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षष्ठी के दोनों दलों में वह ५, ३, ६, ८, ७, १, २ एवं ४ संख्यक दिशाओं में रहती है। सप्तमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध में वह ६, ४, ७, १, ८, २, ३ एवं ५ संख्यक दिशाओं में रहती है। तथा अष्टमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठो यामों वह योगिनी क्रमशः ८, ६, १, ३, २, ४, ५ एवं ७ संख्यक दिशाओं में रहती है। दिशा संख्या पूर्वादि क्रम से १-२-३-४ आदि हैं। इस प्रकार क्रम से ईशान की ८ संख्या हो जाती है। इस प्रकार प्रतिपदा के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में योगिनी का क्रम- से पूर्व, उत्तर, आग्नेय, नैर्ऋत्य, दक्षिण पश्चिम, वायव्य एवं ईशान कोण में संचार होता है। द्वितीया के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में उसका क्रम-से उत्तर, पश्चिम, ईशान, आग्नेय, पूर्व, दक्षिण, नैर्ऋत्य एवं वायव्य कोण में विचरण होता है। तृतीया के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में वह क्रम से आग्नेय, ईशान, दक्षिण, पश्चिम, नैर्ऋत्य, वायव्य, उत्तर एवं पूर्व दिशा में विचरण करती है। चतुर्थी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में वह क्रम-से नैर्ऋत्य, आग्नेय, पश्चिम, उत्तर, वायव्य, ईशान, पूर्व एवं दक्षिण दिशा में घूमती है। पंचमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में उसका संचार क्रम से दक्षिण, पूर्व, नैर्ऋत्य, वायव्य, पश्चिम, उत्तर ईशान एवं अग्नि कोण में होता है। षष्ठी के पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में उसका संचार क्रमसे पश्चिम, दक्षिण, वायव्य, ईशान, उत्तर, पूर्व, आग्नेय एवं नैर्ऋत्य कोण में होता है। सप्तमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में उसका संचार क्रमसे वायव्य, नैर्ऋत्य, उत्तर, पूर्व, ईशान, आग्नेय, दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में होता है। तथा अष्टमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में योगिनी क्रमसे ईशान, वायव्य, पूर्व, दक्षिण, आग्नेय, नैर्ऋत्य, पश्चिम एवं उत्तर दिशाओं में विचरण करती है।
षष्ठी के दोनों दलों में वह पाँच, तीन, छः, आठ, सात, एक, दो एवं चार संख्यक दिशाओं में रहती है। सप्तमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध में वह छः, चार, सात, एक, आठ, दो, तीन एवं पाँच संख्यक दिशाओं में रहती है। तथा अष्टमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठो यामों वह योगिनी क्रमशः आठ, छः, एक, तीन, दो, चार, पाँच एवं सात संख्यक दिशाओं में रहती है। दिशा संख्या पूर्वादि क्रम से एक-दो-तीन-चार आदि हैं। इस प्रकार क्रम से ईशान की आठ संख्या हो जाती है। इस प्रकार प्रतिपदा के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में योगिनी का क्रम- से पूर्व, उत्तर, आग्नेय, नैर्ऋत्य, दक्षिण पश्चिम, वायव्य एवं ईशान कोण में संचार होता है। द्वितीया के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में उसका क्रम-से उत्तर, पश्चिम, ईशान, आग्नेय, पूर्व, दक्षिण, नैर्ऋत्य एवं वायव्य कोण में विचरण होता है। तृतीया के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में वह क्रम से आग्नेय, ईशान, दक्षिण, पश्चिम, नैर्ऋत्य, वायव्य, उत्तर एवं पूर्व दिशा में विचरण करती है। चतुर्थी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में वह क्रम-से नैर्ऋत्य, आग्नेय, पश्चिम, उत्तर, वायव्य, ईशान, पूर्व एवं दक्षिण दिशा में घूमती है। पंचमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठों यामों में उसका संचार क्रम से दक्षिण, पूर्व, नैर्ऋत्य, वायव्य, पश्चिम, उत्तर ईशान एवं अग्नि कोण में होता है। षष्ठी के पूर्वार्द्ध और उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में उसका संचार क्रमसे पश्चिम, दक्षिण, वायव्य, ईशान, उत्तर, पूर्व, आग्नेय एवं नैर्ऋत्य कोण में होता है। सप्तमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में उसका संचार क्रमसे वायव्य, नैर्ऋत्य, उत्तर, पूर्व, ईशान, आग्नेय, दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में होता है। तथा अष्टमी के पूर्वार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध के आठ-आठ यामों में योगिनी क्रमसे ईशान, वायव्य, पूर्व, दक्षिण, आग्नेय, नैर्ऋत्य, पश्चिम एवं उत्तर दिशाओं में विचरण करती है।
मेरठ(www. arya-tv. com) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दिल्ली-दून हाईवे के संधावली चौराहे पर मंगलवार देर रात तेज रफ्तार कैंटर ने बाइक सवार तीन युवकों को कुचल दिया। इनमें से खतौली निवासी दो किशोर उम्र सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि तीसरा युवक घायल हो गया। एक कार व साइकिल भी कैंटर की चपेट में आ गए, जिससे साइकिल सवार भी घायल हो गया। खतौली कस्बे के तीर्थ कॉलोनी निवासी लोकेश विद्युत विभाग में काम करता है। मंगलवार को उसके गांव सहावली निवासी रिश्तेदार के बेटे की शादी थी, जिसकी बरात हाईवे स्थित गांव संधावली में गई थी। शादी में शामिल होने के लिए लोकेश के दो बेटे आर्यन (15) व प्रियांशु (13) भी आए हुए थे। देर रात करीब नौ बजे आर्यन व प्रियांशु अपनी रिश्तेदारी के युवक गांव वजीदपुर निवासी प्रिंस के साथ एक ही बाइक पर किसी काम से हाईवे पर गए थे। जैसे ही बाइक हाईवे के संधावली चौराहे पर पहुंची, मेरठ की ओर से आ रहे तेज रफ्तार केंटर ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया।
मेरठ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दिल्ली-दून हाईवे के संधावली चौराहे पर मंगलवार देर रात तेज रफ्तार कैंटर ने बाइक सवार तीन युवकों को कुचल दिया। इनमें से खतौली निवासी दो किशोर उम्र सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि तीसरा युवक घायल हो गया। एक कार व साइकिल भी कैंटर की चपेट में आ गए, जिससे साइकिल सवार भी घायल हो गया। खतौली कस्बे के तीर्थ कॉलोनी निवासी लोकेश विद्युत विभाग में काम करता है। मंगलवार को उसके गांव सहावली निवासी रिश्तेदार के बेटे की शादी थी, जिसकी बरात हाईवे स्थित गांव संधावली में गई थी। शादी में शामिल होने के लिए लोकेश के दो बेटे आर्यन व प्रियांशु भी आए हुए थे। देर रात करीब नौ बजे आर्यन व प्रियांशु अपनी रिश्तेदारी के युवक गांव वजीदपुर निवासी प्रिंस के साथ एक ही बाइक पर किसी काम से हाईवे पर गए थे। जैसे ही बाइक हाईवे के संधावली चौराहे पर पहुंची, मेरठ की ओर से आ रहे तेज रफ्तार केंटर ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया।
हल्के वजन 1.5 किलो सदमे अवशोषित धूप में सुखाना के साथ। - बाहरी भार के साथ और बिना खड़े होने और चलने के दौरान संतुलन और स्थिरता में सुधार। - वॉकिंग के दौरान लिगामेंट इंजरी का खतरा कम करता है। - विशेष रूप से भारी भार वहन कार्य के दौरान आराम / सुरक्षा बढ़ाएं। - एंटी-स्किड, एंटी-स्टैटिक, कम्पोजिट टो कैप, ऐंटि-एंट्री, स्पीड पहनने की सुविधा। प्रौद्योगिकी धारकों का स्थानांतरणः You are about to proceed to an external website. Click Yes to proceed.
हल्के वजन एक.पाँच किलो सदमे अवशोषित धूप में सुखाना के साथ। - बाहरी भार के साथ और बिना खड़े होने और चलने के दौरान संतुलन और स्थिरता में सुधार। - वॉकिंग के दौरान लिगामेंट इंजरी का खतरा कम करता है। - विशेष रूप से भारी भार वहन कार्य के दौरान आराम / सुरक्षा बढ़ाएं। - एंटी-स्किड, एंटी-स्टैटिक, कम्पोजिट टो कैप, ऐंटि-एंट्री, स्पीड पहनने की सुविधा। प्रौद्योगिकी धारकों का स्थानांतरणः You are about to proceed to an external website. Click Yes to proceed.
बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमें कितना भी बलिदान देना पड़ेगा, हम देंगे। लेकिन हम बंगाल को बचाएंगे, बंगाल की संस्कृति और संस्कार को बचाएंगे। बंगाल को सोनार बांग्ला बनाकर प्रदेश की जनता को सौपेंगे, यही हमारा संकल्प है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला किया है। साथ ही कहा है कि पश्चिम बंगाल में दीदी और भतीजे का खेल चल रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमें कितना भी बलिदान देना पड़ेगा, हम देंगे। लेकिन हम बंगाल को बचाएंगे, बंगाल की संस्कृति और संस्कार को बचाएंगे। बंगाल को सोनार बांग्ला बनाकर प्रदेश की जनता को सौपेंगे, यही हमारा संकल्प है। कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कूचबिहार में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष को रात को मारकर फांसी पर लटका दिया गया। ये दीदी और भतीजे का खेल चल रहा है। वो सोच रहे कि चुनाव के पहले हम आतंक फैलाकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं को घर बैठा देंगे। दीदी आपका ये सपना पूरा नहीं होगा। जनता इस तरह की हरकतों से डरने वाली नहीं है, वो घर नहीं बैठेगी। मतदान करेगी और 2 मई को आने वाले चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी को घर बैठाएगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दिनहाता में एक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक कार्यकर्ता का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। बीजेपी ने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस पर हत्या का आरोप लगाया है। दिनहाता में पार्टी ऑफिस के पास बीजेपी मंडल अध्यक्ष का शव फंदे से लटका हुआ मिला था।
बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमें कितना भी बलिदान देना पड़ेगा, हम देंगे। लेकिन हम बंगाल को बचाएंगे, बंगाल की संस्कृति और संस्कार को बचाएंगे। बंगाल को सोनार बांग्ला बनाकर प्रदेश की जनता को सौपेंगे, यही हमारा संकल्प है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला किया है। साथ ही कहा है कि पश्चिम बंगाल में दीदी और भतीजे का खेल चल रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमें कितना भी बलिदान देना पड़ेगा, हम देंगे। लेकिन हम बंगाल को बचाएंगे, बंगाल की संस्कृति और संस्कार को बचाएंगे। बंगाल को सोनार बांग्ला बनाकर प्रदेश की जनता को सौपेंगे, यही हमारा संकल्प है। कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कूचबिहार में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष को रात को मारकर फांसी पर लटका दिया गया। ये दीदी और भतीजे का खेल चल रहा है। वो सोच रहे कि चुनाव के पहले हम आतंक फैलाकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं को घर बैठा देंगे। दीदी आपका ये सपना पूरा नहीं होगा। जनता इस तरह की हरकतों से डरने वाली नहीं है, वो घर नहीं बैठेगी। मतदान करेगी और दो मई को आने वाले चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी को घर बैठाएगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दिनहाता में एक भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। बीजेपी ने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस पर हत्या का आरोप लगाया है। दिनहाता में पार्टी ऑफिस के पास बीजेपी मंडल अध्यक्ष का शव फंदे से लटका हुआ मिला था।
मौत के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त भय का माहौल बना हुआ है 13 मई तक गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूरी तरह से बंदिश रहेगी। शहर के बाद कोरोना का संक्रमण गांवों में बढ़ने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। भिवानी जिले मुंढाल गांव में एक सप्ताह के भीतर तीनों गांव (मुंढाल खुर्द, मुंढाल कला व पड़ोसी गांव ) में 30 लोगों की मौत हो गई। वह बात दीगर है कि ये सभी कोरोना संक्रमित नहीं थे,लेकिन इनमें से आधे लोगों ने कोरोना टेस्ट करवाया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बाकी मरने वालों का कोरोना टेस्ट नहीं हो पाया था। गांव में मौत का सिलसिला जारी रहने के बाद ग्राम पंचायत ने अपने स्तर पर ही गांव में पांच दिन लॉकडाउन लगा लिया है। गांव के बस स्टैंड को जोड़ने वाली मुख्य गली पर पुलिस का नाका तो गांव की अंदरूनी गलियों में ग्रामीण अपने स्तर पर नाके लगाएंगे। जिसको लेकर ग्रामीणों ने कुछ युवाओं की ड्यूटी भी लगा दी है। 13 मई तक गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूरी तरह से बंदिश रहेगी। तीनों गांवों में एक सप्ताह के भीतर 30 लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त भय का माहौल बना हुआ है। मौतों का आंकड़ा बढने की वह से गांव की पंचायत ने पांच दिन का अपने स्तर पर लॉकडाउन लगाने का निर्णय लिया है। फैसले के अनुसार गांव में किसी तरह से कोई भी बाहरी व्यक्ति सब्जी व फल आदि बेचने के लिए नहीं आएगा। अगर कोई पहुंचा तो भी उसको बाहर ही रोक दिया जाएगा। इसके लिए गांव के बाहरी मुख्य मार्गों पर पुलिस के नाके लगवाए गए है। गांव के अंदर के मोहल्लों को आपस में जाड़ने वाली गलियों पर युवा नाके लगाएंगे। वे नाकों से किसी भी एक. दूसरे मोहल्ले के लोगों को नहीं मिलने देंगे। इस बारे में पंचायत ने भिवानी के एसपी व जिला उपायुक्त को पत्र भेजकर फैसले के बारे में जानकारी दे दी है। गांव मुंढाल के सरपंच विजय कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर उनके तीनों गांव में करीब 30. 35 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें से कुछ कोरोना पॉजिटिव थे। तो कुछ मरने वालों को एक दो दिन हलका बुखार आया था। उनकी कोरोना के सैम्पल नहीं लिए गए थे। ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि ये सारे ही पॉजिटिव थे या नहीं। एक सप्ताह के भीतर इतनी मौत होने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। जिसके चलते गांव में 13 मई तक अपने स्तर पर ही लॉकडाउन लगाए जाने का फैसला लिया है। यह फैसला केवल उनका ही नहीं है, पूरे गांव के मौजिज लोगों की सहमति के बाद लिया गया है। गांव में अनाज की दुकान तीन घंटे, दूध की तीन घंटे तथा दवाई की दुकानें 24 घंटे खुली रहेंगी। साथ ही उन्होंने गांव में जितने भी सफाई कर्मचारी है। उन सभी को गांव में सफाई करने के आदेश जारी किए गए है। साथ ही उनको यह भी कहा गया है कि वे गावं में लोगों को कोरोना से बचने के लिए जागरूक भी। उन्होंने इस बारे में एसपी व उपायुक्त को भी सूचित कर दिया है।
मौत के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त भय का माहौल बना हुआ है तेरह मई तक गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूरी तरह से बंदिश रहेगी। शहर के बाद कोरोना का संक्रमण गांवों में बढ़ने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। भिवानी जिले मुंढाल गांव में एक सप्ताह के भीतर तीनों गांव में तीस लोगों की मौत हो गई। वह बात दीगर है कि ये सभी कोरोना संक्रमित नहीं थे,लेकिन इनमें से आधे लोगों ने कोरोना टेस्ट करवाया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बाकी मरने वालों का कोरोना टेस्ट नहीं हो पाया था। गांव में मौत का सिलसिला जारी रहने के बाद ग्राम पंचायत ने अपने स्तर पर ही गांव में पांच दिन लॉकडाउन लगा लिया है। गांव के बस स्टैंड को जोड़ने वाली मुख्य गली पर पुलिस का नाका तो गांव की अंदरूनी गलियों में ग्रामीण अपने स्तर पर नाके लगाएंगे। जिसको लेकर ग्रामीणों ने कुछ युवाओं की ड्यूटी भी लगा दी है। तेरह मई तक गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने पर पूरी तरह से बंदिश रहेगी। तीनों गांवों में एक सप्ताह के भीतर तीस लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त भय का माहौल बना हुआ है। मौतों का आंकड़ा बढने की वह से गांव की पंचायत ने पांच दिन का अपने स्तर पर लॉकडाउन लगाने का निर्णय लिया है। फैसले के अनुसार गांव में किसी तरह से कोई भी बाहरी व्यक्ति सब्जी व फल आदि बेचने के लिए नहीं आएगा। अगर कोई पहुंचा तो भी उसको बाहर ही रोक दिया जाएगा। इसके लिए गांव के बाहरी मुख्य मार्गों पर पुलिस के नाके लगवाए गए है। गांव के अंदर के मोहल्लों को आपस में जाड़ने वाली गलियों पर युवा नाके लगाएंगे। वे नाकों से किसी भी एक. दूसरे मोहल्ले के लोगों को नहीं मिलने देंगे। इस बारे में पंचायत ने भिवानी के एसपी व जिला उपायुक्त को पत्र भेजकर फैसले के बारे में जानकारी दे दी है। गांव मुंढाल के सरपंच विजय कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर उनके तीनों गांव में करीब तीस. पैंतीस लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें से कुछ कोरोना पॉजिटिव थे। तो कुछ मरने वालों को एक दो दिन हलका बुखार आया था। उनकी कोरोना के सैम्पल नहीं लिए गए थे। ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि ये सारे ही पॉजिटिव थे या नहीं। एक सप्ताह के भीतर इतनी मौत होने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। जिसके चलते गांव में तेरह मई तक अपने स्तर पर ही लॉकडाउन लगाए जाने का फैसला लिया है। यह फैसला केवल उनका ही नहीं है, पूरे गांव के मौजिज लोगों की सहमति के बाद लिया गया है। गांव में अनाज की दुकान तीन घंटे, दूध की तीन घंटे तथा दवाई की दुकानें चौबीस घंटाटे खुली रहेंगी। साथ ही उन्होंने गांव में जितने भी सफाई कर्मचारी है। उन सभी को गांव में सफाई करने के आदेश जारी किए गए है। साथ ही उनको यह भी कहा गया है कि वे गावं में लोगों को कोरोना से बचने के लिए जागरूक भी। उन्होंने इस बारे में एसपी व उपायुक्त को भी सूचित कर दिया है।
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (Cricketnmore) । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को भारत दौरे पर आ रही श्रीलंका टीम के कार्यक्रम का ऐलान कर दिया। नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (Cricketnmore)। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को भारत दौरे पर आ रही श्रीलंका टीम के कार्यक्रम का ऐलान कर दिया।श्रीलंका 16 नवंबर से 24 दिसंबर तक भारत दौरे पर रहेगी जहां वह तीन टेस्ट, तीन वनडे और तीन टी-20 मैचों की सीरीज खेलेगी। दूसरा टेस्ट मैच नागपुर में 24 से 28 नवंबर के बीच खेला जाएगा। तीसरे और आखिरी टेस्ट मैच की मेजबानी दिल्ली करेगी जो दो दिसंबर से छह दिसंबर के बीच खेला जाएगा। तीन टी-20 मैचों की सीरीज की शुरुआत कटक में 20 दिसंबर से होगी। दूसरा मैच इंदौर में 22 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। तीसरे मैच की मेजबानी मुंबई को मिली है। यह मैच 24 दिसंबर को खेला जाएगा।
नई दिल्ली, तीन अक्टूबर । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मंगलवार को भारत दौरे पर आ रही श्रीलंका टीम के कार्यक्रम का ऐलान कर दिया। नई दिल्ली, तीन अक्टूबर । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मंगलवार को भारत दौरे पर आ रही श्रीलंका टीम के कार्यक्रम का ऐलान कर दिया।श्रीलंका सोलह नवंबर से चौबीस दिसंबर तक भारत दौरे पर रहेगी जहां वह तीन टेस्ट, तीन वनडे और तीन टी-बीस मैचों की सीरीज खेलेगी। दूसरा टेस्ट मैच नागपुर में चौबीस से अट्ठाईस नवंबर के बीच खेला जाएगा। तीसरे और आखिरी टेस्ट मैच की मेजबानी दिल्ली करेगी जो दो दिसंबर से छह दिसंबर के बीच खेला जाएगा। तीन टी-बीस मैचों की सीरीज की शुरुआत कटक में बीस दिसंबर से होगी। दूसरा मैच इंदौर में बाईस दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। तीसरे मैच की मेजबानी मुंबई को मिली है। यह मैच चौबीस दिसंबर को खेला जाएगा।
दिवाली के तुरंत बाद ही छठ पूजा (Chhath Puja) मनाया जाता है. छठ पूजा आस्था का महापर्व के रूप में जाना जाता है. ये पर्व बिहार और उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाता है. हालांकि, अब दूसरे राज्यों में भी इसे धूम-धाम से मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिनों का होता है. वहीं, इस पूजा पर प्रवासी अपने घर वापस आते हैं. बिहार में लगभग सभी घरों में इस आस्था के पर्व को मनाया जाता है. जिससे लाखों की तादाद में बिहार से बाहर काम करने वाले लोग पूरे परिवार के साथ घर वापस आते हैं. ऐसे में बिहार आने वाली ट्रेनों में अधिक भीड़ देखी जा रही है. छठ पूजा को लेकर यात्रियों को टिकट नहीं मिल रहा है. इस वजह से यात्री जैसे-तैसे ट्रेन पकड़ कर घर पहुंच रहे हैं. हालांकि, भारतीय रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की है जिससे लोग छठ में यात्रा कर सकें, लेकिन यात्रियों की तादाद इतनी है कि, लोगों को रिजर्व टिकट नहीं मिल रहे हैं. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इसी वजह से केंद्र सरकार से बड़ी अपील की है. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील में कहा है कि, छठ पूजा में बिहार पहुंच रहे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसलिए सरकार को और अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलाने चाहिए. आपको बता दें, आस्था का महापर्व छठ पूजा चार दिनों का होता है. जो नहाए खाए से शुरु होता है. नहाय खाय 28 अक्टूबर को है यानी इस दिन से छठ पूजा का कार्यक्रम शुरू हो जाता है. 29 अक्टूबर को खरना का कार्यक्रम होगा. वहीं, उसके अगले दिन 30 अक्टूबर को पहला अर्घ्य और 31 अक्टूबर को प्रातः अर्घ्य दिया जाएगा. इसके साथ ही छठ पूजा की समाप्ति होगी.
दिवाली के तुरंत बाद ही छठ पूजा मनाया जाता है. छठ पूजा आस्था का महापर्व के रूप में जाना जाता है. ये पर्व बिहार और उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाता है. हालांकि, अब दूसरे राज्यों में भी इसे धूम-धाम से मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिनों का होता है. वहीं, इस पूजा पर प्रवासी अपने घर वापस आते हैं. बिहार में लगभग सभी घरों में इस आस्था के पर्व को मनाया जाता है. जिससे लाखों की तादाद में बिहार से बाहर काम करने वाले लोग पूरे परिवार के साथ घर वापस आते हैं. ऐसे में बिहार आने वाली ट्रेनों में अधिक भीड़ देखी जा रही है. छठ पूजा को लेकर यात्रियों को टिकट नहीं मिल रहा है. इस वजह से यात्री जैसे-तैसे ट्रेन पकड़ कर घर पहुंच रहे हैं. हालांकि, भारतीय रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की है जिससे लोग छठ में यात्रा कर सकें, लेकिन यात्रियों की तादाद इतनी है कि, लोगों को रिजर्व टिकट नहीं मिल रहे हैं. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इसी वजह से केंद्र सरकार से बड़ी अपील की है. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील में कहा है कि, छठ पूजा में बिहार पहुंच रहे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसलिए सरकार को और अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलाने चाहिए. आपको बता दें, आस्था का महापर्व छठ पूजा चार दिनों का होता है. जो नहाए खाए से शुरु होता है. नहाय खाय अट्ठाईस अक्टूबर को है यानी इस दिन से छठ पूजा का कार्यक्रम शुरू हो जाता है. उनतीस अक्टूबर को खरना का कार्यक्रम होगा. वहीं, उसके अगले दिन तीस अक्टूबर को पहला अर्घ्य और इकतीस अक्टूबर को प्रातः अर्घ्य दिया जाएगा. इसके साथ ही छठ पूजा की समाप्ति होगी.
Satpal Satti, President, Himachal BJP. हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष को उनकी बदजुबानी पर चुनाव आयोग ने उन्हें एक एडवायजरी जारी की है. आयोग ने सत्ती को विवादित टिप्पणियों पर अब तक तीन नोटिस दिए हैं. तीसरे नोटिस के एवज में यह एडवायजरी सत्ती को दी गई है. रिटर्निंग ऑफिसर कम डीसी मंडी ने एडवायजरी में कहा कि आंचार सहिंता के दौरान सभी राजनेताओं सभ्य आचरण की उम्मीद की जाती है. हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष सत्ती को अपने विवादित बोलों के लिए तीन बार चुनाव आयोग ने नोटिस थमाया था. हाल ही में तीसरी बार नोटिस मिला था. इसके अलावा, आयोग ने उनके प्रचार पर 48 घंटे का बैन भी लगाया था. नालागढ़ और ऊना के अंब में सत्ती ने राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका पर टिप्पणियां की थीं. नालागढ़ में सत्ती के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ है. .
Satpal Satti, President, Himachal BJP. हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष को उनकी बदजुबानी पर चुनाव आयोग ने उन्हें एक एडवायजरी जारी की है. आयोग ने सत्ती को विवादित टिप्पणियों पर अब तक तीन नोटिस दिए हैं. तीसरे नोटिस के एवज में यह एडवायजरी सत्ती को दी गई है. रिटर्निंग ऑफिसर कम डीसी मंडी ने एडवायजरी में कहा कि आंचार सहिंता के दौरान सभी राजनेताओं सभ्य आचरण की उम्मीद की जाती है. हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष सत्ती को अपने विवादित बोलों के लिए तीन बार चुनाव आयोग ने नोटिस थमाया था. हाल ही में तीसरी बार नोटिस मिला था. इसके अलावा, आयोग ने उनके प्रचार पर अड़तालीस घंटाटे का बैन भी लगाया था. नालागढ़ और ऊना के अंब में सत्ती ने राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका पर टिप्पणियां की थीं. नालागढ़ में सत्ती के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ है. .
२-मा गुण पर्याय भी इन्द्रिय से ग्रहण होने शक्य नहीं । १०३. पृथिवीभूत से क्या तात्पर्य ? १०१. निम्न वस्तुयें क्या हैं ? पुस्तक, चौकी, स्तम्भ, जूता, वायु, घड़ी, मोटरकार, वस्त्र । १०२. पांचभूत कौन से हैं ? पृथिवी, अप्, तेज, वायु, आकाश । आकाश भौतिक नहीं है इसलिये कोई कोई चार ही भूत कहता है । १०४. अपभूत से क्या समझे ? २- द्रध्याधिकार सभी ठोस पदार्थ अर्थात स्थूल स्थूल स्कन्ध पृथिवी कहे जाते है; जैसे मिट्टी, पत्थर, लोहा, सोना, रत्न आदि । १०५ . तेजभूत से क्या समझे ? सभी तरल पदार्थ अर्थात् स्थूल स्कन्ध अप् कहे जाते हैं; जैसे ज़ल, तेल, घी, दूध आदि । ऊष्णता व कान्तिरूप से जो कुछ प्रतीत होता है वह सब तेज या अग्निभूत है; जैसे अग्नि, सोने की कान्ति आदि । १०६. वायुभूत से क्या समझे ? वायुवत् प्रतीति में आने वाले सब पदार्थ वायुभूत के अन्तर्गत हैं; जैसे- सभी प्रकार की वायु, गैस, वाष्प, धूम आदि । १९७. क्या ये दृष्ट ठोस व तरल आदि पदार्थ ही पंचभूत हैं ? यद्यपि समझाने के लिये ऐसा ही बताया जाता है, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं । ये सभी उपरोक्त पदार्थ तो पांचों भूतों के सम्मेल व संघात से उत्पन्न स्थूल स्कन्ध हैं । 'भूत' तो सूक्ष्म हैं; जिन्हें आहारक वर्गणा के ही उत्तर भेद रूप से ग्रहण किया जा सकता है। दृष्ट पृथिवी में भी वे पांचों हीनाधिक रूप से देखे जा सकते हैं और दृष्ट जल व वायु आदि में । जिस 'भूत' का अंश अधिक होता है, वह भूत वैसे ही लक्षण वाला • कहा जाता है ।
दो-मा गुण पर्याय भी इन्द्रिय से ग्रहण होने शक्य नहीं । एक सौ तीन. पृथिवीभूत से क्या तात्पर्य ? एक सौ एक. निम्न वस्तुयें क्या हैं ? पुस्तक, चौकी, स्तम्भ, जूता, वायु, घड़ी, मोटरकार, वस्त्र । एक सौ दो. पांचभूत कौन से हैं ? पृथिवी, अप्, तेज, वायु, आकाश । आकाश भौतिक नहीं है इसलिये कोई कोई चार ही भूत कहता है । एक सौ चार. अपभूत से क्या समझे ? दो- द्रध्याधिकार सभी ठोस पदार्थ अर्थात स्थूल स्थूल स्कन्ध पृथिवी कहे जाते है; जैसे मिट्टी, पत्थर, लोहा, सोना, रत्न आदि । एक सौ पाँच . तेजभूत से क्या समझे ? सभी तरल पदार्थ अर्थात् स्थूल स्कन्ध अप् कहे जाते हैं; जैसे ज़ल, तेल, घी, दूध आदि । ऊष्णता व कान्तिरूप से जो कुछ प्रतीत होता है वह सब तेज या अग्निभूत है; जैसे अग्नि, सोने की कान्ति आदि । एक सौ छः. वायुभूत से क्या समझे ? वायुवत् प्रतीति में आने वाले सब पदार्थ वायुभूत के अन्तर्गत हैं; जैसे- सभी प्रकार की वायु, गैस, वाष्प, धूम आदि । एक सौ सत्तानवे. क्या ये दृष्ट ठोस व तरल आदि पदार्थ ही पंचभूत हैं ? यद्यपि समझाने के लिये ऐसा ही बताया जाता है, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं । ये सभी उपरोक्त पदार्थ तो पांचों भूतों के सम्मेल व संघात से उत्पन्न स्थूल स्कन्ध हैं । 'भूत' तो सूक्ष्म हैं; जिन्हें आहारक वर्गणा के ही उत्तर भेद रूप से ग्रहण किया जा सकता है। दृष्ट पृथिवी में भी वे पांचों हीनाधिक रूप से देखे जा सकते हैं और दृष्ट जल व वायु आदि में । जिस 'भूत' का अंश अधिक होता है, वह भूत वैसे ही लक्षण वाला • कहा जाता है ।
वाइफ़ ने रात को 02 बजे नींद से उठा कर पूछा- बताना जरा 2003 वर्ल्ड कप में सचिन ने पाकिस्तान के खिलाफ कितना स्कोर किया था? हसबेंड- 98, चांदनी मूवी में कौन सी हिरोइन थी? हसबेंड- लेकिन तुम इतनी रात को ये सब क्यों पूछ रही हो? वाइफ़- अब बताओ, सुबह से बर्थडे विश क्यों नहीं किया मुझे? पप्पू- आईटीआई और आप? जा रहे हैं। मोनू- वह कैसे? सोनू- उनसे जब भी पैसे मांगो कहते हैं क्या करोगे इतनी धनराशि का? भिखारी- क्या बात है साहब, पहले आप मुझे 100 रुपये देते थे, बाद में 50 और अब बस 25 रुपये ही देते हैं। बच्चा भी हो गया है। भिखारी- वाह साहब! आप अपने पूरे परिवार को मेरे पैसों से ऐश करा रहे हो।
वाइफ़ ने रात को दो बजे नींद से उठा कर पूछा- बताना जरा दो हज़ार तीन वर्ल्ड कप में सचिन ने पाकिस्तान के खिलाफ कितना स्कोर किया था? हसबेंड- अट्ठानवे, चांदनी मूवी में कौन सी हिरोइन थी? हसबेंड- लेकिन तुम इतनी रात को ये सब क्यों पूछ रही हो? वाइफ़- अब बताओ, सुबह से बर्थडे विश क्यों नहीं किया मुझे? पप्पू- आईटीआई और आप? जा रहे हैं। मोनू- वह कैसे? सोनू- उनसे जब भी पैसे मांगो कहते हैं क्या करोगे इतनी धनराशि का? भिखारी- क्या बात है साहब, पहले आप मुझे एक सौ रुपयापये देते थे, बाद में पचास और अब बस पच्चीस रुपयापये ही देते हैं। बच्चा भी हो गया है। भिखारी- वाह साहब! आप अपने पूरे परिवार को मेरे पैसों से ऐश करा रहे हो।
नई दिल्ली. भारत में किसानों की कम आय कई वर्षों से एक समस्या रही है. देश का पेट पालने वाले अन्नदाता कभी फसलों की बर्बादी तो कभी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने से परेशान रहते हैं. इसी वजह से किसान संगठन अक्सर धरने-प्रदर्शन करते रहते हैं. हालांकि, सरकार ने किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं. छोटे किसानों के लिए पीएम किसान योजना भी चलाई है, जिसके तहत हर साल किस्तों में किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है. किसानों की बदहाली के बीच क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां किसान काफी खुशहाल हैं और दूसरे राज्यों के किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण भी हैं. देश के कुछ राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी है. इनमें पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं, जहां किसान अपनी खेती के तरीकों से काफी समृद्ध हैं. हालांकि, एक राज्य इनमें ऐसा है जहां के किसान के सबसे ज्यादा समृद्ध हैं. आइये जानते हैं इन राज्यों के किसानों की आर्थिक स्थिति और उनकी मासिक आय क्या है? इस राज्य के किसान ज्यादा खुशहालदेश में मेघालय के किसानों को सबसे अमीर माना जाता है. इसकी गवाही खुद सरकारी आंकड़े देते हैं. इस राज्य के किसानों की मासिक आय 2019 में 29,348 रुपये थी. सरकारी एजेंसी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो पर हर राज्य के किसानों की मासिक आय के आंकड़े उपलब्ध हैं. इनमें मेघालय के किसान आमदनी के मामले में देशभर में अव्वल हैं. बेहतर आय होने का कारणमेघालय के किसानों की बेहतर आय होने का सबसे बड़ा कारण है जैविक खेती, क्योंकि ऑर्गेनिक खेती ज्यादा होने की वजह से फसलों की उत्पादन लागत कम है. यहां के किसान यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं. यहां ज्यादातर बागवानी फसलों की खेती होती है. मेघालय के किसान मार्केट से बहुत कम बीज खरीदते हैं और पारंपरिक बीजों को प्राथमिकता देते हैं इसलिए यहां के किसानों की औसत आय अच्छी है. किन फसलों की खेती करते ये किसानमेघालय के किसान चावल और मक्का खूब उगाते हैं. इसके अलावा बागवानी की फसलों में पाईनेपल, कटहल, केला और संतरे की बड़े पैमाने पर खेती होती है. मेघालय में अदरक और हल्दी का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और यहां की हल्दी बहुत खास होती है. ज्यादा बारिश, ज्यादा पानी और बेहतर फसलखेती-किसानी में पानी और बेहतर मौसम सबसे अहम घटक होता है. यहां के किसानों को सिंचाई के लिए पानी प्राकृतिक रूप से मिल जाता है, क्योंकि यहां सबसे अधिक बारिश होती है. मेघालय के मासिनराम का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है. यहां सालाना औसत बारिश 11,872 मिलीमीटर होती है. जो चेरापूंजी से भी 100 मिलीमीटर ज्यादा है. इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के किसान दूसरे व तीसरे नंबर पर आते हैं. पंजाब के किसानों की मासिक आय 26,701 रुपये है और हरियाणा में यह आंकड़ा 22,841 रुपये है. .
नई दिल्ली. भारत में किसानों की कम आय कई वर्षों से एक समस्या रही है. देश का पेट पालने वाले अन्नदाता कभी फसलों की बर्बादी तो कभी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाने से परेशान रहते हैं. इसी वजह से किसान संगठन अक्सर धरने-प्रदर्शन करते रहते हैं. हालांकि, सरकार ने किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं. छोटे किसानों के लिए पीएम किसान योजना भी चलाई है, जिसके तहत हर साल किस्तों में किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है. किसानों की बदहाली के बीच क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां किसान काफी खुशहाल हैं और दूसरे राज्यों के किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण भी हैं. देश के कुछ राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी है. इनमें पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं, जहां किसान अपनी खेती के तरीकों से काफी समृद्ध हैं. हालांकि, एक राज्य इनमें ऐसा है जहां के किसान के सबसे ज्यादा समृद्ध हैं. आइये जानते हैं इन राज्यों के किसानों की आर्थिक स्थिति और उनकी मासिक आय क्या है? इस राज्य के किसान ज्यादा खुशहालदेश में मेघालय के किसानों को सबसे अमीर माना जाता है. इसकी गवाही खुद सरकारी आंकड़े देते हैं. इस राज्य के किसानों की मासिक आय दो हज़ार उन्नीस में उनतीस,तीन सौ अड़तालीस रुपयापये थी. सरकारी एजेंसी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो पर हर राज्य के किसानों की मासिक आय के आंकड़े उपलब्ध हैं. इनमें मेघालय के किसान आमदनी के मामले में देशभर में अव्वल हैं. बेहतर आय होने का कारणमेघालय के किसानों की बेहतर आय होने का सबसे बड़ा कारण है जैविक खेती, क्योंकि ऑर्गेनिक खेती ज्यादा होने की वजह से फसलों की उत्पादन लागत कम है. यहां के किसान यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं. यहां ज्यादातर बागवानी फसलों की खेती होती है. मेघालय के किसान मार्केट से बहुत कम बीज खरीदते हैं और पारंपरिक बीजों को प्राथमिकता देते हैं इसलिए यहां के किसानों की औसत आय अच्छी है. किन फसलों की खेती करते ये किसानमेघालय के किसान चावल और मक्का खूब उगाते हैं. इसके अलावा बागवानी की फसलों में पाईनेपल, कटहल, केला और संतरे की बड़े पैमाने पर खेती होती है. मेघालय में अदरक और हल्दी का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और यहां की हल्दी बहुत खास होती है. ज्यादा बारिश, ज्यादा पानी और बेहतर फसलखेती-किसानी में पानी और बेहतर मौसम सबसे अहम घटक होता है. यहां के किसानों को सिंचाई के लिए पानी प्राकृतिक रूप से मिल जाता है, क्योंकि यहां सबसे अधिक बारिश होती है. मेघालय के मासिनराम का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है. यहां सालाना औसत बारिश ग्यारह,आठ सौ बहत्तर मिलीमीटर होती है. जो चेरापूंजी से भी एक सौ मिलीमीटर ज्यादा है. इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के किसान दूसरे व तीसरे नंबर पर आते हैं. पंजाब के किसानों की मासिक आय छब्बीस,सात सौ एक रुपयापये है और हरियाणा में यह आंकड़ा बाईस,आठ सौ इकतालीस रुपयापये है. .
नाइजीरिया के ओंडो प्रांत में कल एक कैथोलिक चर्च पर बंदूक धारियों के हमले में 50 लोग मारे गए और कई घायल हो गये। ओंडो प्रांत में ओबो के इस गिरजाघर में रविवार की सुबह प्रार्थना के लिए अनेक लोग एकत्र थे। बंदूकधारियों ने पहले चर्च में विस्फोट किया, इसके बाद श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस सामूहिक नरसंहार के कारणों का पता नहीं चल सका है। अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
नाइजीरिया के ओंडो प्रांत में कल एक कैथोलिक चर्च पर बंदूक धारियों के हमले में पचास लोग मारे गए और कई घायल हो गये। ओंडो प्रांत में ओबो के इस गिरजाघर में रविवार की सुबह प्रार्थना के लिए अनेक लोग एकत्र थे। बंदूकधारियों ने पहले चर्च में विस्फोट किया, इसके बाद श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस सामूहिक नरसंहार के कारणों का पता नहीं चल सका है। अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
नई दिल्ली (एजेंसी). कोरोना वायरस (Covid-19 In India) : के खिलाफ लड़ाई में पीएम मोदी ने देश के शीर्ष खिलाड़ियों से वीडियो कॉल के जरिए बात की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, कोहली समेत देश के दिग्गज खिलाड़ियों से सहयोग मांगा है. इसके साथ ही टीम इंडिया की पूर्व ओपनिंग जोड़ी सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ने पीएम को भरोसा दिलाया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जीत दिलाने में वह पूरा सहयोग देंगे. सचिन तेंदुलकर ने कहा कि टीम इंडिया के लिए मैं नंबर चार पर बल्लेबाजी करता था और पीएम मोदी ने भी मुझे नंबर चार पर बात करने का मौका दिया. उन्होंने बताया, "आज पीएम से बात करते हुए मेरा बैटिंग ऑर्डर चार था. कोरोना वायरस के खलिाफ मैंने नंबर चार पर बल्लेबाजी की है. टीम इंडिया के लिए भी नंबर चार पर ही बल्लेबाजी करता था. " वहीं बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पीएम मोदी की सभी खिलाड़ियों से बात करने की पहल पर खुशी जााहिर की है. सौरव गांगुली ने पीएम से कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में पूरे देशभर में पुलिस बेहतरीन काम कर रही है और हम इस लड़ाई में जीत हासिल करेंगे. सूत्रों के मुताबिक सचिन तेंदुलकर ने पीएम से कहा है कि लॉकडाउन के बाद भी लोगों को कोरोना वायरस को गंभीरता से लेना चाहिए. सचिन ने कहा है कि लॉकडाउन के बाद भी इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसके साथ ही सचिन-सौरव ने पीएम को भरोसा दिलाया है कि वह देश के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. इसके साथ ही पीएम मोदी ने अब तक खिलाड़ियों के कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में दिए गए सहयोग की सराहना की है. पीएम मोदी के साथ इस वीडियो कॉल में खेल मंत्री किरन रिजिजू और 49 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इनमें तेंदुलकर, गांगुली और कोहली के अलावा विश्व कप विजेता पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान, युवराज सिंह और केएल राहुल का नाम भी हैं.
नई दिल्ली . कोरोना वायरस : के खिलाफ लड़ाई में पीएम मोदी ने देश के शीर्ष खिलाड़ियों से वीडियो कॉल के जरिए बात की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, कोहली समेत देश के दिग्गज खिलाड़ियों से सहयोग मांगा है. इसके साथ ही टीम इंडिया की पूर्व ओपनिंग जोड़ी सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ने पीएम को भरोसा दिलाया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जीत दिलाने में वह पूरा सहयोग देंगे. सचिन तेंदुलकर ने कहा कि टीम इंडिया के लिए मैं नंबर चार पर बल्लेबाजी करता था और पीएम मोदी ने भी मुझे नंबर चार पर बात करने का मौका दिया. उन्होंने बताया, "आज पीएम से बात करते हुए मेरा बैटिंग ऑर्डर चार था. कोरोना वायरस के खलिाफ मैंने नंबर चार पर बल्लेबाजी की है. टीम इंडिया के लिए भी नंबर चार पर ही बल्लेबाजी करता था. " वहीं बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पीएम मोदी की सभी खिलाड़ियों से बात करने की पहल पर खुशी जााहिर की है. सौरव गांगुली ने पीएम से कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में पूरे देशभर में पुलिस बेहतरीन काम कर रही है और हम इस लड़ाई में जीत हासिल करेंगे. सूत्रों के मुताबिक सचिन तेंदुलकर ने पीएम से कहा है कि लॉकडाउन के बाद भी लोगों को कोरोना वायरस को गंभीरता से लेना चाहिए. सचिन ने कहा है कि लॉकडाउन के बाद भी इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसके साथ ही सचिन-सौरव ने पीएम को भरोसा दिलाया है कि वह देश के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. इसके साथ ही पीएम मोदी ने अब तक खिलाड़ियों के कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में दिए गए सहयोग की सराहना की है. पीएम मोदी के साथ इस वीडियो कॉल में खेल मंत्री किरन रिजिजू और उनचास खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इनमें तेंदुलकर, गांगुली और कोहली के अलावा विश्व कप विजेता पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान, युवराज सिंह और केएल राहुल का नाम भी हैं.
नई दिल्लीः पीएम नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को विज्ञान भवन में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के 'सतर्कता जागरूकता सप्ताह' के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि "किसी भी कीमत पर" भ्रष्टाचारी बचने नहीं चाहिए तथा उन्हें राजनीतिक व सामाजिक प्रश्रय भी नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने वाले सीवीसी जैसे संगठनों और एजेंसियों को रक्षात्मक होने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश की भलाई के लिए काम करने वालों को अपराध बोध में जीने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "हमें राजनीतिक एजेंडे पर नहीं चलना है किन्तु देश के सामान्य लोगों को जो परेशानी हो रही है, उससे उन्हें मुक्ति दिलाने का हमारा काम है और हमें इसे करना है। " पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे संगठन जब ईमानदारी से अपना काम करते हैं तो भले ही कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए चिल्लाते रहें, मगर उन्हें समाज का साथ मिलता है। गुजरात के सीएम के तौर पर अपने अनुभव साझा करते हुए मोदी ने कहा, "मैं लंबे अरसे से इस व्यवस्था से निकला हूं, लंबे अरसे तक सरकार के प्रमुख के तौर पर काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, मैंने बहुत गालियां सुनी है, बहुत आरोप सुने हैं, मेरे लिए कुछ नहीं बचा है किन्तु जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होती है वह सत्य को परखती है, सत्य को जानती है। " पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों के लिए सरकारी विभागों को रैंकिंग देने का सुझाव देते हुए कहा, "हमें मिशन मोड पर सरकारी अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंतिम रूप देने की जरुरत है। " उन्होंने यह भी कहा कि हर भ्रष्टाचारी को समाज के कटघरे में खड़ा किए जाने का वातावरण बनाना बहुत जरुरी है क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा होने के बाद भी कई बार भ्रष्टाचारियों का गौरवगान भी किया जाता है। उन्होंने कहा, "मैं तो देखता हूं कि ईमानदारी का ठेका लेने वाले लोग, उनके साथ (भ्रष्टाचारियों) फोटो खींचवाने में भी शर्म नहीं करते। यह हालत भारतीय समाज के लिए ठीक नहीं है। ऐसे लोगों को समाज द्वारा कर्तव्य का बोध कराया जाना बहुत जरुरी है। " प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भ्रष्टाचार एक ऐसी बुराई है जिससे हम सभी को दूर रहना चाहिए। हम भी बीते 8 सालों से 'अभाव' और 'दबाव' से बनी व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। " प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को तंत्र को बदलने के लिए काम करना चाहिए तथा भ्रष्टाचार की परंपरा समाप्त होनी चाहिए क्योंकि भारत स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि देश को एक ऐसा प्रशासनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता रखता हो। वही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड से भ्रष्टाचार, शोषण की और संसाधनों पर नियंत्रण की जो विरासत मिली, दुर्भाग्य से स्वतंत्रता के बाद इसे और विस्तार मिला। उन्होंने कहा मगर आजादी के अमृतकाल में दशकों से चली आ रही इस परिपाटी को पूरी तरह बदल देना है।
नई दिल्लीः पीएम नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को विज्ञान भवन में केंद्रीय सतर्कता आयोग के 'सतर्कता जागरूकता सप्ताह' के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि "किसी भी कीमत पर" भ्रष्टाचारी बचने नहीं चाहिए तथा उन्हें राजनीतिक व सामाजिक प्रश्रय भी नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार एवं भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने वाले सीवीसी जैसे संगठनों और एजेंसियों को रक्षात्मक होने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश की भलाई के लिए काम करने वालों को अपराध बोध में जीने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "हमें राजनीतिक एजेंडे पर नहीं चलना है किन्तु देश के सामान्य लोगों को जो परेशानी हो रही है, उससे उन्हें मुक्ति दिलाने का हमारा काम है और हमें इसे करना है। " पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे संगठन जब ईमानदारी से अपना काम करते हैं तो भले ही कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए चिल्लाते रहें, मगर उन्हें समाज का साथ मिलता है। गुजरात के सीएम के तौर पर अपने अनुभव साझा करते हुए मोदी ने कहा, "मैं लंबे अरसे से इस व्यवस्था से निकला हूं, लंबे अरसे तक सरकार के प्रमुख के तौर पर काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, मैंने बहुत गालियां सुनी है, बहुत आरोप सुने हैं, मेरे लिए कुछ नहीं बचा है किन्तु जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होती है वह सत्य को परखती है, सत्य को जानती है। " पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों के लिए सरकारी विभागों को रैंकिंग देने का सुझाव देते हुए कहा, "हमें मिशन मोड पर सरकारी अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंतिम रूप देने की जरुरत है। " उन्होंने यह भी कहा कि हर भ्रष्टाचारी को समाज के कटघरे में खड़ा किए जाने का वातावरण बनाना बहुत जरुरी है क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा होने के बाद भी कई बार भ्रष्टाचारियों का गौरवगान भी किया जाता है। उन्होंने कहा, "मैं तो देखता हूं कि ईमानदारी का ठेका लेने वाले लोग, उनके साथ फोटो खींचवाने में भी शर्म नहीं करते। यह हालत भारतीय समाज के लिए ठीक नहीं है। ऐसे लोगों को समाज द्वारा कर्तव्य का बोध कराया जाना बहुत जरुरी है। " प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भ्रष्टाचार एक ऐसी बुराई है जिससे हम सभी को दूर रहना चाहिए। हम भी बीते आठ सालों से 'अभाव' और 'दबाव' से बनी व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। " प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को तंत्र को बदलने के लिए काम करना चाहिए तथा भ्रष्टाचार की परंपरा समाप्त होनी चाहिए क्योंकि भारत स्वतंत्रता की पचहत्तरवीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि देश को एक ऐसा प्रशासनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता रखता हो। वही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड से भ्रष्टाचार, शोषण की और संसाधनों पर नियंत्रण की जो विरासत मिली, दुर्भाग्य से स्वतंत्रता के बाद इसे और विस्तार मिला। उन्होंने कहा मगर आजादी के अमृतकाल में दशकों से चली आ रही इस परिपाटी को पूरी तरह बदल देना है।
[PART II - SEC. 3 (ii) ] परन्तु, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर की दूरी के परे पारिस्थितिक संवेदी जोन की सीमा तक नए होटल और रिसोर्टों का स्थापन पर्यटन महायोजना के अनुसार पारिस्थितिक पर्यटन सुविधा के लिए पूर्व परिभाषित और निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए ही अनुज्ञात होंगे । (ii) आंचलिक महायोजना का अनुमोदन किए जाने तक, पर्यटन के लिए विकास और विद्यमान पर्यटन क्रियाकलापों के विस्तार को वास्तविक स्थल विनिर्दिष्ट संवीक्षा तथा मानीटरी समिति की सिफारिश पर आधारित संबंधित विनियामक प्राधिकारियों द्वारा अनुज्ञात किया जाएगा । (4) नैसर्गिक विरासत -- पारिस्थितिक संवेदी जोन में महत्वपूर्ण नैसर्गिक विरासत के सभी स्थलों जैसे सभी जीन कोश आरक्षित क्षेत्र, शैल विरचनाएं, जल प्रपातों, झरनों, घाटी मार्गों, उपवनों, गुफाएं, स्थलों, भ्रमण, अश्वरोहण, प्रपातो आदि की पहचान की जाएगी और उन्हें संरक्षित किया जाएगा तथा उनकी सुरक्षा और संरक्षा के लिए इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से छह मास के भीतर, उपयुक्त योजना बनाएगी और ऐसी योजना आंचलिक महायोजना का भाग होगा । (5) मानव निर्मित विरासत स्थलों - पारिस्थितिक संवेदी जोन में भवनों, संरचनाओं, शिल्प-तथ्य, ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक महत्व के क्षेत्रों की पहचान करनी होगी और इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से छह माह के भीतर उनके संरक्षण की योजनाएं तैयार करनी होंगी तथा आंचलिक महायोजना में सम्मिलित की जाएगी । (6) ध्वनि प्रदूषण पारिस्थितिक संवेदी जोन में ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार का पर्यावरण विभाग वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में मार्गदर्शक सिद्धांत और विनियम तैयार करेगा । (7) वायु प्रदूषण पारिस्थितिक संवेदी जोन में, वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार का पर्यावरण विभाग वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में मार्गदर्शक सिद्धांत और विनियम तैयार करेगा । (8) बहिस्राव का निस्सारण -- पारिस्थितिक संवेदी जोन में उपचारित बहिस्राव का निस्सारण जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (1974 का 6) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार होगा । (9) ठोस अपशिष्ट -- ठोस अपशिष्टों का निपटान निम्नलिखित रूप में होगा - (क) पारिस्थितिक संवेदी जोन में ठोस अपशिष्टों का निपटान भारत सरकार के तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्रालय की समय-समय पर यथा संशोधित अधिसूचना सं. का.आ. 908 (अ), तारीख 25 सितंबर, 2000 नगरपालिक ठोस अपशिष्ट ( प्रबंध और हथालन) नियम, 2000 के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ; (ख) स्थानीय प्राधिकरण जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय संघटकों में ठोस अपशिष्टों के संपृथक्कन के लिए योजनाएं तैयार करेंगे; (ग) जैव निम्नीकरणीय सामग्री को अधिमानतः खाद बनाकर या कृमि खेती के माध्यम से पुनःचक्रित किया जाएगा ; (घ) अकार्बनिक सामग्री का निपटान पारिस्थितिक संवेदी जोन के बाहर पहचान किए गए स्थल पर किसी पर्यावरणीय स्वीकृत रीति में होगा और पारिस्थितिक संवेदी जोन में ठोस अपशिष्टों को जलाना या भष्मीकरण अनुज्ञात नहीं होगा । (10) जैव चिकित्सीय अपशिष्ट पारिस्थितिक संवेदी जोन में जैव चिकित्सीय अपशिष्टों का निपटान भारत सरकार के तत्कालीन द्वारा पर्यावरण और वन मंत्रालय की समय-समय पर यथासंशोधित अधिसूचना सं. का.आ. 630 (अ) तारीख 20 जुलाई, 1998 द्वारा प्रकाशित जैव चिकित्सीय अपशिष्ट ( प्रबंध और हथालन) नियम, 1998 के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा । (11) यानीय परिवहन - परिवहन की यानीय गतिविधियां आवास के अनुकूल विनियमित होंगी और इस संबंध में आंचलिक महायोजना में विशेष उपबंध सम्मिलित किए जाएंगे और राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकरण द्वारा आंचलिक महायोजना के तैयार होने और अनुमोदित होने तक, मानीटरी समिति सुसंगत अधिनियमों और प्रवृत्त नियमों और इसके अध्यधीन बनाए गए विनियमों के अधीन यानीय गतिविधियों के अनुपालन को मानीटर करेगी। 4. पारिस्थितिक संवेदी जोन में प्रतिषिद्ध और विनियमित क्रियाकलापों की सूची - पारिस्थितिक संवेदी जोन में सभी क्रियाकलाप पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (1986 का 29) के उपबंधों और इसके अध्यधीन बनाए गए नियमों द्वारा शासित होंगे और नीचे दी गई तालिका में विनिर्दिष्ट रीति में विनियमित होंगे, अर्थात् :
[PART II - SEC. तीन ] परन्तु, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर की दूरी के परे पारिस्थितिक संवेदी जोन की सीमा तक नए होटल और रिसोर्टों का स्थापन पर्यटन महायोजना के अनुसार पारिस्थितिक पर्यटन सुविधा के लिए पूर्व परिभाषित और निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए ही अनुज्ञात होंगे । आंचलिक महायोजना का अनुमोदन किए जाने तक, पर्यटन के लिए विकास और विद्यमान पर्यटन क्रियाकलापों के विस्तार को वास्तविक स्थल विनिर्दिष्ट संवीक्षा तथा मानीटरी समिति की सिफारिश पर आधारित संबंधित विनियामक प्राधिकारियों द्वारा अनुज्ञात किया जाएगा । नैसर्गिक विरासत -- पारिस्थितिक संवेदी जोन में महत्वपूर्ण नैसर्गिक विरासत के सभी स्थलों जैसे सभी जीन कोश आरक्षित क्षेत्र, शैल विरचनाएं, जल प्रपातों, झरनों, घाटी मार्गों, उपवनों, गुफाएं, स्थलों, भ्रमण, अश्वरोहण, प्रपातो आदि की पहचान की जाएगी और उन्हें संरक्षित किया जाएगा तथा उनकी सुरक्षा और संरक्षा के लिए इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से छह मास के भीतर, उपयुक्त योजना बनाएगी और ऐसी योजना आंचलिक महायोजना का भाग होगा । मानव निर्मित विरासत स्थलों - पारिस्थितिक संवेदी जोन में भवनों, संरचनाओं, शिल्प-तथ्य, ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक महत्व के क्षेत्रों की पहचान करनी होगी और इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से छह माह के भीतर उनके संरक्षण की योजनाएं तैयार करनी होंगी तथा आंचलिक महायोजना में सम्मिलित की जाएगी । ध्वनि प्रदूषण पारिस्थितिक संवेदी जोन में ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार का पर्यावरण विभाग वायु अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में मार्गदर्शक सिद्धांत और विनियम तैयार करेगा । वायु प्रदूषण पारिस्थितिक संवेदी जोन में, वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार का पर्यावरण विभाग वायु अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में मार्गदर्शक सिद्धांत और विनियम तैयार करेगा । बहिस्राव का निस्सारण -- पारिस्थितिक संवेदी जोन में उपचारित बहिस्राव का निस्सारण जल अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार होगा । ठोस अपशिष्ट -- ठोस अपशिष्टों का निपटान निम्नलिखित रूप में होगा - पारिस्थितिक संवेदी जोन में ठोस अपशिष्टों का निपटान भारत सरकार के तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्रालय की समय-समय पर यथा संशोधित अधिसूचना सं. का.आ. नौ सौ आठ , तारीख पच्चीस सितंबर, दो हज़ार नगरपालिक ठोस अपशिष्ट नियम, दो हज़ार के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ; स्थानीय प्राधिकरण जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय संघटकों में ठोस अपशिष्टों के संपृथक्कन के लिए योजनाएं तैयार करेंगे; जैव निम्नीकरणीय सामग्री को अधिमानतः खाद बनाकर या कृमि खेती के माध्यम से पुनःचक्रित किया जाएगा ; अकार्बनिक सामग्री का निपटान पारिस्थितिक संवेदी जोन के बाहर पहचान किए गए स्थल पर किसी पर्यावरणीय स्वीकृत रीति में होगा और पारिस्थितिक संवेदी जोन में ठोस अपशिष्टों को जलाना या भष्मीकरण अनुज्ञात नहीं होगा । जैव चिकित्सीय अपशिष्ट पारिस्थितिक संवेदी जोन में जैव चिकित्सीय अपशिष्टों का निपटान भारत सरकार के तत्कालीन द्वारा पर्यावरण और वन मंत्रालय की समय-समय पर यथासंशोधित अधिसूचना सं. का.आ. छः सौ तीस तारीख बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे द्वारा प्रकाशित जैव चिकित्सीय अपशिष्ट नियम, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा । यानीय परिवहन - परिवहन की यानीय गतिविधियां आवास के अनुकूल विनियमित होंगी और इस संबंध में आंचलिक महायोजना में विशेष उपबंध सम्मिलित किए जाएंगे और राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकरण द्वारा आंचलिक महायोजना के तैयार होने और अनुमोदित होने तक, मानीटरी समिति सुसंगत अधिनियमों और प्रवृत्त नियमों और इसके अध्यधीन बनाए गए विनियमों के अधीन यानीय गतिविधियों के अनुपालन को मानीटर करेगी। चार. पारिस्थितिक संवेदी जोन में प्रतिषिद्ध और विनियमित क्रियाकलापों की सूची - पारिस्थितिक संवेदी जोन में सभी क्रियाकलाप पर्यावरण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियासी के उपबंधों और इसके अध्यधीन बनाए गए नियमों द्वारा शासित होंगे और नीचे दी गई तालिका में विनिर्दिष्ट रीति में विनियमित होंगे, अर्थात् :
तेल के मामले में राष्ट्रीयकरण की नीति ग्रहण करने का हक है। मगर शोषण और साम्राज्य - लिप्सा को भावना से जिनके विचार दूषित नहीं हो गये हैं, वे यह स्वीकार करेंगे, कि ईरान सरकार को तेल उत्पादन के राष्ट्रीयकरण का अधिकार प्राप्त है और जबरन १९३३ में जो सुविधाएँ ऐंग्लो-ईरानियन कंपनी ने प्राप्त कर ली थीं, उन्हें भी खतम करने का नैतिक हक ईरान को है। यह वर्तमान युग के लिए एक अभिशाप ही है, कि १९५१ में टोरी पार्टी के पत्र यह चाहते हैं कि दक्षिणी ईरान पर अधिकार कर के तेल से मुनाफा कमाने का धन्धा अंग्रेजी कंपनी के हाथ में ही रहे । ईरान में तेल पैदा हो और उसका पूरा नफा ब्रिटेन उठावे, यह आज का ईरान कैसे बरदाश्त कर सकता है। अरबों रुपया ईरान के तेल से ब्रिटेन की उक्त कंपनी ने कमाया और कमाती जा रही है । मुनाफे का अनुमान इसी बात से किया जा सकता है, कि एंग्लोईरानियन श्रायल कंपनी प्रतिवर्ष कर के रूप में ब्रिटिश सरकार को एक करोड़ ग्रस्सी लाख पौंड देती है । जिस देश के तेल से ब्रिटेन की तिजोरियाँ भरती जा रही हैं, वहीं, उस भागे देश ईरान के निवासी गरीबी का जीवन बिता रहे हैं । भला शोषकों का ब्रिटेन क्योंकर पसन्द आयेगा ? आज रह-रह कर स्ट्रैटफर्ड - ग्रान-एवन की याद आती रही । डायरी लिखते समय मैंने सोचा, ब्रिटेन का वह गाँव कितना गौरवशाली है, जो केवल अंग्रेजी भाषा-भाषियों का ही नहीं, बल्कि समस्त साहित्य-प्रेमियों का हृदयस्थल बन गया है और इसीलिए शेक्सपियर के ब्रिटेन से सभी को प्यार है । (१) कॉमनवेल्थ पुस्तकालय में संस्कृत और हिंदी की पांडुलिपियाँ (२) "ब्रिटेन पर अमेरिका छा जाना चाहता है " (३) कुछ पत्रों की ग्राहक संख्या आज लंदन की कामनवेल्थ लाइब्ररी में हिन्दी और संस्कृत की कई अलभ्य पांडुलिपियों को देख कर मन में बड़ी व्यथा हुई। पाकिस्तानी हठ के कारण जहाँ भारत और पाकिस्तान की कई समस्याएँ अब तक नहीं सुलझ सकी हैं, वहीं इस पुस्तकालय से भारतीय पुस्तकों की पांडुलिपियाँ प्राप्त करने के संबंध में भी कोई निर्णय नहीं हो सका है। किन्तु इस पुस्तकालय को देखने के बाद यह भी कहना पड़ता है, कि साम्राज्यवादी लूट की कोई सीमा नहीं होती । अंग्रेज़ शोषकों ने धन-दौलत तो लूटा ही, हमारी सांस्कृतिक निधियाँ भी यहाँ उठा ले श्राये । संस्कृत, पाली, हिन्दी, तेलगू, तिब्बती, पारसी, अरबी आदि भाषाओं की हज़ारों पांडुलिपियाँ यहाँ संग्रहीत हैं। इन पांडुलिपियों की निश्चित संख्या दस हज़ार से कम न होगी। विषयों की दृष्टि से साहित्य, इतिहास, धर्म, कला, ज्योतिष और वैद्यक श्रादि कई विषयों की पांडुलिपियाँ यहाँ हैं । संस्कृत पांडुलिपियों की संख्या करीब पाँच हज़ार है । हिन्दी पांडुलिपियों की संख्या लगभग १५० है । पृथ्वीराज रासो की दो अधूरी प्रतियाँ मैंने यहीं देखीं । हम्मीर रासो की पांडुलिपि और कबीर के पदों का संग्रह भी यहाँ है । महाकवि केशवदास की कई पांडुलिपियाँ यहाँ उठा लाई गई हैं। बिहारी सतसई की १७१६ की प्राचीन प्रति यहाँ रखी है। हिन्दी गद्य की कुछ बहुत पुरानी पुस्तकें यहाँ हैं, जिनमें एक ओरछा-नरेश महाराज इन्द्रजीत सिंह की 'भर्तृहरिनीति शतक' पर टीका भी है। सुदर्शनदास द्वारा लिखित 'ज्ञान समुद्र' की एक प्रति भी मैंने देखी, जिसमें वैष्णव सन्तों का वर्णन है । अभी उस दिन मैं लंदन के कुछ भारतीय छात्रों से बातचीत करते हुए इस बात का मजाक उड़ा रहा था, कि 'हिंदी का डाक्टर' बनने के लिए पता नहीं विलायत क्यों ज़रूरी समझा जाता है। किन्तु इन पांडुलिपियों को देख कर मुझे स्वीकार करना पड़ा, कि लंदन आये बिना छात्रों को शोधसम्बन्धी कार्यों में तब तक कठिनाई बनी रहेगी, जब तक इन पांडुलिपियों को हम प्राप्त नहीं कर लेते । आज शाम को फ्लीट स्ट्रीट के एक पत्र में कुछ संवाददाताओं से इस सम्बन्ध में बातें होती रहीं, कि क्या कारण है कि अभी तक ब्रिटेन में भी कोई महिला ( महिला सम्बन्धी पत्रों को छोड़ कर ) न तो किसी पत्र की सम्पादिका है और न किसी महत्वपूर्ण पद पर ही उन्हें काम करने का अवसर मिला है। मुझे बताया गया कि, 'टाइम्स' ने विदेश में एक महिला संवाददात्री को नियुक्त किया है। ब्रिटेन के पत्रकारों का यह ख्याल है, कि बाल स्तम्भों, शृंगार प्रसाधन एवं पारिवारिक जीवन-सम्बन्धी खबरों को महिलाएँ पुरुषों से अच्छा लिख सकती हैं। 'नेशनल यूनियन श्राफ जर्नलिस्ट्स' के दस हज़ार सदस्यों में महिलाओं की संख्या पाँच सौ से अधिक नहीं है । जहाँ तक वेतन का सम्बन्ध है, पत्रकारिता के क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं का निम्नतम वेतन बराबर है। किन्तु ऊँचे ग्रेड में महिलाओं की संख्या नगण्य है । हाँ, 'महिलापृष्ठ' की सम्पादिका को अच्छा वेतन मिलता है । हर प्रतिष्ठित पत्र में महिलापृष्ठ के लिए सम्पादिका नियुक्त होती है। एक संवाददाता ने हँसते हुए कहा, कि महिलाओं के लिए 'उपसम्पादकी' करना आसान नहीं है, किन्तु वे संवाददाता का काम अच्छी तरह कर सकती हैं । 'न्यूज क्रॉनिकल' की संवाददात्री लूसी मोरगन ने ब्रिटिश पत्रकारों के बीच अच्छी प्रतिष्ठा अर्जित की है। महिला पत्रकारों की संस्था का नाम - 'दि सोसायटी श्राव वीमन जर्नलिस्ट्स' है, जिसकी स्थापना १८९४ में 'लेडीज पिक्टोरियल' के मालिक श्री जे० एस० वुड ने की थी। इसके अतिरिक्त अन्य पत्रकार संगठनों में भी ने महिला पत्रकार शामिल हैं । आज एक पत्रकार ने मुझे यह भी बताया, 'पिक्चर पोस्ट' के सम्पादक टेड कॉसल के इस्तीफे के पीछे अमेरिको दूतावास का हाथ है। इनके पहले इसी पत्र के सम्पादक टाम होपकिन्सन भी त्यागपत्र दे चुके थे । 'पिक्चर पोस्ट' की ग्राहक संख्या बढ़ाने के लिए इसके मालिकों ने सनसनीखेज़ सामग्री देने के सम्बन्ध में जो नोति ग्रहण की थी, उसकी फ्लीट स्ट्रीट में बड़ी चर्चा है। श्री टेड कॉसल एक सक्रिय सोशलिस्ट तथा पार्लमेंट की सदस्या बारबरा कॉसल के पति हैं, इसलिए लंदन के पत्रकारों में इस इस्तीफे की विशेष रूप से चर्चा थी । 'पिक्चर पोस्ट' के १० मार्च के अंक में एंडू राथ का एक लेख चीनी सेना के बारे में प्रकाशित हुआ था । इस लेख में लेखक ने कुछ ऐसी बातें लिखी थीं, जो अमेरिका की विदेश नीति के प्रतिकूज थीं। कहा जाता है, कि लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने श्री कॉसल से मिल कर उक्त लेख के प्रकाशन पर आपत्ति की थी। 'न्यू स्टेट्समैन एंड नेशन ने अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी की इस बात को बेचैनी पैदा करने वाली घटना बताया था। इस घटना से ब्रिटिश मज़दूर दल से निष्कासित श्री जिलियाकस का यह आरोप क्या सत्य नहीं साबित होता, कि अमेरिका ब्रिटेन के जीवन पर छा जाना चाहता है । 'पत्र' से बाहर निकल कर मैंने टैक्सी पकड़ी और सीधे बी० बी० सी० के पूर्वी विभाग पहुँच गया। वहाँ कवि श्री गिरिजाकुमार माथुर को देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ। बाद उन्होंने मुझे बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ के ब्राडकास्टिंग विभाग से उनका सम्बन्ध खत्म हो गया है और लंदन होते हुए वह भी स्वदेश लौट रहे हैं । चाय पीने के बाद यहीं से हम लोग हिंदी केन्द्र के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए रवाना हुए । बेनीपुरीजी ने उद्घाटन-भाषण किया । डाक्टर कमज कुजश्रेष्ठ ने अध्यक्ष तथा श्री श्रोमप्रकाश आर्य ने जनरल सेक्रेटरी की हैसियत से इस केन्द्र के कार्यक्रम पर प्रकाश डाला । लंदन में हिन्दी भाषा और साहित्य का प्रचार करना ही इसका उद्देश्य बताया गया । श्री गिरिजाकुमार माथुर के साथ 'टेल्स आफ हाफमैन' संगीत-रूपक कार्लटन थियेटर जा कर देखा । श्री गिरिजाकुमार 'मैनहाटन' और अमेरिकी ऐश्वर्य की चर्चा करने में बड़ी दिलचस्पी ले रहे थे । दूसरे साथियों का इससे मनोरंजन हो रहा था। यह ठीक है, कि अमेरिका में गगनचुम्बी अट्टालिकाएँ हैं, बिजलो की छलछलाती रोशनी है और डालर की महिमा भी अनोखी है, किन्तु उसी अमेरिका में जन-गायक 'पाल रोबसन' पर पत्थर भी फेंके जाते हैं। इसकी चर्चा शुरू होते ही माथुर चुप हो गये । कुछ भावुक कवि परिस्थितियों के शिकार हो हो जाने । श्राज] ब्रिटिश पत्रों को ग्राहक संख्या के बारे में भी कुछ पत्रकारों से बातें हुई । यहाँ पत्रों के ग्राहकों की संख्या निश्चय ही बड़ी सन्तोषप्रद है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षा के कारण हमारे देश के पत्र बहुत पिछड़े हुए हैं। पहले
तेल के मामले में राष्ट्रीयकरण की नीति ग्रहण करने का हक है। मगर शोषण और साम्राज्य - लिप्सा को भावना से जिनके विचार दूषित नहीं हो गये हैं, वे यह स्वीकार करेंगे, कि ईरान सरकार को तेल उत्पादन के राष्ट्रीयकरण का अधिकार प्राप्त है और जबरन एक हज़ार नौ सौ तैंतीस में जो सुविधाएँ ऐंग्लो-ईरानियन कंपनी ने प्राप्त कर ली थीं, उन्हें भी खतम करने का नैतिक हक ईरान को है। यह वर्तमान युग के लिए एक अभिशाप ही है, कि एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में टोरी पार्टी के पत्र यह चाहते हैं कि दक्षिणी ईरान पर अधिकार कर के तेल से मुनाफा कमाने का धन्धा अंग्रेजी कंपनी के हाथ में ही रहे । ईरान में तेल पैदा हो और उसका पूरा नफा ब्रिटेन उठावे, यह आज का ईरान कैसे बरदाश्त कर सकता है। अरबों रुपया ईरान के तेल से ब्रिटेन की उक्त कंपनी ने कमाया और कमाती जा रही है । मुनाफे का अनुमान इसी बात से किया जा सकता है, कि एंग्लोईरानियन श्रायल कंपनी प्रतिवर्ष कर के रूप में ब्रिटिश सरकार को एक करोड़ ग्रस्सी लाख पौंड देती है । जिस देश के तेल से ब्रिटेन की तिजोरियाँ भरती जा रही हैं, वहीं, उस भागे देश ईरान के निवासी गरीबी का जीवन बिता रहे हैं । भला शोषकों का ब्रिटेन क्योंकर पसन्द आयेगा ? आज रह-रह कर स्ट्रैटफर्ड - ग्रान-एवन की याद आती रही । डायरी लिखते समय मैंने सोचा, ब्रिटेन का वह गाँव कितना गौरवशाली है, जो केवल अंग्रेजी भाषा-भाषियों का ही नहीं, बल्कि समस्त साहित्य-प्रेमियों का हृदयस्थल बन गया है और इसीलिए शेक्सपियर के ब्रिटेन से सभी को प्यार है । कॉमनवेल्थ पुस्तकालय में संस्कृत और हिंदी की पांडुलिपियाँ "ब्रिटेन पर अमेरिका छा जाना चाहता है " कुछ पत्रों की ग्राहक संख्या आज लंदन की कामनवेल्थ लाइब्ररी में हिन्दी और संस्कृत की कई अलभ्य पांडुलिपियों को देख कर मन में बड़ी व्यथा हुई। पाकिस्तानी हठ के कारण जहाँ भारत और पाकिस्तान की कई समस्याएँ अब तक नहीं सुलझ सकी हैं, वहीं इस पुस्तकालय से भारतीय पुस्तकों की पांडुलिपियाँ प्राप्त करने के संबंध में भी कोई निर्णय नहीं हो सका है। किन्तु इस पुस्तकालय को देखने के बाद यह भी कहना पड़ता है, कि साम्राज्यवादी लूट की कोई सीमा नहीं होती । अंग्रेज़ शोषकों ने धन-दौलत तो लूटा ही, हमारी सांस्कृतिक निधियाँ भी यहाँ उठा ले श्राये । संस्कृत, पाली, हिन्दी, तेलगू, तिब्बती, पारसी, अरबी आदि भाषाओं की हज़ारों पांडुलिपियाँ यहाँ संग्रहीत हैं। इन पांडुलिपियों की निश्चित संख्या दस हज़ार से कम न होगी। विषयों की दृष्टि से साहित्य, इतिहास, धर्म, कला, ज्योतिष और वैद्यक श्रादि कई विषयों की पांडुलिपियाँ यहाँ हैं । संस्कृत पांडुलिपियों की संख्या करीब पाँच हज़ार है । हिन्दी पांडुलिपियों की संख्या लगभग एक सौ पचास है । पृथ्वीराज रासो की दो अधूरी प्रतियाँ मैंने यहीं देखीं । हम्मीर रासो की पांडुलिपि और कबीर के पदों का संग्रह भी यहाँ है । महाकवि केशवदास की कई पांडुलिपियाँ यहाँ उठा लाई गई हैं। बिहारी सतसई की एक हज़ार सात सौ सोलह की प्राचीन प्रति यहाँ रखी है। हिन्दी गद्य की कुछ बहुत पुरानी पुस्तकें यहाँ हैं, जिनमें एक ओरछा-नरेश महाराज इन्द्रजीत सिंह की 'भर्तृहरिनीति शतक' पर टीका भी है। सुदर्शनदास द्वारा लिखित 'ज्ञान समुद्र' की एक प्रति भी मैंने देखी, जिसमें वैष्णव सन्तों का वर्णन है । अभी उस दिन मैं लंदन के कुछ भारतीय छात्रों से बातचीत करते हुए इस बात का मजाक उड़ा रहा था, कि 'हिंदी का डाक्टर' बनने के लिए पता नहीं विलायत क्यों ज़रूरी समझा जाता है। किन्तु इन पांडुलिपियों को देख कर मुझे स्वीकार करना पड़ा, कि लंदन आये बिना छात्रों को शोधसम्बन्धी कार्यों में तब तक कठिनाई बनी रहेगी, जब तक इन पांडुलिपियों को हम प्राप्त नहीं कर लेते । आज शाम को फ्लीट स्ट्रीट के एक पत्र में कुछ संवाददाताओं से इस सम्बन्ध में बातें होती रहीं, कि क्या कारण है कि अभी तक ब्रिटेन में भी कोई महिला न तो किसी पत्र की सम्पादिका है और न किसी महत्वपूर्ण पद पर ही उन्हें काम करने का अवसर मिला है। मुझे बताया गया कि, 'टाइम्स' ने विदेश में एक महिला संवाददात्री को नियुक्त किया है। ब्रिटेन के पत्रकारों का यह ख्याल है, कि बाल स्तम्भों, शृंगार प्रसाधन एवं पारिवारिक जीवन-सम्बन्धी खबरों को महिलाएँ पुरुषों से अच्छा लिख सकती हैं। 'नेशनल यूनियन श्राफ जर्नलिस्ट्स' के दस हज़ार सदस्यों में महिलाओं की संख्या पाँच सौ से अधिक नहीं है । जहाँ तक वेतन का सम्बन्ध है, पत्रकारिता के क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं का निम्नतम वेतन बराबर है। किन्तु ऊँचे ग्रेड में महिलाओं की संख्या नगण्य है । हाँ, 'महिलापृष्ठ' की सम्पादिका को अच्छा वेतन मिलता है । हर प्रतिष्ठित पत्र में महिलापृष्ठ के लिए सम्पादिका नियुक्त होती है। एक संवाददाता ने हँसते हुए कहा, कि महिलाओं के लिए 'उपसम्पादकी' करना आसान नहीं है, किन्तु वे संवाददाता का काम अच्छी तरह कर सकती हैं । 'न्यूज क्रॉनिकल' की संवाददात्री लूसी मोरगन ने ब्रिटिश पत्रकारों के बीच अच्छी प्रतिष्ठा अर्जित की है। महिला पत्रकारों की संस्था का नाम - 'दि सोसायटी श्राव वीमन जर्नलिस्ट्स' है, जिसकी स्थापना एक हज़ार आठ सौ चौरानवे में 'लेडीज पिक्टोरियल' के मालिक श्री जेशून्य एसशून्य वुड ने की थी। इसके अतिरिक्त अन्य पत्रकार संगठनों में भी ने महिला पत्रकार शामिल हैं । आज एक पत्रकार ने मुझे यह भी बताया, 'पिक्चर पोस्ट' के सम्पादक टेड कॉसल के इस्तीफे के पीछे अमेरिको दूतावास का हाथ है। इनके पहले इसी पत्र के सम्पादक टाम होपकिन्सन भी त्यागपत्र दे चुके थे । 'पिक्चर पोस्ट' की ग्राहक संख्या बढ़ाने के लिए इसके मालिकों ने सनसनीखेज़ सामग्री देने के सम्बन्ध में जो नोति ग्रहण की थी, उसकी फ्लीट स्ट्रीट में बड़ी चर्चा है। श्री टेड कॉसल एक सक्रिय सोशलिस्ट तथा पार्लमेंट की सदस्या बारबरा कॉसल के पति हैं, इसलिए लंदन के पत्रकारों में इस इस्तीफे की विशेष रूप से चर्चा थी । 'पिक्चर पोस्ट' के दस मार्च के अंक में एंडू राथ का एक लेख चीनी सेना के बारे में प्रकाशित हुआ था । इस लेख में लेखक ने कुछ ऐसी बातें लिखी थीं, जो अमेरिका की विदेश नीति के प्रतिकूज थीं। कहा जाता है, कि लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने श्री कॉसल से मिल कर उक्त लेख के प्रकाशन पर आपत्ति की थी। 'न्यू स्टेट्समैन एंड नेशन ने अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी की इस बात को बेचैनी पैदा करने वाली घटना बताया था। इस घटना से ब्रिटिश मज़दूर दल से निष्कासित श्री जिलियाकस का यह आरोप क्या सत्य नहीं साबित होता, कि अमेरिका ब्रिटेन के जीवन पर छा जाना चाहता है । 'पत्र' से बाहर निकल कर मैंने टैक्सी पकड़ी और सीधे बीशून्य बीशून्य सीशून्य के पूर्वी विभाग पहुँच गया। वहाँ कवि श्री गिरिजाकुमार माथुर को देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ। बाद उन्होंने मुझे बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ के ब्राडकास्टिंग विभाग से उनका सम्बन्ध खत्म हो गया है और लंदन होते हुए वह भी स्वदेश लौट रहे हैं । चाय पीने के बाद यहीं से हम लोग हिंदी केन्द्र के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए रवाना हुए । बेनीपुरीजी ने उद्घाटन-भाषण किया । डाक्टर कमज कुजश्रेष्ठ ने अध्यक्ष तथा श्री श्रोमप्रकाश आर्य ने जनरल सेक्रेटरी की हैसियत से इस केन्द्र के कार्यक्रम पर प्रकाश डाला । लंदन में हिन्दी भाषा और साहित्य का प्रचार करना ही इसका उद्देश्य बताया गया । श्री गिरिजाकुमार माथुर के साथ 'टेल्स आफ हाफमैन' संगीत-रूपक कार्लटन थियेटर जा कर देखा । श्री गिरिजाकुमार 'मैनहाटन' और अमेरिकी ऐश्वर्य की चर्चा करने में बड़ी दिलचस्पी ले रहे थे । दूसरे साथियों का इससे मनोरंजन हो रहा था। यह ठीक है, कि अमेरिका में गगनचुम्बी अट्टालिकाएँ हैं, बिजलो की छलछलाती रोशनी है और डालर की महिमा भी अनोखी है, किन्तु उसी अमेरिका में जन-गायक 'पाल रोबसन' पर पत्थर भी फेंके जाते हैं। इसकी चर्चा शुरू होते ही माथुर चुप हो गये । कुछ भावुक कवि परिस्थितियों के शिकार हो हो जाने । श्राज] ब्रिटिश पत्रों को ग्राहक संख्या के बारे में भी कुछ पत्रकारों से बातें हुई । यहाँ पत्रों के ग्राहकों की संख्या निश्चय ही बड़ी सन्तोषप्रद है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षा के कारण हमारे देश के पत्र बहुत पिछड़े हुए हैं। पहले
Don't Miss! खबरों की माने तो शाहरूख खान ने अपनी फिल्म के डारेक्टर अनुभव सिन्हा, रॉ वन अर्जुन रामपाल, रजनीकांत के लिए यह कार बुक भई करवा दी है। लेकिन लोगों का मानना है कि रजनीकांत ने खुशी से यह रोल किया था। इसके लिए वो किसी भी तरह का रितर्न गिफ्ट नहीं लेना चाहेंगे। साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत आज भी अपनी पुरानी कार में ही सफर करना पसंद करते हैं। उन्हे लक्जरी लाइफ से कोई मतलब नहीं है उन्हें सिम्पल रहना ही रास आता है। अगर वो इस गिफ्ट को एक्सेप्ट भी कर लेते हैं तो हो सकता है कि वो किसी अपने क्लोज रिलेटीव को यह गिफ्ट दे दें। खैर बॉलीवुड में यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब शाहरूख ने अपनी फिल्म के सफल हो जाने पर कार गिफ्ट करने जा रहे हैं इससे पहले भी वो अपनी फ्रेंड फराह खान को भी ओम शांती ओम के हिट हो जाने पर कार गिफ्ट कर चुके हैं। Shahrukh Khan, who had planned to gift a BMW car to super star for doing a cameo in Ra One, might be disappointed to hear that he may not accept his gift.
