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गौरीगंज (अमेठी)। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे अमेठी जिले में कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले में खाता नहीं खोल पाने वाली पार्टी का जनाधार 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार के बाद तेजी से खिसक रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव से इस चुनाव में पार्टी को मिले मतों की तुलना करें तो पता चलता है कि पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।
देश में अस्तित्व के संकट से जूझ रही पार्टी की दशा जिले में भी कमोवेश वही है। कभी जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर विजय पताका फहराने वाली पार्टी दो चुनावों से खाता तक नहीं खोल सकी है। आंकड़े बताते हैं कि पार्टी जिले में लगातार अपना जनाधार खोती जा रही है।
2017 के विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा में पार्टी को 10. 36 प्रतिशत, गौरीगंज में 25. 61 प्रतिशत, तिलोई में 18. 30 प्रतिशत तथा जगदीशपुर में 35. 03 प्रतिशत मत मिले थे। इस चुनाव में गौरीगंज व जगदीशपुर में पार्टी रनर तो तिलोई व अमेठी में तीसरे स्थान पर रही थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से पराजित होने के बाद राहुल गांधी ने अमेठी से दूरी बनाई तो लोगों का मोह भी पार्टी से कम होता गया।
विधानसभा चुनाव 2022 के पहले जगदीशपुर में राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी के साथ रोड शो कर अमेठी में वापसी का संकेत देते हुए 25 फरवरी को अमेठी के विशेषरगंज व जगदीशपुर में जनसभा कर पार्टी का अस्तित्व बचाने की कोशिश भी की। लेकिन पार्टी का वोट बैंक बचाने में नाकाम साबित हुए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट बैंक में जमकर सेंधमारी हुई। गौरीगंज में रनर होने का तमगा भी हाथ से दूर हो गया। सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को मिले मत पिछले चुनाव की अपेक्षा कम रहे।
विधानसभा निर्वाचन के मतों की गणना के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार विधानसभा 2017 में चारों विधानसभा में 7,77,529 मतों में 1,74,240 मत कांग्रेस का प्राप्त हुए थे। जो संपूर्ण मतदान का 22. 04 प्रतिशत था। जबकि विधानसभा निर्वाचन 2022 में पड़े 8,00,928 मतों में कांग्रेस को महज 1,31,513 मत ही मिले। यह पड़े मत का 16. 42 प्रतिशत है।
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गौरीगंज । कभी कांग्रेस का गढ़ रहे अमेठी जिले में कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में जिले में खाता नहीं खोल पाने वाली पार्टी का जनाधार दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार के बाद तेजी से खिसक रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव से इस चुनाव में पार्टी को मिले मतों की तुलना करें तो पता चलता है कि पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। देश में अस्तित्व के संकट से जूझ रही पार्टी की दशा जिले में भी कमोवेश वही है। कभी जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर विजय पताका फहराने वाली पार्टी दो चुनावों से खाता तक नहीं खोल सकी है। आंकड़े बताते हैं कि पार्टी जिले में लगातार अपना जनाधार खोती जा रही है। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा में पार्टी को दस. छत्तीस प्रतिशत, गौरीगंज में पच्चीस. इकसठ प्रतिशत, तिलोई में अट्ठारह. तीस प्रतिशत तथा जगदीशपुर में पैंतीस. तीन प्रतिशत मत मिले थे। इस चुनाव में गौरीगंज व जगदीशपुर में पार्टी रनर तो तिलोई व अमेठी में तीसरे स्थान पर रही थी। दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से पराजित होने के बाद राहुल गांधी ने अमेठी से दूरी बनाई तो लोगों का मोह भी पार्टी से कम होता गया। विधानसभा चुनाव दो हज़ार बाईस के पहले जगदीशपुर में राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी के साथ रोड शो कर अमेठी में वापसी का संकेत देते हुए पच्चीस फरवरी को अमेठी के विशेषरगंज व जगदीशपुर में जनसभा कर पार्टी का अस्तित्व बचाने की कोशिश भी की। लेकिन पार्टी का वोट बैंक बचाने में नाकाम साबित हुए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट बैंक में जमकर सेंधमारी हुई। गौरीगंज में रनर होने का तमगा भी हाथ से दूर हो गया। सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को मिले मत पिछले चुनाव की अपेक्षा कम रहे। विधानसभा निर्वाचन के मतों की गणना के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार विधानसभा दो हज़ार सत्रह में चारों विधानसभा में सात,सतहत्तर,पाँच सौ उनतीस मतों में एक,चौहत्तर,दो सौ चालीस मत कांग्रेस का प्राप्त हुए थे। जो संपूर्ण मतदान का बाईस. चार प्रतिशत था। जबकि विधानसभा निर्वाचन दो हज़ार बाईस में पड़े आठ,शून्य,नौ सौ अट्ठाईस मतों में कांग्रेस को महज एक,इकतीस,पाँच सौ तेरह मत ही मिले। यह पड़े मत का सोलह. बयालीस प्रतिशत है।
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गदरपुर क्राइम न्यूज़ः देशवासी श्रद्धा हत्याकांड को अभी भूल भी नहीं पाए हैं कि एक मामूली विवाद पर प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के दोनों हाथ काट दिए। गदरपुर निवास यह युवक लिव इन रिलेशनशिप में युवती के साथ रह रहा था। इलाज के दौरान युवती की मृत्यु हो गई है। यह खबर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। हालांकि, इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान ने भी की है। गदरपुर का ग्राम महतोष निवासी एक युवक केरल की कोच्चि में ब्यूटी पार्लर में करीब छह साल से काम कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक युवती से हुई। बातचीत की शुरुआत हुई तो दोनों में प्यार का हो गया। इसके बाद दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे।
एक दिन किसी बात को लेकर तीन दिसंबर को दोनों में विवाद हो गया। युवक ने युवती के दोनों हाथ पाटल से काट दिए। जिससे आसपास के लोगों ने युवती को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर के बारे में जब युवक के स्वजन को पता लगी तो उनका कहना था कि युवक 23 नवंबर को अपनी बहन की शादी में आया था।
शादी के तीन दिन बाद वह चला गया। ग्राम प्रधान नवी जान ने बताया कि न्यूज चैनल व सोशल मीडिया पर इस तरह की खबर देखी है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के कुछ युवक केरल के कोच्चि में पार्लर का काम करते हैं। उनके द्वारा सूचना दी गई थी कि दोनों में कोई विवाद हुआ था और विवाद के बाद युवक ने युवती के दोनों हाथ काट दिए थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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गदरपुर क्राइम न्यूज़ः देशवासी श्रद्धा हत्याकांड को अभी भूल भी नहीं पाए हैं कि एक मामूली विवाद पर प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के दोनों हाथ काट दिए। गदरपुर निवास यह युवक लिव इन रिलेशनशिप में युवती के साथ रह रहा था। इलाज के दौरान युवती की मृत्यु हो गई है। यह खबर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। हालांकि, इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान ने भी की है। गदरपुर का ग्राम महतोष निवासी एक युवक केरल की कोच्चि में ब्यूटी पार्लर में करीब छह साल से काम कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक युवती से हुई। बातचीत की शुरुआत हुई तो दोनों में प्यार का हो गया। इसके बाद दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। एक दिन किसी बात को लेकर तीन दिसंबर को दोनों में विवाद हो गया। युवक ने युवती के दोनों हाथ पाटल से काट दिए। जिससे आसपास के लोगों ने युवती को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर के बारे में जब युवक के स्वजन को पता लगी तो उनका कहना था कि युवक तेईस नवंबर को अपनी बहन की शादी में आया था। शादी के तीन दिन बाद वह चला गया। ग्राम प्रधान नवी जान ने बताया कि न्यूज चैनल व सोशल मीडिया पर इस तरह की खबर देखी है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के कुछ युवक केरल के कोच्चि में पार्लर का काम करते हैं। उनके द्वारा सूचना दी गई थी कि दोनों में कोई विवाद हुआ था और विवाद के बाद युवक ने युवती के दोनों हाथ काट दिए थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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नई दिल्लीः
अभिनेता अनिल कपूर ने आगामी फिल्म 'फन्ने खां' की शूटिंग शुरू कर दी है और उन्होंने इसे बेहद खास फिल्म करार दिया। अनिल ने रविवार को ट्विटर पर फिल्म के क्लैपबोर्ड की तस्वीर साझा करते हुए बताया कि शूटिंग शुरू हो गई है।
उन्होंने तस्वीर के कैप्शन में लिखा, 'और यहां कुछ नए और बेहद खास की शुरुआत के लिए क्लैप। शुरुआती दिन सर्वश्रेष्ठ दिन। 'फन्ने खां'। शूटिंग शुरू।'
इससे पहले अनिल द्वारा साझा की गई फिल्म की फर्स्ट लुक में अनिल सुनहरे रंग की जैकेट पहने दिखाई दिए थे।
ऑस्कर नामांकित डच फिल्म 'एव्रीबडीज फेमस' की आधिकारिक रीमेक 'फन्ने खां' अतुल मांजरेकर द्वारा निर्देशित होगी और इसमें ऐश्वर्य राय बच्चन और राजकुमार राव जैसे सितारे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे।
ऐश्वर्य और अनिल बड़े पर्दे पर लगभग दो दशक बाद साथ दिखेंगे। इससे पहले वह वर्ष 2000 में 'हमारा दिल आपके पास है' और 1999 की हिट फिल्म 'ताल' में साथ नजर आ चुके हैं।
इससे पहले खबर थी कि आर. माधवन, ऐश्वर्य के साथ दिखेंगे और इसके बाद चर्चा थी कि अभिनेत्री इस बात से परेशान थीं क्योंकि वह राजकुमार के साथ काम करना चाहती थीं।
राजकुमार और ऐश्वर्या पहली बार किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे। बता दें कि इसके पहले ऐश के अपोजिट आर माधवन और विक्की कौशल का नाम भी सामने आ रहा था।
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नई दिल्लीः अभिनेता अनिल कपूर ने आगामी फिल्म 'फन्ने खां' की शूटिंग शुरू कर दी है और उन्होंने इसे बेहद खास फिल्म करार दिया। अनिल ने रविवार को ट्विटर पर फिल्म के क्लैपबोर्ड की तस्वीर साझा करते हुए बताया कि शूटिंग शुरू हो गई है। उन्होंने तस्वीर के कैप्शन में लिखा, 'और यहां कुछ नए और बेहद खास की शुरुआत के लिए क्लैप। शुरुआती दिन सर्वश्रेष्ठ दिन। 'फन्ने खां'। शूटिंग शुरू।' इससे पहले अनिल द्वारा साझा की गई फिल्म की फर्स्ट लुक में अनिल सुनहरे रंग की जैकेट पहने दिखाई दिए थे। ऑस्कर नामांकित डच फिल्म 'एव्रीबडीज फेमस' की आधिकारिक रीमेक 'फन्ने खां' अतुल मांजरेकर द्वारा निर्देशित होगी और इसमें ऐश्वर्य राय बच्चन और राजकुमार राव जैसे सितारे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे। ऐश्वर्य और अनिल बड़े पर्दे पर लगभग दो दशक बाद साथ दिखेंगे। इससे पहले वह वर्ष दो हज़ार में 'हमारा दिल आपके पास है' और एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे की हिट फिल्म 'ताल' में साथ नजर आ चुके हैं। इससे पहले खबर थी कि आर. माधवन, ऐश्वर्य के साथ दिखेंगे और इसके बाद चर्चा थी कि अभिनेत्री इस बात से परेशान थीं क्योंकि वह राजकुमार के साथ काम करना चाहती थीं। राजकुमार और ऐश्वर्या पहली बार किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे। बता दें कि इसके पहले ऐश के अपोजिट आर माधवन और विक्की कौशल का नाम भी सामने आ रहा था।
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क्या आप जानना चाहते हैं कि सर्दी के मौसम में लोग किस तरह से रहते हैं गांव में ? चलिए हम आज आपको दिखाते हैं। शहरों के घरों में लोग रज़ाई, गद्दे, कम्बल में लिपटे चाय की चुस्कियां लेते ही नज़र आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि गांव के घरों में ठण्ड में कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिलता है। रूई के गद्दे, रज़ाई तो नहीं लेकिन लोग यहाँ पुआल के बिस्तर पर लेटना-बैठना पसंद करते हैं। पुआल से बना बिस्तर न ही सिर्फ ज़्यादा गर्माहट देता है बल्कि रज़ाई-गद्दे से ज़्यादा किफायती भी होता है और गांव में आसानी से मिल जाता है।
ये भी देखें - "हमरी अटरिया पर आ जा सावरिया.... " गांव की कुछ अनोखी झलकियां!
ठंडक से बचने के लिए लोग अपने घरों में या अपने जानवर के बचाव के लिए किस तरह से पुआल यानी जो धान का सूखा पौधा होता है वो इस्तेमाल करते हैं। हमें गांव में कच्चे घर यानी मिट्टी के बने छप्पर वाले घर भी दीखते हैं।
गांव में अभी भी कुछ परिवारों में या यूं कहें कि जो थोड़ा गरीब परिवार है उनके पास गद्दा गलैंचा सुथरी है । पहले तो खुला पैरा बिछाकर एक कमरे में या एक डालकर उसी में सारे परिवार रहते थे। लेकिन अब इसमें बदलाव आया है। लोग अपने खाट पर, बोरी में भरकर या साड़ी का खोल बनाकर उसमें पुआल भरकर गद्दा बनाकर सोते हैं। जानवर को खाने और सुलाने के लिए भी पैरा इस्तेमाल किया जाता है । ये पुआल एक नहीं अनेक कामों में इस्तेमाल किया जाता है।
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क्या आप जानना चाहते हैं कि सर्दी के मौसम में लोग किस तरह से रहते हैं गांव में ? चलिए हम आज आपको दिखाते हैं। शहरों के घरों में लोग रज़ाई, गद्दे, कम्बल में लिपटे चाय की चुस्कियां लेते ही नज़र आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि गांव के घरों में ठण्ड में कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिलता है। रूई के गद्दे, रज़ाई तो नहीं लेकिन लोग यहाँ पुआल के बिस्तर पर लेटना-बैठना पसंद करते हैं। पुआल से बना बिस्तर न ही सिर्फ ज़्यादा गर्माहट देता है बल्कि रज़ाई-गद्दे से ज़्यादा किफायती भी होता है और गांव में आसानी से मिल जाता है। ये भी देखें - "हमरी अटरिया पर आ जा सावरिया.... " गांव की कुछ अनोखी झलकियां! ठंडक से बचने के लिए लोग अपने घरों में या अपने जानवर के बचाव के लिए किस तरह से पुआल यानी जो धान का सूखा पौधा होता है वो इस्तेमाल करते हैं। हमें गांव में कच्चे घर यानी मिट्टी के बने छप्पर वाले घर भी दीखते हैं। गांव में अभी भी कुछ परिवारों में या यूं कहें कि जो थोड़ा गरीब परिवार है उनके पास गद्दा गलैंचा सुथरी है । पहले तो खुला पैरा बिछाकर एक कमरे में या एक डालकर उसी में सारे परिवार रहते थे। लेकिन अब इसमें बदलाव आया है। लोग अपने खाट पर, बोरी में भरकर या साड़ी का खोल बनाकर उसमें पुआल भरकर गद्दा बनाकर सोते हैं। जानवर को खाने और सुलाने के लिए भी पैरा इस्तेमाल किया जाता है । ये पुआल एक नहीं अनेक कामों में इस्तेमाल किया जाता है।
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देश भर में कोविड-19 की दूसरी लहर में जहां जगह-जगह से हर रोज ऑक्सीजन व वेंटिलेटर न मिलने की वजह से लोगों की जान जाने की खबरें रही हैं, वहीं जिले में कोविड अस्पताल में 12 वेंटिलेटर बेकार रखे पड़े हैं। क्योंकि उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। इस कारण वेंटिलेटर की जरूरत वाले मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
दोआबा के खागा स्थित लेवल-2 का कोविड अस्पताल बनाया गया हैं। यहां पर ऑक्सीजन बेड तो हैं लेकिन वेंटिलेटर बेड नहीं हैं क्योंकि यहां उपलब्ध 12 वेंटिलेटर अभी संचालित नहीं हो पाए हैं। यह वेंटिलेटर जनपद में एक साल से रखे हैं, इनमें से कुछ जिला अस्पताल से गए थे तो कुछ की खरीदारी की गई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में मौजूदा समय में 17 वेंटीलेटर हैं जिन्हें चलाने के लिए यहां डाक्टर भी हैं और टेक्नीशियन भी। लेवल-2 के प्रभारी डॉ. यूपी कुशवाहा ने स्वीकर किया कि अभी यह वेंटिलेटर संचालित नहीं हो पाए हैं क्योंकि उसके लिए टेक्नीशियन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। आश्चर्य है कि पिछले वर्ष ही मिल गए वेंटिलेटर को अब तक क्यों नहीं संचालित किया जा सका और जरूरी प्रशिक्षित टेक्नीशियन की भर्ती क्यों नहीं की जा सकी। कोविड-19 मरीजों के इलाज से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश के कई जिलों में वेंटिलेटर मिले। इन वेंटिलेटर को चलाने के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन की भर्ती यदि समय से कर ली गई होती तो आज एल- टू अस्पताल भी गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज करने में सक्षम होते।
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देश भर में कोविड-उन्नीस की दूसरी लहर में जहां जगह-जगह से हर रोज ऑक्सीजन व वेंटिलेटर न मिलने की वजह से लोगों की जान जाने की खबरें रही हैं, वहीं जिले में कोविड अस्पताल में बारह वेंटिलेटर बेकार रखे पड़े हैं। क्योंकि उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। इस कारण वेंटिलेटर की जरूरत वाले मरीजों को रेफर किया जा रहा है। दोआबा के खागा स्थित लेवल-दो का कोविड अस्पताल बनाया गया हैं। यहां पर ऑक्सीजन बेड तो हैं लेकिन वेंटिलेटर बेड नहीं हैं क्योंकि यहां उपलब्ध बारह वेंटिलेटर अभी संचालित नहीं हो पाए हैं। यह वेंटिलेटर जनपद में एक साल से रखे हैं, इनमें से कुछ जिला अस्पताल से गए थे तो कुछ की खरीदारी की गई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में मौजूदा समय में सत्रह वेंटीलेटर हैं जिन्हें चलाने के लिए यहां डाक्टर भी हैं और टेक्नीशियन भी। लेवल-दो के प्रभारी डॉ. यूपी कुशवाहा ने स्वीकर किया कि अभी यह वेंटिलेटर संचालित नहीं हो पाए हैं क्योंकि उसके लिए टेक्नीशियन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। आश्चर्य है कि पिछले वर्ष ही मिल गए वेंटिलेटर को अब तक क्यों नहीं संचालित किया जा सका और जरूरी प्रशिक्षित टेक्नीशियन की भर्ती क्यों नहीं की जा सकी। कोविड-उन्नीस मरीजों के इलाज से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश के कई जिलों में वेंटिलेटर मिले। इन वेंटिलेटर को चलाने के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन की भर्ती यदि समय से कर ली गई होती तो आज एल- टू अस्पताल भी गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज करने में सक्षम होते।
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दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के न्यू कालोनी सब-डिवीजन कार्यालय में तैनात फोरमैन आनंद कुमार वर्मा सेवानिवृत्त हो गए। 25 वर्ष की सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
जासं, गुरुग्रामः दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के न्यू कालोनी सब-डिवीजन कार्यालय में तैनात फोरमैन आनंद कुमार वर्मा सेवानिवृत्त हो गए। 25 वर्ष की सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। न्यू कालोनी उपमंडल कार्यालय में उप मंडल अधिकारी देवेंद्र अत्री, सर्कल अधीक्षक ठाकुरदास डांग, संजय चुघ, विजय मेहता, यूनियन के सर्कल सचिव सुशील शर्मा, यूनिट प्रधान अमरजीत जाखड़, राजेश ठाकरान, अन्य पदाधिकारी और कर्मचारियों ने सेवनिवृत्ति पर शुभकामनाएं दी। उपमंडल अभियंता देवेंद्र अत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
संवाद सहयोगी, पटौदीः पाथफाइंडर ग्लोबल स्कूल पटौदी के कक्षा पांच के छात्र रुद्र ठाकरान का राष्ट्रीय सैनिक स्कूल में दाखिले के लिए चयन हो गया है। इससे विद्यालय में खुशी का माहौल है। मंगलवार को एक समारोह में विद्यालय की प्रिसिपल जागृति शर्मा ने रुद्र ठाकरान को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि 25 मई को इस परीक्षा के लिए विद्यार्थियों का साक्षात्कार हुआ था। अब इसका परिणाम आ गया है। सम्मान समारोह में रुद्र के पिता सुरेश कुमार तथा माता रीना देवी, सह प्राचार्य पवन बाली, उप प्राचार्या नीना यादव, मुख्य अध्यापिका अर्चना शुक्ला उपस्थित रहे।
जागरण संवाददाता, गुरुग्रामः सोहना रोड स्थित केआइआइटी वर्ल्ड स्कूल में विश्व जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम हुआ। विद्यार्थियों ने एक नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। सभी ने उत्साहपूर्वक सुंदर पोस्टर बनाए और नारे लिखे। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सबको बताया कि आने वाले समय में भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा। इससे देश के लिए कई समस्याएं पैदा होंगी। बढ़ती जनसंख्या के परिणामों का प्रदर्शन किया जिसमें भोजन और पानी की कमी, युद्ध और सामाजिक संघर्ष और प्राकृतिक संसाधनों की कमी शामिल थी। स्कूल की प्रिसिपल नीलिमा कामराह ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का मुख्य कारण उन मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करना है जो बढ़ती आबादी के साथ-साथ बढ़ सकते हैं।
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दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के न्यू कालोनी सब-डिवीजन कार्यालय में तैनात फोरमैन आनंद कुमार वर्मा सेवानिवृत्त हो गए। पच्चीस वर्ष की सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। जासं, गुरुग्रामः दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के न्यू कालोनी सब-डिवीजन कार्यालय में तैनात फोरमैन आनंद कुमार वर्मा सेवानिवृत्त हो गए। पच्चीस वर्ष की सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। न्यू कालोनी उपमंडल कार्यालय में उप मंडल अधिकारी देवेंद्र अत्री, सर्कल अधीक्षक ठाकुरदास डांग, संजय चुघ, विजय मेहता, यूनियन के सर्कल सचिव सुशील शर्मा, यूनिट प्रधान अमरजीत जाखड़, राजेश ठाकरान, अन्य पदाधिकारी और कर्मचारियों ने सेवनिवृत्ति पर शुभकामनाएं दी। उपमंडल अभियंता देवेंद्र अत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। संवाद सहयोगी, पटौदीः पाथफाइंडर ग्लोबल स्कूल पटौदी के कक्षा पांच के छात्र रुद्र ठाकरान का राष्ट्रीय सैनिक स्कूल में दाखिले के लिए चयन हो गया है। इससे विद्यालय में खुशी का माहौल है। मंगलवार को एक समारोह में विद्यालय की प्रिसिपल जागृति शर्मा ने रुद्र ठाकरान को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि पच्चीस मई को इस परीक्षा के लिए विद्यार्थियों का साक्षात्कार हुआ था। अब इसका परिणाम आ गया है। सम्मान समारोह में रुद्र के पिता सुरेश कुमार तथा माता रीना देवी, सह प्राचार्य पवन बाली, उप प्राचार्या नीना यादव, मुख्य अध्यापिका अर्चना शुक्ला उपस्थित रहे। जागरण संवाददाता, गुरुग्रामः सोहना रोड स्थित केआइआइटी वर्ल्ड स्कूल में विश्व जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम हुआ। विद्यार्थियों ने एक नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। सभी ने उत्साहपूर्वक सुंदर पोस्टर बनाए और नारे लिखे। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सबको बताया कि आने वाले समय में भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा। इससे देश के लिए कई समस्याएं पैदा होंगी। बढ़ती जनसंख्या के परिणामों का प्रदर्शन किया जिसमें भोजन और पानी की कमी, युद्ध और सामाजिक संघर्ष और प्राकृतिक संसाधनों की कमी शामिल थी। स्कूल की प्रिसिपल नीलिमा कामराह ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का मुख्य कारण उन मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करना है जो बढ़ती आबादी के साथ-साथ बढ़ सकते हैं।
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अगर आपसे शुक्रवार की मनोरंजन जगत से जुड़ी बड़ी खबरें मिस हो गई हैं तो Entertainment Top 5 में आप इनके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं.
मनोरंजन जगत में रोजना ऐसी खबरें सामने आती हैं, जो कि कभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं, तो कभी उन्हें मायूस कर जाती हैं. 16 जुलाई यानी शुक्रवार को भी बॉलीवुड से लेकर टीवी तक तमाम खबरें सुर्खियों में रहीं. एक तरफ जहां सुरेखा सीकरी इस दुनिया को अलविदा कहकर चली गई हैं, वहीं भूषण कुमार पर एक महिला ने रेप का आरोप लगाया है. अगर आपसे शुक्रवार की मनोरंजन जगत से जुड़ी बड़ी खबरें मिस हो गई हैं तो Entertainment Top 5 में आप इनके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं.
नेशनल अवॉर्ड विनर एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी का मुंबई में निधन हो गया है. एक्ट्रेस काफी समय से बीमार चल रही थीं. 2020 में सुरेखा, ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो गई थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्ट्रेस का निधन शुक्रवार सुबह दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ है. वह दूसरे ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हुए कॉम्पलीकेशन्स से जूझ रही थीं.
बता दें कि सुरेखा ने थिएटर, फिल्म और टीवी में खूब काम किया था. उन्होंने साल 1978 में पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म किस्सा कुर्सी का से डेब्यू किया था. सुरेखा इसके बाद कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं. इतना ही नहीं सुरेखा को सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए 3 बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है.
टी-सीरीज (T Series) कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार (Bhushan Kumar) पर रेप का मामला दर्ज हुआ है. आरोप है कि टी सीरीज के एक प्रोजेक्ट में काम दिलाने का लालच देकर उन्होंने एक 30 साल की लड़की से बलात्कार किया. मुंबई के डी एन नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुंबई के अलग-अलग जगहों पर घटना को अंजाम दिया गया था. पीड़िता ने ये भी आरोप लगाया कि उसके फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी जा रही थी. हालांकि अभी तक इस मामले में भूषण कुमार या उनकी टीम की तरफ से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है.
साल 2016 में आई 'ऐ दिल है मुश्किल' (Ae Dil Hai Mushkil) के बाद, करण जौहर (Karan Johar) करीब पांच साल बाद अपनी आगामी पीरियड फिल्म 'तख्त' (Takht) के जरिए एक बार फिर से निर्देशन की कमान संभालने का फैसला लिया था. लेकिन अब करण जौहर के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है, जिसे सुनकर करण के फैंस को झटका लग सकता है.
कहा जा रहा है कि फिल्म तख्त विवादास्पद मुगल इतिहास पर आधारित फिल्म थी. इस फिल्म का बजट भी बहुत तगड़ा था. ये एक दमदार और महंगा हिस्टॉरिकल कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्म थी. इस फिल्म का निर्माण करण जौहर फॉक्स स्टार स्टूडियोज (Fox Star Studios) के साथ मिलकर कर रहे थे, लेकिन कुछ वजहों से फॉक्स स्टार स्टूडियोज ने फिल्म 'तख्त' से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए शायद एक वजह ये भी हो सकती है कि फाइनेंशियल नुकसान को देखते हुए करण जौहर ने तख्त को फिलहाल नहीं बना रहे हैं.
बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस मंदाकिनी (Mandakini) को आज हर कोई जनता है. उनकी सुपरहिट फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' को दर्शक आज भी खूब पसंद करते हैं. 80 के दशक में बॉलीवुड में एंट्री करने वाली एक्ट्रेस मंदाकिनी आज भी बॉलीवुड का बड़ा नाम हैं. एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से दमदार डेब्यू किया था. इस फिल्म को राज कपूर ने बनाया था और इस फिल्म में हमें राजीव कपूर एक्ट्रेस के साथ मुख्य भूमिका में नजर आए थे. इस फिल्म में एक्ट्रेस का झरने वाला सीन बहुत चर्चा में आया था. एक्ट्रेस का असली नाम यास्मीन जोसेफ है लेकिन उन्होंने फिल्मों में काम न मिलने के कारण अपना नाम बदल लिया था. ऐसे में अब खबर है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द बॉलीवुड में अपना कमबैक करने वाली हैं.
मंदाकिनी बहुत जल्द बॉलीवुड फिल्मों में हमें नजर आ सकती हैं. एक्ट्रेस के मैनेजर ने बताया है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द हमें किसी प्रोजेक्ट में नजर आएंगी. ये जानकारी उनके मैनेजर बाबूभाई ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दी है. मैनेजर ने कहा है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द हमें किसी न किसी प्रोजेक्ट में नजर आएंगी. जहां वो इन दिनों लगातार स्क्रिप्ट पढ़ रही हैं. जिस वजह से निश्चित रूप से वो हमें किसी न किसी फिल्म में नजर आएंगी. वो इन दिनों लीड रोल के तलाश में हैं. मंदाकिनी के भाई भानु चाहते हैं कि वो फिर एक बार एक्टिंग में अपनी दमदार वापसी करें.
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) का मशहूर शो कौन बनेगा करोड़पति का सीजन 13 (Kaun Banega Crorepati Season 13) बहुत जल्द टीवी पर वापस आने वाला है. जहां इस शो के शुभारंभ की जानकारी भी एक ब्रांडेड एंटरटेनमेंट बन चुकी है. जी हां देशभर में पसंद किए जाने वाले इस शो को अब बड़े ही अलग अंदाज में प्रमोट किया जा रहा है. मशहूर फिल्मकार नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) ने इस शो को प्रमोट करने के लिए 3 हिस्सों की शॉर्ट फिल्म बनाई है. जिसे जल्द रिलीज किया जाएगा. इसकी पहली झलक सामने आ चुकी है. जो बेहद कमाल की है.
मध्य प्रदेश के बेरछा में खास तौर पर शूट की गई इस फिल्म में एक्टर ओमकार दास मानिकपुरी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. ओमकार दास मानिकपुरी फिल्मों और नाटकों में खूब काम करते हैं, और वो बेहद मशहूर भी हैं. जहां इस कहानी में कई पात्र हैं जो एक गांव में रहते हैं. गांव में स्कूल नहीं है. जिस वजह से सभी परेशान हैं. लेकिन इस बीच अमिताभ बच्चन का कौन बनेगा करोड़पति का एड चलता है और सभी लोग इसे देखते हैं. इस एड के खत्म होते ही गांव की असली कहानी की शुरुआत होती है.
