौली में शनिवार की सुबह युवक की रॉड और डंडे से पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से इलाके में स्थिति बेहद गंभीर हो गया है। तनाव की स्थिति है और भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया है। चंदौली के एसपी अंकुर अग्रवाल ग्रामीणों को समझाने में जुटे हैं। इसी बीच मुग़लसराय विधायिका साधना सिंह मौके पर पहुंचीं और मृतक के परिजन से मामले के बाबत जानकारी ली। जानकारी के मुताबिक शनिवार की सुबह सिकटिया और दुसधान के ग्रामीणों को बीच किसी बात को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस संघर्ष में एक युवक को मौत के घाट उतार दिया गया। मृतक विशाल पासवान दुसधाने मुहल्ले के निवासी है। घटना के वाद मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे और इंसाफ की मांग करने लगे। इसी बीच मौके पर पहुंची मुग़लसराय विधायिका साधना सिंह ने मृतक की बहन से वादा किया कि वह अपराधियों को सख्त जवाब देंगी। ताजा अपडेट के मुताबिक दो लोगों के बीच हुआ विवाद चंदौली जिले के जिला और पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन थानों की फोर्स मौके पर बुला ली है। ग्रामीण भी मौके पर भारी संख्या में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार सिकटिया चौराहे पर बबलू पासवान अपनी चाय पान की दुकान और कमला यादव अपने मिठाई की गुमटी लगाकर रोजी रोजगार चलाते थे। बबलू और कमला के बीच किसी बात को लेकर आपस में विवाद हुआ है। उसी से यह मामला बढ़ने लगा है। दोनों गुटों में लड़ाई आरोप लगाया जा रहा है कि कमला यादव और उनके परिवार के कुछ लोगों ने बुधवार की रात में बबलू पासवान की गुमटी में आग लगा दी थी। इसके बाद गुरुवार को दोनों पक्ष अलीनगर थाने भी पहुंचे थे, लेकिन अलीनगर पुलिस ने मामले में लापरवाही बरती और बिना ठोस कार्यवाही के मामले को रफा-दफा कर दिया। इसके बाद लोगों का आक्रोश ठंडा नहीं हुआ और शुक्रवार की रात कमला यादव की गुमटी में भी आग लगा दी गई। इसके बाद जैसे ही शनिवार की सुबह हुई तो तारनपुर दुसधान बस्ती के दो युवक जैसे ही सिकटिया चौराहे पर पहुंचे वहां पर पहले से मौजूद लोग दोनों पर टूट पड़े।
पाकिस्तान सरकार मुंबई हमले के साजिशकर्ता जकी उर रहमान लखवी को मिली जमानत को चुनौती देने को लेकर सोमवार को याचिका दायर करने नाकाम रही। दूसरी तरफ, लखवी ने न्यायिक आयोग के रिकार्ड को इस मामले में सबूत का हिस्सा बनाने के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनौती दे डाली। अभियोजन पक्ष इस्लामाबाद स्थित आतंकवाद विरोधी अदालत के आदेश की प्रति नहीं मिल पाने के कारण जमानत को चुनौती देने वाली याचिका दायर नहीं कर सका। आतंकवाद विरोधी अदालत ने लखवी को जमानत दी थी। मुख्य अभियोजक चौधरी अजहर ने कहा कि हम आतंकवाद विरोधी अदालत के आदेश की प्रति हासिल कर पाने में मुश्किल का सामना कर रहे हैं। मैं नहीं कह सकता कि हम मंगलवार को अपील दायर कर पाएंगे या नहीं क्योंकि यह अदालत के आदेश की प्रति हासिल करने से जुड़ा हुआ है। अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद हमें याचिका तैयार करने के लिए समय चाहिए। आतंकवाद विरोधी अदालत के न्यायाधीश कौसर अब्बास जैदी ने बीते 18 दिसंबर को सबूत के अभाव का हवाला देते हुए लखवी को जमानत दे दी थी। हालांकि वह जेल से बाहर नहीं आ सका क्योंकि सरकार ने लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी आदेश (पीएमओ) के तहत लखवी को तीन महीने के लिए हिरासत में ले लिया था। उधर, लखवी के वकील ने मुंबई हमले के संदर्भ में पाकिस्तान न्यायिक आयोग के रिकॉर्ड को सबूत का हिस्सा बनाने के अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि हमने इस मामले में न्यायिक आयोग के रिकॉर्ड को सबूत हिस्सा का बनाने के निचली अदालत के निर्णय को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने लखवी की याचिका पर सुनवाई करने के लिए न्यायमूर्ति अतहर मिनाल्लाह और न्यायमूर्ति नूरूल्लाह के दो सदस्यीय पीठ का गठन किया है। अब्बासी ने कहा कि अदालत का कार्यालय इस मामले की सुनवाई की तारीख तय करेगा। पाकिस्तानी न्यायिक आयोग ने मुंबई हमले के मामले से जुड़े गवाहों के बयान लेने के लिए दो बार भारत का दौरा किया। अभियोजन पक्ष ने आयोग की रिपोर्ट तैयार की है, लेकिन लखवी ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इसे मामले में सबूत का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। मुंबई हमले के मामले में लखवी के अलावा यहां छह दूसरे आतंकवादियों अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम को भी अभियुक्त बनाया गया है। पाकिस्तान में मुंबई हमले की 2009 से ही सुनवाई चल रही है।
पाकिस्तान सरकार मुंबई हमले के साजिशकर्ता जकी उर रहमान लखवी को मिली जमानत को चुनौती देने को लेकर सोमवार को याचिका दायर करने नाकाम रही। दूसरी तरफ, लखवी ने न्यायिक आयोग के रिकार्ड को इस मामले में सबूत का हिस्सा बनाने के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनौती दे डाली। अभियोजन पक्ष इस्लामाबाद स्थित आतंकवाद विरोधी अदालत के आदेश की प्रति नहीं मिल पाने के कारण जमानत को चुनौती देने वाली याचिका दायर नहीं कर सका। आतंकवाद विरोधी अदालत ने लखवी को जमानत दी थी। मुख्य अभियोजक चौधरी अजहर ने कहा कि हम आतंकवाद विरोधी अदालत के आदेश की प्रति हासिल कर पाने में मुश्किल का सामना कर रहे हैं। मैं नहीं कह सकता कि हम मंगलवार को अपील दायर कर पाएंगे या नहीं क्योंकि यह अदालत के आदेश की प्रति हासिल करने से जुड़ा हुआ है। अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद हमें याचिका तैयार करने के लिए समय चाहिए। आतंकवाद विरोधी अदालत के न्यायाधीश कौसर अब्बास जैदी ने बीते अट्ठारह दिसंबर को सबूत के अभाव का हवाला देते हुए लखवी को जमानत दे दी थी। हालांकि वह जेल से बाहर नहीं आ सका क्योंकि सरकार ने लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी आदेश के तहत लखवी को तीन महीने के लिए हिरासत में ले लिया था। उधर, लखवी के वकील ने मुंबई हमले के संदर्भ में पाकिस्तान न्यायिक आयोग के रिकॉर्ड को सबूत का हिस्सा बनाने के अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि हमने इस मामले में न्यायिक आयोग के रिकॉर्ड को सबूत हिस्सा का बनाने के निचली अदालत के निर्णय को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने लखवी की याचिका पर सुनवाई करने के लिए न्यायमूर्ति अतहर मिनाल्लाह और न्यायमूर्ति नूरूल्लाह के दो सदस्यीय पीठ का गठन किया है। अब्बासी ने कहा कि अदालत का कार्यालय इस मामले की सुनवाई की तारीख तय करेगा। पाकिस्तानी न्यायिक आयोग ने मुंबई हमले के मामले से जुड़े गवाहों के बयान लेने के लिए दो बार भारत का दौरा किया। अभियोजन पक्ष ने आयोग की रिपोर्ट तैयार की है, लेकिन लखवी ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इसे मामले में सबूत का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। मुंबई हमले के मामले में लखवी के अलावा यहां छह दूसरे आतंकवादियों अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम को भी अभियुक्त बनाया गया है। पाकिस्तान में मुंबई हमले की दो हज़ार नौ से ही सुनवाई चल रही है।
जिला सिरमौर के कोविड अस्पताल से दो कैदी फरार हो गए। दोनों कैदी कोरोना पॉजिटिव थे और जिला अस्पताल में आइसोलेशन में भर्ती थे। शनिवार दोपहर को ये लोग अस्पताल की पिछली खिड़की तोड़कर पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गए, जिसके बाद सिरमौर जिला के एसपी खुशहाल चंद शर्मा व पांवटा साहिब के डीएसपी वीर बहादुर सिंह पुलिस टीम के साथ उन्हें ढूंढने लगे और शाम को पुलिस की मेहनत रंग लाई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को सराहां के पास एनएच से गिरफ्तार कर लिया। एसपी खुशहाल चंद शर्मा ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
जिला सिरमौर के कोविड अस्पताल से दो कैदी फरार हो गए। दोनों कैदी कोरोना पॉजिटिव थे और जिला अस्पताल में आइसोलेशन में भर्ती थे। शनिवार दोपहर को ये लोग अस्पताल की पिछली खिड़की तोड़कर पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गए, जिसके बाद सिरमौर जिला के एसपी खुशहाल चंद शर्मा व पांवटा साहिब के डीएसपी वीर बहादुर सिंह पुलिस टीम के साथ उन्हें ढूंढने लगे और शाम को पुलिस की मेहनत रंग लाई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को सराहां के पास एनएच से गिरफ्तार कर लिया। एसपी खुशहाल चंद शर्मा ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
नई दिल्ली। सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली बीसीसीआई की टीम ने शुक्रवार को अपना एक साल पूरा कर लिया है। इस टीम के पास हालांकि आईपीएल के 13वें सीजन का आयोजन कराने के अलावा कोई और उपलब्धि नहीं है, जिसका कारण है कोरोनावायरस महामारी। पिछले साल चारों अधिकारी बिना किसी विरोध के सर्वसम्मति से चुने गए थे। इस टीम ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई प्रशासकों की समिति (सीओए) से 33 महीने बाद काम अपने हाथ में लिया था। चूंकि टीम में से किसी को भी बीसीसीआई में काम करने का अनुभव नहीं था इसलिए सभी ने अपना समय लिया। वह सीख रहे थे कि कोविड ने मार्च में सब कुछ रोक दिया। अब इस टीम के सामने एक बड़ा सवाल 2020-21 घरेलू सीजन को आयोजित कराना है जो जनवरी में शुरू हो सकता है। बीसीसीआई की शीर्ष परिषद ने फैसला किया है कि रणजी ट्रॉफी को ही आयोजित किया जाएगा, इसके अलावा सीनियर महिला टूर्नामेंट को भी आयोजित किया जा सकता है। एक राज्य संघ के अध्यक्ष ने आईएएनएस से कहा, "सभी अधिकारी बीसीसीआई में नए थे। ईमादारी से कहूं तो उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला। वह सैटल होते इससे पहले ही कोविड ने सब कुछ रोक दिया था। प्राथमिकता आईपीएल को बचाने की थी, जो उन्होंने किया। आईपीएल चालू है और पैसा आ रहा है। " उन्होंने कहा, "लेकिन वो ज्यादा कुछ गतिविधियां नहीं कर सके, जैसे की कोविड के कारण घरेलू क्रिकेट का आयोजन। साथ ही भारत के पूर्व कप्तान बीसीसीआई अध्यक्ष हैं तो हम उम्मीद कर रहे थे कि वह घरेलू टूर्नामेंट में नए प्रारूप लेकर आएंगे। " उनसे जब गांगुली की टीम को नंबर देने को कहा गया तो उन्होंने कहा, "कोई नंबर नहीं क्योंकि इनकी परीक्षा ही नहीं हुई। उन्हें काम करने के लिए पूरा साल मिलता तो नंबर दिए जाते। " वहीं पूर्वोत्तर के राज्य बीसीसीआई से दुखी हैं क्योंकि उन्हें उनके हिस्से का फंड नहीं मिला है। पूर्वोत्तर के अधिकारी ने कहा, "सीओए की टीम ज्यादा प्रभावी थी। उन्होंने भी सट्टेबाजी प्रकरण के कारण सैटल होने में समय लिया था- सात-आठ महीने। और कोरोने से पांच महीने पहले बीसीसीआई के मौजूदा अधिकारियों ने कामकाज संभाल लिया था लेकिन हमने ज्यादा कुछ नहीं देखा। इसलिए हम दोनों में तुलना नहीं कर सकते। अगर कोरोना नहीं होता तो शायद यह टीम अच्छा करती। " पूर्वोत्तर के राज्यों में बीसीसीआई को मुद्दों पर ध्यान देने और सुलझाने की जरूरत है। अधिकारी ने कहा, "2018-19 में सीओए ने उन लोगों को सीधा भुगतान किया था जिन्होंने ट्रू्नामेंट के आयोजनों में मदद की थी,चाहे वो होटल हो, ट्रांसपोर्टर हों। 2018-19, 2019-20 में बीसीसीआई से संबद्ध प्रत्येक राज्य संघ को 30-30 करोड़ रुपये प्रत्येक संघ को दिए जाने थे। लेकिन यह पूर्वोत्तर के राज्यों को नहीं दी गई है। बीसीसीआई को वेंडरों को देने वाली राशि काट बाकी का पैसा हमें देना चाहिए जिसे हम क्रिकेट के विकास में मदद करें। उन्होंने कहा, "पिछले साल बीसीसीआई ने हर राज्य को एक सीजन के लिए 10. 80 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन हमने टूर्नामेंट्स की मेजबानी के लिए 11 से 12 करोड़ रुपये खत्म किए थे। हमें बाकी का पैसा क्रिकेट के विकास के लिए चाहिए। "
