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हर व्यक्ति चाहता है कि उसका हर दिन अच्छा जाए। इसलिए कुछ लोग अपने दिन की शुरुवात भगवान की पूजा करके भी करते है। कुछ लोग सुबह उठकर शुभ चीजों को दखते है कि उनका पूरा दिन अच्छा बीते। अगर दिन की खराब शुरुआत अक्सर लोगों के मुंह से यही बात निकलवाती है कि न जानें आज सुबह क्या देख लिया था, जो सारा दिन खराब निकला। हर व्यक्ति की चाह होती है कि उसके दिन की शुरुआत अच्छी हो। सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। लेकिन सुबह उठते ही हमारी नजर किस चीज पर पड़नी चाहिए और किस पर नहीं ये भी काफी महत्वपूर्ण होता है। वास्तु के मुताबिक जीवन को चलाना काफी शुभ माना जाता है। जो लोग सुबह के समय उठकर पूजा, पाठ, व्यायाम, स्नान या अपना कोई जरूरी काम करते हैं, उनका शरीर पूरे दिन एनर्जी से भरा रहता है और वे खुद को काफी फुर्तीला महसूस करते हैं। साथ ही हमारे काम बनते चले जाते हैं। लेकिन अगर सुबह के समय हम गलत बातें करें, गलत चीजों को देख लें तो हमारे दिमाग पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है। रुकी हुई घड़ी- वास्तु की मानें तो सुबह उठते ही बंद घड़ी भी नहीं देखनी चाहिए. इस कारण घर में आर्थिक तंगी आने लगती हैं। झूठे बर्तन- सुबह उठने के बाद अगर किचन में मौजूद झूठे बर्तन देख लिए जाए तो इससे भी दिन की शुरुआत खराब हो सकती है। खंडित मूर्ति- वैसे तो घर में टूटी या खंडित मूर्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये भी अशुभ होता है। लेकिन अगर आपके घर में खंडित या टूटी मूर्ति है तो भूल से भी उसे ऐसी जगह न रखें कि सुबह उठते ही वह आपकी आंखों के सामने मौजूद हो। शीशा- कभी भी सुबह उठकर शीशा नहीं देखना चाहिए। ये अशुभ होता है।
हर व्यक्ति चाहता है कि उसका हर दिन अच्छा जाए। इसलिए कुछ लोग अपने दिन की शुरुवात भगवान की पूजा करके भी करते है। कुछ लोग सुबह उठकर शुभ चीजों को दखते है कि उनका पूरा दिन अच्छा बीते। अगर दिन की खराब शुरुआत अक्सर लोगों के मुंह से यही बात निकलवाती है कि न जानें आज सुबह क्या देख लिया था, जो सारा दिन खराब निकला। हर व्यक्ति की चाह होती है कि उसके दिन की शुरुआत अच्छी हो। सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। लेकिन सुबह उठते ही हमारी नजर किस चीज पर पड़नी चाहिए और किस पर नहीं ये भी काफी महत्वपूर्ण होता है। वास्तु के मुताबिक जीवन को चलाना काफी शुभ माना जाता है। जो लोग सुबह के समय उठकर पूजा, पाठ, व्यायाम, स्नान या अपना कोई जरूरी काम करते हैं, उनका शरीर पूरे दिन एनर्जी से भरा रहता है और वे खुद को काफी फुर्तीला महसूस करते हैं। साथ ही हमारे काम बनते चले जाते हैं। लेकिन अगर सुबह के समय हम गलत बातें करें, गलत चीजों को देख लें तो हमारे दिमाग पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है। रुकी हुई घड़ी- वास्तु की मानें तो सुबह उठते ही बंद घड़ी भी नहीं देखनी चाहिए. इस कारण घर में आर्थिक तंगी आने लगती हैं। झूठे बर्तन- सुबह उठने के बाद अगर किचन में मौजूद झूठे बर्तन देख लिए जाए तो इससे भी दिन की शुरुआत खराब हो सकती है। खंडित मूर्ति- वैसे तो घर में टूटी या खंडित मूर्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये भी अशुभ होता है। लेकिन अगर आपके घर में खंडित या टूटी मूर्ति है तो भूल से भी उसे ऐसी जगह न रखें कि सुबह उठते ही वह आपकी आंखों के सामने मौजूद हो। शीशा- कभी भी सुबह उठकर शीशा नहीं देखना चाहिए। ये अशुभ होता है।
दो दिन की देरी से केरल में दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अच्छी गति के साथ आगे बढ़ रहा है. मॉनसून 2021 कई राज्यों में समय से काफी पहले पहुंच गया है और अभी भी इसके आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. दो दिन की देरी से केरल में दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अच्छी गति के साथ आगे बढ़ रहा है. मॉनसून 2021 कई राज्यों में समय से काफी पहले पहुंच गया है और अभी भी इसके आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. खरीफ फसलों की खेती-बाड़ी में लगे किसानों के लिए मॉनसून की बारिश का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है. हालांकि सामान्य से कम और ज्यादा बारिश उनके लिए नुकसान का सबब बन जाती है. लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में मॉनसून के सामान्य रहने की बात कही है. मॉनसून की स्थिति पर जानकारी देते हुए मौसम विभाग ने बताया कि 13 जून 2021 तक दक्षिण पश्चिम मॉनसून मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सो, पूरे छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के हिस्सों में आगे बढ़ गया है. मॉनसून पूर्वी उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है. विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चमि मॉनसून के पूरे मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाकी बचे हिस्सों, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, हरियाणा और पंजाब में आगे बढ़ने के लिए अगले 48 घंटे तक स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. आईएमडी ने बताया है कि राजस्थान में अभी मॉनसून नहीं पहुंचा है लेकिन अगले तीन-चार दिन आंधी बारिश जारी रहने का अनुमान है. 15 जून को पश्चिमी राजस्थान की जोधपुर और बीकानेर संभाग में आंधी बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी. इस दौरान तेज थंडरस्टॉर्म, हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक दर्ज हो सकती है. जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक आरएस शर्मा के अनुसार अजमेर, जयपुर, भरतपुर कोटा संभाग के जिलों में भी 15-16 जून को थंडरस्टॉर्म के साथ तेज बारिश होने की प्रबल संभावना है. उदयपुर व कोटा संभाग में भी 15-16-17 जून को थंडरस्टॉर्म के साथ बारिश का अनुमान है. इसके अलावा, मौसम विभाग ने पंजाब और हरियाणा के अधिकतर हिस्सों में 14 जून और 15 जून को कहीं मध्यम और कहीं गरज के साथ छींटे पड़ने का पूर्वानुमान जताया है. Update on Progress of southwest Monsoon as on 13th June 2021: ♦ Southwest Monsoon has further advanced into some more parts of Madhya Pradesh; entire Chhattisgarh, Odisha, West Bengal, Jharkhand, and Bihar; most parts of east Uttar Pradesh; some parts of west Uttar Pradesh; निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा के ऊपर है. इसके और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है और पश्चिम उत्तर-पश्चिम दिशा में झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ सकता है. इसके बाद अच्छी बारिश हो सकती है. स्काईमेट के अनुसार आने वाले 24 घंटे में कोंकण, गोवा और उत्तरी तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, केरल, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. इन इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. इसके अलावा, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, पश्चिमी हिमालय, पंजाब के कुछ हिस्से, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तर और पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. दक्षिण गुजरात में हल्की बारिश हो सकती है.
दो दिन की देरी से केरल में दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अच्छी गति के साथ आगे बढ़ रहा है. मॉनसून दो हज़ार इक्कीस कई राज्यों में समय से काफी पहले पहुंच गया है और अभी भी इसके आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. दो दिन की देरी से केरल में दस्तक देने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अच्छी गति के साथ आगे बढ़ रहा है. मॉनसून दो हज़ार इक्कीस कई राज्यों में समय से काफी पहले पहुंच गया है और अभी भी इसके आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. खरीफ फसलों की खेती-बाड़ी में लगे किसानों के लिए मॉनसून की बारिश का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है. हालांकि सामान्य से कम और ज्यादा बारिश उनके लिए नुकसान का सबब बन जाती है. लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने पूर्वानुमान में मॉनसून के सामान्य रहने की बात कही है. मॉनसून की स्थिति पर जानकारी देते हुए मौसम विभाग ने बताया कि तेरह जून दो हज़ार इक्कीस तक दक्षिण पश्चिम मॉनसून मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सो, पूरे छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के हिस्सों में आगे बढ़ गया है. मॉनसून पूर्वी उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है. विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चमि मॉनसून के पूरे मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाकी बचे हिस्सों, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, हरियाणा और पंजाब में आगे बढ़ने के लिए अगले अड़तालीस घंटाटे तक स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. आईएमडी ने बताया है कि राजस्थान में अभी मॉनसून नहीं पहुंचा है लेकिन अगले तीन-चार दिन आंधी बारिश जारी रहने का अनुमान है. पंद्रह जून को पश्चिमी राजस्थान की जोधपुर और बीकानेर संभाग में आंधी बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी. इस दौरान तेज थंडरस्टॉर्म, हवा की गति चालीस से साठ किलोग्राममीटर प्रतिघंटा तक दर्ज हो सकती है. जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक आरएस शर्मा के अनुसार अजमेर, जयपुर, भरतपुर कोटा संभाग के जिलों में भी पंद्रह-सोलह जून को थंडरस्टॉर्म के साथ तेज बारिश होने की प्रबल संभावना है. उदयपुर व कोटा संभाग में भी पंद्रह सोलह सत्रह जून को थंडरस्टॉर्म के साथ बारिश का अनुमान है. इसके अलावा, मौसम विभाग ने पंजाब और हरियाणा के अधिकतर हिस्सों में चौदह जून और पंद्रह जून को कहीं मध्यम और कहीं गरज के साथ छींटे पड़ने का पूर्वानुमान जताया है. Update on Progress of southwest Monsoon as on तेरह जूनe दो हज़ार इक्कीस: ♦ Southwest Monsoon has further advanced into some more parts of Madhya Pradesh; entire Chhattisgarh, Odisha, West Bengal, Jharkhand, and Bihar; most parts of east Uttar Pradesh; some parts of west Uttar Pradesh; निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा के ऊपर है. इसके और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है और पश्चिम उत्तर-पश्चिम दिशा में झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ सकता है. इसके बाद अच्छी बारिश हो सकती है. स्काईमेट के अनुसार आने वाले चौबीस घंटाटे में कोंकण, गोवा और उत्तरी तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, केरल, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. इन इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. इसके अलावा, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, पश्चिमी हिमालय, पंजाब के कुछ हिस्से, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तर और पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. दक्षिण गुजरात में हल्की बारिश हो सकती है.
भारत के नाना धर्मों में आगम का साम्राज्य है। जैन धर्म में मात्रा में न्यून होने पर भी आगमपूजा का पर्याप्त समावेश है। बौद्ध धर्म का 'वज्रयान' इसी पद्धति का प्रयोजक मार्ग है। वैदिक धर्म में उपास्य देवता की भिन्नता के कारण इसके तीन प्रकार हैः वैष्णव आगम (पंचरात्र तथा वैखानस आगम), शैव आगम (पाशुपत, शैवसिद्धांत, त्रिक आदि) तथा शाक्त आगम। . 16 संबंधोंः तन्त्र, तालमान (शिल्पकला), तंत्र साहित्य (भारतीय), प्रतिमा, पूर्णागिरी, शिल्पशास्त्र, शिवानन्द गोस्वामी, शैवसिद्धान्त, सुरेन्द्र चौधरी, हिन्दू दर्शन, हिन्दू धर्म, हवाई, आगम (भाषा संबंधी), कवाई, अर्धमागधी, अष्टावक्र (महाकाव्य)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित तंत्र या प्रणाली या सिस्टम के बारे में तंत्र (सिस्टम) देखें। ---- तन्त्र कलाएं (ऊपर से, दक्षिणावर्त): हिन्दू तांत्रिक देवता, बौद्ध तान्त्रिक देवता, जैन तान्त्रिक चित्र, कुण्डलिनी चक्र, एक यंत्र एवं ११वीं शताब्दी का सैछो (तेन्दाई तंत्र परम्परा का संस्थापक तन्त्र, परम्परा से जुड़े हुए आगम ग्रन्थ हैं। तन्त्र शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत है। तन्त्र-परम्परा एक हिन्दू एवं बौद्ध परम्परा तो है ही, जैन धर्म, सिख धर्म, तिब्बत की बोन परम्परा, दाओ-परम्परा तथा जापान की शिन्तो परम्परा में पायी जाती है। भारतीय परम्परा में किसी भी व्यवस्थित ग्रन्थ, सिद्धान्त, विधि, उपकरण, तकनीक या कार्यप्रणाली को भी तन्त्र कहते हैं। हिन्दू परम्परा में तन्त्र मुख्यतः शाक्त सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ है, उसके बाद शैव सम्प्रदाय से, और कुछ सीमा तक वैष्णव परम्परा से भी। शैव परम्परा में तन्त्र ग्रन्थों के वक्ता साधारणतयः शिवजी होते हैं। बौद्ध धर्म का वज्रयान सम्प्रदाय अपने तन्त्र-सम्बन्धी विचारों, कर्मकाण्डों और साहित्य के लिये प्रसिद्ध है। तन्त्र का शाब्दिक उद्भव इस प्रकार माना जाता है - "तनोति त्रायति तन्त्र"। जिससे अभिप्राय है - तनना, विस्तार, फैलाव इस प्रकार इससे त्राण होना तन्त्र है। हिन्दू, बौद्ध तथा जैन दर्शनों में तन्त्र परम्परायें मिलती हैं। यहाँ पर तन्त्र साधना से अभिप्राय "गुह्य या गूढ़ साधनाओं" से किया जाता रहा है। तन्त्रों को वेदों के काल के बाद की रचना माना जाता है जिसका विकास प्रथम सहस्राब्दी के मध्य के आसपास हुआ। साहित्यक रूप में जिस प्रकार पुराण ग्रन्थ मध्ययुग की दार्शनिक-धार्मिक रचनायें माने जाते हैं उसी प्रकार तन्त्रों में प्राचीन-अख्यान, कथानक आदि का समावेश होता है। अपनी विषयवस्तु की दृष्टि से ये धर्म, दर्शन, सृष्टिरचना शास्त्र, प्राचीन विज्ञान आदि के इनसाक्लोपीडिया भी कहे जा सकते हैं। यूरोपीय विद्वानों ने अपने उपनिवीशवादी लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तन्त्र को 'गूढ़ साधना' (esoteric practice) या 'साम्प्रदायिक कर्मकाण्ड' बताकर भटकाने की कोशिश की है। वैसे तो तन्त्र ग्रन्थों की संख्या हजारों में है, किन्तु मुख्य-मुख्य तन्त्र 64 कहे गये हैं। तन्त्र का प्रभाव विश्व स्तर पर है। इसका प्रमाण हिन्दू, बौद्ध, जैन, तिब्बती आदि धर्मों की तन्त्र-साधना के ग्रन्थ हैं। भारत में प्राचीन काल से ही बंगाल, बिहार और राजस्थान तन्त्र के गढ़ रहे हैं। . तालमान (शिल्पकला) तालमान भारतीय प्रतिमामानविज्ञान (iconometry) की पारम्परिक प्रणाली है जो शिल्पशास्त्रों पर आधारित है। हिन्दू आगम ग्रन्थों (जैसे, कर्णागम) तथा अन्य शिल्पशास्त्रों में देवी-देवताओं की मूर्तियों के विभिन्न अंगों/भागों के माप का अत्यन्त विशद वर्णन मिलता है। श्रेणीःवास्तु. तंत्र साहित्य (भारतीय) तंत्र भारतीय उपमहाद्वीप की एक वैविधतापूर्ण एवं सम्पन्न आध्यात्मिक परिपाटी है। तंत्र के अन्तर्गत विविध प्रकार के विचार एवं क्रियाकलाप आ जाते हैं। तन्यते विस्तारयते ज्ञानं अनेन् इति तन्त्रम् - अर्थात ज्ञान को इसके द्वारा तानकर विस्तारित किया जाता है, यही तंत्र है। इसका इतिहास बहुत पुराना है। समय के साथ यह परिपाटी अनेक परिवर्तनों से होकर गुजरी है और सम्प्रति अत्यन्त दकियानूसी विचारों से लेकर बहुत ही प्रगत विचारों का सम्मिश्रण है। तंत्र अपने विभिन्न रूपों में भारत, नेपाल, चीन, जापान, तिब्बत, कोरिया, कम्बोडिया, म्यांमार, इण्डोनेशिया और मंगोलिया में विद्यमान रहा है। भारतीय तंत्र साहित्य विशाल और वैचित्र्यमय साहित्य है। यह प्राचीन भी है तथा व्यापक भी। वैदिक वाङ्मय से भी किसी किसी अंश में इसकी विशालता अधिक है। चरणाव्यूह नामक ग्रंथ से वैदिक साहित्य का किंचित् परिचय मिलता है, परन्तु तन्त्र साहित्य की तुलना में उपलब्ध वैदिक साहित्य एक प्रकार से साधारण मालूम पड़ता है। तांत्रिक साहित्य का अति प्राचीन रूप लुप्त हो गया है। परन्तु उसके विस्तार का जो परिचय मिलता है उससे अनुमान किया जा सकता है कि प्राचीन काल में वैदिक साहित्य से भी इसकी विशालता अधिक थी और वैचित्र्य भी। संक्षेप में कहा जा सकता है कि परम अद्वैत विज्ञान का सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्लेषण और विवरण जैसा तंत्र ग्रंथों में है, वैसा किसी शास्त्र के ग्रंथों में नहीं है। साथ ही साथ यह भी सच है कि उच्चाटन, वशीकरण प्रभृति क्षुद्र विद्याओं का प्रयोग विषयक विवरण भी तंत्र में मिलता है। स्पष्टतः वर्तमान हिंदू समाज वेद-आश्रित होने पर भी व्यवहार-भूमि में विशेष रूप से तंत्र द्वारा ही नियंत्रित है। . 'प्रतिमा' शब्द देवविशेष, व्यक्तिविशेष अथवा पदार्थविशेष की प्रतिकृति, बिंब, मूर्ति अथवा आकृति सभी का बोधक है; परंतु यहाँ पर प्रतिमा से तात्पर्य भक्तिभावना से भावित देवविशेष की मूर्ति अथवा देवभावना से अनुप्राणित पदार्थविशेष की प्रतिकृति से है। किसी ऐतिहासिक व्यक्ति या वस्तु की तथैव अथवा काल्पनिक प्रतिकृति जो मिट्टी या पत्थर में बनाई जाए प्रतिमा कहलाती है। प्रतिमा बनाने वाले को मूर्ति शिल्पी कहते हैं और प्रतिमा बनाने के काम को मूर्ति शिल्प कहा जाता है। मंदिरों में पूजा के लिए इनकी स्थापना होती है तथा घर नगर और संस्थानों में सुंदरता के लिए इन्हें स्थापित किया जाता है। देवी देवताओं और प्रसिद्ध व्यक्तियों की प्रतिमाएँ बनाई जाती हैं। . पूर्णागिरि मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड प्रान्त के टनकपुर में अन्नपूर्णा शिखर पर ५५०० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यह १०८ सिद्ध पीठों में से एक है। यह स्थान महाकाली की पीठ माना जाता है। कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति की कन्या और शिव की अर्धांगिनी सती की नाभि का भाग यहाँ पर विष्णु चक्र से कट कर गिरा था। प्रतिवर्ष इस शक्ति पीठ की यात्रा करने आस्थावान श्रद्धालु कष्ट सहकर भी यहाँ आते हैं। . शिल्पशास्त्र वे प्राचीन हिन्दू ग्रन्थ हैं जिनमें विविध प्रकार की कलाओं तथा हस्तशिल्पों की डिजाइन और सिद्धान्त का विवेचन किया गया है। इस प्रकार की चौसठ कलाओं का उल्लेख मिलता है जिन्हे 'बाह्य-कला' कहते हैं। इनमें काष्ठकारी, स्थापत्य कला, आभूषण कला, नाट्यकला, संगीत, वैद्यक, नृत्य, काव्यशास्त्र आदि हैं। इनके अलावा चौसठ अभ्यन्तर कलाओं का भी उल्लेख मिलता है जो मुख्यतः 'काम' से सम्बन्धित हैं, जैसे चुम्बन, आलिंगन आदि। यद्यपि सभी विषय आपस में सम्बन्धित हैं किन्तु शिल्पशास्त्र में मुख्यतः मूर्तिकला और वास्तुशास्त्र में भवन, दुर्ग, मन्दिर, आवास आदि के निर्माण का वर्णन है। . शिवानन्द गोस्वामी । शिरोमणि भट्ट (अनुमानित कालः संवत् १७१०-१७९७) तंत्र-मंत्र, साहित्य, काव्यशास्त्र, आयुर्वेद, सम्प्रदाय-ज्ञान, वेद-वेदांग, कर्मकांड, धर्मशास्त्र, खगोलशास्त्र-ज्योतिष, होरा शास्त्र, व्याकरण आदि अनेक विषयों के जाने-माने विद्वान थे। इनके पूर्वज मूलतः तेलंगाना के तेलगूभाषी उच्चकुलीन पंचद्रविड़ वेल्लनाडू ब्राह्मण थे, जो उत्तर भारतीय राजा-महाराजाओं के आग्रह और निमंत्रण पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य प्रान्तों में आ कर कुलगुरु, राजगुरु, धर्मपीठ निर्देशक, आदि पदों पर आसीन हुए। शिवानन्द गोस्वामी त्रिपुर-सुन्दरी के अनन्य साधक और शक्ति-उपासक थे। एक चमत्कारिक मान्त्रिक और तांत्रिक के रूप में उनकी साधना और सिद्धियों की अनेक घटनाएँ उल्लेखनीय हैं। श्रीमद्भागवत के बाद सबसे विपुल ग्रन्थ सिंह-सिद्धांत-सिन्धु लिखने का श्रेय शिवानंद गोस्वामी को है।" . शैवसिद्धान्त, आगम शैव सम्प्रदाय तथा वैदिक शैव सम्प्रदाय का सम्मिलित सिद्धान्त है। यह द्वैत सिद्धान्त है। शैवसिद्धान्त का लक्ष्य शिव की कृपा की प्राप्ति द्वारा ज्ञानी बनना है। . सुरेन्द्र चौधरी (1933-2001) हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में मुख्यतः कथालोचक के रूप में मान्य हैं। हिन्दी कहानी के शीर्ष आलोचकों में उनका स्थान प्रायः निर्विवाद रहा है। . हिन्दू धर्म में दर्शन अत्यन्त प्राचीन परम्परा रही है। वैदिक दर्शनों में षड्दर्शन अधिक प्रसिद्ध और प्राचीन हैं। . हिन्दू धर्म (संस्कृतः सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . हवाई का नक़्शा हवाई (हवाइयन भाषाः Hawai'i, हवइ'इ - अंत में 'इ' को दो बार बोलें) संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रशान्त महासागर के मध्य में स्थित एक प्रान्त है। यह अमेरिका का अकेला प्रांत है जो पूरी तरह द्वीपों से ही बना हुआ है और हवाई द्वीप समूह के अधिकांश द्वीप इसी प्रांत में सम्मिलित हैं। हवाई के आठ मुख्य द्वीप हैं, जो उत्तरपश्चिम से दक्षिणपूर्व में एक पंक्ति पर बिछे हैं। इन आठ द्वीपों के नाम हैं (उत्तरपश्चिम से शुरू होते हुए) - नि'इहउ, कउअ'इ, ओअहू, मोलोक'इ, लान'इ, कहो'ओलवे, मउइ और हवइ'इ। इनमें हवइ'इ का द्वीप सबसे बड़ा है और पूर्ण प्रांत के नाम से भिन्न करने के लिए उसे कभी-कभी "बड़ा द्वीप" भी बुलाया जाता है। अगर बाक़ी सभी द्वीपों को मिलाया जाए तो बड़ा द्वीप उन सबके क्षेत्रफल से बड़ा है। पर्यटन और जनसँख्या की दृष्टि से चार द्वीप - ओआहू (Oʻahu), माउइ (Maui), बड़ा द्वीप (Hawaiʻi) और काउआइ (Kauaʻi) - हवाई के मुख्य द्वीप माने जाते हैं। हवाई की राजधानी होनोलूलू ओअहू पर स्थित है। मउइ अपने बालू-तट (बीच) के लिए विख्यात है। कउअ'इ में दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित और आगम सिद्धांतों पर स्थापित एक सुन्दर शैव मंदिर है। . आगम (भाषा संबंधी) भाषा संबंधी आगम एक प्रकार का भाषायी परिवर्तन है। इसका संबंध मुख्य रूप से ध्वनिपरिवर्तन से है। व्याकरण की आवश्यकता के बिना जब किसी शब्द में कोई ध्वनि बढ़ जाती है तब उसे आगम कहा जाता है। यह एक प्रकार की भाषायी वृद्धि है। उदाहरणार्थ "नाज' शब्द के आगे 'अ'-ध्वनि जोड़कर 'अनाज' शब्द बनाया जाता है। वास्तव में यहाँ व्याकरण की दृष्टि से 'अ'-की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि 'नाज' एवं 'अनाज' शब्दों की व्याकरणात्मक स्थिति में कोई अंतर नहीं है। इसलिए 'अनाज' में 'अ' स्वर का आगम समझा जाएगा। आगम तीन प्रकार का होता हैः (१) स्वरागम, जिसमें स्वर की वृद्धि होती है। (२) व्यंजनागम, जिसमें व्यंजन की वृद्धि होती है। (३) अक्षरागम, जिसमें स्वर सहित व्यंजन की वृद्धि होती है। आगम शब्द की तीन स्थितियों में हो सकता हैः (१) शब्द के आरंभ में, अर्थात् आदि आगम। (२) शब्द के मध्य में, अर्थात् मध्य आगम। (३) शब्द के अंत में, अर्थात् अंत आगम। नीचे हर प्रकार के आगम के उदाहरण दिए जा रहे हैं . हवाई प्रान्त का एक द्वीप। यहां एक सुन्दर शैव मन्दिर दक्षिण भारत की शैली में आगम अनुसार स्थापित है। . मध्य भारतीय आर्य परिवार की भाषा अर्धमागधी संस्कृत और आधुनिक भारतीय भाषाओं के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह प्राचीन काल में मगध की साहित्यिक एवं बोलचाल की भाषा थी। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने इसी भाषा में अपने धर्मोपदेश किए थे। आगे चलकर महावीर के शिष्यों ने भी महावीर के उपदेशों का संग्रह अर्धमागधी में किया जो आगम नाम से प्रसिद्ध हुए। . अष्टावक्र (महाकाव्य) अष्टावक्र (२०१०) जगद्गुरु रामभद्राचार्य (१९५०-) द्वारा २००९ में रचित एक हिन्दी महाकाव्य है। इस महाकाव्य में १०८-१०८ पदों के आठ सर्ग हैं और इस प्रकार कुल ८६४ पद हैं। महाकाव्य ऋषि अष्टावक्र की कथा प्रस्तुत करता है, जो कि रामायण और महाभारत आदि हिन्दू ग्रंथों में उपलब्ध है। महाकाव्य की एक प्रति का प्रकाशन जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया था। पुस्तक का विमोचन जनवरी १४, २०१० को कवि के षष्टिपूर्ति महोत्सव के दिन किया गया। इस काव्य के नायक अष्टावक्र अपने शरीर के आठों अंगों से विकलांग हैं। महाकाव्य अष्टावक्र ऋषि की संपूर्ण जीवन यात्रा को प्रस्तुत करता है जोकि संकट से प्रारम्भ होकर सफलता से होते हुए उनके उद्धार तक जाती है। महाकवि, जो स्वयं दो मास की अल्पायु से प्रज्ञाचक्षु हैं, के अनुसार इस महाकाव्य में विकलांगों की सार्वभौम समस्याओं के समाधानात्मक सूत्र प्रस्तुत किए गए हैं। उनके अनुसार महाकाव्य के आठ सर्ग विकलांगों की आठ मनोवृत्तियों के विश्लेषण मात्र हैं।रामभद्राचार्य २०१०, पृष्ठ क-ग। .
भारत के नाना धर्मों में आगम का साम्राज्य है। जैन धर्म में मात्रा में न्यून होने पर भी आगमपूजा का पर्याप्त समावेश है। बौद्ध धर्म का 'वज्रयान' इसी पद्धति का प्रयोजक मार्ग है। वैदिक धर्म में उपास्य देवता की भिन्नता के कारण इसके तीन प्रकार हैः वैष्णव आगम , शैव आगम तथा शाक्त आगम। . सोलह संबंधोंः तन्त्र, तालमान , तंत्र साहित्य , प्रतिमा, पूर्णागिरी, शिल्पशास्त्र, शिवानन्द गोस्वामी, शैवसिद्धान्त, सुरेन्द्र चौधरी, हिन्दू दर्शन, हिन्दू धर्म, हवाई, आगम , कवाई, अर्धमागधी, अष्टावक्र । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित तंत्र या प्रणाली या सिस्टम के बारे में तंत्र देखें। ---- तन्त्र कलाएं : हिन्दू तांत्रिक देवता, बौद्ध तान्त्रिक देवता, जैन तान्त्रिक चित्र, कुण्डलिनी चक्र, एक यंत्र एवं ग्यारहवीं शताब्दी का सैछो या 'साम्प्रदायिक कर्मकाण्ड' बताकर भटकाने की कोशिश की है। वैसे तो तन्त्र ग्रन्थों की संख्या हजारों में है, किन्तु मुख्य-मुख्य तन्त्र चौंसठ कहे गये हैं। तन्त्र का प्रभाव विश्व स्तर पर है। इसका प्रमाण हिन्दू, बौद्ध, जैन, तिब्बती आदि धर्मों की तन्त्र-साधना के ग्रन्थ हैं। भारत में प्राचीन काल से ही बंगाल, बिहार और राजस्थान तन्त्र के गढ़ रहे हैं। . तालमान तालमान भारतीय प्रतिमामानविज्ञान की पारम्परिक प्रणाली है जो शिल्पशास्त्रों पर आधारित है। हिन्दू आगम ग्रन्थों तथा अन्य शिल्पशास्त्रों में देवी-देवताओं की मूर्तियों के विभिन्न अंगों/भागों के माप का अत्यन्त विशद वर्णन मिलता है। श्रेणीःवास्तु. तंत्र साहित्य तंत्र भारतीय उपमहाद्वीप की एक वैविधतापूर्ण एवं सम्पन्न आध्यात्मिक परिपाटी है। तंत्र के अन्तर्गत विविध प्रकार के विचार एवं क्रियाकलाप आ जाते हैं। तन्यते विस्तारयते ज्ञानं अनेन् इति तन्त्रम् - अर्थात ज्ञान को इसके द्वारा तानकर विस्तारित किया जाता है, यही तंत्र है। इसका इतिहास बहुत पुराना है। समय के साथ यह परिपाटी अनेक परिवर्तनों से होकर गुजरी है और सम्प्रति अत्यन्त दकियानूसी विचारों से लेकर बहुत ही प्रगत विचारों का सम्मिश्रण है। तंत्र अपने विभिन्न रूपों में भारत, नेपाल, चीन, जापान, तिब्बत, कोरिया, कम्बोडिया, म्यांमार, इण्डोनेशिया और मंगोलिया में विद्यमान रहा है। भारतीय तंत्र साहित्य विशाल और वैचित्र्यमय साहित्य है। यह प्राचीन भी है तथा व्यापक भी। वैदिक वाङ्मय से भी किसी किसी अंश में इसकी विशालता अधिक है। चरणाव्यूह नामक ग्रंथ से वैदिक साहित्य का किंचित् परिचय मिलता है, परन्तु तन्त्र साहित्य की तुलना में उपलब्ध वैदिक साहित्य एक प्रकार से साधारण मालूम पड़ता है। तांत्रिक साहित्य का अति प्राचीन रूप लुप्त हो गया है। परन्तु उसके विस्तार का जो परिचय मिलता है उससे अनुमान किया जा सकता है कि प्राचीन काल में वैदिक साहित्य से भी इसकी विशालता अधिक थी और वैचित्र्य भी। संक्षेप में कहा जा सकता है कि परम अद्वैत विज्ञान का सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्लेषण और विवरण जैसा तंत्र ग्रंथों में है, वैसा किसी शास्त्र के ग्रंथों में नहीं है। साथ ही साथ यह भी सच है कि उच्चाटन, वशीकरण प्रभृति क्षुद्र विद्याओं का प्रयोग विषयक विवरण भी तंत्र में मिलता है। स्पष्टतः वर्तमान हिंदू समाज वेद-आश्रित होने पर भी व्यवहार-भूमि में विशेष रूप से तंत्र द्वारा ही नियंत्रित है। . 'प्रतिमा' शब्द देवविशेष, व्यक्तिविशेष अथवा पदार्थविशेष की प्रतिकृति, बिंब, मूर्ति अथवा आकृति सभी का बोधक है; परंतु यहाँ पर प्रतिमा से तात्पर्य भक्तिभावना से भावित देवविशेष की मूर्ति अथवा देवभावना से अनुप्राणित पदार्थविशेष की प्रतिकृति से है। किसी ऐतिहासिक व्यक्ति या वस्तु की तथैव अथवा काल्पनिक प्रतिकृति जो मिट्टी या पत्थर में बनाई जाए प्रतिमा कहलाती है। प्रतिमा बनाने वाले को मूर्ति शिल्पी कहते हैं और प्रतिमा बनाने के काम को मूर्ति शिल्प कहा जाता है। मंदिरों में पूजा के लिए इनकी स्थापना होती है तथा घर नगर और संस्थानों में सुंदरता के लिए इन्हें स्थापित किया जाता है। देवी देवताओं और प्रसिद्ध व्यक्तियों की प्रतिमाएँ बनाई जाती हैं। . पूर्णागिरि मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड प्रान्त के टनकपुर में अन्नपूर्णा शिखर पर पाँच हज़ार पाँच सौ फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यह एक सौ आठ सिद्ध पीठों में से एक है। यह स्थान महाकाली की पीठ माना जाता है। कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति की कन्या और शिव की अर्धांगिनी सती की नाभि का भाग यहाँ पर विष्णु चक्र से कट कर गिरा था। प्रतिवर्ष इस शक्ति पीठ की यात्रा करने आस्थावान श्रद्धालु कष्ट सहकर भी यहाँ आते हैं। . शिल्पशास्त्र वे प्राचीन हिन्दू ग्रन्थ हैं जिनमें विविध प्रकार की कलाओं तथा हस्तशिल्पों की डिजाइन और सिद्धान्त का विवेचन किया गया है। इस प्रकार की चौसठ कलाओं का उल्लेख मिलता है जिन्हे 'बाह्य-कला' कहते हैं। इनमें काष्ठकारी, स्थापत्य कला, आभूषण कला, नाट्यकला, संगीत, वैद्यक, नृत्य, काव्यशास्त्र आदि हैं। इनके अलावा चौसठ अभ्यन्तर कलाओं का भी उल्लेख मिलता है जो मुख्यतः 'काम' से सम्बन्धित हैं, जैसे चुम्बन, आलिंगन आदि। यद्यपि सभी विषय आपस में सम्बन्धित हैं किन्तु शिल्पशास्त्र में मुख्यतः मूर्तिकला और वास्तुशास्त्र में भवन, दुर्ग, मन्दिर, आवास आदि के निर्माण का वर्णन है। . शिवानन्द गोस्वामी । शिरोमणि भट्ट तंत्र-मंत्र, साहित्य, काव्यशास्त्र, आयुर्वेद, सम्प्रदाय-ज्ञान, वेद-वेदांग, कर्मकांड, धर्मशास्त्र, खगोलशास्त्र-ज्योतिष, होरा शास्त्र, व्याकरण आदि अनेक विषयों के जाने-माने विद्वान थे। इनके पूर्वज मूलतः तेलंगाना के तेलगूभाषी उच्चकुलीन पंचद्रविड़ वेल्लनाडू ब्राह्मण थे, जो उत्तर भारतीय राजा-महाराजाओं के आग्रह और निमंत्रण पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य प्रान्तों में आ कर कुलगुरु, राजगुरु, धर्मपीठ निर्देशक, आदि पदों पर आसीन हुए। शिवानन्द गोस्वामी त्रिपुर-सुन्दरी के अनन्य साधक और शक्ति-उपासक थे। एक चमत्कारिक मान्त्रिक और तांत्रिक के रूप में उनकी साधना और सिद्धियों की अनेक घटनाएँ उल्लेखनीय हैं। श्रीमद्भागवत के बाद सबसे विपुल ग्रन्थ सिंह-सिद्धांत-सिन्धु लिखने का श्रेय शिवानंद गोस्वामी को है।" . शैवसिद्धान्त, आगम शैव सम्प्रदाय तथा वैदिक शैव सम्प्रदाय का सम्मिलित सिद्धान्त है। यह द्वैत सिद्धान्त है। शैवसिद्धान्त का लक्ष्य शिव की कृपा की प्राप्ति द्वारा ज्ञानी बनना है। . सुरेन्द्र चौधरी हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में मुख्यतः कथालोचक के रूप में मान्य हैं। हिन्दी कहानी के शीर्ष आलोचकों में उनका स्थान प्रायः निर्विवाद रहा है। . हिन्दू धर्म में दर्शन अत्यन्त प्राचीन परम्परा रही है। वैदिक दर्शनों में षड्दर्शन अधिक प्रसिद्ध और प्राचीन हैं। . हिन्दू धर्म एक धर्म है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है। इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है। . हवाई का नक़्शा हवाई संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रशान्त महासागर के मध्य में स्थित एक प्रान्त है। यह अमेरिका का अकेला प्रांत है जो पूरी तरह द्वीपों से ही बना हुआ है और हवाई द्वीप समूह के अधिकांश द्वीप इसी प्रांत में सम्मिलित हैं। हवाई के आठ मुख्य द्वीप हैं, जो उत्तरपश्चिम से दक्षिणपूर्व में एक पंक्ति पर बिछे हैं। इन आठ द्वीपों के नाम हैं - नि'इहउ, कउअ'इ, ओअहू, मोलोक'इ, लान'इ, कहो'ओलवे, मउइ और हवइ'इ। इनमें हवइ'इ का द्वीप सबसे बड़ा है और पूर्ण प्रांत के नाम से भिन्न करने के लिए उसे कभी-कभी "बड़ा द्वीप" भी बुलाया जाता है। अगर बाक़ी सभी द्वीपों को मिलाया जाए तो बड़ा द्वीप उन सबके क्षेत्रफल से बड़ा है। पर्यटन और जनसँख्या की दृष्टि से चार द्वीप - ओआहू , माउइ , बड़ा द्वीप और काउआइ - हवाई के मुख्य द्वीप माने जाते हैं। हवाई की राजधानी होनोलूलू ओअहू पर स्थित है। मउइ अपने बालू-तट के लिए विख्यात है। कउअ'इ में दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित और आगम सिद्धांतों पर स्थापित एक सुन्दर शैव मंदिर है। . आगम भाषा संबंधी आगम एक प्रकार का भाषायी परिवर्तन है। इसका संबंध मुख्य रूप से ध्वनिपरिवर्तन से है। व्याकरण की आवश्यकता के बिना जब किसी शब्द में कोई ध्वनि बढ़ जाती है तब उसे आगम कहा जाता है। यह एक प्रकार की भाषायी वृद्धि है। उदाहरणार्थ "नाज' शब्द के आगे 'अ'-ध्वनि जोड़कर 'अनाज' शब्द बनाया जाता है। वास्तव में यहाँ व्याकरण की दृष्टि से 'अ'-की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि 'नाज' एवं 'अनाज' शब्दों की व्याकरणात्मक स्थिति में कोई अंतर नहीं है। इसलिए 'अनाज' में 'अ' स्वर का आगम समझा जाएगा। आगम तीन प्रकार का होता हैः स्वरागम, जिसमें स्वर की वृद्धि होती है। व्यंजनागम, जिसमें व्यंजन की वृद्धि होती है। अक्षरागम, जिसमें स्वर सहित व्यंजन की वृद्धि होती है। आगम शब्द की तीन स्थितियों में हो सकता हैः शब्द के आरंभ में, अर्थात् आदि आगम। शब्द के मध्य में, अर्थात् मध्य आगम। शब्द के अंत में, अर्थात् अंत आगम। नीचे हर प्रकार के आगम के उदाहरण दिए जा रहे हैं . हवाई प्रान्त का एक द्वीप। यहां एक सुन्दर शैव मन्दिर दक्षिण भारत की शैली में आगम अनुसार स्थापित है। . मध्य भारतीय आर्य परिवार की भाषा अर्धमागधी संस्कृत और आधुनिक भारतीय भाषाओं के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह प्राचीन काल में मगध की साहित्यिक एवं बोलचाल की भाषा थी। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने इसी भाषा में अपने धर्मोपदेश किए थे। आगे चलकर महावीर के शिष्यों ने भी महावीर के उपदेशों का संग्रह अर्धमागधी में किया जो आगम नाम से प्रसिद्ध हुए। . अष्टावक्र अष्टावक्र जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा दो हज़ार नौ में रचित एक हिन्दी महाकाव्य है। इस महाकाव्य में एक सौ आठ-एक सौ आठ पदों के आठ सर्ग हैं और इस प्रकार कुल आठ सौ चौंसठ पद हैं। महाकाव्य ऋषि अष्टावक्र की कथा प्रस्तुत करता है, जो कि रामायण और महाभारत आदि हिन्दू ग्रंथों में उपलब्ध है। महाकाव्य की एक प्रति का प्रकाशन जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया था। पुस्तक का विमोचन जनवरी चौदह, दो हज़ार दस को कवि के षष्टिपूर्ति महोत्सव के दिन किया गया। इस काव्य के नायक अष्टावक्र अपने शरीर के आठों अंगों से विकलांग हैं। महाकाव्य अष्टावक्र ऋषि की संपूर्ण जीवन यात्रा को प्रस्तुत करता है जोकि संकट से प्रारम्भ होकर सफलता से होते हुए उनके उद्धार तक जाती है। महाकवि, जो स्वयं दो मास की अल्पायु से प्रज्ञाचक्षु हैं, के अनुसार इस महाकाव्य में विकलांगों की सार्वभौम समस्याओं के समाधानात्मक सूत्र प्रस्तुत किए गए हैं। उनके अनुसार महाकाव्य के आठ सर्ग विकलांगों की आठ मनोवृत्तियों के विश्लेषण मात्र हैं।रामभद्राचार्य दो हज़ार दस, पृष्ठ क-ग। .
हेल्थ डेस्कः जब इंसान के शरीर में कोई बड़ी बीमारी होने वाली होती हैं तो उसका शरीर पहले से हीं इसारा करने लगता हैं। लेकिन लोगों को इसके बारे में सही जानकारी नहीं होने के कारण इन संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं। जिसके कारण उन्हें भविष्य में किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। आज जानने की कोशिश करेंगे इन्ही संकेतों के बारे में की अगर आपका शरीर ऐसा संकेत देता हैं तो उसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें और डॉक्टर की सहायता ले। तो आईये जानते हैं विस्तार से की शरीर के इन 4 संकेत को न करें नजरअंदाज, हो सकती है बड़ी बीमारी। 3 . अगर किसी व्यक्ति के यूरिन में ब्लड आने की समस्या होती हैं तो ये संकेत इंसान के लिए सबसे खरतनाक माना जाता हैं। इस संकेत को कभी भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। क्यों की यह संकेत शरीर में किसी बड़ी बीमारी की ओर इसारा करता हैं। जब महिलाओं के ओवरीज में संक्रमण हो जाते हैं और पुरुषों के डोर्सल भेन में संक्रमण हो जाता हैं तब यूरिन से ब्लड आते हैं। सही समय पर इसका इलाज ना करने से ये संक्रमण धीर धीरे कैंसर का रूप ले लेता हैं। जो इंसान के जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरनाक हैं। इसलिए शरीर के इस संकेत को नजरअंदाज ना करें। 4 . अगर किसी व्यक्ति के पेट में अचानक से दर्द होता हैं और उसे बार बार यूरिन करने का मन करता हैं। साथ हीं साथ यूरिन के रंग में पीलापन आ जाता हैं और यूरिन करने के दौरान झाग बनता हैं तो इस संकेत को बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। शरीर में ऐसी समस्या तभी उत्पन होती हैं जब शरीर का किडनी ठीक तरीकों से काम नहीं करता हैं। इस समस्या को नजरअंदाज करने से कभी कभी इंसान की किडनी ख़राब हो जाती हैं और इंसान को कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। इसलिए अगर आपका शरीर ऐसा संकेत देता हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
हेल्थ डेस्कः जब इंसान के शरीर में कोई बड़ी बीमारी होने वाली होती हैं तो उसका शरीर पहले से हीं इसारा करने लगता हैं। लेकिन लोगों को इसके बारे में सही जानकारी नहीं होने के कारण इन संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं। जिसके कारण उन्हें भविष्य में किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। आज जानने की कोशिश करेंगे इन्ही संकेतों के बारे में की अगर आपका शरीर ऐसा संकेत देता हैं तो उसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें और डॉक्टर की सहायता ले। तो आईये जानते हैं विस्तार से की शरीर के इन चार संकेत को न करें नजरअंदाज, हो सकती है बड़ी बीमारी। तीन . अगर किसी व्यक्ति के यूरिन में ब्लड आने की समस्या होती हैं तो ये संकेत इंसान के लिए सबसे खरतनाक माना जाता हैं। इस संकेत को कभी भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। क्यों की यह संकेत शरीर में किसी बड़ी बीमारी की ओर इसारा करता हैं। जब महिलाओं के ओवरीज में संक्रमण हो जाते हैं और पुरुषों के डोर्सल भेन में संक्रमण हो जाता हैं तब यूरिन से ब्लड आते हैं। सही समय पर इसका इलाज ना करने से ये संक्रमण धीर धीरे कैंसर का रूप ले लेता हैं। जो इंसान के जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरनाक हैं। इसलिए शरीर के इस संकेत को नजरअंदाज ना करें। चार . अगर किसी व्यक्ति के पेट में अचानक से दर्द होता हैं और उसे बार बार यूरिन करने का मन करता हैं। साथ हीं साथ यूरिन के रंग में पीलापन आ जाता हैं और यूरिन करने के दौरान झाग बनता हैं तो इस संकेत को बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। शरीर में ऐसी समस्या तभी उत्पन होती हैं जब शरीर का किडनी ठीक तरीकों से काम नहीं करता हैं। इस समस्या को नजरअंदाज करने से कभी कभी इंसान की किडनी ख़राब हो जाती हैं और इंसान को कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। इसलिए अगर आपका शरीर ऐसा संकेत देता हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
नई दिल्ली। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान (Pakistan) को करारी हार मिली है। इस हार के बाद पाकिस्तान का विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के सपने को झटका सा लग गया है। दूसरे टेस्ट मैच में श्रीलंका ने पाकिस्तान को 261 रनों पर ही समेट दिया। श्रीलंका ने 246 रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। सीरीज की बराबरी 1-1 पर छूटी। इस हार के बाद पाकिस्तान की हालत पतली है और वह अब पांचवें स्थान पर खिसक गया है। वहीं सीरीज के पहले टेस्ट मैच की जीत के साथ ही पाकिस्तान भारत को पीछे छोड़ते हुए तीसरे पायदान पर था। बाबर आजम की टीम के पास दूसरे टैस्ट मैच को जीतने के साथ ही शीर्ष-2 में जगह बनाने का सुनहरी मौका था। लेकिन उन्होंने यह मौका खो दिया। श्रीलंका की टीम ने दिमुथ करुणारत्ने (Dimuth Karunaratne) की कप्तानी में दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी की। स्पिनर प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस ने कमाल का प्रदर्शन किया। सीरीज के पहले टेस्ट को जीतने के बाद पाकिस्तान भारत (India) को पीछे छोड़कर तीसरे पायदान पर पहुंच गया था। बाबर आजम की टीम के पास दूसरे टेस्ट को जीतकर शीर्ष दो में जगह बनाने का अवसर थाए लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी। दिमुथ करुणारत्ने की कप्तानी वाली श्रीलंकाई टीम ने दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी की। स्पिनर प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस (Ramesh Mendis) ने कमाल का प्रदर्शन किया। भारतीय टीम बर्मिंघम में टेस्ट हारने के बाद चौथे स्थान पर है। आस्ट्रेलिया के बाद श्रीलंका की टीम पाकिस्तान के खिलाफ 1-1 से बराबर करने में भी सफल हुई है। चौथे स्थान पर रहते हुए भारत के 52. 08 अंक हैं। उधर पाकिस्तान की टीम के 51. 85 फीसदी अंक हैं। वहींदक्षिण अफ्रीका 71. 43 फीसदी अंक के साथ पहले स्थान पर काबिज है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के 70 फीसदी अंक हैं। ऐसे में दक्षिणी अफ्रीका टीम स्वयं को आस्ट्रेलिया की टीम से आगे देखना चाहेगी और इसके लिए उसके पास मौका भी है। इसके लिए यह टीम हरसंभव प्रयास भी करेगी।
नई दिल्ली। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान को करारी हार मिली है। इस हार के बाद पाकिस्तान का विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के सपने को झटका सा लग गया है। दूसरे टेस्ट मैच में श्रीलंका ने पाकिस्तान को दो सौ इकसठ रनों पर ही समेट दिया। श्रीलंका ने दो सौ छियालीस रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। सीरीज की बराबरी एक-एक पर छूटी। इस हार के बाद पाकिस्तान की हालत पतली है और वह अब पांचवें स्थान पर खिसक गया है। वहीं सीरीज के पहले टेस्ट मैच की जीत के साथ ही पाकिस्तान भारत को पीछे छोड़ते हुए तीसरे पायदान पर था। बाबर आजम की टीम के पास दूसरे टैस्ट मैच को जीतने के साथ ही शीर्ष-दो में जगह बनाने का सुनहरी मौका था। लेकिन उन्होंने यह मौका खो दिया। श्रीलंका की टीम ने दिमुथ करुणारत्ने की कप्तानी में दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी की। स्पिनर प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस ने कमाल का प्रदर्शन किया। सीरीज के पहले टेस्ट को जीतने के बाद पाकिस्तान भारत को पीछे छोड़कर तीसरे पायदान पर पहुंच गया था। बाबर आजम की टीम के पास दूसरे टेस्ट को जीतकर शीर्ष दो में जगह बनाने का अवसर थाए लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी। दिमुथ करुणारत्ने की कप्तानी वाली श्रीलंकाई टीम ने दूसरे मैच में जबरदस्त वापसी की। स्पिनर प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस ने कमाल का प्रदर्शन किया। भारतीय टीम बर्मिंघम में टेस्ट हारने के बाद चौथे स्थान पर है। आस्ट्रेलिया के बाद श्रीलंका की टीम पाकिस्तान के खिलाफ एक-एक से बराबर करने में भी सफल हुई है। चौथे स्थान पर रहते हुए भारत के बावन. आठ अंक हैं। उधर पाकिस्तान की टीम के इक्यावन. पचासी फीसदी अंक हैं। वहींदक्षिण अफ्रीका इकहत्तर. तैंतालीस फीसदी अंक के साथ पहले स्थान पर काबिज है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के सत्तर फीसदी अंक हैं। ऐसे में दक्षिणी अफ्रीका टीम स्वयं को आस्ट्रेलिया की टीम से आगे देखना चाहेगी और इसके लिए उसके पास मौका भी है। इसके लिए यह टीम हरसंभव प्रयास भी करेगी।
नागराकाटा : लोको पायलट ने ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक लगा कर रेल पटरी पर खड़े हाथी को बचाने में कामयाबी रहा। चंपारामारी जंगल के नागराकाटा व चालसा स्टेशन के बीच स्थित पीलर नंबर 70/6-5 के पास रेलवे लाइन के किनारे एक हाथी खड़ा था। उस समय इंटरसिटी एक्सप्रेस अलीपुरद्वार जंक्शन से सिलीगुड़ी जा रही थी। जैसे ही ट्रेन के लोको पायलट अरिंदम घोष व सह-चालक केके राजा ने हाथी को देखा, उन्होंने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाया और ट्रेन को धीमा कर दिया। रेल पटरी से हाथी जंगल की ओर चले जाने के बाद फिर लोको पायलट ने ट्रेन को गंतव्य की ओर रवाना किये। रेल सूत्रों के अनुसार दो महीने में सिलीगुड़ी से अलीपुरद्वार जंक्शन जाते वक्त डुवार्स के रेलवे रूट पर अब तक 7 बार ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं। इससे पहले 24 अक्टूबर को महानंदा जंगल के निकट सेवक व गुलमा स्टेशन के बीच कुछ ऐसी ही घटना घटी थी। उस दिन एक मालगाड़ी रेलवे ट्रैक के बीच में खड़े एक हाथी को ट्रेन का आपातकालीन ब्रेक लगाकर बचा लिया था। इस से पहले 29 व 31 अगस्त एवं 11 व 30 सितंबर को लोको पायलटों ने चार हाथियों का का प्राण बचाया था। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरद्वार मंडल के मंडल रेल प्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि जंगल रूट पर ट्रेनें हमेशा नियंत्रित गति से चलती हैं। लोको पायलटों को हमेशा सतर्क रहकर ट्रेन चलाने का सुझाव दिया गया है।
नागराकाटा : लोको पायलट ने ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक लगा कर रेल पटरी पर खड़े हाथी को बचाने में कामयाबी रहा। चंपारामारी जंगल के नागराकाटा व चालसा स्टेशन के बीच स्थित पीलर नंबर सत्तर/छः-पाँच के पास रेलवे लाइन के किनारे एक हाथी खड़ा था। उस समय इंटरसिटी एक्सप्रेस अलीपुरद्वार जंक्शन से सिलीगुड़ी जा रही थी। जैसे ही ट्रेन के लोको पायलट अरिंदम घोष व सह-चालक केके राजा ने हाथी को देखा, उन्होंने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाया और ट्रेन को धीमा कर दिया। रेल पटरी से हाथी जंगल की ओर चले जाने के बाद फिर लोको पायलट ने ट्रेन को गंतव्य की ओर रवाना किये। रेल सूत्रों के अनुसार दो महीने में सिलीगुड़ी से अलीपुरद्वार जंक्शन जाते वक्त डुवार्स के रेलवे रूट पर अब तक सात बार ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं। इससे पहले चौबीस अक्टूबर को महानंदा जंगल के निकट सेवक व गुलमा स्टेशन के बीच कुछ ऐसी ही घटना घटी थी। उस दिन एक मालगाड़ी रेलवे ट्रैक के बीच में खड़े एक हाथी को ट्रेन का आपातकालीन ब्रेक लगाकर बचा लिया था। इस से पहले उनतीस व इकतीस अगस्त एवं ग्यारह व तीस सितंबर को लोको पायलटों ने चार हाथियों का का प्राण बचाया था। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरद्वार मंडल के मंडल रेल प्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि जंगल रूट पर ट्रेनें हमेशा नियंत्रित गति से चलती हैं। लोको पायलटों को हमेशा सतर्क रहकर ट्रेन चलाने का सुझाव दिया गया है।
मुंबईः उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कम्बोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन से शनिवार को मुलाकत करके मानव संसाधन, बारूदी सुरंगों को हटाने और विकास परियोजनाओं सहित अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने पर चर्चा की। आसियान-भारत सम्मेलन से इतर दोनों देशों ने संस्कृति, वन्यजीव और स्वास्थ्य के क्षेत्र में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये। सम्मेलन को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि उन्होंने आसियान सम्मेलन के सफल अध्यक्षता के लिए कम्बोडिया के प्रधानमंत्री को बधाई दी। दोनों देशों के बीच जिन चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए हैं उनमें स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में सहयोग, जैवविविधता संरक्षण और सतत वन्यजीव प्रबंधन शामिल है। इसके तहत कम्बोडिया में फिर से बाघों को बसाने की परियोजना भी शामिल है। Hon'ble Vice President, Shri Jagdeep Dhankhar met H. E. Hun Sen, Prime Minister of Cambodia in Phnom Penh today.
मुंबईः उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कम्बोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन से शनिवार को मुलाकत करके मानव संसाधन, बारूदी सुरंगों को हटाने और विकास परियोजनाओं सहित अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने पर चर्चा की। आसियान-भारत सम्मेलन से इतर दोनों देशों ने संस्कृति, वन्यजीव और स्वास्थ्य के क्षेत्र में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये। सम्मेलन को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि उन्होंने आसियान सम्मेलन के सफल अध्यक्षता के लिए कम्बोडिया के प्रधानमंत्री को बधाई दी। दोनों देशों के बीच जिन चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए हैं उनमें स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में सहयोग, जैवविविधता संरक्षण और सतत वन्यजीव प्रबंधन शामिल है। इसके तहत कम्बोडिया में फिर से बाघों को बसाने की परियोजना भी शामिल है। Hon'ble Vice President, Shri Jagdeep Dhankhar met H. E. Hun Sen, Prime Minister of Cambodia in Phnom Penh today.
हमारे लिए यह बड़ी लज्जा और दुःखकी बात है कि महात्माजीकी मृत्यु उनके हाथों नहीं हुई जिन्हें हम उनका शत्रु समझते थे वरन अपने ही मित्रों और अपने ही देशवासीके हाथों उनकी हत्या हुई। भगवानसे हमारी प्रार्थना है कि वह बापूकी पवित्र आत्माको पूर्ण विश्राम और शांति दे तथा हमें ऐसी शक्ति दे कि हम उनके आदर्शों और उपदेशांपर चल सकें । माननीय गोपीनाथ बारदोलाई [ प्रधान मंत्री : असाम ] महात्मा गांधीक दुःखद निधनसे आज सारा देश शोक-मग्न है। उस पुण्यश्लोक महापुरुषकी पवित्र स्मृति में हम अपनी श्रद्धाञ्जलि अर्पित करते हैं। बापूके न रहनेपर आज हमारा देश एक ऐसे पथ-प्रदर्शकसे विहीन हो गया जिसमें भारत के संकट-काल में उसकी सहायता करनेकी अद्भुत क्षमता थी। वीरताके कार्यो में उनका स्थान ईसा मसीह के समान ही था । आजका दिन शोक मनानेका नहीं वरन आत्मनिरीक्षण तथा तप करनेका है। महात्माजीका निधन असामकी एक महती क्षति है। जब भी कभी असाम कठिनाई या संकटमें पड़ा, महात्माजीने सदा उसकी सहायता की भावी युग ही भलीभाँति जान सकेगा कि महात्माजी मानवताके कितने महान सेवक थे । बापूके बड़ेसे बड़े जिस स्मारककी स्थापना देश द्वारा हो सकती है, वह है महात्माजीके संदेशों और उपदेशोंको पूरा करना। गांधीजी जिस उद्देश्यकी साधना में मरे उस आपसी संदेह, घृणा और द्वेषको दूर करना हमारा सबसे पहला कर्त्तव्य है। यद्यपि उन्होंने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता प्रदान की तथापि उनकी आत्मा तबतक संतुष्ट नहीं हो पाती जबतक सांप्रदायिकताका विष समाजसे वह विनष्ट न कर देते। ईश्वर में विश्वास ही उनका प्रधान अस्त्र था जिसके सहारे वह असत् शक्ति से सदा लड़ते रहे । उनका दृढ़ विश्वास था कि असत्पर विजय पानेका साधन सत् ही होना चाहिये तथा ईश्वरपर सदा विश्वास रखना चाहिये । सत्य तथा अहिंसके द्वारा संघर्ष करते हुए भारतको स्वतंत्रता दिलाकर उन्होंने अपने सिद्धांतको पूरा कर दिखाया। जनतासे प्रार्थना है कि वह दृढ़ताके साथ गांधीजीकी शिक्षाओंका अनुसरण करे। यद्यपि शरीरतः वह हमारे बीच अब नहीं हैं तथापि उनकी आत्मा अपने स्वजनोंका आचरण सदा देखती रहेगी। गांधीजी कभी मर नहीं सकते। उनकी आत्मा अमर है। वह सबके हृदय में रहेंगे, क्योंकि वह न केवल भारतके ही वरन समस्त विश्वके थे। गांधीजीका मार्ग प्रकाशपूरा राज-पथ है; और उनके चरण-चिन्होंका अनुसरण करना हमारा कर्त्तव्य है। हमारे द्वारा महात्माजीके अस्थि-प्रवाहका संस्कार तभी पूर्ण हो सकता है जब बापूकी आत्मा अपने सिद्धांतोंको कार्यान्वित होते देखेगी। उस महापुरुपकी अपरिमित शक्ति और असीम करुणाका ध्यान आते ही हमारा हृदय उनके प्रति श्रद्धा और सम्मानसे भर उठता है। हम विश्वास दिलाते हैं कि हम वापूके आदर्शोको प्राप्त करने में अपनी समस्त शक्ति लगा देगें । सर मुहम्मद सादुल्ला [ भूतपूर्व प्रधान मन्त्री असाम ] गांधीजीकी मौखिक प्रशंसासे काम नहीं चलेगा । यदि सचमुच उस महान आत्माको श्रद्धाञ्जलि देनी है तो उनके कार्य हमें पूर्ण करने होंगे। हिंदू होते हुए भी महात्माजी इस्लाम धर्मके सिद्धांतों एवं आदर्शोंको मानते थे । १३०० वप हुए मक्कामें अरबके पैगम्बरने सत्याग्रहका उपदेश दिया था। उसीके समानान्तर महात्माजीका सत्याग्रह था। महात्माजीकी प्रार्थनामें कुरानका भी पाठ होता था; इसीसे सिद्ध है कि वह भारतमें सभी धर्मोका समन्वय चाहते थे । उस महान आत्मा के प्रति मौखिक श्रद्धा उपहासकी वस्तु है। हम चाहिये कि हम लोग मिलकर देशकी दशाको उन्नत बनाने के लिए प्रयत्न करें, साधारण जनताका स्तर ऊँचा उठावें, विभिन्न सांप्रदायों में एकता और सद्भावना बढ़ावें और इस भाँति शांति और सद्भावके नवयुगका प्रवर्त्तन करें । माननीय जे० जे० एम० निकोलस राय [ निर्माण मंत्री : असाम ] बाधूके लिए हम इससे बढ़कर और कोई कार्य नहीं कर सकते कि ईश्वर तथा मानवताकी सेवामें अपनेको उत्सर्ग कर दें; क्योंकि उनकी आत्माको इसीसे शांति मिलेगी। महात्माजी इसके लिए जीवित रहे। इससे अधिक और किसी भी बातसे उनको प्रसन्नता नहीं होगी। मैं सब लोगोंसे प्रार्थना करता हूँ, वे स्मरण रखें कि ईश्वरका अस्तित्व है, पाप तथा दुष्कृत्यके लिए दंड मिलता है, और पुण्य तथा सत्कार्य में शांति मिलती है। इसलिए आजके स्मरणीय दिवसपर हम लोगोंको निश्चय करना चाहिये कि ईश्वरकी सहायतासे प्रेम तथा सत्कार्यके बीज हम बोयेगे, अपने हृदयसे घृणा तथा बैरके भाव निकाल देंगे। हम ईश्वर से प्रार्थना करें और अपने हृदयकी परीक्षा करें कि पापका बीज उसमें न उगे । उनके मौन - दिवस इस बातवे सूचक हैं कि इनसे उन्हें अपने सहकर्मियों के साथ कार्य करनेका बल भगवान से मिलता था । इसका वे अनुभव करते थे। मौन रहनेसे उन्हें वह शक्ति प्राप्त होती थी जिसके द्वारा पवित्रता, औचित्य, प्रेम और शांतिषे शाश्वत सत्यका वास्तविक महत्त्व प्रतिष्ठित कर सकें। उनके उपवासोका नैतिक महत्त्व हुआ करता था। उनकी प्रार्थना व्यक्त करती है कि जनता के हृदयका परिवर्त्तन वे भगवानकी सहायतासे करना चाहते थे जिसके द्वारा अशांति प्रस्त राष्ट्र में ही नहीं समस्त विश्वमें सच्ची शांतिकी प्रतिष्ठा हो सके । भारतीय राष्ट्रके बापू महात्मा गांधी अनुभव करते थे कि भारतके सभी लोग तथा सभी संप्रदाय उनसे अभिन्न हैं, वे सबके हैं और सब उनके हैं । समस्त संसारके लिए उनके हृदय में करुणा थी और समस्त पीड़ित मानवताके प्रति उनका अन्तस्तल ममतासे परिपूर्ण था। ईसाके समान ही महात्माजीका आचरण भी सम्पूर्ण मानवके प्रति प्रेम, औचित्य और सद्भावनासे ओत-प्रोत था । पद-प्राप्तिकी महत्वाकांक्षा, दूसरोंके प्रति घृणा और धर्मका बिना समझे बूके अंधानुसरण करना कितना भीषण और जघन्य हो सकता है इसकी सूचना महात्माजीकी इस हत्यासे मिलती है। उनकी हत्या उस जातिके ही व्यक्तिने को, जिसे वे प्रेम करते थे। महात्माजीका यह बलिदान व्यर्थ न होगा; अपने लक्षसाधनमें उसका प्रभाव और भी शक्तिशाली होगा। भगवानसे प्रार्थना है इस हत्या द्वारा उन लोगों के हृदय भी प्रभावित हो जायँ जिनका हाथ इस षड्यंत्र में रहा । महात्माजीके समाज सुधारकी दृष्टिसे आधुनिक नैतिक जगतमें यह मृत्यु बड़ी ही शानदार रही। मन हाथ-पैरकी अपेक्षा बहुत ज्यादा काम करता है। विचार मात्र किया है विचार-रहित हिंसा हो ही नहीं सकती।" - गांधीजी माननीय रामनाथ दास [ स्वास्थ्य तथा श्रम मंत्री : असाम ] गांधीजीकी भी हत्या हो सकती है, यह हमने कभी नहीं सोचा था । यह महावलिदान अब भी हमारी आँखें खोल दे, यही कामना है । मौलाना मुहम्मद तैयब्बुल्ला [ अध्यक्ष : प्रांतीय कांग्रेस कमेटी ] अहिंसाके देवदूत महात्मा गांधीका निधन ईसाकी भाँति हुआ। सत्य और शांतिकी स्थापनाके प्रयत्नमें वे शहीद हुए। इतना ही नहीं, इस्लामकी रक्षाके लिए उन्होंने आत्म-बलिदान किया। उनका अंतिम ऐतिहासिक उपवास मुसलमानों की सुरक्षा के लिए तो 'घोषणापत्र' ही था। अत्युत्कृष्ट और महान प्रयास था जिसके द्वारा वे विनाशकारी ज्वालाको शांत और विनष्ट करना चाहते थे जो आज भारतकी करने प्रयत्नशील है। उनके दिखाये हुए भार्गपर चलकर हमें उनके लक्ष्योंकी पूर्तिके लिए प्रयत्न करना चाहिये । श्री बसन्त कुमार दास [ प्रसिद्ध काग्रेसी नेता ] भारतने अपना अनमोल रत्न खो दिया। अब वह गरीब हो गया है। गांधीजी की हत्या इतिहासका वह कलंक है, जो तभी घुल सकता है जब हम गांधीजीके पथपर चलकर उसका प्रायश्चित्त करें । श्री वैद्यनाथ मुखर्जी महात्मा गांधी हमारे राष्ट्र-पिता थे। उन्हें खोकर भारतने क्या नहीं खो दिया है ? अब रोनेके सिवा हम कर ही क्या सकते हैं।
हमारे लिए यह बड़ी लज्जा और दुःखकी बात है कि महात्माजीकी मृत्यु उनके हाथों नहीं हुई जिन्हें हम उनका शत्रु समझते थे वरन अपने ही मित्रों और अपने ही देशवासीके हाथों उनकी हत्या हुई। भगवानसे हमारी प्रार्थना है कि वह बापूकी पवित्र आत्माको पूर्ण विश्राम और शांति दे तथा हमें ऐसी शक्ति दे कि हम उनके आदर्शों और उपदेशांपर चल सकें । माननीय गोपीनाथ बारदोलाई [ प्रधान मंत्री : असाम ] महात्मा गांधीक दुःखद निधनसे आज सारा देश शोक-मग्न है। उस पुण्यश्लोक महापुरुषकी पवित्र स्मृति में हम अपनी श्रद्धाञ्जलि अर्पित करते हैं। बापूके न रहनेपर आज हमारा देश एक ऐसे पथ-प्रदर्शकसे विहीन हो गया जिसमें भारत के संकट-काल में उसकी सहायता करनेकी अद्भुत क्षमता थी। वीरताके कार्यो में उनका स्थान ईसा मसीह के समान ही था । आजका दिन शोक मनानेका नहीं वरन आत्मनिरीक्षण तथा तप करनेका है। महात्माजीका निधन असामकी एक महती क्षति है। जब भी कभी असाम कठिनाई या संकटमें पड़ा, महात्माजीने सदा उसकी सहायता की भावी युग ही भलीभाँति जान सकेगा कि महात्माजी मानवताके कितने महान सेवक थे । बापूके बड़ेसे बड़े जिस स्मारककी स्थापना देश द्वारा हो सकती है, वह है महात्माजीके संदेशों और उपदेशोंको पूरा करना। गांधीजी जिस उद्देश्यकी साधना में मरे उस आपसी संदेह, घृणा और द्वेषको दूर करना हमारा सबसे पहला कर्त्तव्य है। यद्यपि उन्होंने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता प्रदान की तथापि उनकी आत्मा तबतक संतुष्ट नहीं हो पाती जबतक सांप्रदायिकताका विष समाजसे वह विनष्ट न कर देते। ईश्वर में विश्वास ही उनका प्रधान अस्त्र था जिसके सहारे वह असत् शक्ति से सदा लड़ते रहे । उनका दृढ़ विश्वास था कि असत्पर विजय पानेका साधन सत् ही होना चाहिये तथा ईश्वरपर सदा विश्वास रखना चाहिये । सत्य तथा अहिंसके द्वारा संघर्ष करते हुए भारतको स्वतंत्रता दिलाकर उन्होंने अपने सिद्धांतको पूरा कर दिखाया। जनतासे प्रार्थना है कि वह दृढ़ताके साथ गांधीजीकी शिक्षाओंका अनुसरण करे। यद्यपि शरीरतः वह हमारे बीच अब नहीं हैं तथापि उनकी आत्मा अपने स्वजनोंका आचरण सदा देखती रहेगी। गांधीजी कभी मर नहीं सकते। उनकी आत्मा अमर है। वह सबके हृदय में रहेंगे, क्योंकि वह न केवल भारतके ही वरन समस्त विश्वके थे। गांधीजीका मार्ग प्रकाशपूरा राज-पथ है; और उनके चरण-चिन्होंका अनुसरण करना हमारा कर्त्तव्य है। हमारे द्वारा महात्माजीके अस्थि-प्रवाहका संस्कार तभी पूर्ण हो सकता है जब बापूकी आत्मा अपने सिद्धांतोंको कार्यान्वित होते देखेगी। उस महापुरुपकी अपरिमित शक्ति और असीम करुणाका ध्यान आते ही हमारा हृदय उनके प्रति श्रद्धा और सम्मानसे भर उठता है। हम विश्वास दिलाते हैं कि हम वापूके आदर्शोको प्राप्त करने में अपनी समस्त शक्ति लगा देगें । सर मुहम्मद सादुल्ला [ भूतपूर्व प्रधान मन्त्री असाम ] गांधीजीकी मौखिक प्रशंसासे काम नहीं चलेगा । यदि सचमुच उस महान आत्माको श्रद्धाञ्जलि देनी है तो उनके कार्य हमें पूर्ण करने होंगे। हिंदू होते हुए भी महात्माजी इस्लाम धर्मके सिद्धांतों एवं आदर्शोंको मानते थे । एक हज़ार तीन सौ वप हुए मक्कामें अरबके पैगम्बरने सत्याग्रहका उपदेश दिया था। उसीके समानान्तर महात्माजीका सत्याग्रह था। महात्माजीकी प्रार्थनामें कुरानका भी पाठ होता था; इसीसे सिद्ध है कि वह भारतमें सभी धर्मोका समन्वय चाहते थे । उस महान आत्मा के प्रति मौखिक श्रद्धा उपहासकी वस्तु है। हम चाहिये कि हम लोग मिलकर देशकी दशाको उन्नत बनाने के लिए प्रयत्न करें, साधारण जनताका स्तर ऊँचा उठावें, विभिन्न सांप्रदायों में एकता और सद्भावना बढ़ावें और इस भाँति शांति और सद्भावके नवयुगका प्रवर्त्तन करें । माननीय जेशून्य जेशून्य एमशून्य निकोलस राय [ निर्माण मंत्री : असाम ] बाधूके लिए हम इससे बढ़कर और कोई कार्य नहीं कर सकते कि ईश्वर तथा मानवताकी सेवामें अपनेको उत्सर्ग कर दें; क्योंकि उनकी आत्माको इसीसे शांति मिलेगी। महात्माजी इसके लिए जीवित रहे। इससे अधिक और किसी भी बातसे उनको प्रसन्नता नहीं होगी। मैं सब लोगोंसे प्रार्थना करता हूँ, वे स्मरण रखें कि ईश्वरका अस्तित्व है, पाप तथा दुष्कृत्यके लिए दंड मिलता है, और पुण्य तथा सत्कार्य में शांति मिलती है। इसलिए आजके स्मरणीय दिवसपर हम लोगोंको निश्चय करना चाहिये कि ईश्वरकी सहायतासे प्रेम तथा सत्कार्यके बीज हम बोयेगे, अपने हृदयसे घृणा तथा बैरके भाव निकाल देंगे। हम ईश्वर से प्रार्थना करें और अपने हृदयकी परीक्षा करें कि पापका बीज उसमें न उगे । उनके मौन - दिवस इस बातवे सूचक हैं कि इनसे उन्हें अपने सहकर्मियों के साथ कार्य करनेका बल भगवान से मिलता था । इसका वे अनुभव करते थे। मौन रहनेसे उन्हें वह शक्ति प्राप्त होती थी जिसके द्वारा पवित्रता, औचित्य, प्रेम और शांतिषे शाश्वत सत्यका वास्तविक महत्त्व प्रतिष्ठित कर सकें। उनके उपवासोका नैतिक महत्त्व हुआ करता था। उनकी प्रार्थना व्यक्त करती है कि जनता के हृदयका परिवर्त्तन वे भगवानकी सहायतासे करना चाहते थे जिसके द्वारा अशांति प्रस्त राष्ट्र में ही नहीं समस्त विश्वमें सच्ची शांतिकी प्रतिष्ठा हो सके । भारतीय राष्ट्रके बापू महात्मा गांधी अनुभव करते थे कि भारतके सभी लोग तथा सभी संप्रदाय उनसे अभिन्न हैं, वे सबके हैं और सब उनके हैं । समस्त संसारके लिए उनके हृदय में करुणा थी और समस्त पीड़ित मानवताके प्रति उनका अन्तस्तल ममतासे परिपूर्ण था। ईसाके समान ही महात्माजीका आचरण भी सम्पूर्ण मानवके प्रति प्रेम, औचित्य और सद्भावनासे ओत-प्रोत था । पद-प्राप्तिकी महत्वाकांक्षा, दूसरोंके प्रति घृणा और धर्मका बिना समझे बूके अंधानुसरण करना कितना भीषण और जघन्य हो सकता है इसकी सूचना महात्माजीकी इस हत्यासे मिलती है। उनकी हत्या उस जातिके ही व्यक्तिने को, जिसे वे प्रेम करते थे। महात्माजीका यह बलिदान व्यर्थ न होगा; अपने लक्षसाधनमें उसका प्रभाव और भी शक्तिशाली होगा। भगवानसे प्रार्थना है इस हत्या द्वारा उन लोगों के हृदय भी प्रभावित हो जायँ जिनका हाथ इस षड्यंत्र में रहा । महात्माजीके समाज सुधारकी दृष्टिसे आधुनिक नैतिक जगतमें यह मृत्यु बड़ी ही शानदार रही। मन हाथ-पैरकी अपेक्षा बहुत ज्यादा काम करता है। विचार मात्र किया है विचार-रहित हिंसा हो ही नहीं सकती।" - गांधीजी माननीय रामनाथ दास [ स्वास्थ्य तथा श्रम मंत्री : असाम ] गांधीजीकी भी हत्या हो सकती है, यह हमने कभी नहीं सोचा था । यह महावलिदान अब भी हमारी आँखें खोल दे, यही कामना है । मौलाना मुहम्मद तैयब्बुल्ला [ अध्यक्ष : प्रांतीय कांग्रेस कमेटी ] अहिंसाके देवदूत महात्मा गांधीका निधन ईसाकी भाँति हुआ। सत्य और शांतिकी स्थापनाके प्रयत्नमें वे शहीद हुए। इतना ही नहीं, इस्लामकी रक्षाके लिए उन्होंने आत्म-बलिदान किया। उनका अंतिम ऐतिहासिक उपवास मुसलमानों की सुरक्षा के लिए तो 'घोषणापत्र' ही था। अत्युत्कृष्ट और महान प्रयास था जिसके द्वारा वे विनाशकारी ज्वालाको शांत और विनष्ट करना चाहते थे जो आज भारतकी करने प्रयत्नशील है। उनके दिखाये हुए भार्गपर चलकर हमें उनके लक्ष्योंकी पूर्तिके लिए प्रयत्न करना चाहिये । श्री बसन्त कुमार दास [ प्रसिद्ध काग्रेसी नेता ] भारतने अपना अनमोल रत्न खो दिया। अब वह गरीब हो गया है। गांधीजी की हत्या इतिहासका वह कलंक है, जो तभी घुल सकता है जब हम गांधीजीके पथपर चलकर उसका प्रायश्चित्त करें । श्री वैद्यनाथ मुखर्जी महात्मा गांधी हमारे राष्ट्र-पिता थे। उन्हें खोकर भारतने क्या नहीं खो दिया है ? अब रोनेके सिवा हम कर ही क्या सकते हैं।
इस शो में एक्ट्रेस बहू के किरदार में नजर आईं थी। बिग बॉस 12' की विजेता बनने के बाद दीपिका कक्कड़ के पास कई सारे प्रोजेक्ट हैं, दीपिका जल्द ही एक नए शो में नजर आ सकती हैं। जयपुरः रिएलिटी शो 'बिग बॉस 12' की विनर दीपिका कक्कड़ के फैंस के लिए बुरी खबर है। दीपिका कक्कड़ इन दिनों काफी बीमार चल रही हैं। इस बात का खुलासा खुद दीपिका के पति शोएब इब्राहिम ने किया है। उनके पति ने बीमारी की जानकारी सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर करते हुए दिया है। पति शोएब द्वारा शेयर की गई फोटो में दीपिका शोएब के कंधे पर सिर रखे हुए नजर आ रही हैं। इस फोटो को शेयर करते हुए शोएब ने कैप्शन में लिखा है- 'मेरा बच्चा बीमार। ' दीपिका बुखार से जूझ रही हैं। शोएब के इस खुलासे के बाद दीपिका के फैंस उनके जल्द से जल्द ठीक होने की दुआएं करने लगे हैं। दीपिका के तबीयत खराब होने के के खुलासे के बाद शोएब ने एक और फोटो शेयर दीपिका के ठीक होने की बात कही है।
इस शो में एक्ट्रेस बहू के किरदार में नजर आईं थी। बिग बॉस बारह' की विजेता बनने के बाद दीपिका कक्कड़ के पास कई सारे प्रोजेक्ट हैं, दीपिका जल्द ही एक नए शो में नजर आ सकती हैं। जयपुरः रिएलिटी शो 'बिग बॉस बारह' की विनर दीपिका कक्कड़ के फैंस के लिए बुरी खबर है। दीपिका कक्कड़ इन दिनों काफी बीमार चल रही हैं। इस बात का खुलासा खुद दीपिका के पति शोएब इब्राहिम ने किया है। उनके पति ने बीमारी की जानकारी सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर करते हुए दिया है। पति शोएब द्वारा शेयर की गई फोटो में दीपिका शोएब के कंधे पर सिर रखे हुए नजर आ रही हैं। इस फोटो को शेयर करते हुए शोएब ने कैप्शन में लिखा है- 'मेरा बच्चा बीमार। ' दीपिका बुखार से जूझ रही हैं। शोएब के इस खुलासे के बाद दीपिका के फैंस उनके जल्द से जल्द ठीक होने की दुआएं करने लगे हैं। दीपिका के तबीयत खराब होने के के खुलासे के बाद शोएब ने एक और फोटो शेयर दीपिका के ठीक होने की बात कही है।
e-scooter Price Hike : महंगे होते पेट्रोल-डीजल से त्रस्त होकर अगर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए जरूरी खबर है. यहां भी आपको महंगाई की मार पड़नेवाली है. जी हां, आनेवाले दिनों में ई-स्कूटर्स की कीमत बढ़नेवाली है. Crisil की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की कीमत अभी के मुकाबले 45,000 रुपये तक महंगी हो सकती है. पिछले कुछ सालों में भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिमांड बढ़ी है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनियों की सेल तेजी से बढ़ी है. Crisil की रिपोर्ट कहती है कि इस समय लोगों का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की तरफ झुकाव इसलिए है क्योंकि ये फिलहाल कॉस्ट इफिशिएंट हैं और कई मॉडल्स में उपलब्ध हैं. साथ ही, लोग इन्हें घरों में भी चार्ज कर सकते हैं. पिछले एक साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल में 132 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, Joy e-bike बनानेवाली कंपनी WardWizard ने फरवरी 2022 में 4,450 यूनिट्स बेचे. कंपनी ने बीते एक साल में 1,290 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है. वहीं, लीडिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर बनानेवाली कंपनी Hero Electric के इस समय भारतीय सड़कों पर 4. 5 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स मौजूद हैं. Crisil रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग बढ़ने की मुख्य वजह सरकार द्वारा इनकी खरीद पर दिया जाने वाला सब्सिडी है. केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अच्छी-खासी सब्सिडी दी जा रही है. सरकार द्वारा चलाये नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान के तहत आनेवाले FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicle) स्कीम की वजह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद पर फिलहाल सब्सिडी दी जा रही है. इसकी वजह से इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की परचेजिंग कॉस्ट के बीच का अंतर कम किया जा रहा है. सरकार द्वारा चलायी जा रही FAME स्कीम के तहत जहां पहले फेज में 60 से 65 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही थी, उसे अब बढ़ाकर 85 प्रतिशत तक कर दिया गया है. पिछले 5 वित्त वर्ष में सब्सिडी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल की सेल में साल-दर-साल 20 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है. Crisil एनालिसिस के मुताबिक, FAME II (फेज II) 2023 में खत्म हो रहा है, जिसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर 45,000 रुपये तक महंगी हो सकती है.
e-scooter Price Hike : महंगे होते पेट्रोल-डीजल से त्रस्त होकर अगर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए जरूरी खबर है. यहां भी आपको महंगाई की मार पड़नेवाली है. जी हां, आनेवाले दिनों में ई-स्कूटर्स की कीमत बढ़नेवाली है. Crisil की रिपोर्ट के अनुसार, दो हज़ार पच्चीस तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की कीमत अभी के मुकाबले पैंतालीस,शून्य रुपयापये तक महंगी हो सकती है. पिछले कुछ सालों में भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिमांड बढ़ी है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनियों की सेल तेजी से बढ़ी है. Crisil की रिपोर्ट कहती है कि इस समय लोगों का इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ झुकाव इसलिए है क्योंकि ये फिलहाल कॉस्ट इफिशिएंट हैं और कई मॉडल्स में उपलब्ध हैं. साथ ही, लोग इन्हें घरों में भी चार्ज कर सकते हैं. पिछले एक साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल में एक सौ बत्तीस प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, Joy e-bike बनानेवाली कंपनी WardWizard ने फरवरी दो हज़ार बाईस में चार,चार सौ पचास यूनिट्स बेचे. कंपनी ने बीते एक साल में एक,दो सौ नब्बे प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है. वहीं, लीडिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर बनानेवाली कंपनी Hero Electric के इस समय भारतीय सड़कों पर चार. पाँच लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स मौजूद हैं. Crisil रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग बढ़ने की मुख्य वजह सरकार द्वारा इनकी खरीद पर दिया जाने वाला सब्सिडी है. केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अच्छी-खासी सब्सिडी दी जा रही है. सरकार द्वारा चलाये नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान के तहत आनेवाले FAME स्कीम की वजह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद पर फिलहाल सब्सिडी दी जा रही है. इसकी वजह से इंटरनल कम्बशन इंजन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की परचेजिंग कॉस्ट के बीच का अंतर कम किया जा रहा है. सरकार द्वारा चलायी जा रही FAME स्कीम के तहत जहां पहले फेज में साठ से पैंसठ प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही थी, उसे अब बढ़ाकर पचासी प्रतिशत तक कर दिया गया है. पिछले पाँच वित्त वर्ष में सब्सिडी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल की सेल में साल-दर-साल बीस प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है. Crisil एनालिसिस के मुताबिक, FAME II दो हज़ार तेईस में खत्म हो रहा है, जिसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर पैंतालीस,शून्य रुपयापये तक महंगी हो सकती है.
