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नई दिल्लीः हाल ही में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर वर्ष 2050 तक पूर्व में अनुमानित संख्या से तीन गुना अधिक आबादी को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पूरी तरह खत्म हो सकती है। शोध के अनुसार, मुंबई ही नहीं, चीन का शंघाई, मिश्र का अलेक्जेंड्रिया भी 2050 तक पानी में डूब जाएगा। न्यू जर्सी स्थित 'क्लाइमेट सेंट्रल' द्वारा किए गए इस शोध को 'नेचर कम्यूनिकेशंस' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। शोध के अनुसार, वर्तमान में लगभग 15 करोड़ लोग ऐसी भूमि पर रह रहे हैं जो मध्य शताब्दी तक हाई टाइड की जद में होगी। नए अनुमान के मुताबिक भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के पूरी तरह खत्म होने का खतरा है। खासकर शहर के निचले किनारे को सबसे ज्यादा खतरा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लेखकों ने सैटेलाइट रीडिंग के आधार पर भूमि की ऊंचाई की गणना का एक अधिक सटीक तरीका विकसित किया है, जो बड़े क्षेत्रों पर समुद्र-स्तर के प्रभाव के आकलन का एक मानक तरीका है, और पाया कि पिछली संख्याएं हकीकत से बहुत ज्यादा दूर थीं।
नई दिल्लीः हाल ही में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर वर्ष दो हज़ार पचास तक पूर्व में अनुमानित संख्या से तीन गुना अधिक आबादी को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पूरी तरह खत्म हो सकती है। शोध के अनुसार, मुंबई ही नहीं, चीन का शंघाई, मिश्र का अलेक्जेंड्रिया भी दो हज़ार पचास तक पानी में डूब जाएगा। न्यू जर्सी स्थित 'क्लाइमेट सेंट्रल' द्वारा किए गए इस शोध को 'नेचर कम्यूनिकेशंस' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। शोध के अनुसार, वर्तमान में लगभग पंद्रह करोड़ लोग ऐसी भूमि पर रह रहे हैं जो मध्य शताब्दी तक हाई टाइड की जद में होगी। नए अनुमान के मुताबिक भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के पूरी तरह खत्म होने का खतरा है। खासकर शहर के निचले किनारे को सबसे ज्यादा खतरा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लेखकों ने सैटेलाइट रीडिंग के आधार पर भूमि की ऊंचाई की गणना का एक अधिक सटीक तरीका विकसित किया है, जो बड़े क्षेत्रों पर समुद्र-स्तर के प्रभाव के आकलन का एक मानक तरीका है, और पाया कि पिछली संख्याएं हकीकत से बहुत ज्यादा दूर थीं।
पूरी दुनिया में अब ओमिक्रॉन का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इसे लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। भारत के कई राज्यों में भी इसके मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। इसी बीच ओमिक्रॉन को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, एक हालिया रिसर्च में दावा किया गया है हुआ है कि जब ओमिक्रॉन को मात देने में एंटीबॉडी फेल हो जाती है तो शरीर की टी-कोशिकाएं उससे लड़ती हैं। ये कोशिकाएं इस वायरस से लड़ने में समर्थ हैं। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी और हॉन्ग-कॉन्ग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की संयुक्त रिसर्च में ये दावा किया गया है। इस रिसर्च को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वायरस से लड़ने में शरीर की सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस कही जाने वाली यानी टी-सेल्स कारगर साबित हुई हैं। शोधकर्ताओं ने आगे बताया कि कोरोना के दूसरे वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन में सबसे ज्यादा बार म्यूटेशन हुए हैं। म्यूटेशन होने के कारण ऐसा माना जा रहा है कि वैक्सीन के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडीज को भी मात दे सकता है। ऐसी स्थिति में अगर ऑमिक्रॉन शरीर में प्रवेश करता है तो टी-सेल्स उस पर अटैक करेंगी। यह खास तरह की कोशिकाएं हैं। इनका निर्माण हड्डियों के मैरो में होता है। वहीं, मेलबर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मैथ्यु मैके ने बताया, शुरुआती दौर की स्टडी है और इसके नतीजे सकारात्मक रहे हैं। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि ओमिक्रॉन ही नहीं दूसरे वैरिएंट पर भी जब एंटीबॉडीज नहीं काम करेंगी तो टी-सेल्स वायरस से सुरक्षा देंगी।
पूरी दुनिया में अब ओमिक्रॉन का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इसे लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। भारत के कई राज्यों में भी इसके मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। इसी बीच ओमिक्रॉन को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, एक हालिया रिसर्च में दावा किया गया है हुआ है कि जब ओमिक्रॉन को मात देने में एंटीबॉडी फेल हो जाती है तो शरीर की टी-कोशिकाएं उससे लड़ती हैं। ये कोशिकाएं इस वायरस से लड़ने में समर्थ हैं। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी और हॉन्ग-कॉन्ग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की संयुक्त रिसर्च में ये दावा किया गया है। इस रिसर्च को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वायरस से लड़ने में शरीर की सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस कही जाने वाली यानी टी-सेल्स कारगर साबित हुई हैं। शोधकर्ताओं ने आगे बताया कि कोरोना के दूसरे वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन में सबसे ज्यादा बार म्यूटेशन हुए हैं। म्यूटेशन होने के कारण ऐसा माना जा रहा है कि वैक्सीन के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडीज को भी मात दे सकता है। ऐसी स्थिति में अगर ऑमिक्रॉन शरीर में प्रवेश करता है तो टी-सेल्स उस पर अटैक करेंगी। यह खास तरह की कोशिकाएं हैं। इनका निर्माण हड्डियों के मैरो में होता है। वहीं, मेलबर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मैथ्यु मैके ने बताया, शुरुआती दौर की स्टडी है और इसके नतीजे सकारात्मक रहे हैं। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि ओमिक्रॉन ही नहीं दूसरे वैरिएंट पर भी जब एंटीबॉडीज नहीं काम करेंगी तो टी-सेल्स वायरस से सुरक्षा देंगी।
चुनाव के दौरान डीयू कैंपस का माहौल देखने लायक होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) चुनाव की तैयारी में पूरी तरह जुट गई है. कैंपस की दीवारें पोस्टरों और बैनरों से पटी पड़ी हैं. हालांकि अब तक संगठनों ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है लेकिन छात्र संगठन इस प्रचार में कोई भी चूक नहीं करना चाहते हैं. इसलिए स्टूडेंट्स यूनियन ने वोट मांगने के लिए कैंपेनिंग भी शुरू कर दी है. इस बार के चुनाव में हर पार्टी के पास FYUP और CSAT के ही मुद्दे होंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि एक सामान मुद्दे को वे किस तरह पेश कर वोट बंटोरते हैं. डीयू में लाखों की संख्या में यूथ पढ़ते हैं. हर चुनाव में यूथ की भागीदारी अहम होती है. यही वजह है कि हर साल डूसू चुनावों से रुझान मिलता है कि यूथ किस पार्टी की विचारधारा के साथ है. पिछले साल डूसू की चार में से तीन सीटें एबीपीवी ने जीती थी जोकि बीजेपी की स्टूडेंट विंग है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस साल भी एबीवीपी का पलड़ा भारी है. 12 सितंबर को होने वाले इस चुनाव के नतीजे से यह साफ हो जाएगा कि अगर दिल्ली में चुनाव होते है तो यूथ किसका साथ देगा.
चुनाव के दौरान डीयू कैंपस का माहौल देखने लायक होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव की तैयारी में पूरी तरह जुट गई है. कैंपस की दीवारें पोस्टरों और बैनरों से पटी पड़ी हैं. हालांकि अब तक संगठनों ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है लेकिन छात्र संगठन इस प्रचार में कोई भी चूक नहीं करना चाहते हैं. इसलिए स्टूडेंट्स यूनियन ने वोट मांगने के लिए कैंपेनिंग भी शुरू कर दी है. इस बार के चुनाव में हर पार्टी के पास FYUP और CSAT के ही मुद्दे होंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि एक सामान मुद्दे को वे किस तरह पेश कर वोट बंटोरते हैं. डीयू में लाखों की संख्या में यूथ पढ़ते हैं. हर चुनाव में यूथ की भागीदारी अहम होती है. यही वजह है कि हर साल डूसू चुनावों से रुझान मिलता है कि यूथ किस पार्टी की विचारधारा के साथ है. पिछले साल डूसू की चार में से तीन सीटें एबीपीवी ने जीती थी जोकि बीजेपी की स्टूडेंट विंग है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस साल भी एबीवीपी का पलड़ा भारी है. बारह सितंबर को होने वाले इस चुनाव के नतीजे से यह साफ हो जाएगा कि अगर दिल्ली में चुनाव होते है तो यूथ किसका साथ देगा.
'क्वीन' फिल्म में कंगना रनौत के मंगेतर का रोल निभाकर फेमस हुए एक्टर राजकुमार राव को कौन नहीं जानता। हाल ही में राजकुमार राव राधिका आप्टे के साथ एक चैट शो में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखने के बाद दोनों स्टार्स उन पर हंसने लगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, यह दोनों स्टार्स नेहा धूपिया के चैट शो 'BFFS वॉग' में आने वाले हैं। इस चैट शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है। प्रोमो में नेहा राजकुमार राव और राधिका आप्टे से कई सवाल पूछते हुए दिखाई दे रही हैं। इस दौरान शो के एक हिस्से में नेहा जब राजकुमार राव को 'Strip it or Strap it' टास्क देती है तो वह कपड़े उतारने लगते हैं। जिसे देखकर राधिका और नेहा हंसने लगती हैं। इस चैट शो के दौरान नेहा ने राजकुमार राव से पूछा कि ऐसी कौन सी फेमस एक्ट्रेस हैं जिनके साथ वह काम कर चुके हैं तो उन्होंने कंगना का नाम लिया। वहीं जब राधिका से पूछा कि कौन से फिल्ममेकर को रिटायर हो जाना चाहिए तो राधिका ने रामगोपाल वर्मा का नाम लिया। आपको बता दें, नेहा के चैट शो पर कई सारे सेलिब्रिटीज आ चुके हैं। राजकुमार राव जल्द ही 'ओमार्टा' फिल्म में नजर आएंगे। इस फिल्म में वह आतंकवादी का रोल निभाएंगे। हंसल मेहता और राजकुमार राव की साथ में चौथी फिल्म है। इससे पहले दोनों फिल्म सिटी लाइट्स, शाहिद और अलीगढ़ में साथ काम कर चुके हैं। यह फिल्म 20 अप्रैल, 2018 को रिलीज होगी।
'क्वीन' फिल्म में कंगना रनौत के मंगेतर का रोल निभाकर फेमस हुए एक्टर राजकुमार राव को कौन नहीं जानता। हाल ही में राजकुमार राव राधिका आप्टे के साथ एक चैट शो में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखने के बाद दोनों स्टार्स उन पर हंसने लगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, यह दोनों स्टार्स नेहा धूपिया के चैट शो 'BFFS वॉग' में आने वाले हैं। इस चैट शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है। प्रोमो में नेहा राजकुमार राव और राधिका आप्टे से कई सवाल पूछते हुए दिखाई दे रही हैं। इस दौरान शो के एक हिस्से में नेहा जब राजकुमार राव को 'Strip it or Strap it' टास्क देती है तो वह कपड़े उतारने लगते हैं। जिसे देखकर राधिका और नेहा हंसने लगती हैं। इस चैट शो के दौरान नेहा ने राजकुमार राव से पूछा कि ऐसी कौन सी फेमस एक्ट्रेस हैं जिनके साथ वह काम कर चुके हैं तो उन्होंने कंगना का नाम लिया। वहीं जब राधिका से पूछा कि कौन से फिल्ममेकर को रिटायर हो जाना चाहिए तो राधिका ने रामगोपाल वर्मा का नाम लिया। आपको बता दें, नेहा के चैट शो पर कई सारे सेलिब्रिटीज आ चुके हैं। राजकुमार राव जल्द ही 'ओमार्टा' फिल्म में नजर आएंगे। इस फिल्म में वह आतंकवादी का रोल निभाएंगे। हंसल मेहता और राजकुमार राव की साथ में चौथी फिल्म है। इससे पहले दोनों फिल्म सिटी लाइट्स, शाहिद और अलीगढ़ में साथ काम कर चुके हैं। यह फिल्म बीस अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह को रिलीज होगी।
इसका मतलब है कि सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ के लिए, क्या होगा? सिग्मा इलेक्ट्रॉन करने वाले पदार्थों के लिए; तो, इन चीजों के लिए क्या होगा उदाहरण के लिए डी अल्काइल कार्बाइन। सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थों के लिए कि यदि वह कार्बाइन में प्रस्तुत करता है; तो यह कैसा व्यवहार करेगा; एक बार जब यह सिग्मा इलेक्ट्रॉन प्रतिस्थापक दान कर देता है तो यह क्या करेगा? तो, यह क्या करेगा? यह प्रेरक रूप से छोटे गैर-बंधन sp2 कक्षीय और p कक्षीय अंतराल को प्रेरित करेगा जो त्रिगुण अवस्था का पक्षधर है। अगर हम देखें; अगर आपको याद हो तो मैंने अपनी पिछली कक्षा में दिखाया था कि इसे इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन में कैसे दिखाया जा सकता है; चलो इस तरह कहते हैं। तो, इस बॉन्डिंग के लिए हमने सिग्मा दिया है फिर यह एक sp2 फिर p और फिर सिग्मा स्टार जैसा है। अब हमने इस त्रिक के लिए p कक्षक के लिए इन इलेक्ट्रॉनों को इस प्रकार भरा। अब सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ क्या करेंगे? अब यह छोटे गैर-बंधन sp2 कक्षीय p कक्षीय अंतराल के लिए प्रेरक रूप से प्रेरित करता है। इसका मतलब है, मूल रूप से कार्बेन में प्रतिस्थापन प्रतिस्थापन दान करने वाले सिग्मा इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण; इसका मतलब है, इस तरह; चलो इस तरह कहते हैं। इसलिए, यदि ये 2 उदाहरण एल्काइल समूहों के अनुसार सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ हैं, तो वे गैर-बंधन sp2 कक्षीय और p कक्षीय के बीच के अंतर को कम करने के लिए प्रेरक रूप से प्रेरित करेंगे। तो, वे इसे कम करने की कोशिश करेंगे और एक बार यह ऊर्जा कम हो जाएगी; जाहिर है, ये कार्बाइन ट्रिपल अवस्था के रूप में रहना चाहते थे क्योंकि इन sp2 और p के बीच ऊर्जा अंतर अब कम है; तो यह त्रिगुणात्मक अवस्था के रूप में रहेगा। तो, क्या होगा? ट्रिपल स्टेट एहसान । इसलिए, यदि आप हमारी पिछली स्लाइड में देखते हैं तो हमने दिखाया है कि उदाहरण के अनुसार इस तरह; यहाँ यदि आप देखें तो मैंने वह त्रिक कार्बेन दिखाया है; सभी इस तरह हैं कि हमारे माता-पिता कार्बाइन अणुः सीएच 2 कार्बिन, सीएचपीएच या अल्किल समूह कार्बेन वाले अल्काइल समूह; वे वास्तव में ट्रिपल कार्बाइन के रूप में रहते हैं। (Refer Slide Time: 13:20) इसके बाद, हम देखेंगे कि कार्बेन में एकाकी जोड़े के साथ इलेक्ट्रॉन समृद्ध पदार्थ होते हैं।
इसका मतलब है कि सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ के लिए, क्या होगा? सिग्मा इलेक्ट्रॉन करने वाले पदार्थों के लिए; तो, इन चीजों के लिए क्या होगा उदाहरण के लिए डी अल्काइल कार्बाइन। सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थों के लिए कि यदि वह कार्बाइन में प्रस्तुत करता है; तो यह कैसा व्यवहार करेगा; एक बार जब यह सिग्मा इलेक्ट्रॉन प्रतिस्थापक दान कर देता है तो यह क्या करेगा? तो, यह क्या करेगा? यह प्रेरक रूप से छोटे गैर-बंधन spदो कक्षीय और p कक्षीय अंतराल को प्रेरित करेगा जो त्रिगुण अवस्था का पक्षधर है। अगर हम देखें; अगर आपको याद हो तो मैंने अपनी पिछली कक्षा में दिखाया था कि इसे इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन में कैसे दिखाया जा सकता है; चलो इस तरह कहते हैं। तो, इस बॉन्डिंग के लिए हमने सिग्मा दिया है फिर यह एक spदो फिर p और फिर सिग्मा स्टार जैसा है। अब हमने इस त्रिक के लिए p कक्षक के लिए इन इलेक्ट्रॉनों को इस प्रकार भरा। अब सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ क्या करेंगे? अब यह छोटे गैर-बंधन spदो कक्षीय p कक्षीय अंतराल के लिए प्रेरक रूप से प्रेरित करता है। इसका मतलब है, मूल रूप से कार्बेन में प्रतिस्थापन प्रतिस्थापन दान करने वाले सिग्मा इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण; इसका मतलब है, इस तरह; चलो इस तरह कहते हैं। इसलिए, यदि ये दो उदाहरण एल्काइल समूहों के अनुसार सिग्मा इलेक्ट्रॉन दान करने वाले पदार्थ हैं, तो वे गैर-बंधन spदो कक्षीय और p कक्षीय के बीच के अंतर को कम करने के लिए प्रेरक रूप से प्रेरित करेंगे। तो, वे इसे कम करने की कोशिश करेंगे और एक बार यह ऊर्जा कम हो जाएगी; जाहिर है, ये कार्बाइन ट्रिपल अवस्था के रूप में रहना चाहते थे क्योंकि इन spदो और p के बीच ऊर्जा अंतर अब कम है; तो यह त्रिगुणात्मक अवस्था के रूप में रहेगा। तो, क्या होगा? ट्रिपल स्टेट एहसान । इसलिए, यदि आप हमारी पिछली स्लाइड में देखते हैं तो हमने दिखाया है कि उदाहरण के अनुसार इस तरह; यहाँ यदि आप देखें तो मैंने वह त्रिक कार्बेन दिखाया है; सभी इस तरह हैं कि हमारे माता-पिता कार्बाइन अणुः सीएच दो कार्बिन, सीएचपीएच या अल्किल समूह कार्बेन वाले अल्काइल समूह; वे वास्तव में ट्रिपल कार्बाइन के रूप में रहते हैं। इसके बाद, हम देखेंगे कि कार्बेन में एकाकी जोड़े के साथ इलेक्ट्रॉन समृद्ध पदार्थ होते हैं।
आईपीएल 2020 का ख़िताब मुंबई इंडियंस की टीम ने जीत लिया था और रिकॉर्ड पांचवी बार आईपीएल की चैम्पियन बन गई थी. बीसीसीआई ने आईपीएल 2021 की तैयारी भी शुरू कर दी है. हालांकि आईपीएल 2021 से पहले बीसीसीआई एक और टी-20 टूर्नामेंट का आयोजन करने जा रही है. कोविड-19 के कारण इस बार भारतीय का घरेलू क्रिकेट सीजन भी प्रभावित रहा. ऐसी संभावना है कि इंडियन प्रीमियर लीग-14 की खिलाड़ियों की नीलामी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड कोरोना वायरस महामारी के कारण संशोधित घरेलू सीजन की शुरुआत जनवरी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए राष्ट्रीय टी20 चैंपियनशिप के साथ कर सकता है. पीटीआई न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, अधिकारी ने आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए कहा, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद आईपीएल 2021 संस्करण अगले साल अप्रैल-मई की सामान्य विंडो में हो सकता है. बीसीसीआई के ही एक सूत्र के अनुसार एक बड़ी नीलामी की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि अगले सीजन में एक नई टीम की एंट्री हो सकती है. ऐसे में इस टूर्नामेंट में 8 की बजाय 9 टीमें हो सकती है.
आईपीएल दो हज़ार बीस का ख़िताब मुंबई इंडियंस की टीम ने जीत लिया था और रिकॉर्ड पांचवी बार आईपीएल की चैम्पियन बन गई थी. बीसीसीआई ने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस की तैयारी भी शुरू कर दी है. हालांकि आईपीएल दो हज़ार इक्कीस से पहले बीसीसीआई एक और टी-बीस टूर्नामेंट का आयोजन करने जा रही है. कोविड-उन्नीस के कारण इस बार भारतीय का घरेलू क्रिकेट सीजन भी प्रभावित रहा. ऐसी संभावना है कि इंडियन प्रीमियर लीग-चौदह की खिलाड़ियों की नीलामी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड कोरोना वायरस महामारी के कारण संशोधित घरेलू सीजन की शुरुआत जनवरी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए राष्ट्रीय टीबीस चैंपियनशिप के साथ कर सकता है. पीटीआई न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, अधिकारी ने आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए कहा, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद आईपीएल दो हज़ार इक्कीस संस्करण अगले साल अप्रैल-मई की सामान्य विंडो में हो सकता है. बीसीसीआई के ही एक सूत्र के अनुसार एक बड़ी नीलामी की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि अगले सीजन में एक नई टीम की एंट्री हो सकती है. ऐसे में इस टूर्नामेंट में आठ की बजाय नौ टीमें हो सकती है.
रूरू-मृग के चमड़े से वह ढका हुआ है। मजीठ के रंग से रँगी हुई और मुर्वी तंतु से बुनी हुई यह धोती पहने हुए है। इसके हाथ में जप करने के लिये माला, धनुष और पीपल का दंड है ।' उत्तर- चरित के दूसरे अंक में आत्रेयी, लव और कुश के में जातकर्म, चूडाकर्म, उपनयन और वेदाध्ययन आदि संस्कारों का वृत्तांत लिखा हुआ है। वीर-चरित के प्रथम अंक में रामचंद्र आदि के दीक्षा ग्रहण, गोदान-मंगल और विवाह संस्कार का वर्णन है। भवभूति ने सानिक गृहस्थ के दृष्टांत के तौर पर बौरचरित के चौथे अंक में विश्वामित्र और उत्तर-चरित के प्रथम अंक में जनक ऋषि के नित्य कर्मों का उल्लेख किया है । वीर-चरित और उत्तर-घरित के दूसरे अंक में अतिथि सत्कार की प्रणाली और उसकी प्रयोजनीयता को बहुत ही अच्छी तरह दिखाया है । ब्राह्मण परशुराम को क्षत्रिय रामचंद्र के विरुद्ध युद्ध के लिये सुनकर जनक शतानंद से कहते हैंऋषिरयमतिथिश्चेत् विष्टरैः पाद्यमर्थ्यम् तदनु व मधुपर्क कल्प्यतां श्रोत्रियाय । अयनुरिपुरकस्मात् द्वेष्टिनः पुत्रभाण्डे कार्मुकस्याधिकारः ॥ ( वीर-चरित, २) 'यह जामदग्न्य ऋषि यदि अतिथि रूप से आए हैं, तो उन्हें आसन, पाय, अर्ध्य और मधुपर्क दीजिए; और यदि ये हमारे पुत्र-तुल्य रामचंद्र से शत्रुता करने के लिये आए हैं, तो इस नीतिहीन ब्राह्मण की सेवा हमें धनुष से ही करनी होगी।' उत्तर-चरित के दूसरे अंक में आत्रेयी के आगमन से प्रसन होकर वन-देवता फल-फूल और पत्ते बखेरकर अपनी प्रसन्नता प्रकट करते हैं और कहते हैंयथेच्छा भोग्यं वो वनमिदमयं मे सुदिवसः सतां सद्भिः सङ्गः कथमपि हि पुण्येन भवति । तरुच्छाया तोयं यदपि तपसां योग्यमशनम् फलं वा मूलं वा तदपि न पराधीनमिह वः ॥ (उत्तर, ७२ ) 'इस वन में उत्पन्न हुए द्रव्यों का आप इच्छानुसार भोग कीजिए । आज हमारे सौभाग्य का दिन है कि आपके दर्शन हुए, विना पुण्य फलों के उदय हुए सजनों का समागम नहीं होता वृक्षों की छाया, झरनों का जल और फल-मूल आदि तपस्वियों का भोजन है । यहाँ पर जो कुछ है, उसे आप ही समझें, पराया नहीं।' वीर-चरित के तीसरे अंक में लिखा है कि जो लोग इष्टापूर्त कर्मों में विघ्न डालते थे, राजा दशरथ उनका दमन करते थे। अत्रं तपः सत्यं वेदानाञ्चैव पालनम् आतिथ्यं वैश्वदेवञ्च इष्टमित्यभिधीयते । वापीकूपतड़ागादिदेवतायतनानि च । अनप्रदानामारामाः पूर्त्तमित्यभिधीयते ।। इष्टेन गमते स्वर्ग पूर्तेन मोक्षमाप्नुयात् । (अत्रिः) महर्षि अत्रि लिखते हैं - 'अमिहोत्र, तपस्या, सच बोलना वेद-रक्षण, अतिथि सत्कार और वैश्वदेव ये सब यज्ञ कहाते हैं नाड़ी, कुओं और तालाब खुदवाना, अन्नन्दान, बाग़ लगवाना, ये सब पूत कहते हैं । यज्ञ से स्वर्ग और पूर्त्त से मोक्ष की प्राभि होती है।' वीर-चरित के तीसरे अंक में श्रेष्ठ ब्राह्मण के कर्तव्य कर्मों का आभास दिया गया है । वशिष्ठ परशुराम से कहते हैं"अयि वत्स, किमन्या यrationngaपिशाचिकया ? श्रोत्रियो जामदग्न्यपूतं भजस्व पन्धानमारण्यकश्चापि तत्प्रचिनु चित्तप्रसादनीश्चतस्रो सैन्याविभावनाः । प्रसीदनु हि ते विशोका ज्योतिष्मती नाम चित्तवृत्तिः । समापयतु परशुं च । तत्मसाइजं ऋतम्भराभिधानमवहिःसाधनोपाधेयसर्वासंसानमपविठवो परागमूर्जस्वलमन्तज्योतिपो दर्शनं प्रज्ञानमपि संभवति । तद्धि आचरितव्यं ब्राह्मणेन सरति येन मृत्युं पास्मानम् ।" (वीर, ३) 'हे वत्स, जीवन-भर इस आयुध-पिशाचिका में भक्त रहने से क्या लाभ है ? है जामदस्य, तुम वानप्रस्थ धर्मावलंबी ब्राह्मण हो, अतएव तुम्हें पवित्र पथ का अवलंबन करना चाहिए । तुम मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा इन चार वृत्तियों के अनुशीलन से चित्त को निर्मल करो । तुम्हारी दुःख-रहित और प्रकाश-स्वरूप मंत्रीकरुणामुदितो पेक्षा चित्तप्रसादनीभवनाः । { पाठअल -१३३ ) इस पर वाचस्पति मिश्र लिखते हैं-'दुखितेषु मैत्रीं सौहार्द भावयत ईर्ष्याकालुष्य निवर्त्तते चित्तस्स । दुःखितेषु कल्यानारमनीव परस्मिन्दुःखाइसेच्छां भावयनः पराप्रकार चिकीर्षाकालुष्य चेतसो निवर्त्तते । पुण्यशीलेषु प्राणिषु मुदितां वर्षं भावयतः कालभ्यं चेतमो नेवर्तते । अपुरावशीलेषु चोपेचां माध्यस्थंभावयतोऽमर्थकालुष्यं चेनसो निवर्त्तते । ततश्चास्य राजसतामसर्मति सात्त्विकः शुक्लो उपना इति चित्त-वृत्ति का उदय हो । परशु का त्याग करो । नित्य सत्य-पूर्ण ऊर्जस्वल ( बलवती ) और अंतर्ज्योति को प्रकाशित करनेवाली प्रज्ञा की तुम्हें प्राप्ति हो । इस प्रज्ञा को प्राप्त करके तुम्हें सभी शक्तियों की प्राप्ति हो जायगी । फिर किसी कार्य के करने में बाहरी साधन की तुम्हें आवश्यकता न होगी । मल और श्र रण के दूर हो जाने पर तुम्हारी प्रज्ञा उलटा काम न करेगी ब्राह्मण को इसी तरह आचरण करना चाहिए । इसी आचरण के द्वारा ब्राह्मरण मृत्यु तक को जीत लेता है ।' उत्तर-चरित के चौथे अंक में लिखा है कि महर्षि जनक पराक और सांतपन आदि कठिन तप किया करते थे । वोर-चरित के पहले अंक में लिखा है कि जनक ने याज्ञचल्क्य से ब्रह्म विद्या की प्राप्ति की थी । उत्तर चरित के दूसरे अंक में लिखा है कि लव और कुश ने वाल्मीकि के पास तीन तरह की विद्याएँ सीखी थीं । आत्रेयी ने दाक्षिणात्य में अपने आने का उद्देश्य वन-देवताओं को इस तरह बताया था-अस्मिन्नगस्त्यप्रमुखाः प्रदेशे भूयांस उद्गीथविदो वसन्ति । तेभ्योऽधिगंतुं निगमान्तविद्यां वाल्मीकिपादिह पर्यटामि ।। ( उत्तर, २) ● द्वादशाहोपवासेन घराकः परिकीर्तितः । याज्ञवल्क्य संहिता, २-३२ ↑ पश्चराज्यन्त्र गोजीरदविमूत्रशद घृतम् । नग्या परेन्सेदेष सान्तपनो विधिः ॥ अन्त्रि- संहिता, ११६ 'इस प्रदेश में अगस्त्य आदि सामवेद के जाननेवाले ब्राह्मण रहते हैं, उनसे उपनिषदों की विद्या सीखने के लिये मैं वाल्मीकि के आश्रम से यहाँ आई हूँ।' वास्तव में इस समय वेद के पढ़ने-पढ़ाने में गुरु-शिष्य लगे रहते थे। भवभूति दक्षिण के रहनेवाले थे। इसलिये उन्होंने कावेरी नदी के किनारे की भूमि का विशेष वर्णन किया है । कावेरी के किनारे पर बहुत ब्राह्मण वास करते थे । जिन्होंने निरंतर नप और वेदाध्ययन द्वारा ब्रह्म का साक्षात्कार कर लिया था, वे इस स्थान पर हजारों वर्ष तक रहे थे । वीर-चरित के सातवें अंक में लिखा हैरामः । अयं वारां राशिः किल मरुभूग्रह्विलसितैस्यं विन्ध्यो येनाहतविहृतिराध्मानमजहात् ! विलिल्ये यत्कुक्षिस्थितशिखिनि वातापि वपुषा सकासां वाणीनां मुनिरकलितास्मास्तु विषयः ॥ ( वीर, ७ ) 'जिसकी चेष्टा से महासमुद्र मरुभूमि बन गया था, जिसके प्रभाव से विंध्य पर्वत ने वृद्धि छोड़कर अपने गर्व का त्याग किया था, जिसकी जठराप्ति में वातापि दानव का देह पच गया था, वही अचिंत्य-माहात्म्य महर्षि अगस्त्य इस कावेरी के तीर पर वास करते हैं । जिन शांत मनीषियों ने संसार से चित्त हटाकर वनवास ग्रहण किया था, वे लोग नदी के तौर पर, वृक्ष के नीचे, या पहाड़ की गुहा में, किस तरह, जंगल में पैदा हुए अन से अपना पेट भरकर काल-यापन करते थे, उत्तर-चरित के प्रथम अंक में भवभूति ने इन सब बातों का बड़ा ही मनोहर वर्णन किया है।
रूरू-मृग के चमड़े से वह ढका हुआ है। मजीठ के रंग से रँगी हुई और मुर्वी तंतु से बुनी हुई यह धोती पहने हुए है। इसके हाथ में जप करने के लिये माला, धनुष और पीपल का दंड है ।' उत्तर- चरित के दूसरे अंक में आत्रेयी, लव और कुश के में जातकर्म, चूडाकर्म, उपनयन और वेदाध्ययन आदि संस्कारों का वृत्तांत लिखा हुआ है। वीर-चरित के प्रथम अंक में रामचंद्र आदि के दीक्षा ग्रहण, गोदान-मंगल और विवाह संस्कार का वर्णन है। भवभूति ने सानिक गृहस्थ के दृष्टांत के तौर पर बौरचरित के चौथे अंक में विश्वामित्र और उत्तर-चरित के प्रथम अंक में जनक ऋषि के नित्य कर्मों का उल्लेख किया है । वीर-चरित और उत्तर-घरित के दूसरे अंक में अतिथि सत्कार की प्रणाली और उसकी प्रयोजनीयता को बहुत ही अच्छी तरह दिखाया है । ब्राह्मण परशुराम को क्षत्रिय रामचंद्र के विरुद्ध युद्ध के लिये सुनकर जनक शतानंद से कहते हैंऋषिरयमतिथिश्चेत् विष्टरैः पाद्यमर्थ्यम् तदनु व मधुपर्क कल्प्यतां श्रोत्रियाय । अयनुरिपुरकस्मात् द्वेष्टिनः पुत्रभाण्डे कार्मुकस्याधिकारः ॥ 'यह जामदग्न्य ऋषि यदि अतिथि रूप से आए हैं, तो उन्हें आसन, पाय, अर्ध्य और मधुपर्क दीजिए; और यदि ये हमारे पुत्र-तुल्य रामचंद्र से शत्रुता करने के लिये आए हैं, तो इस नीतिहीन ब्राह्मण की सेवा हमें धनुष से ही करनी होगी।' उत्तर-चरित के दूसरे अंक में आत्रेयी के आगमन से प्रसन होकर वन-देवता फल-फूल और पत्ते बखेरकर अपनी प्रसन्नता प्रकट करते हैं और कहते हैंयथेच्छा भोग्यं वो वनमिदमयं मे सुदिवसः सतां सद्भिः सङ्गः कथमपि हि पुण्येन भवति । तरुच्छाया तोयं यदपि तपसां योग्यमशनम् फलं वा मूलं वा तदपि न पराधीनमिह वः ॥ 'इस वन में उत्पन्न हुए द्रव्यों का आप इच्छानुसार भोग कीजिए । आज हमारे सौभाग्य का दिन है कि आपके दर्शन हुए, विना पुण्य फलों के उदय हुए सजनों का समागम नहीं होता वृक्षों की छाया, झरनों का जल और फल-मूल आदि तपस्वियों का भोजन है । यहाँ पर जो कुछ है, उसे आप ही समझें, पराया नहीं।' वीर-चरित के तीसरे अंक में लिखा है कि जो लोग इष्टापूर्त कर्मों में विघ्न डालते थे, राजा दशरथ उनका दमन करते थे। अत्रं तपः सत्यं वेदानाञ्चैव पालनम् आतिथ्यं वैश्वदेवञ्च इष्टमित्यभिधीयते । वापीकूपतड़ागादिदेवतायतनानि च । अनप्रदानामारामाः पूर्त्तमित्यभिधीयते ।। इष्टेन गमते स्वर्ग पूर्तेन मोक्षमाप्नुयात् । महर्षि अत्रि लिखते हैं - 'अमिहोत्र, तपस्या, सच बोलना वेद-रक्षण, अतिथि सत्कार और वैश्वदेव ये सब यज्ञ कहाते हैं नाड़ी, कुओं और तालाब खुदवाना, अन्नन्दान, बाग़ लगवाना, ये सब पूत कहते हैं । यज्ञ से स्वर्ग और पूर्त्त से मोक्ष की प्राभि होती है।' वीर-चरित के तीसरे अंक में श्रेष्ठ ब्राह्मण के कर्तव्य कर्मों का आभास दिया गया है । वशिष्ठ परशुराम से कहते हैं"अयि वत्स, किमन्या यrationngaपिशाचिकया ? श्रोत्रियो जामदग्न्यपूतं भजस्व पन्धानमारण्यकश्चापि तत्प्रचिनु चित्तप्रसादनीश्चतस्रो सैन्याविभावनाः । प्रसीदनु हि ते विशोका ज्योतिष्मती नाम चित्तवृत्तिः । समापयतु परशुं च । तत्मसाइजं ऋतम्भराभिधानमवहिःसाधनोपाधेयसर्वासंसानमपविठवो परागमूर्जस्वलमन्तज्योतिपो दर्शनं प्रज्ञानमपि संभवति । तद्धि आचरितव्यं ब्राह्मणेन सरति येन मृत्युं पास्मानम् ।" 'हे वत्स, जीवन-भर इस आयुध-पिशाचिका में भक्त रहने से क्या लाभ है ? है जामदस्य, तुम वानप्रस्थ धर्मावलंबी ब्राह्मण हो, अतएव तुम्हें पवित्र पथ का अवलंबन करना चाहिए । तुम मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा इन चार वृत्तियों के अनुशीलन से चित्त को निर्मल करो । तुम्हारी दुःख-रहित और प्रकाश-स्वरूप मंत्रीकरुणामुदितो पेक्षा चित्तप्रसादनीभवनाः । { पाठअल -एक सौ तैंतीस ) इस पर वाचस्पति मिश्र लिखते हैं-'दुखितेषु मैत्रीं सौहार्द भावयत ईर्ष्याकालुष्य निवर्त्तते चित्तस्स । दुःखितेषु कल्यानारमनीव परस्मिन्दुःखाइसेच्छां भावयनः पराप्रकार चिकीर्षाकालुष्य चेतसो निवर्त्तते । पुण्यशीलेषु प्राणिषु मुदितां वर्षं भावयतः कालभ्यं चेतमो नेवर्तते । अपुरावशीलेषु चोपेचां माध्यस्थंभावयतोऽमर्थकालुष्यं चेनसो निवर्त्तते । ततश्चास्य राजसतामसर्मति सात्त्विकः शुक्लो उपना इति चित्त-वृत्ति का उदय हो । परशु का त्याग करो । नित्य सत्य-पूर्ण ऊर्जस्वल और अंतर्ज्योति को प्रकाशित करनेवाली प्रज्ञा की तुम्हें प्राप्ति हो । इस प्रज्ञा को प्राप्त करके तुम्हें सभी शक्तियों की प्राप्ति हो जायगी । फिर किसी कार्य के करने में बाहरी साधन की तुम्हें आवश्यकता न होगी । मल और श्र रण के दूर हो जाने पर तुम्हारी प्रज्ञा उलटा काम न करेगी ब्राह्मण को इसी तरह आचरण करना चाहिए । इसी आचरण के द्वारा ब्राह्मरण मृत्यु तक को जीत लेता है ।' उत्तर-चरित के चौथे अंक में लिखा है कि महर्षि जनक पराक और सांतपन आदि कठिन तप किया करते थे । वोर-चरित के पहले अंक में लिखा है कि जनक ने याज्ञचल्क्य से ब्रह्म विद्या की प्राप्ति की थी । उत्तर चरित के दूसरे अंक में लिखा है कि लव और कुश ने वाल्मीकि के पास तीन तरह की विद्याएँ सीखी थीं । आत्रेयी ने दाक्षिणात्य में अपने आने का उद्देश्य वन-देवताओं को इस तरह बताया था-अस्मिन्नगस्त्यप्रमुखाः प्रदेशे भूयांस उद्गीथविदो वसन्ति । तेभ्योऽधिगंतुं निगमान्तविद्यां वाल्मीकिपादिह पर्यटामि ।। ● द्वादशाहोपवासेन घराकः परिकीर्तितः । याज्ञवल्क्य संहिता, दो-बत्तीस ↑ पश्चराज्यन्त्र गोजीरदविमूत्रशद घृतम् । नग्या परेन्सेदेष सान्तपनो विधिः ॥ अन्त्रि- संहिता, एक सौ सोलह 'इस प्रदेश में अगस्त्य आदि सामवेद के जाननेवाले ब्राह्मण रहते हैं, उनसे उपनिषदों की विद्या सीखने के लिये मैं वाल्मीकि के आश्रम से यहाँ आई हूँ।' वास्तव में इस समय वेद के पढ़ने-पढ़ाने में गुरु-शिष्य लगे रहते थे। भवभूति दक्षिण के रहनेवाले थे। इसलिये उन्होंने कावेरी नदी के किनारे की भूमि का विशेष वर्णन किया है । कावेरी के किनारे पर बहुत ब्राह्मण वास करते थे । जिन्होंने निरंतर नप और वेदाध्ययन द्वारा ब्रह्म का साक्षात्कार कर लिया था, वे इस स्थान पर हजारों वर्ष तक रहे थे । वीर-चरित के सातवें अंक में लिखा हैरामः । अयं वारां राशिः किल मरुभूग्रह्विलसितैस्यं विन्ध्यो येनाहतविहृतिराध्मानमजहात् ! विलिल्ये यत्कुक्षिस्थितशिखिनि वातापि वपुषा सकासां वाणीनां मुनिरकलितास्मास्तु विषयः ॥ 'जिसकी चेष्टा से महासमुद्र मरुभूमि बन गया था, जिसके प्रभाव से विंध्य पर्वत ने वृद्धि छोड़कर अपने गर्व का त्याग किया था, जिसकी जठराप्ति में वातापि दानव का देह पच गया था, वही अचिंत्य-माहात्म्य महर्षि अगस्त्य इस कावेरी के तीर पर वास करते हैं । जिन शांत मनीषियों ने संसार से चित्त हटाकर वनवास ग्रहण किया था, वे लोग नदी के तौर पर, वृक्ष के नीचे, या पहाड़ की गुहा में, किस तरह, जंगल में पैदा हुए अन से अपना पेट भरकर काल-यापन करते थे, उत्तर-चरित के प्रथम अंक में भवभूति ने इन सब बातों का बड़ा ही मनोहर वर्णन किया है।
रायपुर। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 जनवरी 2023 को कोरबा जिले के एकदिवसीय दौरे पर रहेंगे। अमित शाह झारखंड से होते हुए एक दिन के प्रवास पर कोरबा आएंगे। इस दिन वे आकांक्षी जिला कोरबा के विकास कार्यों का जायजा लेंगे और जिले के अधिकारियों की बैठक लेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी। अमित शाह समीक्षा बैठक के बाद कोरबा जिला बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक लेंगे। फिर मां सर्वमंगला के दर्शन करेंगे और शाम को वापस दिल्ली लौटेंगे। इससे पहले अगस्त में भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए थे। उन्होंने यहां मोदी@20 किताब पर बात करने आए थे। शहर के साइंस कॉलेज स्थित दीनदयाल ऑडिटोरियम में समाज के अलग-अलग विद्वानों को बुलाकर इस किताब पर परिचर्चा का आयोजन बीजेपी की तरफ से किया गया था। अमित शाह ने मंच से मोदी सरकार की उपलब्धियों और उनके कामकाजों को गिनवा रहे थे। उन्होंने भरी सभा में कहा था कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदल दो, चुटकियों में नक्सलवाद खत्म हो जाएगा।
रायपुर। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात जनवरी दो हज़ार तेईस को कोरबा जिले के एकदिवसीय दौरे पर रहेंगे। अमित शाह झारखंड से होते हुए एक दिन के प्रवास पर कोरबा आएंगे। इस दिन वे आकांक्षी जिला कोरबा के विकास कार्यों का जायजा लेंगे और जिले के अधिकारियों की बैठक लेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी। अमित शाह समीक्षा बैठक के बाद कोरबा जिला बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक लेंगे। फिर मां सर्वमंगला के दर्शन करेंगे और शाम को वापस दिल्ली लौटेंगे। इससे पहले अगस्त में भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए थे। उन्होंने यहां मोदी@बीस किताब पर बात करने आए थे। शहर के साइंस कॉलेज स्थित दीनदयाल ऑडिटोरियम में समाज के अलग-अलग विद्वानों को बुलाकर इस किताब पर परिचर्चा का आयोजन बीजेपी की तरफ से किया गया था। अमित शाह ने मंच से मोदी सरकार की उपलब्धियों और उनके कामकाजों को गिनवा रहे थे। उन्होंने भरी सभा में कहा था कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदल दो, चुटकियों में नक्सलवाद खत्म हो जाएगा।
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देवबंद। दारुल उलूम ने रविवार को 250 मदरसों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद उत्तरप्रदेश में मदरसों के सर्वे का समर्थन कर दिया। संगठन ने कहा कि सरकारी जमीन पर बने मदरसों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मदरसों से भी सर्वे के दौरान सरकार का समर्थन करने की अपील की। देवबंद में हुए सम्मेलन के बाद दारुल उलूम के प्रमुख अर्शद मदनी ने कहा कि सर्व कराना सरकार का हक है। उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। अभी तक के सर्वे में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। हमने कभी नहीं कहा कि एक समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार 10 सितंबर से राज्य में संचालित मदरसों का सर्वे करा रही है। हालांकि मदरसों की नाराजगी के बाद भी प्रदेशभर में कही भी सर्वे टीम को विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी मदरसों की बेहतरी के लिए कराए जा रहे सर्वे के काम की तारीफ करते हुए कहा था कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। आजाद ने कहा कि सर्वे के बाद मदरसे न तो बंद होंगे और न ही उन पर बुलडोजर चलाया जाएगा। मदरसे बंद करने और इन पर बुलडोजर चलाने की बात कहकर विपक्षी दल मुसलमानों को भ्रमित कर रहे हैं।
देवबंद। दारुल उलूम ने रविवार को दो सौ पचास मदरसों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद उत्तरप्रदेश में मदरसों के सर्वे का समर्थन कर दिया। संगठन ने कहा कि सरकारी जमीन पर बने मदरसों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मदरसों से भी सर्वे के दौरान सरकार का समर्थन करने की अपील की। देवबंद में हुए सम्मेलन के बाद दारुल उलूम के प्रमुख अर्शद मदनी ने कहा कि सर्व कराना सरकार का हक है। उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। अभी तक के सर्वे में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। हमने कभी नहीं कहा कि एक समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार दस सितंबर से राज्य में संचालित मदरसों का सर्वे करा रही है। हालांकि मदरसों की नाराजगी के बाद भी प्रदेशभर में कही भी सर्वे टीम को विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी मदरसों की बेहतरी के लिए कराए जा रहे सर्वे के काम की तारीफ करते हुए कहा था कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। आजाद ने कहा कि सर्वे के बाद मदरसे न तो बंद होंगे और न ही उन पर बुलडोजर चलाया जाएगा। मदरसे बंद करने और इन पर बुलडोजर चलाने की बात कहकर विपक्षी दल मुसलमानों को भ्रमित कर रहे हैं।
पटना. अग्निपथ योजना के खिलाफ सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को देखते हुए पटना जंक्शन सहित राज्य के सही रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. रेलवे डीआईजी राजीव रंजन ने पटना जंक्शन पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया. अग्निपथ के विरोध में हुए उपद्रव के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को पहुँचाया गया. भारत बंद के दौरान किसी प्रकार की हिंसा से निपटने और रेलवे संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए रेल पुलिस जीआरपी और आरपीएफ पूरी तरह मुस्तैद है. उन्होंने कहा कि हालिया हिंसक घटनाओं के बाद RPF और GRP काफी सतर्कता बरत रही है. रेल डीआईजी राजीव रंजन ने बताया सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं पूरे बिहार में स्थिति शांतिपूर्ण है. पूरे बिहार में रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. कहीं से अब तक किसी तरीके की दिक्कत नहीं हुई है. अग्निपथ के खिलाफ विरोध के कारण प्रदर्शनकारियों ने रेलवे को निशाना बनाया था. लिहाजा RPF के सीनियर ऑफिसर्स ने हिंसा करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं. आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. पटना जंक्शन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. हालांकि सोमवार के भारत बंद का पटना सहित राज्य के अन्य जिलों में कोई खास असर नहीं दिख रहा है. कुछ संगठनों की ओर से छिटपुट प्रदर्शन और मार्च किया गया है लेकिन व्यापक स्तर पर किसी तरह का विरोध नहीं देकने को मिला है. न तो बंद के कारण सरकारी या निजी दफ्तर बंद है और ना ही व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद है. स्कूल, कॉलेज, बैंक आदि भी आम दिनों की तरह खुले है. सडकों पर आवाजाही भी सामान्य है. चूकी रेलवे की ओर से ट्रेन परिचालन को सीमित कर दिया गया है इस कारण आम लोगों को यात्रा करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी दानापुर रेल मंडल से एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन नही हुआ है. न तो लोकल ट्रेनें चल रही है और ना ही लंबी दूरी की ट्रेनों को शुरू किया गया है.
पटना. अग्निपथ योजना के खिलाफ सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को देखते हुए पटना जंक्शन सहित राज्य के सही रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. रेलवे डीआईजी राजीव रंजन ने पटना जंक्शन पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया. अग्निपथ के विरोध में हुए उपद्रव के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को पहुँचाया गया. भारत बंद के दौरान किसी प्रकार की हिंसा से निपटने और रेलवे संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए रेल पुलिस जीआरपी और आरपीएफ पूरी तरह मुस्तैद है. उन्होंने कहा कि हालिया हिंसक घटनाओं के बाद RPF और GRP काफी सतर्कता बरत रही है. रेल डीआईजी राजीव रंजन ने बताया सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं पूरे बिहार में स्थिति शांतिपूर्ण है. पूरे बिहार में रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. कहीं से अब तक किसी तरीके की दिक्कत नहीं हुई है. अग्निपथ के खिलाफ विरोध के कारण प्रदर्शनकारियों ने रेलवे को निशाना बनाया था. लिहाजा RPF के सीनियर ऑफिसर्स ने हिंसा करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं. आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. पटना जंक्शन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. हालांकि सोमवार के भारत बंद का पटना सहित राज्य के अन्य जिलों में कोई खास असर नहीं दिख रहा है. कुछ संगठनों की ओर से छिटपुट प्रदर्शन और मार्च किया गया है लेकिन व्यापक स्तर पर किसी तरह का विरोध नहीं देकने को मिला है. न तो बंद के कारण सरकारी या निजी दफ्तर बंद है और ना ही व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद है. स्कूल, कॉलेज, बैंक आदि भी आम दिनों की तरह खुले है. सडकों पर आवाजाही भी सामान्य है. चूकी रेलवे की ओर से ट्रेन परिचालन को सीमित कर दिया गया है इस कारण आम लोगों को यात्रा करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी दानापुर रेल मंडल से एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन नही हुआ है. न तो लोकल ट्रेनें चल रही है और ना ही लंबी दूरी की ट्रेनों को शुरू किया गया है.
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश गुप्ता ने आज अपने कार्यालय पर हनुमान जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई। उन्होंने कहा कि इस धरती पर कलयुग में सबसे बड़े पालन हार और सुधारक भगवान श्री हनुमान ही है। महराजगंजः कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश गुप्ता ने आज अपने कार्यालय पर हनुमान जयंती बड़ी धूम धाम से मनाई। इस मौके पर उनके साथ कई लोगों ने भगवान हनुमान की आरती उतारी और हनुमान जी को फूल माला चढ़ाकार व द्वीप जलाकर कर उनकी जयंती मनायी गयी। कहा जाता है कि भगवान बजरंग बली की पूजा में कई नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं। हनुमान जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में राकेश गुप्ता ने कहा कि इस धरती पर कलयुग में सबसे बड़े पालनहारऔर सुधारक भगवान श्री हनुमान ही है। जो गलत काम करता है, उनको हनुमान जी उसका फल भी देते है। इस अवसर पर सर्वेश तिवारी, सूर्यप्रताप त्रिपाठी,आदेश पटेल, रामलखन पटेल, अभिषेक गुप्ता, धनंजय, राहुल सागर, केके श्रीवास्तव, शिवांगी, भब्या, विष्णु, नारायण धर्मदेव के साथ करीब दर्जनों लोग मौजूद रहे।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश गुप्ता ने आज अपने कार्यालय पर हनुमान जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई। उन्होंने कहा कि इस धरती पर कलयुग में सबसे बड़े पालन हार और सुधारक भगवान श्री हनुमान ही है। महराजगंजः कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश गुप्ता ने आज अपने कार्यालय पर हनुमान जयंती बड़ी धूम धाम से मनाई। इस मौके पर उनके साथ कई लोगों ने भगवान हनुमान की आरती उतारी और हनुमान जी को फूल माला चढ़ाकार व द्वीप जलाकर कर उनकी जयंती मनायी गयी। कहा जाता है कि भगवान बजरंग बली की पूजा में कई नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं। हनुमान जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में राकेश गुप्ता ने कहा कि इस धरती पर कलयुग में सबसे बड़े पालनहारऔर सुधारक भगवान श्री हनुमान ही है। जो गलत काम करता है, उनको हनुमान जी उसका फल भी देते है। इस अवसर पर सर्वेश तिवारी, सूर्यप्रताप त्रिपाठी,आदेश पटेल, रामलखन पटेल, अभिषेक गुप्ता, धनंजय, राहुल सागर, केके श्रीवास्तव, शिवांगी, भब्या, विष्णु, नारायण धर्मदेव के साथ करीब दर्जनों लोग मौजूद रहे।
दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने दिवाली (Diwali) के मौके पर मजदूरों को तोहफा देते हुए न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) में इजाफा किया है। दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने दिवाली के मौके पर दिहाड़ी मजदूरों को बड़ा तोहफा दिया है। केजरीवाल सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को इजाफा करते हुए दिल्ली के अकुशल मजदूरों (Unskilled Labour) के लिए 14842 तो वहीं सेमी स्किल मजदूरों (Semi Skilled) के लिए 16341 न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसके साथ ही सरकार ने श्रमिकों के लिए 6 महीने का महंगाई भत्ता भी तय किया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दिल्ली सरकार को न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला 6 महीने देर से आया जिसके चलते मजदूरों को इसका फायदा मिलने में थोड़ा वक्त लग गया। केजरीवाल सरकार ने दावा किया है कि इस बढ़ोत्तरी के साथ ही दिल्ली में मजदूरों की कमाई सबसे अधिक हो जाएगी। इसके अलावा सरकार के इस कदम से गरीब की जेब में पैसा जाएगा, जिससे डिमांड व सप्लाई बढ़ेगी और मंदी पर नियंत्रण होगा। दिल्ली सरकार के फैसले के अनुसार अब दिल्ली में अकुशल श्रमिक/कर्मचारियों को 571 रुपये रोजाना यानी 14,842 रुपये महीना मेहताना मिलेगा। वहीं अर्धकुशल श्रमिक/कर्मचारी को 629 रुपये रोजाना के हिसाब से 16,341 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलेगा।
दिल्ली सरकार ने दिवाली के मौके पर मजदूरों को तोहफा देते हुए न्यूनतम मजदूरी में इजाफा किया है। दिल्ली सरकार ने दिवाली के मौके पर दिहाड़ी मजदूरों को बड़ा तोहफा दिया है। केजरीवाल सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को इजाफा करते हुए दिल्ली के अकुशल मजदूरों के लिए चौदह हज़ार आठ सौ बयालीस तो वहीं सेमी स्किल मजदूरों के लिए सोलह हज़ार तीन सौ इकतालीस न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसके साथ ही सरकार ने श्रमिकों के लिए छः महीने का महंगाई भत्ता भी तय किया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला छः महीने देर से आया जिसके चलते मजदूरों को इसका फायदा मिलने में थोड़ा वक्त लग गया। केजरीवाल सरकार ने दावा किया है कि इस बढ़ोत्तरी के साथ ही दिल्ली में मजदूरों की कमाई सबसे अधिक हो जाएगी। इसके अलावा सरकार के इस कदम से गरीब की जेब में पैसा जाएगा, जिससे डिमांड व सप्लाई बढ़ेगी और मंदी पर नियंत्रण होगा। दिल्ली सरकार के फैसले के अनुसार अब दिल्ली में अकुशल श्रमिक/कर्मचारियों को पाँच सौ इकहत्तर रुपयापये रोजाना यानी चौदह,आठ सौ बयालीस रुपयापये महीना मेहताना मिलेगा। वहीं अर्धकुशल श्रमिक/कर्मचारी को छः सौ उनतीस रुपयापये रोजाना के हिसाब से सोलह,तीन सौ इकतालीस रुपयापये मासिक पारिश्रमिक मिलेगा।
Jharkhand Crime News : झारखंड के रांची जिले के बेड़ो प्रखंड स्थित नरकोपी थाना क्षेत्र में आदिवासी नाबालिग छात्रा से घर में घुसकर दुष्कर्म करने के आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू की रिम्स (रांची) में इलाज के दौरान मौत हो गयी. आपको बता दें कि पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया था. रांची जिले के बेड़ो प्रखंड के नरकोपी थाना क्षेत्र में घर में घुसकर आदिवासी नाबालिग बिटिया से दुष्कर्म के आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. आपको बता दें कि आरोपी नाबालिग छात्रा का पीछा करते हुए घर तक पहुंच गया था. घर में अकेला देख उसने दुष्कर्म किया था. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया. ये घटना 28 अगस्त की है. थाना प्रभारी अविनाश ने आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू (पिता रब्बुल अंसारी) को 30 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बताया जा रहा है कि नाबालिग छात्रा दोपहर में अपने घर के पास के कुआं पर नहाने के लिए गयी थी. इसी दौरान बारिश होने लगी, तो उससे बचने के लिए वह पास के एक पेड़ के नीचे चली गई, जहां गांव के एक लड़के को पास आता देख नाबालिग छात्रा बारिश से भींगते हुए अपने घर की ओर भागने लगी. इसी दौरान नाबालिग छात्रा का पीछा करते हुए आरोपी युवक शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू उसके घर तक पहुंच गया. इस दौरान घर के सभी लोग खेत में काम करने चले गये थे. वह घर में अकेली थी. इसी दौरान नाबालिग छात्रा के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया था.
Jharkhand Crime News : झारखंड के रांची जिले के बेड़ो प्रखंड स्थित नरकोपी थाना क्षेत्र में आदिवासी नाबालिग छात्रा से घर में घुसकर दुष्कर्म करने के आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू की रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गयी. आपको बता दें कि पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया था. रांची जिले के बेड़ो प्रखंड के नरकोपी थाना क्षेत्र में घर में घुसकर आदिवासी नाबालिग बिटिया से दुष्कर्म के आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. आपको बता दें कि आरोपी नाबालिग छात्रा का पीछा करते हुए घर तक पहुंच गया था. घर में अकेला देख उसने दुष्कर्म किया था. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया. ये घटना अट्ठाईस अगस्त की है. थाना प्रभारी अविनाश ने आरोपी शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू को तीस अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बताया जा रहा है कि नाबालिग छात्रा दोपहर में अपने घर के पास के कुआं पर नहाने के लिए गयी थी. इसी दौरान बारिश होने लगी, तो उससे बचने के लिए वह पास के एक पेड़ के नीचे चली गई, जहां गांव के एक लड़के को पास आता देख नाबालिग छात्रा बारिश से भींगते हुए अपने घर की ओर भागने लगी. इसी दौरान नाबालिग छात्रा का पीछा करते हुए आरोपी युवक शहरूद्दीन अंसारी उर्फ रिंकू उसके घर तक पहुंच गया. इस दौरान घर के सभी लोग खेत में काम करने चले गये थे. वह घर में अकेली थी. इसी दौरान नाबालिग छात्रा के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया था.
IPS राजविन्दर सिंह भट्टी ने संभाला बिहार के DGP का पदभार (Photo Credit: सोशल मीडिया) Patna: बिहार के नए डीजीपी आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी ने पदभार संभाल लिया है. बिहार पुलिस द्वारा अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस बात की जानकारी दी गई. इस मौके पर पूर्व डीजीपी संजीव कुमार सिंघल को बिहार की सेवानिवृत्ति के उपरान्त उनके सम्मान में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन भी किया गया. डीजीपी का पद संभालने के बाद राजविंदर सिंह भट्टी ने कहा कि बिहार में जो भी कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां हैं उनसे सख्ती से निबटा जाएगा. बता दें कि बिहार कैडर के 1990 बैच के आईपीसीएस अधिकारी राजविंदर सिंह भट्टी को बिहार का नया डीजीपी बनाने के लिए गृह विभाग द्वारा 18 दिसंबर को ही अधिसूचना जारी कर दी गई थी. नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. बेशक अब आईपीएस भट्टी ने बिहार के डीजीपी के तौर पर चार्ज लिया है लेकिन इससे पहले भी वो बिहार को अपनी सेवा दे चुके हैं. वे बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के डीजी पद पर रह चुके हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें बीएसएफ में एडीजी बनाया गया था. बता दें कि बिहार के नए डीजीपी के रेस में आईपीएस भट्टी समेत तीन और आईपीएस अधिकारियों के नाम की चर्चा थी. इनमें 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी मनमोहन सिंह, 1989 बैच के आलोक राज और शोभा अहोतकर का नाम शामिल था लेकिन अंत में आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी के नाम पर मुहर लगी. मनमोहन सिंह और राजविंदर सिंह दोनों ही मूल रूप से पंजाब के रहनेवाले हैं और दोनों ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे हैं. बिहार के नए डीजीपी आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी का कार्यकाल 30 सितंबर 2025 तक है. आईपीएस भट्टी पर 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव शांतिपुर्ण तरीके से सम्पन्न कराए जाने की बड़ी जिम्मेदारी है. इसके अलावा शराबबंदी कानून को पूरी तरह से धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी भी नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी पर होगी. राजविंदर सिंह भट्टी को बिहार का डीजीपी ऐसे समय बनाया गया है जब छपरा शराब कांड समेत कई मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सूबे की महागठबंधन सरकार पर हमलावर है. दूसरी तरफ, शिक्षक अभ्यर्थी, बीपीएससी अभ्यर्थी व दूसरे अभ्यर्थी सड़क पर हैं और लगातार महागठबंधन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचश्प होगा कि नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी सूबे में कानून-व्यवस्था कैसे अच्छे से बनाए रखते हैं.
IPS राजविन्दर सिंह भट्टी ने संभाला बिहार के DGP का पदभार Patna: बिहार के नए डीजीपी आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी ने पदभार संभाल लिया है. बिहार पुलिस द्वारा अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस बात की जानकारी दी गई. इस मौके पर पूर्व डीजीपी संजीव कुमार सिंघल को बिहार की सेवानिवृत्ति के उपरान्त उनके सम्मान में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन भी किया गया. डीजीपी का पद संभालने के बाद राजविंदर सिंह भट्टी ने कहा कि बिहार में जो भी कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां हैं उनसे सख्ती से निबटा जाएगा. बता दें कि बिहार कैडर के एक हज़ार नौ सौ नब्बे बैच के आईपीसीएस अधिकारी राजविंदर सिंह भट्टी को बिहार का नया डीजीपी बनाने के लिए गृह विभाग द्वारा अट्ठारह दिसंबर को ही अधिसूचना जारी कर दी गई थी. नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. बेशक अब आईपीएस भट्टी ने बिहार के डीजीपी के तौर पर चार्ज लिया है लेकिन इससे पहले भी वो बिहार को अपनी सेवा दे चुके हैं. वे बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के डीजी पद पर रह चुके हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें बीएसएफ में एडीजी बनाया गया था. बता दें कि बिहार के नए डीजीपी के रेस में आईपीएस भट्टी समेत तीन और आईपीएस अधिकारियों के नाम की चर्चा थी. इनमें एक हज़ार नौ सौ अठासी बैच के आईपीएस अधिकारी मनमोहन सिंह, एक हज़ार नौ सौ नवासी बैच के आलोक राज और शोभा अहोतकर का नाम शामिल था लेकिन अंत में आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी के नाम पर मुहर लगी. मनमोहन सिंह और राजविंदर सिंह दोनों ही मूल रूप से पंजाब के रहनेवाले हैं और दोनों ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे हैं. बिहार के नए डीजीपी आईपीएस राजविंदर सिंह भट्टी का कार्यकाल तीस सितंबर दो हज़ार पच्चीस तक है. आईपीएस भट्टी पर दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव और दो हज़ार पच्चीस का बिहार विधानसभा चुनाव शांतिपुर्ण तरीके से सम्पन्न कराए जाने की बड़ी जिम्मेदारी है. इसके अलावा शराबबंदी कानून को पूरी तरह से धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी भी नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी पर होगी. राजविंदर सिंह भट्टी को बिहार का डीजीपी ऐसे समय बनाया गया है जब छपरा शराब कांड समेत कई मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सूबे की महागठबंधन सरकार पर हमलावर है. दूसरी तरफ, शिक्षक अभ्यर्थी, बीपीएससी अभ्यर्थी व दूसरे अभ्यर्थी सड़क पर हैं और लगातार महागठबंधन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचश्प होगा कि नए डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी सूबे में कानून-व्यवस्था कैसे अच्छे से बनाए रखते हैं.