Don't Miss! खबरों की माने तो शाहरूख खान ने अपनी फिल्म के डारेक्टर अनुभव सिन्हा, रॉ वन अर्जुन रामपाल, रजनीकांत के लिए यह कार बुक भई करवा दी है। लेकिन लोगों का मानना है कि रजनीकांत ने खुशी से यह रोल किया था। इसके लिए वो किसी भी तरह का रितर्न गिफ्ट नहीं लेना चाहेंगे। साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत आज भी अपनी पुरानी कार में ही सफर करना पसंद करते हैं। उन्हे लक्जरी लाइफ से कोई मतलब नहीं है उन्हें सिम्पल रहना ही रास आता है। अगर वो इस गिफ्ट को एक्सेप्ट भी कर लेते हैं तो हो सकता है कि वो किसी अपने क्लोज रिलेटीव को यह गिफ्ट दे दें। खैर बॉलीवुड में यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब शाहरूख ने अपनी फिल्म के सफल हो जाने पर कार गिफ्ट करने जा रहे हैं इससे पहले भी वो अपनी फ्रेंड फराह खान को भी ओम शांती ओम के हिट हो जाने पर कार गिफ्ट कर चुके हैं। Shahrukh Khan, who had planned to gift a BMW car to super star for doing a cameo in Ra One, might be disappointed to hear that he may not accept his gift.
उन्होंने कहा कि पिछले छह साल से दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार है और छह साल से ये सरकार गरीबों, मज़दूरों, किसानों पर एक के बाद एक आक्रमण कर रही है। इनकी एक भी नीति गरीब जनता को फायदा पहुंचाने की नहीं है, इनकी सब नीति इनके 3-4 चुने हुए मित्रों के लिए बनाई जाती हैं । राहुल गांधी ने कहा कि कृषि कानूनों को जल्दी लाने की क्या जरूरत थी? 6 महीने या 1 साल रुक जाते तो क्या हो जाता? जल्दी ये थी कि आज कोविड फैला हुआ है और नरेंद्र मोदी ये सोचते हैं कि अगर किसान के पैर पर कुल्हाड़ी मारी तो कोविड के समय में किसान कुछ नहीं कर पाएगा ।
उन्होंने कहा कि पिछले छह साल से दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार है और छह साल से ये सरकार गरीबों, मज़दूरों, किसानों पर एक के बाद एक आक्रमण कर रही है। इनकी एक भी नीति गरीब जनता को फायदा पहुंचाने की नहीं है, इनकी सब नीति इनके तीन-चार चुने हुए मित्रों के लिए बनाई जाती हैं । राहुल गांधी ने कहा कि कृषि कानूनों को जल्दी लाने की क्या जरूरत थी? छः महीने या एक साल रुक जाते तो क्या हो जाता? जल्दी ये थी कि आज कोविड फैला हुआ है और नरेंद्र मोदी ये सोचते हैं कि अगर किसान के पैर पर कुल्हाड़ी मारी तो कोविड के समय में किसान कुछ नहीं कर पाएगा ।
यदि आप अपने घर की आर्थिक स्थिति अच्छी करना चाहती हैं और माता दुर्गा की कृपा पाना चाहती हैं, तो शारदीय नवरात्रि में कुछ विशेष उपाय आजमा सकती हैं। शारदीय नवरात्रि का हिंदुओं में विशेष महत्व बताया गया है। माता दुर्गा के 9 रूपों के पूजन को बहुत ज्यादा फलदायी माना जाता है। इस पर्व को दुर्गा पूजा की तरह भी मनाया जाता है। इस दौरान लोग माता का पूजन बड़े ही श्रद्धा भाव से करते हैं और घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा की असीम कृपा पाने के लिए कुछ ऐसे उपाय भी किए जा सकते हैं जो आपकी आर्थिक स्थिति को ठीक करने में मदद कर सकते हैं और धन लाभ के योग बना सकते हैं। इन विशेष उपायों से घर में धन धान्य बना रह सकता है और खुशहाली आ सकती है। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया से जानें शारदीय नवरात्रि के दौरान धन प्राप्ति के कुछ उपायों के बारे में। 1 - नवरात्रि के दौरान आप किसी भी एक दिन पानी में दही मिलाकर नहाएं। यदि आपके हाथ में पैसा लंबे समय तक नहीं टिकता है तो इस उपाय से घर में बरकत होगी और धन की वृद्धि होगी। 2- नवरात्रि के दौरान दुर्गा के 9 रूपों का हम स्मरण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि वह हमारे लिए धन के योग बना सकती हैं। यदि आप नवरात्रि के किसी भी दिन पानी में हरी इलायची डालकर स्नान करेंगी तो आपको अपार धन मिलेगा। 3- नवरात्रि के दौरान आप धन लाभ के लिए माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। इस दिन आप श्री सूक्तम का पाठ करें इससे आपको लाभ होगा। 4 -दुर्गा जी की नियमित रूप से पूजा अर्चना करें और उन्हें अष्टमी तिथि के दिन श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। ऐसा करने से आपके लिए धन के योग तो बनेंगे ही और पति पत्नी के बीच संबंध भी मजबूत होंगे। 5- नवरात्रि के पांचवे दिन सफेद कौड़ी, कमल गट्टे, साबुत सुपारी, हरी इलाइची, मखाने सभी चीजें 5 की संख्या में लें और मुट्ठी भर हवन सामग्री के साथ मिश्रित करके 108 बार माला जा जाप करते हुए हवन करें। 6- नवरात्रि की पूजा के दौरान आप हनुमान जी के मंदिर जाएं और उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करें। इस उपाय से आपके लिए धन के मार्ग खुलेंगे। 7- यदि आप नौकरी और व्यापार में उन्नति चाहते हैं तो पान के पत्ते का इस्तेमाल नवरात्रि के नौ दिनों में करें। इन दिनों में आप पान का पत्ता लेकर इसमें कुछ गुलाब की पंखुड़ियां रखें और माता दुर्गा को चढ़ाएं। इस उपाय से आपका रुका हुआ धन भी वापस मिल जाएगा। 8- नवरात्रि में अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का निशान बनाएं, ये भी सुख समृद्धि का कारक होता है। यदि आप हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाएंगी तो यह घर की आर्थिक स्थिति अच्छी बनाने में मदद करेगा। 9- नवरात्रि में कलश (कलश पर नारियल क्यों रखा जाता है)या घट की पूजा की भी विशेष मान्यता है। इस दौरान यदि आप घर में किसी वजह से घट स्थापित नहीं कर पा रही हैं, तो नियमित रूप से घट की पूजा मंदिर जाकर करें। 10-नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती अर्गला स्तोत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से घर में धन की वर्षा होगी। नवरात्रि में दुर्गा मंत्र का जाप भी विशेष होता है। इन दिनों में यदि आप इस मंत्र का जाप करेंगी तो लाभदायक होगा। यदि आप शारदीय नवरात्रि में यहां बताए उपाय आजमाएंगी तो आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
यदि आप अपने घर की आर्थिक स्थिति अच्छी करना चाहती हैं और माता दुर्गा की कृपा पाना चाहती हैं, तो शारदीय नवरात्रि में कुछ विशेष उपाय आजमा सकती हैं। शारदीय नवरात्रि का हिंदुओं में विशेष महत्व बताया गया है। माता दुर्गा के नौ रूपों के पूजन को बहुत ज्यादा फलदायी माना जाता है। इस पर्व को दुर्गा पूजा की तरह भी मनाया जाता है। इस दौरान लोग माता का पूजन बड़े ही श्रद्धा भाव से करते हैं और घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा की असीम कृपा पाने के लिए कुछ ऐसे उपाय भी किए जा सकते हैं जो आपकी आर्थिक स्थिति को ठीक करने में मदद कर सकते हैं और धन लाभ के योग बना सकते हैं। इन विशेष उपायों से घर में धन धान्य बना रह सकता है और खुशहाली आ सकती है। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया से जानें शारदीय नवरात्रि के दौरान धन प्राप्ति के कुछ उपायों के बारे में। एक - नवरात्रि के दौरान आप किसी भी एक दिन पानी में दही मिलाकर नहाएं। यदि आपके हाथ में पैसा लंबे समय तक नहीं टिकता है तो इस उपाय से घर में बरकत होगी और धन की वृद्धि होगी। दो- नवरात्रि के दौरान दुर्गा के नौ रूपों का हम स्मरण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि वह हमारे लिए धन के योग बना सकती हैं। यदि आप नवरात्रि के किसी भी दिन पानी में हरी इलायची डालकर स्नान करेंगी तो आपको अपार धन मिलेगा। तीन- नवरात्रि के दौरान आप धन लाभ के लिए माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। इस दिन आप श्री सूक्तम का पाठ करें इससे आपको लाभ होगा। चार -दुर्गा जी की नियमित रूप से पूजा अर्चना करें और उन्हें अष्टमी तिथि के दिन श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। ऐसा करने से आपके लिए धन के योग तो बनेंगे ही और पति पत्नी के बीच संबंध भी मजबूत होंगे। पाँच- नवरात्रि के पांचवे दिन सफेद कौड़ी, कमल गट्टे, साबुत सुपारी, हरी इलाइची, मखाने सभी चीजें पाँच की संख्या में लें और मुट्ठी भर हवन सामग्री के साथ मिश्रित करके एक सौ आठ बार माला जा जाप करते हुए हवन करें। छः- नवरात्रि की पूजा के दौरान आप हनुमान जी के मंदिर जाएं और उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करें। इस उपाय से आपके लिए धन के मार्ग खुलेंगे। सात- यदि आप नौकरी और व्यापार में उन्नति चाहते हैं तो पान के पत्ते का इस्तेमाल नवरात्रि के नौ दिनों में करें। इन दिनों में आप पान का पत्ता लेकर इसमें कुछ गुलाब की पंखुड़ियां रखें और माता दुर्गा को चढ़ाएं। इस उपाय से आपका रुका हुआ धन भी वापस मिल जाएगा। आठ- नवरात्रि में अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का निशान बनाएं, ये भी सुख समृद्धि का कारक होता है। यदि आप हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाएंगी तो यह घर की आर्थिक स्थिति अच्छी बनाने में मदद करेगा। नौ- नवरात्रि में कलश या घट की पूजा की भी विशेष मान्यता है। इस दौरान यदि आप घर में किसी वजह से घट स्थापित नहीं कर पा रही हैं, तो नियमित रूप से घट की पूजा मंदिर जाकर करें। दस-नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती अर्गला स्तोत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से घर में धन की वर्षा होगी। नवरात्रि में दुर्गा मंत्र का जाप भी विशेष होता है। इन दिनों में यदि आप इस मंत्र का जाप करेंगी तो लाभदायक होगा। यदि आप शारदीय नवरात्रि में यहां बताए उपाय आजमाएंगी तो आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने थाईलैण्ड में ऐसे क़ानूनों (lèse-majesté) के बढ़ते इस्तेमाल पर गम्भीर चिन्ता ज़ाहिर की है जिनमें लोगों को शाही परिवार के कथित निरादर के आरोपों में कड़ी सज़ाएँ सुनाई जा रही है. यूएन विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि इन क़ानूनों के इस्तेमाल से नागरिकों के लिये स्थान सिकुड़ रहा है और बुनियादी अधिकारों के इस्तेमाल के लिये ख़तरा पैदा हो गया है. थाईलैण्ड की आपराधिक दण्ड संहिता (lèse-majesté) के प्रावधानों में, शाही परिवार का तिरस्कार या निरादर किये जाने या फिर उन्हें धमकी दिये जाने पर पाबन्दी है. ऐसे मामलों में दोषी पाए गए लोगों को गम्भीर सज़ा भुगतनी पड़ती है. विचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी मामलों पर यूएन की विशेष रैपोर्टेयर आयरीन ख़ान सहित, अन्य मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस सम्बन्ध में एक वक्तव्य जारी किया है. विशेषज्ञों ने, सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में 60 वर्षीय पूर्व नौकरशाह अंचन प्रीलर्त के मामले पर चिन्ता जताई है जिन्हें शाही परिवार का निरादर करने के आरोप में 43 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इस क़ानून के तहत दी जाने वाली सज़ाओं में यह सबसे गम्भीर प्रावधान है. बताया गया है कि अंचन प्रीलर्त ने अपने फ़ेसबुक पेज पर, वर्ष 2014 और 2015 में ऐसे ऑडियो सन्देश शेयर किये जोकि शाही परिवार के लिये कथित रूप से अपमानजनक थे. संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह मामला पहली बार वर्ष 2016 मे उठाया था. शुरुआत में इस मामले की सुनवाई एक सैन्य अदालत में हुई है और उन्हें 87 वर्ष की सज़ा सुनाई गई. इस मामले को, वर्ष 2019 में, सिविल कोर्ट में हस्तान्तरित कर दिया गया जहाँ अंचन प्रीलर्त ने अपना कथित अपराध स्वीकार कर लिया. इसके बाद उनकी सज़ा की अवधि घटा कर आधी कर दी गई. लेकिन कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की गई है. यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों के मुताबिक़, वैश्विक महामारी कोविड-19 से उपजी स्थिति के कारण लोकतन्त्र-समर्थक कार्यकर्ता अब ऑनलाइन माध्यमों पर ज़्यादा सक्रिय हैं. लेकिन थाई सरकार ने lèse-majesté क़ानून के प्रावधानों को अब पहले से कहीं ज़्यादा सख़्ती से लागू करना शुरू कर दिया है. कुछ मामलों में तो नाबालिग़ों पर अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल किये जाने पर गम्भीर आरोप तय किये गए हैं. यूएन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर थाईलैण्ड की सरकार के साथ रचनात्मक सम्वाद को आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के तहत सार्वजनिक हस्तियाँ, और उच्च राजनैतिक पदाधिकारी भी आलोचना से परे नहीं हैं. विशेष रैपोर्टेयर ने थाई सरकार से आग्रह किया है कि इन क़ानूनों की समीक्षा किये जाने और उन्हें रद्द किये जाने की आवश्यकता है. उनके मुताबिक़, जो लोग ऐसे मामलों में आपराधिक मुक़दमों का सामना कर रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप वापिस लिये जाने होंगे. साथ ही अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी और शान्तिपूर्ण सभा के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिये बन्दी बनाये गए लोगों को रिहा किया जाना होगा. स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये, संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने थाईलैण्ड में ऐसे क़ानूनों के बढ़ते इस्तेमाल पर गम्भीर चिन्ता ज़ाहिर की है जिनमें लोगों को शाही परिवार के कथित निरादर के आरोपों में कड़ी सज़ाएँ सुनाई जा रही है. यूएन विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि इन क़ानूनों के इस्तेमाल से नागरिकों के लिये स्थान सिकुड़ रहा है और बुनियादी अधिकारों के इस्तेमाल के लिये ख़तरा पैदा हो गया है. थाईलैण्ड की आपराधिक दण्ड संहिता के प्रावधानों में, शाही परिवार का तिरस्कार या निरादर किये जाने या फिर उन्हें धमकी दिये जाने पर पाबन्दी है. ऐसे मामलों में दोषी पाए गए लोगों को गम्भीर सज़ा भुगतनी पड़ती है. विचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी मामलों पर यूएन की विशेष रैपोर्टेयर आयरीन ख़ान सहित, अन्य मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस सम्बन्ध में एक वक्तव्य जारी किया है. विशेषज्ञों ने, सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में साठ वर्षीय पूर्व नौकरशाह अंचन प्रीलर्त के मामले पर चिन्ता जताई है जिन्हें शाही परिवार का निरादर करने के आरोप में तैंतालीस साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इस क़ानून के तहत दी जाने वाली सज़ाओं में यह सबसे गम्भीर प्रावधान है. बताया गया है कि अंचन प्रीलर्त ने अपने फ़ेसबुक पेज पर, वर्ष दो हज़ार चौदह और दो हज़ार पंद्रह में ऐसे ऑडियो सन्देश शेयर किये जोकि शाही परिवार के लिये कथित रूप से अपमानजनक थे. संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह मामला पहली बार वर्ष दो हज़ार सोलह मे उठाया था. शुरुआत में इस मामले की सुनवाई एक सैन्य अदालत में हुई है और उन्हें सत्तासी वर्ष की सज़ा सुनाई गई. इस मामले को, वर्ष दो हज़ार उन्नीस में, सिविल कोर्ट में हस्तान्तरित कर दिया गया जहाँ अंचन प्रीलर्त ने अपना कथित अपराध स्वीकार कर लिया. इसके बाद उनकी सज़ा की अवधि घटा कर आधी कर दी गई. लेकिन कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की गई है. यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों के मुताबिक़, वैश्विक महामारी कोविड-उन्नीस से उपजी स्थिति के कारण लोकतन्त्र-समर्थक कार्यकर्ता अब ऑनलाइन माध्यमों पर ज़्यादा सक्रिय हैं. लेकिन थाई सरकार ने lèse-majesté क़ानून के प्रावधानों को अब पहले से कहीं ज़्यादा सख़्ती से लागू करना शुरू कर दिया है. कुछ मामलों में तो नाबालिग़ों पर अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल किये जाने पर गम्भीर आरोप तय किये गए हैं. यूएन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर थाईलैण्ड की सरकार के साथ रचनात्मक सम्वाद को आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के तहत सार्वजनिक हस्तियाँ, और उच्च राजनैतिक पदाधिकारी भी आलोचना से परे नहीं हैं. विशेष रैपोर्टेयर ने थाई सरकार से आग्रह किया है कि इन क़ानूनों की समीक्षा किये जाने और उन्हें रद्द किये जाने की आवश्यकता है. उनके मुताबिक़, जो लोग ऐसे मामलों में आपराधिक मुक़दमों का सामना कर रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप वापिस लिये जाने होंगे. साथ ही अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी और शान्तिपूर्ण सभा के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिये बन्दी बनाये गए लोगों को रिहा किया जाना होगा. स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये, संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध कलाकार और अपने हुनर से सभी को लोटपोट कर देने वाले अदाकार राजपाल यादव (Rajpal Yadav) इन दिनों सरोवर नगरी नैनीताल पहुंचे हुए हैं। यहां वह अपनी फिल्म एमबापे की शूटिंग के लिए आए हुए हैं। निर्देशक राहुल पॉल के निर्देशन में बन रही इस फिल्म की शूटिंग तीन सप्ताह तक नैनीताल में ही होनी है। इसके बाद फिल्म की शूटिंग हल्द्वानी में होगी। शहर के बलरामपुर हाउस में फिल्म के कई शॉट फिल्माए जा चुके हैं। राजपाल यादव के अतिरिक्त बॉलीवुड में अपने मजाकिया अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले प्रसिद्ध कलाकार हेमंत पांडे भी इस फिल्म में नजर आएंगे। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर शूटिंग को लेकर कुछ फोटोज़ भी साझा की हैं। तीन सप्ताह तक चलने वाली फिल्म की शूटिंग में नैनीताल की कई खास लोकेशन पर सीन फिल्माए जा रहे हैं। बीते दिनों सुसाइड पॉइंट, बारापत्थर के माउंटेन क्लब, नैनीझील में फिल्म की शूटिंग की गई थी। इसी बीच राजपाल यादव ने नैनीताल में घुड़सवारी का भी आनंद लिया। एमबापे फिल्म बाप बेटे के अनूठे संबंध पर आधारित मार्मिक फिल्म है। फिल्म में प्रसिद्ध फुटबॉलर एमबापे से जुड़े जरूरी अंश भी शामिल हैं। उत्तराखंड के ही निवासी केके पुरी, राहुल देवी, कविता और मकरंद देशपांडे भी इस फिल्म में दिखाई देंगे। नैनीताल के ही निवासी ज्ञान प्रकाश भी इस फिल्म में एक्टिंग कर रहे हैं। नैनीताल के नजदीकी सातताल में भी इस फिल्म के कई दृश्य फिल्माए जा चुके हैं। राजपाल यादव ने पत्रकारों से वार्ता में बोला कि उत्तराखंड बहुत ही सुंदर है। यह राज्य किसी भी हालात में स्विट्जरलैंड से कम नहीं है। उत्तराखंड और यूपी में फिल्म निर्माण के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्हें यहां काम करके काफी मजा आ रहा है और वह भविष्य में भी नैनीताल आना चाहेंगे। बता दें कि राजपाल यादव ने गरम मसाला, ढोल, मुझसे विवाह करोगी, दे दना दन, चुप चुप के, भूल भुलैया, खट्टा मीठा, मालामाल वीकली, फिर हेरा फेरी, भागम भाग समेत कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध कलाकार और अपने हुनर से सभी को लोटपोट कर देने वाले अदाकार राजपाल यादव इन दिनों सरोवर नगरी नैनीताल पहुंचे हुए हैं। यहां वह अपनी फिल्म एमबापे की शूटिंग के लिए आए हुए हैं। निर्देशक राहुल पॉल के निर्देशन में बन रही इस फिल्म की शूटिंग तीन सप्ताह तक नैनीताल में ही होनी है। इसके बाद फिल्म की शूटिंग हल्द्वानी में होगी। शहर के बलरामपुर हाउस में फिल्म के कई शॉट फिल्माए जा चुके हैं। राजपाल यादव के अतिरिक्त बॉलीवुड में अपने मजाकिया अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले प्रसिद्ध कलाकार हेमंत पांडे भी इस फिल्म में नजर आएंगे। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर शूटिंग को लेकर कुछ फोटोज़ भी साझा की हैं। तीन सप्ताह तक चलने वाली फिल्म की शूटिंग में नैनीताल की कई खास लोकेशन पर सीन फिल्माए जा रहे हैं। बीते दिनों सुसाइड पॉइंट, बारापत्थर के माउंटेन क्लब, नैनीझील में फिल्म की शूटिंग की गई थी। इसी बीच राजपाल यादव ने नैनीताल में घुड़सवारी का भी आनंद लिया। एमबापे फिल्म बाप बेटे के अनूठे संबंध पर आधारित मार्मिक फिल्म है। फिल्म में प्रसिद्ध फुटबॉलर एमबापे से जुड़े जरूरी अंश भी शामिल हैं। उत्तराखंड के ही निवासी केके पुरी, राहुल देवी, कविता और मकरंद देशपांडे भी इस फिल्म में दिखाई देंगे। नैनीताल के ही निवासी ज्ञान प्रकाश भी इस फिल्म में एक्टिंग कर रहे हैं। नैनीताल के नजदीकी सातताल में भी इस फिल्म के कई दृश्य फिल्माए जा चुके हैं। राजपाल यादव ने पत्रकारों से वार्ता में बोला कि उत्तराखंड बहुत ही सुंदर है। यह राज्य किसी भी हालात में स्विट्जरलैंड से कम नहीं है। उत्तराखंड और यूपी में फिल्म निर्माण के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्हें यहां काम करके काफी मजा आ रहा है और वह भविष्य में भी नैनीताल आना चाहेंगे। बता दें कि राजपाल यादव ने गरम मसाला, ढोल, मुझसे विवाह करोगी, दे दना दन, चुप चुप के, भूल भुलैया, खट्टा मीठा, मालामाल वीकली, फिर हेरा फेरी, भागम भाग समेत कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है।
पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, "अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। " प्रशांत किशोर ने इस बात को कहा कि पीएम मोदी का विशाल राजनीतिक अनुभव उन्हें मतदाताओं की इच्छाओं और महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करता है। पीएम मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। श्रमिकों को सम्मानित भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। "आज मंदिर का जो दिव्य और भव्य परिसर सबके सामने है वो बाबा काशी विश्वनाथ की इच्छा और प्रधानमंत्री मोदी के सार्थक और दृढ़ इच्छशक्ति के कारण ही संभव हुआ हैं। " प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल कुछ देर के लिए हैक कर लिया गया। इसके बाद इससे बिटकॉइन से जुड़े ट्वीट किए गए। PMO ने दी जानकारी। बलरामपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीडीएस जरल बिपिन रावत को याद करते हुए कहा कि वे जहाँ भी होंगे, भारत को आगे बढ़ते हुए देखेंगे।
पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, "अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। " प्रशांत किशोर ने इस बात को कहा कि पीएम मोदी का विशाल राजनीतिक अनुभव उन्हें मतदाताओं की इच्छाओं और महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करता है। पीएम मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। श्रमिकों को सम्मानित भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। "आज मंदिर का जो दिव्य और भव्य परिसर सबके सामने है वो बाबा काशी विश्वनाथ की इच्छा और प्रधानमंत्री मोदी के सार्थक और दृढ़ इच्छशक्ति के कारण ही संभव हुआ हैं। " प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल कुछ देर के लिए हैक कर लिया गया। इसके बाद इससे बिटकॉइन से जुड़े ट्वीट किए गए। PMO ने दी जानकारी। बलरामपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीडीएस जरल बिपिन रावत को याद करते हुए कहा कि वे जहाँ भी होंगे, भारत को आगे बढ़ते हुए देखेंगे।
नई दिल्लीः अब खेती लोगों के लिए एक बेहतरीन आय का स्त्रोत बन गई है। किसान अब नए तरीकों का प्रयोग करके नई नई चीजों की खेती कर रहे हैं। इसी क्रम में पढ़िए यह लेख। खेती के जरिए लाखों की कमाई करने वाले 70 वर्ष चौधरी सुमेर राव अपने खेतो में किन्नू उगाते हैं। वे घरडाना कला गांव के रहने वाले हैं। उनके खेतों में उगे किन्नू की डिमांड देश के साथ-साथ विदेशों में भी होती है। चौधरी सुमेर पहले परम्परागत खेती करते थे, लेकिन उसमें इतनी आय नहीं हो रही थी इसलिए उन्होंने फलदार पौधे लगाने का फैसला किया। चौधरी सुमेर ने साल 2014 में श्रीगंगानगरसे किन्नू के 100 पौधे लाकर अपने जमीन में लगा दिए थे। जब उन्हें इससेे अच्छा मुनाफा होने लगा तो उन्होंने और भी पौधे अपने जमीन पर लगा दिए। वर्तमान में चौधरी सुमेर के 10 बीघा जमीन पर 200 से ज्यादा किन्नू के पौधे हैं, तथा अन्य 150 किस्मों के पौधे लगे हुए हैं। उन्हें किन्नू से हर साल 15 लाख रुपए तक का मुनाफा होता है। चौधरी सुमेर राव बताते हैं कि उनके खेत में लगे किन्नू की क्वालिटी अच्छी है इसलिए इसकी डिमांड विदेशों तक होती है। वे किन्नू की सप्लाई दिल्ली और जयपुर में भी करते हैं। दो साल पहले दुबई की एक पार्टी ने उनसे किन्नू मंगवाया था। चौधरी सुमेर किन्नू के पौधों में डाली जाने वाली खाद नीम के पत्तों और गोबर से घर पर ही बनाते हैं। जैविक खाद के प्रयोग से किन्नू की क्वालिटी और अच्छी हो गई है। चौधरी सुमेर अब अन्य किसानों के खेतों में किन्नू का बगीचा लगाने में मदद कर रहे हैं। वे उनके लिए गुटी विधि से तैयार पौधा, खाद व स्प्रे भी उपलब्ध करवाते हैं। वे अन्य किसानों को किन्नू की बागवानी के तरीके सिखाने के साथ-साथ मार्केटिंग करने में भी मदद करते हैं। चौधरी सुमेर राव अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
नई दिल्लीः अब खेती लोगों के लिए एक बेहतरीन आय का स्त्रोत बन गई है। किसान अब नए तरीकों का प्रयोग करके नई नई चीजों की खेती कर रहे हैं। इसी क्रम में पढ़िए यह लेख। खेती के जरिए लाखों की कमाई करने वाले सत्तर वर्ष चौधरी सुमेर राव अपने खेतो में किन्नू उगाते हैं। वे घरडाना कला गांव के रहने वाले हैं। उनके खेतों में उगे किन्नू की डिमांड देश के साथ-साथ विदेशों में भी होती है। चौधरी सुमेर पहले परम्परागत खेती करते थे, लेकिन उसमें इतनी आय नहीं हो रही थी इसलिए उन्होंने फलदार पौधे लगाने का फैसला किया। चौधरी सुमेर ने साल दो हज़ार चौदह में श्रीगंगानगरसे किन्नू के एक सौ पौधे लाकर अपने जमीन में लगा दिए थे। जब उन्हें इससेे अच्छा मुनाफा होने लगा तो उन्होंने और भी पौधे अपने जमीन पर लगा दिए। वर्तमान में चौधरी सुमेर के दस बीघा जमीन पर दो सौ से ज्यादा किन्नू के पौधे हैं, तथा अन्य एक सौ पचास किस्मों के पौधे लगे हुए हैं। उन्हें किन्नू से हर साल पंद्रह लाख रुपए तक का मुनाफा होता है। चौधरी सुमेर राव बताते हैं कि उनके खेत में लगे किन्नू की क्वालिटी अच्छी है इसलिए इसकी डिमांड विदेशों तक होती है। वे किन्नू की सप्लाई दिल्ली और जयपुर में भी करते हैं। दो साल पहले दुबई की एक पार्टी ने उनसे किन्नू मंगवाया था। चौधरी सुमेर किन्नू के पौधों में डाली जाने वाली खाद नीम के पत्तों और गोबर से घर पर ही बनाते हैं। जैविक खाद के प्रयोग से किन्नू की क्वालिटी और अच्छी हो गई है। चौधरी सुमेर अब अन्य किसानों के खेतों में किन्नू का बगीचा लगाने में मदद कर रहे हैं। वे उनके लिए गुटी विधि से तैयार पौधा, खाद व स्प्रे भी उपलब्ध करवाते हैं। वे अन्य किसानों को किन्नू की बागवानी के तरीके सिखाने के साथ-साथ मार्केटिंग करने में भी मदद करते हैं। चौधरी सुमेर राव अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
Recover your password. A password will be e-mailed to you. अब आप घर बैठे पोस्ट ऑफिस की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं और अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं, जानिए कैसे ? देश के स्टेट बैंक SBI से करें बिजनेस, ATM फ्रेंचाइजी से करें अच्छी कमाई !
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खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा बनाई गई पॉलिसी, विभाग द्वारा 10 चोटियों को किया गया है निर्धारित। उन पर्वतारोहिया के लिए अच्छी खबर है जिन्होंने ऊंची-ऊंची चोटियों को फतेह किया है। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा ऐसे पर्वतारोहियों को पांच लाख रुपये तक देने के लिए पॉलिसी बनाई गई है। इस पॉलिसी में खेल निदेशालय द्वारा 10 पर्वतों की ऊंची चोटियों को सूचीबद्ध किया गया है। जो भी पर्वतारोही इन 10 में से किसी भी चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करता है तो हरियाणा सरकार पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार तथा सी ग्रेड का ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बनाया जाएगा। इससे पर्वतारोहियों को आर्थिक सहायता भी होगी। किसी भी पर्वतारोही को एक ही चोटी पर कई बार चढ़ने की दशा में उसे केवल एक ही बार पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार व ग्रेडेशन बनाया जाएगा। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा माउंट एवरेस्ट नेपाल से दक्षिण पूर्व की रिज के अलावा अन्य-29028 फुट, माउंट के 2- 28250 फुट, माउंट कंचन जंगा 28208 फुट, माउंट लहोत्से 27890 फुट, माउंट मैकाल 27790 फुट, माउंट धौलागिरी 26810 फुट, माउंट नंगा पर्वत 26660 फुट, माउंट अन्नपूर्णा 25447 फुट, माउंट कामेट पश्चिमम मुख रिज 25447 फुट व माउंट नंदा देवी पूर्व 24389 फुट को शामिल किया गया है। जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी राजबाला दहिया ने बताया कि इन चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाले प्रतिभागी किसी भी कार्यदिवस को दीवान बाल कृष्ण रंगशाला कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हरियाणा सरकार द्वारा पर्वतारोहियों के लिए यह पॉलिसी बहुत ही कारगर रहेगी। इस पॉलिसी के तहत पर्वतारोहिया को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे।
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा बनाई गई पॉलिसी, विभाग द्वारा दस चोटियों को किया गया है निर्धारित। उन पर्वतारोहिया के लिए अच्छी खबर है जिन्होंने ऊंची-ऊंची चोटियों को फतेह किया है। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा ऐसे पर्वतारोहियों को पांच लाख रुपये तक देने के लिए पॉलिसी बनाई गई है। इस पॉलिसी में खेल निदेशालय द्वारा दस पर्वतों की ऊंची चोटियों को सूचीबद्ध किया गया है। जो भी पर्वतारोही इन दस में से किसी भी चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करता है तो हरियाणा सरकार पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार तथा सी ग्रेड का ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बनाया जाएगा। इससे पर्वतारोहियों को आर्थिक सहायता भी होगी। किसी भी पर्वतारोही को एक ही चोटी पर कई बार चढ़ने की दशा में उसे केवल एक ही बार पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार व ग्रेडेशन बनाया जाएगा। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा माउंट एवरेस्ट नेपाल से दक्षिण पूर्व की रिज के अलावा अन्य-उनतीस हज़ार अट्ठाईस फुट, माउंट के दो- अट्ठाईस हज़ार दो सौ पचास फुट, माउंट कंचन जंगा अट्ठाईस हज़ार दो सौ आठ फुट, माउंट लहोत्से सत्ताईस हज़ार आठ सौ नब्बे फुट, माउंट मैकाल सत्ताईस हज़ार सात सौ नब्बे फुट, माउंट धौलागिरी छब्बीस हज़ार आठ सौ दस फुट, माउंट नंगा पर्वत छब्बीस हज़ार छः सौ साठ फुट, माउंट अन्नपूर्णा पच्चीस हज़ार चार सौ सैंतालीस फुट, माउंट कामेट पश्चिमम मुख रिज पच्चीस हज़ार चार सौ सैंतालीस फुट व माउंट नंदा देवी पूर्व चौबीस हज़ार तीन सौ नवासी फुट को शामिल किया गया है। जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी राजबाला दहिया ने बताया कि इन चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाले प्रतिभागी किसी भी कार्यदिवस को दीवान बाल कृष्ण रंगशाला कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हरियाणा सरकार द्वारा पर्वतारोहियों के लिए यह पॉलिसी बहुत ही कारगर रहेगी। इस पॉलिसी के तहत पर्वतारोहिया को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे।
दिवालिया क्रिप्टो-ऋणदाता वायेजर डिजिटल फिर से मुसीबत में पड़ गया है, इस बार अपने लेनदारों की आलोचना कर रहा है। Voyager Digital के असुरक्षित लेनदारों की आधिकारिक समिति ने अपने कर्मचारियों के लिए एक प्रतिधारण बोनस को मंजूरी देने के लिए क्रिप्टो-ऋणदाता के अनुरोध के खिलाफ आपत्ति दर्ज की है। के अनुसार कोर्ट फाइलिंगलेनदारों ने दावा किया कि वोयाजर डिजिटल ने अपनी "मुख्य कर्मचारी प्रतिधारण योजना" के लिए जो औचित्य प्रदान किया है, वह पर्याप्त नहीं है। एक के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रस्ताव 2 अगस्त को दायर की गई, वोयाजर डिजिटल 38 "गैर-अंदरूनी" कर्मचारियों को बोनस देने के लिए अपने फंड के 1.9 मिलियन डॉलर की मांग कर रही थी ताकि उन्हें कहीं और रोजगार विकल्प तलाशने से रोका जा सके। अदालती फाइलिंग ने संबंधित कर्मचारियों को कंपनी के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में वर्णित किया, साथ ही "लेखा, नकद और डिजिटल संपत्ति प्रबंधन, आईटी अवसंरचना, कानूनी" विभागों में काम किया। फाइलिंग ने छंटनी के माध्यम से लागत को कम करने के लिए वोयाजर के अपर्याप्त प्रयासों की भी आलोचना की और क्रिप्टो-उद्योग के बड़े नामों को संदर्भित किया, जिसने क्रिप्टो-सर्दियों के बीच अपने कर्मचारियों की संख्या को कम कर दिया। क्रिप्टो-ऋणदाता का दावा है कि उन्हें संबंधित कर्मचारियों को खोने का खतरा था, लेनदारों द्वारा भी खारिज कर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि कंपनी के लगभग 350 कर्मचारियों में से केवल 12 ने याचिका की तारीख से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। लेनदारों की समिति के वकीलों ने तर्क दिया कि क्रिप्टो-उद्योग के मौजूदा माहौल और नौकरी के बाजार में प्रतिभा की प्रचुरता को देखते हुए, खोए हुए कर्मचारियों को बदलने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वायेजर के पतन ने केवल पहले से ही संघर्षरत उद्योग को जोड़ा है, क्रिप्टो-संक्रमण के लिए धन्यवाद, जिसने इसके मद्देनजर खरबों डॉलर का वाष्पीकरण देखा। इसके बाद क्रिप्टो एक्सचेंजों पर बैंक-रन के कारण क्रिप्टोक्यूरेंसी ट्रेडिंग रिकॉर्ड निम्न स्तर पर थी, निराश निवेशक जिन्हें अब उद्योग पर भरोसा नहीं है, और स्थिति को संबोधित करने के लिए सांसदों पर बढ़ते दबाव। जबकि निवेशक अपने धन को वापस पाने के लिए बहुत कम कर सकते हैं और कुछ मामलों में जीवन-बचत, कानून निर्माताओं ने नियामक एजेंसियों पर गर्मी बढ़ा दी है, उपयोगकर्ताओं के हित में कड़े विनियमन और सुरक्षा उपायों की मांग की है। परिणाम? कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन (सीएफटीसी), फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एफडीआईसी) जैसे नियामक प्राधिकरणों से पूरे उद्योग में बढ़ी हुई जांच और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) जैसे बाजार नियामकों के लिए सही बहाना जो अपने अधिकार क्षेत्र को खत्म करना चाहते हैं। वायेजर डिजिटल क्रिप्टो-प्लेटफ़ॉर्म की लंबी कतार में सिर्फ एक नाम है जो क्रिप्टो-विंटर के आगे झुक गया है। जैसे अधिकांश प्लेटफार्मों के मामले में, जिन्होंने दुकान बंद कर दी है या दिवालिएपन के लिए दायर किया है, वोयाजर के पतन का पता टेरा नेटवर्क के पतन से लगाया जा सकता है। कई देनदारों से चूक के बाद, विशेष रूप से $650 मिलियन का ऋण चूक अब बंद हो चुके क्रिप्टो-हेज फंड थ्री एरो कैपिटल से, वोयाजर ने 1 जुलाई को अपने प्लेटफॉर्म पर सभी निकासी और व्यापारिक गतिविधियों को रोक दिया। यह शुरू किया स्वैच्छिक अध्याय 11 दिवालियापन कार्यवाही 6 जुलाई को।
दिवालिया क्रिप्टो-ऋणदाता वायेजर डिजिटल फिर से मुसीबत में पड़ गया है, इस बार अपने लेनदारों की आलोचना कर रहा है। Voyager Digital के असुरक्षित लेनदारों की आधिकारिक समिति ने अपने कर्मचारियों के लिए एक प्रतिधारण बोनस को मंजूरी देने के लिए क्रिप्टो-ऋणदाता के अनुरोध के खिलाफ आपत्ति दर्ज की है। के अनुसार कोर्ट फाइलिंगलेनदारों ने दावा किया कि वोयाजर डिजिटल ने अपनी "मुख्य कर्मचारी प्रतिधारण योजना" के लिए जो औचित्य प्रदान किया है, वह पर्याप्त नहीं है। एक के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रस्ताव दो अगस्त को दायर की गई, वोयाजर डिजिटल अड़तीस "गैर-अंदरूनी" कर्मचारियों को बोनस देने के लिए अपने फंड के एक.नौ मिलियन डॉलर की मांग कर रही थी ताकि उन्हें कहीं और रोजगार विकल्प तलाशने से रोका जा सके। अदालती फाइलिंग ने संबंधित कर्मचारियों को कंपनी के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में वर्णित किया, साथ ही "लेखा, नकद और डिजिटल संपत्ति प्रबंधन, आईटी अवसंरचना, कानूनी" विभागों में काम किया। फाइलिंग ने छंटनी के माध्यम से लागत को कम करने के लिए वोयाजर के अपर्याप्त प्रयासों की भी आलोचना की और क्रिप्टो-उद्योग के बड़े नामों को संदर्भित किया, जिसने क्रिप्टो-सर्दियों के बीच अपने कर्मचारियों की संख्या को कम कर दिया। क्रिप्टो-ऋणदाता का दावा है कि उन्हें संबंधित कर्मचारियों को खोने का खतरा था, लेनदारों द्वारा भी खारिज कर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि कंपनी के लगभग तीन सौ पचास कर्मचारियों में से केवल बारह ने याचिका की तारीख से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। लेनदारों की समिति के वकीलों ने तर्क दिया कि क्रिप्टो-उद्योग के मौजूदा माहौल और नौकरी के बाजार में प्रतिभा की प्रचुरता को देखते हुए, खोए हुए कर्मचारियों को बदलने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वायेजर के पतन ने केवल पहले से ही संघर्षरत उद्योग को जोड़ा है, क्रिप्टो-संक्रमण के लिए धन्यवाद, जिसने इसके मद्देनजर खरबों डॉलर का वाष्पीकरण देखा। इसके बाद क्रिप्टो एक्सचेंजों पर बैंक-रन के कारण क्रिप्टोक्यूरेंसी ट्रेडिंग रिकॉर्ड निम्न स्तर पर थी, निराश निवेशक जिन्हें अब उद्योग पर भरोसा नहीं है, और स्थिति को संबोधित करने के लिए सांसदों पर बढ़ते दबाव। जबकि निवेशक अपने धन को वापस पाने के लिए बहुत कम कर सकते हैं और कुछ मामलों में जीवन-बचत, कानून निर्माताओं ने नियामक एजेंसियों पर गर्मी बढ़ा दी है, उपयोगकर्ताओं के हित में कड़े विनियमन और सुरक्षा उपायों की मांग की है। परिणाम? कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन , फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन जैसे नियामक प्राधिकरणों से पूरे उद्योग में बढ़ी हुई जांच और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन जैसे बाजार नियामकों के लिए सही बहाना जो अपने अधिकार क्षेत्र को खत्म करना चाहते हैं। वायेजर डिजिटल क्रिप्टो-प्लेटफ़ॉर्म की लंबी कतार में सिर्फ एक नाम है जो क्रिप्टो-विंटर के आगे झुक गया है। जैसे अधिकांश प्लेटफार्मों के मामले में, जिन्होंने दुकान बंद कर दी है या दिवालिएपन के लिए दायर किया है, वोयाजर के पतन का पता टेरा नेटवर्क के पतन से लगाया जा सकता है। कई देनदारों से चूक के बाद, विशेष रूप से छः सौ पचास डॉलर मिलियन का ऋण चूक अब बंद हो चुके क्रिप्टो-हेज फंड थ्री एरो कैपिटल से, वोयाजर ने एक जुलाई को अपने प्लेटफॉर्म पर सभी निकासी और व्यापारिक गतिविधियों को रोक दिया। यह शुरू किया स्वैच्छिक अध्याय ग्यारह दिवालियापन कार्यवाही छः जुलाई को।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में स्थानांतरण के खेल पर शिकंजा कसता जा रहा है। जागरण के पूरे मामले को उजागर करने पर जिलाधिकारी विवेक वाष्ण्रेय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। डीएम ने बताया कि स्थानांतरण में रोक और फिर भी कार्यभार ग्रहण करने और न करने के मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।1कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में स्थानांतरण का खेल तो हमेशा से चलता आया। शासनादेश में स्थानांतरण की कोई व्यवस्था न होने के बाद भी मनमर्जी से स्थानांतरण होते रहे। पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी स्थानांतरण किए थे। बताते हैं कि करीब 37 शिक्षक शिक्षिकाएं व अन्य कर्मचारी इसके दायरे में आए थे। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा था तो डीएम ने स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। हालांकि जिसके बाद मामला शांत हो गया, जिनका सेटिंग से स्थानातंरण हुआ था उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन जिन्हें सही विद्यालय नहीं मिला था वह भटकते रहे। जिसके बाद 31 मई 2016 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने अपने आदेश में साफ कहा था कि 30 अप्रैल 2016 को हुए स्थानांतरणों को नियम विरुद्ध होने के कारण जिलाधिकारी के आदेश दिनांक नौ मई 2016 के अनुपालन में तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है, और आदेशित किया जाता है कि अपने पूर्व विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करें। इस आदेश को लेकर चर्चा चल ही रही थी कि जिला समनव्यक बालिका शिक्षा शैलेश कुमार गुप्ता की आख्या के आधार पर बीएसए ने 10 जून को कार्यभार ग्रहण न करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर संविदा समाप्ति की चेतावनी तक दे दी। दोहरे आदेश से विभाग में खलबली मच गई। जागरण ने खेल के मामले को शुरु से उठाया, रविवार के अंक में पेज संख्या आठ पर प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित क । जिसे जिलाधिकारी श्री वाष्ण्रेय ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। स्थानांतरण पर रोक और फिर नए आदेश किन परिस्थितयों में जारी किया गया, इसकी गहराई से जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सेटिंग वालों को फिट करने के लिए हुआ खेल : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में स्थानांतरण के खेल का मामला फंस गया। विभागीय जानकारों के अनुसार जिन लोगों का सेटिंग से स्थानातंरण हुआ था उन्होंने तुरंत ही कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन जब आदेश रुक गए तो जिन्हें बिन मर्जी विद्यालयों को भेजा गया था वह पूर्व विद्यालय पहुंचे लेकिन कई स्थानों पर ऐसा भी सामने आया कि उनके स्थान पर दूसरा कार्यभार ग्रहण कर चुका। आरोप है कि मामला जिला समन्वयक बालिका शिक्षा तक पहुंचा तो उन्होंने सेटिंग वालों को फिट करने के लिए नया आदेश जारी करवा दिया। जोकि विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि गहराई से जांच हो गई तो खेल की पोल भी खुल जाएगी। लक्ष्मी की कृपा से होता है खेल : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में लक्ष्मी की कृपा से खेल हो रहा है। वैसे तो सभी में मनमानी होती लेकिन स्थानांतरण में तो हद हो गई। निरस्तीकरण और फिर आदेश का मामला सामने आया ही है, ऐसा भी मामले हैं जिसमें पूर्व में स्थानांतरण का आदेश निरस्त कर दिया गया लेकिन उसके बाद भी विद्यालय नहीं छोड़ा गया। जानकारों का कहना है कि अगर पूरी जांच हो तो कई मामले सामने आएंगे।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में स्थानांतरण के खेल पर शिकंजा कसता जा रहा है। जागरण के पूरे मामले को उजागर करने पर जिलाधिकारी विवेक वाष्ण्रेय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। डीएम ने बताया कि स्थानांतरण में रोक और फिर भी कार्यभार ग्रहण करने और न करने के मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।एककस्तूरबा गांधी विद्यालयों में स्थानांतरण का खेल तो हमेशा से चलता आया। शासनादेश में स्थानांतरण की कोई व्यवस्था न होने के बाद भी मनमर्जी से स्थानांतरण होते रहे। पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी स्थानांतरण किए थे। बताते हैं कि करीब सैंतीस शिक्षक शिक्षिकाएं व अन्य कर्मचारी इसके दायरे में आए थे। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा था तो डीएम ने स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। हालांकि जिसके बाद मामला शांत हो गया, जिनका सेटिंग से स्थानातंरण हुआ था उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन जिन्हें सही विद्यालय नहीं मिला था वह भटकते रहे। जिसके बाद इकतीस मई दो हज़ार सोलह को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने अपने आदेश में साफ कहा था कि तीस अप्रैल दो हज़ार सोलह को हुए स्थानांतरणों को नियम विरुद्ध होने के कारण जिलाधिकारी के आदेश दिनांक नौ मई दो हज़ार सोलह के अनुपालन में तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है, और आदेशित किया जाता है कि अपने पूर्व विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करें। इस आदेश को लेकर चर्चा चल ही रही थी कि जिला समनव्यक बालिका शिक्षा शैलेश कुमार गुप्ता की आख्या के आधार पर बीएसए ने दस जून को कार्यभार ग्रहण न करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर संविदा समाप्ति की चेतावनी तक दे दी। दोहरे आदेश से विभाग में खलबली मच गई। जागरण ने खेल के मामले को शुरु से उठाया, रविवार के अंक में पेज संख्या आठ पर प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित क । जिसे जिलाधिकारी श्री वाष्ण्रेय ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। स्थानांतरण पर रोक और फिर नए आदेश किन परिस्थितयों में जारी किया गया, इसकी गहराई से जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सेटिंग वालों को फिट करने के लिए हुआ खेल : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में स्थानांतरण के खेल का मामला फंस गया। विभागीय जानकारों के अनुसार जिन लोगों का सेटिंग से स्थानातंरण हुआ था उन्होंने तुरंत ही कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन जब आदेश रुक गए तो जिन्हें बिन मर्जी विद्यालयों को भेजा गया था वह पूर्व विद्यालय पहुंचे लेकिन कई स्थानों पर ऐसा भी सामने आया कि उनके स्थान पर दूसरा कार्यभार ग्रहण कर चुका। आरोप है कि मामला जिला समन्वयक बालिका शिक्षा तक पहुंचा तो उन्होंने सेटिंग वालों को फिट करने के लिए नया आदेश जारी करवा दिया। जोकि विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि गहराई से जांच हो गई तो खेल की पोल भी खुल जाएगी। लक्ष्मी की कृपा से होता है खेल : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में लक्ष्मी की कृपा से खेल हो रहा है। वैसे तो सभी में मनमानी होती लेकिन स्थानांतरण में तो हद हो गई। निरस्तीकरण और फिर आदेश का मामला सामने आया ही है, ऐसा भी मामले हैं जिसमें पूर्व में स्थानांतरण का आदेश निरस्त कर दिया गया लेकिन उसके बाद भी विद्यालय नहीं छोड़ा गया। जानकारों का कहना है कि अगर पूरी जांच हो तो कई मामले सामने आएंगे।
सुरुदित रत्नसंदीद प्रद होता तो भूख प्याम श्रादिकको व्याधियों कैसे मुझे सताती ? यदि यह गरीर साथ न लगा होता तो ये सम्मान, अपमान, इष्टवियोग अनिष्ट सयोग प्रादिक कैसे लग जाते ? इस प्रमूर्त ज्ञानमात्र छात्मामे ये सम्मान प्रमान नहीं प्रायः करते । जब यह जीव शरीरपर दृष्टि दिए है में यह हू और इसने गुझे ऐसा कह डाला, यह भी कुछ नही समझता और ये मुके अनेक लोग देख रहे है, उनकी निगाहमे मेरा अपमान हो गया। ये सब वार्ते शरीरको निगाह करके स्टायी जा रही है, तो हम आपके सारे कष्टोका आधार यह शरीर बन रहा है। तब यह भावना बनायें कि शरीर हो न पाहिए। शरीर रहित मेरा शुभे स्वयका स्वरूप है, बस वही स्वरूप मेरा बने । मुझे यह शरीर न चाहिए । यह शरीर अलग हो और धागे कोई शरीर न मिले मेरी ऐसी वाया है। इसमे क्या नफा पाया जा रहा है ? नया शरीर मिला, जिन्दगीसे जिये, नाना कष्टोको पाया । फिर मरे, फिर नया जीवन पाया, फिर मरे, फिर नया जीवन पाया और उस जीवन से दुख पाया । यह धारा क्यो बने मेरे को । यह शरीर ही मेरा न रहे । शरीररहित केवल ज्ञानमात्र आत्मा रहूं, बस यह ही भीनरमे धून होनी चाहिए कि मुझको तो यही बनना है । सभी मनुष्य अपने अंतिम बनने की बात चित्तमे लाते है । तो हम प्रापमे यह हो बात आनी चाहिए कि मै शरीररहित केवल अपने स्वरूपमात्र रह जाऊँ, इसके अतिरिक्त मुझे अन्य कुछ न चाहिये । यह भावना हो तो जो होनेका है फल्याण के लिए वह सब सहज होता रहेगा । अपना कल्याण तो अपने स्वरूपकी सभाल मात्र है । दयितजनेन वियोग सयोगं खलजनेन जीवानां । मुखदुख च समस्त विधिरेव निरकुश कुरुते ॥३७०॥ ( ८५ ) सांसारिक घटनाप्रोको दैवकृतता - इस लोकमे इष्ट जनोके साथ वियोग, अनिष्टजनोके साथ सयोग और सुख दुखकी प्राप्ति कराना आदिक सब बातें निर्भय रीतिसे प्रवर्ताने वाले देवकी कृपा है । दैव ही बिना किसी भयके इन सब बातोको करता है । यहाँ बाह्य घटनावोके साथ श्रात्मम्वरूपके असम्बन्धकी बात दर्शायी गई है। जितने ये सब बाह्य समागम घटनायें हो रही है ये सब औपाधिक हैं, नैमित्तिक हैं, ये आत्माके स्वभाव रूप नहीं है और ऐसा प्रवल निमित्त नैमित्तिक योग है यहाँ कि इस इस प्रकारसे कर्मविपाक होने पर इस इस पदार्थमे इस इस प्रकारकी घटना हो जाती है । (८६) कार्यकारणभावका दो पद्धतियोसे निरूपरगण - कार्य कारण भाव दो प्रकारसे - देखा जाता है । एक उपादानदृष्टि से भौर एक घटनादृष्टि से । उपादानदृष्टि से तो स्वयका स्वयंमे हो कार्यकारणभाव है। पूर्वावस्थासयुक्त स्वद्रव्य उपादान कारण है और प्रवर्तने वाली नई गापा ३७० अवस्था यह कार्य है । एक ही द्रव्य अपने में कारणपने और कार्यपनेको अनुभवता हुआ अनादि से अनन्तकाल तक निरन्तर वर्तता रहता है । घटनादृष्टि से यह बात घटती है कि जितने स्व भावानुरूप कार्य हैं वे पर उपाधिका सम्बध पाये बिना स्वय हो अपने आप बर्तते रहते हैं । हां कालद्रव्य एक साधारण निमित्त है अतएव उसकी कथनी विशिष्ट नहीं की जाती । वह तो निरन्तर है ही। पर विकार परिणमन जितने होते है अर्थात् स्वभाव के प्रतिकूल परिणमन वे समस्त परिणमन किसी बाह्य प्रसङ्गका सान्निध्य पाकर ही होते है, अन्य प्रकार नही हुआ करते । परिणमन सबका अपने आपमे है । यह तो है वस्तुको स्वतंत्रता । और विकार परिणमनसे भी वस्तुस्वातन्त्र्य को अपने स्वचतुष्टय के स्वातन्त्र्यको नही छोडता है । निमित्त सान्निध्यमे भी उपादान मात्र अपनी ही परिणतिसे परिणमा है, दूसरेकी परिणतिको लेकर नही परिणमता है, ऐसा ही नियोग है और इस ही प्रकार विकारका उत्पाद चलता है अर्थात् जब घटनादृष्टि से कार्य कारण भावका विचार करते हैं तो उन्हे कार्य कारण शब्दसे कहना या साध्य साधन शब्दसे कहना । साधन मायने कारण और साध्य मायने कार्य । ( ८७ ) जतिके साध्य साधनको व्यवस्था - देखिये - साधन व साध्य उत्पत्ति और ज्ञप्ति दोनोमे होते है याने ज्ञप्तिसे भी साधन साध्य होता है, उत्पत्तिमे भी साधन साध्य होता है । जप्ति मायने जानकारी । जैसे ऊपर धुवाँ उठता हुआ देखा तो उस धुवेंका ज्ञान करनेसे यह ज्ञान कर लिया गया कि इस मकानमे या इस पर्वतसे झाग जल रही है । तो धुर्वांके ज्ञानसे अग्निका ज्ञान धुवाँके ज्ञानसे अग्निका ज्ञान होना ये ज्ञप्तिके साध्य साधन कहलाते है । जिसे दर्शनशास्त्रमे कहा है - "साधनात्साध्यविज्ञानमनुमानम् ।" साधनसे साध्य का ज्ञान होना अनुमान है । तो ज्ञप्तिके साधनसे साध्यका ज्ञान होता है न कि उत्पाद हुआ है । ये जानकारीके साध्य साधन है। जब उत्पत्ति के साध्य साधनकी बात देखते है तो घटना दृष्टिमे उपादान निमित्त सभी प्रकारका परिचय किया जाता है । तो उत्पत्तिकी दृष्टिमे साधन है श्रग्नि और साध्य है धुव । धुर्वांसे श्रग्नि उत्पन्न नही होती, किन्तु अग्निसे धुवाँ उत्पन्न होता है । तब जानकारीमे तो धुवाँसे अग्निका ज्ञान चला, उत्पत्तिमे श्रग्निसे धुवाँको उत्पत्ति हुई है । तो उत्पत्ति और ज्ञप्तिमे साध्य साधन एकदम बदल गये । जो ज्ञप्तिमे साधन है वह उत्पत्तिमे साध्य है । जो ज्ञप्तिमे साध्य बना है वह उत्पत्तिमे साधन है ! अब इस तरहसे आत्माको निरखिये । श्रात्मामे विकारभावके जाननेसे कर्म प्रकृतिका उदय जाना जाता है । जैसे अग्नि पदार्थका प्रत्यक्ष नहीं है, परोक्ष है, तब ही तो धुवां जानकर अग्निका ज्ञान करना पड़ा है। ऐसे ही कर्मोदय परोक्ष है, प्रत्यक्ष नही है । स्पष्ट नहीं है और विकार प्रत्यक्ष है। यद्यपि विकार प्रमूर्तिक भाव है और कर्मविपाक मूर्तिक है तो विकारसे मोटी चीज है कर्म ! अमूर्तिक होने के कारण वे कर्म मूर्तिक तो हैं और ये विकार उन कर्मोंसे भी सूक्ष्म है, क्योंकि जीवविपरिणमन है, मगर खुदपर बीती हुई बात बात है इसलिए स्वसम्वेदन उनका बन जाता है, और स्वसम्वेदन होनेसे अपने आपके विकार को स्पष्ट प्रतिभात होते हैं पर कर्म विपाक ज्ञात नही होता । तो यहाँ साधनसे साध्यका शान किया गया है अर्थात् प्रात्माके रागद्वेषादिक विकारोको देखकर कर्मोदयका ज्ञान किया गया है । यहाँ कर्मोदय प्रवश्य था, अवश्य है क्योकि विकार भाव होने से । तो यह है शप्तिका साधन । जानकारीमै जीव विकार वना साधन और कर्मोदय बना साध्य । यह है जानकारीके विषयकी वात । (८८) उत्पत्तिके साध्य साधनको व्यवस्था - अब उत्पत्तिको श्रोरसे देखें तो उत्पत्तिसे पादानका परिचय होता, निमित्तका भी परिचय किया जाता । तो उत्पत्तिको ओरसे बात यह है कि कर्मोदयका सन्निधान होनेपर रागद्वेषादिक विकार जगा तो यहाँ कर्मोदय निमित्त कारण है, और विकार नैमित्तिक कार्य है । तो यहाँ विकार कार्य हो गया, कर्मोदय कारण हो गया । यह कार्यकारणभाव निमित्तनैमित्तिककी व्यवस्था है नही, उपादानको व्यवस्था वाला नही । उपादान व्यवस्थामे कार्मारण स्कंघ तो कारण है और कार्मारण स्कंघमे जो कर्मानुभाग उदित हुआ है वह उसका कार्य है । जीव यह प्रशुद्ध उपादान कारण है और जीवमे जो विकार उपयोग बनता है वह कार्य है । पर निमित्तनैमित्तिकदृष्टिसे यहा कर्मोदय निमित्त कारण है और यह विकार नैमित्तिक कार्य है । वहीं यह न कहा जा सकेगा कि विकारभाव होनेसे कर्मोदय हाजिर हुआ । यह सिद्धान्तके अत्यन्त विपरीत बात है, जानो जो बात जैसी है, वस्तुस्वातंत्र्य [सव जगह निरखो । उपादान उपादेय भाव सब जगह श्रमिट है । तो उत्पत्तिको जब बात कहने लगेगे तो यह ही कहा जायगा कि कर्मोदय निमित्त कारण है और विकार भाव नैमित्तिक कारण है । वहा कारण कर्मोदय रहा और कार्य विकार रहा, जब कि ज्ञप्तिके प्रसगमे साध्य रहा था कर्मोदय और साधन हुआ था विकार । श्रव समझना यह है कि उत्पत्ति और शप्तिमे साध्य साधनको व्यवस्था अपने अपने भिन्न भिन्न क्षेत्रको व्यवस्था है । श्रोर इसी कारण जब कबका प्रयोग यो होता है कि जब कर्मोदय होता है तव जीवमे विकार जगता है, यह निमित्त नैमित्तिक भाव उस ही समयका है । उस ही समयमे होनेपर भी निमित्त नैमित्तिकका विवरण यथार्थ किया जाता है, अटपट उल्टा नही । जैसे जब दीपक जलता है तब प्रकाश होता है। जब दीपक जलता है उसी समय प्रकाश होना एक क्रिया है, मगर जब दीपक जलता तब प्रकाश होता, यो तो बोला जाता है, पर यो नही कहा जाता कि जब प्रकाश हो जाता तब दीपक जलता । दोनो एक समयमे होकर भी निमित्त नैमित्तिक कार्य कारणकी व्यवस्था एक नियत व्यवस्था है । तो जब कर्मों
सुरुदित रत्नसंदीद प्रद होता तो भूख प्याम श्रादिकको व्याधियों कैसे मुझे सताती ? यदि यह गरीर साथ न लगा होता तो ये सम्मान, अपमान, इष्टवियोग अनिष्ट सयोग प्रादिक कैसे लग जाते ? इस प्रमूर्त ज्ञानमात्र छात्मामे ये सम्मान प्रमान नहीं प्रायः करते । जब यह जीव शरीरपर दृष्टि दिए है में यह हू और इसने गुझे ऐसा कह डाला, यह भी कुछ नही समझता और ये मुके अनेक लोग देख रहे है, उनकी निगाहमे मेरा अपमान हो गया। ये सब वार्ते शरीरको निगाह करके स्टायी जा रही है, तो हम आपके सारे कष्टोका आधार यह शरीर बन रहा है। तब यह भावना बनायें कि शरीर हो न पाहिए। शरीर रहित मेरा शुभे स्वयका स्वरूप है, बस वही स्वरूप मेरा बने । मुझे यह शरीर न चाहिए । यह शरीर अलग हो और धागे कोई शरीर न मिले मेरी ऐसी वाया है। इसमे क्या नफा पाया जा रहा है ? नया शरीर मिला, जिन्दगीसे जिये, नाना कष्टोको पाया । फिर मरे, फिर नया जीवन पाया, फिर मरे, फिर नया जीवन पाया और उस जीवन से दुख पाया । यह धारा क्यो बने मेरे को । यह शरीर ही मेरा न रहे । शरीररहित केवल ज्ञानमात्र आत्मा रहूं, बस यह ही भीनरमे धून होनी चाहिए कि मुझको तो यही बनना है । सभी मनुष्य अपने अंतिम बनने की बात चित्तमे लाते है । तो हम प्रापमे यह हो बात आनी चाहिए कि मै शरीररहित केवल अपने स्वरूपमात्र रह जाऊँ, इसके अतिरिक्त मुझे अन्य कुछ न चाहिये । यह भावना हो तो जो होनेका है फल्याण के लिए वह सब सहज होता रहेगा । अपना कल्याण तो अपने स्वरूपकी सभाल मात्र है । दयितजनेन वियोग सयोगं खलजनेन जीवानां । मुखदुख च समस्त विधिरेव निरकुश कुरुते ॥तीन सौ सत्तर॥ सांसारिक घटनाप्रोको दैवकृतता - इस लोकमे इष्ट जनोके साथ वियोग, अनिष्टजनोके साथ सयोग और सुख दुखकी प्राप्ति कराना आदिक सब बातें निर्भय रीतिसे प्रवर्ताने वाले देवकी कृपा है । दैव ही बिना किसी भयके इन सब बातोको करता है । यहाँ बाह्य घटनावोके साथ श्रात्मम्वरूपके असम्बन्धकी बात दर्शायी गई है। जितने ये सब बाह्य समागम घटनायें हो रही है ये सब औपाधिक हैं, नैमित्तिक हैं, ये आत्माके स्वभाव रूप नहीं है और ऐसा प्रवल निमित्त नैमित्तिक योग है यहाँ कि इस इस प्रकारसे कर्मविपाक होने पर इस इस पदार्थमे इस इस प्रकारकी घटना हो जाती है । कार्यकारणभावका दो पद्धतियोसे निरूपरगण - कार्य कारण भाव दो प्रकारसे - देखा जाता है । एक उपादानदृष्टि से भौर एक घटनादृष्टि से । उपादानदृष्टि से तो स्वयका स्वयंमे हो कार्यकारणभाव है। पूर्वावस्थासयुक्त स्वद्रव्य उपादान कारण है और प्रवर्तने वाली नई गापा तीन सौ सत्तर अवस्था यह कार्य है । एक ही द्रव्य अपने में कारणपने और कार्यपनेको अनुभवता हुआ अनादि से अनन्तकाल तक निरन्तर वर्तता रहता है । घटनादृष्टि से यह बात घटती है कि जितने स्व भावानुरूप कार्य हैं वे पर उपाधिका सम्बध पाये बिना स्वय हो अपने आप बर्तते रहते हैं । हां कालद्रव्य एक साधारण निमित्त है अतएव उसकी कथनी विशिष्ट नहीं की जाती । वह तो निरन्तर है ही। पर विकार परिणमन जितने होते है अर्थात् स्वभाव के प्रतिकूल परिणमन वे समस्त परिणमन किसी बाह्य प्रसङ्गका सान्निध्य पाकर ही होते है, अन्य प्रकार नही हुआ करते । परिणमन सबका अपने आपमे है । यह तो है वस्तुको स्वतंत्रता । और विकार परिणमनसे भी वस्तुस्वातन्त्र्य को अपने स्वचतुष्टय के स्वातन्त्र्यको नही छोडता है । निमित्त सान्निध्यमे भी उपादान मात्र अपनी ही परिणतिसे परिणमा है, दूसरेकी परिणतिको लेकर नही परिणमता है, ऐसा ही नियोग है और इस ही प्रकार विकारका उत्पाद चलता है अर्थात् जब घटनादृष्टि से कार्य कारण भावका विचार करते हैं तो उन्हे कार्य कारण शब्दसे कहना या साध्य साधन शब्दसे कहना । साधन मायने कारण और साध्य मायने कार्य । जतिके साध्य साधनको व्यवस्था - देखिये - साधन व साध्य उत्पत्ति और ज्ञप्ति दोनोमे होते है याने ज्ञप्तिसे भी साधन साध्य होता है, उत्पत्तिमे भी साधन साध्य होता है । जप्ति मायने जानकारी । जैसे ऊपर धुवाँ उठता हुआ देखा तो उस धुवेंका ज्ञान करनेसे यह ज्ञान कर लिया गया कि इस मकानमे या इस पर्वतसे झाग जल रही है । तो धुर्वांके ज्ञानसे अग्निका ज्ञान धुवाँके ज्ञानसे अग्निका ज्ञान होना ये ज्ञप्तिके साध्य साधन कहलाते है । जिसे दर्शनशास्त्रमे कहा है - "साधनात्साध्यविज्ञानमनुमानम् ।" साधनसे साध्य का ज्ञान होना अनुमान है । तो ज्ञप्तिके साधनसे साध्यका ज्ञान होता है न कि उत्पाद हुआ है । ये जानकारीके साध्य साधन है। जब उत्पत्ति के साध्य साधनकी बात देखते है तो घटना दृष्टिमे उपादान निमित्त सभी प्रकारका परिचय किया जाता है । तो उत्पत्तिकी दृष्टिमे साधन है श्रग्नि और साध्य है धुव । धुर्वांसे श्रग्नि उत्पन्न नही होती, किन्तु अग्निसे धुवाँ उत्पन्न होता है । तब जानकारीमे तो धुवाँसे अग्निका ज्ञान चला, उत्पत्तिमे श्रग्निसे धुवाँको उत्पत्ति हुई है । तो उत्पत्ति और ज्ञप्तिमे साध्य साधन एकदम बदल गये । जो ज्ञप्तिमे साधन है वह उत्पत्तिमे साध्य है । जो ज्ञप्तिमे साध्य बना है वह उत्पत्तिमे साधन है ! अब इस तरहसे आत्माको निरखिये । श्रात्मामे विकारभावके जाननेसे कर्म प्रकृतिका उदय जाना जाता है । जैसे अग्नि पदार्थका प्रत्यक्ष नहीं है, परोक्ष है, तब ही तो धुवां जानकर अग्निका ज्ञान करना पड़ा है। ऐसे ही कर्मोदय परोक्ष है, प्रत्यक्ष नही है । स्पष्ट नहीं है और विकार प्रत्यक्ष है। यद्यपि विकार प्रमूर्तिक भाव है और कर्मविपाक मूर्तिक है तो विकारसे मोटी चीज है कर्म ! अमूर्तिक होने के कारण वे कर्म मूर्तिक तो हैं और ये विकार उन कर्मोंसे भी सूक्ष्म है, क्योंकि जीवविपरिणमन है, मगर खुदपर बीती हुई बात बात है इसलिए स्वसम्वेदन उनका बन जाता है, और स्वसम्वेदन होनेसे अपने आपके विकार को स्पष्ट प्रतिभात होते हैं पर कर्म विपाक ज्ञात नही होता । तो यहाँ साधनसे साध्यका शान किया गया है अर्थात् प्रात्माके रागद्वेषादिक विकारोको देखकर कर्मोदयका ज्ञान किया गया है । यहाँ कर्मोदय प्रवश्य था, अवश्य है क्योकि विकार भाव होने से । तो यह है शप्तिका साधन । जानकारीमै जीव विकार वना साधन और कर्मोदय बना साध्य । यह है जानकारीके विषयकी वात । उत्पत्तिके साध्य साधनको व्यवस्था - अब उत्पत्तिको श्रोरसे देखें तो उत्पत्तिसे पादानका परिचय होता, निमित्तका भी परिचय किया जाता । तो उत्पत्तिको ओरसे बात यह है कि कर्मोदयका सन्निधान होनेपर रागद्वेषादिक विकार जगा तो यहाँ कर्मोदय निमित्त कारण है, और विकार नैमित्तिक कार्य है । तो यहाँ विकार कार्य हो गया, कर्मोदय कारण हो गया । यह कार्यकारणभाव निमित्तनैमित्तिककी व्यवस्था है नही, उपादानको व्यवस्था वाला नही । उपादान व्यवस्थामे कार्मारण स्कंघ तो कारण है और कार्मारण स्कंघमे जो कर्मानुभाग उदित हुआ है वह उसका कार्य है । जीव यह प्रशुद्ध उपादान कारण है और जीवमे जो विकार उपयोग बनता है वह कार्य है । पर निमित्तनैमित्तिकदृष्टिसे यहा कर्मोदय निमित्त कारण है और यह विकार नैमित्तिक कार्य है । वहीं यह न कहा जा सकेगा कि विकारभाव होनेसे कर्मोदय हाजिर हुआ । यह सिद्धान्तके अत्यन्त विपरीत बात है, जानो जो बात जैसी है, वस्तुस्वातंत्र्य [सव जगह निरखो । उपादान उपादेय भाव सब जगह श्रमिट है । तो उत्पत्तिको जब बात कहने लगेगे तो यह ही कहा जायगा कि कर्मोदय निमित्त कारण है और विकार भाव नैमित्तिक कारण है । वहा कारण कर्मोदय रहा और कार्य विकार रहा, जब कि ज्ञप्तिके प्रसगमे साध्य रहा था कर्मोदय और साधन हुआ था विकार । श्रव समझना यह है कि उत्पत्ति और शप्तिमे साध्य साधनको व्यवस्था अपने अपने भिन्न भिन्न क्षेत्रको व्यवस्था है । श्रोर इसी कारण जब कबका प्रयोग यो होता है कि जब कर्मोदय होता है तव जीवमे विकार जगता है, यह निमित्त नैमित्तिक भाव उस ही समयका है । उस ही समयमे होनेपर भी निमित्त नैमित्तिकका विवरण यथार्थ किया जाता है, अटपट उल्टा नही । जैसे जब दीपक जलता है तब प्रकाश होता है। जब दीपक जलता है उसी समय प्रकाश होना एक क्रिया है, मगर जब दीपक जलता तब प्रकाश होता, यो तो बोला जाता है, पर यो नही कहा जाता कि जब प्रकाश हो जाता तब दीपक जलता । दोनो एक समयमे होकर भी निमित्त नैमित्तिक कार्य कारणकी व्यवस्था एक नियत व्यवस्था है । तो जब कर्मों
चीन और पाकिस्तान अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान की सरकार को मान्यता दे सकते हैं. इसके पीछे की वजह तालिबानी अधिकारियों से चीन के विदेश मंत्री की मुलाकात है. चीन, पाकिस्तान, रूस और तुर्की औपचारिक रूप से अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान सरकार (Taliban Government) को मान्यता देने के लिए तैयार नजर आ रह हैं. तालिबान (Taliban) ने रविवार को राजधानी काबुल (Kabul) स्थित राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया और देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) सरकारी अधिकारियों के साथ तजाकिस्तान (Tajikistan) भाग गए. तालिबान का अब देश पर पूरी तरह से नियंत्रण हो गया है और माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन 'इस्लामी अमीरात ऑफ अफगानिस्तान' की घोषणा कर सकता है. अधिकतर वैश्विक शक्तियां अफगानिस्तान पर तालिबान के शासन को मान्यता देने के लिए अनिच्छुक नजर आ रही हैं. ब्रिटेन (Britain) के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान को 'आतंकवाद का प्रजनन स्थल' बनने नहीं दिया जा सकता है. लेकिन बीजिंग (Beijing) और इस्लामाबाद (Islamabad) संभावित नई सरकार के साथ रिश्ते बनाने के लिए इसे मान्यता दे सकते हैं. चीन की सरकारी मीडिया अपने लोगों को इस संभावित हालात को स्वीकार करने के लिए तैयार कर रही है कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को इस्लामी समूह को मान्यता देनी पड़ सकती है. चीन में पिछले महीने सरकारी मीडिया द्वारा विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) की तस्वीरें जारी की गई थीं, जिसमें उन्हें पारंपरिक कपड़े पहने हुए तालिबान अधिकारियों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े देखा जा सकता था. चीनी सरकार ने सोमवार को कहा कि वह तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने के लिए तैयार है. एएफपी के अनुसार, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, चीन स्वतंत्र रूप से अपने भाग्य का निर्धारण करने के अफगान लोगों के अधिकार का सम्मान करता है और अफगानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहकारी संबंध विकसित करना जारी रखना चाहता है. वहीं, रूस ने कहा कि इसकी अभी काबुल स्थित दूतावास को खाली करने की कोई योजना नहीं है. रूसी सरकारी मीडिया का कहना है कि तालिबान ने अफगानिस्तान में राजनयिक स्टाफ की सुरक्षा की गारंटी का वादा किया है. तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि संगठन के रूस के साथ अच्छे रिश्ते हैं और रूस और अन्य दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाई गई है. सुन्नी मुस्लिम तालिबान के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते रखने वाले ईरान (Iran) ने भी अपने राजनयिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने हाल के समय में तालिबान द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करने से इनकार किया है. ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा है कि पाकिस्तान तालिबान सरकार को मान्यता देगा. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन (Recep Tayyip Erdogan) ने कहा कि तालिबान के देशव्यापी हमले के बीच बढ़ती प्रवास लहर को रोकने के लिए उनका देश पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए काम करेगा.
