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संजय जोठे (Sanjay Jothe) सनातनी षड्यंत्रकार जब अध्यात्म और धर्म की व्याख्या करते हैं तब वे चर्चा और प्रचार के लिए अपने पवित्र पुरुषों को नहीं चुनते। वे उन्हें तहखानों में सुरक्षित रखते हैं। धर्म प्रचार शास्त्रार्थ आदि के लिए वे आदि शंकर या तुलसीदास को नहीं चुनते बल्कि वे बुद्ध, गोरख, रविदास और कबीर को चुनते हैं। मैं यहां आदि शंकर या तुलसी का अपमान नहीं कर रहा हूँ, जिन लोगों को उनकी शिक्षा और उनका अनुशासन अच्छा लगता है वे बेशक उसमे प्रसन्न रहें। उन्हें शुभकामनायें। लेकिन मजा ये है कि आधुनिक विज्ञान, विज्ञानवाद, आधुनिकता और पश्चिमी सभ्यता के सामने स्वयं को पिछड़ा और अन्धविश्वासी अनुभव करते हुए और उनका सामना करते हुए ये भारतीय पंडित और बाबा लोग शंकर या तुलसी को सामने नहीं करेंगे, वे बुद्ध और कबीर को सामने करेंगे, उनपर अपना दावा करेंगे। वही बुद्ध और कबीर - जिन्हें इन महानुभावों ने खुद ही मिटा डालना चाहा था अपनी जमीन पर। ये ठीक वही चाल है जिसमे भक्तमंडली दंगों के समय दलितों आदिवासियों को लड़ने मरने के लिए आगे कर देती है। भारतीय दार्शनिक गुरु और साहित्यकार भी हमेशा से यही करते आये हैं। वे ग्लोबल आधुनिकता की लड़ाई में शंकर, तुलसी आदि को बचाकर रखेंगे और बुद्ध, कबीर, गोरख रविदास को आगे कर देंगे। फिर लड़ाई खत्म होते ही शंकर, तुलसी को वापस निकाल लेंगे और बुद्ध कबीर गोरख इत्यादि को फिर से इतिहास में दफन कर देंगे। ये पुरानी लीला है इस देश की। इसीलिये यहां कुछ नहीं बदलता। "यही बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी"। और जब पुराना मिटता नहीं तो नया बनता नहीं, और हम सुधरते नहीं। पिछले सौ सालो का प्रतिशील भारतीय आध्यामिक साहित्य या हिंदी साहित्य देखिये। खासकर वो साहित्य जो पश्चिमी लोगों से सम्पर्क के बाद उनसे बराबरी करने के लिए लिखा गया है। उनके सामने महान बनने के लिए शंकर और तुलसी की बजाय बुद्ध और कबीर और संतों पर ही फोकस किया गया है और इन क्रांतिकारियों ने वैदिक पाखण्ड का जो विरोध किया है उसकी व्याख्या ऐसे की गयी है जैसे कि कबीर गोरख रविदास और बुद्ध भारत के मुख्यधारा के धर्म और धार्मिक विमर्श के वाहक हैं। इस तरह ये पश्चिमी समाज के सामने कबीर और बुद्ध की क्रान्ति की मशाल में अपने सनातन अंधकार को छुपाते रहे हैं। और सत्तर के दशक तक आते आते तो हद्द ही हो गयी। ओशो और उनकी नकल मारने वाले बाबाओं ने तो बुद्ध और कबीर के मुंह से पूरा वेदांत ही बुलवा लिया। उसके बाद परिणाम सामने है। आजकल के जीवित बाबा बुद्ध और कबीर के संपूर्ण ब्राह्मणीकरण के प्रति इतने आश्वस्त हो गए हैं कि वे अब इनको बाईपास करके पतंजलि, आदियोगी सहित सीधे मिथकों को चर्चा में लाने लगे हैं। मिथकों के अन्धविश्वास की स्वीकृति का कुल मतलब ये है कि जनमानस से बुद्ध गोरख रविदास और कबीर पूरी तरह पोंछ डाले गए हैं। ये ओशो स्टाइल बाबाओं की गजब की सफलता है। बुद्ध पुनर्जन्म, आत्मा, आत्म और परमात्मा को नकारते हैं लेकिन ओशो ने बुद्ध की व्याख्या करते हुए सम्यक स्मृति अर्थात सम्मासति को आत्मस्मरण कहा जो एकदम गलत अनुवाद है। बुद्ध के शून्य और शंकर के पूर्ण को एक ही कहा जो सरासर साजिश है। असल में पश्चिम के सामने भारत की सामाजिक नैतिकता और धर्म बहुत दरिद्र नजर आते हैं। ऐसे में पश्चिम के सामने स्वयं को महान साबित करने का भारतीय बाबाओं के पास एक ही उपाय है और वो हैं बुद्ध। इसीलिये भारत के राजनेता और बाबा लोग पश्चिम में बुद्ध का नाम जपते हैं और भारत लौटते ही वेदांत गाने लगते हैं। इस षड्यंत्र को समझना होगा हमें। जिन मित्रों को भारत के लिए नए धर्म की प्रस्तावना में थोड़ी भी रूचि हो वे इस चर्चा को खूब फैलाएं। संजय जोठे फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल फेलो हैं और लीड इंडिया फेलो हैं। मूलतः मध्यप्रदेेश से हैं। समाज कार्य में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से एम् ए के बाद ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय विकास में M.A. हैं और वर्तमान में TISS मुम्बई से पीएचडी कर रहे हैं। सामाजिक विकास के मुद्दों सहित पर पिछले 14 वर्षों से विभिन्न संस्थाओं के साथ कार्यरत है। ज्योतिबा फुले पर इनकी एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, और एक अन्य किताब प्रकाशनाधीन है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और ब्लॉग्स में बहुजन समाज और दलित विमर्श के मुद्दों पर शोध आधारित लेखन में संलग्न हैं।
संजय जोठे सनातनी षड्यंत्रकार जब अध्यात्म और धर्म की व्याख्या करते हैं तब वे चर्चा और प्रचार के लिए अपने पवित्र पुरुषों को नहीं चुनते। वे उन्हें तहखानों में सुरक्षित रखते हैं। धर्म प्रचार शास्त्रार्थ आदि के लिए वे आदि शंकर या तुलसीदास को नहीं चुनते बल्कि वे बुद्ध, गोरख, रविदास और कबीर को चुनते हैं। मैं यहां आदि शंकर या तुलसी का अपमान नहीं कर रहा हूँ, जिन लोगों को उनकी शिक्षा और उनका अनुशासन अच्छा लगता है वे बेशक उसमे प्रसन्न रहें। उन्हें शुभकामनायें। लेकिन मजा ये है कि आधुनिक विज्ञान, विज्ञानवाद, आधुनिकता और पश्चिमी सभ्यता के सामने स्वयं को पिछड़ा और अन्धविश्वासी अनुभव करते हुए और उनका सामना करते हुए ये भारतीय पंडित और बाबा लोग शंकर या तुलसी को सामने नहीं करेंगे, वे बुद्ध और कबीर को सामने करेंगे, उनपर अपना दावा करेंगे। वही बुद्ध और कबीर - जिन्हें इन महानुभावों ने खुद ही मिटा डालना चाहा था अपनी जमीन पर। ये ठीक वही चाल है जिसमे भक्तमंडली दंगों के समय दलितों आदिवासियों को लड़ने मरने के लिए आगे कर देती है। भारतीय दार्शनिक गुरु और साहित्यकार भी हमेशा से यही करते आये हैं। वे ग्लोबल आधुनिकता की लड़ाई में शंकर, तुलसी आदि को बचाकर रखेंगे और बुद्ध, कबीर, गोरख रविदास को आगे कर देंगे। फिर लड़ाई खत्म होते ही शंकर, तुलसी को वापस निकाल लेंगे और बुद्ध कबीर गोरख इत्यादि को फिर से इतिहास में दफन कर देंगे। ये पुरानी लीला है इस देश की। इसीलिये यहां कुछ नहीं बदलता। "यही बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी"। और जब पुराना मिटता नहीं तो नया बनता नहीं, और हम सुधरते नहीं। पिछले सौ सालो का प्रतिशील भारतीय आध्यामिक साहित्य या हिंदी साहित्य देखिये। खासकर वो साहित्य जो पश्चिमी लोगों से सम्पर्क के बाद उनसे बराबरी करने के लिए लिखा गया है। उनके सामने महान बनने के लिए शंकर और तुलसी की बजाय बुद्ध और कबीर और संतों पर ही फोकस किया गया है और इन क्रांतिकारियों ने वैदिक पाखण्ड का जो विरोध किया है उसकी व्याख्या ऐसे की गयी है जैसे कि कबीर गोरख रविदास और बुद्ध भारत के मुख्यधारा के धर्म और धार्मिक विमर्श के वाहक हैं। इस तरह ये पश्चिमी समाज के सामने कबीर और बुद्ध की क्रान्ति की मशाल में अपने सनातन अंधकार को छुपाते रहे हैं। और सत्तर के दशक तक आते आते तो हद्द ही हो गयी। ओशो और उनकी नकल मारने वाले बाबाओं ने तो बुद्ध और कबीर के मुंह से पूरा वेदांत ही बुलवा लिया। उसके बाद परिणाम सामने है। आजकल के जीवित बाबा बुद्ध और कबीर के संपूर्ण ब्राह्मणीकरण के प्रति इतने आश्वस्त हो गए हैं कि वे अब इनको बाईपास करके पतंजलि, आदियोगी सहित सीधे मिथकों को चर्चा में लाने लगे हैं। मिथकों के अन्धविश्वास की स्वीकृति का कुल मतलब ये है कि जनमानस से बुद्ध गोरख रविदास और कबीर पूरी तरह पोंछ डाले गए हैं। ये ओशो स्टाइल बाबाओं की गजब की सफलता है। बुद्ध पुनर्जन्म, आत्मा, आत्म और परमात्मा को नकारते हैं लेकिन ओशो ने बुद्ध की व्याख्या करते हुए सम्यक स्मृति अर्थात सम्मासति को आत्मस्मरण कहा जो एकदम गलत अनुवाद है। बुद्ध के शून्य और शंकर के पूर्ण को एक ही कहा जो सरासर साजिश है। असल में पश्चिम के सामने भारत की सामाजिक नैतिकता और धर्म बहुत दरिद्र नजर आते हैं। ऐसे में पश्चिम के सामने स्वयं को महान साबित करने का भारतीय बाबाओं के पास एक ही उपाय है और वो हैं बुद्ध। इसीलिये भारत के राजनेता और बाबा लोग पश्चिम में बुद्ध का नाम जपते हैं और भारत लौटते ही वेदांत गाने लगते हैं। इस षड्यंत्र को समझना होगा हमें। जिन मित्रों को भारत के लिए नए धर्म की प्रस्तावना में थोड़ी भी रूचि हो वे इस चर्चा को खूब फैलाएं। संजय जोठे फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल फेलो हैं और लीड इंडिया फेलो हैं। मूलतः मध्यप्रदेेश से हैं। समाज कार्य में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से एम् ए के बाद ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय विकास में M.A. हैं और वर्तमान में TISS मुम्बई से पीएचडी कर रहे हैं। सामाजिक विकास के मुद्दों सहित पर पिछले चौदह वर्षों से विभिन्न संस्थाओं के साथ कार्यरत है। ज्योतिबा फुले पर इनकी एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, और एक अन्य किताब प्रकाशनाधीन है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और ब्लॉग्स में बहुजन समाज और दलित विमर्श के मुद्दों पर शोध आधारित लेखन में संलग्न हैं।
हाल के वर्षों में युवा लोगों में से बेहद लोकप्रिय हैसाइप्रस समुद्र तट "निसी बीच"। समुद्र के पास होटल बहुत मांग में हैं। हर साल पूरे यूरोप के युवा लोग यहां आते हैं जो न केवल समुद्र में आराम करना चाहते हैं, बल्कि मस्ती करने के लिए भी चाहते हैं। समुद्र के साथ होटल सबसे सुविधाजनक हैंआराम के लिए वे न केवल बच्चों, उम्र के लोगों, बल्कि युवा लोगों के साथ जोड़ देंगे जो हमेशा स्थानीय समुद्र तट पर क्या हो रहा है, इसके बारे में हमेशा जागरूक रहना चाहते हैं। तथ्य यह है कि गर्मियों में समुद्र तट निसी बीच पार्टियों की जगह में बदल जाता है। गर्मी फोम डिस्को और डीजे के लिए एक समय है। यह इस कारण से है कि निसी बीच समुद्र तट पर होटलउन लोगों के बीच इतना लोकप्रिय है जो पहले से ही 16 हैं, लेकिन अभी तक 50 नहीं हैं। समुद्र के रहने से बेहतर क्या हो सकता है और घटनाओं के केंद्र में होने वाले सभी त्यौहारों में भाग ले सकता है। निसी बीच (होटल में स्थित हैनिकट निकटता, हम बाद में चर्चा करेंगे) अद्भुत नीले पानी और सफेद रेशम रेत। यहां, कोई भी ऊब जाएगा नहींः catamarans, केले, और पैराशूट हैं। मैं ध्यान रखना चाहता हूं कि खाड़ी का पूर्वी हिस्सा स्वयं ही हैनिसी बीच छोटा है, और इसलिए बच्चों के साथ छुट्टियों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। लेकिन हलचल पश्चिमी निसी बीच निश्चित रूप से अधिक सक्रिय और युवा पर्यटकों के लिए अपील करेगा। गर्मियों में, उच्च मौसम के दौरान, आने के लिए बेहतर हैसमय से पहले इस समय, समुद्र से एक हल्की हवा है, छुट्टियों को शांत गर्म पानी का आनंद मिलता है। और दोपहर तक दक्षिण-पश्चिम हवा, एक नियम के रूप में, लहरें उठाती है, जिस पर कूदना बहुत मजेदार होता है। आइया नापा में अच्छा मौसम कभी भी गर्मियों और सूरज से प्रसन्न होने वाले पर्यटकों को नहीं लाता है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए एक उत्कृष्ट जगह साइप्रस हो सकती है। होटल निसी बीच 4 * हमेशा पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह इसके फायदेमंद स्थान के कारण है। हर होटल का दावा नहीं कर सकता है,जो भूमध्य सागर के बहुत तट पर स्थित है। जटिल निसी बीच (साइप्रस) का अपना उष्णकटिबंधीय उद्यान है, जिसमें 100,000 वर्ग मीटर है। सबसे पहले, होटल उन छुट्टियों से अपील करेगा जो समुद्र तट पर अपनी छुट्टियां बिताने का इरादा रखते हैं, न कि पूल में, बस एक पत्थर समुद्र तट से फेंक देते हैं। यहां तक कि सबसे छोटे पर्यटक खुद से चलने में सक्षम होंगे। होटल निसी बीच (आइया नापा, साइप्रस) हैउत्कृष्ट आधारभूत संरचना। अपने क्षेत्र में एक अच्छा आराम के लिए आवश्यक सब कुछ है। और शहर के बहुत ही केंद्र में केवल कुछ किलोमीटर दूर। परिसर के पास कई कैफे, दुकानें, बार और रेस्तरां हैं। होटल निसी बीच (आइया नापा, साइप्रस) में कमरों की एक अच्छी संख्या है, जो 270 अपार्टमेंट्स द्वारा प्रस्तुत की जाती हैः परिसर के सभी अपार्टमेंट बनाये गये हैंभूमध्य शैली। मेहमान उज्ज्वल अंदरूनी और आरामदायक फर्नीचर पसंद करेंगे। सभी श्रेणियों के कमरे एयर कंडीशनिंग, हीटिंग, हेयर ड्रायर, सुरक्षित, सैटेलाइट टीवी, टेलीफोन, रेडियो, मिनी बार से सुसज्जित हैं। होटल 24 घंटे की सेवा संचालित करता है। कमरे दैनिक साफ कर रहे हैं। इसके अलावा हर दिन मिनी बार का स्टॉक भर जाता है और बाथरूम में डिटर्जेंट अपडेट होते हैं। जटिल निसी बीच (साइप्रस) में एक सम्मेलन कक्ष हैसभी प्रकार की घटनाओं को पूरा करने के लिए। अनुभवी होटल कर्मचारी किसी भी व्यावसायिक मीटिंग या अन्य कार्यक्रम को व्यवस्थित करने में मदद करेंगे। विभिन्न क्षमता के तीन हॉल हैं। उनमें से सबसे बड़ा 500 लोगों तक ले सकता है, और सबसे छोटा - 30 तक। होटल आधे बोर्ड का अभ्यास करता है। रेस्तरां पौष्टिक और विविध व्यंजन तैयार करता है। क्षेत्र में एक बच्चों का कमरा है, भ्रमण का आयोजन करने के लिए एक टेबल, एक एक्सचेंज ऑफिस, एक ब्यूटी सैलून, एक कपड़े धोने, कियोस्क, दुकानें, कार किराए पर लेना, पार्किंग। होटल में रहते हुए, पर्यटक जा सकते हैंखेल और स्वास्थ्य-सुधार जटिल। जिम और जिम, एक धूपघड़ी, सौना, एक भाप कमरे हैं। चूंकि निसी बीच एक साल का रिज़ॉर्ट है, इसलिए मेहमान इनडोर पूल से प्रसन्न होंगे, जिसका उपयोग नवंबर से अप्रैल तक किया जा सकता है, जब समुद्र अब प्रासंगिक नहीं है। आप अभी भी बॉडी केयर प्रक्रियाओं पर जा सकते हैं। गर्म अवधि में एक आउटडोर स्विमिंग पूल है, यह उन लोगों से अपील करेगा जो समुद्री स्नान को किनारे नहीं लेना चाहते हैं। टेनिस कोर्ट, मिनी-फुटबॉल और मिनी-गोल्फ कोर्ट और बास्केटबाल कोर्ट भी हैं। आउटडोर पूल में हर दिन एक्वा एरोबिक्स कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। आम तौर पर, हर कोई एक दिलचस्प व्यवसाय ढूंढ सकता है और ऊब नहीं सकता, समुद्र और समुद्र तट का उल्लेख न करें, जो आगंतुकों का मुख्य लक्ष्य है। समुद्र तट के पास निसी बीच में कई और परिसरों हैं, जिन्हें छुट्टियों के लिए भी एक विकल्प माना जा सकता है। वासोस निसी प्लाज 4 * (लघु संस्करण,"VASSOS Nissi Beach") - - एक होटल है कि अपने मेहमान एक इनडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल, सौना और जिम प्रदान करता है जो अक्सर हमारे हमवतन द्वारा प्रयोग किया जाता है। परिसर से 200 मीटर की दूरी पर एक पानी पार्क और समुद्र तट बस दो मिनट चलना है। गर्मी में आइया नापा का मौसम समुद्र के आराम के लिए अनुकूल है, लेकिन रिसॉर्ट ने साल भर का खिताब अर्जित किया है। तट पर स्थित, होटल वासोस निसी कर सकते हैंमनोरंजन के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनें। इसके लिए, परिसर में आपको जो भी चाहिए वह सब कुछ है। होटल के कमरों में एक खूबसूरत समुद्री दृश्य के साथ बालकनी हैं। सभी अपार्टमेंट मिनीबार, फ्लैट स्क्रीन टीवी और एयर कंडीशनिंग से सुसज्जित हैं। बाथरूम सभी आवश्यक टॉयलेटरीज़ और हेयरड्रायर से लैस हैं। होटल का अपना स्वाद है। हर सुबह एक पूर्ण अंग्रेजी नाश्ता परोसा जाता है। शाम को, पर्यटकों के लिए एक बार और एक रेस्तरां है। इसके अलावा, परिसर में मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो आपको ऊब नहीं पाएंगे। उन पर्यटकों के लिए जो अपने जीवन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैंखेल के बिना, एक टेनिस कोर्ट, एक फिटनेस रूम है। पेशेवर मालिश सेवाओं की पेशकश करेंगे जबकि एनिमेटर्स आपके बच्चों का ख्याल रखेंगे। आम तौर पर, होटल नया है और इसकी श्रेणी की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है। युवाओं की समीक्षा के अनुसार, बाकी यहां बहुत अच्छा है, खासकर सबसे नग्न समुद्र तट निसी बीच के निकट। होटल में 126 मानक हैं औरसुइट्स। बजट संख्या तीन लोगों तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें एक टीवी, एयर कंडीशनिंग, सुरक्षित, हेअर ड्रायर, मिनीबार है। इंटरनेट सेवाएं अतिरिक्त भुगतान की जाती हैं। विकलांग लोगों के लिए अपार्टमेंट भी हैं। लक्जरी कमरे काफी विशाल हैं (82 मीटर वर्ग)। उनके पास एक बेडरूम और एक बैठक का कमरा है, साथ ही कॉफी और चाय के लिए दो बाथरूम, एक टीवी, इंटरनेट, किट हैं। होटल का मुख्य रेस्तरां यम लाउंज हैबुफे के प्रकार के अनुसार मेहमानों के लिए भोजन आयोजित करता है। लेकिन प्रसिद्ध समुद्र तट राष्ट्रीय व्यंजनों के व्यंजन पेश करेगा, यहां एक विशेष बच्चों का मेनू भी है। दिन के दौरान लॉबी बार और पूल बार शांत कॉकटेल और अच्छे मिठाई से प्रसन्न हैं। होटल परिसर के क्षेत्र मेंनिः शुल्क छतरियों और सूर्य लाउंजर्स से सुसज्जित बैठने की जगह के साथ एक आउटडोर स्विमिंग पूल है। यह विकल्प उन लोगों के लिए आदर्श है जो समुद्र और समुद्र तट पार्टियों की सुंदरता से उदासीन हैं, होटल छोड़ने और कृत्रिम तालाब का आनंद लेने के लिए पसंद करते हैं। साइट पर बच्चों का पूल भी है। इस तरह के एक स्तर को स्थापित करने के लिए, वासोस निसी के पास एक अच्छा आधारभूत संरचना हैः एक सम्मेलन कक्ष, कार किराए पर लेना, एक विनिमय कार्यालय, दुकानें, ड्राई क्लीनिंग, कपड़े धोने, एक डॉक्टर, पार्किंग। एडम्स बीच - तट पर एक और होटलभूमध्य सागर, जो निसी बीच के समुद्र तट के पास स्थित है। कमरों की बालकनी एक खूबसूरत समुद्री दृश्य पेश करती है। परिसर के मेहमान कई स्विमिंग पूल, एक स्पा और एक टेनिस कोर्ट का उपयोग कर सकते हैं। होटल न केवल अद्भुत हैस्थान, लेकिन लकड़ी के फर्नीचर के साथ पूरा कमरे भी अच्छे कमरे। सभी गर्म पेस्टल रंगों में सजाए गए हैं। अपार्टमेंट एयर कंडीशनिंग और सैटेलाइट टीवी से सुसज्जित हैं। सभी कमरों में बालकनी हैं, जिनमें से कुछ भूमध्य सागर के अद्भुत दृश्य पेश करते हैं। एडम्स बीच होटल के मेहमान आनंद ले सकते हैंओलंपिक नामक स्पा की सेवाएं, जिम और मालिश पर जाएं। परिसर के क्षेत्र में एक स्मारिका दुकान और एक सुपरमार्केट है। कई रेस्तरां और बार हैं। वे सभी भूमध्यसागरीय से पूर्वी तक विभिन्न व्यंजनों के स्वादिष्ट व्यंजन पेश करते हैं। Dionyssos शौचालय पर्यटकों के लिए एक बुफे परोसता है, और वाला में आप ताजा मछली से सबसे अच्छा व्यंजन का स्वाद ले सकते हैं।
हाल के वर्षों में युवा लोगों में से बेहद लोकप्रिय हैसाइप्रस समुद्र तट "निसी बीच"। समुद्र के पास होटल बहुत मांग में हैं। हर साल पूरे यूरोप के युवा लोग यहां आते हैं जो न केवल समुद्र में आराम करना चाहते हैं, बल्कि मस्ती करने के लिए भी चाहते हैं। समुद्र के साथ होटल सबसे सुविधाजनक हैंआराम के लिए वे न केवल बच्चों, उम्र के लोगों, बल्कि युवा लोगों के साथ जोड़ देंगे जो हमेशा स्थानीय समुद्र तट पर क्या हो रहा है, इसके बारे में हमेशा जागरूक रहना चाहते हैं। तथ्य यह है कि गर्मियों में समुद्र तट निसी बीच पार्टियों की जगह में बदल जाता है। गर्मी फोम डिस्को और डीजे के लिए एक समय है। यह इस कारण से है कि निसी बीच समुद्र तट पर होटलउन लोगों के बीच इतना लोकप्रिय है जो पहले से ही सोलह हैं, लेकिन अभी तक पचास नहीं हैं। समुद्र के रहने से बेहतर क्या हो सकता है और घटनाओं के केंद्र में होने वाले सभी त्यौहारों में भाग ले सकता है। निसी बीच अद्भुत नीले पानी और सफेद रेशम रेत। यहां, कोई भी ऊब जाएगा नहींः catamarans, केले, और पैराशूट हैं। मैं ध्यान रखना चाहता हूं कि खाड़ी का पूर्वी हिस्सा स्वयं ही हैनिसी बीच छोटा है, और इसलिए बच्चों के साथ छुट्टियों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। लेकिन हलचल पश्चिमी निसी बीच निश्चित रूप से अधिक सक्रिय और युवा पर्यटकों के लिए अपील करेगा। गर्मियों में, उच्च मौसम के दौरान, आने के लिए बेहतर हैसमय से पहले इस समय, समुद्र से एक हल्की हवा है, छुट्टियों को शांत गर्म पानी का आनंद मिलता है। और दोपहर तक दक्षिण-पश्चिम हवा, एक नियम के रूप में, लहरें उठाती है, जिस पर कूदना बहुत मजेदार होता है। आइया नापा में अच्छा मौसम कभी भी गर्मियों और सूरज से प्रसन्न होने वाले पर्यटकों को नहीं लाता है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए एक उत्कृष्ट जगह साइप्रस हो सकती है। होटल निसी बीच चार * हमेशा पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह इसके फायदेमंद स्थान के कारण है। हर होटल का दावा नहीं कर सकता है,जो भूमध्य सागर के बहुत तट पर स्थित है। जटिल निसी बीच का अपना उष्णकटिबंधीय उद्यान है, जिसमें एक सौ,शून्य वर्ग मीटर है। सबसे पहले, होटल उन छुट्टियों से अपील करेगा जो समुद्र तट पर अपनी छुट्टियां बिताने का इरादा रखते हैं, न कि पूल में, बस एक पत्थर समुद्र तट से फेंक देते हैं। यहां तक कि सबसे छोटे पर्यटक खुद से चलने में सक्षम होंगे। होटल निसी बीच हैउत्कृष्ट आधारभूत संरचना। अपने क्षेत्र में एक अच्छा आराम के लिए आवश्यक सब कुछ है। और शहर के बहुत ही केंद्र में केवल कुछ किलोमीटर दूर। परिसर के पास कई कैफे, दुकानें, बार और रेस्तरां हैं। होटल निसी बीच में कमरों की एक अच्छी संख्या है, जो दो सौ सत्तर अपार्टमेंट्स द्वारा प्रस्तुत की जाती हैः परिसर के सभी अपार्टमेंट बनाये गये हैंभूमध्य शैली। मेहमान उज्ज्वल अंदरूनी और आरामदायक फर्नीचर पसंद करेंगे। सभी श्रेणियों के कमरे एयर कंडीशनिंग, हीटिंग, हेयर ड्रायर, सुरक्षित, सैटेलाइट टीवी, टेलीफोन, रेडियो, मिनी बार से सुसज्जित हैं। होटल चौबीस घंटाटे की सेवा संचालित करता है। कमरे दैनिक साफ कर रहे हैं। इसके अलावा हर दिन मिनी बार का स्टॉक भर जाता है और बाथरूम में डिटर्जेंट अपडेट होते हैं। जटिल निसी बीच में एक सम्मेलन कक्ष हैसभी प्रकार की घटनाओं को पूरा करने के लिए। अनुभवी होटल कर्मचारी किसी भी व्यावसायिक मीटिंग या अन्य कार्यक्रम को व्यवस्थित करने में मदद करेंगे। विभिन्न क्षमता के तीन हॉल हैं। उनमें से सबसे बड़ा पाँच सौ लोगों तक ले सकता है, और सबसे छोटा - तीस तक। होटल आधे बोर्ड का अभ्यास करता है। रेस्तरां पौष्टिक और विविध व्यंजन तैयार करता है। क्षेत्र में एक बच्चों का कमरा है, भ्रमण का आयोजन करने के लिए एक टेबल, एक एक्सचेंज ऑफिस, एक ब्यूटी सैलून, एक कपड़े धोने, कियोस्क, दुकानें, कार किराए पर लेना, पार्किंग। होटल में रहते हुए, पर्यटक जा सकते हैंखेल और स्वास्थ्य-सुधार जटिल। जिम और जिम, एक धूपघड़ी, सौना, एक भाप कमरे हैं। चूंकि निसी बीच एक साल का रिज़ॉर्ट है, इसलिए मेहमान इनडोर पूल से प्रसन्न होंगे, जिसका उपयोग नवंबर से अप्रैल तक किया जा सकता है, जब समुद्र अब प्रासंगिक नहीं है। आप अभी भी बॉडी केयर प्रक्रियाओं पर जा सकते हैं। गर्म अवधि में एक आउटडोर स्विमिंग पूल है, यह उन लोगों से अपील करेगा जो समुद्री स्नान को किनारे नहीं लेना चाहते हैं। टेनिस कोर्ट, मिनी-फुटबॉल और मिनी-गोल्फ कोर्ट और बास्केटबाल कोर्ट भी हैं। आउटडोर पूल में हर दिन एक्वा एरोबिक्स कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। आम तौर पर, हर कोई एक दिलचस्प व्यवसाय ढूंढ सकता है और ऊब नहीं सकता, समुद्र और समुद्र तट का उल्लेख न करें, जो आगंतुकों का मुख्य लक्ष्य है। समुद्र तट के पास निसी बीच में कई और परिसरों हैं, जिन्हें छुट्टियों के लिए भी एक विकल्प माना जा सकता है। वासोस निसी प्लाज चार * - - एक होटल है कि अपने मेहमान एक इनडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल, सौना और जिम प्रदान करता है जो अक्सर हमारे हमवतन द्वारा प्रयोग किया जाता है। परिसर से दो सौ मीटर की दूरी पर एक पानी पार्क और समुद्र तट बस दो मिनट चलना है। गर्मी में आइया नापा का मौसम समुद्र के आराम के लिए अनुकूल है, लेकिन रिसॉर्ट ने साल भर का खिताब अर्जित किया है। तट पर स्थित, होटल वासोस निसी कर सकते हैंमनोरंजन के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनें। इसके लिए, परिसर में आपको जो भी चाहिए वह सब कुछ है। होटल के कमरों में एक खूबसूरत समुद्री दृश्य के साथ बालकनी हैं। सभी अपार्टमेंट मिनीबार, फ्लैट स्क्रीन टीवी और एयर कंडीशनिंग से सुसज्जित हैं। बाथरूम सभी आवश्यक टॉयलेटरीज़ और हेयरड्रायर से लैस हैं। होटल का अपना स्वाद है। हर सुबह एक पूर्ण अंग्रेजी नाश्ता परोसा जाता है। शाम को, पर्यटकों के लिए एक बार और एक रेस्तरां है। इसके अलावा, परिसर में मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो आपको ऊब नहीं पाएंगे। उन पर्यटकों के लिए जो अपने जीवन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैंखेल के बिना, एक टेनिस कोर्ट, एक फिटनेस रूम है। पेशेवर मालिश सेवाओं की पेशकश करेंगे जबकि एनिमेटर्स आपके बच्चों का ख्याल रखेंगे। आम तौर पर, होटल नया है और इसकी श्रेणी की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है। युवाओं की समीक्षा के अनुसार, बाकी यहां बहुत अच्छा है, खासकर सबसे नग्न समुद्र तट निसी बीच के निकट। होटल में एक सौ छब्बीस मानक हैं औरसुइट्स। बजट संख्या तीन लोगों तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें एक टीवी, एयर कंडीशनिंग, सुरक्षित, हेअर ड्रायर, मिनीबार है। इंटरनेट सेवाएं अतिरिक्त भुगतान की जाती हैं। विकलांग लोगों के लिए अपार्टमेंट भी हैं। लक्जरी कमरे काफी विशाल हैं । उनके पास एक बेडरूम और एक बैठक का कमरा है, साथ ही कॉफी और चाय के लिए दो बाथरूम, एक टीवी, इंटरनेट, किट हैं। होटल का मुख्य रेस्तरां यम लाउंज हैबुफे के प्रकार के अनुसार मेहमानों के लिए भोजन आयोजित करता है। लेकिन प्रसिद्ध समुद्र तट राष्ट्रीय व्यंजनों के व्यंजन पेश करेगा, यहां एक विशेष बच्चों का मेनू भी है। दिन के दौरान लॉबी बार और पूल बार शांत कॉकटेल और अच्छे मिठाई से प्रसन्न हैं। होटल परिसर के क्षेत्र मेंनिः शुल्क छतरियों और सूर्य लाउंजर्स से सुसज्जित बैठने की जगह के साथ एक आउटडोर स्विमिंग पूल है। यह विकल्प उन लोगों के लिए आदर्श है जो समुद्र और समुद्र तट पार्टियों की सुंदरता से उदासीन हैं, होटल छोड़ने और कृत्रिम तालाब का आनंद लेने के लिए पसंद करते हैं। साइट पर बच्चों का पूल भी है। इस तरह के एक स्तर को स्थापित करने के लिए, वासोस निसी के पास एक अच्छा आधारभूत संरचना हैः एक सम्मेलन कक्ष, कार किराए पर लेना, एक विनिमय कार्यालय, दुकानें, ड्राई क्लीनिंग, कपड़े धोने, एक डॉक्टर, पार्किंग। एडम्स बीच - तट पर एक और होटलभूमध्य सागर, जो निसी बीच के समुद्र तट के पास स्थित है। कमरों की बालकनी एक खूबसूरत समुद्री दृश्य पेश करती है। परिसर के मेहमान कई स्विमिंग पूल, एक स्पा और एक टेनिस कोर्ट का उपयोग कर सकते हैं। होटल न केवल अद्भुत हैस्थान, लेकिन लकड़ी के फर्नीचर के साथ पूरा कमरे भी अच्छे कमरे। सभी गर्म पेस्टल रंगों में सजाए गए हैं। अपार्टमेंट एयर कंडीशनिंग और सैटेलाइट टीवी से सुसज्जित हैं। सभी कमरों में बालकनी हैं, जिनमें से कुछ भूमध्य सागर के अद्भुत दृश्य पेश करते हैं। एडम्स बीच होटल के मेहमान आनंद ले सकते हैंओलंपिक नामक स्पा की सेवाएं, जिम और मालिश पर जाएं। परिसर के क्षेत्र में एक स्मारिका दुकान और एक सुपरमार्केट है। कई रेस्तरां और बार हैं। वे सभी भूमध्यसागरीय से पूर्वी तक विभिन्न व्यंजनों के स्वादिष्ट व्यंजन पेश करते हैं। Dionyssos शौचालय पर्यटकों के लिए एक बुफे परोसता है, और वाला में आप ताजा मछली से सबसे अच्छा व्यंजन का स्वाद ले सकते हैं।
दबंग एक्टर सलमान खान आए दिन अपने शो बिग बॉस को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं। आप जानते ही होंगे उनके शो में दिन पर दिन नए नए ट्विस्ट आ रहे हैं। ऐसे में बीते दिन शो के वीकेंड का वार एपिसोड में ऐजाज खान पर सबसे ज्यादा गाज गिरी है। इस दौरान पहले तो रुबीना दिलायक ने ही ऐजाज खान के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया है और उसके बाद जैस्मिन भसीन ने भी ऐजाज खान पर गंभीर आरोप लगा दिए। जी दरअसल उन्होंने सलमान खान को बताया कि 'कैसे एक टास्क में ऐजाज खान उन पर चढ़ते हुए दिखे थे और वो उन्हें फिजीकली इंटीमिटेड करने की कोशिश कर रहे थे। ' वैसे असीम रियाज के भाई उमर रियाज हर बार अपना व्यू रखते हैं। उन्हें BB13 में भी हर दिन ट्वीट करते हुए देखा गया था। वैसे बीते कल वीकेंड का वार में आरोपों के बाद खुद सलमान खान ने भी जैस्मिन भसीन को सलाह दी कि 'अगर उन्हें ऐसा लगता है तो उन्हें वहां से हट जाना चाहिए था और इस मुद्दे को आपस में सुलझाना चाहिए। '
दबंग एक्टर सलमान खान आए दिन अपने शो बिग बॉस को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं। आप जानते ही होंगे उनके शो में दिन पर दिन नए नए ट्विस्ट आ रहे हैं। ऐसे में बीते दिन शो के वीकेंड का वार एपिसोड में ऐजाज खान पर सबसे ज्यादा गाज गिरी है। इस दौरान पहले तो रुबीना दिलायक ने ही ऐजाज खान के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया है और उसके बाद जैस्मिन भसीन ने भी ऐजाज खान पर गंभीर आरोप लगा दिए। जी दरअसल उन्होंने सलमान खान को बताया कि 'कैसे एक टास्क में ऐजाज खान उन पर चढ़ते हुए दिखे थे और वो उन्हें फिजीकली इंटीमिटेड करने की कोशिश कर रहे थे। ' वैसे असीम रियाज के भाई उमर रियाज हर बार अपना व्यू रखते हैं। उन्हें BBतेरह में भी हर दिन ट्वीट करते हुए देखा गया था। वैसे बीते कल वीकेंड का वार में आरोपों के बाद खुद सलमान खान ने भी जैस्मिन भसीन को सलाह दी कि 'अगर उन्हें ऐसा लगता है तो उन्हें वहां से हट जाना चाहिए था और इस मुद्दे को आपस में सुलझाना चाहिए। '
दुनियाभर में कोरोना वायरस तांडव मचा रहा है। बड़े-बड़े बैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी इसकी रोकथाम के लिए दवा बनाने में असफल हो गए हैं। नई दिल्लीः दुनियाभर में कोरोना वायरस तांडव मचा रहा है। बड़े-बड़े वैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी इसकी रोकथाम के लिए दवा बनाने में असफल हो गए हैं। अब इसके संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के पास मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही एक मात्र उपाय बचा है। सभी सरकारों द्वारा भी यही सलाह दी रही है। अब सांस ले सकेंगे। इसके साथ ही बीजिंग शायद दुनिया का ऐसा कदम उठाने वाला पहला शहर बन गया है। इससे ये साफ होता है कि चीन की राजधानी बीजिंग में कोरोना वायरस संबंधी हालात काबू में हैं। बीजिंग सेंटर फॉर डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ने इसके लिए नए निर्देशों की घोषणा की है, जिसमें कहा गया है कि लोगों को बाहर निकलने पर मास्क पहनने की जरूरत नहीं है लेकिन अब भी उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग बना कर रहना होगा।
दुनियाभर में कोरोना वायरस तांडव मचा रहा है। बड़े-बड़े बैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी इसकी रोकथाम के लिए दवा बनाने में असफल हो गए हैं। नई दिल्लीः दुनियाभर में कोरोना वायरस तांडव मचा रहा है। बड़े-बड़े वैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी इसकी रोकथाम के लिए दवा बनाने में असफल हो गए हैं। अब इसके संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के पास मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही एक मात्र उपाय बचा है। सभी सरकारों द्वारा भी यही सलाह दी रही है। अब सांस ले सकेंगे। इसके साथ ही बीजिंग शायद दुनिया का ऐसा कदम उठाने वाला पहला शहर बन गया है। इससे ये साफ होता है कि चीन की राजधानी बीजिंग में कोरोना वायरस संबंधी हालात काबू में हैं। बीजिंग सेंटर फॉर डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ने इसके लिए नए निर्देशों की घोषणा की है, जिसमें कहा गया है कि लोगों को बाहर निकलने पर मास्क पहनने की जरूरत नहीं है लेकिन अब भी उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग बना कर रहना होगा।
- Kartik Aaryan : दोस्ताना 2 से करण जौहर ने निकाला बाहर, पहली बार कार्तिक ने तोड़ी चुप्पी- हमारे संस्कार भी.. Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు.. హాట్ లుక్స్ వైరల్!
- Kartik Aaryan : दोस्ताना दो से करण जौहर ने निकाला बाहर, पहली बार कार्तिक ने तोड़ी चुप्पी- हमारे संस्कार भी.. Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు.. హాట్ లుక్స్ వైరల్!
पैगंबर मोहम्मद साहब पर की गई टिप्पणी को लेकर अब अफगानिस्तान में हुकूमत चला रहे तालिबान ने अपना बयान जारी किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि वह भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह कट्टरपंथियों को इस्लाम का अपमान करने और मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की इजाजत नहीं दे। हैरानी की बात यह है कि अपनी हुकूमत में कट्टर नियमों को लागू करने वाला तालिबान भारत को भाषण दे रहा है। बता दें कि अब तक कई इस्लामिक देश बीजेपी नेताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर अपना पुरजोर विरोध दर्ज करा चुके हैं। इन देशों में ईरान, इराक़, क़ुवैत, क़तर, सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, जॉर्डन, अफगानिस्तान, बहरीन, मालदीव, लीबिया और इंडोनेशिया शामिल हैं। इन देशों ने बीजेपी नेताओं के बयानों को पैगंबर मोहम्मद साहब का अपमान बताया है। जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान की हुकूमत भारत में सरकार चला रही पार्टी के नेता के द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों की कड़ी मजम्मत करती है। भारत ने कुछ दिन पहले ही एक एक प्रतिनिधिमंडल को अफगानिस्तान भेजा था। अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के बाद भारत की ओर से यह पहला आधिकारिक दौरा था। इसके बाद ही उम्मीद जगी है कि भारत और तालिबान के रिश्ते बेहतर हो सकते हैं। लेकिन पैगंबर पर की गई टिप्पणी को लेकर तालिबान की नाराजगी इसमें खलल डाल सकती है। भारत ने अफगानिस्तान को बीते कई सालों में लगातार मदद की है। कोरोना के काल में भी भारत लगातार उसे जरूरी चीजें पहुंचाता रहा है। अफगानिस्तान में जब इससे पहले तालिबान की हुकूमत थी तब वहां महिलाओं, बच्चों पर जुल्म की खबरें लगातार आती रहती थीं। तालिबान ने बीते साल जब फिर से अफगानिस्तान में हुकूमत संभाली है तब से वहां महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। तालिबान ने बीते दिनों एक बार फिर से महिलाओं को परदे में कैद करने का हुक्म दिया है। तालिबान महिलाओं को सिर से लेकर पैर तक पर्दे में रहने का हुक्म देता है इस वजह से वहां महिलाएं खौफ में हैं। तालिबान के राज में महिलाओं को घर के बाहर अकेले जाने और काम करने पर भी जबरदस्त सख्ती है लेकिन बावजूद इसके वह भारत को नसीहत दे रहा है। बीते कुछ महीनों में अफगानिस्तान में शियाओं की मस्जिद में धमाके भी हुए हैं। तालिबान के कट्टरपंथी रवैये के चलते ही उसके दोबारा सत्ता में लौटने पर बड़ी संख्या में लोग अफगानिस्तान को छोड़कर भाग गए थे। भारतीय सामानों का बहिष्कारउधर, कुवैत के सुपर मार्केट में भारतीय सामानों का बहिष्कार शुरू हो गया है। अल-अर्दिया को-ऑपरेटिव सोसाइटी स्टोर के कर्मचारियों ने "इस्लामोफोबिक" टिप्पणियों के विरोध में भारतीय चाय और अन्य उत्पादों को ट्रॉलियों में रखकर कूड़े में फेंक दिया। कुवैत सिटी के ठीक बाहर सुपरमार्केट में, चावल के बोरे, मसालों और मिर्च की अलमारियों को प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया गया है। वहां अरबी में लिखा हुआ है- हमने भारतीय उत्पादों को हटा दिया है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया और नवीन जिंदल को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था।
पैगंबर मोहम्मद साहब पर की गई टिप्पणी को लेकर अब अफगानिस्तान में हुकूमत चला रहे तालिबान ने अपना बयान जारी किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि वह भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह कट्टरपंथियों को इस्लाम का अपमान करने और मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की इजाजत नहीं दे। हैरानी की बात यह है कि अपनी हुकूमत में कट्टर नियमों को लागू करने वाला तालिबान भारत को भाषण दे रहा है। बता दें कि अब तक कई इस्लामिक देश बीजेपी नेताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर अपना पुरजोर विरोध दर्ज करा चुके हैं। इन देशों में ईरान, इराक़, क़ुवैत, क़तर, सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, जॉर्डन, अफगानिस्तान, बहरीन, मालदीव, लीबिया और इंडोनेशिया शामिल हैं। इन देशों ने बीजेपी नेताओं के बयानों को पैगंबर मोहम्मद साहब का अपमान बताया है। जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान की हुकूमत भारत में सरकार चला रही पार्टी के नेता के द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों की कड़ी मजम्मत करती है। भारत ने कुछ दिन पहले ही एक एक प्रतिनिधिमंडल को अफगानिस्तान भेजा था। अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के बाद भारत की ओर से यह पहला आधिकारिक दौरा था। इसके बाद ही उम्मीद जगी है कि भारत और तालिबान के रिश्ते बेहतर हो सकते हैं। लेकिन पैगंबर पर की गई टिप्पणी को लेकर तालिबान की नाराजगी इसमें खलल डाल सकती है। भारत ने अफगानिस्तान को बीते कई सालों में लगातार मदद की है। कोरोना के काल में भी भारत लगातार उसे जरूरी चीजें पहुंचाता रहा है। अफगानिस्तान में जब इससे पहले तालिबान की हुकूमत थी तब वहां महिलाओं, बच्चों पर जुल्म की खबरें लगातार आती रहती थीं। तालिबान ने बीते साल जब फिर से अफगानिस्तान में हुकूमत संभाली है तब से वहां महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। तालिबान ने बीते दिनों एक बार फिर से महिलाओं को परदे में कैद करने का हुक्म दिया है। तालिबान महिलाओं को सिर से लेकर पैर तक पर्दे में रहने का हुक्म देता है इस वजह से वहां महिलाएं खौफ में हैं। तालिबान के राज में महिलाओं को घर के बाहर अकेले जाने और काम करने पर भी जबरदस्त सख्ती है लेकिन बावजूद इसके वह भारत को नसीहत दे रहा है। बीते कुछ महीनों में अफगानिस्तान में शियाओं की मस्जिद में धमाके भी हुए हैं। तालिबान के कट्टरपंथी रवैये के चलते ही उसके दोबारा सत्ता में लौटने पर बड़ी संख्या में लोग अफगानिस्तान को छोड़कर भाग गए थे। भारतीय सामानों का बहिष्कारउधर, कुवैत के सुपर मार्केट में भारतीय सामानों का बहिष्कार शुरू हो गया है। अल-अर्दिया को-ऑपरेटिव सोसाइटी स्टोर के कर्मचारियों ने "इस्लामोफोबिक" टिप्पणियों के विरोध में भारतीय चाय और अन्य उत्पादों को ट्रॉलियों में रखकर कूड़े में फेंक दिया। कुवैत सिटी के ठीक बाहर सुपरमार्केट में, चावल के बोरे, मसालों और मिर्च की अलमारियों को प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया गया है। वहां अरबी में लिखा हुआ है- हमने भारतीय उत्पादों को हटा दिया है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया और नवीन जिंदल को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने शनिवार को महान बॉलीवुड अभिनेताओं दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घरों को खरीदने के लिए 2. 35 करोड़ रुपये जारी करने को मंजूरी दे दी और इसे राष्ट्रीय विरासत घोषित किया। पेशावर के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली असगर ने, संचार और निर्माण विभाग की एक रिपोर्ट के बाद, दिलीप कुमार के 101 वर्ग मीटर के घर की कीमत 80. 56 लाख रुपये तय की है, जबकि राज कपूर के छह मार्ला हाउस में 151. 75 वर्गमीटर के लिए 1. 50 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए हैं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में उपयोग की जाने वाली क्षेत्र की पारंपरिक इकाई को 272. 25 वर्ग फुट या 25. 2929 वर्ग मीटर के बराबर माना जाता है। खरीद के बाद दोनों घरों को केपी पुरातत्व विभाग द्वारा एक संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने दोनों ऐतिहासिक इमारतों को खरीदने के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की रिहाई के लिए प्रांतीय सरकार को औपचारिक अनुरोध भेजा था, जहां भारतीय सिनेमा के दो महानायक विभाजन के पहले दिनों में पैदा हुए और उठाए गए थे।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने शनिवार को महान बॉलीवुड अभिनेताओं दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घरों को खरीदने के लिए दो. पैंतीस करोड़ रुपये जारी करने को मंजूरी दे दी और इसे राष्ट्रीय विरासत घोषित किया। पेशावर के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली असगर ने, संचार और निर्माण विभाग की एक रिपोर्ट के बाद, दिलीप कुमार के एक सौ एक वर्ग मीटर के घर की कीमत अस्सी. छप्पन लाख रुपये तय की है, जबकि राज कपूर के छह मार्ला हाउस में एक सौ इक्यावन. पचहत्तर वर्गमीटर के लिए एक. पचास करोड़ रुपये स्वीकार किए गए हैं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में उपयोग की जाने वाली क्षेत्र की पारंपरिक इकाई को दो सौ बहत्तर. पच्चीस वर्ग फुट या पच्चीस. दो हज़ार नौ सौ उनतीस वर्ग मीटर के बराबर माना जाता है। खरीद के बाद दोनों घरों को केपी पुरातत्व विभाग द्वारा एक संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने दोनों ऐतिहासिक इमारतों को खरीदने के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक की रिहाई के लिए प्रांतीय सरकार को औपचारिक अनुरोध भेजा था, जहां भारतीय सिनेमा के दो महानायक विभाजन के पहले दिनों में पैदा हुए और उठाए गए थे।
Tata Nexon EV: Tata Motors ने हाल ही में अपनी इलेक्ट्रिक कार Nexon EV को पेश किया है, जिसकी बुकिंग भी कंपनी ने शुरू कर दी है। Nexon EV भारतीय बाजार में टाटा की दूसरी इलेक्ट्रिक कार है, जो मौजूदा Nexon से डिजाइन में बिल्कुल अलग है। इस कार को 3 वेरिएंट XM, XZ+,XZ+Lux में पेश किया गया है। जिसे अधिकारीक तौर पर जनवरी में लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल हम आपको बताने जा रहे हैं इस कार में दिए जाने वाले सभी ट्रिम की पूरी डीटेलः नेक्सॉन ईवी टाटा की नई जिपट्रॉन ईवी तकनीक द्वारा तैयार की जाएगी। जिसमें 30. 2 kwh की लिथियम बैटरी दी जाएगी। जो 129hp की पावर और 245nm का टार्क जनरेट करेगी। नेक्सॉन ईवी सिंगल चार्ज में 300 km से ज्यादा की रेंज देगी। वहीं फास्ट चार्जिंग के जरिए 80% तक 1 घंटे में इसे चार्ज किया जा सकेगा। नेक्सॉन की बैटरी को 15 AMP प्लग के इस्तेमाल से घर पर भी चार्ज किया जा सकेगा। XM: इस कार के बेस वैरिएंट यानी XM में ड्यूल एयरबैग,EBD के साथ ABS,कॉर्नरिंग स्टैबिलिटी कंट्रोल,16 इंच के स्टील व्हील,एलईडी डीआरएल, कीलेस एंट्री,ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल, फ्रंट और रियर पावर विंडो, टाटा कनेक्टेड-कार एप्लीकेशन जैसे फीचर्स दिए जाएंगे। XZ + : इसमें रियर पार्किंग कैमरा, ड्यूल टोन रुफ, 16 इंच के डायमंड-कट अलॉय व्हील, फॉग-लैंप, इलेक्ट्रिक एडजेस्टेबल ORVMs, लैदर रैप स्टीयरिंग व्हील, 7. 0 इंच का एमआईडी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जो एंड्रॉइड ऑटो और ऐपल कारप्ले को सपोर्ट करेगा, इसके अलावा 7. 0 इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम आदि फीचर्स दिए जाएंगे। XZ+ LUX : इसमें ऑटोमैटिक सनरूफ,ऑटोमैटिक हेडलाइट्स, रेन सेंसिंग वाइपर्स, मल्टी-ड्राइव मोड जिसमें ड्राइव और स्पोर्ट शामिल होगा। इसके अलावा लैदर सीट्स, 6 वे एडजेस्टेबल ड्राइवर सीट, कूल्ड ग्लोव बॉक्स, 8-स्पीकर हरमन साउंड सिस्टम जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। Nexon EV को तीन कलर ऑप्शन- सिग्नेचर टील ब्लू, मूनलाइट सिल्वर और ग्लेशियर व्हाइट में लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल इस कार से पर्दा उठाया गया है, हालांकि इसे अगले साल के शुरुआत में लॉन्च किया जाएगा।
Tata Nexon EV: Tata Motors ने हाल ही में अपनी इलेक्ट्रिक कार Nexon EV को पेश किया है, जिसकी बुकिंग भी कंपनी ने शुरू कर दी है। Nexon EV भारतीय बाजार में टाटा की दूसरी इलेक्ट्रिक कार है, जो मौजूदा Nexon से डिजाइन में बिल्कुल अलग है। इस कार को तीन वेरिएंट XM, XZ+,XZ+Lux में पेश किया गया है। जिसे अधिकारीक तौर पर जनवरी में लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल हम आपको बताने जा रहे हैं इस कार में दिए जाने वाले सभी ट्रिम की पूरी डीटेलः नेक्सॉन ईवी टाटा की नई जिपट्रॉन ईवी तकनीक द्वारा तैयार की जाएगी। जिसमें तीस. दो kwh की लिथियम बैटरी दी जाएगी। जो एक सौ उनतीसhp की पावर और दो सौ पैंतालीसnm का टार्क जनरेट करेगी। नेक्सॉन ईवी सिंगल चार्ज में तीन सौ किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देगी। वहीं फास्ट चार्जिंग के जरिए अस्सी% तक एक घंटाटे में इसे चार्ज किया जा सकेगा। नेक्सॉन की बैटरी को पंद्रह AMP प्लग के इस्तेमाल से घर पर भी चार्ज किया जा सकेगा। XM: इस कार के बेस वैरिएंट यानी XM में ड्यूल एयरबैग,EBD के साथ ABS,कॉर्नरिंग स्टैबिलिटी कंट्रोल,सोलह इंच के स्टील व्हील,एलईडी डीआरएल, कीलेस एंट्री,ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल, फ्रंट और रियर पावर विंडो, टाटा कनेक्टेड-कार एप्लीकेशन जैसे फीचर्स दिए जाएंगे। XZ + : इसमें रियर पार्किंग कैमरा, ड्यूल टोन रुफ, सोलह इंच के डायमंड-कट अलॉय व्हील, फॉग-लैंप, इलेक्ट्रिक एडजेस्टेबल ORVMs, लैदर रैप स्टीयरिंग व्हील, सात. शून्य इंच का एमआईडी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जो एंड्रॉइड ऑटो और ऐपल कारप्ले को सपोर्ट करेगा, इसके अलावा सात. शून्य इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम आदि फीचर्स दिए जाएंगे। XZ+ LUX : इसमें ऑटोमैटिक सनरूफ,ऑटोमैटिक हेडलाइट्स, रेन सेंसिंग वाइपर्स, मल्टी-ड्राइव मोड जिसमें ड्राइव और स्पोर्ट शामिल होगा। इसके अलावा लैदर सीट्स, छः वे एडजेस्टेबल ड्राइवर सीट, कूल्ड ग्लोव बॉक्स, आठ-स्पीकर हरमन साउंड सिस्टम जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। Nexon EV को तीन कलर ऑप्शन- सिग्नेचर टील ब्लू, मूनलाइट सिल्वर और ग्लेशियर व्हाइट में लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल इस कार से पर्दा उठाया गया है, हालांकि इसे अगले साल के शुरुआत में लॉन्च किया जाएगा।
भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा है कि बहुत से लोग ऐसे थे जो सोचते थे कि वो भारत के लिए खेलने वाले आखिरी गेंदबाज होंगे. इसकी वजह थी- उनका अनोखा एक्शन. ये बात उन्होंने युवराज सिंह के साथ बातचीत में कही. बुमराह ने कहा कि उनके ऐक्शन को देखकर काफी लोग कहते थे कि वो एक दो रणजी ट्रॉफी मैच से ज्यादा नहीं खेल पाएंगे. दिलचस्प बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करने के बाद बुमराह अब तक टीम इंडिया के लिए 12 टेस्ट, 58 वनडे और 45 टी-20 मैच खेल चुके हैं. अंतररष्ट्रीय करियर में वो करीब सवा दो सौ विकेट ले चुके हैं. उन्हें टीम इंडिया की गेंदबाजी यूनिट का कप्तान भी कहा जाता है. भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी की जगह लेना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि लोग जानते हैं कि मैं विकेटकीपिंग से ज्यादा समय तक दूर नहीं रहा हूं, लेकिन जब भारतीय टीम के लिए विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी मिली तो बहुत तनाव था।. उन्होंने कहा कि विकेट के पीछे अगर थोड़ी सी भी गलती हुई तो लोगों को लगता है कि आप धोनी जैसे नहीं हैं. क्रिकेट फैंस को विकेट के पीछे किसी और को देखने की आदत डलवाना आसान नहीं हैं. हाल ही में विराट कोहली ने ऋषभ पंत के लगातार खराब प्रदर्शन के बाद केएल राहुल को बल्लेबाजी के साथ साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी थी. भारतीय टेस्ट टीम के सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि मौजूदा हालात हमारे कंट्रोल से बाहर की बात है. इस वक्त का इस्तेमाल बेहतर तरीके से करना चाहिए. इस समय का इस्तेमाल उन बातों पर करना चाहिए जिस पर खिलाड़ी फोकस करना चाहता है. उन्होंने कहाकि इस वक्त अनुशासन को बनाए रखना है. खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि कबड्डी को ओलंपिक में शामिल कराना भारत का अंतिम लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि कबड्डी की प्रतिभाएं सिर्फ भारत या एशिया में नहीं बल्कि पूरी दुनिया मे हैं. खेल मंत्री स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित ऑनलाइन सेशन में बोल रहे थे. इसमें कई देशों के कबड्डी कोच शामिल थे. एशियाई देशों में भारत का कबड्डी में लंबे समय तक दबदबा रहा है. कोरोना की भयानक महामारी की वजह से 28 जून को होने वाली फ्रेंच ग्रां प्री फॉर्मूला वन रेसिंग को रद्द कर दिया गया है. रेस के आयोजकों ने यह जानकारी दी. इस रेस के प्रबंध निदेशक एरिक बोलियर ने कहा कि कोविड-19 की मौजूदा भयावहता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा है कि बहुत से लोग ऐसे थे जो सोचते थे कि वो भारत के लिए खेलने वाले आखिरी गेंदबाज होंगे. इसकी वजह थी- उनका अनोखा एक्शन. ये बात उन्होंने युवराज सिंह के साथ बातचीत में कही. बुमराह ने कहा कि उनके ऐक्शन को देखकर काफी लोग कहते थे कि वो एक दो रणजी ट्रॉफी मैच से ज्यादा नहीं खेल पाएंगे. दिलचस्प बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करने के बाद बुमराह अब तक टीम इंडिया के लिए बारह टेस्ट, अट्ठावन वनडे और पैंतालीस टी-बीस मैच खेल चुके हैं. अंतररष्ट्रीय करियर में वो करीब सवा दो सौ विकेट ले चुके हैं. उन्हें टीम इंडिया की गेंदबाजी यूनिट का कप्तान भी कहा जाता है. भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी की जगह लेना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि लोग जानते हैं कि मैं विकेटकीपिंग से ज्यादा समय तक दूर नहीं रहा हूं, लेकिन जब भारतीय टीम के लिए विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी मिली तो बहुत तनाव था।. उन्होंने कहा कि विकेट के पीछे अगर थोड़ी सी भी गलती हुई तो लोगों को लगता है कि आप धोनी जैसे नहीं हैं. क्रिकेट फैंस को विकेट के पीछे किसी और को देखने की आदत डलवाना आसान नहीं हैं. हाल ही में विराट कोहली ने ऋषभ पंत के लगातार खराब प्रदर्शन के बाद केएल राहुल को बल्लेबाजी के साथ साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी थी. भारतीय टेस्ट टीम के सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि मौजूदा हालात हमारे कंट्रोल से बाहर की बात है. इस वक्त का इस्तेमाल बेहतर तरीके से करना चाहिए. इस समय का इस्तेमाल उन बातों पर करना चाहिए जिस पर खिलाड़ी फोकस करना चाहता है. उन्होंने कहाकि इस वक्त अनुशासन को बनाए रखना है. खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि कबड्डी को ओलंपिक में शामिल कराना भारत का अंतिम लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि कबड्डी की प्रतिभाएं सिर्फ भारत या एशिया में नहीं बल्कि पूरी दुनिया मे हैं. खेल मंत्री स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित ऑनलाइन सेशन में बोल रहे थे. इसमें कई देशों के कबड्डी कोच शामिल थे. एशियाई देशों में भारत का कबड्डी में लंबे समय तक दबदबा रहा है. कोरोना की भयानक महामारी की वजह से अट्ठाईस जून को होने वाली फ्रेंच ग्रां प्री फॉर्मूला वन रेसिंग को रद्द कर दिया गया है. रेस के आयोजकों ने यह जानकारी दी. इस रेस के प्रबंध निदेशक एरिक बोलियर ने कहा कि कोविड-उन्नीस की मौजूदा भयावहता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस ने 23 अगस्त को ब्यान जारी कर बताया कि वह अमेरिकी समयानुसार 24 अगस्त को अमेरिकी सरकार पर औपचारिक मुकदमा चलाएगी। विश्व बैंक के महानिदेशक डेविड मालपास ने हाल ही में यह चेतावनी दी कि कोविड-19 महामारी से 10 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में वापस लौट सकते हैं। टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस ने 23 अगस्त को ब्यान जारी कर बताया कि वह अमेरिकी समयानुसार 24 अगस्त को अमेरिकी सरकार पर औपचारिक मुकदमा चलाएगी। बयान में कहा गया कि एक साल में हमने संजीदगी से अमेरिकी सरकार के साथ उसकी चिंता के समाधान पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी सरकार ने तथ्यों की उपेक्षा कर समुचित कानूनी प्रक्रिया छोड़कर वाणिज्यिक कंपनियों की वार्ता में जबरन हस्तक्षेप करने की चेष्टा की। कानूनी प्रशासन और कंपनी तथा उपभोक्ताओं के न्यायपूर्ण बर्ताव को सुनिश्चित करने के लिए हमने कानूनी उपाय से हितों की सुरक्षा की घोषणा की। ध्यान रहे 6 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश के मुताबिक अमेरिकी वैधिक प्रशासन के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति या उद्यम 45 दिन के बाद टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस के साथ कोई कारोबार नहीं कर सकेगी । चीनी बायोटेक कंपनी साइनो वाक के बोर्ड अध्यक्ष यिन वेइतुंग ने हाल ही में सीजीटीएन को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि परीक्षण के परिणामों से साबित होता है कि उनकी कंपनी के वैक्सीन को विश्व भर में सुरक्षात्मक प्रभाव मिला है। साइनो वाक के वैक्सीन की वार्षिक उत्पादन क्षमता 30 करोड़ होगी। उन्होंने कहा कि साइनो वाक को अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व से आये बीस से अधिक विभिन्न वायरस स्ट्रेन मिले थे। उन्होंने अपने टीके के प्रतिरोधक सीरम से इन वायरस स्ट्रेन को निष्प्रभाव किया। उन्होंने पाया कि उन वायरसों को निष्प्रभाव किया गया है। वे बहुत आशावान है कि सीरम टाइप आफ कोविड-19 वायरस नहीं बदला है। उनका वैक्सीन विश्व के सभी वायरस स्ट्रेन को निष्प्रभाव कर सकता है, इसलिए वे कह सकते हैं कि उनके वैक्सीन का विश्व भर में सुरक्षात्मक प्रभाव मिलेगा। विश्व बैंक के महानिदेशक डेविड मालपास ने हाल ही में यह चेतावनी दी कि कोविड-19 महामारी से 10 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में वापस लौट सकते हैं। इससे पहले विश्व बैंक ने यह अनुमान लगाया कि कोविड-19 महामारी से 6 करोड़ लोग अति गरीबी की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन नए अनुमान के अनुसार यह स्थिति बिगड़ रही है। 7 करोड़ से 10 करोड़ तक लोग अत्यधिक गरीबी में कैद हो जाएंगे। मालपास ने कहा कि अगर महामारी की स्थिति गंभीर होती है तो इस संख्या के बढ़ने की संभावना है। विश्व बैंक ने यह वचन दिया कि आपात स्थितियों का मुकाबला करने के लिए 2021 के जून तक 100 देशों को 1 करोड़ 60 लाख अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाई जाएगी। इस वर्ष के जून के अंत तक विश्व बैंक ने 21 लाख अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाई। यूरोपीय संघ (ईयू) ने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र समर्थित प्रधानमंत्री फेयज सेराज और लीबिया की प्रतिनिधि सभा के (संसद) स्पीकर एगुइला सालेह द्वारा की गई संघर्ष विराम घोषणाओं का स्वागत किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, एक बयान में शनिवार को ईयू के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल ने कहा कि आपसी सद्भावान एक 'रचनात्मक पहला कदम है' जो लीबिया के नेताओं के गतिरोध को दूर करने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है और दीर्घकालिक संघर्ष को समाप्त करने की उम्मीद जगाता है। उन्होंने बयान में कहा, "हम लीबिया में सभी सैन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने के लिए समझौते का पूरी तरह से समर्थन करते हैं, लीबिया में मौजूद सभी विदेशी जवानों और किराए के सैनिकों की विदाई की आवश्यकता है और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली बर्लिन प्रक्रिया के ढांचे में बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की जरूरत है। " जनवरी में तेहरान के पास यूक्रेनी विमान को मार गिराए जाने के मामले में ईरान मुआवजा देने के लिए तैयार है। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकरी दी। ईरान ने कबूल किया था कि उसकी सेना ने भूलवश यूक्रेनी विमान को मार गिराया था। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रमुख तौराज देहकानी जंगनेह ने शनिवार को यह टिप्पणी की। तेहरान में अक्टूबर में होने वाले दोनों देशों के विमानन अधिकारियों के बीच नए दौर की बातचीत से पहले उन्होंने यह बात कही है। जंगनेह के हवाले कहा गया, "जो स्पष्ट है वह यह है कि ईरान ने अपनी गलती के लिए जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है और इसलिए देश पूरा मुआवजा देने को लेकर बातचीत के लिए तैयार है। "
टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस ने तेईस अगस्त को ब्यान जारी कर बताया कि वह अमेरिकी समयानुसार चौबीस अगस्त को अमेरिकी सरकार पर औपचारिक मुकदमा चलाएगी। विश्व बैंक के महानिदेशक डेविड मालपास ने हाल ही में यह चेतावनी दी कि कोविड-उन्नीस महामारी से दस करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में वापस लौट सकते हैं। टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस ने तेईस अगस्त को ब्यान जारी कर बताया कि वह अमेरिकी समयानुसार चौबीस अगस्त को अमेरिकी सरकार पर औपचारिक मुकदमा चलाएगी। बयान में कहा गया कि एक साल में हमने संजीदगी से अमेरिकी सरकार के साथ उसकी चिंता के समाधान पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी सरकार ने तथ्यों की उपेक्षा कर समुचित कानूनी प्रक्रिया छोड़कर वाणिज्यिक कंपनियों की वार्ता में जबरन हस्तक्षेप करने की चेष्टा की। कानूनी प्रशासन और कंपनी तथा उपभोक्ताओं के न्यायपूर्ण बर्ताव को सुनिश्चित करने के लिए हमने कानूनी उपाय से हितों की सुरक्षा की घोषणा की। ध्यान रहे छः अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश के मुताबिक अमेरिकी वैधिक प्रशासन के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति या उद्यम पैंतालीस दिन के बाद टिक-टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस के साथ कोई कारोबार नहीं कर सकेगी । चीनी बायोटेक कंपनी साइनो वाक के बोर्ड अध्यक्ष यिन वेइतुंग ने हाल ही में सीजीटीएन को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि परीक्षण के परिणामों से साबित होता है कि उनकी कंपनी के वैक्सीन को विश्व भर में सुरक्षात्मक प्रभाव मिला है। साइनो वाक के वैक्सीन की वार्षिक उत्पादन क्षमता तीस करोड़ होगी। उन्होंने कहा कि साइनो वाक को अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व से आये बीस से अधिक विभिन्न वायरस स्ट्रेन मिले थे। उन्होंने अपने टीके के प्रतिरोधक सीरम से इन वायरस स्ट्रेन को निष्प्रभाव किया। उन्होंने पाया कि उन वायरसों को निष्प्रभाव किया गया है। वे बहुत आशावान है कि सीरम टाइप आफ कोविड-उन्नीस वायरस नहीं बदला है। उनका वैक्सीन विश्व के सभी वायरस स्ट्रेन को निष्प्रभाव कर सकता है, इसलिए वे कह सकते हैं कि उनके वैक्सीन का विश्व भर में सुरक्षात्मक प्रभाव मिलेगा। विश्व बैंक के महानिदेशक डेविड मालपास ने हाल ही में यह चेतावनी दी कि कोविड-उन्नीस महामारी से दस करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में वापस लौट सकते हैं। इससे पहले विश्व बैंक ने यह अनुमान लगाया कि कोविड-उन्नीस महामारी से छः करोड़ लोग अति गरीबी की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन नए अनुमान के अनुसार यह स्थिति बिगड़ रही है। सात करोड़ से दस करोड़ तक लोग अत्यधिक गरीबी में कैद हो जाएंगे। मालपास ने कहा कि अगर महामारी की स्थिति गंभीर होती है तो इस संख्या के बढ़ने की संभावना है। विश्व बैंक ने यह वचन दिया कि आपात स्थितियों का मुकाबला करने के लिए दो हज़ार इक्कीस के जून तक एक सौ देशों को एक करोड़ साठ लाख अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाई जाएगी। इस वर्ष के जून के अंत तक विश्व बैंक ने इक्कीस लाख अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाई। यूरोपीय संघ ने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र समर्थित प्रधानमंत्री फेयज सेराज और लीबिया की प्रतिनिधि सभा के स्पीकर एगुइला सालेह द्वारा की गई संघर्ष विराम घोषणाओं का स्वागत किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, एक बयान में शनिवार को ईयू के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल ने कहा कि आपसी सद्भावान एक 'रचनात्मक पहला कदम है' जो लीबिया के नेताओं के गतिरोध को दूर करने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है और दीर्घकालिक संघर्ष को समाप्त करने की उम्मीद जगाता है। उन्होंने बयान में कहा, "हम लीबिया में सभी सैन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने के लिए समझौते का पूरी तरह से समर्थन करते हैं, लीबिया में मौजूद सभी विदेशी जवानों और किराए के सैनिकों की विदाई की आवश्यकता है और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली बर्लिन प्रक्रिया के ढांचे में बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की जरूरत है। " जनवरी में तेहरान के पास यूक्रेनी विमान को मार गिराए जाने के मामले में ईरान मुआवजा देने के लिए तैयार है। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकरी दी। ईरान ने कबूल किया था कि उसकी सेना ने भूलवश यूक्रेनी विमान को मार गिराया था। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रमुख तौराज देहकानी जंगनेह ने शनिवार को यह टिप्पणी की। तेहरान में अक्टूबर में होने वाले दोनों देशों के विमानन अधिकारियों के बीच नए दौर की बातचीत से पहले उन्होंने यह बात कही है। जंगनेह के हवाले कहा गया, "जो स्पष्ट है वह यह है कि ईरान ने अपनी गलती के लिए जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है और इसलिए देश पूरा मुआवजा देने को लेकर बातचीत के लिए तैयार है। "
केदार नगर पार्क को भी अब हरियाली की आस सताने लगी है। सैटरडे को आस-पास के लोगों ने पार्क की दुर्दशा का बखान करते हुए जमकर हंगामा काटा। लोगों का आरोप है कि कॉलोनी को बने हुए 35 साल हो गए हैं लेकिन एडीए की ओर से एक ही बार पार्क की बाउंड्रीवाल बनावाई गई है। लोगों को हेल्दी रखने के लिए पार्क में टहलना एडवाइज किया जाता है। लेकिन केदार नगर के पार्क का तो केस ही निराला है। पार्क के अंदर नगर निगम ने पानी की निकासी के लिए तीन सेफ्टी टैंक बना रखे हैं। जहां सिवाय दुर्गंध और गंदगी के कुछ दिखाई नहीं देता। कई बार कंप्लेन करने के बाद भी पार्क में विकास कार्य नहीं हो सके हैं। कई कंप्लेन करने के बाद भी जब पार्क की स्थिति नहीं सुधरी तो लोगोंं का सब्र का बांध टूट गया। सैटरडे को लोगों ने पार्क के अंदर खड़े होकर काफी हंगामा किया। लोगों का आरोप है कि पार्क की दुर्दशा की ओर किसी भी अधिकारी ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। पार्क के अंदर पेड़-पौधों की क्यारियों की जगह पॉलिथीन और कूड़ा पड़ा रहता है। बच्चे खेलने की जगह एक-दूसरे का मुंह ताकते रहते हैं। यही नहीं पार्क की बाउंड्रीवाल भी टूट चुकी है। लोगों ने बताया कि एडीए ने बाउंड्रीवाल को 20 साल पहले बनाया था। लेकिन उसके बाद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पार्क की दुर्दशा की अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां लगे खराब हैंडपंप के पास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लोगों ने बताया कि पार्क के अंदर एक हैंडपंप लगवाया गया था, जिसने लगने के बाद से ही उसने काम नहीं किया। यह कॉलोनी एडीए द्वारा विकसित की गई थी, मैं इस कॉलोनी में सन् 1984 से रह रहा हूं, इस बीच केवल एक बार पार्क की बाउंड्रीवाल का निर्माण करवाया गया था। तब से पार्क की स्थिति की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पार्क कहां से डेवलप होगा, पार्क के लिए कई बार एडीए के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और अब पार्क को एडीए ने नगर निगम के अंडर में कर दिया है तब भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही। इस पार्क में से सिवाय गंदगी के कुछ दिखाई नहीं देता, इस पार्क के आस-पास ही दर्जनों मकान बने हुए हैं, उन मकानों में रहने वाले बच्चों के खेलने तक की जगह इस पार्क के अंदर नहीं है। जिस पार्क में फूल पौधे होने चाहिए थे उस पार्क के अंदर नगर निगम ने सेप्टिक टैंक बनवा दिए हैं। जिसके कारण पार्क के अंदर हर समय गंदा पानी भरा रहता है। घर के सामने पार्क बना है, पार्क के अंदर हरियाली तो है नहीं गंदगी के ढेर लगे हैं। जिसके कारण मच्छर पनपने लगे हैं रात को सोना भी मुश्किल हो जाता है। अपनी व्यथा किसे सुनाएं। एक-एक करके सिटी के पार्को की स्थिति को सुधारने का काम किया जा रहा है। शीघ्र ही इस पार्क की हालत को भी सुधारने के काम शुरू किए जाएंगे.
केदार नगर पार्क को भी अब हरियाली की आस सताने लगी है। सैटरडे को आस-पास के लोगों ने पार्क की दुर्दशा का बखान करते हुए जमकर हंगामा काटा। लोगों का आरोप है कि कॉलोनी को बने हुए पैंतीस साल हो गए हैं लेकिन एडीए की ओर से एक ही बार पार्क की बाउंड्रीवाल बनावाई गई है। लोगों को हेल्दी रखने के लिए पार्क में टहलना एडवाइज किया जाता है। लेकिन केदार नगर के पार्क का तो केस ही निराला है। पार्क के अंदर नगर निगम ने पानी की निकासी के लिए तीन सेफ्टी टैंक बना रखे हैं। जहां सिवाय दुर्गंध और गंदगी के कुछ दिखाई नहीं देता। कई बार कंप्लेन करने के बाद भी पार्क में विकास कार्य नहीं हो सके हैं। कई कंप्लेन करने के बाद भी जब पार्क की स्थिति नहीं सुधरी तो लोगोंं का सब्र का बांध टूट गया। सैटरडे को लोगों ने पार्क के अंदर खड़े होकर काफी हंगामा किया। लोगों का आरोप है कि पार्क की दुर्दशा की ओर किसी भी अधिकारी ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। पार्क के अंदर पेड़-पौधों की क्यारियों की जगह पॉलिथीन और कूड़ा पड़ा रहता है। बच्चे खेलने की जगह एक-दूसरे का मुंह ताकते रहते हैं। यही नहीं पार्क की बाउंड्रीवाल भी टूट चुकी है। लोगों ने बताया कि एडीए ने बाउंड्रीवाल को बीस साल पहले बनाया था। लेकिन उसके बाद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पार्क की दुर्दशा की अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां लगे खराब हैंडपंप के पास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लोगों ने बताया कि पार्क के अंदर एक हैंडपंप लगवाया गया था, जिसने लगने के बाद से ही उसने काम नहीं किया। यह कॉलोनी एडीए द्वारा विकसित की गई थी, मैं इस कॉलोनी में सन् एक हज़ार नौ सौ चौरासी से रह रहा हूं, इस बीच केवल एक बार पार्क की बाउंड्रीवाल का निर्माण करवाया गया था। तब से पार्क की स्थिति की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पार्क कहां से डेवलप होगा, पार्क के लिए कई बार एडीए के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और अब पार्क को एडीए ने नगर निगम के अंडर में कर दिया है तब भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही। इस पार्क में से सिवाय गंदगी के कुछ दिखाई नहीं देता, इस पार्क के आस-पास ही दर्जनों मकान बने हुए हैं, उन मकानों में रहने वाले बच्चों के खेलने तक की जगह इस पार्क के अंदर नहीं है। जिस पार्क में फूल पौधे होने चाहिए थे उस पार्क के अंदर नगर निगम ने सेप्टिक टैंक बनवा दिए हैं। जिसके कारण पार्क के अंदर हर समय गंदा पानी भरा रहता है। घर के सामने पार्क बना है, पार्क के अंदर हरियाली तो है नहीं गंदगी के ढेर लगे हैं। जिसके कारण मच्छर पनपने लगे हैं रात को सोना भी मुश्किल हो जाता है। अपनी व्यथा किसे सुनाएं। एक-एक करके सिटी के पार्को की स्थिति को सुधारने का काम किया जा रहा है। शीघ्र ही इस पार्क की हालत को भी सुधारने के काम शुरू किए जाएंगे.