जनज्वार ब्यूरो, बिहार। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर इस बार बिहार सरकार अलर्ट मोड पर है। राज्य में कोरोना की जांच में तेजी लाने तथा ट्रेनों व बसों के माध्यम से दूसरे राज्यों से आनेवाले यात्रियों की कोविड जांच का निर्देश दिया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लगभग दो माह तक राज्य में काफी अफरातफरी की स्थिति बन गई थी। ऑक्सीजन की किल्लत से मारामारी की स्थिति थी तो संक्रमितों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे थे। बाद में ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था सरकार ने अपने हाथों में लेते हुए अस्पतालों के लिए कोटा निर्धारित कर दिया था। हालांकि, इस दौरान संक्रमित मरीजों और उनके परिजनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अस्पतालों में बेड न मिलने से बड़ी संख्या में लोगों को होम आइसोलेशन का सहारा लेना पड़ा था। बाद में 5 मई से राज्य में लॉकडाउन लगाया गया था लेकिन विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे कि लॉकडाउन लगाने में भी देरी कर दी गई। इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि ट्रेन तथा अंतरर्राज्यीय बसों के माध्यम से अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों का उनके गंतव्य स्टेशन, बस अड्डों पर रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से सघन रूप से जांच करायी जाए। जाँच के परिणाम के आलोक में पूर्व में निर्गत निदेशों के आलोक में होम आइसोलेशन में रह रहे या कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य के निरंतर अनुश्रवन की व्यवस्था की जाए। सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जिन इलाकों में संक्रमण के मामले पाए जाते हैं वहां सघन जांच करायी जाय तथा संक्रमित व्यक्तियों की पहचान के उपरांत कंटैक्ट ट्रेसिंग निश्चित रूप से की जाए। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि लक्ष्य के अनुरूप कोविड जांच का सैंपल संग्रह करना सुनिश्चित करें। जिलों में शत-प्रतिशत कोविड टेस्टिंग कार्य सम्पन्न करना सुनिश्चित करेंगे। किसी भी स्थिति में लक्ष्य से कम जाँच स्वीकार्य नहीं होगा। जिलों में प्रतिदिन 1000 आरटीपीसीआर तथा 90 ट्रूनेट जांच के लिए सैंपल लिया जायेगा। इसके साथ व्यापक स्तर पर रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से प्रखंड जिला व गांव स्तर पर कोरोना की जांच की जायेगी । उधर सारण के सिविल सर्जन डॉ.जर्नादन प्रसाद सुकुमार ने कहा कि सभी की कोशिश रहनी चाहिए कि कोरोना से बचाव के इंतजाम खुद भी करते रहें। ऐसा करने से तीसरी लहर आने की आशंका को ही कुंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "फिर भी यदि कोई आकस्मिक स्थिति हुई तो स्वास्थ्य महकमा अब पूरी तरह से तैयार है।" बता दें कि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत और सूबे के अस्पतालों में बेड की कमी को लेकर सरकार की काफी आलोचना हुई थी और संक्रमित लोगों और उनके परिजनों को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ी थीं। सिविल सर्जन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में शून्य से 18 वर्ष तक के लोगों व बच्चों को अत्यधिक रूप से प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है। इस संभावित परिस्थिति में बीमार बच्चों की अनुमानित वृद्धि से निपटने व नियंत्रित करने के लिए पूर्व तैयारी की जा रही है।
जनज्वार ब्यूरो, बिहार। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर इस बार बिहार सरकार अलर्ट मोड पर है। राज्य में कोरोना की जांच में तेजी लाने तथा ट्रेनों व बसों के माध्यम से दूसरे राज्यों से आनेवाले यात्रियों की कोविड जांच का निर्देश दिया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लगभग दो माह तक राज्य में काफी अफरातफरी की स्थिति बन गई थी। ऑक्सीजन की किल्लत से मारामारी की स्थिति थी तो संक्रमितों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे थे। बाद में ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था सरकार ने अपने हाथों में लेते हुए अस्पतालों के लिए कोटा निर्धारित कर दिया था। हालांकि, इस दौरान संक्रमित मरीजों और उनके परिजनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अस्पतालों में बेड न मिलने से बड़ी संख्या में लोगों को होम आइसोलेशन का सहारा लेना पड़ा था। बाद में पाँच मई से राज्य में लॉकडाउन लगाया गया था लेकिन विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे कि लॉकडाउन लगाने में भी देरी कर दी गई। इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि ट्रेन तथा अंतरर्राज्यीय बसों के माध्यम से अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों का उनके गंतव्य स्टेशन, बस अड्डों पर रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से सघन रूप से जांच करायी जाए। जाँच के परिणाम के आलोक में पूर्व में निर्गत निदेशों के आलोक में होम आइसोलेशन में रह रहे या कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य के निरंतर अनुश्रवन की व्यवस्था की जाए। सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जिन इलाकों में संक्रमण के मामले पाए जाते हैं वहां सघन जांच करायी जाय तथा संक्रमित व्यक्तियों की पहचान के उपरांत कंटैक्ट ट्रेसिंग निश्चित रूप से की जाए। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि लक्ष्य के अनुरूप कोविड जांच का सैंपल संग्रह करना सुनिश्चित करें। जिलों में शत-प्रतिशत कोविड टेस्टिंग कार्य सम्पन्न करना सुनिश्चित करेंगे। किसी भी स्थिति में लक्ष्य से कम जाँच स्वीकार्य नहीं होगा। जिलों में प्रतिदिन एक हज़ार आरटीपीसीआर तथा नब्बे ट्रूनेट जांच के लिए सैंपल लिया जायेगा। इसके साथ व्यापक स्तर पर रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से प्रखंड जिला व गांव स्तर पर कोरोना की जांच की जायेगी । उधर सारण के सिविल सर्जन डॉ.जर्नादन प्रसाद सुकुमार ने कहा कि सभी की कोशिश रहनी चाहिए कि कोरोना से बचाव के इंतजाम खुद भी करते रहें। ऐसा करने से तीसरी लहर आने की आशंका को ही कुंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "फिर भी यदि कोई आकस्मिक स्थिति हुई तो स्वास्थ्य महकमा अब पूरी तरह से तैयार है।" बता दें कि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत और सूबे के अस्पतालों में बेड की कमी को लेकर सरकार की काफी आलोचना हुई थी और संक्रमित लोगों और उनके परिजनों को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ी थीं। सिविल सर्जन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में शून्य से अट्ठारह वर्ष तक के लोगों व बच्चों को अत्यधिक रूप से प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है। इस संभावित परिस्थिति में बीमार बच्चों की अनुमानित वृद्धि से निपटने व नियंत्रित करने के लिए पूर्व तैयारी की जा रही है।
सनेही जो की काव्य-यात्रा- साधना अन्न-धन रहते पड़ा अकाल हो रही है विधि की विधि नष्ट । बुभुक्षित छोड़ रहे हैं प्राण गगन तक गूंजा हाहाकार । हज़ारों ठण्डे होते इधर . उधर है गर्म 'चोर बाजार' । 'दहेज प्रथा' समाज के लिए अभिशाप बन गयी है । आज उसके विरोध के नारे लगाये जा रहे हैं । सनेही जी ने दूसरे दशक में ही समाज को इस कुप्रथा से सावधान किया था। उन्होंने 'बीबा-विसुवा', 'कुलीन की उच्चता' और 'नवयुवकों की दहेज-प्रियता' का खुल कर विरोध किया था : कुलवान दहेज को रो रहे हैं । ससुराल का है जो भरोसा बड़ा नाम समेत डुबो रहे हैं । चिर संचित गौरव खो रहे हैं 'बिसुवे' बस ये विष वो रहे हैं । सनेही जी सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कवि थे । वे अपने युग के नेता थे और दलितों, पीड़ितों, शोषितों और विपन्न लोगों की पीड़ा मुखर करने में सबसे आगे थे । परम्परावादी होते हुए भी वे सुधार के कट्टर समर्थक थे । आर्थिक वैषम्य के वे घोर विरोधी थे। समाज में समता भाव लाने हेतु वे सदैव प्रयत्नशील रहे । उनका 'साम्यवाद समाज कल्याण की भावना से प्रेरित है । उन्होंने उसे राजनैतिक मुद्दा नहीं बनाया। इसी को लक्ष्य कर के उन्होंने लिखा था3 समदर्शी फिर 'साम्यरूप धर जग में आया, समता का सन्देश गया घर घर पहुँचाया । धनद-रंक का, ऊँच-नीच का भेद मिटाया विचलित हो वैषम्य बहुत रोया-चिल्लाया । काँटे बोये राह में, फूल वही बनते गये । 'साम्यवाद' के स्नेह में सुजन सुधी सनते गये । उनकी कविता का मर्म जानने के लिए 'त्रिशूल' और सनेही का अन्तर समझना आवश्यक है। उन्होंने स्वयं लिखा हैपौष-मार्गशीर्ष : शक १६०४ ]
सनेही जो की काव्य-यात्रा- साधना अन्न-धन रहते पड़ा अकाल हो रही है विधि की विधि नष्ट । बुभुक्षित छोड़ रहे हैं प्राण गगन तक गूंजा हाहाकार । हज़ारों ठण्डे होते इधर . उधर है गर्म 'चोर बाजार' । 'दहेज प्रथा' समाज के लिए अभिशाप बन गयी है । आज उसके विरोध के नारे लगाये जा रहे हैं । सनेही जी ने दूसरे दशक में ही समाज को इस कुप्रथा से सावधान किया था। उन्होंने 'बीबा-विसुवा', 'कुलीन की उच्चता' और 'नवयुवकों की दहेज-प्रियता' का खुल कर विरोध किया था : कुलवान दहेज को रो रहे हैं । ससुराल का है जो भरोसा बड़ा नाम समेत डुबो रहे हैं । चिर संचित गौरव खो रहे हैं 'बिसुवे' बस ये विष वो रहे हैं । सनेही जी सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कवि थे । वे अपने युग के नेता थे और दलितों, पीड़ितों, शोषितों और विपन्न लोगों की पीड़ा मुखर करने में सबसे आगे थे । परम्परावादी होते हुए भी वे सुधार के कट्टर समर्थक थे । आर्थिक वैषम्य के वे घोर विरोधी थे। समाज में समता भाव लाने हेतु वे सदैव प्रयत्नशील रहे । उनका 'साम्यवाद समाज कल्याण की भावना से प्रेरित है । उन्होंने उसे राजनैतिक मुद्दा नहीं बनाया। इसी को लक्ष्य कर के उन्होंने लिखा थातीन समदर्शी फिर 'साम्यरूप धर जग में आया, समता का सन्देश गया घर घर पहुँचाया । धनद-रंक का, ऊँच-नीच का भेद मिटाया विचलित हो वैषम्य बहुत रोया-चिल्लाया । काँटे बोये राह में, फूल वही बनते गये । 'साम्यवाद' के स्नेह में सुजन सुधी सनते गये । उनकी कविता का मर्म जानने के लिए 'त्रिशूल' और सनेही का अन्तर समझना आवश्यक है। उन्होंने स्वयं लिखा हैपौष-मार्गशीर्ष : शक एक हज़ार छः सौ चार ]
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) नई परती / . / . ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। आबादी प्रसार हेतू / / . बजरं / . / . ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । तालाब / . / . नाली / . / . ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। आबादी / . / . चकमार्ग / . / . रास्ता / . / . सड़क / . / . ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। काब्रास्तिान / . / . शमशन / . / . ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । आबादी मेला / . / . खेल का मैदान / . / . हड़ावर / . / . ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती नई परती / . / . ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। आबादी प्रसार हेतू / / . बजरं / . / . ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । तालाब / . / . नाली / . / . ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। आबादी / . / . चकमार्ग / . / . रास्ता / . / . सड़क / . / . ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। काब्रास्तिान / . / . शमशन / . / . ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । आबादी मेला / . / . खेल का मैदान / . / . हड़ावर / . / . ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
छः आवश्यक जैन धर्म की धार्मिक क्रियाओं में छः आवश्यक मुख्य माने गए है। आवश्यक का अर्थ है-प्रतिदिन अवश्य करने योग्य आत्मविशुद्धि करने वाले धार्मिक अनुष्ठान । वे छः आवश्यक इस प्रकार १ सामायिक = समभाव, २ चतुर्विंशतिस्तव = भगवान की स्तुतिः ३. वन्दन = गुरुदेव को नमस्कार, ४ प्रतिक्रमण = पापाचार से हटना, कायोत्सर्ग = शरीर का ममत्व त्याग कर ध्यान करना, ६ प्रत्याख्यान= पाप कार्यों का त्याग करना । उक्त श्रावश्यकों का पूर्ण रूप से आचरण तो प्रतिक्रमण करते समय किया जाता है। किंतु सर्वप्रथम जो यह सामायिक श्रावश्यक है, इसमें भी धागे के पांच आवश्यकों की झांकी मिल जाती है । करेमि मामाइयं में सामायिक आवश्यक का, भंते में चतुर्विंशति स्वव का, तस्स भने में गुरुवन्दन का, पडिक्कमामि में प्रतिक्रमण का, माणं वोसिरामि में कायोत्सर्ग का, सावज्जं जोगं पच्चक्याम में प्रत्याख्यान आवश्यक का समावेश हो जाता है। अतएव सामायिक करने वाले महानुभाव, जरा गहरे आत्म-निरीक्षण में उतरें तो वे सामायिक के द्वारा भी छहों आवश्यकों का आचरण करते हुए अपना आत्मकल्याण कर सकते हैं। आज कल सामायिक के काल के सम्बन्ध में बड़ी ही अव्यवस्था है । कोई प्रातः काल करता है तो कोई सायंकाल । कोई दुपहर को करता है तो कोई रात को। मतलब यह है कि मनमानी कल्पना से जो जब चाहता है तभी कर लेता है, समय की पाबंदी का कोई खयाल नहीं रक्खा जाता। अपने आपको क्रान्तिकारी सुधारक कहनेवाले तर्क करते हैं कि इससे क्या ? यह तो धर्म किया है, जब जी चाहा, तभी कर लिया। काल के बंधन में पड़ने से क्या लाभ ?" मुझे इस कुतर्क पर बड़ा ही दुःख होता है। भगवान महावीर ने स्थान-स्थान पर काल की नियमितता पर बल दिया है। प्रतिक्रमण जैसी धार्मिक क्रियाओं के लिए भी असमय के कारण प्रायश्चित तक का विधान किया है। सूत्रों के स्वाध्याय के लिए क्यों समय का खयाल रक्खा जाता है ? धार्मिक क्रियाएँ तो मनुष्य को और अधिक नियंत्रित करती हैं, अतः इनके लिए तो समय का पाबंद होना अतीव आवश्यक है। समय की नियमितता का मन पर बड़ा चमत्कारी प्रभाव होता है । उच्छृङ्गल मम को योंही अव्यवस्थित छोड़ देनेसे वह और भी अधिक चंचल हो उठता है। रोगी को औषधि समय पर दी जाती है। अध्ययन के लिए विद्या मंदिरों में समय मिश्रित होता है। विशिष्ट व्यक्ति अपने भोजन, शयन आदि का समय भी ठीक निश्चित रखते हैं। अधिक क्या, साधारण व्यसनों तक की नियमितता का भी मन पर बड़ा प्रभाव होता । तमाखू आदि दुर्व्यसन करने वाले मनुष्य, नियत समय पर ही दुर्व्यसनों का संकल्प करते हैं। अफीम खाने वाले व्यक्ति को ठीक नियत समय पर अफीम की याद आ जाती है, और यदि उस समय न मिले तो वहं विक्षिप्त हो जाता है। इसी प्रकार सदाचार के कर्तव्य भी अपने लिए समय के नियम की अपेक्षा रखते हैं। साधक के लिए समय का इतना अभ्यस्त हो जाना चाहिये कि वह नियत समय पर सब कार्य छोड़ कर सर्व प्रथम आवश्यक धर्म क्रिया करे। यह भी क्या धार्मिक जीवन है कि आाज प्रातःकाल तो कल दुपहर को, परले दिन सायंकाल तो उससे अगले दिन किसी और ही समय । आजकल यह अनियमितता बहुत ही बढ़ रही है। इससे न धर्म के समय धर्म ही होता है और न कर्म के समय कर्म ही । प्रश्न किया जा सकता है कि फिर कौन से काल का निश्चय करना चाहिए? उत्तर में कहना है कि सामायिक के लिए प्रातः और सायंकाल का समय बहुत ही सुन्दर है। प्रकृति के लीलाक्षेत्र संसार में वस्तुतः में इधर सूर्योदय का और उधर सूर्यास्त का समय, बड़ा ही सुरम्य एवं मनोहर होता है। संभव है नगर की गलियों में रहने वाले प्राप लोग दुर्भाग्य से प्रकृति के इस विलक्षण दृश्य के दर्शन से वंचित हों; परन्तु यदि कभी आपको नदियों के सुरम्य तटों पर, पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर, या बीहड़ बनों में रहने का प्रसंग हुआ हो और वहां दोनों सन्ध्याओं के सुन्दर दृश्य आंखों की नज़र पड़े हों तो मैं निश्चय से कहता हूं कि आप उस समय आनन्द विभोर हुए बिना न रहे होंगे । ऐसे प्रसंगों पर किसी भी दर्शक का भावुक अन्तःकरण उदात्त और गंभीर विचारों से परिपूर्ण हुये बिना नहीं रह सकता। लेखक को शिमला यात्रा के वे सुन्दर एवं सुमनोहर प्रभात और सायंकाल के अब भी भूले नहीं है। जब कभी स्मृति भाती है, हृदय भानन्द से गुदगुदाने लगता है। हो प्रभात का समय तो ध्यान चिन्तन आदि के लिए बहुत ही सुन्दर माना गया है। सुनहरा प्रभात एकान्त, शान्ति और प्रसन्नता आदि की दृष्टि से वस्तुतः प्रकृति का श्रेष्ठ रूप है। इस समय हिंसा और क्रूरता नहीं होती, दूसरे मनुष्यों के साथ सम्पर्क न होने के कारण असल्य एवं कटु भाषण का भी अवसर नहीं आता, चोर चोरी से निवृत्त हो जाते हैं, कामी पुरुष काम वासना से निवृत्ति पा लेते हैं। अस्तु, हिंसा, असत्य, स्तेय और ब्रह्मचर्य आदि के कुरुचि पूर्ण दृश्यों के न रहने से आस पास का वायु मण्डल अशुद्ध विचारों से स्वयं ही अदूषित रहता है। इस प्रकार सामायिक की पवित्र क्रिया के लिए यह समय बड़ा ही पुनीत है। यदि प्रभातकाल में न हो सके तो सायंकाल का समय भी दूसरे समयों की अपेक्षा शान्त माना गया है। आसन कैसा ? उपयु क शीर्षक के नीचे मैं बिछाने वाले आसनों की बात नहीं कह रहा हूं। यहां भासन से अभिप्राय बैठने के ढंग से है। कुछ लोगों का बैठना बढ़ा ही अव्यवस्थित होता है। वे जरा सी देर भी स्थिर होकर नहीं बैठ सकते। स्थिर आसन मन को दुर्बलता और संचलता का द्योतक । भला जो साधक दो घड़ी के लिए भी अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह अपने मन पर क्या खाक विजय प्राप्त करेगा ? आसन, योग के आठ अंगों में से तीसरा श्रग माना गया इससे शरीर में रक्त की शुद्धि होती है, और स्वास्थ्य ठीक होने से उच्च विचारों को बल मिलता है। शिर नीचा झुकाये, पीठ को दुहरी किये, पैरों को फैलाये बैठे रहने वाला मनुष्य कभी भी महान नहीं बन सकता। हद आासन का मन पर बड़ा प्रभाव होता है। शरीर की कड़क मन में कड़क अवश्य लाती हैं। अतएव सामायिक में सिद्धासन अथवा पद्मासन आदि किसी एक आसन से जॅच कर बैठने का अभ्यास रखना चाहिए । मस्तिष्क का सम्बन्ध रीढ की हड्डियों से है, अतः मेरुदण्ड को भी तना हुआ रखना आवश्यक है। भासनों के सम्बन्ध में विशेष जानकारी के लिए प्राचीन योगशास्त्र आदि ग्रन्थों का अवलोकन करना अधिक अच्छा होगा। यदि पाठक इतनी दूर न जाना चाहें तो लेखक की महामंत्र नवकार नामक पुस्तक भासन कैसा ? से भी कुछ थोड़ा सा आवश्यक परिचय मिल सकेगा। यहां तो दो तीन सुप्रसिद्ध आसनों का उल्लेख ही पर्याप्त रहेगा १. सिद्धासन ――बाएं पैर की एड़ी से जननेन्द्रिय और गुदा के बीच के स्थान को दबा कर दाहिने पैर की एडी को जननेन्द्रिय के ऊपर के प्रदेश को दबाना, ढुड्डी को हृदय में जमाना, और देह को सीधा रख कर दोनों भौंहों के बीच में दृष्टि को केन्द्रित करना, सिद्धासन है। १. पद्मासन-बायीं जांघ पर दाहिना पैर और दाहिनी जांघ पर बायां पैर रखना, फिर दोनों हाथों को दोनों जंघाओं पर चित रखना अथवा दोनों हाथों को नाभि के पास ध्यानमुद्रा में रखना, पद्मासन है। ३. पर्येकासन-दाहिना पैर और बायीं जांघ के नीचे और बायां पैर दाहिनी जांघ के नीचे दबा कर बैठना, पर्येकासन है। पर्येकासन का दूसरा नाम सुखासन भी है। सर्वसाधारण इसे भालथी-पालथी भी कहते हैं । सामायिक करने वाले को अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की घोर रखना श्रेष्ठ माना गया है। जिनभद्र गयी मा श्रमण, विशेषावश्यक भाष्य में लिखते हैं कि पुव्वाभिमुहो उत्तरमुहो व दिज्जाऽहवा पडिच्छेज्जा-या ३४०६ । शास्त्रस्वाध्याय, प्रतिक्रमण, और दीक्षा दान आदि धर्मक्रियाएं पूर्व और उत्तर दिशा की ओर ही करने का विधान है। स्थानांग सूत्र में भगवान महावीर ने भी इन्हीं दो दिशाओं का महत्व वर्णन किया है। अतः यदि गुरुदेव विद्यमान हों तो उनके सम्मुख बैठते हुए अन्य किसी दिशा में भी मुख किया जा सकता है, परन्तु अन्य स्थल पर तो पूर्व और उत्तर की तर्फ मुख रखना ही उचित है । जब कभी पूर्व और उत्तर दिशा का विचार चल पड़ता है तो प्रश्न किया जाता है कि पूर्व और उत्तर दिशा में ही ऐसा क्या महत्त्व है, जो कि अन्य दिशाओं को छोड़ कर इनकी भोर ही मुख किया जाय ? उत्तर में कहना है कि शास्त्रपरम्परा ही सबसे बड़ा प्रमाण है। अभी तक आचार्यों ने इस के वैज्ञानिक महत्त्वपर कोई विस्तृत प्रकाश नहीं डाला । हां अभी-अभी वैदिक विद्वान् सातवलेकर जी ने इस सम्बन्ध में कुछ लिखा है और यह काफी विचारणीय है । प्राचीदिशा-आगे बढ़मा, उन्नति करना, अप्रभाग में हो जानायह प्रान्त-प्रपूर्वक धन्य धातु का मूल अर्थ है, जिससे पूर्वदिशाबाचक
छः आवश्यक जैन धर्म की धार्मिक क्रियाओं में छः आवश्यक मुख्य माने गए है। आवश्यक का अर्थ है-प्रतिदिन अवश्य करने योग्य आत्मविशुद्धि करने वाले धार्मिक अनुष्ठान । वे छः आवश्यक इस प्रकार एक सामायिक = समभाव, दो चतुर्विंशतिस्तव = भगवान की स्तुतिः तीन. वन्दन = गुरुदेव को नमस्कार, चार प्रतिक्रमण = पापाचार से हटना, कायोत्सर्ग = शरीर का ममत्व त्याग कर ध्यान करना, छः प्रत्याख्यान= पाप कार्यों का त्याग करना । उक्त श्रावश्यकों का पूर्ण रूप से आचरण तो प्रतिक्रमण करते समय किया जाता है। किंतु सर्वप्रथम जो यह सामायिक श्रावश्यक है, इसमें भी धागे के पांच आवश्यकों की झांकी मिल जाती है । करेमि मामाइयं में सामायिक आवश्यक का, भंते में चतुर्विंशति स्वव का, तस्स भने में गुरुवन्दन का, पडिक्कमामि में प्रतिक्रमण का, माणं वोसिरामि में कायोत्सर्ग का, सावज्जं जोगं पच्चक्याम में प्रत्याख्यान आवश्यक का समावेश हो जाता है। अतएव सामायिक करने वाले महानुभाव, जरा गहरे आत्म-निरीक्षण में उतरें तो वे सामायिक के द्वारा भी छहों आवश्यकों का आचरण करते हुए अपना आत्मकल्याण कर सकते हैं। आज कल सामायिक के काल के सम्बन्ध में बड़ी ही अव्यवस्था है । कोई प्रातः काल करता है तो कोई सायंकाल । कोई दुपहर को करता है तो कोई रात को। मतलब यह है कि मनमानी कल्पना से जो जब चाहता है तभी कर लेता है, समय की पाबंदी का कोई खयाल नहीं रक्खा जाता। अपने आपको क्रान्तिकारी सुधारक कहनेवाले तर्क करते हैं कि इससे क्या ? यह तो धर्म किया है, जब जी चाहा, तभी कर लिया। काल के बंधन में पड़ने से क्या लाभ ?" मुझे इस कुतर्क पर बड़ा ही दुःख होता है। भगवान महावीर ने स्थान-स्थान पर काल की नियमितता पर बल दिया है। प्रतिक्रमण जैसी धार्मिक क्रियाओं के लिए भी असमय के कारण प्रायश्चित तक का विधान किया है। सूत्रों के स्वाध्याय के लिए क्यों समय का खयाल रक्खा जाता है ? धार्मिक क्रियाएँ तो मनुष्य को और अधिक नियंत्रित करती हैं, अतः इनके लिए तो समय का पाबंद होना अतीव आवश्यक है। समय की नियमितता का मन पर बड़ा चमत्कारी प्रभाव होता है । उच्छृङ्गल मम को योंही अव्यवस्थित छोड़ देनेसे वह और भी अधिक चंचल हो उठता है। रोगी को औषधि समय पर दी जाती है। अध्ययन के लिए विद्या मंदिरों में समय मिश्रित होता है। विशिष्ट व्यक्ति अपने भोजन, शयन आदि का समय भी ठीक निश्चित रखते हैं। अधिक क्या, साधारण व्यसनों तक की नियमितता का भी मन पर बड़ा प्रभाव होता । तमाखू आदि दुर्व्यसन करने वाले मनुष्य, नियत समय पर ही दुर्व्यसनों का संकल्प करते हैं। अफीम खाने वाले व्यक्ति को ठीक नियत समय पर अफीम की याद आ जाती है, और यदि उस समय न मिले तो वहं विक्षिप्त हो जाता है। इसी प्रकार सदाचार के कर्तव्य भी अपने लिए समय के नियम की अपेक्षा रखते हैं। साधक के लिए समय का इतना अभ्यस्त हो जाना चाहिये कि वह नियत समय पर सब कार्य छोड़ कर सर्व प्रथम आवश्यक धर्म क्रिया करे। यह भी क्या धार्मिक जीवन है कि आाज प्रातःकाल तो कल दुपहर को, परले दिन सायंकाल तो उससे अगले दिन किसी और ही समय । आजकल यह अनियमितता बहुत ही बढ़ रही है। इससे न धर्म के समय धर्म ही होता है और न कर्म के समय कर्म ही । प्रश्न किया जा सकता है कि फिर कौन से काल का निश्चय करना चाहिए? उत्तर में कहना है कि सामायिक के लिए प्रातः और सायंकाल का समय बहुत ही सुन्दर है। प्रकृति के लीलाक्षेत्र संसार में वस्तुतः में इधर सूर्योदय का और उधर सूर्यास्त का समय, बड़ा ही सुरम्य एवं मनोहर होता है। संभव है नगर की गलियों में रहने वाले प्राप लोग दुर्भाग्य से प्रकृति के इस विलक्षण दृश्य के दर्शन से वंचित हों; परन्तु यदि कभी आपको नदियों के सुरम्य तटों पर, पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर, या बीहड़ बनों में रहने का प्रसंग हुआ हो और वहां दोनों सन्ध्याओं के सुन्दर दृश्य आंखों की नज़र पड़े हों तो मैं निश्चय से कहता हूं कि आप उस समय आनन्द विभोर हुए बिना न रहे होंगे । ऐसे प्रसंगों पर किसी भी दर्शक का भावुक अन्तःकरण उदात्त और गंभीर विचारों से परिपूर्ण हुये बिना नहीं रह सकता। लेखक को शिमला यात्रा के वे सुन्दर एवं सुमनोहर प्रभात और सायंकाल के अब भी भूले नहीं है। जब कभी स्मृति भाती है, हृदय भानन्द से गुदगुदाने लगता है। हो प्रभात का समय तो ध्यान चिन्तन आदि के लिए बहुत ही सुन्दर माना गया है। सुनहरा प्रभात एकान्त, शान्ति और प्रसन्नता आदि की दृष्टि से वस्तुतः प्रकृति का श्रेष्ठ रूप है। इस समय हिंसा और क्रूरता नहीं होती, दूसरे मनुष्यों के साथ सम्पर्क न होने के कारण असल्य एवं कटु भाषण का भी अवसर नहीं आता, चोर चोरी से निवृत्त हो जाते हैं, कामी पुरुष काम वासना से निवृत्ति पा लेते हैं। अस्तु, हिंसा, असत्य, स्तेय और ब्रह्मचर्य आदि के कुरुचि पूर्ण दृश्यों के न रहने से आस पास का वायु मण्डल अशुद्ध विचारों से स्वयं ही अदूषित रहता है। इस प्रकार सामायिक की पवित्र क्रिया के लिए यह समय बड़ा ही पुनीत है। यदि प्रभातकाल में न हो सके तो सायंकाल का समय भी दूसरे समयों की अपेक्षा शान्त माना गया है। आसन कैसा ? उपयु क शीर्षक के नीचे मैं बिछाने वाले आसनों की बात नहीं कह रहा हूं। यहां भासन से अभिप्राय बैठने के ढंग से है। कुछ लोगों का बैठना बढ़ा ही अव्यवस्थित होता है। वे जरा सी देर भी स्थिर होकर नहीं बैठ सकते। स्थिर आसन मन को दुर्बलता और संचलता का द्योतक । भला जो साधक दो घड़ी के लिए भी अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह अपने मन पर क्या खाक विजय प्राप्त करेगा ? आसन, योग के आठ अंगों में से तीसरा श्रग माना गया इससे शरीर में रक्त की शुद्धि होती है, और स्वास्थ्य ठीक होने से उच्च विचारों को बल मिलता है। शिर नीचा झुकाये, पीठ को दुहरी किये, पैरों को फैलाये बैठे रहने वाला मनुष्य कभी भी महान नहीं बन सकता। हद आासन का मन पर बड़ा प्रभाव होता है। शरीर की कड़क मन में कड़क अवश्य लाती हैं। अतएव सामायिक में सिद्धासन अथवा पद्मासन आदि किसी एक आसन से जॅच कर बैठने का अभ्यास रखना चाहिए । मस्तिष्क का सम्बन्ध रीढ की हड्डियों से है, अतः मेरुदण्ड को भी तना हुआ रखना आवश्यक है। भासनों के सम्बन्ध में विशेष जानकारी के लिए प्राचीन योगशास्त्र आदि ग्रन्थों का अवलोकन करना अधिक अच्छा होगा। यदि पाठक इतनी दूर न जाना चाहें तो लेखक की महामंत्र नवकार नामक पुस्तक भासन कैसा ? से भी कुछ थोड़ा सा आवश्यक परिचय मिल सकेगा। यहां तो दो तीन सुप्रसिद्ध आसनों का उल्लेख ही पर्याप्त रहेगा एक. सिद्धासन ――बाएं पैर की एड़ी से जननेन्द्रिय और गुदा के बीच के स्थान को दबा कर दाहिने पैर की एडी को जननेन्द्रिय के ऊपर के प्रदेश को दबाना, ढुड्डी को हृदय में जमाना, और देह को सीधा रख कर दोनों भौंहों के बीच में दृष्टि को केन्द्रित करना, सिद्धासन है। एक. पद्मासन-बायीं जांघ पर दाहिना पैर और दाहिनी जांघ पर बायां पैर रखना, फिर दोनों हाथों को दोनों जंघाओं पर चित रखना अथवा दोनों हाथों को नाभि के पास ध्यानमुद्रा में रखना, पद्मासन है। तीन. पर्येकासन-दाहिना पैर और बायीं जांघ के नीचे और बायां पैर दाहिनी जांघ के नीचे दबा कर बैठना, पर्येकासन है। पर्येकासन का दूसरा नाम सुखासन भी है। सर्वसाधारण इसे भालथी-पालथी भी कहते हैं । सामायिक करने वाले को अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की घोर रखना श्रेष्ठ माना गया है। जिनभद्र गयी मा श्रमण, विशेषावश्यक भाष्य में लिखते हैं कि पुव्वाभिमुहो उत्तरमुहो व दिज्जाऽहवा पडिच्छेज्जा-या तीन हज़ार चार सौ छः । शास्त्रस्वाध्याय, प्रतिक्रमण, और दीक्षा दान आदि धर्मक्रियाएं पूर्व और उत्तर दिशा की ओर ही करने का विधान है। स्थानांग सूत्र में भगवान महावीर ने भी इन्हीं दो दिशाओं का महत्व वर्णन किया है। अतः यदि गुरुदेव विद्यमान हों तो उनके सम्मुख बैठते हुए अन्य किसी दिशा में भी मुख किया जा सकता है, परन्तु अन्य स्थल पर तो पूर्व और उत्तर की तर्फ मुख रखना ही उचित है । जब कभी पूर्व और उत्तर दिशा का विचार चल पड़ता है तो प्रश्न किया जाता है कि पूर्व और उत्तर दिशा में ही ऐसा क्या महत्त्व है, जो कि अन्य दिशाओं को छोड़ कर इनकी भोर ही मुख किया जाय ? उत्तर में कहना है कि शास्त्रपरम्परा ही सबसे बड़ा प्रमाण है। अभी तक आचार्यों ने इस के वैज्ञानिक महत्त्वपर कोई विस्तृत प्रकाश नहीं डाला । हां अभी-अभी वैदिक विद्वान् सातवलेकर जी ने इस सम्बन्ध में कुछ लिखा है और यह काफी विचारणीय है । प्राचीदिशा-आगे बढ़मा, उन्नति करना, अप्रभाग में हो जानायह प्रान्त-प्रपूर्वक धन्य धातु का मूल अर्थ है, जिससे पूर्वदिशाबाचक
सामाजिक चिंता, जिसे सामाजिक भय के रूप में भी जाना जाता है, एक दुर्बल मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। यह सामाजिक स्थितियों के एक गहन और लगातार भय की विशेषता है, जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संकट और हानि होती है। जबकि कई व्यक्ति सामाजिक बेचैनी के कुछ स्तर का अनुभव करते हैं, सामाजिक चिंता वाले लोग भय और चिंता के अधिक गहन स्तर का सामना करते हैं जो उनकी भलाई और जीवन की समग्र गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। निर्णय और अस्वीकृति का अत्यधिक भयः सामाजिक चिंता वाले व्यक्तियों में अक्सर दूसरों द्वारा न्याय किए जाने, अपमानित होने या अस्वीकार किए जाने का अत्यधिक भय होता है। वे लगातार कुछ शर्मनाक कहने या करने की चिंता करते हैं, जिससे अत्यधिक आत्म-चेतना हो सकती है और सामाजिक स्थितियों से पूरी तरह से बचा जा सकता है। नकारात्मक मूल्यांकन का यह डर इतना तीव्र हो सकता है कि सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति ऐसी स्थितियों से बच सकते हैं जहां वे संभावित रूप से ध्यान का केंद्र हो सकते हैं, जैसे कि सार्वजनिक बोलना, पार्टियों में भाग लेना या समूह गतिविधियों में भाग लेना। शारीरिक लक्षणः सामाजिक चिंता विभिन्न शारीरिक लक्षणों में प्रकट हो सकती है, जो परेशान करने वाले और विघटनकारी हो सकते हैं। इन लक्षणों में तेजी से दिल की धड़कन, पसीना, कांपना या कंपकंपी, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, मतली और यहां तक कि घबराहट के दौरे शामिल हो सकते हैं। सामाजिक चिंता के लिए शारीरिक प्रतिक्रिया अनुभव किए गए भय और परेशानी को बढ़ा सकती है, एक दुष्चक्र बना सकती है जो चिंता को और मजबूत करती है। परिहार व्यवहारः अपनी चिंता को कम करने के लिए, सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति अक्सर परिहार व्यवहार का सहारा लेते हैं। वे सामाजिक स्थितियों से बच सकते हैं, खुद को अलग कर सकते हैं, या उन गतिविधियों से पीछे हट सकते हैं जिनका वे एक बार आनंद लेते थे। परिहार चिंता से अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन यह व्यक्तियों को अपने डर का सामना करने और मुकाबला तंत्र विकसित करने से रोककर सामाजिक चिंता के चक्र को भी कायम रखता है। बिगड़ा हुआ सामाजिक और व्यावसायिक कार्यः सामाजिक चिंता का किसी व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक कामकाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि व्यक्ति भय और परिहार के कारण संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकते हैं। शैक्षिक या पेशेवर सेटिंग्स में, सामाजिक चिंता शैक्षणिक या कैरियर की प्रगति में बाधा बन सकती है, विकास और उन्नति के अवसरों को सीमित कर सकती है। फैसले का डर और नकारात्मक मूल्यांकन भी विचारों को व्यक्त करने, चर्चाओं में योगदान देने या नेतृत्व की भूमिका निभाने को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। नकारात्मक आत्म-धारणा और कम आत्म-सम्मानः लगातार न्याय और जांच महसूस करते हुए, सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति अक्सर नकारात्मक आत्म-धारणा और कम आत्म-सम्मान विकसित करते हैं। वे नकारात्मक आत्म-चर्चा में संलग्न हो सकते हैं, खुद को दूसरों से हीन समझ सकते हैं, या गलतियाँ करने या मूर्ख दिखने का एक गहन भय पाल सकते हैं। ये आत्म-धारणाएं आगे चलकर सामाजिक अलगाव में योगदान दे सकती हैं और व्यक्तिगत विकास में बाधा बन सकती हैं। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
सामाजिक चिंता, जिसे सामाजिक भय के रूप में भी जाना जाता है, एक दुर्बल मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। यह सामाजिक स्थितियों के एक गहन और लगातार भय की विशेषता है, जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संकट और हानि होती है। जबकि कई व्यक्ति सामाजिक बेचैनी के कुछ स्तर का अनुभव करते हैं, सामाजिक चिंता वाले लोग भय और चिंता के अधिक गहन स्तर का सामना करते हैं जो उनकी भलाई और जीवन की समग्र गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। निर्णय और अस्वीकृति का अत्यधिक भयः सामाजिक चिंता वाले व्यक्तियों में अक्सर दूसरों द्वारा न्याय किए जाने, अपमानित होने या अस्वीकार किए जाने का अत्यधिक भय होता है। वे लगातार कुछ शर्मनाक कहने या करने की चिंता करते हैं, जिससे अत्यधिक आत्म-चेतना हो सकती है और सामाजिक स्थितियों से पूरी तरह से बचा जा सकता है। नकारात्मक मूल्यांकन का यह डर इतना तीव्र हो सकता है कि सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति ऐसी स्थितियों से बच सकते हैं जहां वे संभावित रूप से ध्यान का केंद्र हो सकते हैं, जैसे कि सार्वजनिक बोलना, पार्टियों में भाग लेना या समूह गतिविधियों में भाग लेना। शारीरिक लक्षणः सामाजिक चिंता विभिन्न शारीरिक लक्षणों में प्रकट हो सकती है, जो परेशान करने वाले और विघटनकारी हो सकते हैं। इन लक्षणों में तेजी से दिल की धड़कन, पसीना, कांपना या कंपकंपी, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, मतली और यहां तक कि घबराहट के दौरे शामिल हो सकते हैं। सामाजिक चिंता के लिए शारीरिक प्रतिक्रिया अनुभव किए गए भय और परेशानी को बढ़ा सकती है, एक दुष्चक्र बना सकती है जो चिंता को और मजबूत करती है। परिहार व्यवहारः अपनी चिंता को कम करने के लिए, सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति अक्सर परिहार व्यवहार का सहारा लेते हैं। वे सामाजिक स्थितियों से बच सकते हैं, खुद को अलग कर सकते हैं, या उन गतिविधियों से पीछे हट सकते हैं जिनका वे एक बार आनंद लेते थे। परिहार चिंता से अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन यह व्यक्तियों को अपने डर का सामना करने और मुकाबला तंत्र विकसित करने से रोककर सामाजिक चिंता के चक्र को भी कायम रखता है। बिगड़ा हुआ सामाजिक और व्यावसायिक कार्यः सामाजिक चिंता का किसी व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक कामकाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि व्यक्ति भय और परिहार के कारण संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकते हैं। शैक्षिक या पेशेवर सेटिंग्स में, सामाजिक चिंता शैक्षणिक या कैरियर की प्रगति में बाधा बन सकती है, विकास और उन्नति के अवसरों को सीमित कर सकती है। फैसले का डर और नकारात्मक मूल्यांकन भी विचारों को व्यक्त करने, चर्चाओं में योगदान देने या नेतृत्व की भूमिका निभाने को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। नकारात्मक आत्म-धारणा और कम आत्म-सम्मानः लगातार न्याय और जांच महसूस करते हुए, सामाजिक चिंता वाले व्यक्ति अक्सर नकारात्मक आत्म-धारणा और कम आत्म-सम्मान विकसित करते हैं। वे नकारात्मक आत्म-चर्चा में संलग्न हो सकते हैं, खुद को दूसरों से हीन समझ सकते हैं, या गलतियाँ करने या मूर्ख दिखने का एक गहन भय पाल सकते हैं। ये आत्म-धारणाएं आगे चलकर सामाजिक अलगाव में योगदान दे सकती हैं और व्यक्तिगत विकास में बाधा बन सकती हैं। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
[ पत्र - सम्पादन रंग-ढंग का ढाँचा खिंच जाता है और दूसरे अपने पत्र प्रकाशित देखकर पत्र प्रेषक समाचार पत्र से स्वभावतः सहानुभूति करने लगते हैं । पहिले प्रकार से उन अध्ययन शील पाठकों की मनः तुष्टि होगी जो समाज की समस्याओं का अध्ययन करना चाहते हैं और दूसरे से स्वयं पत्र संचालकों को यह लाभ होगा कि पत्र प्रकाशन की उत्सुकता में पत्र प्रेषक उनके पत्र को पढ़ने के लालायित रहेंगे, उसे खरीदने और दूसरे मित्रों से खरीदवाने की कोशिश करेंगे। इस से एक लाभ और भी होगा। वह यह कि जनता में एक-एक को देखकर पत्र भेजने और प्रकाशित हो जाने पर उन्हें पढ़ने को रुचि पैदा होगी और इस प्रकार धीरे-धीरे समाचार पत्र पढ़ने की ओर उनका ध्यान आकृष्ट होगा। इन्हीं लाभों का अव लोकन कर अब चतुर संचालक और सम्पादक गण इस ओर अधिक ध्यान देने लगे है और कुछ लोग विज्ञापन तक दे दे कर पत्र मंगवाने का प्रयत्न करते हैं। ये पत्र स्थूलरूप से दो प्रकार के होते हैं। एक वे जो अपने सम्वाददाताओं द्वारा, आवश्यकतानुसार उन्हें इधर उधर भेजकर मंगाये जाते हैं और दूसरे वे जो विना मंगाये इधर उधर के कुछ लोगों द्वारा भेजे जाते हैं। इन पत्रों में, जहां जहां से वे भेजे जाते हैं वहां वहां की नानाप्रकार की बातें रहती हैं। शोक सम्वाद, हर्षोत्सव समाचार, सभा सोसाइटियों के समाचार, और सबसे अधिक जनता की अपनी शिकायतें आदि सत्र बातें होती हैं। साधारणतया शोक हर्ष आदिके पत्र अधिक महत्व पूर्ण नहीं होते। किन्तु शिका१६६
[ पत्र - सम्पादन रंग-ढंग का ढाँचा खिंच जाता है और दूसरे अपने पत्र प्रकाशित देखकर पत्र प्रेषक समाचार पत्र से स्वभावतः सहानुभूति करने लगते हैं । पहिले प्रकार से उन अध्ययन शील पाठकों की मनः तुष्टि होगी जो समाज की समस्याओं का अध्ययन करना चाहते हैं और दूसरे से स्वयं पत्र संचालकों को यह लाभ होगा कि पत्र प्रकाशन की उत्सुकता में पत्र प्रेषक उनके पत्र को पढ़ने के लालायित रहेंगे, उसे खरीदने और दूसरे मित्रों से खरीदवाने की कोशिश करेंगे। इस से एक लाभ और भी होगा। वह यह कि जनता में एक-एक को देखकर पत्र भेजने और प्रकाशित हो जाने पर उन्हें पढ़ने को रुचि पैदा होगी और इस प्रकार धीरे-धीरे समाचार पत्र पढ़ने की ओर उनका ध्यान आकृष्ट होगा। इन्हीं लाभों का अव लोकन कर अब चतुर संचालक और सम्पादक गण इस ओर अधिक ध्यान देने लगे है और कुछ लोग विज्ञापन तक दे दे कर पत्र मंगवाने का प्रयत्न करते हैं। ये पत्र स्थूलरूप से दो प्रकार के होते हैं। एक वे जो अपने सम्वाददाताओं द्वारा, आवश्यकतानुसार उन्हें इधर उधर भेजकर मंगाये जाते हैं और दूसरे वे जो विना मंगाये इधर उधर के कुछ लोगों द्वारा भेजे जाते हैं। इन पत्रों में, जहां जहां से वे भेजे जाते हैं वहां वहां की नानाप्रकार की बातें रहती हैं। शोक सम्वाद, हर्षोत्सव समाचार, सभा सोसाइटियों के समाचार, और सबसे अधिक जनता की अपनी शिकायतें आदि सत्र बातें होती हैं। साधारणतया शोक हर्ष आदिके पत्र अधिक महत्व पूर्ण नहीं होते। किन्तु शिकाएक सौ छयासठ
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Matthew Rava. मैथ्यू रावा एक ऑटो रिपेयर एक्सपर्ट और Brakes to You के सह-संस्थापक और मार्केटिंग के प्रमुख हैं। ये ब्रेक्स से संबन्धित ऑटो मरम्मत में माहिर हैं। मैथ्यू ने पेंसिल्वेनिया के वेस्ट चेस्टर विश्वविद्यालय से बी.एस. अर्जित किया। यह आर्टिकल १,९४८ बार देखा गया है। साइफनिंग (Siphoning) वो टेक्निक है जिसमें गैस को एक ट्यूब या पाइप द्वारा किसी नये कंटेनर में मुँह द्वारा खींचा (sucking) जाता है। मानिए या मत मानिए, गैस साइफ़न करने की जानकारी रखना केवल छोटे-मोटे अपराधियों के लिए ही ज़रूरी नहीं है! यह कौशल बहुत सी परिस्थितियों में काम आ सकता है, जैसे कि कहीं बियाबान में आपकी गैस ख़त्म हो गई हो, वेहिकल को विंटराइज़ (winterize) करने की ज़रूरत हो, या आपको लॉन-मोवर की टंकी भरवानी हो और आप गैस स्टेशन जाने से बचना चाहते हों। सिर्फ़ एक या दो थोड़ी लंबी प्लास्टिक ट्यूबिंग (tubing) और एक खाली गैस कैन (can) की सहायता से गैस साइफ़न करने के लिए पहले चरण से देखिये। नोटः यह तरीका उन गैस टंकियों में काम नहीं करेगा जिनमें खास एंटी-साइफ़न बैरियर लगा होता है। (हालांकि ऐसे बैरियर को भी स्क्रूड्राइवर की मदद से खुला रखा जा सकता है)। - इस विधि में आप दो ट्यूबिंग्स का इस्तेमाल करेंगे - एक इतनी लंबी जो गैस टंकी में अंदर तक पहुँच सके, और दूसरी उससे छोटी और बस इतनी लंबी कि टंकी के बस अंदर तक पहुँच सके। चाहे आप ट्यूबिंग के दो अलग अलग टुकड़े ले लीजिये या एक ही ट्यूबिंग के दो हिस्से कर लीजिये - दोनों का प्रभाव एक ही होगा। - अगर आपको एक टाइट (tight) सील बनाने में दिक्कत हो रही है, तब रैग को पानी में भिगो कर निचोड़ लीजिये और फिर उसको ट्यूब के चारों ओर पैक कर दीजिये। आम तौर पर सूखे की तुलना में, गीले रैग से अधिक टाइट सील बन जाती है। - अगर आपको कठिनाई हो रही हो तो सुनिश्चित करिए कि ट्यूब्स के चारों ओर टाइट सील लगी है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि छोटे ट्यूब के अतिरिक्त कहीं भी और से, हवा गैस की टंकी से न तो निकले और न ही उसमें घुसे। - जब आप साइफ़न करना बंद करना चाहें, तब अगर ट्यूब में से गैस वापस टंकी में बह कर न जाये, तब यह सुनिश्चित करिए कि छोटे वाले ट्यूब में कोई अवरोध नहीं है, अगर ज़रूरी हो, तब ट्यूब्स के चारों ओर से सील हटा दीजिये ताकि गैस बह कर वापस जा सके। गैस के वापस बह कर टंकी में जाने के लिए हवा को बाहर निकाल कर जगह बनाने की आवश्यकता होती है। - इन पंप्स से आप सुरक्षित रूप से और आसानी से बिना अपने हाथ गंदे किये और गैस के धुएँ के एक्स्पोज़र का जोखिम उठाए गैस साइफ़न कर सकते हैं। अतः, सावधान व्यक्ति के लिए ये आदर्श विकल्प हैं। 2टंकी के नीचे गैस कैन को ज़मीन पर रखिए और ट्यूबिंग को टंकी से कैन तक लाइयेः इस लेख में बताये गए अन्य तरीकों की तरह, सक्शन केवल साइफ़न शुरू करने के लिए ज़रूरी प्रारंभिक बल लगाता है। जब गैस का बहना शुरू हो जाता है, बाकी काम ग्रैविटी करती है। इसके कारण, यह महत्वपूर्ण है कि बर्तन को टंकी में गैस के लेवेल (level) से नीचे रखा जाये। - अधिकांश हाथ से चलाने वाले पंप्स में लिक्विड का बहाव शुरू करने के लिए आपको बस कुछ ही बार पंप करने की ज़रूरत होगी - जिसके बाद, गैस को स्वतन्त्रता से बहना शुरू कर देना चाहिए। - स्वचालित पंप्स को पंप करने की प्रक्रिया के दौरान चालू छोड़ा भी जा सकता है और नहीं भी। और अधिक जानकारी के लिए साइफ़न पंप के साथ दिये गए निर्देशों को देखिये। 4जब आप उस पॉइंट (point) के निकट पहुँचें जब उसको रोकना हो, तब बहाव को रोकने के लिए ट्यूबिंग के सिरे को ऊपर उठाइए (या बर्तन को ही उठाइए): ट्यूबिंग के सिरे को टंकी में भरी गैस के स्तर से ऊपर उठाने से, गैस का उल्टा प्रवाह शुरू हो जाएगा, ताकि पंप में बची हुई गैस वापस बह कर इंजन में चली जाये। अगर आप किसी स्वचालित पंप का इस्तेमाल कर रहे होंगे, तब इस पॉइंट पर आपको पंप बंद करना होगा। 5साइफ़न पंप को टंकी से निकालिएः जब ट्यूबिंग से अतिरिक्त गैस निकल जाएगी, तब आप उसे आराम से गैस टंकी से निकाल सकते हैं। आपका काम पूरा हो गया है। गैस टंकी को बंद करिए और गैस कैन को सील कर दीजिये, और फिर अपना साइफ़न पंप निकाल कर उसे डिसअसेंबल (disassemble) करके स्टोर कर दीजिये। - कुछ साइफ़न पंप्स को इस्तेमाल करने के बाद उनकी सफ़ाई करनी पड़ती हैः अधिक जानकारी के लिए उपलब्ध निर्देशों को देखिये - अक्सर, केवल इतना ही पर्याप्त होता है कि साबुन और पानी के मिश्रण को पंप में से हो कर गुज़रने दिया जाये और पंप को हवा से सूखने दीजिये। पारंपरिक तरह से मुँह से साइफ़न करना (इसकी सलाह नहीं दी जाती है) 1गैसोलीन के ज़हर के जोखिम को समझिएः गैसोलीन में अनेक रासायनिक कंपाउंड होते हैं जिन्हें हाइड्रोकार्बन कहते हैं, जो मानवों के लिए ज़हरीले होते हैं।[११] X रिसर्च सोर्स गैसोलीन को निगलने या उसके धुएँ को सूंघने से अनेक बुरे (जिनसे जीवन को खतरा हो सकता है) लक्षण पैदा हो सकते हैं, जैसे कि सांस लेने में कठिनाई, स्थानीय खुजली, अंधापन, पेट में दर्द, उल्टी (जिसमें कभी-कभी ख़ून भी आ सकता है), सुस्ती, कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (cognitive impairment) वगैरह। अगर आप साइफ़न करने के लिए इस विधि का इस्तेमाल करते हैं, तब यह सावधानी बरतिए कि न तो आप गैसोलीन को गटकें और न ही उसके धुएँ को सूंघ लें। - अगर आप गैसोलीन से एक्स्पोज़ (expose) हो ही जाएँ तब तुरंत ही एमर्जेंसी सेवाओं को या स्थानीय ज़हर नियंत्रण केंद्र को सूचित करिए। 21 inch (2.5 cm) व्यास वाली एक क्लियर प्लास्टिक ट्यूबिंग और एक शीशे का बंद कंटेनर लीजियेः जैसा कि पिछले तरीके में बताया गया है, उसी प्रकार से इस विधि में भी थोड़ी ट्यूबिंग और साइफ़न की गई गैस रखने के लिए एक बर्तन की ज़रूरत होती है। ऊपर दिये गए तरीके की तरह ही, गैस को गिरने से बचाने के लिए और इसलिए कि उसका धुआँ सांस में अंदर न जाये, यह महत्वपूर्ण है कि बंद गैस कैनिस्टर का इस्तेमाल किया जाये। हालांकि, इस तरीके के लिए खास तौर पर क्लियर ट्यूबिंग की केवल संस्तुति ही नहीं की जाती है, बल्कि यह क्रूशियल (crucial) है। चूंकि गैस का मुँह के अंदर जाना आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, इसलिए आपको गैस ट्यूब में मूव करती हुई दिखनी चाहिए ताकि गैस आपके मुँह में पहुंचे उसके पहले ही आप ट्यूब को मुँह से निकाल सकें। 4ट्यूबिंग का खुला सिरा अपने मुँह में रखिएः अपने मुँह का इस्तेमाल करके गैस साइफ़न करने के इस तरीके में, मुँह का इस्तेमाल करके ट्यूब में सक्शन बनाया जाता है, जिससे गैस टंकी से बाहर आती है। जब एक बार गैस स्वतन्त्रता से बहने लगेगी, ग्रैविटी के कारण गैस टंकी से बाहर निकलती रहेगी। ध्यान रखिएगा कि न तो आप गैस को गटकें और न ही उसके धुएँ को सांस से अंदर जाने दें। जब ट्यूब आपके मुँह में हो, तब केवल नाक से सांस लीजिये और ट्यूब में गैस के स्तर को ध्यान से देखते रहिए। 5अपनी उँगलियाँ मुँह के निकट ट्यूबिंग के ऊपर रखिए ताकि अगर गैस आपके मुँह में घुसने लगे तब आप उसे तुरंत खींच कर निकाल सकेंः जब आप ट्यूब को सक करना शुरू कर देंगे, तब गैस तेज़ी से बहने लगेगी। गैस के प्रवाह को रोकने के लिए एक हाथ तैयार रखिए ताकि वह आपके मुँह में नहीं जाये। 6ट्यूबिंग को सक (suck) करिए और ट्यूब में गैस के बहाव को देखियेः गैस के धुएँ को सांस से अंदर जाने के जोखिम को कम से कम करने के लिए (मगर किसी भी तरह मिटाने के लिए नहीं), अपने मुँह से सक करने का प्रयास करिए, फेफड़ों से नहीं - जैसे कि आप सिगरेट नहीं बल्कि सिगार पी रहे हों। जब गैस ट्यूब में बहना शुरू करेगी, वह कुछ तेज़ी से बह सकती है, इसलिए सावधान रहिए। जब गैस आपके मुँह से करीब छह इंच नीचे रह जाये, तब अंत की तरफ़ ट्यूबिंग को कस कर मरोड़ दीजिये और अपने मुँह से उसे निकाल लीजिये। 7ट्यूबिंग में हवा के बुलबुले देखियेः गैस साइफ़न करते समय हवा के बुलबुलों का आना मामूली अवरोध हैं, चूंकि वह उचित बहाव को बाधित कर सकता है, जिसके कारण आपको और कस कर सक करना पड़ सकता है, जो कि ख़तरनाक है। अगर आप ट्यूबिंग में हवा के बुलबुले देखें तब मरोड़ को ढीला कर दीजिये और गैस को वापस कार की टंकी में गिर जाने दीजिये, तथा उसके बाद फिर कोशिश करिए। - ट्यूब को इस तरह पोज़ीशन (position) करिए ताकि आप टंकी के ठीक ऊपर सक करें। कुछ सूत्रों के अनुसार, जब ट्यूब सीधी नीचे की ओर पड़ी होने के स्थान पर साइड में होती है, तब हवा के बुलबुले आने की संभावना बढ़ जाती है। 8ट्यूबिंग के सिरे को गैस के कैन में डालिए और मरोड़ को खोल दीजियेः गैस को गैस कैन में बहना शुरू कर देना चाहिए। इस पॉइंट से, ग्रैविटी की शक्ति गैसोलीन को टंकी से कैन की ओर खींचती रहनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि गैस एक स्थिर गति से कैन में भर्ती रहे उस पर नज़र रखिएगा। 9जब आपको जितनी गैस चाहिए आप उसके आसपास पहुँच जाएँ तब ट्यूबिंग को टंकी बाहर खींच लीजियेः ऐसा करने से गैस का बहाव रुक जाता है और ट्यूब में बची हुई गैस सुरक्षित रूप से गैस कैन में गिर जाएगी। ट्यूब को टंकी से निकालने से पहले ट्यूब में बची हुई गैस का वॉल्यूम (volume) देखिये - आप नहीं चाहेंगे कि बहुत देर तक इंतज़ार करें और ओवरफ़्लो का जोखिम उठाएँ। - उसके स्थान पर, केवल ट्यूबिंग के खुले सिरे को ढक दीजिये और उसे गैस की टंकी के स्तर से ऊपर उठा दीजिए। ग्रैविटी के कारण गैस वापस टंकी में गिर जाएगी। आप चाहें तो उसी प्रभाव के लिए गैस कैन को ही उठा सकते हैं। 10जब पूरी गैस, कंटेनर में वापस गिर जाये तब ट्यूबिंग को गैस कंटेनर से निकाल लीजिये। आपका काम हो गया है! अपनी गैस की टंकी को बंद करिए और गैस के कैन को सील करिए ताकि आप धुएँ को सांस से अंदर न ले लें। - ध्यान रहे कि गैस आपके मुँह में न जाए। ट्यूबिंग का इस्तेमाल तभी करिए जबकि आप गैसोलीन के स्तर को देख सकें। गैसोलीन को गटकना या उसको सांस से अंदर लेने के गंभीर हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। - उसमें से निकलने वाला धुआँ आपके फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप चाहें, तो साइफ़न पंप का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। - ध्यान रखिएगा कि गैस ओवरफ़्लो न करे। - ट्यूबिंग (बेहतर होगा, यदि क्लियर हो)
