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नारी शक्ति वंदना विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है. विधेयक पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होते ही यह कानून बन जाएगा. कानून के अमल में अभी देरी है, लेकिन इसने कई परंपरागत सीटों से चुनाव लड़ते और जीत हासिल करते आ रहे नेताओं की चिंता बढ़ा दी है. लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदना विधेयक संसद से पास हो गया है. बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के साथ ही कानून बन जाएगा और विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएगी. इस कानून से एक तरफ महिलाओं के सियासी भाग्य खुलेंगे तो दूसरी तरफ देश के तमाम दिग्गज नेताओं के सीटों का खेल बिगड़ सकता है. ऐसे में उन्हें अपनी परंपरागत सीटों के साथ एक दूसरी सीट का भी विकल्प बनाकर रखना होगा? महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद मौजूदा समय में देश की 543 संसदीय सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. महिला आरक्षण भी रोटेशन के आधार पर होगा और हर परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बदली जा सकेंगी. 2024 के बाद जनगणना होगी और उसकी बाद लोकसभा और विधानसभा की सीटों का परिसीमन होगा. विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक मौजूदा एससी-एसटी आरक्षण में भी 33 फीसदी सीटें दोनों ही समुदाय की महिलाओं की होगी. परिसीमन के बाद सीटें बढ़ती हैं तो फिर उस लिहाज से महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होंगी, लेकिन 33 फीसदी सीटों पर सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ सकेंगी. ऐसे में तमाम पुरुष सांसद और विधायकों को अपनी सीटें छोड़नी पड़ेगी. फिलहाल भले ही ऐसा दिख रहा हो कि मोदी सरकार ने आसानी से इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पास करा लिया हो, लेकिन इसकी एक परीक्षा 2029 के लोकसभा और उसके बाद अलग-अलग राज्यों की विधानसभा में भी होनी है. परंपरागत तौर पर किसी विधानसभा या लोकसभा सीट पर राजनीति करने वाले नेताओं के सामने भी असमंजस के हालात बनेंगे. ऐसे में अगर उनकी परंपरागत सीट जिससे वो जीतकर लगातार विधायक या सांसद बनते रहे हैं, वो सीट महिलाओं के कोटे में चली गई तो उनके सामने क्या राजनीतिक विकल्प होगा? यह स्थिति एक चुनाव में ही नहीं बल्कि हर पंद्रह साल के बाद होनी है, क्योंकि महिला आरक्षण रोटेशन के आधार पर होगा और हर परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बदली जाएंगी. ऐसे में दिग्गज नेताओं के एक सीट से जीतने के बाद भी दूसरी सीट का विकल्प बनाकर रखना होगा. हैदराबाद लोकसभा सीट से AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार चार बार से सांसद हैं और उनसे पहले उनके पिता सुल्तान सलाउद्दीन ओवैसी लगातार 6 बार सांसद रहे हैं. इस तरह से हैदाराबाद सीट ओवैसी की परंपरागत सीट मानी जाती है और परिसीमन में अगर उनकी सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो फिर ओवैसी को नई सीट तलाशना होगा. मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट है, जहां से नकुलनाथ सांसद हैं और उससे पहले कमलनाथ सांसद थे. यह कमलनाथ की परंपरागत सीट रही है और 1980 अब तक सिर्फ एक बार यह सीट उनके हाथ से निकली है. ऐसे में अगर छिंदवाड़ा सीट महिला के लिए रिजर्व हो जाती है तो फिर कमलनाथ परिवार को नई सीट तलाशनी होगी. इस तरह से मध्य प्रदेश में राघोगढ़ विधानसभा सीट है, जिस पर 1977 से दिग्विजय सिंह के परिवार का कब्जा है. पहले दिग्विजय सिंह विधायक रहे फिर उनके बाद उनके भाई लक्ष्मण सिंह और अब उनके बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं. परिसीमन में अगर यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो दिग्विजय सिंह के परिवार को नई सीट देखनी होगी. उत्तर प्रदेश में बरेली लोकसभा सीट पर बीजेपी सांसद संतोष गंगवार का कब्जा है. 1989 से अभी तक सिर्फ एक बार वो चुनाव 2009 में हारे हैं. इसके अलावा उन्हें बरेली सीट पर कोई चुनौती नहीं दे सका. ऐसे में बरेली सीट अगर महिला आरक्षण में चली जाती है तो फिर गंगवार को नई सीट तलाशनी होगी. हालांकि, उम्र के ऐसे पढ़ाव पर हैं कि अगला चुनाव लड़ते हैं कि नहीं देखना होगा. इसके अलावा बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह के लिए भी सियासी चुनौती होगी. कैसरगंज सीट से बृजभूषण सिंह लगातार जीत रहे हैं और अगर यह सीट आरक्षित हो जाती है तो फिर उन्हें नया विकल्प तलाशना होगा. इसी तरह उनके बेटे प्रतीक भूषण विधायक हैं, उनके लिए भी चिंता है. कुंडा विधानसभा सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया लगातार जीतकर विधायक बने रहे हैं और उनके करीबी विनोद सरोज बाबागंज सीट से जीत रहे हैं. ऐसे में अगर यह दोनों सीटें परिसीमन में महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो उनकी चुनौती बढ़ सकती है. यूपी के शाहजहांपुर विधानसभा सीट से सुरेश खन्ना लगातार जीत रहे हैं. ऐसे में अगर उनके इस सीट पर जीत के सिलसिले पर ब्रेक लग सकता है. कानपुर की इरफान सोलंकी, हरदोई सीट पर नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल, रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह, जसवंतनगर सीट से शिवपाल यादव, शाहिद मंजूर, रामअचल राजभर, दुर्गा यादव, अवधेश प्रसाद, फरीद किदवई, इकबाल महमूस जैसे नेता विधायक लगातार बनते आ रहे हैं. जगदंबिका पाल, सफीकुर्रहमान बर्क, राजवीर सिंह और आनंद सिंह के बेटे कीर्ति वर्धन सिंह संसदीय का चुनाव जीत रहे हैं. तमिलनाडु में एमके स्टालिन, पंजाब में अकाली दल के नेता सुखबीर बादल,श्रीनगर से फारुख अब्दुल्ला, हिमाचल से हमीरपुर से अनुराग ठाकुर, हरियाणा की रेवाड़ी से राव इंद्रजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखे हुए हैं. इतना ही नहीं देश के तमाम दिग्गज नेता हैं, जो अपनी-अपनी परंपरागत सीटों से जीत दर्ज कर रहे हैं. ऐसे में अगर परिसीमन में यह सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाती है तो फिर उनके सामने सियासी संकट गहरा जाएगा. महिला आरक्षण को लागू करने के लिए माना जा रहा है कि साल 2026-27 में सीटों का परिसीमन के बाद हो सकता है. ऐसे में जो मौजूदा पुरुष सांसद हैं, उनकी अपनी चिंता उठने लगी है कि उनकी परंपरागत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी तो उनकी राजनीति का क्या होगा. दिलचस्प बात यह है कि महिला आरक्षण की चपेट में कौन नेता-नेता आते हैं, यह देखना होगा?
नारी शक्ति वंदना विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है. विधेयक पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होते ही यह कानून बन जाएगा. कानून के अमल में अभी देरी है, लेकिन इसने कई परंपरागत सीटों से चुनाव लड़ते और जीत हासिल करते आ रहे नेताओं की चिंता बढ़ा दी है. लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदना विधेयक संसद से पास हो गया है. बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के साथ ही कानून बन जाएगा और विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में तैंतीस फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएगी. इस कानून से एक तरफ महिलाओं के सियासी भाग्य खुलेंगे तो दूसरी तरफ देश के तमाम दिग्गज नेताओं के सीटों का खेल बिगड़ सकता है. ऐसे में उन्हें अपनी परंपरागत सीटों के साथ एक दूसरी सीट का भी विकल्प बनाकर रखना होगा? महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद मौजूदा समय में देश की पाँच सौ तैंतालीस संसदीय सीटों में से एक सौ इक्यासी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. महिला आरक्षण भी रोटेशन के आधार पर होगा और हर परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बदली जा सकेंगी. दो हज़ार चौबीस के बाद जनगणना होगी और उसकी बाद लोकसभा और विधानसभा की सीटों का परिसीमन होगा. विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक मौजूदा एससी-एसटी आरक्षण में भी तैंतीस फीसदी सीटें दोनों ही समुदाय की महिलाओं की होगी. परिसीमन के बाद सीटें बढ़ती हैं तो फिर उस लिहाज से महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होंगी, लेकिन तैंतीस फीसदी सीटों पर सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ सकेंगी. ऐसे में तमाम पुरुष सांसद और विधायकों को अपनी सीटें छोड़नी पड़ेगी. फिलहाल भले ही ऐसा दिख रहा हो कि मोदी सरकार ने आसानी से इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पास करा लिया हो, लेकिन इसकी एक परीक्षा दो हज़ार उनतीस के लोकसभा और उसके बाद अलग-अलग राज्यों की विधानसभा में भी होनी है. परंपरागत तौर पर किसी विधानसभा या लोकसभा सीट पर राजनीति करने वाले नेताओं के सामने भी असमंजस के हालात बनेंगे. ऐसे में अगर उनकी परंपरागत सीट जिससे वो जीतकर लगातार विधायक या सांसद बनते रहे हैं, वो सीट महिलाओं के कोटे में चली गई तो उनके सामने क्या राजनीतिक विकल्प होगा? यह स्थिति एक चुनाव में ही नहीं बल्कि हर पंद्रह साल के बाद होनी है, क्योंकि महिला आरक्षण रोटेशन के आधार पर होगा और हर परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बदली जाएंगी. ऐसे में दिग्गज नेताओं के एक सीट से जीतने के बाद भी दूसरी सीट का विकल्प बनाकर रखना होगा. हैदराबाद लोकसभा सीट से AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार चार बार से सांसद हैं और उनसे पहले उनके पिता सुल्तान सलाउद्दीन ओवैसी लगातार छः बार सांसद रहे हैं. इस तरह से हैदाराबाद सीट ओवैसी की परंपरागत सीट मानी जाती है और परिसीमन में अगर उनकी सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो फिर ओवैसी को नई सीट तलाशना होगा. मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट है, जहां से नकुलनाथ सांसद हैं और उससे पहले कमलनाथ सांसद थे. यह कमलनाथ की परंपरागत सीट रही है और एक हज़ार नौ सौ अस्सी अब तक सिर्फ एक बार यह सीट उनके हाथ से निकली है. ऐसे में अगर छिंदवाड़ा सीट महिला के लिए रिजर्व हो जाती है तो फिर कमलनाथ परिवार को नई सीट तलाशनी होगी. इस तरह से मध्य प्रदेश में राघोगढ़ विधानसभा सीट है, जिस पर एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से दिग्विजय सिंह के परिवार का कब्जा है. पहले दिग्विजय सिंह विधायक रहे फिर उनके बाद उनके भाई लक्ष्मण सिंह और अब उनके बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं. परिसीमन में अगर यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो दिग्विजय सिंह के परिवार को नई सीट देखनी होगी. उत्तर प्रदेश में बरेली लोकसभा सीट पर बीजेपी सांसद संतोष गंगवार का कब्जा है. एक हज़ार नौ सौ नवासी से अभी तक सिर्फ एक बार वो चुनाव दो हज़ार नौ में हारे हैं. इसके अलावा उन्हें बरेली सीट पर कोई चुनौती नहीं दे सका. ऐसे में बरेली सीट अगर महिला आरक्षण में चली जाती है तो फिर गंगवार को नई सीट तलाशनी होगी. हालांकि, उम्र के ऐसे पढ़ाव पर हैं कि अगला चुनाव लड़ते हैं कि नहीं देखना होगा. इसके अलावा बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह के लिए भी सियासी चुनौती होगी. कैसरगंज सीट से बृजभूषण सिंह लगातार जीत रहे हैं और अगर यह सीट आरक्षित हो जाती है तो फिर उन्हें नया विकल्प तलाशना होगा. इसी तरह उनके बेटे प्रतीक भूषण विधायक हैं, उनके लिए भी चिंता है. कुंडा विधानसभा सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया लगातार जीतकर विधायक बने रहे हैं और उनके करीबी विनोद सरोज बाबागंज सीट से जीत रहे हैं. ऐसे में अगर यह दोनों सीटें परिसीमन में महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो उनकी चुनौती बढ़ सकती है. यूपी के शाहजहांपुर विधानसभा सीट से सुरेश खन्ना लगातार जीत रहे हैं. ऐसे में अगर उनके इस सीट पर जीत के सिलसिले पर ब्रेक लग सकता है. कानपुर की इरफान सोलंकी, हरदोई सीट पर नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल, रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह, जसवंतनगर सीट से शिवपाल यादव, शाहिद मंजूर, रामअचल राजभर, दुर्गा यादव, अवधेश प्रसाद, फरीद किदवई, इकबाल महमूस जैसे नेता विधायक लगातार बनते आ रहे हैं. जगदंबिका पाल, सफीकुर्रहमान बर्क, राजवीर सिंह और आनंद सिंह के बेटे कीर्ति वर्धन सिंह संसदीय का चुनाव जीत रहे हैं. तमिलनाडु में एमके स्टालिन, पंजाब में अकाली दल के नेता सुखबीर बादल,श्रीनगर से फारुख अब्दुल्ला, हिमाचल से हमीरपुर से अनुराग ठाकुर, हरियाणा की रेवाड़ी से राव इंद्रजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखे हुए हैं. इतना ही नहीं देश के तमाम दिग्गज नेता हैं, जो अपनी-अपनी परंपरागत सीटों से जीत दर्ज कर रहे हैं. ऐसे में अगर परिसीमन में यह सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाती है तो फिर उनके सामने सियासी संकट गहरा जाएगा. महिला आरक्षण को लागू करने के लिए माना जा रहा है कि साल दो हज़ार छब्बीस-सत्ताईस में सीटों का परिसीमन के बाद हो सकता है. ऐसे में जो मौजूदा पुरुष सांसद हैं, उनकी अपनी चिंता उठने लगी है कि उनकी परंपरागत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी तो उनकी राजनीति का क्या होगा. दिलचस्प बात यह है कि महिला आरक्षण की चपेट में कौन नेता-नेता आते हैं, यह देखना होगा?
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत को देश का नया मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। एक आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव अशोक लवासा को चुनाव आयुक्त बनाया गया है। रावत मंगलवार को कार्यभार संभालेंगे। वह अचल कुमार जोति का स्थान लेंगे, जो सोमवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। रावत मध्य प्रदेश काडर के 1977 बैच के आईएएस अफसर हैं। उन्हें अगस्त 2015 में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। लवासा भी मंगलवार को पद संभालेंगे। निर्वाचन आयोग में एक अन्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा हैं।
नई दिल्ली, इक्कीस जनवरी । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत को देश का नया मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। एक आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव अशोक लवासा को चुनाव आयुक्त बनाया गया है। रावत मंगलवार को कार्यभार संभालेंगे। वह अचल कुमार जोति का स्थान लेंगे, जो सोमवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। रावत मध्य प्रदेश काडर के एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर बैच के आईएएस अफसर हैं। उन्हें अगस्त दो हज़ार पंद्रह में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। लवासा भी मंगलवार को पद संभालेंगे। निर्वाचन आयोग में एक अन्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा हैं।
1632 में स्थापित, UT एस्टोनिया का एकमात्र शास्त्रीय विश्वविद्यालय है। UT में 13 000 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं (incl। 1800 अंतर्राष्ट्रीय छात्र) और UT में 3800 कर्मचारी हैं (सहित। 1800 अकादमिक कर्मचारी (190 प्रोफेसर)। अपने छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता का समर्थन और विकास करने के लिए, विश्वविद्यालय के पास 31 देशों में 80 भागीदार विश्वविद्यालय हैं। UT इसमें 4 संकाय और 4 कॉलेज शामिल हैं। अधिकांश UT टार्टू में स्थित है, जो एस्टोनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर है; हालाँकि, इसके कॉलेज पर्नू, विलजंडी और नरवा में स्थित हैं। टार्टू की आबादी 100 000 है, और इसके निवासियों का पांचवां हिस्सा छात्र हैं। टार्टू एक जीवंत छात्र शहर है। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष नए दिनों के साथ शुरू होता है और प्रत्येक सेमेस्टर का मुख्य आकर्षण वसंत और शरद ऋतु छात्र दिवस होते हैं, विशेष रूप से छात्रों के लिए सप्ताह भर चलने वाला उत्सव। UT के कई छात्र क्लब और संघ हैं, जिनमें पेशेवर संगठनों से लेकर अनौपचारिक समूह शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए, ESN टार्टू मुख्य संगठन है जो अपना ध्यान अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के कल्याण पर केंद्रित करता है। UT छात्रों के लिए कार्यक्रमों और अद्वितीय विषयों का विस्तृत चयन प्रदान करता है। UT कई इरास्मस मुंडस और दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के सहयोग से आयोजित अन्य संयुक्त मास्टर कार्यक्रमों में भी भाग लेता है। UT अपने शिक्षण और बैचलर-मास्टर (3+2) अध्ययन मॉड्यूल की प्रणाली के संगठन में बोलोग्ना प्रक्रिया का पालन करता है। पीएचडी की पढ़ाई की अवधि 4 साल है। शैक्षणिक वर्ष प्रत्येक वर्ष सितंबर की शुरुआत में शुरू होता है।
एक हज़ार छः सौ बत्तीस में स्थापित, UT एस्टोनिया का एकमात्र शास्त्रीय विश्वविद्यालय है। UT में तेरह शून्य से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं और UT में तीन हज़ार आठ सौ कर्मचारी हैं । अपने छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता का समर्थन और विकास करने के लिए, विश्वविद्यालय के पास इकतीस देशों में अस्सी भागीदार विश्वविद्यालय हैं। UT इसमें चार संकाय और चार कॉलेज शामिल हैं। अधिकांश UT टार्टू में स्थित है, जो एस्टोनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर है; हालाँकि, इसके कॉलेज पर्नू, विलजंडी और नरवा में स्थित हैं। टार्टू की आबादी एक सौ शून्य है, और इसके निवासियों का पांचवां हिस्सा छात्र हैं। टार्टू एक जीवंत छात्र शहर है। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष नए दिनों के साथ शुरू होता है और प्रत्येक सेमेस्टर का मुख्य आकर्षण वसंत और शरद ऋतु छात्र दिवस होते हैं, विशेष रूप से छात्रों के लिए सप्ताह भर चलने वाला उत्सव। UT के कई छात्र क्लब और संघ हैं, जिनमें पेशेवर संगठनों से लेकर अनौपचारिक समूह शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए, ESN टार्टू मुख्य संगठन है जो अपना ध्यान अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के कल्याण पर केंद्रित करता है। UT छात्रों के लिए कार्यक्रमों और अद्वितीय विषयों का विस्तृत चयन प्रदान करता है। UT कई इरास्मस मुंडस और दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के सहयोग से आयोजित अन्य संयुक्त मास्टर कार्यक्रमों में भी भाग लेता है। UT अपने शिक्षण और बैचलर-मास्टर अध्ययन मॉड्यूल की प्रणाली के संगठन में बोलोग्ना प्रक्रिया का पालन करता है। पीएचडी की पढ़ाई की अवधि चार साल है। शैक्षणिक वर्ष प्रत्येक वर्ष सितंबर की शुरुआत में शुरू होता है।
मुंबईः यूपी में योगी सरकार लाउडस्पीकर के विरुद्ध अभियान चला रही है। इसके तहत धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं, या उनकी आवाज कम की जा रही है। इसी बीच MNS के चीफ राज ठाकरे ने धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाने पर मुख्यमंत्री योगी की प्रशंसा की है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र में जो हैं वे योगी नहीं, भोगी हैं। राज ठाकरे ने ट्वीट किया, धार्मिक स्थलों खास तौर पर मस्जिदों से लाउडस्पीकरों को हटाने के लिए मैं योगी सरकार को तहे दिल से बधाई देता हूं तथा आभारी हूं। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र में कोई योगी नहीं है। मगर यहां सभी भोगी हैं। उत्तर प्रदेश में अब तक 6031 धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाए जा चुके हैं। वहीं, 35000 से अधिक की आवाज कम की गई है। हालांकि, सरकार की इस कार्रवाई पर विपक्ष प्रश्न उठा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हम सभी की आस्था का पूरा सम्मान करते हैं। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। किन्तु इसका सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन कर दूसरों को परेशान किया जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। हाल ही में यूपी के कई शहरों में लाउडस्पीकर को लेकर विवाद हुआ था। कुछ हिंदू संगठनों ने मस्जिदों में लाउड स्पीकर लगाने के जवाब में मंदिरों में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ कराने की घोषणा की थी। कुछ स्थानों पर छतों पर भी लाउड स्पीकर लगाए गए थे। इन सबके बीच सरकार ने लाउड स्पीकर को लेकर निर्देश जारी किए थे।
मुंबईः यूपी में योगी सरकार लाउडस्पीकर के विरुद्ध अभियान चला रही है। इसके तहत धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं, या उनकी आवाज कम की जा रही है। इसी बीच MNS के चीफ राज ठाकरे ने धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाने पर मुख्यमंत्री योगी की प्रशंसा की है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र में जो हैं वे योगी नहीं, भोगी हैं। राज ठाकरे ने ट्वीट किया, धार्मिक स्थलों खास तौर पर मस्जिदों से लाउडस्पीकरों को हटाने के लिए मैं योगी सरकार को तहे दिल से बधाई देता हूं तथा आभारी हूं। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र में कोई योगी नहीं है। मगर यहां सभी भोगी हैं। उत्तर प्रदेश में अब तक छः हज़ार इकतीस धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाए जा चुके हैं। वहीं, पैंतीस हज़ार से अधिक की आवाज कम की गई है। हालांकि, सरकार की इस कार्रवाई पर विपक्ष प्रश्न उठा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हम सभी की आस्था का पूरा सम्मान करते हैं। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। किन्तु इसका सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन कर दूसरों को परेशान किया जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। हाल ही में यूपी के कई शहरों में लाउडस्पीकर को लेकर विवाद हुआ था। कुछ हिंदू संगठनों ने मस्जिदों में लाउड स्पीकर लगाने के जवाब में मंदिरों में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ कराने की घोषणा की थी। कुछ स्थानों पर छतों पर भी लाउड स्पीकर लगाए गए थे। इन सबके बीच सरकार ने लाउड स्पीकर को लेकर निर्देश जारी किए थे।
( १५० ) विवाहपद्धति भा० टी० । कांतिं प्रयच्छति ॥ तस्माद्दीपप्रदानेन मम वंशप्रव र्धनम् ॥ इति ॥ अत्र अन्येपिकन्याबान्धवाः यथासंभ वं द्रव्यं वरवध्वर्थेप्रयच्छति । केचनहोमांतेप्रयच्छं ति । इयं देशाचारतो व्यवस्था ज्ञातव्येति शम् ॥ इति क्षेपकम् । मा०टी - वस्त्रग्रंथि बन्धनंक अनंतर कन्यादान लिखते हैं यजमान शंखमें दूर्वाक्षत फल पुष्प चन्दन जल लेकर दाता वरके दक्षिण हाथपर कन्याका दक्षिण हाथ गखे पूर्वोक्त मन्त्रार्थ - वरुणरूपमें यजमान और सूर्य मंकल्परूप यह द्रव्य विष्णुरूप वर यह विधि ग्रहण करे इस मंत्र को दाता पढे स्वस्ति हो ऐसे कहे मंत्रार्थ - आकाश तुम्हारेको देता है और पृथ्वी ग्रहण करती है । इस मन्त्रसे कन्याका हाथ वर ग्रहण करे अनंतर आज किये कन्या दानकी शास्त्र विहित स्वर्गादि प्राप्तिक लिये यह सुवर्ण अग्निदेव संबंधि अमुक शर्मादि वरको दक्षिणाम देता है वागौ दो वत्ससहित देता है । इसके अनंतर तुमको कल्याण हो ऐसे वर कहे और संकल्पकीविधि बृहत्पराशरजी लिखते हैं ( कन्यादानसमारम्भे दाताशंखे समादेत् । दुर्वाक्षतफलं पुष्पंचन्दनं जलमेवच ) इत्यादि संपूर्ण विधानको विस्तारके भयसे नहीं लिखते ॥ और संकल्प पूर्व कन्यादानका लिखा हुआ है। स्वस्तीति इसस्थान में आचारसे और संबंधि पुरुषभी सुवर्ण रजत ताम्र गौ महिषी ग्राम पृथ्वी यौतक होनेसे कन्याको यथाशक्ति देते हैं । कई होमके अनंतर कई २ वधू वरके विसर्जनके अनंतर खट्यादि दान करते हैं । यह सब अपने २ देशाचारसे व्यवस्था जाननी जिस देशमें जैसे हो तैसेही करना इससे मुनियोंके मतभी बहुत लिखते हैं ( कन्याप्रदानन्तुविधायता तस्तदक्षिणांगोमिथुनंसुवणम् ।। दत्त्वाप्रदद्याद्वरणं वरार्थं वस्त्राणि पात्राणिविभूषणानि ॥ तत्रैवदेयानि बहुश्रुताजगुर्वाल्मीकिजाबालपराशरायाः । होमान्तआहुर्भृगुनारदाया विसर्जनेव्यासमरीचिकौत्साः॥ इत्यादि ) और देशाचार में प्रमाण ( ग्रामवचनंच - कुर्युर्विवाहश्म शानयोग्रमंप्राविशतादिति वचनात्तस्मात्तयाग्रमप्रमाणमितिश्रुतेः )।। अर्थ कि विवाहक कर्तव्यता में और श्मशान अर्थात् प्रेतक्रिया में ग्राम में प्रवेश कर ग्रामवचन करें इस श्रुतिसे अपने २ देशरीति और कुलरीति और ग्रामरीति परन्तु जो धर्मविरुद्ध न होंवे उनको करे । यजुर्वेद अध्याय ७ मूल० मन्त्र ४८ ॥ ॐकांदात्कस्मा॑ऽअदा॒त्कामदा॒त्का मयादात् । कामो॑दा॒ताकाम॑ प्रतिगृह ताकामैतत् ॥ इतिवरः पठेत् ॥ ततस्तांपाणौगृहीत्वा । ॐयदैषिमनसादूरंदिशोनुपवमानो वा । हिरण्यवर्णोवैकर्णः सत्वामनमन्सांकरोतु ॥ श्रीअ मुकदेवीइतिपठन्निष्कामति ततोवेदिदक्षिणस्यांदिशिवारि पूर्णदृढकलशमूर्ध्वतिष्ठतोमौनिनः पुरुषस्यस्कन्धेअभिषेक पर्यन्तंधारयेत् । ततः परस्परंसमीक्षेथामितिकन्या प्रैषानंतरम् च॒क्षुरप॑ति॒घ्नेधि॑शि॒वाप॒शुभ्यः सु॒मना॑ः सु॒वच॑ः ॥ वी॒रसुर्देवकका॑मास्यो॒ नाश॒न्नो॑भव॒द्वि॒पदे॒शंचतुष्प॑दे ॥ सोम॑ःप्रथमोवविदेगंध॒र्वोवि॑िवि॒द॒उत्त॑रः । तु॒तयो॑ अ॒ग्निष्टो॒पति॑स्तु॒रीयस्तेमनुष्युजाः ॥ सोमददद्गन्ध॒र्वाय॑गन्धुर्वोद॑द॒दग्नये॑ । र॒यंच॑पु॒त्रांचा॑दाद॒ग्निर्मुह्यमथो॑ इ॒माम् ॥ सानः पूषाशिवतमामेरयसान उरूउशती विहर । यस्यामशंतःप्रहरामशेपंयस्या मुकामाबहवोनिविष्टयै । इतिवरपठितम न्त्रतपरस्परनिरीक्षणम् । भा० टी० कोदादिति ( मन्त्रार्थ ) प्रश्न - कौन देता है उत्तरकाम अर्थात् इच्छाही देती है । जिससे कामही देता और कामही लेनेवाला इस लिये यह पत्नी प्रतिग्रह उस काम ( संकल्पके लिये है । बलि है सर्वसे और धन्य है कि जो क्षत्रियादि जो १ अघोरचक्षु यह मंत्र अथर्वणवेद कांड १४ अनु० २ । मंत्र १८ लिखा है । २ सोमः प्रथमोविविदे- यह मंत्र ऋग्वेद मंडल १० सूक्त ८५ मंत्र ४० है । ३ ऋग्वेद, मं० १० सूक्त, ८५ मंत्र ॥ ४१ ।। दान मरणपर्यंतभी नहीं लेते अधिकारके न होनेसे यह उनकोभी दान महाकन्यारूपी देती है । यह इच्छाकी स्तुतिपर मंत्र है । इस मंत्रको प्रथम वर पढे पीछेसे वधूको हस्तसे ग्रहण कर ( यदेषि ) इस मंत्र को पढे ( मंत्रार्थ ) प्राच्यादिसे लक्षित वायुकी न्यांई तुम्हारेको पिताके गृहसे दूर लेजाता हूँ वह वायु और हिरण्यवर्ण सूर्य वैकर्ण अग्नि अर्थात् दिक् वायु सूर्य अग्न्यादि देव मुझमें लगा है हृदय जिसका ऐसी तुमको करें । इस मंत्र के अन्तमें वर कन्याका नाम लेवे । ( आत्मनाम गुरोर्नामेति ) आगे नाम कभी न ग्रहण करै अनंतर दक्षिण दिशामें जलपूर्ण कलश स्कंध ( कांधेपर ) रखकर अभिषेक पर्यन्त पुरुष दृढ स्थित रहै ॥ उठकर तुम आपसमें देखें यह यजमान कहे ( मंत्रार्थ ) हे कन्ये ! तुम सौम्य दृष्टिवाली हो और अपतिघ्नी अर्थात् पातके अर्थके नाश करनेवाली मत हो इस विवाहसंस्कार के अनंतर पशुवत् जो आश्रित पुरुष उनमें हितकरनेवाली हो और प्रसन्नचित्तवाली सुंदर प्रतापवाली सत्पुत्र और वीरपुत्रोंके पैदा करनेवाली देवकामा ( देवान् अग्न्यादीन् पूजार्थे कामयति इच्छतीति ) अर्थात् देवताओंमें तथा पित्रों में श्रद्धावाली हो ( स्योना ) सुखी हमारेको कल्याण देनेवाली हो ॥ सिद्धांत यह है कि, तुम्हारेसे हमको सर्वदा लाभ हो ।। कन्यास्तुतिमंत्रका अर्थ- हेकन्ये ! प्रथम रक्षाकरनेवाला चन्द्रमा जन्मदिनसे सार्द्धद्वय वर्ष ( अर्थात् ) २ ॥ अढाई वर्ष पर्यन्त तुम्हारी पुष्टि करता हुआ तिसके अनंतर गंधर्व अर्थात् सूर्य पांचवर्ष पर्यंत तुम्हारेको पढाताहुआ इसलिये सूर्य तुम्हारा दूसरा पति ( पाति रक्षति इति पतिः ) अर्थात् रक्षाकरनेवाला अनंतर पांचवर्षसे लेकर साढेसातवर्षतक अनि तुम्हारेको शुद्धता सर्वकाममें देता हुआ इससे अनि तीसरापति रक्षाकरनेवाला भया ॥ प्रमाण जैसे ( पूर्व स्त्रियः सुरैर्भुक्ताः सोमगन्धर्ववह्निभिः । प्रतिपोष्याध्याव्यसंशोध्यपरित्यक्तां नरो भजेत् ॥ ) अर्थ - जन्मदिनसे ले साढेसात वर्षमें अढाई २ ॥ वर्ष क्रमसे सोम चन्द्रमा सूर्य अग्नि देवने क्रमसे (भुक्ता ) रक्षा की। (भुज पालनाभ्यव्यवहारयोः) इस धातुसे क्तप्रत्ययके आनेसे बहुवचनान्त होनेसे भुक्ताः यह शब्द सिद्ध होता है । और क्रममें पुष्टकर तथा पढाकर और शुद्धकरके त्यागकी हुई स्त्रियोंको नर भजते हैं अर्थात् सेवन करते हैं (भज सेवायां ) इस धातु से लिंङ् लकारके आनेसे यासके स्थान में ईय तिप आदि आनेसे रूप भजेत् बनता है । इसलिये साढेसातवर्षके अनन्तर ज्योतिषशास्त्र में विवाह करने का दोष लिखा है । ( मंत्रार्थ ) चन्द्रमा ३० मासमें पुष्टकर सूर्यको देता भया सूर्यभी ३० महीने के अनन्तर दक्षता पांडित्यको देकर अग्रिके समर्पण करता भया वह अग्निदेव इस स्त्रीकोसाथ पुत्रोंके धनके धर्मके शुद्धकर मुझे देता है प्रमाणभी जैसे- "याज्ञवल्क्यस्मृति अध्याय १ सोमः शौचन्ददावा सांगन्धर्वश्च शुभांगिरम् । पावकः सर्वमेध्यत्वं मेध्या वै योषितः स्मृ ता इत्यादि " अर्थ - पूर्वोक्तही है इसलिये ही सर्व स्त्रियोंको बिना पढा ये ऐसी चातुर्यता होती है कि जो विद्वान् लोक हैं उनकोभी बुद्धि नष्टकर अपने आधीन करलेती हैं और नृत्यादि कलामें ऐसी कुशल होती हैं कि, जो नहीं कही जाती यह विना
विवाहपद्धति भाशून्य टीशून्य । कांतिं प्रयच्छति ॥ तस्माद्दीपप्रदानेन मम वंशप्रव र्धनम् ॥ इति ॥ अत्र अन्येपिकन्याबान्धवाः यथासंभ वं द्रव्यं वरवध्वर्थेप्रयच्छति । केचनहोमांतेप्रयच्छं ति । इयं देशाचारतो व्यवस्था ज्ञातव्येति शम् ॥ इति क्षेपकम् । माशून्यटी - वस्त्रग्रंथि बन्धनंक अनंतर कन्यादान लिखते हैं यजमान शंखमें दूर्वाक्षत फल पुष्प चन्दन जल लेकर दाता वरके दक्षिण हाथपर कन्याका दक्षिण हाथ गखे पूर्वोक्त मन्त्रार्थ - वरुणरूपमें यजमान और सूर्य मंकल्परूप यह द्रव्य विष्णुरूप वर यह विधि ग्रहण करे इस मंत्र को दाता पढे स्वस्ति हो ऐसे कहे मंत्रार्थ - आकाश तुम्हारेको देता है और पृथ्वी ग्रहण करती है । इस मन्त्रसे कन्याका हाथ वर ग्रहण करे अनंतर आज किये कन्या दानकी शास्त्र विहित स्वर्गादि प्राप्तिक लिये यह सुवर्ण अग्निदेव संबंधि अमुक शर्मादि वरको दक्षिणाम देता है वागौ दो वत्ससहित देता है । इसके अनंतर तुमको कल्याण हो ऐसे वर कहे और संकल्पकीविधि बृहत्पराशरजी लिखते हैं इत्यादि संपूर्ण विधानको विस्तारके भयसे नहीं लिखते ॥ और संकल्प पूर्व कन्यादानका लिखा हुआ है। स्वस्तीति इसस्थान में आचारसे और संबंधि पुरुषभी सुवर्ण रजत ताम्र गौ महिषी ग्राम पृथ्वी यौतक होनेसे कन्याको यथाशक्ति देते हैं । कई होमके अनंतर कई दो वधू वरके विसर्जनके अनंतर खट्यादि दान करते हैं । यह सब अपने दो देशाचारसे व्यवस्था जाननी जिस देशमें जैसे हो तैसेही करना इससे मुनियोंके मतभी बहुत लिखते हैं और देशाचार में प्रमाण ।। अर्थ कि विवाहक कर्तव्यता में और श्मशान अर्थात् प्रेतक्रिया में ग्राम में प्रवेश कर ग्रामवचन करें इस श्रुतिसे अपने दो देशरीति और कुलरीति और ग्रामरीति परन्तु जो धर्मविरुद्ध न होंवे उनको करे । यजुर्वेद अध्याय सात मूलशून्य मन्त्र अड़तालीस ॥ ॐकांदात्कस्मा॑ऽअदा॒त्कामदा॒त्का मयादात् । कामो॑दा॒ताकाम॑ प्रतिगृह ताकामैतत् ॥ इतिवरः पठेत् ॥ ततस्तांपाणौगृहीत्वा । ॐयदैषिमनसादूरंदिशोनुपवमानो वा । हिरण्यवर्णोवैकर्णः सत्वामनमन्सांकरोतु ॥ श्रीअ मुकदेवीइतिपठन्निष्कामति ततोवेदिदक्षिणस्यांदिशिवारि पूर्णदृढकलशमूर्ध्वतिष्ठतोमौनिनः पुरुषस्यस्कन्धेअभिषेक पर्यन्तंधारयेत् । ततः परस्परंसमीक्षेथामितिकन्या प्रैषानंतरम् च॒क्षुरप॑ति॒घ्नेधि॑शि॒वाप॒शुभ्यः सु॒मना॑ः सु॒वच॑ः ॥ वी॒रसुर्देवकका॑मास्यो॒ नाश॒न्नो॑भव॒द्वि॒पदे॒शंचतुष्प॑दे ॥ सोम॑ःप्रथमोवविदेगंध॒र्वोवि॑िवि॒द॒उत्त॑रः । तु॒तयो॑ अ॒ग्निष्टो॒पति॑स्तु॒रीयस्तेमनुष्युजाः ॥ सोमददद्गन्ध॒र्वाय॑गन्धुर्वोद॑द॒दग्नये॑ । र॒यंच॑पु॒त्रांचा॑दाद॒ग्निर्मुह्यमथो॑ इ॒माम् ॥ सानः पूषाशिवतमामेरयसान उरूउशती विहर । यस्यामशंतःप्रहरामशेपंयस्या मुकामाबहवोनिविष्टयै । इतिवरपठितम न्त्रतपरस्परनिरीक्षणम् । भाशून्य टीशून्य कोदादिति प्रश्न - कौन देता है उत्तरकाम अर्थात् इच्छाही देती है । जिससे कामही देता और कामही लेनेवाला इस लिये यह पत्नी प्रतिग्रह उस काम इस मंत्र को पढे प्राच्यादिसे लक्षित वायुकी न्यांई तुम्हारेको पिताके गृहसे दूर लेजाता हूँ वह वायु और हिरण्यवर्ण सूर्य वैकर्ण अग्नि अर्थात् दिक् वायु सूर्य अग्न्यादि देव मुझमें लगा है हृदय जिसका ऐसी तुमको करें । इस मंत्र के अन्तमें वर कन्याका नाम लेवे । आगे नाम कभी न ग्रहण करै अनंतर दक्षिण दिशामें जलपूर्ण कलश स्कंध रखकर अभिषेक पर्यन्त पुरुष दृढ स्थित रहै ॥ उठकर तुम आपसमें देखें यह यजमान कहे हे कन्ये ! तुम सौम्य दृष्टिवाली हो और अपतिघ्नी अर्थात् पातके अर्थके नाश करनेवाली मत हो इस विवाहसंस्कार के अनंतर पशुवत् जो आश्रित पुरुष उनमें हितकरनेवाली हो और प्रसन्नचित्तवाली सुंदर प्रतापवाली सत्पुत्र और वीरपुत्रोंके पैदा करनेवाली देवकामा अर्थात् देवताओंमें तथा पित्रों में श्रद्धावाली हो सुखी हमारेको कल्याण देनेवाली हो ॥ सिद्धांत यह है कि, तुम्हारेसे हमको सर्वदा लाभ हो ।। कन्यास्तुतिमंत्रका अर्थ- हेकन्ये ! प्रथम रक्षाकरनेवाला चन्द्रमा जन्मदिनसे सार्द्धद्वय वर्ष दो ॥ अढाई वर्ष पर्यन्त तुम्हारी पुष्टि करता हुआ तिसके अनंतर गंधर्व अर्थात् सूर्य पांचवर्ष पर्यंत तुम्हारेको पढाताहुआ इसलिये सूर्य तुम्हारा दूसरा पति अर्थात् रक्षाकरनेवाला अनंतर पांचवर्षसे लेकर साढेसातवर्षतक अनि तुम्हारेको शुद्धता सर्वकाममें देता हुआ इससे अनि तीसरापति रक्षाकरनेवाला भया ॥ प्रमाण जैसे अर्थ - जन्मदिनसे ले साढेसात वर्षमें अढाई दो ॥ वर्ष क्रमसे सोम चन्द्रमा सूर्य अग्नि देवने क्रमसे रक्षा की। इस धातुसे क्तप्रत्ययके आनेसे बहुवचनान्त होनेसे भुक्ताः यह शब्द सिद्ध होता है । और क्रममें पुष्टकर तथा पढाकर और शुद्धकरके त्यागकी हुई स्त्रियोंको नर भजते हैं अर्थात् सेवन करते हैं इस धातु से लिंङ् लकारके आनेसे यासके स्थान में ईय तिप आदि आनेसे रूप भजेत् बनता है । इसलिये साढेसातवर्षके अनन्तर ज्योतिषशास्त्र में विवाह करने का दोष लिखा है । चन्द्रमा तीस मासमें पुष्टकर सूर्यको देता भया सूर्यभी तीस महीने के अनन्तर दक्षता पांडित्यको देकर अग्रिके समर्पण करता भया वह अग्निदेव इस स्त्रीकोसाथ पुत्रोंके धनके धर्मके शुद्धकर मुझे देता है प्रमाणभी जैसे- "याज्ञवल्क्यस्मृति अध्याय एक सोमः शौचन्ददावा सांगन्धर्वश्च शुभांगिरम् । पावकः सर्वमेध्यत्वं मेध्या वै योषितः स्मृ ता इत्यादि " अर्थ - पूर्वोक्तही है इसलिये ही सर्व स्त्रियोंको बिना पढा ये ऐसी चातुर्यता होती है कि जो विद्वान् लोक हैं उनकोभी बुद्धि नष्टकर अपने आधीन करलेती हैं और नृत्यादि कलामें ऐसी कुशल होती हैं कि, जो नहीं कही जाती यह विना
Scorpio Vrischika Arthik Rashifal Today 6 MAY 2022: वृश्चिक राशि वालों को आज अपनी सेहत का खूब ख्याल रखना होगा। आज आपको आंतरिक विकार होने की संभावना हैं। आज का दिन इस सबकी जांच कराने और किसी अच्छे डॉक्टर इस विषय में सलाह मशविरा करने में व्यतीत करें। रोग की अवस्था में भी आपका चलना फिरना काफी ज्यादा हो गया है। आज इस राशि के जातक का मन उदास रहेगा। जिसका जीवन और रोजगार पर असर पड़ेगा। घर पर रहें, परिवार का ख्याल रखें। पढाई में कुछ कलात्मक करेंगे। जिससे भविष्य में सफलता हाथ लगेगी। नौकरी में नई योजनाएं फलीभूत होगी। सेहत समान्य रहेगा । खान पान पर ध्यान दें।
Scorpio Vrischika Arthik Rashifal Today छः MAY दो हज़ार बाईस: वृश्चिक राशि वालों को आज अपनी सेहत का खूब ख्याल रखना होगा। आज आपको आंतरिक विकार होने की संभावना हैं। आज का दिन इस सबकी जांच कराने और किसी अच्छे डॉक्टर इस विषय में सलाह मशविरा करने में व्यतीत करें। रोग की अवस्था में भी आपका चलना फिरना काफी ज्यादा हो गया है। आज इस राशि के जातक का मन उदास रहेगा। जिसका जीवन और रोजगार पर असर पड़ेगा। घर पर रहें, परिवार का ख्याल रखें। पढाई में कुछ कलात्मक करेंगे। जिससे भविष्य में सफलता हाथ लगेगी। नौकरी में नई योजनाएं फलीभूत होगी। सेहत समान्य रहेगा । खान पान पर ध्यान दें।
आज जब जंक फूड और कैंडीज हर बच्चे के फेवरिट बनते जा रहेे हैंं ऐसे में जरूरी है कि उन्हें फल खाने की आदत डाली जाए, इसमें स्कूलों में होने वाला फ्रूट ब्रेक बहुत मदद कर सकता है। आज जब जंक फूड और कैंडीज हर बच्चे के फेवरिट बनते जा रहेे हैंं ऐसे में जरूरी है कि उन्हें फल खाने की आदत डाली जाए, इसमें स्कूलों में होने वाला फ्रूट ब्रेक बहुत मदद कर सकता है। अगर दूध का सेवन दिन में किया जाए तो यह हमें दिनभर एनर्जी देता है और रात में लिया जाए तो दिमाग शांत रहता है। आयुर्वेद में भी दूध पीने का सही समय रात ही है। बच्चा बहुत अधिक चाय पीता है तो इसका असर उसके दिमाग, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही बहुत अधिक चाय पीने का असर शारीरिक विकास पर भी पड़ता है। अपने शौक के लिए समय निकालें। नियोजित छुट्टियां प्लान करें। अपने दैनिक कार्यक्रम के लिए कुछ समय निकालें। अपनी सहेलियों के साथ छुट्टी पर जाएं। इससे आपको मानसिक रूप से शांति, सुकून और तनाव मुक्त महसूस होगा। प्रोबायोटिक्स के स्वास्थ्य लाभों के बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस बात की जानकारी का अभाव है कि सेहत लाभों के लिए किन प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जाए ? शिल्पा का कहना है कि जब आप खाना खाते हैं, तो उस दौरान टीवी बिल्कुल भी ना देखें। खासकर, बच्चों के साथ खाना खा रहे हैं तब टीवी, लैपटॉप, मोबाइल से दूरी बनाएं। अरहर यानी तूअर दाल भारत के लगभग हर हिस्से में बड़े शौक से खाई जाती है, बल्कि कुछ प्रांतों में तो अरहर दाल को ही प्रमुख दाल माना जाता है, यह खास दाल इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ और भी कई फायदे देती है सेहत को। शायद आपको पता नहीं कि दही की तासीर गर्म मानी गई है। साथ ही पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए दही सबसे उत्तम आहार है। लगातार बैठकर पढ़ने से बचें। बीच में कुछ समय के लिए व्यायाम करें। एक्टिविटी बढ़ाने से तनाव कम होता है और आप बेहतर महसूस करते हैं। इस दौरान आप सैर करना, दौड़ना, तैरना, डांस करना जैसे व्यायाम कर सकते हैं। हाथ से खाना खाने से संतुष्टि मिलती है जिसे आयुर्वेद में तृप्ति कहा गया है, यह तरीका वजन घटाने से लेकर अपच की समस्या से भी निजात दिलाता है। क्या आप जानते हैं कि जंक फूड खाने की आदत वाले लोगों को डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। हम यहां लिख रहे हैं 3 ऐसी ही चीज़ों के बारे में जिन्हें ग़लत तरीके से पका कर खाना आपके लिए हो सकता है नुकसान दायक। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि साथ खाना खाने से सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। खासकर, बच्चों में परिवार के साथ खाने से हेल्दी आदतें विकसित होती हैं। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रूजुता दीवेकर ने बतायीं इंडियन सुपरफूड सूरन की कुछ खूबियां। हम आपको यहां बता रहे हैं आरारोट की कुछ खूबियां। मिठाई से भले ही पूरी तरह से परहेज न करें, लेकिन अधिक मात्रा में भी मिठाई का सेवन करने से बचें। कोशिश कीजिए कि पूरी मिठाई खाने की बजाय मिठाई का टुकड़ा लेकर मुंह मीठा कर लें ताकि मिठास भी हो और सेहत भी बनी रहे। जिस व्यक्ति की काया निरोग रहती है, वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति का ही शरीर और दिमाग पूर्ण सक्रिय रहता है। बाल अधिकार के पैरोकार सत्यार्थी ने कहा, "बेहतर पोषण और आरोग्य पर व्यक्ति की खुशहाली और स्वतंत्रता निर्भर करती है। " आपके बच्चों और डायबिटीज़ के मरीज़ों को इस दाल से मिल सकता है भरपूर पोषण । लाइफस्टाइल और सही डायट को नज़रअंदाज़ करने से आपका ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ सकता है। व्रत में फलाहार के तौर पर खाया जाने वाला राजगिरा प्रोटीन और विटामिन का खजाना है। ग्लूटेन इंटॉलरेंस समस्या से परेशान लोगों को गेंहूं से बनी चीज़ें खाने से मना किया जाता है। पढ़ें यह आर्टिकल और समझे उन स्मार्ट तरीकों को जो आपको वेट मैनेजमेंट में करेंगे मदद । ग्रीन टी मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ाकर वजन कम करने में काफी सहायक होती है। इंडियन मेडिकल गजट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रोटीन का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय आहारों में प्रोटीन की कमी पाई जाती है। अंगों के कार्य, मांसपेशियों की मरम्मत और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। कुछ लोग अपनी डायट कंट्रोल नहीं कर पाते और झिझकते हुए भी मसालेदार और ऑयली फूड खा लेते हैं। समोसा, सोडा ड्रिंक्स और शक्कर से भरी चीज़ें खाने से बचें। वजन की चिंता छोड़ इस तरह खा सकते हैं आम। कम तेल और बिना मक्खन वाले छोले जो आपकी सेहत के लिए हैं फायदेमंद। केले के पत्ते पर खाना खाने से बाल बनते हैं काले और चमकदार। अपनी डायट में कीजिए थोड़ा सा बदलाव और रहिए हेल्दी।
आज जब जंक फूड और कैंडीज हर बच्चे के फेवरिट बनते जा रहेे हैंं ऐसे में जरूरी है कि उन्हें फल खाने की आदत डाली जाए, इसमें स्कूलों में होने वाला फ्रूट ब्रेक बहुत मदद कर सकता है। आज जब जंक फूड और कैंडीज हर बच्चे के फेवरिट बनते जा रहेे हैंं ऐसे में जरूरी है कि उन्हें फल खाने की आदत डाली जाए, इसमें स्कूलों में होने वाला फ्रूट ब्रेक बहुत मदद कर सकता है। अगर दूध का सेवन दिन में किया जाए तो यह हमें दिनभर एनर्जी देता है और रात में लिया जाए तो दिमाग शांत रहता है। आयुर्वेद में भी दूध पीने का सही समय रात ही है। बच्चा बहुत अधिक चाय पीता है तो इसका असर उसके दिमाग, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही बहुत अधिक चाय पीने का असर शारीरिक विकास पर भी पड़ता है। अपने शौक के लिए समय निकालें। नियोजित छुट्टियां प्लान करें। अपने दैनिक कार्यक्रम के लिए कुछ समय निकालें। अपनी सहेलियों के साथ छुट्टी पर जाएं। इससे आपको मानसिक रूप से शांति, सुकून और तनाव मुक्त महसूस होगा। प्रोबायोटिक्स के स्वास्थ्य लाभों के बारे में तो जानते हैं, लेकिन इस बात की जानकारी का अभाव है कि सेहत लाभों के लिए किन प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जाए ? शिल्पा का कहना है कि जब आप खाना खाते हैं, तो उस दौरान टीवी बिल्कुल भी ना देखें। खासकर, बच्चों के साथ खाना खा रहे हैं तब टीवी, लैपटॉप, मोबाइल से दूरी बनाएं। अरहर यानी तूअर दाल भारत के लगभग हर हिस्से में बड़े शौक से खाई जाती है, बल्कि कुछ प्रांतों में तो अरहर दाल को ही प्रमुख दाल माना जाता है, यह खास दाल इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ और भी कई फायदे देती है सेहत को। शायद आपको पता नहीं कि दही की तासीर गर्म मानी गई है। साथ ही पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए दही सबसे उत्तम आहार है। लगातार बैठकर पढ़ने से बचें। बीच में कुछ समय के लिए व्यायाम करें। एक्टिविटी बढ़ाने से तनाव कम होता है और आप बेहतर महसूस करते हैं। इस दौरान आप सैर करना, दौड़ना, तैरना, डांस करना जैसे व्यायाम कर सकते हैं। हाथ से खाना खाने से संतुष्टि मिलती है जिसे आयुर्वेद में तृप्ति कहा गया है, यह तरीका वजन घटाने से लेकर अपच की समस्या से भी निजात दिलाता है। क्या आप जानते हैं कि जंक फूड खाने की आदत वाले लोगों को डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। हम यहां लिख रहे हैं तीन ऐसी ही चीज़ों के बारे में जिन्हें ग़लत तरीके से पका कर खाना आपके लिए हो सकता है नुकसान दायक। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि साथ खाना खाने से सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। खासकर, बच्चों में परिवार के साथ खाने से हेल्दी आदतें विकसित होती हैं। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रूजुता दीवेकर ने बतायीं इंडियन सुपरफूड सूरन की कुछ खूबियां। हम आपको यहां बता रहे हैं आरारोट की कुछ खूबियां। मिठाई से भले ही पूरी तरह से परहेज न करें, लेकिन अधिक मात्रा में भी मिठाई का सेवन करने से बचें। कोशिश कीजिए कि पूरी मिठाई खाने की बजाय मिठाई का टुकड़ा लेकर मुंह मीठा कर लें ताकि मिठास भी हो और सेहत भी बनी रहे। जिस व्यक्ति की काया निरोग रहती है, वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति का ही शरीर और दिमाग पूर्ण सक्रिय रहता है। बाल अधिकार के पैरोकार सत्यार्थी ने कहा, "बेहतर पोषण और आरोग्य पर व्यक्ति की खुशहाली और स्वतंत्रता निर्भर करती है। " आपके बच्चों और डायबिटीज़ के मरीज़ों को इस दाल से मिल सकता है भरपूर पोषण । लाइफस्टाइल और सही डायट को नज़रअंदाज़ करने से आपका ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ सकता है। व्रत में फलाहार के तौर पर खाया जाने वाला राजगिरा प्रोटीन और विटामिन का खजाना है। ग्लूटेन इंटॉलरेंस समस्या से परेशान लोगों को गेंहूं से बनी चीज़ें खाने से मना किया जाता है। पढ़ें यह आर्टिकल और समझे उन स्मार्ट तरीकों को जो आपको वेट मैनेजमेंट में करेंगे मदद । ग्रीन टी मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ाकर वजन कम करने में काफी सहायक होती है। इंडियन मेडिकल गजट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रोटीन का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि अस्सी प्रतिशत से अधिक भारतीय आहारों में प्रोटीन की कमी पाई जाती है। अंगों के कार्य, मांसपेशियों की मरम्मत और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। कुछ लोग अपनी डायट कंट्रोल नहीं कर पाते और झिझकते हुए भी मसालेदार और ऑयली फूड खा लेते हैं। समोसा, सोडा ड्रिंक्स और शक्कर से भरी चीज़ें खाने से बचें। वजन की चिंता छोड़ इस तरह खा सकते हैं आम। कम तेल और बिना मक्खन वाले छोले जो आपकी सेहत के लिए हैं फायदेमंद। केले के पत्ते पर खाना खाने से बाल बनते हैं काले और चमकदार। अपनी डायट में कीजिए थोड़ा सा बदलाव और रहिए हेल्दी।
- सलमान खान और आयत का क्यूट वीडियो वायरल, बंदर को खाना खिलाते आए नजर! - डॉन दाऊद इब्राहिम की गर्लफ्रेंड ने 'सूर्यवंशी' पर निकाली भड़ास, बोलीं- इस्लामफोबिया को बढ़ावा ! - 'टिप टिप बरसा पानी' रीमेक पर नाराज फैंस के लिए क्या बोले रोहित शेट्टी? बयान है चर्चा में! - सिद्धार्थ मल्होत्रा की एक्शन फिल्म योद्धा का ऐलान, दमदार पोस्टर हुआ रिलीज! - कंगना रनौत के आजादी कमेंट पर भड़के कांग्रेस नेता, एक्ट्रेस को कहा 'नाचनेवाली' - रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर स्टारर अनटाइटल्ड फिल्म इस दिन होगी रिलीज, लव रंजन का धमाका! - अभिषेक बच्चन की 'बॉब बिस्वास' का कल होगा ट्रेलर रिलीज, 3 दिसंबर को जी5 पर होगा धमाकेदार प्रीमियर!
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हैदराबाद, 10 नवंबर तेलंगाना के पतानचेरू के पास आउटर रिंग रोड पर मंगलवार को दो गाड़ियों की टक्कर हो गई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य जख्मी हो गए। पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 10 लोगों को ले जा रही एक गाड़ी को दूसरे वाहन ने ओवर टेक करते हुए टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में छह लोगों की मौके पर मौत हो गई। ये लोग बेंगलुरू से आ रहे थे। घायलों को पतानचेरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को शक है कि हादसे का कारण अधिक रफ्तार से गाड़ी चलाना हो सकता है और वह मामले की जांच कर रही है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
हैदराबाद, दस नवंबर तेलंगाना के पतानचेरू के पास आउटर रिंग रोड पर मंगलवार को दो गाड़ियों की टक्कर हो गई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य जख्मी हो गए। पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के दस लोगों को ले जा रही एक गाड़ी को दूसरे वाहन ने ओवर टेक करते हुए टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में छह लोगों की मौके पर मौत हो गई। ये लोग बेंगलुरू से आ रहे थे। घायलों को पतानचेरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को शक है कि हादसे का कारण अधिक रफ्तार से गाड़ी चलाना हो सकता है और वह मामले की जांच कर रही है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Patna: पुलिस ने प्रेमी के साथ फरार हुए विवाहित महिला को गिरफ्तार कर लिया. साथ में उसके प्रेमी को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने महिला को उसके परिजनों को सौंप दिया. बताया जाता है कि कुछ समय पहले दानापुर की इस युवती का पड़ोस में रहने वाले एक लड़के के साथ अफेयर था. दोनों कॉलेज में एक साथ पढ़ते थे. इस बीच युवती की शादी शाहपुर के तेतरिया गांव में हो गयी. इसके बाद भी दोनों के बीच बातचीत होती रही और प्यार परवान चढ़ता रहा. इस बीच युवती 25 मई की रात अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई. पति ने प्रेमी पर पत्नी को भगाकर ले जाने का केस दर्ज कराया. आरोप लगाया कि घटना वाली रात प्रेमी तेतरिया गांव आया था. वह मेरी पत्नी को भगा ले गया. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए बिहिया चौरस्ता से विवाहिता और प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया. बरामदगी के बाद कोर्ट में पेश किया गया. यहां से विवाहिता को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया.
Patna: पुलिस ने प्रेमी के साथ फरार हुए विवाहित महिला को गिरफ्तार कर लिया. साथ में उसके प्रेमी को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने महिला को उसके परिजनों को सौंप दिया. बताया जाता है कि कुछ समय पहले दानापुर की इस युवती का पड़ोस में रहने वाले एक लड़के के साथ अफेयर था. दोनों कॉलेज में एक साथ पढ़ते थे. इस बीच युवती की शादी शाहपुर के तेतरिया गांव में हो गयी. इसके बाद भी दोनों के बीच बातचीत होती रही और प्यार परवान चढ़ता रहा. इस बीच युवती पच्चीस मई की रात अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई. पति ने प्रेमी पर पत्नी को भगाकर ले जाने का केस दर्ज कराया. आरोप लगाया कि घटना वाली रात प्रेमी तेतरिया गांव आया था. वह मेरी पत्नी को भगा ले गया. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए बिहिया चौरस्ता से विवाहिता और प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया. बरामदगी के बाद कोर्ट में पेश किया गया. यहां से विवाहिता को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया.
खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह को इशारों में धमकी दी है। अमृतपाल ने रविवार को पंजाब के मोगा जिले के बुधसिंह वाला गांव में कहा- इंदिरा ने भी दबाने की कोशिश की थी, क्या हश्र हुआ? अब अमित शाह अपनी इच्छा पूरी कर के देख लें। अमृतपाल पंजाबी सिंगर दीप सिद्धू की बरसी में आया था। वह वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख है, जिसे दीप सिद्धू ने ही बनाया था। दरअसल, अमित शाह ने कुछ दिन पहले कहा था कि पंजाब में खालिस्तान समर्थकों पर हमारी नजर है। अमृतपाल से शाह के बयान को लेकर सवाल किया गया था। इस पर अमृतपाल ने कहा कि शाह को कह दो कि पंजाब का बच्चा-बच्चा खालिस्तान की बात करता है। जो करना है कर ले। हम अपना राज मांग रहे हैं, किसी दूसरे का नहीं। 500 साल से हमारे पूर्वजों ने इस धरती पर अपना खून बहाया है। कुर्बानी देने वाले इतने लोग हैं कि हम उंगलियों पर नहीं गिना सकते। इस धरती के दावेदार हम हैं। इस दावे से हमें कोई पीछे नहीं हटा सकता। न इंदिरा हटा सकी थी और न ही मोदी या अमित शाह हटा सकता है। दुनिया भर की फौजें आ जाएं, हम मरते मर जाएंगे, लेकिन अपना दावा नहीं छोड़ेंगे। अमृतपाल ने पूछा- शाह हिंदू राष्ट्र की बात कहने वालों पर कार्रवाई करेंगे? अमृतपाल सिंह ने कहा- हिंदुस्तान की हुकूमत सेक्युलर हुकूमत है। मुझे बताओ कि कभी देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की बात कहने वालों पर कार्रवाई करेंगे। इसका मतलब फर्क है। हिंदुओं और सिखों की इंस्पिरेशन का फर्क है। सिख नहीं कर सकते, लेकिन हिंदू अपनी बात कर सकते हैं। मुझे ये लगता है कि दबाने से कुछ नहीं दबता। इंदिरा गांधी ने यह करके देख लिया, क्या नतीजा निकला। यह भी करके देख लें, इनकी इच्छा पूरी करने वाली बात है। हम तो हथेली पर सिर रखकर चल रहे हैं। हमें मौत का भय होता तो इन रास्तों पर चलते ही ना। गृह मंत्री (अमित शाह) अपनी इच्छा पूरी करके देख लें। पंजाब में इस वक्त अमृतपाल सिंह का नाम चर्चा में है। 'वारिस पंजाब दे' संगठन में बीते साल ही अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी (ताजपोशी) हुई थी। 'वारिस पंजाब दे' एक प्रेशर ग्रुप है, जिसे 2 साल पहले पंजाब के एक्टर और एक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने बनाया था। यह दीप सिद्धू वही हैं, जो किसान आंदोलन के वक्त अफसरों से अंग्रेजी में बात करके चर्चा में आए थे। उसके बाद किसान आंदोलन के वक्त ट्रैक्टर मार्च के दौरान दीप को लाल किला हिंसा का मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में दीप सिद्धू की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद अमृतपाल को इसका मुखी बना दिया गया। अमृतपाल कुछ ही समय पहले दुबई से भारत आया। दुबई में वह अपने परिवार के ट्रांसपोर्ट बिजनेस में हाथ बंटाता था। यहां आते ही अमृतपाल अपनी दमदार भाषण शैली के कारण चर्चा में आ गया। अपने भाषण में वह खालिस्तान के समर्थन में खुल कर बोलता है। इतना ही नहीं, वह पंजाब के युवाओं को ड्रग्स के जाल से मुक्त करवाने के दावों के साथ युवाओं को अपने साथ जोड़ रहा है। अमृतपाल सिंह ने अपने भाषण में अमित शाह की तुलना इंदिरा गांधी के साथ की है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1984 में गोल्डन टेंपल को जरनैल सिंह भिंडरांवाला से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार करवाया था। जिसके बाद 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी। इसी जरनैल सिंह भिंडरांवाला को अमृतपाल अपना आदर्श मानता है। अमृतपाल सिंह अपने एक करीबी तूफान सिंह की गिरफ्तारी से भड़का हुआ है। अमृतसर के अजनाला में एक सिख युवक को अगवा करने और उसके साथ मारपीट के आरोप में पुलिस ने अमृतपाल सिंह, 5 अन्य व 25 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर रखा है। इसी मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमृतपाल के करीबी तूफान को गिरफ्तार किया। जिसके बाद से ही अमृतपाल लगातार भड़का हुआ है और पहले पंजाब पुलिस व अब गृह मंत्री अमित शाह को खुली धमकी दे रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह को इशारों में धमकी दी है। अमृतपाल ने रविवार को पंजाब के मोगा जिले के बुधसिंह वाला गांव में कहा- इंदिरा ने भी दबाने की कोशिश की थी, क्या हश्र हुआ? अब अमित शाह अपनी इच्छा पूरी कर के देख लें। अमृतपाल पंजाबी सिंगर दीप सिद्धू की बरसी में आया था। वह वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख है, जिसे दीप सिद्धू ने ही बनाया था। दरअसल, अमित शाह ने कुछ दिन पहले कहा था कि पंजाब में खालिस्तान समर्थकों पर हमारी नजर है। अमृतपाल से शाह के बयान को लेकर सवाल किया गया था। इस पर अमृतपाल ने कहा कि शाह को कह दो कि पंजाब का बच्चा-बच्चा खालिस्तान की बात करता है। जो करना है कर ले। हम अपना राज मांग रहे हैं, किसी दूसरे का नहीं। पाँच सौ साल से हमारे पूर्वजों ने इस धरती पर अपना खून बहाया है। कुर्बानी देने वाले इतने लोग हैं कि हम उंगलियों पर नहीं गिना सकते। इस धरती के दावेदार हम हैं। इस दावे से हमें कोई पीछे नहीं हटा सकता। न इंदिरा हटा सकी थी और न ही मोदी या अमित शाह हटा सकता है। दुनिया भर की फौजें आ जाएं, हम मरते मर जाएंगे, लेकिन अपना दावा नहीं छोड़ेंगे। अमृतपाल ने पूछा- शाह हिंदू राष्ट्र की बात कहने वालों पर कार्रवाई करेंगे? अमृतपाल सिंह ने कहा- हिंदुस्तान की हुकूमत सेक्युलर हुकूमत है। मुझे बताओ कि कभी देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की बात कहने वालों पर कार्रवाई करेंगे। इसका मतलब फर्क है। हिंदुओं और सिखों की इंस्पिरेशन का फर्क है। सिख नहीं कर सकते, लेकिन हिंदू अपनी बात कर सकते हैं। मुझे ये लगता है कि दबाने से कुछ नहीं दबता। इंदिरा गांधी ने यह करके देख लिया, क्या नतीजा निकला। यह भी करके देख लें, इनकी इच्छा पूरी करने वाली बात है। हम तो हथेली पर सिर रखकर चल रहे हैं। हमें मौत का भय होता तो इन रास्तों पर चलते ही ना। गृह मंत्री अपनी इच्छा पूरी करके देख लें। पंजाब में इस वक्त अमृतपाल सिंह का नाम चर्चा में है। 'वारिस पंजाब दे' संगठन में बीते साल ही अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी हुई थी। 'वारिस पंजाब दे' एक प्रेशर ग्रुप है, जिसे दो साल पहले पंजाब के एक्टर और एक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने बनाया था। यह दीप सिद्धू वही हैं, जो किसान आंदोलन के वक्त अफसरों से अंग्रेजी में बात करके चर्चा में आए थे। उसके बाद किसान आंदोलन के वक्त ट्रैक्टर मार्च के दौरान दीप को लाल किला हिंसा का मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में दीप सिद्धू की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद अमृतपाल को इसका मुखी बना दिया गया। अमृतपाल कुछ ही समय पहले दुबई से भारत आया। दुबई में वह अपने परिवार के ट्रांसपोर्ट बिजनेस में हाथ बंटाता था। यहां आते ही अमृतपाल अपनी दमदार भाषण शैली के कारण चर्चा में आ गया। अपने भाषण में वह खालिस्तान के समर्थन में खुल कर बोलता है। इतना ही नहीं, वह पंजाब के युवाओं को ड्रग्स के जाल से मुक्त करवाने के दावों के साथ युवाओं को अपने साथ जोड़ रहा है। अमृतपाल सिंह ने अपने भाषण में अमित शाह की तुलना इंदिरा गांधी के साथ की है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में गोल्डन टेंपल को जरनैल सिंह भिंडरांवाला से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार करवाया था। जिसके बाद दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी। इसी जरनैल सिंह भिंडरांवाला को अमृतपाल अपना आदर्श मानता है। अमृतपाल सिंह अपने एक करीबी तूफान सिंह की गिरफ्तारी से भड़का हुआ है। अमृतसर के अजनाला में एक सिख युवक को अगवा करने और उसके साथ मारपीट के आरोप में पुलिस ने अमृतपाल सिंह, पाँच अन्य व पच्चीस अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर रखा है। इसी मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमृतपाल के करीबी तूफान को गिरफ्तार किया। जिसके बाद से ही अमृतपाल लगातार भड़का हुआ है और पहले पंजाब पुलिस व अब गृह मंत्री अमित शाह को खुली धमकी दे रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जब गोल्डफिश अंडे देने की तैयारी कर रही होती है (जिसे "स्पॉनिंग" के रूप में जाना जाता है) गोल्डफिश को प्रेग्नेंट कहा जाता है। यदि आपको लगता है कि आपकी गोल्डफिश अंडे देने (स्पॉन) की तैयारी कर रही है, तो इसका पता लगाने के कई तरीके हैं। सबसे पहले, यह पता लगाने की कोशिश करें कि आपकी फिश अंडे देने के लिए सही स्थिति में हैं या नहीं। फिर, अपने मेल और फीमेल दोनों फिश में "प्री-स्पॉनिंग" बिहेवियर को देखने की कोशिश करें। हालांकि यह दुर्लभ है, एक प्रेग्नेंट गोल्डफिश खरीदना संभव है। अन्यथा, आपकी फिश केवल तभी प्रेग्नेंट होगी जब मेल और फीमेल दोनों फिश मौजूद हों। 1. पता करें कि क्या आपकी फिश फीमेल हैः अपनी गोल्डफिश के सेक्स को पता करने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप फिश खरीदते समय या पशु चिकित्सक से पूछें। कहा गया है, कि फीमेल गोल्डफिश की बॉडी बड़ी होती है। ऊपर से देखे जाने पर, आप आमतौर पर नोटिस करेंगे कि फीमेल की बॉडी बड़ी, और मेल का मिड सेक्शन पतला होता है। इसके अलावा, फीमेल पेक्टोरल (गिल्स के ठीक पीछे स्थित) फिन मेल की तुलना में छोटे और गोल होते हैं। इसके साथ ही, आमतौर पर गोल्डफिश तब तक अंडे नहीं देगी जब तक कि वह कम से कम 1 साल की नहीं हो जाती हैं। 2. साल के समय पर ध्यान देंः यदि आपकी गोल्डफिश को बाहर रखा गया है, तो यह केवल स्प्रिंग या गर्मी की शुरुआत में अंडे देगी। यदि आपकी गोल्डफिश को हमेशा अंदर रखा गया है, तो यह साल में कभी भी अंडे दे सकती है। क्या आपकी बाहर रखी गई गोल्डफिश प्रेग्नेंट है यह निर्धारित करते समय सोचें कि अभी क्या सीजन है। 3. अपने पानी का तापमान चेक करेंः गोल्डफिश अधिकांश रूप से ऐसे पानी में ब्रीड करती हैं जिसका तापमान लगभग 68 °F (20 °C)होता है। यदि आपको लगता है कि आपकी गोल्डफिश अंडे देने की तैयारी कर रही है, तो अपने पानी का तापमान चेक करके देखें कि क्या तापमान सही है। 4. अपनी मेल गोल्डफिश पर स्पॉनिंग टूबर्कल्स (spawning tubercles) को देखेंः जब आपके मेल गोल्डफिश अंडे देने के लिए तैयार होते हैं, तो उनके सिर, गिल कवर, और पेक्टरल फिन के पास एक छोटा सा सफेद बम्प "spawning tubercles" बन जाएगा। यदि आप अपने मेल फिश पर ये स्पॉट्स दिखते हैं, तो अधिक संभावना है कि आपकी फ़ीमेल फिश प्रेग्नेंट हो सकती है। स्पॉनिंग टूबर्कल्स दिखने में मुश्किल हो सकते हैं। यदि आपको ये नहीं दिखते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी फिश प्रेग्नेंट नहीं है। 5. नोटिस करें कि क्या मेल गोल्डफिश फीमेल गोल्डफिश का पीछा करता हैः जब वह अंडे देने की तैयारी करते हैं, तो मेल फिश फीमेल का पीछा कभी-कभी एक डांस के रूप में करता है जिसे "spawning chase" कहा जाता है। कई मामलों में, यह बिहेवियर स्पॉनिंग टूबर्कल्स (जिन्हें मुश्किल से देखा जा सकता है) की तुलना में अधिक दिखता है। 6. अपनी गोल्डफिश के एक्टिविटी लेवल पर ध्यान देंः जब गोल्डफिश अंडे देने वाली होती है, तो वे आमतौर पर बहुत धीरे मूव करती हैं। नोट करें कि क्या आपकी गोल्डफिश धीरे मूव कर रही है या आसपास जाने में कोई परेशानी हो रही है। आप नोटिस कर सकते हैं कि आपकी गोल्डफिश "nesting" कर रही है, या अधिकांश समय शेल्टर या पौधों में छिप रही है। 7. नोटिस करें कि क्या आपकी फिश फूड खाने से मना करती हैः जब फिश अंडे देने की तैयारी कर रही होती हैं, तो वे कभी कभी फूड खाने से मना करती हैं। यदि आपकी गोल्डफिश उतना ज्यादा नहीं खा रही है, तो हो सकता है कि बह जल्दी अंडे देने वाली है। 8. अपनी गोल्डफिश की बॉडी के साइज को नोट करेंः फीमेल गोल्डफिश की बॉडी मेल गोल्डफिश की तुलना में थोड़ी अधिक राउंड होती है। जब आपकी फीमेल गोल्ड फिश अंडे देने वाली होती है, तो उनके पेट का साइज बड़ा हो सकता है, और थोड़ा बाहर की तरफ निकल सकता है। स्पॉनिंग टूबर्कल्स की तरह, कुछ फिश में यह अच्छे से दिख सकते हैं, जबकि हो सकता है कि आपको दूसरों में बिलकुल भी न दिखें।
जब गोल्डफिश अंडे देने की तैयारी कर रही होती है गोल्डफिश को प्रेग्नेंट कहा जाता है। यदि आपको लगता है कि आपकी गोल्डफिश अंडे देने की तैयारी कर रही है, तो इसका पता लगाने के कई तरीके हैं। सबसे पहले, यह पता लगाने की कोशिश करें कि आपकी फिश अंडे देने के लिए सही स्थिति में हैं या नहीं। फिर, अपने मेल और फीमेल दोनों फिश में "प्री-स्पॉनिंग" बिहेवियर को देखने की कोशिश करें। हालांकि यह दुर्लभ है, एक प्रेग्नेंट गोल्डफिश खरीदना संभव है। अन्यथा, आपकी फिश केवल तभी प्रेग्नेंट होगी जब मेल और फीमेल दोनों फिश मौजूद हों। एक. पता करें कि क्या आपकी फिश फीमेल हैः अपनी गोल्डफिश के सेक्स को पता करने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप फिश खरीदते समय या पशु चिकित्सक से पूछें। कहा गया है, कि फीमेल गोल्डफिश की बॉडी बड़ी होती है। ऊपर से देखे जाने पर, आप आमतौर पर नोटिस करेंगे कि फीमेल की बॉडी बड़ी, और मेल का मिड सेक्शन पतला होता है। इसके अलावा, फीमेल पेक्टोरल फिन मेल की तुलना में छोटे और गोल होते हैं। इसके साथ ही, आमतौर पर गोल्डफिश तब तक अंडे नहीं देगी जब तक कि वह कम से कम एक साल की नहीं हो जाती हैं। दो. साल के समय पर ध्यान देंः यदि आपकी गोल्डफिश को बाहर रखा गया है, तो यह केवल स्प्रिंग या गर्मी की शुरुआत में अंडे देगी। यदि आपकी गोल्डफिश को हमेशा अंदर रखा गया है, तो यह साल में कभी भी अंडे दे सकती है। क्या आपकी बाहर रखी गई गोल्डफिश प्रेग्नेंट है यह निर्धारित करते समय सोचें कि अभी क्या सीजन है। तीन. अपने पानी का तापमान चेक करेंः गोल्डफिश अधिकांश रूप से ऐसे पानी में ब्रीड करती हैं जिसका तापमान लगभग अड़सठ °F होता है। यदि आपको लगता है कि आपकी गोल्डफिश अंडे देने की तैयारी कर रही है, तो अपने पानी का तापमान चेक करके देखें कि क्या तापमान सही है। चार. अपनी मेल गोल्डफिश पर स्पॉनिंग टूबर्कल्स को देखेंः जब आपके मेल गोल्डफिश अंडे देने के लिए तैयार होते हैं, तो उनके सिर, गिल कवर, और पेक्टरल फिन के पास एक छोटा सा सफेद बम्प "spawning tubercles" बन जाएगा। यदि आप अपने मेल फिश पर ये स्पॉट्स दिखते हैं, तो अधिक संभावना है कि आपकी फ़ीमेल फिश प्रेग्नेंट हो सकती है। स्पॉनिंग टूबर्कल्स दिखने में मुश्किल हो सकते हैं। यदि आपको ये नहीं दिखते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी फिश प्रेग्नेंट नहीं है। पाँच. नोटिस करें कि क्या मेल गोल्डफिश फीमेल गोल्डफिश का पीछा करता हैः जब वह अंडे देने की तैयारी करते हैं, तो मेल फिश फीमेल का पीछा कभी-कभी एक डांस के रूप में करता है जिसे "spawning chase" कहा जाता है। कई मामलों में, यह बिहेवियर स्पॉनिंग टूबर्कल्स की तुलना में अधिक दिखता है। छः. अपनी गोल्डफिश के एक्टिविटी लेवल पर ध्यान देंः जब गोल्डफिश अंडे देने वाली होती है, तो वे आमतौर पर बहुत धीरे मूव करती हैं। नोट करें कि क्या आपकी गोल्डफिश धीरे मूव कर रही है या आसपास जाने में कोई परेशानी हो रही है। आप नोटिस कर सकते हैं कि आपकी गोल्डफिश "nesting" कर रही है, या अधिकांश समय शेल्टर या पौधों में छिप रही है। सात. नोटिस करें कि क्या आपकी फिश फूड खाने से मना करती हैः जब फिश अंडे देने की तैयारी कर रही होती हैं, तो वे कभी कभी फूड खाने से मना करती हैं। यदि आपकी गोल्डफिश उतना ज्यादा नहीं खा रही है, तो हो सकता है कि बह जल्दी अंडे देने वाली है। आठ. अपनी गोल्डफिश की बॉडी के साइज को नोट करेंः फीमेल गोल्डफिश की बॉडी मेल गोल्डफिश की तुलना में थोड़ी अधिक राउंड होती है। जब आपकी फीमेल गोल्ड फिश अंडे देने वाली होती है, तो उनके पेट का साइज बड़ा हो सकता है, और थोड़ा बाहर की तरफ निकल सकता है। स्पॉनिंग टूबर्कल्स की तरह, कुछ फिश में यह अच्छे से दिख सकते हैं, जबकि हो सकता है कि आपको दूसरों में बिलकुल भी न दिखें।
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने रियासत में विधानसभा चुनाव न कराने पर भारतीय चुनाव आयोग के फैसले पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि कि अगर लोकसभा चुनाव हो सकते हैं तो फिर विधानसभा चुनाव क्यों नहीं। गौरतलब है कि राज्य में जून 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू है। राज्य में विभिन्न राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव कराने व राज्य में एक निर्वाचित सरकार की बहाली की मांग कर रहे हैं। सभी को उम्मीद थी कि चुनाव आयोग राज्य में संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराएगा। लेकिन गत रोज चुनाव आयोग ने रियासत में कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए विधानसभा चुनावों की घोषणा को कुछ समय के लिए टाल दिया। अलबत्ता, राज्य में लोस चुनाव देश के अन्य भागों के साथ ही कराए जा रहे हैं। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य में सभी राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की मांग की है। सभी ने इस विषय में चुनाव आयेाग के समक्ष अपना पक्ष रखा। संसदीय चु़नावों के लिए यहां माहौल अनुकूल है, लेकिन विधानसभा चुनावों के लिए नहीं। यहां पंचायत और स्थानीय शहरी निकायों के चुनाव भी बीते साल कराए गए और वह एक शांत माहौल में संपन्न हुए हैं। यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबल पहले से ही मौजूद हैं,फिर भी यहां चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं?