2. 'संसार को सुंदर और धन-धान्य पूर्ण बनाने में मनुष्य के सोच-विचार, आकांक्षा और श्रम का बड़ा महत्त्व है।' इस कविता के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए । योग्यता विस्तार अपने घर और विद्यालय को सजाने, सँवारने और अन्य क्रिया-कलापों में अपने योगदान पर विचार कीजिए और बताइए कि क्या वह आपको संतोषजनक लगता है ? नए गगन में नया सूर्य - नए युग का नया प्रकाश आभा चमक, योगदान, भागीदारी सपनों ने सहलाया- फूल खिलने के सपने देखे, आकांक्षा की, कल्पना की खलिहान- कटी फ़सल को इकट्ठा रखने का स्थान शोणित - रक्त विशाल भूखंड लंबी-चौड़ी धरती का टुकड़ा प्राणों ने नहलाया पूरी शक्ति और मन से सींचा 8. जीता कौन? ( प्रस्तुत पाठ में कछुए और खरगोश की प्रचलित पुरानी कहानी को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। एक युवा खरगोश अपने पूर्वजों की पराजय के कलंक को धो देने का निश्चय करता है। वह अपनी बदनामी से मुक्ति पाने के लिए एक बार पुनः दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन करवाता है फिर भी इतिहास को नहीं बदल पाता। यह सब कैसे हुआ, प्रस्तुत पाठ में इसे अत्यंत व्यंग्यात्मक एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।) 'दौड़ में कछुआ खरगोश को हरा देता है' - यह उक्ति सुनते-सुनते जब कान पक गए तो एक युवा खरगोश तैश खा गया । न जाने वह कौन-सा पूर्वज था जो बीच दौड़ में सो गया और हमेशा-हमेशा के लिए खरगोश जाति के मुँह पर कालिख पोत गया ! भला कहाँ कछुआ और कहाँ खरगोश ! एक बीस बार पैर मारकर मुश्किल से दस सेंटीमीटर सरकता है और दूसरा एक छलांग में कई मीटर नाप देता है। फिर भी सदियों से हारा हुआ कहलवाता चला आ रहा है। है न घोर अनर्थ ! घोर नाइंसाफ़ी ! वह भी मात्र एक पूर्वज की गलती के कारण । न जाने कौन-सा नशा करके दौड़ा था या फिर अपनी टाँगों की उछाल और रफ़्तार के घमंड में चूर हो गया था। बीच दौड़ में टाँगें पसार कर बेफ़िक्र सो गया और अब कलंक का बोझ सारी कौम ढो रही है। कोई बात हुई भला ! आहत खरगोश ने इस सदियों पुराने कलंक को धोने की ठान ली और शहर के कछुओं से भरे सबसे बड़े तालाब के किनारे जा एक बार फिर से दौड़ की चुनौती दे डाली। चुनौती की गर्जना सुनकर कछुए स्तब्ध रह गए। मुँह से एक बोल भी नहीं फूटा । उत्तर ही नहीं सूझा । दौड़ में अच्छी-खासी प्राचीन ख्याति चली आ रही थी । आज यह कौन सिरफिरा चुनौती देने आ पहुँचा । हर कछुए ने जब से होश सँभाला था, खरगोश से दौड़ जीतने का तमगा गले में लटका पाया था । अब इसे दोबारा सिद्ध करने की क्या ज़रूरत आ पड़ी । एक बुज़ुर्ग कछुए ने बात टालने की कोशिश की, "भाई खरगोश, अब दौड़ की क्या ज़रूरत है, दौड़ जो होनी थी हो चुकी । सारे ज़माने को उसके नतीजे का पता है। अब बार-बार तो दौड़ नहीं होती । " "कैसे नहीं होती ! वह दौड़ एक धोखा थी, फ़रेब थी । हमारी जात को बदनाम करने का षड्यंत्र था। मैं उस दौड़ को नहीं मानता । अगर तुम दौड़ में सचमुच जीत सकते हो तो आओ मुझसे जीतकर दिखाओ । " खरगोश आपे से बाहर हो गया । तैश खाने में कुछ नहीं रखा था। अतः बुज़ुर्ग कछुए ने शालीन तर्क प्रस्तुत किया, "देखो, तुम जवान खून हो। हम वृद्ध हो चुके हैं। अब तुमसे क्या दौड़ लगाएँगे। जवानी में कुछ कहते तो सोचते भी । " " बनो मत, खून तो तुम्हारे यहाँ भी जवान है। सारे कछुए वृद्ध नहीं हुए हैं। मैं तो किसी भी एक से दौड़ लगाने को तैयार हूँ । है कोई माई का लाल कछुओं में !" खरगोश ने ताल ठोककर दो बार उछाल भरी । माई के लाल तो सभी थे, लेकिन अवसर इसका दावा करने का नहीं था। कछुए जितना बचना चाह रहे थे, खरगोश उतना ही लपेट रहा था । चुनौती स्वीकार करने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता था। इस बात की क्या गारंटी थी कि इस बार भी खरगोश वही पुरानी गलती को दोहराएगा । खामखाह इतिहास बदल जाएगा। कहावत उलट जाएगी। मुँह काला हो जाएगा। चुनौती उठाने का अर्थ था आ बैल मुझे मार । निर्बलता के दामन में संतोष मशरूम की तरह बढ़ता रहता है । सो, ज़ब्त खाकर बचाव का पैंतरा फेंका, "भाई, हम झगड़े - फ़साद में विश्वास नहीं करते। जैसे चल रहा है वैसे ही चलने दो। हमें अब कोई दौड़ नहीं लगानी।" लेकिन खरगोश तो ठानकर आया था कि जैसा चल रहा है वैसा नहीं चलने देगा। पूर्वजों का कलंक तो वह धोकर रहेगा । वह गरजा, "लगानी कैसे नहीं है। अगर दौड़ नहीं लगानी तो हार माननी पड़ेगी। घोषणा करनी होगी कि खरगोश से दौड़ हार गए। अब कभी कछुए को दौड़ में खरगोश से जीता हुआ नहीं समझा जाएगा । कछुए चुप्पी साध गए । अब अचानक खरगोश को अपनी भूल का एहसास हुआ । उसे 'प्रेस' को साथ लाना चाहिए था। कोई संवाददाता होता जो उसकी इस दमदार चुनौती को सनसनीखेज़ समाचार के रूप में प्रसारित करता । दूरदर्शन पर भी देता। अगर कछुए इसी तरह टाल-मटोल करते रहे तो कैसे होगी दौड़ ? कैसे हो सकेगा खरगोश जाति का मुँह उजला ? कैसे धुलेगी परंपरागत कालिख ? उसकी चुनौती को, प्रस्तावित दौड़ को और उसके परिणाम को पूरे प्रचारप्रसार की ज़रूरत थी । स्थानीय या राष्ट्रीय नहीं, अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी । उस कलमुँही कहावत का भी तो विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होकर सदियों से जमकर प्रचार हुआ है । अतः सोच-समझकर खरगोश ने नया पासा फेंका, "मैं कल फिर इसी समय आऊँगा । इस बार मेरे साथ प्रेस और फ़ोटोग्राफ़र भी होंगे। अगर कोई कछुआ दौड़ लगाने के लिए राज़ी नहीं हुआ तो समझ लो कहावत बदल जाएगी। देश-विदेश के अखबारों में छपेगा कि अब खरगोश कछुए से दौड़ जीत गया है। खुली चुनौती के बाद भी कोई कछुआ दौड़ में खरगोश को नहीं हरा सका । वह कहावत कोई तुम्हारी जागीर नहीं है जिसका फ़ायदा तुम लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी उठाते चले जाओगे।" खरगोश तो उफ़नता-बिफ़रता अगले दिन आने के लिए कहकर लौट गया, लेकिन कछुओं की चेतना घंटों तक नहीं लौटी। बैठे-बिठाए किस . मुसीबत में पड़ गए। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। ये अचानक खरगोश की मति कैसे फिर गई । गहन मंत्रणा करने के लिए सभी कछुए अपने मुखिया
दो. 'संसार को सुंदर और धन-धान्य पूर्ण बनाने में मनुष्य के सोच-विचार, आकांक्षा और श्रम का बड़ा महत्त्व है।' इस कविता के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए । योग्यता विस्तार अपने घर और विद्यालय को सजाने, सँवारने और अन्य क्रिया-कलापों में अपने योगदान पर विचार कीजिए और बताइए कि क्या वह आपको संतोषजनक लगता है ? नए गगन में नया सूर्य - नए युग का नया प्रकाश आभा चमक, योगदान, भागीदारी सपनों ने सहलाया- फूल खिलने के सपने देखे, आकांक्षा की, कल्पना की खलिहान- कटी फ़सल को इकट्ठा रखने का स्थान शोणित - रक्त विशाल भूखंड लंबी-चौड़ी धरती का टुकड़ा प्राणों ने नहलाया पूरी शक्ति और मन से सींचा आठ. जीता कौन? 'दौड़ में कछुआ खरगोश को हरा देता है' - यह उक्ति सुनते-सुनते जब कान पक गए तो एक युवा खरगोश तैश खा गया । न जाने वह कौन-सा पूर्वज था जो बीच दौड़ में सो गया और हमेशा-हमेशा के लिए खरगोश जाति के मुँह पर कालिख पोत गया ! भला कहाँ कछुआ और कहाँ खरगोश ! एक बीस बार पैर मारकर मुश्किल से दस सेंटीमीटर सरकता है और दूसरा एक छलांग में कई मीटर नाप देता है। फिर भी सदियों से हारा हुआ कहलवाता चला आ रहा है। है न घोर अनर्थ ! घोर नाइंसाफ़ी ! वह भी मात्र एक पूर्वज की गलती के कारण । न जाने कौन-सा नशा करके दौड़ा था या फिर अपनी टाँगों की उछाल और रफ़्तार के घमंड में चूर हो गया था। बीच दौड़ में टाँगें पसार कर बेफ़िक्र सो गया और अब कलंक का बोझ सारी कौम ढो रही है। कोई बात हुई भला ! आहत खरगोश ने इस सदियों पुराने कलंक को धोने की ठान ली और शहर के कछुओं से भरे सबसे बड़े तालाब के किनारे जा एक बार फिर से दौड़ की चुनौती दे डाली। चुनौती की गर्जना सुनकर कछुए स्तब्ध रह गए। मुँह से एक बोल भी नहीं फूटा । उत्तर ही नहीं सूझा । दौड़ में अच्छी-खासी प्राचीन ख्याति चली आ रही थी । आज यह कौन सिरफिरा चुनौती देने आ पहुँचा । हर कछुए ने जब से होश सँभाला था, खरगोश से दौड़ जीतने का तमगा गले में लटका पाया था । अब इसे दोबारा सिद्ध करने की क्या ज़रूरत आ पड़ी । एक बुज़ुर्ग कछुए ने बात टालने की कोशिश की, "भाई खरगोश, अब दौड़ की क्या ज़रूरत है, दौड़ जो होनी थी हो चुकी । सारे ज़माने को उसके नतीजे का पता है। अब बार-बार तो दौड़ नहीं होती । " "कैसे नहीं होती ! वह दौड़ एक धोखा थी, फ़रेब थी । हमारी जात को बदनाम करने का षड्यंत्र था। मैं उस दौड़ को नहीं मानता । अगर तुम दौड़ में सचमुच जीत सकते हो तो आओ मुझसे जीतकर दिखाओ । " खरगोश आपे से बाहर हो गया । तैश खाने में कुछ नहीं रखा था। अतः बुज़ुर्ग कछुए ने शालीन तर्क प्रस्तुत किया, "देखो, तुम जवान खून हो। हम वृद्ध हो चुके हैं। अब तुमसे क्या दौड़ लगाएँगे। जवानी में कुछ कहते तो सोचते भी । " " बनो मत, खून तो तुम्हारे यहाँ भी जवान है। सारे कछुए वृद्ध नहीं हुए हैं। मैं तो किसी भी एक से दौड़ लगाने को तैयार हूँ । है कोई माई का लाल कछुओं में !" खरगोश ने ताल ठोककर दो बार उछाल भरी । माई के लाल तो सभी थे, लेकिन अवसर इसका दावा करने का नहीं था। कछुए जितना बचना चाह रहे थे, खरगोश उतना ही लपेट रहा था । चुनौती स्वीकार करने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता था। इस बात की क्या गारंटी थी कि इस बार भी खरगोश वही पुरानी गलती को दोहराएगा । खामखाह इतिहास बदल जाएगा। कहावत उलट जाएगी। मुँह काला हो जाएगा। चुनौती उठाने का अर्थ था आ बैल मुझे मार । निर्बलता के दामन में संतोष मशरूम की तरह बढ़ता रहता है । सो, ज़ब्त खाकर बचाव का पैंतरा फेंका, "भाई, हम झगड़े - फ़साद में विश्वास नहीं करते। जैसे चल रहा है वैसे ही चलने दो। हमें अब कोई दौड़ नहीं लगानी।" लेकिन खरगोश तो ठानकर आया था कि जैसा चल रहा है वैसा नहीं चलने देगा। पूर्वजों का कलंक तो वह धोकर रहेगा । वह गरजा, "लगानी कैसे नहीं है। अगर दौड़ नहीं लगानी तो हार माननी पड़ेगी। घोषणा करनी होगी कि खरगोश से दौड़ हार गए। अब कभी कछुए को दौड़ में खरगोश से जीता हुआ नहीं समझा जाएगा । कछुए चुप्पी साध गए । अब अचानक खरगोश को अपनी भूल का एहसास हुआ । उसे 'प्रेस' को साथ लाना चाहिए था। कोई संवाददाता होता जो उसकी इस दमदार चुनौती को सनसनीखेज़ समाचार के रूप में प्रसारित करता । दूरदर्शन पर भी देता। अगर कछुए इसी तरह टाल-मटोल करते रहे तो कैसे होगी दौड़ ? कैसे हो सकेगा खरगोश जाति का मुँह उजला ? कैसे धुलेगी परंपरागत कालिख ? उसकी चुनौती को, प्रस्तावित दौड़ को और उसके परिणाम को पूरे प्रचारप्रसार की ज़रूरत थी । स्थानीय या राष्ट्रीय नहीं, अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी । उस कलमुँही कहावत का भी तो विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होकर सदियों से जमकर प्रचार हुआ है । अतः सोच-समझकर खरगोश ने नया पासा फेंका, "मैं कल फिर इसी समय आऊँगा । इस बार मेरे साथ प्रेस और फ़ोटोग्राफ़र भी होंगे। अगर कोई कछुआ दौड़ लगाने के लिए राज़ी नहीं हुआ तो समझ लो कहावत बदल जाएगी। देश-विदेश के अखबारों में छपेगा कि अब खरगोश कछुए से दौड़ जीत गया है। खुली चुनौती के बाद भी कोई कछुआ दौड़ में खरगोश को नहीं हरा सका । वह कहावत कोई तुम्हारी जागीर नहीं है जिसका फ़ायदा तुम लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी उठाते चले जाओगे।" खरगोश तो उफ़नता-बिफ़रता अगले दिन आने के लिए कहकर लौट गया, लेकिन कछुओं की चेतना घंटों तक नहीं लौटी। बैठे-बिठाए किस . मुसीबत में पड़ गए। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। ये अचानक खरगोश की मति कैसे फिर गई । गहन मंत्रणा करने के लिए सभी कछुए अपने मुखिया
रोग के प्रारंभिक दौर में मुख्य लक्षणऊपरी श्वसन तंत्र की सूजन के समान - यह नाक श्लेष्म की सूजन है। शरीर में संक्रमण के विकास में अगले चरण में लाल रंग के एक बड़े दानेदार लाल रंग का आना होता है। और केवल समय पर टीकाकरण रोग से बचने में मदद करेगा। जब माता-पिता जानते हैं कि खसरा प्रकट होता हैबच्चों, वे अपनी स्थिति को कम करने के लिए समय पर कई उपाय कर सकते हैं एक बीमार बच्चे को एक अच्छी तरह हवादार कमरे में बिस्तर पर रखा जाना चाहिए, अक्सर बिस्तरों के लेंस और पजामा को बदलते हुए, विटामिन में समृद्ध पेय पीता है। क्योंकि एक छोटे से रोगी की आंखों में सूजन हो जाएगी, आपको उन्हें गर्म पानी या बोरिक एसिड के कमजोर समाधान के साथ लगातार धोने की जरूरत है। इसके बाद, दवा "सल्फैसिल सोडियम" को नज़र में ड्रिप करना आवश्यक है। गर्मी से फंसे, होंठ स्वच्छ लिपस्टिक या बोरिक पेट्रोलियम जेली से चिकनाई कर रहे हैं बलगम की नाक को साफ करना बेहद महत्वपूर्ण है अगर बच्चा अपनी नाक को नहीं उड़ा सकता है, तो बच्चों को नाक से एक छोटे सिरिंज से अलग किया जाता है। फिर, नाक साइनस का इलाज करना आवश्यक है, जिसमें एक कपास झाड़ू के साथ वासलीन में डूबा हुआ हो। बहुत उपयोगी जामुन, नींबू के साथ पानी। रोगी को हल्का भोजन देना बेहतर होता हैः दही, केफिर, दलिया, सब्जी प्यूरी या उबला हुआ, एक मांस की चक्की, बीफ या चिकन के माध्यम से सड़ गया। मिसाल शिशु के शरीर को गंभीर रूप से कमजोर करती है - यह अन्य संक्रमणों के लिए कमजोर हो जाता है। हाइपोथर्मिया और अनावश्यक संपर्कों से बचाने के लिए यह बेहद सतर्क होना जरूरी है, क्योंकि इस अवधि में आम इन्फ्लूएंजा वायरस न्यूमोनिया के एक गंभीर रूप में बदल सकता है। चूंकि इस बीमारी से गंभीरसंक्रामक रोगों, रोगी को जरूरी एक विशेषज्ञ द्वारा मनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसी टीम में एक महामारी का खतरा है जहां वायरस वाहक है बच्चों में हल्के खसरे का उपचार घर पर होता है। सामान्य तौर पर, वे एंटीपीरेक्टिक ड्रग्स, भरपूर मात्रा में पेय, विटामिन और उम्मीदवारों का उपयोग करते हैं। अस्पताल में, मरीजों को केवल जटिलता के मामले में स्थानांतरित किया जाता है। खसरा को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका पहले से ही हैकई साल एक टीकाकरण है हम जानते हैं कि इस प्रक्रिया का मुख्य तरीका क्या है। एक कमजोर वायरस के साथ शरीर को संक्रमित करते हुए, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति निश्चित रोग सूक्ष्मजीवों के प्रति प्रतिरक्षित प्रतीत होता है। यह ध्यान देने योग्य है कि हर कोई नहीं जानता कि बच्चे के खसले एक छिपे हुए रूप में प्रकट होते हैं। रोग की शुरुआत के क्षण को याद नहीं करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं हैंः तापमान बढ़ जाता है, और नेत्रश्लेष्मलाशोथ का एक आसान रूप प्रतीत होता है। यदि संक्रमण की ऐसी अभिव्यक्तियां 2-3 दिनों तक नहीं जाती हैं, तो आपको बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। 12 महीने की उम्र से बच्चों को खसरा होने के कारण टीका लगाया जा रहा है, अगली टीका 6 साल तक की जाती है। विभिन्न प्रकार के टीकाकरण का अभ्यास किया जाता हैः - मोनोवसेकेशन; - त्रिवेक्षण (जब पदार्थ एक साथ कण्ठ, रूबेला और खसरा के साथ जुड़ा होता है)। हालांकि, किसी भी प्रकार के टीकाकरण के लिए मतभेद हैं। एचआईवी संक्रमण में खसरे की अभिव्यक्ति के बारे में बहुत कम जानकारी है गर्भावस्था और एक क्षय रोग पर यह सख्त इनोक्लीज करने के लिए मना किया जाता है।
रोग के प्रारंभिक दौर में मुख्य लक्षणऊपरी श्वसन तंत्र की सूजन के समान - यह नाक श्लेष्म की सूजन है। शरीर में संक्रमण के विकास में अगले चरण में लाल रंग के एक बड़े दानेदार लाल रंग का आना होता है। और केवल समय पर टीकाकरण रोग से बचने में मदद करेगा। जब माता-पिता जानते हैं कि खसरा प्रकट होता हैबच्चों, वे अपनी स्थिति को कम करने के लिए समय पर कई उपाय कर सकते हैं एक बीमार बच्चे को एक अच्छी तरह हवादार कमरे में बिस्तर पर रखा जाना चाहिए, अक्सर बिस्तरों के लेंस और पजामा को बदलते हुए, विटामिन में समृद्ध पेय पीता है। क्योंकि एक छोटे से रोगी की आंखों में सूजन हो जाएगी, आपको उन्हें गर्म पानी या बोरिक एसिड के कमजोर समाधान के साथ लगातार धोने की जरूरत है। इसके बाद, दवा "सल्फैसिल सोडियम" को नज़र में ड्रिप करना आवश्यक है। गर्मी से फंसे, होंठ स्वच्छ लिपस्टिक या बोरिक पेट्रोलियम जेली से चिकनाई कर रहे हैं बलगम की नाक को साफ करना बेहद महत्वपूर्ण है अगर बच्चा अपनी नाक को नहीं उड़ा सकता है, तो बच्चों को नाक से एक छोटे सिरिंज से अलग किया जाता है। फिर, नाक साइनस का इलाज करना आवश्यक है, जिसमें एक कपास झाड़ू के साथ वासलीन में डूबा हुआ हो। बहुत उपयोगी जामुन, नींबू के साथ पानी। रोगी को हल्का भोजन देना बेहतर होता हैः दही, केफिर, दलिया, सब्जी प्यूरी या उबला हुआ, एक मांस की चक्की, बीफ या चिकन के माध्यम से सड़ गया। मिसाल शिशु के शरीर को गंभीर रूप से कमजोर करती है - यह अन्य संक्रमणों के लिए कमजोर हो जाता है। हाइपोथर्मिया और अनावश्यक संपर्कों से बचाने के लिए यह बेहद सतर्क होना जरूरी है, क्योंकि इस अवधि में आम इन्फ्लूएंजा वायरस न्यूमोनिया के एक गंभीर रूप में बदल सकता है। चूंकि इस बीमारी से गंभीरसंक्रामक रोगों, रोगी को जरूरी एक विशेषज्ञ द्वारा मनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, ऐसी टीम में एक महामारी का खतरा है जहां वायरस वाहक है बच्चों में हल्के खसरे का उपचार घर पर होता है। सामान्य तौर पर, वे एंटीपीरेक्टिक ड्रग्स, भरपूर मात्रा में पेय, विटामिन और उम्मीदवारों का उपयोग करते हैं। अस्पताल में, मरीजों को केवल जटिलता के मामले में स्थानांतरित किया जाता है। खसरा को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका पहले से ही हैकई साल एक टीकाकरण है हम जानते हैं कि इस प्रक्रिया का मुख्य तरीका क्या है। एक कमजोर वायरस के साथ शरीर को संक्रमित करते हुए, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति निश्चित रोग सूक्ष्मजीवों के प्रति प्रतिरक्षित प्रतीत होता है। यह ध्यान देने योग्य है कि हर कोई नहीं जानता कि बच्चे के खसले एक छिपे हुए रूप में प्रकट होते हैं। रोग की शुरुआत के क्षण को याद नहीं करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं हैंः तापमान बढ़ जाता है, और नेत्रश्लेष्मलाशोथ का एक आसान रूप प्रतीत होता है। यदि संक्रमण की ऐसी अभिव्यक्तियां दो-तीन दिनों तक नहीं जाती हैं, तो आपको बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। बारह महीने की उम्र से बच्चों को खसरा होने के कारण टीका लगाया जा रहा है, अगली टीका छः साल तक की जाती है। विभिन्न प्रकार के टीकाकरण का अभ्यास किया जाता हैः - मोनोवसेकेशन; - त्रिवेक्षण । हालांकि, किसी भी प्रकार के टीकाकरण के लिए मतभेद हैं। एचआईवी संक्रमण में खसरे की अभिव्यक्ति के बारे में बहुत कम जानकारी है गर्भावस्था और एक क्षय रोग पर यह सख्त इनोक्लीज करने के लिए मना किया जाता है।
अधिक खाने के विकार के इलाज क्या हैं? अधिक खाने के विकार के इलाज का लक्ष्य है इकट्ठे बहुत अधिक भोजन करने की प्रवृत्ति कम करना, भावनात्मक रूप से स्वस्थ बनाना और जरूरत हो तो वजन कम करना है। क्योंकि इस विकार के पीड़ित अधिक खाने के दौर के बाद शर्म, आत्म-घृणा और अन्य नकारात्मक भावनाओं से घिर जाते हैं। उपचार से ऐसी और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं को दूर करना होता है। मनोचिकित्सा से आदतों में बदलाव लाने और बार-बार अत्यधिक भोजन करने की तलब कम करने में मदद मिल सकती है। मनोचिकित्सा निम्न प्रकार की हो सकती है : - कॉग्निटिव बीहेवियरल थेरेपी (Cognitive Behavioral Therapy) यह थेरेपी आपको उन समस्याओं का सामना बेहतर तरीके करने में मदद करती है जिनसे आपको अधिक खाने की तलब लगती है, जैसे शरीर के बारे में नकारात्मक भावनाएं या चित्त का अवसादग्रस्त होना। इससे आपको अपने व्यवहार और खाने के पैटर्न पर बेहतर नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है। यदि आप मोटापे के शिकार हैं तो इसके अलावा वजन घटाने के लिए काउंसलिंग का भी सहारा लेना पड़ सकता है। (और पढ़ें - पेट कम करने के उपाय) पारस्परिक मनोचिकित्सा आपके अन्य लोगों के साथ संबंध पर गौर करती है। इसका लक्ष्य है आपके पारस्परिक कौशल में सुधार लाना। इसके तहत परिवार, मित्र और सहयोगियों के साथ आपके सम्बन्ध में सुधार करने की कोशिश होती होती है ताकि पारस्परिक सम्बन्ध और संवाद कौशल से पैदा कर अधिक खाने की तलब पर लगाम लगाई जा सके। (और पढ़ें - हिप्स कम करने के उपाय) - डायलेक्टिकल बीहेविअरल थेरेपी (Dialectical behavior therapy) इस थेरेपी की मदद से आप तनाव सहन करने, भावनाओं को नियंत्रित करने और दूसरों के साथ अपने संबंध बेहतर बनाने जैसे व्यवहार सम्बन्धी कौशल सीख सकते हैं। और इस सबसे आपको बहुत अधिक खाने की तलब पर काबू करने में मदद मिल सकती है। (और पढ़ें - कमर कम करने के उपाय) खाने के विकार के इलाज की कोई विशेष दवा नहीं है। लेकिन, कई प्रकार की दवाएं लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं, जैसे अवसादरोधी (Antidepressants) दवाएं। लेकिन ये दवाएं बगैर डॉक्टरी सलाह के न लें। (और पढ़ें - मोटापा कम करने की दवा) 3. बीहेविअरल वेट-लॉस प्रोग्राम्स (Behavioral weight-loss programs) अधिक खाने के विकार ग्रस्त लोग अक्सर कई बार वजन घटाने का प्रयास करते हैं जिनमें वे नाकाम रहते हैं। हालांकि, वजन घटाने की प्रक्रिया अपनाने की सलाह तब तक नहीं दी जाती है जब तक मूल बीमारी यानि बहुत अधिक खाने का विकार ठीक न हो जाए। इसकी वजह यह है कि कम कैलोरी से अधिक खाने की तलब फिर लग सकती है। उचित स्थिति में वजन घटाने की प्रक्रिया आम तौर पर चिकित्सकीय निगरानी में शुरू की जाती है ताकि आपकी पोषण सम्बन्धी आवश्यकताएं पूरी हों। अधिक खाने की तलब से जुड़ी वजन घटाने की प्रक्रियाएं तब ज्यादा कारगर हो सकती हैं जबकि आप कॉग्निटिव बीहेविअरल थेरेपी की भी मदद ले रहे हों। (और पढ़ें- मोटापा कम करने के लिए डाइट-चार्ट) अधिक खाने के विकार से ग्रस्त लोगों के लिए स्व-सहायता सम्बन्धी किताबें, वीडियो, इंटरनेट प्रोग्राम या सहायता समूह प्रभावी होते हैं। कुछ खाने के विकार से जुड़े कुछ कार्यक्रम स्वयं सहायता पुस्तिकाएं प्रदान करते हैं जिनका इस्तेमाल आप स्वयं या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कर सकते हैं। हालांकि, आपको तब भी मनोचिकित्सा या दवाओं के साथ उपयुक्त उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। (और पढ़ें - मानसिक रोग का इलाज)
अधिक खाने के विकार के इलाज क्या हैं? अधिक खाने के विकार के इलाज का लक्ष्य है इकट्ठे बहुत अधिक भोजन करने की प्रवृत्ति कम करना, भावनात्मक रूप से स्वस्थ बनाना और जरूरत हो तो वजन कम करना है। क्योंकि इस विकार के पीड़ित अधिक खाने के दौर के बाद शर्म, आत्म-घृणा और अन्य नकारात्मक भावनाओं से घिर जाते हैं। उपचार से ऐसी और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं को दूर करना होता है। मनोचिकित्सा से आदतों में बदलाव लाने और बार-बार अत्यधिक भोजन करने की तलब कम करने में मदद मिल सकती है। मनोचिकित्सा निम्न प्रकार की हो सकती है : - कॉग्निटिव बीहेवियरल थेरेपी यह थेरेपी आपको उन समस्याओं का सामना बेहतर तरीके करने में मदद करती है जिनसे आपको अधिक खाने की तलब लगती है, जैसे शरीर के बारे में नकारात्मक भावनाएं या चित्त का अवसादग्रस्त होना। इससे आपको अपने व्यवहार और खाने के पैटर्न पर बेहतर नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है। यदि आप मोटापे के शिकार हैं तो इसके अलावा वजन घटाने के लिए काउंसलिंग का भी सहारा लेना पड़ सकता है। पारस्परिक मनोचिकित्सा आपके अन्य लोगों के साथ संबंध पर गौर करती है। इसका लक्ष्य है आपके पारस्परिक कौशल में सुधार लाना। इसके तहत परिवार, मित्र और सहयोगियों के साथ आपके सम्बन्ध में सुधार करने की कोशिश होती होती है ताकि पारस्परिक सम्बन्ध और संवाद कौशल से पैदा कर अधिक खाने की तलब पर लगाम लगाई जा सके। - डायलेक्टिकल बीहेविअरल थेरेपी इस थेरेपी की मदद से आप तनाव सहन करने, भावनाओं को नियंत्रित करने और दूसरों के साथ अपने संबंध बेहतर बनाने जैसे व्यवहार सम्बन्धी कौशल सीख सकते हैं। और इस सबसे आपको बहुत अधिक खाने की तलब पर काबू करने में मदद मिल सकती है। खाने के विकार के इलाज की कोई विशेष दवा नहीं है। लेकिन, कई प्रकार की दवाएं लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं, जैसे अवसादरोधी दवाएं। लेकिन ये दवाएं बगैर डॉक्टरी सलाह के न लें। तीन. बीहेविअरल वेट-लॉस प्रोग्राम्स अधिक खाने के विकार ग्रस्त लोग अक्सर कई बार वजन घटाने का प्रयास करते हैं जिनमें वे नाकाम रहते हैं। हालांकि, वजन घटाने की प्रक्रिया अपनाने की सलाह तब तक नहीं दी जाती है जब तक मूल बीमारी यानि बहुत अधिक खाने का विकार ठीक न हो जाए। इसकी वजह यह है कि कम कैलोरी से अधिक खाने की तलब फिर लग सकती है। उचित स्थिति में वजन घटाने की प्रक्रिया आम तौर पर चिकित्सकीय निगरानी में शुरू की जाती है ताकि आपकी पोषण सम्बन्धी आवश्यकताएं पूरी हों। अधिक खाने की तलब से जुड़ी वजन घटाने की प्रक्रियाएं तब ज्यादा कारगर हो सकती हैं जबकि आप कॉग्निटिव बीहेविअरल थेरेपी की भी मदद ले रहे हों। अधिक खाने के विकार से ग्रस्त लोगों के लिए स्व-सहायता सम्बन्धी किताबें, वीडियो, इंटरनेट प्रोग्राम या सहायता समूह प्रभावी होते हैं। कुछ खाने के विकार से जुड़े कुछ कार्यक्रम स्वयं सहायता पुस्तिकाएं प्रदान करते हैं जिनका इस्तेमाल आप स्वयं या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कर सकते हैं। हालांकि, आपको तब भी मनोचिकित्सा या दवाओं के साथ उपयुक्त उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।
बबन कुंअर सेवा समिति द्वारा सारण जिला में मांझी प्रखंड के इनायतपुर पंचायत के बालोखरा गांव में डाबर इंडिया द्वारा प्रदत्त ग्लूकोज एवम जूस का वितरण किया गया । लगभग में 100 से अधिक महिलाओं के बीच वितरण का कार्य हुआ । संस्था के सचिव श्री अमित कुमार सिंह एवम संस्था के कोषाध्यक्ष पवन कुमार सक्रिय सदस्य सूरज कुमार आदि लोग उपस्थित रहे । लोगो के बीच महिला सशक्तिकरण को लेकर भी महिलाओं को संस्था के सचिव अमित कुमार ने बताया । बिहार सरकार और भारत सरकार द्वारा किए जा रहे । कार्यों को भी महिलाओं को बताया गया महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। बिहार में महिला सशक्तिकरण को लेकर युवाओं ने एक बेहतर संगठन बनाया है जिसका नाम है बबन कुंवर सेवा समिति दूधैला सारण जिसकी स्थापना 13 सितंबर 2021 को हुई है इस संगठन का मुख्य मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है जिसमें शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार उत्पीड़न डिजिटल क्रांति का प्रचार प्रसार करना है इस संगठन के अध्यक्ष हैं विनायक कुमार झा जबकि सचिव है अमित कुमार सिंह कोषाध्यक्ष है पवन कुमार संयोजक है अविनाश कुमार संगठन के सक्रिय सदस्यों में आनंद कृष्णा पवन कुमार सौरभ कुमार और रवि कुमार शामिल है। बिहार में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो काम होना चाहिए वह नहीं हुआ है जितने भी संगठन है वह अपना पेट भरने में ही लगे रहते हैं महिला सशक्तिकरण की बातें तो होती है पर यह संचिका ओं से निकलकर जमीन पर नजर नहीं आती है महिलाओं के साथ उत्पीड़न हो या उनके शिक्षा की या स्वास्थ्य की बात कोई उनकी आवाज को नहीं उठाता है इसी सब विषयों को लेकर उन्होंने इस संगठन की स्थापना की है तथा ग्रास रूट लेवल पर काम कर रहे हैं लोगों का सहयोग भी मिल रहा है उन्होंने बताया कि संगठन के सचिव अमित कुमार सिंह सारण में काफी बेहतर काम कर रहे हैं जबकि पवन कुमार अविनाश कुमार और बाकी टीम के सदस्य पटना में ग्रास रूट लेवल तक जाकर लोगों की सहायता कर रहे हैं समाज के विभिन्न तबकों का सहयोग भी उनके संगठन को मिल रहा है।
बबन कुंअर सेवा समिति द्वारा सारण जिला में मांझी प्रखंड के इनायतपुर पंचायत के बालोखरा गांव में डाबर इंडिया द्वारा प्रदत्त ग्लूकोज एवम जूस का वितरण किया गया । लगभग में एक सौ से अधिक महिलाओं के बीच वितरण का कार्य हुआ । संस्था के सचिव श्री अमित कुमार सिंह एवम संस्था के कोषाध्यक्ष पवन कुमार सक्रिय सदस्य सूरज कुमार आदि लोग उपस्थित रहे । लोगो के बीच महिला सशक्तिकरण को लेकर भी महिलाओं को संस्था के सचिव अमित कुमार ने बताया । बिहार सरकार और भारत सरकार द्वारा किए जा रहे । कार्यों को भी महिलाओं को बताया गया महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। बिहार में महिला सशक्तिकरण को लेकर युवाओं ने एक बेहतर संगठन बनाया है जिसका नाम है बबन कुंवर सेवा समिति दूधैला सारण जिसकी स्थापना तेरह सितंबर दो हज़ार इक्कीस को हुई है इस संगठन का मुख्य मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है जिसमें शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार उत्पीड़न डिजिटल क्रांति का प्रचार प्रसार करना है इस संगठन के अध्यक्ष हैं विनायक कुमार झा जबकि सचिव है अमित कुमार सिंह कोषाध्यक्ष है पवन कुमार संयोजक है अविनाश कुमार संगठन के सक्रिय सदस्यों में आनंद कृष्णा पवन कुमार सौरभ कुमार और रवि कुमार शामिल है। बिहार में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो काम होना चाहिए वह नहीं हुआ है जितने भी संगठन है वह अपना पेट भरने में ही लगे रहते हैं महिला सशक्तिकरण की बातें तो होती है पर यह संचिका ओं से निकलकर जमीन पर नजर नहीं आती है महिलाओं के साथ उत्पीड़न हो या उनके शिक्षा की या स्वास्थ्य की बात कोई उनकी आवाज को नहीं उठाता है इसी सब विषयों को लेकर उन्होंने इस संगठन की स्थापना की है तथा ग्रास रूट लेवल पर काम कर रहे हैं लोगों का सहयोग भी मिल रहा है उन्होंने बताया कि संगठन के सचिव अमित कुमार सिंह सारण में काफी बेहतर काम कर रहे हैं जबकि पवन कुमार अविनाश कुमार और बाकी टीम के सदस्य पटना में ग्रास रूट लेवल तक जाकर लोगों की सहायता कर रहे हैं समाज के विभिन्न तबकों का सहयोग भी उनके संगठन को मिल रहा है।
14 सितंबर को, एक भाषा के रूप में हिंदी ने भारत में अपना आधिकारिक दर्जा हासिल किया। इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मनोरंजन जगत की कई मशहूर हस्तियां ने बताया कि उन्हें हिंदी की कौन सी कहावत पसंद है। 'जाको रखे साईं मार साके ना कोई। ' मैं अक्सर इसका इस्तेमाल नहीं करती लेकिन इसमें विश्वास करती हूं। मेरे जीवन में बार-बार यह मेरे लिए सच साबित हुआ है। तो मेरा पसंदीदा कहावत है 'जला हुआ छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है' जिसका मतलब है कि एक बार आप जीवन में जल गए हैं या एक बार आपको एक बुरा अनुभव हुआ है, तो, निश्चित रूप से आप बहुत सतर्क हैं और उस मामले के लिए कोई भी बहुत सतर्क और बहुत सावधानी से और बहुत व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता है कि प्रत्येक चाल क्या है। 'जैसी करनी वैसी भरनी। ' मैं असल जिंदगी में इस पर पूरा विश्वास करती हूं। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक तरीका है। आप जैसे कर्म करेंगे आप को वैसा ही फल मिलेगा। मुझे लगता है कि हर किसी को इसे केवल एक कहावत के रूप में नहीं लेना चाहिए, बल्कि इसे अपने जीवन का एक हिस्सा बनाना चाहिए जिसे वे जीवन भर याद रखते हैं। यह आपके जीवन जीने के तरीके के नियमों में से एक है। 'दूर के ढोल सुहावने' इसका कारण यह है कि, हम हमेशा यह सोचते हैं कि दूसरे लोगों का जीवन हमसे बेहतर मानते हैं। लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता है। यह सिर्फ इतना है कि हम वास्तविकता से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। 'तेरे मुंह में घी शकर'। यह मेरी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़ा है और वह वेस्ट पाम बीच, मियामी में एक खाद्य उत्सव के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए था। यह घटना तब हुई जब मैं ओबेरॉय से लोअर परेल में होपिंग शेफ नामक फर्म में शामिल हुआ। यह सिर्फ 7 दिन पहले की बात है जब मुझे इस जगह के मालिक से पता चला कि हम फरवरी 2016 में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारतीय भोजन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। शेफ मिशेल स्वामी (सेलिब्रिटी शेफ) और मुझे इस इवेंट का हिस्सा बनना था, जिसकी चर्चा जनवरी 2016 में हुई थी। जब मैंने शेफ मिशेल के साथ इस इवेंट के बारे में चर्चा की, तो इवेंट और प्लानिंग के बारे में सारी बातचीत के बाद, मैंने उनसे कहा कि यह विदेश में होना चाहिए न कि भारत में क्योंकि हमने जिस योजना और भोजन को क्रियान्वित करने के बारे में सोचा था, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का था। और, शेफ मिशेल ने इस कहावत की तर्ज पर अपनी भाषा में कुछ कहा और मुस्कुरा दिए।
चौदह सितंबर को, एक भाषा के रूप में हिंदी ने भारत में अपना आधिकारिक दर्जा हासिल किया। इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मनोरंजन जगत की कई मशहूर हस्तियां ने बताया कि उन्हें हिंदी की कौन सी कहावत पसंद है। 'जाको रखे साईं मार साके ना कोई। ' मैं अक्सर इसका इस्तेमाल नहीं करती लेकिन इसमें विश्वास करती हूं। मेरे जीवन में बार-बार यह मेरे लिए सच साबित हुआ है। तो मेरा पसंदीदा कहावत है 'जला हुआ छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है' जिसका मतलब है कि एक बार आप जीवन में जल गए हैं या एक बार आपको एक बुरा अनुभव हुआ है, तो, निश्चित रूप से आप बहुत सतर्क हैं और उस मामले के लिए कोई भी बहुत सतर्क और बहुत सावधानी से और बहुत व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता है कि प्रत्येक चाल क्या है। 'जैसी करनी वैसी भरनी। ' मैं असल जिंदगी में इस पर पूरा विश्वास करती हूं। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक तरीका है। आप जैसे कर्म करेंगे आप को वैसा ही फल मिलेगा। मुझे लगता है कि हर किसी को इसे केवल एक कहावत के रूप में नहीं लेना चाहिए, बल्कि इसे अपने जीवन का एक हिस्सा बनाना चाहिए जिसे वे जीवन भर याद रखते हैं। यह आपके जीवन जीने के तरीके के नियमों में से एक है। 'दूर के ढोल सुहावने' इसका कारण यह है कि, हम हमेशा यह सोचते हैं कि दूसरे लोगों का जीवन हमसे बेहतर मानते हैं। लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता है। यह सिर्फ इतना है कि हम वास्तविकता से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। 'तेरे मुंह में घी शकर'। यह मेरी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़ा है और वह वेस्ट पाम बीच, मियामी में एक खाद्य उत्सव के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए था। यह घटना तब हुई जब मैं ओबेरॉय से लोअर परेल में होपिंग शेफ नामक फर्म में शामिल हुआ। यह सिर्फ सात दिन पहले की बात है जब मुझे इस जगह के मालिक से पता चला कि हम फरवरी दो हज़ार सोलह में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारतीय भोजन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। शेफ मिशेल स्वामी और मुझे इस इवेंट का हिस्सा बनना था, जिसकी चर्चा जनवरी दो हज़ार सोलह में हुई थी। जब मैंने शेफ मिशेल के साथ इस इवेंट के बारे में चर्चा की, तो इवेंट और प्लानिंग के बारे में सारी बातचीत के बाद, मैंने उनसे कहा कि यह विदेश में होना चाहिए न कि भारत में क्योंकि हमने जिस योजना और भोजन को क्रियान्वित करने के बारे में सोचा था, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का था। और, शेफ मिशेल ने इस कहावत की तर्ज पर अपनी भाषा में कुछ कहा और मुस्कुरा दिए।
अलीगढ़ जागरण संवाददाता। अलीगढ़वासियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। जनपद में कोविड-19 वायरस ने फिर दस्तक दे दी है। बुधवार को एडीए कालोनी के 55 वर्षीय व्यक्ति में इस वायरस की पुष्टि हुई है। मरीज का जेएन मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा है। अलीगढ़, जागरण संवाददाता। अलीगढ़वासियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। जनपद में कोविड-19 वायरस ने फिर दस्तक दे दी है। बुधवार को एडीए कालोनी के 55 वर्षीय व्यक्ति में इस वायरस की पुष्टि हुई है। मरीज का जेएन मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा है। ढाई माह बाद कोरोना का कोई नया संक्रमित मरीज सामने आया। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट हो गया है। ऐसे में सभी को सतर्क होने की जरूरत है। मास्क का इस्तेमाल जरूर करें और शारीरिक दूरी का भी पालन करें। जिले में कोरोना की दूसरी लहर की समाप्ति पर तीन जुलाई को अंतिम कोरोना मरीज सामने आया था। तब से रोजाना चार से पांच हजार लोगों की सैंपलिंग हो रही थी, लेकिन कोई नया मरीज नहीं निकला। इससे तमाम बेफिक्र थे। चर्चा होने लगी कि कोरोना खत्म हो गया। स्वास्थ्य विभाग की अपील के बाद भी लोग लापरवाह होते चले गए। चेहरे से मास्क हट गया तो शारीरिक दूरी के बंधन भी तोड़ दिए। जबकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व चिकित्सक लोगों को समझाते रहे कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। यदि लापरवाही बरती तो फिर से वापसी हो सकती है। आखिरकार, ये नया मामला सामने आ गया। रामघाट रोड स्थित एडीए कालोनी के 54 वर्षीय को पिछले दिनों तेज बुखार आया। स्वजन ने इसे मौसमी बुखार समझा और दवा ले ली, लेकिन 21 सितंबर को मरीज को सांस लेने में तकलीफ हुई। स्वजन तुरंत ही मेडिकल कालेज ले गए। मेडिकल कालेज की टीम को शक हुआ। मरीज की आरटीपीसीआर जांच कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। बुधवार को मेडिकल कालेज में कोरोना के मरीज की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया। अधिकारियों ने फिर से लोगों कोविड प्रोटोकाल का पालन करने की अपील जारी कर दी। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के नए मरीज की हिस्ट्री खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि पता चल सके कि यह व्यक्ति संक्रमित हुआ तो कैसे। हालांकि, अभी तक की पड़ताल में उसके किसी यात्रा से लौटने की बात सामने आई है। गुरुवार को विभागीय टीमें मेडिकल कालेज पहुंचकर जरूरी जानकारी जुटाएगी। एक टीम मरीज के घर भी पहुंचेगी। परिवार व आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए जाएंगे। कोरोना का यह कैसा वैरिएंट है, इसकी भी जांच कराई जाएगी। बता दें कि करीब एक माह पूर्व हाथरस में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, लेकिन उसके बाद कोई नया मरीज नहीं मिला। संभवतः यहां भी ऐसा ही हो, लेकिन इसके लिए सावधानी तो बरतनी ही पड़ेगी। सीएमओ डा. आनंद उपाध्याय ने कहा, नया कोविड संक्रमित मरीज मिलने से घबराने की जरूरत नहीं। लोगों ने अपनी समझदारी से पहले भी कोरोना जनपद से विदा किया। अब फिर से पहले की सावधानी और सतर्कता बरतना शुरू कर दें। घर से निकलें तो मास्क लगाएं। हाथों को सैनिटाइज करते रहें। शारीरिक दूरी का पालन व कोविड प्रोटोकाल को फिर से जीवन में लागू कर लें।
अलीगढ़ जागरण संवाददाता। अलीगढ़वासियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। जनपद में कोविड-उन्नीस वायरस ने फिर दस्तक दे दी है। बुधवार को एडीए कालोनी के पचपन वर्षीय व्यक्ति में इस वायरस की पुष्टि हुई है। मरीज का जेएन मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा है। अलीगढ़, जागरण संवाददाता। अलीगढ़वासियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। जनपद में कोविड-उन्नीस वायरस ने फिर दस्तक दे दी है। बुधवार को एडीए कालोनी के पचपन वर्षीय व्यक्ति में इस वायरस की पुष्टि हुई है। मरीज का जेएन मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा है। ढाई माह बाद कोरोना का कोई नया संक्रमित मरीज सामने आया। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट हो गया है। ऐसे में सभी को सतर्क होने की जरूरत है। मास्क का इस्तेमाल जरूर करें और शारीरिक दूरी का भी पालन करें। जिले में कोरोना की दूसरी लहर की समाप्ति पर तीन जुलाई को अंतिम कोरोना मरीज सामने आया था। तब से रोजाना चार से पांच हजार लोगों की सैंपलिंग हो रही थी, लेकिन कोई नया मरीज नहीं निकला। इससे तमाम बेफिक्र थे। चर्चा होने लगी कि कोरोना खत्म हो गया। स्वास्थ्य विभाग की अपील के बाद भी लोग लापरवाह होते चले गए। चेहरे से मास्क हट गया तो शारीरिक दूरी के बंधन भी तोड़ दिए। जबकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व चिकित्सक लोगों को समझाते रहे कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। यदि लापरवाही बरती तो फिर से वापसी हो सकती है। आखिरकार, ये नया मामला सामने आ गया। रामघाट रोड स्थित एडीए कालोनी के चौवन वर्षीय को पिछले दिनों तेज बुखार आया। स्वजन ने इसे मौसमी बुखार समझा और दवा ले ली, लेकिन इक्कीस सितंबर को मरीज को सांस लेने में तकलीफ हुई। स्वजन तुरंत ही मेडिकल कालेज ले गए। मेडिकल कालेज की टीम को शक हुआ। मरीज की आरटीपीसीआर जांच कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। बुधवार को मेडिकल कालेज में कोरोना के मरीज की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया। अधिकारियों ने फिर से लोगों कोविड प्रोटोकाल का पालन करने की अपील जारी कर दी। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के नए मरीज की हिस्ट्री खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि पता चल सके कि यह व्यक्ति संक्रमित हुआ तो कैसे। हालांकि, अभी तक की पड़ताल में उसके किसी यात्रा से लौटने की बात सामने आई है। गुरुवार को विभागीय टीमें मेडिकल कालेज पहुंचकर जरूरी जानकारी जुटाएगी। एक टीम मरीज के घर भी पहुंचेगी। परिवार व आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए जाएंगे। कोरोना का यह कैसा वैरिएंट है, इसकी भी जांच कराई जाएगी। बता दें कि करीब एक माह पूर्व हाथरस में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, लेकिन उसके बाद कोई नया मरीज नहीं मिला। संभवतः यहां भी ऐसा ही हो, लेकिन इसके लिए सावधानी तो बरतनी ही पड़ेगी। सीएमओ डा. आनंद उपाध्याय ने कहा, नया कोविड संक्रमित मरीज मिलने से घबराने की जरूरत नहीं। लोगों ने अपनी समझदारी से पहले भी कोरोना जनपद से विदा किया। अब फिर से पहले की सावधानी और सतर्कता बरतना शुरू कर दें। घर से निकलें तो मास्क लगाएं। हाथों को सैनिटाइज करते रहें। शारीरिक दूरी का पालन व कोविड प्रोटोकाल को फिर से जीवन में लागू कर लें।
कनाडा में हुए गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके के मर्डर की जिम्मेदारी पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी. वहीं अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग ने भी फेसबुक पोस्ट कर सुक्खा दुनेके की हत्या की जिम्मेदारी ली है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर सुक्खा का मर्डर किस गैंग ने करवाया है? कनाडा में गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके की हत्या के मामले में अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग की एंट्री हो गई है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग के द्वारा सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लिए जाने के बाद अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली है. बता दें कि सुक्खा दुनेके की बीते बुधवार को कनाडा में गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी. हमलवारों ने उस पर करीब 15 गोलियां दागी थीं. सुक्खा से पहले हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी कनाडा में की गई थी. निज्जर की हत्या को लेकर ही भारत और कनाडा के रिश्तों में खटास आ गई है. ये भी पढ़ें- पंजाब में आतंकी फंडिंग के लिए वर्चस्व की जंग, खाक में मिले कई गैंगस्टर, अब किसका नंबर? सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके बंबिहा गैंग से ताल्लुक रखता था. साल 2017 में ही इसने भारत छोड़ दिया और जाली दस्तावेजों के जरिए कनाडा में शरण ले ली. इसे मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला का राइट हैंड माना जाता था. इस पर पंजाब के मोगा जिले में 18 मुकदमे दर्ज हैं. बता दें कि खालिस्तानी के समर्थक संगठनों पर एनआईए शिकंजा कर रही है.
कनाडा में हुए गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके के मर्डर की जिम्मेदारी पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी. वहीं अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग ने भी फेसबुक पोस्ट कर सुक्खा दुनेके की हत्या की जिम्मेदारी ली है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर सुक्खा का मर्डर किस गैंग ने करवाया है? कनाडा में गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके की हत्या के मामले में अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग की एंट्री हो गई है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग के द्वारा सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लिए जाने के बाद अब जग्गू भगवानपुरिया गैंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली है. बता दें कि सुक्खा दुनेके की बीते बुधवार को कनाडा में गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी. हमलवारों ने उस पर करीब पंद्रह गोलियां दागी थीं. सुक्खा से पहले हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी कनाडा में की गई थी. निज्जर की हत्या को लेकर ही भारत और कनाडा के रिश्तों में खटास आ गई है. ये भी पढ़ें- पंजाब में आतंकी फंडिंग के लिए वर्चस्व की जंग, खाक में मिले कई गैंगस्टर, अब किसका नंबर? सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके बंबिहा गैंग से ताल्लुक रखता था. साल दो हज़ार सत्रह में ही इसने भारत छोड़ दिया और जाली दस्तावेजों के जरिए कनाडा में शरण ले ली. इसे मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला का राइट हैंड माना जाता था. इस पर पंजाब के मोगा जिले में अट्ठारह मुकदमे दर्ज हैं. बता दें कि खालिस्तानी के समर्थक संगठनों पर एनआईए शिकंजा कर रही है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
लंदन। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच तीन टेस्ट मुकाबलों की सीरीज का पहला मुकाबला क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा है। इस दौरान इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शेन वॉर्न को श्रद्धांजलि दी। आपको बता दें कि ईसीबी ने लॉर्ड्स के कमेंट्री बॉक्स का नाम शेन वॉर्न के नाम पर करने का फैसला किया है। इतना ही नहीं इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे मुकाबले के बीच में थोड़ी देर के मुकाबला रुका और खिलाड़ियों समेत स्टेडियम में मौजूद तमाम क्रिकेटप्रेमियों की तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी। आपको बता दें कि शेन वॉर्न की याद में 23वें ओवर के बाद 23 सेकंड के लिए खेल को रोका गया। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद तमाम क्रिकेटप्रेमियों ने तालियों के साथ शेन वॉर्न को याद किया। इस संबंध में न्यूजीलैंड क्रिकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर फोटो शेयर किया है। दरअसल, स्टेडियम की स्क्रीन पर जैसे ही शेन वॉर्न के 700वां विकेट लेने वाला वीडियो शुरू हुआ, तभी मुकाबले को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। शेन वॉर्न थाइलैंड में छुट्टियां मनाने गए हुए थे। इस दौरान 4 मार्च, 2022 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से आस्ट्रेलियाई दिग्गज की मौत हो गई थी। उनकी खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में दुख पसरा था। हर एक खिलाड़ी उन्हें याद कर रहा था। आपको बता दें कि शेन वॉर्न के नाम टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट दर्ज है। ऐसा कारनामा करने वाले वो दुनिया के दूसरे खिलाड़ी थे। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। ऐसे में इंग्लैंड के गेंदबाज कीवियों पर हावी दिखाई दिए। खबर लिखे जाने तक कीवियों ने 9 विकेट के नुकसान पर महज 108 रन बनाए हैं। इस दौरान लंबे समय बाद इंग्लैड की प्लेइंग इलेवन में जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड की जोड़ी एकसाथ खेलते हुए दिखाई दी।
लंदन। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच तीन टेस्ट मुकाबलों की सीरीज का पहला मुकाबला क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा है। इस दौरान इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शेन वॉर्न को श्रद्धांजलि दी। आपको बता दें कि ईसीबी ने लॉर्ड्स के कमेंट्री बॉक्स का नाम शेन वॉर्न के नाम पर करने का फैसला किया है। इतना ही नहीं इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे मुकाबले के बीच में थोड़ी देर के मुकाबला रुका और खिलाड़ियों समेत स्टेडियम में मौजूद तमाम क्रिकेटप्रेमियों की तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी। आपको बता दें कि शेन वॉर्न की याद में तेईसवें ओवर के बाद तेईस सेकंड के लिए खेल को रोका गया। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद तमाम क्रिकेटप्रेमियों ने तालियों के साथ शेन वॉर्न को याद किया। इस संबंध में न्यूजीलैंड क्रिकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर फोटो शेयर किया है। दरअसल, स्टेडियम की स्क्रीन पर जैसे ही शेन वॉर्न के सात सौवां विकेट लेने वाला वीडियो शुरू हुआ, तभी मुकाबले को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। शेन वॉर्न थाइलैंड में छुट्टियां मनाने गए हुए थे। इस दौरान चार मार्च, दो हज़ार बाईस को दिल का दौरा पड़ने की वजह से आस्ट्रेलियाई दिग्गज की मौत हो गई थी। उनकी खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में दुख पसरा था। हर एक खिलाड़ी उन्हें याद कर रहा था। आपको बता दें कि शेन वॉर्न के नाम टेस्ट क्रिकेट में सात सौ आठ विकेट दर्ज है। ऐसा कारनामा करने वाले वो दुनिया के दूसरे खिलाड़ी थे। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। ऐसे में इंग्लैंड के गेंदबाज कीवियों पर हावी दिखाई दिए। खबर लिखे जाने तक कीवियों ने नौ विकेट के नुकसान पर महज एक सौ आठ रन बनाए हैं। इस दौरान लंबे समय बाद इंग्लैड की प्लेइंग इलेवन में जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड की जोड़ी एकसाथ खेलते हुए दिखाई दी।
शिवपुरी। जैन धर्म के क्षमावाणी पर्व पर शासकीय आदेशानुसार मांस की दुकानें बंद रखे जाने का निर्देश है। इसी निर्देश के पालन में आज श्वेताम्बर जैन समाज के धर्मावलंबियों ने पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी और डिप्टी कलेक्टर प्रजापति को ज्ञापन सौंपा। कल जैन मिलन ने एसडीएम रूपेश उपाध्याय को ज्ञापन देकर क्षमावाणी पर्व पर मांस की दुकानें बंद रखे जाने का अनुरोध किया था। जैन समाज द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने एसपी और मु य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर क्षमावाणी पर्व 5 और 6 सित बर तथा 15 सित बर को मांस की दुकानें बंद रखे जाना सुनिश्चित किए जाने का आदेश दिया है। आज स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कोचेटा, श्वेता बर जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी तेजमल सांखला, राजकुमार कोचेटा, मुकेश जैन, नेमराज धारीवाल, संजय लूनावत, अशोक कोचेटा और हरी शर्मा ने पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी और डिप्टी कलेक्टर श्री प्रजापति को ज्ञापन सौंपकर उनसे अनुरोध किया कि क्षमावाणी पर्व 5 और 6 सित बर को जैन धर्म की धार्मिक भावनाओं का स मान करते हुए मांस विक्रय की दुकानें बंद रखी जाएं। विदित हो कि श्वेताम्बर जैन समाज में मंदिरवासी जैन समाज का क्षमावाणी पर्व 5 सित बर को और स्थानकवासी श्वेता बर जैन समाज का क्षमावाणी पर्व 6 सित बर को मनाया जा रहा है। इस दिन जैन धर्मावलंबी अहिंसा धर्म का पालन करते हुए समस्त संसार को अहिंसा का संदेश देते हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार ने गजट नोटिफिकेशन द्वारा क्षमावाणी पर्व पर मांस की दुकानें बंद रखे जाने का आदेश प्रसारित कर जैन समाज की धार्मिक भावना का स मान किया है।
शिवपुरी। जैन धर्म के क्षमावाणी पर्व पर शासकीय आदेशानुसार मांस की दुकानें बंद रखे जाने का निर्देश है। इसी निर्देश के पालन में आज श्वेताम्बर जैन समाज के धर्मावलंबियों ने पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी और डिप्टी कलेक्टर प्रजापति को ज्ञापन सौंपा। कल जैन मिलन ने एसडीएम रूपेश उपाध्याय को ज्ञापन देकर क्षमावाणी पर्व पर मांस की दुकानें बंद रखे जाने का अनुरोध किया था। जैन समाज द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने एसपी और मु य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर क्षमावाणी पर्व पाँच और छः सित बर तथा पंद्रह सित बर को मांस की दुकानें बंद रखे जाना सुनिश्चित किए जाने का आदेश दिया है। आज स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कोचेटा, श्वेता बर जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी तेजमल सांखला, राजकुमार कोचेटा, मुकेश जैन, नेमराज धारीवाल, संजय लूनावत, अशोक कोचेटा और हरी शर्मा ने पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी और डिप्टी कलेक्टर श्री प्रजापति को ज्ञापन सौंपकर उनसे अनुरोध किया कि क्षमावाणी पर्व पाँच और छः सित बर को जैन धर्म की धार्मिक भावनाओं का स मान करते हुए मांस विक्रय की दुकानें बंद रखी जाएं। विदित हो कि श्वेताम्बर जैन समाज में मंदिरवासी जैन समाज का क्षमावाणी पर्व पाँच सित बर को और स्थानकवासी श्वेता बर जैन समाज का क्षमावाणी पर्व छः सित बर को मनाया जा रहा है। इस दिन जैन धर्मावलंबी अहिंसा धर्म का पालन करते हुए समस्त संसार को अहिंसा का संदेश देते हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार ने गजट नोटिफिकेशन द्वारा क्षमावाणी पर्व पर मांस की दुकानें बंद रखे जाने का आदेश प्रसारित कर जैन समाज की धार्मिक भावना का स मान किया है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
इसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर ने की व संचालन कमल गौतम ने किया। प्रदर्शन में पूर्व मंत्री योगराज सिंह, धर्मवीर बालियान सैकड़ों कि संख्या में लोकदल कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के आह्वान पर रालोद कार्यकर्ताओं ने किसानों के गन्ना भुगतान की मांग को लेकर जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर के नेतृत्व में रालोद पदाधिकारी व किसानों ने गन्ना अधिकारी कार्यालय सरकुलर रोड पर बकाया गन्ना भुगतान के संबंध में गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए धरना दिया। यहां पर वार्ता के लिए पहुंचे एडीएम प्रशासन और जिला गन्ना अधिकारी को रालोद नेताओं ने अपने बीच ही घंटों तक बैठाये रखा। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के आह्वान पर किसानों के गन्ना भुगतान की मांग को लेकर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सवेरे के समय पार्टी के सर्कुलर रोड स्थित कार्यालय पर इकट्ठा हुए। जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर की अगुवाई में सभी रालोद कार्यकर्ता सर्कुलर रोड से होते हुए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय पहुंचे। जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर की अध्यक्षता और सत्यवीर वर्मा व कमल गौतम के संयुक्त रूप से संचालन में आयोजित किए गए धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री योगराज सिंह व धर्मवीर बालियान आदि वक्ताओं ने चीनी मिलों द्वारा किसानों का अभी तक गन्ना भुगतान न होने पर गहरी नाराजगी जताई। वक्ताओं ने मुख्य रूप से गन्ना किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जल्द से जल्द गन्ना भुगतान कराने की अपील की साथ ही प्रशासन को चेताया की अगर बकाया गन्ना भुगतान जल्द से जल्द नहीं कराया जाता है तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा अपर जिलाधिकारी ने कहा जल्द ही बकाया गन्ना भुगतान कराया जायेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई के चलते किसानों की फसल लागत लगातार बढ़ रही है। लेकिन सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति का कोई ध्यान नहीं है। इसी वजह से सरकार की ओर से पिछले कई सालों से गन्ने के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिसके चलते लागत और मुनाफे के अंतर से किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। भारी बारिश के बावजूद भी बड़ी संख्या में किसान जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। धरने में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष प्रभात तोमर, पूर्व मंत्री धर्मबीर बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, क्षेत्रीय किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष उधम सिंह मंत्री, नौशाद खान, अजित राठी, धर्मेंद्र राठी, कृष्णपाल राठी, मास्टर राजपाल सिंह, भूपेंद्र प्रधान, सोमपाल सिंह बालियान, देवेंद्र मलिक, विदित मलिक, सार्थक लटियान, पंकज राठी, अंकित सहरावत, बाल किशोर त्यागी, ओंकार बालियान, पराग चौधरी, धर्मेंद्र तोमर, सोनू दतियाना, संजीव, दीन मोहम्मद, नसीम राणा, उदयवीर मास्टर, रमेश काकड़ा, विकास बालियान, शादाब अली, शहीर आलम, डा. मोनिका, राजू आढ़ती, रविंद्र सिंह, विनोद मलिक, विनोद मेघाखेड़ी, कंवरपाल फौजी, चमार मधोराम शास्त्री, अमित मलिक आदि सैकड़ों कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर ने की व संचालन कमल गौतम ने किया। प्रदर्शन में पूर्व मंत्री योगराज सिंह, धर्मवीर बालियान सैकड़ों कि संख्या में लोकदल कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के आह्वान पर रालोद कार्यकर्ताओं ने किसानों के गन्ना भुगतान की मांग को लेकर जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर के नेतृत्व में रालोद पदाधिकारी व किसानों ने गन्ना अधिकारी कार्यालय सरकुलर रोड पर बकाया गन्ना भुगतान के संबंध में गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव करते हुए धरना दिया। यहां पर वार्ता के लिए पहुंचे एडीएम प्रशासन और जिला गन्ना अधिकारी को रालोद नेताओं ने अपने बीच ही घंटों तक बैठाये रखा। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के आह्वान पर किसानों के गन्ना भुगतान की मांग को लेकर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सवेरे के समय पार्टी के सर्कुलर रोड स्थित कार्यालय पर इकट्ठा हुए। जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर की अगुवाई में सभी रालोद कार्यकर्ता सर्कुलर रोड से होते हुए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय पहुंचे। जिला अध्यक्ष प्रभात तोमर की अध्यक्षता और सत्यवीर वर्मा व कमल गौतम के संयुक्त रूप से संचालन में आयोजित किए गए धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री योगराज सिंह व धर्मवीर बालियान आदि वक्ताओं ने चीनी मिलों द्वारा किसानों का अभी तक गन्ना भुगतान न होने पर गहरी नाराजगी जताई। वक्ताओं ने मुख्य रूप से गन्ना किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जल्द से जल्द गन्ना भुगतान कराने की अपील की साथ ही प्रशासन को चेताया की अगर बकाया गन्ना भुगतान जल्द से जल्द नहीं कराया जाता है तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा अपर जिलाधिकारी ने कहा जल्द ही बकाया गन्ना भुगतान कराया जायेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई के चलते किसानों की फसल लागत लगातार बढ़ रही है। लेकिन सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति का कोई ध्यान नहीं है। इसी वजह से सरकार की ओर से पिछले कई सालों से गन्ने के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिसके चलते लागत और मुनाफे के अंतर से किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। भारी बारिश के बावजूद भी बड़ी संख्या में किसान जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। धरने में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष प्रभात तोमर, पूर्व मंत्री धर्मबीर बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, क्षेत्रीय किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष उधम सिंह मंत्री, नौशाद खान, अजित राठी, धर्मेंद्र राठी, कृष्णपाल राठी, मास्टर राजपाल सिंह, भूपेंद्र प्रधान, सोमपाल सिंह बालियान, देवेंद्र मलिक, विदित मलिक, सार्थक लटियान, पंकज राठी, अंकित सहरावत, बाल किशोर त्यागी, ओंकार बालियान, पराग चौधरी, धर्मेंद्र तोमर, सोनू दतियाना, संजीव, दीन मोहम्मद, नसीम राणा, उदयवीर मास्टर, रमेश काकड़ा, विकास बालियान, शादाब अली, शहीर आलम, डा. मोनिका, राजू आढ़ती, रविंद्र सिंह, विनोद मलिक, विनोद मेघाखेड़ी, कंवरपाल फौजी, चमार मधोराम शास्त्री, अमित मलिक आदि सैकड़ों कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Posted On: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अक्टूबर 2020 (अनंतिम) महीने के लिए ग्रामीण, शहरी और संयुक्त रूप से आधार 2012 = 100 पर चयनित उप-समूहों/ समूहों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) में उतार-चढ़ाव को जारी कर रहा है। अखिल भारतीय और सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उप-समूह और समूह के लिए भी सीपीआई जारी किए जा रहे हैं। मूल्य डेटा आमतौर पर चयनित 1,114 शहरी बाजारों और चयनित 1,181 गांवों से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के एक साप्ताहिक रोस्टर पर एनएसओ के फील्ड ऑपरेशन डिवीजन के फील्ड कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत दौरे जरिये एकत्रित किया जाता है। अक्टूबर, 2020, माह के दौरान एनएसओ ने 98.1 फीसदी गांवों और 97.9 फीसदी शहरी से उन वस्तुओं के मूल्य एकत्रित किए जबकि बाजार के लिहाज से कीमतों की संख्या 84.3 फीसदी ग्रामीण और 89.3 फीसदी शहरी दर्ज की गई थी। सामान्य सूचकांक और सीएफपीआई पर आधारित अखिल भारतीय मुद्रास्फीति की दर (बिंदुवार आधार पर यानी पिछले साल के इसी महीने में, यानी,अक्टूबर 2020 से अक्टूबर 2019 की तुलना) इस प्रकार हैः सीपीआई (सामान्य) और सीएफपीआई पर आधारित अखिल भारतीय मुद्रास्फीति दरें (% में) अक्टूबर. 2020 (अनंतिम) सितंबर. 2020 (अंतिम) सीपीआई (सामान्य) सामान्य सूचकांक और सीएफपीआई में मासिक बदलाव की जानकारी नीचे दी जा रही हैंः सितंबर 2020 की तुलना में अक्टूबर 2020 के दौरान अखिल भारतीय सीपीआई (सामान्य) और सीएफपीआई में मासिक बदलाव (%): सीपीआई (सामान्य) नोटः अक्टूबर 2020 के आंकड़े अनंतिम हैं। मूल्य डेटा वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होते हैं, जिसकी निगरानी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा की जाती है। नवंबर 2020 के लिए सूचकांक जारी करने की अगली तारीख 14दिसंबर, 2020 (सोमवार) निर्धारित की गई है।
Posted On: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अक्टूबर दो हज़ार बीस महीने के लिए ग्रामीण, शहरी और संयुक्त रूप से आधार दो हज़ार बारह = एक सौ पर चयनित उप-समूहों/ समूहों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में उतार-चढ़ाव को जारी कर रहा है। अखिल भारतीय और सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उप-समूह और समूह के लिए भी सीपीआई जारी किए जा रहे हैं। मूल्य डेटा आमतौर पर चयनित एक,एक सौ चौदह शहरी बाजारों और चयनित एक,एक सौ इक्यासी गांवों से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के एक साप्ताहिक रोस्टर पर एनएसओ के फील्ड ऑपरेशन डिवीजन के फील्ड कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत दौरे जरिये एकत्रित किया जाता है। अक्टूबर, दो हज़ार बीस, माह के दौरान एनएसओ ने अट्ठानवे.एक फीसदी गांवों और सत्तानवे.नौ फीसदी शहरी से उन वस्तुओं के मूल्य एकत्रित किए जबकि बाजार के लिहाज से कीमतों की संख्या चौरासी.तीन फीसदी ग्रामीण और नवासी.तीन फीसदी शहरी दर्ज की गई थी। सामान्य सूचकांक और सीएफपीआई पर आधारित अखिल भारतीय मुद्रास्फीति की दर इस प्रकार हैः सीपीआई और सीएफपीआई पर आधारित अखिल भारतीय मुद्रास्फीति दरें अक्टूबर. दो हज़ार बीस सितंबर. दो हज़ार बीस सीपीआई सामान्य सूचकांक और सीएफपीआई में मासिक बदलाव की जानकारी नीचे दी जा रही हैंः सितंबर दो हज़ार बीस की तुलना में अक्टूबर दो हज़ार बीस के दौरान अखिल भारतीय सीपीआई और सीएफपीआई में मासिक बदलाव : सीपीआई नोटः अक्टूबर दो हज़ार बीस के आंकड़े अनंतिम हैं। मूल्य डेटा वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होते हैं, जिसकी निगरानी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा की जाती है। नवंबर दो हज़ार बीस के लिए सूचकांक जारी करने की अगली तारीख चौदहदिसंबर, दो हज़ार बीस निर्धारित की गई है।
FIFA World Cup 2022: कतर में खेले जा रही फीफा वर्ल्ड कप में राउंड ऑफ 16 का दौर समाप्त हो चुका है और आज से क्वार्टर फाइनल के मुकाबले शुरू होने वाले हैं। आज मैदान पर लियोनल मेसी, नेमार, रिचार्ससन समेत कई सितारे दिखने वाले हैं जो कि अपनी टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल तक ले जाना चाहेंगे। आज पहला मैच ब्राजील और क्रोएशिया के बीच खेला जाने वाला है ये मैच भारतीय समयानुसार 8:30 बजे से शुरु होगा। वहीं दूसरा मैच नीदरलैंड और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। ये मैच देर रात 12:30 बजे शुरू होगा। फीफा वर्ल्ड कप 2022 के क्वार्टर फाइनल का पहला मुकाबला क्रोएशिया और ब्राजील के बीच खेला जाएगा। इस मैच को जीतकर दोनों ही टीमें सेमीफाइनल में पहुंचना चाहेगी। दोनों टीमों ने चार मैच खेले हैं जिसमें तीन ब्राजील जीता है और एक ड्रॉ रहा है। बता दें कि निया की नंबर एक टीम ब्राजील में स्टार स्ट्राइकर नेमार टखने की चोट से फिट होकर लौट चुके हैं। इसके अलावा प्रमुख रक्षक खिलाड़ी डेनिलो की भी वापसी हो चुकी है। हालांकि क्रोएशिया को भी वह हल्के में नहीं लेना चाहेगी। गत उपविजेता क्रोएशिया की टीम ने प्री क्वार्टर में जापान के साथ 1-1 से ड्रॉ खेलने के बाद पेनाल्टी शूटआउट में जीत हासिल की थी। उसे अब ब्राजील के स्ट्राइकर्स से बचना होगा और गोल भी दागने होंगे। सुपरस्टार फॉरवर्ड लियोनल मेसी की टीम अर्जेंटीना का सामना शुक्रवार को फीफा विश्वकप के क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से होगा। अपना आखिरी विश्वकप लियोनल मेसी पर सभी की निगाहें लगी होंगी जिनके दम पर अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा है। मेसी अपनी टीम को 8 साल के बाद सेमीफाइनल में पहुंचाना चाहेंगे। वहीं, अर्जेंटीना को नीदरलैंड से कड़ी चुनौती मिलेगी। नीदरलैंड की टीम किसी को भी हराने का दमखम रखती है। मेसी ने भी कहा था कि एक और मुश्किल मैच सामने है। नीदरलैंड की टीम 2014 विश्वकप में अर्जेंटीना से मिली पिछली हार का बदला लेना चाहेगी।
FIFA World Cup दो हज़ार बाईस: कतर में खेले जा रही फीफा वर्ल्ड कप में राउंड ऑफ सोलह का दौर समाप्त हो चुका है और आज से क्वार्टर फाइनल के मुकाबले शुरू होने वाले हैं। आज मैदान पर लियोनल मेसी, नेमार, रिचार्ससन समेत कई सितारे दिखने वाले हैं जो कि अपनी टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल तक ले जाना चाहेंगे। आज पहला मैच ब्राजील और क्रोएशिया के बीच खेला जाने वाला है ये मैच भारतीय समयानुसार आठ:तीस बजे से शुरु होगा। वहीं दूसरा मैच नीदरलैंड और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। ये मैच देर रात बारह:तीस बजे शुरू होगा। फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के क्वार्टर फाइनल का पहला मुकाबला क्रोएशिया और ब्राजील के बीच खेला जाएगा। इस मैच को जीतकर दोनों ही टीमें सेमीफाइनल में पहुंचना चाहेगी। दोनों टीमों ने चार मैच खेले हैं जिसमें तीन ब्राजील जीता है और एक ड्रॉ रहा है। बता दें कि निया की नंबर एक टीम ब्राजील में स्टार स्ट्राइकर नेमार टखने की चोट से फिट होकर लौट चुके हैं। इसके अलावा प्रमुख रक्षक खिलाड़ी डेनिलो की भी वापसी हो चुकी है। हालांकि क्रोएशिया को भी वह हल्के में नहीं लेना चाहेगी। गत उपविजेता क्रोएशिया की टीम ने प्री क्वार्टर में जापान के साथ एक-एक से ड्रॉ खेलने के बाद पेनाल्टी शूटआउट में जीत हासिल की थी। उसे अब ब्राजील के स्ट्राइकर्स से बचना होगा और गोल भी दागने होंगे। सुपरस्टार फॉरवर्ड लियोनल मेसी की टीम अर्जेंटीना का सामना शुक्रवार को फीफा विश्वकप के क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से होगा। अपना आखिरी विश्वकप लियोनल मेसी पर सभी की निगाहें लगी होंगी जिनके दम पर अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा है। मेसी अपनी टीम को आठ साल के बाद सेमीफाइनल में पहुंचाना चाहेंगे। वहीं, अर्जेंटीना को नीदरलैंड से कड़ी चुनौती मिलेगी। नीदरलैंड की टीम किसी को भी हराने का दमखम रखती है। मेसी ने भी कहा था कि एक और मुश्किल मैच सामने है। नीदरलैंड की टीम दो हज़ार चौदह विश्वकप में अर्जेंटीना से मिली पिछली हार का बदला लेना चाहेगी।
"साल 1942 में रिलीज हुई अनिल कपूर और मनीषा कोईराला अभिनीत फिल्म "1942: ए लव स्टोरी" के गीत "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" को जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" में 24 सालों बाद फिर से रीक्रिएट किया गया है। अनिल कपूर स्टारर फिल्म "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" का आज मुंबई में लाइव ट्रेलर लॉन्च हुआ है। जिसकी तैयारी जोरो-शोरों से की गई है। फिल्म में अनिल के अलावा उनकी बेटी सोनम कपूर और जूही चावला और राजकुमार राव भी एक अहम भूमिका में दिखेंगे। फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी ने अपने सोशल मीडिया पर फ़िल्म "संजू" का नया पोस्टर जारी कर दिया है जिसमे नरगिस दत्त की भूमिका में मनीषा कोइराला नजर आ रही हैं। नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला का अफेयर बॉलीवुड के लिए एक शॉकिंग न्यूज जैसा था। नाना जैसे कड़क व्यक्ति के साथ किसी का रोमांस भी हो सकता है, इस पर किसी को यकीन ही नहीं आ रहा था। जबकि मनीषा भी नाना पर दिलों जान से फिदा हो चुकी थीं। लेकिन नाना ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे उनका प्यार भरा रिश्ता टूट गया। फिल्म "मकड़ी" तो सभी को बखूबी याद है। फिल्म विशाल भारद्वाज की थी जिसमें एक डरावनी औरत एक बच्ची को अपनी नौकरानी बना लेती है। फिल्म "डियर माया" के पहले भाग की कहानी लगभग वैसी ही है। लीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने दमदार वापसी की है। उनकी फिल्म "डियर माया" का ट्रेलर रिलीज हो गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला जल्द ही सालों के बाद संजय दत्त की बायोपिक से कमबैक करने वाली हैं। मनीषा कोइराला ने बॉलीवुड में बतौर अभिनेत्री 90 के दशक में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया था। मनीषा कोइराला बॉलीवुड की उन सौभाग्यशाली अभिनेत्रियों में से हैं, जिन्हें पहली ही फिल्म से कामयाबी मिल गई। मनीषा होटल छोड़ कर पायलट बाबा के शिविर में विदेशी भक्तों के साथ रह रही हैं।
"साल एक हज़ार नौ सौ बयालीस में रिलीज हुई अनिल कपूर और मनीषा कोईराला अभिनीत फिल्म "एक हज़ार नौ सौ बयालीस: ए लव स्टोरी" के गीत "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" को जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" में चौबीस सालों बाद फिर से रीक्रिएट किया गया है। अनिल कपूर स्टारर फिल्म "एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा" का आज मुंबई में लाइव ट्रेलर लॉन्च हुआ है। जिसकी तैयारी जोरो-शोरों से की गई है। फिल्म में अनिल के अलावा उनकी बेटी सोनम कपूर और जूही चावला और राजकुमार राव भी एक अहम भूमिका में दिखेंगे। फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी ने अपने सोशल मीडिया पर फ़िल्म "संजू" का नया पोस्टर जारी कर दिया है जिसमे नरगिस दत्त की भूमिका में मनीषा कोइराला नजर आ रही हैं। नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला का अफेयर बॉलीवुड के लिए एक शॉकिंग न्यूज जैसा था। नाना जैसे कड़क व्यक्ति के साथ किसी का रोमांस भी हो सकता है, इस पर किसी को यकीन ही नहीं आ रहा था। जबकि मनीषा भी नाना पर दिलों जान से फिदा हो चुकी थीं। लेकिन नाना ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे उनका प्यार भरा रिश्ता टूट गया। फिल्म "मकड़ी" तो सभी को बखूबी याद है। फिल्म विशाल भारद्वाज की थी जिसमें एक डरावनी औरत एक बच्ची को अपनी नौकरानी बना लेती है। फिल्म "डियर माया" के पहले भाग की कहानी लगभग वैसी ही है। लीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने दमदार वापसी की है। उनकी फिल्म "डियर माया" का ट्रेलर रिलीज हो गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला जल्द ही सालों के बाद संजय दत्त की बायोपिक से कमबैक करने वाली हैं। मनीषा कोइराला ने बॉलीवुड में बतौर अभिनेत्री नब्बे के दशक में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया था। मनीषा कोइराला बॉलीवुड की उन सौभाग्यशाली अभिनेत्रियों में से हैं, जिन्हें पहली ही फिल्म से कामयाबी मिल गई। मनीषा होटल छोड़ कर पायलट बाबा के शिविर में विदेशी भक्तों के साथ रह रही हैं।
छतरपुर कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर पानी सप्लाई, जल स्त्रोतों और उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जहां कलेक्टर के निर्देश पर बड़ामलहरा SDM विकास कुमार आनंद ने मनकारी और महाराजगंज में जल निगम के जीएम के साथ वाटर सप्लाई नेटवर्क और ग्रेविटी मैन के एयर वाल्व और स्लूस वाल्व का निरीक्षण किया। तो वहीं दूसरी ओर जल समस्या के निवारण के लिए बोरिंग कराई गईं साथ ही पुराने हैंडपंप रिपेयर होकर क्रियाशील हुए। जिससे पानी मिलने से ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। कलेक्टर संदीप जी आर द्वारा जिले में जल स्त्रोतों को क्रियाशील बनाने के लिए अधिकारी निरीक्षण कर प्रमाण दे रहे है। जहां बक्स्वाहा के ग्राम बमोरी में नवीन सफल बोरिंग कराई गई। जिससे गांव के लोगों में खुशी का माहौल रहा। इसी क्रम में छतरपुर के ग्राम बगौता के ग्राम सुलनेरन पुरवा में, गौरिहार के ग्राम घूर में, रामजाला, देवरीपुरवा, बड़ामलहरा के ग्राम अवार खेरा और बिजावर के ग्राम रगौली, मादेलन पुरवा भारतपुरा, नयागांव में हैंडपंपों को क्रियाशील किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छतरपुर कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर पानी सप्लाई, जल स्त्रोतों और उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जहां कलेक्टर के निर्देश पर बड़ामलहरा SDM विकास कुमार आनंद ने मनकारी और महाराजगंज में जल निगम के जीएम के साथ वाटर सप्लाई नेटवर्क और ग्रेविटी मैन के एयर वाल्व और स्लूस वाल्व का निरीक्षण किया। तो वहीं दूसरी ओर जल समस्या के निवारण के लिए बोरिंग कराई गईं साथ ही पुराने हैंडपंप रिपेयर होकर क्रियाशील हुए। जिससे पानी मिलने से ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। कलेक्टर संदीप जी आर द्वारा जिले में जल स्त्रोतों को क्रियाशील बनाने के लिए अधिकारी निरीक्षण कर प्रमाण दे रहे है। जहां बक्स्वाहा के ग्राम बमोरी में नवीन सफल बोरिंग कराई गई। जिससे गांव के लोगों में खुशी का माहौल रहा। इसी क्रम में छतरपुर के ग्राम बगौता के ग्राम सुलनेरन पुरवा में, गौरिहार के ग्राम घूर में, रामजाला, देवरीपुरवा, बड़ामलहरा के ग्राम अवार खेरा और बिजावर के ग्राम रगौली, मादेलन पुरवा भारतपुरा, नयागांव में हैंडपंपों को क्रियाशील किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा बोले- कौन हैं शाहरुख खान? मैं नहीं जानता : फिर SRK ने रात 2 बजे किया फोन, फिर..' कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। शनिवार को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शाहरुख की फिल्म पठान देखने से मना कर दिया था। यहां एक सवाल के जवाब में उन्होंने यहां तक कह दिया- कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। लेकिन आज मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर बताया कि मुझे शनिवार-रविवार रात 2 बजे शाहरुख खान ने फोन किया था। वे गुवाहाटी के नरेंगी हॉल में होने वाली पठान की स्क्रीनिंग को लेकर परेशान थे। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का कर्तव्य है। हम सुनिश्चित करेंगे कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान कोई विवाद न हो। दरअसल, 20 जनवरी को गुवाहाटी के नरेंगी में एक सिनेमा हॉल में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी। इस दौरान शाहरुख खान के पोस्टर जला दिए। इसी हॉल में 25 जनवरी को पठान की स्क्रीनिंग होगी। पठान फिल्म के खिलाफ दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन पर संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने यहां तक कह दिया- कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। शाहरुख ने मुझे फोन नहीं किया है, लेकिन अगर वे कॉल करते हैं तो मैं इस मामले को देखूंगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आज ट्वीट कर बताया कि मुझे शनिवार-रविवार रात 2 बजे शाहरुख खान ने फोन किया था। वे गुवाहाटी के नरेंगी हॉल में होने वाली पठान की स्क्रीनिंग को लेकर परेशान थे। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का कर्तव्य है। हम सुनिश्चित करेंगे कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान कोई विवाद न हो। क्यों हो रहा है विवाद? पठान के गाने 'बेशरम रंग' में दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की बिकिनी पहनी है। विरोध करने वालों का कहना है कि भगवा रंग हिंदू धर्म का प्रतीक है और दीपिका इस रंग के कपड़े पहन कर बेशरम रंग के बोल वाले गाने पर डांस कर रही हैं जो कि काफी आपत्तिजनक है। भगवा जैसे पवित्र रंग का प्रयोग बिकिनी के लिए करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य हिन्दू संगठनों ने फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है।
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा बोले- कौन हैं शाहरुख खान? मैं नहीं जानता : फिर SRK ने रात दो बजे किया फोन, फिर..' कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। शनिवार को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शाहरुख की फिल्म पठान देखने से मना कर दिया था। यहां एक सवाल के जवाब में उन्होंने यहां तक कह दिया- कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। लेकिन आज मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर बताया कि मुझे शनिवार-रविवार रात दो बजे शाहरुख खान ने फोन किया था। वे गुवाहाटी के नरेंगी हॉल में होने वाली पठान की स्क्रीनिंग को लेकर परेशान थे। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का कर्तव्य है। हम सुनिश्चित करेंगे कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान कोई विवाद न हो। दरअसल, बीस जनवरी को गुवाहाटी के नरेंगी में एक सिनेमा हॉल में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी। इस दौरान शाहरुख खान के पोस्टर जला दिए। इसी हॉल में पच्चीस जनवरी को पठान की स्क्रीनिंग होगी। पठान फिल्म के खिलाफ दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन पर संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने यहां तक कह दिया- कौन हैं शाहरुख खान? मैं उनके या फिल्म के बारे में कुछ नहीं जानता। शाहरुख ने मुझे फोन नहीं किया है, लेकिन अगर वे कॉल करते हैं तो मैं इस मामले को देखूंगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आज ट्वीट कर बताया कि मुझे शनिवार-रविवार रात दो बजे शाहरुख खान ने फोन किया था। वे गुवाहाटी के नरेंगी हॉल में होने वाली पठान की स्क्रीनिंग को लेकर परेशान थे। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का कर्तव्य है। हम सुनिश्चित करेंगे कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान कोई विवाद न हो। क्यों हो रहा है विवाद? पठान के गाने 'बेशरम रंग' में दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की बिकिनी पहनी है। विरोध करने वालों का कहना है कि भगवा रंग हिंदू धर्म का प्रतीक है और दीपिका इस रंग के कपड़े पहन कर बेशरम रंग के बोल वाले गाने पर डांस कर रही हैं जो कि काफी आपत्तिजनक है। भगवा जैसे पवित्र रंग का प्रयोग बिकिनी के लिए करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य हिन्दू संगठनों ने फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है।
बैंकॉक। थाइलैंड की सरकार ने मोबाइल गेम पोकेमोन गो के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस गेम को खेलने के लिए जगह निर्धारित करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों से बुधवार को यह जानकारी मिली। निन्टेंडो ने यह गेम थाइलैंड में 6 अगस्त को बाजार में उतारा था। यह एक आभासी वास्तविकता (आगूमेंटेड रियलटी) वाला गेम है जो थाईलैंड के युवाओं में काफी मशहूर है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रसारण और दूरसंचार आयोग (एनबीटीसी) और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत संभवतः इस गेम के खेलने के लिए क्षेत्र निर्धारित कर दिया जाएगा। बैंकॉक के प्रसिद्ध शॉपिंग सेंटर पारगोन में मंगलवार रात को एक लक्सरी स्टोर के बाहर बड़ी संख्या में लोग इस गेम को खेलते हुए देखे गए। क्योंकि कई स्थानों को 'चारा मॉड्यूल' के रूप में स्थापित किया गया है। इसके अलावा अभिभावकों को अपने बच्चों को इस गेम की लत से दूर रखने के सुझाव दिए गए हैं। थाई पुलिस ने ड्राइव करने के दौरान इस गेम को खेलने पर कड़ाई से रोक लगा दी है।
बैंकॉक। थाइलैंड की सरकार ने मोबाइल गेम पोकेमोन गो के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस गेम को खेलने के लिए जगह निर्धारित करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों से बुधवार को यह जानकारी मिली। निन्टेंडो ने यह गेम थाइलैंड में छः अगस्त को बाजार में उतारा था। यह एक आभासी वास्तविकता वाला गेम है जो थाईलैंड के युवाओं में काफी मशहूर है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रसारण और दूरसंचार आयोग और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत संभवतः इस गेम के खेलने के लिए क्षेत्र निर्धारित कर दिया जाएगा। बैंकॉक के प्रसिद्ध शॉपिंग सेंटर पारगोन में मंगलवार रात को एक लक्सरी स्टोर के बाहर बड़ी संख्या में लोग इस गेम को खेलते हुए देखे गए। क्योंकि कई स्थानों को 'चारा मॉड्यूल' के रूप में स्थापित किया गया है। इसके अलावा अभिभावकों को अपने बच्चों को इस गेम की लत से दूर रखने के सुझाव दिए गए हैं। थाई पुलिस ने ड्राइव करने के दौरान इस गेम को खेलने पर कड़ाई से रोक लगा दी है।
नई दिल्ली, (भाषा)। देश में लगातार बढ़ रही उढर्जा की मांग और जीवाश्म ईंधनों के सीमित भंडार को देखते हुए न केवल उढर्जा संरक्षण बल्कि नवीकरणीय उढर्जा पर पर्याप्त बल दिये जाने की आवश्यकता है। फिलहाल देश में खपत होने वाली बिजली का करीब 70 फीसदी हिस्सा ताप विद्युत से, 21 फीसदी पनबिजली और करीब चार फीसदी परमाणु विद्युत से आता है। बिजली उत्पादन लगातार बढ़ने के बाद भी इसकी कमी दूर नहीं हो रही है और इसके कई कारणों में एक पारेषण हानि भी है। देश में पारेषण एवं वितरण के दौरान करीब 30 से 45 फीसदी बिजली नष्ट हो जाती है। नई दिल्ली पावर लिमिटेड के जनसंपर्क अधिकारी अजय महराज कहते हैं कि हम दिल्ली में पारेषण हानि वर्ष 2002 के 53 फीसदी से घटाकर अब करीब 14. 5 फीसदी तक लाने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उढर्जा संरक्षण के लिए आवश्यक है कि लोग अपने घरों में बीबीई उपकरण लगाएं और आतंरिक वायरिंग की त्रुटियें को दूरस्त करें। लोग बिजली का कम से कम यानि न्यायोचित उपयोग करें। उन्हें अपने घरों में सीएफल ट्यूब का उपयोग करना चाहिए। उधर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पर्यावरण संकाय के प्रो. उमेश कुलश्रेष्" कहते हैं कि उढर्जा संरक्षण के लिए उसके इस्तेमाल में कमी, उढर्जा कार्यकुशलता में वृद्धि और पुनःउपयोग ःपुनर्चक्रणः बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि उढर्जा संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के साथ ही नई आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि यदि फालतू खाना फेंका जाता है तो वह भी उढर्जा की बर्बादी है। दरअसल ऐसे में उस अतिरिक्त खाने को पकाने में जो उढर्जा व्यय हुई है उसका कोई महत्व नहीं रहा। कुलश्रेष्" कहते हैं कि उढर्जा की बढ़ती मांग के सिलसिले में परमाणु उढर्जा बेहतर विकल्प है लेकिन बड़े पैमाने पर परमाणु उढर्जा के उपयोग के लिए हमें अभी 20-30 वर्ष इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में नवीकरणीय उढर्जा खासकर सौर उढर्जा पर विशेष ध्यान देना होगा। फिलहाल देश में नवीकरणीय उढर्जा का मौजूदा स्थापित आधार करीब 16492. 42 मेगावाट है जो कुल स्थापित आधार का करीब आ" फीसदी है। इसमें भी पवन उढर्जा का योगदान एक तिहाई है। महराज ने कहा कि उनकी कंपनी सौर उढर्जा संयंत्र लगा रही हैं। कई स्थानों पर ये संयंत्र लगाए भी जा चुके हैं। चूंकि दिल्ली में आ" नौ महीने सूर्य की अच्छी रोशनी बनी रहती हैं, इस दृष्टि से यहां सौर उढर्जा का उपयोग काफी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी स्कूलों में बच्चों को उढर्जा संरक्षण के महत्व और उपाय के बारे में बताती है। सौर उपकरणों के महंगे होने के संबंध में कुलश्रेष्" ने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी है कि हमें कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है कि बड़ी कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया जाए, मैटेरियल साइंस को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जहां तक पुनर्चक्रण की बात है तो उदाहरण स्वरूप मूल सीसे की तुलना में पुनर्चक्रित सीसे से न केवल 50 फीसदी बिजली की बचत होती है बल्कि 20 फीसदी कम वायु एवं 50 फीसदी कम जल प्रदूषण होता है। पुनर्चक्रित एक ग्लास कंटेनर से इतनी उढर्जा बचती है कि 100 वाट का बल्ब चार घंटे तक जल सकता है।
नई दिल्ली, । देश में लगातार बढ़ रही उढर्जा की मांग और जीवाश्म ईंधनों के सीमित भंडार को देखते हुए न केवल उढर्जा संरक्षण बल्कि नवीकरणीय उढर्जा पर पर्याप्त बल दिये जाने की आवश्यकता है। फिलहाल देश में खपत होने वाली बिजली का करीब सत्तर फीसदी हिस्सा ताप विद्युत से, इक्कीस फीसदी पनबिजली और करीब चार फीसदी परमाणु विद्युत से आता है। बिजली उत्पादन लगातार बढ़ने के बाद भी इसकी कमी दूर नहीं हो रही है और इसके कई कारणों में एक पारेषण हानि भी है। देश में पारेषण एवं वितरण के दौरान करीब तीस से पैंतालीस फीसदी बिजली नष्ट हो जाती है। नई दिल्ली पावर लिमिटेड के जनसंपर्क अधिकारी अजय महराज कहते हैं कि हम दिल्ली में पारेषण हानि वर्ष दो हज़ार दो के तिरेपन फीसदी से घटाकर अब करीब चौदह. पाँच फीसदी तक लाने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उढर्जा संरक्षण के लिए आवश्यक है कि लोग अपने घरों में बीबीई उपकरण लगाएं और आतंरिक वायरिंग की त्रुटियें को दूरस्त करें। लोग बिजली का कम से कम यानि न्यायोचित उपयोग करें। उन्हें अपने घरों में सीएफल ट्यूब का उपयोग करना चाहिए। उधर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पर्यावरण संकाय के प्रो. उमेश कुलश्रेष्" कहते हैं कि उढर्जा संरक्षण के लिए उसके इस्तेमाल में कमी, उढर्जा कार्यकुशलता में वृद्धि और पुनःउपयोग ःपुनर्चक्रणः बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि उढर्जा संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के साथ ही नई आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि यदि फालतू खाना फेंका जाता है तो वह भी उढर्जा की बर्बादी है। दरअसल ऐसे में उस अतिरिक्त खाने को पकाने में जो उढर्जा व्यय हुई है उसका कोई महत्व नहीं रहा। कुलश्रेष्" कहते हैं कि उढर्जा की बढ़ती मांग के सिलसिले में परमाणु उढर्जा बेहतर विकल्प है लेकिन बड़े पैमाने पर परमाणु उढर्जा के उपयोग के लिए हमें अभी बीस-तीस वर्ष इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में नवीकरणीय उढर्जा खासकर सौर उढर्जा पर विशेष ध्यान देना होगा। फिलहाल देश में नवीकरणीय उढर्जा का मौजूदा स्थापित आधार करीब सोलह हज़ार चार सौ बानवे. बयालीस मेगावाट है जो कुल स्थापित आधार का करीब आ" फीसदी है। इसमें भी पवन उढर्जा का योगदान एक तिहाई है। महराज ने कहा कि उनकी कंपनी सौर उढर्जा संयंत्र लगा रही हैं। कई स्थानों पर ये संयंत्र लगाए भी जा चुके हैं। चूंकि दिल्ली में आ" नौ महीने सूर्य की अच्छी रोशनी बनी रहती हैं, इस दृष्टि से यहां सौर उढर्जा का उपयोग काफी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी स्कूलों में बच्चों को उढर्जा संरक्षण के महत्व और उपाय के बारे में बताती है। सौर उपकरणों के महंगे होने के संबंध में कुलश्रेष्" ने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी है कि हमें कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है कि बड़ी कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया जाए, मैटेरियल साइंस को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जहां तक पुनर्चक्रण की बात है तो उदाहरण स्वरूप मूल सीसे की तुलना में पुनर्चक्रित सीसे से न केवल पचास फीसदी बिजली की बचत होती है बल्कि बीस फीसदी कम वायु एवं पचास फीसदी कम जल प्रदूषण होता है। पुनर्चक्रित एक ग्लास कंटेनर से इतनी उढर्जा बचती है कि एक सौ वाट का बल्ब चार घंटे तक जल सकता है।
अतिवृष्टि से उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में बड़े पैमाने पर हुआ है फसलों को नुकसान. पहले सूखा और अब बाढ़, बारिश ने बढ़ाई परेशानी. सीएम ने कहा-भारतीय किसान प्रकृति पर हैं निर्भर, ग्लोबल वॉर्मिंग का सामना कर रहे हैं किसान. उत्तर प्रदेश के 62 जिलों में इस वर्ष समय पर बारिश नहीं हुई. इनके सर्वे के आदेश दिए गए हैं. इन स्थानों पर दलहल, तिलहन और सब्जी के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. दूसरी ओर, पिछले 10 दिनों से अतिवृष्टि से फसलों को अधिक नुकसान हुआ है. प्रदेश के जिन 12 जिलों में बाढ़ के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है, उनमें प्रदेश सरकार ने मुआवजे के लिए 876 करोड़ रुपये भेजे हैं. उसके वितरण का काम चल रहा है. कृषि से जुड़े एक कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बात की जानकारी दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभार्थियों को 'मेरा पॉलिसी मेरा हाथ' के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है. इस योजना से लाभान्वित हुए एक किसान ने उन्हें बताया कि उसके छह बीघा खेत के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से उसे 18000 रुपये की सहायता मिली है. सीएम ने कहा कि सभी किसानों को इन पॉलिसियों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय किसान प्रकृति पर निर्भर हैं. किसानों को ग्लोबल वॉर्मिंग का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद प्रदेश के किसानों द्वारा रिकॉर्ड मात्रा में खाद्यान्न का उत्पादन किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश की क्षमता को अन्नदाता ने सभी के समक्ष प्रस्तुत किया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार धरती माता के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया गया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से फसली बीमा कराया गया. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को लागू कर लंबित कृषि सिंचाई योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा पूरा कराया जा रहा है. प्रदेश में छोटी-बड़ी 36 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कराया गया, जिनके माध्यम से 21 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई. प्रदेश में अब तक 27 हजार किसानों को सोलर पंप उपलब्ध करवाए गए. अब 30 हजार किसानों को सोलर पंप उपलब्ध करवाने के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ जिले में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती की विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. प्राकृतिक खेती से अनेक लाभ हैं. बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर एवं पेस्टीसाइड का उपयोग खेतों में किया जाता है. नेचुरल फार्मिंग के माध्यम से इसे न्यूनतम किया जा सकता है. एक एकड़ खेती में फर्टिलाइजर एवं पेस्टीसाइड के उपयोग में 12,000 से 15,000 रुपये का खर्च आता है, जबकि प्राकृतिक खेती में यह खर्च मात्र 1,000 रुपये तक सीमित हो जाएगा. किसानों प्रति एकड़ 11 से 14 हजार रुपये तक बचत होगी.