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Matthew Rava. मैथ्यू रावा एक ऑटो रिपेयर एक्सपर्ट और Brakes to You के सह-संस्थापक और मार्केटिंग के प्रमुख हैं। ये ब्रेक्स से संबन्धित ऑटो मरम्मत में माहिर हैं। मैथ्यू ने पेंसिल्वेनिया के वेस्ट चेस्टर विश्वविद्यालय से बी.एस. अर्जित किया। यह आर्टिकल एक,नौ सौ अड़तालीस बार देखा गया है। साइफनिंग वो टेक्निक है जिसमें गैस को एक ट्यूब या पाइप द्वारा किसी नये कंटेनर में मुँह द्वारा खींचा जाता है। मानिए या मत मानिए, गैस साइफ़न करने की जानकारी रखना केवल छोटे-मोटे अपराधियों के लिए ही ज़रूरी नहीं है! यह कौशल बहुत सी परिस्थितियों में काम आ सकता है, जैसे कि कहीं बियाबान में आपकी गैस ख़त्म हो गई हो, वेहिकल को विंटराइज़ करने की ज़रूरत हो, या आपको लॉन-मोवर की टंकी भरवानी हो और आप गैस स्टेशन जाने से बचना चाहते हों। सिर्फ़ एक या दो थोड़ी लंबी प्लास्टिक ट्यूबिंग और एक खाली गैस कैन की सहायता से गैस साइफ़न करने के लिए पहले चरण से देखिये। नोटः यह तरीका उन गैस टंकियों में काम नहीं करेगा जिनमें खास एंटी-साइफ़न बैरियर लगा होता है। । - इस विधि में आप दो ट्यूबिंग्स का इस्तेमाल करेंगे - एक इतनी लंबी जो गैस टंकी में अंदर तक पहुँच सके, और दूसरी उससे छोटी और बस इतनी लंबी कि टंकी के बस अंदर तक पहुँच सके। चाहे आप ट्यूबिंग के दो अलग अलग टुकड़े ले लीजिये या एक ही ट्यूबिंग के दो हिस्से कर लीजिये - दोनों का प्रभाव एक ही होगा। - अगर आपको एक टाइट सील बनाने में दिक्कत हो रही है, तब रैग को पानी में भिगो कर निचोड़ लीजिये और फिर उसको ट्यूब के चारों ओर पैक कर दीजिये। आम तौर पर सूखे की तुलना में, गीले रैग से अधिक टाइट सील बन जाती है। - अगर आपको कठिनाई हो रही हो तो सुनिश्चित करिए कि ट्यूब्स के चारों ओर टाइट सील लगी है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि छोटे ट्यूब के अतिरिक्त कहीं भी और से, हवा गैस की टंकी से न तो निकले और न ही उसमें घुसे। - जब आप साइफ़न करना बंद करना चाहें, तब अगर ट्यूब में से गैस वापस टंकी में बह कर न जाये, तब यह सुनिश्चित करिए कि छोटे वाले ट्यूब में कोई अवरोध नहीं है, अगर ज़रूरी हो, तब ट्यूब्स के चारों ओर से सील हटा दीजिये ताकि गैस बह कर वापस जा सके। गैस के वापस बह कर टंकी में जाने के लिए हवा को बाहर निकाल कर जगह बनाने की आवश्यकता होती है। - इन पंप्स से आप सुरक्षित रूप से और आसानी से बिना अपने हाथ गंदे किये और गैस के धुएँ के एक्स्पोज़र का जोखिम उठाए गैस साइफ़न कर सकते हैं। अतः, सावधान व्यक्ति के लिए ये आदर्श विकल्प हैं। दोटंकी के नीचे गैस कैन को ज़मीन पर रखिए और ट्यूबिंग को टंकी से कैन तक लाइयेः इस लेख में बताये गए अन्य तरीकों की तरह, सक्शन केवल साइफ़न शुरू करने के लिए ज़रूरी प्रारंभिक बल लगाता है। जब गैस का बहना शुरू हो जाता है, बाकी काम ग्रैविटी करती है। इसके कारण, यह महत्वपूर्ण है कि बर्तन को टंकी में गैस के लेवेल से नीचे रखा जाये। - अधिकांश हाथ से चलाने वाले पंप्स में लिक्विड का बहाव शुरू करने के लिए आपको बस कुछ ही बार पंप करने की ज़रूरत होगी - जिसके बाद, गैस को स्वतन्त्रता से बहना शुरू कर देना चाहिए। - स्वचालित पंप्स को पंप करने की प्रक्रिया के दौरान चालू छोड़ा भी जा सकता है और नहीं भी। और अधिक जानकारी के लिए साइफ़न पंप के साथ दिये गए निर्देशों को देखिये। चारजब आप उस पॉइंट के निकट पहुँचें जब उसको रोकना हो, तब बहाव को रोकने के लिए ट्यूबिंग के सिरे को ऊपर उठाइए : ट्यूबिंग के सिरे को टंकी में भरी गैस के स्तर से ऊपर उठाने से, गैस का उल्टा प्रवाह शुरू हो जाएगा, ताकि पंप में बची हुई गैस वापस बह कर इंजन में चली जाये। अगर आप किसी स्वचालित पंप का इस्तेमाल कर रहे होंगे, तब इस पॉइंट पर आपको पंप बंद करना होगा। पाँचसाइफ़न पंप को टंकी से निकालिएः जब ट्यूबिंग से अतिरिक्त गैस निकल जाएगी, तब आप उसे आराम से गैस टंकी से निकाल सकते हैं। आपका काम पूरा हो गया है। गैस टंकी को बंद करिए और गैस कैन को सील कर दीजिये, और फिर अपना साइफ़न पंप निकाल कर उसे डिसअसेंबल करके स्टोर कर दीजिये। - कुछ साइफ़न पंप्स को इस्तेमाल करने के बाद उनकी सफ़ाई करनी पड़ती हैः अधिक जानकारी के लिए उपलब्ध निर्देशों को देखिये - अक्सर, केवल इतना ही पर्याप्त होता है कि साबुन और पानी के मिश्रण को पंप में से हो कर गुज़रने दिया जाये और पंप को हवा से सूखने दीजिये। पारंपरिक तरह से मुँह से साइफ़न करना एकगैसोलीन के ज़हर के जोखिम को समझिएः गैसोलीन में अनेक रासायनिक कंपाउंड होते हैं जिन्हें हाइड्रोकार्बन कहते हैं, जो मानवों के लिए ज़हरीले होते हैं।[ग्यारह] X रिसर्च सोर्स गैसोलीन को निगलने या उसके धुएँ को सूंघने से अनेक बुरे लक्षण पैदा हो सकते हैं, जैसे कि सांस लेने में कठिनाई, स्थानीय खुजली, अंधापन, पेट में दर्द, उल्टी , सुस्ती, कॉग्निटिव इंपेयरमेंट वगैरह। अगर आप साइफ़न करने के लिए इस विधि का इस्तेमाल करते हैं, तब यह सावधानी बरतिए कि न तो आप गैसोलीन को गटकें और न ही उसके धुएँ को सूंघ लें। - अगर आप गैसोलीन से एक्स्पोज़ हो ही जाएँ तब तुरंत ही एमर्जेंसी सेवाओं को या स्थानीय ज़हर नियंत्रण केंद्र को सूचित करिए। इक्कीस inch व्यास वाली एक क्लियर प्लास्टिक ट्यूबिंग और एक शीशे का बंद कंटेनर लीजियेः जैसा कि पिछले तरीके में बताया गया है, उसी प्रकार से इस विधि में भी थोड़ी ट्यूबिंग और साइफ़न की गई गैस रखने के लिए एक बर्तन की ज़रूरत होती है। ऊपर दिये गए तरीके की तरह ही, गैस को गिरने से बचाने के लिए और इसलिए कि उसका धुआँ सांस में अंदर न जाये, यह महत्वपूर्ण है कि बंद गैस कैनिस्टर का इस्तेमाल किया जाये। हालांकि, इस तरीके के लिए खास तौर पर क्लियर ट्यूबिंग की केवल संस्तुति ही नहीं की जाती है, बल्कि यह क्रूशियल है। चूंकि गैस का मुँह के अंदर जाना आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, इसलिए आपको गैस ट्यूब में मूव करती हुई दिखनी चाहिए ताकि गैस आपके मुँह में पहुंचे उसके पहले ही आप ट्यूब को मुँह से निकाल सकें। चारट्यूबिंग का खुला सिरा अपने मुँह में रखिएः अपने मुँह का इस्तेमाल करके गैस साइफ़न करने के इस तरीके में, मुँह का इस्तेमाल करके ट्यूब में सक्शन बनाया जाता है, जिससे गैस टंकी से बाहर आती है। जब एक बार गैस स्वतन्त्रता से बहने लगेगी, ग्रैविटी के कारण गैस टंकी से बाहर निकलती रहेगी। ध्यान रखिएगा कि न तो आप गैस को गटकें और न ही उसके धुएँ को सांस से अंदर जाने दें। जब ट्यूब आपके मुँह में हो, तब केवल नाक से सांस लीजिये और ट्यूब में गैस के स्तर को ध्यान से देखते रहिए। पाँचअपनी उँगलियाँ मुँह के निकट ट्यूबिंग के ऊपर रखिए ताकि अगर गैस आपके मुँह में घुसने लगे तब आप उसे तुरंत खींच कर निकाल सकेंः जब आप ट्यूब को सक करना शुरू कर देंगे, तब गैस तेज़ी से बहने लगेगी। गैस के प्रवाह को रोकने के लिए एक हाथ तैयार रखिए ताकि वह आपके मुँह में नहीं जाये। छःट्यूबिंग को सक करिए और ट्यूब में गैस के बहाव को देखियेः गैस के धुएँ को सांस से अंदर जाने के जोखिम को कम से कम करने के लिए , अपने मुँह से सक करने का प्रयास करिए, फेफड़ों से नहीं - जैसे कि आप सिगरेट नहीं बल्कि सिगार पी रहे हों। जब गैस ट्यूब में बहना शुरू करेगी, वह कुछ तेज़ी से बह सकती है, इसलिए सावधान रहिए। जब गैस आपके मुँह से करीब छह इंच नीचे रह जाये, तब अंत की तरफ़ ट्यूबिंग को कस कर मरोड़ दीजिये और अपने मुँह से उसे निकाल लीजिये। सातट्यूबिंग में हवा के बुलबुले देखियेः गैस साइफ़न करते समय हवा के बुलबुलों का आना मामूली अवरोध हैं, चूंकि वह उचित बहाव को बाधित कर सकता है, जिसके कारण आपको और कस कर सक करना पड़ सकता है, जो कि ख़तरनाक है। अगर आप ट्यूबिंग में हवा के बुलबुले देखें तब मरोड़ को ढीला कर दीजिये और गैस को वापस कार की टंकी में गिर जाने दीजिये, तथा उसके बाद फिर कोशिश करिए। - ट्यूब को इस तरह पोज़ीशन करिए ताकि आप टंकी के ठीक ऊपर सक करें। कुछ सूत्रों के अनुसार, जब ट्यूब सीधी नीचे की ओर पड़ी होने के स्थान पर साइड में होती है, तब हवा के बुलबुले आने की संभावना बढ़ जाती है। आठट्यूबिंग के सिरे को गैस के कैन में डालिए और मरोड़ को खोल दीजियेः गैस को गैस कैन में बहना शुरू कर देना चाहिए। इस पॉइंट से, ग्रैविटी की शक्ति गैसोलीन को टंकी से कैन की ओर खींचती रहनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि गैस एक स्थिर गति से कैन में भर्ती रहे उस पर नज़र रखिएगा। नौजब आपको जितनी गैस चाहिए आप उसके आसपास पहुँच जाएँ तब ट्यूबिंग को टंकी बाहर खींच लीजियेः ऐसा करने से गैस का बहाव रुक जाता है और ट्यूब में बची हुई गैस सुरक्षित रूप से गैस कैन में गिर जाएगी। ट्यूब को टंकी से निकालने से पहले ट्यूब में बची हुई गैस का वॉल्यूम देखिये - आप नहीं चाहेंगे कि बहुत देर तक इंतज़ार करें और ओवरफ़्लो का जोखिम उठाएँ। - उसके स्थान पर, केवल ट्यूबिंग के खुले सिरे को ढक दीजिये और उसे गैस की टंकी के स्तर से ऊपर उठा दीजिए। ग्रैविटी के कारण गैस वापस टंकी में गिर जाएगी। आप चाहें तो उसी प्रभाव के लिए गैस कैन को ही उठा सकते हैं। दसजब पूरी गैस, कंटेनर में वापस गिर जाये तब ट्यूबिंग को गैस कंटेनर से निकाल लीजिये। आपका काम हो गया है! अपनी गैस की टंकी को बंद करिए और गैस के कैन को सील करिए ताकि आप धुएँ को सांस से अंदर न ले लें। - ध्यान रहे कि गैस आपके मुँह में न जाए। ट्यूबिंग का इस्तेमाल तभी करिए जबकि आप गैसोलीन के स्तर को देख सकें। गैसोलीन को गटकना या उसको सांस से अंदर लेने के गंभीर हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। - उसमें से निकलने वाला धुआँ आपके फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप चाहें, तो साइफ़न पंप का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। - ध्यान रखिएगा कि गैस ओवरफ़्लो न करे। - ट्यूबिंग
इसके बाद दोनों में बहस शुरू हो गई। कर्मचारी ने महिला को ड्यूटी मैनेजर के पास जाने को कहा, ड्यूटी मैनेजर और महिला के बीच बहस हुई। एयरलाइन के सूत्रों ने कहा कि इसके बाद यात्री ने कथित रूप से ड्यूटी मैनेजर को थप्पड़ जड़ दिया। हवाईअड्डे के पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया ने कहा कि ड्यूटी मैनेजर ने भी बदले में थप्पड़ मारा।
इसके बाद दोनों में बहस शुरू हो गई। कर्मचारी ने महिला को ड्यूटी मैनेजर के पास जाने को कहा, ड्यूटी मैनेजर और महिला के बीच बहस हुई। एयरलाइन के सूत्रों ने कहा कि इसके बाद यात्री ने कथित रूप से ड्यूटी मैनेजर को थप्पड़ जड़ दिया। हवाईअड्डे के पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया ने कहा कि ड्यूटी मैनेजर ने भी बदले में थप्पड़ मारा।
नई दिल्ली। स्पेशल सेल की साउथ वेस्टर्न रेंज की टीम ने एक अहम कामयाबी हासिल करते हुए मियांवाली नगर में ट्रिपल मर्डर के तीन आरोपियों को अरेस्ट किया है। इनके नाम सोनू उर्फ केजरीवाल, सुमित और संदीप के रूप में हुई है। इन तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित है। पुलिस ने इनके पास से तीन पिस्टल और 15 कारतूस बरामद किए हैं। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल की रात लगभग 11 बजे दरियापुर का रहने वाला भूपेंद्र उर्फ मोनू शौकीन चौक, मियांवाली नगर में जब अपनी कार में बैठ रहा था तभी दो बाइकों पर आए कुछ युवकों ने फायरिंग शुरू कर दी। तीन दर्जन से भी ज्यादा गोलियां चलीं और इस फायरिंग में भूपेंद्र उर्फ मोनू उसके पीएसओ दिल्ली पुलिस के एएसआई विजय कुमार और एक अरुण नाम के शख्स की मौत हो गई जबकि एक अन्य पीएसओ कांस्टेबल कुलदीप शर्मा बुरी तरह घायल हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी वहां से फरार हो गया। इस मामले में पुलिस ने 20 मई को सतीश, 8 जून को नवीन खत्री और 26 जुलाई को राजेश को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन बाकी आरोपी पुलिस की पकड़ से बचे रहे। इसी बीच 28 जुलाई को स्पेशल सेल की टीम को एक इनपुट मिला जिससे पता चला कि भूपेंद्र उर्फ मोनू हत्याकांड में शामिल आरोपी अपने किसी जानकार से मिलने रोहणी के सेक्टर 24-25 में महावीर मार्ग पर आएंगे। इस इनपुट पर कार्रवाई करने के लिए एसीपी अखिलेश्वर स्वरूप के सुपरविजन में एक टीम गठित की गई जिसने बताई गई जगह पर ट्रेप लगाकर एक कार को रोक लिया। कार चालक की पहचान सुमित और बाकी दोनों आरोपियों की पहचान सोनू उर्फ केजरीवाल और संदीप के रूप में हुई। इनकी तलाशी लेने पर पुलिस ने इनके पास से तीन पिस्टल और 15 कारतूस बरामद किए। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
नई दिल्ली। स्पेशल सेल की साउथ वेस्टर्न रेंज की टीम ने एक अहम कामयाबी हासिल करते हुए मियांवाली नगर में ट्रिपल मर्डर के तीन आरोपियों को अरेस्ट किया है। इनके नाम सोनू उर्फ केजरीवाल, सुमित और संदीप के रूप में हुई है। इन तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित है। पुलिस ने इनके पास से तीन पिस्टल और पंद्रह कारतूस बरामद किए हैं। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तीस अप्रैल की रात लगभग ग्यारह बजे दरियापुर का रहने वाला भूपेंद्र उर्फ मोनू शौकीन चौक, मियांवाली नगर में जब अपनी कार में बैठ रहा था तभी दो बाइकों पर आए कुछ युवकों ने फायरिंग शुरू कर दी। तीन दर्जन से भी ज्यादा गोलियां चलीं और इस फायरिंग में भूपेंद्र उर्फ मोनू उसके पीएसओ दिल्ली पुलिस के एएसआई विजय कुमार और एक अरुण नाम के शख्स की मौत हो गई जबकि एक अन्य पीएसओ कांस्टेबल कुलदीप शर्मा बुरी तरह घायल हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी वहां से फरार हो गया। इस मामले में पुलिस ने बीस मई को सतीश, आठ जून को नवीन खत्री और छब्बीस जुलाई को राजेश को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन बाकी आरोपी पुलिस की पकड़ से बचे रहे। इसी बीच अट्ठाईस जुलाई को स्पेशल सेल की टीम को एक इनपुट मिला जिससे पता चला कि भूपेंद्र उर्फ मोनू हत्याकांड में शामिल आरोपी अपने किसी जानकार से मिलने रोहणी के सेक्टर चौबीस-पच्चीस में महावीर मार्ग पर आएंगे। इस इनपुट पर कार्रवाई करने के लिए एसीपी अखिलेश्वर स्वरूप के सुपरविजन में एक टीम गठित की गई जिसने बताई गई जगह पर ट्रेप लगाकर एक कार को रोक लिया। कार चालक की पहचान सुमित और बाकी दोनों आरोपियों की पहचान सोनू उर्फ केजरीवाल और संदीप के रूप में हुई। इनकी तलाशी लेने पर पुलिस ने इनके पास से तीन पिस्टल और पंद्रह कारतूस बरामद किए। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
Lalit Modi Sushmita Sen Relationship" पिछले कुछ दिनों से सुष्मिता सेन और ललित मोदी चर्चा में हैं। दोनों ने एक दूसरे को डेट करने का ऐलान किया था। सोशल मीडिया में साथ में रोमांटिक फोटोज भी पोस्ट की। तस्वीरें सोशल मीडिया में आने के बाद से ही इस कपल को ट्रोल किया जा रहा है। ट्रोल करने वाले इस जोड़ी को बेमेल बता रहे हैं। सुष्मिता सेन औऱ ललित मोदी से पहले भी कई बॉलीवुड कपल्स को बेमेल बता ट्रोल किया जा चुका है। लोगों को जब इन सेलेब्स के रिलेशनशिप का पता लगा तो वो काफी सरप्राइज्ड हुए थे। आइए डालते हैं एक नजरः विकी कौशल और कैटरीना कैफ की शादी से भी फैंस सरप्राइज थे। सोशल मीडिया में इस जोड़ी को लोगों ने बेमेल बताया था। वो इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि आखिर कैटरीना जो कि विकी से काफी सीनियर, सफल और उम्र में भी बड़ी हैं वह इस शादी के लिए कैसे तैयार हो गईं। रानी मुखर्जी की आदित्य चोपड़ा संग शादी ने भी फैंस को सरप्राइज किया था। आदित्य रानी से उम्र में भी काफी बड़े थे और तलाकशुदा भी थे। इसे लेकर इस जोड़ी को खूब ट्रोल किया गया था। जूही चावला ने जय मेहता से शादी रचाई थी। जूही और जय की जोड़ी को भी बेमेल बता रहे थे लोग। जूही चावला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोग तो इस तरह की बातें भी करते थे कि उन्होंने जय मेहता से सिर्फ पैसों के लिए शादी की है। बोनी कपूर और श्रीदेवी की जोड़ी भी फैंस को कुछ ज्यादा पसंद नहीं आती थी। संजय दत्त ने मान्यता से शादी की है। मान्यता संजय की तीसरी पत्नी हैं। मान्यता संग संजय की शादी ने हर किसी को चौंका दिया था। बता दें कि मान्यता दत्त पहले से तलाकशुदा थीं। उन्होंने कुछ बी ग्रेड फिल्मों में काम किया है।
Lalit Modi Sushmita Sen Relationship" पिछले कुछ दिनों से सुष्मिता सेन और ललित मोदी चर्चा में हैं। दोनों ने एक दूसरे को डेट करने का ऐलान किया था। सोशल मीडिया में साथ में रोमांटिक फोटोज भी पोस्ट की। तस्वीरें सोशल मीडिया में आने के बाद से ही इस कपल को ट्रोल किया जा रहा है। ट्रोल करने वाले इस जोड़ी को बेमेल बता रहे हैं। सुष्मिता सेन औऱ ललित मोदी से पहले भी कई बॉलीवुड कपल्स को बेमेल बता ट्रोल किया जा चुका है। लोगों को जब इन सेलेब्स के रिलेशनशिप का पता लगा तो वो काफी सरप्राइज्ड हुए थे। आइए डालते हैं एक नजरः विकी कौशल और कैटरीना कैफ की शादी से भी फैंस सरप्राइज थे। सोशल मीडिया में इस जोड़ी को लोगों ने बेमेल बताया था। वो इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि आखिर कैटरीना जो कि विकी से काफी सीनियर, सफल और उम्र में भी बड़ी हैं वह इस शादी के लिए कैसे तैयार हो गईं। रानी मुखर्जी की आदित्य चोपड़ा संग शादी ने भी फैंस को सरप्राइज किया था। आदित्य रानी से उम्र में भी काफी बड़े थे और तलाकशुदा भी थे। इसे लेकर इस जोड़ी को खूब ट्रोल किया गया था। जूही चावला ने जय मेहता से शादी रचाई थी। जूही और जय की जोड़ी को भी बेमेल बता रहे थे लोग। जूही चावला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोग तो इस तरह की बातें भी करते थे कि उन्होंने जय मेहता से सिर्फ पैसों के लिए शादी की है। बोनी कपूर और श्रीदेवी की जोड़ी भी फैंस को कुछ ज्यादा पसंद नहीं आती थी। संजय दत्त ने मान्यता से शादी की है। मान्यता संजय की तीसरी पत्नी हैं। मान्यता संग संजय की शादी ने हर किसी को चौंका दिया था। बता दें कि मान्यता दत्त पहले से तलाकशुदा थीं। उन्होंने कुछ बी ग्रेड फिल्मों में काम किया है।
और बड़ा बनाना चाहते हैं, सदैव असफल रहेंगे, पछताएँगे । "मैं उत्तम वंश का हूँ - इस बात पर गुग्ध पुरुप - थोड़े दिनों में भाईबंदों को अपने ऐसा देखकर विचलित होता है। क्योंकि वह देखता है कि मैं अद्वितीय नहीं, समान गुणवाले लोग बहुसंख्यक मौजूद हैं । वेताल का प्रश्न ( हाय स्वतंत्रते ) फिर तीर की भाँति चुभता है । ब्रह्मविद्या जिसके व्यवहार ( बर्ताव ) में नहीं है, इस प्रकार का एक बड़ा भारी पंडित किसी और विद्वान् पंडित का नाम सुनकर यदि खुल्लमखुल्ला निंदा करना न आरंभ करेगा, तो मन में अवश्य वैसे ही घटने लग जायगा जैसे आरंभिक श्रेणी का वालक अपने से चतुर बालक को देख दुःख मानता है। "मैं ताज़ा एम्० ए० हूँ", इस घमंड में चूर मनुष्य का जब एक महीने में नशा उतरता है, तो देखता है कि मेरे जैसे, बल्कि मुझसे अच्छे सैकड़ों पड़े हैं, मैं श्रेष्ठ नहीं, अद्वितीय नहीं । वेताल का प्रश्न फिर आग की भाँति जलाता है । आज युनिवर्सिटी नवोकेशन का जल्सा है । चांसलर साहब सभा में शोभायमान हैं । फ़ेलो ( सहपाठी ) लोग कुर्सियों पर विराजमान हैं। दर्शकगण चारों ओर से नए ग्रेजुएटों की ओर उँगलियाँ उठा रहे हैं। नया स्नातक मन में बड़ा प्रसन्न हो रहा है कि चौदह-पंद्रह वर्ष के परिश्रम का फल मिलेगा । प्रसन्नता से कपोल फूल रहे हैं । गौन ( gown अर्थात् शाटक फड़काना सर्टिफिकेट के लिये उठा है। चांसलर साहब के सामने सम्मानपूर्वक खड़ा हूँ । इस समय चित्त-वृत्ति कैसी एकाग्र ऐश-वाटिका के नवयुवक ! वाइस चांसलर साहब को वक्तृता सुनने से पहले राम की रामकहानी से चित्त और कान मत मोड़ । प्यारे ! इश्वर तो कंठ से लेकर पग पर्यंत बोर काला जाभा ( जो पूरी आयु में एक दिन भी तो काम में नहीं आता ) पहनकर लोटपोट हो रहा हैं, उधर बेताल तमाशा देख-देखकर हँस रहा है कि "सोलह वर्ष बिता दिए, किंतु मेरे प्रश्न का उत्तर ठीक न दे सका ।" यह नन-मस्तक होना, सर्टिफिकेट के लिये हाथ का बढ़ाना और सम्मानपूर्वक प्रणाम, सब बोल रहे हैं कि नवयुवक उपाधि प्राप्त कर रहा है, प्रमाणपत्र ले रहा है, मान पा रहा है। आनंद यह है कि एक ही काम उधर नवयुवक में अभिमान भर रहा है, उधर डिग्री प्रदान करनेवालों ( फ़ेलो ) युनिवर्सिटी से उसके कमतर और छोटा होने को स्पष्ट जतला रहा है । उस समय ग्रेजुएट के खयाल में जो उन्नति का पद वा स्थान है, वहीं उसके न्यून और छोटा होने का चिह्न है । डिग्री लेना न तो केवल बीसियों समान गुण विद्यार्थी (फ़लो-ग्रेजुएट ) साथ दिखा रहा है, वरन् सैकड़ों बहुत बड़े-बड़े ( फ़ेलो-महाशयों ) के भी एक साथ दर्शन करा रहा है । अतः बी० ए० की बड़ाई ( अद्वितीय होना ) के भला क्या अर्थ हो सकते हैं ? ठीक इसी प्रकार संसारी पुरुष जिस बात में कभी सम्मान समझता है और अभिमान करता है, दूसरी दृष्टि से वह बात सदैव उसकी शान की कसर ( कमी ) जतलाती है । संसार का जीव रहकर अद्वितीय ( श्रेष्ट और स्वतंत्र ) होना किसी प्रकार से संभव नहीं, पर क्या यह स्वाभाविक इच्छा ( स्वतंत्रता श्रेष्ठता ) मनुष्य के भीतर हँसी-ठटोली के लिये हैं, केवल मखौलबाज़ी हैं, और पूरी होने के लिये नहीं है ? ऐसा क्यों होगा। यह स्वाभाविक धुन, (स्वतंत्र और श्रेष्ठ होने की ) यह लग्न जो रात-दिन पीछे लगी रहती है, पूरी क्यों न होगी ? अवश्य पूरी होगी । किंतु परिच्छिन्न जीव होने की हैसियत से मनुष्य के भीतर की यह अग्नि कदापि-कदापि नहीं बुझ सकती । "मैं सेठ हूँ" इस विचार का घमंड रखनेवाला शीघ्र ही देखता है कि मुझसे अधिक धनाढ्य लोग मौजूद हैं । हाय, मैं उन जैसा कब हूँगा । मैं अद्वितीय नहीं, बड़ा नहीं । फिर वेताल का प्रश्न र व्याकुल करता है । बढ़ते-बढ़ते कल्पना करो कि संसार में इंगलैंड का राज्य मिल गया, फिर रूस और फ्रांसद समान शक्त्रिाले हृदय में खटकते रहेंगे, बोरों ( Bores) का भय लगा रहेगा, आदि। प्रजा की दृष्टि में बड़े बन गये, अधीन राजाओं के संपूज्य हो गए, किंतु ज्ञान के बिना दृष्टि तृप्त न होगी, और न होगी । निःसंदेह श्रेष्टता और स्वतंत्रता कोसों दूर रहेगी । सहस्रां महाराजाधिराज इस संसार में हो जाते हैं, क्या सब के सब आनंदित थे ? नहीं, जितनी-जितनी जिसमें ज्ञान की झलक थी, उतना उतना वह आनंदित था । तात्पर्य यह कि जाति, वर्ण और मत (Caste, colour and creed ) की बड़ाई वास्तव में छोटाई है। "मैं उच्च जाति का हूँ, इसलिये बड़ा हूँ" राम कहता है "प्यारे, यदि तुम जाति के कारण सर्वश्रेष्ट और अद्वितीय बनना चाहते हो, तो तुम सबसे नीच हो । क्योंकि उस जाति के तुम-जैसे सहस्रों मनुष्य विद्यमान हैं। किसी विशेष जातिवाला होना तो तुम्हारे श्रेष्ठ ( अद्वितीय या स्वतंत्र ) होने में बाधक हैं ।" यह अनुचित अहंकार मीठी गाजरों बड़ेकी भाँति तुम्हें एक दिन उदर-पीड़ा उत्पन्न करेगा । बड़े नगरों में जब दसहरे का मेला होता है, तो लीलावाले मैदान के चारों ओर प्रायः लोहे का काँटेदार तार लगा देते हैं जिससे बिना टिकट के लोग मैदान के भीतर न । उस समय तार के चक्र के बाहर हिंदुओं का बड़ा भारी जमात्र होता है, देह से देह छिलती है, दर्शक लोग तार के किनारे-किनारे चक्कर लगाते चले जाते हैं, पीछे से धके पर धके मिलते हैं, आगे भीड़ के कारण पैर टिकाने को जगह नहीं मिलती । इस प्रकर पिस- पिसाव में जकड़े हुए चक्र में घूमनेवाला यदि ( क ) स्थान ( ख ) तक चला जाय तो निःसंदेह संसार की दृष्टि से बहुत उन्नति करता है। किंतु उसकी जान से पूछो कि आया स्थान ( क ) की अपेक्षा स्थान ( ख ) पर धकमधका से कुछ कम कुचला जा रहा है कि वैसा ही । प्यारे ! चाहे ( क ) पर पहुँच जाओ, चाहे ( ग ) पर, चाहे फिर ( क ) पर आ जाओ, जब तक चक्र में रहोगे, आगे-पीछे के दवात्र से स्वतंत्रता नितांत असंभव है। हाँ, टिकट खरीदने पर मैदान के भीतर ( अ ) केंद्र को जा सकते हो । वहाँ कोई धक्कमधक्का नहीं है । संसार में स्थान ( क ) वाले, अर्थात् सर्वोच्च प्रतापशाली पुरुप का चित्त वैसा ही डाँवाडोल, चंचल और धक्क खानेवाला होता है, जैसे स्थान ( ग ), अर्थात् श्रेणी, वाले का । ऐ पीड़ा और दुःख में
और बड़ा बनाना चाहते हैं, सदैव असफल रहेंगे, पछताएँगे । "मैं उत्तम वंश का हूँ - इस बात पर गुग्ध पुरुप - थोड़े दिनों में भाईबंदों को अपने ऐसा देखकर विचलित होता है। क्योंकि वह देखता है कि मैं अद्वितीय नहीं, समान गुणवाले लोग बहुसंख्यक मौजूद हैं । वेताल का प्रश्न फिर तीर की भाँति चुभता है । ब्रह्मविद्या जिसके व्यवहार में नहीं है, इस प्रकार का एक बड़ा भारी पंडित किसी और विद्वान् पंडित का नाम सुनकर यदि खुल्लमखुल्ला निंदा करना न आरंभ करेगा, तो मन में अवश्य वैसे ही घटने लग जायगा जैसे आरंभिक श्रेणी का वालक अपने से चतुर बालक को देख दुःख मानता है। "मैं ताज़ा एम्शून्य एशून्य हूँ", इस घमंड में चूर मनुष्य का जब एक महीने में नशा उतरता है, तो देखता है कि मेरे जैसे, बल्कि मुझसे अच्छे सैकड़ों पड़े हैं, मैं श्रेष्ठ नहीं, अद्वितीय नहीं । वेताल का प्रश्न फिर आग की भाँति जलाता है । आज युनिवर्सिटी नवोकेशन का जल्सा है । चांसलर साहब सभा में शोभायमान हैं । फ़ेलो लोग कुर्सियों पर विराजमान हैं। दर्शकगण चारों ओर से नए ग्रेजुएटों की ओर उँगलियाँ उठा रहे हैं। नया स्नातक मन में बड़ा प्रसन्न हो रहा है कि चौदह-पंद्रह वर्ष के परिश्रम का फल मिलेगा । प्रसन्नता से कपोल फूल रहे हैं । गौन पहनकर लोटपोट हो रहा हैं, उधर बेताल तमाशा देख-देखकर हँस रहा है कि "सोलह वर्ष बिता दिए, किंतु मेरे प्रश्न का उत्तर ठीक न दे सका ।" यह नन-मस्तक होना, सर्टिफिकेट के लिये हाथ का बढ़ाना और सम्मानपूर्वक प्रणाम, सब बोल रहे हैं कि नवयुवक उपाधि प्राप्त कर रहा है, प्रमाणपत्र ले रहा है, मान पा रहा है। आनंद यह है कि एक ही काम उधर नवयुवक में अभिमान भर रहा है, उधर डिग्री प्रदान करनेवालों युनिवर्सिटी से उसके कमतर और छोटा होने को स्पष्ट जतला रहा है । उस समय ग्रेजुएट के खयाल में जो उन्नति का पद वा स्थान है, वहीं उसके न्यून और छोटा होने का चिह्न है । डिग्री लेना न तो केवल बीसियों समान गुण विद्यार्थी साथ दिखा रहा है, वरन् सैकड़ों बहुत बड़े-बड़े के भी एक साथ दर्शन करा रहा है । अतः बीशून्य एशून्य की बड़ाई के भला क्या अर्थ हो सकते हैं ? ठीक इसी प्रकार संसारी पुरुष जिस बात में कभी सम्मान समझता है और अभिमान करता है, दूसरी दृष्टि से वह बात सदैव उसकी शान की कसर जतलाती है । संसार का जीव रहकर अद्वितीय होना किसी प्रकार से संभव नहीं, पर क्या यह स्वाभाविक इच्छा मनुष्य के भीतर हँसी-ठटोली के लिये हैं, केवल मखौलबाज़ी हैं, और पूरी होने के लिये नहीं है ? ऐसा क्यों होगा। यह स्वाभाविक धुन, यह लग्न जो रात-दिन पीछे लगी रहती है, पूरी क्यों न होगी ? अवश्य पूरी होगी । किंतु परिच्छिन्न जीव होने की हैसियत से मनुष्य के भीतर की यह अग्नि कदापि-कदापि नहीं बुझ सकती । "मैं सेठ हूँ" इस विचार का घमंड रखनेवाला शीघ्र ही देखता है कि मुझसे अधिक धनाढ्य लोग मौजूद हैं । हाय, मैं उन जैसा कब हूँगा । मैं अद्वितीय नहीं, बड़ा नहीं । फिर वेताल का प्रश्न र व्याकुल करता है । बढ़ते-बढ़ते कल्पना करो कि संसार में इंगलैंड का राज्य मिल गया, फिर रूस और फ्रांसद समान शक्त्रिाले हृदय में खटकते रहेंगे, बोरों का भय लगा रहेगा, आदि। प्रजा की दृष्टि में बड़े बन गये, अधीन राजाओं के संपूज्य हो गए, किंतु ज्ञान के बिना दृष्टि तृप्त न होगी, और न होगी । निःसंदेह श्रेष्टता और स्वतंत्रता कोसों दूर रहेगी । सहस्रां महाराजाधिराज इस संसार में हो जाते हैं, क्या सब के सब आनंदित थे ? नहीं, जितनी-जितनी जिसमें ज्ञान की झलक थी, उतना उतना वह आनंदित था । तात्पर्य यह कि जाति, वर्ण और मत की बड़ाई वास्तव में छोटाई है। "मैं उच्च जाति का हूँ, इसलिये बड़ा हूँ" राम कहता है "प्यारे, यदि तुम जाति के कारण सर्वश्रेष्ट और अद्वितीय बनना चाहते हो, तो तुम सबसे नीच हो । क्योंकि उस जाति के तुम-जैसे सहस्रों मनुष्य विद्यमान हैं। किसी विशेष जातिवाला होना तो तुम्हारे श्रेष्ठ होने में बाधक हैं ।" यह अनुचित अहंकार मीठी गाजरों बड़ेकी भाँति तुम्हें एक दिन उदर-पीड़ा उत्पन्न करेगा । बड़े नगरों में जब दसहरे का मेला होता है, तो लीलावाले मैदान के चारों ओर प्रायः लोहे का काँटेदार तार लगा देते हैं जिससे बिना टिकट के लोग मैदान के भीतर न । उस समय तार के चक्र के बाहर हिंदुओं का बड़ा भारी जमात्र होता है, देह से देह छिलती है, दर्शक लोग तार के किनारे-किनारे चक्कर लगाते चले जाते हैं, पीछे से धके पर धके मिलते हैं, आगे भीड़ के कारण पैर टिकाने को जगह नहीं मिलती । इस प्रकर पिस- पिसाव में जकड़े हुए चक्र में घूमनेवाला यदि स्थान तक चला जाय तो निःसंदेह संसार की दृष्टि से बहुत उन्नति करता है। किंतु उसकी जान से पूछो कि आया स्थान की अपेक्षा स्थान पर धकमधका से कुछ कम कुचला जा रहा है कि वैसा ही । प्यारे ! चाहे पर पहुँच जाओ, चाहे पर, चाहे फिर पर आ जाओ, जब तक चक्र में रहोगे, आगे-पीछे के दवात्र से स्वतंत्रता नितांत असंभव है। हाँ, टिकट खरीदने पर मैदान के भीतर केंद्र को जा सकते हो । वहाँ कोई धक्कमधक्का नहीं है । संसार में स्थान वाले, अर्थात् सर्वोच्च प्रतापशाली पुरुप का चित्त वैसा ही डाँवाडोल, चंचल और धक्क खानेवाला होता है, जैसे स्थान , अर्थात् श्रेणी, वाले का । ऐ पीड़ा और दुःख में
मेथी मलाई पनीर की तरह इसमें कोई साग नहीं होता है। बस, आखिरी में आप मटर और पुदीने के पाउडर से डिश को गार्निश कर सकते हैं। 1 कप दही (दही) एक पैन में तेल डालें और तेल गर्म होने पर उसमें प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, काली इलायची, हरी इलायची और काली मिर्च डालें। इन्हें मध्यम आंच पर प्याज के गलने तक पकाएं। कुछ देर के लिए प्याज को ठंडा होने दें। इसके बाद, एक ग्राइंडर लें, दही के साथ प्याज का मिश्रण डालें और एक चिकना पेस्ट पाने के लिए अच्छी तरह मिलाएं। एक पैन में घी गर्म करें और फिर उसमें प्याज-दही का पेस्ट डालें। उसके बाद, काजू का पेस्ट डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। एक चुटकी नमक डालें, मिलाएं और ढक्कन को ढक दें। इसे 8-10 मिनट तक पकने दें। एक बार हो जाने के बाद, थोड़ा पानी डालें और फिर दूध डालें। सब कुछ अच्छी तरह मिला लें। अंत में जायफल पाउडर और कटे हुए पनीर के टुकड़े डालें। इसे अच्छे से हिलाएं। आप चाहें तो इलायची पाउडर भी डाल सकते हैं। 8-10 मिनट तक पकाएं। आपका मलाई पनीर कोरमा परोसने के लिए तैयार है। इसे थोड़े से पुदीने के पाउडर और पुदीने की पत्ती से गार्निश करें। आप चाहें तो उबले मटर भी डाल सकते हैं।
मेथी मलाई पनीर की तरह इसमें कोई साग नहीं होता है। बस, आखिरी में आप मटर और पुदीने के पाउडर से डिश को गार्निश कर सकते हैं। एक कप दही एक पैन में तेल डालें और तेल गर्म होने पर उसमें प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, काली इलायची, हरी इलायची और काली मिर्च डालें। इन्हें मध्यम आंच पर प्याज के गलने तक पकाएं। कुछ देर के लिए प्याज को ठंडा होने दें। इसके बाद, एक ग्राइंडर लें, दही के साथ प्याज का मिश्रण डालें और एक चिकना पेस्ट पाने के लिए अच्छी तरह मिलाएं। एक पैन में घी गर्म करें और फिर उसमें प्याज-दही का पेस्ट डालें। उसके बाद, काजू का पेस्ट डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। एक चुटकी नमक डालें, मिलाएं और ढक्कन को ढक दें। इसे आठ-दस मिनट तक पकने दें। एक बार हो जाने के बाद, थोड़ा पानी डालें और फिर दूध डालें। सब कुछ अच्छी तरह मिला लें। अंत में जायफल पाउडर और कटे हुए पनीर के टुकड़े डालें। इसे अच्छे से हिलाएं। आप चाहें तो इलायची पाउडर भी डाल सकते हैं। आठ-दस मिनट तक पकाएं। आपका मलाई पनीर कोरमा परोसने के लिए तैयार है। इसे थोड़े से पुदीने के पाउडर और पुदीने की पत्ती से गार्निश करें। आप चाहें तो उबले मटर भी डाल सकते हैं।
मन्दिर है। माममें एक चैत्यालय है। सेठ सेंबरीकाक्ष जीके यहाँ भाहार हुआ। यहाँ भारासेम भन्दामाजी आ गई । २बजे समा हुई जिसमें भगतजी तथा नाथूरामशीके भाषया हुए। यहाँ इविन लग गये । यहाँसे मुन्सरिया तथा चौमरीबाद में विश्यम किया। यह समुयात्रा सुखद रही। भारहीनो षभून अगहन सुवी ३ संवत् २०१ को प्रातः पौधरीवादसे मलकर ८३ बजते-बजते ईसरी पहुँच गये। भितर्मे वड़ा एक बार यहाँ भाकर पुनः परिवर्तन करने किम निका पड़ा था और एस में फँस १० बर्ष यत्र तत्र मटकता रहा । शरीरमें शक्ति नहीं थी फिर भी भटकना पड़ा। आज पुनः श्रीपा प्रमुकी निमायण भूमिके समीप मा जानेसे हृदयमें को भामन्य हुआ यह शब्दकि गोचर नहीं। यह समस्त स्यागियों या परिषर अन्य लोगों को भी महान् इर्प हुआ । देतेईसमें बहुत परिवर्तन हो गया है। जहाँ पहले एक साधारणसी धर्मशाला भी यहाँ भाव विशाल पकी धर्मशाला है, सुन्दर मन्दिर है, तीजनोंके आरमकल्याण के कार्य उदासीनाभ्रम है और छात्रोंके हिवार्य एक पाठशमला है। मामकी पहले की अपेक्षा अधिक हो गई है। यहाँ आनेपर मुझे ऐसा लगने जैसे भारहीनो पभून' - शिरसे मारी भार उत्तर गया हो । सीनाममा मनके लिये एक सुन्दर भषम अलगसे पन गया है। स्नानाहिसे मिच दोनेवर शास्त्र प्रवचन भारहीनो वभूव होता है । अनन्तर भोजनके बाद ११३ बजेसे सामायिक सव त्यागीवर्ग करते हैं। फिर २ बजेसे शास्त्र प्रवचन होता है। अन्तर सायंकालकी सामायिक और रात्रिके प्रारम्भका शास्त्र प्रवचन होता है । सब त्यागी तथा धर्मलाभकी भावनासे यहाँ रहनेवाले अन्य महानुभाव इन सव कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। मैं भी सव कार्यक्रमोंमें पहुँच जाता था। प्रातःकालका प्रवचन मैं कर देता था परन्तु मध्याह्न और रात्रिके प्रवचन अन्य विद्वान् करते थे । मैं श्रवण करता था। प्रातःकालके प्रवचनमें कभी समयसार, कभी प्रवचनसार, कभी पञ्चास्तिकाय, कभी नियमसार आदि कुन्दकुन्द स्वामीके ग्रन्थ रहते थे । कुन्दकुन्द स्वामीने अपने ग्रन्थोंमें जो पदार्थका वर्णन किया है वह बहुत ही सरलताके साथ वस्तुके शुद्ध स्वरूपको वतलानेवाला है। मेरी श्रद्धा तो यह है कि इस युगमें कुन्दकुन्दके समान वस्तुतत्त्वका निरूपण करनेवाला दूसरा आचार्य नहीं हुआ। मध्याह्न में सैद्धान्तिक ग्रन्थका विवेचन रहता था और रात्रिको सर्वसाधारणोपयोगी हिन्दी ग्रन्थ तथा प्रथमानुयोगके ग्रन्थोंका स्वाध्याय चलता था । यहाँ बाहरसे अनेक विद्वान् तथा विशिष्ट महानुभाव यदा कदा रहते हैं। उनके भोजनकी व्यवस्थाके लिये रायबहादुर श्रीचाँदमल्लजी राचीवालोंकी ओर से एक चौका खोल दिया गया जिसमें अतिथियोंके भोजनकी उत्तम व्यवस्था बन गई । यहाँका प्राकृतिक दृश्य भी नयनाभिराम है। पास ही हरे भरे गिरिराजके दर्शन होते हैं। श्रीपार्श्व प्रभुका निर्वारण स्थान अपनी निराली शोभा से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहता है। आकाशको चीरती हुई गिरिराजकी हरी मरी चोटियाँ कभी तो धूमिल घनघटासे आच्छादित हो जाती हैं और कभी स्वच्छ- अनावृत दिखाई देती हैं । प्रातःकालके समय पर्वतकी हरियालीपर जब दिनकरकी लाल
मन्दिर है। माममें एक चैत्यालय है। सेठ सेंबरीकाक्ष जीके यहाँ भाहार हुआ। यहाँ भारासेम भन्दामाजी आ गई । दोबजे समा हुई जिसमें भगतजी तथा नाथूरामशीके भाषया हुए। यहाँ इविन लग गये । यहाँसे मुन्सरिया तथा चौमरीबाद में विश्यम किया। यह समुयात्रा सुखद रही। भारहीनो षभून अगहन सुवी तीन संवत् दो सौ एक को प्रातः पौधरीवादसे मलकर तिरासी बजते-बजते ईसरी पहुँच गये। भितर्मे वड़ा एक बार यहाँ भाकर पुनः परिवर्तन करने किम निका पड़ा था और एस में फँस दस बर्ष यत्र तत्र मटकता रहा । शरीरमें शक्ति नहीं थी फिर भी भटकना पड़ा। आज पुनः श्रीपा प्रमुकी निमायण भूमिके समीप मा जानेसे हृदयमें को भामन्य हुआ यह शब्दकि गोचर नहीं। यह समस्त स्यागियों या परिषर अन्य लोगों को भी महान् इर्प हुआ । देतेईसमें बहुत परिवर्तन हो गया है। जहाँ पहले एक साधारणसी धर्मशाला भी यहाँ भाव विशाल पकी धर्मशाला है, सुन्दर मन्दिर है, तीजनोंके आरमकल्याण के कार्य उदासीनाभ्रम है और छात्रोंके हिवार्य एक पाठशमला है। मामकी पहले की अपेक्षा अधिक हो गई है। यहाँ आनेपर मुझे ऐसा लगने जैसे भारहीनो पभून' - शिरसे मारी भार उत्तर गया हो । सीनाममा मनके लिये एक सुन्दर भषम अलगसे पन गया है। स्नानाहिसे मिच दोनेवर शास्त्र प्रवचन भारहीनो वभूव होता है । अनन्तर भोजनके बाद एक सौ तेरह बजेसे सामायिक सव त्यागीवर्ग करते हैं। फिर दो बजेसे शास्त्र प्रवचन होता है। अन्तर सायंकालकी सामायिक और रात्रिके प्रारम्भका शास्त्र प्रवचन होता है । सब त्यागी तथा धर्मलाभकी भावनासे यहाँ रहनेवाले अन्य महानुभाव इन सव कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। मैं भी सव कार्यक्रमोंमें पहुँच जाता था। प्रातःकालका प्रवचन मैं कर देता था परन्तु मध्याह्न और रात्रिके प्रवचन अन्य विद्वान् करते थे । मैं श्रवण करता था। प्रातःकालके प्रवचनमें कभी समयसार, कभी प्रवचनसार, कभी पञ्चास्तिकाय, कभी नियमसार आदि कुन्दकुन्द स्वामीके ग्रन्थ रहते थे । कुन्दकुन्द स्वामीने अपने ग्रन्थोंमें जो पदार्थका वर्णन किया है वह बहुत ही सरलताके साथ वस्तुके शुद्ध स्वरूपको वतलानेवाला है। मेरी श्रद्धा तो यह है कि इस युगमें कुन्दकुन्दके समान वस्तुतत्त्वका निरूपण करनेवाला दूसरा आचार्य नहीं हुआ। मध्याह्न में सैद्धान्तिक ग्रन्थका विवेचन रहता था और रात्रिको सर्वसाधारणोपयोगी हिन्दी ग्रन्थ तथा प्रथमानुयोगके ग्रन्थोंका स्वाध्याय चलता था । यहाँ बाहरसे अनेक विद्वान् तथा विशिष्ट महानुभाव यदा कदा रहते हैं। उनके भोजनकी व्यवस्थाके लिये रायबहादुर श्रीचाँदमल्लजी राचीवालोंकी ओर से एक चौका खोल दिया गया जिसमें अतिथियोंके भोजनकी उत्तम व्यवस्था बन गई । यहाँका प्राकृतिक दृश्य भी नयनाभिराम है। पास ही हरे भरे गिरिराजके दर्शन होते हैं। श्रीपार्श्व प्रभुका निर्वारण स्थान अपनी निराली शोभा से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहता है। आकाशको चीरती हुई गिरिराजकी हरी मरी चोटियाँ कभी तो धूमिल घनघटासे आच्छादित हो जाती हैं और कभी स्वच्छ- अनावृत दिखाई देती हैं । प्रातःकालके समय पर्वतकी हरियालीपर जब दिनकरकी लाल
बिलासपुर - चलैहली, रैहड़ा, मढ़ौना, हवाण, भदरौन, चुराड़ी, और त्रिफालघाट सड़क की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है। इस सड़क की पिछले दो साल से मरम्मत ही नहीं की गई है। सड़क पर पड़े गड्ढों के कारण इस सड़क पर छोटे वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। यह बात सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण एवं विकास मंच बिलासपुर के अध्यक्ष डा. केडी लखनपाल ने अपने जनसंपर्क अभियान के तहत चलैहली, हरलोग, हवाण और भदरौण क्षेत्रों का दौरा करने के उपरांत लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखकर मौजूदा समय राजनेताओं में शिलान्यास और उद्घाटन करने में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें बरसात के कारण खराब हुई सड़कों की सुध लेने तक का समय नहीं है। सदर विधानसभा क्षेत्र के सुझाइला में शिलान्यास पट्टिका लगाने में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन इस सड़क पर पड़े गड्ढों को भरने की तरफ विभाग का कोई ध्यान नहीं है। क्षेत्र के विकास की ओर किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई ध्यान नहीं दिया। कोलडैम योजना के तहत स्टोरेज टैंकों का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन आज तक इन टैंकों में इस योजना का पानी नहीं डाला गया है।
बिलासपुर - चलैहली, रैहड़ा, मढ़ौना, हवाण, भदरौन, चुराड़ी, और त्रिफालघाट सड़क की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है। इस सड़क की पिछले दो साल से मरम्मत ही नहीं की गई है। सड़क पर पड़े गड्ढों के कारण इस सड़क पर छोटे वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। यह बात सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण एवं विकास मंच बिलासपुर के अध्यक्ष डा. केडी लखनपाल ने अपने जनसंपर्क अभियान के तहत चलैहली, हरलोग, हवाण और भदरौण क्षेत्रों का दौरा करने के उपरांत लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखकर मौजूदा समय राजनेताओं में शिलान्यास और उद्घाटन करने में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें बरसात के कारण खराब हुई सड़कों की सुध लेने तक का समय नहीं है। सदर विधानसभा क्षेत्र के सुझाइला में शिलान्यास पट्टिका लगाने में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन इस सड़क पर पड़े गड्ढों को भरने की तरफ विभाग का कोई ध्यान नहीं है। क्षेत्र के विकास की ओर किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई ध्यान नहीं दिया। कोलडैम योजना के तहत स्टोरेज टैंकों का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन आज तक इन टैंकों में इस योजना का पानी नहीं डाला गया है।
सेंट जार्ज। भारत और वेस्टइंडीज ए के बीच तीसरे और आखिरी अनधिकृत वनडे मैच में बारिश के कारण एक गेंद भी फेंकी नहीं जा सकी। दोनों टीमों के बीच श्रृंखला। . । से ड्रा रही। कल रात से जारी बारिश आज भी नहीं थमी। अंपायरों विंसेंट बुलेन और गोलेंड ग्रीव्स के पास मैच रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं था। वेस्टइंडीज ए ने पहला मैच दो विकेट से जीता था जबकि भारत ने दूसरे मैच में 108 रन से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही भारत ए टीम का वेस्टइंडीज दौरा भी खत्म हो गया। दोनों टीमों के बीच दो टी20 मैचों की श्रृंखला भी ड्रा रही थी। वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की अनधिकृत चार दिवसीय टेस्ट श्रृंखला जीती थी। भारतीय स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा और शिखर धवन लय हासिल करने के लिये जूझते रहे लेकिन जलज सक्सेना जैसे युवाओं ने अच्छा प्रदर्शन किया।
सेंट जार्ज। भारत और वेस्टइंडीज ए के बीच तीसरे और आखिरी अनधिकृत वनडे मैच में बारिश के कारण एक गेंद भी फेंकी नहीं जा सकी। दोनों टीमों के बीच श्रृंखला। . । से ड्रा रही। कल रात से जारी बारिश आज भी नहीं थमी। अंपायरों विंसेंट बुलेन और गोलेंड ग्रीव्स के पास मैच रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं था। वेस्टइंडीज ए ने पहला मैच दो विकेट से जीता था जबकि भारत ने दूसरे मैच में एक सौ आठ रन से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही भारत ए टीम का वेस्टइंडीज दौरा भी खत्म हो गया। दोनों टीमों के बीच दो टीबीस मैचों की श्रृंखला भी ड्रा रही थी। वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की अनधिकृत चार दिवसीय टेस्ट श्रृंखला जीती थी। भारतीय स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा और शिखर धवन लय हासिल करने के लिये जूझते रहे लेकिन जलज सक्सेना जैसे युवाओं ने अच्छा प्रदर्शन किया।
कानपुर/बीपी प्रतिनिधि। बर्रा स्थित केमिकल फैक्ट्री के गोदाम में शुक्रवार को भीषण आग लग गई। फलस्वरूप धमाके के साथ केमिकल से भरे ड्रम फटने लगे, जिससे भगदड़ मच गई। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार की दोपहर गोदाम में कर्मचारी काम कर रहे थे। जब उन्होंने आग की लपटें और धुआं देखा तो वे लोग बाहर की तरफ भागे। इस बीच केमिकल भरे ड्रम आग की चपेट में आ गए और धमाके के साथ फटने लगे। कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन थोड़ी ही देर में आग पास की झुग्गी झोपड़ियों तक पहुंच गई। इसके बाद चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के घंटों बाद दमकल कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग से लाखों का नुकसान हुआ है। अभी तक आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
कानपुर/बीपी प्रतिनिधि। बर्रा स्थित केमिकल फैक्ट्री के गोदाम में शुक्रवार को भीषण आग लग गई। फलस्वरूप धमाके के साथ केमिकल से भरे ड्रम फटने लगे, जिससे भगदड़ मच गई। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार की दोपहर गोदाम में कर्मचारी काम कर रहे थे। जब उन्होंने आग की लपटें और धुआं देखा तो वे लोग बाहर की तरफ भागे। इस बीच केमिकल भरे ड्रम आग की चपेट में आ गए और धमाके के साथ फटने लगे। कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन थोड़ी ही देर में आग पास की झुग्गी झोपड़ियों तक पहुंच गई। इसके बाद चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के घंटों बाद दमकल कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग से लाखों का नुकसान हुआ है। अभी तक आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
UP Hindi Latest News: शुक्रवार को संजीव जीवा हत्याकांड के दौरान घायल हुई बच्ची के फेफड़े से गोली निकाल दी गई है। पहले से अब बच्ची को काफी आराम है। डॉक्टर बच्ची की निगरानी कर रहे हैं। लखनऊः कैसरबाग स्थित सेशन कोर्ट में बुधवार को संजीव जीवा हत्याकांड में घायल 18 माह की बच्ची की शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी की गई। केजीएमयू ट्रॉमा में डेढ़ घंटे तक चली सर्जरी में बच्ची के फेफड़े से सफलतापूर्वक डॉक्टरों ने गोली निकाल दी। अब बच्ची की हालत स्थिर है और उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। हालांकि, अगले 24 घंटे उसे आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सर्जरी के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन शाम तक वेंटिलेटर से हटा दिया गया। ट्रॉमा के सीएमएस डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि गोली पीठ की हड्डी और फेफड़े के बीच में फंसी थी, इसलिए इसे निकालना थोड़ा जटिल था, लेकिन ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्व यह काम किया। इसमें गोली से जो भी हिस्सा क्षतिग्रस्त था, उसे रिपेयर किया गया। बच्ची अब होश में आ गई है और बात कर रही है, लेकिन गनशॉट सर्जरी के बाद इंफेक्शन का खतरा हो सकता है, इसलिए अगले 24 घंटे बच्ची को निगरानी में रखा गया है। बीकेटी निवासी सौरभ अपने पिता के साथ बुधवार को एक केस की सुनवाई में आए थे, तभी हुए गोली कांड में सौरभ की डेढ़ साल की बच्ची को भी गोली लग गई थी। पहले उसे बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था। गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बच्ची और परिजनों से मिलकर हाल चाल लिया था।
UP Hindi Latest News: शुक्रवार को संजीव जीवा हत्याकांड के दौरान घायल हुई बच्ची के फेफड़े से गोली निकाल दी गई है। पहले से अब बच्ची को काफी आराम है। डॉक्टर बच्ची की निगरानी कर रहे हैं। लखनऊः कैसरबाग स्थित सेशन कोर्ट में बुधवार को संजीव जीवा हत्याकांड में घायल अट्ठारह माह की बच्ची की शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी की गई। केजीएमयू ट्रॉमा में डेढ़ घंटे तक चली सर्जरी में बच्ची के फेफड़े से सफलतापूर्वक डॉक्टरों ने गोली निकाल दी। अब बच्ची की हालत स्थिर है और उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। हालांकि, अगले चौबीस घंटाटे उसे आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सर्जरी के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन शाम तक वेंटिलेटर से हटा दिया गया। ट्रॉमा के सीएमएस डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि गोली पीठ की हड्डी और फेफड़े के बीच में फंसी थी, इसलिए इसे निकालना थोड़ा जटिल था, लेकिन ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सफलतापूर्व यह काम किया। इसमें गोली से जो भी हिस्सा क्षतिग्रस्त था, उसे रिपेयर किया गया। बच्ची अब होश में आ गई है और बात कर रही है, लेकिन गनशॉट सर्जरी के बाद इंफेक्शन का खतरा हो सकता है, इसलिए अगले चौबीस घंटाटे बच्ची को निगरानी में रखा गया है। बीकेटी निवासी सौरभ अपने पिता के साथ बुधवार को एक केस की सुनवाई में आए थे, तभी हुए गोली कांड में सौरभ की डेढ़ साल की बच्ची को भी गोली लग गई थी। पहले उसे बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था। गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बच्ची और परिजनों से मिलकर हाल चाल लिया था।
कैलिफोर्निया। कैलिफोर्निया के ऑकलैंड में एक नाइट क्लब में पार्टी के दौरान आग लग गई। इस आग से झुलसकर 9 लोगों की मौत हो गई। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आग की घटना शाम रात के 11:30 बजे के आसपास हुई। जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त क्लब में गोल्डन डोना ग्रूप का कंसर्ट चल रहा था, जिसकी वजह से वहां लोगों की काफी भीड़ थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 50 से ज्यादा लोग उस वक्त क्लब में मौजूद थे। हादसे में जहां 9 लोगों की मौत हो गई, वहीं कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लोकल रिपोर्टस के मुताबिक करीब 13 लोग लापता है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और रात-बचाव दल मौके पर पहुंची हुई है। पुलिस लगातार लोगों की मदद में जुटी हुई है। अभी तक आग लगने की वजह का खुलासा नहीं हुआ है।
कैलिफोर्निया। कैलिफोर्निया के ऑकलैंड में एक नाइट क्लब में पार्टी के दौरान आग लग गई। इस आग से झुलसकर नौ लोगों की मौत हो गई। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आग की घटना शाम रात के ग्यारह:तीस बजे के आसपास हुई। जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त क्लब में गोल्डन डोना ग्रूप का कंसर्ट चल रहा था, जिसकी वजह से वहां लोगों की काफी भीड़ थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब पचास से ज्यादा लोग उस वक्त क्लब में मौजूद थे। हादसे में जहां नौ लोगों की मौत हो गई, वहीं कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लोकल रिपोर्टस के मुताबिक करीब तेरह लोग लापता है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और रात-बचाव दल मौके पर पहुंची हुई है। पुलिस लगातार लोगों की मदद में जुटी हुई है। अभी तक आग लगने की वजह का खुलासा नहीं हुआ है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
लखनऊ। अनुबंध केतहत नो-पार्किंग से गाड़ियां उठाने का संचालन नगर निगम के यातायात बूथ से ही किया जाएगा। इसके बाद भी ठेकेदार ने नए बूथ बनाए हैं। नए बूथ लालबाग और नेशनल कॉलेज के पास बनाए गए हैं, जहां पर नो-पार्किंग से उठाई जाने वाली गाड़ियां रखी जाती हैं। पहले इस एरिया में सिर्फ कसमंडा हाउस के पास ही बूथ पर सभी गाड़ियां आती थीं। इस साल नगर निगम ने फरवरी में क्रेन ठेकेदार को नो-पार्किंग से गाड़ी उठाने का ठेका दिया। उस समय शहर में नगर निगम के महज पांच ही क्रेन बूथ थे, जिनके आसपास के क्षेत्र से ही गाड़ियां उठाई जाती थीं। उनमें हजरतगंज कसमंडा हाउस के सामने, चारबाग, गोमती नगर में समतामूलक और महानगर थाना प्रमुख हैं, लेकिन जब से ठेका हुआ है यह संख्या बढ़ गई है। ठेकेदार ने अपने हिसाब से नए बूथ बना दिए। उनमें सहारागंज के निकट नेशनल कॉलेज वाली रोड पर, लालबाग, गाजीपुर थाना, गोमती नगर थाना, अलीगंज थाना, आलमबाग नहर के पास आदि प्रमुख हैं। इसका मकसद अधिक गाड़ियां उठाकर ज्यादा से ज्यादा कमाई करना। यह तब है जबकि अनुबंध में साफ लिखा है कि ठेकेदार नगर निगम बूथों से क्रेेनों का संचालन करेगा। नो-पार्किंग से गाड़ी उठाने वाली क्रेन खुद यातायात नियमों को तोड़ रांग साइड में दौड़ रही है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी गोमती नगर और इंदिरा नगर क्षेत्र में ठेकेदार की क्रेने रांग साइड दौड़ती दिखी। विभूति खंड में दोपहर को क्रेन गाड़ी उठाने रॉन्ग साइड गई और वापस रॉन्ग साइड आई। गोमती नगर से पॅालीटेक्निक चौराहे की ओर भी एक क्रेन रॉन्ग साइड गाड़ी लेकर आई। इसी तरह पॉलीटेक्निक चौराहे से चिनहट की ओर भी क्रेन रॉन्ग साइड गई।
लखनऊ। अनुबंध केतहत नो-पार्किंग से गाड़ियां उठाने का संचालन नगर निगम के यातायात बूथ से ही किया जाएगा। इसके बाद भी ठेकेदार ने नए बूथ बनाए हैं। नए बूथ लालबाग और नेशनल कॉलेज के पास बनाए गए हैं, जहां पर नो-पार्किंग से उठाई जाने वाली गाड़ियां रखी जाती हैं। पहले इस एरिया में सिर्फ कसमंडा हाउस के पास ही बूथ पर सभी गाड़ियां आती थीं। इस साल नगर निगम ने फरवरी में क्रेन ठेकेदार को नो-पार्किंग से गाड़ी उठाने का ठेका दिया। उस समय शहर में नगर निगम के महज पांच ही क्रेन बूथ थे, जिनके आसपास के क्षेत्र से ही गाड़ियां उठाई जाती थीं। उनमें हजरतगंज कसमंडा हाउस के सामने, चारबाग, गोमती नगर में समतामूलक और महानगर थाना प्रमुख हैं, लेकिन जब से ठेका हुआ है यह संख्या बढ़ गई है। ठेकेदार ने अपने हिसाब से नए बूथ बना दिए। उनमें सहारागंज के निकट नेशनल कॉलेज वाली रोड पर, लालबाग, गाजीपुर थाना, गोमती नगर थाना, अलीगंज थाना, आलमबाग नहर के पास आदि प्रमुख हैं। इसका मकसद अधिक गाड़ियां उठाकर ज्यादा से ज्यादा कमाई करना। यह तब है जबकि अनुबंध में साफ लिखा है कि ठेकेदार नगर निगम बूथों से क्रेेनों का संचालन करेगा। नो-पार्किंग से गाड़ी उठाने वाली क्रेन खुद यातायात नियमों को तोड़ रांग साइड में दौड़ रही है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी गोमती नगर और इंदिरा नगर क्षेत्र में ठेकेदार की क्रेने रांग साइड दौड़ती दिखी। विभूति खंड में दोपहर को क्रेन गाड़ी उठाने रॉन्ग साइड गई और वापस रॉन्ग साइड आई। गोमती नगर से पॅालीटेक्निक चौराहे की ओर भी एक क्रेन रॉन्ग साइड गाड़ी लेकर आई। इसी तरह पॉलीटेक्निक चौराहे से चिनहट की ओर भी क्रेन रॉन्ग साइड गई।
उत्तर प्रदेश लोगों को शीतलहर से राहत मिलने जा रही है. लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अगले एक हफ्ते के मौसम (Weather) का पूर्वानुमान जारी कर दिया गया है. लखनऊ (Lucknow) में मौसम विभाग (Met. Department) की ओर से जारी किया गया पूर्वानुमान लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है. मौसम विभाग का मानना है कि जिस तरह से शीतलहर का प्रकोप चल रहा था उसमें अब वैसे तेजी देखने को नहीं मिलेगी. यानी भीषण ठण्ड से लोगों को राहत मिल गयी है. अगले तीन दिनों तक तो लगातार पूरे प्रदेश में धूप निकलेगी. हालांकि ये जरूर है कि मौसम के खुला होने के कारण कई जिलों में कोहरे से परेशानी हो लेकिन, धूप जरूर निकलेगी. 5 जनवरी को तो पूरे प्रदेश में धूर खिली रहेगी लेकिन 6 जनवरी को पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में हल्के बादल देखे जा सकेंगे. बाकी प्रदेश में धूप खिली रहेगी. पिछले दिनों जिस तरह से धूप के लिए लोग तरस गये और ऊपर से बारिश ने ठण्डी बढ़ा दी. लेकिन, अब संकट का ये दौर थम गया है. लगातार धूप निकल रही है और अगले कुछ दिनों तक निकलती रहेगी. इसकी वजह से ठण्ड में भी काफी कमी आ गई है. जो गलन पिछले दिनों महसूस की जा रही थी, उससे लोगों को राहत मिल गई है. अब से तीन चार पहले प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था लेकिन, अब दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आस पास पहुंच गया है. रात का जो तापमान 1 या 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था, अब उसमें भी उछाल गया है. रात का न्यूनतम तापमान भी अब 10 डिग्री के आसपास तक पहुंच गया है. ये तापमान सामान्य तापमान से थोड़ा ज्यादा ही है. इससे कामकाजी लोगों को राहत मिली है. साथ ही मजबूरी में सड़क किनारे रहने वाले लोगों को भी राहत मिली है. पिछले दिनों पूरे प्रदेश में भीषण ठण्ड की वजह से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. हालांकि सरकारी आंकड़े कुछ और हैं. लेकिन, अब तसल्ली की बात ये है कि ठण्ड कम होने से हो रही मौतों के आंकड़ों में भी कमी आयेगी. इससे जिला प्रशासन के अफसरों को भी राहत मिलेगी. मौसम विभाग का कहना है कि मौसम के साफ हो जाने के कारण भले ही दिन में अच्छी धूप मिलेगी. लेकिन, इसी साफ मौसम के कारण कोहरे की परेशानी बनी रहेगी. पिछले दिनों बादलों और बारिश के कारण कोहरे से थोड़ी राहत मिली थी लेकिन अब मौसम के साफ होने कारण ज्यादातर जिलों में सुबह सुबह कोहरे की समस्या बनी रहेगी. मौसम विभाग का ये भी कहना है कि इससे ज्यादा परेशानी नहीं होगी क्योंकि दिन चढ़ने के साथ कोहरा छट जायेगा और लोगों को खिली धूप मिल सकेगी. ये भी पढ़ेंः 'कांग्रेस के 'घोटालों की संस्कृति' का शिकार हुए सोनभद्र के दलित, आदिवासी' . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए 800 करोड़!
उत्तर प्रदेश लोगों को शीतलहर से राहत मिलने जा रही है. लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अगले एक हफ्ते के मौसम का पूर्वानुमान जारी कर दिया गया है. लखनऊ में मौसम विभाग की ओर से जारी किया गया पूर्वानुमान लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है. मौसम विभाग का मानना है कि जिस तरह से शीतलहर का प्रकोप चल रहा था उसमें अब वैसे तेजी देखने को नहीं मिलेगी. यानी भीषण ठण्ड से लोगों को राहत मिल गयी है. अगले तीन दिनों तक तो लगातार पूरे प्रदेश में धूप निकलेगी. हालांकि ये जरूर है कि मौसम के खुला होने के कारण कई जिलों में कोहरे से परेशानी हो लेकिन, धूप जरूर निकलेगी. पाँच जनवरी को तो पूरे प्रदेश में धूर खिली रहेगी लेकिन छः जनवरी को पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में हल्के बादल देखे जा सकेंगे. बाकी प्रदेश में धूप खिली रहेगी. पिछले दिनों जिस तरह से धूप के लिए लोग तरस गये और ऊपर से बारिश ने ठण्डी बढ़ा दी. लेकिन, अब संकट का ये दौर थम गया है. लगातार धूप निकल रही है और अगले कुछ दिनों तक निकलती रहेगी. इसकी वजह से ठण्ड में भी काफी कमी आ गई है. जो गलन पिछले दिनों महसूस की जा रही थी, उससे लोगों को राहत मिल गई है. अब से तीन चार पहले प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान दस डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था लेकिन, अब दिन का तापमान बीस डिग्री सेल्सियस के आस पास पहुंच गया है. रात का जो तापमान एक या दो डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था, अब उसमें भी उछाल गया है. रात का न्यूनतम तापमान भी अब दस डिग्री के आसपास तक पहुंच गया है. ये तापमान सामान्य तापमान से थोड़ा ज्यादा ही है. इससे कामकाजी लोगों को राहत मिली है. साथ ही मजबूरी में सड़क किनारे रहने वाले लोगों को भी राहत मिली है. पिछले दिनों पूरे प्रदेश में भीषण ठण्ड की वजह से सत्तर से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. हालांकि सरकारी आंकड़े कुछ और हैं. लेकिन, अब तसल्ली की बात ये है कि ठण्ड कम होने से हो रही मौतों के आंकड़ों में भी कमी आयेगी. इससे जिला प्रशासन के अफसरों को भी राहत मिलेगी. मौसम विभाग का कहना है कि मौसम के साफ हो जाने के कारण भले ही दिन में अच्छी धूप मिलेगी. लेकिन, इसी साफ मौसम के कारण कोहरे की परेशानी बनी रहेगी. पिछले दिनों बादलों और बारिश के कारण कोहरे से थोड़ी राहत मिली थी लेकिन अब मौसम के साफ होने कारण ज्यादातर जिलों में सुबह सुबह कोहरे की समस्या बनी रहेगी. मौसम विभाग का ये भी कहना है कि इससे ज्यादा परेशानी नहीं होगी क्योंकि दिन चढ़ने के साथ कोहरा छट जायेगा और लोगों को खिली धूप मिल सकेगी. ये भी पढ़ेंः 'कांग्रेस के 'घोटालों की संस्कृति' का शिकार हुए सोनभद्र के दलित, आदिवासी' . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए आठ सौ करोड़!