यीरविनोद. [ राठौड़ व कछवाहोंकी काम्यावी -७७८ सिवाना जागीरमें दिये जानेका हुक्म हुआ; इनको ताकीद कर दें, कि फ़साद और बेजा हरकत न करें, आंबेरसे हाथ खेंचकर चुप चाप बैठे; खुदाने चाहा, तो दुबारा हुजूरमें अर्ज करके जोधपुर और आंबेर इनको दिला दिये जावेंगे; हर एक अपना वकील भेजकर सनद हासिल करे. इन बातोंके दर्यापत करनेसे बहुत खुशी हासिल हुई, लेकिन नव्वाब साहिब सलामत, अस्ल हकीकृत यह है, कि ये लोग जब उदयपुरमें पहुंचे, तो मैंने सिर्फ शाहजादह साहिवके हुक्म और हज़रत शहन्शाहकी खैरख्वाहीके लिहाजसे हर तरहकी नसीहतें, जो मुनासिव नज़र आईं, उन अज़ीज़ोंको कहीं; और हुजूरमें भी इत्तिलाई अर्जी भेजकर एक महीनेसे ज़ियादह उन लोगोंको ठहरा रक्खा; लेकिन बादशाही अकारोंकी नाराज़ीके सवव कोई मल्लव दुरुस्त न हुआ. सफ़र ज़ाहिर है, कि बुजुर्ग खुदाने दुन्याके इन्तिजामको कुद्रतसे किया, और बहुत चीजें व जान्दार पैदा किये; और हर हुलाक़ेके लिये जुड़े आदमी मुकुर फर्माये हैं. इसी तरह अगले बादशाह राजपूतानाकी आमद, खर्च और इन्तिज़ामपर नज़र करके अपनी खुशीसे इस इलाकेके मौजूद आदमियोंके बुजुर्गोंको वतनकी जागीरोंके सिवाय अपने पाससे पर्गने और इन्म देते रहे हैं, जिसके सबब उन्होंने उम्दह खिझतें की हैं. इस वक्त मुल्कमें हर तरफ़ फ़साद उठ रहा है, और हर तरह कोशिश कीजाती है, लेकिन बग़ैर वतनमें जागीर मिलनेके दोनों अज़ीज़ ( जयसिंह व अजीतसिंह ) और दुर्गदास राठौड़ फुसादसे जल्द बाज़ न आवेंगे; यह खैरख्वाह मुद्दतसे आपकी खितमें एतिबार रखता है, इस वास्ते बेतकल्लुफ, जो कुछ सच नज़र आया, लिख दिया है; इस मौकेपर मुनासिव यही है, कि शाहजादह साहिवकी सिफारिशसे वतनकी जागीरोंके लिये इन लोगोंको सनद इनायत होजावे, तो बहुत मुनासिव है; आगे जिस तरह हज़रत शहनशाह की मर्जी मुबारक और बड़े अहकारोंकी खुशी हो, सबसे बिह्तर है, वकीलोंके लिये, जो फुर्माया, उसका यह हाल है, कि मैं आपके कारखानह और मकानको अपना घर जानता हूं, जल्द वकील भी आपकी खिद्मतमें हाज़िर होजाएंगे, ज़ियादह क्या तळीफ दी जाये. इसके बाद महाराजा अजीतसिंह, जयसिंह और महाराणा २ अमरसिंहकी फ़ौजने जोधपुरसे निकलकर पुष्करमें एक महीने तक मकाम रक्खा, और अजमेरके सूबहदार राजा खांसे फ़ौज खर्चके कुछ रुपये लेकर दोनों राजाओंने सांभरपर जा
यीरविनोद. [ राठौड़ व कछवाहोंकी काम्यावी -सात सौ अठहत्तर सिवाना जागीरमें दिये जानेका हुक्म हुआ; इनको ताकीद कर दें, कि फ़साद और बेजा हरकत न करें, आंबेरसे हाथ खेंचकर चुप चाप बैठे; खुदाने चाहा, तो दुबारा हुजूरमें अर्ज करके जोधपुर और आंबेर इनको दिला दिये जावेंगे; हर एक अपना वकील भेजकर सनद हासिल करे. इन बातोंके दर्यापत करनेसे बहुत खुशी हासिल हुई, लेकिन नव्वाब साहिब सलामत, अस्ल हकीकृत यह है, कि ये लोग जब उदयपुरमें पहुंचे, तो मैंने सिर्फ शाहजादह साहिवके हुक्म और हज़रत शहन्शाहकी खैरख्वाहीके लिहाजसे हर तरहकी नसीहतें, जो मुनासिव नज़र आईं, उन अज़ीज़ोंको कहीं; और हुजूरमें भी इत्तिलाई अर्जी भेजकर एक महीनेसे ज़ियादह उन लोगोंको ठहरा रक्खा; लेकिन बादशाही अकारोंकी नाराज़ीके सवव कोई मल्लव दुरुस्त न हुआ. सफ़र ज़ाहिर है, कि बुजुर्ग खुदाने दुन्याके इन्तिजामको कुद्रतसे किया, और बहुत चीजें व जान्दार पैदा किये; और हर हुलाक़ेके लिये जुड़े आदमी मुकुर फर्माये हैं. इसी तरह अगले बादशाह राजपूतानाकी आमद, खर्च और इन्तिज़ामपर नज़र करके अपनी खुशीसे इस इलाकेके मौजूद आदमियोंके बुजुर्गोंको वतनकी जागीरोंके सिवाय अपने पाससे पर्गने और इन्म देते रहे हैं, जिसके सबब उन्होंने उम्दह खिझतें की हैं. इस वक्त मुल्कमें हर तरफ़ फ़साद उठ रहा है, और हर तरह कोशिश कीजाती है, लेकिन बग़ैर वतनमें जागीर मिलनेके दोनों अज़ीज़ और दुर्गदास राठौड़ फुसादसे जल्द बाज़ न आवेंगे; यह खैरख्वाह मुद्दतसे आपकी खितमें एतिबार रखता है, इस वास्ते बेतकल्लुफ, जो कुछ सच नज़र आया, लिख दिया है; इस मौकेपर मुनासिव यही है, कि शाहजादह साहिवकी सिफारिशसे वतनकी जागीरोंके लिये इन लोगोंको सनद इनायत होजावे, तो बहुत मुनासिव है; आगे जिस तरह हज़रत शहनशाह की मर्जी मुबारक और बड़े अहकारोंकी खुशी हो, सबसे बिह्तर है, वकीलोंके लिये, जो फुर्माया, उसका यह हाल है, कि मैं आपके कारखानह और मकानको अपना घर जानता हूं, जल्द वकील भी आपकी खिद्मतमें हाज़िर होजाएंगे, ज़ियादह क्या तळीफ दी जाये. इसके बाद महाराजा अजीतसिंह, जयसिंह और महाराणा दो अमरसिंहकी फ़ौजने जोधपुरसे निकलकर पुष्करमें एक महीने तक मकाम रक्खा, और अजमेरके सूबहदार राजा खांसे फ़ौज खर्चके कुछ रुपये लेकर दोनों राजाओंने सांभरपर जा
सर्जिकल स्ट्राइक पर बनीं विकी कौशल और यामी गौतम की फिल्म 'उरी सिनेमाघरों में बंपर कमाई कर रही है. सिनेमाघरों में फिल्म हॉउसफुल चल रही है और हो भी क्यों न ? भारतीय आर्मी अफसर के गौरान्वित कारनामे को कौन नहीं जानना चाहता. सब जानते हैं कि 29 सितंबर 2016 को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी लेकिन 10 दिन के भीतर इस मिशन को कैसे अंजाम दिया गया था, यह कोई नहीं जानता. यह फिल्म उसी हकीकत को फ़िल्मी पर्दे पर दर्शा रही है. 16 जनवरी की रात मुंबई के हाई क्लास रेस्टोरेंट में फिल्म की सफलता का जश्न मनाया गया. फिल्म की पूरी स्टारकास्ट इस जश्न का हिस्सा बनीं. यामी गौतम, विकी कौशल, परेश रावल पत्नी के साथ और भी कई लोग नजर आएं. 'पटाखा' से फ़िल्मी करियर की शुरुआत करनेवाली राधिका मदान भी इस जश्न का हिस्सा बनीं. शिशिर शर्मा भी व्हाइट शर्ट और ब्लू पैंट में दिखाई दिए. 'उरी' के डायरेक्टर सिद्धार्थ धर भी पार्टी वेन्यू के बाहर स्पॉट हुए. पार्टी के दौरान सभी ने 'hows the josh' ग्राफ़िक का टी- शर्ट पहना था.
सर्जिकल स्ट्राइक पर बनीं विकी कौशल और यामी गौतम की फिल्म 'उरी सिनेमाघरों में बंपर कमाई कर रही है. सिनेमाघरों में फिल्म हॉउसफुल चल रही है और हो भी क्यों न ? भारतीय आर्मी अफसर के गौरान्वित कारनामे को कौन नहीं जानना चाहता. सब जानते हैं कि उनतीस सितंबर दो हज़ार सोलह को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी लेकिन दस दिन के भीतर इस मिशन को कैसे अंजाम दिया गया था, यह कोई नहीं जानता. यह फिल्म उसी हकीकत को फ़िल्मी पर्दे पर दर्शा रही है. सोलह जनवरी की रात मुंबई के हाई क्लास रेस्टोरेंट में फिल्म की सफलता का जश्न मनाया गया. फिल्म की पूरी स्टारकास्ट इस जश्न का हिस्सा बनीं. यामी गौतम, विकी कौशल, परेश रावल पत्नी के साथ और भी कई लोग नजर आएं. 'पटाखा' से फ़िल्मी करियर की शुरुआत करनेवाली राधिका मदान भी इस जश्न का हिस्सा बनीं. शिशिर शर्मा भी व्हाइट शर्ट और ब्लू पैंट में दिखाई दिए. 'उरी' के डायरेक्टर सिद्धार्थ धर भी पार्टी वेन्यू के बाहर स्पॉट हुए. पार्टी के दौरान सभी ने 'hows the josh' ग्राफ़िक का टी- शर्ट पहना था.
मानव शरीर स्वतंत्र रूप से सक्षम शराब का उत्पादन होता है। इथेनॉल, जो जटिल जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं, अंतर्जात शराब के रूप में जाना का एक परिणाम के रूप में हमारे शरीर में उत्पादन किया जाता है। इस सामग्री को फेफड़े और यकृत के ऊतकों में सबसे बड़ा मात्रा में केंद्रित है। एक छोटे हद तक अंतर्जात शराब शरीर के अन्य संरचनाओं में है। कई चालकों के लिए कि क्या सड़क यातायात दुर्घटनाओं के सर्वेक्षण के परिणामों पर इस तरह के एक सामग्री प्रभाव के सक्रिय विकास के सवाल में रुचि रखते हैं? सब के बाद, मौजूदा कानूनों जब खून में अल्कोहल की बहुत कम सांद्रता का पता लगाने के ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव के लिए प्रदान करते हैं। रक्त में अंतर्जात शराब - यह क्या है? पदार्थ की शारीरिक हालत में अपर्याप्त उत्पादन में परिलक्षित के रूप में? हम इन सवालों के जवाब और आलेख में और बाद में करने की कोशिश करेंगे। अंतर्जात शराब - यह क्या है? संक्षेप में बात हो रही है, अंतर्जात शराब बुलाया इथेनॉल, जो जीवन की प्रक्रिया में शरीर में ग्रंथियों द्वारा निर्मित है। वह आक्रामक स्थिति के प्रति शरीर की ऊतकों के अनुकूलन में भाग लेता है, में कार्य करता है ऊर्जा के स्रोत के रूप में यह आसान तनावपूर्ण स्थितियों से उबरने के लिए बनाता है। विशेष अध्ययन के परिणामों के रूप में, शरीर में अंतर्जात शराब सक्रिय रूप से सकारात्मक भावनात्मक राज्यों के साथ उत्पादन किया जाता है। इसके विपरीत, राशि मजबूत नकारात्मक भावनाओं के मामले में कम है। जैसे शराब के कई अलग-अलग प्रकारः - सही मायने में अंतर्जात - शराब है, जो, कम मात्रा में शरीर में कोशिकाओं द्वारा निर्मित है बाहरी उत्तेजनाओं के प्रभाव की परवाह किए बिना। जिम्मेदार पदार्थों विशेष रासायनिक यौगिक शराब डिहाइड्रोजनेज की परिभाषा के तहत जाना जाता है के उत्पादन के लिए। कहा उत्प्रेरक सबसे अंगों की कोशिकाओं में उपलब्ध है। विशेष रूप से जिगर ऊतक में अपनी उच्च सामग्री। इसलिए, इस शरीर मुख्य अंतर्जात शराब की "उत्पादक" माना जाता है। - सशर्त अंतर्जात कुछ खाद्य पदार्थों के पाचन तंत्र में दरार के प्रभाव में शरीर में गठन किया था। किन कारणों से शरीर में अंतर्जात शराब में वृद्धि के स्तर पर असर पड़ेगा? अंतर्जात शराब सक्रिय रूप से निम्नलिखित परिस्थितियों में खून में जारी किया जा सकता हैः - रोग। एक ऊंचा से डॉक्टरों द्वारा शोध के अनुसार रक्त शराब सामग्री मधुमेह, क्रोनिक ब्रोन्काइटिस के साथ लोगों को, और साथ ही जिगर और गुर्दे की बीमारी के साथ उन लोगों के रूप में प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में, शरीर में अल्कोहल की अधिकतम एकाग्रता 0. 4 पीपीएम के आदेश तक पहुँच सकते हैं। हालांकि, कहा उपाय स्वीकार्य मानकों के भीतर है। - खाद्य। इथाइल अल्कोहल के उत्पादन के लिए शरीर में सक्रिय कोशिकाओं में भोजन है कि शराब शामिल नहीं है की खपत हो सकती है। यह दही, चॉकलेट, क्वास, कुछ फलों और सब्जियों हो सकता है। - मानसिक राज्यों। जैसा कि पहले उल्लेख, सकारात्मक और नकारात्मक अनुभवों रासायनिक प्रतिक्रियाओं है कि मानव में शराब अंतर्जात फार्म को सक्रिय करें। हालांकि, सही ढंग से, मात्रात्मक रूप में इथाइल अल्कोहल के उत्पादन की निर्भरता निर्धारित करने के लिए कुछ भावनात्मक गड़बड़ी की प्रकृति के अनुसार, वैज्ञानिकों अभी भी विफल रहता है। कोई 0. 01 पीपीएम से अधिक पर अंतर्जात खड़ा की एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त शराब एकाग्रता में मौन राज्य में। वास्तव में, शरीर दिन शुद्ध इथेनॉल के बारे में 10 ग्राम के दौरान उत्पादन करने में सक्षम है। हालांकि, यह संख्या, काफी भिन्न होता है कारकों की एक संख्या के प्रभाव पर निर्भर करता है। शराब की दैनिक दर को समायोजित करने के लिए एक व्यक्ति बियर का आधा एक गिलास, वोदका की के बारे में 30 मिलीलीटर, क्वास 800 मिलीलीटर, 120 मिलीलीटर या शराब दही का 1. 5 एल का उपयोग करने के लिए पर्याप्त है। इन ढ़ाल के आदर्श की अवधारणा के अंतर्गत आते हैं। अगर अधिक नहीं, व्यक्ति के लक्षण है कि नशे की अवधारणा के अनुरूप महसूस नहीं होगी। क्यों अंतर्जात शराब शरीर के लिए आवश्यक? इथेनॉल, जो शरीर में कोशिकाओं द्वारा निर्मित हैः - यह शरीर जल्दी से अपरिचित, काफी आक्रामक पर्यावरणीय कारकों के अनुकूल करने के लिए अनुमति देता है। यह तनाव को संभालने और कठिन परिस्थितियों में नैतिक अशांति दूर करने के लिए मदद करता है। - यह शरीर की ऊतकों के लिए ऊर्जा के स्रोत के कार्य करता है। - मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के कामकाज पर सकारात्मक प्रभाव। - यह vasodilatation को बढ़ावा देता है, परिणामस्वरूप, रक्त प्रवाह, त्वरित आपूर्ति पोषक तत्वों की कोशिकाओं में सुधार होगा। - यह चयापचय की प्रक्रिया की सक्रियता प्रदान करता है। - एंडोर्फिन के उत्पादन में शामिल हैं - तो खुशी का हार्मोन कहा जाता। - यह रोग की स्थिति में नकारात्मक कारकों का विरोध करने के कक्षों की क्षमता बढ़ जाती है। शरीर में विफलताओं के कारण के रूप में अंतर्जात अल्कोहल की अनुपस्थिति शरीर की कोशिकाओं के उत्पादन के उल्लंघन व्यक्त किया है और प्रतिकूल ऊपर प्रक्रियाओं के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। खतरा यह है कि ड्राइवरों के लिए अंतर्जात शराब वहन करती है? वाहन मालिकों लोगों की श्रेणी है, जो शरीर में अल्कोहल की अनुमति दर से अधिक नहीं बहुत महत्वपूर्ण है कर रहे हैं। परिस्थितियों, तंत्रिका अधिक वोल्टेज के मामले में विशेष रूप से, कुछ खाद्य पदार्थों, ऑक्सीजन की कमी खाने, अंग, कोशिकाओं है, जो चयापचय में शामिल हैं के रोगों की उपस्थिति, रक्त में इथेनॉल की राशि में प्राकृतिक वृद्धि मनाया जा सकता है जब। कुछ स्थितियों में, वहाँ प्रभाव है कि एक व्यक्ति वोदका का एक गिलास हाल ही में उपयोग किया गया है। इस तरह के मामलों की स्थिति में, चालक साबित होता है कि वह कोई शराब ले लिया है। एक व्यक्ति पहिया पीछे प्राप्त करने से पहले शराब पीने नहीं करता है, निरीक्षण पर यह नशीली दवाओं के उपचार केंद्र के लिए यात्रा करने के लिए एक विशेष परीक्षा प्रदर्शन करने के लिए मना नहीं करना चाहिए। विफलता तो तुरंत करने के लिए, और बाद में यह उनके मामले को साबित करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उपरोक्त प्रक्रिया के बाद एक स्वतंत्र रक्त परीक्षण लेने के लिए एक निजी क्लिनिक में जाने के लिए अपने दम पर खड़ा है। इस तरह के कार्यों अदालत में एक यातायात दुर्घटना के मुकदमे में अपने ही निर्दोष साबित करने के लिए एक विश्वसनीय मकसद होगा। क्या से खाद्य पदार्थ छोड़ देना चाहिए, पहिया पीछे पाने के लिए इच्छुक? तथाकथित श्वास है, जो करने के लिए कानून प्रवर्तन अधिकारी के उपयोग के चालकों के संयम का निर्धारण करने की अनुमति के उपयोग में खून में अल्कोहल का स्तर से अधिक पुष्टि कर सकते हैं में सहाराः - घोड़ी के दूध, अल्कोहल रहित बीयर 0. 4 पीपीएम का परिणाम को जोड़ सकते हैं; - किण्वित केफिर, दही, सब्जियां या फल के साथ संयुक्त - 0. 2 पीपीएम के आदेश; - पेस्ट्री और ब्रांडी - 0. 4 पीपीएम; - क्वास - 0. 3 से 0. 6 पीपीएम तक; - चॉकलेट - 0. 1 पीपीएम; - 0. 2 पीपीएम - काले रोटी और सॉस से बना सैंडविच। अंतर्जात, बहिर्जनित शराब Corvalolum के रूप में ऐसी दवाओं, valoserdin, वेलेरियन, motherwort मिलावट के उपयोग में शरीर में केंद्रित किया जा सकता है। ड्राइवर के लिए समस्या भी तम्बाकू का उपयोग हो सकता है। अभ्यास से पता चलता है के रूप में, एक हाल ही में सिगरेट आप धूम्रपान करते हैं जितना 0. 2 पीपीएम से खून में अल्कोहल का स्तर बढ़ जाता। हम यह भी शराबियों की संतानों के बारे में बात करनी चाहिए। आनुवांशिक कारक, ऐसे व्यक्तियों के कारण शरीर में अंतर्जात शराब का अभाव है। रोग घटना गर्भ में असामान्य प्रक्रियाओं के विकास, विशेष रूप से, चयापचय की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण धीमा द्वारा समझाया जा सकता। इस तरह के बदलाव के परिणामों अक्सर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षेत्रों में बच्चों को गतिविधि की कमी प्रकट। शराबियों के बच्चे अक्सर तनाव से ग्रस्त हैं,, एक भावनात्मक कमजोरी महसूस अपने साथियों के साथ। यह उल्लेखनीय है कि बुरा आनुवंशिकता के साथ बच्चों बाद में विफल पेय पदार्थ नशीली के उपयोग के द्वारा रक्त में इथाइल अल्कोहल के लिए आवश्यक दर को बनाने वाली है। शराबियों के इस तरह के चयापचय संबंधी विकार संतानों से पीड़ित जीवन भर के लिए जिम्मेदार है। देखा जा सकता है, किसी भी व्यक्ति के शरीर में, यहां तक कि एक पूर्ण जो नशे में हो, हमेशा इथाइल अल्कोहल की कम मात्रा में होती। स्वाभाविक रूप से, सामग्री इस तरह के कम मात्रा कि नशा करने के लिए नेतृत्व नहीं करता है में निर्मित है। बारी में, नकारात्मक घटना के एक नंबर का एक कारण के रूप में अंतर्जात शराब की कमी, व्यक्त किया जा सकता, विशेष रूप से, दूसरों को मानव जीवन शक्ति की कमी, बाह्य stimuli करने के लिए मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं को धीमा,। अंत में यह ध्यान देने योग्य है कि लोगों के भारी बहुमत रक्त में अंतर्जात शराब की कमी से ग्रस्त नहीं है लायक है। इसलिए, यह विचार है कि क्या यह समझ में आता है, शराब का सहारा एक राशि है जो शरीर की शर्त पर एक हानिकारक प्रभाव पड़ता में इसका इस्तेमाल करने के लायक है।
मानव शरीर स्वतंत्र रूप से सक्षम शराब का उत्पादन होता है। इथेनॉल, जो जटिल जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं, अंतर्जात शराब के रूप में जाना का एक परिणाम के रूप में हमारे शरीर में उत्पादन किया जाता है। इस सामग्री को फेफड़े और यकृत के ऊतकों में सबसे बड़ा मात्रा में केंद्रित है। एक छोटे हद तक अंतर्जात शराब शरीर के अन्य संरचनाओं में है। कई चालकों के लिए कि क्या सड़क यातायात दुर्घटनाओं के सर्वेक्षण के परिणामों पर इस तरह के एक सामग्री प्रभाव के सक्रिय विकास के सवाल में रुचि रखते हैं? सब के बाद, मौजूदा कानूनों जब खून में अल्कोहल की बहुत कम सांद्रता का पता लगाने के ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव के लिए प्रदान करते हैं। रक्त में अंतर्जात शराब - यह क्या है? पदार्थ की शारीरिक हालत में अपर्याप्त उत्पादन में परिलक्षित के रूप में? हम इन सवालों के जवाब और आलेख में और बाद में करने की कोशिश करेंगे। अंतर्जात शराब - यह क्या है? संक्षेप में बात हो रही है, अंतर्जात शराब बुलाया इथेनॉल, जो जीवन की प्रक्रिया में शरीर में ग्रंथियों द्वारा निर्मित है। वह आक्रामक स्थिति के प्रति शरीर की ऊतकों के अनुकूलन में भाग लेता है, में कार्य करता है ऊर्जा के स्रोत के रूप में यह आसान तनावपूर्ण स्थितियों से उबरने के लिए बनाता है। विशेष अध्ययन के परिणामों के रूप में, शरीर में अंतर्जात शराब सक्रिय रूप से सकारात्मक भावनात्मक राज्यों के साथ उत्पादन किया जाता है। इसके विपरीत, राशि मजबूत नकारात्मक भावनाओं के मामले में कम है। जैसे शराब के कई अलग-अलग प्रकारः - सही मायने में अंतर्जात - शराब है, जो, कम मात्रा में शरीर में कोशिकाओं द्वारा निर्मित है बाहरी उत्तेजनाओं के प्रभाव की परवाह किए बिना। जिम्मेदार पदार्थों विशेष रासायनिक यौगिक शराब डिहाइड्रोजनेज की परिभाषा के तहत जाना जाता है के उत्पादन के लिए। कहा उत्प्रेरक सबसे अंगों की कोशिकाओं में उपलब्ध है। विशेष रूप से जिगर ऊतक में अपनी उच्च सामग्री। इसलिए, इस शरीर मुख्य अंतर्जात शराब की "उत्पादक" माना जाता है। - सशर्त अंतर्जात कुछ खाद्य पदार्थों के पाचन तंत्र में दरार के प्रभाव में शरीर में गठन किया था। किन कारणों से शरीर में अंतर्जात शराब में वृद्धि के स्तर पर असर पड़ेगा? अंतर्जात शराब सक्रिय रूप से निम्नलिखित परिस्थितियों में खून में जारी किया जा सकता हैः - रोग। एक ऊंचा से डॉक्टरों द्वारा शोध के अनुसार रक्त शराब सामग्री मधुमेह, क्रोनिक ब्रोन्काइटिस के साथ लोगों को, और साथ ही जिगर और गुर्दे की बीमारी के साथ उन लोगों के रूप में प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में, शरीर में अल्कोहल की अधिकतम एकाग्रता शून्य. चार पीपीएम के आदेश तक पहुँच सकते हैं। हालांकि, कहा उपाय स्वीकार्य मानकों के भीतर है। - खाद्य। इथाइल अल्कोहल के उत्पादन के लिए शरीर में सक्रिय कोशिकाओं में भोजन है कि शराब शामिल नहीं है की खपत हो सकती है। यह दही, चॉकलेट, क्वास, कुछ फलों और सब्जियों हो सकता है। - मानसिक राज्यों। जैसा कि पहले उल्लेख, सकारात्मक और नकारात्मक अनुभवों रासायनिक प्रतिक्रियाओं है कि मानव में शराब अंतर्जात फार्म को सक्रिय करें। हालांकि, सही ढंग से, मात्रात्मक रूप में इथाइल अल्कोहल के उत्पादन की निर्भरता निर्धारित करने के लिए कुछ भावनात्मक गड़बड़ी की प्रकृति के अनुसार, वैज्ञानिकों अभी भी विफल रहता है। कोई शून्य. एक पीपीएम से अधिक पर अंतर्जात खड़ा की एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त शराब एकाग्रता में मौन राज्य में। वास्तव में, शरीर दिन शुद्ध इथेनॉल के बारे में दस ग्राम के दौरान उत्पादन करने में सक्षम है। हालांकि, यह संख्या, काफी भिन्न होता है कारकों की एक संख्या के प्रभाव पर निर्भर करता है। शराब की दैनिक दर को समायोजित करने के लिए एक व्यक्ति बियर का आधा एक गिलास, वोदका की के बारे में तीस मिलीलीटर, क्वास आठ सौ मिलीलीटर, एक सौ बीस मिलीलीटर या शराब दही का एक. पाँच एल का उपयोग करने के लिए पर्याप्त है। इन ढ़ाल के आदर्श की अवधारणा के अंतर्गत आते हैं। अगर अधिक नहीं, व्यक्ति के लक्षण है कि नशे की अवधारणा के अनुरूप महसूस नहीं होगी। क्यों अंतर्जात शराब शरीर के लिए आवश्यक? इथेनॉल, जो शरीर में कोशिकाओं द्वारा निर्मित हैः - यह शरीर जल्दी से अपरिचित, काफी आक्रामक पर्यावरणीय कारकों के अनुकूल करने के लिए अनुमति देता है। यह तनाव को संभालने और कठिन परिस्थितियों में नैतिक अशांति दूर करने के लिए मदद करता है। - यह शरीर की ऊतकों के लिए ऊर्जा के स्रोत के कार्य करता है। - मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के कामकाज पर सकारात्मक प्रभाव। - यह vasodilatation को बढ़ावा देता है, परिणामस्वरूप, रक्त प्रवाह, त्वरित आपूर्ति पोषक तत्वों की कोशिकाओं में सुधार होगा। - यह चयापचय की प्रक्रिया की सक्रियता प्रदान करता है। - एंडोर्फिन के उत्पादन में शामिल हैं - तो खुशी का हार्मोन कहा जाता। - यह रोग की स्थिति में नकारात्मक कारकों का विरोध करने के कक्षों की क्षमता बढ़ जाती है। शरीर में विफलताओं के कारण के रूप में अंतर्जात अल्कोहल की अनुपस्थिति शरीर की कोशिकाओं के उत्पादन के उल्लंघन व्यक्त किया है और प्रतिकूल ऊपर प्रक्रियाओं के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। खतरा यह है कि ड्राइवरों के लिए अंतर्जात शराब वहन करती है? वाहन मालिकों लोगों की श्रेणी है, जो शरीर में अल्कोहल की अनुमति दर से अधिक नहीं बहुत महत्वपूर्ण है कर रहे हैं। परिस्थितियों, तंत्रिका अधिक वोल्टेज के मामले में विशेष रूप से, कुछ खाद्य पदार्थों, ऑक्सीजन की कमी खाने, अंग, कोशिकाओं है, जो चयापचय में शामिल हैं के रोगों की उपस्थिति, रक्त में इथेनॉल की राशि में प्राकृतिक वृद्धि मनाया जा सकता है जब। कुछ स्थितियों में, वहाँ प्रभाव है कि एक व्यक्ति वोदका का एक गिलास हाल ही में उपयोग किया गया है। इस तरह के मामलों की स्थिति में, चालक साबित होता है कि वह कोई शराब ले लिया है। एक व्यक्ति पहिया पीछे प्राप्त करने से पहले शराब पीने नहीं करता है, निरीक्षण पर यह नशीली दवाओं के उपचार केंद्र के लिए यात्रा करने के लिए एक विशेष परीक्षा प्रदर्शन करने के लिए मना नहीं करना चाहिए। विफलता तो तुरंत करने के लिए, और बाद में यह उनके मामले को साबित करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उपरोक्त प्रक्रिया के बाद एक स्वतंत्र रक्त परीक्षण लेने के लिए एक निजी क्लिनिक में जाने के लिए अपने दम पर खड़ा है। इस तरह के कार्यों अदालत में एक यातायात दुर्घटना के मुकदमे में अपने ही निर्दोष साबित करने के लिए एक विश्वसनीय मकसद होगा। क्या से खाद्य पदार्थ छोड़ देना चाहिए, पहिया पीछे पाने के लिए इच्छुक? तथाकथित श्वास है, जो करने के लिए कानून प्रवर्तन अधिकारी के उपयोग के चालकों के संयम का निर्धारण करने की अनुमति के उपयोग में खून में अल्कोहल का स्तर से अधिक पुष्टि कर सकते हैं में सहाराः - घोड़ी के दूध, अल्कोहल रहित बीयर शून्य. चार पीपीएम का परिणाम को जोड़ सकते हैं; - किण्वित केफिर, दही, सब्जियां या फल के साथ संयुक्त - शून्य. दो पीपीएम के आदेश; - पेस्ट्री और ब्रांडी - शून्य. चार पीपीएम; - क्वास - शून्य. तीन से शून्य. छः पीपीएम तक; - चॉकलेट - शून्य. एक पीपीएम; - शून्य. दो पीपीएम - काले रोटी और सॉस से बना सैंडविच। अंतर्जात, बहिर्जनित शराब Corvalolum के रूप में ऐसी दवाओं, valoserdin, वेलेरियन, motherwort मिलावट के उपयोग में शरीर में केंद्रित किया जा सकता है। ड्राइवर के लिए समस्या भी तम्बाकू का उपयोग हो सकता है। अभ्यास से पता चलता है के रूप में, एक हाल ही में सिगरेट आप धूम्रपान करते हैं जितना शून्य. दो पीपीएम से खून में अल्कोहल का स्तर बढ़ जाता। हम यह भी शराबियों की संतानों के बारे में बात करनी चाहिए। आनुवांशिक कारक, ऐसे व्यक्तियों के कारण शरीर में अंतर्जात शराब का अभाव है। रोग घटना गर्भ में असामान्य प्रक्रियाओं के विकास, विशेष रूप से, चयापचय की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण धीमा द्वारा समझाया जा सकता। इस तरह के बदलाव के परिणामों अक्सर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षेत्रों में बच्चों को गतिविधि की कमी प्रकट। शराबियों के बच्चे अक्सर तनाव से ग्रस्त हैं,, एक भावनात्मक कमजोरी महसूस अपने साथियों के साथ। यह उल्लेखनीय है कि बुरा आनुवंशिकता के साथ बच्चों बाद में विफल पेय पदार्थ नशीली के उपयोग के द्वारा रक्त में इथाइल अल्कोहल के लिए आवश्यक दर को बनाने वाली है। शराबियों के इस तरह के चयापचय संबंधी विकार संतानों से पीड़ित जीवन भर के लिए जिम्मेदार है। देखा जा सकता है, किसी भी व्यक्ति के शरीर में, यहां तक कि एक पूर्ण जो नशे में हो, हमेशा इथाइल अल्कोहल की कम मात्रा में होती। स्वाभाविक रूप से, सामग्री इस तरह के कम मात्रा कि नशा करने के लिए नेतृत्व नहीं करता है में निर्मित है। बारी में, नकारात्मक घटना के एक नंबर का एक कारण के रूप में अंतर्जात शराब की कमी, व्यक्त किया जा सकता, विशेष रूप से, दूसरों को मानव जीवन शक्ति की कमी, बाह्य stimuli करने के लिए मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं को धीमा,। अंत में यह ध्यान देने योग्य है कि लोगों के भारी बहुमत रक्त में अंतर्जात शराब की कमी से ग्रस्त नहीं है लायक है। इसलिए, यह विचार है कि क्या यह समझ में आता है, शराब का सहारा एक राशि है जो शरीर की शर्त पर एक हानिकारक प्रभाव पड़ता में इसका इस्तेमाल करने के लायक है।
Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फिल्म अभिनेत्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्माता नीतू चंद्रा ने शिष्टाचार मुलाकात की. उन्होंने फिल्मों के माध्यम से झारखंड के स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को आगे बढ़ाने और यहां के खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्मों की शूटिंग और स्थानीय कलाकारों को बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने की इच्छा जतायी. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि झारखंड में फिल्मों के जरिए यहां के अलग-अलग व्यवसायों को प्रमोट करने की काफी संभावनाएं हैं, और इस क्षेत्र में पूरा सहयोग करने को तैयार हूं. मुख्यमंत्री को नीतू चंद्रा ने बताया कि राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्माता नितिन एन चंद्रा के साथ मिलकर पिछले 12 वर्षों से झारखंड -बिहार की पृष्ठभूमि और यहां के अलग-अलग लोकेशंस पर फिल्म बनाते आ रहे हैं. इसी कड़ी में अब झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में स्थानीय कलाकारों के साथ फिल्म बनाने की योजना है, जो अंग्रेजी सबटाइटल के साथ होगी, ताकि यहां की कला-संस्कृति, परंपरा और अन्य विधाओं को देश -दुनिया के सामने दिखायी जा सके. मुख्यमंत्री ने इन्हें हर संभव सहयोग करने का भरोसा दिलाया.
Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फिल्म अभिनेत्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्माता नीतू चंद्रा ने शिष्टाचार मुलाकात की. उन्होंने फिल्मों के माध्यम से झारखंड के स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को आगे बढ़ाने और यहां के खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्मों की शूटिंग और स्थानीय कलाकारों को बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने की इच्छा जतायी. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि झारखंड में फिल्मों के जरिए यहां के अलग-अलग व्यवसायों को प्रमोट करने की काफी संभावनाएं हैं, और इस क्षेत्र में पूरा सहयोग करने को तैयार हूं. मुख्यमंत्री को नीतू चंद्रा ने बताया कि राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्माता नितिन एन चंद्रा के साथ मिलकर पिछले बारह वर्षों से झारखंड -बिहार की पृष्ठभूमि और यहां के अलग-अलग लोकेशंस पर फिल्म बनाते आ रहे हैं. इसी कड़ी में अब झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में स्थानीय कलाकारों के साथ फिल्म बनाने की योजना है, जो अंग्रेजी सबटाइटल के साथ होगी, ताकि यहां की कला-संस्कृति, परंपरा और अन्य विधाओं को देश -दुनिया के सामने दिखायी जा सके. मुख्यमंत्री ने इन्हें हर संभव सहयोग करने का भरोसा दिलाया.
हेदी क्लम हेलोवीन की पूजा करता है और हर साल इसे महान दायरे के साथ मनाता है। अब मॉडल पार्टी की तैयारी में व्यस्त है और छुट्टी के लिए एक शानदार पोशाक "conjures" है। जर्मन सुपरमॉडल सार्वजनिक हित को गर्म करने के लिए, सोशल नेटवर्क में पेज पर पोस्ट किए गए अपने नए सूट की कुछ तस्वीरें। Instagram में स्नैपशॉट बहुत जानकारीपूर्ण नहीं थे। उन पर लड़की मिट्टी के समान अज्ञात पदार्थ के साथ पूरी तरह से smeared था, और फिर सूख गया। हाल ही में, क्लम ने संवाददाताओं से कहा कि वह कलाकार माइक मैरिनो और डिजाइनर क्रिस्टीन सिरिआनो के साथ पोशाक पर काम कर रही थीं, जिन्होंने प्रोजेक्ट पोडियम शो जीता था, और पत्रकारों को कुछ रोचक तस्वीरों के साथ भी प्रदान किया जो हेइडी के गुप्त पोशाक पर पर्दे का खुलासा करते थे। Klum ने कहा, साथ में हम एक असामान्य और अद्भुत वस्त्र के साथ आया जो सभी पुरुष कल्पनाओं को अवशोषित करता है। पोशाक के लिए, मैरिनो और उनके सहायक ने आंखों को छोड़कर स्टार के शरीर के सभी हिस्सों को कास्ट किया। अपरिहार्य शीर्ष मॉडल को हेलोवीन की रानी को सही ढंग से माना जाता है। जो भी हेदी नहीं था . . . प्रशंसकों को विशेष रूप से बिल्ली की पोशाक को तेज फेंग, रक्तपात करने वाली देवी काली, त्वचा के बिना मानव मस्तिष्क की छवि के साथ याद है।
हेदी क्लम हेलोवीन की पूजा करता है और हर साल इसे महान दायरे के साथ मनाता है। अब मॉडल पार्टी की तैयारी में व्यस्त है और छुट्टी के लिए एक शानदार पोशाक "conjures" है। जर्मन सुपरमॉडल सार्वजनिक हित को गर्म करने के लिए, सोशल नेटवर्क में पेज पर पोस्ट किए गए अपने नए सूट की कुछ तस्वीरें। Instagram में स्नैपशॉट बहुत जानकारीपूर्ण नहीं थे। उन पर लड़की मिट्टी के समान अज्ञात पदार्थ के साथ पूरी तरह से smeared था, और फिर सूख गया। हाल ही में, क्लम ने संवाददाताओं से कहा कि वह कलाकार माइक मैरिनो और डिजाइनर क्रिस्टीन सिरिआनो के साथ पोशाक पर काम कर रही थीं, जिन्होंने प्रोजेक्ट पोडियम शो जीता था, और पत्रकारों को कुछ रोचक तस्वीरों के साथ भी प्रदान किया जो हेइडी के गुप्त पोशाक पर पर्दे का खुलासा करते थे। Klum ने कहा, साथ में हम एक असामान्य और अद्भुत वस्त्र के साथ आया जो सभी पुरुष कल्पनाओं को अवशोषित करता है। पोशाक के लिए, मैरिनो और उनके सहायक ने आंखों को छोड़कर स्टार के शरीर के सभी हिस्सों को कास्ट किया। अपरिहार्य शीर्ष मॉडल को हेलोवीन की रानी को सही ढंग से माना जाता है। जो भी हेदी नहीं था . . . प्रशंसकों को विशेष रूप से बिल्ली की पोशाक को तेज फेंग, रक्तपात करने वाली देवी काली, त्वचा के बिना मानव मस्तिष्क की छवि के साथ याद है।
नलखेड़ा। माहेश्वरी समाज की महिलाओं द्वारा कजरी तीज मनाई गई। इस दिन महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा की गई। माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने बताया कि रविवार को तीज के दिन परंपरा अनुसार सातुड़ी तीज के रूप में महिलाओं द्वारा दिन भर निर्जला व्रत रखा जाता है रात को महिलाओं द्वारा नीमड़ी की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा उदय होने के बाद महिलाएं रात में चंद्रमा की पूजा अर्चना व चंद्र दर्शन कर सत्तू को पति के हाथों के द्वारा केक की तरह काटा जाता है। ज्योति चांडक ने बताया कि माहेश्वरी समाज में तीज के त्यौहार को बड़ा महत्व माना जाता है। कालीसिंध। पाड़ली, घुंसी व आसपास के क्षेत्रों में रविवार को महिलाओं व कन्याओं ने कजरी तीज मनाई। सुबह से महिलाओं ने अपने घर -परिवार में कजरी तीज माता की प्रतिमाओं का आकर्षक श्रृंगार किया। दोपहर पश्चात मंदिरों, चौराहे एवं तालाबों पर एकत्रित होकर तीज माता को सिर पर रखकर नृत्य किया, भक्ति गीत गाए व कथा पाठ किया। सभी ने धार्मिक परंपरानुसार तीज माता की पूजन की, नदी, नालो, तालाबों पर जाकर जवारे का विसर्जन किया, प्रतिमा का भी पूजन किया। आगर मालवा। विवाहिता को जबरन कीटनाशक दवा पिलाने के मामले में पुलिस ने महिला के पति व ससुराल वालों पर प्रकरण दर्ज किया हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम उमरपुर की रहने वाली सावित्री बाई का विवाह गुरूखेड़ी निवासी कमल मालवीय के साथ हुआ था। विवाहिता का आरोप है कि उसके ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करते हुए मारपीट करते थे तथा जान से मारने की धोंस देते थे। गत 25 जुलाई को पति कमल पिता उदालाल मालवीय, सास गंगाबाई तथा जेठ देवीलाल व घनश्याम ने जान से मारने की धोंस देते हुए सावित्री बाई का मुह पकड़कर जहरीली कीटनाशक इल्लीमार दवाई उसके मुह में डाल दी। जिसके कारण फरियादी को ईलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। पुलिस ने धारा 428ए, 328, 383, 294, 506, 34 आईपीसी के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज किया हैं। नलखेड़ा। कलेक्टर अवधेश शर्मा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डीएस रणदा के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम अंतर्गत मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा संचालित बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं को शासकीय महाविद्यालय नलखेड़ा में जिला समन्वयक जन अभियान परिषद प्रेमसिंह चौहान ने हर घर तिरंगा अभियान के बारे में जानकारी दी। साथ ही अंकुर अभियान के बारे में बताया गया। जिसमें वायूदूत एप्प डाउनलोड कर पंजीयन के बारे में समझाया तथा प्रत्येक छात्र छात्राओं को 50-50 रजिस्ट्रेशन एवं पौधे लगाकर एप में अपलोड करने के लिए कहा गया।
नलखेड़ा। माहेश्वरी समाज की महिलाओं द्वारा कजरी तीज मनाई गई। इस दिन महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा की गई। माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने बताया कि रविवार को तीज के दिन परंपरा अनुसार सातुड़ी तीज के रूप में महिलाओं द्वारा दिन भर निर्जला व्रत रखा जाता है रात को महिलाओं द्वारा नीमड़ी की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा उदय होने के बाद महिलाएं रात में चंद्रमा की पूजा अर्चना व चंद्र दर्शन कर सत्तू को पति के हाथों के द्वारा केक की तरह काटा जाता है। ज्योति चांडक ने बताया कि माहेश्वरी समाज में तीज के त्यौहार को बड़ा महत्व माना जाता है। कालीसिंध। पाड़ली, घुंसी व आसपास के क्षेत्रों में रविवार को महिलाओं व कन्याओं ने कजरी तीज मनाई। सुबह से महिलाओं ने अपने घर -परिवार में कजरी तीज माता की प्रतिमाओं का आकर्षक श्रृंगार किया। दोपहर पश्चात मंदिरों, चौराहे एवं तालाबों पर एकत्रित होकर तीज माता को सिर पर रखकर नृत्य किया, भक्ति गीत गाए व कथा पाठ किया। सभी ने धार्मिक परंपरानुसार तीज माता की पूजन की, नदी, नालो, तालाबों पर जाकर जवारे का विसर्जन किया, प्रतिमा का भी पूजन किया। आगर मालवा। विवाहिता को जबरन कीटनाशक दवा पिलाने के मामले में पुलिस ने महिला के पति व ससुराल वालों पर प्रकरण दर्ज किया हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम उमरपुर की रहने वाली सावित्री बाई का विवाह गुरूखेड़ी निवासी कमल मालवीय के साथ हुआ था। विवाहिता का आरोप है कि उसके ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करते हुए मारपीट करते थे तथा जान से मारने की धोंस देते थे। गत पच्चीस जुलाई को पति कमल पिता उदालाल मालवीय, सास गंगाबाई तथा जेठ देवीलाल व घनश्याम ने जान से मारने की धोंस देते हुए सावित्री बाई का मुह पकड़कर जहरीली कीटनाशक इल्लीमार दवाई उसके मुह में डाल दी। जिसके कारण फरियादी को ईलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। पुलिस ने धारा चार सौ अट्ठाईसए, तीन सौ अट्ठाईस, तीन सौ तिरासी, दो सौ चौरानवे, पाँच सौ छः, चौंतीस आईपीसी के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज किया हैं। नलखेड़ा। कलेक्टर अवधेश शर्मा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डीएस रणदा के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम अंतर्गत मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा संचालित बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं को शासकीय महाविद्यालय नलखेड़ा में जिला समन्वयक जन अभियान परिषद प्रेमसिंह चौहान ने हर घर तिरंगा अभियान के बारे में जानकारी दी। साथ ही अंकुर अभियान के बारे में बताया गया। जिसमें वायूदूत एप्प डाउनलोड कर पंजीयन के बारे में समझाया तथा प्रत्येक छात्र छात्राओं को पचास-पचास रजिस्ट्रेशन एवं पौधे लगाकर एप में अपलोड करने के लिए कहा गया।
आपके दिल के बारे में कुछ चीजें ब्रेनर नहीं हैंः व्यायाम इसे स्वस्थ रखता है, और बहुत अधिक वजन कम होता है। लेकिन आपके दिल के बारे में कई अन्य आश्चर्यजनक तथ्य हैं जिन्हें आप शायद कभी नहीं जानते थे। (उदाहरण के लिए, जब आप गठबंधन के प्रतिज्ञा के दौरान अपने दिल पर अपना हाथ डालते हैं, तो आपका स्थान थोड़ा सा से अधिक होता है।) अपने शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों के अजीब और आकर्षक कामकाज के बारे में और जानने के लिए उपरोक्त वीडियो देखें। आपके दिल के बारे में कुछ चीजें ब्रेनर नहीं हैंः व्यायाम इसे स्वस्थ रखता है, और बहुत अधिक वजन कम होता है।
आपके दिल के बारे में कुछ चीजें ब्रेनर नहीं हैंः व्यायाम इसे स्वस्थ रखता है, और बहुत अधिक वजन कम होता है। लेकिन आपके दिल के बारे में कई अन्य आश्चर्यजनक तथ्य हैं जिन्हें आप शायद कभी नहीं जानते थे। अपने शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों के अजीब और आकर्षक कामकाज के बारे में और जानने के लिए उपरोक्त वीडियो देखें। आपके दिल के बारे में कुछ चीजें ब्रेनर नहीं हैंः व्यायाम इसे स्वस्थ रखता है, और बहुत अधिक वजन कम होता है।
एक RTI में खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इलाज पर होने वाले खर्च का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अपने पैसे से करते हैं। आरोपित अनस ने छात्रा के कॉलेज में घुसकर सबसे सामने उसे बेइज्जत किया। विरोध करने पर उसे तेजाब से नहलाने और उसका सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। वीडियो में साफ सुन सकते हैं कि ये व्यक्ति कहता है, "मैं पागल हूँ। मैं तो तुमको काटकर फेंक दूँगा अभी. . . तुम पर तौहीन-ए-रिसालत (ईशनिंदा) लगाऊँगा। " जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इसके बाद से स्थानीय हिंदू डरे हुए हैं और सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। ऑपइंडिया की खबर के बाद झारखंड के जमशेदपुर में मानगो स्थित गुरुद्वारे ने भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकवादी कहने वाले पोस्टर को हटा दिया है। कोर्ट में इतने पुराने मुकदमे लंबित हैं कि उन केसों से कम उम्र तो सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान सभी 27 न्यायाधीश हैं। कुछ केस तो 70 साल पुराने हैं। उत्तराखंड के जोशीमठ की ताज़ा परिस्थिति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है। फिलहाल, इस क्षेत्र को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के नियमों को तैयार और लागू करने के लिए गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार दिया गया है।
एक RTI में खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इलाज पर होने वाले खर्च का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अपने पैसे से करते हैं। आरोपित अनस ने छात्रा के कॉलेज में घुसकर सबसे सामने उसे बेइज्जत किया। विरोध करने पर उसे तेजाब से नहलाने और उसका सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। वीडियो में साफ सुन सकते हैं कि ये व्यक्ति कहता है, "मैं पागल हूँ। मैं तो तुमको काटकर फेंक दूँगा अभी. . . तुम पर तौहीन-ए-रिसालत लगाऊँगा। " जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इसके बाद से स्थानीय हिंदू डरे हुए हैं और सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। ऑपइंडिया की खबर के बाद झारखंड के जमशेदपुर में मानगो स्थित गुरुद्वारे ने भारतीय सेना को हिंदुत्व आतंकवादी कहने वाले पोस्टर को हटा दिया है। कोर्ट में इतने पुराने मुकदमे लंबित हैं कि उन केसों से कम उम्र तो सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान सभी सत्ताईस न्यायाधीश हैं। कुछ केस तो सत्तर साल पुराने हैं। उत्तराखंड के जोशीमठ की ताज़ा परिस्थिति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है। फिलहाल, इस क्षेत्र को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को तैयार और लागू करने के लिए गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार दिया गया है।
mpresults. nic. in : मंदसौर। मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हुए। इसमें मंदसौर जिले के 6 विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची में स्थान बनाया है। प्रदेश में मंदसौर जिला 12वें स्थान पर है। खास बात यह है कि इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है। mpresults. nic. in : जिले में 12वीं का परीक्षा परिणाम 57. 93 फीसदी रहा जबकि 10वीं का परीक्षा परिणाम 66. 97 फीसदी रहा। जिले की अंजली गुप्ता मिस्टी सोनी और नंदिनी बैरागी ने 12वीं में मेरिट सूची में स्थान बनाया है जबकि दसवीं की मेरिट सूची में महिमा महेश्वरी हिमानी पाटीदार और वैदिक वेद ने प्रावीण्य सूची में स्थान पाया है।
mpresults. nic. in : मंदसौर। मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित हुए। इसमें मंदसौर जिले के छः विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची में स्थान बनाया है। प्रदेश में मंदसौर जिला बारहवें स्थान पर है। खास बात यह है कि इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है। mpresults. nic. in : जिले में बारहवीं का परीक्षा परिणाम सत्तावन. तिरानवे फीसदी रहा जबकि दसवीं का परीक्षा परिणाम छयासठ. सत्तानवे फीसदी रहा। जिले की अंजली गुप्ता मिस्टी सोनी और नंदिनी बैरागी ने बारहवीं में मेरिट सूची में स्थान बनाया है जबकि दसवीं की मेरिट सूची में महिमा महेश्वरी हिमानी पाटीदार और वैदिक वेद ने प्रावीण्य सूची में स्थान पाया है।
लैटिन शब्द ट्रिट्यूरे हमारी भाषा में क्रश के रूप में आया। यह क्रिया किसी भौतिक या प्रतीकात्मक अर्थ में किसी चीज को छिन्न-भिन्न, विघटित या क्रश करने के लिए संदर्भित करती है। उदाहरण के लिएः "हलवा बनाने के लिए, पहले हमें चॉकलेट कुकीज़ को कुचलना होगा", "जैतून पीसने के बाद, हमें थोड़ा तेल डालना होगा", "विपक्ष ने सरकार पर राष्ट्रीय संविधान को कुचलने का आरोप लगाया । "हालांकि, सबसे सफल संस्करण तथाकथित मिनीपिमर (नाम है जो कंपनी के संक्षिप्त रूप में "पेक्वनास इंडसेंटस मैकैनिको एलेक्ट्रिकस रेनिडास" के जवाब में है), जिसे 1959 में बाजार में लॉन्च किया गया था; यह कई स्पेनिश बोलने वाले देशों में जाना जाता है, हालांकि कई लोग नहीं जानते हैं कि यह एक विदेशी भाषा में एक नाम नहीं है। कुछ समय बाद, कंपनी ने इस विशेष घरेलू उपकरण का निर्माण किया, जो अन्य कार्यों के साथ-साथ पिटाई, द्रवीकरण और कुचलने में सक्षम था, जिसे ब्रौन जीएमबीएच द्वारा अधिग्रहित किया गया था। मिनीपिमर को इतना आकर्षक बनाने वाला विस्तार इसका लचीलापन है, क्योंकि यह विशेष रूप से इसके संचालन के लिए सहायक उपकरण की श्रृंखला पर निर्भर नहीं करता है; हालांकि इसमें आम तौर पर एक ग्लास और एक आधार शामिल होता है, जिसकी उपयोगिता को बढ़ाने के लिए ब्लेड के साथ, किसी भी कंटेनर में इसका उपयोग करना संभव है और प्रत्येक उपयोग के बाद रिंसिंग से परे बहुत सख्त रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है। एक प्रतीकात्मक अर्थ में, श्रेडिंग किसी अन्य व्यक्ति के बयानों या विचारों पर अपने तर्क थोपने के इरादे से हमला करने से जुड़ा होता हैः "डिप्टी दर्जनों दस्तावेज दिखाकर आरोपों को झटकने में कामयाब रहे", "आप सभी को कुचलने के लिए क्यों जोर देते हैं" मेरे प्रोजेक्ट्स? " खेल में, श्रेडिंग को महान परिमाण की हार प्रदान करने के लिए भी जोड़ा जा सकता हैः "स्थानीय टीम अपने प्रतिद्वंद्वी को कुचलने के लिए लौट आईः इस बार 156 से 70 से जीता", "प्रतिद्वंद्वी को कुचलने की कोई आवश्यकता नहीं है, मैं जीतने से संतुष्ट हूं" ।
लैटिन शब्द ट्रिट्यूरे हमारी भाषा में क्रश के रूप में आया। यह क्रिया किसी भौतिक या प्रतीकात्मक अर्थ में किसी चीज को छिन्न-भिन्न, विघटित या क्रश करने के लिए संदर्भित करती है। उदाहरण के लिएः "हलवा बनाने के लिए, पहले हमें चॉकलेट कुकीज़ को कुचलना होगा", "जैतून पीसने के बाद, हमें थोड़ा तेल डालना होगा", "विपक्ष ने सरकार पर राष्ट्रीय संविधान को कुचलने का आरोप लगाया । "हालांकि, सबसे सफल संस्करण तथाकथित मिनीपिमर , जिसे एक हज़ार नौ सौ उनसठ में बाजार में लॉन्च किया गया था; यह कई स्पेनिश बोलने वाले देशों में जाना जाता है, हालांकि कई लोग नहीं जानते हैं कि यह एक विदेशी भाषा में एक नाम नहीं है। कुछ समय बाद, कंपनी ने इस विशेष घरेलू उपकरण का निर्माण किया, जो अन्य कार्यों के साथ-साथ पिटाई, द्रवीकरण और कुचलने में सक्षम था, जिसे ब्रौन जीएमबीएच द्वारा अधिग्रहित किया गया था। मिनीपिमर को इतना आकर्षक बनाने वाला विस्तार इसका लचीलापन है, क्योंकि यह विशेष रूप से इसके संचालन के लिए सहायक उपकरण की श्रृंखला पर निर्भर नहीं करता है; हालांकि इसमें आम तौर पर एक ग्लास और एक आधार शामिल होता है, जिसकी उपयोगिता को बढ़ाने के लिए ब्लेड के साथ, किसी भी कंटेनर में इसका उपयोग करना संभव है और प्रत्येक उपयोग के बाद रिंसिंग से परे बहुत सख्त रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है। एक प्रतीकात्मक अर्थ में, श्रेडिंग किसी अन्य व्यक्ति के बयानों या विचारों पर अपने तर्क थोपने के इरादे से हमला करने से जुड़ा होता हैः "डिप्टी दर्जनों दस्तावेज दिखाकर आरोपों को झटकने में कामयाब रहे", "आप सभी को कुचलने के लिए क्यों जोर देते हैं" मेरे प्रोजेक्ट्स? " खेल में, श्रेडिंग को महान परिमाण की हार प्रदान करने के लिए भी जोड़ा जा सकता हैः "स्थानीय टीम अपने प्रतिद्वंद्वी को कुचलने के लिए लौट आईः इस बार एक सौ छप्पन से सत्तर से जीता", "प्रतिद्वंद्वी को कुचलने की कोई आवश्यकता नहीं है, मैं जीतने से संतुष्ट हूं" ।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जबरन धर्मांतरण का मुद्दा व्यापक प्रभाव वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और वह याचिका पर कोई राय बनाने या सरकार को नोटिस जारी करने से पहले विषय की गहराई से पड़ताल करना चाहती है। याचिका के जरिये, भयादोहन कर या तोहफे एवं धन के जरिये प्रलोभन के द्वारा किये जाने वाले धर्मांतरण को प्रतिबंधित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अदालत अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि भय दिखाकर धर्मांतरण करना न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का उल्लंघन करता है बल्कि पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ भी है, जो कि संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह के अनुरोध का क्या आधार है और जबरन धर्मांतरण के आंकड़े कहां हैं तथा इस तरह के धर्मांतरण की संख्या कितनी है? केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा महत्वपूर्ण है। इस पर पीठ ने कहा कि यह व्यापक प्रभाव वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अदालत कोई राय बनाने से पहले इसकी गहराई से पड़ताल करना चाहती है। अदालत ने याचिका की आगे की सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख निर्धारित कर दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जबरन धर्मांतरण का मुद्दा व्यापक प्रभाव वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और वह याचिका पर कोई राय बनाने या सरकार को नोटिस जारी करने से पहले विषय की गहराई से पड़ताल करना चाहती है। याचिका के जरिये, भयादोहन कर या तोहफे एवं धन के जरिये प्रलोभन के द्वारा किये जाने वाले धर्मांतरण को प्रतिबंधित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अदालत अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि भय दिखाकर धर्मांतरण करना न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद चौदह,पंद्रह,इक्कीस और पच्चीस का उल्लंघन करता है बल्कि पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ भी है, जो कि संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस तरह के अनुरोध का क्या आधार है और जबरन धर्मांतरण के आंकड़े कहां हैं तथा इस तरह के धर्मांतरण की संख्या कितनी है? केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा महत्वपूर्ण है। इस पर पीठ ने कहा कि यह व्यापक प्रभाव वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अदालत कोई राय बनाने से पहले इसकी गहराई से पड़ताल करना चाहती है। अदालत ने याचिका की आगे की सुनवाई के लिए पच्चीस जुलाई की तारीख निर्धारित कर दी।
मुंबईः राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) के आवास पर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। कॉलर (Caller) ने पवार के सिल्वर ओक्स घर पर फोन किया और हिंदी भाषा में धमकी दी कि वह मुंबई आएगा और देसी पिस्तौल से उन्हें गोली मार देगा। एहतियात के तौर पर NCP नेता के सुरक्षा दस्ते ने गामदेवी पुलिस थाने में शिकायत (Complaint) दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। राकांपा (NCP) के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि फोन करने वाला मानसिक रूप (Mental Form) से अस्थिर प्रतीत होता है, जो नियमित अंतराल पर पवार के आवास पर फोन करता रहता है और इस तरह की धमकी देता है। तापसे ने कहा, पिछले कुछ दिनों में उसने कई बार फोन किया और इसी तरह की धमकी दी। पुलिस को सूचित कर दिया गया है। पवार के सोमवार को अपना 82वां जन्मदिन मनाने के एक दिन बाद यह फोन आया, जिसमें एनसीपी कांग्रेस (NCP Congress) और शिवसेना (UBT) के शीर्ष नेताओं और अन्य शुभचिंतकों ने भाग लिया। पहले भी, पवार को इस तरह की धमकियां मिल चुकी है। अप्रैल में उनके आवास पर महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने, जो हड़ताल पर थे, हमला किया था।
मुंबईः राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के आवास पर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। कॉलर ने पवार के सिल्वर ओक्स घर पर फोन किया और हिंदी भाषा में धमकी दी कि वह मुंबई आएगा और देसी पिस्तौल से उन्हें गोली मार देगा। एहतियात के तौर पर NCP नेता के सुरक्षा दस्ते ने गामदेवी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। राकांपा के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि फोन करने वाला मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत होता है, जो नियमित अंतराल पर पवार के आवास पर फोन करता रहता है और इस तरह की धमकी देता है। तापसे ने कहा, पिछले कुछ दिनों में उसने कई बार फोन किया और इसी तरह की धमकी दी। पुलिस को सूचित कर दिया गया है। पवार के सोमवार को अपना बयासीवां जन्मदिन मनाने के एक दिन बाद यह फोन आया, जिसमें एनसीपी कांग्रेस और शिवसेना के शीर्ष नेताओं और अन्य शुभचिंतकों ने भाग लिया। पहले भी, पवार को इस तरह की धमकियां मिल चुकी है। अप्रैल में उनके आवास पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने, जो हड़ताल पर थे, हमला किया था।
मुंबईः रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी भी निभा रही है। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवराज मानसपुरे के अनुसार, मध्य रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सरकार के साथ समन्वय कर 194 बच्चों को बचाया है. मार्च-2023 से अप्रैल-2023 तक यानी "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" के तहत मध्य रेलवे के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्मों से रेलवे पुलिस और अन्य फ्रंटलाइन रेलवे कर्मचारी। इसमें 144 साल के लड़के और 50 लड़कियां शामिल हैं और चाइल्डलाइन जैसे गैर सरकारी संगठनों की मदद से अपने माता-पिता के साथ फिर से जुड़ गए हैं। जो बच्चे अपने परिवार को बताए बिना रेलवे स्टेशन पर आते हैं, किसी लड़ाई या पारिवारिक मुद्दों के कारण या बेहतर जीवन या शहर के ग्लैमर आदि की तलाश में प्रशिक्षित आरपीएफ कर्मियों द्वारा ढूंढे जाते हैं। ये प्रशिक्षित आरपीएफ कर्मी बच्चों से जुड़ते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और उन्हें उनके माता-पिता से मिलाने की सलाह देते हैं। कई माता-पिता रेलवे की इस नेक सेवा के लिए गहरा आभार और आभार व्यक्त करते हैं।
मुंबईः रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी भी निभा रही है। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवराज मानसपुरे के अनुसार, मध्य रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल ने सरकार के साथ समन्वय कर एक सौ चौरानवे बच्चों को बचाया है. मार्च-दो हज़ार तेईस से अप्रैल-दो हज़ार तेईस तक यानी "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" के तहत मध्य रेलवे के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्मों से रेलवे पुलिस और अन्य फ्रंटलाइन रेलवे कर्मचारी। इसमें एक सौ चौंतालीस साल के लड़के और पचास लड़कियां शामिल हैं और चाइल्डलाइन जैसे गैर सरकारी संगठनों की मदद से अपने माता-पिता के साथ फिर से जुड़ गए हैं। जो बच्चे अपने परिवार को बताए बिना रेलवे स्टेशन पर आते हैं, किसी लड़ाई या पारिवारिक मुद्दों के कारण या बेहतर जीवन या शहर के ग्लैमर आदि की तलाश में प्रशिक्षित आरपीएफ कर्मियों द्वारा ढूंढे जाते हैं। ये प्रशिक्षित आरपीएफ कर्मी बच्चों से जुड़ते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और उन्हें उनके माता-पिता से मिलाने की सलाह देते हैं। कई माता-पिता रेलवे की इस नेक सेवा के लिए गहरा आभार और आभार व्यक्त करते हैं।