अतिवृष्टि से उत्तर प्रदेश के बारह जिलों में बड़े पैमाने पर हुआ है फसलों को नुकसान. पहले सूखा और अब बाढ़, बारिश ने बढ़ाई परेशानी. सीएम ने कहा-भारतीय किसान प्रकृति पर हैं निर्भर, ग्लोबल वॉर्मिंग का सामना कर रहे हैं किसान. उत्तर प्रदेश के बासठ जिलों में इस वर्ष समय पर बारिश नहीं हुई. इनके सर्वे के आदेश दिए गए हैं. इन स्थानों पर दलहल, तिलहन और सब्जी के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. दूसरी ओर, पिछले दस दिनों से अतिवृष्टि से फसलों को अधिक नुकसान हुआ है. प्रदेश के जिन बारह जिलों में बाढ़ के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है, उनमें प्रदेश सरकार ने मुआवजे के लिए आठ सौ छिहत्तर करोड़ रुपये भेजे हैं. उसके वितरण का काम चल रहा है. कृषि से जुड़े एक कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बात की जानकारी दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभार्थियों को 'मेरा पॉलिसी मेरा हाथ' के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है. इस योजना से लाभान्वित हुए एक किसान ने उन्हें बताया कि उसके छह बीघा खेत के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से उसे अट्ठारह हज़ार रुपयापये की सहायता मिली है. सीएम ने कहा कि सभी किसानों को इन पॉलिसियों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय किसान प्रकृति पर निर्भर हैं. किसानों को ग्लोबल वॉर्मिंग का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद प्रदेश के किसानों द्वारा रिकॉर्ड मात्रा में खाद्यान्न का उत्पादन किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश की क्षमता को अन्नदाता ने सभी के समक्ष प्रस्तुत किया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार धरती माता के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया गया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से फसली बीमा कराया गया. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को लागू कर लंबित कृषि सिंचाई योजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा पूरा कराया जा रहा है. प्रदेश में छोटी-बड़ी छत्तीस सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कराया गया, जिनके माध्यम से इक्कीस लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई. प्रदेश में अब तक सत्ताईस हजार किसानों को सोलर पंप उपलब्ध करवाए गए. अब तीस हजार किसानों को सोलर पंप उपलब्ध करवाने के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ जिले में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती की विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. प्राकृतिक खेती से अनेक लाभ हैं. बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर एवं पेस्टीसाइड का उपयोग खेतों में किया जाता है. नेचुरल फार्मिंग के माध्यम से इसे न्यूनतम किया जा सकता है. एक एकड़ खेती में फर्टिलाइजर एवं पेस्टीसाइड के उपयोग में बारह,शून्य से पंद्रह,शून्य रुपयापये का खर्च आता है, जबकि प्राकृतिक खेती में यह खर्च मात्र एक,शून्य रुपयापये तक सीमित हो जाएगा. किसानों प्रति एकड़ ग्यारह से चौदह हजार रुपये तक बचत होगी.
KANPUR: कार्डियोलॉजी में चल रही गड़बडि़यों पर हुए लगातार खुलासों के बाद अब कमिश्नर की गठित की गई जांच कमेटी सक्रिय हो गई। जांच कमेटी के अध्यक्ष अपर आयुक्त राजीव शर्मा ने कार्डियोलॉजी डायरेक्टर से 10 बिंदुओं पर जबाव तलब किया है। इन बिंदुओं में फंड से जुड़े दस्तावेज और उसके खर्चे की डिटेल मांगी गई है। इसके अलावा पैथोलॉजी से लेकर ऑपरेशन के दौरान लगाए जाने वाले स्टंट, पेसमेकर और वॉल्व की खरीद का ब्योरा भी तलब किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने बताया कि जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉयरेक्टर को इस बाबत जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। बाद में कार्डियोलॉजी जाकर हकीकत को भी देखा जाएगा। लखनऊ से कौन आया था? बीते हफ्ते जब कार्डियोलॉजी में गड़बडि़यों को लेकर लगातार खुलासे किए जा रहे थे। इसी दौरान लखनऊ से एक अधिकारी बेहद गुपचुप तरीके से कार्डियोलॉजी का दौरा कर गए। बताया जाता है उन्हें खास सीएम के निर्देश पर कार्डियोलॉजी की हकीकत जानने के लिए भेजा गया था। सूत्रों की माने तो इस अधिकारी ने कार्डियोलॉजी में डॉक्टर्स की अकूत कमाई को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
KANPUR: कार्डियोलॉजी में चल रही गड़बडि़यों पर हुए लगातार खुलासों के बाद अब कमिश्नर की गठित की गई जांच कमेटी सक्रिय हो गई। जांच कमेटी के अध्यक्ष अपर आयुक्त राजीव शर्मा ने कार्डियोलॉजी डायरेक्टर से दस बिंदुओं पर जबाव तलब किया है। इन बिंदुओं में फंड से जुड़े दस्तावेज और उसके खर्चे की डिटेल मांगी गई है। इसके अलावा पैथोलॉजी से लेकर ऑपरेशन के दौरान लगाए जाने वाले स्टंट, पेसमेकर और वॉल्व की खरीद का ब्योरा भी तलब किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने बताया कि जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉयरेक्टर को इस बाबत जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। बाद में कार्डियोलॉजी जाकर हकीकत को भी देखा जाएगा। लखनऊ से कौन आया था? बीते हफ्ते जब कार्डियोलॉजी में गड़बडि़यों को लेकर लगातार खुलासे किए जा रहे थे। इसी दौरान लखनऊ से एक अधिकारी बेहद गुपचुप तरीके से कार्डियोलॉजी का दौरा कर गए। बताया जाता है उन्हें खास सीएम के निर्देश पर कार्डियोलॉजी की हकीकत जानने के लिए भेजा गया था। सूत्रों की माने तो इस अधिकारी ने कार्डियोलॉजी में डॉक्टर्स की अकूत कमाई को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
फंसे हुए कर्ज़ (एनपीए) के काफ़ी बढ़ जाने की आशंका जताई गई है. है. हुए कर्ज़ बढ़कर 8. 1-9. 5 फ़ीसदी हो सकता है, जो सितंबर 2021 में 6. 9 फ़ीसदी रही है. भी हो सकती है. हिस्सा रहा है. जहां 6. 9 फ़ीसदी हो गई, वहीं शुद्ध एनपीए केवल 2. 3 फ़ीसदी रह गई. बुधवार को दिल्ली सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कोरोना संक्रमण के 923 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं. 30 मई के बाद एक दिन में रिकॉर्ड हुए कोविड संक्रमण के मामलों की ये रिकॉर्ड संख्या बताई जा रही है. संक्रमण के नए मामलों के साथ दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 1. 29 हो गई है. मंगलवार को दिल्ली में 496 नए मामले रिपोर्ट हुए थे. दिल्ली सरकार ने मंगलवार को येलो अलर्ट का एलान किया था और आज राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट कल से दोगुना यानी एक फ़ीसदी पर पहुंच गया है. येलो अलर्ट के तहत स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान, सिनेमा हॉल, जिम और स्पा पर पाबंदी लगा दी गई है. मॉल को ऑड-ईवन के आधार पर खोलने के लिए इजाजत दी गई है. मेट्रो में भीड़-भाड़ को देखते हुए 50 फीसदी क्षमता के साथ चलाने की इजाजत दी गई है. दिल्ली में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लागू है. देश में फिलहाल कोरोना के कुल एक्टिव केस क़रीब 77 हज़ार हैं. इनमें से 9,195 नए केस 24 घंटे में सामने आए हैं. भारत में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के 781 मामले सामने आए हैं. दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल का कहना है कि कुछ समस्याओं के चलते आईफ़ोन असेंबल करने वाली अपनी सहयोगी कंपनी फ़ॉक्सकॉन के तमिलनाडु के कारखाने को निगरानी (प्रोबेशन) में रखने का फ़ैसला लिया गया है. एप्पल के अनुसार, दोनों कंपनियों ने पाया था कि उस कारखाने के कर्मचारियों की आराम करने और खाने की जगह कंपनी के ज़रूरी मानकों को पूरा नहीं करते. वैसे पिछले साल उसने अपने एक दूसरे सप्लायर विस्ट्रोन को प्रोबेशन पर डाल दिया था, क्योंकि वहां उसके कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हंगामा किया था. तब एप्पल ने कहा था कि वो उसे तब तक कोई काम नहीं देगी जब तक कि श्रमिकों की समस्याएं दूर नहीं हो जाती. एप्पल का ताज़ा क़दम फ़ॉक्सकॉन के संयंत्र में इस महीने श्रमिकों के आंदोलन के बाद आया. इस आंदोलन में तमिलनाडु में चेन्नई के निकट उसके श्रीपेरंबुदुर संयंत्र के क़रीब 250 महिलाओं को फ़ूड प्वाइजनिंग का शिकार हो जाना पड़ा. उसमें से 150 से अधिक महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उस संयंत्र में 17 हज़ार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. इस समस्या के बाद कंपनी को 18 दिसंबर को फ़ॉक्सकॉन के इस संयत्र को बंद करना पड़ा था. दोनों कंपनियों ने अभी तक ये नहीं बताया है कि इसे कब दोबारा खोला जाएगा. लगभग सभी धर्मों का प्रचार सोशल मीडिया पर बढ़ा है. नन से लेकर इमाम और बाकी धर्मों के प्रचारक भी इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और धर्म की बातें करते हैं. बीबीसी की एक रिसर्च में पता चला है कि टिकटॉक वह प्लेटफॉर्म है जहां धार्मिक कंटेट सबसे अधिक तेज़ी से फैल रहा है. सऊदी अरब ने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग को एक बार फिर अनिवार्य कर दिया है. ये नियम इनडोर और आउटडोर दोनों जगह मान्य होंगे. सऊदी सरकार के एक मंत्री जानकारी दी है कि नए नियम कल यानी गुरुवार से लागू होंगे. सऊदी अरब में भी हालिया दिनों में सक्रमण के मामले बढ़े हैं. भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. संक्रमण पर काबू पाने के लिए पाबंदियों का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका और फ्रांस में नए मामलों का नया रिकॉर्ड कायम हो चुका है. वहीं, एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि ओमिक्रॉन की चुनौती से निपटना आसान नहीं है. भारत में भी ओमिक्रॉन और कोरोना के दूसरे वैरिएंट से जुड़े केस बढ़ने के बाद ये सवाल किया जा रहा है कि क्या ये संक्रमण की तीसरी लहर की दस्तक है? कई एक्सपर्ट इस सवाल को पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर रहे हैं. देश के कुछ हिस्सों में भले ही अब भी भीड़ भरी राजनीतिक रैलियां जारी हों लेकिन सरकारों ने पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया है. दिल्ली सरकार ने मंगलवार को येलो अलर्ट का एलान किया था और आज राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट कल से दोगुना यानी एक फ़ीसदी पर पहुंच गया है. देश में फिलहाल कोरोना के कुल एक्टिव केस क़रीब 77 हज़ार हैं. इनमें से 9,195 नए केस 24 घंटे में सामने आए हैं. भारत में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के 781 मामले सामने आए हैं. सबसे ज़्यादा 238 संक्रमित दिल्ली से हैं. महाराष्ट्र में ये संख्या 167 है. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि मुंबई में पॉजिटिविटी रेट 4 फ़ीसदी है. वहीं, राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने बताया कि पिछले हफ़्ते जहां 150 नए केस रोज आ रहे थे अब ये संख्या दो हज़ार केस रोजाना तक पहुंच रही है. बुधवार को अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 2510 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं. तमिलनाडु के हेल्थ सेक्रेटरी जे राधाकृष्णन के मुताबिक चेन्नई में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और टेस्ट की संख्या दो गुनी कर दी गई है. सौ फ़ीसदी कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के प्रोफ़ेसर श्रीनाथ रेड्डी ने बीबीसी से कहा कि राहत सिर्फ ये है कि अब तक ओमिक्रॉन से जुड़े मामलों में गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि हम केस बढ़ते हुए देख रहे हैं. ख़ासकर बड़े शहरों में मामले बढ़ रहे हैं. मुंबई में 70 प्रतिशत का उछाल आया है. दिल्ली में 50 फीसदी मामले बढ़े हैं. हम जानते हैं कि ये बहुत संक्रामक वैरिएंट है. लेकिन अभी अस्पतालों में भीड़ नहीं है. ज़्यादातर केस में मामूली लक्षण दिखे हैं. ये राहत की बात है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि मामूली लक्षण होने के बाद भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से जुड़ा जोखिम कम नहीं है. अमेरिका में जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ डायरेक्टर लॉरेंस गॉस्टिन भी कहते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़ी चुनौती पेश कर रहा है. प्रोफेसर लॉरेंस ने कहा कि ये धरती का सबसे संक्रामक रोगाणु हो सकता है. हो सकता है कि ये इतिहास का सबसे ज़्यादा संक्रामक वायरस बन जाए. ये धरती पर मौजूद हर इंसान को प्रभावित कर सकता है. अब सवाल ये है कि क्या हम इसके साथ रह सकते हैं. "अब हमें ये पता लगाना है कि क्या ये गंभीर बीमारी की वजह बन रहा है. क्या इसकी वजह से अस्पताल जाना पड़ रहा है. क्या ये मौत की वजह बन रहा है और उसके मुताबिक बचाव के तरीके आजमाए जाने चाहिए. हमें इसी दिशा में सोचना चाहिए. " प्रोफ़ेसर लॉरेंस ने जैसे आगाह किया, वैसा अमेरिका और यूरोपीय देशों में दिख भी रहा है. अमेरिका में एक दिन में कोरोना के नए मामले सामने आने का नया रिकॉर्ड कायम हुआ. देश में सोमवार को साढ़े चार लाख नए केस दर्ज हुए. यूरोप के कई देश भी ओमिक्रॉन वौरिएंट पर रोक लगाने में जूझ रहे हैं. फ्रांस में एक दिन में करीब डेढ़ लाख नए केस मिले. इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और इंग्लैंड में भी रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं. ये माना जा रहा है कि क्रिसमस की वजह से मामले दर्ज करने में हुई देरी भी केस की संख्या बढ़ने की एक वजह हो सकती है. कोरोना महामारी में परिवार गंवाया, उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या चाहते हैं ये लोग? जिन चेहरों की हंसी इस घर की दीवारों पर गूंजा करती थी, आज वही चेहरे इन दीवारों पर लटकी तस्वीरों में कैद हैं. कोरोना की भयावह दूसरी लहर इस परिवार पर कहर बनकर टूटी और परिवार के आठ सदस्यों को अपने साथ बहा ले गई. 22 अप्रैल से 15 मई के बीच क़रीब एक महीने में इस परिवार ने चार सगे भाइयों, दो बहनों, मां और बड़ी मां की अर्थियां उठने का दर्द सहा. लखनऊ से सटे इमलिया गांव के इस एक परिवार की कहानी उत्तर प्रदेश में उस वक़्त की भयावह तस्वीर को दिखाती है. सीमा यादव आज भी उस वक़्त को याद करके सिहर जाती हैं, जब एक के बाद एक होती मौतों से उनका पूरा परिवार उजड़ गया. समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कानपुर रैली में गड़बड़ी फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए पांच कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल दिया है. सपा की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है, "समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर सचिन केसरवानी, अंकुर पटेल, अंकेश यादव, सुकांत शर्मा और सुशील राजपूत को कल दिनांक 28 दिसंबर, 2021 को कानपुर में हुई घटना में तथाकथित संलिप्तता के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. " इससे पहले समाचार एजेंसी एएनआई ने रिपोर्ट दी थी कि मंगलवार को कानपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में गड़बड़ी फैलाने की साज़िश रचने के आरोप में पुलिस ने पाँच लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है. महिलाओं पर केंद्रित सोशल कम्युनिटी प्लेटफॉर्म पंखुड़ी और ग्रैबहाउस कंपनी की संस्थापक पंखुड़ी श्रीवास्तव की मौत चर्चा में है. ऐसी ख़बरें हैं कि उनका निधन कार्डियक अरेस्ट से हुआ है. वे 32 साल की थीं. इससे पहले 40 वर्षीय अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. क्या युवाओं में दिल की बीमारी बढ़ रही है? ब्रिटेन के अदालती इतिहास में इसे सबसे बड़ा तलाक़ केस कहा जा रहा है. अलग हो चुकी पत्नी से मामला सुलझाने के लिए दुबई के अरबपति शासक पर 55 करोड़ पाउंड की देनदारी आई है, यानी लगभग 5500 करोड़ या 55 अरब रुपये. ब्रिटेन के हाई कोर्ट ने मंगलवार को राजकुमारी हया बिंत अल-हुसैन से सेटलमेंट की राशि 25 करोड़ पाउंड तय की है. हया 47 साल की हैं और वो जॉर्डन के पूर्व किंग हुसैन की बेटी हैं. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को मोदी सरकार पर देश के रणनीतिक हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस का कहना है कि मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को एक ऐसी प्राइवेट कंपनी के हाथों बेचा गया है जिसे उस कारोबार का कोई अनुभव नहीं था. नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने ये दावा किया कि अलग-अलग तरीकों से कंपनी का मूल्यांकन करने पर सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का वैल्यूएशन 957 करोड़ रुपये 1600 करोड़ रुपये के बीच में पड़ता है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग़ाज़ियाबाद की इस सरकारी कंपनी को नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड को 210 करोड़ रुपये में बेच डाला. गौरव वल्लभ ने कहा, "हमारी मांग है कि इस बिक्री को रोका जाए. नंदल फाइनेंस के प्रमोटर नोएडा-ग़ाज़ियाबाद के क्षेत्र में एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी चलाते हैं और वे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ करीबी रखने के लिए जाने जाते हैं. " सरकार ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड को 210 करोड़ रुपये में बेचने का एलान किया था. कंपनी की रिज़र्व कीमत 194 करोड़ रुपये रखी गई थी. एयर इंडिया की बिक्री के बाद विनिवेश की जाने वाली ये दूसरी सरकारी कंपनी है. कांग्रेस प्रवक्ता ने ये भी दावा किया कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को खरीदने वाली प्राइवेट कंपनी के पास महज 10 कर्मचारी हैं और नेशनल कंपनी लॉ अपीलाट ट्राइब्यूनल में कंपनी के ख़िलाफ़ एक मुक़दमा भी लंबित है. कोरोना महामारी की शुरुआत में डेमी स्किपर को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. वो बताती हैं कि उन्होंने बीते डेढ़ साल में कई चीज़ों का ट्रेड किया. उनका लक्ष्य था कि वो एक हेयरपिन के बदले एक मकान ले सकें, इस चुनौती को डेमी पूरा करने में कामयाब रहीं. देखिए उनकी कहानी. पाकिस्तान का कटासराज मंदिर देखा आपने? पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से दो घंटे की दूरी पर है पोथोहर पठार. यहां प्राचीन हिंदू मंदिर हैं जिन्हें कटासराज मंदिर कहते हैं. कहा जाता है कि यह जगह महाभारत कालीन है. दो साल के अंतराल के बाद, भारत से 87 यात्रियों का जत्था इन मंदिरों में आया. ये सभी यात्री वाघा बॉर्डर के रास्ते 17 दिसंबर को लाहौर पहुंचे. फिर सभी लोग 18 दिसंबर को कटासराज गए और 23 दिसंबर को भारत लौट गए. कटासराज की अगली यात्रा मार्च के महीने में शिवरात्रि के मौके पर आयोजित की जाएगी. कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तेज़ी से बढ़ते कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार स्कूलों-कॉलेजों को दोबारा बंद करने, लोकल ट्रेनों की संख्या घटाने और 50 फ़ीसदी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम शुरू करने पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक प्रशासनिक बैठक में हालात की समीक्षा के बाद इसके संकेत दिए. राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान नए मरीजों की तादाद में रिकार्ड तीन सौ से अधिक की वृद्धि हुई है. कोरोना के मामले 439 से बढ़ कर 752 तक पहुँच गए हैं. दूसरी ओर, ओमिक्रॉन के पाँच नए मरीज बुधवार को सामने आए. राज्य में अब तक ऐसे 11 मरीज सामने आ चुके हैं. बीते 24 घंटे में जो 752 मामले सामने आए हैं उनमें से 382 अकेले कोलकाता में हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और लोकल ट्रेन सेवाओं पर फ़ैसला राज्य में कोविड-19 की स्थिति की अगली समीक्षा बैठक के बाद लिया जाएगा. अगले महीने होने वाले गंगासागर मेले को ध्यान में रखते हुए लोकल ट्रेनों को तत्काल बंद करना संभव नहीं है. ध्यान रहे कि करीब 20 महीने बाद बीते 16 नवंबर को राज्य के स्कूल-कॉलेज खोले गए थे. वैसे, राज्य में ओमिक्रॉन के पहले मामले की पुष्टि होते ही सरकार ने कोरोना की पाबंदियों को 15 जनवरी तक बढ़ा दिया था. इनमें रात 11 से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू भी शामिल है. लेकिन क्रिसमस और नए साल को ध्यान में रखते हुए 24 दिसंबर से पहली जनवरी तक इसमें ढील दी गई है. ममता ने आम लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है. आरबीएल बैंक, अचानक से यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक की कतार में खड़ा नज़र क्यों आ रहा है? रिज़र्व बैंक का कहना है -ऑल इज़ वेल. आरबीएल बैंक के नए मुखिया, अंतरिम सीईओ राजीव आहूजा का भी कहना है -ऑल इज़ वेल. लेकिन इन दोनों के जगाए भी भरोसा क्यों नहीं जग रहा है? कुछ तो पर्देदारी है. आख़िर आरबीएल बैंक में हुआ क्या है कि कई सालों से निवेशकों की आंख का तारा रहा यह बैंक अचानक यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक की कतार में खड़ा हुआ नज़र आ रहा है. और इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या हुआ है जिसके बारे में न तो बैंक का मैनेजमेंट कुछ कह रहा है और न ही आरबीआई? रिज़र्व बैंक का कहना है कि बैंक में नकदी की कोई किल्लत नहीं है और खाताधारकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है. विक्रम मिसरी बने नए डिप्टी एनएसए, चीन के साथ बदलेगा माहौल? तीन साल तक चीन में भारतीय राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले विक्रम मिसरी को भारत का अगला उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या डिप्टी NSA नियुक्त किया गया है. वो पंकज सरन की जगह लेंगे जो 31 दिसंबर तक इस पद बने रहेंगे. सरन रूस और बांग्लादेश में भारत के राजदूत रह चुके हैं. वहीं मिसरी ऐसे समय में चीन के राजदूत थे जब भारत और चीन के बीच संबंध बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे थे. भारत और चीन के बीच लद्दाख़ में नियंत्रण रेखा पर 19 महीनों तक सीमा गतिरोध बना हुआ था और अभी भी कुछ जगहों पर चीन और भारत के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को लेकर बातचीत चल रही है. ओमिक्रॉन के तेजी से बढ़ते मामलों पर आज का कार्टून. उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एमवे, टपरवेयर और ऑरिफ्लेम जैसी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों पर पिरामिड बिज़नेस मॉडल और पैसे बाँटने वाली योजनाओं को बढ़ावा देने से रोक लगा दी है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि इन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर नए नियमों पर अमल करना होगा. नए नियमों के अनुसार, वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री के बाद आने वाली शिकायतों के लिए ये कंपनियाँ, इसके विक्रेताओं की तरह ही ज़िम्मेदार होंगी. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन (डायरेक्ट सेलिंग) रूल्स, 2021 डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट सेलिंग करने वाले विक्रेताओं, दोनों पर लागू होंगे. नए नियमों के अनुसार, राज्य सरकारों को कंपनियों और विक्रेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए व्यवस्था बनानी होगी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसा पहली बार है जब कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री के लिए नियम बनाए गए हैं. अगर इनका अनुपालन नहीं किया गया तो क़ानून के अनुसार दंडात्मक प्रावधान भी उन पर लागू होंगे. नए नियमों के अनुसार, डायरेक्ट सेलिंग कारोबार से जुड़ी कंपनियों पर पिरामिड मॉडल और इस कारोबार से जुड़े लोगों को कमीशन के बंटवारे की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है. ये नियम उन कंपनियों पर भी लागू होंगे जो भारतीय तो नहीं हैं लेकिन भारत में कारोबार करती हैं. महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा है कि बुधवार को शायद मुंबई में 2000 से भी ज़्यादा कोरोना के नए मामले आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह यहाँ हर दिन 150 नए मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब ये मामले 2000 हो गए हैं. पिछले 24 घंटों में मुंबई में 1377 मामले दर्ज किए गए थे. उससे एक दिन पहले ये संख्या 809 थी. आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया है कि मुंबई में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र बीएमसी के साथ उनकी बैठक हुई है, जिसमें मौजूदा स्थिति और तैयारियों की समीक्षा कई गई. साथ ही इस बैठक में 15 से 18 साल के बच्चों को वैक्सीन देने की योजना पर भी चर्चा हुई. आदित्य ठाकरे ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएँ नहीं, लेकिन सतर्कता बरतें.
फंसे हुए कर्ज़ के काफ़ी बढ़ जाने की आशंका जताई गई है. है. हुए कर्ज़ बढ़कर आठ. एक-नौ. पाँच फ़ीसदी हो सकता है, जो सितंबर दो हज़ार इक्कीस में छः. नौ फ़ीसदी रही है. भी हो सकती है. हिस्सा रहा है. जहां छः. नौ फ़ीसदी हो गई, वहीं शुद्ध एनपीए केवल दो. तीन फ़ीसदी रह गई. बुधवार को दिल्ली सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कोरोना संक्रमण के नौ सौ तेईस नए मामले रिपोर्ट हुए हैं. तीस मई के बाद एक दिन में रिकॉर्ड हुए कोविड संक्रमण के मामलों की ये रिकॉर्ड संख्या बताई जा रही है. संक्रमण के नए मामलों के साथ दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट बढ़कर एक. उनतीस हो गई है. मंगलवार को दिल्ली में चार सौ छियानवे नए मामले रिपोर्ट हुए थे. दिल्ली सरकार ने मंगलवार को येलो अलर्ट का एलान किया था और आज राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट कल से दोगुना यानी एक फ़ीसदी पर पहुंच गया है. येलो अलर्ट के तहत स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान, सिनेमा हॉल, जिम और स्पा पर पाबंदी लगा दी गई है. मॉल को ऑड-ईवन के आधार पर खोलने के लिए इजाजत दी गई है. मेट्रो में भीड़-भाड़ को देखते हुए पचास फीसदी क्षमता के साथ चलाने की इजाजत दी गई है. दिल्ली में रात ग्यारह बजे से सुबह पाँच बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लागू है. देश में फिलहाल कोरोना के कुल एक्टिव केस क़रीब सतहत्तर हज़ार हैं. इनमें से नौ,एक सौ पचानवे नए केस चौबीस घंटाटे में सामने आए हैं. भारत में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के सात सौ इक्यासी मामले सामने आए हैं. दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल का कहना है कि कुछ समस्याओं के चलते आईफ़ोन असेंबल करने वाली अपनी सहयोगी कंपनी फ़ॉक्सकॉन के तमिलनाडु के कारखाने को निगरानी में रखने का फ़ैसला लिया गया है. एप्पल के अनुसार, दोनों कंपनियों ने पाया था कि उस कारखाने के कर्मचारियों की आराम करने और खाने की जगह कंपनी के ज़रूरी मानकों को पूरा नहीं करते. वैसे पिछले साल उसने अपने एक दूसरे सप्लायर विस्ट्रोन को प्रोबेशन पर डाल दिया था, क्योंकि वहां उसके कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हंगामा किया था. तब एप्पल ने कहा था कि वो उसे तब तक कोई काम नहीं देगी जब तक कि श्रमिकों की समस्याएं दूर नहीं हो जाती. एप्पल का ताज़ा क़दम फ़ॉक्सकॉन के संयंत्र में इस महीने श्रमिकों के आंदोलन के बाद आया. इस आंदोलन में तमिलनाडु में चेन्नई के निकट उसके श्रीपेरंबुदुर संयंत्र के क़रीब दो सौ पचास महिलाओं को फ़ूड प्वाइजनिंग का शिकार हो जाना पड़ा. उसमें से एक सौ पचास से अधिक महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उस संयंत्र में सत्रह हज़ार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. इस समस्या के बाद कंपनी को अट्ठारह दिसंबर को फ़ॉक्सकॉन के इस संयत्र को बंद करना पड़ा था. दोनों कंपनियों ने अभी तक ये नहीं बताया है कि इसे कब दोबारा खोला जाएगा. लगभग सभी धर्मों का प्रचार सोशल मीडिया पर बढ़ा है. नन से लेकर इमाम और बाकी धर्मों के प्रचारक भी इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और धर्म की बातें करते हैं. बीबीसी की एक रिसर्च में पता चला है कि टिकटॉक वह प्लेटफॉर्म है जहां धार्मिक कंटेट सबसे अधिक तेज़ी से फैल रहा है. सऊदी अरब ने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग को एक बार फिर अनिवार्य कर दिया है. ये नियम इनडोर और आउटडोर दोनों जगह मान्य होंगे. सऊदी सरकार के एक मंत्री जानकारी दी है कि नए नियम कल यानी गुरुवार से लागू होंगे. सऊदी अरब में भी हालिया दिनों में सक्रमण के मामले बढ़े हैं. भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. संक्रमण पर काबू पाने के लिए पाबंदियों का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका और फ्रांस में नए मामलों का नया रिकॉर्ड कायम हो चुका है. वहीं, एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि ओमिक्रॉन की चुनौती से निपटना आसान नहीं है. भारत में भी ओमिक्रॉन और कोरोना के दूसरे वैरिएंट से जुड़े केस बढ़ने के बाद ये सवाल किया जा रहा है कि क्या ये संक्रमण की तीसरी लहर की दस्तक है? कई एक्सपर्ट इस सवाल को पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर रहे हैं. देश के कुछ हिस्सों में भले ही अब भी भीड़ भरी राजनीतिक रैलियां जारी हों लेकिन सरकारों ने पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया है. दिल्ली सरकार ने मंगलवार को येलो अलर्ट का एलान किया था और आज राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट कल से दोगुना यानी एक फ़ीसदी पर पहुंच गया है. देश में फिलहाल कोरोना के कुल एक्टिव केस क़रीब सतहत्तर हज़ार हैं. इनमें से नौ,एक सौ पचानवे नए केस चौबीस घंटाटे में सामने आए हैं. भारत में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के सात सौ इक्यासी मामले सामने आए हैं. सबसे ज़्यादा दो सौ अड़तीस संक्रमित दिल्ली से हैं. महाराष्ट्र में ये संख्या एक सौ सरसठ है. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि मुंबई में पॉजिटिविटी रेट चार फ़ीसदी है. वहीं, राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने बताया कि पिछले हफ़्ते जहां एक सौ पचास नए केस रोज आ रहे थे अब ये संख्या दो हज़ार केस रोजाना तक पहुंच रही है. बुधवार को अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के दो हज़ार पाँच सौ दस नए मामले रिपोर्ट हुए हैं. तमिलनाडु के हेल्थ सेक्रेटरी जे राधाकृष्णन के मुताबिक चेन्नई में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और टेस्ट की संख्या दो गुनी कर दी गई है. सौ फ़ीसदी कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के प्रोफ़ेसर श्रीनाथ रेड्डी ने बीबीसी से कहा कि राहत सिर्फ ये है कि अब तक ओमिक्रॉन से जुड़े मामलों में गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि हम केस बढ़ते हुए देख रहे हैं. ख़ासकर बड़े शहरों में मामले बढ़ रहे हैं. मुंबई में सत्तर प्रतिशत का उछाल आया है. दिल्ली में पचास फीसदी मामले बढ़े हैं. हम जानते हैं कि ये बहुत संक्रामक वैरिएंट है. लेकिन अभी अस्पतालों में भीड़ नहीं है. ज़्यादातर केस में मामूली लक्षण दिखे हैं. ये राहत की बात है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि मामूली लक्षण होने के बाद भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से जुड़ा जोखिम कम नहीं है. अमेरिका में जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ डायरेक्टर लॉरेंस गॉस्टिन भी कहते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़ी चुनौती पेश कर रहा है. प्रोफेसर लॉरेंस ने कहा कि ये धरती का सबसे संक्रामक रोगाणु हो सकता है. हो सकता है कि ये इतिहास का सबसे ज़्यादा संक्रामक वायरस बन जाए. ये धरती पर मौजूद हर इंसान को प्रभावित कर सकता है. अब सवाल ये है कि क्या हम इसके साथ रह सकते हैं. "अब हमें ये पता लगाना है कि क्या ये गंभीर बीमारी की वजह बन रहा है. क्या इसकी वजह से अस्पताल जाना पड़ रहा है. क्या ये मौत की वजह बन रहा है और उसके मुताबिक बचाव के तरीके आजमाए जाने चाहिए. हमें इसी दिशा में सोचना चाहिए. " प्रोफ़ेसर लॉरेंस ने जैसे आगाह किया, वैसा अमेरिका और यूरोपीय देशों में दिख भी रहा है. अमेरिका में एक दिन में कोरोना के नए मामले सामने आने का नया रिकॉर्ड कायम हुआ. देश में सोमवार को साढ़े चार लाख नए केस दर्ज हुए. यूरोप के कई देश भी ओमिक्रॉन वौरिएंट पर रोक लगाने में जूझ रहे हैं. फ्रांस में एक दिन में करीब डेढ़ लाख नए केस मिले. इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और इंग्लैंड में भी रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं. ये माना जा रहा है कि क्रिसमस की वजह से मामले दर्ज करने में हुई देरी भी केस की संख्या बढ़ने की एक वजह हो सकती है. कोरोना महामारी में परिवार गंवाया, उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या चाहते हैं ये लोग? जिन चेहरों की हंसी इस घर की दीवारों पर गूंजा करती थी, आज वही चेहरे इन दीवारों पर लटकी तस्वीरों में कैद हैं. कोरोना की भयावह दूसरी लहर इस परिवार पर कहर बनकर टूटी और परिवार के आठ सदस्यों को अपने साथ बहा ले गई. बाईस अप्रैल से पंद्रह मई के बीच क़रीब एक महीने में इस परिवार ने चार सगे भाइयों, दो बहनों, मां और बड़ी मां की अर्थियां उठने का दर्द सहा. लखनऊ से सटे इमलिया गांव के इस एक परिवार की कहानी उत्तर प्रदेश में उस वक़्त की भयावह तस्वीर को दिखाती है. सीमा यादव आज भी उस वक़्त को याद करके सिहर जाती हैं, जब एक के बाद एक होती मौतों से उनका पूरा परिवार उजड़ गया. समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कानपुर रैली में गड़बड़ी फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए पांच कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल दिया है. सपा की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है, "समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर सचिन केसरवानी, अंकुर पटेल, अंकेश यादव, सुकांत शर्मा और सुशील राजपूत को कल दिनांक अट्ठाईस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस को कानपुर में हुई घटना में तथाकथित संलिप्तता के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. " इससे पहले समाचार एजेंसी एएनआई ने रिपोर्ट दी थी कि मंगलवार को कानपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में गड़बड़ी फैलाने की साज़िश रचने के आरोप में पुलिस ने पाँच लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है. महिलाओं पर केंद्रित सोशल कम्युनिटी प्लेटफॉर्म पंखुड़ी और ग्रैबहाउस कंपनी की संस्थापक पंखुड़ी श्रीवास्तव की मौत चर्चा में है. ऐसी ख़बरें हैं कि उनका निधन कार्डियक अरेस्ट से हुआ है. वे बत्तीस साल की थीं. इससे पहले चालीस वर्षीय अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. क्या युवाओं में दिल की बीमारी बढ़ रही है? ब्रिटेन के अदालती इतिहास में इसे सबसे बड़ा तलाक़ केस कहा जा रहा है. अलग हो चुकी पत्नी से मामला सुलझाने के लिए दुबई के अरबपति शासक पर पचपन करोड़ पाउंड की देनदारी आई है, यानी लगभग पाँच हज़ार पाँच सौ करोड़ या पचपन अरब रुपये. ब्रिटेन के हाई कोर्ट ने मंगलवार को राजकुमारी हया बिंत अल-हुसैन से सेटलमेंट की राशि पच्चीस करोड़ पाउंड तय की है. हया सैंतालीस साल की हैं और वो जॉर्डन के पूर्व किंग हुसैन की बेटी हैं. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को मोदी सरकार पर देश के रणनीतिक हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस का कहना है कि मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को एक ऐसी प्राइवेट कंपनी के हाथों बेचा गया है जिसे उस कारोबार का कोई अनुभव नहीं था. नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने ये दावा किया कि अलग-अलग तरीकों से कंपनी का मूल्यांकन करने पर सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का वैल्यूएशन नौ सौ सत्तावन करोड़ एक हज़ार छः सौ रुपया करोड़ रुपये के बीच में पड़ता है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग़ाज़ियाबाद की इस सरकारी कंपनी को नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड को दो सौ दस करोड़ रुपये में बेच डाला. गौरव वल्लभ ने कहा, "हमारी मांग है कि इस बिक्री को रोका जाए. नंदल फाइनेंस के प्रमोटर नोएडा-ग़ाज़ियाबाद के क्षेत्र में एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी चलाते हैं और वे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ करीबी रखने के लिए जाने जाते हैं. " सरकार ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड को दो सौ दस करोड़ रुपये में बेचने का एलान किया था. कंपनी की रिज़र्व कीमत एक सौ चौरानवे करोड़ रुपये रखी गई थी. एयर इंडिया की बिक्री के बाद विनिवेश की जाने वाली ये दूसरी सरकारी कंपनी है. कांग्रेस प्रवक्ता ने ये भी दावा किया कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को खरीदने वाली प्राइवेट कंपनी के पास महज दस कर्मचारी हैं और नेशनल कंपनी लॉ अपीलाट ट्राइब्यूनल में कंपनी के ख़िलाफ़ एक मुक़दमा भी लंबित है. कोरोना महामारी की शुरुआत में डेमी स्किपर को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. वो बताती हैं कि उन्होंने बीते डेढ़ साल में कई चीज़ों का ट्रेड किया. उनका लक्ष्य था कि वो एक हेयरपिन के बदले एक मकान ले सकें, इस चुनौती को डेमी पूरा करने में कामयाब रहीं. देखिए उनकी कहानी. पाकिस्तान का कटासराज मंदिर देखा आपने? पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से दो घंटे की दूरी पर है पोथोहर पठार. यहां प्राचीन हिंदू मंदिर हैं जिन्हें कटासराज मंदिर कहते हैं. कहा जाता है कि यह जगह महाभारत कालीन है. दो साल के अंतराल के बाद, भारत से सत्तासी यात्रियों का जत्था इन मंदिरों में आया. ये सभी यात्री वाघा बॉर्डर के रास्ते सत्रह दिसंबर को लाहौर पहुंचे. फिर सभी लोग अट्ठारह दिसंबर को कटासराज गए और तेईस दिसंबर को भारत लौट गए. कटासराज की अगली यात्रा मार्च के महीने में शिवरात्रि के मौके पर आयोजित की जाएगी. कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तेज़ी से बढ़ते कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार स्कूलों-कॉलेजों को दोबारा बंद करने, लोकल ट्रेनों की संख्या घटाने और पचास फ़ीसदी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम शुरू करने पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक प्रशासनिक बैठक में हालात की समीक्षा के बाद इसके संकेत दिए. राज्य में बीते चौबीस घंटाटों के दौरान नए मरीजों की तादाद में रिकार्ड तीन सौ से अधिक की वृद्धि हुई है. कोरोना के मामले चार सौ उनतालीस से बढ़ कर सात सौ बावन तक पहुँच गए हैं. दूसरी ओर, ओमिक्रॉन के पाँच नए मरीज बुधवार को सामने आए. राज्य में अब तक ऐसे ग्यारह मरीज सामने आ चुके हैं. बीते चौबीस घंटाटे में जो सात सौ बावन मामले सामने आए हैं उनमें से तीन सौ बयासी अकेले कोलकाता में हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और लोकल ट्रेन सेवाओं पर फ़ैसला राज्य में कोविड-उन्नीस की स्थिति की अगली समीक्षा बैठक के बाद लिया जाएगा. अगले महीने होने वाले गंगासागर मेले को ध्यान में रखते हुए लोकल ट्रेनों को तत्काल बंद करना संभव नहीं है. ध्यान रहे कि करीब बीस महीने बाद बीते सोलह नवंबर को राज्य के स्कूल-कॉलेज खोले गए थे. वैसे, राज्य में ओमिक्रॉन के पहले मामले की पुष्टि होते ही सरकार ने कोरोना की पाबंदियों को पंद्रह जनवरी तक बढ़ा दिया था. इनमें रात ग्यारह से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू भी शामिल है. लेकिन क्रिसमस और नए साल को ध्यान में रखते हुए चौबीस दिसंबर से पहली जनवरी तक इसमें ढील दी गई है. ममता ने आम लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की है. आरबीएल बैंक, अचानक से यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक की कतार में खड़ा नज़र क्यों आ रहा है? रिज़र्व बैंक का कहना है -ऑल इज़ वेल. आरबीएल बैंक के नए मुखिया, अंतरिम सीईओ राजीव आहूजा का भी कहना है -ऑल इज़ वेल. लेकिन इन दोनों के जगाए भी भरोसा क्यों नहीं जग रहा है? कुछ तो पर्देदारी है. आख़िर आरबीएल बैंक में हुआ क्या है कि कई सालों से निवेशकों की आंख का तारा रहा यह बैंक अचानक यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक की कतार में खड़ा हुआ नज़र आ रहा है. और इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या हुआ है जिसके बारे में न तो बैंक का मैनेजमेंट कुछ कह रहा है और न ही आरबीआई? रिज़र्व बैंक का कहना है कि बैंक में नकदी की कोई किल्लत नहीं है और खाताधारकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है. विक्रम मिसरी बने नए डिप्टी एनएसए, चीन के साथ बदलेगा माहौल? तीन साल तक चीन में भारतीय राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले विक्रम मिसरी को भारत का अगला उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या डिप्टी NSA नियुक्त किया गया है. वो पंकज सरन की जगह लेंगे जो इकतीस दिसंबर तक इस पद बने रहेंगे. सरन रूस और बांग्लादेश में भारत के राजदूत रह चुके हैं. वहीं मिसरी ऐसे समय में चीन के राजदूत थे जब भारत और चीन के बीच संबंध बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे थे. भारत और चीन के बीच लद्दाख़ में नियंत्रण रेखा पर उन्नीस महीनों तक सीमा गतिरोध बना हुआ था और अभी भी कुछ जगहों पर चीन और भारत के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को लेकर बातचीत चल रही है. ओमिक्रॉन के तेजी से बढ़ते मामलों पर आज का कार्टून. उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एमवे, टपरवेयर और ऑरिफ्लेम जैसी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों पर पिरामिड बिज़नेस मॉडल और पैसे बाँटने वाली योजनाओं को बढ़ावा देने से रोक लगा दी है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि इन कंपनियों को नब्बे दिनों के भीतर नए नियमों पर अमल करना होगा. नए नियमों के अनुसार, वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री के बाद आने वाली शिकायतों के लिए ये कंपनियाँ, इसके विक्रेताओं की तरह ही ज़िम्मेदार होंगी. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स, दो हज़ार इक्कीस डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट सेलिंग करने वाले विक्रेताओं, दोनों पर लागू होंगे. नए नियमों के अनुसार, राज्य सरकारों को कंपनियों और विक्रेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए व्यवस्था बनानी होगी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसा पहली बार है जब कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री के लिए नियम बनाए गए हैं. अगर इनका अनुपालन नहीं किया गया तो क़ानून के अनुसार दंडात्मक प्रावधान भी उन पर लागू होंगे. नए नियमों के अनुसार, डायरेक्ट सेलिंग कारोबार से जुड़ी कंपनियों पर पिरामिड मॉडल और इस कारोबार से जुड़े लोगों को कमीशन के बंटवारे की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है. ये नियम उन कंपनियों पर भी लागू होंगे जो भारतीय तो नहीं हैं लेकिन भारत में कारोबार करती हैं. महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा है कि बुधवार को शायद मुंबई में दो हज़ार से भी ज़्यादा कोरोना के नए मामले आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह यहाँ हर दिन एक सौ पचास नए मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब ये मामले दो हज़ार हो गए हैं. पिछले चौबीस घंटाटों में मुंबई में एक हज़ार तीन सौ सतहत्तर मामले दर्ज किए गए थे. उससे एक दिन पहले ये संख्या आठ सौ नौ थी. आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया है कि मुंबई में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र बीएमसी के साथ उनकी बैठक हुई है, जिसमें मौजूदा स्थिति और तैयारियों की समीक्षा कई गई. साथ ही इस बैठक में पंद्रह से अट्ठारह साल के बच्चों को वैक्सीन देने की योजना पर भी चर्चा हुई. आदित्य ठाकरे ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएँ नहीं, लेकिन सतर्कता बरतें.
अपनी करुण-कथा नहीं सुनायेंगे । आज तो छाती तोड़ कर, गला फाड़ कर, सिर उठा कर, नाम ले ले कर उन्हें बुलायेंगे । आप भी रोयेंगे और उन्हें भी रुलायेंगे। टेरो, टेरो, हृदय खोलकर हृदयेश्वर को देशे। दीनो, उन दीनबन्धु परमेश्वर को टेरोः( गायन नं० ५ ) तुम्हारे होत नहीं का पीर । हे करुणा-निधि, जगदाधारी, दुष्ट-दुलन बलवीर ॥ सुनते हैं जब जब भक्तों पर, पड़ती है कुछ भीर । तब तब उनकी रक्षा को तुम, धरते मनुज शरीर ॥ अविनाशी के अंश विपति में, और फिर होंय अधीर । नहीं देखतीं क्या वे अँखियाँ, इन अँखियन के नीर ॥ [ सब का जाना ] कई चौपा सीन स्थान- कारागार [ शैया पर देवकी का छठा पुत्र सो रहा है, देवकी उसके पास सिर झुकाये बैठी है, वसुदेव एक थोर को खड़े हुए करुणा भरी दृष्टि से उसे देख रहे हैं । देवकी - स्वामी, अब तक पांच पुत्र हमने राक्षस की भेंट कर दिये, अब छठे की बारी है । हाय, वे मेरे नन्हे नन्हे दुलारे, वे मेरे छाती के टुकड़े और आंखों के तारे, जिन्होंने संसार- उपवन में जन्म लेकर एक दिन भी हवा न खाई, जिन्होंने माता की गोद में आकर एक समय भी दूध न पिया, ऐसे बन्द मुंह वाले, अछूते और भोले भाले, उस राक्षस ने पत्थर की चट्टान पर पटक पटक कर मार डालेः फूलने भी वें न पाये थे भपेटा खा गये । ऐसे कल्ले थे जो सचमुच चिन खिले मुरझा गये ॥ गोद में आने के पहले, नष्ट होते लाल हैं । मां नहीं मरती है, बच्चे मर रहे हर साल हैं ।। वसुदेव - हाय ! ऐसा दृश्य कहीं नहीं है, ऐसा राक्षस कहीं नहीं है, तो ऐसा पिता भी कहीं नहीं है जो अपने हाथों से अपने लालों को ले जाकर उस वधिक के हाथों में दे देता है ला देवको, इस बैठे बच्चे को भी दे दे, इसे भी उस भेड़िये के आगे डाल झाऊँ । देवकी- नहीं नाथ, इसे मैं नहीं दूंगी। मालूम होता है कि माँ बाप होकर भी हमारे हृदयों में बच्चों का मोह नहीं है । वसुदेव - यह तू क्या कह रही है ! देवकी - ठीक कह रही हूँ, बच्चों का मोह माँ बाप को अगर होता, तो अपने हाथों से अपने पाँच पाँच लालों को उस हत्यारे के आगे न डाल देते । सोह अपने प्राणों का है जिनकी रक्षा बच्चों को बलि देकर की जाती है। हाय, यह संसार कितना स्वार्थी है ? वसुदेव-नहीं देवकी, हम इतने स्वार्थी नहीं हैं, इतने निर्मोही और निर्दयी नहीं हैं। हमारे जितने वच्चे मरे हैं उतने ही छेद हमारो छाती में हो गये हैं। परन्तु हम क्या करें, लाचार हैं, वचन दे चुके हैं, अपने वचन पर दृढ़ रहने के वास्तें तैयार हैं । संसार में दो प्रकार के मनुष्य हुआ करते हैं, एक वह जो दुःख आ पड़ने पर फूट फूटकर रोने लगते हैं और दूसरे वह जो संकट सहते हैं, भीतर ही भीतर जलते हैं, परन्तु मुंह से आह नहीं करते हैं। हम तुम इसी श्रेणी में हैंःवन्दी बनें, भिखारी हुए, कष्ट उठाये बच्चे भी अपने काल की हैं भेंट चढ़ाये ।। पर ध्यान यह रक्खा कि वचन अपना न जाये । कष्टों में- 'हाय' मुंह से निकलने नहीं पाये ।। कुम्हलाने दो कुम्हलाये जो उद्यान ये अपना । इतिहास को रँग डालेगा बलिदान ये अपना ।। देवकी - सत्य है नाथ, मेरी भूल थी जो मैंने अपने और आपके लिये भी स्वार्थी बनाया, भीरु ठहराया । वसुदेव - हम यह भी तो जानते हैं कि आठवें पुत्र हो के वास्ते हमने यह जीवन धारण किया है, उसी के लिये अपने अब के लालों को काल के गाल में घर दिया है । देवकी - परन्तु" वसुदेव - हाँ हाँदेवको - फिर बिना कहे नहीं रहा जाता । क्या यह क्षत्रियत्व है ? वसुदेव - नहीं, यह क्षत्रियत्व नहीं है। हम कय कह रहे हैं कि यह क्षत्रियत्व है। क्षत्रियत्न क्या-पुरुषत्व से भी आज हम गिरे हुए हैं। अपने सामने अपने लालों को कटता हुआ देखते हैं और मुंह से हाय तक नहीं करते । ओह ! इतनी कायरता, इतनी भीरुता - पहाड़ नहीं हिलते, तारामण्डल नहीं टूटता, भूचाल नहीं आता, तूफ़ान नहीं उठता, सूर्य और चन्द्र, तुम फाले क्यों नहीं पड़ जाते ? वायु, तू ठहर क्यों नहीं जाती ? पृथ्वी, तू रसातल में धँस क्यों नहीं जाती ? - सब गूंगे हैं, सब बहरे हैं, सारा संसार मानो सोरहा है, दयानिधान की पदवी वाले ने भी कठोरता का कवच पहन लिया है। तो वसुदेव, तू भी अपनी छाती कठोर करके, हाथों को पत्थर बनाके, हत्यारे के पास ले जाने के लिये, इस छठे बच्चे को उठाB अभागी के लड़ैते, उठ, मरण तेरा हिंडोला है । तेरी माता शिला है अत्र, पिता अत्र तेरा बर्षा है । [ शैय्या पर से वसुदेव बच्चे को उठाते हैं, देवकी बच्चे को अन्तिम बार देखने के लिये गोद में लेना चाहती है पर वसुदेव विलम्ब होजाने के भय से नहीं देना चाहते देवकी - एक बार, केवल एक बार, मुंह चूम लूं। वसुदेव-आह ! देवको - दूध पिला दूं । वसुदेव-ओह ! देवको - अच्छा, ले जाओ, नहाँ छुऊँगी । उघर को अपनी आँखें भी नहीं करूंगी। मैं समभूंगी कि मेरे कोई बच्चा पैदा ही नहीं हुआ। मैं निप्ती हूं । वसुदेव - हाय. :--- सभी बच्चों को अपने पाहते हैं, प्यार करते हैं। हमारे सामने लेकिन हमारे लाल मस्ते हैं ॥ उधर माता चिलखती है, इधर यह बाप रोता है । जुदा आंखों का तारा सामने आँखों के होता है ।। देवकी -- ( वसुदेव जय बच्चे सहित दरवाजे तक पहुंचते हैं तय ) ठहरो, अभी ठहरो, न ले जाओ, अभी न ले जाओ, एक बार मुंह और देख लेने दो। वसुदेव - प्रिये, अब जाने ही दो । यदि बहुत देर हो जायेगी, तो राक्षस की भृकुटी शिव का तीसरा नेत्र बन जायेगी । देवकी ~~ ( यच्चे को छीनने की चेष्टा करती है ) बन जाने दो । वसुदेव-~-नहीं प्रिये, अब जाने ही दो :छाती, छठी लड़ाई है, फिर तू कठोर हो । उठने दे, मोह-नद में जो उठती हिलोर हो ।। तन से हृदय को, प्यार हृदय से निकाल दे । चल कर बधिक के सामने बच्चे को डाल दे ।। [ वसुदेव बच्चे को लेकर चले जाते हैं, देवकी मूर्च्छित होकर गिर जाती है ]
अपनी करुण-कथा नहीं सुनायेंगे । आज तो छाती तोड़ कर, गला फाड़ कर, सिर उठा कर, नाम ले ले कर उन्हें बुलायेंगे । आप भी रोयेंगे और उन्हें भी रुलायेंगे। टेरो, टेरो, हृदय खोलकर हृदयेश्वर को देशे। दीनो, उन दीनबन्धु परमेश्वर को टेरोः तुम्हारे होत नहीं का पीर । हे करुणा-निधि, जगदाधारी, दुष्ट-दुलन बलवीर ॥ सुनते हैं जब जब भक्तों पर, पड़ती है कुछ भीर । तब तब उनकी रक्षा को तुम, धरते मनुज शरीर ॥ अविनाशी के अंश विपति में, और फिर होंय अधीर । नहीं देखतीं क्या वे अँखियाँ, इन अँखियन के नीर ॥ [ सब का जाना ] कई चौपा सीन स्थान- कारागार [ शैया पर देवकी का छठा पुत्र सो रहा है, देवकी उसके पास सिर झुकाये बैठी है, वसुदेव एक थोर को खड़े हुए करुणा भरी दृष्टि से उसे देख रहे हैं । देवकी - स्वामी, अब तक पांच पुत्र हमने राक्षस की भेंट कर दिये, अब छठे की बारी है । हाय, वे मेरे नन्हे नन्हे दुलारे, वे मेरे छाती के टुकड़े और आंखों के तारे, जिन्होंने संसार- उपवन में जन्म लेकर एक दिन भी हवा न खाई, जिन्होंने माता की गोद में आकर एक समय भी दूध न पिया, ऐसे बन्द मुंह वाले, अछूते और भोले भाले, उस राक्षस ने पत्थर की चट्टान पर पटक पटक कर मार डालेः फूलने भी वें न पाये थे भपेटा खा गये । ऐसे कल्ले थे जो सचमुच चिन खिले मुरझा गये ॥ गोद में आने के पहले, नष्ट होते लाल हैं । मां नहीं मरती है, बच्चे मर रहे हर साल हैं ।। वसुदेव - हाय ! ऐसा दृश्य कहीं नहीं है, ऐसा राक्षस कहीं नहीं है, तो ऐसा पिता भी कहीं नहीं है जो अपने हाथों से अपने लालों को ले जाकर उस वधिक के हाथों में दे देता है ला देवको, इस बैठे बच्चे को भी दे दे, इसे भी उस भेड़िये के आगे डाल झाऊँ । देवकी- नहीं नाथ, इसे मैं नहीं दूंगी। मालूम होता है कि माँ बाप होकर भी हमारे हृदयों में बच्चों का मोह नहीं है । वसुदेव - यह तू क्या कह रही है ! देवकी - ठीक कह रही हूँ, बच्चों का मोह माँ बाप को अगर होता, तो अपने हाथों से अपने पाँच पाँच लालों को उस हत्यारे के आगे न डाल देते । सोह अपने प्राणों का है जिनकी रक्षा बच्चों को बलि देकर की जाती है। हाय, यह संसार कितना स्वार्थी है ? वसुदेव-नहीं देवकी, हम इतने स्वार्थी नहीं हैं, इतने निर्मोही और निर्दयी नहीं हैं। हमारे जितने वच्चे मरे हैं उतने ही छेद हमारो छाती में हो गये हैं। परन्तु हम क्या करें, लाचार हैं, वचन दे चुके हैं, अपने वचन पर दृढ़ रहने के वास्तें तैयार हैं । संसार में दो प्रकार के मनुष्य हुआ करते हैं, एक वह जो दुःख आ पड़ने पर फूट फूटकर रोने लगते हैं और दूसरे वह जो संकट सहते हैं, भीतर ही भीतर जलते हैं, परन्तु मुंह से आह नहीं करते हैं। हम तुम इसी श्रेणी में हैंःवन्दी बनें, भिखारी हुए, कष्ट उठाये बच्चे भी अपने काल की हैं भेंट चढ़ाये ।। पर ध्यान यह रक्खा कि वचन अपना न जाये । कष्टों में- 'हाय' मुंह से निकलने नहीं पाये ।। कुम्हलाने दो कुम्हलाये जो उद्यान ये अपना । इतिहास को रँग डालेगा बलिदान ये अपना ।। देवकी - सत्य है नाथ, मेरी भूल थी जो मैंने अपने और आपके लिये भी स्वार्थी बनाया, भीरु ठहराया । वसुदेव - हम यह भी तो जानते हैं कि आठवें पुत्र हो के वास्ते हमने यह जीवन धारण किया है, उसी के लिये अपने अब के लालों को काल के गाल में घर दिया है । देवकी - परन्तु" वसुदेव - हाँ हाँदेवको - फिर बिना कहे नहीं रहा जाता । क्या यह क्षत्रियत्व है ? वसुदेव - नहीं, यह क्षत्रियत्व नहीं है। हम कय कह रहे हैं कि यह क्षत्रियत्व है। क्षत्रियत्न क्या-पुरुषत्व से भी आज हम गिरे हुए हैं। अपने सामने अपने लालों को कटता हुआ देखते हैं और मुंह से हाय तक नहीं करते । ओह ! इतनी कायरता, इतनी भीरुता - पहाड़ नहीं हिलते, तारामण्डल नहीं टूटता, भूचाल नहीं आता, तूफ़ान नहीं उठता, सूर्य और चन्द्र, तुम फाले क्यों नहीं पड़ जाते ? वायु, तू ठहर क्यों नहीं जाती ? पृथ्वी, तू रसातल में धँस क्यों नहीं जाती ? - सब गूंगे हैं, सब बहरे हैं, सारा संसार मानो सोरहा है, दयानिधान की पदवी वाले ने भी कठोरता का कवच पहन लिया है। तो वसुदेव, तू भी अपनी छाती कठोर करके, हाथों को पत्थर बनाके, हत्यारे के पास ले जाने के लिये, इस छठे बच्चे को उठाB अभागी के लड़ैते, उठ, मरण तेरा हिंडोला है । तेरी माता शिला है अत्र, पिता अत्र तेरा बर्षा है । [ शैय्या पर से वसुदेव बच्चे को उठाते हैं, देवकी बच्चे को अन्तिम बार देखने के लिये गोद में लेना चाहती है पर वसुदेव विलम्ब होजाने के भय से नहीं देना चाहते देवकी - एक बार, केवल एक बार, मुंह चूम लूं। वसुदेव-आह ! देवको - दूध पिला दूं । वसुदेव-ओह ! देवको - अच्छा, ले जाओ, नहाँ छुऊँगी । उघर को अपनी आँखें भी नहीं करूंगी। मैं समभूंगी कि मेरे कोई बच्चा पैदा ही नहीं हुआ। मैं निप्ती हूं । वसुदेव - हाय. :--- सभी बच्चों को अपने पाहते हैं, प्यार करते हैं। हमारे सामने लेकिन हमारे लाल मस्ते हैं ॥ उधर माता चिलखती है, इधर यह बाप रोता है । जुदा आंखों का तारा सामने आँखों के होता है ।। देवकी -- ठहरो, अभी ठहरो, न ले जाओ, अभी न ले जाओ, एक बार मुंह और देख लेने दो। वसुदेव - प्रिये, अब जाने ही दो । यदि बहुत देर हो जायेगी, तो राक्षस की भृकुटी शिव का तीसरा नेत्र बन जायेगी । देवकी ~~ बन जाने दो । वसुदेव-~-नहीं प्रिये, अब जाने ही दो :छाती, छठी लड़ाई है, फिर तू कठोर हो । उठने दे, मोह-नद में जो उठती हिलोर हो ।। तन से हृदय को, प्यार हृदय से निकाल दे । चल कर बधिक के सामने बच्चे को डाल दे ।। [ वसुदेव बच्चे को लेकर चले जाते हैं, देवकी मूर्च्छित होकर गिर जाती है ]
सोनी टीवी पर दिखाए जाने वाला शो 'द कपिल शर्मा शो' लोगों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। इस शो की टीआरपी आसमान को छू रही है। शनिवार और रविवार को दिखाए जाने वाले इस शो में कपिल शर्मा सुमोना चक्रवर्ती, कृष्णा अभिषेक, भारती सिहं, कीकू जैसे कलाकार शामिल हैं। आपको बता दें कि एक वक्त था, जब इस शो में एक अहम किरदार निभाने वाले कॉमेडियन सुनील ग्रोवर उर्फ गुत्थी ने लोगों का दिल जीत लिया था। लेकिन कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच आपसी मतभेद के कारण सुनील ग्रोवर ने बीच में ही इस शो को छोड़ दिया था। जिसके बाद वह इस शो में बिल्कुल भी दिखाई नहीं दिए। लेकिन अब ख़बर आ रही है कि द कपिल शर्मा शो के प्रोडयूसर सलमान खान ने सुनील ग्रोवर को फोन कर के शो में वापस आने को कहा है। अब देखना होगा कि क्या सलमान खान के कहने पर सुनील ग्रोवर शो में वापस आने को तैयार हो जाएंगे ? क्या कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच चल रही कोल्ड वॉर खत्म हो जाएगी ? क्या दर्शकों को फिर एक बार इनकी जोड़ी एक साथ में देखने को मिलेगी ?