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अगर आपसे शुक्रवार की मनोरंजन जगत से जुड़ी बड़ी खबरें मिस हो गई हैं तो Entertainment Top पाँच में आप इनके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं. मनोरंजन जगत में रोजना ऐसी खबरें सामने आती हैं, जो कि कभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं, तो कभी उन्हें मायूस कर जाती हैं. सोलह जुलाई यानी शुक्रवार को भी बॉलीवुड से लेकर टीवी तक तमाम खबरें सुर्खियों में रहीं. एक तरफ जहां सुरेखा सीकरी इस दुनिया को अलविदा कहकर चली गई हैं, वहीं भूषण कुमार पर एक महिला ने रेप का आरोप लगाया है. अगर आपसे शुक्रवार की मनोरंजन जगत से जुड़ी बड़ी खबरें मिस हो गई हैं तो Entertainment Top पाँच में आप इनके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं. नेशनल अवॉर्ड विनर एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी का मुंबई में निधन हो गया है. एक्ट्रेस काफी समय से बीमार चल रही थीं. दो हज़ार बीस में सुरेखा, ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो गई थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्ट्रेस का निधन शुक्रवार सुबह दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ है. वह दूसरे ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हुए कॉम्पलीकेशन्स से जूझ रही थीं. बता दें कि सुरेखा ने थिएटर, फिल्म और टीवी में खूब काम किया था. उन्होंने साल एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म किस्सा कुर्सी का से डेब्यू किया था. सुरेखा इसके बाद कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं. इतना ही नहीं सुरेखा को सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. टी-सीरीज कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार पर रेप का मामला दर्ज हुआ है. आरोप है कि टी सीरीज के एक प्रोजेक्ट में काम दिलाने का लालच देकर उन्होंने एक तीस साल की लड़की से बलात्कार किया. मुंबई के डी एन नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुंबई के अलग-अलग जगहों पर घटना को अंजाम दिया गया था. पीड़िता ने ये भी आरोप लगाया कि उसके फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी जा रही थी. हालांकि अभी तक इस मामले में भूषण कुमार या उनकी टीम की तरफ से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है. साल दो हज़ार सोलह में आई 'ऐ दिल है मुश्किल' के बाद, करण जौहर करीब पांच साल बाद अपनी आगामी पीरियड फिल्म 'तख्त' के जरिए एक बार फिर से निर्देशन की कमान संभालने का फैसला लिया था. लेकिन अब करण जौहर के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है, जिसे सुनकर करण के फैंस को झटका लग सकता है. कहा जा रहा है कि फिल्म तख्त विवादास्पद मुगल इतिहास पर आधारित फिल्म थी. इस फिल्म का बजट भी बहुत तगड़ा था. ये एक दमदार और महंगा हिस्टॉरिकल कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्म थी. इस फिल्म का निर्माण करण जौहर फॉक्स स्टार स्टूडियोज के साथ मिलकर कर रहे थे, लेकिन कुछ वजहों से फॉक्स स्टार स्टूडियोज ने फिल्म 'तख्त' से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए शायद एक वजह ये भी हो सकती है कि फाइनेंशियल नुकसान को देखते हुए करण जौहर ने तख्त को फिलहाल नहीं बना रहे हैं. बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस मंदाकिनी को आज हर कोई जनता है. उनकी सुपरहिट फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' को दर्शक आज भी खूब पसंद करते हैं. अस्सी के दशक में बॉलीवुड में एंट्री करने वाली एक्ट्रेस मंदाकिनी आज भी बॉलीवुड का बड़ा नाम हैं. एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से दमदार डेब्यू किया था. इस फिल्म को राज कपूर ने बनाया था और इस फिल्म में हमें राजीव कपूर एक्ट्रेस के साथ मुख्य भूमिका में नजर आए थे. इस फिल्म में एक्ट्रेस का झरने वाला सीन बहुत चर्चा में आया था. एक्ट्रेस का असली नाम यास्मीन जोसेफ है लेकिन उन्होंने फिल्मों में काम न मिलने के कारण अपना नाम बदल लिया था. ऐसे में अब खबर है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द बॉलीवुड में अपना कमबैक करने वाली हैं. मंदाकिनी बहुत जल्द बॉलीवुड फिल्मों में हमें नजर आ सकती हैं. एक्ट्रेस के मैनेजर ने बताया है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द हमें किसी प्रोजेक्ट में नजर आएंगी. ये जानकारी उनके मैनेजर बाबूभाई ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दी है. मैनेजर ने कहा है कि एक्ट्रेस बहुत जल्द हमें किसी न किसी प्रोजेक्ट में नजर आएंगी. जहां वो इन दिनों लगातार स्क्रिप्ट पढ़ रही हैं. जिस वजह से निश्चित रूप से वो हमें किसी न किसी फिल्म में नजर आएंगी. वो इन दिनों लीड रोल के तलाश में हैं. मंदाकिनी के भाई भानु चाहते हैं कि वो फिर एक बार एक्टिंग में अपनी दमदार वापसी करें. बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का मशहूर शो कौन बनेगा करोड़पति का सीजन तेरह बहुत जल्द टीवी पर वापस आने वाला है. जहां इस शो के शुभारंभ की जानकारी भी एक ब्रांडेड एंटरटेनमेंट बन चुकी है. जी हां देशभर में पसंद किए जाने वाले इस शो को अब बड़े ही अलग अंदाज में प्रमोट किया जा रहा है. मशहूर फिल्मकार नितेश तिवारी ने इस शो को प्रमोट करने के लिए तीन हिस्सों की शॉर्ट फिल्म बनाई है. जिसे जल्द रिलीज किया जाएगा. इसकी पहली झलक सामने आ चुकी है. जो बेहद कमाल की है. मध्य प्रदेश के बेरछा में खास तौर पर शूट की गई इस फिल्म में एक्टर ओमकार दास मानिकपुरी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. ओमकार दास मानिकपुरी फिल्मों और नाटकों में खूब काम करते हैं, और वो बेहद मशहूर भी हैं. जहां इस कहानी में कई पात्र हैं जो एक गांव में रहते हैं. गांव में स्कूल नहीं है. जिस वजह से सभी परेशान हैं. लेकिन इस बीच अमिताभ बच्चन का कौन बनेगा करोड़पति का एड चलता है और सभी लोग इसे देखते हैं. इस एड के खत्म होते ही गांव की असली कहानी की शुरुआत होती है.
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मुंबई : भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के झांसी में कई इक्विपमेंट्स को सेनाओं को आधिकारिक रूप से सौंपा था. इसके अलावा भारतीय नौसेना में आईएनएस विशाखापट्टनम को शामिल किए जाने से समुद्र में भारत की ताकत बढ़ी. तो वहीं, अब महासागर की गहराई में भारत की ताकत को चार गुना बढ़ाने की तैयारी है.
दरअसल, कलावरी क्लास सबमरीन यानी पनडुब्बी INS वेला आज भारतीय नौसेना में शामिल होने वाली है. आईएनएस वेला, कलावरी क्लास की चौथी सबमरीन है, जो 221 फीट लंबी, 40 फीट ऊंची और 1565 टन वजनी है. INS वेला में मशीनरी सेट करने के लिए लगभग 11 किलोमीटर लंबी पाइप और करीब 60 किलोमीटर की केबल फिटिंग की गई है.
यह सबमरीन स्पेशल स्टील से बनी है, इसमें हाई टेंसाइल स्ट्रेंथ है जो पानी के अंदर ज्यादा गहराई तक जाकर ऑपरेट करने में सक्षम है. इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी इसे रडार सिस्टम को धोखा देने योग्य बनाती है यानी रडार इसे ट्रैक नहीं कर पाएगा. यह दुश्मन को भनक लगाए बिना ही अपना काम पूरा कर सकती है. इसके अलावा इसे किसी भी मौसम में ऑपरेट किया जा सकता है.
आईएनएस वेला में दो 1250 केडब्ल्यू डीजल इंजन लगाए गए हैं. इसमें 360 बैटरी सेल्स हैं. प्रत्येक का वजन 750 किलोग्राम के करीब है. इन्हीं बैटरियों के दम पर आईएनएस वेला 6500 नॉटिकल माइल्स यानी करीब 12000 किमी का रास्ता तय कर सकती है. यह सफर 45-50 दिनों का हो सकता है. ये सबमरीन 350 मीटर तक की गहराई में भी जाकर दुश्मन का पता लगा सकती है.
आईएनएस वेला की टॉप स्पीड की बात करे तो यह 22 नोट्स है. इसमें पीछे की ओर फ्रांस से ली गई तकनीकी वाली मैग्नेटिस्ड प्रोपल्शन मोटर है. इसकी आवाज सबमरीन से बाहर नहीं जाती है. इसीलिए, आईएनएस वेला सबमरीन को साइलेंट किलर भी कहा जा सकता है. इसके भीतर एडवांस वेपन हैं जो युद्ध जैसे समय में आसानी से दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकते हैं.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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मुंबई : भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा है. इसी कड़ी में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के झांसी में कई इक्विपमेंट्स को सेनाओं को आधिकारिक रूप से सौंपा था. इसके अलावा भारतीय नौसेना में आईएनएस विशाखापट्टनम को शामिल किए जाने से समुद्र में भारत की ताकत बढ़ी. तो वहीं, अब महासागर की गहराई में भारत की ताकत को चार गुना बढ़ाने की तैयारी है. दरअसल, कलावरी क्लास सबमरीन यानी पनडुब्बी INS वेला आज भारतीय नौसेना में शामिल होने वाली है. आईएनएस वेला, कलावरी क्लास की चौथी सबमरीन है, जो दो सौ इक्कीस फीट लंबी, चालीस फीट ऊंची और एक हज़ार पाँच सौ पैंसठ टन वजनी है. INS वेला में मशीनरी सेट करने के लिए लगभग ग्यारह किलोग्राममीटर लंबी पाइप और करीब साठ किलोग्राममीटर की केबल फिटिंग की गई है. यह सबमरीन स्पेशल स्टील से बनी है, इसमें हाई टेंसाइल स्ट्रेंथ है जो पानी के अंदर ज्यादा गहराई तक जाकर ऑपरेट करने में सक्षम है. इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी इसे रडार सिस्टम को धोखा देने योग्य बनाती है यानी रडार इसे ट्रैक नहीं कर पाएगा. यह दुश्मन को भनक लगाए बिना ही अपना काम पूरा कर सकती है. इसके अलावा इसे किसी भी मौसम में ऑपरेट किया जा सकता है. आईएनएस वेला में दो एक हज़ार दो सौ पचास केडब्ल्यू डीजल इंजन लगाए गए हैं. इसमें तीन सौ साठ बैटरी सेल्स हैं. प्रत्येक का वजन सात सौ पचास किलोग्रामग्राम के करीब है. इन्हीं बैटरियों के दम पर आईएनएस वेला छः हज़ार पाँच सौ नॉटिकल माइल्स यानी करीब बारह हज़ार किमी का रास्ता तय कर सकती है. यह सफर पैंतालीस-पचास दिनों का हो सकता है. ये सबमरीन तीन सौ पचास मीटर तक की गहराई में भी जाकर दुश्मन का पता लगा सकती है. आईएनएस वेला की टॉप स्पीड की बात करे तो यह बाईस नोट्स है. इसमें पीछे की ओर फ्रांस से ली गई तकनीकी वाली मैग्नेटिस्ड प्रोपल्शन मोटर है. इसकी आवाज सबमरीन से बाहर नहीं जाती है. इसीलिए, आईएनएस वेला सबमरीन को साइलेंट किलर भी कहा जा सकता है. इसके भीतर एडवांस वेपन हैं जो युद्ध जैसे समय में आसानी से दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकते हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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दिल्ली पुलिस ने कहा- "पहलवानों को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी"
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने उन्माद में कानून तोड़ा, यही वजह है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके प्रदर्शन को अधिसूचित स्थान रोक दिया गया।
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर पहलवान साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के साथ आयोजकों और उनके समर्थकों के खिलाफ दंगा करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में रविवार को प्राथमिकी दर्ज की।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने उन्माद में कानून तोड़ा, यही वजह है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके प्रदर्शन को अधिसूचित स्थान रोक दिया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि पहलवानों का प्रदर्शन अब तक सुचारू रूप से चल रहा था।
दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर लिखा, "कुश्ती पहलवानों का धरना और प्रदर्शन निर्बाध तरीके से जंतर मंतर की सूचित जगह पर चल रहा था। कल प्रदर्शकारियों ने तमाम आग्रह और अनुरोध के बावजूद कानून का उन्मादी रूप से उल्लंघन करा। अतः चल रहे धरने को समाप्त कर दिया गया है। "
पुलिस ने आगे लिखा, "यदि कुश्ती पहलवान भविष्य में दोबारा धरने प्रदर्शन की अनुमति की अर्जी लगाते हैं, तो उन्हें जंतर-मंतर के अलावा अन्य उपयुक्त, सूचित स्थानों में से किसी जगह अनुमति दी जाएगी। "
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला 'महापंचायत' के लिए नये संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर 109 प्रदर्शनकारियों सहित पूरी दिल्ली में 700 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विनेश फोगाट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को भारतीय कुश्ती महासंघ प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में सात दिन लग गए थे, लेकिन उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने में सात घंटे भी नहीं लगे, जो 'शांतिपूर्वक' विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को बृजभूषण को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था।
(भाषा इनपुट के साथ)
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दिल्ली पुलिस ने कहा- "पहलवानों को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी" दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने उन्माद में कानून तोड़ा, यही वजह है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके प्रदर्शन को अधिसूचित स्थान रोक दिया गया। नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर पहलवान साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के साथ आयोजकों और उनके समर्थकों के खिलाफ दंगा करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में रविवार को प्राथमिकी दर्ज की। इस बीच दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कल प्रदर्शनकारियों ने उन्माद में कानून तोड़ा, यही वजह है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके प्रदर्शन को अधिसूचित स्थान रोक दिया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि पहलवानों का प्रदर्शन अब तक सुचारू रूप से चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर लिखा, "कुश्ती पहलवानों का धरना और प्रदर्शन निर्बाध तरीके से जंतर मंतर की सूचित जगह पर चल रहा था। कल प्रदर्शकारियों ने तमाम आग्रह और अनुरोध के बावजूद कानून का उन्मादी रूप से उल्लंघन करा। अतः चल रहे धरने को समाप्त कर दिया गया है। " पुलिस ने आगे लिखा, "यदि कुश्ती पहलवान भविष्य में दोबारा धरने प्रदर्शन की अनुमति की अर्जी लगाते हैं, तो उन्हें जंतर-मंतर के अलावा अन्य उपयुक्त, सूचित स्थानों में से किसी जगह अनुमति दी जाएगी। " इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला 'महापंचायत' के लिए नये संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर एक सौ नौ प्रदर्शनकारियों सहित पूरी दिल्ली में सात सौ लोगों को हिरासत में लिया गया है। घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विनेश फोगाट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को भारतीय कुश्ती महासंघ प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में सात दिन लग गए थे, लेकिन उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने में सात घंटे भी नहीं लगे, जो 'शांतिपूर्वक' विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। देश के शीर्ष पहलवानों ने तेईस अप्रैल को बृजभूषण को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था।
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"मैंने 9 साल की उम्र में उनसे ट्रेनिंग लेनी शुरू की और तब क्लब की फ़ीस सिर्फ़ 50 रुपए हुआ करती थी. और आप समझ लो, वो उन खिलाड़ियों से फ़ीस तक नहीं लेते थे, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर हुआ करते थे. उन्हें मुफ़्त में सिखाते थे. "
"दिसंबर 2001 में जब वो महिला क्रिकेट टीम के कोच थे, मैं कप्तान बनी थी और हमारी टीम ने पहली बार इंग्लैंड को 5-0 से वनडे में हराया था. "
इन क़िस्सों के ज़रिए जिस शख़्सियत को याद किया जा रहा है, उन्होंने भारतीय क्रिकेट जगत को क़रीब 12 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सौंपे, जिनमें से ऋषभ पंत, शिखर धवन टीम इंडिया के लिए आज के समय में खेल रहे हैं.
दिल्ली के घरेलू क्रिकेट के दिग्गज कोच रहे तारक सिन्हा का 5 नवंबर को लंग कैंसर के चलते निधन हो गया.
उन्होंने 1969 में दिल्ली में अपनी क्लर्क की नौकरी से जमा किए पैसों से सोनेट क्लब की स्थापना की थी. उसी क्लब से शुरुआत कर रमन लांबा से लेकर ऋषभ पंत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाई.
उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी.
जब हम दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थित उनके सोनेट क्लब पहुंचे, तो पता चला कि उनके अंतिम दर्शन के लिए वीरेंद्र सहवाग और उनका परिवार, ऋषभ पंत का परिवार, आशीष नेहरा का परिवार, पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन और आकाश चोपड़ा का परिवार वहां पहुंचा हुआ था.
पूरा क्रिकेट ग्राउंड मौजूदा युवा खिलाड़ियों, पूर्व कोच, क्रिकेटरों और उनके परिजनों से भरा हुआ था. ये मंज़र खिलाड़ियों के दिल में बैठे उनके लिए सम्मान की एक बानगी भर था.
उनको याद करते हुए पूर्व क्रिकेटर संजीव शर्मा ने बीबीसी से कहा, "रमन लांबा ने उनसे कहा कि आप आशीष नेहरा पर क्यों मेहनत कर रहे हो? इसमें वो बात नहीं लग रही, तब उस्ताद जी कहते हैं- नहीं, यह खिलाड़ी काफ़ी आगे तक जाएगा. "
वहीं अतुल वासन कहते हैं, "मैं 4 साल तक डीडीसीए का सिलेक्टर रहा लेकिन कभी भी उस्ताद जी ने मुझे कॉल करके किसी की सिफ़ारिश नहीं लगाई. "
खेल पत्रकार इंद्रनील बसु बताते हैं कि तारक सिन्हा को 2018 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन वो अपनी असल उपलब्धि खिलाड़ियों को क्रिकेट के बारीक गुर सिखाने और उन्हें आगे बढ़ाने में ही मानते थे.
वो कहते हैं कि उन्हें पहचान और पुरस्कार की कोई भूख नहीं थी. इसका उदाहरण इस बात से मिलता है कि कई दिग्गज खिलाड़ियों ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए उनका नामांकन उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर ही करवाया था.
तारक सिन्हा दिल्ली के कमला नगर के सरकारी स्कूल (बिरला स्कूल) के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ थे. वो सीके नायडू ट्रॉफ़ी के लिए दिल्ली की जूनियर टीम में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे. लेकिन उनका चयन नहीं हुआ.
इससे आहत होकर उन्होंने आगे चलकर एक क्रिकेट एकेडमी खोलने का मन बना लिया, जहां सरकारी स्कूल के युवा खिलाड़ियों की अच्छे स्तर पर ट्रेनिंग दी जानी थी. साल 1969 में उन्होंने सोनेट क्लब का गठन किया, जिसकी शुरुआत सरकारी बिरला स्कूल से ही हुई.
बाद में तारक सिन्हा दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में क्लर्क की नौकरी पर लगे और वहां से मिलने वाले वेतन को अपने क्लब को निखारने में लगाने लगे.
जब ये क्लब 20 बच्चों के साथ शुरू हुआ, तो किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि ये क्लब आगे जाकर दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स से मुक़ाबला करेगा और दिल्ली के प्रमुख मुक़ाबले जीतेगा.
डीडीसीए (दिल्ली एवं ज़िला क्रिकेट संघ) ने 1971 में जाकर इस क्लब को मान्यता दी. यही नहीं, इस क्रिकेट क्लब को कम पैसों, सुविधाओं के कारण कई बार जगह बदलनी पड़ी. सबसे पहले ये बिरला स्कूल में था, फिर अजमल ख़ान पार्क इसका नया ठिकाना बना. उसके बाद, डीसीएम ग्राउंड, फिर डीयू का राजधानी कॉलेज और मौजूदा समय में ये वेंकटेश्वर कॉलेज ग्राउंड में स्थित है.
अतुल वासन बताते हैं कि वो 14 साल की उम्र में सोनेट क्लब गए थे. और वहां तारक सिन्हा से उन्होंने कड़ी मेहनत करने और बुरे वक्त में भी हौसला रखने की कला सीखी.
वो याद करते हैं कि सोनेट क्लब में कोई अमीर-ग़रीब नहीं होता था. सबको एक स्तर पर रखा जाता था. सभी बच्चों को विकेट लगाने से लेकर पिच पर ख़ुद रोलर चलाना सिखाया जाता था. उसके बाद ही उनकी कोचिंग शुरू होती थी.
उन्हें एक वाक़या याद आया, जब उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं चल रहा था. उस वक़्त उन्होंने क्रिकेट ही छोड़ने का मन बना लिया था. जब 'उस्ताद जी' (तारक सिन्हा को सब प्यार से उस्ताद जी बुलाते हैं) को पता चला तो, वो सीधे अतुल वासन के घर चले गए. वहां जाकर उन्हें और उनके पिता को ख़ूब समझाया.
अतुल वासन कहते हैं, "कौन कोच इतना ध्यान देता है? वो तब अपने खिलाड़ियों का हाथ थामते थे, जब वो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते थे. उनकी वजह से ही आप मुझे इंडियन टीम में खेलते देख पाए, क्योंकि उन्होंने मुझे थामे रखा. "
वहीं आकाश चोपड़ा ने बताया कि 9 साल की उम्र में उन्होंने क्लब में खेलना शुरू किया. आकाश चोपड़ा कहते हैं, "उनकी सबसे बड़ी प्रतिभा छोटी उम्र में ही टैलेंट को पहचान लेना थी. वो तो यहां तक अनुमान लगा लेते थे कि कोई खिलाड़ी कहां तक जा सकता है. इसके साथ ही, वो ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में ही ट्रेनिंग देते थे. "
तारक सिन्हा के क्लब में ही क्रिकेट सीखने वाले पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजीव शर्मा एक क़िस्सा बताते हैं, "जब आशीष नेहरा अपनी पहचान बना चुके थे, तब एक बार वो उस्ताद जी का सोनेट क्लब में इंतज़ार कर रहे थे. उस्ताद जी काफ़ी देर से आए, तो आशीष ने पूछा कि आप जल्दी क्यों नहीं आते? "
"इस पर तारक सिन्हा ने जवाब दिया कि 'मेरा घर गाज़ियाबाद में है. अब इतनी दूर से आऊंगा तो समय तो लगेगा ही. ' ये सुनने के बाद आशीष नेहरा ने उस्ताद जी के लिए द्वारका में घर ले दिया. "
यही नहीं, उनके क्लब के लिए समय-समय पर बड़े खिलाड़ी आर्थिक रूप से मदद भी करते रहे. हालांकि उन्होंने कभी ख़ुद से किसी के पास जाकर कुछ नहीं मांगा.
उनकी कोचिंग के तरीके के बारे में संजीव शर्मा बताते हैं कि वो गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ दोनों की तकनीक पर काम करते थे. गर्मी के समय में वो स्पिनर्स को और सर्दी के समय में तेज़ गेंदबाज़ों को कड़ा प्रशिक्षण देते थे.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रहीं अंजुम चोपड़ा ने बीबीसी से हुई बातचीत में बताया कि दिसंबर 2001 में जब उनका चयन कप्तान के तौर पर हुआ, उस समय तारक सिन्हा ही कोच थे. उनके समय में ही 2002 में महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विदेशी टीम को घरेलू वनडे मुक़ाबलों में 5-0 से हराया था. तब इंग्लैंड की टीम वनडे सिरीज़ के लिए भारत आई थी.
वो बताती हैं कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने किसी विदेशी ज़मीन पर जाकर जो पहली टेस्ट सिरीज़ जीती, वो भी उन्हीं की कोचिंग के समय दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेली गई सिरीज़ थी.
संजीव शर्मा बताते हैं कि "राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के जब वह एक मुख्य पदाधिकारी बने, तब दो साल तक राजस्थान टीम रणजी ट्रॉफ़ी विजेता रही. अच्छे खिलाड़ी की परख करने का उनमें एक नेचुरल टैलेंट था. साथ ही, वो कई विदेशी क्रिकेट कोच या खिलाड़ियों की क़िताबें भी पढ़ते रहते थे. "
इतने खिलाड़ियों को बड़े-बड़े मुक़ाम तक पहुंचाने के बाद भी 'उस्ताद जी' अंत तक सादा जीवन ही जीते रहे. उन्होंने कभी परिवार नहीं बनाया, शादी नहीं की. क्रिकेट को ही अपनी जीवनसंगिनी मानकर खिलाड़ियों की प्रतिभा में ही अपना परिवार तलाशते रहे.
जिन 12 अंतराष्ट्रीय राष्ट्रीय खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षित कियाः ऋषभ पंत, शिखर धवन, आकाश चोपड़ा, अंजुम चोपड़ा, आशीष नेहरा, अतुल वासन, संजीव शर्मा, केपी भास्कर, अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर, रमन लांबा, सुरेंदर खन्ना और रणधीर सिंह.
दिल्ली के खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कई दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों के भी उस्ताद रहे तारक सिन्हा. जैसेः मयंक सिंधाना (पंजाब), एकलव्य दीवान (यूपी), राजीव देओरा (बिहार).
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"मैंने नौ साल की उम्र में उनसे ट्रेनिंग लेनी शुरू की और तब क्लब की फ़ीस सिर्फ़ पचास रुपयापए हुआ करती थी. और आप समझ लो, वो उन खिलाड़ियों से फ़ीस तक नहीं लेते थे, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर हुआ करते थे. उन्हें मुफ़्त में सिखाते थे. " "दिसंबर दो हज़ार एक में जब वो महिला क्रिकेट टीम के कोच थे, मैं कप्तान बनी थी और हमारी टीम ने पहली बार इंग्लैंड को पाँच-शून्य से वनडे में हराया था. " इन क़िस्सों के ज़रिए जिस शख़्सियत को याद किया जा रहा है, उन्होंने भारतीय क्रिकेट जगत को क़रीब बारह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सौंपे, जिनमें से ऋषभ पंत, शिखर धवन टीम इंडिया के लिए आज के समय में खेल रहे हैं. दिल्ली के घरेलू क्रिकेट के दिग्गज कोच रहे तारक सिन्हा का पाँच नवंबर को लंग कैंसर के चलते निधन हो गया. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में दिल्ली में अपनी क्लर्क की नौकरी से जमा किए पैसों से सोनेट क्लब की स्थापना की थी. उसी क्लब से शुरुआत कर रमन लांबा से लेकर ऋषभ पंत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाई. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. जब हम दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थित उनके सोनेट क्लब पहुंचे, तो पता चला कि उनके अंतिम दर्शन के लिए वीरेंद्र सहवाग और उनका परिवार, ऋषभ पंत का परिवार, आशीष नेहरा का परिवार, पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन और आकाश चोपड़ा का परिवार वहां पहुंचा हुआ था. पूरा क्रिकेट ग्राउंड मौजूदा युवा खिलाड़ियों, पूर्व कोच, क्रिकेटरों और उनके परिजनों से भरा हुआ था. ये मंज़र खिलाड़ियों के दिल में बैठे उनके लिए सम्मान की एक बानगी भर था. उनको याद करते हुए पूर्व क्रिकेटर संजीव शर्मा ने बीबीसी से कहा, "रमन लांबा ने उनसे कहा कि आप आशीष नेहरा पर क्यों मेहनत कर रहे हो? इसमें वो बात नहीं लग रही, तब उस्ताद जी कहते हैं- नहीं, यह खिलाड़ी काफ़ी आगे तक जाएगा. " वहीं अतुल वासन कहते हैं, "मैं चार साल तक डीडीसीए का सिलेक्टर रहा लेकिन कभी भी उस्ताद जी ने मुझे कॉल करके किसी की सिफ़ारिश नहीं लगाई. " खेल पत्रकार इंद्रनील बसु बताते हैं कि तारक सिन्हा को दो हज़ार अट्ठारह में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन वो अपनी असल उपलब्धि खिलाड़ियों को क्रिकेट के बारीक गुर सिखाने और उन्हें आगे बढ़ाने में ही मानते थे. वो कहते हैं कि उन्हें पहचान और पुरस्कार की कोई भूख नहीं थी. इसका उदाहरण इस बात से मिलता है कि कई दिग्गज खिलाड़ियों ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए उनका नामांकन उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर ही करवाया था. तारक सिन्हा दिल्ली के कमला नगर के सरकारी स्कूल के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ थे. वो सीके नायडू ट्रॉफ़ी के लिए दिल्ली की जूनियर टीम में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे. लेकिन उनका चयन नहीं हुआ. इससे आहत होकर उन्होंने आगे चलकर एक क्रिकेट एकेडमी खोलने का मन बना लिया, जहां सरकारी स्कूल के युवा खिलाड़ियों की अच्छे स्तर पर ट्रेनिंग दी जानी थी. साल एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में उन्होंने सोनेट क्लब का गठन किया, जिसकी शुरुआत सरकारी बिरला स्कूल से ही हुई. बाद में तारक सिन्हा दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में क्लर्क की नौकरी पर लगे और वहां से मिलने वाले वेतन को अपने क्लब को निखारने में लगाने लगे. जब ये क्लब बीस बच्चों के साथ शुरू हुआ, तो किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि ये क्लब आगे जाकर दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स से मुक़ाबला करेगा और दिल्ली के प्रमुख मुक़ाबले जीतेगा. डीडीसीए ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में जाकर इस क्लब को मान्यता दी. यही नहीं, इस क्रिकेट क्लब को कम पैसों, सुविधाओं के कारण कई बार जगह बदलनी पड़ी. सबसे पहले ये बिरला स्कूल में था, फिर अजमल ख़ान पार्क इसका नया ठिकाना बना. उसके बाद, डीसीएम ग्राउंड, फिर डीयू का राजधानी कॉलेज और मौजूदा समय में ये वेंकटेश्वर कॉलेज ग्राउंड में स्थित है. अतुल वासन बताते हैं कि वो चौदह साल की उम्र में सोनेट क्लब गए थे. और वहां तारक सिन्हा से उन्होंने कड़ी मेहनत करने और बुरे वक्त में भी हौसला रखने की कला सीखी. वो याद करते हैं कि सोनेट क्लब में कोई अमीर-ग़रीब नहीं होता था. सबको एक स्तर पर रखा जाता था. सभी बच्चों को विकेट लगाने से लेकर पिच पर ख़ुद रोलर चलाना सिखाया जाता था. उसके बाद ही उनकी कोचिंग शुरू होती थी. उन्हें एक वाक़या याद आया, जब उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं चल रहा था. उस वक़्त उन्होंने क्रिकेट ही छोड़ने का मन बना लिया था. जब 'उस्ताद जी' को पता चला तो, वो सीधे अतुल वासन के घर चले गए. वहां जाकर उन्हें और उनके पिता को ख़ूब समझाया. अतुल वासन कहते हैं, "कौन कोच इतना ध्यान देता है? वो तब अपने खिलाड़ियों का हाथ थामते थे, जब वो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते थे. उनकी वजह से ही आप मुझे इंडियन टीम में खेलते देख पाए, क्योंकि उन्होंने मुझे थामे रखा. " वहीं आकाश चोपड़ा ने बताया कि नौ साल की उम्र में उन्होंने क्लब में खेलना शुरू किया. आकाश चोपड़ा कहते हैं, "उनकी सबसे बड़ी प्रतिभा छोटी उम्र में ही टैलेंट को पहचान लेना थी. वो तो यहां तक अनुमान लगा लेते थे कि कोई खिलाड़ी कहां तक जा सकता है. इसके साथ ही, वो ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में ही ट्रेनिंग देते थे. " तारक सिन्हा के क्लब में ही क्रिकेट सीखने वाले पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजीव शर्मा एक क़िस्सा बताते हैं, "जब आशीष नेहरा अपनी पहचान बना चुके थे, तब एक बार वो उस्ताद जी का सोनेट क्लब में इंतज़ार कर रहे थे. उस्ताद जी काफ़ी देर से आए, तो आशीष ने पूछा कि आप जल्दी क्यों नहीं आते? " "इस पर तारक सिन्हा ने जवाब दिया कि 'मेरा घर गाज़ियाबाद में है. अब इतनी दूर से आऊंगा तो समय तो लगेगा ही. ' ये सुनने के बाद आशीष नेहरा ने उस्ताद जी के लिए द्वारका में घर ले दिया. " यही नहीं, उनके क्लब के लिए समय-समय पर बड़े खिलाड़ी आर्थिक रूप से मदद भी करते रहे. हालांकि उन्होंने कभी ख़ुद से किसी के पास जाकर कुछ नहीं मांगा. उनकी कोचिंग के तरीके के बारे में संजीव शर्मा बताते हैं कि वो गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ दोनों की तकनीक पर काम करते थे. गर्मी के समय में वो स्पिनर्स को और सर्दी के समय में तेज़ गेंदबाज़ों को कड़ा प्रशिक्षण देते थे. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रहीं अंजुम चोपड़ा ने बीबीसी से हुई बातचीत में बताया कि दिसंबर दो हज़ार एक में जब उनका चयन कप्तान के तौर पर हुआ, उस समय तारक सिन्हा ही कोच थे. उनके समय में ही दो हज़ार दो में महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विदेशी टीम को घरेलू वनडे मुक़ाबलों में पाँच-शून्य से हराया था. तब इंग्लैंड की टीम वनडे सिरीज़ के लिए भारत आई थी. वो बताती हैं कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने किसी विदेशी ज़मीन पर जाकर जो पहली टेस्ट सिरीज़ जीती, वो भी उन्हीं की कोचिंग के समय दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेली गई सिरीज़ थी. संजीव शर्मा बताते हैं कि "राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के जब वह एक मुख्य पदाधिकारी बने, तब दो साल तक राजस्थान टीम रणजी ट्रॉफ़ी विजेता रही. अच्छे खिलाड़ी की परख करने का उनमें एक नेचुरल टैलेंट था. साथ ही, वो कई विदेशी क्रिकेट कोच या खिलाड़ियों की क़िताबें भी पढ़ते रहते थे. " इतने खिलाड़ियों को बड़े-बड़े मुक़ाम तक पहुंचाने के बाद भी 'उस्ताद जी' अंत तक सादा जीवन ही जीते रहे. उन्होंने कभी परिवार नहीं बनाया, शादी नहीं की. क्रिकेट को ही अपनी जीवनसंगिनी मानकर खिलाड़ियों की प्रतिभा में ही अपना परिवार तलाशते रहे. जिन बारह अंतराष्ट्रीय राष्ट्रीय खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षित कियाः ऋषभ पंत, शिखर धवन, आकाश चोपड़ा, अंजुम चोपड़ा, आशीष नेहरा, अतुल वासन, संजीव शर्मा, केपी भास्कर, अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर, रमन लांबा, सुरेंदर खन्ना और रणधीर सिंह. दिल्ली के खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कई दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों के भी उस्ताद रहे तारक सिन्हा. जैसेः मयंक सिंधाना , एकलव्य दीवान , राजीव देओरा .