नई दिल्ली। सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली बीसीसीआई की टीम ने शुक्रवार को अपना एक साल पूरा कर लिया है। इस टीम के पास हालांकि आईपीएल के तेरहवें सीजन का आयोजन कराने के अलावा कोई और उपलब्धि नहीं है, जिसका कारण है कोरोनावायरस महामारी। पिछले साल चारों अधिकारी बिना किसी विरोध के सर्वसम्मति से चुने गए थे। इस टीम ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई प्रशासकों की समिति से तैंतीस महीने बाद काम अपने हाथ में लिया था। चूंकि टीम में से किसी को भी बीसीसीआई में काम करने का अनुभव नहीं था इसलिए सभी ने अपना समय लिया। वह सीख रहे थे कि कोविड ने मार्च में सब कुछ रोक दिया। अब इस टीम के सामने एक बड़ा सवाल दो हज़ार बीस-इक्कीस घरेलू सीजन को आयोजित कराना है जो जनवरी में शुरू हो सकता है। बीसीसीआई की शीर्ष परिषद ने फैसला किया है कि रणजी ट्रॉफी को ही आयोजित किया जाएगा, इसके अलावा सीनियर महिला टूर्नामेंट को भी आयोजित किया जा सकता है। एक राज्य संघ के अध्यक्ष ने आईएएनएस से कहा, "सभी अधिकारी बीसीसीआई में नए थे। ईमादारी से कहूं तो उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला। वह सैटल होते इससे पहले ही कोविड ने सब कुछ रोक दिया था। प्राथमिकता आईपीएल को बचाने की थी, जो उन्होंने किया। आईपीएल चालू है और पैसा आ रहा है। " उन्होंने कहा, "लेकिन वो ज्यादा कुछ गतिविधियां नहीं कर सके, जैसे की कोविड के कारण घरेलू क्रिकेट का आयोजन। साथ ही भारत के पूर्व कप्तान बीसीसीआई अध्यक्ष हैं तो हम उम्मीद कर रहे थे कि वह घरेलू टूर्नामेंट में नए प्रारूप लेकर आएंगे। " उनसे जब गांगुली की टीम को नंबर देने को कहा गया तो उन्होंने कहा, "कोई नंबर नहीं क्योंकि इनकी परीक्षा ही नहीं हुई। उन्हें काम करने के लिए पूरा साल मिलता तो नंबर दिए जाते। " वहीं पूर्वोत्तर के राज्य बीसीसीआई से दुखी हैं क्योंकि उन्हें उनके हिस्से का फंड नहीं मिला है। पूर्वोत्तर के अधिकारी ने कहा, "सीओए की टीम ज्यादा प्रभावी थी। उन्होंने भी सट्टेबाजी प्रकरण के कारण सैटल होने में समय लिया था- सात-आठ महीने। और कोरोने से पांच महीने पहले बीसीसीआई के मौजूदा अधिकारियों ने कामकाज संभाल लिया था लेकिन हमने ज्यादा कुछ नहीं देखा। इसलिए हम दोनों में तुलना नहीं कर सकते। अगर कोरोना नहीं होता तो शायद यह टीम अच्छा करती। " पूर्वोत्तर के राज्यों में बीसीसीआई को मुद्दों पर ध्यान देने और सुलझाने की जरूरत है। अधिकारी ने कहा, "दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में सीओए ने उन लोगों को सीधा भुगतान किया था जिन्होंने ट्रू्नामेंट के आयोजनों में मदद की थी,चाहे वो होटल हो, ट्रांसपोर्टर हों। दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस, दो हज़ार उन्नीस-बीस में बीसीसीआई से संबद्ध प्रत्येक राज्य संघ को तीस-तीस करोड़ रुपये प्रत्येक संघ को दिए जाने थे। लेकिन यह पूर्वोत्तर के राज्यों को नहीं दी गई है। बीसीसीआई को वेंडरों को देने वाली राशि काट बाकी का पैसा हमें देना चाहिए जिसे हम क्रिकेट के विकास में मदद करें। उन्होंने कहा, "पिछले साल बीसीसीआई ने हर राज्य को एक सीजन के लिए दस. अस्सी करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन हमने टूर्नामेंट्स की मेजबानी के लिए ग्यारह से बारह करोड़ रुपये खत्म किए थे। हमें बाकी का पैसा क्रिकेट के विकास के लिए चाहिए। "
Raebareli News Today: भीम आर्मी गैंग के दर्जनों दबंगों द्वारा गांव के घरों में घुसकर मचाये गये तांडव व मारपीट की जांच करने लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह डीह थाना पहुंची। Raebareli: जिले में आतंक का पर्याय बने भीम आर्मी गैंग के दर्जनों दबंगों द्वारा गांव के घरों में घुसकर मचाये गये तांडव व दलितों के पक्ष में बसपा सुप्रीमो द्वारा किए गए ट्वीट को संज्ञान में लेकर मौके पर जांच करने लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह जिले के डीह थाना पहुंची। जहां पर मार-पीट में घायल दो युवकों के परिजनों से बातचीत कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर कार्यवाही का आश्वासन दिया। दरअसल बीती रविवार को दो पक्षों के मध्य हुए आपसी विवाद के बीच भीम आर्मी नाम के संचालित गैंग के सदस्यों ने असलहों से लैस हो जमकर उत्पात मचाया था जिसमें दो युवक काफी गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है, वहीं ग्रामीणों के बीच बचाव में दबंग आधा दर्जन बाइक व तमंचे छोड़कर मौके से फरार हो गए थे, जिसको लेकर दोनों पक्षों से तहरीर दी गई थी। इस मामले में दलितों की पिटाई को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक ट्वीट किया था जिसको संज्ञान में ले कर आईजी लक्ष्मी सिंह ने मौके का मुआयना कर प्रभावी कार्यवाही करने की बात कही। आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि थाना डीह के नया पुरवा गांव में जो घटना घटी है उसकी समीक्षा की गई है। दोनों पक्षों से बात की गई है। ट्रैक्टर को ओर टेक करने को लेकर यह घटना घटी है जो दूसरे गांव मे जा कर मारपीट किए हैं उन पर एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और एक की गिरफ्तारी भी हो चुकी है और भी लोगो की गिरफ्तारी की जा रही है। इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सीओ के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
Raebareli News Today: भीम आर्मी गैंग के दर्जनों दबंगों द्वारा गांव के घरों में घुसकर मचाये गये तांडव व मारपीट की जांच करने लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह डीह थाना पहुंची। Raebareli: जिले में आतंक का पर्याय बने भीम आर्मी गैंग के दर्जनों दबंगों द्वारा गांव के घरों में घुसकर मचाये गये तांडव व दलितों के पक्ष में बसपा सुप्रीमो द्वारा किए गए ट्वीट को संज्ञान में लेकर मौके पर जांच करने लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह जिले के डीह थाना पहुंची। जहां पर मार-पीट में घायल दो युवकों के परिजनों से बातचीत कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर कार्यवाही का आश्वासन दिया। दरअसल बीती रविवार को दो पक्षों के मध्य हुए आपसी विवाद के बीच भीम आर्मी नाम के संचालित गैंग के सदस्यों ने असलहों से लैस हो जमकर उत्पात मचाया था जिसमें दो युवक काफी गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है, वहीं ग्रामीणों के बीच बचाव में दबंग आधा दर्जन बाइक व तमंचे छोड़कर मौके से फरार हो गए थे, जिसको लेकर दोनों पक्षों से तहरीर दी गई थी। इस मामले में दलितों की पिटाई को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक ट्वीट किया था जिसको संज्ञान में ले कर आईजी लक्ष्मी सिंह ने मौके का मुआयना कर प्रभावी कार्यवाही करने की बात कही। आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि थाना डीह के नया पुरवा गांव में जो घटना घटी है उसकी समीक्षा की गई है। दोनों पक्षों से बात की गई है। ट्रैक्टर को ओर टेक करने को लेकर यह घटना घटी है जो दूसरे गांव मे जा कर मारपीट किए हैं उन पर एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और एक की गिरफ्तारी भी हो चुकी है और भी लोगो की गिरफ्तारी की जा रही है। इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सीओ के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
IPL 2023: द ग्रेट सुनील गावस्कर ने मुंबई इंडियंस और उसके कप्तान रोहित शर्मा को लेकर एक सलाह दी है। खराब फॉर्म से जूझ रहे रोहित शर्मा को लेकर उन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले एक ऐसी सलाह दी है जिस पर कप्तान को सोचना चाहिए। उन्होंने मुंबई की बल्लेबाजी क्रम पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए टीम इंडिया की घोषणा कर दी गई है, लेकिन भारतीय कप्तान रोहित शर्मा फॉर्म में नहीं हैं। आईपीएल 2023 में उनके बल्ले से एकमात्र अर्धशतकीय पारी निकली है। ऐसे में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से पहले उनका अपनी लय हासिल करना बेहद जरूरी है। अब तक खेले गए 7 मैच में रोहित शर्मा ने 25. 86 की औसत से कुल 181 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर 65 रन रहा है। ऐसे में भारत के पूर्व बल्लेबाज द ग्रेट सुनील गावस्कर ने उन्हें WTC Final 2023 से पहले ब्रेक लेने की सलाह दी है। स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए उन्होंने कहा 'मैं मुंबई इंडियंस के बल्लेबाजी क्रम में कुछ बदलाव देखना चाहूंगा। ईमानदारी से, मैं यह भी कहूंगा कि रोहित को भी इस समय ब्रेक लेना चाहिए और खुद को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए फिट रखना चाहिए। वह आखिकी के कुछ मैचों के लिए फिर से वापस आ सकते हैं, लेकिन अभी, उन्हें खुद को थोड़ी राहत देनी चाहिए' उन्होंने आगे कहा 'वह थोड़ा बैचेन दिख रहे हैं। हो सकता है कि वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बारे में सोच रहे हैं, मैं नहीं जानता। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इस स्टेज में उन्हें ब्रेक ले लेनी चाहिए और आखिरी के 3-4 मैच में दोबारा वापस आना चाहिए। इस सीजन की बात करें तो अब तक मुंबई इंडियंस का सीजन अच्छा नहीं रहा है। 7 में से 3 मुकाबला जीतकर मुंबई फिलहाल 7वें स्थान पर है। मुंबई ने शुरुआत में दो मुकाबले गंवाए थे। उसके बाद जीत की हैट्रिक लगाकर शानदार वापसी भी की, लेकिन टीम फिर लगातार दो मुकाबला हार चुकी है। ट्रेंडिंगः
IPL दो हज़ार तेईस: द ग्रेट सुनील गावस्कर ने मुंबई इंडियंस और उसके कप्तान रोहित शर्मा को लेकर एक सलाह दी है। खराब फॉर्म से जूझ रहे रोहित शर्मा को लेकर उन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले एक ऐसी सलाह दी है जिस पर कप्तान को सोचना चाहिए। उन्होंने मुंबई की बल्लेबाजी क्रम पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए टीम इंडिया की घोषणा कर दी गई है, लेकिन भारतीय कप्तान रोहित शर्मा फॉर्म में नहीं हैं। आईपीएल दो हज़ार तेईस में उनके बल्ले से एकमात्र अर्धशतकीय पारी निकली है। ऐसे में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से पहले उनका अपनी लय हासिल करना बेहद जरूरी है। अब तक खेले गए सात मैच में रोहित शर्मा ने पच्चीस. छियासी की औसत से कुल एक सौ इक्यासी रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर पैंसठ रन रहा है। ऐसे में भारत के पूर्व बल्लेबाज द ग्रेट सुनील गावस्कर ने उन्हें WTC Final दो हज़ार तेईस से पहले ब्रेक लेने की सलाह दी है। स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए उन्होंने कहा 'मैं मुंबई इंडियंस के बल्लेबाजी क्रम में कुछ बदलाव देखना चाहूंगा। ईमानदारी से, मैं यह भी कहूंगा कि रोहित को भी इस समय ब्रेक लेना चाहिए और खुद को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए फिट रखना चाहिए। वह आखिकी के कुछ मैचों के लिए फिर से वापस आ सकते हैं, लेकिन अभी, उन्हें खुद को थोड़ी राहत देनी चाहिए' उन्होंने आगे कहा 'वह थोड़ा बैचेन दिख रहे हैं। हो सकता है कि वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बारे में सोच रहे हैं, मैं नहीं जानता। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इस स्टेज में उन्हें ब्रेक ले लेनी चाहिए और आखिरी के तीन-चार मैच में दोबारा वापस आना चाहिए। इस सीजन की बात करें तो अब तक मुंबई इंडियंस का सीजन अच्छा नहीं रहा है। सात में से तीन मुकाबला जीतकर मुंबई फिलहाल सातवें स्थान पर है। मुंबई ने शुरुआत में दो मुकाबले गंवाए थे। उसके बाद जीत की हैट्रिक लगाकर शानदार वापसी भी की, लेकिन टीम फिर लगातार दो मुकाबला हार चुकी है। ट्रेंडिंगः