सोनी टीवी पर दिखाए जाने वाला शो 'द कपिल शर्मा शो' लोगों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। इस शो की टीआरपी आसमान को छू रही है। शनिवार और रविवार को दिखाए जाने वाले इस शो में कपिल शर्मा सुमोना चक्रवर्ती, कृष्णा अभिषेक, भारती सिहं, कीकू जैसे कलाकार शामिल हैं। आपको बता दें कि एक वक्त था, जब इस शो में एक अहम किरदार निभाने वाले कॉमेडियन सुनील ग्रोवर उर्फ गुत्थी ने लोगों का दिल जीत लिया था। लेकिन कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच आपसी मतभेद के कारण सुनील ग्रोवर ने बीच में ही इस शो को छोड़ दिया था। जिसके बाद वह इस शो में बिल्कुल भी दिखाई नहीं दिए। लेकिन अब ख़बर आ रही है कि द कपिल शर्मा शो के प्रोडयूसर सलमान खान ने सुनील ग्रोवर को फोन कर के शो में वापस आने को कहा है। अब देखना होगा कि क्या सलमान खान के कहने पर सुनील ग्रोवर शो में वापस आने को तैयार हो जाएंगे ? क्या कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच चल रही कोल्ड वॉर खत्म हो जाएगी ? क्या दर्शकों को फिर एक बार इनकी जोड़ी एक साथ में देखने को मिलेगी ?
बेलारूसी समाज के पश्चिमीकरण और शासक वर्ग के लिए सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक वेटिकन है। हाल ही में, बेलारूसी अधिकारियों के निमंत्रण पर, वेटिकन के राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पेरोलिन ने मिन्स्क की आधिकारिक यात्रा का भुगतान किया। कार्डिनल की यात्रा के बारे में एपोस्टोलिक संज्ञा के संदेश में, यह नोट किया गया था कि इस तरह से पोप फ्रांसिस "बेलारूसी लोगों के प्रति अपने गहन सम्मान और अपने निकटतम सहयोगी के माध्यम से प्रार्थना और दिलों की एकता में बेलारूस के कैथोलिकों के साथ मिलने की इच्छा रखते हैं"। पवित्र राज्य के सचिव ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, विदेश मंत्री व्लादिमीर मेकी के साथ-साथ बेलारूस के कैथोलिक बिशप सम्मेलन के सदस्यों के साथ मुलाकात की। पिएत्रो पारोलिना और अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच मुलाकात के हिस्से के रूप में, बेलारूस के प्रमुख ने कहा कि उन्हें सीधे पोप गणराज्य में आने में खुशी होगी। और बेलारूस गणराज्य के विदेश मंत्रालय के प्रमुख ने कहा कि कार्डिनल का आगमन बेलारूस के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसके बीच वेटिकन और "समझ और विश्वास का एक विशेष संबंध विकसित किया। " उद्धरणः "वेटिकन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हमारे लिए एक विशेष भागीदार है, और आधुनिक समाज की समस्याओं को हल करने के लिए वेटिकन के दृष्टिकोण बेलारूसी लोगों के करीब और समझने योग्य हैं। " बदले में, पवित्र राज्य के सचिव ने कहा कि वेटिकन बेलारूस के राष्ट्रपति की यात्रा को प्राप्त करने के लिए तैयार था, उसने बेलारूस और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए एक तरह का मंच बनने की घोषणा की, और विश्वास व्यक्त किया कि बेलारूस और वेटिकन के बीच संबंध सक्रिय रूप से विकसित होंगे। अपनी यात्रा के दौरान, पिएत्रो पेरोलिन ने कहा कि होली सी बेलारूस और पश्चिम के बीच संबंधों की स्थापना का समर्थन कर सकती है। इस तरह का समर्थन, बेलारूस में माल्टा के संप्रभु सैन्य आदेश के प्रतिनिधित्व द्वारा प्रदान किया गया समर्थन - अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने सीधे आदेश राजदूत पॉल फ्रेडरिक वॉन फुरहर के साथ एक बैठक में कहा कि उन्हें बेलारूस और यूरोप के बीच संबंधों के निर्माण में कैथोलिक चर्च की एक अधिक सक्रिय भूमिका की उम्मीद है - पहले से ही कुछ निश्चित फल हैं। आज, राष्ट्रपति लुकाशेंको के न्यायालय सेवकों की वैचारिक और विश्वव्यापी प्राथमिकताएं और बेलारूसी अधिकारियों के सबसे विचित्र रुझानों के प्रति संवेदनशील वैटिकन के पोलैंड के माध्यम से चुपचाप बंद हैं। बेलारूस गणराज्य के सांस्कृतिक और अर्थपूर्ण परिदृश्य के साथ-साथ कुछ अधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों के कैथोलिक प्रोफेसरों-पोल्स से प्रेरित होने वाले आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। इस और पोलैंड की प्रासंगिक संरचनाओं और सेवाओं के "धर्मनिरपेक्ष" काम में योगदान देता है। शुरुआती 2000 में वापस। कजाकिस्तान में डंडे के जातीय प्रवासी के प्रत्यावर्तन पर बिल (12 मिलियन डॉलर से अधिक के बजट आवंटन के साथ पांच साल के लिए डिज़ाइन किया गया) को अपनाया गया था। बेलारूस (और यूक्रेन) के लिए, इस तरह के बिल जमे हुए थे। इसके बजाय, 2000 की शुरुआत से। उपायों को गवर्निंग बॉडीज ("कुलीन वर्ग") में, और 2000 के अंत में जातीय डंडे के प्रवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किया जा रहा है। ध्रुव मानचित्र को अपनाया गया (जनता के लिए)। आधिकारिक तौर पर, बेलारूस के राज्य के अधिकारियों को बर्खास्तगी के खतरे के तहत "पोल कार्ड" सौंपने के लिए मजबूर किया जाता है - बेलारूस गणराज्य के कानून "सार्वजनिक सेवा" में संशोधन के अनुसार जो कि फरवरी NNUMX पर फरवरी 11 पर लागू हुआ था। इसके अलावा, कार्यकर्ता के बयान और बेलारूस के नेताओं में से एक के अनुसार बेलारूस में आंद्रेज पोकज़ोबुत के संघ के नेता, "बहुत कुछ संस्था के प्रमुख पर निर्भर करता है। कुछ लोग कानून को सख्ती से लागू करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो आंखें बंद कर लेते हैं। " पोलिश राजनयिक संस्थानों का आश्वासन है कि उन्हें इस बारे में किसी को भी जानकारी नहीं दी जाती है कि विदेशी नागरिक के पास "ध्रुव कार्ड" है या नहीं। पोलैंड प्रतिवर्ष $ 500 हजार से अधिक की राशि में बेलारूसी विरोध के सूचना संसाधनों का वित्तपोषण करता है। मार्च 2012 के लिए पोलैंड के विदेश मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, "बेलारूस की लोकतांत्रिक ताकतों" को सहायता से संबंधित गतिविधियों के लिए धन चार्टर 97 पोर्टल ($ 100 से अधिक) के रूप में ऐसी संरचनाओं तक फैला है, बेलारूसी ऐतिहासिक समाज "(लगभग 70 हजार डॉलर), फाउंडेशन फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी" (लगभग 140 हजार डॉलर), कंपनी "ईस्ट यूरोपियन डेमोक्रेटिक सेंटर" (लगभग 130 हजार डॉलर), "रॉबर्ट स्कूमन का बेलारूसी समाज" (लगभग 70 हजार डॉलर) और "ब्यूरो" लोकतांत्रिक बेलारूस के साथ एकजुटता "(लगभग 85 हजार डॉलर)। यह तथ्य कि "बेलारूस पोलिश राजनीति के हितों के घेरे में लौट रहा है", बेलारूसी विपक्षी सदस्यों ने 4 दिसंबर 2014 को पूरी दुनिया के लिए खुशी की घोषणा की, जब इतिहास में पहली बार, बेलारूस की विशेष सुनवाई पोलिश संसद में आयोजित की गई थी। (पार्टियों ने सहमति व्यक्त की कि इस तरह की बैठकें निरंतर आधार पर आयोजित की जाएंगी, एक अनुमोदित दिन आदेश और कुछ मुद्दे होंगे)। पोलैंड के सेजम के विदेश मामलों की समिति की बैठक में, पोलिश अधिकारियों द्वारा वित्तपोषित मीडिया के नेताओं और प्रतिनिधियों (जैसे बेलसैट टीवी चैनल एग्निज़स्का रोमास्ज़ेस्का के निदेशक), पोलैंड में बेलारूसी प्रवासी, साथ ही बेलारूसी समर्थक पश्चिमी विपक्षी दलों और संगठनों को बेलारूसी पक्ष को चित्रित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। जिसमें आंद्रेई सनिकोव, बेलारूस गणराज्य के विदेश मामलों के मंत्रालय के एक पूर्व उप प्रमुख, जो लंदन में रहते हैं। पोलिश पक्ष का प्रतिनिधित्व विदेशी मामलों की समिति के प्रमुख रॉबर्ट टिसकज़िविक्ज़, पोलिश संसदीय दल "लॉ एंड जस्टिस" के उपाध्यक्ष, प्रवासन संबंधों पर आयोग के अध्यक्ष एडम लिपिंस्की, विदेश मामलों पर सेज़म समिति के उपाध्यक्ष, तेदुस्स इविंस्की, विदेश मंत्रालय के पूर्वी विभाग के प्रमुख के मंत्रालय के विदेश विभाग में किया जाता है। बेलारूस में लेस्ज़ेक शेरेपका, इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी फंड के प्रमुख क्रिज़सटेस्टो स्टैनोव्स्की, नाटो संसदीय असेंबली के सदस्य विटोल्ड वाशिकोवस्की, सेजम और राजनयिकों के अन्य सदस्य। (प्रतिनिधित्व का स्तर अन्य बातों के अलावा गवाही देता है, सोवियत-सोवियत अंतरिक्ष के यूरोपीय भाग में नेतृत्व के लिए पोलैंड और लिथुआनिया के बीच अनिर्दिष्ट प्रतिद्वंद्विता में असली नेता कौन है)। "बेलारूसी मुद्दा पोलिश राजनीति का एक महत्वपूर्ण तत्व है," पैन Tyszkiewicz ने कहा। सीमास विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ने कहा, "बेलारूस में लोकतांत्रिक विपक्ष के साथ संबंधों के उच्चतम स्तर तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक धारणा में बेलारूसी सवाल को भी अनसुना करना चाहिए," हमने कहा, "हम चाहते हैं कि बेलारूस हमारे यूरोपीय पड़ोस का हिस्सा बने। "। एक दिलचस्प बिंदु - पोलिश पक्ष पर, बहुत अलग राजनीतिक संरचनाओं के प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया। फिर भी, बेलारूसी सवाल राजनीतिक विरोधियों और विरोधियों को भी एकजुट करता है! इसके अलावा, पोलिश राजनेताओं और राजनयिकों को तथाकथित बेलारूसी की वास्तविक क्षमता के बारे में अच्छी तरह पता है विपक्षी, उनकी राजनीतिक नपुंसकता, नीरसता और तुच्छता। और चुनावी रेटिंग, जो सांख्यिकीय त्रुटि के क्षेत्र में लगातार तीसरी बार उतार-चढ़ाव कर रही है। यही कारण है कि वे बेलारूसी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क विकसित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, बेलारूस के प्रति पोलिश नीति के सवाल पर एक ही घटना में, आधिकारिक वारसॉ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह "सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में संपर्कों के संदर्भ में सभी उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने" पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। इसके बाद डंडे न केवल अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ, बल्कि इसी तरह के विरोध के साथ भी विश्वास करने का नाटक करते हैं? और फिर उन्हें भी उसकी आवश्यकता क्यों है? कारण को पंजीकृत विपक्षी पश्चिमी देशों और शासन के पदाधिकारियों के बीच वैचारिक भिन्नता के क्रमिक रूप से गायब होने की मांग की जानी चाहिए, जो पहले से ही खुले तौर पर और बिना अतिशयोक्ति के बेलारूस में राज्य स्तर पर खून की बदबू पैदा कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से एक यूरोपीय सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मौजूदा परिस्थितियों में, पश्चिम को बेलारूसी विपक्ष का समर्थन करने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है - यदि संभव हो तो, सीधे अधिकारियों के साथ सहयोग करें, जिनकी समर्थक पश्चिमी स्थिति वास्तव में विपक्ष के पश्चिम की तुलना में बहुत अलग नहीं है। - लेखकः - मूल स्रोतः
बेलारूसी समाज के पश्चिमीकरण और शासक वर्ग के लिए सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक वेटिकन है। हाल ही में, बेलारूसी अधिकारियों के निमंत्रण पर, वेटिकन के राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पेरोलिन ने मिन्स्क की आधिकारिक यात्रा का भुगतान किया। कार्डिनल की यात्रा के बारे में एपोस्टोलिक संज्ञा के संदेश में, यह नोट किया गया था कि इस तरह से पोप फ्रांसिस "बेलारूसी लोगों के प्रति अपने गहन सम्मान और अपने निकटतम सहयोगी के माध्यम से प्रार्थना और दिलों की एकता में बेलारूस के कैथोलिकों के साथ मिलने की इच्छा रखते हैं"। पवित्र राज्य के सचिव ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, विदेश मंत्री व्लादिमीर मेकी के साथ-साथ बेलारूस के कैथोलिक बिशप सम्मेलन के सदस्यों के साथ मुलाकात की। पिएत्रो पारोलिना और अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच मुलाकात के हिस्से के रूप में, बेलारूस के प्रमुख ने कहा कि उन्हें सीधे पोप गणराज्य में आने में खुशी होगी। और बेलारूस गणराज्य के विदेश मंत्रालय के प्रमुख ने कहा कि कार्डिनल का आगमन बेलारूस के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसके बीच वेटिकन और "समझ और विश्वास का एक विशेष संबंध विकसित किया। " उद्धरणः "वेटिकन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हमारे लिए एक विशेष भागीदार है, और आधुनिक समाज की समस्याओं को हल करने के लिए वेटिकन के दृष्टिकोण बेलारूसी लोगों के करीब और समझने योग्य हैं। " बदले में, पवित्र राज्य के सचिव ने कहा कि वेटिकन बेलारूस के राष्ट्रपति की यात्रा को प्राप्त करने के लिए तैयार था, उसने बेलारूस और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए एक तरह का मंच बनने की घोषणा की, और विश्वास व्यक्त किया कि बेलारूस और वेटिकन के बीच संबंध सक्रिय रूप से विकसित होंगे। अपनी यात्रा के दौरान, पिएत्रो पेरोलिन ने कहा कि होली सी बेलारूस और पश्चिम के बीच संबंधों की स्थापना का समर्थन कर सकती है। इस तरह का समर्थन, बेलारूस में माल्टा के संप्रभु सैन्य आदेश के प्रतिनिधित्व द्वारा प्रदान किया गया समर्थन - अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने सीधे आदेश राजदूत पॉल फ्रेडरिक वॉन फुरहर के साथ एक बैठक में कहा कि उन्हें बेलारूस और यूरोप के बीच संबंधों के निर्माण में कैथोलिक चर्च की एक अधिक सक्रिय भूमिका की उम्मीद है - पहले से ही कुछ निश्चित फल हैं। आज, राष्ट्रपति लुकाशेंको के न्यायालय सेवकों की वैचारिक और विश्वव्यापी प्राथमिकताएं और बेलारूसी अधिकारियों के सबसे विचित्र रुझानों के प्रति संवेदनशील वैटिकन के पोलैंड के माध्यम से चुपचाप बंद हैं। बेलारूस गणराज्य के सांस्कृतिक और अर्थपूर्ण परिदृश्य के साथ-साथ कुछ अधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों के कैथोलिक प्रोफेसरों-पोल्स से प्रेरित होने वाले आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है। इस और पोलैंड की प्रासंगिक संरचनाओं और सेवाओं के "धर्मनिरपेक्ष" काम में योगदान देता है। शुरुआती दो हज़ार में वापस। कजाकिस्तान में डंडे के जातीय प्रवासी के प्रत्यावर्तन पर बिल को अपनाया गया था। बेलारूस के लिए, इस तरह के बिल जमे हुए थे। इसके बजाय, दो हज़ार की शुरुआत से। उपायों को गवर्निंग बॉडीज में, और दो हज़ार के अंत में जातीय डंडे के प्रवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किया जा रहा है। ध्रुव मानचित्र को अपनाया गया । आधिकारिक तौर पर, बेलारूस के राज्य के अधिकारियों को बर्खास्तगी के खतरे के तहत "पोल कार्ड" सौंपने के लिए मजबूर किया जाता है - बेलारूस गणराज्य के कानून "सार्वजनिक सेवा" में संशोधन के अनुसार जो कि फरवरी NNUMX पर फरवरी ग्यारह पर लागू हुआ था। इसके अलावा, कार्यकर्ता के बयान और बेलारूस के नेताओं में से एक के अनुसार बेलारूस में आंद्रेज पोकज़ोबुत के संघ के नेता, "बहुत कुछ संस्था के प्रमुख पर निर्भर करता है। कुछ लोग कानून को सख्ती से लागू करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो आंखें बंद कर लेते हैं। " पोलिश राजनयिक संस्थानों का आश्वासन है कि उन्हें इस बारे में किसी को भी जानकारी नहीं दी जाती है कि विदेशी नागरिक के पास "ध्रुव कार्ड" है या नहीं। पोलैंड प्रतिवर्ष पाँच सौ डॉलर हजार से अधिक की राशि में बेलारूसी विरोध के सूचना संसाधनों का वित्तपोषण करता है। मार्च दो हज़ार बारह के लिए पोलैंड के विदेश मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, "बेलारूस की लोकतांत्रिक ताकतों" को सहायता से संबंधित गतिविधियों के लिए धन चार्टर सत्तानवे पोर्टल के रूप में ऐसी संरचनाओं तक फैला है, बेलारूसी ऐतिहासिक समाज ", फाउंडेशन फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी" , कंपनी "ईस्ट यूरोपियन डेमोक्रेटिक सेंटर" , "रॉबर्ट स्कूमन का बेलारूसी समाज" और "ब्यूरो" लोकतांत्रिक बेलारूस के साथ एकजुटता "। यह तथ्य कि "बेलारूस पोलिश राजनीति के हितों के घेरे में लौट रहा है", बेलारूसी विपक्षी सदस्यों ने चार दिसंबर दो हज़ार चौदह को पूरी दुनिया के लिए खुशी की घोषणा की, जब इतिहास में पहली बार, बेलारूस की विशेष सुनवाई पोलिश संसद में आयोजित की गई थी। । पोलैंड के सेजम के विदेश मामलों की समिति की बैठक में, पोलिश अधिकारियों द्वारा वित्तपोषित मीडिया के नेताओं और प्रतिनिधियों , पोलैंड में बेलारूसी प्रवासी, साथ ही बेलारूसी समर्थक पश्चिमी विपक्षी दलों और संगठनों को बेलारूसी पक्ष को चित्रित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। जिसमें आंद्रेई सनिकोव, बेलारूस गणराज्य के विदेश मामलों के मंत्रालय के एक पूर्व उप प्रमुख, जो लंदन में रहते हैं। पोलिश पक्ष का प्रतिनिधित्व विदेशी मामलों की समिति के प्रमुख रॉबर्ट टिसकज़िविक्ज़, पोलिश संसदीय दल "लॉ एंड जस्टिस" के उपाध्यक्ष, प्रवासन संबंधों पर आयोग के अध्यक्ष एडम लिपिंस्की, विदेश मामलों पर सेज़म समिति के उपाध्यक्ष, तेदुस्स इविंस्की, विदेश मंत्रालय के पूर्वी विभाग के प्रमुख के मंत्रालय के विदेश विभाग में किया जाता है। बेलारूस में लेस्ज़ेक शेरेपका, इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी फंड के प्रमुख क्रिज़सटेस्टो स्टैनोव्स्की, नाटो संसदीय असेंबली के सदस्य विटोल्ड वाशिकोवस्की, सेजम और राजनयिकों के अन्य सदस्य। । "बेलारूसी मुद्दा पोलिश राजनीति का एक महत्वपूर्ण तत्व है," पैन Tyszkiewicz ने कहा। सीमास विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ने कहा, "बेलारूस में लोकतांत्रिक विपक्ष के साथ संबंधों के उच्चतम स्तर तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक धारणा में बेलारूसी सवाल को भी अनसुना करना चाहिए," हमने कहा, "हम चाहते हैं कि बेलारूस हमारे यूरोपीय पड़ोस का हिस्सा बने। "। एक दिलचस्प बिंदु - पोलिश पक्ष पर, बहुत अलग राजनीतिक संरचनाओं के प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया। फिर भी, बेलारूसी सवाल राजनीतिक विरोधियों और विरोधियों को भी एकजुट करता है! इसके अलावा, पोलिश राजनेताओं और राजनयिकों को तथाकथित बेलारूसी की वास्तविक क्षमता के बारे में अच्छी तरह पता है विपक्षी, उनकी राजनीतिक नपुंसकता, नीरसता और तुच्छता। और चुनावी रेटिंग, जो सांख्यिकीय त्रुटि के क्षेत्र में लगातार तीसरी बार उतार-चढ़ाव कर रही है। यही कारण है कि वे बेलारूसी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क विकसित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, बेलारूस के प्रति पोलिश नीति के सवाल पर एक ही घटना में, आधिकारिक वारसॉ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह "सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में संपर्कों के संदर्भ में सभी उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने" पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। इसके बाद डंडे न केवल अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ, बल्कि इसी तरह के विरोध के साथ भी विश्वास करने का नाटक करते हैं? और फिर उन्हें भी उसकी आवश्यकता क्यों है? कारण को पंजीकृत विपक्षी पश्चिमी देशों और शासन के पदाधिकारियों के बीच वैचारिक भिन्नता के क्रमिक रूप से गायब होने की मांग की जानी चाहिए, जो पहले से ही खुले तौर पर और बिना अतिशयोक्ति के बेलारूस में राज्य स्तर पर खून की बदबू पैदा कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से एक यूरोपीय सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मौजूदा परिस्थितियों में, पश्चिम को बेलारूसी विपक्ष का समर्थन करने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है - यदि संभव हो तो, सीधे अधिकारियों के साथ सहयोग करें, जिनकी समर्थक पश्चिमी स्थिति वास्तव में विपक्ष के पश्चिम की तुलना में बहुत अलग नहीं है। - लेखकः - मूल स्रोतः
नासिकः महाराष्ट्र के नासिक में शुक्रवार शाम एक भीषण सड़क हादसा हुआ। इस सड़क हादसे में कम से कम 5 कॉलेज विद्यार्थियों की मौत हो गई, जबकि 4 अन्य लोग घायल हो गए। कार में यात्रा कर रहे विद्यार्थियों के एक समूह की कार का टायर फटने की वजह से वह डिवाइडर को तोड़कर दूसरी लेन में घुस गई तथा दो गाड़ियों से उसकी टक्कर हो गई। पुलिस के एक अफसर ने कहा कि यह घटना सिन्नर के समीप मोहदरी घाट में हुई। पुलिस ने बताया कि कॉलेज के 8 विद्यार्थियों का एक ग्रुप नासिक से सिन्नर की तरफ जा रहा था। उनकी तेज गति कार ने लेन तोड़ दी तथा दूसरी ओर से आ रही दो अन्य कारों को टक्कर मार दी। वही सभी विद्यार्थियों की आयु 18-20 के करीब बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि 5 विद्यार्थियों की मौके पर ही मौत हो गई तथा तीन अन्य घायल हो गए। साथ ही सामने से आ रही एक कार का चालक भी चोटिल हो गया। जिस गाड़ी का टायर फटा उसमें सवार लोग कॉलेज के छात्र थे। ये टक्कर इतनी बड़ी थी कि दुर्घटना में कार चकनाचूर हो गई। पुलिस ने बताया कि इस विद्यार्थियों में जिन 5 व्यक्तियों की मौत हुई है, उनमें 3 लड़कियां और 2 लड़के सम्मिलित हैं। नासिक सिन्नर हाईवे पर निरंतर सड़क हादसे होते रहते है। इसकी एक सबसे बड़ी वजह गाड़ियों की तेज रफ्तार होती है। 7 दिसंबर की रात को नासिक-सिन्नर हाईवे पर ही एक भीषण रोड एक्सीडेंट हुआ था। शिंदे पलसे टोल नाका के लगभग हुए इस सड़क हादसे में एक बस ने 3 गाड़ियों को खतरनाक टक्कर मार दी। तत्पश्चात, उस बस में आग लग गई। इस दुर्घटना में भी 4 व्यक्तियों की मौत होने की खबर आई थी।
नासिकः महाराष्ट्र के नासिक में शुक्रवार शाम एक भीषण सड़क हादसा हुआ। इस सड़क हादसे में कम से कम पाँच कॉलेज विद्यार्थियों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। कार में यात्रा कर रहे विद्यार्थियों के एक समूह की कार का टायर फटने की वजह से वह डिवाइडर को तोड़कर दूसरी लेन में घुस गई तथा दो गाड़ियों से उसकी टक्कर हो गई। पुलिस के एक अफसर ने कहा कि यह घटना सिन्नर के समीप मोहदरी घाट में हुई। पुलिस ने बताया कि कॉलेज के आठ विद्यार्थियों का एक ग्रुप नासिक से सिन्नर की तरफ जा रहा था। उनकी तेज गति कार ने लेन तोड़ दी तथा दूसरी ओर से आ रही दो अन्य कारों को टक्कर मार दी। वही सभी विद्यार्थियों की आयु अट्ठारह-बीस के करीब बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि पाँच विद्यार्थियों की मौके पर ही मौत हो गई तथा तीन अन्य घायल हो गए। साथ ही सामने से आ रही एक कार का चालक भी चोटिल हो गया। जिस गाड़ी का टायर फटा उसमें सवार लोग कॉलेज के छात्र थे। ये टक्कर इतनी बड़ी थी कि दुर्घटना में कार चकनाचूर हो गई। पुलिस ने बताया कि इस विद्यार्थियों में जिन पाँच व्यक्तियों की मौत हुई है, उनमें तीन लड़कियां और दो लड़के सम्मिलित हैं। नासिक सिन्नर हाईवे पर निरंतर सड़क हादसे होते रहते है। इसकी एक सबसे बड़ी वजह गाड़ियों की तेज रफ्तार होती है। सात दिसंबर की रात को नासिक-सिन्नर हाईवे पर ही एक भीषण रोड एक्सीडेंट हुआ था। शिंदे पलसे टोल नाका के लगभग हुए इस सड़क हादसे में एक बस ने तीन गाड़ियों को खतरनाक टक्कर मार दी। तत्पश्चात, उस बस में आग लग गई। इस दुर्घटना में भी चार व्यक्तियों की मौत होने की खबर आई थी।
नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। अगर आप बैंक में सरकारी नौकरी (Bank Recruitment 2022) पाने की इच्छा रखते हैं तो यह खबर आपके लिए यह बेहतरीन अवसर है कर्नाटक स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक (Karnataka State Co-Operative Apex Bank Limited) ने Bank Assistant पदों के लिए भर्ती प्रकाशित की है योग्य उम्मीदवार कर्नाटक स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक (Karnataka Apex Bank Vacancy 2022) की आधिकारिक वेबसाइट www. karnatakaapex. com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदन करने की आखिरी तारीख 16 अप्रैल 2022 तक है। योग्यता - उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से Degree या इसके सामान उपाधि होने पर भी स्वीकृति है। आयु सीमा - उम्मीदवार की अधिकतम आयु 18 से 35 वर्ष तक होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया - लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, में परफॉरमेंस के अनुसार इस रोजगार में प्रत्याशी का चयन होगा। वेतनमान - इस Govt Job में सैलेरी ₹28425/- से ₹87125/- तक होगी। आवेदन प्रक्रिया - इस रोजगार के लिए आपको आवेदन Online करना होगा आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करें। आवेदन शुल्क (Application Fees)
नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। अगर आप बैंक में सरकारी नौकरी पाने की इच्छा रखते हैं तो यह खबर आपके लिए यह बेहतरीन अवसर है कर्नाटक स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक ने Bank Assistant पदों के लिए भर्ती प्रकाशित की है योग्य उम्मीदवार कर्नाटक स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक की आधिकारिक वेबसाइट www. karnatakaapex. com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदन करने की आखिरी तारीख सोलह अप्रैल दो हज़ार बाईस तक है। योग्यता - उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से Degree या इसके सामान उपाधि होने पर भी स्वीकृति है। आयु सीमा - उम्मीदवार की अधिकतम आयु अट्ठारह से पैंतीस वर्ष तक होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया - लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, में परफॉरमेंस के अनुसार इस रोजगार में प्रत्याशी का चयन होगा। वेतनमान - इस Govt Job में सैलेरी अट्ठाईस हज़ार चार सौ पच्चीस रुपया/- से सत्तासी हज़ार एक सौ पच्चीस रुपया/- तक होगी। आवेदन प्रक्रिया - इस रोजगार के लिए आपको आवेदन Online करना होगा आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करें। आवेदन शुल्क
इस आर्टिकल को पढ़ने से पहले, सबसे ज़रूरी बात ये जान लीजिए कि जिन लोगों का नाम इंग्लिश के R और T अक्षर से शुरू होता है, उनकी राशि तुला होती है। जी हां, जिन लोगों के नाम का पहला अक्षर रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू या ते यानि इंग्लिश अक्षर R और T है, वे लोग तुला राशि के होते हैं। इन लोगों के स्वभाव के बारे में काफी बातें हर किसी को पता नहीं होती क्योंकि इनका व्यक्तित्व रहस्यमयी होता है। साथ ही ये अपने बारे में किसी को भी ज्यादा जानकारी देने में यकीन नहीं रखते हैं। इनके बारे में सबसे खास बात ये होती है कि ये किसी भी सिचुएशन को बड़ी ही आसानी से डील कर लेते हैं। ये खुद तो पॉजिटिव होते ही हैं साथ ही ये किसी और को भी बहुत ही आसानी से मोटिवेट करते हैं। इन लोगों के बारे में एक और बहुत ही खास बात ये है कि ये किसी ना किसी फील्ड में या किसी कला में निपुण होते हैं। इन्हें किसी एक विशेष कला में ज़रूर स्पेशिलिटी हासिल होती है। एक और बात ये कि इस राशि के लोग किसी से भी बहुत ही जल्दी घुल-मिल जाते हैं। इनके इसी नेचर की वजह से इनके फ्रेंड्स की संख्या भी बहुत अधिक होती है। ये अपने मित्रों के बीच बहुत पॉपुलर होते हैं। इनकी पर्सनैलिटी ही कुछ ऐसी होती है कि जहां जाते हैं सारी लाइमलाइट अपनी तरफ खींच लेते हैं। ये स्वभाव से बहुत ही ज्यादा खुशमिज़ाज होते हैं और अपने आस-पास भी हंसी-खुशी का माहौल बनाए रखते हैं। ये लोग दिमाग से बहुत तेज़ होते हैं इसलिए दिमाग से जुड़े कामों में इनकी बहुत रूचि होती है। इसके अलावा अपने आप को सजाने-संवारने और अपने घर को खूबसूरत बनाए रखने का इन्हें बहुत शौक होता है। इनके सॉफ्ट नेचर का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि इन्हें बच्चों के साथ वक्त बिताना बहुत पसंद होता है। ये संस्कारी भी होते हैं और बड़ों को पूरा मान-सम्मान देते हैं। इन्हें अपना पर्सनल स्पेस बहुत प्यारा होता है और उस में ये किसी और को आने नहीं देना चाहते। इन्हें लाइफ में लगातार आगे बढ़ते रहना पसंद होता है। ये अच्छे लाइफ पार्टनर साबित होते हैं। एडवेंचर में इनकी काफी रूचि होती है। इन लोगों के बारे में कुछ नेगेटिव बातें भी हैं जैसे कि इन्हें किसी और के साथ अटेंशन बांटना पसंद नहीं आता। इन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता अगर इनके अलावा किसी और को महत्व मिलता है। कईं बार ये खुद को इतना महत्वपूर्ण मान लेते हैं कि इन्हें अपने अलावा कोई और नज़र ही नहीं आता। अक्सर ये कुछ ऐसी बाते भी बोल जाते हैं जो किसी को ठेस पहुंचा सकती है। इन्हें आसानी से आप अपनी बातों में उलझा सकते हैं। इनकी अपनी सोच कुछ खास नहीं होती है। ये रिश्तों में फायदा-नुकसान बहुत देखते हैं। तो कुछ मिलाकर, ये लोग काफी हद तक एक बेहतर व्यक्तित्व के मालिक होते हैं लेकिन इन्हें अपनी कुछ बातों को बदलना बहुत ज़रूरी है।
इस आर्टिकल को पढ़ने से पहले, सबसे ज़रूरी बात ये जान लीजिए कि जिन लोगों का नाम इंग्लिश के R और T अक्षर से शुरू होता है, उनकी राशि तुला होती है। जी हां, जिन लोगों के नाम का पहला अक्षर रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू या ते यानि इंग्लिश अक्षर R और T है, वे लोग तुला राशि के होते हैं। इन लोगों के स्वभाव के बारे में काफी बातें हर किसी को पता नहीं होती क्योंकि इनका व्यक्तित्व रहस्यमयी होता है। साथ ही ये अपने बारे में किसी को भी ज्यादा जानकारी देने में यकीन नहीं रखते हैं। इनके बारे में सबसे खास बात ये होती है कि ये किसी भी सिचुएशन को बड़ी ही आसानी से डील कर लेते हैं। ये खुद तो पॉजिटिव होते ही हैं साथ ही ये किसी और को भी बहुत ही आसानी से मोटिवेट करते हैं। इन लोगों के बारे में एक और बहुत ही खास बात ये है कि ये किसी ना किसी फील्ड में या किसी कला में निपुण होते हैं। इन्हें किसी एक विशेष कला में ज़रूर स्पेशिलिटी हासिल होती है। एक और बात ये कि इस राशि के लोग किसी से भी बहुत ही जल्दी घुल-मिल जाते हैं। इनके इसी नेचर की वजह से इनके फ्रेंड्स की संख्या भी बहुत अधिक होती है। ये अपने मित्रों के बीच बहुत पॉपुलर होते हैं। इनकी पर्सनैलिटी ही कुछ ऐसी होती है कि जहां जाते हैं सारी लाइमलाइट अपनी तरफ खींच लेते हैं। ये स्वभाव से बहुत ही ज्यादा खुशमिज़ाज होते हैं और अपने आस-पास भी हंसी-खुशी का माहौल बनाए रखते हैं। ये लोग दिमाग से बहुत तेज़ होते हैं इसलिए दिमाग से जुड़े कामों में इनकी बहुत रूचि होती है। इसके अलावा अपने आप को सजाने-संवारने और अपने घर को खूबसूरत बनाए रखने का इन्हें बहुत शौक होता है। इनके सॉफ्ट नेचर का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि इन्हें बच्चों के साथ वक्त बिताना बहुत पसंद होता है। ये संस्कारी भी होते हैं और बड़ों को पूरा मान-सम्मान देते हैं। इन्हें अपना पर्सनल स्पेस बहुत प्यारा होता है और उस में ये किसी और को आने नहीं देना चाहते। इन्हें लाइफ में लगातार आगे बढ़ते रहना पसंद होता है। ये अच्छे लाइफ पार्टनर साबित होते हैं। एडवेंचर में इनकी काफी रूचि होती है। इन लोगों के बारे में कुछ नेगेटिव बातें भी हैं जैसे कि इन्हें किसी और के साथ अटेंशन बांटना पसंद नहीं आता। इन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता अगर इनके अलावा किसी और को महत्व मिलता है। कईं बार ये खुद को इतना महत्वपूर्ण मान लेते हैं कि इन्हें अपने अलावा कोई और नज़र ही नहीं आता। अक्सर ये कुछ ऐसी बाते भी बोल जाते हैं जो किसी को ठेस पहुंचा सकती है। इन्हें आसानी से आप अपनी बातों में उलझा सकते हैं। इनकी अपनी सोच कुछ खास नहीं होती है। ये रिश्तों में फायदा-नुकसान बहुत देखते हैं। तो कुछ मिलाकर, ये लोग काफी हद तक एक बेहतर व्यक्तित्व के मालिक होते हैं लेकिन इन्हें अपनी कुछ बातों को बदलना बहुत ज़रूरी है।
रायपुर. कोरोनावायरस से संक्रमण की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षण संस्थानों को आज से (शुक्रवार से) 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर जारी निर्देश के मुताबिक, कोरोनावायरस की आशंका के चलते शुक्रवार से शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। राज्य के समस्त शासकीय तथा निजी विद्यालयों को और स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित समस्त शिक्षण संस्थाओं तथा समस्त प्रशिक्षण संस्थानों को 31 मार्च तक के लिए तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग ने भी निजी व सरकारी महाविद्यालयों को 31 मार्च तक बंद करने के आदेश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार को प्रदेश के समस्त संभागायुक्त, संचालक लोक शिक्षण, कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है। इसमें 10वीं तथा 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं यथावत पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सम्पन्न होगी। इन परीक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था यथावत रहेगी। इससे पहले गुरुवार को राजधानी दिल्ली और पर्वतीय राज्य उत्तराखंड से भी ऐसी ही खबरें आईं थीं। दोनों ही जगहों पर स्कूल 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिए गए है। दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से शहर के सभी सार्वजनिक स्विमिंग पूलों को भी 31 मार्च तक बंद करने का आदेश दिया है।
रायपुर. कोरोनावायरस से संक्रमण की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षण संस्थानों को आज से इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर जारी निर्देश के मुताबिक, कोरोनावायरस की आशंका के चलते शुक्रवार से शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। राज्य के समस्त शासकीय तथा निजी विद्यालयों को और स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित समस्त शिक्षण संस्थाओं तथा समस्त प्रशिक्षण संस्थानों को इकतीस मार्च तक के लिए तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग ने भी निजी व सरकारी महाविद्यालयों को इकतीस मार्च तक बंद करने के आदेश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार को प्रदेश के समस्त संभागायुक्त, संचालक लोक शिक्षण, कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है। इसमें दसवीं तथा बारहवीं बोर्ड की परीक्षाएं यथावत पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सम्पन्न होगी। इन परीक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था यथावत रहेगी। इससे पहले गुरुवार को राजधानी दिल्ली और पर्वतीय राज्य उत्तराखंड से भी ऐसी ही खबरें आईं थीं। दोनों ही जगहों पर स्कूल इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दिए गए है। दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से शहर के सभी सार्वजनिक स्विमिंग पूलों को भी इकतीस मार्च तक बंद करने का आदेश दिया है।
नईदुनिया ब्यूरो, जयपुर। राजस्थान में स्कूली शिक्षा प्राइवेट स्कूलों के भरोसे होती जा रही है। पिछले छह वर्ष में निजी स्कूलों में 18 लाख बच्चे बढ़े हैं जबकि सरकारी स्कूलों में 21 लाख बच्चे कम हो गए। पूरे प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राजधानी जयपुर में तो पिछले दो वर्ष में प्राइवेट स्कूलों की संख्या देश के किसी भी शहर से ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी एक सरकारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में 1235 नए प्राइवेट स्कूल खुले हैं। जयपुर जिले में कुल 4524 प्राइवेट स्कूल हो गए हैं। हालांकि इनकी संख्या सरकारी स्कूलों से अभी कुछ कम है, लेकिन बच्चों की संख्या की बात की जाए तो प्राइवेट स्कूलों में सरकारी स्कूलों के मुकाबले लगभग दो गुने ज्यादा बच्चे पढ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में जहां करीब पौने आठ लाख बच्चे पढ़ रहे है, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या सिर्फ साढ़े तीन लाख है। शिक्षकों की संख्या भी निजी स्कूलों में ही ज्यादा है। पूरे राजस्थान की बात करें तो निजी स्कूलों में जहां करीब तीन लाख शिक्षक और कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में पौने तीन लाख शिक्षक कर्मचारी काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में निजी स्कूलों की संख्या और प्रभाव पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2006 से 2012 के बीच दस हजार से ज्यादा नए निजी स्कूल खुले, वहीं सरकारी स्कूल सिर्फ करीब डेढ़ हजार ही खुल पाए। इसी तरह निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या 38 से बढ़कर 56 लाख हो गई, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या 86 लाख से घटकर 65 लाख रह गई। स्कूलों में बच्चे सामान्य ढंग से पढ़-लिख भी नहीं पा रहे हैं। राजस्थान में निजी गैर अनुदानित स्कूलों की संस्था सोसायटी फॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष दामोदर गोयल कहते है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण यह स्थिति बनी है। खुद सरकार ने संभागों के अपने दौरों में इस बात पर चिंता जाहिर की है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपना काम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश की शिक्षा में निजी स्कूल बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और सरकार को इन्हें पूरा सहयोग देना चाहिए। हमारे रिजल्ट और प्रदर्शन हर तरह से बेहतर हैं, लेकिन सरकार से हमें सहयोग नहीं मिलता।
नईदुनिया ब्यूरो, जयपुर। राजस्थान में स्कूली शिक्षा प्राइवेट स्कूलों के भरोसे होती जा रही है। पिछले छह वर्ष में निजी स्कूलों में अट्ठारह लाख बच्चे बढ़े हैं जबकि सरकारी स्कूलों में इक्कीस लाख बच्चे कम हो गए। पूरे प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राजधानी जयपुर में तो पिछले दो वर्ष में प्राइवेट स्कूलों की संख्या देश के किसी भी शहर से ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी एक सरकारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में एक हज़ार दो सौ पैंतीस नए प्राइवेट स्कूल खुले हैं। जयपुर जिले में कुल चार हज़ार पाँच सौ चौबीस प्राइवेट स्कूल हो गए हैं। हालांकि इनकी संख्या सरकारी स्कूलों से अभी कुछ कम है, लेकिन बच्चों की संख्या की बात की जाए तो प्राइवेट स्कूलों में सरकारी स्कूलों के मुकाबले लगभग दो गुने ज्यादा बच्चे पढ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में जहां करीब पौने आठ लाख बच्चे पढ़ रहे है, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या सिर्फ साढ़े तीन लाख है। शिक्षकों की संख्या भी निजी स्कूलों में ही ज्यादा है। पूरे राजस्थान की बात करें तो निजी स्कूलों में जहां करीब तीन लाख शिक्षक और कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में पौने तीन लाख शिक्षक कर्मचारी काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में निजी स्कूलों की संख्या और प्रभाव पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। वर्ष दो हज़ार छः से दो हज़ार बारह के बीच दस हजार से ज्यादा नए निजी स्कूल खुले, वहीं सरकारी स्कूल सिर्फ करीब डेढ़ हजार ही खुल पाए। इसी तरह निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या अड़तीस से बढ़कर छप्पन लाख हो गई, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या छियासी लाख से घटकर पैंसठ लाख रह गई। स्कूलों में बच्चे सामान्य ढंग से पढ़-लिख भी नहीं पा रहे हैं। राजस्थान में निजी गैर अनुदानित स्कूलों की संस्था सोसायटी फॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष दामोदर गोयल कहते है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण यह स्थिति बनी है। खुद सरकार ने संभागों के अपने दौरों में इस बात पर चिंता जाहिर की है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपना काम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश की शिक्षा में निजी स्कूल बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और सरकार को इन्हें पूरा सहयोग देना चाहिए। हमारे रिजल्ट और प्रदर्शन हर तरह से बेहतर हैं, लेकिन सरकार से हमें सहयोग नहीं मिलता।
दिल्ली के चुनावी घमासान में सभी राजनीतिक पार्टियों पर विधानसभा चुनावों के लिए आचार संहिता को लेकर चुनाव आयोग की नजर अब टेढ़ी हो गयी है. अब दिल्ली विधानसभा चुनावों को केवल 10 दिन का समय शेष बचा है. लेकिन आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर इन पार्टियों पर लगातार कार्यवाई की जा रही है. अभी तक आचार संहिता के उल्लंघन में आम आदमी पार्टी सभी पार्टियों को पीछे छोड़ चुकी है. अगर सूत्रों की मानें तो आचार संहिता के उल्लंघन में आम आदमी पार्टी सबसे आगे है, दूसरों की संपत्ति पर अपने विज्ञापन लगाकर चुनाव प्रचार करने के आरोप में दिल्ली चुनाव आयोग भी आप पर कई केस दर्ज करा चुका है. वहीँ भड़काऊ भाषण देने के मामले में बीजेपी सबसे आगे है. वैसे तो बीजेपी नेताओं की अटपटी बयानबाजी पूरे देश में सुर्ख़ियों में है. भड़काऊ बयान देने के कारण ही बीजेपी के सभी नेताओं की सभाओं और बयानों पर चुनाव आयोग की तीखी नजर है. लेकिन इस खेल में कांग्रेस भी पीछे नहीं है. आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में आप के बाद कांग्रेस का ही नंबर आता है. आचार संहिता के उल्लंघन में अब तक आम आदमी पार्टी के खिलाफ 17 केस दर्ज किए जा चुके हैं.
दिल्ली के चुनावी घमासान में सभी राजनीतिक पार्टियों पर विधानसभा चुनावों के लिए आचार संहिता को लेकर चुनाव आयोग की नजर अब टेढ़ी हो गयी है. अब दिल्ली विधानसभा चुनावों को केवल दस दिन का समय शेष बचा है. लेकिन आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर इन पार्टियों पर लगातार कार्यवाई की जा रही है. अभी तक आचार संहिता के उल्लंघन में आम आदमी पार्टी सभी पार्टियों को पीछे छोड़ चुकी है. अगर सूत्रों की मानें तो आचार संहिता के उल्लंघन में आम आदमी पार्टी सबसे आगे है, दूसरों की संपत्ति पर अपने विज्ञापन लगाकर चुनाव प्रचार करने के आरोप में दिल्ली चुनाव आयोग भी आप पर कई केस दर्ज करा चुका है. वहीँ भड़काऊ भाषण देने के मामले में बीजेपी सबसे आगे है. वैसे तो बीजेपी नेताओं की अटपटी बयानबाजी पूरे देश में सुर्ख़ियों में है. भड़काऊ बयान देने के कारण ही बीजेपी के सभी नेताओं की सभाओं और बयानों पर चुनाव आयोग की तीखी नजर है. लेकिन इस खेल में कांग्रेस भी पीछे नहीं है. आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में आप के बाद कांग्रेस का ही नंबर आता है. आचार संहिता के उल्लंघन में अब तक आम आदमी पार्टी के खिलाफ सत्रह केस दर्ज किए जा चुके हैं.
हरियाणा के हिसार जिले के हांसी कस्बे में बीती रात आदर्श नगर स्थित साईं प्रॉपर्टी की दुकान में भीषण आग लग गई। दुकान मालिक अश्वनी का आरोप है कि दुकान में आग लगी नहीं, बल्कि शरारती तत्वों द्वारा लगाई गई है। रात के करीब 10:00 बजे के बाद वह दुकान से गया है। आग करीब 1:00 बजे के बाद लगाई गई। पहले दुकान का गेट तोड़ा गया। उसके बाद अंदर पड़ी कुर्सियां, स्टूल, काउंटर व् इंपोर्टेंट कागज़ात जला दिए गए। दुकान का पूरा सामान जलकर राख हो गया है। सुबह करीब 5 बजे लोगों ने दुकान से धुंआ निकलता देखा तो सूचना दी कि दुकान में आग लगी है। अश्वनी ने बताया कि वह तुरंत मौके पर पहुंचा तो धुंआ निकलता देखा। उसने लोगों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। दमकल विभाग को भी आग लगने की सूचना दी। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। शिकायत दर्ज करा दी गई है, लेकिन दुकान में अभी निर्माण कार्य चल रहा था। अभी तो उसकी दुकान का मुहूर्त भी नहीं हुआ था कि खुलने से पहले ही दुकान जलाकर खाक कर दी गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के हिसार जिले के हांसी कस्बे में बीती रात आदर्श नगर स्थित साईं प्रॉपर्टी की दुकान में भीषण आग लग गई। दुकान मालिक अश्वनी का आरोप है कि दुकान में आग लगी नहीं, बल्कि शरारती तत्वों द्वारा लगाई गई है। रात के करीब दस:शून्य बजे के बाद वह दुकान से गया है। आग करीब एक:शून्य बजे के बाद लगाई गई। पहले दुकान का गेट तोड़ा गया। उसके बाद अंदर पड़ी कुर्सियां, स्टूल, काउंटर व् इंपोर्टेंट कागज़ात जला दिए गए। दुकान का पूरा सामान जलकर राख हो गया है। सुबह करीब पाँच बजे लोगों ने दुकान से धुंआ निकलता देखा तो सूचना दी कि दुकान में आग लगी है। अश्वनी ने बताया कि वह तुरंत मौके पर पहुंचा तो धुंआ निकलता देखा। उसने लोगों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। दमकल विभाग को भी आग लगने की सूचना दी। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। शिकायत दर्ज करा दी गई है, लेकिन दुकान में अभी निर्माण कार्य चल रहा था। अभी तो उसकी दुकान का मुहूर्त भी नहीं हुआ था कि खुलने से पहले ही दुकान जलाकर खाक कर दी गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टेवोवरक्यौलरपरीटोनाइटेस याने उदररोग । इस बीमारी में पेट बढता२बहुत चढ जाता है कभी कब्ज होती है कभी दस्तआने लगते हैं और पेट खिंचा तना मालूम पडता है और पेटमें दर्द होता है, के भी होने लगती है, दबानेपर कभी २ गोलेसे मालूम पंडते हैं कारण शरदी कमजोरी मेहनत नहीं करना इत्यादि । पेट पर टिंचर अयोडीन लगाना चाहिये और मुरक्कवात, आइडनेट इत्यादिका सेवन कराना चाहिये तथा प्लीहा दिककी दवा देनेसे फायदा होता है इस वास्ते क्षारादिक उत्तम दवा है। आसाइटिस याने जलोदर । इस बीमारी के कारण पेटमें पानी भरजाता है हाथ पैर और मुखपर शोथ, श्वासलेनमें कुछ तकलीफ और प्यास अधिक होजाती है अगर किसी अंतडी या नस अथवा और किसी जगह पानी भरजावें तो उसे ड्रायसी बोलते हैं । कारण पानी सुखानेवाली रंगोंका निर्वल पडजाना, उन्होंकी हरक्कत में फरक पडना इत्यादि । एलोपेथिकचिकित्सा । पेटका पानी निकालकर ऐसा करना चाहिये जिस्में फिर न वढे । जिसके वास्ते गर्म खुश्क दवा अथवा मुरकबात फौलाद इत्यादि देना चाहिये ।
टेवोवरक्यौलरपरीटोनाइटेस याने उदररोग । इस बीमारी में पेट बढतादोबहुत चढ जाता है कभी कब्ज होती है कभी दस्तआने लगते हैं और पेट खिंचा तना मालूम पडता है और पेटमें दर्द होता है, के भी होने लगती है, दबानेपर कभी दो गोलेसे मालूम पंडते हैं कारण शरदी कमजोरी मेहनत नहीं करना इत्यादि । पेट पर टिंचर अयोडीन लगाना चाहिये और मुरक्कवात, आइडनेट इत्यादिका सेवन कराना चाहिये तथा प्लीहा दिककी दवा देनेसे फायदा होता है इस वास्ते क्षारादिक उत्तम दवा है। आसाइटिस याने जलोदर । इस बीमारी के कारण पेटमें पानी भरजाता है हाथ पैर और मुखपर शोथ, श्वासलेनमें कुछ तकलीफ और प्यास अधिक होजाती है अगर किसी अंतडी या नस अथवा और किसी जगह पानी भरजावें तो उसे ड्रायसी बोलते हैं । कारण पानी सुखानेवाली रंगोंका निर्वल पडजाना, उन्होंकी हरक्कत में फरक पडना इत्यादि । एलोपेथिकचिकित्सा । पेटका पानी निकालकर ऐसा करना चाहिये जिस्में फिर न वढे । जिसके वास्ते गर्म खुश्क दवा अथवा मुरकबात फौलाद इत्यादि देना चाहिये ।
देश में हुई भारी बारिश से नाइजर और बेन्यू नदी का पानी अपने तटों को लांघकर खेतों और सड़कों पर भर गया है। बाढ़ की वजह से लाखों लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं। । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (एनईएमए) के सनी दाती ने एएफपी को बताया, ' हमने चार राज्यों कोगी, डेल्टा, अनाम्ब्रा और नाइजर में राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। ' । इसके अलावा आठ राज्यों पर भी नजर रखी जा रही है जो बाढ़ से प्रभावित हैं।
देश में हुई भारी बारिश से नाइजर और बेन्यू नदी का पानी अपने तटों को लांघकर खेतों और सड़कों पर भर गया है। बाढ़ की वजह से लाखों लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं। । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के सनी दाती ने एएफपी को बताया, ' हमने चार राज्यों कोगी, डेल्टा, अनाम्ब्रा और नाइजर में राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। ' । इसके अलावा आठ राज्यों पर भी नजर रखी जा रही है जो बाढ़ से प्रभावित हैं।
Quick links: उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में बीजेपी की धमाकेदार जीत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में यूपी की जनता ने विकास और सुरक्षा के लिए वोट किया इसके साथ ही सीएम योगी ने निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत को अब तक की सबसे बड़ी जीत कहा। यूपी में ट्रिपल इंजन का नारा देकर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने 17 नगर निगम के मेयर पदों पर भगवा लहराया है. इन नगर निगमों के पार्षद पदों पर भी भाजपा ने भारी जीत हासिल करते हुए नगर निगम सदनों में पूर्ण बहुमत हासिल किया है. यूपी की 'लोकल सरकार' में इस जीत से जहां मिशन लोकसभा के लिए कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा वहीं आगे की रणनीति को धार देने में भी पार्टी को सफलता मिलेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीजेपी दफ्तर पहुंचें हैं। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में बंपर जीत के बाद मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं। निकाय चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली है सभी 17 मेयर की सीट और दोनों विधानसभा के उप चुनाव में एनडीए जीता है। वार्ड 11 से भाजपा प्रत्याशी नरेश कुमार कश्यप जीते, 36 वोटों से बसपा प्रत्याशी को हराया। वार्ड 45 से भाजपा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह जीते, 1863 वोटों से जीत दर्ज की। गाजियाबाद मेयर सीट पर बीजेपी की बंपर जीत। लगभग 90 हजार वोट से सुनीता दयाल की जीत। यूपी नगर पालिका और पंचायत में अध्यक्ष पदों पर भाजपा सबसे आगे है। बीजेपी नगर पालिका की 99 सीटों और नगर पंचायत की 90 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं दूसरे नंबर पर सपा है. लेकिन निर्दलीय उसे टक्कर दे रहे हैं। यहां पालिका में सपा 39 तो निर्दलीय 37 सीटों पर आगे हैं। इसी तरह पंचायतों में सपा 46 सीटों और निर्दलीय 66 सीटों पर आगे चल रहे हैं। झांसी के बाद अब अयोध्या नगर निगम में महापौर पद पर भी बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। यूपी बीजेपी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है. उसने ट्वीट किया कि अयोध्या नगर निगम में महापौर पद पर श्री गिरीशपति त्रिपाठी के विजयी होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हम आपके यशस्वी कार्यकाल की कामना करते हैं। यूपी नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन सबसे खराब दिका रहा है। कांग्रेस मेयर सीट पर सभी पार्टियों से पीछे चल रही है यानी जीरो पर है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष के लिए 5 सीटों पर और नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 3 सीटों पर आगे है। यूपी नगर पालिका परिषद की 199 सीटों पर भाजपा का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी को निर्दलीय प्रत्योशियों ने पछाड़ दिया है। नगर पालिका परिषद चुनाव में बीजेपी को 85 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी 46 सीटों पर, सपा 40 सीटों पर, बसपा 23 सीटों और कांग्रेस 5 सीटों पर आगे चल रह है। ताजा अपडेट के अनुसार, मेयर चुनाव में बीजेपी 17 में से 16 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बसपा एक सीट पर आगे चल रही है। कांग्रेस और सपा अभी भी शून्य पर अटकी हुई है। इस बीच, 199 नगरपालिकाओं में से 158 से उपलब्ध रुझानों से पता चलता है कि भाजपा 65 पर, सपा 53 पर, बसपा 21 पर, कांग्रेस नौ पर और अन्य 10 सीटों पर आगे है। नगर पंचायत चुनाव में, कुल 544 पदों में से 305 सीटों के रुझान बताते हैं कि भाजपा 128 पर, सपा 119 पर, बसपा 29 पर, कांग्रेस 15 पर और अन्य 14 सीटों पर आगे चल रही है। बलिया (नगर पंचायत रतसर कला) निकाय चुनावः झांसी में मेयर पद के लिए तीसरे राउंड की काउंटिंग के बाद बीजेपी प्रत्याशी बिहारी लाल आर्य चल रहे हैं आगे। बिहारी लाल को अब तक कुल 13671 वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस पत्याशी अरविंद चल रहे हैं। मुरादाबादःभारतीय जनता पार्टी के महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल मंडी समिति पहुंचे। पुलिस कर्मचारियों के लिए आरक्षित गेट से एंट्री करने की कोशिश की ड्यूटी पर तैनात गलशहीद थाना प्रभारी मोहित काजला ने उन्हें रोकने की कोशिश क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अर्पित कपूर मौके पर पहुंचे महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल ने उनसे इसी गेट से अंदर जाने के लिए कहा उन्होंने साफ कहा की यह गेट सरकारी कर्मचारियों के लिए ही आरक्षित है लिहाजा आप यहां से नहीं जा सकते हैं कुछ देर के बाद क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अर्पित कपूर महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को अपने साथ दूसरे गेट तक ले गए। बाराबंकी नगर पालिका के लिए मतगणना जारी,पोस्टर बैलट की गिनती में सपा प्रत्याशी आगे,सपा की शीला सिंह पोस्टल बैलट पेपर में आगे। आगरा के वार्ड नंबर 01 से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी मीना देवी लगभग 1700 वोट्स से जीत दर्ज की। कौशाम्बी में मतगणना स्थल पर पत्रकारों को जाने से रोका,ADM ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोका,मतगणना स्थल के बाहर पत्रकार धरने पर बैठे। कौशाम्बी के बाबू सिंह सयारा मतगणना स्थल का मामला। प्रयागराज मेयर चुनाव में पोस्टल बैलट के दूसरे राउंड में भी बीजेपी प्रत्याशी गणेश केसरवानी आगे। 63 वोटों से चल रहे हैं आगे। उत्तर प्रदेश की 17 नगर निगमों के शुरुआती रुझान में बीजेपी 12, सपा 1 और बसपा 2 सीटों पर आगे है। वहीं नगर पालिका की 10 सीटों पर बीजेपी आगे है, जबकि एक पर सपा आगे है। नगर पंचायत में बीजेपी 12, सपा 6 और बसपा 2 सीटों पर आगे है। बीजेपी अभी गोरखपुर, झांसी, अयोध्या, लखनऊ समेत 12 नगर निगम सीटों पर आगे है। वाराणसी में भाजपा के प्रत्याशी अशोक तिवारी ने काशी के कोतवाल बाबा श्री काल भैरव मंदिर में दर्शन पूजन किया । पुजारी ने बाबा के मंगला आरती श्रृंगार का चढ़ा माला आशीर्वाद स्वरूप अशोक तिवारी को दिया और बाबा के चरण का तिलक लगाकर विजयी होने का आशीर्वाद दिया । मतगणना शुरू होने से पहले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, 'आशा है चुनाव आयोग हर एक राउंड के बाद आंकड़े बताता जाएगा जिससे जन विश्वास बना रहे।' आपको बता दें कि अखिलेश यादव मतगणना पर हमेशा से सवालिया निशान लगाते रहे हैं। लखनऊ के शुरुआती रुझानों में बीजेपी मेयर प्रत्याशी सुषमा खरकवाल आगे चल रही हैं। सपा की वंदना मिश्रा दूसरे नंबर पर हैं। महोबा में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में आज सुबह 8 बजे से महोबा जिले के तीन स्थानों में मतगणना प्रारंभ हो गई । जिले की दो नगर पालिका और तीन नगर पंचायत के लिए 48 चेयरमैन प्रत्याशियों और सभासद के 459 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। प्रशासन ने पत्रकारों को मतगणना स्थल से बाहर कर दिया जिससे पत्रकारों मे भारी रोष है। प्रयागराज में उम्मीदवारों और उनके एजेंट की मौजूदगी में खोले गए स्ट्रांग रूम। ईवीएम और पोस्टल बैलट निकाले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव की मतगणना शुरू हो गई है। कुछ ही देर में सीटों से रुझान आने शुरू हो जाएंगे। सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है। नगर निकाय चुनाव में 17 महापौर, 1420 पार्षद, नगर पालिका परिषदों के 199 अध्यक्ष, नगर पालिका परिषदों के 5327 सदस्य, नगर पंचायतों के 544 अध्यक्ष और नगर पंचायतों के 7178 सदस्यों के निर्वाचन के लिए दोनों चरणों में मतदान हुआ। चुनाव में 17 महापौर और 1,401 पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हुआ, जबकि 19 पार्षद निर्विरोध चुने गए। राज्य में नगर पालिका परिषदों के 198 अध्यक्षों और 5,260 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ। मतदाताओं ने नगर पंचायतों के 542 अध्यक्षों और नगर पंचायतों के 7,104 सदस्यों के भाग्य का फैसला करने के लिए भी मतदान किया। कुल मिलाकर, 162 जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए, जबकि 14,522 पदों के लिए 83,378 उम्मीदवार मैदान में थे। उत्तर प्रदेश में महापौर का चुनाव आगरा, झांसी, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, सहारनपुर, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन नगर निगम में हुआ। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने नगर निकाय के चुनावों के लिए अधिसूचना जारी करने की घोषणा करते हुए पहले कहा था कि राज्य में महापौर की 17 सीटों और पार्षदों की 1,420 सीटों पर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से मतदान होगा, जबकि शेष पर मतपत्र का उपयोग किया जाएगा। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव की मतगणना थोड़ी देर में शुरू होगी। मतगणना स्थल पर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस प्रयागराज डीएम ने विजय जुलूस न निकालने का फरमान जारी किया है। स्थानीय निकाय चुनाव में जीते उम्मीदवार विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। यूपी नगर निकाय चुनाव के पहले चरण के दौरान 37 जिलों में 52 फीसदी तो दूसरे चरण के दौरान 38 जिलों में 53 फीसदी वोटिंग हुई थी। यूपी निकाय चुनाव को 2024 का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। इन चुनावों में बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों की साख दांव पर लगी हुई है। मथुरा में भी आज यूपी निकाय चुनाव की मतगणना होनी है। इसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। SP सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया, "मतगणना के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस बल की तैनाती है, वैध पास वालों को ही अंदर जाने दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने पर मनाही है। विजय जुलूस पर चुनाव आयोग ने प्रतिबंध लगाया है।" बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताक़त लगाई थी। वह आज अपने फेवर में बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारे हैं। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी अपने फेवर में अच्छे रिजल्ट आने की आशा कर रही है।
Quick links: उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में बीजेपी की धमाकेदार जीत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में यूपी की जनता ने विकास और सुरक्षा के लिए वोट किया इसके साथ ही सीएम योगी ने निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत को अब तक की सबसे बड़ी जीत कहा। यूपी में ट्रिपल इंजन का नारा देकर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने सत्रह नगर निगम के मेयर पदों पर भगवा लहराया है. इन नगर निगमों के पार्षद पदों पर भी भाजपा ने भारी जीत हासिल करते हुए नगर निगम सदनों में पूर्ण बहुमत हासिल किया है. यूपी की 'लोकल सरकार' में इस जीत से जहां मिशन लोकसभा के लिए कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा वहीं आगे की रणनीति को धार देने में भी पार्टी को सफलता मिलेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीजेपी दफ्तर पहुंचें हैं। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में बंपर जीत के बाद मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं। निकाय चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली है सभी सत्रह मेयर की सीट और दोनों विधानसभा के उप चुनाव में एनडीए जीता है। वार्ड ग्यारह से भाजपा प्रत्याशी नरेश कुमार कश्यप जीते, छत्तीस वोटों से बसपा प्रत्याशी को हराया। वार्ड पैंतालीस से भाजपा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह जीते, एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ वोटों से जीत दर्ज की। गाजियाबाद मेयर सीट पर बीजेपी की बंपर जीत। लगभग नब्बे हजार वोट से सुनीता दयाल की जीत। यूपी नगर पालिका और पंचायत में अध्यक्ष पदों पर भाजपा सबसे आगे है। बीजेपी नगर पालिका की निन्यानवे सीटों और नगर पंचायत की नब्बे सीटों पर आगे चल रही है। वहीं दूसरे नंबर पर सपा है. लेकिन निर्दलीय उसे टक्कर दे रहे हैं। यहां पालिका में सपा उनतालीस तो निर्दलीय सैंतीस सीटों पर आगे हैं। इसी तरह पंचायतों में सपा छियालीस सीटों और निर्दलीय छयासठ सीटों पर आगे चल रहे हैं। झांसी के बाद अब अयोध्या नगर निगम में महापौर पद पर भी बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। यूपी बीजेपी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है. उसने ट्वीट किया कि अयोध्या नगर निगम में महापौर पद पर श्री गिरीशपति त्रिपाठी के विजयी होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हम आपके यशस्वी कार्यकाल की कामना करते हैं। यूपी नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन सबसे खराब दिका रहा है। कांग्रेस मेयर सीट पर सभी पार्टियों से पीछे चल रही है यानी जीरो पर है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष के लिए पाँच सीटों पर और नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन सीटों पर आगे है। यूपी नगर पालिका परिषद की एक सौ निन्यानवे सीटों पर भाजपा का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी को निर्दलीय प्रत्योशियों ने पछाड़ दिया है। नगर पालिका परिषद चुनाव में बीजेपी को पचासी सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी छियालीस सीटों पर, सपा चालीस सीटों पर, बसपा तेईस सीटों और कांग्रेस पाँच सीटों पर आगे चल रह है। ताजा अपडेट के अनुसार, मेयर चुनाव में बीजेपी सत्रह में से सोलह सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बसपा एक सीट पर आगे चल रही है। कांग्रेस और सपा अभी भी शून्य पर अटकी हुई है। इस बीच, एक सौ निन्यानवे नगरपालिकाओं में से एक सौ अट्ठावन से उपलब्ध रुझानों से पता चलता है कि भाजपा पैंसठ पर, सपा तिरेपन पर, बसपा इक्कीस पर, कांग्रेस नौ पर और अन्य दस सीटों पर आगे है। नगर पंचायत चुनाव में, कुल पाँच सौ चौंतालीस पदों में से तीन सौ पाँच सीटों के रुझान बताते हैं कि भाजपा एक सौ अट्ठाईस पर, सपा एक सौ उन्नीस पर, बसपा उनतीस पर, कांग्रेस पंद्रह पर और अन्य चौदह सीटों पर आगे चल रही है। बलिया निकाय चुनावः झांसी में मेयर पद के लिए तीसरे राउंड की काउंटिंग के बाद बीजेपी प्रत्याशी बिहारी लाल आर्य चल रहे हैं आगे। बिहारी लाल को अब तक कुल तेरह हज़ार छः सौ इकहत्तर वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस पत्याशी अरविंद चल रहे हैं। मुरादाबादःभारतीय जनता पार्टी के महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल मंडी समिति पहुंचे। पुलिस कर्मचारियों के लिए आरक्षित गेट से एंट्री करने की कोशिश की ड्यूटी पर तैनात गलशहीद थाना प्रभारी मोहित काजला ने उन्हें रोकने की कोशिश क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अर्पित कपूर मौके पर पहुंचे महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल ने उनसे इसी गेट से अंदर जाने के लिए कहा उन्होंने साफ कहा की यह गेट सरकारी कर्मचारियों के लिए ही आरक्षित है लिहाजा आप यहां से नहीं जा सकते हैं कुछ देर के बाद क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अर्पित कपूर महापौर प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को अपने साथ दूसरे गेट तक ले गए। बाराबंकी नगर पालिका के लिए मतगणना जारी,पोस्टर बैलट की गिनती में सपा प्रत्याशी आगे,सपा की शीला सिंह पोस्टल बैलट पेपर में आगे। आगरा के वार्ड नंबर एक से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी मीना देवी लगभग एक हज़ार सात सौ वोट्स से जीत दर्ज की। कौशाम्बी में मतगणना स्थल पर पत्रकारों को जाने से रोका,ADM ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोका,मतगणना स्थल के बाहर पत्रकार धरने पर बैठे। कौशाम्बी के बाबू सिंह सयारा मतगणना स्थल का मामला। प्रयागराज मेयर चुनाव में पोस्टल बैलट के दूसरे राउंड में भी बीजेपी प्रत्याशी गणेश केसरवानी आगे। तिरेसठ वोटों से चल रहे हैं आगे। उत्तर प्रदेश की सत्रह नगर निगमों के शुरुआती रुझान में बीजेपी बारह, सपा एक और बसपा दो सीटों पर आगे है। वहीं नगर पालिका की दस सीटों पर बीजेपी आगे है, जबकि एक पर सपा आगे है। नगर पंचायत में बीजेपी बारह, सपा छः और बसपा दो सीटों पर आगे है। बीजेपी अभी गोरखपुर, झांसी, अयोध्या, लखनऊ समेत बारह नगर निगम सीटों पर आगे है। वाराणसी में भाजपा के प्रत्याशी अशोक तिवारी ने काशी के कोतवाल बाबा श्री काल भैरव मंदिर में दर्शन पूजन किया । पुजारी ने बाबा के मंगला आरती श्रृंगार का चढ़ा माला आशीर्वाद स्वरूप अशोक तिवारी को दिया और बाबा के चरण का तिलक लगाकर विजयी होने का आशीर्वाद दिया । मतगणना शुरू होने से पहले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, 'आशा है चुनाव आयोग हर एक राउंड के बाद आंकड़े बताता जाएगा जिससे जन विश्वास बना रहे।' आपको बता दें कि अखिलेश यादव मतगणना पर हमेशा से सवालिया निशान लगाते रहे हैं। लखनऊ के शुरुआती रुझानों में बीजेपी मेयर प्रत्याशी सुषमा खरकवाल आगे चल रही हैं। सपा की वंदना मिश्रा दूसरे नंबर पर हैं। महोबा में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में आज सुबह आठ बजे से महोबा जिले के तीन स्थानों में मतगणना प्रारंभ हो गई । जिले की दो नगर पालिका और तीन नगर पंचायत के लिए अड़तालीस चेयरमैन प्रत्याशियों और सभासद के चार सौ उनसठ प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। प्रशासन ने पत्रकारों को मतगणना स्थल से बाहर कर दिया जिससे पत्रकारों मे भारी रोष है। प्रयागराज में उम्मीदवारों और उनके एजेंट की मौजूदगी में खोले गए स्ट्रांग रूम। ईवीएम और पोस्टल बैलट निकाले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव की मतगणना शुरू हो गई है। कुछ ही देर में सीटों से रुझान आने शुरू हो जाएंगे। सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है। नगर निकाय चुनाव में सत्रह महापौर, एक हज़ार चार सौ बीस पार्षद, नगर पालिका परिषदों के एक सौ निन्यानवे अध्यक्ष, नगर पालिका परिषदों के पाँच हज़ार तीन सौ सत्ताईस सदस्य, नगर पंचायतों के पाँच सौ चौंतालीस अध्यक्ष और नगर पंचायतों के सात हज़ार एक सौ अठहत्तर सदस्यों के निर्वाचन के लिए दोनों चरणों में मतदान हुआ। चुनाव में सत्रह महापौर और एक,चार सौ एक पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हुआ, जबकि उन्नीस पार्षद निर्विरोध चुने गए। राज्य में नगर पालिका परिषदों के एक सौ अट्ठानवे अध्यक्षों और पाँच,दो सौ साठ सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ। मतदाताओं ने नगर पंचायतों के पाँच सौ बयालीस अध्यक्षों और नगर पंचायतों के सात,एक सौ चार सदस्यों के भाग्य का फैसला करने के लिए भी मतदान किया। कुल मिलाकर, एक सौ बासठ जनप्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए, जबकि चौदह,पाँच सौ बाईस पदों के लिए तिरासी,तीन सौ अठहत्तर उम्मीदवार मैदान में थे। उत्तर प्रदेश में महापौर का चुनाव आगरा, झांसी, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, सहारनपुर, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन नगर निगम में हुआ। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने नगर निकाय के चुनावों के लिए अधिसूचना जारी करने की घोषणा करते हुए पहले कहा था कि राज्य में महापौर की सत्रह सीटों और पार्षदों की एक,चार सौ बीस सीटों पर ईवीएम के माध्यम से मतदान होगा, जबकि शेष पर मतपत्र का उपयोग किया जाएगा। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव की मतगणना थोड़ी देर में शुरू होगी। मतगणना स्थल पर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस प्रयागराज डीएम ने विजय जुलूस न निकालने का फरमान जारी किया है। स्थानीय निकाय चुनाव में जीते उम्मीदवार विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। यूपी नगर निकाय चुनाव के पहले चरण के दौरान सैंतीस जिलों में बावन फीसदी तो दूसरे चरण के दौरान अड़तीस जिलों में तिरेपन फीसदी वोटिंग हुई थी। यूपी निकाय चुनाव को दो हज़ार चौबीस का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। इन चुनावों में बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों की साख दांव पर लगी हुई है। मथुरा में भी आज यूपी निकाय चुनाव की मतगणना होनी है। इसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। SP सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया, "मतगणना के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस बल की तैनाती है, वैध पास वालों को ही अंदर जाने दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने पर मनाही है। विजय जुलूस पर चुनाव आयोग ने प्रतिबंध लगाया है।" बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताक़त लगाई थी। वह आज अपने फेवर में बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारे हैं। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी अपने फेवर में अच्छे रिजल्ट आने की आशा कर रही है।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है ऐसे में सवाल ये है कि क्या स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इस संबंध में दिल्ली एम्स के मुखिया डॉ रणदीप गुलेरिया ने अपने विचार रखते हुए कहा था कि स्कूलों को कुछ शर्तों के साथ खोला जाना चाहिए। पाकिस्तान के पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया का मानना है कि पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी भविष्य में कमेंट्री पर कोचिंग को तरजीह देंगे। कनेरिया से यूट्यूब चैनल पर सवाल-जवाब सत्र के दौरान पूछा गया कि एमएस धोनी अपनी दूसरी पारी में क्या विकल्प चुनेंगे। राहुल गांधी को फलों के राजा यानी आम पसंद हैं, लेकिन यूपी की आम की जगह आंध्र प्रदेश का आम ज्यादा अच्छा लगता है। इसके साथ ही वो उन्हें दशहरी आम ज्यादा मीठा लगता है, कुछ हद तक लंगड़ा अच्छा लगता है। लेकिन उनकी आम की स्वाद कथा पर अब सियासी तंज कसा जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी जे ब्लिंकन 27 जुलाई और 28 जुलाई को भारत का दौरा करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह देश की उनकी पहली यात्रा है। यात्रा के दौरान, वह 28 जुलाई को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को कहा। महाराष्ट्र इस समय जल प्रलय का सामना कर रहा है। भारी बारिश की वजह से रायगढ़ जिले में तीन जगहों पर भूस्खलन हुआ जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई। मौके पर राहत कार्य चलाया जा रहा है और मुआवजे के मरहम भी लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि मलबे में अभी भी 30 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान एक तरफ तो भारत से रिश्ते सुधारने की बात करते हैं। लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर उनकी जुबां या तो बहकने लगती है या वो नापाक सोच के साथ बयानबाजी करते हैं। इमरान खान का कश्मीर राग, कराएंगे जनमत संग्रह जो फैसला होगा करेंगे कबूल लेकिन. . भारतीय रेलवे ने नए एसी-2 टियर एलएचबी कोच का स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक किया। नए कोच ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाई। पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के अनुसार, कोच के विभिन्न पहलुओं और यूरोपीय मानकों के अनुपालन की जांच के लिए ट्रायल किए गए। भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में एक और अनुकरणीय उपलब्धि की दिशा में आगे बढ़ते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के बालासोर तट से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली आकाश-एनजी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर की संभावना पर बढ़ती चिंताओं के बीच, एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कहा कि देश की आबादी में काफी अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता है। लंबे समय से जिस तस्वीर का इंतजार था वह तस्वीर आखिर आ ही गई। शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चंडीगढ़ में मुलाकात हुई। चंडीगढ़ में हो गई कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच मुलाकात, क्या दिल भी मिले! बिहार का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर मुन्ना मुन्ना मिश्रा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को मुन्ना मिश्रा के पास से एक एके 47 भी मिली है। पेगासस जासूसी मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है। संसद के जारी मानसून सत्र में वह इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए अड़ा है। हालांकि, सरकार जासूसी को इस मामले को खारिज करती आई है। Mansoon Session : पेगासस जासूसी मसले पर सत्ता और विपक्ष में रार, क्या निलंबित होंगे शांतनू सेन? विश्वबैंक के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की थोक कीमत आधारित मुद्रस्फीति 30 साल के उच्चतम स्तर पर है, जिससे देश के लिये चिंताजनक स्थिति पैदा हो गयी है। हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में ईद के मौके पर मुस्लिम श्रमिकों द्वारा नमाज अदा किए जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसे लेकर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मुलाकात की है। जम्मू-कश्मीर में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस ने अखनूर के कानाचक सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया है। पुलिस के मुताबिक ड्रोन के अंदर से विस्फोटक भी बरामद किया गया है। महाराष्ट्र में भारी बारिश की वजह से राज्य के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और जनजीवन पटरी से उतर गया है। भारी बारिश की वजह से रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा (Yediyurappa) ने गुरुवार को कहा कि वह राज्य का दौरा जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा 2023 के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक को बरकरार रखे और 2024 के आम चुनावों में भी 25 सीटें जीतें। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने एक हत्या मामले में जमानत अर्जी को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि देश में अमीरों और गरीबों के लिए दो समानांतर कानूनी व्यवस्थाएं नहीं चल सकतीं। देश में आज एफएम और निजी चैनलों की भरमार है, लेकिन एक वक्त था, जब समाचार और मनोरंजन का एकमात्र साधन रेडियो और दूरदर्शन ही हुआ करते थे। आकाशवाणी की स्थापना 1927 में 23 जुलाई के दिन की गई थी। इंटरनेट डाउन होने से कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे कि Amazon, Zomato, और Myntra समेत कई साइट्स को 22 जुलाई को अस्थाई व्यवधान का सामना करना पड़ा।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है ऐसे में सवाल ये है कि क्या स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इस संबंध में दिल्ली एम्स के मुखिया डॉ रणदीप गुलेरिया ने अपने विचार रखते हुए कहा था कि स्कूलों को कुछ शर्तों के साथ खोला जाना चाहिए। पाकिस्तान के पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया का मानना है कि पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी भविष्य में कमेंट्री पर कोचिंग को तरजीह देंगे। कनेरिया से यूट्यूब चैनल पर सवाल-जवाब सत्र के दौरान पूछा गया कि एमएस धोनी अपनी दूसरी पारी में क्या विकल्प चुनेंगे। राहुल गांधी को फलों के राजा यानी आम पसंद हैं, लेकिन यूपी की आम की जगह आंध्र प्रदेश का आम ज्यादा अच्छा लगता है। इसके साथ ही वो उन्हें दशहरी आम ज्यादा मीठा लगता है, कुछ हद तक लंगड़ा अच्छा लगता है। लेकिन उनकी आम की स्वाद कथा पर अब सियासी तंज कसा जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी जे ब्लिंकन सत्ताईस जुलाई और अट्ठाईस जुलाई को भारत का दौरा करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह देश की उनकी पहली यात्रा है। यात्रा के दौरान, वह अट्ठाईस जुलाई को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा। महाराष्ट्र इस समय जल प्रलय का सामना कर रहा है। भारी बारिश की वजह से रायगढ़ जिले में तीन जगहों पर भूस्खलन हुआ जिसमें छत्तीस लोगों की मौत हो गई। मौके पर राहत कार्य चलाया जा रहा है और मुआवजे के मरहम भी लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि मलबे में अभी भी तीस से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान एक तरफ तो भारत से रिश्ते सुधारने की बात करते हैं। लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर उनकी जुबां या तो बहकने लगती है या वो नापाक सोच के साथ बयानबाजी करते हैं। इमरान खान का कश्मीर राग, कराएंगे जनमत संग्रह जो फैसला होगा करेंगे कबूल लेकिन. . भारतीय रेलवे ने नए एसी-दो टियर एलएचबी कोच का स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक किया। नए कोच ने एक सौ अस्सी किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाई। पश्चिम मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के अनुसार, कोच के विभिन्न पहलुओं और यूरोपीय मानकों के अनुपालन की जांच के लिए ट्रायल किए गए। भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में एक और अनुकरणीय उपलब्धि की दिशा में आगे बढ़ते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा के बालासोर तट से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली आकाश-एनजी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर की संभावना पर बढ़ती चिंताओं के बीच, एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कहा कि देश की आबादी में काफी अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता है। लंबे समय से जिस तस्वीर का इंतजार था वह तस्वीर आखिर आ ही गई। शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चंडीगढ़ में मुलाकात हुई। चंडीगढ़ में हो गई कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच मुलाकात, क्या दिल भी मिले! बिहार का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर मुन्ना मुन्ना मिश्रा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को मुन्ना मिश्रा के पास से एक एके सैंतालीस भी मिली है। पेगासस जासूसी मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है। संसद के जारी मानसून सत्र में वह इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए अड़ा है। हालांकि, सरकार जासूसी को इस मामले को खारिज करती आई है। Mansoon Session : पेगासस जासूसी मसले पर सत्ता और विपक्ष में रार, क्या निलंबित होंगे शांतनू सेन? विश्वबैंक के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की थोक कीमत आधारित मुद्रस्फीति तीस साल के उच्चतम स्तर पर है, जिससे देश के लिये चिंताजनक स्थिति पैदा हो गयी है। हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में ईद के मौके पर मुस्लिम श्रमिकों द्वारा नमाज अदा किए जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसे लेकर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मुलाकात की है। जम्मू-कश्मीर में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस ने अखनूर के कानाचक सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया है। पुलिस के मुताबिक ड्रोन के अंदर से विस्फोटक भी बरामद किया गया है। महाराष्ट्र में भारी बारिश की वजह से राज्य के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और जनजीवन पटरी से उतर गया है। भारी बारिश की वजह से रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने गुरुवार को कहा कि वह राज्य का दौरा जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा दो हज़ार तेईस के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक को बरकरार रखे और दो हज़ार चौबीस के आम चुनावों में भी पच्चीस सीटें जीतें। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने एक हत्या मामले में जमानत अर्जी को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि देश में अमीरों और गरीबों के लिए दो समानांतर कानूनी व्यवस्थाएं नहीं चल सकतीं। देश में आज एफएम और निजी चैनलों की भरमार है, लेकिन एक वक्त था, जब समाचार और मनोरंजन का एकमात्र साधन रेडियो और दूरदर्शन ही हुआ करते थे। आकाशवाणी की स्थापना एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में तेईस जुलाई के दिन की गई थी। इंटरनेट डाउन होने से कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे कि Amazon, Zomato, और Myntra समेत कई साइट्स को बाईस जुलाई को अस्थाई व्यवधान का सामना करना पड़ा।