'लेडी खली' का सामना वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में अमेरिका की इंटरनेशनल रेसलर नटालिया से होगा। नटालिया को मात देने के लिए लेडी खली रोजाना 14 घंटे पसीना बहा रही हैं। हार्ड केडी और लेडी खली के नाम से मशहूर कविता कहती हैं कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूई में भी देश का झंडा बुलंद करेंगीं। माना जा रहा है कि नटालिया के अलावा पहुंचने वाली अन्य तीन रेसलर भी कविता के साथ भिड़ सकती हैं। बागपतः 'लेडी खली' का सामना वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में अमेरिका की इंटरनेशनल रेसलर नटालिया से होगा। नटालिया को मात देने के लिए लेडी खली रोजाना 14 घंटे पसीना बहा रही हैं। हार्ड केडी और लेडी खली के नाम से मशहूर कविता दलाल कहती हैं कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूई में भी देश का झंडा बुलंद करेंगीं। माना जा रहा है कि नटालिया के अलावा पहुंचने वाली अन्य तीन रेसलर भी कविता के साथ भिड़ सकती हैं। कौन हैं कविता दलाल ? -कविता दलाल हरियाणा के जींद जिले के मालवी गांव की निवासी हैं। -कविता ने हरियाणा के जुलना के सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। -इसके बाद साल 2004 में कविता ने लखनऊ में अपनी रेसलिंग की ट्रेनिंग शुरू की। -इस दौरान उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी और साल 2005 में अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया। -पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद साल 2008 में कविता ने बतौर कांस्टेबल एसएसबी में नौकरी ज्वाइन की। -नौकरी लगने के बाद साल 2009 में कविता ने यूपी के बागपत जिले के बिजवाड़ा गांव के रहने वाले गौरव से शादी की। -शादी के बाद भी कविता ने रेसलिंग करना नहीं छोड़ा। -कविता के पति गौरव भी एसएसबी में कॉन्स्टेबल और वॉलीबॉल के खिलाड़ी हैं। वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में द अंडरटेकर के अलावा कनाड़ा के ब्रॉडी स्टील, ब्रोक लेस्नर, रेंडी ओरटोन, जेफ हार्डी जैसे दिग्गजों को इंवाइट किया गया है। इनके अलावा चार महिला रेसलर भी शिरकत करेंगी। फिलहाल अभी उनके नाम पर मुहर नहीं लग सकी है। -12 अक्टूबर को हरियाणा के पानीपत में होने जा रहे वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट के द ग्रेट खली रिटर्न शो में दुनिया के 18 रेसलर्स के बीच भिड़ंत होगी। -इसमें इंटरनेशनल रेसलर मार्क विलियम कैलावे 'द अंडरटेकर' को भी दिलीप सिंह राणा 'द ग्रेट खली' ने खुली चुनौती दी है। -महिला रेसलिंग में कविता दलाल 'हार्ड केडी' भारत का प्रतिनिधित्व करेंगीं। -अब यह 12 अक्टूबर को पानीपत के स्टेडियम में होगी। देश-दुनिया की कई महिला रेसलर्स को टक्कर दे चुकीं कविता दलाल ने पिछले दिनों कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट (सीडब्ल्यूई) की रिंग में नेशनल रेसलर बुलबुल को भी करारी शिकस्त दी थी। कुछ दिन पहले कविता को खली ने अपने शो 'द ग्रेट खली रिटर्न शो' डब्ल्यूडब्ल्यूई में फाइट के लिए इंवाइट किया। डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में अपना परचम लहराने के लिए कविता जालंधर में खली की एकडेमी में ट्रेनिंग ले रही हैं।
'लेडी खली' का सामना वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में अमेरिका की इंटरनेशनल रेसलर नटालिया से होगा। नटालिया को मात देने के लिए लेडी खली रोजाना चौदह घंटाटे पसीना बहा रही हैं। हार्ड केडी और लेडी खली के नाम से मशहूर कविता कहती हैं कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूई में भी देश का झंडा बुलंद करेंगीं। माना जा रहा है कि नटालिया के अलावा पहुंचने वाली अन्य तीन रेसलर भी कविता के साथ भिड़ सकती हैं। बागपतः 'लेडी खली' का सामना वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में अमेरिका की इंटरनेशनल रेसलर नटालिया से होगा। नटालिया को मात देने के लिए लेडी खली रोजाना चौदह घंटाटे पसीना बहा रही हैं। हार्ड केडी और लेडी खली के नाम से मशहूर कविता दलाल कहती हैं कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूई में भी देश का झंडा बुलंद करेंगीं। माना जा रहा है कि नटालिया के अलावा पहुंचने वाली अन्य तीन रेसलर भी कविता के साथ भिड़ सकती हैं। कौन हैं कविता दलाल ? -कविता दलाल हरियाणा के जींद जिले के मालवी गांव की निवासी हैं। -कविता ने हरियाणा के जुलना के सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बारहवीं तक पढ़ाई की। -इसके बाद साल दो हज़ार चार में कविता ने लखनऊ में अपनी रेसलिंग की ट्रेनिंग शुरू की। -इस दौरान उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी और साल दो हज़ार पाँच में अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया। -पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद साल दो हज़ार आठ में कविता ने बतौर कांस्टेबल एसएसबी में नौकरी ज्वाइन की। -नौकरी लगने के बाद साल दो हज़ार नौ में कविता ने यूपी के बागपत जिले के बिजवाड़ा गांव के रहने वाले गौरव से शादी की। -शादी के बाद भी कविता ने रेसलिंग करना नहीं छोड़ा। -कविता के पति गौरव भी एसएसबी में कॉन्स्टेबल और वॉलीबॉल के खिलाड़ी हैं। वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट में द अंडरटेकर के अलावा कनाड़ा के ब्रॉडी स्टील, ब्रोक लेस्नर, रेंडी ओरटोन, जेफ हार्डी जैसे दिग्गजों को इंवाइट किया गया है। इनके अलावा चार महिला रेसलर भी शिरकत करेंगी। फिलहाल अभी उनके नाम पर मुहर नहीं लग सकी है। -बारह अक्टूबर को हरियाणा के पानीपत में होने जा रहे वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट के द ग्रेट खली रिटर्न शो में दुनिया के अट्ठारह रेसलर्स के बीच भिड़ंत होगी। -इसमें इंटरनेशनल रेसलर मार्क विलियम कैलावे 'द अंडरटेकर' को भी दिलीप सिंह राणा 'द ग्रेट खली' ने खुली चुनौती दी है। -महिला रेसलिंग में कविता दलाल 'हार्ड केडी' भारत का प्रतिनिधित्व करेंगीं। -अब यह बारह अक्टूबर को पानीपत के स्टेडियम में होगी। देश-दुनिया की कई महिला रेसलर्स को टक्कर दे चुकीं कविता दलाल ने पिछले दिनों कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट की रिंग में नेशनल रेसलर बुलबुल को भी करारी शिकस्त दी थी। कुछ दिन पहले कविता को खली ने अपने शो 'द ग्रेट खली रिटर्न शो' डब्ल्यूडब्ल्यूई में फाइट के लिए इंवाइट किया। डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में अपना परचम लहराने के लिए कविता जालंधर में खली की एकडेमी में ट्रेनिंग ले रही हैं।
यमराज उसे मान लें तो मैं न करनेवाला कौन है ? किन्तु मरनेवालों की सूची तो विमाता के पास रहती है। वही देखकर मुझे बताती है कि किसका समय आ गया ? किस तरह उसे मरना है ? में उनसे चलकर इस सम्बन्ध में पूछता है ?" निपादराज बोले, "हम भी आपके साथ चलेंगे । " काल देवता ने कहा, "चलिये ।" और यह पूरा जुलूस विमाता के पास पहुँचा। व्यासजी ने फिर अपनी बात कह सुनाई। बोले, "ये मेरे नाना श्री निषादराज हैं । मरना नहीं चाहते । मौत से भयभीत हैं । यमराज, मौत और काल देवता सवने मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। अब आप भी कृपा करके मान जाइये । अपनी सूची में से मेरे नाना जी का नाम काट दीजिये ।' विमाता ने कहा, "महर्षि व्यास, मुझे पता था कि आपके नाना मौत से बहुत डरते हैं; मरना नहीं चाहते । इसीलिए मैंने उनके मरने के सम्बन्ध में ऐसी शर्त लगा रखी थी जो सुगमता से कभी पूरी न हो सके । किन्तु मैं अब क्या करूँ ! यह देखिये क्या लिखा है- 'निषादराज मौत से बहुत डरते हैं । इनकी मौत तब तक नहीं होनी चाहिये जब तक वे महपि व्यास, यमराज, मौत और काल देवता सबको साथ लेकर स्वयं मेरे पास न आएँ । और तभी निपादराज धड़ाम से गिर पड़े और मर गये । विमाता ने कहा, "मैंने बड़ी कठिन शर्त रखी थी । ये सब लोग साधारणतया कभी इकट्ठे नहीं होते किन्तु अब मैं क्या करूँ ? आपके नानाजी तो स्वयं ही सबको इकट्ठा करके मेरे पास ले आए।" कोटि जतन कोई करे, कर ले लाख हजार । जो जम्मा सो मरहि है, यही जगत व्योहार ॥ कोटि जतन करना चहे, कर ले मेरे मोत ! जो जन्मा सो मरहि है, यही जगत की रीत ॥ जन्मा-जन्मा सव कहें, यह नहि जानत कोय । जो जन्मा सो जायगा, प्राखिर भरना होय ॥
यमराज उसे मान लें तो मैं न करनेवाला कौन है ? किन्तु मरनेवालों की सूची तो विमाता के पास रहती है। वही देखकर मुझे बताती है कि किसका समय आ गया ? किस तरह उसे मरना है ? में उनसे चलकर इस सम्बन्ध में पूछता है ?" निपादराज बोले, "हम भी आपके साथ चलेंगे । " काल देवता ने कहा, "चलिये ।" और यह पूरा जुलूस विमाता के पास पहुँचा। व्यासजी ने फिर अपनी बात कह सुनाई। बोले, "ये मेरे नाना श्री निषादराज हैं । मरना नहीं चाहते । मौत से भयभीत हैं । यमराज, मौत और काल देवता सवने मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। अब आप भी कृपा करके मान जाइये । अपनी सूची में से मेरे नाना जी का नाम काट दीजिये ।' विमाता ने कहा, "महर्षि व्यास, मुझे पता था कि आपके नाना मौत से बहुत डरते हैं; मरना नहीं चाहते । इसीलिए मैंने उनके मरने के सम्बन्ध में ऐसी शर्त लगा रखी थी जो सुगमता से कभी पूरी न हो सके । किन्तु मैं अब क्या करूँ ! यह देखिये क्या लिखा है- 'निषादराज मौत से बहुत डरते हैं । इनकी मौत तब तक नहीं होनी चाहिये जब तक वे महपि व्यास, यमराज, मौत और काल देवता सबको साथ लेकर स्वयं मेरे पास न आएँ । और तभी निपादराज धड़ाम से गिर पड़े और मर गये । विमाता ने कहा, "मैंने बड़ी कठिन शर्त रखी थी । ये सब लोग साधारणतया कभी इकट्ठे नहीं होते किन्तु अब मैं क्या करूँ ? आपके नानाजी तो स्वयं ही सबको इकट्ठा करके मेरे पास ले आए।" कोटि जतन कोई करे, कर ले लाख हजार । जो जम्मा सो मरहि है, यही जगत व्योहार ॥ कोटि जतन करना चहे, कर ले मेरे मोत ! जो जन्मा सो मरहि है, यही जगत की रीत ॥ जन्मा-जन्मा सव कहें, यह नहि जानत कोय । जो जन्मा सो जायगा, प्राखिर भरना होय ॥
थे कितनी दफ़हा साथ जागे. मेरी हक़ीक़त सँवर गई थी. हिंदी कविता (Hindi Studio) और उर्दू स्टूडियो, आज की पूरी पीढ़ी की साहित्यिक चेतना झकझोरने वाले अब तक के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रोजेक्ट के संस्थापक फ़िल्म निर्माता-निर्देशक मनीष गुप्ता लगभग डेढ़ दशक विदेश में रहने के बाद अब मुंबई में रहते हैं और पूर्णतया भारतीय साहित्य के प्रचार-प्रसार / और अपनी मातृभाषाओं के प्रति मोह जगाने के काम में संलग्न हैं. यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
थे कितनी दफ़हा साथ जागे. मेरी हक़ीक़त सँवर गई थी. हिंदी कविता और उर्दू स्टूडियो, आज की पूरी पीढ़ी की साहित्यिक चेतना झकझोरने वाले अब तक के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रोजेक्ट के संस्थापक फ़िल्म निर्माता-निर्देशक मनीष गुप्ता लगभग डेढ़ दशक विदेश में रहने के बाद अब मुंबई में रहते हैं और पूर्णतया भारतीय साहित्य के प्रचार-प्रसार / और अपनी मातृभाषाओं के प्रति मोह जगाने के काम में संलग्न हैं. यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) में शेफाली जरीवाला (Shefali Jariwala) को नॉमिनेट करने पर आया पति पारस त्यागी (Parag Tyagi) का बयान। बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) के घर में रिश्ते पल पल बदलते है। ऐसा ही इस बार भी हो रहा है। लोग अपने गेम के हिसाब से न सिर्फ रिश्ते बनाते हैं बल्कि उन्हें तोड़ने में भी कंटेस्टेंट्स को ज्यादा वक्त नहीं लगता है। हाल ही में सलमान खान के इस रियल्टी टीवी शो में वाइल्ड कार्ड के जरिए 6 लोगों की एंट्री हुई है। इनमें से एक और अहम मेहमान है कांटा लगा गर्ल शेफाली जरीवाला (Shefali Jariwala)। अदाकारा ने टीवी शो में एंट्री मारते ही घर में हंगामा मचा दिया है। लेकिन इस बीच बीते दिन के नॉमिनेशन टास्क में जैसे ही पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) ने एक्ट्रेस का नाम लिया। वैसे ही, घर के बाहर बैठे उनके पतिदेव पराग त्यागी (Parag Tyagi) का मूड खराब हो गया। लेकिन इसके साथ ही पराग त्यागी ने पारस के गेम को लेकर एक बड़ी बात कह दी है। एक्टर के पति ने कहा है कि पारस ने अपना असली रंग दिखा दिया। दरअसल, घर में एंट्री के बाद पारस छाबड़ा ने शेफाली को भाभी कहकर बुलाया था। इस पर ही तंज कसते हुए पराग त्यागी ने कहा कि पारस ने अपना असली रंग दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो वैसे वो उन्हें भाभी कह रहा था लेकिन नॉमिनेशन का नंबर आया तो सबसे पहले शेफाली को ही नॉमिनेट कर दिया। इससे पता लगता है कि उनका असली रंग क्या है। वैसे, सिर्फ शेफाली और पारस ही नहीं, घर में इन दिनों शहनाज और सिद्धार्थ शुक्ला के बीच भी दूरियां आ रही है। दोनों की दोस्ती में दूरी के बीच शहनाज, घर के अंदर हिमांशी के आने से भी हिली हुई है। ऐसे में नए कंटेस्टेंट घरवालों के लिए नई मुसीबत लेकर आए है। इसे देखकर तो यही लगता है कि आने वाले दिनों में अभी घर में और भी हंगामा होना तय है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
बिग बॉस तेरह में शेफाली जरीवाला को नॉमिनेट करने पर आया पति पारस त्यागी का बयान। बिग बॉस तेरह के घर में रिश्ते पल पल बदलते है। ऐसा ही इस बार भी हो रहा है। लोग अपने गेम के हिसाब से न सिर्फ रिश्ते बनाते हैं बल्कि उन्हें तोड़ने में भी कंटेस्टेंट्स को ज्यादा वक्त नहीं लगता है। हाल ही में सलमान खान के इस रियल्टी टीवी शो में वाइल्ड कार्ड के जरिए छः लोगों की एंट्री हुई है। इनमें से एक और अहम मेहमान है कांटा लगा गर्ल शेफाली जरीवाला । अदाकारा ने टीवी शो में एंट्री मारते ही घर में हंगामा मचा दिया है। लेकिन इस बीच बीते दिन के नॉमिनेशन टास्क में जैसे ही पारस छाबड़ा ने एक्ट्रेस का नाम लिया। वैसे ही, घर के बाहर बैठे उनके पतिदेव पराग त्यागी का मूड खराब हो गया। लेकिन इसके साथ ही पराग त्यागी ने पारस के गेम को लेकर एक बड़ी बात कह दी है। एक्टर के पति ने कहा है कि पारस ने अपना असली रंग दिखा दिया। दरअसल, घर में एंट्री के बाद पारस छाबड़ा ने शेफाली को भाभी कहकर बुलाया था। इस पर ही तंज कसते हुए पराग त्यागी ने कहा कि पारस ने अपना असली रंग दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो वैसे वो उन्हें भाभी कह रहा था लेकिन नॉमिनेशन का नंबर आया तो सबसे पहले शेफाली को ही नॉमिनेट कर दिया। इससे पता लगता है कि उनका असली रंग क्या है। वैसे, सिर्फ शेफाली और पारस ही नहीं, घर में इन दिनों शहनाज और सिद्धार्थ शुक्ला के बीच भी दूरियां आ रही है। दोनों की दोस्ती में दूरी के बीच शहनाज, घर के अंदर हिमांशी के आने से भी हिली हुई है। ऐसे में नए कंटेस्टेंट घरवालों के लिए नई मुसीबत लेकर आए है। इसे देखकर तो यही लगता है कि आने वाले दिनों में अभी घर में और भी हंगामा होना तय है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Shraddha Murder Case: हत्या के बाद भी लड़कियों को घर लाकर आफताब बनाता था शारीरिक संबंध, डेटिंग ऐप से खुलेगा राज! Petrol Price Today : बढ़े कच्चे तेल के दाम, जानिए कितना बदला पेट्रोल-डीजल का रेट ? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. 2022 : All Rights Reserved.
Shraddha Murder Case: हत्या के बाद भी लड़कियों को घर लाकर आफताब बनाता था शारीरिक संबंध, डेटिंग ऐप से खुलेगा राज! Petrol Price Today : बढ़े कच्चे तेल के दाम, जानिए कितना बदला पेट्रोल-डीजल का रेट ? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved.
नामःसंस्कृत -- मांसरोहिणी, रोहिणी, अग्निरूहा, अतिरुहा, चन्द्रवल्लभा, चर्मकशा, कशामांसी, लोमकर्णी, बीरवती, रसायनी इत्यादि । हिन्दी - - रोहिणी, रोहण, रक्तरोहण । मराठी -- रोहिणी, मांसरोहिणी, पोटर । - बंगाल - रोहन, रोहिणा । वम्बई - रोहन । गुजराती - रोहणी । काठियावाड़ - रोना । तामील - सेम । तेलगू - सेमी । उर्दू - रोहन । इंग्लिश - Redwood Tree ! लेटिन - Soymida Febrifuga ( सोयमिडा फेब्रीफ्यूगा )। वर्णन - यह एक बड़ी जाति का वृक्ष होता है । इसके पत्ते जुड़म, ३ से लेकर ६ के जोड़ों में लगते । इसके फूल कुछ इरापन लिये हुए सफेद रङ्ग के होते हैं। इसके फल छोटी सेव की तरह और पकने पर काले हो जाते हैं । इसकी लकड़ी और छाल गहरे लाल रङ्ग की, मोटी और कड़वी होती है। यह छाल कुचले की छाल की तरह दिखलाई देती है । औषधि में इसकी छाल ही उपयोग में ली जाती है । आयुर्वेदिक मत - आयुर्वेदिक मत से मांसरोहिणी वीर्यवर्द्धक, मृदु विरेचक, कसेली, ज्वरनाशक, कृमिनाशक, कामोद्दीपक और त्रिदोषनाशक होती है। यह गले के व्रण, वात, त्रिदोष, ज्वर, खाँसी, दमा, रक्तविकार, व्रण, कुष्ठ और अतिसार में लाभदायक होती है । यूनानी मत -- यूनानी मत से इसकी छाल आँतों का संकोचन करनेवाली और ज्वर में लामदायक होती है । रोहिणी की छाल में उत्तम संकोचक, कटुपौष्टिक और थोड़ी मात्रा में पार्यायिक ज्वरनाशक धर्म रहते हैं। बड़ी मात्रा में इसको देने से चकर आ जाते हैं और जी घबराता है। जीर्णज्वर और आंतों की शिथिलता में यह एक बहुत उपयोगी वस्तु है । इसकी छाल का काढ़ा बनाकर देने की अपेक्षा इसका चूर्ण देना विशेष लाभदायक होता है। प्राचीन अतिसार में इसको ले लेने से उत्तम परिणाम दृष्टिगोचर होता है । मलेरिया ज्वर अथवा पार्यायिक ज्वरों में और उनसे होनेवाली कमजोरी में, पुराने और हठीले अतिसार में और प्रवाहिका में तथा दूसरे ऐसे रोगों में जिसमें संकोचक औषधि की जरूरत होती है इस वनस्पति का उपयोग सफलता के साथ किया जा सकता है । कोमान के मतानुसार इस वृक्ष की छाल कटु-पौष्टिक और मलेरिया के विष को नष्ट करने के लिये सिनकोना की छाल के समान मानी जाती है। इसने इसकी छाल का काढ़ा १ औंस की मात्रा में दिन में तीन बार मलेरिया ज्वर के रोगियों को दिया और उसमें यह लाभदायक पाई गई । मगर इसकी किया बहुत ही धीरे और सिनकोना के उपक्षारों की अपेक्षा बहुत ही कम दर्जे की पाई गई । इसकी छाल का काढ़ा ओक की छाल के प्रतिनिधि रूप में व्रणों को धोने, एनिमा देने और कुल्ले करने के काम में लिया जा सकता है ।
नामःसंस्कृत -- मांसरोहिणी, रोहिणी, अग्निरूहा, अतिरुहा, चन्द्रवल्लभा, चर्मकशा, कशामांसी, लोमकर्णी, बीरवती, रसायनी इत्यादि । हिन्दी - - रोहिणी, रोहण, रक्तरोहण । मराठी -- रोहिणी, मांसरोहिणी, पोटर । - बंगाल - रोहन, रोहिणा । वम्बई - रोहन । गुजराती - रोहणी । काठियावाड़ - रोना । तामील - सेम । तेलगू - सेमी । उर्दू - रोहन । इंग्लिश - Redwood Tree ! लेटिन - Soymida Febrifuga । वर्णन - यह एक बड़ी जाति का वृक्ष होता है । इसके पत्ते जुड़म, तीन से लेकर छः के जोड़ों में लगते । इसके फूल कुछ इरापन लिये हुए सफेद रङ्ग के होते हैं। इसके फल छोटी सेव की तरह और पकने पर काले हो जाते हैं । इसकी लकड़ी और छाल गहरे लाल रङ्ग की, मोटी और कड़वी होती है। यह छाल कुचले की छाल की तरह दिखलाई देती है । औषधि में इसकी छाल ही उपयोग में ली जाती है । आयुर्वेदिक मत - आयुर्वेदिक मत से मांसरोहिणी वीर्यवर्द्धक, मृदु विरेचक, कसेली, ज्वरनाशक, कृमिनाशक, कामोद्दीपक और त्रिदोषनाशक होती है। यह गले के व्रण, वात, त्रिदोष, ज्वर, खाँसी, दमा, रक्तविकार, व्रण, कुष्ठ और अतिसार में लाभदायक होती है । यूनानी मत -- यूनानी मत से इसकी छाल आँतों का संकोचन करनेवाली और ज्वर में लामदायक होती है । रोहिणी की छाल में उत्तम संकोचक, कटुपौष्टिक और थोड़ी मात्रा में पार्यायिक ज्वरनाशक धर्म रहते हैं। बड़ी मात्रा में इसको देने से चकर आ जाते हैं और जी घबराता है। जीर्णज्वर और आंतों की शिथिलता में यह एक बहुत उपयोगी वस्तु है । इसकी छाल का काढ़ा बनाकर देने की अपेक्षा इसका चूर्ण देना विशेष लाभदायक होता है। प्राचीन अतिसार में इसको ले लेने से उत्तम परिणाम दृष्टिगोचर होता है । मलेरिया ज्वर अथवा पार्यायिक ज्वरों में और उनसे होनेवाली कमजोरी में, पुराने और हठीले अतिसार में और प्रवाहिका में तथा दूसरे ऐसे रोगों में जिसमें संकोचक औषधि की जरूरत होती है इस वनस्पति का उपयोग सफलता के साथ किया जा सकता है । कोमान के मतानुसार इस वृक्ष की छाल कटु-पौष्टिक और मलेरिया के विष को नष्ट करने के लिये सिनकोना की छाल के समान मानी जाती है। इसने इसकी छाल का काढ़ा एक औंस की मात्रा में दिन में तीन बार मलेरिया ज्वर के रोगियों को दिया और उसमें यह लाभदायक पाई गई । मगर इसकी किया बहुत ही धीरे और सिनकोना के उपक्षारों की अपेक्षा बहुत ही कम दर्जे की पाई गई । इसकी छाल का काढ़ा ओक की छाल के प्रतिनिधि रूप में व्रणों को धोने, एनिमा देने और कुल्ले करने के काम में लिया जा सकता है ।
पहले नेता भ्रष्ट हुए. फिर नेताओं ने भ्रष्ट अफसरों को करीब रखकर उन्हें प्रमोट करना और उनके जरिए कमाना शुरू किया. इसके बाद भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट अफसर ने मीडिया को भ्रष्ट कर अपने भ्रष्टाचार की पोल को खुलने से रोका, साथ ही भ्रष्टाचार के गठजोड़ को बड़ा किया. ये साबित तथ्य हैं. इसीलिए कहा जाता है कि मीडिया कोई अलग थलग भ्रष्ट नहीं है बल्कि इसे दो भ्रष्ट स्तंभों ने भ्रष्ट करने में अहम भूमिका निभाई है. देश में जब तक राजनीति अच्छी नहीं होगी, राजनीति नहीं सुधरेगी तब तक मीडिया का सुधरना मुश्किल है. इसी का ताजा उदाहरण है एक नेता द्वारा मीडिया वालों को रिश्वत देने का. बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें लिफाफे में प्रत्येक पत्रकार को दो-दो सौ रुपये बांटे गए. कई पत्रकारों ने रुपये देने का या कम रुपये देने का विरोध किया और फिर मच गया हंगामा. घटना ओडिशा के पुरी की है. संसद की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा ने पुरी में पत्रकारों को बुलाया था. आयोजकों की ओर से पत्रकारों को 200 रुपए वाले लिफाफे बांटे गए. मामला गरमाने के बाद शहर के कई पत्रकारों ने सांसद मिश्रा और विधायक महेश्वर मोहंती के खिलाफ रिश्वत देने की शिकायत दर्ज कराई है. यूको बैंक द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए सांसद मिश्रा मंगलवार को पुरी पहुंचे थे. वे यहां केंद्र सरकार द्वारा कराए जा रहे कामों को निरीक्षण करने और कुछ और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पहुंचे थे. कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद वे यूको बैंक द्वारा स्थानीय मेयफेयर होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने पहुंचे. जब वे पत्रकारों के बीच पहुंचे, उनसे आयोजकों द्वारा 200 रुपए के लिफाफे बांटे जाने की शिकायत की. वहां मौजूद एक लोकल टीवी चैनल के पत्रकार जीत पटनायक ने बताया कि 'जैसे ही हमें नोटपैड के रुपए के लिफाफे दिए गए, हम सभी ने आपत्ति दर्ज कराई. अपने मन की खबरें छपवाने के लिए आयोजकों द्वारा किया गया यह कृत्य बहुत निंदनीय है. हम सभी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का बायकॉट किया. ' इसके बाद कुछ पत्रकारों ने स्थानीय सी-बीच पुलिस स्टेशन में सांसद और विधायक के खिलाफ 'रिश्वत' दिए जाने का मामला दर्ज कराया. पुरी में पत्रकारों को रिश्वत दिए जाने का मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. यूको बैंक ने यहां भी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और पत्रकारों को 300 रुपए वाले लिफाफे दिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में तकरीबन 40 पत्रकार मौजूद थे. हालांकि इनमें से किसी के द्वारा भी पैसे वापस किए जाने की जानकारी नहीं मिली है.
पहले नेता भ्रष्ट हुए. फिर नेताओं ने भ्रष्ट अफसरों को करीब रखकर उन्हें प्रमोट करना और उनके जरिए कमाना शुरू किया. इसके बाद भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट अफसर ने मीडिया को भ्रष्ट कर अपने भ्रष्टाचार की पोल को खुलने से रोका, साथ ही भ्रष्टाचार के गठजोड़ को बड़ा किया. ये साबित तथ्य हैं. इसीलिए कहा जाता है कि मीडिया कोई अलग थलग भ्रष्ट नहीं है बल्कि इसे दो भ्रष्ट स्तंभों ने भ्रष्ट करने में अहम भूमिका निभाई है. देश में जब तक राजनीति अच्छी नहीं होगी, राजनीति नहीं सुधरेगी तब तक मीडिया का सुधरना मुश्किल है. इसी का ताजा उदाहरण है एक नेता द्वारा मीडिया वालों को रिश्वत देने का. बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें लिफाफे में प्रत्येक पत्रकार को दो-दो सौ रुपये बांटे गए. कई पत्रकारों ने रुपये देने का या कम रुपये देने का विरोध किया और फिर मच गया हंगामा. घटना ओडिशा के पुरी की है. संसद की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा ने पुरी में पत्रकारों को बुलाया था. आयोजकों की ओर से पत्रकारों को दो सौ रुपयापए वाले लिफाफे बांटे गए. मामला गरमाने के बाद शहर के कई पत्रकारों ने सांसद मिश्रा और विधायक महेश्वर मोहंती के खिलाफ रिश्वत देने की शिकायत दर्ज कराई है. यूको बैंक द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए सांसद मिश्रा मंगलवार को पुरी पहुंचे थे. वे यहां केंद्र सरकार द्वारा कराए जा रहे कामों को निरीक्षण करने और कुछ और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पहुंचे थे. कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद वे यूको बैंक द्वारा स्थानीय मेयफेयर होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने पहुंचे. जब वे पत्रकारों के बीच पहुंचे, उनसे आयोजकों द्वारा दो सौ रुपयापए के लिफाफे बांटे जाने की शिकायत की. वहां मौजूद एक लोकल टीवी चैनल के पत्रकार जीत पटनायक ने बताया कि 'जैसे ही हमें नोटपैड के रुपए के लिफाफे दिए गए, हम सभी ने आपत्ति दर्ज कराई. अपने मन की खबरें छपवाने के लिए आयोजकों द्वारा किया गया यह कृत्य बहुत निंदनीय है. हम सभी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का बायकॉट किया. ' इसके बाद कुछ पत्रकारों ने स्थानीय सी-बीच पुलिस स्टेशन में सांसद और विधायक के खिलाफ 'रिश्वत' दिए जाने का मामला दर्ज कराया. पुरी में पत्रकारों को रिश्वत दिए जाने का मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. यूको बैंक ने यहां भी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और पत्रकारों को तीन सौ रुपयापए वाले लिफाफे दिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में तकरीबन चालीस पत्रकार मौजूद थे. हालांकि इनमें से किसी के द्वारा भी पैसे वापस किए जाने की जानकारी नहीं मिली है.
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा की महत्त्वपूर्ण बैठक सिरसा में हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि 8 सितंबर को प्रदेशभर में रोडवेज का चक्का जाम रहेगा। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सिरसा डिपो के प्रधान रामकुमार चुरनिया ने बताया कि हरियाणा रोडवेज सोनीपत डिपो की बस सोनीपत से जयपुर के लिए चली थी और रास्ते में एक थार चालक ने बस ड्राइवर व कंडक्टर को बेवजह परेशान किया और बार-बार ब्रेक लगाकर बस रोकने की कोशिश की। इसके बाद जब चालक-परिचालक ने विरोध किया तो थार चालक ने दोनों को कुचल दिया। इसमें चालक जगबीर सिंह की मौत, जबकि परिचालक फतेह सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हादसे के बाद चालक सोनीपत व गोहाना डिपो तो उसी समय बंद कर दिया गया था, लेकिन अब सांझा मोर्चा की बैठक कर निर्णय लिया गया है कि पूरे प्रदेश में कल 8 सितंबर को चक्का जाम रहेगा। प्रधान ने बताया कि अगर समय रहते प्रशासन ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो बड़ा आंदोलन होगा। इसी के साथ मांग हैं कि मृतक चालक के परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी दी जाए, परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए, गम्भीर रूप से घायलों को 10-10 लाख मुआवजा दिया जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा की महत्त्वपूर्ण बैठक सिरसा में हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि आठ सितंबर को प्रदेशभर में रोडवेज का चक्का जाम रहेगा। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सिरसा डिपो के प्रधान रामकुमार चुरनिया ने बताया कि हरियाणा रोडवेज सोनीपत डिपो की बस सोनीपत से जयपुर के लिए चली थी और रास्ते में एक थार चालक ने बस ड्राइवर व कंडक्टर को बेवजह परेशान किया और बार-बार ब्रेक लगाकर बस रोकने की कोशिश की। इसके बाद जब चालक-परिचालक ने विरोध किया तो थार चालक ने दोनों को कुचल दिया। इसमें चालक जगबीर सिंह की मौत, जबकि परिचालक फतेह सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हादसे के बाद चालक सोनीपत व गोहाना डिपो तो उसी समय बंद कर दिया गया था, लेकिन अब सांझा मोर्चा की बैठक कर निर्णय लिया गया है कि पूरे प्रदेश में कल आठ सितंबर को चक्का जाम रहेगा। प्रधान ने बताया कि अगर समय रहते प्रशासन ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो बड़ा आंदोलन होगा। इसी के साथ मांग हैं कि मृतक चालक के परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी दी जाए, परिवार को पचास लाख रुपए मुआवजा दिया जाए, गम्भीर रूप से घायलों को दस-दस लाख मुआवजा दिया जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टीम इंडिया ने दो टेस्ट की सीरीज में बांग्लादेश को 2-0 क्लीन स्वीप किया। भारत ने बांग्लादेश को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए डे-नाइट टेस्ट में रविवार को पारी और 46 रन से हरा दिया। टीम इंडिया ने दो टेस्ट की सीरीज में 2-0 क्लीन स्वीप किया। भारत पारी के अंतर से लगातार चार टेस्ट जीतने वाला पहला देश है। भारत की घर में यह लगातार 12वीं टेस्ट सीरीज जीत है। भारतीय टीम ने पहली पारी 347/9 के स्कोर पर घोषित कर दी थी। बांग्लादेश की टीम पहली पारी में 106 और दूसरी पारी में 195 रन पर ऑलआउट हुई। इशांत शर्मा ने दोनों पारियों में कुल 12 विकेट लिए। वे मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। भारत में यह पहला टेस्ट है, जब स्पिनर को कोई विकेट नहीं मिला। बांग्लादेश के मुश्फिकुर रहीम ने सबसे ज्यादा 74 रन बनाए। विराट कोहली ने टेस्ट करियर का 27वां शतक लगाया। वे डे-नाइट टेस्ट में ऐसा करने वाले दुनिया के 16वें बल्लेबाज हैं। विराट कोहली लगातार सात टेस्ट जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं। उनसे पहले महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 2013 में लगातार 6 टेस्ट जीते थे। इशांत शर्मा ने दोनों पारियों में कुल 12 विकेट लिए। वे मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। भारत ने बांग्लादेश को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए डे-नाइट टेस्ट में रविवार को पारी और 46 रन से हरा दिया। उमेश यादव ने मैच में 8 विकेट लिए। भारत पारी के अंतर से लगातार चार टेस्ट जीतने वाला पहला देश है। भारत की घर में यह लगातार 12वीं टेस्ट सीरीज जीत है।
टीम इंडिया ने दो टेस्ट की सीरीज में बांग्लादेश को दो-शून्य क्लीन स्वीप किया। भारत ने बांग्लादेश को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए डे-नाइट टेस्ट में रविवार को पारी और छियालीस रन से हरा दिया। टीम इंडिया ने दो टेस्ट की सीरीज में दो-शून्य क्लीन स्वीप किया। भारत पारी के अंतर से लगातार चार टेस्ट जीतने वाला पहला देश है। भारत की घर में यह लगातार बारहवीं टेस्ट सीरीज जीत है। भारतीय टीम ने पहली पारी तीन सौ सैंतालीस/नौ के स्कोर पर घोषित कर दी थी। बांग्लादेश की टीम पहली पारी में एक सौ छः और दूसरी पारी में एक सौ पचानवे रन पर ऑलआउट हुई। इशांत शर्मा ने दोनों पारियों में कुल बारह विकेट लिए। वे मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। भारत में यह पहला टेस्ट है, जब स्पिनर को कोई विकेट नहीं मिला। बांग्लादेश के मुश्फिकुर रहीम ने सबसे ज्यादा चौहत्तर रन बनाए। विराट कोहली ने टेस्ट करियर का सत्ताईसवां शतक लगाया। वे डे-नाइट टेस्ट में ऐसा करने वाले दुनिया के सोलहवें बल्लेबाज हैं। विराट कोहली लगातार सात टेस्ट जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं। उनसे पहले महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने दो हज़ार तेरह में लगातार छः टेस्ट जीते थे। इशांत शर्मा ने दोनों पारियों में कुल बारह विकेट लिए। वे मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। भारत ने बांग्लादेश को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए डे-नाइट टेस्ट में रविवार को पारी और छियालीस रन से हरा दिया। उमेश यादव ने मैच में आठ विकेट लिए। भारत पारी के अंतर से लगातार चार टेस्ट जीतने वाला पहला देश है। भारत की घर में यह लगातार बारहवीं टेस्ट सीरीज जीत है।
दरअसल, ये दोनों डिस्पेंसरियां भोपाल के बाग उमराव दूल्हा और अशोका गार्डन में संचालित है। इसे शाकीर अली खान अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। शिफ्ट करने का विवाद तूल पकड़ने लगा है। स्थानीय रहवासियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। लोग बताते हैं कि इन दो डिस्पेंसरियों से हजारों की आबादी को लाभ मिलता है। सामान्य बीमारियों के लिए उन्हें अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। डिस्पेंसरियों के शिफ्ट हो जाने के बाद इनकी मुश्किलें बढ़ जाएगी। वहीं, शिफ्टिंग पर अधिकारियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभी यह काम पुननिर्माण के लिए किया जा रहा है। काम पूरा होते ही डिस्पेंसरी यहीं से संचालित की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी कोरोना की तीसरी लहर चल रही है। ऐसे समय में इसे शिफ्ट करना उचित नहीं है। मगर विभागीय तौर पर लोगों की मांग को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों की मांगों का कांग्रेस ने समर्थन किया है। कांग्रेस शिफ्टिंग के विरोध में है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि कोविड के रहते हुए यह बेहद गलत निर्णय है। हम इसका विरोध करते हैं। शिवराज जी इसे कृप्या देखें।
दरअसल, ये दोनों डिस्पेंसरियां भोपाल के बाग उमराव दूल्हा और अशोका गार्डन में संचालित है। इसे शाकीर अली खान अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। शिफ्ट करने का विवाद तूल पकड़ने लगा है। स्थानीय रहवासियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। लोग बताते हैं कि इन दो डिस्पेंसरियों से हजारों की आबादी को लाभ मिलता है। सामान्य बीमारियों के लिए उन्हें अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। डिस्पेंसरियों के शिफ्ट हो जाने के बाद इनकी मुश्किलें बढ़ जाएगी। वहीं, शिफ्टिंग पर अधिकारियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभी यह काम पुननिर्माण के लिए किया जा रहा है। काम पूरा होते ही डिस्पेंसरी यहीं से संचालित की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी कोरोना की तीसरी लहर चल रही है। ऐसे समय में इसे शिफ्ट करना उचित नहीं है। मगर विभागीय तौर पर लोगों की मांग को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों की मांगों का कांग्रेस ने समर्थन किया है। कांग्रेस शिफ्टिंग के विरोध में है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि कोविड के रहते हुए यह बेहद गलत निर्णय है। हम इसका विरोध करते हैं। शिवराज जी इसे कृप्या देखें।
नई दिल्ली। टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस की संयुक्त उद्यम कंपनी विस्तारा के यात्रियों की संख्या दो साल से कम समय में 30 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। करीब दो साल पहले सेवा शुरू करने वाली कंपनी घरेलू विमानन बाजार में तीव्र वृद्धि से कंपनी यह आंकड़ा हासिल कर सकी है। - विस्तारा ने एक विज्ञप्ति में कहा कि 30 लाखवें यात्री अभिनव अधिकारी थे, जिन्होंने एयरलाइंस के कोलकाता-दिल्ली उड़ान की सेवा ली। - टाटा संस तथा सिंगापुर एयरलाइंस की संयुक्त उद्यम इकाई विस्तारा ने जनवरी 2015 में अपनी उड़ान सेवा शुरू की थी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 2. 9 प्रतिशत रही। पिछले दो साल में यह सबसे मजबूत वृद्धि है। निर्यात क्षेत्र के पटरी पर लौटने तथा अंततः कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से देश की वृद्धि दर अच्छी रही है। - वाणिज्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 1. 4 प्रतिशत थी। - डॉलर के स्थिर होने के साथ गर्मियों में निर्यात में अच्छी वृद्धि हुई है और कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। - इस तिमाही में अच्छी वृद्धि की उम्मीद है। एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार लोहानी ने कहा कि कंपनी द्वारा अगले साल छह अंतरराष्ट्रीय स्थानों पर सेवा शुरू करने की उम्मीद है। यहां दिवाली उत्सव के दौरान उन्होंने ट्रैवल एजेंटों से कहा कि इस साल हमने चार अंतरराष्ट्रीय स्थानों के लिए उड़ानें शुरू की हैं। - यह किसी वैश्विक एयरलाइंस कंपनी के बड़े विस्तारों में से एक है। - कंपनी जल्द ही सिंगापुर से कोलकाता और ढाका के लिए 19 नवंबर से और दिल्ली से मैड्रिड के लिए एक दिसंबर से उड़ान शुरू करेगी। - मैड्रिड वाली उड़ान सिंगापुर को भी जोड़ेगी। साइंस या साइंस करियर पत्रिका के वार्षिक सर्वेक्षण में बायोकॉन को बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष दस नियोक्ता कंपनियों में शामिल किया गया है। बायोकॉन ने विज्ञप्ति में बताया कि साइंस 2016 टॉप एंप्लॉयर सूची में उसे नौंवा स्थान प्राप्त हुआ है। - पिछले साल इस सूची में उसे 13वां स्थान मिला था। - इस सूची में एशिया से शामिल होने वाली वह इकलौती कंपनी है।
नई दिल्ली। टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस की संयुक्त उद्यम कंपनी विस्तारा के यात्रियों की संख्या दो साल से कम समय में तीस लाख के आंकड़े को पार कर गई है। करीब दो साल पहले सेवा शुरू करने वाली कंपनी घरेलू विमानन बाजार में तीव्र वृद्धि से कंपनी यह आंकड़ा हासिल कर सकी है। - विस्तारा ने एक विज्ञप्ति में कहा कि तीस लाखवें यात्री अभिनव अधिकारी थे, जिन्होंने एयरलाइंस के कोलकाता-दिल्ली उड़ान की सेवा ली। - टाटा संस तथा सिंगापुर एयरलाइंस की संयुक्त उद्यम इकाई विस्तारा ने जनवरी दो हज़ार पंद्रह में अपनी उड़ान सेवा शुरू की थी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में दो. नौ प्रतिशत रही। पिछले दो साल में यह सबसे मजबूत वृद्धि है। निर्यात क्षेत्र के पटरी पर लौटने तथा अंततः कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से देश की वृद्धि दर अच्छी रही है। - वाणिज्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर एक. चार प्रतिशत थी। - डॉलर के स्थिर होने के साथ गर्मियों में निर्यात में अच्छी वृद्धि हुई है और कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। - इस तिमाही में अच्छी वृद्धि की उम्मीद है। एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार लोहानी ने कहा कि कंपनी द्वारा अगले साल छह अंतरराष्ट्रीय स्थानों पर सेवा शुरू करने की उम्मीद है। यहां दिवाली उत्सव के दौरान उन्होंने ट्रैवल एजेंटों से कहा कि इस साल हमने चार अंतरराष्ट्रीय स्थानों के लिए उड़ानें शुरू की हैं। - यह किसी वैश्विक एयरलाइंस कंपनी के बड़े विस्तारों में से एक है। - कंपनी जल्द ही सिंगापुर से कोलकाता और ढाका के लिए उन्नीस नवंबर से और दिल्ली से मैड्रिड के लिए एक दिसंबर से उड़ान शुरू करेगी। - मैड्रिड वाली उड़ान सिंगापुर को भी जोड़ेगी। साइंस या साइंस करियर पत्रिका के वार्षिक सर्वेक्षण में बायोकॉन को बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष दस नियोक्ता कंपनियों में शामिल किया गया है। बायोकॉन ने विज्ञप्ति में बताया कि साइंस दो हज़ार सोलह टॉप एंप्लॉयर सूची में उसे नौंवा स्थान प्राप्त हुआ है। - पिछले साल इस सूची में उसे तेरहवां स्थान मिला था। - इस सूची में एशिया से शामिल होने वाली वह इकलौती कंपनी है।
पूरा बच्चन परिवार मंगलवार तड़के मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के लिए नंगे पांव पहुंचा और माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा जल्द ही प्रदर्शित होने वाली फ़िल्म सरकार राज की सफलता के लिए दुआ मांगने को लेकर की गई है. अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन शादी के बाद इस फ़िल्म में पहली बार एक साथ नज़र आएंगे. इतना ही नहीं, ख़ुद अमिताभ बच्चन भी इस फ़िल्म में हैं. बच्चन परिवार किसी भी बड़े आयोजन से पहले सिद्धिविनायक मंदिर जाना नहीं भूलता. इस बार ख़ास बात ये है कि अमिताभ बच्चन अपने बेटे और बहू के साथ पहली बार स्क्रीन पर अभिनय करते हुए दर्शकों के सामने आएंगे. मंगलवार सुबह मुंबई की सड़कों पर उस वक़्त और ज़्यादा भीड़ इकट्ठी हो गई जब अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ दर्शन के लिए सिद्धिविनायक मंदिर पहुँचे. न सिर्फ अमिताभ बच्चन बल्कि पूरा बच्चन परिवार इस फिल्म की सफलता के बारे में ख़ासा उत्साहित है. इसी ख़ुशी की वजह से अमिताभ बच्चन ने बेटे अभिषेक बच्चन और बहू ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ नंगे पांव जाकर मंदिर में सुबह की आरती में हिस्सा लिया और अपनी फ़िल्म सरकार राज की सफलता के लिए दुआ मांगी. अभिषेक बच्चन के कुछ दोस्तों ने भी इसमें हिस्सा लिया. इस पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. जैसे-जैसे अमिताभ अपने परिवार के साथ आगे बढ़े वैसे-वैसे अपने पसंदीदा कलाकारों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उनके पीछे हो ली. सरकार राज राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म है. ये इससे पहले आई फ़िल्म सरकार की अगली कड़ी और इस साल की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म है. ख़ास बात ये भी है कि ये शादी के बाद अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की पहली फ़िल्म है. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन तीनों दमदार भूमिका में हैं. ये फ़िल्म रिलीज़ से पहले ही काफी चर्चा बटोर चुकी है और प्रोमोज़ में ऐश्वर्या का नया क़िरदार और रूप भी चर्चा का विषय बन गया है.
पूरा बच्चन परिवार मंगलवार तड़के मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के लिए नंगे पांव पहुंचा और माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा जल्द ही प्रदर्शित होने वाली फ़िल्म सरकार राज की सफलता के लिए दुआ मांगने को लेकर की गई है. अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन शादी के बाद इस फ़िल्म में पहली बार एक साथ नज़र आएंगे. इतना ही नहीं, ख़ुद अमिताभ बच्चन भी इस फ़िल्म में हैं. बच्चन परिवार किसी भी बड़े आयोजन से पहले सिद्धिविनायक मंदिर जाना नहीं भूलता. इस बार ख़ास बात ये है कि अमिताभ बच्चन अपने बेटे और बहू के साथ पहली बार स्क्रीन पर अभिनय करते हुए दर्शकों के सामने आएंगे. मंगलवार सुबह मुंबई की सड़कों पर उस वक़्त और ज़्यादा भीड़ इकट्ठी हो गई जब अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ दर्शन के लिए सिद्धिविनायक मंदिर पहुँचे. न सिर्फ अमिताभ बच्चन बल्कि पूरा बच्चन परिवार इस फिल्म की सफलता के बारे में ख़ासा उत्साहित है. इसी ख़ुशी की वजह से अमिताभ बच्चन ने बेटे अभिषेक बच्चन और बहू ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ नंगे पांव जाकर मंदिर में सुबह की आरती में हिस्सा लिया और अपनी फ़िल्म सरकार राज की सफलता के लिए दुआ मांगी. अभिषेक बच्चन के कुछ दोस्तों ने भी इसमें हिस्सा लिया. इस पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. जैसे-जैसे अमिताभ अपने परिवार के साथ आगे बढ़े वैसे-वैसे अपने पसंदीदा कलाकारों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उनके पीछे हो ली. सरकार राज राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म है. ये इससे पहले आई फ़िल्म सरकार की अगली कड़ी और इस साल की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म है. ख़ास बात ये भी है कि ये शादी के बाद अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की पहली फ़िल्म है. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन तीनों दमदार भूमिका में हैं. ये फ़िल्म रिलीज़ से पहले ही काफी चर्चा बटोर चुकी है और प्रोमोज़ में ऐश्वर्या का नया क़िरदार और रूप भी चर्चा का विषय बन गया है.