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CWC 2019 बेयरस्टो ने बेहद अहम मुकाबले में भारत के खिलाफ शतक लगाकर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया।
नई दिल्ली, जेएनएन। India vs England ICC cricket world cup 2019: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के तूफानी ओपनर बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो ने बर्मिंघम में भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कमाल के अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम के खिलाफ शतक लगा दिया। ये बेयरस्टो का इस विश्व कप में पहला शतक रहा। इस विश्व कप में उन्होंने इंग्लैंड की तरफ से पांचवां शतक लगाया। इसके अलावा बेयरस्टो इस विश्व कप में भारत के खिलाफ शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बन गए।
भारत के खिलाफ बेयरस्टो ने अपने वनडे करियर का आठवां शतक लगाया। वर्ल्ड कप 2019 का ये उनका पहला शतक है। भारत के खिलाफ उन्होंने अपना ये शतक 90 गेंदों पर पूरा किया। अपने शतक को पूरा करने के लिए उन्होंने 8 चौके व 6 छक्के लगाए। इससे पहले इस विश्व कप के सात मैचों में बेयरस्टो ने 0,32,51,45,90,0,27 रन की पारी खेली थी। भारत के खिलाफ मुकाबले में बेयरस्टो ने 109 गेंदों पर 111 रन बनाए। उन्होंने अपनी इस पारी में 10 चौके व 6 छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 101. 83 का रहा।
बेयरस्टो ने पहले विकेट के लिए जेसन रॉय के साथ मिलकर 160 रन की साझेदारी की। इस विश्व कप में भारत के खिलाफ पहले विकेट के लिए ये सबसे बड़ी साझेदारी रही। इसके अलावा विश्व कप इतिहास में भारत के खिलाफ भी ये पहले विकेट के लिए सबसे बड़़ी साझेदारी साबित हुई।
Highest opening stands against India in this World Cup:
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CWC दो हज़ार उन्नीस बेयरस्टो ने बेहद अहम मुकाबले में भारत के खिलाफ शतक लगाकर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया। नई दिल्ली, जेएनएन। India vs England ICC cricket world cup दो हज़ार उन्नीस: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के तूफानी ओपनर बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो ने बर्मिंघम में भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कमाल के अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम के खिलाफ शतक लगा दिया। ये बेयरस्टो का इस विश्व कप में पहला शतक रहा। इस विश्व कप में उन्होंने इंग्लैंड की तरफ से पांचवां शतक लगाया। इसके अलावा बेयरस्टो इस विश्व कप में भारत के खिलाफ शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बन गए। भारत के खिलाफ बेयरस्टो ने अपने वनडे करियर का आठवां शतक लगाया। वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस का ये उनका पहला शतक है। भारत के खिलाफ उन्होंने अपना ये शतक नब्बे गेंदों पर पूरा किया। अपने शतक को पूरा करने के लिए उन्होंने आठ चौके व छः छक्के लगाए। इससे पहले इस विश्व कप के सात मैचों में बेयरस्टो ने शून्य,बत्तीस,इक्यावन,पैंतालीस,नब्बे,शून्य,सत्ताईस रन की पारी खेली थी। भारत के खिलाफ मुकाबले में बेयरस्टो ने एक सौ नौ गेंदों पर एक सौ ग्यारह रन बनाए। उन्होंने अपनी इस पारी में दस चौके व छः छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट एक सौ एक. तिरासी का रहा। बेयरस्टो ने पहले विकेट के लिए जेसन रॉय के साथ मिलकर एक सौ साठ रन की साझेदारी की। इस विश्व कप में भारत के खिलाफ पहले विकेट के लिए ये सबसे बड़ी साझेदारी रही। इसके अलावा विश्व कप इतिहास में भारत के खिलाफ भी ये पहले विकेट के लिए सबसे बड़़ी साझेदारी साबित हुई। Highest opening stands against India in this World Cup:
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार करने की प्रतीक्षा कर रहा है। उस समय कार्ति अपने पिता की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में ही मौजूद थे।
मेहता ने न्यायमूर्ति आर. भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष बहस करते हुए कहा कि जांच एजेंसी कार्ति की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक हटने का इंतजार कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्ति ने दिल्ली हाईकोर्ट में धनशोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है।
इन दलीलों के दौरान कार्ति के चेहरे पर कोई भी भाव नहीं दिखा और वह पीठ के न्यायाधीशों को देख रहे थे।
अदालत के समक्ष मेहता ने दोहराया कि उनकी गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाई गई है और यह रोक हटते ही उन्हें भी मामले में गिरफ्तार किया जाएगा।
मेहता शीर्ष अदालत के समक्ष पी. चिदंबरम को जमानत देने के खिलाफ बहस कर रहे थे।
चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था और 22 अक्टूबर को उन्हें शीर्ष अदालत ने जमानत दे दी थी।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार करने की प्रतीक्षा कर रहा है। उस समय कार्ति अपने पिता की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में ही मौजूद थे। मेहता ने न्यायमूर्ति आर. भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष बहस करते हुए कहा कि जांच एजेंसी कार्ति की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक हटने का इंतजार कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्ति ने दिल्ली हाईकोर्ट में धनशोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। इन दलीलों के दौरान कार्ति के चेहरे पर कोई भी भाव नहीं दिखा और वह पीठ के न्यायाधीशों को देख रहे थे। अदालत के समक्ष मेहता ने दोहराया कि उनकी गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाई गई है और यह रोक हटते ही उन्हें भी मामले में गिरफ्तार किया जाएगा। मेहता शीर्ष अदालत के समक्ष पी. चिदंबरम को जमानत देने के खिलाफ बहस कर रहे थे। चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में इक्कीस अगस्त को गिरफ्तार किया था और बाईस अक्टूबर को उन्हें शीर्ष अदालत ने जमानत दे दी थी।
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(जीएनएस) पीलीभीत। घाट पर अवैध कब्जा होने के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने डीएम को पत्र देकर मामले की जांच कराने और कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घाट पर कब्जा होने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरनपुर देहात क्षेत्र में गाटा संख्या 1625 और 1632 नान जेड ए में है। दोनों नंबर घाट के रूप में दर्ज है।
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पीलीभीत। घाट पर अवैध कब्जा होने के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने डीएम को पत्र देकर मामले की जांच कराने और कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घाट पर कब्जा होने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरनपुर देहात क्षेत्र में गाटा संख्या एक हज़ार छः सौ पच्चीस और एक हज़ार छः सौ बत्तीस नान जेड ए में है। दोनों नंबर घाट के रूप में दर्ज है।
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Schools Reopen, Coronavirus Pandemic : देश में कोरोना का कहर जारी है. हर दिन कोविड-19 (Covid-19) के 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. देश में लंबे समय से बंद स्कूलों को खोलने की तैयारी भी चल रही है. वहीं, देश में कई प्राइवेट स्कूलों पर कोरोना की ऐसी मार पड़ी है कि अब आर्थिक तंगी के चलते बंद होने की कगार तक पहुंच गए हैं. कर्नाटक के प्राइवेट स्कूलों का भी हाल ऐसा ही है.
कर्नाटक के प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन का कहना है कि कोरोना काल में राज्य के प्राइवेट स्कूलों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. कुछ दिनों पहले एसोसिएशन के अध्यक्ष शाशि कुमार न्यूज एजेन्सी ANI को बताया था कि फीस नहीं दिए जाने के कारण राज्य के प्राइवेट स्कूल अब बंद होने के कगार पर हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है. शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस में बच्चों को पढ़ा रहे हैं पर उन्हें वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं.
कर्नाटक में निजी स्कूलों को दिसंबर तक बंद रखने का फैसला लिया गया है. राज्य में 20,000 से अधिक स्कूल हैं और इनमें से लगभग 18,000 प्राइवेट स्कूल हैं. बता दें किकाउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर स्कूल खोलने की बात कही है. कौसिंल ने राज्यों को लिखा है कि 4 जनवरी 2021 से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को लिए आशिंक रूप से स्कूल खोले जायें.
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Schools Reopen, Coronavirus Pandemic : देश में कोरोना का कहर जारी है. हर दिन कोविड-उन्नीस के तीस हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. देश में लंबे समय से बंद स्कूलों को खोलने की तैयारी भी चल रही है. वहीं, देश में कई प्राइवेट स्कूलों पर कोरोना की ऐसी मार पड़ी है कि अब आर्थिक तंगी के चलते बंद होने की कगार तक पहुंच गए हैं. कर्नाटक के प्राइवेट स्कूलों का भी हाल ऐसा ही है. कर्नाटक के प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन का कहना है कि कोरोना काल में राज्य के प्राइवेट स्कूलों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. कुछ दिनों पहले एसोसिएशन के अध्यक्ष शाशि कुमार न्यूज एजेन्सी ANI को बताया था कि फीस नहीं दिए जाने के कारण राज्य के प्राइवेट स्कूल अब बंद होने के कगार पर हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है. शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस में बच्चों को पढ़ा रहे हैं पर उन्हें वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं. कर्नाटक में निजी स्कूलों को दिसंबर तक बंद रखने का फैसला लिया गया है. राज्य में बीस,शून्य से अधिक स्कूल हैं और इनमें से लगभग अट्ठारह,शून्य प्राइवेट स्कूल हैं. बता दें किकाउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर स्कूल खोलने की बात कही है. कौसिंल ने राज्यों को लिखा है कि चार जनवरी दो हज़ार इक्कीस से दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को लिए आशिंक रूप से स्कूल खोले जायें.
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चल रही थी। शाहू जी ने इसी बीच राजाराम कॉलेज के प्रिंसिपल एफ अडेयर के स्थान पर 19 अक्टूबर 1902 को आर्थर सिडनी लूसी को प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त किया । प्रिंसिपल अडेयर की विदाई के अवसर पर कोल्हापुर कॉलेज के छात्रों द्वारा 'श्री तुकराम' (1901) नाटक खेला गया । संत तुकाराम के विरोधी रामेश्वर भट्ट नामक व्यक्ति ने नाटक में तुकाराम को शूद्र बताया, यह भी कहा कि संत तुकाराम को वेदोक्त का अधिकार नहीं है। मराठों ने इस नाटक का विरोध किया तथा शक्ति प्रयोग की धमकी दी। वासुदेव रंगनाथ शिरवाल्कर नाटक के रचयिता थे जिन्होने छत्रपति शाहू की सभी कार्यवाहियों का खंडन किया। नाटक बाबा साहब घोरपड़े को समर्पित किया गया था जो छत्रपति शाहू के प्रबल विरोधी थे। ब्राह्मणों ने ऐसे ब्राह्मणों को जाति से इस कारण बहिष्कृत किया कि उन लोगों ने छत्रपति शाहू के यहाँ वेदोक्त पद्धति से कर्मकाण्ड करवाये हैं।
कोल्हापुर राज्य इन दिनो ब्राह्मणों और अब्राह्मणों के द्वन्द का केन्द्र बन गया था इस तूफानी आन्दोलन ने समूचे महाराष्ट्र को हिला दिया था । छत्रपति शाहू जी सवर्णो, शूद्रों तथा अतिशूद्रों का मानवी समीकरण चाहते थे। वे सभी की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में समानता के आकांक्षी थे किन्तु ब्राह्मणों का दुर्भाव शिखर पर था । वे मात्र अपने सम्मान और शिक्षित होने से संतुष्ट नहीं थे। प्रत्युत वे यह भी चाहते थे कि अब्राह्मण आर्थिक, बौद्धिक और शैक्षिक दृष्टि से कभी आगे न बढ़ सके। इसके लिये उनको हर कुर्बानी स्वीकार थी। परन्तु अब्राह्मणों में व्याप्त अन्धविश्वास तथा जड़ता ब्राह्मणो की जड़े जमाये हुई थी। उन्हीं दिनों ब्राह्मणों ने बीजापुर को अपने प्रतिनिधि के रूप में छत्रपति शाहू जी के पास यह जानने के लिये भेजा कि वेदोक्त विवाद में कोल्हापुर के दीवान जो कार्यवाही कर रहे है वह छत्रपति के आदेश से कर रहें है अथवा स्वतन्त्र रूप से कर रहे है ।
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चल रही थी। शाहू जी ने इसी बीच राजाराम कॉलेज के प्रिंसिपल एफ अडेयर के स्थान पर उन्नीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ दो को आर्थर सिडनी लूसी को प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त किया । प्रिंसिपल अडेयर की विदाई के अवसर पर कोल्हापुर कॉलेज के छात्रों द्वारा 'श्री तुकराम' नाटक खेला गया । संत तुकाराम के विरोधी रामेश्वर भट्ट नामक व्यक्ति ने नाटक में तुकाराम को शूद्र बताया, यह भी कहा कि संत तुकाराम को वेदोक्त का अधिकार नहीं है। मराठों ने इस नाटक का विरोध किया तथा शक्ति प्रयोग की धमकी दी। वासुदेव रंगनाथ शिरवाल्कर नाटक के रचयिता थे जिन्होने छत्रपति शाहू की सभी कार्यवाहियों का खंडन किया। नाटक बाबा साहब घोरपड़े को समर्पित किया गया था जो छत्रपति शाहू के प्रबल विरोधी थे। ब्राह्मणों ने ऐसे ब्राह्मणों को जाति से इस कारण बहिष्कृत किया कि उन लोगों ने छत्रपति शाहू के यहाँ वेदोक्त पद्धति से कर्मकाण्ड करवाये हैं। कोल्हापुर राज्य इन दिनो ब्राह्मणों और अब्राह्मणों के द्वन्द का केन्द्र बन गया था इस तूफानी आन्दोलन ने समूचे महाराष्ट्र को हिला दिया था । छत्रपति शाहू जी सवर्णो, शूद्रों तथा अतिशूद्रों का मानवी समीकरण चाहते थे। वे सभी की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में समानता के आकांक्षी थे किन्तु ब्राह्मणों का दुर्भाव शिखर पर था । वे मात्र अपने सम्मान और शिक्षित होने से संतुष्ट नहीं थे। प्रत्युत वे यह भी चाहते थे कि अब्राह्मण आर्थिक, बौद्धिक और शैक्षिक दृष्टि से कभी आगे न बढ़ सके। इसके लिये उनको हर कुर्बानी स्वीकार थी। परन्तु अब्राह्मणों में व्याप्त अन्धविश्वास तथा जड़ता ब्राह्मणो की जड़े जमाये हुई थी। उन्हीं दिनों ब्राह्मणों ने बीजापुर को अपने प्रतिनिधि के रूप में छत्रपति शाहू जी के पास यह जानने के लिये भेजा कि वेदोक्त विवाद में कोल्हापुर के दीवान जो कार्यवाही कर रहे है वह छत्रपति के आदेश से कर रहें है अथवा स्वतन्त्र रूप से कर रहे है ।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पाकिस्तान पुलिस ने बुधवार को इमरान के खिलाफ एक वकील की हत्या के आरोप में केस दर्ज किया है. यह वकील उनके खिलाफ देशद्रोह की कार्रवाई करने की मांग कर रहा था.
पुलिस ने 70 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर के खिलाफ 'हत्या के लिए उकसाने' का मामला दर्ज किया है. इमरान को बीते साल अप्रैल में संसद में विश्वास मत हारने के बाद पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने संसद को भंग कर दिया था. इसके बाद से ही वह दर्जनों मामला का सामना कर रहे हैं.
पूर्व पीएम पर वकील की हत्या का आरोप नहीं लगा है. उन्होंने अपने खिलाफ सभी मामलों को सत्ता पर काबिज दलों द्वारा मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया है. उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि वह 16 अन्य मामलों में जमानत लेने के लिए गुरुवार को अदालत जाएंगे. प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता बाबर खान ने कहा कि अगर हत्या के मामले की सुनवाई होती है तो खान औपचारिक आरोपों का सामना कर सकते हैं.
मारे गए वकील अब्दुर रजाक ने अविश्वास प्रस्ताव के बाद अपनी सरकार को भंग करने के लिए खान के खिलाफ देशद्रोह की कार्यवाही की मांग करते हुए कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. पुलिस ने कहा कि मंगलवार को रजाक अदालत जा रहा था, तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी.
रजाक के वकील बेटे सिराज अहमद ने पुलिस को बताया कि उनके पिता को पूर्व प्रधानमंत्री के अपमान से अज्ञात लोगों द्वारा मार दिया गया था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अज्ञात बदमाशों और इमरान के बीच क्या संबंध है.
बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में 9 मई को गिरफ्तार किए जाने के बाद इमरान खान के समर्थकों ने सरकारी दफ्तरों और सेना के भवनों पर हमला कर दिया था. हालांकि इमरान को हिंसा उकसाने के आतंकवाद के आरोप में जमानत पर रिहा कर दिया गया था.
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पाकिस्तान पुलिस ने बुधवार को इमरान के खिलाफ एक वकील की हत्या के आरोप में केस दर्ज किया है. यह वकील उनके खिलाफ देशद्रोह की कार्रवाई करने की मांग कर रहा था. पुलिस ने सत्तर वर्षीय पूर्व क्रिकेटर के खिलाफ 'हत्या के लिए उकसाने' का मामला दर्ज किया है. इमरान को बीते साल अप्रैल में संसद में विश्वास मत हारने के बाद पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने संसद को भंग कर दिया था. इसके बाद से ही वह दर्जनों मामला का सामना कर रहे हैं. पूर्व पीएम पर वकील की हत्या का आरोप नहीं लगा है. उन्होंने अपने खिलाफ सभी मामलों को सत्ता पर काबिज दलों द्वारा मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया है. उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि वह सोलह अन्य मामलों में जमानत लेने के लिए गुरुवार को अदालत जाएंगे. प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता बाबर खान ने कहा कि अगर हत्या के मामले की सुनवाई होती है तो खान औपचारिक आरोपों का सामना कर सकते हैं. मारे गए वकील अब्दुर रजाक ने अविश्वास प्रस्ताव के बाद अपनी सरकार को भंग करने के लिए खान के खिलाफ देशद्रोह की कार्यवाही की मांग करते हुए कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. पुलिस ने कहा कि मंगलवार को रजाक अदालत जा रहा था, तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी. रजाक के वकील बेटे सिराज अहमद ने पुलिस को बताया कि उनके पिता को पूर्व प्रधानमंत्री के अपमान से अज्ञात लोगों द्वारा मार दिया गया था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अज्ञात बदमाशों और इमरान के बीच क्या संबंध है. बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में नौ मई को गिरफ्तार किए जाने के बाद इमरान खान के समर्थकों ने सरकारी दफ्तरों और सेना के भवनों पर हमला कर दिया था. हालांकि इमरान को हिंसा उकसाने के आतंकवाद के आरोप में जमानत पर रिहा कर दिया गया था.
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार हम बात कर रहे है एक्टर इरफ़ान खान के बारे में जो के एक प्रकार से अब बॉलीवुड की फिल्मो ले साथ ही साथ हॉलीवुड की फिल्मो में भी खासा व्यस्त है. अब बात कर लेते है उनकी एक अपकमिंग फिल्म 'हिंदी मीडियम' के बारे में तो बता दे कि, 'लाइफ ऑफ़ पाई' जैसी फिल्म में अपनी शानदार अदाकारी का अपने जलवा दिखा चुके इरफ़ान खान जिनकी यह फिल्म जो के शिक्षा पर आधारित फिल्म है.
अब इस फिल्म का एक शानदार ट्रेलर भी रिलीज हो गया है. फ़िल्म 'हिंदी मीडियम' का ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में अपनी बेटी के दाखिले के लिए ज़ोर लगाते एक कपल की कहानी दिखाता ये ट्रेलर वाकई में सच्चाई को छूता है. इस फिल्म का नाम 'हिंदी मीडियम' है इमरान के साथ इस फिल्म में पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर भी नजर आएगी.
इनके अलावा इस फिल्म में अमृता सिंह भी नजर आएगी. तथा स्कूलों के चक्कर लगाते माता पिता और स्कूल के मानदंडों के अनुसार अंग्रेज़ी सीखने की कोशिश करता एक हिंदी भाषी पिता, समाज की सोच पर कड़वा कटाक्ष दिखाता है. इरफ़ान सबा की यह फिल्म 12 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
50 साल की उम्र में चौथे बच्चे के पिता बने बॉलीवुड के 'गनी भाई'
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार हम बात कर रहे है एक्टर इरफ़ान खान के बारे में जो के एक प्रकार से अब बॉलीवुड की फिल्मो ले साथ ही साथ हॉलीवुड की फिल्मो में भी खासा व्यस्त है. अब बात कर लेते है उनकी एक अपकमिंग फिल्म 'हिंदी मीडियम' के बारे में तो बता दे कि, 'लाइफ ऑफ़ पाई' जैसी फिल्म में अपनी शानदार अदाकारी का अपने जलवा दिखा चुके इरफ़ान खान जिनकी यह फिल्म जो के शिक्षा पर आधारित फिल्म है. अब इस फिल्म का एक शानदार ट्रेलर भी रिलीज हो गया है. फ़िल्म 'हिंदी मीडियम' का ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में अपनी बेटी के दाखिले के लिए ज़ोर लगाते एक कपल की कहानी दिखाता ये ट्रेलर वाकई में सच्चाई को छूता है. इस फिल्म का नाम 'हिंदी मीडियम' है इमरान के साथ इस फिल्म में पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर भी नजर आएगी. इनके अलावा इस फिल्म में अमृता सिंह भी नजर आएगी. तथा स्कूलों के चक्कर लगाते माता पिता और स्कूल के मानदंडों के अनुसार अंग्रेज़ी सीखने की कोशिश करता एक हिंदी भाषी पिता, समाज की सोच पर कड़वा कटाक्ष दिखाता है. इरफ़ान सबा की यह फिल्म बारह मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. पचास साल की उम्र में चौथे बच्चे के पिता बने बॉलीवुड के 'गनी भाई'
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स्टोइनिस को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 10वें संस्करण में अपनी टीम किंग्स इलेवन पंजाब के साथ पांच मई को अभ्यास के दौरान दाहिने कंधे में चोट लग गई थी। भारत में हुए स्कैन के बाद स्टोइनिस स्वदेश लौट आए थे।
वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रवक्ता के हवाले से लिखा है, उन्होंने गेंदबाजी की और मेडिकल स्टाफ चोट से उबरने की उनकी प्रगति से खुश है। स्टोइनिस ने आईपीएल में पंजाब के लिए तीन पारियों में महज 17 रन बनाए थे और दो विकेट लिए थे।
मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
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स्टोइनिस को इंडियन प्रीमियर लीग के दसवें संस्करण में अपनी टीम किंग्स इलेवन पंजाब के साथ पांच मई को अभ्यास के दौरान दाहिने कंधे में चोट लग गई थी। भारत में हुए स्कैन के बाद स्टोइनिस स्वदेश लौट आए थे। वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रवक्ता के हवाले से लिखा है, उन्होंने गेंदबाजी की और मेडिकल स्टाफ चोट से उबरने की उनकी प्रगति से खुश है। स्टोइनिस ने आईपीएल में पंजाब के लिए तीन पारियों में महज सत्रह रन बनाए थे और दो विकेट लिए थे। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
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आज समाज डिजिटल, पानीपत :
पानीपत। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि सामान्य पात्रता परीक्षा (सीइटी) 2022 को कराने को लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं। जिले में 44 केंद्रों पर 70 हजार के करीब अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इनमें 34 परीक्षा केंद्र पानीपत व 10 परीक्षा केंद्र समालखा में बनाये गये हैं। परीक्षा को सफलतापूर्वक कराने को लेकर सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गये हैं। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता से करवाने के लिए 13 ड्यूटी मजिस्ट्रेट और 4 फ्लाइंग स्क्वायड बनाई गई है। अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। डीआरओ रूम को कंट्रोल रूम बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि सामान्य पात्रता परीक्षा दो शिफ्टों में होगी। 5 नवंबर को 10 बजे से 11. 45 बजे तक की पहली शिफ्ट व दूसरी बाद दोपहर 3 बजे से 4. 45 बजे तक की होगी। यही शडयूल 6 नवंबर की परीक्षा का रहेगा। जो अभ्यर्थी पानीपत से करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, सोनीपत और गुरुग्राम में परीक्षा देने के लिए जायेंगे उनके लिए परिवहन विभाग ने 210 बसों की व्यवस्था की है। इनमें परिवहन विभाग की बसों के अलावा सहकारिता समितियों, प्राईवेट स्कूलों की बसें भी शामिल हैं। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि बस स्टैंड पर 50 कर्मचारियों व अधिकारियों को एडवांस बुकिंग के लिए लगाया गया है। एडवांस बुकिंग के लिए 10 काउंटर बनाए गए हैं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड में अलग से कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। एडवांस बुकिंग का समय शाम 5 बजे तक ही निर्धारित किया गया है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि बसों की एडवांस बुकिंग अभ्यर्थी बस डिपो में बनाए गए बुकिंग काउंटर पर करवा सकते हैं। अभ्यर्थी स्वयं बुकिंग काउंटर पर जाकर या उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति जाकर एडवांस बुकिंग करवा सकता है। सरकार ने बसों की एडवांस बुकिंग में होने वाली परेशानी से बचने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर फोन करके अभ्यर्थी बस सम्बंधी जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि बुकिंग के लिए बस अड्डों पर एडवांस सीट बुकिंग के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सरकार की ओर से सभी अभ्यर्थियों से अनुरोध किया गया है कि वे डिपो, सब डिपो में जाकर एडवांस बुकिंग करवाते हुए अपनी सीट नंबर सुरक्षित कर लें। सुशील सारवान ने बताया कि परीक्षा को लेकर बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए जिले में रात्रि ठहराव व परिवहन सुविधा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी परीक्षार्थी को रात्रि ठहराव या भोजन इत्यादि में कोई समस्या न आए, इसलिए शहर के सामाजिक संस्थाओं व धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई है।
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आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि सामान्य पात्रता परीक्षा दो हज़ार बाईस को कराने को लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं। जिले में चौंतालीस केंद्रों पर सत्तर हजार के करीब अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इनमें चौंतीस परीक्षा केंद्र पानीपत व दस परीक्षा केंद्र समालखा में बनाये गये हैं। परीक्षा को सफलतापूर्वक कराने को लेकर सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गये हैं। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता से करवाने के लिए तेरह ड्यूटी मजिस्ट्रेट और चार फ्लाइंग स्क्वायड बनाई गई है। अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। डीआरओ रूम को कंट्रोल रूम बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सामान्य पात्रता परीक्षा दो शिफ्टों में होगी। पाँच नवंबर को दस बजे से ग्यारह. पैंतालीस बजे तक की पहली शिफ्ट व दूसरी बाद दोपहर तीन बजे से चार. पैंतालीस बजे तक की होगी। यही शडयूल छः नवंबर की परीक्षा का रहेगा। जो अभ्यर्थी पानीपत से करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, सोनीपत और गुरुग्राम में परीक्षा देने के लिए जायेंगे उनके लिए परिवहन विभाग ने दो सौ दस बसों की व्यवस्था की है। इनमें परिवहन विभाग की बसों के अलावा सहकारिता समितियों, प्राईवेट स्कूलों की बसें भी शामिल हैं। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि बस स्टैंड पर पचास कर्मचारियों व अधिकारियों को एडवांस बुकिंग के लिए लगाया गया है। एडवांस बुकिंग के लिए दस काउंटर बनाए गए हैं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड में अलग से कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। एडवांस बुकिंग का समय शाम पाँच बजे तक ही निर्धारित किया गया है। उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि बसों की एडवांस बुकिंग अभ्यर्थी बस डिपो में बनाए गए बुकिंग काउंटर पर करवा सकते हैं। अभ्यर्थी स्वयं बुकिंग काउंटर पर जाकर या उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति जाकर एडवांस बुकिंग करवा सकता है। सरकार ने बसों की एडवांस बुकिंग में होने वाली परेशानी से बचने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर फोन करके अभ्यर्थी बस सम्बंधी जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि बुकिंग के लिए बस अड्डों पर एडवांस सीट बुकिंग के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकार की ओर से सभी अभ्यर्थियों से अनुरोध किया गया है कि वे डिपो, सब डिपो में जाकर एडवांस बुकिंग करवाते हुए अपनी सीट नंबर सुरक्षित कर लें। सुशील सारवान ने बताया कि परीक्षा को लेकर बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए जिले में रात्रि ठहराव व परिवहन सुविधा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी परीक्षार्थी को रात्रि ठहराव या भोजन इत्यादि में कोई समस्या न आए, इसलिए शहर के सामाजिक संस्थाओं व धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई है।
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Viral Video: जीवन में सफलता हासिल करने और भीड़ से अलग दिखने के लिए हर किसी को अपना सर्वश्रेष्ठ करने की जरूरत होती है। बचपन से ही अच्छे गुणों का विकास होना आवश्यक है क्योंकि बच्चों का दिमाग नाजुक होता है और इसे आसानी से इच्छानुसार आकार दिया जा सकता है। लगभग हर माता-पिता अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर तैयार करने का प्रयास करते हैं।
बचपन बहुत सी चीजों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन एक यह भी कि उस उम्र में हम कितने दयालु होते हैं और हर किसी को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। बच्चों के ऐसे कई वीडियो हम सबने देखे होंगे, जहां वे बड़ों से ज्यादा जागरुक और दूसरों के प्रति प्यार पेश करते हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक छोटा बच्चा एक छोटे डॉगी की प्यास बुझाने में मदद कर रहा है। यह छोटा बच्चा अपने दयालु हावभाव और मासूमियत से इंटरनेट पर धूम मचा रहा है।
जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है, बच्चे को हैंडपंप को चलाते हुए देखा जा सकता है। इस बीच, डॉगी को पास इंतजार करते देखा जा सकता है। बच्चा पंप सही से नहीं चला पा रहा है, क्योंकि वह काफी छोटा है।
हालांकि, डॉगी के प्रति जाने-अनजाने उसके कार्य ने सबका दिल जीत लिया। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाती है और पंप से थोड़ा पानी बहने लगता है। और, डॉगी ख़ुशी से टपकते पानी को पीने लगता है। भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी सुसांता नंदा द्वारा ट्विटर पर साझा किया गया वीडियो वायरल हो गया है।
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Viral Video: जीवन में सफलता हासिल करने और भीड़ से अलग दिखने के लिए हर किसी को अपना सर्वश्रेष्ठ करने की जरूरत होती है। बचपन से ही अच्छे गुणों का विकास होना आवश्यक है क्योंकि बच्चों का दिमाग नाजुक होता है और इसे आसानी से इच्छानुसार आकार दिया जा सकता है। लगभग हर माता-पिता अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर तैयार करने का प्रयास करते हैं। बचपन बहुत सी चीजों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन एक यह भी कि उस उम्र में हम कितने दयालु होते हैं और हर किसी को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। बच्चों के ऐसे कई वीडियो हम सबने देखे होंगे, जहां वे बड़ों से ज्यादा जागरुक और दूसरों के प्रति प्यार पेश करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक छोटा बच्चा एक छोटे डॉगी की प्यास बुझाने में मदद कर रहा है। यह छोटा बच्चा अपने दयालु हावभाव और मासूमियत से इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है, बच्चे को हैंडपंप को चलाते हुए देखा जा सकता है। इस बीच, डॉगी को पास इंतजार करते देखा जा सकता है। बच्चा पंप सही से नहीं चला पा रहा है, क्योंकि वह काफी छोटा है। हालांकि, डॉगी के प्रति जाने-अनजाने उसके कार्य ने सबका दिल जीत लिया। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाती है और पंप से थोड़ा पानी बहने लगता है। और, डॉगी ख़ुशी से टपकते पानी को पीने लगता है। भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुसांता नंदा द्वारा ट्विटर पर साझा किया गया वीडियो वायरल हो गया है।
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दुबई, 12 सितंबर । मौजूदा विजेता मुंबई इंडियंस ने शनिवार को आईपीएल के आगामी सीजन के लिए अपना थीम कैम्पेन लांच कर दिया है।
मौजूदा विजेता प्रशंसकों को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए जश्न में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रही है।
फ्रेंचाइजी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें प्रशंसक अपने घरों और कॉलोनियों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर जश्न मानते दिखाई दे रहे हैं।
फ्रेंचाइजी ने एक बयान में कहा, यह हमारे परिवार की भावना को बताता है जो किसी भी स्थिति में सिमटती नहीं है।
आईपीएल-2020 का आयोजन इस बार कोविड-19 के कारण संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में किया जा रहा है। सीजन के पहले मैच में मुंबई का सामना चेन्नई सपुर किंग्स से होगा।
फ्रेंचाइजी ने शनिवार को ही ट्वीट कर बताया है कि केरन पोलार्ड और शेरफाने रदरफोर्ड टीम के साथ जुड़ने के लिए यूएई पहुंच गए हैं।
Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
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दुबई, बारह सितंबर । मौजूदा विजेता मुंबई इंडियंस ने शनिवार को आईपीएल के आगामी सीजन के लिए अपना थीम कैम्पेन लांच कर दिया है। मौजूदा विजेता प्रशंसकों को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए जश्न में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रही है। फ्रेंचाइजी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें प्रशंसक अपने घरों और कॉलोनियों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर जश्न मानते दिखाई दे रहे हैं। फ्रेंचाइजी ने एक बयान में कहा, यह हमारे परिवार की भावना को बताता है जो किसी भी स्थिति में सिमटती नहीं है। आईपीएल-दो हज़ार बीस का आयोजन इस बार कोविड-उन्नीस के कारण संयुक्त अरब अमीरात में किया जा रहा है। सीजन के पहले मैच में मुंबई का सामना चेन्नई सपुर किंग्स से होगा। फ्रेंचाइजी ने शनिवार को ही ट्वीट कर बताया है कि केरन पोलार्ड और शेरफाने रदरफोर्ड टीम के साथ जुड़ने के लिए यूएई पहुंच गए हैं। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
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अगर आप भी हॉस्टल में रहते हैं या किसी के यहां पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन में हैं. तब आपको 12 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ सकता है. इस बारे में कर्नाटक के एएआर ने एक बड़ा फैसला सुनाया है.