प्रयागराज में लव जिहाद का मामला सामने आया है। मऊ के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने पहचान छुपाकर 16 साल की नाबालिग हिंदू लड़की को पहले प्यार में फंसाया। फिर धर्म परिवर्तन कराने के बाद निकाह किया। मामले में लड़की ने कीडगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने बताया कि निकाह के बाद जबरन मांस खिलाने का दबाव बनाने लगा। इससे परेशान होकर वह अपने मायके प्रयागराज चल गई। इस पर आरोपी उसे धमकाने और साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। लड़की ने पुलिस को शिकायती पत्र में बताया कि आरोपी युवक मोहम्मद शाहिद मऊ के जमालपुर आदर्श नगर का रहने वाला है। वह पहले मऊ में ही अपने परिवार के साथ रहती थी। इस दौरान शाहिद से उसकी मुलाकात हुई। धीरे-धीरे शाहिद परिवार से नजदीकियां बढ़ाने लगा। फिर परिवार में आना-जाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे शाहिद ने झांसे में लेकर करीब तीन साल पहले निकाह कर लिया। शादी के समय उसकी की उम्र 16 साल थी। पीड़िता के बताया कि इस बीच उसके पिता का ट्रांसफर प्रयागराज हो गया। वह माता-पिता इकलौती संतान है। वहीं शाहिद उसे लगातार जबरन मांस खिलाने का दबाव बनाने लगा। इससे परेशान होकर वह प्रयागराज अपने माता-पिता के पास आ गई। वह एक साल से ज्यादा समय से अपने मायके में रह रही है। उधर, शाहिद पीड़िता को साथ चलने के लिए धमकी देता रहा और परेशान करना शुरू कर दिया। कीडगंज थानाध्यक्ष का कहना है कि युवक को लड़की के तहरीर के आधार पर पॉक्सो एक्ट, एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रयागराज में लव जिहाद का मामला सामने आया है। मऊ के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने पहचान छुपाकर सोलह साल की नाबालिग हिंदू लड़की को पहले प्यार में फंसाया। फिर धर्म परिवर्तन कराने के बाद निकाह किया। मामले में लड़की ने कीडगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने बताया कि निकाह के बाद जबरन मांस खिलाने का दबाव बनाने लगा। इससे परेशान होकर वह अपने मायके प्रयागराज चल गई। इस पर आरोपी उसे धमकाने और साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। लड़की ने पुलिस को शिकायती पत्र में बताया कि आरोपी युवक मोहम्मद शाहिद मऊ के जमालपुर आदर्श नगर का रहने वाला है। वह पहले मऊ में ही अपने परिवार के साथ रहती थी। इस दौरान शाहिद से उसकी मुलाकात हुई। धीरे-धीरे शाहिद परिवार से नजदीकियां बढ़ाने लगा। फिर परिवार में आना-जाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे शाहिद ने झांसे में लेकर करीब तीन साल पहले निकाह कर लिया। शादी के समय उसकी की उम्र सोलह साल थी। पीड़िता के बताया कि इस बीच उसके पिता का ट्रांसफर प्रयागराज हो गया। वह माता-पिता इकलौती संतान है। वहीं शाहिद उसे लगातार जबरन मांस खिलाने का दबाव बनाने लगा। इससे परेशान होकर वह प्रयागराज अपने माता-पिता के पास आ गई। वह एक साल से ज्यादा समय से अपने मायके में रह रही है। उधर, शाहिद पीड़िता को साथ चलने के लिए धमकी देता रहा और परेशान करना शुरू कर दिया। कीडगंज थानाध्यक्ष का कहना है कि युवक को लड़की के तहरीर के आधार पर पॉक्सो एक्ट, एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की 72वीं पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। शहीद दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'अपने अंतिम बलिदान में गांधीजी ने हमारे लिए एक अनुस्मारक छोड़ाः बिना शर्त प्यार, खासतौर से दूसरों के लिए। मुझे विश्वास है, हममें से कई लोग गांधीजी के सच्चे संदेश की खोज करेंगे। ' #MahatmaGandhi: जब बापू पर चली थीं गोलियां, जानें कौन मिलना चाहता था गोडसे से? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ट्वीट कर कहा, 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। ' राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Vice President M Venkaiah Naidu) ने भी गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। नायडू ने ट्वीट किया, 'राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी को आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है, मैं भी उन्हें श्रद्धा सुमन अॢपत करता हूं। ' उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का समग्र जीवन और शांति एवं अहिंसा का उनका संदेश पूरी दुनिया के लिए सर्वकालिक तौर पर सामयिक है। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि गांधी जी ने अहिंसा, सत्याग्रह और असहयोग के अपने दर्शन से लोगों को एकजुट कर राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया था। नायडू ने बापू के ग्राम स्वराज्य की संकल्पना को शहर और गांव के बीच की खाई पाटने का एकमात्र सूत्र बताते हुए कहा, 'भूख, भ्रष्टाचार, भेदभाव, गऱीबी और असमानता से मुक्ति दिलाकर सामाजिक और धार्मिक समरसता क़ायम कर नए भारत का निर्माण करना ही गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ' गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी देश के बापू को द्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। गांधी जी को कोटि-कोटि नमन। ' महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम विनायक गोडसे (Nathuram Godse) ने की थी। गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला भवन में शाम की प्रार्थना सभा से उठ रहे महात्मा गांधी के सीने पर तीन बार गोली चालकर उनकी हत्या कर दी थी। गांधी जी की मृत्यु की खबर से पूरा देश शोकाकुल था। पूरे देश में 30 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है। राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि पर उनके शहादत को याद करते हुए शहीद दिवस (Shaheed Diwas) मनाया जाता है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बहत्तरवीं पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। शहीद दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'अपने अंतिम बलिदान में गांधीजी ने हमारे लिए एक अनुस्मारक छोड़ाः बिना शर्त प्यार, खासतौर से दूसरों के लिए। मुझे विश्वास है, हममें से कई लोग गांधीजी के सच्चे संदेश की खोज करेंगे। ' #MahatmaGandhi: जब बापू पर चली थीं गोलियां, जानें कौन मिलना चाहता था गोडसे से? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। ' राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पूज्य बापू के व्यक्तित्व, विचार और आदर्श हमें सशक्त, सक्षम और समृद्ध न्यू इंडिया के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। नायडू ने ट्वीट किया, 'राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी को आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है, मैं भी उन्हें श्रद्धा सुमन अॢपत करता हूं। ' उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का समग्र जीवन और शांति एवं अहिंसा का उनका संदेश पूरी दुनिया के लिए सर्वकालिक तौर पर सामयिक है। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि गांधी जी ने अहिंसा, सत्याग्रह और असहयोग के अपने दर्शन से लोगों को एकजुट कर राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया था। नायडू ने बापू के ग्राम स्वराज्य की संकल्पना को शहर और गांव के बीच की खाई पाटने का एकमात्र सूत्र बताते हुए कहा, 'भूख, भ्रष्टाचार, भेदभाव, गऱीबी और असमानता से मुक्ति दिलाकर सामाजिक और धार्मिक समरसता क़ायम कर नए भारत का निर्माण करना ही गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ' गृह मंत्री अमित शाह ने भी देश के बापू को द्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। गांधी जी को कोटि-कोटि नमन। ' महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। महात्मा गांधी जी के विचार आज भी उतने ही शाश्वत हैं जितने दशकों पहले थे। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समूचे विश्व को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वच्छ भारत के गांधी जी के सपने को आज साकार करने का काम मोदी जी ने किया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या तीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को नाथूराम विनायक गोडसे ने की थी। गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला भवन में शाम की प्रार्थना सभा से उठ रहे महात्मा गांधी के सीने पर तीन बार गोली चालकर उनकी हत्या कर दी थी। गांधी जी की मृत्यु की खबर से पूरा देश शोकाकुल था। पूरे देश में तीस जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है। राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि पर उनके शहादत को याद करते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट का आधार नहीं हो सकती और सीबीआई को अब कानून के अनुसार स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने मामले में सीबीआई की रिपोर्ट देखी है. इसरो जासूसी मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई कानून के हिसाब से जांच के लिए स्वतंत्र है. साथ ही कहा कि सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के बाद कानून के हिसाब से आगे बढ़ना चहिए. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जस्टिस डीके जन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को एफआईआर दर्ज करने के बाद सबूत एकत्र करना चाहिए और जस्टिस डीके जैन की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चहिए. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट का आधार नहीं हो सकती और सीबीआई को अब कानून के अनुसार स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने मामले में सीबीआई की रिपोर्ट देखी है और रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रासंगिक पहलू की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है. सीबीआई ने एफआईआर अपलोड नहीं किया है और मामले में कोर्ट के पिछले आदेश को आधार बताया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी एसवी राजू के अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि हम अध्यक्ष सहित समिति की तरफ से किए गए प्रयासों की सराहना करते हैं. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 1994 में इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जासूसी मामले में फंसाने की कथित साजिश में केरल के पूर्व पुलिस प्रमुख सिबी मैथ्यू और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर आज ही वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, ये सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने कहा है. वहीं सीबीआई ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक रिपोर्ट फाइल की है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूछताछ की ये प्रारंभिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में फाइल की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी जासूसी केस में नंबी नारायणन को फंसाने वाले जिम्मेदार अफसरों की 'चूक और कमीशन के कृत्यों' की जांच के लिए कमेटी बनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि जैन कमेटी रिपोर्ट को शुरुआती जांच रिपोर्ट मानते हुए इस मामले की जांच की जाए. रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) डीके जैन की अध्यक्षता में 14 सितंबर, 2018 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था और केरल सरकार को नारायणन के 'घोर अपमान' के लिए उन्हें 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया था. समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट सौंपी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा कि सीबीआई जांच एक बड़ी सफलता है, लेकिन मेरे पास कहने को कुछ नहीं है. साथ ही कहा कि जब तक मैं जैन कमेटी की रिपोर्ट नहीं देख लेता, तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं. रिपोर्ट में कुछ ऐसा होगा, जिसे वो (सुप्रीम कोर्ट) सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं. तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायणन इसरो के सायरोजेनिक्स विभाग के प्रमुख थे, जब वो एक जासूसी कांड में फंसे. नवंबर 1994 में नंबी नारायणन पर आरोप लगा था कि उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाएं विदेशी एजेंट्स से शेयर की थीं. नंबी नारायणन को साल 1994 में केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट का आधार नहीं हो सकती और सीबीआई को अब कानून के अनुसार स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने मामले में सीबीआई की रिपोर्ट देखी है. इसरो जासूसी मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई कानून के हिसाब से जांच के लिए स्वतंत्र है. साथ ही कहा कि सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के बाद कानून के हिसाब से आगे बढ़ना चहिए. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जस्टिस डीके जन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को एफआईआर दर्ज करने के बाद सबूत एकत्र करना चाहिए और जस्टिस डीके जैन की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चहिए. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट का आधार नहीं हो सकती और सीबीआई को अब कानून के अनुसार स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने मामले में सीबीआई की रिपोर्ट देखी है और रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रासंगिक पहलू की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है. सीबीआई ने एफआईआर अपलोड नहीं किया है और मामले में कोर्ट के पिछले आदेश को आधार बताया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी एसवी राजू के अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि हम अध्यक्ष सहित समिति की तरफ से किए गए प्रयासों की सराहना करते हैं. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जासूसी मामले में फंसाने की कथित साजिश में केरल के पूर्व पुलिस प्रमुख सिबी मैथ्यू और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर आज ही वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, ये सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने कहा है. वहीं सीबीआई ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक रिपोर्ट फाइल की है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूछताछ की ये प्रारंभिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में फाइल की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी जासूसी केस में नंबी नारायणन को फंसाने वाले जिम्मेदार अफसरों की 'चूक और कमीशन के कृत्यों' की जांच के लिए कमेटी बनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि जैन कमेटी रिपोर्ट को शुरुआती जांच रिपोर्ट मानते हुए इस मामले की जांच की जाए. रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. साल दो हज़ार अट्ठारह में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश डीके जैन की अध्यक्षता में चौदह सितंबर, दो हज़ार अट्ठारह को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था और केरल सरकार को नारायणन के 'घोर अपमान' के लिए उन्हें पचास लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया था. समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट सौंपी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा कि सीबीआई जांच एक बड़ी सफलता है, लेकिन मेरे पास कहने को कुछ नहीं है. साथ ही कहा कि जब तक मैं जैन कमेटी की रिपोर्ट नहीं देख लेता, तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं. रिपोर्ट में कुछ ऐसा होगा, जिसे वो सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं. तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायणन इसरो के सायरोजेनिक्स विभाग के प्रमुख थे, जब वो एक जासूसी कांड में फंसे. नवंबर एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में नंबी नारायणन पर आरोप लगा था कि उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाएं विदेशी एजेंट्स से शेयर की थीं. नंबी नारायणन को साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
एक रिपोर्ट की मानें तो पिछले पांच सालों के अंदर बिहार के इन शहरों में जमीन की कीमत दोगनी गति के साथ बढ़ी हैं। पटना के बाद दरभंगा शहर में जमीन की कीमत आसमान छू रही हैं। एयरपोर्ट और एम्स के कारण दरभंगा में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं। जानकारों की मानें तो पटना में बिहटा, दानापुर इलाकों में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं। इन इलाकों में जमीन की औसतन कीमत 20 से 40 लाख तक पहुंच गई हैं। वहीं मेन सड़क पर जमीन की कीमत 50 लाख के आस-पास पहुंच गई हैं। वहीं दरभंगा एयरपोर्ट के आस-पास की जमीन 30 से 40 लाख तक बिक रही हैं। वहीं भागलपुर, मुजफ्फरपुर शहरों में जमीन का रेट भी तेजी से बढ़ रहा हैं। भागलपुर के मेन रोड पर जमीन 40 लाख के आस-पास हैं। वहीं हाल मुजफ्फरपुर का भी हैं।
एक रिपोर्ट की मानें तो पिछले पांच सालों के अंदर बिहार के इन शहरों में जमीन की कीमत दोगनी गति के साथ बढ़ी हैं। पटना के बाद दरभंगा शहर में जमीन की कीमत आसमान छू रही हैं। एयरपोर्ट और एम्स के कारण दरभंगा में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं। जानकारों की मानें तो पटना में बिहटा, दानापुर इलाकों में जमीन की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं। इन इलाकों में जमीन की औसतन कीमत बीस से चालीस लाख तक पहुंच गई हैं। वहीं मेन सड़क पर जमीन की कीमत पचास लाख के आस-पास पहुंच गई हैं। वहीं दरभंगा एयरपोर्ट के आस-पास की जमीन तीस से चालीस लाख तक बिक रही हैं। वहीं भागलपुर, मुजफ्फरपुर शहरों में जमीन का रेट भी तेजी से बढ़ रहा हैं। भागलपुर के मेन रोड पर जमीन चालीस लाख के आस-पास हैं। वहीं हाल मुजफ्फरपुर का भी हैं।
बैरकपुर : शुक्रवार को राज्य के परिवहन मंत्री स्नेहाशिष चक्रवर्ती ने उत्तर बैरकपुर नगरपालिका के तहत तैयार किये गये गये देवीतल्ला फेरीघाट सहित अंचल के कुछ और नवनिर्मित फेरी घाटों का परिदर्शन किया। इसके बाद ही संवाददाताओं से मुखातिब हो मंत्री ने कहा कि जलपरिवहन को राज्य सरकार ने पिछले कुछ सालों में काफी उन्नत किया है। सरकार की इसके विकास और विस्तार को लेकर और भी कई योजनाएं हैं। इस क्रम में हमारा टार्गेट 58 नये फेरी घाटों पर फेरी परिसवा शुरू करनी है। फिलहाल 22 नये फेरी घाट बनकर तैयार हैं जहां हुए कार्यों के परिदर्शन करने के लिए वे खुद पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही इनका उद्घाटन किया जायेगा। वहीं इन फेरीघाट पर वेसेल की सुविधा यात्रियों को उपलब्ध होगी। इन सभी का नामकरण प्रदेश की मुख्यमंत्री ही करेंगी। उन्होंने एसबीएसटीसी कर्मियों की हड़ताल को लेकर कहा कि वे आंदोलनकारियों से बात करेंगे और उनकी जो मांगें संभव होंगी उन्हें पूरा भी करेंगे।
बैरकपुर : शुक्रवार को राज्य के परिवहन मंत्री स्नेहाशिष चक्रवर्ती ने उत्तर बैरकपुर नगरपालिका के तहत तैयार किये गये गये देवीतल्ला फेरीघाट सहित अंचल के कुछ और नवनिर्मित फेरी घाटों का परिदर्शन किया। इसके बाद ही संवाददाताओं से मुखातिब हो मंत्री ने कहा कि जलपरिवहन को राज्य सरकार ने पिछले कुछ सालों में काफी उन्नत किया है। सरकार की इसके विकास और विस्तार को लेकर और भी कई योजनाएं हैं। इस क्रम में हमारा टार्गेट अट्ठावन नये फेरी घाटों पर फेरी परिसवा शुरू करनी है। फिलहाल बाईस नये फेरी घाट बनकर तैयार हैं जहां हुए कार्यों के परिदर्शन करने के लिए वे खुद पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही इनका उद्घाटन किया जायेगा। वहीं इन फेरीघाट पर वेसेल की सुविधा यात्रियों को उपलब्ध होगी। इन सभी का नामकरण प्रदेश की मुख्यमंत्री ही करेंगी। उन्होंने एसबीएसटीसी कर्मियों की हड़ताल को लेकर कहा कि वे आंदोलनकारियों से बात करेंगे और उनकी जो मांगें संभव होंगी उन्हें पूरा भी करेंगे।
केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है। केजरीवाल ने लिखा - क्या इस पर विश्वास करना मुमकिन है कि नीरव मोदी या विजय माल्या बिना बीजेपी सरकार की अनदेखी के देश छोड़ने में सफल हो गए? इसके बाद केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एसपी शुक्ला ने केजरीवाल के इस ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि हम 2011 में सरकार में नहीं थे। अगर कांग्रेस या अन्य पार्टियां आरोप लगा रही है तो क्या वह 2011-14 तक सो रही थी? उन्हें इसकी जांच करवानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार हर समस्या पर कड़ा रुख अपना रही है। इसके अलावा एसपी शुक्ला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार (कांग्रेस) घोटालों की सरकार थी और उसने अपने समय में घोटालेबाजों को स्थापित किया था, जिसके कारण आज देश को ये दिन देखना पड़ रहा है।
केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है। केजरीवाल ने लिखा - क्या इस पर विश्वास करना मुमकिन है कि नीरव मोदी या विजय माल्या बिना बीजेपी सरकार की अनदेखी के देश छोड़ने में सफल हो गए? इसके बाद केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एसपी शुक्ला ने केजरीवाल के इस ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि हम दो हज़ार ग्यारह में सरकार में नहीं थे। अगर कांग्रेस या अन्य पार्टियां आरोप लगा रही है तो क्या वह दो हज़ार ग्यारह-चौदह तक सो रही थी? उन्हें इसकी जांच करवानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार हर समस्या पर कड़ा रुख अपना रही है। इसके अलावा एसपी शुक्ला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार घोटालों की सरकार थी और उसने अपने समय में घोटालेबाजों को स्थापित किया था, जिसके कारण आज देश को ये दिन देखना पड़ रहा है।
हिन्दू बिसकुट सावुन पोमेटम, तेल सफाचट औ अरवी गम । हम तुम जिनको करते प्यार, वह तसवीरें भेजो चार । दो या चार ताश हो वैसे, उस दिन तुम कहते थे जैसे । आपकी भेजी जो यह पाऊं, तो जीकी कुछ तपत वुझाऊं । कुरसी मेज हे काटे साती, नाविल पोथी नहीं सुहाती । तुम चाहे आओ मत आओ, यह सब चीजें भट्ट भिजवाओ । जोगीडा । बाबाजी वचनम् हा सदाशिव गोरस जागे . सदाशिव गोरस जागेलण्डन जागे पेरिस जागे अमरीका भी जागे । ऐसा नाद करूं भारतमे सोता उठकर भागे ॥ हा सदाशिव गोरख जागे मन्तर मारूं जन्तर मारूं भूत मसान जगाऊं । सब भारतवालों को अक्किल चुटकी मार उडाऊं ॥ सदाशिव गोरख जागेअकड तोडं कङ्कड तोडूं तोडूं पत्थर रोडे । सारे बाबू पकड बनाऊं बिना पूंछके धोडे ।। सदासिव गोरख जागेनाक फोड बाबूत्रञ्चोकी डालू कथा सूत । सबकी एक रकवी करदूं तो जोगीका पूत ॥ सदाशिव गोरस जागे बीबीजी वचनम् बाबाजी तेरी - सदा चरणोंकी चेरी । हे सन्यासी सदा उदासी सुनके तुम्हरी बानी । जीमे चसी तुम्हारी मूरत भूल गई कृस्तानी ।।
हिन्दू बिसकुट सावुन पोमेटम, तेल सफाचट औ अरवी गम । हम तुम जिनको करते प्यार, वह तसवीरें भेजो चार । दो या चार ताश हो वैसे, उस दिन तुम कहते थे जैसे । आपकी भेजी जो यह पाऊं, तो जीकी कुछ तपत वुझाऊं । कुरसी मेज हे काटे साती, नाविल पोथी नहीं सुहाती । तुम चाहे आओ मत आओ, यह सब चीजें भट्ट भिजवाओ । जोगीडा । बाबाजी वचनम् हा सदाशिव गोरस जागे . सदाशिव गोरस जागेलण्डन जागे पेरिस जागे अमरीका भी जागे । ऐसा नाद करूं भारतमे सोता उठकर भागे ॥ हा सदाशिव गोरख जागे मन्तर मारूं जन्तर मारूं भूत मसान जगाऊं । सब भारतवालों को अक्किल चुटकी मार उडाऊं ॥ सदाशिव गोरख जागेअकड तोडं कङ्कड तोडूं तोडूं पत्थर रोडे । सारे बाबू पकड बनाऊं बिना पूंछके धोडे ।। सदासिव गोरख जागेनाक फोड बाबूत्रञ्चोकी डालू कथा सूत । सबकी एक रकवी करदूं तो जोगीका पूत ॥ सदाशिव गोरस जागे बीबीजी वचनम् बाबाजी तेरी - सदा चरणोंकी चेरी । हे सन्यासी सदा उदासी सुनके तुम्हरी बानी । जीमे चसी तुम्हारी मूरत भूल गई कृस्तानी ।।
भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में वीरेन्द्र सहवाग के बाद तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल करने वाले युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज करूण नायर जिन मौकों के हकदार थे, वह उन्हें नहीं मिल सके। लेकिन जिस युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज को कोच अनिल कुंबले ने अपने कार्यकाल के दौरान मौका दिया उसी को रवि शास्त्री ने लगातार नजरअंदाज किया। रवि शास्त्री के कार्यकाल में करूण नायर को पूरी तरह से ही टीम से बाहर कर इस युवा प्रतिभा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जी हां, टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ 2016 में तिहरा शतक लगाने वाले करुण नायर को 2017 के बाद से अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौके नहीं मिल सके। हालांकि ये खिलाड़ी घरेलू स्तर पर अपनी कर्नाटक की टीम के लिए लगातार रन बना रहा है।
भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में वीरेन्द्र सहवाग के बाद तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल करने वाले युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज करूण नायर जिन मौकों के हकदार थे, वह उन्हें नहीं मिल सके। लेकिन जिस युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज को कोच अनिल कुंबले ने अपने कार्यकाल के दौरान मौका दिया उसी को रवि शास्त्री ने लगातार नजरअंदाज किया। रवि शास्त्री के कार्यकाल में करूण नायर को पूरी तरह से ही टीम से बाहर कर इस युवा प्रतिभा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जी हां, टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ दो हज़ार सोलह में तिहरा शतक लगाने वाले करुण नायर को दो हज़ार सत्रह के बाद से अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौके नहीं मिल सके। हालांकि ये खिलाड़ी घरेलू स्तर पर अपनी कर्नाटक की टीम के लिए लगातार रन बना रहा है।
सिद्धार्थनगर में वरासत अभियान के दौरान शत्रु संपत्ति का खुलासा हुआ है। सन 1954 के पहले पाकिस्तान में जाकर बस गए 31 किसानों की 4. 5 एकड़ जमीन पर आज भी उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। सिद्धार्थनगर- उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में बड़ा मामला सामने आया है। यहां भारत की आजादी के बाद सन् 1954 में देश छोड़ पाकिस्तान जाकर बस गए किसानों की जमीन पर उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। जिले में राजस्व विभाग की टीम ने वरासत अभियान चलाया, जिसमें खुलासा हुआ कि ऐसे 31 किसान हैं, जिनकी 4. 5 एकड़ जमीन पर उनके वारिसान खेती करते हैं। पाकिस्तान जाने से पहले वे उन्हे ये सौंप कर गए थे। मामला सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज तहसील क्षेत्र का है, जहां वरासत अभियान के दौरान शत्रु संपत्ति का खुलासा हुआ है। डुमरियागंज तहसील के जमौतिया गांव का में सन 1954 के पहले पाकिस्तान में जाकर बस गए 31 किसानों की 4. 5 एकड़ जमीन पर आज भी उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। इस बात का जानकारी तब हुई, जब राजस्व विभाग की टीम वरासत अभियान के तहत खतौनी का सत्यापन करने जमातिया गाँव पहुची और वरासत पढ़ कर सुनाई जाने लगी । इस बारे में गांव को लोगों का कहना है कुछ लोग 1954 के पहले पाकिस्तान चले गए थे और अपनी जमीन को वारिसान को सौप कर चले गए थे। जिस पर आज वारिसान खेती कर रहे हैं। वहीं एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने भी राजस्व की टीम के साथ गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग की टीम को सत्यापन के दौरान शत्रु संपत्ति की जानकारी मिली है। जिसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी दी गई है। साथ ही आगे की विधिक कार्यवाही की जा रही है। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
सिद्धार्थनगर में वरासत अभियान के दौरान शत्रु संपत्ति का खुलासा हुआ है। सन एक हज़ार नौ सौ चौवन के पहले पाकिस्तान में जाकर बस गए इकतीस किसानों की चार. पाँच एकड़ जमीन पर आज भी उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। सिद्धार्थनगर- उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में बड़ा मामला सामने आया है। यहां भारत की आजादी के बाद सन् एक हज़ार नौ सौ चौवन में देश छोड़ पाकिस्तान जाकर बस गए किसानों की जमीन पर उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। जिले में राजस्व विभाग की टीम ने वरासत अभियान चलाया, जिसमें खुलासा हुआ कि ऐसे इकतीस किसान हैं, जिनकी चार. पाँच एकड़ जमीन पर उनके वारिसान खेती करते हैं। पाकिस्तान जाने से पहले वे उन्हे ये सौंप कर गए थे। मामला सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज तहसील क्षेत्र का है, जहां वरासत अभियान के दौरान शत्रु संपत्ति का खुलासा हुआ है। डुमरियागंज तहसील के जमौतिया गांव का में सन एक हज़ार नौ सौ चौवन के पहले पाकिस्तान में जाकर बस गए इकतीस किसानों की चार. पाँच एकड़ जमीन पर आज भी उनके पट्टीदार खेती कर रहे हैं। इस बात का जानकारी तब हुई, जब राजस्व विभाग की टीम वरासत अभियान के तहत खतौनी का सत्यापन करने जमातिया गाँव पहुची और वरासत पढ़ कर सुनाई जाने लगी । इस बारे में गांव को लोगों का कहना है कुछ लोग एक हज़ार नौ सौ चौवन के पहले पाकिस्तान चले गए थे और अपनी जमीन को वारिसान को सौप कर चले गए थे। जिस पर आज वारिसान खेती कर रहे हैं। वहीं एसडीएम त्रिभुवन कुमार ने भी राजस्व की टीम के साथ गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग की टीम को सत्यापन के दौरान शत्रु संपत्ति की जानकारी मिली है। जिसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी दी गई है। साथ ही आगे की विधिक कार्यवाही की जा रही है। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
Breaking News: July में होगा Rajasthan Congress का Booth सम्मेलन । Jaipur । Rajasthan Election 2023 July में Congress में Jaipur में Booth सम्मेलन का आयोजन होगा. आपको बता दें की सम्मेलन के लिए Rahul Gandhi और Congress President Mallikarjun Kharge को आमंत्रित किया गया है. Tarot Card Reading । आपके लिए आज के दिन का संदेश । Aaj Ka Rashifal । क्या कहते हैं आपके तारे ?
Breaking News: July में होगा Rajasthan Congress का Booth सम्मेलन । Jaipur । Rajasthan Election बीसतेईस जुलाईy में Congress में Jaipur में Booth सम्मेलन का आयोजन होगा. आपको बता दें की सम्मेलन के लिए Rahul Gandhi और Congress President Mallikarjun Kharge को आमंत्रित किया गया है. Tarot Card Reading । आपके लिए आज के दिन का संदेश । Aaj Ka Rashifal । क्या कहते हैं आपके तारे ?
GORAKHPUR: कई मामलों में वांछित चल रहे फरार अपराधी को पिपराइच पुलिस ने कस्बे के हनुमान मंदिर से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 315 बोर तमंचा व कारतूस बरामद हुए। गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया। मिली जानकारी के मुताबिक थाना क्षेत्र के अगया निवासी गौरजीत चौधरी पुत्र शिवनाथ चौधरी बखिरा थाना क्षेत्र में चोरी की बड़ी वारदात फरार चल रहा था। इस मामले में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। उसके अन्य तीन साथियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में उसने पुलिस के सामने कई राज उगले। पकड़े गई अपराधी ने पुलिस को बताया कि इसके पूर्व वह आजमगढ़ के सेठ नौमी के वहां रहकर काम करता था। सेठ अपने किसी रिश्तेदार के यहां गया तो मौका देख वह 81 हजार नकद सहित लाखों के जेवरात लेकर फरार हो गया। उक्त युवक की तलाश में ढाई साल से पुलिस खाक छान रही थी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका था। उसने पुलिस को बताया कि वह कई छोटी-बड़ी वारदातें कर चुका है। उस पर अहिरौली थाने में भी उस पर चोरी का केस दर्ज हुआ था। इसके पूर्व मेडिकल कॉलेज के पास घर से बॉक्स चुरा के जाते समय ग्रामीणों के सहयोग से पकड़ा गया। तब पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
GORAKHPUR: कई मामलों में वांछित चल रहे फरार अपराधी को पिपराइच पुलिस ने कस्बे के हनुमान मंदिर से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से तीन सौ पंद्रह बोर तमंचा व कारतूस बरामद हुए। गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया। मिली जानकारी के मुताबिक थाना क्षेत्र के अगया निवासी गौरजीत चौधरी पुत्र शिवनाथ चौधरी बखिरा थाना क्षेत्र में चोरी की बड़ी वारदात फरार चल रहा था। इस मामले में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। उसके अन्य तीन साथियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में उसने पुलिस के सामने कई राज उगले। पकड़े गई अपराधी ने पुलिस को बताया कि इसके पूर्व वह आजमगढ़ के सेठ नौमी के वहां रहकर काम करता था। सेठ अपने किसी रिश्तेदार के यहां गया तो मौका देख वह इक्यासी हजार नकद सहित लाखों के जेवरात लेकर फरार हो गया। उक्त युवक की तलाश में ढाई साल से पुलिस खाक छान रही थी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका था। उसने पुलिस को बताया कि वह कई छोटी-बड़ी वारदातें कर चुका है। उस पर अहिरौली थाने में भी उस पर चोरी का केस दर्ज हुआ था। इसके पूर्व मेडिकल कॉलेज के पास घर से बॉक्स चुरा के जाते समय ग्रामीणों के सहयोग से पकड़ा गया। तब पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आईपीएल का 12 वां संस्करण शुरु हो चुका है, सभी टीमें इस समय जोरदार प्रर्दशन करती हुई नजर आ रही है. देखा जाए तो एक या दो टीमों को अगर छोड़ दिया जाए तो इस बार अभी ये कहबना मुश्किल होगी कि कौन सी टीम अभी प्लेआफ में पहुंचने की हकदार है, इसके बावजूदस आज हम आपको कुछ आंकड़े दिखाएंगे कि कौन सी टीमें प्लेआफ में जगह बना सकती है. ये हैं चार टीमें जो प्लेआफ में जगह बना सकती हैंः दिल्ली कैपिटल ने अपने 6 मैचों में से सिर्फ 3 में जीत हासिल की है, लेकिन टीम निश्चित रूप से अंतिम चार में जगह बनाने के दावेदारों में से एक है. दिल्ली अंक तालिका में बहुत ऊपर होती, अगर उसने कुछ मैच जो कम अंतर से गंवाए है, उनको बचाने में कामयाब हो जाती. कगिसो रबाडा की तेज गति के कारण विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशानी हुई. दक्षिण अफ्रीका के उनके साथी क्रिस मॉरिस भी गेंद से काफी प्रभावित रहे हैं. हालांकि, दिल्ली की सबसे बड़ी ताकत उनका शीर्ष क्रम है. पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत ने शानदार पारियां खेलकर टीम को जीत दिलान में योगदान दिया है. तो ये टीम इस बार आईपीएल में खिताब की होड़ में अवश्य दिखाई देगी. कोलकाता नाइट राइडर्स ने एक बार फिर अपने प्रदर्शन से सभी को हैरान कर दिया है. शुरुआती मौकों में कई खिलाड़ी को मौका नहीं दिया गया, खासकर जब शिवम मावी, कमलेश नागरकोटी और एनरिक एनट्रोज़ को चोट के कारण टीम से बाहर रखा गया. आंद्रे रसेल ने केकेआर के लिए कई मौकों पर अकेल दम पर मैच जीताने में टीम को योगदान दिया है. नीतीश राणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. केकेआर की तेज गेंदबाजी इंग्लैंड के तेज गेंदबाज हैरी गुरनी के आने से पहले थोड़ी कमजोर दिख रही थी, अब इस पर भी विराम लग गया है. उनकी गेंदबाजी मे सुधार देखने को मिल रहा है. सुनील नरेन, कुलदीप यादव और पीयूष चावला की स्पिन तिकड़ी धमाल मचा रही है. इसके अलावा, बल्लेबाजी में क्रिस लिन, सुनील नारायण और रॉबिन उथप्पा ने वापसी कर अच्छी बल्लेबाजी के संकेत दे दिए है. पिछले साल निराशाजनक सीजन के बाद, मुंबई इंडियंस ने आईपीएल 2019 में अच्छी शुरुआत की है. दिल्ली कैपिटल के खिलाफ अपना पहला मैच हारने के बाद, मुंबई इंडियंस ने मजबूत वापसी की है, अपने पिछले 4 मैचों में से 3 जीते, जिसमें सीएसके के खिलाफ बड़ी जीत शामिल है. हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या ने अच्छा प्रर्दशन कर टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया है. वहीं पोलार्ड भी वापसी के संकत दे चुके है. पोलार्ड मुंबई इंडियंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. रोहित शर्मा भी बल्लेबाजी में अच्छा योगदान दे रहे है. गत चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने चौथे आईपीएल मेों शानदार शुरुआत की है. सीएसके ने अपने 5 मैचों में से 4 में जीत हासिल की है. एमएस धोनी ने एक बार फिर से आईपीएल में अहम योगदान दिया है. है और टीम के लिए कुछ मैच जीतने वाली पारियां खेली हैं. उन्होंने यह भी दिखाया है कि धीमे भारतीय विकेटों पर एक कप्तान के रूप में वह कितने प्रभावी हैं. सीएसके हालांकि उनकी गेंदबाजी को लेकर थोड़ा चिंतित होगा. भले ही स्पिनरों ने अच्छा प्रर्दशन किया हो, लेकिन पेसरों ने अभी तक कुछ अच्छा खेल नहीं दिखाया है. चेन्नई सुपरकिंग्स भी प्लेआफ में जगह बनाने में कामयाब हो सकती है. आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
आईपीएल का बारह वां संस्करण शुरु हो चुका है, सभी टीमें इस समय जोरदार प्रर्दशन करती हुई नजर आ रही है. देखा जाए तो एक या दो टीमों को अगर छोड़ दिया जाए तो इस बार अभी ये कहबना मुश्किल होगी कि कौन सी टीम अभी प्लेआफ में पहुंचने की हकदार है, इसके बावजूदस आज हम आपको कुछ आंकड़े दिखाएंगे कि कौन सी टीमें प्लेआफ में जगह बना सकती है. ये हैं चार टीमें जो प्लेआफ में जगह बना सकती हैंः दिल्ली कैपिटल ने अपने छः मैचों में से सिर्फ तीन में जीत हासिल की है, लेकिन टीम निश्चित रूप से अंतिम चार में जगह बनाने के दावेदारों में से एक है. दिल्ली अंक तालिका में बहुत ऊपर होती, अगर उसने कुछ मैच जो कम अंतर से गंवाए है, उनको बचाने में कामयाब हो जाती. कगिसो रबाडा की तेज गति के कारण विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशानी हुई. दक्षिण अफ्रीका के उनके साथी क्रिस मॉरिस भी गेंद से काफी प्रभावित रहे हैं. हालांकि, दिल्ली की सबसे बड़ी ताकत उनका शीर्ष क्रम है. पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत ने शानदार पारियां खेलकर टीम को जीत दिलान में योगदान दिया है. तो ये टीम इस बार आईपीएल में खिताब की होड़ में अवश्य दिखाई देगी. कोलकाता नाइट राइडर्स ने एक बार फिर अपने प्रदर्शन से सभी को हैरान कर दिया है. शुरुआती मौकों में कई खिलाड़ी को मौका नहीं दिया गया, खासकर जब शिवम मावी, कमलेश नागरकोटी और एनरिक एनट्रोज़ को चोट के कारण टीम से बाहर रखा गया. आंद्रे रसेल ने केकेआर के लिए कई मौकों पर अकेल दम पर मैच जीताने में टीम को योगदान दिया है. नीतीश राणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. केकेआर की तेज गेंदबाजी इंग्लैंड के तेज गेंदबाज हैरी गुरनी के आने से पहले थोड़ी कमजोर दिख रही थी, अब इस पर भी विराम लग गया है. उनकी गेंदबाजी मे सुधार देखने को मिल रहा है. सुनील नरेन, कुलदीप यादव और पीयूष चावला की स्पिन तिकड़ी धमाल मचा रही है. इसके अलावा, बल्लेबाजी में क्रिस लिन, सुनील नारायण और रॉबिन उथप्पा ने वापसी कर अच्छी बल्लेबाजी के संकेत दे दिए है. पिछले साल निराशाजनक सीजन के बाद, मुंबई इंडियंस ने आईपीएल दो हज़ार उन्नीस में अच्छी शुरुआत की है. दिल्ली कैपिटल के खिलाफ अपना पहला मैच हारने के बाद, मुंबई इंडियंस ने मजबूत वापसी की है, अपने पिछले चार मैचों में से तीन जीते, जिसमें सीएसके के खिलाफ बड़ी जीत शामिल है. हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या ने अच्छा प्रर्दशन कर टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया है. वहीं पोलार्ड भी वापसी के संकत दे चुके है. पोलार्ड मुंबई इंडियंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. रोहित शर्मा भी बल्लेबाजी में अच्छा योगदान दे रहे है. गत चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने चौथे आईपीएल मेों शानदार शुरुआत की है. सीएसके ने अपने पाँच मैचों में से चार में जीत हासिल की है. एमएस धोनी ने एक बार फिर से आईपीएल में अहम योगदान दिया है. है और टीम के लिए कुछ मैच जीतने वाली पारियां खेली हैं. उन्होंने यह भी दिखाया है कि धीमे भारतीय विकेटों पर एक कप्तान के रूप में वह कितने प्रभावी हैं. सीएसके हालांकि उनकी गेंदबाजी को लेकर थोड़ा चिंतित होगा. भले ही स्पिनरों ने अच्छा प्रर्दशन किया हो, लेकिन पेसरों ने अभी तक कुछ अच्छा खेल नहीं दिखाया है. चेन्नई सुपरकिंग्स भी प्लेआफ में जगह बनाने में कामयाब हो सकती है. आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा के अनुसार, वर्तमान मेंपित्त नली प्रणाली की बीमारियों की संख्या में वृद्धि हुई। यह एक अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, कुपोषण, और एक व्यक्ति की वंशानुगत पूर्वाग्रह के आचरण द्वारा समझाया गया है। प्रत्येक वर्ष पित्त उच्च रक्तचाप के विकास के साथ बीमारियों में वृद्धि हुई है। हमारे लेख में इस गंभीर रोगविज्ञान पर चर्चा की जाएगी। बिलीरी उच्च रक्तचाप सबसे अधिक हैयकृत और पित्त मूत्राशय में होने वाली घातक प्रकृति के निओप्लाज्म का एक सामान्य अभिव्यक्ति। अक्सर, यह रोगविज्ञान यांत्रिक जौनिस के साथ होता है। पैनक्रिया के सिर पर दिखाई देने वाला ट्यूमर पित्त नलिकाओं पर दबाव डालना शुरू कर देता है, और वहां स्थित पत्थरों या पॉलीप्स दबाव की उपस्थिति को बढ़ावा देते हैं, जो पित्त को सामान्य रूप से बहने की अनुमति नहीं देता है। शल्य चिकित्सा एंडोस्कोपिक हस्तक्षेप का उपयोग करते हुए, इस तरह के उच्च रक्तचाप का इलाज किया जाता है। पित्त उच्च रक्तचाप निम्नलिखित रोगजनक स्थितियों के तहत विकसित करने में सक्षम हैः - सौम्य और घातक ट्यूमर,पित्त नलिकाओं में से एक में उत्पन्न होता है, जिससे बहिर्वाह का उल्लंघन होता है। इसके अलावा, इस तरह के रोगविज्ञान के उद्भव पास के अंग नियोप्लाज्म में विकसित नलिकाओं में से एक के निचोड़ने की ओर जाता है। - गैल्स्टोन रोग और कैलकुस cholecystitis।इस तरह की बीमारियों को हेपेटोबिलरी सिस्टम के विभिन्न हिस्सों में अघुलनशील पत्थरों के गठन और यांत्रिक पीलिया की घटना के रूप में चिह्नित किया जाता है। - परजीवी के नलिकाओं में उपस्थिति - हेल्मिंथ्स। इसके अलावा जन्मजात जन्म के कारण भी यह बीमारी विकसित हो सकती हैपित्तीय पथ के विकृतियां, जिनमें लुमेन का एक संशोधित आकार और व्यास होता है। इस मामले में, बीमारी के संकेत पहले ही बचपन में दिखाई देते हैं। प्रारंभिक पर पित्त उच्च रक्तचाप के लक्षणअपने विकास के दौरान, वे किसी भी तरह से खुद को प्रकट नहीं करते हैं, यही वजह है कि कई रोगियों को यह बीमारी शुरू होती है। हालांकि, यह निम्नलिखित लक्षणों के लिए रखवाली के लायक हैः - कमजोरी; - पेट फूलना, - दस्त; - सही हाइपोकॉन्ड्रिअम में दर्द। मुख्य लक्षण, स्पष्ट रूप से सिंड्रोम की ओर इशारा करते हुएपित्त उच्च रक्तचाप, पोर्टल प्रणाली में दबाव के साथ जुड़े प्लीहा की मात्रा में वृद्धि है। बाद के चरण में, एनीमिया, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और ल्यूकोपेनिया होते हैं। इसके कारण पीलिया होता हैपित्ताशय की थैली पर यांत्रिक दबाव। पेट की गुहा में द्रव (जलोदर) जमा हो सकता है, जिसकी एक विशेषता थेरेपी के लिए इसका प्रतिरोध है। इससे छुटकारा पाने में आमतौर पर लंबा समय लगता है। रोगी पेट की मात्रा बढ़ाना शुरू कर देता है, पैरों में सूजन होती है, पेट की दीवार पर पूर्वकाल की नस का विस्तार होता है। रोग का सबसे गंभीर प्रकटन हैपेट, मलाशय, या घेघा में रक्तस्राव। यह सब खून की उल्टी के साथ है। और अगर अन्नप्रणाली में रक्तस्राव होता है, तो मल में रक्त की अशुद्धता होगी। निम्नलिखित मामलों में साधन अनुसंधान विधियों का आयोजन किया जाता हैः - पित्त उच्च रक्तचाप की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए; - इस तरह की विकृति की घटना का कारण बनने वाले रोग को स्थापित करने के लिए। निम्नलिखित विधियों को सबसे अधिक जानकारीपूर्ण माना जाता है। उपचार योजना चुनने में महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एकपित्त उच्च रक्तचाप पित्त नली ब्लॉक के स्तर का निर्धारण है। इस मामले में, मुख्य गैर-इनवेसिव विधि पेट की गुहा और रेट्रोपरिटोनियल स्पेस की अल्ट्रासाउंड परीक्षा है। इस तरह के निदान के कारण, बाहरी और इंट्राहेपेटिक पित्त नलिकाओं के विस्तार का पता लगाया जाता है, जो इस तरह के विकृति का लक्षण है। डिस्टल ब्लॉक स्तर के साथ पित्त उच्च रक्तचापहेपेटिकोहोलेडोच के विस्तार की विशेषता है, और थोड़ी देर के बाद इंट्राहेपेटिक नलिकाएं पतला हो जाती हैं, और पित्ताशय के आकार में वृद्धि होती है। 10 मिमी से अधिक व्यास के साथ एक वाहिनी एक रसौली के मामले में होता है। एक उच्च ब्लॉक के साथ, एक टूटे हुए पित्ताशय की थैली की उपस्थिति और इंट्राहेपेटिक नलिकाओं के विस्तार का पता लगाया जाता है। 51.3% मामलों में ट्यूमर मनाया जाता है। पेट और रेट्रोपरिटोनियल अंगों का सीटी स्कैनअंतरिक्ष कई अंगों की संरचनात्मक सुविधाओं की कल्पना करने में मदद करता है। इस तरह के एक अध्ययन से बड़े आकार की संरचनाओं के संबंध में काफी सटीक परिणाम प्राप्त करना संभव हो जाता है और यह आकलन करता है कि आसन्न संरचनाओं में वे कितनी दृढ़ता से अंकुरित होते हैं। यदि इस तरह के विकृति का संदेह है,पित्त उच्च रक्तचाप के रूप में, विशेषज्ञ सबसे अधिक बार इंडोस्कोपिक रेट्रोहोलियोपियोप्रोटोग्राफी या कोलेजनियोग्राफी करते हैं। इस तरह के तरीकों के साथ रेडियोपैक पदार्थों की शुरूआत अलग-अलग तरीकों से की जाती है, लेकिन एक समान परिणाम होता है। एक्स-रे तस्वीर पर इस पदार्थ के कारण, डक्टल प्रणाली की धैर्य की डिग्री का आकलन करना संभव है। इस तरह के एक अध्ययन को एक आक्रामक विधि माना जाता है,और केवल एक कठिन मामले में, अर्थात् संदिग्ध घातक ट्यूमर के मामले में इसका सहारा लें। आमतौर पर अल्ट्रासोनोग्राफी के नियंत्रण में यकृत का एक उद्देश्यपूर्ण ट्रेपायोपॉपी किया जाता है। पैथोलॉजी के फोकस से ऊतक की एक छोटी मात्रा ली जाती है, जिसे हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षा के अधीन किया जाता है। प्राप्त परिणाम नियोप्लाज्म की प्रकृति का न्याय करना संभव बनाता है। यदि उपर्युक्त नैदानिक विधियाँ नहीं हैंपित्त उच्च रक्तचाप के कारण की पहचान करने में सक्षम, फिर ऑपरेशन करें। यह एक बार में नैदानिक और चिकित्सीय सर्जिकल जोड़तोड़ दोनों को अंजाम देने के अवसर के साथ लैप्रोस्कोपिक या लैपरोटोमिकली प्रदर्शन किया जा सकता है। डायग्नोस्टिक्स की मदद से, प्रत्यक्ष दृश्य और अंतर्गर्भाशयी बायोप्सी की जाती है। सर्जिकल जोड़तोड़ का पता चला विकृति विज्ञान की प्रकृति के आधार पर किया जाता है। यदि पित्त उच्च रक्तचाप का निदान किया गया है, तो उपचार रूढ़िवादी या शल्य चिकित्सा द्वारा किया जाता है। रूढ़िवादी उपचार आमतौर पर किया जाता हैकार्यात्मक विकार, जिसका उन्मूलन ऐसी दवाओं द्वारा "एटेनोलोल", "नाइट्रोग्लिसरीन", "मोनोप्रिल", "एनप्रिलिन", "नाइट्रोसोरबाइड", "सॉलोडेक्सिड", "एडनीट" के रूप में किया जाता है। सर्जिकल उपचार केवल बाहर किया जाता हैयदि सूचीबद्ध दवाएं कोई परिणाम नहीं लाती हैं। ऑपरेशन जलोदर, आंत, पेट और अन्नप्रणाली के रक्तस्राव, साथ ही हाइपरप्लेनिअल सिंड्रोम के विकास का पता लगाने में किया जाता है। सर्जिकल हस्तक्षेप के आधुनिक तरीकों में लैप्रोस्कोपी का उपयोग शामिल है, जो एक कम प्रभाव वाला है, एक कैमरा, माइक्रोमैनिपुलेटर और प्रकाश के साथ पतली ट्यूबों के छोटे चीरों के माध्यम से परिचय के साथ बख्शते संचालन। मॉनिटर पर एक छवि दिखाई देती है, जिसके आधार पर डॉक्टर बाधा को हटा देता है। किसी भी मामले में आत्म-औषधि और नहीं कर सकतेट्यूमर को हटाने के लिए दवाएं और रसायन लें, पेट की मात्रा को कम करें और बिना डॉक्टर के पर्चे के पत्थरों को हटा दें। इसके अलावा, यदि जिगर और पित्ताशय की थैली के उच्च रक्तचाप का पता चला है, तो निम्नलिखित चिकित्सीय क्रियाएं की जाती हैंः - तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स के इष्टतम स्तर को बनाए रखने के लिए ड्रॉपर लगाएं; - दवाओं का उपयोग करें जो यकृत कोशिकाओं के रक्त की आपूर्ति और पोषण में सुधार करते हैं; - एंटीबायोटिक थेरेपी बाहर ले; - पित्त पथ के विघटन आचरण।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा के अनुसार, वर्तमान मेंपित्त नली प्रणाली की बीमारियों की संख्या में वृद्धि हुई। यह एक अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, कुपोषण, और एक व्यक्ति की वंशानुगत पूर्वाग्रह के आचरण द्वारा समझाया गया है। प्रत्येक वर्ष पित्त उच्च रक्तचाप के विकास के साथ बीमारियों में वृद्धि हुई है। हमारे लेख में इस गंभीर रोगविज्ञान पर चर्चा की जाएगी। बिलीरी उच्च रक्तचाप सबसे अधिक हैयकृत और पित्त मूत्राशय में होने वाली घातक प्रकृति के निओप्लाज्म का एक सामान्य अभिव्यक्ति। अक्सर, यह रोगविज्ञान यांत्रिक जौनिस के साथ होता है। पैनक्रिया के सिर पर दिखाई देने वाला ट्यूमर पित्त नलिकाओं पर दबाव डालना शुरू कर देता है, और वहां स्थित पत्थरों या पॉलीप्स दबाव की उपस्थिति को बढ़ावा देते हैं, जो पित्त को सामान्य रूप से बहने की अनुमति नहीं देता है। शल्य चिकित्सा एंडोस्कोपिक हस्तक्षेप का उपयोग करते हुए, इस तरह के उच्च रक्तचाप का इलाज किया जाता है। पित्त उच्च रक्तचाप निम्नलिखित रोगजनक स्थितियों के तहत विकसित करने में सक्षम हैः - सौम्य और घातक ट्यूमर,पित्त नलिकाओं में से एक में उत्पन्न होता है, जिससे बहिर्वाह का उल्लंघन होता है। इसके अलावा, इस तरह के रोगविज्ञान के उद्भव पास के अंग नियोप्लाज्म में विकसित नलिकाओं में से एक के निचोड़ने की ओर जाता है। - गैल्स्टोन रोग और कैलकुस cholecystitis।इस तरह की बीमारियों को हेपेटोबिलरी सिस्टम के विभिन्न हिस्सों में अघुलनशील पत्थरों के गठन और यांत्रिक पीलिया की घटना के रूप में चिह्नित किया जाता है। - परजीवी के नलिकाओं में उपस्थिति - हेल्मिंथ्स। इसके अलावा जन्मजात जन्म के कारण भी यह बीमारी विकसित हो सकती हैपित्तीय पथ के विकृतियां, जिनमें लुमेन का एक संशोधित आकार और व्यास होता है। इस मामले में, बीमारी के संकेत पहले ही बचपन में दिखाई देते हैं। प्रारंभिक पर पित्त उच्च रक्तचाप के लक्षणअपने विकास के दौरान, वे किसी भी तरह से खुद को प्रकट नहीं करते हैं, यही वजह है कि कई रोगियों को यह बीमारी शुरू होती है। हालांकि, यह निम्नलिखित लक्षणों के लिए रखवाली के लायक हैः - कमजोरी; - पेट फूलना, - दस्त; - सही हाइपोकॉन्ड्रिअम में दर्द। मुख्य लक्षण, स्पष्ट रूप से सिंड्रोम की ओर इशारा करते हुएपित्त उच्च रक्तचाप, पोर्टल प्रणाली में दबाव के साथ जुड़े प्लीहा की मात्रा में वृद्धि है। बाद के चरण में, एनीमिया, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और ल्यूकोपेनिया होते हैं। इसके कारण पीलिया होता हैपित्ताशय की थैली पर यांत्रिक दबाव। पेट की गुहा में द्रव जमा हो सकता है, जिसकी एक विशेषता थेरेपी के लिए इसका प्रतिरोध है। इससे छुटकारा पाने में आमतौर पर लंबा समय लगता है। रोगी पेट की मात्रा बढ़ाना शुरू कर देता है, पैरों में सूजन होती है, पेट की दीवार पर पूर्वकाल की नस का विस्तार होता है। रोग का सबसे गंभीर प्रकटन हैपेट, मलाशय, या घेघा में रक्तस्राव। यह सब खून की उल्टी के साथ है। और अगर अन्नप्रणाली में रक्तस्राव होता है, तो मल में रक्त की अशुद्धता होगी। निम्नलिखित मामलों में साधन अनुसंधान विधियों का आयोजन किया जाता हैः - पित्त उच्च रक्तचाप की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए; - इस तरह की विकृति की घटना का कारण बनने वाले रोग को स्थापित करने के लिए। निम्नलिखित विधियों को सबसे अधिक जानकारीपूर्ण माना जाता है। उपचार योजना चुनने में महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एकपित्त उच्च रक्तचाप पित्त नली ब्लॉक के स्तर का निर्धारण है। इस मामले में, मुख्य गैर-इनवेसिव विधि पेट की गुहा और रेट्रोपरिटोनियल स्पेस की अल्ट्रासाउंड परीक्षा है। इस तरह के निदान के कारण, बाहरी और इंट्राहेपेटिक पित्त नलिकाओं के विस्तार का पता लगाया जाता है, जो इस तरह के विकृति का लक्षण है। डिस्टल ब्लॉक स्तर के साथ पित्त उच्च रक्तचापहेपेटिकोहोलेडोच के विस्तार की विशेषता है, और थोड़ी देर के बाद इंट्राहेपेटिक नलिकाएं पतला हो जाती हैं, और पित्ताशय के आकार में वृद्धि होती है। दस मिमी से अधिक व्यास के साथ एक वाहिनी एक रसौली के मामले में होता है। एक उच्च ब्लॉक के साथ, एक टूटे हुए पित्ताशय की थैली की उपस्थिति और इंट्राहेपेटिक नलिकाओं के विस्तार का पता लगाया जाता है। इक्यावन.तीन% मामलों में ट्यूमर मनाया जाता है। पेट और रेट्रोपरिटोनियल अंगों का सीटी स्कैनअंतरिक्ष कई अंगों की संरचनात्मक सुविधाओं की कल्पना करने में मदद करता है। इस तरह के एक अध्ययन से बड़े आकार की संरचनाओं के संबंध में काफी सटीक परिणाम प्राप्त करना संभव हो जाता है और यह आकलन करता है कि आसन्न संरचनाओं में वे कितनी दृढ़ता से अंकुरित होते हैं। यदि इस तरह के विकृति का संदेह है,पित्त उच्च रक्तचाप के रूप में, विशेषज्ञ सबसे अधिक बार इंडोस्कोपिक रेट्रोहोलियोपियोप्रोटोग्राफी या कोलेजनियोग्राफी करते हैं। इस तरह के तरीकों के साथ रेडियोपैक पदार्थों की शुरूआत अलग-अलग तरीकों से की जाती है, लेकिन एक समान परिणाम होता है। एक्स-रे तस्वीर पर इस पदार्थ के कारण, डक्टल प्रणाली की धैर्य की डिग्री का आकलन करना संभव है। इस तरह के एक अध्ययन को एक आक्रामक विधि माना जाता है,और केवल एक कठिन मामले में, अर्थात् संदिग्ध घातक ट्यूमर के मामले में इसका सहारा लें। आमतौर पर अल्ट्रासोनोग्राफी के नियंत्रण में यकृत का एक उद्देश्यपूर्ण ट्रेपायोपॉपी किया जाता है। पैथोलॉजी के फोकस से ऊतक की एक छोटी मात्रा ली जाती है, जिसे हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षा के अधीन किया जाता है। प्राप्त परिणाम नियोप्लाज्म की प्रकृति का न्याय करना संभव बनाता है। यदि उपर्युक्त नैदानिक विधियाँ नहीं हैंपित्त उच्च रक्तचाप के कारण की पहचान करने में सक्षम, फिर ऑपरेशन करें। यह एक बार में नैदानिक और चिकित्सीय सर्जिकल जोड़तोड़ दोनों को अंजाम देने के अवसर के साथ लैप्रोस्कोपिक या लैपरोटोमिकली प्रदर्शन किया जा सकता है। डायग्नोस्टिक्स की मदद से, प्रत्यक्ष दृश्य और अंतर्गर्भाशयी बायोप्सी की जाती है। सर्जिकल जोड़तोड़ का पता चला विकृति विज्ञान की प्रकृति के आधार पर किया जाता है। यदि पित्त उच्च रक्तचाप का निदान किया गया है, तो उपचार रूढ़िवादी या शल्य चिकित्सा द्वारा किया जाता है। रूढ़िवादी उपचार आमतौर पर किया जाता हैकार्यात्मक विकार, जिसका उन्मूलन ऐसी दवाओं द्वारा "एटेनोलोल", "नाइट्रोग्लिसरीन", "मोनोप्रिल", "एनप्रिलिन", "नाइट्रोसोरबाइड", "सॉलोडेक्सिड", "एडनीट" के रूप में किया जाता है। सर्जिकल उपचार केवल बाहर किया जाता हैयदि सूचीबद्ध दवाएं कोई परिणाम नहीं लाती हैं। ऑपरेशन जलोदर, आंत, पेट और अन्नप्रणाली के रक्तस्राव, साथ ही हाइपरप्लेनिअल सिंड्रोम के विकास का पता लगाने में किया जाता है। सर्जिकल हस्तक्षेप के आधुनिक तरीकों में लैप्रोस्कोपी का उपयोग शामिल है, जो एक कम प्रभाव वाला है, एक कैमरा, माइक्रोमैनिपुलेटर और प्रकाश के साथ पतली ट्यूबों के छोटे चीरों के माध्यम से परिचय के साथ बख्शते संचालन। मॉनिटर पर एक छवि दिखाई देती है, जिसके आधार पर डॉक्टर बाधा को हटा देता है। किसी भी मामले में आत्म-औषधि और नहीं कर सकतेट्यूमर को हटाने के लिए दवाएं और रसायन लें, पेट की मात्रा को कम करें और बिना डॉक्टर के पर्चे के पत्थरों को हटा दें। इसके अलावा, यदि जिगर और पित्ताशय की थैली के उच्च रक्तचाप का पता चला है, तो निम्नलिखित चिकित्सीय क्रियाएं की जाती हैंः - तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स के इष्टतम स्तर को बनाए रखने के लिए ड्रॉपर लगाएं; - दवाओं का उपयोग करें जो यकृत कोशिकाओं के रक्त की आपूर्ति और पोषण में सुधार करते हैं; - एंटीबायोटिक थेरेपी बाहर ले; - पित्त पथ के विघटन आचरण।
इन दो तीन वर्षों में उनके हृदय में शान्ति, संतोष और ईश्व जैसी हद हुई बेसी विरों के ही भाग्य में होती है। मन निर अन्तर्मुग रहने के कारण उन्हें बीच बीच में दिव्य दर्शन होने लगे रोज प्रातः सायं मंच्या करते समय गायत्री का ध्यान करने करने पैसे तन्मय हो जाते थे कि उनकाक्त हो जाता था औ मैठे हुए नेत्रों से अनरल प्रेमाश्रुभाग बहने लग जाती थी। प्रभत समय हाय में टोकनी लेकर पूजा के लिये तोड़ने समय उन्हें ऐस दिखता था कि उनकी आराध्य श्री शीतला देवी अष्टवर्षीय कन्या का के रूप लेकर रक्त वस्त्र परिधान किये हुए और अनेक प्रकार अलंकार पहने हँसती हँसती उनके साथ आ रही हो और फूलों के पेड़ों की डालियों को झुकाकर उन्हें फूल तोड़ने में सहायता दे रही हो इसी प्रकार और अन्य दिव्य दर्शनों से उनका हृदय सदा उत्साहपूर्ण रहा करता था और अन्तःकरण के दृढ विश्वास तथा भक्ति के प्रकाश मुख पर प्रकट होने से उनका चेहरा सा तेजस्वी दिखई देता था। उनकी धीर गंभीर प्रशान्त और तेजस्वी मुद्रा को देखकर ग्रामवासियों के मन में उनके प्रति धीरे धीरे बहुत भक्ति और श्रद्धा होने लगी और वे लोग ऋषि के समान उनका आदर करने लगे । वे जब रास्ते से जाते थे तो ग्रामवासी अपनी बातें बंद कर देते थे और बड़े आदर से उठकर उनका सम्मान करते थे। तालाब में जब वे स्नान करते रहते, तब उनका स्नान समाप्त होने तक कोई दूसरा मनुष् तालाच में नहीं उतरता था। उनका आशीर्वाद कभी विफल नहीं हो सकता है, इस दृढ़ भावना से ग्रामवासी अपने सुख-दुःख के प्रसंगों में उनसे आशीर्वाद लेते थे ।
इन दो तीन वर्षों में उनके हृदय में शान्ति, संतोष और ईश्व जैसी हद हुई बेसी विरों के ही भाग्य में होती है। मन निर अन्तर्मुग रहने के कारण उन्हें बीच बीच में दिव्य दर्शन होने लगे रोज प्रातः सायं मंच्या करते समय गायत्री का ध्यान करने करने पैसे तन्मय हो जाते थे कि उनकाक्त हो जाता था औ मैठे हुए नेत्रों से अनरल प्रेमाश्रुभाग बहने लग जाती थी। प्रभत समय हाय में टोकनी लेकर पूजा के लिये तोड़ने समय उन्हें ऐस दिखता था कि उनकी आराध्य श्री शीतला देवी अष्टवर्षीय कन्या का के रूप लेकर रक्त वस्त्र परिधान किये हुए और अनेक प्रकार अलंकार पहने हँसती हँसती उनके साथ आ रही हो और फूलों के पेड़ों की डालियों को झुकाकर उन्हें फूल तोड़ने में सहायता दे रही हो इसी प्रकार और अन्य दिव्य दर्शनों से उनका हृदय सदा उत्साहपूर्ण रहा करता था और अन्तःकरण के दृढ विश्वास तथा भक्ति के प्रकाश मुख पर प्रकट होने से उनका चेहरा सा तेजस्वी दिखई देता था। उनकी धीर गंभीर प्रशान्त और तेजस्वी मुद्रा को देखकर ग्रामवासियों के मन में उनके प्रति धीरे धीरे बहुत भक्ति और श्रद्धा होने लगी और वे लोग ऋषि के समान उनका आदर करने लगे । वे जब रास्ते से जाते थे तो ग्रामवासी अपनी बातें बंद कर देते थे और बड़े आदर से उठकर उनका सम्मान करते थे। तालाब में जब वे स्नान करते रहते, तब उनका स्नान समाप्त होने तक कोई दूसरा मनुष् तालाच में नहीं उतरता था। उनका आशीर्वाद कभी विफल नहीं हो सकता है, इस दृढ़ भावना से ग्रामवासी अपने सुख-दुःख के प्रसंगों में उनसे आशीर्वाद लेते थे ।
10 जून, नई दिल्ली (CRICKETNMORE)। स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन रविवार को साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बन सकते हैं। मुकाबले से पहले ओवल में आज अश्विन नेट्स में जमकर प्रैक्टिस करते हुए नजर आए। अश्विन को हार्दिक पांड्या या फिर केदार जाधव की जगह टीम में शामिल किया जा सकता है। लेकिन टीम के संयोजन के हिसाब से केदार को बाहर बैठाया जा सकता है।
दस जून, नई दिल्ली । स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन रविवार को साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बन सकते हैं। मुकाबले से पहले ओवल में आज अश्विन नेट्स में जमकर प्रैक्टिस करते हुए नजर आए। अश्विन को हार्दिक पांड्या या फिर केदार जाधव की जगह टीम में शामिल किया जा सकता है। लेकिन टीम के संयोजन के हिसाब से केदार को बाहर बैठाया जा सकता है।
चुनाव के इस मौसम में दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा तथा कांग्रेस के बीच मतदाता को लुभाने की घोषणाएं की जा रही हैं। पहले भाजपा के वित्तमंत्री ने अंतरिम बजट में ऐलान किया कि हर छोटे किसान के खाते में 6,000 रुपए की रकम प्रति वर्ष सीधे डाल दी जाएगी। इसके बाद कांग्रेस ने ऐलान किया कि यदि वह सत्ता में आई तो गरीब व्यक्ति को यानि केवल छोटे किसान को ही नहीं बल्कि देश के हर गरीब नागरिक के खाते में 6,000 रुपया प्रति माह या 72,000 रुपए प्रति वर्ष की रकम सीधे डाली जाएगी जिससे वह आपनी मौलिक जरूरतों को पूरा कर सकें। दोनों पार्टियों को यह समझ आ रहा है कि सरकारी योजनाओं के से गरीब को रहत पहुंचाने की योजनाएं सफल नहीं हुई हैं। इस प्रस्तावित नकद ट्रांसफर योजना का एक सीधा लाभ यह होगा कि गरीबी पूरी तरह दूर हो जाएगी बशर्ते सभी नागरिकों को इन योजनाओं में शामिल किया जाए। ऐसे नकद ट्रांसफर को यूनिवर्सल इनकम बेसिक स्कीम अथवा यूबीआईएस कहा जाता है। जैसे यदि केवल बीपील धारकों को यह रकम दी जाती है तो यह पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई अध्ययन बताते हैं कि तमाम गरीबों के पास बीपील कार्ड नहीं हैं। इसलिए यदि यह योजना सभी देशवासियों के उपर लगाई जाती है तो गरीबी निश्चित रूप से दूर हो जाएगी। इस योजना का दूसरा लाभ होगा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था चल निकलेगी। गरीब के पास धन आएगा तो वह उस रकम से कपड़ा और साइकिल खरीदेगा और अर्थव्यवस्था में मांग और निवेश का सुचक्र स्थापित हो जाएगा। यही रकम यदि कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से व्यय की जाती है तो उसके एक हिस्से का रिसाव हो जाता है जैसे सोना खरीदने में वह रकम देश से बहार चली जाती है। सीधे नकद देने में यह रिसाव बंद हो जाएगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। तीसरा लाभ होगा कि तमाम कल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त नौकरशाही के भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल जाएगी। इन सभी लाभों को देखते हुए देशवासियों को सीधे रकम देने की योजना को लागू करना चाहिए। लेकिन सभी को संशय है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी? इस संशय को बल इस बात से भी मिलता है कि विश्व में केवल एक देश ने यूबीआईएस को प्रयोग के रूप में लागू किया गया था, फिनलैंड में और फिनलैंड ने इस योजना को केवल दो साल बाद ही त्याग दिया क्योंकि इस योजना को लागू करने का आर्थिक भार बहुत अधिक था। लेकिन मेरे गणित के अनुसार अपने देश में यह भय निर्मूल है मुक्ति हम बहुत बड़ी रकम कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय कर रहे हैं। देश की सरकार यदि चाहे तो यूबीआईएस के लिए धन जुटा सकती है। गणित इस प्रकार है। केंद्र सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर निम्न प्रकार के खर्च किए जा रहे हैंः खाद्य सब्सिडी पर 140,000 करोड़ रूपए प्रति वर्ष, रोजगार गारंटी एवं दूसरी कल्याणकारी योजनाओं पर 136,000 करोड़ एवं शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर 134,000 करोड़, कुल 410,000 करोड़। इस रकम का मेरे आंकलन में आधा यानि 205,000 करोड़ प्रशासनिक खर्च में जाता है। शेष का आधा यानि 102,000 करोड़ बीपीएल परिवारों को मिलता है और शेष का आधा 102,000 करोड़ एपीएल परिवारों को मिलता है जिसका बीपीएल को नुक्सान होगा। केंद्र सरकार द्वारा ही फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम पर 100,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी हर वर्ष दी जा रही है। इसे समाप्त कर दिया जाए तो मेरे आंकलन में बीपीएल परिवारों को इसका 5 प्रतिशत यानि 5000 करोड़ का नुकसान होगा। फर्टिलाइजर तथा पेट्रोलियम की सब्सिडी में उनका हिस्सा कम होगा क्योंकि इन माल की खपत बीपीएल द्वारा कम की जाती है। शेष 95,000 करोड़ का घाटा एपीएल परिवारों को होगा। सरकार कुछ रकम अतिरिक्त टैक्स लगाकर अर्जित कर सकती है। अपने देश में पेट्रोल और डीजल की 14,532 करोड़ लीटर की खपत होती है। इस पर 10 रुपए प्रति लीटर का यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो 140,000 करोड़ रुपए अर्जित हो सकते हैं। इसी प्रकार जीएसटी पर यदि 10 प्रतिशत यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो 120,000 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष अर्जित हो सकते हैं। इन दोनों मदों पर 260,000 करोड़ रुपए अर्जित किए जा सकते हैं। इसमें बीपीएल पर भार 10 प्रतिशत यानि 26,000 करोड़ रुपए पड़ेगा, जबकि एपीएल पर भार 90 प्रतिशत यानि 234,000 करोड़ पड़ेगा क्योंकि पेट्रोल एवं अन्य वस्तुओं की अधिकाधिक खपत एपीएल परिवारों द्वारा ही की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा आयकर पर यदि 10 प्रतिशत का यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो 100 करोड़ रुपए अर्जित किए जा सकते हैं जिसका पूरा भार एपीएल परिवारों पर पड़ेगा क्योंकि बीपीएल परिवार आयकर नहीं देते हैं। उपरोक्त गणना के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा 410,000 करोड़ विभिन्न सब्सिडियों को समाप्त करके, 100,000 करोड़ फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम सब्सिडी समाप्त करके, 260,000 करोड़ रुपए पेट्रोल एवं जीएसटी पर सैस लगाकर और 100,000 करोड़ इनकम टैक्स पर सैस लगाकर अर्जित किए जा सकते हैं। यह कुल मिलाकर 870,000 करोड़ होता है। इस रकम से 135 करोड़ लोगों को 6000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष दिया जा सकता है। यदि पांच लोगों का परिवार माने तो यह रकम 30,000 करोड़ रुपए प्रति परिवार प्रति वर्ष अथवा 2500 रुपए प्रति परिवार प्रति माह बैठती है। इस रकम को देने में सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। अब देखें कि बीपीएल परिवार पर इस योजना का क्या प्रभाव पड़ेगा। बीपीएल को कल्याणकारी योजनाओं के निरस्त होने से 102,000 करोड़ की हानि होगी। फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम सब्सिडी समाप्त करने से 5,000 करोड़ की हानि होगी। पेट्रोल एवं जीएसटी पर यूबीआईएस सैस लगाने से 26,000 करोड़ की हानि होगी। कुल 133,000 करोड़ की हानि होगी। इसके सामने यूबीआईएस से बीपीएल परिवारों को कुल 870,000 करोड़ का एक-तिहाई यानि 287,000 करोड़ रुपए का लाभ होगा। इस प्रकार बीपीएल परिवारों को 154,000 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होगा। एपीएल के लिए भी यह सौदा लाभ का है। उन्हें विभिन्न सब्सिडियों को समाप्त करने से 102,000 करोड़ रुपए की हानि होगी। फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम की सब्सिडी को समाप्त करने से 95,000 करोड़ रुपए की हानि होगी। पेट्रोल और उएऊ पर यूबीआईएस सैस से 234,000 करोड़ की हानि होगी और इनकम टैक्स पर सैस लगाने से 100,000 करोड़ की हानि होगी। कुल हानि 531,000 करोड़ होगी। इसके सामने 870,000 करोड़ रुपए की कुल यूबीआईएस राशि में इनका दो तिहाई हिस्सा होगा यानि इन्हें 574,000 करोड़ रुपए मिलेंगे। इस प्रकार इन्हें भी 43,000 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होगा। अंतिम आंकलन है कि केंद्र सरकार अपने ही बल पर यूबीआईएस को लागू कर सकती है। वित्तमंत्री ने जो छोटे किसान को सीधे रकम देने का वादा किया है, उसका विस्तार करना चाहिए। कांग्रेस को भयग्रस्त होकर यूबीआईएस को केवल गरीबों पर लागू करने के स्थान पर सम्पूर्ण जनता पर लागू करना चाहिए।