शोषण किया करते थे । लार्ड वेलेजली ने भराठा-शक्ति को ध्येय से इन राज्यों को अँगरेजी संरक्षण में ले लिया था । मराठों के विरुद्ध उसे इन राज्यों से पर्याप्त सहायता भी मिली थी । परन्तु मरुस्थल में स्थित होने के कारण वे आर्थिक दृष्टि से अंगरेजों के लिए विशेष लाभप्रद न थी । जब सर जार्ज बाल भारतवर्ष का गवर्नर जनरल हुआ तो उसने पुनः इन राज्यों को मराठों के सुपुर्द कर दिया। इस विश्वासघातपूर्ण कार्य के लिए उसकी बहुत निन्दा की गई । आशा यह थी कि कदाचित् लार्ड मिण्टो पुनः मराठों से छीनकर उन राज्यों को अंगरेजी संरक्षण में ले ले। परन्तु नया गवर्नर जनरल तटस्थता की नीति का अनुयायी था । अतः उसने उन राज्यों एवं मराठों के बीच में कोई हस्तक्षेप न किया और वे पूर्ववत् मराठों के ही अधीन रहे। त्रावणकोर का विद्रोह (सन् १८०८ ) - - त्रावणकोर का राज्य सहायकसन्धि द्वारा अँगरेजों के अधीनस्थ था । मिण्टो के शासन काल में उसने पुनः स्वतन्त्र होने की चेष्टा की। इस समय राज्य के दीवान वेलू तम्पी और अँगरेज रेजीडेंट का पारस्परिक सम्बन्ध मित्रतापूर्ण न था । राज्य के आन्तरिक शासन में अंगरेजों का अत्यधिक हस्तक्षेप दीवान के असन्तोष का मुख्य कारण था । अतः एक घोषणा-पत्र के द्वारा उसने अपने राज्य निवासियों को धर्म एवं राज्य के नाम पर अँगरेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए कहा । परिणाम स्वरूप जनता ने विद्रोह कर दिया। अँगरेज रेजीडेण्ट के घर पर आक्रमण किया गया । वह तो किसी प्रकार भाग निकला परन्तु अनेक योरपीय सैनिक मारे गये । मिण्टो ने सूचना पाते ही राज्य में एक सेना भेजी जिसने विद्रोह का कठोरतापूर्वक दमन किया । वेलू तम्पी ने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए आत्महत्या कर ली। त्रावणकोर एवं कोचीन के राज्य कुशासन के आरोप पर कुछ समय के लिए ब्रिटिश अधिकार में कर लिये गये । बाह्य-नीति~-लार्ड मिण्टो की बाह्य-नोति फ्रांस और रूस के सम्भावित आक्रमण के परिणाम स्वरूप थी । इस समय अँगरेजों को भय था कि ये दोनों योरपीय राष्ट्र उत्तरी-पश्चिमी स्थल मार्ग से भारतवर्ष पर आक्रमण कर सकते है । अतः अँगरेजों को अपनी उत्तरी-पश्चिमी सीमा को सुदृढ़ करने की चिन्ता हुई । इस सीमा पर पंजाब, सिन्ध, अफगानिस्तान और फारस के राज्य स्थित थे । लार्ड मिण्टो ने बाह्य आक्रमण के भय को दूर करने के लिए इन राज्यों से मैत्रीपूर्ण राजनीतिक सम्बन्ध स्थापित करने की चेष्टा की । पंजाब और रणजीत सिंह - मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् पंजाब पर सिक्खों का अधिकार हो गया । कालान्तर में महाराजा रणजीतसिंह ने वहां एक सुसंगठित राज्य की स्थापना कर ली। सिक्ख का शुद्ध संस्कृत रूप शिष्य है । गुरु नानक ने अपने अनुयायियों का यही नाम रक्खा था । वे सिक्खों के प्रथम गुरु थे और उनके पवित्र ग्रन्थ 'आदि ग्रन्थ' का निर्माण कर उन्होंने सिक्खों को एक पृथक् सम्प्रदाय में संगठित कर दिया था। प्रारम्भ में यह एक धार्मिक सम्प्रदाय था । परन्तु सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने उन्हें सैनिक रूप दे दिया। गोविन्दसिंह अभी केवल १५ वर्ष के ही थे जब उनके पिता गुरु तेगबहादुर का धर्मान्ध औरंगजेब ने वध करा दिया। फिर क्या था ? सारा मिक्ख समुदाय प्रतिहिंसा की भावना से व्यग्र हो उठा । गुरु गोविन्द सिंह ने इस भावना से लाभ उठाकर अपनी अद्भुत संगठन-शक्ति के द्वारा उन्हें एक सैनिक सम्प्रदाय में संगठित कर दिया । सन् १७०८ में गुरु गोविन्द सिंह की मृत्यु हो गई । परन्तु इस समय तक सिक्ख सम्प्रदाय भारतवर्ष में एक प्रबल सैनिक वर्ग हो चुका था। नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों से देश में अव्यवस्था फैल गई और केन्द्रीय शक्ति शिथिल पड़ गई। इस अवसर से लाभ उठाकर सिवखों ने अपनी शक्ति और भी बढ़ा ली और सम्पूर्ण पंजाब उनके प्रभुत्व में आ गया । इस समय उनका सम्प्रदाय अथवा खालसा १२ मिसलों में विभक्त था । प्रत्येक का एक नेता होता था। रणजीतसिंह का पितामह चरतसिंह सुखेरकुचिया एक ऐसे ही मिसल का नेता था। उसने आस-पास की भूमि जीतकर एक निश्चित भू-प्रदेश पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया था । उसके पुत्र महासिंह ने अपने पिता के संगठन कार्य को जारी रक्खा । सन् १७९१ में उसकी मृत्यु हो गई। उसके पश्चात् मिसल के शासन का सूत्र उसके पुत्र रणजीतसिंह के हाथ में आया । उस समय उसकी आयु केवल १२ वर्ष की थी । परन्तु आरम्भ से ही उसने अपनी तीव्र प्रतिभा एवं कार्यक्षमता का परिचय देना प्रारम्भ कर दिया। उसमें संगठन शक्ति सराहनीय थी । शीघ्र ही उसने अपनी सेना को संगठित कर अपना राज्य विस्तार करना आरम्भ किया। जिस समय लार्ड मिण्टो भारतवर्ष में गवर्नर-जनरल होकर आया, उस समय तक रणजीतसिंह पंजाब में अपना प्रभुत्व स्थापित कर चुका था । लाहौर उसके राज्य की राजधानी थी । सर्वप्रथम अंगरेजों का ध्यान सिक्खों की उदीयमान शक्ति की ओर उस समय आकृष्ट हुआ जब सन् १८०४ में फतेहगढ़ युद्ध में परास्त हो होलकर ने भागकर पंजाब में शरण ली। रणजीतसिंह होलकर की मन्धि करना चाहता था, परन्तु उसके परामर्शदाताओं ने अँगरेजों से संघर्ष होने की आशंका से उसे ऐसा करने से रोक दिया। उस समय से अँगरेजी अभिरुचि पंजाब में उत्तरोत्तर बढ़ती गई । सन् १८०६ तक रणजीतसिंह ने सम्पूर्ण पंजाब पर अधिकार कर पूर्व में सतलज नदी तक अपनी राज्य-सीमा बढ़ा ली थी। अब वह सतलज नदी के पूर्व में स्थित पटियाला, नाभा एवं झींद के राज्यों को हस्तगत करना चाहता था । सन् १८०६ में उसने सतलज नदी पार की और झींद और पटियाला पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। रणजीतसिह की साम्राज्य-विस्तार-कारिणी महत्वाकांक्षा से भयभीत होकर सतलज नदी के पूर्व में स्थित देशी राज्यों ने अँगरेजों से संरक्षण की प्रार्थना की । ये राज्य रणजीतसिंह के राज्य एवं अँगरेजी राज्य के बीच में स्थित थे । अतः इनकी स्वतन्त्रता के लिए अँगरेज भी चिन्तित थे क्योंकि ये उनके लिए 'बफर स्टेट' ( Buffer State ) का कार्य करते थे । पुनः अँगजों को इस प्रदेश से होकर होनेवाले सम्मिलित फ्रांसीसी और सी आश्रमण का भी भय था । इससे वे इन राज्यों की स्वतन्त्रता एवं रणजीत सिंह की मित्रता दोनों के लिए समान रूप से उत्सुक थे । इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए लार्ड मिण्टो ने दिल्ली के रेजीडेंट मेटकाफ (Metcalfe) को रणजीतसिंह से बातचीत करने के लिए भेजा। रणजीतसिंह अंगरेजों से सन्धि करने के लिए इस शर्त पर तैयार हुआ कि वे सतलज नदी के पूर्व के राज्यों पर उसका आधिपत्य स्वीकार कर लें और उसके राज्य के आन्तरिक विषयों में हस्तक्षेप न करें। इस प्रस्ताव से मिण्टो बड़े संकट में पड़ गया । वह रणजीत सिंह के राज्य की सीमा को सतलज नदी तक ही रखना चाहता था । अतः उसने अब दृढ़ता से काम लिया; एक अँगरेजी मेना सतलज-तट पर भेजी गई । वास्तव में रणजीतसिह अँगरेजों में युद्ध न करना चाहता था। अतः अब उसने अमृतसर में अप्रैल, रान् १८०९ में अंगरेजों से सन्धि कर ली। इसके अनुसार सतलज सिव ख- राज्य की सीमा मान ली गई । उसके पूर्व की स्वतन्त्र रियासतें अंगरेजों को संरक्षता में आ गई । जब तक रणजीतसिह जीवित रहा तब तक उसने इस सन्धि का अक्षरशः पालन किया । फिर उसने कभी भी सतलज नदी को पार कर पूर्वी प्रदेश पर आक्रमण न किया। इस प्रकार उसके साथ लार्ड मिण्टो की नीति सर्वथा सफल रही। फारस और अफगानिस्तान -- फारम का शाह फ्रांसीसियों का मित्र था । फ्रांसीसी सरकार ने उसकी राजधानी तेहरान में अपना दूत भेजा था और आवश्यकतानुसार शाह को सैनिक एवं आर्थिक सहायता देने का भी वचन दिया था। फारस में बढ़ते हुए फ्रांसीसी प्रभाव को देखकर लाई मिण्टो मशंकित हो गया। टिलसिट की सन्धि के पश्चात् उसका भय ओर भी बढ़ गया। उसे निरन्तर फ्रांस और रूस की सम्मिलित शक्तियों के आक्रमण का भय रहता था। अतः अपनी पश्चिमी सीमा सुरक्षित करने के लिए उसने फारस के शाह को अपने पक्ष में लेना चाहा । इस ध्येय की पूर्ति के लिए उसने फारस में अपना एक दूत भेजा । अधिक दबाव पड़ने पर शाह ने सन् १८०९ में अंगरेजों के साथ मन्धि कर ली। इसके अनुसार अंगरेजों ने आवश्यकता पड़ने पर शाह को सैनिक सहायता देना स्वीकार किया। इसके बदले में शाह ने वचन दिया कि वह भारे अंगरेज-विरोधी योरपीय नागरिकों को अपने राज्य से निकाल देगा और फ्रांस अथवा रूस की सेनाओं को भारत पर आमण करने के लिए अपने राज्य से मार्ग न देगा । इसी प्रकार सन् १८०९ में लाई मिण्टो ने माउण्ट स्टुअर्ट एलफिस्टन (Mount Stuart Elphinstone) को राजनीतिक विषयों पर बातचीत करने के लिए काबुल भेजा। वहाँ के अमीर शाहशुजा ने अंगरेजों से सन्धि कर लो । परन्तु इस सन्धि से विशेष लाभ न हुआ क्योंकि शीघ्र ही आन्तरिक युद्ध के कारण शाह शुजा अफगानिस्तान से निर्वासित कर दिया गया । फ्रांसीसी उपनिवेशों पर अधिकार--योरप में अँगरेजी-फ्रांसीसी युद्ध भारतवर्ष में भी उसकी ज्वाला भड़क उठी। अँगरेजों ने उनके उपनिवेशों पर अधिकार करने का यह अच्छा अवसर देखा । अतः सन् १८९० में भारत सरकार ने एक जहाजी-बेड़ा भेजकर बुर्बो और मारीशस के द्वीपों पर अपना अधिकार कर लिया । कम्पनी को नया आज्ञा-पत्र ( सन् १८१३ ) -- सन् १८१३ में कम्पनी को २० वर्ष के लिए पुनः आज्ञा पत्र दिया गया । परन्तु इस बार उससे भारतीय व्यापार का एकाधिकार ले लिया गया, यद्यपि उसका चीन के साथ होनेवाले व्यापार का एकाधिकार पूर्ववत् सुरक्षित रहा । इस बार भारतवर्ष में शिक्षाप्रसार की ओर भी ध्यान दिया गया और इस कार्य के लिए १ लाख रुपया वार्षिक स्वीकृत किया गया । योरपीयों की धार्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारतवर्ष में तीन पादरियों की नियुक्ति की गई जिनका वेतन भारतीय कोष से देना निश्चित हुआ । सात वर्ष के शासन के पश्चात् सन् १८१३ में लार्ड मिण्टो इंगलैंड चला गया । उसने यथासम्भव शान्तिमय नीति का अवलम्बन लिया । उसका शासन विशेषतया अन्य स्वतन्त्र राज्यों के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित करने के कारण प्रसिद्ध है । वास्तव में फ्रांसीसी - रूसी शक्तियों के सम्भावित आक्रमण के भय के निराकरण के लिए ही उसने ऐसा किया था । उसके समय से अँगरेजों का ध्यान भारतवर्ष की उत्तरी-पश्चिमी सीमा की ओर अधिकाधिक आकृष्ट होता गया जिसने उनके इतिहास की एक विशेष रूप रेखा कर दी । इसका वर्णन आगे के अध्यायों में किया जायेगा । अध्याय २२ सन् १८१३ में भारतीय परिस्थितिमाएको प्रत्यावर्तन (सन् १८१२) और लाइपजिंग ( मन् १८१३ ) के युद्ध के पश्चात् नैपोलियन की आशाओं पर तुपारपात हो गया। ब्रिटिश भारतवर्ष पर आक्रमण का भय जाता रहा । अतः अंगरेजों ने पुनः अग्रगामी, उग्र एवं साम्राज्य विस्तार कारिणी नीति का अनुसरण करना प्रारम्भ किया। सन् १८१३ में लार्ड मिष्टो के पद-त्याग करने पर लार्ड हेस्टिग्ज भारतवर्ष का गवर्नर जनरल बनाया गया । वह अमेरिका के स्वतन्त्रता संग्राम में इंगलैंड की ओर से भाग ले चुका था। ब्रिटिश पार्लियामेंट में बैठकर उसने लार्ड वेटेजली की उग्र नीति का तीव्र विरोध किया था। परन्तु जब वह स्वयं गवर्नर जनरल होकर आया तो उसे ज्ञात हुआ कि वास्तव में उसे भी विशेष परिस्थिति के कारण वेलेजली की ही भाँति उग्र नीति का अनुसरण करना होगा। भारतवर्ष की तत्कालीन परिस्थिति सन्तोषजनक न थी । । यद्यपि मराठा सरदार वेलेजली के समय में परास्त हो चुके थे, परन्तु उनका दमन न हो सकता था । लार्ड मिण्टो की शान्ति प्रधान नीति से लाभ उठाकर सिंधिया, होलकर और भोंसले ने पुनः अपनी शक्ति संगठित कर ली थी और अब वे ब्रिटिश शक्ति का मूलोच्छेदन करने के हेतु योजना बना रहे थे। उधर, पेशवा भी सहायक सन्धि को तोड़ फेंकना चाहता था । मध्यभारत में अराजकता फैली हुई थी। पिण्डारियों के भय के कारण जन-साधारण का धन-जन अरक्षित हो रहा था । भारतवर्ष के बाहर नेपाल और ब्रह्मा विशेष सबल हो गये थे। उनकी राज्य विस्तार - कारिणी महत्त्वाकांक्षा से अंगरेजी सत्ता को भय उपस्थित हो गया था । गोरखा- युद्ध (सन् १८१४-१६ ) -- सर्वप्रथम हेस्टिग्ज का ध्यान नेपाल की ओर गया । ऊपर कहा जा चुका है कि इस समय नेपाल की शक्ति बहुत बढ़ गई थी और अब वह अपनी सीमाओं का विस्तार करना चाहता था। सन् १८०१ में अंगरेजों ने अवध के नवाब वजीर से गोरखपुर हस्तगत कर लिया था । अतः अब उसकी सीमा ब्रिटिश भारत की सीमा से मिल गई थी। नैपाल के आदि इतिहास के विषय में विशेष ज्ञात नहीं । १४वीं सदी में वहाँ क्षत्रियों के अनेक छोटे-छोटे स्वतन्त्र राज्य स्थापित हो गये । अनवरत युद्ध के पश्चात् अन्त में गोरखों ने अन्य वर्गों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और उसके नेता पृथ्वीनारायण ने सन् १७६७ में एक राजवंश की स्थापना की । गोरखा- राज्य ने बड़ी शीघ्रता से उन्नति की । थोड़े ही समय में उसकी पूर्व की सीमा सिक्किम तक और पश्चिम की सीमा सतलज नदी तक विस्तृत हो गई । नेपाल की उदीयमान शक्ति को देखकर अँगरेजों ने उससे व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने की चेष्टा की, परन्तु विफल रहे। उन्होंने सन् १७९३ में कर्नल कर्कपैट्रिक ( Col. Kirkpatrick ) और सन् १८०२ में कैप्टेन नाक्स ( Captain Knox ) को वार्ता चलाने के हेतु नैपाल भेजा, परन्तु कोई विशेष परिणाम न हुआ । अतः नैपाल-राज्य लार्ड हेस्टिग्ज के समय तक अँगरेजों के लिए रहस्यमय देश ही रहा । अंगरेजी और नेपाली राज्य की सीमाएँ निश्चित रूप से निर्धारित न थीं, अतः दोनों में बहुत दिनों से झगड़ा चल रहा था । गोरखे सम्पूर्ण तराई को अपना प्रदेश समझते थे, परन्तु अँगरेज उस दिशा में उनके राज्य विस्तार से अपने साम्राज्य के लिए खतरा समझते थे। लार्ड मिण्टो के समय में गोरखों ने सारन और गोरखपुर के कुछ भू-प्रदेश पर अधिकार करना चाहा, परन्तु अँगरेजों की चेतावनी के कारण वे कुछ समय तक ऐसा न कर सके । परन्तु थोड़े ही समय के अनन्तर उन्होंने शिवराज और बुतवल पर अधिकार कर लिया। अँगरेजों को जब यह सूचना मिली तो उन्होंने अपनी सेना भेजकर इन जिलों पर पुनः अपना अधिकार कर लिया । गोरखों ने इसे अनधिकार चेष्टा समझा और वे एगरेजों से अत्यन्त क्रुद्ध हो