"मन करे अगर इस बारिश में, चलो कहीं घूम के आएं, तो मध्य प्रदेश में वो सब कुछ है, जो दिल को छु जाए। " मध्य प्रदेश - देश का दिल कहा जाने वाला एक ऐसा प्रदेश जो अपनी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्म, प्राकृतिक सौन्दर्य एवं सम्पदा, वन्य जीव, और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश विदेश में प्रसिद्ध है। यदि आप इस मानसून में कही घूमना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यहाँ कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो मानसून के दौरान चारों और फैली हरियाली, बहती नदियों, और पर्वतों से गिरते झरनों के कारण पर्यटकों को अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुभव कराते हैं। मध्य प्रदेश के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल इस प्रकार है, जहां आप मानसून के दौरान जा सकते हैं । 1.पचमढ़ी (Pachmarhi ) पचमढ़ी - भोपाल से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर होशंगाबाद जिले में स्थित है। सिंध व सतपुड़ा की सुंदर पहाड़ियों से घिरा यह मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है, जिसकी ऊंचाई क़रीब 1100 मीटर है। मध्य प्रदेश के इस खूबसूरत हिल-स्टेशन को अपनी प्राकृतिक सौन्दर्यता के कारण सतपुड़ा की रानी के नाम से भी जाना जाता है। पचमढ़ी को अपने वनस्पतियों और जीवों के लिए यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व में भी सूचीबद्ध किया गया है। ऐसा माना जाता है कि पांचों पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस स्थान का दौरा किया था । यदि आप इस मानसून प्रकृति के सौन्दर्य का अनुभव करना चाहते हैं, तो अपने परिवार या दोस्तों के साथ पचमढ़ी जरूर आए और यहाँ के खूबसूरत झरने, शांत कल-कल बहती नदियों, खूबसूरत घाटियों के अद्भुत सौन्दर्य का आनंद लें। 2.मांडू (Mandu) मांडू पश्चिमि मध्य प्रदेश के मालवा में इंदौर से लगभग 90 किमी दूर एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां पर स्थित खूबसूरत ऐतिहासिक स्मारकों की वास्तुकला विभिन्न शासन काल के प्रभाव को दर्शाती है। मानसून की रिमझिम बारिश, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के मध्य इन इमारतों की खूबसूरती पर्यटकों को और भी आकर्षित करती है । 3.ओरछा (Orchha) मध्यप्रदेश में बेतवा नदी के तट पर बसा, ओरछा शहर एक समय शक्तिशाली बुंदेला राजपूतों की राजधानी हुआ करता था जो आज बहुत शांत और सुंदर है। यहां ओरछा के सम्राटों द्वारा बनाए गए भव्य मंदिर और स्मारकों के कारण यह पर्यटन स्थल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ओरछा के मुख्य किले के अतिरिक्त यहां राजा राम का मंदिर, जहांगीर महल, राजा महल स्टैंड, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, हनुमान मंदिर, परवीन महल, शीश महल, कंचन घाट पर स्थित छतरियां व कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं। मानसून के दौरान यहाँ चारों और फैली हरियाली और प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच इन ऐतिहासिक विरासतों का नजारा पर्यटकों के लिए किसी शानदार अनुभव से कम नहीं। इसके अलावा , अगर मौसम अनुकूल रहता है, तो आप बेतवा में राफ्टिंग का भी आनंद ले सकते हैं । 4.खजुराहो (Khajuraho) मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल, जो पूरे विश्व में अपने प्राचीन धरोहरों और मध्य-कालीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो मंदिर मूल रूप से हिंदू और जैन मंदिरों का एक संग्रह है, जिनका निर्माण 950 ईस्वी और 1050 ईस्वी के मध्य चंदेल वंश द्वारा करवाया गया था। इन पौराणिक मंदिरों की भव्यता और अद्भुत शिल्प कौशल हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। सन 1986 में यूनेस्को द्वारा इन मंदिरों को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में स्थान दिया गया है, जो इसके महत्व को दर्शाता है। इसके साथ हीं विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह भी पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। विंध्य पर्वत श्रृंखला पर स्थित खजुराहो, मानसून के दौरान और भी हरा-भरा हो जाता है, जो देखने में बेहद खूबसूरत और मनमोहक लगता है। इसके अतिरिक्त खजुराहो से लगभग 22 किमी दूर प्राकृतिक सुंदरता का आनद लेने आप रानेह फॉल्स भी जा सकते हैं । 5.अमरकंटक (Amarkantak) भोपाल से लगभग दूरी 550 किमी और जबलपुर से लगभग 250 किमी दुरी पर स्थित अमरकंटक मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है । भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक नर्मदा के अलावा सोन और जोहिला यहाँ से निकलती है। यदि आप प्रकृति को निहारना पसंद करते है, तो मानसून के दौरान अमरकंटक से कुछ दूरी पर स्थित कई खूबसूरत स्थल आपको जरूर देखने चाहिए, जैसे नर्मदा उद्गम मंदिर नर्मदा कुंड, सोनमुड़ा (सोन नदी का स्रोत), दुग्धधारा जल प्रपात और कपिलधारा जल प्रपात जो अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य से घिरे हुए हैं। अमरकंटक की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और आध्यात्मिक तरंगें आपके दिल को खुशी और सकारात्मकता से भर देगी। अगर आप अभी भी इस मौसम से बाहर निकलने के मूड में नहीं हैं तो चिंता ना करें एमपीटी हॉलिडे होम्स में शानदार नाश्ते व गरमा गरम चाय, कॉफी के साथ आप अपने कमरे की खिड़कियों से खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।
"मन करे अगर इस बारिश में, चलो कहीं घूम के आएं, तो मध्य प्रदेश में वो सब कुछ है, जो दिल को छु जाए। " मध्य प्रदेश - देश का दिल कहा जाने वाला एक ऐसा प्रदेश जो अपनी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्म, प्राकृतिक सौन्दर्य एवं सम्पदा, वन्य जीव, और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश विदेश में प्रसिद्ध है। यदि आप इस मानसून में कही घूमना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यहाँ कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो मानसून के दौरान चारों और फैली हरियाली, बहती नदियों, और पर्वतों से गिरते झरनों के कारण पर्यटकों को अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुभव कराते हैं। मध्य प्रदेश के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल इस प्रकार है, जहां आप मानसून के दौरान जा सकते हैं । एक.पचमढ़ी पचमढ़ी - भोपाल से लगभग दो सौ किलोग्राममीटर की दूरी पर होशंगाबाद जिले में स्थित है। सिंध व सतपुड़ा की सुंदर पहाड़ियों से घिरा यह मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है, जिसकी ऊंचाई क़रीब एक हज़ार एक सौ मीटर है। मध्य प्रदेश के इस खूबसूरत हिल-स्टेशन को अपनी प्राकृतिक सौन्दर्यता के कारण सतपुड़ा की रानी के नाम से भी जाना जाता है। पचमढ़ी को अपने वनस्पतियों और जीवों के लिए यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व में भी सूचीबद्ध किया गया है। ऐसा माना जाता है कि पांचों पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस स्थान का दौरा किया था । यदि आप इस मानसून प्रकृति के सौन्दर्य का अनुभव करना चाहते हैं, तो अपने परिवार या दोस्तों के साथ पचमढ़ी जरूर आए और यहाँ के खूबसूरत झरने, शांत कल-कल बहती नदियों, खूबसूरत घाटियों के अद्भुत सौन्दर्य का आनंद लें। दो.मांडू मांडू पश्चिमि मध्य प्रदेश के मालवा में इंदौर से लगभग नब्बे किमी दूर एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां पर स्थित खूबसूरत ऐतिहासिक स्मारकों की वास्तुकला विभिन्न शासन काल के प्रभाव को दर्शाती है। मानसून की रिमझिम बारिश, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के मध्य इन इमारतों की खूबसूरती पर्यटकों को और भी आकर्षित करती है । तीन.ओरछा मध्यप्रदेश में बेतवा नदी के तट पर बसा, ओरछा शहर एक समय शक्तिशाली बुंदेला राजपूतों की राजधानी हुआ करता था जो आज बहुत शांत और सुंदर है। यहां ओरछा के सम्राटों द्वारा बनाए गए भव्य मंदिर और स्मारकों के कारण यह पर्यटन स्थल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ओरछा के मुख्य किले के अतिरिक्त यहां राजा राम का मंदिर, जहांगीर महल, राजा महल स्टैंड, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, हनुमान मंदिर, परवीन महल, शीश महल, कंचन घाट पर स्थित छतरियां व कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं। मानसून के दौरान यहाँ चारों और फैली हरियाली और प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच इन ऐतिहासिक विरासतों का नजारा पर्यटकों के लिए किसी शानदार अनुभव से कम नहीं। इसके अलावा , अगर मौसम अनुकूल रहता है, तो आप बेतवा में राफ्टिंग का भी आनंद ले सकते हैं । चार.खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल, जो पूरे विश्व में अपने प्राचीन धरोहरों और मध्य-कालीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो मंदिर मूल रूप से हिंदू और जैन मंदिरों का एक संग्रह है, जिनका निर्माण नौ सौ पचास ईस्वी और एक हज़ार पचास ईस्वी के मध्य चंदेल वंश द्वारा करवाया गया था। इन पौराणिक मंदिरों की भव्यता और अद्भुत शिल्प कौशल हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। सन एक हज़ार नौ सौ छियासी में यूनेस्को द्वारा इन मंदिरों को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में स्थान दिया गया है, जो इसके महत्व को दर्शाता है। इसके साथ हीं विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह भी पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। विंध्य पर्वत श्रृंखला पर स्थित खजुराहो, मानसून के दौरान और भी हरा-भरा हो जाता है, जो देखने में बेहद खूबसूरत और मनमोहक लगता है। इसके अतिरिक्त खजुराहो से लगभग बाईस किमी दूर प्राकृतिक सुंदरता का आनद लेने आप रानेह फॉल्स भी जा सकते हैं । पाँच.अमरकंटक भोपाल से लगभग दूरी पाँच सौ पचास किमी और जबलपुर से लगभग दो सौ पचास किमी दुरी पर स्थित अमरकंटक मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है । भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक नर्मदा के अलावा सोन और जोहिला यहाँ से निकलती है। यदि आप प्रकृति को निहारना पसंद करते है, तो मानसून के दौरान अमरकंटक से कुछ दूरी पर स्थित कई खूबसूरत स्थल आपको जरूर देखने चाहिए, जैसे नर्मदा उद्गम मंदिर नर्मदा कुंड, सोनमुड़ा , दुग्धधारा जल प्रपात और कपिलधारा जल प्रपात जो अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य से घिरे हुए हैं। अमरकंटक की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और आध्यात्मिक तरंगें आपके दिल को खुशी और सकारात्मकता से भर देगी। अगर आप अभी भी इस मौसम से बाहर निकलने के मूड में नहीं हैं तो चिंता ना करें एमपीटी हॉलिडे होम्स में शानदार नाश्ते व गरमा गरम चाय, कॉफी के साथ आप अपने कमरे की खिड़कियों से खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।
Heybike ने Tyson फोल्डिंग ई-बाइक घोषित की है, जो मैग्नीशियम मेटल के केवल एक टुकड़े से बनी है। इस इलेक्ट्रिक बाइक को CES 2023 में भी दिखाया जाना है, लेकिन कंपनी ने इस बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट से पहले ही ई-बाइक को घोषित कर दिया है। यह एक फुल-सस्पेंशन फोल्डेबल बाइक है। कंपनी के पोर्टफोलियो में यह पहली ई-बाइक नहीं है। Heybike के पास पहले से कई इलेक्ट्रिक बाइक हैं, जो इसी तरह टिकाऊ होने का दावा करती हैं और साथ ही दमदार स्पेसिफिकेशन्स से लैस आती हैं। , Heybike ने Tyson फोल्डिंग ई-बाइक की कीमत का खुलासा नहीं किया है और न ही इसके सभी स्पेसिफिकेशन्स से पर्दा उठाया गया है। हम ये सभी जानकारियों के CES 2023 में सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। Heybike Tyson ई-बाइक के लिए दावा किया गया है कि यह टिकाऊ है और साथ ही बेहद हल्की भी है। इसकी लोड कैपेसिटी भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें मैग्नीशियम मेटल का भारी इस्तेमाल किया गया है। टायसन ई-बाइक में पीछे लगे रैक में 55 किग्रा तक का भार रखा जा सकता है। स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो इसमें फ्रंट हाइड्रोलिक सस्पेंशन फोर्क है, साथ ही रियर सस्पेंशन सिस्टम भी है। बाइक में 4-इंच मोटे टायर्स हैं। इसमें हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक भी शामिल किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, हेबाइक टायसन ई-बाइक में मौजूद इलेक्ट्रिक मोटर 750W क्षमता की है। इसमें 48V 15Ah बैटरी पैक मिलता है, जो कंपनी के दावे अनुसार, लगभग 88 km की असिस्टेड रेंज देने में सक्षम है। बाइक का वजन लगभग 35 किग्रा है। इसमें 7-स्पीड गियर क्लस्टर दिया गया है। टॉप स्पीड की जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है।
Heybike ने Tyson फोल्डिंग ई-बाइक घोषित की है, जो मैग्नीशियम मेटल के केवल एक टुकड़े से बनी है। इस इलेक्ट्रिक बाइक को CES दो हज़ार तेईस में भी दिखाया जाना है, लेकिन कंपनी ने इस बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट से पहले ही ई-बाइक को घोषित कर दिया है। यह एक फुल-सस्पेंशन फोल्डेबल बाइक है। कंपनी के पोर्टफोलियो में यह पहली ई-बाइक नहीं है। Heybike के पास पहले से कई इलेक्ट्रिक बाइक हैं, जो इसी तरह टिकाऊ होने का दावा करती हैं और साथ ही दमदार स्पेसिफिकेशन्स से लैस आती हैं। , Heybike ने Tyson फोल्डिंग ई-बाइक की कीमत का खुलासा नहीं किया है और न ही इसके सभी स्पेसिफिकेशन्स से पर्दा उठाया गया है। हम ये सभी जानकारियों के CES दो हज़ार तेईस में सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। Heybike Tyson ई-बाइक के लिए दावा किया गया है कि यह टिकाऊ है और साथ ही बेहद हल्की भी है। इसकी लोड कैपेसिटी भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें मैग्नीशियम मेटल का भारी इस्तेमाल किया गया है। टायसन ई-बाइक में पीछे लगे रैक में पचपन किग्रा तक का भार रखा जा सकता है। स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो इसमें फ्रंट हाइड्रोलिक सस्पेंशन फोर्क है, साथ ही रियर सस्पेंशन सिस्टम भी है। बाइक में चार-इंच मोटे टायर्स हैं। इसमें हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक भी शामिल किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, हेबाइक टायसन ई-बाइक में मौजूद इलेक्ट्रिक मोटर सात सौ पचास वाट क्षमता की है। इसमें अड़तालीस वोल्ट पंद्रहAh बैटरी पैक मिलता है, जो कंपनी के दावे अनुसार, लगभग अठासी किलोमीटर की असिस्टेड रेंज देने में सक्षम है। बाइक का वजन लगभग पैंतीस किग्रा है। इसमें सात-स्पीड गियर क्लस्टर दिया गया है। टॉप स्पीड की जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है।
अभिषेक बच्चन ने ट्वीट किया, "आप सभी की लगातार दुआओं और शुभकामनाओं का शुक्रिया. मैं हमेशा इसका ऋणी रहूंगा। ऐश्वर्या और आराध्या कोरोना निगेटिव हो चुके हैं और अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। वे अब घर पर ही रहेंगे. मेरे पिता और मैं, मेडिकल स्टाफ की निगरानी में अस्पताल में ही रहेंगे। " अमित साध और अभिषेक बच्चन ने हाल ही में एक वेब सीरीज में साथ काम किया था। ऐसे में अमित साध का भी कोविड-19 टेस्ट हुआ जिसकी रिपोर्ट अब सामने आ चुकी है।
अभिषेक बच्चन ने ट्वीट किया, "आप सभी की लगातार दुआओं और शुभकामनाओं का शुक्रिया. मैं हमेशा इसका ऋणी रहूंगा। ऐश्वर्या और आराध्या कोरोना निगेटिव हो चुके हैं और अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। वे अब घर पर ही रहेंगे. मेरे पिता और मैं, मेडिकल स्टाफ की निगरानी में अस्पताल में ही रहेंगे। " अमित साध और अभिषेक बच्चन ने हाल ही में एक वेब सीरीज में साथ काम किया था। ऐसे में अमित साध का भी कोविड-उन्नीस टेस्ट हुआ जिसकी रिपोर्ट अब सामने आ चुकी है।
यूएनएचआरसी से रूस को निलंबित करने के लिए मसौदा प्रस्ताव पर 93 देशों ने इसके समर्थन में वोट किया। जबकि 24 देशों ने इसके खिलाफ और भारत सहित 58 देश इस वोटिंग से दूर रहे। न्यूयॉर्कः संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग (UNHRC) से रूस को सस्पेंड कर दिया गया है। गुरुवार को इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में वोटिंग हुई, दरअसल, यूक्रेन में रूसी सेना के द्वारा कथित नरसंहार, अमानवीय व्यवहार को लेकर यूएनएचआरसी से रूस को निलंबित करने के लिए मसौदा प्रस्ताव लाया गया था। जिसमें 93 देशों ने इसके समर्थन में वोट किया। जबकि 24 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया। वहीं भारत समेत 58 देश इस वोटिंग से दूर रहे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, टीएस तिरुमूर्ति ने कहा मानवाधिकारों की घोषणा के मसौदे से लेकर मानवाधिकारों की रक्षा करने में भारत आगे रहा है। हम मानते हैं कि सभी निर्णय उचित प्रक्रिया का सम्मान करते हुए और लोकतांत्रिक संरचना के रूप में लिए जाने चाहिए। यह अंतर्राष्ट्रीय संगठनों विशेष रूप से UN पर भी लागू होता है। बता दें कि यूक्रेन के बूचा में रूसी सेना द्वारा कथित नरसंहार को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चर्चा हुई थी। इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आक्रमणकारी देश रूस पर गंभीर आरोप लगाए थे। जेलेंस्की ने कहा, नागरिकों को टैंकों से कुचल दिया गया, महिलाओं का उनके बच्चों के सामने बलात्कार किया और उन्हें मार डाला गया। बूचा में रूसी सेना ने जो किया वह क्रूरता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सचमुच उल्लंघन किया गया है। कहा जा रहा है कि बूचा सहित अन्य यूक्रेनी शहरों में रूस के सैनिकों ने आम नागरिकों को भी मारा था और उनके साथ अमानवीय कृत्यों को अजाम दिया था, जिसकी चौतरफा निंदा हो रही है। ईयू ने भी बूचा में हुई घटना की निंदा की थी। हालांकि रूस इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है।
यूएनएचआरसी से रूस को निलंबित करने के लिए मसौदा प्रस्ताव पर तिरानवे देशों ने इसके समर्थन में वोट किया। जबकि चौबीस देशों ने इसके खिलाफ और भारत सहित अट्ठावन देश इस वोटिंग से दूर रहे। न्यूयॉर्कः संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग से रूस को सस्पेंड कर दिया गया है। गुरुवार को इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में वोटिंग हुई, दरअसल, यूक्रेन में रूसी सेना के द्वारा कथित नरसंहार, अमानवीय व्यवहार को लेकर यूएनएचआरसी से रूस को निलंबित करने के लिए मसौदा प्रस्ताव लाया गया था। जिसमें तिरानवे देशों ने इसके समर्थन में वोट किया। जबकि चौबीस देशों ने इसके खिलाफ वोट किया। वहीं भारत समेत अट्ठावन देश इस वोटिंग से दूर रहे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, टीएस तिरुमूर्ति ने कहा मानवाधिकारों की घोषणा के मसौदे से लेकर मानवाधिकारों की रक्षा करने में भारत आगे रहा है। हम मानते हैं कि सभी निर्णय उचित प्रक्रिया का सम्मान करते हुए और लोकतांत्रिक संरचना के रूप में लिए जाने चाहिए। यह अंतर्राष्ट्रीय संगठनों विशेष रूप से UN पर भी लागू होता है। बता दें कि यूक्रेन के बूचा में रूसी सेना द्वारा कथित नरसंहार को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चर्चा हुई थी। इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आक्रमणकारी देश रूस पर गंभीर आरोप लगाए थे। जेलेंस्की ने कहा, नागरिकों को टैंकों से कुचल दिया गया, महिलाओं का उनके बच्चों के सामने बलात्कार किया और उन्हें मार डाला गया। बूचा में रूसी सेना ने जो किया वह क्रूरता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सचमुच उल्लंघन किया गया है। कहा जा रहा है कि बूचा सहित अन्य यूक्रेनी शहरों में रूस के सैनिकों ने आम नागरिकों को भी मारा था और उनके साथ अमानवीय कृत्यों को अजाम दिया था, जिसकी चौतरफा निंदा हो रही है। ईयू ने भी बूचा में हुई घटना की निंदा की थी। हालांकि रूस इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है।
५६० । भारतीय रगमच का विवेचनात्मक इतिहाम अवगत कराया जाय, जो रगमच के वास्तविक सरक्षक हैं। रग-आन्दोलन को झोपड़ी के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिये समय-समय पर सम्मेलनो, विचार गोष्ठियो (सेमिनार्स) या परिचर्चाओ (सिम्पोजियम्स) की आवश्यकता है । इन सम्मेलनो, विचार-गोष्ठियो आदि का महत्त्व सामाजिको के शिक्षण अथवा लोकमत के जागरण तक ही सीमित नहीं है, वरन् विभिन्न प्रदेशो अथवा देशो की अभिनय-पद्धति, नाट्य-विषयक विचारों एवं मच के शिल्पिक ज्ञान के आदान-प्रदान में भी इनसे प्रोत्साहन मिलता है। इनसे एक-दूसरे को कुछ सिखाने और दूसरो से कुछ सीखने का अवसर मिलता है और प्रादेशिक या आचलिक कूपमहूकता दूर होती है। इससे रंगमंच के त्रिदेवोनाटककार, उपस्थापक एव अभिनेता, तीनो को पारस्परिक लेन-देन से लाभ होता है और उन्हें अपनी-अपनी दुर्बलताओ को दूर करने का अवसर प्राप्त होना है। वे पुन शक्ति बढोर वर और तीव्र गति से प्रगति पथ पर अग्रसर हो चलते हैं। संगीत नाटक अकादमी के कार्य-कलापों मे विविध प्रदेशों के नृत्य, नाटक एवं संगीत विषयक विचारों के आदान-प्रदान की व्यवस्था है। अप्रैल, १९६१ मे भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों का सास्कृतिक सम्मेलन नई दिल्ली में हुआ था, जिसमे नृत्य, नाटक और संगीत के क्षेत्र मे विगत कुछ वर्षो मे हुई प्रगति पर विचार किया गया था। भारतीय रगमच और नाटको पर विचार के समय नटराज पृथ्वीराज कपूर ने यह मत व्यक्त किया कि 'हमे सदैव पश्चिम से ही उधार नही लेना चाहिये । हम नाटको के क्षेत्र मे भी दूसरो को बहुत कुछ दे सकते हैं ।' पश्चिमी रगमन के अत्यधिक मशीनीकरण के विरुद्ध भारत को यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इन्ही दिनों दिल्ली के भारतीय नाट्य सघ द्वारा ३१ मार्च मे २ अप्रैल, १९६१ तक एक त्रिदिवसीम विचार गोष्ठी आयोजित की गई थी, जिसमे समसामयिक नाट्य-लेखन तथा नाटकोपस्थापन के दो महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया गया था। गोष्ठी के कुछ निष्कर्ष या अनुदासाएँ अत्यन्त विचारोत्तेजक हैं। नाटककार ओर उपस्थापक के सम्बन्धो के प्रसंग में यह मत व्यक्त किया गया कि दोनों को एक-दूसरे के मूल तत्त्वो का अध्ययन करना चाहिये और यह अनुशसा की कि प्रत्येक नाट्य-दल मे कुछ सदस्य-नाटककार होने चाहिये, जो दल को आवश्यकताओं और परिसीमाओ, उपस्थापन की व्यावहारिक समस्याओ और रगमच की प्रकृति को समझ कर नाटक लिखें । रगमच के विकास मे मूळ संस्कृत नाटको और उनके रूपातरी के उपस्थापन के महत्त्व को स्वीकार करते हुए यह मत व्यक्त किया गया कि संस्कृत रगमच को परपरा और शिल्प से आधुनिक नाटककार एव उपस्थापक बडी स्फूति ग्रहण कर सकते हैं । इसके विपरीत अभिव्यजना के नये मार्गों की खोज में पश्चिम की शैली और शिल्प के अधानुकरण के खतरों के प्रति सचेत करते हुए यह अनुशंसा की गई कि पश्चिमी नाटको और उनके उपस्थापनो के मूल्य और स्तर का विवेकपूर्ण मूल्याकन इस दृष्टि से किया जाना चाहिये कि भारतीय रगमच के विविध रूपों के साथ उसका कहाँ तक सामजस् है और हमारे जीवन और युग की व्याख्या इन नये मार्गो एवं शैलियों के द्वारा कहाँ तक की जा सकती है। उत्तम नाटको के अभाव के प्रश्न पर मतैक्य व्यक्त करते हुए गोष्ठी ने यह अनुशंसा की कि प्रत्येक भाषा के सर्वश्रेष्ठ नाटको को चुन कर राजकीय सहायता से उनका प्रकाशन किया जाय। गोष्ठी ने सबसे अन्त मे रगमच के साथ नाटककार के योग की आवश्यकता को स्वीकार कर उसे प्रोत्साहन देने के लिये सभी मडलियो एवं नाट्य संस्थाओ से यह आग्रह किया कि वे कापीराइट कानून का सम्मान कर प्रत्येक उपस्थापित नाटक का शुल्क और रायल्टी लेखक को दें, उसके नाम का प्रचार करें और अपने नाटको के उपस्थापन में उसका सक्रिय सहयोग प्राप्त करें ये निष्कर्ष और अनुशसाएँ नाटक और रगमच के विकास के लिये अत्यत्त महत्त्वपूर्ण हैं । भारतीय रंगमंच : समस्याए, अनुप्रेरणाएं और भविष्य । ५६१ इस प्रकार की विचार गोष्ठियों के आयोजन कानपुर, कलकत्ता और प्रयाग मे सन् १९६२ मे १९६६ के बीच हो चुके हैं, जिनमे लोक मन्च, अव्यावसायिक रगमच को समस्याओं एवं कठिनाइयों, नाटक और रंगमंच की परम्परा और प्रयोग, नाटककार और परिचालक की समस्याओं, प्रेक्षक और समीक्षक के प्रश्नों पर विचार-विनिमय हुआ। इस प्रकार को गोष्ठियो का स्तर यद्यपि सर्वत्र बहुत ऊँचा नहीं था, तथापि हिन्दी रंगमंच से सम्बन्धित अनेक ज्वलंत प्रश्नो और उनके विविध पक्षो पर कुछ विचार मामने आये। रंगकर्मियों एवं नाट्य मनीषियो को एक साथ बैठ कर अपनी समस्याओ, अपनी सीमाओं और उपलब्धियो का लेखा-जोखा लेने का एक सुअवसर मिला, जो रंगमच के नवोत्थान की माग की पूर्ति के लिए आवश्यक है । भारतीय नाट्य सघ, दिल्ली ने अभिनय, स्वर-साधना आदि के सोदाहरण प्रदर्शन के लिए एक वार्तामाला का सितम्बर, १९६१ मे आयोजन किया था। वार्ताकारों ने अपने विषय को स्पष्ट करने के लिए अभिनय, स्वर का आरोह-अवरोह, कार्य व्यापार आदि का प्रदर्शन भी साथ मे किया।" इस वार्तामाला की अन्तिम वार्ता थी'नृत्यनाटिकाओ का संगीत और गायक का स्वर ।' यह वार्ता श्रीमती शन्नो खुराना ने दी थी। उन्होंने बताया कि स्वर का माधुर्य और विभिन्न भावो को साकार करने की क्षमता अपने मे एक विशेषता है। उन्होने वार्ता के अन्त में 'हीर-राँझा' की नायिका हीर का अभिनय प्रस्तुत कर अपनी स्वर-साधना का परिचय भी दिया। इस प्रकार के सांस्कृतिक सम्मेलन, गोष्ठियाँ वार्ताएँ आदि दिल्ली में प्रायः हुआ करती हैं, परन्तु आवश्यकता इस बात की है कि अन्यत्र भी इनके आयोजन हों, जिससे रंगमच के प्रति सामाजिको और सम्बन्धित त्रिमूर्ति की चेतना प्रबुद्ध हो । (च) रंगशालाओं को शृखला बीसवी दाती के चौथे दशक में बोलपट के आविर्भाव और विकास ने इस तीव्रता और व्यापकता के साथ जन-मानस को आच्छादित किया कि अधिकाश परम्परागत पारसी- गुजराती, पारसीहिन्दी, बगला और मराठी रंगशालाएँ छविगृहों में परिणत हो गयी, किन्तु बोलपट की इस चुनौती को स्वीकार कर बंगला और गुजराती को कुछ रंगशालाएँ सिर ऊँचा किये हुये खड़ी रही। कलकत्ता के स्टार, मिनर्वा, रंगमहल और विश्वरूपा तथा बंबई का भांगवाडी थियेटर (जहाँ देशी नाटक समाज अवस्थित है) आज भी अपनी विजयवैजयन्ती ऊँची फहरा रहे हैं । मिनर्वा के समतल रगमच पर 'अगार' मे कोयले की सान मे विस्फोट और जलप्लावन तथा 'कल्लोल' (१९६५ ई०) मे युद्धपोत की 'कैबिन' और 'डेक' तथा युद्ध के दृश्य बड़ी सफलता के साथ दिखाये जा चुके हैं। विश्वरूपा के 'सेतू' नाटक में एक पूरी ट्रेन का गुजरना प्रदर्शित किया गया था। पारसीहिन्दी रंगम के अलौकिक चमत्कारो की fatar का स्थान अब वैज्ञानिक रंगोपकरणो को सहायता से आधुनिक रगमच के लौकिक चमत्कारों की बुद्धिग्राह्यता एवं तार्किक औचित्य ने ले लिया है। सामाजिक चलचिनो के चमत्कारपूर्ण यथार्थ को रगमच पर देखना चाहता है और उसकी इसी माग की पूर्ति कर आधुनिक रंगमच ने बगाल मे असाधारण लोकप्रियता प्राप्त कर ली है। वहाँ सभी पुराने गालय व्यावसायिक सफलता का वरण कर यह सिद्ध कर चुके हैं कि आज भी रंगशालाओं को व्यावसायिक आधार पर सफलता के साथ चलाया जा सकता है । गुजराती और हिन्दी में भी व्यावसायिक रंगालय क्रमा. बम्बई और कलकत्ते मे आठवे दशक के अन्त तक चलते रहे हैं। गुजराती के देशी नाटक समाज के उपस्थापनो मे आधुनिकता का प्रवेश तो हुआ है, किन्तु आज भी उसकी अभिनय-शैली पाँच दशक पुरानी है । हिन्दी मे मूनलाइट थियेटर के मच पर 'काश्मीर हमारा है' ( १९६५ ई०) मे फिल्म की सहायता से नायक के पैराशूट से उतरने के बाद काश्मीर युद्धक्षेत्र का मंचीय दृश्यबंध बड़े सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया था। शिल्प को दृष्टि से हिन्दी का व्यावसायिक रंगमच बॅगला रगमंच की
पाँच सौ साठ । भारतीय रगमच का विवेचनात्मक इतिहाम अवगत कराया जाय, जो रगमच के वास्तविक सरक्षक हैं। रग-आन्दोलन को झोपड़ी के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिये समय-समय पर सम्मेलनो, विचार गोष्ठियो या परिचर्चाओ की आवश्यकता है । इन सम्मेलनो, विचार-गोष्ठियो आदि का महत्त्व सामाजिको के शिक्षण अथवा लोकमत के जागरण तक ही सीमित नहीं है, वरन् विभिन्न प्रदेशो अथवा देशो की अभिनय-पद्धति, नाट्य-विषयक विचारों एवं मच के शिल्पिक ज्ञान के आदान-प्रदान में भी इनसे प्रोत्साहन मिलता है। इनसे एक-दूसरे को कुछ सिखाने और दूसरो से कुछ सीखने का अवसर मिलता है और प्रादेशिक या आचलिक कूपमहूकता दूर होती है। इससे रंगमंच के त्रिदेवोनाटककार, उपस्थापक एव अभिनेता, तीनो को पारस्परिक लेन-देन से लाभ होता है और उन्हें अपनी-अपनी दुर्बलताओ को दूर करने का अवसर प्राप्त होना है। वे पुन शक्ति बढोर वर और तीव्र गति से प्रगति पथ पर अग्रसर हो चलते हैं। संगीत नाटक अकादमी के कार्य-कलापों मे विविध प्रदेशों के नृत्य, नाटक एवं संगीत विषयक विचारों के आदान-प्रदान की व्यवस्था है। अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ इकसठ मे भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों का सास्कृतिक सम्मेलन नई दिल्ली में हुआ था, जिसमे नृत्य, नाटक और संगीत के क्षेत्र मे विगत कुछ वर्षो मे हुई प्रगति पर विचार किया गया था। भारतीय रगमच और नाटको पर विचार के समय नटराज पृथ्वीराज कपूर ने यह मत व्यक्त किया कि 'हमे सदैव पश्चिम से ही उधार नही लेना चाहिये । हम नाटको के क्षेत्र मे भी दूसरो को बहुत कुछ दे सकते हैं ।' पश्चिमी रगमन के अत्यधिक मशीनीकरण के विरुद्ध भारत को यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इन्ही दिनों दिल्ली के भारतीय नाट्य सघ द्वारा इकतीस मार्च मे दो अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ इकसठ तक एक त्रिदिवसीम विचार गोष्ठी आयोजित की गई थी, जिसमे समसामयिक नाट्य-लेखन तथा नाटकोपस्थापन के दो महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया गया था। गोष्ठी के कुछ निष्कर्ष या अनुदासाएँ अत्यन्त विचारोत्तेजक हैं। नाटककार ओर उपस्थापक के सम्बन्धो के प्रसंग में यह मत व्यक्त किया गया कि दोनों को एक-दूसरे के मूल तत्त्वो का अध्ययन करना चाहिये और यह अनुशसा की कि प्रत्येक नाट्य-दल मे कुछ सदस्य-नाटककार होने चाहिये, जो दल को आवश्यकताओं और परिसीमाओ, उपस्थापन की व्यावहारिक समस्याओ और रगमच की प्रकृति को समझ कर नाटक लिखें । रगमच के विकास मे मूळ संस्कृत नाटको और उनके रूपातरी के उपस्थापन के महत्त्व को स्वीकार करते हुए यह मत व्यक्त किया गया कि संस्कृत रगमच को परपरा और शिल्प से आधुनिक नाटककार एव उपस्थापक बडी स्फूति ग्रहण कर सकते हैं । इसके विपरीत अभिव्यजना के नये मार्गों की खोज में पश्चिम की शैली और शिल्प के अधानुकरण के खतरों के प्रति सचेत करते हुए यह अनुशंसा की गई कि पश्चिमी नाटको और उनके उपस्थापनो के मूल्य और स्तर का विवेकपूर्ण मूल्याकन इस दृष्टि से किया जाना चाहिये कि भारतीय रगमच के विविध रूपों के साथ उसका कहाँ तक सामजस् है और हमारे जीवन और युग की व्याख्या इन नये मार्गो एवं शैलियों के द्वारा कहाँ तक की जा सकती है। उत्तम नाटको के अभाव के प्रश्न पर मतैक्य व्यक्त करते हुए गोष्ठी ने यह अनुशंसा की कि प्रत्येक भाषा के सर्वश्रेष्ठ नाटको को चुन कर राजकीय सहायता से उनका प्रकाशन किया जाय। गोष्ठी ने सबसे अन्त मे रगमच के साथ नाटककार के योग की आवश्यकता को स्वीकार कर उसे प्रोत्साहन देने के लिये सभी मडलियो एवं नाट्य संस्थाओ से यह आग्रह किया कि वे कापीराइट कानून का सम्मान कर प्रत्येक उपस्थापित नाटक का शुल्क और रायल्टी लेखक को दें, उसके नाम का प्रचार करें और अपने नाटको के उपस्थापन में उसका सक्रिय सहयोग प्राप्त करें ये निष्कर्ष और अनुशसाएँ नाटक और रगमच के विकास के लिये अत्यत्त महत्त्वपूर्ण हैं । भारतीय रंगमंच : समस्याए, अनुप्रेरणाएं और भविष्य । पाँच सौ इकसठ इस प्रकार की विचार गोष्ठियों के आयोजन कानपुर, कलकत्ता और प्रयाग मे सन् एक हज़ार नौ सौ बासठ मे एक हज़ार नौ सौ छयासठ के बीच हो चुके हैं, जिनमे लोक मन्च, अव्यावसायिक रगमच को समस्याओं एवं कठिनाइयों, नाटक और रंगमंच की परम्परा और प्रयोग, नाटककार और परिचालक की समस्याओं, प्रेक्षक और समीक्षक के प्रश्नों पर विचार-विनिमय हुआ। इस प्रकार को गोष्ठियो का स्तर यद्यपि सर्वत्र बहुत ऊँचा नहीं था, तथापि हिन्दी रंगमंच से सम्बन्धित अनेक ज्वलंत प्रश्नो और उनके विविध पक्षो पर कुछ विचार मामने आये। रंगकर्मियों एवं नाट्य मनीषियो को एक साथ बैठ कर अपनी समस्याओ, अपनी सीमाओं और उपलब्धियो का लेखा-जोखा लेने का एक सुअवसर मिला, जो रंगमच के नवोत्थान की माग की पूर्ति के लिए आवश्यक है । भारतीय नाट्य सघ, दिल्ली ने अभिनय, स्वर-साधना आदि के सोदाहरण प्रदर्शन के लिए एक वार्तामाला का सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ इकसठ मे आयोजन किया था। वार्ताकारों ने अपने विषय को स्पष्ट करने के लिए अभिनय, स्वर का आरोह-अवरोह, कार्य व्यापार आदि का प्रदर्शन भी साथ मे किया।" इस वार्तामाला की अन्तिम वार्ता थी'नृत्यनाटिकाओ का संगीत और गायक का स्वर ।' यह वार्ता श्रीमती शन्नो खुराना ने दी थी। उन्होंने बताया कि स्वर का माधुर्य और विभिन्न भावो को साकार करने की क्षमता अपने मे एक विशेषता है। उन्होने वार्ता के अन्त में 'हीर-राँझा' की नायिका हीर का अभिनय प्रस्तुत कर अपनी स्वर-साधना का परिचय भी दिया। इस प्रकार के सांस्कृतिक सम्मेलन, गोष्ठियाँ वार्ताएँ आदि दिल्ली में प्रायः हुआ करती हैं, परन्तु आवश्यकता इस बात की है कि अन्यत्र भी इनके आयोजन हों, जिससे रंगमच के प्रति सामाजिको और सम्बन्धित त्रिमूर्ति की चेतना प्रबुद्ध हो । रंगशालाओं को शृखला बीसवी दाती के चौथे दशक में बोलपट के आविर्भाव और विकास ने इस तीव्रता और व्यापकता के साथ जन-मानस को आच्छादित किया कि अधिकाश परम्परागत पारसी- गुजराती, पारसीहिन्दी, बगला और मराठी रंगशालाएँ छविगृहों में परिणत हो गयी, किन्तु बोलपट की इस चुनौती को स्वीकार कर बंगला और गुजराती को कुछ रंगशालाएँ सिर ऊँचा किये हुये खड़ी रही। कलकत्ता के स्टार, मिनर्वा, रंगमहल और विश्वरूपा तथा बंबई का भांगवाडी थियेटर आज भी अपनी विजयवैजयन्ती ऊँची फहरा रहे हैं । मिनर्वा के समतल रगमच पर 'अगार' मे कोयले की सान मे विस्फोट और जलप्लावन तथा 'कल्लोल' मे युद्धपोत की 'कैबिन' और 'डेक' तथा युद्ध के दृश्य बड़ी सफलता के साथ दिखाये जा चुके हैं। विश्वरूपा के 'सेतू' नाटक में एक पूरी ट्रेन का गुजरना प्रदर्शित किया गया था। पारसीहिन्दी रंगम के अलौकिक चमत्कारो की fatar का स्थान अब वैज्ञानिक रंगोपकरणो को सहायता से आधुनिक रगमच के लौकिक चमत्कारों की बुद्धिग्राह्यता एवं तार्किक औचित्य ने ले लिया है। सामाजिक चलचिनो के चमत्कारपूर्ण यथार्थ को रगमच पर देखना चाहता है और उसकी इसी माग की पूर्ति कर आधुनिक रंगमच ने बगाल मे असाधारण लोकप्रियता प्राप्त कर ली है। वहाँ सभी पुराने गालय व्यावसायिक सफलता का वरण कर यह सिद्ध कर चुके हैं कि आज भी रंगशालाओं को व्यावसायिक आधार पर सफलता के साथ चलाया जा सकता है । गुजराती और हिन्दी में भी व्यावसायिक रंगालय क्रमा. बम्बई और कलकत्ते मे आठवे दशक के अन्त तक चलते रहे हैं। गुजराती के देशी नाटक समाज के उपस्थापनो मे आधुनिकता का प्रवेश तो हुआ है, किन्तु आज भी उसकी अभिनय-शैली पाँच दशक पुरानी है । हिन्दी मे मूनलाइट थियेटर के मच पर 'काश्मीर हमारा है' मे फिल्म की सहायता से नायक के पैराशूट से उतरने के बाद काश्मीर युद्धक्षेत्र का मंचीय दृश्यबंध बड़े सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया था। शिल्प को दृष्टि से हिन्दी का व्यावसायिक रंगमच बॅगला रगमंच की
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ 'मन की बात' करते हैं, देश की नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के एक बीजेपी विधायक ने महिला के साथ दुष्कर्म किया, लेकिन पीएम मोदी ने एक शब्द भी नहीं कहा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेंगलुरु में समृद्ध भारत फाउंडेशन के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान लोगों से बात करते हुए उन्होंने अमति शाह और येदियुरप्पा पर बयान दिया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने लोगों से कई मद्दों पर बातचीत की। इससे पहले चिक्काबल्लापुर में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ 'मन की बात' करते हैं, देश की नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी विधायक ने महिला के साथ दुष्कर्म किया, लेकिन पीएम मोदी ने इस पर एक शब्द नहीं कहा। कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और नतीजे 15 मई को आएंगे। इस चुनाव में कांग्रेस की ओर से मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही सीएम उम्मीदवार हैं। वहीं बीजेपी की ओर से बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ 'मन की बात' करते हैं, देश की नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के एक बीजेपी विधायक ने महिला के साथ दुष्कर्म किया, लेकिन पीएम मोदी ने एक शब्द भी नहीं कहा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेंगलुरु में समृद्ध भारत फाउंडेशन के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान लोगों से बात करते हुए उन्होंने अमति शाह और येदियुरप्पा पर बयान दिया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने लोगों से कई मद्दों पर बातचीत की। इससे पहले चिक्काबल्लापुर में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ 'मन की बात' करते हैं, देश की नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी विधायक ने महिला के साथ दुष्कर्म किया, लेकिन पीएम मोदी ने इस पर एक शब्द नहीं कहा। कर्नाटक में बारह मई को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और नतीजे पंद्रह मई को आएंगे। इस चुनाव में कांग्रेस की ओर से मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही सीएम उम्मीदवार हैं। वहीं बीजेपी की ओर से बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
इस कंपनी का केवल एक शेयर आपको करोड़पति बना देगा. एक शेयर की जितनी कीमत है, एक आम आदमी पूरी जिंदगी में उतनी कमाई नहीं कर पाता है. इस कंपनी के एक शेयर से जिंदगी आर्थिक तौर बेहतरीन हो सकती है. यहां बात हो रही है दुनिया के सबसे महंगे शेयर की. दुनिया में सबसे महंगे स्टॉक बर्कशायर हैथवे इंक (Berkshire Hathaway Inc. ) का है. इस कंपनी के एक शेयर की कीमत फिलहाल करीब 3. 33 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस एक शेयर में आप घर, गाड़ी, नौकर-चाकर, बैंक बैलेंस और ऐशो आराम की सभी चीजें जुटा सकते हैं. इस शेयर को खरीदना तो आम आदमी केवल सपना रहता है. अब आइए आपको बताते हैं कि इस बर्कशायर हैथवे इंक कंपनी का प्रमुख कौन हैं? वॉरेन बफेट (warren buffett) आज की तारीख में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. दुनिया के सबसे महंगे शेयर वाली कंपनी Berkshire Hathaway Inc. के प्रमुख वॉरेन बफेट ही हैं. Berkshire Hathaway Inc. का शेयर फिलहाल 4,17,250 डॉलर (यानी 3,33,43,907 रुपये) का है. इसी साल 20 अप्रैल को यह शेयर 523550 डॉलर (यानी 4,00,19,376 रुपये) का था. यानी पिछले तीन महीने में ये शेयर करीब 20 फीसदी गिर चुका है. गौरतलब है कि दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट को दुनियाभर में लोग फॉलो करते हैं. कहा जाता है कि जिस कंपनी में वॉरेन बफेट निवेश करते हैं, उसके दिन बदल जाते हैं. फोर्ब्स के मुताबिक बर्कशायर हैथवे में वॉरेन बफेट की 16 फीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी का सबसे ज्यादा कारोबार अमेरिका में है. कंपनी में करीब 3,72,000 कर्मचारी काम करते हैं. Berkshire Hathaway Inc. अमेरिका के अलावा चीन में विस्तार की योजना बना रही है. वॉरेन बफेट ने जब 1965 में इस टेक्सटाइन कंपनी का कमान संभाली थी, तब इसके एक शेयर की कीमत 20 डॉलर से भी कम थी.
इस कंपनी का केवल एक शेयर आपको करोड़पति बना देगा. एक शेयर की जितनी कीमत है, एक आम आदमी पूरी जिंदगी में उतनी कमाई नहीं कर पाता है. इस कंपनी के एक शेयर से जिंदगी आर्थिक तौर बेहतरीन हो सकती है. यहां बात हो रही है दुनिया के सबसे महंगे शेयर की. दुनिया में सबसे महंगे स्टॉक बर्कशायर हैथवे इंक का है. इस कंपनी के एक शेयर की कीमत फिलहाल करीब तीन. तैंतीस करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस एक शेयर में आप घर, गाड़ी, नौकर-चाकर, बैंक बैलेंस और ऐशो आराम की सभी चीजें जुटा सकते हैं. इस शेयर को खरीदना तो आम आदमी केवल सपना रहता है. अब आइए आपको बताते हैं कि इस बर्कशायर हैथवे इंक कंपनी का प्रमुख कौन हैं? वॉरेन बफेट आज की तारीख में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. दुनिया के सबसे महंगे शेयर वाली कंपनी Berkshire Hathaway Inc. के प्रमुख वॉरेन बफेट ही हैं. Berkshire Hathaway Inc. का शेयर फिलहाल चार,सत्रह,दो सौ पचास डॉलर का है. इसी साल बीस अप्रैल को यह शेयर पाँच लाख तेईस हज़ार पाँच सौ पचास डॉलर का था. यानी पिछले तीन महीने में ये शेयर करीब बीस फीसदी गिर चुका है. गौरतलब है कि दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट को दुनियाभर में लोग फॉलो करते हैं. कहा जाता है कि जिस कंपनी में वॉरेन बफेट निवेश करते हैं, उसके दिन बदल जाते हैं. फोर्ब्स के मुताबिक बर्कशायर हैथवे में वॉरेन बफेट की सोलह फीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी का सबसे ज्यादा कारोबार अमेरिका में है. कंपनी में करीब तीन,बहत्तर,शून्य कर्मचारी काम करते हैं. Berkshire Hathaway Inc. अमेरिका के अलावा चीन में विस्तार की योजना बना रही है. वॉरेन बफेट ने जब एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में इस टेक्सटाइन कंपनी का कमान संभाली थी, तब इसके एक शेयर की कीमत बीस डॉलर से भी कम थी.
राजत अमीके मद छाके काल कूट कीधों चंचल तुरंग के समान ऐन काके हैं। पिय कै हियराके मृग मीनन के थाके कीघों सौति साल ही के सुखमा के ऐन काके हैं । परम कहत देखि खंजन हूं थाके कीधों श्याम सेत ताके लाल आभा साधिका के हैं। छत्र के छपाकरके भूपाल के छलां के चारु चंचल चला के नैन बांके राधिका के हैं ॥१७६ ॥ खंजन नवीन मीन मानके उमाके देत नाके देत मृगमद कंज के कहाके हैं । ठौर ठौर भंवर भ्रमत जाके ताके संग माखन चकोर कहें चंचल चलाके हैं । ऐसे ना रमाके ना उमाके ना तिलोत्तमाके प्रवल हरौल पंचवांन] प्रति नाके हैं। हैं न मंजुघोषाके बखाने मैनका के हैं न नैन ऐन सुखमाके नैन बांके राधिकाके हैं ॥१७७॥ लालची लजीले लोल ललित रसीले लखे लोगन ललक लैलै लूटत लराके हैं। दिन मैं छलीन चित छैलन को छोमैं छरै छोरै छरकीले सो छबीले छवि छाके हैं । मनसा कहत डेरा डौड़ोके न डारैं डांका डारत डगर डग डारत में डाके हैं । ऐसे और काके मैनका के अबला के मैन बानन ते बांके नैन बांके राधिकाके हैं ॥१७८॥ एक हो झमाके में छमाके मन मोह लेत ऐसे मारवाकेना उमा के ना रमा के हैं। दसहूं दिसा के मनसा के फल देनहार करन निसा के इमि जाकी ओर ताके हैं । जायके जहांके तहां मीन जलढांके गए हरिन हहाके ऐसे कमल कहाके हैं। सकल समाके सुखमाके महिमा के
राजत अमीके मद छाके काल कूट कीधों चंचल तुरंग के समान ऐन काके हैं। पिय कै हियराके मृग मीनन के थाके कीघों सौति साल ही के सुखमा के ऐन काके हैं । परम कहत देखि खंजन हूं थाके कीधों श्याम सेत ताके लाल आभा साधिका के हैं। छत्र के छपाकरके भूपाल के छलां के चारु चंचल चला के नैन बांके राधिका के हैं ॥एक सौ छिहत्तर ॥ खंजन नवीन मीन मानके उमाके देत नाके देत मृगमद कंज के कहाके हैं । ठौर ठौर भंवर भ्रमत जाके ताके संग माखन चकोर कहें चंचल चलाके हैं । ऐसे ना रमाके ना उमाके ना तिलोत्तमाके प्रवल हरौल पंचवांन] प्रति नाके हैं। हैं न मंजुघोषाके बखाने मैनका के हैं न नैन ऐन सुखमाके नैन बांके राधिकाके हैं ॥एक सौ सतहत्तर॥ लालची लजीले लोल ललित रसीले लखे लोगन ललक लैलै लूटत लराके हैं। दिन मैं छलीन चित छैलन को छोमैं छरै छोरै छरकीले सो छबीले छवि छाके हैं । मनसा कहत डेरा डौड़ोके न डारैं डांका डारत डगर डग डारत में डाके हैं । ऐसे और काके मैनका के अबला के मैन बानन ते बांके नैन बांके राधिकाके हैं ॥एक सौ अठहत्तर॥ एक हो झमाके में छमाके मन मोह लेत ऐसे मारवाकेना उमा के ना रमा के हैं। दसहूं दिसा के मनसा के फल देनहार करन निसा के इमि जाकी ओर ताके हैं । जायके जहांके तहां मीन जलढांके गए हरिन हहाके ऐसे कमल कहाके हैं। सकल समाके सुखमाके महिमा के
नई दिल्ली : मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन ने साबित कर दिया की प्यार की कोई शक्ल नहीं होती वो हर रूप में किया जा सकता है. मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन ने साबित कर दिया की प्यार की कोई शक्ल नहीं होती वो हर रूप में किया जा सकता है. इन दोनों की मुलाकात 2020 में मिस ग्रैंड इंटरनेशनल पेजेंट के दौरान हुई थी. जिसके बाद दोनों करीब आए और एक सीक्रेट सेरेमनी में शादी रचा ली. ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर इस जानकारी को शेयर करते हुए दोनों ने एक वीडियो पोस्ट किया. ब्यूटी क्वीन्स ने बताया कि उन्होंने एक प्राइवेट सेरेमनी में 28 अक्टूबर को शादी रचाई है. रोमांटिक तस्वीरों से भरा वीडियो शेयर कर कैप्शन दिया अपने रिश्ते को प्राइवेट रखने के फैसले के बाद हमने उस दरवाजे को 28 अक्टूबर 2022 को खोल दिया है. और अब अपने रिश्ते को दुनिया के सामने जाहिर कर रहे हैं. यह वीडियो लेडी कपल की रोमांटिक पलों से भरा हुआ है. इसमें दोनों को एक दूजे को प्यार करते देखा जा रहा है. दोनों के बीच पर लॉन्ग वेकेशन की रोमांटिक तस्वीरें भी सामने आई हैं. मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन की शादी की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई है. दोनों ही सुंदरी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और अपनी सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं.
नई दिल्ली : मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन ने साबित कर दिया की प्यार की कोई शक्ल नहीं होती वो हर रूप में किया जा सकता है. मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन ने साबित कर दिया की प्यार की कोई शक्ल नहीं होती वो हर रूप में किया जा सकता है. इन दोनों की मुलाकात दो हज़ार बीस में मिस ग्रैंड इंटरनेशनल पेजेंट के दौरान हुई थी. जिसके बाद दोनों करीब आए और एक सीक्रेट सेरेमनी में शादी रचा ली. ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर इस जानकारी को शेयर करते हुए दोनों ने एक वीडियो पोस्ट किया. ब्यूटी क्वीन्स ने बताया कि उन्होंने एक प्राइवेट सेरेमनी में अट्ठाईस अक्टूबर को शादी रचाई है. रोमांटिक तस्वीरों से भरा वीडियो शेयर कर कैप्शन दिया अपने रिश्ते को प्राइवेट रखने के फैसले के बाद हमने उस दरवाजे को अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार बाईस को खोल दिया है. और अब अपने रिश्ते को दुनिया के सामने जाहिर कर रहे हैं. यह वीडियो लेडी कपल की रोमांटिक पलों से भरा हुआ है. इसमें दोनों को एक दूजे को प्यार करते देखा जा रहा है. दोनों के बीच पर लॉन्ग वेकेशन की रोमांटिक तस्वीरें भी सामने आई हैं. मिस अर्जेंटीना मारियाना वरेला और मिस प्यूर्टो रिको फैबियोला वेलेंटाइन की शादी की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई है. दोनों ही सुंदरी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और अपनी सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं.
बेंगलुरु में ऑटोरिक्शा चालक शहर में चल रहे निजी बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स के विरोध में सोमवार को हड़ताल पर जाएंगे। आदर्श ऑटो एंड टैक्सी ड्राइवर्स यूनियन के प्रमुख एम मंजूनाथ ने बताया कि रविवार आधी रात से सोमवार आधी रात तक दो लाख से ज्यादा ऑटोरिक्शा सड़कों से नदारद रहेंगे। यूनियन, कर्नाटक की राजधानी में ऑटोरिक्शा चालकों का सबसे बड़ा संगठन है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बेंगलुरु में ऑटोरिक्शा चालक शहर में चल रहे निजी बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स के विरोध में सोमवार को हड़ताल पर जाएंगे। आदर्श ऑटो एंड टैक्सी ड्राइवर्स यूनियन के प्रमुख एम मंजूनाथ ने बताया कि रविवार आधी रात से सोमवार आधी रात तक दो लाख से ज्यादा ऑटोरिक्शा सड़कों से नदारद रहेंगे। यूनियन, कर्नाटक की राजधानी में ऑटोरिक्शा चालकों का सबसे बड़ा संगठन है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
भुवनेश्वर । भारतीय कला व संस्कृति के उत्थान के लिए विद्यार्थियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भुवनेश्वर के निलाद्री बिहार सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय कला मंच द्वारा तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिभा संगम कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि विभिन्न कैंपसों में से कलाकार छात्र- छात्राओं को मंच प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय कला मंच हर दो साल में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करता है। इस प्रतिभा संगम कार्यक्रम में राज्य व देश के विभिन्न कैंपसों से एक हजार से अधिक छात्र- छात्राएं भाग ले रही हैं। भारतीय कला जैसे नृत्य, संगीत, अभिनय, चित्रकला, स्वरचित कविता गायन, रंगोली आदि में रुचि रखने वाले छात्र छात्राओं के लिए अपना प्रतिभा प्रदर्शन करने का यह एक बड़ा माध्यम है। प्रतिभा संगम कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों में प्रतियोगिता ही आयोजित नहीं करता, बल्कि उन्हें वरिष्ठ व नामचीन कलाकारों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। उद्घाटन कार्यक्रम में पद्मविभूषण तथा राज्यसभा सांसत रघुनाथ महापात्र ने कहा कि भारत की महान संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में विद्यार्थियों को आगे आना चाहिए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कला मंच के संयोजक तन्मय दास ने इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से अवगत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में राष्ट्रीय अभिनय विद्यालय बाराणसी के अध्यक्ष रामजी बाली, पूर्व सांसद तथा अभिनेता सिद्धांत महापात्र, ओडिशा चलचित्र निगम के अध्यक्ष सत्यव्रत त्रिपाठी, अभिनेत्री अनु चौधरी, अभिनेता बाबु शान मोहंती, व्यंग कवि ज्ञान होता उपस्थित थे। स्वागत समिति के अध्यक्ष अजीत दास ने स्वागत भाषण दिया।
भुवनेश्वर । भारतीय कला व संस्कृति के उत्थान के लिए विद्यार्थियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भुवनेश्वर के निलाद्री बिहार सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय कला मंच द्वारा तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिभा संगम कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि विभिन्न कैंपसों में से कलाकार छात्र- छात्राओं को मंच प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय कला मंच हर दो साल में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करता है। इस प्रतिभा संगम कार्यक्रम में राज्य व देश के विभिन्न कैंपसों से एक हजार से अधिक छात्र- छात्राएं भाग ले रही हैं। भारतीय कला जैसे नृत्य, संगीत, अभिनय, चित्रकला, स्वरचित कविता गायन, रंगोली आदि में रुचि रखने वाले छात्र छात्राओं के लिए अपना प्रतिभा प्रदर्शन करने का यह एक बड़ा माध्यम है। प्रतिभा संगम कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों में प्रतियोगिता ही आयोजित नहीं करता, बल्कि उन्हें वरिष्ठ व नामचीन कलाकारों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। उद्घाटन कार्यक्रम में पद्मविभूषण तथा राज्यसभा सांसत रघुनाथ महापात्र ने कहा कि भारत की महान संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में विद्यार्थियों को आगे आना चाहिए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कला मंच के संयोजक तन्मय दास ने इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से अवगत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में राष्ट्रीय अभिनय विद्यालय बाराणसी के अध्यक्ष रामजी बाली, पूर्व सांसद तथा अभिनेता सिद्धांत महापात्र, ओडिशा चलचित्र निगम के अध्यक्ष सत्यव्रत त्रिपाठी, अभिनेत्री अनु चौधरी, अभिनेता बाबु शान मोहंती, व्यंग कवि ज्ञान होता उपस्थित थे। स्वागत समिति के अध्यक्ष अजीत दास ने स्वागत भाषण दिया।
अगर आप भी होली (Holi Festival) के खास पर्व पर पकौड़े बनाने की सोच रहे हैं तो आजमाइए ये 8 टिप्स और पाए नए स्वाद में पकौड़ियां। - बेसन के घोल में 1-2 चम्मच भीगी हुई मूंग की दाल मिला देने से पकौड़ी का स्वाद अलग हो जाता है। - बेसन के घोल में अगर गीला नारियल थोड़ा-सा पीस कर मिलाने से पकौड़े का स्वाद लाजवाब हो जाता है। - अगर प्याज की जगह हरा प्याज (Spring Onion) बारीक काट कर बेसन के घोल में मिला लिया जाए तो भजिए का टेस्ट दोगुना बढ़ जाएगा। - पकौड़े के घोल में अगर एक चुटकी अरारोट और थोड़ा-सा गर्म तेल डालें तो पकौड़े अधिक कुरकुरे और खाने में स्वादिष्ट लगते हैं। - भजिया या पकौड़े परोसते समय इन पर चाट मसाला छिडकें और हरी चटनी के साथ खाने से पकौड़े अधिक टेस्टी लगते हैं। - पकौड़े बनाते समय घोल में आधा चम्मच चावल का आटा मिला देने से भी पकौड़े कुरकुरे और टेस्टी बनेंगे। - सभी घरों में पकौड़ियां बनती हैं पर पकौड़ी को हर बार थोड़ा अलग ढंग से बनाया जाए तो खाने में नया स्वाद मिलेगा। - अगर आप भजिए को अधिक क्रिस्पी बनाना चाहते हैं तो बेसन में मीठे सोड़े की जगह 2 चम्मच गरम तेल का मोयन देकर अच्छी तरह फेंटे और फिर इसके भजिए बनाएं, आप खुद जान जाएंगे।
अगर आप भी होली के खास पर्व पर पकौड़े बनाने की सोच रहे हैं तो आजमाइए ये आठ टिप्स और पाए नए स्वाद में पकौड़ियां। - बेसन के घोल में एक-दो चम्मच भीगी हुई मूंग की दाल मिला देने से पकौड़ी का स्वाद अलग हो जाता है। - बेसन के घोल में अगर गीला नारियल थोड़ा-सा पीस कर मिलाने से पकौड़े का स्वाद लाजवाब हो जाता है। - अगर प्याज की जगह हरा प्याज बारीक काट कर बेसन के घोल में मिला लिया जाए तो भजिए का टेस्ट दोगुना बढ़ जाएगा। - पकौड़े के घोल में अगर एक चुटकी अरारोट और थोड़ा-सा गर्म तेल डालें तो पकौड़े अधिक कुरकुरे और खाने में स्वादिष्ट लगते हैं। - भजिया या पकौड़े परोसते समय इन पर चाट मसाला छिडकें और हरी चटनी के साथ खाने से पकौड़े अधिक टेस्टी लगते हैं। - पकौड़े बनाते समय घोल में आधा चम्मच चावल का आटा मिला देने से भी पकौड़े कुरकुरे और टेस्टी बनेंगे। - सभी घरों में पकौड़ियां बनती हैं पर पकौड़ी को हर बार थोड़ा अलग ढंग से बनाया जाए तो खाने में नया स्वाद मिलेगा। - अगर आप भजिए को अधिक क्रिस्पी बनाना चाहते हैं तो बेसन में मीठे सोड़े की जगह दो चम्मच गरम तेल का मोयन देकर अच्छी तरह फेंटे और फिर इसके भजिए बनाएं, आप खुद जान जाएंगे।
नई दिल्लीः गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने केरल में हुई राजनीतिक हिंसा की हालिया घटनाओं के बारे केंद्र की चिंताओं से सूबे के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन को अवगत कराया और उनसे इस बाबत कदम उठाने को कहा। गौरतलब है कि मंगलवार को राज्य में भाजपा कार्यालय पर हमला किया गया था। (देश-विदेश की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें) दिल्ली में अधिकारियों ने बताया कि टेलीफोन पर बातचीत के दौरान सिंह ने राजनीतिक हिंसा को लेकर विजयन से चर्चा की और मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को इस बाबत प्रभावी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। भाजपा की केरल इकाई के प्रदेश अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन ने तिरूवनंतपुरम में संवाददातओं से बातचीत के दौरान दावा किया कि सिंह ने राज्य सरकार से कहा कि सूबे में भाजपा कार्यकर्ताओं पर माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर बार-बार हमला किये जाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कदम नहीं उठाया तो केंद्र महज मूक दर्शक बनकर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मंत्री ने केंद्रीय गृह सचिव से केरल की जमीनी हकीकत के बारे में एक रिपोर्ट मांगी है। तिरूवनंतपुरम में भाजपा के एक कार्यालय पर मंगलवार रात देसी बम से हमला किया गया था और पार्टी ने माकपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने का आरोप लगाया था।
नई दिल्लीः गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने केरल में हुई राजनीतिक हिंसा की हालिया घटनाओं के बारे केंद्र की चिंताओं से सूबे के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन को अवगत कराया और उनसे इस बाबत कदम उठाने को कहा। गौरतलब है कि मंगलवार को राज्य में भाजपा कार्यालय पर हमला किया गया था। दिल्ली में अधिकारियों ने बताया कि टेलीफोन पर बातचीत के दौरान सिंह ने राजनीतिक हिंसा को लेकर विजयन से चर्चा की और मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को इस बाबत प्रभावी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। भाजपा की केरल इकाई के प्रदेश अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन ने तिरूवनंतपुरम में संवाददातओं से बातचीत के दौरान दावा किया कि सिंह ने राज्य सरकार से कहा कि सूबे में भाजपा कार्यकर्ताओं पर माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर बार-बार हमला किये जाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कदम नहीं उठाया तो केंद्र महज मूक दर्शक बनकर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मंत्री ने केंद्रीय गृह सचिव से केरल की जमीनी हकीकत के बारे में एक रिपोर्ट मांगी है। तिरूवनंतपुरम में भाजपा के एक कार्यालय पर मंगलवार रात देसी बम से हमला किया गया था और पार्टी ने माकपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने का आरोप लगाया था।
लोकसभा चुनाव के नतीजे को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग देखनेे को मिल रही है। देहरादून, राज्य ब्यूरो। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी एक महीना बाकी है, लेकिन नतीजों से पहले ही जीतने-हराने के दावे को लेकर प्रदेश के सियासी दिग्गजों के बीच घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच सोशल मीडिया पर दिलचस्प जुबानी जंग का नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार गिनाईं तो जवाब में उन्होंने चुटकी ली कि वर्ष 2022 के चुनाव में आप रिकार्ड बुक में जिंदा रहेंगे, मैं लोगों की भावना और जुबां पर जिंदा रहूंगा। ऐसे में भला मुख्यमंत्री कैसे चुप रहते, लिहाजा उन्होंने भी पलटवार किया कि आप लोगों की जुबां पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए, जनता आपको 2017 में अहसास करा चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों ही अपने-अपने दलों की ओर से अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। बावजूद इसके दोनों एक-दूसरे को लेकर सियासी चुटकियां और जुबानी घेराबंदी का मौका नहीं चूक रहे हैं। नतीजतन उत्तराखंड की पांच सीटों के लिए चुनाव भले ही 11 अप्रैल को संपन्न हो गया हो, लेकिन चुनावी तपिश शिद्दत के साथ बरकरार है। ऐसे ही दोनों दिग्गज नेताओं ने प्रदेश के सियासी माहौल को अपने वार-पलटवार से गर्मा दिया। दरअसल, राज्य में भाजपा की चुनावी नैया के खेवनहार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस की कार्यसमिति के सदस्य, महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राज्य में अब तक पिछले चुनावों में मिली शिकस्त को गिना दिया। हरीश रावत वर्तमान में नैनीताल संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भी हैं। मुख्यमंत्री ने ऐसा कहते हुए इशारों में ही अपने अंदाज में चुनावी भविष्यवाणी की कोशिश की। असम में बतौर प्रदेश प्रभारी कांग्रेस के चुनाव प्रचार के व्यस्त कार्यक्रम से फुर्सत पाते ही हरीश रावत यानी हरदा ने फेसबुक अकाउंट पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर पलटवार कर दिया। उन्होंने कहा, गिरते हैं सह सवार ही मैदान-ए-जंग में। मुझे हराने वाले लोगों को आज याद नहीं है, हारने वाला हरीश रावत आज भी लोगों की जुबां पर जिंदा है। मेरी शुभकामना है आप 2022 का चुनाव भेटें, मगर याद रखना आप रिकॉर्ड बुक में जिंदा रहेंगे, मैं इसके बाद भी लोगों की भावना और जुबां में जिंदा रहूंगा। रहा सवाल इस बार के चुनाव का, क्या आप कहीं चुनाव में थे, क्या आपके नाम व काम पर किसी ने वोट मांगा, हरीश रावत भूतपूर्व मुख्यमंत्री इस चुनाव में भी मतदाताओं के मध्य जिंदा था, उसके काम, उसके सोच की चर्चा हो रही थी। खैर भगवान ने चाहा तो आपका घमंड जल्दी टूट जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री के इस प्रहार के बाद अब दोबारा मोर्चा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संभाला। उन्होंने भी फेसबुक पर पूर्व मुख्यमंत्री को आदरणीय हरीश रावत जी के रूप में संबोधित कर पलटवार किया, चुनाव में हार-जीत लगी रहती है, लोकतंत्र में जिताना व हराना जनता के हाथ में है। कहा कि आप लोगों की जुबां पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए जिंदा है, इसका अहसास आपको जनता 2017 में करवा चुकी है, लोगों के दिलों में कौन कितना जिंदा रहता है, इस बात का फैसला 23 मई को हो जाएगा। आप पर चुनाव का बहुत दबाव रहा होगा। इसलिए बता दूं कि मैंने प्रदेश के करीब करीब हर कोने में 15 दिन में 60 जनसभाएं की और हर जगह जनता का भरपूर प्यार और समर्थन मुझे और मेरी पार्टी को मिला। जहां तक बात अहंकार की है, तो आप मुझे इस बात का जवाब दीजिए कि अहंकारी कौन है, अति आत्मविश्वास में कौन लबरेज था, आपने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में रैली करने तक के लिए नहीं बुलाया। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति इतना अविश्वास क्यों, बहरहाल आप भी मान चुके हैं कि आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने से आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी सरकार के कामों का सवाल है, उसका आकलन जनता जनार्दन करेगी। आपकी बेचैनी में समझ सकता हूं।
लोकसभा चुनाव के नतीजे को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग देखनेे को मिल रही है। देहरादून, राज्य ब्यूरो। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी एक महीना बाकी है, लेकिन नतीजों से पहले ही जीतने-हराने के दावे को लेकर प्रदेश के सियासी दिग्गजों के बीच घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच सोशल मीडिया पर दिलचस्प जुबानी जंग का नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार गिनाईं तो जवाब में उन्होंने चुटकी ली कि वर्ष दो हज़ार बाईस के चुनाव में आप रिकार्ड बुक में जिंदा रहेंगे, मैं लोगों की भावना और जुबां पर जिंदा रहूंगा। ऐसे में भला मुख्यमंत्री कैसे चुप रहते, लिहाजा उन्होंने भी पलटवार किया कि आप लोगों की जुबां पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए, जनता आपको दो हज़ार सत्रह में अहसास करा चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों ही अपने-अपने दलों की ओर से अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। बावजूद इसके दोनों एक-दूसरे को लेकर सियासी चुटकियां और जुबानी घेराबंदी का मौका नहीं चूक रहे हैं। नतीजतन उत्तराखंड की पांच सीटों के लिए चुनाव भले ही ग्यारह अप्रैल को संपन्न हो गया हो, लेकिन चुनावी तपिश शिद्दत के साथ बरकरार है। ऐसे ही दोनों दिग्गज नेताओं ने प्रदेश के सियासी माहौल को अपने वार-पलटवार से गर्मा दिया। दरअसल, राज्य में भाजपा की चुनावी नैया के खेवनहार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस की कार्यसमिति के सदस्य, महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राज्य में अब तक पिछले चुनावों में मिली शिकस्त को गिना दिया। हरीश रावत वर्तमान में नैनीताल संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भी हैं। मुख्यमंत्री ने ऐसा कहते हुए इशारों में ही अपने अंदाज में चुनावी भविष्यवाणी की कोशिश की। असम में बतौर प्रदेश प्रभारी कांग्रेस के चुनाव प्रचार के व्यस्त कार्यक्रम से फुर्सत पाते ही हरीश रावत यानी हरदा ने फेसबुक अकाउंट पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर पलटवार कर दिया। उन्होंने कहा, गिरते हैं सह सवार ही मैदान-ए-जंग में। मुझे हराने वाले लोगों को आज याद नहीं है, हारने वाला हरीश रावत आज भी लोगों की जुबां पर जिंदा है। मेरी शुभकामना है आप दो हज़ार बाईस का चुनाव भेटें, मगर याद रखना आप रिकॉर्ड बुक में जिंदा रहेंगे, मैं इसके बाद भी लोगों की भावना और जुबां में जिंदा रहूंगा। रहा सवाल इस बार के चुनाव का, क्या आप कहीं चुनाव में थे, क्या आपके नाम व काम पर किसी ने वोट मांगा, हरीश रावत भूतपूर्व मुख्यमंत्री इस चुनाव में भी मतदाताओं के मध्य जिंदा था, उसके काम, उसके सोच की चर्चा हो रही थी। खैर भगवान ने चाहा तो आपका घमंड जल्दी टूट जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री के इस प्रहार के बाद अब दोबारा मोर्चा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संभाला। उन्होंने भी फेसबुक पर पूर्व मुख्यमंत्री को आदरणीय हरीश रावत जी के रूप में संबोधित कर पलटवार किया, चुनाव में हार-जीत लगी रहती है, लोकतंत्र में जिताना व हराना जनता के हाथ में है। कहा कि आप लोगों की जुबां पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए जिंदा है, इसका अहसास आपको जनता दो हज़ार सत्रह में करवा चुकी है, लोगों के दिलों में कौन कितना जिंदा रहता है, इस बात का फैसला तेईस मई को हो जाएगा। आप पर चुनाव का बहुत दबाव रहा होगा। इसलिए बता दूं कि मैंने प्रदेश के करीब करीब हर कोने में पंद्रह दिन में साठ जनसभाएं की और हर जगह जनता का भरपूर प्यार और समर्थन मुझे और मेरी पार्टी को मिला। जहां तक बात अहंकार की है, तो आप मुझे इस बात का जवाब दीजिए कि अहंकारी कौन है, अति आत्मविश्वास में कौन लबरेज था, आपने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में रैली करने तक के लिए नहीं बुलाया। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति इतना अविश्वास क्यों, बहरहाल आप भी मान चुके हैं कि आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने से आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी सरकार के कामों का सवाल है, उसका आकलन जनता जनार्दन करेगी। आपकी बेचैनी में समझ सकता हूं।
उन्होंने राधा के स्वरूप के दर्शन इस प्रकार कराये हैंस्वर्न मुकुर रूप राधा नोल-कमल दल नैनी। सोस फूल माँग मोतिन को रत्न जटित आभूषण वेनी ॥ १ व्याम और श्वामा दोनों का जी एक दूसरे से मिला हुआ है । श्यामा श्याम को और श्यामा को भाते हैंकुज महन खती हैं। स्यामां प्यारी मेरो तेरी जीय क्र्यो हं मिलि जाइ । तू मोको हूँ तोंको भावत रहें परस्पर हियं समाई ॥ सुरत सनेह जिय अन्तर पारं तापर मेरो कछु न वसाइ । नव नव केलि रूप रस राधे राषत प्राननि लाड लडाइ ।। श्री रसिक बिहारी यह सुष विलसत एक टक नंना रहे लगाइ या त्रित होत नहीं कबहूं उपजत अगनित माइ ।। 2 में व्यामा और श्याम अकेले हैं । श्यामा-श्याम के रूप-रस को कृष्ण और गधा दोनों एक दूसरे के प्राणों में समाये हुए है तथाजमहल में परस्पर क्रीड़ा करते है -
उन्होंने राधा के स्वरूप के दर्शन इस प्रकार कराये हैंस्वर्न मुकुर रूप राधा नोल-कमल दल नैनी। सोस फूल माँग मोतिन को रत्न जटित आभूषण वेनी ॥ एक व्याम और श्वामा दोनों का जी एक दूसरे से मिला हुआ है । श्यामा श्याम को और श्यामा को भाते हैंकुज महन खती हैं। स्यामां प्यारी मेरो तेरी जीय क्र्यो हं मिलि जाइ । तू मोको हूँ तोंको भावत रहें परस्पर हियं समाई ॥ सुरत सनेह जिय अन्तर पारं तापर मेरो कछु न वसाइ । नव नव केलि रूप रस राधे राषत प्राननि लाड लडाइ ।। श्री रसिक बिहारी यह सुष विलसत एक टक नंना रहे लगाइ या त्रित होत नहीं कबहूं उपजत अगनित माइ ।। दो में व्यामा और श्याम अकेले हैं । श्यामा-श्याम के रूप-रस को कृष्ण और गधा दोनों एक दूसरे के प्राणों में समाये हुए है तथाजमहल में परस्पर क्रीड़ा करते है -
नई दिल्ली। सस्ते फोन के लिए आया YouTube Go ऐप अगस्त 2022 में बंद होने वाला है! दरअसल, 2016 में इसे किफायती एंड्रॉइड गो स्मार्टफोन के लिए पेश किए गए यूट्यूब ऐप के हल्के वर्जन के तौर पर लॉन्च किया गया था। लो-एंड यानी सस्ते फोन पर चलाना आसान बनाने के लिए यूट्यूब गो ऐप (YouTube Go App) ने मुख्य ऐप के कई फीचर्स को छोड़ दिया था। गो वर्जन ऐप ने कमेंट करने, पोस्ट करने, कंटेंट क्रिएट करने और डार्क थीम का उपयोग करने की क्षमता को छोड़ा था। 2016 में, ऐप को उन क्षेत्रों के यूजर्स के लिए पेश किया गया था, जहां कनेक्टिविटी, डेटा की कीमतों और लो-एंड वाले डिवाइसेस जैसे कई कारणों ने ओवरऑल यूजर एक्सपीरियंस को प्रभावित किया था। अगस्त में बंद होगा यूट्यूब गो ऐप! (YouTube Go App) अब जब यूट्यूब गो ऐप बंद हो रहा है, ऐसे में मेन यूट्यूब ऐप ने अब कनेक्टिविटी इश्यू वाले ऐसे लो-एंड डिवाइसेस में बेहतर तरीके से काम करने का वादा किया गया है। यूट्यूब गो अभी भी अगस्त तक चलने वाला है और इससे लोगों को या तो मुख्य ऐप में अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए, या बेहतर तरीके से पूरे यूट्यूब एक्सपीरियंस प्राप्त करने के लिए एक बेहतर फोन पर जाना चाहिए। अब यह देखा जाना बाकी है कि क्या गूगल एंड्रॉइड गो पर प्लग को हटा देता है, जो कि किफायती स्मार्टफोन के लिए एंड्रॉइड का लाइट वर्जन है। एंड्रॉइड गो का उपयोग कुछ एंट्री-लेवल स्मार्टफोन द्वारा किया जाता है जो एक वेल-ऑप्टिमाइज्ड यूजर एक्सपीरियंस प्रदान करता है। हालांकि, अधिकांश आधुनिक समय के किफायती एंड्रॉइड फोन एंड्रॉइड के लेटेस्ट और सबसे शक्तिशाली वर्जन को आसानी से चलाने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली हैं।
नई दिल्ली। सस्ते फोन के लिए आया YouTube Go ऐप अगस्त दो हज़ार बाईस में बंद होने वाला है! दरअसल, दो हज़ार सोलह में इसे किफायती एंड्रॉइड गो स्मार्टफोन के लिए पेश किए गए यूट्यूब ऐप के हल्के वर्जन के तौर पर लॉन्च किया गया था। लो-एंड यानी सस्ते फोन पर चलाना आसान बनाने के लिए यूट्यूब गो ऐप ने मुख्य ऐप के कई फीचर्स को छोड़ दिया था। गो वर्जन ऐप ने कमेंट करने, पोस्ट करने, कंटेंट क्रिएट करने और डार्क थीम का उपयोग करने की क्षमता को छोड़ा था। दो हज़ार सोलह में, ऐप को उन क्षेत्रों के यूजर्स के लिए पेश किया गया था, जहां कनेक्टिविटी, डेटा की कीमतों और लो-एंड वाले डिवाइसेस जैसे कई कारणों ने ओवरऑल यूजर एक्सपीरियंस को प्रभावित किया था। अगस्त में बंद होगा यूट्यूब गो ऐप! अब जब यूट्यूब गो ऐप बंद हो रहा है, ऐसे में मेन यूट्यूब ऐप ने अब कनेक्टिविटी इश्यू वाले ऐसे लो-एंड डिवाइसेस में बेहतर तरीके से काम करने का वादा किया गया है। यूट्यूब गो अभी भी अगस्त तक चलने वाला है और इससे लोगों को या तो मुख्य ऐप में अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए, या बेहतर तरीके से पूरे यूट्यूब एक्सपीरियंस प्राप्त करने के लिए एक बेहतर फोन पर जाना चाहिए। अब यह देखा जाना बाकी है कि क्या गूगल एंड्रॉइड गो पर प्लग को हटा देता है, जो कि किफायती स्मार्टफोन के लिए एंड्रॉइड का लाइट वर्जन है। एंड्रॉइड गो का उपयोग कुछ एंट्री-लेवल स्मार्टफोन द्वारा किया जाता है जो एक वेल-ऑप्टिमाइज्ड यूजर एक्सपीरियंस प्रदान करता है। हालांकि, अधिकांश आधुनिक समय के किफायती एंड्रॉइड फोन एंड्रॉइड के लेटेस्ट और सबसे शक्तिशाली वर्जन को आसानी से चलाने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली हैं।
शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि मंगलवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूरे भक्तिभाव के साथ आराधना की गयी। बुधवार को नवमी पर सिद्धिदात्री की उपासना के बाद हवन व पुर्णाहूति की जाएगी। अष्टमी को लेकर घर से लेकर मंदिरों तक भक्तिमय माहौल बना रहा। शहर व गांव के लोग पूरी तरह मां की आराधना में डूबे रहे। श्रद्धालुओं ने महाअष्टमी का उपवास रख गौरी माता का ध्यान व पूजन किया। कोई फलाहार तो कोई निराहर रहकर अष्टमी व्रत को पूरा करने में लगा रहा।
शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि मंगलवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूरे भक्तिभाव के साथ आराधना की गयी। बुधवार को नवमी पर सिद्धिदात्री की उपासना के बाद हवन व पुर्णाहूति की जाएगी। अष्टमी को लेकर घर से लेकर मंदिरों तक भक्तिमय माहौल बना रहा। शहर व गांव के लोग पूरी तरह मां की आराधना में डूबे रहे। श्रद्धालुओं ने महाअष्टमी का उपवास रख गौरी माता का ध्यान व पूजन किया। कोई फलाहार तो कोई निराहर रहकर अष्टमी व्रत को पूरा करने में लगा रहा।
आप सभी ने कई तरीके के आइसक्रीम रोल खाएं होंगे, लेकिन इन दिनों एक अलग तरीके का आइसक्रीम रोल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जिसे बनाने के लिए गुलाब जामुन का इस्तेमाल किया गया है. खाने के साथ एक्सपेरिमेंट (weird food combination) इस वक्त सोशल मीडिया (Viral Social Media) पर खूब ट्रेंड में है. फूड स्ट्रीट वेंडर्स भी लजीज जायके के साथ आए दिन कोई ना कोई ताकी उनके कस्टमर्स को उनका किया गया प्रयोग पसंद आ जाए. हाल के दिनों में एक ऐसा ही फूड एक्सपेरिमेंट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. जिसे देखने के बाद लोगों ने मिक्स रिएक्शन दिए. दुकानदार सबसे पहले आइसक्रीम रोल बनाने वाली प्लेट के ऊपर गुलाब जामुन को काटते देखा जा सकता है, जिसके बाद फिर स्ट्रीट फूड वेंडर को गुलाब जामुन और आइसक्रीम को लेकर आपस में मिलाते देखा जा सकता है, अच्छे दोनों चीजें मिक्स होने के बाद दुकानदार उसे प्लेट पर सपाट कर देता है, वहीं उसके जमते ही उसे रोल के अनुसार काटकर एक कप में लगाकर गुलाब जामुन के साथ सर्व करता है. इस फूड एक्सपेरिमेंट पर लोगों ने मिक्स रिएक्शन दिए कहने का मतलब है कि किसी को यह डिश पसंद आई तो वहीं किसी ने इस डिश पर अपनी नाराजगी दर्ज करवाई. एक यूजर ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा, ' कॉबिनेशन ने इन दोनो का अच्छा लग रहा है उम्मीद है कि टेस्ट भी अच्छा ही हो.' वहीं दूसरे यूजर ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा, ' गुलाब जामुन की मौत पर दो मिनट का मौन.' एक अन्य यूजर ने इस क्लिप पर कमेंट कर लिखा, ' कितना टेस्टी है ये मुझे इसे ट्राई करना है.' वहीं एक दूसरे यूज़र ने कहा कि दाल-चावल, राजमा और छोले की आइसक्रीम कब मिलेगी? इसके अलावा और भी कई यूजर्स ने इस पर कमेंट के जरिए अपना रिएक्शन दिया है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर oye.foodieee नाम के अकाउंट द्वारा शेयर किया गया है. जिसे खबर लिखे जाने तक 86 हजार से ज्यादा लाइक्स और लाखों व्यूज मिल चुके हैं . वैसे आपकी जानकारी के लिए ये पहली बार नहीं है कि जब किसी वीयर्ड कॉबिनेशन के साथ आइसक्रीम रोल तैयार किया गया हो! इससे पहले भी कई बार इसी तरह के कई अजीबोगरीब आइसक्रीम रोल तैयार किए जा चुके हैं. जिसके बारे में सोचकर ही मन घिना जाता है.