अगर कोई व्यक्ति हॉस्टल में रेंट या किसी पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन के लिए पेमेंट करता है, तब उसे 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी देना पड़ सकता है. ये कहना है कर्नाटक में जीएसटी-अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग्स (एएआर) का. दरअसल दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई करते हुए जीएसटी-एएआर ने ये फैसला सुनाया है.
जीएसटी-एएआर का कहना है कि हॉस्टल के लिए चुकाया गया रेंट जीएसटी छूट के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि ये कोई रेजिडेंशियल रहवास नहीं है. कर्नाटक के श्रीसांई लग्जीरियस स्टे एलएलपी के एक मामले की सुनवाई करते हुए जीएसटी-एएआर ने कहा कि जीएसटी के तहत किसी रेजिडेंशियल ड्वैलिंग के लिए रेंट पर जीएसटी छूट उपलब्ध है.
इसे भी देखें : गोल्ड इंवेस्टमेंट पर लगता है इनकम टैक्स, जानें कैसे दिखाना है ITR में?
श्रीसांई कर्नाटक में पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन डेवलप और मैनेज करती है. उसने जीएसटी-एएआर में अप्लीकेशन दायर की थी कि ये हॉस्टल्स आम घरों की तरह हैं, इसलिए इनके किराये पर जीएसटी नहीं वसूला जाना चाहिए.
देश में अभी रेजिडेंशियल ड्वैलिंग्स के रेंट पर कोई जीएसटी नहीं लगता है. वहीं ऐसे होटल्स, इन, गेस्ट हाउस जहां एक दिन का किराया 1,000 रुपये तक हैं, उन्हें भी जीएसटी से छूट प्राप्त थी. फिर जुलाई 2022 में सरकार ने इन होटल्स और गेस्ट हाउस को दी जाने वाली जीएसटी छूट खत्म करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. ये छूट 18 जुलाई 2022 से समाप्त हो गई.
जीएसटी-एएआर ने कहा कि हॉस्टल अकॉमोडेशन को 17 जुलाई 2022 तक ही जीएसटी से छूट प्राप्त थी. वो भी प्रतिदिन 1000 रुपये से कम किराया होने की वजह से, अब हॉस्टल अकॉमोडेशन पर 12 प्रतिशत का जीएसटी देना होगा. जीएसटी-एएआर के इस फैसले के बाद हॉस्टल या पीजी में रहने वाले स्टूडेंट्स का खर्च बढ़ जाएगा.
जीएसटी कानून मुताबिक यदि किसी जगह को रेजिडेंशियल पर्पज से किराये पर दिया जाता है, तभी उस पर किसी तरह का जीएसटी नहीं देना होता है. जीएसटी-एएआर ने स्पष्ट किया है कि रेजिडेंशियल ड्वैलिंग का मतलब परमानेंट स्टे से है. इसलिए इसमें गेस्ट हाउस, लॉज या उस जैसे निवास शामिल नहीं होते.
इसके अलावा एक अन्य मामले में जीएसटी-एएआर ने माना कि हॉस्टल में दी जाने वाली टीवी, वाशिंग मशीन इत्यादि की सुविधाएं बंडल (क्लब की गई) सर्विस नहीं हैं. इसलिए इन पर टैक्स अलग से लगाया जाना चाहिए.
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अगर आप भी हॉस्टल में रहते हैं या किसी के यहां पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन में हैं. तब आपको बारह प्रतिशत जीएसटी देना पड़ सकता है. इस बारे में कर्नाटक के एएआर ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. अगर कोई व्यक्ति हॉस्टल में रेंट या किसी पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन के लिए पेमेंट करता है, तब उसे बारह प्रतिशत की दर से जीएसटी देना पड़ सकता है. ये कहना है कर्नाटक में जीएसटी-अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग्स का. दरअसल दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई करते हुए जीएसटी-एएआर ने ये फैसला सुनाया है. जीएसटी-एएआर का कहना है कि हॉस्टल के लिए चुकाया गया रेंट जीएसटी छूट के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि ये कोई रेजिडेंशियल रहवास नहीं है. कर्नाटक के श्रीसांई लग्जीरियस स्टे एलएलपी के एक मामले की सुनवाई करते हुए जीएसटी-एएआर ने कहा कि जीएसटी के तहत किसी रेजिडेंशियल ड्वैलिंग के लिए रेंट पर जीएसटी छूट उपलब्ध है. इसे भी देखें : गोल्ड इंवेस्टमेंट पर लगता है इनकम टैक्स, जानें कैसे दिखाना है ITR में? श्रीसांई कर्नाटक में पेइंग गेस्ट अकॉमोडेशन डेवलप और मैनेज करती है. उसने जीएसटी-एएआर में अप्लीकेशन दायर की थी कि ये हॉस्टल्स आम घरों की तरह हैं, इसलिए इनके किराये पर जीएसटी नहीं वसूला जाना चाहिए. देश में अभी रेजिडेंशियल ड्वैलिंग्स के रेंट पर कोई जीएसटी नहीं लगता है. वहीं ऐसे होटल्स, इन, गेस्ट हाउस जहां एक दिन का किराया एक,शून्य रुपयापये तक हैं, उन्हें भी जीएसटी से छूट प्राप्त थी. फिर जुलाई दो हज़ार बाईस में सरकार ने इन होटल्स और गेस्ट हाउस को दी जाने वाली जीएसटी छूट खत्म करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. ये छूट अट्ठारह जुलाई दो हज़ार बाईस से समाप्त हो गई. जीएसटी-एएआर ने कहा कि हॉस्टल अकॉमोडेशन को सत्रह जुलाई दो हज़ार बाईस तक ही जीएसटी से छूट प्राप्त थी. वो भी प्रतिदिन एक हज़ार रुपयापये से कम किराया होने की वजह से, अब हॉस्टल अकॉमोडेशन पर बारह प्रतिशत का जीएसटी देना होगा. जीएसटी-एएआर के इस फैसले के बाद हॉस्टल या पीजी में रहने वाले स्टूडेंट्स का खर्च बढ़ जाएगा. जीएसटी कानून मुताबिक यदि किसी जगह को रेजिडेंशियल पर्पज से किराये पर दिया जाता है, तभी उस पर किसी तरह का जीएसटी नहीं देना होता है. जीएसटी-एएआर ने स्पष्ट किया है कि रेजिडेंशियल ड्वैलिंग का मतलब परमानेंट स्टे से है. इसलिए इसमें गेस्ट हाउस, लॉज या उस जैसे निवास शामिल नहीं होते. इसके अलावा एक अन्य मामले में जीएसटी-एएआर ने माना कि हॉस्टल में दी जाने वाली टीवी, वाशिंग मशीन इत्यादि की सुविधाएं बंडल सर्विस नहीं हैं. इसलिए इन पर टैक्स अलग से लगाया जाना चाहिए.
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अनूपपुर,डेस्क रिपोर्ट। नर्मदा दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी हादसे का शिकार हो गई, रीवा से अमरकंटक जा रहे श्रद्धालुओं का वाहन तेज गति के कारण अंनियंत्रित हो गया और पेड़ से जा टकराया जिसमें एक व्यक्ति की घटना स्थल पर मौत हो गई। 6 अन्य घायल हो गये, बताया जा रहा है कि अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के दर्शन करने रीवा से श्रद्धालु अपने वाहन जीप क्र. एमपी 17 बी ए 1608 से आ रहे थे। अमरकंटक पहुंचने से पहले रविवार की सुबह क्रीड़ा परिसर तिराहा के समीप वाहन के तेज गति के होने के चलतें ड्रायवर का वाहन पर नियंत्रण नही रहा और गाड़ी सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई जिसमे चालक के दूसरी ओर बैठे व्यक्ति की मौत हो गई। इसके साथ ही गाड़ी में सवार 6 अन्य घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक में प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय अनूपपुर भेज दिया गया। स्थानीय लोगो ने बताया कि वाहन गति तेज थी जिससे अंनियंत्रित हो कर सीधे पेड़ जा टकराई इससे चालक के बगल का हिस्सा पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया है और सामने बैठे ही व्यक्ति की मृत्यु हुई है। फिलहाल कुछ घायलों की हालत गंभीर है।
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अनूपपुर,डेस्क रिपोर्ट। नर्मदा दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी हादसे का शिकार हो गई, रीवा से अमरकंटक जा रहे श्रद्धालुओं का वाहन तेज गति के कारण अंनियंत्रित हो गया और पेड़ से जा टकराया जिसमें एक व्यक्ति की घटना स्थल पर मौत हो गई। छः अन्य घायल हो गये, बताया जा रहा है कि अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के दर्शन करने रीवा से श्रद्धालु अपने वाहन जीप क्र. एमपी सत्रह बी ए एक हज़ार छः सौ आठ से आ रहे थे। अमरकंटक पहुंचने से पहले रविवार की सुबह क्रीड़ा परिसर तिराहा के समीप वाहन के तेज गति के होने के चलतें ड्रायवर का वाहन पर नियंत्रण नही रहा और गाड़ी सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई जिसमे चालक के दूसरी ओर बैठे व्यक्ति की मौत हो गई। इसके साथ ही गाड़ी में सवार छः अन्य घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक में प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय अनूपपुर भेज दिया गया। स्थानीय लोगो ने बताया कि वाहन गति तेज थी जिससे अंनियंत्रित हो कर सीधे पेड़ जा टकराई इससे चालक के बगल का हिस्सा पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया है और सामने बैठे ही व्यक्ति की मृत्यु हुई है। फिलहाल कुछ घायलों की हालत गंभीर है।
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Indian Premier League 2021, Kolkata Knight Riders vs Chennai Super Kings, Live Score and Updates: आईपीएल-2021 में 21 अप्रैल को दूसरा मैच कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) और चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम (Wankhede Stadium, Mumbai) में खेला जाना है. सीएसके अब तक 3 में से 2 मैच अपने नाम कर चुकी है, जबकि केकेआर ने 3 में से महज 1 मुकाबला ही अपने नाम किया है. आज चेन्नई की निगाहें जीत की हैट्रिक लगाने पर होंगी.
केकेआर की टीम का वानखेड़े में यह इस सत्र का पहला मैच होगा. वह लगातार दो हार झेलने के बाद यहां पहुंची है और ऐसे में धोनी की अगुवाई वाली सीएसके का पलड़ा भारी लगता है. इयोन मोर्गन की कप्तानी वाला केकेआर अपने अभियान को पटरी पर लाने के लिए टीम में कुछ बदलाव कर सकता है।.
कोलकाता नाइटराइडर्स : इयोन मोर्गन (कप्तान), दिनेश कार्तिक, शुभमन गिल, नितीश राणा, टिम सेफर्ट, रिंकू सिंह, आंद्रे रसेल, सुनील नारायण, कुलदीप यादव, शिवम मावी, लॉकी फर्ग्यूसन, पैट कमिंस, कमलेश नागरकोटी, संदीप वारियर, प्रसिद्ध कृष्णा, राहुल त्रिपाठी, वरुण चक्रवर्ती, शाकिब अल हसन, शेल्डन जैक्सन, वैभव अरोड़ा, हरभजन सिंह, करुण नायर, बेन कटिंग, वेंकटेश अय्यर और पवन नेगी.
चेन्नई सुपर किंग्स : महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, केएम आसिफ, दीपक चाहर, ड्वेन ब्रावो, फाफ डु प्लेसिस, इमरान ताहिर, एन जगदीसन, कर्ण शर्मा, लुंगी एंगिडी, मिशेल सेंटनर, रविंद्र जडेजा, रितुराज गायकवाड़, शार्दुल ठाकुर, सैम करन, जोश हेजलवुड, आर साई किशोर, रॉबिन उथप्पा, मोइन अली, कृष्णप्पा गौतम, चेतेश्वर पुजारा, एम हरिशंकर रेड्डी, के भगत वर्मा और सी हरि निशांत.
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Indian Premier League दो हज़ार इक्कीस, Kolkata Knight Riders vs Chennai Super Kings, Live Score and Updates: आईपीएल-दो हज़ार इक्कीस में इक्कीस अप्रैल को दूसरा मैच कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है. सीएसके अब तक तीन में से दो मैच अपने नाम कर चुकी है, जबकि केकेआर ने तीन में से महज एक मुकाबला ही अपने नाम किया है. आज चेन्नई की निगाहें जीत की हैट्रिक लगाने पर होंगी. केकेआर की टीम का वानखेड़े में यह इस सत्र का पहला मैच होगा. वह लगातार दो हार झेलने के बाद यहां पहुंची है और ऐसे में धोनी की अगुवाई वाली सीएसके का पलड़ा भारी लगता है. इयोन मोर्गन की कप्तानी वाला केकेआर अपने अभियान को पटरी पर लाने के लिए टीम में कुछ बदलाव कर सकता है।. कोलकाता नाइटराइडर्स : इयोन मोर्गन , दिनेश कार्तिक, शुभमन गिल, नितीश राणा, टिम सेफर्ट, रिंकू सिंह, आंद्रे रसेल, सुनील नारायण, कुलदीप यादव, शिवम मावी, लॉकी फर्ग्यूसन, पैट कमिंस, कमलेश नागरकोटी, संदीप वारियर, प्रसिद्ध कृष्णा, राहुल त्रिपाठी, वरुण चक्रवर्ती, शाकिब अल हसन, शेल्डन जैक्सन, वैभव अरोड़ा, हरभजन सिंह, करुण नायर, बेन कटिंग, वेंकटेश अय्यर और पवन नेगी. चेन्नई सुपर किंग्स : महेंद्र सिंह धोनी , सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, केएम आसिफ, दीपक चाहर, ड्वेन ब्रावो, फाफ डु प्लेसिस, इमरान ताहिर, एन जगदीसन, कर्ण शर्मा, लुंगी एंगिडी, मिशेल सेंटनर, रविंद्र जडेजा, रितुराज गायकवाड़, शार्दुल ठाकुर, सैम करन, जोश हेजलवुड, आर साई किशोर, रॉबिन उथप्पा, मोइन अली, कृष्णप्पा गौतम, चेतेश्वर पुजारा, एम हरिशंकर रेड्डी, के भगत वर्मा और सी हरि निशांत.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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तेलुगु-कड़ी लिपि.
के दानपत्रों के अक्षरों के सिर चौकूटे नहीं किंतु छोटी सी आड़ी लकीर से बने हुए हैं. इस लिपिपत्र की लिपियों का समय केवल अनुमान से ही लिखा है.
लिपिपत्र ४३वें की मूल पंक्तियों का' नागरी अक्षरांतरजितं भगवता श्रीविजयपलक्कडस्थानात् परमब्रह्मरायस्य स्ववाहबलार्जितो जितक्षा तपोनिधेः विधितसर्व्व मर्यादस्य स्थितिस्थितस्यामितात्मनो महाराजस्य श्रोस्कन्दवणः प्रपौत्रस्याञ्चितशक्ति सिद्धिसम्पन्नस्य प्रतापोपनवराजमण्डलस्य महाराजस्य वसुधातलैकवीरस्य श्री वीरवणः पौत्रस्य देवद्विजलिपिपत्र ४४ वां.
यह लिपिपत्र देवगिरि से मिले हुए कदंबवंशी राजा मृगेशवर्मन और काकुस्थवर्मन् ' के दानपत्तों से तय्यार किया गया है. इनके अक्षरों के सिर चौकंटे परंतु भीतर से भरे हुए हैं और कितने ही अक्षरों की आड़ी लकीरें विशेष कर स्वमदार बनती गई हैं (देखो, मृगेशवर्मन् के दानपत्रों में इ, ख, ज, ट, ड, घ, ष, भ, म. व और ह, और काकुस्थवर्मन् के दानपत्र में इ, ख, च, ढ, द, ल आदि ).
लिपिपत्र ४४वें की मूल पंक्तियों का नागरी अक्षरांतर -
सिद्दम् ॥ जयत्यहंस्त्रिलोकेशः सर्व्वभूतहिते रतः रागायरिइरोनन्ती मन्तज्ञानदुगौश्वरः ।। स्वस्ति विजय वैज[य] त्या[:] स्वामिम हासेनमातृगणानुद्ध्या (ध्या)ताभिषिक्तानां मानव्यसगोचाणां' हारितिपु()()गिरसा प्रतिकृतम्बाध्य (ध्या ) यचर्चकाना (नां) सहसदंबाना (नां) कदंबानां अनेकजन्मान्तरीपार्जित विपुलपुण्य स्कन्धः आइवार्जितलिपिपत्र ४५ वां.
यह लिपिपत्र चालुक्यवंशी राजा मंगलेश्वर के समय के शक सं. ५०० ( ई. स. ५७८) के शिलालेख , उसी वंश के राजा पुलुकेशिन ( दूसरे ) के हैदराबाद (निज़ाम राज्य में ) से मिले हुए शक सं. ५३४ ( ई. स. ६१२ ) के दानपत्र और पूर्वी चालुक्य राजा सर्वलोकाश्रय ( विजयसिद्धि, मंगियुवराज ) के राज्यवर्ष दूसरे ( ई. स. ६७३ ) के दानपत्र से तय्यार किया गया है. मंगलेश्वर
१. ये मूल पंकियां उरुबुलि के दामपत्र से हैं. ९. ई. एँ, जि. ७, पृ ३५ के सामन के प्लेट से.
१. इं. ऍ; जि. ६, पृ. २४ और २५ के बीच के प्लेटो से.
५. ये मूल पंक्तियां मृगेशवर्मन् के दानपत्र से है.
५. "भिषिक्लानां' के 'ना' के पीछे ठीक वैसा ही विक है जैसा कि मृगेशवर्मन् के दामपत्र से दिये हुए अक्षरों में 'हिः' के बिसर्ग के नीचे की बिंदी के स्थान में पाया जाता है. संभव है कि यह अनुस्वार का सिद्ध हो ( न कि 'म्' का ) जो अक्षर के ऊपर नहीं किंतु भागे धरा हो. इस प्रकार का चिह्न उक्ल दानपत्र में तीन जगह मिलता है, अन्यत्र अनुस्वार का मियत चिक सर्वत्र अक्षर के ऊपर ही धरा है.
4. यहां भी ठीक वही चिह्न है जिसका विवेचन टिप्पण ८ में किया गया है.
● इं; पै; जि. १०, पृ. ५८ के पास के मेट से.
९. . इंजि. ८, पृ. २३८ और २३६ के बीच के प्लेटों से.
८. इं. ऍ; जि ६, पृ. ७२ और ७३ के बीच के प्लेटो से.
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तेलुगु-कड़ी लिपि. के दानपत्रों के अक्षरों के सिर चौकूटे नहीं किंतु छोटी सी आड़ी लकीर से बने हुए हैं. इस लिपिपत्र की लिपियों का समय केवल अनुमान से ही लिखा है. लिपिपत्र तैंतालीसवें की मूल पंक्तियों का' नागरी अक्षरांतरजितं भगवता श्रीविजयपलक्कडस्थानात् परमब्रह्मरायस्य स्ववाहबलार्जितो जितक्षा तपोनिधेः विधितसर्व्व मर्यादस्य स्थितिस्थितस्यामितात्मनो महाराजस्य श्रोस्कन्दवणः प्रपौत्रस्याञ्चितशक्ति सिद्धिसम्पन्नस्य प्रतापोपनवराजमण्डलस्य महाराजस्य वसुधातलैकवीरस्य श्री वीरवणः पौत्रस्य देवद्विजलिपिपत्र चौंतालीस वां. यह लिपिपत्र देवगिरि से मिले हुए कदंबवंशी राजा मृगेशवर्मन और काकुस्थवर्मन् ' के दानपत्तों से तय्यार किया गया है. इनके अक्षरों के सिर चौकंटे परंतु भीतर से भरे हुए हैं और कितने ही अक्षरों की आड़ी लकीरें विशेष कर स्वमदार बनती गई हैं . लिपिपत्र चौंतालीसवें की मूल पंक्तियों का नागरी अक्षरांतर - सिद्दम् ॥ जयत्यहंस्त्रिलोकेशः सर्व्वभूतहिते रतः रागायरिइरोनन्ती मन्तज्ञानदुगौश्वरः ।। स्वस्ति विजय वैज[य] त्या[:] स्वामिम हासेनमातृगणानुद्ध्या ताभिषिक्तानां मानव्यसगोचाणां' हारितिपुगिरसा प्रतिकृतम्बाध्य यचर्चकाना सहसदंबाना कदंबानां अनेकजन्मान्तरीपार्जित विपुलपुण्य स्कन्धः आइवार्जितलिपिपत्र पैंतालीस वां. यह लिपिपत्र चालुक्यवंशी राजा मंगलेश्वर के समय के शक सं. पाँच सौ के शिलालेख , उसी वंश के राजा पुलुकेशिन के हैदराबाद से मिले हुए शक सं. पाँच सौ चौंतीस के दानपत्र और पूर्वी चालुक्य राजा सर्वलोकाश्रय के राज्यवर्ष दूसरे के दानपत्र से तय्यार किया गया है. मंगलेश्वर एक. ये मूल पंकियां उरुबुलि के दामपत्र से हैं. नौ. ई. एँ, जि. सात, पृ पैंतीस के सामन के प्लेट से. एक. इं. ऍ; जि. छः, पृ. चौबीस और पच्चीस के बीच के प्लेटो से. पाँच. ये मूल पंक्तियां मृगेशवर्मन् के दानपत्र से है. पाँच. "भिषिक्लानां' के 'ना' के पीछे ठीक वैसा ही विक है जैसा कि मृगेशवर्मन् के दामपत्र से दिये हुए अक्षरों में 'हिः' के बिसर्ग के नीचे की बिंदी के स्थान में पाया जाता है. संभव है कि यह अनुस्वार का सिद्ध हो जो अक्षर के ऊपर नहीं किंतु भागे धरा हो. इस प्रकार का चिह्न उक्ल दानपत्र में तीन जगह मिलता है, अन्यत्र अनुस्वार का मियत चिक सर्वत्र अक्षर के ऊपर ही धरा है. चार. यहां भी ठीक वही चिह्न है जिसका विवेचन टिप्पण आठ में किया गया है. ● इं; पै; जि. दस, पृ. अट्ठावन के पास के मेट से. नौ. . इंजि. आठ, पृ. दो सौ अड़तीस और दो सौ छत्तीस के बीच के प्लेटों से. आठ. इं. ऍ; जि छः, पृ. बहत्तर और तिहत्तर के बीच के प्लेटो से.