गये । मई, सन् १८१४ में उन्होंने बतवल के थाने पर आक्रमण कर दिया । अतः अब अँगरेजों को उनके विरुद्ध युद्ध घोषणा करनी पड़ी। लार्ड हेस्टिग्ज ने युद्ध की एक विस्तृत योजना बनाई। ३० हजार की एक विशाल अँगरेजी सेना ने नेपाल राज्य पर आक्रमण किया, परन्तु गोरखों की अद्भुत वीरता एवं पर्वतीय प्रदेश की दुर्गमता के कारण उसे प्रारम्भ में राफलता न मिली। मार्टले और वुड नामक अंगरेज सेनापतियों को गोरखों के भीषण आक्रमण के सामने भागना पड़ा । कलंगा के पहाड़ी दुर्ग पर अधिकार करने के प्रयास में अँगरेजी जनरल जिलेस्पी (General Gillespic ) को अपने ) प्राण गँवाने पड़े । अंगरेजों की इन प्रारम्भिक पराजयों से अन्य देशी राज्यों को प्रोत्साहन मिला। उन्होंने सम्मिलित रूप से आक्रमण कर अँगरेजों को भारतवर्ष से निकाल देने का यह अच्छा अवसर देखा। इस उद्देश्य से मराठों, पिण्डारियों एवं रणजीत सिंह ने आपस में वार्ता प्रारम्भ कर दी। यह सूचना पाकर हेस्टिग्ज भयभीत हो गया। उसने डेविड आक्टर लोनी ( David Ochter.ony ) की अध्यक्षता में पुनः सेनाओं का संगटन किया । अभाग्यवश अपनी पारस्परिक अविश्वास भावना के कारण देशी राज्यों का संगठित एवं सम्मिलित रूप से कार्य करना असम्भव हो गया । इस स्थिति से अंगरेजों ने पूरा लाभ उठाया । जनरल आक्टर लोनी ने पुनः नेपाली सेनापति अमरसिंह थापा पर आक्रमण किया और इस बार उसकी विजय हुई । नेपाली दुर्ग मुलांव ( Malaon ) पर मई, सन् १८१५ में अंगरेजों का अधिकार हो गया और अमरसिंह को विवश हो आत्म-समर्पण करना पड़ा । अंगरेजो ने धन का प्रलोभन देकर गोरखा सिपाहियों को भी अपनी ओर मिला लिया । अतः नेपाली सरकार को विवश होकर सन्धि वार्ता चलानी पड़ी। उसके परिणामस्वरूप नवम्बर, सन् १८१५ में सिगौली की सन्धि हो गई । परन्तु अमरसिंह की सम्मति से नेपाली सरकार ने पुनः युद्ध आरम्भ करने का निश्चय किया और सिगौली की सन्धि को अस्वीकार कर दिया। यह सूचना पाकर अंगरेज सेनापति आवटर लोनी पुनः गोरखों पर आक्रमण किया और मकवानपुर (Makwanpur) के युद्ध में पराजित किया । हताश होकर अन्त में नेपाल सरकार ने सिगौली की सन्धि स्वीकार कर ली । इस सन्धि के अनुसार अंगरेजों को गढ़वाल और कुमायूँ के जिले एवं तराई का एक विस्तृत भू-प्रदेश मिला । नेपाली सरकार को सदैव के लिए शिकम से हटना पड़ा । उसने अपनी राजधानी काठमांडू में अंगरेज रेजीडेंट रखना भी स्वीकार कर लिया। इस प्रकार सिक्ख-राज्य और नैपाली राज्य के बीच में अँगरेजी भू-प्रदेश के आ जाने के कारण दोनों में गुटबन्दी करना असम्भव हो गया। इस सन्धि के अनुसार शिमला, नैनीताल और अल्मोड़ा के सुन्दर पर्वतीय नगर अँगरेजों के अधिकार में आ गये । उस समय से अभी तक दोनों सरकारों ने मिगौली की सन्धि का सत्यतापूर्वक पालन किया है। कालान्तर में मराठा-शक्ति से युद्ध होना अवश्यम्भावी समझकर अंगरेजों ने गोरखों को सन्तुष्ट कर उन्हें अपने पक्ष में लेने के ध्येय से नेपाल राज्य को तराई का एक विस्तृत देश पुनः लौटा दिया। पिण्डारी युद्ध (सन् १८१६-१८ ) - गोरखा- युद्ध के पश्चात् हेस्टिग्ज का ध्यान पिण्डारियों की ओर गया । इनकी उत्पत्ति एवं नाम का कारण निश्चित रूप से ज्ञात नहीं । परन्तु इतना निश्चित है कि इनका किसी धर्म या जाति से सम्बन्ध न था। पहले पहल इनका नाम हम औरंगजेब के शासन काल में सुनते है। इन्होंने मराठों का पक्ष लेकर मुगल साम्राज्य की धर्मान्धता के विरुद्ध युद्ध किया था । १९वीं शताब्दी के प्रारम्भ में इन्होंने पुनः ख्याति प्राप्ति की । नर्मदा प्रदेश एवं मालवा इनका मुख्य केन्द्र हो गया। ये लोग सैनिक प्रवृत्ति के वीरकर्मा एवं साहसी व्यक्ति थे। कालान्तर में इनमें बहुसंख्यक डाकू और लुटेरे भी सम्मिलित हो गये थे। इस प्रकार इनका दल सबल हो गया था। चीतू, वासिल मुहम्मद, अमीर खाँ और करीम खाँ इनके नेता थे जिनकी अध्यक्षता में १५,००० से २०,००० तक पिण्डारी रहते थे। इनके सशस्त्र दल मनुष्यों का उत्पीडन कर इतस्ततः घूमते थे। इनके आक्रमणो मे जन साधारण का धन-जन अरक्षित हो गया था । अनेक इतिहासकारों का मत है कि इनके कार्यों का राजनीतिक उद्देश्य भी था । ये मराठों के सहयोग से अंगरेजी सत्ता का विनाश करना चाहते थे। इन्होंने मराठों से गुप्त रूप से सन्धि कर ली थी और आवश्यकतानुसार उन्हें सैनिक सहायता देने के लिए तैयार थे। परन्तु मराठों के साथ इनका यथार्थ सम्बन्ध निश्चित रूप से ज्ञात नहीं। अंगरेजों ने जान-बूझकर इनके कार्यों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बर्नर एवं निर्दयतापूर्ण बताया है। ऐसा करने हेस्टिग्ज की मराठों के विरुद्ध उग्र नीति का औचित्य प्रदर्शित करना चाहते है। अस्तु, हेस्टिग्ज ने पिण्डारियों का दमन करने का निश्चय किया। इस कार्य के लिए उसने १ लाख १३ हजार सिपाहियों की सेना संगठित की। इसे चार भागों में विभक्त किया गया । इसका कारण था कि उसी समय मराठों ते भी युद्ध प्रारम्भ होनेवाला था। हेस्टिग्ज को चिन्ता थी कि कही पिण्डारी और मराठे सम्मिलित होकर अँगरेजों से युद्ध न करे। अतः वह उन दोनों को अलग-अलग रखना चाहता था; उत्तरी सेना का नेतृत्व स्वयं हेस्टिग्ज ने अपने ऊपर लिया और दक्षिणी सेना एक अन्य अफसर सर टामस हिसलाप (Sir Thomas Hislop) की अधीनता में रक्खी गई। इस प्रकार चारों ओर से मराठों और पिण्डारियों के विरुद्ध कार्यवाही आरम्भ हुई। पिण्डारी चारों ओर घिर गये। अंगरेजी सेना ने उन पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर उनका पीछा किया। पिण्डारी अस्त-व्यस्त हो गये। उनके बहुसंख्यक सैनिक मारे गये। उनके एक नेता अमीर खाँ ने अँगरेजों की अधीनता स्वीकार कर ली। अँगरेजों ने उसे टोक का राज्य देकर अपने पक्ष में कर लिया। यहाँ पर अभी तक उसके वंशज राज्य कर रहे है। इसी प्रकार करीम खाँ भी हताश होकर अंगरेजों के अधीनस्थ हो गया। उनका अन्य नेता चीतू जंगल में भाग गया जहाँ उसे एक चीते ने मार डाला। इस प्रकार हेरिटग्ज ने सुव्यवस्थित सैनिक-योजना के द्वारा पिण्डारियों की सवल शक्तियों को चूर्ण कर दिया। उनके दल बिखर गये। बहुत से पिण्डारी नगरों और ग्रामों में आकर बम गये जहाँ वे साधारण नागरिकों की भांति जीवन व्यतीत करने लगे। बहुतों ने किसानों और कारीगरी का पेशा ग्रहण कर लिया । मराठा-संघ का पतन ( १८१७-१९ ) --हेस्टिग्ज ने प्रारम्भ से ही समझ लिया था कि भारतवर्ष में अंगरेजी सत्ता को सर्वशक्तिमान बनाने के लिए मराठो से युद्ध करना अवश्यम्भावी है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, वेलेजली ने मराठों को परास्त तो किया था, परन्तु उनकी शक्ति को पूर्णतया नष्ट न कर सका था। उसके जाने के पश्चात् लाई मिष्टो की शान्ति प्रधान नीति से लाभ उठाकर मराठों ने पुनः शक्ति-संचय करना प्रारम्भ कर दिया था । वे भली भाँति समझ गये थे कि एगरेज भारतवर्ष के लिए एक महान् आपत्ति के रूप में विद्यमान हैं। उनकी शत्रुता एवं मित्रता दोनों ही देशी राज्यों के भारत का शर्तहास लिए समान रूप से घातक हैं। । वे अन्य देशी राज्यों के भाग्य को देख ही चुके थे। उनमें से कुछ तो अँगरेज़ों के विरुद्ध अपना अस्तित्व ही खो चुके थे और कुछ उनकी कूटनीतिपूर्ण सहायक-सन्धि के चंगुल में फँसकर अपनी प्रतिष्ठा एवं स्वतन्त्रता को खोकर अँगरेजों की अधीनता में येन केन प्रकारेण अपना अपमानजनक अस्तित्व चला रहे थे। मराठों में केवल पेशवा ने अँगरेजों से सहायकसन्धि की थी और वह भी अब उसे तोड़ने की चिन्ता में था । परन्तु, अन्य मराठा सरदार अपने नेता पेशवा को अंगरेजों के अधीन देखकर अपमान से क्षुब्ध थे। वे उनके विरुद्ध युद्ध की योजनाएं बना रहे थे । हेस्टिग्ज इस स्थिति से परिचित था । अतः उसने बड़ी सावधानी से कार्य करना प्रारम्भ किया। मराठों के पारस्परिक द्वेष-भाव ने उसकी राजनीतिक एवं सैनिक योजनाओं में पर्याप्त योग दिया। हेस्टिग्ज और भोंसले - सर्वप्रथम हेस्टिग्ज का ध्यान भोंसला राज्य की ओर आकृष्ट हुआ । इस समय नागपुर अन्तःकलह से व्याप्त था । २२ मार्च सन् १८१६ को राघोजी भोंसले द्वितीय ( Raghuji Bhosale II ) की मृत्यु हो गई । उसके पुत्र परसोजी (Parsoji) की शारीरिक एवं ) मानसिक स्थिति अच्छी न थी । अतः संरक्षक पद के लिए राघोजी की विधवा पत्नी चुकाबाई और अप्पा साहब में झगड़ा आरम्भ हो गया । हेस्टिंग्ज ने इस गृह कलह से पूरा लाभ उठाया। उसने अप्पा साहब का पक्ष लिया और उसे सहायता देने का वचन दिया। प्रलोभन में पड़कर अप्पा साहब ने मई, सन् १८१६ में अंगरेजों से सहायक सन्धि कर ली। इस सन्धि से मराठासंघ की शक्ति को बड़ा आघात पहुँचा । माल्कम ( Sir John Malcolm ) के कथनानुसार अँगरेजों के लिए इस समय 'नागपुर के साथ होनेवाली सहायकसन्धि से अधिक सौभाग्यशाली कोई अन्य घटना नहीं हो सकती थी ।' हेस्टिग्ज और पेशवा --मराठा- सरदारों में पेशवा ही एक ऐसा था जिसने हेस्टिग्ज के पूर्व अँगरेजों से सहायक सन्धि की थी। परन्तु अब वह अँगरेजों के बन्धन से मुक्त होना चाहता था । अतः बेसीन की सन्धि के पश्चात् ही बाजी - राव द्वितीय ने अपनी शक्ति को संगठित करना प्रारम्भ कर दिया। उसकी बढ़ती हुई शक्ति को देखकर अंगरेज सशंकित हो गये और उन्होंने उसे निर्बल करने के ध्येय से उसके अधीनस्थ राज्यों को अपनी ओर मिलाना प्रारम्भ कर दिया। पूना-स्थित अँगरेज रेजीडेंट एलफिस्टन के प्रोत्साहन के परिणाम स्वरूप कोल्हापुर और सावन्तवाडी (Sawantwadi ) के राज्यों ने पेशवा की अधीनता अस्वीकार कर अपनी स्वतन्त्रता घोषित कर दी। इस प्रकार पेशवा और अँगरेजों में असन्तोष की भावना बढ़ने लगी । सन् १८१४ में यह असन्तोष और भी बढ़ गया । पेशवा का मंत्री त्र्यम्बक जी अँगरेजों का घोर विरोधी था और उसने पुनः मराठा संघ को अँगरेजों के विरुद्ध संगठित करना प्रारम्भ किया । अतः उसने योजना निर्माण के लिए अपने दूत सिंधिया, होलकर और भोंसले के दरबारों में भेजे । पेशवा ने बेसीन की सन्धि को तोड़ने के ध्येय से पुनः निजाम-राज्य और बड़ौदा-राज्य (गायकवाड़ ) से अपने प्राचीन अधिकारों को माँगा । सन्धि-वार्ता के लिए बड़ौदा का मंत्री गंगाधर शास्त्री पुना आया। कहते हैं कि त्र्यम्बक जी ने षड्यन्त्र करके वहाँ उसकी हत्या कराई परन्तु वर्तमान ऐतिहासिक अनुसन्धानों के आधार पर यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि इस हत्या में पेशवा अथवा उसके मंत्री का कुछ भी हाथ था। फिर भी कूटनीतिज्ञ अँगरेजों को इस घटना से लाभ उठाने का पूरा अवसर मिल गया । पूना का अँगरेज रेजीडेंट एलफिंस्टन तो पहले से ही त्र्यम्बक जी का विरोधी था । अतः उसने अब इस हत्या का आरोप उसी पर लगाया। त्र्यम्बक जी पकड़ गया और एक थाने में बन्दी बना लिया गया । परन्तु किसी प्रकार वह वहाँ से भाग निकला। एलफिस्टन को पुनः अवसर मिला । उसने त्र्यम्बक जी के निकल जाने में पेशवा का हाथ बताया। इस प्रकार एक के बाद दुसरा आरोप लगाकर उसने पेशवा को भयभीत कर दिया । अन्त में आत्मरक्षा का कोई उपाय न देखकर जून, सन् १८१७ को पेशवा ने अँगरेजों से एक नई सन्धि कर ली। इसके अनुसार पेशवा ने मराठा संघ की अध्यक्षता का अधिकार छोड़ दिया। पुनः उसने किसी भी विदेशी सत्ता के साथ पत्र व्यवहार न करने की प्रतिज्ञा की । अंगरेजों ने उसके राज्य का कुछ भाग अपने राज्य में मिला लिया । इसके अतिरिक्त उसने अपने मन्त्री त्र्यम्बक जी को अँगरेजों के हवाले कर दिया । यद्यपि विवशता - वश पेशवा ने इन अपमानजनक प्रस्तावों को स्वीकार सरसार काहनिहा तो कर लिया, परन्तु हृदय से वह अँगरेज़ों का घोर शत्रु हो गया और भविष्य में उनके विरुद्ध कार्यवाही करने का अवसर ढूँढ़ने लगा । हेस्टिग्ज और सिन्धिया -- १८०५ ई० की सन्धि के अनुसार अँगरेजों ने सिन्धिया को वचन दिया कि वे उससे अधीनस्थ राजपूत राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप न करेंगे । जन हेस्टिग्ज गवर्नर जनरल होकर आग तो उसे ज्ञात हुआ कि उसके पूर्वाधिकारियों ने इस प्रकार की सन्धि कर बड़ी भारी भूल की है। सामरिक एवं राजनीतिक दृष्टियों से इन राजपूत राज्यों की स्थिति बड़ी महत्त्वपूर्ण थी। यदि वे अंगरेजों की संरक्षता में आ जाते तो मध्य-भारत में अंगरेजों की स्थिति बड़ी सुरक्षित हो जाती । पुनः इससे मराठों की शक्ति भी बहुत कुछ क्षीण हो जाती । अतः इन विचारों से प्रेरित होकर हेस्टिग्ज अब सिंधिया के साथ हुई १८०५ ई० की सन्धि को परिवर्तित करने की चिन्ता करने लगा । इस ध्येय की पूर्ति के लिए दिल्ली के अंगरेज रेजीडेण्ट मेटकाफ (Metcalfe) ने राजपूत राज्यों से वार्ता चलानी प्रारम्भ की। उधर हेस्टिग्ज न सिधिया को भयभीत करने के लिए उस पर पिण्डारियों की सहायता करने का आरोप लगाया और उसमे हिडिया और असीरगढ़ के दो दुर्ग माँगे । पुनः उसे सूचित किया