आप सभी ने कई तरीके के आइसक्रीम रोल खाएं होंगे, लेकिन इन दिनों एक अलग तरीके का आइसक्रीम रोल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जिसे बनाने के लिए गुलाब जामुन का इस्तेमाल किया गया है. खाने के साथ एक्सपेरिमेंट इस वक्त सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड में है. फूड स्ट्रीट वेंडर्स भी लजीज जायके के साथ आए दिन कोई ना कोई ताकी उनके कस्टमर्स को उनका किया गया प्रयोग पसंद आ जाए. हाल के दिनों में एक ऐसा ही फूड एक्सपेरिमेंट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. जिसे देखने के बाद लोगों ने मिक्स रिएक्शन दिए. दुकानदार सबसे पहले आइसक्रीम रोल बनाने वाली प्लेट के ऊपर गुलाब जामुन को काटते देखा जा सकता है, जिसके बाद फिर स्ट्रीट फूड वेंडर को गुलाब जामुन और आइसक्रीम को लेकर आपस में मिलाते देखा जा सकता है, अच्छे दोनों चीजें मिक्स होने के बाद दुकानदार उसे प्लेट पर सपाट कर देता है, वहीं उसके जमते ही उसे रोल के अनुसार काटकर एक कप में लगाकर गुलाब जामुन के साथ सर्व करता है. इस फूड एक्सपेरिमेंट पर लोगों ने मिक्स रिएक्शन दिए कहने का मतलब है कि किसी को यह डिश पसंद आई तो वहीं किसी ने इस डिश पर अपनी नाराजगी दर्ज करवाई. एक यूजर ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा, ' कॉबिनेशन ने इन दोनो का अच्छा लग रहा है उम्मीद है कि टेस्ट भी अच्छा ही हो.' वहीं दूसरे यूजर ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा, ' गुलाब जामुन की मौत पर दो मिनट का मौन.' एक अन्य यूजर ने इस क्लिप पर कमेंट कर लिखा, ' कितना टेस्टी है ये मुझे इसे ट्राई करना है.' वहीं एक दूसरे यूज़र ने कहा कि दाल-चावल, राजमा और छोले की आइसक्रीम कब मिलेगी? इसके अलावा और भी कई यूजर्स ने इस पर कमेंट के जरिए अपना रिएक्शन दिया है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर oye.foodieee नाम के अकाउंट द्वारा शेयर किया गया है. जिसे खबर लिखे जाने तक छियासी हजार से ज्यादा लाइक्स और लाखों व्यूज मिल चुके हैं . वैसे आपकी जानकारी के लिए ये पहली बार नहीं है कि जब किसी वीयर्ड कॉबिनेशन के साथ आइसक्रीम रोल तैयार किया गया हो! इससे पहले भी कई बार इसी तरह के कई अजीबोगरीब आइसक्रीम रोल तैयार किए जा चुके हैं. जिसके बारे में सोचकर ही मन घिना जाता है.
इस बैंक में हुई 13. 5 लाख की डकैती। सिविल लाइंस स्थित यूको बैंक में 17 लॉकर तोड़ करोड़ों की चोरी के मामले में मुख्य संदिग्ध और झारखंड के शातिर बदमाश हसन चिकना गैंग के दो सदस्यों को पकड़ लिया है। उनसे पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारियां मिली हैं। पता चला है कि चिकना गैंग यूको बैंक जैसी ही कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। इनमें कुछ महीनों पहले बोकारो स्थित स्टेट बैंक की एडीएम शाखा में हुई करोड़ों की चोरी की वारदात भी शामिल है। सिविल लाइंस स्थित यूको बैंक की मुख्य शाखा में 29 अप्रैल की रात घुसे चोरों ने 17 लॉकर तोड़कर करोड़ों का माल उड़ा दिया था। चोरों ने घटना में गैस कटर का इस्तेमाल किया था। मामले के खुलासे में एसटीएफ के साथ ही क्राइम ब्रांच भी लगी है। जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने कौशाम्बी और करेली निवासी दो युवकों को उठाया। सूत्रों की मानें तो तब पता चला कि झारखंड के एक गिरोह ने इस घटना को अंजाम दिया। पूछताछ के दौरान करेली और कौशाम्बी निवासी युवकों की भूमिका मददगार के तौर पर सामने आई। दोनों को लेकर पुलिस की एक टीम ने पश्चिम बंगाल के मालदा में दबिश देकर गिरोह के एक सदस्य को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने झारखंड के साहिबगंज जिले से दो लोगों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इनमें राजमहल थाना क्षेत्र के लखीपुर से पकड़ा गया मो. अकबर शेख और लखीपुर से हिरासत में लिया गया हमीर शेख शामिल हैं। दोनों शातिर बदमाश हसन चिकना के गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं। जो झारखंड समेत अन्य राज्यों में चोरी की कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। हालांकि इस मामले मेें फिलहाल जिला पुलिस का कोई अफसर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो दोनों शातिरों ने पूछताछ में यूको बैंक चोरी की वारदात में शामिल होने की बात कबूल ली है। उनसे पुलिस को यह भी पता चला है कि 17 लॉकरों से बदमाशों को कुल 55 लाख रुपये की नगदी मिली थी। इनमें से 3. 5 लाख रुपये करेली और कौशाम्बी निवासी दोनों मददगारों को दिए गए थे। इसी जानकारी के आधार पर शनिवार रात पुलिस ने करेली में छापा मारकर 1. 5 लाख रुपये बरामद किए। सूत्रों की मानें तो पूछताछ में बदमाशों ने यह भी कबूल किया है कि यूको बैंक की घटना में लाया गया ऑक्सीजन सिलेंडर कौशाम्बी से लाया गया था। इसमें कौशाम्बी निवासी मददगार ने गिरोह के सदस्यों की मदद की थी। उसने सिलेंडर दिलाने के साथ ही बदमाशों को किराये पर पिकअप भी मुहैया कराया था जिस पर लादकर सिलेंडर बैंक तक ले जाया गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो हसन चिकना गिरोह ने कुछ महीनों पहले बोकारों में भी एक बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। तब एसबीआई एडीएम शाखा में 76 लॉकर काटकर करोड़ों रुपये के जेवर उड़ा दिए गए थे। इस मामले में झारखंड पुलिस गिरोह के 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है जिनमें चिकना की पत्नी भी शामिल है। हालांकि सरगना चिकना को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। झारखंड पुलिस इस मामले में छह करोड़ रुपये के जेवरात बरामद कर चुकी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
इस बैंक में हुई तेरह. पाँच लाख की डकैती। सिविल लाइंस स्थित यूको बैंक में सत्रह लॉकर तोड़ करोड़ों की चोरी के मामले में मुख्य संदिग्ध और झारखंड के शातिर बदमाश हसन चिकना गैंग के दो सदस्यों को पकड़ लिया है। उनसे पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारियां मिली हैं। पता चला है कि चिकना गैंग यूको बैंक जैसी ही कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। इनमें कुछ महीनों पहले बोकारो स्थित स्टेट बैंक की एडीएम शाखा में हुई करोड़ों की चोरी की वारदात भी शामिल है। सिविल लाइंस स्थित यूको बैंक की मुख्य शाखा में उनतीस अप्रैल की रात घुसे चोरों ने सत्रह लॉकर तोड़कर करोड़ों का माल उड़ा दिया था। चोरों ने घटना में गैस कटर का इस्तेमाल किया था। मामले के खुलासे में एसटीएफ के साथ ही क्राइम ब्रांच भी लगी है। जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने कौशाम्बी और करेली निवासी दो युवकों को उठाया। सूत्रों की मानें तो तब पता चला कि झारखंड के एक गिरोह ने इस घटना को अंजाम दिया। पूछताछ के दौरान करेली और कौशाम्बी निवासी युवकों की भूमिका मददगार के तौर पर सामने आई। दोनों को लेकर पुलिस की एक टीम ने पश्चिम बंगाल के मालदा में दबिश देकर गिरोह के एक सदस्य को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने झारखंड के साहिबगंज जिले से दो लोगों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इनमें राजमहल थाना क्षेत्र के लखीपुर से पकड़ा गया मो. अकबर शेख और लखीपुर से हिरासत में लिया गया हमीर शेख शामिल हैं। दोनों शातिर बदमाश हसन चिकना के गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं। जो झारखंड समेत अन्य राज्यों में चोरी की कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। हालांकि इस मामले मेें फिलहाल जिला पुलिस का कोई अफसर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो दोनों शातिरों ने पूछताछ में यूको बैंक चोरी की वारदात में शामिल होने की बात कबूल ली है। उनसे पुलिस को यह भी पता चला है कि सत्रह लॉकरों से बदमाशों को कुल पचपन लाख रुपये की नगदी मिली थी। इनमें से तीन. पाँच लाख रुपये करेली और कौशाम्बी निवासी दोनों मददगारों को दिए गए थे। इसी जानकारी के आधार पर शनिवार रात पुलिस ने करेली में छापा मारकर एक. पाँच लाख रुपये बरामद किए। सूत्रों की मानें तो पूछताछ में बदमाशों ने यह भी कबूल किया है कि यूको बैंक की घटना में लाया गया ऑक्सीजन सिलेंडर कौशाम्बी से लाया गया था। इसमें कौशाम्बी निवासी मददगार ने गिरोह के सदस्यों की मदद की थी। उसने सिलेंडर दिलाने के साथ ही बदमाशों को किराये पर पिकअप भी मुहैया कराया था जिस पर लादकर सिलेंडर बैंक तक ले जाया गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो हसन चिकना गिरोह ने कुछ महीनों पहले बोकारों में भी एक बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। तब एसबीआई एडीएम शाखा में छिहत्तर लॉकर काटकर करोड़ों रुपये के जेवर उड़ा दिए गए थे। इस मामले में झारखंड पुलिस गिरोह के तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है जिनमें चिकना की पत्नी भी शामिल है। हालांकि सरगना चिकना को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। झारखंड पुलिस इस मामले में छह करोड़ रुपये के जेवरात बरामद कर चुकी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
संस्कृत साहित्य तथा काव्यशास्त्र Motor (Sanskrit Literature and Poetic) 4. 1. संस्कृत साहित्य 1. रघुवंशम् - महाकवि कालिदासकृत 'रघुवंशम्' समग्र संस्कृत वाङ्मय में एक उत्कृष्ट महाकाव्य है । इसके 19 सर्गों में सूर्यवंश के 31 राजाओं का वर्णन समाहित है । प्रारम्भिक नौ सर्गों में राम के चार पूर्वजों - दिलीप, रघु, अज तथा दशरथ का वर्णन है । 10 से 15 सर्ग तक रामचरित्र तथा 16 से 19वें सर्ग पर्यन्त राम के वंश का वर्णन किया गया है । इस ग्रन्थ में कालिदास की परिपक्वप्रज्ञा तथा प्रौढ़ प्रतिभा का सुन्दर निदर्शन होता है । इसमें महाकाव्य के सभी लक्षण घटित हो जाते हैं । यही कारण है कि आलंकारिकों ने 'रघुवंश' को लक्षित महाकाव्य का सर्वोत्तम निदर्शन माना है। महाकवि ने वैदर्भी रीति का आश्रय लिया है, जैसी कि उक्ति भी प्रचलित है -"वैदर्भी रीति सन्दर्भे कालिदासो विशिष्यते ।।" प्रसाद गुण के साथ-साथ माधुर्य का भी अच्छा परिपाक हुआ है, यद्यपि ओज गुण का सर्वथा अभाव है । इसमें शृंगार, वीर, करुण तथा शान्त चारों रसों का सम्यक् प्रयोग हुआ है । यथा - अग्निवर्ण के विलास - वर्णन में - शृंगार; रघु, अज व राम के युद्ध प्रसंगों वीर रस अज-विलाप में करुण रस तथा वाल्मीकि, वशिष्ठ व सर्वस्वत्यागी रघु के वर्णन में शान्तरस का प्राधान्य है । मुख्य रूप से संयोग शृंगार तथा विप्रलम्भ शृंगार का प्रयोग समुचित रूप में प्रदर्शित किया गया है । कथानक का मूल श्रोत- 'रामायण' है । जहाँ तक इस ग्रन्थ के रचनाकाल का प्रश्न है, विद्वानों में मतैक्य नहीं है, परन्तु अधिकांश विद्वान् इस बात से सहमत हैं कि ई. पू. 150 से 475 ई. के बीच ही कालिदास का समय निर्धारित किया जा सकता है । महाकवि कालिदास के जिस श्लोक पर रीझकर कवियों ने उन्हें 'दीपशिखा कालिदास', की उपाधि से अलंकृत किया है, वह रघुवंश महाकाव्य के ही इन्दुमती - स्वयम्बर में उल्लिखित है, जो इस प्रकार है"संचारिणी दीपशिखेव रात्रौ, यं यं व्यतीयाय पतिवरा सा । नरेन्द्रमार्गाट्ट इव प्रपेदे, विवर्णभावं स स भूमिपालः ॥" रघुवंश /6 / 67, ध्यातव्य है कि 'रघुवंश' महाकाव्य का प्रारम्भ दिलीप के वर्णन से तथा समाप्ति अग्निवर्ण के वर्णन से होती है । 2. मेघदूतम् - महाकविकालिदासरचित 'मेघदूतम्' एक 'खण्डकाव्य' है, जिसे आधुनिक विद्वानो (खास करके मैक्डोनल) ने 'गीतिकाव्य' (Lyric) की संज्ञा दे रखी है । सम्पूर्ण ग्रन्थ हो भागों- पूर्वमेघ और उत्तरमेघ में विभक्त है; जिसमें बल्लभदेव की टीका के अनुसार कुल 111 पद्य है जबकि आचार्य मल्लिनाथ ने अपनी टीका में कुल 118 पद्य दिए हैं, जिनमें एक विरही यक्ष के द्वारा, विरहानलसन्तप्त अपनी कान्ता (प्रिया) के पास मेघ के द्वारा सन्देश भेजने की एक मौलिक कल्पना की गई है, यद्यपि कुछ लोग, 'मेघदूत' की उपजीव्यता का श्रेय 'रामायण' को देते हैं।
संस्कृत साहित्य तथा काव्यशास्त्र Motor चार. एक. संस्कृत साहित्य एक. रघुवंशम् - महाकवि कालिदासकृत 'रघुवंशम्' समग्र संस्कृत वाङ्मय में एक उत्कृष्ट महाकाव्य है । इसके उन्नीस सर्गों में सूर्यवंश के इकतीस राजाओं का वर्णन समाहित है । प्रारम्भिक नौ सर्गों में राम के चार पूर्वजों - दिलीप, रघु, अज तथा दशरथ का वर्णन है । दस से पंद्रह सर्ग तक रामचरित्र तथा सोलह से उन्नीसवें सर्ग पर्यन्त राम के वंश का वर्णन किया गया है । इस ग्रन्थ में कालिदास की परिपक्वप्रज्ञा तथा प्रौढ़ प्रतिभा का सुन्दर निदर्शन होता है । इसमें महाकाव्य के सभी लक्षण घटित हो जाते हैं । यही कारण है कि आलंकारिकों ने 'रघुवंश' को लक्षित महाकाव्य का सर्वोत्तम निदर्शन माना है। महाकवि ने वैदर्भी रीति का आश्रय लिया है, जैसी कि उक्ति भी प्रचलित है -"वैदर्भी रीति सन्दर्भे कालिदासो विशिष्यते ।।" प्रसाद गुण के साथ-साथ माधुर्य का भी अच्छा परिपाक हुआ है, यद्यपि ओज गुण का सर्वथा अभाव है । इसमें शृंगार, वीर, करुण तथा शान्त चारों रसों का सम्यक् प्रयोग हुआ है । यथा - अग्निवर्ण के विलास - वर्णन में - शृंगार; रघु, अज व राम के युद्ध प्रसंगों वीर रस अज-विलाप में करुण रस तथा वाल्मीकि, वशिष्ठ व सर्वस्वत्यागी रघु के वर्णन में शान्तरस का प्राधान्य है । मुख्य रूप से संयोग शृंगार तथा विप्रलम्भ शृंगार का प्रयोग समुचित रूप में प्रदर्शित किया गया है । कथानक का मूल श्रोत- 'रामायण' है । जहाँ तक इस ग्रन्थ के रचनाकाल का प्रश्न है, विद्वानों में मतैक्य नहीं है, परन्तु अधिकांश विद्वान् इस बात से सहमत हैं कि ई. पू. एक सौ पचास से चार सौ पचहत्तर ई. के बीच ही कालिदास का समय निर्धारित किया जा सकता है । महाकवि कालिदास के जिस श्लोक पर रीझकर कवियों ने उन्हें 'दीपशिखा कालिदास', की उपाधि से अलंकृत किया है, वह रघुवंश महाकाव्य के ही इन्दुमती - स्वयम्बर में उल्लिखित है, जो इस प्रकार है"संचारिणी दीपशिखेव रात्रौ, यं यं व्यतीयाय पतिवरा सा । नरेन्द्रमार्गाट्ट इव प्रपेदे, विवर्णभावं स स भूमिपालः ॥" रघुवंश /छः / सरसठ, ध्यातव्य है कि 'रघुवंश' महाकाव्य का प्रारम्भ दिलीप के वर्णन से तथा समाप्ति अग्निवर्ण के वर्णन से होती है । दो. मेघदूतम् - महाकविकालिदासरचित 'मेघदूतम्' एक 'खण्डकाव्य' है, जिसे आधुनिक विद्वानो ने 'गीतिकाव्य' की संज्ञा दे रखी है । सम्पूर्ण ग्रन्थ हो भागों- पूर्वमेघ और उत्तरमेघ में विभक्त है; जिसमें बल्लभदेव की टीका के अनुसार कुल एक सौ ग्यारह पद्य है जबकि आचार्य मल्लिनाथ ने अपनी टीका में कुल एक सौ अट्ठारह पद्य दिए हैं, जिनमें एक विरही यक्ष के द्वारा, विरहानलसन्तप्त अपनी कान्ता के पास मेघ के द्वारा सन्देश भेजने की एक मौलिक कल्पना की गई है, यद्यपि कुछ लोग, 'मेघदूत' की उपजीव्यता का श्रेय 'रामायण' को देते हैं।
सावन का पावन माह चल रहा है। इस माह में महादेव एवं माता पार्वती की उपासना होती है। महादेव को सावन का महीना बेहद प्रिय हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सावन के महीने को कामनापूर्ति करने वाला बताया गया है। इस माह में आराधना करने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है। प्रथा है कि महादेव एवं माता पार्वती सावन में भूमि पर वास करते हैं। कई लोग महादेव को खुश करने के लिए सावन में उपवास रखते हैं। इसके अतिरिक्त सोमवार के दिन विशेष उपाय करते हैं। वही महादेव का स्वरूप अन्य देवताओं से अलग हैं। उनके गले में नाग, जटा में गंगा, सिर पर चंद्रमा तथा हाथ में त्रिशूल- डमरू इस बात का प्रतीक है। मगर क्या आप जानते हैं इन सभी चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग वजह हैं। महादेव सिर्फ इंसान की भक्ति से नहीं अन्य जीवों पर भी अपनी दृष्टि बनाएं रखते हैं। कहा जाता हैं कि नाग-नागिन महादेव को अपना ईश्वर मानते हैं। उनके गले में भी सर्प की माला लिपटी रहती हैं। आइये आपको बताते है इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में। पौराणिक कथा के मुताबिक, नागराज वासुकी महादेव के परम भक्ते थें। वे हमेशा उनकी उपासना करने में लीन रहते थे। कथा के मुताबिक, समुद्र मंथन के वक़्त नागराज वासुकी ने रस्सी का काम किया था। महादेव नागराज की भक्ति देखकर खुश हो गए। उन्होंने वासुकी को अपने गले से लिपटे रहने का वरदान दिया। इसके पश्चात् से नागराज वासुकी अमर हो गए। सावन के माह में नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में खास तौर पर सांपों की पूजा होती है।
सावन का पावन माह चल रहा है। इस माह में महादेव एवं माता पार्वती की उपासना होती है। महादेव को सावन का महीना बेहद प्रिय हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सावन के महीने को कामनापूर्ति करने वाला बताया गया है। इस माह में आराधना करने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है। प्रथा है कि महादेव एवं माता पार्वती सावन में भूमि पर वास करते हैं। कई लोग महादेव को खुश करने के लिए सावन में उपवास रखते हैं। इसके अतिरिक्त सोमवार के दिन विशेष उपाय करते हैं। वही महादेव का स्वरूप अन्य देवताओं से अलग हैं। उनके गले में नाग, जटा में गंगा, सिर पर चंद्रमा तथा हाथ में त्रिशूल- डमरू इस बात का प्रतीक है। मगर क्या आप जानते हैं इन सभी चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग वजह हैं। महादेव सिर्फ इंसान की भक्ति से नहीं अन्य जीवों पर भी अपनी दृष्टि बनाएं रखते हैं। कहा जाता हैं कि नाग-नागिन महादेव को अपना ईश्वर मानते हैं। उनके गले में भी सर्प की माला लिपटी रहती हैं। आइये आपको बताते है इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में। पौराणिक कथा के मुताबिक, नागराज वासुकी महादेव के परम भक्ते थें। वे हमेशा उनकी उपासना करने में लीन रहते थे। कथा के मुताबिक, समुद्र मंथन के वक़्त नागराज वासुकी ने रस्सी का काम किया था। महादेव नागराज की भक्ति देखकर खुश हो गए। उन्होंने वासुकी को अपने गले से लिपटे रहने का वरदान दिया। इसके पश्चात् से नागराज वासुकी अमर हो गए। सावन के माह में नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में खास तौर पर सांपों की पूजा होती है।
कांग्रेस ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के स्लैब से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और दावा किया कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद प्रधानमंत्री इस तरह बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने लोकतंत्र के लिए जरूरी संस्थाओं को लगातार अपमानित किया है। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट, सीएजी जैसी संस्थाओं की अवहेलना करना भी नहीं छोड़ा है। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने आर्मी और देश की हर लोकतांत्रिक संस्था का अपमान किया है। हाल ही में उन्होंने राफेल डील पर फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस हस चुनाव के पहले बार-बार सिर्फ ईवीएम को लेकर चिल्लाती है, ये उनकी आदत बन गई है। अब देखिए कांग्रेस कैसे चुपचाप है, जब चुनाव में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है तो वह कुछ नहीं बोल रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस का डीएनए अभी भी वैसा ही है। जब जीतते हैं तो कहते हैं ईवीएम ठीक है और नतीजे से पहले उसी ईवीएम पर संदेह भी पैदा कर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, अब जब नतीजे उनके पक्ष में आए हैं तो उन्होंने नतीजों को स्वीकार कर लिया है, उसी ईवीएम से आए हैं, जिनमें गड़बड़ी की वो बात करते हैं। इधर कांग्रेस ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के स्लैब से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और दावा किया कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद प्रधानमंत्री इस तरह बात कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जीएसटी के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दोहरी नीति अपनाई है तथा पहले 'एक देश, सात कर' संबंधी राहुल गांधी के बयान को लेकर सरकार के लोग उनका मजाक बनाते थे। दरअसल, प्रधानमंत्री ने मंगलवार को संकेत दिया था कि आने वाले समय में 99 फीसदी वस्तुएं जीएसटी 18 फीसदी स्लैब में आ सकती हैं।
कांग्रेस ने माल एवं सेवा कर के स्लैब से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और दावा किया कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद प्रधानमंत्री इस तरह बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने लोकतंत्र के लिए जरूरी संस्थाओं को लगातार अपमानित किया है। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट, सीएजी जैसी संस्थाओं की अवहेलना करना भी नहीं छोड़ा है। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने आर्मी और देश की हर लोकतांत्रिक संस्था का अपमान किया है। हाल ही में उन्होंने राफेल डील पर फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस हस चुनाव के पहले बार-बार सिर्फ ईवीएम को लेकर चिल्लाती है, ये उनकी आदत बन गई है। अब देखिए कांग्रेस कैसे चुपचाप है, जब चुनाव में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है तो वह कुछ नहीं बोल रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस का डीएनए अभी भी वैसा ही है। जब जीतते हैं तो कहते हैं ईवीएम ठीक है और नतीजे से पहले उसी ईवीएम पर संदेह भी पैदा कर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, अब जब नतीजे उनके पक्ष में आए हैं तो उन्होंने नतीजों को स्वीकार कर लिया है, उसी ईवीएम से आए हैं, जिनमें गड़बड़ी की वो बात करते हैं। इधर कांग्रेस ने माल एवं सेवा कर के स्लैब से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और दावा किया कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद प्रधानमंत्री इस तरह बात कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जीएसटी के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दोहरी नीति अपनाई है तथा पहले 'एक देश, सात कर' संबंधी राहुल गांधी के बयान को लेकर सरकार के लोग उनका मजाक बनाते थे। दरअसल, प्रधानमंत्री ने मंगलवार को संकेत दिया था कि आने वाले समय में निन्यानवे फीसदी वस्तुएं जीएसटी अट्ठारह फीसदी स्लैब में आ सकती हैं।
सरकारी 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' (केसीएनए) ने मंगलवार को एक खबर में बताया कि किम ने बीती रात एक सैन्य परेड के दौरान यह बयान दिया। उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच किम का यह बयान आया है। किम ने हाल के महीनों में कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत और अन्य रियायतें हासिल करने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाने के मकसद से उत्तर कोरिया ऐसा कर रहा है। उत्तर कोरिया ने अपनी सेना की स्थापना की 90वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार देर रात को राजधानी में एक सैन्य परेड निकाली।
सरकारी 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' ने मंगलवार को एक खबर में बताया कि किम ने बीती रात एक सैन्य परेड के दौरान यह बयान दिया। उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच किम का यह बयान आया है। किम ने हाल के महीनों में कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत और अन्य रियायतें हासिल करने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाने के मकसद से उत्तर कोरिया ऐसा कर रहा है। उत्तर कोरिया ने अपनी सेना की स्थापना की नब्बेवीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार देर रात को राजधानी में एक सैन्य परेड निकाली।
हम में से ज़्यादातर लोग जब भी टीवी या एड्स में मॉडल्स या सिलेब्ज़ को देखते हैं, तो हमें उनकी स्टाइलिंग बेहद पसंद आती है। शॉपिंग करते वक्त भी हम उसी तरह के कपड़े तलाश करते हैं। हालांकि, ज़रूरी नही है कि हर किसी पर हर तरह का स्टाइल अच्छा लगे। कपड़ों के अलग-अलग स्टाइल अलग-अलग बॉडी टाइप के लिए बनाए जाते हैं। ज़ाहिर तौर पर मॉडल्स और सिलेब्ज़ फिट होते हैं तो उन पर हर तरह के कपड़े अच्छे लगते हैं। वहीं आम लोग ज़रूरी नहीं कि उतने फिट हों। अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आपका पसंदीदा स्टाइल आप पर सूट नहीं कर रहा तो परेशान न हों। ज़ाहिर तौर पर मॉडल्स और सिलेब्ज़ फिट होते हैं, तो उन पर हर तरह के कपड़े अच्छे लगते हैं। वहीं, आम लोग ज़रूरी नहीं कि उतने फिट हों। अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आपका पसंदीदा स्टाइल आप पर सूट नहीं कर रहा, तो परेशान न हों। आप पसंद में कुछ बदलाव कर अपने लुक को बेहतर बना सकती हैं। आज हम दे रहे हैं ऐसे टिप्स जिनकी मदद से आप दिख सकती हैं स्लिम और ख़ूबसूरत। कैसे चुनें कपड़े? दुनिया में शायद ही कोई होगा जो अच्छा न दिखना चाहता हो। ऐसे में आप किस तरह के कपड़े पहनते हैं, ये अहम हो सकता है। हमारे कपड़े और लुक ही हमारा फर्स्ट इमप्रेशन बनाते हैं। साथ ही ये कपड़े के स्टाइल पर निर्भर करता है कि आप मोटे दिखेंगे या पतले। खासकर अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो ज़्यादा ढीले-ढाले कपड़े आपके दुश्मन से कम नहीं। इसलिए जब भी कपड़े खरीदें तो इस बात का ध्यान रखें कि वह ज़रूरत से ज़्यादा ढीले न हों। यहां तक कि जब जींस भी खरीदें तो वेल फिटेड ही खरीदें। अगर आपको भी लगता है कि आपका बढ़ा हुआ वज़न आपके लुक को ख़राब कर रहा है, तो आप अपने कपड़ों में कुछ बदलाव ज़रूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप दिख सकते हैं स्लिम और खूबसूरत। कपड़ों से पहले ज़रूरी है कि आप अपने बॉडी पॉश्चर को सुधारें। सही पॉश्चर में उठने-बैठने से आप ज़्यादा स्लिम और कॉन्फिडेंट दिखते हैं। अच्छे पॉश्चर का मतलब है कि आप झुक कर नहीं चलते, आपके कंधे सीधे और बैक सीधी रहती है। कपड़े हमेशा अच्छी फिटिंग के ही पहनें। कपड़ें न ज़्यादा ढीले हों और न ही कसे हुए। बिल्कुल परफेक्ट फिटिंग के कपड़ों में आप स्लिम दिखते हैं। कोशिश करें कि आप हल्के रंगों की जगह गहरे रंग के कपड़े ज़्यादा पहनें। गहरे रंग का मतलब सिर्फ काले रंग से नहीं है। इसके अलावा आप बैंगनी, डार्क-ग्रे, डार्क-ब्राउन या मैरून जैसे रंग पहन सकते हैं। डार्क कलर्स आपको स्लिम लुक देते हैं। शॉपिंग करते वक्त इस बात का खास ख़्याल रखें कि कपड़ों पर बड़े-बड़े प्रिंट्स न बने हों। बड़े प्रिंट्स में शरीर बेडौल दिखता है इसलिए प्लेन कपड़ें ही चुनें या प्रिंट पसंद हैं तो छोटे प्रिंट वाले कपड़े ही ख़रीदें।
हम में से ज़्यादातर लोग जब भी टीवी या एड्स में मॉडल्स या सिलेब्ज़ को देखते हैं, तो हमें उनकी स्टाइलिंग बेहद पसंद आती है। शॉपिंग करते वक्त भी हम उसी तरह के कपड़े तलाश करते हैं। हालांकि, ज़रूरी नही है कि हर किसी पर हर तरह का स्टाइल अच्छा लगे। कपड़ों के अलग-अलग स्टाइल अलग-अलग बॉडी टाइप के लिए बनाए जाते हैं। ज़ाहिर तौर पर मॉडल्स और सिलेब्ज़ फिट होते हैं तो उन पर हर तरह के कपड़े अच्छे लगते हैं। वहीं आम लोग ज़रूरी नहीं कि उतने फिट हों। अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आपका पसंदीदा स्टाइल आप पर सूट नहीं कर रहा तो परेशान न हों। ज़ाहिर तौर पर मॉडल्स और सिलेब्ज़ फिट होते हैं, तो उन पर हर तरह के कपड़े अच्छे लगते हैं। वहीं, आम लोग ज़रूरी नहीं कि उतने फिट हों। अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आपका पसंदीदा स्टाइल आप पर सूट नहीं कर रहा, तो परेशान न हों। आप पसंद में कुछ बदलाव कर अपने लुक को बेहतर बना सकती हैं। आज हम दे रहे हैं ऐसे टिप्स जिनकी मदद से आप दिख सकती हैं स्लिम और ख़ूबसूरत। कैसे चुनें कपड़े? दुनिया में शायद ही कोई होगा जो अच्छा न दिखना चाहता हो। ऐसे में आप किस तरह के कपड़े पहनते हैं, ये अहम हो सकता है। हमारे कपड़े और लुक ही हमारा फर्स्ट इमप्रेशन बनाते हैं। साथ ही ये कपड़े के स्टाइल पर निर्भर करता है कि आप मोटे दिखेंगे या पतले। खासकर अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो ज़्यादा ढीले-ढाले कपड़े आपके दुश्मन से कम नहीं। इसलिए जब भी कपड़े खरीदें तो इस बात का ध्यान रखें कि वह ज़रूरत से ज़्यादा ढीले न हों। यहां तक कि जब जींस भी खरीदें तो वेल फिटेड ही खरीदें। अगर आपको भी लगता है कि आपका बढ़ा हुआ वज़न आपके लुक को ख़राब कर रहा है, तो आप अपने कपड़ों में कुछ बदलाव ज़रूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप दिख सकते हैं स्लिम और खूबसूरत। कपड़ों से पहले ज़रूरी है कि आप अपने बॉडी पॉश्चर को सुधारें। सही पॉश्चर में उठने-बैठने से आप ज़्यादा स्लिम और कॉन्फिडेंट दिखते हैं। अच्छे पॉश्चर का मतलब है कि आप झुक कर नहीं चलते, आपके कंधे सीधे और बैक सीधी रहती है। कपड़े हमेशा अच्छी फिटिंग के ही पहनें। कपड़ें न ज़्यादा ढीले हों और न ही कसे हुए। बिल्कुल परफेक्ट फिटिंग के कपड़ों में आप स्लिम दिखते हैं। कोशिश करें कि आप हल्के रंगों की जगह गहरे रंग के कपड़े ज़्यादा पहनें। गहरे रंग का मतलब सिर्फ काले रंग से नहीं है। इसके अलावा आप बैंगनी, डार्क-ग्रे, डार्क-ब्राउन या मैरून जैसे रंग पहन सकते हैं। डार्क कलर्स आपको स्लिम लुक देते हैं। शॉपिंग करते वक्त इस बात का खास ख़्याल रखें कि कपड़ों पर बड़े-बड़े प्रिंट्स न बने हों। बड़े प्रिंट्स में शरीर बेडौल दिखता है इसलिए प्लेन कपड़ें ही चुनें या प्रिंट पसंद हैं तो छोटे प्रिंट वाले कपड़े ही ख़रीदें।
हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए गए। इससे एडमिशन, फिर पठन-पाठन का काम बाधित हो सकता है। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि चुनाव आयोग से अनुमति लेकर शिक्षकों के पद सृजित कराए जा सकते हैं। यूनिवर्सिटी की बीटेक और बीएस की सीटें ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) मेन से भरी जाएंगी। एमएससी और पीएचडी की सीटें ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) से भरी जा सकती हैं। एमबीए की सीटें मैनेजमेंट एप्टीट्यूट टेस्ट (मैट) या फिर कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट (कैट) से भरी जाएंगी। इससे पहले ही शिक्षकों पद सृजित किए जाने का मामला सामने आ गया। कुलपति ने बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू है। अनुबंधित या फिर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकती है। इस पर चुनाव आयोग को पत्र लिखा जाएगा। एडमिशन का हवाला देकर शिक्षकों के पद सृजित किए जाने की अनुमति मांगी जाएगी, फिर एक्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग कराके पद अनुमोदित कराया जा सकेगा। कानपुर (ब्यूरो)। हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में पीएचडी की सीटें बढ़ेंगी। इसकी सूचना इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और बेसिक साइंस के विभागाध्यक्षों से मांगी गई है, फिर एडमिशन का आर्डिनेंस जारी होगा। इसी सिलसिले में कुलपति प्रो. एमजेड खान ने मंगलवार को मीटिंग भी की। कुलपति ने कहा कि सुपरवाइजर की जानकारी मिलने के बाद ही पीएचडी की सीटें तय की जा सकेंगी।
हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए गए। इससे एडमिशन, फिर पठन-पाठन का काम बाधित हो सकता है। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि चुनाव आयोग से अनुमति लेकर शिक्षकों के पद सृजित कराए जा सकते हैं। यूनिवर्सिटी की बीटेक और बीएस की सीटें ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन से भरी जाएंगी। एमएससी और पीएचडी की सीटें ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग से भरी जा सकती हैं। एमबीए की सीटें मैनेजमेंट एप्टीट्यूट टेस्ट या फिर कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट से भरी जाएंगी। इससे पहले ही शिक्षकों पद सृजित किए जाने का मामला सामने आ गया। कुलपति ने बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू है। अनुबंधित या फिर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकती है। इस पर चुनाव आयोग को पत्र लिखा जाएगा। एडमिशन का हवाला देकर शिक्षकों के पद सृजित किए जाने की अनुमति मांगी जाएगी, फिर एक्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग कराके पद अनुमोदित कराया जा सकेगा। कानपुर । हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में पीएचडी की सीटें बढ़ेंगी। इसकी सूचना इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और बेसिक साइंस के विभागाध्यक्षों से मांगी गई है, फिर एडमिशन का आर्डिनेंस जारी होगा। इसी सिलसिले में कुलपति प्रो. एमजेड खान ने मंगलवार को मीटिंग भी की। कुलपति ने कहा कि सुपरवाइजर की जानकारी मिलने के बाद ही पीएचडी की सीटें तय की जा सकेंगी।
आज आप दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहेंगे। पारिवारिक समस्याओं से निपटने में पिता का पूरा सहयोग मिलेगा। आज आपका दिन सकारात्मकता से भरा रहेगा। कोई काम मन-मुताबिक पूरा होने पर लवमेट आपसे खुश होंगे । इस राशि के विवाहित आज जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे, रिश्तों में मधुरता आएगी। गाय को रोटी खिलाएं, आर्थिक पक्ष मजबूत होंगे। आज आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। आज किसी जरूरी काम को पूरा करने में आ रही अड़चने दूर हो जाएगी। आज पिता स्वरूप किसी व्यक्ति का आशीर्वाद लें, आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आयेगा। अगर आपने हाल ही में किसी काम की शुरूआत की है, तो आज उसका सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। आज कोई बड़ा ऑफर मिलने से धन लाभ हो सकता है। इस राशि के विवाहित आज जीवनसाथी के साथ ट्रिप पर जा सकते हैं। चिड़ियों को दाना डालें, रिश्ते मजबूत बनेंगे।
आज आप दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहेंगे। पारिवारिक समस्याओं से निपटने में पिता का पूरा सहयोग मिलेगा। आज आपका दिन सकारात्मकता से भरा रहेगा। कोई काम मन-मुताबिक पूरा होने पर लवमेट आपसे खुश होंगे । इस राशि के विवाहित आज जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे, रिश्तों में मधुरता आएगी। गाय को रोटी खिलाएं, आर्थिक पक्ष मजबूत होंगे। आज आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। आज किसी जरूरी काम को पूरा करने में आ रही अड़चने दूर हो जाएगी। आज पिता स्वरूप किसी व्यक्ति का आशीर्वाद लें, आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आयेगा। अगर आपने हाल ही में किसी काम की शुरूआत की है, तो आज उसका सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। आज कोई बड़ा ऑफर मिलने से धन लाभ हो सकता है। इस राशि के विवाहित आज जीवनसाथी के साथ ट्रिप पर जा सकते हैं। चिड़ियों को दाना डालें, रिश्ते मजबूत बनेंगे।
जर्मनी से जेडजीवी उपकरण की वापसी के बाद कारें बेलारूस में आ गईं। बेलारूसियों को एक्सएनयूएमएक्स इकाइयां मिलीं, जिन्हें तथाकथित निर्यात समूह को सौंपा गया था। "अस्सी के दशक" का परिष्कृत संस्करण प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन टर्बो टैंक के लिए कोई विदेशी खरीदार नहीं थे। और 2011 में, व्यवसाय मृत अंत से स्थानांतरित हो गया हैः 66 मशीनों ने यमन खरीदा। येमेनी सेना T-800BV की विशेषताओं से प्रभावित थी और उन्हें बहुत गर्व था कि उनकी सेना को इस तरह की उच्च तकनीक वाली मशीनों के साथ फिर से तैयार किया गया था। दुर्भाग्य से, बेचे गए टैंकों के शोषण के बारे में बहुत कम जानकारी है। यह आशा बनी हुई है कि यमन में वे खुद को कोकेशस में अपने समय के साथ-साथ दिखाएंगे। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों को इसमें संदेह है। टैंक क्रू की कम योग्यता कारों को बर्बाद कर सकती है।
जर्मनी से जेडजीवी उपकरण की वापसी के बाद कारें बेलारूस में आ गईं। बेलारूसियों को एक्सएनयूएमएक्स इकाइयां मिलीं, जिन्हें तथाकथित निर्यात समूह को सौंपा गया था। "अस्सी के दशक" का परिष्कृत संस्करण प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन टर्बो टैंक के लिए कोई विदेशी खरीदार नहीं थे। और दो हज़ार ग्यारह में, व्यवसाय मृत अंत से स्थानांतरित हो गया हैः छयासठ मशीनों ने यमन खरीदा। येमेनी सेना T-आठ सौBV की विशेषताओं से प्रभावित थी और उन्हें बहुत गर्व था कि उनकी सेना को इस तरह की उच्च तकनीक वाली मशीनों के साथ फिर से तैयार किया गया था। दुर्भाग्य से, बेचे गए टैंकों के शोषण के बारे में बहुत कम जानकारी है। यह आशा बनी हुई है कि यमन में वे खुद को कोकेशस में अपने समय के साथ-साथ दिखाएंगे। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों को इसमें संदेह है। टैंक क्रू की कम योग्यता कारों को बर्बाद कर सकती है।
बीएमडब्ल्यू 6 सीरीज के स्पेयर पार्ट्स और एसेसरीज़ की लिस्ट पाएं, साथ ही फ्रंट बम्पर, रियर बम्पर, बोनट/हुड, head light, tail light, फ्रंट डोर एन्ड रियर, डिक्की, साइड व्यू मिरर, फ्रंट विंडशील्ड ग्लास और दूसरे बॉडी पार्ट्स की प्राइस भी देखें। - सभी (24) - Maintenance (1) - Suspension (2) - Price (1) - Engine (4) - Experience (7) - Comfort (10) - Performance (4) क्या आप उलझन में हैं? अपना प्रश्न पूछें और 48 घंटों के भीतर जवाब पाएं। What आईएस the ईंधन capacity का the बीएमडब्ल्यू 6 series? The fuel capacity of the BMW 6 series is 66. 0. What आईएस the waiting period for the बीएमडब्ल्यू 6 series? What आईएस the ground clearance, it it enough? आई want to buy a car, which वन आईएस best between 6-series और E-Class? आईएस it possible to book for a मैनुअल ट्रांसमिशन for the बीएमडब्ल्यू 6 SERIES? BMW 6 Seriescomes with 8-speed automatic transmission only. बीएमडब्ल्यू 6 सीरीज के टायर का साइज क्या है? म्यूजिक सिस्टम के स्पेसिफिकेशन क्या हैं? बीएमडब्ल्यू 6 सीरीज का कर्ब वेट कितना है? क्या बीएमडब्ल्यू 6 सीरीज में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल मिलता है? क्या बीएमडब्ल्यू 6 सीरीज में सनरूफ मिलता है ?
बीएमडब्ल्यू छः सीरीज के स्पेयर पार्ट्स और एसेसरीज़ की लिस्ट पाएं, साथ ही फ्रंट बम्पर, रियर बम्पर, बोनट/हुड, head light, tail light, फ्रंट डोर एन्ड रियर, डिक्की, साइड व्यू मिरर, फ्रंट विंडशील्ड ग्लास और दूसरे बॉडी पार्ट्स की प्राइस भी देखें। - सभी - Maintenance - Suspension - Price - Engine - Experience - Comfort - Performance क्या आप उलझन में हैं? अपना प्रश्न पूछें और अड़तालीस घंटाटों के भीतर जवाब पाएं। What आईएस the ईंधन capacity का the बीएमडब्ल्यू छः series? The fuel capacity of the BMW छः series is छयासठ. शून्य. What आईएस the waiting period for the बीएमडब्ल्यू छः series? What आईएस the ground clearance, it it enough? आई want to buy a car, which वन आईएस best between छः-series और E-Class? आईएस it possible to book for a मैनुअल ट्रांसमिशन for the बीएमडब्ल्यू छः SERIES? BMW छः Seriescomes with आठ-speed automatic transmission only. बीएमडब्ल्यू छः सीरीज के टायर का साइज क्या है? म्यूजिक सिस्टम के स्पेसिफिकेशन क्या हैं? बीएमडब्ल्यू छः सीरीज का कर्ब वेट कितना है? क्या बीएमडब्ल्यू छः सीरीज में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल मिलता है? क्या बीएमडब्ल्यू छः सीरीज में सनरूफ मिलता है ?
अंबिकापुर. शहर में होली से पहले बलरामपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय शराब स्मग्लिंग का पर्दा फाश कियाहै. बलरामपुर पुलिस ने सूरजपुर जिले की ओर जा रहे टाटा सफारी गाड़ी को बरामद किया है. गाड़ी में से भिन्न-भिन्न कंपनियों के 230 लीटर से अधिक अंग्रेजी शराब बरामद हुई है. इस घटना में टाटा सफारी गाड़ी चालक दयाशंकर गुप्ता (30) डुमरपान के रहवासी को अरैस्ट कर लिया गया है. इस मुद्दे में कुछ बड़े शराब तस्करों के नाम भी सामने आए हैं. जिनकी तलाश पुलिस प्रसाशन द्वारा की जा रही है. पुलिस द्वारा बताया गया कि वाहन से अंग्रेजी शराब व्हिस्की के लगभग दस पेटी बरामद हुई. हर एक पेटी में अंग्रेजी शराब और भिन्न-भिन्न कंपनियों के बियर बरामद हुए. बताया गया कि कुल 231. 2 लीटर शराब की जब्ती हुई है. मध्य प्रदेश के बैढ़न सिंगरौली क्षेत्र से अंग्रेजी शराब की स्मग्लिंग पहले भी छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में होती रही है. पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि आरोपित हर बार अपना रूट बदल देते हैं. इस बार मजबूत सूचना के कारण पुलिस द्वारा होली से पहले भारी मात्रा में शराब बरामद की गई है. अंतरराज्यीय शराब तस्करों द्वारा सफारी गाड़ी में शराब लोड करने के बाद गाड़ी को सुनियोजित ढंग से जंगली रास्ते से होते हुए यूपी के बीजपुर क्षेत्र में प्रवेश कराया गया था वहां से अंदर ही अंदर आरोपित बलरामपुर जिले के तालकेश्वरपुर होते वाड्रफनगर के पास गाड़ी को लेकर निकला था. इसकी सूचना पहले ही पुलिस को मिल गई थी और पुलिस ने घेराबंदी कर शराब सहित गाड़ी को बरामद कर लिया.
अंबिकापुर. शहर में होली से पहले बलरामपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय शराब स्मग्लिंग का पर्दा फाश कियाहै. बलरामपुर पुलिस ने सूरजपुर जिले की ओर जा रहे टाटा सफारी गाड़ी को बरामद किया है. गाड़ी में से भिन्न-भिन्न कंपनियों के दो सौ तीस लीटरटर से अधिक अंग्रेजी शराब बरामद हुई है. इस घटना में टाटा सफारी गाड़ी चालक दयाशंकर गुप्ता डुमरपान के रहवासी को अरैस्ट कर लिया गया है. इस मुद्दे में कुछ बड़े शराब तस्करों के नाम भी सामने आए हैं. जिनकी तलाश पुलिस प्रसाशन द्वारा की जा रही है. पुलिस द्वारा बताया गया कि वाहन से अंग्रेजी शराब व्हिस्की के लगभग दस पेटी बरामद हुई. हर एक पेटी में अंग्रेजी शराब और भिन्न-भिन्न कंपनियों के बियर बरामद हुए. बताया गया कि कुल दो सौ इकतीस. दो लीटरटर शराब की जब्ती हुई है. मध्य प्रदेश के बैढ़न सिंगरौली क्षेत्र से अंग्रेजी शराब की स्मग्लिंग पहले भी छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में होती रही है. पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि आरोपित हर बार अपना रूट बदल देते हैं. इस बार मजबूत सूचना के कारण पुलिस द्वारा होली से पहले भारी मात्रा में शराब बरामद की गई है. अंतरराज्यीय शराब तस्करों द्वारा सफारी गाड़ी में शराब लोड करने के बाद गाड़ी को सुनियोजित ढंग से जंगली रास्ते से होते हुए यूपी के बीजपुर क्षेत्र में प्रवेश कराया गया था वहां से अंदर ही अंदर आरोपित बलरामपुर जिले के तालकेश्वरपुर होते वाड्रफनगर के पास गाड़ी को लेकर निकला था. इसकी सूचना पहले ही पुलिस को मिल गई थी और पुलिस ने घेराबंदी कर शराब सहित गाड़ी को बरामद कर लिया.
मुंबई, (भाषा)। भारतीय टीम से बाहर चल रहे ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह ने कहा कि वह 14 जनवरी से शुरू हो रही हाकी इंडिया लीग के जरिये राष्ट्रीय टीम में वापसी करने पर नजरें लगाए बै"s हैं। एचआईएल में मुंबई मैजीशियन्स की ओर से खेलने वाले संदीप ने यहां कल संवाददाताआंs से कहा, मैं अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं क्योंकि यह भारतीय टीम में वापसी के लिए मेरे पास अच्छा मंच है। लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के बाद संदीप को टीम से बाहर कर दिया गया था। संदीप ने कहा कि वह कोच माइकल नोब्स के उस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहेंगे जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन नहीं करने वाले सीनियर खिलाड़ियों के लिये राष्ट्रीय टीम में वापसी करने में मुश्किल होगी। उन्होंने कहा, मैं प्रतिक्रिया नहीं करना चाहता। मैं अच्छा प्रदर्शन करके टीम में वापसी करने की कोशिश करूंगा।
मुंबई, । भारतीय टीम से बाहर चल रहे ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह ने कहा कि वह चौदह जनवरी से शुरू हो रही हाकी इंडिया लीग के जरिये राष्ट्रीय टीम में वापसी करने पर नजरें लगाए बै"s हैं। एचआईएल में मुंबई मैजीशियन्स की ओर से खेलने वाले संदीप ने यहां कल संवाददाताआंs से कहा, मैं अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं क्योंकि यह भारतीय टीम में वापसी के लिए मेरे पास अच्छा मंच है। लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के बाद संदीप को टीम से बाहर कर दिया गया था। संदीप ने कहा कि वह कोच माइकल नोब्स के उस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहेंगे जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन नहीं करने वाले सीनियर खिलाड़ियों के लिये राष्ट्रीय टीम में वापसी करने में मुश्किल होगी। उन्होंने कहा, मैं प्रतिक्रिया नहीं करना चाहता। मैं अच्छा प्रदर्शन करके टीम में वापसी करने की कोशिश करूंगा।
हिमाचल प्रदेश में शनिवार को कोविड-19 के 258 नए मामले आए और मंडी तथा सिरमौर जिलों में संक्रमण के कारण दो और मरीजों की मौत हो गयी। शिमलाः हिमाचल प्रदेश में शनिवार को कोविड-19 के 258 नए मामले आए और मंडी तथा सिरमौर जिलों में संक्रमण के कारण दो और मरीजों की मौत हो गयी। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, राज्य में कोरोना वायरस के उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1,807 है। मंडी जिले में 63 वर्षीय व्यक्ति और सिरमौर जिले में ₨68 वर्षीय महिला की संक्रमण के कारण मौत हो गयी जिससे राज्य में कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,200 हो गयी है। मंडी में शुक्रवार को 19 वर्षीय महिला की संक्रमण से मौत हो गयी थी। अभी तक कोविड-19 के कारण सबसे अधिक मौत कांगड़ा (1,268) में हुई है। इसके बाद शिमला में 730, मंडी में 518, सोलन में 341, हमीरपुर में 333, ऊना में 283, सिरमौर में 228, चंबा में 179, कुल्लू में 164, बिलासपुर में 97, किन्नौर में 41 तथा लाहौल और स्पीति में 18 लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पर्वतीय राज्य में साप्ताहिक संक्रमण दर 6. 6 प्रतिशत दर्ज की गयी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने शुक्रवार को कहा था कि एक दिन में कोविड-19 का पता लगाने के लिए करीब 5,000 नमूनों की जांच की जा रही है और अस्पताल में भर्ती होने की दर 0. 9 प्रतिशत है। केंद्र के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार स्थिति पर नियमित आधार पर नजर रख रही है। शांडिल ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने सतर्कता बरतने और कोविड अनुकूल व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने केंद्र से कोविड-19 रोधी टीकों की आपूर्ति करने का भी अनुरोध किया ताकि लोगों को एहतियाती खुराक दी जा सके।
हिमाचल प्रदेश में शनिवार को कोविड-उन्नीस के दो सौ अट्ठावन नए मामले आए और मंडी तथा सिरमौर जिलों में संक्रमण के कारण दो और मरीजों की मौत हो गयी। शिमलाः हिमाचल प्रदेश में शनिवार को कोविड-उन्नीस के दो सौ अट्ठावन नए मामले आए और मंडी तथा सिरमौर जिलों में संक्रमण के कारण दो और मरीजों की मौत हो गयी। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, राज्य में कोरोना वायरस के उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक,आठ सौ सात है। मंडी जिले में तिरेसठ वर्षीय व्यक्ति और सिरमौर जिले में ₨अड़सठ वर्षीय महिला की संक्रमण के कारण मौत हो गयी जिससे राज्य में कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर चार,दो सौ हो गयी है। मंडी में शुक्रवार को उन्नीस वर्षीय महिला की संक्रमण से मौत हो गयी थी। अभी तक कोविड-उन्नीस के कारण सबसे अधिक मौत कांगड़ा में हुई है। इसके बाद शिमला में सात सौ तीस, मंडी में पाँच सौ अट्ठारह, सोलन में तीन सौ इकतालीस, हमीरपुर में तीन सौ तैंतीस, ऊना में दो सौ तिरासी, सिरमौर में दो सौ अट्ठाईस, चंबा में एक सौ उन्यासी, कुल्लू में एक सौ चौंसठ, बिलासपुर में सत्तानवे, किन्नौर में इकतालीस तथा लाहौल और स्पीति में अट्ठारह लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पर्वतीय राज्य में साप्ताहिक संक्रमण दर छः. छः प्रतिशत दर्ज की गयी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने शुक्रवार को कहा था कि एक दिन में कोविड-उन्नीस का पता लगाने के लिए करीब पाँच,शून्य नमूनों की जांच की जा रही है और अस्पताल में भर्ती होने की दर शून्य. नौ प्रतिशत है। केंद्र के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार स्थिति पर नियमित आधार पर नजर रख रही है। शांडिल ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने सतर्कता बरतने और कोविड अनुकूल व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने केंद्र से कोविड-उन्नीस रोधी टीकों की आपूर्ति करने का भी अनुरोध किया ताकि लोगों को एहतियाती खुराक दी जा सके।
आरोपित डॉक्टर इस्माइल ने अपनी प्रेमिका से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या ही कर डाली। पुलिस को इस हत्याकांड का खुलासा करने में 40 दिन लगे। इस्लामी नियम-कायदों से बैंकिंग का हवाला देकर IMA द्वारा निवेश की धोखाधड़ी के मामले में CBI ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। शिक्षक ने क्लास के दौरान 'शार्ली एब्दो' अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। जिसके बाद सिर कलम कर के उसकी हत्या कर दी गई। लखीसराय जिले की दो विधानसभा सीटों के समीकरण, यादव बहुल पंचायतों का इस बार कैसा है चुनावी मिजाज। नीतीश का सूर्यगढ़ा से क्या है 'नाता'? जैसे ही रिपब्लिक के कम से कम पाँच पत्रकारों ने लाइव टीवी पर पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की तो प्रदीप भंडारी को पुलिस स्टेशन से जाने की अनुमति दे दी गई। "भारत को ग्लोबल कम्युनिटी का समर्थन प्राप्त है। हमारे इरादे नेक और मजबूत हैं। 130 करोड़ लोगों का देश किसी के सामने नहीं झुकेगा। हम सही भी है और अधिकांश देशों का हमारे साथ समर्थन है। " पीएम मोदी ने चुनाव आयोजन की तरह टीका वितरण की ऐसी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया जिसमें सरकारी और नागरिक समूहों के प्रत्येक स्तर की भागीदारी हो। बलविंदर की पत्नी ने कहा, हत्या के लिए सरकार, प्रशासन और खुफिया एजेंसियाँ जिम्मेदार हैं। हमने फिर से सुरक्षा की माँग की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। प्रदीप भंडारी के पास अग्रिम जमानत था, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। खबर है कि उनके जल्द ही गिरफ्तार होने की संभावना है।
आरोपित डॉक्टर इस्माइल ने अपनी प्रेमिका से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या ही कर डाली। पुलिस को इस हत्याकांड का खुलासा करने में चालीस दिन लगे। इस्लामी नियम-कायदों से बैंकिंग का हवाला देकर IMA द्वारा निवेश की धोखाधड़ी के मामले में CBI ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। शिक्षक ने क्लास के दौरान 'शार्ली एब्दो' अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। जिसके बाद सिर कलम कर के उसकी हत्या कर दी गई। लखीसराय जिले की दो विधानसभा सीटों के समीकरण, यादव बहुल पंचायतों का इस बार कैसा है चुनावी मिजाज। नीतीश का सूर्यगढ़ा से क्या है 'नाता'? जैसे ही रिपब्लिक के कम से कम पाँच पत्रकारों ने लाइव टीवी पर पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की तो प्रदीप भंडारी को पुलिस स्टेशन से जाने की अनुमति दे दी गई। "भारत को ग्लोबल कम्युनिटी का समर्थन प्राप्त है। हमारे इरादे नेक और मजबूत हैं। एक सौ तीस करोड़ लोगों का देश किसी के सामने नहीं झुकेगा। हम सही भी है और अधिकांश देशों का हमारे साथ समर्थन है। " पीएम मोदी ने चुनाव आयोजन की तरह टीका वितरण की ऐसी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया जिसमें सरकारी और नागरिक समूहों के प्रत्येक स्तर की भागीदारी हो। बलविंदर की पत्नी ने कहा, हत्या के लिए सरकार, प्रशासन और खुफिया एजेंसियाँ जिम्मेदार हैं। हमने फिर से सुरक्षा की माँग की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। प्रदीप भंडारी के पास अग्रिम जमानत था, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। खबर है कि उनके जल्द ही गिरफ्तार होने की संभावना है।
मेष राशि (Aries) च, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ : आज आपकी नौकरी-धंधे की चिंता खत्म हो सकती है। जीवनसाथी द्वारा आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है और ससुराल पक्ष से चल रहा वाद विवाद भी समाप्त होगा। आज आपको अपनी अपेक्षाओं को तार्किक स्तर पर रखना होगा। ज्यादा लालच कोई बड़ा नुकसान करा सकता है। पारिवारिक मामलों में ज्यादा हस्तक्षेप ना करें। सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में भी रुचि बढ़ेगी। ज्यादा सोच-विचार करने से मौके हाथ से निकल भी सकते हैं। वृषभ राशि (Taurus) ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो ब बो : आज जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा जिससे जीवन के कुछ अहम फैसले लेना आसान होगा। छोटी-छोटी बातों पर आहत होने जैसे स्वभाव को सुधारें। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य पाकर आप अपनी काफी सारी समस्याओं को हल कर पाएंगे,लेकिन आपको धन संबन्धित मामलों में सतर्कता बरतनी होगी। परिजनों- मित्रों के साथ मांगलिक आयोजन में शामिल होने के अवसर मिलेंगे। परिजनों-मित्रों के साथ अधिक समय बिता सकेंगे। मिथुन राशि (Gemini) का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह : अपने कार्य की एक अलग शैली से अपने काम की पहचान बनाएंगे। जो लोग नौकरीपेशा है,उन्हें उन्नति मिलती दिख रही है और आपके चारों ओर का वातावरण शांतिपूर्ण बना रहेगा, इसलिए आपको अपने मन में नकारात्मक विचारों को आने से रोकना होगा। यदि कोई मित्र रूठा हुआ है तो उसे मनाएंगे। आपकी सलाह सबके लिए लाभकारी रहेगी। आप दूसरों के साथ परिचय करने में न चूके। अपनी पारिवारिक व्यवस्था को उचित बनाकर रखें। कर्क राशि (Cancer) ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो : आज आपकी सभी परेशानियाँ दूर होगी। नौकरी व्यवसाय में पदोन्नति और आय वृद्धि का योग है। यात्रा आपके लिए सामान्य रहेगी, लेकिन परिवार के लोगों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने में आप सफल रहेंगे। सायंकाल के समय आपके घर अतिथि का आगमन हो सकता है। अपनी वाणी पर संयम रखें अन्यथा परिवार में तनाव होने की संभावना हो सकती है। माता जी का स्वास्थ्य चिंता का कारण बनेगा। विवाहेत्तर संबंधों की संभावनाओं से दूर रहे। सिंह राशि (Leo) मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे : आज चोरी या धन हानि की आशंका है। बिजनेस में नई परियोजना से आपको फायदा हो सकता है। छात्रों का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा। नौकरी करने वाले लोग नौकरी में आने वाली बाधाओं से परेशान रहेंगे। सोशल मीडिया के ज़रिए आपका कोई नया दोस्त बनेगा। आपका मन गहरी बातों को जानने में अधिक रुचि दिखाएगा। माता-पिता की सेहत में सुधार होगा। दूसरों के मामले में हस्तक्षेप करना संबंधों में कड़वाहट ला सकता है। कन्या राशि (Virgo) ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो : आपका यह दिन मौज मस्ती में व्यतीत होगा। बुजुर्गों तथा बड़े भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। आज व्यापारी वर्ग को विशेष रूप से अच्छे फल प्राप्त होंगे, जिससे धन लाभ के योग बनेंगे। आपको खर्चों में कमी का प्रयास करना चाहिए। कोई शुभ प्रसंग हो सकता है। वैवाहिक जीवन बेहतर रहेगा। समय पर कार्य पूरे नहीं होने से नौकरी में परेशानी आ सकती है। प्रॉपर्टी संबंधी किसी भी कार्य में निवेश करने के लिए समय उचित नहीं है। तुला राशि (Libra) रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते : आज आप अपने प्रिय द्वारा कही गयी बातों के प्रति काफ़ी संवेदनशील होंगे, अपने जज़्बात पर क़ाबू रखें। कपड़ा व्यवसायियों को आज अच्छा लाभ होगा। भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश कर सकते हैं। ससुराल के लोगों से अच्छी बातचीत होगी। नौकरी में सफलता मिलेगी। व्यापारियों के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों की वजह से कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त संबंधी डील होने की संभावना है। वृश्चिक राशि (Scorpio) तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू : आज आपके शादीशुदा जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहेगा। समय खुशनुमा और बेहतर परिणाम देने वाला है। परिवार के लोगों के साथ आप अच्छा समय व्यतीत करेंगे। अपने हुनर और समझदारी से कार्यों को बखूबी पूरा करेंगे। व्यापार में आज अचानक शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। धन की वर्षा होने के पूरे-पूरे योग बन रहे हैं। आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें। धनु राशि (Sagittarius) ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे : आज किसी बड़ी डील में आपको सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहिए। लंबे समय बाद आप जीवनसाथी के साथ अतिरिक्त समय बिता पाएंगे। यदि आप अपने प्रिय को कोई तोहफा खरीदने की योजना बना रहे हैं इसके लिए दिन उचित है। दोस्त के रूप में छिपे हुए आपके शत्रुओं से सावधान रहें। घर वालों के साथ किसी बात को लेकर थोड़ा मनमुटाव हो सकता है। आय के साथ-साथ खर्चे भी सामने आएंगे। अपने व्यक्तित्व और भविष्य को लेकर जागरुक रहें। मकर राशि (Capricorn) भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी : क्रोध और आवेश में आकर संबंधों को खराब न करें धैर्य से काम लें। आज आप सामाजिक कार्यों में भाग लेंगे। घर के बड़ों की ओर से आपको कुछ अच्छे सुझाव भी मिल सकते हैं। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। आपको रीड की हड्डी में दर्द की शिकायत हो सकती है। दूसरों की मदद भी करेंगे और उनके हितों की भी चिंता करेंगे। घर में मेहमानों के आगमन से उत्सव भरा माहौल रहेगा। आर्थिक स्थिति में अचानक से शुभ बदलाव होने की संभावना है। कुंभ राशि (Aquarius) गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा : आज कोई धोखा दे सकता है। दाम्पत्य जीवन में थोड़ी अनबन हो सकती है। पारिवारिक जीवन में स्थितियां प्रतिकूल नजर आ रही हैं। घर के किसी सदस्य के साथ आपकी कहासुनी हो सकती है। आपको गुस्से में गलत शब्दों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। अपने कार्यक्षेत्र में उन्नति करने कर सकते हैं। शरीर के ऊपरी हिस्से में कष्ट हो सकता है। सौदेबाजी में बहुत अच्छी सफलता भी मिलने के योग हैं। मीन राशि (Pisces) दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची : आज आनंद-प्रमोद के पीछे धन खर्च हो सकता है। आपका उत्साह और आत्मविश्वास चरम पर रहना है। आज आज आपको कोई भी महत्वपूर्ण व्यवसाई फैसला न लेने की सलाह दी जाती है। जीवनसाथी का प्रेम और सहयोग मिलेगा। सेहत आपकी ठीक रहेगी। आज आपको आराम करने का भी समय मिलेगा। आपके विचारों में ऐसी सख्ती रहेगी कि आपके मित्रों को वह चुनौतीपूर्ण महसूस हो सकते हैं। आलस को हावी ना होने दें। आपने Rashifal 22 May 2023 का सभी राशियों का rashifal पढ़ा। आप को Rashifal 22 May 2023 का यह rashifal कैसा लगा? कमेंट करके अपनी राय जरुर दें और हमारे द्वारा बताया गया यह राशिफल अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें। नोटः आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में Rashifal 22 May 2023 से कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी ज्योतिषी से मिल सकते हैं।
मेष राशि च, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ : आज आपकी नौकरी-धंधे की चिंता खत्म हो सकती है। जीवनसाथी द्वारा आपको कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है और ससुराल पक्ष से चल रहा वाद विवाद भी समाप्त होगा। आज आपको अपनी अपेक्षाओं को तार्किक स्तर पर रखना होगा। ज्यादा लालच कोई बड़ा नुकसान करा सकता है। पारिवारिक मामलों में ज्यादा हस्तक्षेप ना करें। सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में भी रुचि बढ़ेगी। ज्यादा सोच-विचार करने से मौके हाथ से निकल भी सकते हैं। वृषभ राशि ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो ब बो : आज जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा जिससे जीवन के कुछ अहम फैसले लेना आसान होगा। छोटी-छोटी बातों पर आहत होने जैसे स्वभाव को सुधारें। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य पाकर आप अपनी काफी सारी समस्याओं को हल कर पाएंगे,लेकिन आपको धन संबन्धित मामलों में सतर्कता बरतनी होगी। परिजनों- मित्रों के साथ मांगलिक आयोजन में शामिल होने के अवसर मिलेंगे। परिजनों-मित्रों के साथ अधिक समय बिता सकेंगे। मिथुन राशि का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह : अपने कार्य की एक अलग शैली से अपने काम की पहचान बनाएंगे। जो लोग नौकरीपेशा है,उन्हें उन्नति मिलती दिख रही है और आपके चारों ओर का वातावरण शांतिपूर्ण बना रहेगा, इसलिए आपको अपने मन में नकारात्मक विचारों को आने से रोकना होगा। यदि कोई मित्र रूठा हुआ है तो उसे मनाएंगे। आपकी सलाह सबके लिए लाभकारी रहेगी। आप दूसरों के साथ परिचय करने में न चूके। अपनी पारिवारिक व्यवस्था को उचित बनाकर रखें। कर्क राशि ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो : आज आपकी सभी परेशानियाँ दूर होगी। नौकरी व्यवसाय में पदोन्नति और आय वृद्धि का योग है। यात्रा आपके लिए सामान्य रहेगी, लेकिन परिवार के लोगों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने में आप सफल रहेंगे। सायंकाल के समय आपके घर अतिथि का आगमन हो सकता है। अपनी वाणी पर संयम रखें अन्यथा परिवार में तनाव होने की संभावना हो सकती है। माता जी का स्वास्थ्य चिंता का कारण बनेगा। विवाहेत्तर संबंधों की संभावनाओं से दूर रहे। सिंह राशि मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे : आज चोरी या धन हानि की आशंका है। बिजनेस में नई परियोजना से आपको फायदा हो सकता है। छात्रों का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा। नौकरी करने वाले लोग नौकरी में आने वाली बाधाओं से परेशान रहेंगे। सोशल मीडिया के ज़रिए आपका कोई नया दोस्त बनेगा। आपका मन गहरी बातों को जानने में अधिक रुचि दिखाएगा। माता-पिता की सेहत में सुधार होगा। दूसरों के मामले में हस्तक्षेप करना संबंधों में कड़वाहट ला सकता है। कन्या राशि ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो : आपका यह दिन मौज मस्ती में व्यतीत होगा। बुजुर्गों तथा बड़े भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। आज व्यापारी वर्ग को विशेष रूप से अच्छे फल प्राप्त होंगे, जिससे धन लाभ के योग बनेंगे। आपको खर्चों में कमी का प्रयास करना चाहिए। कोई शुभ प्रसंग हो सकता है। वैवाहिक जीवन बेहतर रहेगा। समय पर कार्य पूरे नहीं होने से नौकरी में परेशानी आ सकती है। प्रॉपर्टी संबंधी किसी भी कार्य में निवेश करने के लिए समय उचित नहीं है। तुला राशि रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते : आज आप अपने प्रिय द्वारा कही गयी बातों के प्रति काफ़ी संवेदनशील होंगे, अपने जज़्बात पर क़ाबू रखें। कपड़ा व्यवसायियों को आज अच्छा लाभ होगा। भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश कर सकते हैं। ससुराल के लोगों से अच्छी बातचीत होगी। नौकरी में सफलता मिलेगी। व्यापारियों के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों की वजह से कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त संबंधी डील होने की संभावना है। वृश्चिक राशि तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू : आज आपके शादीशुदा जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहेगा। समय खुशनुमा और बेहतर परिणाम देने वाला है। परिवार के लोगों के साथ आप अच्छा समय व्यतीत करेंगे। अपने हुनर और समझदारी से कार्यों को बखूबी पूरा करेंगे। व्यापार में आज अचानक शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। धन की वर्षा होने के पूरे-पूरे योग बन रहे हैं। आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें। धनु राशि ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे : आज किसी बड़ी डील में आपको सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहिए। लंबे समय बाद आप जीवनसाथी के साथ अतिरिक्त समय बिता पाएंगे। यदि आप अपने प्रिय को कोई तोहफा खरीदने की योजना बना रहे हैं इसके लिए दिन उचित है। दोस्त के रूप में छिपे हुए आपके शत्रुओं से सावधान रहें। घर वालों के साथ किसी बात को लेकर थोड़ा मनमुटाव हो सकता है। आय के साथ-साथ खर्चे भी सामने आएंगे। अपने व्यक्तित्व और भविष्य को लेकर जागरुक रहें। मकर राशि भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी : क्रोध और आवेश में आकर संबंधों को खराब न करें धैर्य से काम लें। आज आप सामाजिक कार्यों में भाग लेंगे। घर के बड़ों की ओर से आपको कुछ अच्छे सुझाव भी मिल सकते हैं। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। आपको रीड की हड्डी में दर्द की शिकायत हो सकती है। दूसरों की मदद भी करेंगे और उनके हितों की भी चिंता करेंगे। घर में मेहमानों के आगमन से उत्सव भरा माहौल रहेगा। आर्थिक स्थिति में अचानक से शुभ बदलाव होने की संभावना है। कुंभ राशि गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा : आज कोई धोखा दे सकता है। दाम्पत्य जीवन में थोड़ी अनबन हो सकती है। पारिवारिक जीवन में स्थितियां प्रतिकूल नजर आ रही हैं। घर के किसी सदस्य के साथ आपकी कहासुनी हो सकती है। आपको गुस्से में गलत शब्दों का प्रयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है। अपने कार्यक्षेत्र में उन्नति करने कर सकते हैं। शरीर के ऊपरी हिस्से में कष्ट हो सकता है। सौदेबाजी में बहुत अच्छी सफलता भी मिलने के योग हैं। मीन राशि दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची : आज आनंद-प्रमोद के पीछे धन खर्च हो सकता है। आपका उत्साह और आत्मविश्वास चरम पर रहना है। आज आज आपको कोई भी महत्वपूर्ण व्यवसाई फैसला न लेने की सलाह दी जाती है। जीवनसाथी का प्रेम और सहयोग मिलेगा। सेहत आपकी ठीक रहेगी। आज आपको आराम करने का भी समय मिलेगा। आपके विचारों में ऐसी सख्ती रहेगी कि आपके मित्रों को वह चुनौतीपूर्ण महसूस हो सकते हैं। आलस को हावी ना होने दें। आपने Rashifal बाईस मई दो हज़ार तेईस का सभी राशियों का rashifal पढ़ा। आप को Rashifal बाईस मई दो हज़ार तेईस का यह rashifal कैसा लगा? कमेंट करके अपनी राय जरुर दें और हमारे द्वारा बताया गया यह राशिफल अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें। नोटः आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में Rashifal बाईस मई दो हज़ार तेईस से कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी ज्योतिषी से मिल सकते हैं।
Chandra Grahan In Ujjain: महाकाल की नगरी उज्जैन में इस बार चंद्रग्रहण सिर्फ 36 मिनट दिखाई देगा। साथ ही महाकाल मंदिर के पट भी चंद्रग्रहण पर बंद नहीं होंगे। चंद्रग्रहण को लोग खुली आंखों से देख सकते हैं। उज्जैनः कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण (mp chandra grahan timing) है। चंद्रोदय शाम 5:43 बजे होगा, कोरी आंखों से चंद्रमा को निहार सकते हैं। इस चंद्रग्रहण का असर उज्जैन के महाकाल मंदिर पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान भक्त बाबा महाकाल का दर्शन कर सकेंगे। जानकारों का कहना है कि मंगलवार को खगोलीय घटनाक्रम के चलते पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। हालांकि उज्जैन में यह आंशिक चंद्रग्रहण के रूप में केवल 36 मिनट ही दिखाई देगा। जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि आठ नवंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 2:38:05 बजे, मध्य की स्थिति 4:29:10 बजे और मोक्ष शाम 6:19:02 बजे होगा। मध्य की स्थिति में चंद्रमा का 100 प्रतिशत भाग पृथ्वी के छाया क्षेत्र में हो जाएगा। भारत में कोलकाता, कोहिमा, पटना, पुरी, रांची, इम्फाल में चंद्रोदय पूर्णता समय शाम 5:12 बजे से पूर्व होने के कारण यहां पूर्ण चंद्रग्रहण देख सकेंगे। उज्जैन में चंद्रोदय शाम 5:43 बजे होने के कारण शाम 6:19 बजे तक केवल 36 मिनट ही आंशिक चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्रग्रहण को हम कोरी आंखों या टेलीस्कोप/बाइनोक्युलर से देख सकते हैं।
Chandra Grahan In Ujjain: महाकाल की नगरी उज्जैन में इस बार चंद्रग्रहण सिर्फ छत्तीस मिनट दिखाई देगा। साथ ही महाकाल मंदिर के पट भी चंद्रग्रहण पर बंद नहीं होंगे। चंद्रग्रहण को लोग खुली आंखों से देख सकते हैं। उज्जैनः कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण है। चंद्रोदय शाम पाँच:तैंतालीस बजे होगा, कोरी आंखों से चंद्रमा को निहार सकते हैं। इस चंद्रग्रहण का असर उज्जैन के महाकाल मंदिर पर नहीं होगा। ग्रहण काल के दौरान भक्त बाबा महाकाल का दर्शन कर सकेंगे। जानकारों का कहना है कि मंगलवार को खगोलीय घटनाक्रम के चलते पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। हालांकि उज्जैन में यह आंशिक चंद्रग्रहण के रूप में केवल छत्तीस मिनट ही दिखाई देगा। जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि आठ नवंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। ग्रहण का प्रारंभ दोपहर दो:अड़तीस:पाँच बजे, मध्य की स्थिति चार:उनतीस:दस बजे और मोक्ष शाम छः:उन्नीस:दो बजे होगा। मध्य की स्थिति में चंद्रमा का एक सौ प्रतिशत भाग पृथ्वी के छाया क्षेत्र में हो जाएगा। भारत में कोलकाता, कोहिमा, पटना, पुरी, रांची, इम्फाल में चंद्रोदय पूर्णता समय शाम पाँच:बारह बजे से पूर्व होने के कारण यहां पूर्ण चंद्रग्रहण देख सकेंगे। उज्जैन में चंद्रोदय शाम पाँच:तैंतालीस बजे होने के कारण शाम छः:उन्नीस बजे तक केवल छत्तीस मिनट ही आंशिक चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्रग्रहण को हम कोरी आंखों या टेलीस्कोप/बाइनोक्युलर से देख सकते हैं।
मुंबई, 20 सितंबर (आईएएनएस)। शशांक घोष की फिल्म 'खूबसूरत' की रिलीज को चार साल पूरे होने पर अभिनेत्री सोनम कपूर अहूजा भावुक हो गईं और उन्होंने इस फिल्म को 'अविस्मरणीय अनुभव' बताया। सोनम ने एक छोटा सा वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपने सह-कलाकार किरन खेर और फवाद खान के साथ कुछ मजेदार पल बिता रही हैं। उन्होंने कहा, 'खूबसूरत' अविस्मरणीय अनुभव था! मुझे अभी भी फिल्म की शूटिंग के दौरान पर्दे के पीछे के मजेदार और हंसी के क्षण याद हैं। रिया कपूर, अनिल कपूर और सिद्धार्थ रॉय कपूर द्वारा निर्मित फिल्म 'खूबसूरत' एक प्रेम कहानी है, जो मिली (सोनम) की कहानी है, जो राजकुमार (फवाद) से प्यार करने लगती है।
मुंबई, बीस सितंबर । शशांक घोष की फिल्म 'खूबसूरत' की रिलीज को चार साल पूरे होने पर अभिनेत्री सोनम कपूर अहूजा भावुक हो गईं और उन्होंने इस फिल्म को 'अविस्मरणीय अनुभव' बताया। सोनम ने एक छोटा सा वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपने सह-कलाकार किरन खेर और फवाद खान के साथ कुछ मजेदार पल बिता रही हैं। उन्होंने कहा, 'खूबसूरत' अविस्मरणीय अनुभव था! मुझे अभी भी फिल्म की शूटिंग के दौरान पर्दे के पीछे के मजेदार और हंसी के क्षण याद हैं। रिया कपूर, अनिल कपूर और सिद्धार्थ रॉय कपूर द्वारा निर्मित फिल्म 'खूबसूरत' एक प्रेम कहानी है, जो मिली की कहानी है, जो राजकुमार से प्यार करने लगती है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व की भाजपा सरकार के समय एक अप्रैल 2022 के बाद खोले नए कार्यालयों को बंद कर दिया, जबकि स्तरोन्नत कार्यालयों को पुरानी स्थिति में ला दिया है। स्वास्थ्य, राजस्व, वन, लोक निर्माण और कृषि विभाग के ऐसे 307 नए कार्यालय सुक्खू सरकार ने बंद कर दिए हैं। संबंधित विभागाध्यक्षों ने बुधवार को इन कार्यालयों को डिनोटिफाई कर दिया है। सरकार ने 179 स्वास्थ्य संस्थान, 79 पटवार सर्किल, 3 तहसील, 20 उपतहसील और 9 कानूनगो सर्किल, लोक निर्माण विभाग के 16 सर्किल, डिवीजन, सब डिवीजन बंद किए हैं। हिमाचल में 75 साल बाद मंडी में खुला सेटलमेंट डिवीजन और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के तहत सराज विधानसभा क्षेत्र के जंजैहली में खोला वन्य प्राणी डिवीजन भी डिनोटिफाई किया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि भाजपा सरकार के समय बिना बजट प्रावधान और बिना पद सृजित किए जो कार्यालय खोले गए थे, उन पर यह कार्रवाई की गई है। इन कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी साथ लगते अन्य कार्यालयों में शिफ्ट होंगे। आगामी दिनों में सरकारv समीक्षा कर जरूरत के हिसाब से कार्यालय दोबारा खोलने या न खोलने पर विचार करेगी। पूर्व की जयराम सरकार की ओर से एक अप्रैल 2022 के बाद खोले करीब 250 स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का फैसला कैबिनेट बैठक में होगा। इन संस्थानों में कितने विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं, कितने शिक्षक नियुक्त हैं, इन संस्थानों से सटे पुराने शिक्षण संस्थानों की दूरी कितनी है, इन सबका डाटा तैयार किया जा रहा है। सभी जानकारियां कैबिनेट बैठक में लाई जाएंगी। उसके बाद ही इन्हें बंद रखने या खुले रखने का फैसला लिया जाएगा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार की ओर से संस्थान बंद करना न्यायसंगत नहीं, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण है। जल्द हमारी पार्टी प्रदेश हित में जनता के साथ सड़कों पर उतर कर कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेगी और जरूरत पड़ी तो कोर्ट में भी इस विषय को उठाएगी। जयराम ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बदले की भावना से काम करने के आज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। पे नाऊ पर क्लिक करे।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व की भाजपा सरकार के समय एक अप्रैल दो हज़ार बाईस के बाद खोले नए कार्यालयों को बंद कर दिया, जबकि स्तरोन्नत कार्यालयों को पुरानी स्थिति में ला दिया है। स्वास्थ्य, राजस्व, वन, लोक निर्माण और कृषि विभाग के ऐसे तीन सौ सात नए कार्यालय सुक्खू सरकार ने बंद कर दिए हैं। संबंधित विभागाध्यक्षों ने बुधवार को इन कार्यालयों को डिनोटिफाई कर दिया है। सरकार ने एक सौ उन्यासी स्वास्थ्य संस्थान, उन्यासी पटवार सर्किल, तीन तहसील, बीस उपतहसील और नौ कानूनगो सर्किल, लोक निर्माण विभाग के सोलह सर्किल, डिवीजन, सब डिवीजन बंद किए हैं। हिमाचल में पचहत्तर साल बाद मंडी में खुला सेटलमेंट डिवीजन और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के तहत सराज विधानसभा क्षेत्र के जंजैहली में खोला वन्य प्राणी डिवीजन भी डिनोटिफाई किया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि भाजपा सरकार के समय बिना बजट प्रावधान और बिना पद सृजित किए जो कार्यालय खोले गए थे, उन पर यह कार्रवाई की गई है। इन कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी साथ लगते अन्य कार्यालयों में शिफ्ट होंगे। आगामी दिनों में सरकारv समीक्षा कर जरूरत के हिसाब से कार्यालय दोबारा खोलने या न खोलने पर विचार करेगी। पूर्व की जयराम सरकार की ओर से एक अप्रैल दो हज़ार बाईस के बाद खोले करीब दो सौ पचास स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का फैसला कैबिनेट बैठक में होगा। इन संस्थानों में कितने विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं, कितने शिक्षक नियुक्त हैं, इन संस्थानों से सटे पुराने शिक्षण संस्थानों की दूरी कितनी है, इन सबका डाटा तैयार किया जा रहा है। सभी जानकारियां कैबिनेट बैठक में लाई जाएंगी। उसके बाद ही इन्हें बंद रखने या खुले रखने का फैसला लिया जाएगा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार की ओर से संस्थान बंद करना न्यायसंगत नहीं, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण है। जल्द हमारी पार्टी प्रदेश हित में जनता के साथ सड़कों पर उतर कर कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करेगी और जरूरत पड़ी तो कोर्ट में भी इस विषय को उठाएगी। जयराम ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बदले की भावना से काम करने के आज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। पे नाऊ पर क्लिक करे।
आशीष श्रीवास्तव आजतक में बतौर संवाददाता लखनऊ ब्यूरो में तैनात हैं. आशीष को पत्रकारिता में 8 साल का अनुभव है. आशीष श्रीवास्तव ने पत्रकारिता की डिग्री लेने के साथ ही अंग्रेजी में मास्टर्स किया है. आशीष श्रीवास्तव ने दैनिक जागरण के साथ बतौर इंटर्न अपने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. उसके बाद यूपी के कई क्षेत्रीय चैनलों में काम किया. आजतक की पारी के दौरान आशीष ने लखनऊ के सैफुल्ला एनकाउंटर को सबसे तेज और पहले रिपोर्टिंग की थी. आशीष ने यूपी के डीजीपी सहित सभी बड़े राजनीतिक लीडर्स का इंटरव्यू किया है जिसमें बीजेपी, समाजवादी पार्टी ,बीएसपी और कांग्रेस के नेता शामिल हैं.