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने रियासत में विधानसभा चुनाव न कराने पर भारतीय चुनाव आयोग के फैसले पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि कि अगर लोकसभा चुनाव हो सकते हैं तो फिर विधानसभा चुनाव क्यों नहीं। गौरतलब है कि राज्य में जून दो हज़ार अट्ठारह से राष्ट्रपति शासन लागू है। राज्य में विभिन्न राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव कराने व राज्य में एक निर्वाचित सरकार की बहाली की मांग कर रहे हैं। सभी को उम्मीद थी कि चुनाव आयोग राज्य में संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराएगा। लेकिन गत रोज चुनाव आयोग ने रियासत में कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए विधानसभा चुनावों की घोषणा को कुछ समय के लिए टाल दिया। अलबत्ता, राज्य में लोस चुनाव देश के अन्य भागों के साथ ही कराए जा रहे हैं। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य में सभी राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की मांग की है। सभी ने इस विषय में चुनाव आयेाग के समक्ष अपना पक्ष रखा। संसदीय चु़नावों के लिए यहां माहौल अनुकूल है, लेकिन विधानसभा चुनावों के लिए नहीं। यहां पंचायत और स्थानीय शहरी निकायों के चुनाव भी बीते साल कराए गए और वह एक शांत माहौल में संपन्न हुए हैं। यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबल पहले से ही मौजूद हैं,फिर भी यहां चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं?
इन्दौर। हाईकोर्ट के कर्मचारियों/अधिकारियों को गैरजरूरी शादी व धार्मिक आयोजन में भाग लेने से रोक दिया गया है। किसी को कोरोना हुआ या कोई रिश्तेदार भी संक्रमित होगा तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ होने का प्रमाण देना होगा, तभी वह कार्य पर हाजिर हो सकेगा। इंदौर में एक हाईकोर्ट जज के रीडर को कोरोना निकलने के बाद हाईकोर्ट ने 9 बिंदुओं पर अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। इन्हें निर्देशित किया गया है कि दूसरे जिले से उनके घर आकर किसी सदस्य या रिश्तेदार के होम आइसोलेशन में या क्वारेंटाइन होने की दशा में इसकी सूचना तुरंत रजिस्ट्रार को देना होगी। इसी तरह इनका निवास संक्रमित क्षेत्र में आने की दशा में उन्हें अवकाश मंजूर कराने के लिए संक्रमित क्षेत्र होने का आदेश या अलग से आवेदन देना होगा। उन्हें शादी व धार्मिक आयोजन वाले ऐसे स्थान (जहां फालतू की भीड़ होती है) पर आमतौर पर भाग नहीं लेने को कहा गया है। इनमें जाना आवश्यक ही होने पर उन्हें नियंत्रक अधिकारी को सूचना देने को कहा गया है। किसी अधिकारी-कर्मचारी या उनके परिवार के किसी सदस्य को कोरोना होने पर उन्हें तत्काल रजिस्ट्रार को सूचना देना होगी और जब तक वे स्वस्थ नहीं हो जाते तब तक कार्यालय नहीं आने को कहा है। कार्यालय आने के पहले उन्हें सक्षम अधिकारी का स्वस्थता का प्रमाण पत्र लाना होगा। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को एक जिले से दूसरे जिले या नगर निगम सीमा से बाहर जाने की दशा में कार्यालय से पहले अनुमति हासिल करना होगी। इसके अलावा बिना निर्देश के किसी कर्मचारी को फाइल नहीं लाने की हिदायत दी गई है।
इन्दौर। हाईकोर्ट के कर्मचारियों/अधिकारियों को गैरजरूरी शादी व धार्मिक आयोजन में भाग लेने से रोक दिया गया है। किसी को कोरोना हुआ या कोई रिश्तेदार भी संक्रमित होगा तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ होने का प्रमाण देना होगा, तभी वह कार्य पर हाजिर हो सकेगा। इंदौर में एक हाईकोर्ट जज के रीडर को कोरोना निकलने के बाद हाईकोर्ट ने नौ बिंदुओं पर अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। इन्हें निर्देशित किया गया है कि दूसरे जिले से उनके घर आकर किसी सदस्य या रिश्तेदार के होम आइसोलेशन में या क्वारेंटाइन होने की दशा में इसकी सूचना तुरंत रजिस्ट्रार को देना होगी। इसी तरह इनका निवास संक्रमित क्षेत्र में आने की दशा में उन्हें अवकाश मंजूर कराने के लिए संक्रमित क्षेत्र होने का आदेश या अलग से आवेदन देना होगा। उन्हें शादी व धार्मिक आयोजन वाले ऐसे स्थान पर आमतौर पर भाग नहीं लेने को कहा गया है। इनमें जाना आवश्यक ही होने पर उन्हें नियंत्रक अधिकारी को सूचना देने को कहा गया है। किसी अधिकारी-कर्मचारी या उनके परिवार के किसी सदस्य को कोरोना होने पर उन्हें तत्काल रजिस्ट्रार को सूचना देना होगी और जब तक वे स्वस्थ नहीं हो जाते तब तक कार्यालय नहीं आने को कहा है। कार्यालय आने के पहले उन्हें सक्षम अधिकारी का स्वस्थता का प्रमाण पत्र लाना होगा। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को एक जिले से दूसरे जिले या नगर निगम सीमा से बाहर जाने की दशा में कार्यालय से पहले अनुमति हासिल करना होगी। इसके अलावा बिना निर्देश के किसी कर्मचारी को फाइल नहीं लाने की हिदायत दी गई है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान में बेहद 'ओछे आरोपों' पर राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी के बाद लोकतंत्र तार-तार हो गया है लेकिन वहां की स्वतंत्र न्यायपालिका और मुखर मीडिया द्वारा सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना आशा की एकमात्र किरण है। महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष मुफ्ती ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी पर बुधवार को यह बात कही। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष खान को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में लंबित भ्रष्टाचार के एक मामले में अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स ने 70 वर्षीय खान को गिरफ्तार किया और जेल की वैन में बैठाकर ले गए। इसे लेकर पूरे देश में उनकी पार्टी पीटीआई के समर्थकों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान में बेहद 'ओछे आरोपों' पर राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी के बाद लोकतंत्र तार-तार हो गया है लेकिन वहां की स्वतंत्र न्यायपालिका और मुखर मीडिया द्वारा सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना आशा की एकमात्र किरण है। महबूबा मुफ्ती पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष मुफ्ती ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी पर बुधवार को यह बात कही। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष खान को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में लंबित भ्रष्टाचार के एक मामले में अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स ने सत्तर वर्षीय खान को गिरफ्तार किया और जेल की वैन में बैठाकर ले गए। इसे लेकर पूरे देश में उनकी पार्टी पीटीआई के समर्थकों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक विभाग सीटीडी की ओर से दावा किया गया है कि पिछले वर्ष पंजाब में होने वाली चार आतंकवादी घटनाओं में अफ़ग़ानिस्तान से चलने वाला पाकिस्तान तालेबान का एक गुट अहरारुश्शाम लिप्त था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि कुछ लोग निराधार आरोप लगा कर अफ़ग़ानिस्तान के जनमत को इस देश में युद्ध जारी रहने के वास्तविक कारणों की ओर से गुमराह करना चाहते हैं। अफ़ग़ानिस्तान में क्रिकेट मैच के दौरान एक स्टेडियम में होने वाले विस्फोट में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक भीषण धमाके में एक व्यक्ति घायल हो गया है। पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के फराह प्रांत में स्थित अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के सैन्य ठिकाने पर तालेबान के दो हमलों में 30 सुरक्षाकर्मी हताहत और कई अन्य घायल हो गए हैं। अफ़ग़ानिस्तान के केन्द्र ग़ज़नी प्रांत में महत्वपूर्ण हाईवे पर क़ब्ज़े के लिए तालेबान लड़ाकों के हमले के जवाब में अमरीकी वायु सेना ने अफ़ग़ान सैनिकों की सहायता के लिए कई हमले किए जिसके परिणाम में 31 लड़ाकों के मारे जाने की सूचना हैं। अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर एवं उत्तर पूर्वी इलाक़ों में 37 तालिबान मारे गए हैं। अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भागों में होने वाले श्रंखलाबद्ध हमलों के बाद जीवन एक बार फिर ठप्प पड़ गया। दो धमाके राजधानी काबुल में हुए और एक धमाका कंधार में हुआ और ख़ोस्त में फ़ायरिंग की घटना हुई। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल और कंधार प्रांत के ज़िला दामान में तीन बम धमाकों में छात्रों और पत्रकारों सहित 49 लोग हताहत और कई अन्य घायल हो गये। केन्द्रीय एशिया में दाइश से मुक़ाबले के लिए रूस ने कमर कस ली है।
पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक विभाग सीटीडी की ओर से दावा किया गया है कि पिछले वर्ष पंजाब में होने वाली चार आतंकवादी घटनाओं में अफ़ग़ानिस्तान से चलने वाला पाकिस्तान तालेबान का एक गुट अहरारुश्शाम लिप्त था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि कुछ लोग निराधार आरोप लगा कर अफ़ग़ानिस्तान के जनमत को इस देश में युद्ध जारी रहने के वास्तविक कारणों की ओर से गुमराह करना चाहते हैं। अफ़ग़ानिस्तान में क्रिकेट मैच के दौरान एक स्टेडियम में होने वाले विस्फोट में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक भीषण धमाके में एक व्यक्ति घायल हो गया है। पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के फराह प्रांत में स्थित अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के सैन्य ठिकाने पर तालेबान के दो हमलों में तीस सुरक्षाकर्मी हताहत और कई अन्य घायल हो गए हैं। अफ़ग़ानिस्तान के केन्द्र ग़ज़नी प्रांत में महत्वपूर्ण हाईवे पर क़ब्ज़े के लिए तालेबान लड़ाकों के हमले के जवाब में अमरीकी वायु सेना ने अफ़ग़ान सैनिकों की सहायता के लिए कई हमले किए जिसके परिणाम में इकतीस लड़ाकों के मारे जाने की सूचना हैं। अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर एवं उत्तर पूर्वी इलाक़ों में सैंतीस तालिबान मारे गए हैं। अफ़ग़ानिस्तान के कुछ भागों में होने वाले श्रंखलाबद्ध हमलों के बाद जीवन एक बार फिर ठप्प पड़ गया। दो धमाके राजधानी काबुल में हुए और एक धमाका कंधार में हुआ और ख़ोस्त में फ़ायरिंग की घटना हुई। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल और कंधार प्रांत के ज़िला दामान में तीन बम धमाकों में छात्रों और पत्रकारों सहित उनचास लोग हताहत और कई अन्य घायल हो गये। केन्द्रीय एशिया में दाइश से मुक़ाबले के लिए रूस ने कमर कस ली है।
चुप तुम रहो, चुप हम रहें. . . एक ख़ूबसूरत शाम और मेहमानों से सजी महफ़िल में गीत गाता एक क्लब सिंगर. जिसने भी 1996 की हिंदी फ़िल्म 'इस रात की सुबह नहीं देखी' को देखा है, उन्हें ये गीत याद होगा. पूरी फ़िल्म में वो क्लब सिंगर सिर्फ़ और सिर्फ़ इस गाने में दिखाई देता है. दुबला-पतला सा एक युवक जो कुछ सालों में तमिल फ़िल्मों का सुपरस्टार और हिंदी फ़िल्मों का हीरो बनने वाला था- नाम था आर माधवन, जो अब नई फ़िल्म 'रॉकेट्री' में नज़र आ रहे हैं. चंद सेकेंड के इस रोल में आर माधवन की मौजूदगी तो दर्ज नहीं हुई थी और फ़िल्में अभी दूर थी. लेकिन टीवी पर वो एक्टर नाम बनने की ओर क़दम बढ़ा चुके थे. 90 के दशक में एक के बाद उनके सीरियल आए- बनेगी अपनी बात, साया, घर जमाई, सी हॉक्स. . . और इनके ज़रिए वो अच्छे ख़ास मशहूर हो गए. वैसे फ़िल्मों में माधवन ने अपना डेब्यू तमिल या हिंदी में नहीं, 1997 की इंग्लिश फ़िल्म 'इन्फ़र्नो' और 1998 में आई 'शांति शांति शांति' नाम की एक कन्नड़ फ़िल्म से किया था. आर माधवन उन चंद अभिनेताओं में से एक हैं, जो हिंदी, तमिल और कुछ हद तक दूसरी भाषाओं में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं. दक्षिण भारत के कई सुपरस्टार हिंदी फ़िल्मों में काम कर चुके हैं, जैसे रजनीकांत, चिरंजीवी, नागार्जुन, कमल हासन, मोहनलाल, पृथ्वीराज, राणा दग्गुबती और इनकी कुछ फ़िल्में हिट भी रहीं. लेकिन श्रीदेवी, वैजयंतीमाला, रेखा, हेमा मालिनी, जया प्रदा जैसी अभिनेत्रियों के उलट, दक्षिण भारतीय हीरो को हिंदी फ़िल्मों में सीमित सफलता मिली है. रामचरण, एनटीआर जूनियर जैसे हीरो का तात्कालिक क्रेज़ ज़रूर है, लेकिन ये अभी शुरुआती दौर है. माधवन इस क्रम का अपवाद कहे जा सकते हैं, जिन्होंने इस धारणा को तोड़ा है. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. कुछ दिन पहले बीबीसी से बातचीत में माधवन ने अपनी सफलता को यूँ बयां किया था, "दरअसल मैं दोनों भाषा ठीक तरह से बोल लेता हूँ. मैं (तब के) बिहार और आज के झारखंड (जमशेदपुर) में पला-बढ़ा हूँ. चूँकि हिंदी ठीक से बोल लेता हूँ, तो दर्शकों को मेरे साथ रिलेट करना आसान हो गया. मैं तमिल परिवार से हूँ, तो वो भाषा भी ठीक से बोल लेता हूँ. मणिरत्नम जी ने मुझे इंट्रोड्यूस किया है. तमिल इंडस्ट्री में भी मुझे स्वीकार करने में लोगों को कोई दिक्कत नहीं हुई. " उन्होंने कहा था, "मैं सिक्स पैक वाला हीरो तो हूँ नहीं. रोमांटिक फ़िल्में कम ही की हैं मैंने. लेकिन मैंने जो भी फ़िल्में की हैं, वो ये सोचकर की हैं कि युवा दर्शकों को ये न लगे कि 'मैडी रीचेबल' है. मैं उनके लिए एस्पिरेशनल होना चाह रहा था. उन्हें लगे कि चाहे वो 'तनु वेड्स मनु' का मनु हो या 'थ्री इडियट्स' का फ़रहान- मैडी में एक क्षमता है, जो हममें भी होनी चाहिए. तो मैंने ऐसे ही रोल चुने, जो एस्पिरेशनल हों और वो लोगों को पसंद आया. " आर माधवन की इस सफलता के क्रम को समझने के लिए उनके अतीत में भी झाँकना होगा. आर माधवन की पैदाइश झारखंड के जमदेशपुर में हुई- हिंदी परिवेश, तमिल परिवार और महाराष्ट्र में पढ़ाई. इसका उन पर मिला-जुला असर हुआ. एक्टर बनना कोई शुरुआती सपना नहीं था. फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' के फ़रहान वाला सीन जहाँ माँ-बाप बेटे के इंजीनियर बनाना चाहते हैं, कुछ वैसा ही मिलता-जुलता क़िस्सा माधवन की ज़िंदगी में भी था. बोर्ड में 58 फ़ीसदी नंबर आए. एनसीसी कैडेट के रूप में प्रदर्शन इतना अच्छा रहा कि इंग्लैंड भेजा गया, जहाँ ब्रिटिश आर्मी के साथ ट्रेनिंग ली. बीएससी इलेक्ट्रॉनिक्स किया जैसा कि माँ-बाप की ख़्वाहिश थी कि इंजीनियर जैसा कुछ बने. लेकिन सबकी इच्छा के ख़िलाफ़ माधवन ने पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया. कोल्हापुर में पब्लिक स्पीकिंग की क्लास भी लेने लगे, तो ज़बरदस्त हिट हो गए. बाद में मुंबई आकर थोड़ी बहुत मॉडलिंग की, तो वहाँ से सीरियल और फ़िल्मों का रास्ता खुल गया. टुकड़ों-टुकड़ों में ये तब्दीलियाँ होती रहीं, लेंकिन माधवन के करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब 2000 में उन्हें मणिरत्नम ने अपनी तमिल फ़िल्म अलईपायुदे (Alaipayuthey) में लिया और फिर 2001 में तमिल फ़िल्म 'मिन्नले' आई. रोमांटिक हीरो के तौर पर बस माधवन युवाओं के दिल में बस गए और फिर तमिल फ़िल्म 'रन' से माधवन ने एक्शन में एंट्री ली. मणिरत्नम की फ़िल्म युवा के जिस रोल में आपने अभिषेक बच्चन को देखा, वो रोल 2004 में तमिल फ़िल्म में माधवन ने ही किया था. 'एक लड़की देखी बिल्कुल बिजली की तरह. एक चमक और मैं अपना दिल खो बैठा. बस अब एक ही तमन्ना है. रहना है उसके दिल में'. यही वो डायलॉग और फ़िल्म है, जिससे आर माधवन ने 2001 में हिंदी फ़िल्मों में बतौर रामोंटिक हीरो एंट्री ली. उस वक़्त तो फ़िल्म पिट गई, लेकिन माधवन 'मैडी' के नाम के उस रोमांटिक रोल से मशहूर हो गए. माधवन तमिल में सुपरस्टार रोल में स्थापित होते गए, तो 2005 के बाद से हिंदी फ़िल्मों में ज़्यादा दिखने लगे. हिंदी में उन्होंने छोटा रोल या सह कलाकार का रोल करने में भी गुरेज़ नहीं किया. जैसा उनकी फ़िल्म 'दिल विल प्यार व्यार' का डायलॉग भी है- 'बड़ी चीज़ों की क़ीमत कभी छोटी नहीं हुआ करती. ' फिर चाहे फ़िल्म 'गुरु' (2007) के आदर्शवादी पत्रकार श्याम सक्सेना का रोल हो, जो अभिषेक बच्चन (धीरूभाई) को चैलेंज करता है, 'मुंबई मेरी जान' का निखिल हो, जो मुंबई ब्लास्ट के बाद डिप्रेशन से गुज़र रहा है या फिर 'रंग दे बसंती' (2006) का फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट अजय सिंह राठौड़ हो, जो सिखाकर जाता है कि 'कोई भी देश परफ़ेक्ट नहीं होता, उसे बेहतर बनाना पड़ता है. ' या फिर थ्री इडियट्स का फ़रहान जिसकी ये बात आज भी चेहरे पर शरारत भरी प्यारी मुस्कान ला देती है कि 'दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन दोस्त फ़र्स्ट आ जाए तो ज़्यादा दुख होता है'. हिंदी फ़िल्मों में 2009 की फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' एक तरह से उनके लिए गेमचेंजर साबित हुई. हालांकि, बीच-बीच में उनकी कई हिंदी फ़िल्में फ्लॉप भी हुईं. और यही वो वक़्त था, जब माधवन ने फ़िल्मों से ब्रेक ले लिया. माधवन को लगातार मिलती रही सफलता को इस नज़रिए से भी देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने आप को रिइन्वेंट किया है. उनका रोमांटिक हीरो वाला अच्छा ख़ासा फेज़ चल रहा था. लेकिन 2010-11 के आसपास 40 की उम्र में उन्होंने बैकसीट लेते हुए कई सालों का ब्रेक लिया और नए तरीके से वापसी की. तब उनकी फ़िल्म 'तनु वेड्स मनु' रिलीज़ हुई ही थी और ज़बरदस्त धूम मचा रही थी. पीटीआई से बातचीत में माधवन ने कहा था, "ब्रेक लेने को लेकर मैं थोड़ा नर्वस तो था. लेकिन सिर्फ़ बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करते रहने का कोई मतलब नहीं है, अगर आप अच्छी फ़िल्मों में काम नहीं कर रहे हो. मैंने आमिर ख़ान से ये सीखा. 'लगान' के दौरान उन्होंने भी चार साल का ब्रेक लिया था. अगर आप अच्छा काम नहीं करते, तो लोगों को भी याद नहीं रहता. " वापसी के बाद माधवन ने 'इरुधी सुत्रु' (irudhi Suttru) जैसी तमिल फ़िल्म की, जिसमें वो किसी रोमांटिक या एक्शन हीरो के रूप में नहीं, बल्कि एक बॉक्सिंग कोच के रोल में थे, जो एक युवा लड़की को ट्रेन करने का चैलेंज लेते हैं. इस रोल के लिए माधवन ने बॉक्सिंग सीखी, एक असल मार्शल आटर्स खिलाड़ी को रोल के लिए मनाया. इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और माधवन को फ़िल्मफेयर अवॉर्ड. जब हिंदी में 'साला ख़डूस' फ़िल्म को रिलीज़ करने की बारी आई, तो माधवन ने ख़ुद इसे डिस्ट्रीब्यूट करने का ज़िम्मा उठाया. माधवन ने एनकाउंटर स्पेशिलस्ट का जो रोल सुपरहिट तमिल फ़िल्म 'विक्रम वेधा' में किया था, आज ऋतिक रोशन वही रोल हिंदी में करने जा रहे हैं. करियर और ज़िंदगी में रिस्क लेने की बात पर माधवन कहते हैं, "मुझे ख़तरा कभी नज़र ही नहीं आता. ख़तरा नज़र आए तो मैं डरूँ न. कभी-कभी तो ऐसी जगह घुस गया हूँ, जहाँ लगता है कि मैं कहाँ जा रहा हूँ. चाहे वो एक्टिंग हो, पहली बार निर्देशन हो, पब्लिक स्पीकिंग का करियर हो या मोटसाइकिल और स्कीइंग का शौक हो, मैं एक हद तक सफल रहा हूँ. मैंने लाइफ़ में संघर्ष नहीं किया. मैं तो एक्टर बनने आया ही नहीं था. राह चलते इंसान को एक्टर बना दिया. मणिरत्नम ने सच में एक राह चलते इंसान को साउथ में सुपरस्टार बना दिया. राजकुमारी हिरानी, राकेश मेहरा इन सबने बुलाया. शाहरुख़ ख़ान मेरी पहली निर्देशित फ़िल्म में हैं. इसमें कुछ संघर्ष नहीं है. मैं इसे संघर्ष कहूँगा तो भगवान मेरे से ख़फ़ा हो जाएँगे. मैंने हर पल का आनंद लिया है. " फ़िल्में और रोल ही नहीं, माधवन ने समय के साथ नए माध्यमों को भी अपनाया है. 2018 में उन्होंने ब्रीद के साथ पहली बार वेबसिरीज़ में भी क़दम रखा. और 50 साल की उम्र में माधवन ने ख़ुद को नया चैलेंज दिया. उन्होंने फ़िल्म डाइरेक्ट, प्रोडयूस और लिखने का ज़िम्मा उठाया और वो भी एक मुश्किल विषय पर- इसरो वैज्ञानिक डॉक्टर एस नांबी नारायण की कहानी, जिन्हें जासूस करार दिया गया और करियर तबाह हो गया लेकिन दशकों बाद वो बेक़सूर साबित हुए. सिर्फ़ हीरो की भूमिका में काम करने वाले माधवन ने तब फ़िल्म बनाने का बीड़ा उठाया, जब फ़िल्म शुरु होने के कुछ दिन बाद निर्देशक अलग हो गए, जबकि इससे पहले माधवन को निर्देशन का कोई तज़ुर्बा नहीं है. डॉक्टर नांबी नारायण की बात चली है तो उनकी कहानी किसी भी फ़िल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. 30 नंवबर, 1994 की दोपहर देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिक नांबी को अचानक गिरफ़्तार कर लिया जाता है. उस व़क्त डॉक्टर नांबी इसरो के क्राइजेनिक रॉकेट इंजन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे. इस प्रोजेक्ट के लिए वो रूस से तकनीक ले रहे थे. अख़बारों ने रातोंरात उन्हें 'गद्दार' घोषित कर दिया, एक ऐसा गद्दार जिसने मालदीव की दो महिलाओं के हनी ट्रैप में फंसकर रूस से भारत को मिलने वाली टेक्नोलॉजी पाकिस्तान को बेच डाली. उन पर भारत के सरकारी गोपनीय क़ानून (ऑफ़िशियल सीक्रेट लॉ) के उल्लंघन और भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मामले दर्ज किए गए. जब भी उन्हें जेल से अदालत में सुनवाई के लिए ले जाया जाता, भीड़ चिल्ला-चिल्लाकर उन्हें 'गद्दार' और 'जासूस' बुलाती. झूठों आरोपों के एवज़ में 2018 में डॉक्टर एस नांबी नारायणन को सुप्रीम कोर्ट ने मुआवज़े के तौर पर 50 लाख रुपए देने का आदेश दिया. विज्ञान, भावनाओं, न्याय और दर्दनाक सफ़र वाली इसी कहानी को आर माधवन अपनी नई फ़िल्म 'रॉकेटरी' में लेकर आए हैं. एक एक्टर, एक प्रोड्यूसर के बाद बतौर निर्देशक के तौर पर आना माधवन की ख़ुद को परखने की ये शायद नई कसौटी है. इस फ़िल्म के किरदार में फिट होने के लिए माधवन ने अपने दाँत और जबड़ा तुड़वाकर नए तरीक़े से सेट करवाए, ताकि वो डॉक्टर नांबी जैसे दिख सकें. रॉकेटरी वो फ़िल्म जिसके लिए माधवन को शाहरुख़ ख़ान ने कहा था कि उन्हें इस फ़िल्म का हिस्सा बनना है और उन्हें कोई भी रोल चलेगा. ये वही माधवन हैं, जिनकी पहली फ़िल्म 'अकेली' 1997 में बनी, तो कभी रिलीज़ ही नहीं हो पाई, क्योंकि कोई ख़रीदने वाला नहीं था और अभी कुछ साल पहले आख़िरकार यूट्यूब पर रिलीज़ की गई. ऐसा नहीं है कि माधवन ने औसत या फ़्लॉप फ़िल्में नहीं की. दिल विल प्यार व्यार, जोड़ी ब्रेकर, झूठा ही सही, रामजी लंदनवाले, सिंकदर ऐसी कई फ़िल्में हैं, जो आईं और चली गईं. लेकिन वक़्त, उम्र, दर्शक, तकनीक, ओटीटी जैसे नए मीडियम, इन सबके हिसाब से ख़ुद को ढालते हुए माधवन ने ख़ुद की लगातार नई पहचान बनाई है. माधवन की छवि एक ऐसे शख़्स की तरह मन में उभरती है, जो स्टार तो हैं पर स्टारडम की उलझनों से थोड़ा दूर. जब मेरी सहयोगी मधु पाल ने माधवन से ये सवाल पूछा तो उन्होंने जवाब कुछ यूँ दिया, "मुझे बच्चन साहब, कमल हासन, रजनीकांत जी सबसे मिलने का मौक़ा मिला है. मैं समझता हूँ कि स्टारडम कभी न कभी हमसे दूर हो जाएगा. हम सब तो बच्चन बनकर नहीं रह पाँएगे. ये शानो-शौक़त हमसे चली ही जानी है, पर अगर हम उसी स्टारडम वाले माइंडसेट में रहेंगे तो बाद के दिन बर्बाद हो जाते हैं. " "मैंने शुरुआत से यही सोचा है कि अपनी औकात में रहूँ. जितनी चादर है उतने ही पैर फैलाऊँगा. मैं मानता हूँ कि स्टारडम को बस इतना ही इस्तेमाल करूँ कि कुछ देर के लिए स्क्रीन पर लोगों को ख़ुश कर सकूँ. बाक़ी मैं ख़ुद को दूसरे बंधनों से मुक़्त करना चाहता हूँ. " वैसे इन दिनों एक्टर, डाइरेक्टर, राइटर से परे माधवन की एक नई पहचान भी है- 16 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय तैराक वेदांत माधवन के पिता जो भारत के लिए कई मेडल जीत चुके हैं. माधवन कहते हैं, वेदांत भी जानता है कि जितनी चर्चा उसकी हो रही है, उसकी एक वजह ये है कि वो आर माधवन का बेटा है, जबकि उससे बेहतर तैराकी करने वाले बच्चे भी हैं. मैं ख़ुश हूँ कि वेदांत इस बात को समझता है. उसे बचपन से ही तैराकी का शौक रहा है. थ्री इडियट्स करने की वजह से मैं समझ चुका था कि मुझे उसे आज़ादी देनी होगी. वे कहते हैं, मुझे ये भी पता है कि कभी न कभी मैं उसका दुश्मन सा बन जाऊँगा जैसे पिता और बच्चों के बीच तक़रार होता है. पर प्यार भी है. किसी भी पिता की तरह मुझमें भी वो सारी भावनाएँ हैं- डर, घबराहट, प्यार. 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चुप तुम रहो, चुप हम रहें. . . एक ख़ूबसूरत शाम और मेहमानों से सजी महफ़िल में गीत गाता एक क्लब सिंगर. जिसने भी एक हज़ार नौ सौ छियानवे की हिंदी फ़िल्म 'इस रात की सुबह नहीं देखी' को देखा है, उन्हें ये गीत याद होगा. पूरी फ़िल्म में वो क्लब सिंगर सिर्फ़ और सिर्फ़ इस गाने में दिखाई देता है. दुबला-पतला सा एक युवक जो कुछ सालों में तमिल फ़िल्मों का सुपरस्टार और हिंदी फ़िल्मों का हीरो बनने वाला था- नाम था आर माधवन, जो अब नई फ़िल्म 'रॉकेट्री' में नज़र आ रहे हैं. चंद सेकेंड के इस रोल में आर माधवन की मौजूदगी तो दर्ज नहीं हुई थी और फ़िल्में अभी दूर थी. लेकिन टीवी पर वो एक्टर नाम बनने की ओर क़दम बढ़ा चुके थे. नब्बे के दशक में एक के बाद उनके सीरियल आए- बनेगी अपनी बात, साया, घर जमाई, सी हॉक्स. . . और इनके ज़रिए वो अच्छे ख़ास मशहूर हो गए. वैसे फ़िल्मों में माधवन ने अपना डेब्यू तमिल या हिंदी में नहीं, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे की इंग्लिश फ़िल्म 'इन्फ़र्नो' और एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में आई 'शांति शांति शांति' नाम की एक कन्नड़ फ़िल्म से किया था. आर माधवन उन चंद अभिनेताओं में से एक हैं, जो हिंदी, तमिल और कुछ हद तक दूसरी भाषाओं में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं. दक्षिण भारत के कई सुपरस्टार हिंदी फ़िल्मों में काम कर चुके हैं, जैसे रजनीकांत, चिरंजीवी, नागार्जुन, कमल हासन, मोहनलाल, पृथ्वीराज, राणा दग्गुबती और इनकी कुछ फ़िल्में हिट भी रहीं. लेकिन श्रीदेवी, वैजयंतीमाला, रेखा, हेमा मालिनी, जया प्रदा जैसी अभिनेत्रियों के उलट, दक्षिण भारतीय हीरो को हिंदी फ़िल्मों में सीमित सफलता मिली है. रामचरण, एनटीआर जूनियर जैसे हीरो का तात्कालिक क्रेज़ ज़रूर है, लेकिन ये अभी शुरुआती दौर है. माधवन इस क्रम का अपवाद कहे जा सकते हैं, जिन्होंने इस धारणा को तोड़ा है. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. कुछ दिन पहले बीबीसी से बातचीत में माधवन ने अपनी सफलता को यूँ बयां किया था, "दरअसल मैं दोनों भाषा ठीक तरह से बोल लेता हूँ. मैं बिहार और आज के झारखंड में पला-बढ़ा हूँ. चूँकि हिंदी ठीक से बोल लेता हूँ, तो दर्शकों को मेरे साथ रिलेट करना आसान हो गया. मैं तमिल परिवार से हूँ, तो वो भाषा भी ठीक से बोल लेता हूँ. मणिरत्नम जी ने मुझे इंट्रोड्यूस किया है. तमिल इंडस्ट्री में भी मुझे स्वीकार करने में लोगों को कोई दिक्कत नहीं हुई. " उन्होंने कहा था, "मैं सिक्स पैक वाला हीरो तो हूँ नहीं. रोमांटिक फ़िल्में कम ही की हैं मैंने. लेकिन मैंने जो भी फ़िल्में की हैं, वो ये सोचकर की हैं कि युवा दर्शकों को ये न लगे कि 'मैडी रीचेबल' है. मैं उनके लिए एस्पिरेशनल होना चाह रहा था. उन्हें लगे कि चाहे वो 'तनु वेड्स मनु' का मनु हो या 'थ्री इडियट्स' का फ़रहान- मैडी में एक क्षमता है, जो हममें भी होनी चाहिए. तो मैंने ऐसे ही रोल चुने, जो एस्पिरेशनल हों और वो लोगों को पसंद आया. " आर माधवन की इस सफलता के क्रम को समझने के लिए उनके अतीत में भी झाँकना होगा. आर माधवन की पैदाइश झारखंड के जमदेशपुर में हुई- हिंदी परिवेश, तमिल परिवार और महाराष्ट्र में पढ़ाई. इसका उन पर मिला-जुला असर हुआ. एक्टर बनना कोई शुरुआती सपना नहीं था. फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' के फ़रहान वाला सीन जहाँ माँ-बाप बेटे के इंजीनियर बनाना चाहते हैं, कुछ वैसा ही मिलता-जुलता क़िस्सा माधवन की ज़िंदगी में भी था. बोर्ड में अट्ठावन फ़ीसदी नंबर आए. एनसीसी कैडेट के रूप में प्रदर्शन इतना अच्छा रहा कि इंग्लैंड भेजा गया, जहाँ ब्रिटिश आर्मी के साथ ट्रेनिंग ली. बीएससी इलेक्ट्रॉनिक्स किया जैसा कि माँ-बाप की ख़्वाहिश थी कि इंजीनियर जैसा कुछ बने. लेकिन सबकी इच्छा के ख़िलाफ़ माधवन ने पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया. कोल्हापुर में पब्लिक स्पीकिंग की क्लास भी लेने लगे, तो ज़बरदस्त हिट हो गए. बाद में मुंबई आकर थोड़ी बहुत मॉडलिंग की, तो वहाँ से सीरियल और फ़िल्मों का रास्ता खुल गया. टुकड़ों-टुकड़ों में ये तब्दीलियाँ होती रहीं, लेंकिन माधवन के करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब दो हज़ार में उन्हें मणिरत्नम ने अपनी तमिल फ़िल्म अलईपायुदे में लिया और फिर दो हज़ार एक में तमिल फ़िल्म 'मिन्नले' आई. रोमांटिक हीरो के तौर पर बस माधवन युवाओं के दिल में बस गए और फिर तमिल फ़िल्म 'रन' से माधवन ने एक्शन में एंट्री ली. मणिरत्नम की फ़िल्म युवा के जिस रोल में आपने अभिषेक बच्चन को देखा, वो रोल दो हज़ार चार में तमिल फ़िल्म में माधवन ने ही किया था. 'एक लड़की देखी बिल्कुल बिजली की तरह. एक चमक और मैं अपना दिल खो बैठा. बस अब एक ही तमन्ना है. रहना है उसके दिल में'. यही वो डायलॉग और फ़िल्म है, जिससे आर माधवन ने दो हज़ार एक में हिंदी फ़िल्मों में बतौर रामोंटिक हीरो एंट्री ली. उस वक़्त तो फ़िल्म पिट गई, लेकिन माधवन 'मैडी' के नाम के उस रोमांटिक रोल से मशहूर हो गए. माधवन तमिल में सुपरस्टार रोल में स्थापित होते गए, तो दो हज़ार पाँच के बाद से हिंदी फ़िल्मों में ज़्यादा दिखने लगे. हिंदी में उन्होंने छोटा रोल या सह कलाकार का रोल करने में भी गुरेज़ नहीं किया. जैसा उनकी फ़िल्म 'दिल विल प्यार व्यार' का डायलॉग भी है- 'बड़ी चीज़ों की क़ीमत कभी छोटी नहीं हुआ करती. ' फिर चाहे फ़िल्म 'गुरु' के आदर्शवादी पत्रकार श्याम सक्सेना का रोल हो, जो अभिषेक बच्चन को चैलेंज करता है, 'मुंबई मेरी जान' का निखिल हो, जो मुंबई ब्लास्ट के बाद डिप्रेशन से गुज़र रहा है या फिर 'रंग दे बसंती' का फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट अजय सिंह राठौड़ हो, जो सिखाकर जाता है कि 'कोई भी देश परफ़ेक्ट नहीं होता, उसे बेहतर बनाना पड़ता है. ' या फिर थ्री इडियट्स का फ़रहान जिसकी ये बात आज भी चेहरे पर शरारत भरी प्यारी मुस्कान ला देती है कि 'दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन दोस्त फ़र्स्ट आ जाए तो ज़्यादा दुख होता है'. हिंदी फ़िल्मों में दो हज़ार नौ की फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' एक तरह से उनके लिए गेमचेंजर साबित हुई. हालांकि, बीच-बीच में उनकी कई हिंदी फ़िल्में फ्लॉप भी हुईं. और यही वो वक़्त था, जब माधवन ने फ़िल्मों से ब्रेक ले लिया. माधवन को लगातार मिलती रही सफलता को इस नज़रिए से भी देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने आप को रिइन्वेंट किया है. उनका रोमांटिक हीरो वाला अच्छा ख़ासा फेज़ चल रहा था. लेकिन दो हज़ार दस-ग्यारह के आसपास चालीस की उम्र में उन्होंने बैकसीट लेते हुए कई सालों का ब्रेक लिया और नए तरीके से वापसी की. तब उनकी फ़िल्म 'तनु वेड्स मनु' रिलीज़ हुई ही थी और ज़बरदस्त धूम मचा रही थी. पीटीआई से बातचीत में माधवन ने कहा था, "ब्रेक लेने को लेकर मैं थोड़ा नर्वस तो था. लेकिन सिर्फ़ बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करते रहने का कोई मतलब नहीं है, अगर आप अच्छी फ़िल्मों में काम नहीं कर रहे हो. मैंने आमिर ख़ान से ये सीखा. 'लगान' के दौरान उन्होंने भी चार साल का ब्रेक लिया था. अगर आप अच्छा काम नहीं करते, तो लोगों को भी याद नहीं रहता. " वापसी के बाद माधवन ने 'इरुधी सुत्रु' जैसी तमिल फ़िल्म की, जिसमें वो किसी रोमांटिक या एक्शन हीरो के रूप में नहीं, बल्कि एक बॉक्सिंग कोच के रोल में थे, जो एक युवा लड़की को ट्रेन करने का चैलेंज लेते हैं. इस रोल के लिए माधवन ने बॉक्सिंग सीखी, एक असल मार्शल आटर्स खिलाड़ी को रोल के लिए मनाया. इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और माधवन को फ़िल्मफेयर अवॉर्ड. जब हिंदी में 'साला ख़डूस' फ़िल्म को रिलीज़ करने की बारी आई, तो माधवन ने ख़ुद इसे डिस्ट्रीब्यूट करने का ज़िम्मा उठाया. माधवन ने एनकाउंटर स्पेशिलस्ट का जो रोल सुपरहिट तमिल फ़िल्म 'विक्रम वेधा' में किया था, आज ऋतिक रोशन वही रोल हिंदी में करने जा रहे हैं. करियर और ज़िंदगी में रिस्क लेने की बात पर माधवन कहते हैं, "मुझे ख़तरा कभी नज़र ही नहीं आता. ख़तरा नज़र आए तो मैं डरूँ न. कभी-कभी तो ऐसी जगह घुस गया हूँ, जहाँ लगता है कि मैं कहाँ जा रहा हूँ. चाहे वो एक्टिंग हो, पहली बार निर्देशन हो, पब्लिक स्पीकिंग का करियर हो या मोटसाइकिल और स्कीइंग का शौक हो, मैं एक हद तक सफल रहा हूँ. मैंने लाइफ़ में संघर्ष नहीं किया. मैं तो एक्टर बनने आया ही नहीं था. राह चलते इंसान को एक्टर बना दिया. मणिरत्नम ने सच में एक राह चलते इंसान को साउथ में सुपरस्टार बना दिया. राजकुमारी हिरानी, राकेश मेहरा इन सबने बुलाया. शाहरुख़ ख़ान मेरी पहली निर्देशित फ़िल्म में हैं. इसमें कुछ संघर्ष नहीं है. मैं इसे संघर्ष कहूँगा तो भगवान मेरे से ख़फ़ा हो जाएँगे. मैंने हर पल का आनंद लिया है. " फ़िल्में और रोल ही नहीं, माधवन ने समय के साथ नए माध्यमों को भी अपनाया है. दो हज़ार अट्ठारह में उन्होंने ब्रीद के साथ पहली बार वेबसिरीज़ में भी क़दम रखा. और पचास साल की उम्र में माधवन ने ख़ुद को नया चैलेंज दिया. उन्होंने फ़िल्म डाइरेक्ट, प्रोडयूस और लिखने का ज़िम्मा उठाया और वो भी एक मुश्किल विषय पर- इसरो वैज्ञानिक डॉक्टर एस नांबी नारायण की कहानी, जिन्हें जासूस करार दिया गया और करियर तबाह हो गया लेकिन दशकों बाद वो बेक़सूर साबित हुए. सिर्फ़ हीरो की भूमिका में काम करने वाले माधवन ने तब फ़िल्म बनाने का बीड़ा उठाया, जब फ़िल्म शुरु होने के कुछ दिन बाद निर्देशक अलग हो गए, जबकि इससे पहले माधवन को निर्देशन का कोई तज़ुर्बा नहीं है. डॉक्टर नांबी नारायण की बात चली है तो उनकी कहानी किसी भी फ़िल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. तीस नंवबर, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे की दोपहर देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिक नांबी को अचानक गिरफ़्तार कर लिया जाता है. उस व़क्त डॉक्टर नांबी इसरो के क्राइजेनिक रॉकेट इंजन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे. इस प्रोजेक्ट के लिए वो रूस से तकनीक ले रहे थे. अख़बारों ने रातोंरात उन्हें 'गद्दार' घोषित कर दिया, एक ऐसा गद्दार जिसने मालदीव की दो महिलाओं के हनी ट्रैप में फंसकर रूस से भारत को मिलने वाली टेक्नोलॉजी पाकिस्तान को बेच डाली. उन पर भारत के सरकारी गोपनीय क़ानून के उल्लंघन और भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मामले दर्ज किए गए. जब भी उन्हें जेल से अदालत में सुनवाई के लिए ले जाया जाता, भीड़ चिल्ला-चिल्लाकर उन्हें 'गद्दार' और 'जासूस' बुलाती. झूठों आरोपों के एवज़ में दो हज़ार अट्ठारह में डॉक्टर एस नांबी नारायणन को सुप्रीम कोर्ट ने मुआवज़े के तौर पर पचास लाख रुपए देने का आदेश दिया. विज्ञान, भावनाओं, न्याय और दर्दनाक सफ़र वाली इसी कहानी को आर माधवन अपनी नई फ़िल्म 'रॉकेटरी' में लेकर आए हैं. एक एक्टर, एक प्रोड्यूसर के बाद बतौर निर्देशक के तौर पर आना माधवन की ख़ुद को परखने की ये शायद नई कसौटी है. इस फ़िल्म के किरदार में फिट होने के लिए माधवन ने अपने दाँत और जबड़ा तुड़वाकर नए तरीक़े से सेट करवाए, ताकि वो डॉक्टर नांबी जैसे दिख सकें. रॉकेटरी वो फ़िल्म जिसके लिए माधवन को शाहरुख़ ख़ान ने कहा था कि उन्हें इस फ़िल्म का हिस्सा बनना है और उन्हें कोई भी रोल चलेगा. ये वही माधवन हैं, जिनकी पहली फ़िल्म 'अकेली' एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में बनी, तो कभी रिलीज़ ही नहीं हो पाई, क्योंकि कोई ख़रीदने वाला नहीं था और अभी कुछ साल पहले आख़िरकार यूट्यूब पर रिलीज़ की गई. ऐसा नहीं है कि माधवन ने औसत या फ़्लॉप फ़िल्में नहीं की. दिल विल प्यार व्यार, जोड़ी ब्रेकर, झूठा ही सही, रामजी लंदनवाले, सिंकदर ऐसी कई फ़िल्में हैं, जो आईं और चली गईं. लेकिन वक़्त, उम्र, दर्शक, तकनीक, ओटीटी जैसे नए मीडियम, इन सबके हिसाब से ख़ुद को ढालते हुए माधवन ने ख़ुद की लगातार नई पहचान बनाई है. माधवन की छवि एक ऐसे शख़्स की तरह मन में उभरती है, जो स्टार तो हैं पर स्टारडम की उलझनों से थोड़ा दूर. जब मेरी सहयोगी मधु पाल ने माधवन से ये सवाल पूछा तो उन्होंने जवाब कुछ यूँ दिया, "मुझे बच्चन साहब, कमल हासन, रजनीकांत जी सबसे मिलने का मौक़ा मिला है. मैं समझता हूँ कि स्टारडम कभी न कभी हमसे दूर हो जाएगा. हम सब तो बच्चन बनकर नहीं रह पाँएगे. ये शानो-शौक़त हमसे चली ही जानी है, पर अगर हम उसी स्टारडम वाले माइंडसेट में रहेंगे तो बाद के दिन बर्बाद हो जाते हैं. " "मैंने शुरुआत से यही सोचा है कि अपनी औकात में रहूँ. जितनी चादर है उतने ही पैर फैलाऊँगा. मैं मानता हूँ कि स्टारडम को बस इतना ही इस्तेमाल करूँ कि कुछ देर के लिए स्क्रीन पर लोगों को ख़ुश कर सकूँ. बाक़ी मैं ख़ुद को दूसरे बंधनों से मुक़्त करना चाहता हूँ. " वैसे इन दिनों एक्टर, डाइरेक्टर, राइटर से परे माधवन की एक नई पहचान भी है- सोलह वर्षीय अंतरराष्ट्रीय तैराक वेदांत माधवन के पिता जो भारत के लिए कई मेडल जीत चुके हैं. माधवन कहते हैं, वेदांत भी जानता है कि जितनी चर्चा उसकी हो रही है, उसकी एक वजह ये है कि वो आर माधवन का बेटा है, जबकि उससे बेहतर तैराकी करने वाले बच्चे भी हैं. मैं ख़ुश हूँ कि वेदांत इस बात को समझता है. उसे बचपन से ही तैराकी का शौक रहा है. थ्री इडियट्स करने की वजह से मैं समझ चुका था कि मुझे उसे आज़ादी देनी होगी. वे कहते हैं, मुझे ये भी पता है कि कभी न कभी मैं उसका दुश्मन सा बन जाऊँगा जैसे पिता और बच्चों के बीच तक़रार होता है. पर प्यार भी है. किसी भी पिता की तरह मुझमें भी वो सारी भावनाएँ हैं- डर, घबराहट, प्यार.
गाजियाबाद पुलिस ने टीवी चैनल की महिला न्यूज एंकर का लगातार पीछा करने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी की कार भी रिकवर कर ली गई है, जिससे वो ऑफिस तक हर रोज पीछा करता था। आरोपी का पिता यूपी पुलिस से रिटायर सब इंस्पेक्टर है। पुलिस, आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है। नोएडा में एक टीवी चैनल का मुख्यालय है। यहां कार्यरत महिला एंकर ने शनिवार को ट्वीट करके बताया कि एक अज्ञात शख्स पिछले 10 दिन से उनकी कार का ऑफिस तक पीछा करता है। इस कार पर पुलिस का स्टिकर भी लगा हुआ है। इस कार ने कई बार हाईवे पर ओवरटेक करने की कोशिश भी की। एंकर ने बताया कि वे सुबह 4 बजे ऑफिस जा रही थीं, तब भी इस कार सवार अज्ञात शख्स ने उनका पीछा किया। इस ट्वीट पर गाजियाबाद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके बाद महिला एंकर ने आरोपी की खड़ी हुई गाड़ी का फोटो ट्वीट किया और पुलिस को बताया कि ये कार अपने एड्रेस पर खड़ी हुई है। इतना ही नहीं महिला पत्रकार ने कार नंबर और उसके बारे में पूरी डिटेल्स निकालकर ट्वीट कर दी। इसके बाद महिला एंकर के समर्थन में कई और पत्रकार आ गए। तब जाकर गाजियाबाद की कविनगर थाना पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया। कविनगर थाना पुलिस ने कुछ ही घंटे में कार्रवाई करते हुए आरोपी अजय प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वो शास्त्रीनगर का रहने वाला है। आरोपी की लाल रंग की कार भी बरामद हो गई है। अजय प्रताप ने बताया कि उसके पिता यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर रह चुके हैं, इसलिए वो कार पर पुलिस का स्टिकर लगाता था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि वो एंकर का लगातार 10 दिन से पीछा क्यों कर रहा था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गाजियाबाद पुलिस ने टीवी चैनल की महिला न्यूज एंकर का लगातार पीछा करने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी की कार भी रिकवर कर ली गई है, जिससे वो ऑफिस तक हर रोज पीछा करता था। आरोपी का पिता यूपी पुलिस से रिटायर सब इंस्पेक्टर है। पुलिस, आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है। नोएडा में एक टीवी चैनल का मुख्यालय है। यहां कार्यरत महिला एंकर ने शनिवार को ट्वीट करके बताया कि एक अज्ञात शख्स पिछले दस दिन से उनकी कार का ऑफिस तक पीछा करता है। इस कार पर पुलिस का स्टिकर भी लगा हुआ है। इस कार ने कई बार हाईवे पर ओवरटेक करने की कोशिश भी की। एंकर ने बताया कि वे सुबह चार बजे ऑफिस जा रही थीं, तब भी इस कार सवार अज्ञात शख्स ने उनका पीछा किया। इस ट्वीट पर गाजियाबाद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके बाद महिला एंकर ने आरोपी की खड़ी हुई गाड़ी का फोटो ट्वीट किया और पुलिस को बताया कि ये कार अपने एड्रेस पर खड़ी हुई है। इतना ही नहीं महिला पत्रकार ने कार नंबर और उसके बारे में पूरी डिटेल्स निकालकर ट्वीट कर दी। इसके बाद महिला एंकर के समर्थन में कई और पत्रकार आ गए। तब जाकर गाजियाबाद की कविनगर थाना पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया। कविनगर थाना पुलिस ने कुछ ही घंटे में कार्रवाई करते हुए आरोपी अजय प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वो शास्त्रीनगर का रहने वाला है। आरोपी की लाल रंग की कार भी बरामद हो गई है। अजय प्रताप ने बताया कि उसके पिता यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर रह चुके हैं, इसलिए वो कार पर पुलिस का स्टिकर लगाता था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि वो एंकर का लगातार दस दिन से पीछा क्यों कर रहा था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कराचीः पाकिस्तान के अशांत दक्षिणपश्चिम बलूचिस्तान प्रांत में निशाना बनाकर किए गए संदिग्ध आत्मघाती हमले में आज एक अतिरिक्त महानिरीक्षक और दो अन्य पुलिस अधिकारी मारे गए। यह विस्फोट अतिरिक्त महानिरीक्षक (एआईजी) दूरसंचार हामिद शकील के वाहन को निशाना बनाकर किया गया। हमले के समय वाहन प्रांतीय राजधानी क्वेटा के एक रिहायशी इलाके से गुजर रहा था। पुलिस ने बताया कि दो पुलिस अधिकारियों के साथ शकील भी मारे गए जबकि तीन अधिकारियों समेत छह अन्य घायल हो गए। (रूसी लड़के का दावा, पिछले जन्म में रहता था मंगल ग्रह पर, खोले कई राज) टीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि हमले में वाहन को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। शकील उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ऑपरेशंस, कार्यवाहक डीआईजी जांच और एआईजी ऑपरेशंस के साथ-साथ कई अन्य अहम पदों पर सेवारत थे। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आत्मघाती विस्फोट था। इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया गया है। बलूचिस्तान के गवर्नर मुहम्मद खान अचाकजई और मुख्यमंत्री सनाउल्लाह जेहरी ने हमले की कड़ी निंदा की है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
कराचीः पाकिस्तान के अशांत दक्षिणपश्चिम बलूचिस्तान प्रांत में निशाना बनाकर किए गए संदिग्ध आत्मघाती हमले में आज एक अतिरिक्त महानिरीक्षक और दो अन्य पुलिस अधिकारी मारे गए। यह विस्फोट अतिरिक्त महानिरीक्षक दूरसंचार हामिद शकील के वाहन को निशाना बनाकर किया गया। हमले के समय वाहन प्रांतीय राजधानी क्वेटा के एक रिहायशी इलाके से गुजर रहा था। पुलिस ने बताया कि दो पुलिस अधिकारियों के साथ शकील भी मारे गए जबकि तीन अधिकारियों समेत छह अन्य घायल हो गए। टीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि हमले में वाहन को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। शकील उप महानिरीक्षक ऑपरेशंस, कार्यवाहक डीआईजी जांच और एआईजी ऑपरेशंस के साथ-साथ कई अन्य अहम पदों पर सेवारत थे। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आत्मघाती विस्फोट था। इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया गया है। बलूचिस्तान के गवर्नर मुहम्मद खान अचाकजई और मुख्यमंत्री सनाउल्लाह जेहरी ने हमले की कड़ी निंदा की है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
पिछली सदी के 80 के दशक मेंगुप्त सूचनाओं के लिए अनधिकृत पहुंच कुछ हलकों के प्रतिनिधियों के बीच बहुत लोकप्रिय थी, जिनके बीच "डार्क डांटे" केविन पॉल्सन थे, जो एक हैकर थे, जो अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा और अमेरिकी कानून की अनदेखी के लिए प्रसिद्ध हो गए। इस युवक ने अपना नाम अमर कर दिया,KIIS रेडियो स्टेशन (लॉस एंजिल्स) में कई दर्जन फोन कॉल को गलत बताया और कई अन्य अवैध कार्यों को अंजाम दिया। उदाहरण के लिए, एक दिन वह, अपने मित्र के अनुरोध पर - एक वर्चुअल एस्कॉर्ट एजेंसी के मालिक - ने येलो पेज प्रकाशन के कर्मचारियों द्वारा एकत्र किए गए पुराने टेलीफोन संपर्कों को बहाल किया। एक पेशेवर के रूप में, टेलीफोन लाइनों को हैक करने में पुलेसन "विशेष"। कार्रवाई के चुने हुए पाठ्यक्रम ने उन्हें मूल्यवान पुरस्कारों के मालिक बनने में मदद की - हवाई और एक पॉर्श कार की यात्रा। थोड़ी देर बाद यह सक्षम प्रोग्रामर (पर)सामग्री संसाधनों में से कुछ जिसका नाम केविन पॉल्सेन है, ने यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन्स के डेटाबेस में हैक करने और निजी टेलीफोन वार्तालापों के बारे में वर्गीकृत जानकारी प्राप्त करने के लिए उपयोग किया। इस कहानी को विस्तार से और क्रम में बताया जाना चाहिए। केविन ने बचपन से ही चीजों को आकर्षित कियासमझने में आसान नहीं है। उदाहरण के लिए, एक नौजवान के रूप में, वह भोगवाद में रुचि रखते थे, जिसके परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए उनके व्यक्तिगत स्थान ने चुड़ैलों के विश्राम स्थल के रूप में देखा। उसी कारण से - सादगी की कमी - उसकीटेलीफोन कंपनी मा बेल के नेटवर्क को आकर्षित किया। 16 साल के केविन पॉल्सेन आसानी से फ़्रीकिंग चैंपियनशिप (टेलीफोन नेटवर्क और मशीनों में हैकिंग) जीत सकते थे, और फोन लाइनों को जोड़ना, अनधिकृत टेली कॉन्फ्रेंसिंग पकड़ना और अन्य लोगों के फोन पर बातचीत सुनना उनका पसंदीदा मनोरंजन था। कहने की जरूरत नहीं है, जब उनके माता-पिता ने उन्हें $ 200 का टीआरएस -80 कंप्यूटर दिया था, ऐसा "खिलौना" अब उनके लिए उपयोगी नहीं हो सकता है अगर यह एक अंतर्निहित मॉडेम से सुसज्जित नहीं है। अनिवार्य रूप से पॉल्सेन के करियर का भयावह रूपएक और फ्रिकर की गतिविधियों के समानांतर विकसित - रॉन ऑस्टिन के युवा "हरे"। "सहकर्मी" अक्सर "ओवरलैप्ड" - पहले, एक ही और अपने स्वयं के टेलीकांफ्रेंस के आगंतुकों के रूप में, और फिर कंप्यूटर संचार बनाए रखने के लिए शुरू किया। वर्चुअल दोस्ती चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न होयुवा बर्गलरों को एक साथ लाया गयाः वे "लूट" की जानकारी साझा करने और पेशेवर रहस्यों की सूक्ष्मता के लिए एक-दूसरे को समर्पित करने की कोई जल्दी नहीं थे। बल्कि, इसके विपरीत - व्यक्तिगत सफलता को घमंड करने के लिए मामूली अवसर का उपयोग करने की कोशिश की। जब 1983 का अंत आया, तो केविन पकड़ा गया। उन पर टेलीफोन लाइनों के साथ धोखाधड़ी करने और यूसीएलए के नेटवर्क में अवैध प्रवेश का आरोप लगाया गया था, लेकिन बचपन में ही उन्हें छोड़ दिया गया था। दो साल बाद, पॉल्सेन और उसका दोस्त - फ्रिकरमार्क लॉटर, कार्यदिवस के दौरान SRI इंटरनेशनल में नौकरी पा चुके हैं, उन्होंने प्रशासनिक नेटवर्क की विश्वसनीयता की जांच की। जब व्यवसायिक घंटे बाहर चल रहे थे, सम्मानजनक क्लर्क केविन पॉल्सेन के बजाय, डार्क डांटे दिखाई दिया - एक रात का विश्व नेटवर्क शिकारी जिसने किसी गोपनीय जानकारी को निकालने की उम्मीद में गुप्त लेबिरिंथ में ARPANet का शिकार किया। दूसरों के बनाए रहस्यों को सीखने की इच्छापॉल्सेन चोर मास्टर कुंजी का उपयोग करना सीखते हैं और बहुत सी चीजें प्राप्त करते हैं जो निगरानी और सुनने की सुविधा प्रदान करते हैं। उन्होंने बार-बार अपने कौशल को लागू किया, प्रशांत बेल की सेवा करने वाले संघीय प्रतिनिधियों और कर्मियों का अवलोकन किया, जिन्होंने बदले में, कष्टप्रद हैकर को ट्रैक करने की लंबे समय से कोशिश की थी। केविन हमेशा सभ्य व्यवहार करना पसंद करते थेप्रतिद्वंद्वी। सन माइक्रोसिस्टम्स को स्थानांतरित करना और राज्य नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त करना, उन्होंने अक्सर अमेरिकी रक्षा विभाग के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला किया और उन फ़ाइलों के लिए शिकार किया जिनकी सामग्री अमेरिकी सैन्य खुफिया के लिए थी। डार्क डांटे की तलाश कर रहे फेड्स को हासिल होने की संभावना नहीं हैअगर परिणाम एक हैकर के लिए गलत नहीं था। गेराज का उपयोग करने के लिए केविन किराए का विस्तार करना भूल गया। गैरेज के मालिक ने ताला तोड़कर, औद्योगिक विशेष उपकरण देखे, जिसमें उस समय शानदार पैसे खर्च हुए, और पुलिस को बुलाया। संघीय जांच ब्यूरो ने लियाशिल्पकार को ट्रैक करने के लिए सत्रह महीने, जिसने इस बीच एक ऐसा कृत्य किया, जिसने उसे सदियों के लिए गौरवान्वित किया - लॉस एंजिल्स टेलीफोन लाइन को हैक करना। यह सच है कि इस जीत के बाद, युवा "विशेषज्ञ", बिना रुके, एक दूसरे को प्राप्त किया, निवेश संस्थानों के नेटवर्क में प्रवेश किया। 1989 में पहली बार केविन पॉल्सेन को हिरासत में लिया गया था। वह केवल 24 साल का था, लेकिन उसके "खाते" में पहले से ही कई हैक किए गए टेलीफोन नेटवर्क और सर्वर थे। लॉस एंजिल्स रेडियो स्टेशन KIIS-FM ने अपने श्रोताओं के लिए आयोजित किया, जिसमें संभवतः Poulsen (केविन-केआईएम-एफएम के प्रशंसकों के बीच अच्छी तरह से शामिल हो सकता है), एक पुरस्कार ड्राइंग के साथ एक प्रश्नोत्तरी। इस कार्यक्रम ने लाइव और आकर्षित कियाआम जनता का ध्यान, क्योंकि "दांव पर" एक कार थी। संपादकीय कार्यालय पहुंचने में कामयाब रहे रेडियो श्रोताओं को एक उपहार के रूप में एक नया पोर्श 944 एस 2 प्राप्त करने का अवसर दिया गया। शर्तों के अनुसार यह अद्भुत उपहारक्विज, एक सौ दूसरे कॉल करने वालों की संपत्ति बनना था। केविन पॉल्सेन ने संचार नेटवर्क को इस तरह से अवरुद्ध कर दिया कि कोई भी प्रतिभागी, खुद को छोड़कर, रेडियो स्टेशन के माध्यम से नहीं मिल सकता है, और हैकर के लिए "एक सौ दूसरा" टेलीफोन प्रदाता बनना मुश्किल नहीं था। अप्रैल 1991 में, संघीय ब्यूरो के कर्मचारीअभी भी अनाम लेखक की निंदा के लिए अपराधी को हिरासत में लेने में कामयाब रहा, जिसने कानून के रखवालों को सूचित किया कि पॉल्सन कहां है। केविन लॉस एंजिल्स के पीछे सुपरमार्केट में से एक में सिर्फ "बाहर खरीदारी" कर रहा था। एफबीआई ने उस पर असली शिकार की घोषणा की, जिसके बाद पूर्व अपराधी, और अब लोकप्रिय वायर्ड समाचार के प्रधान संपादक को हिरासत में लिया गया। आरोप 1994 में दायर किया गया था। केविन पॉल्सेन को चार साल के लिए जेल जाना पड़ा - हैकिंग गतिविधियों के लिए उन दिनों एक सख्त पर्याप्त सजा। वास्तव में, केविन पॉल्सेन नई पीढ़ी के एक उत्साही व्यक्ति हैं, एक उत्साही प्रोग्रामर, जिनके लिए नए कौशल और जानकारी प्राप्त करना (साथ ही साथ आजीविका) आम तौर पर स्वीकृत नियमों का पालन करने से अधिक महत्वपूर्ण है। प्रारंभ में, हैकर्स ने विशेषज्ञों को बुलायाप्रोग्रामिंग और उनके सहयोगियों के परिणामों के विस्तृत अनुसंधान में शामिल। इसके अलावा, हैकर्स व्यक्तिगत रूप से विकसित प्रणालियों की विश्वसनीयता बढ़ाने या अन्य पेशेवरों से "उधार" लेने के अवसरों की तलाश और खोज कर सकते हैं। केविन Poulsen ... हैक आदेश? आज, शब्द "हैकर" के तहत पारंपरिक रूप से हैतात्पर्य एक ऐसे विशेषज्ञ से है जो अपनी (या किसी की) जागरूकता का उपयोग हालिया वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में एक ऐसी पहल करने के लिए करता है जो वर्तमान कानून द्वारा अनुमोदित नहीं है। उदाहरण के लिए, वर्गीकृत साइटों, प्रणालियों और नेटवर्क से अनधिकृत परिचय। यह विभिन्न श्रेणियों के हैकरों के अस्तित्व के बारे में भी जाना जाता है, जिनकी गतिविधियाँ कम सामान्यीकृत हैं। इनमें शामिल हैंः - कार्डर्स जिनकी गतिविधि का दायरा हैकिंग है और प्लास्टिक बैंक कार्ड में निहित जानकारी का अनधिकृत उपयोग है। - पटाखे प्रोग्रामर हैं जो कॉपीराइट कानून द्वारा संरक्षित सूचना उत्पादों को अवैध रूप से प्राप्त करने में विशेषज्ञ हैं। - स्क्रिप्ट किडी। ये "कारीगर" अन्य लोगों की सामग्री को तैयार करते हैं, पहले से विकसित स्क्रिप्ट, सॉफ्टवेयर कोड के टुकड़े और सॉफ्टवेयर की प्रसिद्ध "कमजोरियों" का उपयोग करते हैं। - नेटवर्क समुद्री डाकू। इन "नेटवर्क के कॉल पर शिकारी" की गतिविधि का क्षेत्र कॉपीराइट कानून (या किसी भी तरह के पड़ोसी अधिकारों) द्वारा संरक्षित किसी और के विकास की अनधिकृत बिक्री है। इसके अलावा, हैकर्स को "व्हाइट" और "ब्लैक" में विभाजित किया गया है। हैकर्स "व्हाइट" और "ब्लैक" "व्हाइट" हैकर्स ("व्हाइट कैप") कानून नहीं हैंउल्लंघन करते हैं। ये अत्यधिक योग्य विशेषज्ञ (शालीनता के लिए, जिन्हें अक्सर एथनिक हैकर्स कहा जाता है) कंपनी-नियोक्ता की इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की सुरक्षा के स्तर पर किराया, शोध और परीक्षण के लिए काम करते हैं। कुछ "सफेद", खुद के लिए काम कर रहे हैं, नए उत्पादों और कार्यक्रमों को विकसित कर रहे हैं, फिर से, मौजूदा कानून का उल्लंघन किए बिना। "ब्लैक हैकर्स", या "ब्लैक कैप्स", टूजिसके लिए केविन पॉल्सेन का संबंध है (प्रसिद्धि "उन्हें इस व्यवसाय के लिए सटीक रूप से पकड़ा") हैकर्स को कहा जाता है जो अपने शस्त्रागार में उपलब्ध कौशल और ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ निकालने के लिए करते हैं। जेल की सजा काटने के बाद, केविन पॉल्सन को वायर्ड न्यूज के लिए एक पत्रकार की नौकरी मिल गई। जल्द ही उन्हें मुख्य संपादक के पद पर पदोन्नत किया गया, जो आज तक उनके पास है। फुरसत में, पुल्सेन किताबें लिखते हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध हैकौन सा - किंगपिनः कैसे एक हैकर ने अरब-डॉलर साइबर क्राइम अंडरग्राउंड ("चोर इन लॉः कैसे एक हैकर" को "भूमिगत साइबर अपराध में एक बिलियन डॉलर" बना दिया), जो कार्डर्स और हैकर्स को पकड़ने में विशेषज्ञता वाली अमेरिकी विशेष सेवाओं की कुछ तकनीकों के बारे में बताता है।
पिछली सदी के अस्सी के दशक मेंगुप्त सूचनाओं के लिए अनधिकृत पहुंच कुछ हलकों के प्रतिनिधियों के बीच बहुत लोकप्रिय थी, जिनके बीच "डार्क डांटे" केविन पॉल्सन थे, जो एक हैकर थे, जो अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा और अमेरिकी कानून की अनदेखी के लिए प्रसिद्ध हो गए। इस युवक ने अपना नाम अमर कर दिया,KIIS रेडियो स्टेशन में कई दर्जन फोन कॉल को गलत बताया और कई अन्य अवैध कार्यों को अंजाम दिया। उदाहरण के लिए, एक दिन वह, अपने मित्र के अनुरोध पर - एक वर्चुअल एस्कॉर्ट एजेंसी के मालिक - ने येलो पेज प्रकाशन के कर्मचारियों द्वारा एकत्र किए गए पुराने टेलीफोन संपर्कों को बहाल किया। एक पेशेवर के रूप में, टेलीफोन लाइनों को हैक करने में पुलेसन "विशेष"। कार्रवाई के चुने हुए पाठ्यक्रम ने उन्हें मूल्यवान पुरस्कारों के मालिक बनने में मदद की - हवाई और एक पॉर्श कार की यात्रा। थोड़ी देर बाद यह सक्षम प्रोग्रामर सामग्री संसाधनों में से कुछ जिसका नाम केविन पॉल्सेन है, ने यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन्स के डेटाबेस में हैक करने और निजी टेलीफोन वार्तालापों के बारे में वर्गीकृत जानकारी प्राप्त करने के लिए उपयोग किया। इस कहानी को विस्तार से और क्रम में बताया जाना चाहिए। केविन ने बचपन से ही चीजों को आकर्षित कियासमझने में आसान नहीं है। उदाहरण के लिए, एक नौजवान के रूप में, वह भोगवाद में रुचि रखते थे, जिसके परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए उनके व्यक्तिगत स्थान ने चुड़ैलों के विश्राम स्थल के रूप में देखा। उसी कारण से - सादगी की कमी - उसकीटेलीफोन कंपनी मा बेल के नेटवर्क को आकर्षित किया। सोलह साल के केविन पॉल्सेन आसानी से फ़्रीकिंग चैंपियनशिप जीत सकते थे, और फोन लाइनों को जोड़ना, अनधिकृत टेली कॉन्फ्रेंसिंग पकड़ना और अन्य लोगों के फोन पर बातचीत सुनना उनका पसंदीदा मनोरंजन था। कहने की जरूरत नहीं है, जब उनके माता-पिता ने उन्हें दो सौ डॉलर का टीआरएस -अस्सी कंप्यूटर दिया था, ऐसा "खिलौना" अब उनके लिए उपयोगी नहीं हो सकता है अगर यह एक अंतर्निहित मॉडेम से सुसज्जित नहीं है। अनिवार्य रूप से पॉल्सेन के करियर का भयावह रूपएक और फ्रिकर की गतिविधियों के समानांतर विकसित - रॉन ऑस्टिन के युवा "हरे"। "सहकर्मी" अक्सर "ओवरलैप्ड" - पहले, एक ही और अपने स्वयं के टेलीकांफ्रेंस के आगंतुकों के रूप में, और फिर कंप्यूटर संचार बनाए रखने के लिए शुरू किया। वर्चुअल दोस्ती चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न होयुवा बर्गलरों को एक साथ लाया गयाः वे "लूट" की जानकारी साझा करने और पेशेवर रहस्यों की सूक्ष्मता के लिए एक-दूसरे को समर्पित करने की कोई जल्दी नहीं थे। बल्कि, इसके विपरीत - व्यक्तिगत सफलता को घमंड करने के लिए मामूली अवसर का उपयोग करने की कोशिश की। जब एक हज़ार नौ सौ तिरासी का अंत आया, तो केविन पकड़ा गया। उन पर टेलीफोन लाइनों के साथ धोखाधड़ी करने और यूसीएलए के नेटवर्क में अवैध प्रवेश का आरोप लगाया गया था, लेकिन बचपन में ही उन्हें छोड़ दिया गया था। दो साल बाद, पॉल्सेन और उसका दोस्त - फ्रिकरमार्क लॉटर, कार्यदिवस के दौरान SRI इंटरनेशनल में नौकरी पा चुके हैं, उन्होंने प्रशासनिक नेटवर्क की विश्वसनीयता की जांच की। जब व्यवसायिक घंटे बाहर चल रहे थे, सम्मानजनक क्लर्क केविन पॉल्सेन के बजाय, डार्क डांटे दिखाई दिया - एक रात का विश्व नेटवर्क शिकारी जिसने किसी गोपनीय जानकारी को निकालने की उम्मीद में गुप्त लेबिरिंथ में ARPANet का शिकार किया। दूसरों के बनाए रहस्यों को सीखने की इच्छापॉल्सेन चोर मास्टर कुंजी का उपयोग करना सीखते हैं और बहुत सी चीजें प्राप्त करते हैं जो निगरानी और सुनने की सुविधा प्रदान करते हैं। उन्होंने बार-बार अपने कौशल को लागू किया, प्रशांत बेल की सेवा करने वाले संघीय प्रतिनिधियों और कर्मियों का अवलोकन किया, जिन्होंने बदले में, कष्टप्रद हैकर को ट्रैक करने की लंबे समय से कोशिश की थी। केविन हमेशा सभ्य व्यवहार करना पसंद करते थेप्रतिद्वंद्वी। सन माइक्रोसिस्टम्स को स्थानांतरित करना और राज्य नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त करना, उन्होंने अक्सर अमेरिकी रक्षा विभाग के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला किया और उन फ़ाइलों के लिए शिकार किया जिनकी सामग्री अमेरिकी सैन्य खुफिया के लिए थी। डार्क डांटे की तलाश कर रहे फेड्स को हासिल होने की संभावना नहीं हैअगर परिणाम एक हैकर के लिए गलत नहीं था। गेराज का उपयोग करने के लिए केविन किराए का विस्तार करना भूल गया। गैरेज के मालिक ने ताला तोड़कर, औद्योगिक विशेष उपकरण देखे, जिसमें उस समय शानदार पैसे खर्च हुए, और पुलिस को बुलाया। संघीय जांच ब्यूरो ने लियाशिल्पकार को ट्रैक करने के लिए सत्रह महीने, जिसने इस बीच एक ऐसा कृत्य किया, जिसने उसे सदियों के लिए गौरवान्वित किया - लॉस एंजिल्स टेलीफोन लाइन को हैक करना। यह सच है कि इस जीत के बाद, युवा "विशेषज्ञ", बिना रुके, एक दूसरे को प्राप्त किया, निवेश संस्थानों के नेटवर्क में प्रवेश किया। एक हज़ार नौ सौ नवासी में पहली बार केविन पॉल्सेन को हिरासत में लिया गया था। वह केवल चौबीस साल का था, लेकिन उसके "खाते" में पहले से ही कई हैक किए गए टेलीफोन नेटवर्क और सर्वर थे। लॉस एंजिल्स रेडियो स्टेशन KIIS-FM ने अपने श्रोताओं के लिए आयोजित किया, जिसमें संभवतः Poulsen , एक पुरस्कार ड्राइंग के साथ एक प्रश्नोत्तरी। इस कार्यक्रम ने लाइव और आकर्षित कियाआम जनता का ध्यान, क्योंकि "दांव पर" एक कार थी। संपादकीय कार्यालय पहुंचने में कामयाब रहे रेडियो श्रोताओं को एक उपहार के रूप में एक नया पोर्श नौ सौ चौंतालीस एस दो प्राप्त करने का अवसर दिया गया। शर्तों के अनुसार यह अद्भुत उपहारक्विज, एक सौ दूसरे कॉल करने वालों की संपत्ति बनना था। केविन पॉल्सेन ने संचार नेटवर्क को इस तरह से अवरुद्ध कर दिया कि कोई भी प्रतिभागी, खुद को छोड़कर, रेडियो स्टेशन के माध्यम से नहीं मिल सकता है, और हैकर के लिए "एक सौ दूसरा" टेलीफोन प्रदाता बनना मुश्किल नहीं था। अप्रैल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में, संघीय ब्यूरो के कर्मचारीअभी भी अनाम लेखक की निंदा के लिए अपराधी को हिरासत में लेने में कामयाब रहा, जिसने कानून के रखवालों को सूचित किया कि पॉल्सन कहां है। केविन लॉस एंजिल्स के पीछे सुपरमार्केट में से एक में सिर्फ "बाहर खरीदारी" कर रहा था। एफबीआई ने उस पर असली शिकार की घोषणा की, जिसके बाद पूर्व अपराधी, और अब लोकप्रिय वायर्ड समाचार के प्रधान संपादक को हिरासत में लिया गया। आरोप एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में दायर किया गया था। केविन पॉल्सेन को चार साल के लिए जेल जाना पड़ा - हैकिंग गतिविधियों के लिए उन दिनों एक सख्त पर्याप्त सजा। वास्तव में, केविन पॉल्सेन नई पीढ़ी के एक उत्साही व्यक्ति हैं, एक उत्साही प्रोग्रामर, जिनके लिए नए कौशल और जानकारी प्राप्त करना आम तौर पर स्वीकृत नियमों का पालन करने से अधिक महत्वपूर्ण है। प्रारंभ में, हैकर्स ने विशेषज्ञों को बुलायाप्रोग्रामिंग और उनके सहयोगियों के परिणामों के विस्तृत अनुसंधान में शामिल। इसके अलावा, हैकर्स व्यक्तिगत रूप से विकसित प्रणालियों की विश्वसनीयता बढ़ाने या अन्य पेशेवरों से "उधार" लेने के अवसरों की तलाश और खोज कर सकते हैं। केविन Poulsen ... हैक आदेश? आज, शब्द "हैकर" के तहत पारंपरिक रूप से हैतात्पर्य एक ऐसे विशेषज्ञ से है जो अपनी जागरूकता का उपयोग हालिया वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में एक ऐसी पहल करने के लिए करता है जो वर्तमान कानून द्वारा अनुमोदित नहीं है। उदाहरण के लिए, वर्गीकृत साइटों, प्रणालियों और नेटवर्क से अनधिकृत परिचय। यह विभिन्न श्रेणियों के हैकरों के अस्तित्व के बारे में भी जाना जाता है, जिनकी गतिविधियाँ कम सामान्यीकृत हैं। इनमें शामिल हैंः - कार्डर्स जिनकी गतिविधि का दायरा हैकिंग है और प्लास्टिक बैंक कार्ड में निहित जानकारी का अनधिकृत उपयोग है। - पटाखे प्रोग्रामर हैं जो कॉपीराइट कानून द्वारा संरक्षित सूचना उत्पादों को अवैध रूप से प्राप्त करने में विशेषज्ञ हैं। - स्क्रिप्ट किडी। ये "कारीगर" अन्य लोगों की सामग्री को तैयार करते हैं, पहले से विकसित स्क्रिप्ट, सॉफ्टवेयर कोड के टुकड़े और सॉफ्टवेयर की प्रसिद्ध "कमजोरियों" का उपयोग करते हैं। - नेटवर्क समुद्री डाकू। इन "नेटवर्क के कॉल पर शिकारी" की गतिविधि का क्षेत्र कॉपीराइट कानून द्वारा संरक्षित किसी और के विकास की अनधिकृत बिक्री है। इसके अलावा, हैकर्स को "व्हाइट" और "ब्लैक" में विभाजित किया गया है। हैकर्स "व्हाइट" और "ब्लैक" "व्हाइट" हैकर्स कानून नहीं हैंउल्लंघन करते हैं। ये अत्यधिक योग्य विशेषज्ञ कंपनी-नियोक्ता की इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की सुरक्षा के स्तर पर किराया, शोध और परीक्षण के लिए काम करते हैं। कुछ "सफेद", खुद के लिए काम कर रहे हैं, नए उत्पादों और कार्यक्रमों को विकसित कर रहे हैं, फिर से, मौजूदा कानून का उल्लंघन किए बिना। "ब्लैक हैकर्स", या "ब्लैक कैप्स", टूजिसके लिए केविन पॉल्सेन का संबंध है हैकर्स को कहा जाता है जो अपने शस्त्रागार में उपलब्ध कौशल और ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ निकालने के लिए करते हैं। जेल की सजा काटने के बाद, केविन पॉल्सन को वायर्ड न्यूज के लिए एक पत्रकार की नौकरी मिल गई। जल्द ही उन्हें मुख्य संपादक के पद पर पदोन्नत किया गया, जो आज तक उनके पास है। फुरसत में, पुल्सेन किताबें लिखते हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध हैकौन सा - किंगपिनः कैसे एक हैकर ने अरब-डॉलर साइबर क्राइम अंडरग्राउंड , जो कार्डर्स और हैकर्स को पकड़ने में विशेषज्ञता वाली अमेरिकी विशेष सेवाओं की कुछ तकनीकों के बारे में बताता है।
कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियां आरोप लगाया करती थीं कि आर एस एस की मानसिकता महिलाओं से भेदभाव करने की रहती है. इस संगठन में सिर्फ पुरुषों को ही प्रवेश है. ऐसी बयानबाजी करते समय विपक्ष इस बात से अनजान था कि संघ परिवार में राष्ट्रसेविका समिति का भी समावेश है. उसमें महिलाएं राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक उद्देश्यों को लेकर अनुशासनपूर्वक सक्रिय है. दीर्घकाल तक मावशी केलकर राष्ट्रसेविका समिति की प्रमुख रहीं. लंबे समय तक संघ ने मीडिया में प्रचार से अपनी दूरी बनाए रखी इस वजह से राष्ट्रसेविका समिति को लेकर कई लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई. अब एक नए विकासक्रम के तहत संघ कुछ नए उल्लेखनीय कदम उठाने जा रहा है. आरएसएस की स्थापना 1925 में डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. 2024 में संघ अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है जिसे लेकर विभिन्न बदलावों की संकल्पना है. पानीपत के समालेखा में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की त्रिदिवसीय बैठक में पहले ही दिन एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की गई कि अब आरएसएस में महिलाओं की शाखाएं लगनेवाली हैं. संघ के सहकार्यवाह (मुख्य सचिव) मनमोहन वैद्य ने कहा कि संघ में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पहले भी विचार-विमर्श चलता रहा है लेकिन इस बार इस संबंध में निर्णय ले लिया गया. उल्लेखनीय है कि एमएस गोलवलकर गुरुजी, बालासाहब देवरस, रज्जू भैया, सुदर्शन के सरसंघ चालक रहते आरएसएस की प्रगति होती रही लेकिन पिछले एक दशक में उसका काफी विस्तार हुआ है. डा. मोहन भागवत के सरसंघ चालक रहते विविध क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ी है. मनमोहन वैद्य ने बताया कि पहले संघ की 42,613 शाखाएं लगती थीं जिनकी संख्या अब बढ़कर 68,651 हो गई है. हर सप्ताह संघ की 26,877 बैठकें हुआ करती हैं. संघ की शाखा में ध्वज प्रणाम, एकात्मता मंत्र, व्यायाम, खेल, बौद्धिक इत्यादि का समावेश होता है. ज्येष्ठ, तरुण व बाल स्वयंसेवकों की शाखाएं चलती हैं. विदेश में आरएसएस की शाखाएं एचएसएस (हिंदू स्वयंसेवक संघ) नाम से संचालित होती हैं. संघ का तीन वर्षीय अधिकारी प्रशिक्षण वर्ग होता है. उसके प्रचारक देश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कार्य करते हैं. संघ स्वयं को राजनीति से अलिप्त बताता है लेकिन उसके स्वयंसेवकों को छूट है कि वे अपनी रुचि के अनुसार किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो सकते हैं. स्वयंसेवकों के संस्कार ऐसे होते है कि वे बीजेपी में शामिल होना पसंद करते हैं. वे अन्य क्षेत्रों में भी सेवा दे सकते हैं जैसे शिक्षा भारती, उद्योग भारती, वनवासी कल्याण आश्रम आदि!
कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियां आरोप लगाया करती थीं कि आर एस एस की मानसिकता महिलाओं से भेदभाव करने की रहती है. इस संगठन में सिर्फ पुरुषों को ही प्रवेश है. ऐसी बयानबाजी करते समय विपक्ष इस बात से अनजान था कि संघ परिवार में राष्ट्रसेविका समिति का भी समावेश है. उसमें महिलाएं राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक उद्देश्यों को लेकर अनुशासनपूर्वक सक्रिय है. दीर्घकाल तक मावशी केलकर राष्ट्रसेविका समिति की प्रमुख रहीं. लंबे समय तक संघ ने मीडिया में प्रचार से अपनी दूरी बनाए रखी इस वजह से राष्ट्रसेविका समिति को लेकर कई लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई. अब एक नए विकासक्रम के तहत संघ कुछ नए उल्लेखनीय कदम उठाने जा रहा है. आरएसएस की स्थापना एक हज़ार नौ सौ पच्चीस में डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. दो हज़ार चौबीस में संघ अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है जिसे लेकर विभिन्न बदलावों की संकल्पना है. पानीपत के समालेखा में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की त्रिदिवसीय बैठक में पहले ही दिन एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की गई कि अब आरएसएस में महिलाओं की शाखाएं लगनेवाली हैं. संघ के सहकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने कहा कि संघ में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पहले भी विचार-विमर्श चलता रहा है लेकिन इस बार इस संबंध में निर्णय ले लिया गया. उल्लेखनीय है कि एमएस गोलवलकर गुरुजी, बालासाहब देवरस, रज्जू भैया, सुदर्शन के सरसंघ चालक रहते आरएसएस की प्रगति होती रही लेकिन पिछले एक दशक में उसका काफी विस्तार हुआ है. डा. मोहन भागवत के सरसंघ चालक रहते विविध क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ी है. मनमोहन वैद्य ने बताया कि पहले संघ की बयालीस,छः सौ तेरह शाखाएं लगती थीं जिनकी संख्या अब बढ़कर अड़सठ,छः सौ इक्यावन हो गई है. हर सप्ताह संघ की छब्बीस,आठ सौ सतहत्तर बैठकें हुआ करती हैं. संघ की शाखा में ध्वज प्रणाम, एकात्मता मंत्र, व्यायाम, खेल, बौद्धिक इत्यादि का समावेश होता है. ज्येष्ठ, तरुण व बाल स्वयंसेवकों की शाखाएं चलती हैं. विदेश में आरएसएस की शाखाएं एचएसएस नाम से संचालित होती हैं. संघ का तीन वर्षीय अधिकारी प्रशिक्षण वर्ग होता है. उसके प्रचारक देश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कार्य करते हैं. संघ स्वयं को राजनीति से अलिप्त बताता है लेकिन उसके स्वयंसेवकों को छूट है कि वे अपनी रुचि के अनुसार किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो सकते हैं. स्वयंसेवकों के संस्कार ऐसे होते है कि वे बीजेपी में शामिल होना पसंद करते हैं. वे अन्य क्षेत्रों में भी सेवा दे सकते हैं जैसे शिक्षा भारती, उद्योग भारती, वनवासी कल्याण आश्रम आदि!
फेफड़ों का बलगम कैसे साफ करें? जुखाम के दौरान क्या आपने बंद नाक या भरी हुई नाक महसूस की है हो सकता है आपको इसका कारण नहीं मालूम हो दरअसल जुखाम के समय नाक के आसपास के टिशूज और ब्लड वेसल्स में सूजन आ जाने से बलगम की वजह से नाक बंद हो जाती है। ऐसा ही कुछ सीने पर जमा बलगम की वजह से भी हो सकता है और इस वजह से आपको कंजेशन महसूस होने लगता है। ठंड, एलर्जी, साइनस यह जुए में अधिक रहने की वजह से बलगम या टिशूज में सूजन की समस्या अक्सर देखी जा सकती है आइए जानते हैं वह पांच असरदार तरीके जिनसे इस स्थिति से निपटा जा सकता है।
फेफड़ों का बलगम कैसे साफ करें? जुखाम के दौरान क्या आपने बंद नाक या भरी हुई नाक महसूस की है हो सकता है आपको इसका कारण नहीं मालूम हो दरअसल जुखाम के समय नाक के आसपास के टिशूज और ब्लड वेसल्स में सूजन आ जाने से बलगम की वजह से नाक बंद हो जाती है। ऐसा ही कुछ सीने पर जमा बलगम की वजह से भी हो सकता है और इस वजह से आपको कंजेशन महसूस होने लगता है। ठंड, एलर्जी, साइनस यह जुए में अधिक रहने की वजह से बलगम या टिशूज में सूजन की समस्या अक्सर देखी जा सकती है आइए जानते हैं वह पांच असरदार तरीके जिनसे इस स्थिति से निपटा जा सकता है।
शेयर बाजार से जुड़े लोगों के लिए आज की शुरुआत बेहतर हुई है। सोमवार को बाजार खुलते ही जबरदस्त उछाल देखा गया। सेंसेक्स-निफ्टी में बढ़त के हरे निशान के साथ कारोबार हो रहा है। दिन की शुरुआत होते ही सेंसेक्स 460 प्वाइंटर उछाल के साथ 60,205 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी में भी उछाल देखा गया। बाजार खुलते ही यह 120 प्वाइंट की उछाल के साथ 17,932 पर पहुंच गया।
शेयर बाजार से जुड़े लोगों के लिए आज की शुरुआत बेहतर हुई है। सोमवार को बाजार खुलते ही जबरदस्त उछाल देखा गया। सेंसेक्स-निफ्टी में बढ़त के हरे निशान के साथ कारोबार हो रहा है। दिन की शुरुआत होते ही सेंसेक्स चार सौ साठ प्वाइंटर उछाल के साथ साठ,दो सौ पाँच पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी में भी उछाल देखा गया। बाजार खुलते ही यह एक सौ बीस प्वाइंट की उछाल के साथ सत्रह,नौ सौ बत्तीस पर पहुंच गया।
नौहराधार - तहसील नौहराधार के तहत विजट देवता बोगधार में तीन दिवसीय मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसका उद्घाटन अतिरिक्त उपायुक्त सिरमौर हरबंस नेगी ने किया। मुख्यातिथि ने पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। देवता की छड़ी के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर मेला आरंभ हुआ। इस मेले में हजारों की तादात में लोग मेले का आनंद लेते हैं। इस मेले में नौहराधार की 15 पंचायतों के लोग शरीख होते हैं। इस मेले में वालीबाल व कबड्डी मुख्य आकर्षण रही। इसमें 12 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का मेलार्थियों ने खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसकी पंडाल में बैठे लोगों ने खूब सराहना की। सर्वप्रथम बच्चों ने स्वागत गीत से लोगों का स्वागत किया। उसके बाद एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति देकर खूब समां बांधा। समापन अवसर पर लोगों का मनोरंजन हिमाचल के प्रसिद्ध कलाकार मदन झाल्टा करेगें । विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
नौहराधार - तहसील नौहराधार के तहत विजट देवता बोगधार में तीन दिवसीय मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसका उद्घाटन अतिरिक्त उपायुक्त सिरमौर हरबंस नेगी ने किया। मुख्यातिथि ने पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। देवता की छड़ी के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर मेला आरंभ हुआ। इस मेले में हजारों की तादात में लोग मेले का आनंद लेते हैं। इस मेले में नौहराधार की पंद्रह पंचायतों के लोग शरीख होते हैं। इस मेले में वालीबाल व कबड्डी मुख्य आकर्षण रही। इसमें बारह टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का मेलार्थियों ने खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसकी पंडाल में बैठे लोगों ने खूब सराहना की। सर्वप्रथम बच्चों ने स्वागत गीत से लोगों का स्वागत किया। उसके बाद एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति देकर खूब समां बांधा। समापन अवसर पर लोगों का मनोरंजन हिमाचल के प्रसिद्ध कलाकार मदन झाल्टा करेगें । विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
एक कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सर्वोच्च रैंकिंग कार्यकारी है. हेल्थकेयर सीईओ की भूमिका न केवल सुविधाकर्ता है बल्कि स्वास्थ्य देखभाल उद्योग के बदलाव करने वाले भी हैं. उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में प्रमुख कॉर्पोरेट निर्णय लेना, कंपनी के समग्र संचालन और संसाधनों का प्रबंधन, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, बोर्ड, कॉर्पोरेट ऑपरेशन और कंपनी का सार्वजनिक चेहरा होना शामिल हैं. अर्जुन वैद्य, सीईओ, डॉ. वैद्य'सः न्यू एज आयुर्वेद, फोर्ब्स 30U30 और बिज़नेस वर्ल्ड 40U40 के तहत सूचीबद्ध किया गया है. वर्षों के दौरान, वैद्य परिवार के सदस्यों ने ज्ञान पारित किया है जिसने अब आयुष मंत्रालय, आईएसओ 9001:2015 और जीएमपी प्रमाणित विनिर्माण सुविधा के लिए 100+ एफडीए द्वारा अनुमोदित आयुर्वेदिक स्वामित्व दवा के लिए अनुमोदित फॉर्मूलेशन प्रदान किए हैं जो हमें एफडीए को भी मंजूरी मिली है. डॉ. वैद्य एक 3 वर्षीय नए आयुर्वेदिक प्रोडक्ट स्टार्टअप है, जो भारत और विश्वव्यापी दोनों में आज के आधुनिक उपभोक्ता आयुर्वेद के समृद्ध, पारंपरिक भारतीय विज्ञान को लाने का प्रयास करता है. अर्जुन ने अपने विचारों को साझा किया, "यह एक बहुत जटिल प्रश्न है और मुझे लगता है कि आयुर्वेद के उदाहरण लेने के लिए विभिन्न हितधारकों से संबंधित कार्य की आवश्यकता है, महत्वपूर्ण चुनौती एक्सेस को हल कर रही है, महत्वपूर्ण प्रश्न, उपभोक्ताओं को माइनस एजुकेशन और संदेश प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है. जब हम एकजुट प्रयास के बारे में बात करते हैं, विशेष रूप से आयुर्वेद के लिए, हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है - चाहे वह ब्रांड, सरकार, हम एक उपभोक्ता के रूप में, अनुसंधान संस्थान, डॉक्टर, सभी को एक साथ आना होता है. सब कुछ एक साथ लाने के लिए महत्वपूर्ण बात सभी हितधारकों के साथ एक संक्षिप्त प्रयास है. जब हम आयुर्वेद के बारे में उद्योग या स्पेस के रूप में बात करते हैं, तो हम सही दिशा में कदम उठा रहे हैं और इस संदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं. फिर भी हम बहुत दूर हैं जहां हमें भारत जैसे देश में होना चाहिए, और इसलिए हितधारकों के माध्यम से अधिक सहयोग और दीर्घकालिक दृष्टि के माध्यम से काम करने वाले हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है, न केवल अल्पकालिक, स्वार्थपूर्ण उद्देश्य, बल्कि एक व्यापक परिप्रेक्ष्य. यह एक देश की आवश्यकता के रूप में सबसे बड़ी चुनौती है, इन समस्याओं को हल करने के लिए," वह कहता है, अर्जुन ने अपनी यात्रा को साझा किया, "यह एक सुंदर यात्रा रही है, और हम एक व्यापार और एक ब्रांड के रूप में बढ़ गए हैं. लेकिन हेल्थकेयर सेक्टर में होने के बारे में सबसे खूबसूरत बात यह है कि जीवन को प्रभावित कर रहा है और एक डिजिटल ब्रांड होने के कारण, अल्प तीन वर्षों में हमने 16,500 पिन कोड में एक मिलियन से अधिक ऑर्डर पूरे किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट और अपनी उंगलियों को छूने पर देखभाल मिलता है और यह इस इंडस्ट्री का सबसे सुंदर हिस्सा है. हम उपभोक्ताओं की विशिष्ट हेल्थकेयर समस्याओं को हल करने और उनके जीवन को अब तक प्रभावित करने में सक्षम हैं जहां से हम आज बैठे हैं," वह कहता है. अर्जुन हेल्थकेयर के भविष्य के बारे में बात करता है, "मैं इसका एक बड़ा प्रस्तावक हूं क्योंकि उदाहरण के लिए, अगर आप टेली-कंसल्टेशन देखते हैं, तो उन्होंने इस महामारी में छत के माध्यम से गोली मार ली है. अब हम एक ज़ूम कॉल के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं, हालांकि, 6 - 8 महीने पहले, हम इसके बारे में कभी नहीं सोचा होगा. मुझे लगता है कि डिजिटलाइज़ेशन ने जीवन बदल दिया है और उपभोक्ता व्यवहार डिजिटल की ओर बढ़ गया है. रोगी टेली-कन्सल्टेशन के माध्यम से अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं जो 1000 मील दूर हो सकते हैं और डिजिटलाइज़ेशन के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले हेल्थकेयर तक पहुंच पा रहे हैं. इसकी विशाल क्षमता है, लेकिन स्वास्थ्य देखभाल के साथ, इसे सही तरीके से लाभ उठाना होगा. गुणवत्ता मानक होने चाहिए, प्रतिक्रिया तंत्र होने चाहिए, और इसे नियंत्रित या नियंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य सेवा की बात आने पर गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है. इसलिए भविष्य डिजिटल है और आश्चर्यजनक कार्य हो रहा है, लेकिन हमें प्रसार को नियंत्रित करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्ता बनाए रखा जाए," वह कहता है. "मैं सिर्फ एक उद्यमी और आयुर्वेद में विश्वास करता हूं" अर्जुन स्वास्थ्य देखभाल पर और अधिक खर्च करने के बारे में खुलता है, "मैं पॉलिसी निर्माता नहीं हूं; मैं सिर्फ एक उद्यमी हूं और आयुर्वेद में विश्वास करता हूं. मुझे लगता है कि हमारे जैसे देश में, हेल्थकेयर पर खर्च करने की क्षमता अंतहीन है क्योंकि हमारे पास इतना लंबा तरीका है. लेकिन एक विकासशील देश के रूप में, हमारे पास विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का अपना हिस्सा है. इस महामारी के बाद, स्वास्थ्य देखभाल, सामुदायिक स्वास्थ्य, स्वच्छता जैसे विषयों को अब भारत में गंभीरता से नहीं लिया गया है. मैं फरवरी में भारत में लोगों की इम्यूनिटी लग्जरी थी, लेकिन आज इम्यूनिटी आवश्यक है. अब हर कोई तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, च्यवनप्राश और कधा जानता है, लेकिन फरवरी 2020 में यह मामला नहीं था. लेकिन मुझे लगता है कि यह इवेंट पहले से ही लोगों के स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के प्रति सोच को बदल चुका है और सरकार भी उनके विचार को बदल देगी और इस स्थान पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी," वह कहते हैं. (रेबिया मिस्ट्री मुल्ला द्वारा संपादित)
एक कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी सर्वोच्च रैंकिंग कार्यकारी है. हेल्थकेयर सीईओ की भूमिका न केवल सुविधाकर्ता है बल्कि स्वास्थ्य देखभाल उद्योग के बदलाव करने वाले भी हैं. उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में प्रमुख कॉर्पोरेट निर्णय लेना, कंपनी के समग्र संचालन और संसाधनों का प्रबंधन, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, बोर्ड, कॉर्पोरेट ऑपरेशन और कंपनी का सार्वजनिक चेहरा होना शामिल हैं. अर्जुन वैद्य, सीईओ, डॉ. वैद्य'सः न्यू एज आयुर्वेद, फोर्ब्स तीसUतीस और बिज़नेस वर्ल्ड चालीसUचालीस के तहत सूचीबद्ध किया गया है. वर्षों के दौरान, वैद्य परिवार के सदस्यों ने ज्ञान पारित किया है जिसने अब आयुष मंत्रालय, आईएसओ नौ हज़ार एक:दो हज़ार पंद्रह और जीएमपी प्रमाणित विनिर्माण सुविधा के लिए एक सौ+ एफडीए द्वारा अनुमोदित आयुर्वेदिक स्वामित्व दवा के लिए अनुमोदित फॉर्मूलेशन प्रदान किए हैं जो हमें एफडीए को भी मंजूरी मिली है. डॉ. वैद्य एक तीन वर्षीय नए आयुर्वेदिक प्रोडक्ट स्टार्टअप है, जो भारत और विश्वव्यापी दोनों में आज के आधुनिक उपभोक्ता आयुर्वेद के समृद्ध, पारंपरिक भारतीय विज्ञान को लाने का प्रयास करता है. अर्जुन ने अपने विचारों को साझा किया, "यह एक बहुत जटिल प्रश्न है और मुझे लगता है कि आयुर्वेद के उदाहरण लेने के लिए विभिन्न हितधारकों से संबंधित कार्य की आवश्यकता है, महत्वपूर्ण चुनौती एक्सेस को हल कर रही है, महत्वपूर्ण प्रश्न, उपभोक्ताओं को माइनस एजुकेशन और संदेश प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है. जब हम एकजुट प्रयास के बारे में बात करते हैं, विशेष रूप से आयुर्वेद के लिए, हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है - चाहे वह ब्रांड, सरकार, हम एक उपभोक्ता के रूप में, अनुसंधान संस्थान, डॉक्टर, सभी को एक साथ आना होता है. सब कुछ एक साथ लाने के लिए महत्वपूर्ण बात सभी हितधारकों के साथ एक संक्षिप्त प्रयास है. जब हम आयुर्वेद के बारे में उद्योग या स्पेस के रूप में बात करते हैं, तो हम सही दिशा में कदम उठा रहे हैं और इस संदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं. फिर भी हम बहुत दूर हैं जहां हमें भारत जैसे देश में होना चाहिए, और इसलिए हितधारकों के माध्यम से अधिक सहयोग और दीर्घकालिक दृष्टि के माध्यम से काम करने वाले हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है, न केवल अल्पकालिक, स्वार्थपूर्ण उद्देश्य, बल्कि एक व्यापक परिप्रेक्ष्य. यह एक देश की आवश्यकता के रूप में सबसे बड़ी चुनौती है, इन समस्याओं को हल करने के लिए," वह कहता है, अर्जुन ने अपनी यात्रा को साझा किया, "यह एक सुंदर यात्रा रही है, और हम एक व्यापार और एक ब्रांड के रूप में बढ़ गए हैं. लेकिन हेल्थकेयर सेक्टर में होने के बारे में सबसे खूबसूरत बात यह है कि जीवन को प्रभावित कर रहा है और एक डिजिटल ब्रांड होने के कारण, अल्प तीन वर्षों में हमने सोलह,पाँच सौ पिन कोड में एक मिलियन से अधिक ऑर्डर पूरे किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट और अपनी उंगलियों को छूने पर देखभाल मिलता है और यह इस इंडस्ट्री का सबसे सुंदर हिस्सा है. हम उपभोक्ताओं की विशिष्ट हेल्थकेयर समस्याओं को हल करने और उनके जीवन को अब तक प्रभावित करने में सक्षम हैं जहां से हम आज बैठे हैं," वह कहता है. अर्जुन हेल्थकेयर के भविष्य के बारे में बात करता है, "मैं इसका एक बड़ा प्रस्तावक हूं क्योंकि उदाहरण के लिए, अगर आप टेली-कंसल्टेशन देखते हैं, तो उन्होंने इस महामारी में छत के माध्यम से गोली मार ली है. अब हम एक ज़ूम कॉल के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं, हालांकि, छः - आठ महीने पहले, हम इसके बारे में कभी नहीं सोचा होगा. मुझे लगता है कि डिजिटलाइज़ेशन ने जीवन बदल दिया है और उपभोक्ता व्यवहार डिजिटल की ओर बढ़ गया है. रोगी टेली-कन्सल्टेशन के माध्यम से अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं जो एक हज़ार मील दूर हो सकते हैं और डिजिटलाइज़ेशन के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले हेल्थकेयर तक पहुंच पा रहे हैं. इसकी विशाल क्षमता है, लेकिन स्वास्थ्य देखभाल के साथ, इसे सही तरीके से लाभ उठाना होगा. गुणवत्ता मानक होने चाहिए, प्रतिक्रिया तंत्र होने चाहिए, और इसे नियंत्रित या नियंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य सेवा की बात आने पर गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है. इसलिए भविष्य डिजिटल है और आश्चर्यजनक कार्य हो रहा है, लेकिन हमें प्रसार को नियंत्रित करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्ता बनाए रखा जाए," वह कहता है. "मैं सिर्फ एक उद्यमी और आयुर्वेद में विश्वास करता हूं" अर्जुन स्वास्थ्य देखभाल पर और अधिक खर्च करने के बारे में खुलता है, "मैं पॉलिसी निर्माता नहीं हूं; मैं सिर्फ एक उद्यमी हूं और आयुर्वेद में विश्वास करता हूं. मुझे लगता है कि हमारे जैसे देश में, हेल्थकेयर पर खर्च करने की क्षमता अंतहीन है क्योंकि हमारे पास इतना लंबा तरीका है. लेकिन एक विकासशील देश के रूप में, हमारे पास विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का अपना हिस्सा है. इस महामारी के बाद, स्वास्थ्य देखभाल, सामुदायिक स्वास्थ्य, स्वच्छता जैसे विषयों को अब भारत में गंभीरता से नहीं लिया गया है. मैं फरवरी में भारत में लोगों की इम्यूनिटी लग्जरी थी, लेकिन आज इम्यूनिटी आवश्यक है. अब हर कोई तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, च्यवनप्राश और कधा जानता है, लेकिन फरवरी दो हज़ार बीस में यह मामला नहीं था. लेकिन मुझे लगता है कि यह इवेंट पहले से ही लोगों के स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के प्रति सोच को बदल चुका है और सरकार भी उनके विचार को बदल देगी और इस स्थान पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी," वह कहते हैं.
अपने बेबाक निर्णय से भारतीय समाज में अपनी अलग छवि बनाने वाली धावक दुती चंद ने ओलंपिक के लिए परिपाटी से हटकर एक और कदम उठाया है. टोक्यो ओलंपिक के टिकट के लिए यह एथलीट भुवनेश्वर में लड़कों के साथ लोहा ले रही है. नेशनल कैंप से हटकर दुती भुवनेश्वर में 100 मीटर में 10. 8 से 10. 9 सेकेंड का समय निकालने वाले दो लड़कों के साथ दौड़ लगा रही हैं. दुती चंद ओलंपिक की तैयारी में लग गई हैं. दुती ने एक मीडिया से बात करते हुए ये बताया है कि वह अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए लड़कों के साथ 400 मीटर से एक किलोमीटर की दौड़ भी लगा रही हैं. दुती के मुताबिक टोकियो ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए 11. 15 सेकेंड का समय छूने के लिए उन्होंने पहली बार लड़कों के साथ ट्रेनिंग का रास्ता चुना है. कैंप में लड़कियों के साथ दौड़ लगाकर उन्हें यह समय छूने में मदद नहीं मिलती, लेकिन उन्हें लगता है कि लड़कों के साथ टक्कर लेकर वह अगले वर्ष ओलंपिक का टिकट जरूर हासिल कर लेंगी. दुती के अनुसार उन्होंने ओलंपिक केलिए यह तैयारी राज्य सरकार की मदद से नवंबर माह में शुरू की है. हालांकि टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) ओलंपिक के लिए खिलाडिय़ों की मदद केलिए है, लेकिन उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया तो राज्य सरकार उनकी मदद के लिए आगे आ गई. यही वजह है कि वह भुवनेश्वर में विशेषज्ञों की 10 सदस्यीय टीम के साथ तैयारियां कर रही हैं. राज्य में उनके स्तर की अन्य कोई एथलीट नहीं हैं जिसके चलते उनके प्रस्ताव पर सरकार ने उन्हें ट्रेनिंग के लिए लड़के उपलब्ध कराए हैं.
अपने बेबाक निर्णय से भारतीय समाज में अपनी अलग छवि बनाने वाली धावक दुती चंद ने ओलंपिक के लिए परिपाटी से हटकर एक और कदम उठाया है. टोक्यो ओलंपिक के टिकट के लिए यह एथलीट भुवनेश्वर में लड़कों के साथ लोहा ले रही है. नेशनल कैंप से हटकर दुती भुवनेश्वर में एक सौ मीटर में दस. आठ से दस. नौ सेकेंड का समय निकालने वाले दो लड़कों के साथ दौड़ लगा रही हैं. दुती चंद ओलंपिक की तैयारी में लग गई हैं. दुती ने एक मीडिया से बात करते हुए ये बताया है कि वह अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए लड़कों के साथ चार सौ मीटर से एक किलोमीटर की दौड़ भी लगा रही हैं. दुती के मुताबिक टोकियो ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए ग्यारह. पंद्रह सेकेंड का समय छूने के लिए उन्होंने पहली बार लड़कों के साथ ट्रेनिंग का रास्ता चुना है. कैंप में लड़कियों के साथ दौड़ लगाकर उन्हें यह समय छूने में मदद नहीं मिलती, लेकिन उन्हें लगता है कि लड़कों के साथ टक्कर लेकर वह अगले वर्ष ओलंपिक का टिकट जरूर हासिल कर लेंगी. दुती के अनुसार उन्होंने ओलंपिक केलिए यह तैयारी राज्य सरकार की मदद से नवंबर माह में शुरू की है. हालांकि टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम ओलंपिक के लिए खिलाडिय़ों की मदद केलिए है, लेकिन उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया तो राज्य सरकार उनकी मदद के लिए आगे आ गई. यही वजह है कि वह भुवनेश्वर में विशेषज्ञों की दस सदस्यीय टीम के साथ तैयारियां कर रही हैं. राज्य में उनके स्तर की अन्य कोई एथलीट नहीं हैं जिसके चलते उनके प्रस्ताव पर सरकार ने उन्हें ट्रेनिंग के लिए लड़के उपलब्ध कराए हैं.
अरोड़ा ने बताया कि आवासन मण्डल के 7075 आवास खरीदने के लिये इच्छुक बोलीदाता ई-ऑक्शन के माध्यम से रिवर्स बिडिंग कर सकेंगे जो 30 सितम्बर से शुरू होगी। बोलीदाता आरक्षित मूल्य के 0. 5 परसेंटेज पॉईंट के गुणांक पर ऋणात्मक बोली लगा सकेंगे। रिवर्स बिडिंग के लिये 0 से 25 प्रतिशत और 0 से 50 प्रतिशत की 2 श्रेणियां बनाई गई है। जो आवेदक न्यूनतम छूट के साथ बोली लगायेगा उसे आवास आवंटित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि ई-ऑक्शन विंडो बन्द होने के अगले दिन सफल बोलीदाताओं को 10 प्रतिशत राशि 3 दिन में जमा करवाने का मांग पत्र जारी कर दिया जायेगा। शेष राशि 60 दिन में जमा करवानी होगी। पूरी राशि या जरूरी दस्तावेज जमा करवाने के बाद 7 दिन के अन्दर सफल बोलीदाताओं को आवास का पजेशन दे दिया जायेगा। अरोड़ा ने बताया कि ई-ऑक्शन में शामिल किये जाने वाले सभी आवासों का आरक्षित मूल्य 30 अगस्त तक तय कर दिया जायेगा। जिसके बाद इन आवासों अथवा फ्लैटस के नम्बर, फोटोग्राफ, नक्शे आदि की जानकारी मण्डल की वेबसाइट पर 6 सितम्बर से आमजन के लिये उपलब्ध करवा दी जायेगी। उन्होंने बताया कि ई-ऑक्शन में ई-मित्र केन्द्रों से भी बोली लगाई जा सके इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से बात की जा रही है। राजस्थान में रिवर्स बिडिंग के माध्यम से आवासों की बिक्री का यह पहला मौका है। इस पहल से आमजन को आवासन मण्डल के फ्लैट और आवास बेहद आकर्षक कीमतों में उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, मण्डल को भी अनिस्तारित सम्पत्तियों के निस्तारण में मदद मिलेगी। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा को राजस्थान आवासन मण्डल में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अभिनव नवाचार करने के लिये सम्मानित किया है। नेशनल रियल इस्टेट डवलपमेंट काउंसिल के होटल ताज पैलेस नई दिल्ली में आयोजित 15वें राष्ट्रीय अधिवेशन में यह सम्मान प्रदान किया गया। अरोड़ा की ओर से मण्डल के मुख्य अभियन्ता के. सी. मीणा ने यह सम्मान ग्रहण किया।
अरोड़ा ने बताया कि आवासन मण्डल के सात हज़ार पचहत्तर आवास खरीदने के लिये इच्छुक बोलीदाता ई-ऑक्शन के माध्यम से रिवर्स बिडिंग कर सकेंगे जो तीस सितम्बर से शुरू होगी। बोलीदाता आरक्षित मूल्य के शून्य. पाँच परसेंटेज पॉईंट के गुणांक पर ऋणात्मक बोली लगा सकेंगे। रिवर्स बिडिंग के लिये शून्य से पच्चीस प्रतिशत और शून्य से पचास प्रतिशत की दो श्रेणियां बनाई गई है। जो आवेदक न्यूनतम छूट के साथ बोली लगायेगा उसे आवास आवंटित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि ई-ऑक्शन विंडो बन्द होने के अगले दिन सफल बोलीदाताओं को दस प्रतिशत राशि तीन दिन में जमा करवाने का मांग पत्र जारी कर दिया जायेगा। शेष राशि साठ दिन में जमा करवानी होगी। पूरी राशि या जरूरी दस्तावेज जमा करवाने के बाद सात दिन के अन्दर सफल बोलीदाताओं को आवास का पजेशन दे दिया जायेगा। अरोड़ा ने बताया कि ई-ऑक्शन में शामिल किये जाने वाले सभी आवासों का आरक्षित मूल्य तीस अगस्त तक तय कर दिया जायेगा। जिसके बाद इन आवासों अथवा फ्लैटस के नम्बर, फोटोग्राफ, नक्शे आदि की जानकारी मण्डल की वेबसाइट पर छः सितम्बर से आमजन के लिये उपलब्ध करवा दी जायेगी। उन्होंने बताया कि ई-ऑक्शन में ई-मित्र केन्द्रों से भी बोली लगाई जा सके इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से बात की जा रही है। राजस्थान में रिवर्स बिडिंग के माध्यम से आवासों की बिक्री का यह पहला मौका है। इस पहल से आमजन को आवासन मण्डल के फ्लैट और आवास बेहद आकर्षक कीमतों में उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, मण्डल को भी अनिस्तारित सम्पत्तियों के निस्तारण में मदद मिलेगी। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा को राजस्थान आवासन मण्डल में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अभिनव नवाचार करने के लिये सम्मानित किया है। नेशनल रियल इस्टेट डवलपमेंट काउंसिल के होटल ताज पैलेस नई दिल्ली में आयोजित पंद्रहवें राष्ट्रीय अधिवेशन में यह सम्मान प्रदान किया गया। अरोड़ा की ओर से मण्डल के मुख्य अभियन्ता के. सी. मीणा ने यह सम्मान ग्रहण किया।
आजमगढ़ जिला कारागार में एक दिन पूर्व जेल प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में चार मोबाइल मिले हैं। इन मोबाइल में दो में सिम लगे थे जबकि दो फोन में सिम नहीं थे। जेल प्रशासन लगातार कारागार में छापेमारी करा रहा है जिससे जेल से किसी तरह की अवैध गतिविधि संचालित न होने पाए। इस मामले में जेलर विकास कटियार ने सिधारी थाने में अज्ञात के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। सिधारी थाने में दर्ज मुकदमें की पुष्टि इंस्पेक्टर ने की है। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कारागार में कई फोन मिले जिसका मुकदमा सिधारी थाने में दर्ज है। जेल प्रशासन का कहना है कि बरामद मोबाइल को कैदियों ने जमीन में गाड़कर रखा था जिससे काफी खोजबीन के बाद निकाला जा सका। जेल प्रशासन का यह अभियान लगातार चलता रहेगा। जिन फोन में सिम लगे हैं, उनका सीडीआर निकाल कर आरोपियों की पहचान की जाएगी। जिले के डीएम विशाल भारद्वाज और एसपी अनुराग आर्य ने 26 जुलाई को जेल में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 12 मोबाइल के साथ ही 97 गांजे की पुड़िया भी बरामद हुई थी। मामले में शासन ने जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर और दो बंदी रक्षकों सहित पांच लोगों को निलंबित भी किया था। आजमगढ़ जेल की गिनती प्रदेश के संवेदनशील जेलों में होती है। ऐसे में जेल प्रशासन जेल में फोन को लेकर सतर्कता बरत रहा है, जिससे जेल से चलने वाले मोबाइल को रोका जा सके। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आजमगढ़ जिला कारागार में एक दिन पूर्व जेल प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में चार मोबाइल मिले हैं। इन मोबाइल में दो में सिम लगे थे जबकि दो फोन में सिम नहीं थे। जेल प्रशासन लगातार कारागार में छापेमारी करा रहा है जिससे जेल से किसी तरह की अवैध गतिविधि संचालित न होने पाए। इस मामले में जेलर विकास कटियार ने सिधारी थाने में अज्ञात के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। सिधारी थाने में दर्ज मुकदमें की पुष्टि इंस्पेक्टर ने की है। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कारागार में कई फोन मिले जिसका मुकदमा सिधारी थाने में दर्ज है। जेल प्रशासन का कहना है कि बरामद मोबाइल को कैदियों ने जमीन में गाड़कर रखा था जिससे काफी खोजबीन के बाद निकाला जा सका। जेल प्रशासन का यह अभियान लगातार चलता रहेगा। जिन फोन में सिम लगे हैं, उनका सीडीआर निकाल कर आरोपियों की पहचान की जाएगी। जिले के डीएम विशाल भारद्वाज और एसपी अनुराग आर्य ने छब्बीस जुलाई को जेल में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में बारह मोबाइल के साथ ही सत्तानवे गांजे की पुड़िया भी बरामद हुई थी। मामले में शासन ने जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर और दो बंदी रक्षकों सहित पांच लोगों को निलंबित भी किया था। आजमगढ़ जेल की गिनती प्रदेश के संवेदनशील जेलों में होती है। ऐसे में जेल प्रशासन जेल में फोन को लेकर सतर्कता बरत रहा है, जिससे जेल से चलने वाले मोबाइल को रोका जा सके। This website follows the DNPA Code of Ethics.
3 जनवरी रविवार की शाम पांच बजे अलवर जिले के शाहजहांपुर-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों पर हरियाणा पुलिस ने भीषण आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। रेवाड़ी में दिल्ली-जयपुर हाइवे पर स्थित खेड़ा बॉर्डर और संगवाड़ी से किसानों के कुछ जत्थों ने आज दिल्ली कूच किया, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें धारूहेड़ा के पास रोक दिया। इसके बाद हरियाणा पुलिस ने एनएच-8 हाईवे पर ट्रक और कंटेनर आड़ा-तिरछा करके एक मजबूत और अस्थायी बैरिकेड बना दिया। जब दिल्ली कूच का मन बनाकर निकले आंदोलनकारी किसानों ने कंटेनर हटाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे। फिलहाल हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। जबकि सभी आंदोलनरत किसानों को हरियाणा में धारूहेड़ा के पास रोका गया है। वहीं हाईवे पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव के बाद वाहनों का लगभग पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। बता दें कि ये सभी किसान दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए रवाना हुए थे और हरियाणा के रास्ते दिल्ली पहुंचना चाह रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने खट्टर नामक बाधा पार करने से पहले ही उन्हें रोक दिया है। इससे पहले 31 दिसंबर गुरुवार को भी राजस्थान में किसानों के एक जत्थे ने राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर शाहजहांपुर आने की कोशिश की थी, तब करीब एक दर्जन ट्रैक्टरों ने हरियाणा पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए हरियाणा में प्रवेश कर लिया था और दिल्ली की तरफ कूच कर गए थे। उधर, पंजाब के संगरूर जिले में एक भाजपा नेता के सभा में जाने का विरोध कर रहे AIKMS कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया है। कई लोग इस लाठीचार्ज में घायल हुए हैं। एक कार्यकर्ता को सर में चोट आई है।
तीन जनवरी रविवार की शाम पांच बजे अलवर जिले के शाहजहांपुर-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों पर हरियाणा पुलिस ने भीषण आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। रेवाड़ी में दिल्ली-जयपुर हाइवे पर स्थित खेड़ा बॉर्डर और संगवाड़ी से किसानों के कुछ जत्थों ने आज दिल्ली कूच किया, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें धारूहेड़ा के पास रोक दिया। इसके बाद हरियाणा पुलिस ने एनएच-आठ हाईवे पर ट्रक और कंटेनर आड़ा-तिरछा करके एक मजबूत और अस्थायी बैरिकेड बना दिया। जब दिल्ली कूच का मन बनाकर निकले आंदोलनकारी किसानों ने कंटेनर हटाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे। फिलहाल हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। जबकि सभी आंदोलनरत किसानों को हरियाणा में धारूहेड़ा के पास रोका गया है। वहीं हाईवे पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव के बाद वाहनों का लगभग पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। बता दें कि ये सभी किसान दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए रवाना हुए थे और हरियाणा के रास्ते दिल्ली पहुंचना चाह रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने खट्टर नामक बाधा पार करने से पहले ही उन्हें रोक दिया है। इससे पहले इकतीस दिसंबर गुरुवार को भी राजस्थान में किसानों के एक जत्थे ने राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर शाहजहांपुर आने की कोशिश की थी, तब करीब एक दर्जन ट्रैक्टरों ने हरियाणा पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए हरियाणा में प्रवेश कर लिया था और दिल्ली की तरफ कूच कर गए थे। उधर, पंजाब के संगरूर जिले में एक भाजपा नेता के सभा में जाने का विरोध कर रहे AIKMS कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया है। कई लोग इस लाठीचार्ज में घायल हुए हैं। एक कार्यकर्ता को सर में चोट आई है।
छ्वन्रूस्॥ श्वष्ठक्कक्त्र : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (अक्षेस) का स्वच्छता सर्वेक्षण फरवरी में होगा। जनवरी तक का शेड्यूल शहरी विकास मंत्रालय ने जारी कर दिया है। इस तरह, जमशेदपुर अक्षेस को तैयारी करने के लिए और मोहलत मिल गई है। जमशेदपुर इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन की दौड़ में काफी आगे चल रहा है। स्वच्छता एप डाउनलोड और इसके जरिए सफाई के मामले में जमशेदपुर को 400 में 400 अंक मिले हैं। सिटीजन फीडबैक में जमशेदपुर देश में तीसरे नंबर पर है। शहर को स्वच्छतम शहर बनाने में जमशेदपुर अक्षेस के विशेष अधिकारी संजय कुमार पूरी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने न केवल जमशेदपुर अक्षेस को रैंकिंग में काफी ऊपर ले जाने की पहल की है बल्कि कोल्हान के अन्य नगर निकायों को भी वो टिप्स दे रहे हैं। आनस्पाट कंपोस्टिंग के लिए उन्होंने देश की नामी कंपनियों के साथ कार्यशाला में कोल्हान के सभी नगर निकायों के विशेष अधिकारियों और नगर प्रबंधकों को बुलाया। स्वच्छता सर्वेक्षण में किस तरह बेहतर रैंकिंग हासिल की जाए इसे लेकर वो चार मर्तबा कार्यशाला करा चुके हैं। इन कार्यशालाओं में कोल्हान के सभी नगर निकायों के अधिकारी आए। हाल ही में दिल्ली से आए स्वच्छता सर्वेक्षण के नोडल अधिकारी अनिल प्रकाश और सुनील कुमार के साथ होने वाली बैठक में भी विशेष अधिकारी संजय कुमार ने सभी नगर निकायों के अधिकारियों को बुलाया था। यही नहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जमशेदपुर अक्षेस ने पतंग उत्सव, सेल्फी विद डस्टबिन, एप डाउनलोड प्रतियोगिता आदि कराई है। शहर में सार्वजनिक स्थलों की चित्रकारी से परिपूर्ण दीवारें सर्वेक्षण का पता दे रही हैं।
छ्वन्रूस्॥ श्वष्ठक्कक्त्र : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति का स्वच्छता सर्वेक्षण फरवरी में होगा। जनवरी तक का शेड्यूल शहरी विकास मंत्रालय ने जारी कर दिया है। इस तरह, जमशेदपुर अक्षेस को तैयारी करने के लिए और मोहलत मिल गई है। जमशेदपुर इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन की दौड़ में काफी आगे चल रहा है। स्वच्छता एप डाउनलोड और इसके जरिए सफाई के मामले में जमशेदपुर को चार सौ में चार सौ अंक मिले हैं। सिटीजन फीडबैक में जमशेदपुर देश में तीसरे नंबर पर है। शहर को स्वच्छतम शहर बनाने में जमशेदपुर अक्षेस के विशेष अधिकारी संजय कुमार पूरी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने न केवल जमशेदपुर अक्षेस को रैंकिंग में काफी ऊपर ले जाने की पहल की है बल्कि कोल्हान के अन्य नगर निकायों को भी वो टिप्स दे रहे हैं। आनस्पाट कंपोस्टिंग के लिए उन्होंने देश की नामी कंपनियों के साथ कार्यशाला में कोल्हान के सभी नगर निकायों के विशेष अधिकारियों और नगर प्रबंधकों को बुलाया। स्वच्छता सर्वेक्षण में किस तरह बेहतर रैंकिंग हासिल की जाए इसे लेकर वो चार मर्तबा कार्यशाला करा चुके हैं। इन कार्यशालाओं में कोल्हान के सभी नगर निकायों के अधिकारी आए। हाल ही में दिल्ली से आए स्वच्छता सर्वेक्षण के नोडल अधिकारी अनिल प्रकाश और सुनील कुमार के साथ होने वाली बैठक में भी विशेष अधिकारी संजय कुमार ने सभी नगर निकायों के अधिकारियों को बुलाया था। यही नहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जमशेदपुर अक्षेस ने पतंग उत्सव, सेल्फी विद डस्टबिन, एप डाउनलोड प्रतियोगिता आदि कराई है। शहर में सार्वजनिक स्थलों की चित्रकारी से परिपूर्ण दीवारें सर्वेक्षण का पता दे रही हैं।
भीम थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर तालाब में नहाने उतारा युवक डूब गया। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से युवक की तलाश शुरू किया। पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाकर 27 घंटे बाद शव को तालाब से बाहर निकाला। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। हेड कांस्टेबल प्रवीण सिंह ने बताया कि पाली रायपुर के बगड़ी कलालिया निवासी गजेंद्र सिंह (22) तालाब में डूब गया। वह लाखेला का तालाब गांव में अपने मामा चेतन सिंह की लड़कियों की शादी में शामिल होने आया था। दोपहर करीब 1 बजे ननिहाल के दोस्तों के साथ तालाब पर नहाने के लिए गया था। तैरते हुए तालाब में वह बीच पानी में चला गया। गहरे पानी में जाकर डूब गया। तालाब पर कपड़े धो रही महिलाओं ने उसे डूबने देखकर शोर मचाया। दोस्तों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह बचा नहीं पाए। युवक के डूबने का पता चलन पर ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। देर शाम तक युवक नहीं मिला। बुधवार सुबह दोबारा गोताखोर युवक की तलाश में तालाब में उतरी। दोपहर करीब 4 बजे गजेंद्र का शव तालाब से बाहर निकाला गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भीम थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर तालाब में नहाने उतारा युवक डूब गया। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से युवक की तलाश शुरू किया। पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाकर सत्ताईस घंटाटे बाद शव को तालाब से बाहर निकाला। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। हेड कांस्टेबल प्रवीण सिंह ने बताया कि पाली रायपुर के बगड़ी कलालिया निवासी गजेंद्र सिंह तालाब में डूब गया। वह लाखेला का तालाब गांव में अपने मामा चेतन सिंह की लड़कियों की शादी में शामिल होने आया था। दोपहर करीब एक बजे ननिहाल के दोस्तों के साथ तालाब पर नहाने के लिए गया था। तैरते हुए तालाब में वह बीच पानी में चला गया। गहरे पानी में जाकर डूब गया। तालाब पर कपड़े धो रही महिलाओं ने उसे डूबने देखकर शोर मचाया। दोस्तों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह बचा नहीं पाए। युवक के डूबने का पता चलन पर ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। देर शाम तक युवक नहीं मिला। बुधवार सुबह दोबारा गोताखोर युवक की तलाश में तालाब में उतरी। दोपहर करीब चार बजे गजेंद्र का शव तालाब से बाहर निकाला गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्लीः 26 साल पहले जब बीजेपी के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी का रथ बिहार में घुसा था, तो बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया था। उन्होंने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक के सफर पर निकले आडवाणी के रथ को रोकने के लिए 2 अफसरों को चुना था। उन्हीं 2 अफसरों में से एक, राज कुमार सिंह उर्फ आर के सिंह ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें बिजली, नवीन एवं नवीनीकृत ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। अक्टूबर 1990 में आर के सिंह बिहार सरकार में सेक्रटरी के तौर पर तैनात थे। वह राज्य सरकार के विशेष चॉपर में IPS ऑफिसर रामेश्वर ओरांव बैठकर सुबह ही राजधानी पटना से समस्तीपुर पहुंचे। यह आर के सिंह ही थे जिन्होंने उस सर्किट हाउस का दरवाजा खटखटाया जहां लालकृष्ण आडवाणी रुके हुए थे। उन्होंने आडवाणी से कहा कि उनके पास उनकी गिरफ्तारी का वॉरंट है। ओरांव और सिंह उसके बाद आडवाणी को लेकर पटना से मासनजेर गेस्ट हाउस पहुंचे जो झारखंड के दुमका जिले में स्थित है। आर के सिंह बिहार के आरा से लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा वह संसद के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पेंशन, जन शिकायत और कानून और न्याय संबंधी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं। राज कुमार सिंह 1975 बैच (बिहार काडर) के पूर्व IAS अधिकारी हैं। 20 दिसंबर 1952 को जन्मे सिंह ने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने पुलिस आधुनिकीकरण और जेल आधुनिकीकरण की योजनाओं में भी खासा योगदान किया। इसके अलावा वह आपदा प्रबंधन का ढांचा तैयार करने में भी शामिल रहे। यूपीए सरकार के कार्यकाल में वह सचिव रक्षा उत्पादन रहे। जब आडवाणी गृह मंत्री थे तब सिंह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव थे। इसके अलावा बिहार सरकार के विभागों में भी उनकी सेवाएं रहीं। इन्होंने पुलिस और जेल आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन के लिए ढांचा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा आर के सिंह ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई की है फिर कानून में बैचलर डिग्री हासिल की। वह नीदरलैंड की RVB ड्वेल्फ यूनिवर्सटी से भी पढ़ाई कर चुके हैं।
नई दिल्लीः छब्बीस साल पहले जब बीजेपी के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी का रथ बिहार में घुसा था, तो बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया था। उन्होंने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक के सफर पर निकले आडवाणी के रथ को रोकने के लिए दो अफसरों को चुना था। उन्हीं दो अफसरों में से एक, राज कुमार सिंह उर्फ आर के सिंह ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें बिजली, नवीन एवं नवीनीकृत ऊर्जा राज्यमंत्री बनाया गया है। अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे में आर के सिंह बिहार सरकार में सेक्रटरी के तौर पर तैनात थे। वह राज्य सरकार के विशेष चॉपर में IPS ऑफिसर रामेश्वर ओरांव बैठकर सुबह ही राजधानी पटना से समस्तीपुर पहुंचे। यह आर के सिंह ही थे जिन्होंने उस सर्किट हाउस का दरवाजा खटखटाया जहां लालकृष्ण आडवाणी रुके हुए थे। उन्होंने आडवाणी से कहा कि उनके पास उनकी गिरफ्तारी का वॉरंट है। ओरांव और सिंह उसके बाद आडवाणी को लेकर पटना से मासनजेर गेस्ट हाउस पहुंचे जो झारखंड के दुमका जिले में स्थित है। आर के सिंह बिहार के आरा से लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा वह संसद के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पेंशन, जन शिकायत और कानून और न्याय संबंधी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं। राज कुमार सिंह एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर बैच के पूर्व IAS अधिकारी हैं। बीस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ बावन को जन्मे सिंह ने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने पुलिस आधुनिकीकरण और जेल आधुनिकीकरण की योजनाओं में भी खासा योगदान किया। इसके अलावा वह आपदा प्रबंधन का ढांचा तैयार करने में भी शामिल रहे। यूपीए सरकार के कार्यकाल में वह सचिव रक्षा उत्पादन रहे। जब आडवाणी गृह मंत्री थे तब सिंह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव थे। इसके अलावा बिहार सरकार के विभागों में भी उनकी सेवाएं रहीं। इन्होंने पुलिस और जेल आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन के लिए ढांचा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा आर के सिंह ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई की है फिर कानून में बैचलर डिग्री हासिल की। वह नीदरलैंड की RVB ड्वेल्फ यूनिवर्सटी से भी पढ़ाई कर चुके हैं।
पाल निगली (Paul Niggli; १८८२ - १९५३) स्विट्जरलैण्ड के क्रिस्टलवैज्ञानिक थे। वे एक्स-किरण क्रिस्टलिकी में अग्रणी थे। इंजीनियरी की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् इन्होंने खनिज (mineralogy) एवं प्रस्तरविज्ञान (petrology) का अध्ययन किया। इनका कार्यक्षेत्र क्रिस्टलिकी (crystallography) या खनिज एवं प्रस्तरविज्ञान ही रहा है। इन्होंने खनिज की रचना तथा उद्गम ज्ञात करने के लिए भौतिक रसायन के सिद्धान्तों का उपयोग किया। इन्होंने रासायनिक विश्लेषणों की गणना द्वारा नए मान उपलब्ध किए, जिन्हें इन्हीं के नाम पर निगली मान (Niggly values) कहते हैं। शिलाओं के रासायनिक संघटन प्रदर्शित करने के लिए इन्होंने लेखाचित्रीय विधियों का निर्माण किया। यूरोप के कई विश्वविद्यालयों ने इन्हें डॉक्टरेट को सम्मानित उपाधि से विभूषित किया। अमरीका तथा रीओ डे जानेरो की खनिज संस्थानों ने आपको पदक देकर सम्मानित किया। श्रेणीःवैज्ञानिक. 0 संबंधों।
पाल निगली स्विट्जरलैण्ड के क्रिस्टलवैज्ञानिक थे। वे एक्स-किरण क्रिस्टलिकी में अग्रणी थे। इंजीनियरी की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् इन्होंने खनिज एवं प्रस्तरविज्ञान का अध्ययन किया। इनका कार्यक्षेत्र क्रिस्टलिकी या खनिज एवं प्रस्तरविज्ञान ही रहा है। इन्होंने खनिज की रचना तथा उद्गम ज्ञात करने के लिए भौतिक रसायन के सिद्धान्तों का उपयोग किया। इन्होंने रासायनिक विश्लेषणों की गणना द्वारा नए मान उपलब्ध किए, जिन्हें इन्हीं के नाम पर निगली मान कहते हैं। शिलाओं के रासायनिक संघटन प्रदर्शित करने के लिए इन्होंने लेखाचित्रीय विधियों का निर्माण किया। यूरोप के कई विश्वविद्यालयों ने इन्हें डॉक्टरेट को सम्मानित उपाधि से विभूषित किया। अमरीका तथा रीओ डे जानेरो की खनिज संस्थानों ने आपको पदक देकर सम्मानित किया। श्रेणीःवैज्ञानिक. शून्य संबंधों।
कोरोना वायरस को लेकर अब भी लोगों में कई भ्रांतियां हैं। इनमें से एक यह भी है कि फ्रिज का ठंडा पानी पीने से कोरोना की बीमारी जकड़ सकती है। इस वजह से लोग मटकों की तरफ भाग रहे हैं। इस बारे में डॉक्टर कहते हैं कि फ्रिज के पानी से कोरोना का कोई लेनादेना नहीं है। अप्रैल खत्म हो चुका है और मई भी लगभग आधा बीत चुका है। ऐसे में पिछले साल तो लोग फ्रिज के ठंडे पानी का काफी इस्तेमाल करने लगे थे। इस बार लोग खौफ की वजह से ऐसा करने से बच रहे हैं। काफी लोगों को डर है कि फ्रिज के ठंडे पानी से कोरोना हो सकता है। इस वजह से उन्होंने फ्रिज की जगह मटके को तरजीह दी है। इस बारे में जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपी़ सिंह ने कहा कि मौसम में बदलाव हो रहा है। इस वजह से सर्दी खांसी जकाम जैसी बीमारियां जकड़ सकती हैं। फ्रिज के ठंडे पानी से कोरोना नहीं हो सकता है लेकिन बदलते मौसम में फ्रिज का ठंडा पानी आपकी तबियत खराब कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे सर्दी-जुकाम हो सकता है, जिससे आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे में कोरोना वायरस आसानी से शरीर पर अटैक कर सकता है। लोगों को फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचें। मटके के पानी का तापमान ज्यादा कम नहीं होता है। इस वजह से उससे ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। वहीं, लॉकडाउन के इस दौर में सड़क किनारे मटके बेचने वाले बैठने लगे हैं। बता दें कि गाजियाबाद में कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 10 मई को जिले में 4 नए केस सामने आए थे। जबकि 11 मई को भी जनपद में 4 नए मामले सामने आए। इस समय जनपद में कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या कुल 141 हो चुकी है। इनमें से 83 लोग पूरी तरह स्वस्थ होने पर अपने घर जा चुके हैं। 56 लोगों का वर्तमान में अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
कोरोना वायरस को लेकर अब भी लोगों में कई भ्रांतियां हैं। इनमें से एक यह भी है कि फ्रिज का ठंडा पानी पीने से कोरोना की बीमारी जकड़ सकती है। इस वजह से लोग मटकों की तरफ भाग रहे हैं। इस बारे में डॉक्टर कहते हैं कि फ्रिज के पानी से कोरोना का कोई लेनादेना नहीं है। अप्रैल खत्म हो चुका है और मई भी लगभग आधा बीत चुका है। ऐसे में पिछले साल तो लोग फ्रिज के ठंडे पानी का काफी इस्तेमाल करने लगे थे। इस बार लोग खौफ की वजह से ऐसा करने से बच रहे हैं। काफी लोगों को डर है कि फ्रिज के ठंडे पानी से कोरोना हो सकता है। इस वजह से उन्होंने फ्रिज की जगह मटके को तरजीह दी है। इस बारे में जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपी़ सिंह ने कहा कि मौसम में बदलाव हो रहा है। इस वजह से सर्दी खांसी जकाम जैसी बीमारियां जकड़ सकती हैं। फ्रिज के ठंडे पानी से कोरोना नहीं हो सकता है लेकिन बदलते मौसम में फ्रिज का ठंडा पानी आपकी तबियत खराब कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे सर्दी-जुकाम हो सकता है, जिससे आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे में कोरोना वायरस आसानी से शरीर पर अटैक कर सकता है। लोगों को फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचें। मटके के पानी का तापमान ज्यादा कम नहीं होता है। इस वजह से उससे ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। वहीं, लॉकडाउन के इस दौर में सड़क किनारे मटके बेचने वाले बैठने लगे हैं। बता दें कि गाजियाबाद में कोविड-उन्नीस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दस मई को जिले में चार नए केस सामने आए थे। जबकि ग्यारह मई को भी जनपद में चार नए मामले सामने आए। इस समय जनपद में कोविड-उन्नीस संक्रमित मरीजों की संख्या कुल एक सौ इकतालीस हो चुकी है। इनमें से तिरासी लोग पूरी तरह स्वस्थ होने पर अपने घर जा चुके हैं। छप्पन लोगों का वर्तमान में अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
शिवपुरी। 33 के. व्ही. रातौर एवं 11 के. व्ही. टी. व्ही. टावर एवं खुड़ा फीडर पर 12 मार्च को आवश्यक रख-रखाव के कार्य किए जाने के कारण विद्युत प्रवाह बंद रहेगा। उक्त 33 के. व्ही. रातौर फीडर के बंद रहने से प्रातः 10 बजे से शाम 4 बजे तक 33/11 केव्ही उपकेन्द्र रातौर एवं लालगड़ से जुड़े समस्त क्षेत्र प्रभावित रहेंगे तथा 11 के. व्ही. टीव्ही टावर फीडर के बंद रहने से प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक टीव्ही टावर रोड, पटेल नगर, विवेकानंदपुरम, खुडा, बीटीपी स्कूल, गौतम बिहार आदि क्षेत्र प्रभावित रहेंगे।
शिवपुरी। तैंतीस के. व्ही. रातौर एवं ग्यारह के. व्ही. टी. व्ही. टावर एवं खुड़ा फीडर पर बारह मार्च को आवश्यक रख-रखाव के कार्य किए जाने के कारण विद्युत प्रवाह बंद रहेगा। उक्त तैंतीस के. व्ही. रातौर फीडर के बंद रहने से प्रातः दस बजे से शाम चार बजे तक तैंतीस/ग्यारह केव्ही उपकेन्द्र रातौर एवं लालगड़ से जुड़े समस्त क्षेत्र प्रभावित रहेंगे तथा ग्यारह के. व्ही. टीव्ही टावर फीडर के बंद रहने से प्रातः सात बजे से दोपहर बारह बजे तक टीव्ही टावर रोड, पटेल नगर, विवेकानंदपुरम, खुडा, बीटीपी स्कूल, गौतम बिहार आदि क्षेत्र प्रभावित रहेंगे।
Girl Child Labour Rescued: एक एनजीओ से मिली जानकारी के बाद डीसीडब्ल्यू ने बाल श्रम के लिए मजबूर की गई 14 साल की एक लड़की को बचाया है. जो कि झारखंड की रहने वाली है. Delhi News: दिल्ली महिला आयोग ने बाल श्रम के लिए मजबूर की गई 14 साल की एक लड़की को बचाया है. 5 अगस्त को दिल्ली महिला आयोग को एक संगठन 'सिल्वर सेवन' से शिकायत मिली, जिसमें बताया गया कि दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 इलाके में एक 14 साल की लड़की को घरेलू सहायिका के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था. आयोग ने तुरंत संस्था के कर्मचारियों से संपर्क किया और उनके साथ स्थानीय पुलिस स्टेशन गए. उन्होंने बताया कि लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ एक घर में रखा जा रहा था और उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि उन्हें सटीक पता नहीं पता, लेकिन वह टीम के साथ इसका पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं . 14 साल की अनाथ झारखण्डी लड़की को दिल्ली के GK 1 की कोठी में जबरन बंदी बनवाके काम करवाते थे। लड़की को बहुत मारते भी थे और उसे कोई पैसे भी नहीं देते थे। हमको जैसे ही NGO ने उसके बारे में बताया, हमने लड़की को रेस्क्यू करवाया। पुलिस को नोटिस इशू किया है। FIR करें और अरेस्ट तुरंत हो! दिल्ली महिला आयोग की टीम दिल्ली पुलिस अधिकारियों और संगठन के साथ ग्रेटर कैलाश-1 में घटनास्थल पर गई और 14 वर्षीय लड़की को बचाया. उसे पुलिस स्टेशन लाया गया, वह बहुत डरी हुई और सदमे में थी. वह उस घर में वापस न भेजे जाने के लिए गुहार लगा रही थी. लड़की ने बताया कि वह झारखंड के गिरिडीह जिले की रहने वाली है और उसने 7वीं कक्षा तक पढ़ाई की है. जब वह बहुत छोटी थी तभी उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई और उसके परिवार में 2 भाई और 2 बहनें हैं. उसने बताया कि उसके भाई और भाभी उसे परेशान करते थे और अक्सर उसकी पिटाई करते थे, इसलिए वह अपने घर से भाग गई और 2021 में अपने पड़ोसी के साथ दिल्ली आ गई, जिसने उसे राजधानी में नौकरी दिलाने का वादा किया था. उसने बताया कि गोविंद नाम के व्यक्ति के जरिये उसे घरेलू काम करने के लिए एक घर में रखा गया था और वह डेढ़ साल से अधिक समय से वहां रह रही थी. ये भी पढ़ेंः Haryana Violence: कांग्रेस डेलिगेशन को नूंह में नहीं दी गई एंट्री, क्या कल AAP की भी होगी No Entry? लड़की ने बताया कि जिस परिवार के साथ वह काम कर रही थी, उसमें चार सदस्य थे - मकान मालिक, उसकी पत्नी और उनके 18 और 13 साल के दो लड़के. उसने कहा कि वह घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थी और उसे घर का सारा काम करना पड़ता था. उसने कहा कि मालकिन नियमित रूप से उसके साथ दुर्व्यवहार करती थी और उसकी पिटाई करती थी. लड़की को मालकिन ने बताया कि उसे काफी पैसे खर्च करके खरीदा गया है और वह उसे जाने नहीं देंगे. उसने कहा कि उसे मात्र 3000-4000 प्रति माह दिए जाते थे और वह भी उसे नहीं सौंपे जाते थे. बल्कि मालकिन द्वारा उसके मासिक राशन और अन्य आवश्यक चीजों को खरीदने के लिए खर्च किया जाता था. लड़की ने बताया कि एक बार उसने अपने चाचा को झारखंड से बुलाया कि वह उसे ले जाए, लेकिन मालकिन ने उसे डांटा और उसे जाने नहीं दिया. उसने कहा कि उसने अपनी आपबीती अपने घर आए एक खाना बनाने वाले को बताई और उसने इसकी जानकारी एक एनजीओ को दी. लड़की ने कहा कि वह घर में नहीं रहना चाहती. रेस्क्यू के दौरान घर में एक और घरेलू सहायिका भी मिली. उसने बताया कि वह तीन महीने से घर में काम कर रही थी और वह भी नौकरी छोड़ कर जाना चाहती थी, लेकिन मालकिन ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी. हालांकि उसने मालिकों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई. दिल्ली पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज किया. अब लड़की को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और फिलहाल उसे आश्रय गृह में रखा गया है. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने कहा कि हमें एक लड़की को एक घर में जबरन रखे जाने की शिकायत मिली. उसका शोषण किया जा रहा था और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे कैद करके रखा गया था. हमने तुरंत यह सुनिश्चित किया कि दिल्ली पुलिस की मदद से लड़की को बचाया जाए. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है. हम मामले में नोटिस जारी कर रहे हैं. यह शर्मनाक है कि जीके 1 के एक पॉश बंगले में रहने वाले मकान मालिकों ने लड़की पर इस तरह का अत्याचार किया है. उन्हें तत्काल गिरफ्तार करने की जरूरत है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
Girl Child Labour Rescued: एक एनजीओ से मिली जानकारी के बाद डीसीडब्ल्यू ने बाल श्रम के लिए मजबूर की गई चौदह साल की एक लड़की को बचाया है. जो कि झारखंड की रहने वाली है. Delhi News: दिल्ली महिला आयोग ने बाल श्रम के लिए मजबूर की गई चौदह साल की एक लड़की को बचाया है. पाँच अगस्त को दिल्ली महिला आयोग को एक संगठन 'सिल्वर सेवन' से शिकायत मिली, जिसमें बताया गया कि दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-एक इलाके में एक चौदह साल की लड़की को घरेलू सहायिका के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था. आयोग ने तुरंत संस्था के कर्मचारियों से संपर्क किया और उनके साथ स्थानीय पुलिस स्टेशन गए. उन्होंने बताया कि लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ एक घर में रखा जा रहा था और उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि उन्हें सटीक पता नहीं पता, लेकिन वह टीम के साथ इसका पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं . चौदह साल की अनाथ झारखण्डी लड़की को दिल्ली के GK एक की कोठी में जबरन बंदी बनवाके काम करवाते थे। लड़की को बहुत मारते भी थे और उसे कोई पैसे भी नहीं देते थे। हमको जैसे ही NGO ने उसके बारे में बताया, हमने लड़की को रेस्क्यू करवाया। पुलिस को नोटिस इशू किया है। FIR करें और अरेस्ट तुरंत हो! दिल्ली महिला आयोग की टीम दिल्ली पुलिस अधिकारियों और संगठन के साथ ग्रेटर कैलाश-एक में घटनास्थल पर गई और चौदह वर्षीय लड़की को बचाया. उसे पुलिस स्टेशन लाया गया, वह बहुत डरी हुई और सदमे में थी. वह उस घर में वापस न भेजे जाने के लिए गुहार लगा रही थी. लड़की ने बताया कि वह झारखंड के गिरिडीह जिले की रहने वाली है और उसने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. जब वह बहुत छोटी थी तभी उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई और उसके परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं. उसने बताया कि उसके भाई और भाभी उसे परेशान करते थे और अक्सर उसकी पिटाई करते थे, इसलिए वह अपने घर से भाग गई और दो हज़ार इक्कीस में अपने पड़ोसी के साथ दिल्ली आ गई, जिसने उसे राजधानी में नौकरी दिलाने का वादा किया था. उसने बताया कि गोविंद नाम के व्यक्ति के जरिये उसे घरेलू काम करने के लिए एक घर में रखा गया था और वह डेढ़ साल से अधिक समय से वहां रह रही थी. ये भी पढ़ेंः Haryana Violence: कांग्रेस डेलिगेशन को नूंह में नहीं दी गई एंट्री, क्या कल AAP की भी होगी No Entry? लड़की ने बताया कि जिस परिवार के साथ वह काम कर रही थी, उसमें चार सदस्य थे - मकान मालिक, उसकी पत्नी और उनके अट्ठारह और तेरह साल के दो लड़के. उसने कहा कि वह घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थी और उसे घर का सारा काम करना पड़ता था. उसने कहा कि मालकिन नियमित रूप से उसके साथ दुर्व्यवहार करती थी और उसकी पिटाई करती थी. लड़की को मालकिन ने बताया कि उसे काफी पैसे खर्च करके खरीदा गया है और वह उसे जाने नहीं देंगे. उसने कहा कि उसे मात्र तीन हज़ार-चार हज़ार प्रति माह दिए जाते थे और वह भी उसे नहीं सौंपे जाते थे. बल्कि मालकिन द्वारा उसके मासिक राशन और अन्य आवश्यक चीजों को खरीदने के लिए खर्च किया जाता था. लड़की ने बताया कि एक बार उसने अपने चाचा को झारखंड से बुलाया कि वह उसे ले जाए, लेकिन मालकिन ने उसे डांटा और उसे जाने नहीं दिया. उसने कहा कि उसने अपनी आपबीती अपने घर आए एक खाना बनाने वाले को बताई और उसने इसकी जानकारी एक एनजीओ को दी. लड़की ने कहा कि वह घर में नहीं रहना चाहती. रेस्क्यू के दौरान घर में एक और घरेलू सहायिका भी मिली. उसने बताया कि वह तीन महीने से घर में काम कर रही थी और वह भी नौकरी छोड़ कर जाना चाहती थी, लेकिन मालकिन ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी. हालांकि उसने मालिकों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई. दिल्ली पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज किया. अब लड़की को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और फिलहाल उसे आश्रय गृह में रखा गया है. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने कहा कि हमें एक लड़की को एक घर में जबरन रखे जाने की शिकायत मिली. उसका शोषण किया जा रहा था और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे कैद करके रखा गया था. हमने तुरंत यह सुनिश्चित किया कि दिल्ली पुलिस की मदद से लड़की को बचाया जाए. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है. हम मामले में नोटिस जारी कर रहे हैं. यह शर्मनाक है कि जीके एक के एक पॉश बंगले में रहने वाले मकान मालिकों ने लड़की पर इस तरह का अत्याचार किया है. उन्हें तत्काल गिरफ्तार करने की जरूरत है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
नई दिल्ली में सिख प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से उनके सात लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर दिल्ली के गुरुद्वारा श्री बाला साहिब जी ने एक 'अखंड पाठ' का आयोजन किया था। यह 15 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर को समाप्त हुआ। इस 'अखंड पाठ' में हजारों सिख भक्तों ने भाग लिया। गुरुद्वारा श्री बाला साहिब जी का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रसाद और शुभकामनाएं देने के लिए प्रधानमंत्री के आवास पर प्रधानमंत्री से मिलने गया था। प्रतिनिधिमंडल ने पगड़ी बांधकर और सिरोपा भेंट कर प्रधानमंत्री का सम्मानित किया। प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की अरदास भी की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की और सिख समुदाय के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली में सिख प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से उनके सात लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर दिल्ली के गुरुद्वारा श्री बाला साहिब जी ने एक 'अखंड पाठ' का आयोजन किया था। यह पंद्रह सितंबर से शुरू होकर सत्रह सितंबर को समाप्त हुआ। इस 'अखंड पाठ' में हजारों सिख भक्तों ने भाग लिया। गुरुद्वारा श्री बाला साहिब जी का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रसाद और शुभकामनाएं देने के लिए प्रधानमंत्री के आवास पर प्रधानमंत्री से मिलने गया था। प्रतिनिधिमंडल ने पगड़ी बांधकर और सिरोपा भेंट कर प्रधानमंत्री का सम्मानित किया। प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की अरदास भी की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की और सिख समुदाय के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
लंदन में 6 मई को किंग चार्ल्स तृतीय और रानी का राज्याभिषेक होगा। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद से ही किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही हैं। किंग चार्ल्स III के राज्याभिषेक में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर से तमाम बड़े नेता पहुंचेंगे। जानकारी के मुताबिक, ब्रिटिश दूतावास ने सम्राट के राज्याभिषेक समारोह में भाग लेने के लिए मुंबई के डब्बावालों को निमंत्रण भेजा है। मुंबई के प्रसिद्ध डब्बावालों ने दावा किया कि उन्हें 6 मई को किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। जिसके बाद उन्हें मंगलवार को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स के लिए उपहार खरीदते हुए देखा गया। डब्बावालों ने किंग के लिए एक पुनेरी पगड़ी और वारकरी समुदाय का एक शॉल खरीदा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ब्रिटिश दूतावास ने 74 वर्षीय सम्राट के राज्याभिषेक समारोह में भाग लेने के लिए डब्बावालों को निमंत्रण भेजा है। साल 2003 में, चार्ल्स III ने शहर की अपनी यात्रा के दौरान मुंबई के चर्चगेट स्टेशन पर डब्बावालों से मुलाकात की थी। 2005 में दो डब्बावालों ने चार्ल्स और कैमिला पार्कर की शाही शादी में भाग लिया था। वहीं, राज्याभिषेक से पहले मंगलवार को पश्चिमी भारत के ब्रिटिश हाई कमिश्नर एलन जेम्मेल ने किंग के सम्मान में मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने ट्वीट कर कहा, "हम महामहिम राजा और महारानी के राज्याभिषेक से पहले एक उत्सव कार्यक्रम कर रहे हैं। राष्ट्रमंडल देश और मुंबई के हमारे सभी दोस्तों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। 6 मई को राज्याभिषेक यूनाइटेड किंगडम के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जिसमें विश्व के नेता ऐतिहासिक समारोह का जश्न मनाने के लिए भाग लेते हैं। " किंग चार्ल्स द्वितीय को यूके और 14 अन्य स्वतंत्र क्षेत्रों के राजा का ताज पहनाया जाएगा।
लंदन में छः मई को किंग चार्ल्स तृतीय और रानी का राज्याभिषेक होगा। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद से ही किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही हैं। किंग चार्ल्स III के राज्याभिषेक में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर से तमाम बड़े नेता पहुंचेंगे। जानकारी के मुताबिक, ब्रिटिश दूतावास ने सम्राट के राज्याभिषेक समारोह में भाग लेने के लिए मुंबई के डब्बावालों को निमंत्रण भेजा है। मुंबई के प्रसिद्ध डब्बावालों ने दावा किया कि उन्हें छः मई को किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। जिसके बाद उन्हें मंगलवार को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स के लिए उपहार खरीदते हुए देखा गया। डब्बावालों ने किंग के लिए एक पुनेरी पगड़ी और वारकरी समुदाय का एक शॉल खरीदा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ब्रिटिश दूतावास ने चौहत्तर वर्षीय सम्राट के राज्याभिषेक समारोह में भाग लेने के लिए डब्बावालों को निमंत्रण भेजा है। साल दो हज़ार तीन में, चार्ल्स III ने शहर की अपनी यात्रा के दौरान मुंबई के चर्चगेट स्टेशन पर डब्बावालों से मुलाकात की थी। दो हज़ार पाँच में दो डब्बावालों ने चार्ल्स और कैमिला पार्कर की शाही शादी में भाग लिया था। वहीं, राज्याभिषेक से पहले मंगलवार को पश्चिमी भारत के ब्रिटिश हाई कमिश्नर एलन जेम्मेल ने किंग के सम्मान में मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने ट्वीट कर कहा, "हम महामहिम राजा और महारानी के राज्याभिषेक से पहले एक उत्सव कार्यक्रम कर रहे हैं। राष्ट्रमंडल देश और मुंबई के हमारे सभी दोस्तों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। छः मई को राज्याभिषेक यूनाइटेड किंगडम के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जिसमें विश्व के नेता ऐतिहासिक समारोह का जश्न मनाने के लिए भाग लेते हैं। " किंग चार्ल्स द्वितीय को यूके और चौदह अन्य स्वतंत्र क्षेत्रों के राजा का ताज पहनाया जाएगा।
ब्लिंकिट के नए आउटडोर विज्ञापनों पर तो आपकी नजर जरूर गई होगी. हमारा मतलब यहां-वहां सड़कों पर लगे होर्डिंग और सार्वजनिक बसों पर लगे उन विज्ञापनों से है, जो बरबस ही अपनी ओर देखने और मुस्कुराने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इनमें ऐसा कुछ नहीं है जो आपके होश उड़ा दे या आपको सोचने के लिए मजबूर कर दे. हां, ब्लिंकिट के ये विज्ञापन आपको कुछ ऐसी मजेदार लाइनों के साथ मिलेंगे, जिन्हें आप दिल से जानते हैं. इनकी सादगी ही इन विज्ञापनों की खूबसूरती है और लोगों के दिल जीतने की वजह भी. सिलसिलेवार ढंग से होर्डिंग पर सजे ब्लिंकिट के ये विज्ञापन लोकप्रिय बॉलीवुड गानों की तर्ज पर कुछ इस तरह से बनाए गए हैं कि वो निश्चित उत्पाद के बारे में पूरी जानकारी बड़ी आसानी से ग्राहकों तक पहुंचा देते हैं. वो प्रोडक्ट जिसे आप ऐप पर ऑर्डर कर सकते हैं. 'अंडा ये बिंदास है, अंडा ये बिंदास है' - 2001 का केके और अनु मलिक का गीत बंदा ये बिंदास है पर बना है तो वहीं कॉर्निटोस के लिए तैयार किया गया विज्ञापन 'बसंती नाआच-ओज' शोले (1975) फिल्म का एक लोकप्रिय डायलॉग है. ये सीधे लोगों के दिल से जुड़े हैं और उन्हें इस एप पर जाने के लिए मजबूर कर देते हैं. ब्लिंकिट मिनटों में 5,000 से ज्यादा उत्पाद डिलीवर करता है और यह उनके YouTube पर दिए जा रहे विज्ञापनों से आगे का कदम है. इन विज्ञापनों की खासियत ये है कि वे अपने द्वारा बेचे जा रहे उत्पाद के बारे में कोई कहानी नहीं कहते या झूठे वादे नहीं करते हैं. मतलब साफ है बिना लाग लपेट के अपने एप को लोगों के बीच पहुंचाना. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस तरह से वे 'स्पीड डिलीवरी', ब्लिंकिट की यूएसपी के बारे में बात करने से बचते हैं, जिसे डिलीवरी पार्टनर्स के प्रति असंवेदनशील होने के लिए बहुत अधिक आलोचना झेलनी पड़ी है. ब्लिंकिट अपने बारे में कुछ न बताते हुए भी उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहा है. ये विज्ञापन हमारे सामने आए बॉलीवुड गानों का सबसे अच्छा रीमिक्स हो सकते हैं. इसके और भी बहुत से विज्ञापन कुछ ऐसे ही जबान पर बने रहने वाले 'रैप' शब्दों से बने हैं. मसलन 'अपना लाइम आएगा' नींबू का विज्ञापन करता है, जबकि 'चकना मेरेया मेरेया' लेज़ की पब्लिसिटी करता है. इससे कॉर्निटोस नाचो चिप्स, एमटीआर और लेज़ काफी खुश हुए होंगे क्योंकि उन्हें ब्लिंकिट के लिए मुफ्त बिलबोर्ड टाईम जो मिल गया है. इसलिए हम कह सकते हैं कि उनके विज्ञापन का तरीका कोई नया नहीं है. यहां इस बात को ध्यान में रखना भी जरूरी है कि जोमैटो ने ब्लिंकिट का अधिग्रहण कर लिया है. प्रिंट विज्ञापनों के शानदार दिन निश्चित रूप से खत्म हो गए हैं, शब्दों की कोई कमी नहीं है. फॉक्सवैगन के 'थिंक स्मॉल' जैसे विज्ञापन शायद वापसी नहीं कर पाए. मैं यह बात ग्रे इंडिया द्वारा 2014 ड्यूरासेल के शानदार विज्ञापनों की प्रतिभा को स्वीकार करते हुए कह रहा हूं. स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसी द मिनिमलिस्ट के इंस्टाग्राम विज्ञापन भी अपने उत्पादों की मार्केटिंग के लिए रचनात्मकता को सरलता के साथ पेश करने का एक अच्छा उदाहरण है. ब्लिंकिट के ये वन-लाइन ज़िंगर्स भले ही पुरस्कार न जीतें, लेकिन वे निश्चित रूप से दिल जीत रहे हैं. (इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. )
ब्लिंकिट के नए आउटडोर विज्ञापनों पर तो आपकी नजर जरूर गई होगी. हमारा मतलब यहां-वहां सड़कों पर लगे होर्डिंग और सार्वजनिक बसों पर लगे उन विज्ञापनों से है, जो बरबस ही अपनी ओर देखने और मुस्कुराने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इनमें ऐसा कुछ नहीं है जो आपके होश उड़ा दे या आपको सोचने के लिए मजबूर कर दे. हां, ब्लिंकिट के ये विज्ञापन आपको कुछ ऐसी मजेदार लाइनों के साथ मिलेंगे, जिन्हें आप दिल से जानते हैं. इनकी सादगी ही इन विज्ञापनों की खूबसूरती है और लोगों के दिल जीतने की वजह भी. सिलसिलेवार ढंग से होर्डिंग पर सजे ब्लिंकिट के ये विज्ञापन लोकप्रिय बॉलीवुड गानों की तर्ज पर कुछ इस तरह से बनाए गए हैं कि वो निश्चित उत्पाद के बारे में पूरी जानकारी बड़ी आसानी से ग्राहकों तक पहुंचा देते हैं. वो प्रोडक्ट जिसे आप ऐप पर ऑर्डर कर सकते हैं. 'अंडा ये बिंदास है, अंडा ये बिंदास है' - दो हज़ार एक का केके और अनु मलिक का गीत बंदा ये बिंदास है पर बना है तो वहीं कॉर्निटोस के लिए तैयार किया गया विज्ञापन 'बसंती नाआच-ओज' शोले फिल्म का एक लोकप्रिय डायलॉग है. ये सीधे लोगों के दिल से जुड़े हैं और उन्हें इस एप पर जाने के लिए मजबूर कर देते हैं. ब्लिंकिट मिनटों में पाँच,शून्य से ज्यादा उत्पाद डिलीवर करता है और यह उनके YouTube पर दिए जा रहे विज्ञापनों से आगे का कदम है. इन विज्ञापनों की खासियत ये है कि वे अपने द्वारा बेचे जा रहे उत्पाद के बारे में कोई कहानी नहीं कहते या झूठे वादे नहीं करते हैं. मतलब साफ है बिना लाग लपेट के अपने एप को लोगों के बीच पहुंचाना. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस तरह से वे 'स्पीड डिलीवरी', ब्लिंकिट की यूएसपी के बारे में बात करने से बचते हैं, जिसे डिलीवरी पार्टनर्स के प्रति असंवेदनशील होने के लिए बहुत अधिक आलोचना झेलनी पड़ी है. ब्लिंकिट अपने बारे में कुछ न बताते हुए भी उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहा है. ये विज्ञापन हमारे सामने आए बॉलीवुड गानों का सबसे अच्छा रीमिक्स हो सकते हैं. इसके और भी बहुत से विज्ञापन कुछ ऐसे ही जबान पर बने रहने वाले 'रैप' शब्दों से बने हैं. मसलन 'अपना लाइम आएगा' नींबू का विज्ञापन करता है, जबकि 'चकना मेरेया मेरेया' लेज़ की पब्लिसिटी करता है. इससे कॉर्निटोस नाचो चिप्स, एमटीआर और लेज़ काफी खुश हुए होंगे क्योंकि उन्हें ब्लिंकिट के लिए मुफ्त बिलबोर्ड टाईम जो मिल गया है. इसलिए हम कह सकते हैं कि उनके विज्ञापन का तरीका कोई नया नहीं है. यहां इस बात को ध्यान में रखना भी जरूरी है कि जोमैटो ने ब्लिंकिट का अधिग्रहण कर लिया है. प्रिंट विज्ञापनों के शानदार दिन निश्चित रूप से खत्म हो गए हैं, शब्दों की कोई कमी नहीं है. फॉक्सवैगन के 'थिंक स्मॉल' जैसे विज्ञापन शायद वापसी नहीं कर पाए. मैं यह बात ग्रे इंडिया द्वारा दो हज़ार चौदह ड्यूरासेल के शानदार विज्ञापनों की प्रतिभा को स्वीकार करते हुए कह रहा हूं. स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसी द मिनिमलिस्ट के इंस्टाग्राम विज्ञापन भी अपने उत्पादों की मार्केटिंग के लिए रचनात्मकता को सरलता के साथ पेश करने का एक अच्छा उदाहरण है. ब्लिंकिट के ये वन-लाइन ज़िंगर्स भले ही पुरस्कार न जीतें, लेकिन वे निश्चित रूप से दिल जीत रहे हैं.