चीन और पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता दे सकते हैं. इसके पीछे की वजह तालिबानी अधिकारियों से चीन के विदेश मंत्री की मुलाकात है. चीन, पाकिस्तान, रूस और तुर्की औपचारिक रूप से अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देने के लिए तैयार नजर आ रह हैं. तालिबान ने रविवार को राजधानी काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया और देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी सरकारी अधिकारियों के साथ तजाकिस्तान भाग गए. तालिबान का अब देश पर पूरी तरह से नियंत्रण हो गया है और माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन 'इस्लामी अमीरात ऑफ अफगानिस्तान' की घोषणा कर सकता है. अधिकतर वैश्विक शक्तियां अफगानिस्तान पर तालिबान के शासन को मान्यता देने के लिए अनिच्छुक नजर आ रही हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान को 'आतंकवाद का प्रजनन स्थल' बनने नहीं दिया जा सकता है. लेकिन बीजिंग और इस्लामाबाद संभावित नई सरकार के साथ रिश्ते बनाने के लिए इसे मान्यता दे सकते हैं. चीन की सरकारी मीडिया अपने लोगों को इस संभावित हालात को स्वीकार करने के लिए तैयार कर रही है कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को इस्लामी समूह को मान्यता देनी पड़ सकती है. चीन में पिछले महीने सरकारी मीडिया द्वारा विदेश मंत्री वांग यी की तस्वीरें जारी की गई थीं, जिसमें उन्हें पारंपरिक कपड़े पहने हुए तालिबान अधिकारियों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े देखा जा सकता था. चीनी सरकार ने सोमवार को कहा कि वह तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने के लिए तैयार है. एएफपी के अनुसार, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, चीन स्वतंत्र रूप से अपने भाग्य का निर्धारण करने के अफगान लोगों के अधिकार का सम्मान करता है और अफगानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहकारी संबंध विकसित करना जारी रखना चाहता है. वहीं, रूस ने कहा कि इसकी अभी काबुल स्थित दूतावास को खाली करने की कोई योजना नहीं है. रूसी सरकारी मीडिया का कहना है कि तालिबान ने अफगानिस्तान में राजनयिक स्टाफ की सुरक्षा की गारंटी का वादा किया है. तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि संगठन के रूस के साथ अच्छे रिश्ते हैं और रूस और अन्य दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाई गई है. सुन्नी मुस्लिम तालिबान के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते रखने वाले ईरान ने भी अपने राजनयिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल के समय में तालिबान द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करने से इनकार किया है. ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा है कि पाकिस्तान तालिबान सरकार को मान्यता देगा. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने कहा कि तालिबान के देशव्यापी हमले के बीच बढ़ती प्रवास लहर को रोकने के लिए उनका देश पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए काम करेगा.
दिल्ली के सरकारी आवास पर पत्थर फेंके जाने का दावा करते हुए एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हाई सिक्यॉरिटी जोन में घर होने के बावजूद चार बार हमला हो चुका है। सोमवार को उन्होंने इसे राजस्थान के दो मुस्लिम युवकों की हत्या से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जुनैद और नसीर को किडनैप करके जिंदा जलाया जा सकता है तो वह कौन हैं? सांसद ने यह भी कहा कि गोडसे समर्थक लोग इस हमले के पीछे हो सकते हैं, जिनके हौसले अभी बुलंद हैं। ओवैसी ने नासीर और जुनैद की हत्या के आरोपी की पत्नी की पुलिस द्वारा पिटाई से कथित तौर पर उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत को लेकर भी दुख जाहिर किया और इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि वह जुनैद और नासीर के परिवार से मुलाकात भी करना चाहते हैं। दो दिवसीय राजस्थान दौरे से लौटे ओवैसी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,'दिनदहाड़े जब जुनैद और नसीर को किडनैप करके उनको पीटकर जिंदा जला दिया जा सकता है तो मैं कौन से खेत की मूली हूं? जो भी यह कर रहे हैं उनके हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उनको मालूम है कि उनकी पार्टी सत्ता में है। चाहे जुनैद हो, नासिर हो या जहां कहीं भी दलितों को, आदिवासियों को होता है, असदुद्दीन ओवैसी एमपी जरूर है, लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं। उनको लगता है कि हिंसा के जरिए वह अपने अजेंडे को पूरा कर सकते हैं। ' ओवैसी ने कहा कि हमलावर गोडसे की विचाराधारा में विश्वास करने वाले हो सकते हैं।
दिल्ली के सरकारी आवास पर पत्थर फेंके जाने का दावा करते हुए एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हाई सिक्यॉरिटी जोन में घर होने के बावजूद चार बार हमला हो चुका है। सोमवार को उन्होंने इसे राजस्थान के दो मुस्लिम युवकों की हत्या से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जुनैद और नसीर को किडनैप करके जिंदा जलाया जा सकता है तो वह कौन हैं? सांसद ने यह भी कहा कि गोडसे समर्थक लोग इस हमले के पीछे हो सकते हैं, जिनके हौसले अभी बुलंद हैं। ओवैसी ने नासीर और जुनैद की हत्या के आरोपी की पत्नी की पुलिस द्वारा पिटाई से कथित तौर पर उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत को लेकर भी दुख जाहिर किया और इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि वह जुनैद और नासीर के परिवार से मुलाकात भी करना चाहते हैं। दो दिवसीय राजस्थान दौरे से लौटे ओवैसी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,'दिनदहाड़े जब जुनैद और नसीर को किडनैप करके उनको पीटकर जिंदा जला दिया जा सकता है तो मैं कौन से खेत की मूली हूं? जो भी यह कर रहे हैं उनके हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उनको मालूम है कि उनकी पार्टी सत्ता में है। चाहे जुनैद हो, नासिर हो या जहां कहीं भी दलितों को, आदिवासियों को होता है, असदुद्दीन ओवैसी एमपी जरूर है, लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं। उनको लगता है कि हिंसा के जरिए वह अपने अजेंडे को पूरा कर सकते हैं। ' ओवैसी ने कहा कि हमलावर गोडसे की विचाराधारा में विश्वास करने वाले हो सकते हैं।
14 नवंबर को मैथोडिस्ट चर्च हॉल, पापाटोएटोए, ऑकलैंड में 'शाम-ए-गज़ल' का आयोजन किया गया। इस समारोह का आयोजन 'कला कौशल समिति ने किया था। स्थानीय कलाकारों में फीजी, भारत, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से संबंध रखने वाले कलाकारों ने ग़ज़ल गायन किया। इस समारोह में हरीश कथनौर, अज़ीम अनवर, वीरेन्द प्रकाश, रजनेश प्रसाद, प्रवीण रवि, किरणजीत सिंह, फरीद, सतीशेश्वर नन्द, निलेष महाराज व चन्द्र कुमार ने गज़ल गायन किया तो शिवन पदयाची व नवलीन प्रसाद ने संगीत वाद्य से समां बाध दिया। ऑकलैंड निवासी हरीश कथनौर गज़ल गायन में सुपरिचित नाम हैं। उन्होंने कई ग़जल गाई जिनमेंः और उन्होंने 'दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है', गाई जो खू़ब सराही गईं। श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दियाः तेरी बेवफाई का शुक्रिया, मुझे तूने जीना सिखा दिया। समारोह में आए अतिथियों ने भी समारोह के अंत में भागीदारी की जिसमें हास्य की छटा बखेरते 'बेदी साहब' को काफी सराहना मिली। 'शाम-ए-ग़ज़ल' समारोह का मंच-संचालन 'भारत-दर्शन' के संपादक ने किया। समारोह में जलपान व खाने का इंतजाम समिति के सदस्य श्री प्रसाद व उनकी श्रीमती ने किया था।
चौदह नवंबर को मैथोडिस्ट चर्च हॉल, पापाटोएटोए, ऑकलैंड में 'शाम-ए-गज़ल' का आयोजन किया गया। इस समारोह का आयोजन 'कला कौशल समिति ने किया था। स्थानीय कलाकारों में फीजी, भारत, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से संबंध रखने वाले कलाकारों ने ग़ज़ल गायन किया। इस समारोह में हरीश कथनौर, अज़ीम अनवर, वीरेन्द प्रकाश, रजनेश प्रसाद, प्रवीण रवि, किरणजीत सिंह, फरीद, सतीशेश्वर नन्द, निलेष महाराज व चन्द्र कुमार ने गज़ल गायन किया तो शिवन पदयाची व नवलीन प्रसाद ने संगीत वाद्य से समां बाध दिया। ऑकलैंड निवासी हरीश कथनौर गज़ल गायन में सुपरिचित नाम हैं। उन्होंने कई ग़जल गाई जिनमेंः और उन्होंने 'दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है', गाई जो खू़ब सराही गईं। श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दियाः तेरी बेवफाई का शुक्रिया, मुझे तूने जीना सिखा दिया। समारोह में आए अतिथियों ने भी समारोह के अंत में भागीदारी की जिसमें हास्य की छटा बखेरते 'बेदी साहब' को काफी सराहना मिली। 'शाम-ए-ग़ज़ल' समारोह का मंच-संचालन 'भारत-दर्शन' के संपादक ने किया। समारोह में जलपान व खाने का इंतजाम समिति के सदस्य श्री प्रसाद व उनकी श्रीमती ने किया था।
बिहार के नवादा में एक महिला की संतान नहीं होने के बाद उसके ससुराल वालों ने उसकी हत्या कर दी. इसके बाद बिना किसी को सूचना दिए महिला का दाह संस्कार कर रहे थे, इसबात की खबर किसी ने पुलिस को दे दी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और आरोपी ससुर और पति को गिरफ्तार कर लिया है. नवादा में बच्चा नहीं होने पर एक महिला की हत्या (Murder of woman) कर दी गई है. यहां अकबरपुर थाना इलाके में एक महिला की हत्या के बाद ससुराल वाले किसी को बताए बिना उसका दाह संस्कार करने जा रहे थे. इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को जब्त कर लिया. घटना पकरी गांव की है. मृतका की पहचान हिसुआ थाना क्षेत्र के घुरिहा गांव निवासी सुनील कुमार की बेटी पम्पी कुमारी के रूप में हुई है. घटना के संबंध में बताया जा रहा है की हिसुआ थाना क्षेत्र के घुरिहा गांव के सुनील कुमार ने 8 साल पहले अपनी बेटी पम्पी कुमारी की शादी 29 वर्ष पकरी गांव के शैलेंद्र सिंह के पुत्र नीतीश कुमार के साथ की थी. कई साल बीत जाने के बाद भी जब दोनों को कोई संतान नहीं हुआ तो पति पत्नी में आए दिन झगड़ा होने लगा. इसके बाद पम्पी कुमारी को ससुराल वाले प्रताड़ित भी करने लगे. इस बाबत दोनों पक्षों में कई बार पंचायत भी हुआ. इसके साथ ही महिला को ससुराल वाले दहेज के लिए भी तंग करने लगे. कुछ दिन पहले भी महिला की ससुराल वालों ने पिटाई की थी. पिटाई के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई. जिसके बाद जब महिला को इलाज के लिए नवादा, फिर पटना ले जाया गया. जहां इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई है. इसके बाद रात में ही उसके शव को पकरी गांव लाया गया. गुरुवार को शव को जलाने के लिए गांव के श्मशान घाट ले जाया गया था. इसकी सूचना किसी ने मृतिका के पिता को दे दी. जिसके बाद पिता ने इसकी सूचना अकबरपुर थाना को दी. इसकी सूचना मिलने के बाद थानाध्यक्ष अजय कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और श्मशान घाट से शव को बरामद कर लिया. इसके साथ ही पुलिस ने पति और पति और ससुर को गिरफ्तार कर लिया. शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस ने बताया कि लड़की के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. और पति और ससुर को गिरफ्तार किया है.
बिहार के नवादा में एक महिला की संतान नहीं होने के बाद उसके ससुराल वालों ने उसकी हत्या कर दी. इसके बाद बिना किसी को सूचना दिए महिला का दाह संस्कार कर रहे थे, इसबात की खबर किसी ने पुलिस को दे दी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और आरोपी ससुर और पति को गिरफ्तार कर लिया है. नवादा में बच्चा नहीं होने पर एक महिला की हत्या कर दी गई है. यहां अकबरपुर थाना इलाके में एक महिला की हत्या के बाद ससुराल वाले किसी को बताए बिना उसका दाह संस्कार करने जा रहे थे. इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को जब्त कर लिया. घटना पकरी गांव की है. मृतका की पहचान हिसुआ थाना क्षेत्र के घुरिहा गांव निवासी सुनील कुमार की बेटी पम्पी कुमारी के रूप में हुई है. घटना के संबंध में बताया जा रहा है की हिसुआ थाना क्षेत्र के घुरिहा गांव के सुनील कुमार ने आठ साल पहले अपनी बेटी पम्पी कुमारी की शादी उनतीस वर्ष पकरी गांव के शैलेंद्र सिंह के पुत्र नीतीश कुमार के साथ की थी. कई साल बीत जाने के बाद भी जब दोनों को कोई संतान नहीं हुआ तो पति पत्नी में आए दिन झगड़ा होने लगा. इसके बाद पम्पी कुमारी को ससुराल वाले प्रताड़ित भी करने लगे. इस बाबत दोनों पक्षों में कई बार पंचायत भी हुआ. इसके साथ ही महिला को ससुराल वाले दहेज के लिए भी तंग करने लगे. कुछ दिन पहले भी महिला की ससुराल वालों ने पिटाई की थी. पिटाई के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई. जिसके बाद जब महिला को इलाज के लिए नवादा, फिर पटना ले जाया गया. जहां इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई है. इसके बाद रात में ही उसके शव को पकरी गांव लाया गया. गुरुवार को शव को जलाने के लिए गांव के श्मशान घाट ले जाया गया था. इसकी सूचना किसी ने मृतिका के पिता को दे दी. जिसके बाद पिता ने इसकी सूचना अकबरपुर थाना को दी. इसकी सूचना मिलने के बाद थानाध्यक्ष अजय कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और श्मशान घाट से शव को बरामद कर लिया. इसके साथ ही पुलिस ने पति और पति और ससुर को गिरफ्तार कर लिया. शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस ने बताया कि लड़की के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. और पति और ससुर को गिरफ्तार किया है.
चारा घोटाला में रांची जेल में बंद लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले से संबंधित सबसे बड़े मसले यानी याचिका संख्या RC 47A/97 में अगस्त से सुनवाई आरंभ होने वाली है। चारा घोटाले के सबसे बड़े मसले में राजद प्रमुख लालू यादव से तकरीबन 22 सवाल पूछे जाएंगे। ऐसा बताया जा रहा है कि CBI उनसे जो 22 प्रश्नों का उत्तर मांगेगी वो मुख्यमंत्री समय में डोरंडा कोषागार से 139. 35 करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी से संबंधित होंगे। लालू प्रसाद को सारे प्रश्नों के उत्तर न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर मौजूद होकर देने होंगे। CBI की विशेष अदालत में जल्द ही लालू के बयान की तिथि तय होगी। लालू यादव चारा घोटाले के पांच मसलों में आरोपी है। चार मसलों में निर्णय आ चुका है। चारों मसलों में तीन वर्ष से 14 वर्ष की सजा सुनाई गई है। चारा घोटाला याचिका संख्या RC 47A/97 मसलों में लालू प्रसाद सहित अन्य 114 गुना-हगारों के इल्जाम साबित करने के लिए CBI कुल 575 गवाहों को पेश किया है। इन्हीं गवाहों के गवाही के आधार पर लालू प्रसाद के किस्मत का निर्णय होगा। अभियोजन साक्ष्य बंद होने के बाद न्यायालय गुना-हगारों के बयान दायर कर रही है। आपको बता दें कि डोरंडा कोषागार से तकरीबन 139 करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी की गई थी। इस मसले में 119 गुनाहगार trial का सामना कर रहे हैं, जिसमें लालू प्रसाद, पूर्व सांसद आरके राणा, जगदीश शर्मा जैसे कुछ अहम नेताओं के नाम सम्मिलित हैं। इसमें लालू प्रसाद तथा जगदीश शर्मा फिलहाल रांची के होटवार कारागार में बंद हैं। डोरंडा कोषागार से लगभग 140 करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी वाले मसले के याचिका संख्या RC 47A/97 में फिर से सोमवार से सुनवाई आरंभ हो जायेगी। मालूम हो कि इस मसले में 17 गुना-हगारों के बयान दायर किए जा चुके हैं। सोमवार से आरंभ होने वाली सुनवाई में शीघ्र ही लालू प्रसाद सहित अन्य बड़े सियासी तथा बहुत सारे IAS अधिकारियों के बयान दायर किए जाएंगे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि सबसे बड़े मसले में शीघ्र ही निर्णय आएगा।
चारा घोटाला में रांची जेल में बंद लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले से संबंधित सबसे बड़े मसले यानी याचिका संख्या RC सैंतालीस एम्पीयर/सत्तानवे में अगस्त से सुनवाई आरंभ होने वाली है। चारा घोटाले के सबसे बड़े मसले में राजद प्रमुख लालू यादव से तकरीबन बाईस सवाल पूछे जाएंगे। ऐसा बताया जा रहा है कि CBI उनसे जो बाईस प्रश्नों का उत्तर मांगेगी वो मुख्यमंत्री समय में डोरंडा कोषागार से एक सौ उनतालीस. पैंतीस करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी से संबंधित होंगे। लालू प्रसाद को सारे प्रश्नों के उत्तर न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर मौजूद होकर देने होंगे। CBI की विशेष अदालत में जल्द ही लालू के बयान की तिथि तय होगी। लालू यादव चारा घोटाले के पांच मसलों में आरोपी है। चार मसलों में निर्णय आ चुका है। चारों मसलों में तीन वर्ष से चौदह वर्ष की सजा सुनाई गई है। चारा घोटाला याचिका संख्या RC सैंतालीस एम्पीयर/सत्तानवे मसलों में लालू प्रसाद सहित अन्य एक सौ चौदह गुना-हगारों के इल्जाम साबित करने के लिए CBI कुल पाँच सौ पचहत्तर गवाहों को पेश किया है। इन्हीं गवाहों के गवाही के आधार पर लालू प्रसाद के किस्मत का निर्णय होगा। अभियोजन साक्ष्य बंद होने के बाद न्यायालय गुना-हगारों के बयान दायर कर रही है। आपको बता दें कि डोरंडा कोषागार से तकरीबन एक सौ उनतालीस करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी की गई थी। इस मसले में एक सौ उन्नीस गुनाहगार trial का सामना कर रहे हैं, जिसमें लालू प्रसाद, पूर्व सांसद आरके राणा, जगदीश शर्मा जैसे कुछ अहम नेताओं के नाम सम्मिलित हैं। इसमें लालू प्रसाद तथा जगदीश शर्मा फिलहाल रांची के होटवार कारागार में बंद हैं। डोरंडा कोषागार से लगभग एक सौ चालीस करोड़ रूपए की गैर-कानूनी निकासी वाले मसले के याचिका संख्या RC सैंतालीस एम्पीयर/सत्तानवे में फिर से सोमवार से सुनवाई आरंभ हो जायेगी। मालूम हो कि इस मसले में सत्रह गुना-हगारों के बयान दायर किए जा चुके हैं। सोमवार से आरंभ होने वाली सुनवाई में शीघ्र ही लालू प्रसाद सहित अन्य बड़े सियासी तथा बहुत सारे IAS अधिकारियों के बयान दायर किए जाएंगे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि सबसे बड़े मसले में शीघ्र ही निर्णय आएगा।
Tips To Activate 5G Network: देश में 5G सर्विस शुरू हो गई है। भारती एयरटेल ने 8 शहरों से सेवा शुरू कर दी है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मोबाइल कांग्रेस में देश को 5G सेवाओं का गिफ्ट दिया। अब इस दौड़ में टेलिकॉम कंपनियां शामिल हो गई हैं। 5G सेवा चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। एयरटेल ने 8 शहरों में 5G सर्विस शुरू करने का ऐलान किया है। इनमें दिल्ली, वाराणसी, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और सिलीगुड़ी शामिल है। कंपनी का कहना है कि मार्च 2024 तक पूरे देश में 5G सेवाएं शुरू हो जाएंगी। यदि आप इन 8 शहरों में रहते हैं, तो 5G नेटवर्क को एक्टिवेट कर सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपने मोबाइल में 5G नेटवर्क को चालू कर सकते हैं। हालांकि केवल वे यूजर्स जिनके पास 5G सपोर्ट फोन है, वे इस सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे। 5G नेटवर्क के लिए आपको नया सिम खरीदने की जरूरत नहीं है। आप मौजूदा सिम कार्ड पर 5G सर्विस सक्रिय कर सकते हैं। स्टेप 1- आपको अपने स्मार्टफोन के सेटिंग मेन्यू में जाना होगा। स्टेप 2- अब मोबाइल नेटवर्क विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 3- नेटवर्क मोड पर जाकर 5G/4G/3G/2G का ऑप्शन चुनें। स्टेप 4- मोबाइल स्क्रीन के ऊपरी राइट साइड में 5G नेटवर्क मोड देखने के लिए होम स्क्रीम पर वापस जाएं। एयरटेल के अनुसार 4G सिम 5G कनेक्टिविटी वाले फोन में काम कर सकता है। 5G नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए आपको 5G स्मार्टफोन के साथ सिम की जरूरत होगी। हालांकि 4G सिम भी 5G मोबाइल का इस्तेमाल करते समय बेहतर कनेक्टिविटी और ट्रांसमिशन देगा। एयरटेल ने कहा, 'आपके पास 5G नेटवर्क के साथ कम्पेटिबल डिवाइस होना चाहिए। ' एयरटेल ने बताया कि 4जी मोबाइल फोन में 5G सिम का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह आपको 4जी नेटवर्क पर ही सेवा देगा। 5G तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए 5जी डिवाइस होना चाहिए।
Tips To Activate पाँचG Network: देश में पाँचG सर्विस शुरू हो गई है। भारती एयरटेल ने आठ शहरों से सेवा शुरू कर दी है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मोबाइल कांग्रेस में देश को पाँचG सेवाओं का गिफ्ट दिया। अब इस दौड़ में टेलिकॉम कंपनियां शामिल हो गई हैं। पाँचG सेवा चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। एयरटेल ने आठ शहरों में पाँचG सर्विस शुरू करने का ऐलान किया है। इनमें दिल्ली, वाराणसी, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और सिलीगुड़ी शामिल है। कंपनी का कहना है कि मार्च दो हज़ार चौबीस तक पूरे देश में पाँचG सेवाएं शुरू हो जाएंगी। यदि आप इन आठ शहरों में रहते हैं, तो पाँचG नेटवर्क को एक्टिवेट कर सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपने मोबाइल में पाँचG नेटवर्क को चालू कर सकते हैं। हालांकि केवल वे यूजर्स जिनके पास पाँचG सपोर्ट फोन है, वे इस सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे। पाँचG नेटवर्क के लिए आपको नया सिम खरीदने की जरूरत नहीं है। आप मौजूदा सिम कार्ड पर पाँचG सर्विस सक्रिय कर सकते हैं। स्टेप एक- आपको अपने स्मार्टफोन के सेटिंग मेन्यू में जाना होगा। स्टेप दो- अब मोबाइल नेटवर्क विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप तीन- नेटवर्क मोड पर जाकर पाँचG/चारG/तीनG/दोG का ऑप्शन चुनें। स्टेप चार- मोबाइल स्क्रीन के ऊपरी राइट साइड में पाँचG नेटवर्क मोड देखने के लिए होम स्क्रीम पर वापस जाएं। एयरटेल के अनुसार चारG सिम पाँचG कनेक्टिविटी वाले फोन में काम कर सकता है। पाँचG नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए आपको पाँचG स्मार्टफोन के साथ सिम की जरूरत होगी। हालांकि चारG सिम भी पाँचG मोबाइल का इस्तेमाल करते समय बेहतर कनेक्टिविटी और ट्रांसमिशन देगा। एयरटेल ने कहा, 'आपके पास पाँचG नेटवर्क के साथ कम्पेटिबल डिवाइस होना चाहिए। ' एयरटेल ने बताया कि चारजी मोबाइल फोन में पाँचG सिम का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह आपको चारजी नेटवर्क पर ही सेवा देगा। पाँचG तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए पाँचजी डिवाइस होना चाहिए।
साल 2022 को पीछे छोड़ दुनिया अब नए साल में प्रवेश कर चुकी है. साल 2023 का आगाज़ हो रहा है और क्रिकेट फैन्स के लिए यह साल काफी अहम है. क्योंकि इस बार वनडे का वर्ल्ड कप होना है, जो भारत में ही होगा. टीम इंडिया इस साल अपना मिशन 3 जनवरी से ही शुरू कर देगी, जब वह घरेलू सीरीज में श्रीलंका के साथ भिड़ेगी. श्रीलंका का भारत दौरा (जनवरी में): न्यूजीलैंड का भारत दौरा (जनवरी-फरवरी): ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा (फरवरी-मार्च): आईपीएल 2023 ( अप्रैल-मई में होने की संभावना) भारत का वेस्टइंडीज दौरा (जुलाई-अगस्त): 2 टेस्ट, 3 वनडे और 3 टी20 मैच (शेड्यूल जारी नहीं) एशिया कप (सितंबर): ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा (सितंबर): 3 वनडे (स्थल, तारीखों की घोषणा बाकी) वनडे विश्व कप (10 अक्टूबर- 26 नवंबर): WC भारत में होगा और 48 मैच खेले जाएंगे (स्थान, तारीखें तय की जानी हैं) ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा (नवंबर-दिसंबर): 5 टी20 मुकाबले (स्थान और तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी) भारत का साउथ अफ्रीका दौरा (दिसंबर-जनवरी 2024): 2 टेस्ट, 3 वनडे और 3 टी20 मैच (शेड्यूल जारी नहीं)
साल दो हज़ार बाईस को पीछे छोड़ दुनिया अब नए साल में प्रवेश कर चुकी है. साल दो हज़ार तेईस का आगाज़ हो रहा है और क्रिकेट फैन्स के लिए यह साल काफी अहम है. क्योंकि इस बार वनडे का वर्ल्ड कप होना है, जो भारत में ही होगा. टीम इंडिया इस साल अपना मिशन तीन जनवरी से ही शुरू कर देगी, जब वह घरेलू सीरीज में श्रीलंका के साथ भिड़ेगी. श्रीलंका का भारत दौरा : न्यूजीलैंड का भारत दौरा : ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा : आईपीएल दो हज़ार तेईस भारत का वेस्टइंडीज दौरा : दो टेस्ट, तीन वनडे और तीन टीबीस मैच एशिया कप : ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा : तीन वनडे वनडे विश्व कप : WC भारत में होगा और अड़तालीस मैच खेले जाएंगे ऑस्ट्रेलिया का भारत दौरा : पाँच टीबीस मुकाबले भारत का साउथ अफ्रीका दौरा : दो टेस्ट, तीन वनडे और तीन टीबीस मैच
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीति पर ध्यान केन्द्रित करने की बजाय जनहित में काम करने को कहा वे आज संसद भवन में पार्टी सांसदों को संबोधित कर रहे थे बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे अधिकारियों के साथ मिलकर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता की शिकायतों को सुनें उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने सदन में मंत्रियों की अनुपस्थिति पर चिन्ता जताई प्रहलाद जोशी ने बताया कि सांसदों को सरकार की नई योजनाओं की जानकारी अपने क्षेत्र के लोगों को देने को कहा गया है बैठक के दौरान प्रधान मंत्री मोदी ने यह भी कहा कि प्रत्येक सांसद को अपने क्षेत्र के लोगों के लिए नई योजना बनानी चाहिए लोकसभा में दो हजार उन्नीसबीस के लिए सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय की अनुदान मांगें मंजूर हो गई हैं अपने जवाब में केन्द्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने बताया कि देश के राजमार्गों की सुरक्षा के लिए एशियाई विकास बैंकएडीबी ने सात हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है वे आज लोकसभा में दो हजार उन्नीस के लिए सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय की अनुदान मांगों का जवाब दे रहे थे उन्होंने बताया कि सात सौ छियासी दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान की गई है और इनमें से तीन सौ स्थानों को दुरूस्त कर लिया गया है केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि भारत नेट कार्यक्रम के अन्तर्गत ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ी एक लाख अट्ठाईस हजार से अधिक ग्राम पंचायतें अपने यहां किए गए कार्यक्रमों और लाभार्थियों को दी गई सहायता के सबूत के तौर पर छायाचित्र अपलोड कर रही हैं हर पंचायत में कनेक्टिविटी उपलब्ध हो यह हमने सुनिश्चित करने की कोशिश की है भारत नेट के द्वारा दो हज़ार चौदह में उनसठ पंचायत जोड़ी थी भारत ऑप्टिकल फाइबर से हर दृष्टि से पंचायतों को अपनी वेबसाइट बनाने की आजादी है और अगर पंचायतें हमारे पोर्टल पर जुड़ना चाहती हैं तो निश्चित रूप से हमने उनको सारी सर्विस प्रोवाइड कर रखी हैं नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि दो लाख उन्नीस हजार ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास परियोजनाएं और शुरू किए गए सोलह हजार कार्यों का विवरण वेबसाइट पर डाला है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरू पूर्णिमा के अवसर पर अध्यापकों गुरूओं और मार्गदर्शकों को शुभकामना दी है उन्होंने कहा कि वे उन सभी गुरूओं को नमन करते हैं जिन्होंने समाज को बनाने और उसे प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरू पूर्णिमा पर नाथ पंथ की परम्परागत पूजा के लिये आज गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पहुंचे और गुरू गोरक्षनाथ सहित नाथ पंथ के अपने सभी गुरूओं की पूजाअर्चना की इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये उन्होंने प्रदेषवासियों को गुरू पूर्णिमा की बधाई देते हुये कहा कि गुरू समाज का मार्गदर्षन करता है और उसे एक नयी दिषा प्रदान करता है उन्होंने कहा कि गुरू परम्परा भारत देष के मूल में है वैदिक काल से ही समयसमय पर इस परम्परा को अनेक ऋशियों ने ऊंचाई प्रदान की है प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए एक अपराधी के खिलाफ कुछ दिन पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या का आरोप था और उसपर एक लाख रूपये का इनाम रखा गया था मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक ने आकाशवाणी को बताया कि रोहित उर्फ संधू और राकेश नाम के ये अपराधी लूट और हत्या के कई मामलों में शामिल थे पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं मुजफ्फरनगर का रहने वाला रोहित इस महीने की दो तारीख को पुलिस हिरासत से फरार हो गया था नेपाल में भारी वर्षा के कारण आई बाढ़ और जमीन धंसने की घटनाओं में मरने वालों की संख्या अठहत्तर हो गई है तीस व्यक्ति लापता है और पचास घायल हैं हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि इकतीस जिलों में जोरों की बारिश होने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है बाढ़ और चट्टाने खिसकने से पिछले छह दिनों में सैकड़ों मकान नष्ट हो गए और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं देश के विभिन्न हिस्सों में यातायात बिजलीपानी और संचार सेवा भी प्रभावित हुई हैं राहत तथा बचाव कार्य जारी है और अब तक तीन हजार लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं साथ ही जल जनित बिमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्यकर्मी भी भेजे गए हैं इस बीच स्थिति में धीरेधीरे सुधार हो रहा है बाढ़ भविष्यवाणी विभाग के अनुसार अगले तीन दिन तक तीन प्रमुख नदियों का जलस्तर सामान्य रहने की उम्मीद है उधर मौसम विभाग ने देश के कुछ स्थानों पर वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है राजकुमार आकाशवाणी समाचार काठमांडू
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीति पर ध्यान केन्द्रित करने की बजाय जनहित में काम करने को कहा वे आज संसद भवन में पार्टी सांसदों को संबोधित कर रहे थे बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे अधिकारियों के साथ मिलकर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता की शिकायतों को सुनें उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने सदन में मंत्रियों की अनुपस्थिति पर चिन्ता जताई प्रहलाद जोशी ने बताया कि सांसदों को सरकार की नई योजनाओं की जानकारी अपने क्षेत्र के लोगों को देने को कहा गया है बैठक के दौरान प्रधान मंत्री मोदी ने यह भी कहा कि प्रत्येक सांसद को अपने क्षेत्र के लोगों के लिए नई योजना बनानी चाहिए लोकसभा में दो हजार उन्नीसबीस के लिए सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय की अनुदान मांगें मंजूर हो गई हैं अपने जवाब में केन्द्रीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने बताया कि देश के राजमार्गों की सुरक्षा के लिए एशियाई विकास बैंकएडीबी ने सात हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है वे आज लोकसभा में दो हजार उन्नीस के लिए सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय की अनुदान मांगों का जवाब दे रहे थे उन्होंने बताया कि सात सौ छियासी दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान की गई है और इनमें से तीन सौ स्थानों को दुरूस्त कर लिया गया है केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि भारत नेट कार्यक्रम के अन्तर्गत ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ी एक लाख अट्ठाईस हजार से अधिक ग्राम पंचायतें अपने यहां किए गए कार्यक्रमों और लाभार्थियों को दी गई सहायता के सबूत के तौर पर छायाचित्र अपलोड कर रही हैं हर पंचायत में कनेक्टिविटी उपलब्ध हो यह हमने सुनिश्चित करने की कोशिश की है भारत नेट के द्वारा दो हज़ार चौदह में उनसठ पंचायत जोड़ी थी भारत ऑप्टिकल फाइबर से हर दृष्टि से पंचायतों को अपनी वेबसाइट बनाने की आजादी है और अगर पंचायतें हमारे पोर्टल पर जुड़ना चाहती हैं तो निश्चित रूप से हमने उनको सारी सर्विस प्रोवाइड कर रखी हैं नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि दो लाख उन्नीस हजार ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास परियोजनाएं और शुरू किए गए सोलह हजार कार्यों का विवरण वेबसाइट पर डाला है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरू पूर्णिमा के अवसर पर अध्यापकों गुरूओं और मार्गदर्शकों को शुभकामना दी है उन्होंने कहा कि वे उन सभी गुरूओं को नमन करते हैं जिन्होंने समाज को बनाने और उसे प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरू पूर्णिमा पर नाथ पंथ की परम्परागत पूजा के लिये आज गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पहुंचे और गुरू गोरक्षनाथ सहित नाथ पंथ के अपने सभी गुरूओं की पूजाअर्चना की इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये उन्होंने प्रदेषवासियों को गुरू पूर्णिमा की बधाई देते हुये कहा कि गुरू समाज का मार्गदर्षन करता है और उसे एक नयी दिषा प्रदान करता है उन्होंने कहा कि गुरू परम्परा भारत देष के मूल में है वैदिक काल से ही समयसमय पर इस परम्परा को अनेक ऋशियों ने ऊंचाई प्रदान की है प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए एक अपराधी के खिलाफ कुछ दिन पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या का आरोप था और उसपर एक लाख रूपये का इनाम रखा गया था मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक ने आकाशवाणी को बताया कि रोहित उर्फ संधू और राकेश नाम के ये अपराधी लूट और हत्या के कई मामलों में शामिल थे पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं मुजफ्फरनगर का रहने वाला रोहित इस महीने की दो तारीख को पुलिस हिरासत से फरार हो गया था नेपाल में भारी वर्षा के कारण आई बाढ़ और जमीन धंसने की घटनाओं में मरने वालों की संख्या अठहत्तर हो गई है तीस व्यक्ति लापता है और पचास घायल हैं हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि इकतीस जिलों में जोरों की बारिश होने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है बाढ़ और चट्टाने खिसकने से पिछले छह दिनों में सैकड़ों मकान नष्ट हो गए और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं देश के विभिन्न हिस्सों में यातायात बिजलीपानी और संचार सेवा भी प्रभावित हुई हैं राहत तथा बचाव कार्य जारी है और अब तक तीन हजार लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं साथ ही जल जनित बिमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्यकर्मी भी भेजे गए हैं इस बीच स्थिति में धीरेधीरे सुधार हो रहा है बाढ़ भविष्यवाणी विभाग के अनुसार अगले तीन दिन तक तीन प्रमुख नदियों का जलस्तर सामान्य रहने की उम्मीद है उधर मौसम विभाग ने देश के कुछ स्थानों पर वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है राजकुमार आकाशवाणी समाचार काठमांडू
रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) की अपकमिंग फिल्म 'सूर्यवंशी' (Sooryavanshi) में इस बार एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन हीरो एक साथ नजर आएंगे। इस बार दर्शकों को तीन गुना एक्शन देखने को मिलेगा। रोहित शेट्टी अपनी फिल्मों में एक्शन के लिए ही जाने जाते हैं। इस बार उनकी फिल्म 'सूर्यवंशी' में अक्षय कुमार (Akshay kumar) के साथ अजय देवगन (Ajay Dewgn) और रणवीर सिंह (Ranveer Singh) भी दिखाई देंगे। सूर्यवंशी में अक्षय कुमार के साथ काम करने को लेकर अजय देवगन ने बड़ी बात कही है। अजय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम तीनों (अक्षय कुमार, रणवीर सिंह ) को एक साथ लाना एक अच्छा विचार है। अजय ने बताया कि अक्षय कुमार और उन्होंने एक साथ उड़ान भरी थी। हम दोनों एक दूसरे का बहुत सम्मान करते हैं। हमारे बीच बहुत प्यार है। बता दें अजय देवगन और अक्षय कुमार ने 90 के दशक में एक साथ कई फिल्मों में काम किया था। बता दें सूर्यवंशी में सिंघम यानी अजय देवगन और सिंबा रणवीर सिंह के साथ अक्षय कुमार एक्शन करते हुए दिखाई देंगे। अभी हाल ही में फिल्म का टीजर सामने आया। जिसमें ये तीनों हीरो पुलिस के अवतार में नजर आ रहे हैं। हिंदी रश का ताजा वीडियो देंखे :
रोहित शेट्टी की अपकमिंग फिल्म 'सूर्यवंशी' में इस बार एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन हीरो एक साथ नजर आएंगे। इस बार दर्शकों को तीन गुना एक्शन देखने को मिलेगा। रोहित शेट्टी अपनी फिल्मों में एक्शन के लिए ही जाने जाते हैं। इस बार उनकी फिल्म 'सूर्यवंशी' में अक्षय कुमार के साथ अजय देवगन और रणवीर सिंह भी दिखाई देंगे। सूर्यवंशी में अक्षय कुमार के साथ काम करने को लेकर अजय देवगन ने बड़ी बात कही है। अजय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम तीनों को एक साथ लाना एक अच्छा विचार है। अजय ने बताया कि अक्षय कुमार और उन्होंने एक साथ उड़ान भरी थी। हम दोनों एक दूसरे का बहुत सम्मान करते हैं। हमारे बीच बहुत प्यार है। बता दें अजय देवगन और अक्षय कुमार ने नब्बे के दशक में एक साथ कई फिल्मों में काम किया था। बता दें सूर्यवंशी में सिंघम यानी अजय देवगन और सिंबा रणवीर सिंह के साथ अक्षय कुमार एक्शन करते हुए दिखाई देंगे। अभी हाल ही में फिल्म का टीजर सामने आया। जिसमें ये तीनों हीरो पुलिस के अवतार में नजर आ रहे हैं। हिंदी रश का ताजा वीडियो देंखे :
कोलकाता : पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने सोमवार को दावा किया कि राज्य के विरूद्ध एक साजिश रची जा रही है जिसके तहत सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Congress) को बदनाम किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बीच तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि जिन्होंने गलतियां की हैं उन्हें गलतियां सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि कुछ लोग बंगाल में बैठकर खा रहे हैं और साजिश कर रहे हैं और दिल्ली से कह रहे हैं कि बंगाल को पैसा न दें। मुझे दिल्ली के पैसे की जरूरत नहीं है। बंगाल अपने पैरों पर खड़ा होने में सक्षम है। हमारा स्वाभिमान हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, हम दिल्ली को इसे नहीं छीनने देंगे। (इनपुट एजेंसी)
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया कि राज्य के विरूद्ध एक साजिश रची जा रही है जिसके तहत सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को बदनाम किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बीच तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि जिन्होंने गलतियां की हैं उन्हें गलतियां सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि कुछ लोग बंगाल में बैठकर खा रहे हैं और साजिश कर रहे हैं और दिल्ली से कह रहे हैं कि बंगाल को पैसा न दें। मुझे दिल्ली के पैसे की जरूरत नहीं है। बंगाल अपने पैरों पर खड़ा होने में सक्षम है। हमारा स्वाभिमान हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, हम दिल्ली को इसे नहीं छीनने देंगे।
Ankita (Photo Credit: Twitter) दुमकाः 19 वर्षीय अंकिता (Ankita) को आग लगाने से कुछ दिन पहले शाहरुख (Shahrukh) ने उसके कमरे की खिड़की का शीशा तोड़ दिया था. अंकिता के परिवार के अनुसार, शाहरुख के भाई सलमान (salman) ने माफी मांगी थी और उनसे घटना की रिपोर्ट न करने को कहा था. 23 अगस्त को शाहरुख ने कथित तौर पर अंकिता पर उसके कमरे की खिड़की के बाहर से पेट्रोल डाला जब वह सो रही थी और उसे झारखंड (Jharkhand) के दुमका (Dumka) स्थिति मकान में आग लगा दी. अंकिता को 90 प्रतिशत जलने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई. शाहरुख फिलहाल पुलिस हिरासत में है. घटना से पांच दिन पहले शाहरुख का अंकिता के परिवार से विवाद हो गया था और बहस के दौरान शाहरुख ने उसके कमरे की खिड़की का शीशा तोड़ दिया था. शाहरुख के भाई सलमान अपने मामा के साथ अंकिता के घर उनकी ओर से माफी मांगने गए. उन्होंने अंकिता के परिवार से पुलिस को मामले की रिपोर्ट न करने के लिए कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि शाहरुख को शहर से बाहर भेज दिया जाएगा. अंकिता के चाचा ने बताया, "जब उसने [शाहरुख] खिड़की का शीशा तोड़ दिया था यदि हमने उस समय कार्रवाई की होती और पुलिस को इस घटना की सूचना दी होती तो उसने अंकिता पर फिर से हमला करने की हिम्मत नहीं की. " घायल होने से पहले अंकिता ने पुलिस को अपना बयान दिया, जिसमें उसने कहा कि आरोपी ने करीब 10 दिन पहले उसके मोबाइल पर फोन किया और उसे अपना दोस्त बनने के लिए दबाव बनाया. उसने मुझे सोमवार रात करीब 8 बजे फिर से फोन किया और मुझसे कहा कि अगर मैंने उससे बात नहीं की तो वह मुझे मार डालेगा. मैंने अपने पिता को धमकी के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वह मंगलवार को उस व्यक्ति के परिवार से बात करेंगे. अंकिता ने कहा, मंगलवार की सुबह मुझे अपनी पीठ पर दर्द की अनुभूति हुई और मुझे कुछ जलने की गंध आ रही थी. आंख खुली तो मैंने उसे भागते हुए पाया. मैं दर्द से कराहने लगा और अपने पिता के कमरे में चला गया. मेरे माता-पिता ने आग बुझाई और मुझे अस्पताल ले गए. मंगलवार को एक अन्य व्यक्ति जिसने कथित तौर पर शाहरुख को पेट्रोल की आपूर्ति की थी, को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. दूसरे आरोपी की पहचान छोटू खान उर्फ नईम के रूप में हुई है. इस बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि मामले को त्वरित निपटान के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में लिया जाएगा. उन्होंने दुमका जिला प्रशासन को शोक संतप्त परिवार को तत्काल 10 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है.
Ankita दुमकाः उन्नीस वर्षीय अंकिता को आग लगाने से कुछ दिन पहले शाहरुख ने उसके कमरे की खिड़की का शीशा तोड़ दिया था. अंकिता के परिवार के अनुसार, शाहरुख के भाई सलमान ने माफी मांगी थी और उनसे घटना की रिपोर्ट न करने को कहा था. तेईस अगस्त को शाहरुख ने कथित तौर पर अंकिता पर उसके कमरे की खिड़की के बाहर से पेट्रोल डाला जब वह सो रही थी और उसे झारखंड के दुमका स्थिति मकान में आग लगा दी. अंकिता को नब्बे प्रतिशत जलने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई. शाहरुख फिलहाल पुलिस हिरासत में है. घटना से पांच दिन पहले शाहरुख का अंकिता के परिवार से विवाद हो गया था और बहस के दौरान शाहरुख ने उसके कमरे की खिड़की का शीशा तोड़ दिया था. शाहरुख के भाई सलमान अपने मामा के साथ अंकिता के घर उनकी ओर से माफी मांगने गए. उन्होंने अंकिता के परिवार से पुलिस को मामले की रिपोर्ट न करने के लिए कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि शाहरुख को शहर से बाहर भेज दिया जाएगा. अंकिता के चाचा ने बताया, "जब उसने [शाहरुख] खिड़की का शीशा तोड़ दिया था यदि हमने उस समय कार्रवाई की होती और पुलिस को इस घटना की सूचना दी होती तो उसने अंकिता पर फिर से हमला करने की हिम्मत नहीं की. " घायल होने से पहले अंकिता ने पुलिस को अपना बयान दिया, जिसमें उसने कहा कि आरोपी ने करीब दस दिन पहले उसके मोबाइल पर फोन किया और उसे अपना दोस्त बनने के लिए दबाव बनाया. उसने मुझे सोमवार रात करीब आठ बजे फिर से फोन किया और मुझसे कहा कि अगर मैंने उससे बात नहीं की तो वह मुझे मार डालेगा. मैंने अपने पिता को धमकी के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वह मंगलवार को उस व्यक्ति के परिवार से बात करेंगे. अंकिता ने कहा, मंगलवार की सुबह मुझे अपनी पीठ पर दर्द की अनुभूति हुई और मुझे कुछ जलने की गंध आ रही थी. आंख खुली तो मैंने उसे भागते हुए पाया. मैं दर्द से कराहने लगा और अपने पिता के कमरे में चला गया. मेरे माता-पिता ने आग बुझाई और मुझे अस्पताल ले गए. मंगलवार को एक अन्य व्यक्ति जिसने कथित तौर पर शाहरुख को पेट्रोल की आपूर्ति की थी, को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. दूसरे आरोपी की पहचान छोटू खान उर्फ नईम के रूप में हुई है. इस बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि मामले को त्वरित निपटान के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में लिया जाएगा. उन्होंने दुमका जिला प्रशासन को शोक संतप्त परिवार को तत्काल दस लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Tesla in India: टेस्ला ने अब आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है कि वह भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को बेचेगा और जल्द ही कंपनी अपने प्रोडक्शन प्लांट का काम शुरू कर सकती है। इसकी तैयारी अभी से ही शुरू हो गई हैं। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि टेस्ला को भारत में किसी भी प्रकार की रियायत या खास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा। यानी कि टेस्ला भारत में अपने दम पर काम करेगी। उसे किसी भी प्रकार का अनुदान या फिर इंसेंटिव का लाभ नहीं मिलने वाला है। फिलहाल इस पर भारत सरकार कोई विचार नहीं करने वाली है। लेकिन इस सबके बावजूद फैसला भारत में आने वाली है और लोगों का इसके बीच काफी ज्यादा हाइट बन चुका है। सरकारी अधिकारी के लिए बयान के मुताबिक सरकार पहले ही एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल यानी कि एसीसी बैट्री स्टोरेज के लिए 18100 करोड़ की PLI योजना और ऑटो कॉम्पोनेंट्स, ड्रॉन्स के लिए 26058 करोड़ के PLI योजना को शुरू किया है। इसलिए भारत में प्रोत्साहन पाने के लिए कम्पनी को प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत आवेदन करना होता है। अगर टेस्ला को भी किसी भी प्रकार का प्रोत्साहन चाहिए तो उसे इस नीति के तहत आवेदन करना होगा। कुछ रिपोर्टर्स की माने तो भारत सरकार टेस्ला को खास फैसिलिटी दे सकती है। हालांकि अभी तक इस पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने बस इतना ही बताया है की टेस्ला के साथ बातचीत में उन्होंने अपनी नीतियों को साफ कर दिया है। अगर उन्हें किसी भी प्रकार की सहूलियत चाहिए तो PLI me के जरिए वह ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही भारत में वह काफी अच्छे से व्यापार कर सकते हैं।
Tesla in India: टेस्ला ने अब आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है कि वह भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को बेचेगा और जल्द ही कंपनी अपने प्रोडक्शन प्लांट का काम शुरू कर सकती है। इसकी तैयारी अभी से ही शुरू हो गई हैं। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि टेस्ला को भारत में किसी भी प्रकार की रियायत या खास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा। यानी कि टेस्ला भारत में अपने दम पर काम करेगी। उसे किसी भी प्रकार का अनुदान या फिर इंसेंटिव का लाभ नहीं मिलने वाला है। फिलहाल इस पर भारत सरकार कोई विचार नहीं करने वाली है। लेकिन इस सबके बावजूद फैसला भारत में आने वाली है और लोगों का इसके बीच काफी ज्यादा हाइट बन चुका है। सरकारी अधिकारी के लिए बयान के मुताबिक सरकार पहले ही एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल यानी कि एसीसी बैट्री स्टोरेज के लिए अट्ठारह हज़ार एक सौ करोड़ की PLI योजना और ऑटो कॉम्पोनेंट्स, ड्रॉन्स के लिए छब्बीस हज़ार अट्ठावन करोड़ के PLI योजना को शुरू किया है। इसलिए भारत में प्रोत्साहन पाने के लिए कम्पनी को प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव योजना के तहत आवेदन करना होता है। अगर टेस्ला को भी किसी भी प्रकार का प्रोत्साहन चाहिए तो उसे इस नीति के तहत आवेदन करना होगा। कुछ रिपोर्टर्स की माने तो भारत सरकार टेस्ला को खास फैसिलिटी दे सकती है। हालांकि अभी तक इस पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने बस इतना ही बताया है की टेस्ला के साथ बातचीत में उन्होंने अपनी नीतियों को साफ कर दिया है। अगर उन्हें किसी भी प्रकार की सहूलियत चाहिए तो PLI me के जरिए वह ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही भारत में वह काफी अच्छे से व्यापार कर सकते हैं।
ऊना के अम्ब पंचायत को अब सरकार ने नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया है। जानकारी के अनुसार, चिंतपूर्वी के बीजेपी विधायक बलवीर चौधरी की कहने पर अंब पंचायत को ये दर्जा मिला है। मीडिया पर पहले ख़बर आ रही थी कि ऊना से एक विधायक नाराजगी के चलते इस्तीफा देने गए हैं। लेकिन असल में इस्तीफे को लेकर नहीं, बल्कि अंब को नगर पंचायत बनाने को लेकर विधायक शिमला गए थे। पिछले कल सोमवार को जब पंचायतों की अधिसूचना जारी हुई थी उसके बाद से विधायक ने अंब को नगर पंचायत न बनाने की नाराजगी जताई थी। इसके बाद मीडिया में ख़बर उड़ी की एक विधायक अपना इस्तीफा देने जा रहे हैं। लेकिन मंगलवार मुख्यमंत्री के शिमला में बैठक के बाद सारा मसला हल हो गया औऱ अंब को नगर पंचायत बना दिया गया। ग़ौरतलब है कि नगर पंचायत बनने के बाद नगर निकाय के तहत आने वाली विभिन्न योजनायों से अम्ब क्षेत्र लाभान्वित होगा, जिसका लाभ लोगों को मिलेगा। अंब को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए विधायक ने पहले भी कई दफा प्रयास किये, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब विधायक ने कड़ा रूख अपनाते हुए मुख्यमंत्री दरबार में खुद हाजिरी लगाई जिसके बाद ये तोहफा मिला।
ऊना के अम्ब पंचायत को अब सरकार ने नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया है। जानकारी के अनुसार, चिंतपूर्वी के बीजेपी विधायक बलवीर चौधरी की कहने पर अंब पंचायत को ये दर्जा मिला है। मीडिया पर पहले ख़बर आ रही थी कि ऊना से एक विधायक नाराजगी के चलते इस्तीफा देने गए हैं। लेकिन असल में इस्तीफे को लेकर नहीं, बल्कि अंब को नगर पंचायत बनाने को लेकर विधायक शिमला गए थे। पिछले कल सोमवार को जब पंचायतों की अधिसूचना जारी हुई थी उसके बाद से विधायक ने अंब को नगर पंचायत न बनाने की नाराजगी जताई थी। इसके बाद मीडिया में ख़बर उड़ी की एक विधायक अपना इस्तीफा देने जा रहे हैं। लेकिन मंगलवार मुख्यमंत्री के शिमला में बैठक के बाद सारा मसला हल हो गया औऱ अंब को नगर पंचायत बना दिया गया। ग़ौरतलब है कि नगर पंचायत बनने के बाद नगर निकाय के तहत आने वाली विभिन्न योजनायों से अम्ब क्षेत्र लाभान्वित होगा, जिसका लाभ लोगों को मिलेगा। अंब को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए विधायक ने पहले भी कई दफा प्रयास किये, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब विधायक ने कड़ा रूख अपनाते हुए मुख्यमंत्री दरबार में खुद हाजिरी लगाई जिसके बाद ये तोहफा मिला।
सर्प की लगातार फूंकार के सामने प्रतीत होती है, जिसमें कि रुपयों को एक साथ हिलाने से उत्पन्न ध्वनि के समान ध्वनि भी सम्मिलित हो । यह वाजवतीय नाही जण ( Thoracic fistula ) के कुछ रोगियों में, तथा कभी कभी वायुमृत फुफ्फुसावरण और फुफ्फुमावरण प्रदाद में संचित तरल के ऊपर तनाव रहित फुफ्फुस, और स्वासन के स्वर में कठोर बने हुए क्षेत्र के समीप में टेपन करने पर भी प्रतीत होती है। परीक्षक को हमरा रखना चाहिये कि अगर रोते हुए स्वस्थ बालक की वक्ष पर ठेवन किया जायगा इसी प्रकार की आवाज उत्पन्न होगी । कौप्यक ध्वनि ( Amphoric resonance ) - यह फुफ्फुस में बृहद् गहर होने पर, रिक्त बोनल के मुँह पर फूंक मारने से उत्पन्न ध्वनि के समान प्रतीत होती है। इसमें प्रतिध्वनि वृद्धियुक्त होती है तथा समाप्ति भी वीरे धीरे ही होती है । रोग संप्राप्ति से प्राप्त कुछ विकृत आवाज - कुछ विकृतावस्था यो में टेपन अनि में परिवर्तन हो जाता है । मौतिक विज्ञान की दृष्टि से इसका वर्णन करना बहुत कुछ सम्भव है । १-- जब ठेपन व्वनि गुजित हो तथा इसकी उत्पत्ति का कारण फुफ्फुस में उत्पन्न उस प्रकार का गहर हो कि जिसका सम्बन्ध किसी खास प्रणाली से हो, तन रोगी का मुँह खुना कर टेवन करने पर आवाज की तीव्रता चट जाती है । २ - गह्वर के ऊपर टेपन व्यनि की तंत्रता रोगी की स्थिति पर निर्भर है । इसका विशेष स्पष्टीकरण इस प्रकार है कि किसी रोगी के गहर में कुछ तरज़ है, तब उसकी स्थिति के परिवर्तन ( मोने बैठने दि) के अनुसार इम तरल की स्थिति मी बदल जाती है। जिससे गहर के आकार में परिवर्तन होना स्वाभाविक ही है । इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी इस पर प्रभाव डालते है । ३. गहूर के ऊपर टेवन व्यनि श्वास ग्रहण के समय तीन हो जाती और निश्वास के समय मद । इस पर वक्ष की दीवार के तनाव का भी प्रभाव पड़ता है। ८. चायुभृत-फुफ्फुसावरण में सोये हुए रोगी की टेनन ध्वनि बैठे तुलना में ज्यादा तीव्र होती है । कुछ अवस्थाओं मे वच के सामने की मॉस के विकृत पोषण के कारण वे आवश्यकता के ज्यादा उत्तेजनामय हो जाती है। ऐसो अवस्था मे वृक्षोस्थि पर हल्का प्रहार करने से उरच्छदा ( Pectoral ) पेशी के कुछ दूर तक के तन्तु बारबार प्रसारण सकुचित होते रहते हैं । यह अवस्था राजयक्ष्मा में उत्पन्न होती है, और इसे "पेशी प्रसारण जन्य उद्दीपना वस्था या पेशी शोध ( Myotatic irritability or myvidema ) " कहा जाता है। यदि ट्युनिक फार्क द्वारा निर्धारण करने का यत्र किया जाय तो फुफ्फुसों की सीमा का परिचय मिलने के अतिरिक्त उनके खण्डो की सीमा जानने मे भी सफलता मिल जाती है। उस यंत्र का पैर वक्ष के आगे की के पशु कान्तर के ऊपर छोटी तख्ती में लगाकर ठीक उसी समय सामान्य ध्वनि चाहक यंत्र से पिछली योर ध्वनि श्रवण करें । जब ध्वनि बाहक यन्त्र एक खण्ड से दूसरे खण्ड पर गमन करता है, तन कितनीक समय ध्वनिभेद अवगत से हो सकता है । जब जिस खण्ड के सामने ट्य निक फार्क स्थापित होता है और उसी खण्ड के ऊपर ध्वनि बाहक यन्त्र रखा जाता है, तब आवाज की स्पष्ट तर औौर उच्चतर हो जाती है। ५. श्रवण (Auscultation ) फुफ्फुस के वायु कोष्ठ, श्वास नलिका, श्वास प्रणालिका आदि पर वनि बाहक यन्त्र रख कर सुनने पर स्वाभाविक श्वास, वनि, शब्द च्वनि तथा आगन्तुक ध्वनि सुनाई देती है। इसके मुख्य प्रकार निम्नानुसार हैं । A. gara afà qar Character of Respiratory sound. १ वायुकोपीय नाद ( Vesicular breathing - ( तृण की आवाज सदृश ) I. स्वाभाविक Normal II. वर्द्धित या शैशवीय Puerile III. कर्कश Harsh IV. विच्छिन्न Jarkey or cog-wheel V. मन्द या अनुपस्थित Feeble or absent. VI. दीर्घ निःश्वासज मर्मर व्वनि With prolonged expiratory २ - नालीयनाद - Bronchial breathing (ज) I. सामान्य Ordinary.