चुनाव के इस मौसम में दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा तथा कांग्रेस के बीच मतदाता को लुभाने की घोषणाएं की जा रही हैं। पहले भाजपा के वित्तमंत्री ने अंतरिम बजट में ऐलान किया कि हर छोटे किसान के खाते में छः,शून्य रुपयापए की रकम प्रति वर्ष सीधे डाल दी जाएगी। इसके बाद कांग्रेस ने ऐलान किया कि यदि वह सत्ता में आई तो गरीब व्यक्ति को यानि केवल छोटे किसान को ही नहीं बल्कि देश के हर गरीब नागरिक के खाते में छः,शून्य रुपयापया प्रति माह या बहत्तर,शून्य रुपयापए प्रति वर्ष की रकम सीधे डाली जाएगी जिससे वह आपनी मौलिक जरूरतों को पूरा कर सकें। दोनों पार्टियों को यह समझ आ रहा है कि सरकारी योजनाओं के से गरीब को रहत पहुंचाने की योजनाएं सफल नहीं हुई हैं। इस प्रस्तावित नकद ट्रांसफर योजना का एक सीधा लाभ यह होगा कि गरीबी पूरी तरह दूर हो जाएगी बशर्ते सभी नागरिकों को इन योजनाओं में शामिल किया जाए। ऐसे नकद ट्रांसफर को यूनिवर्सल इनकम बेसिक स्कीम अथवा यूबीआईएस कहा जाता है। जैसे यदि केवल बीपील धारकों को यह रकम दी जाती है तो यह पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई अध्ययन बताते हैं कि तमाम गरीबों के पास बीपील कार्ड नहीं हैं। इसलिए यदि यह योजना सभी देशवासियों के उपर लगाई जाती है तो गरीबी निश्चित रूप से दूर हो जाएगी। इस योजना का दूसरा लाभ होगा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था चल निकलेगी। गरीब के पास धन आएगा तो वह उस रकम से कपड़ा और साइकिल खरीदेगा और अर्थव्यवस्था में मांग और निवेश का सुचक्र स्थापित हो जाएगा। यही रकम यदि कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से व्यय की जाती है तो उसके एक हिस्से का रिसाव हो जाता है जैसे सोना खरीदने में वह रकम देश से बहार चली जाती है। सीधे नकद देने में यह रिसाव बंद हो जाएगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। तीसरा लाभ होगा कि तमाम कल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त नौकरशाही के भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल जाएगी। इन सभी लाभों को देखते हुए देशवासियों को सीधे रकम देने की योजना को लागू करना चाहिए। लेकिन सभी को संशय है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी? इस संशय को बल इस बात से भी मिलता है कि विश्व में केवल एक देश ने यूबीआईएस को प्रयोग के रूप में लागू किया गया था, फिनलैंड में और फिनलैंड ने इस योजना को केवल दो साल बाद ही त्याग दिया क्योंकि इस योजना को लागू करने का आर्थिक भार बहुत अधिक था। लेकिन मेरे गणित के अनुसार अपने देश में यह भय निर्मूल है मुक्ति हम बहुत बड़ी रकम कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय कर रहे हैं। देश की सरकार यदि चाहे तो यूबीआईएस के लिए धन जुटा सकती है। गणित इस प्रकार है। केंद्र सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर निम्न प्रकार के खर्च किए जा रहे हैंः खाद्य सब्सिडी पर एक सौ चालीस,शून्य करोड़ रूपए प्रति वर्ष, रोजगार गारंटी एवं दूसरी कल्याणकारी योजनाओं पर एक सौ छत्तीस,शून्य करोड़ एवं शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर एक सौ चौंतीस,शून्य करोड़, कुल चार सौ दस,शून्य करोड़। इस रकम का मेरे आंकलन में आधा यानि दो सौ पाँच,शून्य करोड़ प्रशासनिक खर्च में जाता है। शेष का आधा यानि एक सौ दो,शून्य करोड़ बीपीएल परिवारों को मिलता है और शेष का आधा एक सौ दो,शून्य करोड़ एपीएल परिवारों को मिलता है जिसका बीपीएल को नुक्सान होगा। केंद्र सरकार द्वारा ही फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम पर एक सौ,शून्य करोड़ रुपए की सब्सिडी हर वर्ष दी जा रही है। इसे समाप्त कर दिया जाए तो मेरे आंकलन में बीपीएल परिवारों को इसका पाँच प्रतिशत यानि पाँच हज़ार करोड़ का नुकसान होगा। फर्टिलाइजर तथा पेट्रोलियम की सब्सिडी में उनका हिस्सा कम होगा क्योंकि इन माल की खपत बीपीएल द्वारा कम की जाती है। शेष पचानवे,शून्य करोड़ का घाटा एपीएल परिवारों को होगा। सरकार कुछ रकम अतिरिक्त टैक्स लगाकर अर्जित कर सकती है। अपने देश में पेट्रोल और डीजल की चौदह,पाँच सौ बत्तीस करोड़ लीटर की खपत होती है। इस पर दस रुपयापए प्रति लीटर का यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो एक सौ चालीस,शून्य करोड़ रुपए अर्जित हो सकते हैं। इसी प्रकार जीएसटी पर यदि दस प्रतिशत यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो एक सौ बीस,शून्य करोड़ रुपए प्रतिवर्ष अर्जित हो सकते हैं। इन दोनों मदों पर दो सौ साठ,शून्य करोड़ रुपए अर्जित किए जा सकते हैं। इसमें बीपीएल पर भार दस प्रतिशत यानि छब्बीस,शून्य करोड़ रुपए पड़ेगा, जबकि एपीएल पर भार नब्बे प्रतिशत यानि दो सौ चौंतीस,शून्य करोड़ पड़ेगा क्योंकि पेट्रोल एवं अन्य वस्तुओं की अधिकाधिक खपत एपीएल परिवारों द्वारा ही की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा आयकर पर यदि दस प्रतिशत का यूबीआईएस सैस लगा दिया जाए तो एक सौ करोड़ रुपए अर्जित किए जा सकते हैं जिसका पूरा भार एपीएल परिवारों पर पड़ेगा क्योंकि बीपीएल परिवार आयकर नहीं देते हैं। उपरोक्त गणना के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा चार सौ दस,शून्य करोड़ विभिन्न सब्सिडियों को समाप्त करके, एक सौ,शून्य करोड़ फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम सब्सिडी समाप्त करके, दो सौ साठ,शून्य करोड़ रुपए पेट्रोल एवं जीएसटी पर सैस लगाकर और एक सौ,शून्य करोड़ इनकम टैक्स पर सैस लगाकर अर्जित किए जा सकते हैं। यह कुल मिलाकर आठ सौ सत्तर,शून्य करोड़ होता है। इस रकम से एक सौ पैंतीस करोड़ लोगों को छः हज़ार रुपयापए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष दिया जा सकता है। यदि पांच लोगों का परिवार माने तो यह रकम तीस,शून्य करोड़ रुपए प्रति परिवार प्रति वर्ष अथवा दो हज़ार पाँच सौ रुपयापए प्रति परिवार प्रति माह बैठती है। इस रकम को देने में सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। अब देखें कि बीपीएल परिवार पर इस योजना का क्या प्रभाव पड़ेगा। बीपीएल को कल्याणकारी योजनाओं के निरस्त होने से एक सौ दो,शून्य करोड़ की हानि होगी। फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम सब्सिडी समाप्त करने से पाँच,शून्य करोड़ की हानि होगी। पेट्रोल एवं जीएसटी पर यूबीआईएस सैस लगाने से छब्बीस,शून्य करोड़ की हानि होगी। कुल एक सौ तैंतीस,शून्य करोड़ की हानि होगी। इसके सामने यूबीआईएस से बीपीएल परिवारों को कुल आठ सौ सत्तर,शून्य करोड़ का एक-तिहाई यानि दो सौ सत्तासी,शून्य करोड़ रुपए का लाभ होगा। इस प्रकार बीपीएल परिवारों को एक सौ चौवन,शून्य करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होगा। एपीएल के लिए भी यह सौदा लाभ का है। उन्हें विभिन्न सब्सिडियों को समाप्त करने से एक सौ दो,शून्य करोड़ रुपए की हानि होगी। फर्टिलाइजर एवं पेट्रोलियम की सब्सिडी को समाप्त करने से पचानवे,शून्य करोड़ रुपए की हानि होगी। पेट्रोल और उएऊ पर यूबीआईएस सैस से दो सौ चौंतीस,शून्य करोड़ की हानि होगी और इनकम टैक्स पर सैस लगाने से एक सौ,शून्य करोड़ की हानि होगी। कुल हानि पाँच सौ इकतीस,शून्य करोड़ होगी। इसके सामने आठ सौ सत्तर,शून्य करोड़ रुपए की कुल यूबीआईएस राशि में इनका दो तिहाई हिस्सा होगा यानि इन्हें पाँच सौ चौहत्तर,शून्य करोड़ रुपए मिलेंगे। इस प्रकार इन्हें भी तैंतालीस,शून्य करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होगा। अंतिम आंकलन है कि केंद्र सरकार अपने ही बल पर यूबीआईएस को लागू कर सकती है। वित्तमंत्री ने जो छोटे किसान को सीधे रकम देने का वादा किया है, उसका विस्तार करना चाहिए। कांग्रेस को भयग्रस्त होकर यूबीआईएस को केवल गरीबों पर लागू करने के स्थान पर सम्पूर्ण जनता पर लागू करना चाहिए।
Bihar Assembly Election 2020 उपेंद्र व मुकेश के फैसले से महागठबंधन व लोजपा के निर्णय के बाद एनडीए में ऊहापोह। चार से पांच हजार वोटों का बिखराव भी परिणाम पर डाल सकता प्रभाव। चुनाव पूर्व बन रहे छोटे-छोटे गठजोड़ों ने जटिलता बढ़ा दी है। मुजफ्फरपुर [प्रेम शंकर मिश्रा]। एनडीए और महागठबंधन के घटक दलों के बगावती सुरों ने चुनावी राग खराब कर दिया है। महागठबंधन से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने खुद को अलग किया। इसके बाद उत्तर बिहार में जातीय समीकरण के आधार पर वोट बैंक का दावा करनेवाले मुकेश सहनी ने सीट बंटवारे की घोषणा के दौरान ही बगावत कर दी। लोजपा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को खारिज कर अलग चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी। चुनाव पूर्व बन रहे छोटे-छोटे गठजोड़ों ने जटिलता बढ़ा दी है। जिन सीटों पर कांटों का संघर्ष होगा, वहां ये बड़ा उलट-फेर कर सकते हैं। जन अधिकार पार्टी ने अनुसूचित जाति के नेता चंद्रशेखर व बिहार मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया है। रालोसपा को बसपा के रूप में नया साथी मिला है। हाथी पर सवार रालोसपा का यह गठबंधन अतिपिछड़ा व दलित वोट बैंक पर लक्ष्य साधेगा। लोजपा का भी आधार वोट दलित ही है। इसके अलावा ओवैसी भी जमीन तलाश रहे। उत्तर बिहार के कुछ मुस्लिम बहुल सीटों पर वे उम्मीदवार दे सकते हैं। एनडीए व महागठबंधन में सीटों का बंटवारा हो चुका है। मगर, टिकट पर अभी अंतिम निर्णय बाकी है। कई नेता इंतजार कर रहे। बेटिकटों की नाराजगी बढ़ेगी और वे दूसरे दल व गठबंधन का दामन थामने से नहीं हिचकेंगे। छोटे-छोटे गठबंधन भी इसी इंतजार में रहेेंगे। वे टिकट कटने से नाराज बड़े दल के नेताओं को लपकने की पूरी कोशिश करेंगे। क्षेत्र में चॢचत ये नेता जरूर अंतर पैदा करेंगे। पिछले विधानसभा चुनाव का परिणाम कई दृश्य दिखाता है। शिवहर से 'हमÓ प्रत्याशी लवली आनंद 44,115 वोट लाकर भी साढ़े चार सौ के अंतर से हार गई थीं। निर्दलीय ठाकुर रत्नाकर को 22 हजार वोट मिले। मुजफ्फरपुर के गायघाट में राजद के महेश्वर प्रसाद यादव ने भाजपा की वीणा देवी को साढ़े तीन हजार मतों से हराया था। इसमें निर्दलीय अशोक कुमार सिंह को मिले 7800 वोट ही फैक्टर रहा। वाल्मीकिनगर, बोचहां व कांटी में तो त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय ने ही बाजी मारी। चुनाव को प्रभावित करनेवाले इन उम्मीदवारों में से कई को बड़े दलों ने अपने में शामिल कर लिया है। मगर, कई ऐसे हैं जो प्लेटफॉर्म तलाश रहे हैं। उन्हें इन छोटे गठजोड़ में जगह मिली तो परिणाम पर निश्चय ही कुछ असर पड़ेगा।
Bihar Assembly Election दो हज़ार बीस उपेंद्र व मुकेश के फैसले से महागठबंधन व लोजपा के निर्णय के बाद एनडीए में ऊहापोह। चार से पांच हजार वोटों का बिखराव भी परिणाम पर डाल सकता प्रभाव। चुनाव पूर्व बन रहे छोटे-छोटे गठजोड़ों ने जटिलता बढ़ा दी है। मुजफ्फरपुर [प्रेम शंकर मिश्रा]। एनडीए और महागठबंधन के घटक दलों के बगावती सुरों ने चुनावी राग खराब कर दिया है। महागठबंधन से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने खुद को अलग किया। इसके बाद उत्तर बिहार में जातीय समीकरण के आधार पर वोट बैंक का दावा करनेवाले मुकेश सहनी ने सीट बंटवारे की घोषणा के दौरान ही बगावत कर दी। लोजपा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को खारिज कर अलग चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी। चुनाव पूर्व बन रहे छोटे-छोटे गठजोड़ों ने जटिलता बढ़ा दी है। जिन सीटों पर कांटों का संघर्ष होगा, वहां ये बड़ा उलट-फेर कर सकते हैं। जन अधिकार पार्टी ने अनुसूचित जाति के नेता चंद्रशेखर व बिहार मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया है। रालोसपा को बसपा के रूप में नया साथी मिला है। हाथी पर सवार रालोसपा का यह गठबंधन अतिपिछड़ा व दलित वोट बैंक पर लक्ष्य साधेगा। लोजपा का भी आधार वोट दलित ही है। इसके अलावा ओवैसी भी जमीन तलाश रहे। उत्तर बिहार के कुछ मुस्लिम बहुल सीटों पर वे उम्मीदवार दे सकते हैं। एनडीए व महागठबंधन में सीटों का बंटवारा हो चुका है। मगर, टिकट पर अभी अंतिम निर्णय बाकी है। कई नेता इंतजार कर रहे। बेटिकटों की नाराजगी बढ़ेगी और वे दूसरे दल व गठबंधन का दामन थामने से नहीं हिचकेंगे। छोटे-छोटे गठबंधन भी इसी इंतजार में रहेेंगे। वे टिकट कटने से नाराज बड़े दल के नेताओं को लपकने की पूरी कोशिश करेंगे। क्षेत्र में चॢचत ये नेता जरूर अंतर पैदा करेंगे। पिछले विधानसभा चुनाव का परिणाम कई दृश्य दिखाता है। शिवहर से 'हमÓ प्रत्याशी लवली आनंद चौंतालीस,एक सौ पंद्रह वोट लाकर भी साढ़े चार सौ के अंतर से हार गई थीं। निर्दलीय ठाकुर रत्नाकर को बाईस हजार वोट मिले। मुजफ्फरपुर के गायघाट में राजद के महेश्वर प्रसाद यादव ने भाजपा की वीणा देवी को साढ़े तीन हजार मतों से हराया था। इसमें निर्दलीय अशोक कुमार सिंह को मिले सात हज़ार आठ सौ वोट ही फैक्टर रहा। वाल्मीकिनगर, बोचहां व कांटी में तो त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय ने ही बाजी मारी। चुनाव को प्रभावित करनेवाले इन उम्मीदवारों में से कई को बड़े दलों ने अपने में शामिल कर लिया है। मगर, कई ऐसे हैं जो प्लेटफॉर्म तलाश रहे हैं। उन्हें इन छोटे गठजोड़ में जगह मिली तो परिणाम पर निश्चय ही कुछ असर पड़ेगा।
देख सकेंगे जो यहाँ हैं और जो संसार भर में सबसे बड़ी समझ जाती हैं और इस प्रकार बैटिलकीक के विचारों की उन्नति से यथा सम्भव आप भली प्रकार अवगत हो सकेंगे । आपके फिलोरिडा आने से मुझे वास्तव में बड़ी प्रसन्नता होगी । वहाँ आप अपने ही देश जैसा जलवायु पायेंगे । और वहाँ का वाताचरण भी आपको बहुत अनुकूल ही मिलेगा। मैं अपने फिलोरिडा के स्थान का एक चित्र इस पत्र के साथ ही भेज रहा हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप से मिलकर और आपकी यथा सम्भव सहायता करके मुझे प्रसन्नता होगी और यह न केवल आपकी ही खातिर बल्कि मि० गांधी के प्रति अपने विश्वास तथा आदर के निमित्त । मैं हूं आपका शुभचिन्तक, जोन हार्वे कैलोग । डा० होम्स के द्वारा मुझे अमेरिका के सर्कारी महकमों से काफ़ी मदद मिली। स्वास्थ्य तथा खाद्य विभाग की मुझे पूरी जानकारी कराने के लिए वहाँ के मैयोर (Mayor) द्वारा कई इन्सपेक्टरों को आदेश दे दिये गये थे जो मुझे अपनी-अपनी गाड़ियों में न्यूयोर्क से साठ सत्तर मील की दूरी तक ले जाकर वहाँ की प्रशंसनीय दुग्धशालाओं का प्रारम्भ से अन्त तक का सब कार्य भली भांति समझाते थे तथा वहाँ के मुर्गों व मछली पालन के सब ढङ्ग दिखाते और बताते थे। एक बार मुझे न्यूयोर्क का जिबहख़ाना भी देखने जाना पड़ा यद्यपि वहाँ बाहर वालों को जाने की इजाज़त आमतौर पर नहीं मिलती थी। मैं लगभग ढाई घन्टे तक वहाँ रहा और वहाँ की शुरू से आखिर तक की सब क्रियायें मैंने देखीं। वहाँ की कोलम्बिया यूनीवर्सिटी में मुझे किसी भी प्रेक्टिकल क्लास में ठने की अनुमति डा० होम्स की कृपा से यूनीवर्सिटी के डीन (Dean ) द्वारा -दो सौ एक
देख सकेंगे जो यहाँ हैं और जो संसार भर में सबसे बड़ी समझ जाती हैं और इस प्रकार बैटिलकीक के विचारों की उन्नति से यथा सम्भव आप भली प्रकार अवगत हो सकेंगे । आपके फिलोरिडा आने से मुझे वास्तव में बड़ी प्रसन्नता होगी । वहाँ आप अपने ही देश जैसा जलवायु पायेंगे । और वहाँ का वाताचरण भी आपको बहुत अनुकूल ही मिलेगा। मैं अपने फिलोरिडा के स्थान का एक चित्र इस पत्र के साथ ही भेज रहा हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप से मिलकर और आपकी यथा सम्भव सहायता करके मुझे प्रसन्नता होगी और यह न केवल आपकी ही खातिर बल्कि मिशून्य गांधी के प्रति अपने विश्वास तथा आदर के निमित्त । मैं हूं आपका शुभचिन्तक, जोन हार्वे कैलोग । डाशून्य होम्स के द्वारा मुझे अमेरिका के सर्कारी महकमों से काफ़ी मदद मिली। स्वास्थ्य तथा खाद्य विभाग की मुझे पूरी जानकारी कराने के लिए वहाँ के मैयोर द्वारा कई इन्सपेक्टरों को आदेश दे दिये गये थे जो मुझे अपनी-अपनी गाड़ियों में न्यूयोर्क से साठ सत्तर मील की दूरी तक ले जाकर वहाँ की प्रशंसनीय दुग्धशालाओं का प्रारम्भ से अन्त तक का सब कार्य भली भांति समझाते थे तथा वहाँ के मुर्गों व मछली पालन के सब ढङ्ग दिखाते और बताते थे। एक बार मुझे न्यूयोर्क का जिबहख़ाना भी देखने जाना पड़ा यद्यपि वहाँ बाहर वालों को जाने की इजाज़त आमतौर पर नहीं मिलती थी। मैं लगभग ढाई घन्टे तक वहाँ रहा और वहाँ की शुरू से आखिर तक की सब क्रियायें मैंने देखीं। वहाँ की कोलम्बिया यूनीवर्सिटी में मुझे किसी भी प्रेक्टिकल क्लास में ठने की अनुमति डाशून्य होम्स की कृपा से यूनीवर्सिटी के डीन द्वारा -दो सौ एक
राष्ट्र निर्माण एक गतिशील प्रक्रिया है जो राष्ट्र की विचार धारात्मक महत्वाकाक्षा को सामाजिक सास्कृतिक आर्थिक तथा राजनीतिक स्तर पर निश्चित स्वरुप प्रदान करती है। किसी नवस्वतन्त्र राष्ट्र के निर्माण की यह प्रक्रिया अत्यन्त जटिल है। नेहरु ने अपने शासन काल के इस दूसरे दशक में इस प्रक्रिया को अपने तथा अपने सहयोगियो द्वारा बनाये रखा। पण्डित नेहरु के सहयोगियो मे महलनोबिस जिन्होने रुस के विकास को ध्यान में रखकर पचवर्षीय योजनाओ को तैयार कर देश के आर्थिक विकास को केन्द्र मे रखा। पण्डित नेहरु और उनके सहयोगी यह जानते थे कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण की पहली शर्त है उसकी आर्थिक सुदृढता। इसलिए राष्ट्रनिर्माताओ ने इन पचवर्षीय योजनाओ मे भारत के आर्थिक विकास पर विशेष बल दिया। साथ ही राष्ट्र के विकास से सबधित लगभग सभी बिन्दुओ पर ध्यान रखा गया। विकास के इन प्रारम्भिक चरणो मे आर्थिक विकास के समक्ष तत्कालीन राष्ट्रनिर्माताओ तथा चिन्तको को अन्य बिन्दु अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण नही लगते थे। यही कारण था कि पचवर्षीय योजनाए अपने प्रथम चरण मे जहाँ अत्यन्त सफल रही वही दूसरे चरण से ही वो असतुलित दिखने लगी। विकास के इस चरण मे जिन अन्य बिन्दुओ पर भी ध्यान देने की आवश्यकता थी वो सरकारी उपेक्षा का शिकार रही । सरकारी बजट का अधिकाश हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि विज्ञान और तकनीकी जैसे क्षेत्रो तथा अन्य ऐसे क्षेत्रो पर खर्च होता था जो राष्ट्र की तत्कालीन आवश्यकता थी। इन राष्ट्रीय समस्याओ के व्यामोह मे महिला प्रश्नो पर विचार करना न तो आवश्यक समझा गया और न ही इसकी आवश्यकता ही समझी गयी। इन उपेक्षाओ के होते हुए भी महिलाओ से सबधित सामाजिक प्रश्न राजनीतिक रूप से नही तो सामाजिक रुप से ही गम्भीरता पूर्वक लोगो के समक्ष उभरने लगे। प्रोफेसर सिह एल आर "Problem of nation building in India" जी बी पत संस्थान में प्रस्तुत शोध पत्रा । राष्ट्रीय आन्दोलन के समय महिलाओ से सबधित जो विषय विचारणीय थे जिन पर राष्ट्रीय नेताओ ने अनेक विचार प्रस्तुत किये वो सभी विषय स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात उतने मुखर नही रह गये थे। फिर भी महत्वपूर्ण हिन्दू कोड बिल के पश्चात दहेज निरोधक कानून जैसी सवैधनिक प्रक्रिया इस बात का प्रबल सकेत थी कि भारतीय राष्ट्रीय सरकार महिला विषयक प्रश्नो पर निष्क्रिय नही है । औपनिवेशिक काल मे नारी सम्बन्धी विषयो के प्रति विशेष चिता व्यक्त की गयी थी । बाल-विवाह सती प्रथा पर्दा वैधव्य के प्रति विशेष चिता थी । राष्ट्र के विकास प्रक्रिया मे यह चिता बाद के दशको मे उतने सघन रूप से नही दिखायी देती । नारी सम्बन्धी प्रश्नो पर सरकारी तथा सामाजिक दोनो ही स्तरो पर अनुकूल वातावरण भी तेयार नही किया गया। स्वय महिलाये राष्ट्रीय आन्दोलन के पश्चात निष्क्रिय और निस्तेज होने लगी। राष्ट्रीय प्रश्नो के समक्ष उन्होने नवस्वतंत्र राष्ट्र के नवनिर्माण प्रक्रिया के मूल बिन्दु को भुलाकर पुन अपने पुराने स्वरूप को ग्रहण करने लगी। यह एक प्रतिगामी कदम था जो आने वाले वर्षो मे महिलाओ के विकास के सम्बन्ध मे घातक सिद्ध हुआ। इन उपेक्षाओ के होते हुए भी स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात के इस दूसरे दशक में भारतीय समाज में परिवर्तन स्पष्टत दिखने लगा । नवीन वैचारिक धरातल पर विभिन्न कारणो से नारी शिक्षा की आवश्यक्ता का आभास लोगो को होने लगा। नारी शिक्षा के नये परिवेश मे नारी की परिवर्तित भूमिका से लगभग सम्पूर्ण भारत आकर्षित हुआ। यह आकर्षण विशेष रूप से युवा पुरूषो मे दिखने लगा। इसके अनेक कारण थे । यद्यपि इस दशक मे शिक्षा का आवश्यकता से बहुत कम विकास हुआ किन्तु पारिवारिक तथा सामाजिक रूप से समाज तथा नारी के विकास में शिक्षा की आवश्यकताओ को गम्भीरता दी जाने लगी । यही कारण था कि समाज मे नारी की स्थिति तथा नारी विकास से सम्बन्धित प्रश्न गम्भीर स्वरूप ग्रहण कर राष्ट्रीय प्रश्नो से जुड गये। ये प्रश्न शिक्षा के माध्यम से न केवल महिलाओ अपितु समाज तथा राष्ट्र दोनो के ही समक्ष गम्भीर स्वरूप ग्रहण करने लगे। महिलाओ के उत्थान के सम्बन्ध मे धीरे-धीरे राष्ट्रीय सहमति बनने लगी फलस्वरूप सरकार ने महिलाओ के विकास के गम्भीर प्रयास प्रारम्भ कर दिये और कहा कि भारत मे महिलाओ के विकास के लिए अति आवश्यक है लिग निर्धारित कार्यों पर विचार करना तथा उसमे परिवर्तन लाना । फलस्वरूप एक समिति का गठन किया गया। जिसे Committee of status of womene in India (1974) जाना गया। उत्तर प्रदेश का सामाजिक एव सास्कृतिक वातावरण इसके सभी क्षेत्रो मे लगभग समान है। नगरीय एव ग्रामीण दोनो ही स्तरो पर बालिकाओ एव महिलाओ की उपेक्षा सामान्य जीवन शैली है। शिक्षा से लेकर सम्पतित्तगत अधिकारो तक उसे दूसरे दर्जे की नागरिकता प्राप्त है। वो तमाम घरेलू ससाधन जो व्यक्तित्व के विकास मे साहयक सिद्ध होते है - पर बालको एव पुरूषो का अधोषित अधिकार है। जो यहाँ के समाज की परम्परागत सोच है। कन्या का जन्म दुख का कारण माना जाता है। उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रो मे व्यवस्था के इस स्वरूप को सामाजिक समझदारी के साथ अपरोक्ष रूप से बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाता है। यह स्वीकृति परम्परागत व्यवस्था का हिस्सा है जिसे हम पितृसत्ता के माध्यम से समझ सकते है। परिवार जो समाज की बुनियादी इकाई है सबसे अधिक पितृसस्थातम सस्था है । ' पुरूष ही इस सस्था का मुखिया है। पुरूष हीन परिवार समाज की दया और दमन दोनो ही स्थितियों से गुजरते है। यही से लडके और लडकी के मध्य ऊँच-नीच का भेदभाव प्रारम्भ होता है। परिवार का मुखिया परिवार मे रहने वाले सभी स्त्री पुरूषो पर नियंत्रण रखता है। 1 भसीन कमला पितृसत्ता क्या है? पृष्ठ- 10 औरतो का ट्रेनिग एव कम्युनिकेशन सेटर ।
राष्ट्र निर्माण एक गतिशील प्रक्रिया है जो राष्ट्र की विचार धारात्मक महत्वाकाक्षा को सामाजिक सास्कृतिक आर्थिक तथा राजनीतिक स्तर पर निश्चित स्वरुप प्रदान करती है। किसी नवस्वतन्त्र राष्ट्र के निर्माण की यह प्रक्रिया अत्यन्त जटिल है। नेहरु ने अपने शासन काल के इस दूसरे दशक में इस प्रक्रिया को अपने तथा अपने सहयोगियो द्वारा बनाये रखा। पण्डित नेहरु के सहयोगियो मे महलनोबिस जिन्होने रुस के विकास को ध्यान में रखकर पचवर्षीय योजनाओ को तैयार कर देश के आर्थिक विकास को केन्द्र मे रखा। पण्डित नेहरु और उनके सहयोगी यह जानते थे कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण की पहली शर्त है उसकी आर्थिक सुदृढता। इसलिए राष्ट्रनिर्माताओ ने इन पचवर्षीय योजनाओ मे भारत के आर्थिक विकास पर विशेष बल दिया। साथ ही राष्ट्र के विकास से सबधित लगभग सभी बिन्दुओ पर ध्यान रखा गया। विकास के इन प्रारम्भिक चरणो मे आर्थिक विकास के समक्ष तत्कालीन राष्ट्रनिर्माताओ तथा चिन्तको को अन्य बिन्दु अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण नही लगते थे। यही कारण था कि पचवर्षीय योजनाए अपने प्रथम चरण मे जहाँ अत्यन्त सफल रही वही दूसरे चरण से ही वो असतुलित दिखने लगी। विकास के इस चरण मे जिन अन्य बिन्दुओ पर भी ध्यान देने की आवश्यकता थी वो सरकारी उपेक्षा का शिकार रही । सरकारी बजट का अधिकाश हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि विज्ञान और तकनीकी जैसे क्षेत्रो तथा अन्य ऐसे क्षेत्रो पर खर्च होता था जो राष्ट्र की तत्कालीन आवश्यकता थी। इन राष्ट्रीय समस्याओ के व्यामोह मे महिला प्रश्नो पर विचार करना न तो आवश्यक समझा गया और न ही इसकी आवश्यकता ही समझी गयी। इन उपेक्षाओ के होते हुए भी महिलाओ से सबधित सामाजिक प्रश्न राजनीतिक रूप से नही तो सामाजिक रुप से ही गम्भीरता पूर्वक लोगो के समक्ष उभरने लगे। प्रोफेसर सिह एल आर "Problem of nation building in India" जी बी पत संस्थान में प्रस्तुत शोध पत्रा । राष्ट्रीय आन्दोलन के समय महिलाओ से सबधित जो विषय विचारणीय थे जिन पर राष्ट्रीय नेताओ ने अनेक विचार प्रस्तुत किये वो सभी विषय स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात उतने मुखर नही रह गये थे। फिर भी महत्वपूर्ण हिन्दू कोड बिल के पश्चात दहेज निरोधक कानून जैसी सवैधनिक प्रक्रिया इस बात का प्रबल सकेत थी कि भारतीय राष्ट्रीय सरकार महिला विषयक प्रश्नो पर निष्क्रिय नही है । औपनिवेशिक काल मे नारी सम्बन्धी विषयो के प्रति विशेष चिता व्यक्त की गयी थी । बाल-विवाह सती प्रथा पर्दा वैधव्य के प्रति विशेष चिता थी । राष्ट्र के विकास प्रक्रिया मे यह चिता बाद के दशको मे उतने सघन रूप से नही दिखायी देती । नारी सम्बन्धी प्रश्नो पर सरकारी तथा सामाजिक दोनो ही स्तरो पर अनुकूल वातावरण भी तेयार नही किया गया। स्वय महिलाये राष्ट्रीय आन्दोलन के पश्चात निष्क्रिय और निस्तेज होने लगी। राष्ट्रीय प्रश्नो के समक्ष उन्होने नवस्वतंत्र राष्ट्र के नवनिर्माण प्रक्रिया के मूल बिन्दु को भुलाकर पुन अपने पुराने स्वरूप को ग्रहण करने लगी। यह एक प्रतिगामी कदम था जो आने वाले वर्षो मे महिलाओ के विकास के सम्बन्ध मे घातक सिद्ध हुआ। इन उपेक्षाओ के होते हुए भी स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात के इस दूसरे दशक में भारतीय समाज में परिवर्तन स्पष्टत दिखने लगा । नवीन वैचारिक धरातल पर विभिन्न कारणो से नारी शिक्षा की आवश्यक्ता का आभास लोगो को होने लगा। नारी शिक्षा के नये परिवेश मे नारी की परिवर्तित भूमिका से लगभग सम्पूर्ण भारत आकर्षित हुआ। यह आकर्षण विशेष रूप से युवा पुरूषो मे दिखने लगा। इसके अनेक कारण थे । यद्यपि इस दशक मे शिक्षा का आवश्यकता से बहुत कम विकास हुआ किन्तु पारिवारिक तथा सामाजिक रूप से समाज तथा नारी के विकास में शिक्षा की आवश्यकताओ को गम्भीरता दी जाने लगी । यही कारण था कि समाज मे नारी की स्थिति तथा नारी विकास से सम्बन्धित प्रश्न गम्भीर स्वरूप ग्रहण कर राष्ट्रीय प्रश्नो से जुड गये। ये प्रश्न शिक्षा के माध्यम से न केवल महिलाओ अपितु समाज तथा राष्ट्र दोनो के ही समक्ष गम्भीर स्वरूप ग्रहण करने लगे। महिलाओ के उत्थान के सम्बन्ध मे धीरे-धीरे राष्ट्रीय सहमति बनने लगी फलस्वरूप सरकार ने महिलाओ के विकास के गम्भीर प्रयास प्रारम्भ कर दिये और कहा कि भारत मे महिलाओ के विकास के लिए अति आवश्यक है लिग निर्धारित कार्यों पर विचार करना तथा उसमे परिवर्तन लाना । फलस्वरूप एक समिति का गठन किया गया। जिसे Committee of status of womene in India जाना गया। उत्तर प्रदेश का सामाजिक एव सास्कृतिक वातावरण इसके सभी क्षेत्रो मे लगभग समान है। नगरीय एव ग्रामीण दोनो ही स्तरो पर बालिकाओ एव महिलाओ की उपेक्षा सामान्य जीवन शैली है। शिक्षा से लेकर सम्पतित्तगत अधिकारो तक उसे दूसरे दर्जे की नागरिकता प्राप्त है। वो तमाम घरेलू ससाधन जो व्यक्तित्व के विकास मे साहयक सिद्ध होते है - पर बालको एव पुरूषो का अधोषित अधिकार है। जो यहाँ के समाज की परम्परागत सोच है। कन्या का जन्म दुख का कारण माना जाता है। उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रो मे व्यवस्था के इस स्वरूप को सामाजिक समझदारी के साथ अपरोक्ष रूप से बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाता है। यह स्वीकृति परम्परागत व्यवस्था का हिस्सा है जिसे हम पितृसत्ता के माध्यम से समझ सकते है। परिवार जो समाज की बुनियादी इकाई है सबसे अधिक पितृसस्थातम सस्था है । ' पुरूष ही इस सस्था का मुखिया है। पुरूष हीन परिवार समाज की दया और दमन दोनो ही स्थितियों से गुजरते है। यही से लडके और लडकी के मध्य ऊँच-नीच का भेदभाव प्रारम्भ होता है। परिवार का मुखिया परिवार मे रहने वाले सभी स्त्री पुरूषो पर नियंत्रण रखता है। एक भसीन कमला पितृसत्ता क्या है? पृष्ठ- दस औरतो का ट्रेनिग एव कम्युनिकेशन सेटर ।
मोतिहारी/राजन दत्त द्विवेदी। शहरवासियों पर बिना आतिरिक्त कर लगाए शहर का विकास किया जाएगा। हर तबके के साथ-साथ नगर निगम के कर्मियों के साथ भी बेहतर समन्यव स्थापित कर काम किया जाएगा। आईएमए हॉल में आयोजित मेडिकल रिप्रजेंटेटिव व दवा व्यवसायियों की बैठक में उक्त बातें दवा व्यवसायी संघ के जिलाध्यक्ष अशफाक करीम ने कही। संगठन की तरफ से उन्हें नगर निगम का मेयर प्रत्याशी घोषित किया गया है। स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हर व्यक्ति के लिए अशफाक करीम आज तक बेहतर कार्य करते रहे हैं। बैठक में दवा बिक्रय प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से नगर निगम के मेयर पद के लिए अशफाक करीम के नाम को प्रस्तावित किया, जिनको दवा व्यवसाई संगठन ने समर्थन दिया है। मौके पर पूर्वी चंपारण दवा व्यवसायी संघ के सचिव ध्रुव देव् नारायण सिंह ने कहा कि अशफाक करीम लगातार 20 वर्ष से पूर्वी चंपारण जिला दवा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल में संगठन विकास की ऊंचाइयों को छुआ है। वही कई आंदोलन का नेतृत्व सफलतापूर्वक कर उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता को जाहिर कर दिया है। सदैव जाति, धर्म, राजनीति से परे रहकर काम किया है, जो मिशाल है। कोरोनाकाल के उनके कार्यो की कई दफे जिला प्रशासन, औषधि प्रशासन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों ने सराहना की है। दवा विक्रय प्रतिनिधियों के साथ सदा ही इन्होंने सामंजस्य बनाकर काम किया और मौका आने पर साथ खड़े नजर आए। करीम कहते हैं कि जिला मुख्यालय नगर निगम बना है और पहली बार ही जनता को सीधे रूप से मेयर का चुनाव करने का मौका मिला है, इसलिए उनका मानना है कि जनता गैर राजनीतिक दल के व्यक्ति को चुने। मौके पर दवा व्यवसाई संघ के सचिव ध्रुव देव् नारायण सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, राजा कुमार सिंह उमाशंकर सिंह एमआर संघ के अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह, संत कुमार, उदय सिंह, नवीन कुमार, विजय कुमार, संजय कुमार एवं आशुतोष रंजन आदि उपस्थित थे।
मोतिहारी/राजन दत्त द्विवेदी। शहरवासियों पर बिना आतिरिक्त कर लगाए शहर का विकास किया जाएगा। हर तबके के साथ-साथ नगर निगम के कर्मियों के साथ भी बेहतर समन्यव स्थापित कर काम किया जाएगा। आईएमए हॉल में आयोजित मेडिकल रिप्रजेंटेटिव व दवा व्यवसायियों की बैठक में उक्त बातें दवा व्यवसायी संघ के जिलाध्यक्ष अशफाक करीम ने कही। संगठन की तरफ से उन्हें नगर निगम का मेयर प्रत्याशी घोषित किया गया है। स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हर व्यक्ति के लिए अशफाक करीम आज तक बेहतर कार्य करते रहे हैं। बैठक में दवा बिक्रय प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से नगर निगम के मेयर पद के लिए अशफाक करीम के नाम को प्रस्तावित किया, जिनको दवा व्यवसाई संगठन ने समर्थन दिया है। मौके पर पूर्वी चंपारण दवा व्यवसायी संघ के सचिव ध्रुव देव् नारायण सिंह ने कहा कि अशफाक करीम लगातार बीस वर्ष से पूर्वी चंपारण जिला दवा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल में संगठन विकास की ऊंचाइयों को छुआ है। वही कई आंदोलन का नेतृत्व सफलतापूर्वक कर उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता को जाहिर कर दिया है। सदैव जाति, धर्म, राजनीति से परे रहकर काम किया है, जो मिशाल है। कोरोनाकाल के उनके कार्यो की कई दफे जिला प्रशासन, औषधि प्रशासन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों ने सराहना की है। दवा विक्रय प्रतिनिधियों के साथ सदा ही इन्होंने सामंजस्य बनाकर काम किया और मौका आने पर साथ खड़े नजर आए। करीम कहते हैं कि जिला मुख्यालय नगर निगम बना है और पहली बार ही जनता को सीधे रूप से मेयर का चुनाव करने का मौका मिला है, इसलिए उनका मानना है कि जनता गैर राजनीतिक दल के व्यक्ति को चुने। मौके पर दवा व्यवसाई संघ के सचिव ध्रुव देव् नारायण सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, राजा कुमार सिंह उमाशंकर सिंह एमआर संघ के अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह, संत कुमार, उदय सिंह, नवीन कुमार, विजय कुमार, संजय कुमार एवं आशुतोष रंजन आदि उपस्थित थे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) IPL 2022 में अभी तक अपने सभी 7 मैच हार चुकी है और आईपीएल इतिहास में पहली टीम है, जिसने शुरुआती 7 मैच गंवाए हैं. क्रिकेट ऐसा खेल है, जहां किसी वक्त कोई टीम या खिलाड़ी अगर अर्श पर हैं, तो वह कभी भी फर्श पर आ सकते हैं. अगर बात इंडियन प्रीमियर लीग की करें, तो ये और भी ज्यादा देखने को मिलता है और इसका सबसे ताजा उदाहरण आईपीएल 2022 (IPL 2022) सीजन में दिख रहा है, जहां मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) जैसी टीम पहले सात मैच हार चुकी है और अभी तक खाता भी नहीं खोल सकी है. ये वही मुंबई इंडियंस है, जिसके नाम सबसे ज्यादा पांच आईपीएल खिताब हैं. जाहिर तौर पर मुंबई इंडियंस कई गलतियां कर रही है, जिसके कारण उसे इस हाल का सामना करना पड़ रहा है और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने इन्हीं में से एक का जिक्र करते हुए सुधार की उम्मीद जताई है. मुंबई इंडियंस के पूर्व कप्तान और पिछले कई सीजन से टीम के मेंटॉर सचिन तेंदुलकर का मानना है कि मुंबई को निर्णायक क्षणों में अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत है. पूर्व भारतीय ओपनर सचिन तेंदुलकर के मुताबिक टी20 एक बेहद क्रूर फॉर्मेट है, जहां छोटी गलतियां भी भारी पड़ जाती हैं. मुंबई ने इस सीजन में बैटिंग से लेकर बॉलिंग तक कई गलतियां की हैं और इसी कारण ये टीम लगातार सात मैच हार चुकी है. टीम को पिछली हार अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मिली, जिसमें महेंद्र सिंह धोनी ने आखिरी ओवर में मुंबई से जीत छीन ली. इसी मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर ने स्टार स्पोटर्स से बातचीत में टीम की मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा, "इस फॉर्मेट में ऐसी कोई भी टीम नहीं है जिसने यह अनुभव नहीं किया हो जो इस समय मुंबई इंडियंस कर रही है. यह प्रारूप क्रूर हो सकता है. मैच के अहम क्षणों को भुनाना जरूरी है. इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहती. कई बार आप दो या तीन रन से हारते हैं या आखिरी गेंद पर हार जाते हैं. सिर्फ यही नहीं, तेंदुलकर ने टीम को एक मजबूत इकाई के तौर पर जमने में वक्त लगने की बात भी कही, क्योंकि टीम में कई युवा और नए खिलाड़ी हैं. मास्टर ब्लास्टर के मुताबिक, "एक बात साफ है कि चुनौतीपूर्ण सीजन होने के बावजूद खिलाड़ियों ने काफी मेहनत की है. यह नई और युवा टीम है. इसे जमने में वक्त लगेगा लेकिन इस तरह के दौर में ही एक दूसरे के साथ खड़े रहकर आप समाधान निकाल सकते हैं. सचिन को मिलेगा बर्थडे गिफ्ट? मुंबई इंडियंस इस सीजन में ज्यादातर मौकों पर करीबी मुकाबलों में हारी है. कई बार तो जीत की स्थिति में होने के बाद उन्हें भुनाने में नाकाम रहने का खामियाजा मुंबई को भुगतना पड़ा है. ये आईपीएल इतिहास की पहली टीम है, जिसने किसी सीजन की शुरुआत में अपने सभी 7 मैच गंवाए हैं. मुंबई का अगला मुकाबला अब 24 अप्रैल को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ है. उस दिन सचिन का जन्मदिन भी है और मैच भी घरेलू मैदान वानखेडे स्टेडियम में है. ऐसे में मुंबई के खिलाड़ी सचिन को जीत का तोहफा देना चाहेंगे.
मुंबई इंडियंस IPL दो हज़ार बाईस में अभी तक अपने सभी सात मैच हार चुकी है और आईपीएल इतिहास में पहली टीम है, जिसने शुरुआती सात मैच गंवाए हैं. क्रिकेट ऐसा खेल है, जहां किसी वक्त कोई टीम या खिलाड़ी अगर अर्श पर हैं, तो वह कभी भी फर्श पर आ सकते हैं. अगर बात इंडियन प्रीमियर लीग की करें, तो ये और भी ज्यादा देखने को मिलता है और इसका सबसे ताजा उदाहरण आईपीएल दो हज़ार बाईस सीजन में दिख रहा है, जहां मुंबई इंडियंस जैसी टीम पहले सात मैच हार चुकी है और अभी तक खाता भी नहीं खोल सकी है. ये वही मुंबई इंडियंस है, जिसके नाम सबसे ज्यादा पांच आईपीएल खिताब हैं. जाहिर तौर पर मुंबई इंडियंस कई गलतियां कर रही है, जिसके कारण उसे इस हाल का सामना करना पड़ रहा है और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने इन्हीं में से एक का जिक्र करते हुए सुधार की उम्मीद जताई है. मुंबई इंडियंस के पूर्व कप्तान और पिछले कई सीजन से टीम के मेंटॉर सचिन तेंदुलकर का मानना है कि मुंबई को निर्णायक क्षणों में अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत है. पूर्व भारतीय ओपनर सचिन तेंदुलकर के मुताबिक टीबीस एक बेहद क्रूर फॉर्मेट है, जहां छोटी गलतियां भी भारी पड़ जाती हैं. मुंबई ने इस सीजन में बैटिंग से लेकर बॉलिंग तक कई गलतियां की हैं और इसी कारण ये टीम लगातार सात मैच हार चुकी है. टीम को पिछली हार अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मिली, जिसमें महेंद्र सिंह धोनी ने आखिरी ओवर में मुंबई से जीत छीन ली. इसी मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर ने स्टार स्पोटर्स से बातचीत में टीम की मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा, "इस फॉर्मेट में ऐसी कोई भी टीम नहीं है जिसने यह अनुभव नहीं किया हो जो इस समय मुंबई इंडियंस कर रही है. यह प्रारूप क्रूर हो सकता है. मैच के अहम क्षणों को भुनाना जरूरी है. इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहती. कई बार आप दो या तीन रन से हारते हैं या आखिरी गेंद पर हार जाते हैं. सिर्फ यही नहीं, तेंदुलकर ने टीम को एक मजबूत इकाई के तौर पर जमने में वक्त लगने की बात भी कही, क्योंकि टीम में कई युवा और नए खिलाड़ी हैं. मास्टर ब्लास्टर के मुताबिक, "एक बात साफ है कि चुनौतीपूर्ण सीजन होने के बावजूद खिलाड़ियों ने काफी मेहनत की है. यह नई और युवा टीम है. इसे जमने में वक्त लगेगा लेकिन इस तरह के दौर में ही एक दूसरे के साथ खड़े रहकर आप समाधान निकाल सकते हैं. सचिन को मिलेगा बर्थडे गिफ्ट? मुंबई इंडियंस इस सीजन में ज्यादातर मौकों पर करीबी मुकाबलों में हारी है. कई बार तो जीत की स्थिति में होने के बाद उन्हें भुनाने में नाकाम रहने का खामियाजा मुंबई को भुगतना पड़ा है. ये आईपीएल इतिहास की पहली टीम है, जिसने किसी सीजन की शुरुआत में अपने सभी सात मैच गंवाए हैं. मुंबई का अगला मुकाबला अब चौबीस अप्रैल को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ है. उस दिन सचिन का जन्मदिन भी है और मैच भी घरेलू मैदान वानखेडे स्टेडियम में है. ऐसे में मुंबई के खिलाड़ी सचिन को जीत का तोहफा देना चाहेंगे.
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? 5 मिनट के ठुमकों के लिए 4 करोड़. . . ये होता है STARDOM! स्टारडम किसे कहा जाता है ये तो आप सेलिब्रिटी से पूछिए। हाल ही में आईफा अवार्ड खत्म हुए हैं लेकिन यहां सितारों के ठुमकों की कीमत जानकर आपके होश ही उड़ जाएंगे। ये तो हम आपको बता ही चुके हैं कि आईफा अवार्ड में दीपिका पादुकोण ने प्रियंका के साथ स्टेज पर परफॉर्म करने से मना कर दिया। लेकिन दरअसल, असल वजह थी दोनों की फीस का अंतर। लाख। था। अब ये तो सभी को पता है कि प्रियंका चोपड़ा हॉलीवुड की दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं। लेकिन इसके लिए उन्होंने डील कितने में साइन की है ये सुनकर ज़रा चौंकिएगा मत। क्योंकि ये प्रियंका चोपड़ा की कीमत है। हॉलिवुडिया कीमत! पीसी पहली भारतीय अभिनेत्री हैं जिनके साथ अमेरिकी टीवी नेटवर्क एबीसी ने अनुबंध किया है। इस कॉनट्रैक्ट की कीमत है 25 करोड़ रूपये।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? पाँच मिनट के ठुमकों के लिए चार करोड़. . . ये होता है STARDOM! स्टारडम किसे कहा जाता है ये तो आप सेलिब्रिटी से पूछिए। हाल ही में आईफा अवार्ड खत्म हुए हैं लेकिन यहां सितारों के ठुमकों की कीमत जानकर आपके होश ही उड़ जाएंगे। ये तो हम आपको बता ही चुके हैं कि आईफा अवार्ड में दीपिका पादुकोण ने प्रियंका के साथ स्टेज पर परफॉर्म करने से मना कर दिया। लेकिन दरअसल, असल वजह थी दोनों की फीस का अंतर। लाख। था। अब ये तो सभी को पता है कि प्रियंका चोपड़ा हॉलीवुड की दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं। लेकिन इसके लिए उन्होंने डील कितने में साइन की है ये सुनकर ज़रा चौंकिएगा मत। क्योंकि ये प्रियंका चोपड़ा की कीमत है। हॉलिवुडिया कीमत! पीसी पहली भारतीय अभिनेत्री हैं जिनके साथ अमेरिकी टीवी नेटवर्क एबीसी ने अनुबंध किया है। इस कॉनट्रैक्ट की कीमत है पच्चीस करोड़ रूपये।
फोटो कैप्शनः टिकट चेकिंग और आरपीएफ स्टाफ विभिन्न उपनगरीय स्टेशनों पर यात्रियों की आईडी की जांच, उनका मार्गदर्शन और उनके मूवमेंट को रेग्युलेट करते हुए दिखाई दे रहे है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 21 अप्रैल, 2021 को जारी किए गए "ब्रेक द चेन" दिशानिर्देशों के संबंध में,पश्चिम रेलवे ने इसमें उल्लिखित दिशा-निर्देशों के उचित कार्यान्वयन के लिए विभिन्न विस्तृत व्यवस्थाएँ की हैं। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिनांक 21. 04. 2021 को आर्डर कमांक DMU / 2020 / CR. 92 / DisM-1 के माध्यम से जारी किए गए दिशा-निर्देशों को यात्रियों की जानकारी के लिए बुकिंग ऑफिस के बाहर निर्धारित जगह पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। रेलवे स्टेशनों पर लोगों की जागरूकता के लिए नियमित घोषणाएं शुरू की गई हैं,जिसमें यह सूचित किया जा रहा है कि केवल राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आवश्यक श्रेणी के कर्मचारियों को ही विशेष मुंबई उपनगरीय लोकल ट्रेनों से यात्रा करने की अनुमति है। तदनुसार, उपनगरीय टिकट केवल बुकिंग काउंटर से ही जारी किये जा रहे है तथा इन नए दिशानिर्देशों को देखते हुए एटीवीएम, जेटीबीएस के साथ-साथ यूटीएस ऐप को फिलहाल डीएक्टिवेट किया गया है। श्री ठाकुर ने बताया कि भीड़ की निगरानी और नियंत्रण के लिए सभी स्टेशनों, सरक्यूलेटिंग एरिया और प्लेटफार्मों पर कर्मचारियों की अधिकतम तैनाती सुनिश्चित की गई है। यात्रियों के आवागमन को सुव्यवस्थित करने के लिए, स्टेशनों के दोनों ओर सीमित संख्या में प्रवेश / निकास गेट खुले रहेंगे। किंतु प्रमुख स्टेशनों पर, एक दिशा में 2 प्रवेश / निकास गेट भी प्रदान किए गए हैं। तदनुसार, पश्चिम रेलवे के उपनगरीय खंड पर लगभग 180 प्रवेश / निकास गेट बंद कर दिए गए हैं। दिशानिर्देशों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने और स्टेशन पर अनधिकृत व्यक्तियों को रोकने के लिए स्टेशन के प्रवेश / निकास गेट पर पर्याप्त आरपीएफ / जीआरपी कर्मियों के साथ-साथ टिकट चेकिंग स्टाफ को तैनात किया गया है। केवल राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट आवश्यक श्रेणियों के यात्रियों को यात्रा की अनुमति देने के लिए यात्रियों की आईडी की जाँच की जा रही है। इसके अलावा, संवेदनशील स्टेशनों पर स्थिति और भीड़ प्रबंधन की निगरानी के लिए रेलवे अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। कड़े प्रतिबंध लागू होने के पहले दिन, यानी 23 अप्रैल, 2021 को यात्रियों की मदद, उनके उचित मार्गदर्शन और उनकी जांच के लिए उपनगरीय स्टेशनों पर 135 टिकट चेकिंग स्टाफ और 471 आरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया। अनधिकृत यात्रियों पर अंकुश लगाने के लिए टिकट चेकिंग भी तेज कर दी गई है। 23 अप्रैल, 2021 को, पश्चिम रेलवे के उपनगरीय स्टेशनों बिना टिकट यात्रा के 267 मामलों में कार्रवाई कर 69,000 रुपये जुर्माना प्राप्त किया गया। वर्तमान COVID -19 की स्थिति के मद्देनजर, रेलवे परिसर (रेलगाड़ियों सहित) में सभी व्यक्तियों द्वारा फेस मास्क / फेस कवर पहनना सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे (रेलवे परिसर में स्वच्छता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए दंड) नियम, 2012 के तहत अधिकृत रेलवे अधिकारियों द्वारा रेलवे परिसर और ट्रेनों में फेस मास्क / कवर न पहनने वाले और थूकने इत्यादि से गन्दगी फ़ैलाने वाले व्यक्तियों पर 500 दंड का प्रावधान है। 23 अप्रैल, 2021 को रेलवे अधिकारियों और साथ ही BMC मार्शलों द्वारा 107 व्यक्तियों पर मास्क नहीं पहनने के लिए जुर्माना लगा 17,600/- रुपये प्राप्त किये गए। यह विदित हो कि 17 से 23 अप्रैल, 2021 की अवधि के दौरान, 537 लोगों पर मास्क न पहनने के लिए फाइन किया गया और उनसे दंड स्वरुप 1. 23 लाख रुपये की वसूली की गयी। श्री ठाकुर ने आगे बताया कि पश्चिम रेलवे कोविड हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम (PAS)के साथ-साथ लिए स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से नियमित घोषणाएं भी कर रही है। इसी प्रकार, आकर्षक इन्फोग्राफिक्स, वेबकार्ड, ई-पोस्टर्स और वीडियो आदि के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कोविड उपयुक्त व्यवहार और कोविड स्वास्थ्य प्रोटोकॉल पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पश्चिम रेलवे अपने सभी सम्माननीय यात्रियों से ट्रेनों में यात्रा के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने सहित कोविड - 19 से संबंधित मानदंडों, प्रोटोकॉल और SOPs का पालन पालन करने का अनुरोध करती है। साथ ही यात्रियों से अनुरोध है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल पश्चिम रेलवे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल (www. twitter. com/WesternRly) और (www. twitter. com/drmbct) के साथ ही फेसबुक पेज (www. facebook. com / WesternRly)) से अपडेट प्राप्त कर सकते हैं ।
फोटो कैप्शनः टिकट चेकिंग और आरपीएफ स्टाफ विभिन्न उपनगरीय स्टेशनों पर यात्रियों की आईडी की जांच, उनका मार्गदर्शन और उनके मूवमेंट को रेग्युलेट करते हुए दिखाई दे रहे है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इक्कीस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को जारी किए गए "ब्रेक द चेन" दिशानिर्देशों के संबंध में,पश्चिम रेलवे ने इसमें उल्लिखित दिशा-निर्देशों के उचित कार्यान्वयन के लिए विभिन्न विस्तृत व्यवस्थाएँ की हैं। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिनांक इक्कीस. चार. दो हज़ार इक्कीस को आर्डर कमांक DMU / दो हज़ार बीस / CR. बानवे / DisM-एक के माध्यम से जारी किए गए दिशा-निर्देशों को यात्रियों की जानकारी के लिए बुकिंग ऑफिस के बाहर निर्धारित जगह पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। रेलवे स्टेशनों पर लोगों की जागरूकता के लिए नियमित घोषणाएं शुरू की गई हैं,जिसमें यह सूचित किया जा रहा है कि केवल राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आवश्यक श्रेणी के कर्मचारियों को ही विशेष मुंबई उपनगरीय लोकल ट्रेनों से यात्रा करने की अनुमति है। तदनुसार, उपनगरीय टिकट केवल बुकिंग काउंटर से ही जारी किये जा रहे है तथा इन नए दिशानिर्देशों को देखते हुए एटीवीएम, जेटीबीएस के साथ-साथ यूटीएस ऐप को फिलहाल डीएक्टिवेट किया गया है। श्री ठाकुर ने बताया कि भीड़ की निगरानी और नियंत्रण के लिए सभी स्टेशनों, सरक्यूलेटिंग एरिया और प्लेटफार्मों पर कर्मचारियों की अधिकतम तैनाती सुनिश्चित की गई है। यात्रियों के आवागमन को सुव्यवस्थित करने के लिए, स्टेशनों के दोनों ओर सीमित संख्या में प्रवेश / निकास गेट खुले रहेंगे। किंतु प्रमुख स्टेशनों पर, एक दिशा में दो प्रवेश / निकास गेट भी प्रदान किए गए हैं। तदनुसार, पश्चिम रेलवे के उपनगरीय खंड पर लगभग एक सौ अस्सी प्रवेश / निकास गेट बंद कर दिए गए हैं। दिशानिर्देशों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने और स्टेशन पर अनधिकृत व्यक्तियों को रोकने के लिए स्टेशन के प्रवेश / निकास गेट पर पर्याप्त आरपीएफ / जीआरपी कर्मियों के साथ-साथ टिकट चेकिंग स्टाफ को तैनात किया गया है। केवल राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट आवश्यक श्रेणियों के यात्रियों को यात्रा की अनुमति देने के लिए यात्रियों की आईडी की जाँच की जा रही है। इसके अलावा, संवेदनशील स्टेशनों पर स्थिति और भीड़ प्रबंधन की निगरानी के लिए रेलवे अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। कड़े प्रतिबंध लागू होने के पहले दिन, यानी तेईस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को यात्रियों की मदद, उनके उचित मार्गदर्शन और उनकी जांच के लिए उपनगरीय स्टेशनों पर एक सौ पैंतीस टिकट चेकिंग स्टाफ और चार सौ इकहत्तर आरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया। अनधिकृत यात्रियों पर अंकुश लगाने के लिए टिकट चेकिंग भी तेज कर दी गई है। तेईस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को, पश्चिम रेलवे के उपनगरीय स्टेशनों बिना टिकट यात्रा के दो सौ सरसठ मामलों में कार्रवाई कर उनहत्तर,शून्य रुपयापये जुर्माना प्राप्त किया गया। वर्तमान COVID -उन्नीस की स्थिति के मद्देनजर, रेलवे परिसर में सभी व्यक्तियों द्वारा फेस मास्क / फेस कवर पहनना सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे नियम, दो हज़ार बारह के तहत अधिकृत रेलवे अधिकारियों द्वारा रेलवे परिसर और ट्रेनों में फेस मास्क / कवर न पहनने वाले और थूकने इत्यादि से गन्दगी फ़ैलाने वाले व्यक्तियों पर पाँच सौ दंड का प्रावधान है। तेईस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को रेलवे अधिकारियों और साथ ही BMC मार्शलों द्वारा एक सौ सात व्यक्तियों पर मास्क नहीं पहनने के लिए जुर्माना लगा सत्रह,छः सौ/- रुपये प्राप्त किये गए। यह विदित हो कि सत्रह से तेईस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस की अवधि के दौरान, पाँच सौ सैंतीस लोगों पर मास्क न पहनने के लिए फाइन किया गया और उनसे दंड स्वरुप एक. तेईस लाख रुपये की वसूली की गयी। श्री ठाकुर ने आगे बताया कि पश्चिम रेलवे कोविड हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के साथ-साथ लिए स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से नियमित घोषणाएं भी कर रही है। इसी प्रकार, आकर्षक इन्फोग्राफिक्स, वेबकार्ड, ई-पोस्टर्स और वीडियो आदि के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कोविड उपयुक्त व्यवहार और कोविड स्वास्थ्य प्रोटोकॉल पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पश्चिम रेलवे अपने सभी सम्माननीय यात्रियों से ट्रेनों में यात्रा के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने सहित कोविड - उन्नीस से संबंधित मानदंडों, प्रोटोकॉल और SOPs का पालन पालन करने का अनुरोध करती है। साथ ही यात्रियों से अनुरोध है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल पश्चिम रेलवे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल और के साथ ही फेसबुक पेज ) से अपडेट प्राप्त कर सकते हैं ।
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। दीपावली (Diwali 2022) के अवसर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने पत्नी श्रीमती साधना सिंह और पूरे परिवार के साथ जाकर पूजन के लिए मां लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदी। राजधानी के न्यू मार्केट में सपरिवार पहुंचकर उन्होने धन, धान्य, सुख, समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी की प्रतिमा ली और उनसे संपूर्ण मध्यप्रदेश और देश पर अपनी कृपा की वर्षा करते रहने की प्रार्थना की। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। घर घर में सुख, समृद्धि और वैभव की कामना के साथ महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। आज अमावस्या तिथि शाम 5 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर की शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त 6 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ हो रहा है और ये रात 8 बजकर 16 मिनट तक रगेगा। ये अवधि 1 घंटे 23 मिनट की है और यही पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है। वहीं प्रदोष काल 5 बजकर 43 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। वृषभ काल शाम 6 बजकर 53 मिनट से रात 8 बजकर 48 मिनट तक है। उत्तम मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। दिवाली पर परंपरानुसार सबसे पहले श्रीगणेश की पूजा की जाती है और फिर माता लक्ष्मी का विधि विधान से पूजन किया जाता है। पूजन सामग्री में शंख, कमल का फूल, लाल वस्त्र, गोमती चक्र, धनिया के दाने, सुपारी, कच्चा सिंघाड़ा, मोती व कमलगट्टे की माला को रखना चाहिए।
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। दीपावली के अवसर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पत्नी श्रीमती साधना सिंह और पूरे परिवार के साथ जाकर पूजन के लिए मां लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदी। राजधानी के न्यू मार्केट में सपरिवार पहुंचकर उन्होने धन, धान्य, सुख, समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी की प्रतिमा ली और उनसे संपूर्ण मध्यप्रदेश और देश पर अपनी कृपा की वर्षा करते रहने की प्रार्थना की। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। घर घर में सुख, समृद्धि और वैभव की कामना के साथ महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। आज अमावस्या तिथि शाम पाँच बजकर सत्ताईस मिनट से प्रारंभ होकर पच्चीस अक्टूबर की शाम चार बजकर अट्ठारह मिनट तक रहेगी। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त छः बजकर तिरेपन मिनट से प्रारंभ हो रहा है और ये रात आठ बजकर सोलह मिनट तक रगेगा। ये अवधि एक घंटाटे तेईस मिनट की है और यही पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है। वहीं प्रदोष काल पाँच बजकर तैंतालीस मिनट से रात आठ बजकर सोलह मिनट तक रहेगी। वृषभ काल शाम छः बजकर तिरेपन मिनट से रात आठ बजकर अड़तालीस मिनट तक है। उत्तम मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। दिवाली पर परंपरानुसार सबसे पहले श्रीगणेश की पूजा की जाती है और फिर माता लक्ष्मी का विधि विधान से पूजन किया जाता है। पूजन सामग्री में शंख, कमल का फूल, लाल वस्त्र, गोमती चक्र, धनिया के दाने, सुपारी, कच्चा सिंघाड़ा, मोती व कमलगट्टे की माला को रखना चाहिए।
Nainital News: नैनीताल (Nainital) में भवाली (Bhowali) से लगभग 8 किलोमीटर दूर कैंची नामक स्थान में कैंची धाम (Kainchi Dham) मंदिर स्थापित है. जिसमें हनुमान भक्त बाबा नीब करौली महाराज ने भंडारे की शुरुवात कराई. शहर से 19 किलोमीटर दूर वैली में बसे कैंची धाम मंदिर में साल 1965 से भंडारा होते आ रहा है. बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा भंडारे की शुरुआत करने के बाद पिछले 57 सालों से लगातार भंडारे का आयोजन होता है और लाखों लोग यहां पैदल प्रसाद लेने आते हैं. कोविड काल के दो सालों की बंदी के बाद इस साल प्रशासन ने भंडारे के आयोजन की अनुमति दे दी. मंदिर में भक्तों को मालपुए और सब्जी का पैक्ड प्रसाद दिया गया और दूर दूर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे. श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे पैदल यात्रियों के साथ मोटरसाइकिल, कार, बस, पुलिस वाहन और शटल सेवा के कारण भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई कि सड़क पूरी तरह से जाम हो गई. पुलिस कर्मियों को एस. एस. पी. को जाम से निकालना मुश्किल हो गया . पुलिस ने शटल सेवा में लगी बसों और मंदिर की तरफ जा रहे सभी वाहनों को प्रतिबंधित किया, तब जाकर ट्रैफिक व्यवस्था दोबारा पटरी पर आ सकी. भक्तों ने पैदल मंदिर की तरफ जा रहे श्रद्धालुओं के लिए पानी, नींबू पानी, जूस, पूरी आलू और हलवे का टेंट लगाकर इंतजाम किया हुआ था. मंदिर प्रबंधन की तरफ से बाबा और मां के दर्शन के बाद प्रसाद वितरण की पूरी व्यवस्था की गई है. मंदिर में व्यवस्थाओं को संभालने के लिए भक्तों ने श्रमदान किया.
Nainital News: नैनीताल में भवाली से लगभग आठ किलोग्राममीटर दूर कैंची नामक स्थान में कैंची धाम मंदिर स्थापित है. जिसमें हनुमान भक्त बाबा नीब करौली महाराज ने भंडारे की शुरुवात कराई. शहर से उन्नीस किलोग्राममीटर दूर वैली में बसे कैंची धाम मंदिर में साल एक हज़ार नौ सौ पैंसठ से भंडारा होते आ रहा है. बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा भंडारे की शुरुआत करने के बाद पिछले सत्तावन सालों से लगातार भंडारे का आयोजन होता है और लाखों लोग यहां पैदल प्रसाद लेने आते हैं. कोविड काल के दो सालों की बंदी के बाद इस साल प्रशासन ने भंडारे के आयोजन की अनुमति दे दी. मंदिर में भक्तों को मालपुए और सब्जी का पैक्ड प्रसाद दिया गया और दूर दूर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे. श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे पैदल यात्रियों के साथ मोटरसाइकिल, कार, बस, पुलिस वाहन और शटल सेवा के कारण भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई कि सड़क पूरी तरह से जाम हो गई. पुलिस कर्मियों को एस. एस. पी. को जाम से निकालना मुश्किल हो गया . पुलिस ने शटल सेवा में लगी बसों और मंदिर की तरफ जा रहे सभी वाहनों को प्रतिबंधित किया, तब जाकर ट्रैफिक व्यवस्था दोबारा पटरी पर आ सकी. भक्तों ने पैदल मंदिर की तरफ जा रहे श्रद्धालुओं के लिए पानी, नींबू पानी, जूस, पूरी आलू और हलवे का टेंट लगाकर इंतजाम किया हुआ था. मंदिर प्रबंधन की तरफ से बाबा और मां के दर्शन के बाद प्रसाद वितरण की पूरी व्यवस्था की गई है. मंदिर में व्यवस्थाओं को संभालने के लिए भक्तों ने श्रमदान किया.