वैदिक धर्म - ११ समावर्तनमान होनेपर जय, प्राचारीको जाती है, उनका धार्मिक कृत्य किया जाना है। इसके पश्चागे गृह प्रवेशका व्यधिकारी होता है। १२ विवाह-मन्नानोत्पत्ति एवं लोक धर्म पालनके मद्देश्य से प्राचारी एवं प्रमचारिणी अपने नहुन पत्नी और पतिका चरण करने हैं। इस समय अग्नियो साक्षी कर दोनों जो एक दूसरेका पाणि-करते हैं उसे विवाह संस्कार करते हैं । १३ गार्हस्पत्य जय मनुष्य गृहस्थाश्रममें प्रवेश करके अपने घर में धार्मिक विधि किये गये सकारात्य हो पनि पत्नी स्थापना करता है उस समय संस्कार कहते हैं। इस संस्कार के का आरम्भ कर देते हैं। १४ चानमस्य - मन्नानोत्पत्ति, उसका पालन, एवं शिआदि कार्य समाप्त कर आयुके तीसरे भाग में धर्म एवं मोक्षकी साधना के लिये जो घरका त्याग किया जाता है इसे वानप्रस्थ और उस समय / किये गये धार्मिक कृत्यको वानप्रस्थ संस्कार कहते हैं। १५ संन्यास - आयुके अन्तिम भाग में जब मनुष्य ईश्वरका चिन्तन करते हुए मोक्ष की साधना में लगना चाहता है और सब प्राणियोंपर समष्टि रख कर जनहितको अपना एक मात्र उद्देश बना लेता है उस समय वानप्रस्थाश्रम परित्याग कर धार्मिक कृत्यके साथ संन्यास ग्रहण करता है। उसी धार्मिक कृत्यको सन्यास संस्कार कहते हैं ।
वैदिक धर्म - ग्यारह समावर्तनमान होनेपर जय, प्राचारीको जाती है, उनका धार्मिक कृत्य किया जाना है। इसके पश्चागे गृह प्रवेशका व्यधिकारी होता है। बारह विवाह-मन्नानोत्पत्ति एवं लोक धर्म पालनके मद्देश्य से प्राचारी एवं प्रमचारिणी अपने नहुन पत्नी और पतिका चरण करने हैं। इस समय अग्नियो साक्षी कर दोनों जो एक दूसरेका पाणि-करते हैं उसे विवाह संस्कार करते हैं । तेरह गार्हस्पत्य जय मनुष्य गृहस्थाश्रममें प्रवेश करके अपने घर में धार्मिक विधि किये गये सकारात्य हो पनि पत्नी स्थापना करता है उस समय संस्कार कहते हैं। इस संस्कार के का आरम्भ कर देते हैं। चौदह चानमस्य - मन्नानोत्पत्ति, उसका पालन, एवं शिआदि कार्य समाप्त कर आयुके तीसरे भाग में धर्म एवं मोक्षकी साधना के लिये जो घरका त्याग किया जाता है इसे वानप्रस्थ और उस समय / किये गये धार्मिक कृत्यको वानप्रस्थ संस्कार कहते हैं। पंद्रह संन्यास - आयुके अन्तिम भाग में जब मनुष्य ईश्वरका चिन्तन करते हुए मोक्ष की साधना में लगना चाहता है और सब प्राणियोंपर समष्टि रख कर जनहितको अपना एक मात्र उद्देश बना लेता है उस समय वानप्रस्थाश्रम परित्याग कर धार्मिक कृत्यके साथ संन्यास ग्रहण करता है। उसी धार्मिक कृत्यको सन्यास संस्कार कहते हैं ।
शिमला - ऑल इंडिया ऑडिट व अकाउंट्स एसोसिएशन की वर्कशॉप शुक्रवार से शिमला में होगी। वर्कशॉप में देश भर के एसोसिएशन के पदाधिकारी भाग लेंगे। वर्कशॉप 27 मई तक चलेगी। ट्रेड यूनियन वर्कशॉप कालीबाड़ी सभागार में होगी। लेखा तथा लेखा परीक्षा संगठन समन्वय समिति शिमला के संयोजक हरीश जुल्का ने बताया कि ट्रेड यूनियन वर्कशॉप चार सत्रों में होगी। इसमें नई पेंशन स्कीम, अनुशासनिक नियम, जेसीएम स्वरूप और वर्तमान समय में सेवा संगठनों और ट्रेड यूनियन की क्या भूमिका होगी, इस पर चर्चा की जाएगी। ऑल इंडिया ऑडिट व अकाउंट्स एसोसिएशन के विभिन्न यूनिट के पदाधिकारी गुरुवार को शिमला पहुंच गए हैं। गुरुवार को एजी आफिस में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें केएल गौतम को सम्मानित किया गया। केएल गौतम मात्र अढ़ाई साल की नौकरी के बाद एजी आफिस में 1984 में पहली बार जनरल सेक्रेटरी के पद पर चुने गए थे और लगातार 1991 तक इस पद पर रहे। फिर 1993 से 1999 तक तथा 2011 से से 2017 तक उन्हें इस पद पर चुना गया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
शिमला - ऑल इंडिया ऑडिट व अकाउंट्स एसोसिएशन की वर्कशॉप शुक्रवार से शिमला में होगी। वर्कशॉप में देश भर के एसोसिएशन के पदाधिकारी भाग लेंगे। वर्कशॉप सत्ताईस मई तक चलेगी। ट्रेड यूनियन वर्कशॉप कालीबाड़ी सभागार में होगी। लेखा तथा लेखा परीक्षा संगठन समन्वय समिति शिमला के संयोजक हरीश जुल्का ने बताया कि ट्रेड यूनियन वर्कशॉप चार सत्रों में होगी। इसमें नई पेंशन स्कीम, अनुशासनिक नियम, जेसीएम स्वरूप और वर्तमान समय में सेवा संगठनों और ट्रेड यूनियन की क्या भूमिका होगी, इस पर चर्चा की जाएगी। ऑल इंडिया ऑडिट व अकाउंट्स एसोसिएशन के विभिन्न यूनिट के पदाधिकारी गुरुवार को शिमला पहुंच गए हैं। गुरुवार को एजी आफिस में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें केएल गौतम को सम्मानित किया गया। केएल गौतम मात्र अढ़ाई साल की नौकरी के बाद एजी आफिस में एक हज़ार नौ सौ चौरासी में पहली बार जनरल सेक्रेटरी के पद पर चुने गए थे और लगातार एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे तक इस पद पर रहे। फिर एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे तक तथा दो हज़ार ग्यारह से से दो हज़ार सत्रह तक उन्हें इस पद पर चुना गया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) द्वारा PFMS पोर्टल के माध्यम से भुगतान/व्यय किये जाने हेतु पीएफएमएस सेल द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) देखें। हमारा व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें । Zero Balance Account को Payment के लिए कैसे Activate करें? Agency Data Operator और Agency Data Approver Id कैसे बनानी है? Vendors कैसे Add करें? The post विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) द्वारा Pfms पोर्टल के माध्यम से भुगतान/व्यय किये जाने हेतु पीएफएमएस सेल द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) देखें। first appeared on बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग शासनादेश समाचार.
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आज बेरोजगारी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। जहाँ कोरोना के कारण लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है वहीँ लगभग 4 साल से वैकेंसी न निकलने से आक्रोश में हैं। अयोध्या जिले के रहने वाले यूथ जो आर्मी की तैयारी कर रहे हैं और जिनकी ओवर ऐज हो गयी है। खबर लहरिया से बात करने पर युवाओं में सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा दिखा। उनका कहना है कि हमारी ऐज हो गयी है और हमारा सपना टूट रहा है लेकिन सरकार वैकेंसी नहीं निकाल रही। युवाओं ने कहा कुछ दिन बाद वही स्थिति आ जाएगी की मुझे भी सड़क पर पकौड़े बेचना पड़ेगा। घर वाले भी दवाब डाल रहे बाहर जाओ नौकरी करो यहां तक बोल रहे शादी करो। चार साल से ज्यादा हो गया वैकेंसी नहीं आ रही है ऐसे में क्या करें। हम लोगों ने वैकेंसी को लेकर ज्ञापन दिया लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। यही उम्मीद से दौड़ रहे हैं कि कभी ना कभी तो वैकेंसी आयेगी ही और जब तक ओवर ऐज नहीं होंगे तब तक दौड़ेंगे।
आज बेरोजगारी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। जहाँ कोरोना के कारण लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है वहीँ लगभग चार साल से वैकेंसी न निकलने से आक्रोश में हैं। अयोध्या जिले के रहने वाले यूथ जो आर्मी की तैयारी कर रहे हैं और जिनकी ओवर ऐज हो गयी है। खबर लहरिया से बात करने पर युवाओं में सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा दिखा। उनका कहना है कि हमारी ऐज हो गयी है और हमारा सपना टूट रहा है लेकिन सरकार वैकेंसी नहीं निकाल रही। युवाओं ने कहा कुछ दिन बाद वही स्थिति आ जाएगी की मुझे भी सड़क पर पकौड़े बेचना पड़ेगा। घर वाले भी दवाब डाल रहे बाहर जाओ नौकरी करो यहां तक बोल रहे शादी करो। चार साल से ज्यादा हो गया वैकेंसी नहीं आ रही है ऐसे में क्या करें। हम लोगों ने वैकेंसी को लेकर ज्ञापन दिया लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। यही उम्मीद से दौड़ रहे हैं कि कभी ना कभी तो वैकेंसी आयेगी ही और जब तक ओवर ऐज नहीं होंगे तब तक दौड़ेंगे।
सूर्य के प्रभाव से यह समय आपके जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि करने वाला होगा इसके पूरे आसार हैं। नई योजना पर कार्य आरंभ करने का विचार बना सकते हैं। चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है लेकिन आप अपने विवेक व कार्यकुशलता से इससे बाहर निकलने में कामयाब हो सकते हैं। कुल मिलाकर समय आपके अनुकूल रहने के संभावना है। इस समय आप ऊर्जावान रह सकते हैं। हर कार्य को आप बड़े ही उत्साह से करेंगे। कार्यस्थल पर भी आपका प्रदर्शन ठीक रहेगा। आप अपने कार्य से संतुष्ट हो सकते हैं। परिवार में छोटे भाई बहनों से छोटा मोटा विवाद हो सकता है। हालांकि भाई बहनों की तरक्की के आसार भी बन रहे हैं। समय से साथ यह तकरार दूर हो जाएगा। इस समय आप कम दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं। धन भाव में सूर्य के आने से धन प्राप्ति के योग आपके लिए बन सकते हैं। पैतृक संपत्ति से आपको लाभ मिल सकता है। रुका धन मिलने की संभावना है। भाई बंधुओं से मनमुटाव होने के आसार बन सकते हैं। संयम व समझदारी से काम लें। प्रेम से मामले को सुलझाया जा सकता है। कर्क संक्रांति होने के कारण यह समय आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला रह सकता है। साथ ही आपकी कार्यक्षमता व कार्यकुशलता अच्छी रहेगी। कार्य स्थल पर आप अपने कार्य को प्रभावी ढंग से करने में कामयाब होंगे। जिससे ऑफिस में आपका रूतबा भी बढ़ेगा। सूर्य के प्रभाव से संभव है कि आपमें अहंकार की भावना आ जाए। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। अग्नि से दूरी बनाकर रखें। यह समय आपके आत्मविश्वास में कुछ कमी ला सकता है। आप कुछ कार्यों को लेकर असहज भी हो सकते हैं। काम में कम मन लग सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नेत्र संबंधी कुछ समस्याओं से परेशान हो सकते हैं। चोट लगने के संकेत भी हैं, इसलिए सतर्क रहें। पिता के स्वास्थ्य को लेकर भी आप इस समय चिंतित हो सकते हैं। यह समय आपके लिये धन वृद्धि के योग बना रहा है। रूका धन आपको मिल सकता है। किसी योजना में किया गया निवेश आपको लाभ दिला सकता है। कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय रह सकता है। सुख-संपति में वृद्धि के आसार हैं। आत्मविश्वास से भरे निर्णय ले सकते हैं। जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं। उन्हें सफलता मिल सकती है। किसी नई परियोजना पर काम शुरु करना चाहते हैं या नया व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं तो समय अनुकूल है। नौकरी में परिवर्तन करने के इच्छुक जातकों को भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं। लेकिन जल्दबाजी न करें। पदोन्नति की उम्मीद रखने वाले जातकों के लिए समय अच्छा रहने के आसार हैं। आप काम के अलावा अतिरिक्त रूप से कार्य करके भी आय में वृद्धि कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र के लिए यह समय आपके अनुकूल रह सकता है। लंबे समय से आप मकान खरीदने के लिए प्रयासरत हैं तो इस समय सफलता मिल सकती है। सरकारी योजनाओं से भी आपको कोई लाभ मिल सकता है। धन प्राप्ति के योग भी आपके लिए बन रहे हैं। घर में किसी धार्मिक कार्य का आयोजन भी हो सकता है। सूर्य का कर्क राशि में आना आपके लिए सही नहीं है। पिता के स्वास्थ्य को लेकर आपकी चिंता बढ़ सकती है तो वहीं कार्यस्थल पर भी आपका प्रदर्शन कम हो सकता है। कुछ जातकों को नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है। कुल मिलाकर व्यावसायिक दृष्टि से समय अनुकूल नहीं कहा जा सकता। हालांकि नया कार्य शुरु कर रहे हैं तो परिणाम सकारात्मक मिल सकते हैं जिससे आपका आत्मबल भी बढ़ने के आसार हैं। जीवन साथी के साथ आपके मतभेद बढ़ सकते हैं। कुछ जातकों के दांपत्य जीवन में इतनी खटास भी आ सकती है कि आपको एक दूसरे से अलग होने का निर्णय लेना पड़े। जिन जातकों के विवाह की बात चल रही है हो सकता है इस समय उन्हें खुशखबरी न मिले। हालांकि विवाहित दंपतियों में मकर जातकों के जीवनसाथी कार्यक्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं। शरीर में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। नौकरीशुदा जातक सर्वाइकल की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं। करियर के मामले में समय अनुकूल रहेगा और कार्योन्नति के आसार भी आपके लिए बन सकते हैं। कार्य को पूरे लगन के साथ करें। धन के लिए भी समय सही रहेगा। खर्च पर नियंत्रण रखें तो और भी अच्छा होगा। कोई अवॉर्ड मिल सकता है. . . । जो दंपति संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं उन्हें भी खुशखबरी मिल सकती है। यह समय कार्यक्षेत्र में भी आपके मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि लाने वाला रह सकता है। बस आपको अपने कार्य को गंभीरता व पूरी जिम्मेदारी करना होगा। विवाह के योग भी इस समय आपके लिए बन रहे हैं। नया कार्य आरंभ करने के लिये भी समय उपयुक्त है। सेहत का ध्यान रखें।
सूर्य के प्रभाव से यह समय आपके जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि करने वाला होगा इसके पूरे आसार हैं। नई योजना पर कार्य आरंभ करने का विचार बना सकते हैं। चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है लेकिन आप अपने विवेक व कार्यकुशलता से इससे बाहर निकलने में कामयाब हो सकते हैं। कुल मिलाकर समय आपके अनुकूल रहने के संभावना है। इस समय आप ऊर्जावान रह सकते हैं। हर कार्य को आप बड़े ही उत्साह से करेंगे। कार्यस्थल पर भी आपका प्रदर्शन ठीक रहेगा। आप अपने कार्य से संतुष्ट हो सकते हैं। परिवार में छोटे भाई बहनों से छोटा मोटा विवाद हो सकता है। हालांकि भाई बहनों की तरक्की के आसार भी बन रहे हैं। समय से साथ यह तकरार दूर हो जाएगा। इस समय आप कम दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं। धन भाव में सूर्य के आने से धन प्राप्ति के योग आपके लिए बन सकते हैं। पैतृक संपत्ति से आपको लाभ मिल सकता है। रुका धन मिलने की संभावना है। भाई बंधुओं से मनमुटाव होने के आसार बन सकते हैं। संयम व समझदारी से काम लें। प्रेम से मामले को सुलझाया जा सकता है। कर्क संक्रांति होने के कारण यह समय आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला रह सकता है। साथ ही आपकी कार्यक्षमता व कार्यकुशलता अच्छी रहेगी। कार्य स्थल पर आप अपने कार्य को प्रभावी ढंग से करने में कामयाब होंगे। जिससे ऑफिस में आपका रूतबा भी बढ़ेगा। सूर्य के प्रभाव से संभव है कि आपमें अहंकार की भावना आ जाए। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। अग्नि से दूरी बनाकर रखें। यह समय आपके आत्मविश्वास में कुछ कमी ला सकता है। आप कुछ कार्यों को लेकर असहज भी हो सकते हैं। काम में कम मन लग सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नेत्र संबंधी कुछ समस्याओं से परेशान हो सकते हैं। चोट लगने के संकेत भी हैं, इसलिए सतर्क रहें। पिता के स्वास्थ्य को लेकर भी आप इस समय चिंतित हो सकते हैं। यह समय आपके लिये धन वृद्धि के योग बना रहा है। रूका धन आपको मिल सकता है। किसी योजना में किया गया निवेश आपको लाभ दिला सकता है। कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय रह सकता है। सुख-संपति में वृद्धि के आसार हैं। आत्मविश्वास से भरे निर्णय ले सकते हैं। जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं। उन्हें सफलता मिल सकती है। किसी नई परियोजना पर काम शुरु करना चाहते हैं या नया व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं तो समय अनुकूल है। नौकरी में परिवर्तन करने के इच्छुक जातकों को भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं। लेकिन जल्दबाजी न करें। पदोन्नति की उम्मीद रखने वाले जातकों के लिए समय अच्छा रहने के आसार हैं। आप काम के अलावा अतिरिक्त रूप से कार्य करके भी आय में वृद्धि कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र के लिए यह समय आपके अनुकूल रह सकता है। लंबे समय से आप मकान खरीदने के लिए प्रयासरत हैं तो इस समय सफलता मिल सकती है। सरकारी योजनाओं से भी आपको कोई लाभ मिल सकता है। धन प्राप्ति के योग भी आपके लिए बन रहे हैं। घर में किसी धार्मिक कार्य का आयोजन भी हो सकता है। सूर्य का कर्क राशि में आना आपके लिए सही नहीं है। पिता के स्वास्थ्य को लेकर आपकी चिंता बढ़ सकती है तो वहीं कार्यस्थल पर भी आपका प्रदर्शन कम हो सकता है। कुछ जातकों को नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है। कुल मिलाकर व्यावसायिक दृष्टि से समय अनुकूल नहीं कहा जा सकता। हालांकि नया कार्य शुरु कर रहे हैं तो परिणाम सकारात्मक मिल सकते हैं जिससे आपका आत्मबल भी बढ़ने के आसार हैं। जीवन साथी के साथ आपके मतभेद बढ़ सकते हैं। कुछ जातकों के दांपत्य जीवन में इतनी खटास भी आ सकती है कि आपको एक दूसरे से अलग होने का निर्णय लेना पड़े। जिन जातकों के विवाह की बात चल रही है हो सकता है इस समय उन्हें खुशखबरी न मिले। हालांकि विवाहित दंपतियों में मकर जातकों के जीवनसाथी कार्यक्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं। शरीर में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। नौकरीशुदा जातक सर्वाइकल की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं। करियर के मामले में समय अनुकूल रहेगा और कार्योन्नति के आसार भी आपके लिए बन सकते हैं। कार्य को पूरे लगन के साथ करें। धन के लिए भी समय सही रहेगा। खर्च पर नियंत्रण रखें तो और भी अच्छा होगा। कोई अवॉर्ड मिल सकता है. . . । जो दंपति संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं उन्हें भी खुशखबरी मिल सकती है। यह समय कार्यक्षेत्र में भी आपके मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि लाने वाला रह सकता है। बस आपको अपने कार्य को गंभीरता व पूरी जिम्मेदारी करना होगा। विवाह के योग भी इस समय आपके लिए बन रहे हैं। नया कार्य आरंभ करने के लिये भी समय उपयुक्त है। सेहत का ध्यान रखें।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राउत (60) को उपनगर गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत एक अगस्त को गिरफ्तार किया था। उन्हें सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर विशेष पीएमएलए न्यायाधीश एमजी देशपांडे की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने राउत की न्यायिक हिरासत की अवधि 14 दिनों के लिए और बढ़ा दी। शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी राउत ने सभी आरोपों से इनकार किया है और अपने खिलाफ ईडी के मामले को "फर्जी" बताया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने राउत को उपनगर गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में धन शोधन रोकथाम कानून के तहत एक अगस्त को गिरफ्तार किया था। उन्हें सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर विशेष पीएमएलए न्यायाधीश एमजी देशपांडे की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने राउत की न्यायिक हिरासत की अवधि चौदह दिनों के लिए और बढ़ा दी। शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी राउत ने सभी आरोपों से इनकार किया है और अपने खिलाफ ईडी के मामले को "फर्जी" बताया है।
कम बजट वाली एलोवेरा की खेती में उत्पादन बढ़िया होता है , तो इसे कहां बेचना है? आज कुछ कंपनियों के नाम और जानकारी देने की कोशिश की है। किसान मित्रों को इसकी जानकारी चाहिए होगी। कमर्सिअली एलोवेरा की खेती में फार्मिंग के दूसरे वर्ष में प्रत्येक हेक्टर अंदाजित 15 से 20 टन एलोवेरा का उत्पादन होता है। आंतरराष्ट्रीय कक्षा पर एलोवरा की डिमांड बहुत ज्यादा है। ऐसे समय में कम बजटवाली एलोवेरा की खेती किसानो के लिए फायदेमंद साबित होती है। सब लोग तंदुरस्त हेल्थ के लिए नेचरल प्रोडक्ट तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे है ऐसे में एलोवेरा जेल का मार्किट बड़ा हो रहा है। किसान फसल की खेती से पहले निम्नलिखित प्रसिद्ध कंपनियों के साथ अनुबंध कर सकते हैं। भारतीय कंपनीयां (Indian company)
कम बजट वाली एलोवेरा की खेती में उत्पादन बढ़िया होता है , तो इसे कहां बेचना है? आज कुछ कंपनियों के नाम और जानकारी देने की कोशिश की है। किसान मित्रों को इसकी जानकारी चाहिए होगी। कमर्सिअली एलोवेरा की खेती में फार्मिंग के दूसरे वर्ष में प्रत्येक हेक्टर अंदाजित पंद्रह से बीस टन एलोवेरा का उत्पादन होता है। आंतरराष्ट्रीय कक्षा पर एलोवरा की डिमांड बहुत ज्यादा है। ऐसे समय में कम बजटवाली एलोवेरा की खेती किसानो के लिए फायदेमंद साबित होती है। सब लोग तंदुरस्त हेल्थ के लिए नेचरल प्रोडक्ट तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे है ऐसे में एलोवेरा जेल का मार्किट बड़ा हो रहा है। किसान फसल की खेती से पहले निम्नलिखित प्रसिद्ध कंपनियों के साथ अनुबंध कर सकते हैं। भारतीय कंपनीयां
अपने पाठकों के लिए गांव कनेक्शन रोज लेकर आता है हेल्थ टिप्स। गुजरात में रहने वाले हर्बल आचार्य यानी डॉ. दीपक आचार्य रोजाना एक वीडियो के जरिए आपको जड़ी-बूटियों, देसी फल और सब्जियों से जुड़े हिंदुस्तानी वनवासियों के पारंपारिक नुस्खें बताएंगे जो आप के लिए काफी यूजफुल हो सकते हैं। संबंधित ख़बरें.
अपने पाठकों के लिए गांव कनेक्शन रोज लेकर आता है हेल्थ टिप्स। गुजरात में रहने वाले हर्बल आचार्य यानी डॉ. दीपक आचार्य रोजाना एक वीडियो के जरिए आपको जड़ी-बूटियों, देसी फल और सब्जियों से जुड़े हिंदुस्तानी वनवासियों के पारंपारिक नुस्खें बताएंगे जो आप के लिए काफी यूजफुल हो सकते हैं। संबंधित ख़बरें.
नई दिल्ली। देश में सूर्यग्रहण का नजारा करोड़ों लोगों ने देखा। देशवासियों की तरह पीएम मोदी ने भी गुरुवार की सुबह सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा देखा। उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर अपनी तस्वीरें भी शेयर कीं। ट्विटर पर सूर्य ग्रहण की अपनी तस्वीर शेयर कर उन्होंने लिखा, "बहुत से भारतीयों की तरह मैं भी सूर्य ग्रहण देखने को लेकर उत्सुक था। दुर्भाग्य से बादल छाए रहने की वजह से मैं सूर्य ग्रहण नहीं देख सका लेकिन लाइव स्ट्रीमिंग की मदद से मैंने कोझिकोड और अन्य जगहों की सूर्य ग्रहण की झलकें देखीं। विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर इस विषय पर मेरा काफी ज्ञानवर्धन हुआ। "बता दें कि गुरुवार को साल 2019 के अंत में सबसे बड़ा और अंतिम सूर्य ग्रहण दिखा। इसी साल पहले 6 जनवरी और 2 जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण लगा था। यह सूर्य ग्रहण को देश के दक्षिणी भाग में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्सों में दिखाई दिया जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई दिया। इस बार कई स्थानों पर बादल होने की वजह से सूर्य ग्रहण का नजारा कई लोग नहीं देख पाए। कितने ही लोगों ने जहां बादल साफ थे इस नजारे का आनंद उठाया। दुबई से भी ग्रहण की ताजा तस्वीरें सामने आई। यहां सूरज रिंग आॅफ फायर की तरह नजर आया। सूर्य ग्रहण 11. 05 बजे खत्म हुआ। अब अगले साल 2020 में पहला सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगेगा, इसके बाद 14 दिसंबर में दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा।
नई दिल्ली। देश में सूर्यग्रहण का नजारा करोड़ों लोगों ने देखा। देशवासियों की तरह पीएम मोदी ने भी गुरुवार की सुबह सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा देखा। उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर अपनी तस्वीरें भी शेयर कीं। ट्विटर पर सूर्य ग्रहण की अपनी तस्वीर शेयर कर उन्होंने लिखा, "बहुत से भारतीयों की तरह मैं भी सूर्य ग्रहण देखने को लेकर उत्सुक था। दुर्भाग्य से बादल छाए रहने की वजह से मैं सूर्य ग्रहण नहीं देख सका लेकिन लाइव स्ट्रीमिंग की मदद से मैंने कोझिकोड और अन्य जगहों की सूर्य ग्रहण की झलकें देखीं। विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर इस विषय पर मेरा काफी ज्ञानवर्धन हुआ। "बता दें कि गुरुवार को साल दो हज़ार उन्नीस के अंत में सबसे बड़ा और अंतिम सूर्य ग्रहण दिखा। इसी साल पहले छः जनवरी और दो जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण लगा था। यह सूर्य ग्रहण को देश के दक्षिणी भाग में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्सों में दिखाई दिया जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई दिया। इस बार कई स्थानों पर बादल होने की वजह से सूर्य ग्रहण का नजारा कई लोग नहीं देख पाए। कितने ही लोगों ने जहां बादल साफ थे इस नजारे का आनंद उठाया। दुबई से भी ग्रहण की ताजा तस्वीरें सामने आई। यहां सूरज रिंग आॅफ फायर की तरह नजर आया। सूर्य ग्रहण ग्यारह. पाँच बजे खत्म हुआ। अब अगले साल दो हज़ार बीस में पहला सूर्य ग्रहण इक्कीस जून दो हज़ार बीस को लगेगा, इसके बाद चौदह दिसंबर में दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा।
मौसियाँ झेंप गईं और पीछे हट गईं। पर मनोरमा से न रहा गया। झट आगे बढ़कर वह जेब देखने लगी। रसोईघर की दहलीज पर सन्तू हाथ में पानी का गिलास उठाए रुक गया और मंगलसेन की ओर देखने लगा। चाचा मंगलसेन खड़ा कभी एक का मुँह देख रहा था, कभी दूसरे का। वह कुछ कहना चाहता था, मगर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था। एक जेब में से मैला-सा रूमाल निकला, फिर बीड़ियों की गड्डी, माचिस, छोटा-सा पैंसिल का टुकड़ा। "इस जेब में तो नहीं है।" मनोरमा बोली और दूसरी जेब देखने लगी। मनोरमा एक-एक चीज निकालती और अपनी सहेलियों को दिखा- दिखाकर हँसती । दाईं जेब में कुछ खनका । मनोरमा चिल्ला उठी, "कुछ खनका है, इसी जेब में है, चोर पकड़ा गया! तुमने सुना, मालती?" जेब में टूटा हुआ चाकू रखा था, जो चाबियों के गुच्छे से लगकर खनका था। "छोड़ दो, मनोरमा! जाने दो, सबका धर्म अपने-अपने साथ है। आपसे चम्मच अच्छा नहीं है, मंगलसेनजी, लेकिन यह सगाई की चीज थी।" मंगलसेन की साँस फूलने लगी और टाँगें काँपने लगीं, लेकिन मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। "दोनों कान खोलकर सुन ले, मंगलसेन!" बाबूजी ने गरजकर कहा, "मैं तेरे से पाँच रुपए चम्मच के ले लूँगा, इसमें मैं कोई लिहाज नहीं करूंगा।" मंगलसेन खड़े-खड़े गिर पड़ा। "बधाई, बहनजी!" नीचे आँगन में से तीन-चार स्त्रियों की आवाज एक साथ आ गई । मंगलसेन गिरा भी अजीब ढंग से । धम्म से जमीन पर जो पड़ा तो उकड़ हो गया, और पगड़ी उतरकर गले में आ गई। मनोरमा अपनी हँसी रोके न रोक सकी। "देखो जी, कुछ तो खयाल करो। गली-मुहल्ला सुनता होगा । इतनी रुखाई से भी कोई बोलता है!" माँजी ने कहा, फिर घबराकर सन्तू से कहने लगीं, "इधर आओ सन्तू, और इन्हें छज्जे पर लिटा आओ।" वीरजी फिर खिन्न-सा अनुभव करते हुए अपने कमरे में चले गए। मैंने जल्दबाजी की, मुझे बीच में नहीं पड़ना चाहिए था। इन्होंने चम्मच कहाँ चुराया होगा, जरूर कहीं गिर गया होगा।
मौसियाँ झेंप गईं और पीछे हट गईं। पर मनोरमा से न रहा गया। झट आगे बढ़कर वह जेब देखने लगी। रसोईघर की दहलीज पर सन्तू हाथ में पानी का गिलास उठाए रुक गया और मंगलसेन की ओर देखने लगा। चाचा मंगलसेन खड़ा कभी एक का मुँह देख रहा था, कभी दूसरे का। वह कुछ कहना चाहता था, मगर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था। एक जेब में से मैला-सा रूमाल निकला, फिर बीड़ियों की गड्डी, माचिस, छोटा-सा पैंसिल का टुकड़ा। "इस जेब में तो नहीं है।" मनोरमा बोली और दूसरी जेब देखने लगी। मनोरमा एक-एक चीज निकालती और अपनी सहेलियों को दिखा- दिखाकर हँसती । दाईं जेब में कुछ खनका । मनोरमा चिल्ला उठी, "कुछ खनका है, इसी जेब में है, चोर पकड़ा गया! तुमने सुना, मालती?" जेब में टूटा हुआ चाकू रखा था, जो चाबियों के गुच्छे से लगकर खनका था। "छोड़ दो, मनोरमा! जाने दो, सबका धर्म अपने-अपने साथ है। आपसे चम्मच अच्छा नहीं है, मंगलसेनजी, लेकिन यह सगाई की चीज थी।" मंगलसेन की साँस फूलने लगी और टाँगें काँपने लगीं, लेकिन मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। "दोनों कान खोलकर सुन ले, मंगलसेन!" बाबूजी ने गरजकर कहा, "मैं तेरे से पाँच रुपए चम्मच के ले लूँगा, इसमें मैं कोई लिहाज नहीं करूंगा।" मंगलसेन खड़े-खड़े गिर पड़ा। "बधाई, बहनजी!" नीचे आँगन में से तीन-चार स्त्रियों की आवाज एक साथ आ गई । मंगलसेन गिरा भी अजीब ढंग से । धम्म से जमीन पर जो पड़ा तो उकड़ हो गया, और पगड़ी उतरकर गले में आ गई। मनोरमा अपनी हँसी रोके न रोक सकी। "देखो जी, कुछ तो खयाल करो। गली-मुहल्ला सुनता होगा । इतनी रुखाई से भी कोई बोलता है!" माँजी ने कहा, फिर घबराकर सन्तू से कहने लगीं, "इधर आओ सन्तू, और इन्हें छज्जे पर लिटा आओ।" वीरजी फिर खिन्न-सा अनुभव करते हुए अपने कमरे में चले गए। मैंने जल्दबाजी की, मुझे बीच में नहीं पड़ना चाहिए था। इन्होंने चम्मच कहाँ चुराया होगा, जरूर कहीं गिर गया होगा।
रांची : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का वित्तीय वर्ष 2021- 22 का टैरिफ आदेश जारी कर दिया गया है. आयोग ने 6. 5% की टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दी है. इसके साथ ही यदि उपभोक्ता बिल तिथि के 5 दिनों के भीतर भुगतान करता है तो उपभोक्ता को बिल के भुगतान पर 2% की त्वरित छूट भी प्रदान की जाएगी. ऑनलाइन या किसी डिजिटल मोड के माध्यम से किए गए बिल की पूरी राशि की देय तिथि के भीतर भुगतान की गई राशि पर 1% छूट की अनुमति दी गई है. इसकी अधिकतम सीमा छूट 250 रुपये होगी. लोड फैक्टर रिबेट सभी उपभोक्ताओं को दिया जाएगा जिनका लोड फैक्टर 65% से अधिक होगा प्रीपेड मीटर इन पर स्विच करने एवं प्रीपेड मीटर लगाने के 1 महीने के भीतर पूरी सुरक्षा जमा राशि की वापसी की जाएगी तथा संबंधित उपभोक्ता श्रेणी के लिए ऊर्जा शुल्क पर 3% की छूट लागू होगी. इसके साथ ही बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने अपने प्रत्याशी का वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2363. 87 करोड़ के राजस्व में अंतर की मांग की गई थी आयोग द्वारा अपने विवेकपूर्ण जांच के उपरांत 1592. 31 करोड़ की मंजूरी प्रदान की है.
रांची : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस- बाईस का टैरिफ आदेश जारी कर दिया गया है. आयोग ने छः. पाँच% की टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दी है. इसके साथ ही यदि उपभोक्ता बिल तिथि के पाँच दिनों के भीतर भुगतान करता है तो उपभोक्ता को बिल के भुगतान पर दो% की त्वरित छूट भी प्रदान की जाएगी. ऑनलाइन या किसी डिजिटल मोड के माध्यम से किए गए बिल की पूरी राशि की देय तिथि के भीतर भुगतान की गई राशि पर एक% छूट की अनुमति दी गई है. इसकी अधिकतम सीमा छूट दो सौ पचास रुपयापये होगी. लोड फैक्टर रिबेट सभी उपभोक्ताओं को दिया जाएगा जिनका लोड फैक्टर पैंसठ% से अधिक होगा प्रीपेड मीटर इन पर स्विच करने एवं प्रीपेड मीटर लगाने के एक महीने के भीतर पूरी सुरक्षा जमा राशि की वापसी की जाएगी तथा संबंधित उपभोक्ता श्रेणी के लिए ऊर्जा शुल्क पर तीन% की छूट लागू होगी. इसके साथ ही बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने अपने प्रत्याशी का वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में दो हज़ार तीन सौ तिरेसठ. सत्तासी करोड़ के राजस्व में अंतर की मांग की गई थी आयोग द्वारा अपने विवेकपूर्ण जांच के उपरांत एक हज़ार पाँच सौ बानवे. इकतीस करोड़ की मंजूरी प्रदान की है.
अभिनेता अमिता साध जिन्होंने वेब सीरीज और फिल्मों में अच्छी पकड़ बनायी है, उन्होनें हाल ही में अपने मेंटल हेल्थ पर बात की. अमित ने बताया कि उन्होंने चार बार आत्महत्या करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, 'जब वह 16-18 साल के थे तो उन्होंने 4 बार आत्महत्या करने की कोशिश की थी. उन्होंने बताया कि वह सूइसाइडल नहीं थे फिर भी अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश करते रहते थे. चौथी बार कोशिश के बाद उन्होंने फैसला लिया कि अब ऐसा नहीं करना बल्कि आगे बढ़ना है. इसके बाद उन्होंने 'नेवर गिव अप' का मंत्र अपनाया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ' अमित ने MensXP को बताया कि इससे उबरने में उनको 20 साल लगे. वह बताते हैं, मैं इससे एक दिन में नहीं निकला- मुझे 20 साल लग गए. मुझे बस ये पता था कि ये अंत नहीं है. उन्होंने बताया कि जिस दिन उन्हें समझ आया कि जीवन एक गिफ्ट है, उसी दिन से उनका नजरिया पॉजिटिव हो गया. वह बताते हैं, अब मेरे मन में कमजोर लोगों के लिए प्यार और दया है. अमित ने कहा कि कई लोग सूइसाइड कर लेते हैं औऱ कई लोगों को एक बुरे वक्त पर इसका खयाल आता है. मेरे लिए असली ताकत इससे बाहर आना है.
अभिनेता अमिता साध जिन्होंने वेब सीरीज और फिल्मों में अच्छी पकड़ बनायी है, उन्होनें हाल ही में अपने मेंटल हेल्थ पर बात की. अमित ने बताया कि उन्होंने चार बार आत्महत्या करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, 'जब वह सोलह-अट्ठारह साल के थे तो उन्होंने चार बार आत्महत्या करने की कोशिश की थी. उन्होंने बताया कि वह सूइसाइडल नहीं थे फिर भी अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश करते रहते थे. चौथी बार कोशिश के बाद उन्होंने फैसला लिया कि अब ऐसा नहीं करना बल्कि आगे बढ़ना है. इसके बाद उन्होंने 'नेवर गिव अप' का मंत्र अपनाया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ' अमित ने MensXP को बताया कि इससे उबरने में उनको बीस साल लगे. वह बताते हैं, मैं इससे एक दिन में नहीं निकला- मुझे बीस साल लग गए. मुझे बस ये पता था कि ये अंत नहीं है. उन्होंने बताया कि जिस दिन उन्हें समझ आया कि जीवन एक गिफ्ट है, उसी दिन से उनका नजरिया पॉजिटिव हो गया. वह बताते हैं, अब मेरे मन में कमजोर लोगों के लिए प्यार और दया है. अमित ने कहा कि कई लोग सूइसाइड कर लेते हैं औऱ कई लोगों को एक बुरे वक्त पर इसका खयाल आता है. मेरे लिए असली ताकत इससे बाहर आना है.
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। कतला एक सबसे तेज बढ़ने वाली मछली है यह गंगा नदीय तट की प्रमुख प्रजाति है। भारत में इसका फैलाव आंध्रप्रदेश की गोदावरी नदीं तथा कृष्णा व कावेरी नदियों तक है। भारत में असम, बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में सामान्यतया कतला के नाम से, उड़ीसा में भाखुर, पंजाब में थरला, आंध्र में बीचा, मद्रास मे थोथा के नाम से जानी जाती है। शरीर गहरा, उत्कृष्ट सिर, पेट की अपेक्षा पीठ पर अधिक उभार, सिर बड़ा, मुंह चैड़ा तथा उपर की ओर मुड़ा हुआ, पेट ओंठ, शरीर ऊपरी ओर से धूसर तथा पाष्र्व व पेट रूपहला तथा सुनहरा, पंख काले होते हैं। यह मुख्यतः जल के सतह से अपना भोजन प्राप्त करती है। जन्तु प्लवक इसका प्रमुख भोजन है। 10 मिली मीटर की कतला (फाई) केवल युनीसेलुलर, एलगी, प्रोटोजोअन, रोटीफर खाती है तथा 10 से 16.5 मिली मीटर की फ्राई मुख्य रूप से जन्तुप्लवक खाती है, लेकिन इसके भोजन में यदाकदा कीड़ों के लार्वे, सूक्ष्म शैवाल तथा जलीय धास पात एवं सड़ी गली वनस्पति के छाटे टुकड़ों का भी समावेश हाते है। लंबाई 1.8 मीटर व वजन 60 किलो ग्राम। कतला मछली 3 वर्ष में लैगिकं परिपक्वता प्राप्त कर लेती है। मादा मछली में मार्च माह से तथा नर में अप्रैल माह से परिपक्वता प्रारंभ होकर जून माह तक पूर्ण परिपक्व हो जाते है। यह प्राकृतिक नदीय वातावरण में प्रजनन करती है। वर्षा ऋतु इसका मुख्य प्रजनन काल है। इसकी अण्ड जनन क्षमता 80,000 से 1,50,000 अण्डे प्रतिकिलो ग्राम होती है, सामान्यतः कतला मछली में 1.25 लाख प्रति किलो ग्राम अण्डे देने की क्षमता होती है। कतला के अण्डे गोलाकार, पारदर्षी हल्के लाल रंग के लगभग 2 से 2.5 मि.मी. ब्यास के जा निषेचिन होने पर पानी में फलू कर 4.4 से 5 मि.मी. तक हो जाते है, हेचिंग होने पर हेचलिंग 4 से 5 मि.मी. लंबाई के पारदर्शी होते है। भारतीय प्रमुख शफर मछलियो मे कतला मछली शीध्र बढ़ने वाली मछली है, सघन मत्स्य पालन में इसका महत्वपूर्ण स्थान है, तथा प्रदेश के जलाषयो एवं छोटे तालाबों मे पालने योग्य है। एक वर्ष के पालन में यह 1 से 1.5 किलोग्राम तक वजन की हो जाती है। यह खाने में अत्यंत स्वादिष्ट तथा बाज़ारों में ऊँचे दाम पर बिकती है। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। कतला एक सबसे तेज बढ़ने वाली मछली है यह गंगा नदीय तट की प्रमुख प्रजाति है। भारत में इसका फैलाव आंध्रप्रदेश की गोदावरी नदीं तथा कृष्णा व कावेरी नदियों तक है। भारत में असम, बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में सामान्यतया कतला के नाम से, उड़ीसा में भाखुर, पंजाब में थरला, आंध्र में बीचा, मद्रास मे थोथा के नाम से जानी जाती है। शरीर गहरा, उत्कृष्ट सिर, पेट की अपेक्षा पीठ पर अधिक उभार, सिर बड़ा, मुंह चैड़ा तथा उपर की ओर मुड़ा हुआ, पेट ओंठ, शरीर ऊपरी ओर से धूसर तथा पाष्र्व व पेट रूपहला तथा सुनहरा, पंख काले होते हैं। यह मुख्यतः जल के सतह से अपना भोजन प्राप्त करती है। जन्तु प्लवक इसका प्रमुख भोजन है। दस मिली मीटर की कतला केवल युनीसेलुलर, एलगी, प्रोटोजोअन, रोटीफर खाती है तथा दस से सोलह.पाँच मिली मीटर की फ्राई मुख्य रूप से जन्तुप्लवक खाती है, लेकिन इसके भोजन में यदाकदा कीड़ों के लार्वे, सूक्ष्म शैवाल तथा जलीय धास पात एवं सड़ी गली वनस्पति के छाटे टुकड़ों का भी समावेश हाते है। लंबाई एक दशमलव आठ मीटर व वजन साठ किलो ग्राम। कतला मछली तीन वर्ष में लैगिकं परिपक्वता प्राप्त कर लेती है। मादा मछली में मार्च माह से तथा नर में अप्रैल माह से परिपक्वता प्रारंभ होकर जून माह तक पूर्ण परिपक्व हो जाते है। यह प्राकृतिक नदीय वातावरण में प्रजनन करती है। वर्षा ऋतु इसका मुख्य प्रजनन काल है। इसकी अण्ड जनन क्षमता अस्सी,शून्य से एक,पचास,शून्य अण्डे प्रतिकिलो ग्राम होती है, सामान्यतः कतला मछली में एक.पच्चीस लाख प्रति किलो ग्राम अण्डे देने की क्षमता होती है। कतला के अण्डे गोलाकार, पारदर्षी हल्के लाल रंग के लगभग दो से दो.पाँच मि.मी. ब्यास के जा निषेचिन होने पर पानी में फलू कर चार.चार से पाँच मि.मी. तक हो जाते है, हेचिंग होने पर हेचलिंग चार से पाँच मि.मी. लंबाई के पारदर्शी होते है। भारतीय प्रमुख शफर मछलियो मे कतला मछली शीध्र बढ़ने वाली मछली है, सघन मत्स्य पालन में इसका महत्वपूर्ण स्थान है, तथा प्रदेश के जलाषयो एवं छोटे तालाबों मे पालने योग्य है। एक वर्ष के पालन में यह एक से एक दशमलव पाँच किलोग्रामग्राम तक वजन की हो जाती है। यह खाने में अत्यंत स्वादिष्ट तथा बाज़ारों में ऊँचे दाम पर बिकती है।
सीबीआई के पूर्व निदेशक यू एस मिश्रा का बृहस्पतिवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई ने एक बयान में मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त किया। एजेंसी के प्रवक्ता आर सी जोशी ने एक बयान में कहा, "केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के सभी रैंक के अधिकारी और कर्मी सीबीआई के पूर्व निदेशक श्री यू एस मिश्रा के दुखद निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह परिवार को इस क्षति को सहन करने की शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करें। " मिश्रा ने 6 दिसंबर, 2003 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के दौरान 21वें प्रमुख के रूप में एजेंसी की कमान संभाली थी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में 6 दिसंबर, 2005 को अपना दो साल का कार्यकाल पूरा किया। ओडिशा काडर के 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी मिश्रा ने राज्य पुलिस के साथ-साथ भारत सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। जोशी ने कहा, "उन्होंने सीबीआई में एसपी, डीआईजी और विशेष निदेशक सहित विभिन्न पदों पर काम किया और संस्था के प्रमुख बने। " उन्होंने कहा कि वह सच्चे पेशेवर विलक्षण व्यक्ति के साथ एक उच्च पदस्थ अधिकारी थे। मिश्रा को इंटरपोल का उपाध्यक्ष भी चुना गया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
सीबीआई के पूर्व निदेशक यू एस मिश्रा का बृहस्पतिवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई ने एक बयान में मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त किया। एजेंसी के प्रवक्ता आर सी जोशी ने एक बयान में कहा, "केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के सभी रैंक के अधिकारी और कर्मी सीबीआई के पूर्व निदेशक श्री यू एस मिश्रा के दुखद निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह परिवार को इस क्षति को सहन करने की शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करें। " मिश्रा ने छः दिसंबर, दो हज़ार तीन को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के दौरान इक्कीसवें प्रमुख के रूप में एजेंसी की कमान संभाली थी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में छः दिसंबर, दो हज़ार पाँच को अपना दो साल का कार्यकाल पूरा किया। ओडिशा काडर के एक हज़ार नौ सौ अड़सठ बैच के आईपीएस अधिकारी मिश्रा ने राज्य पुलिस के साथ-साथ भारत सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। जोशी ने कहा, "उन्होंने सीबीआई में एसपी, डीआईजी और विशेष निदेशक सहित विभिन्न पदों पर काम किया और संस्था के प्रमुख बने। " उन्होंने कहा कि वह सच्चे पेशेवर विलक्षण व्यक्ति के साथ एक उच्च पदस्थ अधिकारी थे। मिश्रा को इंटरपोल का उपाध्यक्ष भी चुना गया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने TGT परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। 02 सितंबर को होने वाली गणित की डीएसएसएसबी टीजीटी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइटdsssb. delhi. gov. in से डीएसएसएसबी टीजीटी प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। DSSSB ने जूनियर असिस्टेंट (पोस्ट कोड - 95/20) के पद के लिए 31 अगस्त 2021 को परीक्षा का एडमिट कार्ड भी अपलोड कर दिया है। DSSSB एडमिट कार्ड डाउनलोड करना का लिंक भी नीचे दिया गया है। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइटdsssb. delhi. gov. in पर जाएं। वेबसाइट के होम पेज पर आपको 'DOWNLOAD ADMIT CARD FOR ONLINE CBT EXAM DATED 28. 08. 2021 FOR POST CODE 18/20 AND 48/20' का लिंक मिलेगा। उसपर क्लिक करें। क्लिक करते ही नया पेज खुल जाएगा। यहां आपको अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि डालनी होगी। डिटेल्स डालने के बाद सबमिट कर देना है। सबमिट करते ही आपका एडमिट कार्ड आपके सामने स्क्रीन पर होगा। अब आप इसे डाउनलोड कर पाएंगे। उम्मीदवारों को एग्जाम सेंटर में COVID-19 संबंधित सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा। इस भर्ती के लिए होने वाले एग्जाम में कुल 200 सवाल पूछे जाएंगे। हर सवाल 1 नंबर का होगा। पूरा पेपर करने के लिए 2 घंटे का समय मिलेगा। DSSSSB ने TGT कंप्यूटर साइंस, लैब असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट, केयर टेक, TGT स्पेशल एजुकेशन, स्टेनो हिंदी और अन्य पदों के लिए 01, 02, 07, 08, 14, 21, 28 अगस्त 2021 को निर्धारित टियर 1 लिखित परीक्षा आयोजित की थी। सेक्शन A: एग्जाम में जनरल अवेयरनेस से 20 नंबर के 20 सवाल पूछे जाएंगे। जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग से से 20 नंबर के 20 सवाल पूछे जाएंगे। अर्थमेटिकल एंड न्यूमेरिकल एबिलिटी से से 20 नंबर के 20 सवाल पूछे जाएंगे। इंग्लिश लेंगुएज टेस्ट में 20 नंबर के 20 सवाल पूछे जाएंगे। हिंदी लेंगुएज टेस्ट में 20 नंबर के 20 सवाल पूछे जाएंगे। सेक्शन B: इसमें टेक्नोलॉजी मेथोडोलॉजी से 100 नंबर के 100 सवाल पूछे जाएंगे। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का डायरेक्ट लिंकhttps://cdn. digialm. com/EForms/configuredHtml/1258/72184/login. html है।
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने TGT परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। दो सितंबर को होने वाली गणित की डीएसएसएसबी टीजीटी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइटdsssb. delhi. gov. in से डीएसएसएसबी टीजीटी प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। DSSSB ने जूनियर असिस्टेंट के पद के लिए इकतीस अगस्त दो हज़ार इक्कीस को परीक्षा का एडमिट कार्ड भी अपलोड कर दिया है। DSSSB एडमिट कार्ड डाउनलोड करना का लिंक भी नीचे दिया गया है। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइटdsssb. delhi. gov. in पर जाएं। वेबसाइट के होम पेज पर आपको 'DOWNLOAD ADMIT CARD FOR ONLINE CBT EXAM DATED अट्ठाईस. आठ. दो हज़ार इक्कीस FOR POST CODE अट्ठारह/बीस AND अड़तालीस/बीस' का लिंक मिलेगा। उसपर क्लिक करें। क्लिक करते ही नया पेज खुल जाएगा। यहां आपको अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि डालनी होगी। डिटेल्स डालने के बाद सबमिट कर देना है। सबमिट करते ही आपका एडमिट कार्ड आपके सामने स्क्रीन पर होगा। अब आप इसे डाउनलोड कर पाएंगे। उम्मीदवारों को एग्जाम सेंटर में COVID-उन्नीस संबंधित सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा। इस भर्ती के लिए होने वाले एग्जाम में कुल दो सौ सवाल पूछे जाएंगे। हर सवाल एक नंबर का होगा। पूरा पेपर करने के लिए दो घंटाटे का समय मिलेगा। DSSSSB ने TGT कंप्यूटर साइंस, लैब असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट, केयर टेक, TGT स्पेशल एजुकेशन, स्टेनो हिंदी और अन्य पदों के लिए एक, दो, सात, आठ, चौदह, इक्कीस, अट्ठाईस अगस्त दो हज़ार इक्कीस को निर्धारित टियर एक लिखित परीक्षा आयोजित की थी। सेक्शन A: एग्जाम में जनरल अवेयरनेस से बीस नंबर के बीस सवाल पूछे जाएंगे। जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग से से बीस नंबर के बीस सवाल पूछे जाएंगे। अर्थमेटिकल एंड न्यूमेरिकल एबिलिटी से से बीस नंबर के बीस सवाल पूछे जाएंगे। इंग्लिश लेंगुएज टेस्ट में बीस नंबर के बीस सवाल पूछे जाएंगे। हिंदी लेंगुएज टेस्ट में बीस नंबर के बीस सवाल पूछे जाएंगे। सेक्शन B: इसमें टेक्नोलॉजी मेथोडोलॉजी से एक सौ नंबर के एक सौ सवाल पूछे जाएंगे। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का डायरेक्ट लिंकhttps://cdn. digialm. com/EForms/configuredHtml/एक हज़ार दो सौ अट्ठावन/बहत्तर हज़ार एक सौ चौरासी/login. html है।
सोत्पला दीर्घिका यन्त्र विदलस्कन काम्बुजा हंसानां करुमन्द्रेया बिरुतेन मनोहराः ॥५५॥ सरांस्युरफुल्लपद्मानि वनमुन्मसको किलम् । क्रीडाद्रयश्च रुचिराः सन्ति यत्र पदे पदे ॥५६॥ यत्राधूय तहम्मन्दमावाति मृदुमारुतः । पटवासमिवातन्वन् मकरन्दरजोऽमितः ॥५७॥ यत्र गन्धवहाधूतैराकीर्णा पुष्परेणुभिः । वसुधा राजते पीत सोमणेत्राव कुण्ठिा ॥५८॥ यत्रामोदित दिग्मार्गः मरुद्भिः पुष्पजं रज. । नभसि श्रियमाधत्ते वितानस्यामितो हृतम् ॥ ५३॥ यन्त्र नातपसंत्राधा न वृष्टिर्न हिमादयः । नेतयो दन्दका वा प्राणिनां भयहंतवः ।।६० ।। न ज्योत्स्ना नाप्यहोरात्रविभागो नत संक्रमः । नियंकवृत्तयो भावा यत्रैषां सुखहेतवः ।।६१।। वनानि नित्यपुष्पाणि नलिन्यो नित्यपङ्कजाः । यत्र निश्यसुखा देशा रखपांसुमिराचिता ।।६२।। यत्रोत्पश्चवतां दिव्यमङ्गुल्याहारमुद्र सम्वदन्त्युत्तानशय्यायामा सप्ताहव्यतिक्रमात् ।।६३।। ततो देशान्तरं तेषामामनन्ति मनीषिण । दम्पतीनां महारङ्गरिङ्गिणां दिनसप्तकम् ।।६४।। सप्ताहन परणाथ प्रोत्थाय कलमाषिण । स्खलद्गति महेलं च संचरन्ति महीतले ।।६५।। तत स्थिरपदन्या सैर्वजन्ति दिनसप्तकम् । कलाज्ञानेन सप्ताह' निर्विशन्ति गुणैश्च तं ।।६६।। परेण सप्तरात्रेण सम्पूर्ण नवयौवना । लमदंशुकमदूषा जायन्ते मोगमागिन ॥६७॥ स्वादिष्ट, कोमल और मनोहर तृणरूपी सम्पत्तिको रसायन समझकर बड़े हर्पसे चरा करते है ।॥५४॥ जहाँ अनेक वापिकाएँ है जो कमलोंसे सहित है, उनमें सुवर्णके समान डीले कमल फूल रहे है और जो हंसोंक मधुर तथा गम्भीर शब्दोंसे अतिशय मनोहर जान पड़ती हैं ॥५५॥ जहाँ जगह-जगहपर फूले हुए कमलोंसे सुशोभित तालाब, उन्मत्त कोकिलाओंसे भरे हुए वन और सुन्दर कीड़ापर्वत हैं ।।५६।। जहाँ कोमल वायु वृक्षोंको हिलाता हुआ धीरे-धीरे बहता रहता है । वहु वायु बहते समय सब और कमलोंकी परागको उड़ाता रहता है जिससे ऐसा मालूम होता है मानो सच और सुगन्धित चूर्ण ही फैला रहा हो ॥ ५७ ॥ जहाँ वायुके द्वारा उड़कर आये हुए पुष्पपरागसे ढकी हुई पृथ्वी ऐसी शोभायमान हो रही है मानो पीले रंगके रेशमी वस्त्रसे ढका हो ।। ५८ ।। जहाँ दशां दिशाओं में वायुके द्वारा उड़ उड़कर आकाश में इकट्ठा हुआ पुष्पपराग सब ओर से तने हुए चॅदोबाकी शोभा धारण करता है ।। ५९ ।। जहाँ न गरमीका क्लेश होता है, न पानी बरसता है, न तुपार आदि पड़ता है, न अतिवृष्टि आदि ईतियाँ हैं और न प्राणियांको भय उत्पन्न करनेवाले साँप, बिच्छू, ग्वटमल आदि दुष्ट जन्तु ही हुआ करते है। ६० ।। जहाँ न चाँदनी है, न रात-दिनका विभाग और न ऋतुओंका परिवर्तन ही है, जहाँ सुख देनेवाले सब पदार्थ सदा एक से रहते है ।।११।। जहोके वन सदा फूलोंसे युक्त रहते हैं, कमलिनियोंमें सदा कमल लगे रहते है, और रत्नकी धूलिसे व्याप्त हुए देश सदा सुखी रहते हैं ।। ६२ ।। जहाँ उत्पन्न हुए आर्य लोग प्रथम सात दिन तक अपनी शय्यापर चित्त पड़े रहते हैं । उस समय आचार्यांने हाथका रसीला अंगूठा चूमना ही उनका दिव्य आहार बतलाया है ।।६३।। तत्पश्चात् विद्वानोंका मत है कि वे दोनों दम्पतीद्वतीय सप्ताह में पृथ्वीरूपी रंगभूमिमें घुटनोंक बल चलते हुए एक स्थानसे दूसरे स्थान तक जाने लगते है ।। ६४ ।। तदनन्तर तीसरे सप्ताह में वे खड़े होकर अस्पष्ट किन्तु मीठी-मीठी बातें कहने लगते हैं और गिरते-पड़ते खेलते हुए जमीनपर चलने लगते है ।।६५।। फिर चौथे सप्ताह में अपने पैर स्थिरतासे रखते हुए चलने लगते हैं तथा पाँचबे सप्ताहमें अनेक कलाओं और गुणोंसे सहित हो जाते हैं ।। ६६ ।। छठे सप्ताह में पूर्ण जवान हो जाते हैं और सातवें सप्ताह में अच्छे-अच्छे वस्त्राभूषण धारण कर भोग भोगनेवाले १. वासचूर्णम् । २. स्वर्णवर्णपट्टवस्त्रेण । ४. पदार्था । ५. उद्गतरसम् । ६ अनुभवन्ति । ३. बाच्छादिता । -गुण्ठिता अ०, प० स०, नवमासं स्थिता गर्ने रत्नगर्भगृहोप मे । यत्र दम्पतितामेत्य जायन्ते दानिनो नरा ।।६८॥ यदा दम्पतिसंभूति जनयित्रो परासुता । सदैव तत्र पुत्रादिसंकल्पो यम देहिनाम् ॥६९।। क्षुत जृम्मितमात्रेण यत्राहुर्मृतिमङ्गिनाम् । स्वभाव माईबाद यान्ति दिवमेव यदुद्भवा ॥ ७० ॥ देहोच्छ्रायं नृणां यत्र नानालक्षणसुन्दरम् । धनुषां षट्सहस्राणि 'विवृण्वन्त्याप्तसूक्तयः ।।७१।। पल्यनयमितं यन्त्र देहिनामायुरिष्यते । दिनत्रयेण चाहारः 'कुबलीफलमात्रकः ॥७२॥ "यक न जरातका न वियोगो न शोचनम् । नानिष्टसंप्रयोगश्च न चिन्ता वॅन्यमेव च ॥७३॥ न निद्रा नातिन्द्राण नात्युन्मेष निमेषणम् । न शारीरमलं यत्र न लालास्वेदसंभवः ॥७४।। न यत्र बिरहोन्मादो न यन्त्र मदनज्वर । न यत्र खण्डना भोगे मुखं यत्र निरन्तरम् ॥७५॥ न विषादो भयं ग्लानि नरुचि कुपितं च न । न कार्पण्यमनाचारो न बली यत्र नावल ॥१६॥ 'बालार्कसमनिर्माषा निःस्वेदा नीरजोऽम्बरा । यत्र पुण्योदयानित्यं रंरम्यन्ते नरा सुखम् ॥७७॥ दशाङ्गतरूलभूत भोगानुभवनोद्भवम् । सुख यत्रातिशेतं तां चक्रिणो मोगमं पदम् ॥७८ ॥ मन्त्र दीर्घायुषां नृणां नाका मृत्यु । निरुपद्रवमायु स्वं जीवन्त्युक्तप्रमाणकम् ॥७९॥ हो जाते हैं ।।६७ ।। पूर्वभवमें दान देनेवाले मनुष्य ही जहाँ उत्पन्न होते है । वे उत्पन्न होने के पहले नौ माह तक गर्भमें इस प्रकार रहते है जिस प्रकार कि कोई ग्लोंके महल में रहता है। उन्हें गर्भमें कुछ भी दुःख नहीं होता। और स्त्री-पुरुष साथ-साथ ही पैदा होते हैं। वे दोनों स्त्रीपुरुष दम्पतिपने को प्राप्त होकर ही रहते हैं ।।६८।। चूँकि वहाँ जिस समय दम्पतिका जन्म होना है उसी समय उनके माता-पिताका देहान्त हो जाता है इसलिए वहाँके जीवोंमें पुत्र आदिका संकल्प नहीं होता ।।६९।। जहाँ केवल छीक और जंभाई लेने मात्र से ही प्राणियोंकी मृत्यु हो जाती है अर्थात् अन्त समय में माताको छींक और पुरुषको जँभाई आती है । जहाँ उत्पन्न होनेवाले जीव स्वभावसे कोमलपरिणामी होनेके कारण स्वर्गको ही जाते है ७० ॥ जहाँ उत्पन्न होनेवाले लोगोंका शरीर अनेक लक्षणोंसे सुशोभित तथा छह हजार धनुप ऊँचा होता है ऐसा आप्तप्रणीत आगम स्पष्ट वर्णन करते हैं ।। ७१ । जहाँ जीवोंकी आयु तीन पल्य प्रमाण होती है और आहार तीन दिन के बाद होता है, वह भी बदरीफल ( छोटे बेरके ) बराबर ।। ७२ ।। जहाँ उत्पन्न हुए जीवोंके न वुढापा आता है, न रोग होना है, न विग्ह होता है, न शोक होता हैं, न अनिष्टका संयोग होता है, न चिन्ता होती है, न हीनता होती है. न नींद आती है, न आलम्य आता है, न नेत्रोंके पलक झपते है, न शरीर में मल होता है, न लार बहती है और न पसीना ही आता है ।। ७३-७४ ।। जहाँ न विरहका उन्माद है, न कामज्वर है, न भोगांका विच्छेद है किन्तु निरन्तर सुख ही सुख रहता है ।। ७५ ।। जहाँ न विपाद है, न भय हैं, न 'ग्लानि है, न अरुचि है, न क्रोध है, न कृपणता है, न अनाचार है, न कोई बलवान है और न कोई निर्बल है ॥ ७६ ॥ जहाँ के मनुष्य वालसूर्यके समान देदीप्यमान, पसीनारहित और स्वच्छ वस्त्रोंके धारक होते है तथा पुण्यके उदयसे सदा सुखपूर्वक क्रीड़ा करते रहते है ।। ७७।। जहाँ दश प्रकार के कल्पवृक्षांस उत्पन्न हुए भोगांके अनुभव करनेसे उत्पन्न हुआ सुख चक्रवर्तकी भोगसम्पदाओंका भी उल्लंघन करना है अर्थात् वहाँके जीव चक्रवर्तीकी अपेक्षा अधिक सुखी रहते हैं ।।७८।। जहाँ मनुष्य बड़ी लम्बी आयुके धारक होते हैं उनकी असमय में मृत्यु नहीं होती । वे अपनी तीन पत्य प्रमाण आयु तक निर्विघ्न रूपसे जीवित रहते हैं ।। ७९ ।। १. जननीजनकयो । २. जृम्भण । ३. विवरणं कुर्वन्ति । ४. बदरम् । ५ यत्रोत्पन्नानाम् । ६ तन्द्रा । ७. हर्षय । ८. कोरः ९. तरुणार्कमदृशशरीरुच । १०. अकाले सर्वेऽपि समसंमोगाः सर्वे समसुदयाः । सर्वे सर्वर्तुजान् भोगान् यत्र विन्दन्त्यनामयाः ॥८० ॥ सर्वेऽपि सुन्दराकारा सर्वे वज्रास्थिबन्धना । सर्वे चिरायुष कान्त्या गोर्वाणा इव यदुवळे ॥८१ ॥ यत्र कल्पतरुच्छायामुपेस्य ललितस्मितौ । दम्पती गीतवादि रमेते सततोत्सवै ॥८२॥ कलाकुशलता कस्य देहस्वं कलकण्ठता । मास्सयष्यदिवेकल्यमपि यत्र निसर्गजम् ॥ ८३ ॥ स्वभावसुन्दराकारा स्वभावललितेहिता । स्वमाय मधुरालापा मोदन्तं यत्र देहिन ।।८४ ॥ दानाद् दानानुमोदाद् वा यत्र पात्रसमाश्रितात् । प्राणिन सुखमेधन्ते यावजीवमनामया ॥८५॥ कुदृष्टयो व्रहींना केवलं मोगका शिक्षण । दत्वा दानान्यपात्रेषु तिर्यक्त्वं यत्र यान्त्यमी ॥८६॥ कुशीला कुत्सिताचारा कुवेषा दुरुपोषिता । मायाचाराइच जायन्ते मृगा यत्र बतच्युता ॥८७ ॥ "मिथुनं मिथुनं तेषां मृगाणामपि जायते । न मिथोऽस्ति विरोधों' वा 'बैरं वरस्यमेव वा ॥८८ ॥ इत्यध्यन्त सुम्बे तस्मिन् क्षेत्रे पात्रप्रदानत । श्रीमती वञ्ज्रजश्च दम्पतिश्वमुपयतु ॥८९ ॥ प्रागुकाश्य मृगा जन्म भेजस्तत्रैव मद्रका । पायदानानुमोदन दिव्यं मानुष्यमाश्रिता ॥९०॥ तथा मतिवरायाश्च तद् वियोगाद् गताः शुचम् । हृदधर्मान्तिकं दाक्षां जैनीमाशि श्रियन् पराम् ।।९१।। ते सम्यग्दर्शनशान चारित्राचारसंपदम् । समाराध्य यथाकालं स्वर्गलोकमयासिषु ॥१२॥ जहाँ सब जीव समान रूपसे भोगांका अनुभव करते है, सबके एक समान सुखका उदय होता है, सभी नीरोग रहकर छहों ऋतुओंके भोगोपभोग प्राप्त करते हैं ।।८०।। जहाँ उत्पन्न हुए सभी जीव सुन्दर आकारके धारक है, सभी ववृषभनागचसंहननसे सहित हैं, सभी दीर्घ आयुके धारक हैं और सभी कान्तिसे देवोंके समान है ।।८१।। जहाँ स्त्री-पुरुष कल्पवृक्षकी छायामें जाकर लीलापूर्वक मन्द-मन्द हँसते हुए, गाना-बजाना आदि उत्सवोंसे सदा क्रीड़ा करते रहते है ।।८।। जहाँ कलाओंमें कुशल होना, स्वर्गके समान सुन्दर शरीर प्राप्त होना, मधुर कण्ठ होना और मात्सर्य, ईर्ष्या आदि दोपोंका अभाव होना आदि बातें स्वभावसे ही होती है ।।८३।। जहाँके जीव स्वभावसे ही सुन्दर आकारवाले, स्वभावसे ही मनोहर चेष्टाओंवाले और स्वभाव ही मधुर वचन बोलने वाले होते है। इस प्रकार वे सदा प्रसन्न रहते है ।।८४।। उत्तम पात्रके लिए दान देने अथवा उनके लिए दिये हुए दानकी अनुमोदना करनेसे जीव जिस भोगभूमिमें उत्पन्न होते है और जीवनपर्यन्त नीरोग रहकर सुखसे बढ़ते रहते हैं ।।८५।। जो जीव मिथ्याइष्टि हैं, व्रतोंसे होन है और केवल भोगोंके अभिलापी है वे अपात्रों में दान देकर वहाँ निर्यच पर्यायको प्राप्त होते हैं ।। ८६।। जो जीव कुशील हैं-खोटे स्वभावके धारक है, मिथ्या आचार के पालक हैं, कुवेषी है, मिथ्या उपवास करनेवाले है, मायाचारी हैं और व्रतभ्रष्ट है वे जिम भोगभूमि में हरिण आदि पशु होते हैं ।।८७।। और जहाँ पशुओंके युगल भी आनन्दसे क्रीड़ा करते हैं। उनके परस्परमें न विरोध होता है न वैर होता हैं और न उनका जीवन ही नीरस होना है ।।८८।। इस प्रकार अत्यन्त सुखोंसे भरे हुए उस उत्तरकुरुक्षेत्र में पात्रदानके प्रभावसे वे दोनों श्रीमती और वजंघ दम्पती अवस्थाको प्राप्त हुए - स्त्री और पुरुषरूप से उत्पन्न हुए ।।८९।। जिनका वर्णन पहले किया जा चुका है ऐसे नकुल, सिंह, वानर और शूकर भी पात्रदानकी अनुमोदनाक प्रभावसे वहींपर दिव्य मनुष्यशरीरको पाकर भद्रपरिणामी आर्य हुए ।।१०।। इधर मतिवर, आनन्द, धनमित्र और अकम्पन ये चारों ही जीव श्रीमती और वनजंघके विरहसे भारी शोकको प्राप्त हुए और अन्त में चारोंने ही श्रीदृढ धर्म नामके आचार्य के समीप उत्कृष्ट जिनदीक्षा धारण कर ली ।।११।। और चारों ही सम्यग्दर्शन, १. लभन्ते । 'विदु लाभे । २ यश्रीताः । ३. रेमात अ०, १०, ३० स० म० ३४. निरामय । कल्पदेहत्वं अ०, प०, ८० स० । ५. मनोज्ञवण्ठत्वम् । ६. चेष्टा । ७. मैथुन मि-स०, द०, ल० । ८. वध्यवत्रकादिभावः । ९. मानसिको द्वेष । १०. रसक्षयः । अभो प्रवेयकस्याधो विमाने तेऽहमिन्द्रवाम् । प्रासास्तपोऽनुभाबेन तपो हि फलतीप्सितम् ॥ १३ ॥ "अथातो बज्रजकार्य कान्तया सममेकदा । कल्पपादपजां लक्ष्मोमीक्षमाण क्षणं स्थित ॥ ९४ ॥ सूर्यप्रमस्य देवस्य नभोयायि विमानकम् दृष्टा जातिस्मरो भूत्वा प्रबुद्ध प्रियया समम् ॥९५॥ तावच्चारणयोयुग्मं दूरादागच्छवैत । तं च तावनुगृहन्तौ व्योम्नः समवतेरतु ॥९६॥ हवा तो सहसात्यासीदभ्युत्थानादिसंभ्रम । संस्कारा प्राकना नूनं प्रेरयन्त्यङ्गिनो हिते ॥९७॥ अभ्यु सिष्ठव सौ रेजे मुनीन्द्रौ सह कान्तया । नलिम्या दिवस. सूर्यप्रतिसूर्याविवोद्गतौ ॥१९८॥ तयोरधिपदद्वन्द्व दत्ता प्रणनाम स । आनन्दाधुलबै सान्दै आायशिव तस्कमौ ॥९६॥ तामाशोभिरथा श्वास्य प्रणतं प्रमदान्वितम् । यती समुश्वितं देशमध्यासीनौ यथाक्रमम् ॥१०० ॥ तत सुखोपविष्टौ तौ सोऽपृच्छदिति चारणो। लसदन्वांशुसंतानैः पुष्पाञ्जलिमिवाकिरन् ॥१०१॥ भगवन्तौ युवां 'क्वस्यो कुतस्त्यौ किं नु कारणम् । युष्मदागमने ब्रूतमिदमेतत्तयाथ मे ॥ १०२ ॥ युष्मत्संदर्शनाजात सौहार्द मम मानसम् । प्रसीदति किमु ज्ञात पूर्वी 'शाती युवां मम ॥१०३ ॥ सम्यग्ज्ञान तथा सम्यकूचारित्ररूपी सम्पदाकी आराधना कर अपनी-अपनी आयुके अनुसार स्वर्गलोक गये ।।१२।। वहाँ तपके प्रभावसे अधोमैवेयक के सबसे नीचेके विमानमें ( पहले प्रवेयक में ) अहमिन्द्र पदको प्राप्त हुए । सो ठीक ही है । तप सबके अभीष्ट फलोंको फलता है ।।१३।। अनन्तर एक समय वज्रजंघ आर्य अपनी स्त्रीके साथ कल्पवृक्षकी शोभा निहारता हुआ क्षण-भर बैठा ही था ।।९४।। कि इतनेमें आकाश में जाते हुए सूर्यप्रभ देवके विमानको देखकर उसे अपनी स्त्रीके साथ-साथ ही जातिस्मरण हो गया और उसी क्षण दोनांको संसारके स्वरूपका यथार्थ ज्ञान हो गया ।।९५।। उसी समय वज्रजंघके जीवने दूरसे आते हुए दो चारण मुनि देखे । वे मुनि भी उसपर अनुग्रह करते हुए आकाशमार्ग से उतर पड़े ।।९६।। वज्रजंघका जीव उन्हें आता हुआ देखकर शीघ्र ही खड़ा हो गया। सच है, पूर्व जन्मक संस्कार ही जीवोंको हित कार्य में प्रेरित करते रहते है ।।९७।। दोनों मुनियोंके समक्ष अपनी स्त्री के साथ खड़ा होता हुआ वज्रजंघका जीव ऐसा शोभायमान हो रहा था जैसे उदित होते हुए सूर्य और प्रतिसूर्यके समझ कमलिनीके साथ दिन शोभायमान होता है ।।१८।। वज्रजंघके जीवने दोनों मुनियोंके चरणयुगलमें अर्घ चढाया और नमस्कार किया। उस समय उसके नेत्रोंसे हर्षके ऑसू निकलनिकल कर मुनिराजके चरणोंपर पड़ रहे थे जिससे वह ऐसा जान पड़ता था मानो अश्रुजलसे उनके चरणोंका प्रक्षालन ही कर रहा हो ।।९९ ।। वे दोनों मुनि स्त्रीके साथ प्रणाम करते हुए आर्य वज्रजंघको आशीर्वाद द्वारा आश्वासन देकर मुनियोंके योग्य स्थानपर यथाक्रम बैठ गये।। १००।। तदनन्तर मुखपूर्वक बैठे हुए दोनों चारण मुनियोंसे वज्रजंघ नीचे लिखे अनुसार पूछने लगा । पृछते समय उसके मुखसे दाँतोंकी किरणोंका समूह निकल रहा था जिससे ऐसा मालूम होता था मानो वह पुष्पाञ्जलि ही बिखेर रहा हो ।।१०१॥ वह बोला - हे भगवन्, आप कहाँ के रहनेवाले हैं ? आप कहाँ से आये हैं और आपके आनेका क्या कारण है ? यह सब आज मुझसे कहिए ॥ १०२ ।। हे प्रभो, आपके दर्शनसे मेरे हृदय में मित्रताका भाव उमड़ रहा है, चित्त बहुत ही प्रसन्न हो रहा है और मुझे ऐसा मालूम होता है कि मानो आप मेरे परि१. अनन्तरम् । २ अवतरत स्म । ३. विवोन्नतौ १०४ पदयुगले । ५. यते. म०, ल० । ६. क्व भवो । ७. कुत आगती । 'क्वेहामातस्त्रात् त्यच्' इति यथाक्रम भवार्थे आगतार्थे च त्यचप्रत्यय । ८. प्रत्यक्षतया । -मेतनषाद्य मे म० ल० । ९. पूर्वस्मिन् ज्ञातौ । १०. बन्धू ।