भीनमाल को जिला बनाने की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से 19 वें दिन भी धरना जारी रहा। धरनास्थल पर संबोधित करते हुए समिति के शेखर व्यास ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता तब तक अनशन जारी रहेगा। अशोक सिंह ओपावत ने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता को त्यागकर जनहित में निर्णय लेवें जिससे की पिछले महीने भर से अनशन पर बैठे क्षेत्रवासियों को न्याय मिल सके। भरत सिंह भोजाणी ने कहा कि अगर जल्द ही जिला की घोषणा नही की जाती तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। क्रमिक अनशन पर शैतान सिंह भाटी, श्रवण सिंह राव, सत्यवान सिंह राजपुरोहित, नैनाराम मांजु सेवड़ी , विक्रम सिंह इराणी, शंभुसिंह राठौड़, रामलाल सियाग , हनीफ खां मीरासी, नरपत सिंह लोल, संजीव माथुर और रेखा राम पुरोहित सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भीनमाल को जिला बनाने की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से उन्नीस वें दिन भी धरना जारी रहा। धरनास्थल पर संबोधित करते हुए समिति के शेखर व्यास ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता तब तक अनशन जारी रहेगा। अशोक सिंह ओपावत ने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता को त्यागकर जनहित में निर्णय लेवें जिससे की पिछले महीने भर से अनशन पर बैठे क्षेत्रवासियों को न्याय मिल सके। भरत सिंह भोजाणी ने कहा कि अगर जल्द ही जिला की घोषणा नही की जाती तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। क्रमिक अनशन पर शैतान सिंह भाटी, श्रवण सिंह राव, सत्यवान सिंह राजपुरोहित, नैनाराम मांजु सेवड़ी , विक्रम सिंह इराणी, शंभुसिंह राठौड़, रामलाल सियाग , हनीफ खां मीरासी, नरपत सिंह लोल, संजीव माथुर और रेखा राम पुरोहित सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
है, क्या कहा ? सुना कि नहीं। केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल घातिया कर्मा के का नाश करना होता है, घातिया कर्मा मे, चाहे मूल प्रकृति हो या उत्तर प्रकृति, कोई भी प्रकृति प्रशस्त प्रकृति नहीं होती। इसलिए जैनाचार्या का कहना है कि सर्वप्रथम पाप कर्मों की निर्जरा करके नवीन कर्मा को तू रोक ले पुण्य तेरे लिए कोई विपरीत काम नहीं करेगा, वाधक नहीं होगा। पुण्य को रखने की बात नहीं कही जा रही है, लेकिन निर्जरा का क्रम तो यही होगा कि सर्वप्रथम पाप का सवर कर, नवीन पापास्रव को रोके, पूर्ववद्ध कर्मों की निर्जरा करे और वर्तमान वन्ध को मिटा दे तो नियम में वह केवलज्ञान प्राप्त कग टेगा। यह भी ध्यान रखना कि जब तक साता का आस्रव होता रहेगा तब तक उसे मुक्ति का कोई ठिकाना नहीं है। केवलज्ञान होने के उपरान्त भी आठ वर्ष अन्तर्मुहूर्त कम पूर्वकोटि वर्ष तक भी वह रह सकता ह। वैभाविक पर्याय में और केवल साता का आस्रव होता रहता है। उस आस्रव का रोकने के लिए आचार्य कहते हैं कि तृतीय व चतुर्थ शुक्ल ध्यान आवश्यक है, वे ही भीतर वैठे हुए अघातिया कर्मों का नाश करने में समर्थ है। अघातिया कर्मा की निर्जरा करने का नम्वर वाट में आता है, लेकिन घातिया कर्मो की निर्जरा करने का प्रावधान पहले है। सवर के क्षेत्र मे, वन्ध के क्षेत्र में भी इसी क्रम की बात आती है। इसलिए "जिन पुण्य पाप नहीं कीना" इस ढोहे का अर्थ- मर्म सही-सही वही व्यक्ति समझ सकता है जो कर्म सिद्धान्त के बारे मे सही-सही जानकारी रखता है। यदि इस प्रकार की सही-सही जानकारी नहीं रखता हुआ भी वह कहता है कि सम्यग्दृष्टि पाप-पुण्य दानो प्रकार के कर्मास्रव को राक देता है, वह भी चतुर्थगुणस्थान मे रोक देता है, ता उमं तो अपने आप ही वन्ध हांगा ओर कोई छोटा वन्ध नहीं, वहुत वडा वन्ध माना जायेगा, क्योंकि सामन वाला सोचेंगा कि विकल्प तो मिटे नहीं फिर भी यह कह रहे है कि पुण्य नहीं होना चाहिए और हो रहा है तो इसका अर्थ है कि मेरे पास सम्यग्दर्शन नहीं है और धर्मात्मा भी नहीं हो सकता जब तक, तब तक कि पुण्य वन्ध को न रोकू। ऐसा करने वाले व्यक्ति के पास जब खुद के सम्यग्दर्शन का पतियारा (ठिकाना ) नहीं है, तो चारित्र की बात करना ही गलत हो जाएगी। इस प्रकार यदि श्रद्धान वना लेता है तो दोनो ही ससार की ओर वढे चले जा रहे है - उपदश सुनने वाला भी और उपदेश देने वाला भी। जैसा कि कहा है"केचिठामादान्नष्टाः केचिच्चाज्ञानान्नष्टाः केचिन्नष्टैरपि नष्टाः" लोग प्रमाद के द्वारा नष्ट हो जाते है, कुछ लोग अज्ञान के द्वारा नष्ट हो
है, क्या कहा ? सुना कि नहीं। केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल घातिया कर्मा के का नाश करना होता है, घातिया कर्मा मे, चाहे मूल प्रकृति हो या उत्तर प्रकृति, कोई भी प्रकृति प्रशस्त प्रकृति नहीं होती। इसलिए जैनाचार्या का कहना है कि सर्वप्रथम पाप कर्मों की निर्जरा करके नवीन कर्मा को तू रोक ले पुण्य तेरे लिए कोई विपरीत काम नहीं करेगा, वाधक नहीं होगा। पुण्य को रखने की बात नहीं कही जा रही है, लेकिन निर्जरा का क्रम तो यही होगा कि सर्वप्रथम पाप का सवर कर, नवीन पापास्रव को रोके, पूर्ववद्ध कर्मों की निर्जरा करे और वर्तमान वन्ध को मिटा दे तो नियम में वह केवलज्ञान प्राप्त कग टेगा। यह भी ध्यान रखना कि जब तक साता का आस्रव होता रहेगा तब तक उसे मुक्ति का कोई ठिकाना नहीं है। केवलज्ञान होने के उपरान्त भी आठ वर्ष अन्तर्मुहूर्त कम पूर्वकोटि वर्ष तक भी वह रह सकता ह। वैभाविक पर्याय में और केवल साता का आस्रव होता रहता है। उस आस्रव का रोकने के लिए आचार्य कहते हैं कि तृतीय व चतुर्थ शुक्ल ध्यान आवश्यक है, वे ही भीतर वैठे हुए अघातिया कर्मों का नाश करने में समर्थ है। अघातिया कर्मा की निर्जरा करने का नम्वर वाट में आता है, लेकिन घातिया कर्मो की निर्जरा करने का प्रावधान पहले है। सवर के क्षेत्र मे, वन्ध के क्षेत्र में भी इसी क्रम की बात आती है। इसलिए "जिन पुण्य पाप नहीं कीना" इस ढोहे का अर्थ- मर्म सही-सही वही व्यक्ति समझ सकता है जो कर्म सिद्धान्त के बारे मे सही-सही जानकारी रखता है। यदि इस प्रकार की सही-सही जानकारी नहीं रखता हुआ भी वह कहता है कि सम्यग्दृष्टि पाप-पुण्य दानो प्रकार के कर्मास्रव को राक देता है, वह भी चतुर्थगुणस्थान मे रोक देता है, ता उमं तो अपने आप ही वन्ध हांगा ओर कोई छोटा वन्ध नहीं, वहुत वडा वन्ध माना जायेगा, क्योंकि सामन वाला सोचेंगा कि विकल्प तो मिटे नहीं फिर भी यह कह रहे है कि पुण्य नहीं होना चाहिए और हो रहा है तो इसका अर्थ है कि मेरे पास सम्यग्दर्शन नहीं है और धर्मात्मा भी नहीं हो सकता जब तक, तब तक कि पुण्य वन्ध को न रोकू। ऐसा करने वाले व्यक्ति के पास जब खुद के सम्यग्दर्शन का पतियारा नहीं है, तो चारित्र की बात करना ही गलत हो जाएगी। इस प्रकार यदि श्रद्धान वना लेता है तो दोनो ही ससार की ओर वढे चले जा रहे है - उपदश सुनने वाला भी और उपदेश देने वाला भी। जैसा कि कहा है"केचिठामादान्नष्टाः केचिच्चाज्ञानान्नष्टाः केचिन्नष्टैरपि नष्टाः" लोग प्रमाद के द्वारा नष्ट हो जाते है, कुछ लोग अज्ञान के द्वारा नष्ट हो
अमरीका के सांसद, विधायक, पूर्व राष्ट्रपति और गवर्नर आदि सेवानिवृत्त होने के बाद अपने या किराए के मकानों में रहते हैं। अमरीका में भी लोकतंत्र है। जब जनहित के लिए कोई प्रस्ताव राज्यसभा, लोकसभा या विधानसभा में पास होना होता है, तब हर राजनीतिक पार्टी हो-हल्ला खूब मचाते हुए एक-दूसरे पर आरोप-प्रतिरोप लगाते हुए उस बिल या प्रस्ताव को लटका देती है। लेकिन जब इनके खुद के फायदे की कोई बात होती है, तब उसको बिना देरी और बिना शोर-शराबे के एकजुट हो पास कर देते हैं, जैसे कि पूर्व मुख्यमंत्री के लिए सरकारी बंगले की सुविधा। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद से सरकारी बंगलों को खाली करने का जो फैसला दिया, काफी सराहनीय और उचित फैसला है। जब कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होता है, तो उसको सरकारी बंगले या रिहायश खाली करने पड़ते हैं और अगर किसी को रिहायश के किराए की राशि मिल रही होती है, तो सरकार सब कुछ वापस ले लेती है। फिर पांच वर्ष तक राज करने वालों को ताउम्र के लिए सरकारी बंगले क्यों? सुप्रीम कोर्ट को अब इस पर विचार करना चाहिए कि कहीं सत्ताधारी, राजनेता, नौकरशाह और अन्य सरकारी बंगलों को किराए पर देकर सरकारी खजाने को चूना तो नहीं लगा रहे हैं? अपना सही जीवनसंगी चुनिए। केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
अमरीका के सांसद, विधायक, पूर्व राष्ट्रपति और गवर्नर आदि सेवानिवृत्त होने के बाद अपने या किराए के मकानों में रहते हैं। अमरीका में भी लोकतंत्र है। जब जनहित के लिए कोई प्रस्ताव राज्यसभा, लोकसभा या विधानसभा में पास होना होता है, तब हर राजनीतिक पार्टी हो-हल्ला खूब मचाते हुए एक-दूसरे पर आरोप-प्रतिरोप लगाते हुए उस बिल या प्रस्ताव को लटका देती है। लेकिन जब इनके खुद के फायदे की कोई बात होती है, तब उसको बिना देरी और बिना शोर-शराबे के एकजुट हो पास कर देते हैं, जैसे कि पूर्व मुख्यमंत्री के लिए सरकारी बंगले की सुविधा। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद से सरकारी बंगलों को खाली करने का जो फैसला दिया, काफी सराहनीय और उचित फैसला है। जब कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होता है, तो उसको सरकारी बंगले या रिहायश खाली करने पड़ते हैं और अगर किसी को रिहायश के किराए की राशि मिल रही होती है, तो सरकार सब कुछ वापस ले लेती है। फिर पांच वर्ष तक राज करने वालों को ताउम्र के लिए सरकारी बंगले क्यों? सुप्रीम कोर्ट को अब इस पर विचार करना चाहिए कि कहीं सत्ताधारी, राजनेता, नौकरशाह और अन्य सरकारी बंगलों को किराए पर देकर सरकारी खजाने को चूना तो नहीं लगा रहे हैं? अपना सही जीवनसंगी चुनिए। केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
वीगो वीडियो ऐप की ओर से अपने कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा देने और उन्हें पुरस्कृत करने के मकसद से प्रशंसकों और अनुयायियों को आकर्षित करने के लिए 20 जून को फैन पावर सीज़न 4 अभियान शुरू किया है । इसमें उपयोगकर्ताओं को उनके पसंदीदा कंटेंट क्रिएटर्स की सराहना के लिए डिजिटल टोकन 'फ्लैश' भेजने का प्रावधान किया गया है । यह फ्लैश उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो देखकर या अपने दोस्तों को ऐप में आमंत्रित कर जुटाया जा सकता है । इस अभियान के दौरान हाल ही में चर्चित अभिनेत्री और एक सक्रिय वीगो वीडियो निर्माता मोनालिसा ने अपने प्रशंसकों से 'फ्लैश' टोकन भेजने का आह्वान किया तो उनके प्रशंसक टूट पड़े और अपनी चाहतों की बरसात कर दी । मोनालिसा को मिलने वाला समर्थन काफी था और फैन पावर लीडरबोर्ड पर उनकी फैन रैंकिंग तेजी से बढ़ी । विशेष रूप से उसके शीर्ष समर्थकों में से एक, 'हमसफर' नामक वीगो उपयोगकर्ता ने उनको अधिकतम 'फ्लैश' टोकन भेजा । जो सभी को आश्चर्यचकित कर गया । मोनालिसा ने अपने फैन को धन्यवाद देने के लिए उस लड़के को बुलाया । इस अभियान और उसमे घटित घटनाओं से अभिभूत होती हुई मोनालिसा बोली कि "यह एक महान अनुभव था, मुझे मीलों दूर के प्रशंसकों के साथ बातचीत करने का मौका मिला । मैं फैन पावर सीजन 4 में भाग ले कर उत्साहित हूँ । " वीगो वीडियो फैन पावर अभियान दिलचस्प तरीके से लोगों को जोड़ रहा है । उपयोगकर्ता सक्रीय हो गए हैं और अपनी राय जाहिर करने लगे हैं क्या मोनालिसा इस सीजन की फैन पॉवर कैंपेन विजेता होंगी ? गौरतलब है कि वीगो वीडियो अपने देश का अग्रणी मूल लघु वीडियो प्लेटफ़ॉर्म है जो उपयोगकर्ताओं को सम्मोहक कहानियां बनाने और साझा करने का मौका देता है, ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें । वीगो वीडियो उन उपयोगकर्ताओं को संपादन सहयोग भी देता है जो प्रत्येक दिन छोटे क्षणों को वीडियो में कैद करते हैं और उन्हें सब के साथ साझा करते हैं ।
वीगो वीडियो ऐप की ओर से अपने कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा देने और उन्हें पुरस्कृत करने के मकसद से प्रशंसकों और अनुयायियों को आकर्षित करने के लिए बीस जून को फैन पावर सीज़न चार अभियान शुरू किया है । इसमें उपयोगकर्ताओं को उनके पसंदीदा कंटेंट क्रिएटर्स की सराहना के लिए डिजिटल टोकन 'फ्लैश' भेजने का प्रावधान किया गया है । यह फ्लैश उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो देखकर या अपने दोस्तों को ऐप में आमंत्रित कर जुटाया जा सकता है । इस अभियान के दौरान हाल ही में चर्चित अभिनेत्री और एक सक्रिय वीगो वीडियो निर्माता मोनालिसा ने अपने प्रशंसकों से 'फ्लैश' टोकन भेजने का आह्वान किया तो उनके प्रशंसक टूट पड़े और अपनी चाहतों की बरसात कर दी । मोनालिसा को मिलने वाला समर्थन काफी था और फैन पावर लीडरबोर्ड पर उनकी फैन रैंकिंग तेजी से बढ़ी । विशेष रूप से उसके शीर्ष समर्थकों में से एक, 'हमसफर' नामक वीगो उपयोगकर्ता ने उनको अधिकतम 'फ्लैश' टोकन भेजा । जो सभी को आश्चर्यचकित कर गया । मोनालिसा ने अपने फैन को धन्यवाद देने के लिए उस लड़के को बुलाया । इस अभियान और उसमे घटित घटनाओं से अभिभूत होती हुई मोनालिसा बोली कि "यह एक महान अनुभव था, मुझे मीलों दूर के प्रशंसकों के साथ बातचीत करने का मौका मिला । मैं फैन पावर सीजन चार में भाग ले कर उत्साहित हूँ । " वीगो वीडियो फैन पावर अभियान दिलचस्प तरीके से लोगों को जोड़ रहा है । उपयोगकर्ता सक्रीय हो गए हैं और अपनी राय जाहिर करने लगे हैं क्या मोनालिसा इस सीजन की फैन पॉवर कैंपेन विजेता होंगी ? गौरतलब है कि वीगो वीडियो अपने देश का अग्रणी मूल लघु वीडियो प्लेटफ़ॉर्म है जो उपयोगकर्ताओं को सम्मोहक कहानियां बनाने और साझा करने का मौका देता है, ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें । वीगो वीडियो उन उपयोगकर्ताओं को संपादन सहयोग भी देता है जो प्रत्येक दिन छोटे क्षणों को वीडियो में कैद करते हैं और उन्हें सब के साथ साझा करते हैं ।
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, करीब पांच सप्ताह में लगभग एक करोड़ परामर्श उपलब्ध कराये गए थे, जिससे संकेत मिलता है कि टेलीमेडिसिन को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है। बयान के अनुसार, इस प्लेटफार्म का उपयोग करने वाले दस अग्रणी राज्य हैंः आंध्र प्रदेश (2,82,42,880), पश्चिम बंगाल (1,00,05,725), कर्नाटक (94,46,699), तमिलनाडु (87,23,333), महाराष्ट्र (40,70,430), उत्तर प्रदेश (37,63,092), मध्य प्रदेश (32,83,607), बिहार (26,24,482), तेलंगाना (24,52,529), गुजरात (16,73,888)। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ई-स्वास्थ्य पहल ई-संजीवनी एक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जो पारंपरिक रूप से डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लेने के स्थान पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे ही चिकित्सीय लाभ उठाने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास करती है। बयान के अनुसार, इसमें दो वर्टिकल शामिल हैं, जो सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों सहित, सफलतापूर्वक देश के सुदूर इलाकों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पहला वर्टिकल ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी टेली-परामर्श प्रदान करके ग्रामीण-शहरी डिजिटल स्वास्थ्य विभाजन की खाई को पाटने का प्रयास करता है और इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आयुष्मान भारत योजना के सभी ई-लाभार्थी उन फायदों को प्राप्त कर सकें जिनके वे वास्तव में हकदार हैं। बयान के अनुसार, यह वर्टिकल 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर काम करता है, जिसके तहत राज्य स्तर पर 'आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र' (एचडब्ल्यूसी) स्थापित किए जाते हैं। उसमें कहा गया है कि ये केन्द्र साइकिल के पहिए में लगे स्पोक की तरह काम करते हैं जो आंचलिक स्तर पर हब (जिसमें एमबीबीएस/स्पेशलिटी/सुपर- विशेषज्ञ चिकित्सक) के साथ मैप किए जाते हैं। बयान के अनुसार, इस मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से 1,09,748 आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी) तथा 14,188 चिकित्सा केंद्रों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिनसे कुल 7,11,58,968 टेली-परामर्श प्रदान किये गए हैं। बयान के अनुसार, दूसरा वर्टिकल ई-संजीवनी ओपीडी है, जो ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से काम करता है। उसमें कहा गया है कि इसके माध्यम से स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप के जरिये प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाता है, जिससे डॉक्टर के परामर्श को रोगी के निवास स्थान की परवाह किए बिना सुलभ बनाया जा सकता है। बयान के अनुसार, ई-संजीवनी ओपीडी ने 2,22,026 चिकित्सकों, विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित तथा अपने साथ काम करने के लिए जोड़ा गया है, जिनकी सहायता के साथ 1,144 ऑनलाइन ओपीडी संचालित की जाती हैं। इस प्लेटफॉर्म का एक दिन में 4. 34 लाख से अधिक मरीजों की सेवा करने का प्रभावशाली रिकॉर्ड है। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोहाली का सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) उपयोगकर्ताओं को समग्र तकनीकी प्रशिक्षण एवं सहायता प्रदान कर रहा है, साथ ही यह प्रतिदिन 10 लाख रोगियों को चिकित्सा सेवा प्रदान करने में सक्षम होने के लिए इस वर्टिकल के संकायों को लगातार बढ़ा रहा है। ई-संजीवनी आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन (एबीडीएम) का ही एक हिस्सा है और ई-संजीवनी एप्लिकेशन के माध्यम से 45,000 से अधिक आभा आईडी तैयार की गई हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, करीब पांच सप्ताह में लगभग एक करोड़ परामर्श उपलब्ध कराये गए थे, जिससे संकेत मिलता है कि टेलीमेडिसिन को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है। बयान के अनुसार, इस प्लेटफार्म का उपयोग करने वाले दस अग्रणी राज्य हैंः आंध्र प्रदेश , पश्चिम बंगाल , कर्नाटक , तमिलनाडु , महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , बिहार , तेलंगाना , गुजरात । केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ई-स्वास्थ्य पहल ई-संजीवनी एक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जो पारंपरिक रूप से डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लेने के स्थान पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे ही चिकित्सीय लाभ उठाने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास करती है। बयान के अनुसार, इसमें दो वर्टिकल शामिल हैं, जो सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों सहित, सफलतापूर्वक देश के सुदूर इलाकों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पहला वर्टिकल ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी टेली-परामर्श प्रदान करके ग्रामीण-शहरी डिजिटल स्वास्थ्य विभाजन की खाई को पाटने का प्रयास करता है और इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आयुष्मान भारत योजना के सभी ई-लाभार्थी उन फायदों को प्राप्त कर सकें जिनके वे वास्तव में हकदार हैं। बयान के अनुसार, यह वर्टिकल 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर काम करता है, जिसके तहत राज्य स्तर पर 'आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र' स्थापित किए जाते हैं। उसमें कहा गया है कि ये केन्द्र साइकिल के पहिए में लगे स्पोक की तरह काम करते हैं जो आंचलिक स्तर पर हब के साथ मैप किए जाते हैं। बयान के अनुसार, इस मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से एक,नौ,सात सौ अड़तालीस आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा चौदह,एक सौ अठासी चिकित्सा केंद्रों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिनसे कुल सात,ग्यारह,अट्ठावन,नौ सौ अड़सठ टेली-परामर्श प्रदान किये गए हैं। बयान के अनुसार, दूसरा वर्टिकल ई-संजीवनी ओपीडी है, जो ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से काम करता है। उसमें कहा गया है कि इसके माध्यम से स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप के जरिये प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाता है, जिससे डॉक्टर के परामर्श को रोगी के निवास स्थान की परवाह किए बिना सुलभ बनाया जा सकता है। बयान के अनुसार, ई-संजीवनी ओपीडी ने दो,बाईस,छब्बीस चिकित्सकों, विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित तथा अपने साथ काम करने के लिए जोड़ा गया है, जिनकी सहायता के साथ एक,एक सौ चौंतालीस ऑनलाइन ओपीडी संचालित की जाती हैं। इस प्लेटफॉर्म का एक दिन में चार. चौंतीस लाख से अधिक मरीजों की सेवा करने का प्रभावशाली रिकॉर्ड है। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोहाली का सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग उपयोगकर्ताओं को समग्र तकनीकी प्रशिक्षण एवं सहायता प्रदान कर रहा है, साथ ही यह प्रतिदिन दस लाख रोगियों को चिकित्सा सेवा प्रदान करने में सक्षम होने के लिए इस वर्टिकल के संकायों को लगातार बढ़ा रहा है। ई-संजीवनी आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन का ही एक हिस्सा है और ई-संजीवनी एप्लिकेशन के माध्यम से पैंतालीस,शून्य से अधिक आभा आईडी तैयार की गई हैं।
लरकाना, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना की मेडिकल छात्रा निमृता मीरचंदानी की रहस्यमय हालात में हुई मौत की गुत्थी अब तक अनसुलझी है। कई तरह के कानूनी पेंच मामले में सामने आते जा रहे हैं। इस सबके बीच, छात्रा को इनसाफ दिलाने की मांग को लेकर हिंदू समुदाय ने सिंध में कई जगह प्रदर्शन किया। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, निमृता की हत्या का आरोप और दोषियों को सजा देने की मांग के साथ सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय के सदस्यों ने कई जगहों पर प्रदर्शन किया। शहदादकोट नामक जगह पर हिंदू समुदाय के सदस्यों ने धरना देकर निमृता के लिए इनसाफ की मांग की। खैरपुर में समुदाय ने अपना कारोबार बंद रखकर प्रदर्शन किया। मोरो और घावर नामक जगहों पर हिंदू समुदाय और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने रैली निकालकर विरोध जताया। दूसरी ओर, शहीद मोहतरमा बेनजीर भुट्टो मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय के डेंटल कॉलेज की छात्रा निमृता मीरचंदानी की मौत के मामले में कानूनी पेचीदगियां बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्रा के परिजनों ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कराने से इनकार कर दिया है। 'जंग' अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निमृता के भाई डॉक्टर विशाल ने कहा है कि वह न्यायिक जांच रिपोर्ट आने से पहले अपनी बहन की हत्या या आत्महत्या के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं कराएंगे। वह न्यायिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मसूद बंगश ने बताया कि निमृता के घरवालों ने प्राथमिकी दर्ज कराने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस सिंध की हिंदू पंचायत के जरिए कुमारी के घरवालों को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए राजी करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से मामले में कानूनी पेचीदगी पैदा हुई है और जांच पर असर पड़ा है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि निमृता मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने तक पुलिस भी खुद से मामला नहीं दर्ज करेगी। यह रिपोर्ट आने के बाद भी अगर छात्रा के घरवालों ने प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई तो फिर यह काम पुलिस करेगी। पुलिस का कहना है कि मामले में बिना रिपोर्ट दर्ज हुए दो छात्रों को पुलिस ने हिरासत में रखा हुआ है। पुलिस का कहना है कि ऐसी स्थिति में इन दोनों को अधिक समय तक हिरासत में रखने से कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। इन छात्रों में से एक मेहरान अबरो ने पुलिस को बताया कि उसकी और निमृता की घनिष्ठ मित्रता थी और निमृता उससे शादी करना चाहती थी लेकिन उसने मना कर दिया था। उधर, न्यायिक जांच की राह में भी रोड़ा आता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लरकाना के जिला एवं सत्र न्यायाधीश निमृता की मौत के मामले की जांच में हिचकिचा रहे हैं। 'डॉन' की रिपोर्ट में लरकाना जिले की पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी देते हुए यह भी कहा गया कि एक सूत्र ने बताया कि न्यायाधीश ने जांच से सिरे से मना ही कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायाधीश का मानना है कि सिंध के गृह मंत्रालय ने उनसे सीधे मामले की जांच करने का आग्रह किया है जबकि यह आग्रह सिंध हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से आना चाहिए था।
लरकाना, तेईस सितम्बर । पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना की मेडिकल छात्रा निमृता मीरचंदानी की रहस्यमय हालात में हुई मौत की गुत्थी अब तक अनसुलझी है। कई तरह के कानूनी पेंच मामले में सामने आते जा रहे हैं। इस सबके बीच, छात्रा को इनसाफ दिलाने की मांग को लेकर हिंदू समुदाय ने सिंध में कई जगह प्रदर्शन किया। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, निमृता की हत्या का आरोप और दोषियों को सजा देने की मांग के साथ सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय के सदस्यों ने कई जगहों पर प्रदर्शन किया। शहदादकोट नामक जगह पर हिंदू समुदाय के सदस्यों ने धरना देकर निमृता के लिए इनसाफ की मांग की। खैरपुर में समुदाय ने अपना कारोबार बंद रखकर प्रदर्शन किया। मोरो और घावर नामक जगहों पर हिंदू समुदाय और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने रैली निकालकर विरोध जताया। दूसरी ओर, शहीद मोहतरमा बेनजीर भुट्टो मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय के डेंटल कॉलेज की छात्रा निमृता मीरचंदानी की मौत के मामले में कानूनी पेचीदगियां बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्रा के परिजनों ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कराने से इनकार कर दिया है। 'जंग' अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निमृता के भाई डॉक्टर विशाल ने कहा है कि वह न्यायिक जांच रिपोर्ट आने से पहले अपनी बहन की हत्या या आत्महत्या के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं कराएंगे। वह न्यायिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मसूद बंगश ने बताया कि निमृता के घरवालों ने प्राथमिकी दर्ज कराने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस सिंध की हिंदू पंचायत के जरिए कुमारी के घरवालों को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए राजी करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से मामले में कानूनी पेचीदगी पैदा हुई है और जांच पर असर पड़ा है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि निमृता मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने तक पुलिस भी खुद से मामला नहीं दर्ज करेगी। यह रिपोर्ट आने के बाद भी अगर छात्रा के घरवालों ने प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई तो फिर यह काम पुलिस करेगी। पुलिस का कहना है कि मामले में बिना रिपोर्ट दर्ज हुए दो छात्रों को पुलिस ने हिरासत में रखा हुआ है। पुलिस का कहना है कि ऐसी स्थिति में इन दोनों को अधिक समय तक हिरासत में रखने से कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। इन छात्रों में से एक मेहरान अबरो ने पुलिस को बताया कि उसकी और निमृता की घनिष्ठ मित्रता थी और निमृता उससे शादी करना चाहती थी लेकिन उसने मना कर दिया था। उधर, न्यायिक जांच की राह में भी रोड़ा आता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लरकाना के जिला एवं सत्र न्यायाधीश निमृता की मौत के मामले की जांच में हिचकिचा रहे हैं। 'डॉन' की रिपोर्ट में लरकाना जिले की पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी देते हुए यह भी कहा गया कि एक सूत्र ने बताया कि न्यायाधीश ने जांच से सिरे से मना ही कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायाधीश का मानना है कि सिंध के गृह मंत्रालय ने उनसे सीधे मामले की जांच करने का आग्रह किया है जबकि यह आग्रह सिंध हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से आना चाहिए था।
Roorkee News मंगलौर पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया। सोमवार शाम मंगलौर पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान दो युवक एक बाइक पर पुरकाजी की ओर से आते दिखाई दिए। दोनों युवकों ने पुलिस की चेकिंग को देखकर बाइक को मोड़ लिया। जिस पर पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने चोरी गिरोह के राज खोले। मंगलौर, संवाद सहयोगी। मंगलौर पुलिस ने चोरी की 13 बाइक के साथ एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह को पकड़ा है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है। साथ ही, उनका आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है। मंगलौर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महेश जोशी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के थाना पुरकाजी के ग्राम धमात निवासी जयवीर एक जुलाई को गुरुकुल नारसन में सामान लेने आया था। वह बाइक खड़ी कर दुकान में सामान लेने गया, इसी दौरान उसकी बाइक चोरी हो गई। पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। सोमवार शाम मंगलौर पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान दो युवक एक बाइक पर पुरकाजी की ओर से आते दिखाई दिए। दोनों युवकों ने पुलिस की चेकिंग को देखकर बाइक को मोड़ लिया। जिस पर पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई को नारसन से यह बाइक चोरी की थी। पूछताछ में आरोपितों की पहचान मोहम्मद साबिर निवासी कानूनगुयान मुस्लिम पुरकाजी और सलमान निवासी नूरनगरियान खेड़ा पुरकाजी, जिला मुजफ्फरनगर के रूप में हुई। उन्होंने अपने एक अन्य साथी विशाल निवासी ग्राम कुहाहेड़ी के बारे में भी जानकारी दी। आरोपितों ने बताया कि वह वाहन चोरी कर उन्हें पार्ट्स बेच देते हैं। पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर कांवड़ पटरी के पास बने एक गोदाम से 12 बाइक और एक बाइक की चेसिस बरामद की है। आरोपितों ने बताया कि अधिकांश बाइक उत्तर प्रदेश से चोरी की हैं। बरामद बाइक में से एक भगवानपुर थाना क्षेत्र से चोरी की थी। आरोपितों ने बताया कि वह बाइक बेचने के बजाय उसके पार्ट्स बेच देते थे, इससे फंसने का खतरा भी कम रहता है। बाइक चोरी करने वाले गिरोह के सदस्यों ने बताया कि उनको खुद याद नहीं है कि उन्होंने कितनी बाइक चोरी की है। चोरी करने के बाद वह बाइक के पार्ट्स को अलग-अलग कर देते थे और चेसिस को उठाकर गंग नहर में फेंक देते थे। यदि गंग नहर को बंद करा दिया जाए तो बीस से अधिक चेसिस वह गंग नहर से बरामद करा सकते हैं।
Roorkee News मंगलौर पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया। सोमवार शाम मंगलौर पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान दो युवक एक बाइक पर पुरकाजी की ओर से आते दिखाई दिए। दोनों युवकों ने पुलिस की चेकिंग को देखकर बाइक को मोड़ लिया। जिस पर पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने चोरी गिरोह के राज खोले। मंगलौर, संवाद सहयोगी। मंगलौर पुलिस ने चोरी की तेरह बाइक के साथ एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह को पकड़ा है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है। साथ ही, उनका आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है। मंगलौर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महेश जोशी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के थाना पुरकाजी के ग्राम धमात निवासी जयवीर एक जुलाई को गुरुकुल नारसन में सामान लेने आया था। वह बाइक खड़ी कर दुकान में सामान लेने गया, इसी दौरान उसकी बाइक चोरी हो गई। पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। सोमवार शाम मंगलौर पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान दो युवक एक बाइक पर पुरकाजी की ओर से आते दिखाई दिए। दोनों युवकों ने पुलिस की चेकिंग को देखकर बाइक को मोड़ लिया। जिस पर पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई को नारसन से यह बाइक चोरी की थी। पूछताछ में आरोपितों की पहचान मोहम्मद साबिर निवासी कानूनगुयान मुस्लिम पुरकाजी और सलमान निवासी नूरनगरियान खेड़ा पुरकाजी, जिला मुजफ्फरनगर के रूप में हुई। उन्होंने अपने एक अन्य साथी विशाल निवासी ग्राम कुहाहेड़ी के बारे में भी जानकारी दी। आरोपितों ने बताया कि वह वाहन चोरी कर उन्हें पार्ट्स बेच देते हैं। पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर कांवड़ पटरी के पास बने एक गोदाम से बारह बाइक और एक बाइक की चेसिस बरामद की है। आरोपितों ने बताया कि अधिकांश बाइक उत्तर प्रदेश से चोरी की हैं। बरामद बाइक में से एक भगवानपुर थाना क्षेत्र से चोरी की थी। आरोपितों ने बताया कि वह बाइक बेचने के बजाय उसके पार्ट्स बेच देते थे, इससे फंसने का खतरा भी कम रहता है। बाइक चोरी करने वाले गिरोह के सदस्यों ने बताया कि उनको खुद याद नहीं है कि उन्होंने कितनी बाइक चोरी की है। चोरी करने के बाद वह बाइक के पार्ट्स को अलग-अलग कर देते थे और चेसिस को उठाकर गंग नहर में फेंक देते थे। यदि गंग नहर को बंद करा दिया जाए तो बीस से अधिक चेसिस वह गंग नहर से बरामद करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने जिन पुलिस उपाधीक्षकों को सम्मानित किया गया उनमें रीना राठोर, नताशा सिंह, अभिनय चौधरी, स्वप्निल मुयाल, सुमित पाण्डे शामिल हुए। इस बार 17 पुलिस उपाधीक्षकों ने पीटीसी नरेन्द्र नगर से अपना प्रशिक्षण पूरा किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पीटीसी में आडिटोरियम का निर्माण किया जाएगा। साइबर क्राइम को रोकने के लिए कोर्सेज शुरू किये जायेंगे। पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण भत्ता दिया जायेगा। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रशिक्षण के उपरांत पास आउट होने वाले सभी पुलिस उपाधीक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दी जाने वाली शिक्षा ही प्रशिक्षण है। प्रशिक्षण कोई एक दिन में पूर्ण होने वाला वन टाइम टास्क नहीं है, अपितु उसके अनुरूप खुद को बदलना पड़ता है। प्रशिक्षण ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा हम अपने पेशेवर कार्यों को तेजी व दक्षता से करने में सक्षम होते हैं। उन्होंने कहा कि पीटीसी प्रशिक्षुओं को कानूनों की जानकारी के अलावा शस्त्र संचालन आदि अनेक प्रकार के जरूरी कौशल का प्रशिक्षण भी दिया गया होगा। क्षमताओं का वास्तविक आकलन तो तभी होगा जब हम अपने सीखे हुए ज्ञान एवं कौशल को अपने व्यवहारिक जीवन सही व सहज तरीके से प्रयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की कई विविधताएं हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थिति एक सबसे बड़ी चुनौती है। जहां बाढ़, बादल फटना, भू-स्खलन, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त सड़क दुर्घटनाओं का यदा-कदा सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमारी राज्य पुलिस की भूमिका अन्य राज्यों की तुलना में और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुलिस अन्य अपराधों के अलावा साइबर और संगठित अपराधों पर रोक लगाकर राज्य में चौतरफा सुरक्षा का माहौल तैयार करेंगे। कोरोना संकट के इस दौर में उत्तराखण्ड पुलिस ने कई नई-नई चुनौतियों का सामना किया है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि पुलिस के सामने अनैक चुनौतियां हैं। पुलिस को नई-नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यह कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस में जन सेवक के गुण होने बहुत जरूरी हैं। हमारा मकसद पीड़ित केन्द्रित होना चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, अपर पुलिस महानिदेशक, डॉ. पीवीके प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण पूरन सिंह रावत, निदेशक पीटीसी राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी टिहरी ईवा आशीष श्रीवास्तव, एसएसपी टिहरी तृप्ति भट्ट आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पीटीसी नरेन्द्र नगर में साइबर अपराधों में रोकने के लिए ई-सुरक्षा चक्र हेल्पलाईन नम्बर 155260 का शुभारंभ किया। यह नम्बर विशेषकर वित्तीय साइबर अपराधों में त्वरित सहायता के लिए है। उन्होंने कहा कि इस हेल्पलाईन नम्बर की जानकारी सबको हो, इसलिए इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाय। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता लाना जरूरी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ई-सुरक्षा चक्र बुकलेट का विमोचन भी किया। इस अवसर पर जानकारी दी गई कि विगत कुछ वर्षो में साईबर अपराध के मामलो मे लगातार बढोत्तरी हुई है। वित्तीय एवं गैर वित्तीय मामले सामने आ रहे है। हाल ही मे गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पीड़ितो की त्वरित सहायता प्रदान कराने हेतु एक साईबर हेल्प लाईन नम्बर 155260 जारी किया गया है। उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बना जिसे गृह मंत्रालय से साईबर हेल्पलाईन नम्बर 155260 के संचालन की अनुमति प्राप्त हुयी। इस नम्बर पर किसी भी प्रकार के वित्तीय साईबर अपराध की सूचना दी जा सकती है तथा पीड़ित को अतिशीघ्र राहत देने का प्रयास किया जायेगा। इस नई प्रणाली के लिये स्पेशल टास्क फोर्स के अधीन साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन में एक ई-सुरक्षा चक्र कन्ट्रोल रुम की स्थापना की गयी है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने छावनी परिषद् गढ़ी कैन्ट में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त पुनर्निर्मित केन्टोनमेंट जनरल हॉस्पिटल का शुभारम्भ किया। इस हॉस्पिटल में 150 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है। इसमें 10 बेड में आईसीयू एवं 11 वेंटिलेटर की व्यवस्था भी है। इस अस्पताल का पुनर्निर्माण मात्र 45 दिन में किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड की तीसरी संभावित लहर के दृष्टिगत राज्य में सभी तैयारियां की गई है। राज्य में ऑक्सीजन बैड, आईसीयू, वेंटिलेटर आदि की पर्याप्त व्यवस्था है। जिला अस्पतालों के अलावा सीएचसी स्तर तक भी ऑक्सीजन प्लांट लगाये जा रहे हैं। डीआरडीओ के सहयोग से ऋषिकेश एवं हल्द्वानी में आधुनिक कोविड केयर सेंटर की स्थापना की गई है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि छावनी परिषद में इस अस्पताल के पुनर्निर्माण से मरीजों को ईलाज के लिए अन्यत्र नहीं भटकना पड़ेगा। पिछले कुछ समय में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है। देहरादून में ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की संख्या में काफी वृद्धि की गई है। इस अवसर पर सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक हरवंश कपूर, छावनी परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर एसएन सिंह, सीईओ तनु जैन, महन्त कृष्ण गिरी, महन्त भरत गिरी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने गुरुवार को मीडिया सेंटर सचिवालय में आयेाजित संक्षिप्त व सादगीपूर्ण कार्यक्रम में 'सेवा, समर्पण और विश्वास के 100 दिन' विकास पुस्तिका का विमोचन किया। पुस्तिका का प्रकाशन सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की ओर से किया गया है। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक हरबंस कपूर, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, उमेश शर्मा काउ, खजानदास, सहदेव सिंह पुंडीर, राजकुमार ठुकराल, रामसिंह कैड़ा, विनोद कंडारी, सूचना महानिदेशक रणबीर सिंह चौहान व अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अपर निदेशक डा. अनिल चंदोला ने किया। विकास पुस्तिका के विमोचन से पूर्व दो मिनट का मौन रख कर 2013 की केदारनाथ आपदा व केाविड में प्राण गंवाने वाले लेागों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर सीएम तीरत सिंह रावत ने अपने कार्यकाल के 100 दिन होने के कार्यों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 100 दिन में सरकार ने कोविड से सफलतापूर्वक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि 10 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिन में ही वे स्वयं कोविड संक्रमित हो गए। इस पर गाईडलाईन का पूरी तरह से पालन करते हुए उन्हें एक कक्ष में ही कई दिनों तक रहना पड़ा। परंतु इस अवधि में भी उन्होंने अधिकारियों से वर्चुअल मीटिंग कीं। दूर दराज के क्षेत्रों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण के लिए वर्चुअल चौपालों का आयेाजन किया। इनमें वर्चुअल प्रतिभाग करते हुए लोगों की समस्याओं को सुना और उनका निदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। बड़ी संख्या में लोगों की शिकायतों को दूर किया गया। जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने मौके पर ही जनता की समस्याओं का समाधान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे गांव की मिट्टी से जुड़े हैं और ग्रामीणों व आम जन के दुख दर्द को भली भांति जानते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से विकास प्राधिकरणों को हटाया ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में परेशान न होना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विकास की रणनीति बना रहे थे तो कोविड की दूसरी लहर पूरे देश में आ गई। किसी को पता नहीं था कि कोविड की दूसरी लहर इस तरह का रूप लेगी। परंतु जल्द ही हमने स्थिति को पूरी तरह से सम्भाल लिया। पिछले लगभग तीन माह में हमने आईसीयू बेड, आक्सीजन बेड, वेंटिलेटर आदि की संख्या कई गुना तक बढ़ा दी। प्रत्येक जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट स्थापित किए। सीएससी तक भी आक्सीजन प्लांट लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के निर्देशों पर डीआरडीओ ने ऋषिकेश में 500 बेड का कोविड अस्पताल 14 दिन में तैयार कर दिया। हल्द्वानी में 21 दिन में तैयार कर दिया। हमने राज्य में काफी तैयारी कर ली हैं। हम केाविड की तीसरी लहर के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों की आजीविका पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ी है। केाविड के प्रभाव से पर्यटन व्यवसायियों को हुए नुकसान की भरपायी के लिये उन्हें 5 हजार रूपये की एकमुस्त आर्थिक सहायता दिये जाने का निर्णय लिया है। इससे लगभग 50 हजार पर्यटन उद्योग भी लाभान्वित होंगे। यही नहीं पर्यटन सेक्टर से जुड़े टूर ऑपरेटरों, एडवेंचर टूर ऑपरेटरों और राफ्टिंग गाइडों को भी 10-10 हजार रूपये की आर्थिक सहायता दिये जाने का निर्णय लिया है। पर्यटन स्वरोजगार के लाभार्थियों को ब्याज में छूट के साथ ही लाइसेंस फीस को माफ करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने 18-44 वर्ष वालों को निशुल्क टीकाकरण और गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 45 से अधिक उम्र वालों में लगभग 65 फीसदी का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। कोविड को देखते हुए प्रदेश में हम विशेष खाद्यान्न सहायता दे रहे हैं। साढ़े सात किलो प्रति राशन कार्ड खाद्यान्न मिलता था जिसको बढ़ाकर बीस किलो प्रतिमाह कर दिया है। आपदा में पहली बार चीनी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री जी और अनेक केंद्रीय मंत्रियों से भेंट कर राज्य के विकास पर विचार विमर्श किया। उन्हें राज्य की आवश्यकताओं से अवगत कराया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति विशेष आस्था है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि उत्तराखंड को लेकर किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के दिल्ली दौरे में हम पूरी तैयारी से गए। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से भेंट के दौरान मंत्रालयों के और राज्य के अधिकारी भी साथ बैठते थे। इससे मौके पर ही उत्तराखंड के हित में बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। हर मंत्रालय ने कुछ न कुछ दिया ही है। आईडीपीएल, ऋषिकेश को स्पेशल टूरिज्म जोन के रूप में विकसित किए जाने की योजना को स्वीकृति दी गई है। दिल्ली-रामनगर कार्बेट इको ट्रेन चलाने की सैद्धांतिक सहमति के साथ ही, टनकपुर-बागेश्वर और डोइवाला से गंगोत्री-यमनोत्री के रेललाइन के सर्वे की भी सहमति दी गई है। हरिद्वार में हेलीपैड बनाने के लिए बी. एच. ई. एल. द्वारा 4 एकड़ भूमि राज्य सरकार को दिये जाने की भारत सरकार द्वारा सहमति दी गई है। कुमायूं में एम्स के लिए भी केंद्र सरकार से अनुरोध किया है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
मुख्यमंत्री ने जिन पुलिस उपाधीक्षकों को सम्मानित किया गया उनमें रीना राठोर, नताशा सिंह, अभिनय चौधरी, स्वप्निल मुयाल, सुमित पाण्डे शामिल हुए। इस बार सत्रह पुलिस उपाधीक्षकों ने पीटीसी नरेन्द्र नगर से अपना प्रशिक्षण पूरा किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पीटीसी में आडिटोरियम का निर्माण किया जाएगा। साइबर क्राइम को रोकने के लिए कोर्सेज शुरू किये जायेंगे। पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण भत्ता दिया जायेगा। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रशिक्षण के उपरांत पास आउट होने वाले सभी पुलिस उपाधीक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दी जाने वाली शिक्षा ही प्रशिक्षण है। प्रशिक्षण कोई एक दिन में पूर्ण होने वाला वन टाइम टास्क नहीं है, अपितु उसके अनुरूप खुद को बदलना पड़ता है। प्रशिक्षण ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा हम अपने पेशेवर कार्यों को तेजी व दक्षता से करने में सक्षम होते हैं। उन्होंने कहा कि पीटीसी प्रशिक्षुओं को कानूनों की जानकारी के अलावा शस्त्र संचालन आदि अनेक प्रकार के जरूरी कौशल का प्रशिक्षण भी दिया गया होगा। क्षमताओं का वास्तविक आकलन तो तभी होगा जब हम अपने सीखे हुए ज्ञान एवं कौशल को अपने व्यवहारिक जीवन सही व सहज तरीके से प्रयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की कई विविधताएं हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थिति एक सबसे बड़ी चुनौती है। जहां बाढ़, बादल फटना, भू-स्खलन, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त सड़क दुर्घटनाओं का यदा-कदा सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमारी राज्य पुलिस की भूमिका अन्य राज्यों की तुलना में और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुलिस अन्य अपराधों के अलावा साइबर और संगठित अपराधों पर रोक लगाकर राज्य में चौतरफा सुरक्षा का माहौल तैयार करेंगे। कोरोना संकट के इस दौर में उत्तराखण्ड पुलिस ने कई नई-नई चुनौतियों का सामना किया है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि पुलिस के सामने अनैक चुनौतियां हैं। पुलिस को नई-नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यह कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस में जन सेवक के गुण होने बहुत जरूरी हैं। हमारा मकसद पीड़ित केन्द्रित होना चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, अपर पुलिस महानिदेशक, डॉ. पीवीके प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण पूरन सिंह रावत, निदेशक पीटीसी राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी टिहरी ईवा आशीष श्रीवास्तव, एसएसपी टिहरी तृप्ति भट्ट आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पीटीसी नरेन्द्र नगर में साइबर अपराधों में रोकने के लिए ई-सुरक्षा चक्र हेल्पलाईन नम्बर एक लाख पचपन हज़ार दो सौ साठ का शुभारंभ किया। यह नम्बर विशेषकर वित्तीय साइबर अपराधों में त्वरित सहायता के लिए है। उन्होंने कहा कि इस हेल्पलाईन नम्बर की जानकारी सबको हो, इसलिए इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाय। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता लाना जरूरी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ई-सुरक्षा चक्र बुकलेट का विमोचन भी किया। इस अवसर पर जानकारी दी गई कि विगत कुछ वर्षो में साईबर अपराध के मामलो मे लगातार बढोत्तरी हुई है। वित्तीय एवं गैर वित्तीय मामले सामने आ रहे है। हाल ही मे गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पीड़ितो की त्वरित सहायता प्रदान कराने हेतु एक साईबर हेल्प लाईन नम्बर एक लाख पचपन हज़ार दो सौ साठ जारी किया गया है। उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बना जिसे गृह मंत्रालय से साईबर हेल्पलाईन नम्बर एक लाख पचपन हज़ार दो सौ साठ के संचालन की अनुमति प्राप्त हुयी। इस नम्बर पर किसी भी प्रकार के वित्तीय साईबर अपराध की सूचना दी जा सकती है तथा पीड़ित को अतिशीघ्र राहत देने का प्रयास किया जायेगा। इस नई प्रणाली के लिये स्पेशल टास्क फोर्स के अधीन साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन में एक ई-सुरक्षा चक्र कन्ट्रोल रुम की स्थापना की गयी है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने छावनी परिषद् गढ़ी कैन्ट में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त पुनर्निर्मित केन्टोनमेंट जनरल हॉस्पिटल का शुभारम्भ किया। इस हॉस्पिटल में एक सौ पचास ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है। इसमें दस बेड में आईसीयू एवं ग्यारह वेंटिलेटर की व्यवस्था भी है। इस अस्पताल का पुनर्निर्माण मात्र पैंतालीस दिन में किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड की तीसरी संभावित लहर के दृष्टिगत राज्य में सभी तैयारियां की गई है। राज्य में ऑक्सीजन बैड, आईसीयू, वेंटिलेटर आदि की पर्याप्त व्यवस्था है। जिला अस्पतालों के अलावा सीएचसी स्तर तक भी ऑक्सीजन प्लांट लगाये जा रहे हैं। डीआरडीओ के सहयोग से ऋषिकेश एवं हल्द्वानी में आधुनिक कोविड केयर सेंटर की स्थापना की गई है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि छावनी परिषद में इस अस्पताल के पुनर्निर्माण से मरीजों को ईलाज के लिए अन्यत्र नहीं भटकना पड़ेगा। पिछले कुछ समय में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है। देहरादून में ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की संख्या में काफी वृद्धि की गई है। इस अवसर पर सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक हरवंश कपूर, छावनी परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर एसएन सिंह, सीईओ तनु जैन, महन्त कृष्ण गिरी, महन्त भरत गिरी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने गुरुवार को मीडिया सेंटर सचिवालय में आयेाजित संक्षिप्त व सादगीपूर्ण कार्यक्रम में 'सेवा, समर्पण और विश्वास के एक सौ दिन' विकास पुस्तिका का विमोचन किया। पुस्तिका का प्रकाशन सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की ओर से किया गया है। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक हरबंस कपूर, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, उमेश शर्मा काउ, खजानदास, सहदेव सिंह पुंडीर, राजकुमार ठुकराल, रामसिंह कैड़ा, विनोद कंडारी, सूचना महानिदेशक रणबीर सिंह चौहान व अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अपर निदेशक डा. अनिल चंदोला ने किया। विकास पुस्तिका के विमोचन से पूर्व दो मिनट का मौन रख कर दो हज़ार तेरह की केदारनाथ आपदा व केाविड में प्राण गंवाने वाले लेागों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर सीएम तीरत सिंह रावत ने अपने कार्यकाल के एक सौ दिन होने के कार्यों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक सौ दिन में सरकार ने कोविड से सफलतापूर्वक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि दस मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिन में ही वे स्वयं कोविड संक्रमित हो गए। इस पर गाईडलाईन का पूरी तरह से पालन करते हुए उन्हें एक कक्ष में ही कई दिनों तक रहना पड़ा। परंतु इस अवधि में भी उन्होंने अधिकारियों से वर्चुअल मीटिंग कीं। दूर दराज के क्षेत्रों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण के लिए वर्चुअल चौपालों का आयेाजन किया। इनमें वर्चुअल प्रतिभाग करते हुए लोगों की समस्याओं को सुना और उनका निदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। बड़ी संख्या में लोगों की शिकायतों को दूर किया गया। जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने मौके पर ही जनता की समस्याओं का समाधान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे गांव की मिट्टी से जुड़े हैं और ग्रामीणों व आम जन के दुख दर्द को भली भांति जानते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से विकास प्राधिकरणों को हटाया ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में परेशान न होना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विकास की रणनीति बना रहे थे तो कोविड की दूसरी लहर पूरे देश में आ गई। किसी को पता नहीं था कि कोविड की दूसरी लहर इस तरह का रूप लेगी। परंतु जल्द ही हमने स्थिति को पूरी तरह से सम्भाल लिया। पिछले लगभग तीन माह में हमने आईसीयू बेड, आक्सीजन बेड, वेंटिलेटर आदि की संख्या कई गुना तक बढ़ा दी। प्रत्येक जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट स्थापित किए। सीएससी तक भी आक्सीजन प्लांट लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के निर्देशों पर डीआरडीओ ने ऋषिकेश में पाँच सौ बेड का कोविड अस्पताल चौदह दिन में तैयार कर दिया। हल्द्वानी में इक्कीस दिन में तैयार कर दिया। हमने राज्य में काफी तैयारी कर ली हैं। हम केाविड की तीसरी लहर के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों की आजीविका पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ी है। केाविड के प्रभाव से पर्यटन व्यवसायियों को हुए नुकसान की भरपायी के लिये उन्हें पाँच हजार रूपये की एकमुस्त आर्थिक सहायता दिये जाने का निर्णय लिया है। इससे लगभग पचास हजार पर्यटन उद्योग भी लाभान्वित होंगे। यही नहीं पर्यटन सेक्टर से जुड़े टूर ऑपरेटरों, एडवेंचर टूर ऑपरेटरों और राफ्टिंग गाइडों को भी दस-दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता दिये जाने का निर्णय लिया है। पर्यटन स्वरोजगार के लाभार्थियों को ब्याज में छूट के साथ ही लाइसेंस फीस को माफ करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने अट्ठारह-चौंतालीस वर्ष वालों को निशुल्क टीकाकरण और गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पैंतालीस से अधिक उम्र वालों में लगभग पैंसठ फीसदी का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। कोविड को देखते हुए प्रदेश में हम विशेष खाद्यान्न सहायता दे रहे हैं। साढ़े सात किलो प्रति राशन कार्ड खाद्यान्न मिलता था जिसको बढ़ाकर बीस किलो प्रतिमाह कर दिया है। आपदा में पहली बार चीनी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री जी और अनेक केंद्रीय मंत्रियों से भेंट कर राज्य के विकास पर विचार विमर्श किया। उन्हें राज्य की आवश्यकताओं से अवगत कराया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति विशेष आस्था है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि उत्तराखंड को लेकर किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के दिल्ली दौरे में हम पूरी तैयारी से गए। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से भेंट के दौरान मंत्रालयों के और राज्य के अधिकारी भी साथ बैठते थे। इससे मौके पर ही उत्तराखंड के हित में बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। हर मंत्रालय ने कुछ न कुछ दिया ही है। आईडीपीएल, ऋषिकेश को स्पेशल टूरिज्म जोन के रूप में विकसित किए जाने की योजना को स्वीकृति दी गई है। दिल्ली-रामनगर कार्बेट इको ट्रेन चलाने की सैद्धांतिक सहमति के साथ ही, टनकपुर-बागेश्वर और डोइवाला से गंगोत्री-यमनोत्री के रेललाइन के सर्वे की भी सहमति दी गई है। हरिद्वार में हेलीपैड बनाने के लिए बी. एच. ई. एल. द्वारा चार एकड़ भूमि राज्य सरकार को दिये जाने की भारत सरकार द्वारा सहमति दी गई है। कुमायूं में एम्स के लिए भी केंद्र सरकार से अनुरोध किया है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
कभी मैं 'कार्टूनिस्ट ' हुआ करता था। रोज़ सुबह मेरे बनाये कार्टून अख़बार के प्रथम पेज पर तीन कालम में छप जाया करते थे । सिर्फ़ एक ' फ्रेम ' में सिमटे हुए मेरे कार्टून के पात्रों को घुटन महसूस होने लगी थी लिहाज़ा मैं ' 24 फ्रेम ' (फ़िल्म) की दुनिया में चला आया। इस ' लाक डाउन ' में कुछ न कर पाने की विवशता लिये मैं एक न्यूज़ चैनल पर भूखे-प्यासे अनंत यात्रा पर पैदल ही निकल पड़े मज़दूरों के पलायन का दृश्य देख कर बेचैन हो रहा था कि मेरी पत्नी की आवाज़ सुनाई पड़ी - ' जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते क्यों नहीं कुछ कार्टून ही बनाते हैं । ' .... . मैं तो भूल ही गया था कि मैं कार्टून भी बना सकता हूँ। मुद्दतों बाद फिर एक कार्टून बना कर आप सब से शेयर कर रहा हूँ।
कभी मैं 'कार्टूनिस्ट ' हुआ करता था। रोज़ सुबह मेरे बनाये कार्टून अख़बार के प्रथम पेज पर तीन कालम में छप जाया करते थे । सिर्फ़ एक ' फ्रेम ' में सिमटे हुए मेरे कार्टून के पात्रों को घुटन महसूस होने लगी थी लिहाज़ा मैं ' चौबीस फ्रेम ' की दुनिया में चला आया। इस ' लाक डाउन ' में कुछ न कर पाने की विवशता लिये मैं एक न्यूज़ चैनल पर भूखे-प्यासे अनंत यात्रा पर पैदल ही निकल पड़े मज़दूरों के पलायन का दृश्य देख कर बेचैन हो रहा था कि मेरी पत्नी की आवाज़ सुनाई पड़ी - ' जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते क्यों नहीं कुछ कार्टून ही बनाते हैं । ' .... . मैं तो भूल ही गया था कि मैं कार्टून भी बना सकता हूँ। मुद्दतों बाद फिर एक कार्टून बना कर आप सब से शेयर कर रहा हूँ।
नोटिस में कहा गया है, सभी गाय प्रेमी 14 फरवरी को गौ माता के महत्व को ध्यान में रखते हुए और जीवन को खुशहाल और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखते हुए गाय हग डे के रूप में मना सकते हैं। 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे नहीं बल्कि लोगों से 'गाय को गले लगाएं' दिवस / Cow Hug Day मनाने की गुज़ारिश की गयी है और यह अपील पशु कल्याण बोर्ड द्वारा नोटिस ज़ारी करके की गयी है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया ( Animal Welfare Board of India) ने "Cow Hug Day' मनाने से सकारात्मक ऊर्जा फैलाने व सामूहिक ख़ुशी को प्रोत्साहित करने की बात कही। चलिए मान लेते हैं, गाय को गले लगाने का दिवस मनाने से वह सारी चीज़ें होंगी जिसकी बात पशु कल्याण बोर्ड ने कही पर इससे गायों को क्या मिलेगा? इस चीज़ से गायों का कल्याण कैसे होगा? या फिर ऐसे गायों को गले लगाने से वह मिलवर्तन की ओर सन्देश दे रहे हैं? भारत देश जहां करोड़ों की संख्या में पशुओं को उचित सुविधा न मिल पाने की वजह से सड़कों, चौराहों पर आवारा घूमना पड़ता है। ठिठुरती ठण्ड में ठण्ड से बचने के लिए कोई शेड नहीं मिलता। गौशालाएं नहीं होती। जिन पशुओं की आये दिन सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है इत्यादि चीज़ों की ओर ध्यान देने की बजाय व इसका समाधान करने की बजाय पशु कल्याण बोर्ड बस गाये को गले लगाने की बात कहकर सकारात्मकता फ़ैलाने की बात करता है। इसे समझदारी कही जाए या राजनीति? ये गाय को लेकर भारत में चलने वाली राजनीति आज तक थमी नहीं। गाय के नाम पर इतनी राजनीति हुई लेकिन गायों की दुर्दशा पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हाँ, नाम के लिए योजनाएं व उनके लिए करोड़ों का बजट बस तय करके हाथ झाड़ दिया गया। जिन योजनाओं का लाभ तक पशुओं को नहीं दिया जाता जिनके नाम करोड़ों की राजनीति की खेली जाती है। ये भी पढ़ें - गौशाला में जानवरों को मिल रहा जीवन या मौत? क्या कहता है नोटिस? जनवरी 2022 के लाइव स्टॉक सेन्स डाटा के अनुसार, भारत में 5 मिलियन से भी ज़्यादा आवारा मवेशी हैं। लोग तो खुशहाल हो जाएंगे पर आवारा पशुओं को खुशहाली कैसे दी जायेगी? खबर लहरिया की 24 जनवरी की प्रकाशित रिपोर्ट में किसान यूनियन के नरैनी तहसील अध्यक्ष दिनेश पटेल ने बताया, गौशालाओं में गौवंश की सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ होता है। इसे भक्ति कहें या गोवंश के साथ ज़्यादती। पहले यही गोवंश बिक जाते थे। अन्ना जानवर नहीं घूमते थे। सीमित होते थे तो लोग अपने घरों में बांधते थे जिससे किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहती थी और जो गोवंश आज सड़कों पर हैं या गौशालाओं में ठंड से हो या भूख से मौत के शिकार हो रहे हैं, वह भी नहीं होते थे पर आज की स्थिति ऐसी है कि गोवंश जिसको गौ माता कहते हैं वह मारी-मारी फिर रही हैं। उन्हें रखने के लिए किसी के घरों में अब जगह ही नहीं है और सरकार जो गौशाला बनवाए हुए हैं और उनके खान-पान रख-रखाव के लिए बजट दे रही है, वह सिर्फ गौशालाओं और रख-रखाव के जिम्मेदार लोगों के लिए उनकी कमाई के ज़रिये से ज़्यादा और कुछ नहीं दिखाई देता। अभी हाल ही में हफ्ते भर पहले रिसौरा गांव में लगभग पांच गौवंश की मौत हुई है। यह तो सिर्फ एक ही उदाहरण है लेकिन ऐसे कई और उदाहरण आपको देखने को मिल सकते हैं। सकारात्मकता सिर्फ गले लगाने से नहीं आएगी बल्कि देश में गायों की दुर्दशा को बेहतर करने से आएगी।
नोटिस में कहा गया है, सभी गाय प्रेमी चौदह फरवरी को गौ माता के महत्व को ध्यान में रखते हुए और जीवन को खुशहाल और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखते हुए गाय हग डे के रूप में मना सकते हैं। चौदह फरवरी को वैलेंटाइन डे नहीं बल्कि लोगों से 'गाय को गले लगाएं' दिवस / Cow Hug Day मनाने की गुज़ारिश की गयी है और यह अपील पशु कल्याण बोर्ड द्वारा नोटिस ज़ारी करके की गयी है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने "Cow Hug Day' मनाने से सकारात्मक ऊर्जा फैलाने व सामूहिक ख़ुशी को प्रोत्साहित करने की बात कही। चलिए मान लेते हैं, गाय को गले लगाने का दिवस मनाने से वह सारी चीज़ें होंगी जिसकी बात पशु कल्याण बोर्ड ने कही पर इससे गायों को क्या मिलेगा? इस चीज़ से गायों का कल्याण कैसे होगा? या फिर ऐसे गायों को गले लगाने से वह मिलवर्तन की ओर सन्देश दे रहे हैं? भारत देश जहां करोड़ों की संख्या में पशुओं को उचित सुविधा न मिल पाने की वजह से सड़कों, चौराहों पर आवारा घूमना पड़ता है। ठिठुरती ठण्ड में ठण्ड से बचने के लिए कोई शेड नहीं मिलता। गौशालाएं नहीं होती। जिन पशुओं की आये दिन सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है इत्यादि चीज़ों की ओर ध्यान देने की बजाय व इसका समाधान करने की बजाय पशु कल्याण बोर्ड बस गाये को गले लगाने की बात कहकर सकारात्मकता फ़ैलाने की बात करता है। इसे समझदारी कही जाए या राजनीति? ये गाय को लेकर भारत में चलने वाली राजनीति आज तक थमी नहीं। गाय के नाम पर इतनी राजनीति हुई लेकिन गायों की दुर्दशा पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हाँ, नाम के लिए योजनाएं व उनके लिए करोड़ों का बजट बस तय करके हाथ झाड़ दिया गया। जिन योजनाओं का लाभ तक पशुओं को नहीं दिया जाता जिनके नाम करोड़ों की राजनीति की खेली जाती है। ये भी पढ़ें - गौशाला में जानवरों को मिल रहा जीवन या मौत? क्या कहता है नोटिस? जनवरी दो हज़ार बाईस के लाइव स्टॉक सेन्स डाटा के अनुसार, भारत में पाँच मिलियन से भी ज़्यादा आवारा मवेशी हैं। लोग तो खुशहाल हो जाएंगे पर आवारा पशुओं को खुशहाली कैसे दी जायेगी? खबर लहरिया की चौबीस जनवरी की प्रकाशित रिपोर्ट में किसान यूनियन के नरैनी तहसील अध्यक्ष दिनेश पटेल ने बताया, गौशालाओं में गौवंश की सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ होता है। इसे भक्ति कहें या गोवंश के साथ ज़्यादती। पहले यही गोवंश बिक जाते थे। अन्ना जानवर नहीं घूमते थे। सीमित होते थे तो लोग अपने घरों में बांधते थे जिससे किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहती थी और जो गोवंश आज सड़कों पर हैं या गौशालाओं में ठंड से हो या भूख से मौत के शिकार हो रहे हैं, वह भी नहीं होते थे पर आज की स्थिति ऐसी है कि गोवंश जिसको गौ माता कहते हैं वह मारी-मारी फिर रही हैं। उन्हें रखने के लिए किसी के घरों में अब जगह ही नहीं है और सरकार जो गौशाला बनवाए हुए हैं और उनके खान-पान रख-रखाव के लिए बजट दे रही है, वह सिर्फ गौशालाओं और रख-रखाव के जिम्मेदार लोगों के लिए उनकी कमाई के ज़रिये से ज़्यादा और कुछ नहीं दिखाई देता। अभी हाल ही में हफ्ते भर पहले रिसौरा गांव में लगभग पांच गौवंश की मौत हुई है। यह तो सिर्फ एक ही उदाहरण है लेकिन ऐसे कई और उदाहरण आपको देखने को मिल सकते हैं। सकारात्मकता सिर्फ गले लगाने से नहीं आएगी बल्कि देश में गायों की दुर्दशा को बेहतर करने से आएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनावी मैदान में इस बार क्रिकेटर अशोक डिंडा और मनोज तिवारी भी उतर सकते हैं. बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की पार्टी ने इसके लिए सीट का भी सेलेक्शन कर लिया है. मनोज तिवारी जहां टीएमसी की ओर से हावड़ा नॉर्थ सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं, वहीं बीजेपी अशोक डिंडा मेदिनीपुर के किसी भी सीट से प्रत्याशी बना सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अशोक डिंडा (Ashok Dinda) बीजेपी टिकट से चुनाव लड़ सकते हैं. इसके लिए बीजेपी ने मेदिनीपुर सीट को चुना है. हालांकि इसका आधिकारिक एलान पार्टी ने अभी तक नहीं किया है. वहीं डिंडा भी मेदिनीपुर में सक्रिय हो गए हैं और उन्हें इन इलाकों में कई कार्यकर्मों में भाग लेते देखा जा रहा है. नॉर्थ हावड़ा सीट से लड़ सकते हैं मनोज तिवारी- सूत्रों के मुताबिक मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) को तृणमूल कांग्रेस नॉर्थ हावड़ा सीट से मैदान में उतार सकती है. मनोज तिवारी को पार्टी लक्ष्मी शुक्ला वाली सीट पर कैंडिडेट बनाने की तैयारी में है. बता दें कि लक्ष्मी शुक्ला की भी एंट्री क्रिकेट से ही राजनीति में हुई थी. वे ममता सरकार में मंत्री मी बने थे. बीजेपी की बैठक आज- विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रत्याशी चयन करने के लिए कोलकाता की एक पांच सितारा होटल में बैठक बुलाई है. जानकारी के अनुसार इस बैठक में भाजपा के केंद्रीय नेता कैलाश विजयवर्गीय, शिव प्रकाश, अरविंद मेनन, दिलीप घोष और मुकुल राय उपस्थित होंगे. वहीं बैठक में भाग लेने के लिए अमित शाह के विशेष दूत और पार्टी के केंद्रीय नेता भूपेंद्र यादव पहले ही कोलकाता पहुंच चुके हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनावी मैदान में इस बार क्रिकेटर अशोक डिंडा और मनोज तिवारी भी उतर सकते हैं. बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की पार्टी ने इसके लिए सीट का भी सेलेक्शन कर लिया है. मनोज तिवारी जहां टीएमसी की ओर से हावड़ा नॉर्थ सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं, वहीं बीजेपी अशोक डिंडा मेदिनीपुर के किसी भी सीट से प्रत्याशी बना सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अशोक डिंडा बीजेपी टिकट से चुनाव लड़ सकते हैं. इसके लिए बीजेपी ने मेदिनीपुर सीट को चुना है. हालांकि इसका आधिकारिक एलान पार्टी ने अभी तक नहीं किया है. वहीं डिंडा भी मेदिनीपुर में सक्रिय हो गए हैं और उन्हें इन इलाकों में कई कार्यकर्मों में भाग लेते देखा जा रहा है. नॉर्थ हावड़ा सीट से लड़ सकते हैं मनोज तिवारी- सूत्रों के मुताबिक मनोज तिवारी को तृणमूल कांग्रेस नॉर्थ हावड़ा सीट से मैदान में उतार सकती है. मनोज तिवारी को पार्टी लक्ष्मी शुक्ला वाली सीट पर कैंडिडेट बनाने की तैयारी में है. बता दें कि लक्ष्मी शुक्ला की भी एंट्री क्रिकेट से ही राजनीति में हुई थी. वे ममता सरकार में मंत्री मी बने थे. बीजेपी की बैठक आज- विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रत्याशी चयन करने के लिए कोलकाता की एक पांच सितारा होटल में बैठक बुलाई है. जानकारी के अनुसार इस बैठक में भाजपा के केंद्रीय नेता कैलाश विजयवर्गीय, शिव प्रकाश, अरविंद मेनन, दिलीप घोष और मुकुल राय उपस्थित होंगे. वहीं बैठक में भाग लेने के लिए अमित शाह के विशेष दूत और पार्टी के केंद्रीय नेता भूपेंद्र यादव पहले ही कोलकाता पहुंच चुके हैं.
नई दिल्ली. बरकतों से भरा इस्लाम धर्म का पवित्र महीना रमजान इस साल अप्रैल महीने की 24 तारीख से शुरू होगा. रमजान का चांद देखने के बाद मुस्लिम लोग रोजा रखने की शुरुआत करेंगे. रमजान के पूरे महीने रोजे (व्रत) रखकर खुदा की इबादत की जाती है. रमजान में करीब 1 महीने तक हर दिन सूरज उगने से पहले उठकर सहरी खा कर रोजा जाता है जिसे शाम में इफ्तारी के बाद खोला जाता है. रमजान के पवित्र महीने में मस्जिदों में तराबी (नमाज) की शुरूआत हो जाती है. तराबी की नमाज में मस्जिद के मौलाना कुराने ए पाक को मौखिक तौर पर सुनाते हुए नमाज पढ़ाते हैं. इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है. हर एक हिस्से में करीब 10 रोजे तक होते हैं. शुरुआती 10 दिनों को लेकर कहा जाता है कि इन दिनों में अल्लाह की भरपूर रहमत लोगों पर बरसती है. आगे के 10 रोजे मगफिरत के कहे जाते हैं. इन 10 दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोगों खुदा से माफी मांगते हैं और आखिरत में जन्नत देने की दुआ मांगते हैं. वहीं रमजान के आखिरी हिस्से में जहन्नुम (नर्क) की आग से बचने की दुआ की जाती है. रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोगों को गलत कामों से हटकर सिर्फ अल्लाह की इबादत करने की हिदायत दी जाती है. जब पवित्र रमजान महीना पूरा हो जाता है तो उसके अगले दिन ईद उल फितर का त्योहार पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता है.
नई दिल्ली. बरकतों से भरा इस्लाम धर्म का पवित्र महीना रमजान इस साल अप्रैल महीने की चौबीस तारीख से शुरू होगा. रमजान का चांद देखने के बाद मुस्लिम लोग रोजा रखने की शुरुआत करेंगे. रमजान के पूरे महीने रोजे रखकर खुदा की इबादत की जाती है. रमजान में करीब एक महीने तक हर दिन सूरज उगने से पहले उठकर सहरी खा कर रोजा जाता है जिसे शाम में इफ्तारी के बाद खोला जाता है. रमजान के पवित्र महीने में मस्जिदों में तराबी की शुरूआत हो जाती है. तराबी की नमाज में मस्जिद के मौलाना कुराने ए पाक को मौखिक तौर पर सुनाते हुए नमाज पढ़ाते हैं. इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है. हर एक हिस्से में करीब दस रोजे तक होते हैं. शुरुआती दस दिनों को लेकर कहा जाता है कि इन दिनों में अल्लाह की भरपूर रहमत लोगों पर बरसती है. आगे के दस रोजे मगफिरत के कहे जाते हैं. इन दस दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोगों खुदा से माफी मांगते हैं और आखिरत में जन्नत देने की दुआ मांगते हैं. वहीं रमजान के आखिरी हिस्से में जहन्नुम की आग से बचने की दुआ की जाती है. रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोगों को गलत कामों से हटकर सिर्फ अल्लाह की इबादत करने की हिदायत दी जाती है. जब पवित्र रमजान महीना पूरा हो जाता है तो उसके अगले दिन ईद उल फितर का त्योहार पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता है.
Funny Video: लड़की ने बिना पढ़े आईएएस बनने का जो टिप्स दिया है, उसे सुनकर यकीनन आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे. इस मजेदार वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर शेयर किया गया है. महज 5 सेकंड के इस वीडियो को अब तक 8 हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है. Funny Video: आईएएस कैसे बनें? ये एक ऐसा सवाल है, जिसे आप गूगल पर सर्च करेंगे तो हजारों जवाब आएंगे, जिसमें से कुछ जवाब आपके काम के होंगे, वाजिब होंगे तो कुछ जवाब मजाकिया अंदाज वाले भी देखने को मिल जाएंगे. खैर, आपको ये तो पता ही होगा कि यूपीएससी को देश की कठिन परीक्षा माना जाता है, जिसमें पास करना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. वैसे तो हर साल लाखों की संख्या में छात्र ये एग्जाम देते हैं, लेकिन उनमें से महज कुछ ही लोगों का सेलेक्शन हो पाता है. सोशल मीडिया पर आजकल इसी से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़की मजेदार अंदाज में बिना पढ़े आईएएस बनने के टिप्स देती नजर आ रही है. आपने ऐसे वीडियोज देखे होंगे, जिसमें यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र या ये परीक्षा पास कर चुके लोग बताते हैं कि उन्होंने तो हर दिन 8-10 घंटे पढ़ाई की और तब जाकर वो यूपीएससी क्लियर कर पाए, जबकि कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने तो दिन में महज 4-5 घंटे ही पढ़ाई की, जिसकी बदौलत वो पास हो गए. साथ ही वो दूसरों को भी ऐसे ही टिप्स देते नजर आते हैं कि उन्हें कितनी देर पढ़ाई करनी चाहिए, पर इस वायरल वीडियो में लड़की ने बिना पढ़े आईएएस बनने का जो टिप्स दिया है, उसे सुनकर तो आपकी हंसी ही छूट जाएगी. लड़की ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि बिना पढ़े तो सपनों में ही आईएएस बना जा सकता है, तो वहीं बनो. इस मजेदार वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @UPSC_Notes नाम की आईडी से शेयर किया गया है. महज 5 सेकंड के इस वीडियो को अब तक 8 हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. वहीं, लोगों ने वीडियो देखने के बाद तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा है, 'अच्छा दीदी', तो एक अन्य यूजर ने लिखा है, 'अईयस ना आईएएस होता है दीदी'. इसी तरह एक और यूजर ने फिल्म का एक सीन शेयर करते हुए लिखा है, 'मस्त प्लान है'.
Funny Video: लड़की ने बिना पढ़े आईएएस बनने का जो टिप्स दिया है, उसे सुनकर यकीनन आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे. इस मजेदार वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर शेयर किया गया है. महज पाँच सेकंड के इस वीडियो को अब तक आठ हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है. Funny Video: आईएएस कैसे बनें? ये एक ऐसा सवाल है, जिसे आप गूगल पर सर्च करेंगे तो हजारों जवाब आएंगे, जिसमें से कुछ जवाब आपके काम के होंगे, वाजिब होंगे तो कुछ जवाब मजाकिया अंदाज वाले भी देखने को मिल जाएंगे. खैर, आपको ये तो पता ही होगा कि यूपीएससी को देश की कठिन परीक्षा माना जाता है, जिसमें पास करना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. वैसे तो हर साल लाखों की संख्या में छात्र ये एग्जाम देते हैं, लेकिन उनमें से महज कुछ ही लोगों का सेलेक्शन हो पाता है. सोशल मीडिया पर आजकल इसी से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़की मजेदार अंदाज में बिना पढ़े आईएएस बनने के टिप्स देती नजर आ रही है. आपने ऐसे वीडियोज देखे होंगे, जिसमें यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र या ये परीक्षा पास कर चुके लोग बताते हैं कि उन्होंने तो हर दिन आठ-दस घंटाटे पढ़ाई की और तब जाकर वो यूपीएससी क्लियर कर पाए, जबकि कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने तो दिन में महज चार-पाँच घंटाटे ही पढ़ाई की, जिसकी बदौलत वो पास हो गए. साथ ही वो दूसरों को भी ऐसे ही टिप्स देते नजर आते हैं कि उन्हें कितनी देर पढ़ाई करनी चाहिए, पर इस वायरल वीडियो में लड़की ने बिना पढ़े आईएएस बनने का जो टिप्स दिया है, उसे सुनकर तो आपकी हंसी ही छूट जाएगी. लड़की ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि बिना पढ़े तो सपनों में ही आईएएस बना जा सकता है, तो वहीं बनो. इस मजेदार वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @UPSC_Notes नाम की आईडी से शेयर किया गया है. महज पाँच सेकंड के इस वीडियो को अब तक आठ हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. वहीं, लोगों ने वीडियो देखने के बाद तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा है, 'अच्छा दीदी', तो एक अन्य यूजर ने लिखा है, 'अईयस ना आईएएस होता है दीदी'. इसी तरह एक और यूजर ने फिल्म का एक सीन शेयर करते हुए लिखा है, 'मस्त प्लान है'.