सर्प की लगातार फूंकार के सामने प्रतीत होती है, जिसमें कि रुपयों को एक साथ हिलाने से उत्पन्न ध्वनि के समान ध्वनि भी सम्मिलित हो । यह वाजवतीय नाही जण के कुछ रोगियों में, तथा कभी कभी वायुमृत फुफ्फुसावरण और फुफ्फुमावरण प्रदाद में संचित तरल के ऊपर तनाव रहित फुफ्फुस, और स्वासन के स्वर में कठोर बने हुए क्षेत्र के समीप में टेपन करने पर भी प्रतीत होती है। परीक्षक को हमरा रखना चाहिये कि अगर रोते हुए स्वस्थ बालक की वक्ष पर ठेवन किया जायगा इसी प्रकार की आवाज उत्पन्न होगी । कौप्यक ध्वनि - यह फुफ्फुस में बृहद् गहर होने पर, रिक्त बोनल के मुँह पर फूंक मारने से उत्पन्न ध्वनि के समान प्रतीत होती है। इसमें प्रतिध्वनि वृद्धियुक्त होती है तथा समाप्ति भी वीरे धीरे ही होती है । रोग संप्राप्ति से प्राप्त कुछ विकृत आवाज - कुछ विकृतावस्था यो में टेपन अनि में परिवर्तन हो जाता है । मौतिक विज्ञान की दृष्टि से इसका वर्णन करना बहुत कुछ सम्भव है । एक-- जब ठेपन व्वनि गुजित हो तथा इसकी उत्पत्ति का कारण फुफ्फुस में उत्पन्न उस प्रकार का गहर हो कि जिसका सम्बन्ध किसी खास प्रणाली से हो, तन रोगी का मुँह खुना कर टेवन करने पर आवाज की तीव्रता चट जाती है । दो - गह्वर के ऊपर टेपन व्यनि की तंत्रता रोगी की स्थिति पर निर्भर है । इसका विशेष स्पष्टीकरण इस प्रकार है कि किसी रोगी के गहर में कुछ तरज़ है, तब उसकी स्थिति के परिवर्तन के अनुसार इम तरल की स्थिति मी बदल जाती है। जिससे गहर के आकार में परिवर्तन होना स्वाभाविक ही है । इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी इस पर प्रभाव डालते है । तीन. गहूर के ऊपर टेवन व्यनि श्वास ग्रहण के समय तीन हो जाती और निश्वास के समय मद । इस पर वक्ष की दीवार के तनाव का भी प्रभाव पड़ता है। आठ. चायुभृत-फुफ्फुसावरण में सोये हुए रोगी की टेनन ध्वनि बैठे तुलना में ज्यादा तीव्र होती है । कुछ अवस्थाओं मे वच के सामने की मॉस के विकृत पोषण के कारण वे आवश्यकता के ज्यादा उत्तेजनामय हो जाती है। ऐसो अवस्था मे वृक्षोस्थि पर हल्का प्रहार करने से उरच्छदा पेशी के कुछ दूर तक के तन्तु बारबार प्रसारण सकुचित होते रहते हैं । यह अवस्था राजयक्ष्मा में उत्पन्न होती है, और इसे "पेशी प्रसारण जन्य उद्दीपना वस्था या पेशी शोध " कहा जाता है। यदि ट्युनिक फार्क द्वारा निर्धारण करने का यत्र किया जाय तो फुफ्फुसों की सीमा का परिचय मिलने के अतिरिक्त उनके खण्डो की सीमा जानने मे भी सफलता मिल जाती है। उस यंत्र का पैर वक्ष के आगे की के पशु कान्तर के ऊपर छोटी तख्ती में लगाकर ठीक उसी समय सामान्य ध्वनि चाहक यंत्र से पिछली योर ध्वनि श्रवण करें । जब ध्वनि बाहक यन्त्र एक खण्ड से दूसरे खण्ड पर गमन करता है, तन कितनीक समय ध्वनिभेद अवगत से हो सकता है । जब जिस खण्ड के सामने ट्य निक फार्क स्थापित होता है और उसी खण्ड के ऊपर ध्वनि बाहक यन्त्र रखा जाता है, तब आवाज की स्पष्ट तर औौर उच्चतर हो जाती है। पाँच. श्रवण फुफ्फुस के वायु कोष्ठ, श्वास नलिका, श्वास प्रणालिका आदि पर वनि बाहक यन्त्र रख कर सुनने पर स्वाभाविक श्वास, वनि, शब्द च्वनि तथा आगन्तुक ध्वनि सुनाई देती है। इसके मुख्य प्रकार निम्नानुसार हैं । A. gara afà qar Character of Respiratory sound. एक वायुकोपीय नाद I. स्वाभाविक Normal II. वर्द्धित या शैशवीय Puerile III. कर्कश Harsh IV. विच्छिन्न Jarkey or cog-wheel V. मन्द या अनुपस्थित Feeble or absent. VI. दीर्घ निःश्वासज मर्मर व्वनि With prolonged expiratory दो - नालीयनाद - Bronchial breathing I. सामान्य Ordinary.
२८ नवम्बर । महिला हिंसा के उपर बनाया गया फिल्म पिंक ने प्रदर्शन के बाद चारों तरफ वाहवाही पायी है । अब ये फिल्म संयुक्त राष्ट्र संघ की नजर में चढी है । संघ की मुख्यालय में बलिउड फिल्म पिंक की विशेष प्रदर्शनी की जाएगी । फिल्म पिंक में उठाया गया विषयवस्तु ने सामाज की एक विकृत पक्ष को उदघाटीत किया है । सायद यही वजह है की दर्शक से अधिक समीक्षक इस फिल्म की प्रशंसा कर रहें हैं । पिंक के मुख्य किरदारों में महानायक अमिताभ बच्चन, तप्सी पत्रु हैं । महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में कहा है कि महासंघ ने फिल्म की विशेष प्रदर्शनी में मुझे निमन्त्रणा भेजा है ।
अट्ठाईस नवम्बर । महिला हिंसा के उपर बनाया गया फिल्म पिंक ने प्रदर्शन के बाद चारों तरफ वाहवाही पायी है । अब ये फिल्म संयुक्त राष्ट्र संघ की नजर में चढी है । संघ की मुख्यालय में बलिउड फिल्म पिंक की विशेष प्रदर्शनी की जाएगी । फिल्म पिंक में उठाया गया विषयवस्तु ने सामाज की एक विकृत पक्ष को उदघाटीत किया है । सायद यही वजह है की दर्शक से अधिक समीक्षक इस फिल्म की प्रशंसा कर रहें हैं । पिंक के मुख्य किरदारों में महानायक अमिताभ बच्चन, तप्सी पत्रु हैं । महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में कहा है कि महासंघ ने फिल्म की विशेष प्रदर्शनी में मुझे निमन्त्रणा भेजा है ।
Avesh Khan Interview दिल्ली कैपिटल्स के लिए आइपीएल 2021 में शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज आवेश खान ने बताया है कि यूएई की पिचों पर गेंदबाजों को किस तरह की गेंद ज्यादा फेंकनी चाहिए क्योंकि उनको भी वहां विकेट मिले हैं। दिल्ली कैपिटल्स के दायें हाथ के तेज गेंदबाज आवेश खान फिलहाल भारतीय टीम के नेट गेंदबाज के तौर पर यूएई में हैं। आवेश ने इस साल आइपीएल के 16 मैचों में 24 विकेट हासिल किए थे और वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर काबिज हुए। इंदौर के रहने वाले आवेश को उम्मीद है कि वह जल्द ही टीम इंडिया के लिए खेलते नजर आएंगे। आवेश खान से विभिन्न मुद्दों पर अभिषेक त्रिपाठी ने खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश : -आइपीएल शुरू होने से विश्व कप शुरू होने के बीच यूएई की पिच में क्या बदलाव देख रहे हैं? --जैसे-जैसे यह आइपीएल आगे बढ़ा, निश्चित रूप से पिचें धीमी और धीमी होती गई। जब आइपीएल पिछले साल यूएई में हुआ था तब पिचों में बहुत अधिक गति थी और इसलिए नियमित रूप से बड़े स्कोर बन रहे थे। हालांकि, इस बार यह पूरी तरह से अलग नजारा था। -दिल्ली कैपिटल्स के प्रदर्शन और माहौल के बारे में क्या कहेंगे? --हम इस सत्र में जिस तरह से खेले हैं उससे हम काफी खुश हैं। हम पूरे सत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। टीम के माहौल की बात करें तो यह बहुत शानदार है। हर कोई एक-दूसरे का समर्थन करता है और हम सभी ने पिछले कुछ वर्षो में बहुत अच्छा तालमेल बिठाया है। दिल्ली कैपिटल्स कैंप का हिस्सा बनना आश्चर्यजनक है। -क्या आपको पंत में भविष्य का टीम इंडिया का कप्तान नजर आता है और क्यों? पंत की कप्तानी में खास क्या है? --रिषभ एक शानदार कप्तान हैं। वह हमेशा सकारात्मक रहते हैं और हम सभी का समर्थन करते हैं। उन्होंने इस सत्र में मेरा विशेष रूप से समर्थन किया है और मुझे वैसे गेंदबाजी करने की आजादी दी है जैसे मैं चाहता हूं, जो एक अच्छे कप्तान की पहचान है। फिलहाल दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान के तौर पर वह बेहतरीन काम कर रहे हैं और अगर भविष्य में उन्हें टीम इंडिया का कप्तान बनने का मौका मिलता है तो मुझे यकीन है कि वह वहां भी अच्छा काम करेंगे। -आपको अपनी गेंदबाजी में क्या सुधार दिखाई देता है? यूएई की पिचों पर तेज गेंदबाजों को क्या ध्यान में रखना होता है? --मैंने इस सत्र में काफी आत्मविश्वास हासिल किया है। टीम का नियमित सदस्य बनने से मुझे काफी आत्मविश्वास मिला है। मैंने अपनी यार्कर सुधारने के लिए विशेष रूप से काम किया है और यार्कर किसी भी गेंदबाज के लिए घातक हथियार है। मुझे लगता है कि यूएई में अधिकांश गेंदबाजों के लिए गति में बदलाव ने अच्छा काम किया है। चूंकि पिचें धीमी होती हैं, इसलिए गेंद की गति को लगातार बदलने से यूएई में गेंदबाजों को मदद मिलती है। -आपको टीम इंडिया के बायो-बबल में नेट गेंदबाज के तौर पर शामिल किया गया है? इस यात्रा को कैसे देखते हैं? विश्व कप से पहले टीम इंडिया के कैंप में प्रवेश करना कितनी बड़ी बात है? --टीम इंडिया के सेट-अप का हिस्सा बनना शानदार अहसास है, वो भी टी-20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में। मैं वास्तव में नेट्स पर भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने और यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपना प्रशिक्षण कैसे करते हैं। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक रोमांचक समय होने वाला है। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि जल्द ही मुझे मुख्य भारतीय टीम में चुना जाएगा। -नेट गेंदबाज के तौर पर आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी? क्या वहां पर आप कुछ बचकर गेंदबाजी करेंगे कि खिलाड़ी चोटिल न हों या जैसे मैच में करते हैं वैसे करेंगे? --आम तौर पर एक नेट गेंदबाज के रूप में हमें बल्लेबाज की इच्छा के अनुसार गेंदबाजी करनी होती है। अगर कोई बल्लेबाज अपने खेल के किसी खास पहलू पर काम करना चाहता है तो मैं नेट गेंदबाज के तौर पर उसकी मदद कर सकता हूं। नहीं तो हम अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करने की कोशिश करते हैं, ताकि बल्लेबाज मैच के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाएं। -आपके लिए टीम इंडिया की कैप कितनी महत्वपूर्ण है? आगे के लक्ष्य क्या हैं? --भारतीय टीम में शामिल होना निश्चित रूप से किसी भी भारतीय क्रिकेटर का बुनियादी सपना होता है। मैं अपने खेल पर कड़ी मेहनत करता रहूंगा और अपने अवसरों को भुनाता रहूंगा। उम्मीद है कि मुझे जल्द ही भारत के लिए खेलने का बुलावा आएगा। टी-20 विश्व कप के दौरान कम से कम भारतीय टीम के माहौल में रहना बहुत अच्छा होगा। भारत के लिए खेलना हमेशा से मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य रहा है। -इन पिचों को देखकर तेज गेंदबाजों की विश्व कप में क्या भूमिका होगी और उन्हें क्या रणनीति अपनानी चाहिए? --टी-20 प्रारूप में विविधताएं बहुत महत्वपूर्ण हैं और मुझे लगता है कि तेज गेंदबाजों को अपने कटर का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना होगा। हमने देखा है कि गेंदबाजों ने आइपीएल के दूसरे हाफ में गेंद से गति हासिल कर काफी विकेट लिए हैं। महत्वपूर्ण परिस्थितियों में यार्कर का इस्तेमाल करना भी तेज गेंदबाजों के लिए फायदेमंद होगा।
Avesh Khan Interview दिल्ली कैपिटल्स के लिए आइपीएल दो हज़ार इक्कीस में शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज आवेश खान ने बताया है कि यूएई की पिचों पर गेंदबाजों को किस तरह की गेंद ज्यादा फेंकनी चाहिए क्योंकि उनको भी वहां विकेट मिले हैं। दिल्ली कैपिटल्स के दायें हाथ के तेज गेंदबाज आवेश खान फिलहाल भारतीय टीम के नेट गेंदबाज के तौर पर यूएई में हैं। आवेश ने इस साल आइपीएल के सोलह मैचों में चौबीस विकेट हासिल किए थे और वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर काबिज हुए। इंदौर के रहने वाले आवेश को उम्मीद है कि वह जल्द ही टीम इंडिया के लिए खेलते नजर आएंगे। आवेश खान से विभिन्न मुद्दों पर अभिषेक त्रिपाठी ने खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश : -आइपीएल शुरू होने से विश्व कप शुरू होने के बीच यूएई की पिच में क्या बदलाव देख रहे हैं? --जैसे-जैसे यह आइपीएल आगे बढ़ा, निश्चित रूप से पिचें धीमी और धीमी होती गई। जब आइपीएल पिछले साल यूएई में हुआ था तब पिचों में बहुत अधिक गति थी और इसलिए नियमित रूप से बड़े स्कोर बन रहे थे। हालांकि, इस बार यह पूरी तरह से अलग नजारा था। -दिल्ली कैपिटल्स के प्रदर्शन और माहौल के बारे में क्या कहेंगे? --हम इस सत्र में जिस तरह से खेले हैं उससे हम काफी खुश हैं। हम पूरे सत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। टीम के माहौल की बात करें तो यह बहुत शानदार है। हर कोई एक-दूसरे का समर्थन करता है और हम सभी ने पिछले कुछ वर्षो में बहुत अच्छा तालमेल बिठाया है। दिल्ली कैपिटल्स कैंप का हिस्सा बनना आश्चर्यजनक है। -क्या आपको पंत में भविष्य का टीम इंडिया का कप्तान नजर आता है और क्यों? पंत की कप्तानी में खास क्या है? --रिषभ एक शानदार कप्तान हैं। वह हमेशा सकारात्मक रहते हैं और हम सभी का समर्थन करते हैं। उन्होंने इस सत्र में मेरा विशेष रूप से समर्थन किया है और मुझे वैसे गेंदबाजी करने की आजादी दी है जैसे मैं चाहता हूं, जो एक अच्छे कप्तान की पहचान है। फिलहाल दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान के तौर पर वह बेहतरीन काम कर रहे हैं और अगर भविष्य में उन्हें टीम इंडिया का कप्तान बनने का मौका मिलता है तो मुझे यकीन है कि वह वहां भी अच्छा काम करेंगे। -आपको अपनी गेंदबाजी में क्या सुधार दिखाई देता है? यूएई की पिचों पर तेज गेंदबाजों को क्या ध्यान में रखना होता है? --मैंने इस सत्र में काफी आत्मविश्वास हासिल किया है। टीम का नियमित सदस्य बनने से मुझे काफी आत्मविश्वास मिला है। मैंने अपनी यार्कर सुधारने के लिए विशेष रूप से काम किया है और यार्कर किसी भी गेंदबाज के लिए घातक हथियार है। मुझे लगता है कि यूएई में अधिकांश गेंदबाजों के लिए गति में बदलाव ने अच्छा काम किया है। चूंकि पिचें धीमी होती हैं, इसलिए गेंद की गति को लगातार बदलने से यूएई में गेंदबाजों को मदद मिलती है। -आपको टीम इंडिया के बायो-बबल में नेट गेंदबाज के तौर पर शामिल किया गया है? इस यात्रा को कैसे देखते हैं? विश्व कप से पहले टीम इंडिया के कैंप में प्रवेश करना कितनी बड़ी बात है? --टीम इंडिया के सेट-अप का हिस्सा बनना शानदार अहसास है, वो भी टी-बीस विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में। मैं वास्तव में नेट्स पर भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने और यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपना प्रशिक्षण कैसे करते हैं। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक रोमांचक समय होने वाला है। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि जल्द ही मुझे मुख्य भारतीय टीम में चुना जाएगा। -नेट गेंदबाज के तौर पर आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी? क्या वहां पर आप कुछ बचकर गेंदबाजी करेंगे कि खिलाड़ी चोटिल न हों या जैसे मैच में करते हैं वैसे करेंगे? --आम तौर पर एक नेट गेंदबाज के रूप में हमें बल्लेबाज की इच्छा के अनुसार गेंदबाजी करनी होती है। अगर कोई बल्लेबाज अपने खेल के किसी खास पहलू पर काम करना चाहता है तो मैं नेट गेंदबाज के तौर पर उसकी मदद कर सकता हूं। नहीं तो हम अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करने की कोशिश करते हैं, ताकि बल्लेबाज मैच के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाएं। -आपके लिए टीम इंडिया की कैप कितनी महत्वपूर्ण है? आगे के लक्ष्य क्या हैं? --भारतीय टीम में शामिल होना निश्चित रूप से किसी भी भारतीय क्रिकेटर का बुनियादी सपना होता है। मैं अपने खेल पर कड़ी मेहनत करता रहूंगा और अपने अवसरों को भुनाता रहूंगा। उम्मीद है कि मुझे जल्द ही भारत के लिए खेलने का बुलावा आएगा। टी-बीस विश्व कप के दौरान कम से कम भारतीय टीम के माहौल में रहना बहुत अच्छा होगा। भारत के लिए खेलना हमेशा से मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य रहा है। -इन पिचों को देखकर तेज गेंदबाजों की विश्व कप में क्या भूमिका होगी और उन्हें क्या रणनीति अपनानी चाहिए? --टी-बीस प्रारूप में विविधताएं बहुत महत्वपूर्ण हैं और मुझे लगता है कि तेज गेंदबाजों को अपने कटर का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना होगा। हमने देखा है कि गेंदबाजों ने आइपीएल के दूसरे हाफ में गेंद से गति हासिल कर काफी विकेट लिए हैं। महत्वपूर्ण परिस्थितियों में यार्कर का इस्तेमाल करना भी तेज गेंदबाजों के लिए फायदेमंद होगा।
डिसक्लेमरःयह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स. कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है। नयी दिल्ली, 10 जुलाई :भाषाः केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में 36 द्वीपों की पहचान की है जिनका संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों एवं अन्य पक्षों से विचार विमर्श करके समग्र विकास किया जायेगा।
डिसक्लेमरःयह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स. कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है। नयी दिल्ली, दस जुलाई :भाषाः केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में छत्तीस द्वीपों की पहचान की है जिनका संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों एवं अन्य पक्षों से विचार विमर्श करके समग्र विकास किया जायेगा।
मेरठ में कचहरी स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में रोजगार मेले का आयोजन किया गया. जिसमें 7 कम्पनियों ने 150 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू कर 93 अभ्यर्थियों का चयन किया. मेले में पुखराज हैल्थ केयर, डा। रेड्डी फाउन्डेशन, पंजाब नेशनल बैंक मेटलाईफ, शिव शक्ति बायोटेक्नोलोजिस, टीडीएस प्लेसमेण्टसर्विस, हिंदुस्तान कन्सट्रक्सन और तान्या ऑटोमोबाईल कम्पनी ने कम्प्यूटर आपरेटर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, इन्श्योरेंस एडवाईजर, अप्रेन्टिस, टेलीकॉलर एवं डेवलपमेंट मैनेजर के लिए इंटरव्यू लिए. रोजगार मेले में मौजूद अभ्यर्थियों का जिला सेवायोजन अधिकारी सचिन चौधरी ने कैरियर मार्गदर्शन किया. युवाओं को प्रेरित करते हुए कहां कि सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से दी जाने वाली सभी सेवाओं का फायदा उठायें. प्रतिभागी अभ्यर्थियों को अवगत कराया कि वे कामयाबी के लिए सतत् कोशिश करते रहे हैं. कैरियर यात्रा की शुरूआत पहले कदम से ही होती है, प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के उभरते अवसर, वर्तमान में मौजूद रोजगार के अवसरों, इंटरव्यू की तैयारी और कार्यस्थल पर मनोवृत्ति के संबंध में बताया गया. अभ्यर्थियों का साक्षात्कार करते कंपनी के प्रतिनिधि. कम्पनी के एचआर ने अपनी कम्पनी की रिक्तियों और प्रोडक्ट से सम्बन्धित जानकारी विस्तार से दी. शुरुआत के बाद 7 कम्पनियों ने 150 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू कर पुखराज हैल्थ केयर में 13, डा रेड्डी फाउन्डेशन में 3, पंजाब नेशनल बैंक मेटलाईफ- में 9, शिव शक्ति बायोटेक्नोलोजिस में 9, टीडीएस प्लेसमेण्ट सर्विस में 18, हिंदुस्तान कन्सट्रक्सन में 36 और तान्या ऑटोमोबाईल में 5 अभ्यर्थियों को चयनित किया. कम्पनियों ने न्यूनतम वेतन 8000 से 15500 भिन्न-भिन्न शैक्षिक योग्यताओं के लिए ऑफर किया. 12 अभ्यर्थियों को नौकरी ऑफर लेटर भी दिए गए.
मेरठ में कचहरी स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में रोजगार मेले का आयोजन किया गया. जिसमें सात कम्पनियों ने एक सौ पचास अभ्यर्थियों के इंटरव्यू कर तिरानवे अभ्यर्थियों का चयन किया. मेले में पुखराज हैल्थ केयर, डा। रेड्डी फाउन्डेशन, पंजाब नेशनल बैंक मेटलाईफ, शिव शक्ति बायोटेक्नोलोजिस, टीडीएस प्लेसमेण्टसर्विस, हिंदुस्तान कन्सट्रक्सन और तान्या ऑटोमोबाईल कम्पनी ने कम्प्यूटर आपरेटर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, इन्श्योरेंस एडवाईजर, अप्रेन्टिस, टेलीकॉलर एवं डेवलपमेंट मैनेजर के लिए इंटरव्यू लिए. रोजगार मेले में मौजूद अभ्यर्थियों का जिला सेवायोजन अधिकारी सचिन चौधरी ने कैरियर मार्गदर्शन किया. युवाओं को प्रेरित करते हुए कहां कि सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से दी जाने वाली सभी सेवाओं का फायदा उठायें. प्रतिभागी अभ्यर्थियों को अवगत कराया कि वे कामयाबी के लिए सतत् कोशिश करते रहे हैं. कैरियर यात्रा की शुरूआत पहले कदम से ही होती है, प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के उभरते अवसर, वर्तमान में मौजूद रोजगार के अवसरों, इंटरव्यू की तैयारी और कार्यस्थल पर मनोवृत्ति के संबंध में बताया गया. अभ्यर्थियों का साक्षात्कार करते कंपनी के प्रतिनिधि. कम्पनी के एचआर ने अपनी कम्पनी की रिक्तियों और प्रोडक्ट से सम्बन्धित जानकारी विस्तार से दी. शुरुआत के बाद सात कम्पनियों ने एक सौ पचास अभ्यर्थियों के इंटरव्यू कर पुखराज हैल्थ केयर में तेरह, डा रेड्डी फाउन्डेशन में तीन, पंजाब नेशनल बैंक मेटलाईफ- में नौ, शिव शक्ति बायोटेक्नोलोजिस में नौ, टीडीएस प्लेसमेण्ट सर्विस में अट्ठारह, हिंदुस्तान कन्सट्रक्सन में छत्तीस और तान्या ऑटोमोबाईल में पाँच अभ्यर्थियों को चयनित किया. कम्पनियों ने न्यूनतम वेतन आठ हज़ार से पंद्रह हज़ार पाँच सौ भिन्न-भिन्न शैक्षिक योग्यताओं के लिए ऑफर किया. बारह अभ्यर्थियों को नौकरी ऑफर लेटर भी दिए गए.
KATIHAR : कटिहार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे गौशाला में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है, युवक को दो गोली लगी, जिसमें एक गोली सीने में लगी जबकि दूसरी गोली सर में लगकर आंखों से निकल गई। घटना के बारे में बताया जा रहा है कि इसी मोहल्ले के संजय सहनी हैं जो पिछले 6 साल से नेपाल में रह रहे थे 5 दिनों पहले ही वह कटिहार आए थे और आज वापस जाने वाले थे। संजय की पत्नी नीतू की मानें तो एक दोस्त विमल को रात को फोन कर बुलाया और उसके बाद संजय वापस नहीं आए। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और तफ्तीश में जुट गए हैं। बता दें कि 2016 में मोहम्मद सोनू नामक एक युवक की हत्या मामले में संजय वांछित है।
KATIHAR : कटिहार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे गौशाला में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है, युवक को दो गोली लगी, जिसमें एक गोली सीने में लगी जबकि दूसरी गोली सर में लगकर आंखों से निकल गई। घटना के बारे में बताया जा रहा है कि इसी मोहल्ले के संजय सहनी हैं जो पिछले छः साल से नेपाल में रह रहे थे पाँच दिनों पहले ही वह कटिहार आए थे और आज वापस जाने वाले थे। संजय की पत्नी नीतू की मानें तो एक दोस्त विमल को रात को फोन कर बुलाया और उसके बाद संजय वापस नहीं आए। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और तफ्तीश में जुट गए हैं। बता दें कि दो हज़ार सोलह में मोहम्मद सोनू नामक एक युवक की हत्या मामले में संजय वांछित है।
टीवी एक्ट्रेस रुबिना दिलैक इन दिनों बिग बॉस के घर में कैद है। इस शो से जुड़ते ही रुबीना की लाइफ से कंट्रोवर्सी भी जुड़ गई है। वैसे तो रुबिना इस वक़्त शो में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, उन्हें इस वक़्त लाखो लोग सपोर्ट कर रहे है। रुबिना दिलैक की ईमानदारी और सुझ- भुज इस समय उनके लिए दर्शको का दिल जीतने में मददगार साबित हो रही है। लेकिन इसी शो में एक टास्क के दौरान उन्होंने शायद अनजाने में किसी का दिल बुरी तरह से दुखा दिया है। दरअसल, बिग बॉस में टास्क के दौरान रुबिना दिलैक सीरियल 'शक्ति' में अपने को-स्टार सुदेश बैरी का नाम भूल गई थीं। जिसे लेकर एक्टर सुदेश बैरी के फैंस के अलावा 'शक्ति' सीरीयल की एक और एक्टर काम्या पंजाबी ने सोशल मीडिया पर रुबीना की टांग खिंचाई की थी। सुदेश बैरी ने कहा कि "इसमें कोई शक नहीं है कि रुबिना एक शानदार एक्ट्रेस और एक बेहतरीन को-एक्टर हैं, जब भी मुझसे कोई रुबीना के बारे में बात करता हैं तो मैंने हमेशा उसकी तारीफ ही की है। देखिए गलती की गुंजाइश तो वहां होती है जहां दो लोगों ने साथ में थोड़ा बहुत काम ही किया होता है तो ऐसे में एक दूसरा का नाम याद रखना थोड़ा मुश्किल रहता है। लेकिन जहां आप किसी के साथ कई सालों से काम करते आ रहे हैं तो ऐसे में अगर आप अपने को-एक्टर का नाम भूल जाते हैं तो ये जानबूझकर की हुई गलती है। " सुदेश ने मीडिया को बताया कि आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन "मैं ना तो कभी टीवी देखता हूं, ना कोई फिल्म देखता हूं, मैं सिर्फ चुपचाप अपना काम करता हूं और बाकी का समय अपने बेटे सूरज के यू-ट्यूब चैनल को डिवोट करता हूं जिसमें मुझे खुशी मिलती है। जब मुझे मेरे फैंस और 'शक्ति' सीरियल के को-एक्टर ने बताया कि रुबीना बिग बॉस में मेरा नाम भूल गई है तो मुझे ये बात सुनकर हंसी आ गई कि देखो लोगों को कैसा- कैसा गुमान हो जाता है। "
टीवी एक्ट्रेस रुबिना दिलैक इन दिनों बिग बॉस के घर में कैद है। इस शो से जुड़ते ही रुबीना की लाइफ से कंट्रोवर्सी भी जुड़ गई है। वैसे तो रुबिना इस वक़्त शो में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, उन्हें इस वक़्त लाखो लोग सपोर्ट कर रहे है। रुबिना दिलैक की ईमानदारी और सुझ- भुज इस समय उनके लिए दर्शको का दिल जीतने में मददगार साबित हो रही है। लेकिन इसी शो में एक टास्क के दौरान उन्होंने शायद अनजाने में किसी का दिल बुरी तरह से दुखा दिया है। दरअसल, बिग बॉस में टास्क के दौरान रुबिना दिलैक सीरियल 'शक्ति' में अपने को-स्टार सुदेश बैरी का नाम भूल गई थीं। जिसे लेकर एक्टर सुदेश बैरी के फैंस के अलावा 'शक्ति' सीरीयल की एक और एक्टर काम्या पंजाबी ने सोशल मीडिया पर रुबीना की टांग खिंचाई की थी। सुदेश बैरी ने कहा कि "इसमें कोई शक नहीं है कि रुबिना एक शानदार एक्ट्रेस और एक बेहतरीन को-एक्टर हैं, जब भी मुझसे कोई रुबीना के बारे में बात करता हैं तो मैंने हमेशा उसकी तारीफ ही की है। देखिए गलती की गुंजाइश तो वहां होती है जहां दो लोगों ने साथ में थोड़ा बहुत काम ही किया होता है तो ऐसे में एक दूसरा का नाम याद रखना थोड़ा मुश्किल रहता है। लेकिन जहां आप किसी के साथ कई सालों से काम करते आ रहे हैं तो ऐसे में अगर आप अपने को-एक्टर का नाम भूल जाते हैं तो ये जानबूझकर की हुई गलती है। " सुदेश ने मीडिया को बताया कि आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन "मैं ना तो कभी टीवी देखता हूं, ना कोई फिल्म देखता हूं, मैं सिर्फ चुपचाप अपना काम करता हूं और बाकी का समय अपने बेटे सूरज के यू-ट्यूब चैनल को डिवोट करता हूं जिसमें मुझे खुशी मिलती है। जब मुझे मेरे फैंस और 'शक्ति' सीरियल के को-एक्टर ने बताया कि रुबीना बिग बॉस में मेरा नाम भूल गई है तो मुझे ये बात सुनकर हंसी आ गई कि देखो लोगों को कैसा- कैसा गुमान हो जाता है। "
वेब सीरीज़ (Web Series) के चलते OTT का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ गया है. इसी चीज़ को देखते हुए टेलिकॉम कंपिनयां भी अपने रिचार्ज प्लान के साथ OTT सब्सक्रिप्शन ऑफर पेश कर रही हैं. कुछ यूज़र ऐसे हैं प्लान तलाश करते हैं, जिसमें Disney+ Hotstar, Netflix जैसे OTT का फायदा दिया जाता हो, और उसके लिए वह ज़्यादा खर्च भी नहीं करना चाहते हैं. तो आज हम आपको एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और जियो के कुछ ऐसे प्लान के बारे में बता रहे हैं जिसमें नेटफ्लिक्स का फायदा दिया जाता है. सिर्फ 399 रुपये में एयरटेल का धांसू प्लान- एयरटेल ग्राहकों के लिए हर रेंज के प्लान पेश करता है. लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं 399 रुपये वाले प्लान की. इस सस्ते प्लान ग्राहकों को कुल 28 दिनों की वैलिडिटी मिलती है. डेटा के तौर पर इसमें हर दिन 2. 5 जीबी डेटा दिया जाता है. 4,000 रुपये से ज्यादा कम हुई Samsung के धाकड़ फोन की कीमत, खरीदने की भीड़! कॉलिंग के लिए इसमें अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग की सुविधा मिलती हैं. इतना ही नहीं इसमें ग्राहकों को हर दिन 100SMS का फायदा दिया जाता है. इसके अलावा आपको 3 महीने के लिए फ्री Disney+Hotstar Mobile सब्सक्रिप्शन मिलेगा. Vodafone Idea की बात करें तो इस प्रीपेड प्लान में भी ग्राहकों मुफ्त में Disney+ Hotstar का फायदा दिया जाता है. प्लान में हर दिन ग्राहकों को 2. 5 जीबी हाई-स्पीड डेटा मिलता है. कॉलिंग के तौर पर इसमें अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और हर दिन 100SMS का फायदा दिया जाता है. ये प्लान 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है. प्लान में यूज़र्स को 3 महीने के लिए Disney Plus Hotstar Mobile सब्सक्रिप्शन दिया जाता है. आखिर में बात करें रिलायंस जियो की तो कंपनी अपने किसी भी प्रीपेड के साथ OTT का सब्सक्रिप्शन नहीं देती है. लेकन अगर आप ओटीटी बेनिफिट चाहते हैं तो पोस्टपेड की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं. कंपनी के पोस्टपेड प्लान की शुरुआती कीमत 399 रुपये है. 399 रुपये वाले पोस्टपेड प्लान में ग्राहकों को नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम का फायदा दिया जाता है. .
वेब सीरीज़ के चलते OTT का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ गया है. इसी चीज़ को देखते हुए टेलिकॉम कंपिनयां भी अपने रिचार्ज प्लान के साथ OTT सब्सक्रिप्शन ऑफर पेश कर रही हैं. कुछ यूज़र ऐसे हैं प्लान तलाश करते हैं, जिसमें Disney+ Hotstar, Netflix जैसे OTT का फायदा दिया जाता हो, और उसके लिए वह ज़्यादा खर्च भी नहीं करना चाहते हैं. तो आज हम आपको एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और जियो के कुछ ऐसे प्लान के बारे में बता रहे हैं जिसमें नेटफ्लिक्स का फायदा दिया जाता है. सिर्फ तीन सौ निन्यानवे रुपयापये में एयरटेल का धांसू प्लान- एयरटेल ग्राहकों के लिए हर रेंज के प्लान पेश करता है. लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं तीन सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान की. इस सस्ते प्लान ग्राहकों को कुल अट्ठाईस दिनों की वैलिडिटी मिलती है. डेटा के तौर पर इसमें हर दिन दो. पाँच जीबी डेटा दिया जाता है. चार,शून्य रुपयापये से ज्यादा कम हुई Samsung के धाकड़ फोन की कीमत, खरीदने की भीड़! कॉलिंग के लिए इसमें अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग की सुविधा मिलती हैं. इतना ही नहीं इसमें ग्राहकों को हर दिन एक सौSMS का फायदा दिया जाता है. इसके अलावा आपको तीन महीने के लिए फ्री Disney+Hotstar Mobile सब्सक्रिप्शन मिलेगा. Vodafone Idea की बात करें तो इस प्रीपेड प्लान में भी ग्राहकों मुफ्त में Disney+ Hotstar का फायदा दिया जाता है. प्लान में हर दिन ग्राहकों को दो. पाँच जीबी हाई-स्पीड डेटा मिलता है. कॉलिंग के तौर पर इसमें अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और हर दिन एक सौSMS का फायदा दिया जाता है. ये प्लान अट्ठाईस दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है. प्लान में यूज़र्स को तीन महीने के लिए Disney Plus Hotstar Mobile सब्सक्रिप्शन दिया जाता है. आखिर में बात करें रिलायंस जियो की तो कंपनी अपने किसी भी प्रीपेड के साथ OTT का सब्सक्रिप्शन नहीं देती है. लेकन अगर आप ओटीटी बेनिफिट चाहते हैं तो पोस्टपेड की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं. कंपनी के पोस्टपेड प्लान की शुरुआती कीमत तीन सौ निन्यानवे रुपयापये है. तीन सौ निन्यानवे रुपयापये वाले पोस्टपेड प्लान में ग्राहकों को नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम का फायदा दिया जाता है. .
Ranchi : ऑल इंडिया मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन (अमालटा) के 42वें अधिवेशन के दूसरे दिनसाइंटिफिक सेमिनार हुआ. इसमें शामिल डेलीगेट्स ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे. सीसीएल गांधीनगर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ जितेंद्र कुमार ने म्यूकर्माइकोसिस पर व्याख्यान दिया, जबकि फिजियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार सिन्हा ने शुगर मरीजों की गहन चिकित्सा एवं जांच में सहयोगी टॉपिक पर चर्चा की. इससे पहले समिनार की शुरुआत आयोजन के अध्यक्ष रामाशीष सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया. रिम्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सीमा कुमारी ने ओवरव्यू ऑफ लैबोरेटरी क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम पर लोगों के बीच महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की. रिम्स ब्लड बैंक की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुषमा कुमारी ने प्रीवैलेंस ऑफ वायरल (एचबीसी, एचसीवी और एचआईवी) के स्वस्थ रक्तदाताओं में संक्रमण पर व्याख्यान दिया. पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से रतन दीप शर्मा (हरियाणा), संतोष कुमार सिंह (झारखंड), सुधांशु रंजन (भारतीय सिविल हॉस्पिटल रांची), डॉ विनय भूषण (पटना), सरोज सिंह (बीएचयू बनारस), राजेंद्र कुमार दुबे (पटना) ने पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से लोगों के बीच लैब टेक्नीशियन के जीवन में होने वाली उपयोगी जानकारियां साझा की. आयोजन को सफल बनाने में ऑल इंडिया मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑर्गेनाइजर कमेटी के मंटू नाग, सुबोध कुमार, मनोज कुमार, राजीव कुमार( ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री), नवीन कुमार, राणा चंदन, उमा काबरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
Ranchi : ऑल इंडिया मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन के बयालीसवें अधिवेशन के दूसरे दिनसाइंटिफिक सेमिनार हुआ. इसमें शामिल डेलीगेट्स ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे. सीसीएल गांधीनगर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ जितेंद्र कुमार ने म्यूकर्माइकोसिस पर व्याख्यान दिया, जबकि फिजियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार सिन्हा ने शुगर मरीजों की गहन चिकित्सा एवं जांच में सहयोगी टॉपिक पर चर्चा की. इससे पहले समिनार की शुरुआत आयोजन के अध्यक्ष रामाशीष सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया. रिम्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सीमा कुमारी ने ओवरव्यू ऑफ लैबोरेटरी क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम पर लोगों के बीच महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की. रिम्स ब्लड बैंक की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुषमा कुमारी ने प्रीवैलेंस ऑफ वायरल के स्वस्थ रक्तदाताओं में संक्रमण पर व्याख्यान दिया. पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से रतन दीप शर्मा , संतोष कुमार सिंह , सुधांशु रंजन , डॉ विनय भूषण , सरोज सिंह , राजेंद्र कुमार दुबे ने पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से लोगों के बीच लैब टेक्नीशियन के जीवन में होने वाली उपयोगी जानकारियां साझा की. आयोजन को सफल बनाने में ऑल इंडिया मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑर्गेनाइजर कमेटी के मंटू नाग, सुबोध कुमार, मनोज कुमार, राजीव कुमार, नवीन कुमार, राणा चंदन, उमा काबरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वायु व ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं जिनकी शुरूआत इसी हफ्ते यानी 4 नवंबर से की जा रही है। हालांकि फिलहाल यह शुरूआत असम के गुवाहाटी शहर से की जा रही है। इन बसों का संचालन Assam State Transport Corporation(ASTC) द्वारा किया जाएगा। ASTC के मैनेजिंग डायरेक्टर आनंद प्रकाश तिवाड़ी ने इस बारे में कहा है कि इन इलेक्ट्रिक बसों को 'ई-बस' नाम दिया गया है। इनका संचालन फिलहाल 6 महीनों के लिए जालूकवाड़ी से खानपाड़ा के बीच में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए किया गया है। बताया गया है इस पहल के तहत पहले चरण में 4 नवंबर से 15 e-bus का संचालन किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में अन्य रूटों पर भी ऐसी ही बसों का संचालन किया जाएगा। आपको बता दें कि ASTC इसी साल अगस्त में ये ऐलान किया था कि लगभग 1000 ई-बसों का संचालन किया जाएगा। ये बसें हंगरी की Csepel Holding कंपनी द्वारा मुहैया करवाई जा रही हैं।
वायु व ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं जिनकी शुरूआत इसी हफ्ते यानी चार नवंबर से की जा रही है। हालांकि फिलहाल यह शुरूआत असम के गुवाहाटी शहर से की जा रही है। इन बसों का संचालन Assam State Transport Corporation द्वारा किया जाएगा। ASTC के मैनेजिंग डायरेक्टर आनंद प्रकाश तिवाड़ी ने इस बारे में कहा है कि इन इलेक्ट्रिक बसों को 'ई-बस' नाम दिया गया है। इनका संचालन फिलहाल छः महीनों के लिए जालूकवाड़ी से खानपाड़ा के बीच में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए किया गया है। बताया गया है इस पहल के तहत पहले चरण में चार नवंबर से पंद्रह e-bus का संचालन किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में अन्य रूटों पर भी ऐसी ही बसों का संचालन किया जाएगा। आपको बता दें कि ASTC इसी साल अगस्त में ये ऐलान किया था कि लगभग एक हज़ार ई-बसों का संचालन किया जाएगा। ये बसें हंगरी की Csepel Holding कंपनी द्वारा मुहैया करवाई जा रही हैं।
लॉर्ड्स के मैदान से क्रिकेट को अलविदा कहेंगी झूलन गोस्वामी! खेल, डेस्क रिपोर्ट। दुनिया की सबसे कामयाब महिला तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने शायद क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया है। बीसीसीआई के अधिकारी ने संकेत दिए है कि 24 सितम्बर को 'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ खेला जाने वाला मुकाबला 'चकदा एक्सप्रेस' का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच होगा। 39 वर्षीय गोस्वामी को जुलाई में श्रीलंका में पिछली 50 ओवरों की सीरीज से चूकने के बाद शुक्रवार को इंग्लैंड में तीन एकदिवसीय मैचों के लिए भारत की टीम में शामिल किया गया था। यहीं माना जा रहा है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने झूलन से अवश्य बात की होगी। जानकारी के मुताबिक, टीम प्रबंधन ने गोस्वामी से युवा तेज गेंदबाजों का एक पूल बनाने के बारे में बात की थी, जो सभी प्रारूपों में काम कर सकते हैं। हालांकि, गोस्वामी जुलाई में श्रीलंका दौरे पर जाने वाली थी, लेकिन फिटनेस के मुद्दों के कारण चूक गई। उन्होंने जुलाई के मध्य में ही पूरी तरह से फिटनेस हासिल कर ली और वह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के मेडिकल स्टाफ से मंजूरी के बाद इंग्लैंड दौरे के लिए चुनी गई। बता दे, गोस्वामी आखिरी बार इस साल मार्च में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे विश्व कप के दौरान भारत के लिए खेलती हुई नजर आई थी। बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, "बीसीसीआई उन्हें उचित विदाई देने के लिए उत्सुक था, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के अंतिम ग्रुप गेम से पहले एक साइड स्ट्रेन लेने के बाद झूलन मैदान पर अलविदा नहीं कह सकती थी। झूलन ने 2018 के बाद से T20I नहीं खेला है, जबकि अक्टूबर 2021 में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। झूलन तीन फोर्मट्स में 352 विकेट के साथ महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं। झूलन ने मार्च 2002 में 19 साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और दो दशकों के दौरान उन्होंने 12 टेस्ट, 68 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 201 एकदिवसीय मैच खेले। उन्होंने 6 एकदिवसीय वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधितित्व किया है। आपको बता दें, भारत इंग्लैंड में 10, 13 और 15 सितंबर को तीन टी20 मैच खेलेगा, जबकि उसके बाद 18, 21 और 24 सितंबर को वनडे मैच खेलेगा।
लॉर्ड्स के मैदान से क्रिकेट को अलविदा कहेंगी झूलन गोस्वामी! खेल, डेस्क रिपोर्ट। दुनिया की सबसे कामयाब महिला तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने शायद क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया है। बीसीसीआई के अधिकारी ने संकेत दिए है कि चौबीस सितम्बर को 'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ खेला जाने वाला मुकाबला 'चकदा एक्सप्रेस' का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच होगा। उनतालीस वर्षीय गोस्वामी को जुलाई में श्रीलंका में पिछली पचास ओवरों की सीरीज से चूकने के बाद शुक्रवार को इंग्लैंड में तीन एकदिवसीय मैचों के लिए भारत की टीम में शामिल किया गया था। यहीं माना जा रहा है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने झूलन से अवश्य बात की होगी। जानकारी के मुताबिक, टीम प्रबंधन ने गोस्वामी से युवा तेज गेंदबाजों का एक पूल बनाने के बारे में बात की थी, जो सभी प्रारूपों में काम कर सकते हैं। हालांकि, गोस्वामी जुलाई में श्रीलंका दौरे पर जाने वाली थी, लेकिन फिटनेस के मुद्दों के कारण चूक गई। उन्होंने जुलाई के मध्य में ही पूरी तरह से फिटनेस हासिल कर ली और वह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के मेडिकल स्टाफ से मंजूरी के बाद इंग्लैंड दौरे के लिए चुनी गई। बता दे, गोस्वामी आखिरी बार इस साल मार्च में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे विश्व कप के दौरान भारत के लिए खेलती हुई नजर आई थी। बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, "बीसीसीआई उन्हें उचित विदाई देने के लिए उत्सुक था, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के अंतिम ग्रुप गेम से पहले एक साइड स्ट्रेन लेने के बाद झूलन मैदान पर अलविदा नहीं कह सकती थी। झूलन ने दो हज़ार अट्ठारह के बाद से TबीसI नहीं खेला है, जबकि अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। झूलन तीन फोर्मट्स में तीन सौ बावन विकेट के साथ महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं। झूलन ने मार्च दो हज़ार दो में उन्नीस साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और दो दशकों के दौरान उन्होंने बारह टेस्ट, अड़सठ टीबीस अंतरराष्ट्रीय और दो सौ एक एकदिवसीय मैच खेले। उन्होंने छः एकदिवसीय वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधितित्व किया है। आपको बता दें, भारत इंग्लैंड में दस, तेरह और पंद्रह सितंबर को तीन टीबीस मैच खेलेगा, जबकि उसके बाद अट्ठारह, इक्कीस और चौबीस सितंबर को वनडे मैच खेलेगा।
नईदिल्ली। गुजरात के मेहसाणा में हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी के विरोध में रविवार को शुरू हुए आंदोलन के बाद पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) ने सोमवार को बंद का ऐलान किया है। इस दौरान प्रशासन ने हिंसा और आंदोलन के उग्र होने के मद्देनजर मेहसाणा के अलावा सूरत और राजकोट में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को ऐहतियातन 19 अप्रैल तक बंद कर दिया है। गौरतलब है कि रविवार को शुरू हुए इस आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया था। आंदोलन में शामिल लोगों ने दो इमारतों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस की कई गाड़ियों को क्षति पहुंचाई। रविवार को भीड़ को बेकाबू होता देख प्रशासन ने मेहसाणा में कर्फ्यू लगा दिया था। लोगों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा था। सरदार पटेल ग्रुप (एसपीजी) ने पटेल समुदाय को आरक्षण देने तथा जेल में बंद हार्दिक पटेल समेत दूसरे पाटीदार नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर जेल भरो आंदोलन का एलान किया था। रविवार को समुदाय के हजारों लोग शहर के मोढेरा चौराहे पर जुटे थे। उनकी अगुवाई एसपीजी के प्रमुख लालजी पटेल कर रहे थे। उनका आरोप है कि पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। वे लोग जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ रहे थे कि तभी पुलिस ने भीड़ को उकसाने के लिए लालजी और उनके संगठन के कुछ सदस्यों पर लाठी से वार किया। लालजी के सिर पर चोट आई है। इसके बाद हालात काबू से बाहर होते गए।
नईदिल्ली। गुजरात के मेहसाणा में हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी के विरोध में रविवार को शुरू हुए आंदोलन के बाद पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने सोमवार को बंद का ऐलान किया है। इस दौरान प्रशासन ने हिंसा और आंदोलन के उग्र होने के मद्देनजर मेहसाणा के अलावा सूरत और राजकोट में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को ऐहतियातन उन्नीस अप्रैल तक बंद कर दिया है। गौरतलब है कि रविवार को शुरू हुए इस आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया था। आंदोलन में शामिल लोगों ने दो इमारतों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस की कई गाड़ियों को क्षति पहुंचाई। रविवार को भीड़ को बेकाबू होता देख प्रशासन ने मेहसाणा में कर्फ्यू लगा दिया था। लोगों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा था। सरदार पटेल ग्रुप ने पटेल समुदाय को आरक्षण देने तथा जेल में बंद हार्दिक पटेल समेत दूसरे पाटीदार नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर जेल भरो आंदोलन का एलान किया था। रविवार को समुदाय के हजारों लोग शहर के मोढेरा चौराहे पर जुटे थे। उनकी अगुवाई एसपीजी के प्रमुख लालजी पटेल कर रहे थे। उनका आरोप है कि पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। वे लोग जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ रहे थे कि तभी पुलिस ने भीड़ को उकसाने के लिए लालजी और उनके संगठन के कुछ सदस्यों पर लाठी से वार किया। लालजी के सिर पर चोट आई है। इसके बाद हालात काबू से बाहर होते गए।
Supreme Court Collegium: खबर है कि रिजिजू की तरफ से यह भी कहा गया है कि प्रदेश के प्रतिनिधि हाईकोर्ट कॉलेजियम का हिस्सा होना चाहिए। खास बात है कि कोर्ट और सरकार में इस मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है। न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और सरकार में तकरार जारी है। अब खबर है कि सरकार नियुक्ति पर फैसला लेने वाले कॉलेजियम में अपने प्रतिनिधियों को भी शामिल करना चाहती है। कहा जा रहा है कि इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा गया है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रिजिजू ने सीजेआई को पत्र लिखा है, जिसमें कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने लिखा कि पैनल में पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष न्यायाधीशों को सरकार के प्रतिनिधियों को भी हिस्सा बनाना चाहिए। खबर है कि रिजिजू की तरफ से यह भी कहा गया है कि प्रदेश के प्रतिनिधि हाईकोर्ट कॉलेजियम का हिस्सा होना चाहिए। खास बात है कि कोर्ट और सरकार में इस मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है। बीते साल ही रिजिजू ने कॉलेजियन सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया था। भाषा के अनुसार, रिजिजू ने राज्यसभा में कहा था कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रणाली में सुधार लाए जाने के अनुरोध के साथ ही नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता और सामाजिक विविधता के अभाव के संबंध में कई सोर्सेज से अभ्यावेदन मिले हैं। रीजीजू ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'सरकार ने उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया ज्ञापन को अनुपूरित करने के लिए सुझाव भेजे हैं। ' प्रक्रिया ज्ञापन एक दस्तावेज है जो उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले के दौरान काम करता है।
Supreme Court Collegium: खबर है कि रिजिजू की तरफ से यह भी कहा गया है कि प्रदेश के प्रतिनिधि हाईकोर्ट कॉलेजियम का हिस्सा होना चाहिए। खास बात है कि कोर्ट और सरकार में इस मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है। न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और सरकार में तकरार जारी है। अब खबर है कि सरकार नियुक्ति पर फैसला लेने वाले कॉलेजियम में अपने प्रतिनिधियों को भी शामिल करना चाहती है। कहा जा रहा है कि इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा गया है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रिजिजू ने सीजेआई को पत्र लिखा है, जिसमें कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने लिखा कि पैनल में पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष न्यायाधीशों को सरकार के प्रतिनिधियों को भी हिस्सा बनाना चाहिए। खबर है कि रिजिजू की तरफ से यह भी कहा गया है कि प्रदेश के प्रतिनिधि हाईकोर्ट कॉलेजियम का हिस्सा होना चाहिए। खास बात है कि कोर्ट और सरकार में इस मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है। बीते साल ही रिजिजू ने कॉलेजियन सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया था। भाषा के अनुसार, रिजिजू ने राज्यसभा में कहा था कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रणाली में सुधार लाए जाने के अनुरोध के साथ ही नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता और सामाजिक विविधता के अभाव के संबंध में कई सोर्सेज से अभ्यावेदन मिले हैं। रीजीजू ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'सरकार ने उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया ज्ञापन को अनुपूरित करने के लिए सुझाव भेजे हैं। ' प्रक्रिया ज्ञापन एक दस्तावेज है जो उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले के दौरान काम करता है।
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश-लालू, कांग्रेस और एनसीपी के महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है. 100-100 सीटों पर जेडीयू और आरजेडी वहीं कांग्रेस को 40 सीटें दी गई हैं. इसके अलावा एनसीपी को तीन सीटें दी गई हैं. महागठबंधन की ओर से संयुक्त कार्यक्रम का निर्णय भी लिया गया है. नीतीश-लालू पटना में 30 अगस्त को गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली करेंगे. लालू प्रसाद यादव ने कहा, सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने के लिए महागठबंधन की दरकरार थी. लालू ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की फूहड़ भाषा का जवाब दिया जाएगा.
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश-लालू, कांग्रेस और एनसीपी के महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है. एक सौ-एक सौ सीटों पर जेडीयू और आरजेडी वहीं कांग्रेस को चालीस सीटें दी गई हैं. इसके अलावा एनसीपी को तीन सीटें दी गई हैं. महागठबंधन की ओर से संयुक्त कार्यक्रम का निर्णय भी लिया गया है. नीतीश-लालू पटना में तीस अगस्त को गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली करेंगे. लालू प्रसाद यादव ने कहा, सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने के लिए महागठबंधन की दरकरार थी. लालू ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की फूहड़ भाषा का जवाब दिया जाएगा.
GAYA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गया दौरे के दौरान विष्णुपद मंदिर में पूजा करने के दौरान एक गैर हिन्दू की मौजदगी को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जहां भाजपा ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। वहीं इस मामले में अब मंदिर में सीएम के साथ मौजूद मंत्री सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी और मंदिर के पुजारी की तरफ से अपनी प्रतिक्रिया दी गई है। विष्णुपद मंदिर में जाने को लेकर उपजे विवाद में अपना नाम सामने आने पर मंत्री मो. इसराइल मंसूरी ने कहा मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि मैं मुख्यमंत्री जी के साथ विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश किया हूं। इस संबंध में विष्णुपद मंदिर के सचिव गजाधर लाल पाठक ने बताया कि आज तक ऐसा नहीं हुआ था। परंपरा चली आ रही है कि अहिंदू मंदिर में प्रवेश वर्जित है मंदिर की स्थापना इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर कराई थी अगर ऐसी बात है तो कमेटी बैठक करके निर्णय लेगी। गयाजी के विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर मुख्य द्वार पर अहिंदू प्रवेश वर्जित लिखा हुआ है इसके बावजूद आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गया दौरे पर आए थे और विष्णुपद मंदिर के गर्भ में पूजा अर्चना की। उनके साथ पार्टी के नेता कार्यकर्ता सहित बिहार सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी भी गर्भ गृह में सीएम नीतीश कुमार के साथ मौजूद थे । ये तस्वीर और वीडियो सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी द्वारा जारी की गई है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर ने मौजूदा सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं के प्रवेश की ही अनुमति है। विधर्मी को ले जाकर सीएम नीतीश ने बड़ा पाप किया है। अब यह मंंदिर अपवित्र हो गया है। मंदिर को शुद्धिकरण करना होगा। इसलिए सीएम नीतीश इस पर तुरंत माफी मांगे और इसराइल मंसूरी से इस्तीफा ले।
GAYA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गया दौरे के दौरान विष्णुपद मंदिर में पूजा करने के दौरान एक गैर हिन्दू की मौजदगी को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जहां भाजपा ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। वहीं इस मामले में अब मंदिर में सीएम के साथ मौजूद मंत्री सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी और मंदिर के पुजारी की तरफ से अपनी प्रतिक्रिया दी गई है। विष्णुपद मंदिर में जाने को लेकर उपजे विवाद में अपना नाम सामने आने पर मंत्री मो. इसराइल मंसूरी ने कहा मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि मैं मुख्यमंत्री जी के साथ विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश किया हूं। इस संबंध में विष्णुपद मंदिर के सचिव गजाधर लाल पाठक ने बताया कि आज तक ऐसा नहीं हुआ था। परंपरा चली आ रही है कि अहिंदू मंदिर में प्रवेश वर्जित है मंदिर की स्थापना इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर कराई थी अगर ऐसी बात है तो कमेटी बैठक करके निर्णय लेगी। गयाजी के विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर मुख्य द्वार पर अहिंदू प्रवेश वर्जित लिखा हुआ है इसके बावजूद आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गया दौरे पर आए थे और विष्णुपद मंदिर के गर्भ में पूजा अर्चना की। उनके साथ पार्टी के नेता कार्यकर्ता सहित बिहार सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी भी गर्भ गृह में सीएम नीतीश कुमार के साथ मौजूद थे । ये तस्वीर और वीडियो सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी द्वारा जारी की गई है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर ने मौजूदा सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं के प्रवेश की ही अनुमति है। विधर्मी को ले जाकर सीएम नीतीश ने बड़ा पाप किया है। अब यह मंंदिर अपवित्र हो गया है। मंदिर को शुद्धिकरण करना होगा। इसलिए सीएम नीतीश इस पर तुरंत माफी मांगे और इसराइल मंसूरी से इस्तीफा ले।
कोरोना महामारी कहर बनकर आम लोगों पर टूटी है। पहली बार ऐसे हालात बने हैं कि मुक्तिधाम में शव जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। कई शहरों में शवदाह के लिए नए स्टैंड बनाने पड़े हैं। इधर, अस्पताल मरीजों से खचाखच भरे हैं लेकिन उन्हें न तो ऑक्सीजन मिल पा रही है न ही दवाएं। ग्वालियर में मंगलवार को कोरोना के 1342 नए मरीज मिले और 28 की मौत हो गई। शहर के सबसे बड़े मुक्तिधाम लक्ष्मीगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में मंगलवार को 26 शवों का कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हुआ। लगातार मौतों के कारण यहां चिता स्थल के लिए 5 घंटे की वेटिंग चल रही है। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती राजीव बुधौलिया का सोमवार सुबह साढ़े छह बजे निधन हुआ। उनके परिजन राजीव शर्मा ने बताया कि निजी एंबुलेंस से शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। पांच घंटे बाद अंतिम संस्कार हो सका। झांसी निवासी रामलली दुबे का सोमवार को निधन हुआ। पति ओमप्रकाश शव लेकर दोपहर 2 बजे मुक्तिधाम पहुंचे तो बताया गया कि उनका दसवां नंबर है, जो रात्रि आठ बजे आएगा। इसके बाद उन्होंने नकद लकड़ी-कंडे खरीदे और अंतिम संस्कार करवाया। ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में 842 कोविड बेड हैं, इनमें से 419 भरे हुए हैं। प्राइवेट अस्पतालों के 1742 में से 1077 बेड भरे हुए हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जीआरएमसी में 331 बिस्तर और बढ़ाए जा रहे हैं। हमीदिया अस्पताल का डी-ब्लॉक। 660 कोविड बेड, 595 फुल। 80 वेंटिलेटर, 250 ऑक्सीजन बेड भी फुल। इलाज में जुटे 870 डॉक्टरों में से 100 तो 650 नर्स में से 40 संक्रमित हो चुकी हैं। भदभदा विश्राम घाट में हर दिन 80 से ज्यादा कोविड अंतिम संस्कार हो रहे हैं। यहां चिता स्थल के लिए डेढ़ से दो घंटे की वेटिंग रहती है। जिला अस्पताल में न पर्याप्त बेड हैं न दवाएं मिल रही हैं और न ही ऑक्सीजन। मरीजों को भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन इंतजाम नहीं हैं। ट्रामा सेंटर में महिला सर्जिकल वार्ड में कुछ मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया गया। वहीं हड्डी वार्ड के सामने खाली बेड पड़े थे। कमलेश गौतम ने बताया कि उनके भाई भर्ती है, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए परेशान हैं। पिछले चार दिन से रोज करीब आधा दर्जन लोगों की मौत सिर्फ कोरोना से हो रही है। दो दिन पहले ऐसी स्थिति बनी कि लकड़ी-कंडे पूरी तरह खत्म हो गए। दरगाह कमेटी और ग्रामीणों ने लकड़ी-कंडों की व्यवस्था की। मंगलवार को ब्यावरा नगर पालिका ने तीन ट्रॉली जलाऊ लकड़ी शमशान के लिए मंगवाई, जिसमें से दस क्विंटल लकड़ी शमशान के पास कमरे में रखकर ताला लगा दिया गया है। इधर, ब्यावरा का कोविड केयर सेंटर मरीजों से भर चुका है। यहां रेमडेसिविर व दवाओं की भी कमी है। इसलिए लोग अन्य शहरों में जा रहे हैं। मंगलवार को विदिशा मेडिकल कॉलेज से 25 शव निकाले गए। 20 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का अंतिम संस्कार बेतवा तट स्थित मुक्तिधाम में किया गया। अप्रैल के 20 दिन में ही करीब 100 संक्रमित मरीजों का मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हो चुका है। प्रशासन बेड भले ही न बढ़ा पाया हो लेकिन मुक्तिधाम में जरूर 10 दिन के अंदर 27 नए शवदाह स्थल बना दिए हैं। जिला अस्पताल में 30 ऑक्सीजन बेड, 10 आईसीयू और 30 आइसोलेशन बेड है। सभी ऑक्सीजन और आईसीयू वार्ड फुल है। इस कारण जनरल वार्ड में कोरोना लक्षण वाले 25 मरीजों को भर्ती किया है, उन्हें वहां ऑक्सीजन चढ़ाई जा रही है। इंतजाम न होने से 20 से 25 मरीज रोज इंदौर, दाहोद व बड़ौदा इलाज कराने जा रहे हैं। विश्वसखा कॉलोनी के बिजली कर्मचारी 3 दिन से अस्पताल में भर्ती है। फेफड़ों में 60% इन्फेक्शन के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लग पाया। ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हुई तो खुद ही 70 हजार रुपए की ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीद कर लाए हैं। अशोकनगर : हिरियन के टपरा मुक्तिधाम में सोमवार को शव जलाने के लिए जगह ही नहीं बची। दो शवों को दूसरी ओर तुलसी सरोवर के पास वाले श्मशान ले जाना पड़ा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोरोना महामारी कहर बनकर आम लोगों पर टूटी है। पहली बार ऐसे हालात बने हैं कि मुक्तिधाम में शव जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। कई शहरों में शवदाह के लिए नए स्टैंड बनाने पड़े हैं। इधर, अस्पताल मरीजों से खचाखच भरे हैं लेकिन उन्हें न तो ऑक्सीजन मिल पा रही है न ही दवाएं। ग्वालियर में मंगलवार को कोरोना के एक हज़ार तीन सौ बयालीस नए मरीज मिले और अट्ठाईस की मौत हो गई। शहर के सबसे बड़े मुक्तिधाम लक्ष्मीगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में मंगलवार को छब्बीस शवों का कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हुआ। लगातार मौतों के कारण यहां चिता स्थल के लिए पाँच घंटाटे की वेटिंग चल रही है। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती राजीव बुधौलिया का सोमवार सुबह साढ़े छह बजे निधन हुआ। उनके परिजन राजीव शर्मा ने बताया कि निजी एंबुलेंस से शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। पांच घंटे बाद अंतिम संस्कार हो सका। झांसी निवासी रामलली दुबे का सोमवार को निधन हुआ। पति ओमप्रकाश शव लेकर दोपहर दो बजे मुक्तिधाम पहुंचे तो बताया गया कि उनका दसवां नंबर है, जो रात्रि आठ बजे आएगा। इसके बाद उन्होंने नकद लकड़ी-कंडे खरीदे और अंतिम संस्कार करवाया। ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में आठ सौ बयालीस कोविड बेड हैं, इनमें से चार सौ उन्नीस भरे हुए हैं। प्राइवेट अस्पतालों के एक हज़ार सात सौ बयालीस में से एक हज़ार सतहत्तर बेड भरे हुए हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जीआरएमसी में तीन सौ इकतीस बिस्तर और बढ़ाए जा रहे हैं। हमीदिया अस्पताल का डी-ब्लॉक। छः सौ साठ कोविड बेड, पाँच सौ पचानवे फुल। अस्सी वेंटिलेटर, दो सौ पचास ऑक्सीजन बेड भी फुल। इलाज में जुटे आठ सौ सत्तर डॉक्टरों में से एक सौ तो छः सौ पचास नर्स में से चालीस संक्रमित हो चुकी हैं। भदभदा विश्राम घाट में हर दिन अस्सी से ज्यादा कोविड अंतिम संस्कार हो रहे हैं। यहां चिता स्थल के लिए डेढ़ से दो घंटे की वेटिंग रहती है। जिला अस्पताल में न पर्याप्त बेड हैं न दवाएं मिल रही हैं और न ही ऑक्सीजन। मरीजों को भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन इंतजाम नहीं हैं। ट्रामा सेंटर में महिला सर्जिकल वार्ड में कुछ मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया गया। वहीं हड्डी वार्ड के सामने खाली बेड पड़े थे। कमलेश गौतम ने बताया कि उनके भाई भर्ती है, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए परेशान हैं। पिछले चार दिन से रोज करीब आधा दर्जन लोगों की मौत सिर्फ कोरोना से हो रही है। दो दिन पहले ऐसी स्थिति बनी कि लकड़ी-कंडे पूरी तरह खत्म हो गए। दरगाह कमेटी और ग्रामीणों ने लकड़ी-कंडों की व्यवस्था की। मंगलवार को ब्यावरा नगर पालिका ने तीन ट्रॉली जलाऊ लकड़ी शमशान के लिए मंगवाई, जिसमें से दस क्विंटल लकड़ी शमशान के पास कमरे में रखकर ताला लगा दिया गया है। इधर, ब्यावरा का कोविड केयर सेंटर मरीजों से भर चुका है। यहां रेमडेसिविर व दवाओं की भी कमी है। इसलिए लोग अन्य शहरों में जा रहे हैं। मंगलवार को विदिशा मेडिकल कॉलेज से पच्चीस शव निकाले गए। बीस कोरोना पॉजिटिव मरीजों का अंतिम संस्कार बेतवा तट स्थित मुक्तिधाम में किया गया। अप्रैल के बीस दिन में ही करीब एक सौ संक्रमित मरीजों का मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हो चुका है। प्रशासन बेड भले ही न बढ़ा पाया हो लेकिन मुक्तिधाम में जरूर दस दिन के अंदर सत्ताईस नए शवदाह स्थल बना दिए हैं। जिला अस्पताल में तीस ऑक्सीजन बेड, दस आईसीयू और तीस आइसोलेशन बेड है। सभी ऑक्सीजन और आईसीयू वार्ड फुल है। इस कारण जनरल वार्ड में कोरोना लक्षण वाले पच्चीस मरीजों को भर्ती किया है, उन्हें वहां ऑक्सीजन चढ़ाई जा रही है। इंतजाम न होने से बीस से पच्चीस मरीज रोज इंदौर, दाहोद व बड़ौदा इलाज कराने जा रहे हैं। विश्वसखा कॉलोनी के बिजली कर्मचारी तीन दिन से अस्पताल में भर्ती है। फेफड़ों में साठ% इन्फेक्शन के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लग पाया। ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हुई तो खुद ही सत्तर हजार रुपए की ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीद कर लाए हैं। अशोकनगर : हिरियन के टपरा मुक्तिधाम में सोमवार को शव जलाने के लिए जगह ही नहीं बची। दो शवों को दूसरी ओर तुलसी सरोवर के पास वाले श्मशान ले जाना पड़ा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस (Jacqueline Fernandez) इन दिनों अपनी फिल्म 'रामसेतु' में बिजी हैं। इसके बावजूद वो अपने बोल्ड अंदाज को फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। एक्ट्रेस के पास ना सिर्फ शानदार एक्टिंग स्किल है बल्कि उनका लुक भी कुछ ऐसा है जो उन्हें एक बार देख ले वो बार-बार देखता है। श्रीलंकाई हसीना एक बेहतरीन फिगर की मल्लिका है। वो अपनी खूबसूरती को आए दिन तस्वीरों के जरिए लोगों के साथ साझा करती हैं। सलमान की हीरोइन ने अपनी दुबई की तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली है। बिल्डिंग की टेरेस पर अभिनेत्री ब्लू बिकीनी में चिल करती नजर आई। नीचे देखते हैं जैकलीन की कुछ बोल्ड और खूबसूरत तस्वीरें जो लोगों को दीवाना बना रही है। मुंबई. टेलीविजन की दुनिया में अपना नाम बनाने वाली मौनी रॉय (Mouni Roy)अब बॉलीवुड में अपने जलवे बिखरे रही हैं। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मौनी अक्षय कुमार (Akshay Kumar) और जॉन अब्राहम (John Abraham) जैसे सितारों के साथ वो लीड रोल निभा चुकी हैं। एक्ट्रेस ना सिर्फ अपनी एक्टिंग के बदौलत बल्कि अपने ड्रेसिंग सेंस को लेकर भी चर्चे में रहती हैं। वो आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी हॉट तस्वीरें डालती रहती है। इसके साथ ही उन्हें अलग-अलग जगह पर जबरदस्त अंदाज में स्पॉट भी किया जाता है। हाल ही में अभिनेत्री को अंधेरी में ब्लैक ड्रेस में स्पॉट किया गया। वो गजब की खूबसूरत लग रही थी। आइए उनकी हसीन तस्वीर के साथ उनके बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियां देते हैं।
मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस इन दिनों अपनी फिल्म 'रामसेतु' में बिजी हैं। इसके बावजूद वो अपने बोल्ड अंदाज को फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। एक्ट्रेस के पास ना सिर्फ शानदार एक्टिंग स्किल है बल्कि उनका लुक भी कुछ ऐसा है जो उन्हें एक बार देख ले वो बार-बार देखता है। श्रीलंकाई हसीना एक बेहतरीन फिगर की मल्लिका है। वो अपनी खूबसूरती को आए दिन तस्वीरों के जरिए लोगों के साथ साझा करती हैं। सलमान की हीरोइन ने अपनी दुबई की तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली है। बिल्डिंग की टेरेस पर अभिनेत्री ब्लू बिकीनी में चिल करती नजर आई। नीचे देखते हैं जैकलीन की कुछ बोल्ड और खूबसूरत तस्वीरें जो लोगों को दीवाना बना रही है। मुंबई. टेलीविजन की दुनिया में अपना नाम बनाने वाली मौनी रॉय अब बॉलीवुड में अपने जलवे बिखरे रही हैं। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मौनी अक्षय कुमार और जॉन अब्राहम जैसे सितारों के साथ वो लीड रोल निभा चुकी हैं। एक्ट्रेस ना सिर्फ अपनी एक्टिंग के बदौलत बल्कि अपने ड्रेसिंग सेंस को लेकर भी चर्चे में रहती हैं। वो आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी हॉट तस्वीरें डालती रहती है। इसके साथ ही उन्हें अलग-अलग जगह पर जबरदस्त अंदाज में स्पॉट भी किया जाता है। हाल ही में अभिनेत्री को अंधेरी में ब्लैक ड्रेस में स्पॉट किया गया। वो गजब की खूबसूरत लग रही थी। आइए उनकी हसीन तस्वीर के साथ उनके बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियां देते हैं।
रोमः मध्य इटली में बुधवार को आए भूकंप में मृतकों की संख्या बढ़कर 247 हो गई है. भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6. 2 मापी गई. 'बीबीसी' ने विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया कि भूकंप में 360 से अधिक लोग घायल हो गए और अभी भी कई लोग मलबे के नीचे दबे हैं. बचाव कार्यो के लिए 4,300 लोगों को तैनात किया गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत गंभीर होने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है. इटली में बुधवार को सुबह 3. 36 बजे तेज भूकंप आया था. विभाग के मुताबिक, मध्य इटली के रिएती प्रांत में सर्वाधिक 190 लोगों की मौत हुई है जबकि एस्कोली पिसेनो प्रांत में 57 लोगों की मौत हुई है. बचावकर्मियों का कहना है कि उन्होंने एमाट्रिस के होटल रोमा के मलबे से पांच शवों को बाहर निकाला. अधिकारियों का कहना है कि होटल में लगभग 35 लोग थे जिनमें से अधिकतर बचकर बाहर निकलने में कामयाब रहे. एक स्थानीय दमकलकर्मी का कहना है कि लगभग 10 लोगों का अभी भी कुछ पता नहीं है.