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श्रीमगवद्गीता सार ।
तथा स्थिति की व्याख्या और विवरण प्रगट करती दिखायी देतो है, तो जिज्ञास पुरुषको इतने ही से यह सोच कर सन्तुष्ट होना चाहिये, कि एक यथार्थ और समुचित फल उसके हाथ लगा है।
श्लोक १२/१३ -प्रारम्भ में हो चिन्ताशील पुरुष को ये बातें सावधानता पूर्वक स्मरण रखने का आदेश किया जाता है :( १ ) मुख्यतः, क्या सत् और मत् है ? ( २ ) मनुष्य में कोई ऐसी चीज़ है, जो और आत्मा को एक समझने से मना करती है।
( ३ ) अहम् का तात्पर्य एक प्रधानतः सत् पदार्थ से हैएक ऐम्रा सत् पदार्थ जो परिवर्तनशील स्थिति से भिन्न-भिन्न रूप से प्रभावान्वित होने पर भी स्वयं परिवर्तनशील नहीं तथा जो अपने को सबका आधारभूत समझता है। ऐसे ही सत् पदार्थ को 'आत्मा' कहते हैं ।
( ४ ) जो कुछ मुख्यतः मत् है, उसका बिल्कुल प्रभाव नहीं हो सकता । तर्कशास्तके कार्य-कारण नियम के अनुसार सत् पदार्थ की जड़ एक नित्य पदार्थ ही हो सकता है। और जो कुछ परिवर्तन इसके सम्भव है, वे इसको केवल भिन्न-भिन्न अवस्थायें तथा विकार मात्र हैं। इसोको विनाश कहते हैं, विनाश कोई स्वतन्त्र वस्तु नहीं । चाहे यह चैतन्य जीव हो या जड़ वस्तु हो, मुख्यतः इस सत्-पदार्थको स्वतः या इसके प्रधान रूप में अवश्य हो नित्य मानना होगा। यदि यह नियम अतीत और वर्त्तमानके विषय में सत्य है, तो भविष्यत् के विषय में भी इसको सत्य मानने के लिये विवश होते हैं। यह एक मामूली उत्ति है, कि वस्तुका नाश नहीं होता ( Matter is indestructible.)। पूर्वोल्लिखित नियममें और इस मामूली उक्तिमें वस्तुगत्या ऐक्य है । जैसी परिभाषा उस नियमको की गयी है, उससे इस मामूली उक्ति के भाव स्पष्ट व्यक्त हो जाते हैं। नियम से सत्यका उघतर और
साधारण उक्ति तो केवल चेतना रहित वस्तु के विषय में है। किन्तु यहाँ दिखलाया गया है, कि इस उक्ति का गूढ़तर अर्थ है और अन्य एक पदार्थ के विषय में भी इसका उपयोग कर सकते है । इस अन्य पदार्थ को हम लोग सुविधा के लिये आध्यात्मिक कहेंगे। इस अन्य पदार्थ में कुछ ऐसे गुण हैं, जो जड़ पदार्थ में नहीं हो सकते । इसलिये इम को जड़ पदार्थ से भिन्न पदार्थ मानना पड़ेगा। दोनों ही के अस्तित्वका पर्याप्त प्रमाण मिलता है। वह साधारण उक्ति कहती है कि, वस्तु अक्षय है; अब हम उस उक्तिका अधिक व्यापक अर्थ करके कहेंगे कि वस्तु ही नहीं, ये दोनों पदाघे अविनश्वर हैं। दोनों ही के विषय में यह कहना पड़ता हैः कि दोनों मुख्यतः अविनश्वर हैंः अर्थात् दोनों ही का भूत, भविषत् और वर्तमान में प्रधानतः एक ही रूप रहता है। दोनों ही काल आदि है न अन्त है; दोनों ही स्थिति के अधीन हैं। जड़ वस्तुमं फेरफार या रूपान्तर होता है, परन्तु चैतन्य पदार्थ में नहीं। पहला विच्छेद्य है। उसके भिन्न-भिन्न अंश हो सकते हैं; उसके रूप स्थूल होते हैं। दूसरे के भिन्न-भिन्न अंश या स्थूल रूप हो ही नहीं सकते। स्थान-विशेषके कारण जड़ पदार्थ का आध्यात्मिक पदार्थ पर प्रभाव पड़ सकता है और यही इन दोनों का पारस्परिक सम्बन्ध है ।
जो बातें अर्जुन मान गये हैं, वहीं से १२/१२ वें श्लोकों में विवाद प्रारम्भ होता है। अर्जुन धार्मिक और अधार्मिक कार्यों में भेद मान गये है। उन्हें निश्चित रूप से यह भी विश्वास है कि, उन कार्योंके क्या फल होंगे। उन्हें एक उच्चतर जीवन-देवताओं के जीवन जैसे जीवन में विश्वास है । नारकीय जीवनमें भी उन्हें उसी तरह विश्वास है। वे यह भी सकते हैं, कि समर में विजय या पराजय का होना उनको - किंबहुना किसी मनुष्य की इच्छा के अधीन नहीं है। अतएब, अर्जुन को लिए बुद्धिहीन सांसारिक मनुश्रीमद्भगवद्गीता सार ।
उन्हें ऊँचे दर्जकी शिक्षा प्राप्त है। इसलिये श्रोकृष्ण गहन से गहन और कक्ष से रुक्ष प्रश्नों को गर्जुन के सामने उपस्थित करना उचित समझते हैं। जो चीजें सर्वदा व्याप्त रहती हैं अथवा जिनके कारण ये शाखत नियम प्रभावित या परिवर्त्तित होते हैं । उन चीज़ोंको श्रोर हृषीकेश अर्जुनका ध्यान आकर्पित करते हैं । १२ वें और १३ वे लोकों में बातें इस टॅगसे कही गयी हैं, कि उनको पढ़कर भी पाठक "अहम्" "त्वाम्" और "एतद् " तथा परिवर्तनशील शरीरको एक मानने में अपनेको स्वतन्त्र समझ सकता है और सम्भव है कि इनको एक मानने को भूल उसपर तुरन्त व्यक्त न हो जाय । आगे चलकर भगवान् ने कहा है-वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृहाति नरोऽपरागित तथा. शरीराणि विहाय जोर्गान्यन्यानि मंयाति नवानि देही ।।२२।। इस लोक से स्पष्ट है कि, देह से भिन्न एक अविनाशी देही है; और दोनों को एक मानना बड़ी भारी भूल है। हाँ, ऐसी भूल करने में लोग खतन्त्र हैं। कोई रोकने वाला नहीं । विचार नियन्त्रित नहीं। अपने मत को अतार्किकताको बिना परवा किये लोग श्रीकृष्ण की पूर्वोल्लिखित सब बातों को स्वीकार कर सकते हैं। पर ऐसे विरुद्ध और भ्रान्त मतके खण्डन की सत्र युक्तियाँ साङ्गेतिक रूपसे दी गई है। कुछ युक्तियों का उल्लेख तो आगे चलकर श्रीकृष्ण ने स्पष्टतया कर दिया है। परन्तु सव युक्तियों का सार इसी एक प्रश्न में है- क्या जिस आधार पर सब चौंज़ें अवलम्बित हैं, वह आधार हो असत्य है; क्या एक ही पदार्थ - चाहे वह जड़ या चैतन्य पदार्थ हो - इन सबका आधार हैः किसी को यह चिन्तनीय क्षति पहुँचती है ? इन सब बातोंसे लोगोंका शरीर और आत्माको एक मानना भ्रान्त मालूम होता है। सूक्ष्म विचार से यह मालूम होता है कि, इस मतको मानने से कोई साध्य ही नहीं रह जाता और जब साध्य ही नहीं है, तब साध्य का साधन ढूँढ़ना निरर्थक और मरीचिका के अनुसन्धानको तरह व्यर्थ है ।
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श्रीमगवद्गीता सार । तथा स्थिति की व्याख्या और विवरण प्रगट करती दिखायी देतो है, तो जिज्ञास पुरुषको इतने ही से यह सोच कर सन्तुष्ट होना चाहिये, कि एक यथार्थ और समुचित फल उसके हाथ लगा है। श्लोक बारह/तेरह -प्रारम्भ में हो चिन्ताशील पुरुष को ये बातें सावधानता पूर्वक स्मरण रखने का आदेश किया जाता है : मुख्यतः, क्या सत् और मत् है ? मनुष्य में कोई ऐसी चीज़ है, जो और आत्मा को एक समझने से मना करती है। अहम् का तात्पर्य एक प्रधानतः सत् पदार्थ से हैएक ऐम्रा सत् पदार्थ जो परिवर्तनशील स्थिति से भिन्न-भिन्न रूप से प्रभावान्वित होने पर भी स्वयं परिवर्तनशील नहीं तथा जो अपने को सबका आधारभूत समझता है। ऐसे ही सत् पदार्थ को 'आत्मा' कहते हैं । जो कुछ मुख्यतः मत् है, उसका बिल्कुल प्रभाव नहीं हो सकता । तर्कशास्तके कार्य-कारण नियम के अनुसार सत् पदार्थ की जड़ एक नित्य पदार्थ ही हो सकता है। और जो कुछ परिवर्तन इसके सम्भव है, वे इसको केवल भिन्न-भिन्न अवस्थायें तथा विकार मात्र हैं। इसोको विनाश कहते हैं, विनाश कोई स्वतन्त्र वस्तु नहीं । चाहे यह चैतन्य जीव हो या जड़ वस्तु हो, मुख्यतः इस सत्-पदार्थको स्वतः या इसके प्रधान रूप में अवश्य हो नित्य मानना होगा। यदि यह नियम अतीत और वर्त्तमानके विषय में सत्य है, तो भविष्यत् के विषय में भी इसको सत्य मानने के लिये विवश होते हैं। यह एक मामूली उत्ति है, कि वस्तुका नाश नहीं होता । पूर्वोल्लिखित नियममें और इस मामूली उक्तिमें वस्तुगत्या ऐक्य है । जैसी परिभाषा उस नियमको की गयी है, उससे इस मामूली उक्ति के भाव स्पष्ट व्यक्त हो जाते हैं। नियम से सत्यका उघतर और साधारण उक्ति तो केवल चेतना रहित वस्तु के विषय में है। किन्तु यहाँ दिखलाया गया है, कि इस उक्ति का गूढ़तर अर्थ है और अन्य एक पदार्थ के विषय में भी इसका उपयोग कर सकते है । इस अन्य पदार्थ को हम लोग सुविधा के लिये आध्यात्मिक कहेंगे। इस अन्य पदार्थ में कुछ ऐसे गुण हैं, जो जड़ पदार्थ में नहीं हो सकते । इसलिये इम को जड़ पदार्थ से भिन्न पदार्थ मानना पड़ेगा। दोनों ही के अस्तित्वका पर्याप्त प्रमाण मिलता है। वह साधारण उक्ति कहती है कि, वस्तु अक्षय है; अब हम उस उक्तिका अधिक व्यापक अर्थ करके कहेंगे कि वस्तु ही नहीं, ये दोनों पदाघे अविनश्वर हैं। दोनों ही के विषय में यह कहना पड़ता हैः कि दोनों मुख्यतः अविनश्वर हैंः अर्थात् दोनों ही का भूत, भविषत् और वर्तमान में प्रधानतः एक ही रूप रहता है। दोनों ही काल आदि है न अन्त है; दोनों ही स्थिति के अधीन हैं। जड़ वस्तुमं फेरफार या रूपान्तर होता है, परन्तु चैतन्य पदार्थ में नहीं। पहला विच्छेद्य है। उसके भिन्न-भिन्न अंश हो सकते हैं; उसके रूप स्थूल होते हैं। दूसरे के भिन्न-भिन्न अंश या स्थूल रूप हो ही नहीं सकते। स्थान-विशेषके कारण जड़ पदार्थ का आध्यात्मिक पदार्थ पर प्रभाव पड़ सकता है और यही इन दोनों का पारस्परिक सम्बन्ध है । जो बातें अर्जुन मान गये हैं, वहीं से बारह/बारह वें श्लोकों में विवाद प्रारम्भ होता है। अर्जुन धार्मिक और अधार्मिक कार्यों में भेद मान गये है। उन्हें निश्चित रूप से यह भी विश्वास है कि, उन कार्योंके क्या फल होंगे। उन्हें एक उच्चतर जीवन-देवताओं के जीवन जैसे जीवन में विश्वास है । नारकीय जीवनमें भी उन्हें उसी तरह विश्वास है। वे यह भी सकते हैं, कि समर में विजय या पराजय का होना उनको - किंबहुना किसी मनुष्य की इच्छा के अधीन नहीं है। अतएब, अर्जुन को लिए बुद्धिहीन सांसारिक मनुश्रीमद्भगवद्गीता सार । उन्हें ऊँचे दर्जकी शिक्षा प्राप्त है। इसलिये श्रोकृष्ण गहन से गहन और कक्ष से रुक्ष प्रश्नों को गर्जुन के सामने उपस्थित करना उचित समझते हैं। जो चीजें सर्वदा व्याप्त रहती हैं अथवा जिनके कारण ये शाखत नियम प्रभावित या परिवर्त्तित होते हैं । उन चीज़ोंको श्रोर हृषीकेश अर्जुनका ध्यान आकर्पित करते हैं । बारह वें और तेरह वे लोकों में बातें इस टॅगसे कही गयी हैं, कि उनको पढ़कर भी पाठक "अहम्" "त्वाम्" और "एतद् " तथा परिवर्तनशील शरीरको एक मानने में अपनेको स्वतन्त्र समझ सकता है और सम्भव है कि इनको एक मानने को भूल उसपर तुरन्त व्यक्त न हो जाय । आगे चलकर भगवान् ने कहा है-वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृहाति नरोऽपरागित तथा. शरीराणि विहाय जोर्गान्यन्यानि मंयाति नवानि देही ।।बाईस।। इस लोक से स्पष्ट है कि, देह से भिन्न एक अविनाशी देही है; और दोनों को एक मानना बड़ी भारी भूल है। हाँ, ऐसी भूल करने में लोग खतन्त्र हैं। कोई रोकने वाला नहीं । विचार नियन्त्रित नहीं। अपने मत को अतार्किकताको बिना परवा किये लोग श्रीकृष्ण की पूर्वोल्लिखित सब बातों को स्वीकार कर सकते हैं। पर ऐसे विरुद्ध और भ्रान्त मतके खण्डन की सत्र युक्तियाँ साङ्गेतिक रूपसे दी गई है। कुछ युक्तियों का उल्लेख तो आगे चलकर श्रीकृष्ण ने स्पष्टतया कर दिया है। परन्तु सव युक्तियों का सार इसी एक प्रश्न में है- क्या जिस आधार पर सब चौंज़ें अवलम्बित हैं, वह आधार हो असत्य है; क्या एक ही पदार्थ - चाहे वह जड़ या चैतन्य पदार्थ हो - इन सबका आधार हैः किसी को यह चिन्तनीय क्षति पहुँचती है ? इन सब बातोंसे लोगोंका शरीर और आत्माको एक मानना भ्रान्त मालूम होता है। सूक्ष्म विचार से यह मालूम होता है कि, इस मतको मानने से कोई साध्य ही नहीं रह जाता और जब साध्य ही नहीं है, तब साध्य का साधन ढूँढ़ना निरर्थक और मरीचिका के अनुसन्धानको तरह व्यर्थ है ।
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26 वर्षीय छात्रा का अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर जनगांव जिले के गिरनी थांडा में किया गया।
हालांकि, प्रीति के परिवार ने मांग की कि अधिकारी इस बात का खुलासा करें कि 21 और 22 फरवरी की दरम्यानी रात को उसके साथ क्या हुआ था, जब वह वारंगल के एमजीएम अस्पताल में ड्यूटी पर थी।
उसके पिता नरेंद्र ने दावा किया कि प्रीति ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है। यह आरोप लगाते हुए कि किसी ने उनकी बेटी को घातक इंजेक्शन दिया। उन्होंने पुलिस से इस कोण से जांच करने की मांग की।
रेलवे सुरक्षा बल में सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र ने कहा कि उनकी बेटी कायर नहीं थी, जो अपनी जीवन लीला समाप्त कर ले।
उन्होंने यह भी मांग की कि काकतीय मेडिकल कॉलेज (केएमसी) में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख को निलंबित करने के बाद मामले की सिटिंग जज द्वारा जांच की जाए।
प्रीति की बहन पूजा ने कहा कि दोषियों को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें फांसी दी जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी और लड़की को इसका सामना न करना पड़े।
अंतिम संस्कार में कुछ राजनीतिक दलों, छात्र समूहों और आदिवासी संगठनों के नेताओं ने भाग लिया। मडिगा आरक्षण पोराटा समिति (एमआरपीएस) के नेता मांडा कृष्णा मडिगा भी उपस्थित थे।
प्रीति की बहन ने कहा कि सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर्स को परेशान करना कॉलेजों में आम बात है, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा। उसने कहा, उसकी बहन दूसरों की तरह नहीं थी जो वरिष्ठों द्वारा परेशान किए जाने के बाद समझौता कर लेते हैं।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा ने कहा, मैंने उससे कहा कि अगर तुम इसे सहन नहीं कर सकती हो, तो बस उसे थप्पड़ मारो और घर आ जाओ। तनाव मत लो। कुछ नहीं होगा। हम ध्यान रखेंगे।
प्रीति तीन बहनों में सबसे छोटी थी। नलगोंडा के कामिनेनी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा करने के बाद, प्रीति ने केएमसी में पीजी की सीट हासिल की थी और उसकी कक्षाएं नवंबर में शुरू हुई थीं।
उन्होंने कहा कि प्रीति ने जो हासिल किया है, उस पर उन्हें गर्व है क्योंकि उनके परिवार में कोई भी डॉक्टर नहीं बना है। बंजारा समुदाय, जिससे वे ताल्लुक रखते हैं, के पास भी कुछ ही डॉक्टर हैं।
पूजा ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अच्छी शिक्षा देने के लिए सारी संपत्ति बेच दी। उसकी दूसरी बहन सीबीएसई में काम करती है, जबकि उसका इकलौता भाई एमबीए कर रहा है।
वारंगल पुलिस ने 24 फरवरी को प्रीति के सीनियर एम. ए. सैफ को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने कहा कि प्रीति को उसके वरिष्ठ द्वारा लक्षित उत्पीड़न ने उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित किया हो सकता है।
पुलिस के मुताबिक, सैफ एक व्हाट्सएप ग्रुप में उसके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा था। (आईएएनएस)
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छब्बीस वर्षीय छात्रा का अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर जनगांव जिले के गिरनी थांडा में किया गया। हालांकि, प्रीति के परिवार ने मांग की कि अधिकारी इस बात का खुलासा करें कि इक्कीस और बाईस फरवरी की दरम्यानी रात को उसके साथ क्या हुआ था, जब वह वारंगल के एमजीएम अस्पताल में ड्यूटी पर थी। उसके पिता नरेंद्र ने दावा किया कि प्रीति ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है। यह आरोप लगाते हुए कि किसी ने उनकी बेटी को घातक इंजेक्शन दिया। उन्होंने पुलिस से इस कोण से जांच करने की मांग की। रेलवे सुरक्षा बल में सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र ने कहा कि उनकी बेटी कायर नहीं थी, जो अपनी जीवन लीला समाप्त कर ले। उन्होंने यह भी मांग की कि काकतीय मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख को निलंबित करने के बाद मामले की सिटिंग जज द्वारा जांच की जाए। प्रीति की बहन पूजा ने कहा कि दोषियों को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें फांसी दी जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी और लड़की को इसका सामना न करना पड़े। अंतिम संस्कार में कुछ राजनीतिक दलों, छात्र समूहों और आदिवासी संगठनों के नेताओं ने भाग लिया। मडिगा आरक्षण पोराटा समिति के नेता मांडा कृष्णा मडिगा भी उपस्थित थे। प्रीति की बहन ने कहा कि सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर्स को परेशान करना कॉलेजों में आम बात है, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा। उसने कहा, उसकी बहन दूसरों की तरह नहीं थी जो वरिष्ठों द्वारा परेशान किए जाने के बाद समझौता कर लेते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूजा ने कहा, मैंने उससे कहा कि अगर तुम इसे सहन नहीं कर सकती हो, तो बस उसे थप्पड़ मारो और घर आ जाओ। तनाव मत लो। कुछ नहीं होगा। हम ध्यान रखेंगे। प्रीति तीन बहनों में सबसे छोटी थी। नलगोंडा के कामिनेनी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा करने के बाद, प्रीति ने केएमसी में पीजी की सीट हासिल की थी और उसकी कक्षाएं नवंबर में शुरू हुई थीं। उन्होंने कहा कि प्रीति ने जो हासिल किया है, उस पर उन्हें गर्व है क्योंकि उनके परिवार में कोई भी डॉक्टर नहीं बना है। बंजारा समुदाय, जिससे वे ताल्लुक रखते हैं, के पास भी कुछ ही डॉक्टर हैं। पूजा ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अच्छी शिक्षा देने के लिए सारी संपत्ति बेच दी। उसकी दूसरी बहन सीबीएसई में काम करती है, जबकि उसका इकलौता भाई एमबीए कर रहा है। वारंगल पुलिस ने चौबीस फरवरी को प्रीति के सीनियर एम. ए. सैफ को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कहा कि प्रीति को उसके वरिष्ठ द्वारा लक्षित उत्पीड़न ने उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित किया हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, सैफ एक व्हाट्सएप ग्रुप में उसके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा था।
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हमने सुना तबसे हम आपके आगमन की उत्कट इच्छा लिये हुए थे । आखिर आप यहाँ आ ही गये है । आपके दर्शन कर सके, इसमे हम अपने को धन्य मानते है । दुरात्मा, अत्यधिक बाहुबली राक्षस गर्वोन्मत्त होकर हमारे आश्रम में आये, और हवनवेदियो का नाश किया, यूप-काष्ठो को उखाडकर फेंक दिया, पेडो को उखाड डाला, जपमालाओ को तोड दिया, हमारे वस्त्र फाड़ डाले, फलो को चुन लिया, फूलो को गिरा दिया, सरोवरी का पानी गदा कर दिया, कई प्रकार के दुख दिये और कई मुनियो को मार भी डाला । हमारी रक्षा करनेवाला कोई नहीं है । हे देव । आप हमारी रक्षा कीजिए । हमें दुख देनेवाले इन राक्षसो को हम अपनी क्रोधपूर्ण दृष्टि से देखकर, चाहें तो भस्म कर सकते है । किन्तु पृथ्वी पर आपके जैसे राजा के रहते हुए हम क्रोध नहीं करते है । अत, आप इन दुष्ट राक्षसो का सहार करके हमारे तप की रक्षा कीजिए ।" तब राम ने उन्हें सात्वना दी कि मैं युद्ध में इन राक्षमो का वध करूँगा, आप खिन्न मत होइए । इसके पश्चात् उन्होने शरभग के आश्रम के निवासी मुनियो को अपने अभयदान का वृत्तात सुनाया, राक्षसो का वध करने की प्रतिज्ञा की और उनकी सगति में वही रात विताई ।
दूसरे दिन बहुत से मुनि वहाँ आये और राम से अपने-अपने आश्रमो में आने की प्रार्थना की । तब राम सुतीक्ष्ण मुनि से आज्ञा लेकर अन्य मुनियो के पुण्याश्रमो को देखने की अभिलाषा से वहाँ से रवाना हुए । मार्ग में जानकी ने राम को देखकर कहा" हे अनघ, (हम) राज्य छोडकर वन में आये है, जटाएँ तथा वल्कल धारण किये मुनियो की तरह जीवन बिता रहे है, ऐसी दशा में आप राक्षमो पर क्यो क्रोध करते है ? विचार करने पर यह सगत नही मालूम होता है । हे काकुत्स्थ - तिलक, जबसे आपने मुनियो को राक्षसो का वध करने का आश्वासन दिया है, तबसे मेरा मन बहुत ही खिन्न हो रहा है । यह कार्य ठीक नहीं है, इसलिए आप यह कर्म छोड दीजिए । हे प्राणेश्वर, क्या प्राणियों को मारने से पाप नहीं लगेगा ? किसी समय एक मुनि अत्यंत तपोनिष्ठा से जीवन-यापन करते थे । इन्द्र ने उन्हें एक खड्ग देकर कहा -- इसे आप रखिए, मै फिर आकर इसे ले जाऊँगा । तदनंतर उस मुनि ने उस खड्ग से लता, वृक्षो को काटते हुए, हिंसा में प्रवृत्त हो, जडमति बनकर तपश्चर्या त्याग दी और अत को दुर्गति को प्राप्त हुआ । इसलिए हे देव, कहाँ तप और कहाँ राजधर्म तथा अस्त्र-शस्त्र ? आप ऐसा कार्य न कीजिए ।"
तब रामचंद्र ने हँसकर सीता से कहा - हे साध्वी, तुम्हारा बताया हुआ मार्ग ब्राह्मणो का है, क्षत्रियो का नही । मेरा हृदय जानते हुए भी मुझपर अत्यधिक अनुराग रखने के कारण तुम ऐसा कह रही हो । हे तरुणी, उत्तम राजधर्म का पालन करनेवाले इसीलिए तो धनुष-वाण धारण करके विचरण करते है कि शरणागतो की रक्षा कर सकें । तुम इस परम धर्म का विचार क्यो नही करती हो ? मैं उन महामुनियो को दिये गये वचन का अवश्य ही पालन करूँगा । यही मेरा दृढ सकल्प है । मैं अपने प्राण भले ही छोड दूं, तुम्हें भी त्याग दूं, या लक्ष्मण को भी छोड़ दूं, किंतु अपना प्रण नहीं टाल सकता ।' इन बातो को सुनकर जानकी चुप रह गई और लक्ष्मण विस्मित हो गये ।
६. मंदकर्णी का वृत्तांत
इसके पश्चात् रामचंद्र प्रत्येक आश्रम में, कही तीन महीने, कही चार महीने, आराम से रहते हुए, पुण्याश्रमों के दर्शन करते हुए आगे बढ़े । मार्ग में उन्होंने एक स्थान पर एक तड़ाग देखा, जिसके जल के मध्य में संगीत का निनाद अत्यधिक सुनाई पड़ रहा था । अन्यंत विस्मयचकित होकर वे उस तड़ाग के किनारे पहुँचे और उसके निकट निवास करने वाले वर्ममृत नामक मुनि को देखकर बोले - हे मुनिनाथ, यह कैसी विचित्र बात है कि इन तड़ाग के जल में से ऐना शब्द सुनाई दे रहा है ? 'तव वर्ममृत ने अत्यत उत्साह से रामचंद्र ने कहा - 'किसी समय मदकर्णी नामक मुनि इस तडाग के जल के बीच खडे होकर बड़ी निष्ठा से अनेक वर्ष तक अत्युग्र तपस्या करते रहे । उस तप को देखकर इन्द्रादि देवता भयभीत हो गये । उस मुनि के महत्त्व को क्षीण करने के लिए उन्होंने पाँच अप्सराजो को भेजा । वे अप्सराएँ मुनि की परिणीता ववएँ वन गईं और वे जल के मध्य मूनि के द्वारा निर्मित स्वर्णसौधो में, मुनि के सम्मुख वड़े मोद-मग्न हो नृत्य कर रही है । इसी कारण ने यह नरोवर पचाप्सर के नाम से विख्यात है । जो मथुर ध्वनि अब सुनाई पड रही है, वह उनके वाघो की ध्वनि है ।
इन वचनो को सुनकर राम ने अत्यत भक्ति ने पुण्यात्मा मंदकर्णी को प्रणाम किया और उस घोरदन के मार्ग से आगे बढे । मार्ग में उन्होंने कई मुनियो का दर्शन करके उनको प्रणाम किया । बहुत से पुण्य तपोदनो को देखकर मुग्य हुए, कमल और कमलिनियो से भरे सरोवरो में स्नान किया; मद-मद गति से चलनेवाले पवन की प्रगमा और झिल्लियों की झकार की निंदा की । शुक, मयूर आदि पक्षियों को पकड़ते हुए, वे हाथी, वराह आदि मृगो का शिकार करते जाते थे । कभी मेघास्त्र का प्रयोग करके गर्मी को दूर करते और कभी अपने दर्शन करनेवाले के पाप मिटाते । कभी यौवन को प्राप्त लताओ से फूल चुनते, कभी झकार करनेवाले भ्रमरो को दूर भगाकर गगनच्ची पर्वत-शिखरो पर चढ़ जाते । जब जानकी थक जाती थी, तब उनका परिहास करते हुए वडी मृदुल गति से गुफाओं को पार करते हुए, चढाद पर चढने की क्रिया (जानकी को) सिखाते । वहाँ को मीलनियो के साहस की प्रशंसा करते हुए, अभेद्य झाड़ियो में प्रवेश करते हुए ऐसी घाटियों में भ्रमण करने लगे, जहाँ सूर्य की किरणें भी नही पहुँच पाती थी । इस तरह राम, लक्ष्मण तथा जानकी के साथ पुण्य तीर्थो, पुण्य नदियो तथा पुण्य तपोवनो में भ्रमण करते हुए दस वर्ष के उपरान्त फिर से सुतीक्ष्ण मुनि के आश्रम में लौट आये और उस मुनि के यहाँ बड़े आराम से कुछ वर्ष तक रहे ।
७. अगस्त्य से भेंट
एक दिन रामचंद्र ने अगस्त्य के दर्शन की इच्छा से प्रेरित होकर (सुतीक्ष्ण) मुनि को देखकर पवित्र भक्ति ने साथ कहा - 'हे महात्मा, मुनिश्रेष्ठ, अगस्य कहाँ रहते हैं उनकहाँ है ? कृपया बतलाइए । सुतीण ने उन्हें उस आश्रम के मार्ग की दिशा तथा चिह्न वताये और लागीर्वाद देकर उन्हें विदा किया । अपने प्रिय अनुज तथा पत्नी के साथ दक्षिण की ओर चार योजन का रास्ता तय करके, बहुत मे जगलो, पहाडो
तथा नदियों को पार करते हुए वे अगस्त्य के भ्राता के आश्रम में पहुँचे । वहाँ वडी श्रद्धा मे उस यतीश्वर के चरण में सिर झुकाकर वे उस रात को वही ठहरे । मुनि के सत्संग में रहते हुए राम ने उनसे प्रश्न किया- 'हे यतीश्वर, पहले इस स्थान पर अगस्त्य ने वातापि का सहार कैसे किया ?" तब वह मुनीद्र रामचंद्र को देखकर उस पुण्य-कथा को इस प्रकार कहने लगे - "विसी समय वातापि और इल्वल नामक दो प्रचड राक्षस इस पृथ्वी पर रहते थे। उनमें वातापि मेष का रूप धारण कर लेता था और इल्वल ऋषि के रूप में मार्ग में अडा रहता था । वह मार्ग में जानेवाले ब्राह्मणो को श्राद्ध के बहाने अपने घर में आमंत्रित करता था और वडे प्रेम से घर बुला लाता था । उसके पश्चात् उस मेष को मारकर बडे प्रेम से उसका भोजन दनाकर उसे अतिथियों को खिलाता था । भोजन के पश्चात् वह वातापि का नाम लेकर पुकारता था - हे वातापि । जल्दी चले आओ ।' तब वह ब्राह्मणो का पेट चीरकर बाहर निकल पड़ता था। इस प्रकार, उन्होने कितने ही मुनियों को मार डाला । एक दिन कुभसभव ( अगस्त्य ) उस मार्ग से आये, तो उसने कपट से उन्हें भी भोजन कराया और भोजन के पश्चात् वातापि को पुकारा । तत्र अगस्त्य ने कहा - 'अव वातापि कहाँ से निकलेगा । वह तो कभी का पच गया है ।' इस पर क्रुद्ध होकर इल्वल ने राक्षस का रूप धरकर उनपर आक्रमण करने के लिए निकला, तो कुभसंभव ने अपने हुकार मात्र से देखते-देखते उसको भस्म कर दिया और सब मुनियो को हर्षित किया । इतना ही नही, उन्होंने विध्याचल को दवा दिया, अद्वितीय ढंग से समस्त सागर को पी गये और नहुष को साँप वन जाने का शाप दिया । ऐसे पुण्यमूर्त्ति अगस्त्य केवल मुनि नही है । वे मुनि के रूप में ( रहनेवाले) शिवजी है । "
इन बातो को सुनकर रघुराम हर्षित हुए । दूसरे दिन मुनि ने रामचन्द्र का उचित आदर-सत्कार करने के बाद उन्हें आशीर्वाद देकर अगस्त्य मुनि के आश्रम का मार्ग बताया उस मार्ग से एक योजन तक जाने के पश्चात् उन्होने अगस्त्य के उस रमणीय आश्रम को देखा, जो कटहल, दाडिम, शमी, वेर, अश्वत्थ, साल, द्राक्षा ( किशमिश ), रसाल, तमाल, वेल, खर्जूर, मदार आदि वृक्षो से और उन वृक्षो पर लदे हुए सुगंधित फूल, और उन फूलो के मकरद पर आसक्त भ्रमर, सुन्दर पुप्पो के पौधे, और उन पौधो के मध्य मित्रता के साथ विचरण करनेवाले मृगो, कोकिलो का कल-कूजन, शास्त्र तथा वेद-ध्वनि, तथा विविध तपोविनोदो से दीप्तिमान् था ।
आश्रम में पहुँचकर राम ने एक मुनि के द्वारा अपने आगमन का समाचार अगस्त्य मुनि को जनाया, और उसके पश्चात् उनके सम्मुख उपस्थित होकर उनके चरण कमलो में वडी भक्ति से वदना की । अगस्त्य ने उन्हें हृदय से लगाया, आशीर्वाद दिये और विविध प्रकार से सतुष्ट किया । तदुपरान्त मुनि बोले - हे शुभ नामवाले राम, हे उत्पल-य्याम, हे गुणधाम, तुम क्रूर दानवो में भय उत्पन्न करनेवाले हो । मुनियों का सौभाग्य है कि तुमने मुनि वेश में तपस्वी की तरह वन में निवास करते हुए, मुनियो को अभयदान दिया है कि तुम राक्षसो का सहार करोगे, जत वे दुखी न हो । तुम्हारे इन दयापूर्ण वचनो को सुनकर मुझे परम हर्ष हुआ ।'
इस प्रकार कहने के पश्चात् उन्होने बडे प्रेम से उनका अतिथि सत्कार किया और असमान दिव्यास्त्र, शस्त्र, कोदड तथा कवच आदि प्रदान किये । उन सबको ग्रहण करके रामचंद्र ने वही उनके सत्संग में रात्रि विताई ।
दूसरे दिन सध्या आदि से निवृत्त होने के पश्चात् परमात्मा राम ने उस मुनिश्रेष्ठ को प्रणाम किया । तव उनको आशीर्वाद देकर भविष्य के कार्य की संभावना करके उस धीमान् कुभसभव ने अत्यंत आदर के साथ रामचंद्र को संबोधित करके कहा -- 'हे राम । तुम उस पचवटी में जाकर रहो, जिसके प्रागण में गोदावरी नदी के पुण्य जल से गीतल वनाये गये तथा मद-मद चलनेवाले पवन के प्रभाव से लता-रूनी नर्त्तकियाँ नृत्य करती रहती है, और जो जटाधारी धूर्जटि के लिए पूज्य है । कुभमभव की आज्ञा लेकर रघुवर उस स्थान के लिए रवाना हुए ।
८. जटायु से मित्रता
मार्ग के मध्य में उन्होने एक खगराज को देखा, जो पखो से युक्त कुल पर्वत के समान था । राम ने सोचा कि यह भी कोई राक्षस होगा, इसलिए उससे प्रश्न किया कि तुम कौन हो ? तब वह पक्षी बडे हर्ष से कहने लगा- 'हे राम, मेरे पिता, गरुड के अग्रज, कश्यप के पुत्र तथा सूर्य के सारथी महात्मा अरुण है । सपाति मेरे अग्रज है । मे आपके पिता का मित्र हूँ, आपका हितैषी हूँ, पराया नही हूँ और मै महान् साहसी हूँ । मेरा नाम जटायु है । यह वन असुर- राजा के अधीन है, इसलिए (आप) सीता की रक्षा सावधानी से करते रहिएगा ।' तब राम ने उसे अपने पिता दशरथ के समान मन में मानकर वडे स्नेह से उसकी पूजा की और वहाँ से चलकर पचवटी में जा पहुँचे । वहाँ के श्रेष्ठ तपस्वी तथा मुनियो को बडी भक्ति से प्रणाम करके राम ने उनका सत्कार ग्रहण किया और फिर लक्ष्मण तथा सीता को देखकर वोले - 'हमने कई प्रकार के पुण्य आश्रमो को देखा है, किन्तु ऐसी गौतमी गगा ( गोदावरी ), ऐसे सरोवर, ऐसे वृक्ष और ऐसे आश्रम कही नही देखे । हम आज से यही रहेंगे ।'
इस प्रकार वे अत्यत हर्षित हुए और वहाँ के मुनियो की अनुमति प्राप्त करने के पश्चात् स्वय तथा लक्ष्मण ने उसी दिन वडी तत्परता से एक सुंदर पर्णशाला बनाई । तत्पश्चात् आप और लक्ष्मण ने उसकी पूजा की और भूसुता (सीता) के साथ उस पर्णशाला में प्रवेश किया । इस प्रकार वे छह मास तक वडे सुख से वहाँ रहे ।
९ हेमंत वर्णन
तव समस्त पृथ्वी को तथा दसो दिशाओ को कुहरे से आच्छादित करते हुए हेमत ऋतु का आगमन हुआ । एक दिन प्रात काल ही सीता के साथ स्नान करने के लिए जाते समय राम ने लक्ष्मण को देखकर कहा -- "हे लक्ष्मण, तुमने शीतकाल की महिमा देखी है चारो ओर हिम इस प्रकार आच्छादित हो गया है, मानो सभी दिशाएँ ठंड से भीत होकर श्वेत कौशेय धारण किये हो । सारी पृथ्वी पर गिरी हुई ओस की बूंदें जमकर ऐसी दिखाई दे रही है, मानो हेमत ऋतु-रूपी वाटल ने समस्त आकाश में व्याप्त होकर
अत्यधिक ओले बरसाये हो । कहीं-कही ओस-कण दूर्वांकुरो के सिरो पर ऐसे दिखाई पड रहे है, मानो मरकत की शलाकाओ की पक्तियो पर सदर ढंग से पिरोये गये मोतियो की लडियाँ हो । उस पुष्प - लताओ को देखो, जो कामदेव के सम्मोहनास्त्र के समान, स्पर्श करनेवाले पवन से भयभीत होकर, मानो विरहिणियो की तरह चचल गति से डोल रही हैं । ओस में रहनेवाले कमल, आँसुओ में निमग्न विरहिणियो के मुखो का उपहास कर रहे हैं । वहाँ देखो, पानी के ऊपर तैरनेवाले कमलो के पराग पर मँडरानेवाले भ्रमर और लाल कमल, ठंड से पीडित सरोवर के देवताओं के लिए धुएँ से युक्त अगीठियो के समान दीख रहे है । ह अनुज, वहाँ देखो, जगली हाथी प्यास से व्याकुल होकर मद गति से दौडते हुए इस नदी में आते है, नदी के जल को अपनी सूडो में भरकर चिंघाडते हुए अपनी सूडो को समेटे हुए भाग रहे है । अब भरत भी मेरे प्रति भक्ति रखने के कारण राज भोग छोडकर, वल्कल तथा जटाएँ धारण करके, मेरे आगमन की प्रतीक्षा करते हुए तडप रहा होगा । न जानें, वह महान् व्यक्ति, परम पावन भ्रातृ प्रेमी, अपने पिता तथा अग्रज की आज्ञा का पालन करनेवाला परम यशस्त्री, आश्रिो का रक्षक भरत, उष काल में कैसे सरयू नदी में स्नान करता होगा ? न जाने, वह मुनि की तरह कैसे पृथ्वी पर सोता होगा ? मेरे पिता के सत्य वचन तथा मेरा दृढ सकल्प उनके कारण ही सभी लोको में इतने प्रख्यात हुए । जिस माता की आज्ञा के कारण में सभी सयमी मुनियो के आशीर्वाद प्राप्त कर सका, ऐसी माता को न जाने कटु वचनो से वह कितना दुख देता होगा । नहीं, भला वह पुण्यात्मा ऐसा क्यो करने लगा ? राज्य के अधिकार से अलग होकर मै तपस्वी हुआ, किंतु राज्य का अधिकारी होते हुए भी वह तपस्वी हुआ । उस पुण्यात्मा को देखकर दूसरों को मीखना चाहिए कि भाइयो में परस्पर कैसा व्यवहार उचित है । ऐसे भरत तथा स्नेहपूर्ण माताओ, तथा अन्य नातेदारो को न जाने हम कब देख पायेंगे ।" इस प्रकार उनके सबध में सोचते हुए वडी श्रद्रा से उन्होने गौतमी नदी में जी भरकर स्नान किया, सूर्य को अर्घ्य दिया, गायत्री मंत्र का जप करने के पश्चात् ब्रह्म यज्ञ किया और पर्णशाला को लोटकर बडी प्रसन्नता से रहने लगे ।