गया कि अंगरेज मालवा और राजपुताने के राज्यों को अपने संरक्षण में लेने का विचार कर रहे हैं । ये सब प्रस्ताव सन् १८०५ की सन्धियों के विरुद्ध थे । मिथिया उन्हें सुनकर किकर्त्तव्यविमूढ़ हो गया । अभी वह सम्पूर्ण स्थिति पर विचार कर ही रहा था कि इतने में हेस्टिग्ज दल-बल-सहित उसके राज्य की सीमा पर पहुँच गया । आत्म-रक्षा का अन्य उपाय न देखकर सिधिया ने ५ नवम्बर, सन् १८१७ में अंगरेजों के साथ ग्वालियर की सन्धि कर ली। इसके अनुसार मिधिया ने वचन दिया कि वह पिडारियों को न तो किसी प्रकार की सहायता देगा और न उन्हें अपने राज्य में प्रविष्ट होने देगा । राजपूत राज्यों पर से उसका अधिकार जाता रहा। वे अँगरेजों के संरक्षण में आ गये । होलकर और पठान-सन् १८११ में जसवन्त राव होलकर की मृत्यु हो गई । जिस पुत्र को उसने गोद लिया था, वह अभी अल्पायु था । अतः तुलसीबाई उसकी संरक्षक बनी। परन्तु कुछ समय पञ्चाच वेतन न मिलने के कारण उसकी सेना ने विद्रोह कर दिया। अतः अल्पायु शासक को साथ लेकर उसे आत्मरक्षा के लिए राज्य से भागना पड़ा। अब उसने हेस्टिग्ज से एक गुप्त सन्धि कर ली । अँगरेजों के संरक्षण के कारण उसके राज्य के सैनिक नेता उससे और भी अधिक असन्तुष्ट हो गये । होलकर राज्य की अव्यवस्था से लाभ उठाकर हेस्टिग्ज ने उसे और अधिक निर्बल करने का प्रयत्न करना प्रारम्भ किया। पठान सरदार अमीर खाँ होलकर का मित्र था। अंगरेजों ने उसे अपने पक्ष में मिलाने की चेष्टा की । उन्होंने सन् १८१७ में उससे एक कर ली और उसे टोंक का नवाब बना दिया। इसके बदले में उसने अपनी लुटेरों की सेना को भंग कर देने एवं भविष्य में अंगरेजों के साथ मित्रता रखने का वचन दिया। इस प्रकार अमीर खाँ के अँगरेजी पक्ष में चले जाने से होलकर का पक्ष और भी अधिक निर्बल हो गया । पेशवा से युद्ध - जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पुना की अपमानजनक - सन्धि के कारण पेशवा बड़ा क्षुब्ध था । वह उसे नष्ट करने की सतत चेष्टा कर रहा था । अँगरेजी रेजीडेंट एलफिस्टन ने स्थिति को गम्भीर होते देखकर अपना दूतावास पुना से हटाकर किक में स्थापित किया। अवसर पाकर ५ नवम्बर, सन् १८१७ को पेशवा ने किकीं स्थित उसके दूतावास पर आक्रमण कर दिया और उसे जलाकर भस्म कर दिया । परन्तु एलफिस्टन किसी प्रकार निकलकर भाग गया । अंगरेजों को जब इस दुर्घटना की सूचना मिली तो उन्होंने पूना पर आक्रमण कर उसे अपने अधिकार में कर लिया। बाजीराव पेशवा भागा, परन्तु अंगरेज सेनापति जनरल स्मिथ ने उसका पीछा किया और जनवरी, १८१८ मे कोरीगांव के युद्ध में उसे पराजित किया । पुनः फरवरी मास में अप्टी के युद्ध में पेशवा की फिर हार हुई । हताश होकर अन्त में उसने सर जान मालकम के समक्ष जून, १८१८ में आत्म-समर्पण कर दिया । सन्धि के अनुसार उसे ८ लाख रुपया वार्षिक की पेंशन दी गई और वह बिटूर में रक्खा गया । पेशवा का पद भंग कर दिया गया। सतारा के राज्य सिहासन पर शिवाजी का एक वंशज बिठाया गया । शेष पेशवा - राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया । । भोंसले से युद्ध - - परसो जी की हत्या के पश्चात् अप्पा साहब नागपुर के राज्य-सिंहासन पर बैठा । वह भी अँगरेजों से असन्तुष्ट था । अतः पेशवा की १८१७ को अँगरेज रेजीडेंसी पर आक्रमण किया । परन्तु अँगरेजों ने मीताबल्दी और नागपुर के युद्ध में उसे परास्त कर दिया । अप्पा साहब पदच्युत कर दिया गया। नर्मदा नदी के उत्तर का सम्पूर्ण भोंसलाराज्य अंगरेजी राज्य में मिला लिया गया । शेष राज्य का अधिकारी राघोजी भोंसले द्वितीय का अल्पायु पौत्र बनाया गया । उसके संरक्षण के लिए एक ब्रिटिश रेजीडेण्ट की नियुक्ति हुई । होलकर से युद्ध - होलकर राज्य के सैनिक सरदारों ने जैसे ही पेशवा के आक्रमण का समाचार सुना वैसे ही उन्होंने अपनी सेनाओं को एकत्र किया और उसकी सहायता के हेतु दक्षिण की ओर बढ़े। परन्तु उनके मार्ग को अँगरेजी सेनापति सर टामस हिसलाप ( Sir Thomas Hislop) और ) सर जान मालकम ने रोक दिया । अन्त में २१ दिसम्बर, १८१७ को महीदपुर नामक स्थान पर दोनों पक्षों की सेनाओं में युद्ध हुआ जिसमें अँगरेजों की विजय हुई। अन्त में जनवरी, सन् १८१८ में मन्दसोर की सन्धि हो गई । इसके अनुसार होलकर ने सहायता सन्धि स्वीकार कर ली । उसने अपने राज्य में अँगरेजी रोना रख ली एवं किसी भी विदेशी सत्ता से सम्बन्ध न रखने का वचन दिया। उसने अपने राज्य का कुछ प्रदेश अँगरेजों को दे दिया। सिन्धिया और गायकवाड़ से सन्धि -- अभी तक सिधिया पूर्ण रूप से युद्ध क्षेत्र से बाहर रहा था । अन्य मराठा सरदारों का दमन कर अब हेस्टिग्ज ने उसकी ओर ध्यान दिया । सन् १८१८ में उसे विवश होकर अँगरेजों से सन्धि करनी पड़ी जिसके अनुसार उमने अजमेर अँगरेजों को दे दिया और अपने राज्य की सीमा को पुनः निर्धारित करना स्वीकार कर लिया । अब गायकवाड़ ने भी अँगरेजों से एक नवीन सन्धि कर ली। इसके अनुसार उसने अपने राज्य की अँगरेजी सेना की संख्या बढ़ाना स्वीकार कर लिया और उसके खर्च के लिए अहमदाबाद का भाग अँगरेजों को दे दिया। इन समस्त युद्धों के परिणाम स्वरूप मराठों को शक्ति चूर्ण हो गई । सिंध और पंजाब को छोड़कर अब छोड़कर अब समस्त भारत अंगरेजों के अधिकार में आ गया । कम्पनी की प्रभुता सर्वमान्य हो गई ।
शोषण किया करते थे । लार्ड वेलेजली ने भराठा-शक्ति को ध्येय से इन राज्यों को अँगरेजी संरक्षण में ले लिया था । मराठों के विरुद्ध उसे इन राज्यों से पर्याप्त सहायता भी मिली थी । परन्तु मरुस्थल में स्थित होने के कारण वे आर्थिक दृष्टि से अंगरेजों के लिए विशेष लाभप्रद न थी । जब सर जार्ज बाल भारतवर्ष का गवर्नर जनरल हुआ तो उसने पुनः इन राज्यों को मराठों के सुपुर्द कर दिया। इस विश्वासघातपूर्ण कार्य के लिए उसकी बहुत निन्दा की गई । आशा यह थी कि कदाचित् लार्ड मिण्टो पुनः मराठों से छीनकर उन राज्यों को अंगरेजी संरक्षण में ले ले। परन्तु नया गवर्नर जनरल तटस्थता की नीति का अनुयायी था । अतः उसने उन राज्यों एवं मराठों के बीच में कोई हस्तक्षेप न किया और वे पूर्ववत् मराठों के ही अधीन रहे। त्रावणकोर का विद्रोह - - त्रावणकोर का राज्य सहायकसन्धि द्वारा अँगरेजों के अधीनस्थ था । मिण्टो के शासन काल में उसने पुनः स्वतन्त्र होने की चेष्टा की। इस समय राज्य के दीवान वेलू तम्पी और अँगरेज रेजीडेंट का पारस्परिक सम्बन्ध मित्रतापूर्ण न था । राज्य के आन्तरिक शासन में अंगरेजों का अत्यधिक हस्तक्षेप दीवान के असन्तोष का मुख्य कारण था । अतः एक घोषणा-पत्र के द्वारा उसने अपने राज्य निवासियों को धर्म एवं राज्य के नाम पर अँगरेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए कहा । परिणाम स्वरूप जनता ने विद्रोह कर दिया। अँगरेज रेजीडेण्ट के घर पर आक्रमण किया गया । वह तो किसी प्रकार भाग निकला परन्तु अनेक योरपीय सैनिक मारे गये । मिण्टो ने सूचना पाते ही राज्य में एक सेना भेजी जिसने विद्रोह का कठोरतापूर्वक दमन किया । वेलू तम्पी ने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए आत्महत्या कर ली। त्रावणकोर एवं कोचीन के राज्य कुशासन के आरोप पर कुछ समय के लिए ब्रिटिश अधिकार में कर लिये गये । बाह्य-नीति~-लार्ड मिण्टो की बाह्य-नोति फ्रांस और रूस के सम्भावित आक्रमण के परिणाम स्वरूप थी । इस समय अँगरेजों को भय था कि ये दोनों योरपीय राष्ट्र उत्तरी-पश्चिमी स्थल मार्ग से भारतवर्ष पर आक्रमण कर सकते है । अतः अँगरेजों को अपनी उत्तरी-पश्चिमी सीमा को सुदृढ़ करने की चिन्ता हुई । इस सीमा पर पंजाब, सिन्ध, अफगानिस्तान और फारस के राज्य स्थित थे । लार्ड मिण्टो ने बाह्य आक्रमण के भय को दूर करने के लिए इन राज्यों से मैत्रीपूर्ण राजनीतिक सम्बन्ध स्थापित करने की चेष्टा की । पंजाब और रणजीत सिंह - मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् पंजाब पर सिक्खों का अधिकार हो गया । कालान्तर में महाराजा रणजीतसिंह ने वहां एक सुसंगठित राज्य की स्थापना कर ली। सिक्ख का शुद्ध संस्कृत रूप शिष्य है । गुरु नानक ने अपने अनुयायियों का यही नाम रक्खा था । वे सिक्खों के प्रथम गुरु थे और उनके पवित्र ग्रन्थ 'आदि ग्रन्थ' का निर्माण कर उन्होंने सिक्खों को एक पृथक् सम्प्रदाय में संगठित कर दिया था। प्रारम्भ में यह एक धार्मिक सम्प्रदाय था । परन्तु सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने उन्हें सैनिक रूप दे दिया। गोविन्दसिंह अभी केवल पंद्रह वर्ष के ही थे जब उनके पिता गुरु तेगबहादुर का धर्मान्ध औरंगजेब ने वध करा दिया। फिर क्या था ? सारा मिक्ख समुदाय प्रतिहिंसा की भावना से व्यग्र हो उठा । गुरु गोविन्द सिंह ने इस भावना से लाभ उठाकर अपनी अद्भुत संगठन-शक्ति के द्वारा उन्हें एक सैनिक सम्प्रदाय में संगठित कर दिया । सन् एक हज़ार सात सौ आठ में गुरु गोविन्द सिंह की मृत्यु हो गई । परन्तु इस समय तक सिक्ख सम्प्रदाय भारतवर्ष में एक प्रबल सैनिक वर्ग हो चुका था। नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों से देश में अव्यवस्था फैल गई और केन्द्रीय शक्ति शिथिल पड़ गई। इस अवसर से लाभ उठाकर सिवखों ने अपनी शक्ति और भी बढ़ा ली और सम्पूर्ण पंजाब उनके प्रभुत्व में आ गया । इस समय उनका सम्प्रदाय अथवा खालसा बारह मिसलों में विभक्त था । प्रत्येक का एक नेता होता था। रणजीतसिंह का पितामह चरतसिंह सुखेरकुचिया एक ऐसे ही मिसल का नेता था। उसने आस-पास की भूमि जीतकर एक निश्चित भू-प्रदेश पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया था । उसके पुत्र महासिंह ने अपने पिता के संगठन कार्य को जारी रक्खा । सन् एक हज़ार सात सौ इक्यानवे में उसकी मृत्यु हो गई। उसके पश्चात् मिसल के शासन का सूत्र उसके पुत्र रणजीतसिंह के हाथ में आया । उस समय उसकी आयु केवल बारह वर्ष की थी । परन्तु आरम्भ से ही उसने अपनी तीव्र प्रतिभा एवं कार्यक्षमता का परिचय देना प्रारम्भ कर दिया। उसमें संगठन शक्ति सराहनीय थी । शीघ्र ही उसने अपनी सेना को संगठित कर अपना राज्य विस्तार करना आरम्भ किया। जिस समय लार्ड मिण्टो भारतवर्ष में गवर्नर-जनरल होकर आया, उस समय तक रणजीतसिंह पंजाब में अपना प्रभुत्व स्थापित कर चुका था । लाहौर उसके राज्य की राजधानी थी । सर्वप्रथम अंगरेजों का ध्यान सिक्खों की उदीयमान शक्ति की ओर उस समय आकृष्ट हुआ जब सन् एक हज़ार आठ सौ चार में फतेहगढ़ युद्ध में परास्त हो होलकर ने भागकर पंजाब में शरण ली। रणजीतसिंह होलकर की मन्धि करना चाहता था, परन्तु उसके परामर्शदाताओं ने अँगरेजों से संघर्ष होने की आशंका से उसे ऐसा करने से रोक दिया। उस समय से अँगरेजी अभिरुचि पंजाब में उत्तरोत्तर बढ़ती गई । सन् एक हज़ार आठ सौ छः तक रणजीतसिंह ने सम्पूर्ण पंजाब पर अधिकार कर पूर्व में सतलज नदी तक अपनी राज्य-सीमा बढ़ा ली थी। अब वह सतलज नदी के पूर्व में स्थित पटियाला, नाभा एवं झींद के राज्यों को हस्तगत करना चाहता था । सन् एक हज़ार आठ सौ छः में उसने सतलज नदी पार की और झींद और पटियाला पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। रणजीतसिह की साम्राज्य-विस्तार-कारिणी महत्वाकांक्षा से भयभीत होकर सतलज नदी के पूर्व में स्थित देशी राज्यों ने अँगरेजों से संरक्षण की प्रार्थना की । ये राज्य रणजीतसिंह के राज्य एवं अँगरेजी राज्य के बीच में स्थित थे । अतः इनकी स्वतन्त्रता के लिए अँगरेज भी चिन्तित थे क्योंकि ये उनके लिए 'बफर स्टेट' का कार्य करते थे । पुनः अँगजों को इस प्रदेश से होकर होनेवाले सम्मिलित फ्रांसीसी और सी आश्रमण का भी भय था । इससे वे इन राज्यों की स्वतन्त्रता एवं रणजीत सिंह की मित्रता दोनों के लिए समान रूप से उत्सुक थे । इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए लार्ड मिण्टो ने दिल्ली के रेजीडेंट मेटकाफ को रणजीतसिंह से बातचीत करने के लिए भेजा। रणजीतसिंह अंगरेजों से सन्धि करने के लिए इस शर्त पर तैयार हुआ कि वे सतलज नदी के पूर्व के राज्यों पर उसका आधिपत्य स्वीकार कर लें और उसके राज्य के आन्तरिक विषयों में हस्तक्षेप न करें। इस प्रस्ताव से मिण्टो बड़े संकट में पड़ गया । वह रणजीत सिंह के राज्य की सीमा को सतलज नदी तक ही रखना चाहता था । अतः उसने अब दृढ़ता से काम लिया; एक अँगरेजी मेना सतलज-तट पर भेजी गई । वास्तव में रणजीतसिह अँगरेजों में युद्ध न करना चाहता था। अतः अब उसने अमृतसर में अप्रैल, रान् एक हज़ार आठ सौ नौ में अंगरेजों से सन्धि कर ली। इसके अनुसार सतलज सिव ख- राज्य की सीमा मान ली गई । उसके पूर्व की स्वतन्त्र रियासतें अंगरेजों को संरक्षता में आ गई । जब तक रणजीतसिह जीवित रहा तब तक उसने इस सन्धि का अक्षरशः पालन किया । फिर उसने कभी भी सतलज नदी को पार