कर्नाटकः कर्नाटक SSLC 2017 की परीक्षाएं जिन बच्चों ने दी थी आखिरकार उनके लिए राहत भरी खबर आ ही गई। जी हां कर्नाटक SSLC 2017 का परीक्षा परिणाम आज दोपहर 3 बजे घोषित होगा। जिन बच्चों और माता-पिताओं को रिजल्ट का बेसबरी से इंतज़ार था, आज उनका इंतज़ार खत्म होने का दिन है। परीक्षा देने के बाद हर बच्चे के दिमाग में सिर्फ यही चलता है कि बस जल्दी से उसका रिजल्ट आ जाए, क्योंकि बच्चे अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए बेहद उतावले होते है। तो बस 3 बजे तक का करें इंतज़ार 3 बजे आपका रिजल्ट होगा आपके हाथों में। क्या-क्या चाहिए रिजल्ट देखने के लिए और कहाँ देखें रिजल्ट : - एडमिट कार्ड होना चाहिए। - आप अपना परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट http://kseeb. kar. nic. in/ पर जाकर देख सकते है। जहाँ एक तरफ बच्चे रिजल्ट जानने के लिए उतावले होते हैं तो वही माता-पिता को अपने बच्चों के परीक्षा परिणाम कि काफी चिंता होती है। उनके मन में रिजल्ट को लेकर डर बैठा रहता है, हांलाकि हम ये नही कह सकते की बच्चों को अपने परीक्षा परिणाम की कोई चिंता नही होती। जबाकि बच्चा भी अपने रिजल्ट को लेकर उतना ही चिंतित होता है, जितना कि उनके मम्मी-पापा। अब बस 3 बजे तक का इंतज़ार फिर उसके बाद SSLC 2017 के रिजल्ट घोषित हो जाएगें। कर्नाटक माध्यमिक शिक्षा परीक्षा बोर्ड सन 1966 में अस्तित्व में आया था और तब से यह बोर्ड SSLC और अन्य परीक्षाओं का संचालन करता आ रहा है। बोर्ड ने अपनी मूल्यांकन प्रणाली और परिणाम में सुधार करने का निर्णय लिया है, जिसके चलते बोर्ड ने मंडल कार्यालय स्थापित किए हैं। तो वही बोर्ड हर साल जून और मार्च के महीने में परीक्षा के असफल उम्मीदवारों के लिए पूरक परीक्षाएं भी आयोजित करता है।
कर्नाटकः कर्नाटक SSLC दो हज़ार सत्रह की परीक्षाएं जिन बच्चों ने दी थी आखिरकार उनके लिए राहत भरी खबर आ ही गई। जी हां कर्नाटक SSLC दो हज़ार सत्रह का परीक्षा परिणाम आज दोपहर तीन बजे घोषित होगा। जिन बच्चों और माता-पिताओं को रिजल्ट का बेसबरी से इंतज़ार था, आज उनका इंतज़ार खत्म होने का दिन है। परीक्षा देने के बाद हर बच्चे के दिमाग में सिर्फ यही चलता है कि बस जल्दी से उसका रिजल्ट आ जाए, क्योंकि बच्चे अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए बेहद उतावले होते है। तो बस तीन बजे तक का करें इंतज़ार तीन बजे आपका रिजल्ट होगा आपके हाथों में। क्या-क्या चाहिए रिजल्ट देखने के लिए और कहाँ देखें रिजल्ट : - एडमिट कार्ड होना चाहिए। - आप अपना परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट http://kseeb. kar. nic. in/ पर जाकर देख सकते है। जहाँ एक तरफ बच्चे रिजल्ट जानने के लिए उतावले होते हैं तो वही माता-पिता को अपने बच्चों के परीक्षा परिणाम कि काफी चिंता होती है। उनके मन में रिजल्ट को लेकर डर बैठा रहता है, हांलाकि हम ये नही कह सकते की बच्चों को अपने परीक्षा परिणाम की कोई चिंता नही होती। जबाकि बच्चा भी अपने रिजल्ट को लेकर उतना ही चिंतित होता है, जितना कि उनके मम्मी-पापा। अब बस तीन बजे तक का इंतज़ार फिर उसके बाद SSLC दो हज़ार सत्रह के रिजल्ट घोषित हो जाएगें। कर्नाटक माध्यमिक शिक्षा परीक्षा बोर्ड सन एक हज़ार नौ सौ छयासठ में अस्तित्व में आया था और तब से यह बोर्ड SSLC और अन्य परीक्षाओं का संचालन करता आ रहा है। बोर्ड ने अपनी मूल्यांकन प्रणाली और परिणाम में सुधार करने का निर्णय लिया है, जिसके चलते बोर्ड ने मंडल कार्यालय स्थापित किए हैं। तो वही बोर्ड हर साल जून और मार्च के महीने में परीक्षा के असफल उम्मीदवारों के लिए पूरक परीक्षाएं भी आयोजित करता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब बोर्ड टॉपर्स का मुख्यमंत्री भगवंत मान सम्मान कर सकते हैं। 10वीं में टॉप करने वाले स्टूडेंट्स को नकद पुरस्कार भी मिलेगा। स्टेट टॉपर पहली रैंक पाने वाली छात्रा को एक लाख रुपए दिया जाएगा। करियर डेस्क : पंजाब बोर्ड 10वीं में लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। 99. 34 प्रतिशत छात्राएं और 98. 83 फीसदी छात्र पास हुए हैं। पहली तीन रैंक पर भी बेटियों का ही कब्जा है। इसमें फिरोजपुर की नैंसी रानी (Nancy Rani), संगरूर की दिलप्रीत कौर (Dilpreet Kaur) और संगरूर की ही कोमलप्रीत कौर (Komanpreet Kaur) हैं। नैंसी और दिलप्रीत के एक बराबर ही नंबर आए हैं लेकिन नैंसी को पहली रैंक मिली है जबकि दिलप्रीत को दूसरी। जानिए समान मार्क्स मिलने पर भी दोनों को अलग-अलग पोजिशन क्यों दी गई है? पंजाब बोर्ड 10वीं में पहली तीन पोजिशन पर लड़कियां हैं। नैंसी रानी को 650 में से 644 नंबर मिले हैं। दिलप्रीत कौर को भी 650 में से 644 अंक मिले हैं। वहीं, कोमलप्रीत कौर को 650 में से 642 मार्क्स मिले हैं। नैंसी रानी और दिलप्रीत कौर ने एक बराबर ही नंबर प्राप्त किए हैं, लेकिन नैंसी उम्र में छोटी है, इसलिए PSEB बोर्ड के नियम के मुताबिक उन्हें फर्स्ट रैंक और दिलप्रीत को सेकंड रैंक मिली है। पंजाब बोर्ड 10वीं के पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया था। साल 2021 में 99. 93 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए थे। जिसमें से छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 99. 94 फीसदी और 99. 92 प्रतिशत छात्र पास हुए थे। 10वीं के रिजल्ट में इस बार गुरदासपुर जिले का परिणाम सबसे बेहतर है। यहां 99. 52 स्टूडेंट्स ने परीक्षा पास की है। इसके बाद पठानकोट का नंबर है। सबसे नीचे फिरोजपुर जिला है। यहां 98. 65 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। इस बार पंजाब बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में कुल 3 लाख 23 हजार 361 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इसमें से 3 लाख 16 हजार 699 स्टूडेंट्स को सफलता मिली है। इस साल 97. 94 फीसदी छात्र पास हुए हैं। बता दें कि पंजाब बोर्ड 12वीं का रिजल्ट 28 जून 2022 को जारी किया गया था। 12वीं में 96. 96 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए थे। उसी वक्त कयास लगाए गए थे कि इस बार 10वीं कक्षा का रिजल्ट भी 95 प्रतिशत से ऊपर ही देखने को मिल सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब बोर्ड टॉपर्स का मुख्यमंत्री भगवंत मान सम्मान कर सकते हैं। दसवीं में टॉप करने वाले स्टूडेंट्स को नकद पुरस्कार भी मिलेगा। स्टेट टॉपर पहली रैंक पाने वाली छात्रा को एक लाख रुपए दिया जाएगा। करियर डेस्क : पंजाब बोर्ड दसवीं में लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। निन्यानवे. चौंतीस प्रतिशत छात्राएं और अट्ठानवे. तिरासी फीसदी छात्र पास हुए हैं। पहली तीन रैंक पर भी बेटियों का ही कब्जा है। इसमें फिरोजपुर की नैंसी रानी , संगरूर की दिलप्रीत कौर और संगरूर की ही कोमलप्रीत कौर हैं। नैंसी और दिलप्रीत के एक बराबर ही नंबर आए हैं लेकिन नैंसी को पहली रैंक मिली है जबकि दिलप्रीत को दूसरी। जानिए समान मार्क्स मिलने पर भी दोनों को अलग-अलग पोजिशन क्यों दी गई है? पंजाब बोर्ड दसवीं में पहली तीन पोजिशन पर लड़कियां हैं। नैंसी रानी को छः सौ पचास में से छः सौ चौंतालीस नंबर मिले हैं। दिलप्रीत कौर को भी छः सौ पचास में से छः सौ चौंतालीस अंक मिले हैं। वहीं, कोमलप्रीत कौर को छः सौ पचास में से छः सौ बयालीस मार्क्स मिले हैं। नैंसी रानी और दिलप्रीत कौर ने एक बराबर ही नंबर प्राप्त किए हैं, लेकिन नैंसी उम्र में छोटी है, इसलिए PSEB बोर्ड के नियम के मुताबिक उन्हें फर्स्ट रैंक और दिलप्रीत को सेकंड रैंक मिली है। पंजाब बोर्ड दसवीं के पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया था। साल दो हज़ार इक्कीस में निन्यानवे. तिरानवे प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए थे। जिसमें से छात्राओं का पासिंग प्रतिशत निन्यानवे. चौरानवे फीसदी और निन्यानवे. बानवे प्रतिशत छात्र पास हुए थे। दसवीं के रिजल्ट में इस बार गुरदासपुर जिले का परिणाम सबसे बेहतर है। यहां निन्यानवे. बावन स्टूडेंट्स ने परीक्षा पास की है। इसके बाद पठानकोट का नंबर है। सबसे नीचे फिरोजपुर जिला है। यहां अट्ठानवे. पैंसठ प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। इस बार पंजाब बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में कुल तीन लाख तेईस हजार तीन सौ इकसठ छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इसमें से तीन लाख सोलह हजार छः सौ निन्यानवे स्टूडेंट्स को सफलता मिली है। इस साल सत्तानवे. चौरानवे फीसदी छात्र पास हुए हैं। बता दें कि पंजाब बोर्ड बारहवीं का रिजल्ट अट्ठाईस जून दो हज़ार बाईस को जारी किया गया था। बारहवीं में छियानवे. छियानवे प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए थे। उसी वक्त कयास लगाए गए थे कि इस बार दसवीं कक्षा का रिजल्ट भी पचानवे प्रतिशत से ऊपर ही देखने को मिल सकता है।
IND vs SA 1st ODI Match: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जा रहा है। इस मुकाबले में बारिश ने खलल डाली है। जिसके चलते यह मुकाबला 40-40 ओवर का निर्धारित किया गया है। IND vs SA 1st ODI Match: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जा रहा है। इस मुकाबले में बारिश ने खलल डाली है। जिसके चलते यह मुकाबला 40-40 ओवर का निर्धारित किया गया है। टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया है। अफ्रीका की टीम ने इस मैच में शानदार बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया। टीम के लिए डेविड मिलर और हेनरिच क्लासन ने सर्वाधिक रनों की पारी खेली। दोनों बल्लेबाज़ों ने अर्धशतक जमाया। जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज़ डीकॉक ने भी 48 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत को यह मुकाबला जीतने के लिए 250 रन बनाने होंगे। भारतीय गेंदबाज़ों ने जमकर दिए एक्स्ट्रा रनः इस मैच में टीम इंडिया के गेंदबाज़ों ने शुरूआती सफलता मिलने के बावजूद ख़ास प्रदर्शन नहीं किया। अपना पहला वनडे मैच खेल रहे रवि बिश्नोई ने भी काफी रन लुटाए। शार्दुल ठाकुर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 8 ओवर में 35 रन देकर दो बड़ी सफलता अर्जित की। लेकिन टीम इंडिया के अन्य गेंदबाज़ों ने अपनी लाइन लेंथ पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। और इस मैच में 21 एक्स्ट्रा रन दिए। जिसमें 15 वाइड बॉल शामिल रही। इसमें 8 वाइड के रन रवि बिश्नोई के नाम रहे। रवि बिश्नोई ने अपने वनडे करियर का पहला विकेट क्विंटन डिकॉक को आउट करके हासिल किया। डिकॉक ने इस मैच में 54 गेंदों में 48 रन बनाए। मारक्रम को कुलदीप यादव ने फिर फंसाया जाल मेंः इस मैच में कुलदीप यादव ने बेहतरीन गेंदबाज़ी की। लेकिन वो सिर्फ एक विकेट लेने में कामयाब हुए। उन्होंने अफ्रीका के सबसे धाकड़ बल्लेबाज़ एडेन मारक्रम को आउट किया। कुलदीप यादव ने मारक्रम को अपने जाल में तीसरी बार फंसाया है। कुलदीप ने 4 पारियों में मारक्रम को तीसरी बार आउट किया। इस मैच में मारक्रम बिना खाता खोले आउट हुए। यादव ने अपने आठ ओवर के स्पेल में सिर्फ 39 रन खर्च करके एक विकेट लिए। बारिश के कारण 40-40 ओवर का हुआ मैचः लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर होने वाले इस वनडे मैच पर बारिश का साया बना हुआ है। बारिश की खलल के चलते मैच के समय में बड़ा बदलाव किया गया है। बता दें इस मैच को लेकर बारिश के पूर्वानुमान से इकाना स्टेडियम के प्रबंधन की चिंता भी बढ़ गई हैं। लेकिन इसके बाद भी इकाना स्टेडियम के प्रबंधन के अनुसार अगर मैच के दौरान बारिश नहीं हुई तो मैच पूरा करवाने के लिए खासा इंतज़ाम किया गया है। टॉस में करीब दो घंटे की देरी हुई। लेकिन अब उम्मीद हैं यहां एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। बारिश के चलते यह मुकाबला 40-40 ओवर का निर्धारित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकाः जानेमन मलान, क्विंटन डिकॉक (विकेटकीपर), तेम्बा बावुमा (कप्तान), एडेन मार्करम, हेनरिक क्लासेन, डेविड मिलर, वेन पार्नेल, केशव महाराज, कगिसो रबाडा, लुंगी एनगिडी और तबरेज शम्सी। भारतः शिखर धवन (कप्तान), शुभमन गिल, ऋतुराज गायकवाड़, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन (विकेटकीपर), शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज और आवेश खान।
IND vs SA एकst ODI Match: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जा रहा है। इस मुकाबले में बारिश ने खलल डाली है। जिसके चलते यह मुकाबला चालीस-चालीस ओवर का निर्धारित किया गया है। IND vs SA एकst ODI Match: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जा रहा है। इस मुकाबले में बारिश ने खलल डाली है। जिसके चलते यह मुकाबला चालीस-चालीस ओवर का निर्धारित किया गया है। टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया है। अफ्रीका की टीम ने इस मैच में शानदार बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया। टीम के लिए डेविड मिलर और हेनरिच क्लासन ने सर्वाधिक रनों की पारी खेली। दोनों बल्लेबाज़ों ने अर्धशतक जमाया। जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज़ डीकॉक ने भी अड़तालीस रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत को यह मुकाबला जीतने के लिए दो सौ पचास रन बनाने होंगे। भारतीय गेंदबाज़ों ने जमकर दिए एक्स्ट्रा रनः इस मैच में टीम इंडिया के गेंदबाज़ों ने शुरूआती सफलता मिलने के बावजूद ख़ास प्रदर्शन नहीं किया। अपना पहला वनडे मैच खेल रहे रवि बिश्नोई ने भी काफी रन लुटाए। शार्दुल ठाकुर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए आठ ओवर में पैंतीस रन देकर दो बड़ी सफलता अर्जित की। लेकिन टीम इंडिया के अन्य गेंदबाज़ों ने अपनी लाइन लेंथ पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। और इस मैच में इक्कीस एक्स्ट्रा रन दिए। जिसमें पंद्रह वाइड बॉल शामिल रही। इसमें आठ वाइड के रन रवि बिश्नोई के नाम रहे। रवि बिश्नोई ने अपने वनडे करियर का पहला विकेट क्विंटन डिकॉक को आउट करके हासिल किया। डिकॉक ने इस मैच में चौवन गेंदों में अड़तालीस रन बनाए। मारक्रम को कुलदीप यादव ने फिर फंसाया जाल मेंः इस मैच में कुलदीप यादव ने बेहतरीन गेंदबाज़ी की। लेकिन वो सिर्फ एक विकेट लेने में कामयाब हुए। उन्होंने अफ्रीका के सबसे धाकड़ बल्लेबाज़ एडेन मारक्रम को आउट किया। कुलदीप यादव ने मारक्रम को अपने जाल में तीसरी बार फंसाया है। कुलदीप ने चार पारियों में मारक्रम को तीसरी बार आउट किया। इस मैच में मारक्रम बिना खाता खोले आउट हुए। यादव ने अपने आठ ओवर के स्पेल में सिर्फ उनतालीस रन खर्च करके एक विकेट लिए। बारिश के कारण चालीस-चालीस ओवर का हुआ मैचः लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर होने वाले इस वनडे मैच पर बारिश का साया बना हुआ है। बारिश की खलल के चलते मैच के समय में बड़ा बदलाव किया गया है। बता दें इस मैच को लेकर बारिश के पूर्वानुमान से इकाना स्टेडियम के प्रबंधन की चिंता भी बढ़ गई हैं। लेकिन इसके बाद भी इकाना स्टेडियम के प्रबंधन के अनुसार अगर मैच के दौरान बारिश नहीं हुई तो मैच पूरा करवाने के लिए खासा इंतज़ाम किया गया है। टॉस में करीब दो घंटे की देरी हुई। लेकिन अब उम्मीद हैं यहां एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। बारिश के चलते यह मुकाबला चालीस-चालीस ओवर का निर्धारित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकाः जानेमन मलान, क्विंटन डिकॉक , तेम्बा बावुमा , एडेन मार्करम, हेनरिक क्लासेन, डेविड मिलर, वेन पार्नेल, केशव महाराज, कगिसो रबाडा, लुंगी एनगिडी और तबरेज शम्सी। भारतः शिखर धवन , शुभमन गिल, ऋतुराज गायकवाड़, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन , शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज और आवेश खान।
दैत्यराज विषं दत्तस्महभिरति भीषणम्। जीर्ण तेन सहान्नेन प्रहलादेन सुतेन ते। त्वर्यतां त्वर्यतां हे सद्योदैत्यपुरोहिताः। कृत्यां तस्य विनाशय उत्पादयत मा चिरम्। । सकाशमागम्यः प्रह्लादस्य पुरोहिताः। सामषूर्वमथोचुस्ते प्रहलादं विनयान्वितम। । जातस्त्रलोक्य विख्यात आयुष्मन्ब्रह्मणाकुले। दैत्यराजस्य तनयो हिरण्यकशिपोर्भवान। । कि देवैः किमनन्तेन किमन्पेन तवाश्रयः। पिता ते सर्वलोकानां त्व तथैव भविष्यसि। । तस्मात्परित्यजैनां त्वं विपक्षस्तवसंहिताम्। श्लाध्यः पिता समस्तानां परमोगुरुः। । एवमेतन्महाभागाः श्लाध्यमेतन्महाकुलम। नान्यथा वदेत्। । सूदगण ने कहा, हे दैत्यराज! आपकी इच्छानुसार हमने अत्यंत तीक्षण विष दिया था, परंतु आपका पुत्र उसे अन्न के साथ ही पचा गया। हिरण्यकश्यप ने कहा, पुरोहितो! अब विलंब न करो, मारने के लिए अब शीघ्र ही कृत्या उत्पन्न करो। श्री पराशरजी ने कहा-यह सुनकर पुरोहितगण प्रह्लाद के पास गए और अति विनीत भाव से उन्होंने साम नीतिपूर्वक कहा। पुरोहित बोले, अरे आयुष्मान! तुम त्रैलोक्य प्रसिद्ध ब्रह्मकुल में अवतीर्ण हुए हो तथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप तुम्हारे पिता हैं। देवगण, अनंत अथवा किसी अन्य से भी तुम्हें क्या प्रयोजन है? तुम्हारे पिता सभी लोगों के आश्रय रूप हैं और तुम्हें भी वैसा ही होना चाहिए। पिता सर्वत्र प्रशंसनीय है, वहीं गुरुओं के परम गुरु हैं, इसलिए उन्हीं को स्तुति करनी चाहिए। पता च मम सर्वंस्मिज्जगत्युकृष्टचेष्टितः। एतदप्यवगच्छामि सत्यमत्रापि नानृतम्। । गुरुणामपि सर्वेषां पिता परमेको गुरुः। यदुक्तं भ्रांतिस्तत्रापि स्वल्पापि हि न विद्यते। । पिता गुरुर्न संदेहः पूजनीयः प्रयत्नतः। तत्रापि नापराध्यामीत्येवं मानसि में स्थितम। । यत्वेतत्किमनन्तेनेत्युक्त युष्माभिरीदृशम। को ब्रवीती यथान्याय्य किंतु नेतद्वचोऽथवत। । इत्युक्तबा सोऽभवन्मौनी तेषां गौरवयन्त्रितः। प्रहस्य च पुनः प्राह किमनन्तेन साध्वियि। । साधु भो किमरन्तेनसाधु भो गुयुवो मम। श्रूयता यदनन्तेन यदि खेद न यास्यथ। । प्रह्लाद ने कहा, हे महाभागो! आपका कथन यथार्थ है भगवान मरीचि का यह कुल संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है, इनमें अन्यथा नहीं है। यह भी ज्ञात है कि मेरे पिता जी भी संपूर्ण विश्व में अत्यंत पराक्रमी हैं, इसमें भी कुछ संदेह है। सभी गुरुओं में पिता ही परम गुरु है, आपके इस कथन में भी मुझे शंका नहीं है। पिता जी परम गुरु और पूजनीय हैं, यह भी निःसंदेह सत्य है तथा मैं भी उसके प्रति किसी अपराध में प्रवृत्त नहीं हूं। परंतु आपका यह कथन कि अनंत से क्या प्रायोजन है, क्या कभी न्यायोचित माना जा सकता है? इसे मैं ठीक नहीं मानता। यह कहकर उन पुरोहितों का मान रखने के लिए तो वह चुप हो गए और फिर हंसते हुए बोले, अनंत से क्या प्रायोजन आपको इस विचार को धन्यवाद है। हे गुरुओं! मुझे अनंत से क्या प्रायोजन? आपके इस विचार को धन्यवाद! यदि आप बुरा न मानें तो अनंत से जो प्रायोजन है। उसे कहता हूं, कृपया सुनिए।
दैत्यराज विषं दत्तस्महभिरति भीषणम्। जीर्ण तेन सहान्नेन प्रहलादेन सुतेन ते। त्वर्यतां त्वर्यतां हे सद्योदैत्यपुरोहिताः। कृत्यां तस्य विनाशय उत्पादयत मा चिरम्। । सकाशमागम्यः प्रह्लादस्य पुरोहिताः। सामषूर्वमथोचुस्ते प्रहलादं विनयान्वितम। । जातस्त्रलोक्य विख्यात आयुष्मन्ब्रह्मणाकुले। दैत्यराजस्य तनयो हिरण्यकशिपोर्भवान। । कि देवैः किमनन्तेन किमन्पेन तवाश्रयः। पिता ते सर्वलोकानां त्व तथैव भविष्यसि। । तस्मात्परित्यजैनां त्वं विपक्षस्तवसंहिताम्। श्लाध्यः पिता समस्तानां परमोगुरुः। । एवमेतन्महाभागाः श्लाध्यमेतन्महाकुलम। नान्यथा वदेत्। । सूदगण ने कहा, हे दैत्यराज! आपकी इच्छानुसार हमने अत्यंत तीक्षण विष दिया था, परंतु आपका पुत्र उसे अन्न के साथ ही पचा गया। हिरण्यकश्यप ने कहा, पुरोहितो! अब विलंब न करो, मारने के लिए अब शीघ्र ही कृत्या उत्पन्न करो। श्री पराशरजी ने कहा-यह सुनकर पुरोहितगण प्रह्लाद के पास गए और अति विनीत भाव से उन्होंने साम नीतिपूर्वक कहा। पुरोहित बोले, अरे आयुष्मान! तुम त्रैलोक्य प्रसिद्ध ब्रह्मकुल में अवतीर्ण हुए हो तथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप तुम्हारे पिता हैं। देवगण, अनंत अथवा किसी अन्य से भी तुम्हें क्या प्रयोजन है? तुम्हारे पिता सभी लोगों के आश्रय रूप हैं और तुम्हें भी वैसा ही होना चाहिए। पिता सर्वत्र प्रशंसनीय है, वहीं गुरुओं के परम गुरु हैं, इसलिए उन्हीं को स्तुति करनी चाहिए। पता च मम सर्वंस्मिज्जगत्युकृष्टचेष्टितः। एतदप्यवगच्छामि सत्यमत्रापि नानृतम्। । गुरुणामपि सर्वेषां पिता परमेको गुरुः। यदुक्तं भ्रांतिस्तत्रापि स्वल्पापि हि न विद्यते। । पिता गुरुर्न संदेहः पूजनीयः प्रयत्नतः। तत्रापि नापराध्यामीत्येवं मानसि में स्थितम। । यत्वेतत्किमनन्तेनेत्युक्त युष्माभिरीदृशम। को ब्रवीती यथान्याय्य किंतु नेतद्वचोऽथवत। । इत्युक्तबा सोऽभवन्मौनी तेषां गौरवयन्त्रितः। प्रहस्य च पुनः प्राह किमनन्तेन साध्वियि। । साधु भो किमरन्तेनसाधु भो गुयुवो मम। श्रूयता यदनन्तेन यदि खेद न यास्यथ। । प्रह्लाद ने कहा, हे महाभागो! आपका कथन यथार्थ है भगवान मरीचि का यह कुल संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है, इनमें अन्यथा नहीं है। यह भी ज्ञात है कि मेरे पिता जी भी संपूर्ण विश्व में अत्यंत पराक्रमी हैं, इसमें भी कुछ संदेह है। सभी गुरुओं में पिता ही परम गुरु है, आपके इस कथन में भी मुझे शंका नहीं है। पिता जी परम गुरु और पूजनीय हैं, यह भी निःसंदेह सत्य है तथा मैं भी उसके प्रति किसी अपराध में प्रवृत्त नहीं हूं। परंतु आपका यह कथन कि अनंत से क्या प्रायोजन है, क्या कभी न्यायोचित माना जा सकता है? इसे मैं ठीक नहीं मानता। यह कहकर उन पुरोहितों का मान रखने के लिए तो वह चुप हो गए और फिर हंसते हुए बोले, अनंत से क्या प्रायोजन आपको इस विचार को धन्यवाद है। हे गुरुओं! मुझे अनंत से क्या प्रायोजन? आपके इस विचार को धन्यवाद! यदि आप बुरा न मानें तो अनंत से जो प्रायोजन है। उसे कहता हूं, कृपया सुनिए।
मुंबई, मुंबई के कमला मिल्स के पब में आग लगने की दिल दहला देने वाली घटना में 14 लोगों के मारे जाने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बड़ी कार्रवाई की है. शनिवार को बीएमसी ने 314 स्थानों पर अवैध ढांचों को गिरा दिया और सात होटल सील कर दिए. बीएमसी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने शहर में और उपनगरों में 624 रेस्तरां, ढाबों व मॉल का निरीक्षण किया और 314 स्थानों पर बने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया. इसमें कहा गया कि बीएमसी ने कार्रवाई के दौरान सात होटल सील कर दिए और 417 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोअर परेल स्थित पब '1 एबव' के सह-मालिक हितेश सांघवी और जिगर सांघवी के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है. शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में सांघवी बंधुओं, एक अन्य सह-मालिक अभिजीत मनका और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था. निरीक्षण अभियान का ब्योरा देते हुए बीएमसी प्रवक्ता राम दोतोंडे ने बताया कि नगर निकाय के करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य में शामिल रहे. उन्होंने बताया कि न सिर्फ मध्य मुंबई बल्कि मलाड और मुलुंद सहित दूर दराज के इलाकों में भी अवैध होटलों और रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि दक्षिण मुंबई में पुलिस मुख्यालय के पास स्थित लोकप्रिय जफरान होटल का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया. इसके लिए नगर निकाय ने अपने पूरे कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने को कहा है. शिवाजी पार्क, मुलुंद, दहीसर, मलाड, पारसी जिमखाना, ग्रांट रोड, अंधेरी और घाटकोपर में भी अभियान चलाया गया. नगर निकाय ने अपने अधिकारियों को टीमें गठित करने का भी निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नए साल की पार्टियों के मद्देनजर रेस्तरां और बार सुरक्षा नियमों का पालन करें. कमला मिल्स में आग लगने की घटना के बाद शुक्रवार को बीएमसी ने लापरवाही बरतने के आरोप में अपने पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. दोतोंडे ने बताया कि मुंबई में 24 वार्ड हैं और सभी वार्डों में तीन टीमें रेस्तरां, पब और भोजनालय की जांच कर रही हैं. उन्होंने बताया कि सभी टीमों में 10-10 सदस्य हैं, जिनमें स्वास्थ्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और निरीक्षक शामिल हैं. महानगरपालिका प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने को कहा है. कई विभागों के कर्मचारियों के अवकाश और साप्ताहिक अवकाश भी रद्द कर दिए गए हैं. साथ ही इन अधिकारियों और कर्मचारियों को रेस्तरां और पबों की विस्तृत सूची दी गई है, जहां प्रारंभिक जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने की बात सामने आई है. निकाय प्रमुख अजय मेहता ने सभी सहायक नगरपालिका आयुक्तों और बीएमसी के उपायुक्तों को भेजे अपने संदेश में कहा कि सभी क्षेत्रीय उपायुक्त और वार्ड अधिकारियों से अनुरोध किया जाता है कि वे भवन व फैक्टरी विभागों के कर्मचारियों, चिकित्सा अधिकारी और दमकल विभाग के कर्मचारियों को मिलाकर एक टीम का गठन करें. इसमें कहा गया कि ये दल संबंधित वार्डों के सभी रेस्तरां में निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां आग लगने से बचने के पुख्ता इंतजाम हैं या नहीं. इसमें यह भी कहा गया कि परिसरों में आग लगने पर बचकर निकलने के लिए रास्ते व सीढ़ियां चौड़ी होनी चाहिए और यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि यह जगह अतिक्रमण से मुक्त हो.
मुंबई, मुंबई के कमला मिल्स के पब में आग लगने की दिल दहला देने वाली घटना में चौदह लोगों के मारे जाने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बड़ी कार्रवाई की है. शनिवार को बीएमसी ने तीन सौ चौदह स्थानों पर अवैध ढांचों को गिरा दिया और सात होटल सील कर दिए. बीएमसी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने शहर में और उपनगरों में छः सौ चौबीस रेस्तरां, ढाबों व मॉल का निरीक्षण किया और तीन सौ चौदह स्थानों पर बने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया. इसमें कहा गया कि बीएमसी ने कार्रवाई के दौरान सात होटल सील कर दिए और चार सौ सत्रह एलपीजी सिलेंडर जब्त किए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोअर परेल स्थित पब 'एक एबव' के सह-मालिक हितेश सांघवी और जिगर सांघवी के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है. शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में सांघवी बंधुओं, एक अन्य सह-मालिक अभिजीत मनका और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था. निरीक्षण अभियान का ब्योरा देते हुए बीएमसी प्रवक्ता राम दोतोंडे ने बताया कि नगर निकाय के करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य में शामिल रहे. उन्होंने बताया कि न सिर्फ मध्य मुंबई बल्कि मलाड और मुलुंद सहित दूर दराज के इलाकों में भी अवैध होटलों और रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि दक्षिण मुंबई में पुलिस मुख्यालय के पास स्थित लोकप्रिय जफरान होटल का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया. इसके लिए नगर निकाय ने अपने पूरे कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने को कहा है. शिवाजी पार्क, मुलुंद, दहीसर, मलाड, पारसी जिमखाना, ग्रांट रोड, अंधेरी और घाटकोपर में भी अभियान चलाया गया. नगर निकाय ने अपने अधिकारियों को टीमें गठित करने का भी निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नए साल की पार्टियों के मद्देनजर रेस्तरां और बार सुरक्षा नियमों का पालन करें. कमला मिल्स में आग लगने की घटना के बाद शुक्रवार को बीएमसी ने लापरवाही बरतने के आरोप में अपने पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. दोतोंडे ने बताया कि मुंबई में चौबीस वार्ड हैं और सभी वार्डों में तीन टीमें रेस्तरां, पब और भोजनालय की जांच कर रही हैं. उन्होंने बताया कि सभी टीमों में दस-दस सदस्य हैं, जिनमें स्वास्थ्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और निरीक्षक शामिल हैं. महानगरपालिका प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने को कहा है. कई विभागों के कर्मचारियों के अवकाश और साप्ताहिक अवकाश भी रद्द कर दिए गए हैं. साथ ही इन अधिकारियों और कर्मचारियों को रेस्तरां और पबों की विस्तृत सूची दी गई है, जहां प्रारंभिक जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने की बात सामने आई है. निकाय प्रमुख अजय मेहता ने सभी सहायक नगरपालिका आयुक्तों और बीएमसी के उपायुक्तों को भेजे अपने संदेश में कहा कि सभी क्षेत्रीय उपायुक्त और वार्ड अधिकारियों से अनुरोध किया जाता है कि वे भवन व फैक्टरी विभागों के कर्मचारियों, चिकित्सा अधिकारी और दमकल विभाग के कर्मचारियों को मिलाकर एक टीम का गठन करें. इसमें कहा गया कि ये दल संबंधित वार्डों के सभी रेस्तरां में निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां आग लगने से बचने के पुख्ता इंतजाम हैं या नहीं. इसमें यह भी कहा गया कि परिसरों में आग लगने पर बचकर निकलने के लिए रास्ते व सीढ़ियां चौड़ी होनी चाहिए और यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि यह जगह अतिक्रमण से मुक्त हो.
अमेठीः उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बीती 28 अप्रैल को बीस दिनों पूर्व गायब हुए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में जर्जर भवन में फांसी के फंदे से लटकती हुई लाश मिली थी। गुस्साए परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने और कारवाई न करने का आरोप लगाया। जिसको लेकर पुलिस परिजन और ग्रामीणों के बीच शव के अंतिम संस्कार करने को लेकर काफी हंगामा भी हुआ। पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह व सीओ के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए। ज्ञात हो कि थाना संग्रामपुर क्षेत्र मे विगत 28 अप्रैल को अनिकेश गुप्ता उर्फ मदन पुत्र बंशीलाल गुप्ता निवासी भौसिंहपुर थाना संग्रामपुर का क्षत विक्षत अवस्था में शव फांसी के फंदे से लटकता मिला था। जिसको लेकर परिजनों ने काफी हंगामा भी किया। उनका कहना था कि संग्रामपुर थाने से महज 100 मीटर दूरी पर हमारे पुत्र का क्षत-विक्षत अवस्था में शव मिला है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया था कि संग्रामपुर पुलिस के लापरवाही का नतीजा है कि आज हमारे लड़के का शव मिला। परिजनों ने कहा कि संग्रामपुर पुलिस पर विश्वास नहीं कर सकते। इसलिए इस घटना की जांच अमेठी क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार यादव के हाथो होनी चाहिए इस पर परिजनों व गुस्साए ग्रामीणों का संग्रामपुर पुलिस के बीच हंगामा हुआ। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने थाने का घेराव किया। मौके पर क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार, उपजिलाधिकारी अमेठी संजीव मौर्य पहुँच कर परिजनों से मिले। परिजनों को निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। वही पूर्व मंत्री डा. अमिता सिंह ने फोन करके परिजनों से बात की और स्थित का जायजा लिया वही उन्होंने पूरी सहायता करने का आश्वासन दिया। जिसपर परिजनों ने अपने लाल का अंतिम संस्कार किया।
अमेठीः उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बीती अट्ठाईस अप्रैल को बीस दिनों पूर्व गायब हुए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में जर्जर भवन में फांसी के फंदे से लटकती हुई लाश मिली थी। गुस्साए परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने और कारवाई न करने का आरोप लगाया। जिसको लेकर पुलिस परिजन और ग्रामीणों के बीच शव के अंतिम संस्कार करने को लेकर काफी हंगामा भी हुआ। पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह व सीओ के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए। ज्ञात हो कि थाना संग्रामपुर क्षेत्र मे विगत अट्ठाईस अप्रैल को अनिकेश गुप्ता उर्फ मदन पुत्र बंशीलाल गुप्ता निवासी भौसिंहपुर थाना संग्रामपुर का क्षत विक्षत अवस्था में शव फांसी के फंदे से लटकता मिला था। जिसको लेकर परिजनों ने काफी हंगामा भी किया। उनका कहना था कि संग्रामपुर थाने से महज एक सौ मीटर दूरी पर हमारे पुत्र का क्षत-विक्षत अवस्था में शव मिला है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया था कि संग्रामपुर पुलिस के लापरवाही का नतीजा है कि आज हमारे लड़के का शव मिला। परिजनों ने कहा कि संग्रामपुर पुलिस पर विश्वास नहीं कर सकते। इसलिए इस घटना की जांच अमेठी क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार यादव के हाथो होनी चाहिए इस पर परिजनों व गुस्साए ग्रामीणों का संग्रामपुर पुलिस के बीच हंगामा हुआ। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने थाने का घेराव किया। मौके पर क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार, उपजिलाधिकारी अमेठी संजीव मौर्य पहुँच कर परिजनों से मिले। परिजनों को निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। वही पूर्व मंत्री डा. अमिता सिंह ने फोन करके परिजनों से बात की और स्थित का जायजा लिया वही उन्होंने पूरी सहायता करने का आश्वासन दिया। जिसपर परिजनों ने अपने लाल का अंतिम संस्कार किया।
GAYA : कांग्रेस नेता डॉ0 विजय कुमार शर्मा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वैक्सीन घर की खेती बेचकर नही खरीदा है. ये वैक्सीन जनता के पैसे का है. उन्होंने यह भी कहा की नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन विदेश भेज दिया, जिसकी कमी से देश में लोगों की मौत हुई है. इसके लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेवार हैं. उन्होंने यह भी कहा की हमारे देश में ऑक्सीजन की कमी हो गयी और ऑक्सीजन विदेश भेज दिया गया. उन्होंने यह भी कहा की दूसरे फेज में कोरोना आने से पहले पूरी दुनिया के देशों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त किया. लेकिन भारत इसमें जीरो रहा. भारत में चुनाव और कुम्भ का आयोजन होता रहा. वहीँ उन्होंने जन अधिकार पार्टी के सुप्रीमो पप्पू यादव के गिरफ्तारी पर कहा कि पप्पू यादव गरीबों के नेता हैं. इतने बीमार होने के बाद भी अपने कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रख कर गरीबों को देने का काम किया. महामारी में गरीबो को खाना भी खिलाया और खुद बिहार के सभी हॉस्पिटलों में जाकर मरीजों का हाल चाल जाना. उन्होंने कहा की मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछना चाहता हूँ की गरीबों की सेवा करना गुनाह है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पप्पू यादव को जल्द से जल्द रिहा कराने की मांग की.
GAYA : कांग्रेस नेता डॉशून्य विजय कुमार शर्मा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वैक्सीन घर की खेती बेचकर नही खरीदा है. ये वैक्सीन जनता के पैसे का है. उन्होंने यह भी कहा की नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन विदेश भेज दिया, जिसकी कमी से देश में लोगों की मौत हुई है. इसके लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेवार हैं. उन्होंने यह भी कहा की हमारे देश में ऑक्सीजन की कमी हो गयी और ऑक्सीजन विदेश भेज दिया गया. उन्होंने यह भी कहा की दूसरे फेज में कोरोना आने से पहले पूरी दुनिया के देशों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त किया. लेकिन भारत इसमें जीरो रहा. भारत में चुनाव और कुम्भ का आयोजन होता रहा. वहीँ उन्होंने जन अधिकार पार्टी के सुप्रीमो पप्पू यादव के गिरफ्तारी पर कहा कि पप्पू यादव गरीबों के नेता हैं. इतने बीमार होने के बाद भी अपने कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रख कर गरीबों को देने का काम किया. महामारी में गरीबो को खाना भी खिलाया और खुद बिहार के सभी हॉस्पिटलों में जाकर मरीजों का हाल चाल जाना. उन्होंने कहा की मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछना चाहता हूँ की गरीबों की सेवा करना गुनाह है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पप्पू यादव को जल्द से जल्द रिहा कराने की मांग की.
हाल ही में 'साइंटिफिक डेटा' पत्रिका में प्रकाशित शोध में ग्लोबल वार्मिंग के शीर्ष 10 योगदानकर्त्ताओं में भारत को पाँचवाँ स्थान दिया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदुः - शीर्ष योगदानकर्त्ताः - तापमान में 0.28 डिग्री सेल्सियस (17.3%) वृद्धि के कारण अपने कुल उत्सर्जन के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका सूची में शीर्ष स्थान पर है। - चीन दूसरे और रूस तीसरे स्थान पर रहा। - भारत की स्थितिः - भारत वर्ष 2005 के 10वें स्थान से पाँचवें स्थान पर पहुँच गया। - वर्ष 1850 से 2021 तक 0.08 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग के लिये भारत उत्तरदायी है। - वर्ष 1851-2021 से भारत के कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4) और नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में क्रमशः 0.04 डिग्री सेल्सियस, 0.03 डिग्री सेल्सियस और 0.006 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग देखी गई है। - वार्मिंग का कारणः - विश्व के आधे देशों में भूमि उपयोग और वानिकी क्षेत्र का वार्मिंग में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। - ब्राज़ील में भूमि उपयोग, भूमि उपयोग परिवर्तन और वानिकी (LULUCF) से CO2 उत्सर्जन के कारण 0.04 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग हुई। - इसके अतिरिक्त LULUCF क्षेत्र ने वर्ष 1851-2021 के बीच CH4 उत्सर्जन के कारण कुल वार्मिंग में 38% और N2O उत्सर्जन की वजह से 72% का योगदान रहा। - रिपोर्ट में वनों की अंधाधुंध कटाई एवं कृषि विस्तार से जुड़े उत्सर्जन पर प्रकाश डाला गया है। - जीवाश्म ईंधन का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान अभी भी बना हुआ है। वर्ष 1992 के बाद से वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के कारण होने वाली अतिरिक्त वार्मिंग भूमि-उपयोग परिवर्तन के कारण चार गुना से अधिक हो गई है। ग्रीनहाउस गैसेंः - ग्रीनहाउस गैस एक ऐसी गैस है जो थर्मल इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य पर चमकदार ऊर्जा को अवशोषित एवं उत्सर्जित करती है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव उत्पन्न होता है। - पृथ्वी के वायुमंडल में प्राथमिक ग्रीनहाउस गैस जल वाष्प (H2O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और ओज़ोन (O3) हैं। प्रश्न. निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक पक्षाभ मेघ विरलन तकनीक तथा समताप मंडल में सल्फेट वायु विलय अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?(2019)
हाल ही में 'साइंटिफिक डेटा' पत्रिका में प्रकाशित शोध में ग्लोबल वार्मिंग के शीर्ष दस योगदानकर्त्ताओं में भारत को पाँचवाँ स्थान दिया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदुः - शीर्ष योगदानकर्त्ताः - तापमान में शून्य दशमलव अट्ठाईस डिग्री सेल्सियस वृद्धि के कारण अपने कुल उत्सर्जन के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका सूची में शीर्ष स्थान पर है। - चीन दूसरे और रूस तीसरे स्थान पर रहा। - भारत की स्थितिः - भारत वर्ष दो हज़ार पाँच के दसवें स्थान से पाँचवें स्थान पर पहुँच गया। - वर्ष एक हज़ार आठ सौ पचास से दो हज़ार इक्कीस तक शून्य दशमलव आठ डिग्री सेल्सियस वार्मिंग के लिये भारत उत्तरदायी है। - वर्ष एक हज़ार आठ सौ इक्यावन-दो हज़ार इक्कीस से भारत के कार्बन डाइऑक्साइड , मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में क्रमशः शून्य दशमलव चार डिग्री सेल्सियस, शून्य दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस और शून्य दशमलव छः डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग देखी गई है। - वार्मिंग का कारणः - विश्व के आधे देशों में भूमि उपयोग और वानिकी क्षेत्र का वार्मिंग में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। - ब्राज़ील में भूमि उपयोग, भूमि उपयोग परिवर्तन और वानिकी से COदो उत्सर्जन के कारण शून्य दशमलव चार डिग्री सेल्सियस वार्मिंग हुई। - इसके अतिरिक्त LULUCF क्षेत्र ने वर्ष एक हज़ार आठ सौ इक्यावन-दो हज़ार इक्कीस के बीच CHचार उत्सर्जन के कारण कुल वार्मिंग में अड़तीस% और NदोO उत्सर्जन की वजह से बहत्तर% का योगदान रहा। - रिपोर्ट में वनों की अंधाधुंध कटाई एवं कृषि विस्तार से जुड़े उत्सर्जन पर प्रकाश डाला गया है। - जीवाश्म ईंधन का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान अभी भी बना हुआ है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ बानवे के बाद से वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के कारण होने वाली अतिरिक्त वार्मिंग भूमि-उपयोग परिवर्तन के कारण चार गुना से अधिक हो गई है। ग्रीनहाउस गैसेंः - ग्रीनहाउस गैस एक ऐसी गैस है जो थर्मल इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य पर चमकदार ऊर्जा को अवशोषित एवं उत्सर्जित करती है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव उत्पन्न होता है। - पृथ्वी के वायुमंडल में प्राथमिक ग्रीनहाउस गैस जल वाष्प , कार्बन डाइऑक्साइड , मीथेन , नाइट्रस ऑक्साइड और ओज़ोन हैं। प्रश्न. निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक पक्षाभ मेघ विरलन तकनीक तथा समताप मंडल में सल्फेट वायु विलय अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?
खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है. वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता. यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है. नेट हाउस या पॉली हाउस में आम तौर पर सब्जियों की खेती की जाती है. संरक्षित खेती में विशेष तौर से छोटे आकार के फलों को ही उगाया जाता है. लेकिन इसमें अब केले की खेती भी हो रही है और किसान अपनी आय कई गुना तक बढ़ा रहे हैं. गुजरात के कच्छ में किसानों ने प्रयोग के तौर पर नेट में केले की खेती शुरू की और उन्हें जबरदस्त सफलता मिली. खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है. साथ ही जैविक और अजैविक कारकों से भी फसल नेट हाउस में प्रभावित नहीं होती. वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता. यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है. कच्छ के किसान हरेश भाई नेट हाउस में केले की खेती कर रहे हैं. डीडी किसान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरेश भाई तीन साल पहले इजराइल गए थे. वहां पर उन्होंने देखा कि नेट हाउस में केले की खेती भी हो रही है. आने के बाद हरेश भाई ने केले की जी-9 किस्म की खेती शुरू की. हरेश भाई बताते हैं कि मैंनै एक एकड़ में 1244 प्लांट लगाए हैं. एक-एक केले का लूम 60 किलो का हो रहा है. सामान्य तौर पर लगाने से मुश्किल से 20 से 25 किलो का लूम होता है. उन्होंने बताया कि नेट हाउस में केले की खेती कर किसान अपनी इनकम दोगुनी ही नहीं, चार गुनी तक बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि नेट हाउस बनाने में भी सरकार से मदद मिल रही है. हरेश भाई के मुताबिक, जब मैंने नेट हाउस बनाया तो मुझे सरकार की तरफ 65 प्रतिशत सब्सिडी मिली है. अपने जेब से लगाया गया पैसा भी जल्द ही वापस आ गया. गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन होने से लोग इन केलों की खरीद बड़ी चाव से करते हैं. नेट हाउस के केले की गुणवत्ता एक्सपोर्ट लायक होती है. सरकार एपीडा के माध्यम से इन केलों का दूसरे कई देशों में निर्यात करती है और इसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है. इस समय जी-9 किस्म के केले की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. यहां के कृषि विज्ञान केंद्र ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका अदा की है. कृषि विज्ञान केंद्र, कच्छ के वैज्ञानिक डॉ राम निवास कहते हैं कि नेट हाउस में केले की खेती में कई फायदे हैं. पहला तो कीट और मौसम की मार का असर नहीं पड़ता. केले के पौधे तेज हवाओं को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और उखड़ जाते हैं. लेकिन नेट हाउस में इस समस्या से भी निजात मिल जाती है. किसानों का कीट आदी पर लगने वाला खर्च बच जाता है. नुकसान न के बराबर होता है, जिससे आय में बढ़ोतरी होती है. वहीं गुणवत्ता इतनी अच्छी होती है कि बाहर से लोग ऑर्डर देते हैं.
खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है. वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता. यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है. नेट हाउस या पॉली हाउस में आम तौर पर सब्जियों की खेती की जाती है. संरक्षित खेती में विशेष तौर से छोटे आकार के फलों को ही उगाया जाता है. लेकिन इसमें अब केले की खेती भी हो रही है और किसान अपनी आय कई गुना तक बढ़ा रहे हैं. गुजरात के कच्छ में किसानों ने प्रयोग के तौर पर नेट में केले की खेती शुरू की और उन्हें जबरदस्त सफलता मिली. खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है. साथ ही जैविक और अजैविक कारकों से भी फसल नेट हाउस में प्रभावित नहीं होती. वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता. यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है. कच्छ के किसान हरेश भाई नेट हाउस में केले की खेती कर रहे हैं. डीडी किसान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरेश भाई तीन साल पहले इजराइल गए थे. वहां पर उन्होंने देखा कि नेट हाउस में केले की खेती भी हो रही है. आने के बाद हरेश भाई ने केले की जी-नौ किस्म की खेती शुरू की. हरेश भाई बताते हैं कि मैंनै एक एकड़ में एक हज़ार दो सौ चौंतालीस प्लांट लगाए हैं. एक-एक केले का लूम साठ किलो का हो रहा है. सामान्य तौर पर लगाने से मुश्किल से बीस से पच्चीस किलो का लूम होता है. उन्होंने बताया कि नेट हाउस में केले की खेती कर किसान अपनी इनकम दोगुनी ही नहीं, चार गुनी तक बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि नेट हाउस बनाने में भी सरकार से मदद मिल रही है. हरेश भाई के मुताबिक, जब मैंने नेट हाउस बनाया तो मुझे सरकार की तरफ पैंसठ प्रतिशत सब्सिडी मिली है. अपने जेब से लगाया गया पैसा भी जल्द ही वापस आ गया. गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन होने से लोग इन केलों की खरीद बड़ी चाव से करते हैं. नेट हाउस के केले की गुणवत्ता एक्सपोर्ट लायक होती है. सरकार एपीडा के माध्यम से इन केलों का दूसरे कई देशों में निर्यात करती है और इसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है. इस समय जी-नौ किस्म के केले की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. यहां के कृषि विज्ञान केंद्र ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका अदा की है. कृषि विज्ञान केंद्र, कच्छ के वैज्ञानिक डॉ राम निवास कहते हैं कि नेट हाउस में केले की खेती में कई फायदे हैं. पहला तो कीट और मौसम की मार का असर नहीं पड़ता. केले के पौधे तेज हवाओं को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और उखड़ जाते हैं. लेकिन नेट हाउस में इस समस्या से भी निजात मिल जाती है. किसानों का कीट आदी पर लगने वाला खर्च बच जाता है. नुकसान न के बराबर होता है, जिससे आय में बढ़ोतरी होती है. वहीं गुणवत्ता इतनी अच्छी होती है कि बाहर से लोग ऑर्डर देते हैं.
नई दिल्ली : अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थशास्त्रियों के साथ मुलाकात कर अहम बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पांच अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। नीति आयोग द्वारा आयोजित इस बैठक में 40 अर्थशास्त्रियों और अन्य एक्सपर्ट ने भाग लिया। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी है। जनवरी-मार्च के बीच देश की विकास दर 5। 8 फीसदी तक ही पहुंच सकी थी। इस बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल थे। यह बैठक 'इकोनॉमिक पॉलिसी-द रोड अहेड' की थीम पर आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें रोजगार और मैक्रो- इकोनॉमी, खेती व जल संसाधन, निर्यात, शिक्षा व स्वास्थ्य प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को अर्थव्यवस्था से जुड़े जाटिल मुद्दों पर सुझाव देने पर धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी सरकार सभी मुद्दों पर दिए गए सुझावों को अमल में लाने का प्रयास करेगी। As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
नई दिल्ली : अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थशास्त्रियों के साथ मुलाकात कर अहम बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पांच अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। नीति आयोग द्वारा आयोजित इस बैठक में चालीस अर्थशास्त्रियों और अन्य एक्सपर्ट ने भाग लिया। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी है। जनवरी-मार्च के बीच देश की विकास दर पाँच। आठ फीसदी तक ही पहुंच सकी थी। इस बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल थे। यह बैठक 'इकोनॉमिक पॉलिसी-द रोड अहेड' की थीम पर आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें रोजगार और मैक्रो- इकोनॉमी, खेती व जल संसाधन, निर्यात, शिक्षा व स्वास्थ्य प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को अर्थव्यवस्था से जुड़े जाटिल मुद्दों पर सुझाव देने पर धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी सरकार सभी मुद्दों पर दिए गए सुझावों को अमल में लाने का प्रयास करेगी। As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
उप-राष्ट्रपति पद के लिए 5 अगस्त को चुनाव होगा। राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रमुख चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी ने आज प्रेस कॉंफ़्रेस में इस आशय की घोषणा की। आयोग 4 जुलाई को चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 18 जुलाई होगी तथा छंटनी का कार्य 19 जुलाई को किया जाएगा। उपराष्ट्रपति चुनाव की मतगणना मतदान वाले दिन , पांच अगस्त को ही होगी। मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है, वह दो बार से इस पद पर हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित और नामांकित सदस्य उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है, इस समय दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या 790 है लेकिन कुछ सीट खाली हैं। उम्मीदवार को बतौर ज़मानत 15 हज़ार रुपये जमा करवाने होते हैं। उम्मीदवार की उम्र 35 साल होनी चाहिये और वह केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिये। ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर देश में सरगर्मियां चल रही हैं। सत्ताधारी दल की ओर से बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंदो को मैदान में उतारा गया है जबकि विपक्ष ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों नेता अपना नामांकन भर चुके हैं और अब पूरे देश में प्रचार कर रहे हैं। 7 जुलाई सोमवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले जाएंगे और 20 जुलाई को मतगणना होगी।
उप-राष्ट्रपति पद के लिए पाँच अगस्त को चुनाव होगा। राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रमुख चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी ने आज प्रेस कॉंफ़्रेस में इस आशय की घोषणा की। आयोग चार जुलाई को चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा। नामांकन भरने की अंतिम तिथि अट्ठारह जुलाई होगी तथा छंटनी का कार्य उन्नीस जुलाई को किया जाएगा। उपराष्ट्रपति चुनाव की मतगणना मतदान वाले दिन , पांच अगस्त को ही होगी। मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल दस अगस्त को समाप्त हो रहा है, वह दो बार से इस पद पर हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित और नामांकित सदस्य उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है, इस समय दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या सात सौ नब्बे है लेकिन कुछ सीट खाली हैं। उम्मीदवार को बतौर ज़मानत पंद्रह हज़ार रुपये जमा करवाने होते हैं। उम्मीदवार की उम्र पैंतीस साल होनी चाहिये और वह केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिये। ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर देश में सरगर्मियां चल रही हैं। सत्ताधारी दल की ओर से बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंदो को मैदान में उतारा गया है जबकि विपक्ष ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों नेता अपना नामांकन भर चुके हैं और अब पूरे देश में प्रचार कर रहे हैं। सात जुलाई सोमवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले जाएंगे और बीस जुलाई को मतगणना होगी।
।। उत्तरकथा ।। ६३१ तुम्हारी जान के के छूट सकती है ? अब ठो नाती-पोतों के दिन आये हैं। कर्तव्य से ज्यादा किसी सम्बन्ध में सनना नहीं चाहती । क्या सब कुछ तुम्हारे हाथ में है ? न हो, पर सब कुछ बेहाथ भी नहीं होता। अब चोजों पर से हमारी पकड़ ढीलो हो रही है । इसके पहले कि उनके जाने का हमें दुःख हो, अच्छा है कि हम पहले से त्यागने की मनःस्थिति बना लें । वो, पंचापन को तुमने सौ रुपये दिये कि नहीं ? सौ रुपये ? किस बात के लिए ? अरे वो मन्या ने दिल्ली के पते पर मँगवाये हैं कि नहीं। मन्या ने अच्छी हम लोगों को सांसत कर रखी है । उसको पार्टी न हुई हमारी जान की आफत हो गयी। पढ़ना-लिखना सब छोड़कर कभी कलकत्ता तो कभी दिल्ली - घरवाले तो उसके लेखे से जैसे हैं ही नहीं। पता नहीं किसी दिन कोई मुसीबत न खड़ी कर ले अपने लिए । तभी बाहर के दरवाजे को 'कल' वोली। दोनों ने एक साथ ही देखा कि श्रीमती नर्मदा देवी उपाध्याय अपनी बहू के साथ आयी हैं।
।। उत्तरकथा ।। छः सौ इकतीस तुम्हारी जान के के छूट सकती है ? अब ठो नाती-पोतों के दिन आये हैं। कर्तव्य से ज्यादा किसी सम्बन्ध में सनना नहीं चाहती । क्या सब कुछ तुम्हारे हाथ में है ? न हो, पर सब कुछ बेहाथ भी नहीं होता। अब चोजों पर से हमारी पकड़ ढीलो हो रही है । इसके पहले कि उनके जाने का हमें दुःख हो, अच्छा है कि हम पहले से त्यागने की मनःस्थिति बना लें । वो, पंचापन को तुमने सौ रुपये दिये कि नहीं ? सौ रुपये ? किस बात के लिए ? अरे वो मन्या ने दिल्ली के पते पर मँगवाये हैं कि नहीं। मन्या ने अच्छी हम लोगों को सांसत कर रखी है । उसको पार्टी न हुई हमारी जान की आफत हो गयी। पढ़ना-लिखना सब छोड़कर कभी कलकत्ता तो कभी दिल्ली - घरवाले तो उसके लेखे से जैसे हैं ही नहीं। पता नहीं किसी दिन कोई मुसीबत न खड़ी कर ले अपने लिए । तभी बाहर के दरवाजे को 'कल' वोली। दोनों ने एक साथ ही देखा कि श्रीमती नर्मदा देवी उपाध्याय अपनी बहू के साथ आयी हैं।
राष्ट्रगान अपमान केस में पश्चिम बंगाल की मुख्य्मंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। आपको बता दें कि सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राष्ट्रगान अपमान केस में पुलिस जांच के आदेश दे दिए हैं। इसी के साथ ही पुलिस को मामले की जांच कर 28 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दे दिया गया है। सीएम ममता बनर्जी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में शिकायत रद्द करने की मांग कर थी लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया। अब मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ पुलिस जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पूरा मामला दिसंबर 2021 का है। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सीएम ममता पर भाजपा नेता विवेकानंद गुप्ता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। बीजेपी नेता की शिकायत पर कोर्ट ने मार्च 2022 में ममता बनर्जी को समन जारी किया था। इसके बाद सीएम ममता ने इस समन को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने ये मामला मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया था। इसके बाद सीएम ममता बनर्जी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सीएम ममता ने हाई कोर्ट में इस शिकायत को खत्म करने की मांग की थी। इस अर्जी में ममता बनर्जी ने कहा कि सत्र अदालत को समन हमेशा के लिए रद्द कर देना चाहिए था न कि मामले को दोबारा विचार करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेजना चाहिए था। जस्टिस बोरकर ने कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। भाजपा नेता की शिकायत के अनुसार दिसंबर 2021 में ममता बनर्जी कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई के यशवंतराव चव्हाण ऑडिटॉरियम पहुँची थीं। कार्यक्रम में राष्ट्रगान बजने के बाद तक वे बैठी रहीं। इसके बाद अचानक से उठीं। राष्ट्रगान की 2 पक्तियाँ गाने के बाद राष्ट्रगान के बीच हीं वे कार्यक्रम स्थल से चली गईं। बीजेपी नेता विवेकानंद गुप्ता ने मार्च 2022 में इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद बंगाल की सीएम को समन जारी किया गया।
राष्ट्रगान अपमान केस में पश्चिम बंगाल की मुख्य्मंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। आपको बता दें कि सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राष्ट्रगान अपमान केस में पुलिस जांच के आदेश दे दिए हैं। इसी के साथ ही पुलिस को मामले की जांच कर अट्ठाईस अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दे दिया गया है। सीएम ममता बनर्जी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में शिकायत रद्द करने की मांग कर थी लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया। अब मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ पुलिस जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पूरा मामला दिसंबर दो हज़ार इक्कीस का है। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सीएम ममता पर भाजपा नेता विवेकानंद गुप्ता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। बीजेपी नेता की शिकायत पर कोर्ट ने मार्च दो हज़ार बाईस में ममता बनर्जी को समन जारी किया था। इसके बाद सीएम ममता ने इस समन को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने ये मामला मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया था। इसके बाद सीएम ममता बनर्जी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सीएम ममता ने हाई कोर्ट में इस शिकायत को खत्म करने की मांग की थी। इस अर्जी में ममता बनर्जी ने कहा कि सत्र अदालत को समन हमेशा के लिए रद्द कर देना चाहिए था न कि मामले को दोबारा विचार करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेजना चाहिए था। जस्टिस बोरकर ने कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। भाजपा नेता की शिकायत के अनुसार दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में ममता बनर्जी कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई के यशवंतराव चव्हाण ऑडिटॉरियम पहुँची थीं। कार्यक्रम में राष्ट्रगान बजने के बाद तक वे बैठी रहीं। इसके बाद अचानक से उठीं। राष्ट्रगान की दो पक्तियाँ गाने के बाद राष्ट्रगान के बीच हीं वे कार्यक्रम स्थल से चली गईं। बीजेपी नेता विवेकानंद गुप्ता ने मार्च दो हज़ार बाईस में इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद बंगाल की सीएम को समन जारी किया गया।
जहरीली शराब से अलीगढ़ में 100 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले शराब माफिया और उनके इस अवैध काम में साथ देने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। शासन व डीजीपी मुख्यालय के निर्देशानुसार पुलिस ने गुरुवार को शराब कांड के अपराधियों के खिलाफ अभियान शुरू किया और गैंगस्टर एक्ट के आरोपी की 10 लाख रुपए की अचल संपत्ति कुर्क की। पुलिस के अनुसार यह सारी संपत्ति अवैध शराब के कारोबार से ही अर्जित की गई है, जिसके चलते गैंगस्टर एक्ट अधिनियम के तहत इसकी कुर्की की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी के निर्देशानुसार शराब माफिया सुमित कुमार उर्फ सोनी पुत्र सुरेशपाल सिंह निवासी हैदरनगर थाना अकराबाद, हाल निवासी शंकर विहार कालोनी थाना क्वार्सी अलीगढ़ के विरुद्ध अपमिश्रित शराब का कारोबार/व्यापार कर अवैध रूप से अर्जित की गयी सम्पत्ति का चिन्हीकरण करने के बाद गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के अन्तर्गत कार्यवाही की गई। इसमें अचल 10,46,714 रुपए की अचल संपत्ति को जब्त किया गया है। इसमें पुलिस ने मौजा अलहदादपुर स्थित प्लाट सं. 49 खसरा सं. 964 कीमत 6,18,714 रुपए और मौजा अदौन स्थित गाटा सं. 1610 रकबा 0. 242 भूमि कीमत करीब 4,28,000 रुपए को जब्त किया गया है। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि जहरीली शराब से लोगों की जान लेने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शराब माफियाओं के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करते हुए पुलिए अब तक 73 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। इससे पहले शराब माफिया अनिल चौधरी, विपिन यादव उर्फ ओमवीर सिंह, मुनीष कुमार शर्मा, रिषी कुमार, अर्जुन, विक्रम सिंह व नीरज चौधरी, रविन्द्र पाठक, सतीश कुमार उर्फ खुराना की सम्पत्ति गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुर्क की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आगे भी यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जहरीली शराब से अलीगढ़ में एक सौ से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले शराब माफिया और उनके इस अवैध काम में साथ देने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। शासन व डीजीपी मुख्यालय के निर्देशानुसार पुलिस ने गुरुवार को शराब कांड के अपराधियों के खिलाफ अभियान शुरू किया और गैंगस्टर एक्ट के आरोपी की दस लाख रुपए की अचल संपत्ति कुर्क की। पुलिस के अनुसार यह सारी संपत्ति अवैध शराब के कारोबार से ही अर्जित की गई है, जिसके चलते गैंगस्टर एक्ट अधिनियम के तहत इसकी कुर्की की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी के निर्देशानुसार शराब माफिया सुमित कुमार उर्फ सोनी पुत्र सुरेशपाल सिंह निवासी हैदरनगर थाना अकराबाद, हाल निवासी शंकर विहार कालोनी थाना क्वार्सी अलीगढ़ के विरुद्ध अपमिश्रित शराब का कारोबार/व्यापार कर अवैध रूप से अर्जित की गयी सम्पत्ति का चिन्हीकरण करने के बाद गैंगस्टर एक्ट की धारा चौदह के अन्तर्गत कार्यवाही की गई। इसमें अचल दस,छियालीस,सात सौ चौदह रुपयापए की अचल संपत्ति को जब्त किया गया है। इसमें पुलिस ने मौजा अलहदादपुर स्थित प्लाट सं. उनचास खसरा सं. नौ सौ चौंसठ कीमत छः,अट्ठारह,सात सौ चौदह रुपयापए और मौजा अदौन स्थित गाटा सं. एक हज़ार छः सौ दस रकबा शून्य. दो सौ बयालीस भूमि कीमत करीब चार,अट्ठाईस,शून्य रुपयापए को जब्त किया गया है। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि जहरीली शराब से लोगों की जान लेने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शराब माफियाओं के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करते हुए पुलिए अब तक तिहत्तर करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। इससे पहले शराब माफिया अनिल चौधरी, विपिन यादव उर्फ ओमवीर सिंह, मुनीष कुमार शर्मा, रिषी कुमार, अर्जुन, विक्रम सिंह व नीरज चौधरी, रविन्द्र पाठक, सतीश कुमार उर्फ खुराना की सम्पत्ति गैंगस्टर एक्ट की धारा चौदह के तहत कुर्क की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आगे भी यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छायाः- अहोनञ्चेन्द्रियत्वमपि स लभते, उत्तमधर्मच तिहि दुर्लभा । कुतिथि निपेवको जनः, समयं गौतम ! मा प्रमादीः ॥१८॥ शब्दार्थः- हे गौतम ! वह जीव यदि परिपूर्ण पांचों इन्द्रियां प्राप्त कर ले तो उत्तम धर्म का श्रवण दुर्लभ है - श्रेष्ठ धर्म के तत्त्व का उपदेश पाना कठिन है, क्योंकि मनुष्य कुतीर्थियों की उपासना करने वाले देखे जाते हैं । इसलिए समय मात्र भी प्रमाद न करो । भाष्यः - पुण्य अधिक प्रबलतर हुआ और किसी जीव को, मनुष्यत्व, आर्यत्व और परिपूर्ण कार्यकारी इन्द्रियां भी प्राप्त हो गई तो भी धर्म साधना के अन्तरायों का अन्त नहीं होता। क्योंकि जगत् में बहुतेरे मनुष्य कुतीर्थियों का सेवन करते हैं । जिसके द्वारा तरा जाय या जो तारने वाला हो उसे तीर्थ कहते हैं। कहा भी हैतिज्जइ जं तेरण तहि, तओ व तित्थं तयं च दव्वम्मि । सरियाई भागो निरवायो तम्मिय पसिद्धे ॥ गाथा का भाव ऊपर आ चुका है। जिसके सहारे तिरने योग्य वस्तु तिरती है - पार पहुंचती है, वह तीर्थ कहलाता है । सुविधाजनक नदी आदि का एक विशिष्ट भाग (घाट) द्रव्यतीर्थ है । नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव रूप चार निक्षेपों के भेद से तीर्थ चार प्रकार का है। किसी वस्तु का, जिसमें तीर्थ का गुण न हो, 'तीर्थ' ऐसा नाम रख लेना नामतीर्थ है । किसी तदाकार अथवा अतदाकार वस्तु में 'तीर्थ' की स्थापना कर लेना स्थापना तीर्थ कहलाता है। नदी सरोवर आदि द्रव्य तीर्थ कहे जाते हैं, क्योंकि उनसे शरीर ही तिरता है अर्थात् शरीर ही इस पार से उस पार पहुंचता है । इसके अतिरिक्त नदी आदि शरीर के द्रव्यमल-बाह्य मैल को ही हटाता है । तथा नदी प्रभृति कभी तिराती है, कभी नहीं तिराती-तैरने वाले को डुवा भी देती है। इन सब कारणों से नदी आदि द्रव्य-तीर्थ कहलाते हैं । भावतीर्थ का स्वरूप इस प्रकार है --- भावे तित्थं संघो, सुयविहियं तारओ तहिं साहू । । नारगाइतियं तरणं तरियव्वं भवसमुद्दोऽयं ।। अर्थात् - संघ भावतीर्थ है । साधु तारने वाले हैं । सम्यग्दर्शन, ज्ञान और चारित्र रूप रत्नत्रय तिरने के साधन हैं और संसार रूपी समुद्र तिरने योग्य है । एकान्त रूप मिथ्या प्ररूपणा करने वाले सिद्धान्त के अनुयायियों का समूह कुतीर्थ समझना चाहिए और उसकी स्थापना करने वाले कुतीर्थी हैं । जगत् के अनेक मनुष्य, मनुष्य भव, आर्य क्षेत्र, इन्द्रियपरिपूर्णता रूप कल्याण की सामग्री प्राप्त करके भी कुतीर्थीयों का सेवन करते हैं। उनका सेवन करने से कल्याण के बदले अकल्याण होता है। नास्तिक लोग आत्मा का अस्तित्व अस्वीकार करके खाने पीने और आनन्दोपभोग करने की वृत्ति जागृत करते हैं और आत्मा को धर्म - मार्ग से हटा देते हैं । कोई लोग समस्त पदार्थों को क्षणिक मानते हैं । अतः किये हुए पुण्य पाप का फल
छायाः- अहोनञ्चेन्द्रियत्वमपि स लभते, उत्तमधर्मच तिहि दुर्लभा । कुतिथि निपेवको जनः, समयं गौतम ! मा प्रमादीः ॥अट्ठारह॥ शब्दार्थः- हे गौतम ! वह जीव यदि परिपूर्ण पांचों इन्द्रियां प्राप्त कर ले तो उत्तम धर्म का श्रवण दुर्लभ है - श्रेष्ठ धर्म के तत्त्व का उपदेश पाना कठिन है, क्योंकि मनुष्य कुतीर्थियों की उपासना करने वाले देखे जाते हैं । इसलिए समय मात्र भी प्रमाद न करो । भाष्यः - पुण्य अधिक प्रबलतर हुआ और किसी जीव को, मनुष्यत्व, आर्यत्व और परिपूर्ण कार्यकारी इन्द्रियां भी प्राप्त हो गई तो भी धर्म साधना के अन्तरायों का अन्त नहीं होता। क्योंकि जगत् में बहुतेरे मनुष्य कुतीर्थियों का सेवन करते हैं । जिसके द्वारा तरा जाय या जो तारने वाला हो उसे तीर्थ कहते हैं। कहा भी हैतिज्जइ जं तेरण तहि, तओ व तित्थं तयं च दव्वम्मि । सरियाई भागो निरवायो तम्मिय पसिद्धे ॥ गाथा का भाव ऊपर आ चुका है। जिसके सहारे तिरने योग्य वस्तु तिरती है - पार पहुंचती है, वह तीर्थ कहलाता है । सुविधाजनक नदी आदि का एक विशिष्ट भाग द्रव्यतीर्थ है । नाम, स्थापना, द्रव्य और भाव रूप चार निक्षेपों के भेद से तीर्थ चार प्रकार का है। किसी वस्तु का, जिसमें तीर्थ का गुण न हो, 'तीर्थ' ऐसा नाम रख लेना नामतीर्थ है । किसी तदाकार अथवा अतदाकार वस्तु में 'तीर्थ' की स्थापना कर लेना स्थापना तीर्थ कहलाता है। नदी सरोवर आदि द्रव्य तीर्थ कहे जाते हैं, क्योंकि उनसे शरीर ही तिरता है अर्थात् शरीर ही इस पार से उस पार पहुंचता है । इसके अतिरिक्त नदी आदि शरीर के द्रव्यमल-बाह्य मैल को ही हटाता है । तथा नदी प्रभृति कभी तिराती है, कभी नहीं तिराती-तैरने वाले को डुवा भी देती है। इन सब कारणों से नदी आदि द्रव्य-तीर्थ कहलाते हैं । भावतीर्थ का स्वरूप इस प्रकार है --- भावे तित्थं संघो, सुयविहियं तारओ तहिं साहू । । नारगाइतियं तरणं तरियव्वं भवसमुद्दोऽयं ।। अर्थात् - संघ भावतीर्थ है । साधु तारने वाले हैं । सम्यग्दर्शन, ज्ञान और चारित्र रूप रत्नत्रय तिरने के साधन हैं और संसार रूपी समुद्र तिरने योग्य है । एकान्त रूप मिथ्या प्ररूपणा करने वाले सिद्धान्त के अनुयायियों का समूह कुतीर्थ समझना चाहिए और उसकी स्थापना करने वाले कुतीर्थी हैं । जगत् के अनेक मनुष्य, मनुष्य भव, आर्य क्षेत्र, इन्द्रियपरिपूर्णता रूप कल्याण की सामग्री प्राप्त करके भी कुतीर्थीयों का सेवन करते हैं। उनका सेवन करने से कल्याण के बदले अकल्याण होता है। नास्तिक लोग आत्मा का अस्तित्व अस्वीकार करके खाने पीने और आनन्दोपभोग करने की वृत्ति जागृत करते हैं और आत्मा को धर्म - मार्ग से हटा देते हैं । कोई लोग समस्त पदार्थों को क्षणिक मानते हैं । अतः किये हुए पुण्य पाप का फल
Big News: भारतीय कप्तान विराट कोहली को आउट करने की इस गेंंदबाज ने जतायी ख्वाहिश! Mission2019: पीएम मोदी आज सूरत और डांडी का करेंगे दौरा, जानिए पूरा कार्यक्रम! Advertisement: अब आसमान में की जायेगी एडवरटाइजिंग, जानिए कैसे ! Swine Flu: पूर्व सीएम को स्वाइल फ्लू ने बनाया शिकार, अस्पताल में एडमिट! Ram Mandir: अयोध्या मामले में केन्द्र सरकार ने उठाया बड़ा कदमा, कोर्ट से मांगी मंजूरी! Big Breaking: शिया वक्फ बोर्ड के चेरयमैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज, जानिए क्यों? New Bike: बजाज डोमिनर बाइक फरवरी में कर सकती है लॉच, जानिए इसक फीचर्स! Housefull: फिल्म ठाकरे का पहला शो रहा हाउसफुल, मिला अच्छा रिसपांस! Launching: आज लॉच होगा मारुति सुजुकी Wagon R का नया वेरिएंट, जानिए इसके फीचर्स!