सोत्पला दीर्घिका यन्त्र विदलस्कन काम्बुजा हंसानां करुमन्द्रेया बिरुतेन मनोहराः ॥पचपन॥ सरांस्युरफुल्लपद्मानि वनमुन्मसको किलम् । क्रीडाद्रयश्च रुचिराः सन्ति यत्र पदे पदे ॥छप्पन॥ यत्राधूय तहम्मन्दमावाति मृदुमारुतः । पटवासमिवातन्वन् मकरन्दरजोऽमितः ॥सत्तावन॥ यत्र गन्धवहाधूतैराकीर्णा पुष्परेणुभिः । वसुधा राजते पीत सोमणेत्राव कुण्ठिा ॥अट्ठावन॥ यत्रामोदित दिग्मार्गः मरुद्भिः पुष्पजं रज. । नभसि श्रियमाधत्ते वितानस्यामितो हृतम् ॥ तिरेपन॥ यन्त्र नातपसंत्राधा न वृष्टिर्न हिमादयः । नेतयो दन्दका वा प्राणिनां भयहंतवः ।।साठ ।। न ज्योत्स्ना नाप्यहोरात्रविभागो नत संक्रमः । नियंकवृत्तयो भावा यत्रैषां सुखहेतवः ।।इकसठ।। वनानि नित्यपुष्पाणि नलिन्यो नित्यपङ्कजाः । यत्र निश्यसुखा देशा रखपांसुमिराचिता ।।बासठ।। यत्रोत्पश्चवतां दिव्यमङ्गुल्याहारमुद्र सम्वदन्त्युत्तानशय्यायामा सप्ताहव्यतिक्रमात् ।।तिरेसठ।। ततो देशान्तरं तेषामामनन्ति मनीषिण । दम्पतीनां महारङ्गरिङ्गिणां दिनसप्तकम् ।।चौंसठ।। सप्ताहन परणाथ प्रोत्थाय कलमाषिण । स्खलद्गति महेलं च संचरन्ति महीतले ।।पैंसठ।। तत स्थिरपदन्या सैर्वजन्ति दिनसप्तकम् । कलाज्ञानेन सप्ताह' निर्विशन्ति गुणैश्च तं ।।छयासठ।। परेण सप्तरात्रेण सम्पूर्ण नवयौवना । लमदंशुकमदूषा जायन्ते मोगमागिन ॥सरसठ॥ स्वादिष्ट, कोमल और मनोहर तृणरूपी सम्पत्तिको रसायन समझकर बड़े हर्पसे चरा करते है ।॥चौवन॥ जहाँ अनेक वापिकाएँ है जो कमलोंसे सहित है, उनमें सुवर्णके समान डीले कमल फूल रहे है और जो हंसोंक मधुर तथा गम्भीर शब्दोंसे अतिशय मनोहर जान पड़ती हैं ॥पचपन॥ जहाँ जगह-जगहपर फूले हुए कमलोंसे सुशोभित तालाब, उन्मत्त कोकिलाओंसे भरे हुए वन और सुन्दर कीड़ापर्वत हैं ।।छप्पन।। जहाँ कोमल वायु वृक्षोंको हिलाता हुआ धीरे-धीरे बहता रहता है । वहु वायु बहते समय सब और कमलोंकी परागको उड़ाता रहता है जिससे ऐसा मालूम होता है मानो सच और सुगन्धित चूर्ण ही फैला रहा हो ॥ सत्तावन ॥ जहाँ वायुके द्वारा उड़कर आये हुए पुष्पपरागसे ढकी हुई पृथ्वी ऐसी शोभायमान हो रही है मानो पीले रंगके रेशमी वस्त्रसे ढका हो ।। अट्ठावन ।। जहाँ दशां दिशाओं में वायुके द्वारा उड़ उड़कर आकाश में इकट्ठा हुआ पुष्पपराग सब ओर से तने हुए चॅदोबाकी शोभा धारण करता है ।। उनसठ ।। जहाँ न गरमीका क्लेश होता है, न पानी बरसता है, न तुपार आदि पड़ता है, न अतिवृष्टि आदि ईतियाँ हैं और न प्राणियांको भय उत्पन्न करनेवाले साँप, बिच्छू, ग्वटमल आदि दुष्ट जन्तु ही हुआ करते है। साठ ।। जहाँ न चाँदनी है, न रात-दिनका विभाग और न ऋतुओंका परिवर्तन ही है, जहाँ सुख देनेवाले सब पदार्थ सदा एक से रहते है ।।ग्यारह।। जहोके वन सदा फूलोंसे युक्त रहते हैं, कमलिनियोंमें सदा कमल लगे रहते है, और रत्नकी धूलिसे व्याप्त हुए देश सदा सुखी रहते हैं ।। बासठ ।। जहाँ उत्पन्न हुए आर्य लोग प्रथम सात दिन तक अपनी शय्यापर चित्त पड़े रहते हैं । उस समय आचार्यांने हाथका रसीला अंगूठा चूमना ही उनका दिव्य आहार बतलाया है ।।तिरेसठ।। तत्पश्चात् विद्वानोंका मत है कि वे दोनों दम्पतीद्वतीय सप्ताह में पृथ्वीरूपी रंगभूमिमें घुटनोंक बल चलते हुए एक स्थानसे दूसरे स्थान तक जाने लगते है ।। चौंसठ ।। तदनन्तर तीसरे सप्ताह में वे खड़े होकर अस्पष्ट किन्तु मीठी-मीठी बातें कहने लगते हैं और गिरते-पड़ते खेलते हुए जमीनपर चलने लगते है ।।पैंसठ।। फिर चौथे सप्ताह में अपने पैर स्थिरतासे रखते हुए चलने लगते हैं तथा पाँचबे सप्ताहमें अनेक कलाओं और गुणोंसे सहित हो जाते हैं ।। छयासठ ।। छठे सप्ताह में पूर्ण जवान हो जाते हैं और सातवें सप्ताह में अच्छे-अच्छे वस्त्राभूषण धारण कर भोग भोगनेवाले एक. वासचूर्णम् । दो. स्वर्णवर्णपट्टवस्त्रेण । चार. पदार्था । पाँच. उद्गतरसम् । छः अनुभवन्ति । तीन. बाच्छादिता । -गुण्ठिता अशून्य, पशून्य सशून्य, नवमासं स्थिता गर्ने रत्नगर्भगृहोप मे । यत्र दम्पतितामेत्य जायन्ते दानिनो नरा ।।अड़सठ॥ यदा दम्पतिसंभूति जनयित्रो परासुता । सदैव तत्र पुत्रादिसंकल्पो यम देहिनाम् ॥उनहत्तर।। क्षुत जृम्मितमात्रेण यत्राहुर्मृतिमङ्गिनाम् । स्वभाव माईबाद यान्ति दिवमेव यदुद्भवा ॥ सत्तर ॥ देहोच्छ्रायं नृणां यत्र नानालक्षणसुन्दरम् । धनुषां षट्सहस्राणि 'विवृण्वन्त्याप्तसूक्तयः ।।इकहत्तर।। पल्यनयमितं यन्त्र देहिनामायुरिष्यते । दिनत्रयेण चाहारः 'कुबलीफलमात्रकः ॥बहत्तर॥ "यक न जरातका न वियोगो न शोचनम् । नानिष्टसंप्रयोगश्च न चिन्ता वॅन्यमेव च ॥तिहत्तर॥ न निद्रा नातिन्द्राण नात्युन्मेष निमेषणम् । न शारीरमलं यत्र न लालास्वेदसंभवः ॥चौहत्तर।। न यत्र बिरहोन्मादो न यन्त्र मदनज्वर । न यत्र खण्डना भोगे मुखं यत्र निरन्तरम् ॥पचहत्तर॥ न विषादो भयं ग्लानि नरुचि कुपितं च न । न कार्पण्यमनाचारो न बली यत्र नावल ॥सोलह॥ 'बालार्कसमनिर्माषा निःस्वेदा नीरजोऽम्बरा । यत्र पुण्योदयानित्यं रंरम्यन्ते नरा सुखम् ॥सतहत्तर॥ दशाङ्गतरूलभूत भोगानुभवनोद्भवम् । सुख यत्रातिशेतं तां चक्रिणो मोगमं पदम् ॥अठहत्तर ॥ मन्त्र दीर्घायुषां नृणां नाका मृत्यु । निरुपद्रवमायु स्वं जीवन्त्युक्तप्रमाणकम् ॥उन्यासी॥ हो जाते हैं ।।सरसठ ।। पूर्वभवमें दान देनेवाले मनुष्य ही जहाँ उत्पन्न होते है । वे उत्पन्न होने के पहले नौ माह तक गर्भमें इस प्रकार रहते है जिस प्रकार कि कोई ग्लोंके महल में रहता है। उन्हें गर्भमें कुछ भी दुःख नहीं होता। और स्त्री-पुरुष साथ-साथ ही पैदा होते हैं। वे दोनों स्त्रीपुरुष दम्पतिपने को प्राप्त होकर ही रहते हैं ।।अड़सठ।। चूँकि वहाँ जिस समय दम्पतिका जन्म होना है उसी समय उनके माता-पिताका देहान्त हो जाता है इसलिए वहाँके जीवोंमें पुत्र आदिका संकल्प नहीं होता ।।उनहत्तर।। जहाँ केवल छीक और जंभाई लेने मात्र से ही प्राणियोंकी मृत्यु हो जाती है अर्थात् अन्त समय में माताको छींक और पुरुषको जँभाई आती है । जहाँ उत्पन्न होनेवाले जीव स्वभावसे कोमलपरिणामी होनेके कारण स्वर्गको ही जाते है सत्तर ॥ जहाँ उत्पन्न होनेवाले लोगोंका शरीर अनेक लक्षणोंसे सुशोभित तथा छह हजार धनुप ऊँचा होता है ऐसा आप्तप्रणीत आगम स्पष्ट वर्णन करते हैं ।। इकहत्तर । जहाँ जीवोंकी आयु तीन पल्य प्रमाण होती है और आहार तीन दिन के बाद होता है, वह भी बदरीफल बराबर ।। बहत्तर ।। जहाँ उत्पन्न हुए जीवोंके न वुढापा आता है, न रोग होना है, न विग्ह होता है, न शोक होता हैं, न अनिष्टका संयोग होता है, न चिन्ता होती है, न हीनता होती है. न नींद आती है, न आलम्य आता है, न नेत्रोंके पलक झपते है, न शरीर में मल होता है, न लार बहती है और न पसीना ही आता है ।। तिहत्तर-चौहत्तर ।। जहाँ न विरहका उन्माद है, न कामज्वर है, न भोगांका विच्छेद है किन्तु निरन्तर सुख ही सुख रहता है ।। पचहत्तर ।। जहाँ न विपाद है, न भय हैं, न 'ग्लानि है, न अरुचि है, न क्रोध है, न कृपणता है, न अनाचार है, न कोई बलवान है और न कोई निर्बल है ॥ छिहत्तर ॥ जहाँ के मनुष्य वालसूर्यके समान देदीप्यमान, पसीनारहित और स्वच्छ वस्त्रोंके धारक होते है तथा पुण्यके उदयसे सदा सुखपूर्वक क्रीड़ा करते रहते है ।। सतहत्तर।। जहाँ दश प्रकार के कल्पवृक्षांस उत्पन्न हुए भोगांके अनुभव करनेसे उत्पन्न हुआ सुख चक्रवर्तकी भोगसम्पदाओंका भी उल्लंघन करना है अर्थात् वहाँके जीव चक्रवर्तीकी अपेक्षा अधिक सुखी रहते हैं ।।अठहत्तर।। जहाँ मनुष्य बड़ी लम्बी आयुके धारक होते हैं उनकी असमय में मृत्यु नहीं होती । वे अपनी तीन पत्य प्रमाण आयु तक निर्विघ्न रूपसे जीवित रहते हैं ।। उन्यासी ।। एक. जननीजनकयो । दो. जृम्भण । तीन. विवरणं कुर्वन्ति । चार. बदरम् । पाँच यत्रोत्पन्नानाम् । छः तन्द्रा । सात. हर्षय । आठ. कोरः नौ. तरुणार्कमदृशशरीरुच । दस. अकाले सर्वेऽपि समसंमोगाः सर्वे समसुदयाः । सर्वे सर्वर्तुजान् भोगान् यत्र विन्दन्त्यनामयाः ॥अस्सी ॥ सर्वेऽपि सुन्दराकारा सर्वे वज्रास्थिबन्धना । सर्वे चिरायुष कान्त्या गोर्वाणा इव यदुवळे ॥इक्यासी ॥ यत्र कल्पतरुच्छायामुपेस्य ललितस्मितौ । दम्पती गीतवादि रमेते सततोत्सवै ॥बयासी॥ कलाकुशलता कस्य देहस्वं कलकण्ठता । मास्सयष्यदिवेकल्यमपि यत्र निसर्गजम् ॥ तिरासी ॥ स्वभावसुन्दराकारा स्वभावललितेहिता । स्वमाय मधुरालापा मोदन्तं यत्र देहिन ।।चौरासी ॥ दानाद् दानानुमोदाद् वा यत्र पात्रसमाश्रितात् । प्राणिन सुखमेधन्ते यावजीवमनामया ॥पचासी॥ कुदृष्टयो व्रहींना केवलं मोगका शिक्षण । दत्वा दानान्यपात्रेषु तिर्यक्त्वं यत्र यान्त्यमी ॥छियासी॥ कुशीला कुत्सिताचारा कुवेषा दुरुपोषिता । मायाचाराइच जायन्ते मृगा यत्र बतच्युता ॥सत्तासी ॥ "मिथुनं मिथुनं तेषां मृगाणामपि जायते । न मिथोऽस्ति विरोधों' वा 'बैरं वरस्यमेव वा ॥अठासी ॥ इत्यध्यन्त सुम्बे तस्मिन् क्षेत्रे पात्रप्रदानत । श्रीमती वञ्ज्रजश्च दम्पतिश्वमुपयतु ॥नवासी ॥ प्रागुकाश्य मृगा जन्म भेजस्तत्रैव मद्रका । पायदानानुमोदन दिव्यं मानुष्यमाश्रिता ॥नब्बे॥ तथा मतिवरायाश्च तद् वियोगाद् गताः शुचम् । हृदधर्मान्तिकं दाक्षां जैनीमाशि श्रियन् पराम् ।।इक्यानवे।। ते सम्यग्दर्शनशान चारित्राचारसंपदम् । समाराध्य यथाकालं स्वर्गलोकमयासिषु ॥बारह॥ जहाँ सब जीव समान रूपसे भोगांका अनुभव करते है, सबके एक समान सुखका उदय होता है, सभी नीरोग रहकर छहों ऋतुओंके भोगोपभोग प्राप्त करते हैं ।।अस्सी।। जहाँ उत्पन्न हुए सभी जीव सुन्दर आकारके धारक है, सभी ववृषभनागचसंहननसे सहित हैं, सभी दीर्घ आयुके धारक हैं और सभी कान्तिसे देवोंके समान है ।।इक्यासी।। जहाँ स्त्री-पुरुष कल्पवृक्षकी छायामें जाकर लीलापूर्वक मन्द-मन्द हँसते हुए, गाना-बजाना आदि उत्सवोंसे सदा क्रीड़ा करते रहते है ।।आठ।। जहाँ कलाओंमें कुशल होना, स्वर्गके समान सुन्दर शरीर प्राप्त होना, मधुर कण्ठ होना और मात्सर्य, ईर्ष्या आदि दोपोंका अभाव होना आदि बातें स्वभावसे ही होती है ।।तिरासी।। जहाँके जीव स्वभावसे ही सुन्दर आकारवाले, स्वभावसे ही मनोहर चेष्टाओंवाले और स्वभाव ही मधुर वचन बोलने वाले होते है। इस प्रकार वे सदा प्रसन्न रहते है ।।चौरासी।। उत्तम पात्रके लिए दान देने अथवा उनके लिए दिये हुए दानकी अनुमोदना करनेसे जीव जिस भोगभूमिमें उत्पन्न होते है और जीवनपर्यन्त नीरोग रहकर सुखसे बढ़ते रहते हैं ।।पचासी।। जो जीव मिथ्याइष्टि हैं, व्रतोंसे होन है और केवल भोगोंके अभिलापी है वे अपात्रों में दान देकर वहाँ निर्यच पर्यायको प्राप्त होते हैं ।। छियासी।। जो जीव कुशील हैं-खोटे स्वभावके धारक है, मिथ्या आचार के पालक हैं, कुवेषी है, मिथ्या उपवास करनेवाले है, मायाचारी हैं और व्रतभ्रष्ट है वे जिम भोगभूमि में हरिण आदि पशु होते हैं ।।सत्तासी।। और जहाँ पशुओंके युगल भी आनन्दसे क्रीड़ा करते हैं। उनके परस्परमें न विरोध होता है न वैर होता हैं और न उनका जीवन ही नीरस होना है ।।अठासी।। इस प्रकार अत्यन्त सुखोंसे भरे हुए उस उत्तरकुरुक्षेत्र में पात्रदानके प्रभावसे वे दोनों श्रीमती और वजंघ दम्पती अवस्थाको प्राप्त हुए - स्त्री और पुरुषरूप से उत्पन्न हुए ।।नवासी।। जिनका वर्णन पहले किया जा चुका है ऐसे नकुल, सिंह, वानर और शूकर भी पात्रदानकी अनुमोदनाक प्रभावसे वहींपर दिव्य मनुष्यशरीरको पाकर भद्रपरिणामी आर्य हुए ।।दस।। इधर मतिवर, आनन्द, धनमित्र और अकम्पन ये चारों ही जीव श्रीमती और वनजंघके विरहसे भारी शोकको प्राप्त हुए और अन्त में चारोंने ही श्रीदृढ धर्म नामके आचार्य के समीप उत्कृष्ट जिनदीक्षा धारण कर ली ।।ग्यारह।। और चारों ही सम्यग्दर्शन, एक. लभन्ते । 'विदु लाभे । दो यश्रीताः । तीन. रेमात अशून्य, दस, तीस सशून्य मशून्य चौंतीस. निरामय । कल्पदेहत्वं अशून्य, पशून्य, अस्सी सशून्य । पाँच. मनोज्ञवण्ठत्वम् । छः. चेष्टा । सात. मैथुन मि-सशून्य, दशून्य, लशून्य । आठ. वध्यवत्रकादिभावः । नौ. मानसिको द्वेष । दस. रसक्षयः । अभो प्रवेयकस्याधो विमाने तेऽहमिन्द्रवाम् । प्रासास्तपोऽनुभाबेन तपो हि फलतीप्सितम् ॥ तेरह ॥ "अथातो बज्रजकार्य कान्तया सममेकदा । कल्पपादपजां लक्ष्मोमीक्षमाण क्षणं स्थित ॥ चौरानवे ॥ सूर्यप्रमस्य देवस्य नभोयायि विमानकम् दृष्टा जातिस्मरो भूत्वा प्रबुद्ध प्रियया समम् ॥पचानवे॥ तावच्चारणयोयुग्मं दूरादागच्छवैत । तं च तावनुगृहन्तौ व्योम्नः समवतेरतु ॥छियानवे॥ हवा तो सहसात्यासीदभ्युत्थानादिसंभ्रम । संस्कारा प्राकना नूनं प्रेरयन्त्यङ्गिनो हिते ॥सत्तानवे॥ अभ्यु सिष्ठव सौ रेजे मुनीन्द्रौ सह कान्तया । नलिम्या दिवस. सूर्यप्रतिसूर्याविवोद्गतौ ॥एक सौ अट्ठानवे॥ तयोरधिपदद्वन्द्व दत्ता प्रणनाम स । आनन्दाधुलबै सान्दै आायशिव तस्कमौ ॥छियानवे॥ तामाशोभिरथा श्वास्य प्रणतं प्रमदान्वितम् । यती समुश्वितं देशमध्यासीनौ यथाक्रमम् ॥एक सौ ॥ तत सुखोपविष्टौ तौ सोऽपृच्छदिति चारणो। लसदन्वांशुसंतानैः पुष्पाञ्जलिमिवाकिरन् ॥एक सौ एक॥ भगवन्तौ युवां 'क्वस्यो कुतस्त्यौ किं नु कारणम् । युष्मदागमने ब्रूतमिदमेतत्तयाथ मे ॥ एक सौ दो ॥ युष्मत्संदर्शनाजात सौहार्द मम मानसम् । प्रसीदति किमु ज्ञात पूर्वी 'शाती युवां मम ॥एक सौ तीन ॥ सम्यग्ज्ञान तथा सम्यकूचारित्ररूपी सम्पदाकी आराधना कर अपनी-अपनी आयुके अनुसार स्वर्गलोक गये ।।बारह।। वहाँ तपके प्रभावसे अधोमैवेयक के सबसे नीचेके विमानमें अहमिन्द्र पदको प्राप्त हुए । सो ठीक ही है । तप सबके अभीष्ट फलोंको फलता है ।।तेरह।। अनन्तर एक समय वज्रजंघ आर्य अपनी स्त्रीके साथ कल्पवृक्षकी शोभा निहारता हुआ क्षण-भर बैठा ही था ।।चौरानवे।। कि इतनेमें आकाश में जाते हुए सूर्यप्रभ देवके विमानको देखकर उसे अपनी स्त्रीके साथ-साथ ही जातिस्मरण हो गया और उसी क्षण दोनांको संसारके स्वरूपका यथार्थ ज्ञान हो गया ।।पचानवे।। उसी समय वज्रजंघके जीवने दूरसे आते हुए दो चारण मुनि देखे । वे मुनि भी उसपर अनुग्रह करते हुए आकाशमार्ग से उतर पड़े ।।छियानवे।। वज्रजंघका जीव उन्हें आता हुआ देखकर शीघ्र ही खड़ा हो गया। सच है, पूर्व जन्मक संस्कार ही जीवोंको हित कार्य में प्रेरित करते रहते है ।।सत्तानवे।। दोनों मुनियोंके समक्ष अपनी स्त्री के साथ खड़ा होता हुआ वज्रजंघका जीव ऐसा शोभायमान हो रहा था जैसे उदित होते हुए सूर्य और प्रतिसूर्यके समझ कमलिनीके साथ दिन शोभायमान होता है ।।अट्ठारह।। वज्रजंघके जीवने दोनों मुनियोंके चरणयुगलमें अर्घ चढाया और नमस्कार किया। उस समय उसके नेत्रोंसे हर्षके ऑसू निकलनिकल कर मुनिराजके चरणोंपर पड़ रहे थे जिससे वह ऐसा जान पड़ता था मानो अश्रुजलसे उनके चरणोंका प्रक्षालन ही कर रहा हो ।।निन्यानवे ।। वे दोनों मुनि स्त्रीके साथ प्रणाम करते हुए आर्य वज्रजंघको आशीर्वाद द्वारा आश्वासन देकर मुनियोंके योग्य स्थानपर यथाक्रम बैठ गये।। एक सौ।। तदनन्तर मुखपूर्वक बैठे हुए दोनों चारण मुनियोंसे वज्रजंघ नीचे लिखे अनुसार पूछने लगा । पृछते समय उसके मुखसे दाँतोंकी किरणोंका समूह निकल रहा था जिससे ऐसा मालूम होता था मानो वह पुष्पाञ्जलि ही बिखेर रहा हो ।।एक सौ एक॥ वह बोला - हे भगवन्, आप कहाँ के रहनेवाले हैं ? आप कहाँ से आये हैं और आपके आनेका क्या कारण है ? यह सब आज मुझसे कहिए ॥ एक सौ दो ।। हे प्रभो, आपके दर्शनसे मेरे हृदय में मित्रताका भाव उमड़ रहा है, चित्त बहुत ही प्रसन्न हो रहा है और मुझे ऐसा मालूम होता है कि मानो आप मेरे परिएक. अनन्तरम् । दो अवतरत स्म । तीन. विवोन्नतौ एक सौ चार पदयुगले । पाँच. यते. मशून्य, लशून्य । छः. क्व भवो । सात. कुत आगती । 'क्वेहामातस्त्रात् त्यच्' इति यथाक्रम भवार्थे आगतार्थे च त्यचप्रत्यय । आठ. प्रत्यक्षतया । -मेतनषाद्य मे मशून्य लशून्य । नौ. पूर्वस्मिन् ज्ञातौ । दस. बन्धू ।
हरियाणा के झज्जर जिले में एक कंपनी के साइट सुपरवाइजर से बदमाशों ने बलेनो कार छीन ली। यह वारदात साइट से घर लौटते वक्त रास्ते में लुहारी-पाटौदा रोड पर हुई। झज्जर के माछरौली थाना की पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर 2 बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दोनों बदमाशों के नाम भी सामने आ गए हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी को लेकर दबिश दे रही है। मिली जानकारी के अनुसार, मूलरूप से दादरी निवासी राकेश झज्जर जिले के गांव लुहारी स्थित इंडोस्पेस कंपनी में बतौर साइट सुपरवाइजर कार्यरत है। वह फिलहाल पाटौदा में किराए के कमरे पर रहता है। गुरुवार देर रात करीब 2 बजे वह साइट से अपने कमरे पर लौट रहे थे। तभी लुहारी-पाटौदा रोड पर पीछे से एक बाइक पर सवार होकर आए दो बदमाशों ने उनकी गाड़ी के आगे बाइक लगाकर रोका। कार रुकते ही दोनों ने उसे नीचे उतारकर हाथापाई शुरू कर दी। इससे पहले राकेश कुछ समझ पाता, एक बदमाश गाड़ी में जाकर बैठ गया और दूसरा बदमाश उसे जान से मारने की धमकी देने लगा। राकेश की मानें तो दोनों बदमाश एक दूसरे को नाम लेकर बुला रहे थे। एक बदमाश प्रवेश दूसरे को विजय उर्फ चीकू कहकर बुला रहा था। दोनों बदमाश गाड़ी और बाइक लेकर भाग गए। किसी राहगीर की मदद से राकेश ने लूटपाट की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही माछरौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों तरफ नाकाबंदी भी कराई, लेकिन बदमाशों का सुराग नहीं लग पाया। पुलिस ने बाइक सवार दो नामजद बदमाशों के खिलाफ स्नैचिंग व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के झज्जर जिले में एक कंपनी के साइट सुपरवाइजर से बदमाशों ने बलेनो कार छीन ली। यह वारदात साइट से घर लौटते वक्त रास्ते में लुहारी-पाटौदा रोड पर हुई। झज्जर के माछरौली थाना की पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर दो बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दोनों बदमाशों के नाम भी सामने आ गए हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी को लेकर दबिश दे रही है। मिली जानकारी के अनुसार, मूलरूप से दादरी निवासी राकेश झज्जर जिले के गांव लुहारी स्थित इंडोस्पेस कंपनी में बतौर साइट सुपरवाइजर कार्यरत है। वह फिलहाल पाटौदा में किराए के कमरे पर रहता है। गुरुवार देर रात करीब दो बजे वह साइट से अपने कमरे पर लौट रहे थे। तभी लुहारी-पाटौदा रोड पर पीछे से एक बाइक पर सवार होकर आए दो बदमाशों ने उनकी गाड़ी के आगे बाइक लगाकर रोका। कार रुकते ही दोनों ने उसे नीचे उतारकर हाथापाई शुरू कर दी। इससे पहले राकेश कुछ समझ पाता, एक बदमाश गाड़ी में जाकर बैठ गया और दूसरा बदमाश उसे जान से मारने की धमकी देने लगा। राकेश की मानें तो दोनों बदमाश एक दूसरे को नाम लेकर बुला रहे थे। एक बदमाश प्रवेश दूसरे को विजय उर्फ चीकू कहकर बुला रहा था। दोनों बदमाश गाड़ी और बाइक लेकर भाग गए। किसी राहगीर की मदद से राकेश ने लूटपाट की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही माछरौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों तरफ नाकाबंदी भी कराई, लेकिन बदमाशों का सुराग नहीं लग पाया। पुलिस ने बाइक सवार दो नामजद बदमाशों के खिलाफ स्नैचिंग व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नयी दिल्ली, 3 जुलाई (एजेंसी) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि 'चरमपंथी, अतिवादी' खालिस्तानी सोच भारत या अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के लिए ठीक नहीं है। भाजपा के जनसंपर्क अभियान कार्यक्रम से इतर विदेश मंत्री एस़ जयशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार कनाडा में हाल ही में हुई एक रैली के दौरान खालिस्तान समर्थक पोस्टर प्रदर्शित किये जाने का मुद्दा उस देश की सरकार के समक्ष उठायेगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमने कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे हमारे सहयोगी देशों, जहां खालिस्तानी गतिविधियां हुई हैं, उनसे आग्रह किया है कि वे खालिस्तानियों को तवज्जो नहीं दें, क्योंकि उनकी चरमपंथी, अतिवादी सोच न तो हमारे लिए, न ही उनके लिये और न ही उनसे हमारे संबंधों के लिए ठीक है। हम पोस्टर के मुद्दे को वहां की सरकार के साथ उठायेंगे। मेरा मानना है कि अब तक ऐसा पहले ही किया जा चुका होगा।
नयी दिल्ली, तीन जुलाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि 'चरमपंथी, अतिवादी' खालिस्तानी सोच भारत या अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के लिए ठीक नहीं है। भाजपा के जनसंपर्क अभियान कार्यक्रम से इतर विदेश मंत्री एस़ जयशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार कनाडा में हाल ही में हुई एक रैली के दौरान खालिस्तान समर्थक पोस्टर प्रदर्शित किये जाने का मुद्दा उस देश की सरकार के समक्ष उठायेगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमने कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे हमारे सहयोगी देशों, जहां खालिस्तानी गतिविधियां हुई हैं, उनसे आग्रह किया है कि वे खालिस्तानियों को तवज्जो नहीं दें, क्योंकि उनकी चरमपंथी, अतिवादी सोच न तो हमारे लिए, न ही उनके लिये और न ही उनसे हमारे संबंधों के लिए ठीक है। हम पोस्टर के मुद्दे को वहां की सरकार के साथ उठायेंगे। मेरा मानना है कि अब तक ऐसा पहले ही किया जा चुका होगा।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ के दौरान एक जवान घायल हो गया है। तो वहीं तीन आतंकियों को मार गिराया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ के दौरान एक जवान घायल हो गया है। अब खबर है कि सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। इससे पहले एएनआई के मुताबिक खबर थी कि कुलगाम जिले के लर्रू इलाके में सुबह से ही सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान एक घर में दो से तीन के छुपे होने की खबर मिली थी। फिलहाल, सुरक्षाबलों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया है। दोनों ओर से जबर्दस्त फायरिंग हो रही है। घायल जवान को नजदीकी अस्पलताल में भर्ती किया गया है।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ के दौरान एक जवान घायल हो गया है। तो वहीं तीन आतंकियों को मार गिराया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ के दौरान एक जवान घायल हो गया है। अब खबर है कि सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। इससे पहले एएनआई के मुताबिक खबर थी कि कुलगाम जिले के लर्रू इलाके में सुबह से ही सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान एक घर में दो से तीन के छुपे होने की खबर मिली थी। फिलहाल, सुरक्षाबलों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया है। दोनों ओर से जबर्दस्त फायरिंग हो रही है। घायल जवान को नजदीकी अस्पलताल में भर्ती किया गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज आठ सप्ताह का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर को एनसीईआरटी ने बनाया है। यह कैलेंडर एक से 5वीं क्लास के बच्चों के लिए है। इस वैकल्पिक केलैंडर की मदद से शिक्षकों को प्राथमिक स्तर के बच्चों को घर में पढ़ाने में मदद मिलेगी। इसकी सहायता से शिक्षक टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया टूल्स सीखेंगे जिनसे वो आसानी से बच्चों को घर से पढ़ाई में मदद कर सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने ट्वीट से यह जानकारी दी कि आज 8 महीने का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर लॉन्च किया है। यह कैलेंडर खासतौर पर पहली से 5वीं क्लास के बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे शिक्षकों को विभिन्न टूल्स की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही इस आठ सप्ताह के कैलेंडर में यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि छात्रों को कम से कम समय कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताना पड़े। इस कैलेंडर के द्वारा सभी छात्र, जिनके पास इंटरनेट सुविधा है वो भी और जिनके पास नहीं है वो भी, शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF) भी शुरू किया गया है। NCERT से नए NCF के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने की उम्मीद की जाएगी। विषय विशेषज्ञ स्कूल शिक्षा के लिए इस प्रक्रिया को शुरू करते हैं, और दिसंबर 2020 तक अंतरिम रिपोर्ट देते हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज आठ सप्ताह का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर को एनसीईआरटी ने बनाया है। यह कैलेंडर एक से पाँचवीं क्लास के बच्चों के लिए है। इस वैकल्पिक केलैंडर की मदद से शिक्षकों को प्राथमिक स्तर के बच्चों को घर में पढ़ाने में मदद मिलेगी। इसकी सहायता से शिक्षक टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया टूल्स सीखेंगे जिनसे वो आसानी से बच्चों को घर से पढ़ाई में मदद कर सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने ट्वीट से यह जानकारी दी कि आज आठ महीने का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर लॉन्च किया है। यह कैलेंडर खासतौर पर पहली से पाँचवीं क्लास के बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे शिक्षकों को विभिन्न टूल्स की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही इस आठ सप्ताह के कैलेंडर में यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि छात्रों को कम से कम समय कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताना पड़े। इस कैलेंडर के द्वारा सभी छात्र, जिनके पास इंटरनेट सुविधा है वो भी और जिनके पास नहीं है वो भी, शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा भी शुरू किया गया है। NCERT से नए NCF के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने की उम्मीद की जाएगी। विषय विशेषज्ञ स्कूल शिक्षा के लिए इस प्रक्रिया को शुरू करते हैं, और दिसंबर दो हज़ार बीस तक अंतरिम रिपोर्ट देते हैं।
मुजफ्फरनगर। थाना को0नगर पर नियुक्त उ0नि0 हरीश राघव द्वारा वॉछित अभियुक्त नकीब पुत्र लियाकत निवासी मौहल्ला किदवईनगर थाना कोतवाली नगर मु0नगर को अभियुक्त के मसकन से गिरफ्तार किया गया। वहीं थाना को0नगर पर नियुक्त उ0नि0 नीरज कुमार द्वारा वारण्टी अभियुक्त कालू पुत्र नजीर निवासी नयाबाग ठठेरो वाली गली थाना को0नगर मु0नगर को अभियुक्त के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना नई मण्डी पर नियुक्त उ0नि0 संजय सिंह द्वारा वांछित अभियुक्त सागर पुत्र तेजपाल निवासी ग्राम सिसौली थाना भौराकलां जनपद मु0नगर को भोपा पुल बाईपास से गिरफ्तार किया गया। वहीं थाना नई मण्डी पर नियुक्त उ0नि0 विजयपाल अत्री द्वारा वांछित अभियुक्त अनिल पुत्र धनापल निवासी ग्राम सिम्भालकी थाना छपार जनपद मु0नगर हाल पता ओमविहार थाना रूडकी जनपद हरिक्षर को अभियुक्त के मसकन से गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना नई मण्डी पर नियुक्त उ0नि0 योगेश शर्मा द्वारा वारण्टी अभियुक्त सोनू पुत्र लालसिंह निवासी हाल पता मौहल्ला अमितविहार कूकडा थाना नई मण्डी जनपद मु0नगर व वारंटी अभियुक्त भीम पुत्र जन्गी निवासी ग्राम अलमासपुर जनपद मुजफ्फरनगर को अभियुक्तों के मसकन से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा थाना पुरकाजी पर नियुक्त व0उ0नि0 रघुराज सिंह द्वारा वांछित अभियुक्तों कुवॅरपाल उर्फ कोरा पुत्र शेरसिंह, सुभाष पुत्र सिंहराम निवासीगण ग्राम खेडकी थाना पुरकाजी जनपद मुजफ्फरनगर को अभियुक्तों के मसकन से गिरफ्तार किया गया।
मुजफ्फरनगर। थाना कोशून्यनगर पर नियुक्त उशून्यनिशून्य हरीश राघव द्वारा वॉछित अभियुक्त नकीब पुत्र लियाकत निवासी मौहल्ला किदवईनगर थाना कोतवाली नगर मुशून्यनगर को अभियुक्त के मसकन से गिरफ्तार किया गया। वहीं थाना कोशून्यनगर पर नियुक्त उशून्यनिशून्य नीरज कुमार द्वारा वारण्टी अभियुक्त कालू पुत्र नजीर निवासी नयाबाग ठठेरो वाली गली थाना कोशून्यनगर मुशून्यनगर को अभियुक्त के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना नई मण्डी पर नियुक्त उशून्यनिशून्य संजय सिंह द्वारा वांछित अभियुक्त सागर पुत्र तेजपाल निवासी ग्राम सिसौली थाना भौराकलां जनपद मुशून्यनगर को भोपा पुल बाईपास से गिरफ्तार किया गया। वहीं थाना नई मण्डी पर नियुक्त उशून्यनिशून्य विजयपाल अत्री द्वारा वांछित अभियुक्त अनिल पुत्र धनापल निवासी ग्राम सिम्भालकी थाना छपार जनपद मुशून्यनगर हाल पता ओमविहार थाना रूडकी जनपद हरिक्षर को अभियुक्त के मसकन से गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना नई मण्डी पर नियुक्त उशून्यनिशून्य योगेश शर्मा द्वारा वारण्टी अभियुक्त सोनू पुत्र लालसिंह निवासी हाल पता मौहल्ला अमितविहार कूकडा थाना नई मण्डी जनपद मुशून्यनगर व वारंटी अभियुक्त भीम पुत्र जन्गी निवासी ग्राम अलमासपुर जनपद मुजफ्फरनगर को अभियुक्तों के मसकन से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा थाना पुरकाजी पर नियुक्त वशून्यउशून्यनिशून्य रघुराज सिंह द्वारा वांछित अभियुक्तों कुवॅरपाल उर्फ कोरा पुत्र शेरसिंह, सुभाष पुत्र सिंहराम निवासीगण ग्राम खेडकी थाना पुरकाजी जनपद मुजफ्फरनगर को अभियुक्तों के मसकन से गिरफ्तार किया गया।
[ लेखक - डा० बहादुर चन्द शास्त्री, ऐम ए, ऐम. ओ. ऐल, डी.लिट ] हिन्दी मे प्रचलित लोकोक्तियों और मुहावरों के भिन्न भिन्न 'अर्थ तथा अपनी भाषा मे उनका प्रयोग किस तरह किया जाता है यह सब जानने के लिये इस पुस्तक की एक प्रति अवश्य खरीदिए । हिन्दी - रत्न, हिन्दी-भूषण और मैटिकुलेशन के प्रत्येक विद्यार्थी को यह पुस्तक पढनी चाहिये । मूल्य ii) सरल पत्र लेखन [ ले० - श्री पेशवप्रसाद शुक्ल विशारद ] इसमें घरेलू पत्र, व्यावहारिक पत्र, निमन्त्रण पत्र और अर्जी आदि लिखने का ढंग बड़ी सरल भाषा मे समझाया गया है। पत्र लिखना सीखने के लिए सर्वोत्तम पुस्तक । मूल्य ।) मात्र हिन्दी भूषण निबन्ध-माला (ले० - श्री शंभुदयाल सकसेना साहित्यरस, सेठिया कालेज, पीकानेर) इस पुस्तक में हिन्दी- भूषण परीक्षा मे पिछले १०-१२ वर्षो मे आए हुए लगभग ४५ विषयो पर विस्तृत निवन्ध और लगभग इतने ही खाके दिये गए हैं। भाषा शुद्ध और सरल है । पृष्ठ संख्या ३०० से अधिक और मूल्य १) मात्र । निबन्ध के पत्र में ही सव में से अधिक विद्यार्थी फेल होते हैं; इसलिए इसकी एक प्रति अवश्य खरीदिए ।
[ लेखक - डाशून्य बहादुर चन्द शास्त्री, ऐम ए, ऐम. ओ. ऐल, डी.लिट ] हिन्दी मे प्रचलित लोकोक्तियों और मुहावरों के भिन्न भिन्न 'अर्थ तथा अपनी भाषा मे उनका प्रयोग किस तरह किया जाता है यह सब जानने के लिये इस पुस्तक की एक प्रति अवश्य खरीदिए । हिन्दी - रत्न, हिन्दी-भूषण और मैटिकुलेशन के प्रत्येक विद्यार्थी को यह पुस्तक पढनी चाहिये । मूल्य ii) सरल पत्र लेखन [ लेशून्य - श्री पेशवप्रसाद शुक्ल विशारद ] इसमें घरेलू पत्र, व्यावहारिक पत्र, निमन्त्रण पत्र और अर्जी आदि लिखने का ढंग बड़ी सरल भाषा मे समझाया गया है। पत्र लिखना सीखने के लिए सर्वोत्तम पुस्तक । मूल्य ।) मात्र हिन्दी भूषण निबन्ध-माला इस पुस्तक में हिन्दी- भूषण परीक्षा मे पिछले दस-बारह वर्षो मे आए हुए लगभग पैंतालीस विषयो पर विस्तृत निवन्ध और लगभग इतने ही खाके दिये गए हैं। भाषा शुद्ध और सरल है । पृष्ठ संख्या तीन सौ से अधिक और मूल्य एक) मात्र । निबन्ध के पत्र में ही सव में से अधिक विद्यार्थी फेल होते हैं; इसलिए इसकी एक प्रति अवश्य खरीदिए ।
इंडियन आइडल -3 की जबरदस्त सफलता को देखते हुए विज्ञापकों ने इस रियालिटी शो के इस सीजन के लिए भी लाइन लगाना शुरू कर दिया है। सोनी एंटरटेनमेंट पर शुरू होने वाले इंडियन आइडल-4 के विज्ञापनों का 85 फीसदी समय पहले ही बिक चुका है। यह कार्यक्रम 19 सितंबर से शुक्रवार और शनिवार को रात 9-10 बजे के बीच प्रसारित किया जाएगा। चैनल ने इस बार प्रायोजकों की संख्या भी बढ़ा दी है। इंडियन आइडल-3 के लिए जहां 6 प्रायोजक ही थे, वहीं इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया है। इस सीजन को नेस्ले, बजाज आलियांज, एलजी सोनी इंडिया, पारले एग्रो, प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, एयरटेल, आईटीसी, टाटा स्काई और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां प्रायोजित कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक प्रायोजक ने इसके लिए लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान 10 सेकंड के स्पॉट भी लगभग 2 लाख रुपये में बिकने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले सीजन में 10 सेकंड के स्पॉट के लिए कंपनियों ने 1. 75 लाख रुपये खर्च किए थे। प्रत्येक प्रायोजक को हर एपिसोड के दौरान 60 सेकंड का समय दिया जाएगा। चैनल को इस कार्यक्रम से लगभग 50 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले साल की तुलना में दोगुनी कमाई होगी। पिछले सीजन से चैनल ने 26 करोड़ रुपये की कमाई की थी। सूत्रों के मुताबिक इंडियन आइडल-3 के दौरान 6 प्रायोजकों ने लगभग 3-3 करोड़ रुपये खर्च किए थे। टैम मीडिया रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक इसके फाइनल के दौरान टीआरपी 3. 1 रही थी। इसे शीर्ष 100 रेटिंग वाले कार्यक्रमों में 32वें स्थान पर रखा गया था। इंडियन आइडल ब्रिटेन के मशहूर कार्यक्रम पॉप आइडल का भारतीय संस्करण है।
इंडियन आइडल -तीन की जबरदस्त सफलता को देखते हुए विज्ञापकों ने इस रियालिटी शो के इस सीजन के लिए भी लाइन लगाना शुरू कर दिया है। सोनी एंटरटेनमेंट पर शुरू होने वाले इंडियन आइडल-चार के विज्ञापनों का पचासी फीसदी समय पहले ही बिक चुका है। यह कार्यक्रम उन्नीस सितंबर से शुक्रवार और शनिवार को रात नौ-दस बजे के बीच प्रसारित किया जाएगा। चैनल ने इस बार प्रायोजकों की संख्या भी बढ़ा दी है। इंडियन आइडल-तीन के लिए जहां छः प्रायोजक ही थे, वहीं इस साल यह आंकड़ा बढ़कर दस हो गया है। इस सीजन को नेस्ले, बजाज आलियांज, एलजी सोनी इंडिया, पारले एग्रो, प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, एयरटेल, आईटीसी, टाटा स्काई और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां प्रायोजित कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक प्रायोजक ने इसके लिए लगभग चार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान दस सेकंड के स्पॉट भी लगभग दो लाख रुपये में बिकने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले सीजन में दस सेकंड के स्पॉट के लिए कंपनियों ने एक. पचहत्तर लाख रुपये खर्च किए थे। प्रत्येक प्रायोजक को हर एपिसोड के दौरान साठ सेकंड का समय दिया जाएगा। चैनल को इस कार्यक्रम से लगभग पचास करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले साल की तुलना में दोगुनी कमाई होगी। पिछले सीजन से चैनल ने छब्बीस करोड़ रुपये की कमाई की थी। सूत्रों के मुताबिक इंडियन आइडल-तीन के दौरान छः प्रायोजकों ने लगभग तीन-तीन करोड़ रुपये खर्च किए थे। टैम मीडिया रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक इसके फाइनल के दौरान टीआरपी तीन. एक रही थी। इसे शीर्ष एक सौ रेटिंग वाले कार्यक्रमों में बत्तीसवें स्थान पर रखा गया था। इंडियन आइडल ब्रिटेन के मशहूर कार्यक्रम पॉप आइडल का भारतीय संस्करण है।
Delhi Congress Meeting में क्या हुआ Sachin Pilot ने बता दिया! Ashok Gehlot । Rajasthan Congress NewsRajasthan Congress Meeting में कई मुद्दों पर बातें हुई. Sachin Pilot ने बताया दिया कि क्या क्या हुआ? चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
Delhi Congress Meeting में क्या हुआ Sachin Pilot ने बता दिया! Ashok Gehlot । Rajasthan Congress NewsRajasthan Congress Meeting में कई मुद्दों पर बातें हुई. Sachin Pilot ने बताया दिया कि क्या क्या हुआ? चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
मैंने अत्यन्त श्रद्धा के साथ कमरे में चुपचाप प्रवेश किया था। मास्टर महाशय के देवता सदृश रूप ने मुझे चकाचौंध कर दिया। श्वेत रेशम समान दाढ़ी और विशाल तेजस्वी नेत्रों से युक्त वे पवित्रता का साक्षात् अवतार लग रहे थे। ऊपर की ओर उठा हुआ उनका चेहरा और जुड़े हुए हाथ देखकर मैं समझ गया कि उनके पास मेरे उस प्रथम आगमन ने उनकी अर्चना में बाधा डाली है। उस समय तक मुझे जितने धक्के लगे थे उन सब से बढ़कर तीव्र धक्का उनके स्वागतपूर्ण सरल शब्दों से लगा। माँ की मृत्यु के कारण हुए विरह-दुःख को ही मैं दुःख की पराकाष्ठा मानता आ रहा था। अब अपनी जगन्माता से विरह की भावना मेरी आत्मा को अवर्णनीय यातना देने लगी। विलाप करते हुए मैं ज़मीन पर गिर पड़ा। "छोटे महाशय, शांत हो जाओ!" संतवर को सहानुभूतिपूर्ण दुःख हो रहा था। किसी अगाध समुद्र में असहाय छोड़ दिये गये मनुष्य की तरह अपने बचाव का एकमात्र उपाय जानकर मैंने उनके चरणों को कसकर पकड़ लिया। इस प्रकार की मध्यस्थता का वचन सहज ही नहीं दे दिया जाता; अतः महात्मा चुप रहने पर बाध्य हो गये। मुझे समस्त शंकाओं से परे विश्वास हो गया था कि मास्टर महाशय वहाँ जगन्माता से घनिष्ठता के साथ वार्तालाप कर रहे थे। यह सोचकर मैं अत्यंत अपमानित अनुभव कर रहा था कि मेरी आँखें जगन्माता को देख नहीं सकती थीं जिन्हें अभी इस समय भी उस सन्त की निर्मल दृष्टि निहार रही थी। निर्लज्जतापूर्वक उनके पाँव पकड़े हुए और उनके सौम्य विरोध को अनसुना करते हुए मैं बार-बार उनकी मध्यस्थता की कृपा की याचना उनसे करता रहा। "मैं परमप्रिय माँ तक तुम्हारी प्रार्थना पहुँचा दूंगा।" मास्टर महाशय ने आखिर हार मानकर सहानुभूतिपूर्वक धीरे से मुस्कराते हुए कहा। क्या शक्ति थी उन शब्दों में कि मेरा मन विरह-व्याकुलता से तुरन्त मुक्त हो गया! "महाशय, अपना वचन याद रखिये! माँ का सन्देश पाने के लिये मैं पुनः शीघ्र ही आपकी सेवा में उपस्थित हो जाऊँगा।" एक क्षण पूर्व ही दुःख और सिसकियों से मेरा जो कण्ठस्वर अवरुद्ध हुआ जाता था, अब आशा की आनन्द ध्वनि से मुखरित हो रहा था। लम्बे जीने से नीचे उतरते-उतरते अतीत की स्मृतियों से मेरा मन भर आया 50, एमहर्स्ट स्ट्रीट के इसी घर में, जो अब मास्टर महाशय का आवास था, किसी समय मेरा परिवार रहा करता था। यहीं मेरी माँ की मृत्यु हुई थी। स्वर्गवासी माता के लिये यहीं पर मेरा मानवी हृदय पीड़ित हुआ था; और यहीं पर आज जगन्माता के विरह में मेरी आत्मा विद्ध हो उठी थी। मेरे शोकविह्वल मन की वेदनाओं और अंततः मेरी निरामयता की मौन साक्षी बनी यही वे पुनीत दीवारें थीं! घर जाते हुए मेरे पाँव उत्सुकतावश जल्दी-जल्दी उठ रहे थे। अपनी छोटी-सी अटारी में मैं दस बजे तक एकान्त में ध्यान करता रहा उष्ण रात्रि का अन्धकार अचानक एक अद्भुत दृश्य के साथ प्रकाशमान हो उठा। दिव्य आभायुक्त जगजननी मेरे सामने खड़ी थीं। मधुर स्मित करता उनका मुखारविंद परमसौन्दर्य का मूर्त रूप था। "सदा ही मैंने तुम्हें प्रेम किया है! सदैव मैं तुमसे प्रेम करती रहूँगी!" उनका दिव्य स्वर अभी वातावरण में गूँज ही रहा था कि वे अदृश्य हो गयीं। दूसरे दिन प्रातः काल सूर्य ने क्षितिज पर अभी झाँकना आरम्भ ही किया था कि मैं मास्टर महाशय के घर पहुँच गया। हृदयविदारक स्मृतियों से जुड़े उस घर की सीढ़ियाँ चढ़ कर मैं चौथी मंजिल पर उनके कमरे के सामने पहुँच गया। बन्द दरवाजे की मूठ पर एक कपड़ा लिपटा हुआ था जो शायद इस बात का संकेत था कि वे एकान्त चाहते हैं। मैं दरवाजे के सामने दुविधा में खड़ा था कि इतने में मास्टर महाशय ने स्वयं ही दरवाजा खोल दिया। मैंने उनके पूज्य चरणकमलों में प्रणाम किया। दिव्य उल्लास को छिपाते हुए मैंने विनोद भाव में अपना मुख गम्भीर बना लिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। स्पष्ट था कि मेरी गम्भीरता का नाटक प्रभावी नहीं था। "इतनी गूढ़ता, इतना छल क्यों? क्या सन्त कभी सीधी बात नहीं करते ?" मैं शायद थोड़ा चिढ़ गया था। मेरी आत्मा की खिड़कियों को खोलने की कुंजी मास्टर महाशय के पास थी; मैंने पुनः उनके चरणों में साष्टांग प्रणिपात किया। परन्तु इस बार मेरी आँखों से जो अश्रु बह रहे थे वे अतीव हर्ष के थे, दुःख के नहीं। ये सीधे-सादे सन्त कौन थे, जिनका परमसत्ता से किया गया छोटे से छोटा अनुरोध भी मधुर स्वीकृति पा जाता था? इस संसार के जीवन में उनकी भूमिका अत्यंत साधारण थी, जो मेरी दृष्टि में विनम्रता के सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति के अनुरूप थी। एमहर्स्ट स्ट्रीट के इस घर में मास्टर महाशय1 लड़कों के लिये एक छोटा सा हाईस्कूल चलाते थे। उनके मुँह से कभी डाँट-फटकार का कोई शब्द नहीं निकलता था। उनका अनुशासन किसी नियम या छड़ी की वजह से नहीं था। इन सादगीयुक्त कक्षाओं में सच्चा उच्चतर गणित सिखाया जाता था, और सिखाया जाता था प्रेम का रसायन शास्त्र जिसका पाठ्यपुस्तकों में कभी कोई उल्लेख भी नहीं मिल सकता। अगम्य प्रतीत होने वाले नीरस उपदेशों की अपेक्षा आध्यात्मिक संसर्ग के द्वारा ही वे अपने ज्ञान का प्रसार करते थे। जगज्जननी के विशुद्ध प्रेम में वे इतने चूर रहते थे कि मान-अपमान की बाह्य औपचारिकताओं की ओर उनका कोई ध्यान ही नहीं रहता था। प्रतिदिन दोपहर ढलते-ढलते मैं एमहर्स्ट स्ट्रीट में उनके घर पहुँच जाता। मुझे मास्टर महाशय के उस दिव्य चषक की चाह रहती थी जो इतना लबालब भरा हुआ था कि उसकी बूंदें प्रतिदिन मेरे ऊपर छलकती थीं। पहले कभी भी इतने भक्तिभाव से मैं नतमस्तक नहीं हुआ था; अब तो मास्टर महाशय के चरणस्पर्श से पुनीत हुई भूमि पर केवल चलने का अवसर मिलने को भी मैं अपना सौभाग्य मानने लगा। "महाशय! कृपया इस चंपकमाला को धारण कीजिये। मैंने यह खास आपके लिये बनायी है।" एक दिन शाम को मैं अपनी पुष्पमाला हाथ में लिये उनके घर पहुँच गया। परन्तु बार-बार इस सम्मान को अस्वीकार करते हुए वे संकोच से पीछे हट गये। मेरे दुःख का अनुभव करते हुए अन्ततः उन्होंने मुस्कराते हुए उसे स्वीकार कर लिया। "चूँकि हम दोनों ही माँ के भक्त हैं, इसलिये इस शरीर में वास करने वाली माँ के प्रति अपनी श्रद्धा के रूप में तुम वह माला इस देह मन्दिर को पहना सकते हो।" उनके विशाल स्वभाव में कहीं तनिक भी जगह नहीं थी कि अहंकार अपना पग जमा सके। "कल हम मेरे गुरु के वास से सदा के लिये धन्य हुए दक्षिणेश्वर के काली मन्दिर चलेंगे।" मास्टर महाशय ईसा-सदृश गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। अगले दिन सुबह दक्षिणेश्वर तक की चार मील की यात्रा हमने नाव से तय की। काली के नौ गुम्बदों वाले मन्दिर में हमने प्रवेश किया जहाँ माँ काली और शिव की मूर्ति अति कौशल से निर्मित चाँदी के चमकदार सहस्रदल कमल पर विराजमान है। मास्टर महाशय आनन्द से प्रफुल्लित हो उठे। वे अपनी प्रियतम माँ के साथ अथक प्रेमलीला में मग्न थे। जैसे जैसे वे माँ का नाम जपते जा रहे थे, मेरा आनंदित मन मानो उस सहस्रदल कमल की तरह ही सहस्रधाराओं में फूट पड़ रहा था। कुछ देर बाद हम दोनों उस पुण्यभूमि में टहलते-टहलते झाऊ के झुरमुट में जाकर रुक गये। इस पेड़ की विशेषतास्वरूप इस से झरने वाला मधुर रस मानों मास्टर महाशय से झरते अमृत का प्रतीक था। उनका नाम जप चलता ही जा रहा था। झाऊ के गुलाबी परदार पुष्पों के बीच मैं घास पर सख्त, निश्चल शरीर से बैठा रहा। उतने समय के लिये मैं शरीर को भूलकर दिव्य लोकों की यात्रा करता रहा। इस संत के साथ की हुई दक्षिणेश्वर की अनेक तीर्थयात्राओं में यह प्रथम थी मास्टर महाशय से ही मैंने ईश्वर के मातृत्व पक्ष या ईश्वरीय करुणा के माधुर्य को जाना। उस शिशुसरल संत को ईश्वर के पितृत्व पक्ष या ईश्वरीय न्याय में कोई रुचि नहीं थी। कठोर, सटीक, गणितीय निर्णय की कल्पना ही उनके कोमल स्वभाव के विपरीत थी। "ये तो पृथ्वी पर स्वर्ग के साक्षात् देवताओं के प्रतिरूप हैं!" एक दिन उन्हें प्रार्थना करते देख मेरे मन में उनके प्रति प्रेम से भरकर विचार उठा। किसी प्रकार की निंदा आलोचना या गुण-दोष का विचार कभी उनके मन में नहीं उठा। वे तो इस जगत् को आद्यपवित्रता से चिरपरिचित अपनी दृष्टि से ही निहारते थे। उनके काया, वाणी, मन, कर्म, सब कुछ उनकी आत्मा की सरलता के साथ सहज सुसामंजस्य रखते थे। "मेरे गुरुदेव ने मुझे यही बताया था।" अपने हर उपदेश को किसी प्रकार के आग्रह या अधिकारवाणी के बिना इसी श्रद्धापूरित वाक्य के साथ वे समाप्त करते थे। श्रीरामकृष्ण के साथ मास्टर महाशय की एकात्मता इतनी गहरी हो गयी थी कि अपने किसी भी विचार को अब वे अपना विचार नहीं मानते थे। एक दिन संध्या समय मास्टर महाशय और मैं एक दूसरे का हाथ थामे उनके स्कूल के पास वाले रास्ते पर चल रहे थे। मेरा आनंद फीका हो गया जब एक परिचित घमंडी व्यक्ति वहाँ आ पहुँचा। उसने अपने लम्बे प्रवचन से हमें तंग कर दिया। मेरी दृष्टि उस मुक्ति-स्थल पर लगी रही। उसके लाल द्वार पर पहुँचते ही अपना अधूरा वाक्य भी पूरा किये बिना और कुछ भी कहे बिना वह व्यक्ति अचानक मुड़कर चला गया। विक्षुब्ध वातावरण में फिर से शांति छा गयी। एक अन्य दिन मैं हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास अकेला ही टहल रहा था। एक पल के लिये मैं एक छोटे से मन्दिर के पास खड़ा हो गया और वहाँ ढोलक, करताल के शोर में जोर-जोर से कीर्तन करते लोगों को मन ही मन कोसने लगा। "केवल मुँह से तोते की तरह प्रभु का पवित्र नाम लेते रहने वाले इन लोगों के कीर्तन में भक्ति का कितना अभाव है", मैं मन ही मन सोच रहा था। अचानक मास्टर महाशय को तेज कदमों से अपनी ओर आते देखकर मैं विस्मित हो गया। उस सन्त ने मेरे प्रश्न की ओर कोई ध्यान न देकर सीधे मेरे मन के विचार का उत्तर दिया। "क्या यह सच नहीं है छोटे महाशय, कि प्रभु का नाम किसी भी मुँह से क्यों न निकला हो, मधुर ही लगता है चाहे वह मुँह अज्ञानी का हो या ज्ञानी का?" उन्होंने स्नेहपूर्वक एक हाथ से मुझे अपने अंक में भर लिया; उनके जादू के गालिचे पर सवार होकर मैं तुरंत जगज्जननी के दयामयी सान्निध्य में पहुँच गया। "क्या तुम कुछ बायोस्कोप देखना चाहोगे?" एक दिन अपराह्न को एकान्तप्रिय मास्टर महाशय से यह प्रश्न सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ उस समय भारत में चलचित्र को बायोस्कोप कहते थे। मैं सहमत हो गया; किसी भी कारण से क्यों न हो, उनके सान्निध्य में रहने का आनंद मेरे लिये पर्याप्त था। द्रुत गति से चलते हुए थोड़ी ही देर में हम कोलकाता विश्वविद्यालय के सामने स्थित बगीचे में पहुँच गये। मास्टर महाशय ने दीघी (जलकुंड) के पास स्थित एक बेंच की ओर इशारा किया। थोड़ी देर बाद हम विश्वविद्यालय के एक कक्ष में गये जहाँ एक लेक्चर चल रहा था। बीच-बीच में स्लाइडस से चित्र भी दिखाये जा रहे थे, किन्तु वह लेक्चर और स्लाइड शो, दोनों ही समान रूप से अत्यंत नीरस थे। "तो ये है वह बायोस्कोप जो मास्टर महाशय मुझे दिखाना चाहते थे!" मैं अधीर हो उठा था, परन्तु चेहरे पर उकताहट का कोई भाव लाकर मैं मास्टर महाशय को दुःखी नहीं करना चाहता था। इतने में वे चुपचाप मेरी ओर झुके। जैसे ही मेरे कान में चल रही उनकी यह फुसफुसाहट समाप्त हुई, कक्ष में अंधेरा छा गया। अब तक ऊँची आवाज़ में ज़ोर-ज़ोर से व्याख्यान दे रहे प्रोफेसर महोदय की वाणी विस्मय से एक पल के लिये रुक गयी और फिर उन्होंने कहा, "इस कक्ष की विद्युत प्रणाली में कुछ गड़बड़ मालूम होती है।" इतने समय में मास्टर महाशय और मैं उस कक्ष के द्वार से बाहर निकल चुके थे। बरामदे में से जाते हुए मैंने पलटकर पीछे देखा तो उस कक्ष में फिर से रोशनी हो गयी थी। "छोटे महाशय, उस बायोस्कोप से तुम निराश हो गये थे परन्तु मैं समझता हूँ कि तुम्हें एक दूसरा बायोस्कोप अवश्य पसन्द आयेगा।" मास्टर महाशय और मैं विश्वविद्यालय भवन के सामने एक फुटपाथ पर खड़े थे। उन्होंने हृदय के स्थान पर मेरी छाती पर धीरे से थपकी दी। उसी के साथ मुझ पर एक अद्भुत निःस्तब्धता छा गयी। जैसे आधुनिक बोलपट (talkies), यदि ध्वनियंत्र में कुछ खराबी आ जाय तो मूक चलचित्र बन जाते हैं, उसी प्रकार, विधाता के हाथ ने किसी अगम्य चमत्कार के द्वारा जगत् के सारे कोलाहल का गला घोंट दिया। पदयात्री, ट्रामगाड़ियाँ, मोटर कारें, बैलगाड़ियाँ, लोहे के चक्कों वाली घोड़ागाड़ियाँ, सब बिना कोई आवाज किये इधर से उधर आ-जा रहे थे। मैं अपने पीछे, दायें, बायें के सभी दृश्य वैसे ही देख रहा था जैसे अपने सामने के दृश्य; मानों मेरी दृष्टि सर्वव्यापी हो गयी हो। कोलकाता के उस छोटे-से हिस्से की समस्त गतिविधियों का परिदृश्य मेरे समक्ष बिना कोई आवाज किये चल रहा था। राख की पतली परत के नीचे नज़र आने वाली अग्नि की दीप्ति के समान मद्धिम प्रभा सारे परिदृश्य में व्याप्त थी। मेरा अपना शरीर उस परिदृश्य में विद्यमान अनेकानेक परछाइयों से अधिक कुछ भी नहीं लग रहा था; फर्क सिर्फ इतना था कि मेरे शरीर की परछाई निश्चल थी जबकि अन्य सभी परछाईयाँ बिना किसी आवाज के इधर-उधर आ-जा रहीं थीं। कई लड़के, जो मेरे मित्र ही थे, मेरी ओर आये और चले गये; यद्यपि उन्होंने मेरी ओर सीधे देखा परन्तु उसमें पहचान का कोई संकेत तक नहीं था। इस अद्वितीय मूकनाट्य ने मुझे एक अवर्णनीय आनंद से विभोर कर दिया। मैं किसी आनंदामृत के झरने से जी भरकर अमृतपान कर रहा था। अकस्मात् मेरी छाती पर पुनः मास्टर महाशय का कोमल आघात हुआ। जगत् का कर्णकर्कश कोलाहल मेरी अनिच्छुक श्रवणेंद्रियों पर टूट पड़ा। मैं लड़खड़ाया, जैसे किसी ने अत्यंत नाजुक स्वप्न से निष्ठुरतापूर्वक जगा दिया हो। वह दिव्य मदिरा मेरी पहुँच से बाहर हटा दी गयी थी। यदि किसी ने सीधे-सादे विनम्र मास्टर महाशय को और मुझे उस समय उस भीड़भरे फुटपाथ से दूर जाते देखा होगा तो उसे अवश्य ही सन्देह हुआ होगा कि हम दोनों नशें में धुत हैं। मुझे लग रहा था कि संध्या के प्रकाश की रंग बदलती छटाएँ भी हमारी ही तरह ईश्वर के नशे में डूबी जा रही थीं। तुच्छ शब्दों में उनकी महत्कृपा का वर्णन करने का प्रयास करते हुए यह विचार मेरे मन में आये बिना नहीं रहता कि क्या मास्टर महाशय और अन्य संतजनों को, जिनसे मैं मिला था, उस समय यह ज्ञात होगा कि अनेक वर्षोपरान्त मैं एक पाश्चात्य देश में बैठकर उनके भगवद्भक्तिरस से ओतप्रोत जीवन की गाथाएँ लिखूँगा? उन्हें इसका पूर्वज्ञान हो तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा, न ही, मैं सोचता हूँ मेरे पाठकों को होगा जो यहाँ तक मेरे साथ रहे हैं। सभी धर्मों के सन्तों ने ईश्वर को दिव्य प्रियतम मानकर उस सरल आधार पर ईश्वर-साक्षात्कार प्राप्त किया है। चूँकि परंब्रह्म निर्गुण और अचिंत्य है, इसलिये मानवी विचार और आकांक्षा ने सदा ही उसे जगन्माता का रूप दिया है। साकार, सगुण ईश्वर और निराकार, निर्गुण ब्रह्म के मतों का संयोग हिंदु विचारधारा की प्राचीन उपलब्धि है, जिसका प्रतिपादन वेदों और भगवद्गीता में किया गया है। "परस्पर विरोधी विचारों का यह मिलाप" हृदय और बुद्धि दोनों को ही संतुष्ट करता है। भक्ति और ज्ञान मूलतः एक ही हैं। प्रपत्ति (ईश्वर में आश्रय लेना) और शरणागति (ईश्वरीय अनुकम्पा के प्रति सम्पूर्ण समर्पण भाव) वस्तुतः सर्वोच्च ज्ञान के पथ हैं। सभी युगों के सन्तों ने शिशुसुलभ भाव से जगन्माता को प्राप्त किया और उन सभी ने कहा कि उन्होंने सदा ही जगन्माता को उनके साथ खेलते पाया। मास्टर महाशय के जीवन में महत्त्वपूर्ण और महत्त्वहीन अवसरों पर भी इस दिव्य खेल की अभिव्यक्तियाँ स्पष्ट हुईं। ईश्वर की दृष्टि में कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि छोटे-से परमाणु को बनाने में ईश्वर ने अपनी अतिशय सूक्ष्म-दर्शिता के औचित्य को न लगाया होता तो क्या आकाश अभिजित और स्वाति नक्षत्रों जैसी गौरवशाली रचनाओं को धारण कर पाता ? "महत्त्वपूर्ण" और "महत्त्वहीन" का भेद प्रभु के लिये निश्चय ही अज्ञात है कि कहीं एक सुई के अभाव में पूरा ब्रह्माण्ड ही ढह जाय ! 2 वेबस्टर की न्यू इंटरनेशनल डिक्शनरी (1934) में कहा गया है कि कभी-कभी बायोस्कोप की व्याख्या इस प्रकार भी की जा सकती हैः "जीवन का दृश्य; वह जो ऐसा दृश्य प्रस्तुत करता है।" तो मास्टर महाशय ने जो शब्द चुना था वह विलक्षण रूप से यथार्थ था। 3 [सेंट जॉन ऑफ़ द क्रॉस इस प्रिय ईसाई सन्त की मृत्यु १५९१ में हुई थी। १८५९ में उनके पार्थिव शरीर को जब कब्र से बाहर निकाला गया तो उसमें किसी प्रकार का कोई विकार नहीं हुआ था। सर फ्रांसिस यंगहस्बैंड (अटलान्टिक मन्थली, दिसम्बर १९३६) ने परमानन्द की अपनी वैयक्तिक अनुभूति के विषय में कहा हैः "उल्लास या हर्ष से भी कहीं अधिक तीव्र भावना मेरे मन में उठी; मैं आनन्द में पूर्णतः विभोर हो गया, और इस अवर्णनीय एवं असह्यप्राय आनंद के साथ ही संसार की सारभूत महानता का बोध मेरे अन्तःकरण में जागा मुझे संशयातीत विश्वास हो गया कि लोग मन से अच्छे होते हैं, कि उनकी बुराइयों केवल बाह्य होती हैं।