कर पूर्वी प्रदेश पर आक्रमण न किया। इस प्रकार उसके साथ लार्ड मिण्टो की नीति सर्वथा सफल रही। फारस और अफगानिस्तान -- फारम का शाह फ्रांसीसियों का मित्र था । फ्रांसीसी सरकार ने उसकी राजधानी तेहरान में अपना दूत भेजा था और आवश्यकतानुसार शाह को सैनिक एवं आर्थिक सहायता देने का भी वचन दिया था। फारस में बढ़ते हुए फ्रांसीसी प्रभाव को देखकर लाई मिण्टो मशंकित हो गया। टिलसिट की सन्धि के पश्चात् उसका भय ओर भी बढ़ गया। उसे निरन्तर फ्रांस और रूस की सम्मिलित शक्तियों के आक्रमण का भय रहता था। अतः अपनी पश्चिमी सीमा सुरक्षित करने के लिए उसने फारस के शाह को अपने पक्ष में लेना चाहा । इस ध्येय की पूर्ति के लिए उसने फारस में अपना एक दूत भेजा । अधिक दबाव पड़ने पर शाह ने सन् एक हज़ार आठ सौ नौ में अंगरेजों के साथ मन्धि कर ली। इसके अनुसार अंगरेजों ने आवश्यकता पड़ने पर शाह को सैनिक सहायता देना स्वीकार किया। इसके बदले में शाह ने वचन दिया कि वह भारे अंगरेज-विरोधी योरपीय नागरिकों को अपने राज्य से निकाल देगा और फ्रांस अथवा रूस की सेनाओं को भारत पर आमण करने के लिए अपने राज्य से मार्ग न देगा । इसी प्रकार सन् एक हज़ार आठ सौ नौ में लाई मिण्टो ने माउण्ट स्टुअर्ट एलफिस्टन को राजनीतिक विषयों पर बातचीत करने के लिए काबुल भेजा। वहाँ के अमीर शाहशुजा ने अंगरेजों से सन्धि कर लो । परन्तु इस सन्धि से विशेष लाभ न हुआ क्योंकि शीघ्र ही आन्तरिक युद्ध के कारण शाह शुजा अफगानिस्तान से निर्वासित कर दिया गया । फ्रांसीसी उपनिवेशों पर अधिकार--योरप में अँगरेजी-फ्रांसीसी युद्ध भारतवर्ष में भी उसकी ज्वाला भड़क उठी। अँगरेजों ने उनके उपनिवेशों पर अधिकार करने का यह अच्छा अवसर देखा । अतः सन् एक हज़ार आठ सौ नब्बे में भारत सरकार ने एक जहाजी-बेड़ा भेजकर बुर्बो और मारीशस के द्वीपों पर अपना अधिकार कर लिया । कम्पनी को नया आज्ञा-पत्र -- सन् एक हज़ार आठ सौ तेरह में कम्पनी को बीस वर्ष के लिए पुनः आज्ञा पत्र दिया गया । परन्तु इस बार उससे भारतीय व्यापार का एकाधिकार ले लिया गया, यद्यपि उसका चीन के साथ होनेवाले व्यापार का एकाधिकार पूर्ववत् सुरक्षित रहा । इस बार भारतवर्ष में शिक्षाप्रसार की ओर भी ध्यान दिया गया और इस कार्य के लिए एक लाख रुपया वार्षिक स्वीकृत किया गया । योरपीयों की धार्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारतवर्ष में तीन पादरियों की नियुक्ति की गई जिनका वेतन भारतीय कोष से देना निश्चित हुआ । सात वर्ष के शासन के पश्चात् सन् एक हज़ार आठ सौ तेरह में लार्ड मिण्टो इंगलैंड चला गया । उसने यथासम्भव शान्तिमय नीति का अवलम्बन लिया । उसका शासन विशेषतया अन्य स्वतन्त्र राज्यों के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित करने के कारण प्रसिद्ध है । वास्तव में फ्रांसीसी - रूसी शक्तियों के सम्भावित आक्रमण के भय के निराकरण के लिए ही उसने ऐसा किया था । उसके समय से अँगरेजों का ध्यान भारतवर्ष की उत्तरी-पश्चिमी सीमा की ओर अधिकाधिक आकृष्ट होता गया जिसने उनके इतिहास की एक विशेष रूप रेखा कर दी । इसका वर्णन आगे के अध्यायों में किया जायेगा । अध्याय बाईस सन् एक हज़ार आठ सौ तेरह में भारतीय परिस्थितिमाएको प्रत्यावर्तन और लाइपजिंग के युद्ध के पश्चात् नैपोलियन की आशाओं पर तुपारपात हो गया। ब्रिटिश भारतवर्ष पर आक्रमण का भय जाता रहा । अतः अंगरेजों ने पुनः अग्रगामी, उग्र एवं साम्राज्य विस्तार कारिणी नीति का अनुसरण करना प्रारम्भ किया। सन् एक हज़ार आठ सौ तेरह में लार्ड मिष्टो के पद-त्याग करने पर लार्ड हेस्टिग्ज भारतवर्ष का गवर्नर जनरल बनाया गया । वह अमेरिका के स्वतन्त्रता संग्राम में इंगलैंड की ओर से भाग ले चुका था। ब्रिटिश पार्लियामेंट में बैठकर उसने लार्ड वेटेजली की उग्र नीति का तीव्र विरोध किया था। परन्तु जब वह स्वयं गवर्नर जनरल होकर आया तो उसे ज्ञात हुआ कि वास्तव में उसे भी विशेष परिस्थिति के कारण वेलेजली की ही भाँति उग्र नीति का अनुसरण करना होगा। भारतवर्ष की तत्कालीन परिस्थिति सन्तोषजनक न थी । । यद्यपि मराठा सरदार वेलेजली के समय में परास्त हो चुके थे, परन्तु उनका दमन न हो सकता था । लार्ड मिण्टो की शान्ति प्रधान नीति से लाभ उठाकर सिंधिया, होलकर और भोंसले ने पुनः अपनी शक्ति संगठित कर ली थी और अब वे ब्रिटिश शक्ति का मूलोच्छेदन करने के हेतु योजना बना रहे थे। उधर, पेशवा भी सहायक सन्धि को तोड़ फेंकना चाहता था । मध्यभारत में अराजकता फैली हुई थी। पिण्डारियों के भय के कारण जन-साधारण का धन-जन अरक्षित हो रहा था । भारतवर्ष के बाहर नेपाल और ब्रह्मा विशेष सबल हो गये थे। उनकी राज्य विस्तार - कारिणी महत्त्वाकांक्षा से अंगरेजी सत्ता को भय उपस्थित हो गया था । गोरखा- युद्ध -- सर्वप्रथम हेस्टिग्ज का ध्यान नेपाल की ओर गया । ऊपर कहा जा चुका है कि इस समय नेपाल की शक्ति बहुत बढ़ गई थी और अब वह अपनी सीमाओं का विस्तार करना चाहता था। सन् एक हज़ार आठ सौ एक में अंगरेजों ने अवध के नवाब वजीर से गोरखपुर हस्तगत कर लिया था । अतः अब उसकी सीमा ब्रिटिश भारत की सीमा से मिल गई थी। नैपाल के आदि इतिहास के विषय में विशेष ज्ञात नहीं । चौदहवीं सदी में वहाँ क्षत्रियों के अनेक छोटे-छोटे स्वतन्त्र राज्य स्थापित हो गये । अनवरत युद्ध के पश्चात् अन्त में गोरखों ने अन्य वर्गों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और उसके नेता पृथ्वीनारायण ने सन् एक हज़ार सात सौ सरसठ में एक राजवंश की स्थापना की । गोरखा- राज्य ने बड़ी शीघ्रता से उन्नति की । थोड़े ही समय में उसकी पूर्व की सीमा सिक्किम तक और पश्चिम की सीमा सतलज नदी तक विस्तृत हो गई । नेपाल की उदीयमान शक्ति को देखकर अँगरेजों ने उससे व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने की चेष्टा की, परन्तु विफल रहे। उन्होंने सन् एक हज़ार सात सौ तिरानवे में कर्नल कर्कपैट्रिक और सन् एक हज़ार आठ सौ दो में कैप्टेन नाक्स को वार्ता चलाने के हेतु नैपाल भेजा, परन्तु कोई विशेष परिणाम न हुआ । अतः नैपाल-राज्य लार्ड हेस्टिग्ज के समय तक अँगरेजों के लिए रहस्यमय देश ही रहा । अंगरेजी और नेपाली राज्य की सीमाएँ निश्चित रूप से निर्धारित न थीं, अतः दोनों में बहुत दिनों से झगड़ा चल रहा था । गोरखे सम्पूर्ण तराई को अपना प्रदेश समझते थे, परन्तु अँगरेज उस दिशा में उनके राज्य विस्तार से अपने साम्राज्य के लिए खतरा समझते थे। लार्ड मिण्टो के समय में गोरखों ने सारन और गोरखपुर के कुछ भू-प्रदेश पर अधिकार करना चाहा, परन्तु अँगरेजों की चेतावनी के कारण वे कुछ समय तक ऐसा न कर सके । परन्तु थोड़े ही समय के अनन्तर उन्होंने शिवराज और बुतवल पर अधिकार कर लिया। अँगरेजों को जब यह सूचना मिली तो उन्होंने अपनी सेना भेजकर इन जिलों पर पुनः अपना अधिकार कर लिया । गोरखों ने इसे अनधिकार चेष्टा समझा और वे एगरेजों से अत्यन्त क्रुद्ध हो गये । मई, सन् एक हज़ार आठ सौ चौदह में उन्होंने बतवल के थाने पर आक्रमण कर दिया । अतः अब अँगरेजों को उनके विरुद्ध युद्ध घोषणा करनी पड़ी। लार्ड हेस्टिग्ज ने युद्ध की एक विस्तृत योजना बनाई। तीस हजार की एक विशाल अँगरेजी सेना ने नेपाल राज्य पर आक्रमण किया, परन्तु गोरखों की अद्भुत वीरता एवं पर्वतीय प्रदेश की दुर्गमता के कारण उसे प्रारम्भ में राफलता न मिली। मार्टले और वुड नामक अंगरेज सेनापतियों को गोरखों के भीषण आक्रमण के सामने भागना पड़ा । कलंगा के पहाड़ी दुर्ग पर अधिकार करने के प्रयास में अँगरेजी जनरल जिलेस्पी को अपने ) प्राण गँवाने पड़े । अंगरेजों की इन प्रारम्भिक पराजयों से अन्य देशी राज्यों को प्रोत्साहन मिला। उन्होंने सम्मिलित रूप से आक्रमण कर अँगरेजों को भारतवर्ष से निकाल देने का यह अच्छा अवसर देखा। इस उद्देश्य से मराठों, पिण्डारियों एवं रणजीत सिंह ने आपस में वार्ता प्रारम्भ कर दी। यह सूचना पाकर हेस्टिग्ज भयभीत हो गया। उसने डेविड आक्टर लोनी की अध्यक्षता में पुनः सेनाओं का संगटन किया । अभाग्यवश अपनी पारस्परिक अविश्वास भावना के कारण देशी राज्यों का संगठित एवं सम्मिलित रूप से कार्य करना असम्भव हो गया । इस स्थिति से अंगरेजों ने पूरा लाभ उठाया । जनरल आक्टर लोनी ने पुनः नेपाली सेनापति अमरसिंह थापा पर आक्रमण किया और इस बार उसकी विजय हुई । नेपाली दुर्ग मुलांव पर मई, सन् एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में अंगरेजों का अधिकार हो गया और अमरसिंह को विवश हो आत्म-समर्पण करना पड़ा । अंगरेजो ने धन का प्रलोभन देकर गोरखा सिपाहियों को भी अपनी ओर मिला लिया । अतः नेपाली सरकार को विवश होकर सन्धि वार्ता चलानी पड़ी। उसके परिणामस्वरूप नवम्बर, सन् एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में सिगौली की सन्धि हो गई । परन्तु अमरसिंह की सम्मति से नेपाली सरकार ने पुनः युद्ध आरम्भ करने का निश्चय किया और सिगौली की सन्धि को अस्वीकार कर दिया। यह सूचना पाकर अंगरेज सेनापति आवटर लोनी पुनः गोरखों पर आक्रमण किया और मकवानपुर के युद्ध में पराजित किया । हताश होकर अन्त में नेपाल सरकार ने सिगौली की सन्धि स्वीकार कर ली । इस सन्धि के अनुसार अंगरेजों को गढ़वाल और कुमायूँ के जिले एवं तराई का एक विस्तृत भू-प्रदेश मिला । नेपाली सरकार को सदैव के लिए शिकम से हटना पड़ा । उसने अपनी राजधानी काठमांडू में अंगरेज रेजीडेंट रखना भी स्वीकार कर लिया। इस प्रकार सिक्ख-राज्य और नैपाली राज्य के बीच में अँगरेजी भू-प्रदेश के आ जाने के कारण दोनों में गुटबन्दी करना असम्भव हो गया। इस सन्धि के अनुसार शिमला, नैनीताल और अल्मोड़ा के सुन्दर पर्वतीय नगर अँगरेजों के अधिकार में आ गये । उस समय से अभी तक दोनों सरकारों ने मिगौली की सन्धि का सत्यतापूर्वक पालन किया है। कालान्तर में मराठा-शक्ति से युद्ध होना अवश्यम्भावी समझकर अंगरेजों ने गोरखों को सन्तुष्ट कर उन्हें अपने पक्ष में लेने के ध्येय से नेपाल राज्य को तराई का एक विस्तृत देश पुनः लौटा दिया। पिण्डारी युद्ध - गोरखा- युद्ध के पश्चात् हेस्टिग्ज का ध्यान पिण्डारियों की ओर गया । इनकी उत्पत्ति एवं नाम का कारण निश्चित रूप से ज्ञात नहीं । परन्तु इतना निश्चित है कि इनका किसी धर्म या जाति से सम्बन्ध न था। पहले पहल इनका नाम हम औरंगजेब के शासन काल में सुनते है। इन्होंने मराठों का पक्ष लेकर मुगल साम्राज्य की धर्मान्धता के विरुद्ध युद्ध किया था । उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में इन्होंने पुनः ख्याति प्राप्ति की । नर्मदा प्रदेश एवं मालवा इनका मुख्य केन्द्र हो गया। ये लोग सैनिक प्रवृत्ति के वीरकर्मा एवं साहसी व्यक्ति थे। कालान्तर में इनमें बहुसंख्यक डाकू और लुटेरे भी सम्मिलित हो गये थे। इस प्रकार इनका दल सबल हो गया था। चीतू, वासिल मुहम्मद, अमीर खाँ और करीम खाँ इनके नेता थे जिनकी अध्यक्षता में पंद्रह,शून्य से बीस,शून्य तक पिण्डारी रहते थे। इनके सशस्त्र दल मनुष्यों का उत्पीडन कर इतस्ततः घूमते थे। इनके आक्रमणो मे जन साधारण का धन-जन अरक्षित हो गया था । अनेक इतिहासकारों का मत है कि इनके कार्यों का राजनीतिक उद्देश्य भी था । ये मराठों के सहयोग से अंगरेजी सत्ता का विनाश करना चाहते थे। इन्होंने मराठों से गुप्त रूप से सन्धि कर ली थी और आवश्यकतानुसार उन्हें सैनिक सहायता देने के लिए तैयार थे। परन्तु मराठों के साथ इनका यथार्थ सम्बन्ध निश्चित रूप से ज्ञात नहीं। अंगरेजों ने जान-बूझकर इनके कार्यों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बर्नर एवं निर्दयतापूर्ण बताया है। ऐसा करने हेस्टिग्ज की मराठों के विरुद्ध उग्र नीति का औचित्य प्रदर्शित करना चाहते है। अस्तु, हेस्टिग्ज ने पिण्डारियों का दमन करने का निश्चय किया। इस कार्य के लिए उसने एक लाख तेरह हजार सिपाहियों की सेना संगठित की। इसे चार भागों में विभक्त किया गया । इसका कारण था कि उसी समय मराठों ते भी युद्ध प्रारम्भ होनेवाला था। हेस्टिग्ज को चिन्ता थी कि कही पिण्डारी और मराठे सम्मिलित होकर अँगरेजों से युद्ध न करे। अतः वह उन दोनों को अलग-अलग रखना चाहता था; उत्तरी सेना का नेतृत्व स्वयं हेस्टिग्ज ने अपने ऊपर लिया और दक्षिणी सेना एक अन्य अफसर सर टामस हिसलाप की अधीनता में रक्खी गई। इस प्रकार चारों ओर से मराठों और पिण्डारियों के विरुद्ध कार्यवाही आरम्भ हुई। पिण्डारी चारों ओर घिर गये। अंगरेजी सेना ने उन पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर उनका पीछा किया। पिण्डारी अस्त-व्यस्त हो गये। उनके बहुसंख्यक सैनिक मारे गये। उनके एक नेता अमीर खाँ ने अँगरेजों की अधीनता स्वीकार कर ली। अँगरेजों ने उसे टोक का राज्य देकर अपने