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Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Tips to Increase Breast Size: अधिकतर लड़कियां चाहती हैं कि उनके ब्रेस्ट यानी स्तनों का आकार बड़ा (Big breast) और सुडौल (sudol breast) हो। कई लड़कियां छोटे ब्रेस्ट साइज होने के कारण निराश हो जाती हैं। उनमें हीन भावना पैदा होने लगती है। उनके लिए छोटा ब्रेस्ट एक समस्या और शर्म की बात बन जाती है। उन्हें लगता है कि वो दूसरी लड़कियों की तुलना में कम आकर्षक हैं, पर ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं होता है कि जिनके स्तनों का आकार छोटा है, वो आकर्षक नहीं होतीं। हर किसी का शारीरिक विकास उनके शरीर में मौजूद हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है। यही बात ब्रेस्ट साइज के बढ़ने भी निर्भर करता है। हालांकि, कम उम्र से ही खानपान, एक्सरसाइज, योगासनों का अभ्यास किया जाए, तो ब्रेस्ट का ग्रोथ सही (Tips to Increase Breast Size) तरीके से हो सकता है। ब्रेस्ट का विकास कुछ लड़कियों में 10 वर्ष की उम्र से, तो कुछ लड़कियों में 11-12 वर्ष की उम्र से होने लगता है। वक्ष या स्तनों के विकास लिए एस्ट्रोजेन हार्मोन जिम्मेदार होता है। यदि शरीर में एस्ट्रोजेन की कमी और टेस्टोस्टरोन अधिक होता है, तो भी वक्ष का विकास नहीं हो पाता है। हालांकि, कम उम्र से ही खानपान, योगासन, एक्सरसाइज आदि पर ध्यान दिया जाए, तो ब्रेस्ट को सामान्य आकार में बढ़ा (Tips to Increase Breast Size in hindi) सकती हैं। कभी भी ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए दवा या सप्लिमेंट का सेवन ना करें। इनके सेवन से स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकता है। 1 प्रतिदिन अपने ब्रेस्ट की मालिश करें। ऐसा 20 से 30 मिनट करती हैं, तो दो से पांच महीने में 1 कप साइज जितने बड़े हो सकते हैं। मसाज करने से ब्रेस्ट की मांसपेशियों में रक्त संचार बढ़ता है। ब्रेस्ट और निप्पल उत्तेजित होते हैं। ऐसे में हार्मोन प्रोलैक्टिन का निर्माण अधिक होता है। हथेलियों को मिलाकर आपस में खूब तेजी से रगड़ें। अब गर्म हथेलियों को स्तनों पर रखकर ऊपर की तरफ ले जाएं और गोलाई में मसाज करें। रात में सोने से पहले 100-300 बार इस प्रक्रिया को करें। ऐसा आप हर दिन करती हैं, तो कम से कम 10-15 मिनट तक करें। 2 आप तेल मालिश भी कर सकती हैं। इसके लिए आपको चाहिए जेरैनिमय, यांगयांग और आमंड ऑयल। इन तीनों को एक-एक चम्मच बराबर मात्रा में मिलाएं। इस तेल से एक दिन में दो बार अपने स्तनों का मसाज करें। इस तरह से ब्रेस्ट मसाज करना प्राचीन ताओवादी व्यायाम का हिस्सा हुआ करता था। हालांकि, इसे महिलाएं नहीं करती थीं, बल्कि मादा हिरण पर इस्तेमाल किया जाता था। यदि स्तनों का विकास सही से हो, तो उसके लिए हेल्दी और पौष्टिक चीजों का सेवन करना बहुत जरूरी है। फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज शामिल करें। इनके सेवन से टेस्टोस्टरोन का अधिक निर्माण नहीं होगा। यह हार्मोन प्राकृतिक रूप से स्तनों के विकास में बाधा (How to Increase Breast Size at home) डालता है। महिलाओं में टेस्टोस्टरोन का निर्माण अधिक होने पर पुरुषों की ही तरह मिनिमल ब्रेस्ट टिशू बनते हैं। प्लांट बेस्ड एस्ट्रोजेंस जैसे सोयाबीन, राजमा, मटर का सेवन कम उम्र से ही करना चाहिए। ये ऐसी चीजें हैं, जिनमें एस्ट्रोजेंस अधिक मात्रा में मौजूद होती है। एस्ट्रोजेन वक्ष उत्तकों के विकास को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार (breast size badhane ke upay in hindi) होता है। इसके अलावा अंडे, ओमेगा-3 फैटी एसिड, कद्दू के बीज, मछली, नट्स, एवोकाडो आदि खाएं। 1 प्रतिदिन पुशअप्स करने से सीने में मांसपेशियों का विकास होता है। पुशअप्स करने के लिए पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को फर्श पर रखें। पैरों को पीछे की तरफ सीधा करें। घुटनों को फर्श से सटाएं। हथेलियों के सहारे खुद को ऊपर की तरफ उठाएं और तीन गिनने तक उसी अवस्था में रहें। अब शरीर को वापस पहले की अवस्था में ले आएं। इस प्रक्रिया को 5 बार दोहराएं। 2 ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए आप योगासन में गोमुखासन करके देखें। योग को ब्रेस्ट साइज (Yoga to increase Breast Size) बढ़ाने के लिए कारगर माना गया है। इससे शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होता है। गोमुखासन करने के कई अन्य सेहत लाभ भी होते हैं।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Tips to Increase Breast Size: अधिकतर लड़कियां चाहती हैं कि उनके ब्रेस्ट यानी स्तनों का आकार बड़ा और सुडौल हो। कई लड़कियां छोटे ब्रेस्ट साइज होने के कारण निराश हो जाती हैं। उनमें हीन भावना पैदा होने लगती है। उनके लिए छोटा ब्रेस्ट एक समस्या और शर्म की बात बन जाती है। उन्हें लगता है कि वो दूसरी लड़कियों की तुलना में कम आकर्षक हैं, पर ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं होता है कि जिनके स्तनों का आकार छोटा है, वो आकर्षक नहीं होतीं। हर किसी का शारीरिक विकास उनके शरीर में मौजूद हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है। यही बात ब्रेस्ट साइज के बढ़ने भी निर्भर करता है। हालांकि, कम उम्र से ही खानपान, एक्सरसाइज, योगासनों का अभ्यास किया जाए, तो ब्रेस्ट का ग्रोथ सही तरीके से हो सकता है। ब्रेस्ट का विकास कुछ लड़कियों में दस वर्ष की उम्र से, तो कुछ लड़कियों में ग्यारह-बारह वर्ष की उम्र से होने लगता है। वक्ष या स्तनों के विकास लिए एस्ट्रोजेन हार्मोन जिम्मेदार होता है। यदि शरीर में एस्ट्रोजेन की कमी और टेस्टोस्टरोन अधिक होता है, तो भी वक्ष का विकास नहीं हो पाता है। हालांकि, कम उम्र से ही खानपान, योगासन, एक्सरसाइज आदि पर ध्यान दिया जाए, तो ब्रेस्ट को सामान्य आकार में बढ़ा सकती हैं। कभी भी ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए दवा या सप्लिमेंट का सेवन ना करें। इनके सेवन से स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकता है। एक प्रतिदिन अपने ब्रेस्ट की मालिश करें। ऐसा बीस से तीस मिनट करती हैं, तो दो से पांच महीने में एक कप साइज जितने बड़े हो सकते हैं। मसाज करने से ब्रेस्ट की मांसपेशियों में रक्त संचार बढ़ता है। ब्रेस्ट और निप्पल उत्तेजित होते हैं। ऐसे में हार्मोन प्रोलैक्टिन का निर्माण अधिक होता है। हथेलियों को मिलाकर आपस में खूब तेजी से रगड़ें। अब गर्म हथेलियों को स्तनों पर रखकर ऊपर की तरफ ले जाएं और गोलाई में मसाज करें। रात में सोने से पहले एक सौ-तीन सौ बार इस प्रक्रिया को करें। ऐसा आप हर दिन करती हैं, तो कम से कम दस-पंद्रह मिनट तक करें। दो आप तेल मालिश भी कर सकती हैं। इसके लिए आपको चाहिए जेरैनिमय, यांगयांग और आमंड ऑयल। इन तीनों को एक-एक चम्मच बराबर मात्रा में मिलाएं। इस तेल से एक दिन में दो बार अपने स्तनों का मसाज करें। इस तरह से ब्रेस्ट मसाज करना प्राचीन ताओवादी व्यायाम का हिस्सा हुआ करता था। हालांकि, इसे महिलाएं नहीं करती थीं, बल्कि मादा हिरण पर इस्तेमाल किया जाता था। यदि स्तनों का विकास सही से हो, तो उसके लिए हेल्दी और पौष्टिक चीजों का सेवन करना बहुत जरूरी है। फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज शामिल करें। इनके सेवन से टेस्टोस्टरोन का अधिक निर्माण नहीं होगा। यह हार्मोन प्राकृतिक रूप से स्तनों के विकास में बाधा डालता है। महिलाओं में टेस्टोस्टरोन का निर्माण अधिक होने पर पुरुषों की ही तरह मिनिमल ब्रेस्ट टिशू बनते हैं। प्लांट बेस्ड एस्ट्रोजेंस जैसे सोयाबीन, राजमा, मटर का सेवन कम उम्र से ही करना चाहिए। ये ऐसी चीजें हैं, जिनमें एस्ट्रोजेंस अधिक मात्रा में मौजूद होती है। एस्ट्रोजेन वक्ष उत्तकों के विकास को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके अलावा अंडे, ओमेगा-तीन फैटी एसिड, कद्दू के बीज, मछली, नट्स, एवोकाडो आदि खाएं। एक प्रतिदिन पुशअप्स करने से सीने में मांसपेशियों का विकास होता है। पुशअप्स करने के लिए पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को फर्श पर रखें। पैरों को पीछे की तरफ सीधा करें। घुटनों को फर्श से सटाएं। हथेलियों के सहारे खुद को ऊपर की तरफ उठाएं और तीन गिनने तक उसी अवस्था में रहें। अब शरीर को वापस पहले की अवस्था में ले आएं। इस प्रक्रिया को पाँच बार दोहराएं। दो ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए आप योगासन में गोमुखासन करके देखें। योग को ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के लिए कारगर माना गया है। इससे शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होता है। गोमुखासन करने के कई अन्य सेहत लाभ भी होते हैं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता अरोड़ा ने हाल ही में अपना 41वां जन्मदिन सेलिब्रेट किया। बर्थडे पार्टी की तस्वीरें इंटरनेट पर आ गई हैं और इन तस्वीरों में अमृता अपनी पूरी गर्ल गैंग के साथ एन्जॉय करती दिखाई पड़ रही हैं। तस्वीरों में अमृता अरोड़ा के साथ उनकी बड़ी बहन मलाइका अरोड़ा और उनकी बेस्ट फ्रेंड्स करीना कपूर खान, करिश्मा कपूर और मल्लिका भट्ट नजर आ रही हैं। पार्टी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही हैं। करिश्मा कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पार्टी की एक खास फोटो शेयर की है। इस फोटो में अमृता अरोड़ा को उनकी सभी बेस्ट फ्रेंड्स घेरे नजर आ रही हैं और सभी ने उन्हें कस कर गले लगा रखा है। बेचारी अमृता अरोड़ा बीच में पिसती दिखाई दे रही हैं। उनके सामने कई सारे केक और एक कैप रखी हुई है जिसे अमूमन केक कटिंग सेरिमनी के दौरान पहना जाता है। करिश्मा कपूर ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, 'मेरी प्यारी अमोलास को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। ' इसी तरह मलाइका अरोड़ा ने भी बर्थडे पार्टी के दौरान की फोटो शेयर की है। फोटो में अमृता अरोड़ा केक काटती दिखाई पड़ रही हैं और सारी दोस्त उनके साथ खड़ी हुई हैं। फोटो के साथ मलाइका ने लिखा, 'हमारे गैंग की गोंद। हैप्पी बर्थडे मेरी बेबी सिस्टर। ' करीना कपूर खान ने भी पार्टी की कुछ तस्वीरें अपनी इंस्टा स्टोरी पर शेयर की हैं। फोटोज के कैप्शन में करीना कपूर खान ने लिखा- हैप्पी बर्थडे मेरी बेस्ट फ्रेंड फॉरेवर। तुम्हारे जैसी कोई भी नहीं है। बता दें कि अमृता अरोड़ा ने साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म 'कितने दूर कितने पास' के जरिए बॉलीवुड डेब्यू किया था। उन्होंने 'गर्लफ्रेंड' और 'फाइट क्लब' जैसी फिल्मों में काम किया है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता अरोड़ा ने हाल ही में अपना इकतालीसवां जन्मदिन सेलिब्रेट किया। बर्थडे पार्टी की तस्वीरें इंटरनेट पर आ गई हैं और इन तस्वीरों में अमृता अपनी पूरी गर्ल गैंग के साथ एन्जॉय करती दिखाई पड़ रही हैं। तस्वीरों में अमृता अरोड़ा के साथ उनकी बड़ी बहन मलाइका अरोड़ा और उनकी बेस्ट फ्रेंड्स करीना कपूर खान, करिश्मा कपूर और मल्लिका भट्ट नजर आ रही हैं। पार्टी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही हैं। करिश्मा कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पार्टी की एक खास फोटो शेयर की है। इस फोटो में अमृता अरोड़ा को उनकी सभी बेस्ट फ्रेंड्स घेरे नजर आ रही हैं और सभी ने उन्हें कस कर गले लगा रखा है। बेचारी अमृता अरोड़ा बीच में पिसती दिखाई दे रही हैं। उनके सामने कई सारे केक और एक कैप रखी हुई है जिसे अमूमन केक कटिंग सेरिमनी के दौरान पहना जाता है। करिश्मा कपूर ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, 'मेरी प्यारी अमोलास को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। ' इसी तरह मलाइका अरोड़ा ने भी बर्थडे पार्टी के दौरान की फोटो शेयर की है। फोटो में अमृता अरोड़ा केक काटती दिखाई पड़ रही हैं और सारी दोस्त उनके साथ खड़ी हुई हैं। फोटो के साथ मलाइका ने लिखा, 'हमारे गैंग की गोंद। हैप्पी बर्थडे मेरी बेबी सिस्टर। ' करीना कपूर खान ने भी पार्टी की कुछ तस्वीरें अपनी इंस्टा स्टोरी पर शेयर की हैं। फोटोज के कैप्शन में करीना कपूर खान ने लिखा- हैप्पी बर्थडे मेरी बेस्ट फ्रेंड फॉरेवर। तुम्हारे जैसी कोई भी नहीं है। बता दें कि अमृता अरोड़ा ने साल दो हज़ार दो में रिलीज हुई फिल्म 'कितने दूर कितने पास' के जरिए बॉलीवुड डेब्यू किया था। उन्होंने 'गर्लफ्रेंड' और 'फाइट क्लब' जैसी फिल्मों में काम किया है।
बिहार के लखीसराय में स्पेशल-26 स्टाइल में फर्जी इनकम टैक्स अधिकारी बनकर दिए लूटकांड खुलासा पुलिस ने कर लिया है. पुलिस ने सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही ये बात भी सामने आई है कि बालू ठेकेदार के यहां 35 नहीं केवल 11 लाख रुपए की लूट हुई थी. बिहार के लखीसराय (Bihar Lakhisarai ) में इनकम टैक्स अधिकारी बनकर लूट की घटना को अंजाम देने वाले लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर लिया है. पुलिस ने बालू ठेकेदार के घर लूट को अंजाम देने के चर्चित मामले का पर्दाफाश कर लिया है. लखीसराय पुलिस ने फर्जी इनकम टैक्स रेड में शामिल 6 फर्जी इनकम टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में सभी गिरफ्तारी पटना और शेखपुरा जिले से हुई है. पुलिस ने लूट के 5 लाख 70 हजार रूपये के साथ फर्जी आई कार्ड, मोबाइल, कोट, पैन्ट एवं घटना में प्रयोग किए गए बैग को बरामद किया है. इस लूटकांड में बालू ठेकेदार का चचेरा भाई भी शामिल था. स्पेशल 26 स्टाइल में हुई यह लूटकांड 31 जनवरी की है. जब कबैया थाना क्षेत्र में रहने वाले बालू कारोबारी संजय सिंह के घर स्कार्पियो पर सवार होकर 5 पुरूष और दो महिलाएं इनकमटैक्स अधिकारी बनकर पहुंचे और रेड के बहाने घर में रखे रूपए और जेवरात लेकर फरार हो गए. एसपी ने बताया कि इस पूरे वारदात को लखीसराय पुलिस ने चैलेंज के रूप में लिया और इसका खुलासा करते हुए घटना में शामिल सभी 6 अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार अपराधियों में चंदन कुमार और सुमित कुमार पटना जिले के रहनेवाले हैं. वहीं मंजित कुमार और सोनू कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं. जबकि कुश कुमार शेखपुरा और गु़जन चौके पश्चिम चंपारण के रहनेवाले हैं. घटना का मास्टरमाइंड चंदन कुमार है जो पेशे मेकेनिकल इंजीनियर है. जबकि घटना में लाइनर की भूमिका निभाने वाला कुश कुमार बालू ठेकेदार का चचेरा भाई है. ये भी पढ़ेंः
बिहार के लखीसराय में स्पेशल-छब्बीस स्टाइल में फर्जी इनकम टैक्स अधिकारी बनकर दिए लूटकांड खुलासा पुलिस ने कर लिया है. पुलिस ने सभी पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही ये बात भी सामने आई है कि बालू ठेकेदार के यहां पैंतीस नहीं केवल ग्यारह लाख रुपए की लूट हुई थी. बिहार के लखीसराय में इनकम टैक्स अधिकारी बनकर लूट की घटना को अंजाम देने वाले लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर लिया है. पुलिस ने बालू ठेकेदार के घर लूट को अंजाम देने के चर्चित मामले का पर्दाफाश कर लिया है. लखीसराय पुलिस ने फर्जी इनकम टैक्स रेड में शामिल छः फर्जी इनकम टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में सभी गिरफ्तारी पटना और शेखपुरा जिले से हुई है. पुलिस ने लूट के पाँच लाख सत्तर हजार रूपये के साथ फर्जी आई कार्ड, मोबाइल, कोट, पैन्ट एवं घटना में प्रयोग किए गए बैग को बरामद किया है. इस लूटकांड में बालू ठेकेदार का चचेरा भाई भी शामिल था. स्पेशल छब्बीस स्टाइल में हुई यह लूटकांड इकतीस जनवरी की है. जब कबैया थाना क्षेत्र में रहने वाले बालू कारोबारी संजय सिंह के घर स्कार्पियो पर सवार होकर पाँच पुरूष और दो महिलाएं इनकमटैक्स अधिकारी बनकर पहुंचे और रेड के बहाने घर में रखे रूपए और जेवरात लेकर फरार हो गए. एसपी ने बताया कि इस पूरे वारदात को लखीसराय पुलिस ने चैलेंज के रूप में लिया और इसका खुलासा करते हुए घटना में शामिल सभी छः अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार अपराधियों में चंदन कुमार और सुमित कुमार पटना जिले के रहनेवाले हैं. वहीं मंजित कुमार और सोनू कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं. जबकि कुश कुमार शेखपुरा और गु़जन चौके पश्चिम चंपारण के रहनेवाले हैं. घटना का मास्टरमाइंड चंदन कुमार है जो पेशे मेकेनिकल इंजीनियर है. जबकि घटना में लाइनर की भूमिका निभाने वाला कुश कुमार बालू ठेकेदार का चचेरा भाई है. ये भी पढ़ेंः
नई दिल्ली. एयर इंडिया में एक सीनियर क्रू मेंबर द्वारा अटेंडेंट को थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर एयर इंडिया विवादों में आ गया है. बताया जा रहा है कि मामला 17 मार्च का है. एक अटेंडेंट ने बिजनेस क्लास में सफर कर रहे एक यात्री को नॉनवेज खाना परोस दिया था. बाद में उसने यात्री से माफी मांग ली थी. लेकिन जब यह बात क्रू मेंबर्स तक पहुंची तो एक वरिष्ठ कर्मचारी ने अटेंडेंट को इस गलती के लिए थप्पड़ मार दिया. यह घटना नई दिल्ली से फ्रैंकफर्ट के बीच एयर इंडिया के विमान में हुई है. एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि इस घटना की आंतरिक जांच का आदेश दे दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, जिस यात्री को नॉनवेज परोसा गया था उसने इसकी जानकारी केबिन सुपरवाइजर को दी. लेकिन उसने शिकायत नहीं की थी. लेकिन बाद में इस घटना के बाद केबिन क्रू के सुपरवाइजर ने फ्लाइट अटेंडेंट को जानकारी देते हुए थप्पड़ मार दिया. बताया जा रहा है कि थप्पड़ लगने के बाद भी अटेंडेंट ने इस घटना का विरोध फ्लाइट में नहीं किया. लेकिन विमान लैंड करने के बाद उसने अपने सीनियर की शिकायत एयर इंडिया से की. इस मामले पर एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि हमें शिकायत मिली है कि केबिन सुपरवाइजर ने फ्लाइट अटेंडेंट को थप्पड़ मारा था. यह घटना दिल्ली से फ्रेंकफर्ट जा रहे विमान एआई 121 में हुई. इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिये गए हैं. इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है.
नई दिल्ली. एयर इंडिया में एक सीनियर क्रू मेंबर द्वारा अटेंडेंट को थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर एयर इंडिया विवादों में आ गया है. बताया जा रहा है कि मामला सत्रह मार्च का है. एक अटेंडेंट ने बिजनेस क्लास में सफर कर रहे एक यात्री को नॉनवेज खाना परोस दिया था. बाद में उसने यात्री से माफी मांग ली थी. लेकिन जब यह बात क्रू मेंबर्स तक पहुंची तो एक वरिष्ठ कर्मचारी ने अटेंडेंट को इस गलती के लिए थप्पड़ मार दिया. यह घटना नई दिल्ली से फ्रैंकफर्ट के बीच एयर इंडिया के विमान में हुई है. एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि इस घटना की आंतरिक जांच का आदेश दे दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, जिस यात्री को नॉनवेज परोसा गया था उसने इसकी जानकारी केबिन सुपरवाइजर को दी. लेकिन उसने शिकायत नहीं की थी. लेकिन बाद में इस घटना के बाद केबिन क्रू के सुपरवाइजर ने फ्लाइट अटेंडेंट को जानकारी देते हुए थप्पड़ मार दिया. बताया जा रहा है कि थप्पड़ लगने के बाद भी अटेंडेंट ने इस घटना का विरोध फ्लाइट में नहीं किया. लेकिन विमान लैंड करने के बाद उसने अपने सीनियर की शिकायत एयर इंडिया से की. इस मामले पर एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि हमें शिकायत मिली है कि केबिन सुपरवाइजर ने फ्लाइट अटेंडेंट को थप्पड़ मारा था. यह घटना दिल्ली से फ्रेंकफर्ट जा रहे विमान एआई एक सौ इक्कीस में हुई. इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिये गए हैं. इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है.
उपराजधानी दुमका में रविवार को जिला क्रिकेट संघ दुमका के तत्वाधान में चल रहे समर कैंप का समापन हो गया। रविवार की सुबह दुमका के वैलनेस जिम में फिजिकल ट्रेनर महादेव सिंह के द्वारा खिलाड़ियों को क्रिकेट में जिम में क्या और कैसे अभ्यास करने हैं बताया गया साथ ही सीएम झा के द्वारा बल्लेबाजों और गेंदबाजों को जिम में क्या और कैसे अभ्यास करने हैं वह भी बताया गया। आज के सत्र के बाद दुमका जिला सीनियर टीम के सदस्य शुभांशु वर्मा और समीर पंडित ने बताया कि आज के सत्र का काफी बड़ा फायदा उनके क्रिकेट कैरियर में मिलने वाला है। जिला अंडर -19 टीम के सदस्य रहे ऋषि शर्मा ने बताया कि एक गेंदबाज होने के नाते आज के सत्र से उन्हें अपने आप को इंजुरी से बचते हुए कैसे फिट रहकर गेंदबाजी करनी है यह सीखने को मिला। इसके अलावा अंडर 14 और अंडर 16 के बच्चे भी अपने फिटनेस को लेकर दिए गए टिप्स से काफी खुश दिखे। आज के समापन समारोह में कोच सीएम झा को जिला क्रिकेट संघ के सचिव भास्कर अजीत सिंह ने तोहफा देकर सम्मानित किया जबकि ट्रेनर महादेव सिंह को जिला क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष सुरेश मोदी उर्फ चिल्ली मोदी ने तोहफा देकर सम्मानित किया। कोच सीएम झा ने कहा कि बच्चों को जो तकनीकी जानकारी दी गई है अगर उस पर लगातार मेहनत करेंगे तो निश्चित तौर पर दुमका से और भी खिलाड़ी आगे चलकर झारखंड के राष्ट्रीय टीम में शामिल हो सकते हैं। ट्रेनर महादेव सिंह ने कहां की बच्चों को अनुशासित होकर केवल खेल पर ध्यान देते हुए अपना अभ्यास जारी रखना है और जो प्रोसेस है केवल उस पर काम करना है सफलता निश्चित ही मिलेगी। अपने समापन संबोधन में जिला क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष संजय तिवारी ने झारखंड राज्य क्रिकेट संघ और आए हुए दोनों अतिथियों का आभार व्यक्त किया और साथ ही यह कहा कि इस सात दिवसीय समर कैंप से निश्चित ही दुमका के क्रिकेटरों को फायदा मिलेगा और आगे चलकर एक सशक्त टीम बनाने में मदद मिलेगी। अपने संबोधन में सचिव भास्कर अजीत सिंह ने कहा कि आगे चलकर जिला क्रिकेट संघ की कमेटी बड़े टूर्नामेंट का आयोजन करने पर विचार कर रही है और इसका आयोजन भी जल्द ही किया जाएगा। इस अवसर पर जिला क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव अमित रंगराजन एवम उमेश राउत कार्यकरिणी सदस्य आलोक सिंह, चंद्र किशोर सिंह, श्री कुमार पाल, दिवाकर शर्मा, छोटू चौरसिया भी उपस्थित रहे और अंत में सभी ने मिलकर इस इस समर कैंप के संचालन में अहम भूमिका निभाने के लिए मोहम्मद नसीम खान का भी आभार व्यक्त किया साथ ही ही दुमका वैलनेस जिम के संचालक अभिषेक धीवर का भी आभार व्यक्त जिन्होंने जिम में बच्चों को अभ्यास करने की अनुमति दी। आज सुबह सत्र के पहले दुमका जिला के पूर्व खिलाड़ी विद्यापति झा भी आकर बच्चों का उत्साहवर्धन किए। आयोजन के सफल संचालन में उपाध्यक्ष विवेक नंदन के साथ जिला के पूर्व क्रिकेटर बिपीन मोदी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उपराजधानी दुमका में रविवार को जिला क्रिकेट संघ दुमका के तत्वाधान में चल रहे समर कैंप का समापन हो गया। रविवार की सुबह दुमका के वैलनेस जिम में फिजिकल ट्रेनर महादेव सिंह के द्वारा खिलाड़ियों को क्रिकेट में जिम में क्या और कैसे अभ्यास करने हैं बताया गया साथ ही सीएम झा के द्वारा बल्लेबाजों और गेंदबाजों को जिम में क्या और कैसे अभ्यास करने हैं वह भी बताया गया। आज के सत्र के बाद दुमका जिला सीनियर टीम के सदस्य शुभांशु वर्मा और समीर पंडित ने बताया कि आज के सत्र का काफी बड़ा फायदा उनके क्रिकेट कैरियर में मिलने वाला है। जिला अंडर -उन्नीस टीम के सदस्य रहे ऋषि शर्मा ने बताया कि एक गेंदबाज होने के नाते आज के सत्र से उन्हें अपने आप को इंजुरी से बचते हुए कैसे फिट रहकर गेंदबाजी करनी है यह सीखने को मिला। इसके अलावा अंडर चौदह और अंडर सोलह के बच्चे भी अपने फिटनेस को लेकर दिए गए टिप्स से काफी खुश दिखे। आज के समापन समारोह में कोच सीएम झा को जिला क्रिकेट संघ के सचिव भास्कर अजीत सिंह ने तोहफा देकर सम्मानित किया जबकि ट्रेनर महादेव सिंह को जिला क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष सुरेश मोदी उर्फ चिल्ली मोदी ने तोहफा देकर सम्मानित किया। कोच सीएम झा ने कहा कि बच्चों को जो तकनीकी जानकारी दी गई है अगर उस पर लगातार मेहनत करेंगे तो निश्चित तौर पर दुमका से और भी खिलाड़ी आगे चलकर झारखंड के राष्ट्रीय टीम में शामिल हो सकते हैं। ट्रेनर महादेव सिंह ने कहां की बच्चों को अनुशासित होकर केवल खेल पर ध्यान देते हुए अपना अभ्यास जारी रखना है और जो प्रोसेस है केवल उस पर काम करना है सफलता निश्चित ही मिलेगी। अपने समापन संबोधन में जिला क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष संजय तिवारी ने झारखंड राज्य क्रिकेट संघ और आए हुए दोनों अतिथियों का आभार व्यक्त किया और साथ ही यह कहा कि इस सात दिवसीय समर कैंप से निश्चित ही दुमका के क्रिकेटरों को फायदा मिलेगा और आगे चलकर एक सशक्त टीम बनाने में मदद मिलेगी। अपने संबोधन में सचिव भास्कर अजीत सिंह ने कहा कि आगे चलकर जिला क्रिकेट संघ की कमेटी बड़े टूर्नामेंट का आयोजन करने पर विचार कर रही है और इसका आयोजन भी जल्द ही किया जाएगा। इस अवसर पर जिला क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव अमित रंगराजन एवम उमेश राउत कार्यकरिणी सदस्य आलोक सिंह, चंद्र किशोर सिंह, श्री कुमार पाल, दिवाकर शर्मा, छोटू चौरसिया भी उपस्थित रहे और अंत में सभी ने मिलकर इस इस समर कैंप के संचालन में अहम भूमिका निभाने के लिए मोहम्मद नसीम खान का भी आभार व्यक्त किया साथ ही ही दुमका वैलनेस जिम के संचालक अभिषेक धीवर का भी आभार व्यक्त जिन्होंने जिम में बच्चों को अभ्यास करने की अनुमति दी। आज सुबह सत्र के पहले दुमका जिला के पूर्व खिलाड़ी विद्यापति झा भी आकर बच्चों का उत्साहवर्धन किए। आयोजन के सफल संचालन में उपाध्यक्ष विवेक नंदन के साथ जिला के पूर्व क्रिकेटर बिपीन मोदी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सुहाना खान (Suhana Khan) ने सोशल मीडिया पर बेडरूम से अपनी फोटो शेयर की है, इसमें वह अपना परफेक्ट फिगर शो करती नजर आ रही हैं, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. आपको बता दें कि सुहाना ने भले ही अब तक डेब्यू नहीं किया है, लेकिन उनके फैंस अब भी किसी बॉलीवुड स्टार के जितने हो चुके हैं. इंस्टाग्राम पर सुहाना के 1.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं. इसके साथ ही उनके कई फैन पेज भी हैं.
सुहाना खान ने सोशल मीडिया पर बेडरूम से अपनी फोटो शेयर की है, इसमें वह अपना परफेक्ट फिगर शो करती नजर आ रही हैं, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. आपको बता दें कि सुहाना ने भले ही अब तक डेब्यू नहीं किया है, लेकिन उनके फैंस अब भी किसी बॉलीवुड स्टार के जितने हो चुके हैं. इंस्टाग्राम पर सुहाना के एक.छः मिलियन फॉलोअर्स हैं. इसके साथ ही उनके कई फैन पेज भी हैं.
BAREILLY: क्8 साल की उम्र पूरी कर चुके लोग वोटर बनने के लिए खुद आगे बढ़ें और अपना नाम वोटरलिस्ट में जोड़वाएं। इस काम में आपकी हेल्प एरिया के लिए बीएलओ व पर्यवेक्षक करेंगे। डिस्ट्रिक्ट के नए वोटर्स को जोड़ने के लिए स्टेट इलेक्शन कमीशन ने डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर को निर्देश दिए हैं। नए वोटर्स की पहचान कर उनको वोटर लिस्ट से जोड़ने का काम बूथ लेबल ऑफिसर (बीएलओ) और पर्यवेक्षक की होगी। वोटर लिस्ट से जुड़ने के लिए फार्म-म् भरने होंगे। इसके अलावा बर्थ सर्टिफिकेट, एड्रेस प्रूफ के साथ दो फोटो भी देनी होगी। डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर, अभिजीत मुखर्जी ने बताया कि जिनकी एज क्8 साल हो गयी है उन्हें खुद भी वोटर बनने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का भी डाटा बेस तैयार किया जाएगा।
BAREILLY: क्आठ साल की उम्र पूरी कर चुके लोग वोटर बनने के लिए खुद आगे बढ़ें और अपना नाम वोटरलिस्ट में जोड़वाएं। इस काम में आपकी हेल्प एरिया के लिए बीएलओ व पर्यवेक्षक करेंगे। डिस्ट्रिक्ट के नए वोटर्स को जोड़ने के लिए स्टेट इलेक्शन कमीशन ने डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर को निर्देश दिए हैं। नए वोटर्स की पहचान कर उनको वोटर लिस्ट से जोड़ने का काम बूथ लेबल ऑफिसर और पर्यवेक्षक की होगी। वोटर लिस्ट से जुड़ने के लिए फार्म-म् भरने होंगे। इसके अलावा बर्थ सर्टिफिकेट, एड्रेस प्रूफ के साथ दो फोटो भी देनी होगी। डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर, अभिजीत मुखर्जी ने बताया कि जिनकी एज क्आठ साल हो गयी है उन्हें खुद भी वोटर बनने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का भी डाटा बेस तैयार किया जाएगा।
Ranchi/Jamshedpur: लोकसभा चुनाव के छठे चरण का प्रचार अभियान जोर-शोर से चल रहा है. स्थानीय नेताओं के साथ चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारक भी दम लगा रहे हैं. बुधवार को इसी क्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जमशेदपुर पहुंचे. उम्मीद है कि जमशेदपुर पहुंचने के बाद निश्चित तौर से अमित शाह निराश हुए होंगे. क्योंकि भीड़ के नाम पर लोगों से ज्यादा खाली कुर्सियां पड़ी हुई थीं. जनसभा की कुछ तस्वीरें व्हाट्सएप पर वायरल हैं. वायरल वीडियो और स्टिल फोटोग्राफ्स देखने पर साफ जाहिर होता है कि बीजेपी जमशेदपुर में भीड़ इक्ट्टठा नहीं कर पायी. वीडियो तब की है जब मंच पर बीजेपी के सभी दिग्गज मौजूद थे. भाषणबाजी जारी थी. इसे भी पढ़ें - IBC यानी दीवालिया कानून मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि! जमशेदपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा के दौरान खाली पड़ीं कुर्सियां इसलिए भी सुर्खियों में हैं क्योंकि जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी के दो बड़े दिग्गज विधायक हैं. सीएम रघुवर दास जमशेदपुर ईस्ट और मंत्री सरयू राय जमशेदपुर से विधायक हैं. खुद विद्युत बरन महतो जमशेदपुर से सीटिंग एमपी हैं. ऐसे में कुर्सियों का खाली रह जाना चर्चा का विषय बना हुआ है. सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जहां जनसभा हो रही है, वो सीएम के क्षेत्र में पड़ता है. जनसभा जमशेदपुर के ट्रांस्पोर्ट ग्राउंड में हो रही थी. कहा जा रहा है कि ईमानदारी से अगर वहां काम होता तो इतनी भीड़ सिर्फ प्रदेश की जनसभा में जुट सकती थी. कहने वाले कह रहे हैं कि सीएम के घर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा में एक कुर्सी के साथ एक कुर्सी फ्री की व्यवस्था थी.
Ranchi/Jamshedpur: लोकसभा चुनाव के छठे चरण का प्रचार अभियान जोर-शोर से चल रहा है. स्थानीय नेताओं के साथ चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारक भी दम लगा रहे हैं. बुधवार को इसी क्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जमशेदपुर पहुंचे. उम्मीद है कि जमशेदपुर पहुंचने के बाद निश्चित तौर से अमित शाह निराश हुए होंगे. क्योंकि भीड़ के नाम पर लोगों से ज्यादा खाली कुर्सियां पड़ी हुई थीं. जनसभा की कुछ तस्वीरें व्हाट्सएप पर वायरल हैं. वायरल वीडियो और स्टिल फोटोग्राफ्स देखने पर साफ जाहिर होता है कि बीजेपी जमशेदपुर में भीड़ इक्ट्टठा नहीं कर पायी. वीडियो तब की है जब मंच पर बीजेपी के सभी दिग्गज मौजूद थे. भाषणबाजी जारी थी. इसे भी पढ़ें - IBC यानी दीवालिया कानून मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि! जमशेदपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा के दौरान खाली पड़ीं कुर्सियां इसलिए भी सुर्खियों में हैं क्योंकि जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी के दो बड़े दिग्गज विधायक हैं. सीएम रघुवर दास जमशेदपुर ईस्ट और मंत्री सरयू राय जमशेदपुर से विधायक हैं. खुद विद्युत बरन महतो जमशेदपुर से सीटिंग एमपी हैं. ऐसे में कुर्सियों का खाली रह जाना चर्चा का विषय बना हुआ है. सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जहां जनसभा हो रही है, वो सीएम के क्षेत्र में पड़ता है. जनसभा जमशेदपुर के ट्रांस्पोर्ट ग्राउंड में हो रही थी. कहा जा रहा है कि ईमानदारी से अगर वहां काम होता तो इतनी भीड़ सिर्फ प्रदेश की जनसभा में जुट सकती थी. कहने वाले कह रहे हैं कि सीएम के घर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा में एक कुर्सी के साथ एक कुर्सी फ्री की व्यवस्था थी.
नयी दिल्लीः राजधानी की अब रद्द कर दी गई शराब बिक्री नीति के सिलसिले में सीबीआई ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आज गिरफ्तार कर लिया, जिससे मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। जांच 2021 में पेश की गई अब वापस ली गई दिल्ली शराब बिक्री नीति से संबंधित है। मनीष सिसोदिया दिल्ली के आबकारी विभाग के प्रमुख हैं, जिस कारण वह निशाने पर आ गए हैं। नीति के तहत, अधिकांश राज्यों में मानदंडों से हटकर, सरकार का अब शराब बेचने से कोई लेना-देना नहीं था और केवल निजी दुकानों को ही ऐसा करने की अनुमति थी। इसका मुख्य उद्देश्य कालाबाजारी को रोकना, राजस्व में वृद्धि करना और उपभोक्ता अनुभव में सुधार करना था। इसने शराब की होम डिलीवरी और दुकानों को सुबह 3 बजे तक खुले रहने की भी अनुमति दी। लाइसेंसधारी असीमित छूट भी दे सकते हैं। सरकार ने नीति से आय में 27 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की, जिससे लगभग 8,900 करोड़ रुपये की आय हुई। हालाँकि, सुधार जल्द ही मुश्किल में पड़ गए, पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के साथ, जो केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को रिपोर्ट करती है। फिर दिल्ली के नए उपराज्यपाल वीके सक्सेना के साथ केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी। दिल्ली के शीर्ष नौकरशाह की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री सिसोदिया पर नियमों को झुकने और शराब के लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ प्रदान करने का आरोप लगाते हुए, श्री सक्सेना ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच के लिए कहा। कुछ ही समय बाद, मनीष सिसोदिया ने कहा कि नीति रद्द होने जा रही है क्योंकि भाजपा विक्रेताओं को डराने के लिए अपने नियंत्रण वाली जांच एजेंसियों का उपयोग कर रही है। उन्होंने श्री सक्सेना के पूर्ववर्ती अनिल बैजल को "अंतिम-मिनट के परिवर्तन" के लिए भी दोषी ठहराया, जिसने सुधारों को पंगु बना दिया। आज उनकी गिरफ्तारी तक, एजेंसी द्वारा दायर चार्जशीट में श्री सिसोदिया का नाम नहीं लिया गया था। लेकिन पिछले साल सीबीआई ने उनके घर समेत 31 ठिकानों पर छापेमारी की थी. एजेंसी को कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा, मंत्री ने कहा - एक स्टैंड को एजेंसी ने चुनौती नहीं दी। ईडी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को फंसाने और भाजपा के एक अन्य तीखे आलोचक के रूप में जांच का दायरा बढ़ाया और उनके पूर्व लेखाकार को गिरफ्तार किया। इसने दावा किया कि नीति से सरकार को 2,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
नयी दिल्लीः राजधानी की अब रद्द कर दी गई शराब बिक्री नीति के सिलसिले में सीबीआई ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आज गिरफ्तार कर लिया, जिससे मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। जांच दो हज़ार इक्कीस में पेश की गई अब वापस ली गई दिल्ली शराब बिक्री नीति से संबंधित है। मनीष सिसोदिया दिल्ली के आबकारी विभाग के प्रमुख हैं, जिस कारण वह निशाने पर आ गए हैं। नीति के तहत, अधिकांश राज्यों में मानदंडों से हटकर, सरकार का अब शराब बेचने से कोई लेना-देना नहीं था और केवल निजी दुकानों को ही ऐसा करने की अनुमति थी। इसका मुख्य उद्देश्य कालाबाजारी को रोकना, राजस्व में वृद्धि करना और उपभोक्ता अनुभव में सुधार करना था। इसने शराब की होम डिलीवरी और दुकानों को सुबह तीन बजे तक खुले रहने की भी अनुमति दी। लाइसेंसधारी असीमित छूट भी दे सकते हैं। सरकार ने नीति से आय में सत्ताईस प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की, जिससे लगभग आठ,नौ सौ करोड़ रुपये की आय हुई। हालाँकि, सुधार जल्द ही मुश्किल में पड़ गए, पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के साथ, जो केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को रिपोर्ट करती है। फिर दिल्ली के नए उपराज्यपाल वीके सक्सेना के साथ केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी। दिल्ली के शीर्ष नौकरशाह की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री सिसोदिया पर नियमों को झुकने और शराब के लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ प्रदान करने का आरोप लगाते हुए, श्री सक्सेना ने केंद्रीय जांच ब्यूरो जांच के लिए कहा। कुछ ही समय बाद, मनीष सिसोदिया ने कहा कि नीति रद्द होने जा रही है क्योंकि भाजपा विक्रेताओं को डराने के लिए अपने नियंत्रण वाली जांच एजेंसियों का उपयोग कर रही है। उन्होंने श्री सक्सेना के पूर्ववर्ती अनिल बैजल को "अंतिम-मिनट के परिवर्तन" के लिए भी दोषी ठहराया, जिसने सुधारों को पंगु बना दिया। आज उनकी गिरफ्तारी तक, एजेंसी द्वारा दायर चार्जशीट में श्री सिसोदिया का नाम नहीं लिया गया था। लेकिन पिछले साल सीबीआई ने उनके घर समेत इकतीस ठिकानों पर छापेमारी की थी. एजेंसी को कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा, मंत्री ने कहा - एक स्टैंड को एजेंसी ने चुनौती नहीं दी। ईडी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को फंसाने और भाजपा के एक अन्य तीखे आलोचक के रूप में जांच का दायरा बढ़ाया और उनके पूर्व लेखाकार को गिरफ्तार किया। इसने दावा किया कि नीति से सरकार को दो,आठ सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बॉलीवुड की मशहूर सिंगर सुनिधि चौहान आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। अपनी गायकी से लाखों दिलों को जीतने वाली सुनिधि चौहान का जन्म 14 अगस्त, 1983 को नई दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम निधि चौहान था जिसे बाद में कल्याणजी विरजी शाह ने बदलकर सुनिधि चौहान करने की सलाह दी थी जिसके बाद निधि बन गई सुनिधि। गायिकी के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुकी सुनिधि ने महज चार साल की उम्र में सिंगिंग पर आधारित एक स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उस समय सुनिधि की प्रतिभा को एक टीवी एंकर तबस्सुम ने पहचाना और उनके माता-पिता को मुंबई आने का न्योता दिया। इसके बाद 11 साल की उम्र में सुनिधि अपने माता-पिता के साथ मुंबई आ गईं। तब तबस्सुम ने सुनिधि को कल्याणजी विरजी शाह और आनंदजी वीरजी शाह से मिलवाया। सुनिधि कल्याणजी की अकादमी में काम करने लगी और कुछ वर्षों में वह अपने लिटिल वंडर्स मंडली में एक प्रमुख गायिका बन गईं। 1996 में दूरदर्शन के रियलिटी शो मेरी आवाज सुनो में सुनिधि ने भाग लिया था। सुनिधि ने ये प्रतियोगिता जीती और लता मंगेशकर से ट्रॉफी ली। सुनिधि की आवाज को म्यूजिक डायरेक्टर आदेश श्रीवास्तव ने सुना और साल 1996 में आई फिल्म 'शस्त्र' में गाना 'लड़की दीवानी देखो' गाने का मौका दिया। इस गाने को आदेश श्रीवास्तव ने कम्पोज किया था। इस तरह से सुनिधि ने बॉलीवुड में इंट्री कर ली थी। इसके बाद सुनिधि को बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाना गाने का मौका मिला, लेकिन उन्हें असली सफलता 1999 में आई फिल्म 'मस्त' के गाने 'रुकी रुकी सी जिंदगी' से मिली। यह गाना उस समय जबरदस्त हिट हुआ और सुनिधि बॉलीवुड के मशहूर सिंगर्स की लिस्ट में शामिल हो गईं। इसके बाद सुनिधि ने बॉलीवुड में कई हिट गाने दिए। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, बंगाली, नेपाली और उर्दू में भी अपनी गायिकी की छाप छोड़ी। सुनिधि चौहान बॉलीवुड इंडस्ट्री में अब भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा गाए कुछ प्रमुख गानों में पास बुलाती है (जानवर), महबूब मेरे (फिजा), धूम मचाले (धूम), गोरी-गोरी (मैं हूं ना), मीठी मीठी बातें (आप की खातिर), डिस्कोवाले खिसको (दिल बोले हड़िप्पा), रात के ढाई बजे (कमीने), उड़ता तीतर (सांड की आंख), मसखरी (दिल बेचारा), रानी हिंदुस्तानी (शकुंतला देवी) आदि शामिल हैं। सुनिधि फिल्मों में गाना गाने के अलावा कई रियलिटी शोज की जज भी रह चुकी हैं, जिनमें इंडियन आइडल 5 और 6 भी शामिल हैं। सुनिधि चौहान की पहली शादी मात्र 18 साल की उम्र में कोरियोग्राफर और निर्देशक बॉबी खान से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चल पाया और साल 2003 में दोनों अलग हो गए। सुनिधि ने 2012 में अपने दोस्त और संगीत निर्देशक हितेश सोनिक से की है। उनका एक बेटा तेग सोनिक है।
बॉलीवुड की मशहूर सिंगर सुनिधि चौहान आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। अपनी गायकी से लाखों दिलों को जीतने वाली सुनिधि चौहान का जन्म चौदह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ तिरासी को नई दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम निधि चौहान था जिसे बाद में कल्याणजी विरजी शाह ने बदलकर सुनिधि चौहान करने की सलाह दी थी जिसके बाद निधि बन गई सुनिधि। गायिकी के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुकी सुनिधि ने महज चार साल की उम्र में सिंगिंग पर आधारित एक स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उस समय सुनिधि की प्रतिभा को एक टीवी एंकर तबस्सुम ने पहचाना और उनके माता-पिता को मुंबई आने का न्योता दिया। इसके बाद ग्यारह साल की उम्र में सुनिधि अपने माता-पिता के साथ मुंबई आ गईं। तब तबस्सुम ने सुनिधि को कल्याणजी विरजी शाह और आनंदजी वीरजी शाह से मिलवाया। सुनिधि कल्याणजी की अकादमी में काम करने लगी और कुछ वर्षों में वह अपने लिटिल वंडर्स मंडली में एक प्रमुख गायिका बन गईं। एक हज़ार नौ सौ छियानवे में दूरदर्शन के रियलिटी शो मेरी आवाज सुनो में सुनिधि ने भाग लिया था। सुनिधि ने ये प्रतियोगिता जीती और लता मंगेशकर से ट्रॉफी ली। सुनिधि की आवाज को म्यूजिक डायरेक्टर आदेश श्रीवास्तव ने सुना और साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में आई फिल्म 'शस्त्र' में गाना 'लड़की दीवानी देखो' गाने का मौका दिया। इस गाने को आदेश श्रीवास्तव ने कम्पोज किया था। इस तरह से सुनिधि ने बॉलीवुड में इंट्री कर ली थी। इसके बाद सुनिधि को बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाना गाने का मौका मिला, लेकिन उन्हें असली सफलता एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में आई फिल्म 'मस्त' के गाने 'रुकी रुकी सी जिंदगी' से मिली। यह गाना उस समय जबरदस्त हिट हुआ और सुनिधि बॉलीवुड के मशहूर सिंगर्स की लिस्ट में शामिल हो गईं। इसके बाद सुनिधि ने बॉलीवुड में कई हिट गाने दिए। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, बंगाली, नेपाली और उर्दू में भी अपनी गायिकी की छाप छोड़ी। सुनिधि चौहान बॉलीवुड इंडस्ट्री में अब भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा गाए कुछ प्रमुख गानों में पास बुलाती है , महबूब मेरे , धूम मचाले , गोरी-गोरी , मीठी मीठी बातें , डिस्कोवाले खिसको , रात के ढाई बजे , उड़ता तीतर , मसखरी , रानी हिंदुस्तानी आदि शामिल हैं। सुनिधि फिल्मों में गाना गाने के अलावा कई रियलिटी शोज की जज भी रह चुकी हैं, जिनमें इंडियन आइडल पाँच और छः भी शामिल हैं। सुनिधि चौहान की पहली शादी मात्र अट्ठारह साल की उम्र में कोरियोग्राफर और निर्देशक बॉबी खान से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चल पाया और साल दो हज़ार तीन में दोनों अलग हो गए। सुनिधि ने दो हज़ार बारह में अपने दोस्त और संगीत निर्देशक हितेश सोनिक से की है। उनका एक बेटा तेग सोनिक है।
आगरा के कारोबारी से तीन पुलिसकर्मियों ने 50 किलो चांदी लूटी थी। इस मामले में कानपुर देहात के भोगनीपुर इंस्पेक्टर, दारोगा व सिपाही ही लूटेरे निकले हैं। कानपुर देहात व औरैया जनपद की पुलिस ने देर रात इंस्पेक्टर के आवास पर छापेमारी कर चांदी भी बरामद कर ली है। औरैया पुलिस इंस्पेक्टर व दारोगा को अरेस्ट कर अपने साथ लेकर गई। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। बता दें कि तीन दिन पहले आगरा के व्यापारी मनीष सोनी से बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर लूट हुई थी। जांच में कानपुर देहात के पुलिसकर्मी ही लुटेरे निकले। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि तीनों पुसिसकर्मी के निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी औरैया चारू निगम ने बताया कि 6 जून को आगरा के सर्राफा कारोबारी मनीष सोनी 50 किलो चांदी लेकर फतेहपुर से आगरा जा रहे थे। दो नंबर की चांदी होने की जानकारी मिलने पर भोगनीपुर इंस्पेक्टर अजय पाल शर्मा, दरोगा चिंतन कौशिक और हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर ने औरैया सीमा में जाकर व्यापारी को कार समेत रोक लिया। इसके बाद तलाशी के दौरान चांदी बरामद की और जांच-पड़ताल के दौरान कागजात नहीं दिखा सका तो इंस्पेक्टर अपनी टीम के साथ सरकारी गाड़ी में चांदी लूटकर भाग निकले। पीड़ित ने स्थानीय कोतवाली में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। एसपी औरैया ने बताया, जांच पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि ये बदमाश नहीं थे। बल्कि पुलिसवाले थे। इसमें कानपुर देहात के पुलिसकर्मियों का नाम सामने निकलकर आया। इसके बाद एडीजी कानपुर आलोक सिंह को पूरे मामले की जानकारी दी। एडीजी ने कानपुर देहात एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति से संपर्क किया। जानकारी होने के बाद कानपुर देहात एसपी गुरुवार भोगनीपुर कोतवाली पहुंचे। यहां पर इंस्पेक्टर के सरकारी आवास पर छापेमारी कर 50 किलो चांदी बरामद कर ली। ये चांदी सफेद रंग के एक थैले में रखी हुई थी। इसके थोड़ी देर बाद ही एसपी औरैया चारू निगम के साथ पुलिस की टीम पहुंची। एसपी कानपुर देहात ने बताया, इंस्पेक्टर व दारोगा कोतवाली में ही थे। उन्हें तत्काल प्रभाव से अरेस्ट कर लिया गया। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर अपने आवास पर था। उसे छापेमारी की बात पता चली तो वह मौके से भाग गया। जब तक उसके आवास पर पहुंचे, वह जा चुका था। दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को औरैया पुलिस को सौंप दिया गया है। घटना बेहद गंभीर है, उन सभी के खिलाफ विभागीय करवाई की जा रही है। बांदा के रहने वाले मनीष सोनी उर्फ सागर पेशे से सर्राफ हैं। उन्होंने तहरीर दी कि 6 जून को क्रेटा गाड़ी से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से औरेया जा रहा था। कार में मामा का लड़का रवि, भाभी सोनाली, उनकी बेटी आशी बैठे थे। कार को ड्राइवर जगनन्दन चला रहा था। करीब 2. 20 बजे सड़क पर स्कॉर्पियों कार खड़ी थी। पास में 4 लोग थे। कुछ ने वर्दी पहनी थी। उन्होंने हाथ दिखाकर कार को रोक लिया। 2 लोग सादे कपड़ों में थे। एक दरोगा जैसा था, उसकी कमर में पिस्टल लगी थी। उन्होंने ड्राइवर से आईडी मांगी। हमारे ड्राइवर ने आईडी नहीं दी। तो उससे कहा कि तुम नीचे उतरकर खड़े हो जाओ। सर्राफ ने कहा कि हम लोग भी कार के बाहर आकर खड़े हो गए। इसके बाद, सभी लोग गाड़ी की तलाशी लेने लगे। उन्होंने गाड़ी में रखे दो बैग अपने कब्जे में लिए। इनमें 30 टुकड़े चांदी के रखे थे। ये उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो में रख लिए। फिर ड्राइवर को कहा कि तुम गाड़ी में बैठो। उसको गाड़ी में लेकर वो लोग चले गए। हमसें उन्होंने ज्यादा कुछ पूछताछ नहीं की। हमारे मोबाइल अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद हम लोग घबरा गए। हम गाड़ी लेकर औरैया अपने मामा के घर आ गए। करीब दो घंटे बाद ड्राइवर भी वहां आ गया। उसने बताया कि वो लोग गाड़ी लेकर भाऊपुर पुल के नीचे पहुंचे थे। यहां पेट्रोल भरवाया। इसके बाद ड्राइवर को गाड़ी से उतार दिया। चांदी लेकर चले गए। इसके बाद सर्राफ मनीष ने औरैया पुलिस से 7 जून को संपर्क किया और पूरी घटना बताई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आगरा के कारोबारी से तीन पुलिसकर्मियों ने पचास किलो चांदी लूटी थी। इस मामले में कानपुर देहात के भोगनीपुर इंस्पेक्टर, दारोगा व सिपाही ही लूटेरे निकले हैं। कानपुर देहात व औरैया जनपद की पुलिस ने देर रात इंस्पेक्टर के आवास पर छापेमारी कर चांदी भी बरामद कर ली है। औरैया पुलिस इंस्पेक्टर व दारोगा को अरेस्ट कर अपने साथ लेकर गई। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। बता दें कि तीन दिन पहले आगरा के व्यापारी मनीष सोनी से बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर लूट हुई थी। जांच में कानपुर देहात के पुलिसकर्मी ही लुटेरे निकले। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि तीनों पुसिसकर्मी के निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी औरैया चारू निगम ने बताया कि छः जून को आगरा के सर्राफा कारोबारी मनीष सोनी पचास किलो चांदी लेकर फतेहपुर से आगरा जा रहे थे। दो नंबर की चांदी होने की जानकारी मिलने पर भोगनीपुर इंस्पेक्टर अजय पाल शर्मा, दरोगा चिंतन कौशिक और हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर ने औरैया सीमा में जाकर व्यापारी को कार समेत रोक लिया। इसके बाद तलाशी के दौरान चांदी बरामद की और जांच-पड़ताल के दौरान कागजात नहीं दिखा सका तो इंस्पेक्टर अपनी टीम के साथ सरकारी गाड़ी में चांदी लूटकर भाग निकले। पीड़ित ने स्थानीय कोतवाली में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। एसपी औरैया ने बताया, जांच पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि ये बदमाश नहीं थे। बल्कि पुलिसवाले थे। इसमें कानपुर देहात के पुलिसकर्मियों का नाम सामने निकलकर आया। इसके बाद एडीजी कानपुर आलोक सिंह को पूरे मामले की जानकारी दी। एडीजी ने कानपुर देहात एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति से संपर्क किया। जानकारी होने के बाद कानपुर देहात एसपी गुरुवार भोगनीपुर कोतवाली पहुंचे। यहां पर इंस्पेक्टर के सरकारी आवास पर छापेमारी कर पचास किलो चांदी बरामद कर ली। ये चांदी सफेद रंग के एक थैले में रखी हुई थी। इसके थोड़ी देर बाद ही एसपी औरैया चारू निगम के साथ पुलिस की टीम पहुंची। एसपी कानपुर देहात ने बताया, इंस्पेक्टर व दारोगा कोतवाली में ही थे। उन्हें तत्काल प्रभाव से अरेस्ट कर लिया गया। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर अपने आवास पर था। उसे छापेमारी की बात पता चली तो वह मौके से भाग गया। जब तक उसके आवास पर पहुंचे, वह जा चुका था। दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को औरैया पुलिस को सौंप दिया गया है। घटना बेहद गंभीर है, उन सभी के खिलाफ विभागीय करवाई की जा रही है। बांदा के रहने वाले मनीष सोनी उर्फ सागर पेशे से सर्राफ हैं। उन्होंने तहरीर दी कि छः जून को क्रेटा गाड़ी से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से औरेया जा रहा था। कार में मामा का लड़का रवि, भाभी सोनाली, उनकी बेटी आशी बैठे थे। कार को ड्राइवर जगनन्दन चला रहा था। करीब दो. बीस बजे सड़क पर स्कॉर्पियों कार खड़ी थी। पास में चार लोग थे। कुछ ने वर्दी पहनी थी। उन्होंने हाथ दिखाकर कार को रोक लिया। दो लोग सादे कपड़ों में थे। एक दरोगा जैसा था, उसकी कमर में पिस्टल लगी थी। उन्होंने ड्राइवर से आईडी मांगी। हमारे ड्राइवर ने आईडी नहीं दी। तो उससे कहा कि तुम नीचे उतरकर खड़े हो जाओ। सर्राफ ने कहा कि हम लोग भी कार के बाहर आकर खड़े हो गए। इसके बाद, सभी लोग गाड़ी की तलाशी लेने लगे। उन्होंने गाड़ी में रखे दो बैग अपने कब्जे में लिए। इनमें तीस टुकड़े चांदी के रखे थे। ये उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो में रख लिए। फिर ड्राइवर को कहा कि तुम गाड़ी में बैठो। उसको गाड़ी में लेकर वो लोग चले गए। हमसें उन्होंने ज्यादा कुछ पूछताछ नहीं की। हमारे मोबाइल अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद हम लोग घबरा गए। हम गाड़ी लेकर औरैया अपने मामा के घर आ गए। करीब दो घंटे बाद ड्राइवर भी वहां आ गया। उसने बताया कि वो लोग गाड़ी लेकर भाऊपुर पुल के नीचे पहुंचे थे। यहां पेट्रोल भरवाया। इसके बाद ड्राइवर को गाड़ी से उतार दिया। चांदी लेकर चले गए। इसके बाद सर्राफ मनीष ने औरैया पुलिस से सात जून को संपर्क किया और पूरी घटना बताई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अंबाला - जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में लड़कियों के 100 मीटर फ्री स्टाइल मुकाबले में प्रथा मेहता ने प्रथम, अदिति ने द्वितीय और कुंजल ठाकुर ने तृतीय स्थान हासिल किया। जिला तैराकी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंद्र विज ने बताया कि इसी प्रकार 50 मीटर फ्रंट स्ट्रोक में प्रथा मेहता, अदिति शर्मा और कुंजल ठाकुर ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाया। लड़कों की 100 मीटर फ्री स्टाइल मुकाबले में ऋषभ ने प्रथम, मानव गुप्ता ने द्वितीय और दिलशान सांगवान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के 50 मीटर फ्रंट स्ट्रोक में अथर्व ने प्रथम, सार्थक ने द्वितीय और विजय भान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कियों के ग्रुप थ्री में 100 मीटर फ्री स्टाइल में अर्पिता ने प्रथम, गुरनूर कौर ने द्वितीय और नंदिनी ने तृतीय, 50 मीटर फ्रंट स्ट्रोक में अर्पणजोत कौर ने प्रथम, अनुष्का ने द्वितीय और सहज ने द्वितीय स्थान हासिल किया। इसी प्रकार लड़कों के 200 मीटर बैक स्ट्रोक में नीरज ने प्रथम, तेजस ने द्वितीय और शुभम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। लड़कों के गु्रप थ्री 50 मीटर बटरफ्लाई मुकाबले में ऋषभ ने प्रथम, माधव गुप्ता ने द्वितीय और अफशान खान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के गु्रप थ्री के फ्री स्टाइल 50 मीटर में ऋषभ ने प्रथम, अफशान खान ने द्वितीय और अभिनव ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के 100 मीटर फ्री स्टाइल ग्रुप चार में कबीर त्यागी ने प्रथम, पर्थ रनिश ने द्वितीय और पर्थ मल्होत्रा ने तृतीय स्थान हासिल किया। पुरुषों के 100 मीटर सीनियर फ्री स्टाइल में वाशु शर्मा ने प्रथम, तनु चित्कारा ने द्वितीय और पारूल ने तृतीय स्थान हासिल किया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
अंबाला - जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में लड़कियों के एक सौ मीटर फ्री स्टाइल मुकाबले में प्रथा मेहता ने प्रथम, अदिति ने द्वितीय और कुंजल ठाकुर ने तृतीय स्थान हासिल किया। जिला तैराकी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंद्र विज ने बताया कि इसी प्रकार पचास मीटर फ्रंट स्ट्रोक में प्रथा मेहता, अदिति शर्मा और कुंजल ठाकुर ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाया। लड़कों की एक सौ मीटर फ्री स्टाइल मुकाबले में ऋषभ ने प्रथम, मानव गुप्ता ने द्वितीय और दिलशान सांगवान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के पचास मीटर फ्रंट स्ट्रोक में अथर्व ने प्रथम, सार्थक ने द्वितीय और विजय भान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कियों के ग्रुप थ्री में एक सौ मीटर फ्री स्टाइल में अर्पिता ने प्रथम, गुरनूर कौर ने द्वितीय और नंदिनी ने तृतीय, पचास मीटर फ्रंट स्ट्रोक में अर्पणजोत कौर ने प्रथम, अनुष्का ने द्वितीय और सहज ने द्वितीय स्थान हासिल किया। इसी प्रकार लड़कों के दो सौ मीटर बैक स्ट्रोक में नीरज ने प्रथम, तेजस ने द्वितीय और शुभम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। लड़कों के गु्रप थ्री पचास मीटर बटरफ्लाई मुकाबले में ऋषभ ने प्रथम, माधव गुप्ता ने द्वितीय और अफशान खान ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के गु्रप थ्री के फ्री स्टाइल पचास मीटर में ऋषभ ने प्रथम, अफशान खान ने द्वितीय और अभिनव ने तृतीय स्थान हासिल किया। लड़कों के एक सौ मीटर फ्री स्टाइल ग्रुप चार में कबीर त्यागी ने प्रथम, पर्थ रनिश ने द्वितीय और पर्थ मल्होत्रा ने तृतीय स्थान हासिल किया। पुरुषों के एक सौ मीटर सीनियर फ्री स्टाइल में वाशु शर्मा ने प्रथम, तनु चित्कारा ने द्वितीय और पारूल ने तृतीय स्थान हासिल किया। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
नई दिल्ली - संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 126वीं जयंती पर शुक्रवार को पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए गए। बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही देश के लिए किए गए उनके कार्यों और सेवाओं का स्मरण किया गया। राजधानी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह संसद भवन परिसर के लॉन में भारत रत्न डा. अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और राज्य मंत्रियों-कृष्ण पाल गुर्जर और विजय सांपला तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। संसद भवन परिसर में इस अवसर पर आयोजित समारोह में सुबह से ही डा. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हजारों लोगों का तांता लग गया था। समारोह में भाग लेने वाले लोग 'बाबा साहेब अमर रहें, 'जय भीम' और 'जय भारत' के नारे लगा रहे थे। समारोह का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत डा अंबेडकर प्रतिष्ठान ने किया था। समारोह की शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं के मंत्रोच्चार के साथ हुई।
नई दिल्ली - संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की एक सौ छब्बीसवीं जयंती पर शुक्रवार को पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए गए। बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही देश के लिए किए गए उनके कार्यों और सेवाओं का स्मरण किया गया। राजधानी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह संसद भवन परिसर के लॉन में भारत रत्न डा. अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और राज्य मंत्रियों-कृष्ण पाल गुर्जर और विजय सांपला तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। संसद भवन परिसर में इस अवसर पर आयोजित समारोह में सुबह से ही डा. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हजारों लोगों का तांता लग गया था। समारोह में भाग लेने वाले लोग 'बाबा साहेब अमर रहें, 'जय भीम' और 'जय भारत' के नारे लगा रहे थे। समारोह का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत डा अंबेडकर प्रतिष्ठान ने किया था। समारोह की शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं के मंत्रोच्चार के साथ हुई।
हमीरपुर बडू के पास एक तेज रफ्तार कार दीवार तोड़कर सीधे वेल्डिंग की दुकान में जा घुसी। इस हादसे में दुकान में बेल्डिंग का काम कर रहा एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ। घायल की पहचान अशोक कुमार निवासी बड़ू के रूप में हुई है। घायल को इलाज के लिए हमीरपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहां उसका उपचार जारी है। गनीमत रही कि दुकान के अंदर घुसी कार के पिल्लर से टकराने के कारण कार बंद हो गई जिस कारण बड़ा हादसा टल गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार लंबलू की ओर से आई। चालक कार से नियंत्रण खो बैठा और कार दुकान के अंदर घुस गई। घटना में कार चालक को चोट नहीं आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हमीरपुर बडू के पास एक तेज रफ्तार कार दीवार तोड़कर सीधे वेल्डिंग की दुकान में जा घुसी। इस हादसे में दुकान में बेल्डिंग का काम कर रहा एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ। घायल की पहचान अशोक कुमार निवासी बड़ू के रूप में हुई है। घायल को इलाज के लिए हमीरपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहां उसका उपचार जारी है। गनीमत रही कि दुकान के अंदर घुसी कार के पिल्लर से टकराने के कारण कार बंद हो गई जिस कारण बड़ा हादसा टल गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार लंबलू की ओर से आई। चालक कार से नियंत्रण खो बैठा और कार दुकान के अंदर घुस गई। घटना में कार चालक को चोट नहीं आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। तड़ित का दृष्य तड़ित (Lightning) या "आकाशीय बिजली" वायुमण्डल में विद्युत आवेश का डिस्चार्ज होना (एक वस्तु से दूसरी पर स्थानान्तरण) और उससे उत्पन्न कड़कड़ाहट (thunder) को तड़ित कहते हैं। संसार में प्रतिवर्ष लगभग १ करोड़ ६० लाख तड़ित पैदा होते हैं। . बराक (ברק, तड़ित) एक इजरायली, सतह से हवा की मिसाइल है। बराक को जहाज के बिंदु डिफेंस मिसाइल प्रणाली के लिये बनाया गया है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के विमान, एंटी शिप मिसाइल और यूएवी के खिलाफ होता है। . तड़ित और बराक 1 आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। तड़ित 4 संबंध है और बराक 1 3 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (4 + 3)। यह लेख तड़ित और बराक 1 के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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श्रावण माह के पहले सोमवार को उज्जैन में विशाल ध्वज के साथ बाबा श्री महाकाल की प्रथम सवारी निकली. राजाधिराज बाबा महाकाल ने उज्जयिनी का भ्रमण किया. सवारी मार्ग में हजारो श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल को पुष्प अर्पित कर दर्शन लाभ लिया. उज्जैनः विशाल ध्वज के साथ भगवान महाकाल की सवारी आज नगर में निकाली गई. श्रावण माह के पहले दिन सोमवार को उज्जैयिनी के भ्रमण पर निकलकर भगवान श्री महाकालेश्वर ने भक्तों को दर्शन दिए. भगवान श्री महाकाल की पालकी के नगर भ्रमण के रवाना होने के पूर्व सर्व प्रथम भगवान श्री महाकालेश्वर का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन किया गया. इसके पश्चात भगवान की आरती की गई. इस अवसर पर ओम जैन अध्यक्ष मध्यप्रदेश फार्मेसी कोंसिल, प्रशासक संदीप कुमार सोनी, सीईओ स्मार्ट सिटी आशीष पाठक, समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरु, राजेंद्र शर्मा गुरु, राम पुजारी एवं अन्य अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद थे. सभी गणमान्यो ने पालकी को कांधा देकर नगर भ्रमण की ओर रवाना किया. भगवान श्री मनमहेश का विधिवत पूजन-अर्चन मुख्य पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने संपन्न करायी. सवारी नगर भ्रमण कर पुनः महाकाल मंदिर पहुंची जहां भगवान का पूजन अर्चन किया गया. भगवान भोलेनाथ के भक्त भी भोले ही होते हैं, उनका यही भोलापन बाबा महाकाल की सवारी में नजर आया. क्योंकि इस सवारी में कुछ श्रद्धालु देवता का रूप धारण कर निकलते हैं तो कुछ भूत,पलीत और दानव बनकर. बाबा महाकाल की यह सवारी निराली थी, क्योंकि सवारी में कोई झांझ बजाते नजर आया तो कोई डमरु. हर कोई सवारी के दौरान अपनी ही मस्ती में मस्त रहा और बाबा महाकाल का जयघोष करता दिखाई दिया. बाबा महाकाल की सवारी को देखने के लिए श्रद्धालु मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देशभर से उज्जैन पहुंचे और बाबा कि सवारी का दर्शन लाभ लेकर अपने आपको धन्य महसूस किया. महाकाल मंदिर व श्री महाकाल लोक में स्मार्ट सिटी द्वारा दस करोड़ रुपये की लागत से 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं.इसके अलावा आर्टिफिशल इंटेलिजेंसी का भी उपयोग किया गया. मंदिर समिति महाकाल परिसर, हरसिद्धि मंदिर क्षेत्र सवारी मार्ग में 250 सीसीटीवी कैमरे लगवाए है.इसके अलावा पुलिस के 108 स्थानों पर भी 511 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. इनके माध्यम से भी पुलिस कंट्रोल रूम से नजर रखी गई. एमपी के शिक्षा मंत्री, मेयर, विधायक समेत कई लोगों ने की पूजा बाबा महाकाल की सवारी के निकलने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के सभामंडप में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल,विधायक (उत्तर) पारसचंद्र जैन,अध्यक्ष एवं कलेक्टर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति कुमार पुरुषोत्तम, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज,नगर पालिक निगम आयुक्त रोशन सिंह समेत कई लोगों ने भगवान श्री महाकालेश्वशर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हो कर बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ लिया.