मैंने अत्यन्त श्रद्धा के साथ कमरे में चुपचाप प्रवेश किया था। मास्टर महाशय के देवता सदृश रूप ने मुझे चकाचौंध कर दिया। श्वेत रेशम समान दाढ़ी और विशाल तेजस्वी नेत्रों से युक्त वे पवित्रता का साक्षात् अवतार लग रहे थे। ऊपर की ओर उठा हुआ उनका चेहरा और जुड़े हुए हाथ देखकर मैं समझ गया कि उनके पास मेरे उस प्रथम आगमन ने उनकी अर्चना में बाधा डाली है। उस समय तक मुझे जितने धक्के लगे थे उन सब से बढ़कर तीव्र धक्का उनके स्वागतपूर्ण सरल शब्दों से लगा। माँ की मृत्यु के कारण हुए विरह-दुःख को ही मैं दुःख की पराकाष्ठा मानता आ रहा था। अब अपनी जगन्माता से विरह की भावना मेरी आत्मा को अवर्णनीय यातना देने लगी। विलाप करते हुए मैं ज़मीन पर गिर पड़ा। "छोटे महाशय, शांत हो जाओ!" संतवर को सहानुभूतिपूर्ण दुःख हो रहा था। किसी अगाध समुद्र में असहाय छोड़ दिये गये मनुष्य की तरह अपने बचाव का एकमात्र उपाय जानकर मैंने उनके चरणों को कसकर पकड़ लिया। इस प्रकार की मध्यस्थता का वचन सहज ही नहीं दे दिया जाता; अतः महात्मा चुप रहने पर बाध्य हो गये। मुझे समस्त शंकाओं से परे विश्वास हो गया था कि मास्टर महाशय वहाँ जगन्माता से घनिष्ठता के साथ वार्तालाप कर रहे थे। यह सोचकर मैं अत्यंत अपमानित अनुभव कर रहा था कि मेरी आँखें जगन्माता को देख नहीं सकती थीं जिन्हें अभी इस समय भी उस सन्त की निर्मल दृष्टि निहार रही थी। निर्लज्जतापूर्वक उनके पाँव पकड़े हुए और उनके सौम्य विरोध को अनसुना करते हुए मैं बार-बार उनकी मध्यस्थता की कृपा की याचना उनसे करता रहा। "मैं परमप्रिय माँ तक तुम्हारी प्रार्थना पहुँचा दूंगा।" मास्टर महाशय ने आखिर हार मानकर सहानुभूतिपूर्वक धीरे से मुस्कराते हुए कहा। क्या शक्ति थी उन शब्दों में कि मेरा मन विरह-व्याकुलता से तुरन्त मुक्त हो गया! "महाशय, अपना वचन याद रखिये! माँ का सन्देश पाने के लिये मैं पुनः शीघ्र ही आपकी सेवा में उपस्थित हो जाऊँगा।" एक क्षण पूर्व ही दुःख और सिसकियों से मेरा जो कण्ठस्वर अवरुद्ध हुआ जाता था, अब आशा की आनन्द ध्वनि से मुखरित हो रहा था। लम्बे जीने से नीचे उतरते-उतरते अतीत की स्मृतियों से मेरा मन भर आया पचास, एमहर्स्ट स्ट्रीट के इसी घर में, जो अब मास्टर महाशय का आवास था, किसी समय मेरा परिवार रहा करता था। यहीं मेरी माँ की मृत्यु हुई थी। स्वर्गवासी माता के लिये यहीं पर मेरा मानवी हृदय पीड़ित हुआ था; और यहीं पर आज जगन्माता के विरह में मेरी आत्मा विद्ध हो उठी थी। मेरे शोकविह्वल मन की वेदनाओं और अंततः मेरी निरामयता की मौन साक्षी बनी यही वे पुनीत दीवारें थीं! घर जाते हुए मेरे पाँव उत्सुकतावश जल्दी-जल्दी उठ रहे थे। अपनी छोटी-सी अटारी में मैं दस बजे तक एकान्त में ध्यान करता रहा उष्ण रात्रि का अन्धकार अचानक एक अद्भुत दृश्य के साथ प्रकाशमान हो उठा। दिव्य आभायुक्त जगजननी मेरे सामने खड़ी थीं। मधुर स्मित करता उनका मुखारविंद परमसौन्दर्य का मूर्त रूप था। "सदा ही मैंने तुम्हें प्रेम किया है! सदैव मैं तुमसे प्रेम करती रहूँगी!" उनका दिव्य स्वर अभी वातावरण में गूँज ही रहा था कि वे अदृश्य हो गयीं। दूसरे दिन प्रातः काल सूर्य ने क्षितिज पर अभी झाँकना आरम्भ ही किया था कि मैं मास्टर महाशय के घर पहुँच गया। हृदयविदारक स्मृतियों से जुड़े उस घर की सीढ़ियाँ चढ़ कर मैं चौथी मंजिल पर उनके कमरे के सामने पहुँच गया। बन्द दरवाजे की मूठ पर एक कपड़ा लिपटा हुआ था जो शायद इस बात का संकेत था कि वे एकान्त चाहते हैं। मैं दरवाजे के सामने दुविधा में खड़ा था कि इतने में मास्टर महाशय ने स्वयं ही दरवाजा खोल दिया। मैंने उनके पूज्य चरणकमलों में प्रणाम किया। दिव्य उल्लास को छिपाते हुए मैंने विनोद भाव में अपना मुख गम्भीर बना लिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। स्पष्ट था कि मेरी गम्भीरता का नाटक प्रभावी नहीं था। "इतनी गूढ़ता, इतना छल क्यों? क्या सन्त कभी सीधी बात नहीं करते ?" मैं शायद थोड़ा चिढ़ गया था। मेरी आत्मा की खिड़कियों को खोलने की कुंजी मास्टर महाशय के पास थी; मैंने पुनः उनके चरणों में साष्टांग प्रणिपात किया। परन्तु इस बार मेरी आँखों से जो अश्रु बह रहे थे वे अतीव हर्ष के थे, दुःख के नहीं। ये सीधे-सादे सन्त कौन थे, जिनका परमसत्ता से किया गया छोटे से छोटा अनुरोध भी मधुर स्वीकृति पा जाता था? इस संसार के जीवन में उनकी भूमिका अत्यंत साधारण थी, जो मेरी दृष्टि में विनम्रता के सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति के अनुरूप थी। एमहर्स्ट स्ट्रीट के इस घर में मास्टर महाशयएक लड़कों के लिये एक छोटा सा हाईस्कूल चलाते थे। उनके मुँह से कभी डाँट-फटकार का कोई शब्द नहीं निकलता था। उनका अनुशासन किसी नियम या छड़ी की वजह से नहीं था। इन सादगीयुक्त कक्षाओं में सच्चा उच्चतर गणित सिखाया जाता था, और सिखाया जाता था प्रेम का रसायन शास्त्र जिसका पाठ्यपुस्तकों में कभी कोई उल्लेख भी नहीं मिल सकता। अगम्य प्रतीत होने वाले नीरस उपदेशों की अपेक्षा आध्यात्मिक संसर्ग के द्वारा ही वे अपने ज्ञान का प्रसार करते थे। जगज्जननी के विशुद्ध प्रेम में वे इतने चूर रहते थे कि मान-अपमान की बाह्य औपचारिकताओं की ओर उनका कोई ध्यान ही नहीं रहता था। प्रतिदिन दोपहर ढलते-ढलते मैं एमहर्स्ट स्ट्रीट में उनके घर पहुँच जाता। मुझे मास्टर महाशय के उस दिव्य चषक की चाह रहती थी जो इतना लबालब भरा हुआ था कि उसकी बूंदें प्रतिदिन मेरे ऊपर छलकती थीं। पहले कभी भी इतने भक्तिभाव से मैं नतमस्तक नहीं हुआ था; अब तो मास्टर महाशय के चरणस्पर्श से पुनीत हुई भूमि पर केवल चलने का अवसर मिलने को भी मैं अपना सौभाग्य मानने लगा। "महाशय! कृपया इस चंपकमाला को धारण कीजिये। मैंने यह खास आपके लिये बनायी है।" एक दिन शाम को मैं अपनी पुष्पमाला हाथ में लिये उनके घर पहुँच गया। परन्तु बार-बार इस सम्मान को अस्वीकार करते हुए वे संकोच से पीछे हट गये। मेरे दुःख का अनुभव करते हुए अन्ततः उन्होंने मुस्कराते हुए उसे स्वीकार कर लिया। "चूँकि हम दोनों ही माँ के भक्त हैं, इसलिये इस शरीर में वास करने वाली माँ के प्रति अपनी श्रद्धा के रूप में तुम वह माला इस देह मन्दिर को पहना सकते हो।" उनके विशाल स्वभाव में कहीं तनिक भी जगह नहीं थी कि अहंकार अपना पग जमा सके। "कल हम मेरे गुरु के वास से सदा के लिये धन्य हुए दक्षिणेश्वर के काली मन्दिर चलेंगे।" मास्टर महाशय ईसा-सदृश गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। अगले दिन सुबह दक्षिणेश्वर तक की चार मील की यात्रा हमने नाव से तय की। काली के नौ गुम्बदों वाले मन्दिर में हमने प्रवेश किया जहाँ माँ काली और शिव की मूर्ति अति कौशल से निर्मित चाँदी के चमकदार सहस्रदल कमल पर विराजमान है। मास्टर महाशय आनन्द से प्रफुल्लित हो उठे। वे अपनी प्रियतम माँ के साथ अथक प्रेमलीला में मग्न थे। जैसे जैसे वे माँ का नाम जपते जा रहे थे, मेरा आनंदित मन मानो उस सहस्रदल कमल की तरह ही सहस्रधाराओं में फूट पड़ रहा था। कुछ देर बाद हम दोनों उस पुण्यभूमि में टहलते-टहलते झाऊ के झुरमुट में जाकर रुक गये। इस पेड़ की विशेषतास्वरूप इस से झरने वाला मधुर रस मानों मास्टर महाशय से झरते अमृत का प्रतीक था। उनका नाम जप चलता ही जा रहा था। झाऊ के गुलाबी परदार पुष्पों के बीच मैं घास पर सख्त, निश्चल शरीर से बैठा रहा। उतने समय के लिये मैं शरीर को भूलकर दिव्य लोकों की यात्रा करता रहा। इस संत के साथ की हुई दक्षिणेश्वर की अनेक तीर्थयात्राओं में यह प्रथम थी मास्टर महाशय से ही मैंने ईश्वर के मातृत्व पक्ष या ईश्वरीय करुणा के माधुर्य को जाना। उस शिशुसरल संत को ईश्वर के पितृत्व पक्ष या ईश्वरीय न्याय में कोई रुचि नहीं थी। कठोर, सटीक, गणितीय निर्णय की कल्पना ही उनके कोमल स्वभाव के विपरीत थी। "ये तो पृथ्वी पर स्वर्ग के साक्षात् देवताओं के प्रतिरूप हैं!" एक दिन उन्हें प्रार्थना करते देख मेरे मन में उनके प्रति प्रेम से भरकर विचार उठा। किसी प्रकार की निंदा आलोचना या गुण-दोष का विचार कभी उनके मन में नहीं उठा। वे तो इस जगत् को आद्यपवित्रता से चिरपरिचित अपनी दृष्टि से ही निहारते थे। उनके काया, वाणी, मन, कर्म, सब कुछ उनकी आत्मा की सरलता के साथ सहज सुसामंजस्य रखते थे। "मेरे गुरुदेव ने मुझे यही बताया था।" अपने हर उपदेश को किसी प्रकार के आग्रह या अधिकारवाणी के बिना इसी श्रद्धापूरित वाक्य के साथ वे समाप्त करते थे। श्रीरामकृष्ण के साथ मास्टर महाशय की एकात्मता इतनी गहरी हो गयी थी कि अपने किसी भी विचार को अब वे अपना विचार नहीं मानते थे। एक दिन संध्या समय मास्टर महाशय और मैं एक दूसरे का हाथ थामे उनके स्कूल के पास वाले रास्ते पर चल रहे थे। मेरा आनंद फीका हो गया जब एक परिचित घमंडी व्यक्ति वहाँ आ पहुँचा। उसने अपने लम्बे प्रवचन से हमें तंग कर दिया। मेरी दृष्टि उस मुक्ति-स्थल पर लगी रही। उसके लाल द्वार पर पहुँचते ही अपना अधूरा वाक्य भी पूरा किये बिना और कुछ भी कहे बिना वह व्यक्ति अचानक मुड़कर चला गया। विक्षुब्ध वातावरण में फिर से शांति छा गयी। एक अन्य दिन मैं हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास अकेला ही टहल रहा था। एक पल के लिये मैं एक छोटे से मन्दिर के पास खड़ा हो गया और वहाँ ढोलक, करताल के शोर में जोर-जोर से कीर्तन करते लोगों को मन ही मन कोसने लगा। "केवल मुँह से तोते की तरह प्रभु का पवित्र नाम लेते रहने वाले इन लोगों के कीर्तन में भक्ति का कितना अभाव है", मैं मन ही मन सोच रहा था। अचानक मास्टर महाशय को तेज कदमों से अपनी ओर आते देखकर मैं विस्मित हो गया। उस सन्त ने मेरे प्रश्न की ओर कोई ध्यान न देकर सीधे मेरे मन के विचार का उत्तर दिया। "क्या यह सच नहीं है छोटे महाशय, कि प्रभु का नाम किसी भी मुँह से क्यों न निकला हो, मधुर ही लगता है चाहे वह मुँह अज्ञानी का हो या ज्ञानी का?" उन्होंने स्नेहपूर्वक एक हाथ से मुझे अपने अंक में भर लिया; उनके जादू के गालिचे पर सवार होकर मैं तुरंत जगज्जननी के दयामयी सान्निध्य में पहुँच गया। "क्या तुम कुछ बायोस्कोप देखना चाहोगे?" एक दिन अपराह्न को एकान्तप्रिय मास्टर महाशय से यह प्रश्न सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ उस समय भारत में चलचित्र को बायोस्कोप कहते थे। मैं सहमत हो गया; किसी भी कारण से क्यों न हो, उनके सान्निध्य में रहने का आनंद मेरे लिये पर्याप्त था। द्रुत गति से चलते हुए थोड़ी ही देर में हम कोलकाता विश्वविद्यालय के सामने स्थित बगीचे में पहुँच गये। मास्टर महाशय ने दीघी के पास स्थित एक बेंच की ओर इशारा किया। थोड़ी देर बाद हम विश्वविद्यालय के एक कक्ष में गये जहाँ एक लेक्चर चल रहा था। बीच-बीच में स्लाइडस से चित्र भी दिखाये जा रहे थे, किन्तु वह लेक्चर और स्लाइड शो, दोनों ही समान रूप से अत्यंत नीरस थे। "तो ये है वह बायोस्कोप जो मास्टर महाशय मुझे दिखाना चाहते थे!" मैं अधीर हो उठा था, परन्तु चेहरे पर उकताहट का कोई भाव लाकर मैं मास्टर महाशय को दुःखी नहीं करना चाहता था। इतने में वे चुपचाप मेरी ओर झुके। जैसे ही मेरे कान में चल रही उनकी यह फुसफुसाहट समाप्त हुई, कक्ष में अंधेरा छा गया। अब तक ऊँची आवाज़ में ज़ोर-ज़ोर से व्याख्यान दे रहे प्रोफेसर महोदय की वाणी विस्मय से एक पल के लिये रुक गयी और फिर उन्होंने कहा, "इस कक्ष की विद्युत प्रणाली में कुछ गड़बड़ मालूम होती है।" इतने समय में मास्टर महाशय और मैं उस कक्ष के द्वार से बाहर निकल चुके थे। बरामदे में से जाते हुए मैंने पलटकर पीछे देखा तो उस कक्ष में फिर से रोशनी हो गयी थी। "छोटे महाशय, उस बायोस्कोप से तुम निराश हो गये थे परन्तु मैं समझता हूँ कि तुम्हें एक दूसरा बायोस्कोप अवश्य पसन्द आयेगा।" मास्टर महाशय और मैं विश्वविद्यालय भवन के सामने एक फुटपाथ पर खड़े थे। उन्होंने हृदय के स्थान पर मेरी छाती पर धीरे से थपकी दी। उसी के साथ मुझ पर एक अद्भुत निःस्तब्धता छा गयी। जैसे आधुनिक बोलपट , यदि ध्वनियंत्र में कुछ खराबी आ जाय तो मूक चलचित्र बन जाते हैं, उसी प्रकार, विधाता के हाथ ने किसी अगम्य चमत्कार के द्वारा जगत् के सारे कोलाहल का गला घोंट दिया। पदयात्री, ट्रामगाड़ियाँ, मोटर कारें, बैलगाड़ियाँ, लोहे के चक्कों वाली घोड़ागाड़ियाँ, सब बिना कोई आवाज किये इधर से उधर आ-जा रहे थे। मैं अपने पीछे, दायें, बायें के सभी दृश्य वैसे ही देख रहा था जैसे अपने सामने के दृश्य; मानों मेरी दृष्टि सर्वव्यापी हो गयी हो। कोलकाता के उस छोटे-से हिस्से की समस्त गतिविधियों का परिदृश्य मेरे समक्ष बिना कोई आवाज किये चल रहा था। राख की पतली परत के नीचे नज़र आने वाली अग्नि की दीप्ति के समान मद्धिम प्रभा सारे परिदृश्य में व्याप्त थी। मेरा अपना शरीर उस परिदृश्य में विद्यमान अनेकानेक परछाइयों से अधिक कुछ भी नहीं लग रहा था; फर्क सिर्फ इतना था कि मेरे शरीर की परछाई निश्चल थी जबकि अन्य सभी परछाईयाँ बिना किसी आवाज के इधर-उधर आ-जा रहीं थीं। कई लड़के, जो मेरे मित्र ही थे, मेरी ओर आये और चले गये; यद्यपि उन्होंने मेरी ओर सीधे देखा परन्तु उसमें पहचान का कोई संकेत तक नहीं था। इस अद्वितीय मूकनाट्य ने मुझे एक अवर्णनीय आनंद से विभोर कर दिया। मैं किसी आनंदामृत के झरने से जी भरकर अमृतपान कर रहा था। अकस्मात् मेरी छाती पर पुनः मास्टर महाशय का कोमल आघात हुआ। जगत् का कर्णकर्कश कोलाहल मेरी अनिच्छुक श्रवणेंद्रियों पर टूट पड़ा। मैं लड़खड़ाया, जैसे किसी ने अत्यंत नाजुक स्वप्न से निष्ठुरतापूर्वक जगा दिया हो। वह दिव्य मदिरा मेरी पहुँच से बाहर हटा दी गयी थी। यदि किसी ने सीधे-सादे विनम्र मास्टर महाशय को और मुझे उस समय उस भीड़भरे फुटपाथ से दूर जाते देखा होगा तो उसे अवश्य ही सन्देह हुआ होगा कि हम दोनों नशें में धुत हैं। मुझे लग रहा था कि संध्या के प्रकाश की रंग बदलती छटाएँ भी हमारी ही तरह ईश्वर के नशे में डूबी जा रही थीं। तुच्छ शब्दों में उनकी महत्कृपा का वर्णन करने का प्रयास करते हुए यह विचार मेरे मन में आये बिना नहीं रहता कि क्या मास्टर महाशय और अन्य संतजनों को, जिनसे मैं मिला था, उस समय यह ज्ञात होगा कि अनेक वर्षोपरान्त मैं एक पाश्चात्य देश में बैठकर उनके भगवद्भक्तिरस से ओतप्रोत जीवन की गाथाएँ लिखूँगा? उन्हें इसका पूर्वज्ञान हो तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा, न ही, मैं सोचता हूँ मेरे पाठकों को होगा जो यहाँ तक मेरे साथ रहे हैं। सभी धर्मों के सन्तों ने ईश्वर को दिव्य प्रियतम मानकर उस सरल आधार पर ईश्वर-साक्षात्कार प्राप्त किया है। चूँकि परंब्रह्म निर्गुण और अचिंत्य है, इसलिये मानवी विचार और आकांक्षा ने सदा ही उसे जगन्माता का रूप दिया है। साकार, सगुण ईश्वर और निराकार, निर्गुण ब्रह्म के मतों का संयोग हिंदु विचारधारा की प्राचीन उपलब्धि है, जिसका प्रतिपादन वेदों और भगवद्गीता में किया गया है। "परस्पर विरोधी विचारों का यह मिलाप" हृदय और बुद्धि दोनों को ही संतुष्ट करता है। भक्ति और ज्ञान मूलतः एक ही हैं। प्रपत्ति और शरणागति वस्तुतः सर्वोच्च ज्ञान के पथ हैं। सभी युगों के सन्तों ने शिशुसुलभ भाव से जगन्माता को प्राप्त किया और उन सभी ने कहा कि उन्होंने सदा ही जगन्माता को उनके साथ खेलते पाया। मास्टर महाशय के जीवन में महत्त्वपूर्ण और महत्त्वहीन अवसरों पर भी इस दिव्य खेल की अभिव्यक्तियाँ स्पष्ट हुईं। ईश्वर की दृष्टि में कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि छोटे-से परमाणु को बनाने में ईश्वर ने अपनी अतिशय सूक्ष्म-दर्शिता के औचित्य को न लगाया होता तो क्या आकाश अभिजित और स्वाति नक्षत्रों जैसी गौरवशाली रचनाओं को धारण कर पाता ? "महत्त्वपूर्ण" और "महत्त्वहीन" का भेद प्रभु के लिये निश्चय ही अज्ञात है कि कहीं एक सुई के अभाव में पूरा ब्रह्माण्ड ही ढह जाय ! दो वेबस्टर की न्यू इंटरनेशनल डिक्शनरी में कहा गया है कि कभी-कभी बायोस्कोप की व्याख्या इस प्रकार भी की जा सकती हैः "जीवन का दृश्य; वह जो ऐसा दृश्य प्रस्तुत करता है।" तो मास्टर महाशय ने जो शब्द चुना था वह विलक्षण रूप से यथार्थ था। तीन [सेंट जॉन ऑफ़ द क्रॉस इस प्रिय ईसाई सन्त की मृत्यु एक हज़ार पाँच सौ इक्यानवे में हुई थी। एक हज़ार आठ सौ उनसठ में उनके पार्थिव शरीर को जब कब्र से बाहर निकाला गया तो उसमें किसी प्रकार का कोई विकार नहीं हुआ था। सर फ्रांसिस यंगहस्बैंड ने परमानन्द की अपनी वैयक्तिक अनुभूति के विषय में कहा हैः "उल्लास या हर्ष से भी कहीं अधिक तीव्र भावना मेरे मन में उठी; मैं आनन्द में पूर्णतः विभोर हो गया, और इस अवर्णनीय एवं असह्यप्राय आनंद के साथ ही संसार की सारभूत महानता का बोध मेरे अन्तःकरण में जागा मुझे संशयातीत विश्वास हो गया कि लोग मन से अच्छे होते हैं, कि उनकी बुराइयों केवल बाह्य होती हैं।
प्रबोध झालम्बने सम्मुखीभावः । प्रसंख्यानवतो दग्धक्लेशबीजस्य सम्मुखीभूतेऽप्यालम्बने 'नासौ पुनरस्ति, दग्धवीजस्य कुतः प्ररोह इत्यतः क्षीणक्लेशः कुशलश्चरमदेह इत्युच्यते । तत्रैव हि सा दग्धबीजभावा पञ्चमी क्लेशावस्था नान्यत्रोति, सतां क्लेशानां तदा बीजसामर्थ्य दग्धमिति विषयस्य सम्मुखीभावेऽपि सति न भवत्येषां प्रबोध इत्युक्ता प्रसुप्तिर्दग्धवीजानासप्ररोहश्च । तनुत्वमुच्यते प्रतिपक्षभावनोपहताः क्लेशास्तनवो भवन्ति । तथा विच्छिद्य विच्छिद्य तेन तेनात्मना पुनः समुदाचरन्तीति विच्छिताः कथं ? रागकाले क्रोधस्यादर्शनात्, न हि रागकाले क्रोधस्समुदाचरति, रागच क्वचिद्दृश्यमानो न विषयान्तरे नास्ति, नैकस्थां स्त्रियां चैत्रो रक्त इत्यन्यासु स्त्रीषु विरक्त इति, किन्तु तत्र रागो लब्धवृत्तिरन्यत्र भविष्यद्वृत्तिरिति, सहि तदा प्रसुप्ततनु विच्छिन्नो भवति । विषये यो लब्धवृत्तिः स उदारः । सर्वे एवैते क्लेशविषयत्वं नातिकामन्ति । कस्तहि विच्छिन्नः प्रसुप्तस्तनुरुदारो वा क्लेश इति ? उच्यते, सत्यमेवैतत्, किन्तु विशिष्टानामे वैतेषां विच्छिन्नादित्वम् । यथैव प्रतिपक्षभावनातो निवृत्तस्तथैव स्वव्यञ्जकाञ्जनेनाभिव्यक्त इति । सर्व एवाभी क्लेशा प्रविद्या भेदाः कस्मात् ? सर्वेषु प्रविद्यैवाभिप्लवते यदविद्यया वस्त्वाकार्यते तदेवानुशेरते क्लेशा विपर्थ्यास प्रत्ययकाले उपलभ्यन्ते क्षीयमाणां चाविद्यामनु क्षीयते इति ॥ ४ ॥ । प्रसुप्त, तनु, विच्छिन्न और उदार इन चार रूप से रहते हुए अस्मितादि क्लेशों की प्रसवभूमि श्रविद्या है । सू भांष्यानुवाद - यहाँ विद्या क्षेत्र या प्रसवभूमि है अन्य सबों की अर्थात् प्रसुप्त, तमु, विच्छिन्न और उदार इन चार प्रकार के अस्मिता आदि की ( १ ) । उनमें प्रसुप्ति क्या है ?. चित्त म शक्तिमात्र रूप से अवस्थित क्लेश की जो बीजभावप्राप्ति है वह प्रसुप्ति है । प्रसुप्त क्लेश का आलम्बन में (अपने विषय में ) सम्मुखीभाव या अभिव्यक्ति ही प्रबोध है । प्रसंख्यान युक्त का क्लेशबीज दग्ध होने पर वह सम्मुखीभूत अर्थात् विषय - सन्निकृष्ट होने पर भी अंकुरित या प्रबुद्ध नहीं होता । कारण दग्धबीज अंकुरित कैसे हो सकता है ? अतः क्षीरंग क्लेश योगी को कुशल, चरमदेह कहा जाता है (२) । उस प्रकार के योगियों की ही दग्धबीजभावा पंचमी क्लेशावस्था होती है ; दूसरों की ( विदेह आदियों की ) नहीं । उस समय विद्यमान क्लेशसमूह की कार्योत्पादक सामर्थ्य भी दग्ध हो जाती है; अतएव विषय सन्निकर्ष से भी उनको प्ररोह नहीं होता । इस प्रकार की प्रसुप्ति और क्लेशों के दग्ध वीजभाव के कारण जो प्ररोहाभाव होता है वह व्याख्यात हुआ। अब तनुत्व कहा जा रहा है - प्रतिपक्ष की भावना द्वारा अक्रान्त क्लेश तनु हो जाते हैं, और जो समय समय पर विच्छिन्न होकर पुनः उसी प्रकार की वृत्ति पाते हैं वे विच्छिन्न हैं । किस प्रकार ? जैसे - राग के समय में क्रोध के प्रदर्शन होने के कारण, रागकाल में क्रोध वृत्तिमय नहीं होता, और राग किसी एक विषय पर देखा जाता है, इसलिये वह अन्य विषय पर नहीं रहता है ऐसा भी नहीं है । जैसे चैत्र एक स्त्री में अनुरक्त होने के कारण दूसरी में विरक्त नहीं होता वैसे ही । लेकिन उसमें ( जिसमें अनुरक्त है ) राग लब्धवृति और दूसरी में भविष्यद्वृत्ति है । उस समय वह प्रसुप्त या तनु या विच्छिन्न रहता है। विषय पर जो लब्धवृत्ति ( वृत्तिमान् ) है वह उदार होना है । ये सभी क्लेशजनत्व का प्रतिक्रमण नहीं करते। (ये सब यदि एकमात्र क्लेश जाति
प्रबोध झालम्बने सम्मुखीभावः । प्रसंख्यानवतो दग्धक्लेशबीजस्य सम्मुखीभूतेऽप्यालम्बने 'नासौ पुनरस्ति, दग्धवीजस्य कुतः प्ररोह इत्यतः क्षीणक्लेशः कुशलश्चरमदेह इत्युच्यते । तत्रैव हि सा दग्धबीजभावा पञ्चमी क्लेशावस्था नान्यत्रोति, सतां क्लेशानां तदा बीजसामर्थ्य दग्धमिति विषयस्य सम्मुखीभावेऽपि सति न भवत्येषां प्रबोध इत्युक्ता प्रसुप्तिर्दग्धवीजानासप्ररोहश्च । तनुत्वमुच्यते प्रतिपक्षभावनोपहताः क्लेशास्तनवो भवन्ति । तथा विच्छिद्य विच्छिद्य तेन तेनात्मना पुनः समुदाचरन्तीति विच्छिताः कथं ? रागकाले क्रोधस्यादर्शनात्, न हि रागकाले क्रोधस्समुदाचरति, रागच क्वचिद्दृश्यमानो न विषयान्तरे नास्ति, नैकस्थां स्त्रियां चैत्रो रक्त इत्यन्यासु स्त्रीषु विरक्त इति, किन्तु तत्र रागो लब्धवृत्तिरन्यत्र भविष्यद्वृत्तिरिति, सहि तदा प्रसुप्ततनु विच्छिन्नो भवति । विषये यो लब्धवृत्तिः स उदारः । सर्वे एवैते क्लेशविषयत्वं नातिकामन्ति । कस्तहि विच्छिन्नः प्रसुप्तस्तनुरुदारो वा क्लेश इति ? उच्यते, सत्यमेवैतत्, किन्तु विशिष्टानामे वैतेषां विच्छिन्नादित्वम् । यथैव प्रतिपक्षभावनातो निवृत्तस्तथैव स्वव्यञ्जकाञ्जनेनाभिव्यक्त इति । सर्व एवाभी क्लेशा प्रविद्या भेदाः कस्मात् ? सर्वेषु प्रविद्यैवाभिप्लवते यदविद्यया वस्त्वाकार्यते तदेवानुशेरते क्लेशा विपर्थ्यास प्रत्ययकाले उपलभ्यन्ते क्षीयमाणां चाविद्यामनु क्षीयते इति ॥ चार ॥ । प्रसुप्त, तनु, विच्छिन्न और उदार इन चार रूप से रहते हुए अस्मितादि क्लेशों की प्रसवभूमि श्रविद्या है । सू भांष्यानुवाद - यहाँ विद्या क्षेत्र या प्रसवभूमि है अन्य सबों की अर्थात् प्रसुप्त, तमु, विच्छिन्न और उदार इन चार प्रकार के अस्मिता आदि की । उनमें प्रसुप्ति क्या है ?. चित्त म शक्तिमात्र रूप से अवस्थित क्लेश की जो बीजभावप्राप्ति है वह प्रसुप्ति है । प्रसुप्त क्लेश का आलम्बन में सम्मुखीभाव या अभिव्यक्ति ही प्रबोध है । प्रसंख्यान युक्त का क्लेशबीज दग्ध होने पर वह सम्मुखीभूत अर्थात् विषय - सन्निकृष्ट होने पर भी अंकुरित या प्रबुद्ध नहीं होता । कारण दग्धबीज अंकुरित कैसे हो सकता है ? अतः क्षीरंग क्लेश योगी को कुशल, चरमदेह कहा जाता है । उस प्रकार के योगियों की ही दग्धबीजभावा पंचमी क्लेशावस्था होती है ; दूसरों की नहीं । उस समय विद्यमान क्लेशसमूह की कार्योत्पादक सामर्थ्य भी दग्ध हो जाती है; अतएव विषय सन्निकर्ष से भी उनको प्ररोह नहीं होता । इस प्रकार की प्रसुप्ति और क्लेशों के दग्ध वीजभाव के कारण जो प्ररोहाभाव होता है वह व्याख्यात हुआ। अब तनुत्व कहा जा रहा है - प्रतिपक्ष की भावना द्वारा अक्रान्त क्लेश तनु हो जाते हैं, और जो समय समय पर विच्छिन्न होकर पुनः उसी प्रकार की वृत्ति पाते हैं वे विच्छिन्न हैं । किस प्रकार ? जैसे - राग के समय में क्रोध के प्रदर्शन होने के कारण, रागकाल में क्रोध वृत्तिमय नहीं होता, और राग किसी एक विषय पर देखा जाता है, इसलिये वह अन्य विषय पर नहीं रहता है ऐसा भी नहीं है । जैसे चैत्र एक स्त्री में अनुरक्त होने के कारण दूसरी में विरक्त नहीं होता वैसे ही । लेकिन उसमें राग लब्धवृति और दूसरी में भविष्यद्वृत्ति है । उस समय वह प्रसुप्त या तनु या विच्छिन्न रहता है। विषय पर जो लब्धवृत्ति है वह उदार होना है । ये सभी क्लेशजनत्व का प्रतिक्रमण नहीं करते। (ये सब यदि एकमात्र क्लेश जाति
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के पास सिंगल प्वाइंट प्रोग्राम है इंडिया को टारगेट करना उसने एक बार फिर वही किया है पाकिस्तान के एक टीवी चैनल के जरिए इंडिया को धमकी दी है कि वो पेशावर में आर्मी स्कूल पर अटैक में मारे गए बच्चों की डेथ का जिम्मेदार इंडिया को मानता है और उससे इसका बदला लेगा. वैसे ये भी कहा जा सकता है कि उसके जैसे डरपोक लोगों में असली मुजरिमों से तो बदला लेने की हिम्मत तो है नहीं इसलिए वो ऐसे बेसिर पैर के स्टेटमेंट दे कर पनी सियासत को जिंदा रखता है. जमात उद दावा के चीफ हाफिज ने एक स्टेटमेंट में कहा कि पेशावर अटैक के लिए इंडिया रिस्पांसिबल है और इंडिया के प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी इस अटैक पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं. हाफिज ने इंडिया से पेशावर अटैक का बदला लेने की वार्निंग भी दी. हाफिज ने कहा कि पेशावर में आर्मी स्कूल पर जो अटैक हुआ है उसका एक्च्यूअल कल्प्टि इंडिया का पीएम मोदी है. उसने अपने सर्पोटर्स को काल किया कि सब एक बात पर इकट्टे हो जाए कि हमें इन कांस्पिरेटर्स से बदला लेना है. ट्यूजडे को पेशावर के एक आर्मी स्कूल पर हुए तालिबानी टैरेरिस्ट अटैक में 132 बच्चों समेत 141 लोग मारे गए थे. इस इंसीडेंट पर इंडिया ने डीप ग्रीफ शो करते हुए पार्लियामेंट में दो मिनट का मौन भी रखा था. प्राइम मिनिस्टर मोदी ने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को फोन करके कहा था कि टैरेरिज्म के अगेंस्ट फाइट में इंडिया, पाकिस्तान के साथ खड़ा है. मोदी ने शरीफ से कहा था कि इंडिया इस पेनफुल मोमेंट में पाकिस्तान को हर पॉसिबल हेल्प देने के लिए रेडी है. इस अटैक की रिस्पांसबिलटी टैरेरिस्ट ग्रुप तहरीक-ए-तालिबान ने ली थी.
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के पास सिंगल प्वाइंट प्रोग्राम है इंडिया को टारगेट करना उसने एक बार फिर वही किया है पाकिस्तान के एक टीवी चैनल के जरिए इंडिया को धमकी दी है कि वो पेशावर में आर्मी स्कूल पर अटैक में मारे गए बच्चों की डेथ का जिम्मेदार इंडिया को मानता है और उससे इसका बदला लेगा. वैसे ये भी कहा जा सकता है कि उसके जैसे डरपोक लोगों में असली मुजरिमों से तो बदला लेने की हिम्मत तो है नहीं इसलिए वो ऐसे बेसिर पैर के स्टेटमेंट दे कर पनी सियासत को जिंदा रखता है. जमात उद दावा के चीफ हाफिज ने एक स्टेटमेंट में कहा कि पेशावर अटैक के लिए इंडिया रिस्पांसिबल है और इंडिया के प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी इस अटैक पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं. हाफिज ने इंडिया से पेशावर अटैक का बदला लेने की वार्निंग भी दी. हाफिज ने कहा कि पेशावर में आर्मी स्कूल पर जो अटैक हुआ है उसका एक्च्यूअल कल्प्टि इंडिया का पीएम मोदी है. उसने अपने सर्पोटर्स को काल किया कि सब एक बात पर इकट्टे हो जाए कि हमें इन कांस्पिरेटर्स से बदला लेना है. ट्यूजडे को पेशावर के एक आर्मी स्कूल पर हुए तालिबानी टैरेरिस्ट अटैक में एक सौ बत्तीस बच्चों समेत एक सौ इकतालीस लोग मारे गए थे. इस इंसीडेंट पर इंडिया ने डीप ग्रीफ शो करते हुए पार्लियामेंट में दो मिनट का मौन भी रखा था. प्राइम मिनिस्टर मोदी ने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को फोन करके कहा था कि टैरेरिज्म के अगेंस्ट फाइट में इंडिया, पाकिस्तान के साथ खड़ा है. मोदी ने शरीफ से कहा था कि इंडिया इस पेनफुल मोमेंट में पाकिस्तान को हर पॉसिबल हेल्प देने के लिए रेडी है. इस अटैक की रिस्पांसबिलटी टैरेरिस्ट ग्रुप तहरीक-ए-तालिबान ने ली थी.
Voter ID Card Correction कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मृत हुए लोगों का मतदाता सूची से नाम हटाकर सूची को अपडेट करना प्रशासन के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के मुताबिक मृत लोगों के साथ कोरोना महामारी में कोई लोग अपने गांव की तरफ पलायन कर चुके है। नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। Voter ID Card : एक नवंबर से मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए दक्षिण-पश्चिमी व पश्चिमी दोनों ही जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी निगम चुनाव को मद्देनजर रखते हुए इस बार मतदाता सूची में होने वाले संशोधन काफी महत्वपूर्ण है। विशेषकर कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान मृत हुए लोगों का मतदाता सूची से नाम हटाकर सूची को अपडेट करना प्रशासन के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के मुताबिक मृत लोगों के साथ कोरोना महामारी में कोई लोग अपने गांव की तरफ पलायन कर चुके है, ऐसे लोगों का नाम भी मतदाता सूची से हटाया जाएगा। जहां तक नए मतदाताओं को सूची से जोड़ने की बात है, उसके लिए आनलाइन व आफलाइन दोनों ही माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर साल 14 जनवरी को संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। इसके लिए इस वर्ष 1 से 30 नवंबर तक मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। जो भी मतदाता अपने मतदाता पहचान पत्र में संशोधन कराना चाहते है या नाम जुड़वाने के लिए योग्य है तो वे आनलाइन व आफलाइन माध्यम से आवेदन दे सकते हैं। जो मतदाता एक जनवरी 2022 को 18 वर्ष के होने जा रहे हैं या 18 वर्ष के हो चुके हैं वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दें। इसके अलावा जिनको भी मतदाता पहचान पत्र में अपने नाम, घर के पता, पिता या पति का नाम व जन्म तिथि में संशोधन कराना है तो वे भी आवेदन दे सकते है। इसके साथ ही जो मतदाता अब नहीं रहे उनके स्वजन आगे आकर उनका नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फार्म भरें। दक्षिण-पश्चिमी जिले में एसडीएम इलेक्शन अनुपमा चक्रवर्ती ने बताया कि 1 से 30 नवंबर के बीच पोलिंग स्टेशन पर नियमित रूप से शिविर का आयोजन किया जाएगा, जहां जाकर लोग फार्म भर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के साथ संशोधन के लिए आवेदन दे सकते हैं। छह, सात, 27 व 28 को जिले में विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल आफिसर के साथ कई अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन पर मतदाता सूची भी उपलब्ध रहेगी मतदाता जाकर उसमें अपना नाम देख सकते है। आनलाइन प्रक्रिया में निपुण लोग घर बैठे वोटर हेल्पलाइन एप पर भी आवेदन दे सकते है। वहीं पश्चिमी जिले के एसडीएम वीके त्यागी ने बताया कि पाेलिंग स्टेशन के अलावा जिले के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, मेट्रो स्टेशन आदि स्थानों पर भी मोबाइल शिविर लगाएं जाएंगे। अधिक से अधिक मतदाता इस कार्यक्रम का हिस्सा बने इसके लिए सार्वजनिक स्थानों जैसे मदर डेयरी, डिस्पेंसरी, अस्पतालों पर होर्डिंग्स लगाएं जा रहे है, बाजारों में पंफ्लेट बांटे जा रहे व सभी विधानसभा क्षेत्र में मुनादी कराई जा रही है। जिले के अंतर्गत 330 पोलिंग लोकेशन है, जहां तक 6,7,27 व 28 को विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। फिलहाल जिले में 20 लाख 45 हजार 466 मतदाता है। कोई भी मतदाता छूटे नहीं इसके लिए हर योग्य मतदाता इस अभियान में बढ़चढ़ भाग लें। जिले के अंतर्गत 13 लाख 15 हजार 687 मतदाता है और 256 पोलिंग लोकेशन पर विशेष शिविर का आयोजन होगा। मतदान करना एक भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की दिक्कत आने पर मतदाता 1950 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर परेशानी को साझा कर सकते हैं।
Voter ID Card Correction कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मृत हुए लोगों का मतदाता सूची से नाम हटाकर सूची को अपडेट करना प्रशासन के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के मुताबिक मृत लोगों के साथ कोरोना महामारी में कोई लोग अपने गांव की तरफ पलायन कर चुके है। नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। Voter ID Card : एक नवंबर से मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए दक्षिण-पश्चिमी व पश्चिमी दोनों ही जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी निगम चुनाव को मद्देनजर रखते हुए इस बार मतदाता सूची में होने वाले संशोधन काफी महत्वपूर्ण है। विशेषकर कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान मृत हुए लोगों का मतदाता सूची से नाम हटाकर सूची को अपडेट करना प्रशासन के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के मुताबिक मृत लोगों के साथ कोरोना महामारी में कोई लोग अपने गांव की तरफ पलायन कर चुके है, ऐसे लोगों का नाम भी मतदाता सूची से हटाया जाएगा। जहां तक नए मतदाताओं को सूची से जोड़ने की बात है, उसके लिए आनलाइन व आफलाइन दोनों ही माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर साल चौदह जनवरी को संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। इसके लिए इस वर्ष एक से तीस नवंबर तक मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। जो भी मतदाता अपने मतदाता पहचान पत्र में संशोधन कराना चाहते है या नाम जुड़वाने के लिए योग्य है तो वे आनलाइन व आफलाइन माध्यम से आवेदन दे सकते हैं। जो मतदाता एक जनवरी दो हज़ार बाईस को अट्ठारह वर्ष के होने जा रहे हैं या अट्ठारह वर्ष के हो चुके हैं वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दें। इसके अलावा जिनको भी मतदाता पहचान पत्र में अपने नाम, घर के पता, पिता या पति का नाम व जन्म तिथि में संशोधन कराना है तो वे भी आवेदन दे सकते है। इसके साथ ही जो मतदाता अब नहीं रहे उनके स्वजन आगे आकर उनका नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फार्म भरें। दक्षिण-पश्चिमी जिले में एसडीएम इलेक्शन अनुपमा चक्रवर्ती ने बताया कि एक से तीस नवंबर के बीच पोलिंग स्टेशन पर नियमित रूप से शिविर का आयोजन किया जाएगा, जहां जाकर लोग फार्म भर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के साथ संशोधन के लिए आवेदन दे सकते हैं। छह, सात, सत्ताईस व अट्ठाईस को जिले में विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल आफिसर के साथ कई अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन पर मतदाता सूची भी उपलब्ध रहेगी मतदाता जाकर उसमें अपना नाम देख सकते है। आनलाइन प्रक्रिया में निपुण लोग घर बैठे वोटर हेल्पलाइन एप पर भी आवेदन दे सकते है। वहीं पश्चिमी जिले के एसडीएम वीके त्यागी ने बताया कि पाेलिंग स्टेशन के अलावा जिले के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, मेट्रो स्टेशन आदि स्थानों पर भी मोबाइल शिविर लगाएं जाएंगे। अधिक से अधिक मतदाता इस कार्यक्रम का हिस्सा बने इसके लिए सार्वजनिक स्थानों जैसे मदर डेयरी, डिस्पेंसरी, अस्पतालों पर होर्डिंग्स लगाएं जा रहे है, बाजारों में पंफ्लेट बांटे जा रहे व सभी विधानसभा क्षेत्र में मुनादी कराई जा रही है। जिले के अंतर्गत तीन सौ तीस पोलिंग लोकेशन है, जहां तक छः,सात,सत्ताईस व अट्ठाईस को विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। फिलहाल जिले में बीस लाख पैंतालीस हजार चार सौ छयासठ मतदाता है। कोई भी मतदाता छूटे नहीं इसके लिए हर योग्य मतदाता इस अभियान में बढ़चढ़ भाग लें। जिले के अंतर्गत तेरह लाख पंद्रह हजार छः सौ सत्तासी मतदाता है और दो सौ छप्पन पोलिंग लोकेशन पर विशेष शिविर का आयोजन होगा। मतदान करना एक भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की दिक्कत आने पर मतदाता एक हज़ार नौ सौ पचास हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर परेशानी को साझा कर सकते हैं।
आप इस फोटो में देखेंगे की ऐश्वर्या की माता-पिता काफी जवान है। पुराने ज़माने में पति-पत्नी जैसे फोटो निकाला करते थे ठीक वैसे ही यह तस्वीर है। जैसे ही ऐश्वर्या बच्चन ने फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की तुरंत फैंस लाइक्स और कमेंट करने लगे। कुछ दिन पहले ऐश्वर्या ने एक और तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें वह, उनकी माँ और बेटी आराध्या बच्चन दिखाई दे रही हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन, अनिल कपूर और राजकुमार राव के साथ फने खान में दिखाई दी थी। वर्कफ्रंट की बात करें तो, वह मणि रत्नम की तमिल फिल्म 'पोंनियिन सेलवन' में नज़र आयेंगी।
आप इस फोटो में देखेंगे की ऐश्वर्या की माता-पिता काफी जवान है। पुराने ज़माने में पति-पत्नी जैसे फोटो निकाला करते थे ठीक वैसे ही यह तस्वीर है। जैसे ही ऐश्वर्या बच्चन ने फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की तुरंत फैंस लाइक्स और कमेंट करने लगे। कुछ दिन पहले ऐश्वर्या ने एक और तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें वह, उनकी माँ और बेटी आराध्या बच्चन दिखाई दे रही हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन, अनिल कपूर और राजकुमार राव के साथ फने खान में दिखाई दी थी। वर्कफ्रंट की बात करें तो, वह मणि रत्नम की तमिल फिल्म 'पोंनियिन सेलवन' में नज़र आयेंगी।
नई दिल्ली, टीबी एक गंभीर बीमारी है. महिला को गर्भावस्था में टीबी हो जाता है, तो उन्हें आवश्यक तरीके अपनाने चाहिए ताकि गर्भ में पल रहा शिशु और मां दोनों सुरक्षित रहें। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर यह पता लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामान्य जांच करवाते हैं ताकि यह पता चल सके कि गर्भवती महिला को स्वास्थ्य संबंधी ऐसी कोई संभावित समस्या तो नहीं है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक हो. इसके अलावा अगर गर्भवती महिला में वजन का घटना, भूख की कमी, ठंड लगना, बुखार, रात में पसीना आना, खांसी या छाती में दर्द जैसे लक्षण प्रकट होते हैं, तो डॉक्टर सामान्य जांचों के अलावा ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की जांच कराने को कहते हैं. अगर सक्रिय टीबी है, तभी ये सारे लक्षण होंगे, और इन लक्षणों के होने पर जांच करा लेना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे गर्भावस्था प्रभावित हो सकती है. टीबी एक बैक्टीरिया का संक्रमण है, जो आम तौर पर फेफड़े को प्रभावित करता है। माँ को अगर टीबी है, तो यह माँ और शिशु, दोनों के लिए खतरनाक होता है। गर्भवती महिला को टीबी हो तो उनके समय से पहले या कम वजन वाले शिशु पैदा होने की आशंका दोगुनी हो जाती है। साथ ही, शिशु को जन्मजात टीबी भी हो सकता है। टीबी अमूमन दो प्रकार का होता है - सुसुप्त टीबी और सक्रिय टीबी यानी लैटेंट और ऐक्टिव टीबी। सक्रिय अवस्था में इस रोग की तीव्रता ज्यादा होती है। लेकिन, सुसुप्त और सक्रिय, दोनों प्रकार के टीबी से आपके गर्भस्थ शिशु को ख़तरा हो सकता है। सुसुप्त टीबी का कोई लक्षण प्रकट नहीं होता क्योंकि बैक्टीरिया आपके शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहता है। सुसुप्त टीबी को निष्क्रिय टीबी भी कहते हैं और यह संक्रामक नहीं होता है लेकिन इसका इलाज नहीं कराने से यह सक्रिय टीबी में बदल सकता है। सक्रिय टीबी से आप बीमार हो जाती हैं और अधिकतर मामलों में दूसरों को संक्रमित कर सकती हैं। यह टीबी बैक्टीरिया के संक्रमण के तुरंत बाद या वर्षों बाद भी हो सकता है। गर्भवती महिला को यह चिंता हो सकती है कि ट्यूबरकुलोसिस की दवा लेना गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन इसका इलाज नहीं करना और भी बुरा होता है. ऐंटी-टीबी दवाओं के कारण जन्म की असामान्यता या गर्भ में बढ़ते शिशु में दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन, अगर आप गर्भवती हैं, या गर्भ धारण करने की सोच रही हैं, तो आपका डॉक्टर उन दवाओं की अनुशंसा नहीं करेगा. आपको कौन-सा टीबी है, इसी से तय होगा कि आपके लिए कौन-सी दवा सही रहेगी. सुसुप्त टीबी के लिए : अगर आपको कोई लक्षण नहीं है लेकिन जांच में टीबी होने का पता चलता है, तो संभावना है कि आपको आइसोनिएजिड दवा लेनी होगी. पहले नौ महीने तक इसे सप्ताह में दो बार या हर रोज लेना पड़ सकता है. आपको इसके साथ-साथ विटमिन बी6 का सप्लीमेंट भी लेना होगा. आइसोनिएजिड और रिफाम्पिन का तीन महीने का कोर्स भी एक विकल्प है. गर्भवती महिला को ढेर सारी दवाएं देने से बचने के लिए, सुसुप्त टीबी संक्रमण के लिए उपचार को आम तौर पर प्रसव के बाद 2-3 महीनों तक स्थगित किया जा सकता है. सुसुप्त टीबी संक्रमण के लिए इलाज को एकमात्र गर्भावस्था के आधार पर या यहां तक कि पहली तिमाही के दौरान भी स्थगित नहीं किया जाता. विशेषकर उन महिलाओं को, जो हाल में संक्रामक टीबी रोग के शिकार किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आईं हैं, तो उनमें सुसुप्त टीबी संक्रमण से टीबी रोग होने का ख़तरा ज्यादा होता है. सक्रिय टीबी के लिए : आमतौर आइसोनिएजिड, रिफाम्पिन और इथमब्युटोल पहली तीन दवाएं है, जो दी जाती हैं. ज्यादा संभावना है कि ये तीनों दवाएं दो महीने तक हर रोज लेने की ज़रुरत होती है. उसके बाद गर्भावस्था की बाकी पूरी अवधि तक केवल आइसोनिएजिड और रिफाम्पिन को रोजाना या सप्ताह में दो बार लेना होता है. भले ही महिला शिशु को जन्म देने के बाद अभी भी टीबी की प्राथमिक दवाएं ले रही हैं, फिर भी अपने शिशु को बिना किसी समस्या के स्तनपान करा सकती हैं. आप अपने नवजात शिशु को दूध पिला रही हैं और आइसोनिएजिड ले रही हैं, तो विटमिन बी6 लें. इससे आपके बच्चे को कोई नुकसान नहीं होगा। गर्भावस्था के दौरान टीबी की शिकार माता से जन्मे नवजातों में दिखने वाली जटिलतायें इस प्रकार हैं : शिशु का वजन, स्वस्थ माँ से जन्मे शिशु की तुलना में कम हो सकता है. बच्चे को जन्म से टीबी हो सकता है, हालाँकि ऐसा बहुत कम होता है. जन्म के बाद माँ से बच्चे में टीबी का संचरण, अगर रोग अभी भी सक्रिय है और माँ का समय पर इलाज नहीं हुआ था। मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर मनीषा तोमर का कहना है कि अगर शुरुआती दवाओं से आपका टीबी ठीक नहीं हो रहा है, तो हो सकता है आपमें दवा-रेजिस्टेंट किस्म का बैक्टीरिया हो. आपका डॉक्टर दवा बदलने की सलाह दे सकता है, जो दूसरी पंक्ति की दवा होगी. गर्भावस्था के दौरान अनेक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि दवाएं जन्म संबंधी असामान्यता या दूसरी समस्या पैदा कर सकती हैं. अगर आपको दूसरी-पंक्ति के उपचार की ज़रुरत है, तो इस स्थिति में गर्भधारण का विचार कुछ समय के लिए टाल देना बेहतर होगा. टीबी के लिए उपचार लेते रहने के साथ-साथ आप अपने डॉक्टर से परामर्श ले सकती हैं और ऑनलाइन परामर्श या उपचार का विकल्प भी अपना सकती हैं, क्योंकि इस स्थिति से निपटना काफी तनावपूर्ण और थकाऊ हो सकता है. अगर आपको सक्रिय टीबी है तो आपसे दूसरों को संक्रमण होने की आशंका ज्यादा होती है. भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर आप कैसा महसूस करती हैं, इसे किसी के साथ साझा करने से आपको रोग और स्थिति का मुकाबला करने में ज्यादा आसानी होगी.
नई दिल्ली, टीबी एक गंभीर बीमारी है. महिला को गर्भावस्था में टीबी हो जाता है, तो उन्हें आवश्यक तरीके अपनाने चाहिए ताकि गर्भ में पल रहा शिशु और मां दोनों सुरक्षित रहें। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर यह पता लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामान्य जांच करवाते हैं ताकि यह पता चल सके कि गर्भवती महिला को स्वास्थ्य संबंधी ऐसी कोई संभावित समस्या तो नहीं है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक हो. इसके अलावा अगर गर्भवती महिला में वजन का घटना, भूख की कमी, ठंड लगना, बुखार, रात में पसीना आना, खांसी या छाती में दर्द जैसे लक्षण प्रकट होते हैं, तो डॉक्टर सामान्य जांचों के अलावा ट्यूबरकुलोसिस की जांच कराने को कहते हैं. अगर सक्रिय टीबी है, तभी ये सारे लक्षण होंगे, और इन लक्षणों के होने पर जांच करा लेना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे गर्भावस्था प्रभावित हो सकती है. टीबी एक बैक्टीरिया का संक्रमण है, जो आम तौर पर फेफड़े को प्रभावित करता है। माँ को अगर टीबी है, तो यह माँ और शिशु, दोनों के लिए खतरनाक होता है। गर्भवती महिला को टीबी हो तो उनके समय से पहले या कम वजन वाले शिशु पैदा होने की आशंका दोगुनी हो जाती है। साथ ही, शिशु को जन्मजात टीबी भी हो सकता है। टीबी अमूमन दो प्रकार का होता है - सुसुप्त टीबी और सक्रिय टीबी यानी लैटेंट और ऐक्टिव टीबी। सक्रिय अवस्था में इस रोग की तीव्रता ज्यादा होती है। लेकिन, सुसुप्त और सक्रिय, दोनों प्रकार के टीबी से आपके गर्भस्थ शिशु को ख़तरा हो सकता है। सुसुप्त टीबी का कोई लक्षण प्रकट नहीं होता क्योंकि बैक्टीरिया आपके शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहता है। सुसुप्त टीबी को निष्क्रिय टीबी भी कहते हैं और यह संक्रामक नहीं होता है लेकिन इसका इलाज नहीं कराने से यह सक्रिय टीबी में बदल सकता है। सक्रिय टीबी से आप बीमार हो जाती हैं और अधिकतर मामलों में दूसरों को संक्रमित कर सकती हैं। यह टीबी बैक्टीरिया के संक्रमण के तुरंत बाद या वर्षों बाद भी हो सकता है। गर्भवती महिला को यह चिंता हो सकती है कि ट्यूबरकुलोसिस की दवा लेना गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन इसका इलाज नहीं करना और भी बुरा होता है. ऐंटी-टीबी दवाओं के कारण जन्म की असामान्यता या गर्भ में बढ़ते शिशु में दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन, अगर आप गर्भवती हैं, या गर्भ धारण करने की सोच रही हैं, तो आपका डॉक्टर उन दवाओं की अनुशंसा नहीं करेगा. आपको कौन-सा टीबी है, इसी से तय होगा कि आपके लिए कौन-सी दवा सही रहेगी. सुसुप्त टीबी के लिए : अगर आपको कोई लक्षण नहीं है लेकिन जांच में टीबी होने का पता चलता है, तो संभावना है कि आपको आइसोनिएजिड दवा लेनी होगी. पहले नौ महीने तक इसे सप्ताह में दो बार या हर रोज लेना पड़ सकता है. आपको इसके साथ-साथ विटमिन बीछः का सप्लीमेंट भी लेना होगा. आइसोनिएजिड और रिफाम्पिन का तीन महीने का कोर्स भी एक विकल्प है. गर्भवती महिला को ढेर सारी दवाएं देने से बचने के लिए, सुसुप्त टीबी संक्रमण के लिए उपचार को आम तौर पर प्रसव के बाद दो-तीन महीनों तक स्थगित किया जा सकता है. सुसुप्त टीबी संक्रमण के लिए इलाज को एकमात्र गर्भावस्था के आधार पर या यहां तक कि पहली तिमाही के दौरान भी स्थगित नहीं किया जाता. विशेषकर उन महिलाओं को, जो हाल में संक्रामक टीबी रोग के शिकार किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आईं हैं, तो उनमें सुसुप्त टीबी संक्रमण से टीबी रोग होने का ख़तरा ज्यादा होता है. सक्रिय टीबी के लिए : आमतौर आइसोनिएजिड, रिफाम्पिन और इथमब्युटोल पहली तीन दवाएं है, जो दी जाती हैं. ज्यादा संभावना है कि ये तीनों दवाएं दो महीने तक हर रोज लेने की ज़रुरत होती है. उसके बाद गर्भावस्था की बाकी पूरी अवधि तक केवल आइसोनिएजिड और रिफाम्पिन को रोजाना या सप्ताह में दो बार लेना होता है. भले ही महिला शिशु को जन्म देने के बाद अभी भी टीबी की प्राथमिक दवाएं ले रही हैं, फिर भी अपने शिशु को बिना किसी समस्या के स्तनपान करा सकती हैं. आप अपने नवजात शिशु को दूध पिला रही हैं और आइसोनिएजिड ले रही हैं, तो विटमिन बीछः लें. इससे आपके बच्चे को कोई नुकसान नहीं होगा। गर्भावस्था के दौरान टीबी की शिकार माता से जन्मे नवजातों में दिखने वाली जटिलतायें इस प्रकार हैं : शिशु का वजन, स्वस्थ माँ से जन्मे शिशु की तुलना में कम हो सकता है. बच्चे को जन्म से टीबी हो सकता है, हालाँकि ऐसा बहुत कम होता है. जन्म के बाद माँ से बच्चे में टीबी का संचरण, अगर रोग अभी भी सक्रिय है और माँ का समय पर इलाज नहीं हुआ था। मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर मनीषा तोमर का कहना है कि अगर शुरुआती दवाओं से आपका टीबी ठीक नहीं हो रहा है, तो हो सकता है आपमें दवा-रेजिस्टेंट किस्म का बैक्टीरिया हो. आपका डॉक्टर दवा बदलने की सलाह दे सकता है, जो दूसरी पंक्ति की दवा होगी. गर्भावस्था के दौरान अनेक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि दवाएं जन्म संबंधी असामान्यता या दूसरी समस्या पैदा कर सकती हैं. अगर आपको दूसरी-पंक्ति के उपचार की ज़रुरत है, तो इस स्थिति में गर्भधारण का विचार कुछ समय के लिए टाल देना बेहतर होगा. टीबी के लिए उपचार लेते रहने के साथ-साथ आप अपने डॉक्टर से परामर्श ले सकती हैं और ऑनलाइन परामर्श या उपचार का विकल्प भी अपना सकती हैं, क्योंकि इस स्थिति से निपटना काफी तनावपूर्ण और थकाऊ हो सकता है. अगर आपको सक्रिय टीबी है तो आपसे दूसरों को संक्रमण होने की आशंका ज्यादा होती है. भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर आप कैसा महसूस करती हैं, इसे किसी के साथ साझा करने से आपको रोग और स्थिति का मुकाबला करने में ज्यादा आसानी होगी.