क्या आपने 'त्रिदेव' और 'विश्वात्मा' फिल्म देखी है? यदि हां, तो आपको सोनम उर्फ बख्तावर खान जरूर याद होगी। जी हां, वही 90 के दशक में बोल्ड एक्ट्रेस के तौर पर प्रसिद्ध हुईं सोनम। दरअसल, सोनम का असली नाम बख्तावर खान है। महज 14 साल की उम्र में बॉलीवुड में कदम रखने वाली सोनम की प्रसिद्धि इतनी थी कि 90 के दशक में प्रोड्यूसर्स उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए उनके घर के चक्कर काटते थे। हालांकि इतना बेहतरीन करियर होने के बावूज सोनम ने 25 फिल्मों में काम करने बाद अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी। सोनम ने ऐसा क्यों किया? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी जिसकी वजह से उन्हें अपने करियर के पीक पर गुमनाम होना पड़ा? आइए जानते हैं। आज ही के दिन सन 1972 में जन्मी सोनम ने 1988 में आई फिल्म 'विजय' से अपने करियर की शुरूआत की थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर गई और सोनम रातों-रात सुपरस्टार बन गईं। इस फिल्म में सोनम ने जबरदस्त किसिंग सीन दिए और इसी के बाद से उनकी गिनती बोल्ड एक्ट्रेस में होने लगी। सोनम सच में उस दौर की सबसे लकी एक्ट्रेस थीं जिनकी पहली ही फिल्म ने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था। हालांकि, सोनम को असली पहचान 'विजय' और 'त्रिदेव' जैसी फिल्मों से मिली। इतना ही नहीं, त्रिदेव के सुपरहिट होने के बाद से हर कोई सोनम काे ओए ओए गर्ल के नाम से जानने लगे। जी हां, उस दौर में सोनम का क्रेज इस कदर था कि त्रिदेव की रिलीज के 1 साल बाद आई फिल्म 'मिट्टी और सोना' में किसी ने चंकी पांडे को नोटिस तक नहीं किया। हर कोई अपनी नजरें सोनम पर टिकाए बैठा था। बता दें कि इस फिल्म में सोमन ने जबरदस्त बोल्ड सीन्स दिए थे। बता दें कि 90 के दशक में बोल्ड सीन्स देना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यही कारण है कि फिल्म 'मिट्टी और सोना' ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। यदि उन दिनों के लोगों से इस फिल्म के बारे में बात करेंगे तो वह आपको बताएंगे कि उस दौर में लोग इस फिल्म की टिकट खरीदने के लिए घंटों लाइन लगाकर बैठे रहते थे। टिकट मिलते ही वजह सिनेमाघरों के अंदर चले जाते थे और जैसे ही सोनम के बोल्ड सीन्स खत्म हो जाते थे वह थिएटर छोड़ बाहर चले जाते थे। इतनी प्रसिद्ध होने के बावजूद सोनम ने यह इंडस्ट्री छोड़ दी। जी हां, सोनम ने शादी के बाद फिल्में को अलविदा कह दिया। बाद में अंडरवर्ल्ड से लगातार मिल रही जान से मारने की धमकी की वजह से सोनम और उनके पति ने भारत छोड़ दिया और विदेश जाकर बस गए।
क्या आपने 'त्रिदेव' और 'विश्वात्मा' फिल्म देखी है? यदि हां, तो आपको सोनम उर्फ बख्तावर खान जरूर याद होगी। जी हां, वही नब्बे के दशक में बोल्ड एक्ट्रेस के तौर पर प्रसिद्ध हुईं सोनम। दरअसल, सोनम का असली नाम बख्तावर खान है। महज चौदह साल की उम्र में बॉलीवुड में कदम रखने वाली सोनम की प्रसिद्धि इतनी थी कि नब्बे के दशक में प्रोड्यूसर्स उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए उनके घर के चक्कर काटते थे। हालांकि इतना बेहतरीन करियर होने के बावूज सोनम ने पच्चीस फिल्मों में काम करने बाद अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी। सोनम ने ऐसा क्यों किया? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी जिसकी वजह से उन्हें अपने करियर के पीक पर गुमनाम होना पड़ा? आइए जानते हैं। आज ही के दिन सन एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में जन्मी सोनम ने एक हज़ार नौ सौ अठासी में आई फिल्म 'विजय' से अपने करियर की शुरूआत की थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर गई और सोनम रातों-रात सुपरस्टार बन गईं। इस फिल्म में सोनम ने जबरदस्त किसिंग सीन दिए और इसी के बाद से उनकी गिनती बोल्ड एक्ट्रेस में होने लगी। सोनम सच में उस दौर की सबसे लकी एक्ट्रेस थीं जिनकी पहली ही फिल्म ने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था। हालांकि, सोनम को असली पहचान 'विजय' और 'त्रिदेव' जैसी फिल्मों से मिली। इतना ही नहीं, त्रिदेव के सुपरहिट होने के बाद से हर कोई सोनम काे ओए ओए गर्ल के नाम से जानने लगे। जी हां, उस दौर में सोनम का क्रेज इस कदर था कि त्रिदेव की रिलीज के एक साल बाद आई फिल्म 'मिट्टी और सोना' में किसी ने चंकी पांडे को नोटिस तक नहीं किया। हर कोई अपनी नजरें सोनम पर टिकाए बैठा था। बता दें कि इस फिल्म में सोमन ने जबरदस्त बोल्ड सीन्स दिए थे। बता दें कि नब्बे के दशक में बोल्ड सीन्स देना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यही कारण है कि फिल्म 'मिट्टी और सोना' ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। यदि उन दिनों के लोगों से इस फिल्म के बारे में बात करेंगे तो वह आपको बताएंगे कि उस दौर में लोग इस फिल्म की टिकट खरीदने के लिए घंटों लाइन लगाकर बैठे रहते थे। टिकट मिलते ही वजह सिनेमाघरों के अंदर चले जाते थे और जैसे ही सोनम के बोल्ड सीन्स खत्म हो जाते थे वह थिएटर छोड़ बाहर चले जाते थे। इतनी प्रसिद्ध होने के बावजूद सोनम ने यह इंडस्ट्री छोड़ दी। जी हां, सोनम ने शादी के बाद फिल्में को अलविदा कह दिया। बाद में अंडरवर्ल्ड से लगातार मिल रही जान से मारने की धमकी की वजह से सोनम और उनके पति ने भारत छोड़ दिया और विदेश जाकर बस गए।
श्रीनगर, चार जनवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्डे पर सोमवार को खराब दृश्यता के कारण लगातार दूसरे दिन विमानों का आवागमन प्रभावित हुआ । अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी । उन्होंने कहा कि दिन में दृश्यता की स्थिति में सुधार होने के बाद विमानों का परिचालन शुरू हो सकेगा । गौरतलब है कि घाटी में हिमपात होने के कारण रविवार को विमानों का परिचालन रद्द करना पड़ना था । मौसम विभाग ने कि सोमवार से अगले दो दिन तक मध्यम से तेज और कहीं-कहीं भारी हिमपात होने की आशंका जतायी है ।
श्रीनगर, चार जनवरी जम्मू कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्डे पर सोमवार को खराब दृश्यता के कारण लगातार दूसरे दिन विमानों का आवागमन प्रभावित हुआ । अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी । उन्होंने कहा कि दिन में दृश्यता की स्थिति में सुधार होने के बाद विमानों का परिचालन शुरू हो सकेगा । गौरतलब है कि घाटी में हिमपात होने के कारण रविवार को विमानों का परिचालन रद्द करना पड़ना था । मौसम विभाग ने कि सोमवार से अगले दो दिन तक मध्यम से तेज और कहीं-कहीं भारी हिमपात होने की आशंका जतायी है ।
BAREILLY: इज्जतनगर थाना अंतर्गत स्टेडियम रोड पर देव विहार कॉलोनी में प्राइवेट आईआईटी कॉलेज के संचालक के घर मंडे दोपहर रिश्तेदार बनकर आए बदमाशों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने कॉलेज मालिक के पत्नी के ननदोई की ओर से मिठाई भेजने के बहाने गेट ओपन करा लिया और फिर बंधक बनाकर लूटपाट शुरू कर दी। आरोप है कि बदमाशों ने किचन में गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की और फिर उसे मरा समझकर मौके से फरार हो गए। बदमाश मौके पर मिठाई, फल, चश्मा और मोबाइल भूल गए हैं। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया है कि उससे पुलिस को घटना पर संदेह लग रहा है। हालांकि, पुलिस ने हत्या के प्रयास की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। मूलरूप से हाथरस निवासी जयदीप शर्मा स्टेडियम रोड पर आशापुरम कॉलोनी के पास देव विहार में पत्नी नंदिनी और छह साल की बेटी अनुष्का संग रहते हैं। उनका बीसलपुर रोड पर कमुआ गांव के पास राधाकिशन आईटीआई कॉलेज है। वह मंडे सुबह कॉलेज गए हुए थे। घर में पत्नी अकेली थीं। नौकरानी के जाने के बाद पत्नी पूजा की तैयारी कर रही थीं कि तभी सवा एक बजे मेन गेट ओपन कराकर तीन लोग घर में घुस आए। तीनों ने कहा कि उन्हें तारापुर वाले भाई साहब मुरारीलाल जी ने भेजा है। मुरारीलाल का नाम बताने के चलते ही नंदनी ने गेट ओपन कर दिया। तीनों अपने साथ में मिठाई का डिब्बा और सेब भी लाए थे। नंदिनी तीनों के लिए पानी लायी दौरान एक युवक ने बोला कि सर के कॉलेज में बेटे का एडमिशन कराना है। नंदिनी ने बताया कि जैसे ही वह तीनों के लिए चाय बनाने किचन में गई. तभी बदमाशों ने हमला बोल दिया और उन्हें पकड़ लिया और उनकी गर्दन दबाने लगे। उन्होंने बचने की कोशिश भी की, जिसके चलते उनके हाथों की चूडि़यां भी टूट गई। जब वह बेहोश हो गई तो बदमाश वहां से भाग गए। जब उन्हें कुछ देर बाद होश आया तो उन्होंने पड़ोसी को सूचना दी। पड़ोसी की सूचना पर पुलिस पहुंची और पूछताछ शुरू की। जब पुलिस ने घर में जांच की तो पाया कि घर से कोई भी सामान गायब नहीं हुआ है। इससे साफ है कि बदमाशों का मकसद हत्या करना ही रहा होगा। महिला ने जब बदमाशों से पति से बात करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि मोबाइल की बैट्री डाउन है और चार्जर मांगा, लेकिन घर पर जो मोबाइल मिला है, उसमें सिम ही नहीं था। आईटीआई संचालक के घर घुसे बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे। क्योंकि बदमाशों को पता था कि घर में संचालक की पत्नी अकेली है। घर में एक डॉगी भी था, लेकिन वह छत पर बंधा हुआ था। पड़ोसियों के मुताबिक संचालक के घर के बाहर एक बैगनआर कार खड़ी थी, लेकिन जिस शॉप से मिठाई लायी गई उसके दुकानदार ने बताया कि एक युवक उनकी दुकान पर आया था कि आधा किलो मिक्स मिठाई लेकर गया था। पुलिस ने पास की कॉलोनी के एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज कलेक्ट की है। आईटीआई संचालक के घर पत्नी पर हमला करने का मामला सामने आया है। हत्या के प्रयास की एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
BAREILLY: इज्जतनगर थाना अंतर्गत स्टेडियम रोड पर देव विहार कॉलोनी में प्राइवेट आईआईटी कॉलेज के संचालक के घर मंडे दोपहर रिश्तेदार बनकर आए बदमाशों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने कॉलेज मालिक के पत्नी के ननदोई की ओर से मिठाई भेजने के बहाने गेट ओपन करा लिया और फिर बंधक बनाकर लूटपाट शुरू कर दी। आरोप है कि बदमाशों ने किचन में गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की और फिर उसे मरा समझकर मौके से फरार हो गए। बदमाश मौके पर मिठाई, फल, चश्मा और मोबाइल भूल गए हैं। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया है कि उससे पुलिस को घटना पर संदेह लग रहा है। हालांकि, पुलिस ने हत्या के प्रयास की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। मूलरूप से हाथरस निवासी जयदीप शर्मा स्टेडियम रोड पर आशापुरम कॉलोनी के पास देव विहार में पत्नी नंदिनी और छह साल की बेटी अनुष्का संग रहते हैं। उनका बीसलपुर रोड पर कमुआ गांव के पास राधाकिशन आईटीआई कॉलेज है। वह मंडे सुबह कॉलेज गए हुए थे। घर में पत्नी अकेली थीं। नौकरानी के जाने के बाद पत्नी पूजा की तैयारी कर रही थीं कि तभी सवा एक बजे मेन गेट ओपन कराकर तीन लोग घर में घुस आए। तीनों ने कहा कि उन्हें तारापुर वाले भाई साहब मुरारीलाल जी ने भेजा है। मुरारीलाल का नाम बताने के चलते ही नंदनी ने गेट ओपन कर दिया। तीनों अपने साथ में मिठाई का डिब्बा और सेब भी लाए थे। नंदिनी तीनों के लिए पानी लायी दौरान एक युवक ने बोला कि सर के कॉलेज में बेटे का एडमिशन कराना है। नंदिनी ने बताया कि जैसे ही वह तीनों के लिए चाय बनाने किचन में गई. तभी बदमाशों ने हमला बोल दिया और उन्हें पकड़ लिया और उनकी गर्दन दबाने लगे। उन्होंने बचने की कोशिश भी की, जिसके चलते उनके हाथों की चूडि़यां भी टूट गई। जब वह बेहोश हो गई तो बदमाश वहां से भाग गए। जब उन्हें कुछ देर बाद होश आया तो उन्होंने पड़ोसी को सूचना दी। पड़ोसी की सूचना पर पुलिस पहुंची और पूछताछ शुरू की। जब पुलिस ने घर में जांच की तो पाया कि घर से कोई भी सामान गायब नहीं हुआ है। इससे साफ है कि बदमाशों का मकसद हत्या करना ही रहा होगा। महिला ने जब बदमाशों से पति से बात करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि मोबाइल की बैट्री डाउन है और चार्जर मांगा, लेकिन घर पर जो मोबाइल मिला है, उसमें सिम ही नहीं था। आईटीआई संचालक के घर घुसे बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे। क्योंकि बदमाशों को पता था कि घर में संचालक की पत्नी अकेली है। घर में एक डॉगी भी था, लेकिन वह छत पर बंधा हुआ था। पड़ोसियों के मुताबिक संचालक के घर के बाहर एक बैगनआर कार खड़ी थी, लेकिन जिस शॉप से मिठाई लायी गई उसके दुकानदार ने बताया कि एक युवक उनकी दुकान पर आया था कि आधा किलो मिक्स मिठाई लेकर गया था। पुलिस ने पास की कॉलोनी के एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज कलेक्ट की है। आईटीआई संचालक के घर पत्नी पर हमला करने का मामला सामने आया है। हत्या के प्रयास की एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
इन सितारों के घर का मेकओवर कर चुकी हैं गौरी खान (Gauri Khan) बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की पत्नी गौरी खान (Gauri Khan) एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। हाल ही में गौरी खान ने अनन्या पांडे (Ananya Panday) के घर को डेकोरेट किया है। इस बात की जानकारी अनन्या ने अपने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर दी हैं। इससे पहले भी गौरी खान ने बॉलीवुड के कई सितारों के घर को नया रूप दिया है। इस लिस्ट में करण जौहर (Karan Johar) से लेकर कटरीना कैफ तक के नाम शामिल हैं।
इन सितारों के घर का मेकओवर कर चुकी हैं गौरी खान बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। हाल ही में गौरी खान ने अनन्या पांडे के घर को डेकोरेट किया है। इस बात की जानकारी अनन्या ने अपने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर दी हैं। इससे पहले भी गौरी खान ने बॉलीवुड के कई सितारों के घर को नया रूप दिया है। इस लिस्ट में करण जौहर से लेकर कटरीना कैफ तक के नाम शामिल हैं।
जेएनयू की छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया था कि उसने फोन पर बातचीत में कहा था कि वह अपने दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जा रही है। इसके बाद फोन रख दिया था। नई दिल्ली, 15 फरवरीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से पीएचडी करने वाली 26 वर्षीय छात्रा 10 मार्च से लापता थी, जिसे पुलिस ने खोज निकाला है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी मिलिंद डोंब्रे ने बताया है कि जेएनयू की लापता छात्र मिल गई है। छात्रा का कहना है कि वह खुद ही चली गई थीं। वह ठीक हैं। आपको बता दें कि गुरुवार को उसके लापता होने का पांचवां दिन था। इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 के तहत यानि अगवा करने का मुकदमा दर्ज किया था। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई थी। जानकारी के अनुसार बताया गया था कि छात्रा पूजा कसाना मूल रूप से गाजियाबाद की रहने वाली है और जेएनयू से इंटीग्रेटेड एम. फिल एंड पीएचडी का कोर्स कर रही है। पूजा के पिता के मुताबिक, उन्होंने 10 मार्च को रात में पूजा से बात की थी। खबरों के अनुसार, छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया था कि उसने बातचीत में कहा था कि वह अपने दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जा रही है। इसके बाद फोन रख दिया। जब सुबह 11 मार्च को दोबारा फोन लगाया गया तो उसका फोन स्विच ऑफ जा रहा था। उसके बाद से उससे कोई बातचीत नहीं हुई है। बेटी का फोन लगातार स्विच ऑफ रहने के बाद पिता ने उसकी तलाश करनी शुरू कर दी थी और जेएनयू कैंपस के अंदर उसके हॉस्टल में भी गए थे, लेकिन उसका कमरा बंद मिला था। हर जगह तलाश करने के बाद उसके पिता ने 12 मार्च को पुलिस में एक लिखित शिकायत दी थी। आपको बता दें कि इससे पहले जेएनयू से 15 अक्टूबर, 2016 को लापता हुए नजीब अहमद का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। इस मामले में पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की एक फोरेंसिक प्रयोगशाला को जेएनयू छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में संदिग्ध नौ छात्रों के मोबाइल फोन की जांच का काम तेज करने का निर्देश दिए थे। अदालत ने जब्त फोन के फोरेंसिक विश्लेषण में देरी पर चिंता जताते हुए प्रयोगशाला को 19 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।
जेएनयू की छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया था कि उसने फोन पर बातचीत में कहा था कि वह अपने दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जा रही है। इसके बाद फोन रख दिया था। नई दिल्ली, पंद्रह फरवरीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाली छब्बीस वर्षीय छात्रा दस मार्च से लापता थी, जिसे पुलिस ने खोज निकाला है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी मिलिंद डोंब्रे ने बताया है कि जेएनयू की लापता छात्र मिल गई है। छात्रा का कहना है कि वह खुद ही चली गई थीं। वह ठीक हैं। आपको बता दें कि गुरुवार को उसके लापता होने का पांचवां दिन था। इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा तीन सौ पैंसठ के तहत यानि अगवा करने का मुकदमा दर्ज किया था। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई थी। जानकारी के अनुसार बताया गया था कि छात्रा पूजा कसाना मूल रूप से गाजियाबाद की रहने वाली है और जेएनयू से इंटीग्रेटेड एम. फिल एंड पीएचडी का कोर्स कर रही है। पूजा के पिता के मुताबिक, उन्होंने दस मार्च को रात में पूजा से बात की थी। खबरों के अनुसार, छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया था कि उसने बातचीत में कहा था कि वह अपने दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जा रही है। इसके बाद फोन रख दिया। जब सुबह ग्यारह मार्च को दोबारा फोन लगाया गया तो उसका फोन स्विच ऑफ जा रहा था। उसके बाद से उससे कोई बातचीत नहीं हुई है। बेटी का फोन लगातार स्विच ऑफ रहने के बाद पिता ने उसकी तलाश करनी शुरू कर दी थी और जेएनयू कैंपस के अंदर उसके हॉस्टल में भी गए थे, लेकिन उसका कमरा बंद मिला था। हर जगह तलाश करने के बाद उसके पिता ने बारह मार्च को पुलिस में एक लिखित शिकायत दी थी। आपको बता दें कि इससे पहले जेएनयू से पंद्रह अक्टूबर, दो हज़ार सोलह को लापता हुए नजीब अहमद का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। इस मामले में पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की एक फोरेंसिक प्रयोगशाला को जेएनयू छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में संदिग्ध नौ छात्रों के मोबाइल फोन की जांच का काम तेज करने का निर्देश दिए थे। अदालत ने जब्त फोन के फोरेंसिक विश्लेषण में देरी पर चिंता जताते हुए प्रयोगशाला को उन्नीस मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।
लाइव हिंदी खबर :- सिंह राशि :- इन राशि के लोगों पर महाकाल का आशीर्वाद रहेगा इस राशि के लोगों को अपने भविष्य में अपार सफलता मिलेगी लेकिन आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है यदि आप अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हैं तो आप सबसे बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं। आपका आने वाला समय बहुत ख़ुशी से बीतेगा और आपको लाभ मिलने के योग भी दिखेंगे इस चिन्ह वाले लोगों की आय में वृद्धि होगी जिससे वे प्रसन्न होंगे महाकाल की कृपा से आप अपने काम में सफल होंगे। इन राशियों के लोग महाकाल की कृपा से अपने जीवन में कई बदलाव देखेंगे जो लोग व्यवसायी हैं उन्हें व्यापार में भारी धन लाभ होने की संभावना है आपके जीवन की सभी समस्याएं और परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी आपको वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। महाकाल के आशीर्वाद से आप अपने जीवन में सफलता की ओर बढ़ेंगे आपको अपने प्रयासों का फल मिलने वाला है आपको अपने उन दोस्तों को छोड़ना होगा जो गलत काम करते हैं और शराब पीते हैं नहीं तो आपके सम्मान का अपमान होगा। आपको चोट लग सकती है आप आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छूने जा रहे हैं आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। इन राशि के लोगों पर महाकाल के आशीर्वाद से उनके जीवन में आने वाली सभी बुरी शक्तियां दूर हो जाएंगी आपको सफलता के नए अवसर प्राप्त होंगे। आपको इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए यदि आप प्रयास करते हैं तो आप आसानी से अपने जीवन की सबसे बड़ी कठिनाइयों को पार कर लेंगे। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और समय के साथ आपके जीवन में नए बदलाव होंगे जो व्यक्ति एक छात्र है उसे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी और नौकरी वाले लोगों को अपने क्षेत्र में उन्नति मिलेगी। आपके व्यवसाय से लाभ होगा। इन राशियों के जातकों पर महाकाल की कृपा है जिसके कारण इन्हें अचानक धन का लाभ मिलने वाला है जिसके कारण इनका दिल खुश रहेगा इन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा शांति का माहौल रहेगा और परिवार में शांति है। स्थिति मजबूत होगी आपके जीवन में खुशियाँ आने वाली हैं। आप एक नया वाहन खरीद सकते हैं। आपके दुश्मन आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन वे सफल नहीं होंगे।
लाइव हिंदी खबर :- सिंह राशि :- इन राशि के लोगों पर महाकाल का आशीर्वाद रहेगा इस राशि के लोगों को अपने भविष्य में अपार सफलता मिलेगी लेकिन आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है यदि आप अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हैं तो आप सबसे बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं। आपका आने वाला समय बहुत ख़ुशी से बीतेगा और आपको लाभ मिलने के योग भी दिखेंगे इस चिन्ह वाले लोगों की आय में वृद्धि होगी जिससे वे प्रसन्न होंगे महाकाल की कृपा से आप अपने काम में सफल होंगे। इन राशियों के लोग महाकाल की कृपा से अपने जीवन में कई बदलाव देखेंगे जो लोग व्यवसायी हैं उन्हें व्यापार में भारी धन लाभ होने की संभावना है आपके जीवन की सभी समस्याएं और परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी आपको वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। महाकाल के आशीर्वाद से आप अपने जीवन में सफलता की ओर बढ़ेंगे आपको अपने प्रयासों का फल मिलने वाला है आपको अपने उन दोस्तों को छोड़ना होगा जो गलत काम करते हैं और शराब पीते हैं नहीं तो आपके सम्मान का अपमान होगा। आपको चोट लग सकती है आप आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छूने जा रहे हैं आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। इन राशि के लोगों पर महाकाल के आशीर्वाद से उनके जीवन में आने वाली सभी बुरी शक्तियां दूर हो जाएंगी आपको सफलता के नए अवसर प्राप्त होंगे। आपको इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए यदि आप प्रयास करते हैं तो आप आसानी से अपने जीवन की सबसे बड़ी कठिनाइयों को पार कर लेंगे। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और समय के साथ आपके जीवन में नए बदलाव होंगे जो व्यक्ति एक छात्र है उसे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी और नौकरी वाले लोगों को अपने क्षेत्र में उन्नति मिलेगी। आपके व्यवसाय से लाभ होगा। इन राशियों के जातकों पर महाकाल की कृपा है जिसके कारण इन्हें अचानक धन का लाभ मिलने वाला है जिसके कारण इनका दिल खुश रहेगा इन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा शांति का माहौल रहेगा और परिवार में शांति है। स्थिति मजबूत होगी आपके जीवन में खुशियाँ आने वाली हैं। आप एक नया वाहन खरीद सकते हैं। आपके दुश्मन आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन वे सफल नहीं होंगे।
गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर श्रीलंका ने शुक्रवार (22 अक्टूबर) को खेले गए आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2021 के 12वें मुकाबले में नीदरलैंड्स को 8 विकेट से हरा दिया। श्रीलंका पहले ही सुपर 12 के लिए क्वालीफाई कर चुकी है औऱ वह ग्रुप 1 का हिस्सा है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी नीदरलैंड की टीम 10 ओवरों में सिर्फ 44 रनों पर ऑलआउट हो गई। कॉलिन एकरमैन ने सबसे ज्यादा 11 रनों की पारी खेली। इसके अलावा टीम का कोई खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। श्रीलंका के लिए लाहिरू कुमारा ने सात रन देकर तीन विकेट, वहीं वानिंदु हसरंगा ने नौ रन देकर तीन विकेट हासिल किए। इसके अलावा महीश थीक्षाना ने दो और दुष्मंथा चमीरा ने एक विकेट अपने खाते में डाला। इसके जवाब में श्रीलंका ने 7.1 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 45 रन बनाकर जीत हासिल कर ली। कुसल परेरा ने सबसे ज्यादा नाबाद 33 रन बनाए। नीदरलैंड के लिए ब्रैंडन ग्लोवर और पॉल वैन मीकेरेन ने एक-एक विकेट चटकाया।
गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर श्रीलंका ने शुक्रवार को खेले गए आईसीसी टी-बीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस के बारहवें मुकाबले में नीदरलैंड्स को आठ विकेट से हरा दिया। श्रीलंका पहले ही सुपर बारह के लिए क्वालीफाई कर चुकी है औऱ वह ग्रुप एक का हिस्सा है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी नीदरलैंड की टीम दस ओवरों में सिर्फ चौंतालीस रनों पर ऑलआउट हो गई। कॉलिन एकरमैन ने सबसे ज्यादा ग्यारह रनों की पारी खेली। इसके अलावा टीम का कोई खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। श्रीलंका के लिए लाहिरू कुमारा ने सात रन देकर तीन विकेट, वहीं वानिंदु हसरंगा ने नौ रन देकर तीन विकेट हासिल किए। इसके अलावा महीश थीक्षाना ने दो और दुष्मंथा चमीरा ने एक विकेट अपने खाते में डाला। इसके जवाब में श्रीलंका ने सात.एक ओवर में दो विकेट के नुकसान पर पैंतालीस रन बनाकर जीत हासिल कर ली। कुसल परेरा ने सबसे ज्यादा नाबाद तैंतीस रन बनाए। नीदरलैंड के लिए ब्रैंडन ग्लोवर और पॉल वैन मीकेरेन ने एक-एक विकेट चटकाया।
सरकार ने पेट्रोल के दामों को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसका सीधा असर अब लोगों की जेब पर पड़ेगा। बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब 1 अक्टूबर से बिना ब्लेंड किए हुए ईंधन की कीमत 2 रुपए बढ़ा दी जाएगी यानी 1 लीटर पेट्रोल की कीमत पर 2 रुपए का इजाफा हो जाएगा। ब्लेंडेड फ्यूल वह होता है जिसमें पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिक्स किया जाता है और उसकी प्रोसेसिंग की जाती है। खबरों के अनुसार, सरकार के मुताबिक यह कदम फ्यूल के दामों से पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि देश में ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाना है, क्योंकि ब्लेंडेड फ्यूल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। फिलहाल देश में 8 फीसदी इथेनॉल के साथ फ्यूल को ब्लेंड किया जाता है, कुछ राज्य संचालित कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम यह कंपनियां पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाकर बेचते हैं, वहीं लगभग सभी निजी कंपनियां अभी भी बिना इथेनॉल मिलाए पेट्रोल बेचती हैं। सरकार के इस कदम को लेकर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार का यह कदम देश में ब्लेंडेड फ्यूल के चलन को बढ़ाने के लिए है, क्योंकि इससे हमें तेल बेचने वाले देशों पर कम निर्भर होना होगा। गौरतलब है कि भारत ने पेट्रोल में नौ प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है।
सरकार ने पेट्रोल के दामों को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसका सीधा असर अब लोगों की जेब पर पड़ेगा। बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब एक अक्टूबर से बिना ब्लेंड किए हुए ईंधन की कीमत दो रुपयापए बढ़ा दी जाएगी यानी एक लीटरटर पेट्रोल की कीमत पर दो रुपयापए का इजाफा हो जाएगा। ब्लेंडेड फ्यूल वह होता है जिसमें पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिक्स किया जाता है और उसकी प्रोसेसिंग की जाती है। खबरों के अनुसार, सरकार के मुताबिक यह कदम फ्यूल के दामों से पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि देश में ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाना है, क्योंकि ब्लेंडेड फ्यूल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। फिलहाल देश में आठ फीसदी इथेनॉल के साथ फ्यूल को ब्लेंड किया जाता है, कुछ राज्य संचालित कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम यह कंपनियां पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाकर बेचते हैं, वहीं लगभग सभी निजी कंपनियां अभी भी बिना इथेनॉल मिलाए पेट्रोल बेचती हैं। सरकार के इस कदम को लेकर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार का यह कदम देश में ब्लेंडेड फ्यूल के चलन को बढ़ाने के लिए है, क्योंकि इससे हमें तेल बेचने वाले देशों पर कम निर्भर होना होगा। गौरतलब है कि भारत ने पेट्रोल में नौ प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है।
Rohit Sharma statement:नई दिल्लीः तीन मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को पटखनी देकर सीरीज पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है। भारत ने पहला मैच पांच विकेट से जीता था और इसके बाद लगातार दो मैच गंवा दिए। सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया था, जहां ऑस्ट्रेलिया ने 21 रनों से जीत दर्ज की। Rohit Sharma statement:सूर्यकुमार यादव ने इस सीरीज के तीनों मैचों में गोल्डन डक बनाया और आलोचकों के निशाने पर हैं। सीरीज के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने एक बार फिर सूर्यकुमार यादव का बचाव किया है। रोहित ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सूर्यकुमार यादव ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में महज तीन ही गेंद खेल पाए। यह किसी के साथ भी हो सकता है। Rohit Sharma statement:रोहित ने आगे कहा, 'यह किसी के साथ भी हो सकता है, लेकिन उसके अंदर क्वॉलिटी भी है और क्षमता भी है। बस वह ऐसे दौर से गुजर रहा है। ' पहले दो मैचों में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करने उतरे सूर्यकुमार यादव को इस मैच में सातवें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा गया था। एश्टन एगर की गेंद पर सूर्यकुमार यादव बोल्ड होकर पवेलियन लौटे।
Rohit Sharma statement:नई दिल्लीः तीन मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को पटखनी देकर सीरीज पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है। भारत ने पहला मैच पांच विकेट से जीता था और इसके बाद लगातार दो मैच गंवा दिए। सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया था, जहां ऑस्ट्रेलिया ने इक्कीस रनों से जीत दर्ज की। Rohit Sharma statement:सूर्यकुमार यादव ने इस सीरीज के तीनों मैचों में गोल्डन डक बनाया और आलोचकों के निशाने पर हैं। सीरीज के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने एक बार फिर सूर्यकुमार यादव का बचाव किया है। रोहित ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सूर्यकुमार यादव ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में महज तीन ही गेंद खेल पाए। यह किसी के साथ भी हो सकता है। Rohit Sharma statement:रोहित ने आगे कहा, 'यह किसी के साथ भी हो सकता है, लेकिन उसके अंदर क्वॉलिटी भी है और क्षमता भी है। बस वह ऐसे दौर से गुजर रहा है। ' पहले दो मैचों में नंबर-चार पर बल्लेबाजी करने उतरे सूर्यकुमार यादव को इस मैच में सातवें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा गया था। एश्टन एगर की गेंद पर सूर्यकुमार यादव बोल्ड होकर पवेलियन लौटे।
बाढड़ा, 26 दिसंबर (निस) गांव काकड़ौली हुक्मी में एक बंद मकान से लाखों रुपयों के कीमती आभूषण चोरी मामले में पुलिस की लापरवाही के विरोध में पुरुष एवं महिलाओं ने गांव के मुख्य चौक से बाढड़ा पुलिस स्टेशन तक पैदल मार्च किया तथा थाना प्रभारी को मांगपत्र सौंप कर चोरी के दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी करने व चोरी के सभी आभूषण बरामद करने की मांग की। थाना प्रभारी बीर सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि आभूषण चोरी मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। गांव काकड़ौली हुक्मी निवासी एक महिला, जो अपने मायके गई हुई थी, के मकान से चोर ने घर पर रखे लाखों रुपयों के आभूषण गत दिनों उड़ा लिए थे। पुलिस ने गांव के ही युवक को हिरासत में लिया, जिससे कुछ सुराग भी हाथ लगे तथा चांदी के कुछ आभूषणों की बरामदगी भी हुई। पीडि़ता ने आज गांव में पंचायत आयोजित कर पुलिस द्वारा जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया। ग्रामीण सारी पंचायत को पैदल व महिलाओं को ट्रेक्टर ट्राली में लेकर बाढड़ा पुलिस उपाधिक्षक कार्यालय पहुंचे लेकिन उनके छुट्टी पर जाने के कारण ग्रामीणों का पैदल जत्था पुलिस स्टेशन पहुंच कर धरने पर बैठ गया। पूर्व सरपंच सीताराम शर्मा व खाप नेता जयदीप काकड़ौली ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में मनमर्जी कर रही है।
बाढड़ा, छब्बीस दिसंबर गांव काकड़ौली हुक्मी में एक बंद मकान से लाखों रुपयों के कीमती आभूषण चोरी मामले में पुलिस की लापरवाही के विरोध में पुरुष एवं महिलाओं ने गांव के मुख्य चौक से बाढड़ा पुलिस स्टेशन तक पैदल मार्च किया तथा थाना प्रभारी को मांगपत्र सौंप कर चोरी के दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी करने व चोरी के सभी आभूषण बरामद करने की मांग की। थाना प्रभारी बीर सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि आभूषण चोरी मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। गांव काकड़ौली हुक्मी निवासी एक महिला, जो अपने मायके गई हुई थी, के मकान से चोर ने घर पर रखे लाखों रुपयों के आभूषण गत दिनों उड़ा लिए थे। पुलिस ने गांव के ही युवक को हिरासत में लिया, जिससे कुछ सुराग भी हाथ लगे तथा चांदी के कुछ आभूषणों की बरामदगी भी हुई। पीडि़ता ने आज गांव में पंचायत आयोजित कर पुलिस द्वारा जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया। ग्रामीण सारी पंचायत को पैदल व महिलाओं को ट्रेक्टर ट्राली में लेकर बाढड़ा पुलिस उपाधिक्षक कार्यालय पहुंचे लेकिन उनके छुट्टी पर जाने के कारण ग्रामीणों का पैदल जत्था पुलिस स्टेशन पहुंच कर धरने पर बैठ गया। पूर्व सरपंच सीताराम शर्मा व खाप नेता जयदीप काकड़ौली ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में मनमर्जी कर रही है।
नई दिल्लीः कोरोना महामारी से प्रभावित बच्चों को गोद लेने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को अहम निर्देश दिए हैं, अदालत ने निर्देश दिया कि गैर सरकारी संगठनों द्वारा महामारी से प्रभावित बच्चों की पहचान का खुलासा कर फंड इकट्ठा करने और उन्हें गोद लेने के लिए इच्छुक लोगों को आमंत्रित करने से रोका जाए। गुप्ता ने बताया कि लोगों को अनाथों को गोद लेने के लिए आमंत्रित करने वाले कई विज्ञापन सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह के पोस्ट देखने को मिले हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनमें से ज्यादातर पोस्ट फर्जी थे।
नई दिल्लीः कोरोना महामारी से प्रभावित बच्चों को गोद लेने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को अहम निर्देश दिए हैं, अदालत ने निर्देश दिया कि गैर सरकारी संगठनों द्वारा महामारी से प्रभावित बच्चों की पहचान का खुलासा कर फंड इकट्ठा करने और उन्हें गोद लेने के लिए इच्छुक लोगों को आमंत्रित करने से रोका जाए। गुप्ता ने बताया कि लोगों को अनाथों को गोद लेने के लिए आमंत्रित करने वाले कई विज्ञापन सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह के पोस्ट देखने को मिले हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनमें से ज्यादातर पोस्ट फर्जी थे।
वायरल पोस्ट के साथ बताई गई भावनात्मक कहानी सच्ची नहीं है। यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। नई दिल्ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक हिरण का शिकार करते दो चीतों को देखा जा सकता है। तस्वीर में दिख रहा हिरण बेहद स्थिर है, जो स्थिति को देखते हुए अपने आप में अचरज वाली बात है। पोस्ट के साथ दावा किया जा रहा है कि इस तस्वीर ने फोटोग्राफर को डिप्रेशन में ला दिया, क्योंकि इस हिरण ने अपने बच्चों को बचाने के लिए चीतों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। क्या है वायरल पोस्ट में? पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है। एलिसन बटिगिएग की वेबसाइट पर हमें इस तस्वीर के बारे में डिटेल्स मिलीं। यहां इस तस्वीर के साथ डिस्क्रिप्शन लिखा था, "अनुवादितः मैंने सितंबर 2013 में केन्या के मासाई मारा में इस हिरन का शिकार देखा। चीते की मां नरशा अपने बच्चों को शिकार को मारना सिखा रही थी। हालांकि, वे तेज गति से थोड़े धीमे थे और वे असहाय इम्पाला शिकार को मारने के बजाय उसके साथ खेल रहे थे। नरशा, चीता की माँ है, जो सभी तस्वीरों में इम्पाला को गले पकड़े हुए है। युवा कुछ कौशल का अभ्यास करते हैं। जैसे कि उछलना और ट्रिपिंग करना, जो उन्हें सही लगता है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे इम्पाला को प्रभावी ढंग से गला घोंटने में सक्षम हैं। तस्वीरों के इस क्रम में जो असामान्य है वह यह है कि इम्पाला (हिरण) इस पूरी प्रक्रिया में कितना शांत है। यह शायद सदमे में है और इसे डर से लकवा मार गया है।........" पूरी कहानी Cheetah Kill पढ़ी जा सकती है। फेसबुक पर यह पोस्ट Betzaida Alsindawi नामक यूजर ने शेयर की थी। इस यूजर की प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि यूजर ने अपनी पर्सनल जानकारी हाइड कर रखी है। निष्कर्षः वायरल पोस्ट के साथ बताई गई भावनात्मक कहानी सच्ची नहीं है। यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। - Claim Review : his photo is one of the best photos in the last ten years because it brought its owner ((photographer)) into depression: The story says: These two cheetahs attacked the deer at a time when she was playing with her little boys. The deer had a chance to escape, and the distance and survival was in favor of it, but decided to surrender itself to the panthers like this. Why?? To give her children a chance to escape... Because if she escapes first, there won't be time for her children to escape. The picture is the last minute of the mother with her throat in the mouth of the panthers steadily looking to make sure that her little ones escaped peacefully before being predated. कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
वायरल पोस्ट के साथ बताई गई भावनात्मक कहानी सच्ची नहीं है। यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक हिरण का शिकार करते दो चीतों को देखा जा सकता है। तस्वीर में दिख रहा हिरण बेहद स्थिर है, जो स्थिति को देखते हुए अपने आप में अचरज वाली बात है। पोस्ट के साथ दावा किया जा रहा है कि इस तस्वीर ने फोटोग्राफर को डिप्रेशन में ला दिया, क्योंकि इस हिरण ने अपने बच्चों को बचाने के लिए चीतों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। क्या है वायरल पोस्ट में? पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है। एलिसन बटिगिएग की वेबसाइट पर हमें इस तस्वीर के बारे में डिटेल्स मिलीं। यहां इस तस्वीर के साथ डिस्क्रिप्शन लिखा था, "अनुवादितः मैंने सितंबर दो हज़ार तेरह में केन्या के मासाई मारा में इस हिरन का शिकार देखा। चीते की मां नरशा अपने बच्चों को शिकार को मारना सिखा रही थी। हालांकि, वे तेज गति से थोड़े धीमे थे और वे असहाय इम्पाला शिकार को मारने के बजाय उसके साथ खेल रहे थे। नरशा, चीता की माँ है, जो सभी तस्वीरों में इम्पाला को गले पकड़े हुए है। युवा कुछ कौशल का अभ्यास करते हैं। जैसे कि उछलना और ट्रिपिंग करना, जो उन्हें सही लगता है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे इम्पाला को प्रभावी ढंग से गला घोंटने में सक्षम हैं। तस्वीरों के इस क्रम में जो असामान्य है वह यह है कि इम्पाला इस पूरी प्रक्रिया में कितना शांत है। यह शायद सदमे में है और इसे डर से लकवा मार गया है।........" पूरी कहानी Cheetah Kill पढ़ी जा सकती है। फेसबुक पर यह पोस्ट Betzaida Alsindawi नामक यूजर ने शेयर की थी। इस यूजर की प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि यूजर ने अपनी पर्सनल जानकारी हाइड कर रखी है। निष्कर्षः वायरल पोस्ट के साथ बताई गई भावनात्मक कहानी सच्ची नहीं है। यह कहानी मनगढ़ंत है। तस्वीर को खींचने वाली फोटोग्राफर ने भी इस बात की पुष्टि की है। - Claim Review : his photo is one of the best photos in the last ten years because it brought its owner ) into depression: The story says: These two cheetahs attacked the deer at a time when she was playing with her little boys. The deer had a chance to escape, and the distance and survival was in favor of it, but decided to surrender itself to the panthers like this. Why?? To give her children a chance to escape... Because if she escapes first, there won't be time for her children to escape. The picture is the last minute of the mother with her throat in the mouth of the panthers steadily looking to make sure that her little ones escaped peacefully before being predated. कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
सौतेली मां और पिता ने जब अपनी बेटी को घर से भगा दिया तो लोगों ने आसरा देकर उसकी शादी करा दी। इस शादी में पूरा गांव के साथ-साथ दूसरे गांव के लोग भी शरीक हुए और नव दंपती को बधाई दी। यह अनोखी शादी वैशाली जिले के हाजीपुर प्रखंड के दिग्घी कला पूर्वी गांव में हुई है। अब इस शादी की चर्चा पूरे जिले में है। बताया जाता है कि नवादा में पिता और सौतेली मां ने अपनी बेटी को पीटकर भगा दिया था। इसके बाद वह भटकती हुई वैशाली पहुंची। यहां करीब 20 दिनों तक उसे स्थानीय लोगों ने सहारा दिया। इसके बाद जब वह घर जाने को तैयार नहीं हुई तो अच्छा लड़का देखकर उसकी शादी करा दी गई। युवती गुड़िया कुमारी नवादा के मझगांवा की निवासी है। वह मैट्रिक पास है। उसकी सौतेली मां हमेशा मारपीट करती थी, जिसका विरोध पिता भी नहीं करते थे। गुड़िया ने बताया, '5 जनवरी को पिता जगत किशोर यादव और सौतेली मां ने मारपीट कर घर से निकाल दिया था। घर से निकाले जाने के बाद भटकते हुए ट्रेन से पहले पटना, फिर हाजीपुर पहुंची। यहां किसी तरह दिग्घी पूर्वी गांव तक पहुंच गई। गांव में महेंद्र दास के दरवाजे पर जाकर खाना और पानी मांगते हुए रोने लगी। महेंद्र दास की पत्नी ने पूछताछ की तब अपनी आपबीती सुनाई। ' आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद महेंद्र दास के परिवार ने भटकी हुई लड़की को अपने पास रख लिया और बेटी की तरह प्यार देने लगे। महेंद्र दास के यहां रह रही गुड़िया पर इसी बीच कुछ असामाजिक लोगों की नजर पड़ गई। तब उसने दिग्घी पूर्वी पंचायत की मुखिया आशा देवी और उनके पुत्र रवि प्रकाश उर्फ टिंकू को मामले की जानकारी दी। रवि प्रकाश ने बताया कि हमारे समाज का दायित्व था कि उसे अपनी बेटी की नजरों से देखें। इसी उद्देश्य से लड़की से पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उसे थाने को सुपुर्द करने की योजना बनाई गई, लेकिन लड़की यहीं पर अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही थी। उसने थाना जाने से साफ इनकार कर दिया। मुखिया आशा देवी के मुताबिक, लड़की की इच्छा थी कि वह घर नहीं जाएगी, यहीं रहेगी। उसकी शादी कर दी जाए। इसके बाद लड़की के स्वजातीय दिग्घी निवासी कमल राय के भांजे सारण जिले के सबलपुर निवासी अलख राय से उसकी शादी तय की गई। बीते गुरुवार को मुखिया आशा देवी के आवासीय परिसर में सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में दोनों की शादी करा दी गई। शादी में लड़का और लड़की पक्ष समेत अन्य गांवों के लोग भी शामिल हुए। मुखिया पुत्र रवि प्रकाश और उनकी पत्नी पूजा लक्ष्मी ने अपनी बेटी की तरह उसका छेका, तिलक जैसे विधि-विधान कराए। फिर दोनों पति-पत्नी ने गुड़िया का कन्यादान कर उसकी विदाई की। ग्रामीणों ने अपने सामर्थ्य के अनुसार, गुड़िया को उपहार, कपड़ा और आभूषण दिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। गांव में खुशी का माहौल बन गया। शादी के बाद गुड़िया ने कहा, 'सब कुछ मेरी मर्जी से हुआ है। मैं इस शादी से खुश हूं। ' वहीं, सबलपुर नेवल टोला निवासी दूल्हा अलख राय ने बताया, 'इस शादी से वह भी खुश है। शादी पूरे नियम-कानून के साथ हिन्दू रीति-रिवाज से हुई है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी दे दी गई है। ' This website follows the DNPA Code of Ethics.
सौतेली मां और पिता ने जब अपनी बेटी को घर से भगा दिया तो लोगों ने आसरा देकर उसकी शादी करा दी। इस शादी में पूरा गांव के साथ-साथ दूसरे गांव के लोग भी शरीक हुए और नव दंपती को बधाई दी। यह अनोखी शादी वैशाली जिले के हाजीपुर प्रखंड के दिग्घी कला पूर्वी गांव में हुई है। अब इस शादी की चर्चा पूरे जिले में है। बताया जाता है कि नवादा में पिता और सौतेली मां ने अपनी बेटी को पीटकर भगा दिया था। इसके बाद वह भटकती हुई वैशाली पहुंची। यहां करीब बीस दिनों तक उसे स्थानीय लोगों ने सहारा दिया। इसके बाद जब वह घर जाने को तैयार नहीं हुई तो अच्छा लड़का देखकर उसकी शादी करा दी गई। युवती गुड़िया कुमारी नवादा के मझगांवा की निवासी है। वह मैट्रिक पास है। उसकी सौतेली मां हमेशा मारपीट करती थी, जिसका विरोध पिता भी नहीं करते थे। गुड़िया ने बताया, 'पाँच जनवरी को पिता जगत किशोर यादव और सौतेली मां ने मारपीट कर घर से निकाल दिया था। घर से निकाले जाने के बाद भटकते हुए ट्रेन से पहले पटना, फिर हाजीपुर पहुंची। यहां किसी तरह दिग्घी पूर्वी गांव तक पहुंच गई। गांव में महेंद्र दास के दरवाजे पर जाकर खाना और पानी मांगते हुए रोने लगी। महेंद्र दास की पत्नी ने पूछताछ की तब अपनी आपबीती सुनाई। ' आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद महेंद्र दास के परिवार ने भटकी हुई लड़की को अपने पास रख लिया और बेटी की तरह प्यार देने लगे। महेंद्र दास के यहां रह रही गुड़िया पर इसी बीच कुछ असामाजिक लोगों की नजर पड़ गई। तब उसने दिग्घी पूर्वी पंचायत की मुखिया आशा देवी और उनके पुत्र रवि प्रकाश उर्फ टिंकू को मामले की जानकारी दी। रवि प्रकाश ने बताया कि हमारे समाज का दायित्व था कि उसे अपनी बेटी की नजरों से देखें। इसी उद्देश्य से लड़की से पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उसे थाने को सुपुर्द करने की योजना बनाई गई, लेकिन लड़की यहीं पर अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही थी। उसने थाना जाने से साफ इनकार कर दिया। मुखिया आशा देवी के मुताबिक, लड़की की इच्छा थी कि वह घर नहीं जाएगी, यहीं रहेगी। उसकी शादी कर दी जाए। इसके बाद लड़की के स्वजातीय दिग्घी निवासी कमल राय के भांजे सारण जिले के सबलपुर निवासी अलख राय से उसकी शादी तय की गई। बीते गुरुवार को मुखिया आशा देवी के आवासीय परिसर में सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में दोनों की शादी करा दी गई। शादी में लड़का और लड़की पक्ष समेत अन्य गांवों के लोग भी शामिल हुए। मुखिया पुत्र रवि प्रकाश और उनकी पत्नी पूजा लक्ष्मी ने अपनी बेटी की तरह उसका छेका, तिलक जैसे विधि-विधान कराए। फिर दोनों पति-पत्नी ने गुड़िया का कन्यादान कर उसकी विदाई की। ग्रामीणों ने अपने सामर्थ्य के अनुसार, गुड़िया को उपहार, कपड़ा और आभूषण दिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। गांव में खुशी का माहौल बन गया। शादी के बाद गुड़िया ने कहा, 'सब कुछ मेरी मर्जी से हुआ है। मैं इस शादी से खुश हूं। ' वहीं, सबलपुर नेवल टोला निवासी दूल्हा अलख राय ने बताया, 'इस शादी से वह भी खुश है। शादी पूरे नियम-कानून के साथ हिन्दू रीति-रिवाज से हुई है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी दे दी गई है। ' This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्लीः अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम समुदाय से जुड़ने के लिए देश भर में अभियान चला रही भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता है। यह संदेश देने की कोशिश में कि सरकार ने संसद के माध्यम से तीन तलाक को अवैध घोषित करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक काम किया है, भगवा पार्टी ने मंगलवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर पूरे घटनाक्रम को दर्शाया। अभ्यास को अवैध घोषित करने वाली घटनाएँ। वीडियो में तीन तलाक को अवैध घोषित करने के लिए राज्यसभा में प्रस्ताव पारित होने और प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं की प्रतिक्रियाओं को दिखाया गया है। मुस्लिम महिलाओं को सशक्त और संरक्षित करने का दावा करते हुए, भाजपा ने एक दूसरे ट्वीट में लिखाः "तीन तलाक कानून मुस्लिम महिलाओं को सशक्त और संरक्षित करता है! " तीन तलाक बिल को 30 जुलाई, 2019 को संसद में अवैध करार देते हुए पारित किया गया था।
नई दिल्लीः अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम समुदाय से जुड़ने के लिए देश भर में अभियान चला रही भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता है। यह संदेश देने की कोशिश में कि सरकार ने संसद के माध्यम से तीन तलाक को अवैध घोषित करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक काम किया है, भगवा पार्टी ने मंगलवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर पूरे घटनाक्रम को दर्शाया। अभ्यास को अवैध घोषित करने वाली घटनाएँ। वीडियो में तीन तलाक को अवैध घोषित करने के लिए राज्यसभा में प्रस्ताव पारित होने और प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं की प्रतिक्रियाओं को दिखाया गया है। मुस्लिम महिलाओं को सशक्त और संरक्षित करने का दावा करते हुए, भाजपा ने एक दूसरे ट्वीट में लिखाः "तीन तलाक कानून मुस्लिम महिलाओं को सशक्त और संरक्षित करता है! " तीन तलाक बिल को तीस जुलाई, दो हज़ार उन्नीस को संसद में अवैध करार देते हुए पारित किया गया था।
सऊदी अरब तुर्की ALTAY MBT के निर्यात क्षमता में रुचि दिखाई। एक सीमित रक्षा उद्योग के साथ, देश मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे संबद्ध देशों से हथियारों के आयात पर निर्भर करता है। अधिकांश BM विदेश में खरीदे गए थे, हालांकि AL-FAHD और AL-FARIS 8-400 बख्तरबंद कार्मिक वाहक भारी उद्योगों के लिए सऊदी कारखाने Abdallah Al Faris कंपनी में निर्मित किए गए थे। सऊदी अरब इसका आधुनिकीकरण कर रहा है टैंक नवीनतम मानक M1A2S को M1A2। रक्षा मंत्रालय स्लोवाकिया वर्ष के जून 2014 में पुष्टि की गई कि सेना 30 मशीनों के मौजूदा बेड़े को पूरक करने के लिए 9,8 मिलियन डॉलर मूल्य के नियंत्रण बिंदुओं के साथ 107 पहिएदार बख्तरबंद वाहनों की खरीद का कार्यक्रम शुरू करेगी। सशस्त्र बल दक्षिण अफ्रीका गणराज्य वे रक्षा पर अपने श्वेत पत्र को लागू करना शुरू कर रहे हैं, जो अगले दो वर्षों में डेनेल से 238 बीएमपी बीएडीजीआर की डिलीवरी और सपुला और विस्तुला परियोजनाओं के ढांचे के भीतर सीएएसपीआईआर, एमएएमबीए और एसएएमआईएल मशीनों का एक त्वरित प्रतिस्थापन प्रदान करता है। रूस, जो ब्रिक्स ब्लॉक में एक भागीदार है, दक्षिण अफ्रीका को एक संभावित साझेदार के रूप में मान रहा है जो हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए संयुक्त विकास कार्यक्रम बनाकर व्यापार प्रतिबंधों की भरपाई करने में मदद करेगा। अफ्रीका की सबसे बड़ी निजी स्वामित्व वाली रक्षा कंपनी पैरामाउंट ग्रुप ने अपने MBOMBE और MARAUDER मशीनों में कई देशों से दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि उनके पास पारंपरिक और अपरंपरागत खतरों के खिलाफ उत्कृष्ट काउंटरमेशर हैं। अगस्त में, एक्सएनयूएमएक्स, कंपनी बीएई सिस्टम्स ने घोषणा की कि उसने दक्षिण अफ्रीका में अपने व्यापारिक सामरिक वाहनों को एक्सएनयूएमएक्स मिलियन डॉलर में एक स्थानीय कंपनी डेनियल सिस्टम्स को बेच दिया। 2014 में, दक्षिण अफ्रीका ने 80 देशों में 2013 नई और उन्नत मशीनों को 452 बिलियन रैंड में बेच दिया। दक्षिण कोरिया अपने नए K2 ब्लैक पैंथर टैंक का विकास, जो पहले से ही 2016 में पूर्व K1 MBT को पूरी तरह से बदलना चाहिए, पूरी तरह से चल रहा है। इस देश की सेना ने 100 वाहनों के लिए एक प्रारंभिक आदेश जारी किया, हालांकि यह संख्या 600 टैंकों की राशि हो सकती है। पहला K2 टैंक जून 2014 में सेवा में प्रवेश किया। स्पेन नए माध्यम और भारी लड़ाकू समर्थन ट्रकों और सभी सैन्य शाखाओं के लिए रसद समर्थन की खरीद के लिए 127 से 2014 वर्ष की अवधि के लिए 2020 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए। स्वीडन के साथ एक संयुक्त परियोजना में विभिन्न विन्यास में एक्सएनयूएमएक्स मशीनों के पहले बैच के लिए आरएमएमवी आदेश जारी किया नॉर्वे (3 का हिस्सा देखें)। इनमें से, 51 मशीन में विशेष रूप से संरक्षित चालक का केबिन होगा। 48 वर्ष में खरीदी गई पहली 2012 मशीनों के लिए, स्वीडन ने 2013 102 10 को वर्ष के दिसंबर 120 में BAE सिस्टम्स से 2015 मिलियन डॉलर के लिए ऑफ-रोड वाहनों के रूप में व्यक्त किया। वाहनों को विभिन्न संस्करणों में वितरित किया जाएगाः कार्मिक ट्रांसपोर्टर, कमांडर, स्वच्छता और रसद; शिपमेंट 2014 में समाप्त हो जाएगा। जून में, 2, स्वीडिश डिफेंस परचेजिंग एजेंसी और KMW ने LEOPARD 34 टैंक की चेसिस के आधार पर तीन लेगान पुल बिछाने की मशीनों की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। आदेश की लागत लगभग XNUMX मिलियन यूरो है और इसमें प्रशिक्षण के लिए तकनीकी सहायता और उपकरण शामिल हैं, साथ ही अतिरिक्त मशीनों के लिए एक विकल्प भी शामिल है। स्विट्जरलैंड हाल ही में KMW से एक लेगान पुल-बिल्डर का आदेश दिया और वर्तमान में अपनी नई पीढ़ी 2000 बख़्तरबंद कारें प्राप्त कर रहा है। उसे पहले चार ड्राई सपोर्ट ब्रिज (DSB) पुलों की भी प्राप्ति हुई, जो कि Iveco TRAKKER ट्रकों पर स्थापित विलियम्स फैरी इंजीनियरिंग लिमिटेड (WFEL) से 46 मीटर की दूरी पर है। पूरे सिस्टम में दो भाग होते हैंः 10- पहिए वाली पुल बिछाने की प्रणाली जो ट्रेलर के साथ होती है और पुल के कुछ हिस्सों को तीन 8x8 मशीनों द्वारा भी ले जाया जाता है। WFEL (KMW का हिस्सा) नवंबर 2016 तक सभी स्विस सेना DSB पुलों को वितरित करने की उम्मीद करता है। स्विस आर्मी की वेबसाइट का कहना है कि PUCH ऑल-टेरेन वाहनों को 3200 Mercedes G-Class 300 CD पैटर्न के साथ बदला जाना चाहिए, साथ ही KOMandopanzer 2016 2018 के लिए RUAG Defence द्वारा उत्पादित LASSIM की शूटिंग के लिए 16 लेजर ट्रेनिंग सिमुलेटर और XUMUM-XUMUM के लिए 6-XUMMUM के लिए 6 -UM-MMUM क्रमशः पदनाम LASSIM Kdo Pz 100x6 और LASSIM GMTF के तहत। रिकार्डो और DTI के लिए पूरा कर लिया है थाईलैंड BLACK WIDOW SPIDER 8x8 बख्तरबंद वाहन के तकनीकी विकास का प्रारंभिक चरण और वर्तमान में अगले चरण पर आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, 200 MBT के लिए थाईलैंड की वर्ष की 2017 और 100 MBT की पुरानी M41 टैंकों को बदलने की आवश्यकता बताई गई है। देश ने 21 बहुउद्देशीय बख्तरबंद कार जीत 4x4 AMPV का भी आदेश दिया। रक्षा उद्योग टर्की स्वायत्तता का एक उच्च स्तर पर पहुंच गया (स्थानीयकरण स्तर 54 वर्ष में 2013% और 60 वर्ष में 2014% तक पहुंच गया)। सबसे पहले, ट्रैक की गई और पहिए वाली बख्तरबंद वाहनों में तुर्की सेना, जेंडरमेरी और पुलिस की लगभग सभी जरूरतों को वर्तमान में स्थानीय उत्पादन की कीमत पर पूरा किया जा रहा है। इस क्षेत्र में अगला लक्ष्य Gen3 + जनरेशन मेन बैटल टैंक और अगली पीढ़ी के आर्मपिट लड़ाकू वाहन का डिजाइन, विकास और उत्पादन है। तुर्की तुर्की अल्तेय अल्तेय कार्यक्रम के ढांचे में, मुख्य ठेकेदार, ओटोकर, Gen3 + MBT को स्थानीय साझेदारों (Aselsan, MKEK, Roketsan और STM) और दक्षिण कोरियाई फर्म Hyundai / Rotem के सहयोग से विकसित कर रहा है, जिसे तुर्की सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में चुना गया है। पहला प्रोटोटाइप वाहन 1 प्रोटोटाइप (चपलता और उत्तरजीविता परीक्षणों के लिए PV-1), दूसरा प्रोटोटाइप वाहन 2 प्रोटोटाइप (फायरिंग टेस्ट के लिए PV-2) और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग के साथ एक पूर्ण पैमाने पर जॉक-अप 2016 वर्ष के लिए बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दूसरे चरण (एक अलग प्रतियोगिता) के अनुसार प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण के मामले में, अगले पांच वर्षों में 250 MBT ALTAY का उत्पादन किया जाएगा। 2013 में संयुक्त अरब अमीरात टैंक और मरम्मत और वसूली वाहनों के अपने बेड़े को उन्नत किया 436 इकाइयों की संख्या में नेक्सटर LECLERC। देश को 600 पहिएदार वाहनों 8x8 की भी आवश्यकता है और उसने Patria के पांच AMV 8x8 बख्तरबंद वाहनों का आदेश दिया है। ओशको एक्सएनयूएमएक्स मिलियन डॉलर के लिए एक्स-एनयूएमएक्स एम-एटीवी मशीनों को वितरित करना चाहिए; UAE ने तवाज़ुन होल्डिंग्स से 750 NIMR बख्तरबंद वाहनों का भी आदेश दिया। 381 में, कंपनी ने अल्जीरिया में NIMR बख्तरबंद वाहनों के उत्पादन के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए Groupement de la Promotion de I'lndustrie Mecanique के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यूनाइटेड किंगडम नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के नियंत्रण में आंतरिक परिवर्तन (सेना 2020) करना चाहता है। इन परिवर्तनों को 5,3 को एक बिलियन पाउंड बचाना चाहिए और एक WCSP कार्यक्रम (WARRIOR Capability Sustainment Program) और एक बख्तरबंद वाहन कार्यक्रम के कार्यान्वयन में शामिल होना चाहिए, जिसके अनुसार SCOUT स्पेशलिस्ट वाहन (SSV) के विशेष टोही वाहनों को बख्तरबंद टोही वाहनों को आपूर्ति की जाएगी। अलमारियों, साथ ही सभी सैन्य इकाइयों में सार्वभौमिक मशीनों के एक परिवार की आपूर्ति में। कुल मिलाकर, 589 बिलियन डॉलर के SSV के लिए 5,77 मशीनें खरीदी जाएंगी, उनकी आपूर्ति 2017-2024 वर्षों के लिए निर्धारित है। एक होनहार सहायता वाहन के लिए एक योजना विकसित की जा रही है और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय चार नए प्रकार के वाहनों की खरीद के बारे में जानकारी के लिए अनुरोध जारी करने वाला है। यूके एक नई संरक्षित एम्बुलेंस, एक मशीन के साथ एक सुरक्षित प्रणाली के साथ अपने बेड़े में विविधता लाने के लिए चाहता है, pallets (pallets) पर माल रखने के लिए एक सुरक्षित प्रणाली, एक प्रकाश हवाई परिवहन निकासी मशीन और अंत में, एक बहुउद्देश्यीय संरक्षित वाहन MRV-P (मल्टीरोल वाहन-संरक्षित)। 2000 Wolfhound, 125 Ridgeback, 160 मास्टिफ, 400 सियार, 400 HUSKY, 325 Warthog, 100 कोयोट और 70 एक प्रकार का विलायतीः वे तत्काल संचालन आवश्यकताओं के हिस्से के रूप रक्षा के ब्रिटिश मंत्रालय द्वारा समय में प्राप्त कर लिया लगभग 400 कारों रह जाएगा। सेना निरस्त एफआरईएस कार्यक्रम (फ्यूचर रैपिड इफेक्ट सिस्टम - प्रॉमिस रैपिड रेस्पॉन्स सिस्टम) के हिस्से के रूप में बहुउद्देशीय वाहन के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उन्नत नेक्सटर VBCI 8x8 पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन का परीक्षण भी कर रही है। हालाँकि, एक नई 8x8 मशीन खरीदने की योजना अभी तक घोषित नहीं की गई है और यह बहुत संभव है कि वीबीसीआई को एक खुली प्रतियोगिता में भाग लेना होगा। इज़राइली कंपनियों इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और RAMTA द्वारा बनाई गई बख्तरबंद कार रैम में अच्छा प्रदर्शन, वायु परिवहन और सुरक्षा है, इसके अलावा, यह चरम ऑफ-रोड पैंतरेबाज़ी, उच्च विश्वसनीयता और सामर्थ्य को जोड़ती है। 30 से अधिक वर्षों के लिए, मल्टीटास्क-सिद्ध प्लेटफॉर्म दुनिया में कई सेनाओं के साथ सेवा में रहा है। उरुग्वे यह कई प्रकार के लड़ाकू वाहनों से लैस है, जिनमें टैंक भी शामिल हैं। हाल ही में, 233036 वर्ष में रूस से खरीदे गए टाइग्रे GAZ-2 SPM-4 4x2011 बख्तरबंद वाहनों को पुलिस सेवा में पहुंचा दिया गया था। 2013 वर्ष में अमेरिका संरक्षित वाहनों के लिए तीन मुख्य कार्यक्रम थेः एक हल्का सामरिक सामान्य प्रयोजन वाहन संयुक्त प्रकाश सामरिक वाहन (JLTV), एक द्विधा गतिवाला लड़ाकू वाहन (ACV) द्विधा गतिवाला लड़ाकू वाहन और एक ग्राउंड कॉम्बैट वाहन (GCV)। जीसीवी कार्यक्रम फरवरी 2014 में रद्द कर दिया गया था, जबकि भविष्य के एसीवी कार्यक्रम अनिश्चित हैं। JLTV परियोजना बनी हुई है, हालांकि कार्यक्रम की धीमी प्रगति उत्तरी अमेरिकी बख्तरबंद वाहन बाजार में आत्मविश्वास के एक नाटकीय नुकसान की ओर अग्रसर है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि एएमपीवी (बख्तरबंद बहुउद्देश्यीय वाहन) कार्यक्रम को जीसीवी कार्यक्रम पर प्राथमिकता मिली है। दिसंबर 2014 में, अमेरिकी सेना ने एएमपीवी के विकास और उत्पादन के लिए एक अनुबंध की घोषणा की। एएमपीवी के विकास और प्रारंभिक उत्पादन के लिए $ 1,2 बिलियन तक की खुली निविदा के बाद बीएई सिस्टम्स लैंड एंड आर्मामेंट्स को एक अनुबंध से सम्मानित किया गया। पहले चरण के अनुसार, लगभग 382 मिलियन डॉलर और 52 महीने की अवधि के अनुबंध के साथ, बीएई सिस्टम्स 29 मशीनों का निर्माण करेगा। नया एएमपीवी वाहन पुराने M113 परिवार के वाहनों को बदल देगा, जबकि सेना की समग्र लड़ाकू क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी। अनुबंध में एक वैकल्पिक प्रारंभिक उत्पादन चरण भी शामिल है; सकारात्मक निर्णय के मामले में, कंपनी 1,2 बिलियन डॉलर के कुल अनुबंध मूल्य के साथ, इस चरण के भीतर 289 अधिक वाहनों का उत्पादन करेगी। "AMPV M1 अब्राम और M2 / M3 ब्रैडली पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों का समर्थन करेगा, सैन्य इकाइयों को अपडेट करेगा, कमांड और नियंत्रण प्रदान करेगा, प्रत्यक्ष-अग्नि अग्नि, रसद और चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा, घायल और बीमार को खाली करेगा, और सबसे महत्वपूर्ण बात, हवा का एक अभिन्न अंग बन जाएगा। एयरबोर्न टैक्टिकल ग्रुप ", - कर्नल माइकल AMPV प्रोजेक्ट लीडर ने कहा। वर्तमान एएमपीवी कार्यक्रम के अनुसार, पूरे M2897 113 मशीनों को ब्रिगेड स्तर पर और निचले को सामरिक समूह के भीतर बदल दिया जाएगा। लेकिन 1922 M113 बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक भी हैं, जो ब्रिगेड के ऊपर के पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सेना 49000 JLTV बख़्तरबंद कारों को खरीदने का इरादा रखती है, जो कि HUMVEE जीपों को AM जनरल से बदलने के लिए हैं, बदले में, मरीन कॉर्प्स ने 5000 वाहन खरीदने की योजना बनाई है। बजट में कटौती और सीक्वेंटर की अस्पष्ट अनिश्चितता के बावजूद, सैन्य वाहनों का एक पूरा सेट खरीदने का इरादा रखता है और भविष्य में उनकी संख्या में कमी नहीं करता है। प्रमुख ठेकेदार ओशोक रक्षा, लॉकहीड मार्टिन और एएम जनरल 14 बिलियन डॉलर के एक कार्यक्रम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो उत्पादन में विकास और कार्यान्वयन के स्तर पर है। वर्तमान में, प्रत्येक कंपनी को आवश्यक उपकरणों के साथ 22 अनुभवी मशीनों का परीक्षण करने का आदेश दिया गया है। ACV परियोजना को समुद्री कार्मिक कैरियर (MPC) के बख्तरबंद कार्मिक परियोजना के साथ लॉन्च किया गया था, जो समुद्री वाहिनी को तट पर ले जाने के लिए एक मोबाइल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। मरीन कोर 200 ACV 1. 1 वाहनों की खरीद करेगा, और ACV 1. 2 के एक ट्रैक किए गए अस्थायी संस्करण को भी विकसित करेगा; इसे 470 मशीनों के बारे में खरीदने की योजना है। साथ में, ACV और MPC पुराने AAV-7A1 मरीन कॉर्प्स की जगह लेंगे। अप्रैल में, वर्ष के 2014, वाहिनी ने ACV वृद्धि 1. 1 विकल्प के प्रस्तावों के लिए एक अनुरोध जारी किया, जिसके अनुसार अप्रैल 2016 में अनुबंध जारी किए जाने के नौ महीने बाद, प्रति माह 16 मशीनों की गति से XUMUMX प्रोटोटाइप वितरित करना शुरू करने की योजना है। एसीवी वृद्धि 4 के चरण में अनुमानित समुद्री कोर प्रत्येक मशीन की लागत लगभग 1. 1-5 मिलियन डॉलर होगी। प्रारंभिक स्क्रीनिंग चरण में ठेकेदारों की चार टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैंः लॉकहीड-मार्टिन के मॉड्यूलर बख्तरबंद मॉड्यूलर वाहन (एएमवी) और पैट्रिया लैंड सिस्टम्स, जिसे एचएवीओसी एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएक्सयूएनएमएक्स के रूप में जाना जाता है; BAE Systems और Iveco Iveco द्वारा विकसित SUPER-AV 6x8 के अपने गहरे उन्नत संस्करण के साथ लड़ रहे हैं; एसटी कैनेटीक्स और SAIC, एसटी कैनेटीक्स TERREX के उन्नत संस्करण के साथ सामने आए और आखिरकार, जनरल डायनेमिक्स लैंड - सिस्टम कनाडा कंपनियां LAV 8 आर्मर्ड कार्मिक वाहक के उन्नत संस्करण को बढ़ावा दे रही हैं, जो कनाडाई सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले समान है। सितंबर में, अमेरिकी सेना 8 ने तीन हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए नई आवश्यकताओं को जारी किया ताकि अधिक स्पष्ट अभियान चरित्र के साथ एक बल बन सके और उनकी लैंडिंग क्षमताओं में वृद्धि हो सके। फोर्ट बेनिंग में सेना के सम्मेलन में तीन वाहन - एमपीएफ (मोबाइल संरक्षित गोलाबारी - मोबाइल संरक्षित गोलाबारी), यूएलसीवी (अल्ट्रा-लाइटवेट कॉम्बैट व्हीकल) और एलआरवी (हल्का टोही वाहन - हल्का टोही वाहन) प्रस्तुत किए गए। ULCV सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसे हेलिकॉप्टर सस्पेंशन या परिवहन विमान के अंदर ले जाया जा सकता है, उदाहरण के लिए C-8 या C-6. 0। आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए एक परियोजना व्यवहार्यता अध्ययन में 2014 वर्ष में छह कंपनियों ने भाग लिया। कार में लगभग दो टन द्रव्यमान होना चाहिए और 130 किमी तक की क्रूज़िंग रेंज होनी चाहिए। 2014 में हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, अगस्त में 2012, वेनेजुएला चीनी अस्थायी बख्तरबंद कर्मियों के वाहक वीएन-एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएक्सयूएनएमएक्स (निर्यात संस्करण जेडबीएल-एक्सएनयूएमएक्स) इसके समुद्री वाहिनी के लिए स्वीकृत। 1 में, काराकास को रूसी हथियारों की खरीद के लिए 8 बिलियन का सुरक्षित ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें 8 OBT T-09M2010M, BTR-2,2 और बड़ी संख्या में BMP-92 शामिल हैं; उपकरणों की डिलीवरी जारी है। प्रयुक्त सामग्रीः
सऊदी अरब तुर्की ALTAY MBT के निर्यात क्षमता में रुचि दिखाई। एक सीमित रक्षा उद्योग के साथ, देश मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे संबद्ध देशों से हथियारों के आयात पर निर्भर करता है। अधिकांश BM विदेश में खरीदे गए थे, हालांकि AL-FAHD और AL-FARIS आठ-चार सौ बख्तरबंद कार्मिक वाहक भारी उद्योगों के लिए सऊदी कारखाने Abdallah Al Faris कंपनी में निर्मित किए गए थे। सऊदी अरब इसका आधुनिकीकरण कर रहा है टैंक नवीनतम मानक MएकAदोS को MएकAदो। रक्षा मंत्रालय स्लोवाकिया वर्ष के जून दो हज़ार चौदह में पुष्टि की गई कि सेना तीस मशीनों के मौजूदा बेड़े को पूरक करने के लिए नौ,आठ मिलियन डॉलर मूल्य के नियंत्रण बिंदुओं के साथ एक सौ सात पहिएदार बख्तरबंद वाहनों की खरीद का कार्यक्रम शुरू करेगी। सशस्त्र बल दक्षिण अफ्रीका गणराज्य वे रक्षा पर अपने श्वेत पत्र को लागू करना शुरू कर रहे हैं, जो अगले दो वर्षों में डेनेल से दो सौ अड़तीस बीएमपी बीएडीजीआर की डिलीवरी और सपुला और विस्तुला परियोजनाओं के ढांचे के भीतर सीएएसपीआईआर, एमएएमबीए और एसएएमआईएल मशीनों का एक त्वरित प्रतिस्थापन प्रदान करता है। रूस, जो ब्रिक्स ब्लॉक में एक भागीदार है, दक्षिण अफ्रीका को एक संभावित साझेदार के रूप में मान रहा है जो हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए संयुक्त विकास कार्यक्रम बनाकर व्यापार प्रतिबंधों की भरपाई करने में मदद करेगा। अफ्रीका की सबसे बड़ी निजी स्वामित्व वाली रक्षा कंपनी पैरामाउंट ग्रुप ने अपने MBOMBE और MARAUDER मशीनों में कई देशों से दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि उनके पास पारंपरिक और अपरंपरागत खतरों के खिलाफ उत्कृष्ट काउंटरमेशर हैं। अगस्त में, एक्सएनयूएमएक्स, कंपनी बीएई सिस्टम्स ने घोषणा की कि उसने दक्षिण अफ्रीका में अपने व्यापारिक सामरिक वाहनों को एक्सएनयूएमएक्स मिलियन डॉलर में एक स्थानीय कंपनी डेनियल सिस्टम्स को बेच दिया। दो हज़ार चौदह में, दक्षिण अफ्रीका ने अस्सी देशों में दो हज़ार तेरह नई और उन्नत मशीनों को चार सौ बावन बिलियन रैंड में बेच दिया। दक्षिण कोरिया अपने नए Kदो ब्लैक पैंथर टैंक का विकास, जो पहले से ही दो हज़ार सोलह में पूर्व Kएक MBT को पूरी तरह से बदलना चाहिए, पूरी तरह से चल रहा है। इस देश की सेना ने एक सौ वाहनों के लिए एक प्रारंभिक आदेश जारी किया, हालांकि यह संख्या छः सौ टैंकों की राशि हो सकती है। पहला Kदो टैंक जून दो हज़ार चौदह में सेवा में प्रवेश किया। स्पेन नए माध्यम और भारी लड़ाकू समर्थन ट्रकों और सभी सैन्य शाखाओं के लिए रसद समर्थन की खरीद के लिए एक सौ सत्ताईस से दो हज़ार चौदह वर्ष की अवधि के लिए दो हज़ार बीस मिलियन डॉलर आवंटित किए गए। स्वीडन के साथ एक संयुक्त परियोजना में विभिन्न विन्यास में एक्सएनयूएमएक्स मशीनों के पहले बैच के लिए आरएमएमवी आदेश जारी किया नॉर्वे । इनमें से, इक्यावन मशीन में विशेष रूप से संरक्षित चालक का केबिन होगा। अड़तालीस वर्ष में खरीदी गई पहली दो हज़ार बारह मशीनों के लिए, स्वीडन ने दो हज़ार तेरह एक सौ दो दस को वर्ष के दिसंबर एक सौ बीस में BAE सिस्टम्स से दो हज़ार पंद्रह मिलियन डॉलर के लिए ऑफ-रोड वाहनों के रूप में व्यक्त किया। वाहनों को विभिन्न संस्करणों में वितरित किया जाएगाः कार्मिक ट्रांसपोर्टर, कमांडर, स्वच्छता और रसद; शिपमेंट दो हज़ार चौदह में समाप्त हो जाएगा। जून में, दो, स्वीडिश डिफेंस परचेजिंग एजेंसी और KMW ने LEOPARD चौंतीस टैंक की चेसिस के आधार पर तीन लेगान पुल बिछाने की मशीनों की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। आदेश की लागत लगभग XNUMX मिलियन यूरो है और इसमें प्रशिक्षण के लिए तकनीकी सहायता और उपकरण शामिल हैं, साथ ही अतिरिक्त मशीनों के लिए एक विकल्प भी शामिल है। स्विट्जरलैंड हाल ही में KMW से एक लेगान पुल-बिल्डर का आदेश दिया और वर्तमान में अपनी नई पीढ़ी दो हज़ार बख़्तरबंद कारें प्राप्त कर रहा है। उसे पहले चार ड्राई सपोर्ट ब्रिज पुलों की भी प्राप्ति हुई, जो कि Iveco TRAKKER ट्रकों पर स्थापित विलियम्स फैरी इंजीनियरिंग लिमिटेड से छियालीस मीटर की दूरी पर है। पूरे सिस्टम में दो भाग होते हैंः दस- पहिए वाली पुल बिछाने की प्रणाली जो ट्रेलर के साथ होती है और पुल के कुछ हिस्सों को तीन आठxआठ मशीनों द्वारा भी ले जाया जाता है। WFEL नवंबर दो हज़ार सोलह तक सभी स्विस सेना DSB पुलों को वितरित करने की उम्मीद करता है। स्विस आर्मी की वेबसाइट का कहना है कि PUCH ऑल-टेरेन वाहनों को तीन हज़ार दो सौ Mercedes G-Class तीन सौ CD पैटर्न के साथ बदला जाना चाहिए, साथ ही KOMandopanzer दो हज़ार सोलह दो हज़ार अट्ठारह के लिए RUAG Defence द्वारा उत्पादित LASSIM की शूटिंग के लिए सोलह लेजर ट्रेनिंग सिमुलेटर और XUMUM-XUMUM के लिए छः-XUMMUM के लिए छः -UM-MMUM क्रमशः पदनाम LASSIM Kdo Pz एक सौxछः और LASSIM GMTF के तहत। रिकार्डो और DTI के लिए पूरा कर लिया है थाईलैंड BLACK WIDOW SPIDER आठxआठ बख्तरबंद वाहन के तकनीकी विकास का प्रारंभिक चरण और वर्तमान में अगले चरण पर आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, दो सौ MBT के लिए थाईलैंड की वर्ष की दो हज़ार सत्रह और एक सौ MBT की पुरानी Mइकतालीस टैंकों को बदलने की आवश्यकता बताई गई है। देश ने इक्कीस बहुउद्देशीय बख्तरबंद कार जीत चारxचार AMPV का भी आदेश दिया। रक्षा उद्योग टर्की स्वायत्तता का एक उच्च स्तर पर पहुंच गया । सबसे पहले, ट्रैक की गई और पहिए वाली बख्तरबंद वाहनों में तुर्की सेना, जेंडरमेरी और पुलिस की लगभग सभी जरूरतों को वर्तमान में स्थानीय उत्पादन की कीमत पर पूरा किया जा रहा है। इस क्षेत्र में अगला लक्ष्य Genतीन + जनरेशन मेन बैटल टैंक और अगली पीढ़ी के आर्मपिट लड़ाकू वाहन का डिजाइन, विकास और उत्पादन है। तुर्की तुर्की अल्तेय अल्तेय कार्यक्रम के ढांचे में, मुख्य ठेकेदार, ओटोकर, Genतीन + MBT को स्थानीय साझेदारों और दक्षिण कोरियाई फर्म Hyundai / Rotem के सहयोग से विकसित कर रहा है, जिसे तुर्की सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में चुना गया है। पहला प्रोटोटाइप वाहन एक प्रोटोटाइप , दूसरा प्रोटोटाइप वाहन दो प्रोटोटाइप और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग के साथ एक पूर्ण पैमाने पर जॉक-अप दो हज़ार सोलह वर्ष के लिए बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दूसरे चरण के अनुसार प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण के मामले में, अगले पांच वर्षों में दो सौ पचास MBT ALTAY का उत्पादन किया जाएगा। दो हज़ार तेरह में संयुक्त अरब अमीरात टैंक और मरम्मत और वसूली वाहनों के अपने बेड़े को उन्नत किया चार सौ छत्तीस इकाइयों की संख्या में नेक्सटर LECLERC। देश को छः सौ पहिएदार वाहनों आठxआठ की भी आवश्यकता है और उसने Patria के पांच AMV आठxआठ बख्तरबंद वाहनों का आदेश दिया है। ओशको एक्सएनयूएमएक्स मिलियन डॉलर के लिए एक्स-एनयूएमएक्स एम-एटीवी मशीनों को वितरित करना चाहिए; UAE ने तवाज़ुन होल्डिंग्स से सात सौ पचास NIMR बख्तरबंद वाहनों का भी आदेश दिया। तीन सौ इक्यासी में, कंपनी ने अल्जीरिया में NIMR बख्तरबंद वाहनों के उत्पादन के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए Groupement de la Promotion de I'lndustrie Mecanique के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यूनाइटेड किंगडम नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के नियंत्रण में आंतरिक परिवर्तन करना चाहता है। इन परिवर्तनों को पाँच,तीन को एक बिलियन पाउंड बचाना चाहिए और एक WCSP कार्यक्रम और एक बख्तरबंद वाहन कार्यक्रम के कार्यान्वयन में शामिल होना चाहिए, जिसके अनुसार SCOUT स्पेशलिस्ट वाहन के विशेष टोही वाहनों को बख्तरबंद टोही वाहनों को आपूर्ति की जाएगी। अलमारियों, साथ ही सभी सैन्य इकाइयों में सार्वभौमिक मशीनों के एक परिवार की आपूर्ति में। कुल मिलाकर, पाँच सौ नवासी बिलियन डॉलर के SSV के लिए पाँच,सतहत्तर मशीनें खरीदी जाएंगी, उनकी आपूर्ति दो हज़ार सत्रह-दो हज़ार चौबीस वर्षों के लिए निर्धारित है। एक होनहार सहायता वाहन के लिए एक योजना विकसित की जा रही है और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय चार नए प्रकार के वाहनों की खरीद के बारे में जानकारी के लिए अनुरोध जारी करने वाला है। यूके एक नई संरक्षित एम्बुलेंस, एक मशीन के साथ एक सुरक्षित प्रणाली के साथ अपने बेड़े में विविधता लाने के लिए चाहता है, pallets पर माल रखने के लिए एक सुरक्षित प्रणाली, एक प्रकाश हवाई परिवहन निकासी मशीन और अंत में, एक बहुउद्देश्यीय संरक्षित वाहन MRV-P । दो हज़ार Wolfhound, एक सौ पच्चीस Ridgeback, एक सौ साठ मास्टिफ, चार सौ सियार, चार सौ HUSKY, तीन सौ पच्चीस Warthog, एक सौ कोयोट और सत्तर एक प्रकार का विलायतीः वे तत्काल संचालन आवश्यकताओं के हिस्से के रूप रक्षा के ब्रिटिश मंत्रालय द्वारा समय में प्राप्त कर लिया लगभग चार सौ कारों रह जाएगा। सेना निरस्त एफआरईएस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में बहुउद्देशीय वाहन के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उन्नत नेक्सटर VBCI आठxआठ पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन का परीक्षण भी कर रही है। हालाँकि, एक नई आठxआठ मशीन खरीदने की योजना अभी तक घोषित नहीं की गई है और यह बहुत संभव है कि वीबीसीआई को एक खुली प्रतियोगिता में भाग लेना होगा। इज़राइली कंपनियों इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और RAMTA द्वारा बनाई गई बख्तरबंद कार रैम में अच्छा प्रदर्शन, वायु परिवहन और सुरक्षा है, इसके अलावा, यह चरम ऑफ-रोड पैंतरेबाज़ी, उच्च विश्वसनीयता और सामर्थ्य को जोड़ती है। तीस से अधिक वर्षों के लिए, मल्टीटास्क-सिद्ध प्लेटफॉर्म दुनिया में कई सेनाओं के साथ सेवा में रहा है। उरुग्वे यह कई प्रकार के लड़ाकू वाहनों से लैस है, जिनमें टैंक भी शामिल हैं। हाल ही में, दो लाख तैंतीस हज़ार छत्तीस वर्ष में रूस से खरीदे गए टाइग्रे GAZ-दो SPM-चार चारxदो हज़ार ग्यारह बख्तरबंद वाहनों को पुलिस सेवा में पहुंचा दिया गया था। दो हज़ार तेरह वर्ष में अमेरिका संरक्षित वाहनों के लिए तीन मुख्य कार्यक्रम थेः एक हल्का सामरिक सामान्य प्रयोजन वाहन संयुक्त प्रकाश सामरिक वाहन , एक द्विधा गतिवाला लड़ाकू वाहन द्विधा गतिवाला लड़ाकू वाहन और एक ग्राउंड कॉम्बैट वाहन । जीसीवी कार्यक्रम फरवरी दो हज़ार चौदह में रद्द कर दिया गया था, जबकि भविष्य के एसीवी कार्यक्रम अनिश्चित हैं। JLTV परियोजना बनी हुई है, हालांकि कार्यक्रम की धीमी प्रगति उत्तरी अमेरिकी बख्तरबंद वाहन बाजार में आत्मविश्वास के एक नाटकीय नुकसान की ओर अग्रसर है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि एएमपीवी कार्यक्रम को जीसीवी कार्यक्रम पर प्राथमिकता मिली है। दिसंबर दो हज़ार चौदह में, अमेरिकी सेना ने एएमपीवी के विकास और उत्पादन के लिए एक अनुबंध की घोषणा की। एएमपीवी के विकास और प्रारंभिक उत्पादन के लिए एक डॉलर,दो बिलियन तक की खुली निविदा के बाद बीएई सिस्टम्स लैंड एंड आर्मामेंट्स को एक अनुबंध से सम्मानित किया गया। पहले चरण के अनुसार, लगभग तीन सौ बयासी मिलियन डॉलर और बावन महीने की अवधि के अनुबंध के साथ, बीएई सिस्टम्स उनतीस मशीनों का निर्माण करेगा। नया एएमपीवी वाहन पुराने Mएक सौ तेरह परिवार के वाहनों को बदल देगा, जबकि सेना की समग्र लड़ाकू क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी। अनुबंध में एक वैकल्पिक प्रारंभिक उत्पादन चरण भी शामिल है; सकारात्मक निर्णय के मामले में, कंपनी एक,दो बिलियन डॉलर के कुल अनुबंध मूल्य के साथ, इस चरण के भीतर दो सौ नवासी अधिक वाहनों का उत्पादन करेगी। "AMPV Mएक अब्राम और Mदो / Mतीन ब्रैडली पैदल सेना से लड़ने वाले वाहनों का समर्थन करेगा, सैन्य इकाइयों को अपडेट करेगा, कमांड और नियंत्रण प्रदान करेगा, प्रत्यक्ष-अग्नि अग्नि, रसद और चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा, घायल और बीमार को खाली करेगा, और सबसे महत्वपूर्ण बात, हवा का एक अभिन्न अंग बन जाएगा। एयरबोर्न टैक्टिकल ग्रुप ", - कर्नल माइकल AMPV प्रोजेक्ट लीडर ने कहा। वर्तमान एएमपीवी कार्यक्रम के अनुसार, पूरे Mदो हज़ार आठ सौ सत्तानवे एक सौ तेरह मशीनों को ब्रिगेड स्तर पर और निचले को सामरिक समूह के भीतर बदल दिया जाएगा। लेकिन एक हज़ार नौ सौ बाईस Mएक सौ तेरह बख़्तरबंद कर्मियों के वाहक भी हैं, जो ब्रिगेड के ऊपर के पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सेना उनचास हज़ार JLTV बख़्तरबंद कारों को खरीदने का इरादा रखती है, जो कि HUMVEE जीपों को AM जनरल से बदलने के लिए हैं, बदले में, मरीन कॉर्प्स ने पाँच हज़ार वाहन खरीदने की योजना बनाई है। बजट में कटौती और सीक्वेंटर की अस्पष्ट अनिश्चितता के बावजूद, सैन्य वाहनों का एक पूरा सेट खरीदने का इरादा रखता है और भविष्य में उनकी संख्या में कमी नहीं करता है। प्रमुख ठेकेदार ओशोक रक्षा, लॉकहीड मार्टिन और एएम जनरल चौदह बिलियन डॉलर के एक कार्यक्रम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो उत्पादन में विकास और कार्यान्वयन के स्तर पर है। वर्तमान में, प्रत्येक कंपनी को आवश्यक उपकरणों के साथ बाईस अनुभवी मशीनों का परीक्षण करने का आदेश दिया गया है। ACV परियोजना को समुद्री कार्मिक कैरियर के बख्तरबंद कार्मिक परियोजना के साथ लॉन्च किया गया था, जो समुद्री वाहिनी को तट पर ले जाने के लिए एक मोबाइल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। मरीन कोर दो सौ ACV एक. एक वाहनों की खरीद करेगा, और ACV एक. दो के एक ट्रैक किए गए अस्थायी संस्करण को भी विकसित करेगा; इसे चार सौ सत्तर मशीनों के बारे में खरीदने की योजना है। साथ में, ACV और MPC पुराने AAV-सातAएक मरीन कॉर्प्स की जगह लेंगे। अप्रैल में, वर्ष के दो हज़ार चौदह, वाहिनी ने ACV वृद्धि एक. एक विकल्प के प्रस्तावों के लिए एक अनुरोध जारी किया, जिसके अनुसार अप्रैल दो हज़ार सोलह में अनुबंध जारी किए जाने के नौ महीने बाद, प्रति माह सोलह मशीनों की गति से XUMUMX प्रोटोटाइप वितरित करना शुरू करने की योजना है। एसीवी वृद्धि चार के चरण में अनुमानित समुद्री कोर प्रत्येक मशीन की लागत लगभग एक. एक-पाँच मिलियन डॉलर होगी। प्रारंभिक स्क्रीनिंग चरण में ठेकेदारों की चार टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैंः लॉकहीड-मार्टिन के मॉड्यूलर बख्तरबंद मॉड्यूलर वाहन और पैट्रिया लैंड सिस्टम्स, जिसे एचएवीओसी एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएक्सयूएनएमएक्स के रूप में जाना जाता है; BAE Systems और Iveco Iveco द्वारा विकसित SUPER-AV छःxआठ के अपने गहरे उन्नत संस्करण के साथ लड़ रहे हैं; एसटी कैनेटीक्स और SAIC, एसटी कैनेटीक्स TERREX के उन्नत संस्करण के साथ सामने आए और आखिरकार, जनरल डायनेमिक्स लैंड - सिस्टम कनाडा कंपनियां LAV आठ आर्मर्ड कार्मिक वाहक के उन्नत संस्करण को बढ़ावा दे रही हैं, जो कनाडाई सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले समान है। सितंबर में, अमेरिकी सेना आठ ने तीन हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए नई आवश्यकताओं को जारी किया ताकि अधिक स्पष्ट अभियान चरित्र के साथ एक बल बन सके और उनकी लैंडिंग क्षमताओं में वृद्धि हो सके। फोर्ट बेनिंग में सेना के सम्मेलन में तीन वाहन - एमपीएफ , यूएलसीवी और एलआरवी प्रस्तुत किए गए। ULCV सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसे हेलिकॉप्टर सस्पेंशन या परिवहन विमान के अंदर ले जाया जा सकता है, उदाहरण के लिए C-आठ या C-छः. शून्य। आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए एक परियोजना व्यवहार्यता अध्ययन में दो हज़ार चौदह वर्ष में छह कंपनियों ने भाग लिया। कार में लगभग दो टन द्रव्यमान होना चाहिए और एक सौ तीस किमी तक की क्रूज़िंग रेंज होनी चाहिए। दो हज़ार चौदह में हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, अगस्त में दो हज़ार बारह, वेनेजुएला चीनी अस्थायी बख्तरबंद कर्मियों के वाहक वीएन-एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएक्सयूएनएमएक्स इसके समुद्री वाहिनी के लिए स्वीकृत। एक में, काराकास को रूसी हथियारों की खरीद के लिए आठ बिलियन का सुरक्षित ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें आठ OBT T-नौMदो हज़ार दसM, BTR-दो,दो और बड़ी संख्या में BMP-बानवे शामिल हैं; उपकरणों की डिलीवरी जारी है। प्रयुक्त सामग्रीः
BANKA: बांका में एक पत्नी को कर्ज लेना बहुत महंगा पड़ गया। इस बात की जानकारी जैसे ही पति को हुई उसने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। घटना बेलहर थाना क्षेत्र के रमानी टोला की है। जहां ऑटो ड्राइवर पति ने पत्नी के कर्ज लेने से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया। बताया जाता है कि रमानी टोला निवासी अन्नू सिंह की पत्नी किरण देवी जीविका संगठन से जुड़ी हुई है। जीविका सहित अन्य लोगों से पत्नी ने करीब पांच लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। जिसकी सूचना उसने पति को नहीं दी थी। ऑटो चलाकर अन्नु सिंह परिवार का भरण पोषण कर रहा था। मंगलवार को जब कुछ लोग उसके घर पर पहुंचे और पैसे की मांग की। तब अन्नु सिंह को पता चला कि उसकी पत्नी ने कर्ज ले रखा है। उसने पत्नी से पूछा की इतने रुपये उसने कर्ज क्यों लिए और इस पैसे को उसने कहां खर्च किया। पति के इस सवाल से पत्नी गुस्सा हो गयी। इसे लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। कर्ज देने वाले लोग थाना पहुंच गए। इससे परेशान होकर ऑटो चालक ने मंगलवार को जहर खा लिया। जब इसकी जानकारी परिजनों को मिली तो सभी आनन-फानन में उसे अस्पताल ले गये। जहां बुधवार को इलाज के दौरान मायागंज अस्पताल में उसकी मौत हो गयी। इधर पति की मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी के कर्ज लेने के कारण पति ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। पत्नी अब अपनी करनी पर अफसोस जाहिर कर रही है। इस घटना से इलाके के लोग भी हैरान हैं।
BANKA: बांका में एक पत्नी को कर्ज लेना बहुत महंगा पड़ गया। इस बात की जानकारी जैसे ही पति को हुई उसने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। घटना बेलहर थाना क्षेत्र के रमानी टोला की है। जहां ऑटो ड्राइवर पति ने पत्नी के कर्ज लेने से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया। बताया जाता है कि रमानी टोला निवासी अन्नू सिंह की पत्नी किरण देवी जीविका संगठन से जुड़ी हुई है। जीविका सहित अन्य लोगों से पत्नी ने करीब पांच लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। जिसकी सूचना उसने पति को नहीं दी थी। ऑटो चलाकर अन्नु सिंह परिवार का भरण पोषण कर रहा था। मंगलवार को जब कुछ लोग उसके घर पर पहुंचे और पैसे की मांग की। तब अन्नु सिंह को पता चला कि उसकी पत्नी ने कर्ज ले रखा है। उसने पत्नी से पूछा की इतने रुपये उसने कर्ज क्यों लिए और इस पैसे को उसने कहां खर्च किया। पति के इस सवाल से पत्नी गुस्सा हो गयी। इसे लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। कर्ज देने वाले लोग थाना पहुंच गए। इससे परेशान होकर ऑटो चालक ने मंगलवार को जहर खा लिया। जब इसकी जानकारी परिजनों को मिली तो सभी आनन-फानन में उसे अस्पताल ले गये। जहां बुधवार को इलाज के दौरान मायागंज अस्पताल में उसकी मौत हो गयी। इधर पति की मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी के कर्ज लेने के कारण पति ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। पत्नी अब अपनी करनी पर अफसोस जाहिर कर रही है। इस घटना से इलाके के लोग भी हैरान हैं।
फोनपे के ई-कॉमर्स ऐप पिनकोड (Pincode) ने लॉन्च होने के एक महीने में ही ऊंचाइयां भरनी शुरू कर दी हैं। इतने कम समय में प्लेस्टोर पर इस ऐप ने 50 हजार इन्सटॉल पूरे कर लिए हैं। यह ऐप सरकार के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) पर आधारित है। मौजूदा समय में पिनकोड प्लेस्टोर के टॉप 50 एंड्रॉयड ऐप्स की फेहरिस्त में शामिल हो गया है। बैंगलोर में यह ऐप खासा पॉपुलर हो रहा है। इस ऐप का इस्तेमाल लोग रोजमर्रा की चीजों और फूड ऑर्डर करने के लिए करते हैं। पिनकोड ऐप अगले कुछ हफ़्तों में और भी भारतीय शहरों में उपलब्ध होगा। अगले कुछ महीनों में पिनकोड से प्रति दिन 1 लाख ट्रांजैक्शन होने की उम्मीद है। इस साल अप्रैल में, फिनटेक कंपनी फोनपे ने ओएनडीसी पर एक शॉपिंग ऐप, पिनकोड के लॉन्च के साथ ई-कॉमर्स में प्रवेश किया था। ऐप हाइपरलोकल कॉमर्स पर केंद्रित है। इस कदम से वॉलमार्ट के स्वामित्व वाले PhonePe को ई-कॉमर्स स्पेस में Flipkart, Amazon, Reliance के JioMart और Tata के स्वामित्व वाली BigBasket को टक्कर देने में मदद मिलने की उम्मीद है। ई कॉमर्स का व्यापार 2030 तक $350 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है। पिनकोड ने कहा कि वह लोकल दुकानदारों और विक्रेताओं को बढ़ावा देता है और उनका मकसद शहर के उपभोक्ताओं को उनके पड़ोस के स्टोर से डिजिटल रूप से जोड़ना है।
फोनपे के ई-कॉमर्स ऐप पिनकोड ने लॉन्च होने के एक महीने में ही ऊंचाइयां भरनी शुरू कर दी हैं। इतने कम समय में प्लेस्टोर पर इस ऐप ने पचास हजार इन्सटॉल पूरे कर लिए हैं। यह ऐप सरकार के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स पर आधारित है। मौजूदा समय में पिनकोड प्लेस्टोर के टॉप पचास एंड्रॉयड ऐप्स की फेहरिस्त में शामिल हो गया है। बैंगलोर में यह ऐप खासा पॉपुलर हो रहा है। इस ऐप का इस्तेमाल लोग रोजमर्रा की चीजों और फूड ऑर्डर करने के लिए करते हैं। पिनकोड ऐप अगले कुछ हफ़्तों में और भी भारतीय शहरों में उपलब्ध होगा। अगले कुछ महीनों में पिनकोड से प्रति दिन एक लाख ट्रांजैक्शन होने की उम्मीद है। इस साल अप्रैल में, फिनटेक कंपनी फोनपे ने ओएनडीसी पर एक शॉपिंग ऐप, पिनकोड के लॉन्च के साथ ई-कॉमर्स में प्रवेश किया था। ऐप हाइपरलोकल कॉमर्स पर केंद्रित है। इस कदम से वॉलमार्ट के स्वामित्व वाले PhonePe को ई-कॉमर्स स्पेस में Flipkart, Amazon, Reliance के JioMart और Tata के स्वामित्व वाली BigBasket को टक्कर देने में मदद मिलने की उम्मीद है। ई कॉमर्स का व्यापार दो हज़ार तीस तक तीन सौ पचास डॉलर बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है। पिनकोड ने कहा कि वह लोकल दुकानदारों और विक्रेताओं को बढ़ावा देता है और उनका मकसद शहर के उपभोक्ताओं को उनके पड़ोस के स्टोर से डिजिटल रूप से जोड़ना है।
कठुआ/जम्मू, 20 जून (एजेंसी) जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक निजी बैंक से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी की चोरी हो गई है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात हटली मोड़ इलाके में हुई। चोरों ने वारदात को अंजाम देते समय सुरक्षाकर्मी को रस्सी से बांध दिया था। कठुआ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर सी कोतवाल ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
कठुआ/जम्मू, बीस जून जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक निजी बैंक से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी की चोरी हो गई है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात हटली मोड़ इलाके में हुई। चोरों ने वारदात को अंजाम देते समय सुरक्षाकर्मी को रस्सी से बांध दिया था। कठुआ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर सी कोतवाल ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे अपने किरदार को निभाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। कई फिल्मों में एक्ट्रेस का बोल्ड और बिंदास अंदाज देखा जा चुका है, जिस कारण वह चर्चाओं में बनी रहती है। अपनी दमदार एक्टिंग के चलते फिल्म इंडस्ट्री में खास जगह बनाने वाली राधिका की अब ऐसी हालत हो गई है कि उन्हे पहचानना भी मुश्किल हो गया है। राधिका की ऐसी हालत देखकर फैंस काफी परेशान हैं और चह जानना चाहते हैं कि आखिर एक्ट्रेस के साथ ऐसा क्या हुआ। उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर अपनी इस तस्वीर को शेयर किया है। नई तस्वीर में देख सकते हैं कि रियल लाइफ में हॉट दिखने वाली राधिका बिल्कुल बदल गई है। उनके बार छोटे और बिखरे हुए हैं और कपड़ें गंदे नजर आ रहे हैं। दरअसल यह तस्वीर 2016 की है जब राधिका फिल्म 'पार्च्ड' में नजर आई थी। गुजरात बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में उन्होंने लज्जो का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने आदिल हुसैन के साथ इंटीमेट सीन कर बवाल खड़ा कर दिया था। ट्विटर पर उनके खिलाफ #BoycottRadhikaApte ट्रेंड भी चला था। इसके अलावा राधिका आप्टे ने कई और फिल्मों में भी बोल्ड सीन्स दिए थे। उन्होंने खुद बताया था कि- एक फिल्म का वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद उनका उस दौरान घर से निकलना भी मुश्किल हो गया था। यह वीडियो फिल्म 'मैडली' की एक कहानी 'क्लीन शेवेन' के एक सीन का था। उन्होंने बताया था कि- उनके मेरे ड्राइवर, वॉचमैन और स्टाइलिस्ट के ड्राइवर भी उन्हे उस वीडियो क्लिप और वायरल हुई तस्वीरों से पहचानने लगे थे।
बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे अपने किरदार को निभाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। कई फिल्मों में एक्ट्रेस का बोल्ड और बिंदास अंदाज देखा जा चुका है, जिस कारण वह चर्चाओं में बनी रहती है। अपनी दमदार एक्टिंग के चलते फिल्म इंडस्ट्री में खास जगह बनाने वाली राधिका की अब ऐसी हालत हो गई है कि उन्हे पहचानना भी मुश्किल हो गया है। राधिका की ऐसी हालत देखकर फैंस काफी परेशान हैं और चह जानना चाहते हैं कि आखिर एक्ट्रेस के साथ ऐसा क्या हुआ। उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर अपनी इस तस्वीर को शेयर किया है। नई तस्वीर में देख सकते हैं कि रियल लाइफ में हॉट दिखने वाली राधिका बिल्कुल बदल गई है। उनके बार छोटे और बिखरे हुए हैं और कपड़ें गंदे नजर आ रहे हैं। दरअसल यह तस्वीर दो हज़ार सोलह की है जब राधिका फिल्म 'पार्च्ड' में नजर आई थी। गुजरात बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में उन्होंने लज्जो का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने आदिल हुसैन के साथ इंटीमेट सीन कर बवाल खड़ा कर दिया था। ट्विटर पर उनके खिलाफ #BoycottRadhikaApte ट्रेंड भी चला था। इसके अलावा राधिका आप्टे ने कई और फिल्मों में भी बोल्ड सीन्स दिए थे। उन्होंने खुद बताया था कि- एक फिल्म का वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद उनका उस दौरान घर से निकलना भी मुश्किल हो गया था। यह वीडियो फिल्म 'मैडली' की एक कहानी 'क्लीन शेवेन' के एक सीन का था। उन्होंने बताया था कि- उनके मेरे ड्राइवर, वॉचमैन और स्टाइलिस्ट के ड्राइवर भी उन्हे उस वीडियो क्लिप और वायरल हुई तस्वीरों से पहचानने लगे थे।
रायपुर। आरक्षण विधेयक को लेकर प्रदेश में जारी सियासत के बीच एक पत्र सामने आया है, जिससे यह बहस और तीखी हो गई है. इस पत्र में आरक्षण विधेयक को लेकर राज्यपाल द्वारा पूछे गए दस सवालों पर दिए गए राज्य सरकार के जवाबों का जिक्र है. इस पत्र के वायरल होने के साथ ही कांग्रेस की ओर से पलटवार किया गया है. बता दें कि आरक्षण बिल पर सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ने राजभवन के विधिक सलाहकार पर भी निशाना साधा था. इस लिहाज से इस पत्र में स्पष्टीकरण दिया गया है कि राजभवन के विधिक सलाहकार न्यायिक सेवा के जिला जज स्तर के हाईकोर्ट की तरफ से नियुक्त होते हैं. उनके खिलाफ टिप्पणी व राजभवन के अधिकारियों के खिलाफ बोलना उपयुक्त नहीं है. वहीं राज्यपाल द्वारा पूछे गए दस सवालों को लेकर राज्य सरकार द्वारा भेजी गई जानकारियों का भी जिक्र है. इस पत्र पर कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बयानों का अनुसरण राजभवन से होता है. राजभवन की मर्यादा स्वयं गिर रही है. पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं उसके कुछ घंटे बाद राजभवन की तरफ से स्पष्टीकरण आ जाता है. उन्होंने इसका आशय पूछते हुए कहा कि राज्यपाल अनुसुइया उइके ने खुद कहा था आरक्षण विधेयक संशोधन लाया जाए, मैं उस पर खुद हस्ताक्षर करूंगी.