पक्ष में कर लिया। यहाँ पर अभी तक उसके वंशज राज्य कर रहे है। इसी प्रकार करीम खाँ भी हताश होकर अंगरेजों के अधीनस्थ हो गया। उनका अन्य नेता चीतू जंगल में भाग गया जहाँ उसे एक चीते ने मार डाला। इस प्रकार हेरिटग्ज ने सुव्यवस्थित सैनिक-योजना के द्वारा पिण्डारियों की सवल शक्तियों को चूर्ण कर दिया। उनके दल बिखर गये। बहुत से पिण्डारी नगरों और ग्रामों में आकर बम गये जहाँ वे साधारण नागरिकों की भांति जीवन व्यतीत करने लगे। बहुतों ने किसानों और कारीगरी का पेशा ग्रहण कर लिया । मराठा-संघ का पतन --हेस्टिग्ज ने प्रारम्भ से ही समझ लिया था कि भारतवर्ष में अंगरेजी सत्ता को सर्वशक्तिमान बनाने के लिए मराठो से युद्ध करना अवश्यम्भावी है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, वेलेजली ने मराठों को परास्त तो किया था, परन्तु उनकी शक्ति को पूर्णतया नष्ट न कर सका था। उसके जाने के पश्चात् लाई मिष्टो की शान्ति प्रधान नीति से लाभ उठाकर मराठों ने पुनः शक्ति-संचय करना प्रारम्भ कर दिया था । वे भली भाँति समझ गये थे कि एगरेज भारतवर्ष के लिए एक महान् आपत्ति के रूप में विद्यमान हैं। उनकी शत्रुता एवं मित्रता दोनों ही देशी राज्यों के भारत का शर्तहास लिए समान रूप से घातक हैं। । वे अन्य देशी राज्यों के भाग्य को देख ही चुके थे। उनमें से कुछ तो अँगरेज़ों के विरुद्ध अपना अस्तित्व ही खो चुके थे और कुछ उनकी कूटनीतिपूर्ण सहायक-सन्धि के चंगुल में फँसकर अपनी प्रतिष्ठा एवं स्वतन्त्रता को खोकर अँगरेजों की अधीनता में येन केन प्रकारेण अपना अपमानजनक अस्तित्व चला रहे थे। मराठों में केवल पेशवा ने अँगरेजों से सहायकसन्धि की थी और वह भी अब उसे तोड़ने की चिन्ता में था । परन्तु, अन्य मराठा सरदार अपने नेता पेशवा को अंगरेजों के अधीन देखकर अपमान से क्षुब्ध थे। वे उनके विरुद्ध युद्ध की योजनाएं बना रहे थे । हेस्टिग्ज इस स्थिति से परिचित था । अतः उसने बड़ी सावधानी से कार्य करना प्रारम्भ किया। मराठों के पारस्परिक द्वेष-भाव ने उसकी राजनीतिक एवं सैनिक योजनाओं में पर्याप्त योग दिया। हेस्टिग्ज और भोंसले - सर्वप्रथम हेस्टिग्ज का ध्यान भोंसला राज्य की ओर आकृष्ट हुआ । इस समय नागपुर अन्तःकलह से व्याप्त था । बाईस मार्च सन् एक हज़ार आठ सौ सोलह को राघोजी भोंसले द्वितीय की मृत्यु हो गई । उसके पुत्र परसोजी की शारीरिक एवं ) मानसिक स्थिति अच्छी न थी । अतः संरक्षक पद के लिए राघोजी की विधवा पत्नी चुकाबाई और अप्पा साहब में झगड़ा आरम्भ हो गया । हेस्टिंग्ज ने इस गृह कलह से पूरा लाभ उठाया। उसने अप्पा साहब का पक्ष लिया और उसे सहायता देने का वचन दिया। प्रलोभन में पड़कर अप्पा साहब ने मई, सन् एक हज़ार आठ सौ सोलह में अंगरेजों से सहायक सन्धि कर ली। इस सन्धि से मराठासंघ की शक्ति को बड़ा आघात पहुँचा । माल्कम के कथनानुसार अँगरेजों के लिए इस समय 'नागपुर के साथ होनेवाली सहायकसन्धि से अधिक सौभाग्यशाली कोई अन्य घटना नहीं हो सकती थी ।' हेस्टिग्ज और पेशवा --मराठा- सरदारों में पेशवा ही एक ऐसा था जिसने हेस्टिग्ज के पूर्व अँगरेजों से सहायक सन्धि की थी। परन्तु अब वह अँगरेजों के बन्धन से मुक्त होना चाहता था । अतः बेसीन की सन्धि के पश्चात् ही बाजी - राव द्वितीय ने अपनी शक्ति को संगठित करना प्रारम्भ कर दिया। उसकी बढ़ती हुई शक्ति को देखकर अंगरेज सशंकित हो गये और उन्होंने उसे निर्बल करने के ध्येय से उसके अधीनस्थ राज्यों को अपनी ओर मिलाना प्रारम्भ कर दिया। पूना-स्थित अँगरेज रेजीडेंट एलफिस्टन के प्रोत्साहन के परिणाम स्वरूप कोल्हापुर और सावन्तवाडी के राज्यों ने पेशवा की अधीनता अस्वीकार कर अपनी स्वतन्त्रता घोषित कर दी। इस प्रकार पेशवा और अँगरेजों में असन्तोष की भावना बढ़ने लगी । सन् एक हज़ार आठ सौ चौदह में यह असन्तोष और भी बढ़ गया । पेशवा का मंत्री त्र्यम्बक जी अँगरेजों का घोर विरोधी था और उसने पुनः मराठा संघ को अँगरेजों के विरुद्ध संगठित करना प्रारम्भ किया । अतः उसने योजना निर्माण के लिए अपने दूत सिंधिया, होलकर और भोंसले के दरबारों में भेजे । पेशवा ने बेसीन की सन्धि को तोड़ने के ध्येय से पुनः निजाम-राज्य और बड़ौदा-राज्य से अपने प्राचीन अधिकारों को माँगा । सन्धि-वार्ता के लिए बड़ौदा का मंत्री गंगाधर शास्त्री पुना आया। कहते हैं कि त्र्यम्बक जी ने षड्यन्त्र करके वहाँ उसकी हत्या कराई परन्तु वर्तमान ऐतिहासिक अनुसन्धानों के आधार पर यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि इस हत्या में पेशवा अथवा उसके मंत्री का कुछ भी हाथ था। फिर भी कूटनीतिज्ञ अँगरेजों को इस घटना से लाभ उठाने का पूरा अवसर मिल गया । पूना का अँगरेज रेजीडेंट एलफिंस्टन तो पहले से ही त्र्यम्बक जी का विरोधी था । अतः उसने अब इस हत्या का आरोप उसी पर लगाया। त्र्यम्बक जी पकड़ गया और एक थाने में बन्दी बना लिया गया । परन्तु किसी प्रकार वह वहाँ से भाग निकला। एलफिस्टन को पुनः अवसर मिला । उसने त्र्यम्बक जी के निकल जाने में पेशवा का हाथ बताया। इस प्रकार एक के बाद दुसरा आरोप लगाकर उसने पेशवा को भयभीत कर दिया । अन्त में आत्मरक्षा का कोई उपाय न देखकर जून, सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह को पेशवा ने अँगरेजों से एक नई सन्धि कर ली। इसके अनुसार पेशवा ने मराठा संघ की अध्यक्षता का अधिकार छोड़ दिया। पुनः उसने किसी भी विदेशी सत्ता के साथ पत्र व्यवहार न करने की प्रतिज्ञा की । अंगरेजों ने उसके राज्य का कुछ भाग अपने राज्य में मिला लिया । इसके अतिरिक्त उसने अपने मन्त्री त्र्यम्बक जी को अँगरेजों के हवाले कर दिया । यद्यपि विवशता - वश पेशवा ने इन अपमानजनक प्रस्तावों को स्वीकार सरसार काहनिहा तो कर लिया, परन्तु हृदय से वह अँगरेज़ों का घोर शत्रु हो गया और भविष्य में उनके विरुद्ध कार्यवाही करने का अवसर ढूँढ़ने लगा । हेस्टिग्ज और सिन्धिया -- एक हज़ार आठ सौ पाँच ईशून्य की सन्धि के अनुसार अँगरेजों ने सिन्धिया को वचन दिया कि वे उससे अधीनस्थ राजपूत राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप न करेंगे । जन हेस्टिग्ज गवर्नर जनरल होकर आग तो उसे ज्ञात हुआ कि उसके पूर्वाधिकारियों ने इस प्रकार की सन्धि कर बड़ी भारी भूल की है। सामरिक एवं राजनीतिक दृष्टियों से इन राजपूत राज्यों की स्थिति बड़ी महत्त्वपूर्ण थी। यदि वे अंगरेजों की संरक्षता में आ जाते तो मध्य-भारत में अंगरेजों की स्थिति बड़ी सुरक्षित हो जाती । पुनः इससे मराठों की शक्ति भी बहुत कुछ क्षीण हो जाती । अतः इन विचारों से प्रेरित होकर हेस्टिग्ज अब सिंधिया के साथ हुई एक हज़ार आठ सौ पाँच ईशून्य की सन्धि को परिवर्तित करने की चिन्ता करने लगा । इस ध्येय की पूर्ति के लिए दिल्ली के अंगरेज रेजीडेण्ट मेटकाफ ने राजपूत राज्यों से वार्ता चलानी प्रारम्भ की। उधर हेस्टिग्ज न सिधिया को भयभीत करने के लिए उस पर पिण्डारियों की सहायता करने का आरोप लगाया और उसमे हिडिया और असीरगढ़ के दो दुर्ग माँगे । पुनः उसे सूचित किया गया कि अंगरेज मालवा और राजपुताने के राज्यों को अपने संरक्षण में लेने का विचार कर रहे हैं । ये सब प्रस्ताव सन् एक हज़ार आठ सौ पाँच की सन्धियों के विरुद्ध थे । मिथिया उन्हें सुनकर किकर्त्तव्यविमूढ़ हो गया । अभी वह सम्पूर्ण स्थिति पर विचार कर ही रहा था कि इतने में हेस्टिग्ज दल-बल-सहित उसके राज्य की सीमा पर पहुँच गया । आत्म-रक्षा का अन्य उपाय न देखकर सिधिया ने पाँच नवम्बर, सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह में अंगरेजों के साथ ग्वालियर की सन्धि कर ली। इसके अनुसार मिधिया ने वचन दिया कि वह पिडारियों को न तो किसी प्रकार की सहायता देगा और न उन्हें अपने राज्य में प्रविष्ट होने देगा । राजपूत राज्यों पर से उसका अधिकार जाता रहा। वे अँगरेजों के संरक्षण में आ गये । होलकर और पठान-सन् एक हज़ार आठ सौ ग्यारह में जसवन्त राव होलकर की मृत्यु हो गई । जिस पुत्र को उसने गोद लिया था, वह अभी अल्पायु था । अतः तुलसीबाई उसकी संरक्षक बनी। परन्तु कुछ समय पञ्चाच वेतन न मिलने के कारण उसकी सेना ने विद्रोह कर दिया। अतः अल्पायु शासक को साथ लेकर उसे आत्मरक्षा के लिए राज्य से भागना पड़ा। अब उसने हेस्टिग्ज से एक गुप्त सन्धि कर ली । अँगरेजों के संरक्षण के कारण उसके राज्य के सैनिक नेता उससे और भी अधिक असन्तुष्ट हो गये । होलकर राज्य की अव्यवस्था से लाभ उठाकर हेस्टिग्ज ने उसे और अधिक निर्बल करने का प्रयत्न करना प्रारम्भ किया। पठान सरदार अमीर खाँ होलकर का मित्र था। अंगरेजों ने उसे अपने पक्ष में मिलाने की चेष्टा की । उन्होंने सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह में उससे एक कर ली और उसे टोंक का नवाब बना दिया। इसके बदले में उसने अपनी लुटेरों की सेना को भंग कर देने एवं भविष्य में अंगरेजों के साथ मित्रता रखने का वचन दिया। इस प्रकार अमीर खाँ के अँगरेजी पक्ष में चले जाने से होलकर का पक्ष और भी अधिक निर्बल हो गया । पेशवा से युद्ध - जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पुना की अपमानजनक - सन्धि के कारण पेशवा बड़ा क्षुब्ध था । वह उसे नष्ट करने की सतत चेष्टा कर रहा था । अँगरेजी रेजीडेंट एलफिस्टन ने स्थिति को गम्भीर होते देखकर अपना दूतावास पुना से हटाकर किक में स्थापित किया। अवसर पाकर पाँच नवम्बर, सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह को पेशवा ने किकीं स्थित उसके दूतावास पर आक्रमण कर दिया और उसे जलाकर भस्म कर दिया । परन्तु एलफिस्टन किसी प्रकार निकलकर भाग गया । अंगरेजों को जब इस दुर्घटना की सूचना मिली तो उन्होंने पूना पर आक्रमण कर उसे अपने अधिकार में कर लिया। बाजीराव पेशवा भागा, परन्तु अंगरेज सेनापति जनरल स्मिथ ने उसका पीछा किया और जनवरी, एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह मे कोरीगांव के युद्ध में उसे पराजित किया । पुनः फरवरी मास में अप्टी के युद्ध में पेशवा की फिर हार हुई । हताश होकर अन्त में उसने सर जान मालकम के समक्ष जून, एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में आत्म-समर्पण कर दिया । सन्धि के अनुसार उसे आठ लाख रुपया वार्षिक की पेंशन दी गई और वह बिटूर में रक्खा गया । पेशवा का पद भंग कर दिया गया। सतारा के राज्य सिहासन पर शिवाजी का एक वंशज बिठाया गया । शेष पेशवा - राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया । । भोंसले से युद्ध - - परसो जी की हत्या के पश्चात् अप्पा साहब नागपुर के राज्य-सिंहासन पर बैठा । वह भी अँगरेजों से असन्तुष्ट था । अतः पेशवा की एक हज़ार आठ सौ सत्रह को अँगरेज रेजीडेंसी पर आक्रमण किया । परन्तु अँगरेजों ने मीताबल्दी और नागपुर के युद्ध में उसे परास्त कर दिया । अप्पा साहब पदच्युत कर दिया गया। नर्मदा नदी के उत्तर का सम्पूर्ण भोंसलाराज्य अंगरेजी राज्य में मिला लिया गया । शेष राज्य का अधिकारी राघोजी भोंसले द्वितीय का अल्पायु पौत्र बनाया गया । उसके संरक्षण के लिए एक ब्रिटिश रेजीडेण्ट की नियुक्ति हुई । होलकर से युद्ध - होलकर राज्य के सैनिक सरदारों ने जैसे ही पेशवा के आक्रमण का समाचार सुना वैसे ही उन्होंने अपनी सेनाओं को एकत्र किया और उसकी सहायता के हेतु दक्षिण की ओर बढ़े। परन्तु उनके मार्ग को अँगरेजी सेनापति सर टामस हिसलाप और ) सर जान मालकम ने रोक दिया । अन्त में इक्कीस दिसम्बर, एक हज़ार आठ सौ सत्रह को महीदपुर नामक स्थान पर दोनों पक्षों की सेनाओं में युद्ध हुआ जिसमें अँगरेजों की विजय हुई। अन्त में जनवरी, सन् एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में मन्दसोर की सन्धि हो गई । इसके अनुसार होलकर ने सहायता सन्धि स्वीकार कर ली । उसने अपने राज्य में अँगरेजी रोना रख ली एवं किसी भी विदेशी सत्ता से सम्बन्ध न रखने का वचन दिया। उसने अपने राज्य का कुछ प्रदेश अँगरेजों को दे दिया। सिन्धिया और गायकवाड़ से सन्धि -- अभी तक सिधिया पूर्ण रूप से युद्ध क्षेत्र से बाहर रहा था । अन्य मराठा सरदारों का दमन कर अब हेस्टिग्ज ने उसकी ओर ध्यान दिया । सन् एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में उसे विवश होकर अँगरेजों से सन्धि करनी पड़ी जिसके अनुसार उमने अजमेर अँगरेजों को दे दिया और अपने राज्य की सीमा को पुनः निर्धारित करना स्वीकार कर लिया । अब गायकवाड़ ने भी अँगरेजों से एक नवीन सन्धि कर ली। इसके अनुसार उसने अपने राज्य की अँगरेजी सेना की संख्या बढ़ाना स्वीकार कर लिया और उसके खर्च के लिए अहमदाबाद का भाग अँगरेजों को दे दिया। इन समस्त युद्धों के परिणाम स्वरूप मराठों को शक्ति चूर्ण हो गई । सिंध और पंजाब को छोड़कर अब छोड़कर अब समस्त भारत अंगरेजों के अधिकार में आ गया । कम्पनी की प्रभुता सर्वमान्य हो गई ।