आशीष श्रीवास्तव आजतक में बतौर संवाददाता लखनऊ ब्यूरो में तैनात हैं. आशीष को पत्रकारिता में आठ साल का अनुभव है. आशीष श्रीवास्तव ने पत्रकारिता की डिग्री लेने के साथ ही अंग्रेजी में मास्टर्स किया है. आशीष श्रीवास्तव ने दैनिक जागरण के साथ बतौर इंटर्न अपने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. उसके बाद यूपी के कई क्षेत्रीय चैनलों में काम किया. आजतक की पारी के दौरान आशीष ने लखनऊ के सैफुल्ला एनकाउंटर को सबसे तेज और पहले रिपोर्टिंग की थी. आशीष ने यूपी के डीजीपी सहित सभी बड़े राजनीतिक लीडर्स का इंटरव्यू किया है जिसमें बीजेपी, समाजवादी पार्टी ,बीएसपी और कांग्रेस के नेता शामिल हैं.
ब्रह्मा की समानता को प्राप्त होता है। २३२ । जल, अन्न, गौ, भूमि, वस्त्र, तिल, सोना और घी इत्यादि जितने भो दान हैं, इन सब से ही बढ़ कर एक दान है, वह वेद का दान है। ( वेद का पढ़ाना, वेद का प्रचार करना, वैदिक धर्म में प्रवेशः कराना, मनुष्य जाति के कल्याण के लिए इस दान के बराबर और कोई दान नहीं है ) आचार व्यवहार आचारः परमो धर्मः श्रुत्युक्तः स्मार्त एव च । तस्मादस्मिन् सदा युक्तो नित्यं स्यादात्मवान् द्विजः ।। ( नुं १ । १०८ ) श्रुति स्मृति में बतलाया आचार परम धर्म है, इस लिएः आत्मवल के रखने वाले द्विज को सदा इस में सावधान रहना चाहिये । आचाराद्विच्युतो विप्रो न वेदफल मश्नुते । आचारेणतु संयुक्तः सम्पूर्णफलभाग्भवेत् १०९ आचार से गिरा हुआ ब्राह्मण वेद पढ़ने का फल नहीं पाता, जो आचार से युक्त है, वही वेद पढ़ने के सम्पूर्ण फल का भागी होता है । एवमाचारतो दृष्ट्वा धर्मस्य मुनयो गतिम् । सर्वस्य तपसो मूल माचारं जगृहुः परम् । ११० । इस प्रकार मुनिजनों ने धर्म की नींव को आचार के सहारे देख कर तप का उत्तम मूल जान आचार को ग्रहण किया। श्रुति स्मृत्युक्तं सम्यङ् निबद्धं स्वषु कर्मसु । धर्ममूलं निषेवेत सदाचार मतन्द्रितः ।। आचारालभते ह्यायुराचारादीप्सिताः प्रजाः । आचाराद्धनमक्षय्य माचारो हन्त्यलक्षणम् १५६ दुराचारो हि पुरुषो लोके भवति निन्दितः । दुःख भागी च सततं व्याधितोऽल्पायुरेव च १५७ सर्वलक्षण हीनोपियः सदाचारवान् नरः । श्रद्दधानोऽनसूयश्च शतं वर्षाणि जीवति ।१५८/वह सराचार जो अपने कर्मों ( काम धन्धों के साथ सम्बन्ध रखता है और श्रुति स्मृति में स्पष्ट बतलाया गया है, वह धर्म का मूल हैं, उस का अनथक होकर सेवन करें । १५५ । आचार से मनुष्य दीर्घ आयु पाता है, आचार से अच्छी संतान और अनखुट्ट धन पाता है । आचार मनुष्य के कुलक्षण को नष्ट कर देता है । १५६ । दुराचारी पुरुष लोक में निन्दित, सदा दुःख भागी, रोगी और अल्पायु होता है । १५७ । जो पुरुष सदाचारी है, श्रद्धा से भरा हुआ है, असूया से रहित है,
ब्रह्मा की समानता को प्राप्त होता है। दो सौ बत्तीस । जल, अन्न, गौ, भूमि, वस्त्र, तिल, सोना और घी इत्यादि जितने भो दान हैं, इन सब से ही बढ़ कर एक दान है, वह वेद का दान है। आचार व्यवहार आचारः परमो धर्मः श्रुत्युक्तः स्मार्त एव च । तस्मादस्मिन् सदा युक्तो नित्यं स्यादात्मवान् द्विजः ।। श्रुति स्मृति में बतलाया आचार परम धर्म है, इस लिएः आत्मवल के रखने वाले द्विज को सदा इस में सावधान रहना चाहिये । आचाराद्विच्युतो विप्रो न वेदफल मश्नुते । आचारेणतु संयुक्तः सम्पूर्णफलभाग्भवेत् एक सौ नौ आचार से गिरा हुआ ब्राह्मण वेद पढ़ने का फल नहीं पाता, जो आचार से युक्त है, वही वेद पढ़ने के सम्पूर्ण फल का भागी होता है । एवमाचारतो दृष्ट्वा धर्मस्य मुनयो गतिम् । सर्वस्य तपसो मूल माचारं जगृहुः परम् । एक सौ दस । इस प्रकार मुनिजनों ने धर्म की नींव को आचार के सहारे देख कर तप का उत्तम मूल जान आचार को ग्रहण किया। श्रुति स्मृत्युक्तं सम्यङ् निबद्धं स्वषु कर्मसु । धर्ममूलं निषेवेत सदाचार मतन्द्रितः ।। आचारालभते ह्यायुराचारादीप्सिताः प्रजाः । आचाराद्धनमक्षय्य माचारो हन्त्यलक्षणम् एक सौ छप्पन दुराचारो हि पुरुषो लोके भवति निन्दितः । दुःख भागी च सततं व्याधितोऽल्पायुरेव च एक सौ सत्तावन सर्वलक्षण हीनोपियः सदाचारवान् नरः । श्रद्दधानोऽनसूयश्च शतं वर्षाणि जीवति ।एक सौ अट्ठावन/वह सराचार जो अपने कर्मों ( काम धन्धों के साथ सम्बन्ध रखता है और श्रुति स्मृति में स्पष्ट बतलाया गया है, वह धर्म का मूल हैं, उस का अनथक होकर सेवन करें । एक सौ पचपन । आचार से मनुष्य दीर्घ आयु पाता है, आचार से अच्छी संतान और अनखुट्ट धन पाता है । आचार मनुष्य के कुलक्षण को नष्ट कर देता है । एक सौ छप्पन । दुराचारी पुरुष लोक में निन्दित, सदा दुःख भागी, रोगी और अल्पायु होता है । एक सौ सत्तावन । जो पुरुष सदाचारी है, श्रद्धा से भरा हुआ है, असूया से रहित है,
Most Admired Personalities : एक सर्वे के मुताबिक भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी दूसरे सबसे ज्यादा प्रशंसनीय व्यक्ति (Most Admired Personalities list) हैं। यह सर्व एक ब्रिटिश इंटरनेट-आधारित रिसर्च एंड डेटा एनालाइसिस फर्म YOUGOV ने कराया है, जिसमें 41 देशों के 42,000 लोगों ने भाग लिया। Most Admired Personalities list वर्ल्ड कप 2019 के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी क्रिकेट से दूर हैं। इस बीच उनके रिटायरमेंट की खबरें भी आई। हालांकि इसके बाद भी एमएस धोनी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी दूसरे सबसे ज्यादा प्रशंसनीय व्यक्ति (Most Admired Personalities list) हैं। यह सर्व एक ब्रिटिश इंटरनेट-आधारित रिसर्च एंड डेटा एनालाइसिस फर्म YOUGOV ने कराया है, जिसमें 41 देशों के 42,000 लोगों ने भाग लिया। इस सर्वे में दो कैटिगरीज (पुरुष और महिला) में दुनिया की सर्वाधिक प्रशंसनीय (मोस्ट ऐडमायर्ड) लोगों की लिस्ट तैयार की गई है। इस सर्वे के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया में सर्वाधिक प्रशंसनीय लोगों की लिस्ट में (पुरुष कैटिगरी में) छठे जबकि भारत में पहले स्थान पर हैं। भारतीय शख्सियतों में पीएम मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी का नाम शामिल है। यानि यहां धोनी ने भारतीय कप्तान विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे के मुताबिक भारत में पुरुषों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सबसे ज्यादा 15. 66 प्रतिशत लोगों ने प्रशंसनीय माना जबकि महेन्द्र सिंह धोनी 8. 58 प्रतिशत प्रशंसा अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहे। धोनी के बाद खेल जगत से महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को 5. 81 प्रतिशत जबकि विराट कोहली को 4. 46 प्रतिशत लोगों ने प्रशंसनीय माना। इस मामले में भारत में महिलाओं की बात करें तो स्टार मुक्केबाज मैरी कॉम ने सबको पीछे छोड़ दिया है। मैरी कॉम को 10. 36 प्रतिशत, किरण बेदी 9. 46 प्रतिशत, महान गायिका लता मंगेशकर 9. 23 प्रतिशत, बीजेपी की दिग्गज नेता सुषणा स्वराज 7. 13 प्रतिशत और एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को 6. 35 प्रतिशत लोग प्रशंसनीय मानते हैं।
Most Admired Personalities : एक सर्वे के मुताबिक भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी दूसरे सबसे ज्यादा प्रशंसनीय व्यक्ति हैं। यह सर्व एक ब्रिटिश इंटरनेट-आधारित रिसर्च एंड डेटा एनालाइसिस फर्म YOUGOV ने कराया है, जिसमें इकतालीस देशों के बयालीस,शून्य लोगों ने भाग लिया। Most Admired Personalities list वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी क्रिकेट से दूर हैं। इस बीच उनके रिटायरमेंट की खबरें भी आई। हालांकि इसके बाद भी एमएस धोनी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी दूसरे सबसे ज्यादा प्रशंसनीय व्यक्ति हैं। यह सर्व एक ब्रिटिश इंटरनेट-आधारित रिसर्च एंड डेटा एनालाइसिस फर्म YOUGOV ने कराया है, जिसमें इकतालीस देशों के बयालीस,शून्य लोगों ने भाग लिया। इस सर्वे में दो कैटिगरीज में दुनिया की सर्वाधिक प्रशंसनीय लोगों की लिस्ट तैयार की गई है। इस सर्वे के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया में सर्वाधिक प्रशंसनीय लोगों की लिस्ट में छठे जबकि भारत में पहले स्थान पर हैं। भारतीय शख्सियतों में पीएम मोदी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी का नाम शामिल है। यानि यहां धोनी ने भारतीय कप्तान विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे के मुताबिक भारत में पुरुषों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सबसे ज्यादा पंद्रह. छयासठ प्रतिशत लोगों ने प्रशंसनीय माना जबकि महेन्द्र सिंह धोनी आठ. अट्ठावन प्रतिशत प्रशंसा अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहे। धोनी के बाद खेल जगत से महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को पाँच. इक्यासी प्रतिशत जबकि विराट कोहली को चार. छियालीस प्रतिशत लोगों ने प्रशंसनीय माना। इस मामले में भारत में महिलाओं की बात करें तो स्टार मुक्केबाज मैरी कॉम ने सबको पीछे छोड़ दिया है। मैरी कॉम को दस. छत्तीस प्रतिशत, किरण बेदी नौ. छियालीस प्रतिशत, महान गायिका लता मंगेशकर नौ. तेईस प्रतिशत, बीजेपी की दिग्गज नेता सुषणा स्वराज सात. तेरह प्रतिशत और एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को छः. पैंतीस प्रतिशत लोग प्रशंसनीय मानते हैं।
(जी. एन. एस) ता. 24 नई दिल्ली इंफोसिस के भीतर व्हिसिलब्लोअर की शिकायत के बाद के घटनाक्रम पर सरकार नजर बनाए हुए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) कंपनी में कथित लेखा अनियमिताओं के मामले को देखेगा। एनएफआरए कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत काम करता है। यह ऑडिटिंग के पेशे का नियमन करने वाला एक स्वतंत्र नियामक है।
ता. चौबीस नई दिल्ली इंफोसिस के भीतर व्हिसिलब्लोअर की शिकायत के बाद के घटनाक्रम पर सरकार नजर बनाए हुए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण कंपनी में कथित लेखा अनियमिताओं के मामले को देखेगा। एनएफआरए कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत काम करता है। यह ऑडिटिंग के पेशे का नियमन करने वाला एक स्वतंत्र नियामक है।
2.2 किसी भी वर्ष बी.टेक. कार्यक्रम में प्रवेश भारत सरकार के आदेश के अनुसार होगा। वर्तमान में ये केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य और एचएससी परीक्षाओं में सीएसएबी द्वारा संबंधित वर्ष के लिए आयोजित काउंसलिंग के माध्यम से प्रदर्शन पर आधारित हैं। 2.3 संस्थान के किसी भी कार्यक्रम में अनंतिम रूप से या अन्यथा पंजीकृत प्रत्येक छात्र, सीनेट द्वारा निर्धारित योग्यता डिग्री/अनंतिम प्रमाण पत्र और ऐसे अन्य दस्तावेजों की प्रतियां प्रस्तुत करेंगे। इन दस्तावेजों को निर्धारित तिथि तक जमा करना होगा। किसी भी छात्र का प्रवेश, अनंतिम या अन्यथा, जो निर्धारित तिथि तक या तो आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता है या प्रवेश के लिए किसी अन्य निर्धारित आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहता है, संस्थान द्वारा रद्द किया जा सकता है। 2.4 यदि यह पाया जाता है कि छात्र ने प्रवेश के समय गलत जानकारी दी थी या कुछ प्रासंगिक जानकारी को दबा दिया था तो ऐसे किसी भी छात्र के प्रवेश को सीनेट द्वारा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है। 2.5 असंतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर या अनुशासनात्मक आधार पर संस्थान किसी भी छात्र के प्रवेश को रद्द करने का अधिकार रखता है और उसे उसके आजीविका के किसी भी चरण में पढ़ाई बंद करने के लिए कह सकता है। बीटीआर3: उपस्थिति और अनुपस्थिति का अवकाश 3.1 (क) छात्रों को सभी कक्षाओं (व्याख्यान, ट्यूटोरियल, प्रयोगशाला, प्रैक्टिकल, कार्यशालाओं आदि) में भाग लेना अपेक्षित है, जिसके लिए उन्हें पंजीकृत किया गया है। (ख) छात्रों को सभी कक्षाओं में भाग लेना होगा। छात्र को अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में उपस्थित होने से वंचित किया जा सकता है यदि कक्षा में उस की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है और फिर उस पाठ्यक्रम में "एफ" ग्रेड प्रदान किया जाएगा। अनुपस्थिति का अवकाश 3.2 (क) छात्रों से सेमेस्टर के दौरान संस्थान से दूर रहने की अपेक्षा नहीं की जाती है। (ख) छात्रों को निकट परिवार में मृत्यु जैसी स्थितियों में अनुपस्थिति की छुट्टी दी जा सकती है। इस तरह की छुट्टी किसी भी स्थिति में एक सप्ताह से अधिक नहीं होगी। (ग) बीमारी के कारण अनुपस्थिति का अवकाश उचित अनुमति लेने के बाद प्रदान किया जाएगा, जो की तीन सप्ताह से अधिक नहीं होगा। आपात स्थिति के कारण, इस तरह की अनुमति बाद में और आवश्यक होने पर अभिभावक द्वारा ली जा सकती है। (घ) यदि किसी सेमेस्टर में अनुपस्थिति की अवधि तीन सप्ताह से अधिक है, तो छात्र को अपने द्वारा पंजीकृत सभी पाठ्यक्रमों को छोड़ते हुए सेमेस्टर छोड़ना होगा। सीनेट केवल विशेष परिस्थितियों में लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और खोए हुए समय की पूर्ति करने की छात्र की क्षमता का पता लगाने के बाद ही इसकी अनुमति दे सकती है। (ड.) खंड 3.2 (क) से 3.2 (घ) के अनुसार अनुपस्थिति की छुट्टी को उपस्थिति के रूप में नहीं माना जाएगा। 3.3 छात्र की ज़िम्मेदारी होगी कि वह छात्रावास के वार्डन जिसमें वह निवास कर रहा / रही है, और संबंधित प्रशिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले अपनी अनुपस्थिति के बारे में बताए। बीटीआर4: आचरण और अनुशासन 4.1 छात्र संस्थान के दायरे के भीतर और बाहर राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के छात्रों की तरह आचरण करेंगे। 4.2 छात्र अनुशासन से संबंधित सभी मुद्दों के लिए, सामान्य दिशा निर्देश छात्र अनुशासन की पुस्तिका में बताए गए हैं। बीटीआर5: शाखा परिवर्तन 5.1 सामान्य रूप से, स्नातक कार्यक्रम की एक विशेष शाखा में भर्ती छात्र स्नातक होने तक उस शाखा में अध्ययन जारी रखेगा। 5.2 विशेष मामलों में, संस्थान दूसरे सेमेस्टर के बाद छात्र को पढ़ाई की एक शाखा से दूसरी शाखा बदलने की अनुमति दे सकता है। इस तरह के बदलाव की अनुमति इसके बाद के प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी। 5.3 केवल उन छात्रों को दूसरे सेमेस्टर के बाद शाखा / कार्यक्रम में बदलाव के लिए योग्य माना जाएगा, जिन्होंने पहले प्रयास में अपने अध्ययन के पहले दो सेमेस्टर में आवश्यक सभी सामान्य क्रेडिट को पूरा और उत्तीर्ण किया है। 5.4 इच्छुक पात्र छात्रों द्वारा शाखा / कार्यक्रम में परिवर्तन के लिए आवेदन निर्धारित प्रपत्र में भेजकर किया जाना चाहिए। शैक्षणिक अनुभाग प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के दूसरे सेमेस्टर के अंत में आवेदन मांगेगा और पूर्ण किए गए फॉर्म को अधिसूचना में निर्दिष्ट अंतिम तिथि तक जमा करना होगा। 5.5 छात्र वरीयता के क्रम में अपनी पसंद की शाखा / कार्यक्रम, जिसमें वे बदलाव करना चाहते हैं, को सूचीबद्ध कर सकते हैं। आवेदन जमा होने के बाद विकल्पों में फेरबदल करने की अनुमति नहीं होगी। 5.6 शाखा / कार्यक्रम का परिवर्तन आवेदकों की वरीयता के क्रम में कड़ाई से किया जाएगा। इस प्रयोजन के लिए दूसरे सेमेस्टर के अंत में प्राप्त सीपीआई पर विचार किया जाएगा। टाई के मामले में, आवेदकों की जेईई रैंक पर विचार किया जाएगा। 5.7 आवेदकों को शाखा में बदलाव की अनुमति केवल वरीयता के क्रम से ही दी जा सकती है, बशर्ते कि एक शाखा की छात्र संख्या मौजूदा छात्र संख्या से दस प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए और स्वीकृत से दस प्रतिशत ऊपर नहीं जानी चाहिए। 5.8 उपरोक्त नियमों के अनुसार संबंधित आवेदकों के किए गए शाखा के सभी परिवर्तन तीसरे सेमेस्टर से प्रभावी होंगे। इसके बाद किसी भी शाखा / कार्यक्रम में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। 5.9 शाखा के सभी परिवर्तन अंतिम और आवेदकों पर बाध्यकारी होंगे। एक बार शाखा में परिवर्तन मंज़ूर होने के बाद, किसी भी छात्र को किसी भी परिस्थिति में, प्रस्तावित शाखा में परिवर्तन से इनकार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बीटीआर6 पाठ्यक्रम संरचना संस्थान में शिक्षा अध्ययन के सेमेस्टर-आधारित क्रेडिट प्रणाली के अनुसार आयोजित की जाती है। छात्र को पाठ्यक्रम की कक्षाओं में भाग लेने और इसके लिए क्रेडिट अर्जित करने की अनुमति केवल तभी है जब वह उस पाठ्यक्रम के लिए पंजीकृत हो । क्रेडिट सिस्टम की प्रमुख विशेषता एक छात्र के प्रदर्शन / प्रगति के निरंतर मूल्यांकन की प्रक्रिया है जो एक छात्र को उसकी क्षमता या सुविधा के अनुकूल उपयुक्त गति से प्रगति करने की अनुमति देता है, बशर्ते निरंतरता के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं को डिग्री के पूरा करने की अधिकतम स्वीकार्य अवधि के भीतर पूरा किया जाए। छात्र के प्रदर्शन / प्रगति को उस क्रेडिट की संख्या से मापा जाता है जिसे उसने अर्जित किया है, अर्थात् संतोषजनक तरीके से पूरा किया है। छात्र द्वारा प्राप्त पाठ्यक्रम क्रेडिट और ग्रेड के आधार पर ग्रेड प्वाइंट की गणना की जाती है। कार्यक्रम में संतोष जनक प्रगति और निरंतरता के लिए न्यूनतम ग्रेड बिंदु बनाए रखने की आवश्यकता है। डिग्री के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए अर्जित क्रेडिट की न्यूनतम संख्या और न्यूनतम ग्रेड बिंदु भी हासिल किए जाने चाहिए। 6.1 पाठ्यक्रमों के शिक्षण को क्रेडिट में बदला जाएगा; क्रेडिट निम्नलिखित सामान्य पैटर्न के आधार पर पाठ्यक्रमों को दिए गए प्रति सप्ताह 1 घंटा व्याख्यान (एल) प्रति सप्ताह 1 घंटे का ट्यूटोरियल (टी) प्रति सप्ताह 2 घंटे प्रयोगशाला (पी) प्रति सप्ताह 3 घंटे प्रयोगशाला (पी)
दो.दो किसी भी वर्ष बी.टेक. कार्यक्रम में प्रवेश भारत सरकार के आदेश के अनुसार होगा। वर्तमान में ये केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार संयुक्त प्रवेश परीक्षा मुख्य और एचएससी परीक्षाओं में सीएसएबी द्वारा संबंधित वर्ष के लिए आयोजित काउंसलिंग के माध्यम से प्रदर्शन पर आधारित हैं। दो.तीन संस्थान के किसी भी कार्यक्रम में अनंतिम रूप से या अन्यथा पंजीकृत प्रत्येक छात्र, सीनेट द्वारा निर्धारित योग्यता डिग्री/अनंतिम प्रमाण पत्र और ऐसे अन्य दस्तावेजों की प्रतियां प्रस्तुत करेंगे। इन दस्तावेजों को निर्धारित तिथि तक जमा करना होगा। किसी भी छात्र का प्रवेश, अनंतिम या अन्यथा, जो निर्धारित तिथि तक या तो आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता है या प्रवेश के लिए किसी अन्य निर्धारित आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहता है, संस्थान द्वारा रद्द किया जा सकता है। दो.चार यदि यह पाया जाता है कि छात्र ने प्रवेश के समय गलत जानकारी दी थी या कुछ प्रासंगिक जानकारी को दबा दिया था तो ऐसे किसी भी छात्र के प्रवेश को सीनेट द्वारा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है। दो.पाँच असंतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर या अनुशासनात्मक आधार पर संस्थान किसी भी छात्र के प्रवेश को रद्द करने का अधिकार रखता है और उसे उसके आजीविका के किसी भी चरण में पढ़ाई बंद करने के लिए कह सकता है। बीटीआरतीन: उपस्थिति और अनुपस्थिति का अवकाश तीन.एक छात्रों को सभी कक्षाओं में भाग लेना अपेक्षित है, जिसके लिए उन्हें पंजीकृत किया गया है। छात्रों को सभी कक्षाओं में भाग लेना होगा। छात्र को अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में उपस्थित होने से वंचित किया जा सकता है यदि कक्षा में उस की उपस्थिति पचहत्तर प्रतिशत से कम है और फिर उस पाठ्यक्रम में "एफ" ग्रेड प्रदान किया जाएगा। अनुपस्थिति का अवकाश तीन.दो छात्रों से सेमेस्टर के दौरान संस्थान से दूर रहने की अपेक्षा नहीं की जाती है। छात्रों को निकट परिवार में मृत्यु जैसी स्थितियों में अनुपस्थिति की छुट्टी दी जा सकती है। इस तरह की छुट्टी किसी भी स्थिति में एक सप्ताह से अधिक नहीं होगी। बीमारी के कारण अनुपस्थिति का अवकाश उचित अनुमति लेने के बाद प्रदान किया जाएगा, जो की तीन सप्ताह से अधिक नहीं होगा। आपात स्थिति के कारण, इस तरह की अनुमति बाद में और आवश्यक होने पर अभिभावक द्वारा ली जा सकती है। यदि किसी सेमेस्टर में अनुपस्थिति की अवधि तीन सप्ताह से अधिक है, तो छात्र को अपने द्वारा पंजीकृत सभी पाठ्यक्रमों को छोड़ते हुए सेमेस्टर छोड़ना होगा। सीनेट केवल विशेष परिस्थितियों में लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और खोए हुए समय की पूर्ति करने की छात्र की क्षमता का पता लगाने के बाद ही इसकी अनुमति दे सकती है। खंड तीन.दो से तीन.दो के अनुसार अनुपस्थिति की छुट्टी को उपस्थिति के रूप में नहीं माना जाएगा। तीन.तीन छात्र की ज़िम्मेदारी होगी कि वह छात्रावास के वार्डन जिसमें वह निवास कर रहा / रही है, और संबंधित प्रशिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले अपनी अनुपस्थिति के बारे में बताए। बीटीआरचार: आचरण और अनुशासन चार.एक छात्र संस्थान के दायरे के भीतर और बाहर राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के छात्रों की तरह आचरण करेंगे। चार.दो छात्र अनुशासन से संबंधित सभी मुद्दों के लिए, सामान्य दिशा निर्देश छात्र अनुशासन की पुस्तिका में बताए गए हैं। बीटीआरपाँच: शाखा परिवर्तन पाँच.एक सामान्य रूप से, स्नातक कार्यक्रम की एक विशेष शाखा में भर्ती छात्र स्नातक होने तक उस शाखा में अध्ययन जारी रखेगा। पाँच.दो विशेष मामलों में, संस्थान दूसरे सेमेस्टर के बाद छात्र को पढ़ाई की एक शाखा से दूसरी शाखा बदलने की अनुमति दे सकता है। इस तरह के बदलाव की अनुमति इसके बाद के प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी। पाँच.तीन केवल उन छात्रों को दूसरे सेमेस्टर के बाद शाखा / कार्यक्रम में बदलाव के लिए योग्य माना जाएगा, जिन्होंने पहले प्रयास में अपने अध्ययन के पहले दो सेमेस्टर में आवश्यक सभी सामान्य क्रेडिट को पूरा और उत्तीर्ण किया है। पाँच.चार इच्छुक पात्र छात्रों द्वारा शाखा / कार्यक्रम में परिवर्तन के लिए आवेदन निर्धारित प्रपत्र में भेजकर किया जाना चाहिए। शैक्षणिक अनुभाग प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के दूसरे सेमेस्टर के अंत में आवेदन मांगेगा और पूर्ण किए गए फॉर्म को अधिसूचना में निर्दिष्ट अंतिम तिथि तक जमा करना होगा। पाँच.पाँच छात्र वरीयता के क्रम में अपनी पसंद की शाखा / कार्यक्रम, जिसमें वे बदलाव करना चाहते हैं, को सूचीबद्ध कर सकते हैं। आवेदन जमा होने के बाद विकल्पों में फेरबदल करने की अनुमति नहीं होगी। पाँच.छः शाखा / कार्यक्रम का परिवर्तन आवेदकों की वरीयता के क्रम में कड़ाई से किया जाएगा। इस प्रयोजन के लिए दूसरे सेमेस्टर के अंत में प्राप्त सीपीआई पर विचार किया जाएगा। टाई के मामले में, आवेदकों की जेईई रैंक पर विचार किया जाएगा। पाँच.सात आवेदकों को शाखा में बदलाव की अनुमति केवल वरीयता के क्रम से ही दी जा सकती है, बशर्ते कि एक शाखा की छात्र संख्या मौजूदा छात्र संख्या से दस प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए और स्वीकृत से दस प्रतिशत ऊपर नहीं जानी चाहिए। पाँच.आठ उपरोक्त नियमों के अनुसार संबंधित आवेदकों के किए गए शाखा के सभी परिवर्तन तीसरे सेमेस्टर से प्रभावी होंगे। इसके बाद किसी भी शाखा / कार्यक्रम में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। पाँच.नौ शाखा के सभी परिवर्तन अंतिम और आवेदकों पर बाध्यकारी होंगे। एक बार शाखा में परिवर्तन मंज़ूर होने के बाद, किसी भी छात्र को किसी भी परिस्थिति में, प्रस्तावित शाखा में परिवर्तन से इनकार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बीटीआरछः पाठ्यक्रम संरचना संस्थान में शिक्षा अध्ययन के सेमेस्टर-आधारित क्रेडिट प्रणाली के अनुसार आयोजित की जाती है। छात्र को पाठ्यक्रम की कक्षाओं में भाग लेने और इसके लिए क्रेडिट अर्जित करने की अनुमति केवल तभी है जब वह उस पाठ्यक्रम के लिए पंजीकृत हो । क्रेडिट सिस्टम की प्रमुख विशेषता एक छात्र के प्रदर्शन / प्रगति के निरंतर मूल्यांकन की प्रक्रिया है जो एक छात्र को उसकी क्षमता या सुविधा के अनुकूल उपयुक्त गति से प्रगति करने की अनुमति देता है, बशर्ते निरंतरता के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं को डिग्री के पूरा करने की अधिकतम स्वीकार्य अवधि के भीतर पूरा किया जाए। छात्र के प्रदर्शन / प्रगति को उस क्रेडिट की संख्या से मापा जाता है जिसे उसने अर्जित किया है, अर्थात् संतोषजनक तरीके से पूरा किया है। छात्र द्वारा प्राप्त पाठ्यक्रम क्रेडिट और ग्रेड के आधार पर ग्रेड प्वाइंट की गणना की जाती है। कार्यक्रम में संतोष जनक प्रगति और निरंतरता के लिए न्यूनतम ग्रेड बिंदु बनाए रखने की आवश्यकता है। डिग्री के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए अर्जित क्रेडिट की न्यूनतम संख्या और न्यूनतम ग्रेड बिंदु भी हासिल किए जाने चाहिए। छः.एक पाठ्यक्रमों के शिक्षण को क्रेडिट में बदला जाएगा; क्रेडिट निम्नलिखित सामान्य पैटर्न के आधार पर पाठ्यक्रमों को दिए गए प्रति सप्ताह एक घंटाटा व्याख्यान प्रति सप्ताह एक घंटाटे का ट्यूटोरियल प्रति सप्ताह दो घंटाटे प्रयोगशाला प्रति सप्ताह तीन घंटाटे प्रयोगशाला
- सिद्धार्थ शुक्ला के जाने से शहनाज गिल पर टूटा दुखों का पहाड़। - शहनाज गिल के सेट पर लौटने की उम्मीद। - जल्द शुरू कर सकती हैं अपने नए प्रोजेक्ट की शूटिंग। Shehnaaz Gill Can Start Shooting for Her New Project: जाने-माने अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला (Sidharth Shukla) के जाने से अभिनेत्री शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जब से सिद्धार्थ शुक्ला की मौत हुई है तब से शहनाज गिल बुरे दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में खबर मिली थी कि शहनाज गिल ना कुछ खा रहीं हैं और ना किसी से बात कर रही हैं। शहनाज गिल की यह हालत देखकर उनके साथ भी उनके लिए काफी दुखी हैं। लेकिन उनके फैंस उन्हें फिर से सेट पर देखना चाहते हैं। दर्शक उनके सेट पर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, हाल ही में फिल्म हौसला रख (Honsla Rakh) के प्रोड्यूसर ने शहनाज गिल से जुड़ी एक बड़ी बात साझा की है। क्या जल्द सेट पर लौटेंगी शहनाज गिल? पंजाबी फिल्म हौसला रख के प्रोड्यूसर ने हाल ही में अपनी फिल्म और शहनाज गिल से जुड़ी कुछ बातें साझा की हैं। उन्होंने यह बताया कि उनकी फिल्म हौसला रख की शूटिंग लंदन में होनी थी। मगर, शहनाज गिल की यह हालत देखकर फिल्म की शूटिंग को कैंसिल कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ ठीक रहता तो यह शूटिंग लंदन में 15 सितंबर से शुरू कर दी जाती। उन्होंने यह जानकारी दी है कि इस फिल्म की शूटिंग के लिए नई डेट का फैसला जल्द लिया जाएगा। यह डेट शहनाज गिल से बात करने के बाद ही तय होगी। फिलहाल वह अभी शहनाज गिल के मैनेजर के साथ बात कर रहे हैं। हौसला रख फिल्म में शहनाज गिल के साथ दिलजीत दोसांज नजर आएंगे। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शहनाज गिल जल्द सेट पर लौट सकती हैं। शहनाज और सिद्धार्थ शुक्ला बिग बॉस 13 में एक दूसरे के करीब आए थे। दोनों के बीच में होने वाली मीठी नोंक-झोंक दर्शकों को बेहद पसंद आती थी।
- सिद्धार्थ शुक्ला के जाने से शहनाज गिल पर टूटा दुखों का पहाड़। - शहनाज गिल के सेट पर लौटने की उम्मीद। - जल्द शुरू कर सकती हैं अपने नए प्रोजेक्ट की शूटिंग। Shehnaaz Gill Can Start Shooting for Her New Project: जाने-माने अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के जाने से अभिनेत्री शहनाज गिल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जब से सिद्धार्थ शुक्ला की मौत हुई है तब से शहनाज गिल बुरे दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में खबर मिली थी कि शहनाज गिल ना कुछ खा रहीं हैं और ना किसी से बात कर रही हैं। शहनाज गिल की यह हालत देखकर उनके साथ भी उनके लिए काफी दुखी हैं। लेकिन उनके फैंस उन्हें फिर से सेट पर देखना चाहते हैं। दर्शक उनके सेट पर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, हाल ही में फिल्म हौसला रख के प्रोड्यूसर ने शहनाज गिल से जुड़ी एक बड़ी बात साझा की है। क्या जल्द सेट पर लौटेंगी शहनाज गिल? पंजाबी फिल्म हौसला रख के प्रोड्यूसर ने हाल ही में अपनी फिल्म और शहनाज गिल से जुड़ी कुछ बातें साझा की हैं। उन्होंने यह बताया कि उनकी फिल्म हौसला रख की शूटिंग लंदन में होनी थी। मगर, शहनाज गिल की यह हालत देखकर फिल्म की शूटिंग को कैंसिल कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ ठीक रहता तो यह शूटिंग लंदन में पंद्रह सितंबर से शुरू कर दी जाती। उन्होंने यह जानकारी दी है कि इस फिल्म की शूटिंग के लिए नई डेट का फैसला जल्द लिया जाएगा। यह डेट शहनाज गिल से बात करने के बाद ही तय होगी। फिलहाल वह अभी शहनाज गिल के मैनेजर के साथ बात कर रहे हैं। हौसला रख फिल्म में शहनाज गिल के साथ दिलजीत दोसांज नजर आएंगे। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शहनाज गिल जल्द सेट पर लौट सकती हैं। शहनाज और सिद्धार्थ शुक्ला बिग बॉस तेरह में एक दूसरे के करीब आए थे। दोनों के बीच में होने वाली मीठी नोंक-झोंक दर्शकों को बेहद पसंद आती थी।
बान फू वान और " आणधिक फ्ल्यू " वहाँ के स्कूल का अध्यापक, फ्या वोंग इस बीच मेरे पास बना रहा । वह युवक बुद्धिमान जान पड़ता था। उसने हमें बताया कि उसने इसी गॉव में जन्म लिया था परन्तु शिक्षा उसने १९५४ में उत्तरी वियत नाम में पायी थी । इस बात से मेरी जिज्ञासा जागी क्योंकि साम्यवादियों का आम रवैया है कि प्रत्येक दूरवर्ती गाँव से वे एक अत्यंत बुद्धिमान लड़का चुन लेते हैं, चीन या उत्तरी वियत नाम में कुछ समय उसे शिक्षा देते हैं ( यानी साम्यवाद की ) और मास्टर बना कर उसे वापस उसके गाँव में भेज देते हैं। चाओ खुओंग हमेशा कहता था कि लाओस में ये "अध्यापक " साम्यवादियों के सबसे सक्रिय एजेंट है । फ्या वोंग फ्रांसीसी बोल सकता था । अत्यंत आकर्षक उसके तौर-तरीके थे और उसने हमें बहुत सहयोग दिया। परन्तु राजनीति पर वह किसी प्रकार से भी बातचीत करने को तैयार नहीं हुआ। चूँकि गाँव में वह सबसे अधिक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था, इसलिए मैं बहुत सी ज़रूरी और बुनियादी दवाइयाँ उसे दे आया। उसने भी वचन दिया कि भविष्य में वह गम्भीर रोगियों को नाम था के अस्पताल भेजता रहेगा । मुझे बिलकुल नहीं मालूम कि हमारे प्रति उसके क्या विचार थे, परन्तु कम कम बाक़ी गाँव वालों की तरह उसे भी अब इतना तो मालूम हो गया था कि सभी गौरांग राक्षसी स्वभाव के नहीं होते । लौटत हुए घाटी के तल के पास एक आदमी ने हमें रोका । उसने हमसे अपने बच्चे को देखने की विनती की । उसके कथनानुसार बच्चे को " सिर का रोग था। रास्ते से कुछ ही हट कर उसका गाँव था और उसमें पूरी दस झोंपड़ियाँ भी नहीं थीं। हम उसके साथ हो लिये । दृढ़ क़दमों से और तेजी के साथ वह हमें रास्त दिखाते हुए आगे-आगे चलने लगा, परन्तु वह डरा हुआ था । आखिर हम उसके गाँव पहुॅचे जो मृत्यु की गोद में सोया-सा जान पड़ता था। उसकी झोंपड़ी में तेल में का दिया जल रहा था । एक अंधेरे कोने की ओर उसने उंगली उठायी और कहा"नी " । वहाँ उसका लड़का लेटा था । चार बरस का बालक दीन कुत्ते की तरह मिमिया रहा था। मैंने उसकी परीक्षा की। उसे मस्तिष्क का एक रोग था और उसकी मॉसपेशियों पूर्णतया निष्क्रिय हो गयी थीं। उसकी टॉगें और बॉहें गॉठदार लकड़ियों जैसी हो रही थीं । उसके फूले हुए पेट से पता चलता था कि उसमें कीड़ों ने राज जमा रखा था। लड़का एक चटाई पर अपने पेशाब में पड़ा था । वास्तविकता से उसका कोई सम्पर्क नहीं रहा गया था। उसके मस्तिष्क के क्षति प्रस्त होने के लक्षण स्पष्ट थे । १३२ मैं उस बालक के लिए कुछ भी नहीं कर सकता था। निरापद और साफ़-सुथरे आधुनिक अमरीकी अस्पतालों के आशाओं के भंडार में भी मुझे उसके लिए कोई आशा दिखायी नहीं देती थी। मैंने यथासम्भव स्थिति को स्पष्ट किया । उस आदमी ने मेरी राय को दार्शनिक की तरह भवितव्यता के रूप में स्वीकार किया। अपने पुत्र के लिए उसकी अन्तिम आशा मुझ गौरांग ओझा पर टिकी हुई थी । यह सोच कर कि मुझे रोगी से उसकी आशा की अन्तिम किरण नहीं छीननी चाहिए, में स्थिति का पूर्णतया अंधकारमय चित्रण करने से डरता था । मैंने आशा का थोड़ा-सा प्रकाश क़ायम रखने का प्रयत्न किया, परन्तु मेरी आत्मा मुझे ज्यादा उम्मीद बँधाने से रोक रही थी। उस आदमी ने बताया कि गाँव में इस तरह के मरीज़ अनेक हैं । बाद में मैंने जान और बाब के साथ इस रोग के बारे में विचार विनिमय किया और हम इस निष्कर्ष पर पहुॅचे कि यह कोई पारिवारिक रोग होगा । अंधेरा पड़ने से पहले ही हम उस डेरे पर पहुँच गये जहाँ हमने साइकिलें छोड़ी थीं। पिछली रात जंगल में सोने के बाब के प्रयत्नों की बात याद करके हम तीनों ने साइकिलों से सीधे नाम था चले जाने का फ़ैसला किया । मज़दूर और किउ टट्टुओं और सामान के साथ अगले दिन आने वाले थे । रात पड़ने में लगभग एक घंटे की देर थी । हमने सोचा कि हम इतनी देर में पहुँच जायेंगे । लगभग एक घंटे तक हम चलते रहे । हम अपनी दुखती हुई टाँगों से जितनी तेज़ हो सकती थी उतनी तेज़ साइकिलें चला रहे थे । मड़क सूखी हुई थी; कभी कहीं पानी रास्ते पर जमा मिल जाता था । एक जगह पर रास्ते की तंगी को देखते हुए हम ढाल पर बहुत ज्यादा तेज़ी से चले जा रहे थे । रास्ते के एक तरफ़ सैकड़ों फ़ीट गहरा खड्ड था । एक मोड़ लेते हुए साइकिल मेरे काबू से बाहर हो गयी । पहिये फिसल गये और मैं हैंडल के ऊपर से ज़मीन पर आ गिरा। पेट के बल मैं सड़क पर फिसला चला जा रहा था और ठीक सामने था खड्ड । मुझे इतना याद है कि मैने अपनी गति को रोकने के लिए बाँहें फैला कर हाथ ज़मीन में गड़ाये । इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं है । क्षण भर बाद मेरी चेतना लौट आयी। उस समय मैं सड़क के सिरे पर पड़ा था, परन्तु था सड़क पर ही । मेरा सीना और पेट बुरी तरह छिल गया था। मेरी क़मीज़ का सामने का हिस्सा रक्त और धूल से सना हुआ था। मैंने अपने हाथ पर नज़र डाली और यह देख कर घबरा गया कि बाँयें हाथ का अंगूठा कलाई से नव्वे अंश का कोण बना रहा था । अँगूठा अपनी जगह से हट गया था और कलाई की बान फू वान और " आणविक फ्ल्यू एक हट्टी टूट गयी थी । मुझे याद आया कि इस हालत में क्या करना चाहिए । जितने ज़ोर में हो सकता था उतने जोर मे मैने अँगूठे को आहिस्ता-आहिस्ता खींचा। दर्द से जान तो निकल-सी गयी लेकिन अँगूठा ठिकाने पर आ गया । इतनी देर में बाब और जान भी मोड़ पार आ गये । मेरी टूटी-फूटी साइकिल से बचने के प्रयत्न में उन्होंने कठिनाई से अपनी साइकिले रोकीं। उनके मुँह से इतना ही निकला, " भाग्यवान हो जो खड्ड में नहीं गिरे।" एकाएक हमें खयाल आया कि मुझे किसी डाक्टर के पास जाना होगा और एक्स-रे कराना होगा। लेकिन इस इलाके में डाक्टर सिर्फ़ मैं था और एक्स-रे की मशीन हमारे पास थी नहीं । डाक्टर को खुद अपना इलाज न करने की तालीम दी जाती है । लेकिन टूटी हुई और अपने स्थान से हटी हड्डी को बैठाना ज़रूरी था। एक डाक्टर के लिए जिसके कि पेशे में हाथों का बहुत महत्त्व रहता है, इस तरह की चोट बहुत भयावह थी । परन्तु वान फू वान के मार्ग में डा. टामस इली की यह चोट लाओस कार्रवाई " की कहानी में अत्यन्त तुच्छ चीज़ थी । साइकिल कुछ मुड़ गयी थी। उसे हमने पत्थर से ठोक कर सीधा किया । रोगियों की परिचर्या का मेरा छोटा बैग साइकिल के पीछे बँधा हुआ था। अपने हाथ को जो तेज़ी से सूजता जा रहा था, बैग से इलास्टिक की पट्टी निकाल कर बाँधा और हम वहाँ से चल पड़े । इस यात्रा के अन्तिम तीस मिनटों में बरसात भी खूब जोर से होती रही । जिस समय हम नाम था पहुँचे उस समय अधेरा हो चुका था । सी सीढ़ियों पर बैठा हुआ हमारा इंतज़ार कर रहा था । उसका मन उससे कह रहा था कि हम एक दिन पहले ही लौट आयेंगे। अपने लौटने की उस झुटपुटी घड़ी में हमें अपना घर बहुत प्यारा और भला मालूम हुआ । मै खून और धूल में सना हुआ था और मेरे हाथ में बड़ी-सी पट्टी बँधी थी । बाब थकावट से और खटमलों के काटने से इतना शक्ति-हीन हो गया था कि उसके लिए सरकना भी दूभर था । जान थकान से संज्ञा - शून्य हो रहा था । कोई घंटे भर हम फ़र्श पर ही पड़े रहे । सी ने वहीं हमें काफ़ी दी । आखिर हम तीनों ने बारी-बारी से स्नान किया और बिस्तर पर पड़ गये । मेरा हाथ दर्द कर रहा था, सूजन बढ़ती जा रही थी और मैं सोच रहा था कि एक्स-रे की मशीन तक पहुॅचूंगा कहाँ और कैसे ? आखिर पहुँचना नहीं ही हुआ । प्लास्टर, भाग्य और भगवान की कृपा ने मेरा हाथ ठीक किया और जोड़ में खराबी नहीं आयी । अगले दिन सुबह जल्दी ही हम अस्पताल पहुँचे । सारे गाँव में आह चान की अन्त्येष्टि की शानदार तैयारियाँ की जा रही थीं। परन्तु जब आह चान की मृत्यु का कारण हमें ज्ञात हुआ तो हम हैरान रह गये । नाम था में हर आदमी को मालूम था कि आह चान की जिस रोग से मृत्यु हुई थी उसका नाम था " किआ एटोमिक " ( आणविक ज्वर ) जिसका साधारणतया अर्थ हो सकता है आणविक फ्ल्यू ! सबसे पहले स्वयं चाओ खुओंग ने हमें इसके विषय में बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह बिल्कुल मूर्खतापूर्ण बात है । वह जानता था कि कोई भी बुखार या इन्फ़्लूएंजा बिजली की सी इस तेजी से प्राण नहीं से ले सकता । उसने बताया कि यह अफ़वाह आग की तरह फैली थी और सबको इस पर विश्वास था । अफवाह शुरू कैसे हुई ? सारे नाम था में कुल दो या तीन रेडियो थे । हमारे घर में सी ने शपथ ले कर कहा कि रेडियो पोकिंग पर यह समाचार नहीं आया था । हमारे छोटे-से रेडियो पर केवल यही स्टेशन सुना जा सकता था ! सारे प्रान्त में एक मात्र शक्तिशाली रेडियो चाओ खुओंग के यहाँ था और उसने बताया कि किसी भी स्टेशन से उसने " किआ एटोमिक" की चर्चा नहीं सुनी थी । आह चान की अन्त्येष्टि के संस्कार नौ दिन तक होते रहे । हरकारे सब तरफ़ खबर देने दौड़ाये गये थे और दूर-दूर के गाँवों से सम्बन्धी और मित्र नाम था आये थे । शोक की यह लम्बी अवधि बहुत ही अजीब थी । बौद्ध भिक्षु प्रार्थना करने के साथ सुगंधित बत्तियाँ जलाते जाते थे, शोक प्रकट करने वाले रोते थे, संगीतज्ञ अपने वाद्य और मंजीरे बजाते थे तथा बहुत रात गये तक खाना-पीना होता रहता था । अन्त में नवें दिन आह चान का शव लाओस की प्राचीन धार्मिक राजधानी लुआंग परबंग की तरफ़ सिर करके लकड़ी के एक मंच पर रखा गया और उसे अग्नि दी गयी । परन्तु " किआ एटोमिक " की चर्चाी उस अग्नि की लपटों के साथ समाप्त नहीं हुई । आश्चर्य की बात है कि इसी समय, १९५७ की जून में पश्चिमी जगत एशियाई फ़्ल्यू में चिन्तित था । दूर पूर्व के इस कोने में जिसका संसार के संवाद-वाहन साधनों से कोई सम्बंध न था, किसी व्यक्ति ने उस इंफ़्लूएंजा के एक ऐसे प्रतिरूप का आविष्कार कर डाला था जिसकी उत्पत्ति अमरीका में हुई थी । मैं मानता हूँ कि यह सूक्ष्म प्रचार का आदर्श उदाहरण था, और गौरांगों की डाक्टरी सहायता पर करारा वार था, क्योंकि डाक्टरी सहायता नाम-था में बहुत लोकप्रिय हो रही थी । आह चान की आकस्मिक मृत्यु, बान फू वान के पास पहाड़ों में उस बालक की मरणासन्न अवस्था, जिसके कि रोग के सामने पूर्णतया असमर्थ रहा था, मेरे हाथ की चोट, हमारी यात्रा की थकान, और इस बात पर हीनता का अनुभव कि हमारे सामने जो काम पड़ा था उसके मुकाबले हमारी सफलताएँ कितनी तुच्छ थीं, लाखों आदमियों के लिए हम कुछ नहीं कर सकते थे- इन घटनाओं और चीज़ों ने मुझे निराजा के गहरे गर्त के किनारे ला पटका । तभी एक पत्र आया । इस समय मुझे उसीकी आवश्यकता थी । मेरे डाक्टरी स्कूल के भूतपूर्व अध्यक्ष, डा. मेल्विन कास्बर्ग का पत्र था वह । उन्होंने लिखा- "टाम, तुम्हारे सामने गहन निराशा के क्षण भी आयेंगे, जब तुम्हें इस विशाल कार्यक्षेत्र में अपने तमाम प्रयत्न उपेक्षणीय प्रतीत होंगे। लेकिन यह याद रखना, टाम, कि मानवता की प्रगति के प्रत्येक चरण का उद्गम, खोजने पर, किसी एक व्यक्ति, किसी छोटे-से समूह में दिखायी देगा । इसलिए हिम्मत मत हारना, और जैसा कई बरस पहले सेंट पाल ने कहा था, 'अपने विश्वास को अडिग रखना' । " अध्याय १० नदी से यात्रा करने का सुझाव जान डीविटी का था। जब नाम था से प्रस्थान करने का समय निकट आने लगा तब उसने प्रस्ताव किया कि सीधे वियंतियेन जाने के बजाय हम लोग छोटी-छोटी नौकाओं में नाम था नदी से प्रस्थान करें और रास्ते में अलग से पड़े हुए गाँवों में रोगियों को देखते चलें । चाओ खुओंग ने इस योजना का तीव्र विरोध किया। उसका कहना था कि नदी का मार्ग खतरनाक था और यात्रा के योग्य नहीं था । इसके अतिरिक्त उस मार्ग में पड़नेवाले गाँवों के लोग गोरे लोगों से शत्रुता रखते थे । उसने कहा कि उसके जेलखाने में अधिकांश राजनीतिक बन्दी उसी इलाक़ के थे ; स्वयं उसके सैनिक शान्ति और व्यवस्था के लिए नदी में कुछ मील से अधिक दूर जाने का साहस नहीं करते थे । फिर उसे इसमें सन्देह था कि हमें इस यात्रा के लिए नाविक भी मिल सकेंगे जो अपने को खतरे में डालने को तैयार हों । १३६ मैन डा. औदोम को सन्देश भेजा और उन्होंने तुरन्त स्वीकृति दे दी । बूढ़े गवर्नर ने तुरन्त हथियार डाल दिये और कहा कि उस पर अब कोई जिम्मेदारी न थी । फिर भी उसने सशस्त्र रक्षकों का एक अग्रगामी दल भेजने की व्यवस्था की और चार बन्दूक-धारी हमारे साथ जाने को तैनात किये । हमें एक विशेष प्रकार की नौकाओं से जाना था। ये नौकाएँ कोई बारह फ्रीट लम्बी होती हैं। सिर्फ़ इसी प्रकार की नौकाऍ नदी के तेज प्रवाह में चल सकती थीं । नाविकों के विषय में गवर्नर की बात बिलकुल सही निकली; नाविक तय करने में हमें बहुत कठिनाई हुई । किसी भी नाविक ने पहले यह यात्रा नहीं की थी; फिर डाकुओं और तेज बहाव का खतरा था और इनके ऊपर मौसम बरसात का था । इसलिए घनघोर बरसात का मुक़ाबला करना था । किसी तरह कुछ अतिरिक्त पैसे के लालच और चाओ खुओंग के दबाव से काम बन गया। जान ने तीन नावें तय कर लीं। प्रत्येक में चार-चार नाविक थे । दो नाव को खेने के लिए बीच में बैठते थे; बाक़ी दो दोनों सिरों पर खड़े हो कर लम्बे-लम्बे चप्पुओं से नाव को मोड़ते थे । हमने दवाइयों, भोजन-सामग्री और डेरे लगाने के समान को तीनों नावों में इस प्रकार वॉटा कि यदि कोई नाव डूब भी जाय तो हमें खाने, सोने और मरीजों को देखने में कोई कठिनाई न हो । प्रस्थान के लिए सूर्योदय का समय निश्चित किया गया था परन्तु लाओ रीति-नीति के अनुसार व दोपहर से कुछ पहले ही हम चल सके। हम समय पर तैयार हो कर अपने सामान के साथ नौकाओं पर पहुँच गये। प्रमुख नाविक कुछ मिनटों में आने वाला था परन्तु आया एक घंटे के बाद आया भी तो उसने हमें देखा और यह कह कर चल दिया कि काग़ज़ लाने के लिए उसे वापस चाओ खुओंग के पास जाना पड़ेगा । दुभाषियों का कहना था कि नाविकों की हिम्मत जवाब दे रही थी : लुटेरों और नदी के खतरों से व परिचित थे अतः ये ; नतरे उठाने के लिए ज्यादा मेहनताना चाहते थे। मैं उन्हें दोष नहीं दे सकता । नाविक आख़िर गवर्नर के पास से लौटे और हमने एक बार फिर अपने उन दस-बारह मित्रों से विदा ली जो पेड़ों के नीचे बैठ कर अपने को हल्की-हल्की बरसात से बचाने के प्रयत्न कर रहे थे। मैं एक नाव के बीच में बनी हुई बाँस की झोंपड़ी में जा बैठा और नाविकों के आ जाने के बाद मैंने नौसेना के तरीके से लंगर उठाने का आदेश दिया; परन्तु लंगर उठा नहीं। अमरीकियों और नाविकों ने सारा सामान नावों में जिस ढंग मे जमाया था वह प्रमुख नाविक को जँचा नहीं । अतः सारा सामान उतारा गया और वज़न के बारे में प्रमुख नाविक के सुझाव तथा मूल्य के बारे में मेरी आज्ञा के अनुसार उसे वापस चढ़ाया गया । इस तरह । आखिर सामान की लदाई पूरी हुई और हम अच्छी तरह दुआ-बंदगी किये बिना ही किनारा छोड़ कर चल दिये। अब तक बारिश जोर से होने लगी थी और चार दिन तक नहीं रुकी । बरसात में भीगते हुए मित्रों से हमने हाथ हिला कर बिदा ली । जल के तेज बहाव में पहले दिन की यात्रा जितनी खतरनाक रही उतनी ही दिलचस्प भी । दो-दो नाविक हर नौका में अगले और पिछले सिरों पर खड़े हो कर लम्बे-लम्बे चप्पुओं से नावें को इधर-उधर मोड़ते जाते थे । दो-दो नाविक बैठे हुए छोटे चम्पुओं से नावें खे रहे थे। उन्हें चप्पू बहुत नहीं चलाने पड़ते थे क्योंकि नदी की धारा ही हमें बहाये लिये जा रही थी। नावें लहरों पर डोलती हुई चली जा रही थीं। यह सोच कर कि हम लोग ही नहीं हमारा सामान भी सुकुमार होगा, नाविकों ने नौकाओं में ताड़ के पत्तों को छतें-सी बना दी थीं । नाव के गीले फ़र्श पर इनके नीचे किसी तरह बैठा जा सकता था । ये ढालू छतें हमारा सिर छूती थीं । अविराम वर्षा में इतना बचाव भी बहुत था, परन्तु कुछ ही समय में बरसात का पानी छतों के पार आने लगा और हम भीग गये; उस छत के नीचे बैठना या खुले में बैठना बराबर हो गया । तीन घंटे सफ़र करने के बाद हमने पहला क़याम किया । नाविक नौकाओं से उतर कर पानी को पार करके जंगल में गये, इस उद्देश्य से कि नावों की बगल में लगाने के लिए कुछ हरे बाँस काट लायें । नावें बुरी तरह हिचकोले खा रही थीं इसलिए बाँस लगाना जरूरी जान पड़ता था । बहाव अनुमान से कहीं ज्यादा तेज था । यहाँ नदी के किनारा था ही नहीं । बरसात की बाढ़ से पानी इतना बढ़ गया था कि बड़ी-बड़ी झाड़ियों और पेड़ नदी के पाट में आ गये थे और किनारों की जगह केवल पेड़ दिखायी देते थे जिन पर कई फ़ीट ऊँचा पानी चढ़ा हुआ था। जब हमें किसी तरह पहला ढालू किनारा दिखायी दिया तो एक बार फिर हमने नावें रोकीं । इस बार हमें अपना अत्यन्त मूल्यवान सामान लेकर उतरना पड़ा। हम पैदल घने जंगल में चल पड़े। हम जल के किनारे-किनारे चल रहे थे और नौकाएँ तेज बहाव में चल रही थीं; कहीं चट्टानों से टकराती थीं, कहीं लकड़ी के लड़ों के बीच से गुजरती थीं। जल के सफ़ेद घने झाग ने उन्हें घेर रखा था। एकाएक वे जल के न. प्र. ५ एक शान्त भाग में आ पहुँचीं और नाविकों ने उन्हें जल के किनारे लगा दिया । हम कैमरा और दूसरा सामान अपने सिरों पर उठाये हुए घुटनों घुटनों पानी में खड़े थे । ऊपर से बारिश गिर रही थी। इस तरह कभी नाव से उतर कर और कभी नाव में चढ़ कर, रुकते और चलते हुए पहला दिन पूरा हुआ । बरसात बराबर होती रही । पहली रात हम एक छोटे गाँव में पहुँचे । उस समय वहाँ केवल कुछ बूढ़ी औरतें ही थीं । अपने चार बन्दूकधारी सैनिकों के साथ हम डाक्टरी सहायता देने वाले परोपकारी दल के बदले कोई आक्रमणकारी दल ही प्रतीत होते थे । औरतें डर गयीं । उन्होंने बताया कि पुरुष जंगल में शिकार के लिए गये हैं और कुछ देर बाद लौटेंगे । हमने उनसे कहा कि हमें तो सिर छुपाने को एक खाली झोंपड़ी की ज़रूरत है ताकि हम अपने कपड़े वगैरा सुखा कर भोजन की व्यवस्था कर सकें । गाँव भी टूटी-फूटी अतिथिशाला हमें दिखा दी गयी। किसी तरह हमने हाथ-मुँह धोये, आग के पास बैठ कर कपड़े सुखाये, अपना वही सी राशन का खाना गर्म करके भोजन किया । फिर तुरन्त ही हमनें मच्छरदानियाँ लगायीं और बिस्तर खोल कर निद्रा देवी की गोद में चले गये । रात को गर्मी पहुँचाने वाली शराब और पुख्ता जमीन के सपने देखते रहे । सुबह झोंपड़ी के पास गाँव वालों की भीड़ जमा होने की आवाजों से मेरी नींद टूटी । हमें किसी क़िस्म का भय न था, क्योंकि यह गाँव नाम-था के काफ़ी नजदीक था और हमें मालूम था कि यहाँ के कई आदमी हमारे अस्पताल आ चुके थे । कुछ पुराने बीमारों को हमने पहचाना । यहाँ ज्यादा लोगों को डाक्टरी इलाज की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि ये लोग अक्सर नाम था आया करते थे । यद्यपि मौसम में जरा भी सुधार नहीं हुआ, फिर भी हमारी यात्रा दसगुनी अधिक रोचक हो गयी। हम गहरी घाटियों से गुजर रहे थे, परन्तु किनारों पर यहाँ ऊँची-ऊँची चट्टानें नहीं थीं, हरे-भरे विशाल जंगल खड़े थे । हम अपनी-अपनी नावों में बैठे हुए अपने साथियों को बार-बार पुकारते और कहते जाते थे - "देखो, कैसा जानवर है वह ! उसे देखा, कौन सी चिड़िया थी वह ? बन्दर तो नहीं था ?" वगैरह । उस रोज हमने कई गाँवों में मुकाम किया। एक गाँव में हमने अपना वही भोजन किया । नदी के किनारे का हर गाँव अपने अलग रोग से पीड़ित था । कोई भी रोग ऐसा न लगता था जो एक से दूसरे गाँव आया हो या आ सकता हो । ये गाँव एक-दूसरे से बिलकुल असम्बद्ध हैं। इनमें परस्पर न व्यापार होता है न आवागमन । जहाँ तक प्रगति का प्रश्न है यह स्थिति हानिकर है, तथापि इससे यह लाभ भी है कि संक्रामक रोग नहीं फैल पाते। कुछ गाँवों में हैजा कुछ में पेचिश । खुजली, दाद, बेरी-बेरी, सभी गाँवों में समान रूप से फैले हुए थे। मुझमें कभी नही आयेगी । हमने दूसरी रात जिस गाँव में काटने का फ़ैसला किया था, उसके बारे में हमारा नयाल था कि वहाँ विरोधी प्रचार ने कुछ असर किया होगा । इसलिए हम कुछ शंकित थे। गाँव बहुत गरीब था और बहुत ही अलग पड़ता था । नाम-था से भी उसका सम्बंध न था । जंगल की बग़ल से चल कर हम गाँव पहुँचे । एक पहाड़ से सट कर वह बसा हुआ था । हमने मुखिया के घर का पता पूछा । हमें रास्ता बता कर सारा गाँव ही हमारे पीछे-पीछे उस ओर को चल दिया। एकाएक एक आदमी अपने लड़के को लेकर भीड़ से बाहर निकल आया । लगता था कि वह आदमी गाँव का कोई प्रमुख व्यक्ति था । हमारे पास आ कर वह घुटनों के बल बैठ गया। अपने हाथ अपने मुख के सामने कर के वह हमें धन्यवाद देने लगा और अपने गाँव में उसने हमारा स्वागत किया । नाम-था में शुरू के दिनों में हमने उसके लड़के के 'क्काशिओरकोर' रोग का इलाज किया था । हमने लड़के को स्वस्थ कर के पिता को रोग की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय बता दिये थे । लड़के ने जान के पास आ कर अपने हाथ उसकी कमर में डाल दिये । उसके मन में किसी प्रकार का डर न था क्योंकि मेरे साथियों की दया- ममता का उसे अनुभव चुका था। इससे गॉव में तुरन्त ही हमारे प्रति सद्भावना पैदा हो गयी और तास्सीएँग ने अपने घर की सीढ़ियों पर आ कर हमें अन्दर बुला लिया। यह बूढ़ा तास्सीऍग खूब आदमी था। उससे हमने कई सवाल पूछे। हमने पूछा कि अपने गाँव में कभी पहले भी उसने गोरे लोग देखे थे । उसने कहा - " नहीं । फिर हमने पूछा कि उसे या उसके परिवार के दूसरे लोगों को जो सब वहीं बैठे थे, हम कुछ अजीब लोग तो नहीं दिखायी देते । उसने ईमानदारी से जवाब दिया - " हाँ " जैसे-जैसे सन्ध्या बीतती गयी उन लोगों के प्रति हमारी और हमारे प्रति उन लोगों की दिलचस्पी बढ़ती गयी । हमने उससे पूछा कि उसने अपने गाँव में चीनी लोग भी कभी देखे थे या नहीं। उसने जवाब दिया - " हाँ ; चीनी लोग यहाँ अक्सर आते हैं, पर हाल में कुछ दिनों से नहीं आये हैं । " मैंने पूछा - " कब से ? " बूढ़े ने बताया - " यही कोई दस मौसमों से । " यदि इस गाँव में प्रचार हो रहा था तो इस क़बीले के लोग ही कर रहे थे, चीनी लोग नहीं । बहुत बार साम्यवादियों ने उत्तरी लाओस के क़बायली युवकों और युवनियों को चाँदी का लोभ देकर युन्नान और कैंटन बुलाया था । उन चीनी प्रदेशों में धीरे-धीरे और नर्मी से, लेकिन दृढ़तापूर्वक साम्यवादी धारणाएँ उनके मस्तिष्क में बैठायी जाती थी । साम्यवादी इन लोगों को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाते थे और विशेषतया प्रगति " के सपने दिखाते थे । इन युवकों और युवतियों के मन में यह विश्वास बैठ जाता था कि ये नये भूमि सुधारक उनके पिछड़े हुए गाँवों का कुछ हित करेंगे । तब वे अपने पूर्वजों के गाँवों को लौट कर असत्य के प्रचारक बन जाते थे। अपने गाँवों के अज्ञानी लोगों से वे कहते थे - " हम स्कूल बनायेंगे। हमें पढ़ना-लिखना आता है और हम चाहते हैं कि आप लोग भी ज्ञान प्राप्त करें । " और भोले-भाले लोग ज्ञान प्राप्त करने की लालसा ले कर उन्हें सहयोग प्रदान करते थे । इन गाँववालों को राजनीतिक क्षेत्र को किसी भी बात का पता नहीं है । उन्हें मालूम नहीं है कि दुनिया में कैसी खाई पड़ गयी है । दो विभिन्न विचारधाराओं का उन्हें जरा भी ज्ञान नहीं है - एक ईश्वर के प्रति आस्था रखने वालों की और दूसरी अनीश्वरवादियों की। उन्हें खयाल तक नहीं है कि अमरीका क्या है और कहाँ है ? इन लोगों के मन में घृणा पैदा करना कठिन है। यह इस देश की रीति है कि गाँव में जो भी अतिथि आये उसका आदर-सत्कार करना चाहिए। आम तौर पर गाँव का कोई बड़ा-बूढ़ा चाँदी के एक बर्तन में पुष्प, मोमबत्तियाँ और भेंट की अन्य वस्तुएँ ले कर हमारा स्वागत करने के लिए नदी पर उपस्थित रहता था । इस छोटे से गाँव में एक अनोखापन था; इसमें चलने वालों के लिए मार्ग पर पटरी बनी हुई थी । सारे देश में मैंने सिर्फ़ इस गाँव में ही ये पटरियाँ देखीं । एक खास बात यह थी कि यहाँ पटरी सड़क के बीच में थी । बरसात से सड़क पर इतना ज्यादा और गहरा कीचड़ हो गया था कि गाँव वालों ने सड़क के बीच ऊँचा रास्ता बना दिया था । उसके दोनों किनारों पर मुंडेर भी लगी थी । मिट्टी के ढेले और पत्थर जमा कर यह पटरी बनायी गयी थी, ताकि चलने वालों के पैर रपटने से बचे रहें । इन लोगों को हम अमरीकी दर्शनीय वस्तु लग रहे थे । हमारा डिब्बे खोल कर भोजन बनाने का सामान निकालना, खाना पकाना, कुछ अजीब से उपकरणों से भोजन करना, काफ़ी का काला पाउडर, दूध का सफेद पाउडर, और शक्कर मिला कर उसमें खौलता हुआ पानी डाल कर काफ़ी बनाना - यह सब विचित्र रंग-ढंग देख कर उन्हें बड़ा आनन्द आ रहा था; जिसने ये चीजें पहले कभी न देखी हों उसके लिए हैं भी बहुत अजीब । इन गॉव वालों के लिए हम संसार की सबसे मनोरंजक और दर्शनीय चीज़ थे तथा हमारी औषधियों का चमत्कार अत्यंत ग्राह्य । उन्होंने हमारे बारे में थोड़ी-बहुत बातें सुन रखी थीं और हमें सशरीर देखने को वे उत्सुक थे । इस गाँव में कई लोग रोगों से पीड़ित थे, परन्तु लाओस में मानसिक रोगों का नामो-निशान भी नहीं था। अपने साल भर के आवास में मैंने वहाँ मामूली से मानसिक रोग का भी कोई रोगी नहीं देखा । प्राचीन नक्शे के अनुसार नेल गाँव पर हमारा आधा रास्ता तय होता था । तीसरे दिन तीसरे प्रहर के बाद हम इस गाँव में पहुॅचे। दूसरे गाँवों जैसा ही यह गाँव था, कुछ बड़ा ज़रूर था और पुलिस की चौकी भी थी इसमें । बरसात तो हो ही रही थी । उस बरसात में ही गाँव का मुखिया हमारा स्वागत करने आया । इस आदमी को लिखना और पढ़ना आता था और फ्रांसीसी भाषा भी थोड़ी-बहुत बोल लेता था । काफ़ी बड़ा और बढ़िया मकान था उसका । फ्रांसीसी प्रशासन के ज़माने में कई बरस वह राजधानी वियंतियेन में रह चुका था। उसके मकान से लगा हुआ था छोटा-सा औषधालय, जिसमें एक पुरुष नर्स के रूप में नियुक्त था, लेकिन जिसके पास दवा के नाम पर एस्पिरिन, कुनैन और पट्टियाँ भी नहीं थीं। कानूनी रूप से वह शाही राज्य के जन स्वास्थ्य विभाग के मातहत था, परन्तु नियमित रूप से उसके पास दवाइयाँ आदि पहुँचाने का कोई उपाय ही नहीं था । शाही सरकार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में दवाइयाँ और सामान भेजने से डरती थी कि कहीं वे चीजें लुटेरों के हाथ में न पड़ जायें । में यहाँ हम बहुत रात गये तक रोगियों को देखते रहे । एक औरत के गाँठ थी; एक लड़के की आँख में वह बीमारी थी जिसमें आंख की पुतली सफ़ेद और उभरी हुई गोली- सी बन जाती है; कंठमाला कई औरतों के थी ; और एक पुरुष हर्निया ( आंत उतर जाने की बीमारी ) से पीड़ित था । मैंने दवाओं के कई बक्स उस पुरुष नर्स को दे दिये । वह काफ़ी बुद्धिमान जान पड़ता था । उसने हमारा बहुत आभार माना । यहाँ की सारी बातें हमने बाद में मंत्री महोदय को बतायीं । मुखिया ने हमें भोजन कराया। भोजन में हमारी अपनी चीजें भी शामिल थीं । भोजन करने के बाद हमें अतिथि कक्ष में ठहराया गया । रक्षकों के अग्रगामी दल ने उसे हमारे आगमन की सूचना पहले से दे दी थी, इसलिए उसने हमारे लिए चारपाइयाँ बनवा दी थीं । " ये अजीब गोरे आम लोगों की तरह पत्तों की चटाइयाँ बिछा कर फ़र्श पर नहीं सोते । न जाने क्यों ये अपने गद्दे एक लकड़ी के चौखटे पर बिछाते हैं और उसे चारपाई कहते हैं । " उसने यह चारपाइयाँ हमारे लिए बनवायी थीं, परन्तु नाप में गड़बड़ हो गयी थी । वे चौड़ी इतनी ही थीं कि उन पर आदमी चाहे पेट के बल, चाहे पीठ के बल चुपचाप सीधा पड़ा रह सकता था । करवट लेने की कोशिश करता तो सीधा ज़मीन पर आता । छः फ़ुट लम्बे बाब बेचारे की रात बड़ी मुश्किल में बीती । अगले दिन सुबह जल्दी ही हम वहाँ से चल दिये। कई घंटों के बाद एक नाव बड़ी तेज़ी से हमारा पीछा करती हुई आती दिखायी दी । जब वह हमारे करीब पहुँच गयी, तो उसमें बैठे हुए आदमी ने हमें बताया कि वह नेल के उत्तर में कहीं रहता था । नेल में उसकी बहन रहती थी। रात को हमारे पहुँचने पर उसकी बहन को जब मालूम हुआ कि हम लोग ही नाम-था के वे गौरांग डाक्टर हैं, जिनकी चर्चा वहाँ भी लोगों ने सुन रखी थी, तब वह तुरन्त अपने भाई के गाँव को पैदल ही रवाना हो गयी और उसे साथ ले कर सुबह वापस पहुँची । लेकिन तब तक हम लोग रवाना हो चुके थे । अतः एक नाव ले कर वे हमारे पीछे आये । उस आदमी की लड़की मरणासन्न अवस्था में थी । नदी और जंगल के कारण आस-पास कहीं ठहरना सम्भव न था। इसलिए हम अगले गाँव तक चलते गये । वहाँ वह आदमी अपनी पुत्री को अतिथिगृह में लाया । उसे बहुत खतरनाक क़िस्म का निमोनिया था। उसकी सॉस में अतिम क्षणों की घरघराहट सुनायी दे रही थी। उसके दिल की धड़कनें इतनी धीमी पड़ गयी थीं कि बहुत मुश्किल से उन्हें सुन पाया । उसके होठ आक्सीजन की कमी से नीले पड़ गये थे । हमने उसके लिए भरसक कोशिश की, उसे दवाइयाँ दीं, और अन्त में उसके पिता को कई दिन तक इलाज जारी रखने के लिए पर्याप्त औषधियाँ दे दीं । मैं जानता था कि वह सारा इलाज बेकार था क्योंकि उसका जीवित रहना सम्भव न था। उसकी आयु केवल तीन वर्ष, यानी मेरी भतीजी की आयु के बराबर थी । वह रात हमने खा-खो गाँव में गुज़ारी। यह छोटा-सा गाँव घृणाजनक था । यहाँ हम पर सबको वास्तव में सन्देह था। गाँव के हर बच्चे को कुक्कुर खाँसी हो रही थी। रात का वातावरण उस खाँसी की आवाज़ों से गूँज रहा था । हमारे पास - टेट्रामाइसीन' जो इस रोग की रामबाण औषधि है, बहुत थी; परन्तु बच्चों के गले में अचल रूप से अटका हुआ ऐसा कफ़ मैंने और कहीं नहीं देखा । रात जागते हुए कटी और सुबह हम अपना सामान लाद कर चल पड़े।