१०. जंबुमालि का वृत्तांत
एक दिन लक्ष्मण प्रात काल हो उठे और बडे पवित्र चित्त से अपने भाई को प्रणाम किया और कद, मूल, फल आदि लाने वन में चले गये । वनो में घूमते-घामते उन्होने एक ऊँचे पहाड़ को देखा और उसके निकट विचरण करने लगे । इसी समय समस्त पृथ्वी को देदीप्यमान करते हुए सूर्य से उत्पन्न एक खड्ग आकर भीषण जलद के गंभीर गर्जन की सी वाणी में कहने लगा - 'हे राक्षस कुमार, तुम्हारे तप से प्रसन्न होकर सूर्य ने शत्रुओ का नाश करने के लिए मुझे तुम्हारे पास भेजा है । तुम मुझे ग्रहण करो ।' तव उस राक्षसकुमार ने कहा -- सूर्य ने स्वय तुम्हें मुझे न देकर, मेरा अनादर किया है। मैं तुम्हें ग्रहण नहीं करूँगा । मेरे सारे तप पर पानी फिर गया है । हे सूर्य के खड्ग, तुम जहाँ चाहो, जा सकते हो ।' कहकर वह पूर्ववत् अचल समाधि में लीन
हो गया ।
( यह देखकर ) लक्ष्मण विस्मित हुए और उस खड्ग की ओर देखकर वडी कुशलता से उसके निकट पहुँचे और उसे हाथ में लेकर देखने लगे । फिर यह सोचकर कि तपस्वियों के आधार इन फल-वृक्षो को काटना नही चाहिए । वे जहाँ-तहाँ भटकते हुए एक विशाल बाँस की झाडी के निकट पहुँचे और उस झाडी पर खड्ग चलाया । खड्ग चलाते ही उस झाडी के मध्य में तपस्या में लीन एक मुनि कटकर भूमि पर लोटने लगा । यह देखकर लक्ष्मण मूच्छित से हो गये । कुछ समय के उपरान्त वे सँभले और विलाप करने लगे -- 'हाय, यह मैने वया कर डाला ? अनजान से मैने एक ब्राह्मण का वध किया और समस्त लोको की निंदा का पात्र वना । ब्रह्म हत्या का पाप मुझे प्राप्त हुआ है । हाय, मैं इतनी दूर क्यो आया ? मैने यह खड्ग लिया ही क्यो ? अनुपम धर्मात्मा रामचन्द्र के अनुज मुझे ऐसा घोर पाप लग गया है । यह मुनि न जाने कौन है ? ( अनजान में ) मैने उनका वध कर डाला । जानकीनाथ मुनेंगे, तो न जाने मुझे क्या कहकर तज देंगे । क्या जाने मुनिजन कैसा शाप देंगे । मै यह वृत्तात ( राम से ) कह भी नहीं सकता, कहे विना रह भी नहीं सकता । हाय भगवान् । सर्वनाश हो गया है । इस प्रकार भय-विह्वल हो, दुख करते हुए धीरे-धीरे पैर घसीटते हुए वे चले । मन-ही-मन सोचते जाने थे कि महाराज दशरथ को पितृ-भवत ( श्रवणकुमार ) के वध का पाप लगा था । पृथ्वी के लोग कहेंगे कि पिता के समान पुत्र को भी पाप लगा ।
इस प्रकार चिंतित होते हुए वे अपने अग्रज के सम्मुख पहुँचे और थर-थर काँपते हुए गद्गद कठ से युवत हो उन्हें प्रणाम किया । राघव ने अपने अनुज को उठाकर गले से लगाया, ( उनके ) अश्रुओ को पोछा, और दयार्द्रचित्त से कहा - 'हे अनघ, मेरे रहते तुम क्यो भयभीत हो रहे हो ? तुम धर्म के अनुसार आचरण करनेवाले हो, उदार हो निर्मल आत्मा हो, नीतिवान् हो, महाराज दशरथ के मान्य पुत्र हो शिव के समान पराक्रमी तथा शूर हो । भाई, तुम्हारा मुँह ऐसा क्यो उतरा हुआ है ? स्पष्ट रूप से सारा हाल कह सुनाओ ।'
तब जयशील लक्ष्मण ने कहा -- है भयत्राता, आपकी आज्ञा लेकर मै वन से कदमूल, फल लिये आ रहा था । तव एक क्रूर सड्ग को आकाश से आता हुआ देखकर मैने उसे हाथ में ले लिया और एक वाँस की घनी झाडी पर उमे चलाया । उस झाडी में (तपस्या में लीन) एक श्रेष्ठ मुनि तुरत भूमि पर लोट गये । अपने अपराध के लिए चिंतित होते हुए, आपके सामने आने का साहस न रहते हुए भी मुझे आना ही पडा ।'
यह सुनकर राघव अत्यधिक आश्चर्य में पडकर आगे के कर्त्तव्य के सत्रध में सोचने हुए चुप हो रहे । उसी समय वहाँ के सब मुनि सारा वृत्तात ( राम को) सुनाने का निश्चय करके आये और रामचंद्र को आशीर्वाद देकर अत्यत कोमल स्वर में यो वोले --
'हे अखिलेग, आपके अनुज ने अभी अखिललोक शत्रु रावण के भानजे, जत्रु नामक एक दुष्ट का सहार किया है । इसमें कोई दोष नही है । हे राजन्, उनके इस कृत्य से सभी मुनि सतुष्ट हो गये हूँ ।'
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हमने सुना तबसे हम आपके आगमन की उत्कट इच्छा लिये हुए थे । आखिर आप यहाँ आ ही गये है । आपके दर्शन कर सके, इसमे हम अपने को धन्य मानते है । दुरात्मा, अत्यधिक बाहुबली राक्षस गर्वोन्मत्त होकर हमारे आश्रम में आये, और हवनवेदियो का नाश किया, यूप-काष्ठो को उखाडकर फेंक दिया, पेडो को उखाड डाला, जपमालाओ को तोड दिया, हमारे वस्त्र फाड़ डाले, फलो को चुन लिया, फूलो को गिरा दिया, सरोवरी का पानी गदा कर दिया, कई प्रकार के दुख दिये और कई मुनियो को मार भी डाला । हमारी रक्षा करनेवाला कोई नहीं है । हे देव । आप हमारी रक्षा कीजिए । हमें दुख देनेवाले इन राक्षसो को हम अपनी क्रोधपूर्ण दृष्टि से देखकर, चाहें तो भस्म कर सकते है । किन्तु पृथ्वी पर आपके जैसे राजा के रहते हुए हम क्रोध नहीं करते है । अत, आप इन दुष्ट राक्षसो का सहार करके हमारे तप की रक्षा कीजिए ।" तब राम ने उन्हें सात्वना दी कि मैं युद्ध में इन राक्षमो का वध करूँगा, आप खिन्न मत होइए । इसके पश्चात् उन्होने शरभग के आश्रम के निवासी मुनियो को अपने अभयदान का वृत्तात सुनाया, राक्षसो का वध करने की प्रतिज्ञा की और उनकी सगति में वही रात विताई । दूसरे दिन बहुत से मुनि वहाँ आये और राम से अपने-अपने आश्रमो में आने की प्रार्थना की । तब राम सुतीक्ष्ण मुनि से आज्ञा लेकर अन्य मुनियो के पुण्याश्रमो को देखने की अभिलाषा से वहाँ से रवाना हुए । मार्ग में जानकी ने राम को देखकर कहा" हे अनघ, राज्य छोडकर वन में आये है, जटाएँ तथा वल्कल धारण किये मुनियो की तरह जीवन बिता रहे है, ऐसी दशा में आप राक्षमो पर क्यो क्रोध करते है ? विचार करने पर यह सगत नही मालूम होता है । हे काकुत्स्थ - तिलक, जबसे आपने मुनियो को राक्षसो का वध करने का आश्वासन दिया है, तबसे मेरा मन बहुत ही खिन्न हो रहा है । यह कार्य ठीक नहीं है, इसलिए आप यह कर्म छोड दीजिए । हे प्राणेश्वर, क्या प्राणियों को मारने से पाप नहीं लगेगा ? किसी समय एक मुनि अत्यंत तपोनिष्ठा से जीवन-यापन करते थे । इन्द्र ने उन्हें एक खड्ग देकर कहा -- इसे आप रखिए, मै फिर आकर इसे ले जाऊँगा । तदनंतर उस मुनि ने उस खड्ग से लता, वृक्षो को काटते हुए, हिंसा में प्रवृत्त हो, जडमति बनकर तपश्चर्या त्याग दी और अत को दुर्गति को प्राप्त हुआ । इसलिए हे देव, कहाँ तप और कहाँ राजधर्म तथा अस्त्र-शस्त्र ? आप ऐसा कार्य न कीजिए ।" तब रामचंद्र ने हँसकर सीता से कहा - हे साध्वी, तुम्हारा बताया हुआ मार्ग ब्राह्मणो का है, क्षत्रियो का नही । मेरा हृदय जानते हुए भी मुझपर अत्यधिक अनुराग रखने के कारण तुम ऐसा कह रही हो । हे तरुणी, उत्तम राजधर्म का पालन करनेवाले इसीलिए तो धनुष-वाण धारण करके विचरण करते है कि शरणागतो की रक्षा कर सकें । तुम इस परम धर्म का विचार क्यो नही करती हो ? मैं उन महामुनियो को दिये गये वचन का अवश्य ही पालन करूँगा । यही मेरा दृढ सकल्प है । मैं अपने प्राण भले ही छोड दूं, तुम्हें भी त्याग दूं, या लक्ष्मण को भी छोड़ दूं, किंतु अपना प्रण नहीं टाल सकता ।' इन बातो को सुनकर जानकी चुप रह गई और लक्ष्मण विस्मित हो गये । छः. मंदकर्णी का वृत्तांत इसके पश्चात् रामचंद्र प्रत्येक आश्रम में, कही तीन महीने, कही चार महीने, आराम से रहते हुए, पुण्याश्रमों के दर्शन करते हुए आगे बढ़े । मार्ग में उन्होंने एक स्थान पर एक तड़ाग देखा, जिसके जल के मध्य में संगीत का निनाद अत्यधिक सुनाई पड़ रहा था । अन्यंत विस्मयचकित होकर वे उस तड़ाग के किनारे पहुँचे और उसके निकट निवास करने वाले वर्ममृत नामक मुनि को देखकर बोले - हे मुनिनाथ, यह कैसी विचित्र बात है कि इन तड़ाग के जल में से ऐना शब्द सुनाई दे रहा है ? 'तव वर्ममृत ने अत्यत उत्साह से रामचंद्र ने कहा - 'किसी समय मदकर्णी नामक मुनि इस तडाग के जल के बीच खडे होकर बड़ी निष्ठा से अनेक वर्ष तक अत्युग्र तपस्या करते रहे । उस तप को देखकर इन्द्रादि देवता भयभीत हो गये । उस मुनि के महत्त्व को क्षीण करने के लिए उन्होंने पाँच अप्सराजो को भेजा । वे अप्सराएँ मुनि की परिणीता ववएँ वन गईं और वे जल के मध्य मूनि के द्वारा निर्मित स्वर्णसौधो में, मुनि के सम्मुख वड़े मोद-मग्न हो नृत्य कर रही है । इसी कारण ने यह नरोवर पचाप्सर के नाम से विख्यात है । जो मथुर ध्वनि अब सुनाई पड रही है, वह उनके वाघो की ध्वनि है । इन वचनो को सुनकर राम ने अत्यत भक्ति ने पुण्यात्मा मंदकर्णी को प्रणाम किया और उस घोरदन के मार्ग से आगे बढे । मार्ग में उन्होंने कई मुनियो का दर्शन करके उनको प्रणाम किया । बहुत से पुण्य तपोदनो को देखकर मुग्य हुए, कमल और कमलिनियो से भरे सरोवरो में स्नान किया; मद-मद गति से चलनेवाले पवन की प्रगमा और झिल्लियों की झकार की निंदा की । शुक, मयूर आदि पक्षियों को पकड़ते हुए, वे हाथी, वराह आदि मृगो का शिकार करते जाते थे । कभी मेघास्त्र का प्रयोग करके गर्मी को दूर करते और कभी अपने दर्शन करनेवाले के पाप मिटाते । कभी यौवन को प्राप्त लताओ से फूल चुनते, कभी झकार करनेवाले भ्रमरो को दूर भगाकर गगनच्ची पर्वत-शिखरो पर चढ़ जाते । जब जानकी थक जाती थी, तब उनका परिहास करते हुए वडी मृदुल गति से गुफाओं को पार करते हुए, चढाद पर चढने की क्रिया सिखाते । वहाँ को मीलनियो के साहस की प्रशंसा करते हुए, अभेद्य झाड़ियो में प्रवेश करते हुए ऐसी घाटियों में भ्रमण करने लगे, जहाँ सूर्य की किरणें भी नही पहुँच पाती थी । इस तरह राम, लक्ष्मण तथा जानकी के साथ पुण्य तीर्थो, पुण्य नदियो तथा पुण्य तपोवनो में भ्रमण करते हुए दस वर्ष के उपरान्त फिर से सुतीक्ष्ण मुनि के आश्रम में लौट आये और उस मुनि के यहाँ बड़े आराम से कुछ वर्ष तक रहे । सात. अगस्त्य से भेंट एक दिन रामचंद्र ने अगस्त्य के दर्शन की इच्छा से प्रेरित होकर मुनि को देखकर पवित्र भक्ति ने साथ कहा - 'हे महात्मा, मुनिश्रेष्ठ, अगस्य कहाँ रहते हैं उनकहाँ है ? कृपया बतलाइए । सुतीण ने उन्हें उस आश्रम के मार्ग की दिशा तथा चिह्न वताये और लागीर्वाद देकर उन्हें विदा किया । अपने प्रिय अनुज तथा पत्नी के साथ दक्षिण की ओर चार योजन का रास्ता तय करके, बहुत मे जगलो, पहाडो तथा नदियों को पार करते हुए वे अगस्त्य के भ्राता के आश्रम में पहुँचे । वहाँ वडी श्रद्धा मे उस यतीश्वर के चरण में सिर झुकाकर वे उस रात को वही ठहरे । मुनि के सत्संग में रहते हुए राम ने उनसे प्रश्न किया- 'हे यतीश्वर, पहले इस स्थान पर अगस्त्य ने वातापि का सहार कैसे किया ?" तब वह मुनीद्र रामचंद्र को देखकर उस पुण्य-कथा को इस प्रकार कहने लगे - "विसी समय वातापि और इल्वल नामक दो प्रचड राक्षस इस पृथ्वी पर रहते थे। उनमें वातापि मेष का रूप धारण कर लेता था और इल्वल ऋषि के रूप में मार्ग में अडा रहता था । वह मार्ग में जानेवाले ब्राह्मणो को श्राद्ध के बहाने अपने घर में आमंत्रित करता था और वडे प्रेम से घर बुला लाता था । उसके पश्चात् उस मेष को मारकर बडे प्रेम से उसका भोजन दनाकर उसे अतिथियों को खिलाता था । भोजन के पश्चात् वह वातापि का नाम लेकर पुकारता था - हे वातापि । जल्दी चले आओ ।' तब वह ब्राह्मणो का पेट चीरकर बाहर निकल पड़ता था। इस प्रकार, उन्होने कितने ही मुनियों को मार डाला । एक दिन कुभसभव उस मार्ग से आये, तो उसने कपट से उन्हें भी भोजन कराया और भोजन के पश्चात् वातापि को पुकारा । तत्र अगस्त्य ने कहा - 'अव वातापि कहाँ से निकलेगा । वह तो कभी का पच गया है ।' इस पर क्रुद्ध होकर इल्वल ने राक्षस का रूप धरकर उनपर आक्रमण करने के लिए निकला, तो कुभसंभव ने अपने हुकार मात्र से देखते-देखते उसको भस्म कर दिया और सब मुनियो को हर्षित किया । इतना ही नही, उन्होंने विध्याचल को दवा दिया, अद्वितीय ढंग से समस्त सागर को पी गये और नहुष को साँप वन जाने का शाप दिया । ऐसे पुण्यमूर्त्ति अगस्त्य केवल मुनि नही है । वे मुनि के रूप में शिवजी है । " इन बातो को सुनकर रघुराम हर्षित हुए । दूसरे दिन मुनि ने रामचन्द्र का उचित आदर-सत्कार करने के बाद उन्हें आशीर्वाद देकर अगस्त्य मुनि के आश्रम का मार्ग बताया उस मार्ग से एक योजन तक जाने के पश्चात् उन्होने अगस्त्य के उस रमणीय आश्रम को देखा, जो कटहल, दाडिम, शमी, वेर, अश्वत्थ, साल, द्राक्षा , रसाल, तमाल, वेल, खर्जूर, मदार आदि वृक्षो से और उन वृक्षो पर लदे हुए सुगंधित फूल, और उन फूलो के मकरद पर आसक्त भ्रमर, सुन्दर पुप्पो के पौधे, और उन पौधो के मध्य मित्रता के साथ विचरण करनेवाले मृगो, कोकिलो का कल-कूजन, शास्त्र तथा वेद-ध्वनि, तथा विविध तपोविनोदो से दीप्तिमान् था । आश्रम में पहुँचकर राम ने एक मुनि के द्वारा अपने आगमन का समाचार अगस्त्य मुनि को जनाया, और उसके पश्चात् उनके सम्मुख उपस्थित होकर उनके चरण कमलो में वडी भक्ति से वदना की । अगस्त्य ने उन्हें हृदय से लगाया, आशीर्वाद दिये और विविध प्रकार से सतुष्ट किया । तदुपरान्त मुनि बोले - हे शुभ नामवाले राम, हे उत्पल-य्याम, हे गुणधाम, तुम क्रूर दानवो में भय उत्पन्न करनेवाले हो । मुनियों का सौभाग्य है कि तुमने मुनि वेश में तपस्वी की तरह वन में निवास करते हुए, मुनियो को अभयदान दिया है कि तुम राक्षसो का सहार करोगे, जत वे दुखी न हो । तुम्हारे इन दयापूर्ण वचनो को सुनकर मुझे परम हर्ष हुआ ।' इस प्रकार कहने के पश्चात् उन्होने बडे प्रेम से उनका अतिथि सत्कार किया और असमान दिव्यास्त्र, शस्त्र, कोदड तथा कवच आदि प्रदान किये । उन सबको ग्रहण करके रामचंद्र ने वही उनके सत्संग में रात्रि विताई । दूसरे दिन सध्या आदि से निवृत्त होने के पश्चात् परमात्मा राम ने उस मुनिश्रेष्ठ को प्रणाम किया । तव उनको आशीर्वाद देकर भविष्य के कार्य की संभावना करके उस धीमान् कुभसभव ने अत्यंत आदर के साथ रामचंद्र को संबोधित करके कहा -- 'हे राम । तुम उस पचवटी में जाकर रहो, जिसके प्रागण में गोदावरी नदी के पुण्य जल से गीतल वनाये गये तथा मद-मद चलनेवाले पवन के प्रभाव से लता-रूनी नर्त्तकियाँ नृत्य करती रहती है, और जो जटाधारी धूर्जटि के लिए पूज्य है । कुभमभव की आज्ञा लेकर रघुवर उस स्थान के लिए रवाना हुए । आठ. जटायु से मित्रता मार्ग के मध्य में उन्होने एक खगराज को देखा, जो पखो से युक्त कुल पर्वत के समान था । राम ने सोचा कि यह भी कोई राक्षस होगा, इसलिए उससे प्रश्न किया कि तुम कौन हो ? तब वह पक्षी बडे हर्ष से कहने लगा- 'हे राम, मेरे पिता, गरुड के अग्रज, कश्यप के पुत्र तथा सूर्य के सारथी महात्मा अरुण है । सपाति मेरे अग्रज है । मे आपके पिता का मित्र हूँ, आपका हितैषी हूँ, पराया नही हूँ और मै महान् साहसी हूँ । मेरा नाम जटायु है । यह वन असुर- राजा के अधीन है, इसलिए सीता की रक्षा सावधानी से करते रहिएगा ।' तब राम ने उसे अपने पिता दशरथ के समान मन में मानकर वडे स्नेह से उसकी पूजा की और वहाँ से चलकर पचवटी में जा पहुँचे । वहाँ के श्रेष्ठ तपस्वी तथा मुनियो को बडी भक्ति से प्रणाम करके राम ने उनका सत्कार ग्रहण किया और फिर लक्ष्मण तथा सीता को देखकर वोले - 'हमने कई प्रकार के पुण्य आश्रमो को देखा है, किन्तु ऐसी गौतमी गगा , ऐसे सरोवर, ऐसे वृक्ष और ऐसे आश्रम कही नही देखे । हम आज से यही रहेंगे ।' इस प्रकार वे अत्यत हर्षित हुए और वहाँ के मुनियो की अनुमति प्राप्त करने के पश्चात् स्वय तथा लक्ष्मण ने उसी दिन वडी तत्परता से एक सुंदर पर्णशाला बनाई । तत्पश्चात् आप और लक्ष्मण ने उसकी पूजा की और भूसुता के साथ उस पर्णशाला में प्रवेश किया । इस प्रकार वे छह मास तक वडे सुख से वहाँ रहे । नौ हेमंत वर्णन तव समस्त पृथ्वी को तथा दसो दिशाओ को कुहरे से आच्छादित करते हुए हेमत ऋतु का आगमन हुआ । एक दिन प्रात काल ही सीता के साथ स्नान करने के लिए जाते समय राम ने लक्ष्मण को देखकर कहा -- "हे लक्ष्मण, तुमने शीतकाल की महिमा देखी है चारो ओर हिम इस प्रकार आच्छादित हो गया है, मानो सभी दिशाएँ ठंड से भीत होकर श्वेत कौशेय धारण किये हो । सारी पृथ्वी पर गिरी हुई ओस की बूंदें जमकर ऐसी दिखाई दे रही है, मानो हेमत ऋतु-रूपी वाटल ने समस्त आकाश में व्याप्त होकर अत्यधिक ओले बरसाये हो । कहीं-कही ओस-कण दूर्वांकुरो के सिरो पर ऐसे दिखाई पड रहे है, मानो मरकत की शलाकाओ की पक्तियो पर सदर ढंग से पिरोये गये मोतियो की लडियाँ हो । उस पुष्प - लताओ को देखो, जो कामदेव के सम्मोहनास्त्र के समान, स्पर्श करनेवाले पवन से भयभीत होकर, मानो विरहिणियो की तरह चचल गति से डोल रही हैं । ओस में रहनेवाले कमल, आँसुओ में निमग्न विरहिणियो के मुखो का उपहास कर रहे हैं । वहाँ देखो, पानी के ऊपर तैरनेवाले कमलो के पराग पर मँडरानेवाले भ्रमर और लाल कमल, ठंड से पीडित सरोवर के देवताओं के लिए धुएँ से युक्त अगीठियो के समान दीख रहे है । ह अनुज, वहाँ देखो, जगली हाथी प्यास से व्याकुल होकर मद गति से दौडते हुए इस नदी में आते है, नदी के जल को अपनी सूडो में भरकर चिंघाडते हुए अपनी सूडो को समेटे हुए भाग रहे है । अब भरत भी मेरे प्रति भक्ति रखने के कारण राज भोग छोडकर, वल्कल तथा जटाएँ धारण करके, मेरे आगमन की प्रतीक्षा करते हुए तडप रहा होगा । न जानें, वह महान् व्यक्ति, परम पावन भ्रातृ प्रेमी, अपने पिता तथा अग्रज की आज्ञा का पालन करनेवाला परम यशस्त्री, आश्रिो का रक्षक भरत, उष काल में कैसे सरयू नदी में स्नान करता होगा ? न जाने, वह मुनि की तरह कैसे पृथ्वी पर सोता होगा ? मेरे पिता के सत्य वचन तथा मेरा दृढ सकल्प उनके कारण ही सभी लोको में इतने प्रख्यात हुए । जिस माता की आज्ञा के कारण में सभी सयमी मुनियो के आशीर्वाद प्राप्त कर सका, ऐसी माता को न जाने कटु वचनो से वह कितना दुख देता होगा । नहीं, भला वह पुण्यात्मा ऐसा क्यो करने लगा ? राज्य के अधिकार से अलग होकर मै तपस्वी हुआ, किंतु राज्य का अधिकारी होते हुए भी वह तपस्वी हुआ । उस पुण्यात्मा को देखकर दूसरों को मीखना चाहिए कि भाइयो में परस्पर कैसा व्यवहार उचित है । ऐसे भरत तथा स्नेहपूर्ण माताओ, तथा अन्य नातेदारो को न जाने हम कब देख पायेंगे ।" इस प्रकार उनके सबध में सोचते हुए वडी श्रद्रा से उन्होने गौतमी नदी में जी भरकर स्नान किया, सूर्य को अर्घ्य दिया, गायत्री मंत्र का जप करने के पश्चात् ब्रह्म यज्ञ किया और पर्णशाला को लोटकर बडी प्रसन्नता से रहने लगे । दस. जंबुमालि का वृत्तांत एक दिन लक्ष्मण प्रात काल हो उठे और बडे पवित्र चित्त से अपने भाई को प्रणाम किया और कद, मूल, फल आदि लाने वन में चले गये । वनो में घूमते-घामते उन्होने एक ऊँचे पहाड़ को देखा और उसके निकट विचरण करने लगे । इसी समय समस्त पृथ्वी को देदीप्यमान करते हुए सूर्य से उत्पन्न एक खड्ग आकर भीषण जलद के गंभीर गर्जन की सी वाणी में कहने लगा - 'हे राक्षस कुमार, तुम्हारे तप से प्रसन्न होकर सूर्य ने शत्रुओ का नाश करने के लिए मुझे तुम्हारे पास भेजा है । तुम मुझे ग्रहण करो ।' तव उस राक्षसकुमार ने कहा -- सूर्य ने स्वय तुम्हें मुझे न देकर, मेरा अनादर किया है। मैं तुम्हें ग्रहण नहीं करूँगा । मेरे सारे तप पर पानी फिर गया है । हे सूर्य के खड्ग, तुम जहाँ चाहो, जा सकते हो ।' कहकर वह पूर्ववत् अचल समाधि में लीन हो गया । लक्ष्मण विस्मित हुए और उस खड्ग की ओर देखकर वडी कुशलता से उसके निकट पहुँचे और उसे हाथ में लेकर देखने लगे । फिर यह सोचकर कि तपस्वियों के आधार इन फल-वृक्षो को काटना नही चाहिए । वे जहाँ-तहाँ भटकते हुए एक विशाल बाँस की झाडी के निकट पहुँचे और उस झाडी पर खड्ग चलाया । खड्ग चलाते ही उस झाडी के मध्य में तपस्या में लीन एक मुनि कटकर भूमि पर लोटने लगा । यह देखकर लक्ष्मण मूच्छित से हो गये । कुछ समय के उपरान्त वे सँभले और विलाप करने लगे -- 'हाय, यह मैने वया कर डाला ? अनजान से मैने एक ब्राह्मण का वध किया और समस्त लोको की निंदा का पात्र वना । ब्रह्म हत्या का पाप मुझे प्राप्त हुआ है । हाय, मैं इतनी दूर क्यो आया ? मैने यह खड्ग लिया ही क्यो ? अनुपम धर्मात्मा रामचन्द्र के अनुज मुझे ऐसा घोर पाप लग गया है । यह मुनि न जाने कौन है ? मैने उनका वध कर डाला । जानकीनाथ मुनेंगे, तो न जाने मुझे क्या कहकर तज देंगे । क्या जाने मुनिजन कैसा शाप देंगे । मै यह वृत्तात कह भी नहीं सकता, कहे विना रह भी नहीं सकता । हाय भगवान् । सर्वनाश हो गया है । इस प्रकार भय-विह्वल हो, दुख करते हुए धीरे-धीरे पैर घसीटते हुए वे चले । मन-ही-मन सोचते जाने थे कि महाराज दशरथ को पितृ-भवत के वध का पाप लगा था । पृथ्वी के लोग कहेंगे कि पिता के समान पुत्र को भी पाप लगा । इस प्रकार चिंतित होते हुए वे अपने अग्रज के सम्मुख पहुँचे और थर-थर काँपते हुए गद्गद कठ से युवत हो उन्हें प्रणाम किया । राघव ने अपने अनुज को उठाकर गले से लगाया, अश्रुओ को पोछा, और दयार्द्रचित्त से कहा - 'हे अनघ, मेरे रहते तुम क्यो भयभीत हो रहे हो ? तुम धर्म के अनुसार आचरण करनेवाले हो, उदार हो निर्मल आत्मा हो, नीतिवान् हो, महाराज दशरथ के मान्य पुत्र हो शिव के समान पराक्रमी तथा शूर हो । भाई, तुम्हारा मुँह ऐसा क्यो उतरा हुआ है ? स्पष्ट रूप से सारा हाल कह सुनाओ ।' तब जयशील लक्ष्मण ने कहा -- है भयत्राता, आपकी आज्ञा लेकर मै वन से कदमूल, फल लिये आ रहा था । तव एक क्रूर सड्ग को आकाश से आता हुआ देखकर मैने उसे हाथ में ले लिया और एक वाँस की घनी झाडी पर उमे चलाया । उस झाडी में एक श्रेष्ठ मुनि तुरत भूमि पर लोट गये । अपने अपराध के लिए चिंतित होते हुए, आपके सामने आने का साहस न रहते हुए भी मुझे आना ही पडा ।' यह सुनकर राघव अत्यधिक आश्चर्य में पडकर आगे के कर्त्तव्य के सत्रध में सोचने हुए चुप हो रहे । उसी समय वहाँ के सब मुनि सारा वृत्तात सुनाने का निश्चय करके आये और रामचंद्र को आशीर्वाद देकर अत्यत कोमल स्वर में यो वोले -- 'हे अखिलेग, आपके अनुज ने अभी अखिललोक शत्रु रावण के भानजे, जत्रु नामक एक दुष्ट का सहार किया है । इसमें कोई दोष नही है । हे राजन्, उनके इस कृत्य से सभी मुनि सतुष्ट हो गये हूँ ।'
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क्या 'जय श्री राम' के नाम पर लोगों को कहीं भी और कभी भी घेर कर पीट देना इतना आसान है? क्या आपको भी डर लगता है? क्या 'जय श्री राम' के नारे के नाम पर दहशत फैलाना आसान है? आख़िर एक के बाद एक घटनाएँ लगातार क्यों हो रही हैं? हाल ही में गुरुग्राम में कुछ लोगों ने एक मुसलिम युवक को पीटा और उसे 'जय श्री राम' का नारा लगाने पर मजबूर किया। पर, अब निशाने पर हिन्दू भी आ रहे हैं। हाल की एक घटना में एक डॉक्टर को 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया। पुणे के प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ अरुण गदरे के साथ यह घटना दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसी जगह पर घटी। गदरे कहते हैं कि जब पाँच-छह युवकों ने उन्हें घेर लिया तो एक बार तो वह डर गये। हालाँकि उन्हें नुक़सान नहीं पहुँचाया गया।
पुणे के डॉक्टर अरुण गदरे को दिल्ली में जबरन 'जय श्री राम' बोलने को कथित तौर पर मजबूर किया गया। उन्होंने इसकी थाने में भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, लेकिन उन्होंने इसका ज़िक्र एक पत्रकार मित्र से किया तो यह मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने प्रतिक्रियाएँ दीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गदरे ने कहा कि मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था, मैं आतंकित था। उन्होंने कहा कि पाँच-छह युवकों के दबाव में मैंने 'जय श्री राम' बोल दिया, लेकिन उनमें से एक युवक ने कहा कि इतने धीरे क्यों बोल रहे हो, ज़ोर से बोलो। उन्होंने कहा कि क्योंकि युवकों ने उन्हें जाने दिया और कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया तो उन्होंने इसकी थाने में रिपोर्ट दर्ज़ नहीं कराई। बता दें कि हाल के दिनों में जब तब ऐसी ख़बरें आती रही हैं जिसमें जबरन 'जय श्री राम' बुलवाए जाते हैं। इसमें अक्सर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता रहा है।
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' के अनुसार, 26 मई की सुबह की इस घटना का ज़िक्र उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अनंत बागाईतकर से किया। अख़बार ने बागाईतकर के हवाले से लिखा है, 'डॉक्टर गदरे कनॉट प्लेस क्षेत्र में जंतर-मंतर के पास वाईएमसीए में ठहरे हुए थे। वह अगले दिन बिजनौर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने वाले थे। जब वह मॉर्निंग वॉक पर निकले तो पाँच-छह युवकों के एक गैंग ने उन्हें हनुमान मंदिर के आसपास रोका। उनके धर्म के बारे में पूछा और जय श्री राम बोलने को कहा। वह डर गये। ' बागाईतकर के अनुसार, 'गदरे ने जय श्री राम कहा, लेकिन युवकों ने ज़ोर से जय श्री राम बोलने को कहा और पूछा कि अंकल क्या आप हिंदू नहीं हैं? इस पर गदरे वहाँ से चले गये। युवकों ने कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया। '
दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शनिवार रात एक ऐसी ही घटना घटी थी। पीड़ित युवक का आरोप है कि जब वह गुरुग्राम के सदर इलाक़े की एक मसजिद से नमाज पढ़कर लौट रहा था तभी कुछ युवकों ने उसे पहले जबरदस्ती रोका और बाद में उसे जय श्री राम के नारे लगाने को कहा। जब उसने नारा लगाने से मना किया तो आरोपियों ने उसकी पिटाई की। पीड़ित युवक मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है और गुरुग्राम में रहकर टेलर की शॉप पर काम करता है। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने पहले उसकी टोपी उतारी और बाद में उसके साथ ग़लत व्यवहार भी किया। बाद में पुलिस ने कहा कि युवक के साथ मारपीट तो की गई, लेकिन टोपी नहीं उछाली गई थी।
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क्या 'जय श्री राम' के नाम पर लोगों को कहीं भी और कभी भी घेर कर पीट देना इतना आसान है? क्या आपको भी डर लगता है? क्या 'जय श्री राम' के नारे के नाम पर दहशत फैलाना आसान है? आख़िर एक के बाद एक घटनाएँ लगातार क्यों हो रही हैं? हाल ही में गुरुग्राम में कुछ लोगों ने एक मुसलिम युवक को पीटा और उसे 'जय श्री राम' का नारा लगाने पर मजबूर किया। पर, अब निशाने पर हिन्दू भी आ रहे हैं। हाल की एक घटना में एक डॉक्टर को 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया। पुणे के प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ अरुण गदरे के साथ यह घटना दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसी जगह पर घटी। गदरे कहते हैं कि जब पाँच-छह युवकों ने उन्हें घेर लिया तो एक बार तो वह डर गये। हालाँकि उन्हें नुक़सान नहीं पहुँचाया गया। पुणे के डॉक्टर अरुण गदरे को दिल्ली में जबरन 'जय श्री राम' बोलने को कथित तौर पर मजबूर किया गया। उन्होंने इसकी थाने में भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, लेकिन उन्होंने इसका ज़िक्र एक पत्रकार मित्र से किया तो यह मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने प्रतिक्रियाएँ दीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गदरे ने कहा कि मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था, मैं आतंकित था। उन्होंने कहा कि पाँच-छह युवकों के दबाव में मैंने 'जय श्री राम' बोल दिया, लेकिन उनमें से एक युवक ने कहा कि इतने धीरे क्यों बोल रहे हो, ज़ोर से बोलो। उन्होंने कहा कि क्योंकि युवकों ने उन्हें जाने दिया और कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया तो उन्होंने इसकी थाने में रिपोर्ट दर्ज़ नहीं कराई। बता दें कि हाल के दिनों में जब तब ऐसी ख़बरें आती रही हैं जिसमें जबरन 'जय श्री राम' बुलवाए जाते हैं। इसमें अक्सर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता रहा है। अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' के अनुसार, छब्बीस मई की सुबह की इस घटना का ज़िक्र उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अनंत बागाईतकर से किया। अख़बार ने बागाईतकर के हवाले से लिखा है, 'डॉक्टर गदरे कनॉट प्लेस क्षेत्र में जंतर-मंतर के पास वाईएमसीए में ठहरे हुए थे। वह अगले दिन बिजनौर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने वाले थे। जब वह मॉर्निंग वॉक पर निकले तो पाँच-छह युवकों के एक गैंग ने उन्हें हनुमान मंदिर के आसपास रोका। उनके धर्म के बारे में पूछा और जय श्री राम बोलने को कहा। वह डर गये। ' बागाईतकर के अनुसार, 'गदरे ने जय श्री राम कहा, लेकिन युवकों ने ज़ोर से जय श्री राम बोलने को कहा और पूछा कि अंकल क्या आप हिंदू नहीं हैं? इस पर गदरे वहाँ से चले गये। युवकों ने कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया। ' दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शनिवार रात एक ऐसी ही घटना घटी थी। पीड़ित युवक का आरोप है कि जब वह गुरुग्राम के सदर इलाक़े की एक मसजिद से नमाज पढ़कर लौट रहा था तभी कुछ युवकों ने उसे पहले जबरदस्ती रोका और बाद में उसे जय श्री राम के नारे लगाने को कहा। जब उसने नारा लगाने से मना किया तो आरोपियों ने उसकी पिटाई की। पीड़ित युवक मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है और गुरुग्राम में रहकर टेलर की शॉप पर काम करता है। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने पहले उसकी टोपी उतारी और बाद में उसके साथ ग़लत व्यवहार भी किया। बाद में पुलिस ने कहा कि युवक के साथ मारपीट तो की गई, लेकिन टोपी नहीं उछाली गई थी।
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हाल ही में अपने एक फ़ैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। इस डॉक्टर पर अवैध लिंग परीक्षण के संबंध में सूचना पर एक अस्पताल में छापेमारी के बाद पीसीपीएनडीटी अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि गर्भ में मौजूद भ्रूण की लैंगिक जानकारी तक पहुंच पर प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है।
इस मामले के तहत ज़िला उपयुक्त प्राधिकरण, पीसी एंड पीएनडीटी, रोहतक को कुछ डॉक्टरों द्वारा जीवन अस्पताल, नई दिल्ली में भ्रूण के अवैध लिंग निर्धारण के संबंध में एक सूचना प्राप्त हुई थी और फिर वह सूचना डॉ. नितिन राज्य कार्यक्रम अधिकारी, पीसी और पीएनडीटी (डीएफडब्ल्यू) को भेज दी गई थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचित किया था। ऐसी सूचना मिलने पर, दिल्ली में संबंधित प्राधिकरण ने एसडीएम, डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण पूर्वी दिल्ली की अध्यक्षता में जिला निरीक्षण निगरानी समिति (डीआईएमसी) टीम, दक्षिण पूर्व जिला, नई दिल्ली और पीसी एंड पीएनडीटी टीम, रोहतक की एक संयुक्त छापेमारी टीम का गठन किया था।
सभी ने मिलकर एक महिला को फ़र्ज़ी मरीज़ बनाकर जीवन हॉस्पिटल में भेजा और फिर सही समय पर छापेमारी करके अस्पताल में आरोपी लोगों को पकड़ लिया उसके बाद डॉ. शिखा और एक डॉ. रविंदर सभरवाल को जिला उपयुक्त प्राधिकरण, दक्षिण पूर्वी दिल्ली के कार्यालय से एक निलंबन आदेश दिया, साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस प्राप्त भी भेजा, जिसके द्वारा पीसी और पीएनडीटी अधिनियम की धारा 20 (2) के तहत जीवन अस्पताल के पंजीकरण को सस्पेंड कर दिया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि गर्भ में मौजूद भ्रूण की लैंगिक जानकारी तक पहुंच पर प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है।
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी अधिनियम) के सख्त कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को कई निर्देश पारित करते हुए कहा कि भ्रूण का लिंग जानने पर लगा प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है।
पीसी एंड पीएनडीटी ऐक्ट क्यों लागू हुआ?
पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम 20 सितंबर 1994 को भ्रूण के लिंग के निर्धारण के लिए मुख्य रूप से कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीकों को प्रतिबंधित करने के इरादे से लागू किया गया था। इस अधिनियम का शुरुआती उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना था। यह अधिनियम गलती करनेवाले रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट को बचने का कोई प्रस्ताव नहीं देता है।
इस अधिनियम के बारे अदालत ने कहा कि सुविचारित और अच्छी तरह से लागू किया गया पीसी और पीएनडीटी अधिनियम और नियम लैंगिक असंतुलन से निपटने के लिए हस्तक्षेप के साधन हैं। अधिनियम के सामाजिक संदर्भ के साथ-साथ अपराध को भी याद रखने की ज़रूरत है। साथ यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि लैंगिक हिंसा, चाहे वह जन्म के बाद एक महिला बच्चे की सुरक्षा हो या उसके पैदा न होने पर भी हो, केवल राज्य की चिंता नहीं है, बल्कि अदालतों की भी चिंता है। जबकि व्यवहारिक परिवर्तन प्रत्येक परिवार से शुरू होना चाहिए। जब तक उक्त लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कानून का सख्त होना ज़रूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब यह अधिनियम विधायिका द्वारा बनाया गया था, तो अन्य चिकित्सा मुद्दों के साथ-साथ इसका मुख्य उद्देश्य भ्रूण में मौजूद बच्चे के सेक्स बताने की प्रथा को रोकना और दंडित करना भी था। विधायिका इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ थी कि देश के अधिकांश हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या एक आम मुद्दा था। पिछला लिंगानुपात जनसंख्या प्रवृत्ति देश में पुरुष संतानों के लिए वरीयता दर्शाती है। यह मुद्दा इस हद तक अत्यंत महत्वपूर्ण था कि एक लड़की के जन्म से पहले ही उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों के पूरक के लिए और उसके लिंग के आधार पर उसकी हत्या नहीं की जाए, विभिन्न सरकारों ने अतीत में कई योजनाओं को लागू किया।
हाल ही में, लड़कियों की शिक्षा और कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने ऐसी योजनाएं लागू की हैं जिनमें मुफ्त शिक्षा जैसे प्रोत्साहन प्रदान करना और बेटी के जन्म पर एक निश्चित राशि बैंक में जमा करना शामिल है, ताकि उसे बोझ न समझा जाए और उसके माता-पिता को इस बात की चिंता नहीं हो कि उसकी शिक्षा या शादी का खर्चा कैसे उठाया जाए। माज में देखा गया है कि ज़्यादातर लोग लड़कियों को बेटियों के रूप में इसीलिए पसंद नहीं करते हैं कि उसके बड़े होने तक उसकी शिक्षा का बोझ कैसे उठाएंगे और जवान होने के बाद उसकी शादी का खर्चा कैसे वहां होगा। शिक्षा पर खर्चा न करने के पीछे का कारण लड़कियों को दूसरे घर का कूड़ा समझने की सोच है। यही सोच लड़कियों को अच्छा खाने को न देने और शिक्षा पर खर्चा करने से माता-पिता को रोकती है। वे ये सोचते हैं कि इस पर खर्चा करने का क्या फायदा यह तो दूसरे घर चली जाएगी।
हालांकि, एक अजन्मी बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवहारिक बदलाव ज़रूरी हैं। सरकारों द्वारा अलग-अलग योजनाओं को लागू किए जाने के बावजूद हमारा पितृसत्तात्मक समाज हमेशा कम से कम एक लड़के की इच्छा रखते हैं। यह लिंग निर्धारण के लिए एक प्रमुख मानदंड बन गया और इसी वजह से एक लड़की के मामले में अवैध अबॉर्शन होता है । अवैध लिंग निर्धारण परीक्षण और उसके बाद, अवैध अबॉर्शन अपने आप में एक छोटा उद्योग बन गया।
कहने की जरूरत नहीं है कि एक महिला अपने जेंडर के आधार पर 'दोहरी हिंसा' का सामना करती है। पहले, एक महिला पर उसके परिवार के सदस्यों द्वारा केवल एक लड़के को जन्म देने के लिए दबाव डाला जाता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में, पितृसत्तात्मक कंडीशनिंग के कारण महिलाएं खुद एक लड़का चाहती हैं। इस तथ्य पर विचार करते हुए कि एक बार जब वह बूढ़ी हो जाएगी, तो उसके पास एक बेटा होगा जो उसे सहारा देगा। कुछ मामलों में महिलाओं में यह भी असुरक्षा की भावना होती है कि अगर वे एक लड़के को जन्म देने में सक्षम नहीं होती हैं, तो उन्हें परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पितृसत्तात्मक समाज द्वारा भी सम्मान या महत्व नहीं दिया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब यह अधिनियम विधायिका द्वारा बनाया गया था, तो अन्य चिकित्सा मुद्दों के साथ-साथ इसका मुख्य उद्देश्य भ्रूण में मौजूद बच्चे के सेक्स बताने की प्रथा को रोकना और दंडित करना भी था। विधायिका इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ थी कि देश के अधिकांश हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या एक आम मुद्दा था।
दूसरी ओर, ऐसी स्थितियां होती हैं जब एक महिला के परिवार में पहले बच्चे के रूप में पहले से ही एक बेटी होती है, और उन मामलों में, महिलाओं को अबॉर्शन कराने के लिए गंभीर मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। अगर उनका दूसरा बच्चा लड़का नहीं होता है तो उन्हें मानसिक हिंसा का सामना करना पड़ता है और उनके शारीरिक स्वास्थ्य से फैसले भी परिवार लेता है। इसी से बचने के लिए महिला लिंग निर्धारण का रास्ता चुनती हैं और भ्रूण में बेटा न होने की स्थिति में उसका अबॉर्शन उन्हें करवाना पड़ता है। इस तरह के अबॉर्शन कानून के खिलाफ किए जा रहे हैं जो चयनात्मक लिंग निर्धारण पर आधारित हैं और इस अधिनियम के उद्देश्य पर अंकुश लगते हैं।
लिंग-चयनात्मक परीक्षण, उसके बाद लिंग-चयनात्मक गर्भपात आमतौर पर दूसरी तिमाही के बाद के चरणों के दौरान किए जाते हैं। यह काम न केवल महिलाओं को शारीरिक पीड़ा और आघात पहुंचाती है, बल्कि भावनात्मक उथल-पुथल का कारण भी बनती है। जो महिलाएं ऐसी परिस्थितियों में अबॉर्शन कराने का विकल्प चुनती हैं या परिवार के दबाव में अबॉर्शन कराने के लिए मजबूर होती हैं, वे प्राइवेट क्लीनिकों का विकल्प चुनती हैं जहां पर डॉक्टर असुरक्षित और अस्वच्छ उपकरणों का उपयोग करते हैं। बड़ी संख्या में हमारे देश में महिलाओं के पास सुरक्षित और स्वच्छ गर्भपात सेवाओं तक पहुंच नहीं है। चूंकि वे सरकारी अस्पतालों में ऐसा नहीं करवा सकती हैं, तो वे घर पर या असुरक्षित निजी क्लीनिकों में असुरक्षित तरीके अपनाती हैं। ऐसी महिलाएं चिंता, भय और दुख की भावनाओं का अनुभव कर सकती हैं जिन्हें व्यक्त करना मुश्किल है।
पीसी और पीएनडीटी अधिनियम प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाओं के संचालन को नियंत्रित करता है और लिंग चयन को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है। लेकिन, लिंग निर्धारण परीक्षण का व्यवसाय भ्रूण के लिंग को बताने के लिए परीक्षण करने पर समाप्त नहीं होता है, बल्कि कई मामलों में लिंग-चयनात्मक गर्भपात में समाप्त होता है, जो एक प्रमुख चिंता का विषय है। एक कठोर अधिनियम के होने के बावजूद भी यह कार्य आज भी देश में कई क्लिनिक में चोरी-छिपे किया जाता है जो कि की विफलता को दर्शाता है।
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हाल ही में अपने एक फ़ैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। इस डॉक्टर पर अवैध लिंग परीक्षण के संबंध में सूचना पर एक अस्पताल में छापेमारी के बाद पीसीपीएनडीटी अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि गर्भ में मौजूद भ्रूण की लैंगिक जानकारी तक पहुंच पर प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है। इस मामले के तहत ज़िला उपयुक्त प्राधिकरण, पीसी एंड पीएनडीटी, रोहतक को कुछ डॉक्टरों द्वारा जीवन अस्पताल, नई दिल्ली में भ्रूण के अवैध लिंग निर्धारण के संबंध में एक सूचना प्राप्त हुई थी और फिर वह सूचना डॉ. नितिन राज्य कार्यक्रम अधिकारी, पीसी और पीएनडीटी को भेज दी गई थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचित किया था। ऐसी सूचना मिलने पर, दिल्ली में संबंधित प्राधिकरण ने एसडीएम, डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण पूर्वी दिल्ली की अध्यक्षता में जिला निरीक्षण निगरानी समिति टीम, दक्षिण पूर्व जिला, नई दिल्ली और पीसी एंड पीएनडीटी टीम, रोहतक की एक संयुक्त छापेमारी टीम का गठन किया था। सभी ने मिलकर एक महिला को फ़र्ज़ी मरीज़ बनाकर जीवन हॉस्पिटल में भेजा और फिर सही समय पर छापेमारी करके अस्पताल में आरोपी लोगों को पकड़ लिया उसके बाद डॉ. शिखा और एक डॉ. रविंदर सभरवाल को जिला उपयुक्त प्राधिकरण, दक्षिण पूर्वी दिल्ली के कार्यालय से एक निलंबन आदेश दिया, साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस प्राप्त भी भेजा, जिसके द्वारा पीसी और पीएनडीटी अधिनियम की धारा बीस के तहत जीवन अस्पताल के पंजीकरण को सस्पेंड कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि गर्भ में मौजूद भ्रूण की लैंगिक जानकारी तक पहुंच पर प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के सख्त कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को कई निर्देश पारित करते हुए कहा कि भ्रूण का लिंग जानने पर लगा प्रतिबंध सीधे तौर पर महिलाओं के प्रति द्वेष की समस्या से जुड़ा है, जो न केवल इस देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी सभी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को प्रभावित करता है। पीसी एंड पीएनडीटी ऐक्ट क्यों लागू हुआ? पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम बीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ चौरानवे को भ्रूण के लिंग के निर्धारण के लिए मुख्य रूप से कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीकों को प्रतिबंधित करने के इरादे से लागू किया गया था। इस अधिनियम का शुरुआती उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना था। यह अधिनियम गलती करनेवाले रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट को बचने का कोई प्रस्ताव नहीं देता है। इस अधिनियम के बारे अदालत ने कहा कि सुविचारित और अच्छी तरह से लागू किया गया पीसी और पीएनडीटी अधिनियम और नियम लैंगिक असंतुलन से निपटने के लिए हस्तक्षेप के साधन हैं। अधिनियम के सामाजिक संदर्भ के साथ-साथ अपराध को भी याद रखने की ज़रूरत है। साथ यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि लैंगिक हिंसा, चाहे वह जन्म के बाद एक महिला बच्चे की सुरक्षा हो या उसके पैदा न होने पर भी हो, केवल राज्य की चिंता नहीं है, बल्कि अदालतों की भी चिंता है। जबकि व्यवहारिक परिवर्तन प्रत्येक परिवार से शुरू होना चाहिए। जब तक उक्त लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कानून का सख्त होना ज़रूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब यह अधिनियम विधायिका द्वारा बनाया गया था, तो अन्य चिकित्सा मुद्दों के साथ-साथ इसका मुख्य उद्देश्य भ्रूण में मौजूद बच्चे के सेक्स बताने की प्रथा को रोकना और दंडित करना भी था। विधायिका इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ थी कि देश के अधिकांश हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या एक आम मुद्दा था। पिछला लिंगानुपात जनसंख्या प्रवृत्ति देश में पुरुष संतानों के लिए वरीयता दर्शाती है। यह मुद्दा इस हद तक अत्यंत महत्वपूर्ण था कि एक लड़की के जन्म से पहले ही उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों के पूरक के लिए और उसके लिंग के आधार पर उसकी हत्या नहीं की जाए, विभिन्न सरकारों ने अतीत में कई योजनाओं को लागू किया। हाल ही में, लड़कियों की शिक्षा और कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने ऐसी योजनाएं लागू की हैं जिनमें मुफ्त शिक्षा जैसे प्रोत्साहन प्रदान करना और बेटी के जन्म पर एक निश्चित राशि बैंक में जमा करना शामिल है, ताकि उसे बोझ न समझा जाए और उसके माता-पिता को इस बात की चिंता नहीं हो कि उसकी शिक्षा या शादी का खर्चा कैसे उठाया जाए। माज में देखा गया है कि ज़्यादातर लोग लड़कियों को बेटियों के रूप में इसीलिए पसंद नहीं करते हैं कि उसके बड़े होने तक उसकी शिक्षा का बोझ कैसे उठाएंगे और जवान होने के बाद उसकी शादी का खर्चा कैसे वहां होगा। शिक्षा पर खर्चा न करने के पीछे का कारण लड़कियों को दूसरे घर का कूड़ा समझने की सोच है। यही सोच लड़कियों को अच्छा खाने को न देने और शिक्षा पर खर्चा करने से माता-पिता को रोकती है। वे ये सोचते हैं कि इस पर खर्चा करने का क्या फायदा यह तो दूसरे घर चली जाएगी। हालांकि, एक अजन्मी बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवहारिक बदलाव ज़रूरी हैं। सरकारों द्वारा अलग-अलग योजनाओं को लागू किए जाने के बावजूद हमारा पितृसत्तात्मक समाज हमेशा कम से कम एक लड़के की इच्छा रखते हैं। यह लिंग निर्धारण के लिए एक प्रमुख मानदंड बन गया और इसी वजह से एक लड़की के मामले में अवैध अबॉर्शन होता है । अवैध लिंग निर्धारण परीक्षण और उसके बाद, अवैध अबॉर्शन अपने आप में एक छोटा उद्योग बन गया। कहने की जरूरत नहीं है कि एक महिला अपने जेंडर के आधार पर 'दोहरी हिंसा' का सामना करती है। पहले, एक महिला पर उसके परिवार के सदस्यों द्वारा केवल एक लड़के को जन्म देने के लिए दबाव डाला जाता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में, पितृसत्तात्मक कंडीशनिंग के कारण महिलाएं खुद एक लड़का चाहती हैं। इस तथ्य पर विचार करते हुए कि एक बार जब वह बूढ़ी हो जाएगी, तो उसके पास एक बेटा होगा जो उसे सहारा देगा। कुछ मामलों में महिलाओं में यह भी असुरक्षा की भावना होती है कि अगर वे एक लड़के को जन्म देने में सक्षम नहीं होती हैं, तो उन्हें परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पितृसत्तात्मक समाज द्वारा भी सम्मान या महत्व नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब यह अधिनियम विधायिका द्वारा बनाया गया था, तो अन्य चिकित्सा मुद्दों के साथ-साथ इसका मुख्य उद्देश्य भ्रूण में मौजूद बच्चे के सेक्स बताने की प्रथा को रोकना और दंडित करना भी था। विधायिका इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ थी कि देश के अधिकांश हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या एक आम मुद्दा था। दूसरी ओर, ऐसी स्थितियां होती हैं जब एक महिला के परिवार में पहले बच्चे के रूप में पहले से ही एक बेटी होती है, और उन मामलों में, महिलाओं को अबॉर्शन कराने के लिए गंभीर मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। अगर उनका दूसरा बच्चा लड़का नहीं होता है तो उन्हें मानसिक हिंसा का सामना करना पड़ता है और उनके शारीरिक स्वास्थ्य से फैसले भी परिवार लेता है। इसी से बचने के लिए महिला लिंग निर्धारण का रास्ता चुनती हैं और भ्रूण में बेटा न होने की स्थिति में उसका अबॉर्शन उन्हें करवाना पड़ता है। इस तरह के अबॉर्शन कानून के खिलाफ किए जा रहे हैं जो चयनात्मक लिंग निर्धारण पर आधारित हैं और इस अधिनियम के उद्देश्य पर अंकुश लगते हैं। लिंग-चयनात्मक परीक्षण, उसके बाद लिंग-चयनात्मक गर्भपात आमतौर पर दूसरी तिमाही के बाद के चरणों के दौरान किए जाते हैं। यह काम न केवल महिलाओं को शारीरिक पीड़ा और आघात पहुंचाती है, बल्कि भावनात्मक उथल-पुथल का कारण भी बनती है। जो महिलाएं ऐसी परिस्थितियों में अबॉर्शन कराने का विकल्प चुनती हैं या परिवार के दबाव में अबॉर्शन कराने के लिए मजबूर होती हैं, वे प्राइवेट क्लीनिकों का विकल्प चुनती हैं जहां पर डॉक्टर असुरक्षित और अस्वच्छ उपकरणों का उपयोग करते हैं। बड़ी संख्या में हमारे देश में महिलाओं के पास सुरक्षित और स्वच्छ गर्भपात सेवाओं तक पहुंच नहीं है। चूंकि वे सरकारी अस्पतालों में ऐसा नहीं करवा सकती हैं, तो वे घर पर या असुरक्षित निजी क्लीनिकों में असुरक्षित तरीके अपनाती हैं। ऐसी महिलाएं चिंता, भय और दुख की भावनाओं का अनुभव कर सकती हैं जिन्हें व्यक्त करना मुश्किल है। पीसी और पीएनडीटी अधिनियम प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाओं के संचालन को नियंत्रित करता है और लिंग चयन को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है। लेकिन, लिंग निर्धारण परीक्षण का व्यवसाय भ्रूण के लिंग को बताने के लिए परीक्षण करने पर समाप्त नहीं होता है, बल्कि कई मामलों में लिंग-चयनात्मक गर्भपात में समाप्त होता है, जो एक प्रमुख चिंता का विषय है। एक कठोर अधिनियम के होने के बावजूद भी यह कार्य आज भी देश में कई क्लिनिक में चोरी-छिपे किया जाता है जो कि की विफलता को दर्शाता है।
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भारत और श्रीलंका के बीच 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस टेस्ट सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच आज कुछ ही देर के बाद बैंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुरू होगा। पिंक बॉल से खेले जाने वाले इस डे-नाइट टेस्ट मैच के लिए दोनों ही टीमें पूरी तरह से तैयार खड़ी हैं।
बैंगलुरू में होने वाले इस मैच में भारतीय टीम की नजरें जीत पर हैं। भारत ने पहले टेस्ट मैच में श्रीलंका को बड़े अंतर से मात दी थी, जिसके बाद टीम इंडिया इस मैच को जीतने के साथ ही लंका पर क्लीन स्वीप करने की कोशिश करेगी।
भारतीय टीम की जिस लय को देखा जा रहा है, उससे तो इस डे-नाइट टेस्ट मैच में भी जीतने की प्रबल संभावना है। टीम इंडिया के दिग्गज स्पिन गेंदबाज आर अश्विन की इस मैच में एक बड़े खिलाड़ी को पीछे करने पर ध्यान रहेगा।
भारत के अनुभवी ऑफ स्पिन गेंदबाज आर अश्विन इस मैच में एक बड़ा कमाल अपने नाम कर सकते हैं। आर अश्विन श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में 4 विकेट लेने के साथ ही टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले 8वें गेंदबाज बन जाएंगे।
आर अश्विन के पास यहां दक्षिण अफ्रीका के पूर्व महान तेज गेंदबाज डेल स्टेन को पीछे करने का आसान मौका रहेगा। डेल स्टेन के नाम टेस्ट क्रिकेट में 439 विकेट दर्ज हैं। ऐसे में जब अश्विन 4 विकेट और झटकते हैं, तो उनके विकेट की संख्या 440 हो जाएगी और वो स्टेन को पीछे कर 8वें सफलतम टेस्ट गेंदबाद बन जाएंगे।
अपनी फिरकी से पिछले कई सालों से बल्लेबाजों को नचाने वाले आर अश्विन के नाम फिलहाल 85 टेस्ट मैचों में 24. 26 की शानदार औसत से 436 विकेट दर्ज हैं। तो वहीं डेल स्टेन ने 93 टेस्ट जरूर खेले हैं, लेकिन उन्होंने 22. 95 की बेहतरीन औसत से 439 विकेट हासिल किए हैं।
डेल स्टेन को तो आर अश्विन इसी मैच में पीछे कर सकते हैं, लेकिन वो इसके बाद टेस्ट के 7वें सबसे सफलतम गेंदबाड कर्टनी वॉल्श से 83 विकेट दूर हैं। 519 विकेट लेने वाले कर्टनी वॉल्श को पीछे करने में आर अश्विन को मौजूदा फॉर्म को देखते हुए भी करीब सालभर से ज्यादा का समय हो सकता है।
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भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस टेस्ट सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच आज कुछ ही देर के बाद बैंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुरू होगा। पिंक बॉल से खेले जाने वाले इस डे-नाइट टेस्ट मैच के लिए दोनों ही टीमें पूरी तरह से तैयार खड़ी हैं। बैंगलुरू में होने वाले इस मैच में भारतीय टीम की नजरें जीत पर हैं। भारत ने पहले टेस्ट मैच में श्रीलंका को बड़े अंतर से मात दी थी, जिसके बाद टीम इंडिया इस मैच को जीतने के साथ ही लंका पर क्लीन स्वीप करने की कोशिश करेगी। भारतीय टीम की जिस लय को देखा जा रहा है, उससे तो इस डे-नाइट टेस्ट मैच में भी जीतने की प्रबल संभावना है। टीम इंडिया के दिग्गज स्पिन गेंदबाज आर अश्विन की इस मैच में एक बड़े खिलाड़ी को पीछे करने पर ध्यान रहेगा। भारत के अनुभवी ऑफ स्पिन गेंदबाज आर अश्विन इस मैच में एक बड़ा कमाल अपने नाम कर सकते हैं। आर अश्विन श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में चार विकेट लेने के साथ ही टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले आठवें गेंदबाज बन जाएंगे। आर अश्विन के पास यहां दक्षिण अफ्रीका के पूर्व महान तेज गेंदबाज डेल स्टेन को पीछे करने का आसान मौका रहेगा। डेल स्टेन के नाम टेस्ट क्रिकेट में चार सौ उनतालीस विकेट दर्ज हैं। ऐसे में जब अश्विन चार विकेट और झटकते हैं, तो उनके विकेट की संख्या चार सौ चालीस हो जाएगी और वो स्टेन को पीछे कर आठवें सफलतम टेस्ट गेंदबाद बन जाएंगे। अपनी फिरकी से पिछले कई सालों से बल्लेबाजों को नचाने वाले आर अश्विन के नाम फिलहाल पचासी टेस्ट मैचों में चौबीस. छब्बीस की शानदार औसत से चार सौ छत्तीस विकेट दर्ज हैं। तो वहीं डेल स्टेन ने तिरानवे टेस्ट जरूर खेले हैं, लेकिन उन्होंने बाईस. पचानवे की बेहतरीन औसत से चार सौ उनतालीस विकेट हासिल किए हैं। डेल स्टेन को तो आर अश्विन इसी मैच में पीछे कर सकते हैं, लेकिन वो इसके बाद टेस्ट के सातवें सबसे सफलतम गेंदबाड कर्टनी वॉल्श से तिरासी विकेट दूर हैं। पाँच सौ उन्नीस विकेट लेने वाले कर्टनी वॉल्श को पीछे करने में आर अश्विन को मौजूदा फॉर्म को देखते हुए भी करीब सालभर से ज्यादा का समय हो सकता है।
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पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन की रमता जमात बुधवार सुबह अकबरपुर रोड स्थित अखाड़ा संगलवाला से महतौली स्थित निर्वाण अखाड़ा के लिए सुल्तानपुर पहुंची। सुल्तानपुर में शोभयात्रा में शामिल साधु संतों का जगह-जगह फूल बरसाकर और माला पहनाकर स्वागत किया। इसके चलते दो किलोमीटर का रास्ता तय करने में ही करीब सात घंटे लगे।
कुंभ के शाही स्नान में भाग लेने के लिए पंचायती बड़ा अखाड़ा संतों की रमता जमात बुधवार को महतोली स्थित पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के लिए सुल्तानपुर होती हुई महतोली पहुंची। इससे पहले 6 मार्च से जमात अकबरपुर स्थित अखाड़ा संगलवाला में रुकी हुई थी। सुबह करीब 10 बजे सुल्तानपुर गांव के बाहर ही एसटीजेपी पब्लिक स्कूल पर ग्रामीणों ने संतों का भव्य स्वागत किया। वहां से जमात में शामिल साधु संत पैदल महतोली के लिए रवाना हुए। सुल्तानपुर में जगह-जगह लोगों ने जलपान कराकर, पुष्प माला पहनाकर, फूल बरसाकर और भोजन परोसकर अपने-अपने तरीके से शोभायात्र में शामिल साधु संतों का स्वागत किया। शोभायात्र में सभी धर्मों के लोगों ने शामिल होकर सदभाव का परिचय दिया। शोभायात्रा में शामिल झांकियां और महंत महेश्वर दास, महंत रघुमुनि, महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत सुखदेवानंद, महंत प्रेमदास लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। सुल्तानपुर से होते हुए करीब 5 बजे जमात महतोली अखाड़े में पहुंची। महंत प्रेमदास ने बताया कि 15 मार्च तक जमात महतोली में ही रुककर पूजा पाठ करेगी। इसके बाद 16 मार्च को बादशाहपुर स्थित पंचायती बड़ा अखाड़ा के लिए रवाना होगी।
सुल्तानपुर में पहुंची रमता जमात को लेकर हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोग भी काफी उत्साहित दिखे। सुल्तानपुर के चौक पर पूर्व विधायक तस्लीम अहमद, जिला पंचायत सदस्य मजहर हसन, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शादाब अली, तबरेज आलम, शहीद अहमद, मोहसिन, नदीम अहमद, अशरफ ने स्वागत किया। इसके बाद ग्राम प्रधान पति शादाब अली व पूर्व प्रधान अतहर हसन ने लोगों के साथ स्वागत किया। बड़ी मस्जिद पर भी बड़ी संख्या में युवाओ ने स्वागत किया। सुल्तानपुर में पूरे रास्ते सन्तों पर छतों से फूलों की वर्षा होती रही।
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पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन की रमता जमात बुधवार सुबह अकबरपुर रोड स्थित अखाड़ा संगलवाला से महतौली स्थित निर्वाण अखाड़ा के लिए सुल्तानपुर पहुंची। सुल्तानपुर में शोभयात्रा में शामिल साधु संतों का जगह-जगह फूल बरसाकर और माला पहनाकर स्वागत किया। इसके चलते दो किलोमीटर का रास्ता तय करने में ही करीब सात घंटे लगे। कुंभ के शाही स्नान में भाग लेने के लिए पंचायती बड़ा अखाड़ा संतों की रमता जमात बुधवार को महतोली स्थित पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के लिए सुल्तानपुर होती हुई महतोली पहुंची। इससे पहले छः मार्च से जमात अकबरपुर स्थित अखाड़ा संगलवाला में रुकी हुई थी। सुबह करीब दस बजे सुल्तानपुर गांव के बाहर ही एसटीजेपी पब्लिक स्कूल पर ग्रामीणों ने संतों का भव्य स्वागत किया। वहां से जमात में शामिल साधु संत पैदल महतोली के लिए रवाना हुए। सुल्तानपुर में जगह-जगह लोगों ने जलपान कराकर, पुष्प माला पहनाकर, फूल बरसाकर और भोजन परोसकर अपने-अपने तरीके से शोभायात्र में शामिल साधु संतों का स्वागत किया। शोभायात्र में सभी धर्मों के लोगों ने शामिल होकर सदभाव का परिचय दिया। शोभायात्रा में शामिल झांकियां और महंत महेश्वर दास, महंत रघुमुनि, महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत सुखदेवानंद, महंत प्रेमदास लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। सुल्तानपुर से होते हुए करीब पाँच बजे जमात महतोली अखाड़े में पहुंची। महंत प्रेमदास ने बताया कि पंद्रह मार्च तक जमात महतोली में ही रुककर पूजा पाठ करेगी। इसके बाद सोलह मार्च को बादशाहपुर स्थित पंचायती बड़ा अखाड़ा के लिए रवाना होगी। सुल्तानपुर में पहुंची रमता जमात को लेकर हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोग भी काफी उत्साहित दिखे। सुल्तानपुर के चौक पर पूर्व विधायक तस्लीम अहमद, जिला पंचायत सदस्य मजहर हसन, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शादाब अली, तबरेज आलम, शहीद अहमद, मोहसिन, नदीम अहमद, अशरफ ने स्वागत किया। इसके बाद ग्राम प्रधान पति शादाब अली व पूर्व प्रधान अतहर हसन ने लोगों के साथ स्वागत किया। बड़ी मस्जिद पर भी बड़ी संख्या में युवाओ ने स्वागत किया। सुल्तानपुर में पूरे रास्ते सन्तों पर छतों से फूलों की वर्षा होती रही।