रोमः मध्य इटली में बुधवार को आए भूकंप में मृतकों की संख्या बढ़कर दो सौ सैंतालीस हो गई है. भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छः. दो मापी गई. 'बीबीसी' ने विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया कि भूकंप में तीन सौ साठ से अधिक लोग घायल हो गए और अभी भी कई लोग मलबे के नीचे दबे हैं. बचाव कार्यो के लिए चार,तीन सौ लोगों को तैनात किया गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत गंभीर होने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है. इटली में बुधवार को सुबह तीन. छत्तीस बजे तेज भूकंप आया था. विभाग के मुताबिक, मध्य इटली के रिएती प्रांत में सर्वाधिक एक सौ नब्बे लोगों की मौत हुई है जबकि एस्कोली पिसेनो प्रांत में सत्तावन लोगों की मौत हुई है. बचावकर्मियों का कहना है कि उन्होंने एमाट्रिस के होटल रोमा के मलबे से पांच शवों को बाहर निकाला. अधिकारियों का कहना है कि होटल में लगभग पैंतीस लोग थे जिनमें से अधिकतर बचकर बाहर निकलने में कामयाब रहे. एक स्थानीय दमकलकर्मी का कहना है कि लगभग दस लोगों का अभी भी कुछ पता नहीं है.
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली के निजामुद्दीन (Nizamuddin) इलाके से लगातार मिल रहे कोरोना (Coronavirus) संदिग्धों के चलते राजधानी में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार (Delhi Govt) ने फैसला लिया है कि द्वारका के सेक्टर 9 में सबसे बड़ा क्वॉरेंटाइन सेंटर (quarantine center) बनाया जाएगा। इसमें 2500 बेड होंगे। यह दिल्ली सरकार का नवनिर्मित अस्पताल है जिसे अभी शुरू नहीं किया गया है। अब इसे क्वॉरेंटाइन के लिए यूज किया जाएगा। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने बताया है कि निजामुद्दीन के आलमी मरकज की बिल्डिंग को खाली करा लिया गया है। विशेष अभियान के तहत यहां से कुल 2361 लोगों को निकाला गया है। सिसोदिया ने लिखा है कि करीब 36 घंटे के इस ओपरेशन में मेडिकल स्टाफ़, प्रशासन, पुलिस, डीटीसी स्टाफ़ सबने मिलकर, अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। इनमें 617 लोगों को विभिन्न अस्पताल में रखा गया है, वहीं बाकियों का क्वारेंटाइन किया जा रहा है। निजामुद्दीन मरकज से मामला सामने आने के बाद लोकनायक अस्पताल (LNJP Hospital) में कोरोना संक्रमित (Coronavirus) मरीजों की संख्या में अचानक से बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर, नर्स अन्य स्टॉफ को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। दरअसल लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल में व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही है। यूनियन जनरल सेक्रेटरी जीमेल शाजी का कहना है कि इसको लेकर लगातार आला अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहे हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने विश्वास जताया है कि जल्द से जल्द सारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी। मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद जो भी कमी दिख रही है उससे निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन तत्पर है। कोरोना वायरसः जिम बंद हुए हैं एक्सरसाइज नहीं, 'वर्क फ्रॉम होम' की जगह करें 'वर्कआऊट फ्रॉम होम'
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से लगातार मिल रहे कोरोना संदिग्धों के चलते राजधानी में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि द्वारका के सेक्टर नौ में सबसे बड़ा क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाया जाएगा। इसमें दो हज़ार पाँच सौ बेड होंगे। यह दिल्ली सरकार का नवनिर्मित अस्पताल है जिसे अभी शुरू नहीं किया गया है। अब इसे क्वॉरेंटाइन के लिए यूज किया जाएगा। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया है कि निजामुद्दीन के आलमी मरकज की बिल्डिंग को खाली करा लिया गया है। विशेष अभियान के तहत यहां से कुल दो हज़ार तीन सौ इकसठ लोगों को निकाला गया है। सिसोदिया ने लिखा है कि करीब छत्तीस घंटाटे के इस ओपरेशन में मेडिकल स्टाफ़, प्रशासन, पुलिस, डीटीसी स्टाफ़ सबने मिलकर, अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। इनमें छः सौ सत्रह लोगों को विभिन्न अस्पताल में रखा गया है, वहीं बाकियों का क्वारेंटाइन किया जा रहा है। निजामुद्दीन मरकज से मामला सामने आने के बाद लोकनायक अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में अचानक से बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर, नर्स अन्य स्टॉफ को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। दरअसल लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल में व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही है। यूनियन जनरल सेक्रेटरी जीमेल शाजी का कहना है कि इसको लेकर लगातार आला अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहे हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने विश्वास जताया है कि जल्द से जल्द सारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी। मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद जो भी कमी दिख रही है उससे निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन तत्पर है। कोरोना वायरसः जिम बंद हुए हैं एक्सरसाइज नहीं, 'वर्क फ्रॉम होम' की जगह करें 'वर्कआऊट फ्रॉम होम'
Sengol History: 28 मई 2023 को देश के नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं। इस संसद भवन के तैयार होने के साथ ही अब एक शब्द तेजी से सुर्खियों में आ गया है। अब से लोकसभा स्पीकर के आसन के पास सेंगोल होगा। यह सेंगोल शब्द तेजी से सुर्खियों में आया है। आज से पहले शायद किसी को नहीं पता था कि यह सेंगोल क्या है और अचानक यह क्यों कई सालों बाद खबरों में आता है। आपको बता दें कि सेंगोल का मतलब है राजदंड। अक्सर आपने देखा होगा कि पुराने जमाने में भारतीय राजाओं के पास राजदंड होता था जिसका आदेश सभी को मानना होता था। सेंगोल के बारे में प्रधानमंत्री कार्यलय को एक खत के द्वारा पता चला। दरअसल 2 साल पहले एक खत में सेंगोल के बारे में बताया गया था। यह खत चर्चित डांसर पद्मा सुब्रमण्यम ने लिका था। द हिंदू में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक पद्मान सुब्रमण्यम ने पीएमओं को लिखी अपनी चिट्ठी में तमिल मैगजीन 'तुगलक' एक आर्टिकल का हवाला दिया था। जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सेंगोल सौंपने की बात कगी गई थी। पीएमओ को जब भारत की इस धरोहर के बारे में पता चला तो इसकी खोज में संस्कृति मंत्रालय जुट गया। संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) की मदद ली। कला केंद्र के एक्सपर्ट्स ने अर्काइव्स को छान मारा तो उन्हें पता चला कि यह सेंगोल इलाहाबाद के म्यूजियम में रखा हुआ है। सेंगोल के अस्तित्व को कंफर्म करने के लिए मंत्रालय की टीम वुम्मिडी बंगारू चेट्ठी परिवार से भी मिली जिन्होंने कंफर्म किया कि सेंगोल तैयार किया गया था। इस जांच में संस्कृति मंत्रालय को यह भी पता चला कि साल 1947 में भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा नेहरू को सेंगोल सौंपा गया था। इस सेंगोल को मद्रास के प्रसिद्ध ज्वैलर्स वुम्मिडी बंगारू चेट्टी एंड सन्स द्वारा तैयार किया गया था। बता दें कि साल 1947 में इसे तैयार करने में कुल 15 हजार रुपये खर्च करने पड़े थे।
Sengol History: अट्ठाईस मई दो हज़ार तेईस को देश के नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं। इस संसद भवन के तैयार होने के साथ ही अब एक शब्द तेजी से सुर्खियों में आ गया है। अब से लोकसभा स्पीकर के आसन के पास सेंगोल होगा। यह सेंगोल शब्द तेजी से सुर्खियों में आया है। आज से पहले शायद किसी को नहीं पता था कि यह सेंगोल क्या है और अचानक यह क्यों कई सालों बाद खबरों में आता है। आपको बता दें कि सेंगोल का मतलब है राजदंड। अक्सर आपने देखा होगा कि पुराने जमाने में भारतीय राजाओं के पास राजदंड होता था जिसका आदेश सभी को मानना होता था। सेंगोल के बारे में प्रधानमंत्री कार्यलय को एक खत के द्वारा पता चला। दरअसल दो साल पहले एक खत में सेंगोल के बारे में बताया गया था। यह खत चर्चित डांसर पद्मा सुब्रमण्यम ने लिका था। द हिंदू में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक पद्मान सुब्रमण्यम ने पीएमओं को लिखी अपनी चिट्ठी में तमिल मैगजीन 'तुगलक' एक आर्टिकल का हवाला दिया था। जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सेंगोल सौंपने की बात कगी गई थी। पीएमओ को जब भारत की इस धरोहर के बारे में पता चला तो इसकी खोज में संस्कृति मंत्रालय जुट गया। संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की मदद ली। कला केंद्र के एक्सपर्ट्स ने अर्काइव्स को छान मारा तो उन्हें पता चला कि यह सेंगोल इलाहाबाद के म्यूजियम में रखा हुआ है। सेंगोल के अस्तित्व को कंफर्म करने के लिए मंत्रालय की टीम वुम्मिडी बंगारू चेट्ठी परिवार से भी मिली जिन्होंने कंफर्म किया कि सेंगोल तैयार किया गया था। इस जांच में संस्कृति मंत्रालय को यह भी पता चला कि साल एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा नेहरू को सेंगोल सौंपा गया था। इस सेंगोल को मद्रास के प्रसिद्ध ज्वैलर्स वुम्मिडी बंगारू चेट्टी एंड सन्स द्वारा तैयार किया गया था। बता दें कि साल एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में इसे तैयार करने में कुल पंद्रह हजार रुपये खर्च करने पड़े थे।
कल देशभर के कई इलाकों में गणपति विसर्जन का उत्सव मनाया गया। इस मौके पर लोग-बाग नदी नहरों में अपने घर में रखी भगवान गणेश की प्रतिम को विसर्जित करके आते हैं। देश के कई जगहों से विसर्जन के दौरान हादसे की खबरें सामने आई हैं। मुंबई और यूपी के बाराबंकी इलाके से गणेश भगवान की मूर्ति का विसर्जन करने गए कई लोगों की मौत हो गई। मुंबई में पांच बच्चे इस दौरान डूब गए, जिनमें दो अब भी लापता हैं। वहीं यूपी में एक महिला और दो बच्चों समेत कुल पांच लोगों के डूबने की घटना सामने आई है। इसके अलावा हरियाणा में भी नाव पलटने के बाद दो लोगों के लापता होने की खबर है। मुंबई के शनिवार को गणपती विसर्जन के दौरान वर्सोवा बीच इलाके में पांच बच्चे समुद्र में डूब गए। घटना को लेकर मुंबई फायर ब्रिगेड ने कहा कि स्थानीय लोगों ने दो बच्चों को तुरंत बचा लिया और उन्हें इलाज के लिए कूपर अस्पताल ले गए जबकि तीन बच्चों की तलाश अभी भी जारी है। घटनास्थल पर बचाव कार्य किया जा रहा है। फायर ब्रिगेड विभाग ने कहा कि तीन और बच्चों की तलाश के लिए लाइफ ब्वॉय और मनीला रोप, फ्लड रेस्क्यू टीम द्वारा एलईडी लाइट के जरिए डूबने वाले स्थान पर और आसपास के क्षेत्र में फेरी बोट का उपयोग करके बचाव अभियान चलाया जा रहा है। तीन बच्चों को खोजने के लिए पुलिस बोट की भी मदद मांगी गई है। बचाव कार्य को ध्यान में रखते हुए जेट्टी की फ्लड लाइटें भी ऑन रखी गई हैं। यूपी के बाराबंकी में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। मसौली थाना के सआदतगंज कस्बा में रविवार को कल्याणी नदी के भोहरा घाट पर गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक महिला व उसके दो बेटों समेत पांच लोग नदी के तेज बहाव में बह गए। इससे हड़कंप मच गया। पुलिस ने नदी में डूबे लोगों की तलाश में गोताखोर लगाए। मशक्कत के बाद महिला का शव निकाला गया। एसपी व विधायक मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को डूबे लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। देर शाम एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई। हरियाणा के यमुना नगर में भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के दौरान यमुना नदी में कई लोग डूब गये। इनमें से दो लोग लापता हैं। यमुना नगर के ड्यूटी मजिस्ट्रेट तरुण साहोता ने रविवार की शाम को बताया कि कुछ लोग नदी में गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति नदी में डूब गया। उसकी तलाश के लिए नाव पर सवार होकर कुछ लोग यमुना नदी में गये। यमुना नगर के ड्यूटी मजिस्ट्रेट तरुण सहोता कहते हैं, "चार लोगों को बचा लिया गया है।
कल देशभर के कई इलाकों में गणपति विसर्जन का उत्सव मनाया गया। इस मौके पर लोग-बाग नदी नहरों में अपने घर में रखी भगवान गणेश की प्रतिम को विसर्जित करके आते हैं। देश के कई जगहों से विसर्जन के दौरान हादसे की खबरें सामने आई हैं। मुंबई और यूपी के बाराबंकी इलाके से गणेश भगवान की मूर्ति का विसर्जन करने गए कई लोगों की मौत हो गई। मुंबई में पांच बच्चे इस दौरान डूब गए, जिनमें दो अब भी लापता हैं। वहीं यूपी में एक महिला और दो बच्चों समेत कुल पांच लोगों के डूबने की घटना सामने आई है। इसके अलावा हरियाणा में भी नाव पलटने के बाद दो लोगों के लापता होने की खबर है। मुंबई के शनिवार को गणपती विसर्जन के दौरान वर्सोवा बीच इलाके में पांच बच्चे समुद्र में डूब गए। घटना को लेकर मुंबई फायर ब्रिगेड ने कहा कि स्थानीय लोगों ने दो बच्चों को तुरंत बचा लिया और उन्हें इलाज के लिए कूपर अस्पताल ले गए जबकि तीन बच्चों की तलाश अभी भी जारी है। घटनास्थल पर बचाव कार्य किया जा रहा है। फायर ब्रिगेड विभाग ने कहा कि तीन और बच्चों की तलाश के लिए लाइफ ब्वॉय और मनीला रोप, फ्लड रेस्क्यू टीम द्वारा एलईडी लाइट के जरिए डूबने वाले स्थान पर और आसपास के क्षेत्र में फेरी बोट का उपयोग करके बचाव अभियान चलाया जा रहा है। तीन बच्चों को खोजने के लिए पुलिस बोट की भी मदद मांगी गई है। बचाव कार्य को ध्यान में रखते हुए जेट्टी की फ्लड लाइटें भी ऑन रखी गई हैं। यूपी के बाराबंकी में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। मसौली थाना के सआदतगंज कस्बा में रविवार को कल्याणी नदी के भोहरा घाट पर गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक महिला व उसके दो बेटों समेत पांच लोग नदी के तेज बहाव में बह गए। इससे हड़कंप मच गया। पुलिस ने नदी में डूबे लोगों की तलाश में गोताखोर लगाए। मशक्कत के बाद महिला का शव निकाला गया। एसपी व विधायक मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को डूबे लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। देर शाम एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई। हरियाणा के यमुना नगर में भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के दौरान यमुना नदी में कई लोग डूब गये। इनमें से दो लोग लापता हैं। यमुना नगर के ड्यूटी मजिस्ट्रेट तरुण साहोता ने रविवार की शाम को बताया कि कुछ लोग नदी में गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति नदी में डूब गया। उसकी तलाश के लिए नाव पर सवार होकर कुछ लोग यमुना नदी में गये। यमुना नगर के ड्यूटी मजिस्ट्रेट तरुण सहोता कहते हैं, "चार लोगों को बचा लिया गया है।
बुद्धि दांत निकाल दिया, कितना यह अपने जबड़े को नुकसान होगा? बुद्धि दांत थोड़ा खुशी के हैं, भले ही लोग उन्हें काफी अच्छी तरह से कहा जाता है। दंत चिकित्सक अक्सर आगे की समस्याओं से बचने के लिए उनमें से छुटकारा पाने के लिए, की सलाह दी। तो परेशान मत हो अगर आप एक ज्ञान दांत निकाल दिया है। यह तो कितना घाव को नुकसान होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। ताकि उन्हें समझने के लिए, आप इन दांत और उनके हटाने की सुविधाओं की प्रकृति की समझ की आवश्यकता है। अब यह कोई रहस्य नहीं है कि मानव में अस्थि ऊतक के गठन के बारे में 25 वर्षों में समाप्त होता है। इस समय तक, यह उनके मुंह में डाल दिया और जगह सफलतापूर्वक सभी अपनी मास्टर की भलाई के लिए काम करने के लिए समय लगता है दाढ़। सभी लेकिन शृंखला के अंतिम आठवें (यदि दो बराबर हिस्सों में एक लंबवत बार जबड़े से विभाजित)। "आठ" इतनी देर से आने कि वे ज्ञान दांत कहा जाता था क्योंकि 25 साल के एक आदमी जीवन अनुभव हासिल करने में कामयाब रहा है। चिकित्सकों तीसरे दाढ़ कहा जाता है, कि तीसरे स्वदेशी चबाने है। वैसे, ऐसे मामले हैं जब ज्ञान दांत केवल 40 साल की उम्र बढ़ने या बिल्कुल भी विकसित नहीं कर रहे हैं। कुछ भाग्यशाली वे एक परिपक्व उम्र तक मुंह में रहते हैं, ठीक से भोजन को चबाने, कृत्रिम अंग के साथ मदद। सभी बाकी है, जो, दुर्भाग्य से, अधिकांश तीसरी दाढ़ मुसीबत का एक बहुत लाने के लिए। कुछ क्यों हमारे बुद्धिमान शरीर में इस तरह के बेकार दांत, जो सामान्य रूप में नहीं होना चाहिए के अस्तित्व की अनुमति देता है। दुर्भाग्य से, "आठ का समूह" हम अपने बहुत दूर पूर्वजों कि मोटा चारा खिलाया गया से विरासत में मिली है। उनके जबड़े व्यापक थे, और "अतिरिक्त" दांत उन लोगों के साथ हस्तक्षेप नहीं करते। अब हमारे आहार, पर बदलाव आया है ताकि जबड़े छोटे बन गया। तो गलत है, तो एक ज्ञान दांत निकाल दिया कोई बात नहीं है। कितना यह मसूड़ों को नुकसान होगा और केवल मसूड़ों तो क्या होगा? क्यों जटिलताएं हैं, और जो इसके लिए जिम्मेदार है? सबसे अधिक बार दांत ही दोषी ठहराते हैं। तथ्य यह है जबड़े में अंतरिक्ष वे कोई विकल्प नहीं है जब पिछले दाढ़ देखते हैं कि। लेकिन फूटना क्योंकि जहां यह आवश्यक है। यही कारण है कि बढ़ रही है ज्ञान दांत यादृच्छिक और यादृच्छिक पर, अगले खड़े "सात" को नष्ट करने, अपने गाल को घायल कर काटने को बदलने, दंत क्षय और अन्य समस्याओं के एक मेजबान के कारण। , गाल, जीभ की दिशा में आसन्न दांत के लिए एक तिरछा पर, और यहां तक कि पूरी तरह से क्षैतिज - वे किसी भी दिशा में तुला किया जा सकता है। दूसरा विकल्प विशेष रूप से समस्याग्रस्त है। बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, कितना नुकसान होगा घाव, मसूड़ों, पड़ोसी एक बड़ी हद तक क्षेत्रों मुंह में दांत की स्थिति पर निर्भर करता है। सबसे आम परेशानी 5-7 दिनों तक रहता है। लेकिन अगर पहले हटाने दांत आसपास के ऊतकों के स्थान पर पीप सूजन ले लिया है, दर्द बहुत लंबे समय तक रहता है। कि से, एक दांत निकाल दिया जिसे ऊपरी या निचले जबड़े में दर्द की अवधि पर निर्भर है। इस तथ्य के कारण है कि दाढ़ की तीसरी दाढ़ तल पर की तुलना में थोड़ा और अधिक स्थान। इसलिए, वे वहाँ ज्यादातर सपाट या एक मामूली कोण है, जो इसे आसान बना देता है और दंत चिकित्सक और रोगी में हो जाना। इसके अलावा चिकित्सक लिए और अधिक सुविधाजनक उपयोग के साथ ऊपरी जबड़े में। में निचले जबड़े हड्डी को काफी घना है, ज्ञान दांत अक्सर काफी गलत हो जाना, और हटाने लगभग हमेशा जटिल है। इसलिए, इस मामले में, प्रश्नः "आप एक ज्ञान दांत निकालते हैं, तो कितना नुकसान होगा? " - इस सवाल का जवाब बहुत आरामदायक नहीं है। कभी-कभी इस प्रक्रिया को दो सप्ताह तक देरी हो रही है। प्रकृति और दांत अंतरिक्ष के विकास के आधार पर, अपनी जड़ों की राशि पर दांत के पिछले ऑपरेशन राज्य और उसके आसपास के ऊतक को हटाने से, (तीसरी दाढ़ से 2 से 5 तक हो सकता है) हो सकता है सरल (पारंपरिक) और जटिल। और उससे पहले, और एक अन्य जरूरी प्रदर्शन एक्स-रे से पहले। बस हटाने जब विश्वास करते हैंः - एक दांत, या कम से कम यह मसूड़ों का हिस्सा लग रहा था; - दाढ़ वास्तव में या एक मामूली झुकाव के साथ बढ़ता है, - कोई मुड़, घुमावदार वस्तुओं को हटाने के लिए जड़ों; - रोगी पीप मनाया जाता है मसूड़ों की सूजन या एक ज्ञान दांत (pericoronitis) के हुड। बेशक, अगर ऐसा होता है, ज्ञान दांत, गले में मसूड़ों, और कभी कभी गाल, क्योंकि आघात ऊतक को हटा दें। अप्रिय अनुभूतियां के बाद संज्ञाहरण कार्रवाई करेंगे शुरू करते हैं। आमतौर पर डॉक्टर रोगी एक एनाल्जेसिक पीने के लिए और झूठ बोलने की सलाह देता है। इस अवधि में कुल्ला सख्ती से, निषिद्ध है ताकि घाव का थक्का से दूर करने के लिए नहीं। अन्यथा alveolitis (सूखा कुओं रोग) शुरू कर सकते हैं। यह बुखार, तीव्र दर्द और सूजन की विशेषता है। प्रभावित क्षेत्र के गरम सख्त वर्जित है! एक नियम के लिए, बस 2-3 घंटे के लिए अंत हटाने के बाद मुख्य समस्याओं के रूप में। लेकिन अगर बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, गले में 3 दिन, दर्द की तीव्रता की तुलना में अधिक मसूड़ों, जरूरत के रूप में जितनी जल्दी हो सके एक डॉक्टर से परामर्श। कभी कभी यह पुटी में मौजूदा, और स्थानांतरित कर संचालन के लिए नहीं के साथ जुड़े मसूड़ों में दर्द है, लेकिन निर्धारित करने के लिए यह केवल एक विशेषज्ञ हो सकता है। दुर्भाग्य से, तीसरी दाढ़ से छुटकारा हमेशा पारित करने के लिए आसान नहीं है। सबसे सामान्य कारणों में दांत ग्रस्त हैं और डॉक्टर और मरीज। जटिल हटाने अगर माना जाता हैः - ज्ञान दांत (विशेष रूप से जबड़ा में) एक बड़े झुकाव या क्षैतिज रूप में स्थित है; - यह, कि है, मसूड़ों में रहता नहीं काटा जा सकता; - दांतों के आसपास के ऊतक में सूजन, एक festering है, खासकर अगर। पहले और दूसरे मामलों में ऑपरेशन से पहले संज्ञाहरण मजबूत किया जाता है। चिकित्सक रोगी एक चीरा मसूड़ों और कभी कभी भी खोखला जबड़े की हड्डी, दांत को पाने के लिए बनाता है। उन्होंने कहा कि कुछ हिस्सों को हटा दिया है, और यह कभी कभी, ड्रिल टुकड़ों में काट, केविंग लिए आवश्यक है। इन सभी जोड़तोड़ के अंत में हमेशा उसे टुकड़ों में शेष होल की उपस्थिति के लिए जाँच की। घाव पट्टी के अंत में दवाओं है कि मरीज 10-15 मिनट के बाद बाहर थूक दिया जाना चाहिए करने के लिए लागू किया जाता है। यह तो एक ज्ञान दांत निकाल दिया जाता है, तो कितना जबड़े को नुकसान होगा ठीक करने के लिए रोगी की व्यक्तिगत विशेषताओं पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि इस तरह के एक दूरी काफी नुकसान पर स्पष्ट है और नरम और अस्थि ऊतक प्रभावित करते हैं। सर्जरी के बाद, एक घाव में लगातार तेज दर्द, कभी कभी आसन्न दांत, यहां तक कि गले और कान में। कुछ रोगियों को एक तापमान वृद्धि और होंठ, ठोड़ी, जीभ का अकड़ना की है। चिकित्सा की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, डॉक्टर लगभग हमेशा एंटीबायोटिक दवाओं का प्रावधान है। तो इस प्रकार एक ज्ञान दांत, हटाने के बाद सूजन गाल, यह सामान्य माना जाता है। के बारे में 3-5 दिन और सूजन, और स्तब्ध हो जाना जाना चाहिए। लेकिन अगर सूजन बढ़ जाती है, कठिनाइयों श्वास के साथ शुरू करते हैं, निगल, शरीर पर दाने, तो आप तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना चाहिए। अगर ऊपरी ज्ञान दांत निकाल दिया, और ऑपरेशन आसान और त्वरित था, और जटिलताओं दुर्लभ हैं। लेकिन ऐसे मामलों में, रोगी व्यक्ति थोड़ा तापमान (37,5-37,7 के बारे में डिग्री सेल्सियस तक) बढ़ा सकते हैं। इस चोट के कारण ऊतक की अनुमति सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया माना जाता है। इस स्थिति में antipyretics की स्वीकृति दुर्लभ था। एक नियम के, दूसरे दिन के अंत के तापमान वापस सामान्य दवाओं के बिना के रूप में। आप कम ज्ञान दांत और बुखार, प्लस सूजन गाल को हटाने और घाव bleeds हैं, तो भी, घबराओ मत। और इस तरह के एक ऑपरेशन के बाद, यह (प्रावधान है कि चिकित्सा में अच्छी तरह से चला जाता है) के साथ एक या दो दिन में पास करना चाहिए। लेकिन स्थितियों जब घायल क्षेत्र की बहाली के दौरान वहाँ जटिलताओं कि चिकित्सक हस्तक्षेप की आवश्यकता कर रहे हैं देखते हैं। यदि एक ज्ञान दांत निकाल दिया करने के बाद, तापमान, कई दिनों के लिए रखा है, तो यह तेजी से बढ़ जाती है, तो यह अचानक ऑपरेशन के बाद कुछ ही दिनों में दिखाई दिया, इसका मतलब यह हो सकता हैः - घाव संक्रमण था, - सूजन; - घाव में वहाँ (टुकड़ा तंपन दांत की जड़ का एक टुकड़ा,) एक विदेशी वस्तु है; - alveolitis (कुओं सूजन); - एलर्जी की प्रतिक्रिया; - आसन्न दूरदराज के दांत (विशेष रूप से उसकी जड़ भाग में) traumatizing; - तंत्रिका फंसाने। अभ्यास में दंत चिकित्सकों मरीजों की लगातार शिकायतों है कि एक बार उनके ज्ञान दांत निकाल दिया, एक गले में खराश, यह निगल करने के लिए मुश्किल था कर रहे हैं। इसका कारण यह है "आठ" की जड़ों अक्सर त्रिपृष्ठी तंत्रिका के करीब निकटता में स्थित हैं। अगर आपरेशन वह चोट लगी थी या आगे सूजन, वहाँ गले में दर्द है। निकासी के बाद ऊपरी श्वास नलिका के कुछ स्थितियों बेचैनी में लक्षण alveolitis शुरू किया, तापमान में वृद्धि होती है, खासकर अगर कर रहे हैं। अक्सर रोगी दोष, खून का थक्का कुओं rinses या अन्य कार्यों को हटा दें। ऐसे मामले केवल उसके गले के बारे में चिंतित नहीं है, लेकिन कान, जबड़े, स्वस्थ दांतों, गर्दन, छाती के बाद भी एक ज्ञान दांत निकाल दिया हैं। कितना यह जबड़े और ऊपरी श्वसन अंगों को नुकसान होगा, यह जीव की क्षमताओं पर और रोगी के व्यवहार की वैधता पर निर्भर करता है। रोगी डॉक्टर के निर्देशों का वास्तव में और नहीं का पालन करना चाहिए उपचार अपने विवेक पर से निपटने क्योंकि ऐसे मामले हैं जब सर्जरी नहीं की वजह से ऊपरी श्वास नलिका में दर्द, और जुकाम की शुरुआत। तीसरा दाढ़, के रूप में वे चबाने रहे हैं दांत लगभग हमेशा आकार में बड़े होते। इसलिए, एक ज्ञान दांत, एक छेद या एक छेद को दूर करने के लिए सबसे आसान तरीका महत्वपूर्ण है, भले ही। कुछ मामलों में, टांके के साथ बंद हुआ। तंतु इस प्रकार के रूप में अवशोषित और गैर अवशोषित करते थे। अगर सर्जरी से पहले "आठ" क्षेत्र या पीप सूजन की जड़ों में एक पुटी था, छेद खुला छोड़ दिया। समय के साथ यह देरी हो रही है, गम भाग कम है और चिंता करना बंद कर रहा है। जब जटिल हेरफेर मसूड़ा incising या gouging जबड़े की हड्डी तेजी जरूरी ओवरलैप। कई तो चिंता एक ज्ञान दांत के रूप में हटाया के बाद टांके इस जगह को चंगा। बेशक, इस मामले में ऊतक की मरम्मत की प्रक्रिया लंबे समय तक हो जाएगा, और अगर सीवन धागे से अवशोषित नहीं है, यह जरूरी है कि एक बार फिर से उन्हें हटाने के लिए दंत चिकित्सक का दौरा करने के। लेकिन परेशान अभी भी नहीं है। मुख्य बात - यह सुनिश्चित करें कि सीवन क्षेत्र में सूजन और पीप आना नहीं था बनाने के लिए। कभी कभी तीसरा दाढ़ अपने स्वयं के हुड हो सकता है। यह बस मसूड़ों भाग, एक गुना overhanging जो फूटना दांत शुरू कर दिया नहीं है। इसके बारे में कुछ अच्छा है, क्योंकि इस तरह के एक "संरचना" एक जेब की तरह कुछ का गठन पर है, जिसमें खाद्य कणों को साफ करने के लिए बहुत मुश्किल है। जो लोग साफ बैक्टीरिया के लिए एक उत्कृष्ट पर्यावरण खुलासा धीरे-धीरे क्षय करने के लिए शुरू नहीं कर सकते। वे, बारी में, सूजन और क्षय के विकास में योगदान। इस घटना के लक्षण इस प्रकार हैः - मुंह से एक अप्रिय गंध, सावधानी पूर्वक के बावजूद; - दांत विस्फोट के स्थल पर दर्द; - मसूड़ों और गालों की सूजन; - मुंह में एक विदेशी वस्तु की मौजूदगी की बेचैनी की भावना। सही समाधान हुड काट, और अक्सर दांत से छुटकारा पाने के लिए है। अगर केवल एक ज्ञान दांत के साथ हुड हटा दिया है, तो डॉक्टर सही तीसरे दाढ़ बनाए रखा पाया। तो स्थितियों में, जहां "आठ" पूरी तरह से स्वस्थ, आसन्न दांत के साथ हस्तक्षेप नहीं करता है, सुचारू रूप से बढ़ रही है और काटने के परिवर्तन नहीं करता है में आते हैं। अपने आप से, प्रक्रिया छांटना (हटाने) के हुड सरल है और काफी आसानी से स्थानांतरित कर दिया है। इसके बाद जोड़ों लागू नहीं किया। अगर चिकित्सक को बरकरार रखा ज्ञान दांत से बढ़ पूरा नहीं हुआ है समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में, हुड फिर से गठन किया जा सकता। एक मरीज निदान perikoronit कर दिया गया है (हुड की सूजन), के बाद एक एंटीबायोटिक की छांटना निर्धारित है, और विशेष स्नान। दांत निकाले गए ज्ञान की। क्या करें? शुरू करने के लिए, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि दंत चिकित्सक को हटाने का सवाल ही एक्स-रे के बाद फैसला किया। यह भले ही दांत स्पष्ट रूप से नग्न आंखों के लिए दिख रहा है, के रूप में चिकित्सक उपस्थिति और जड़ के स्थान के बारे में पता दाढ़ को दूर करने का इरादा है होना चाहिए करना चाहिए,। गर्भवती महिलाओं को भी इस प्रक्रिया का त्याग नहीं कर सकते हैं। किसी भी हटाने संज्ञाहरण के तहत किया जाता है, तो प्रक्रिया ही लगभग हमेशा दर्द रहित है। केवल अपवाद दांत जड़ों पर मजबूत सूजन और अल्सर के साथ मामले हैं। इस स्थिति में, रोगी एक छोटे से धैर्य होगा। लेकिन यह भी भाग्यशाली है कि आपरेशन के दौरान कुछ भी महसूस नहीं किया था, दर्द, टाला नहीं जा सकता क्योंकि प्रभाव है एक या दो घंटे संघर्ष के लिए किसी भी संज्ञाहरण। एक ज्ञान दांत निकाल दिया - तो, सबसे खराब खत्म हो गया है। आगे क्या करना है? जनरल सिफारिशें नहीं जो लोग किसी अन्य दांत को हटाने के बाद कर रहे हैं से अलग हैं। वे इस प्रकार हैंः 1. खा नहीं, पीने या धूम्रपान 2 घंटे के लिए। 2. , क्षतिग्रस्त क्षेत्र का पता लगाने की कोशिश न करें (उदाहरण के लिए, उंगलियों, जीभ)। 3. आयोडीन और तरह के साथ टैम्पोन घाव पर कोई मलहम न रखें,। 4. कुछ भी नहीं कुल्ला नहीं है! 5. संपीड़न और गरम का उपयोग न करें! 6. सर्जरी के बाद पहले घंटे में शांति सुरक्षित करने के लिए प्रयास करने के लिए। 7. गंभीर दर्द पेय एनाल्जेसिक की बहाली की स्थिति में। लेकिन वहाँ कुछ अतिरिक्त युक्तियाँ जब तीसरी दाढ़ से निपटने कर रहे हैं। तो, अगर बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, सूजन गाल और सूजन कुछ दिनों के, बुखार, गले में खराश कम हो, रक्तस्राव को रोकने नहीं करता है, वहाँ एक स्तब्ध हो जाना था, जब तक सब कुछ अपने आप में चला जाता है इंतजार नहीं है, लेकिन तत्काल चिकित्सा ध्यान चाहते हैं। अपने विवेकाधिकार भी बुखार नहीं कर सकते में दवा लें। ऐसे मामले लक्षण स्वयं चिकनाई हैं, जो तब लगभग रोगी के जीवन की लागत है। बुद्धि दांत कुल्ला करने से हटा दिया? जवाब सरल है - कुछ भी नहीं! जैसा कि ऊपर बताया है, यह खून का थक्का के एक अच्छी तरह से में रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अन्यथा, काफी घाव भरने की प्रक्रिया समय का विस्तार कर सकते हैं। यदि यह वास्तव में क्या हुआ, और छेद में एक छापे, और napuhla आसपास मसूड़ों था और दृढ़ता से दर्द होता है, तो आप अस्पताल जाने की जरूरत है। डॉक्टर (पट्टिका बंद स्क्रैप) अच्छी तरह से साफ है, और एंटीसेप्टिक के साथ इलाज के लिए बाध्य है। मकान एक गिलास पानी में एक चम्मच से थोड़ा कम की दर से जड़ी बूटियों बाबूना, गेंदा, सैलंडन, और बेकिंग सोडा समाधान के काढ़े के साथ स्नान (गहन rinsing के बिना) कर सकते हैं, 3% हाइड्रोजन पेरोक्साइड, या एक फार्मेसी तैयारी "Chlorhexidine" में खरीदा। यह यह पूरी तरह मदद करता है। मुंह भाग धोने और संचालित जगह किया जा सकता है केवल जब पर्याप्त समय हटा ज्ञान दांत के बाद पारित किया है। rinsing, जब खून का थक्का को संरक्षित करने की जरूरत गायब हो गया है? पारंपरिक चिकित्सा शोरबे और सुई लेनी की एक किस्म प्रदान करता है। सबसे लोकप्रिय इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जड़ी बूटियों - कैमोमाइल, ऋषि, ओक छाल, कैलेंडुला, सैलंडन। वे पीसा और उबलते पानी का एक गिलास में सूखी कच्चे माल की 1 बड़ा चम्मच की दर से एक साथ और अलग से जोर देते हैं। तुम भी नींबू बाम का उपयोग कर सकते हैं। यह के अर्क स्वाद और गंध के लिए बहुत ही सुखद है। एक सामान्य सिद्धांत के रूप में यह तैयार करें। यह भी इस संयंत्र से चाय पीना उपयोगी है। एक और महान जड़ी बूटी - कासनी। अपनी जड़ों का काढ़ा केवल रूप में एक अच्छा विरोधी भड़काऊ एक कॉफी विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन। जब दवा की तैयारी जड़ों पीसने और कम से कम 5 मिनट तक उबालें की जरूरत है। इसके अलावा, पारंपरिक चिकित्सा लोकप्रिय समाधान मेंः - सामान्य नमक (पानी का एक हिस्सा कप पर स्लाइड के बिना एक चम्मच); -preparata "Furatsilinom" (पानी की गोली कांच); - पोटेशियम परमैंगनेट (रंग पीला गुलाबी होना चाहिए)।
बुद्धि दांत निकाल दिया, कितना यह अपने जबड़े को नुकसान होगा? बुद्धि दांत थोड़ा खुशी के हैं, भले ही लोग उन्हें काफी अच्छी तरह से कहा जाता है। दंत चिकित्सक अक्सर आगे की समस्याओं से बचने के लिए उनमें से छुटकारा पाने के लिए, की सलाह दी। तो परेशान मत हो अगर आप एक ज्ञान दांत निकाल दिया है। यह तो कितना घाव को नुकसान होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। ताकि उन्हें समझने के लिए, आप इन दांत और उनके हटाने की सुविधाओं की प्रकृति की समझ की आवश्यकता है। अब यह कोई रहस्य नहीं है कि मानव में अस्थि ऊतक के गठन के बारे में पच्चीस वर्षों में समाप्त होता है। इस समय तक, यह उनके मुंह में डाल दिया और जगह सफलतापूर्वक सभी अपनी मास्टर की भलाई के लिए काम करने के लिए समय लगता है दाढ़। सभी लेकिन शृंखला के अंतिम आठवें । "आठ" इतनी देर से आने कि वे ज्ञान दांत कहा जाता था क्योंकि पच्चीस साल के एक आदमी जीवन अनुभव हासिल करने में कामयाब रहा है। चिकित्सकों तीसरे दाढ़ कहा जाता है, कि तीसरे स्वदेशी चबाने है। वैसे, ऐसे मामले हैं जब ज्ञान दांत केवल चालीस साल की उम्र बढ़ने या बिल्कुल भी विकसित नहीं कर रहे हैं। कुछ भाग्यशाली वे एक परिपक्व उम्र तक मुंह में रहते हैं, ठीक से भोजन को चबाने, कृत्रिम अंग के साथ मदद। सभी बाकी है, जो, दुर्भाग्य से, अधिकांश तीसरी दाढ़ मुसीबत का एक बहुत लाने के लिए। कुछ क्यों हमारे बुद्धिमान शरीर में इस तरह के बेकार दांत, जो सामान्य रूप में नहीं होना चाहिए के अस्तित्व की अनुमति देता है। दुर्भाग्य से, "आठ का समूह" हम अपने बहुत दूर पूर्वजों कि मोटा चारा खिलाया गया से विरासत में मिली है। उनके जबड़े व्यापक थे, और "अतिरिक्त" दांत उन लोगों के साथ हस्तक्षेप नहीं करते। अब हमारे आहार, पर बदलाव आया है ताकि जबड़े छोटे बन गया। तो गलत है, तो एक ज्ञान दांत निकाल दिया कोई बात नहीं है। कितना यह मसूड़ों को नुकसान होगा और केवल मसूड़ों तो क्या होगा? क्यों जटिलताएं हैं, और जो इसके लिए जिम्मेदार है? सबसे अधिक बार दांत ही दोषी ठहराते हैं। तथ्य यह है जबड़े में अंतरिक्ष वे कोई विकल्प नहीं है जब पिछले दाढ़ देखते हैं कि। लेकिन फूटना क्योंकि जहां यह आवश्यक है। यही कारण है कि बढ़ रही है ज्ञान दांत यादृच्छिक और यादृच्छिक पर, अगले खड़े "सात" को नष्ट करने, अपने गाल को घायल कर काटने को बदलने, दंत क्षय और अन्य समस्याओं के एक मेजबान के कारण। , गाल, जीभ की दिशा में आसन्न दांत के लिए एक तिरछा पर, और यहां तक कि पूरी तरह से क्षैतिज - वे किसी भी दिशा में तुला किया जा सकता है। दूसरा विकल्प विशेष रूप से समस्याग्रस्त है। बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, कितना नुकसान होगा घाव, मसूड़ों, पड़ोसी एक बड़ी हद तक क्षेत्रों मुंह में दांत की स्थिति पर निर्भर करता है। सबसे आम परेशानी पाँच-सात दिनों तक रहता है। लेकिन अगर पहले हटाने दांत आसपास के ऊतकों के स्थान पर पीप सूजन ले लिया है, दर्द बहुत लंबे समय तक रहता है। कि से, एक दांत निकाल दिया जिसे ऊपरी या निचले जबड़े में दर्द की अवधि पर निर्भर है। इस तथ्य के कारण है कि दाढ़ की तीसरी दाढ़ तल पर की तुलना में थोड़ा और अधिक स्थान। इसलिए, वे वहाँ ज्यादातर सपाट या एक मामूली कोण है, जो इसे आसान बना देता है और दंत चिकित्सक और रोगी में हो जाना। इसके अलावा चिकित्सक लिए और अधिक सुविधाजनक उपयोग के साथ ऊपरी जबड़े में। में निचले जबड़े हड्डी को काफी घना है, ज्ञान दांत अक्सर काफी गलत हो जाना, और हटाने लगभग हमेशा जटिल है। इसलिए, इस मामले में, प्रश्नः "आप एक ज्ञान दांत निकालते हैं, तो कितना नुकसान होगा? " - इस सवाल का जवाब बहुत आरामदायक नहीं है। कभी-कभी इस प्रक्रिया को दो सप्ताह तक देरी हो रही है। प्रकृति और दांत अंतरिक्ष के विकास के आधार पर, अपनी जड़ों की राशि पर दांत के पिछले ऑपरेशन राज्य और उसके आसपास के ऊतक को हटाने से, हो सकता है सरल और जटिल। और उससे पहले, और एक अन्य जरूरी प्रदर्शन एक्स-रे से पहले। बस हटाने जब विश्वास करते हैंः - एक दांत, या कम से कम यह मसूड़ों का हिस्सा लग रहा था; - दाढ़ वास्तव में या एक मामूली झुकाव के साथ बढ़ता है, - कोई मुड़, घुमावदार वस्तुओं को हटाने के लिए जड़ों; - रोगी पीप मनाया जाता है मसूड़ों की सूजन या एक ज्ञान दांत के हुड। बेशक, अगर ऐसा होता है, ज्ञान दांत, गले में मसूड़ों, और कभी कभी गाल, क्योंकि आघात ऊतक को हटा दें। अप्रिय अनुभूतियां के बाद संज्ञाहरण कार्रवाई करेंगे शुरू करते हैं। आमतौर पर डॉक्टर रोगी एक एनाल्जेसिक पीने के लिए और झूठ बोलने की सलाह देता है। इस अवधि में कुल्ला सख्ती से, निषिद्ध है ताकि घाव का थक्का से दूर करने के लिए नहीं। अन्यथा alveolitis शुरू कर सकते हैं। यह बुखार, तीव्र दर्द और सूजन की विशेषता है। प्रभावित क्षेत्र के गरम सख्त वर्जित है! एक नियम के लिए, बस दो-तीन घंटाटे के लिए अंत हटाने के बाद मुख्य समस्याओं के रूप में। लेकिन अगर बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, गले में तीन दिन, दर्द की तीव्रता की तुलना में अधिक मसूड़ों, जरूरत के रूप में जितनी जल्दी हो सके एक डॉक्टर से परामर्श। कभी कभी यह पुटी में मौजूदा, और स्थानांतरित कर संचालन के लिए नहीं के साथ जुड़े मसूड़ों में दर्द है, लेकिन निर्धारित करने के लिए यह केवल एक विशेषज्ञ हो सकता है। दुर्भाग्य से, तीसरी दाढ़ से छुटकारा हमेशा पारित करने के लिए आसान नहीं है। सबसे सामान्य कारणों में दांत ग्रस्त हैं और डॉक्टर और मरीज। जटिल हटाने अगर माना जाता हैः - ज्ञान दांत एक बड़े झुकाव या क्षैतिज रूप में स्थित है; - यह, कि है, मसूड़ों में रहता नहीं काटा जा सकता; - दांतों के आसपास के ऊतक में सूजन, एक festering है, खासकर अगर। पहले और दूसरे मामलों में ऑपरेशन से पहले संज्ञाहरण मजबूत किया जाता है। चिकित्सक रोगी एक चीरा मसूड़ों और कभी कभी भी खोखला जबड़े की हड्डी, दांत को पाने के लिए बनाता है। उन्होंने कहा कि कुछ हिस्सों को हटा दिया है, और यह कभी कभी, ड्रिल टुकड़ों में काट, केविंग लिए आवश्यक है। इन सभी जोड़तोड़ के अंत में हमेशा उसे टुकड़ों में शेष होल की उपस्थिति के लिए जाँच की। घाव पट्टी के अंत में दवाओं है कि मरीज दस-पंद्रह मिनट के बाद बाहर थूक दिया जाना चाहिए करने के लिए लागू किया जाता है। यह तो एक ज्ञान दांत निकाल दिया जाता है, तो कितना जबड़े को नुकसान होगा ठीक करने के लिए रोगी की व्यक्तिगत विशेषताओं पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि इस तरह के एक दूरी काफी नुकसान पर स्पष्ट है और नरम और अस्थि ऊतक प्रभावित करते हैं। सर्जरी के बाद, एक घाव में लगातार तेज दर्द, कभी कभी आसन्न दांत, यहां तक कि गले और कान में। कुछ रोगियों को एक तापमान वृद्धि और होंठ, ठोड़ी, जीभ का अकड़ना की है। चिकित्सा की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, डॉक्टर लगभग हमेशा एंटीबायोटिक दवाओं का प्रावधान है। तो इस प्रकार एक ज्ञान दांत, हटाने के बाद सूजन गाल, यह सामान्य माना जाता है। के बारे में तीन-पाँच दिन और सूजन, और स्तब्ध हो जाना जाना चाहिए। लेकिन अगर सूजन बढ़ जाती है, कठिनाइयों श्वास के साथ शुरू करते हैं, निगल, शरीर पर दाने, तो आप तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना चाहिए। अगर ऊपरी ज्ञान दांत निकाल दिया, और ऑपरेशन आसान और त्वरित था, और जटिलताओं दुर्लभ हैं। लेकिन ऐसे मामलों में, रोगी व्यक्ति थोड़ा तापमान बढ़ा सकते हैं। इस चोट के कारण ऊतक की अनुमति सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया माना जाता है। इस स्थिति में antipyretics की स्वीकृति दुर्लभ था। एक नियम के, दूसरे दिन के अंत के तापमान वापस सामान्य दवाओं के बिना के रूप में। आप कम ज्ञान दांत और बुखार, प्लस सूजन गाल को हटाने और घाव bleeds हैं, तो भी, घबराओ मत। और इस तरह के एक ऑपरेशन के बाद, यह के साथ एक या दो दिन में पास करना चाहिए। लेकिन स्थितियों जब घायल क्षेत्र की बहाली के दौरान वहाँ जटिलताओं कि चिकित्सक हस्तक्षेप की आवश्यकता कर रहे हैं देखते हैं। यदि एक ज्ञान दांत निकाल दिया करने के बाद, तापमान, कई दिनों के लिए रखा है, तो यह तेजी से बढ़ जाती है, तो यह अचानक ऑपरेशन के बाद कुछ ही दिनों में दिखाई दिया, इसका मतलब यह हो सकता हैः - घाव संक्रमण था, - सूजन; - घाव में वहाँ एक विदेशी वस्तु है; - alveolitis ; - एलर्जी की प्रतिक्रिया; - आसन्न दूरदराज के दांत traumatizing; - तंत्रिका फंसाने। अभ्यास में दंत चिकित्सकों मरीजों की लगातार शिकायतों है कि एक बार उनके ज्ञान दांत निकाल दिया, एक गले में खराश, यह निगल करने के लिए मुश्किल था कर रहे हैं। इसका कारण यह है "आठ" की जड़ों अक्सर त्रिपृष्ठी तंत्रिका के करीब निकटता में स्थित हैं। अगर आपरेशन वह चोट लगी थी या आगे सूजन, वहाँ गले में दर्द है। निकासी के बाद ऊपरी श्वास नलिका के कुछ स्थितियों बेचैनी में लक्षण alveolitis शुरू किया, तापमान में वृद्धि होती है, खासकर अगर कर रहे हैं। अक्सर रोगी दोष, खून का थक्का कुओं rinses या अन्य कार्यों को हटा दें। ऐसे मामले केवल उसके गले के बारे में चिंतित नहीं है, लेकिन कान, जबड़े, स्वस्थ दांतों, गर्दन, छाती के बाद भी एक ज्ञान दांत निकाल दिया हैं। कितना यह जबड़े और ऊपरी श्वसन अंगों को नुकसान होगा, यह जीव की क्षमताओं पर और रोगी के व्यवहार की वैधता पर निर्भर करता है। रोगी डॉक्टर के निर्देशों का वास्तव में और नहीं का पालन करना चाहिए उपचार अपने विवेक पर से निपटने क्योंकि ऐसे मामले हैं जब सर्जरी नहीं की वजह से ऊपरी श्वास नलिका में दर्द, और जुकाम की शुरुआत। तीसरा दाढ़, के रूप में वे चबाने रहे हैं दांत लगभग हमेशा आकार में बड़े होते। इसलिए, एक ज्ञान दांत, एक छेद या एक छेद को दूर करने के लिए सबसे आसान तरीका महत्वपूर्ण है, भले ही। कुछ मामलों में, टांके के साथ बंद हुआ। तंतु इस प्रकार के रूप में अवशोषित और गैर अवशोषित करते थे। अगर सर्जरी से पहले "आठ" क्षेत्र या पीप सूजन की जड़ों में एक पुटी था, छेद खुला छोड़ दिया। समय के साथ यह देरी हो रही है, गम भाग कम है और चिंता करना बंद कर रहा है। जब जटिल हेरफेर मसूड़ा incising या gouging जबड़े की हड्डी तेजी जरूरी ओवरलैप। कई तो चिंता एक ज्ञान दांत के रूप में हटाया के बाद टांके इस जगह को चंगा। बेशक, इस मामले में ऊतक की मरम्मत की प्रक्रिया लंबे समय तक हो जाएगा, और अगर सीवन धागे से अवशोषित नहीं है, यह जरूरी है कि एक बार फिर से उन्हें हटाने के लिए दंत चिकित्सक का दौरा करने के। लेकिन परेशान अभी भी नहीं है। मुख्य बात - यह सुनिश्चित करें कि सीवन क्षेत्र में सूजन और पीप आना नहीं था बनाने के लिए। कभी कभी तीसरा दाढ़ अपने स्वयं के हुड हो सकता है। यह बस मसूड़ों भाग, एक गुना overhanging जो फूटना दांत शुरू कर दिया नहीं है। इसके बारे में कुछ अच्छा है, क्योंकि इस तरह के एक "संरचना" एक जेब की तरह कुछ का गठन पर है, जिसमें खाद्य कणों को साफ करने के लिए बहुत मुश्किल है। जो लोग साफ बैक्टीरिया के लिए एक उत्कृष्ट पर्यावरण खुलासा धीरे-धीरे क्षय करने के लिए शुरू नहीं कर सकते। वे, बारी में, सूजन और क्षय के विकास में योगदान। इस घटना के लक्षण इस प्रकार हैः - मुंह से एक अप्रिय गंध, सावधानी पूर्वक के बावजूद; - दांत विस्फोट के स्थल पर दर्द; - मसूड़ों और गालों की सूजन; - मुंह में एक विदेशी वस्तु की मौजूदगी की बेचैनी की भावना। सही समाधान हुड काट, और अक्सर दांत से छुटकारा पाने के लिए है। अगर केवल एक ज्ञान दांत के साथ हुड हटा दिया है, तो डॉक्टर सही तीसरे दाढ़ बनाए रखा पाया। तो स्थितियों में, जहां "आठ" पूरी तरह से स्वस्थ, आसन्न दांत के साथ हस्तक्षेप नहीं करता है, सुचारू रूप से बढ़ रही है और काटने के परिवर्तन नहीं करता है में आते हैं। अपने आप से, प्रक्रिया छांटना के हुड सरल है और काफी आसानी से स्थानांतरित कर दिया है। इसके बाद जोड़ों लागू नहीं किया। अगर चिकित्सक को बरकरार रखा ज्ञान दांत से बढ़ पूरा नहीं हुआ है समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में, हुड फिर से गठन किया जा सकता। एक मरीज निदान perikoronit कर दिया गया है , के बाद एक एंटीबायोटिक की छांटना निर्धारित है, और विशेष स्नान। दांत निकाले गए ज्ञान की। क्या करें? शुरू करने के लिए, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि दंत चिकित्सक को हटाने का सवाल ही एक्स-रे के बाद फैसला किया। यह भले ही दांत स्पष्ट रूप से नग्न आंखों के लिए दिख रहा है, के रूप में चिकित्सक उपस्थिति और जड़ के स्थान के बारे में पता दाढ़ को दूर करने का इरादा है होना चाहिए करना चाहिए,। गर्भवती महिलाओं को भी इस प्रक्रिया का त्याग नहीं कर सकते हैं। किसी भी हटाने संज्ञाहरण के तहत किया जाता है, तो प्रक्रिया ही लगभग हमेशा दर्द रहित है। केवल अपवाद दांत जड़ों पर मजबूत सूजन और अल्सर के साथ मामले हैं। इस स्थिति में, रोगी एक छोटे से धैर्य होगा। लेकिन यह भी भाग्यशाली है कि आपरेशन के दौरान कुछ भी महसूस नहीं किया था, दर्द, टाला नहीं जा सकता क्योंकि प्रभाव है एक या दो घंटे संघर्ष के लिए किसी भी संज्ञाहरण। एक ज्ञान दांत निकाल दिया - तो, सबसे खराब खत्म हो गया है। आगे क्या करना है? जनरल सिफारिशें नहीं जो लोग किसी अन्य दांत को हटाने के बाद कर रहे हैं से अलग हैं। वे इस प्रकार हैंः एक. खा नहीं, पीने या धूम्रपान दो घंटाटे के लिए। दो. , क्षतिग्रस्त क्षेत्र का पता लगाने की कोशिश न करें । तीन. आयोडीन और तरह के साथ टैम्पोन घाव पर कोई मलहम न रखें,। चार. कुछ भी नहीं कुल्ला नहीं है! पाँच. संपीड़न और गरम का उपयोग न करें! छः. सर्जरी के बाद पहले घंटे में शांति सुरक्षित करने के लिए प्रयास करने के लिए। सात. गंभीर दर्द पेय एनाल्जेसिक की बहाली की स्थिति में। लेकिन वहाँ कुछ अतिरिक्त युक्तियाँ जब तीसरी दाढ़ से निपटने कर रहे हैं। तो, अगर बाद एक ज्ञान दांत निकाल दिया, सूजन गाल और सूजन कुछ दिनों के, बुखार, गले में खराश कम हो, रक्तस्राव को रोकने नहीं करता है, वहाँ एक स्तब्ध हो जाना था, जब तक सब कुछ अपने आप में चला जाता है इंतजार नहीं है, लेकिन तत्काल चिकित्सा ध्यान चाहते हैं। अपने विवेकाधिकार भी बुखार नहीं कर सकते में दवा लें। ऐसे मामले लक्षण स्वयं चिकनाई हैं, जो तब लगभग रोगी के जीवन की लागत है। बुद्धि दांत कुल्ला करने से हटा दिया? जवाब सरल है - कुछ भी नहीं! जैसा कि ऊपर बताया है, यह खून का थक्का के एक अच्छी तरह से में रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अन्यथा, काफी घाव भरने की प्रक्रिया समय का विस्तार कर सकते हैं। यदि यह वास्तव में क्या हुआ, और छेद में एक छापे, और napuhla आसपास मसूड़ों था और दृढ़ता से दर्द होता है, तो आप अस्पताल जाने की जरूरत है। डॉक्टर अच्छी तरह से साफ है, और एंटीसेप्टिक के साथ इलाज के लिए बाध्य है। मकान एक गिलास पानी में एक चम्मच से थोड़ा कम की दर से जड़ी बूटियों बाबूना, गेंदा, सैलंडन, और बेकिंग सोडा समाधान के काढ़े के साथ स्नान कर सकते हैं, तीन% हाइड्रोजन पेरोक्साइड, या एक फार्मेसी तैयारी "Chlorhexidine" में खरीदा। यह यह पूरी तरह मदद करता है। मुंह भाग धोने और संचालित जगह किया जा सकता है केवल जब पर्याप्त समय हटा ज्ञान दांत के बाद पारित किया है। rinsing, जब खून का थक्का को संरक्षित करने की जरूरत गायब हो गया है? पारंपरिक चिकित्सा शोरबे और सुई लेनी की एक किस्म प्रदान करता है। सबसे लोकप्रिय इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जड़ी बूटियों - कैमोमाइल, ऋषि, ओक छाल, कैलेंडुला, सैलंडन। वे पीसा और उबलते पानी का एक गिलास में सूखी कच्चे माल की एक बड़ा चम्मच की दर से एक साथ और अलग से जोर देते हैं। तुम भी नींबू बाम का उपयोग कर सकते हैं। यह के अर्क स्वाद और गंध के लिए बहुत ही सुखद है। एक सामान्य सिद्धांत के रूप में यह तैयार करें। यह भी इस संयंत्र से चाय पीना उपयोगी है। एक और महान जड़ी बूटी - कासनी। अपनी जड़ों का काढ़ा केवल रूप में एक अच्छा विरोधी भड़काऊ एक कॉफी विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन। जब दवा की तैयारी जड़ों पीसने और कम से कम पाँच मिनट तक उबालें की जरूरत है। इसके अलावा, पारंपरिक चिकित्सा लोकप्रिय समाधान मेंः - सामान्य नमक ; -preparata "Furatsilinom" ; - पोटेशियम परमैंगनेट ।
मेरठ न्यूज़ः सपा के साथ गठबंधन में शामिल रालोद की आईटी सेल के नाम से फर्जी सूची वायरल होने से सियासी पारा गर्म हो गया. इस सूची में रालोद नेत्री मनीषा अहलावत को मेरठ की महापौर प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था. सूची वायरल होने के बाद गठबंधन नेताओं के होश उड़ गए और एक दूसरे को फोन कर मामले की जानकारी लेने लगे. कार्यकर्ता नेताओं के फोन घनघनाने लगे. बाद में रालोद ने वायरल सूची को फर्जी बताते हुए पूरे मामले का खंडन किया और सीमा प्रधान को गठबंधन प्रत्याशी बताते हुए पूरी ताकत से लड़ाने की बात कही. मनीषा अहलावत ने भी मीडिया से इसका खंडन किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए रालोद ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर वायरल सूची का खंडन किया. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ राजकुमार सांगवान ने कहा कि ये विपक्ष की शरारत है ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ सके. सपा-रालोद गठबंधन से सीमा प्रधान प्रत्याशी है. रालोद पूरी ताकत से गठबंधन धर्म निभाएगा. फर्जी सूची वायरल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीषा अहलावत ने भी इसका खंडन करते हुए कहा कि उनके पास भी लगातार फोन आ रहे हैं. सूची फर्जी है.
मेरठ न्यूज़ः सपा के साथ गठबंधन में शामिल रालोद की आईटी सेल के नाम से फर्जी सूची वायरल होने से सियासी पारा गर्म हो गया. इस सूची में रालोद नेत्री मनीषा अहलावत को मेरठ की महापौर प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था. सूची वायरल होने के बाद गठबंधन नेताओं के होश उड़ गए और एक दूसरे को फोन कर मामले की जानकारी लेने लगे. कार्यकर्ता नेताओं के फोन घनघनाने लगे. बाद में रालोद ने वायरल सूची को फर्जी बताते हुए पूरे मामले का खंडन किया और सीमा प्रधान को गठबंधन प्रत्याशी बताते हुए पूरी ताकत से लड़ाने की बात कही. मनीषा अहलावत ने भी मीडिया से इसका खंडन किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए रालोद ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर वायरल सूची का खंडन किया. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ राजकुमार सांगवान ने कहा कि ये विपक्ष की शरारत है ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ सके. सपा-रालोद गठबंधन से सीमा प्रधान प्रत्याशी है. रालोद पूरी ताकत से गठबंधन धर्म निभाएगा. फर्जी सूची वायरल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीषा अहलावत ने भी इसका खंडन करते हुए कहा कि उनके पास भी लगातार फोन आ रहे हैं. सूची फर्जी है.