एक विभाजन के साथ कमरे ज़ोनिंग -एक आम डिजाइन स्वागत। यह समाधान एक निजी कमरे को व्यवस्थित करने के लिए एक छोटे से कमरे में भी अनुमति देता है। अब विभाजन के विभिन्न रूपों का उपयोग करें। वे आकार, आकार, डिजाइन में भिन्न हैं। एक कमरे में सबसे लोकप्रिय जोनिंगअपार्टमेंट। यहां एक कमरे के लिए रहने की जगह, बेडरूम और अध्ययन को एक साथ सुसज्जित करने की तत्काल आवश्यकता है। साथ ही, विभाजन के साथ कमरे को ज़ोन करने का विचार अपार्टमेंट स्टूडियो में प्रासंगिक है। यह मुख्य रूप से असीमित स्थान की इच्छा के कारण है, हालांकि, व्यक्तिगत क्षेत्रों के साथ। इस लेख में, हम रहने की जगह ज़ोनिंग के सबसे आम तरीकों से परिचित होंगे। कमरे में जोनों को कमरे में विभाजित करना शुरू करने से पहले, आपको यह जानना होगा कि विभाजन दो प्रकार के हैंः जोनों में विभाजित कमरे की असली तस्वीरें लेख में पाई जा सकती हैं। विभाजन का सही उपयोग करने के लिएजोन में कक्ष अलग करने के लिए, आप खाते में न केवल उनके आकार और डिजाइन, लेकिन यह भी कार्यक्षमता और उद्देश्य रखना चाहिए। यह विशेषज्ञों से निपटने के लिए सबसे अच्छा है। इस विधि को कम से कम महंगा माना जाता है। ज़ोनिंग के लिए, केवल संकीर्ण फर्नीचर उपयुक्त है। यह रैक, अलमारियाँ, अलमारियों, और कभी-कभी यहां तक कि असबाबवाला फर्नीचर भी हो सकता है। इस भूमिका के निकटतम कोठरी। इसकी उच्च ऊंचाई के कारण, यह एक सतत विभाजन के कार्यों को करने में सक्षम है, जबकि चीजों के लिए भंडारण स्थान के रूप में कार्य करता है। अपने हाथों से विभाजन की मदद से कमरे को ज़ोन करना बहुत आसान हैः कैबिनेट किसी भी सुविधाजनक स्थान पर स्थापित है। इस डिजाइन के लिए दोनों तरफ एक प्रस्तुत करने योग्य उपस्थिति के लिए, इस मुद्दे पर निर्माता के साथ पहले से चर्चा करना संभव है (यह किसी व्यक्तिगत आदेश में कोई समस्या नहीं है)। छोटे कमरे के लिए उन मॉडलों को खरीदने की सिफारिश की जाती है जिनके दरवाजे में दर्पण कोटिंग होती है। स्लाइड रैक, स्लाइडिंग दरवाजा वार्डरोब के विपरीत,एक असंतुलित सेप्टम बनाओ। इस तरह के डिज़ाइनों के लिए धन्यवाद, प्रकाश कमरे के बहुत दूर भाग में आसानी से प्रवेश कर सकता है। नीचे एक अंधेरे pedestal के साथ उत्कृष्ट मॉडल। सामान्य जगह को और अधिक कठिन बनाये बिना वह आवश्यक अलगाव देगी। कमरे से एक विभाजन के साथ ज़ोनिंगकपड़े - सबसे आसान तरीका। यह डिजाइन शास्त्रीय अंदरूनी और आधुनिक दोनों के लिए बिल्कुल सही है। बाद के संस्करणों में एक आयताकार आकार के भारोत्तोलन एजेंट के साथ घने कपड़े का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। यह इसे एक फॉर्म देगा या इसके विपरीत, इसे सीधा करेगा। इस प्रकार के विभाजन को स्वयं स्थापित करने में कोई समस्या नहीं है। कॉर्निस को छत पर संलग्न करने के लिए पर्याप्त है। क्लासिकिज्म, प्रोवेंस, देश जैसे कुछ शैलियों में, आप चुनौतियों, फ्रिंज, रफल्स, ब्रश के साथ सुरुचिपूर्ण शैलियों का उपयोग कर सकते हैं। यह जगह से बाहर नहीं है कि एक भेड़ का बच्चा होगा। एक विभाजन के साथ कमरे को ज़ोन करना (यहां फोटो देखें) के कई फायदे हैंः पर्दे से विभाजन पूरी तरह से छोटे में फिट होगाकमरा, उदाहरण के लिए, नींद के क्षेत्र को सुसंगत रूप से अलग करना। वे न केवल आंखों से अंतरिक्ष छुपाएंगे, बल्कि इंटीरियर को अधिक आरामदायक और गर्म बना देंगे। सजावटी स्क्रीन का निर्विवाद लाभगतिशीलता है। इसे किसी अन्य स्थान पर ले जाया जा सकता है या पूरी तरह से फोल्ड और हटाया जा सकता है। कई लोग गलती से सोचते हैं कि इस तरह की ज़ोनिंग केवल शास्त्रीय अंदरूनी के लिए उपयुक्त है। वर्तमान में, वे विभिन्न प्रकार के मॉडल तैयार करते हैं जो पूरी तरह से किसी भी शैलियों में फिट होते हैं। ओरिएंटल रूपों के साथ एक स्क्रीन विभाजन के साथ कमरे को ज़ोनिंग जातीय दिशा के लिए एक उत्कृष्ट समाधान होगा। कांच या दर्पण आवेषण के साथ उच्च तकनीक धातु संरचनाओं के लिए उपयुक्त हैं। स्क्रीन का एक अन्य लाभ कार्यक्षमता है। जब आप इसे स्वयं बनाते हैं, तो आप विभिन्न उपकरणों के साथ आ सकते हैं, उदाहरण के लिए, जेब, तटस्थ, अलमारियों। यह समाधान कई छोटी वस्तुओं को समायोजित करेगा। यह टीवी, एक कंघी, एक फोन, और अधिक से एक रिमोट हो सकता है। जो लोग इस जोनिंग विधि को चुनते हैं उनके लिए एकमात्र कार्य सही डिजाइन चुनना है, धन्यवाद, जिसके लिए स्क्रीन सामान्य इंटीरियर के लिए एक सुंदर जोड़ होगी। बड़े कमरे में बड़े तत्वों की आवश्यकता होती है,इसलिए मूल ज़ोनिंग विधि - कॉलम का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। इस प्रकार को स्थिर अलगाव को संदर्भित किया जाता है, इसलिए आपको उन्हें इंस्टॉल करना शुरू करने से पहले सावधानी से सोचने की आवश्यकता है। छोटे कमरों में इस तरह के डिजाइन की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि उनकी उपस्थिति की शक्ति और भव्यता छुपा सकती है और एक जगह इतनी छोटी हो सकती है। कॉलम के विभाजन के साथ कमरे को ज़ोनिंग करने के फायदे और नुकसान हैं। आइए उन्हें अधिक विस्तार से देखें। मेहराब के लिए, सबकुछ यहां बहुत आसान है। वे छोटे और बड़े कमरे दोनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। फॉर्म और डिज़ाइन व्यक्तिगत रूप से चुने जाते हैं, जो अंतरिक्ष की बाहरी धारणा को मूल रूप से बदलते हैं। दरवाजे बहरे या गिलास के साथ उठाया जा सकता है। यदि तीन या अधिक फ्लैप्स स्थापित हैं, तो विभिन्न मॉडलों का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। उदाहरण के लिए, उद्घाटन की चौड़ाई आपको सजावटी आवेषण के साथ चार दरवाजे, फिर दो (किनारों पर) - बहरा, और बाकी (केंद्रीय) स्थापित करने की अनुमति देती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ग्लास वस्तुओं के माध्यम से चमकता नहीं है, आप विशेष प्रसंस्करण के साथ उत्पादों का चयन कर सकते हैंः मैट, figured, रंगीन या उत्कीर्ण। स्लाइडिंग दरवाजे का लाभः एक विभाजन के साथ कमरे ज़ोनिंगअक्सर एक सशर्त भूमिका निभाता है। इस विधि का उपयोग करके, वे एक दृश्य अलगाव प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, और स्पष्ट रूप से चित्रित सीमाएं नहीं। सबसे आम delimiters में से एक फायरप्लेस है। बड़े मॉडल का समय, जिसके लिए एक चिमनी और अतिरिक्त नींव को मजबूत करने की आवश्यकता है, पास हो गया है। उन्हें कॉम्पैक्ट फायरप्लेस द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जो केंद्रीय हीटिंग की बजाय सजावट के रूप में काम करते थे। कमरे को क्षेत्र में विभाजित करने के लिएफायरप्लेस का उपयोग करके, आपको सही मॉडल चुनना होगा। इस उद्देश्य के लिए, फाल्श पैनल या विद्युत उपकरण उपयुक्त हैं। वे विश्वासयोग्य रूप से एक जीवित आग का अनुकरण करते हैं, इसलिए जाहिर है कि पूरी तरह से पूर्ण अग्निशामक से अलग नहीं है। उनकी एकमात्र कमी गंध की कमी और लकड़ी की क्रैकिंग की आवाज है। एम्बेडेड मॉडल ज़ोनिंग के लिए उपयुक्त हैं। वे आमतौर पर प्लास्टरबोर्ड से पूर्व-निर्मित संरचना में घुड़सवार होते हैं। और उसके बाद उचित सामग्री के साथ सजाने के लिए। वर्तमान में आवासीय परिसर में, ईंटआंतरिक विभाजन व्यावहारिक रूप से उपयोग करने के लिए बंद कर दिया। उनके कार्यों ने पूरी तरह से drywall बदल दिया। साथ ही, अन्य भवन सामग्री की तुलना में इसमें बड़ी संख्या में फायदे हैं। हालांकि, इस तरह के विभाजन के बारे में बात करते समय, किसी को कमियों के बारे में चुप नहीं रहना चाहिए। उनमें से बहुत कम हैंः इंटीरियर में एक पेड़ एक क्लासिक है। इस सजावट का उपयोग सभी स्टाइलिस्ट दिशाओं में किया जा सकता है। सेप्टम की सतह की देखभाल करना बहुत आसान है, यह एक नम कपड़े से इसे पोंछने के लिए पर्याप्त है। यदि समय के साथ, उपस्थिति इसकी अपील खो देगी, तो आप इसे पेंट और वार्निश की मदद से अपडेट कर सकते हैं।
एक विभाजन के साथ कमरे ज़ोनिंग -एक आम डिजाइन स्वागत। यह समाधान एक निजी कमरे को व्यवस्थित करने के लिए एक छोटे से कमरे में भी अनुमति देता है। अब विभाजन के विभिन्न रूपों का उपयोग करें। वे आकार, आकार, डिजाइन में भिन्न हैं। एक कमरे में सबसे लोकप्रिय जोनिंगअपार्टमेंट। यहां एक कमरे के लिए रहने की जगह, बेडरूम और अध्ययन को एक साथ सुसज्जित करने की तत्काल आवश्यकता है। साथ ही, विभाजन के साथ कमरे को ज़ोन करने का विचार अपार्टमेंट स्टूडियो में प्रासंगिक है। यह मुख्य रूप से असीमित स्थान की इच्छा के कारण है, हालांकि, व्यक्तिगत क्षेत्रों के साथ। इस लेख में, हम रहने की जगह ज़ोनिंग के सबसे आम तरीकों से परिचित होंगे। कमरे में जोनों को कमरे में विभाजित करना शुरू करने से पहले, आपको यह जानना होगा कि विभाजन दो प्रकार के हैंः जोनों में विभाजित कमरे की असली तस्वीरें लेख में पाई जा सकती हैं। विभाजन का सही उपयोग करने के लिएजोन में कक्ष अलग करने के लिए, आप खाते में न केवल उनके आकार और डिजाइन, लेकिन यह भी कार्यक्षमता और उद्देश्य रखना चाहिए। यह विशेषज्ञों से निपटने के लिए सबसे अच्छा है। इस विधि को कम से कम महंगा माना जाता है। ज़ोनिंग के लिए, केवल संकीर्ण फर्नीचर उपयुक्त है। यह रैक, अलमारियाँ, अलमारियों, और कभी-कभी यहां तक कि असबाबवाला फर्नीचर भी हो सकता है। इस भूमिका के निकटतम कोठरी। इसकी उच्च ऊंचाई के कारण, यह एक सतत विभाजन के कार्यों को करने में सक्षम है, जबकि चीजों के लिए भंडारण स्थान के रूप में कार्य करता है। अपने हाथों से विभाजन की मदद से कमरे को ज़ोन करना बहुत आसान हैः कैबिनेट किसी भी सुविधाजनक स्थान पर स्थापित है। इस डिजाइन के लिए दोनों तरफ एक प्रस्तुत करने योग्य उपस्थिति के लिए, इस मुद्दे पर निर्माता के साथ पहले से चर्चा करना संभव है । छोटे कमरे के लिए उन मॉडलों को खरीदने की सिफारिश की जाती है जिनके दरवाजे में दर्पण कोटिंग होती है। स्लाइड रैक, स्लाइडिंग दरवाजा वार्डरोब के विपरीत,एक असंतुलित सेप्टम बनाओ। इस तरह के डिज़ाइनों के लिए धन्यवाद, प्रकाश कमरे के बहुत दूर भाग में आसानी से प्रवेश कर सकता है। नीचे एक अंधेरे pedestal के साथ उत्कृष्ट मॉडल। सामान्य जगह को और अधिक कठिन बनाये बिना वह आवश्यक अलगाव देगी। कमरे से एक विभाजन के साथ ज़ोनिंगकपड़े - सबसे आसान तरीका। यह डिजाइन शास्त्रीय अंदरूनी और आधुनिक दोनों के लिए बिल्कुल सही है। बाद के संस्करणों में एक आयताकार आकार के भारोत्तोलन एजेंट के साथ घने कपड़े का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। यह इसे एक फॉर्म देगा या इसके विपरीत, इसे सीधा करेगा। इस प्रकार के विभाजन को स्वयं स्थापित करने में कोई समस्या नहीं है। कॉर्निस को छत पर संलग्न करने के लिए पर्याप्त है। क्लासिकिज्म, प्रोवेंस, देश जैसे कुछ शैलियों में, आप चुनौतियों, फ्रिंज, रफल्स, ब्रश के साथ सुरुचिपूर्ण शैलियों का उपयोग कर सकते हैं। यह जगह से बाहर नहीं है कि एक भेड़ का बच्चा होगा। एक विभाजन के साथ कमरे को ज़ोन करना के कई फायदे हैंः पर्दे से विभाजन पूरी तरह से छोटे में फिट होगाकमरा, उदाहरण के लिए, नींद के क्षेत्र को सुसंगत रूप से अलग करना। वे न केवल आंखों से अंतरिक्ष छुपाएंगे, बल्कि इंटीरियर को अधिक आरामदायक और गर्म बना देंगे। सजावटी स्क्रीन का निर्विवाद लाभगतिशीलता है। इसे किसी अन्य स्थान पर ले जाया जा सकता है या पूरी तरह से फोल्ड और हटाया जा सकता है। कई लोग गलती से सोचते हैं कि इस तरह की ज़ोनिंग केवल शास्त्रीय अंदरूनी के लिए उपयुक्त है। वर्तमान में, वे विभिन्न प्रकार के मॉडल तैयार करते हैं जो पूरी तरह से किसी भी शैलियों में फिट होते हैं। ओरिएंटल रूपों के साथ एक स्क्रीन विभाजन के साथ कमरे को ज़ोनिंग जातीय दिशा के लिए एक उत्कृष्ट समाधान होगा। कांच या दर्पण आवेषण के साथ उच्च तकनीक धातु संरचनाओं के लिए उपयुक्त हैं। स्क्रीन का एक अन्य लाभ कार्यक्षमता है। जब आप इसे स्वयं बनाते हैं, तो आप विभिन्न उपकरणों के साथ आ सकते हैं, उदाहरण के लिए, जेब, तटस्थ, अलमारियों। यह समाधान कई छोटी वस्तुओं को समायोजित करेगा। यह टीवी, एक कंघी, एक फोन, और अधिक से एक रिमोट हो सकता है। जो लोग इस जोनिंग विधि को चुनते हैं उनके लिए एकमात्र कार्य सही डिजाइन चुनना है, धन्यवाद, जिसके लिए स्क्रीन सामान्य इंटीरियर के लिए एक सुंदर जोड़ होगी। बड़े कमरे में बड़े तत्वों की आवश्यकता होती है,इसलिए मूल ज़ोनिंग विधि - कॉलम का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। इस प्रकार को स्थिर अलगाव को संदर्भित किया जाता है, इसलिए आपको उन्हें इंस्टॉल करना शुरू करने से पहले सावधानी से सोचने की आवश्यकता है। छोटे कमरों में इस तरह के डिजाइन की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि उनकी उपस्थिति की शक्ति और भव्यता छुपा सकती है और एक जगह इतनी छोटी हो सकती है। कॉलम के विभाजन के साथ कमरे को ज़ोनिंग करने के फायदे और नुकसान हैं। आइए उन्हें अधिक विस्तार से देखें। मेहराब के लिए, सबकुछ यहां बहुत आसान है। वे छोटे और बड़े कमरे दोनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। फॉर्म और डिज़ाइन व्यक्तिगत रूप से चुने जाते हैं, जो अंतरिक्ष की बाहरी धारणा को मूल रूप से बदलते हैं। दरवाजे बहरे या गिलास के साथ उठाया जा सकता है। यदि तीन या अधिक फ्लैप्स स्थापित हैं, तो विभिन्न मॉडलों का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। उदाहरण के लिए, उद्घाटन की चौड़ाई आपको सजावटी आवेषण के साथ चार दरवाजे, फिर दो - बहरा, और बाकी स्थापित करने की अनुमति देती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ग्लास वस्तुओं के माध्यम से चमकता नहीं है, आप विशेष प्रसंस्करण के साथ उत्पादों का चयन कर सकते हैंः मैट, figured, रंगीन या उत्कीर्ण। स्लाइडिंग दरवाजे का लाभः एक विभाजन के साथ कमरे ज़ोनिंगअक्सर एक सशर्त भूमिका निभाता है। इस विधि का उपयोग करके, वे एक दृश्य अलगाव प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, और स्पष्ट रूप से चित्रित सीमाएं नहीं। सबसे आम delimiters में से एक फायरप्लेस है। बड़े मॉडल का समय, जिसके लिए एक चिमनी और अतिरिक्त नींव को मजबूत करने की आवश्यकता है, पास हो गया है। उन्हें कॉम्पैक्ट फायरप्लेस द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जो केंद्रीय हीटिंग की बजाय सजावट के रूप में काम करते थे। कमरे को क्षेत्र में विभाजित करने के लिएफायरप्लेस का उपयोग करके, आपको सही मॉडल चुनना होगा। इस उद्देश्य के लिए, फाल्श पैनल या विद्युत उपकरण उपयुक्त हैं। वे विश्वासयोग्य रूप से एक जीवित आग का अनुकरण करते हैं, इसलिए जाहिर है कि पूरी तरह से पूर्ण अग्निशामक से अलग नहीं है। उनकी एकमात्र कमी गंध की कमी और लकड़ी की क्रैकिंग की आवाज है। एम्बेडेड मॉडल ज़ोनिंग के लिए उपयुक्त हैं। वे आमतौर पर प्लास्टरबोर्ड से पूर्व-निर्मित संरचना में घुड़सवार होते हैं। और उसके बाद उचित सामग्री के साथ सजाने के लिए। वर्तमान में आवासीय परिसर में, ईंटआंतरिक विभाजन व्यावहारिक रूप से उपयोग करने के लिए बंद कर दिया। उनके कार्यों ने पूरी तरह से drywall बदल दिया। साथ ही, अन्य भवन सामग्री की तुलना में इसमें बड़ी संख्या में फायदे हैं। हालांकि, इस तरह के विभाजन के बारे में बात करते समय, किसी को कमियों के बारे में चुप नहीं रहना चाहिए। उनमें से बहुत कम हैंः इंटीरियर में एक पेड़ एक क्लासिक है। इस सजावट का उपयोग सभी स्टाइलिस्ट दिशाओं में किया जा सकता है। सेप्टम की सतह की देखभाल करना बहुत आसान है, यह एक नम कपड़े से इसे पोंछने के लिए पर्याप्त है। यदि समय के साथ, उपस्थिति इसकी अपील खो देगी, तो आप इसे पेंट और वार्निश की मदद से अपडेट कर सकते हैं।
१७ सितम्बर, पर्सा । पर्सा जिला के सदमुकाम में श्रावण १० गते निषेधाज्ञा को निरन्तरता देकर ६वीं वार आश्विन १५ तक बढाया गया है । जिला प्रशासन कार्यालय पर्सा ने गुरुवार को एक सूचना जारी कर आश्विन १५ गते तक निषेधाज्ञा बढाने की बात सार्वजनिक किया है । पर्सा के प्रमुख जिला अधिकारी आस्मान तामांग की अध्यक्षता आज सुबह हुई बैठक में उक्त निर्णय की गई है । बताया गया है कि निषेधाज्ञा के समय कुछ सहज वातावरण रहेगा । पहले की तरह कडाई नहीं की जायेगी । निर्णय में सुरक्षा को अपनाते हुए सार्वजनिक सेवा प्रवाह करने की बात हुई है । सेवा लेने और देने वालों में लगभग दो मिटर की दूरी होनी चाहिए तथा मास्क का प्रयोग अनिवार्य रुप में होना चाहिए । प्रशासन ने जानकारी दी है कि सवारी साधन में सिर्फ ५० प्रतिशत यात्री को ५० प्रतिशत भाडा बढाकर सवारी में बिढाई जायेगी । इसी प्रकार सुबह ८ बजे तक दूकान खोलने का निश्चित समय पर अब कोई पाबन्दी नहीं रहेगी । परन्तु प्रशासन की चेतावनी है कि अन्य स्थान पर भीड भाड न करें । इसके साथ ही संक्रमण नहीं फैलने देने के लिए नो मास्क नो मूभ अभियान को बढाया जा रहा है ।
सत्रह सितम्बर, पर्सा । पर्सा जिला के सदमुकाम में श्रावण दस गते निषेधाज्ञा को निरन्तरता देकर छःवीं वार आश्विन पंद्रह तक बढाया गया है । जिला प्रशासन कार्यालय पर्सा ने गुरुवार को एक सूचना जारी कर आश्विन पंद्रह गते तक निषेधाज्ञा बढाने की बात सार्वजनिक किया है । पर्सा के प्रमुख जिला अधिकारी आस्मान तामांग की अध्यक्षता आज सुबह हुई बैठक में उक्त निर्णय की गई है । बताया गया है कि निषेधाज्ञा के समय कुछ सहज वातावरण रहेगा । पहले की तरह कडाई नहीं की जायेगी । निर्णय में सुरक्षा को अपनाते हुए सार्वजनिक सेवा प्रवाह करने की बात हुई है । सेवा लेने और देने वालों में लगभग दो मिटर की दूरी होनी चाहिए तथा मास्क का प्रयोग अनिवार्य रुप में होना चाहिए । प्रशासन ने जानकारी दी है कि सवारी साधन में सिर्फ पचास प्रतिशत यात्री को पचास प्रतिशत भाडा बढाकर सवारी में बिढाई जायेगी । इसी प्रकार सुबह आठ बजे तक दूकान खोलने का निश्चित समय पर अब कोई पाबन्दी नहीं रहेगी । परन्तु प्रशासन की चेतावनी है कि अन्य स्थान पर भीड भाड न करें । इसके साथ ही संक्रमण नहीं फैलने देने के लिए नो मास्क नो मूभ अभियान को बढाया जा रहा है ।
Rajasthan Congress: बता दें कि इससे पहले हेमाराम चौधरी ने 14 फरवरी 2019 को भी अपना इस्तीफा सौंपा था, लेकिन स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। नई दिल्ली। राजस्थान में कांग्रेस के भीतर एक बार से रार की स्थिति नजर आ ही है। दरअसल कांग्रेस में एक बार फिर से सचिन पायलट और अशोक गहलोत गुट के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं। बता दें कि मंगलवार को सचिन पायलट गुट के नेता हेमाराम चौधरी ने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया है। चौधरी के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस में एक बार से खलबली का आलम है। हेमाराम चौधरी राज्य में मंत्री रहे थे और पूर्व नेता प्रतिपक्ष भी, उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा भेजा है। हेमाराम चौधरी बाड़मेर की गुड़ामालानी विधानसभा सीट से छठी बार विधायक चुने गए हैं। उनके इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक हलचल को देखते हुए माना जा रहा है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट में एक बार फिर से रार तेज होगी। अपना इस्तीफा देते हुए हेमाराम चौधरी ने अशोक गहलोत सरकार पर आरोप लगाया है कि, गहलोत सरकार उनके विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी कर रही है। गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए हेमाराम चौधरी ने कहा, 'सरकार की दुश्मनी मुझसे है, लेकिन मेरे क्षेत्र की जनता की अनदेखी अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होती। हालांकि मैं कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ूंगा। ' बता दें कि इससे पहले हेमाराम चौधरी ने 14 फरवरी 2019 को भी अपना इस्तीफा सौंपा था, लेकिन स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। इन सबके बाद अब एक बार फिर से उनका इस्तीफा अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच दरार को बढ़ाने का कारण बन सकता है। उनका इस्तीफा सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। राज्य के सीनियर नेताओं में से एक हेमाराम चौधरी को इस बार गहलोत कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। पहले की सरकारों में मंत्री रहे चौधरी के कैबिनेट से बाहर रहने को लेकर सवाल खड़े हुए थे। हेमाराम चौधरी पिछले कुछ दिनों से लगातार अपनी ही सरकार पर निशाना साधने में लगे हुए थे। माना जा रहा है कि, राज्य में कांग्रेस के भीतर फिर से तनाव की स्थिति बन सकती है। गहलोत सरकार पर हमला बोलते हुए हेमाराम चौधरी ने उनके विधानसभा क्षेत्र से अधिकारियों को हटाने लगाने को लेकर भी नाराजगी जताई थी। उनकी ताजा नाराजगी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती से जुड़ी बताई जा रही है।
Rajasthan Congress: बता दें कि इससे पहले हेमाराम चौधरी ने चौदह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को भी अपना इस्तीफा सौंपा था, लेकिन स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। नई दिल्ली। राजस्थान में कांग्रेस के भीतर एक बार से रार की स्थिति नजर आ ही है। दरअसल कांग्रेस में एक बार फिर से सचिन पायलट और अशोक गहलोत गुट के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं। बता दें कि मंगलवार को सचिन पायलट गुट के नेता हेमाराम चौधरी ने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया है। चौधरी के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस में एक बार से खलबली का आलम है। हेमाराम चौधरी राज्य में मंत्री रहे थे और पूर्व नेता प्रतिपक्ष भी, उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा भेजा है। हेमाराम चौधरी बाड़मेर की गुड़ामालानी विधानसभा सीट से छठी बार विधायक चुने गए हैं। उनके इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक हलचल को देखते हुए माना जा रहा है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट में एक बार फिर से रार तेज होगी। अपना इस्तीफा देते हुए हेमाराम चौधरी ने अशोक गहलोत सरकार पर आरोप लगाया है कि, गहलोत सरकार उनके विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी कर रही है। गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए हेमाराम चौधरी ने कहा, 'सरकार की दुश्मनी मुझसे है, लेकिन मेरे क्षेत्र की जनता की अनदेखी अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होती। हालांकि मैं कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ूंगा। ' बता दें कि इससे पहले हेमाराम चौधरी ने चौदह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को भी अपना इस्तीफा सौंपा था, लेकिन स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। इन सबके बाद अब एक बार फिर से उनका इस्तीफा अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच दरार को बढ़ाने का कारण बन सकता है। उनका इस्तीफा सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। राज्य के सीनियर नेताओं में से एक हेमाराम चौधरी को इस बार गहलोत कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। पहले की सरकारों में मंत्री रहे चौधरी के कैबिनेट से बाहर रहने को लेकर सवाल खड़े हुए थे। हेमाराम चौधरी पिछले कुछ दिनों से लगातार अपनी ही सरकार पर निशाना साधने में लगे हुए थे। माना जा रहा है कि, राज्य में कांग्रेस के भीतर फिर से तनाव की स्थिति बन सकती है। गहलोत सरकार पर हमला बोलते हुए हेमाराम चौधरी ने उनके विधानसभा क्षेत्र से अधिकारियों को हटाने लगाने को लेकर भी नाराजगी जताई थी। उनकी ताजा नाराजगी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती से जुड़ी बताई जा रही है।
बता दें कि टीएम कृष्णा का यह कंसर्ट दो दिन के 'डांस एंड म्यूजिक इन द पार्क' फेस्टिवल का हिस्सा था. इसका आयोजन दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेहरू पार्क में 17 नवंबर को होना था. इसका आयोजन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और एसपीआईसी-एमएसीएवाई द्वारा संयुक्त रूप से होना था. एएआई ने 5 नवंबर को अपने ट्विटर हैंडल पर जानकारी दी थी कि सिंगर टीएम कृष्णा के इस कंसर्ट से जुड़ी पूरी जानकारी शेयर की थी. इसके बाद 10 नवंबर को भी उनके कार्यक्रम की जानकारी शेयर की गई थी. साथ ही कई अखबारों में इसके लिए विज्ञापन भी दिए गए थे. इस पर एएआई के चेयरमैन गुरुप्रसाद मोहापात्रा ने किसी भी दबाव या आलोचना के कारण यह कंसर्ट रद करने की बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि हमारे सामने कुछ मुद्दे हैं. हम पर काम का कुछ बोझ आ गया है, जिसके कारण हम अभी उस दिन के लिए खाली नहीं है. हमने मीडिया को जो भी सूचना दी है, उतनी ही काफी है, इसके अलावा कुछ और नहीं है. दूसरी ओर टीएम कृष्णा ने सोमवार को एएआई के निमंत्रण को रिट्वीट किया. इसके बाद यह ट्रोल होने लगा. इसमें सरकारी विभाग को कृष्णा का कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा. ट्विटर पर लोगों ने एएआई पर लोगों के रुपये का इस्तेमाल करके कृष्णा का कंसर्ट कराने का आरोप लगाया. लोगों ने कृष्णा को देश विरोधी भी बातया था. बता दें कि टीएम कृष्णा का जन्म 22 जनवरी, 1976 में चेन्नई में हुआ था. उन्होंने 12 साल की उम्र में अपना गायकी का करियर शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने दुनिया भर में अपने कार्यक्रम किए हैं. वह गायक के साथ-साथ लेखक भी हैं. 2013 में प्रकाशित हुई उनकी पुस्तक 'ए सदर्न म्यूजिक-द कर्नाटिक सटोरी' काफी लोकप्रिय हुई थी. इसके लिए उन्हें 2014 में टाटा लिटरेचर अवॉर्ड मिला था. उन्हें 2016 में रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड भी मिल चुका है.
बता दें कि टीएम कृष्णा का यह कंसर्ट दो दिन के 'डांस एंड म्यूजिक इन द पार्क' फेस्टिवल का हिस्सा था. इसका आयोजन दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेहरू पार्क में सत्रह नवंबर को होना था. इसका आयोजन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एसपीआईसी-एमएसीएवाई द्वारा संयुक्त रूप से होना था. एएआई ने पाँच नवंबर को अपने ट्विटर हैंडल पर जानकारी दी थी कि सिंगर टीएम कृष्णा के इस कंसर्ट से जुड़ी पूरी जानकारी शेयर की थी. इसके बाद दस नवंबर को भी उनके कार्यक्रम की जानकारी शेयर की गई थी. साथ ही कई अखबारों में इसके लिए विज्ञापन भी दिए गए थे. इस पर एएआई के चेयरमैन गुरुप्रसाद मोहापात्रा ने किसी भी दबाव या आलोचना के कारण यह कंसर्ट रद करने की बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि हमारे सामने कुछ मुद्दे हैं. हम पर काम का कुछ बोझ आ गया है, जिसके कारण हम अभी उस दिन के लिए खाली नहीं है. हमने मीडिया को जो भी सूचना दी है, उतनी ही काफी है, इसके अलावा कुछ और नहीं है. दूसरी ओर टीएम कृष्णा ने सोमवार को एएआई के निमंत्रण को रिट्वीट किया. इसके बाद यह ट्रोल होने लगा. इसमें सरकारी विभाग को कृष्णा का कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा. ट्विटर पर लोगों ने एएआई पर लोगों के रुपये का इस्तेमाल करके कृष्णा का कंसर्ट कराने का आरोप लगाया. लोगों ने कृष्णा को देश विरोधी भी बातया था. बता दें कि टीएम कृष्णा का जन्म बाईस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में चेन्नई में हुआ था. उन्होंने बारह साल की उम्र में अपना गायकी का करियर शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने दुनिया भर में अपने कार्यक्रम किए हैं. वह गायक के साथ-साथ लेखक भी हैं. दो हज़ार तेरह में प्रकाशित हुई उनकी पुस्तक 'ए सदर्न म्यूजिक-द कर्नाटिक सटोरी' काफी लोकप्रिय हुई थी. इसके लिए उन्हें दो हज़ार चौदह में टाटा लिटरेचर अवॉर्ड मिला था. उन्हें दो हज़ार सोलह में रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड भी मिल चुका है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
रायपुर। अष्टम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. महंत रामसुंदर दास के मुख्य आतिथ्य में आज रायपुर के दूधाधारी मठ परिसर में "मानवता के लिए योग" की थीम पर जिला स्तरीय योग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में रायपुर नगर पालिक निगम के अध्यक्ष प्रमोद दुबे भी शामिल हुए। मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर योगाभ्यास शिविर का शुभारंभ किया गया। नेहरू युवा केंद्र रायपुर के सदस्य और स्कूली छात्र-छात्राएं योगा योगाभ्यास में भाग लिया। योगाभ्यास का शुभारंभ राज गीत से हुआ। ऊँ सभा मण्डली के योग प्रशिक्षकों द्वारा योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया गया।
रायपुर। अष्टम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. महंत रामसुंदर दास के मुख्य आतिथ्य में आज रायपुर के दूधाधारी मठ परिसर में "मानवता के लिए योग" की थीम पर जिला स्तरीय योग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में रायपुर नगर पालिक निगम के अध्यक्ष प्रमोद दुबे भी शामिल हुए। मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर योगाभ्यास शिविर का शुभारंभ किया गया। नेहरू युवा केंद्र रायपुर के सदस्य और स्कूली छात्र-छात्राएं योगा योगाभ्यास में भाग लिया। योगाभ्यास का शुभारंभ राज गीत से हुआ। ऊँ सभा मण्डली के योग प्रशिक्षकों द्वारा योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया गया।
चंडीगढ़। पिछले दिनों प्रदेश के दो थर्मल प्लांटों में सॉक्स कंट्रोल को लेकर निविदाएं आमंत्रित की गई थी जिनमें चाइनीज कंपनियां (Chinese companies) यह टेंडर लेने में सफल हुई थी। लेकिन अब बिजली निगम (Electricity corporation) की तरफ से दोनों ही कंपनियों के टेंडर को कैंसिल करते हुए भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सॉक्स कंट्रोल के लिए बिड के जरिए भारतीय कंपनियों को प्राथमिकताएं दी जाएंगी जिसके लिए प्रक्रिया जारी है। हिसार जिले के खेदड़ थर्मल में 1200 मेगा वाट के लिए 540 करोड रुपए और यमुनानगर में 600 मेगावाट के लिए 284 करोड रुपए के टेंडर हुए थे लेकिन अब जबकि भारतीय कंपनियों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए चाइना की कंपनियों को मिले टेंडरों को निरस्त कर दिया गया है। ऊर्जा मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने बताया की पूर्व में दिए गए दोनों ही टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। हिसार जिले के खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में यह टेंडर बीजिंग की एक कंपनी को मिला था और यमुनानगर में शंघाई की एक कंपनी यह निविदा प्राप्त करने में कामयाब हुई थी। चौधरी रणजीत सिंह ने बताया कि इंटरनेशनल कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए टेंडर लेने में कामयाब हुई चाईना की दोनों ही कंपनियों के निविदाओं को निरस्त कर दिया गया है और अब डोमेस्टिक कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए भारतीय कंपनियों को यह अवसर प्रदान किया जाएगा ताकि देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करते हुए किसी बाहरी देश की कंपनी से यह काम ना करवाते हुए भारतीय कंपनियों को अवसर दिया जाए।
चंडीगढ़। पिछले दिनों प्रदेश के दो थर्मल प्लांटों में सॉक्स कंट्रोल को लेकर निविदाएं आमंत्रित की गई थी जिनमें चाइनीज कंपनियां यह टेंडर लेने में सफल हुई थी। लेकिन अब बिजली निगम की तरफ से दोनों ही कंपनियों के टेंडर को कैंसिल करते हुए भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सॉक्स कंट्रोल के लिए बिड के जरिए भारतीय कंपनियों को प्राथमिकताएं दी जाएंगी जिसके लिए प्रक्रिया जारी है। हिसार जिले के खेदड़ थर्मल में एक हज़ार दो सौ मेगा वाट के लिए पाँच सौ चालीस करोड रुपए और यमुनानगर में छः सौ मेगावाट के लिए दो सौ चौरासी करोड रुपए के टेंडर हुए थे लेकिन अब जबकि भारतीय कंपनियों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए चाइना की कंपनियों को मिले टेंडरों को निरस्त कर दिया गया है। ऊर्जा मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने बताया की पूर्व में दिए गए दोनों ही टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। हिसार जिले के खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में यह टेंडर बीजिंग की एक कंपनी को मिला था और यमुनानगर में शंघाई की एक कंपनी यह निविदा प्राप्त करने में कामयाब हुई थी। चौधरी रणजीत सिंह ने बताया कि इंटरनेशनल कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए टेंडर लेने में कामयाब हुई चाईना की दोनों ही कंपनियों के निविदाओं को निरस्त कर दिया गया है और अब डोमेस्टिक कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए भारतीय कंपनियों को यह अवसर प्रदान किया जाएगा ताकि देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करते हुए किसी बाहरी देश की कंपनी से यह काम ना करवाते हुए भारतीय कंपनियों को अवसर दिया जाए।
Don't Miss! Mahima Chaudhry's mother passes away: बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी की मां का निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मिसेज चौधरी ने पिछले सप्ताह ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कथित तौर पर उम्र संबंधी स्वास्थ्य परेशानियों से उनकी मौत हो गई। फिलहाल अभिनेत्री ने अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो महिमा की मां लंबे समय से उम्र संबंधी समस्या से जूझ रही थीं। इसी बीच अचानक से उनकी सांस भी टूटने लगी और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। महिमा अपनी मां के बेहद करीब थीं, लिहाजा मां के गुजर जाने के वो काफी दुख और सदमे में हैं। नजदीकी सूत्र की मानें तो महिमा की बेटी अरियाना का भी रो रोकर बुरा हाल है। कुछ ही दिनों पहले कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा की मां, और उससे पहले माधुरी दीक्षित की मां की निधन की खबरों ने भी एंटरटेनमेंट जगत में दुख का माहौल ला दिया था। महिमा अपनी मां के साथ एक खास बॉन्ड शेयर करती थीं। वह अक्सर अपने सोशल मीडिया पर अपनी फैमिली पिक्चर्स शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कपिल शर्मा शो का भी हिस्सा बनी थीं। बता दें, कुछ ही समय पहले महिमा चौधरी ने भी कैंसर से जंग जीती है। उन्हें कुछ साल पहले स्तन कैंसर का पता चला था और पिछले साल वह इस गंभीर बीमारी से बहादुरी से लड़ीं। 2022 में उन्होंने खुलासा किया कि अब वह कैंसर मुक्त हैं।
Don't Miss! Mahima Chaudhry's mother passes away: बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी की मां का निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मिसेज चौधरी ने पिछले सप्ताह ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कथित तौर पर उम्र संबंधी स्वास्थ्य परेशानियों से उनकी मौत हो गई। फिलहाल अभिनेत्री ने अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो महिमा की मां लंबे समय से उम्र संबंधी समस्या से जूझ रही थीं। इसी बीच अचानक से उनकी सांस भी टूटने लगी और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। महिमा अपनी मां के बेहद करीब थीं, लिहाजा मां के गुजर जाने के वो काफी दुख और सदमे में हैं। नजदीकी सूत्र की मानें तो महिमा की बेटी अरियाना का भी रो रोकर बुरा हाल है। कुछ ही दिनों पहले कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा की मां, और उससे पहले माधुरी दीक्षित की मां की निधन की खबरों ने भी एंटरटेनमेंट जगत में दुख का माहौल ला दिया था। महिमा अपनी मां के साथ एक खास बॉन्ड शेयर करती थीं। वह अक्सर अपने सोशल मीडिया पर अपनी फैमिली पिक्चर्स शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कपिल शर्मा शो का भी हिस्सा बनी थीं। बता दें, कुछ ही समय पहले महिमा चौधरी ने भी कैंसर से जंग जीती है। उन्हें कुछ साल पहले स्तन कैंसर का पता चला था और पिछले साल वह इस गंभीर बीमारी से बहादुरी से लड़ीं। दो हज़ार बाईस में उन्होंने खुलासा किया कि अब वह कैंसर मुक्त हैं।
ALLAHABAD: नैनी में श्रीचन्द्र उर्फ बच्चा की हत्या सुपारी किलर्स ने की थी। हत्या की सुपारी नैनी के ही जावेद ने दी थी। मर्डर केस का खुलासा करते हुए नैनी पुलिस ने सैटरडे को शूटर तौफीक खां को जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक तौफीक ने बताया है कि सुपारी का पेमेंट अब भी बाकी है। अब पुलिस जावेद की तलाश में जुटी है। जावेद के अरेस्टिंग के बाद ही यह राज खुलेगा कि बच्चा की हत्या से उसे क्या फायदा था। किस दुश्मनी का बदला लेने के लिए उसने ऐसा किया। एडीए चौकी इंचार्ज दुर्ग विजय सिंह ने बताया कि तौफीक और सानू खां के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज थी। नैनी एडीए कालोनी के पास से पुलिस ने झूंसी के रहने वाले तौफीक को गिरफ्तार किया। तौफीक ने बताया कि उसे जावेद ने कहा था कि बच्चा को मार दो, बहुत फायदा होगा। तौफीक ने अपने साथी की मदद से बच्चा को बुलाया और कछार में ले जाकर गोली मार दी। फ्0 मार्च को बच्चा के ससुर ने नैनी में दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
ALLAHABAD: नैनी में श्रीचन्द्र उर्फ बच्चा की हत्या सुपारी किलर्स ने की थी। हत्या की सुपारी नैनी के ही जावेद ने दी थी। मर्डर केस का खुलासा करते हुए नैनी पुलिस ने सैटरडे को शूटर तौफीक खां को जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक तौफीक ने बताया है कि सुपारी का पेमेंट अब भी बाकी है। अब पुलिस जावेद की तलाश में जुटी है। जावेद के अरेस्टिंग के बाद ही यह राज खुलेगा कि बच्चा की हत्या से उसे क्या फायदा था। किस दुश्मनी का बदला लेने के लिए उसने ऐसा किया। एडीए चौकी इंचार्ज दुर्ग विजय सिंह ने बताया कि तौफीक और सानू खां के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज थी। नैनी एडीए कालोनी के पास से पुलिस ने झूंसी के रहने वाले तौफीक को गिरफ्तार किया। तौफीक ने बताया कि उसे जावेद ने कहा था कि बच्चा को मार दो, बहुत फायदा होगा। तौफीक ने अपने साथी की मदद से बच्चा को बुलाया और कछार में ले जाकर गोली मार दी। फ्शून्य मार्च को बच्चा के ससुर ने नैनी में दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इंग्लैंड (England Cricket team) के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर मोंटी पनेसर (Monty Panesar) का मानना है कि भारतीय टीम को हेडिंग्ले में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मेजबान टीम के कप्तान जो रूट (Joe Root) और जॉनी बेयरस्टो (Jonny Bairstow) का यह होम ग्राउंड है। हालांकि, पनेसर ने साथ ही कहा कि अगर भारत ने अच्छी गेंदबाजी की तो वह सीरीज जीतने के दावेदार बन जाएंगे। मोहम्मद सिराज भारतीय तेज गेंदबाजों में अब तक सबसे प्रभावी रहे हैं। लॉर्ड्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट झटके थे। मोंटी पनेसर का मानना है कि एक बार फिर सिराज पर सभी की निगाहें होंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया डॉट कॉम से बातचीत करते हुए पनेसर ने कहा कि अगर भारत जो रूट को जल्दी आउट करने में कामयाब रहा तो हेडिंग्ले टेस्ट जीत सकता है। पनेसर ने कहा, 'हेडिंग्ले जो रूट और जॉनी बेयरस्टो का होम ग्राउंड है। भारत ने लॉर्ड्स में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन हेडिंग्ले में उसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अगर भारत लगातार ऐसी गेंदबाजी करता रहा, तो वह सीरीज जीत सकता है। ' पनेसर ने आगे कहा, 'भारत तभी हेडिंग्ले टेस्ट जीतने में पसंदीदा बनेगा जब जो रूट को जल्दी आउट कर लेगा। सिराज दोनों टीमों में सबसे बड़ा फर्क होंगे। सिराज ने मौजूदा सीरीज में इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खूब परेशान किया है। मेजबान टीम के बल्लेबाजों को सिराज को पढ़ने में परेशानी हुई है। ' लॉर्ड्स टेस्ट में भारतीय खिलाड़ियों को इस बात ने उकसाया कि इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने जसप्रीत बुमराह को निशाना बनाया। तेज गेंदबाज ने जेम्स एंडरसन को शॉर्ट गेंदें डालकर खूब परेशान किया था। तो जब बुमराह क्रीज पर आए तो जो रूट और उनकी टीम ने पलटवार करने का फैसला किया। उन्होंने बुमराह को स्लेज करना शुरू किया और इससे भारतीय टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बाहर आया। पनेसर का मानना है कि कोहली और उनकी टीम इसी तरह की ऊर्जा हेडिंग्ले टेस्ट में भी चाहेगी। उन्होंने कहा, 'विराट कोहली चाहेंगे कि उनके खिलाड़ी हेडिंग्ले टेस्ट में इंग्लिश बल्लेबाजों पर हावी होकर खेलें। इसी मानसिकता के साथ वह मैदान संभालना चाहेंगे। भारतीय टीम मैच में आमना-सामना और ड्रामा चाहेगी। ' भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट 25 अगस्त से हेडिंग्ले में खेला जाएगा।
इंग्लैंड के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर मोंटी पनेसर का मानना है कि भारतीय टीम को हेडिंग्ले में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मेजबान टीम के कप्तान जो रूट और जॉनी बेयरस्टो का यह होम ग्राउंड है। हालांकि, पनेसर ने साथ ही कहा कि अगर भारत ने अच्छी गेंदबाजी की तो वह सीरीज जीतने के दावेदार बन जाएंगे। मोहम्मद सिराज भारतीय तेज गेंदबाजों में अब तक सबसे प्रभावी रहे हैं। लॉर्ड्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट झटके थे। मोंटी पनेसर का मानना है कि एक बार फिर सिराज पर सभी की निगाहें होंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया डॉट कॉम से बातचीत करते हुए पनेसर ने कहा कि अगर भारत जो रूट को जल्दी आउट करने में कामयाब रहा तो हेडिंग्ले टेस्ट जीत सकता है। पनेसर ने कहा, 'हेडिंग्ले जो रूट और जॉनी बेयरस्टो का होम ग्राउंड है। भारत ने लॉर्ड्स में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन हेडिंग्ले में उसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अगर भारत लगातार ऐसी गेंदबाजी करता रहा, तो वह सीरीज जीत सकता है। ' पनेसर ने आगे कहा, 'भारत तभी हेडिंग्ले टेस्ट जीतने में पसंदीदा बनेगा जब जो रूट को जल्दी आउट कर लेगा। सिराज दोनों टीमों में सबसे बड़ा फर्क होंगे। सिराज ने मौजूदा सीरीज में इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खूब परेशान किया है। मेजबान टीम के बल्लेबाजों को सिराज को पढ़ने में परेशानी हुई है। ' लॉर्ड्स टेस्ट में भारतीय खिलाड़ियों को इस बात ने उकसाया कि इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने जसप्रीत बुमराह को निशाना बनाया। तेज गेंदबाज ने जेम्स एंडरसन को शॉर्ट गेंदें डालकर खूब परेशान किया था। तो जब बुमराह क्रीज पर आए तो जो रूट और उनकी टीम ने पलटवार करने का फैसला किया। उन्होंने बुमराह को स्लेज करना शुरू किया और इससे भारतीय टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बाहर आया। पनेसर का मानना है कि कोहली और उनकी टीम इसी तरह की ऊर्जा हेडिंग्ले टेस्ट में भी चाहेगी। उन्होंने कहा, 'विराट कोहली चाहेंगे कि उनके खिलाड़ी हेडिंग्ले टेस्ट में इंग्लिश बल्लेबाजों पर हावी होकर खेलें। इसी मानसिकता के साथ वह मैदान संभालना चाहेंगे। भारतीय टीम मैच में आमना-सामना और ड्रामा चाहेगी। ' भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट पच्चीस अगस्त से हेडिंग्ले में खेला जाएगा।
दून- हरिद्वार के बीच रेलवे ट्रैक पर शनिवार सुबह हाथी घायल होने से ट्रेनों का संचालन बाधित हो गया। इंस्पेक्टर आरपीएफ अनूप सिन्हा ने बताया कि दून आने वाली मदुरै एक्सप्रेस के दून आते वक्त सुबह करीब साढ़े छह बजे कांसरों और रायवाला के बीच ड्राइवर को ट्रैक पर घायल हाथी दिखाई दिया। इसके बाद ड्राइवर ने हाथी से पहले ही ट्रेन इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोक ली और रेलवे अफसरों को सूचना दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने हाथी को ट्रैक से हटाया और उपचार के ले गई। इसके बाद सुबह 10 बजे ट्रेनों का दोबारा संचालन शुरू हो सका। घटना से पहले सुबह दून आने वाली काठगोदाम और नंदा देवी एक्सप्रेस ही दून पहुंच पाई थी। जबकि सुबह जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस ही दून से जा सकी। इसके अलावा सुबह के वक्त दून पहुंचने वाली ट्रेन रायवाला, मोतीचूर, हरिद्वार और दून से जाने वाली ट्रेन दून, हर्रावाला,डोईवाला स्टेशनों पर खड़ी करनी पड़ी।
दून- हरिद्वार के बीच रेलवे ट्रैक पर शनिवार सुबह हाथी घायल होने से ट्रेनों का संचालन बाधित हो गया। इंस्पेक्टर आरपीएफ अनूप सिन्हा ने बताया कि दून आने वाली मदुरै एक्सप्रेस के दून आते वक्त सुबह करीब साढ़े छह बजे कांसरों और रायवाला के बीच ड्राइवर को ट्रैक पर घायल हाथी दिखाई दिया। इसके बाद ड्राइवर ने हाथी से पहले ही ट्रेन इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोक ली और रेलवे अफसरों को सूचना दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने हाथी को ट्रैक से हटाया और उपचार के ले गई। इसके बाद सुबह दस बजे ट्रेनों का दोबारा संचालन शुरू हो सका। घटना से पहले सुबह दून आने वाली काठगोदाम और नंदा देवी एक्सप्रेस ही दून पहुंच पाई थी। जबकि सुबह जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस ही दून से जा सकी। इसके अलावा सुबह के वक्त दून पहुंचने वाली ट्रेन रायवाला, मोतीचूर, हरिद्वार और दून से जाने वाली ट्रेन दून, हर्रावाला,डोईवाला स्टेशनों पर खड़ी करनी पड़ी।
लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, स्टेशन रोड कैम्पस के कक्षा-8 के मेधावी छात्र आरुष नरायण श्रीवास्तव ने रीजनल साइंस सेन्टर के तत्वावधान में आयोजित अन्तर-विद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अर्जित किया है जबकि अंशुमान तिवारी ने क्रासवर्ड पजल प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार अर्जित किया है। यह जानकारी सी. एम. एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने दी है। श्री शर्मा ने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने प्रतिभाग कर अपने ज्ञान-विज्ञान का प्रदर्शन किया। जहाँ एक ओर वाद-विवाद प्रतियोगिता में आरुष ने रचनात्मक विचारों, विश्वव्यापी दृष्टिकोण व प्रभावशाली अभिव्यक्ति क्षमता की छाप छोड़ी तो वहीं दूसरी ओर अंशुमान ने क्रासवर्ड पजल (पहेली) प्रतियोगिता में अपने शब्द भंडार एवं अंग्रेजी भाषा के उत्कृष्ट ज्ञान की बदौलत द्वितीय पुरस्कार अर्जित किया। श्री शर्मा ने बताया कि सी. एम. एस. सदैव ही विभिन्न रचनात्मक एवं सृजनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपने छात्रों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारने एवं जीवन में आगे ही आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित करता रहता है। इन्हीं प्रयासों की बदौलत सी. एम. एस. के मेधावी छात्र विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सर्वाधिक पुरस्कार जीतकर प्रदेश व देश का नाम गौरवान्वित करते हैं तथापि अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के शान्तिपूर्ण व आध्यात्मिक वातावरण एवं अपने विद्वान शिक्षकों को देते हैं।
लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, स्टेशन रोड कैम्पस के कक्षा-आठ के मेधावी छात्र आरुष नरायण श्रीवास्तव ने रीजनल साइंस सेन्टर के तत्वावधान में आयोजित अन्तर-विद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अर्जित किया है जबकि अंशुमान तिवारी ने क्रासवर्ड पजल प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार अर्जित किया है। यह जानकारी सी. एम. एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने दी है। श्री शर्मा ने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने प्रतिभाग कर अपने ज्ञान-विज्ञान का प्रदर्शन किया। जहाँ एक ओर वाद-विवाद प्रतियोगिता में आरुष ने रचनात्मक विचारों, विश्वव्यापी दृष्टिकोण व प्रभावशाली अभिव्यक्ति क्षमता की छाप छोड़ी तो वहीं दूसरी ओर अंशुमान ने क्रासवर्ड पजल प्रतियोगिता में अपने शब्द भंडार एवं अंग्रेजी भाषा के उत्कृष्ट ज्ञान की बदौलत द्वितीय पुरस्कार अर्जित किया। श्री शर्मा ने बताया कि सी. एम. एस. सदैव ही विभिन्न रचनात्मक एवं सृजनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपने छात्रों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारने एवं जीवन में आगे ही आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित करता रहता है। इन्हीं प्रयासों की बदौलत सी. एम. एस. के मेधावी छात्र विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सर्वाधिक पुरस्कार जीतकर प्रदेश व देश का नाम गौरवान्वित करते हैं तथापि अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के शान्तिपूर्ण व आध्यात्मिक वातावरण एवं अपने विद्वान शिक्षकों को देते हैं।
Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: दिवाली का त्योहार हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को अच्छे से सजाते हैं और शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। व्यक्ति को धन-धान्य मां लक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त होता है। दिवाली का दिन माता की पूजा के लिए विशेष माना गया है। कहते हैं जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से मां की भक्ति करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती। दिवाली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। लेकिन इन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है इनकी आरती जिसके बिना दिवाली पूजा अधूरी मानी जाती है। ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम ही जग माता । सूर्य चद्रंमा ध्यावत, दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्याता, तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता । कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी, जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता । सब सभंव हो जाता, तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता । खान पान का वैभव, शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता । रत्न चतुर्दश तुम बिन, महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता । उँर आंनद समाता, ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, ट्रेंडिंगः
Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: दिवाली का त्योहार हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को अच्छे से सजाते हैं और शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। व्यक्ति को धन-धान्य मां लक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त होता है। दिवाली का दिन माता की पूजा के लिए विशेष माना गया है। कहते हैं जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से मां की भक्ति करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती। दिवाली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। लेकिन इन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है इनकी आरती जिसके बिना दिवाली पूजा अधूरी मानी जाती है। ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम ही जग माता । सूर्य चद्रंमा ध्यावत, दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्याता, तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता । कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी, जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता । सब सभंव हो जाता, तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता । खान पान का वैभव, शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता । रत्न चतुर्दश तुम बिन, महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता । उँर आंनद समाता, ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत, ट्रेंडिंगः
Paperless Home loan: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पेपरलेस होम के संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। जिसमें होम लोन को डिजिटल कैटेगरी में शामिल किया गया है। इसे देखते हुए आने वाले समय में ऐसा हो सकता है कि होम लोन अकाउंट डिजिटल रुप में जेनरेट हो जाएगा, जैसे अभी शेयर मार्केट के लिए डीमैट अकाउंट का इलेक्ट्रॉनिक जेनरेशन होता है। - बैंक कम कर सकते हैं प्रोसेसिंग फीस। - एक से 2 दिन मिल सकता है होम लोन। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
Paperless Home loan: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पेपरलेस होम के संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। जिसमें होम लोन को डिजिटल कैटेगरी में शामिल किया गया है। इसे देखते हुए आने वाले समय में ऐसा हो सकता है कि होम लोन अकाउंट डिजिटल रुप में जेनरेट हो जाएगा, जैसे अभी शेयर मार्केट के लिए डीमैट अकाउंट का इलेक्ट्रॉनिक जेनरेशन होता है। - बैंक कम कर सकते हैं प्रोसेसिंग फीस। - एक से दो दिन मिल सकता है होम लोन। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
आगर मालवाः मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में 22 साल की महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया. मां और तीनों बच्चियां पूरी तरह स्वस्थ हैं. बताया जा रहा है कि महिला ने 7वें महीने में ही बच्चियों को जन्म दे दिया. कछालिया गांव की रहने वाली माया को अचानक से प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उसे आगर मालवा के मां पीतांबरा हॉस्पिटल ले जाया गया. डॉक्टरों ने महिला को भर्ती कर लिया. फिर ऑपरेशन करके डिलीवरी करवाई गई. मां पीतांबरा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि देर रात एक बजे महिला ने तीन स्वस्थ बच्चियों को जन्म दिया. महिला की पहली डिलीवरी थी. 9 की जगह सातवें महीने में ही महिला को डिलीवरी पेन शुरू हो गया. नॉर्मल डिलीवरी ऐसे में करना सही नहीं था, जिसके कारण ऑपरेशन करना पड़ा. अस्पताल के डायरेक्टर भूपेन्द्र गुर्जर ने बताया कि तीनों बच्चियों के साथ उनकी माता स्वस्थ हैं. सातवें महीने में डिलीवरी होने से बच्चियों का वजन 1290 ग्राम, 1350 ग्राम और 1420 ग्राम है. बच्चियों के जन्म से परिवार के लोग बेहद खुश हैं. वे बच्चियों को गंगा, यमुना और सरस्वती कहकर पुकार रहे हैं. घर वालों का कहना है कि बच्चियां देवियों का रूप बनकर घर में आई हैं.
आगर मालवाः मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में बाईस साल की महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया. मां और तीनों बच्चियां पूरी तरह स्वस्थ हैं. बताया जा रहा है कि महिला ने सातवें महीने में ही बच्चियों को जन्म दे दिया. कछालिया गांव की रहने वाली माया को अचानक से प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उसे आगर मालवा के मां पीतांबरा हॉस्पिटल ले जाया गया. डॉक्टरों ने महिला को भर्ती कर लिया. फिर ऑपरेशन करके डिलीवरी करवाई गई. मां पीतांबरा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि देर रात एक बजे महिला ने तीन स्वस्थ बच्चियों को जन्म दिया. महिला की पहली डिलीवरी थी. नौ की जगह सातवें महीने में ही महिला को डिलीवरी पेन शुरू हो गया. नॉर्मल डिलीवरी ऐसे में करना सही नहीं था, जिसके कारण ऑपरेशन करना पड़ा. अस्पताल के डायरेक्टर भूपेन्द्र गुर्जर ने बताया कि तीनों बच्चियों के साथ उनकी माता स्वस्थ हैं. सातवें महीने में डिलीवरी होने से बच्चियों का वजन एक हज़ार दो सौ नब्बे ग्राम, एक हज़ार तीन सौ पचास ग्राम और एक हज़ार चार सौ बीस ग्राम है. बच्चियों के जन्म से परिवार के लोग बेहद खुश हैं. वे बच्चियों को गंगा, यमुना और सरस्वती कहकर पुकार रहे हैं. घर वालों का कहना है कि बच्चियां देवियों का रूप बनकर घर में आई हैं.
केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट जी पीआईएफ के चतुर्थ वार्षिक कैलेंडर 'बारामास-2022' देहरादून स्थित अपने कार्यालय में विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बारामास वार्षिक कैलेंडर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन परिचय को जिस तरह संक्षित विवरण के साथ शामिल किया गया, वो एक सराहनीय व अभिनव पहल है। स्कूल के नौनिहालों व युवाओं को उत्तराखंड के इन महान् विभूतियों को जानने का मौका मिलेगा। पेन-इंडिया फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. प्रकाश केशवया ने कहा कि पेन-इंडिया स्कूल के माध्यम से निर्धन बच्चों को निशुल्क व गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराई जा रही है। बच्चों को एक्टिविटी व डिजिटली बेस्ड एजुकेशन देना फाउंडेशन का लक्ष्य है। पीआईएफ के संस्थापक अनूप रावत सांस्कृतिक, इतिहासकार व मीडिया जगत के जानकारों से विचार-विमर्श के बाद कैलेंडर का कंटेट तैयार किया गया। हमारा लक्ष्य युवाओं को राष्ट्र व राज्य निर्माण में उत्तराखंड की अंजान विभूतियों से रुबरू करवाना है। इस दौरान सहसंस्थापक संतोष बुड़ाकोटी, संजय गैरोला, प. भगवती प्रसाद उपाध्याय आदि मौजूद रहे। क्रांतिवीर कालू महर, स्वतंत्रता आंदोलनकारी 'कुमाऊं केसरी' पं. बद्रीदत्त पांडे, स्वतंत्रता आंदोलनकारी बैरिस्टर मुकुंदी लाल, स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह 'गढ़वाली', स्वतंत्रता आंदोलनकारी 'गढ़-केसरी' अनुसूया प्रसाद बहुगुणा, स्वतंत्रता आंदोलनकारी भैरव दत्त धूलिया, स्वतंत्रता आंदोलनकारी बिशनी देवी शाह, क्रांतिकारी भवानी सिंह रावत, अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल, स्वतंत्रता सेनानी साधु सिंह बिष्ट, अमर शहीद वीर केसरी चंद, स्वतंत्रता आंदोलनकारी परिपूर्णानंद पैन्यूली। पेन-इंडिया फाउंडेशन (पीआईएफ) के सहसंस्थापक संतोष बुड़ाकोटी ने कहा कि वार्षिक कैलेंडर बारामास-2022 का प्रकाशन इस वर्ष हिंदी के साथ उत्तराखंड की लोक भाषा गढ़वाली में भी किया गया है। यह उत्तराखंड का पहला लोक भाषा गढ़वाली में प्रकाशित कैलेंडर है। इसका उद्देश्य युवाओं को को अपनी जड़ों व भाषा से जोड़ना है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट जी पीआईएफ के चतुर्थ वार्षिक कैलेंडर 'बारामास-दो हज़ार बाईस' देहरादून स्थित अपने कार्यालय में विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बारामास वार्षिक कैलेंडर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन परिचय को जिस तरह संक्षित विवरण के साथ शामिल किया गया, वो एक सराहनीय व अभिनव पहल है। स्कूल के नौनिहालों व युवाओं को उत्तराखंड के इन महान् विभूतियों को जानने का मौका मिलेगा। पेन-इंडिया फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. प्रकाश केशवया ने कहा कि पेन-इंडिया स्कूल के माध्यम से निर्धन बच्चों को निशुल्क व गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराई जा रही है। बच्चों को एक्टिविटी व डिजिटली बेस्ड एजुकेशन देना फाउंडेशन का लक्ष्य है। पीआईएफ के संस्थापक अनूप रावत सांस्कृतिक, इतिहासकार व मीडिया जगत के जानकारों से विचार-विमर्श के बाद कैलेंडर का कंटेट तैयार किया गया। हमारा लक्ष्य युवाओं को राष्ट्र व राज्य निर्माण में उत्तराखंड की अंजान विभूतियों से रुबरू करवाना है। इस दौरान सहसंस्थापक संतोष बुड़ाकोटी, संजय गैरोला, प. भगवती प्रसाद उपाध्याय आदि मौजूद रहे। क्रांतिवीर कालू महर, स्वतंत्रता आंदोलनकारी 'कुमाऊं केसरी' पं. बद्रीदत्त पांडे, स्वतंत्रता आंदोलनकारी बैरिस्टर मुकुंदी लाल, स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह 'गढ़वाली', स्वतंत्रता आंदोलनकारी 'गढ़-केसरी' अनुसूया प्रसाद बहुगुणा, स्वतंत्रता आंदोलनकारी भैरव दत्त धूलिया, स्वतंत्रता आंदोलनकारी बिशनी देवी शाह, क्रांतिकारी भवानी सिंह रावत, अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल, स्वतंत्रता सेनानी साधु सिंह बिष्ट, अमर शहीद वीर केसरी चंद, स्वतंत्रता आंदोलनकारी परिपूर्णानंद पैन्यूली। पेन-इंडिया फाउंडेशन के सहसंस्थापक संतोष बुड़ाकोटी ने कहा कि वार्षिक कैलेंडर बारामास-दो हज़ार बाईस का प्रकाशन इस वर्ष हिंदी के साथ उत्तराखंड की लोक भाषा गढ़वाली में भी किया गया है। यह उत्तराखंड का पहला लोक भाषा गढ़वाली में प्रकाशित कैलेंडर है। इसका उद्देश्य युवाओं को को अपनी जड़ों व भाषा से जोड़ना है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
'मैंने अपना बाल विवाह रोका, अब दूसरों का नहीं होने दूंगी' लखनऊ। ये हैं हमारे आसपास के असली हीरो... इनमें से किसी ने बाल-विवाह रोका तो किसी ने ग्राम प्रधान बन अपनी पंचायत में शराबबंदी कराई। किसी ने बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया तो किसी ने अपनी ग्राम पंचायत खुले से शौच मुक्त करवाई। लखनऊ के बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह में बुलंदशहर से आयी दुबली-पतली नीरज (31 वर्ष) जब माइक पकड़कर बेबाकी से बोल रही थीं तो सभागार में हर कोई इनका मुरीद हो गया। ये अपने हरियाणावीं लहजे में आत्मविश्वास से कह रही थीं, "पहली बार लखनऊ आयी हूं और माइक पर भी इतनी भीड़ में पहली बार बोल रही हूँ। गरीबी की वजह से हमारी शादी 15 साल की उम्र में हो गयी थी। मैं नहीं चाहती कम उम्र की शादी में जो तकलीफें मैंने झेली हैं कोई और बेटी झेले। पिछले पांच-छह महीने में पांच बाल विवाह रोक चुकी हूं।" ये बदलाव करने वाले हीरो कोई सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और न ही इन्हें इसके लिए कोई पैसा मिलता है। बल्कि ये वो हैं जिन्होंने कभी खुद मुश्किलें का सामना किया है और आज यही आगे आकर बदलाव की नई कहानियाँ लिख रहे हैं। पिछले एक साल में इनके प्रयासों से 307 बाल-विवाह रोके गये हैं। बहराइच जिले से आयी किशोरी अंकिता (17 वर्ष) ने न केवल अपना बाल-विवाह रोका बल्कि पांच और बच्चियों का बाल विवाह रोककर दूसरों के लिए भी उदाहरण बनी। वो बताती हैं, "पहले हमें नहीं पता था कि कम उम्र में शादी होना कानूनी अपराध है। जब दो साल पहले महिला समाख्या से जुड़े तब हमें पता चला। हमने आठ बच्चों की मजदूरी छुडवाकर उनका स्कूल में नामांकन करवाया।" अंकिता की तरह जौनपुर से आये 12 वर्षीय प्रकाश दुबे ने भी तीन बच्चों का नामांकन कराया और एक दिव्यांग बच्चे की स्कूल आने जाने में मदद भी करते हैं। महिला हिंसा और बाल विवाह रोकने के लिए पिछले साल यूनीसेफ के सहयोग से महिला समाख्या, महिला एवं बाल विकास विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य स्तर पर महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' का गठन 19 जिले के 220 ब्लॉक के 16633 पंचायतों में 7864 मंच का गठन किया गया। जिसमें 2418 मंच सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। महिला समाख्या की राज्य परियोजना निदेशक स्मृति सिंह ने कहा, "पिछले एक साल में 19 जिले में 389 बाल विवाह पंजीकरण किये गये जिसमें 307 बाल विवाह रोके गये। महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' में पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान से लेकर छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया। जिससे पंचायत स्तर पर बाल विवाह रोकने, बच्चों का नामांकन कराने जैसी जिम्मेदारी का निर्वाह हर कोई करे।" महिला एवं बाल अधिकार मंच के गठन से लगभग 3000 प्रधानों को संवेदनशील किया गया जिससे ये पंचायत स्तर पर लिंग आधारित भेदभाव के मुद्दे, बाल-विवाह के मुद्दे, महिला हिंसा, बाल संरक्षण व बाल अधिकार के मुद्दे, दहेज़, पानी, मजदूरी, जल जंगल जमीन, उद्यमिता, खेती जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकें। अभी 500 ग्राम पंचायतों को आदर्श पंचायत के रूप में काम किया जा रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर में 26 दिसंबर को बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह में महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' का वार्षिक सम्मेलन किया गया। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से आयी महिलाओं और बेटियों ने लोकगीत और नाटक की प्रस्तुति कर बाल विवाह और घरेलू हिंसा को रोकने का सन्देश दिया। इसके साथ ही पिछले एक साल में अच्छा काम करने वाले छह प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और दो ने अपने अनुभव साझा किये। इस कार्यक्रम के दौरान दो सक्रिय महिला प्रधान जिसमें गोरखपुर की नूरजहाँ को अपनी ग्राम पंचायत खुले से शौच मुक्त करने के लिए सम्मानित किया गया वहीं सीतापुर की कुसुम को अपनी ग्राम पंचायत में शराबबंदी करने के लिए किया गया। बाल विवाह रोकने, बच्चों का नामांकन कराने महिला और बाल मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करने के लिए श्रावस्ती की गोमती, कौशाम्बी की सविता, जौनपुर के प्रकाश, बहराइच की अंकिता को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में बाल विवाह पर सामूहिक चर्चा भी हुई, जिसमें महिलाओं के सामाजिक मुद्दों पर काम करने वाली नीति सक्सेना और ताहिरा हसन भी शामिल थीं।
'मैंने अपना बाल विवाह रोका, अब दूसरों का नहीं होने दूंगी' लखनऊ। ये हैं हमारे आसपास के असली हीरो... इनमें से किसी ने बाल-विवाह रोका तो किसी ने ग्राम प्रधान बन अपनी पंचायत में शराबबंदी कराई। किसी ने बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया तो किसी ने अपनी ग्राम पंचायत खुले से शौच मुक्त करवाई। लखनऊ के बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह में बुलंदशहर से आयी दुबली-पतली नीरज जब माइक पकड़कर बेबाकी से बोल रही थीं तो सभागार में हर कोई इनका मुरीद हो गया। ये अपने हरियाणावीं लहजे में आत्मविश्वास से कह रही थीं, "पहली बार लखनऊ आयी हूं और माइक पर भी इतनी भीड़ में पहली बार बोल रही हूँ। गरीबी की वजह से हमारी शादी पंद्रह साल की उम्र में हो गयी थी। मैं नहीं चाहती कम उम्र की शादी में जो तकलीफें मैंने झेली हैं कोई और बेटी झेले। पिछले पांच-छह महीने में पांच बाल विवाह रोक चुकी हूं।" ये बदलाव करने वाले हीरो कोई सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और न ही इन्हें इसके लिए कोई पैसा मिलता है। बल्कि ये वो हैं जिन्होंने कभी खुद मुश्किलें का सामना किया है और आज यही आगे आकर बदलाव की नई कहानियाँ लिख रहे हैं। पिछले एक साल में इनके प्रयासों से तीन सौ सात बाल-विवाह रोके गये हैं। बहराइच जिले से आयी किशोरी अंकिता ने न केवल अपना बाल-विवाह रोका बल्कि पांच और बच्चियों का बाल विवाह रोककर दूसरों के लिए भी उदाहरण बनी। वो बताती हैं, "पहले हमें नहीं पता था कि कम उम्र में शादी होना कानूनी अपराध है। जब दो साल पहले महिला समाख्या से जुड़े तब हमें पता चला। हमने आठ बच्चों की मजदूरी छुडवाकर उनका स्कूल में नामांकन करवाया।" अंकिता की तरह जौनपुर से आये बारह वर्षीय प्रकाश दुबे ने भी तीन बच्चों का नामांकन कराया और एक दिव्यांग बच्चे की स्कूल आने जाने में मदद भी करते हैं। महिला हिंसा और बाल विवाह रोकने के लिए पिछले साल यूनीसेफ के सहयोग से महिला समाख्या, महिला एवं बाल विकास विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य स्तर पर महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' का गठन उन्नीस जिले के दो सौ बीस ब्लॉक के सोलह हज़ार छः सौ तैंतीस पंचायतों में सात हज़ार आठ सौ चौंसठ मंच का गठन किया गया। जिसमें दो हज़ार चार सौ अट्ठारह मंच सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। महिला समाख्या की राज्य परियोजना निदेशक स्मृति सिंह ने कहा, "पिछले एक साल में उन्नीस जिले में तीन सौ नवासी बाल विवाह पंजीकरण किये गये जिसमें तीन सौ सात बाल विवाह रोके गये। महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' में पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान से लेकर छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया। जिससे पंचायत स्तर पर बाल विवाह रोकने, बच्चों का नामांकन कराने जैसी जिम्मेदारी का निर्वाह हर कोई करे।" महिला एवं बाल अधिकार मंच के गठन से लगभग तीन हज़ार प्रधानों को संवेदनशील किया गया जिससे ये पंचायत स्तर पर लिंग आधारित भेदभाव के मुद्दे, बाल-विवाह के मुद्दे, महिला हिंसा, बाल संरक्षण व बाल अधिकार के मुद्दे, दहेज़, पानी, मजदूरी, जल जंगल जमीन, उद्यमिता, खेती जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकें। अभी पाँच सौ ग्राम पंचायतों को आदर्श पंचायत के रूप में काम किया जा रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर में छब्बीस दिसंबर को बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह में महिला एवं बाल अधिकार मंच 'हक़ से' का वार्षिक सम्मेलन किया गया। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से आयी महिलाओं और बेटियों ने लोकगीत और नाटक की प्रस्तुति कर बाल विवाह और घरेलू हिंसा को रोकने का सन्देश दिया। इसके साथ ही पिछले एक साल में अच्छा काम करने वाले छह प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और दो ने अपने अनुभव साझा किये। इस कार्यक्रम के दौरान दो सक्रिय महिला प्रधान जिसमें गोरखपुर की नूरजहाँ को अपनी ग्राम पंचायत खुले से शौच मुक्त करने के लिए सम्मानित किया गया वहीं सीतापुर की कुसुम को अपनी ग्राम पंचायत में शराबबंदी करने के लिए किया गया। बाल विवाह रोकने, बच्चों का नामांकन कराने महिला और बाल मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करने के लिए श्रावस्ती की गोमती, कौशाम्बी की सविता, जौनपुर के प्रकाश, बहराइच की अंकिता को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में बाल विवाह पर सामूहिक चर्चा भी हुई, जिसमें महिलाओं के सामाजिक मुद्दों पर काम करने वाली नीति सक्सेना और ताहिरा हसन भी शामिल थीं।
भा० - जैसे तीनो वेदों के ज्ञाता को 'वैविध' संज्ञा देते है और अन्यथा ऐसा नहीं कहा जा सकता था अत एव यहां ऋग् यजु और साम यह तीनो की ही संज्ञा है एवं विद्या शब्द समानाधि करण होने से उन्हें वेद वाची प्रमाणित करता है और यदि यह मन्त्र संज्ञक होते उन्हें नयी विद्य नहीं कहते । सं० इस में आशंका करते हैं । व्यतिक्रमे यथाश्रुतीति चेत् ॥ ६ ॥ प० ऋ० - ( व्यतिक्रमे ) ऋचा का यजुर्वेद में तथा यजुः का ऋग्वेद में पाठ होने पर ( यथा श्रुति ) श्रुन्त उच्चैरत्व आदि धर्म लाभ से भी उन शब्दों को वेद वाची मानता ठीक नहीं ( चेत् ) यदि ( इति ) ऐसा कहो ठोक नहीं । भा० ऋचा आदि शब्द वेद वाची मानने से ऋचा में उच्चैरत्व - में उपांशु श्रवण लाभ नहीं हो सकता और पाठ व्यति क्रम से भी ऋचा का उच्चस्त्व और उपांशुत्व एक साथ होता है अतः उक्त शब्दों को वेद वाची मानना ठीक नहीं किन्तु मन्त्र वाची मानकर उसके उत्व और 'उपाशुत्व' विधान मानने सभीचीन है । सं - इस आशंका का यह समाधान है 1 न सर्वस्मिन्निवेशात् ॥ ७ ॥ प०० - (न) ऋचा पाठ के व्यक्ति क्रम से उस के धर्म का व्यति क्रम हो जाने में दोप नहीं क्योंकि वह मीमांसा दर्शनम् - -- ( सर्वस्मिन ) दोनों ऋग् और यजुर्वेद में ( निवेशात् ) मिले रहने से माना गया है। भा० -- ऋचा अथवा यजु का जिस वेद में पाठ है उस में सर्वत्र उस वेद के धर्म को माना है अतः पाठ व्यति क्रम से कोई दोप नहीं आता अतः ऋचा आदि पदों से वाच्य ऋग्वेद आदि का उस धर्म में विधान है मन्त्र का नहीं मानना ही समीचीन है। सं - उक्तार्थ को सम्पुष्ट करते हैं । वेदसंयोगान प्रकरणेनबाध्येत ॥ ८ ॥ प० क्र० -( वेद संयोगात् ) वेद सम्वन्ध से 'उच्चस्त्व' आदि कार्यों का नियम है उसका ( प्रकरणे ) प्रकरण से भी ( न वाध्यते ) हानि नहीं होती । भा० - जो कर्म यजुर्वेद से किया जाना बतलाया है और वाक्य के बल से उस कर्म में पाठ ऋग्वेदस्थ मंत्र विनियोग प्राप्त है तो कर्म-अनुष्ठान काल में उस मंत्र का पाठ उच्च स्वर से किया जावेगा न कि उपांशु (धीरे स्वर ) से । वेद सम्बन्ध से उच्च स्वर तथा प्रकरण सम्बन्ध से उपांश स्वर माना गया है अतः प्रकरण स्वर की समीपता होते हुए भी वाक्य प्राप्त स्वर का बाधक नहीं श्रतएव ऋचादि पद ऋग्वेदादि के वाचक एवं उच्चैत्व आदि उसके धर्म कहे गये हैं मंत्रों के नहीं । सं० - 'अग्न्याधान' फर्म में साम का उपांशु गान निरूपण करते हैं । गुणमुख्यव्यतिक्रमे तदर्थवान्मुख्येन वेदसंयोगः ॥ ॥
भाशून्य - जैसे तीनो वेदों के ज्ञाता को 'वैविध' संज्ञा देते है और अन्यथा ऐसा नहीं कहा जा सकता था अत एव यहां ऋग् यजु और साम यह तीनो की ही संज्ञा है एवं विद्या शब्द समानाधि करण होने से उन्हें वेद वाची प्रमाणित करता है और यदि यह मन्त्र संज्ञक होते उन्हें नयी विद्य नहीं कहते । संशून्य इस में आशंका करते हैं । व्यतिक्रमे यथाश्रुतीति चेत् ॥ छः ॥ पशून्य ऋशून्य - ऋचा का यजुर्वेद में तथा यजुः का ऋग्वेद में पाठ होने पर श्रुन्त उच्चैरत्व आदि धर्म लाभ से भी उन शब्दों को वेद वाची मानता ठीक नहीं यदि ऐसा कहो ठोक नहीं । भाशून्य ऋचा आदि शब्द वेद वाची मानने से ऋचा में उच्चैरत्व - में उपांशु श्रवण लाभ नहीं हो सकता और पाठ व्यति क्रम से भी ऋचा का उच्चस्त्व और उपांशुत्व एक साथ होता है अतः उक्त शब्दों को वेद वाची मानना ठीक नहीं किन्तु मन्त्र वाची मानकर उसके उत्व और 'उपाशुत्व' विधान मानने सभीचीन है । सं - इस आशंका का यह समाधान है एक न सर्वस्मिन्निवेशात् ॥ सात ॥ पशून्य - ऋचा पाठ के व्यक्ति क्रम से उस के धर्म का व्यति क्रम हो जाने में दोप नहीं क्योंकि वह मीमांसा दर्शनम् - -- दोनों ऋग् और यजुर्वेद में मिले रहने से माना गया है। भाशून्य -- ऋचा अथवा यजु का जिस वेद में पाठ है उस में सर्वत्र उस वेद के धर्म को माना है अतः पाठ व्यति क्रम से कोई दोप नहीं आता अतः ऋचा आदि पदों से वाच्य ऋग्वेद आदि का उस धर्म में विधान है मन्त्र का नहीं मानना ही समीचीन है। सं - उक्तार्थ को सम्पुष्ट करते हैं । वेदसंयोगान प्रकरणेनबाध्येत ॥ आठ ॥ पशून्य क्रशून्य - वेद सम्वन्ध से 'उच्चस्त्व' आदि कार्यों का नियम है उसका प्रकरण से भी हानि नहीं होती । भाशून्य - जो कर्म यजुर्वेद से किया जाना बतलाया है और वाक्य के बल से उस कर्म में पाठ ऋग्वेदस्थ मंत्र विनियोग प्राप्त है तो कर्म-अनुष्ठान काल में उस मंत्र का पाठ उच्च स्वर से किया जावेगा न कि उपांशु से । वेद सम्बन्ध से उच्च स्वर तथा प्रकरण सम्बन्ध से उपांश स्वर माना गया है अतः प्रकरण स्वर की समीपता होते हुए भी वाक्य प्राप्त स्वर का बाधक नहीं श्रतएव ऋचादि पद ऋग्वेदादि के वाचक एवं उच्चैत्व आदि उसके धर्म कहे गये हैं मंत्रों के नहीं । संशून्य - 'अग्न्याधान' फर्म में साम का उपांशु गान निरूपण करते हैं । गुणमुख्यव्यतिक्रमे तदर्थवान्मुख्येन वेदसंयोगः ॥ ॥
चर्चा में क्यों? श्रीलंका अपनी आर्थिक और सैन्य शक्ति के माध्यम से COVID-19 महामारी से जूझते हुए चीन द्वारा दिये गए ऋण को पूरा करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें से 2 और द्विपक्षीय करदाताओं (चीन, जापान और भारत जैसे देश) से प्राप्त ऋण से बहुत अधिक था। - विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीस और अर्जेंटीना जैसे देशों की तुलना में श्रीलंका की आर्थिक स्थिति अभी ठीक है क्योंकि यह अपने मुद्रा भंडार, स्थानीय ऋण और नई मुद्रा छाप कर अपने स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय दायित्त्वों को पूरा करने में सफल रहा है। - हालाँकि श्रीलंका द्वारा संप्रभु बॉण्ड (Sovereign Bond) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से लिया गया ऋण एक बड़ी चिंता का विषय है। - श्रीलंका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संप्रभु बॉण्ड के माध्यम से लिये गए 1 बिलियन डॉलर के ऋण की अवधि अक्तूबर माह में पूरी हो जाएगी जो श्रीलंका के संकट को बढ़ा सकता है। श्रीलंका द्वारा ऋण संकट से उबरने के प्रयासः - हाल ही में श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के आर्थिक दबाव को स्वीकार करते हुए यह प्रस्ताव रखा कि इस संकट की स्थिति में 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' यानी सार्क को लंदन क्लब (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में निजी करदाताओं का एक अनौपचारिक समूह) से बातचीत कर समाधान का प्रयास करना चाहिये। - श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के अनुसार, वर्तमान ऋण के भुगतान के लिये कुछ दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंध किये गए हैं, इन प्रयासों के माध्यम से श्रीलंका को मार्च 2020 में 500 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए थे और जल्दी ही 300 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त सहयोग प्राप्त होने की उम्मीद है। - श्रीलंका के केंद्रीय बैंक द्वारा RBI के अलावा अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के साथ भी मुद्रा हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के अंतिम चरण में है, साथ ही IMF और अन्य अंतर्राष्ट्रीय करदाताओं के साथ समझौते के प्रयास किये जा रहे हैं। भारत और श्रीलंकाः - ऐतिहासिक रूप से भारत और श्रीलंका के बीच सकारात्मक संबंध रहे हैं और भारत ने पूर्व में कई अन्य मौकों पर श्रीलंका को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई है। - वर्ष 2000 की मुक्त व्यापार संधि के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। - इस दौरान श्रीलंका को होने वाला भारतीय निर्यात 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर (वर्ष 2001) से बढ़कर 4495 मिलियन अमेरिकी डॉलर (वर्ष 2018) तक पहुँच गया। - हाल के वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग में वृद्धि हुई है, दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास 'मित्र शक्ति' और नौसैनिक अभ्यास 'स्लिनेक्स' (SLINEX) का आयोजन किया जाता है। साथ ही श्रीलंका की सेना के 60% से अधिक सदस्य अपने 'यंग ऑफिसर्स कोर्स' (Young Officers' Course), जूनियर और सीनियर कमांड कोर्स का प्रशिक्षण भारत से प्राप्त करते हैं। - हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता की दृष्टि से भी भारत-श्रीलंका संबंधों का मज़बूत होना बहुत ही आवश्यक है। - हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका में बढ़ते चीनी निवेश और वर्ष 2019 में भारत द्वारा 'मताला एयरपोर्ट' संचालन के प्रस्ताव के रद्द होने से कुछ चिंताएँ बढ़ी हैं। आगे की राहः - हाल ही में विश्व बैंक और IMF द्वारा जारी अनुमानों के अनुसार, COVID-19 महामारी के कारण श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में 3% की गिरावट आने की संभावना है, अतः विदेशी ऋण को पूरा करने के साथ ही श्रीलंका सरकार को स्थानीय ज़रूरतों पर भी ध्यान देना होगा। - विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश के ऋण में वृद्धि के साथ ही सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रश्न उठने लगे हैं, ऐसे में वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने के साथ ही अब समय है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियों में कुछ मूलभूत बदलाव लाए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा कृषि पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये। - हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता भारत के लिये एक चिंता का विषय है साथ ही हाल के वर्षों में श्रीलंका की राजनीतिक अस्थिरता से भारत-श्रीलंका संबंधों में कुछ अनिश्चितताएँ दिखने लगी हैं , अतः भारत द्वारा श्रीलंका के वर्तमान आर्थिक संकट में संभावित सहायता के साथ ही दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती के लिये समन्वय और अन्य प्रयासों में वृद्धि की जानी चाहिये।
चर्चा में क्यों? श्रीलंका अपनी आर्थिक और सैन्य शक्ति के माध्यम से COVID-उन्नीस महामारी से जूझते हुए चीन द्वारा दिये गए ऋण को पूरा करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें से दो और द्विपक्षीय करदाताओं से प्राप्त ऋण से बहुत अधिक था। - विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीस और अर्जेंटीना जैसे देशों की तुलना में श्रीलंका की आर्थिक स्थिति अभी ठीक है क्योंकि यह अपने मुद्रा भंडार, स्थानीय ऋण और नई मुद्रा छाप कर अपने स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय दायित्त्वों को पूरा करने में सफल रहा है। - हालाँकि श्रीलंका द्वारा संप्रभु बॉण्ड के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से लिया गया ऋण एक बड़ी चिंता का विषय है। - श्रीलंका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संप्रभु बॉण्ड के माध्यम से लिये गए एक बिलियन डॉलर के ऋण की अवधि अक्तूबर माह में पूरी हो जाएगी जो श्रीलंका के संकट को बढ़ा सकता है। श्रीलंका द्वारा ऋण संकट से उबरने के प्रयासः - हाल ही में श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के आर्थिक दबाव को स्वीकार करते हुए यह प्रस्ताव रखा कि इस संकट की स्थिति में 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' यानी सार्क को लंदन क्लब से बातचीत कर समाधान का प्रयास करना चाहिये। - श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के अनुसार, वर्तमान ऋण के भुगतान के लिये कुछ दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंध किये गए हैं, इन प्रयासों के माध्यम से श्रीलंका को मार्च दो हज़ार बीस में पाँच सौ मिलियन डॉलर प्राप्त हुए थे और जल्दी ही तीन सौ मिलियन डॉलर का अतिरिक्त सहयोग प्राप्त होने की उम्मीद है। - श्रीलंका के केंद्रीय बैंक द्वारा RBI के अलावा अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के साथ भी मुद्रा हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के अंतिम चरण में है, साथ ही IMF और अन्य अंतर्राष्ट्रीय करदाताओं के साथ समझौते के प्रयास किये जा रहे हैं। भारत और श्रीलंकाः - ऐतिहासिक रूप से भारत और श्रीलंका के बीच सकारात्मक संबंध रहे हैं और भारत ने पूर्व में कई अन्य मौकों पर श्रीलंका को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई है। - वर्ष दो हज़ार की मुक्त व्यापार संधि के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। - इस दौरान श्रीलंका को होने वाला भारतीय निर्यात छः सौ मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर चार हज़ार चार सौ पचानवे मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। - हाल के वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग में वृद्धि हुई है, दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास 'मित्र शक्ति' और नौसैनिक अभ्यास 'स्लिनेक्स' का आयोजन किया जाता है। साथ ही श्रीलंका की सेना के साठ% से अधिक सदस्य अपने 'यंग ऑफिसर्स कोर्स' , जूनियर और सीनियर कमांड कोर्स का प्रशिक्षण भारत से प्राप्त करते हैं। - हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता की दृष्टि से भी भारत-श्रीलंका संबंधों का मज़बूत होना बहुत ही आवश्यक है। - हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका में बढ़ते चीनी निवेश और वर्ष दो हज़ार उन्नीस में भारत द्वारा 'मताला एयरपोर्ट' संचालन के प्रस्ताव के रद्द होने से कुछ चिंताएँ बढ़ी हैं। आगे की राहः - हाल ही में विश्व बैंक और IMF द्वारा जारी अनुमानों के अनुसार, COVID-उन्नीस महामारी के कारण श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में तीन% की गिरावट आने की संभावना है, अतः विदेशी ऋण को पूरा करने के साथ ही श्रीलंका सरकार को स्थानीय ज़रूरतों पर भी ध्यान देना होगा। - विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश के ऋण में वृद्धि के साथ ही सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रश्न उठने लगे हैं, ऐसे में वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने के साथ ही अब समय है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियों में कुछ मूलभूत बदलाव लाए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा कृषि पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये। - हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता भारत के लिये एक चिंता का विषय है साथ ही हाल के वर्षों में श्रीलंका की राजनीतिक अस्थिरता से भारत-श्रीलंका संबंधों में कुछ अनिश्चितताएँ दिखने लगी हैं , अतः भारत द्वारा श्रीलंका के वर्तमान आर्थिक संकट में संभावित सहायता के साथ ही दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती के लिये समन्वय और अन्य प्रयासों में वृद्धि की जानी चाहिये।
मोतिहारी/राजन द्विवेदी। जिले में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। हत्या के पीछे ससुराल वालों के हाथ होने की बात बताई जा रही है। मृत युवक की पहचान प्रेमचंद्र सिंह के 25 वर्षीय पुत्र अवनीश कुमार सिंह के रूप में हुई है। सूचना पर पुलिस पदाधिकारी पहुंच कर मामले की जांच में जुट गए हैं। बताया जाता है कि युवक ने दो साल पहले पड़ोसी की बेटी को प्रेम प्रसंग में भगाकर शादी कर ली थी। इससे लड़की के घरवाले नाराज थे। सोमवार को जब युवक अपने परिवार के साथ सो रहा था। तभी आरोपियों ने हमला कर दिया। उन्होंने घर घुसकर युवक के सिर में गोली मार दी और उसके मां-बाप को घायल कर दिया। यह घटना जितना थाना क्षेत्र के सरौठा गांव की है। परिजनों का आरोप है कि हत्या लड़की के घर वालों ने करवाई है। पुलिस के अनुसार, आपसी रंजिश में हत्या की बात सामने आ रही है। परिजन मृत युवक के ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। मृत युवक की पहचान प्रेमचंद्र सिंह के 25 वर्षीय पुत्र अवनीश कुमार सिंह के रूप में हुई। परिजनों का कहना है कि 2019 में अवनीश ने पड़ोसी मनोरंजन सिंह उर्फ मनोज सिंह की बेटी पूजा कुमारी से भगाकर शादी कर ली थी। वह दिल्ली में सपरिवार रहता था। शादी के बाद से ही लड़की के परिजन काफी गुस्से में थे। मौके की तलाश में थे। परिजनों का कहना है कि कोरोना के कारण जुलाई में वह सपरिवार गांव आ गया। इसके बाद से लड़की के घर वाले उस पर हमला करने की तलाश में थे। इसी क्रम में सोमवार रात लगभग सात बजे अचानक युवक के घर पर हमला कर दिया। डर से घर का दरवाजा बंद कर दिए, लेकिन अपराधी घर का दरवाजा तोड़कर घुस गए तथा अवनीश के सिर में गोली मार दी। घटना में उसके पिता, मां व पत्नी भी घायल हो गए। मां की हालत नाजुक, पटना रेफर : अवनीश के मां की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों ने सदर अस्पताल मोतिहारी में इलाज करने के बाद पटना रेफर कर दिया। पत्नी पूजा भी घायल है। वह बार-बार पति तथा अपने 8 माह की बच्ची के बारे में परिजनों से पूछताछ कर रही है। घटना की सूचना पर एसडीपीओ राजेश कुमार व जितना थानाध्यक्ष अनिल कुमार कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने छानबीन के दौरान मौके से कारतूस का खोखा बरामद किया है।
मोतिहारी/राजन द्विवेदी। जिले में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। हत्या के पीछे ससुराल वालों के हाथ होने की बात बताई जा रही है। मृत युवक की पहचान प्रेमचंद्र सिंह के पच्चीस वर्षीय पुत्र अवनीश कुमार सिंह के रूप में हुई है। सूचना पर पुलिस पदाधिकारी पहुंच कर मामले की जांच में जुट गए हैं। बताया जाता है कि युवक ने दो साल पहले पड़ोसी की बेटी को प्रेम प्रसंग में भगाकर शादी कर ली थी। इससे लड़की के घरवाले नाराज थे। सोमवार को जब युवक अपने परिवार के साथ सो रहा था। तभी आरोपियों ने हमला कर दिया। उन्होंने घर घुसकर युवक के सिर में गोली मार दी और उसके मां-बाप को घायल कर दिया। यह घटना जितना थाना क्षेत्र के सरौठा गांव की है। परिजनों का आरोप है कि हत्या लड़की के घर वालों ने करवाई है। पुलिस के अनुसार, आपसी रंजिश में हत्या की बात सामने आ रही है। परिजन मृत युवक के ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। मृत युवक की पहचान प्रेमचंद्र सिंह के पच्चीस वर्षीय पुत्र अवनीश कुमार सिंह के रूप में हुई। परिजनों का कहना है कि दो हज़ार उन्नीस में अवनीश ने पड़ोसी मनोरंजन सिंह उर्फ मनोज सिंह की बेटी पूजा कुमारी से भगाकर शादी कर ली थी। वह दिल्ली में सपरिवार रहता था। शादी के बाद से ही लड़की के परिजन काफी गुस्से में थे। मौके की तलाश में थे। परिजनों का कहना है कि कोरोना के कारण जुलाई में वह सपरिवार गांव आ गया। इसके बाद से लड़की के घर वाले उस पर हमला करने की तलाश में थे। इसी क्रम में सोमवार रात लगभग सात बजे अचानक युवक के घर पर हमला कर दिया। डर से घर का दरवाजा बंद कर दिए, लेकिन अपराधी घर का दरवाजा तोड़कर घुस गए तथा अवनीश के सिर में गोली मार दी। घटना में उसके पिता, मां व पत्नी भी घायल हो गए। मां की हालत नाजुक, पटना रेफर : अवनीश के मां की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों ने सदर अस्पताल मोतिहारी में इलाज करने के बाद पटना रेफर कर दिया। पत्नी पूजा भी घायल है। वह बार-बार पति तथा अपने आठ माह की बच्ची के बारे में परिजनों से पूछताछ कर रही है। घटना की सूचना पर एसडीपीओ राजेश कुमार व जितना थानाध्यक्ष अनिल कुमार कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने छानबीन के दौरान मौके से कारतूस का खोखा बरामद किया है।
शिमला पिछले लगभग दो साल से शिमला के मैंटल रिहेबिलिटेशन सैंटर में रह रही कर्नाटका के मैसूर जिला की सरस्वती को आखिरकार मीडिया की मदद से उसके घर का पता मिल गया है। दो साल पहले डिप्रेशन में छोड़ चुके पति को खोजते-खोजते शिमला पहुंची सरस्वती के भाषा की दीवार ने पागल बना दिया हिन्दी न बोल पाने के कारण ये अपनी बात किसी को भी समझा नहीं पाई और पागलों के बीच रही है। हिन्दी न बोल पाने के कारण सरस्वती 2 साल तक पागलों के बीच रही है। कयोंकि सरस्वती को सिर्फ कन्नड़ भाषा आती है इसलिए कोई भी उसकी भाषा समझ नहीं पाया। उसकी बाज़ू पर पदमा नाम गुदा हुआ है इसलिए लोग इसे पदमा ही समझते रहे। आज जब सरस्वती के परिजन डॉक्टर सहित शिमला उसको लेने पहुंचे तो पता चला कि उसका नाम सरस्वती है। मीडिया के बार-बार मामला उठाने के बाद ये बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक पहुंची। उसके बाद कर्नाटक सरकार से संपर्क किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी साधना ठाकुर सरस्वती से मिलने मैंटल रिहेबिलिटेशन सैंटर पहुंची क्योंकि वह कन्नड़ भाषा जानती है। उन्होंने भी सरस्वती को उसके घर भेजने के लिए प्रयास किए अंततः आज सरस्वती खुशी-खुशी वह अपने घर लौट रही है। उसके चेहरे पर इसकी ख़ुशी झलक रही थी और बार-बार वह अपनी मां से मिलने की बात कहती रही। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बताया की ऐसे और भी कई मामले प्रदेश में है जिनको संबंधित सरकारों से संपर्क कर हल किया जाएगा।
शिमला पिछले लगभग दो साल से शिमला के मैंटल रिहेबिलिटेशन सैंटर में रह रही कर्नाटका के मैसूर जिला की सरस्वती को आखिरकार मीडिया की मदद से उसके घर का पता मिल गया है। दो साल पहले डिप्रेशन में छोड़ चुके पति को खोजते-खोजते शिमला पहुंची सरस्वती के भाषा की दीवार ने पागल बना दिया हिन्दी न बोल पाने के कारण ये अपनी बात किसी को भी समझा नहीं पाई और पागलों के बीच रही है। हिन्दी न बोल पाने के कारण सरस्वती दो साल तक पागलों के बीच रही है। कयोंकि सरस्वती को सिर्फ कन्नड़ भाषा आती है इसलिए कोई भी उसकी भाषा समझ नहीं पाया। उसकी बाज़ू पर पदमा नाम गुदा हुआ है इसलिए लोग इसे पदमा ही समझते रहे। आज जब सरस्वती के परिजन डॉक्टर सहित शिमला उसको लेने पहुंचे तो पता चला कि उसका नाम सरस्वती है। मीडिया के बार-बार मामला उठाने के बाद ये बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक पहुंची। उसके बाद कर्नाटक सरकार से संपर्क किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी साधना ठाकुर सरस्वती से मिलने मैंटल रिहेबिलिटेशन सैंटर पहुंची क्योंकि वह कन्नड़ भाषा जानती है। उन्होंने भी सरस्वती को उसके घर भेजने के लिए प्रयास किए अंततः आज सरस्वती खुशी-खुशी वह अपने घर लौट रही है। उसके चेहरे पर इसकी ख़ुशी झलक रही थी और बार-बार वह अपनी मां से मिलने की बात कहती रही। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बताया की ऐसे और भी कई मामले प्रदेश में है जिनको संबंधित सरकारों से संपर्क कर हल किया जाएगा।
देश में पहली बार बिछा सबसे लंबा सड़कों का जाल! मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचों में सड़क निर्माण को विकास प्रमुख स्तंभ मानते हुए सकारात्मक कदमों को तेजी से लागू किया। इसकी पृष्ठभूमि में सड़क मंत्रालय को आपूर्ति की प्रणाली में निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना भी बड़ा कारण माना गया है। वहीं परियोजनाओं के अनुमोदन की सीमा रेखा और अंतर-मंत्रालयी समन्वय विकास नीति में वृद्धि, हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल की तरह नवाचार परियोजना कार्यान्वयन मॉडल को बढ़ावा देने से भी निर्माण कार्य को बल मिला।
देश में पहली बार बिछा सबसे लंबा सड़कों का जाल! मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचों में सड़क निर्माण को विकास प्रमुख स्तंभ मानते हुए सकारात्मक कदमों को तेजी से लागू किया। इसकी पृष्ठभूमि में सड़क मंत्रालय को आपूर्ति की प्रणाली में निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना भी बड़ा कारण माना गया है। वहीं परियोजनाओं के अनुमोदन की सीमा रेखा और अंतर-मंत्रालयी समन्वय विकास नीति में वृद्धि, हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल की तरह नवाचार परियोजना कार्यान्वयन मॉडल को बढ़ावा देने से भी निर्माण कार्य को बल मिला।
यह कीनिया और तंज़ानिया के सीमा पर स्थित है। मारा नदी इसके बीच में होकर बहती है। कीनिया के मसाई मारा राष्ट्रीय अभयारण्य में ज़ेब्रा, हिरण, चिंकारा,हाथी,चीता आदि जानवर पाए जाते हैं। यह जगह अफ्रीकन सफारी के लिये प्रसिध्द है। इस अभयारण्य को शेरों का देश भी कहा जाता है। इस अभयारण्य के 1500 वर्ग किमी क्षेत्र में 500 शेर तक़रीबन 20 झुंडों में रहते हैं। मसाई मारा में बारिश होने पर पूरा अभयारण्य हरियाली से भर जाता है।. 0 संबंधों।
यह कीनिया और तंज़ानिया के सीमा पर स्थित है। मारा नदी इसके बीच में होकर बहती है। कीनिया के मसाई मारा राष्ट्रीय अभयारण्य में ज़ेब्रा, हिरण, चिंकारा,हाथी,चीता आदि जानवर पाए जाते हैं। यह जगह अफ्रीकन सफारी के लिये प्रसिध्द है। इस अभयारण्य को शेरों का देश भी कहा जाता है। इस अभयारण्य के एक हज़ार पाँच सौ वर्ग किमी क्षेत्र में पाँच सौ शेर तक़रीबन बीस झुंडों में रहते हैं। मसाई मारा में बारिश होने पर पूरा अभयारण्य हरियाली से भर जाता है।. शून्य संबंधों।
Karwa Chauth 2019: करवा चौथ का त्योहार हर शादीशुदा जोड़े के लिए बेहद खास होता है. आज के दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी इस फेस्टिवल को मिल-जुलकर मनाते हुए नजर आए. आज अनिल कपूर (Anil Kapoor) की पत्नी सुनीता कपूर (Sunita Kapoor) ने मुंबई स्थित अपने घर पर करवा चौथ पार्टी का आयोजन किया जिसमें रवीना टंडन (Raveena Tandon), शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty), पद्मिनी कोल्हापुरे समेत अन्य अभिनेत्रियां नजर आईं. मीडिया में आई लेटेस्ट फोटोज में देखा गया कि शिल्पा और रवीना दुल्हन की तरह सजी-धजी हैं. शिल्पा ने यहां लाल साड़ी पहनी थी तो रवीना लाल रंग की ड्रेस में दिखीं. हाथ में पूजा की थाली लिए ये दोनों काफी खूबसूरत अंदाज में यहां नजर आए. इन्होंने यहां मीडिया एक लिए पोज भी किया जिसके बाद ये वेन्यू की तरफ निकल पड़े. सुनीता कपूर के यहां आयोजीत इस पार्टी में इन सभी अभिनेत्रियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सभी का दिल जीत लिया. आज बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने भी ट्विटर पर जया बच्चन की फोटो शेयर करते हुए एक मजेदार कैप्शन दिया और करवा चौथ की शुभकामनाएं दी.