(य) सचिवालय स्तर पर भारत सरकार के मंत्रालय विभाग, सम्भागों, प्रभाग तथा शाखाओं में बटे हुए हैं। प्रशासकीय दृष्टि से इस सगठन में अधिक परिवर्तन करना सभव नहीं है, फिर भी यदि ये मनालय अपने संगठन का पदमामान कुछ छोटा कर सकें, तो मंत्रालय के संगठन में कमावट आयेगी एवं उसकी कार्यकुशलता बढेगी। आजादी के बाद सभी मंत्रालयों में विकास के नाम पर कार्य एच कर्मचारी दोनों बढे है। इससे मनालय का आकार भी वढा हे और पदसोपान के स्तर भी पुनर्गठन के लिए यदि पदमापान घटाया जाता है तो आकार फैलता है, किंतु यदि सुधारों को समग्रता से देखा जाए तो पगोपान को घटा कर आकार के फैलाव को नये मंत्रालयों में बाट कर अथवा निगम तथा मडल बनाकर मतुलिन किया जा सकता है। इस प्रकार भारत सरकार के मंत्रालयों का पुनर्गठन एक घटना न होकर प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसे निरतरता से देखा जाना चाहिये। मनालय धाहे कितना ही महत्वपूर्ण हो, उसका आकार इतना न दर्द कि उसकी प्रशासनिक कार्यकुशलता नष्ट हो जाए। वित्त, प्रतिरक्षा और गृह विभाग, भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्रालय है और स्वतंत्रता के बाद इनका आकार इतना फैला है कि उसे सीमित करना अनिवार्य है। यह कार्य नये विभागों की रचना द्वारा सपन किया जा सकता है, जो मंत्रालय के अग रहते हुए प्रशासनिक दृष्टि से एक स्वतन इमाई दन सके। वर्तमान में जो सगठन और अधीनस्थ कार्यालय हैं उनके निर्धारण की कोई कमोटी न होने के कारण ये कार्यालय बिना अनुपात वढ रहे हैं। प्रशासनिक सुधार सगठन द्वारा इनके विषय में एक नीति निर्धारित की जा सकती है और उसके अनुरूप मनालय तथा उसके विभाग एवं कार्यालयों के बीच एक समन्वय स्थापित किया जा सकता है। ये विभाग और कार्यालय केवल कार्यकारी विशेषता के आधार पर ही गटित किये जाए और ऐसा करने से मंत्रालय का संगठन आज भी जटिल एवं विशिष्ट समस्याओं को सुलझाने में सक्षम वन सकेगा। मंत्रालयों में पाई जाने वाली नियंत्रण की प्रक्रिया क्षेत्रीय अधिकरणों के माध्यम से सुगठित की जानी चाहिये और जो मनालय लाइन अभिकरण रखते हैं उन्हें भारत के सघात्मक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए अपना प्रशासनिक तन विकसित करना चाहिए। इस संदर्भ में जो ऐतिहासिक स्थितिया रही हैं, वे आज गंभीर परिवर्तन चाहती हैं, चूंकि विकास प्रशामन सभी मनालयों पर नये दवाव हाल रहा है। प्रशासन सुधार आयोग ने इस संदर्भ में पुनगंटन की जो रूप-रेखा प्रस्तुत की है वह स्वागत योग्य है, किंतु आवश्यकता उससे भी आगे जाकर प्रत्येक मंत्रालय का प्रशासनिक मास्टर प्लान बनाने की है, जिससे सभी मनालयों के आगामी दशकों के विस्तार, विकास एवं सीमाओं को ध्यान में रखते हुये एक भुनियोजित विन के रूप में केन्द्रीय प्रशासन को देखा जा सके। इस संदर्भ में जो अध्ययन हुये हैं वे भी केवल आकार के वर्णन से आगे नहीं वढ सके। आज के संदर्भ में यह वाछनीय होगा कि भगालयों के कार्यों की सूची नये रिं से तैयार की जाए, उनके अनुरूप विभागीय सगठन या लोक निगम या मडल गठित किये जाए और अधीनस्थ व सलग्न कार्यालयों के माध्यम से स्टाफ लाइन सबंधों को पुनर्वक्षित किया जाए। सामाजिक परिवर्तन कता के कारण यह कार्य निरंतरता के साथ एक स्थाई अभिकरण द्वारा दिया जाए और उसका समायोजन एवं समन्वय मोरमडल सचिवालय स्वय कर सकता है। मंत्रालयों का गठन केवल प्रशासनिक समस्या न होकर एक राजनैतिक एवं सामाजिक समस्या भी है और उस पर पुनर्विचार करते समय उन सभी तथ्यों एवं तत्वों को ध्यान में रखना आवश्यक है जो किसी भी सुधार योजना को समकालीन तथा उपयोगी बनाने के लिए आवश्यक हैं। राजस्थान राज्य के प्रशासन की सगठनात्मक संरचना भारत एक सघ राज्य है। इस सघ की इकाइया दो प्रकार की है- (1) राज्य, और (2) राघीय क्षेत्र । 'राजस्थान राज्य भारतीय सघ की एक विशाल इकाई है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह द्वितीय वडा राज्य है। अन्य सभी राज्यों की भाति राजस्थान राज्य के पास 66 विषय ऐसे हैं, जिनका प्रशासन संवैधानिक दृष्टि से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। भारतीय संविधान में केन्द्र एवं राज्यों के प्रशासनिक सबध की व्यवस्था सघात्मकता की अपेक्षा एकात्मकता की ओर अधिक झुकी हुई है। गुणात्मकता तथा भावात्मकता की दृष्टि से भी केन्द्र के पास केवल 97 महत्वपूर्ण विषय ही नहीं है, अपितु समवर्ती सूची के 47 विषयों पर भी उसका प्राधान्य है। इसके अतिरिक्त राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले 66 विषयों पर भी केन्द्र कुछ विशेष प्रकार की परिस्थितियों में अपना अधिकार स्थापित कर सकता है। यही कारण है कि राज्यों की अखिल भारतीय सघात्मकता के परिप्रेक्ष्य में रह कर कार्य करना होता है। फिर राजस्थान जैसे पिछड़े राज्य में जहा की प्रति व्यक्ति औमत आप (केवल विहार को छोड़कर) देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है और केन्द्रीय ऋण का भार प्रति वर्ष निरंतरता से बढ़ता जा रहा है, केन्द्र का प्रभाव बढना और भी अधिक स्वाभाविक है। इसके अतिरिक्त भारतीय राजनीति के अन्य कितने ही राजनीतिक तथा आर्थिक दवाव ऐसे हैं जो भारतीय सघ की केन्द्रोन्मुखता तथा राजस्थान राज्य की परिनिर्भरता को व्यवस्थित रूप में बढ़ावा देते हैं। लोक प्रशासन सवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक नीतियों, राष्ट्रीय आकाक्षाओं तथा सामान्य जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति एवं क्रियान्विति का एक मानवीय संयन्त्र है। अनेक प्रशासनिक व्यवस्थाए, शैलिया, प्रक्रियाए एवं प्राविधियां इसकी विविध एव स्थूल अभिव्यक्तिया है। प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन करने के लिए भारतवर्ष में मुख्य रूप से तीन प्रकार की संस्थाए पाई जाती हैं (क) विभाग, (ख) निगम, तथा (ग) आयोग । इनके अनेक मिश्रित अर्द्ध- मिश्रित तथा नवीन स्वरूप भी देखने को मिलते है। लोक-तंत्रात्मक शासन प्रणालियों में इन प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सचालन, भीति-नियंत्रण
सचिवालय स्तर पर भारत सरकार के मंत्रालय विभाग, सम्भागों, प्रभाग तथा शाखाओं में बटे हुए हैं। प्रशासकीय दृष्टि से इस सगठन में अधिक परिवर्तन करना सभव नहीं है, फिर भी यदि ये मनालय अपने संगठन का पदमामान कुछ छोटा कर सकें, तो मंत्रालय के संगठन में कमावट आयेगी एवं उसकी कार्यकुशलता बढेगी। आजादी के बाद सभी मंत्रालयों में विकास के नाम पर कार्य एच कर्मचारी दोनों बढे है। इससे मनालय का आकार भी वढा हे और पदसोपान के स्तर भी पुनर्गठन के लिए यदि पदमापान घटाया जाता है तो आकार फैलता है, किंतु यदि सुधारों को समग्रता से देखा जाए तो पगोपान को घटा कर आकार के फैलाव को नये मंत्रालयों में बाट कर अथवा निगम तथा मडल बनाकर मतुलिन किया जा सकता है। इस प्रकार भारत सरकार के मंत्रालयों का पुनर्गठन एक घटना न होकर प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसे निरतरता से देखा जाना चाहिये। मनालय धाहे कितना ही महत्वपूर्ण हो, उसका आकार इतना न दर्द कि उसकी प्रशासनिक कार्यकुशलता नष्ट हो जाए। वित्त, प्रतिरक्षा और गृह विभाग, भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्रालय है और स्वतंत्रता के बाद इनका आकार इतना फैला है कि उसे सीमित करना अनिवार्य है। यह कार्य नये विभागों की रचना द्वारा सपन किया जा सकता है, जो मंत्रालय के अग रहते हुए प्रशासनिक दृष्टि से एक स्वतन इमाई दन सके। वर्तमान में जो सगठन और अधीनस्थ कार्यालय हैं उनके निर्धारण की कोई कमोटी न होने के कारण ये कार्यालय बिना अनुपात वढ रहे हैं। प्रशासनिक सुधार सगठन द्वारा इनके विषय में एक नीति निर्धारित की जा सकती है और उसके अनुरूप मनालय तथा उसके विभाग एवं कार्यालयों के बीच एक समन्वय स्थापित किया जा सकता है। ये विभाग और कार्यालय केवल कार्यकारी विशेषता के आधार पर ही गटित किये जाए और ऐसा करने से मंत्रालय का संगठन आज भी जटिल एवं विशिष्ट समस्याओं को सुलझाने में सक्षम वन सकेगा। मंत्रालयों में पाई जाने वाली नियंत्रण की प्रक्रिया क्षेत्रीय अधिकरणों के माध्यम से सुगठित की जानी चाहिये और जो मनालय लाइन अभिकरण रखते हैं उन्हें भारत के सघात्मक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए अपना प्रशासनिक तन विकसित करना चाहिए। इस संदर्भ में जो ऐतिहासिक स्थितिया रही हैं, वे आज गंभीर परिवर्तन चाहती हैं, चूंकि विकास प्रशामन सभी मनालयों पर नये दवाव हाल रहा है। प्रशासन सुधार आयोग ने इस संदर्भ में पुनगंटन की जो रूप-रेखा प्रस्तुत की है वह स्वागत योग्य है, किंतु आवश्यकता उससे भी आगे जाकर प्रत्येक मंत्रालय का प्रशासनिक मास्टर प्लान बनाने की है, जिससे सभी मनालयों के आगामी दशकों के विस्तार, विकास एवं सीमाओं को ध्यान में रखते हुये एक भुनियोजित विन के रूप में केन्द्रीय प्रशासन को देखा जा सके। इस संदर्भ में जो अध्ययन हुये हैं वे भी केवल आकार के वर्णन से आगे नहीं वढ सके। आज के संदर्भ में यह वाछनीय होगा कि भगालयों के कार्यों की सूची नये रिं से तैयार की जाए, उनके अनुरूप विभागीय सगठन या लोक निगम या मडल गठित किये जाए और अधीनस्थ व सलग्न कार्यालयों के माध्यम से स्टाफ लाइन सबंधों को पुनर्वक्षित किया जाए। सामाजिक परिवर्तन कता के कारण यह कार्य निरंतरता के साथ एक स्थाई अभिकरण द्वारा दिया जाए और उसका समायोजन एवं समन्वय मोरमडल सचिवालय स्वय कर सकता है। मंत्रालयों का गठन केवल प्रशासनिक समस्या न होकर एक राजनैतिक एवं सामाजिक समस्या भी है और उस पर पुनर्विचार करते समय उन सभी तथ्यों एवं तत्वों को ध्यान में रखना आवश्यक है जो किसी भी सुधार योजना को समकालीन तथा उपयोगी बनाने के लिए आवश्यक हैं। राजस्थान राज्य के प्रशासन की सगठनात्मक संरचना भारत एक सघ राज्य है। इस सघ की इकाइया दो प्रकार की है- राज्य, और राघीय क्षेत्र । 'राजस्थान राज्य भारतीय सघ की एक विशाल इकाई है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह द्वितीय वडा राज्य है। अन्य सभी राज्यों की भाति राजस्थान राज्य के पास छयासठ विषय ऐसे हैं, जिनका प्रशासन संवैधानिक दृष्टि से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। भारतीय संविधान में केन्द्र एवं राज्यों के प्रशासनिक सबध की व्यवस्था सघात्मकता की अपेक्षा एकात्मकता की ओर अधिक झुकी हुई है। गुणात्मकता तथा भावात्मकता की दृष्टि से भी केन्द्र के पास केवल सत्तानवे महत्वपूर्ण विषय ही नहीं है, अपितु समवर्ती सूची के सैंतालीस विषयों पर भी उसका प्राधान्य है। इसके अतिरिक्त राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले छयासठ विषयों पर भी केन्द्र कुछ विशेष प्रकार की परिस्थितियों में अपना अधिकार स्थापित कर सकता है। यही कारण है कि राज्यों की अखिल भारतीय सघात्मकता के परिप्रेक्ष्य में रह कर कार्य करना होता है। फिर राजस्थान जैसे पिछड़े राज्य में जहा की प्रति व्यक्ति औमत आप देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है और केन्द्रीय ऋण का भार प्रति वर्ष निरंतरता से बढ़ता जा रहा है, केन्द्र का प्रभाव बढना और भी अधिक स्वाभाविक है। इसके अतिरिक्त भारतीय राजनीति के अन्य कितने ही राजनीतिक तथा आर्थिक दवाव ऐसे हैं जो भारतीय सघ की केन्द्रोन्मुखता तथा राजस्थान राज्य की परिनिर्भरता को व्यवस्थित रूप में बढ़ावा देते हैं। लोक प्रशासन सवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक नीतियों, राष्ट्रीय आकाक्षाओं तथा सामान्य जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति एवं क्रियान्विति का एक मानवीय संयन्त्र है। अनेक प्रशासनिक व्यवस्थाए, शैलिया, प्रक्रियाए एवं प्राविधियां इसकी विविध एव स्थूल अभिव्यक्तिया है। प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन करने के लिए भारतवर्ष में मुख्य रूप से तीन प्रकार की संस्थाए पाई जाती हैं विभाग, निगम, तथा आयोग । इनके अनेक मिश्रित अर्द्ध- मिश्रित तथा नवीन स्वरूप भी देखने को मिलते है। लोक-तंत्रात्मक शासन प्रणालियों में इन प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सचालन, भीति-नियंत्रण
. . . तो एक बार फिर 'विश्वास' ने दिखाया केजरीवाल पर 'अविश्वास' . . . तो एक बार फिर 'विश्वास' ने दिखाया केजरीवाल पर 'अविश्वास' Publish Time: रविवार को चुनावी तिथियों की घोषणा के साथ ही सियासी दल अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं. Tags: Quick Links:
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