रायपुर। आरक्षण विधेयक को लेकर प्रदेश में जारी सियासत के बीच एक पत्र सामने आया है, जिससे यह बहस और तीखी हो गई है. इस पत्र में आरक्षण विधेयक को लेकर राज्यपाल द्वारा पूछे गए दस सवालों पर दिए गए राज्य सरकार के जवाबों का जिक्र है. इस पत्र के वायरल होने के साथ ही कांग्रेस की ओर से पलटवार किया गया है. बता दें कि आरक्षण बिल पर सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ने राजभवन के विधिक सलाहकार पर भी निशाना साधा था. इस लिहाज से इस पत्र में स्पष्टीकरण दिया गया है कि राजभवन के विधिक सलाहकार न्यायिक सेवा के जिला जज स्तर के हाईकोर्ट की तरफ से नियुक्त होते हैं. उनके खिलाफ टिप्पणी व राजभवन के अधिकारियों के खिलाफ बोलना उपयुक्त नहीं है. वहीं राज्यपाल द्वारा पूछे गए दस सवालों को लेकर राज्य सरकार द्वारा भेजी गई जानकारियों का भी जिक्र है. इस पत्र पर कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बयानों का अनुसरण राजभवन से होता है. राजभवन की मर्यादा स्वयं गिर रही है. पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं उसके कुछ घंटे बाद राजभवन की तरफ से स्पष्टीकरण आ जाता है. उन्होंने इसका आशय पूछते हुए कहा कि राज्यपाल अनुसुइया उइके ने खुद कहा था आरक्षण विधेयक संशोधन लाया जाए, मैं उस पर खुद हस्ताक्षर करूंगी.
16 दिसंबर यानि की आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायबरेली पहुंच गए है. पीएम मोदी प्रातःकाल 9:50 बजे अपने विशेष विमान से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाईक ने पीएम नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी हेलीकॉप्टर में बैठकर यूपी के जिले रायबरेली पहुंचे. रायबरेली पहुंचने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने लालंगज रेलकोच फैक्ट्री में 1100 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. रायबरेली में कोच फ़ैक्टरी में उत्पादित 900वें रेल डिब्बे व हमसफर रेल को पीएम नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित किया. ऐसे लोगों के लिए देश का रक्षा मंत्रालय भी झूठा है, देश की रक्षा मंत्री भी झूठी हैं, भारतीय वायुसेना के अफसर भी झूठे हैं, फ्रांस की सरकार भी झूठी है, झूठ चाहे जितना भी बोला जाए, उसमें जान नहीं होती। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहते हुए कहा कि आज मुझे ये कहते हुए गौरव का एहसास हो रहा है कि आने वाले समय में रायबरेली, रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्लोबल हब बनने वाला है और साथ ही बहुत जल्द रायबरेली के रेल कोच फैक्ट्री में पूरे देशभर के मेट्रो और सेमी हाईस्पीड ट्रेनों के डिब्बे भी बनेगें. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि रायबरेली की ये रेल कोच फैक्ट्री 2007 में स्वीकृत हुई थी और 2010 में ये फैक्ट्री बनकर तैयार भी हो गई. लेकिन उसके बाद 4 साल तक इस फैक्ट्री में कपूरथला से डिब्बे लेकर उनमें पेंच कसने और पेंट करने का काम हुआ. रायबरेली कोच फैक्ट्री में बने 900वें रेल डिब्बे एवं हमसफर ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखा कर देश को समर्पित को किया. इस दौरान राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री पीयूष गोयल मौजूद रहे. पीएम नरेंद्र मोदी ने लालगंज स्थित रेल कोच फैक्ट्री में हमसफ़र ट्रेन के नए कोचों का किया निरीक्षण. ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
सोलह दिसंबर यानि की आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायबरेली पहुंच गए है. पीएम मोदी प्रातःकाल नौ:पचास बजे अपने विशेष विमान से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाईक ने पीएम नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी हेलीकॉप्टर में बैठकर यूपी के जिले रायबरेली पहुंचे. रायबरेली पहुंचने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने लालंगज रेलकोच फैक्ट्री में एक हज़ार एक सौ करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. रायबरेली में कोच फ़ैक्टरी में उत्पादित नौ सौवें रेल डिब्बे व हमसफर रेल को पीएम नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित किया. ऐसे लोगों के लिए देश का रक्षा मंत्रालय भी झूठा है, देश की रक्षा मंत्री भी झूठी हैं, भारतीय वायुसेना के अफसर भी झूठे हैं, फ्रांस की सरकार भी झूठी है, झूठ चाहे जितना भी बोला जाए, उसमें जान नहीं होती। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहते हुए कहा कि आज मुझे ये कहते हुए गौरव का एहसास हो रहा है कि आने वाले समय में रायबरेली, रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्लोबल हब बनने वाला है और साथ ही बहुत जल्द रायबरेली के रेल कोच फैक्ट्री में पूरे देशभर के मेट्रो और सेमी हाईस्पीड ट्रेनों के डिब्बे भी बनेगें. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि रायबरेली की ये रेल कोच फैक्ट्री दो हज़ार सात में स्वीकृत हुई थी और दो हज़ार दस में ये फैक्ट्री बनकर तैयार भी हो गई. लेकिन उसके बाद चार साल तक इस फैक्ट्री में कपूरथला से डिब्बे लेकर उनमें पेंच कसने और पेंट करने का काम हुआ. रायबरेली कोच फैक्ट्री में बने नौ सौवें रेल डिब्बे एवं हमसफर ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखा कर देश को समर्पित को किया. इस दौरान राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री पीयूष गोयल मौजूद रहे. पीएम नरेंद्र मोदी ने लालगंज स्थित रेल कोच फैक्ट्री में हमसफ़र ट्रेन के नए कोचों का किया निरीक्षण.
शादी से पहले अक्सर प्रेमी चांद-तारे तोड़ने की बात करते हैं लेकिन एक ऐसी भी जगह है जहां लड़की से शादी करने के लिए व्हेल मछली का दांत तोड़ना पड़ता है। वर्ना उस लड़के को उसकी मनचाही लड़की नहीं मिल पाती। फिजी में तबुआ नाम की इस परंपरा के अनुसार लड़के को शादी करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े जीव व्हेल मछली के दांत को दुल्हन के पिता को देना पड़ता है। व्हेल उन मछलियों में से है, जो सबसे गहरे पानी में रहती है। अब सोचिए जरा, कौन दीवाना होगा जो उसके मुंह में जाकर उसका दांत तोड़ लाए। वो भी प्यार के लिए, लेकिन प्यार में पड़े आशिक ऐसा करते हैं। तबुआ के नाम से प्रचलित इस परंपरा को आज भी लोग निभा रहे हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि लड़के वाले संपन्न घर के हैं। तबुआ के अनुसार प्यार की अभिव्यक्ति ही तब होती है जब लड़का समुद्र में सैकड़ों फीट गहराई में जाकर दुनिया के सबसे बड़ी मछली का दांत तोड़ लाए।
शादी से पहले अक्सर प्रेमी चांद-तारे तोड़ने की बात करते हैं लेकिन एक ऐसी भी जगह है जहां लड़की से शादी करने के लिए व्हेल मछली का दांत तोड़ना पड़ता है। वर्ना उस लड़के को उसकी मनचाही लड़की नहीं मिल पाती। फिजी में तबुआ नाम की इस परंपरा के अनुसार लड़के को शादी करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े जीव व्हेल मछली के दांत को दुल्हन के पिता को देना पड़ता है। व्हेल उन मछलियों में से है, जो सबसे गहरे पानी में रहती है। अब सोचिए जरा, कौन दीवाना होगा जो उसके मुंह में जाकर उसका दांत तोड़ लाए। वो भी प्यार के लिए, लेकिन प्यार में पड़े आशिक ऐसा करते हैं। तबुआ के नाम से प्रचलित इस परंपरा को आज भी लोग निभा रहे हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि लड़के वाले संपन्न घर के हैं। तबुआ के अनुसार प्यार की अभिव्यक्ति ही तब होती है जब लड़का समुद्र में सैकड़ों फीट गहराई में जाकर दुनिया के सबसे बड़ी मछली का दांत तोड़ लाए।
नई दिल्लीः अवसर की एक बड़ी खिड़की प्रदान करने और सभी पात्र व्यक्तियों को अपने आवेदन दाखिल करने में सक्षम बनाने के लिए, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कहा कि उच्च पेंशन का विकल्प चुनने के लिए आवेदन दाखिल करने की तारीख 26 जून तक बढ़ा दी गई है। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईपीएफओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पेंशनभोगियों/सदस्यों से विकल्प/संयुक्त विकल्प के सत्यापन के लिए आवेदन प्राप्त करने की व्यवस्था की है। " इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अब तक 12 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। ऑनलाइन सुविधा केवल 3 मई तक उपलब्ध रहनी थी। लेकिन कर्मचारियों, नियोक्ताओं और उनके संघों से समय बढ़ाने के लिए कई अभ्यावेदन प्राप्त करने के बाद, समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया, बयान में कहा गया है।
नई दिल्लीः अवसर की एक बड़ी खिड़की प्रदान करने और सभी पात्र व्यक्तियों को अपने आवेदन दाखिल करने में सक्षम बनाने के लिए, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कहा कि उच्च पेंशन का विकल्प चुनने के लिए आवेदन दाखिल करने की तारीख छब्बीस जून तक बढ़ा दी गई है। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईपीएफओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पेंशनभोगियों/सदस्यों से विकल्प/संयुक्त विकल्प के सत्यापन के लिए आवेदन प्राप्त करने की व्यवस्था की है। " इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अब तक बारह लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। ऑनलाइन सुविधा केवल तीन मई तक उपलब्ध रहनी थी। लेकिन कर्मचारियों, नियोक्ताओं और उनके संघों से समय बढ़ाने के लिए कई अभ्यावेदन प्राप्त करने के बाद, समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया, बयान में कहा गया है।
नई दिल्ली - बेयर ग्रिल्स के डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले शो 'मैन वर्सेस वाइल्ड' (Man vs Wild) में कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी नजर आए थे। वहीं एक बार फिर 'मैन वर्सेस वाइल्ड' (Man vs Wild) शो का हिस्सा (Rajinikant) रजनीकांत बनने जा रहे है। फिल्मों में नाम कमा चुके 69 वर्षीय अभिनेता रजनीकांत (Rajinikant) अब छोटे पर्दे पर दिखने जा रहे हैं। डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले इस शो की शूटिंग शुरु हो चुकी है। इस शो के दौरान जल संरक्षण के मुद्दे पर बात की जाएगी। वहीं रजनी कांत ने कहा कि 'इन टू दी वाइल्ड एक अनोखा शो है जिसमें एक्शन है और एक उद्देश्य भी जो समाज की भलाई से जुड़ा है।
नई दिल्ली - बेयर ग्रिल्स के डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले शो 'मैन वर्सेस वाइल्ड' में कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी नजर आए थे। वहीं एक बार फिर 'मैन वर्सेस वाइल्ड' शो का हिस्सा रजनीकांत बनने जा रहे है। फिल्मों में नाम कमा चुके उनहत्तर वर्षीय अभिनेता रजनीकांत अब छोटे पर्दे पर दिखने जा रहे हैं। डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले इस शो की शूटिंग शुरु हो चुकी है। इस शो के दौरान जल संरक्षण के मुद्दे पर बात की जाएगी। वहीं रजनी कांत ने कहा कि 'इन टू दी वाइल्ड एक अनोखा शो है जिसमें एक्शन है और एक उद्देश्य भी जो समाज की भलाई से जुड़ा है।
अच्युतानंदन का जन्म 1923 में केरल के आलप्पुषा में शंकरन और अक्कम्मा के घर में हुआ था। उन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया और 11 वर्ष की उम्र में अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्हें खुद अपनी देखभाल करनी पड़ी और अपने भाई के साथ एक सिलाई की दुकान में काम करना शुरू कर दिया और बाद में एक मजदूर के रूप में एक कॉयर कारखाने में काम करने लगे। अच्युतानंदन व्यापार यूनियन के सक्रिय सदस्य थे और उन्होंने इसे राजनीति में प्रवेश करने के लिए एक मंच बनाया। वे एक लोकप्रिय जन नेता बनकर उभरे, और राजनीति में अखंडता लाने के लिए उन्हें आदर दिया जाता है। वे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री (2006-11)भी हैं और वर्तमान में 2011 से विपक्ष के नेता हैं। बचपन से अच्युतानंदन, संगठित जीवन में दृढ़ता से विश्वास करते हैं। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। वे अपने समर्पण और सादगी के लिए जाने जाते हैं। अच्युतानंदन हमेशा किसानों और उनकी भूमि की सुरक्षा के लिए सबसे आगे रहे हैं, और स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया, जिसके लिए वे 1946 में जेल गए। 1967 में ईएमएस सरकार द्वारा पारित भूमि सुधार अधिनियम को लागू करने के लिए अच्युतानंदन 1970 में केरल में हुए भूमि संघर्ष सबसे आगे थे। Disclaimer: The information relating to the candidate is an archive based on the self-declared affidavit filed at the time of elections. The current status may be different. For the latest on the candidate kindly refer to the affidavit filed by the candidate with the Election Commission of India in the recent election.
अच्युतानंदन का जन्म एक हज़ार नौ सौ तेईस में केरल के आलप्पुषा में शंकरन और अक्कम्मा के घर में हुआ था। उन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया और ग्यारह वर्ष की उम्र में अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्हें खुद अपनी देखभाल करनी पड़ी और अपने भाई के साथ एक सिलाई की दुकान में काम करना शुरू कर दिया और बाद में एक मजदूर के रूप में एक कॉयर कारखाने में काम करने लगे। अच्युतानंदन व्यापार यूनियन के सक्रिय सदस्य थे और उन्होंने इसे राजनीति में प्रवेश करने के लिए एक मंच बनाया। वे एक लोकप्रिय जन नेता बनकर उभरे, और राजनीति में अखंडता लाने के लिए उन्हें आदर दिया जाता है। वे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं और वर्तमान में दो हज़ार ग्यारह से विपक्ष के नेता हैं। बचपन से अच्युतानंदन, संगठित जीवन में दृढ़ता से विश्वास करते हैं। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। वे अपने समर्पण और सादगी के लिए जाने जाते हैं। अच्युतानंदन हमेशा किसानों और उनकी भूमि की सुरक्षा के लिए सबसे आगे रहे हैं, और स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया, जिसके लिए वे एक हज़ार नौ सौ छियालीस में जेल गए। एक हज़ार नौ सौ सरसठ में ईएमएस सरकार द्वारा पारित भूमि सुधार अधिनियम को लागू करने के लिए अच्युतानंदन एक हज़ार नौ सौ सत्तर में केरल में हुए भूमि संघर्ष सबसे आगे थे। Disclaimer: The information relating to the candidate is an archive based on the self-declared affidavit filed at the time of elections. The current status may be different. For the latest on the candidate kindly refer to the affidavit filed by the candidate with the Election Commission of India in the recent election.
Online Fraudsters Arrested in Ujjain: देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले शातिर बदमाशों को तेलंगाना पुलिस ने उज्जैन में गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने महाकाल मंदिर के समीप एक होटल में शरण ले रखी थी. आरोपियों पर ओटीपी के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है. तेलंगाना पुलिस ने महाकाल मंदिर के समीप स्थित होटल नंदी में छापा मारकर 7 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है. बदमाशों द्वारा ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया था. पुलिस को बदमाशों की लंबे समय से तलाश थी. सिटी एसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि महाकाल थाना पुलिस के सहयोग से तेलंगाना पुलिस ने जिन बदमाशों को गिरफ्तार किया है, वे रवि, अशोक आदि नाम से होटल में रुके हुए थे. सभी आरोपी तेलंगाना पुलिस के सर्विलांस में थे. आरोपियों ने लगभग 3 दिन उज्जैन में गुजारा. इस दौरान भगवान महाकाल के दर्शन भी किए. वहीं महाकाल थाना प्रभारी मुनेंद्र गौतम ने बताया कि आरोपियों के 3 साथी पहले ही गिरफ्तार हो गए थे, जिसके बाद इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. ऑनलाइन ठगी करने वाले बदमाशों में शामिल कुछ अपराधी दिल्ली के होने की जानकारी मिली है. हैदराबाद के थाने में आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम का मामला दर्ज हुआ था, इसके बाद से ही लगातार फरार चल रहे थे. महाकाल थाना पुलिस की मदद से तेलंगाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे इन शातिर बदमाशों को पकड़ा है. सिटी एसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद तेलंगाना पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई. सिटी एसपी के मुताबिक आरोपियों द्वारा लोगों से मोबाइल पर ओटीपी पता कर खातों से राशि गायब कर दी जाती थी. इस संबंध में तेलंगाना में वेंकटेश नाम के शख्स ने रिपोर्ट लिखाई थी, जिसके बाद आरोपी पुलिस के रडार पर आए थे.
Online Fraudsters Arrested in Ujjain: देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले शातिर बदमाशों को तेलंगाना पुलिस ने उज्जैन में गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने महाकाल मंदिर के समीप एक होटल में शरण ले रखी थी. आरोपियों पर ओटीपी के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है. तेलंगाना पुलिस ने महाकाल मंदिर के समीप स्थित होटल नंदी में छापा मारकर सात शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है. बदमाशों द्वारा ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया था. पुलिस को बदमाशों की लंबे समय से तलाश थी. सिटी एसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि महाकाल थाना पुलिस के सहयोग से तेलंगाना पुलिस ने जिन बदमाशों को गिरफ्तार किया है, वे रवि, अशोक आदि नाम से होटल में रुके हुए थे. सभी आरोपी तेलंगाना पुलिस के सर्विलांस में थे. आरोपियों ने लगभग तीन दिन उज्जैन में गुजारा. इस दौरान भगवान महाकाल के दर्शन भी किए. वहीं महाकाल थाना प्रभारी मुनेंद्र गौतम ने बताया कि आरोपियों के तीन साथी पहले ही गिरफ्तार हो गए थे, जिसके बाद इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. ऑनलाइन ठगी करने वाले बदमाशों में शामिल कुछ अपराधी दिल्ली के होने की जानकारी मिली है. हैदराबाद के थाने में आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम का मामला दर्ज हुआ था, इसके बाद से ही लगातार फरार चल रहे थे. महाकाल थाना पुलिस की मदद से तेलंगाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे इन शातिर बदमाशों को पकड़ा है. सिटी एसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद तेलंगाना पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई. सिटी एसपी के मुताबिक आरोपियों द्वारा लोगों से मोबाइल पर ओटीपी पता कर खातों से राशि गायब कर दी जाती थी. इस संबंध में तेलंगाना में वेंकटेश नाम के शख्स ने रिपोर्ट लिखाई थी, जिसके बाद आरोपी पुलिस के रडार पर आए थे.
बिहार के वैशाली में बीती रात आग लगने से 10 से ज्यादा घर जलकर खाक हो गया. आग से एक 18 साल की लड़की की जलकर मौत हो गई. लड़की अपने छोटे भाई को आग से बचाने के बाद वापस घर कीमती सामान लाने गई थी. लड़की की बसंत पंचमी के दिन शादी होने वाली थी. बिहार (BIHAR) के वैशाली जिले के बेलसर ओपी क्षेत्र में आग में झुलसकर एक लड़की की मौत हो गई. लड़की की शनिवार बसंत पंचमी के दिन शादी होने वाली थी. वह आग से भाई को बचाने के बाद सामान लाने गई थी जिसके बाद उसकी झुलसकर मौत हो गई. दरअसल वैशाली जिले के बेलसर ओपी क्षेत्र के मनोरा पंचायत के उफरौल मुशहरी टोला वार्ड 13 में घरों में आग लग गई. इसके बाद मौके पर अफरातफरी मच गयी. स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया. इसके बाद ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. और दमकलकर्मियों को सूचना दी. जिसके बाद वैशाली से दो फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची. आगलगी की घटना में एक 18 वर्षीय युवती की दर्दनाक मौत हो गई. आग से कपड़ा, बर्तन, आभूषण, अनाज समेत लाखों की सम्पति जलकर राख हो गई. इसके बाद वहां कोहराम मच गया. सभी परिजन रोने बिलखने लगे. आग बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है. आगजनी में जान गंवाने वाली लड़की की पहचान शंकर मांझी की बेटी18 वर्षीय नूतन कुमारी के रूप में हुई है. नूतन की 5 फरवरी को शादी होने वाली थी. नूतन अपने छोटे भाई को आग से बचाने के बाद घर के दूसके कीमती सामान निकालने दोबारा घर के अंदर गई थी जिसके बाद वह आग की चपेट में आ गई. और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई. मृतिका की मां ने बताया कि बीती रात अचानक बिजली की चिंगारी से घर में आग लग गई. जिसके बाद आग देखते-देखते ही पूरे घर और आस पास के घरों मे फैल गई. आग से 19 से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए. तो वही इस घटना में 18 साल की नूतन की भी मौत हो गई. नूतन की शादी सरस्वती पूजा के दिन थी. आज शादी की रस्म मटकोर पूजा समारोह था, लेकिन इसी बीच बच्ची हादसे का शिकार हो गई. आगजनी में जहां बेटी की मौत हो गई वहीं घर में रखा, रुपया-पैसा, जेवर, बर्तन, कपड़ा समेत सभी सामान जलकर खाक हो गया. मृतका का पिता और भाई दूसरे प्रदेश में मजदूरी का काम करता है. आगजनी से 10 से ज्यादा घरों के लोगों के सिर पर छत नहीं बचा है. उसके बाद प्रचंड ठंड और बारिश की वजह से लोगों का बुरा हाल है. लोग खुले आसमान में रहने को विवश है. पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल भेज दिया है और घटना की जांच में जुट गई है. ये भी पढ़ेंः
बिहार के वैशाली में बीती रात आग लगने से दस से ज्यादा घर जलकर खाक हो गया. आग से एक अट्ठारह साल की लड़की की जलकर मौत हो गई. लड़की अपने छोटे भाई को आग से बचाने के बाद वापस घर कीमती सामान लाने गई थी. लड़की की बसंत पंचमी के दिन शादी होने वाली थी. बिहार के वैशाली जिले के बेलसर ओपी क्षेत्र में आग में झुलसकर एक लड़की की मौत हो गई. लड़की की शनिवार बसंत पंचमी के दिन शादी होने वाली थी. वह आग से भाई को बचाने के बाद सामान लाने गई थी जिसके बाद उसकी झुलसकर मौत हो गई. दरअसल वैशाली जिले के बेलसर ओपी क्षेत्र के मनोरा पंचायत के उफरौल मुशहरी टोला वार्ड तेरह में घरों में आग लग गई. इसके बाद मौके पर अफरातफरी मच गयी. स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया. इसके बाद ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. और दमकलकर्मियों को सूचना दी. जिसके बाद वैशाली से दो फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची. आगलगी की घटना में एक अट्ठारह वर्षीय युवती की दर्दनाक मौत हो गई. आग से कपड़ा, बर्तन, आभूषण, अनाज समेत लाखों की सम्पति जलकर राख हो गई. इसके बाद वहां कोहराम मच गया. सभी परिजन रोने बिलखने लगे. आग बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है. आगजनी में जान गंवाने वाली लड़की की पहचान शंकर मांझी की बेटीअट्ठारह वर्षीय नूतन कुमारी के रूप में हुई है. नूतन की पाँच फरवरी को शादी होने वाली थी. नूतन अपने छोटे भाई को आग से बचाने के बाद घर के दूसके कीमती सामान निकालने दोबारा घर के अंदर गई थी जिसके बाद वह आग की चपेट में आ गई. और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई. मृतिका की मां ने बताया कि बीती रात अचानक बिजली की चिंगारी से घर में आग लग गई. जिसके बाद आग देखते-देखते ही पूरे घर और आस पास के घरों मे फैल गई. आग से उन्नीस से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए. तो वही इस घटना में अट्ठारह साल की नूतन की भी मौत हो गई. नूतन की शादी सरस्वती पूजा के दिन थी. आज शादी की रस्म मटकोर पूजा समारोह था, लेकिन इसी बीच बच्ची हादसे का शिकार हो गई. आगजनी में जहां बेटी की मौत हो गई वहीं घर में रखा, रुपया-पैसा, जेवर, बर्तन, कपड़ा समेत सभी सामान जलकर खाक हो गया. मृतका का पिता और भाई दूसरे प्रदेश में मजदूरी का काम करता है. आगजनी से दस से ज्यादा घरों के लोगों के सिर पर छत नहीं बचा है. उसके बाद प्रचंड ठंड और बारिश की वजह से लोगों का बुरा हाल है. लोग खुले आसमान में रहने को विवश है. पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल भेज दिया है और घटना की जांच में जुट गई है. ये भी पढ़ेंः
भारतीय रसोइयों में दाल और सब्जियों में तड़के के लिए पंचफोरन (Panch Phoron) का इस्तेमाल किया जाता है। यह मसाला 5 अलग-अलग तरह की चीजों से तैयार किए जाने वाला मसालों का एक मिश्रण है। यह खुशबूदार मसालों का मिश्रण न केवल आपकी डिशेज की लज्जत व जायकेदार बढ़ाता है बल्कि, इसके सेवन से सेहत को कई तरह के लाभ होते हैं। आइए जानें पंचफोरन का मसाला क्या है और इसे खाने से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पंच फोरन में मिलाया जाने वाले कलौंजी के दाने (Nigella seeds) आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज (Ayurvedic treatments) के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कलौंजी के दाने मौसम बदलने के साथ होने वाली बीमारियों और इंफेक्शन से राहत दिलाने वाला फूड बताया जाता है। मौसम में आने वाले बदलाव के कारण अक्सर सर्दी-खांसी, सिरदर्द, अस्थमा जैसी समस्याएं होती हैं जिनसे राहत दिलाने का काम कर सकते हैं कलौंजी के बीज। साथ ही यह पीलिया (jaundice) और कॉन्स्टिपेशन (constipation) जैसी समस्याओं से भी आराम मिल सकता है। पंचफोरन मसाला बनाने में जीरे का भी इस्तेमाल किया जाता है। जीरे में उचित मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा पंचफोरन में मेथी दाने का इस्तेमाल किया जाता है। मेथी और जीरा दोनों ही वजन घटाने में काफी मददगार साबित होता है। नियमित तौर पर पंचफोरन का सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में भी मदद मिलती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सौंफ या सौंफ के बीज का सेवन करना एक नेचुरल तरीका है। मोटापे या फिर वजन कम करने के लिए यह बेहद कारगर है। वजन कम करने के अलावा सौंफ कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे को कम करता है। साथ ही, सौंफ सांसों की बदबू को खत्म करने में मदद करता है और मसूड़ों की सेहत के लिए अच्छा होता है। वजन कम करने के लिए सुबह-सुबह सौंफ के पानी का सेवन कर सकते हैं, इससे आपको काफी फायदा मिलेगा।
भारतीय रसोइयों में दाल और सब्जियों में तड़के के लिए पंचफोरन का इस्तेमाल किया जाता है। यह मसाला पाँच अलग-अलग तरह की चीजों से तैयार किए जाने वाला मसालों का एक मिश्रण है। यह खुशबूदार मसालों का मिश्रण न केवल आपकी डिशेज की लज्जत व जायकेदार बढ़ाता है बल्कि, इसके सेवन से सेहत को कई तरह के लाभ होते हैं। आइए जानें पंचफोरन का मसाला क्या है और इसे खाने से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पंच फोरन में मिलाया जाने वाले कलौंजी के दाने आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कलौंजी के दाने मौसम बदलने के साथ होने वाली बीमारियों और इंफेक्शन से राहत दिलाने वाला फूड बताया जाता है। मौसम में आने वाले बदलाव के कारण अक्सर सर्दी-खांसी, सिरदर्द, अस्थमा जैसी समस्याएं होती हैं जिनसे राहत दिलाने का काम कर सकते हैं कलौंजी के बीज। साथ ही यह पीलिया और कॉन्स्टिपेशन जैसी समस्याओं से भी आराम मिल सकता है। पंचफोरन मसाला बनाने में जीरे का भी इस्तेमाल किया जाता है। जीरे में उचित मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा पंचफोरन में मेथी दाने का इस्तेमाल किया जाता है। मेथी और जीरा दोनों ही वजन घटाने में काफी मददगार साबित होता है। नियमित तौर पर पंचफोरन का सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में भी मदद मिलती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सौंफ या सौंफ के बीज का सेवन करना एक नेचुरल तरीका है। मोटापे या फिर वजन कम करने के लिए यह बेहद कारगर है। वजन कम करने के अलावा सौंफ कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे को कम करता है। साथ ही, सौंफ सांसों की बदबू को खत्म करने में मदद करता है और मसूड़ों की सेहत के लिए अच्छा होता है। वजन कम करने के लिए सुबह-सुबह सौंफ के पानी का सेवन कर सकते हैं, इससे आपको काफी फायदा मिलेगा।
भोपाल। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो . ई. ओ. डब्ल्यू. रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी . सीएमएचओ. डा. बी. एन. शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के पांच डाक्टरों, लेखापाल एवं दवा प्रदायकर्ता फर्मों के प्रोपराइटर्स के खिलाफ दवाई क्रय एवं प्रदाय में लाखों रुपये के घोटाले के आरोप सही पाये जाने पर प्रकरण दर्ज किया गया है। ई. ओ. डब्ल्यू से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संबंध में प्राप्त शिकायत की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आरोपी अधिकारी रीवा द्वारा टेंडर जारी करने के पूर्व ही दवाइयां, बिना दर सूची प्राप्त किये स्थानीय स्तर पर चार गुना अधिक दर पर क्रय की गईं। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी अधिकारी अथवा उनके द्वारा नियुक्त किसी भी अधिकारी द्वारा नियमानुसार प्राप्त दवाइयों की मात्रा एवं गुणवत्ता के संबंध में न तो कोई भौतिक सत्यापन किया गया और न ही उक्त संबंध में कोई प्रमाणपत्र अंकित किया गया। जांच में जहां दवाओं की वास्तविक संख्या तथा पंजी में अंकित संख्या में अत्याधिक भिन्नता पाई गयी वहीं स्टॉक में अत्याधिक मात्रा में अवसान तिथि . एक्सपाइरी डेट. की दवाएं पाई गयीं, जिसका कोई रिकार्ड नहीं रखा गया था। विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्राsं को प्रदाय की गई सामग्री का सत्यापन भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रीवा अथवा उनके द्वारा अधिकृत किये गये किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा नहीं किया गया जबकि वर्ष 2009. 10 में डिमांड डाफ्ट द्वारा भुगतान की गयी राशि और कोषालय रीवा से चेक द्वारा आहरित राशि में अंतर पाया गया। वहीं यह भी पता चला कि आवंटित राशि से 36 लाख रुपये का अधिक क्रय किया गया। जांच में यह भी पता चला कि कोषालय से आहरित राशि के देयकों की आफिस कापी से यह स्पष्ट नहीं होता है कि उक्त देयकों से किस मद की राशि का आहरण किया गया जबकि वित्तीय नियमों के प्रतिकूल दो बिल रजिस्टर बनाये गये, जो गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। डा. शर्मा के अतिरिक्त जिनके खिलाफ भादंवि की धारा 420, 120बी, 409, 467, 468 एवं 471 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है, उनमें क्रय समिति के अध्यक्ष डा. एस. के. शर्मा, क्रय समिति के सदस्य डा. बी. एल. मिश्रा, डा. रेणु दुबे, डा. प्रदीप शुक्ला, तथा लेखापाल एस. बी. साकेत शामिल हैं।
भोपाल। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो . ई. ओ. डब्ल्यू. रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी . सीएमएचओ. डा. बी. एन. शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के पांच डाक्टरों, लेखापाल एवं दवा प्रदायकर्ता फर्मों के प्रोपराइटर्स के खिलाफ दवाई क्रय एवं प्रदाय में लाखों रुपये के घोटाले के आरोप सही पाये जाने पर प्रकरण दर्ज किया गया है। ई. ओ. डब्ल्यू से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संबंध में प्राप्त शिकायत की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आरोपी अधिकारी रीवा द्वारा टेंडर जारी करने के पूर्व ही दवाइयां, बिना दर सूची प्राप्त किये स्थानीय स्तर पर चार गुना अधिक दर पर क्रय की गईं। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी अधिकारी अथवा उनके द्वारा नियुक्त किसी भी अधिकारी द्वारा नियमानुसार प्राप्त दवाइयों की मात्रा एवं गुणवत्ता के संबंध में न तो कोई भौतिक सत्यापन किया गया और न ही उक्त संबंध में कोई प्रमाणपत्र अंकित किया गया। जांच में जहां दवाओं की वास्तविक संख्या तथा पंजी में अंकित संख्या में अत्याधिक भिन्नता पाई गयी वहीं स्टॉक में अत्याधिक मात्रा में अवसान तिथि . एक्सपाइरी डेट. की दवाएं पाई गयीं, जिसका कोई रिकार्ड नहीं रखा गया था। विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्राsं को प्रदाय की गई सामग्री का सत्यापन भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रीवा अथवा उनके द्वारा अधिकृत किये गये किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा नहीं किया गया जबकि वर्ष दो हज़ार नौ. दस में डिमांड डाफ्ट द्वारा भुगतान की गयी राशि और कोषालय रीवा से चेक द्वारा आहरित राशि में अंतर पाया गया। वहीं यह भी पता चला कि आवंटित राशि से छत्तीस लाख रुपये का अधिक क्रय किया गया। जांच में यह भी पता चला कि कोषालय से आहरित राशि के देयकों की आफिस कापी से यह स्पष्ट नहीं होता है कि उक्त देयकों से किस मद की राशि का आहरण किया गया जबकि वित्तीय नियमों के प्रतिकूल दो बिल रजिस्टर बनाये गये, जो गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। डा. शर्मा के अतिरिक्त जिनके खिलाफ भादंवि की धारा चार सौ बीस, एक सौ बीसबी, चार सौ नौ, चार सौ सरसठ, चार सौ अड़सठ एवं चार सौ इकहत्तर के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है, उनमें क्रय समिति के अध्यक्ष डा. एस. के. शर्मा, क्रय समिति के सदस्य डा. बी. एल. मिश्रा, डा. रेणु दुबे, डा. प्रदीप शुक्ला, तथा लेखापाल एस. बी. साकेत शामिल हैं।
हॉलीवुड अभिनेता चाडविक बोसमैन, जिन्होंने मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स फिल्मों में ब्लैक पैंथर / किंग टीचला की भूमिका निभाने के बाद एक बड़ी प्रसिद्धि हासिल की, उनका लगभग चार साल तक कोलन कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया. वह 43 वर्ष के थे. चैडविक बोसमैन को प्रसिद्ध फिल्मों 42, कैप्टन अमेरिकाः सिविल वॉर, मार्शल, एवेंजर्सः इन्फिनिटी वॉर, 21 ब्रिज, दा 5 ब्लड्स, आदि में उनके प्रदर्शन के लिए जाना जाता है. साथ ही उनके निधन की खबर की घोषणा करते हुए, उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया, जिसके बाद अभिनेता के प्रशंसकों ने शोक संदेश भेजने शुरू कर दिए. बयान में, चाडविक के परिवार ने लिखा, "यह दुः खद खबर दुख के साथ बतानी पड़ रही है कि हम चाडविक बोसमैन का निधन हो गया हैं. चैडविक को 2016 में पेट के कैंसर का पता चला था, और यह पिछले 4 वर्षों में इसके साथ जूझ रहे थे क्योंकि यह चरण IV में आगे बढ़ गया था. इसलिए उन्हें बचाना संभव न हो सका. इसी के साथ उनके निधन सब बेहद आहत हुए है.
हॉलीवुड अभिनेता चाडविक बोसमैन, जिन्होंने मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स फिल्मों में ब्लैक पैंथर / किंग टीचला की भूमिका निभाने के बाद एक बड़ी प्रसिद्धि हासिल की, उनका लगभग चार साल तक कोलन कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया. वह तैंतालीस वर्ष के थे. चैडविक बोसमैन को प्रसिद्ध फिल्मों बयालीस, कैप्टन अमेरिकाः सिविल वॉर, मार्शल, एवेंजर्सः इन्फिनिटी वॉर, इक्कीस ब्रिज, दा पाँच ब्लड्स, आदि में उनके प्रदर्शन के लिए जाना जाता है. साथ ही उनके निधन की खबर की घोषणा करते हुए, उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया, जिसके बाद अभिनेता के प्रशंसकों ने शोक संदेश भेजने शुरू कर दिए. बयान में, चाडविक के परिवार ने लिखा, "यह दुः खद खबर दुख के साथ बतानी पड़ रही है कि हम चाडविक बोसमैन का निधन हो गया हैं. चैडविक को दो हज़ार सोलह में पेट के कैंसर का पता चला था, और यह पिछले चार वर्षों में इसके साथ जूझ रहे थे क्योंकि यह चरण IV में आगे बढ़ गया था. इसलिए उन्हें बचाना संभव न हो सका. इसी के साथ उनके निधन सब बेहद आहत हुए है.