दमोहः मध्य प्रदेश के दमोह में जिला शिक्षा अधिकारी पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया है। कुछ लोगों के एक समूह ने दमोह जिला शिक्षा अधिकारी एसके मिश्रा पर स्याही फेंकी और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। अधिकारी का कहना है, 'मैं उनके नाम नहीं जानता लेकिन वे स्थानीय लोग हैं। वे गंगा जमुना स्कूल के मुद्दे (हिजाब विवाद) के बारे में बात कर रहे थे। मुझे न तो इसकी जांच दी गई है और न ही मैंने रिपोर्ट दर्ज की है। इसे एक हाई पावर कमेटी को सौंपा गया है। मैंने उनमें से कुछ चेहरों को देखा जिनके पास कुछ बकाया बिल थे। इसलिए, उन्होंने बदला लेने के लिए ऐसा किया होगा। बिल कुछ स्कूलों की मरम्मत के रखरखाव से संबंधित थे। ' वीडियो में देखा जा सकता है कि दमोह जिला शिक्षा अधिकारी अपनी गाड़ी में बैठे होते हैं, इसी दौरान कुछ लोग आते हैं और उनसे बात करने के बहाने उनके ऊपर स्याही फेंक देते हैं। इस दौरान अधिकारी और उनके ड्राइवर, दोनों पर स्याही गिरती है। ये भी पढ़ेंः
दमोहः मध्य प्रदेश के दमोह में जिला शिक्षा अधिकारी पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया है। कुछ लोगों के एक समूह ने दमोह जिला शिक्षा अधिकारी एसके मिश्रा पर स्याही फेंकी और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। अधिकारी का कहना है, 'मैं उनके नाम नहीं जानता लेकिन वे स्थानीय लोग हैं। वे गंगा जमुना स्कूल के मुद्दे के बारे में बात कर रहे थे। मुझे न तो इसकी जांच दी गई है और न ही मैंने रिपोर्ट दर्ज की है। इसे एक हाई पावर कमेटी को सौंपा गया है। मैंने उनमें से कुछ चेहरों को देखा जिनके पास कुछ बकाया बिल थे। इसलिए, उन्होंने बदला लेने के लिए ऐसा किया होगा। बिल कुछ स्कूलों की मरम्मत के रखरखाव से संबंधित थे। ' वीडियो में देखा जा सकता है कि दमोह जिला शिक्षा अधिकारी अपनी गाड़ी में बैठे होते हैं, इसी दौरान कुछ लोग आते हैं और उनसे बात करने के बहाने उनके ऊपर स्याही फेंक देते हैं। इस दौरान अधिकारी और उनके ड्राइवर, दोनों पर स्याही गिरती है। ये भी पढ़ेंः
लंबे समय के इंतजार के बाद मेरठ को इलेक्ट्रिक बस मिल गई। लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकार्पण कर दिया। अभी तक 50 बसों में से पांच बस पहुंची है। एमसीटीएसएल के एमडी के. के. शर्मा ने बताया कि मेरठ में सांसद राजेंद्र अग्रवाल और विधायक सोमेंद्र तोमर ने 10-10 रुपये का टिकट लेकर बस की औपचारिकता पूरी कर दी है। दोनों नेताओं ने बसों की तारीफ करते हुए बधाई दी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
लंबे समय के इंतजार के बाद मेरठ को इलेक्ट्रिक बस मिल गई। लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकार्पण कर दिया। अभी तक पचास बसों में से पांच बस पहुंची है। एमसीटीएसएल के एमडी के. के. शर्मा ने बताया कि मेरठ में सांसद राजेंद्र अग्रवाल और विधायक सोमेंद्र तोमर ने दस-दस रुपयापये का टिकट लेकर बस की औपचारिकता पूरी कर दी है। दोनों नेताओं ने बसों की तारीफ करते हुए बधाई दी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
चीन के वुहान से निकले कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले रखा है। जिसने न जानें कितने लोगों की जान लें ली। वहीं कितनों को बेरोजगार कर दिया। कोरोना के कारण देश की अधिकतर जनसंख्या दो जून की रोटी भी नहीं जुड़ा पा रही है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया कि कोरोना महामारी के बीच 100 करोड़ से अधिक आय रखने वालों की संख्या में कमी आई है। नई दिल्ली : चीन के वुहान से निकले कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले रखा है। जिसने न जानें कितने लोगों की जान लें ली। वहीं कितनों को बेरोजगार कर दिया। कोरोना के कारण देश की अधिकतर जनसंख्या दो जून की रोटी भी नहीं जुड़ा पा रही है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया कि कोरोना महामारी के बीच 100 करोड़ से अधिक आय रखने वालों की संख्या में कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक की आमदनी दिखाने वाले व्यक्तियों की संख्या 2020-21 में 136 थी जबकि 2019-20 में ऐसे लोगों की संख्या 141 और 2018-19 में 77 थी। उन्होंने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि विगत तीन आकलन वर्षों के दौरान आयकर विभाग में फाइल की गई आयकर विवरणी में 100 करोड़ रुपये (एक अरब रुपये) से अधिक की सकल कुल आय प्रकट करने वाले व्यक्तियों की संख्या 2020-21 में 136 थी। उनसे सवाल किया गया था कि क्या यह सच है कि लॉकडाउन के दौरान देश में अरबपतियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इसके जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के पास उपलब्ध सूचना के अनुसार, प्रत्यक्ष करों के तहत अरबपति शब्द की कोई विधायी अथवा प्रशासनिक परिभाषा नहीं है। गरीबी अनुमानों के अनुसार, वर्तमान तेंदुलकर समिति कार्यप्रणाली का अनुसरण करते हुए, भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों की संख्या 2011-12 में 27 करोड़ अनुमानित थी। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि आर्थिक सर्वे 2020-21 में तैयार बेयर नेसेसिटीज इंडेक्स के मुताबिक पीने का पानी, सैनिटेशन, हाइजीन जैसे कई मूलभूत जरूरतों के स्तर में 2012 के मुकाबले 2018 में काफी सुधार हुआ।
चीन के वुहान से निकले कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले रखा है। जिसने न जानें कितने लोगों की जान लें ली। वहीं कितनों को बेरोजगार कर दिया। कोरोना के कारण देश की अधिकतर जनसंख्या दो जून की रोटी भी नहीं जुड़ा पा रही है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया कि कोरोना महामारी के बीच एक सौ करोड़ से अधिक आय रखने वालों की संख्या में कमी आई है। नई दिल्ली : चीन के वुहान से निकले कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले रखा है। जिसने न जानें कितने लोगों की जान लें ली। वहीं कितनों को बेरोजगार कर दिया। कोरोना के कारण देश की अधिकतर जनसंख्या दो जून की रोटी भी नहीं जुड़ा पा रही है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया कि कोरोना महामारी के बीच एक सौ करोड़ से अधिक आय रखने वालों की संख्या में कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि एक सौ करोड़ रुपये या इससे अधिक की आमदनी दिखाने वाले व्यक्तियों की संख्या दो हज़ार बीस-इक्कीस में एक सौ छत्तीस थी जबकि दो हज़ार उन्नीस-बीस में ऐसे लोगों की संख्या एक सौ इकतालीस और दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में सतहत्तर थी। उन्होंने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि विगत तीन आकलन वर्षों के दौरान आयकर विभाग में फाइल की गई आयकर विवरणी में एक सौ करोड़ रुपये से अधिक की सकल कुल आय प्रकट करने वाले व्यक्तियों की संख्या दो हज़ार बीस-इक्कीस में एक सौ छत्तीस थी। उनसे सवाल किया गया था कि क्या यह सच है कि लॉकडाउन के दौरान देश में अरबपतियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इसके जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पास उपलब्ध सूचना के अनुसार, प्रत्यक्ष करों के तहत अरबपति शब्द की कोई विधायी अथवा प्रशासनिक परिभाषा नहीं है। गरीबी अनुमानों के अनुसार, वर्तमान तेंदुलकर समिति कार्यप्रणाली का अनुसरण करते हुए, भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों की संख्या दो हज़ार ग्यारह-बारह में सत्ताईस करोड़ अनुमानित थी। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि आर्थिक सर्वे दो हज़ार बीस-इक्कीस में तैयार बेयर नेसेसिटीज इंडेक्स के मुताबिक पीने का पानी, सैनिटेशन, हाइजीन जैसे कई मूलभूत जरूरतों के स्तर में दो हज़ार बारह के मुकाबले दो हज़ार अट्ठारह में काफी सुधार हुआ।
Harda News : जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही बतरने का आरोप प्रसूता के स्वजनों ने लगाया है। प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत होने पर स्वजनों ने हंगामा किया। इसके बाद मौके पर सिटी कोतवाली थाना पुलिस और सीएमएचओ जिल. . . madhya pradeshSun, 11 Dec 2022 10:10 PM (IST) रहटगांव। नवदुनिया न्यूज नगर में शनिवार की दोपहर खमगांव रोड पर स्थित बटकी जिला बैतूल के रहने वाले वासुदेव यादव के दो साल के बालक की घर पर ही पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई, जिसका अंतिम संस्कार रविवार सुबह किया गया। . . . madhya pradeshSun, 24 Apr 2022 11:16 PM (IST)
Harda News : जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही बतरने का आरोप प्रसूता के स्वजनों ने लगाया है। प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत होने पर स्वजनों ने हंगामा किया। इसके बाद मौके पर सिटी कोतवाली थाना पुलिस और सीएमएचओ जिल. . . madhya pradeshSun, ग्यारह दिसंबर दो हज़ार बाईस दस:दस PM रहटगांव। नवदुनिया न्यूज नगर में शनिवार की दोपहर खमगांव रोड पर स्थित बटकी जिला बैतूल के रहने वाले वासुदेव यादव के दो साल के बालक की घर पर ही पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई, जिसका अंतिम संस्कार रविवार सुबह किया गया। . . . madhya pradeshSun, चौबीस अप्रैल दो हज़ार बाईस ग्यारह:सोलह PM
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। विकास कार्यों को लेकर सीएम शिवराज और उनके मंत्री (Shivraj's minister) सख्त मूड में हैं। प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए देरी पर अधिकारियों से नाराजगी जताई। मंत्री की नाराजगी के बाद नगर निगम कमिश्नर किशोर कान्याल ने ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। मप्र के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह (Minister of State Bharat Singh Kushwaha) ने आज ग्वालियर नगर निगम (Gwalior Municipal Corporation) के वार्ड 61 से 66 में स्थित बस्तियों में मंजूर हुए विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन विकास कार्यों की मंजूरी मिल चुकी है, उनका जल्द से जल्द भूमिपूजन कराकर कार्यों को धरातल पर लाएँ, जिससे सरकार की मंशा के अनुरूप क्षेत्रीय निवासियों को इन कार्यों का लाभ मिल सके। बैठक में इन वार्डों के लिये बड़े-बड़े विकास कार्यों की स्वीकृति और इन कार्यों के भूमिपूजन की तिथियाँ भी तय हुईं। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री कुशवाह ने टेण्डर होने के बाबजूद इन वार्डों में लम्बे समय से कुछ विकास कार्य शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई। मंत्री की नाराजगी के बाद बैठक में मौजूद नगर निगम कमिश्नर किशोर कान्याल ने ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि जिन कार्यों के टेण्डर हो चुके हैं, उन्हें जल्द से जल्द शुरू कराएँ। उन्होंने साफ किया कि कार्य शुरू होने में देरी होने पर संबंधित अधिकारी भी जवाबदेह होंगे। गौरतलब है कि जिन कार्यों के भूमिपूजन की तिथियाँ निर्धारित हुई हैं, उनमें लगभग एक करोड़ 90 लाख रूपए की लागत की सात नम्बर चौराहे से छावनी क्षेत्र की बस्तियों में पेयजल के लिए डलने वाली 14 इंची पाइप लाइन, लगभग एक करोड़ 22 लाख रूपए लागत की पटेल नगर से एमएच चौराहे तक की बस्तियों में पेयजल पाइप लाईन, शहर के वार्ड-61 व 62 में स्थित शंकरपुरी, बैंक कॉलोनी, बालाजीपुरम, कृष्णा विहार, गुलाबपुरी, सांई नगर चौराहा, बीपी सिटी व खेरियामोदी सहित क्षेत्र की अन्य अवैध कॉलोनियों में विशेष निधि से लगभग 3 करोड़ 94 लाख रूपए की लागत से होने वाले विद्युतीकरण कार्य, वीरपुर की पेयजल लाईन, गिरवाई से अजयपुर क्षेत्र की पेयजल लाईन, विभिन्न वार्डों के संजीवनी क्लीनिक सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं। राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने बैठक में जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए इस अभियान को पूरी गंभीरता के साथ अंजाम दें। उन्होंने कहा सरकार की मंशा के अनुरूप अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम घर-घर पहुँचकर निर्धारित 33 योजनाओं के पात्र हितग्राहियों का पता लगाएँ और उन्हें लाभान्वित भी कराएँ। राज्य मंत्री श्री कुशवाह ने कुछ क्षेत्रों में सर्वे टीमों के न पहुँचने पर नाराजगी जताई। बैठक में मौजूद नगर निगम आयुक् किशोर कान्याल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीम के जो सदस्य अभियान के तहत घर-घर नहीं पहुँच रहे हैं उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार भारत सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में के वार्ड-65 सहित अन्य पिछड़ी बस्तियों में मौजूदा माह के दौरान मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान के तहत पाँच बड़े शिविर लगाकर पात्र परिवारों को लाभान्वित कराने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत 14 अक्टूबर को अजयपुर, 19 अक्टूबर को गिरवाई, 20 अक्टूबर को खुरैरी, 27 अक्टूबर को पुरानी छावनी व 29 अक्टूबर को वीरपुर में शिविर लगाए जायेंगे।
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। विकास कार्यों को लेकर सीएम शिवराज और उनके मंत्री सख्त मूड में हैं। प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए देरी पर अधिकारियों से नाराजगी जताई। मंत्री की नाराजगी के बाद नगर निगम कमिश्नर किशोर कान्याल ने ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। मप्र के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने आज ग्वालियर नगर निगम के वार्ड इकसठ से छयासठ में स्थित बस्तियों में मंजूर हुए विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन विकास कार्यों की मंजूरी मिल चुकी है, उनका जल्द से जल्द भूमिपूजन कराकर कार्यों को धरातल पर लाएँ, जिससे सरकार की मंशा के अनुरूप क्षेत्रीय निवासियों को इन कार्यों का लाभ मिल सके। बैठक में इन वार्डों के लिये बड़े-बड़े विकास कार्यों की स्वीकृति और इन कार्यों के भूमिपूजन की तिथियाँ भी तय हुईं। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री कुशवाह ने टेण्डर होने के बाबजूद इन वार्डों में लम्बे समय से कुछ विकास कार्य शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई। मंत्री की नाराजगी के बाद बैठक में मौजूद नगर निगम कमिश्नर किशोर कान्याल ने ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि जिन कार्यों के टेण्डर हो चुके हैं, उन्हें जल्द से जल्द शुरू कराएँ। उन्होंने साफ किया कि कार्य शुरू होने में देरी होने पर संबंधित अधिकारी भी जवाबदेह होंगे। गौरतलब है कि जिन कार्यों के भूमिपूजन की तिथियाँ निर्धारित हुई हैं, उनमें लगभग एक करोड़ नब्बे लाख रूपए की लागत की सात नम्बर चौराहे से छावनी क्षेत्र की बस्तियों में पेयजल के लिए डलने वाली चौदह इंची पाइप लाइन, लगभग एक करोड़ बाईस लाख रूपए लागत की पटेल नगर से एमएच चौराहे तक की बस्तियों में पेयजल पाइप लाईन, शहर के वार्ड-इकसठ व बासठ में स्थित शंकरपुरी, बैंक कॉलोनी, बालाजीपुरम, कृष्णा विहार, गुलाबपुरी, सांई नगर चौराहा, बीपी सिटी व खेरियामोदी सहित क्षेत्र की अन्य अवैध कॉलोनियों में विशेष निधि से लगभग तीन करोड़ चौरानवे लाख रूपए की लागत से होने वाले विद्युतीकरण कार्य, वीरपुर की पेयजल लाईन, गिरवाई से अजयपुर क्षेत्र की पेयजल लाईन, विभिन्न वार्डों के संजीवनी क्लीनिक सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं। राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने बैठक में जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए इस अभियान को पूरी गंभीरता के साथ अंजाम दें। उन्होंने कहा सरकार की मंशा के अनुरूप अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम घर-घर पहुँचकर निर्धारित तैंतीस योजनाओं के पात्र हितग्राहियों का पता लगाएँ और उन्हें लाभान्वित भी कराएँ। राज्य मंत्री श्री कुशवाह ने कुछ क्षेत्रों में सर्वे टीमों के न पहुँचने पर नाराजगी जताई। बैठक में मौजूद नगर निगम आयुक् किशोर कान्याल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीम के जो सदस्य अभियान के तहत घर-घर नहीं पहुँच रहे हैं उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार भारत सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में के वार्ड-पैंसठ सहित अन्य पिछड़ी बस्तियों में मौजूदा माह के दौरान मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान के तहत पाँच बड़े शिविर लगाकर पात्र परिवारों को लाभान्वित कराने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत चौदह अक्टूबर को अजयपुर, उन्नीस अक्टूबर को गिरवाई, बीस अक्टूबर को खुरैरी, सत्ताईस अक्टूबर को पुरानी छावनी व उनतीस अक्टूबर को वीरपुर में शिविर लगाए जायेंगे।
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में फर्श के कलर के बारे में। वास्तु शास्त्र के अनुसार आग्नेय कोण का संबंध अग्नि से बताया गया है और अग्नि का रंग लाल होता है। वास्तु के अनुसार आग्नेय कोण में फर्श के लिये कोशिश करके इस तरह का पत्थर लगवाना चाहिए, जिसमें लाल रंग का कोई डिजाइन बना हो या फिर इस दिशा के थोड़े-से हिस्से में लाल रंग का पत्थर लगा हो। अगर ऐसा करना आपके लिए संभव न हो तो आप दक्षिण-पूर्व दिशा के फर्श पर एक लाल रंग का कालीन बिछा सकते हैं। ऐसा करने से आपके जीवन में ऊष्मा बनी रहेगी और आपका व्यापार खूब आगे बढ़ेगा। आपकी जीवन में तरक्की ही तरक्की होगी।
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में फर्श के कलर के बारे में। वास्तु शास्त्र के अनुसार आग्नेय कोण का संबंध अग्नि से बताया गया है और अग्नि का रंग लाल होता है। वास्तु के अनुसार आग्नेय कोण में फर्श के लिये कोशिश करके इस तरह का पत्थर लगवाना चाहिए, जिसमें लाल रंग का कोई डिजाइन बना हो या फिर इस दिशा के थोड़े-से हिस्से में लाल रंग का पत्थर लगा हो। अगर ऐसा करना आपके लिए संभव न हो तो आप दक्षिण-पूर्व दिशा के फर्श पर एक लाल रंग का कालीन बिछा सकते हैं। ऐसा करने से आपके जीवन में ऊष्मा बनी रहेगी और आपका व्यापार खूब आगे बढ़ेगा। आपकी जीवन में तरक्की ही तरक्की होगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के सोनितपुर जिले के ढेकियाजुली में दो अस्पतालों की आधारशिला रखी और असम के राज्य राजमार्गों तथा प्रमुख जिला सड़कों के निर्माण के लिए एक कार्यक्रम असोम माला का शुभारंभ किया। असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, केन्द्रीय मंत्री श्री रामेश्वर तेली, असम सरकार के मंत्री तथा बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के प्रमुख श्री प्रमोद बोरो भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने असम के लोगों द्वारा उनके प्रति दिखाए गए स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, मंत्री श्री हेमंता बिस्वा, बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के प्रमुख श्री प्रमोद बोरो और राज्य सरकार की असम की सेवा और तेजी से प्रगति के लिए उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने 1942 में आक्रमणकारियों के सामने इस क्षेत्र द्वारा किए गए प्रतिरोध और तिरंगे के लिए शहीदों के बलिदान के गौरवशाली इतिहास को स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा, अभाव, तनाव, भेदभाव और संघर्ष की विरासत को पीछे छोड़ते हुए पूरा पूर्वोत्तर आज विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और इसमें असम मुख्य भूमिका अदा कर रहा है। श्री मोदी ने कहा कि ऐतिहासिक बोडो समझौते के बाद बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के हालिया चुनाव ने इस क्षेत्र में विकास और विश्वास का एक नया अध्याय लिखा है। यह दिवस असम के भाग्य और भविष्य में महत्वपूर्ण बलिदान का साक्षी है क्योंकि असम को बिश्वनाथ और चराईदेव में दो नए मेडिकल कॉलेज का उपहार मिल रहा है और असोम माला के माध्यम से आधुनिक बुनियादी ढांचे की आधारशिला रखी जा रही है। विगत में राज्य में चिकित्सा बुनियादी ढांचे की खराब हालत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय असम में स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर वर्ष 2016 तक की अवधि में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि पिछले 5 वर्षों में 6 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का काम शुरू हो गया है। बिश्वनाथ और चराईदेव मेडिकल कॉलेज उत्तर और ऊपरी असम की जरूरत को पूरा करेंगे। इसी प्रकार इन दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद राज्य में केवल 725 मेडिकल सीटों की पृष्ठभूमि में हर साल 1600 नए डॉक्टर उपलब्ध होंगे। इससे राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि गुवाहाटी एम्स का कार्य तेज गति से चल रहा है और संस्थान में पहला बैच शुरू हो गया है। एम्स का काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा हो जाएगा। उन्होंने असम की समस्या के प्रति ऐतिहासिक उदासीनता का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार पूरे समर्पण भाव से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने असम के लोगों की चिकित्सा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के प्रयास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से असम के 1.25 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं क्योंकि 350 से अधिक अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है। आयुष्मान भारत के तहत असम के लगभग डेढ़ लाख गरीब लोगों का मुफ्त इलाज किया गया है। राज्य में लगभग 55 लाख लोगों ने राज्य में स्थापित स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार का लाभ उठाया है। जनौषधि केन्द्र, अटल अमृत योजना और प्रधानमंत्री डायलिसिस कार्यक्रम आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। प्रधानमंत्री ने असम में चाय बागानों की केन्द्रीयता का भी उल्लेख करते हुए कहा कि धन पुरस्कार मेला योजना के तहत कल चाय बागानों के 7.5 लाख मजदूरों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की विशेष योजना द्वारा मदद की जा रही है। श्रमिकों की देखभाल के लिए चाय बागानों में विशेष चिकित्सा इकाइयां भेजी जाती हैं। इन्हें मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इस साल के बजट में चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय चाय की छवि खराब करने की साजिश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जहां कुछ विदेश स्थित ताकतें भारत की चाय की पहचान पर हमला करने की योजना बना रही हैं। असम की भूमि से प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि इन साजिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा और लोग इन षडयंत्रकारियों और इनका समर्थन करने वालों से जवाब मांगेंगे। हमारे चाय मजदूर इस लड़ाई में विजयी होंगे। भारतीय चाय पर हो रहे इन हमलों में हमारे चाय बागानों के श्रमिकों की कड़ी मेहनत का मुकाबला करने की शक्ति नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की बढ़ती हुई क्षमताओं में आधुनिक सड़कों और बुनियादी ढांचे की मुख्य भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए 'भारत माला परियोजना' के अनुरूप 'असोम माला' शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में हजारों किलोमीटर लंबी सड़कों और अनेक पुलों का निर्माण हुआ है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि असोम माला परियोजना असम के सभी गांवों के लिए चौड़ी सड़कें और संपर्क का नेटवर्क स्थापित होने के सपनों को पूरा करेगी। ये कार्य आने वाले दिनों में नई गति प्राप्त करेंगे क्योंकि इस बजट में तेज गति और विकास के लिए बुनियादी ढांचे के बारे में अप्रत्याशित रूप से जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के सोनितपुर जिले के ढेकियाजुली में दो अस्पतालों की आधारशिला रखी और असम के राज्य राजमार्गों तथा प्रमुख जिला सड़कों के निर्माण के लिए एक कार्यक्रम असोम माला का शुभारंभ किया। असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, केन्द्रीय मंत्री श्री रामेश्वर तेली, असम सरकार के मंत्री तथा बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के प्रमुख श्री प्रमोद बोरो भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने असम के लोगों द्वारा उनके प्रति दिखाए गए स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, मंत्री श्री हेमंता बिस्वा, बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के प्रमुख श्री प्रमोद बोरो और राज्य सरकार की असम की सेवा और तेजी से प्रगति के लिए उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ बयालीस में आक्रमणकारियों के सामने इस क्षेत्र द्वारा किए गए प्रतिरोध और तिरंगे के लिए शहीदों के बलिदान के गौरवशाली इतिहास को स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा, अभाव, तनाव, भेदभाव और संघर्ष की विरासत को पीछे छोड़ते हुए पूरा पूर्वोत्तर आज विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और इसमें असम मुख्य भूमिका अदा कर रहा है। श्री मोदी ने कहा कि ऐतिहासिक बोडो समझौते के बाद बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के हालिया चुनाव ने इस क्षेत्र में विकास और विश्वास का एक नया अध्याय लिखा है। यह दिवस असम के भाग्य और भविष्य में महत्वपूर्ण बलिदान का साक्षी है क्योंकि असम को बिश्वनाथ और चराईदेव में दो नए मेडिकल कॉलेज का उपहार मिल रहा है और असोम माला के माध्यम से आधुनिक बुनियादी ढांचे की आधारशिला रखी जा रही है। विगत में राज्य में चिकित्सा बुनियादी ढांचे की खराब हालत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय असम में स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर वर्ष दो हज़ार सोलह तक की अवधि में केवल छः मेडिकल कॉलेज थे, जबकि पिछले पाँच वर्षों में छः नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का काम शुरू हो गया है। बिश्वनाथ और चराईदेव मेडिकल कॉलेज उत्तर और ऊपरी असम की जरूरत को पूरा करेंगे। इसी प्रकार इन दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद राज्य में केवल सात सौ पच्चीस मेडिकल सीटों की पृष्ठभूमि में हर साल एक हज़ार छः सौ नए डॉक्टर उपलब्ध होंगे। इससे राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि गुवाहाटी एम्स का कार्य तेज गति से चल रहा है और संस्थान में पहला बैच शुरू हो गया है। एम्स का काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा हो जाएगा। उन्होंने असम की समस्या के प्रति ऐतिहासिक उदासीनता का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार पूरे समर्पण भाव से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने असम के लोगों की चिकित्सा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के प्रयास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से असम के एक.पच्चीस करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं क्योंकि तीन सौ पचास से अधिक अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है। आयुष्मान भारत के तहत असम के लगभग डेढ़ लाख गरीब लोगों का मुफ्त इलाज किया गया है। राज्य में लगभग पचपन लाख लोगों ने राज्य में स्थापित स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार का लाभ उठाया है। जनौषधि केन्द्र, अटल अमृत योजना और प्रधानमंत्री डायलिसिस कार्यक्रम आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। प्रधानमंत्री ने असम में चाय बागानों की केन्द्रीयता का भी उल्लेख करते हुए कहा कि धन पुरस्कार मेला योजना के तहत कल चाय बागानों के सात.पाँच लाख मजदूरों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की विशेष योजना द्वारा मदद की जा रही है। श्रमिकों की देखभाल के लिए चाय बागानों में विशेष चिकित्सा इकाइयां भेजी जाती हैं। इन्हें मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इस साल के बजट में चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए एक हज़ार करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय चाय की छवि खराब करने की साजिश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जहां कुछ विदेश स्थित ताकतें भारत की चाय की पहचान पर हमला करने की योजना बना रही हैं। असम की भूमि से प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि इन साजिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा और लोग इन षडयंत्रकारियों और इनका समर्थन करने वालों से जवाब मांगेंगे। हमारे चाय मजदूर इस लड़ाई में विजयी होंगे। भारतीय चाय पर हो रहे इन हमलों में हमारे चाय बागानों के श्रमिकों की कड़ी मेहनत का मुकाबला करने की शक्ति नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की बढ़ती हुई क्षमताओं में आधुनिक सड़कों और बुनियादी ढांचे की मुख्य भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए 'भारत माला परियोजना' के अनुरूप 'असोम माला' शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में हजारों किलोमीटर लंबी सड़कों और अनेक पुलों का निर्माण हुआ है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि असोम माला परियोजना असम के सभी गांवों के लिए चौड़ी सड़कें और संपर्क का नेटवर्क स्थापित होने के सपनों को पूरा करेगी। ये कार्य आने वाले दिनों में नई गति प्राप्त करेंगे क्योंकि इस बजट में तेज गति और विकास के लिए बुनियादी ढांचे के बारे में अप्रत्याशित रूप से जोर दिया गया है।
कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं? जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड! याद है जब लड़कियों के कलपते बापों को धमका कर झूठ बोलने को कहा गया था, 'बोलो कि तुम्हारी लड़कियों के 'गलत' सम्बन्ध थे, बोलो। ' वो कांपते बोल गए। याद है जब लड़कियों के कलपते बापों को धमका कर झूठ बोलने को कहा गया था, 'बोलो कि तुम्हारी लड़कियों के 'गलत' सम्बन्ध थे, बोलो। ' वो कांपते बोल गए। आज आर्टिकल १५ की याद आयी। बेशक वो जात-पात के ज़हर को एक प्रिविलेज्ड लेंस से देखती है। पर वो फिल्म जो कहती है ना, उसके लिए दिल चाहिए पत्थर का। उसका एक एक संवाद कान में सीसे की तरह पिघलता है - क्यूंकि अत्याचार करते हैं हम, जो रोज़ सूट पहन कर समझते हैं हमारे अंदर का कालापन धुल गया। हम वही हैं जो ताज महल को अपने बाप की जागीर की तरह बेचते हैं, पर उसके आस पास की सच्चाई को ढक देते हैं। हम वही हैं जिन्हें नालियां साफ़ चाहिए, पर उसमें उतरने के लिए कोई और चाहिए, वो जो हमारे धिक्कार को सहे और हमारी गालियां सुने, ताकि हम अपने अहम् को सवार सकें। और अगर गलती से वो अपना सर उठा लें हमारे सामने, तो हम या तो वो सर काट दें या कटवा दें। कटवा ही देंगे क्यूंकि हमें अपने हाथों को उस खून से मैला नहीं करना, जो हमारा मैला ढोते ढोते स्याह पड़ चुका है। याद है जब लड़कियों के कलपते बापों को धमका कर झूठ बोलने को कहा गया था, 'बोलो कि तुम्हारी लड़कियों के 'गलत' सम्बन्ध थे, बोलो। ' वो कांपते बोल गए। क्या करते, लड़कियां खो चुके थे, पर ज़िंदा तो रहना था। और ज़िंदा रहने के लिए साहब की बात माननी थी। सच डावाडोल हो कर नंगा खड़ा था सामने। फिर भी कोई मानना नहीं चाहता था। सच आज भी सामने खड़ा है, पर हमें देखना वही है जो हमारी सत्ता के पक्ष में हो। हमारे लिए जान और अस्मत की कीमत अब कुछ रही नहीं। हम सुन्न पड़ चुके हैं। हमें बस विकल्प चाहिए सच को देखने के, जिससे अपना अपराधबोध काम कर सकें, बोल सकें कि नहीं जी, ये इसलिए नहीं हुआ कि जात को औक़ात दिखानी थी। क्या है ना, जिस दिन सच हमें समझ आ गया, उस दिन खुद के साथ जी नहीं पायेंगे हम। घिन आएगी। और मुँह छुपाने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। क्यूंकि नाले साफ़ हो गए, पर अंदर की गंदगी रह गयी। उस आग में भस्म हो गयी इज़्ज़त और धर्म और संस्कृति का झूठा नशा। चाहो तो सेंक लो राजनीती की रोटी। तुमसे सड़कों पर तो ना उतरा जाएगा अब। वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, हर गाँधी जयंती पर गा लेना झूठे मुँह, और भर लेना मुँह को सोच के खोखले लड्डू से। हमें तो अब मिट्टी का स्वाद आता है उसमें से। विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो। यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।
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किसान पिछले कुछ महीनों से नए कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 8 दिसम्बर को किसानों के आह्वान पर हुए भारत बंद का 15 विपक्षी पार्टियों, ट्रेड यूनियंस और 2 रेलवे यूनियंस ने समर्थन किया था. इसके बाद ट्विटर यूज़र @zachjcarter ने एक बहुत बड़े प्रदर्शन की चार तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "भारत में 250 *मिलियन* हड़ताल पर. ये आन्दोलन टीवी पर नहीं दिखाया जाएगा. " इस ट्वीट को 3 दिसम्बर से अबतक 2,000 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है. (आर्काइव लिंक) इन तस्वीरों के पीछे के सन्दर्भ को आपस में जोड़ने के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने सर्च इंजन बिंग और टिनआय (Tin Eye) पर कई रिवर्स इमेज सर्च किये. NDTV, बिज़नेस स्टैण्डर्ड और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग शामिल होने वाले थे. इस तस्वीर को न्यूज़ सेंट्रल 24×7 ने 2018 में पब्लिश किया था. इस तस्वीर का क्रेडिट कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी को दिया गया है. सीताराम येचुरी ने ये तस्वीर 11 मार्च, 2018 को ट्वीट करते हुए दावा किया था कि ये 2018 में मुंबई में किसान मार्च के दौरान ली गयी है. इस तस्वीर को फे़मिनिज़्म इन इंडिया (FII) ने 2018 में किसान मार्च पर आर्टिकल में पब्लिश किया था. ये दोनों तस्वीरें गेटी इमेजेज़ (3, 4) पर है जहां इनका एक ही कैप्शन है, "अमृतसर में 8 जनवरी, 2020 को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट (CPIM) कार्यकर्त्ता विभिन्न मज़दूर यूनियंस के सदस्यों और विपक्षी दलों के साथ मिलकर ट्रेन का रास्ता रोके नारे लगते हुए. पूरे देश में भारतीय सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ़ रेलवे स्टेशन के पास विरोध प्रदर्शन किया गया. " इन तस्वीरों का क्रेडिट फ़ोटोग्राफ़र नरिंदर नानू को दिया गया है. This slideshow requires JavaScript. वायरल मेसेज में ये बताया जा रहा है कि किसान आन्दोलन में 25 करोड़ लोग शामिल हुए, जो कि भारत की कुल जनसंख्या का करीब 17 प्रतिशत है. ऑल्ट न्यूज़ मजदूर यूनियन में शामिल हुए लोगों की संख्या की पुष्टि करने में असमर्थ था लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स BBC (आर्काइव लिंक) और बिज़नेस स्टैण्डर्ड (आर्काइव लिंक) ने रिपोर्ट किया था सरकार की नीतियों के खिलाफ इस प्रदर्शन में 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे. इसके बाद कई लोगों ने इंटरनेट पर भी ये दावा किया था. @zachjcarter के ट्वीट में एक भी तस्वीर वर्तमान किसान आन्दोलन से नहीं जुड़ी है. इनमें से 3 तस्वीर 8 जनवरी को ट्रेड यूनियंस के विरोध प्रदर्शनों की हैं और एक 2018 के किसान मार्च की. सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
किसान पिछले कुछ महीनों से नए कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आठ दिसम्बर को किसानों के आह्वान पर हुए भारत बंद का पंद्रह विपक्षी पार्टियों, ट्रेड यूनियंस और दो रेलवे यूनियंस ने समर्थन किया था. इसके बाद ट्विटर यूज़र @zachjcarter ने एक बहुत बड़े प्रदर्शन की चार तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "भारत में दो सौ पचास *मिलियन* हड़ताल पर. ये आन्दोलन टीवी पर नहीं दिखाया जाएगा. " इस ट्वीट को तीन दिसम्बर से अबतक दो,शून्य से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है. इन तस्वीरों के पीछे के सन्दर्भ को आपस में जोड़ने के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने सर्च इंजन बिंग और टिनआय पर कई रिवर्स इमेज सर्च किये. NDTV, बिज़नेस स्टैण्डर्ड और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हड़ताल में करीब पच्चीस करोड़ लोग शामिल होने वाले थे. इस तस्वीर को न्यूज़ सेंट्रल चौबीस×सात ने दो हज़ार अट्ठारह में पब्लिश किया था. इस तस्वीर का क्रेडिट कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी को दिया गया है. सीताराम येचुरी ने ये तस्वीर ग्यारह मार्च, दो हज़ार अट्ठारह को ट्वीट करते हुए दावा किया था कि ये दो हज़ार अट्ठारह में मुंबई में किसान मार्च के दौरान ली गयी है. इस तस्वीर को फे़मिनिज़्म इन इंडिया ने दो हज़ार अट्ठारह में किसान मार्च पर आर्टिकल में पब्लिश किया था. ये दोनों तस्वीरें गेटी इमेजेज़ पर है जहां इनका एक ही कैप्शन है, "अमृतसर में आठ जनवरी, दो हज़ार बीस को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट कार्यकर्त्ता विभिन्न मज़दूर यूनियंस के सदस्यों और विपक्षी दलों के साथ मिलकर ट्रेन का रास्ता रोके नारे लगते हुए. पूरे देश में भारतीय सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ़ रेलवे स्टेशन के पास विरोध प्रदर्शन किया गया. " इन तस्वीरों का क्रेडिट फ़ोटोग्राफ़र नरिंदर नानू को दिया गया है. This slideshow requires JavaScript. वायरल मेसेज में ये बताया जा रहा है कि किसान आन्दोलन में पच्चीस करोड़ लोग शामिल हुए, जो कि भारत की कुल जनसंख्या का करीब सत्रह प्रतिशत है. ऑल्ट न्यूज़ मजदूर यूनियन में शामिल हुए लोगों की संख्या की पुष्टि करने में असमर्थ था लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स BBC और बिज़नेस स्टैण्डर्ड ने रिपोर्ट किया था सरकार की नीतियों के खिलाफ इस प्रदर्शन में पच्चीस करोड़ लोग शामिल हुए थे. इसके बाद कई लोगों ने इंटरनेट पर भी ये दावा किया था. @zachjcarter के ट्वीट में एक भी तस्वीर वर्तमान किसान आन्दोलन से नहीं जुड़ी है. इनमें से तीन तस्वीर आठ जनवरी को ट्रेड यूनियंस के विरोध प्रदर्शनों की हैं और एक दो हज़ार अट्ठारह के किसान मार्च की. सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
अलवर के बीबीरानी के खेड़ा गांव में मंगलवार को दो बेटों ने अपने मां-बाप को बुरी तरह पीटा। इस घिनौनी हरकत में दोनों बेटों की पत्नियां और बच्चे भी शामिल रहे। बेटों ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। पत्थर काटने वाले हथौड़े से मां के पैरों पर एक के बाद एक पांच वार किए। बीच-बचाव में आए पिता को भी लात-घूसों से पीटा। घर में एक छोटी बेटी थी, वह मां-बाप की हालत देख रोने और कांपने लगी। जब बुजुर्ग पति-पत्नी को हॉस्पिटल ले जाया गया तो दर्द से तड़प रहे थे। बार-बार एक ही बात बोल रहे थे. . . भगवान ऐसी औलाद किसी को न दे. . . । अभी दोनों बुजुर्ग अलवर के जिला हॉस्पिटल में हैं। यहां 60 साल के उदयचंद और 55 साल की राजबाला का इलाज चल रहा है। हॉस्पिटल में जिस वार्ड में भर्ती है, वहां के आस-पास लोगों ने जब पूछा ये कैसे हुआ तो वे भी नहीं बता सके कि उनके ही बेटों ने पिटाई की। लेकिन, जब बेटियां हॉस्पिटल पहुंचीं तो पूरी घटना बताई। इसके बाद जो खुलासे हुए तो 60 साल के पिता की आंख में भी आंसू थे। बहनें रो रही थीं क्योंकि ये लोग उन्हें भी धमकी दे चुके थे। इस घटना के बाद दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने जब पिता और बेटियों से बात की तो बताया कि ये पहली बार नहीं है। लेकिन, बेटों की इज्जत खराब नहीं हो इसलिए दोनों ने कभी किसी को नहीं बताया। बेटे तो दूर की बात दोनों बहू भी इन्हें पसंद नहीं करती है। जब झगड़े की वजह पूछी तो बताया कि झगड़ा केवल जमीन के एक बंटवारे का है। घर की बहुओं को लगता है कि जमीन बेटियों के नाम न कर दे, इसलिए आए दिन मारपीट करते रहते हैं। और, ऐसा पिछले 4 साल से चल रहा है। मेरे (उदयचंद) तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। तीनों बेटियाें लक्ष्मी,बीना और मधु की शादी हो चुकी है। तीन बेटे दिलीप, हितेंद्र और परविंदर हैं। घर का बंटवारा किया हुआ है। इसलिए दिलीप और हितेंद्र अलग रहते हैं। पास में ही परविंदर का मकान है। दिलीप और हितेंद्र कारपेंटर हैं, दोनों का व्यवहार हमें अच्छा नहीं लगता है। इसलिए हम सबसे छोटे बेटे परविंदर के साथ ही रहते हैं। वो खेती-बाड़ी करता है। 4 साल पहले मैंने तीनों बेटियों की शादियां कर दी थी। तब तक सबकुछ सही चल रहा था। लेकिन, इसके बाद दिलीप (32) और हितेंद्र (28) के साथ इनकी पत्नियों का व्यवहार बदलने लगा। बात केवल जमीन की है। गांव में मेरी करीब 8 बीघा जमीन है। जो दिलीप और हितेंद्र ने अपने नाम पहले से करवा दी थी। अब इसी जमीन में से करीब 2 बीघा हिस्सा बचा है। इनकी पत्नियों ने दिमाग में ये डाल दिया था कि कहीं हम लोग बाकी बची जमीन अपनी बेटियों को न दे दें। जबकि मेरे और पत्नी के मन में ऐसा कुछ नहीं था। इसी बात को लेकर पिछले 4 साल से विवाद चल रहा था। लेकिन, हमें पता नहीं था कि मेरे ही बेटे और बहू हैवानियत की हदें पार कद देंगे और इतना बुरी तरह से पीटेंगे कि हमें हॉस्पिटल में आना पड़ेगा। रविवार 25 जून को भी इसी जमीन को लेकर विवाद हुआ था। मैंने इन्हें समझाया भी कि ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन, इन्होंने उस दिन भी हम दोनों के साथ मारपीट की। मामला इतना बढ़ गया कि मुझे सोमवार को थाने जाना पड़ा और दोनों बेटों की शिकायत की। इस दौरान एक पुलिस वाला आया और कुछ देर रुक दोबारा चला गया। सोमवार रात तक सबकुछ सही था। हम लोग परविंदर के यहीं रहते हैं। मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे थे। परविंदर खेत में गया हुआ था। पत्नी राजबाला चाय बनाकर लाई थी। मेरे हाथ में चाय का ग्लास था। एक घूंट भी नीचे नहीं उतरा था कि हितेंद्र चिल्लाते हुए आया। कहने लगा- आ दिलीप आजा. . . आज इनका इलाज करते हैं। इतने में दोनों बेटे और उनकी पत्नियों के साथ उनके बच्चे भी आ गए। दिलीप और उसकी पत्नी मेरी पत्नी के हाथ पकड़ लिए और हितेंद्र हथौड़ा लेकर आया। घर के आंगन में पत्थर काटने वाला हथौड़ा पड़ा था। वजन करीब 5 किलो का होगा। उसने एक बार भी नहीं सोचा कि जिस पर वह हमला कर रहा है वह उसकी मां है। और, मेरी आंखों के सामने 5 बार उसके पैर में वार कर दिया। हर वार पर मेरी पत्नी चिखती रही और चिल्लाती रही लेकिन उनके चेहरे पर शिकंद तक नहीं थी। मैं बीच-बचाव करने आया तो मेरे बेटों ने मुझे भी लात-घूसों से पीटा। मुझे कहने में भी शर्म आती है कि इस मारपीट में मेरे बेटों तो क्या उनकी पत्नियां और बच्चे तक शामिल थे। हमारे (बेटी बीना) मां-बाप के साथ पहली बार ऐसा नहीं हुआ है। मेरे भाइयों का व्यवहार पिछले 4 साल से चल रहा है। पहले छोटी-मोटी कहासुनी होती थी। उनके मन में इस बात का गुस्सा था कि माता-पिता ने जमीन उनके नाम नहीं की। इसलिए फर्जी तरीके से जमीन नाम करवा ली। कई बार घर में जमीन विवाद को लेकर धक्का-मुक्की करते थे, गालियां देते थे। लेकिन, पिछले 2 साल से मारपीट पर उतर आए। दो साल पहले की बात है कि दिलीप जमीन बंटवारे को लेकर इतना बिफर गया कि पिता के सिर पर फर्सी (खेत में फसल काटने वाले औजार) से वार कर घायल कर दिया था। इसके बाद उन्हें जयपुर ले गए और इलाज करवाया। लोग दोनों बेटों की हंसी नहीं उड़ाए इसलिए पिता ने किसी को नहीं बताया कि उनके बेटे ने सिर फोड़ा है। सभी को ये ही कहा था कि एक्सीडेंट में सिर फूट गया। लेकिन, हम आज ये हकीकत बता रहे हैं कि सिर मेरे भाई ने फोड़ा था। बेटी लक्ष्मी ने बताया- दिलीप और हितेंद्र की पत्नी दोनों को भड़काती थी। वह कहती थी अपना व्यवहार अच्छा नहीं है। ऐसे में ये जमीन बेटियों के नाम नहीं कर दे। इनकी हालात ये थी कि ये अपने सास और ससुर को खाना डालना तो दूर की बात इनकी शक्ल देखना तक पसंद नहीं करती थी। मां को मां तक नहीं मानते थे। लोगों के सामने इज्जत उतार देते थे। इसलिए दोनों सबसे छोटे बेटे परविंदर के पास ही रहते थे। हम भी पीहर आते तो परविंदर के यहीं जाते हैं। कई बार तो लोगों के सामने गाली-गलौज की और कपड़े तक फाड़ दिए। उन्होंने बताया कि दिलीप के दो बेटे और हितेंद्र के एक बेटा एक बेटी है। लेकिन, जब हमारे मां-बाप के साथ मारपीट होती थी तो इनके बच्चे भी पीछे नहीं रहते थे। पिता ने बताया पिछले तीन दिनों से दोनों बेटे मारपीट करते आ रहे हैं। इन तीन दिनों में अपनी मां को भी पीटा। मारपीट को लेकर हालात ये है कि कभी भी ये परविंदर के घर आ जाते और मां को भी पीटने लग जाते। हम दोनों के साथ धक्का-मुक्की करते और थप्पड़ मार देते थे। थोड़ा विवाद बढ़ता तो लात-घूसों से पीटने लगते। इस झगड़े से बचने के लए मेरे पास जो रुपए होता वो दे देता और इन्हें रवाना करता। इन 4 सालों में मैं इन्हें 15 लाख रुपए दे चुका हूं। घटना की जानकारी मिलने के बाद उदयचंद और राजबाला की तीनों बेटियां हॉस्पिटल पहुंची। इनमें सबसे छोटी बेटी बीना किसी कंपनी में काम करती है इसलिए मां-बाप के साथ ही रहती है। बेटियों ने बताया कि मारपीट के बाद दिलीप और हितेंद्र ने तीनों को कॉल किया और धमकाया कि मां-बाप के पास कोई नहीं आएगा। यदि गलती से भी आ गए तो उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव होगा। बेटियों ने आरोप लगाया कि दोनों भाई खुद के भांणेज को भी मारने तक की धमकी दे चुके हैं। बेटियों ने बताया कि कई बार हमारे सामने भी मां-बाप को पीटा है। यह हमसे भी देखा नहीं जाता। जब टोकते हैं तो भाई-भाभी उन्हें धमकाने लगते हैं। घर की बहूएं अपने ससुर को कुछ नहीं समझती। मुझे अब उस घर में भी जाने से डर लगता है। सोचता हूं यदि वहां गया तो मुझे मेरे बेटे ही जिंदा मार देंगे। इनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि जब हमें हॉस्पिटल लेकर आ रहे थे तो एम्बुलेंस का पीछा किया। यहां भी पीछा करते हुए धमका रहे थे कि दोनों को छोड़ेंगे नहीं। पुलिस भी इनका कुछ नहीं कर सकी। बेटों से परेशान होकर थाने में 4 बार शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने आरोपी बेटों के खिलाफ एक बार भी कार्रवाई नहीं की। इसलिए भी उनकी हिम्मत बढ़ गई थी कि पुलिस उनका क्या बिगाड़ लेगी। सोमवार को शिकायत के बाद यदि पुलिस कोई एक्शन ले लेती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता। वहीं इस मामले में थाने के एसएचओ धारा सिंह ने बताया कि पहले क्या मामला था मेरे ध्यान में नहीं है। लेकिन, मंगलवार को हुई घटना की किसी ने शिकायत नहीं दी। इसके बाद भी जब हमें जानकारी मिली तो थाने के स्टाफ को भेजा गया और बयान लिए गए। इधर, देर शाम को दोनों बेटों को हिरासत में भी ले लिया है। पिता इस घटना के बाद से परेशान है। साथ में डर भी है कि कहीं उनके बेटे उन्हें मार न दे। पिता ने बताया कि उनके दोनों बेटे दोषी है। उन्हें बख्शा नहीं जाए। जिन्होंने अपनी मां के पैर तोड़ दिए वे किसके सगे हो सकते हैं। जिस मां ने दुनिया दिखाई, अब वे ही अपनी मां को दुनिया में नहीं रहना देना चाह रहे। अब पुलिस दोनों बेटे व बहूओं को गिरफ्तार करे। हमें सुरक्षित किया जाए। राजबाला के दोनों पैर तोड़ दिए गए हैं। हाथ भी टूट गया है। डॉक्टर्स ने बताया कि जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया तो पैर लटके हुए थे और खून बह रहा था। जब मेडिकल टेस्ट किए गए तो पता चला कि पैरों की हडि्डयां टूट चुकी हैं और मल्टीपल फ्रैक्चर है। ऐसे में पैरों का ऑपरेशन होगा और रॉड डाली जाएगी। बेटों की पिटाई से मां अब भी हॉस्पिटल् में बेसुध है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अलवर के बीबीरानी के खेड़ा गांव में मंगलवार को दो बेटों ने अपने मां-बाप को बुरी तरह पीटा। इस घिनौनी हरकत में दोनों बेटों की पत्नियां और बच्चे भी शामिल रहे। बेटों ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। पत्थर काटने वाले हथौड़े से मां के पैरों पर एक के बाद एक पांच वार किए। बीच-बचाव में आए पिता को भी लात-घूसों से पीटा। घर में एक छोटी बेटी थी, वह मां-बाप की हालत देख रोने और कांपने लगी। जब बुजुर्ग पति-पत्नी को हॉस्पिटल ले जाया गया तो दर्द से तड़प रहे थे। बार-बार एक ही बात बोल रहे थे. . . भगवान ऐसी औलाद किसी को न दे. . . । अभी दोनों बुजुर्ग अलवर के जिला हॉस्पिटल में हैं। यहां साठ साल के उदयचंद और पचपन साल की राजबाला का इलाज चल रहा है। हॉस्पिटल में जिस वार्ड में भर्ती है, वहां के आस-पास लोगों ने जब पूछा ये कैसे हुआ तो वे भी नहीं बता सके कि उनके ही बेटों ने पिटाई की। लेकिन, जब बेटियां हॉस्पिटल पहुंचीं तो पूरी घटना बताई। इसके बाद जो खुलासे हुए तो साठ साल के पिता की आंख में भी आंसू थे। बहनें रो रही थीं क्योंकि ये लोग उन्हें भी धमकी दे चुके थे। इस घटना के बाद दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने जब पिता और बेटियों से बात की तो बताया कि ये पहली बार नहीं है। लेकिन, बेटों की इज्जत खराब नहीं हो इसलिए दोनों ने कभी किसी को नहीं बताया। बेटे तो दूर की बात दोनों बहू भी इन्हें पसंद नहीं करती है। जब झगड़े की वजह पूछी तो बताया कि झगड़ा केवल जमीन के एक बंटवारे का है। घर की बहुओं को लगता है कि जमीन बेटियों के नाम न कर दे, इसलिए आए दिन मारपीट करते रहते हैं। और, ऐसा पिछले चार साल से चल रहा है। मेरे तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। तीनों बेटियाें लक्ष्मी,बीना और मधु की शादी हो चुकी है। तीन बेटे दिलीप, हितेंद्र और परविंदर हैं। घर का बंटवारा किया हुआ है। इसलिए दिलीप और हितेंद्र अलग रहते हैं। पास में ही परविंदर का मकान है। दिलीप और हितेंद्र कारपेंटर हैं, दोनों का व्यवहार हमें अच्छा नहीं लगता है। इसलिए हम सबसे छोटे बेटे परविंदर के साथ ही रहते हैं। वो खेती-बाड़ी करता है। चार साल पहले मैंने तीनों बेटियों की शादियां कर दी थी। तब तक सबकुछ सही चल रहा था। लेकिन, इसके बाद दिलीप और हितेंद्र के साथ इनकी पत्नियों का व्यवहार बदलने लगा। बात केवल जमीन की है। गांव में मेरी करीब आठ बीघा जमीन है। जो दिलीप और हितेंद्र ने अपने नाम पहले से करवा दी थी। अब इसी जमीन में से करीब दो बीघा हिस्सा बचा है। इनकी पत्नियों ने दिमाग में ये डाल दिया था कि कहीं हम लोग बाकी बची जमीन अपनी बेटियों को न दे दें। जबकि मेरे और पत्नी के मन में ऐसा कुछ नहीं था। इसी बात को लेकर पिछले चार साल से विवाद चल रहा था। लेकिन, हमें पता नहीं था कि मेरे ही बेटे और बहू हैवानियत की हदें पार कद देंगे और इतना बुरी तरह से पीटेंगे कि हमें हॉस्पिटल में आना पड़ेगा। रविवार पच्चीस जून को भी इसी जमीन को लेकर विवाद हुआ था। मैंने इन्हें समझाया भी कि ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन, इन्होंने उस दिन भी हम दोनों के साथ मारपीट की। मामला इतना बढ़ गया कि मुझे सोमवार को थाने जाना पड़ा और दोनों बेटों की शिकायत की। इस दौरान एक पुलिस वाला आया और कुछ देर रुक दोबारा चला गया। सोमवार रात तक सबकुछ सही था। हम लोग परविंदर के यहीं रहते हैं। मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे थे। परविंदर खेत में गया हुआ था। पत्नी राजबाला चाय बनाकर लाई थी। मेरे हाथ में चाय का ग्लास था। एक घूंट भी नीचे नहीं उतरा था कि हितेंद्र चिल्लाते हुए आया। कहने लगा- आ दिलीप आजा. . . आज इनका इलाज करते हैं। इतने में दोनों बेटे और उनकी पत्नियों के साथ उनके बच्चे भी आ गए। दिलीप और उसकी पत्नी मेरी पत्नी के हाथ पकड़ लिए और हितेंद्र हथौड़ा लेकर आया। घर के आंगन में पत्थर काटने वाला हथौड़ा पड़ा था। वजन करीब पाँच किलो का होगा। उसने एक बार भी नहीं सोचा कि जिस पर वह हमला कर रहा है वह उसकी मां है। और, मेरी आंखों के सामने पाँच बार उसके पैर में वार कर दिया। हर वार पर मेरी पत्नी चिखती रही और चिल्लाती रही लेकिन उनके चेहरे पर शिकंद तक नहीं थी। मैं बीच-बचाव करने आया तो मेरे बेटों ने मुझे भी लात-घूसों से पीटा। मुझे कहने में भी शर्म आती है कि इस मारपीट में मेरे बेटों तो क्या उनकी पत्नियां और बच्चे तक शामिल थे। हमारे मां-बाप के साथ पहली बार ऐसा नहीं हुआ है। मेरे भाइयों का व्यवहार पिछले चार साल से चल रहा है। पहले छोटी-मोटी कहासुनी होती थी। उनके मन में इस बात का गुस्सा था कि माता-पिता ने जमीन उनके नाम नहीं की। इसलिए फर्जी तरीके से जमीन नाम करवा ली। कई बार घर में जमीन विवाद को लेकर धक्का-मुक्की करते थे, गालियां देते थे। लेकिन, पिछले दो साल से मारपीट पर उतर आए। दो साल पहले की बात है कि दिलीप जमीन बंटवारे को लेकर इतना बिफर गया कि पिता के सिर पर फर्सी से वार कर घायल कर दिया था। इसके बाद उन्हें जयपुर ले गए और इलाज करवाया। लोग दोनों बेटों की हंसी नहीं उड़ाए इसलिए पिता ने किसी को नहीं बताया कि उनके बेटे ने सिर फोड़ा है। सभी को ये ही कहा था कि एक्सीडेंट में सिर फूट गया। लेकिन, हम आज ये हकीकत बता रहे हैं कि सिर मेरे भाई ने फोड़ा था। बेटी लक्ष्मी ने बताया- दिलीप और हितेंद्र की पत्नी दोनों को भड़काती थी। वह कहती थी अपना व्यवहार अच्छा नहीं है। ऐसे में ये जमीन बेटियों के नाम नहीं कर दे। इनकी हालात ये थी कि ये अपने सास और ससुर को खाना डालना तो दूर की बात इनकी शक्ल देखना तक पसंद नहीं करती थी। मां को मां तक नहीं मानते थे। लोगों के सामने इज्जत उतार देते थे। इसलिए दोनों सबसे छोटे बेटे परविंदर के पास ही रहते थे। हम भी पीहर आते तो परविंदर के यहीं जाते हैं। कई बार तो लोगों के सामने गाली-गलौज की और कपड़े तक फाड़ दिए। उन्होंने बताया कि दिलीप के दो बेटे और हितेंद्र के एक बेटा एक बेटी है। लेकिन, जब हमारे मां-बाप के साथ मारपीट होती थी तो इनके बच्चे भी पीछे नहीं रहते थे। पिता ने बताया पिछले तीन दिनों से दोनों बेटे मारपीट करते आ रहे हैं। इन तीन दिनों में अपनी मां को भी पीटा। मारपीट को लेकर हालात ये है कि कभी भी ये परविंदर के घर आ जाते और मां को भी पीटने लग जाते। हम दोनों के साथ धक्का-मुक्की करते और थप्पड़ मार देते थे। थोड़ा विवाद बढ़ता तो लात-घूसों से पीटने लगते। इस झगड़े से बचने के लए मेरे पास जो रुपए होता वो दे देता और इन्हें रवाना करता। इन चार सालों में मैं इन्हें पंद्रह लाख रुपए दे चुका हूं। घटना की जानकारी मिलने के बाद उदयचंद और राजबाला की तीनों बेटियां हॉस्पिटल पहुंची। इनमें सबसे छोटी बेटी बीना किसी कंपनी में काम करती है इसलिए मां-बाप के साथ ही रहती है। बेटियों ने बताया कि मारपीट के बाद दिलीप और हितेंद्र ने तीनों को कॉल किया और धमकाया कि मां-बाप के पास कोई नहीं आएगा। यदि गलती से भी आ गए तो उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव होगा। बेटियों ने आरोप लगाया कि दोनों भाई खुद के भांणेज को भी मारने तक की धमकी दे चुके हैं। बेटियों ने बताया कि कई बार हमारे सामने भी मां-बाप को पीटा है। यह हमसे भी देखा नहीं जाता। जब टोकते हैं तो भाई-भाभी उन्हें धमकाने लगते हैं। घर की बहूएं अपने ससुर को कुछ नहीं समझती। मुझे अब उस घर में भी जाने से डर लगता है। सोचता हूं यदि वहां गया तो मुझे मेरे बेटे ही जिंदा मार देंगे। इनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि जब हमें हॉस्पिटल लेकर आ रहे थे तो एम्बुलेंस का पीछा किया। यहां भी पीछा करते हुए धमका रहे थे कि दोनों को छोड़ेंगे नहीं। पुलिस भी इनका कुछ नहीं कर सकी। बेटों से परेशान होकर थाने में चार बार शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने आरोपी बेटों के खिलाफ एक बार भी कार्रवाई नहीं की। इसलिए भी उनकी हिम्मत बढ़ गई थी कि पुलिस उनका क्या बिगाड़ लेगी। सोमवार को शिकायत के बाद यदि पुलिस कोई एक्शन ले लेती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता। वहीं इस मामले में थाने के एसएचओ धारा सिंह ने बताया कि पहले क्या मामला था मेरे ध्यान में नहीं है। लेकिन, मंगलवार को हुई घटना की किसी ने शिकायत नहीं दी। इसके बाद भी जब हमें जानकारी मिली तो थाने के स्टाफ को भेजा गया और बयान लिए गए। इधर, देर शाम को दोनों बेटों को हिरासत में भी ले लिया है। पिता इस घटना के बाद से परेशान है। साथ में डर भी है कि कहीं उनके बेटे उन्हें मार न दे। पिता ने बताया कि उनके दोनों बेटे दोषी है। उन्हें बख्शा नहीं जाए। जिन्होंने अपनी मां के पैर तोड़ दिए वे किसके सगे हो सकते हैं। जिस मां ने दुनिया दिखाई, अब वे ही अपनी मां को दुनिया में नहीं रहना देना चाह रहे। अब पुलिस दोनों बेटे व बहूओं को गिरफ्तार करे। हमें सुरक्षित किया जाए। राजबाला के दोनों पैर तोड़ दिए गए हैं। हाथ भी टूट गया है। डॉक्टर्स ने बताया कि जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया तो पैर लटके हुए थे और खून बह रहा था। जब मेडिकल टेस्ट किए गए तो पता चला कि पैरों की हडि्डयां टूट चुकी हैं और मल्टीपल फ्रैक्चर है। ऐसे में पैरों का ऑपरेशन होगा और रॉड डाली जाएगी। बेटों की पिटाई से मां अब भी हॉस्पिटल् में बेसुध है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टमाटर - 2. 5 कि. लो. 1. सबसे पहले टमाटर को धोकर अच्छी तरह सुखा लें और फिर इन्हें बारीक काटें। 2. प्रेशर कुकर में बारीक कटे टमाटर, अदरक, लहसुन, किशमिश, सूखी लाल मिर्च, सिरका डालें और शक्कर डालें। 3. इसे 9-15 मिनट तक बिना ढक्कन लगाए पकाएं और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि यह बर्तन के तलवे से ना लगे। 4. इसके बाद मिश्नण को 1 सीटी लगाएं और फिर ढक्कन खोलकर करीब आधे घंटे तक येधीमी आंच पर पकाएं। 5. फिर मिक्सचर को ब्लेंडर में डालकर थिक पीस लें। 6. मोटी छननी में केचअप को छान लें। 7. इसमें थोड़ी-सी रिफाइन्ड शुगर डालकर कम से कम आधे घंटे तक पकाएं, ताकि ये गाढ़ी हो जाए। 8. अब 1 चम्मच गर्म पानी में सोडियम बेंजोएट मिलाकर इसका 1/4 टीस्पून मिश्नण में मिक्स करें। 9. लीजिए आपकी सॉस बनकर तैयार है। अब आप इसे किसी एयर टाइट कंटेनर में स्टोर करें।
टमाटर - दो. पाँच कि. लो. एक. सबसे पहले टमाटर को धोकर अच्छी तरह सुखा लें और फिर इन्हें बारीक काटें। दो. प्रेशर कुकर में बारीक कटे टमाटर, अदरक, लहसुन, किशमिश, सूखी लाल मिर्च, सिरका डालें और शक्कर डालें। तीन. इसे नौ-पंद्रह मिनट तक बिना ढक्कन लगाए पकाएं और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि यह बर्तन के तलवे से ना लगे। चार. इसके बाद मिश्नण को एक सीटी लगाएं और फिर ढक्कन खोलकर करीब आधे घंटे तक येधीमी आंच पर पकाएं। पाँच. फिर मिक्सचर को ब्लेंडर में डालकर थिक पीस लें। छः. मोटी छननी में केचअप को छान लें। सात. इसमें थोड़ी-सी रिफाइन्ड शुगर डालकर कम से कम आधे घंटे तक पकाएं, ताकि ये गाढ़ी हो जाए। आठ. अब एक चम्मच गर्म पानी में सोडियम बेंजोएट मिलाकर इसका एक/चार टीस्पून मिश्नण में मिक्स करें। नौ. लीटरजिए आपकी सॉस बनकर तैयार है। अब आप इसे किसी एयर टाइट कंटेनर में स्टोर करें।
रक्षा मंत्रालय ने 28 हजार करोड़ रूपए के उपकरण, साजो सामान की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वायु सेना के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और नौसेना के लिए अपतटीय गश्ती पोत खरीदे जाने है। नई दिल्लीः भारत की तीनों सेनाओं को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जल्द ही भारतीय सेना को नए हथियार, उपकरण और अन्य जरुरी सामान मुहैया कराये जायेंगे। इसके लिए गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने घरेलू उद्योगों से 28 हजार करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। ऐसे में अब भारत की जल- थल और वायु सेना ने भिड़ना चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती बन जाएगा। दरअसल, भारत और पाकिस्तान विभाग के बाद से एक दूसरे से टकराते आ रहे हैं। पाकिस्तान सीमा पर आये दिन भारतीय सेना को ललकारता है और उकसाता है। वहीं इस साल भारत को चीन के बीच अड़ियल और आक्रामक रवैये से टकराना पड़ा। लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई तो देश ने अपनी साइन ताकतों को पहले से ज्यादा मजबूत करने का निर्णय कर लिया। ऐसे में राफेल के बाद एयरफोर्स के लिए कई बड़े विमान और मिसाइलों पर काम हो रहा है, वहीं थल सेना के लिए तोपों, टैंक, अत्याधुनिक हथियारों और बम आदि की खरीद में भी रक्षा मंत्रालय जुट गया है। इसके अलावा नौसेना को दमदार बनाने के लिए रडार वाली स्वदेशी युद्धपोतों, नेवी के एयरक्राफ्ट और भारी सामान ले जाने और मारक क्षमता वाले जहाजों को भी खरीदने व् विकसित करने की योजना है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने 28 हजार करोड़ रूपए के उपकरण, साजो सामान की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, "भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की हथियार और उपकरणों सहित अन्य सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुल 28 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। " बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना के लिए विमानों की मौजूदगी का पता लगाने वाली पूर्व चेतावनी प्रणाली और नौसेना के लिए अपतटीय गश्ती पोत को खरीदने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने घरेलू उद्योग से 27,000 करोड़ रुपए के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें कुल 7 प्रस्ताव शामिल हैं, जिन्हे मंजूरी मिली। इनमे से 6 प्रस्ताव 27,000 करोड़ रुपए के हैं। वहीं अन्य एक प्रस्ताव पूरे एक हजार करोड़ का है। इसके तहत 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग को (स्वीकार्यता मंजूरी दी जाएगी। वहीं डीआरडीओ ने नौसेना के लिए गश्ती पोत, वायुसेना के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और थल सेना के लिए मॉड्यूलर ब्रिगेड ने बनाए हैं, उन्हें भी शामिल किया जाएगा। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
रक्षा मंत्रालय ने अट्ठाईस हजार करोड़ रूपए के उपकरण, साजो सामान की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वायु सेना के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और नौसेना के लिए अपतटीय गश्ती पोत खरीदे जाने है। नई दिल्लीः भारत की तीनों सेनाओं को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जल्द ही भारतीय सेना को नए हथियार, उपकरण और अन्य जरुरी सामान मुहैया कराये जायेंगे। इसके लिए गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने घरेलू उद्योगों से अट्ठाईस हजार करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। ऐसे में अब भारत की जल- थल और वायु सेना ने भिड़ना चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती बन जाएगा। दरअसल, भारत और पाकिस्तान विभाग के बाद से एक दूसरे से टकराते आ रहे हैं। पाकिस्तान सीमा पर आये दिन भारतीय सेना को ललकारता है और उकसाता है। वहीं इस साल भारत को चीन के बीच अड़ियल और आक्रामक रवैये से टकराना पड़ा। लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई तो देश ने अपनी साइन ताकतों को पहले से ज्यादा मजबूत करने का निर्णय कर लिया। ऐसे में राफेल के बाद एयरफोर्स के लिए कई बड़े विमान और मिसाइलों पर काम हो रहा है, वहीं थल सेना के लिए तोपों, टैंक, अत्याधुनिक हथियारों और बम आदि की खरीद में भी रक्षा मंत्रालय जुट गया है। इसके अलावा नौसेना को दमदार बनाने के लिए रडार वाली स्वदेशी युद्धपोतों, नेवी के एयरक्राफ्ट और भारी सामान ले जाने और मारक क्षमता वाले जहाजों को भी खरीदने व् विकसित करने की योजना है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने अट्ठाईस हजार करोड़ रूपए के उपकरण, साजो सामान की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, "भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की हथियार और उपकरणों सहित अन्य सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुल अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। " बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना के लिए विमानों की मौजूदगी का पता लगाने वाली पूर्व चेतावनी प्रणाली और नौसेना के लिए अपतटीय गश्ती पोत को खरीदने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा खरीद परिषद ने घरेलू उद्योग से सत्ताईस,शून्य करोड़ रुपए के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें कुल सात प्रस्ताव शामिल हैं, जिन्हे मंजूरी मिली। इनमे से छः प्रस्ताव सत्ताईस,शून्य करोड़ रुपए के हैं। वहीं अन्य एक प्रस्ताव पूरे एक हजार करोड़ का है। इसके तहत 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग को (स्वीकार्यता मंजूरी दी जाएगी। वहीं डीआरडीओ ने नौसेना के लिए गश्ती पोत, वायुसेना के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और थल सेना के लिए मॉड्यूलर ब्रिगेड ने बनाए हैं, उन्हें भी शामिल किया जाएगा। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
दुनिया में इस वक्त कई देशों के बीच हालात ठीक नहीं हैं। अफगानिस्तान में इस वक्त तालिबान का कब्जा है और जब से तालिबान आया है तब से देश में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। यहां तक कि लोगों को 2 वक्त के भोजन के लिए अपने बच्चों तक को बेचना पड़ रहा है। तालिबान के आते ही उसके सख्त कानून भी वापस लौट आए खासकर महिलाओं के लिए। हाल ही में तालिबान ने तो यह तक ऐलान कर दिया कि स्नानगृह में भी महिलाएं बुर्का बहन कर नाएंगी। इसके अलावा सरिया कानून के तरह तालिबान आम जनता का प्रताड़ित कर रहा है। अफगानिस्तान के अलावा इस वक्त कई और देश जहां पर ऐसी ही बद्दतर स्थिति देखने को मिल रही हैं। उनमें से एक है नाइजीरिया जहां सेना के हमलों का बदला लेने के लिए पूरे गांव को मौत के घाट उतार दिया। नाइजीरिया के उत्तरपश्चिमी राज्य जाम्फ्रा (State Zamfara) में एक बार फिर डाकुओं का आतंक देखने को मिला है। यहां हथियारों के साथ आए इन डाकुओं ने कम से कम 200 लोगों की हत्या कर दी है। सेना ने अभी पिछले ही सप्ताह डाकुओं के ठिकानों पर हवाई हमले किया था। जिसके बाद उन्होंने आम नागरिकों से इसका बदला लिया। जबकि राज्य सरकार का कहना है कि 58 लोगों को मारा गया है। हालांकि मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए क्षेत्र में लौटकर आए ग्रामीणों ने बताया कि 200 से अधिक लोग मारे गए हैं। सेना ने सोमवार को जाम्फ्रा के गुसामी जंगल और पश्चिमी त्समरे गांव में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसमें उनके दो नेताओं सहित 100 से अधिक डाकुओं की मौत हो गई। इसके बाद मोटरसाइकिल पर सवार 300 से अधिक बंदूकधारियों ने मंगलवार को जाम्फ्रा के अंका स्थानीय इलाके के आठ गांवों में धावा बोल दिया और गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कम से कम 30 लोग मारे गए। हमलावरों ने बुधवार से गुरुवार तक अंका और बुक्कुयूम जिलों के 10 गांवों में भी तोड़फोड़ की, निवासियों पर गोलीबारी की और घरों में लूटपाट की और आग लगा दी। डाकुओं को रास्ते में जो दिखा उसे वो गोली मारते गए। 10 गावों में 140 से अधिक लोगों को दफनाया गया है और अधिक शवों की तलाश की जा रही है, क्योंकि कई लोगों का पता नहीं चल पाया है। नाइजीरिया में 2020 के अंत से बड़े पैमाने पर अपहरण और अन्य हिंसक अपराधों में तेज वृद्धि देखने को मिली है। सरकार कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आतंकियों के साथ संघर्ष कर रही है।
दुनिया में इस वक्त कई देशों के बीच हालात ठीक नहीं हैं। अफगानिस्तान में इस वक्त तालिबान का कब्जा है और जब से तालिबान आया है तब से देश में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। यहां तक कि लोगों को दो वक्त के भोजन के लिए अपने बच्चों तक को बेचना पड़ रहा है। तालिबान के आते ही उसके सख्त कानून भी वापस लौट आए खासकर महिलाओं के लिए। हाल ही में तालिबान ने तो यह तक ऐलान कर दिया कि स्नानगृह में भी महिलाएं बुर्का बहन कर नाएंगी। इसके अलावा सरिया कानून के तरह तालिबान आम जनता का प्रताड़ित कर रहा है। अफगानिस्तान के अलावा इस वक्त कई और देश जहां पर ऐसी ही बद्दतर स्थिति देखने को मिल रही हैं। उनमें से एक है नाइजीरिया जहां सेना के हमलों का बदला लेने के लिए पूरे गांव को मौत के घाट उतार दिया। नाइजीरिया के उत्तरपश्चिमी राज्य जाम्फ्रा में एक बार फिर डाकुओं का आतंक देखने को मिला है। यहां हथियारों के साथ आए इन डाकुओं ने कम से कम दो सौ लोगों की हत्या कर दी है। सेना ने अभी पिछले ही सप्ताह डाकुओं के ठिकानों पर हवाई हमले किया था। जिसके बाद उन्होंने आम नागरिकों से इसका बदला लिया। जबकि राज्य सरकार का कहना है कि अट्ठावन लोगों को मारा गया है। हालांकि मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए क्षेत्र में लौटकर आए ग्रामीणों ने बताया कि दो सौ से अधिक लोग मारे गए हैं। सेना ने सोमवार को जाम्फ्रा के गुसामी जंगल और पश्चिमी त्समरे गांव में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसमें उनके दो नेताओं सहित एक सौ से अधिक डाकुओं की मौत हो गई। इसके बाद मोटरसाइकिल पर सवार तीन सौ से अधिक बंदूकधारियों ने मंगलवार को जाम्फ्रा के अंका स्थानीय इलाके के आठ गांवों में धावा बोल दिया और गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कम से कम तीस लोग मारे गए। हमलावरों ने बुधवार से गुरुवार तक अंका और बुक्कुयूम जिलों के दस गांवों में भी तोड़फोड़ की, निवासियों पर गोलीबारी की और घरों में लूटपाट की और आग लगा दी। डाकुओं को रास्ते में जो दिखा उसे वो गोली मारते गए। दस गावों में एक सौ चालीस से अधिक लोगों को दफनाया गया है और अधिक शवों की तलाश की जा रही है, क्योंकि कई लोगों का पता नहीं चल पाया है। नाइजीरिया में दो हज़ार बीस के अंत से बड़े पैमाने पर अपहरण और अन्य हिंसक अपराधों में तेज वृद्धि देखने को मिली है। सरकार कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आतंकियों के साथ संघर्ष कर रही है।
Pataudis Vacation Photos: बॉलीवुड सेलेब्स इन दिनों गर्मी के मौसम से राहत पाने के लिए एक से एक खास डेस्टिनेशन पर वेकेशन मना रहे हैं. ऐसे में सैफ अली खान और करीना कपूर खान भी अपने बच्चों के साथ लंदन में इंजॉय कर रहे हैं. इसी बीच सारा और इब्राहिम भी लंदन पहुंचे और इस वेकेशन का मजा डबल हो गया. पटौदीज की वेकेशन की कुछ बेहद खास तस्वीरें सारा अली खान और करीना कपूर खान ने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर की हैं. सामने आई इन तस्वीरों में जहां सैफ अपने बच्चों के साथ मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं तो वहीं फैंस इस फ्रेम में करीना कपूर को काफी मिस कर रहे हैं. सारा अली खान ने ये तस्वीरें फैंस के साथ इंस्टाग्राम के जरिए शेयर की हैं. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सैफ सारा-इब्राहिम और सबसे छोटे बेटे जेह के साथ खूब मस्ती के मूड में दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि सैफ दूसरी शादी के बाद भी सारा और इब्राहिम को पूरा वक्त देते हैं. सारा और सैफ की बॉन्डिंग हर किसी को काफी पसंद है. बता दें कि सैफ के चारों बच्चों के बीच काफी शानदार बॉन्डिंग है. सारा और इब्राहिम सैफ-करीना के दोनों बेटों तैमूर और जेह के बेहद क्लोज हैं. अक्सर सारा तैमूर और जेह से मिलने के लिए ढेर सारे तोहफों के साथ सैफ-करीना के घर भी जाती रहती हैं. इस तस्वीर में और देख सकते हैं कि सारा कैसे जेह के साथ ढील कर रही और वहीं जेह भी सारा को बेहद क्यूटनेस के साथ घूर रहे हैं. सारा और इब्राहिम इस तस्वीर में सैफ के साथ रॉयल अंदाज में दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि सैफ जहां लंदन में सारा और इब्राहिम के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं तो वहीं करीना ऐसे में अपने दोस्तों और गर्ल गैंग के साथ मस्ती में चूर हैं. बता दें कि गर्मी के मौसम से बचने के लिए तमाम सेलेब्स वेकेशन पर हैं. सारा अली खान ने अस वेकेशन से अपनी काफी सारी प्यारी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर ड्रॉप की हैं. इन तस्वीरों में सारा एक से बढ़कर एक शानदार लुक्स में नजर आ रही हैं. सारा के वेकेशन लुक्स सोशल मीडिया पर टॉक ऑफ द टाउन बने हुए हैं और फैंस इन्हें खूब लाइक और शेयर कर रहे हैं. सारा और इब्राहिम के बीच इस तस्वीर में काफी जबरदस्त बॉन्डिंग देखने को मिल रही है. बता दें कि बी टाउन में सारा और इब्राहिम सबसे पॉप्युलर भाई-बहन की जोड़ी है. सारा अक्सर इब्राहिम के साथ अपनी एक से बढ़कर एक प्यारी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं जिनमें दोनों से नजरे नहीं हटती हैं. करीना कपूर खान ने भी इस वेकेशन की तस्वीरें शेयर की हैं. इस तस्वीर में आप करीना और सैफ को रोमांस में डूबे देख सकते हैं. सैफ करीना की ये तस्वीर वायरल होने के बाद फैंस उनकी और भी तस्वीरों की डिमांस कर रहे हैं. हालांकि फिलहाल सैफ जहां बच्चों के साथ हैं तो वहीं करीना अपने दोस्तों के साथ चिल कर रही हैं.
Pataudis Vacation Photos: बॉलीवुड सेलेब्स इन दिनों गर्मी के मौसम से राहत पाने के लिए एक से एक खास डेस्टिनेशन पर वेकेशन मना रहे हैं. ऐसे में सैफ अली खान और करीना कपूर खान भी अपने बच्चों के साथ लंदन में इंजॉय कर रहे हैं. इसी बीच सारा और इब्राहिम भी लंदन पहुंचे और इस वेकेशन का मजा डबल हो गया. पटौदीज की वेकेशन की कुछ बेहद खास तस्वीरें सारा अली खान और करीना कपूर खान ने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर की हैं. सामने आई इन तस्वीरों में जहां सैफ अपने बच्चों के साथ मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं तो वहीं फैंस इस फ्रेम में करीना कपूर को काफी मिस कर रहे हैं. सारा अली खान ने ये तस्वीरें फैंस के साथ इंस्टाग्राम के जरिए शेयर की हैं. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सैफ सारा-इब्राहिम और सबसे छोटे बेटे जेह के साथ खूब मस्ती के मूड में दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि सैफ दूसरी शादी के बाद भी सारा और इब्राहिम को पूरा वक्त देते हैं. सारा और सैफ की बॉन्डिंग हर किसी को काफी पसंद है. बता दें कि सैफ के चारों बच्चों के बीच काफी शानदार बॉन्डिंग है. सारा और इब्राहिम सैफ-करीना के दोनों बेटों तैमूर और जेह के बेहद क्लोज हैं. अक्सर सारा तैमूर और जेह से मिलने के लिए ढेर सारे तोहफों के साथ सैफ-करीना के घर भी जाती रहती हैं. इस तस्वीर में और देख सकते हैं कि सारा कैसे जेह के साथ ढील कर रही और वहीं जेह भी सारा को बेहद क्यूटनेस के साथ घूर रहे हैं. सारा और इब्राहिम इस तस्वीर में सैफ के साथ रॉयल अंदाज में दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि सैफ जहां लंदन में सारा और इब्राहिम के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं तो वहीं करीना ऐसे में अपने दोस्तों और गर्ल गैंग के साथ मस्ती में चूर हैं. बता दें कि गर्मी के मौसम से बचने के लिए तमाम सेलेब्स वेकेशन पर हैं. सारा अली खान ने अस वेकेशन से अपनी काफी सारी प्यारी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर ड्रॉप की हैं. इन तस्वीरों में सारा एक से बढ़कर एक शानदार लुक्स में नजर आ रही हैं. सारा के वेकेशन लुक्स सोशल मीडिया पर टॉक ऑफ द टाउन बने हुए हैं और फैंस इन्हें खूब लाइक और शेयर कर रहे हैं. सारा और इब्राहिम के बीच इस तस्वीर में काफी जबरदस्त बॉन्डिंग देखने को मिल रही है. बता दें कि बी टाउन में सारा और इब्राहिम सबसे पॉप्युलर भाई-बहन की जोड़ी है. सारा अक्सर इब्राहिम के साथ अपनी एक से बढ़कर एक प्यारी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं जिनमें दोनों से नजरे नहीं हटती हैं. करीना कपूर खान ने भी इस वेकेशन की तस्वीरें शेयर की हैं. इस तस्वीर में आप करीना और सैफ को रोमांस में डूबे देख सकते हैं. सैफ करीना की ये तस्वीर वायरल होने के बाद फैंस उनकी और भी तस्वीरों की डिमांस कर रहे हैं. हालांकि फिलहाल सैफ जहां बच्चों के साथ हैं तो वहीं करीना अपने दोस्तों के साथ चिल कर रही हैं.