बान फू वान और " आणधिक फ्ल्यू " वहाँ के स्कूल का अध्यापक, फ्या वोंग इस बीच मेरे पास बना रहा । वह युवक बुद्धिमान जान पड़ता था। उसने हमें बताया कि उसने इसी गॉव में जन्म लिया था परन्तु शिक्षा उसने एक हज़ार नौ सौ चौवन में उत्तरी वियत नाम में पायी थी । इस बात से मेरी जिज्ञासा जागी क्योंकि साम्यवादियों का आम रवैया है कि प्रत्येक दूरवर्ती गाँव से वे एक अत्यंत बुद्धिमान लड़का चुन लेते हैं, चीन या उत्तरी वियत नाम में कुछ समय उसे शिक्षा देते हैं और मास्टर बना कर उसे वापस उसके गाँव में भेज देते हैं। चाओ खुओंग हमेशा कहता था कि लाओस में ये "अध्यापक " साम्यवादियों के सबसे सक्रिय एजेंट है । फ्या वोंग फ्रांसीसी बोल सकता था । अत्यंत आकर्षक उसके तौर-तरीके थे और उसने हमें बहुत सहयोग दिया। परन्तु राजनीति पर वह किसी प्रकार से भी बातचीत करने को तैयार नहीं हुआ। चूँकि गाँव में वह सबसे अधिक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था, इसलिए मैं बहुत सी ज़रूरी और बुनियादी दवाइयाँ उसे दे आया। उसने भी वचन दिया कि भविष्य में वह गम्भीर रोगियों को नाम था के अस्पताल भेजता रहेगा । मुझे बिलकुल नहीं मालूम कि हमारे प्रति उसके क्या विचार थे, परन्तु कम कम बाक़ी गाँव वालों की तरह उसे भी अब इतना तो मालूम हो गया था कि सभी गौरांग राक्षसी स्वभाव के नहीं होते । लौटत हुए घाटी के तल के पास एक आदमी ने हमें रोका । उसने हमसे अपने बच्चे को देखने की विनती की । उसके कथनानुसार बच्चे को " सिर का रोग था। रास्ते से कुछ ही हट कर उसका गाँव था और उसमें पूरी दस झोंपड़ियाँ भी नहीं थीं। हम उसके साथ हो लिये । दृढ़ क़दमों से और तेजी के साथ वह हमें रास्त दिखाते हुए आगे-आगे चलने लगा, परन्तु वह डरा हुआ था । आखिर हम उसके गाँव पहुॅचे जो मृत्यु की गोद में सोया-सा जान पड़ता था। उसकी झोंपड़ी में तेल में का दिया जल रहा था । एक अंधेरे कोने की ओर उसने उंगली उठायी और कहा"नी " । वहाँ उसका लड़का लेटा था । चार बरस का बालक दीन कुत्ते की तरह मिमिया रहा था। मैंने उसकी परीक्षा की। उसे मस्तिष्क का एक रोग था और उसकी मॉसपेशियों पूर्णतया निष्क्रिय हो गयी थीं। उसकी टॉगें और बॉहें गॉठदार लकड़ियों जैसी हो रही थीं । उसके फूले हुए पेट से पता चलता था कि उसमें कीड़ों ने राज जमा रखा था। लड़का एक चटाई पर अपने पेशाब में पड़ा था । वास्तविकता से उसका कोई सम्पर्क नहीं रहा गया था। उसके मस्तिष्क के क्षति प्रस्त होने के लक्षण स्पष्ट थे । एक सौ बत्तीस मैं उस बालक के लिए कुछ भी नहीं कर सकता था। निरापद और साफ़-सुथरे आधुनिक अमरीकी अस्पतालों के आशाओं के भंडार में भी मुझे उसके लिए कोई आशा दिखायी नहीं देती थी। मैंने यथासम्भव स्थिति को स्पष्ट किया । उस आदमी ने मेरी राय को दार्शनिक की तरह भवितव्यता के रूप में स्वीकार किया। अपने पुत्र के लिए उसकी अन्तिम आशा मुझ गौरांग ओझा पर टिकी हुई थी । यह सोच कर कि मुझे रोगी से उसकी आशा की अन्तिम किरण नहीं छीननी चाहिए, में स्थिति का पूर्णतया अंधकारमय चित्रण करने से डरता था । मैंने आशा का थोड़ा-सा प्रकाश क़ायम रखने का प्रयत्न किया, परन्तु मेरी आत्मा मुझे ज्यादा उम्मीद बँधाने से रोक रही थी। उस आदमी ने बताया कि गाँव में इस तरह के मरीज़ अनेक हैं । बाद में मैंने जान और बाब के साथ इस रोग के बारे में विचार विनिमय किया और हम इस निष्कर्ष पर पहुॅचे कि यह कोई पारिवारिक रोग होगा । अंधेरा पड़ने से पहले ही हम उस डेरे पर पहुँच गये जहाँ हमने साइकिलें छोड़ी थीं। पिछली रात जंगल में सोने के बाब के प्रयत्नों की बात याद करके हम तीनों ने साइकिलों से सीधे नाम था चले जाने का फ़ैसला किया । मज़दूर और किउ टट्टुओं और सामान के साथ अगले दिन आने वाले थे । रात पड़ने में लगभग एक घंटे की देर थी । हमने सोचा कि हम इतनी देर में पहुँच जायेंगे । लगभग एक घंटे तक हम चलते रहे । हम अपनी दुखती हुई टाँगों से जितनी तेज़ हो सकती थी उतनी तेज़ साइकिलें चला रहे थे । मड़क सूखी हुई थी; कभी कहीं पानी रास्ते पर जमा मिल जाता था । एक जगह पर रास्ते की तंगी को देखते हुए हम ढाल पर बहुत ज्यादा तेज़ी से चले जा रहे थे । रास्ते के एक तरफ़ सैकड़ों फ़ीट गहरा खड्ड था । एक मोड़ लेते हुए साइकिल मेरे काबू से बाहर हो गयी । पहिये फिसल गये और मैं हैंडल के ऊपर से ज़मीन पर आ गिरा। पेट के बल मैं सड़क पर फिसला चला जा रहा था और ठीक सामने था खड्ड । मुझे इतना याद है कि मैने अपनी गति को रोकने के लिए बाँहें फैला कर हाथ ज़मीन में गड़ाये । इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं है । क्षण भर बाद मेरी चेतना लौट आयी। उस समय मैं सड़क के सिरे पर पड़ा था, परन्तु था सड़क पर ही । मेरा सीना और पेट बुरी तरह छिल गया था। मेरी क़मीज़ का सामने का हिस्सा रक्त और धूल से सना हुआ था। मैंने अपने हाथ पर नज़र डाली और यह देख कर घबरा गया कि बाँयें हाथ का अंगूठा कलाई से नव्वे अंश का कोण बना रहा था । अँगूठा अपनी जगह से हट गया था और कलाई की बान फू वान और " आणविक फ्ल्यू एक हट्टी टूट गयी थी । मुझे याद आया कि इस हालत में क्या करना चाहिए । जितने ज़ोर में हो सकता था उतने जोर मे मैने अँगूठे को आहिस्ता-आहिस्ता खींचा। दर्द से जान तो निकल-सी गयी लेकिन अँगूठा ठिकाने पर आ गया । इतनी देर में बाब और जान भी मोड़ पार आ गये । मेरी टूटी-फूटी साइकिल से बचने के प्रयत्न में उन्होंने कठिनाई से अपनी साइकिले रोकीं। उनके मुँह से इतना ही निकला, " भाग्यवान हो जो खड्ड में नहीं गिरे।" एकाएक हमें खयाल आया कि मुझे किसी डाक्टर के पास जाना होगा और एक्स-रे कराना होगा। लेकिन इस इलाके में डाक्टर सिर्फ़ मैं था और एक्स-रे की मशीन हमारे पास थी नहीं । डाक्टर को खुद अपना इलाज न करने की तालीम दी जाती है । लेकिन टूटी हुई और अपने स्थान से हटी हड्डी को बैठाना ज़रूरी था। एक डाक्टर के लिए जिसके कि पेशे में हाथों का बहुत महत्त्व रहता है, इस तरह की चोट बहुत भयावह थी । परन्तु वान फू वान के मार्ग में डा. टामस इली की यह चोट लाओस कार्रवाई " की कहानी में अत्यन्त तुच्छ चीज़ थी । साइकिल कुछ मुड़ गयी थी। उसे हमने पत्थर से ठोक कर सीधा किया । रोगियों की परिचर्या का मेरा छोटा बैग साइकिल के पीछे बँधा हुआ था। अपने हाथ को जो तेज़ी से सूजता जा रहा था, बैग से इलास्टिक की पट्टी निकाल कर बाँधा और हम वहाँ से चल पड़े । इस यात्रा के अन्तिम तीस मिनटों में बरसात भी खूब जोर से होती रही । जिस समय हम नाम था पहुँचे उस समय अधेरा हो चुका था । सी सीढ़ियों पर बैठा हुआ हमारा इंतज़ार कर रहा था । उसका मन उससे कह रहा था कि हम एक दिन पहले ही लौट आयेंगे। अपने लौटने की उस झुटपुटी घड़ी में हमें अपना घर बहुत प्यारा और भला मालूम हुआ । मै खून और धूल में सना हुआ था और मेरे हाथ में बड़ी-सी पट्टी बँधी थी । बाब थकावट से और खटमलों के काटने से इतना शक्ति-हीन हो गया था कि उसके लिए सरकना भी दूभर था । जान थकान से संज्ञा - शून्य हो रहा था । कोई घंटे भर हम फ़र्श पर ही पड़े रहे । सी ने वहीं हमें काफ़ी दी । आखिर हम तीनों ने बारी-बारी से स्नान किया और बिस्तर पर पड़ गये । मेरा हाथ दर्द कर रहा था, सूजन बढ़ती जा रही थी और मैं सोच रहा था कि एक्स-रे की मशीन तक पहुॅचूंगा कहाँ और कैसे ? आखिर पहुँचना नहीं ही हुआ । प्लास्टर, भाग्य और भगवान की कृपा ने मेरा हाथ ठीक किया और जोड़ में खराबी नहीं आयी । अगले दिन सुबह जल्दी ही हम अस्पताल पहुँचे । सारे गाँव में आह चान की अन्त्येष्टि की शानदार तैयारियाँ की जा रही थीं। परन्तु जब आह चान की मृत्यु का कारण हमें ज्ञात हुआ तो हम हैरान रह गये । नाम था में हर आदमी को मालूम था कि आह चान की जिस रोग से मृत्यु हुई थी उसका नाम था " किआ एटोमिक " जिसका साधारणतया अर्थ हो सकता है आणविक फ्ल्यू ! सबसे पहले स्वयं चाओ खुओंग ने हमें इसके विषय में बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह बिल्कुल मूर्खतापूर्ण बात है । वह जानता था कि कोई भी बुखार या इन्फ़्लूएंजा बिजली की सी इस तेजी से प्राण नहीं से ले सकता । उसने बताया कि यह अफ़वाह आग की तरह फैली थी और सबको इस पर विश्वास था । अफवाह शुरू कैसे हुई ? सारे नाम था में कुल दो या तीन रेडियो थे । हमारे घर में सी ने शपथ ले कर कहा कि रेडियो पोकिंग पर यह समाचार नहीं आया था । हमारे छोटे-से रेडियो पर केवल यही स्टेशन सुना जा सकता था ! सारे प्रान्त में एक मात्र शक्तिशाली रेडियो चाओ खुओंग के यहाँ था और उसने बताया कि किसी भी स्टेशन से उसने " किआ एटोमिक" की चर्चा नहीं सुनी थी । आह चान की अन्त्येष्टि के संस्कार नौ दिन तक होते रहे । हरकारे सब तरफ़ खबर देने दौड़ाये गये थे और दूर-दूर के गाँवों से सम्बन्धी और मित्र नाम था आये थे । शोक की यह लम्बी अवधि बहुत ही अजीब थी । बौद्ध भिक्षु प्रार्थना करने के साथ सुगंधित बत्तियाँ जलाते जाते थे, शोक प्रकट करने वाले रोते थे, संगीतज्ञ अपने वाद्य और मंजीरे बजाते थे तथा बहुत रात गये तक खाना-पीना होता रहता था । अन्त में नवें दिन आह चान का शव लाओस की प्राचीन धार्मिक राजधानी लुआंग परबंग की तरफ़ सिर करके लकड़ी के एक मंच पर रखा गया और उसे अग्नि दी गयी । परन्तु " किआ एटोमिक " की चर्चाी उस अग्नि की लपटों के साथ समाप्त नहीं हुई । आश्चर्य की बात है कि इसी समय, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन की जून में पश्चिमी जगत एशियाई फ़्ल्यू में चिन्तित था । दूर पूर्व के इस कोने में जिसका संसार के संवाद-वाहन साधनों से कोई सम्बंध न था, किसी व्यक्ति ने उस इंफ़्लूएंजा के एक ऐसे प्रतिरूप का आविष्कार कर डाला था जिसकी उत्पत्ति अमरीका में हुई थी । मैं मानता हूँ कि यह सूक्ष्म प्रचार का आदर्श उदाहरण था, और गौरांगों की डाक्टरी सहायता पर करारा वार था, क्योंकि डाक्टरी सहायता नाम-था में बहुत लोकप्रिय हो रही थी । आह चान की आकस्मिक मृत्यु, बान फू वान के पास पहाड़ों में उस बालक की मरणासन्न अवस्था, जिसके कि रोग के सामने पूर्णतया असमर्थ रहा था, मेरे हाथ की चोट, हमारी यात्रा की थकान, और इस बात पर हीनता का अनुभव कि हमारे सामने जो काम पड़ा था उसके मुकाबले हमारी सफलताएँ कितनी तुच्छ थीं, लाखों आदमियों के लिए हम कुछ नहीं कर सकते थे- इन घटनाओं और चीज़ों ने मुझे निराजा के गहरे गर्त के किनारे ला पटका । तभी एक पत्र आया । इस समय मुझे उसीकी आवश्यकता थी । मेरे डाक्टरी स्कूल के भूतपूर्व अध्यक्ष, डा. मेल्विन कास्बर्ग का पत्र था वह । उन्होंने लिखा- "टाम, तुम्हारे सामने गहन निराशा के क्षण भी आयेंगे, जब तुम्हें इस विशाल कार्यक्षेत्र में अपने तमाम प्रयत्न उपेक्षणीय प्रतीत होंगे। लेकिन यह याद रखना, टाम, कि मानवता की प्रगति के प्रत्येक चरण का उद्गम, खोजने पर, किसी एक व्यक्ति, किसी छोटे-से समूह में दिखायी देगा । इसलिए हिम्मत मत हारना, और जैसा कई बरस पहले सेंट पाल ने कहा था, 'अपने विश्वास को अडिग रखना' । " अध्याय दस नदी से यात्रा करने का सुझाव जान डीविटी का था। जब नाम था से प्रस्थान करने का समय निकट आने लगा तब उसने प्रस्ताव किया कि सीधे वियंतियेन जाने के बजाय हम लोग छोटी-छोटी नौकाओं में नाम था नदी से प्रस्थान करें और रास्ते में अलग से पड़े हुए गाँवों में रोगियों को देखते चलें । चाओ खुओंग ने इस योजना का तीव्र विरोध किया। उसका कहना था कि नदी का मार्ग खतरनाक था और यात्रा के योग्य नहीं था । इसके अतिरिक्त उस मार्ग में पड़नेवाले गाँवों के लोग गोरे लोगों से शत्रुता रखते थे । उसने कहा कि उसके जेलखाने में अधिकांश राजनीतिक बन्दी उसी इलाक़ के थे ; स्वयं उसके सैनिक शान्ति और व्यवस्था के लिए नदी में कुछ मील से अधिक दूर जाने का साहस नहीं करते थे । फिर उसे इसमें सन्देह था कि हमें इस यात्रा के लिए नाविक भी मिल सकेंगे जो अपने को खतरे में डालने को तैयार हों । एक सौ छत्तीस मैन डा. औदोम को सन्देश भेजा और उन्होंने तुरन्त स्वीकृति दे दी । बूढ़े गवर्नर ने तुरन्त हथियार डाल दिये और कहा कि उस पर अब कोई जिम्मेदारी न थी । फिर भी उसने सशस्त्र रक्षकों का एक अग्रगामी दल भेजने की व्यवस्था की और चार बन्दूक-धारी हमारे साथ जाने को तैनात किये । हमें एक विशेष प्रकार की नौकाओं से जाना था। ये नौकाएँ कोई बारह फ्रीट लम्बी होती हैं। सिर्फ़ इसी प्रकार की नौकाऍ नदी के तेज प्रवाह में चल सकती थीं । नाविकों के विषय में गवर्नर की बात बिलकुल सही निकली; नाविक तय करने में हमें बहुत कठिनाई हुई । किसी भी नाविक ने पहले यह यात्रा नहीं की थी; फिर डाकुओं और तेज बहाव का खतरा था और इनके ऊपर मौसम बरसात का था । इसलिए घनघोर बरसात का मुक़ाबला करना था । किसी तरह कुछ अतिरिक्त पैसे के लालच और चाओ खुओंग के दबाव से काम बन गया। जान ने तीन नावें तय कर लीं। प्रत्येक में चार-चार नाविक थे । दो नाव को खेने के लिए बीच में बैठते थे; बाक़ी दो दोनों सिरों पर खड़े हो कर लम्बे-लम्बे चप्पुओं से नाव को मोड़ते थे । हमने दवाइयों, भोजन-सामग्री और डेरे लगाने के समान को तीनों नावों में इस प्रकार वॉटा कि यदि कोई नाव डूब भी जाय तो हमें खाने, सोने और मरीजों को देखने में कोई कठिनाई न हो । प्रस्थान के लिए सूर्योदय का समय निश्चित किया गया था परन्तु लाओ रीति-नीति के अनुसार व दोपहर से कुछ पहले ही हम चल सके। हम समय पर तैयार हो कर अपने सामान के साथ नौकाओं पर पहुँच गये। प्रमुख नाविक कुछ मिनटों में आने वाला था परन्तु आया एक घंटे के बाद आया भी तो उसने हमें देखा और यह कह कर चल दिया कि काग़ज़ लाने के लिए उसे वापस चाओ खुओंग के पास जाना पड़ेगा । दुभाषियों का कहना था कि नाविकों की हिम्मत जवाब दे रही थी : लुटेरों और नदी के खतरों से व परिचित थे अतः ये ; नतरे उठाने के लिए ज्यादा मेहनताना चाहते थे। मैं उन्हें दोष नहीं दे सकता । नाविक आख़िर गवर्नर के पास से लौटे और हमने एक बार फिर अपने उन दस-बारह मित्रों से विदा ली जो पेड़ों के नीचे बैठ कर अपने को हल्की-हल्की बरसात से बचाने के प्रयत्न कर रहे थे। मैं एक नाव के बीच में बनी हुई बाँस की झोंपड़ी में जा बैठा और नाविकों के आ जाने के बाद मैंने नौसेना के तरीके से लंगर उठाने का आदेश दिया; परन्तु लंगर उठा नहीं। अमरीकियों और नाविकों ने सारा सामान नावों में जिस ढंग मे जमाया था वह प्रमुख नाविक को जँचा नहीं । अतः सारा सामान उतारा गया और वज़न के बारे में प्रमुख नाविक के सुझाव तथा मूल्य के बारे में मेरी आज्ञा के अनुसार उसे वापस चढ़ाया गया । इस तरह । आखिर सामान की लदाई पूरी हुई और हम अच्छी तरह दुआ-बंदगी किये बिना ही किनारा छोड़ कर चल दिये। अब तक बारिश जोर से होने लगी थी और चार दिन तक नहीं रुकी । बरसात में भीगते हुए मित्रों से हमने हाथ हिला कर बिदा ली । जल के तेज बहाव में पहले दिन की यात्रा जितनी खतरनाक रही उतनी ही दिलचस्प भी । दो-दो नाविक हर नौका में अगले और पिछले सिरों पर खड़े हो कर लम्बे-लम्बे चप्पुओं से नावें को इधर-उधर मोड़ते जाते थे । दो-दो नाविक बैठे हुए छोटे चम्पुओं से नावें खे रहे थे। उन्हें चप्पू बहुत नहीं चलाने पड़ते थे क्योंकि नदी की धारा ही हमें बहाये लिये जा रही थी। नावें लहरों पर डोलती हुई चली जा रही थीं। यह सोच कर कि हम लोग ही नहीं हमारा सामान भी सुकुमार होगा, नाविकों ने नौकाओं में ताड़ के पत्तों को छतें-सी बना दी थीं । नाव के गीले फ़र्श पर इनके नीचे किसी तरह बैठा जा सकता था । ये ढालू छतें हमारा सिर छूती थीं । अविराम वर्षा में इतना बचाव भी बहुत था, परन्तु कुछ ही समय में बरसात का पानी छतों के पार आने लगा और हम भीग गये; उस छत के नीचे बैठना या खुले में बैठना बराबर हो गया । तीन घंटे सफ़र करने के बाद हमने पहला क़याम किया । नाविक नौकाओं से उतर कर पानी को पार करके जंगल में गये, इस उद्देश्य से कि नावों की बगल में लगाने के लिए कुछ हरे बाँस काट लायें । नावें बुरी तरह हिचकोले खा रही थीं इसलिए बाँस लगाना जरूरी जान पड़ता था । बहाव अनुमान से कहीं ज्यादा तेज था । यहाँ नदी के किनारा था ही नहीं । बरसात की बाढ़ से पानी इतना बढ़ गया था कि बड़ी-बड़ी झाड़ियों और पेड़ नदी के पाट में आ गये थे और किनारों की जगह केवल पेड़ दिखायी देते थे जिन पर कई फ़ीट ऊँचा पानी चढ़ा हुआ था। जब हमें किसी तरह पहला ढालू किनारा दिखायी दिया तो एक बार फिर हमने नावें रोकीं । इस बार हमें अपना अत्यन्त मूल्यवान सामान लेकर उतरना पड़ा। हम पैदल घने जंगल में चल पड़े। हम जल के किनारे-किनारे चल रहे थे और नौकाएँ तेज बहाव में चल रही थीं; कहीं चट्टानों से टकराती थीं, कहीं लकड़ी के लड़ों के बीच से गुजरती थीं। जल के सफ़ेद घने झाग ने उन्हें घेर रखा था। एकाएक वे जल के न. प्र. पाँच एक शान्त भाग में आ पहुँचीं और नाविकों ने उन्हें जल के किनारे लगा दिया । हम कैमरा और दूसरा सामान अपने सिरों पर उठाये हुए घुटनों घुटनों पानी में खड़े थे । ऊपर से बारिश गिर रही थी। इस तरह कभी नाव से उतर कर और कभी नाव में चढ़ कर, रुकते और चलते हुए पहला दिन पूरा हुआ । बरसात बराबर होती रही । पहली रात हम एक छोटे गाँव में पहुँचे । उस समय वहाँ केवल कुछ बूढ़ी औरतें ही थीं । अपने चार बन्दूकधारी सैनिकों के साथ हम डाक्टरी सहायता देने वाले परोपकारी दल के बदले कोई आक्रमणकारी दल ही प्रतीत होते थे । औरतें डर गयीं । उन्होंने बताया कि पुरुष जंगल में शिकार के लिए गये हैं और कुछ देर बाद लौटेंगे । हमने उनसे कहा कि हमें तो सिर छुपाने को एक खाली झोंपड़ी की ज़रूरत है ताकि हम अपने कपड़े वगैरा सुखा कर भोजन की व्यवस्था कर सकें । गाँव भी टूटी-फूटी अतिथिशाला हमें दिखा दी गयी। किसी तरह हमने हाथ-मुँह धोये, आग के पास बैठ कर कपड़े सुखाये, अपना वही सी राशन का खाना गर्म करके भोजन किया । फिर तुरन्त ही हमनें मच्छरदानियाँ लगायीं और बिस्तर खोल कर निद्रा देवी की गोद में चले गये । रात को गर्मी पहुँचाने वाली शराब और पुख्ता जमीन के सपने देखते रहे । सुबह झोंपड़ी के पास गाँव वालों की भीड़ जमा होने की आवाजों से मेरी नींद टूटी । हमें किसी क़िस्म का भय न था, क्योंकि यह गाँव नाम-था के काफ़ी नजदीक था और हमें मालूम था कि यहाँ के कई आदमी हमारे अस्पताल आ चुके थे । कुछ पुराने बीमारों को हमने पहचाना । यहाँ ज्यादा लोगों को डाक्टरी इलाज की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि ये लोग अक्सर नाम था आया करते थे । यद्यपि मौसम में जरा भी सुधार नहीं हुआ, फिर भी हमारी यात्रा दसगुनी अधिक रोचक हो गयी। हम गहरी घाटियों से गुजर रहे थे, परन्तु किनारों पर यहाँ ऊँची-ऊँची चट्टानें नहीं थीं, हरे-भरे विशाल जंगल खड़े थे । हम अपनी-अपनी नावों में बैठे हुए अपने साथियों को बार-बार पुकारते और कहते जाते थे - "देखो, कैसा जानवर है वह ! उसे देखा, कौन सी चिड़िया थी वह ? बन्दर तो नहीं था ?" वगैरह । उस रोज हमने कई गाँवों में मुकाम किया। एक गाँव में हमने अपना वही भोजन किया । नदी के किनारे का हर गाँव अपने अलग रोग से पीड़ित था । कोई भी रोग ऐसा न लगता था जो एक से दूसरे गाँव आया हो या आ सकता हो । ये गाँव एक-दूसरे से बिलकुल असम्बद्ध हैं। इनमें परस्पर न व्यापार होता है न आवागमन । जहाँ तक प्रगति का प्रश्न है यह स्थिति हानिकर है, तथापि इससे यह लाभ भी है कि संक्रामक रोग नहीं फैल पाते। कुछ गाँवों में हैजा कुछ में पेचिश । खुजली, दाद, बेरी-बेरी, सभी गाँवों में समान रूप से फैले हुए थे। मुझमें कभी नही आयेगी । हमने दूसरी रात जिस गाँव में काटने का फ़ैसला किया था, उसके बारे में हमारा नयाल था कि वहाँ विरोधी प्रचार ने कुछ असर किया होगा । इसलिए हम कुछ शंकित थे। गाँव बहुत गरीब था और बहुत ही अलग पड़ता था । नाम-था से भी उसका सम्बंध न था । जंगल की बग़ल से चल कर हम गाँव पहुँचे । एक पहाड़ से सट कर वह बसा हुआ था । हमने मुखिया के घर का पता पूछा । हमें रास्ता बता कर सारा गाँव ही हमारे पीछे-पीछे उस ओर को चल दिया। एकाएक एक आदमी अपने लड़के को लेकर भीड़ से बाहर निकल आया । लगता था कि वह आदमी गाँव का कोई प्रमुख व्यक्ति था । हमारे पास आ कर वह घुटनों के बल बैठ गया। अपने हाथ अपने मुख के सामने कर के वह हमें धन्यवाद देने लगा और अपने गाँव में उसने हमारा स्वागत किया । नाम-था में शुरू के दिनों में हमने उसके लड़के के 'क्काशिओरकोर' रोग का इलाज किया था । हमने लड़के को स्वस्थ कर के पिता को रोग की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय बता दिये थे । लड़के ने जान के पास आ कर अपने हाथ उसकी कमर में डाल दिये । उसके मन में किसी प्रकार का डर न था क्योंकि मेरे साथियों की दया- ममता का उसे अनुभव चुका था। इससे गॉव में तुरन्त ही हमारे प्रति सद्भावना पैदा हो गयी और तास्सीएँग ने अपने घर की सीढ़ियों पर आ कर हमें अन्दर बुला लिया। यह बूढ़ा तास्सीऍग खूब आदमी था। उससे हमने कई सवाल पूछे। हमने पूछा कि अपने गाँव में कभी पहले भी उसने गोरे लोग देखे थे । उसने कहा - " नहीं । फिर हमने पूछा कि उसे या उसके परिवार के दूसरे लोगों को जो सब वहीं बैठे थे, हम कुछ अजीब लोग तो नहीं दिखायी देते । उसने ईमानदारी से जवाब दिया - " हाँ " जैसे-जैसे सन्ध्या बीतती गयी उन लोगों के प्रति हमारी और हमारे प्रति उन लोगों की दिलचस्पी बढ़ती गयी । हमने उससे पूछा कि उसने अपने गाँव में चीनी लोग भी कभी देखे थे या नहीं। उसने जवाब दिया - " हाँ ; चीनी लोग यहाँ अक्सर आते हैं, पर हाल में कुछ दिनों से नहीं आये हैं । " मैंने पूछा - " कब से ? " बूढ़े ने बताया - " यही कोई दस मौसमों से । " यदि इस गाँव में प्रचार हो रहा था तो इस क़बीले के लोग ही कर रहे थे, चीनी लोग नहीं । बहुत बार साम्यवादियों ने उत्तरी लाओस के क़बायली युवकों और युवनियों को चाँदी का लोभ देकर युन्नान और कैंटन बुलाया था । उन चीनी प्रदेशों में धीरे-धीरे और नर्मी से, लेकिन दृढ़तापूर्वक साम्यवादी धारणाएँ उनके मस्तिष्क में बैठायी जाती थी । साम्यवादी इन लोगों को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाते थे और विशेषतया प्रगति " के सपने दिखाते थे । इन युवकों और युवतियों के मन में यह विश्वास बैठ जाता था कि ये नये भूमि सुधारक उनके पिछड़े हुए गाँवों का कुछ हित करेंगे । तब वे अपने पूर्वजों के गाँवों को लौट कर असत्य के प्रचारक बन जाते थे। अपने गाँवों के अज्ञानी लोगों से वे कहते थे - " हम स्कूल बनायेंगे। हमें पढ़ना-लिखना आता है और हम चाहते हैं कि आप लोग भी ज्ञान प्राप्त करें । " और भोले-भाले लोग ज्ञान प्राप्त करने की लालसा ले कर उन्हें सहयोग प्रदान करते थे । इन गाँववालों को राजनीतिक क्षेत्र को किसी भी बात का पता नहीं है । उन्हें मालूम नहीं है कि दुनिया में कैसी खाई पड़ गयी है । दो विभिन्न विचारधाराओं का उन्हें जरा भी ज्ञान नहीं है - एक ईश्वर के प्रति आस्था रखने वालों की और दूसरी अनीश्वरवादियों की। उन्हें खयाल तक नहीं है कि अमरीका क्या है और कहाँ है ? इन लोगों के मन में घृणा पैदा करना कठिन है। यह इस देश की रीति है कि गाँव में जो भी अतिथि आये उसका आदर-सत्कार करना चाहिए। आम तौर पर गाँव का कोई बड़ा-बूढ़ा चाँदी के एक बर्तन में पुष्प, मोमबत्तियाँ और भेंट की अन्य वस्तुएँ ले कर हमारा स्वागत करने के लिए नदी पर उपस्थित रहता था । इस छोटे से गाँव में एक अनोखापन था; इसमें चलने वालों के लिए मार्ग पर पटरी बनी हुई थी । सारे देश में मैंने सिर्फ़ इस गाँव में ही ये पटरियाँ देखीं । एक खास बात यह थी कि यहाँ पटरी सड़क के बीच में थी । बरसात से सड़क पर इतना ज्यादा और गहरा कीचड़ हो गया था कि गाँव वालों ने सड़क के बीच ऊँचा रास्ता बना दिया था । उसके दोनों किनारों पर मुंडेर भी लगी थी । मिट्टी के ढेले और पत्थर जमा कर यह पटरी बनायी गयी थी, ताकि चलने वालों के पैर रपटने से बचे रहें । इन लोगों को हम अमरीकी दर्शनीय वस्तु लग रहे थे । हमारा डिब्बे खोल कर भोजन बनाने का सामान निकालना, खाना पकाना, कुछ अजीब से उपकरणों से भोजन करना, काफ़ी का काला पाउडर, दूध का सफेद पाउडर, और शक्कर मिला कर उसमें खौलता हुआ पानी डाल कर काफ़ी बनाना - यह सब विचित्र रंग-ढंग देख कर उन्हें बड़ा आनन्द आ रहा था; जिसने ये चीजें पहले कभी न देखी हों उसके लिए हैं भी बहुत अजीब । इन गॉव वालों के लिए हम संसार की सबसे मनोरंजक और दर्शनीय चीज़ थे तथा हमारी औषधियों का चमत्कार अत्यंत ग्राह्य । उन्होंने हमारे बारे में थोड़ी-बहुत बातें सुन रखी थीं और हमें सशरीर देखने को वे उत्सुक थे । इस गाँव में कई लोग रोगों से पीड़ित थे, परन्तु लाओस में मानसिक रोगों का नामो-निशान भी नहीं था। अपने साल भर के आवास में मैंने वहाँ मामूली से मानसिक रोग का भी कोई रोगी नहीं देखा । प्राचीन नक्शे के अनुसार नेल गाँव पर हमारा आधा रास्ता तय होता था । तीसरे दिन तीसरे प्रहर के बाद हम इस गाँव में पहुॅचे। दूसरे गाँवों जैसा ही यह गाँव था, कुछ बड़ा ज़रूर था और पुलिस की चौकी भी थी इसमें । बरसात तो हो ही रही थी । उस बरसात में ही गाँव का मुखिया हमारा स्वागत करने आया । इस आदमी को लिखना और पढ़ना आता था और फ्रांसीसी भाषा भी थोड़ी-बहुत बोल लेता था । काफ़ी बड़ा और बढ़िया मकान था उसका । फ्रांसीसी प्रशासन के ज़माने में कई बरस वह राजधानी वियंतियेन में रह चुका था। उसके मकान से लगा हुआ था छोटा-सा औषधालय, जिसमें एक पुरुष नर्स के रूप में नियुक्त था, लेकिन जिसके पास दवा के नाम पर एस्पिरिन, कुनैन और पट्टियाँ भी नहीं थीं। कानूनी रूप से वह शाही राज्य के जन स्वास्थ्य विभाग के मातहत था, परन्तु नियमित रूप से उसके पास दवाइयाँ आदि पहुँचाने का कोई उपाय ही नहीं था । शाही सरकार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में दवाइयाँ और सामान भेजने से डरती थी कि कहीं वे चीजें लुटेरों के हाथ में न पड़ जायें । में यहाँ हम बहुत रात गये तक रोगियों को देखते रहे । एक औरत के गाँठ थी; एक लड़के की आँख में वह बीमारी थी जिसमें आंख की पुतली सफ़ेद और उभरी हुई गोली- सी बन जाती है; कंठमाला कई औरतों के थी ; और एक पुरुष हर्निया से पीड़ित था । मैंने दवाओं के कई बक्स उस पुरुष नर्स को दे दिये । वह काफ़ी बुद्धिमान जान पड़ता था । उसने हमारा बहुत आभार माना । यहाँ की सारी बातें हमने बाद में मंत्री महोदय को बतायीं । मुखिया ने हमें भोजन कराया। भोजन में हमारी अपनी चीजें भी शामिल थीं । भोजन करने के बाद हमें अतिथि कक्ष में ठहराया गया । रक्षकों के अग्रगामी दल ने उसे हमारे आगमन की सूचना पहले से दे दी थी, इसलिए उसने हमारे लिए चारपाइयाँ बनवा दी थीं । " ये अजीब गोरे आम लोगों की तरह पत्तों की चटाइयाँ बिछा कर फ़र्श पर नहीं सोते । न जाने क्यों ये अपने गद्दे एक लकड़ी के चौखटे पर बिछाते हैं और उसे चारपाई कहते हैं । " उसने यह चारपाइयाँ हमारे लिए बनवायी थीं, परन्तु नाप में गड़बड़ हो गयी थी । वे चौड़ी इतनी ही थीं कि उन पर आदमी चाहे पेट के बल, चाहे पीठ के बल चुपचाप सीधा पड़ा रह सकता था । करवट लेने की कोशिश करता तो सीधा ज़मीन पर आता । छः फ़ुट लम्बे बाब बेचारे की रात बड़ी मुश्किल में बीती । अगले दिन सुबह जल्दी ही हम वहाँ से चल दिये। कई घंटों के बाद एक नाव बड़ी तेज़ी से हमारा पीछा करती हुई आती दिखायी दी । जब वह हमारे करीब पहुँच गयी, तो उसमें बैठे हुए आदमी ने हमें बताया कि वह नेल के उत्तर में कहीं रहता था । नेल में उसकी बहन रहती थी। रात को हमारे पहुँचने पर उसकी बहन को जब मालूम हुआ कि हम लोग ही नाम-था के वे गौरांग डाक्टर हैं, जिनकी चर्चा वहाँ भी लोगों ने सुन रखी थी, तब वह तुरन्त अपने भाई के गाँव को पैदल ही रवाना हो गयी और उसे साथ ले कर सुबह वापस पहुँची । लेकिन तब तक हम लोग रवाना हो चुके थे । अतः एक नाव ले कर वे हमारे पीछे आये । उस आदमी की लड़की मरणासन्न अवस्था में थी । नदी और जंगल के कारण आस-पास कहीं ठहरना सम्भव न था। इसलिए हम अगले गाँव तक चलते गये । वहाँ वह आदमी अपनी पुत्री को अतिथिगृह में लाया । उसे बहुत खतरनाक क़िस्म का निमोनिया था। उसकी सॉस में अतिम क्षणों की घरघराहट सुनायी दे रही थी। उसके दिल की धड़कनें इतनी धीमी पड़ गयी थीं कि बहुत मुश्किल से उन्हें सुन पाया । उसके होठ आक्सीजन की कमी से नीले पड़ गये थे । हमने उसके लिए भरसक कोशिश की, उसे दवाइयाँ दीं, और अन्त में उसके पिता को कई दिन तक इलाज जारी रखने के लिए पर्याप्त औषधियाँ दे दीं । मैं जानता था कि वह सारा इलाज बेकार था क्योंकि उसका जीवित रहना सम्भव न था। उसकी आयु केवल तीन वर्ष, यानी मेरी भतीजी की आयु के बराबर थी । वह रात हमने खा-खो गाँव में गुज़ारी। यह छोटा-सा गाँव घृणाजनक था । यहाँ हम पर सबको वास्तव में सन्देह था। गाँव के हर बच्चे को कुक्कुर खाँसी हो रही थी। रात का वातावरण उस खाँसी की आवाज़ों से गूँज रहा था । हमारे पास - टेट्रामाइसीन' जो इस रोग की रामबाण औषधि है, बहुत थी; परन्तु बच्चों के गले में अचल रूप से अटका हुआ ऐसा कफ़ मैंने और कहीं नहीं देखा । रात जागते हुए कटी और सुबह हम अपना सामान लाद कर चल पड़े।
रायपुर । संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा रविवार 21 जून को शाम 5. 30 बजे विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर में राजयोग दिग्दर्शन महासम्मेलन का आयोजन किया गया है। ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय प्रशासिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने इस संदर्भ में पत्रकारों को बताया कि इस संस्थान द्वारा विगत 30 वर्षों से माह के तीसरे रविवार को विश्व के 140 देशों में एक साथ और एक ही समय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। कमला दीदी ने कहा कि समारोह में मुख्यमंत्री रमन सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। इंदौर से मीडिया प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाई कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। सम्मेलन को जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और ब्रह्माकुमारी रश्मि बहन संबोधित करेंगे। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में (25-30 वर्षों में) पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
रायपुर । संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा रविवार इक्कीस जून को शाम पाँच. तीस बजे विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर में राजयोग दिग्दर्शन महासम्मेलन का आयोजन किया गया है। ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय प्रशासिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने इस संदर्भ में पत्रकारों को बताया कि इस संस्थान द्वारा विगत तीस वर्षों से माह के तीसरे रविवार को विश्व के एक सौ चालीस देशों में एक साथ और एक ही समय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। कमला दीदी ने कहा कि समारोह में मुख्यमंत्री रमन सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। इंदौर से मीडिया प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाई कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। सम्मेलन को जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और ब्रह्माकुमारी रश्मि बहन संबोधित करेंगे। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है. ट्रेन से कटकर 56 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई. हादसे के घंटों बाद शव के ऊपर से ट्रेनें गुजरती रही, लेकिन शव पर किसी की नजरें नहीं पड़ी. दरअसल, मृतक प्रशांत गुप्ता जांजगीर के वार्ड नंबर 18 के रमन नगर का रहने वाला है. घर से सुबह फूल लेने के लिए निकला था. जहां पटरी पर ट्रेन से कट गया. ट्रेन उसके ऊपर से गुजर गई. मौके पर ही मौत हो गई. मामले की जानकारी पुलिस को मिली. मौके पर जांजगीर पुलिस पहुंची. मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जांजगीर के खोखसा फाटक के पास हादसा हुआ है. बता दें कि हादसे में सिर अलग और धड़ अलग हो गए हैं. रेलवे ट्रैक पर जो हिस्सों में बंटे दिख रहे हैं. वहीं इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसर गया है. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुराहाल है. - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें.
जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है. ट्रेन से कटकर छप्पन वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई. हादसे के घंटों बाद शव के ऊपर से ट्रेनें गुजरती रही, लेकिन शव पर किसी की नजरें नहीं पड़ी. दरअसल, मृतक प्रशांत गुप्ता जांजगीर के वार्ड नंबर अट्ठारह के रमन नगर का रहने वाला है. घर से सुबह फूल लेने के लिए निकला था. जहां पटरी पर ट्रेन से कट गया. ट्रेन उसके ऊपर से गुजर गई. मौके पर ही मौत हो गई. मामले की जानकारी पुलिस को मिली. मौके पर जांजगीर पुलिस पहुंची. मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जांजगीर के खोखसा फाटक के पास हादसा हुआ है. बता दें कि हादसे में सिर अलग और धड़ अलग हो गए हैं. रेलवे ट्रैक पर जो हिस्सों में बंटे दिख रहे हैं. वहीं इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसर गया है. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुराहाल है. - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें.
आनी-ग्राम पंचायत बखनाओ के च्वाई के बुआंदा में तेंदुए ने एक पांच वर्षीय बच्चे पर अचानक हमला बोलकर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर डाला, जिसे उपचार के लिए आनी अस्पताल पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार घटना मंगलवार देर शाम की है, जब घायल बच्चे की मां गोशाला में थी, जोकि घर के साथ ही है, बच्चा उस समय बाहर टहल रहा था और अपनी मां के पास जा रहा था कि अचानक तेंदुए ने हमला बोल दिया। बच्चे की चीखें सुनकर तुरंत माता-पिता वहां पहुंच गए, जिसके बाद तेंदुए ने बच्चे को वहीं छोड़ दिया। तेंदुए के हमले से बच्चे को सिर व छाती पर छोटे आई हैं, उसे उपचार के लिए तुरंत सिविल अस्पताल आनी लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया। इस बारे में एआरओ चवाई तेज सिंह ने कहा कि तेंदुए को पकड़ने के लिए जल्द पिंजरा लगाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से स्वयं भी सावधानी बरतने और रात को घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
आनी-ग्राम पंचायत बखनाओ के च्वाई के बुआंदा में तेंदुए ने एक पांच वर्षीय बच्चे पर अचानक हमला बोलकर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर डाला, जिसे उपचार के लिए आनी अस्पताल पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार घटना मंगलवार देर शाम की है, जब घायल बच्चे की मां गोशाला में थी, जोकि घर के साथ ही है, बच्चा उस समय बाहर टहल रहा था और अपनी मां के पास जा रहा था कि अचानक तेंदुए ने हमला बोल दिया। बच्चे की चीखें सुनकर तुरंत माता-पिता वहां पहुंच गए, जिसके बाद तेंदुए ने बच्चे को वहीं छोड़ दिया। तेंदुए के हमले से बच्चे को सिर व छाती पर छोटे आई हैं, उसे उपचार के लिए तुरंत सिविल अस्पताल आनी लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया। इस बारे में एआरओ चवाई तेज सिंह ने कहा कि तेंदुए को पकड़ने के लिए जल्द पिंजरा लगाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से स्वयं भी सावधानी बरतने और रात को घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
पवनदीप की उत्तराखंड से वोटिंग अपील,इंडियन आइडल टॉप 14 में बना चुके हैं जगह। चम्बा में सिल्की रका प्वां की शूटिंग जारी ,हार्दिक फिल्म्स से रिलीज़ होगा वीडियो। अनुराधा निराला,संतोष खेतवाल ने गीत एवं स्केच के जरिए दिखाया तीलू रौतेली का जीवन। Indian idol के जज हुए पवनदीप राजन के फैन ,कहा अब वापस मत लौटना। योगनगरी ऋषिकेश के अमन शाह India's Best Dancer के मंच पर मचा रहे धमाल! आने वाला है सुर सुरया बथों ! रुहान ने पोस्टर किया जारी ! जौनसारी हिमाचली गीत झूठी हुआ रिलीज़ ! झलका बेवफाई का दर्द !
पवनदीप की उत्तराखंड से वोटिंग अपील,इंडियन आइडल टॉप चौदह में बना चुके हैं जगह। चम्बा में सिल्की रका प्वां की शूटिंग जारी ,हार्दिक फिल्म्स से रिलीज़ होगा वीडियो। अनुराधा निराला,संतोष खेतवाल ने गीत एवं स्केच के जरिए दिखाया तीलू रौतेली का जीवन। Indian idol के जज हुए पवनदीप राजन के फैन ,कहा अब वापस मत लौटना। योगनगरी ऋषिकेश के अमन शाह India's Best Dancer के मंच पर मचा रहे धमाल! आने वाला है सुर सुरया बथों ! रुहान ने पोस्टर किया जारी ! जौनसारी हिमाचली गीत झूठी हुआ रिलीज़ ! झलका बेवफाई का दर्द !
भुवनेश्वर. राज्य में कोरोना को लेकर बढ़ती सतर्कता के बीच राज्य सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद मास्क की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. लोगों ने आरोप लगाया है कि मास्क को मनमाने दाम बेचा जा रहा है तथा इसका बिल भी ग्राहकों को नहीं दिया जा रहा है. कुछ अस्पतालों में भी इसके दाम निर्धारित मूल्य से अधिक लिया जा रहा है तथा इसका बिल भी नहीं दिया जा रहा है.
भुवनेश्वर. राज्य में कोरोना को लेकर बढ़ती सतर्कता के बीच राज्य सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद मास्क की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. लोगों ने आरोप लगाया है कि मास्क को मनमाने दाम बेचा जा रहा है तथा इसका बिल भी ग्राहकों को नहीं दिया जा रहा है. कुछ अस्पतालों में भी इसके दाम निर्धारित मूल्य से अधिक लिया जा रहा है तथा इसका बिल भी नहीं दिया जा रहा है.
सामाकितहीलता का प्रवर्तक तत्व : पतित-साति पूर्ववर्ती काल के कान इस काल में भी पतित जयवा हीम बाति के साथ किसी भी प्रकार के सम्पर्कको का कारण बताया गया । मनु के अनुसार पतितों को देश देने वाला, उपनयन संस्कार सम्पन्न करने वाला तथा वैवाहिक सम्बन्ध रखने वाला तुरन्त पतित हो जाता था। पति के साथ एक बार अपना एक सवारी पर बैठने उनके साथ ही मंति में बैठकर करने बाळा पतित हो जाता था की ब्राह्मण शुद्ध से था के कर बेक्वादियों में निश्चित होते थे। इसी प्रकार पण्डाल तथा अन्त्यम यी के साथ किसी दिन का सम्बन्ध यदि वज्ञान में बन जाता था, तो वह पतित हो बाता था। उनका मोकन ग्रहण करने तथा उनसे दान लेने पर मी मित्र के पतन की बात कही। ज्ञानपूर्वकन्हीं कार्यों को करने पर वह विप्र उसी मण्डा तथा अन्य के हो बाता था। पतितों कान १ संवत्सरेण पतति पतिलेन सहावन । याताध्यापनातू यानासाशना ।। बण्डाय गत्या मुक्त्या व प्रति । पतस्यज्ञानतो मित्रो ज्ञानात्वाम्यं गच्छति
सामाकितहीलता का प्रवर्तक तत्व : पतित-साति पूर्ववर्ती काल के कान इस काल में भी पतित जयवा हीम बाति के साथ किसी भी प्रकार के सम्पर्कको का कारण बताया गया । मनु के अनुसार पतितों को देश देने वाला, उपनयन संस्कार सम्पन्न करने वाला तथा वैवाहिक सम्बन्ध रखने वाला तुरन्त पतित हो जाता था। पति के साथ एक बार अपना एक सवारी पर बैठने उनके साथ ही मंति में बैठकर करने बाळा पतित हो जाता था की ब्राह्मण शुद्ध से था के कर बेक्वादियों में निश्चित होते थे। इसी प्रकार पण्डाल तथा अन्त्यम यी के साथ किसी दिन का सम्बन्ध यदि वज्ञान में बन जाता था, तो वह पतित हो बाता था। उनका मोकन ग्रहण करने तथा उनसे दान लेने पर मी मित्र के पतन की बात कही। ज्ञानपूर्वकन्हीं कार्यों को करने पर वह विप्र उसी मण्डा तथा अन्य के हो बाता था। पतितों कान एक संवत्सरेण पतति पतिलेन सहावन । याताध्यापनातू यानासाशना ।। बण्डाय गत्या मुक्त्या व प्रति । पतस्यज्ञानतो मित्रो ज्ञानात्वाम्यं गच्छति
इस फोडे की चिकित्सा इस प्रकार से करना चाहिये कि पहिले तो तहलील अर्थात् बैठाने वाली दवाई लगाना चाहिये क्यों कि जो यह बैठ जावै तो बहुतही अच्छा है और बैठाने वाली दवा यह है ।। खाकसी पांच तोले शोरंजान कडवा एक तोले कुदरूगोंद एक तोले इनसब को हरी कासनी के रसमें पीसकर लगावे और उसके पत्ते अर्थात् मकोय के पत्ते गरम करके बांधे जब ले गुठलियां न दीखे तो फस्त खोले और वमन करावे और जो इससे आराम न होयतो उक्त दवाइयों को सोये के अर्क में पीस कर लगावै और जो वर्णन की हुई दवाओं से गुठलियां न बैठेंतो लेप करे। लेप गुलाब के फूल, गेरू, गुलनार सूखी मकोय दम्मुल असंवे न. मूरिद के बीज इन सब दवाइयों को एक एक तोला ले महीन पीस मुरर्गी के अंडेकी सफेदी में मिलाकर गोलियां बनाकर छाया में सुखावै फिर एक गोली अंगूर के सिरके में पीसकर लगाबै और जो इसके लगाने से भी न बैठे और पक जाये तो यह दबा करे ।। कडवा तेल आाध पाव और रविवार वा मंगलवार को मारा हुआ एक गिरगट आक के पत्ते नगे७ मिलाये नग इनसवको तेलमें जलाकर खूब घोटे और ठंडा करके लगाव और कदा चित्त इस घाव के आय और घाव में पानी निकलता होतो बहुत बुरा है । अथवा जो स्याही नही और गांठ फूटी भी न हो तो उसके बैठाने को और दबा लिखते हैं । छुहारेकी गुठली, इमलीके पत्ते इमली के चीथा, महंदी के पत्ते इन सबको बराबर ले महीन पीस कर गुनगुना करके पतला पतला लेप करे ।। अथवा एक मुसेको तिलके तेल में पकावे फिर उस तेलको ल गावे तो गांठ बैठ जायगी ॥ अथवा दो मुख के सांपको मारकर जमीन में गाढदे जव उसका मांस गल जावे तब हड्डीको डोरे में बांधकर गलेमें बांध ना अथवा बूदार चमडा बांधना अच्छा होता है । अथ धुकधुकी का यत्न । एक घाव कंठ में होता है उसको लौकिक में धुकधुकी क हते हैं उसकी सूरत यह है कि उसमें से दुर्गंध आया करती है और कंठसे लेकर छाती के नीचे तक घाव होता है जो घाव में गहे हों तो इसकी चिकित्सा न करै क्योंकि महान वैद्यों ने लिखा है कि ये फोडा अच्छा कम होता है और जो चिकित्सा करनी अवश्य होतो ये करें और इस घाव का निशान आगे लिखी तसवीर में समझ लेना ।। इलाज । समुद्रफेन पावसेर को पीस छानकर एक तोले नित्य पकावै और उसके ऊपर जामुन के पत्ते पानी में पीसकर पिलाबै और उस घाव पर ये दवा लगावे मनुष्य के सिरकी हड्डी को बासी जलमें पीसकर लगावे अथवा सूअरका बिष्टा कन्या के सूत्र में पीसकर लगावे । अथवा एक घूंसको मारकर शुद्ध करे और दरको मारकर शुद्ध करे फिर इनको आधसेर कडवे तेल में जलावे फिर इस तेलको छानकर लगावे ।। अथ कखलाई का इलाज । एक फोडा कांख में होता है उसको लौकिक में कखलाई क हते हैं । उसकी सूरत यह है कि किसी २ मनुष्य के बगल में कई गुठलियां होती है और एक उनमें से पकजाती है जब तक वह अच्छी नहीं होने पाती तबतक और दूसरी पकजा ती है इसी प्रकारसे कईवार करके छः सात हो जाती है और एक सूरत यह है कि एक गुठली सी होकर पकजाती है फिर वह पक कर शघ्रि ही फूटजावे तो बहुत अच्छा है चीरा देना पडता है बिना चीरने के अच्छी नहीं होती जो रोगी बलहीन हो तो फोडे की यह सूरत होती है जो ऊपर कह घ्याये हैं और जो बलवान हो तो यह सूरत होती है कि पहिले कांखमें सृजन सी होती है और बहुत कडी होती है बह बहुत दिनों में पकती है देर होने के कारण नश्तर वा तेजाब लगाते हैं तो रुधिर निकलता है बस यही हानि है जब नीमके पत्ते बांध चुकते हैं तो मरहम लगाने के पीछे पानी निकला करता है वस इसी प्रकार से रोग बढ़ जाता है इस फोडे का निशान नीचे की तसवीर में समझ लेना । इस फोडेकी चिकित्सा यह है कि पहिले वे पत्तियां बांधे जो डाढ़ के फोडे के वास्ते वर्णन कर चुके हैं । जब नरम होजाय तब वह मरहम लगावे जिसमें नान पाव का गूदा लिखा है अथवा यह औषवलगावे। ( ३१ ) नुसखा गेंडूंका मैदा. शहत और मुर्गी के अडेकी जर्दीइन तीनों को मिलाकर लगावे इस दवाके लगाने से बहुत जल्दी फूट जावेगा और जो नरम होतो चीर देवे फिर नीम के पत्ते नमक और शहत बांधे ह मरहम लगावे । नीलाथोथा तीन माशे. कोकनार जला हुआ एक तोले इन दोनों को पीसकर इसमें थोडा निखालिस शब्त मिलाकर रगडे जब मरहम के समान होजाय तब लगावे और जो इससे आराम न हो तो यह दवा लगावे ॥ सूर की हड्डी और सूअर के बाल जलाकर दोनों एक २ तोले लेकर सूअर की चरवी में मिलाकर खूब रगडे और लगावे और घावन सूखा हो तो सूअर की हड्डी की भस्म उसपरबुरके ता घाब सूख जावेगा और जर्राह को चाहिये कि घावपर नि गाह रखे कि घाब पानी न देवे जो घावमेंसे पानी निकलता होतो उसके कारण को जानना उचित है कि किस कारण से उसमें से पानी निकलता है । प्रकृति मनुष्य की चार प्रकारकी 4 होती है। पानी तो रयत के कारण से निकलता हैऔर रुधिर पित्तके कारण में और पीली पीव कफके कारण से पीच खुश्की के कारण से निकला करती है और उचित है कि जो मरहम योग्य समझे वह लगावे ।। छाती के फोडे का इलाज एक फोडा छाती से तीनचार अंगुल ऊपर होता है उस्कोसूरत यह है कि पाहिले तो ददोडासा होता है और फिर बढजाता है फिर अपना बिकार फला देता है इस फोडा को तहलील अर्थात बैठाना अच्छा नहीं क्यों कि दाहिनी ओर को होता है तो इसमें वडा भय रहता है कि फोडा पेटमें न उतर जाय और जो वांई ओर होवे तो कुछ डर नहीं और जो आदि में बैठ जाय तो भी कुछ डर नहीं और पकजावे तो चार डालें और नीम के पत्ते बांधे फिर उसके घावपर यह मरहम लगावे ।। ।। मरहम की विधि । राल सफेद २ तोले, र्न लाथोथा १ रत्ती, विलायती साबन एक माशे इन सबको पीसकर गौके पांचतोले धीमें मिलावे फिर इस्को पानी से धोकर घावपर लगावै इसी सूरतका फोडा बालकके हो अथवा तरुण के होतो बुद्धिमानी से चिकित्सा करे और इसफोडे का बीज सफेद पीलापन लिये निकले तो शघ्रि आराम होजायगा और जो पीव सफद लाल रंग मिला हो ता इसी मरहम मेंजो अभी ऊपर वर्णन की है- काशगाी सफेदा च र माझे मिलावे और इसीघाव पर लगावे ईश्वरकी कृपासे बहुतजल्दआराम हो जायगा इस फोडे वाले रोगी का तसबीर येहै ।।
इस फोडे की चिकित्सा इस प्रकार से करना चाहिये कि पहिले तो तहलील अर्थात् बैठाने वाली दवाई लगाना चाहिये क्यों कि जो यह बैठ जावै तो बहुतही अच्छा है और बैठाने वाली दवा यह है ।। खाकसी पांच तोले शोरंजान कडवा एक तोले कुदरूगोंद एक तोले इनसब को हरी कासनी के रसमें पीसकर लगावे और उसके पत्ते अर्थात् मकोय के पत्ते गरम करके बांधे जब ले गुठलियां न दीखे तो फस्त खोले और वमन करावे और जो इससे आराम न होयतो उक्त दवाइयों को सोये के अर्क में पीस कर लगावै और जो वर्णन की हुई दवाओं से गुठलियां न बैठेंतो लेप करे। लेप गुलाब के फूल, गेरू, गुलनार सूखी मकोय दम्मुल असंवे न. मूरिद के बीज इन सब दवाइयों को एक एक तोला ले महीन पीस मुरर्गी के अंडेकी सफेदी में मिलाकर गोलियां बनाकर छाया में सुखावै फिर एक गोली अंगूर के सिरके में पीसकर लगाबै और जो इसके लगाने से भी न बैठे और पक जाये तो यह दबा करे ।। कडवा तेल आाध पाव और रविवार वा मंगलवार को मारा हुआ एक गिरगट आक के पत्ते नगेसात मिलाये नग इनसवको तेलमें जलाकर खूब घोटे और ठंडा करके लगाव और कदा चित्त इस घाव के आय और घाव में पानी निकलता होतो बहुत बुरा है । अथवा जो स्याही नही और गांठ फूटी भी न हो तो उसके बैठाने को और दबा लिखते हैं । छुहारेकी गुठली, इमलीके पत्ते इमली के चीथा, महंदी के पत्ते इन सबको बराबर ले महीन पीस कर गुनगुना करके पतला पतला लेप करे ।। अथवा एक मुसेको तिलके तेल में पकावे फिर उस तेलको ल गावे तो गांठ बैठ जायगी ॥ अथवा दो मुख के सांपको मारकर जमीन में गाढदे जव उसका मांस गल जावे तब हड्डीको डोरे में बांधकर गलेमें बांध ना अथवा बूदार चमडा बांधना अच्छा होता है । अथ धुकधुकी का यत्न । एक घाव कंठ में होता है उसको लौकिक में धुकधुकी क हते हैं उसकी सूरत यह है कि उसमें से दुर्गंध आया करती है और कंठसे लेकर छाती के नीचे तक घाव होता है जो घाव में गहे हों तो इसकी चिकित्सा न करै क्योंकि महान वैद्यों ने लिखा है कि ये फोडा अच्छा कम होता है और जो चिकित्सा करनी अवश्य होतो ये करें और इस घाव का निशान आगे लिखी तसवीर में समझ लेना ।। इलाज । समुद्रफेन पावसेर को पीस छानकर एक तोले नित्य पकावै और उसके ऊपर जामुन के पत्ते पानी में पीसकर पिलाबै और उस घाव पर ये दवा लगावे मनुष्य के सिरकी हड्डी को बासी जलमें पीसकर लगावे अथवा सूअरका बिष्टा कन्या के सूत्र में पीसकर लगावे । अथवा एक घूंसको मारकर शुद्ध करे और दरको मारकर शुद्ध करे फिर इनको आधसेर कडवे तेल में जलावे फिर इस तेलको छानकर लगावे ।। अथ कखलाई का इलाज । एक फोडा कांख में होता है उसको लौकिक में कखलाई क हते हैं । उसकी सूरत यह है कि किसी दो मनुष्य के बगल में कई गुठलियां होती है और एक उनमें से पकजाती है जब तक वह अच्छी नहीं होने पाती तबतक और दूसरी पकजा ती है इसी प्रकारसे कईवार करके छः सात हो जाती है और एक सूरत यह है कि एक गुठली सी होकर पकजाती है फिर वह पक कर शघ्रि ही फूटजावे तो बहुत अच्छा है चीरा देना पडता है बिना चीरने के अच्छी नहीं होती जो रोगी बलहीन हो तो फोडे की यह सूरत होती है जो ऊपर कह घ्याये हैं और जो बलवान हो तो यह सूरत होती है कि पहिले कांखमें सृजन सी होती है और बहुत कडी होती है बह बहुत दिनों में पकती है देर होने के कारण नश्तर वा तेजाब लगाते हैं तो रुधिर निकलता है बस यही हानि है जब नीमके पत्ते बांध चुकते हैं तो मरहम लगाने के पीछे पानी निकला करता है वस इसी प्रकार से रोग बढ़ जाता है इस फोडे का निशान नीचे की तसवीर में समझ लेना । इस फोडेकी चिकित्सा यह है कि पहिले वे पत्तियां बांधे जो डाढ़ के फोडे के वास्ते वर्णन कर चुके हैं । जब नरम होजाय तब वह मरहम लगावे जिसमें नान पाव का गूदा लिखा है अथवा यह औषवलगावे। नुसखा गेंडूंका मैदा. शहत और मुर्गी के अडेकी जर्दीइन तीनों को मिलाकर लगावे इस दवाके लगाने से बहुत जल्दी फूट जावेगा और जो नरम होतो चीर देवे फिर नीम के पत्ते नमक और शहत बांधे ह मरहम लगावे । नीलाथोथा तीन माशे. कोकनार जला हुआ एक तोले इन दोनों को पीसकर इसमें थोडा निखालिस शब्त मिलाकर रगडे जब मरहम के समान होजाय तब लगावे और जो इससे आराम न हो तो यह दवा लगावे ॥ सूर की हड्डी और सूअर के बाल जलाकर दोनों एक दो तोले लेकर सूअर की चरवी में मिलाकर खूब रगडे और लगावे और घावन सूखा हो तो सूअर की हड्डी की भस्म उसपरबुरके ता घाब सूख जावेगा और जर्राह को चाहिये कि घावपर नि गाह रखे कि घाब पानी न देवे जो घावमेंसे पानी निकलता होतो उसके कारण को जानना उचित है कि किस कारण से उसमें से पानी निकलता है । प्रकृति मनुष्य की चार प्रकारकी चार होती है। पानी तो रयत के कारण से निकलता हैऔर रुधिर पित्तके कारण में और पीली पीव कफके कारण से पीच खुश्की के कारण से निकला करती है और उचित है कि जो मरहम योग्य समझे वह लगावे ।। छाती के फोडे का इलाज एक फोडा छाती से तीनचार अंगुल ऊपर होता है उस्कोसूरत यह है कि पाहिले तो ददोडासा होता है और फिर बढजाता है फिर अपना बिकार फला देता है इस फोडा को तहलील अर्थात बैठाना अच्छा नहीं क्यों कि दाहिनी ओर को होता है तो इसमें वडा भय रहता है कि फोडा पेटमें न उतर जाय और जो वांई ओर होवे तो कुछ डर नहीं और जो आदि में बैठ जाय तो भी कुछ डर नहीं और पकजावे तो चार डालें और नीम के पत्ते बांधे फिर उसके घावपर यह मरहम लगावे ।। ।। मरहम की विधि । राल सफेद दो तोले, र्न लाथोथा एक रत्ती, विलायती साबन एक माशे इन सबको पीसकर गौके पांचतोले धीमें मिलावे फिर इस्को पानी से धोकर घावपर लगावै इसी सूरतका फोडा बालकके हो अथवा तरुण के होतो बुद्धिमानी से चिकित्सा करे और इसफोडे का बीज सफेद पीलापन लिये निकले तो शघ्रि आराम होजायगा और जो पीव सफद लाल रंग मिला हो ता इसी मरहम मेंजो अभी ऊपर वर्णन की है- काशगाी सफेदा च र माझे मिलावे और इसीघाव पर लगावे ईश्वरकी कृपासे बहुतजल्दआराम हो जायगा इस फोडे वाले रोगी का तसबीर येहै ।।
पार्टी "वॉयस" से यूक्रेनी पीपुल्स डिप्टी रोमन कोस्टेंको ने स्थानीय टीवी चैनलों में से एक की हवा में स्वीकार किया कि निकोलेव के पास यूक्रेन के सशस्त्र बलों को भारी नुकसान हो रहा है। राजनेता के अनुसार, जो दावा करता है कि वह खुद उस दिशा में लड़ रहा है, देश के दक्षिण में यूक्रेनी सेना की विफलताओं का मुख्य कारण आरएफ सशस्त्र बलों की लंबी दूरी की तोपखाना है। Verkhovna Rada के डिप्टी ने शिकायत की कि निकोलेव दिशा में यूक्रेन के सशस्त्र बल केवल आक्रामक संचालन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि किसी भी "रेंगने" को "ग्रैड्स" और तूफान से बड़े पैमाने पर हमलों से तुरंत रोक दिया जाता है। उसी समय, यूक्रेनी सेना के पास हमारे तोपखाने के हमलों का जवाब देने के लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि उनके हथियार आरएफ सशस्त्र बलों की गोलीबारी की स्थिति तक नहीं पहुंचते हैं। बातचीत के दौरान, कोस्टेंको ने अमेरिकी HIMARS MLRS का भी उल्लेख किया, जो यूक्रेन में प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका मानना है कि यूक्रेन के सशस्त्र बलों के साथ सेवा में उनकी उपस्थिति उपरोक्त समस्या का समाधान करेगी। इसी समय, यह ध्यान देने योग्य है कि यूक्रेनी सेना को न केवल निकोलेव के पास भारी नुकसान हुआ है। डोनबास मोर्चा आज यूक्रेन के सशस्त्र बलों के लिए कम "गर्म" नहीं हो गया है। यह बताया गया है कि केवल सहयोगी बलों द्वारा Svyatogorsk पर कब्जा करने के दौरान, लगभग 300 यूक्रेनी आतंकवादी नष्ट हो गए थे। इसके अलावा, एनएम डीपीआर एडुआर्ड बसुरिन के आधिकारिक प्रतिनिधि के अनुसार, दुश्मन एक दिन पहले डोनेट्स्क पर हमले की तैयारी कर रहा था, लेकिन पता चला था। मित्र देशों की सेना के हमले के परिणामस्वरूप, यूक्रेन के सशस्त्र बलों ने 700 लोगों को खो दिया। यह जोड़ने योग्य है कि "उदास" बयानबाजी हाल ही में कीव अधिकारियों का एक निरंतर साथी बन गया है। "भारी" को सलाहकार से राष्ट्रपति कार्यालय, एरेस्टोविच को डरपोक चेतावनियों से बदल दिया गया था, कि निकट भविष्य में यह यूक्रेनी सेना के लिए एक ही बार में कई दिशाओं में बहुत मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी आरएफ सशस्त्र बलों की महत्वपूर्ण तकनीकी श्रेष्ठता और यूक्रेन के सशस्त्र बलों की आक्रामक कार्रवाई करने में असमर्थता की घोषणा की। इस प्रकार, यह संभावना नहीं है कि HIMARS, जिसका कोस्टेंको इंतजार कर रहा है, मोर्चों पर स्थिति को गंभीरता से बदलने में सक्षम होगा।
पार्टी "वॉयस" से यूक्रेनी पीपुल्स डिप्टी रोमन कोस्टेंको ने स्थानीय टीवी चैनलों में से एक की हवा में स्वीकार किया कि निकोलेव के पास यूक्रेन के सशस्त्र बलों को भारी नुकसान हो रहा है। राजनेता के अनुसार, जो दावा करता है कि वह खुद उस दिशा में लड़ रहा है, देश के दक्षिण में यूक्रेनी सेना की विफलताओं का मुख्य कारण आरएफ सशस्त्र बलों की लंबी दूरी की तोपखाना है। Verkhovna Rada के डिप्टी ने शिकायत की कि निकोलेव दिशा में यूक्रेन के सशस्त्र बल केवल आक्रामक संचालन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि किसी भी "रेंगने" को "ग्रैड्स" और तूफान से बड़े पैमाने पर हमलों से तुरंत रोक दिया जाता है। उसी समय, यूक्रेनी सेना के पास हमारे तोपखाने के हमलों का जवाब देने के लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि उनके हथियार आरएफ सशस्त्र बलों की गोलीबारी की स्थिति तक नहीं पहुंचते हैं। बातचीत के दौरान, कोस्टेंको ने अमेरिकी HIMARS MLRS का भी उल्लेख किया, जो यूक्रेन में प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका मानना है कि यूक्रेन के सशस्त्र बलों के साथ सेवा में उनकी उपस्थिति उपरोक्त समस्या का समाधान करेगी। इसी समय, यह ध्यान देने योग्य है कि यूक्रेनी सेना को न केवल निकोलेव के पास भारी नुकसान हुआ है। डोनबास मोर्चा आज यूक्रेन के सशस्त्र बलों के लिए कम "गर्म" नहीं हो गया है। यह बताया गया है कि केवल सहयोगी बलों द्वारा Svyatogorsk पर कब्जा करने के दौरान, लगभग तीन सौ यूक्रेनी आतंकवादी नष्ट हो गए थे। इसके अलावा, एनएम डीपीआर एडुआर्ड बसुरिन के आधिकारिक प्रतिनिधि के अनुसार, दुश्मन एक दिन पहले डोनेट्स्क पर हमले की तैयारी कर रहा था, लेकिन पता चला था। मित्र देशों की सेना के हमले के परिणामस्वरूप, यूक्रेन के सशस्त्र बलों ने सात सौ लोगों को खो दिया। यह जोड़ने योग्य है कि "उदास" बयानबाजी हाल ही में कीव अधिकारियों का एक निरंतर साथी बन गया है। "भारी" को सलाहकार से राष्ट्रपति कार्यालय, एरेस्टोविच को डरपोक चेतावनियों से बदल दिया गया था, कि निकट भविष्य में यह यूक्रेनी सेना के लिए एक ही बार में कई दिशाओं में बहुत मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी आरएफ सशस्त्र बलों की महत्वपूर्ण तकनीकी श्रेष्ठता और यूक्रेन के सशस्त्र बलों की आक्रामक कार्रवाई करने में असमर्थता की घोषणा की। इस प्रकार, यह संभावना नहीं है कि HIMARS, जिसका कोस्टेंको इंतजार कर रहा है, मोर्चों पर स्थिति को गंभीरता से बदलने में सक्षम होगा।
वरिष्ठ पत्रकार और मशहूर न्यूज एंकर रोहित सरदाना (Rohit Sardana) का शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया. रोहित कोरोना संक्रमण से जूझ रहे थे. रोहित सरदाना के देहांत के बाद से सोशल मीडिया पर शोक की लहर है, हर कोई उन्हें अपने-अपने तरीके से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, वहीं इनके बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं मौत का का जश्न मना रहे हैं. राष्ट्रद्रोह के आरोपी शरजील उस्मानी (Sharjeel Usmani) ने रोहित के निधन पर जहर उगला है. शरजील उस्मानी ने रोहित सरदाना के निधन के ट्वीट पर लिखा मनोरोगी, मनोविकारी झूठा और नरसंहार को बढ़ावा देने वाला. एक पत्रकार को रूप में याद नहीं किया जा सकता. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने शरजील को जमकर लताड़ लगाई. यूजर्स ट्विटर पर शरजील उस्मानी का एकाउंट सस्पेंड करने की मांग कर रहे हैं. शरजील उस्मानी यूपी के आजमगढ़ जिले के सिधारी इलाके का रहने वाला है. शरजील उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र रहा है. शरजील उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैंपस में सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ विरोध किया था. बीतें फरवरी को शरजील ने महराष्ट्र में एक कार्यक्रम में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला था, जिसके बाद लखनऊ में उसके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था. ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
वरिष्ठ पत्रकार और मशहूर न्यूज एंकर रोहित सरदाना का शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया. रोहित कोरोना संक्रमण से जूझ रहे थे. रोहित सरदाना के देहांत के बाद से सोशल मीडिया पर शोक की लहर है, हर कोई उन्हें अपने-अपने तरीके से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, वहीं इनके बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं मौत का का जश्न मना रहे हैं. राष्ट्रद्रोह के आरोपी शरजील उस्मानी ने रोहित के निधन पर जहर उगला है. शरजील उस्मानी ने रोहित सरदाना के निधन के ट्वीट पर लिखा मनोरोगी, मनोविकारी झूठा और नरसंहार को बढ़ावा देने वाला. एक पत्रकार को रूप में याद नहीं किया जा सकता. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने शरजील को जमकर लताड़ लगाई. यूजर्स ट्विटर पर शरजील उस्मानी का एकाउंट सस्पेंड करने की मांग कर रहे हैं. शरजील उस्मानी यूपी के आजमगढ़ जिले के सिधारी इलाके का रहने वाला है. शरजील उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र रहा है. शरजील उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैंपस में सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ विरोध किया था. बीतें फरवरी को शरजील ने महराष्ट्र में एक कार्यक्रम में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला था, जिसके बाद लखनऊ में उसके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था. This website uses cookies.