रूम में प काल, पपा का संबंध है, उसके सजाने में तो चाज के कमी परम दय होते हैं। यदि वह शत्रुता कायले तयार करें, तो कालिसके है, लेकिन नाटक के रूप में मिशाउन्लोविनकाल में मीर कारित करने की कोशिश करेंगे शान्तला का बले तो नहीं सेला जा चुका है । "गयाने" के सारे नट-नटीमा थे। नृप वो मु दृश्य ही मनाहर, केशभूषा मी चाय, मात्रों की फोमलता के बाग्न । ही क्या ? यानिवाओं से तैयार किय दृश्य बहुत हो समात्रिक विह विशाल थे। स्वर शायद घरमनी थे । वहाँ घरमनीचमिन्य और नृत्य त्यत कोमलता देखी जाती थी, किन्तु उनी चोर रूमी कूप जो इस दिये गये थे, उनमें कबीलेशाही परपना मी स्पष्ट छाप मालूम हाता-या है, गजगामिता ऐमियायो नारियों पर ही ज्यादा तागू ददर चलने वाली यूरोपियन नारियों भला गजगमन करना क्या जन लकिन "गयाने" म नट नटियों के सी होने पर भी उन्होंने ऐसियायो म शनिवाह बडे सुन्दर तौर से किया था । १८ फवरी को तापमान हिमबिन्दु स १५० सेटीग्रेड नाचे था, में यत्र सर्दी का अभ्यस्त हो चुका था। नेवा जमी हुई वा विश्वविद्यालय से लौटते समय उसे सोधे पारकर इमाइनी-सबोगम ट्राम पटते । प्राच्य विभाग के देन (टीन) स्ताइन श्रर्मशास्त्र और राजनीति के एक माने हुए पंडित हैं। चीन में एक वह परामर्श दाता बन क्स्के रह चुके थे और मारत के बारे में भी उनका अध्ययन बडा गंभीर था। उन्होंने चीनी राजनीति र कोटिल्य पर हाल ही में एक लेख लिखा था। उनमे चीन और मारत के राजनीतिक सिद्धान्तों है। दानादान पर देर तक बातचीत होती रही। बोद्ध धम और दर्शन के दानादान के बारे में में भी कुछ जानता था, लेकिन भारत और चीन के दो हजार सा पहिले श्रारम्भ हुए सांस्कृतिक संबंध में राजनीतिक दानादान कितना हुआ इसका पता नहीं था। में जो कुछ भी जानता था उम बतलाता रहा, सन्त की प्रतीक्षा ज्ञान कोटिल्य के अर्थशास्त्र से अधिक नहीं था। उन दिन ( २० फयरी ) में क्वाड़ियों की वो मना की खोज में निरला, तो मेरे साथ हिन्दी की लेक्चरर दोना मारोवना गोल्दमान मी थीं। उन्होंने बतलाया, क हमारे रहने के स्थान के पाम लितनी में अदमी से एक बड़ी श्रच्छी कान है । मैंने उनके साथ जा वहीं से ३३० रूबल में पुगतंत्र और मध्यएमिया "कितनी ही पुरसगढ़ीं। जैसे चार चार्जे राशनहा दुकाना पर महगी 'मलती हैं, किताबों की वैसी हालत नहीं थी, इमलिये ज्यादा लोगों को प्रिय पुस्तकें इन दुकानों मार मी टिक्ती नही थीं । यहाँ पर मुझे १६०४११०२ का छपी पुरातत्व सबंधी दीख पड़ी । १ २३ फरी को छोटी बहुत ही महत्वपूर्ण सवर भारत के बारे म रडियो से मिली । बम्बई में भारतीय नौनिकों ने ग्रेजों के खिलाफ विद्रोह वर दिया। मार्क्स का कहना ठीक होने जा रहा है। आधुनिक सैनिक विद्या में 'शिक्षत-दीक्षित मारतीय चपनीको साग्रज के लिये ही नहीं उगते रहेंगे, बल्कि कभी वह उह भी उठायेंगे। उठने लगीं हैं । पश्चिम के समृद्ध और समुनत देशों में मोतिना हा चीज मिलती हैं, लेकिन उनका उपयोग हजार म एक श्रादमी से भी कम के लिये होता हैं। " सोवियत में शारीरिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के साधन इतने बड़े पैमानेपर हैं, कि उनसे सारी जनता फायदा उठाती है। यदि वहां शिशुशालायें हैं, तो उनमें डेढ़ महीने से तीन वर्ष के सोनियत के सभी बच्चों को रखकर लानन पालन का प्रबंध है । यदि बालोद्यान हैं, तो वह इतने अधिक है, कि उनमें चोथे बरम से सातवें घरस के त तक के सोवियत भूमि के सारे लडके रसे जा सकते । यह बहुत खर्चीली चीज़ है । इगर की तरह १४० रूक्त मासिक देनेवाले माता पिता नहीं देते, लेकिन सबके लिये वहाँ अलग अलग 1 चारपाइयां, गद्दे, तर्किया, चादर लिहाफ, तौलिया, बतन, र्सी, मेज, खेलने के ! सामान सभी जमा किये हुये हैं। बालोद्यानों में खेलते खेलते अधिक से अधिक चीनों
रूम में प काल, पपा का संबंध है, उसके सजाने में तो चाज के कमी परम दय होते हैं। यदि वह शत्रुता कायले तयार करें, तो कालिसके है, लेकिन नाटक के रूप में मिशाउन्लोविनकाल में मीर कारित करने की कोशिश करेंगे शान्तला का बले तो नहीं सेला जा चुका है । "गयाने" के सारे नट-नटीमा थे। नृप वो मु दृश्य ही मनाहर, केशभूषा मी चाय, मात्रों की फोमलता के बाग्न । ही क्या ? यानिवाओं से तैयार किय दृश्य बहुत हो समात्रिक विह विशाल थे। स्वर शायद घरमनी थे । वहाँ घरमनीचमिन्य और नृत्य त्यत कोमलता देखी जाती थी, किन्तु उनी चोर रूमी कूप जो इस दिये गये थे, उनमें कबीलेशाही परपना मी स्पष्ट छाप मालूम हाता-या है, गजगामिता ऐमियायो नारियों पर ही ज्यादा तागू ददर चलने वाली यूरोपियन नारियों भला गजगमन करना क्या जन लकिन "गयाने" म नट नटियों के सी होने पर भी उन्होंने ऐसियायो म शनिवाह बडे सुन्दर तौर से किया था । अट्ठारह फवरी को तापमान हिमबिन्दु स एक सौ पचास सेटीग्रेड नाचे था, में यत्र सर्दी का अभ्यस्त हो चुका था। नेवा जमी हुई वा विश्वविद्यालय से लौटते समय उसे सोधे पारकर इमाइनी-सबोगम ट्राम पटते । प्राच्य विभाग के देन स्ताइन श्रर्मशास्त्र और राजनीति के एक माने हुए पंडित हैं। चीन में एक वह परामर्श दाता बन क्स्के रह चुके थे और मारत के बारे में भी उनका अध्ययन बडा गंभीर था। उन्होंने चीनी राजनीति र कोटिल्य पर हाल ही में एक लेख लिखा था। उनमे चीन और मारत के राजनीतिक सिद्धान्तों है। दानादान पर देर तक बातचीत होती रही। बोद्ध धम और दर्शन के दानादान के बारे में में भी कुछ जानता था, लेकिन भारत और चीन के दो हजार सा पहिले श्रारम्भ हुए सांस्कृतिक संबंध में राजनीतिक दानादान कितना हुआ इसका पता नहीं था। में जो कुछ भी जानता था उम बतलाता रहा, सन्त की प्रतीक्षा ज्ञान कोटिल्य के अर्थशास्त्र से अधिक नहीं था। उन दिन में क्वाड़ियों की वो मना की खोज में निरला, तो मेरे साथ हिन्दी की लेक्चरर दोना मारोवना गोल्दमान मी थीं। उन्होंने बतलाया, क हमारे रहने के स्थान के पाम लितनी में अदमी से एक बड़ी श्रच्छी कान है । मैंने उनके साथ जा वहीं से तीन सौ तीस रूबल में पुगतंत्र और मध्यएमिया "कितनी ही पुरसगढ़ीं। जैसे चार चार्जे राशनहा दुकाना पर महगी 'मलती हैं, किताबों की वैसी हालत नहीं थी, इमलिये ज्यादा लोगों को प्रिय पुस्तकें इन दुकानों मार मी टिक्ती नही थीं । यहाँ पर मुझे एक करोड़ साठ लाख इकतालीस हज़ार एक सौ दो का छपी पुरातत्व सबंधी दीख पड़ी । एक तेईस फरी को छोटी बहुत ही महत्वपूर्ण सवर भारत के बारे म रडियो से मिली । बम्बई में भारतीय नौनिकों ने ग्रेजों के खिलाफ विद्रोह वर दिया। मार्क्स का कहना ठीक होने जा रहा है। आधुनिक सैनिक विद्या में 'शिक्षत-दीक्षित मारतीय चपनीको साग्रज के लिये ही नहीं उगते रहेंगे, बल्कि कभी वह उह भी उठायेंगे। उठने लगीं हैं । पश्चिम के समृद्ध और समुनत देशों में मोतिना हा चीज मिलती हैं, लेकिन उनका उपयोग हजार म एक श्रादमी से भी कम के लिये होता हैं। " सोवियत में शारीरिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के साधन इतने बड़े पैमानेपर हैं, कि उनसे सारी जनता फायदा उठाती है। यदि वहां शिशुशालायें हैं, तो उनमें डेढ़ महीने से तीन वर्ष के सोनियत के सभी बच्चों को रखकर लानन पालन का प्रबंध है । यदि बालोद्यान हैं, तो वह इतने अधिक है, कि उनमें चोथे बरम से सातवें घरस के त तक के सोवियत भूमि के सारे लडके रसे जा सकते । यह बहुत खर्चीली चीज़ है । इगर की तरह एक सौ चालीस रूक्त मासिक देनेवाले माता पिता नहीं देते, लेकिन सबके लिये वहाँ अलग अलग एक चारपाइयां, गद्दे, तर्किया, चादर लिहाफ, तौलिया, बतन, र्सी, मेज, खेलने के ! सामान सभी जमा किये हुये हैं। बालोद्यानों में खेलते खेलते अधिक से अधिक चीनों
कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच कुकीन का जन्म 23 के 1897 पर कुर्स्क शहर में एक श्रमिक वर्ग के परिवार में हुआ था। 1916 में, उन्होंने कॉलेज से स्नातक किया और 12 वें Kalishsky रेजिमेंट में एक स्वयंसेवक के रूप में दाखिला लिया। प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया, अधिकारी के पद तक पहुंचे। कॉन्स्टेंटिन कुकिन - 1918 वर्ष में बेलारूसी पक्षपातपूर्ण टुकड़ी के सेनानी। सेना से विमुद्रीकरण के बाद, कुकीन अपने मूल कुर्स्क में लौट आया। वहां उन्हें अक्टूबर क्रांति की जीत की खबर मिली, जो उन्होंने खुशी से मुलाकात की और तुरंत लाल सेना में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से मिले। इसमें उन्होंने आठ साल सेवा की। 1918 में, उन्हें CPSU (b) के रैंक में भर्ती किया गया था। ऐसा हुआ कि सोवियत सत्ता के लिए संघर्ष के बहुत भंवर में कुकीन था। ब्रेस्ट-लिटोव्स्क में जर्मनी के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए ट्रॉट्स्की के इनकार के बाद, कैसर सेना ने बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू किया। यूक्रेन और बेलारूस पर कब्जा कर लिया गया, जहां कब्जा करने वालों ने अपने नियम बनाए। फरवरी में, आक्रमणकारियों 1918 को नरवा और प्सकोव के पास मुश्किल से रोका गया था। रूस के क्षेत्र में, ब्रायंस्क से 100 किमी में जर्मन कब्जे की रेखा आयोजित की गई थी। जर्मन आक्रमणकारियों के खिलाफ खण्डन आयोजित करने के लिए कुकिन को सेनानियों के एक टुकड़ी के साथ बेलारूसी शहर भेजा गया था। चूंकि रेड आर्मी अभी भी कमजोर थी और जर्मन लोगों के साथ नियमित लड़ाई नहीं कर सकती थी, कब्जे वाले क्षेत्रों में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई थी। कुकीन ने सशस्त्र प्रतिरोध इकाइयों और पक्षपातपूर्ण टुकड़ियों के निर्माण में भाग लिया, जिन्होंने आक्रमणकारियों के अलग-अलग डिवीजनों पर हमला किया, ब्रायोस-गोमेल रेलवे में तोड़फोड़ की और दुश्मन के परिवहन को नष्ट कर दिया। नवंबर में, जर्मनी में एक्सएनयूएमएक्स में एक क्रांति हुई, कैसर विल्हेम द्वितीय को त्यागने के लिए मजबूर किया। सोवियत सरकार ने तुरंत शिकारी ब्रेस्ट शांति को रद्द कर दिया। रूस के उदाहरण के बाद, जर्मन सर्वहारा ने बर्लिन, हैम्बर्ग, कोलोन और अन्य जर्मन शहरों में श्रमिकों और सैनिकों की प्रतिनियुक्तियों की परिषदें बनाईं। एक ही सलाह कब्जे वाले बेलारूस के क्षेत्र में पैदा हुई। जर्मन सैनिकों ने रूस के खिलाफ सभी शत्रुता को रोकने का फैसला किया और अपनी मातृभूमि में शीघ्र वापसी की मांग की। दिसंबर 1918 में, बेलारूस के क्षेत्र से जर्मन सेना की निकासी शुरू हुई। 25 मार्च 1919, रेचेसा एक्स्ट्राऑर्डिनरी मिलिट्री रेवोल्यूशनरी हेडक्वार्टर, कुचिन को रेचेटा गार्ड कंपनी के कमांडर के रूप में नियुक्त करता है, जिसे वह बनाने के लिए कमीशन भी देता है। बेलारूस में, कुकीन "ग्रीन" के गिरोह से लड़ रहा है। सितंबर 1919 में, कुकिन को 53 कैवलरी रेजिमेंट का उप राजनीतिक आयुक्त नियुक्त किया गया था। बाद में वह 9 कैवलरी डिवीजन के राजनीतिक विभाग के प्रमुख के सहायक बन गए। वह दिसंबर 1919 के अंत तक इस स्थिति में था। एक्सएनयूएमएक्स में, कुकीन को क्रीमिया के बखचीसराय क्रांतिकारी समिति का अध्यक्ष और विशेष उद्देश्य इकाइयों (चोन) की टुकड़ी का कमांडर नियुक्त किया जाता है, और सक्रिय रूप से गैंगस्टर से लड़ रहा है। साहस और वीरता के लिए ऑर्डर ऑफ द रेड बैनर से सम्मानित किया गया। अक्टूबर में, CHN टुकड़ी के कमांडरों की एक बैठक के लिए 1920 को कुर्स्क भेजा गया था। यह जानकर कि उनके हमवतन बच्छिसराय की विद्रोह समिति के अध्यक्ष हैं, कूरियन उन्हें अपने गृहनगर लौटने के लिए आमंत्रित करते हैं, जहां वह डिप्टी कुर्स्क प्रांतीय सैन्य कमिश्रर बन जाते हैं और उसी समय उनका राजनीतिक सचिवालय प्रमुख होता है। 1923 में, कुकिन को कुर्स्क का सैन्य कमिश्नर नियुक्त किया गया और उन्हें 1 शहरी जिले की पार्टी की जिला समिति के ब्यूरो का सदस्य चुना गया। लेकिन यहां तक कि उन्होंने केवल एक्सएनयूएमएक्स तक काम किया, जब उन्हें मास्को प्रांत के ज़ारई जिले का सैन्य कमिसर नियुक्त किया गया। इस स्थिति में, कॉन्स्टेंटिन ने डेढ़ साल काम किया। USSR रिवोल्यूशनरी मिलिट्री काउंसिल कुकीन के आदेश से वर्ष के 20 मार्च 1926 को लाल सेना से हटा दिया गया और खुद को पूरी तरह से पार्टी के काम में लगा दिया। उन्हें मास्को में कसीनी बोगाटियर संयंत्र की पार्टी समिति का सचिव और सोकोनिकी जिला पार्टी समिति के ब्यूरो का सदस्य चुना गया है। उनके जीवन की बड़ी घटना आरसीपी (X) के 16 पार्टी सम्मेलन और 1929 में मास्को सिटी पार्टी समिति के एक सदस्य के लिए एक प्रतिनिधि का चुनाव था। यहां उन्होंने पार्टी बिल्डिंग सेक्टर के प्रमुख का पद संभाला। उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए, वह इंस्टीट्यूट ऑफ रेड प्रोफेसरशिप में अध्ययन करने के लिए जाता है, जहां वह सफलतापूर्वक अंग्रेजी भाषा में महारत हासिल करता है। अध्ययन करते हुए, कॉन्स्टेंटिन ने खुद को सकारात्मक पक्ष में स्थापित किया और एक्सएनयूएमएक्स में स्नातक होने के बाद, उन्हें विदेशी मामलों के कमिश्रिएट को सौंपा गया। पीपुल्स कमिश्रिएट कुकिन के केंद्रीय कार्यालय में एक छोटी इंटर्नशिप के बाद, उन्हें संयुक्त स्टॉक कंपनी आर्कोस में रेजिनोइमपोर्ट विभाग के प्रबंधक के रूप में इंग्लैंड भेजा गया था। कुछ समय बाद, उसी 1931 वर्ष में, कुकीन गलती से लंदन में अपने पुराने दोस्त के साथ रेचित्सा में सैन्य सेवा में आए, येवगेनी पेत्रोविच मिकिविक्ज़, एक अवैध खुफिया अधिकारी जो पहले जर्मनी और इटली में काम कर चुके थे। इंग्लैंड में, मिकीविक्ज़ ने एक अवैध निवास का नेतृत्व किया और एक विदेशी नागरिक के नाम पर एक पासपोर्ट था। अचानक हुई बैठक में प्रसन्न होकर, उन्होंने बेलारूस में अपने साथियों, उनके साथियों के साथ संयुक्त संघर्ष को याद किया, वे एक-दूसरे के मामलों में रुचि रखते थे। यह जानने के बाद कि इंग्लैंड में, कुकीन रेजिनिमपोर्ट में काम करता है, मित्सकेविच ने अप्रत्याशित रूप से उसे विदेशी खुफिया काम करने के लिए जाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कोनोस्टिन को व्यक्तिगत रूप से INO के प्रमुख अर्तुर अर्तुजोव की सिफारिश करने के लिए तैयार थे। इस प्रस्ताव ने कुकीन को आश्चर्यचकित रूप से कहा, और उसने उत्तर दिया कि वह अभी भी बुद्धि में काम करने के लिए तैयार नहीं था। हालांकि, कुछ प्रतिबिंब के बाद, वह सहमत हुए और पूछा कि उन्हें ओजीपीयू में काम करने के लिए क्या करना चाहिए। "कुछ भी नहीं," मिकिविक्ज़ ने तुरंत जवाब दिया। - मुख्य बात यह है कि आप किसी को भी मेरे प्रस्ताव के बारे में नहीं बताएंगे, और फिर हम आपको पाएंगे। एक्सएनयूएमएक्स के अंत में, कुकीन को विदेशी खुफिया संवर्ग में नामांकित किया गया था और लंदन में INO कानूनी निवास में शामिल किया गया था। इस तरह की एक त्वरित नियुक्ति विदेशी खुफिया के पुनर्गठन के कारण हुई, जिसे एक्सन्यूएक्स के जनवरी एक्सएनयूएमएक्स से पोलित ब्यूरो के निर्णय द्वारा किया गया था। जर्मनी में नाज़ीवाद के विकास के संबंध में, इस डिक्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोवियत संघ एक नए विश्व युद्ध के खतरे का सामना कर रहा था, जिसे खुफिया कार्यों में वृद्धि की आवश्यकता थी। खुफिया विनियोजन बढ़ाए गए, इसके राज्यों का विस्तार किया गया। कुकीन बुद्धिमत्ता के लिए आदर्श रूप से अनुकूल था, जिसकी पुष्टि उन्होंने अपने आगे के काम से की। 1932 में, उन्होंने इंग्लैंड में अपना काम पूरा किया और मास्को लौट आए। खुफिया प्रबंधन ने उन्हें अपने सबसे सक्रिय बिंदुओं में से एक हार्बिन रेजिडेंसी में काम करने के लिए भेजने का फैसला किया। हार्बिन में काम के महत्व को इस तथ्य से समझाया गया था कि चीन के उत्तर-पूर्व में व्हाइट गार्ड उत्प्रवास का एक महत्वपूर्ण उपनिवेश था, जो जापानी और ब्रिटिश खुफिया सेवाओं के साथ निकटता से जुड़ा था। विदेशी राज्यों की विशेष सेवाओं ने सक्रिय रूप से एजेंटों को भेजा, उनके द्वारा सोवियत संघ के क्षेत्र में भर्ती किया गया। हार्बिन में, कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच गोस्त्राख के सामान्य प्रतिनिधि की स्थिति में थे। वह स्टेशन के काम में सक्रिय रूप से शामिल था, कई दिलचस्प लिंक शुरू किए। हालांकि, एक्सएनयूएमएक्स में, वह गंभीर रूप से बीमार हो गया और यूएसएसआर में वापस जाने के लिए मजबूर हो गया। कुकिन एक वर्ष तक बीमार रहा, और फिर एक्सएनयूएमएक्स में, उसे तथाकथित यशा समूह में भर्ती कराया गया, जिसकी अध्यक्षता जैकब सेरेब्रांस्की ने की, जो एक सैन्य खुफिया एजेंसी थी। जापानी खुफिया के खिलाफ विशेष संचालन समूह का नेतृत्व करने के लिए कुकिन को नियुक्त किया गया था और ट्रांसबाइकलिया के लिए छोड़ दिया गया था। उनके समूह का कार्य यूएसएसआर टोही के क्षेत्र में भेजे गए जापानी खुफिया सेवाओं और रूसी व्हाइट गार्ड आव्रजन के तोड़फोड़ समूहों के साथ लड़ना था। एक्सएनयूएमएक्स में, बकाया विदेशी खुफिया प्रमुख आर्थर आर्टुज़ोव को गिरफ्तार किया गया और फिर गोली मार दी गई। पीपुल्स कमिसार निकोलाई येझोव के आदेश से, कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच को "लोगों के दुश्मन के साथ संबंध" के बारे में गवाही देने के लिए मास्को वापस बुलाया गया था। हालांकि, एनकेवीडी जांचकर्ता उनसे पूछताछ करने में विफल रहेः कुकीन की दिल की बीमारी लंबे समय तक खराब रही, और उन्हें स्वास्थ्य कारणों से राज्य सुरक्षा निकायों से बर्खास्त कर दिया गया। उस समय चेकिस्ट कुकिन केवल 40 वर्ष का था। वह शादीशुदा था, उसके दो बच्चे थे, एक अच्छी शिक्षा, कई पेशे, लेकिन उसे कहीं नौकरी नहीं मिली। जैसे ही कार्मिक अधिकारियों को पता चला कि उसे एनकेवीडी से निकाल दिया गया था "लोगों के दुश्मनों से संपर्क करने के लिए," किसी भी संस्थान के दरवाजे उसके सामने पटक दिए। केवल अब्राम स्लुटस्की के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद, जिन्होंने आर्टुजोव को विदेशी खुफिया विभाग के प्रमुख के रूप में प्रतिस्थापित किया और जो कि पार्टी के सोकोनिकी जिला समिति में संयुक्त कार्य के लिए कुकिन को जानते थे, कोनस्टेंटिन मिखाइलोविच अपने रैंकों में बहाल थे। ताकि उत्साही जांचकर्ताओं को फिर से एक स्काउट में दिलचस्पी न हो, स्लटस्की ने तुरंत उसे यूएसए के लिए एक विदेशी मिशन पर जारी करने के निर्देश दिए, जहां कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच नवंबर 7 में 1937 के बाद वाशिंगटन में यूएसएसआर दूतावास के दूसरे सचिव के पद के तहत छोड़ दिया था। मई 1941 तक, विदेश में USSR के राजनयिक संस्थानों को क्रमशः उनके सहायक उपकरणों की अध्यक्षता वाले, plenipotentiaries कहा जाता था। मई में, दूतावासों को एक्सएनयूएमएक्स कहा जाने लगा, जैसा कि दुनिया भर में प्रथागत है, जैसे राजदूतों के नेतृत्व में दूतावास। कवर के लिए इस स्थिति में, उन्हें व्यक्तिगत मामलों के लिए कमिसार द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्याचेस्लाव मिखाइलोविच मोलोतोव द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिसके साथ भविष्य में उन्हें आधिकारिक व्यवसाय पर एक से अधिक बार संवाद करना होगा और यहां तक कि एक्सएनयूएमएक्स में अमेरिका की यात्राओं पर भी उनके साथ जाना होगा। इस बीच, आंतरिक मामलों के कमांडर येझोव को पद से हटा दिया गया और उन्हें मार दिया गया। उन्हें इस पद पर लॉरेंस बेरिया द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिन्होंने बुद्धि को पुनर्गठित करना शुरू कर दिया था। उनके आदेश से, कुकीन को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां हॉक होवाकिमियन खुफिया निवासी था। न्यूयॉर्क में पहुंचते ही, कोंस्टेंटिन मिखाइलोविच जल्दी से स्थिति से परिचित हो गए और छह महीने के भीतर वह राजनीतिक जानकारी के दो स्रोतों को काम में लाने में सक्षम हो गए, जिससे हमारे देश के प्रति अमेरिकी शासक हलकों की नीतियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी आना शुरू हो गई। निवासी होवाकिमान ने इगोर (कोंस्टेंटिन मिखाइलोविच कुकीन का परिचालन छद्म नाम) को एक और सात मोथबॉल एजेंटों से संपर्क करने के लिए भेजा, जिनके साथ निवासी पीटर गुत्ज़ायत ने पहले काम किया था (वह मास्को को याद किया गया था, ट्रॉटस्कीवाद के अभियुक्त और निष्पादित)। केंद्र ने इन एजेंटों में से आधे को "संदिग्ध स्रोत" के लिए जिम्मेदार ठहराया और उनके साथ काम करना बंद करने का सुझाव दिया। हालांकि, कुकिन ने उनसे मिलना जारी रखा और राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर उनसे बहुमूल्य जानकारी प्राप्त की। इन स्रोतों के साथ काम महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के दौरान जारी रहा और बहुत उत्पादक था। निवासी होवाकीमान ने काम में इगोर की गतिविधि की बहुत सराहना की और सुझाव दिया कि केंद्र उन्हें उप निवासी के रूप में नियुक्त करेगा। हालांकि, केंद्र में ही अनुभवी कर्मियों की कमी के कारण, खुफिया नेतृत्व ने कुकीन को मास्को वापस लेने और उसे एक नेतृत्व की स्थिति में नियुक्त करने का फैसला किया। इसलिए कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच एक्सएनयूएमएक्स-वें विदेशी खुफिया विभाग (यूएसए और कनाडा) के उप प्रमुख बने। लेकिन स्काउट के केंद्र में एक और मुसीबत के लिए इंतजार कर रहा था। एक निश्चित आप्रवासी ने उस पर "काउंटर-क्रांतिकारी संगठन" से संबंधित होने का आरोप लगाया, जिसे कथित रूप से लंदन में आर्कोस संयुक्त स्टॉक कंपनी के तहत बनाया गया था। हालांकि, परीक्षण में उत्प्रवासी के बयानों की बेरुखी का पता चला, और कुकिन को अकेला छोड़ दिया गया। फिर भी, खुफिया प्रमुख ने कहा कि कैसे स्काउट को झटका से बाहर निकालना है। जल्द ही युद्ध शुरू हो गया। जुलाई में 16 के पत्र में निवासी गोर्सकी के बाद से उसे लंदन निवास में भेजने का फैसला किया गया था, 1941 में XNUMX ने अतिरिक्त अनुभवी कार्यकर्ताओं को भेजने के लिए कहा। सोवियत दूतावास में एक स्वागत समारोह में। यूएसएसआर राजदूत कोंस्टेंटिन कुकिन और फील्ड मार्शल बर्नार्ड मोंटगोमरी, लंदन, एक्सएनयूएमएक्स वर्ष। और फिर से मामले में हस्तक्षेप किया। 20 जुलाई 1941, USSR के सुप्रीम सोवियत के प्रेसिडियम के फरमान से, पीपुल्स कमिसरीएट ऑफ इंटरनल अफेयर्स (NKVD) और पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (NKGB) यूएसएसआर के आंतरिक मामलों के सिंगल पीपुल्स कमिश्रिएट में एकजुट हो गए, लावेरी का नेतृत्व किया। नए लोगों के कमिसार ने "ट्रॉट्सकी संगठन" की गतिविधियों में उनकी भागीदारी का सत्यापन पूरा होने तक कुकीन की लंदन की व्यापार यात्रा पर रिपोर्ट को स्थगित कर दिया। तब एनकेवीडी की बुद्धि के प्रमुख पावेल मिखाइलोविच फिटिन ने जर्मन के जासूसों और तोड़फोड़ करने वालों की पहचान करने के लिए फ्रंटलाइन और फ्रंट-लाइन क्षेत्रों में कमांड के काम को अंजाम देने वाले लोगों के कमिश्नरों के कर्मचारियों के एक विशेष समूह को तत्काल कुकीन को छोड़ दिया। कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच इस काम के साथ सफलतापूर्वक मुकाबला कर रहा था, और जल्द ही उसके खिलाफ सभी बेतुके आरोप पूरी तरह से गायब हो गए और वह केंद्रीय खुफिया तंत्र में लौट आया, जहां युद्ध के वर्षों के दौरान ऑपरेटिव सक्षम कर्मी सोने में अपने वजन के लायक थे। जुलाई एक्सएनयूएमएक्स में कुकीन को विदेशी काम के लिए तैयार करने के लिए, वह कमिसार के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर गए। खुफिया प्रबंधन ने अप्रैल 1943 में केवल लंदन रेजिडेंसी में काम करने के लिए कुकिन के निर्देश पर रिपोर्ट पर वापस लौटा, जब NKGB को फिर से स्थापित किया गया था। पीपुल्स कमिसार Vsevolod मर्कुलोव ने रिपोर्ट के साथ खुद को परिचित किया, सुझाव दिया कि फिटिन को गोर्की के बजाय कुकीन को एक निवासी नियुक्त करना चाहिए। फिटिन ने बुरा नहीं माना। कोंस्टेंटिन मिखाइलोविच दूतावास के सलाहकार के रूप में लंदन गए। उनके जाने की पूर्व संध्या पर, वेसेवोलॉड निकोलायेविच मर्कुलोव, पीपुल्स कमिसर ऑफ़ स्टेट सिक्योरिटी द्वारा प्राप्त किया गया, जिन्होंने इंग्लैंड में निवास के कार्यों को संक्षेप में बतायाः पीपुल्स कमिसार कुकिन के साथ बातचीत के बाद, वह उसी दिन लंदन के लिए रवाना हो गए। वह अपने परिवार के साथ रेल से मुरमांस्क गए और वहां से समुद्र के रास्ते इंग्लैंड गए। वह मई 1943 के मध्य में ब्रिटिश राजधानी में पहुंचे, और तुरंत काम में शामिल हो गए। उन्होंने "कैम्ब्रिज फाइव" के सदस्यों के साथ संपर्क किया। मॉस्को मुख्य रूप से इस सवाल में दिलचस्पी रखता था कि चर्चिल के वादे अगस्त - सितंबर 1943 में दूसरा मोर्चा खोलने के लिए कितने गंभीर थे। 15 мая Кукин направляет в Центр добытые агентурным путем в Министерстве авиации сведения о военно-стратегическом плане Великобритании на 1943 год. В нем не было ни слова о высадке англо-американских войск в Европе. Из документа следовало, что англичане намерены изгнать немецко-итальянские войска из Туниса, оккупировать Сицилию и Сардинию, а основные сухопутные операции против нацистской Германии перенести на 1944 год. लंदन रेजिडेंसी के प्रयासों के लिए धन्यवाद, कुकीन के साथ-साथ अन्य विदेशी खुफिया एजेंसियों के नेतृत्व में, स्टालिन को सहयोगियों की योजनाओं के बारे में पता था। नवंबर में बिग थ्री 30 के तेहरान सम्मेलन में, उन्होंने मई 1944 में दूसरा मोर्चा खोलने के लिए इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका से लिखित प्रतिबद्धता हासिल की। वास्तव में, ऑपरेशन ओवरलॉर्ड ने नॉरमैंडी में मित्र राष्ट्रों की लैंडिंग केवल 6 पर 1944 पर शुरू की, जब यह पूरी दुनिया के लिए पहले से ही स्पष्ट था कि यूएसएसआर नाजी जानवर की पीठ को तोड़ने में सक्षम था। तब मित्र राष्ट्रों ने जर्मन पाई को विभाजित करने के लिए जल्दबाजी की। कोंस्टेंटिन कुकिन और उनके नेतृत्व वाले स्काउट्स ने लंदन में फ्रंट-लाइन वालों के करीब की स्थितियों में काम किया। ब्रिटिश राजधानी ने लगभग रोज जर्मन लूफ़्टवाफे़ पर बमबारी की। ऐसा हुआ कि एक ऑपरेटर उस क्षेत्र से एक बैठक से वापस नहीं लौट सकता है जिसने छापा मारा था। तब निवासी खुद एक कार के पहिए के पीछे बैठ गया, अपने साथी के बचाव के लिए दौड़ा और उसे दूतावास में ले गया। कुकिन ने एजेंटों के साथ काम करने के लिए बहुत प्रयास और ध्यान समर्पित किया। 1943 के अंत में, एन्क्रिप्शन मास्को में उनके नाम से आया था, जिसने उन्हें आठ नए गुर्गों के अपने निवास की दिशा की जानकारी दी थी। उसी समय, निवासी को केंद्र को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था कि टीम का सामना करने वाले कार्यों को करने में उनका उपयोग कैसे करें। कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच उस समय गंभीर रूप से बीमार थे और समय पर केंद्र को जवाब नहीं दे सकते थे। एक स्काउट को पेप्टिक अल्सर की बीमारी थी जिसने उसे बिस्तर पर जकड़ लिया था। उन्होंने घर में काम किया, बिस्तर पर लेटे रहे। तीव्र दर्द के हमलों से, वह बैठ भी नहीं सकता था। केवल वर्ष के 1944 की शुरुआत में, अपनी बीमारी के बारे में एक शब्द का उल्लेख किए बिना, निवासी ने बिंदु की गतिविधियों में प्रत्येक ऑपरेटिव का उपयोग करने की योजना पर रिपोर्ट की और केंद्र से कहा कि वह डिप्टी कमिशर फॉर फॉरेन अफेयर्स आंद्रेई विन्हिन्स्की से बात करे और उसे राजनयिक लाइन के माध्यम से अत्यधिक भार से राहत देने के बारे में बताए। हालाँकि, जल्द ही केंद्र से इन प्रस्तावों पर अप्रत्याशित प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। केंद्र में क्यूरेटर कुकिना ने उन्हें इस बारे में सूचित करने के लिए कहा कि कैसे वे खुफिया के हितों में दूतावास के माध्यम से विभिन्न समितियों में अपनी भागीदारी का उपयोग करते हैं। निवासी को अपने कार्यालय में आने वाले प्रत्येक नए कर्मचारी के काम पर विस्तृत रिपोर्ट भेजने के लिए भी कहा गया था। बिस्तर पर रहने वाले निवासी ने केंद्र को पत्र लिखाः - "केंद्र की योजनाओं के अनुसार एक नए तरीके से कार्य हमारे द्वारा विकसित किया गया है। यह अधिक तेजी से युद्ध से बाधित हैः हम जर्मन विमानों से गोले और मिसाइलों के गोले के नीचे काम करते हैं। लगातार बमबारी के कारण, एजेंटों के साथ संवाद करना मुश्किल है। उनमें से कुछ ने इस वजह से लंदन छोड़ दिया। जो लोग इसमें बने रहे, अनिच्छा से और अपने जीवन के लिए आशंका के साथ मतदान के लिए जाते हैं। यदि वे आते हैं, तो बातचीत हमेशा नहीं होती हैः लोग V-1 के उड़ान भरने के शोर को अधिक सुनते हैं। संक्षेप में भर्ती के बारे में। यूरोप में अपने सफल मुक्ति मिशन के संबंध में सोवियत संघ के लिए आम अंग्रेजों की सहानुभूति में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, राज्य में परिचालन संपर्क और हमारे लिए सामान्य राजनीतिक वातावरण का पता लगाना अधिक कठिन हो गया। तथ्य यह है कि यूएसएसआर के प्रति संदेह यूरोप में अपने महान प्रभाव के कारण अंग्रेजी समाज के उच्चतम क्षेत्रों में बढ़ रहा है। यह सब आपको हमारी कठिनाइयों को दिखाने के लिए है, न कि हमारे कथित कमजोर काम को सही ठहराने के लिए। मुझे आपको सीधे बताना होगाः हम आपके आकलन से सहमत नहीं हैं। पिछले वर्ष में, हमने बीस एजेंटों की भर्ती की, छह स्रोतों के साथ संचार बहाल किया। "कैम्ब्रिज फाइव" के काम से प्राप्त उच्च प्रतिफल। स्टेशन ने लगातार सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी प्रदान की, विशेष रूप से यूरेनियम समस्या पर। "इगोर"। वर्ष का फरवरी 1945। " कुकिन के पत्र की सूचना तुरंत विदेशी खुफिया प्रमुख फिटिन को दी गई। इसे पढ़ने के बाद, उन्होंने एक अलग कागज़ पर लिखा और दस्तावेज़ को निम्न सामग्री के समाधान के लिए पिन कियाः "कॉमरेड। क्लैर। 1। किसी भी विदेशी निवासी और उसके कर्मचारियों की गतिविधियों का मूल्यांकन मामलों के ज्ञान पर आधारित होना चाहिए, न कि भावनाओं पर। इसलिए, मेरी जानकारी के बिना, मैं आपसे यह नहीं करने के लिए कहता हूं। 2. Тов. Кукин, к вашему сведению, сумел не только сохранить достигнутый высокой уровень оперативной работы, но и обеспечить получение важных документальных материалов по всем интересующим Центр вопросам. Из лондонской резидентуры мы постоянно получали и сейчас получаем ценнейшую политическую развединформацию, а также сведения о ведущихся в Великобритании работах по созданию ядерного оружия. Руководимая Кукиным резидентура регулярно информировала наше правительство о послевоенных планах Англии и США в отношении мирного устройства в Европе. 3। यह सब देखते हुए, मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से सरकारी पुरस्कार देने के लिए कुकीन और उनके कर्मचारियों पर एक प्रस्तुति तैयार करने के लिए कहता हूं। पी। फिटिन। वर्ष का फरवरी 1945। " लंदन निवास के क्यूरेटर, निश्चित रूप से, अपने काम की सभी बारीकियों को नहीं जानते थे, क्योंकि उनकी कई सामग्री, विशेष रूप से जो कैम्ब्रिज फाइव से प्राप्त हुई थीं, सीधे केंद्र के सामान्य कर्मचारियों को दरकिनार करते हुए "ऊपर" बताए गए थे। खुफिया प्रमुख के संकल्प ने इस तथ्य में सकारात्मक भूमिका निभाई कि लंदन रेजीडेंसी के क्यूरेटरों ने उनकी छोटी हिरासत को रोक दिया, और इससे उनके काम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। क्यूरेटर, निश्चित रूप से, खुफिया प्रमुख के निर्देशों का अनुपालन करता है, और जल्द ही एक बधाई टेलीग्राम लंदन रेजीडेंसी में गया, जिसमें कहा गया कि कोन्स्टेंटिन कुकिन, अलेक्जेंडर बर्कोवस्की और कई अन्य खुफिया अधिकारियों को सैन्य आदेश दिए गए थे। दो महीने बाद, लंबे समय से प्रतीक्षित विजय आई, जिसमें निवासी और उनके कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। युद्ध के वर्षों के दौरान लंदन निवास के काम को केंद्र द्वारा बहुत सराहना मिली। कोई आश्चर्य नहीं, पहले से ही 1960-ies में, सीआईए के पूर्व निदेशक एलेन डुल्ल्स ने युद्ध के वर्षों के दौरान कैम्ब्रिज फाइव से प्राप्त "दुनिया की किसी भी खुफिया जानकारी का अंतिम सपना" कहा था। यह निश्चित रूप से, खुद कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच कुकीन की काफी योग्यता थी, जिन्होंने 1949 वर्ष तक सफलतापूर्वक लंदन में काम किया था। 30 मई 1947, वह प्रमुख निवासी खुफिया नियुक्त किया गया था और एक ही समय में यूके में USSR के असाधारण और बहुपक्षीय राजदूत। मई 1949 में एक व्यापारिक यात्रा पूरी करने के बाद, कुकीन मास्को लौट आया और USSR विदेश मंत्रालय की सूचना समिति के 1 (एंग्लो-अमेरिकन) विभाग का प्रमुख बन गया, क्योंकि तब विदेशी खुफिया विभाग को बुलाया गया था। इस स्थिति में, उन्होंने नवंबर 1951 तक काम किया, जब सूचना समिति को समाप्त कर दिया गया था और विदेशी सुरक्षा राज्य सुरक्षा एजेंसियों के ढांचे में लौट आई थी। दुर्भाग्य से, कॉन्स्टेंटिन कुकिन ने नई संरचना में लंबे समय तक काम करने का प्रबंधन नहीं किया। एक्सएनयूएमएक्स में, उनके पुराने रोग खराब हो गए, और उन्हें एक्सएनयूएमएक्स की उम्र में स्वास्थ्य कारणों से सेवानिवृत्त होने के लिए मजबूर किया गया। 1952 नवंबर 55, Konstantin मिखाइलोविच कुकीन का निधन। राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल काम के लिए, कर्नल कुकिन को ऑर्डर ऑफ लेनिन, रेड बैनर के दो आदेश, देशभक्ति युद्ध के दो आदेश, द स्टार ऑफ़ द रेड स्टार और कई पदक दिए गए।
कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच कुकीन का जन्म तेईस के एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे पर कुर्स्क शहर में एक श्रमिक वर्ग के परिवार में हुआ था। एक हज़ार नौ सौ सोलह में, उन्होंने कॉलेज से स्नातक किया और बारह वें Kalishsky रेजिमेंट में एक स्वयंसेवक के रूप में दाखिला लिया। प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया, अधिकारी के पद तक पहुंचे। कॉन्स्टेंटिन कुकिन - एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह वर्ष में बेलारूसी पक्षपातपूर्ण टुकड़ी के सेनानी। सेना से विमुद्रीकरण के बाद, कुकीन अपने मूल कुर्स्क में लौट आया। वहां उन्हें अक्टूबर क्रांति की जीत की खबर मिली, जो उन्होंने खुशी से मुलाकात की और तुरंत लाल सेना में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से मिले। इसमें उन्होंने आठ साल सेवा की। एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में, उन्हें CPSU के रैंक में भर्ती किया गया था। ऐसा हुआ कि सोवियत सत्ता के लिए संघर्ष के बहुत भंवर में कुकीन था। ब्रेस्ट-लिटोव्स्क में जर्मनी के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए ट्रॉट्स्की के इनकार के बाद, कैसर सेना ने बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू किया। यूक्रेन और बेलारूस पर कब्जा कर लिया गया, जहां कब्जा करने वालों ने अपने नियम बनाए। फरवरी में, आक्रमणकारियों एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह को नरवा और प्सकोव के पास मुश्किल से रोका गया था। रूस के क्षेत्र में, ब्रायंस्क से एक सौ किमी में जर्मन कब्जे की रेखा आयोजित की गई थी। जर्मन आक्रमणकारियों के खिलाफ खण्डन आयोजित करने के लिए कुकिन को सेनानियों के एक टुकड़ी के साथ बेलारूसी शहर भेजा गया था। चूंकि रेड आर्मी अभी भी कमजोर थी और जर्मन लोगों के साथ नियमित लड़ाई नहीं कर सकती थी, कब्जे वाले क्षेत्रों में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई थी। कुकीन ने सशस्त्र प्रतिरोध इकाइयों और पक्षपातपूर्ण टुकड़ियों के निर्माण में भाग लिया, जिन्होंने आक्रमणकारियों के अलग-अलग डिवीजनों पर हमला किया, ब्रायोस-गोमेल रेलवे में तोड़फोड़ की और दुश्मन के परिवहन को नष्ट कर दिया। नवंबर में, जर्मनी में एक्सएनयूएमएक्स में एक क्रांति हुई, कैसर विल्हेम द्वितीय को त्यागने के लिए मजबूर किया। सोवियत सरकार ने तुरंत शिकारी ब्रेस्ट शांति को रद्द कर दिया। रूस के उदाहरण के बाद, जर्मन सर्वहारा ने बर्लिन, हैम्बर्ग, कोलोन और अन्य जर्मन शहरों में श्रमिकों और सैनिकों की प्रतिनियुक्तियों की परिषदें बनाईं। एक ही सलाह कब्जे वाले बेलारूस के क्षेत्र में पैदा हुई। जर्मन सैनिकों ने रूस के खिलाफ सभी शत्रुता को रोकने का फैसला किया और अपनी मातृभूमि में शीघ्र वापसी की मांग की। दिसंबर एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में, बेलारूस के क्षेत्र से जर्मन सेना की निकासी शुरू हुई। पच्चीस मार्च एक हज़ार नौ सौ उन्नीस, रेचेसा एक्स्ट्राऑर्डिनरी मिलिट्री रेवोल्यूशनरी हेडक्वार्टर, कुचिन को रेचेटा गार्ड कंपनी के कमांडर के रूप में नियुक्त करता है, जिसे वह बनाने के लिए कमीशन भी देता है। बेलारूस में, कुकीन "ग्रीन" के गिरोह से लड़ रहा है। सितंबर एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में, कुकिन को तिरेपन कैवलरी रेजिमेंट का उप राजनीतिक आयुक्त नियुक्त किया गया था। बाद में वह नौ कैवलरी डिवीजन के राजनीतिक विभाग के प्रमुख के सहायक बन गए। वह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ उन्नीस के अंत तक इस स्थिति में था। एक्सएनयूएमएक्स में, कुकीन को क्रीमिया के बखचीसराय क्रांतिकारी समिति का अध्यक्ष और विशेष उद्देश्य इकाइयों की टुकड़ी का कमांडर नियुक्त किया जाता है, और सक्रिय रूप से गैंगस्टर से लड़ रहा है। साहस और वीरता के लिए ऑर्डर ऑफ द रेड बैनर से सम्मानित किया गया। अक्टूबर में, CHN टुकड़ी के कमांडरों की एक बैठक के लिए एक हज़ार नौ सौ बीस को कुर्स्क भेजा गया था। यह जानकर कि उनके हमवतन बच्छिसराय की विद्रोह समिति के अध्यक्ष हैं, कूरियन उन्हें अपने गृहनगर लौटने के लिए आमंत्रित करते हैं, जहां वह डिप्टी कुर्स्क प्रांतीय सैन्य कमिश्रर बन जाते हैं और उसी समय उनका राजनीतिक सचिवालय प्रमुख होता है। एक हज़ार नौ सौ तेईस में, कुकिन को कुर्स्क का सैन्य कमिश्नर नियुक्त किया गया और उन्हें एक शहरी जिले की पार्टी की जिला समिति के ब्यूरो का सदस्य चुना गया। लेकिन यहां तक कि उन्होंने केवल एक्सएनयूएमएक्स तक काम किया, जब उन्हें मास्को प्रांत के ज़ारई जिले का सैन्य कमिसर नियुक्त किया गया। इस स्थिति में, कॉन्स्टेंटिन ने डेढ़ साल काम किया। USSR रिवोल्यूशनरी मिलिट्री काउंसिल कुकीन के आदेश से वर्ष के बीस मार्च एक हज़ार नौ सौ छब्बीस को लाल सेना से हटा दिया गया और खुद को पूरी तरह से पार्टी के काम में लगा दिया। उन्हें मास्को में कसीनी बोगाटियर संयंत्र की पार्टी समिति का सचिव और सोकोनिकी जिला पार्टी समिति के ब्यूरो का सदस्य चुना गया है। उनके जीवन की बड़ी घटना आरसीपी के सोलह पार्टी सम्मेलन और एक हज़ार नौ सौ उनतीस में मास्को सिटी पार्टी समिति के एक सदस्य के लिए एक प्रतिनिधि का चुनाव था। यहां उन्होंने पार्टी बिल्डिंग सेक्टर के प्रमुख का पद संभाला। उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए, वह इंस्टीट्यूट ऑफ रेड प्रोफेसरशिप में अध्ययन करने के लिए जाता है, जहां वह सफलतापूर्वक अंग्रेजी भाषा में महारत हासिल करता है। अध्ययन करते हुए, कॉन्स्टेंटिन ने खुद को सकारात्मक पक्ष में स्थापित किया और एक्सएनयूएमएक्स में स्नातक होने के बाद, उन्हें विदेशी मामलों के कमिश्रिएट को सौंपा गया। पीपुल्स कमिश्रिएट कुकिन के केंद्रीय कार्यालय में एक छोटी इंटर्नशिप के बाद, उन्हें संयुक्त स्टॉक कंपनी आर्कोस में रेजिनोइमपोर्ट विभाग के प्रबंधक के रूप में इंग्लैंड भेजा गया था। कुछ समय बाद, उसी एक हज़ार नौ सौ इकतीस वर्ष में, कुकीन गलती से लंदन में अपने पुराने दोस्त के साथ रेचित्सा में सैन्य सेवा में आए, येवगेनी पेत्रोविच मिकिविक्ज़, एक अवैध खुफिया अधिकारी जो पहले जर्मनी और इटली में काम कर चुके थे। इंग्लैंड में, मिकीविक्ज़ ने एक अवैध निवास का नेतृत्व किया और एक विदेशी नागरिक के नाम पर एक पासपोर्ट था। अचानक हुई बैठक में प्रसन्न होकर, उन्होंने बेलारूस में अपने साथियों, उनके साथियों के साथ संयुक्त संघर्ष को याद किया, वे एक-दूसरे के मामलों में रुचि रखते थे। यह जानने के बाद कि इंग्लैंड में, कुकीन रेजिनिमपोर्ट में काम करता है, मित्सकेविच ने अप्रत्याशित रूप से उसे विदेशी खुफिया काम करने के लिए जाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कोनोस्टिन को व्यक्तिगत रूप से INO के प्रमुख अर्तुर अर्तुजोव की सिफारिश करने के लिए तैयार थे। इस प्रस्ताव ने कुकीन को आश्चर्यचकित रूप से कहा, और उसने उत्तर दिया कि वह अभी भी बुद्धि में काम करने के लिए तैयार नहीं था। हालांकि, कुछ प्रतिबिंब के बाद, वह सहमत हुए और पूछा कि उन्हें ओजीपीयू में काम करने के लिए क्या करना चाहिए। "कुछ भी नहीं," मिकिविक्ज़ ने तुरंत जवाब दिया। - मुख्य बात यह है कि आप किसी को भी मेरे प्रस्ताव के बारे में नहीं बताएंगे, और फिर हम आपको पाएंगे। एक्सएनयूएमएक्स के अंत में, कुकीन को विदेशी खुफिया संवर्ग में नामांकित किया गया था और लंदन में INO कानूनी निवास में शामिल किया गया था। इस तरह की एक त्वरित नियुक्ति विदेशी खुफिया के पुनर्गठन के कारण हुई, जिसे एक्सन्यूएक्स के जनवरी एक्सएनयूएमएक्स से पोलित ब्यूरो के निर्णय द्वारा किया गया था। जर्मनी में नाज़ीवाद के विकास के संबंध में, इस डिक्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोवियत संघ एक नए विश्व युद्ध के खतरे का सामना कर रहा था, जिसे खुफिया कार्यों में वृद्धि की आवश्यकता थी। खुफिया विनियोजन बढ़ाए गए, इसके राज्यों का विस्तार किया गया। कुकीन बुद्धिमत्ता के लिए आदर्श रूप से अनुकूल था, जिसकी पुष्टि उन्होंने अपने आगे के काम से की। एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में, उन्होंने इंग्लैंड में अपना काम पूरा किया और मास्को लौट आए। खुफिया प्रबंधन ने उन्हें अपने सबसे सक्रिय बिंदुओं में से एक हार्बिन रेजिडेंसी में काम करने के लिए भेजने का फैसला किया। हार्बिन में काम के महत्व को इस तथ्य से समझाया गया था कि चीन के उत्तर-पूर्व में व्हाइट गार्ड उत्प्रवास का एक महत्वपूर्ण उपनिवेश था, जो जापानी और ब्रिटिश खुफिया सेवाओं के साथ निकटता से जुड़ा था। विदेशी राज्यों की विशेष सेवाओं ने सक्रिय रूप से एजेंटों को भेजा, उनके द्वारा सोवियत संघ के क्षेत्र में भर्ती किया गया। हार्बिन में, कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच गोस्त्राख के सामान्य प्रतिनिधि की स्थिति में थे। वह स्टेशन के काम में सक्रिय रूप से शामिल था, कई दिलचस्प लिंक शुरू किए। हालांकि, एक्सएनयूएमएक्स में, वह गंभीर रूप से बीमार हो गया और यूएसएसआर में वापस जाने के लिए मजबूर हो गया। कुकिन एक वर्ष तक बीमार रहा, और फिर एक्सएनयूएमएक्स में, उसे तथाकथित यशा समूह में भर्ती कराया गया, जिसकी अध्यक्षता जैकब सेरेब्रांस्की ने की, जो एक सैन्य खुफिया एजेंसी थी। जापानी खुफिया के खिलाफ विशेष संचालन समूह का नेतृत्व करने के लिए कुकिन को नियुक्त किया गया था और ट्रांसबाइकलिया के लिए छोड़ दिया गया था। उनके समूह का कार्य यूएसएसआर टोही के क्षेत्र में भेजे गए जापानी खुफिया सेवाओं और रूसी व्हाइट गार्ड आव्रजन के तोड़फोड़ समूहों के साथ लड़ना था। एक्सएनयूएमएक्स में, बकाया विदेशी खुफिया प्रमुख आर्थर आर्टुज़ोव को गिरफ्तार किया गया और फिर गोली मार दी गई। पीपुल्स कमिसार निकोलाई येझोव के आदेश से, कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच को "लोगों के दुश्मन के साथ संबंध" के बारे में गवाही देने के लिए मास्को वापस बुलाया गया था। हालांकि, एनकेवीडी जांचकर्ता उनसे पूछताछ करने में विफल रहेः कुकीन की दिल की बीमारी लंबे समय तक खराब रही, और उन्हें स्वास्थ्य कारणों से राज्य सुरक्षा निकायों से बर्खास्त कर दिया गया। उस समय चेकिस्ट कुकिन केवल चालीस वर्ष का था। वह शादीशुदा था, उसके दो बच्चे थे, एक अच्छी शिक्षा, कई पेशे, लेकिन उसे कहीं नौकरी नहीं मिली। जैसे ही कार्मिक अधिकारियों को पता चला कि उसे एनकेवीडी से निकाल दिया गया था "लोगों के दुश्मनों से संपर्क करने के लिए," किसी भी संस्थान के दरवाजे उसके सामने पटक दिए। केवल अब्राम स्लुटस्की के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद, जिन्होंने आर्टुजोव को विदेशी खुफिया विभाग के प्रमुख के रूप में प्रतिस्थापित किया और जो कि पार्टी के सोकोनिकी जिला समिति में संयुक्त कार्य के लिए कुकिन को जानते थे, कोनस्टेंटिन मिखाइलोविच अपने रैंकों में बहाल थे। ताकि उत्साही जांचकर्ताओं को फिर से एक स्काउट में दिलचस्पी न हो, स्लटस्की ने तुरंत उसे यूएसए के लिए एक विदेशी मिशन पर जारी करने के निर्देश दिए, जहां कोन्स्टेंटिन मिखाइलोविच नवंबर सात में एक हज़ार नौ सौ सैंतीस के बाद वाशिंगटन में यूएसएसआर दूतावास के दूसरे सचिव के पद के तहत छोड़ दिया था। मई एक हज़ार नौ सौ इकतालीस तक, विदेश में USSR के राजनयिक संस्थानों को क्रमशः उनके सहायक उपकरणों की अध्यक्षता वाले, plenipotentiaries कहा जाता था। मई में, दूतावासों को एक्सएनयूएमएक्स कहा जाने लगा, जैसा कि दुनिया भर में प्रथागत है, जैसे राजदूतों के नेतृत्व में दूतावास। कवर के लिए इस स्थिति में, उन्हें व्यक्तिगत मामलों के लिए कमिसार द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्याचेस्लाव मिखाइलोविच मोलोतोव द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिसके साथ भविष्य में उन्हें आधिकारिक व्यवसाय पर एक से अधिक बार संवाद करना होगा और यहां तक कि एक्सएनयूएमएक्स में अमेरिका की यात्राओं पर भी उनके साथ जाना होगा। इस बीच, आंतरिक मामलों के कमांडर येझोव को पद से हटा दिया गया और उन्हें मार दिया गया। उन्हें इस पद पर लॉरेंस बेरिया द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिन्होंने बुद्धि को पुनर्गठित करना शुरू कर दिया था। उनके आदेश से, कुकीन को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां हॉक होवाकिमियन खुफिया निवासी था। न्यूयॉर्क में पहुंचते ही, कोंस्टेंटिन मिखाइलोविच जल्दी से स्थिति से परिचित हो गए और छह महीने के भीतर वह राजनीतिक जानकारी के दो स्रोतों को काम में लाने में सक्षम हो गए, जिससे हमारे देश के प्रति अमेरिकी शासक हलकों की नीतियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी आना शुरू हो गई। निवासी होवाकिमान ने इगोर को एक और सात मोथबॉल एजेंटों से संपर्क करने के लिए भेजा, जिनके साथ निवासी पीटर गुत्ज़ायत ने पहले काम किया था । केंद्र ने इन एजेंटों में से आधे को "संदिग्ध स्रोत" के लिए जिम्मेदार ठहराया और उनके साथ काम करना बंद करने का सुझाव दिया। हालांकि, कुकिन ने उनसे मिलना जारी रखा और राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर उनसे बहुमूल्य जानकारी प्राप्त की। इन स्रोतों के साथ काम महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के दौरान जारी रहा और बहुत उत्पादक था। निवासी होवाकीमान ने काम में इगोर की गतिविधि की बहुत सराहना की और सुझाव दिया कि केंद्र उन्हें उप निवासी के रूप में नियुक्त करेगा। हालांकि, केंद्र में ही अनुभवी कर्मियों की कमी के कारण, खुफिया नेतृत्व ने कुकीन को मास्को वापस लेने और उसे एक नेतृत्व की स्थिति में नियुक्त करने का फैसला किया। इसलिए कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच एक्सएनयूएमएक्स-वें विदेशी खुफिया विभाग के उप प्रमुख बने। लेकिन स्काउट के केंद्र में एक और मुसीबत के लिए इंतजार कर रहा था। एक निश्चित आप्रवासी ने उस पर "काउंटर-क्रांतिकारी संगठन" से संबंधित होने का आरोप लगाया, जिसे कथित रूप से लंदन में आर्कोस संयुक्त स्टॉक कंपनी के तहत बनाया गया था। हालांकि, परीक्षण में उत्प्रवासी के बयानों की बेरुखी का पता चला, और कुकिन को अकेला छोड़ दिया गया। फिर भी, खुफिया प्रमुख ने कहा कि कैसे स्काउट को झटका से बाहर निकालना है। जल्द ही युद्ध शुरू हो गया। जुलाई में सोलह के पत्र में निवासी गोर्सकी के बाद से उसे लंदन निवास में भेजने का फैसला किया गया था, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में XNUMX ने अतिरिक्त अनुभवी कार्यकर्ताओं को भेजने के लिए कहा। सोवियत दूतावास में एक स्वागत समारोह में। यूएसएसआर राजदूत कोंस्टेंटिन कुकिन और फील्ड मार्शल बर्नार्ड मोंटगोमरी, लंदन, एक्सएनयूएमएक्स वर्ष। और फिर से मामले में हस्तक्षेप किया। बीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ इकतालीस, USSR के सुप्रीम सोवियत के प्रेसिडियम के फरमान से, पीपुल्स कमिसरीएट ऑफ इंटरनल अफेयर्स और पीपुल्स कमिश्रिएट ऑफ स्टेट सिक्योरिटी यूएसएसआर के आंतरिक मामलों के सिंगल पीपुल्स कमिश्रिएट में एकजुट हो गए, लावेरी का नेतृत्व किया। नए लोगों के कमिसार ने "ट्रॉट्सकी संगठन" की गतिविधियों में उनकी भागीदारी का सत्यापन पूरा होने तक कुकीन की लंदन की व्यापार यात्रा पर रिपोर्ट को स्थगित कर दिया। तब एनकेवीडी की बुद्धि के प्रमुख पावेल मिखाइलोविच फिटिन ने जर्मन के जासूसों और तोड़फोड़ करने वालों की पहचान करने के लिए फ्रंटलाइन और फ्रंट-लाइन क्षेत्रों में कमांड के काम को अंजाम देने वाले लोगों के कमिश्नरों के कर्मचारियों के एक विशेष समूह को तत्काल कुकीन को छोड़ दिया। कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच इस काम के साथ सफलतापूर्वक मुकाबला कर रहा था, और जल्द ही उसके खिलाफ सभी बेतुके आरोप पूरी तरह से गायब हो गए और वह केंद्रीय खुफिया तंत्र में लौट आया, जहां युद्ध के वर्षों के दौरान ऑपरेटिव सक्षम कर्मी सोने में अपने वजन के लायक थे। जुलाई एक्सएनयूएमएक्स में कुकीन को विदेशी काम के लिए तैयार करने के लिए, वह कमिसार के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर गए। खुफिया प्रबंधन ने अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में केवल लंदन रेजिडेंसी में काम करने के लिए कुकिन के निर्देश पर रिपोर्ट पर वापस लौटा, जब NKGB को फिर से स्थापित किया गया था। पीपुल्स कमिसार Vsevolod मर्कुलोव ने रिपोर्ट के साथ खुद को परिचित किया, सुझाव दिया कि फिटिन को गोर्की के बजाय कुकीन को एक निवासी नियुक्त करना चाहिए। फिटिन ने बुरा नहीं माना। कोंस्टेंटिन मिखाइलोविच दूतावास के सलाहकार के रूप में लंदन गए। उनके जाने की पूर्व संध्या पर, वेसेवोलॉड निकोलायेविच मर्कुलोव, पीपुल्स कमिसर ऑफ़ स्टेट सिक्योरिटी द्वारा प्राप्त किया गया, जिन्होंने इंग्लैंड में निवास के कार्यों को संक्षेप में बतायाः पीपुल्स कमिसार कुकिन के साथ बातचीत के बाद, वह उसी दिन लंदन के लिए रवाना हो गए। वह अपने परिवार के साथ रेल से मुरमांस्क गए और वहां से समुद्र के रास्ते इंग्लैंड गए। वह मई एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस के मध्य में ब्रिटिश राजधानी में पहुंचे, और तुरंत काम में शामिल हो गए। उन्होंने "कैम्ब्रिज फाइव" के सदस्यों के साथ संपर्क किया। मॉस्को मुख्य रूप से इस सवाल में दिलचस्पी रखता था कि चर्चिल के वादे अगस्त - सितंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में दूसरा मोर्चा खोलने के लिए कितने गंभीर थे। पंद्रह мая Кукин направляет в Центр добытые агентурным путем в Министерстве авиации сведения о военно-стратегическом плане Великобритании на एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस год. В нем не было ни слова о высадке англо-американских войск в Европе. Из документа следовало, что англичане намерены изгнать немецко-итальянские войска из Туниса, оккупировать Сицилию и Сардинию, а основные сухопутные операции против нацистской Германии перенести на एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस год. लंदन रेजिडेंसी के प्रयासों के लिए धन्यवाद, कुकीन के साथ-साथ अन्य विदेशी खुफिया एजेंसियों के नेतृत्व में, स्टालिन को सहयोगियों की योजनाओं के बारे में पता था। नवंबर में बिग थ्री तीस के तेहरान सम्मेलन में, उन्होंने मई एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में दूसरा मोर्चा खोलने के लिए इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका से लिखित प्रतिबद्धता हासिल की। वास्तव में, ऑपरेशन ओवरलॉर्ड ने नॉरमैंडी में मित्र राष्ट्रों की लैंडिंग केवल छः पर एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस पर शुरू की, जब यह पूरी दुनिया के लिए पहले से ही स्पष्ट था कि यूएसएसआर नाजी जानवर की पीठ को तोड़ने में सक्षम था। तब मित्र राष्ट्रों ने जर्मन पाई को विभाजित करने के लिए जल्दबाजी की। कोंस्टेंटिन कुकिन और उनके नेतृत्व वाले स्काउट्स ने लंदन में फ्रंट-लाइन वालों के करीब की स्थितियों में काम किया। ब्रिटिश राजधानी ने लगभग रोज जर्मन लूफ़्टवाफे़ पर बमबारी की। ऐसा हुआ कि एक ऑपरेटर उस क्षेत्र से एक बैठक से वापस नहीं लौट सकता है जिसने छापा मारा था। तब निवासी खुद एक कार के पहिए के पीछे बैठ गया, अपने साथी के बचाव के लिए दौड़ा और उसे दूतावास में ले गया। कुकिन ने एजेंटों के साथ काम करने के लिए बहुत प्रयास और ध्यान समर्पित किया। एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस के अंत में, एन्क्रिप्शन मास्को में उनके नाम से आया था, जिसने उन्हें आठ नए गुर्गों के अपने निवास की दिशा की जानकारी दी थी। उसी समय, निवासी को केंद्र को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था कि टीम का सामना करने वाले कार्यों को करने में उनका उपयोग कैसे करें। कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच उस समय गंभीर रूप से बीमार थे और समय पर केंद्र को जवाब नहीं दे सकते थे। एक स्काउट को पेप्टिक अल्सर की बीमारी थी जिसने उसे बिस्तर पर जकड़ लिया था। उन्होंने घर में काम किया, बिस्तर पर लेटे रहे। तीव्र दर्द के हमलों से, वह बैठ भी नहीं सकता था। केवल वर्ष के एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस की शुरुआत में, अपनी बीमारी के बारे में एक शब्द का उल्लेख किए बिना, निवासी ने बिंदु की गतिविधियों में प्रत्येक ऑपरेटिव का उपयोग करने की योजना पर रिपोर्ट की और केंद्र से कहा कि वह डिप्टी कमिशर फॉर फॉरेन अफेयर्स आंद्रेई विन्हिन्स्की से बात करे और उसे राजनयिक लाइन के माध्यम से अत्यधिक भार से राहत देने के बारे में बताए। हालाँकि, जल्द ही केंद्र से इन प्रस्तावों पर अप्रत्याशित प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। केंद्र में क्यूरेटर कुकिना ने उन्हें इस बारे में सूचित करने के लिए कहा कि कैसे वे खुफिया के हितों में दूतावास के माध्यम से विभिन्न समितियों में अपनी भागीदारी का उपयोग करते हैं। निवासी को अपने कार्यालय में आने वाले प्रत्येक नए कर्मचारी के काम पर विस्तृत रिपोर्ट भेजने के लिए भी कहा गया था। बिस्तर पर रहने वाले निवासी ने केंद्र को पत्र लिखाः - "केंद्र की योजनाओं के अनुसार एक नए तरीके से कार्य हमारे द्वारा विकसित किया गया है। यह अधिक तेजी से युद्ध से बाधित हैः हम जर्मन विमानों से गोले और मिसाइलों के गोले के नीचे काम करते हैं। लगातार बमबारी के कारण, एजेंटों के साथ संवाद करना मुश्किल है। उनमें से कुछ ने इस वजह से लंदन छोड़ दिया। जो लोग इसमें बने रहे, अनिच्छा से और अपने जीवन के लिए आशंका के साथ मतदान के लिए जाते हैं। यदि वे आते हैं, तो बातचीत हमेशा नहीं होती हैः लोग V-एक के उड़ान भरने के शोर को अधिक सुनते हैं। संक्षेप में भर्ती के बारे में। यूरोप में अपने सफल मुक्ति मिशन के संबंध में सोवियत संघ के लिए आम अंग्रेजों की सहानुभूति में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, राज्य में परिचालन संपर्क और हमारे लिए सामान्य राजनीतिक वातावरण का पता लगाना अधिक कठिन हो गया। तथ्य यह है कि यूएसएसआर के प्रति संदेह यूरोप में अपने महान प्रभाव के कारण अंग्रेजी समाज के उच्चतम क्षेत्रों में बढ़ रहा है। यह सब आपको हमारी कठिनाइयों को दिखाने के लिए है, न कि हमारे कथित कमजोर काम को सही ठहराने के लिए। मुझे आपको सीधे बताना होगाः हम आपके आकलन से सहमत नहीं हैं। पिछले वर्ष में, हमने बीस एजेंटों की भर्ती की, छह स्रोतों के साथ संचार बहाल किया। "कैम्ब्रिज फाइव" के काम से प्राप्त उच्च प्रतिफल। स्टेशन ने लगातार सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी प्रदान की, विशेष रूप से यूरेनियम समस्या पर। "इगोर"। वर्ष का फरवरी एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस। " कुकिन के पत्र की सूचना तुरंत विदेशी खुफिया प्रमुख फिटिन को दी गई। इसे पढ़ने के बाद, उन्होंने एक अलग कागज़ पर लिखा और दस्तावेज़ को निम्न सामग्री के समाधान के लिए पिन कियाः "कॉमरेड। क्लैर। एक। किसी भी विदेशी निवासी और उसके कर्मचारियों की गतिविधियों का मूल्यांकन मामलों के ज्ञान पर आधारित होना चाहिए, न कि भावनाओं पर। इसलिए, मेरी जानकारी के बिना, मैं आपसे यह नहीं करने के लिए कहता हूं। दो. Тов. Кукин, к вашему сведению, сумел не только сохранить достигнутый высокой уровень оперативной работы, но и обеспечить получение важных документальных материалов по всем интересующим Центр вопросам. Из лондонской резидентуры мы постоянно получали и сейчас получаем ценнейшую политическую развединформацию, а также сведения о ведущихся в Великобритании работах по созданию ядерного оружия. Руководимая Кукиным резидентура регулярно информировала наше правительство о послевоенных планах Англии и США в отношении мирного устройства в Европе. तीन। यह सब देखते हुए, मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से सरकारी पुरस्कार देने के लिए कुकीन और उनके कर्मचारियों पर एक प्रस्तुति तैयार करने के लिए कहता हूं। पी। फिटिन। वर्ष का फरवरी एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस। " लंदन निवास के क्यूरेटर, निश्चित रूप से, अपने काम की सभी बारीकियों को नहीं जानते थे, क्योंकि उनकी कई सामग्री, विशेष रूप से जो कैम्ब्रिज फाइव से प्राप्त हुई थीं, सीधे केंद्र के सामान्य कर्मचारियों को दरकिनार करते हुए "ऊपर" बताए गए थे। खुफिया प्रमुख के संकल्प ने इस तथ्य में सकारात्मक भूमिका निभाई कि लंदन रेजीडेंसी के क्यूरेटरों ने उनकी छोटी हिरासत को रोक दिया, और इससे उनके काम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। क्यूरेटर, निश्चित रूप से, खुफिया प्रमुख के निर्देशों का अनुपालन करता है, और जल्द ही एक बधाई टेलीग्राम लंदन रेजीडेंसी में गया, जिसमें कहा गया कि कोन्स्टेंटिन कुकिन, अलेक्जेंडर बर्कोवस्की और कई अन्य खुफिया अधिकारियों को सैन्य आदेश दिए गए थे। दो महीने बाद, लंबे समय से प्रतीक्षित विजय आई, जिसमें निवासी और उनके कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। युद्ध के वर्षों के दौरान लंदन निवास के काम को केंद्र द्वारा बहुत सराहना मिली। कोई आश्चर्य नहीं, पहले से ही एक हज़ार नौ सौ साठ-ies में, सीआईए के पूर्व निदेशक एलेन डुल्ल्स ने युद्ध के वर्षों के दौरान कैम्ब्रिज फाइव से प्राप्त "दुनिया की किसी भी खुफिया जानकारी का अंतिम सपना" कहा था। यह निश्चित रूप से, खुद कॉन्स्टेंटिन मिखाइलोविच कुकीन की काफी योग्यता थी, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ उनचास वर्ष तक सफलतापूर्वक लंदन में काम किया था। तीस मई एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस, वह प्रमुख निवासी खुफिया नियुक्त किया गया था और एक ही समय में यूके में USSR के असाधारण और बहुपक्षीय राजदूत। मई एक हज़ार नौ सौ उनचास में एक व्यापारिक यात्रा पूरी करने के बाद, कुकीन मास्को लौट आया और USSR विदेश मंत्रालय की सूचना समिति के एक विभाग का प्रमुख बन गया, क्योंकि तब विदेशी खुफिया विभाग को बुलाया गया था। इस स्थिति में, उन्होंने नवंबर एक हज़ार नौ सौ इक्यावन तक काम किया, जब सूचना समिति को समाप्त कर दिया गया था और विदेशी सुरक्षा राज्य सुरक्षा एजेंसियों के ढांचे में लौट आई थी। दुर्भाग्य से, कॉन्स्टेंटिन कुकिन ने नई संरचना में लंबे समय तक काम करने का प्रबंधन नहीं किया। एक्सएनयूएमएक्स में, उनके पुराने रोग खराब हो गए, और उन्हें एक्सएनयूएमएक्स की उम्र में स्वास्थ्य कारणों से सेवानिवृत्त होने के लिए मजबूर किया गया। एक हज़ार नौ सौ बावन नवंबर पचपन, Konstantin मिखाइलोविच कुकीन का निधन। राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल काम के लिए, कर्नल कुकिन को ऑर्डर ऑफ लेनिन, रेड बैनर के दो आदेश, देशभक्ति युद्ध के दो आदेश, द स्टार ऑफ़ द रेड स्टार और कई पदक दिए गए।
इंदौर (मध्य प्रदेश) : साढ़े चार महीने के बच्चे को रविवार को जन्मजात हृदय रोग का इलाज कराने के लिए शहर के हवाईअड्डे से विमान से दिल्ली लाया गया. दोपहर ढाई बजे चोइथराम अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जहां से बच्चे को दिल्ली के मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। देवास जिले के रहने वाले गुरिश जोगचंद्र आर्टरी सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) से पीड़ित थे, जिसे आमतौर पर दिल में छेद के रूप में जाना जाता है। बच्चे के पिता लांस नायक दिनेश ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया था और उन्हें अपने बेटे की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। गुरिश की स्थिति के बारे में जानने के बाद, कलेक्टर इलैयाराजा टी ने परिवार की मदद की और मरीज को दिल्ली ले जाने के लिए एक एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। "गुरीश जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। उन्हें इंदौर, देवास और महू के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हमें बताया कि उनका इलाज दिल्ली में हो सकता है। हमने कलेक्टर इलैयाराजा टी से अपील की, जिन्होंने तुरंत अपना समर्थन दिया, जबकि डिवाइन फाउंडेशन, एनजीओ समाधान, अदभुत कम्युनिटी, गोल्ड कॉइन सेवा संस्थान और अन्य सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मेरे बेटे का इलाज कराने में मदद की, "दिनेश ने कहा। उन्होंने कहा कि डॉ रूचि श्रोती, चोइथराम अस्पताल के डॉ नॉर्मन शर्मा और डॉ अंशुल जायसवाल सहित कई डॉक्टरों ने भी मदद की और बच्चे के इलाज को सुनिश्चित किया। "बच्चे को सैन्य अस्पताल, महू से रेफर किया गया था। उन्हें 20 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था और हमने अपना सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया। चोइथराम अस्पताल के उप निदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ अमित भट्ट ने कहा, उनका इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अंकुर जायसवाल के अधीन किया जा रहा था और उन्हें एयर एंबुलेंस के माध्यम से दिल्ली भेजा गया था। बच्चा दिल्ली पहुंच गया है और उसे मिलिट्री अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। सोमवार को उनकी सर्जरी होने की संभावना है।
इंदौर : साढ़े चार महीने के बच्चे को रविवार को जन्मजात हृदय रोग का इलाज कराने के लिए शहर के हवाईअड्डे से विमान से दिल्ली लाया गया. दोपहर ढाई बजे चोइथराम अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जहां से बच्चे को दिल्ली के मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। देवास जिले के रहने वाले गुरिश जोगचंद्र आर्टरी सेप्टल डिफेक्ट से पीड़ित थे, जिसे आमतौर पर दिल में छेद के रूप में जाना जाता है। बच्चे के पिता लांस नायक दिनेश ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया था और उन्हें अपने बेटे की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। गुरिश की स्थिति के बारे में जानने के बाद, कलेक्टर इलैयाराजा टी ने परिवार की मदद की और मरीज को दिल्ली ले जाने के लिए एक एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। "गुरीश जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। उन्हें इंदौर, देवास और महू के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हमें बताया कि उनका इलाज दिल्ली में हो सकता है। हमने कलेक्टर इलैयाराजा टी से अपील की, जिन्होंने तुरंत अपना समर्थन दिया, जबकि डिवाइन फाउंडेशन, एनजीओ समाधान, अदभुत कम्युनिटी, गोल्ड कॉइन सेवा संस्थान और अन्य सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मेरे बेटे का इलाज कराने में मदद की, "दिनेश ने कहा। उन्होंने कहा कि डॉ रूचि श्रोती, चोइथराम अस्पताल के डॉ नॉर्मन शर्मा और डॉ अंशुल जायसवाल सहित कई डॉक्टरों ने भी मदद की और बच्चे के इलाज को सुनिश्चित किया। "बच्चे को सैन्य अस्पताल, महू से रेफर किया गया था। उन्हें बीस दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था और हमने अपना सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया। चोइथराम अस्पताल के उप निदेशक डॉ अमित भट्ट ने कहा, उनका इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अंकुर जायसवाल के अधीन किया जा रहा था और उन्हें एयर एंबुलेंस के माध्यम से दिल्ली भेजा गया था। बच्चा दिल्ली पहुंच गया है और उसे मिलिट्री अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। सोमवार को उनकी सर्जरी होने की संभावना है।
२४४ प्रकाश की ओर है, चिन्तन और मनन जारी है, तब तो जीवन में चमक आ जाती हैं, नही तो भटकना शुरू हो जाता है मनुष्य । मनुष्य ईश्वर को तो देखने को चल पड़ा है, पर अपनेकभी कभी उसने देखा है ? तुम इस संसार मे न मालूम कहाँ से आए और कैसे आए ? पर जब आ गए हो, तो अच तुमने अपने आपको परखा है या नहीं ? ईश्वर का दर्शन, ईश्वर वनकर ही किया जा सकता है। इससे कोई निचली भूमिका नही है ईश्वर-दर्शन के लिए । ईश्वर का साक्षात्कार तत्स्वरूप बनकर ही किया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि जिसने अपने जीवन में ईश्वर का दर्शन कर लिया है, वही ठीक रूप में ईश्वर का दर्शन कर सकता है। पर, अपना तो पता ही नहीं और ईश्वर की तलाश करने चले, तो फिर क्या प्राप्त हो सकता है ? कुछ भी नहीं । यह तो वही बात हो गई कि एक यात्री जगल मे दौडा चला जा रहा है, पसीने से तर-बतर हो रहा है। आप उससे पूछेको भाई, तुम कहा जा रहे हो ? तुम्हे कहा जाना है ? वह यह कहे कि मुझे तो मालूम नही, कहाँ जाना है ? तो मै समझता कि आप लोगो के मन मे हँसी आए बिना न रहेगी, फिर भले ही आप उस हॅसी को उस आदमी के सामने दबाकर रह जाएँ शिष्टाचार के नाते । भाई, कहाँ से आ रहे हो ? और वह नवान दे कि मुझे तो मालूम नहीं कि मैं कहाँ से आ रहा है, तो यह तो बडी विचित्र वात है ।पूछे होते कौन हो ? वह कई मुझे तो यह भी पता नही कि में फोन जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि २९५ हूँ ? अगर आप यह पूछे तुम दौड क्या रहे हो ? और वह इसके लिए भी कहदे मुझे तो मातृम नहीं, मैं क्यो दौड रहा हूँ ? तो इससे तो आप यही ननभोगे कि इस और दिमाग ठीक नहीं है। इसका तो तरह से इलाज कराना पड़ेगार को जीवन के सम्बन्ध म ।
दो सौ चौंतालीस प्रकाश की ओर है, चिन्तन और मनन जारी है, तब तो जीवन में चमक आ जाती हैं, नही तो भटकना शुरू हो जाता है मनुष्य । मनुष्य ईश्वर को तो देखने को चल पड़ा है, पर अपनेकभी कभी उसने देखा है ? तुम इस संसार मे न मालूम कहाँ से आए और कैसे आए ? पर जब आ गए हो, तो अच तुमने अपने आपको परखा है या नहीं ? ईश्वर का दर्शन, ईश्वर वनकर ही किया जा सकता है। इससे कोई निचली भूमिका नही है ईश्वर-दर्शन के लिए । ईश्वर का साक्षात्कार तत्स्वरूप बनकर ही किया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि जिसने अपने जीवन में ईश्वर का दर्शन कर लिया है, वही ठीक रूप में ईश्वर का दर्शन कर सकता है। पर, अपना तो पता ही नहीं और ईश्वर की तलाश करने चले, तो फिर क्या प्राप्त हो सकता है ? कुछ भी नहीं । यह तो वही बात हो गई कि एक यात्री जगल मे दौडा चला जा रहा है, पसीने से तर-बतर हो रहा है। आप उससे पूछेको भाई, तुम कहा जा रहे हो ? तुम्हे कहा जाना है ? वह यह कहे कि मुझे तो मालूम नही, कहाँ जाना है ? तो मै समझता कि आप लोगो के मन मे हँसी आए बिना न रहेगी, फिर भले ही आप उस हॅसी को उस आदमी के सामने दबाकर रह जाएँ शिष्टाचार के नाते । भाई, कहाँ से आ रहे हो ? और वह नवान दे कि मुझे तो मालूम नहीं कि मैं कहाँ से आ रहा है, तो यह तो बडी विचित्र वात है ।पूछे होते कौन हो ? वह कई मुझे तो यह भी पता नही कि में फोन जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि दो सौ पचानवे हूँ ? अगर आप यह पूछे तुम दौड क्या रहे हो ? और वह इसके लिए भी कहदे मुझे तो मातृम नहीं, मैं क्यो दौड रहा हूँ ? तो इससे तो आप यही ननभोगे कि इस और दिमाग ठीक नहीं है। इसका तो तरह से इलाज कराना पड़ेगार को जीवन के सम्बन्ध म ।
नयी दिल्ली (एजेंसी) : राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने शनिवार को कहा कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद दवा कंपनियों ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज में काम आने वाले रेमडेसिविर इन्जेक्शन के दाम कम कर दिये हैं। दवा कंपनी केडिला हेल्थकेयर, डा. रेड्डीज लैबोरेटरीज और सिप्ला ने रेमडेसिविर इंजेक्शन (100 मिग्रा की शीशी) के अपने अपने ब्रांड के दाम कम किये हैं। कैडिला ने रेमडैक (रेमडेसिवीर 100 मिग्रा) इंजेक्शन का दाम 2,800 से 899 रुपये कर दिया है। सिंजीन इंटरनेशनल ने रेमविन दवा का दाम 3950 रुपये से घटा कर 2,450 रुपये प्रति यूनिट कर दिया है।
नयी दिल्ली : राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने शनिवार को कहा कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद दवा कंपनियों ने कोविड-उन्नीस के मरीजों के इलाज में काम आने वाले रेमडेसिविर इन्जेक्शन के दाम कम कर दिये हैं। दवा कंपनी केडिला हेल्थकेयर, डा. रेड्डीज लैबोरेटरीज और सिप्ला ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के अपने अपने ब्रांड के दाम कम किये हैं। कैडिला ने रेमडैक इंजेक्शन का दाम दो,आठ सौ से आठ सौ निन्यानवे रुपयापये कर दिया है। सिंजीन इंटरनेशनल ने रेमविन दवा का दाम तीन हज़ार नौ सौ पचास रुपयापये से घटा कर दो,चार सौ पचास रुपयापये प्रति यूनिट कर दिया है।
चौक क्षेत्र के गड़वासी टोला में एक विवाहिता की संदिग्ध हाल में मौत हो गई। ससुरालीजन पुलिस व विवाहिता के परिजनों को सूचना दिए बगैर अन्तिम संस्कार करने मणिकर्णिका घाट पर पहुंच गए। इस दौरान किसी की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को चिता से हटवाया और कब्जे में ले लिया। देर रात बनारस पहुंचे विवाहिता के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया और पति समेत उसके पूरे परिवार के खिलाफ तहरीर दी। गड़वासी टोला निवासी प्रतीक की शादी पटना निवासी पायल से तीन साल पहले शादी हुई थी। दोनों को तीन साल की बच्ची भी है। सोमवार को पायल की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। प्रतीक व उसके परिजन किसी को सूचना दिये बगैर चोरी चुपके शव का अन्तिम संस्कार करने जा रहे थे कि पुलिस को सूचना मिल गई। पायल के परिजनों का कहना था कि दहेज की मांग को लेकर पायल को प्रताड़ित किया जाता था। प्रतीक और उसके परिवार वाले पायल से मारपीट भी करते थे। परिजनों का आरोप था कि पायल की हत्या की गई है। उन्होंने जांच की मांग की। देर रात तक सीओ दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी के निर्देश पर फॉरेंसिक टीम ने फिंगर प्रिंट व साक्ष्य इकट्ठा किया। इस संबंध में चौक इंस्पेक्टर राहुल शुक्ला का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी।
चौक क्षेत्र के गड़वासी टोला में एक विवाहिता की संदिग्ध हाल में मौत हो गई। ससुरालीजन पुलिस व विवाहिता के परिजनों को सूचना दिए बगैर अन्तिम संस्कार करने मणिकर्णिका घाट पर पहुंच गए। इस दौरान किसी की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को चिता से हटवाया और कब्जे में ले लिया। देर रात बनारस पहुंचे विवाहिता के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया और पति समेत उसके पूरे परिवार के खिलाफ तहरीर दी। गड़वासी टोला निवासी प्रतीक की शादी पटना निवासी पायल से तीन साल पहले शादी हुई थी। दोनों को तीन साल की बच्ची भी है। सोमवार को पायल की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। प्रतीक व उसके परिजन किसी को सूचना दिये बगैर चोरी चुपके शव का अन्तिम संस्कार करने जा रहे थे कि पुलिस को सूचना मिल गई। पायल के परिजनों का कहना था कि दहेज की मांग को लेकर पायल को प्रताड़ित किया जाता था। प्रतीक और उसके परिवार वाले पायल से मारपीट भी करते थे। परिजनों का आरोप था कि पायल की हत्या की गई है। उन्होंने जांच की मांग की। देर रात तक सीओ दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी के निर्देश पर फॉरेंसिक टीम ने फिंगर प्रिंट व साक्ष्य इकट्ठा किया। इस संबंध में चौक इंस्पेक्टर राहुल शुक्ला का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी।
6 पुरुषों और महिलाओं के गिरोह ने 26 साल के युवक का सिर ईंट से फोड़ डाला. (फोटो-स्क्रीन ग्रैब) बेंगलुरुः बेंगलुरु में शनिवार को तीन पुरुषों और तीन महिलाओं के एक गैंग ने एक 30 वर्षीय युवक की नृशंस हत्या कर दी. हत्या का एक खौफनाक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें युवक को ईंट से मारता हुआ एक गैंग दिखाई दे रहा है. कथित तौर पर पीड़ित को लगभग 20 बार एक बड़ी ईंट से पीटा गया. यह घटना केपी अग्रहारा इलाके की बताई जा रही है. सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि, युवक की पहले गैंग के साथ कुछ बहस हुई इसके बाद आरोपियों ने उसे घेरना शुरू किया. उसमें मौजूद एक महिला ने युवक को पत्थर उठाकर मारा, जबकि अन्य ने उसे जमीन पर गिरा दिया और फिर उसे दोबारा उठाकर मारा. धीरे-धीरे पूरा गैंग उसे मारने लगा और उसके सिर को ईंट से फोड़ डाला ताकि पुलिस उसकी पहचान न कर सके. हालांकि पीड़ित की चीख सुनकर स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचित किया. इस घटना के बाद पश्चिम बेंगलुरु के डीसीपी लक्ष्मण बी निम्बारगी ने कहा कि हेमंत मेडिकल के पास केपी अग्रहारा के 5वें क्रॉस पर देर रात एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. इसमें तीन पुरुष और तीन महिलाओं सहित छह लोग शामिल थे. मृतक की अभी पहचान नहीं हो पाई है. बस इतना पता चला है कि वह बादामी इलाके का रहने वाला है. वहीं शव को विक्टोरिया अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. .
छः पुरुषों और महिलाओं के गिरोह ने छब्बीस साल के युवक का सिर ईंट से फोड़ डाला. बेंगलुरुः बेंगलुरु में शनिवार को तीन पुरुषों और तीन महिलाओं के एक गैंग ने एक तीस वर्षीय युवक की नृशंस हत्या कर दी. हत्या का एक खौफनाक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें युवक को ईंट से मारता हुआ एक गैंग दिखाई दे रहा है. कथित तौर पर पीड़ित को लगभग बीस बार एक बड़ी ईंट से पीटा गया. यह घटना केपी अग्रहारा इलाके की बताई जा रही है. सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि, युवक की पहले गैंग के साथ कुछ बहस हुई इसके बाद आरोपियों ने उसे घेरना शुरू किया. उसमें मौजूद एक महिला ने युवक को पत्थर उठाकर मारा, जबकि अन्य ने उसे जमीन पर गिरा दिया और फिर उसे दोबारा उठाकर मारा. धीरे-धीरे पूरा गैंग उसे मारने लगा और उसके सिर को ईंट से फोड़ डाला ताकि पुलिस उसकी पहचान न कर सके. हालांकि पीड़ित की चीख सुनकर स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचित किया. इस घटना के बाद पश्चिम बेंगलुरु के डीसीपी लक्ष्मण बी निम्बारगी ने कहा कि हेमंत मेडिकल के पास केपी अग्रहारा के पाँचवें क्रॉस पर देर रात एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. इसमें तीन पुरुष और तीन महिलाओं सहित छह लोग शामिल थे. मृतक की अभी पहचान नहीं हो पाई है. बस इतना पता चला है कि वह बादामी इलाके का रहने वाला है. वहीं शव को विक्टोरिया अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. .
भारतीय रिज़र्व बैंक (रिज़र्व बैंक) ने (i) बैंकों में साइबर सुरक्षा ढांचा और (ii) वाणिज्यिक बैंकों और चुनिंदा एफ़आई द्वारा धोखाधड़ी के वर्गीकरण और रिपोर्टिंग पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने के लिए कॉर्पोरेशन बैंक (बैंक) पर 31 जुलाई 2019 के आदेश के द्वारा ₹ 1 करोड़ का मौद्रिक दंड लगाया। यह दंड बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (अधिनियम) की धारा 46ए (4) (i) और 51 (1) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के तहत रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल करना नहीं है। रद्द किए गए डेबिट कार्ड का उपयोग करके धोखाधड़ी से लेनदेन के बारे में बैंक द्वारा प्रस्तुत साइबर सुरक्षा की घटना की रिपोर्ट से पता चला कि बैंकों में साइबर सुरक्षा ढांचे तथा वाणिज्यिक बैंकों और चुनिंदा एफ़आई द्वारा धोखाधड़ी के वर्गीकरण और रिपोर्टिंग पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में बैंक विफल हुआ है। बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें यह सूचित किया गया कि वह कारण बताएं कि रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने के लिए उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। बैंक से प्राप्त उत्तरों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान किए गए मौखिक प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के बाद रिज़र्व बैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रिज़र्व बैंक के निर्देशों के गैर- अनुपालन के उपरोक्त आरोप सिद्ध हुए हैं अतः मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों में साइबर सुरक्षा ढांचा और वाणिज्यिक बैंकों और चुनिंदा एफ़आई द्वारा धोखाधड़ी के वर्गीकरण और रिपोर्टिंग पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने के लिए कॉर्पोरेशन बैंक पर इकतीस जुलाई दो हज़ार उन्नीस के आदेश के द्वारा एक रुपया करोड़ का मौद्रिक दंड लगाया। यह दंड बैंककारी विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा छियालीसए और इक्यावन के साथ पठित धारा सैंतालीसए के प्रावधानों के तहत रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल करना नहीं है। रद्द किए गए डेबिट कार्ड का उपयोग करके धोखाधड़ी से लेनदेन के बारे में बैंक द्वारा प्रस्तुत साइबर सुरक्षा की घटना की रिपोर्ट से पता चला कि बैंकों में साइबर सुरक्षा ढांचे तथा वाणिज्यिक बैंकों और चुनिंदा एफ़आई द्वारा धोखाधड़ी के वर्गीकरण और रिपोर्टिंग पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में बैंक विफल हुआ है। बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें यह सूचित किया गया कि वह कारण बताएं कि रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने के लिए उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। बैंक से प्राप्त उत्तरों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान किए गए मौखिक प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के बाद रिज़र्व बैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रिज़र्व बैंक के निर्देशों के गैर- अनुपालन के उपरोक्त आरोप सिद्ध हुए हैं अतः मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।
चीन से प्राप्त होने वाले ऋण से, सिल्क रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा, जहाँ हाई-स्पीड ट्रेनें एडिरने से कार्स तक यात्रा करेंगी। यह लाइन इज़मिर, दियारबाकिर, अंताल्या और ट्रैबज़ोन तक भी जाएगी। ट्रेनें 250 किमी तक की रफ्तार पकड़ सकेंगी। टीसीडीडी के महाप्रबंधक सुलेमान करमन ने पत्रकारों के साथ हुई बैठक में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ हस्ताक्षरित समझौते के बारे में जानकारी दी, जिसमें रेलवे का निर्माण भी शामिल है। यह व्यक्त करते हुए कि तुर्की ने इस समझौते की बदौलत 2023 तक 6 हजार किलोमीटर तेज और 4 हजार किलोमीटर पारंपरिक रेलवे लाइनों के अपने लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, करमन ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 45 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है, और चीन समझौते के ढांचे के भीतर 28 बिलियन डॉलर का वित्तपोषण प्रदान करेगा। यह बताते हुए कि चीन का लक्ष्य देश के अंदर और बाहर सालाना 2 हजार किलोमीटर हाई-स्पीड ट्रेनें बनाने का है, करमन ने यह भी कहा कि वे अपने लक्ष्य के अनुरूप लीबिया, अल्जीरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में कई परियोजनाएं चला रहे हैं। करमन ने कहा कि हस्ताक्षरित समझौते के साथ, दोनों देश रेलवे के निर्माण में रणनीतिक साझेदारी करेंगे, और चीन-तुर्की संयुक्त कंपनियां तुर्की और विदेशों में हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण में सहयोग करेंगी। करमन ने कहा कि चीन तुर्की में एडिरने-कार्स के बीच तुर्की-चीनी साझेदार कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले सिल्क रेलवे के निर्माण के लिए ऋण प्रदान करेगा और इस ऋण को लंबी अवधि में चुकाया जा सकता है, और कहा कि चीन का लक्ष्य अंकारा-इज़मिर, अंकारा-सिवस, सिवास-एरज़िनकैन, एर्ज़िनकन-ट्रैबज़ोन, सिवास-मालट्या, इलाज़िग-दियारबाकिर और एस्किसे के बीच एक हाई-स्पीड ट्रेन बनाना है। इस लाइन पर हिर-अंताल्या। यह देखते हुए कि चीन रेलवे निर्माण में यूरोपीय देशों में एक बाजार बनाने की कोशिश कर रहा है, करमन ने कहा कि इस कारण से, वे तुर्की को यूरोप के लिए एक प्रचार स्थल के रूप में देखते हैं। करमन ने कहा, "चाहे यह चीन या राज्य से ऋण हो, यह हमें तुर्की में रेलवे के 2023 लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने में सक्षम करेगा। हमने प्रधानमंत्री के स्तर पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किये. उन्हें चुकाना आसान होगा क्योंकि वे सरकारी ऋण देंगे। अच्छी तरह से काम करने पर कम समय में ऋण चुकाया जा सकता है," उन्होंने कहा। सुलेमान करमन ने कहा कि यह अनुमान लगाया गया है कि चीनियों के साथ बनाए जाने वाले सिल्क रेलवे प्रोजेक्ट की तर्ज पर इस्तेमाल की जाने वाली हाई-स्पीड ट्रेनें सिवास तक 250 किलोमीटर और सिवास-कार्स के बीच 180-250 किलोमीटर के बीच की गति पकड़ सकती हैं।
चीन से प्राप्त होने वाले ऋण से, सिल्क रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा, जहाँ हाई-स्पीड ट्रेनें एडिरने से कार्स तक यात्रा करेंगी। यह लाइन इज़मिर, दियारबाकिर, अंताल्या और ट्रैबज़ोन तक भी जाएगी। ट्रेनें दो सौ पचास किमी तक की रफ्तार पकड़ सकेंगी। टीसीडीडी के महाप्रबंधक सुलेमान करमन ने पत्रकारों के साथ हुई बैठक में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ हस्ताक्षरित समझौते के बारे में जानकारी दी, जिसमें रेलवे का निर्माण भी शामिल है। यह व्यक्त करते हुए कि तुर्की ने इस समझौते की बदौलत दो हज़ार तेईस तक छः हजार किलोमीटर तेज और चार हजार किलोमीटर पारंपरिक रेलवे लाइनों के अपने लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, करमन ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पैंतालीस बिलियन डॉलर की आवश्यकता है, और चीन समझौते के ढांचे के भीतर अट्ठाईस बिलियन डॉलर का वित्तपोषण प्रदान करेगा। यह बताते हुए कि चीन का लक्ष्य देश के अंदर और बाहर सालाना दो हजार किलोमीटर हाई-स्पीड ट्रेनें बनाने का है, करमन ने यह भी कहा कि वे अपने लक्ष्य के अनुरूप लीबिया, अल्जीरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में कई परियोजनाएं चला रहे हैं। करमन ने कहा कि हस्ताक्षरित समझौते के साथ, दोनों देश रेलवे के निर्माण में रणनीतिक साझेदारी करेंगे, और चीन-तुर्की संयुक्त कंपनियां तुर्की और विदेशों में हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण में सहयोग करेंगी। करमन ने कहा कि चीन तुर्की में एडिरने-कार्स के बीच तुर्की-चीनी साझेदार कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले सिल्क रेलवे के निर्माण के लिए ऋण प्रदान करेगा और इस ऋण को लंबी अवधि में चुकाया जा सकता है, और कहा कि चीन का लक्ष्य अंकारा-इज़मिर, अंकारा-सिवस, सिवास-एरज़िनकैन, एर्ज़िनकन-ट्रैबज़ोन, सिवास-मालट्या, इलाज़िग-दियारबाकिर और एस्किसे के बीच एक हाई-स्पीड ट्रेन बनाना है। इस लाइन पर हिर-अंताल्या। यह देखते हुए कि चीन रेलवे निर्माण में यूरोपीय देशों में एक बाजार बनाने की कोशिश कर रहा है, करमन ने कहा कि इस कारण से, वे तुर्की को यूरोप के लिए एक प्रचार स्थल के रूप में देखते हैं। करमन ने कहा, "चाहे यह चीन या राज्य से ऋण हो, यह हमें तुर्की में रेलवे के दो हज़ार तेईस लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने में सक्षम करेगा। हमने प्रधानमंत्री के स्तर पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किये. उन्हें चुकाना आसान होगा क्योंकि वे सरकारी ऋण देंगे। अच्छी तरह से काम करने पर कम समय में ऋण चुकाया जा सकता है," उन्होंने कहा। सुलेमान करमन ने कहा कि यह अनुमान लगाया गया है कि चीनियों के साथ बनाए जाने वाले सिल्क रेलवे प्रोजेक्ट की तर्ज पर इस्तेमाल की जाने वाली हाई-स्पीड ट्रेनें सिवास तक दो सौ पचास किलोग्राममीटर और सिवास-कार्स के बीच एक सौ अस्सी-दो सौ पचास किलोग्राममीटर के बीच की गति पकड़ सकती हैं।
जसकौर मीणा (Jaskaur Meena) के बयान पर कांग्रेस ने कहा कि किसानों को बदनाम करने के लिए सत्ता के अहंकार में इतने अंधे हो गए कि इन्हें देश का अन्नदाता आतंकी दिखता है. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) को लेकर राजस्थान के दौसा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद जसकौर मीणा (Jaskaur Meena) के बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी सांसद ने आंदोलनकारी किसानों को आतंकी करार दिया है. जिसके बाद राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने जसकौर मीणा के बयान को किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करार दिया है. जोशी ने कहा, "मैं तो इतना कहना चाहता हूं कि जिस दिन देश का किसान बेईमान हो गया उस दिन देश बचेगा नहीं. जो लोग देश के किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए." वहीं दौसा से कांग्रेस विधायक मुरारीलाल मीणा ने भी सांसद के इस बयान की निंदा की है.