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पर्याये मानों उसके लम्बे इतिहास मे उत्कीणी ही गई हो, ऐसा होता है । इसलिये उस द्रव्य की पूर्णत देखने वाली दृष्टि भी ऐसी ही होनी चाहिये । यही कारण है कि द्रव्य को ग्रहण करने वाली इस दृष्टि को तथा इसका प्रति पादन करने वाले इन अभेद सूचक लक्षणो को द्रव्यार्थिक नय कहा जाता है । वस यही इस नय का या इस प्रकार के लक्षण करने का कारण है । इस नय का प्रयोजन जिज्ञासु श्रोता या पाठक को वस्तु का यथार्थ या भूतार्थ परिचय दिलाना है । अर्थात् जैसी वस्तु एक रस रूप अखड है वैसा ही चित्रण ज्ञान में आना चाहिये, इससे विपरीत नही । यह इसका प्रयोजन है । वक्ता या लेखक इस बात को भूला नही है, कि उसने वस्तु की व्याख्या करते या उसे लिखते हुये क्या क्रम अपनाया है । एक एक अग को पृथक पृथक आगे पीछे ही कहने व लिखने में आया है । यदि इतना ही करके छोड़ दे तो श्रोता के ज्ञान पर कैसा चित्रण बना रहेगा, यह भी उसे पता है । श्रोता बेचारा बिल्कुल अनभिज्ञ है । वह उतना और उस प्रकार ही तो स्वीकार कर सकता है जितना और जिस प्रकार कि वक्ता उसे बताता है । उसके अतिरिक्त अपनी तरफ से वह उस बताये हुये मे हीनाधिकता कैसे कर सकता है । और यदि ऐसा करने का प्रयत्न भी करेगा तो वह उसकी मर्जी से किया गया ग्रहण क्या उसके लिये सदा सशय का स्थान न बना रहेगा ? यहां यह प्रश्न हो सकता है, कि जितने भी दृष्टात अब तक देने मे आये है उन सब मे ही व्याख्या का उपरोक्त क्रम रहा है। फिर भी श्रोता या पाठक को कोई भ्रम होने नही पाया है । उष्णता, दाहकता आदि रूप से भेद करके की गई व्याख्या पर से भी श्रोता ठीक ठीक अभेद अग्नि को ही समझ पाया है, इसके स्थान पर किसी और पदार्थ का चित्रण उसके ज्ञान पट पर नहीं खिचा है । अभेद कहे विना भी स्वय अभेद का ग्रहण हो गया है । जन ऐसा स्वाभाविक रूप से हो ही जाता है तो इस द्रव्याथिक नय को कहने की आवश्यकता ही क्या है ? यह तो केवल वाक् गौरव मात्र रहा । और तो इसका मूल्य है नही । सो भाई । ऐसा नही है । यह वाक् गौरव मात्र नहीं है । तरी शका भी ठीक है । परन्तु तू ना करते समय इतना अवश्य भूल गया है कि जिन दृष्टातो के आधार पर तूने यहा शका उठाई है वह उन पदार्थों सम्बची है, जिन को तू पहिले में यर्थाथत जानता है । अर्थात् पहिले से उनका अभेद चित्रण तेर ज्ञान पट पर खिचा हुआ है । परतु यहा तो किसी अदृष्ट पदाथ को बताना अभीष्ट है, है, जो तू पहिले से नहीं जानता, जिसका यथाय चित्रण पहिले मे तेर ज्ञान पट पर नहीं है । उस चित्रण के प्रभाव म असण्ड द्रव्य को स्वत कैसे समझ सकेगा ? जितना और जैसा वताया जायेगा वही तो समझेगा, उसके अतिरिक्त और वैसे समझेगा ? बताया जा रहा है गड खड करके, अत सण्डो पर से असण्ड एक रस रूप पिण्ड को कमे समझेगा ? सण्ड हो तो समझेगा । और यदि ऐसा हुआ नो क्या कोई भी सत्ता भूत वस्तु तू समय पायेगा ? क्या उस तेरी समझ के अनुरूप खड़ लोक में तुमे वदापि देमन को मिलेंग ? और जन सा कुछ पृथक पृथक् देखने को मिलेगा ही नहीं तो उम प्रकार या वडिन ग्रहण क्या तेरे नाम पर केवल भार मात्र न होगा ? उसमे क्या प्रयोजन सिद्ध हो सकेगा ' जमे कि आगम व उद्धरणा पर से पढ़ कर तथा नानी जीवो के मुद्र में मुन पर यह बातें शदी म तो तू जान रहा है विद्वान लोग भी जान रहे हरि, वाय उपादान चारण से होता है 'काय निमित्त वारण में भी होता है, वाय पुग्वाथ के द्वारा काय नियति या वाल न के द्वारा भी और कार्य भवितव्य के आधीन भी है इत्यादि" । परन्तु इन को अभेद रूप से देखने में असमर्थ वास्तव मे तुझे इस बात का पता ही नही कि कार्य किस कारण से होता है । और इसीलिये बडे बडे विद्वान भी आज परस्पर मे इन कारणो ही की चर्चा में उलझ कर लड़ रहे है । उपादान से कार्य होता सुन कर निमित्तादि शेप चार कारण का निपेच प्रतीत होने लगता है, निमित्त कारण से होता है सुनकर उपादान व पुरुषार्थ आदि का निषेध भासने लगता है, पुरुषार्थ से होता मुन कर नियति व काल लव्धि केवल कपोल कल्पना सी दीखने लगती है, और नियत से होता मुनकर पुरुषार्थ व निमित्त की आवश्यकता ही रहती प्रतीत नही होती । जैन जगत के सर्व अध्यात्मिक पत्र विद्वानो के लिये इसी विषय पर मानो युद्ध के शस्त्र बने हुए है । जिनके द्वारा वे एक दूसरे पर वरावर प्रहार करते रहने में ही अपनी महत्ता समझते है । वर्षो चर्चा करते बीत गये परन्तु आज तक भी समाधान न हो सका । फिर तेरी तो बात ही क्या, तू तो ठहरा मन्द बुद्धि । इसी गान्ति पथ के अग स्वरूप सम्यकत्व, ज्ञान व चारित्र तीनो मे से कोई तो कहता है कि सम्यकत्व पहिले होता है, जब वह होता है तो ज्ञान चारित्र नही होता । कोई कहता है कि ज्ञान पहिले होता है । कोई कहता है कि चारित्र पहले धारो । कोई आगम ज्ञान के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ है, और कोई व्रत धारने व बाह्य के आचरण के पीछे । कोई बाह्य के आचरण को विल्कुल बेकार बता रहा है, और कोई इसमे अपने जीवन का सार देख रहा है । इत्यादि अनेको वाते आज अध्यात्म मार्ग मे क्या तुझसे से छिपी है विचार तो सही कि यदि दृष्ट पदार्थो वत, यहा भी सब उपरोक्त बातों को परस्पर सम्मेल बैठाकर एक रस रूप ग्रहण कर लिया होता, तो लडाईं को कहा अवकाश रह गया था । अदृष्ट विषयो को त्यभेद रूप से कैसे देखा जा सकता है, वही बात यह द्रव्याथिक नय बताता है । इसके बिना परम्पर विरोधी बाता का समन्वय बैठना अगम्भव है । यदि अभेद म्प से देखने का अभ्यास हुआ होता उपरोक्त काय कारण व्यवस्था में न अकेले उपादान को देखता न अकेले निमित्त को अकेले पुरुषाय को और न अकेली निर्यात को । पाचो का मिला हुआ एक रस रूप कोई अद्वितीय विजातीय कारण ही काय व्यवस्था में साथक है जिस में उन पाचो को एक ही समय समान स्थान प्राप्त है, बिल्कुल जीरे के पानी मे पडे मसालो वत् । वास्तव में इन सव कारणो में एक अनोखा सम्मेल है । निमित्त है तहा उपादान है और उपादान है तहा निमित्त । निमित्त के विना उपादान नहीं और उपादान के विना निमित्त नही । जहा पुरुषार्थ है वहा नियति अवश्य ह । पुरपाथ के जिना नियति नही और नियति के बिना पुरुषाय नही । पाचो । को खिचदी जहा बन जाये वह वाम्त विक् रहरयाथ का ग्रहण है जा वास्तव में अवक्तव्य है । इस अवक्तव्य अभेद भाव की ओर संकेत करना ही द्रव्याथिक नय का प्रयोजन है। यदि यह अभेद द्रव्याथिक दृष्टि उत्पन हो गई होती, तो उपादान सुनकर अनुक्त भी निमित्त चा ग्रहण और निमित्त सुनकर उपादान का ग्रहण, अथवा पुरपाथ सुनकर नियति का ग्रहण और नियति मुन कर पुरपाय वा ग्रहणही जाना अनिवाय या जैसा कि प्रवास सुन कर उष्णता का ग्रहण हो जाना अनिवार्य है । उसको पूछने की आवश्यकता नही । ऐसी महिमा है इस द्रव्याथिक नय की वस्तु जटिल है, और द्रयाथिक नय का ग्रहण भी इस लिये जटिल पड़ता है। आज हम नया का नाम तो जानते है । "यह बात अमुक् नय से सत्य है और यह त अमय नय सत्य है " ऐसा बराबर कहते भी रहते है । परन्तु कहते हुये भी न स्वयं अपने मन का समय दूर पर पाते है और न दूसरे के मन का कारण है कि अभेद ग्रहण के अभाव में जो भी पटया सुन पाते है,
पर्याये मानों उसके लम्बे इतिहास मे उत्कीणी ही गई हो, ऐसा होता है । इसलिये उस द्रव्य की पूर्णत देखने वाली दृष्टि भी ऐसी ही होनी चाहिये । यही कारण है कि द्रव्य को ग्रहण करने वाली इस दृष्टि को तथा इसका प्रति पादन करने वाले इन अभेद सूचक लक्षणो को द्रव्यार्थिक नय कहा जाता है । वस यही इस नय का या इस प्रकार के लक्षण करने का कारण है । इस नय का प्रयोजन जिज्ञासु श्रोता या पाठक को वस्तु का यथार्थ या भूतार्थ परिचय दिलाना है । अर्थात् जैसी वस्तु एक रस रूप अखड है वैसा ही चित्रण ज्ञान में आना चाहिये, इससे विपरीत नही । यह इसका प्रयोजन है । वक्ता या लेखक इस बात को भूला नही है, कि उसने वस्तु की व्याख्या करते या उसे लिखते हुये क्या क्रम अपनाया है । एक एक अग को पृथक पृथक आगे पीछे ही कहने व लिखने में आया है । यदि इतना ही करके छोड़ दे तो श्रोता के ज्ञान पर कैसा चित्रण बना रहेगा, यह भी उसे पता है । श्रोता बेचारा बिल्कुल अनभिज्ञ है । वह उतना और उस प्रकार ही तो स्वीकार कर सकता है जितना और जिस प्रकार कि वक्ता उसे बताता है । उसके अतिरिक्त अपनी तरफ से वह उस बताये हुये मे हीनाधिकता कैसे कर सकता है । और यदि ऐसा करने का प्रयत्न भी करेगा तो वह उसकी मर्जी से किया गया ग्रहण क्या उसके लिये सदा सशय का स्थान न बना रहेगा ? यहां यह प्रश्न हो सकता है, कि जितने भी दृष्टात अब तक देने मे आये है उन सब मे ही व्याख्या का उपरोक्त क्रम रहा है। फिर भी श्रोता या पाठक को कोई भ्रम होने नही पाया है । उष्णता, दाहकता आदि रूप से भेद करके की गई व्याख्या पर से भी श्रोता ठीक ठीक अभेद अग्नि को ही समझ पाया है, इसके स्थान पर किसी और पदार्थ का चित्रण उसके ज्ञान पट पर नहीं खिचा है । अभेद कहे विना भी स्वय अभेद का ग्रहण हो गया है । जन ऐसा स्वाभाविक रूप से हो ही जाता है तो इस द्रव्याथिक नय को कहने की आवश्यकता ही क्या है ? यह तो केवल वाक् गौरव मात्र रहा । और तो इसका मूल्य है नही । सो भाई । ऐसा नही है । यह वाक् गौरव मात्र नहीं है । तरी शका भी ठीक है । परन्तु तू ना करते समय इतना अवश्य भूल गया है कि जिन दृष्टातो के आधार पर तूने यहा शका उठाई है वह उन पदार्थों सम्बची है, जिन को तू पहिले में यर्थाथत जानता है । अर्थात् पहिले से उनका अभेद चित्रण तेर ज्ञान पट पर खिचा हुआ है । परतु यहा तो किसी अदृष्ट पदाथ को बताना अभीष्ट है, है, जो तू पहिले से नहीं जानता, जिसका यथाय चित्रण पहिले मे तेर ज्ञान पट पर नहीं है । उस चित्रण के प्रभाव म असण्ड द्रव्य को स्वत कैसे समझ सकेगा ? जितना और जैसा वताया जायेगा वही तो समझेगा, उसके अतिरिक्त और वैसे समझेगा ? बताया जा रहा है गड खड करके, अत सण्डो पर से असण्ड एक रस रूप पिण्ड को कमे समझेगा ? सण्ड हो तो समझेगा । और यदि ऐसा हुआ नो क्या कोई भी सत्ता भूत वस्तु तू समय पायेगा ? क्या उस तेरी समझ के अनुरूप खड़ लोक में तुमे वदापि देमन को मिलेंग ? और जन सा कुछ पृथक पृथक् देखने को मिलेगा ही नहीं तो उम प्रकार या वडिन ग्रहण क्या तेरे नाम पर केवल भार मात्र न होगा ? उसमे क्या प्रयोजन सिद्ध हो सकेगा ' जमे कि आगम व उद्धरणा पर से पढ़ कर तथा नानी जीवो के मुद्र में मुन पर यह बातें शदी म तो तू जान रहा है विद्वान लोग भी जान रहे हरि, वाय उपादान चारण से होता है 'काय निमित्त वारण में भी होता है, वाय पुग्वाथ के द्वारा काय नियति या वाल न के द्वारा भी और कार्य भवितव्य के आधीन भी है इत्यादि" । परन्तु इन को अभेद रूप से देखने में असमर्थ वास्तव मे तुझे इस बात का पता ही नही कि कार्य किस कारण से होता है । और इसीलिये बडे बडे विद्वान भी आज परस्पर मे इन कारणो ही की चर्चा में उलझ कर लड़ रहे है । उपादान से कार्य होता सुन कर निमित्तादि शेप चार कारण का निपेच प्रतीत होने लगता है, निमित्त कारण से होता है सुनकर उपादान व पुरुषार्थ आदि का निषेध भासने लगता है, पुरुषार्थ से होता मुन कर नियति व काल लव्धि केवल कपोल कल्पना सी दीखने लगती है, और नियत से होता मुनकर पुरुषार्थ व निमित्त की आवश्यकता ही रहती प्रतीत नही होती । जैन जगत के सर्व अध्यात्मिक पत्र विद्वानो के लिये इसी विषय पर मानो युद्ध के शस्त्र बने हुए है । जिनके द्वारा वे एक दूसरे पर वरावर प्रहार करते रहने में ही अपनी महत्ता समझते है । वर्षो चर्चा करते बीत गये परन्तु आज तक भी समाधान न हो सका । फिर तेरी तो बात ही क्या, तू तो ठहरा मन्द बुद्धि । इसी गान्ति पथ के अग स्वरूप सम्यकत्व, ज्ञान व चारित्र तीनो मे से कोई तो कहता है कि सम्यकत्व पहिले होता है, जब वह होता है तो ज्ञान चारित्र नही होता । कोई कहता है कि ज्ञान पहिले होता है । कोई कहता है कि चारित्र पहले धारो । कोई आगम ज्ञान के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ है, और कोई व्रत धारने व बाह्य के आचरण के पीछे । कोई बाह्य के आचरण को विल्कुल बेकार बता रहा है, और कोई इसमे अपने जीवन का सार देख रहा है । इत्यादि अनेको वाते आज अध्यात्म मार्ग मे क्या तुझसे से छिपी है विचार तो सही कि यदि दृष्ट पदार्थो वत, यहा भी सब उपरोक्त बातों को परस्पर सम्मेल बैठाकर एक रस रूप ग्रहण कर लिया होता, तो लडाईं को कहा अवकाश रह गया था । अदृष्ट विषयो को त्यभेद रूप से कैसे देखा जा सकता है, वही बात यह द्रव्याथिक नय बताता है । इसके बिना परम्पर विरोधी बाता का समन्वय बैठना अगम्भव है । यदि अभेद म्प से देखने का अभ्यास हुआ होता उपरोक्त काय कारण व्यवस्था में न अकेले उपादान को देखता न अकेले निमित्त को अकेले पुरुषाय को और न अकेली निर्यात को । पाचो का मिला हुआ एक रस रूप कोई अद्वितीय विजातीय कारण ही काय व्यवस्था में साथक है जिस में उन पाचो को एक ही समय समान स्थान प्राप्त है, बिल्कुल जीरे के पानी मे पडे मसालो वत् । वास्तव में इन सव कारणो में एक अनोखा सम्मेल है । निमित्त है तहा उपादान है और उपादान है तहा निमित्त । निमित्त के विना उपादान नहीं और उपादान के विना निमित्त नही । जहा पुरुषार्थ है वहा नियति अवश्य ह । पुरपाथ के जिना नियति नही और नियति के बिना पुरुषाय नही । पाचो । को खिचदी जहा बन जाये वह वाम्त विक् रहरयाथ का ग्रहण है जा वास्तव में अवक्तव्य है । इस अवक्तव्य अभेद भाव की ओर संकेत करना ही द्रव्याथिक नय का प्रयोजन है। यदि यह अभेद द्रव्याथिक दृष्टि उत्पन हो गई होती, तो उपादान सुनकर अनुक्त भी निमित्त चा ग्रहण और निमित्त सुनकर उपादान का ग्रहण, अथवा पुरपाथ सुनकर नियति का ग्रहण और नियति मुन कर पुरपाय वा ग्रहणही जाना अनिवाय या जैसा कि प्रवास सुन कर उष्णता का ग्रहण हो जाना अनिवार्य है । उसको पूछने की आवश्यकता नही । ऐसी महिमा है इस द्रव्याथिक नय की वस्तु जटिल है, और द्रयाथिक नय का ग्रहण भी इस लिये जटिल पड़ता है। आज हम नया का नाम तो जानते है । "यह बात अमुक् नय से सत्य है और यह त अमय नय सत्य है " ऐसा बराबर कहते भी रहते है । परन्तु कहते हुये भी न स्वयं अपने मन का समय दूर पर पाते है और न दूसरे के मन का कारण है कि अभेद ग्रहण के अभाव में जो भी पटया सुन पाते है,
समाज बदल गया. राजनीति बदल गई. चुनाव भी पूरी तरह से बदल गए. तौर, तरीके और तकनीकी तो खैर बदल ही चुके हैं. लेकिन जो बदलने को तैयार नहीं वह है- चुनावों का स्टीरियोटाइप विश्लेषण. यह एक दशक पहले तक अखबार और टीवी के जमाने में ठीक था. तब फैक्ट चेक नहीं थे. उसे क्रॉस चेक नहीं किया जा सकता था. मगर अब हर जेब में इंटरनेट होने की वजह से चुनावों से जुड़ा जितना डेटा किसी पत्रकार, विश्लेषक और पार्टी प्रवक्ताओं के पास हैं- लगभग उतना ही डेटा आम मतदाता के पास भी है. अब अंग्रेजी का भी भौकाल नहीं रहा. अंग्रेजी ज्ञान से हिंदी में निकले मनमाने विश्लेषणों से अब पब्लिक ओपिनियन तैयार नहीं किए जा सकते. भाषाई आधार पर भी समाज में कमोबेश हर जाति और परिवार के अपने ओपिनियन मेकर हैं आज की तारिख में. इसलिए बहुत जरूरी हो जाता है कि ओपिनियन एनालिसिस के नाम पर मीडिया को, पार्टी प्रवक्ताओं को और वित्तपोषित बुद्धिजीवियों को स्टीरियोटाइप से बाहर निकल जाना चाहिए. यह दौर सूचनाओं का समुद्र है. जबरदस्ती करना हमारी अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ठीक नहीं. वर्ना तमाम संस्थाओं, व्यक्तियों की बची-खुची प्रासंगिकता खोने का खतरा है. क्योंकि ऐसे विश्लेषण, मौजूद तथ्यों और समाज की सोच से बिल्कुल मेल नहीं खाते. भ्रमित करते हैं और निराश करते हैं. लोकतंत्र में विकासोन्मुखी और सबकी भागीदारी वाले विचार को भी प्रभावित करते हैं. बावजूद कुछ लोग मनमानी से बाज नहीं आते. क्यों भला? उदाहरण के लिए धार्मिक आधार पर हालिया चुनावी नतीजों के विश्लेषण को लिया जा सकता है. गुजरात और दिल्ली निगम में मुस्लिम मतों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद चुनाव में मुसलमान मतदाताओं के पसंद के मुद्दे नहीं खड़े हो पाए. हिमाचल में तो नाममात्र के मुस्लिम मतदाता हैं. वहां यह कोई मुद्दा ही नहीं था. यह पहला मौका नहीं है. एक दशक से कई चुनाव ऐसे हुए जहां मुसलमान मतों की रचनात्मक भूमिका नहीं दिखी. लेकिन विश्लेषणों के लिए उनका महत्व सबसे ज्यादा था. या तो तमाम लोगों में अब क्षमता नहीं रही कि ईमानदारी से चीजों को देखें और समाज को बताएं. या वे अपने ओहदे का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं- निजी फायदों के लिए. स्टीरियोटाइप विश्लेषण में होता क्या है? स्टीरियोटाइप विश्लेषण देखके ऐसा लग रहा कि हारे या जीतें, मुसलमान मतदाता ही देश की राजनीति तय करते रहे हैं. यह उन्हीं का अधिकार है, दूसरे किसी समूह का नहीं. कई फिरकों, टुकड़ो में बंटे होने, आरक्षण लेने और आरक्षण की चाह रखने के बावजूद मुसलमानों को एक यूनिट ही देखा जाता है. दूसरे- विध्वंसक खांचों में बंटे हैं. गुजरात के विश्लेषण देखिए. गुजरात में एक पार्टी लगातार सत्ता के शीर्ष पर कायम है, दशकों से. मुस्लिम एंगल की वजह से यह पता ही नहीं चल रहा कि आखिर भाजपा की लगातार जीत के पीछे क्या है? लोगों को एक दो चुनाव तक मूर्ख बनाया जा सकता है. गुजरात को देखकर ऐसा लग रहा कि लोग जवानी से बुढापे की दहलीज पार कर चुके, मगर किन्हीं वजहों से पार्टी नहीं बदली? क्यों, हमें पता नहीं. मोदी चाहे जो वजह बताएं, चूंकि वे नेता हैं तो हमें नहीं मान सकते हैं. पर जिनकी जवाबदारी है वे तो ईमानदारी से बता सकते हैं. या अभी भी यही कहेंगे कि आप, कांग्रेस, ओवैसी और सभी निर्दलीय एक होकर लड़ते तो गुजरात में भाजपा की जीत नहीं होती. सवाल है कि फिर एक होकर हर चुनाव क्यों नहीं लड़ते. किसी ने रोका है क्या? कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसे विश्लेषण जानबूझकर थोपे जाते हैं. क्योंकि विश्लेषणों से निकले झूठे सैम्पल की वजह से राजनीतिक दलों तक समाज की सही सोच को पहुंचने से रोका जा सकता है. ऐसे विश्लेषण चुनाव से पहले ही शुरू हो जाते हैं. किसी राज्य में चुनाव की घोषणा होने के बाद मुस्लिम मत कितने प्रतिशत हैं और चुनाव में उनकी क्या भूमिका होगी, कोई ओवैसी, किसी पीस पार्टी की क्या भूमिका होगी- हवा हवाई एनालिसिस आने लगते हैं. किसी एक आम ख़ास के मुंह में चैनल का बूम घुसाकर उसकी आवाज को समाज की आवाज बता दिया जाता है. गुजरात में देखिए कि चुनाव से पहले तक ओवैसी लगभग हर रोज हर टीवी चैनल पर नजर आते थे, लेकिन मतगणना में उन्हें तवज्जो ही नहीं मिली. कांग्रेस और तीसरे दलों की हार और भाजपा की ऐतिहासिक जीतों के पीछे क्या है यह? मुस्लिम एंगल से विश्लेषणों का अपना एजेंडा है. असल में यह सिर्फ इसलिए है कि भारतीय राजनीति में किसी दल की तरफ झुंड के झुंड मुसलमान मतों के जाने का भ्रम बना रहे. यह भ्रम बना रहे ताकि भारत के विचार का विरोध करने वाली राजनीति मजबूत रहे. जिसे सत्ता पानी है उसकी मजबूरी है कि वह करेगा, भले ही उसे अपने ही समाज का बंटवारा क्यों ना करना पड़े. जबकि यह पहले ही स्पष्ट हो चुका है. विश्लेषणों से सुविधाजनक स्थापनाएं महज इसलिए होती हैं कि भारत का लोकतंत्र और राजनीति अपनी स्वाभाविक जरूरत के हिसाब से, स्थानीयता के हिसाब से और भूगोल के हिसाब से मुद्दों को निर्धारित ना करे. कांग्रेस समेत तीसरे दलों की बर्बादी के पीछे और भाजपा की बेशुमार कामयाबी के पीछे असल में यही एक बिंदु अहम है. पिछले डेढ़ दशक में देश में इंटरनेट विस्तार के साथ भाजपा के शीर्ष पर जाने के रास्ते और पड़ाव देख लीजिए. रामपुर और मैनपुरी के उपचुनाव से अब इतना तो समझ ही सकते हैं कि अखिलेश यादव यूपी में सत्ता के बिल्कुल मुहाने पर खड़े थे. मगर आजम खान की नाराजगी का हौवा कुछ इस तरह खड़ा किया गया कि उनके सिर पर जिन्ना का जिन सवार हो गया. उनकी तरफ आ रहे तमाम वोट विदक गए. भाजपा को असल में विकल्पहीन जीत मिली थी वहां. वे अपराजेय नहीं थे. उन्हें हराया जा सकता था. मुस्लिम बहुल सीटों की हकीकत क्या है और विश्लेषण कैसे हो रहा? गुजरात की कुछ मुस्लिम बहुल सीटों का विश्लेषण कई मायनों में मजेदार है. एजेंडा भी साफ हो जाता है. बताया जा रहा है कि कैसे भाजपा के खिलाफ बेतहाशा मुस्लिम उम्मीदवारों की वजह से विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ा. वह विपक्ष जो चुनाव से पहले सिर्फ थोक में मिलने वाले मतों की उम्मीद में गठबंधन नहीं कर पाता, चुनाव के बाद बताया जाता है कि अगर वे साथ लड़ते तो नतीजे क्या होते? गजब देश है. उदाहरण के लिए गुजरात की लिम्बायत, बापूनगर, वेजलपुर और सूरत ईस्ट जैसी कुछेक सीटों को सैम्पल बनाकर की गई एनालिसिस को गूगल कर लीजिए. मजेदार यह है कि यहां तीनों बड़ी पार्टियों (भाजपा, कांग्रेस और आप) ने हिंदू उम्मीदवारों को ही टिकट देने में दिलचस्पी दिखाई. लिम्बायत और वेजलपुर में तीनों पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. ये सीटें भाजपा के खाते में गईं. यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार थे. ओवैसी के भी. लेकिन जीतने वाले भाजपा उम्मीदवार की मार्जिन के बराबर तो छोडिए, सभी मुस्लिम प्रत्याशियों को मिले मतों को भी अगर जोड़ दिया जाए तो वह हार जीत के अंतर का आधा भी नहीं है. सूरत ईस्ट में जरूर कांग्रेस ने मुलिम प्रत्याशी उतारा. बावजूद हार-जीत के अंतर के बराबर दूसरे सभी मुस्लिम उम्मीदवारों ने मिलकर भी वोट नहीं पाया है. और विश्लेषण क्या हो रहा है? अगर थोक के भाव में मुस्लिम उम्मीदवार नहीं होते तो इन सीटों पर विपक्ष जीत जाता. जबकि ईमानदारी से तो यही सवाल होना था कि मुस्लिम बहुल सीटों पर आखिर क्या वजह रही कि विपक्ष को भी हिंदू प्रत्याशी ही मैदान में उतारने पड़े? गुजरात से रामपुर तक मतलब साफ़ है कि मुस्लिम मतदाता अब मुस्लिम बहुल सीटों पर भी निर्णायक नहीं रहे. और राजनीति का मुद्दा पूरी तरह से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व है. जबकि बड़ी बात यह भी है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर भी राजनीतिक पार्टियां अगर ईमानदारी से लडे तो उन्हें वहां भी किसी मुस्लिम कैंडिडेट की जरूरत नहीं है. चुनाव से निकलने वाली असल चीजों को को बताया ही नहीं जा रहा. अब सवाल है कि जब मुलिम बहुल सीटों पर भी मुसलमान मत निर्णायक नहीं हैं तो ऐसे झूठे विश्लेषण क्यों और किस फायदे के लिए हो रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके जरिए भाजपा और कांग्रेस विरोधी, छोटे-छोटे दलों की राजनीति का एजेंडा सेट किया जा रहा है. ऐसे ही एजेंडा की वजह से तमाम राजनीतिक दल आज की तारीख में समाज से डिसकनेक्ट हो चुके हैं और अपनी प्रासंगिकता खोने की कगार पर हैं. हिमाचल के ही नतीजों को ले लीजिए. यहां मात्र 0. 9 मतों के अंतर से सत्ता भाजपा के हाथ से फिसल गई. 0. 9 प्रतिशत के अंतर ने भाजपा को 25 की संख्या में और कांग्रेस 40 के आंकड़े पर पहुंचा दिया. वहां कांग्रेस का कोई चेहरा नहीं था. राहुल गांधी गए नहीं. प्रियंका ने सिर्फ 4 सभाएं कीं, मगर यूं प्रचारित किया जा रहा कि हिमाचल में कांग्रेस के पक्ष में सुनामी थी. जबकि यहां भाजपा में आतंरिक खींचतान थी और सरकारी पेंशनर्स का एक साइलेंट वोट था. किसी को भनक तक नहीं लगी. मीडिया तक भांप नहीं पाया. आख़िरी वक्त में पेंशनर्स के स्विंग ने भाजपा को पटखनी दे दी. विश्लेषण क्या आ रहे हैं, उठाकर देख लीजिए. यह साइलेंट वेव यूपी के विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वी हिस्से में भी नजर आया था. पेंशनर्स पिछले कुछ चुनाव से निर्णायक हो रहे हैं, मगर मुस्लिम एंगल पर विचार देने वाले उसे भांप तक नहीं पा रहे. वे किसी पार्टी की मदद क्या ही करेंगे? अब हिमाचल के किस सैम्पल को आप भाजपा विरोधी दलों तक पहुंचाना चाहते हैं? हिमाचल पर आ रहे बुद्धिजीवियों के विश्लेषण को फिर गौर से देखिए. हिमाचल में मतों की शेयरिंग. समझना मुश्किल नहीं कि लोकतंत्र के लिहाज से यह स्थिति कितनी घातक है. इससे बचा नहीं गया तो हमारे लोकतंत्र का बहुदलीय रूप नष्ट हो जाएगा और हम इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते हैं. बहुत अच्छा है कि राजनीति में अब मुसलमान कोई मुद्दा नहीं हैं. होने भी नहीं चाहिए. यह हालिया जनादेश से निकली एक बहुत बड़ी बात है जिसे भाजपा विरोधी दलों को गौर से देखना चाहिए. छह दिसंबर बीत गया और पता भी नहीं चला. यह मामूली बात नहीं है. बावजूद कि प्रोपगेंडा चलाने वाले वित्त पोषित बुद्धिजीवी राजनीति में अभी भी बाबरी विध्वंस को पीछे छूटा नहीं मान रहे. उसे बार-बार याद कर अपनी मूर्खता प्रदर्शित कर रहे हैं. हाल ही में एक उम्दा लेखक और बुद्धिजीवी पर नजर गई. उन्होंने तर्क दिए कि जब अयोध्या में राम से जुड़े ढेरो मंदिर मौजूद हैं- यह बात पचाने लायक नहीं कि बाबर ने जन्मभूमि तोड़कर मस्जिद बनाई होगी. या फिर तुलसी ने रामचरितमानस में उसका जिक्र क्यों नहीं किया? तुलसी जैसा राम प्रिय भला उस घटना को याद करने से कैसे चूक सकता है? सवाल बढ़िया है. लेकिन भारतीय परंपरा से अनभिज्ञ मूर्खों को कौन समझाएं कि सनातन व्यवस्था में 'जन्मभूमि' का मतलब और महत्व क्या है? सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी जगह हमारे लिए वही तो है. 'जननी जन्मभूमिश्च'. उसके नहीं होने की भरपाई किसी चीज के होने से कभी नहीं की जा सकती. देश में लाखों शिव मंदिर हैं. मगर वह ज्ञानवापी के विश्वेश्वर' की जगह नहीं ले सकते. एक मिनट के लिए यह मान भी लिया जाए कि वहां मंदिर नहीं था. लेकिन यह तो असंभव है कि राम के जन्मस्थान में उनके जन्मस्थान का कहीं जिक्र ही ना हो. कोई निशान ही ना हो. कहीं तो रहा होगा. बाबरी ढाँचे के नीचे ना सही, जब दर्जनों मंदिर हैं राम के नाम पर वहां तो जन्मस्थान का भी कहीं कोई वजूद रहा होगा. सवाल है कि आखिर वह कहां है? मूर्खों को कौन समझाए कि रामचरित मानस, बाबरनामा नहीं है जो तुलसीदास वहां उसका जिक्र करते. बावजूद कि उन्होंने दर्ज किया है. उनके दोहों को राममंदिर विवाद में कोर्ट में भी पेश किया जा चुका है. बावजूद कि मामले में पुरातात्विक रिपोर्ट भी मंदिर के पक्ष में ही है. सुप्रीम कोर्ट रामलला के पक्ष में फैसला भी दे चुका है, मंदिर अंतिम निर्माण की दिशा में है. बावजूद कोई मानने को तैयार नहीं, तो इस बीमारी का कुछ भी नहीं किया जा सकता. अब एक लाइलाज बीमारी के लिए कोई अपनी पार्टी के राजनीतिक मुद्दे बदलना चाहेगा तो वह असल में आत्महत्या ही करेगा. ओवैसी के लिए जरूर यह आत्महत्या नहीं है. उन्हें बाबरी के विध्वंस का रोना रोते रहना चाहिए. मगर दूसरे क्या कर रहे हैं? चुनाव नतीजों के मायने गहरे हैं. इसमें सभी दलों के लिए संदेश है. देश की राजनीति मुसलमानों के तय मुद्दों पर नहीं हो सकती. अब वक्त और जगह भी नहीं है. सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ नतीजों पर आत्ममंथन करना चाहिए. यह भी कि गैरबराबरी एक अस्थाई व्यवस्था है और इसे हमेशा के लिए खत्म करने का कोई मैकेनिज्म किसी पार्टी, विचार और व्यवस्था में नहीं है. यह हमारे बहुलता के सिद्धांत को भी संरक्षण नहीं देता. असमानता, गैरबराबरी रहेगी किसी ना किसी रूप में. हमें मानवता की स्थापना करनी है जो समाज में जहर ना भरे. तो राजनीति के मुद्दे असल में भूख के होने चाहिए, समान शिक्षा के होने चाहिए, एक जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के होने चाहिए, सार्वजनिक परिवहन के होने चाहिए, सुरक्षा के होने चाहिए, समान अवसर के होने चाहिए. कम से कम सभी के लिए एक समान मौका तो होना ही चाहिए. स्वाभिमान का मुद्दा सबके लिए होना चाहिए. और सबसे बड़ा मुद्दा संप्रभुता का होना चाहिए. चाहे जो करना पड़े. अगर समाज तैयार है. उसे चलने दीजिए, दौड़ाने दीजिए. हां, उसकी रफ़्तार पर नजर रखिए. अगर राजनीति बदली तो तो समाज बदल जाएगा. समाज बदलेगा तो उसमें संकोच पनपेगा और इस तरह हमारी संस्कृति खुद ब खुद बदल जाएगी. निश्चित ही हम एक शांत और ज्यादा मानवीय समाज होंगे करुणा से भरे हुए. हम ऐसे ही थे और अभी भी विपरीत से विपरीत हालात में भी रहने की कोशिश कर ही रहे हैं. वोटबैंक पॉलिटिक्स ने सत्ता में बने रहने के लिए हमारे दलों को विवश किया. जो चीजें नहीं थी उसे स्थापित किया गया और असलियत को छिपा दिया गया. आज नहीं तो कल, राजनीतिक मुद्दे बदलने ही पड़ेंगे. समय रहते बदले तो औचित्य बना रह जाएगा. बाद बाकी जो है वह एक-एक कर सामने आ ही रहा है. अब समाज में एक संकोच दिख रहा है.
समाज बदल गया. राजनीति बदल गई. चुनाव भी पूरी तरह से बदल गए. तौर, तरीके और तकनीकी तो खैर बदल ही चुके हैं. लेकिन जो बदलने को तैयार नहीं वह है- चुनावों का स्टीरियोटाइप विश्लेषण. यह एक दशक पहले तक अखबार और टीवी के जमाने में ठीक था. तब फैक्ट चेक नहीं थे. उसे क्रॉस चेक नहीं किया जा सकता था. मगर अब हर जेब में इंटरनेट होने की वजह से चुनावों से जुड़ा जितना डेटा किसी पत्रकार, विश्लेषक और पार्टी प्रवक्ताओं के पास हैं- लगभग उतना ही डेटा आम मतदाता के पास भी है. अब अंग्रेजी का भी भौकाल नहीं रहा. अंग्रेजी ज्ञान से हिंदी में निकले मनमाने विश्लेषणों से अब पब्लिक ओपिनियन तैयार नहीं किए जा सकते. भाषाई आधार पर भी समाज में कमोबेश हर जाति और परिवार के अपने ओपिनियन मेकर हैं आज की तारिख में. इसलिए बहुत जरूरी हो जाता है कि ओपिनियन एनालिसिस के नाम पर मीडिया को, पार्टी प्रवक्ताओं को और वित्तपोषित बुद्धिजीवियों को स्टीरियोटाइप से बाहर निकल जाना चाहिए. यह दौर सूचनाओं का समुद्र है. जबरदस्ती करना हमारी अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ठीक नहीं. वर्ना तमाम संस्थाओं, व्यक्तियों की बची-खुची प्रासंगिकता खोने का खतरा है. क्योंकि ऐसे विश्लेषण, मौजूद तथ्यों और समाज की सोच से बिल्कुल मेल नहीं खाते. भ्रमित करते हैं और निराश करते हैं. लोकतंत्र में विकासोन्मुखी और सबकी भागीदारी वाले विचार को भी प्रभावित करते हैं. बावजूद कुछ लोग मनमानी से बाज नहीं आते. क्यों भला? उदाहरण के लिए धार्मिक आधार पर हालिया चुनावी नतीजों के विश्लेषण को लिया जा सकता है. गुजरात और दिल्ली निगम में मुस्लिम मतों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद चुनाव में मुसलमान मतदाताओं के पसंद के मुद्दे नहीं खड़े हो पाए. हिमाचल में तो नाममात्र के मुस्लिम मतदाता हैं. वहां यह कोई मुद्दा ही नहीं था. यह पहला मौका नहीं है. एक दशक से कई चुनाव ऐसे हुए जहां मुसलमान मतों की रचनात्मक भूमिका नहीं दिखी. लेकिन विश्लेषणों के लिए उनका महत्व सबसे ज्यादा था. या तो तमाम लोगों में अब क्षमता नहीं रही कि ईमानदारी से चीजों को देखें और समाज को बताएं. या वे अपने ओहदे का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं- निजी फायदों के लिए. स्टीरियोटाइप विश्लेषण में होता क्या है? स्टीरियोटाइप विश्लेषण देखके ऐसा लग रहा कि हारे या जीतें, मुसलमान मतदाता ही देश की राजनीति तय करते रहे हैं. यह उन्हीं का अधिकार है, दूसरे किसी समूह का नहीं. कई फिरकों, टुकड़ो में बंटे होने, आरक्षण लेने और आरक्षण की चाह रखने के बावजूद मुसलमानों को एक यूनिट ही देखा जाता है. दूसरे- विध्वंसक खांचों में बंटे हैं. गुजरात के विश्लेषण देखिए. गुजरात में एक पार्टी लगातार सत्ता के शीर्ष पर कायम है, दशकों से. मुस्लिम एंगल की वजह से यह पता ही नहीं चल रहा कि आखिर भाजपा की लगातार जीत के पीछे क्या है? लोगों को एक दो चुनाव तक मूर्ख बनाया जा सकता है. गुजरात को देखकर ऐसा लग रहा कि लोग जवानी से बुढापे की दहलीज पार कर चुके, मगर किन्हीं वजहों से पार्टी नहीं बदली? क्यों, हमें पता नहीं. मोदी चाहे जो वजह बताएं, चूंकि वे नेता हैं तो हमें नहीं मान सकते हैं. पर जिनकी जवाबदारी है वे तो ईमानदारी से बता सकते हैं. या अभी भी यही कहेंगे कि आप, कांग्रेस, ओवैसी और सभी निर्दलीय एक होकर लड़ते तो गुजरात में भाजपा की जीत नहीं होती. सवाल है कि फिर एक होकर हर चुनाव क्यों नहीं लड़ते. किसी ने रोका है क्या? कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसे विश्लेषण जानबूझकर थोपे जाते हैं. क्योंकि विश्लेषणों से निकले झूठे सैम्पल की वजह से राजनीतिक दलों तक समाज की सही सोच को पहुंचने से रोका जा सकता है. ऐसे विश्लेषण चुनाव से पहले ही शुरू हो जाते हैं. किसी राज्य में चुनाव की घोषणा होने के बाद मुस्लिम मत कितने प्रतिशत हैं और चुनाव में उनकी क्या भूमिका होगी, कोई ओवैसी, किसी पीस पार्टी की क्या भूमिका होगी- हवा हवाई एनालिसिस आने लगते हैं. किसी एक आम ख़ास के मुंह में चैनल का बूम घुसाकर उसकी आवाज को समाज की आवाज बता दिया जाता है. गुजरात में देखिए कि चुनाव से पहले तक ओवैसी लगभग हर रोज हर टीवी चैनल पर नजर आते थे, लेकिन मतगणना में उन्हें तवज्जो ही नहीं मिली. कांग्रेस और तीसरे दलों की हार और भाजपा की ऐतिहासिक जीतों के पीछे क्या है यह? मुस्लिम एंगल से विश्लेषणों का अपना एजेंडा है. असल में यह सिर्फ इसलिए है कि भारतीय राजनीति में किसी दल की तरफ झुंड के झुंड मुसलमान मतों के जाने का भ्रम बना रहे. यह भ्रम बना रहे ताकि भारत के विचार का विरोध करने वाली राजनीति मजबूत रहे. जिसे सत्ता पानी है उसकी मजबूरी है कि वह करेगा, भले ही उसे अपने ही समाज का बंटवारा क्यों ना करना पड़े. जबकि यह पहले ही स्पष्ट हो चुका है. विश्लेषणों से सुविधाजनक स्थापनाएं महज इसलिए होती हैं कि भारत का लोकतंत्र और राजनीति अपनी स्वाभाविक जरूरत के हिसाब से, स्थानीयता के हिसाब से और भूगोल के हिसाब से मुद्दों को निर्धारित ना करे. कांग्रेस समेत तीसरे दलों की बर्बादी के पीछे और भाजपा की बेशुमार कामयाबी के पीछे असल में यही एक बिंदु अहम है. पिछले डेढ़ दशक में देश में इंटरनेट विस्तार के साथ भाजपा के शीर्ष पर जाने के रास्ते और पड़ाव देख लीजिए. रामपुर और मैनपुरी के उपचुनाव से अब इतना तो समझ ही सकते हैं कि अखिलेश यादव यूपी में सत्ता के बिल्कुल मुहाने पर खड़े थे. मगर आजम खान की नाराजगी का हौवा कुछ इस तरह खड़ा किया गया कि उनके सिर पर जिन्ना का जिन सवार हो गया. उनकी तरफ आ रहे तमाम वोट विदक गए. भाजपा को असल में विकल्पहीन जीत मिली थी वहां. वे अपराजेय नहीं थे. उन्हें हराया जा सकता था. मुस्लिम बहुल सीटों की हकीकत क्या है और विश्लेषण कैसे हो रहा? गुजरात की कुछ मुस्लिम बहुल सीटों का विश्लेषण कई मायनों में मजेदार है. एजेंडा भी साफ हो जाता है. बताया जा रहा है कि कैसे भाजपा के खिलाफ बेतहाशा मुस्लिम उम्मीदवारों की वजह से विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ा. वह विपक्ष जो चुनाव से पहले सिर्फ थोक में मिलने वाले मतों की उम्मीद में गठबंधन नहीं कर पाता, चुनाव के बाद बताया जाता है कि अगर वे साथ लड़ते तो नतीजे क्या होते? गजब देश है. उदाहरण के लिए गुजरात की लिम्बायत, बापूनगर, वेजलपुर और सूरत ईस्ट जैसी कुछेक सीटों को सैम्पल बनाकर की गई एनालिसिस को गूगल कर लीजिए. मजेदार यह है कि यहां तीनों बड़ी पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवारों को ही टिकट देने में दिलचस्पी दिखाई. लिम्बायत और वेजलपुर में तीनों पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. ये सीटें भाजपा के खाते में गईं. यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार थे. ओवैसी के भी. लेकिन जीतने वाले भाजपा उम्मीदवार की मार्जिन के बराबर तो छोडिए, सभी मुस्लिम प्रत्याशियों को मिले मतों को भी अगर जोड़ दिया जाए तो वह हार जीत के अंतर का आधा भी नहीं है. सूरत ईस्ट में जरूर कांग्रेस ने मुलिम प्रत्याशी उतारा. बावजूद हार-जीत के अंतर के बराबर दूसरे सभी मुस्लिम उम्मीदवारों ने मिलकर भी वोट नहीं पाया है. और विश्लेषण क्या हो रहा है? अगर थोक के भाव में मुस्लिम उम्मीदवार नहीं होते तो इन सीटों पर विपक्ष जीत जाता. जबकि ईमानदारी से तो यही सवाल होना था कि मुस्लिम बहुल सीटों पर आखिर क्या वजह रही कि विपक्ष को भी हिंदू प्रत्याशी ही मैदान में उतारने पड़े? गुजरात से रामपुर तक मतलब साफ़ है कि मुस्लिम मतदाता अब मुस्लिम बहुल सीटों पर भी निर्णायक नहीं रहे. और राजनीति का मुद्दा पूरी तरह से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व है. जबकि बड़ी बात यह भी है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर भी राजनीतिक पार्टियां अगर ईमानदारी से लडे तो उन्हें वहां भी किसी मुस्लिम कैंडिडेट की जरूरत नहीं है. चुनाव से निकलने वाली असल चीजों को को बताया ही नहीं जा रहा. अब सवाल है कि जब मुलिम बहुल सीटों पर भी मुसलमान मत निर्णायक नहीं हैं तो ऐसे झूठे विश्लेषण क्यों और किस फायदे के लिए हो रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके जरिए भाजपा और कांग्रेस विरोधी, छोटे-छोटे दलों की राजनीति का एजेंडा सेट किया जा रहा है. ऐसे ही एजेंडा की वजह से तमाम राजनीतिक दल आज की तारीख में समाज से डिसकनेक्ट हो चुके हैं और अपनी प्रासंगिकता खोने की कगार पर हैं. हिमाचल के ही नतीजों को ले लीजिए. यहां मात्र शून्य. नौ मतों के अंतर से सत्ता भाजपा के हाथ से फिसल गई. शून्य. नौ प्रतिशत के अंतर ने भाजपा को पच्चीस की संख्या में और कांग्रेस चालीस के आंकड़े पर पहुंचा दिया. वहां कांग्रेस का कोई चेहरा नहीं था. राहुल गांधी गए नहीं. प्रियंका ने सिर्फ चार सभाएं कीं, मगर यूं प्रचारित किया जा रहा कि हिमाचल में कांग्रेस के पक्ष में सुनामी थी. जबकि यहां भाजपा में आतंरिक खींचतान थी और सरकारी पेंशनर्स का एक साइलेंट वोट था. किसी को भनक तक नहीं लगी. मीडिया तक भांप नहीं पाया. आख़िरी वक्त में पेंशनर्स के स्विंग ने भाजपा को पटखनी दे दी. विश्लेषण क्या आ रहे हैं, उठाकर देख लीजिए. यह साइलेंट वेव यूपी के विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वी हिस्से में भी नजर आया था. पेंशनर्स पिछले कुछ चुनाव से निर्णायक हो रहे हैं, मगर मुस्लिम एंगल पर विचार देने वाले उसे भांप तक नहीं पा रहे. वे किसी पार्टी की मदद क्या ही करेंगे? अब हिमाचल के किस सैम्पल को आप भाजपा विरोधी दलों तक पहुंचाना चाहते हैं? हिमाचल पर आ रहे बुद्धिजीवियों के विश्लेषण को फिर गौर से देखिए. हिमाचल में मतों की शेयरिंग. समझना मुश्किल नहीं कि लोकतंत्र के लिहाज से यह स्थिति कितनी घातक है. इससे बचा नहीं गया तो हमारे लोकतंत्र का बहुदलीय रूप नष्ट हो जाएगा और हम इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते हैं. बहुत अच्छा है कि राजनीति में अब मुसलमान कोई मुद्दा नहीं हैं. होने भी नहीं चाहिए. यह हालिया जनादेश से निकली एक बहुत बड़ी बात है जिसे भाजपा विरोधी दलों को गौर से देखना चाहिए. छह दिसंबर बीत गया और पता भी नहीं चला. यह मामूली बात नहीं है. बावजूद कि प्रोपगेंडा चलाने वाले वित्त पोषित बुद्धिजीवी राजनीति में अभी भी बाबरी विध्वंस को पीछे छूटा नहीं मान रहे. उसे बार-बार याद कर अपनी मूर्खता प्रदर्शित कर रहे हैं. हाल ही में एक उम्दा लेखक और बुद्धिजीवी पर नजर गई. उन्होंने तर्क दिए कि जब अयोध्या में राम से जुड़े ढेरो मंदिर मौजूद हैं- यह बात पचाने लायक नहीं कि बाबर ने जन्मभूमि तोड़कर मस्जिद बनाई होगी. या फिर तुलसी ने रामचरितमानस में उसका जिक्र क्यों नहीं किया? तुलसी जैसा राम प्रिय भला उस घटना को याद करने से कैसे चूक सकता है? सवाल बढ़िया है. लेकिन भारतीय परंपरा से अनभिज्ञ मूर्खों को कौन समझाएं कि सनातन व्यवस्था में 'जन्मभूमि' का मतलब और महत्व क्या है? सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी जगह हमारे लिए वही तो है. 'जननी जन्मभूमिश्च'. उसके नहीं होने की भरपाई किसी चीज के होने से कभी नहीं की जा सकती. देश में लाखों शिव मंदिर हैं. मगर वह ज्ञानवापी के विश्वेश्वर' की जगह नहीं ले सकते. एक मिनट के लिए यह मान भी लिया जाए कि वहां मंदिर नहीं था. लेकिन यह तो असंभव है कि राम के जन्मस्थान में उनके जन्मस्थान का कहीं जिक्र ही ना हो. कोई निशान ही ना हो. कहीं तो रहा होगा. बाबरी ढाँचे के नीचे ना सही, जब दर्जनों मंदिर हैं राम के नाम पर वहां तो जन्मस्थान का भी कहीं कोई वजूद रहा होगा. सवाल है कि आखिर वह कहां है? मूर्खों को कौन समझाए कि रामचरित मानस, बाबरनामा नहीं है जो तुलसीदास वहां उसका जिक्र करते. बावजूद कि उन्होंने दर्ज किया है. उनके दोहों को राममंदिर विवाद में कोर्ट में भी पेश किया जा चुका है. बावजूद कि मामले में पुरातात्विक रिपोर्ट भी मंदिर के पक्ष में ही है. सुप्रीम कोर्ट रामलला के पक्ष में फैसला भी दे चुका है, मंदिर अंतिम निर्माण की दिशा में है. बावजूद कोई मानने को तैयार नहीं, तो इस बीमारी का कुछ भी नहीं किया जा सकता. अब एक लाइलाज बीमारी के लिए कोई अपनी पार्टी के राजनीतिक मुद्दे बदलना चाहेगा तो वह असल में आत्महत्या ही करेगा. ओवैसी के लिए जरूर यह आत्महत्या नहीं है. उन्हें बाबरी के विध्वंस का रोना रोते रहना चाहिए. मगर दूसरे क्या कर रहे हैं? चुनाव नतीजों के मायने गहरे हैं. इसमें सभी दलों के लिए संदेश है. देश की राजनीति मुसलमानों के तय मुद्दों पर नहीं हो सकती. अब वक्त और जगह भी नहीं है. सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ नतीजों पर आत्ममंथन करना चाहिए. यह भी कि गैरबराबरी एक अस्थाई व्यवस्था है और इसे हमेशा के लिए खत्म करने का कोई मैकेनिज्म किसी पार्टी, विचार और व्यवस्था में नहीं है. यह हमारे बहुलता के सिद्धांत को भी संरक्षण नहीं देता. असमानता, गैरबराबरी रहेगी किसी ना किसी रूप में. हमें मानवता की स्थापना करनी है जो समाज में जहर ना भरे. तो राजनीति के मुद्दे असल में भूख के होने चाहिए, समान शिक्षा के होने चाहिए, एक जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के होने चाहिए, सार्वजनिक परिवहन के होने चाहिए, सुरक्षा के होने चाहिए, समान अवसर के होने चाहिए. कम से कम सभी के लिए एक समान मौका तो होना ही चाहिए. स्वाभिमान का मुद्दा सबके लिए होना चाहिए. और सबसे बड़ा मुद्दा संप्रभुता का होना चाहिए. चाहे जो करना पड़े. अगर समाज तैयार है. उसे चलने दीजिए, दौड़ाने दीजिए. हां, उसकी रफ़्तार पर नजर रखिए. अगर राजनीति बदली तो तो समाज बदल जाएगा. समाज बदलेगा तो उसमें संकोच पनपेगा और इस तरह हमारी संस्कृति खुद ब खुद बदल जाएगी. निश्चित ही हम एक शांत और ज्यादा मानवीय समाज होंगे करुणा से भरे हुए. हम ऐसे ही थे और अभी भी विपरीत से विपरीत हालात में भी रहने की कोशिश कर ही रहे हैं. वोटबैंक पॉलिटिक्स ने सत्ता में बने रहने के लिए हमारे दलों को विवश किया. जो चीजें नहीं थी उसे स्थापित किया गया और असलियत को छिपा दिया गया. आज नहीं तो कल, राजनीतिक मुद्दे बदलने ही पड़ेंगे. समय रहते बदले तो औचित्य बना रह जाएगा. बाद बाकी जो है वह एक-एक कर सामने आ ही रहा है. अब समाज में एक संकोच दिख रहा है.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड का ऑफिशियल ट्रेलर आज ही रिलीज हुआ है, इस धमाकेदार ट्रेलर ने आते ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है. अक्षय कुमार एक बार फिर देशभक्ति के जोनर से जुड़ी फिल्म दर्शकों के लिए लेकर आए हैं. बॉलीवुड के 'खिलाड़ियों के खिलाड़ी' कहलाए जाने वाले अक्षय कुमार पहली बार खेल (हॉकी) पर जुड़ी फिल्म गोल्ड लीड रोल में नजर आने वाले हैं. हालांकि इस फिल्म पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर यह फिल्म किस पर आधारित है या किस शख्स के जीवन से प्रेरित. अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड का जब टाइटल अनाउंस हुआ था तब बी टाउन में गॉस्पिस थे कि यह फिल्म तत्कालीन हॉकी कैप्टन किशन लाल पर आधारित है. वही किशन लाल जिन्होंने भारत को पहला स्वतंत्र रूप से ओलपिंक गोल्ड मेडल दिलवाया. 1948 में किशन लाल की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम लंदन में आयोजित समर ओलंपिक में उतरी जहां उसने अंग्रेंजों को धूल चटाई. हालांकि फिल्म मेकर्स ने हमेशा यही कहा है कि यह फिल्म किसी की बायोपिक नहीं है और न ही किसे से प्रेरित. फिल्ममेकर्स ने कहा कि यह फिल्म भारतीय हॉकी करियर के संघर्ष और गोल्डन ईरा से प्रेरित है. अब यह तो 15 अगस्त (गोल्ड फिल्म रिलीज डेट) को ही होगा जब फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी. हालांकि इससे पहले भारत को 1928 (एमस्टरडैम), 1932 (लॉस एंजल्स) और 1936 (बर्लिन) में हॉकी में गोल्ड जीत चुका था, लेकिन ये मेडल अंग्रेजों की अगुवाई में जीते गए थे जिस वजह से भारतीयों के दिल में गोल्ड मेडल लाने की तमन्ना रह गई थी. 1948 में किशन लाल के कप्तानी में समर ओलपिंयन में भारत का प्रतिनिधित्व किया. इस मैदान में बलबीर सिंह (सीनियर खिलाड़ी) हीरो बनकर उभरे. किशन लाल का नाम भारत के इतिहास के पन्नों में सुनहरे पन्नों में दर्ज है. कृष्ण लाल का देहांत 23 जून 1980 मद्रास (चेन्नई) में हुआ. One generation dreamt it, the other achieved it. #GoldTrailer out on 25th June at 10 am.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड का ऑफिशियल ट्रेलर आज ही रिलीज हुआ है, इस धमाकेदार ट्रेलर ने आते ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है. अक्षय कुमार एक बार फिर देशभक्ति के जोनर से जुड़ी फिल्म दर्शकों के लिए लेकर आए हैं. बॉलीवुड के 'खिलाड़ियों के खिलाड़ी' कहलाए जाने वाले अक्षय कुमार पहली बार खेल पर जुड़ी फिल्म गोल्ड लीड रोल में नजर आने वाले हैं. हालांकि इस फिल्म पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर यह फिल्म किस पर आधारित है या किस शख्स के जीवन से प्रेरित. अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड का जब टाइटल अनाउंस हुआ था तब बी टाउन में गॉस्पिस थे कि यह फिल्म तत्कालीन हॉकी कैप्टन किशन लाल पर आधारित है. वही किशन लाल जिन्होंने भारत को पहला स्वतंत्र रूप से ओलपिंक गोल्ड मेडल दिलवाया. एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में किशन लाल की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम लंदन में आयोजित समर ओलंपिक में उतरी जहां उसने अंग्रेंजों को धूल चटाई. हालांकि फिल्म मेकर्स ने हमेशा यही कहा है कि यह फिल्म किसी की बायोपिक नहीं है और न ही किसे से प्रेरित. फिल्ममेकर्स ने कहा कि यह फिल्म भारतीय हॉकी करियर के संघर्ष और गोल्डन ईरा से प्रेरित है. अब यह तो पंद्रह अगस्त को ही होगा जब फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी. हालांकि इससे पहले भारत को एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस , एक हज़ार नौ सौ बत्तीस और एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में हॉकी में गोल्ड जीत चुका था, लेकिन ये मेडल अंग्रेजों की अगुवाई में जीते गए थे जिस वजह से भारतीयों के दिल में गोल्ड मेडल लाने की तमन्ना रह गई थी. एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में किशन लाल के कप्तानी में समर ओलपिंयन में भारत का प्रतिनिधित्व किया. इस मैदान में बलबीर सिंह हीरो बनकर उभरे. किशन लाल का नाम भारत के इतिहास के पन्नों में सुनहरे पन्नों में दर्ज है. कृष्ण लाल का देहांत तेईस जून एक हज़ार नौ सौ अस्सी मद्रास में हुआ. One generation dreamt it, the other achieved it. #GoldTrailer out on पच्चीस जूनe at दस am.
Voter List Aadhar Link मतदाता सूची में पंजीकृत वोटरों की पहचान तय करने तथा इसे प्रमाणित करने के लिए इसे आधार से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। अब इस कार्य को घर बैठे भी किया जा सकता है। इसके लिए बीएलओ पर निर्भरता खत्म हो गई है। मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। Voter List Aadhar Link: जिला समेत पूरे देश में अभी वोटर लिस्ट को आधार से लिंक करने का काम चल रहा है। यह व्यापक पैमाने पर किए जा रहे हैं। कैंप का आयोजन भी किया जा रहा है। कुछ जगह बीएलओ घर-घर जा रहे हैं। बावजूद बहुत से मतदाताओं की शिकायत है कि उनका आधार अभी लिंक नहीं हुआ है। बीएलओ पहुंच नहीं पाए हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने ऐसी व्यवस्था कर दी है जिससे अब किसी के मदद की जरूरत नहीं होगी। तकनीकी रूप से दक्ष व्यक्ति खुद ही यह काम कर सकते हैं। इसमें किसी मदद की जरूरत नहीं होगी। मतदाता सूची को आधार से जाेड़ने में आ रही दिक्कतों को लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी प्रणव कुमार ने समीक्षा की। कहा, आधार संग्रहण का प्रमुख उद्देश्य निर्वाचक सूची में पंजीकृत निर्वाचक के पहचान को सुनिश्चित करना एवं उनका प्रमाणीकरण करना है। मतदाता से आधार डाटा के संग्रहण के लिए संशोधन किए गए हैं। बीएलओ द्वारा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित गरुड़ एप के माध्यम से आधार संग्रहण का कार्य किया जाना है। निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा ईआरओ नेट के माध्यम से आधार संग्रहण का कार्य करेंगे। मतदाताओं द्वारा स्वयं भी नेशनल वोटर सर्विसेज पोर्टल, वोटर हेल्पलाइन एप अथवा वोटर पोर्टल के माध्यम से प्रमाणितकरण किया जा सकेगा। मतदाता मोबाइल संख्या पर ओटीपी प्राप्त कर स्वयं अपने आधार संख्या का प्रमाणीकरण कर सकते हैं। नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड एक से 49 में आधार संग्रह के लिए रविवार को शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए पांच पदाधिकारियों को वार्ड आवंटित किए गए हैं। वार्ड एक से 10 एएसडीओ पूर्वी, 11 से 20 के लिए अपर निर्वाचन पदाधिकारी पूर्वी, 21 से 30 के लिए बीईओ, मुशहरी, 31 से 40 के लिए मुशहरी सीओ एवं 41 से 49 के लिए सीडीपीओ मुशहरी सदर को पर्यवेक्षण के लिए कहा गया है। मुशहरी के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी बीडीओ को दी गई है।
Voter List Aadhar Link मतदाता सूची में पंजीकृत वोटरों की पहचान तय करने तथा इसे प्रमाणित करने के लिए इसे आधार से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। अब इस कार्य को घर बैठे भी किया जा सकता है। इसके लिए बीएलओ पर निर्भरता खत्म हो गई है। मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। Voter List Aadhar Link: जिला समेत पूरे देश में अभी वोटर लिस्ट को आधार से लिंक करने का काम चल रहा है। यह व्यापक पैमाने पर किए जा रहे हैं। कैंप का आयोजन भी किया जा रहा है। कुछ जगह बीएलओ घर-घर जा रहे हैं। बावजूद बहुत से मतदाताओं की शिकायत है कि उनका आधार अभी लिंक नहीं हुआ है। बीएलओ पहुंच नहीं पाए हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने ऐसी व्यवस्था कर दी है जिससे अब किसी के मदद की जरूरत नहीं होगी। तकनीकी रूप से दक्ष व्यक्ति खुद ही यह काम कर सकते हैं। इसमें किसी मदद की जरूरत नहीं होगी। मतदाता सूची को आधार से जाेड़ने में आ रही दिक्कतों को लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी प्रणव कुमार ने समीक्षा की। कहा, आधार संग्रहण का प्रमुख उद्देश्य निर्वाचक सूची में पंजीकृत निर्वाचक के पहचान को सुनिश्चित करना एवं उनका प्रमाणीकरण करना है। मतदाता से आधार डाटा के संग्रहण के लिए संशोधन किए गए हैं। बीएलओ द्वारा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित गरुड़ एप के माध्यम से आधार संग्रहण का कार्य किया जाना है। निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा ईआरओ नेट के माध्यम से आधार संग्रहण का कार्य करेंगे। मतदाताओं द्वारा स्वयं भी नेशनल वोटर सर्विसेज पोर्टल, वोटर हेल्पलाइन एप अथवा वोटर पोर्टल के माध्यम से प्रमाणितकरण किया जा सकेगा। मतदाता मोबाइल संख्या पर ओटीपी प्राप्त कर स्वयं अपने आधार संख्या का प्रमाणीकरण कर सकते हैं। नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड एक से उनचास में आधार संग्रह के लिए रविवार को शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए पांच पदाधिकारियों को वार्ड आवंटित किए गए हैं। वार्ड एक से दस एएसडीओ पूर्वी, ग्यारह से बीस के लिए अपर निर्वाचन पदाधिकारी पूर्वी, इक्कीस से तीस के लिए बीईओ, मुशहरी, इकतीस से चालीस के लिए मुशहरी सीओ एवं इकतालीस से उनचास के लिए सीडीपीओ मुशहरी सदर को पर्यवेक्षण के लिए कहा गया है। मुशहरी के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी बीडीओ को दी गई है।
Nokia 6300 4G और Nokia 8000 4G को आधिकारिक तौर पर मार्केट में लॉन्च कर दिया गया है। इन दोनों डिवाइसेज में यूजर्स को WhatsApp, Facebook और गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स की सुविधा मिलेगी। नई दिल्लीः Nokia 6300 4G और Nokia 8000 4G को आधिकारिक तौर पर मार्केट में लॉन्च कर दिया गया है। इन दोनों डिवाइसेज में यूजर्स को WhatsApp, Facebook और गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स की सुविधा मिलेगी। हालांकि कंपनी ने इन दोनों डिवाइसेज को कुछ सिलेक्टेड मार्केट में ही लॉन्च किया है। इन दोनों फोन की खास बात है कि इन्हें वाई-फाई हॉटस्पॉट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इन दोनों फोन में आप गूगल मैप्स, फेसबुक और यूट्यूब को भी ऐक्सेस कर सकते हैं। इस फोन में 2. 4 इंच का डिस्प्ले दिया गया है। साथ ही 512 एमबी रैम और 4जीबी की इनबिल्ट स्टोरेज के साथ आने वाले इस फोन में स्नैपड्रैगन 210 प्रोसेसर लगा है। फोन की मेमरी को आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से 32जीबी तक बढ़ा भी सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए इसमें फ्लैशलाइट के साथ VGA कैमरा दिया गया है। खास बात ये है कि इस फ्लैशलाइट का इस्तेमाल टॉर्च की तरह भी किया जा सकता है। फोन में 1500mAh की बैटरी लगी है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी 27 दिन तक के स्टैंडबाय टाइम के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में जीपीएस, ब्लूटूथ, ड्यूल नैनो सिम सपॉर्ट, एफएम रेडियो और एक ऑडियो जैक दिया गया है। इन दोनों फोन के कीमत की बात करें तो Nokia 6300 4G को यूजर्स 49 EUR यानि करीब 4,300 रुपये में खरीद सकते हैं। यह फोन सियान ग्रीन, लाइट चारकोल और पाउडर व्हाइट कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। वहीं Nokia 8000 4G की कीमत 79 EUR यानि लगभग 6,900 रुपये है।
Nokia छः हज़ार तीन सौ चारG और Nokia आठ हज़ार चारG को आधिकारिक तौर पर मार्केट में लॉन्च कर दिया गया है। इन दोनों डिवाइसेज में यूजर्स को WhatsApp, Facebook और गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स की सुविधा मिलेगी। नई दिल्लीः Nokia छः हज़ार तीन सौ चारG और Nokia आठ हज़ार चारG को आधिकारिक तौर पर मार्केट में लॉन्च कर दिया गया है। इन दोनों डिवाइसेज में यूजर्स को WhatsApp, Facebook और गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स की सुविधा मिलेगी। हालांकि कंपनी ने इन दोनों डिवाइसेज को कुछ सिलेक्टेड मार्केट में ही लॉन्च किया है। इन दोनों फोन की खास बात है कि इन्हें वाई-फाई हॉटस्पॉट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इन दोनों फोन में आप गूगल मैप्स, फेसबुक और यूट्यूब को भी ऐक्सेस कर सकते हैं। इस फोन में दो. चार इंच का डिस्प्ले दिया गया है। साथ ही पाँच सौ बारह एमबी रैम और चारजीबी की इनबिल्ट स्टोरेज के साथ आने वाले इस फोन में स्नैपड्रैगन दो सौ दस प्रोसेसर लगा है। फोन की मेमरी को आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से बत्तीसजीबी तक बढ़ा भी सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए इसमें फ्लैशलाइट के साथ VGA कैमरा दिया गया है। खास बात ये है कि इस फ्लैशलाइट का इस्तेमाल टॉर्च की तरह भी किया जा सकता है। फोन में एक हज़ार पाँच सौmAh की बैटरी लगी है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी सत्ताईस दिन तक के स्टैंडबाय टाइम के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में जीपीएस, ब्लूटूथ, ड्यूल नैनो सिम सपॉर्ट, एफएम रेडियो और एक ऑडियो जैक दिया गया है। इन दोनों फोन के कीमत की बात करें तो Nokia छः हज़ार तीन सौ चारG को यूजर्स उनचास यूरो यानि करीब चार,तीन सौ रुपयापये में खरीद सकते हैं। यह फोन सियान ग्रीन, लाइट चारकोल और पाउडर व्हाइट कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। वहीं Nokia आठ हज़ार चारG की कीमत उन्यासी यूरो यानि लगभग छः,नौ सौ रुपयापये है।
पूर्व भारतीय गेंदबाज लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजी सलाहकार बनने में दिलचस्पी दिखाई है। शिवरामकृष्णन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में कहा कि वो टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी कोच के पद के लिए अपना नाम देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा, "चहल और कुलदीप दोनों के पास लेग ब्रेक और गुगली है लेकिन वो अपने खेल में एक टॉप-स्पिनर भी जोड़ सकते हैं। साथ ही उन्हें गुगली को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचना होगा।" टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच फिलहाल भरत अरुण हैं लेकिन स्पिन गेंदबाजी के लिए कोई स्पेशलिस्ट कोच टीम के पास नहीं है।
पूर्व भारतीय गेंदबाज लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजी सलाहकार बनने में दिलचस्पी दिखाई है। शिवरामकृष्णन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में कहा कि वो टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी कोच के पद के लिए अपना नाम देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा, "चहल और कुलदीप दोनों के पास लेग ब्रेक और गुगली है लेकिन वो अपने खेल में एक टॉप-स्पिनर भी जोड़ सकते हैं। साथ ही उन्हें गुगली को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचना होगा।" टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच फिलहाल भरत अरुण हैं लेकिन स्पिन गेंदबाजी के लिए कोई स्पेशलिस्ट कोच टीम के पास नहीं है।
नौणी - इथोपिया का एक दल शुक्रवार को डा. वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी पहुंच रहा है। अपने एकदिवसीय दौरे के दौरान दल के सदस्यों को पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली खेती और वन्य पौधों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। इस दल का नेतृत्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. गेमिबो कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इथोपिया की टीम हिमाचल में होने वाली खेती के बारे में जानने के लिए नौणी विश्वविद्यालय पहुंच रही है। हिमाचल व इथोपिया की भौगोलिक परिस्थिति व पर्यावरण लगभग एक जैसा है। हिमाचल की तर्ज पर इथोपिया भी बागबानी व कृषि प्रधान देश है, इसलिए इथोपिया में खेती व बागबानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष टीम नौणी विश्वविद्यालय पहुंच रही है। इस टीम में कुल 16 सदस्य होंगे। यह टीम एक दिन विश्वविद्यालय में रुकेगी। विश्वविद्यालय द्वारा बागबानी व कृषि क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों के बारे में यह टीम विस्तार से जानकारी लेगी। इसके अलावा पर्यावरण को बचाने के लिए किस प्रकार के वृक्षों को लगाया जाना जरूरी है, इसके बारे में भी टीम के सदस्य जानकारी लेंगे। विश्वविद्यालय की लैब, सोलर सिस्टम, हाइड्रोफिनिक्स प्लांट, बागीचे, फ्लोरीकल्चर, फूड साइंस, मुधमक्खी पालन, प्लांट पाइथोलोजी, सायल साइंस, बागबानी व वानिकी विभाग का भी यह टीम निरीक्षण करेगी। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अपने-अपने विभागों में हुए शोध कार्यों के बारे में इस टीम को विस्तार से जानकारी देंगे। टीम का वार्तालाप विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ रखा गया है। दोनों देशों के वैज्ञानिक अपने अनुभव सांझा करेंगे। 16 सदस्यों वाली इस टीम में इथोपिया सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारी, वैज्ञानिक, प्लानर व अन्य अधिकारी शामिल हैं। पहली बार इथोपिया का दल विश्वविद्यालय में एकदिवसीय दौरे पर आ रहा है। नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एचसी शर्मा ने बताया कि इथोपिया का दल शुक्र्रवार को विश्वविद्यालय में पहुंच रहा है। अपने एकदिवसीय दौरे के दौरान टीम के सदस्यों को बागबानी व कृषि से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
नौणी - इथोपिया का एक दल शुक्रवार को डा. वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी पहुंच रहा है। अपने एकदिवसीय दौरे के दौरान दल के सदस्यों को पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली खेती और वन्य पौधों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। इस दल का नेतृत्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. गेमिबो कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इथोपिया की टीम हिमाचल में होने वाली खेती के बारे में जानने के लिए नौणी विश्वविद्यालय पहुंच रही है। हिमाचल व इथोपिया की भौगोलिक परिस्थिति व पर्यावरण लगभग एक जैसा है। हिमाचल की तर्ज पर इथोपिया भी बागबानी व कृषि प्रधान देश है, इसलिए इथोपिया में खेती व बागबानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष टीम नौणी विश्वविद्यालय पहुंच रही है। इस टीम में कुल सोलह सदस्य होंगे। यह टीम एक दिन विश्वविद्यालय में रुकेगी। विश्वविद्यालय द्वारा बागबानी व कृषि क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों के बारे में यह टीम विस्तार से जानकारी लेगी। इसके अलावा पर्यावरण को बचाने के लिए किस प्रकार के वृक्षों को लगाया जाना जरूरी है, इसके बारे में भी टीम के सदस्य जानकारी लेंगे। विश्वविद्यालय की लैब, सोलर सिस्टम, हाइड्रोफिनिक्स प्लांट, बागीचे, फ्लोरीकल्चर, फूड साइंस, मुधमक्खी पालन, प्लांट पाइथोलोजी, सायल साइंस, बागबानी व वानिकी विभाग का भी यह टीम निरीक्षण करेगी। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अपने-अपने विभागों में हुए शोध कार्यों के बारे में इस टीम को विस्तार से जानकारी देंगे। टीम का वार्तालाप विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ रखा गया है। दोनों देशों के वैज्ञानिक अपने अनुभव सांझा करेंगे। सोलह सदस्यों वाली इस टीम में इथोपिया सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारी, वैज्ञानिक, प्लानर व अन्य अधिकारी शामिल हैं। पहली बार इथोपिया का दल विश्वविद्यालय में एकदिवसीय दौरे पर आ रहा है। नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एचसी शर्मा ने बताया कि इथोपिया का दल शुक्र्रवार को विश्वविद्यालय में पहुंच रहा है। अपने एकदिवसीय दौरे के दौरान टीम के सदस्यों को बागबानी व कृषि से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
दिल्ली में सरकार बनाम एलजी की जुबानी जंग जारी है. ऐसे में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल विनय सक्सेना को लेकर फिर हमला बोला. उन्होंने एलजी पर असंवैधानिक तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा करने का आरोप लगाया. मनीष सिसोदिया का आरोप है कि एलजी दादागिरी कर रहे हैं. उन्होंने प्रिंसिपल की नियुक्ति की 244 पोस्ट पर रोक लगाई हुई है. इसके अलावा मनीष सिसोदिया ने बड़ा हमला बोलते हुए कहा, जनता से स्टडी कराने की जरूरत है कि दिल्ली में एलजी की पोस्ट की जरूरत है भी या नहीं. मनीष सिसोदिया के मुताबिक दिल्ली के LG ने प्रेस रिलीज के माध्यम से दावा किया कि उन्होंने 126 प्रिंसिपल की नियुक्ति की और दिल्ली सरकार ने नियुक्ति रोकी थी. सिसोदिया ने कहा, LG दफ्तर का बयान झूठ का पुलिंदा है, क्योंकि सर्विस इनके पास है इसलिए सिस्टम का मजाक बना दिया गया है. LG ने असंवैधानिक तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट में कब्जा किया हुआ है. सिसोदिया ने कहा कि 2015 में सर्विस डिपार्टमेंट चुनी सरकार के पास था. तब 5 साल से अटके अपॉइंटमेंट करवाए गए थे. इसके बाद केंद्र ने सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया, फिर प्रिंसिपल की नियुक्ति से संबंधित फाइल मंत्री को नहीं दिखाने का काम किया गया. पिछले एक साल में 363 प्रिंसिपल की नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ. विधानसभा को सर्विस डिपार्टमेंट से संबंधित जवाब नहीं दिए, LG ने जवाब देने से इनकार किया. सिसोदिया ने कहा, कल एलजी ने एक प्रेस रिलीज जारी करके क्लेम किया कि उन्होंने सरकारी स्कूलों के लिए 126 प्रिंसिपल्स की नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है. एलजी ऑफिस का यह बयान झूठ का पुलिंदा है. इन्होंने सिस्टम का मजाक बनाकर रखा हुआ है क्योंकि सर्विसेज़ पर असंवैधानिक तरीक़े से केंद्र और एलजी ने क़ब्ज़ा कर रखा है. अगर ऐसा न होता तो आज हर स्कूल में प्रिंसिपल होता, हम वाइस प्रिंसिपल से काम चला रहे हैं. दिल्ली की जनता सरकार चुनती है केजरीवाल की लेकिन सर्विसेज पर इन्होंने कब्जा कर रखा है. इनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, प्रिंसिपल की नियुक्ति की. जब हमारी सरकार बनी तब 2015 में सर्विस डिपार्टमेंट हमारे पास था. 2015 में 370 प्रिंसिपल के पोस्ट का प्रस्ताव यूपीएससी को भेजा, उसके बाद इन्होंने गलत तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया. उसके बाद कोई भी फाइल बिना हमें दिखाए यूपीएससी को ऐसे-ऐसे जवाब दिए, जिससे यूपीएससी संतुष्ट नहीं हुआ. दो साल पहले मैंने इन्फॉर्मल तरीके से अधिकारियों से मिलकर यूपीएससी से संपर्क करके 363 प्रिंसिपल की नियुक्ति का रास्ता साफ कराया. लेकिन उन 370 प्रिंसिपल की नियुक्ति के मामले में एलजी ने कभी भी यूपीएससी को ठीक से जवाब नहीं दिया. सिसोदिया ने कहा, सर्विस डिपार्टमेंट को फंड विधानसभा के जरिए जाता है, लेकिन विधानसभा में सवाल पूछा जाता है तो अधिकारी कहते हैं कि एलजी ने मना किया है सर्विस डिपार्टमेंट का जवाब देने से. '244 स्कूलों को प्रिंसिपल्स की जरूरत' 370 पोस्ट का मामला पुश करके जब हमने अधिकारियों के जरिए LG के पास भिजवाया, तो उन्होंने 370 में से 126 को तो आगे बढ़ाया, लेकिन ये नहीं बताया कि 244 क्यों रोक दी है. ये कहकर कि 5 साल से पोस्ट नहीं भरी गई है, तो इसकी स्टडी कराओ. सिसोदिया ने आगे कहा, LG साहब इन 244 स्कूलों में भी प्रिंसिपल्स चाहिए. इन स्कूलों में वाईस प्रिंसिपल से काम चलाना पड़ रहा है. दादागिरी करके ऐसे किया जा रहा है. अगर सर्विस डिपार्टमेंट हमारे पास होता तो बहुत पहले ही नियुक्ति हो चुकी होती. एलजी से अपील करता हूं कि रोकने के ये बहाने मत बनाइए. यह बच्चों के भविष्य का मामला है. अवैध कब्जा करके ही उन्होंने पूरी सरकार के कामों को रोक रखा है.