Karwa Chauth दो हज़ार उन्नीस: करवा चौथ का त्योहार हर शादीशुदा जोड़े के लिए बेहद खास होता है. आज के दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी इस फेस्टिवल को मिल-जुलकर मनाते हुए नजर आए. आज अनिल कपूर की पत्नी सुनीता कपूर ने मुंबई स्थित अपने घर पर करवा चौथ पार्टी का आयोजन किया जिसमें रवीना टंडन , शिल्पा शेट्टी , पद्मिनी कोल्हापुरे समेत अन्य अभिनेत्रियां नजर आईं. मीडिया में आई लेटेस्ट फोटोज में देखा गया कि शिल्पा और रवीना दुल्हन की तरह सजी-धजी हैं. शिल्पा ने यहां लाल साड़ी पहनी थी तो रवीना लाल रंग की ड्रेस में दिखीं. हाथ में पूजा की थाली लिए ये दोनों काफी खूबसूरत अंदाज में यहां नजर आए. इन्होंने यहां मीडिया एक लिए पोज भी किया जिसके बाद ये वेन्यू की तरफ निकल पड़े. सुनीता कपूर के यहां आयोजीत इस पार्टी में इन सभी अभिनेत्रियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सभी का दिल जीत लिया. आज बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी ट्विटर पर जया बच्चन की फोटो शेयर करते हुए एक मजेदार कैप्शन दिया और करवा चौथ की शुभकामनाएं दी.
- सलमान, आमिर, शाहरुख संग काम करने के बाद भी बॉलीवुड में धाक नहीं जमा पाई ये बच्ची, हुई बुरी तरफ फ्लॉप, पहचाना क्या? Bollywood । Edited by: शिखा यादव ।सोमवार मई 29, 2023 06:53 AM ISTमां की गोद में नजर आ रही ये बच्ची सुपरस्टार पिता की बेटी है. इस बच्ची ने इंडस्ट्री के तीनों खान के साथ काम किया, फिर भी फ्लॉप रही. क्या आप इन्हें पहचान पाए? - सास, बहू और फ्लेमिंगो ने बदली सास बहू के रिश्ते की परिभाषा, धमाकेदार अंदाज में किया कहानी को ट्विस्टWeb-Series । Written by: शिखा यादव ।शुक्रवार मई 5, 2023 10:57 AM ISTसास, बहू की तू तू. . . मैं मैं. . . वाली कहानी अब पुरानी हो गई है. दरअसल, मैनडॉक प्रोडक्शन के बैनर तले बनी सास, बहू और फ्लेमिंगो ने इस रिश्ते को देखने का नजरिया ही बदल दिया है. होमी अदजानिया द्वारा डायरेक्टड यह सीरीज कमाल की है. - डिंपल कपाड़िया की नातिन हैं बला की खूबसूरत, ग्लैमर में मासी ट्विंकल खन्ना को भी देती हैं मात, PHOTO देख फैन्स के उड़े होशBollywood । Written by: शिखा यादव ।रविवार अप्रैल 16, 2023 09:37 AM ISTडिंपल कपाड़िया की छोटी बेटी रिंकी खन्ना अब फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं. रिंकी खन्ना को सोशल मीडिया पर भी ज्यादा एक्टिव नहीं देखा जाता है. हालांकि उनकी 18 साल की बेटी नाओमिका सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं और यहां अक्सर अपनी ग्लैमरस फोटोज और वीडियो साझा करती हैं. - डिंपल कपाड़िया से नहीं बल्कि इस एक्ट्रेस से प्यार करते थे राजेश खन्ना, सात साल बाद इस वजह से टूट गया रिश्ताBollywood । Written by: शिखा यादव ।बुधवार अप्रैल 5, 2023 05:54 AM ISTRajesh Khanna First Love: राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर में जतिन खन्ना के रूप में हुआ था. 24 साल की उम्र में राजेश खन्ना ने 'आखिरी खत' से फिल्मों में डेब्यू किया था. यह फिल्म साल 1966 में आई थी. इस फिल्म के बाद राजेश खन्ना के पास फिल्मों की लाइन लग गई. - डिंपल कपाड़िया के साथ दिख रही बच्ची है बॉलीवुड की बिंदास एक्ट्रेस, पति कहलाते हैं पैसों की खान, पहचाना क्या? Bollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार फ़रवरी 20, 2023 08:01 AM ISTडिंपल की गोद में दिख रही बच्ची आज के टाइम में बॉलीवुड की बिंदास एक्ट्रेस हैं. क्या आ[प बता सकते हैं कि ये बच्ची आखिर कौन है? - Pathaan Box Office Collection Day 22: शाहरुख की 'पठान' को 22वें दिन भी बॉक्स ऑफिस से हिलाना मुश्किल, कमाए इतने करोड़Bollywood । Written by: शिखा यादव ।शुक्रवार फ़रवरी 17, 2023 08:18 AM ISTPathaan Box Office Collection Day 22: लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो शाहरुख की फिल्म ने वर्ल्डवाइड 953 करोड़ की शानदार कमाई की है. कहने की जरूरत नहीं है कि फिल्म अब हिंदी सिनेमा के इतिहास में दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है. - Valentine's Day 2023: अखिलेश यादव से लेकर प्रियंका गांधी तक, फ़िल्मी कहानी से कम नहीं हैं इन नेताओं की लव स्टोरीBollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।शनिवार फ़रवरी 11, 2023 10:11 PM ISTकुछ ऐसे पॉलिटिशन हैं, जिनकी पर्सनल लाइफ के बारें में बहुत की कम लोग जानते हैं. लेकिन जब बात इनकी लव स्टोरी की आती है तो उससे तो इक्का-दुक्का लोग ही वाकिफ होते हैं. इन नेताओं के प्यार के किस्से फिल्मी कहानी से कम नहीं है. आइए जानते हैं. . - डिंपल कपाड़िया की 18 साल की नातिन नाओमिका हैं बेहद ग्लैमरस, PHOTOS देख फैन्स ने कहा- ट्विंकल की छोटी वर्जनBollywood । Written by: शिखा यादव ।शनिवार फ़रवरी 4, 2023 10:30 PM ISTडिंपल कपाड़िया की छोटी बेटी रिंकी खन्ना अब फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं. रिंकी खन्ना को सोशल मीडिया पर भी ज्यादा एक्टिव नहीं देखा जाता है. हालांकि उनकी 18 साल की बेटी नाओमिका सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं और यहां अक्सर अपनी ग्लैमरस फोटोज और वीडियो साझा करती हैं. - Pathaan Box Office Collection Day 1: शाहरुख खान की 'पठान' के पहले दिन का कलेक्शन देखकर आप भी कहेंगे 'ये तो फायर है'Bollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार जनवरी 26, 2023 03:16 PM ISTPathaan Box Office Collection Day 1: शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'पठान' कल यानी 25 जनवरी को रिलीज हो गई है और जैसा कि उम्मीद थी रिलीज होते ही फिल्म ने सभी रिकार्ड्स तोड़ दिए हैं. - Pathaan का ट्रेलर आउट होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए Funny मीम्स, फैन्स बोले- बॉलीवुड को इग्नोर कर सकते हो SRK को नहीं ! Bollywood । Written by: शिखा यादव ।मंगलवार जनवरी 10, 2023 12:12 PM ISTगौरतलब है कि शाहरुख खान फिल्म 'जीरो' के बाद 4 साल बाद 'पठान' से बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे. ऐसे में चार साल बाद उनके कमबैक को लेकर भी सोशल मीडिया यूजर्स जमकर रिएक्शन दे रहे हैं.
- सलमान, आमिर, शाहरुख संग काम करने के बाद भी बॉलीवुड में धाक नहीं जमा पाई ये बच्ची, हुई बुरी तरफ फ्लॉप, पहचाना क्या? Bollywood । Edited by: शिखा यादव ।सोमवार मई उनतीस, दो हज़ार तेईस छः:तिरेपन AM ISTमां की गोद में नजर आ रही ये बच्ची सुपरस्टार पिता की बेटी है. इस बच्ची ने इंडस्ट्री के तीनों खान के साथ काम किया, फिर भी फ्लॉप रही. क्या आप इन्हें पहचान पाए? - सास, बहू और फ्लेमिंगो ने बदली सास बहू के रिश्ते की परिभाषा, धमाकेदार अंदाज में किया कहानी को ट्विस्टWeb-Series । Written by: शिखा यादव ।शुक्रवार मई पाँच, दो हज़ार तेईस दस:सत्तावन AM ISTसास, बहू की तू तू. . . मैं मैं. . . वाली कहानी अब पुरानी हो गई है. दरअसल, मैनडॉक प्रोडक्शन के बैनर तले बनी सास, बहू और फ्लेमिंगो ने इस रिश्ते को देखने का नजरिया ही बदल दिया है. होमी अदजानिया द्वारा डायरेक्टड यह सीरीज कमाल की है. - डिंपल कपाड़िया की नातिन हैं बला की खूबसूरत, ग्लैमर में मासी ट्विंकल खन्ना को भी देती हैं मात, PHOTO देख फैन्स के उड़े होशBollywood । Written by: शिखा यादव ।रविवार अप्रैल सोलह, दो हज़ार तेईस नौ:सैंतीस AM ISTडिंपल कपाड़िया की छोटी बेटी रिंकी खन्ना अब फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं. रिंकी खन्ना को सोशल मीडिया पर भी ज्यादा एक्टिव नहीं देखा जाता है. हालांकि उनकी अट्ठारह साल की बेटी नाओमिका सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं और यहां अक्सर अपनी ग्लैमरस फोटोज और वीडियो साझा करती हैं. - डिंपल कपाड़िया से नहीं बल्कि इस एक्ट्रेस से प्यार करते थे राजेश खन्ना, सात साल बाद इस वजह से टूट गया रिश्ताBollywood । Written by: शिखा यादव ।बुधवार अप्रैल पाँच, दो हज़ार तेईस पाँच:चौवन AM ISTRajesh Khanna First Love: राजेश खन्ना का जन्म उनतीस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ बयालीस को अमृतसर में जतिन खन्ना के रूप में हुआ था. चौबीस साल की उम्र में राजेश खन्ना ने 'आखिरी खत' से फिल्मों में डेब्यू किया था. यह फिल्म साल एक हज़ार नौ सौ छयासठ में आई थी. इस फिल्म के बाद राजेश खन्ना के पास फिल्मों की लाइन लग गई. - डिंपल कपाड़िया के साथ दिख रही बच्ची है बॉलीवुड की बिंदास एक्ट्रेस, पति कहलाते हैं पैसों की खान, पहचाना क्या? Bollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार फ़रवरी बीस, दो हज़ार तेईस आठ:एक AM ISTडिंपल की गोद में दिख रही बच्ची आज के टाइम में बॉलीवुड की बिंदास एक्ट्रेस हैं. क्या आ[प बता सकते हैं कि ये बच्ची आखिर कौन है? - Pathaan Box Office Collection Day बाईस: शाहरुख की 'पठान' को बाईसवें दिन भी बॉक्स ऑफिस से हिलाना मुश्किल, कमाए इतने करोड़Bollywood । Written by: शिखा यादव ।शुक्रवार फ़रवरी सत्रह, दो हज़ार तेईस आठ:अट्ठारह AM ISTPathaan Box Office Collection Day बाईस: लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो शाहरुख की फिल्म ने वर्ल्डवाइड नौ सौ तिरेपन करोड़ की शानदार कमाई की है. कहने की जरूरत नहीं है कि फिल्म अब हिंदी सिनेमा के इतिहास में दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है. - Valentine's Day दो हज़ार तेईस: अखिलेश यादव से लेकर प्रियंका गांधी तक, फ़िल्मी कहानी से कम नहीं हैं इन नेताओं की लव स्टोरीBollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।शनिवार फ़रवरी ग्यारह, दो हज़ार तेईस दस:ग्यारह PM ISTकुछ ऐसे पॉलिटिशन हैं, जिनकी पर्सनल लाइफ के बारें में बहुत की कम लोग जानते हैं. लेकिन जब बात इनकी लव स्टोरी की आती है तो उससे तो इक्का-दुक्का लोग ही वाकिफ होते हैं. इन नेताओं के प्यार के किस्से फिल्मी कहानी से कम नहीं है. आइए जानते हैं. . - डिंपल कपाड़िया की अट्ठारह साल की नातिन नाओमिका हैं बेहद ग्लैमरस, PHOTOS देख फैन्स ने कहा- ट्विंकल की छोटी वर्जनBollywood । Written by: शिखा यादव ।शनिवार फ़रवरी चार, दो हज़ार तेईस दस:तीस PM ISTडिंपल कपाड़िया की छोटी बेटी रिंकी खन्ना अब फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं. रिंकी खन्ना को सोशल मीडिया पर भी ज्यादा एक्टिव नहीं देखा जाता है. हालांकि उनकी अट्ठारह साल की बेटी नाओमिका सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं और यहां अक्सर अपनी ग्लैमरस फोटोज और वीडियो साझा करती हैं. - Pathaan Box Office Collection Day एक: शाहरुख खान की 'पठान' के पहले दिन का कलेक्शन देखकर आप भी कहेंगे 'ये तो फायर है'Bollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार जनवरी छब्बीस, दो हज़ार तेईस तीन:सोलह PM ISTPathaan Box Office Collection Day एक: शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'पठान' कल यानी पच्चीस जनवरी को रिलीज हो गई है और जैसा कि उम्मीद थी रिलीज होते ही फिल्म ने सभी रिकार्ड्स तोड़ दिए हैं. - Pathaan का ट्रेलर आउट होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए Funny मीम्स, फैन्स बोले- बॉलीवुड को इग्नोर कर सकते हो SRK को नहीं ! Bollywood । Written by: शिखा यादव ।मंगलवार जनवरी दस, दो हज़ार तेईस बारह:बारह PM ISTगौरतलब है कि शाहरुख खान फिल्म 'जीरो' के बाद चार साल बाद 'पठान' से बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे. ऐसे में चार साल बाद उनके कमबैक को लेकर भी सोशल मीडिया यूजर्स जमकर रिएक्शन दे रहे हैं.
जनरल सिंह की यमन में मौजूदगी के चलते सैन्य बलों का हौसला बुलंद था. विदेश मंत्रालय, नौसेना, वायुसेना, जहाजरानी, रेल मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच बेहतरीन सामंजस्य की बदौलत बड़ी सहजता के साथ 10 दिनों तक चले इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया गया. एयर इंडिया ने ऑपरेशन में दो एयरबस-320 और एक बोइंग-777 विमान की तैनाती की थी. वहीं भारतीय सेना ने दो सी-17 ग्लोबमास्टर और वायुसेना ने सी-17 एस वायुयान तैनात किए थे. अजीब विडंबना है कि जब यमन में भारत सरकार द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा था, उस समय भारतीय मीडिया प्रेस्टीट्यूड और प्रॉस्टीट्यूड की बहस में उलझा हुआ था. दूसरी ओर, विदेशी मीडिया ने भारत के ऑपरेशन राहत को जगह दी और इसके अगुवा विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की जमकर तारी़फ की. वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा, भारत ने बेहतरीन ढंग से बचाव कार्य की अगुवाई की और यमन में फंसे भारतीयों के अलावा 41 देशों के नागरिकों को भी बचाया. भारतीय दल द्वारा यमन से निकाले गए 960 विदेशी नागरिकों में मिस्र की 20 वर्षीय अलया गाबेर मोहम्मद भी शामिल हैं. उन्होंने खुद को यमन से निकालने के लिए भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया. अलया गाबेर मोहम्मद ने कहा कि आज वह भगवान और भारतीय सेना की वजह से जीवित हैं. भारत ने अपने नागरिकों को बचाने के लिए जहाज भेजा, लेकिन उसने मानवीय निर्णय लेते हुए सभी देशों के नागरिकों को वहां से निकाला. भारत सरकार के इस निर्णय को इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा. 20 वर्षीय अलया यमन के एक होटल में काम करती थीं. उन्होंने यह बात अपनी फेसबुक वॉल पर लिखी. इसके बाद उनकी पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो गई. मिस्र के अधिकांश अ़खबारों एवं समाचार चैनलों ने उनकी बातों को अपने यहां प्रमुुखता से जगह दी. अब सबके मन में यह सवाल उठ रहा है कि आ़िखर मीडिया ने इस मसले को क्यों नहीं दिखाया? क्या देश का मीडिया केवल सरकार की कमियां दिखाने के लिए है? क्या उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह सरकार द्वारा किए गए अच्छे एवं साहसिक कार्यों की खबरें जनता तक पहुंचाए. लेकिन भारतीय मीडिया ने ऑपरेशन राहत में दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि उसे उसमें कुछ भी सनसनीखेज नज़र नहीं आया. ऐसा इसलिए, क्योंकि बचाए गए लोगों में से अधिकांश दक्षिण भारतीय ग़रीब, कामगार मुसलमान थे, जो रोजी-रोटी की तलाश में यमन तक पहुंच गए थे. मीडिया की नज़र में उनकी जान की कोई क़ीमत नहीं थी. बचाए जा रहे लोगों में न कोई धनाढ्य था और न मध्यम वर्ग का, जिनके लिए मीडिया पर तथाकथित सिविल सोसायटी के लोग आवाज़ उठाते. या फिर मीडिया जानबूझ कर यह खबर लोगों तक नहीं पहुंचाना चाहता था, क्योंकि यह नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल से भी कम के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी. सोशल मीडिया में लोग कह रहे थे कि यह निर्णायक नेतृत्व है. हमने दुनिया को दिखा दिया कि भारत में भी विश्वस्तरीय नेता और नेतृत्व है. लेकिन, मीडिया जनरल वीके सिंह के ट्वीट को लेकर बाल की खाल निकालने में उलझा रहा और लोगों का ध्यान मुद्दे से भटकाता रहा. यमन में भारत ने अब तक का दूसरा सबसे बड़ा रेस्न्यू ऑपरेशन यानी ऑपरेशन राहत चलाकर दुनिया को सकते में डाल दिया और यह साबित किया कि गृहयुद्ध से जूझ रहे देश से लोगों को सफलतापूर्वक और सकुशल बचाकर लाया जा सकता है. हालांकि, यमन में भारत के अलावा सात अन्य देश, जिसमें चीन, रूस एवं पाकिस्तान आदि भी शामिल हैं, बचाव कार्य में लगे थे. अमेरिका, फ्रांस एवं जर्मनी जैसे देशों ने भारत से यमन में फंसे अपने नागरिकों को बचाने का आग्रह किया. जिन 41 देशों के 960 नागरिकों को भारतीय दल ने बचाया, वे सभी भारत की ओर बहुत आशा और विश्वास से देख रहे थे. भारत ने किसी को भी निराश नहीं किया. यहां सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका सहित नाटो के सदस्य देशों को अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत की ओर देखना पड़ा. अमेरिकी सेना अभी भी इराक और अफगानिस्तान में मौजूद हैै. बावजूद इसके, वह यमन में फंसे अपने नागरिकों की मदद नहीं कर सकी और उन्हें वहां से बाहर निकालने में असमर्थ नज़र आई. ऐसे में इन सभी देशों ने विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन राहत की ओर रुख किया और अपने नागरिकों को वहां से बाहर निकालने का अनुरोध किया. अमेरिका ने यमन में फंसे अपने नागरिकों के लिए जारी की गई एडवाइजरी में सा़फ तौर पर कहा कि भारत सना से जिबूूती तक अमेरिकी नागरिकों को पहुंचाने में मदद करेगा. भारत यमन में फंसे भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों को बचाने में सफल हुआ. इससे एक वर्ल्ड लीडर के रूप में भारत के कद में इजा़फा हुआ है, जिसका असर सीधे तौर पर भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे पर पड़ेगा. 25 मार्च को यमन में हवाई हमले शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के सुल्तान से फोन पर बात की और अपने नागरिकों को यमन से सुरक्षित वापस निकालने के लिए सहयोग मांगा. इसके बाद 31 मार्च को भारत सरकार ने विदेश राज्य मंत्री एवं पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए ऑपरेशन राहत की कमान देकर यमन भेजा. यह पहला मा़ैका था कि ऐसे ऑपरेशन की कमान किसी केंद्रीय मंत्री को सौंपी गई हो. जनरल सिंह ने 10 दिनों तक यमन में रहकर लोगों को वहां से सकुशल बाहर निकालने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. जनरल सिंह ने ऑपरेशन खत्म होने के बाद लौटकर बताया कि वहां कई तरह की समस्याएं सामने आईं. एक जगह किसी समस्या का समाधान हो जाता था, तो कहीं और समस्या खड़ी हो जाती थी. ऐसे में काम कर रही सभी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पाना बेहद जटिल था. सना के एयरपोर्ट पर हौती आतंकियों का कब्ज़ा था, लेकिन एयर कंट्रोल सऊदी अरब के नियंत्रण में था. भारत सरकार ने यमन से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए राजधानी सना में रोज़ाना हवाई जहाज उतारने के लिए अनुमति मांगी. जनरल सिंह की यमन में मौजूदगी के चलते सैन्य बलों का हौसला बुलंद था. विदेश मंत्रालय, नौसेना, वायुसेना, जहाजरानी, रेल मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच बेहतरीन सामंजस्य की बदौलत बड़ी सहजता के साथ 10 दिनों तक चले इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया गया. एयर इंडिया ने ऑपरेशन में दो एयरबस-320 और एक बोइंग-777 विमान की तैनाती की थी. वहीं भारतीय सेना ने दो सी-17 ग्लोबमास्टर और वायुसेना ने सी-17 एस वायुयान तैनात किए थे. यमन में सैनिक जहाजों को उतारने की अनुमति नहीं थी. इसलिए भारत ने इसके लिए अपने सी-17 ग्लोबमास्टर एयर क्राफ्ट का उपयोग किया, जिन पर गोलियों और छोटे हथियारों का असर नहीं होता है. उनकी मदद से हर दिन लोगों को सना से जिबूूती पहुंचाया गया, वहीं नौसेना ने भी लोगों को अदन से जिबूूती पहुंचाया, जहां से उन्हें भारत के लिए रवाना किया गया. नौसेना ने आईएनएस मुंबई, आईएनएस तर्कश, आईएनएस सुमित्रा जैसे जहाज ऑपरेशन में तैनात किए थे. बचाव दल के लिए वहां काम कर रही एजेंसियों के साथ समन्वय बना पाना सबसे बड़ी परेशानी थी. एयरपोर्ट पर विद्रोहियों का कब्ज़ा था, लेकिन वहां के एयर स्पेस को सऊदी अरब कंट्रोल कर रहा था. ऐसे में एयरपोर्ट पर लैंड करना और तय समय सीमा के अंदर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वहां से निकालना एक बड़ी समस्या थी. वहां भी लोग किसी एक जगह एकत्र नहीं थे. एक समय सीमा के अंदर ही स़िर्फ जा सकते थे और उसके बाद भारतीयों तक खबर पहुंचाना. जनरल वीके सिंह के वहां मौजूद रहने का सबसे बड़ा ़फायदा यह हुआ कि समस्याओं की सही समीक्षा करके उन पर त्वरित ़फैसला ले लिया गया. आ़िखरी दिन सना में एयरक्राफ्ट उतारने की अनुमति नहीं थी और वहां लोग फंसे हुए थे. ऐसे में जनरल सिंह को ़फैसला लेना था कि छह सौ लोगों को वहां से निकाला जाए या वापस लौट जाया जाए. उस दिन हवाई अड्डे पर और कोई नहीं बचा था. जो लोग बचे थे, उनमें 140 विदेशी नागरिक थे. ऐसे में लोगों को बचाने के लिए उन्होंने जोखिम लिया, जो जायज था. राहत अभियान की निगरानी के लिए जनरल सिंह जिबूती में डेरा डाले रहे. पहले दो दिनों तक सऊदी अरब से सना जाने की अनुमति नहीं मिली. फिर सरकार ने उनसे वहां अपने सैन्य जहाज ले जाने की बात कही. इसके बाद जब जनरल वीके सिंह सना गए और उन्होंने यमन के अधिकारियों से बातचीत की, तो बताया गया कि एयरपोर्ट पर विद्रोहियों का कब्जा है. उन्हें यह नहीं मालूम कि जो जहाज वहां उतर रहा है, वह अमेरिका का है, भारत का है या सऊदी अरब का है. यदि वहां गोलीबारी होती है, तो आप क्या करेंगे? ऐसे में लोगों को वहां से निकालने के लिए सैन्य जहाजों की जगह एयर इंडिया के विमानों को सना ले जाया गया. भारत सरकार ने पहले से ही दो विमान ओमान में तैयार कर रखे थे, जिन्हें सना ले जाया गया और वहां से लोगों को जिबूती लाया गया. लोगों को वहां से निकालने में दूसरी सबसे बड़ी समस्या इमीग्रेशन की थी. यमन से वापस आते वक्त एक्जिट वीजा की ज़रूरत होती है, जो वहां की इमीग्रेशन अथॉरिटी जारी करती है. एक मामला तो ऐसा था कि एक शख्स वहां विजिट वीजा पर गए थे और छह साल ज़्यादा रुक गए. इमीग्रेशन अधिकरियों ने कहा कि वे उसे कैसे एक्जिट वीजा दे सकते हैं? ऐसे में उन अधिकारियों को मनाना पड़ा. भारतीय दूतावास और जनरल वीके सिंह को इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसके अलावा एक समस्या यह थी कि भारत सरकार द्वारा इस संबंध में जारी एडवाइजरी जनवरी में खत्म हो चुकी थी और लोग अंतिम समय तक हालात सुधरने का इंतजार करते रहे. जब हालात बेकाबू हो गए, तो लोग एक साथ बड़ी संख्या में यमन से बाहर निकलने के लिए तैयार हो गए. जबकि एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों को बाहर निकाला जा सकता था. ऐसे में किसी तरह विमानों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर यमन से बाहर निकाला गया. नब्बे के दशक में खाड़ी युद्ध के दौरान हुए बचाव कार्य और इस बचाव कार्य में एक बड़ा ़फर्क़ था. इराक द्वारा कुवैत पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका जवाबी हमला करने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी हमले की आशंका के उस दौर में इराक में रह रहे दूसरे देशों के लोगों को निकलने में इराकी प्रशासन भी मदद कर रहा था, लेकिन यमन में सरकार और प्रशासन नामक कोई चीज नहीं बची थी. राष्ट्रपति हादी ने सऊदी अरब में शरण ले रखी है. ऑपरेशन राहत ने हमारी सेनाओं के शौर्य और कौशल के अलावा भारत की कूटनीतिक शक्ति भी रेखांकित की है. इससे एक बार फिर यह साबित हुआ है कि मध्य-पूर्व को लेकर हमारी तटस्थता की नीति बिल्कुल सही है और हमें इसी दिशा में चलते रहने की ज़रूरत है. सऊदी अरब से हमारे मधुर संबंध काम आए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां के शासक शाह सलमान से लगातार संपर्क में रहे. वहीं भारतीय खुफिया एजेंसियां अमेरिका और सऊदी अरब की खुफिया एजेंसियों की मदद से हर पल की जानकारी भारतीय टीम को देती रहीं, जिससे बिना किसी नुक़सान के यह ऑपरेशन सफल हो सका. भारत सरकार ने इराक में फंसे भारतीयों को निकालने में हुई परेशानियों से सबक लिया था. इस बार उसने सही वक्त पर सही फैसला लिया और एक केंद्रीय मंत्री को इस अभियान में लगाया, ताकि मा़ैके पर ही आकस्मिक फैसले लिए जा सकें. इसका फायदा भी सा़फ तौर पर नज़र आया. ऐसे मामलों को नौकरशाहों के भरोसे छोड़ देने से कई चीजें ऐन मा़ैके पर अटक जाती हैं. ऑपरेशन राहत को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाने से दुनिया में भारत का कद बढ़ा है. आने वाले समय में यह भारत के वैश्विक शक्ति बनने की राह में एक बड़ा और महत्वपूर्ण क़दम साबित होगा. - 31 मार्च, 2015 को ऑपरेशन राहत प्रारंभ. - 09 अप्रैल को मिशन पूरा. - 5,600 लोग सुरक्षित निकाले गए. - 4,640 भारतीय, 960 विदेशी. - 41 अन्य देशों के नागरिक बचाए गए. - 2,900 लोग राजधानी सना से विमान द्वारा निकाले गए. - 2,700 लोग युद्धपोतों के ज़रिये बचाए गए, जिन्हें अदन, अल-हुदायदाह और अल-मुकल्ला नामक शहरों से निकाला गया. - 18 विशेष उड़ानों के ज़रिये ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.
जनरल सिंह की यमन में मौजूदगी के चलते सैन्य बलों का हौसला बुलंद था. विदेश मंत्रालय, नौसेना, वायुसेना, जहाजरानी, रेल मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच बेहतरीन सामंजस्य की बदौलत बड़ी सहजता के साथ दस दिनों तक चले इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया गया. एयर इंडिया ने ऑपरेशन में दो एयरबस-तीन सौ बीस और एक बोइंग-सात सौ सतहत्तर विमान की तैनाती की थी. वहीं भारतीय सेना ने दो सी-सत्रह ग्लोबमास्टर और वायुसेना ने सी-सत्रह एस वायुयान तैनात किए थे. अजीब विडंबना है कि जब यमन में भारत सरकार द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा था, उस समय भारतीय मीडिया प्रेस्टीट्यूड और प्रॉस्टीट्यूड की बहस में उलझा हुआ था. दूसरी ओर, विदेशी मीडिया ने भारत के ऑपरेशन राहत को जगह दी और इसके अगुवा विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की जमकर तारी़फ की. वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा, भारत ने बेहतरीन ढंग से बचाव कार्य की अगुवाई की और यमन में फंसे भारतीयों के अलावा इकतालीस देशों के नागरिकों को भी बचाया. भारतीय दल द्वारा यमन से निकाले गए नौ सौ साठ विदेशी नागरिकों में मिस्र की बीस वर्षीय अलया गाबेर मोहम्मद भी शामिल हैं. उन्होंने खुद को यमन से निकालने के लिए भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया. अलया गाबेर मोहम्मद ने कहा कि आज वह भगवान और भारतीय सेना की वजह से जीवित हैं. भारत ने अपने नागरिकों को बचाने के लिए जहाज भेजा, लेकिन उसने मानवीय निर्णय लेते हुए सभी देशों के नागरिकों को वहां से निकाला. भारत सरकार के इस निर्णय को इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा. बीस वर्षीय अलया यमन के एक होटल में काम करती थीं. उन्होंने यह बात अपनी फेसबुक वॉल पर लिखी. इसके बाद उनकी पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो गई. मिस्र के अधिकांश अ़खबारों एवं समाचार चैनलों ने उनकी बातों को अपने यहां प्रमुुखता से जगह दी. अब सबके मन में यह सवाल उठ रहा है कि आ़िखर मीडिया ने इस मसले को क्यों नहीं दिखाया? क्या देश का मीडिया केवल सरकार की कमियां दिखाने के लिए है? क्या उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह सरकार द्वारा किए गए अच्छे एवं साहसिक कार्यों की खबरें जनता तक पहुंचाए. लेकिन भारतीय मीडिया ने ऑपरेशन राहत में दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि उसे उसमें कुछ भी सनसनीखेज नज़र नहीं आया. ऐसा इसलिए, क्योंकि बचाए गए लोगों में से अधिकांश दक्षिण भारतीय ग़रीब, कामगार मुसलमान थे, जो रोजी-रोटी की तलाश में यमन तक पहुंच गए थे. मीडिया की नज़र में उनकी जान की कोई क़ीमत नहीं थी. बचाए जा रहे लोगों में न कोई धनाढ्य था और न मध्यम वर्ग का, जिनके लिए मीडिया पर तथाकथित सिविल सोसायटी के लोग आवाज़ उठाते. या फिर मीडिया जानबूझ कर यह खबर लोगों तक नहीं पहुंचाना चाहता था, क्योंकि यह नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल से भी कम के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी. सोशल मीडिया में लोग कह रहे थे कि यह निर्णायक नेतृत्व है. हमने दुनिया को दिखा दिया कि भारत में भी विश्वस्तरीय नेता और नेतृत्व है. लेकिन, मीडिया जनरल वीके सिंह के ट्वीट को लेकर बाल की खाल निकालने में उलझा रहा और लोगों का ध्यान मुद्दे से भटकाता रहा. यमन में भारत ने अब तक का दूसरा सबसे बड़ा रेस्न्यू ऑपरेशन यानी ऑपरेशन राहत चलाकर दुनिया को सकते में डाल दिया और यह साबित किया कि गृहयुद्ध से जूझ रहे देश से लोगों को सफलतापूर्वक और सकुशल बचाकर लाया जा सकता है. हालांकि, यमन में भारत के अलावा सात अन्य देश, जिसमें चीन, रूस एवं पाकिस्तान आदि भी शामिल हैं, बचाव कार्य में लगे थे. अमेरिका, फ्रांस एवं जर्मनी जैसे देशों ने भारत से यमन में फंसे अपने नागरिकों को बचाने का आग्रह किया. जिन इकतालीस देशों के नौ सौ साठ नागरिकों को भारतीय दल ने बचाया, वे सभी भारत की ओर बहुत आशा और विश्वास से देख रहे थे. भारत ने किसी को भी निराश नहीं किया. यहां सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका सहित नाटो के सदस्य देशों को अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत की ओर देखना पड़ा. अमेरिकी सेना अभी भी इराक और अफगानिस्तान में मौजूद हैै. बावजूद इसके, वह यमन में फंसे अपने नागरिकों की मदद नहीं कर सकी और उन्हें वहां से बाहर निकालने में असमर्थ नज़र आई. ऐसे में इन सभी देशों ने विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन राहत की ओर रुख किया और अपने नागरिकों को वहां से बाहर निकालने का अनुरोध किया. अमेरिका ने यमन में फंसे अपने नागरिकों के लिए जारी की गई एडवाइजरी में सा़फ तौर पर कहा कि भारत सना से जिबूूती तक अमेरिकी नागरिकों को पहुंचाने में मदद करेगा. भारत यमन में फंसे भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों को बचाने में सफल हुआ. इससे एक वर्ल्ड लीडर के रूप में भारत के कद में इजा़फा हुआ है, जिसका असर सीधे तौर पर भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे पर पड़ेगा. पच्चीस मार्च को यमन में हवाई हमले शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के सुल्तान से फोन पर बात की और अपने नागरिकों को यमन से सुरक्षित वापस निकालने के लिए सहयोग मांगा. इसके बाद इकतीस मार्च को भारत सरकार ने विदेश राज्य मंत्री एवं पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए ऑपरेशन राहत की कमान देकर यमन भेजा. यह पहला मा़ैका था कि ऐसे ऑपरेशन की कमान किसी केंद्रीय मंत्री को सौंपी गई हो. जनरल सिंह ने दस दिनों तक यमन में रहकर लोगों को वहां से सकुशल बाहर निकालने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. जनरल सिंह ने ऑपरेशन खत्म होने के बाद लौटकर बताया कि वहां कई तरह की समस्याएं सामने आईं. एक जगह किसी समस्या का समाधान हो जाता था, तो कहीं और समस्या खड़ी हो जाती थी. ऐसे में काम कर रही सभी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पाना बेहद जटिल था. सना के एयरपोर्ट पर हौती आतंकियों का कब्ज़ा था, लेकिन एयर कंट्रोल सऊदी अरब के नियंत्रण में था. भारत सरकार ने यमन से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए राजधानी सना में रोज़ाना हवाई जहाज उतारने के लिए अनुमति मांगी. जनरल सिंह की यमन में मौजूदगी के चलते सैन्य बलों का हौसला बुलंद था. विदेश मंत्रालय, नौसेना, वायुसेना, जहाजरानी, रेल मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच बेहतरीन सामंजस्य की बदौलत बड़ी सहजता के साथ दस दिनों तक चले इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया गया. एयर इंडिया ने ऑपरेशन में दो एयरबस-तीन सौ बीस और एक बोइंग-सात सौ सतहत्तर विमान की तैनाती की थी. वहीं भारतीय सेना ने दो सी-सत्रह ग्लोबमास्टर और वायुसेना ने सी-सत्रह एस वायुयान तैनात किए थे. यमन में सैनिक जहाजों को उतारने की अनुमति नहीं थी. इसलिए भारत ने इसके लिए अपने सी-सत्रह ग्लोबमास्टर एयर क्राफ्ट का उपयोग किया, जिन पर गोलियों और छोटे हथियारों का असर नहीं होता है. उनकी मदद से हर दिन लोगों को सना से जिबूूती पहुंचाया गया, वहीं नौसेना ने भी लोगों को अदन से जिबूूती पहुंचाया, जहां से उन्हें भारत के लिए रवाना किया गया. नौसेना ने आईएनएस मुंबई, आईएनएस तर्कश, आईएनएस सुमित्रा जैसे जहाज ऑपरेशन में तैनात किए थे. बचाव दल के लिए वहां काम कर रही एजेंसियों के साथ समन्वय बना पाना सबसे बड़ी परेशानी थी. एयरपोर्ट पर विद्रोहियों का कब्ज़ा था, लेकिन वहां के एयर स्पेस को सऊदी अरब कंट्रोल कर रहा था. ऐसे में एयरपोर्ट पर लैंड करना और तय समय सीमा के अंदर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वहां से निकालना एक बड़ी समस्या थी. वहां भी लोग किसी एक जगह एकत्र नहीं थे. एक समय सीमा के अंदर ही स़िर्फ जा सकते थे और उसके बाद भारतीयों तक खबर पहुंचाना. जनरल वीके सिंह के वहां मौजूद रहने का सबसे बड़ा ़फायदा यह हुआ कि समस्याओं की सही समीक्षा करके उन पर त्वरित ़फैसला ले लिया गया. आ़िखरी दिन सना में एयरक्राफ्ट उतारने की अनुमति नहीं थी और वहां लोग फंसे हुए थे. ऐसे में जनरल सिंह को ़फैसला लेना था कि छह सौ लोगों को वहां से निकाला जाए या वापस लौट जाया जाए. उस दिन हवाई अड्डे पर और कोई नहीं बचा था. जो लोग बचे थे, उनमें एक सौ चालीस विदेशी नागरिक थे. ऐसे में लोगों को बचाने के लिए उन्होंने जोखिम लिया, जो जायज था. राहत अभियान की निगरानी के लिए जनरल सिंह जिबूती में डेरा डाले रहे. पहले दो दिनों तक सऊदी अरब से सना जाने की अनुमति नहीं मिली. फिर सरकार ने उनसे वहां अपने सैन्य जहाज ले जाने की बात कही. इसके बाद जब जनरल वीके सिंह सना गए और उन्होंने यमन के अधिकारियों से बातचीत की, तो बताया गया कि एयरपोर्ट पर विद्रोहियों का कब्जा है. उन्हें यह नहीं मालूम कि जो जहाज वहां उतर रहा है, वह अमेरिका का है, भारत का है या सऊदी अरब का है. यदि वहां गोलीबारी होती है, तो आप क्या करेंगे? ऐसे में लोगों को वहां से निकालने के लिए सैन्य जहाजों की जगह एयर इंडिया के विमानों को सना ले जाया गया. भारत सरकार ने पहले से ही दो विमान ओमान में तैयार कर रखे थे, जिन्हें सना ले जाया गया और वहां से लोगों को जिबूती लाया गया. लोगों को वहां से निकालने में दूसरी सबसे बड़ी समस्या इमीग्रेशन की थी. यमन से वापस आते वक्त एक्जिट वीजा की ज़रूरत होती है, जो वहां की इमीग्रेशन अथॉरिटी जारी करती है. एक मामला तो ऐसा था कि एक शख्स वहां विजिट वीजा पर गए थे और छह साल ज़्यादा रुक गए. इमीग्रेशन अधिकरियों ने कहा कि वे उसे कैसे एक्जिट वीजा दे सकते हैं? ऐसे में उन अधिकारियों को मनाना पड़ा. भारतीय दूतावास और जनरल वीके सिंह को इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसके अलावा एक समस्या यह थी कि भारत सरकार द्वारा इस संबंध में जारी एडवाइजरी जनवरी में खत्म हो चुकी थी और लोग अंतिम समय तक हालात सुधरने का इंतजार करते रहे. जब हालात बेकाबू हो गए, तो लोग एक साथ बड़ी संख्या में यमन से बाहर निकलने के लिए तैयार हो गए. जबकि एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों को बाहर निकाला जा सकता था. ऐसे में किसी तरह विमानों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर यमन से बाहर निकाला गया. नब्बे के दशक में खाड़ी युद्ध के दौरान हुए बचाव कार्य और इस बचाव कार्य में एक बड़ा ़फर्क़ था. इराक द्वारा कुवैत पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका जवाबी हमला करने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी हमले की आशंका के उस दौर में इराक में रह रहे दूसरे देशों के लोगों को निकलने में इराकी प्रशासन भी मदद कर रहा था, लेकिन यमन में सरकार और प्रशासन नामक कोई चीज नहीं बची थी. राष्ट्रपति हादी ने सऊदी अरब में शरण ले रखी है. ऑपरेशन राहत ने हमारी सेनाओं के शौर्य और कौशल के अलावा भारत की कूटनीतिक शक्ति भी रेखांकित की है. इससे एक बार फिर यह साबित हुआ है कि मध्य-पूर्व को लेकर हमारी तटस्थता की नीति बिल्कुल सही है और हमें इसी दिशा में चलते रहने की ज़रूरत है. सऊदी अरब से हमारे मधुर संबंध काम आए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां के शासक शाह सलमान से लगातार संपर्क में रहे. वहीं भारतीय खुफिया एजेंसियां अमेरिका और सऊदी अरब की खुफिया एजेंसियों की मदद से हर पल की जानकारी भारतीय टीम को देती रहीं, जिससे बिना किसी नुक़सान के यह ऑपरेशन सफल हो सका. भारत सरकार ने इराक में फंसे भारतीयों को निकालने में हुई परेशानियों से सबक लिया था. इस बार उसने सही वक्त पर सही फैसला लिया और एक केंद्रीय मंत्री को इस अभियान में लगाया, ताकि मा़ैके पर ही आकस्मिक फैसले लिए जा सकें. इसका फायदा भी सा़फ तौर पर नज़र आया. ऐसे मामलों को नौकरशाहों के भरोसे छोड़ देने से कई चीजें ऐन मा़ैके पर अटक जाती हैं. ऑपरेशन राहत को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाने से दुनिया में भारत का कद बढ़ा है. आने वाले समय में यह भारत के वैश्विक शक्ति बनने की राह में एक बड़ा और महत्वपूर्ण क़दम साबित होगा. - इकतीस मार्च, दो हज़ार पंद्रह को ऑपरेशन राहत प्रारंभ. - नौ अप्रैल को मिशन पूरा. - पाँच,छः सौ लोग सुरक्षित निकाले गए. - चार,छः सौ चालीस भारतीय, नौ सौ साठ विदेशी. - इकतालीस अन्य देशों के नागरिक बचाए गए. - दो,नौ सौ लोग राजधानी सना से विमान द्वारा निकाले गए. - दो,सात सौ लोग युद्धपोतों के ज़रिये बचाए गए, जिन्हें अदन, अल-हुदायदाह और अल-मुकल्ला नामक शहरों से निकाला गया. - अट्ठारह विशेष उड़ानों के ज़रिये ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.
चंबा - शकुंतला नर्सिंग कालेज की छह छात्राओं ने एचपीयू की मैरिट लिस्ट में नाम दर्ज करवा कर प्रदेशभर में पिछड़े एवं पहाड़ी जिला चंबा का नाम रोशन किया है। कालेज में शिक्षा ग्रहण कर रही बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा आरती ने विवि में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा आयशा, नेहा, अंशिका, अंजलि ने विश्वविद्यालय में चौथ पांचवां, आठवां एवं दसवां स्थान प्राप्त कर कालेज सहित पिछड़े जिला का नाम चमकाया है। इसके अलावा कालेज में नर्सिंग कर रही द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। वहीं बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा सानया कैला भी 82 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश विश्वविद्यालय में आठवंे स्थान पर रही हैं। छात्राओं की इस उपलब्धि पर कालेज प्रबंधन कमेटी चेयरमैन नवीन चौैणा, सचिव शिवांक शर्मा, निदेशक आभा चौणा, प्रचार्य मंजुराज सहित समस्त स्टाफ ने उन्हें बधाई देते हुए आने वाले दिनों में भी उनसे इसी तरह के प्रदर्शन की कामना की है। उन्होंने कहा कि विवि की ओर से घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में एक ही कालेज की छह छात्राओं द्वारा टॉप टेन में आना गर्व का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने कालेज के शतप्रतिशत रिजल्ट पर भी शिक्षकों सहित छात्राओं को बधाई दी है।
चंबा - शकुंतला नर्सिंग कालेज की छह छात्राओं ने एचपीयू की मैरिट लिस्ट में नाम दर्ज करवा कर प्रदेशभर में पिछड़े एवं पहाड़ी जिला चंबा का नाम रोशन किया है। कालेज में शिक्षा ग्रहण कर रही बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा आरती ने विवि में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा आयशा, नेहा, अंशिका, अंजलि ने विश्वविद्यालय में चौथ पांचवां, आठवां एवं दसवां स्थान प्राप्त कर कालेज सहित पिछड़े जिला का नाम चमकाया है। इसके अलावा कालेज में नर्सिंग कर रही द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने पचहत्तर प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। वहीं बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा सानया कैला भी बयासी प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश विश्वविद्यालय में आठवंे स्थान पर रही हैं। छात्राओं की इस उपलब्धि पर कालेज प्रबंधन कमेटी चेयरमैन नवीन चौैणा, सचिव शिवांक शर्मा, निदेशक आभा चौणा, प्रचार्य मंजुराज सहित समस्त स्टाफ ने उन्हें बधाई देते हुए आने वाले दिनों में भी उनसे इसी तरह के प्रदर्शन की कामना की है। उन्होंने कहा कि विवि की ओर से घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में एक ही कालेज की छह छात्राओं द्वारा टॉप टेन में आना गर्व का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने कालेज के शतप्रतिशत रिजल्ट पर भी शिक्षकों सहित छात्राओं को बधाई दी है।
के रूप में पुश्किन। "शरद ऋतु का समय! Oche आकर्षण! " Krylov "क्वार्टेट" के कल्पित कथाः नैतिक और सार क्या है? तस्वीरें और जीवनी असदोवा ई.ए. कविता का गहरा विश्लेषण बाल्मोंट "द एंडलेसनेस" "रोमियो और जूलियट" किसने लिखा था? शेक्सपियर, "रोमियो और जूलियट" सार क्रायलोव का कल्पित कहानी "क्रो और फॉक्स", और साथ ही कहानी "स्वान, कैंसर और पाइक"
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आर्थिक दृष्टिकोण से वर्ष की शुरुआत कुछ कमजोर हो सकती है, लेकिन मां आपकी आर्थिक मदद कर सकती है। व्यापार करने वाले लोग वर्ष की शुरुआत से ही अच्छा प्रॉफिट प्राप्त करने में कामयाब रहेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू हो जाएगा। नौकरीपेशा लोगों को वर्ष के मध्य तक अच्छी आय की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। उस समय निवेश उनको फायदा देगा। कुछ लोगों को अक्टूबर-नवंबर में भी स्पेशल प्रमोशन या सैलेरी इंक्रीमेंट मिल सकता है। वर्ष की शुरुआत किसी भी तरह के इन्वेस्टमेंट के लिए अनुकूल नहीं है, इसलिए इससे बचना ही बढ़िया होगा, लेकिन वर्ष के अंतिम तीन महीनों के दौरान आप इस दिशा में प्रयास करें, तो सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश हमेशा जोखिम भरा होता है। सोच समझकर ही कदम बढ़ाएं, इस वर्ष आपको कोई प्रॉपर्टी प्राप्त करने में सफलता के योग है। किसने बिगाड़ा अडाणी का खेल? क्या फिर से कमबैक कर पाएंगे गौतम अडाणी, कौन सा ग्रह देगा साथ? फ्रांस बनाम मोरक्को फीफा विश्व कप भविष्यवाणीः मैच कौन जीतेगा?
आर्थिक दृष्टिकोण से वर्ष की शुरुआत कुछ कमजोर हो सकती है, लेकिन मां आपकी आर्थिक मदद कर सकती है। व्यापार करने वाले लोग वर्ष की शुरुआत से ही अच्छा प्रॉफिट प्राप्त करने में कामयाब रहेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू हो जाएगा। नौकरीपेशा लोगों को वर्ष के मध्य तक अच्छी आय की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। उस समय निवेश उनको फायदा देगा। कुछ लोगों को अक्टूबर-नवंबर में भी स्पेशल प्रमोशन या सैलेरी इंक्रीमेंट मिल सकता है। वर्ष की शुरुआत किसी भी तरह के इन्वेस्टमेंट के लिए अनुकूल नहीं है, इसलिए इससे बचना ही बढ़िया होगा, लेकिन वर्ष के अंतिम तीन महीनों के दौरान आप इस दिशा में प्रयास करें, तो सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश हमेशा जोखिम भरा होता है। सोच समझकर ही कदम बढ़ाएं, इस वर्ष आपको कोई प्रॉपर्टी प्राप्त करने में सफलता के योग है। किसने बिगाड़ा अडाणी का खेल? क्या फिर से कमबैक कर पाएंगे गौतम अडाणी, कौन सा ग्रह देगा साथ? फ्रांस बनाम मोरक्को फीफा विश्व कप भविष्यवाणीः मैच कौन जीतेगा?
इस मौके पर मोदी ने इशारों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी हमला किया. उन्होंने कहा कि बिना नदी और समुद्र किनारे हजारों किलोमीटर की बंजर जमीन के बावजूद उनके राज्य में कृषि क्षेत्र में जबरदस्त विकास हुआ. मोदी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार का ऐसा रूप शायद ही किसी देश में देखने को मिले. मोदी ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ पर सवालिया लहजे में कहा कि भारतीय सेना अपने ही क्षेत्र से पीछे क्यों हटी? दिल्ली में बैठी सरकार को इसका जवाब देना चाहिए. पाकिस्तानी जेल में हमले में मारे गए सरबजीत सिंह की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि हमारे देश के बेटे की दूसरे देश में हत्या हुई, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में सबसे बड़ा संकट आपसी भरोसे का है. आज जरूरत है कि लोगों को सरकार की नीति और नीयत पर भरोसा हो. समाज नेता पर भरोसा करे. मोदी ने अपने भाषण में गुजरात के विकास का जमकर बखान करते हुए जताया कि उनका मॉडल की सबसे बेहतर है. उन्होंने नारी शक्ति को सबसे महान बताया. मोदी ने कहा कि बिना नारी के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मोदी ने अपने भाषण में दिल्ली रेपकांड और सीमा पर जवानों के सिर काटे जैसे भावनात्मक मुद्दे भी उठाए. मोदी ने गंगा को लेकर कहा कि भारत में हमलोग गंगा नदी को लेकर चिंतित हैं. गंगा को जब तक हम माता मानते रहे, वह पवित्र रही, लेकिन दुनिया ने हमें इस जीवनदायिनी मां को मां न मानकर पानी का एक स्त्रोत मानने को कहा, जिसका नुकसान हमें उठाना पड़ रहा है. मोदी ने कहा कि गुजराती आज एक वैश्विक कम्युनिटी है. वे जहां भी गए, वहां अपनी संस्कृति की छाप छोड़ी. सही मायनों में तो आप (विदेशों में भारतीय) ही हमारे सांस्कृतिक दूत हैं.
इस मौके पर मोदी ने इशारों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी हमला किया. उन्होंने कहा कि बिना नदी और समुद्र किनारे हजारों किलोमीटर की बंजर जमीन के बावजूद उनके राज्य में कृषि क्षेत्र में जबरदस्त विकास हुआ. मोदी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार का ऐसा रूप शायद ही किसी देश में देखने को मिले. मोदी ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ पर सवालिया लहजे में कहा कि भारतीय सेना अपने ही क्षेत्र से पीछे क्यों हटी? दिल्ली में बैठी सरकार को इसका जवाब देना चाहिए. पाकिस्तानी जेल में हमले में मारे गए सरबजीत सिंह की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि हमारे देश के बेटे की दूसरे देश में हत्या हुई, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में सबसे बड़ा संकट आपसी भरोसे का है. आज जरूरत है कि लोगों को सरकार की नीति और नीयत पर भरोसा हो. समाज नेता पर भरोसा करे. मोदी ने अपने भाषण में गुजरात के विकास का जमकर बखान करते हुए जताया कि उनका मॉडल की सबसे बेहतर है. उन्होंने नारी शक्ति को सबसे महान बताया. मोदी ने कहा कि बिना नारी के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मोदी ने अपने भाषण में दिल्ली रेपकांड और सीमा पर जवानों के सिर काटे जैसे भावनात्मक मुद्दे भी उठाए. मोदी ने गंगा को लेकर कहा कि भारत में हमलोग गंगा नदी को लेकर चिंतित हैं. गंगा को जब तक हम माता मानते रहे, वह पवित्र रही, लेकिन दुनिया ने हमें इस जीवनदायिनी मां को मां न मानकर पानी का एक स्त्रोत मानने को कहा, जिसका नुकसान हमें उठाना पड़ रहा है. मोदी ने कहा कि गुजराती आज एक वैश्विक कम्युनिटी है. वे जहां भी गए, वहां अपनी संस्कृति की छाप छोड़ी. सही मायनों में तो आप ही हमारे सांस्कृतिक दूत हैं.
उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद से ही बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. यूपी के तमाम जनपदों में कहीं भारी बारिश तो कही हल्की बारिश देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से तापमान में भी गिरावट आई है और लोगों को तपती और झुलसती गर्मी से राहत मिली है. सोमवार को भी यूपी के अधिकतर हिस्सों बारिश देखने को मिली, पश्चिमी यूपी के रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद जनपदों में झमाझम बारिश हुई, और बाकी इलाकों में भी ठीक-ठाक बारिश हुई हैं. बारिश का ये सिलसिला आज 27 जून को भी जारी रहेगा. मौसम विभाग के मुताबिक आज भी यूपी के अधिकांश हिस्सों में बारिश देखने को मिलेगी. वहीं उत्तराखंड से सटे जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. जबकि अन्य कुछ क्षेत्रों में मध्यम से हल्की बारिश का अनुमान हैं. प्रदेश के अधिकांश हिस्से में हल्की बारिश देखने को मिलेगी. बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है. यूपी के सभी जिलों में तापमान 40 से नीचे आ गया है. अगले पांच दिनों की बात करें तो राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. यूपी में 25 जून से मानसून की एंट्री हुई थी, तभी से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिल रही है बारिश का ये सिलसिला फिलहाल 30 जून तक जारी रहेगी, इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश और मध्यम से हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग लखनऊ केंद्र के मौसम वैज्ञानिक दानिश के मुताबिक 28 जून को भी प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में हल्की भारिश देखने को मिलेगी, जबकि 29 जून को एक बार फिर से मानसून एक्टिव होते दिखाई दे रहा है. जिसकी वजह से एक बार फिर कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है. 30 जून को भी तराई बेल्ट भारी बारिश और बाकी जगहों पर हल्की बारिश का अनुमान जताया गया है. बीते दिन की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान 39. 5 गोरखपुर में रहा और लखनऊ में 35. 4 डिग्री दर्ज किया गया. सोमवार को पश्चिमी यूपी रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद और लखीमपुर खीरी में बारिश हुई.
उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद से ही बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. यूपी के तमाम जनपदों में कहीं भारी बारिश तो कही हल्की बारिश देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से तापमान में भी गिरावट आई है और लोगों को तपती और झुलसती गर्मी से राहत मिली है. सोमवार को भी यूपी के अधिकतर हिस्सों बारिश देखने को मिली, पश्चिमी यूपी के रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद जनपदों में झमाझम बारिश हुई, और बाकी इलाकों में भी ठीक-ठाक बारिश हुई हैं. बारिश का ये सिलसिला आज सत्ताईस जून को भी जारी रहेगा. मौसम विभाग के मुताबिक आज भी यूपी के अधिकांश हिस्सों में बारिश देखने को मिलेगी. वहीं उत्तराखंड से सटे जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. जबकि अन्य कुछ क्षेत्रों में मध्यम से हल्की बारिश का अनुमान हैं. प्रदेश के अधिकांश हिस्से में हल्की बारिश देखने को मिलेगी. बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है. यूपी के सभी जिलों में तापमान चालीस से नीचे आ गया है. अगले पांच दिनों की बात करें तो राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. यूपी में पच्चीस जून से मानसून की एंट्री हुई थी, तभी से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिल रही है बारिश का ये सिलसिला फिलहाल तीस जून तक जारी रहेगी, इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश और मध्यम से हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग लखनऊ केंद्र के मौसम वैज्ञानिक दानिश के मुताबिक अट्ठाईस जून को भी प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में हल्की भारिश देखने को मिलेगी, जबकि उनतीस जून को एक बार फिर से मानसून एक्टिव होते दिखाई दे रहा है. जिसकी वजह से एक बार फिर कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है. तीस जून को भी तराई बेल्ट भारी बारिश और बाकी जगहों पर हल्की बारिश का अनुमान जताया गया है. बीते दिन की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान उनतालीस. पाँच गोरखपुर में रहा और लखनऊ में पैंतीस. चार डिग्री दर्ज किया गया. सोमवार को पश्चिमी यूपी रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद और लखीमपुर खीरी में बारिश हुई.