जसकौर मीणा के बयान पर कांग्रेस ने कहा कि किसानों को बदनाम करने के लिए सत्ता के अहंकार में इतने अंधे हो गए कि इन्हें देश का अन्नदाता आतंकी दिखता है. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को लेकर राजस्थान के दौसा से भारतीय जनता पार्टी सांसद जसकौर मीणा के बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी सांसद ने आंदोलनकारी किसानों को आतंकी करार दिया है. जिसके बाद राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने जसकौर मीणा के बयान को किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करार दिया है. जोशी ने कहा, "मैं तो इतना कहना चाहता हूं कि जिस दिन देश का किसान बेईमान हो गया उस दिन देश बचेगा नहीं. जो लोग देश के किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए." वहीं दौसा से कांग्रेस विधायक मुरारीलाल मीणा ने भी सांसद के इस बयान की निंदा की है.
(जी. एन. एस) ता. 14 लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑनलाइन पंजीकरण 18 मई से शुरू होगा और नियुक्ति पत्र 3 जून से 6 जून के बीच वितरित किए जाएंगे। जो भी अभ्यर्थी इस परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं वह सभी अपने अपने डॉक्यूमेंट तैयार कर लें।
ता. चौदह लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में उनहत्तर हज़ार सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑनलाइन पंजीकरण अट्ठारह मई से शुरू होगा और नियुक्ति पत्र तीन जून से छः जून के बीच वितरित किए जाएंगे। जो भी अभ्यर्थी इस परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं वह सभी अपने अपने डॉक्यूमेंट तैयार कर लें।
संतों पंक्ति 4 में सेंसरशिप को कैसे हटाएं - मोड या कोड? प्रसिद्ध गेम जीटीए हर गेमर के लिए जाना जाता है। उनकी सफलता की कहानी ने कई डेवलपर्स को क्लोन बनाने के लिए प्रेरित किया, जो सभी बाहर नहीं निकले हैं। संतों पंक्ति 4 - दुनिया में "जीटीए" का सबसे प्रसिद्ध क्लोन। एक ऐसा गेम जो देशों के बारे में गेम, फिल्में और यहां तक कि रूढ़िवादी तरीकों का पालन करता है। इसे हल्के ढंग से रखने के लिए, यह काफी विशिष्ट है। उन्होंने निस्संदेह सेंसरशिप की मांग की, और यह उनकी पसंद नहीं थी। संतों पंक्ति 4 में सेंसरशिप को कैसे हटाएं? यह इस खेल के बारे में सबसे लोकप्रिय प्रश्नों में से एक है। इस खेल में क्या है कि इसकी आवश्यकता थीसेंसरशिप? यह एक दिलचस्प सवाल है जिसे अनजाने में उत्तर नहीं दिया जा सकता है। कुछ राज्यों में, वे इतने आश्चर्यचकित थे कि उन्होंने पूरी तरह से गेम को सेंसर किया - इसे कानूनी रूप से अपने क्षेत्र में प्रतिबंधित कर दिया गया था। प्रोजेक्ट स्वयं प्रतिभागियों को संतों पंक्ति 4 में सेंसरशिप को हटाने के सवाल के जवाब का उत्तर देने के लिए मजबूर करता है। खेल सचमुच अश्लील से भरा हैकामुक दृश्य, हिंसा, पीने और दवाओं की सामग्री के साथ दृश्य और आधुनिक दुनिया पर भी व्यंग्य। ब्रह्मांड असामान्य है - नायक सबकुछ करता है जो अन्य खेलों और फिल्मों में नहीं किया जाता था। इसमें इतनी विवादास्पद सामग्री है कि सेंसरशिप वास्तव में कई लोगों को खेलने से रोकती है। यह सब अन्य खेलों, फिल्मों और यहां तक कि किताबों के स्क्रैप से बनाया गया है, लेकिन एक विशिष्टता के साथ - परियोजना खुले तौर पर यह सब उपहास करती है। उदाहरण के लिए, कुछ खेलों में एक प्रेम रेखा विकसित करना संभव था, लेकिन यह बिस्तर के दृश्यों तक नहीं पहुंच पाया। हालांकि, संतों पंक्ति 4 में सबकुछ इस तरह से किया जाता है,कि आप किसी भी चरित्र को लुभाने और इस मामले को बिस्तर पर ला सकते हैं। आप न केवल किसी व्यक्ति पर, बल्कि रोबोट पर भी फहरा सकते हैं। कोई लिंग या दौड़ प्रतिबंध नहीं। कपड़ों से रहित पात्रों में सभी यौन विशेषताओं और विभिन्न आकारों और आकार होते हैं। विशेष रूप से मुख्य चरित्र, वास्तव में इसके निर्माण के पल में खिलाड़ी लाभ के आकार को बढ़ा सकता है। इन सबके अलावा, चरित्र का मुख्य हथियार अक्सर मनमाने ढंग से रंग का एक विशाल रबड़ लिंग होता है। कई देशों में, बेसबॉल बल्ले के इस एनालॉग को भी फिक्र किया गया था। आश्चर्य की बात नहीं है, खिलाड़ियों को सेंसरशिप को हटाने के बारे में चिंतित हैं। संतों पंक्ति 4 में, इसे एक विकल्प के रूप में हटाया नहीं जा सकता है। और यह समस्या की जड़ है। सेंसरशिप के साथ नीचे! सेंसरशिप के बिना एक खेल मजेदार है। कई gamers साजिश नहीं है, लेकिन अन्य परियोजनाओं में पूरी तरह से बेतुका और असंभव स्थितियों को बनाने का अवसर। नंगे छाती को हिलाएं और पुलिस को एक विशाल रबड़ लिंग से हराएं, और फिर मैट्रिक्स से बाहर निकलें, एक विदेशी जहाज पर रहें और नग्न एलियंस के साथ लड़ें! क्या यह मजेदार है? बेशक! संतों पंक्ति 4 में सेंसरशिप को हटाने के तरीके के बारे में सभी खिलाड़ियों के विचारों ने समस्या के दो तार्किक समाधान किए। यह या तो उचित कंसोल कमांड खोजने के लिए है, या किसी तृतीय-पक्ष ऐड-ऑन को स्थापित करने के लिए है जो न केवल सेंसरशिप को हटा सकता है, बल्कि गेम में अतिरिक्त सुविधाएं भी ला सकता है। सभी सेंसरशिप के वैकल्पिक अक्षम करने की कमी के कारण, खिलाड़ियों ने बदलाव करने के सभी संभावित तरीकों की खोज शुरू कर दी। परंपरागत रूप से सबसे आम विधि modding है। संवेदना पंक्ति 4 पर मॉड डाउनलोड करें, सेंसरशिप की सफाई,आप बिना किसी समस्या के कर सकते हैं। सभी मोड खुली पहुंच हैं, और उन्हें स्थापित करना मुश्किल मामला नहीं है। डाउनलोड किए गए संग्रह से फ़ाइलों को रूट की ओर स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त है और पुरानी फाइलों को प्रतिस्थापित करने के लिए सहमत है। हालांकि, सावधानी बरतनी नहीं होगी। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि कोई भी मोडर का भुगतान नहीं करता है, वे अक्सर मोड में एक वायरल विज्ञापन बनाते हैं। कुछ कंपनियां आधिकारिक तौर पर अपने उत्पादों को इतनी बुरी तरह से बढ़ावा देती हैं। इसलिए, यदि डेस्कटॉप पर "अमीगो ब्राउज़र" ढूंढने की कोई इच्छा नहीं है, तो आपको उन्हें अनपॅक करने से पहले संग्रह में फ़ाइलों को जांचना होगा।
संतों पंक्ति चार में सेंसरशिप को कैसे हटाएं - मोड या कोड? प्रसिद्ध गेम जीटीए हर गेमर के लिए जाना जाता है। उनकी सफलता की कहानी ने कई डेवलपर्स को क्लोन बनाने के लिए प्रेरित किया, जो सभी बाहर नहीं निकले हैं। संतों पंक्ति चार - दुनिया में "जीटीए" का सबसे प्रसिद्ध क्लोन। एक ऐसा गेम जो देशों के बारे में गेम, फिल्में और यहां तक कि रूढ़िवादी तरीकों का पालन करता है। इसे हल्के ढंग से रखने के लिए, यह काफी विशिष्ट है। उन्होंने निस्संदेह सेंसरशिप की मांग की, और यह उनकी पसंद नहीं थी। संतों पंक्ति चार में सेंसरशिप को कैसे हटाएं? यह इस खेल के बारे में सबसे लोकप्रिय प्रश्नों में से एक है। इस खेल में क्या है कि इसकी आवश्यकता थीसेंसरशिप? यह एक दिलचस्प सवाल है जिसे अनजाने में उत्तर नहीं दिया जा सकता है। कुछ राज्यों में, वे इतने आश्चर्यचकित थे कि उन्होंने पूरी तरह से गेम को सेंसर किया - इसे कानूनी रूप से अपने क्षेत्र में प्रतिबंधित कर दिया गया था। प्रोजेक्ट स्वयं प्रतिभागियों को संतों पंक्ति चार में सेंसरशिप को हटाने के सवाल के जवाब का उत्तर देने के लिए मजबूर करता है। खेल सचमुच अश्लील से भरा हैकामुक दृश्य, हिंसा, पीने और दवाओं की सामग्री के साथ दृश्य और आधुनिक दुनिया पर भी व्यंग्य। ब्रह्मांड असामान्य है - नायक सबकुछ करता है जो अन्य खेलों और फिल्मों में नहीं किया जाता था। इसमें इतनी विवादास्पद सामग्री है कि सेंसरशिप वास्तव में कई लोगों को खेलने से रोकती है। यह सब अन्य खेलों, फिल्मों और यहां तक कि किताबों के स्क्रैप से बनाया गया है, लेकिन एक विशिष्टता के साथ - परियोजना खुले तौर पर यह सब उपहास करती है। उदाहरण के लिए, कुछ खेलों में एक प्रेम रेखा विकसित करना संभव था, लेकिन यह बिस्तर के दृश्यों तक नहीं पहुंच पाया। हालांकि, संतों पंक्ति चार में सबकुछ इस तरह से किया जाता है,कि आप किसी भी चरित्र को लुभाने और इस मामले को बिस्तर पर ला सकते हैं। आप न केवल किसी व्यक्ति पर, बल्कि रोबोट पर भी फहरा सकते हैं। कोई लिंग या दौड़ प्रतिबंध नहीं। कपड़ों से रहित पात्रों में सभी यौन विशेषताओं और विभिन्न आकारों और आकार होते हैं। विशेष रूप से मुख्य चरित्र, वास्तव में इसके निर्माण के पल में खिलाड़ी लाभ के आकार को बढ़ा सकता है। इन सबके अलावा, चरित्र का मुख्य हथियार अक्सर मनमाने ढंग से रंग का एक विशाल रबड़ लिंग होता है। कई देशों में, बेसबॉल बल्ले के इस एनालॉग को भी फिक्र किया गया था। आश्चर्य की बात नहीं है, खिलाड़ियों को सेंसरशिप को हटाने के बारे में चिंतित हैं। संतों पंक्ति चार में, इसे एक विकल्प के रूप में हटाया नहीं जा सकता है। और यह समस्या की जड़ है। सेंसरशिप के साथ नीचे! सेंसरशिप के बिना एक खेल मजेदार है। कई gamers साजिश नहीं है, लेकिन अन्य परियोजनाओं में पूरी तरह से बेतुका और असंभव स्थितियों को बनाने का अवसर। नंगे छाती को हिलाएं और पुलिस को एक विशाल रबड़ लिंग से हराएं, और फिर मैट्रिक्स से बाहर निकलें, एक विदेशी जहाज पर रहें और नग्न एलियंस के साथ लड़ें! क्या यह मजेदार है? बेशक! संतों पंक्ति चार में सेंसरशिप को हटाने के तरीके के बारे में सभी खिलाड़ियों के विचारों ने समस्या के दो तार्किक समाधान किए। यह या तो उचित कंसोल कमांड खोजने के लिए है, या किसी तृतीय-पक्ष ऐड-ऑन को स्थापित करने के लिए है जो न केवल सेंसरशिप को हटा सकता है, बल्कि गेम में अतिरिक्त सुविधाएं भी ला सकता है। सभी सेंसरशिप के वैकल्पिक अक्षम करने की कमी के कारण, खिलाड़ियों ने बदलाव करने के सभी संभावित तरीकों की खोज शुरू कर दी। परंपरागत रूप से सबसे आम विधि modding है। संवेदना पंक्ति चार पर मॉड डाउनलोड करें, सेंसरशिप की सफाई,आप बिना किसी समस्या के कर सकते हैं। सभी मोड खुली पहुंच हैं, और उन्हें स्थापित करना मुश्किल मामला नहीं है। डाउनलोड किए गए संग्रह से फ़ाइलों को रूट की ओर स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त है और पुरानी फाइलों को प्रतिस्थापित करने के लिए सहमत है। हालांकि, सावधानी बरतनी नहीं होगी। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि कोई भी मोडर का भुगतान नहीं करता है, वे अक्सर मोड में एक वायरल विज्ञापन बनाते हैं। कुछ कंपनियां आधिकारिक तौर पर अपने उत्पादों को इतनी बुरी तरह से बढ़ावा देती हैं। इसलिए, यदि डेस्कटॉप पर "अमीगो ब्राउज़र" ढूंढने की कोई इच्छा नहीं है, तो आपको उन्हें अनपॅक करने से पहले संग्रह में फ़ाइलों को जांचना होगा।
Don't Miss! खेसारी लाल यादव पर काजल राघवानी का जोरदार हमला- लड़की हूं बोलने की हिम्मत रखती हूं ! भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई कंट्रोवर्सी ने जन्म ले लिया है। इसकी वजह है सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी के बीच पैदा हुआ विवाद। जो कि इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। काजल राघवानी और खेसारी लाल यादव ने एक साथ कई बड़ी फिल्में दी हैं। दोनों की जोड़ी को भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे हिट कपल में से एक माना जाता है। हालांकि इन दोनों के बीच का विवाद क्या है इससे सभी अनजान हैं। लेकिन जिस तरह दोनों अपनी बातों को सोशल मीडिया पर रख रहे हैं वो खबरों में छा रहा है। कुछ दिन पहले खेसारी लाल यादव ने फेसबुक लाइव वीडियो के जरिए जानकारी दी कि इंडस्ट्री उन्हें दूसरा सुशांत सिंह राजपूत बनाना चाहती है। उन्होंने इस पूरे वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन कहीं ना कहीं ये जानकारी सामने आयी कि काजल राघवानी के साथ उनका झगड़ा बढ़ता ही जा रहा है। बीते दिन काजल राघवानी ने एक पोस्ट अपलोड कर बिना खेसारी का नाम लिए उन पर हमला बोला है।
Don't Miss! खेसारी लाल यादव पर काजल राघवानी का जोरदार हमला- लड़की हूं बोलने की हिम्मत रखती हूं ! भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई कंट्रोवर्सी ने जन्म ले लिया है। इसकी वजह है सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी के बीच पैदा हुआ विवाद। जो कि इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। काजल राघवानी और खेसारी लाल यादव ने एक साथ कई बड़ी फिल्में दी हैं। दोनों की जोड़ी को भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे हिट कपल में से एक माना जाता है। हालांकि इन दोनों के बीच का विवाद क्या है इससे सभी अनजान हैं। लेकिन जिस तरह दोनों अपनी बातों को सोशल मीडिया पर रख रहे हैं वो खबरों में छा रहा है। कुछ दिन पहले खेसारी लाल यादव ने फेसबुक लाइव वीडियो के जरिए जानकारी दी कि इंडस्ट्री उन्हें दूसरा सुशांत सिंह राजपूत बनाना चाहती है। उन्होंने इस पूरे वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन कहीं ना कहीं ये जानकारी सामने आयी कि काजल राघवानी के साथ उनका झगड़ा बढ़ता ही जा रहा है। बीते दिन काजल राघवानी ने एक पोस्ट अपलोड कर बिना खेसारी का नाम लिए उन पर हमला बोला है।
हर माता पिता को बहुत अच्छी तरह से पता है कि कितना मुश्किल हैबच्चों के पॉलीक्लिनिक में बच्चे के साथ रहना। यह कोई रहस्य नहीं है कि स्वस्थ और बीमार मरीजों को लंबे समय तक डॉक्टर के कार्यालय के सामने सामान्य कतार में बैठना चाहिए। एयरबोर्न संक्रमण फैलाने के जोखिम को कम करने के लिए, बड़े शहरों में क्लिनिक में कैबिनेट "स्वस्थ बचपन" खोलना शुरू कर दिया। यह जगह क्या है और इसमें क्या हो रहा है? बच्चों के चिकित्सा संस्थानों में बच्चों का प्रवेशव्यवस्था की जाती है ताकि स्वस्थ, सौम्य और बीमार एक आम कतार में बैठ सकें। प्रत्येक माता-पिता ने बार-बार इस तरह की स्थिति का सामना किया है - डॉक्टर के पास जाने के बाद लगभग एक बरामद बच्चा बीमार हो जाता है और इससे भी मुश्किल होता है हाल ही में, "स्वस्थ बचपन" के कार्यालय बड़े शहरों में खोलने लगे। बच्चों के मेडिकल संस्थान में, एक स्वस्थ बच्चे, एक नियम के रूप में, बालवाड़ी, स्कूल या पूल में दस्तावेज प्राप्त करने के लिए कई कतार खड़े किए हैं। सभी आवश्यक जानकारी अब आसानी से एक कार्यालय में प्राप्त की जा सकती हैं। स्वस्थ बच्चों के लिए पहली बार एक विशेष कमराअगस्त 2014 में मॉस्को में बच्चों के शहर पॉलीक्लिनिक नं। 94 में खोला गया था। बेशक, मॉस्को पॉलीक्लिनिक में कैबिनेट "स्वस्थ बचपन" केवल एक पायलट परियोजना थी, हालांकि, वह खुद को केवल सकारात्मक पक्ष पर साबित कर दिया। कई बच्चों की प्रतिष्ठानों में, स्वस्थ बच्चों के लिए विशेष कमरे पहले ही खोले जा चुके हैं, लेकिन सभी माता-पिता नहीं जानते कि वे क्या हैं, और कौन इसे चालू कर सकता है। कौन से मामले माता-पिता एक पॉलीक्लिनिक में "स्वस्थ बचपन" कार्यालय में जा सकते हैं (यह क्या है, यह ऊपर लिखा है)? • एफ-026 / वाई के रूप में प्रमाण पत्र के पंजीकरण के लिए। हर कोई जानता है कि किंडरगार्टन या स्कूल में कक्षाएं शुरू करने से पहले, एक बच्चे को पॉलीक्लिनिक में पूर्ण चिकित्सा परीक्षा लेनी पड़ती है। बच्चों के पॉलीक्लिनिक में मंत्रिमंडल "स्वस्थ बचपन" एक ऐसा कार्यालय है जहां हर माता-पिता जल्दी और बिना अनावश्यक नसों के बच्चे के लिए मेडिकल कार्ड तैयार कर सकता है। • कोई भी माता-पिता अपने बेटे को रिकॉर्ड कर सकता है याएक विशेषज्ञ डॉक्टर के लिए नियुक्ति पर बेटी। "स्वस्थ बचपन" कैबिनेट में चिकित्सा कार्यकर्ता सावधानीपूर्वक बच्चे की जांच करेगा, माता-पिता से चिकित्सा संस्थान जाने के कारणों के बारे में साक्षात्कार करेगा और साक्ष्य के आधार पर बच्चे को उपयुक्त चिकित्सक के परामर्श के लिए लिख देगा। • टीकाकरण से पहले चिकित्सा परीक्षा के लिए। प्रत्येक टीकाकरण से पहले डॉक्टर को सावधानी से बच्चे की जांच करनी चाहिए, पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 मिनट लगते हैं, और बाल रोग विशेषज्ञ के लिए लाइन में खड़े होने से 15 से 60 मिनट तक और भी बहुत कुछ होता है। • डेयरी बच्चों के व्यंजनों के लिए एक पर्चे जारी करने के लिए। यह एक रहस्य नहीं है कि बच्चे के माता-पिता के लिए बच्चों के पॉलीक्लिनिक में जाने के लिए यह बहुत ही समस्याग्रस्त है, खासकर यदि यह केवल नुस्खे के लिए एक नुस्खे है। क्लिनिक में किस तरह का कार्यालय "स्वस्थ बचपन"? यह वह जगह है जहां बच्चे के माता-पिता मिनटों के मामले में डेयरी भोजन के लिए छूट प्राप्त पर्चे प्राप्त कर सकते हैं। पॉलीक्लिनिक में मंत्रिमंडल "स्वस्थ बचपन" - वहक्या यह एक आवश्यकता या अतिरिक्त है? इस तरह के कार्यालयों के संगठन ने बच्चों में वायु संक्रमण के फैलाव को काफी कम कर दिया है, क्योंकि अब एक ही कतार में स्वस्थ और बीमार बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, बच्चों के संस्थानों के लिए आवश्यक निर्देश या संदर्भ प्राप्त करना बहुत आसान हो गया। • देखभाल की गुणवत्ता में सुधार और जिला बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता में सुधार। • स्वागत समय में कमी और कतार में प्रतीक्षा। • चिकित्सा रिकॉर्ड के त्वरित और गुणात्मक डिजाइन। • स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ के समय की रिहाई, जिसे वह बीमार बच्चों को दे सकता है।
हर माता पिता को बहुत अच्छी तरह से पता है कि कितना मुश्किल हैबच्चों के पॉलीक्लिनिक में बच्चे के साथ रहना। यह कोई रहस्य नहीं है कि स्वस्थ और बीमार मरीजों को लंबे समय तक डॉक्टर के कार्यालय के सामने सामान्य कतार में बैठना चाहिए। एयरबोर्न संक्रमण फैलाने के जोखिम को कम करने के लिए, बड़े शहरों में क्लिनिक में कैबिनेट "स्वस्थ बचपन" खोलना शुरू कर दिया। यह जगह क्या है और इसमें क्या हो रहा है? बच्चों के चिकित्सा संस्थानों में बच्चों का प्रवेशव्यवस्था की जाती है ताकि स्वस्थ, सौम्य और बीमार एक आम कतार में बैठ सकें। प्रत्येक माता-पिता ने बार-बार इस तरह की स्थिति का सामना किया है - डॉक्टर के पास जाने के बाद लगभग एक बरामद बच्चा बीमार हो जाता है और इससे भी मुश्किल होता है हाल ही में, "स्वस्थ बचपन" के कार्यालय बड़े शहरों में खोलने लगे। बच्चों के मेडिकल संस्थान में, एक स्वस्थ बच्चे, एक नियम के रूप में, बालवाड़ी, स्कूल या पूल में दस्तावेज प्राप्त करने के लिए कई कतार खड़े किए हैं। सभी आवश्यक जानकारी अब आसानी से एक कार्यालय में प्राप्त की जा सकती हैं। स्वस्थ बच्चों के लिए पहली बार एक विशेष कमराअगस्त दो हज़ार चौदह में मॉस्को में बच्चों के शहर पॉलीक्लिनिक नं। चौरानवे में खोला गया था। बेशक, मॉस्को पॉलीक्लिनिक में कैबिनेट "स्वस्थ बचपन" केवल एक पायलट परियोजना थी, हालांकि, वह खुद को केवल सकारात्मक पक्ष पर साबित कर दिया। कई बच्चों की प्रतिष्ठानों में, स्वस्थ बच्चों के लिए विशेष कमरे पहले ही खोले जा चुके हैं, लेकिन सभी माता-पिता नहीं जानते कि वे क्या हैं, और कौन इसे चालू कर सकता है। कौन से मामले माता-पिता एक पॉलीक्लिनिक में "स्वस्थ बचपन" कार्यालय में जा सकते हैं ? • एफ-छब्बीस / वाई के रूप में प्रमाण पत्र के पंजीकरण के लिए। हर कोई जानता है कि किंडरगार्टन या स्कूल में कक्षाएं शुरू करने से पहले, एक बच्चे को पॉलीक्लिनिक में पूर्ण चिकित्सा परीक्षा लेनी पड़ती है। बच्चों के पॉलीक्लिनिक में मंत्रिमंडल "स्वस्थ बचपन" एक ऐसा कार्यालय है जहां हर माता-पिता जल्दी और बिना अनावश्यक नसों के बच्चे के लिए मेडिकल कार्ड तैयार कर सकता है। • कोई भी माता-पिता अपने बेटे को रिकॉर्ड कर सकता है याएक विशेषज्ञ डॉक्टर के लिए नियुक्ति पर बेटी। "स्वस्थ बचपन" कैबिनेट में चिकित्सा कार्यकर्ता सावधानीपूर्वक बच्चे की जांच करेगा, माता-पिता से चिकित्सा संस्थान जाने के कारणों के बारे में साक्षात्कार करेगा और साक्ष्य के आधार पर बच्चे को उपयुक्त चिकित्सक के परामर्श के लिए लिख देगा। • टीकाकरण से पहले चिकित्सा परीक्षा के लिए। प्रत्येक टीकाकरण से पहले डॉक्टर को सावधानी से बच्चे की जांच करनी चाहिए, पूरी प्रक्रिया में लगभग पाँच मिनट लगते हैं, और बाल रोग विशेषज्ञ के लिए लाइन में खड़े होने से पंद्रह से साठ मिनट तक और भी बहुत कुछ होता है। • डेयरी बच्चों के व्यंजनों के लिए एक पर्चे जारी करने के लिए। यह एक रहस्य नहीं है कि बच्चे के माता-पिता के लिए बच्चों के पॉलीक्लिनिक में जाने के लिए यह बहुत ही समस्याग्रस्त है, खासकर यदि यह केवल नुस्खे के लिए एक नुस्खे है। क्लिनिक में किस तरह का कार्यालय "स्वस्थ बचपन"? यह वह जगह है जहां बच्चे के माता-पिता मिनटों के मामले में डेयरी भोजन के लिए छूट प्राप्त पर्चे प्राप्त कर सकते हैं। पॉलीक्लिनिक में मंत्रिमंडल "स्वस्थ बचपन" - वहक्या यह एक आवश्यकता या अतिरिक्त है? इस तरह के कार्यालयों के संगठन ने बच्चों में वायु संक्रमण के फैलाव को काफी कम कर दिया है, क्योंकि अब एक ही कतार में स्वस्थ और बीमार बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, बच्चों के संस्थानों के लिए आवश्यक निर्देश या संदर्भ प्राप्त करना बहुत आसान हो गया। • देखभाल की गुणवत्ता में सुधार और जिला बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता में सुधार। • स्वागत समय में कमी और कतार में प्रतीक्षा। • चिकित्सा रिकॉर्ड के त्वरित और गुणात्मक डिजाइन। • स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ के समय की रिहाई, जिसे वह बीमार बच्चों को दे सकता है।
आरिफ और सारस के साथ अखिलेश यादव (Image Source : Akhilesh Yadav Twitter) पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक सारस पक्षी और उसे पालने वाले शख्स का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पक्षी और इंसान की दोस्ती लोगों को भी काफी पसंद आ रही है. लेकिन अब ये दोस्ती टूट गई है और वन विभाग की टीम ने सारस को समसपुर पक्षी विहार में शिफ्ट कर दिया. भारतीय का संविधान देश के हर नागरिकों की तरह ही जानवरों को भी जीवन जीने की आजादी देता है. अगर कोई व्यक्ति जानवरों को मारने या प्रताड़ित करने की कोशिश करता है तो इसके लिए संविधान में कई तरह के दंड के प्रावधान हैं. इसके अलावा हमारे देश में कई जानवर ऐसे भी हैं जिसे मारने या प्रताड़ना पहुंचाने पर आपको जेल भी हो सकती है. उत्तर प्रदेश की अमेठी के मंडखा गांव में रहने वाले आरिफ को उसकी ही खेत में लगभग एक साल पहले एक घायल सारस मिला था. जब आरीफ ने उस सारस को देखा तब उसके पैर में चोट लगी थी. घायल होने के कारण उसने उसे अपने घर ले जाकर सारस का इलाज किया. अब आरिफ काफी समय सारस के साथ गुजारता था उसे घर का बना खाना जैसे- दाल-चावल, सब्जी रोटी खिलाता था. इस तरह इन दोनों के बीच दोस्ती हुई और समय के साथ ये दोस्ती और भी गहरी होती चली गई. सारस के ठीक हो जाने के बाद आरिफ और उनके परिवार वालों को लगा था कि वह पक्षी खुद ही उड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आरिफ के अनुसार वह पक्षी दिन में उड़कर जंगल और खेतों में चला जाता था, लेकिन शाम होने पर वापस उनके घर आ जाता था. धीरे धीरे आरिफ का परिवार ही सारस का परिवार बन गया. जहां- जहां आरिफ जाते सारस उनके साथ साथ जाता है. वह उनके साथ ही भोजन करता. सारस आरिफ का दोस्त बन गया था. इस दौरान आरिफ अपने यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर सारस के साथ अपनी कुछ वीडियो पोस्ट किया करते थे. इसमें से कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ. वीडियो वायरल के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आरिफ और उनके सारस से मिलने अमेठी पहुंचे. उन्होंने बी सोशल मीडिया पर सारस के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट की. जिसके बाद बीते 21 मार्च को वन विभाग ने आरिफ से सारस को अलग कर दिया और समसपुर पक्षी विहार ले गए. विन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि आरिफ उसकी अच्छे से देखभाल नहीं कर पाएंगे इसलिए सारस को अपने साथ ले जा रहे हैं. हालांकि आरिफ की मुश्किले अभी और बढ़ सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश प्रभागीय वन अधिकारी गौरीगंज ने आरिफ को नोटिस जारी किया है. जिसके अनुसार आरिफ को दो अप्रैल को प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय में पहुंचकर बयान दर्ज कराना होगा. भेजे गए नोटिस में उन पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 2,9, 29,51 और 52 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. सारस को समसपुर पक्षी विहार ले जाने के बाद अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'मैं जिससे भी मिलने जाता हूं सरकार उससे सब कुछ छीन लेती है. ' उन्होंने सारस के अलावा आज़म खान और कानपुर के सपा विधायक इरफान सोलंकी का भी उदाहरण दिया. अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'सरकार अगर आरिफ से सारस छीन सकती है, तो उनसे भी मोर छीन लेना चाहिए जो मोर को दाना खिला रहे थे. लेकिन सरकार के पास वहां पहुंच जाने की. किसी अधिकारी की हिम्मत है कि वहां जाए और मोर को ले आए वहां से? यह सिर्फ़ इसलिए किया सरकार ने क्योंकि सारस से और सारस को पालने वाले आरिफ़ से मैं मिल कर आ गया. " अखिलेश यादव ने आरिफ़ के बारे में कहा, "उन्होंने सारस के साथ दोस्ती दिखाई और उसकी सेवा की जिससे ये इनका मित्र बन गया. ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि कोई सारस किसी इंसान के साथ रहे और उसका व्यवहार बदल जाए. यह तो शोध का विषय है कि सारस इनके पास कैसे रुक गया. " अखिलेश के अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ और आरिफ के पक्ष में फ़ेसबुक पोस्ट किया है. प्रियंका कहती हैं, "अमेठी के रहने वाले आरिफ़ और एक सारस पक्षी की दोस्ती, जय-वीरू की तरह थी. साथ-साथ रहना, साथ खाना, साथ आना-जाना. उनकी दोस्ती इंसान की जीवों से दोस्ती की मिसाल है. आरिफ़ ने उनके प्रिय सारस को घर के सदस्य की तरह पाला, उसकी देखभाल की, उससे प्यार किया. ऐसा करके उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति इंसानी फ़र्ज़ की नज़ीर पेश की है जो कि काबिल-ए-तारीफ़ है. " वन्य जीव संरक्षण कानून क्या है ? भारत में बेजुबान जानवरों पर होने वाले किसी भी तरह के अत्याचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने साल 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था. इस कानून को लाने का मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. साल 2003 में इस कानून में संशोधन किया गया जिसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रख दिया गया. इसमें दंड और और जुर्माना को और भी कठोर कर दिया गया है. 1. प्रिवेंशन ऑन क्रूशियल एनिमल एक्ट 1960की धारा 11(1) के अनुसार भारत में किसी भी पालतू जानवर की मौत उसे छोड़ने, प्रताड़ित करने, भूखा प्यासा रखने के होती है तो आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है. ऐसी परिस्थिति में पालतू जानवर के मालिक पर जुर्माना हो सकता है. और अगर तीन महीने के अंदर दूसरी बार ऐसा ही होता है तो जानवर के मालिक पर जुर्माने के साथ 3 महीने तक की जेल भी हो सकती है. 2. आईपीसी की धारा 428 और 429 के किसी भी जानवर को जहर देकर या किसी और तरीके से जान से मारा गया या उसे कष्ट दिया तो दोषी तो दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है. 3. किसी भी जानवर, चाहे वह पालतू ही क्यों न हो उसे लंबे समय तक लोहे की सांकर या किसी भारी रस्सी से बांधकर रखना अपराध की श्रेणी में आता है. इसके अलावा अगर आप अपने पालतू जानवर को घर के बाहर नहीं निकालते तो यह भी कैद माना जाता है. ऐसी परिस्थिति में 3 माह की जेल और जुर्माना हो सकता है. 4. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 16 (सी) के अनुसार किसी भी जंगली पक्षियों या सरीसृपों को नुकसान पहुंचाना या उनके घोंसलों को नष्ट करना अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसा करने पर व्यक्ति को 3 से 7 साल की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है. 1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में 66 धाराएं और 6 अनुसूचियां हैं. इन अनुसूचियों में पशु-पक्षियों की सभी प्रजातियों को संरक्षण प्रदान किया गया है. 2. अनुसूची-1 और 2 के तहत जंगली जानवरों और पक्षियों को सुरक्षा प्रदान की जाती है और इस नियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को सजा का प्रावधान दिया जाता है. 3. वहीं अनुसूची 3 और 4 भी जंगली जानवरों और पक्षियों को संरक्षण देते हैं लेकिन जिन जानवरों को रखा गया है उनके साथ किए गए अपराध पर सजा का प्रावधान काफी कम हैं. 4. अनुसूची 5 में उन जानवरों को रखा गया है जिसका शिकार किया जा सकता है. जबकि अनुसूची 6 में शामिल पौधों की खेती और रोपण पर रोक लगाई गई है. भारत में जानवरों के खिलाफ कितनी बार गंभीर अपराध दर्ज किए जा चुके हैं? कैग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 2017-18 से 2020-21 के बीच 3 एशियाई शेरों और 73 हाथियों के साथ 63,000 से ज्यादा जानवरों की मौत रेलवे पटरियों पर टक्कर खाने से हुई है. कैग ने रिपोर्ट 'परफॉर्मेंस ऑडिट ऑन डिरेलमेंट इन इंडियन रेलवे' में कहा है कि रेलवे को यह कन्फर्म करना चाहिए कि उन गाइडलाइंस का सख्ती से पालन हो रहा है जिन्हें जानवरों की मौत को रोकने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय ने जारी किया था. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दी गई सलाह ही इन आंकड़ों में कमी ला सकती है. कैग की रिपोर्ट के अनुसार इन 3 सालों में 73 हाथियों और चार शेरों सहित 63,345 जानवर ट्रेन की पटरियों पर आकर मौत के घाट उतर चुके हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में साल 2020 में हाथी और भालू के हमले से 137 लोगों की हुई है. जब 281 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. बीते दस सालों में इस राज्य में कम से कम 204 जंगली हाथी अलग-अलग कारणों से मारे गए. साल 2018 में ही 17 हाथी की मौत हुई, जिसमें 4 नर हाथी हैं. वहीं साल 2018 में 33 भालुओं की मौत हुई है. इसके अलावा एक सफेद शेर और तेन्दुआ की भी मौत प्रदेश के जंगलों में हुई.
आरिफ और सारस के साथ अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक सारस पक्षी और उसे पालने वाले शख्स का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पक्षी और इंसान की दोस्ती लोगों को भी काफी पसंद आ रही है. लेकिन अब ये दोस्ती टूट गई है और वन विभाग की टीम ने सारस को समसपुर पक्षी विहार में शिफ्ट कर दिया. भारतीय का संविधान देश के हर नागरिकों की तरह ही जानवरों को भी जीवन जीने की आजादी देता है. अगर कोई व्यक्ति जानवरों को मारने या प्रताड़ित करने की कोशिश करता है तो इसके लिए संविधान में कई तरह के दंड के प्रावधान हैं. इसके अलावा हमारे देश में कई जानवर ऐसे भी हैं जिसे मारने या प्रताड़ना पहुंचाने पर आपको जेल भी हो सकती है. उत्तर प्रदेश की अमेठी के मंडखा गांव में रहने वाले आरिफ को उसकी ही खेत में लगभग एक साल पहले एक घायल सारस मिला था. जब आरीफ ने उस सारस को देखा तब उसके पैर में चोट लगी थी. घायल होने के कारण उसने उसे अपने घर ले जाकर सारस का इलाज किया. अब आरिफ काफी समय सारस के साथ गुजारता था उसे घर का बना खाना जैसे- दाल-चावल, सब्जी रोटी खिलाता था. इस तरह इन दोनों के बीच दोस्ती हुई और समय के साथ ये दोस्ती और भी गहरी होती चली गई. सारस के ठीक हो जाने के बाद आरिफ और उनके परिवार वालों को लगा था कि वह पक्षी खुद ही उड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आरिफ के अनुसार वह पक्षी दिन में उड़कर जंगल और खेतों में चला जाता था, लेकिन शाम होने पर वापस उनके घर आ जाता था. धीरे धीरे आरिफ का परिवार ही सारस का परिवार बन गया. जहां- जहां आरिफ जाते सारस उनके साथ साथ जाता है. वह उनके साथ ही भोजन करता. सारस आरिफ का दोस्त बन गया था. इस दौरान आरिफ अपने यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर सारस के साथ अपनी कुछ वीडियो पोस्ट किया करते थे. इसमें से कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ. वीडियो वायरल के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आरिफ और उनके सारस से मिलने अमेठी पहुंचे. उन्होंने बी सोशल मीडिया पर सारस के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट की. जिसके बाद बीते इक्कीस मार्च को वन विभाग ने आरिफ से सारस को अलग कर दिया और समसपुर पक्षी विहार ले गए. विन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि आरिफ उसकी अच्छे से देखभाल नहीं कर पाएंगे इसलिए सारस को अपने साथ ले जा रहे हैं. हालांकि आरिफ की मुश्किले अभी और बढ़ सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश प्रभागीय वन अधिकारी गौरीगंज ने आरिफ को नोटिस जारी किया है. जिसके अनुसार आरिफ को दो अप्रैल को प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय में पहुंचकर बयान दर्ज कराना होगा. भेजे गए नोटिस में उन पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा दो,नौ, उनतीस,इक्यावन और बावन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. सारस को समसपुर पक्षी विहार ले जाने के बाद अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'मैं जिससे भी मिलने जाता हूं सरकार उससे सब कुछ छीन लेती है. ' उन्होंने सारस के अलावा आज़म खान और कानपुर के सपा विधायक इरफान सोलंकी का भी उदाहरण दिया. अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'सरकार अगर आरिफ से सारस छीन सकती है, तो उनसे भी मोर छीन लेना चाहिए जो मोर को दाना खिला रहे थे. लेकिन सरकार के पास वहां पहुंच जाने की. किसी अधिकारी की हिम्मत है कि वहां जाए और मोर को ले आए वहां से? यह सिर्फ़ इसलिए किया सरकार ने क्योंकि सारस से और सारस को पालने वाले आरिफ़ से मैं मिल कर आ गया. " अखिलेश यादव ने आरिफ़ के बारे में कहा, "उन्होंने सारस के साथ दोस्ती दिखाई और उसकी सेवा की जिससे ये इनका मित्र बन गया. ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि कोई सारस किसी इंसान के साथ रहे और उसका व्यवहार बदल जाए. यह तो शोध का विषय है कि सारस इनके पास कैसे रुक गया. " अखिलेश के अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ और आरिफ के पक्ष में फ़ेसबुक पोस्ट किया है. प्रियंका कहती हैं, "अमेठी के रहने वाले आरिफ़ और एक सारस पक्षी की दोस्ती, जय-वीरू की तरह थी. साथ-साथ रहना, साथ खाना, साथ आना-जाना. उनकी दोस्ती इंसान की जीवों से दोस्ती की मिसाल है. आरिफ़ ने उनके प्रिय सारस को घर के सदस्य की तरह पाला, उसकी देखभाल की, उससे प्यार किया. ऐसा करके उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति इंसानी फ़र्ज़ की नज़ीर पेश की है जो कि काबिल-ए-तारीफ़ है. " वन्य जीव संरक्षण कानून क्या है ? भारत में बेजुबान जानवरों पर होने वाले किसी भी तरह के अत्याचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था. इस कानून को लाने का मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. साल दो हज़ार तीन में इस कानून में संशोधन किया गया जिसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम दो हज़ार दो रख दिया गया. इसमें दंड और और जुर्माना को और भी कठोर कर दिया गया है. एक. प्रिवेंशन ऑन क्रूशियल एनिमल एक्ट एक हज़ार नौ सौ साठकी धारा ग्यारह के अनुसार भारत में किसी भी पालतू जानवर की मौत उसे छोड़ने, प्रताड़ित करने, भूखा प्यासा रखने के होती है तो आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है. ऐसी परिस्थिति में पालतू जानवर के मालिक पर जुर्माना हो सकता है. और अगर तीन महीने के अंदर दूसरी बार ऐसा ही होता है तो जानवर के मालिक पर जुर्माने के साथ तीन महीने तक की जेल भी हो सकती है. दो. आईपीसी की धारा चार सौ अट्ठाईस और चार सौ उनतीस के किसी भी जानवर को जहर देकर या किसी और तरीके से जान से मारा गया या उसे कष्ट दिया तो दोषी तो दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है. तीन. किसी भी जानवर, चाहे वह पालतू ही क्यों न हो उसे लंबे समय तक लोहे की सांकर या किसी भारी रस्सी से बांधकर रखना अपराध की श्रेणी में आता है. इसके अलावा अगर आप अपने पालतू जानवर को घर के बाहर नहीं निकालते तो यह भी कैद माना जाता है. ऐसी परिस्थिति में तीन माह की जेल और जुर्माना हो सकता है. चार. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बहत्तर की धारा सोलह के अनुसार किसी भी जंगली पक्षियों या सरीसृपों को नुकसान पहुंचाना या उनके घोंसलों को नष्ट करना अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसा करने पर व्यक्ति को तीन से सात साल की जेल और पच्चीस,शून्य रुपयापये का जुर्माना हो सकता है. एक. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में छयासठ धाराएं और छः अनुसूचियां हैं. इन अनुसूचियों में पशु-पक्षियों की सभी प्रजातियों को संरक्षण प्रदान किया गया है. दो. अनुसूची-एक और दो के तहत जंगली जानवरों और पक्षियों को सुरक्षा प्रदान की जाती है और इस नियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को सजा का प्रावधान दिया जाता है. तीन. वहीं अनुसूची तीन और चार भी जंगली जानवरों और पक्षियों को संरक्षण देते हैं लेकिन जिन जानवरों को रखा गया है उनके साथ किए गए अपराध पर सजा का प्रावधान काफी कम हैं. चार. अनुसूची पाँच में उन जानवरों को रखा गया है जिसका शिकार किया जा सकता है. जबकि अनुसूची छः में शामिल पौधों की खेती और रोपण पर रोक लगाई गई है. भारत में जानवरों के खिलाफ कितनी बार गंभीर अपराध दर्ज किए जा चुके हैं? कैग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से दो हज़ार बीस-इक्कीस के बीच तीन एशियाई शेरों और तिहत्तर हाथियों के साथ तिरेसठ,शून्य से ज्यादा जानवरों की मौत रेलवे पटरियों पर टक्कर खाने से हुई है. कैग ने रिपोर्ट 'परफॉर्मेंस ऑडिट ऑन डिरेलमेंट इन इंडियन रेलवे' में कहा है कि रेलवे को यह कन्फर्म करना चाहिए कि उन गाइडलाइंस का सख्ती से पालन हो रहा है जिन्हें जानवरों की मौत को रोकने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय ने जारी किया था. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दी गई सलाह ही इन आंकड़ों में कमी ला सकती है. कैग की रिपोर्ट के अनुसार इन तीन सालों में तिहत्तर हाथियों और चार शेरों सहित तिरेसठ,तीन सौ पैंतालीस जानवर ट्रेन की पटरियों पर आकर मौत के घाट उतर चुके हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में साल दो हज़ार बीस में हाथी और भालू के हमले से एक सौ सैंतीस लोगों की हुई है. जब दो सौ इक्यासी लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. बीते दस सालों में इस राज्य में कम से कम दो सौ चार जंगली हाथी अलग-अलग कारणों से मारे गए. साल दो हज़ार अट्ठारह में ही सत्रह हाथी की मौत हुई, जिसमें चार नर हाथी हैं. वहीं साल दो हज़ार अट्ठारह में तैंतीस भालुओं की मौत हुई है. इसके अलावा एक सफेद शेर और तेन्दुआ की भी मौत प्रदेश के जंगलों में हुई.
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार देश में बेरोजगारी दर में वृद्धि को लेकर भाजपा एवं आरएसएस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि केंद्र की राजग सरकार की रुचि बस देश के कुछ उद्योगपतियों की रक्षा करने में है। नफरत की राजनीति पर हमारा प्यार भारी होगा। नफरत की राजनीति पर हमारा प्यार भारी होगा। भारत जोड़ो यात्रा के नौवें दिन करुणागपल्ली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि दुनिया का दूसरा सबसे धनी व्यक्ति इस देश के एक नेता का घनिष्ठ है। उन्होंने कहा, "मैं आपसे एक सरल प्रश्न पूछता हूं। यदि भारत में इस दुनिया का दूसरा सबसे धनी व्यक्ति है तो हमारे यहां बेरोजगारी की ऊंची दरों में एक क्यों है? यात्रा का शाम का चरण चावरा बस स्टैंड से शुरू हुआ जिसमें गांधी के साथ हजारों लोग थे। वे करुणागपल्ली तक गये। सुबह में यह यात्रा पोलाथोडू से प्रारंभ हुई थी। कांग्रेस का 3,570 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुआ था और जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगा।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार देश में बेरोजगारी दर में वृद्धि को लेकर भाजपा एवं आरएसएस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि केंद्र की राजग सरकार की रुचि बस देश के कुछ उद्योगपतियों की रक्षा करने में है। नफरत की राजनीति पर हमारा प्यार भारी होगा। नफरत की राजनीति पर हमारा प्यार भारी होगा। भारत जोड़ो यात्रा के नौवें दिन करुणागपल्ली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि दुनिया का दूसरा सबसे धनी व्यक्ति इस देश के एक नेता का घनिष्ठ है। उन्होंने कहा, "मैं आपसे एक सरल प्रश्न पूछता हूं। यदि भारत में इस दुनिया का दूसरा सबसे धनी व्यक्ति है तो हमारे यहां बेरोजगारी की ऊंची दरों में एक क्यों है? यात्रा का शाम का चरण चावरा बस स्टैंड से शुरू हुआ जिसमें गांधी के साथ हजारों लोग थे। वे करुणागपल्ली तक गये। सुबह में यह यात्रा पोलाथोडू से प्रारंभ हुई थी। कांग्रेस का तीन,पाँच सौ सत्तर किलोग्राममीटर लंबा पैदल मार्च सात सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुआ था और जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगा।
रांची (ब्यूरो): किसी भी शहर के चौक-चौराहे वहां की पहचान होते हैैं, लेकिन झारखंड का अलग गठन हुए 22 साल बीत जाने के बाद भी राजधानी रांची के चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका है। राजधानी के बदहाल चौक-चौराहों को खूबसूरत बनाने की योजना 2015 से ही बन रही है। एक-दो चौराहों का सौंदर्यीकरण किया भी गया, लेकिन अधिकतर चौराहे आज भी बदहाल हंै, लेकिन अब इन्हीं बदहाल चौराहों का नामकरण झारखंड के शहीदों के नाम पर रखने की चर्चा गर्म है। हालांकि यह योजना जेएमएम की है, लेकिन रांची नगर के सहयोग से ही इस काम को संपादित करने का निर्णय लिया गया है। योजना के तहत राजधानी के वैसे चौराहे जो गुमनाम हैं या जिन्हें कोई नाम नहीं दिया गया उन चौराहों का नामकरण शहीदों के नाम पर किया जाएगा। इसी चरण में डोरंडा में नए चौक का नामकरण स्व विनोद बिहारी महतो के नाम पर रखा गया है। बदहाल चौक-चौराहों को दुरुस्त करने के लिए रांची नगर निगम ने योजना तैयार की थी। 2021 में इस काम के लिए एजेंसी का भी चयन कर लिया गया था, लेकिन इस एक साल से अधिक का समय बीत गया इस दिशा में पहल तक नहीं हुई है। नई व्यवस्था के तहत एजेंसियों को ही चौराहों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ, रख-रखाव, हाई मास्ट लाइट का भी मेंटेनेंस करना था, लेकिन हालत यह है कि कई चौराहों के हाई मास्ट लाइट ज्यादातर बंद ही रहते हैं। अरगोड़ा चौक, पिस्का मोड़, पिस्का मोड़, राजेंद्र चौक, मेकन चौक, एजी मोड़, हिनू चौक, अंबेडकर चौक, सिरमटोली चौक, शहीद चौक, कोकर चौक, बूटी मोड़, अल्बर्ट एक्का चौक, कचहरी चौक, जेल चौक, न्यूक्लियस मॉल चौक, लालपुर चौक और डंगराटोली चौक, दुर्गा सोरेन चौक, जेल चौक, रांची तालाब, कर्बला चौक राजभवन चौक, बूटी मोड़ चौक व अन्य चौराहों का ब्यूटिफिकेशन, फाउंटेन लगाने और ग्रीनरी करने का दावा किया गया था। इसमें सिर्फ राजेंद्र चौक पर ही कुछ काम हुआ है, बाकि आज भी बदहाल हैं। नगर निगम ने इन चौराहों को संवारने के लिए प्राइवेट कंपनियों को जिम्मा दिया था, लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होने से काम नहीं हुआ। सुजाता चौक राजधानी के हृदयस्थली में बसा हुआ है। शहर के बीचोबीच होने के बाद भी यह चौराहा पूरी तरह बदहाल है। इस चौराहे को लाला लाजपत राय चौक के नाम से भी जाना जाता है। यह चौराहा बूरी तरह क्षतिग्रस्त है। आलम यह है कि यहां ट्रैफिक पुलिस को खड़ा होने के लिए भी ठीक से जगह तक नहीं है। मुंडा चौक की हालत भी काफी दयनीय हो चुकी है। यहां पर तरह-तरह के झंडे तो नजर आते हैं, लेकिन इसका ब्यूटीफिकेशन करने की कोई जिम्मेवारी नहीं लेता। यहां तक की इस चौराहे के आस-पास मास्टलाइट भी नहीं लगा हैै। कर्बला चौक और भी ज्यादा बदहाल हालत में है। इस चौराहे का भी सौंदर्यीकरण होना था, लेकिन फिलहाल वह भी ठंडे बस्ते में है। कर्बला चौक के आस-पास काफी भीड़-भाड़ वाला इलाका है। इसका ब्यूटिफिकेशन बहुत जरूरी है। किशोर सिंह यादव चौक काफी प्रमुख चौराहा है। यहां से होकर हर मंत्री, विधायक और अधिकारी का काफिला गुजरता है, लेकिन इस चौराहे को दुरुस्त करने की कोई सुध नहीं ले रहा। यहां पर लगी मास्ट लाइट ज्यादातर समय बंद ही रहती है। चौराहों को सौंदर्यीकरण करने की दिशा में काम चल रहा है। जल्द ही बैठक कर चौक-चौराहों को दुरुस्त करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
रांची : किसी भी शहर के चौक-चौराहे वहां की पहचान होते हैैं, लेकिन झारखंड का अलग गठन हुए बाईस साल बीत जाने के बाद भी राजधानी रांची के चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका है। राजधानी के बदहाल चौक-चौराहों को खूबसूरत बनाने की योजना दो हज़ार पंद्रह से ही बन रही है। एक-दो चौराहों का सौंदर्यीकरण किया भी गया, लेकिन अधिकतर चौराहे आज भी बदहाल हंै, लेकिन अब इन्हीं बदहाल चौराहों का नामकरण झारखंड के शहीदों के नाम पर रखने की चर्चा गर्म है। हालांकि यह योजना जेएमएम की है, लेकिन रांची नगर के सहयोग से ही इस काम को संपादित करने का निर्णय लिया गया है। योजना के तहत राजधानी के वैसे चौराहे जो गुमनाम हैं या जिन्हें कोई नाम नहीं दिया गया उन चौराहों का नामकरण शहीदों के नाम पर किया जाएगा। इसी चरण में डोरंडा में नए चौक का नामकरण स्व विनोद बिहारी महतो के नाम पर रखा गया है। बदहाल चौक-चौराहों को दुरुस्त करने के लिए रांची नगर निगम ने योजना तैयार की थी। दो हज़ार इक्कीस में इस काम के लिए एजेंसी का भी चयन कर लिया गया था, लेकिन इस एक साल से अधिक का समय बीत गया इस दिशा में पहल तक नहीं हुई है। नई व्यवस्था के तहत एजेंसियों को ही चौराहों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ, रख-रखाव, हाई मास्ट लाइट का भी मेंटेनेंस करना था, लेकिन हालत यह है कि कई चौराहों के हाई मास्ट लाइट ज्यादातर बंद ही रहते हैं। अरगोड़ा चौक, पिस्का मोड़, पिस्का मोड़, राजेंद्र चौक, मेकन चौक, एजी मोड़, हिनू चौक, अंबेडकर चौक, सिरमटोली चौक, शहीद चौक, कोकर चौक, बूटी मोड़, अल्बर्ट एक्का चौक, कचहरी चौक, जेल चौक, न्यूक्लियस मॉल चौक, लालपुर चौक और डंगराटोली चौक, दुर्गा सोरेन चौक, जेल चौक, रांची तालाब, कर्बला चौक राजभवन चौक, बूटी मोड़ चौक व अन्य चौराहों का ब्यूटिफिकेशन, फाउंटेन लगाने और ग्रीनरी करने का दावा किया गया था। इसमें सिर्फ राजेंद्र चौक पर ही कुछ काम हुआ है, बाकि आज भी बदहाल हैं। नगर निगम ने इन चौराहों को संवारने के लिए प्राइवेट कंपनियों को जिम्मा दिया था, लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होने से काम नहीं हुआ। सुजाता चौक राजधानी के हृदयस्थली में बसा हुआ है। शहर के बीचोबीच होने के बाद भी यह चौराहा पूरी तरह बदहाल है। इस चौराहे को लाला लाजपत राय चौक के नाम से भी जाना जाता है। यह चौराहा बूरी तरह क्षतिग्रस्त है। आलम यह है कि यहां ट्रैफिक पुलिस को खड़ा होने के लिए भी ठीक से जगह तक नहीं है। मुंडा चौक की हालत भी काफी दयनीय हो चुकी है। यहां पर तरह-तरह के झंडे तो नजर आते हैं, लेकिन इसका ब्यूटीफिकेशन करने की कोई जिम्मेवारी नहीं लेता। यहां तक की इस चौराहे के आस-पास मास्टलाइट भी नहीं लगा हैै। कर्बला चौक और भी ज्यादा बदहाल हालत में है। इस चौराहे का भी सौंदर्यीकरण होना था, लेकिन फिलहाल वह भी ठंडे बस्ते में है। कर्बला चौक के आस-पास काफी भीड़-भाड़ वाला इलाका है। इसका ब्यूटिफिकेशन बहुत जरूरी है। किशोर सिंह यादव चौक काफी प्रमुख चौराहा है। यहां से होकर हर मंत्री, विधायक और अधिकारी का काफिला गुजरता है, लेकिन इस चौराहे को दुरुस्त करने की कोई सुध नहीं ले रहा। यहां पर लगी मास्ट लाइट ज्यादातर समय बंद ही रहती है। चौराहों को सौंदर्यीकरण करने की दिशा में काम चल रहा है। जल्द ही बैठक कर चौक-चौराहों को दुरुस्त करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
नई दिल्ली। चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी OnePlus ने भारतीय बाजार में अपना लेटेस्ट फोन OnePlus 3T लॉन्च कर दिया है। दिल्ली में आयोजित लॉन्चिंग ईवेंट में कंपनी ने इस जबर्दस्त फोन को भारत में उतारा है। OnePlus ने फोन के दो वेरिएंट उतारे हैं। पहला है 64 जीबी मैमोरी वाला वेरिएंट, जिसकी कीमत 29,999 रुपए है। वहीं 128 जीबी मैमोरी वाले वेरिएंट की कीमत 34,999 रुपए है। फोन की बिक्री 14 दिसंबर से शुरू होगी। कंपनी ने इसके लिए ईकॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया से करार किया है। यहां पर यह फोन एक्स्क्लूसिव रूप से उपलब्ध होगा। OnePlus ने बताया कि यह फोन भारत में ही तैयार होगा। इंटरनेशनल मार्केट में यह फोन पिछले महीने लॉन्च किया गया था। फिलहाल इसकी बिक्री अमेरिका और ब्रिटेन सहित यूरोप के मार्केट में जारी है। - OnePlus 3 और OnePlus 3टी से मुकाबला करें तो इसमें तेज क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 821 प्रोसेसर है जबकि ओरिजिनल में स्नैपड्रैगन 820 प्रोसेसर है। - नया फोन 64 जीबी और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट में आता है जबकि वनप्लस 3 सिर्फ 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट में ही मिलता है। - कंपनी ने फ्रंट कैमरे का रिज़ॉल्यूशन को दोगुना करते हुए वनप्लस 3टी में सैमसंग 3पी8एसपी के साथ 1 माइक्रोन पिक्सल का 16 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा दिया है। - जबकि OnePlus 3 में सोनी आईएमएक्स179 के साथ 1. 4 माइक्रोन पिक्सल का 8 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा है। - इसके अलावा वनप्लस 3टी में 3400 एमएएच की बड़ी बैटरी है जबकि वनप्लस 3 में 3000 एमएएच की बैटरी है। - होम बटन में फिंगरप्रिंट सेंसर है और कैपेसिटिव हार्डवेयर बटन के अलावा अलर्ट स्लाइडर भी है।
नई दिल्ली। चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी OnePlus ने भारतीय बाजार में अपना लेटेस्ट फोन OnePlus तीनT लॉन्च कर दिया है। दिल्ली में आयोजित लॉन्चिंग ईवेंट में कंपनी ने इस जबर्दस्त फोन को भारत में उतारा है। OnePlus ने फोन के दो वेरिएंट उतारे हैं। पहला है चौंसठ जीबी मैमोरी वाला वेरिएंट, जिसकी कीमत उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए है। वहीं एक सौ अट्ठाईस जीबी मैमोरी वाले वेरिएंट की कीमत चौंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए है। फोन की बिक्री चौदह दिसंबर से शुरू होगी। कंपनी ने इसके लिए ईकॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया से करार किया है। यहां पर यह फोन एक्स्क्लूसिव रूप से उपलब्ध होगा। OnePlus ने बताया कि यह फोन भारत में ही तैयार होगा। इंटरनेशनल मार्केट में यह फोन पिछले महीने लॉन्च किया गया था। फिलहाल इसकी बिक्री अमेरिका और ब्रिटेन सहित यूरोप के मार्केट में जारी है। - OnePlus तीन और OnePlus तीनटी से मुकाबला करें तो इसमें तेज क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ इक्कीस प्रोसेसर है जबकि ओरिजिनल में स्नैपड्रैगन आठ सौ बीस प्रोसेसर है। - नया फोन चौंसठ जीबी और एक सौ अट्ठाईस जीबी स्टोरेज वेरिएंट में आता है जबकि वनप्लस तीन सिर्फ चौंसठ जीबी स्टोरेज वेरिएंट में ही मिलता है। - कंपनी ने फ्रंट कैमरे का रिज़ॉल्यूशन को दोगुना करते हुए वनप्लस तीनटी में सैमसंग तीनपीआठएसपी के साथ एक माइक्रोन पिक्सल का सोलह मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा दिया है। - जबकि OnePlus तीन में सोनी आईएमएक्सएक सौ उन्यासी के साथ एक. चार माइक्रोन पिक्सल का आठ मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा है। - इसके अलावा वनप्लस तीनटी में तीन हज़ार चार सौ एमएएच की बड़ी बैटरी है जबकि वनप्लस तीन में तीन हज़ार एमएएच की बैटरी है। - होम बटन में फिंगरप्रिंट सेंसर है और कैपेसिटिव हार्डवेयर बटन के अलावा अलर्ट स्लाइडर भी है।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! दूध पीना सेहत के लिए फायदेमंद हैं, यह बात हम सभी जानते हैं. कुछ लोगों को हमेशा दूध में क्या डालकर पीना चाहिए ? जैसे सवाल करते देखा जाता है. कुछ लोगों कि सलह होती है कि फीका दूध पीने के फायदे ज्यादा होते हैं. दूध हल्दी गुड़ के फायदे के बारे में आप भी जानते ही होंगे. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे भी आपको जानना चाहिए. दूध एक ऐसा डेयरी पदार्थ हे जो शरीर को सभी पोषक तत्व देने का काम करता है. दूध का सेवन किसी भी बीमारी में किया जा सकता है. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे के बारे में हम यहां कुछ खास बाते बता रहे हैं. वजन कम करने के लिए अगर आप वेट लॉस डाइट प्लान ले रहे हैं तो आपको दूध में गुड़ मिलाकर पीना चाहिए. दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. रात के समय दूध में गुड़ मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है. अच्छी नींद मेटॉबालिक रेट को तेज करने का काम करती है. शररी में अगर खून की कमी है तो ऐसी डाइट का सेवन करना चाहिए जो हीमोग्लोबिन को बढ़ाने का काम कर सके. गुड़ में हिमोग्लोबिन बढ़ाने के गुण पाये जाते हैं. रोजाना दूध में गुड़ मिलाकर पीने से एनिमिया का खतरा नहीं होता है. एनिमिया की बीमारी में भी दूध में गुड़ मिलाकर पीना फायदेमंद होता है. बढ़ते प्रदूषण की वजह से स्किन केयर थोड़ा मुश्किल हो गया है. लेकिन अगर आप रोजाना दूध में गुड़ मिलाकर पीते हैं तो आपकी स्किन हमेशा हेल्दी रहेगी. बढ़ती उम्र के कारण त्वचा में आने वाले बदलाव को भी दूध में गुड़ डालकर पीने से फायदा मिलता है. दूध में गुड़ डालकर पीने से पीरियड्स के दर्द को दूर किया जा सकता है. हल्के गुनगुने दूध में गुड़ मिलाकर पीरियड्स में पीना चाहिए. गुड़ और दूध पीने से शरीर में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है. शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ऐसे फूड की जरूरत होती है, जो शरीर के अन्य सभी अंगों को ऊर्जा पहुंचा सके. अगर आप डेली डाइट में दूध में गुड़ डालकर पीने को शामिल करते हैं, तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. पाचन की किसी भी समस्या से बचने के लिए दूध में गुड़ डालकर पीना चाहिए. क्योंकि दूध डेयर उत्पाद होने के नाते पेट में हेल्दी बैक्टिरिया बनने में मदद करता है, तो गुड़ पाचन के लिए जरूरी एंजाइम को बनने में मदद करता है. एक्सरसाइज, खेल या काम के कारण शरीर में होने वाले दर्द से बचने के लिए भी दूध में गुड़ डालकर पीना चाहिए. अक्सर दिन भर की थकान के कारण रात में शरीर में दर्द की समस्या होती है. इससे बचने के लिए दूध में गुड़ डालकर पीना फायदेमंद होता है. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे तो आप जान ही गये हैं. लेकिन दूध हल्दी गुड़ के फायदे भी आपको जानना चाहिए. अगर आप रोजाना की डाइट में दुध हल्दी गुड़ को शामिल करते हैं तो कैंसर, हृदय रोग, हार्ट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचे रहते हैं. दूध गर्म पीना चाहिए या ठंडा ? हेल्थ के लिए क्या होता है सही ? दूध पीने के बाद इन 5 खाद्य पदार्थों का सेवन होता है खतरनाक.
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! दूध पीना सेहत के लिए फायदेमंद हैं, यह बात हम सभी जानते हैं. कुछ लोगों को हमेशा दूध में क्या डालकर पीना चाहिए ? जैसे सवाल करते देखा जाता है. कुछ लोगों कि सलह होती है कि फीका दूध पीने के फायदे ज्यादा होते हैं. दूध हल्दी गुड़ के फायदे के बारे में आप भी जानते ही होंगे. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे भी आपको जानना चाहिए. दूध एक ऐसा डेयरी पदार्थ हे जो शरीर को सभी पोषक तत्व देने का काम करता है. दूध का सेवन किसी भी बीमारी में किया जा सकता है. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे के बारे में हम यहां कुछ खास बाते बता रहे हैं. वजन कम करने के लिए अगर आप वेट लॉस डाइट प्लान ले रहे हैं तो आपको दूध में गुड़ मिलाकर पीना चाहिए. दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. रात के समय दूध में गुड़ मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है. अच्छी नींद मेटॉबालिक रेट को तेज करने का काम करती है. शररी में अगर खून की कमी है तो ऐसी डाइट का सेवन करना चाहिए जो हीमोग्लोबिन को बढ़ाने का काम कर सके. गुड़ में हिमोग्लोबिन बढ़ाने के गुण पाये जाते हैं. रोजाना दूध में गुड़ मिलाकर पीने से एनिमिया का खतरा नहीं होता है. एनिमिया की बीमारी में भी दूध में गुड़ मिलाकर पीना फायदेमंद होता है. बढ़ते प्रदूषण की वजह से स्किन केयर थोड़ा मुश्किल हो गया है. लेकिन अगर आप रोजाना दूध में गुड़ मिलाकर पीते हैं तो आपकी स्किन हमेशा हेल्दी रहेगी. बढ़ती उम्र के कारण त्वचा में आने वाले बदलाव को भी दूध में गुड़ डालकर पीने से फायदा मिलता है. दूध में गुड़ डालकर पीने से पीरियड्स के दर्द को दूर किया जा सकता है. हल्के गुनगुने दूध में गुड़ मिलाकर पीरियड्स में पीना चाहिए. गुड़ और दूध पीने से शरीर में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है. शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ऐसे फूड की जरूरत होती है, जो शरीर के अन्य सभी अंगों को ऊर्जा पहुंचा सके. अगर आप डेली डाइट में दूध में गुड़ डालकर पीने को शामिल करते हैं, तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. पाचन की किसी भी समस्या से बचने के लिए दूध में गुड़ डालकर पीना चाहिए. क्योंकि दूध डेयर उत्पाद होने के नाते पेट में हेल्दी बैक्टिरिया बनने में मदद करता है, तो गुड़ पाचन के लिए जरूरी एंजाइम को बनने में मदद करता है. एक्सरसाइज, खेल या काम के कारण शरीर में होने वाले दर्द से बचने के लिए भी दूध में गुड़ डालकर पीना चाहिए. अक्सर दिन भर की थकान के कारण रात में शरीर में दर्द की समस्या होती है. इससे बचने के लिए दूध में गुड़ डालकर पीना फायदेमंद होता है. दूध में गुड़ डालकर पीने के फायदे तो आप जान ही गये हैं. लेकिन दूध हल्दी गुड़ के फायदे भी आपको जानना चाहिए. अगर आप रोजाना की डाइट में दुध हल्दी गुड़ को शामिल करते हैं तो कैंसर, हृदय रोग, हार्ट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचे रहते हैं. दूध गर्म पीना चाहिए या ठंडा ? हेल्थ के लिए क्या होता है सही ? दूध पीने के बाद इन पाँच खाद्य पदार्थों का सेवन होता है खतरनाक.
Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना की अगुवाई वाली पीठ ने गुजरात सरकार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ताओं से 11 दोषियों को मामले में पक्ष बनाने के लिए कहा। मामले की दो हफ्ते बाद फिर सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा, "हमें देखना होगा कि इस मामले में दिमाग का प्रयोग हुआ था या नहीं। इस अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश नहीं दिया, लेकिन केवल राज्य को नीति के अनुसार छूट पर विचार करने के लिए कहा। Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो कौन हैं और 2002 में उनके साथ क्या हुआ था? 27 फरवरी, 2002 को, साबरमती एक्सप्रेस से अयोध्या से लौट रहे तीर्थयात्रियों और कारसेवकों की बॉगी में आग लगा दी गई। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई। इलाके में हिंसा भड़कने के बाद, बिलकिस दाहोद जिले के राधिकपुर गांव से भाग गई। बिलकिस के साथ उनकी बेटी सालेहा, जो उस समय साढ़े तीन साल की थी, और उनके परिवार के 15 अन्य सदस्य थे। 3 मार्च 2002 को परिजन छप्परवाड़ गांव पहुंचे। चार्जशीट के मुताबिक, उन पर हंसिया, तलवार और लाठियों से लैस करीब 20-30 लोगों ने हमला किया था। हमलावरों में 11 आरोपी युवक भी थे। बिलकिस, उसकी मां और तीन अन्य महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और उन्हें बेरहमी से पीटा गया। राधिकपुर गांव के मुसलमानों के 17 सदस्यीय समूह में से आठ मृत पाए गए, छह लापता थे। हमले में केवल बिलकिस, एक आदमी और एक तीन साल का बच्चा बच गया। हमले के बाद कम से कम तीन घंटे तक बिलकिस बेहोश रही। होश में आने के बाद, उसने एक आदिवासी महिला से कपड़े उधार लिए और एक होमगार्ड से मिली जो उसे लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन ले गया। उसने हेड कांस्टेबल सोमाभाई गोरी के पास शिकायत दर्ज कराई। गोधरा राहत शिविर पहुंचने के बाद ही बिलकिस को मेडिकल जांच के लिए सार्वजनिक अस्पताल ले जाया गया। बाद में मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया। यह भी पढ़ेंः
Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को बिलकिस बानो मामले में ग्यारह दोषियों की छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना की अगुवाई वाली पीठ ने गुजरात सरकार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ताओं से ग्यारह दोषियों को मामले में पक्ष बनाने के लिए कहा। मामले की दो हफ्ते बाद फिर सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा, "हमें देखना होगा कि इस मामले में दिमाग का प्रयोग हुआ था या नहीं। इस अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश नहीं दिया, लेकिन केवल राज्य को नीति के अनुसार छूट पर विचार करने के लिए कहा। Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो कौन हैं और दो हज़ार दो में उनके साथ क्या हुआ था? सत्ताईस फरवरी, दो हज़ार दो को, साबरमती एक्सप्रेस से अयोध्या से लौट रहे तीर्थयात्रियों और कारसेवकों की बॉगी में आग लगा दी गई। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई। इलाके में हिंसा भड़कने के बाद, बिलकिस दाहोद जिले के राधिकपुर गांव से भाग गई। बिलकिस के साथ उनकी बेटी सालेहा, जो उस समय साढ़े तीन साल की थी, और उनके परिवार के पंद्रह अन्य सदस्य थे। तीन मार्च दो हज़ार दो को परिजन छप्परवाड़ गांव पहुंचे। चार्जशीट के मुताबिक, उन पर हंसिया, तलवार और लाठियों से लैस करीब बीस-तीस लोगों ने हमला किया था। हमलावरों में ग्यारह आरोपी युवक भी थे। बिलकिस, उसकी मां और तीन अन्य महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और उन्हें बेरहमी से पीटा गया। राधिकपुर गांव के मुसलमानों के सत्रह सदस्यीय समूह में से आठ मृत पाए गए, छह लापता थे। हमले में केवल बिलकिस, एक आदमी और एक तीन साल का बच्चा बच गया। हमले के बाद कम से कम तीन घंटे तक बिलकिस बेहोश रही। होश में आने के बाद, उसने एक आदिवासी महिला से कपड़े उधार लिए और एक होमगार्ड से मिली जो उसे लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन ले गया। उसने हेड कांस्टेबल सोमाभाई गोरी के पास शिकायत दर्ज कराई। गोधरा राहत शिविर पहुंचने के बाद ही बिलकिस को मेडिकल जांच के लिए सार्वजनिक अस्पताल ले जाया गया। बाद में मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया। यह भी पढ़ेंः