दिल्ली में सरकार बनाम एलजी की जुबानी जंग जारी है. ऐसे में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल विनय सक्सेना को लेकर फिर हमला बोला. उन्होंने एलजी पर असंवैधानिक तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा करने का आरोप लगाया. मनीष सिसोदिया का आरोप है कि एलजी दादागिरी कर रहे हैं. उन्होंने प्रिंसिपल की नियुक्ति की दो सौ चौंतालीस पोस्ट पर रोक लगाई हुई है. इसके अलावा मनीष सिसोदिया ने बड़ा हमला बोलते हुए कहा, जनता से स्टडी कराने की जरूरत है कि दिल्ली में एलजी की पोस्ट की जरूरत है भी या नहीं. मनीष सिसोदिया के मुताबिक दिल्ली के LG ने प्रेस रिलीज के माध्यम से दावा किया कि उन्होंने एक सौ छब्बीस प्रिंसिपल की नियुक्ति की और दिल्ली सरकार ने नियुक्ति रोकी थी. सिसोदिया ने कहा, LG दफ्तर का बयान झूठ का पुलिंदा है, क्योंकि सर्विस इनके पास है इसलिए सिस्टम का मजाक बना दिया गया है. LG ने असंवैधानिक तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट में कब्जा किया हुआ है. सिसोदिया ने कहा कि दो हज़ार पंद्रह में सर्विस डिपार्टमेंट चुनी सरकार के पास था. तब पाँच साल से अटके अपॉइंटमेंट करवाए गए थे. इसके बाद केंद्र ने सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया, फिर प्रिंसिपल की नियुक्ति से संबंधित फाइल मंत्री को नहीं दिखाने का काम किया गया. पिछले एक साल में तीन सौ तिरेसठ प्रिंसिपल की नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ. विधानसभा को सर्विस डिपार्टमेंट से संबंधित जवाब नहीं दिए, LG ने जवाब देने से इनकार किया. सिसोदिया ने कहा, कल एलजी ने एक प्रेस रिलीज जारी करके क्लेम किया कि उन्होंने सरकारी स्कूलों के लिए एक सौ छब्बीस प्रिंसिपल्स की नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है. एलजी ऑफिस का यह बयान झूठ का पुलिंदा है. इन्होंने सिस्टम का मजाक बनाकर रखा हुआ है क्योंकि सर्विसेज़ पर असंवैधानिक तरीक़े से केंद्र और एलजी ने क़ब्ज़ा कर रखा है. अगर ऐसा न होता तो आज हर स्कूल में प्रिंसिपल होता, हम वाइस प्रिंसिपल से काम चला रहे हैं. दिल्ली की जनता सरकार चुनती है केजरीवाल की लेकिन सर्विसेज पर इन्होंने कब्जा कर रखा है. इनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, प्रिंसिपल की नियुक्ति की. जब हमारी सरकार बनी तब दो हज़ार पंद्रह में सर्विस डिपार्टमेंट हमारे पास था. दो हज़ार पंद्रह में तीन सौ सत्तर प्रिंसिपल के पोस्ट का प्रस्ताव यूपीएससी को भेजा, उसके बाद इन्होंने गलत तरीके से सर्विस डिपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया. उसके बाद कोई भी फाइल बिना हमें दिखाए यूपीएससी को ऐसे-ऐसे जवाब दिए, जिससे यूपीएससी संतुष्ट नहीं हुआ. दो साल पहले मैंने इन्फॉर्मल तरीके से अधिकारियों से मिलकर यूपीएससी से संपर्क करके तीन सौ तिरेसठ प्रिंसिपल की नियुक्ति का रास्ता साफ कराया. लेकिन उन तीन सौ सत्तर प्रिंसिपल की नियुक्ति के मामले में एलजी ने कभी भी यूपीएससी को ठीक से जवाब नहीं दिया. सिसोदिया ने कहा, सर्विस डिपार्टमेंट को फंड विधानसभा के जरिए जाता है, लेकिन विधानसभा में सवाल पूछा जाता है तो अधिकारी कहते हैं कि एलजी ने मना किया है सर्विस डिपार्टमेंट का जवाब देने से. 'दो सौ चौंतालीस स्कूलों को प्रिंसिपल्स की जरूरत' तीन सौ सत्तर पोस्ट का मामला पुश करके जब हमने अधिकारियों के जरिए LG के पास भिजवाया, तो उन्होंने तीन सौ सत्तर में से एक सौ छब्बीस को तो आगे बढ़ाया, लेकिन ये नहीं बताया कि दो सौ चौंतालीस क्यों रोक दी है. ये कहकर कि पाँच साल से पोस्ट नहीं भरी गई है, तो इसकी स्टडी कराओ. सिसोदिया ने आगे कहा, LG साहब इन दो सौ चौंतालीस स्कूलों में भी प्रिंसिपल्स चाहिए. इन स्कूलों में वाईस प्रिंसिपल से काम चलाना पड़ रहा है. दादागिरी करके ऐसे किया जा रहा है. अगर सर्विस डिपार्टमेंट हमारे पास होता तो बहुत पहले ही नियुक्ति हो चुकी होती. एलजी से अपील करता हूं कि रोकने के ये बहाने मत बनाइए. यह बच्चों के भविष्य का मामला है. अवैध कब्जा करके ही उन्होंने पूरी सरकार के कामों को रोक रखा है.
रूस में पीएम माेदी ने किया चौकाने वाला काम,वीडियाे हुआ वायरल.... 95 साल की उम्र में पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन.... आज इन जिलों में होगी भारी बारिश.... .
रूस में पीएम माेदी ने किया चौकाने वाला काम,वीडियाे हुआ वायरल.... पचानवे साल की उम्र में पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन.... आज इन जिलों में होगी भारी बारिश.... .
" समझौते का भली प्रकार अध्ययन कीजिये । वह परिचारक, जो अपने समझौते की शता को अच्छी तरह नहीं जानता, कुतुबनुमाविहीन नाविक की भाँति है। अधिकतर शिकायते समझौते की शर्तों के भग होने से ही उत्पन्न होती हैं । "अपने विभाग पर एक सरसरी दृष्टि डालते रहिये । आपको जानना चाहिये कि विभाग से क्या काम हो रहे हैं, उसमे मशीने कैसो हैं तथा उन पर वेतन की दरे क्या हैं । "सहायता की प्रत्येक प्रार्थना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिये । परन्तु आपको अपने किसी साथी कर्मचारी की सही शिकायत, जिसे नित्रटाने के लिये आप श्रमनायक से कह सकते हैं तथा किसी ऐसी शिकायत के भेद को जानना चाहिये, जिसके लिये कम्पनी जिम्मेदार नहीं है । "यदि आपको यह विश्वास हो जाय कि शिकायत कोई शिकायत है ही नहीं तो उसको आगे न बढाइये । समझौते की व्याख्या करने मे किसी व्यक्तिगत मतभेद या गलती के कारण उत्पन्न कोई शिकायत सही शिकायत नहीं है । "श्रमनायक से मिलने के पहले ठहरिये और विचार कीजिये । अपने मन से प्रश्न कीजिये कि (१) क्या मुझे मजदूर से सभी तथ्य प्राप्त हो गये हैं से (२) मुझे भी जानकारियाँ प्राप्त हो चुकी हैं ? (३) क्या मैने समझौते की पुन. जॉच कर ली है ? (५) क्या मैने सम्बन्धित मजदूर को मामला समझा दिया है ? मस्तिष्क इस समय कैसा है ? शान्त, ठण्डा तथा स्थिर है ? तब आप श्रमनायक से मिलने के लिये तैयार हैं। जब किसी शिकायत की पैरवी करते हैं तो आप श्रमनायक से कृपा की भीख नहीं माँग रहे हैं । झुकने तथा गिड़गिड़ाने की कोई आवश्यकता नहीं । इसके विपरीत, यह भी याद रखिये कि यदि आप लाठी लेकर श्रमनायक से बात करने जाते हैं, तो आपको उससे बहुत सहयोग नहीं मिल सकता । "यदि श्रमनायक शिकायतों का विनिमय करना चाहे तात्पर्य यह कि यदि वह यह कहे कि आप उसकी कोई शिकायत मान लीजिये, तो वह आपकी मान लेगा तो आप इसे इनकार कर दीजिये । शिकायतों का विनियम करना सम्बन्धित मजदूरों के प्रति अन्याय है। प्रत्येक शिकायत को मामले के औचित्य, अनौचित्य पर ही तय कीजिये । 'श्रमनायक जब आपको पागल बना दे, तत्र अपने क्रोध को शान्त रखने का प्रयत्न कीजिये । क्रोध से पागल होने पर कढाचित् ही कोई सही बात सोच सकें ।
" समझौते का भली प्रकार अध्ययन कीजिये । वह परिचारक, जो अपने समझौते की शता को अच्छी तरह नहीं जानता, कुतुबनुमाविहीन नाविक की भाँति है। अधिकतर शिकायते समझौते की शर्तों के भग होने से ही उत्पन्न होती हैं । "अपने विभाग पर एक सरसरी दृष्टि डालते रहिये । आपको जानना चाहिये कि विभाग से क्या काम हो रहे हैं, उसमे मशीने कैसो हैं तथा उन पर वेतन की दरे क्या हैं । "सहायता की प्रत्येक प्रार्थना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिये । परन्तु आपको अपने किसी साथी कर्मचारी की सही शिकायत, जिसे नित्रटाने के लिये आप श्रमनायक से कह सकते हैं तथा किसी ऐसी शिकायत के भेद को जानना चाहिये, जिसके लिये कम्पनी जिम्मेदार नहीं है । "यदि आपको यह विश्वास हो जाय कि शिकायत कोई शिकायत है ही नहीं तो उसको आगे न बढाइये । समझौते की व्याख्या करने मे किसी व्यक्तिगत मतभेद या गलती के कारण उत्पन्न कोई शिकायत सही शिकायत नहीं है । "श्रमनायक से मिलने के पहले ठहरिये और विचार कीजिये । अपने मन से प्रश्न कीजिये कि क्या मुझे मजदूर से सभी तथ्य प्राप्त हो गये हैं से मुझे भी जानकारियाँ प्राप्त हो चुकी हैं ? क्या मैने समझौते की पुन. जॉच कर ली है ? क्या मैने सम्बन्धित मजदूर को मामला समझा दिया है ? मस्तिष्क इस समय कैसा है ? शान्त, ठण्डा तथा स्थिर है ? तब आप श्रमनायक से मिलने के लिये तैयार हैं। जब किसी शिकायत की पैरवी करते हैं तो आप श्रमनायक से कृपा की भीख नहीं माँग रहे हैं । झुकने तथा गिड़गिड़ाने की कोई आवश्यकता नहीं । इसके विपरीत, यह भी याद रखिये कि यदि आप लाठी लेकर श्रमनायक से बात करने जाते हैं, तो आपको उससे बहुत सहयोग नहीं मिल सकता । "यदि श्रमनायक शिकायतों का विनिमय करना चाहे तात्पर्य यह कि यदि वह यह कहे कि आप उसकी कोई शिकायत मान लीजिये, तो वह आपकी मान लेगा तो आप इसे इनकार कर दीजिये । शिकायतों का विनियम करना सम्बन्धित मजदूरों के प्रति अन्याय है। प्रत्येक शिकायत को मामले के औचित्य, अनौचित्य पर ही तय कीजिये । 'श्रमनायक जब आपको पागल बना दे, तत्र अपने क्रोध को शान्त रखने का प्रयत्न कीजिये । क्रोध से पागल होने पर कढाचित् ही कोई सही बात सोच सकें ।
चिकित्सक, पूरी तरह से हाथों की तकनीक पर अपनी चिकित्सा पद्धति पर निर्भर हैं - यह ओस्टियोपैथ का डॉक्टर है। इसकी गतिविधि प्रत्येक रोगी के लिए एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण प्रदान करती है, क्योंकि यह प्रत्येक जीव की विशिष्टता के कारण है कि उपचार की प्रभावशीलता भिन्न होती है। ओस्टियोपैथी, चिकित्सा और आक्रामक उपचार के तरीकों के विपरीत, एक नरम विधि है, वस्तुतः कोई अवांछनीय प्रभाव और साइड इफेक्ट नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह शरीर के संसाधनों को सक्रिय और पुनर्स्थापना पर केंद्रित है। आज तक, यह विज्ञान सक्रिय रूप से विकसित हो रहा है। ओस्टियोपैथी में एक मुख्य सिद्धांत है, जो कहता है कि एक अंग बीमार नहीं हो सकता। यदि यह कुछ भी दर्द होता है, तो यह एक पूरे के रूप में शरीर की बीमारी को इंगित करता है। इसलिए, मूल कारण को खोजने और समाप्त करने के लिए, आपको इसे पूरी तरह से निदान करना होगा। उसी समय, डॉक्टर किसी भी उपकरण और उपकरणों का उपयोग नहीं करता है, और वह नुस्खे नहीं लिखते हैं उसकी विधि शरीर पर स्थित कुछ बिंदुओं पर हाथों के प्रभाव में होती है, और इस प्रकार वह घायल अंग को भर देता है। ऑस्टियोपैथ का एक बहुत महत्वपूर्ण विशेषता मानव शरीर की शारीरिक रचना का पूरा ज्ञान है। और संवेदनशील हाथों से धन्यवाद, वह घायल अंग को पहचान सकता है और सही निदान कर सकता है। किस तरह का डॉक्टर एक ओस्टियोपैथ है? ओस्टियोपैथ - यह कौन है? अधिकांश मरीज़ डॉक्टर के पास जाने का निर्णय लेने से इस मुद्दे के बारे में सोचते हैं। सबसे पहले, यह एक विशेषज्ञ है, जो पेप्शन की सहायता से, पूरे जीव की अवस्था और उसके व्यक्तिगत अंग, साथ ही मांसपेशियों और हड्डियों के ढांचे को भी निर्धारित कर सकता है। शरीर के कुछ बिंदुओं पर दबाव डालते हुए, वह रोग का इलाज करता है लेकिन इस गतिविधि के आगे बढ़ने से पहले, डॉक्टर को विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा। अपने हाथों की सहायता से, वह शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए सभी प्रणालियों के काम को समायोजित करने में मदद करता है, मांसपेशियों सहित किसी भी दर्द से राहत, तनाव और तनाव को दूर कर सकता है। उनका काम अन्य डॉक्टरों के समान नहीं है शरीर विज्ञान और शरीर रचना विज्ञान के ज्ञान से पहले यह सबसे पहले जुड़ा हुआ है। सब के बाद, उनके बिना यह सभी समस्याओं को समाप्त करना असंभव है जो जीव के सामान्य जीवन में हस्तक्षेप करते हैं। इसलिए, उन ओस्टियोपैथ जो जानबूझकर इस तकनीक के मालिक हैं, उन्हें योग्यता माना जाता है। ये शरीर के तंत्रिका तंत्र और रीढ़ की हड्डी के कार्यों के क्षेत्र में उन्नत विशेषज्ञ हैं। इस डॉक्टर की मैनुअल तकनीक शरीर के तचीकार्डिया, तनाव और संबंधित विकारों के साथ मदद कर सकती है। ऑस्टियोपैथ के हाथों की मदद से, जीव की वसूली की प्रक्रिया त्वरित होती है। प्रसव के बाद महिलाओं में बहुत लोकप्रिय ओस्टियोपैथी है। आखिरकार, इसकी सहायता से, आप हार्मोनल पृष्ठभूमि और पूरे शरीर के कामकाज को सामान्य कर सकते हैं। ओस्टियोपैथ भी भावनात्मक और मानसिक विकारों के अधीन है। जो लोग लगातार सिरदर्द, चयापचय संबंधी विकार और नींद वाले हैं, उन्हें इस विशेषज्ञ की यात्रा करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सामान्य चिकित्सक ऐसी समस्याओं से निपटने में सक्षम नहीं है। ओस्टियोपैथी का निदान कौन है? इसलिए, "ओस्टियोपैथ्स - यह कौन है? " प्रश्न को समझते हुए, अपने कर्तव्यों में क्या है और उन्हें क्या करना चाहिए पता करने के लिए आवश्यक है। ऐसी घटना में जिसे आप अक्सर चक्कर आना, उच्च या निम्न रक्तचाप, सिरदर्द, मतली की भावना से पीड़ित होते हैं, आपको इस विशेषज्ञ के पास एक यात्रा भी दिखाई जाती है। एक और सवाल "ओस्टियोपैथ - यह कौन है"? यह डॉक्टर शरीर में चयापचय को सामान्य कर सकता है, जिससे सभी अंगों के काम में सुधार होता है और वजन घटाने में योगदान देता है। क्या मामलों में एक osteopath आवश्यक है? ऐसे मामलों में जब एक विशेषज्ञ को अपील करता है जो हाथों की मदद से निदान करता है, अर्थात, एक मैनुअल चिकित्सक, बस आवश्यक है यदि आपका बच्चा जन्म के समय घायल हो गया है या पेट में है, बच्चे के जन्म के दौरान हुई विभिन्न प्रकार की विकृति, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, जठरांत्र संबंधी पथ रोग, स्कोलियोसिस, रीढ़ की हड्डी के साथ समस्या, आसन का उल्लंघन, उसके लिए बच्चों के ऑस्टियोपैथ की जरूरत होती है। वयस्क रोगियों के लिए, इस विशेषज्ञ को सिर्फ उन लोगों के लिए उपचार की आवश्यकता होती है जिनके पास मस्क्यूलोस्केलेटल सिस्टम के साथ गंभीर समस्याएं होती हैं। स्त्री रोग संबंधी समस्याओं, ऑपरेशन के अनपेक्षित परिणाम और विभिन्न चोटों, लगातार सर्दी और साइनसइटिस, माइग्रेन और सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल पथ की बीमारियों, ईएनटी अंगों के रोगों के साथ उनकी कोई मदद नहीं होगी। जो महिलाएं बच्चे की प्रतीक्षा करें और गर्भपात का खतरा है, सूजन बढ़ती है और गंभीर विषाक्तता, पीठ दर्द, ओस्टियोपैथ पर भी जाना चाहिए। यह भी प्रसव और भ्रूण सुधार के लिए तैयारी में उपयोगी होगा। डिलीवरी के बाद इस विशेषज्ञ की यात्रा करना भी आवश्यक है। दिए गए डॉक्टर को रिसेप्शन पर इकट्ठा करना, आपके लिए यह आवश्यक है कि वह निश्चित विश्लेषण या नियुक्ति करेगा। उनकी मदद से, एक विशेषज्ञ शरीर की स्थिति, इसकी कार्यप्रणाली की समस्याओं और वर्तमान समस्याओं को दूर करने की पूरी तस्वीर बना सकता है। परीक्षणों के प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपने ओस्टियोपैथ के रूप में इस तरह के चिकित्सक से क्या समस्याएं निकाली हैं। निदान के बावजूद, मूत्र के सामान्य परीक्षण, शिरा से रक्त, मल अनिवार्य है वे विशेषज्ञ को संभावित छिपी समस्याओं की पहचान करने में सक्षम करते हैं जो एक बीमारी के कारण हुई थी ऐसे मामलों हैं जब क्लीनिक या मेडिकल सेंटर में डॉक्टर को स्वतंत्र रूप से आवश्यक परीक्षण करने का मौका मिलता है। इसके लिए धन्यवाद, मरीज के शरीर के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी तेज है। ओस्टियोपैथी काफी दिलचस्प विज्ञान है, क्योंकि यहां उपचार के साथ तालमेल की मदद से हाथ मिलाने हैं। बिल्कुल हर अच्छा ऑस्टियोपैथ में हाथों से काम करने का कौशल है इस पद्धति से पहले परीक्षा में पहले से ही शरीर के कार्यकलापों में विसंगतियों और गड़बड़ी को निर्धारित करने की अनुमति मिलती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही निर्णय को नियुक्त करने से इन समस्याओं को समय से खत्म करने के लिए। यह शरीर पर स्थित विशेष सिग्नल बिंदुओं द्वारा सहायता प्रदान करता है। जब एक मरीज को रीढ़ या खोपड़ी की हड्डियों से संबंधित समस्याओं से इलाज किया जाता है, क्रोनियोसेकरल ओस्टियोपैथी और तंत्र रिफ्लेक्स डायग्नोस्टिक्स का उपयोग किया जाता है। आंत की ऑस्टियोपैथी की विधि आंतरिक अंग से संबंधित समस्याओं की पहचान करने में मदद करेगी। स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए, आपको डॉक्टर की सलाह का पालन करना होगा, जैसे ओस्टियोपैथ वह क्या चंगा करता है, हम जानते हैं यह बहुत सी बीमारियां हैं आंतरिक अंगों के साथ बड़ी संख्या में समस्याएं रीढ़ की गलत स्थिति से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, पीठ को हमेशा सीधे रखा जाना चाहिए। पूरे शरीर की सामान्य क्रियाकलाप की चाबी एक संतुलित आहार और एक स्वस्थ नींद है। यदि आप हमेशा पर्याप्त नींद लेते हैं, तो सही खाएं, फिर आपको तनाव, हताशा और घबराहट का अनुभव नहीं होगा। समस्याओं का समय पर पता लगाने और उनके इलाज के लिए विशेषज्ञों को हर साल जाना आवश्यक है। इससे हमें नर्वस प्रणाली और शरीर को सामान्य रूप से सामान्य कामकाज को बनाए रखने की अनुमति मिलती है, और विभिन्न प्रकार की चोटों के तुरंत बाद ठीक हो जाती है। इस तरह की सरल सलाह के बाद, आप कई सालों तक जी सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं नहीं हैं। अब आप इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैंः "ओस्टियोपैथ - यह कौन है? " ज्ञान और शक्ति विशेषज्ञ के हाथ में होती है जैसे ओस्टियोपैथ उसकी सेवाओं के लिए कीमतें किसी भी मेडिकल संस्था में पाई जा सकती हैं।
चिकित्सक, पूरी तरह से हाथों की तकनीक पर अपनी चिकित्सा पद्धति पर निर्भर हैं - यह ओस्टियोपैथ का डॉक्टर है। इसकी गतिविधि प्रत्येक रोगी के लिए एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण प्रदान करती है, क्योंकि यह प्रत्येक जीव की विशिष्टता के कारण है कि उपचार की प्रभावशीलता भिन्न होती है। ओस्टियोपैथी, चिकित्सा और आक्रामक उपचार के तरीकों के विपरीत, एक नरम विधि है, वस्तुतः कोई अवांछनीय प्रभाव और साइड इफेक्ट नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह शरीर के संसाधनों को सक्रिय और पुनर्स्थापना पर केंद्रित है। आज तक, यह विज्ञान सक्रिय रूप से विकसित हो रहा है। ओस्टियोपैथी में एक मुख्य सिद्धांत है, जो कहता है कि एक अंग बीमार नहीं हो सकता। यदि यह कुछ भी दर्द होता है, तो यह एक पूरे के रूप में शरीर की बीमारी को इंगित करता है। इसलिए, मूल कारण को खोजने और समाप्त करने के लिए, आपको इसे पूरी तरह से निदान करना होगा। उसी समय, डॉक्टर किसी भी उपकरण और उपकरणों का उपयोग नहीं करता है, और वह नुस्खे नहीं लिखते हैं उसकी विधि शरीर पर स्थित कुछ बिंदुओं पर हाथों के प्रभाव में होती है, और इस प्रकार वह घायल अंग को भर देता है। ऑस्टियोपैथ का एक बहुत महत्वपूर्ण विशेषता मानव शरीर की शारीरिक रचना का पूरा ज्ञान है। और संवेदनशील हाथों से धन्यवाद, वह घायल अंग को पहचान सकता है और सही निदान कर सकता है। किस तरह का डॉक्टर एक ओस्टियोपैथ है? ओस्टियोपैथ - यह कौन है? अधिकांश मरीज़ डॉक्टर के पास जाने का निर्णय लेने से इस मुद्दे के बारे में सोचते हैं। सबसे पहले, यह एक विशेषज्ञ है, जो पेप्शन की सहायता से, पूरे जीव की अवस्था और उसके व्यक्तिगत अंग, साथ ही मांसपेशियों और हड्डियों के ढांचे को भी निर्धारित कर सकता है। शरीर के कुछ बिंदुओं पर दबाव डालते हुए, वह रोग का इलाज करता है लेकिन इस गतिविधि के आगे बढ़ने से पहले, डॉक्टर को विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा। अपने हाथों की सहायता से, वह शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए सभी प्रणालियों के काम को समायोजित करने में मदद करता है, मांसपेशियों सहित किसी भी दर्द से राहत, तनाव और तनाव को दूर कर सकता है। उनका काम अन्य डॉक्टरों के समान नहीं है शरीर विज्ञान और शरीर रचना विज्ञान के ज्ञान से पहले यह सबसे पहले जुड़ा हुआ है। सब के बाद, उनके बिना यह सभी समस्याओं को समाप्त करना असंभव है जो जीव के सामान्य जीवन में हस्तक्षेप करते हैं। इसलिए, उन ओस्टियोपैथ जो जानबूझकर इस तकनीक के मालिक हैं, उन्हें योग्यता माना जाता है। ये शरीर के तंत्रिका तंत्र और रीढ़ की हड्डी के कार्यों के क्षेत्र में उन्नत विशेषज्ञ हैं। इस डॉक्टर की मैनुअल तकनीक शरीर के तचीकार्डिया, तनाव और संबंधित विकारों के साथ मदद कर सकती है। ऑस्टियोपैथ के हाथों की मदद से, जीव की वसूली की प्रक्रिया त्वरित होती है। प्रसव के बाद महिलाओं में बहुत लोकप्रिय ओस्टियोपैथी है। आखिरकार, इसकी सहायता से, आप हार्मोनल पृष्ठभूमि और पूरे शरीर के कामकाज को सामान्य कर सकते हैं। ओस्टियोपैथ भी भावनात्मक और मानसिक विकारों के अधीन है। जो लोग लगातार सिरदर्द, चयापचय संबंधी विकार और नींद वाले हैं, उन्हें इस विशेषज्ञ की यात्रा करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सामान्य चिकित्सक ऐसी समस्याओं से निपटने में सक्षम नहीं है। ओस्टियोपैथी का निदान कौन है? इसलिए, "ओस्टियोपैथ्स - यह कौन है? " प्रश्न को समझते हुए, अपने कर्तव्यों में क्या है और उन्हें क्या करना चाहिए पता करने के लिए आवश्यक है। ऐसी घटना में जिसे आप अक्सर चक्कर आना, उच्च या निम्न रक्तचाप, सिरदर्द, मतली की भावना से पीड़ित होते हैं, आपको इस विशेषज्ञ के पास एक यात्रा भी दिखाई जाती है। एक और सवाल "ओस्टियोपैथ - यह कौन है"? यह डॉक्टर शरीर में चयापचय को सामान्य कर सकता है, जिससे सभी अंगों के काम में सुधार होता है और वजन घटाने में योगदान देता है। क्या मामलों में एक osteopath आवश्यक है? ऐसे मामलों में जब एक विशेषज्ञ को अपील करता है जो हाथों की मदद से निदान करता है, अर्थात, एक मैनुअल चिकित्सक, बस आवश्यक है यदि आपका बच्चा जन्म के समय घायल हो गया है या पेट में है, बच्चे के जन्म के दौरान हुई विभिन्न प्रकार की विकृति, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, जठरांत्र संबंधी पथ रोग, स्कोलियोसिस, रीढ़ की हड्डी के साथ समस्या, आसन का उल्लंघन, उसके लिए बच्चों के ऑस्टियोपैथ की जरूरत होती है। वयस्क रोगियों के लिए, इस विशेषज्ञ को सिर्फ उन लोगों के लिए उपचार की आवश्यकता होती है जिनके पास मस्क्यूलोस्केलेटल सिस्टम के साथ गंभीर समस्याएं होती हैं। स्त्री रोग संबंधी समस्याओं, ऑपरेशन के अनपेक्षित परिणाम और विभिन्न चोटों, लगातार सर्दी और साइनसइटिस, माइग्रेन और सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल पथ की बीमारियों, ईएनटी अंगों के रोगों के साथ उनकी कोई मदद नहीं होगी। जो महिलाएं बच्चे की प्रतीक्षा करें और गर्भपात का खतरा है, सूजन बढ़ती है और गंभीर विषाक्तता, पीठ दर्द, ओस्टियोपैथ पर भी जाना चाहिए। यह भी प्रसव और भ्रूण सुधार के लिए तैयारी में उपयोगी होगा। डिलीवरी के बाद इस विशेषज्ञ की यात्रा करना भी आवश्यक है। दिए गए डॉक्टर को रिसेप्शन पर इकट्ठा करना, आपके लिए यह आवश्यक है कि वह निश्चित विश्लेषण या नियुक्ति करेगा। उनकी मदद से, एक विशेषज्ञ शरीर की स्थिति, इसकी कार्यप्रणाली की समस्याओं और वर्तमान समस्याओं को दूर करने की पूरी तस्वीर बना सकता है। परीक्षणों के प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपने ओस्टियोपैथ के रूप में इस तरह के चिकित्सक से क्या समस्याएं निकाली हैं। निदान के बावजूद, मूत्र के सामान्य परीक्षण, शिरा से रक्त, मल अनिवार्य है वे विशेषज्ञ को संभावित छिपी समस्याओं की पहचान करने में सक्षम करते हैं जो एक बीमारी के कारण हुई थी ऐसे मामलों हैं जब क्लीनिक या मेडिकल सेंटर में डॉक्टर को स्वतंत्र रूप से आवश्यक परीक्षण करने का मौका मिलता है। इसके लिए धन्यवाद, मरीज के शरीर के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी तेज है। ओस्टियोपैथी काफी दिलचस्प विज्ञान है, क्योंकि यहां उपचार के साथ तालमेल की मदद से हाथ मिलाने हैं। बिल्कुल हर अच्छा ऑस्टियोपैथ में हाथों से काम करने का कौशल है इस पद्धति से पहले परीक्षा में पहले से ही शरीर के कार्यकलापों में विसंगतियों और गड़बड़ी को निर्धारित करने की अनुमति मिलती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही निर्णय को नियुक्त करने से इन समस्याओं को समय से खत्म करने के लिए। यह शरीर पर स्थित विशेष सिग्नल बिंदुओं द्वारा सहायता प्रदान करता है। जब एक मरीज को रीढ़ या खोपड़ी की हड्डियों से संबंधित समस्याओं से इलाज किया जाता है, क्रोनियोसेकरल ओस्टियोपैथी और तंत्र रिफ्लेक्स डायग्नोस्टिक्स का उपयोग किया जाता है। आंत की ऑस्टियोपैथी की विधि आंतरिक अंग से संबंधित समस्याओं की पहचान करने में मदद करेगी। स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए, आपको डॉक्टर की सलाह का पालन करना होगा, जैसे ओस्टियोपैथ वह क्या चंगा करता है, हम जानते हैं यह बहुत सी बीमारियां हैं आंतरिक अंगों के साथ बड़ी संख्या में समस्याएं रीढ़ की गलत स्थिति से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, पीठ को हमेशा सीधे रखा जाना चाहिए। पूरे शरीर की सामान्य क्रियाकलाप की चाबी एक संतुलित आहार और एक स्वस्थ नींद है। यदि आप हमेशा पर्याप्त नींद लेते हैं, तो सही खाएं, फिर आपको तनाव, हताशा और घबराहट का अनुभव नहीं होगा। समस्याओं का समय पर पता लगाने और उनके इलाज के लिए विशेषज्ञों को हर साल जाना आवश्यक है। इससे हमें नर्वस प्रणाली और शरीर को सामान्य रूप से सामान्य कामकाज को बनाए रखने की अनुमति मिलती है, और विभिन्न प्रकार की चोटों के तुरंत बाद ठीक हो जाती है। इस तरह की सरल सलाह के बाद, आप कई सालों तक जी सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं नहीं हैं। अब आप इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैंः "ओस्टियोपैथ - यह कौन है? " ज्ञान और शक्ति विशेषज्ञ के हाथ में होती है जैसे ओस्टियोपैथ उसकी सेवाओं के लिए कीमतें किसी भी मेडिकल संस्था में पाई जा सकती हैं।
Aaj ka Mausam: अगले 2 घंटों के दौरान हरियाणा में कुरुक्षेत्र, पानीपत, गोहाना में इसके अलावा यूपी के सहारनपुर, गंगोह, देवबंद , देवबंद, शामली, मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता के साथ गरज के साथ बारिश होगी। Aaj Ka Mausam : मानसून (Monsoon 2021) लगातार दो हफ्तों से चरम पर था, लेकिन अब बारिश कुछ धीमी पड़ी है। हालांकि रुक रुक कर बारिश होने का दौर अभी भी जारी है। राजधानी लखनऊ के मौसम (Lucknow Ka Mausam) की ही बात ले लीजिए, बीते दिन सुबह से ही धूप निकली रही। बादल और बारिश दोनों ही आसमान में छिपे बैठे थे, लेकिन रात होते-होते बारिश शुरु हो गई। 8 बजे के बाद लखऩऊ के कुछ इलाकों में तेज बारिश (Heavy Rain) शुरु हो गई। आज भी लखनऊ का मौसम खुला हुआ है, लेकिन मौसम विभाग (Muasam Vibhag) के मुताबिक, बारिश के आसार हैं। मौसम का हाल (Mausam Ka Hal) : लगातार हो रही बारिश से कई शहरों मे जलभराव, सड़कों में कटाव, बाढ़ जैसी स्थिति, पहाड़ों पर लैंडस्लाइड और बादल फटने से जन जीवन काफी समस्या झेल रहा है। यूपी में लगातार पांच दिन बारिश का अलर्ट जारी हुआ है। जबकि यूपी के अलग अलग जिलों से जो तस्वीरे बारिश से होने वाली क्षति को लेकर सामने आ रही हैं, वह बेहद चिंतनीय है। वहीं दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ शहरों, भारी से भी अधिक बारिश हो रही है और अगले कुछ दिन बारिश के आसार बने हुए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ घंटे में हरियाणा और यूपी के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। अगले 2 घंटों के दौरान हरियाणा में कुरुक्षेत्र, पानीपत, गोहाना में इसके अलावा यूपी के सहारनपुर, गंगोह, देवबंद , देवबंद, शामली, मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता के साथ गरज के साथ बारिश होगी। दक्षिणी दिल्ली (डेरामंडी), एनसीआर (गाजियाबाद) में भी अगले 2 घंटों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता की बारिश होगी। IMD के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के मौसम की बात, राजस्थान में लगातार बारिश हो रही है। राजस्थान में नदी-नाले उफान पर हैं। मॉनसून इस बार हिमाचल प्रदेश पर आफत बनकर टूटा है। भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावति हुआ है। हिमाचल में खतरा टला नहीं है, मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की गई है। 6 अगस्त को मौसम कैसा रहेगा (6 August Mausam Kaisa Rahega) कल के मौसम की जानकारी देते हुए मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले कल दिल्ली में बारिश होगी। हरियाणा में भी कल का तेज बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से स्थिति अधिक खराब है। उत्तराखंड में गंगोत्री हाईवे पर भारी भूस्खलन हो गया है। जिसकी वजह से हाईवे के 50 मीटर हिस्से और निर्माणाधीन सड़क सुरक्षा गैलरी पर खतरा मंडराने लगा है। हिमाचल और उत्तराखंड के जिलों से कई ऐसी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जो बारिश के कहर को दर्शा रहे हैं। अगले 3 दिन यहां बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
Aaj ka Mausam: अगले दो घंटाटों के दौरान हरियाणा में कुरुक्षेत्र, पानीपत, गोहाना में इसके अलावा यूपी के सहारनपुर, गंगोह, देवबंद , देवबंद, शामली, मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता के साथ गरज के साथ बारिश होगी। Aaj Ka Mausam : मानसून लगातार दो हफ्तों से चरम पर था, लेकिन अब बारिश कुछ धीमी पड़ी है। हालांकि रुक रुक कर बारिश होने का दौर अभी भी जारी है। राजधानी लखनऊ के मौसम की ही बात ले लीजिए, बीते दिन सुबह से ही धूप निकली रही। बादल और बारिश दोनों ही आसमान में छिपे बैठे थे, लेकिन रात होते-होते बारिश शुरु हो गई। आठ बजे के बाद लखऩऊ के कुछ इलाकों में तेज बारिश शुरु हो गई। आज भी लखनऊ का मौसम खुला हुआ है, लेकिन मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश के आसार हैं। मौसम का हाल : लगातार हो रही बारिश से कई शहरों मे जलभराव, सड़कों में कटाव, बाढ़ जैसी स्थिति, पहाड़ों पर लैंडस्लाइड और बादल फटने से जन जीवन काफी समस्या झेल रहा है। यूपी में लगातार पांच दिन बारिश का अलर्ट जारी हुआ है। जबकि यूपी के अलग अलग जिलों से जो तस्वीरे बारिश से होने वाली क्षति को लेकर सामने आ रही हैं, वह बेहद चिंतनीय है। वहीं दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ शहरों, भारी से भी अधिक बारिश हो रही है और अगले कुछ दिन बारिश के आसार बने हुए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ घंटे में हरियाणा और यूपी के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। अगले दो घंटाटों के दौरान हरियाणा में कुरुक्षेत्र, पानीपत, गोहाना में इसके अलावा यूपी के सहारनपुर, गंगोह, देवबंद , देवबंद, शामली, मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता के साथ गरज के साथ बारिश होगी। दक्षिणी दिल्ली , एनसीआर में भी अगले दो घंटाटों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता की बारिश होगी। IMD के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के मौसम की बात, राजस्थान में लगातार बारिश हो रही है। राजस्थान में नदी-नाले उफान पर हैं। मॉनसून इस बार हिमाचल प्रदेश पर आफत बनकर टूटा है। भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावति हुआ है। हिमाचल में खतरा टला नहीं है, मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की गई है। छः अगस्त को मौसम कैसा रहेगा कल के मौसम की जानकारी देते हुए मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले कल दिल्ली में बारिश होगी। हरियाणा में भी कल का तेज बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से स्थिति अधिक खराब है। उत्तराखंड में गंगोत्री हाईवे पर भारी भूस्खलन हो गया है। जिसकी वजह से हाईवे के पचास मीटर हिस्से और निर्माणाधीन सड़क सुरक्षा गैलरी पर खतरा मंडराने लगा है। हिमाचल और उत्तराखंड के जिलों से कई ऐसी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जो बारिश के कहर को दर्शा रहे हैं। अगले तीन दिन यहां बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की से जुड़ा कोर, टॉप 5 संस्थाओं को मिला अवसर. . सरकारी राशन की दुकानों में गड़बड़ी, आठ सस्पेंड, दो राशन डीलरों पर एफआईआर. . उत्तराखंड में भीम आर्मी को झटका, मुन्नीलाल समेत कई नेता भाजपा में शामिल. . दाद इलाही संपत्ति को कब्जाना चाहते है दबंगई, कार्रवाई की मांग. . कांग्रेस राष्ट्रवाद का प्रतीक, भाजपा कर रही हमारी नकलः रावत. . नहाते समय गंगा में डूबे पांच लड़के, एक की मौत, एक लापता. . दरगाह प्रबंधन की चालाकी या लापरवाही, जायरीनों की कटेगी जेब, ठेकदार मालामाल. . चलते ऑटो में टप्पेबाज महिलाओं ने उड़ाए लाखों के जेवर. . दबंगों ने फौजी के घर पर चलाया बुल्डोजर, पुलिस ने फौजी को ही हवालात में डाला. . "विश्व पर्यावरण दिवस पर किया गया पौधरोपण. .
देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की से जुड़ा कोर, टॉप पाँच संस्थाओं को मिला अवसर. . सरकारी राशन की दुकानों में गड़बड़ी, आठ सस्पेंड, दो राशन डीलरों पर एफआईआर. . उत्तराखंड में भीम आर्मी को झटका, मुन्नीलाल समेत कई नेता भाजपा में शामिल. . दाद इलाही संपत्ति को कब्जाना चाहते है दबंगई, कार्रवाई की मांग. . कांग्रेस राष्ट्रवाद का प्रतीक, भाजपा कर रही हमारी नकलः रावत. . नहाते समय गंगा में डूबे पांच लड़के, एक की मौत, एक लापता. . दरगाह प्रबंधन की चालाकी या लापरवाही, जायरीनों की कटेगी जेब, ठेकदार मालामाल. . चलते ऑटो में टप्पेबाज महिलाओं ने उड़ाए लाखों के जेवर. . दबंगों ने फौजी के घर पर चलाया बुल्डोजर, पुलिस ने फौजी को ही हवालात में डाला. . "विश्व पर्यावरण दिवस पर किया गया पौधरोपण. .
ALLAHABAD (10 May, JNN): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बारा-करछना पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ धरना दे रहे किसानों पर पुलिसिया उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग में दाखिल याचिका की अगली सुनवाई की तारीख 17 मई नियत की है। याचिका में नौ सितंबर 2015 की घटना में गिरफ्तार 42 लोगों को पर्सनल बांड पर छोड़े जाने का समादेश जारी करने की भी मांग की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ ने कचरी गांव के किसान संतोष कुमार पटेल की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता एससी तिवारी तथा प्रदेश सरकार की तरफ से मीनाक्षी सिंह ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा भारी पुलिस बल के साथ नौ सितंबर 2015 को मौके पर पहुंचे और लाठीचार्ज किया। कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही किसानों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया है। जिसकी विवेचना जारी है। याचिका में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा सहित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने की मांग की गई है। इस घटना में आठ गांवों में दहशत फैल गई थी। घरों में आग लग गई। कई घायल हुए थे। राज्य सरकार का कहना है कि शांति कायम रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने नियमानुसार कार्यवाही की है। 11 लोगों का पुनर्वास किया गया है। जिन किसानों ने मुआवजा लिया था वे भूमि वापस लेने को तैयार नहीं थे। 1850 किसानों से करार हुआ। 1792 ने मुआवजा ले लिया। 58 की जमीन विवाद के चलते मुआवजा राशि सरकारी खजाने में जमा की गई है। 92 ने सहमति नहीं दी। धारा 144 का उल्लंघन करने पर पुलिस ने कार्यवाही की है।
ALLAHABAD : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बारा-करछना पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ धरना दे रहे किसानों पर पुलिसिया उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग में दाखिल याचिका की अगली सुनवाई की तारीख सत्रह मई नियत की है। याचिका में नौ सितंबर दो हज़ार पंद्रह की घटना में गिरफ्तार बयालीस लोगों को पर्सनल बांड पर छोड़े जाने का समादेश जारी करने की भी मांग की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ ने कचरी गांव के किसान संतोष कुमार पटेल की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता एससी तिवारी तथा प्रदेश सरकार की तरफ से मीनाक्षी सिंह ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा भारी पुलिस बल के साथ नौ सितंबर दो हज़ार पंद्रह को मौके पर पहुंचे और लाठीचार्ज किया। कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही किसानों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया है। जिसकी विवेचना जारी है। याचिका में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा सहित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने की मांग की गई है। इस घटना में आठ गांवों में दहशत फैल गई थी। घरों में आग लग गई। कई घायल हुए थे। राज्य सरकार का कहना है कि शांति कायम रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने नियमानुसार कार्यवाही की है। ग्यारह लोगों का पुनर्वास किया गया है। जिन किसानों ने मुआवजा लिया था वे भूमि वापस लेने को तैयार नहीं थे। एक हज़ार आठ सौ पचास किसानों से करार हुआ। एक हज़ार सात सौ बानवे ने मुआवजा ले लिया। अट्ठावन की जमीन विवाद के चलते मुआवजा राशि सरकारी खजाने में जमा की गई है। बानवे ने सहमति नहीं दी। धारा एक सौ चौंतालीस का उल्लंघन करने पर पुलिस ने कार्यवाही की है।
शिमला - हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यायल के इक्डोल विभाग में प्रोस्पेक्टस घोटाले को लेकर छात्र संगठनों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। एबीवीपी ने इस मामले को लेकर विवि से उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। बता दें कि गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विवि इकाई ने अध्यनन अधिष्ठाता को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर इकाई अध्यक्ष योग राज डोगरा ने कहा कि विवि प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों में प्रोस्पेक्टस में 10 से 15 सीटें विज्ञापित की जाती हैं, लेकिन विभागों में 3 से 5 सीटें ही भरी गईं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विवि द्वारा छात्रों के साथ जो धोखा किया गया है उसे सहन नहीं किया जाएगा। एबीवीपी का आरोप है कि जिन विभागों में सीटें खाली पड़ी हैं उन्हें भरने में भी विवि प्रशासन कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। एबीवीपी का कहना है कि विवि प्रशासन की यह देरी छात्रों के साथ सीधा - सीधा धोखा है। इस मौके पर इकाई अध्यक्ष योगराज डोगरा ने कहा कि सभी विभागों में प्रस्तावित 15-15 सीटों को भरा जाए और प्रस्तावित सीटों को बढ़ा कर 40 किया जाए व जिन विभागों में छात्र मिनिमम क्राइटेरिया को पूरा नहीं करते व संबंधित विभागों में सीटे खाली हैं, उन्हें 5 प्रतिशत रिलेक्सेशन दिया जाए ताकि विभागों में एमफिल की सीटें भरी जा सकें। इस मौके पर अध्यनन अधिष्ठाता को 5 दिन का समय देते हुए इकाई अध्यक्ष योगराज डोगरा ने कहा कि अगर 5 दिन के अंदर प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की तो विद्यार्थी परिषद विवि प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी। बता दें कि विवि प्रशासन के खिलाफ इससे पहले भी एसएफआई ने भी प्रोस्पेक्टस घोटाले को लेकर उग्र आंदोलन किया था। वहीं, इस मामले में निष्पक्ष जांच न होने पर उग्र आंदोलन करने की भी चेतावनी जारी की थी। इक्डोल विभाग में प्रोस्पेक्टस मामला बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले पर अगर विवि प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो छात्र नेता इस मामले पर आने वाले समय में तूल पकड़ेंगे और एक बार फिर विवि में आंदोलनों का दौर शुरू हो जाएगा। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
शिमला - हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यायल के इक्डोल विभाग में प्रोस्पेक्टस घोटाले को लेकर छात्र संगठनों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। एबीवीपी ने इस मामले को लेकर विवि से उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। बता दें कि गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विवि इकाई ने अध्यनन अधिष्ठाता को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर इकाई अध्यक्ष योग राज डोगरा ने कहा कि विवि प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों में प्रोस्पेक्टस में दस से पंद्रह सीटें विज्ञापित की जाती हैं, लेकिन विभागों में तीन से पाँच सीटें ही भरी गईं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विवि द्वारा छात्रों के साथ जो धोखा किया गया है उसे सहन नहीं किया जाएगा। एबीवीपी का आरोप है कि जिन विभागों में सीटें खाली पड़ी हैं उन्हें भरने में भी विवि प्रशासन कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। एबीवीपी का कहना है कि विवि प्रशासन की यह देरी छात्रों के साथ सीधा - सीधा धोखा है। इस मौके पर इकाई अध्यक्ष योगराज डोगरा ने कहा कि सभी विभागों में प्रस्तावित पंद्रह-पंद्रह सीटों को भरा जाए और प्रस्तावित सीटों को बढ़ा कर चालीस किया जाए व जिन विभागों में छात्र मिनिमम क्राइटेरिया को पूरा नहीं करते व संबंधित विभागों में सीटे खाली हैं, उन्हें पाँच प्रतिशत रिलेक्सेशन दिया जाए ताकि विभागों में एमफिल की सीटें भरी जा सकें। इस मौके पर अध्यनन अधिष्ठाता को पाँच दिन का समय देते हुए इकाई अध्यक्ष योगराज डोगरा ने कहा कि अगर पाँच दिन के अंदर प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की तो विद्यार्थी परिषद विवि प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी। बता दें कि विवि प्रशासन के खिलाफ इससे पहले भी एसएफआई ने भी प्रोस्पेक्टस घोटाले को लेकर उग्र आंदोलन किया था। वहीं, इस मामले में निष्पक्ष जांच न होने पर उग्र आंदोलन करने की भी चेतावनी जारी की थी। इक्डोल विभाग में प्रोस्पेक्टस मामला बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले पर अगर विवि प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो छात्र नेता इस मामले पर आने वाले समय में तूल पकड़ेंगे और एक बार फिर विवि में आंदोलनों का दौर शुरू हो जाएगा। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
You Searched For "Wastu" नल की टोटी से अगर टपक रहा है पानी तो इसके टोटके के बारे में जान आप रह जाएंगे दंग, जानिए! जीवन में तरक्की किसे नही चाहिए। लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे घर में कई ऐसी छोटी-छोटी कमियां रह जाती है जिन्हे हम अनदेखा करते हैं। दुकान पर कम आ रहे हैं ग्राहक तो करें ये टोटका, फिर आने लगेगा पैसा ही पैसा, पलभर में लगने लगेगी भीड़, जानिए कैसे? दुकान में जब तक ग्राहकों (customer) की लाइन न लग जाए तब तक दूकान अच्छी नहीं लगती है. लहसुन के टोटके के बारे में जान दंग रह जाएंगे आप, जानिए!
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फिलीपाइन की आर्थिक निर्भरता को सदा के लिए स्थापित करता था । लागू अधिनियम के अनुसार संयुक्त राज्य को इस सीमा तक रियायत दी गयी थी कि संविधान में अमेरिकी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए भी इसमें सुधार और परिवर्तन करने की आवश्यकता पड़ी । " व्यापारिक अधिनियम में इस प्रकार की व्यवस्था करने के लिए फिलीपाइन के संविधान में ऐसा सुधार करना पड़ा, जिससे भूमि पर अधिकार प्राप्त करने और औद्योगिक कार्य करने में अमेरिकियों को फिलीपाइनों के समान समझा जा सके। इसने अमेरिकियों को गणराज्य में ऐसी आर्थिक स्थिति प्रदान की, जैसी उन्होंने उस समय भी नहीं की थी, जब फिलीपाइन संयुक्त राज्य पर पूर्णतया निर्भर था । पारस्परिक सम्बन्धों की दृष्टि से की गयी इन आर्थिक परिभाषाओं के अतिरिक्त, चूँकि संयुक्त राज्य ने भविष्य में विदेशी अतिक्रमण से द्वीप समूहों की सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व लिया था, इसलिए इसने द्वीप-समूहों के भीतर सैनिक अड्डे बनाने की माँग की । काफी वार्ता के बाद सैनिक अड्डों की संख्या और स्थिति पर समझौता हुआ, जो संयुक्त राज्य और अमेरिकी सरकार दोनों के लिए संतोषप्रद समझा गया, गोकि इन समझौतों की कुछ शर्तों की आलोचना की गयी थी। 'अड्डों के समझौते का अनुमोदन फिलीपाइन-कांग्रेस ने २६ मार्च, १९४७ को किया । यह ध्यान रखना चाहिए कि इन सुरक्षासम्बन्धी प्रबन्धों के विषय में संयुक्त राज्य कांग्रेस ने २६ जून, १९४६ के अधिनियम से राष्ट्रपति को यह अधिकार प्रदान किया कि वे - "फिलीपाइन्स गणराज्य को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा स्थापित करने और उसे बनाये रखने के लिए सैनिक सहायता देने और उस सरकार द्वारा भावी आवश्यकताओं की दृष्टि से सुरक्षात्मक सैनिक कार्रवाइयों में भाग लेने का उसे अवसर प्रदान करने की व्यवस्था करें ।" परिणामस्वरूप सैनिक सहायता संधि पर २१ मार्च, १९४७ को संयुक्त राज्य के राजदूत और राष्ट्रपति रोक्सास ने हस्ता"क्षर किया। १९४८ में फिलीपाइन की सेना के लिए ३८ करोड़ स्टलिंग की अलग से व्यवस्था की गयी, जिसका आधा से अधिक हिस्सा सैनिक पुलिस (मिलिटरी पुलिस ) पर व्यय करना था । (५) जापानियों के साथ गठबन्धन की समस्या जब वाशिंगटन में पुननिर्माण और स्वाधीनता की शर्तें निर्धारित की जा रही थीं, उस समय मनीला में राजनीतिक गतिविधि में तीव्रता आ गयी थी ।की पुनःस्थापना के लिए सरकार को पुनः विधान बनाना पड़ा। इसमें दोनों सभाओं के अधिकांश सदस्यों का जापानियों से गठबन्धन होने के कारण कठिनाई पड़ी । २९ जून, १९४४ को फिलीपाइन सम्बन्धी दो प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करते समय राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने कहा
फिलीपाइन की आर्थिक निर्भरता को सदा के लिए स्थापित करता था । लागू अधिनियम के अनुसार संयुक्त राज्य को इस सीमा तक रियायत दी गयी थी कि संविधान में अमेरिकी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए भी इसमें सुधार और परिवर्तन करने की आवश्यकता पड़ी । " व्यापारिक अधिनियम में इस प्रकार की व्यवस्था करने के लिए फिलीपाइन के संविधान में ऐसा सुधार करना पड़ा, जिससे भूमि पर अधिकार प्राप्त करने और औद्योगिक कार्य करने में अमेरिकियों को फिलीपाइनों के समान समझा जा सके। इसने अमेरिकियों को गणराज्य में ऐसी आर्थिक स्थिति प्रदान की, जैसी उन्होंने उस समय भी नहीं की थी, जब फिलीपाइन संयुक्त राज्य पर पूर्णतया निर्भर था । पारस्परिक सम्बन्धों की दृष्टि से की गयी इन आर्थिक परिभाषाओं के अतिरिक्त, चूँकि संयुक्त राज्य ने भविष्य में विदेशी अतिक्रमण से द्वीप समूहों की सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व लिया था, इसलिए इसने द्वीप-समूहों के भीतर सैनिक अड्डे बनाने की माँग की । काफी वार्ता के बाद सैनिक अड्डों की संख्या और स्थिति पर समझौता हुआ, जो संयुक्त राज्य और अमेरिकी सरकार दोनों के लिए संतोषप्रद समझा गया, गोकि इन समझौतों की कुछ शर्तों की आलोचना की गयी थी। 'अड्डों के समझौते का अनुमोदन फिलीपाइन-कांग्रेस ने छब्बीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को किया । यह ध्यान रखना चाहिए कि इन सुरक्षासम्बन्धी प्रबन्धों के विषय में संयुक्त राज्य कांग्रेस ने छब्बीस जून, एक हज़ार नौ सौ छियालीस के अधिनियम से राष्ट्रपति को यह अधिकार प्रदान किया कि वे - "फिलीपाइन्स गणराज्य को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा स्थापित करने और उसे बनाये रखने के लिए सैनिक सहायता देने और उस सरकार द्वारा भावी आवश्यकताओं की दृष्टि से सुरक्षात्मक सैनिक कार्रवाइयों में भाग लेने का उसे अवसर प्रदान करने की व्यवस्था करें ।" परिणामस्वरूप सैनिक सहायता संधि पर इक्कीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को संयुक्त राज्य के राजदूत और राष्ट्रपति रोक्सास ने हस्ता"क्षर किया। एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में फिलीपाइन की सेना के लिए अड़तीस करोड़ स्टलिंग की अलग से व्यवस्था की गयी, जिसका आधा से अधिक हिस्सा सैनिक पुलिस पर व्यय करना था । जापानियों के साथ गठबन्धन की समस्या जब वाशिंगटन में पुननिर्माण और स्वाधीनता की शर्तें निर्धारित की जा रही थीं, उस समय मनीला में राजनीतिक गतिविधि में तीव्रता आ गयी थी ।की पुनःस्थापना के लिए सरकार को पुनः विधान बनाना पड़ा। इसमें दोनों सभाओं के अधिकांश सदस्यों का जापानियों से गठबन्धन होने के कारण कठिनाई पड़ी । उनतीस जून, एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को फिलीपाइन सम्बन्धी दो प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करते समय राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने कहा
धर्मशाला। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने आज बुधवार को शाहपुर में 1 करोड़ 75 लाख की लागत से बनने वाले पशु चिकित्सालय का शिलान्यास कर भूमिपूजन किया। इस दौरान शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक केवल सिंह पठानिया भी उपस्थित रहे। कृषि मंत्री ने गोरडा में जनसभा को संबोधित करते हुए कि शाहपुर में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने पशु पॉलिक्लीनिक का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि यह संस्थान प्रदेश के पहले पॉलिक्लीनिक में से एक है लेकिन बाद में किसी ने इसके स्तरोन्नयन के लिए किसी ने कोई कदम नहीं उठाया। प्रो. चन्द्र कुमार ने कहा कि इस तीन मंजिला पशु चिकित्सालय में सर्जरी रूम, अल्ट्रासोनोग्राफी रूम, एनेस्थीसिया रूम, माइक्रोबायोलॉजी तथा पैथोलॉजी लैब सहित रोग निदान और निगरानी इकाई भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा यहां छोटे और बड़े सभी प्रकार के पशुओं के उपचार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार के अलावा यहां गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए चिकित्सकों द्वारा शोध भी किया जाएगा, जिसके लिए यहां एक बड़ा सभागार और पुस्तकालय का निर्माण भी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक पशु चिकित्सालय लगभग आधे हिमाचल को कवर करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त पड़ोसी राज्य के लोग भी अपने पशुओं के रोग निदान और उपचार के लिए यहां की सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पशु चिकित्सालय के निर्माण के लिए शुरुआत में 1 करोड़ 75 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो सरकार इसके निर्माण के लिए और अधिक राशि उपलब्ध करवाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि खेतीबाड़ी और पशुपालन हमारी पहचान और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि यह गौरव का विषय हैं और इससे हटना अच्छी बता नहीं है। उन्होंने कहा कि गौसेवा, गौपालन और खेतों में काम करने से हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि आज होने वाले अधिकतम रोग खराब जीवनशैली के कारण हैं। खेतीबाड़ी और पशुपालन से हमारी जीवनशैली सधी हुई रहती है और स्वास्थ्य भी बढ़िया रहता है।
धर्मशाला। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने आज बुधवार को शाहपुर में एक करोड़ पचहत्तर लाख की लागत से बनने वाले पशु चिकित्सालय का शिलान्यास कर भूमिपूजन किया। इस दौरान शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक केवल सिंह पठानिया भी उपस्थित रहे। कृषि मंत्री ने गोरडा में जनसभा को संबोधित करते हुए कि शाहपुर में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने पशु पॉलिक्लीनिक का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि यह संस्थान प्रदेश के पहले पॉलिक्लीनिक में से एक है लेकिन बाद में किसी ने इसके स्तरोन्नयन के लिए किसी ने कोई कदम नहीं उठाया। प्रो. चन्द्र कुमार ने कहा कि इस तीन मंजिला पशु चिकित्सालय में सर्जरी रूम, अल्ट्रासोनोग्राफी रूम, एनेस्थीसिया रूम, माइक्रोबायोलॉजी तथा पैथोलॉजी लैब सहित रोग निदान और निगरानी इकाई भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा यहां छोटे और बड़े सभी प्रकार के पशुओं के उपचार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार के अलावा यहां गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए चिकित्सकों द्वारा शोध भी किया जाएगा, जिसके लिए यहां एक बड़ा सभागार और पुस्तकालय का निर्माण भी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक पशु चिकित्सालय लगभग आधे हिमाचल को कवर करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त पड़ोसी राज्य के लोग भी अपने पशुओं के रोग निदान और उपचार के लिए यहां की सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पशु चिकित्सालय के निर्माण के लिए शुरुआत में एक करोड़ पचहत्तर लाख की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो सरकार इसके निर्माण के लिए और अधिक राशि उपलब्ध करवाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि खेतीबाड़ी और पशुपालन हमारी पहचान और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि यह गौरव का विषय हैं और इससे हटना अच्छी बता नहीं है। उन्होंने कहा कि गौसेवा, गौपालन और खेतों में काम करने से हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि आज होने वाले अधिकतम रोग खराब जीवनशैली के कारण हैं। खेतीबाड़ी और पशुपालन से हमारी जीवनशैली सधी हुई रहती है और स्वास्थ्य भी बढ़िया रहता है।
मंत्रालय अपनी मानव संसाधन योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाने के लिए ढांचागत सुविधओं का निर्माण के लिए वित्तीय सहायता, उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम के लिए सहायता सहित खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। इस क्षेत्र में अनुंसधान कार्य को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास योजना के तहत मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करायी जाती है। यह जानकारी केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसस्करण उद्योग राज्य मंत्री डॉ. चरण दास महंत ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
मंत्रालय अपनी मानव संसाधन योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाने के लिए ढांचागत सुविधओं का निर्माण के लिए वित्तीय सहायता, उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम के लिए सहायता सहित खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। इस क्षेत्र में अनुंसधान कार्य को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास योजना के तहत मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करायी जाती है। यह जानकारी केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसस्करण उद्योग राज्य मंत्री डॉ. चरण दास महंत ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
भोपाल, मध्यप्रदेश। अदालत में उपस्थित होने के लिए जारी किए गए नोटिस की तामीली के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने पर लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया की अदालत ने एएसपी दीपक ठाकुर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं अदालत ने मामले के तीन सहआरोपी प्रधान आरक्षक इशरत परवीन, आरक्षक सौरव भट्ट और कांस्टेबल आरक्षक इंद्रपाल सिंह की जमानत अर्जी निरस्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया। एएसपी दीपक ठाकुर की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी। मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया की अदालत में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पेश किया है चालान। लोकायुक्त पुलिस अधिकारी नीलम पटवा ने बताया कि 2012 में फ रियादी गुलशन जौहर ने लोकायुक्त पुलिस में तत्कालीन साइबर सेल के डीएसपी दीपक ठाकुर, प्रधान आरक्षक ईशरत परवीन, आरक्षक सौरव भट्ट और आरक्षक इंद्रपाल सिंह के खिलाफ पद का दुरुपयोग करते हुए एक मामले में चालान पेश करने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की डिमांड करने की शिकायत थी। इस मामले में जांच के बाद चारों के खिलाफ 2015 में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले के अनुसार पुणे की रहने वाली गुलशन जौहर की बेटी अमेरिका में एक कंपनी जॉब करती थी। उनकी बेटी ने कंपनी का एक कैमरा जबलपुर में रहने वाले विक्रम राजपूत को ढाई लाख में सेल किया था। कैमरे में कुछ दिक्कत आने पर विक्रम ने कंपनी में कंप्लेंट की। बताया जा रहा है की कंप्लेंट प्रोसेस में थी इसी दौरान विक्रम ने भोपाल साइबर सेल में मां बेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने मां बेटी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों की ओर से जेल में मां बेटी को बाहर निकालने और जल्द मामले में चालान पेश करने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की रिश्वत की मांग की गई। हाल ही में रिटायर्ड हुई लोकायुक्त की डीएसपी साधना सिंह ने इस मामले की जांच की थी। लेकिन रिटायर होने की वजह से नीलम पटवा ने इस मामले का चालान अदालत में पेश किया है। लोकायुक्त पुलिस ने परिस्थितिजन साक्ष्य के आधार पर पाया कि दीपक ठाकुर और चारों पुलिसकर्मियों ने पद का दुरुपयोग कर साढ़े तीन लाख रुपयों की डिमांड की। साढ़े तीन लाख रुपए का चेक को कैश कराने के लिए मां-बेटी के रिश्तेदार भोपाल की जिस बैंक में गए थे उस समय 2 कॉन्स्टेबल की लोकेशन बैंक के पास मिली। यह कॉन्स्टेबल दीपक ठाकुर के इशारे पर उस राशि को लेने के लिए गए थे। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
भोपाल, मध्यप्रदेश। अदालत में उपस्थित होने के लिए जारी किए गए नोटिस की तामीली के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने पर लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया की अदालत ने एएसपी दीपक ठाकुर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं अदालत ने मामले के तीन सहआरोपी प्रधान आरक्षक इशरत परवीन, आरक्षक सौरव भट्ट और कांस्टेबल आरक्षक इंद्रपाल सिंह की जमानत अर्जी निरस्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया। एएसपी दीपक ठाकुर की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी। मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया की अदालत में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पेश किया है चालान। लोकायुक्त पुलिस अधिकारी नीलम पटवा ने बताया कि दो हज़ार बारह में फ रियादी गुलशन जौहर ने लोकायुक्त पुलिस में तत्कालीन साइबर सेल के डीएसपी दीपक ठाकुर, प्रधान आरक्षक ईशरत परवीन, आरक्षक सौरव भट्ट और आरक्षक इंद्रपाल सिंह के खिलाफ पद का दुरुपयोग करते हुए एक मामले में चालान पेश करने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की डिमांड करने की शिकायत थी। इस मामले में जांच के बाद चारों के खिलाफ दो हज़ार पंद्रह में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले के अनुसार पुणे की रहने वाली गुलशन जौहर की बेटी अमेरिका में एक कंपनी जॉब करती थी। उनकी बेटी ने कंपनी का एक कैमरा जबलपुर में रहने वाले विक्रम राजपूत को ढाई लाख में सेल किया था। कैमरे में कुछ दिक्कत आने पर विक्रम ने कंपनी में कंप्लेंट की। बताया जा रहा है की कंप्लेंट प्रोसेस में थी इसी दौरान विक्रम ने भोपाल साइबर सेल में मां बेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने मां बेटी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों की ओर से जेल में मां बेटी को बाहर निकालने और जल्द मामले में चालान पेश करने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की रिश्वत की मांग की गई। हाल ही में रिटायर्ड हुई लोकायुक्त की डीएसपी साधना सिंह ने इस मामले की जांच की थी। लेकिन रिटायर होने की वजह से नीलम पटवा ने इस मामले का चालान अदालत में पेश किया है। लोकायुक्त पुलिस ने परिस्थितिजन साक्ष्य के आधार पर पाया कि दीपक ठाकुर और चारों पुलिसकर्मियों ने पद का दुरुपयोग कर साढ़े तीन लाख रुपयों की डिमांड की। साढ़े तीन लाख रुपए का चेक को कैश कराने के लिए मां-बेटी के रिश्तेदार भोपाल की जिस बैंक में गए थे उस समय दो कॉन्स्टेबल की लोकेशन बैंक के पास मिली। यह कॉन्स्टेबल दीपक ठाकुर के इशारे पर उस राशि को लेने के लिए गए थे। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।