श्रावण माह के पहले सोमवार को उज्जैन में विशाल ध्वज के साथ बाबा श्री महाकाल की प्रथम सवारी निकली. राजाधिराज बाबा महाकाल ने उज्जयिनी का भ्रमण किया. सवारी मार्ग में हजारो श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल को पुष्प अर्पित कर दर्शन लाभ लिया. उज्जैनः विशाल ध्वज के साथ भगवान महाकाल की सवारी आज नगर में निकाली गई. श्रावण माह के पहले दिन सोमवार को उज्जैयिनी के भ्रमण पर निकलकर भगवान श्री महाकालेश्वर ने भक्तों को दर्शन दिए. भगवान श्री महाकाल की पालकी के नगर भ्रमण के रवाना होने के पूर्व सर्व प्रथम भगवान श्री महाकालेश्वर का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन किया गया. इसके पश्चात भगवान की आरती की गई. इस अवसर पर ओम जैन अध्यक्ष मध्यप्रदेश फार्मेसी कोंसिल, प्रशासक संदीप कुमार सोनी, सीईओ स्मार्ट सिटी आशीष पाठक, समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरु, राजेंद्र शर्मा गुरु, राम पुजारी एवं अन्य अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद थे. सभी गणमान्यो ने पालकी को कांधा देकर नगर भ्रमण की ओर रवाना किया. भगवान श्री मनमहेश का विधिवत पूजन-अर्चन मुख्य पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने संपन्न करायी. सवारी नगर भ्रमण कर पुनः महाकाल मंदिर पहुंची जहां भगवान का पूजन अर्चन किया गया. भगवान भोलेनाथ के भक्त भी भोले ही होते हैं, उनका यही भोलापन बाबा महाकाल की सवारी में नजर आया. क्योंकि इस सवारी में कुछ श्रद्धालु देवता का रूप धारण कर निकलते हैं तो कुछ भूत,पलीत और दानव बनकर. बाबा महाकाल की यह सवारी निराली थी, क्योंकि सवारी में कोई झांझ बजाते नजर आया तो कोई डमरु. हर कोई सवारी के दौरान अपनी ही मस्ती में मस्त रहा और बाबा महाकाल का जयघोष करता दिखाई दिया. बाबा महाकाल की सवारी को देखने के लिए श्रद्धालु मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देशभर से उज्जैन पहुंचे और बाबा कि सवारी का दर्शन लाभ लेकर अपने आपको धन्य महसूस किया. महाकाल मंदिर व श्री महाकाल लोक में स्मार्ट सिटी द्वारा दस करोड़ रुपये की लागत से पाँच सौ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं.इसके अलावा आर्टिफिशल इंटेलिजेंसी का भी उपयोग किया गया. मंदिर समिति महाकाल परिसर, हरसिद्धि मंदिर क्षेत्र सवारी मार्ग में दो सौ पचास सीसीटीवी कैमरे लगवाए है.इसके अलावा पुलिस के एक सौ आठ स्थानों पर भी पाँच सौ ग्यारह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. इनके माध्यम से भी पुलिस कंट्रोल रूम से नजर रखी गई. एमपी के शिक्षा मंत्री, मेयर, विधायक समेत कई लोगों ने की पूजा बाबा महाकाल की सवारी के निकलने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के सभामंडप में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल,विधायक पारसचंद्र जैन,अध्यक्ष एवं कलेक्टर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति कुमार पुरुषोत्तम, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज,नगर पालिक निगम आयुक्त रोशन सिंह समेत कई लोगों ने भगवान श्री महाकालेश्वशर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हो कर बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ लिया.
विश्व कप खत्म होने के बाद से ही सभी लोग के मन में एक प्रश्न है की महेंद्र सिंह धोनी कब संन्यास लेंगे और यदि नहीं तो कब तक खेलेंगे. इस बीच धोनी ने 2 महीने आर्मी ट्रेनिंग की बात कहकर सभी को चौंका दिया. कल वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय टीम चुनी गयी जिसमें महेंद्र सिंह धोनी नहीं थे. अब इन बातो पर क्रिकेट एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने अपनी राय रखी है. इंग्लैंड में हुए विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी ने 9 मैच खेले हैं. जिसमें उन्होंने 45. 50 की औसत से 273 रन जरुर बनाए. जिसमें 2 अर्द्धशतक शामिल हैं, लेकिन इस बीच धोनी बीच के ओवरों में रन बनाने के लिए जूझते दिखे. जिसके कारण भारतीय टीम की समस्या और बढ़ गयी थी.
विश्व कप खत्म होने के बाद से ही सभी लोग के मन में एक प्रश्न है की महेंद्र सिंह धोनी कब संन्यास लेंगे और यदि नहीं तो कब तक खेलेंगे. इस बीच धोनी ने दो महीने आर्मी ट्रेनिंग की बात कहकर सभी को चौंका दिया. कल वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय टीम चुनी गयी जिसमें महेंद्र सिंह धोनी नहीं थे. अब इन बातो पर क्रिकेट एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने अपनी राय रखी है. इंग्लैंड में हुए विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी ने नौ मैच खेले हैं. जिसमें उन्होंने पैंतालीस. पचास की औसत से दो सौ तिहत्तर रन जरुर बनाए. जिसमें दो अर्द्धशतक शामिल हैं, लेकिन इस बीच धोनी बीच के ओवरों में रन बनाने के लिए जूझते दिखे. जिसके कारण भारतीय टीम की समस्या और बढ़ गयी थी.
चंडीगढ़ : हरियाणा में विपक्षी राजनीतिक दल इनेलो को अलविदा करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को हथीन के विधायक केहर सिंह रावत भी इनेलो को अलविदा करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। एक सप्ताह में यह दूसरा मौका है जब इनेलो विधायक ने पार्टी को अलविदा करते हुए भाजपा का दामन थामा है। रावत के अलावा पैरालंपिक चैंपियन दीपा मलिक ने भी आज भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। हथीन से इनेलो विधायक केहर सिंह रावत को लेकर भी पिछले कई दिनों से अटकलों का दौर चल रहा था। रावत की गिनती रणबीर सिंह गंगवा और फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नगेंद्र भड़ाना के गुट में होती रही है। हालही में हुए विधानसभा सत्र के दौरान भी कई मुद्दों पर अभय चौटाला व केहर सिंह रावत के बीच मतभेद उजागर हुए हैं। गंगवा के भाजपा में शामिल होने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थी कि इनेलो के दो अन्य विधायक भाजपा में शामिल होने की तैयारी में है। जिसके चलते आज केहर सिंह रावत ने पार्टी प्रभारी अनिल जैन और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। केहर सिंह रावत 2014 में इनेलो की तरफ से विधायक चुने गए थे। इससे पिछला चुनाव भी केहर सिंह रावत ने इनेलो की टिकट पर लड़ा था लेकिन 18. 91 फीसदी वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2014 में केहर सिंह रावत ने बीजेपी के हर्ष कुमार को हराया था। इसी दौरान पैरा ओलंपियन दीपा मलिक भी बीजेपी में शामिल हुई। दीपा मलिक ने बताया कि पिछले 70 सालों में खिलाडिय़ों के लिए काम नहीं किया जितना मोदी सरकार ने पांच साल में किया है। उन्होने कहा कि मेरा परिवार सेना से जुड़ा परिवार रहा है और अब वह बीजेपी सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर बीजेपी में शामिल हो रही हैं। इस अवसर पर बोलते हुए केहर ङ्क्षसह रावत ने कहा कि वह प्रदेश व केंद्र सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर ही भाजपा में शामिल हुए हैं। भाजपा में शामिल होने के लिए उनका किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है। इस अवसर पर भाजपा प्रभारी अनिल जैन ने केहर सिंह रावत का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा में उन्हें उचित मान-सम्मान दिया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बिना किसी भेदभाव के हरियाणा में करवाए गए विकास का परिणाम है कि आज विरोधी राजनीतिक दलों के नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। (राजेश जैन)
चंडीगढ़ : हरियाणा में विपक्षी राजनीतिक दल इनेलो को अलविदा करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को हथीन के विधायक केहर सिंह रावत भी इनेलो को अलविदा करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। एक सप्ताह में यह दूसरा मौका है जब इनेलो विधायक ने पार्टी को अलविदा करते हुए भाजपा का दामन थामा है। रावत के अलावा पैरालंपिक चैंपियन दीपा मलिक ने भी आज भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। हथीन से इनेलो विधायक केहर सिंह रावत को लेकर भी पिछले कई दिनों से अटकलों का दौर चल रहा था। रावत की गिनती रणबीर सिंह गंगवा और फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नगेंद्र भड़ाना के गुट में होती रही है। हालही में हुए विधानसभा सत्र के दौरान भी कई मुद्दों पर अभय चौटाला व केहर सिंह रावत के बीच मतभेद उजागर हुए हैं। गंगवा के भाजपा में शामिल होने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थी कि इनेलो के दो अन्य विधायक भाजपा में शामिल होने की तैयारी में है। जिसके चलते आज केहर सिंह रावत ने पार्टी प्रभारी अनिल जैन और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। केहर सिंह रावत दो हज़ार चौदह में इनेलो की तरफ से विधायक चुने गए थे। इससे पिछला चुनाव भी केहर सिंह रावत ने इनेलो की टिकट पर लड़ा था लेकिन अट्ठारह. इक्यानवे फीसदी वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। दो हज़ार चौदह में केहर सिंह रावत ने बीजेपी के हर्ष कुमार को हराया था। इसी दौरान पैरा ओलंपियन दीपा मलिक भी बीजेपी में शामिल हुई। दीपा मलिक ने बताया कि पिछले सत्तर सालों में खिलाडिय़ों के लिए काम नहीं किया जितना मोदी सरकार ने पांच साल में किया है। उन्होने कहा कि मेरा परिवार सेना से जुड़ा परिवार रहा है और अब वह बीजेपी सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर बीजेपी में शामिल हो रही हैं। इस अवसर पर बोलते हुए केहर ङ्क्षसह रावत ने कहा कि वह प्रदेश व केंद्र सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर ही भाजपा में शामिल हुए हैं। भाजपा में शामिल होने के लिए उनका किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है। इस अवसर पर भाजपा प्रभारी अनिल जैन ने केहर सिंह रावत का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा में उन्हें उचित मान-सम्मान दिया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बिना किसी भेदभाव के हरियाणा में करवाए गए विकास का परिणाम है कि आज विरोधी राजनीतिक दलों के नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं।
बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी का कहर जारी है. बल्कि अब इसने अपने पैरों को अन्य जिलों की तरफ भी बढ़ा दिया है. मुजफ्फरपुर के बाद चमकी का अगला शिकार गया जिला है. जिले के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक सप्ताह से एईएस के मरीजों का आना जारी है. अस्पताल में अब तक चमकी बुखार से पीड़ित 15 बच्चे भर्ती हुए हैं, जिनमें से पांच बच्चों की मौत हो चुकी है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन बच्चों की मौत किन कारणों से हुई है. इसकी जांच रिपोर्ट जल्द आने वाली है, इसके बाद ही इसकी पुष्टि हो पाएगी. बता दें कि बारिश शुरू होने के बाद भी गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कालेज के अस्पताल में 5 दिनों में गया और औरंगाबाद जिले के 15 बच्चे भर्ती कराया गया है. इलाज के दौरान इनमें से पांच बच्चों की मौत हो गई है. मरने वाले बच्चों में एईएस की संभावना जताई जा रही है. हालांकि सभी बच्चों की रिपोर्ट पटना भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के मरने का कारण स्पष्ट हो पायेगा. .
बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी का कहर जारी है. बल्कि अब इसने अपने पैरों को अन्य जिलों की तरफ भी बढ़ा दिया है. मुजफ्फरपुर के बाद चमकी का अगला शिकार गया जिला है. जिले के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक सप्ताह से एईएस के मरीजों का आना जारी है. अस्पताल में अब तक चमकी बुखार से पीड़ित पंद्रह बच्चे भर्ती हुए हैं, जिनमें से पांच बच्चों की मौत हो चुकी है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन बच्चों की मौत किन कारणों से हुई है. इसकी जांच रिपोर्ट जल्द आने वाली है, इसके बाद ही इसकी पुष्टि हो पाएगी. बता दें कि बारिश शुरू होने के बाद भी गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कालेज के अस्पताल में पाँच दिनों में गया और औरंगाबाद जिले के पंद्रह बच्चे भर्ती कराया गया है. इलाज के दौरान इनमें से पांच बच्चों की मौत हो गई है. मरने वाले बच्चों में एईएस की संभावना जताई जा रही है. हालांकि सभी बच्चों की रिपोर्ट पटना भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के मरने का कारण स्पष्ट हो पायेगा. .
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2017 का मसौदा सार्वजनिक चर्चा के लिये प्रस्तुत किया गया है। ऐसा इसलिये किया गया है क्योंकि इस संबंध में व्यक्त अनुमानों के अनुसार, यह विधेयक कई मामलों में समाधान ढूँढ पाने में असफल रहा है। मोटेतौर पर यह वर्ष 2008 में पेश किये गए विधेयक जैसा ही है। हालाँकि विधेयक के अंतिम मसौदे में प्रस्तावित कानून का दायरा बढ़ाए जाने की बात कही गई है ताकि उत्पादन, बिक्री और संयंत्र संरक्षण रसायनों को इसके अंतर्गत शामिल किया जा सके। कीटनाशक क्या होते हैं? - कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जिनका इस्तेमाल कीड़े-मकोड़ों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने अथवा उनसे बचाने के लिये किया जाता है। - जैसा कि हम सभी जानते हैं कि उर्वरक पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं, जबकि कीटनाशक पौधों की कीटों से रक्षा के उपाय के रूप में कार्य करते हैं। कृषि रसायन क्या होते हैं? - कृषि-केमिकल्स अथवा कृषि रसायन ऐसे उत्पादों की श्रेणी होती है जिसमें सभी कीटनाशक रसायनों और रासायनिक उर्वरकों को शामिल किया जाता है। - इनका उपयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। हालाँकि यदि एक उचित अनुपात एवं मात्रा में सही तरीके से इनका इस्तेमाल किया जाए तो ये किसानों के लिये बेहतर आय के अवसर प्रदान कर सकते हैं। - वस्तुतः रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की प्रकृति एवं स्थानीय वातावरण पर निर्भर करता है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से पहले बहुत सी सावधानियाँ बरतनी चाहिये। - इसके लिये मिट्टी की सही समय पर जाँच करवानी चाहिये ताकि उन तत्त्वों के विषय में सटीक जानकारी प्राप्त की जा सके जिनकी मिट्टी में कमी है। - इनके उपयोग में सावधानी न बरतने का परिणाम यह हुआ है कि मिट्टी की गुणवत्ता में तो कमी आई ही साथ ही, इसका प्रभाव किसानों की आय के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। - आमतौर पर उपयोग में लाए जाने वाले कृषि- रसायनों में डाइअमोनियम फास्फेट, यूरिया, जिंक सल्फेट, एन.पी.के., पोटैशियम सल्फेट, बोरेक्स, फेरस सल्फेट तथा मेगनीज़ सल्फेट आदि का इस्तेमाल किया जाता हैं। - पिछले कुछ सालों में देश के कई हिस्सों में ज़हरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण किसानों की मौत के मामले सामने आए। इन मामलों के संदर्भ में सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (Centre for Science and Environment - CSE) द्वारा कीटनाशकों के उपयोग के विषय में ठोस दिशा-निर्देश तैयार करने तथा श्रेणी 1 के कई कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी मांग की गई। - संगठन द्वारा इस प्रकार के ज़हरीले कीटनाशकों के असुरक्षित इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिये कीटनाशक प्रबंधन विधेयक को लाने की मांग की गई। - वर्ष 2008 में सरकार द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक संसद में पेश किया गया था, लेकिन उसे पारित नहीं किया गया। - इस विधेयक में कीटनाशक को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। - इसमें खराब गुणवत्ता, मिलावटी या हानिकारक कीटनाशकों के नियमन संबंधी मानदंड निर्धारित किये गए हैं। - इसके अनुसार, किसी भी कीटनाशक को तब तक पंजीकृत नहीं किया जा सकता है जब तक कि उसके फसलों अथवा उत्पादों पर पड़ने वाले प्रभाव जिन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित किया गया है, स्पष्ट नहीं कर दिये जाते हैं। - इतना ही नहीं इसके अंतर्गत कीटनाशक निर्माताओं, वितरकों एवं खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस की प्रक्रिया तय करने संबंधी दिशा-निर्देशों को भी निर्धारित किया गया है। इस विधेयक की आवश्यकता क्यों है? - देश में उपयोग किये जाने वाले कीटनाशकों तथा विनियामक व्यवस्था की विफलता के संदर्भ में एक उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। यह उच्च स्तरीय जाँच समिति वर्ष 2003 की संयुक्त संसदीय समिति के समान होनी चाहिये, जिसने पेय पदार्थों में हानिकारक रासायनिक अवक्षेपों का पता लगाया था तथा इनकी प्रभावी सीमा (tolerance limits) का निर्धारण करने की सिफारिश की थी। - प्रभावी सीमा से तात्पर्य कीटनाशकों की उस मात्रा से है जिस मात्रा तक इन हानिकारक रासायनिक अवक्षेपों का मनुष्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। - कीटनाशकों के उपयोग करने हेतु सलाह देने के लिये एक 'केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड' का गठन किया जाना चाहिये ताकि यह बोर्ड विषाक्त रसायनों के पंजीकरण और वितरण तथा बिक्री का दृढ़तापूर्वक निरिक्षण करे। - इस विधेयक के अंतर्गत उन कीटनाशकों के इस्तेमाल पर किसी तरह की चिंता नहीं जताई गई है जिनके इस्तेमाल पर विश्व के कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया है। - वर्तमान में देश में प्रथम श्रेणी के 18 सबसे खतरनाक कीटनाशकों में से सात का उत्पादन हो रहा है, जिन पर कई देशों द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है। - जबकि भारत की कुल कीटनाशक खपत में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई है। हालाँकि कुछ प्रमुख कीटनाशक प्रयोक्ता राज्य जैसे कि महाराष्ट्र और पंजाब द्वारा इनमें से कुछ कीटनाशकों के संबंध में प्रतिबंध लगाने की योजना है। - इसके अतिरिक्त नए कानून में उस पुराने प्रावधान को बरकरार रखा गया है जिसमें विदेशों से पेश किये गए कीटनाशकों को दो वर्ष तक के प्रारंभिक पंजीयन की अनुमति दी गई है। - इस संबंध में विशेषज्ञों का मत है कि दो साल की अवधि बहुत अधिक है। इससे काफी नुकसान होने की संभावना है। - हालाँकि इस विधेयक के अंतर्गत निहित नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिये कड़े जुर्माने की व्यवस्था की गई है। परंतु इसमें समस्या यह है कि इससे संबद्ध प्रावधानों को स्पष्ट रूप से व्याख्यायित नहीं किया गया है। वस्तुतः इस अस्पष्ट व्याख्या के परिणामस्वरुप सारा दोषारोपण कमज़ोर मानक वाले खराब कीटनाशक निर्माताओं या उनका कारोबार करने वालों के स्थान पर किसानों पर किया जा सकता है। - इतना ही नहीं प्रस्तावित कानून के अंतर्गत स्वदेशी शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के विषय में भी कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई गई है। यही कारण है कि स्थानीय कीट, पतंगों और बीमारियों से संबद्ध शोध के अभाव में विदेशों से निर्मित कीटनाशकों के प्रयोग पर निर्भरता निरंतर बढ़ती जा रही है। - इसके अतिरिक्त विधेयक के अंतर्गत यह भी सुनिश्चित नहीं किया गया है कि खराब कीटनाशकों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी। इसके इतर इस मुद्दे को उपरोक्त विधेयक के बजाय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में शामिल किया गया है। - उल्लेखनीय है कि कपास उत्पादक अपनी फसल को कीड़ों के प्रभाव से बचाने के लिये बड़ी मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। इस प्रकार किसान कीटनाशकों में मिलाए गए विषाक्त रसायनों के प्रभाव में आ जाते हैं, जिसके कारण प्रायः उनकी मृत्यु हो जाती है। - यह तथ्य कि किसान कीटनाशकों के लिये 'कृषि विस्तार अधिकारियों' (agricultural extension officers) की तुलना में प्रायः बेईमान एजेंटों और वाणिज्यिक दुकानों की सलाह पर विश्वास करते हैं। यह कृषि के प्रति सरकार के गैर-ज़िम्मेदराना रवैये को दर्शाता है। - हालाँकि, इस समस्या की जड़ें काफी गहरी हैं। भारत में कीटनाशकों के नियमन की प्रणाली काफी पुरानी है। अतः विगत वर्षों में पिछली सरकारों द्वारा किये गए बेहतरीन प्रयास भी इस दिशा में उपयोगी सिद्ध नहीं हुए। - वर्ष 2008 में एक नया 'कीटनाशक प्रबंधन विधेयक' (Pesticides Management Bill) लाया गया था, जिसे उस समय तो संसदीय स्थायी समिति द्वारा संज्ञान में ले लिया गया था परंतु यह अभी तक लंबित ही पड़ा हुआ है। - हालाँकि इसी दौरान इस बात के भी चिंताजनक प्रमाण मिले थे कि आज किसानों को बेचे जा रहे अधिकांश कीटनाशक नकली हैं और इन नकली कीटनाशकों की बदौलत वास्तविक उत्पाद की तुलना उत्पादन में उच्च वृद्धि दर प्राप्त की जा रही है। - वस्तुतः जब हम कीटनाशकों के प्रयोग से उत्पन्न उत्पादों का सेवन करते हैं तो उसके माध्यम से खतरनाक ज़हर सीधे हमारे शरीर में प्रवेश करता है, जो शरीर की कोशिकाओं में पहुँचकर लाइलाज़ बीमारियों और जानलेवा कैंसर को जन्म देता है। - कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 साल तक अपने भोजन में भिंडी या बैगन का सेवन करता है, तो निश्चित रूप से वह दमा का मरीज़ बन जाएगा। इतना ही नहीं उसकी वास नलिका के भी अवरुद्ध होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाएगी। - वर्तमान में भारतीय किसानों द्वारा बहुत से रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है जो दुनिया के कई अन्य देशों में प्रतिबंधित हैं। उदाहरण के तौर पर, डीडीटी, बीएचसी, एल्ड्रॉन, क्लोसडेन, एड्रीन, मिथाइल पैराथियान, टोक्साफेन, हेप्टाक्लोर इत्यादि। - सीएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में हुई किसानों की मौत के लिये मोनोक्रोटो सीस, ऑक्सिडेमेटेन-मिथाइल, एसेफेट और प्रोफेनोफोस जैसे कीटनाशकों को ज़िम्मेदार माना जाता है। - आको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मोनोक्रोटो सीस एवं ऑक्सिडेमेटेन-मिथाइल को अत्यधिक खतरनाक (वर्ग-1 का) में शामिल किया गया है। - इतना ही नहीं अभी तक मोनोक्रोटो सीस को 60, फोरेट को 37, ट्रायाफोस को 40 और फॉस्फैमिडोन को 49 देशों द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। - हमारे देश में कीटनाशक नियंत्रण हेतु तीन बड़ी संस्थाएँ मौजूद हैं- सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथारिटी आफ इंडिया तथा एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्टस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथारिटी। - ये तीनों संस्थान क्रमशः कृषि, स्वास्थ्य और वाणिज्य मंत्रालयों के अंतर्गत काम करते हैं, यही कारण है कि इनके बीच में आपसी तालमेल की कमी बनी रहती है, जिसका स्पष्ट प्रभाव इनके कार्यों पर परिलक्षित होता है। - ऐसा इसलिये भी हो रहा है क्योंकि सरकार की प्रमुख प्राथमिकता अधिक पैदावार के साथ-साथ अधिक-से-अधिक लोगों के लिये भोजन सुनिश्चित करना है। स्पष्ट रूप से ऐसी स्थिति में कीटनाशक प्रबंधन का मुद्दा दरकिनार कर दिया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते है कि कीटनाशकों के इस्तेमाल से भले ही कुछ समय के लिये कृषि उपज को बढ़ावा मलता है, लेकिन दीर्घावधि के संदर्भ में इसके इस्तेमाल बहुत अधिक खतरनाक होते है। ऐसे में सरकार को इस संबंध में एक प्रभावी नियामक बनाने पर बल देना चाहिये ताकि किसानों की आय को हानि पहुँचाए बिना उसने स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी आजीविका को नुकसान पहुँचने से बचाया जा सके। इसके लिये जहाँ एक ओर उक्त विधेयक में कुछ प्रभावी परिवर्तन करते हुए इसे लागू किया जाना चाहिये वहीं दूसरी ओर कृषि में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल की बजाय जैविक कृषि को अपनाए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिये।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, दो हज़ार सत्रह का मसौदा सार्वजनिक चर्चा के लिये प्रस्तुत किया गया है। ऐसा इसलिये किया गया है क्योंकि इस संबंध में व्यक्त अनुमानों के अनुसार, यह विधेयक कई मामलों में समाधान ढूँढ पाने में असफल रहा है। मोटेतौर पर यह वर्ष दो हज़ार आठ में पेश किये गए विधेयक जैसा ही है। हालाँकि विधेयक के अंतिम मसौदे में प्रस्तावित कानून का दायरा बढ़ाए जाने की बात कही गई है ताकि उत्पादन, बिक्री और संयंत्र संरक्षण रसायनों को इसके अंतर्गत शामिल किया जा सके। कीटनाशक क्या होते हैं? - कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जिनका इस्तेमाल कीड़े-मकोड़ों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने अथवा उनसे बचाने के लिये किया जाता है। - जैसा कि हम सभी जानते हैं कि उर्वरक पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं, जबकि कीटनाशक पौधों की कीटों से रक्षा के उपाय के रूप में कार्य करते हैं। कृषि रसायन क्या होते हैं? - कृषि-केमिकल्स अथवा कृषि रसायन ऐसे उत्पादों की श्रेणी होती है जिसमें सभी कीटनाशक रसायनों और रासायनिक उर्वरकों को शामिल किया जाता है। - इनका उपयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। हालाँकि यदि एक उचित अनुपात एवं मात्रा में सही तरीके से इनका इस्तेमाल किया जाए तो ये किसानों के लिये बेहतर आय के अवसर प्रदान कर सकते हैं। - वस्तुतः रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की प्रकृति एवं स्थानीय वातावरण पर निर्भर करता है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से पहले बहुत सी सावधानियाँ बरतनी चाहिये। - इसके लिये मिट्टी की सही समय पर जाँच करवानी चाहिये ताकि उन तत्त्वों के विषय में सटीक जानकारी प्राप्त की जा सके जिनकी मिट्टी में कमी है। - इनके उपयोग में सावधानी न बरतने का परिणाम यह हुआ है कि मिट्टी की गुणवत्ता में तो कमी आई ही साथ ही, इसका प्रभाव किसानों की आय के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। - आमतौर पर उपयोग में लाए जाने वाले कृषि- रसायनों में डाइअमोनियम फास्फेट, यूरिया, जिंक सल्फेट, एन.पी.के., पोटैशियम सल्फेट, बोरेक्स, फेरस सल्फेट तथा मेगनीज़ सल्फेट आदि का इस्तेमाल किया जाता हैं। - पिछले कुछ सालों में देश के कई हिस्सों में ज़हरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण किसानों की मौत के मामले सामने आए। इन मामलों के संदर्भ में सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट द्वारा कीटनाशकों के उपयोग के विषय में ठोस दिशा-निर्देश तैयार करने तथा श्रेणी एक के कई कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी मांग की गई। - संगठन द्वारा इस प्रकार के ज़हरीले कीटनाशकों के असुरक्षित इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिये कीटनाशक प्रबंधन विधेयक को लाने की मांग की गई। - वर्ष दो हज़ार आठ में सरकार द्वारा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक संसद में पेश किया गया था, लेकिन उसे पारित नहीं किया गया। - इस विधेयक में कीटनाशक को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। - इसमें खराब गुणवत्ता, मिलावटी या हानिकारक कीटनाशकों के नियमन संबंधी मानदंड निर्धारित किये गए हैं। - इसके अनुसार, किसी भी कीटनाशक को तब तक पंजीकृत नहीं किया जा सकता है जब तक कि उसके फसलों अथवा उत्पादों पर पड़ने वाले प्रभाव जिन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम दो हज़ार छः के तहत निर्धारित किया गया है, स्पष्ट नहीं कर दिये जाते हैं। - इतना ही नहीं इसके अंतर्गत कीटनाशक निर्माताओं, वितरकों एवं खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस की प्रक्रिया तय करने संबंधी दिशा-निर्देशों को भी निर्धारित किया गया है। इस विधेयक की आवश्यकता क्यों है? - देश में उपयोग किये जाने वाले कीटनाशकों तथा विनियामक व्यवस्था की विफलता के संदर्भ में एक उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। यह उच्च स्तरीय जाँच समिति वर्ष दो हज़ार तीन की संयुक्त संसदीय समिति के समान होनी चाहिये, जिसने पेय पदार्थों में हानिकारक रासायनिक अवक्षेपों का पता लगाया था तथा इनकी प्रभावी सीमा का निर्धारण करने की सिफारिश की थी। - प्रभावी सीमा से तात्पर्य कीटनाशकों की उस मात्रा से है जिस मात्रा तक इन हानिकारक रासायनिक अवक्षेपों का मनुष्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। - कीटनाशकों के उपयोग करने हेतु सलाह देने के लिये एक 'केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड' का गठन किया जाना चाहिये ताकि यह बोर्ड विषाक्त रसायनों के पंजीकरण और वितरण तथा बिक्री का दृढ़तापूर्वक निरिक्षण करे। - इस विधेयक के अंतर्गत उन कीटनाशकों के इस्तेमाल पर किसी तरह की चिंता नहीं जताई गई है जिनके इस्तेमाल पर विश्व के कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया है। - वर्तमान में देश में प्रथम श्रेणी के अट्ठारह सबसे खतरनाक कीटनाशकों में से सात का उत्पादन हो रहा है, जिन पर कई देशों द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है। - जबकि भारत की कुल कीटनाशक खपत में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई है। हालाँकि कुछ प्रमुख कीटनाशक प्रयोक्ता राज्य जैसे कि महाराष्ट्र और पंजाब द्वारा इनमें से कुछ कीटनाशकों के संबंध में प्रतिबंध लगाने की योजना है। - इसके अतिरिक्त नए कानून में उस पुराने प्रावधान को बरकरार रखा गया है जिसमें विदेशों से पेश किये गए कीटनाशकों को दो वर्ष तक के प्रारंभिक पंजीयन की अनुमति दी गई है। - इस संबंध में विशेषज्ञों का मत है कि दो साल की अवधि बहुत अधिक है। इससे काफी नुकसान होने की संभावना है। - हालाँकि इस विधेयक के अंतर्गत निहित नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिये कड़े जुर्माने की व्यवस्था की गई है। परंतु इसमें समस्या यह है कि इससे संबद्ध प्रावधानों को स्पष्ट रूप से व्याख्यायित नहीं किया गया है। वस्तुतः इस अस्पष्ट व्याख्या के परिणामस्वरुप सारा दोषारोपण कमज़ोर मानक वाले खराब कीटनाशक निर्माताओं या उनका कारोबार करने वालों के स्थान पर किसानों पर किया जा सकता है। - इतना ही नहीं प्रस्तावित कानून के अंतर्गत स्वदेशी शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के विषय में भी कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई गई है। यही कारण है कि स्थानीय कीट, पतंगों और बीमारियों से संबद्ध शोध के अभाव में विदेशों से निर्मित कीटनाशकों के प्रयोग पर निर्भरता निरंतर बढ़ती जा रही है। - इसके अतिरिक्त विधेयक के अंतर्गत यह भी सुनिश्चित नहीं किया गया है कि खराब कीटनाशकों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी। इसके इतर इस मुद्दे को उपरोक्त विधेयक के बजाय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में शामिल किया गया है। - उल्लेखनीय है कि कपास उत्पादक अपनी फसल को कीड़ों के प्रभाव से बचाने के लिये बड़ी मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। इस प्रकार किसान कीटनाशकों में मिलाए गए विषाक्त रसायनों के प्रभाव में आ जाते हैं, जिसके कारण प्रायः उनकी मृत्यु हो जाती है। - यह तथ्य कि किसान कीटनाशकों के लिये 'कृषि विस्तार अधिकारियों' की तुलना में प्रायः बेईमान एजेंटों और वाणिज्यिक दुकानों की सलाह पर विश्वास करते हैं। यह कृषि के प्रति सरकार के गैर-ज़िम्मेदराना रवैये को दर्शाता है। - हालाँकि, इस समस्या की जड़ें काफी गहरी हैं। भारत में कीटनाशकों के नियमन की प्रणाली काफी पुरानी है। अतः विगत वर्षों में पिछली सरकारों द्वारा किये गए बेहतरीन प्रयास भी इस दिशा में उपयोगी सिद्ध नहीं हुए। - वर्ष दो हज़ार आठ में एक नया 'कीटनाशक प्रबंधन विधेयक' लाया गया था, जिसे उस समय तो संसदीय स्थायी समिति द्वारा संज्ञान में ले लिया गया था परंतु यह अभी तक लंबित ही पड़ा हुआ है। - हालाँकि इसी दौरान इस बात के भी चिंताजनक प्रमाण मिले थे कि आज किसानों को बेचे जा रहे अधिकांश कीटनाशक नकली हैं और इन नकली कीटनाशकों की बदौलत वास्तविक उत्पाद की तुलना उत्पादन में उच्च वृद्धि दर प्राप्त की जा रही है। - वस्तुतः जब हम कीटनाशकों के प्रयोग से उत्पन्न उत्पादों का सेवन करते हैं तो उसके माध्यम से खतरनाक ज़हर सीधे हमारे शरीर में प्रवेश करता है, जो शरीर की कोशिकाओं में पहुँचकर लाइलाज़ बीमारियों और जानलेवा कैंसर को जन्म देता है। - कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार पाँच साल तक अपने भोजन में भिंडी या बैगन का सेवन करता है, तो निश्चित रूप से वह दमा का मरीज़ बन जाएगा। इतना ही नहीं उसकी वास नलिका के भी अवरुद्ध होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाएगी। - वर्तमान में भारतीय किसानों द्वारा बहुत से रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है जो दुनिया के कई अन्य देशों में प्रतिबंधित हैं। उदाहरण के तौर पर, डीडीटी, बीएचसी, एल्ड्रॉन, क्लोसडेन, एड्रीन, मिथाइल पैराथियान, टोक्साफेन, हेप्टाक्लोर इत्यादि। - सीएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में हुई किसानों की मौत के लिये मोनोक्रोटो सीस, ऑक्सिडेमेटेन-मिथाइल, एसेफेट और प्रोफेनोफोस जैसे कीटनाशकों को ज़िम्मेदार माना जाता है। - आको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मोनोक्रोटो सीस एवं ऑक्सिडेमेटेन-मिथाइल को अत्यधिक खतरनाक में शामिल किया गया है। - इतना ही नहीं अभी तक मोनोक्रोटो सीस को साठ, फोरेट को सैंतीस, ट्रायाफोस को चालीस और फॉस्फैमिडोन को उनचास देशों द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। - हमारे देश में कीटनाशक नियंत्रण हेतु तीन बड़ी संस्थाएँ मौजूद हैं- सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथारिटी आफ इंडिया तथा एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्टस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथारिटी। - ये तीनों संस्थान क्रमशः कृषि, स्वास्थ्य और वाणिज्य मंत्रालयों के अंतर्गत काम करते हैं, यही कारण है कि इनके बीच में आपसी तालमेल की कमी बनी रहती है, जिसका स्पष्ट प्रभाव इनके कार्यों पर परिलक्षित होता है। - ऐसा इसलिये भी हो रहा है क्योंकि सरकार की प्रमुख प्राथमिकता अधिक पैदावार के साथ-साथ अधिक-से-अधिक लोगों के लिये भोजन सुनिश्चित करना है। स्पष्ट रूप से ऐसी स्थिति में कीटनाशक प्रबंधन का मुद्दा दरकिनार कर दिया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते है कि कीटनाशकों के इस्तेमाल से भले ही कुछ समय के लिये कृषि उपज को बढ़ावा मलता है, लेकिन दीर्घावधि के संदर्भ में इसके इस्तेमाल बहुत अधिक खतरनाक होते है। ऐसे में सरकार को इस संबंध में एक प्रभावी नियामक बनाने पर बल देना चाहिये ताकि किसानों की आय को हानि पहुँचाए बिना उसने स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी आजीविका को नुकसान पहुँचने से बचाया जा सके। इसके लिये जहाँ एक ओर उक्त विधेयक में कुछ प्रभावी परिवर्तन करते हुए इसे लागू किया जाना चाहिये वहीं दूसरी ओर कृषि में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल की बजाय जैविक कृषि को अपनाए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिये।
हर बार की तरह इस बार भी बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी को मनाया जा रहा है। इसे वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण और मंत्रालय के अन्य टॉप अधिकारियों के बीच मनाया जाएगा। इसे जुड़ी पूरी जानकारी नीचे देखें। कल केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की उपस्थिति में प्रथागत हलवा समारोह किया जाएगा। इसे बजट तैयार करने में शामिल अधिकारियों की "लॉक-इन" प्रक्रिया से पहले किया जाता है और इसे बजट पूरा होने के सूचक के रूप में लिया जाता है।
हर बार की तरह इस बार भी बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी को मनाया जा रहा है। इसे वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण और मंत्रालय के अन्य टॉप अधिकारियों के बीच मनाया जाएगा। इसे जुड़ी पूरी जानकारी नीचे देखें। कल केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की उपस्थिति में प्रथागत हलवा समारोह किया जाएगा। इसे बजट तैयार करने में शामिल अधिकारियों की "लॉक-इन" प्रक्रिया से पहले किया जाता है और इसे बजट पूरा होने के सूचक के रूप में लिया जाता है।
- संसद का मानसून सत्र चल रहा है. विपक्ष सदन में लगातार हंगामा करता है, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ती है. वहीं. विपक्ष के इस रवैये पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर निशाना साधा हैं. रविशंकर प्रसाद प्रेस कॉन्फेंस कर कहा कि पेगासस पर बयान हुआ तो मंत्री के बयान को फाड़ दिया. क्या आज तक कोई सबूत दिया है कि किसी का फोन टेप हुआ है. कुछ नंबर सामने आए वो मोदी विरोध के लिए ही जाने जाते है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. साथ ही रविशंकर प्रसाद विपक्ष से सवाल किया क्या विपक्ष चर्चा के लिए है. साथ ही कहा कि क्या कांग्रेस विपक्ष के लोग चर्चा चाहते है, बस कीचड़ उछलना हंगामा करना ही है. भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय पर हुई प्रेस कॉन्फेंस में रविशंकर प्रसाद अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के दो साल पूरे होने का जिक्र किया. इस दौरान रविशंकर प्रसाद टोक्यो ओलंपिक्स में 41 साल बाद मेडल हासिल करने वाली भारतीय हॉकी टीम को जीत पर बधाई दी. मानसून सत्र के दौरान संसद में हुए विपक्ष के हंगामे को लेकर प्रसाद ने कहा, कांग्रेस ने 1947 के बाद से करीब 50 साल राज किया. लेकिन आज उनका व्यवहार कितना उचित है ये देश को जानना जरूरी है.
- संसद का मानसून सत्र चल रहा है. विपक्ष सदन में लगातार हंगामा करता है, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ती है. वहीं. विपक्ष के इस रवैये पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर निशाना साधा हैं. रविशंकर प्रसाद प्रेस कॉन्फेंस कर कहा कि पेगासस पर बयान हुआ तो मंत्री के बयान को फाड़ दिया. क्या आज तक कोई सबूत दिया है कि किसी का फोन टेप हुआ है. कुछ नंबर सामने आए वो मोदी विरोध के लिए ही जाने जाते है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. साथ ही रविशंकर प्रसाद विपक्ष से सवाल किया क्या विपक्ष चर्चा के लिए है. साथ ही कहा कि क्या कांग्रेस विपक्ष के लोग चर्चा चाहते है, बस कीचड़ उछलना हंगामा करना ही है. भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय पर हुई प्रेस कॉन्फेंस में रविशंकर प्रसाद अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के समाप्त होने के दो साल पूरे होने का जिक्र किया. इस दौरान रविशंकर प्रसाद टोक्यो ओलंपिक्स में इकतालीस साल बाद मेडल हासिल करने वाली भारतीय हॉकी टीम को जीत पर बधाई दी. मानसून सत्र के दौरान संसद में हुए विपक्ष के हंगामे को लेकर प्रसाद ने कहा, कांग्रेस ने एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के बाद से करीब पचास साल राज किया. लेकिन आज उनका व्यवहार कितना उचित है ये देश को जानना जरूरी है.
गया है, इस प्रकार पुनरुद्धारित भारतीय राष्ट्र एक भद्दी नकल नहीं होगा बल्कि एक विशुद्ध पुनर्रचना होगी, एक जाली सिक्का नहीं होगा बल्कि असली मुद्रा होगी, एक रही पेवन्द का काम नहीं होगा बल्कि सुन्दर कला भवन होगा। कार्यकर्ताओं की कांग्रेस यह कभी नहीं होता कि मनुष्य को बालों की लट में ढूँढ़ने पर कोई जंगल हाथ लग जाय, जो व्यक्ति छोटी २ घटनाओं को देखने में लगा रहता है, वह इतिहास व जीवन की एक पूर्ण रूप से विहंगम दृष्टि देख सकने में असमर्थ होता है। भूतकाल की सफलताओं व विफलताओं के महत्व को ठीक रूप से आंक सकने में समर्थ होने के लिये केवल विवेचनात्मक शक्ति की आवश्यकता नहीं होती बल्कि कुछ समय और स्थान से भी अन्तर की आवश्यकता होती है। जहाँ राजनीतिज्ञ अपने विचारों के अनुसार अपने दैनिक कार्यक्रम को निर्धारित करता है वहां इतिहास - वेत्ता का यह काम होता है कि वह उस मुख्य विषय का अध्ययन करे जिसके चारों ओर उसकी आलोच्य घटना जुटी रहती हैं। यही कारण है कि आज का इतिहास कल की राजनीति थी, और आज की राजनीति आने वाले कल का इतिहास बनती है। यदि यह विचार ठीक है तो हम लोगों को इसमें आश्चर्य नहीं करना चाहिये की पिछली आधी-शताब्दी में कांग्रेस के कार्य के सम्बन्ध में बहुत गलत आलोचनाएँ हुई हैं। यह आम तौर पर कहा जाता है कि भारत के अँमजी शिक्षित कुलीन वर्ग ही कांग्रेस को चलाते थे, और कांग्रेस ने उन्हीं के स्वार्थों को रक्षा की और लक्ष्य रक्खा तथा बहुसंख्यक मजदूर-पेशे लोगों के स्वार्थों और अधिकारों की अवभारतीय राष्ट्रीयता का संयोजन हेलना की । हां यह बात ठीक है कि कांग्रेस एक दशक पहले अँग्रेजी शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों और विश्वविद्यालयों के उपाधिधारियों द्वारा संचालित होती थी । किन्तु यह कहना कि वे अपने स्वार्थसाधन के लिए इसमें हाथ बटा रहे थे केवल वास्तविक सत्य को उपहासास्पद ही नहीं करना है बल्कि अपने पूर्व वत्तियों के प्रति घोर अज्ञताः ही प्रकाशित करना है, फिर भी हमें यह मानना पड़ेगा कि कांग्रेस का मुकाबला करने में यह कूटिनोति वर्त्ती जाती रही थी कि जो लोग राजनीतिक आन्दोलन में लगे होते थे उनको फुसला कर सरकारी नौकरियों के लालच में फँसाते जाने की कोशिश की जाती रही। इस प्रकार एक के बाद एक इस कूट-नीतिज्ञता के शिकार होते गये । उन लोगों ने सरकार में ऊँचे पद प्राप्त किये और अपना ध्यान उस पढ़ का अधिकार बढ़ाने में लगा दिया, जब कि उनके ग्रहण किये हुए ऊँचे पद में उनकी आशा के अनुसार अधिकार और प्रभाव नहीं दिखलाई पड़ा किन्तु उनको इस प्रकार अपने स्वार्थों की पूर्ति करने वाला देश-द्रोही उसी प्रकार नहीं कह सकते जिस प्रकार आज कल के मन्त्रिमण्डलों पर अधिकार करने के समर्थकों को देश-द्रोही नहीं कहा जा सकता । यह हो सकता है कि इन दोनों दशाओं में सरकार की कूटनीति का मुकाबला करने के लिये कांप्रेस की प्रयुक्त नीति बिलकुल गलत रही हो किन्तु हमें कार्य और कारण तथा परिणाम और उद्देश्य के भेद में भूल नहीं करना चाहिए । यद्यपि पूर्व काल के कांप सवादियों को गांव के नेतृत्व का स्पष्ट रूप से ध्यान नहीं था किन्तु उन लोगों ने अपने कार्य रूप में गाँव के हितों को रक्षा को सब से आगे रक्खा और जब वे गाँव के हितों की रक्षा की बात रख रहे थे तो उनका अभिप्राय श्रमिकों के हितों की रक्षा करना था, क्योंकि प्राम्य-संगठन में बैठे बैठाये लोग नहीं होते और गांव की समस्त जनता को पमीना बहाये बिना धरती माता के गर्भ से धन की प्राप्ति नहीं हो सकती । कांग्रेस १६१५ तक जिन शिकायतों को सामने रखती रही वे गाँव के श्रमिकों के धन्धों और जीवन से ही सम्बन्ध रखती थीं । इस्तमरारी बन्दोबस्त का सवाल उठाने का मतलब भू-कर भारी बोध को - जो प्रत्येक तीस वर्ष या और बढ़ा दिया जाता था - कम करना था । हथियार का कानून रद्द कराने की मांग पेश करने का मतलब गांव के लोगों के हाथ में साधन देना था जिससे वे जंगली जानवरों के नित्य बढ़ते हुए आक्रमणों से अपने घरों. मवेशियों की रक्षा कर सकें। नमक-कर हटवाने का मतलब देहाल के श्रमिकों और उनके मवेशियों की तन्दुरुस्ती ठीक रखना तथा समुद्र के किनारे के छोटे २ गांव के धन्धों की रक्षा करना था । जंगल कानून के विरोध का कारण यह था कि श्रमिकों को जलाने की लकड़ी, घर बनाने के लिये शहतीर और मवेशियों के लिये चारा मिलने का प्राचीन अधिकार प्राप्त हो सके अनिवार्य और निःशुल्क प्राइमरी शिक्षा का कार्यक्रम बनाने का उद्देश्य देहात के श्रमजीवी वर्ग को विश्वास मिटाना था । ग्राम-धन्धों के पुनर्जीवित करने का उद्देश्य गांव के श्रमिकों को भोजन और वस्त्र मुहय्या कराना था । इस प्रकार हम देखते हैं कि कांग्रेस तीस वर्षों से अपने कार्यक्रम में देश के बहुसंख्यक श्रमिक वर्ग के हितों को ही सब से के आगे रखती श्री रही थो, चतुर और धूत सरकार ने ही कांग्रेस वादियों की रुची और ध्यान ऐसी बातों की ओर फेरा जो उनके स्पष्ट स्वार्थों को अधिक पसन्द आने वाले और कार्यकर थे । ताहम आलोचन यह कह सकते हैं कि शहराती क्षेत्र में मज
गया है, इस प्रकार पुनरुद्धारित भारतीय राष्ट्र एक भद्दी नकल नहीं होगा बल्कि एक विशुद्ध पुनर्रचना होगी, एक जाली सिक्का नहीं होगा बल्कि असली मुद्रा होगी, एक रही पेवन्द का काम नहीं होगा बल्कि सुन्दर कला भवन होगा। कार्यकर्ताओं की कांग्रेस यह कभी नहीं होता कि मनुष्य को बालों की लट में ढूँढ़ने पर कोई जंगल हाथ लग जाय, जो व्यक्ति छोटी दो घटनाओं को देखने में लगा रहता है, वह इतिहास व जीवन की एक पूर्ण रूप से विहंगम दृष्टि देख सकने में असमर्थ होता है। भूतकाल की सफलताओं व विफलताओं के महत्व को ठीक रूप से आंक सकने में समर्थ होने के लिये केवल विवेचनात्मक शक्ति की आवश्यकता नहीं होती बल्कि कुछ समय और स्थान से भी अन्तर की आवश्यकता होती है। जहाँ राजनीतिज्ञ अपने विचारों के अनुसार अपने दैनिक कार्यक्रम को निर्धारित करता है वहां इतिहास - वेत्ता का यह काम होता है कि वह उस मुख्य विषय का अध्ययन करे जिसके चारों ओर उसकी आलोच्य घटना जुटी रहती हैं। यही कारण है कि आज का इतिहास कल की राजनीति थी, और आज की राजनीति आने वाले कल का इतिहास बनती है। यदि यह विचार ठीक है तो हम लोगों को इसमें आश्चर्य नहीं करना चाहिये की पिछली आधी-शताब्दी में कांग्रेस के कार्य के सम्बन्ध में बहुत गलत आलोचनाएँ हुई हैं। यह आम तौर पर कहा जाता है कि भारत के अँमजी शिक्षित कुलीन वर्ग ही कांग्रेस को चलाते थे, और कांग्रेस ने उन्हीं के स्वार्थों को रक्षा की और लक्ष्य रक्खा तथा बहुसंख्यक मजदूर-पेशे लोगों के स्वार्थों और अधिकारों की अवभारतीय राष्ट्रीयता का संयोजन हेलना की । हां यह बात ठीक है कि कांग्रेस एक दशक पहले अँग्रेजी शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों और विश्वविद्यालयों के उपाधिधारियों द्वारा संचालित होती थी । किन्तु यह कहना कि वे अपने स्वार्थसाधन के लिए इसमें हाथ बटा रहे थे केवल वास्तविक सत्य को उपहासास्पद ही नहीं करना है बल्कि अपने पूर्व वत्तियों के प्रति घोर अज्ञताः ही प्रकाशित करना है, फिर भी हमें यह मानना पड़ेगा कि कांग्रेस का मुकाबला करने में यह कूटिनोति वर्त्ती जाती रही थी कि जो लोग राजनीतिक आन्दोलन में लगे होते थे उनको फुसला कर सरकारी नौकरियों के लालच में फँसाते जाने की कोशिश की जाती रही। इस प्रकार एक के बाद एक इस कूट-नीतिज्ञता के शिकार होते गये । उन लोगों ने सरकार में ऊँचे पद प्राप्त किये और अपना ध्यान उस पढ़ का अधिकार बढ़ाने में लगा दिया, जब कि उनके ग्रहण किये हुए ऊँचे पद में उनकी आशा के अनुसार अधिकार और प्रभाव नहीं दिखलाई पड़ा किन्तु उनको इस प्रकार अपने स्वार्थों की पूर्ति करने वाला देश-द्रोही उसी प्रकार नहीं कह सकते जिस प्रकार आज कल के मन्त्रिमण्डलों पर अधिकार करने के समर्थकों को देश-द्रोही नहीं कहा जा सकता । यह हो सकता है कि इन दोनों दशाओं में सरकार की कूटनीति का मुकाबला करने के लिये कांप्रेस की प्रयुक्त नीति बिलकुल गलत रही हो किन्तु हमें कार्य और कारण तथा परिणाम और उद्देश्य के भेद में भूल नहीं करना चाहिए । यद्यपि पूर्व काल के कांप सवादियों को गांव के नेतृत्व का स्पष्ट रूप से ध्यान नहीं था किन्तु उन लोगों ने अपने कार्य रूप में गाँव के हितों को रक्षा को सब से आगे रक्खा और जब वे गाँव के हितों की रक्षा की बात रख रहे थे तो उनका अभिप्राय श्रमिकों के हितों की रक्षा करना था, क्योंकि प्राम्य-संगठन में बैठे बैठाये लोग नहीं होते और गांव की समस्त जनता को पमीना बहाये बिना धरती माता के गर्भ से धन की प्राप्ति नहीं हो सकती । कांग्रेस एक हज़ार छः सौ पंद्रह तक जिन शिकायतों को सामने रखती रही वे गाँव के श्रमिकों के धन्धों और जीवन से ही सम्बन्ध रखती थीं । इस्तमरारी बन्दोबस्त का सवाल उठाने का मतलब भू-कर भारी बोध को - जो प्रत्येक तीस वर्ष या और बढ़ा दिया जाता था - कम करना था । हथियार का कानून रद्द कराने की मांग पेश करने का मतलब गांव के लोगों के हाथ में साधन देना था जिससे वे जंगली जानवरों के नित्य बढ़ते हुए आक्रमणों से अपने घरों. मवेशियों की रक्षा कर सकें। नमक-कर हटवाने का मतलब देहाल के श्रमिकों और उनके मवेशियों की तन्दुरुस्ती ठीक रखना तथा समुद्र के किनारे के छोटे दो गांव के धन्धों की रक्षा करना था । जंगल कानून के विरोध का कारण यह था कि श्रमिकों को जलाने की लकड़ी, घर बनाने के लिये शहतीर और मवेशियों के लिये चारा मिलने का प्राचीन अधिकार प्राप्त हो सके अनिवार्य और निःशुल्क प्राइमरी शिक्षा का कार्यक्रम बनाने का उद्देश्य देहात के श्रमजीवी वर्ग को विश्वास मिटाना था । ग्राम-धन्धों के पुनर्जीवित करने का उद्देश्य गांव के श्रमिकों को भोजन और वस्त्र मुहय्या कराना था । इस प्रकार हम देखते हैं कि कांग्रेस तीस वर्षों से अपने कार्यक्रम में देश के बहुसंख्यक श्रमिक वर्ग के हितों को ही सब से के आगे रखती श्री रही थो, चतुर और धूत सरकार ने ही कांग्रेस वादियों की रुची और ध्यान ऐसी बातों की ओर फेरा जो उनके स्पष्ट स्वार्थों को अधिक पसन्द आने वाले और कार्यकर थे । ताहम आलोचन यह कह सकते हैं कि शहराती क्षेत्र में मज