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हालत गंभीर होने पर मासूम को सैफई रेफर किया गया है।
औरैया में एक साल की मासूम से रेप का मामला सामने आया है। सदर कोतवाली के औरैया-दिबियापुर मार्ग पर स्थित एक भट्टा पर काम करने वाले मजदूर ने डेढ़ वर्ष की मासूम के साथ रेप किया। भट्टे पर काम करने वाले लोगों ने मासूम को खून से लथपथ देखा तो सबके होश उड़ गए। उन्होंने फौरन मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने आनन-फानन उसे जिला अस्पताल भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उसे सैफई रेफर किया गया है। वहीं पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
मामला दिबियापुर-औरैया मार्ग पर स्थित ईंट-भट्टे का है। रविवार रात एक डेढ़ वर्षीय मासूम को फतेहपुर निवासी रहीश पुत्र शरीफ खिलाने के लिए ले गया। उसकी मां काम कर रही थी। रहीश ने मासूम के साथ रेप किया और उसको वहीं पर छोड़कर भाग गया। मासूम के रोने-चिल्लाने की आवाज सुन परिजन और दूसरे मजदूर मौके पर पहुंचे। मासूम को खून से लथपथ देख सभी के होश उड़ गए।
परिजनों ने मासूम को जिला अस्पताल भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उसे सैफई रेफर किया गया है। वहीं कोतवाली निरीक्षक संजय पांडेय ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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हालत गंभीर होने पर मासूम को सैफई रेफर किया गया है। औरैया में एक साल की मासूम से रेप का मामला सामने आया है। सदर कोतवाली के औरैया-दिबियापुर मार्ग पर स्थित एक भट्टा पर काम करने वाले मजदूर ने डेढ़ वर्ष की मासूम के साथ रेप किया। भट्टे पर काम करने वाले लोगों ने मासूम को खून से लथपथ देखा तो सबके होश उड़ गए। उन्होंने फौरन मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने आनन-फानन उसे जिला अस्पताल भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उसे सैफई रेफर किया गया है। वहीं पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामला दिबियापुर-औरैया मार्ग पर स्थित ईंट-भट्टे का है। रविवार रात एक डेढ़ वर्षीय मासूम को फतेहपुर निवासी रहीश पुत्र शरीफ खिलाने के लिए ले गया। उसकी मां काम कर रही थी। रहीश ने मासूम के साथ रेप किया और उसको वहीं पर छोड़कर भाग गया। मासूम के रोने-चिल्लाने की आवाज सुन परिजन और दूसरे मजदूर मौके पर पहुंचे। मासूम को खून से लथपथ देख सभी के होश उड़ गए। परिजनों ने मासूम को जिला अस्पताल भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उसे सैफई रेफर किया गया है। वहीं कोतवाली निरीक्षक संजय पांडेय ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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लाइफस्टाइल डेस्कः वास्तु दोष का प्रभाव न केवल पारिवारिक जीवन पर, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी होता है। वास्तु के प्रभाव से अध्ययन के लिए सही वातावरण का निर्माण होता है।
अक्सर यह देखा गया है कि जिस बच्चे के अध्ययन कक्ष में कोई भी वास्तु दोष होता है, उसकी पढ़ाई में बाधाएं आने लगती हैं। वह काफी मेहनत करे तो भी उसे मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलता।
आखिर इसकी क्या वजह है? वास्तु के अनुसार, इसके अनेक कारण हो सकते हैं। आप भी जानिए ऐसे ही कुछ खास उपायों के बारे में जिनसे आपका बच्चा भी पढ़ाई में तेज हो जाएगा।
अध्ययन कक्ष का रंग बच्चे के मन को बहुत प्रभावित करता है। कमरे की दीवारों का रंग बहुत गहरा, भड़कीला और लाल, काला, नीला आदि नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जिस टेबल पर बच्चा पढ़ाई करे, उस पर अनावश्यक वस्तुएं नहीं होनी चाहिए।
बहुत पुरानी किताबें, टूटे और खराब पेन, खाली दवात, रबर के टुकड़े आदि नहीं होने चाहिए। इस कक्ष में प्रकाश की ठीक व्यवस्था होनी चाहिए। जहां तक संभव हो, पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
जहां बैठकर पढ़ाई करे, वहां से बाईं ओर प्रकाश आना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि रोशनी बहुत तेज या धुंधली न हो। इससे बच्चे की आंखें कमजोर हो सकती हैं या सरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
अध्ययन कक्ष में सामान बिखरा हुआ न हो। हर चीज सलीके से और सही जगह रखी होनी चाहिए। कमरे में कचरा, बहुत ज्यादा जूते-चप्पल, बिखरा हुआ खेल का सामान, मैले कपड़े नहीं होने चाहिए। कमरे में बहुत ज्यादा खिड़की-दरवाजे भी नहीं होने चाहिये।
खासतौर पर पढ़ते वक्त बच्चे का ध्यान खिड़की की ओर न जाए। ऐसी स्थिति में खिड़की पर पर्दा लगा देना चाहिए। याद रखें, यह कक्ष सिर्फ अध्ययन के लिए है।
अतः यहां सिर्फ पढ़ाई होनी चाहिए। इस कक्ष में म्यूजिक सिस्टम, टीवी आदि नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार जब तक पढ़ाई करें, मोबाइल आदि उपकरणों से दूर ही रहना चाहिए।
बार-बार मोबाइल देखने से ध्यान भटकता है। अध्ययन कक्ष् में भारी सामान, अनुपयोगी कबाड़, पुराने बर्तन आदि नहीं होने चाहिए। स्टडी रूम में ज्ञान की देवी सरस्वती का चित्र स्थापित कर रोज प्रणाम करने से विद्या की प्राप्ति होती है।
- वास्तु के अनुसार बच्चों के पढ़ने का कमरा यानी स्टडी रूम उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
- स्टडी रूम में किताबों की अलमारी पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए. अगर जगह की कमी के कारण बेडरूम में पढ़ाई करनी हो तो पढ़ते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।
- वास्तु के अनुसार पढ़ाई के वक्त दक्षिण की ओर मुंह करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अग्नि तत्व की प्रधानता होने से बच्चे अनुशासनहीन हो सकते हैं।
- स्टडी टेबल पर ग्लोब या तांबे का पिरामिड रखने से लाभ होता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पढ़ाई की ओर ध्यान केंद्रित होता है।
- स्टडी रूम में TV, VIDEO गेम व CD Player जैसी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। इस चीजों से पढ़ाई से मन भटकता है।
- पढ़ाई के कमरे में पेयजल, घड़ी उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
- स्टडी रूम में गणेशजी और माता सरस्वती की फोटो भी लगानी चाहिए।
- जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता उनके कमरे में मोर पंख रखें।
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लाइफस्टाइल डेस्कः वास्तु दोष का प्रभाव न केवल पारिवारिक जीवन पर, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी होता है। वास्तु के प्रभाव से अध्ययन के लिए सही वातावरण का निर्माण होता है। अक्सर यह देखा गया है कि जिस बच्चे के अध्ययन कक्ष में कोई भी वास्तु दोष होता है, उसकी पढ़ाई में बाधाएं आने लगती हैं। वह काफी मेहनत करे तो भी उसे मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलता। आखिर इसकी क्या वजह है? वास्तु के अनुसार, इसके अनेक कारण हो सकते हैं। आप भी जानिए ऐसे ही कुछ खास उपायों के बारे में जिनसे आपका बच्चा भी पढ़ाई में तेज हो जाएगा। अध्ययन कक्ष का रंग बच्चे के मन को बहुत प्रभावित करता है। कमरे की दीवारों का रंग बहुत गहरा, भड़कीला और लाल, काला, नीला आदि नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जिस टेबल पर बच्चा पढ़ाई करे, उस पर अनावश्यक वस्तुएं नहीं होनी चाहिए। बहुत पुरानी किताबें, टूटे और खराब पेन, खाली दवात, रबर के टुकड़े आदि नहीं होने चाहिए। इस कक्ष में प्रकाश की ठीक व्यवस्था होनी चाहिए। जहां तक संभव हो, पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जहां बैठकर पढ़ाई करे, वहां से बाईं ओर प्रकाश आना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि रोशनी बहुत तेज या धुंधली न हो। इससे बच्चे की आंखें कमजोर हो सकती हैं या सरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन कक्ष में सामान बिखरा हुआ न हो। हर चीज सलीके से और सही जगह रखी होनी चाहिए। कमरे में कचरा, बहुत ज्यादा जूते-चप्पल, बिखरा हुआ खेल का सामान, मैले कपड़े नहीं होने चाहिए। कमरे में बहुत ज्यादा खिड़की-दरवाजे भी नहीं होने चाहिये। खासतौर पर पढ़ते वक्त बच्चे का ध्यान खिड़की की ओर न जाए। ऐसी स्थिति में खिड़की पर पर्दा लगा देना चाहिए। याद रखें, यह कक्ष सिर्फ अध्ययन के लिए है। अतः यहां सिर्फ पढ़ाई होनी चाहिए। इस कक्ष में म्यूजिक सिस्टम, टीवी आदि नहीं होने चाहिए। इसी प्रकार जब तक पढ़ाई करें, मोबाइल आदि उपकरणों से दूर ही रहना चाहिए। बार-बार मोबाइल देखने से ध्यान भटकता है। अध्ययन कक्ष् में भारी सामान, अनुपयोगी कबाड़, पुराने बर्तन आदि नहीं होने चाहिए। स्टडी रूम में ज्ञान की देवी सरस्वती का चित्र स्थापित कर रोज प्रणाम करने से विद्या की प्राप्ति होती है। - वास्तु के अनुसार बच्चों के पढ़ने का कमरा यानी स्टडी रूम उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। - स्टडी रूम में किताबों की अलमारी पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए. अगर जगह की कमी के कारण बेडरूम में पढ़ाई करनी हो तो पढ़ते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए। - वास्तु के अनुसार पढ़ाई के वक्त दक्षिण की ओर मुंह करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अग्नि तत्व की प्रधानता होने से बच्चे अनुशासनहीन हो सकते हैं। - स्टडी टेबल पर ग्लोब या तांबे का पिरामिड रखने से लाभ होता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पढ़ाई की ओर ध्यान केंद्रित होता है। - स्टडी रूम में TV, VIDEO गेम व CD Player जैसी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। इस चीजों से पढ़ाई से मन भटकता है। - पढ़ाई के कमरे में पेयजल, घड़ी उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए। - स्टडी रूम में गणेशजी और माता सरस्वती की फोटो भी लगानी चाहिए। - जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता उनके कमरे में मोर पंख रखें।
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कराचीः पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम के वकील ने लाहौर की हमीजा मुख्तार पर आरोप लगाए हैं कि उसने यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और प्रताड़ना के आरोप वापस लेने के लिए इस शीर्ष क्रिकेटर को ब्लैकमेल किया और एक करोड़ रुपये की मांग की। बुधवार को लाहौर में सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि हमीजा ने सुनवाई को लंबा खींचने के लिए देरी करने की रणनीति अपनाई है जिससे कि वह बाबर को ब्लैकमेल कर सके। बाबर अभी राष्ट्रीय टीम के साथ न्यूजीलैंड में हैं।
अदालत में दायर याचिका में हमीजा ने अरोप लगाए हैं कि बाबर उसके साथ रिश्ते में था और शादी का वादा करके उसने उसका यौन उत्पीड़न और उसके पैसे का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के कप्तान के वकील ने हालांकि कहा कि लड़की ने मामला वापस लेने के लिए पहले एक करोड़ रुपये की मांग की और इसके बाद 20 लाख रुपये मांगने लगी। वकील ने हालांकि कहा कि उनका मुवक्किल एक पैसा भी नहीं देगा क्योंकि उसके खिलाफ सभी आरोप आधारहीन हैं।
वकील ने अदालत से कहा, 'वह मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और प्रताड़ित करने का प्रयास कर रही है क्योंकि उसे पता है कि वह जानी मानी हस्ती है। '
उन्होंने साथ ही सत्र अदालत के न्यायाधीश से आग्रह किया कि वह हमीजा के वकील को बुलाएं और इस मामले में जिरह पूरी करने का निर्देश दें। अदालत ने बाद में सुनवाई स्थगित कर दी और हमीजा के वकील को पेश होने और जिरह पूरी करने के निर्देश जारी किए।
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कराचीः पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम के वकील ने लाहौर की हमीजा मुख्तार पर आरोप लगाए हैं कि उसने यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और प्रताड़ना के आरोप वापस लेने के लिए इस शीर्ष क्रिकेटर को ब्लैकमेल किया और एक करोड़ रुपये की मांग की। बुधवार को लाहौर में सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि हमीजा ने सुनवाई को लंबा खींचने के लिए देरी करने की रणनीति अपनाई है जिससे कि वह बाबर को ब्लैकमेल कर सके। बाबर अभी राष्ट्रीय टीम के साथ न्यूजीलैंड में हैं। अदालत में दायर याचिका में हमीजा ने अरोप लगाए हैं कि बाबर उसके साथ रिश्ते में था और शादी का वादा करके उसने उसका यौन उत्पीड़न और उसके पैसे का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के कप्तान के वकील ने हालांकि कहा कि लड़की ने मामला वापस लेने के लिए पहले एक करोड़ रुपये की मांग की और इसके बाद बीस लाख रुपये मांगने लगी। वकील ने हालांकि कहा कि उनका मुवक्किल एक पैसा भी नहीं देगा क्योंकि उसके खिलाफ सभी आरोप आधारहीन हैं। वकील ने अदालत से कहा, 'वह मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और प्रताड़ित करने का प्रयास कर रही है क्योंकि उसे पता है कि वह जानी मानी हस्ती है। ' उन्होंने साथ ही सत्र अदालत के न्यायाधीश से आग्रह किया कि वह हमीजा के वकील को बुलाएं और इस मामले में जिरह पूरी करने का निर्देश दें। अदालत ने बाद में सुनवाई स्थगित कर दी और हमीजा के वकील को पेश होने और जिरह पूरी करने के निर्देश जारी किए।
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्री श्री नितिन गडकरी कल 18 दिसंबर 2020 को नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया रामपुर (यूपी) में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित किये जा रहे 23वे स्वदेशी शिल्पकारों-दस्तकारों के "हुनर हाट" का उद्घाटन करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी; खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन श्री विनय कुमार सक्सेना और उत्तर प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री सिद्धार्थनाथ सिंह मौजूद रहेंगे।
रामपुर के नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया में 18 से 27 दिसंबर 2020 तक आयोजित हो रहे "हुनर हाट" में देश के कोने-कोने के स्वदेशी दुर्लभ उत्पाद और देश के हर हिस्से से लजीज़ पकवान उपलब्ध हैं। इसके अलावा देश के प्रसिद्द कलाकारों द्वारा हर रोज प्रस्तुत किये जाने वाले पारम्परिक सांस्कृतिक कार्यक्रम यहाँ आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण होंगे। इस "हुनर हाट" में "अनेकता में एकता की संस्कृति" का जीता-जागता एहसास लोग कर सकेंगे। इस "हुनर हाट" में 27 दिसंबर 2020 को "आत्मनिर्भर भारत" कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जायेगा।
श्री नकवी ने कहा कि रामपुर के "हुनर हाट" में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, नागालैंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, बिहार, आँध्रप्रदेश, झारखण्ड, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल एवं अन्य क्षेत्रों से हुनर के उस्ताद कारीगर अपने साथ लकड़ी, ब्रास, बांस, शीशे, कपडे, कागज़, मिटटी आदि के शानदार उत्पाद लेकर आये हैं।
NB/KGS/(MoMA release)
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्री श्री नितिन गडकरी कल अट्ठारह दिसंबर दो हज़ार बीस को नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया रामपुर में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित किये जा रहे तेईसवे स्वदेशी शिल्पकारों-दस्तकारों के "हुनर हाट" का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी; खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन श्री विनय कुमार सक्सेना और उत्तर प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री सिद्धार्थनाथ सिंह मौजूद रहेंगे। रामपुर के नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया में अट्ठारह से सत्ताईस दिसंबर दो हज़ार बीस तक आयोजित हो रहे "हुनर हाट" में देश के कोने-कोने के स्वदेशी दुर्लभ उत्पाद और देश के हर हिस्से से लजीज़ पकवान उपलब्ध हैं। इसके अलावा देश के प्रसिद्द कलाकारों द्वारा हर रोज प्रस्तुत किये जाने वाले पारम्परिक सांस्कृतिक कार्यक्रम यहाँ आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण होंगे। इस "हुनर हाट" में "अनेकता में एकता की संस्कृति" का जीता-जागता एहसास लोग कर सकेंगे। इस "हुनर हाट" में सत्ताईस दिसंबर दो हज़ार बीस को "आत्मनिर्भर भारत" कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जायेगा। श्री नकवी ने कहा कि रामपुर के "हुनर हाट" में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, नागालैंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, बिहार, आँध्रप्रदेश, झारखण्ड, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल एवं अन्य क्षेत्रों से हुनर के उस्ताद कारीगर अपने साथ लकड़ी, ब्रास, बांस, शीशे, कपडे, कागज़, मिटटी आदि के शानदार उत्पाद लेकर आये हैं। NB/KGS/
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जूनियर टूर में युवा टेनिस खिलाड़ियों की सफलताखेल प्रशंसकों की उम्मीदों को पोषण करना, जो एक वयस्क दौरे के लिए स्विचित हो, एथलीट एटीपी रेटिंग के शीर्ष पर चढ़ने में सक्षम होगा। यह वास्तव में ऐसी उम्मीद थी कि फ्रांसीसी टेनिस के प्रशंसकों के बारे में जेरेमी शॉर्डी के बारे में था। लेकिन टेनिस खिलाड़ी जल्द ही तीस साल का है, लेकिन उम्मीदें अधूरी रहती हैं।
सत्रह वर्ष की आयु में, टेनिस खिलाड़ी शुरू होता हैजूनियर दौरे में उनके प्रदर्शन, और सिर्फ एक साल बाद पहली बड़ी सफलता एथलीट के लिए आती है इस साल वह विंबलडन में एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल में खेलता है। और एक साल बाद एक वास्तविक सफलता आती है, बड़ी हेलमेट टूर्नामेंट के तीन फाइनल, और इनमें से एक में वह जीतता है। और यह सिर्फ विंबलडन है, घास पर एक टूर्नामेंट है इस वर्ष जेरेमी शॉर्डी को वर्ष के लिए जूनियर रैंकिंग में तीसरा स्थान मिला है। ऐसा तब था जब वह फ्रांसीसी टेनिस के बढ़ते स्टार थे। लेकिन अब तक ये उम्मीदें उचित नहीं हैं।
2008 के बाद से, जेरेमी शॉर्डी, रेटिंगजो पहले सौ से नीचे नहीं गिरता है, दृढ़ता से दौरे पर अपनी जगह लेता है। 2011 में केवल एक बार, वर्ष के अंत तक, उन्होंने शीर्ष 100 को छोड़ दिया लेकिन हाल ही में उनके परिणाम शीर्ष तीस विश्व टेनिस खिलाड़ियों के क्षेत्र में हैं।
जूनियर टेनिस में उनकी सभी सफलताओं के साथ,जेरेमी शॉर्डी, जिनकी टेनिस काफी मूल है, ने एटीपी में बड़े परिणाम प्राप्त नहीं किए। अपने पूरे करियर के लिए एथलीट वयस्क पुरुष टेनिस में केवल एक खिताब जीतने में सक्षम था। अगर हम इस एथलीट के भौतिक आंकड़ों के बारे में बात करते हैं, तो वे अस्पष्ट हैं, क्योंकि आधुनिक टेनिस के मानक के मुताबिक उनकी काफी बड़ी वृद्धि हुई है, 188 सेंटीमीटर। लेकिन साथ ही यह आसान है, केवल 75 किलोग्राम। ये भौतिक डेटा उसे पर्याप्त शक्तिशाली पिच और अच्छी शक्ति धीरज रखने की अनुमति नहीं देता है, जो आज के विश्व पुरुषों के टेनिस में बहुत जरूरी है।
यह सब के साथ, जेरेमी चौदी सही हाथ हैएक टेनिस खिलाड़ी जो पहले शक्तिशाली नहीं है इसलिए, जीतने के लिए प्रतिद्वंद्वी पर दबाव की एक ताकत नहीं है, लेकिन पिछली रेखा पर एक चालाक खेल है। ग्रैंड स्लैम जेरेमी के टूर्नामेंट में, विशेष रूप से मैचों में तीन जीत से इस तरह की रणनीतियां बड़ी सफलता नहीं मिलीं इस तरह के टूर्नामेंट में सबसे बड़ी सफलता टूर्नामेंट के चौथे दौर में हो रही थी, और केवल एक बार ऐसा मैच जीतना और क्वार्टर फाइनल में शामिल होना संभव हो गया। लेकिन अदालत में और रेटिंग दोनों में स्थिरता, इस एथलीट का मुख्य लाभ है।
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जूनियर टूर में युवा टेनिस खिलाड़ियों की सफलताखेल प्रशंसकों की उम्मीदों को पोषण करना, जो एक वयस्क दौरे के लिए स्विचित हो, एथलीट एटीपी रेटिंग के शीर्ष पर चढ़ने में सक्षम होगा। यह वास्तव में ऐसी उम्मीद थी कि फ्रांसीसी टेनिस के प्रशंसकों के बारे में जेरेमी शॉर्डी के बारे में था। लेकिन टेनिस खिलाड़ी जल्द ही तीस साल का है, लेकिन उम्मीदें अधूरी रहती हैं। सत्रह वर्ष की आयु में, टेनिस खिलाड़ी शुरू होता हैजूनियर दौरे में उनके प्रदर्शन, और सिर्फ एक साल बाद पहली बड़ी सफलता एथलीट के लिए आती है इस साल वह विंबलडन में एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल में खेलता है। और एक साल बाद एक वास्तविक सफलता आती है, बड़ी हेलमेट टूर्नामेंट के तीन फाइनल, और इनमें से एक में वह जीतता है। और यह सिर्फ विंबलडन है, घास पर एक टूर्नामेंट है इस वर्ष जेरेमी शॉर्डी को वर्ष के लिए जूनियर रैंकिंग में तीसरा स्थान मिला है। ऐसा तब था जब वह फ्रांसीसी टेनिस के बढ़ते स्टार थे। लेकिन अब तक ये उम्मीदें उचित नहीं हैं। दो हज़ार आठ के बाद से, जेरेमी शॉर्डी, रेटिंगजो पहले सौ से नीचे नहीं गिरता है, दृढ़ता से दौरे पर अपनी जगह लेता है। दो हज़ार ग्यारह में केवल एक बार, वर्ष के अंत तक, उन्होंने शीर्ष एक सौ को छोड़ दिया लेकिन हाल ही में उनके परिणाम शीर्ष तीस विश्व टेनिस खिलाड़ियों के क्षेत्र में हैं। जूनियर टेनिस में उनकी सभी सफलताओं के साथ,जेरेमी शॉर्डी, जिनकी टेनिस काफी मूल है, ने एटीपी में बड़े परिणाम प्राप्त नहीं किए। अपने पूरे करियर के लिए एथलीट वयस्क पुरुष टेनिस में केवल एक खिताब जीतने में सक्षम था। अगर हम इस एथलीट के भौतिक आंकड़ों के बारे में बात करते हैं, तो वे अस्पष्ट हैं, क्योंकि आधुनिक टेनिस के मानक के मुताबिक उनकी काफी बड़ी वृद्धि हुई है, एक सौ अठासी सेंटीमीटर। लेकिन साथ ही यह आसान है, केवल पचहत्तर किलोग्रामग्राम। ये भौतिक डेटा उसे पर्याप्त शक्तिशाली पिच और अच्छी शक्ति धीरज रखने की अनुमति नहीं देता है, जो आज के विश्व पुरुषों के टेनिस में बहुत जरूरी है। यह सब के साथ, जेरेमी चौदी सही हाथ हैएक टेनिस खिलाड़ी जो पहले शक्तिशाली नहीं है इसलिए, जीतने के लिए प्रतिद्वंद्वी पर दबाव की एक ताकत नहीं है, लेकिन पिछली रेखा पर एक चालाक खेल है। ग्रैंड स्लैम जेरेमी के टूर्नामेंट में, विशेष रूप से मैचों में तीन जीत से इस तरह की रणनीतियां बड़ी सफलता नहीं मिलीं इस तरह के टूर्नामेंट में सबसे बड़ी सफलता टूर्नामेंट के चौथे दौर में हो रही थी, और केवल एक बार ऐसा मैच जीतना और क्वार्टर फाइनल में शामिल होना संभव हो गया। लेकिन अदालत में और रेटिंग दोनों में स्थिरता, इस एथलीट का मुख्य लाभ है।
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जनज्वार। दलितों के साथ उच्च जातियों द्वारा उत्पीड़न की तमाम खबरें आये दिन मीडिया की सुर्खियां बनती रहती हैं, मगर अब पिछड़ी जातियां भी दलितों का शोषण करने में बढ़-चढ़कर सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के हनुमानगढ़ से सामने आ रहा है, जहां पिछड़े समुदाय के लोगों ने दलित युवक को इसलिए नृशंसता से पीटा, क्योंकि उसने अपने मकान पर अंबेडकर का पोस्टर लगाया था। एक दिन बाद गंभीर रूप से घायल दलित युवक की मौत भी हो गयी।
मीडिया में आ रही जानकारी के मुताबिक यह घटना राजस्थान के हनुमानगढ़ में 5 जून को पिछड़ी जाति से संबंध रखने वाले समुदाय के लोगों ने विनोद नाम के युवक की पीट-पीटकर हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने अपने घर पर अंबेडकर का पोस्टर लगाया था।
मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक दलित युवक विनोद मेघवाल राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला था और भीम आर्मी से जुड़ा हुआ था।
विनोद मेघवाले के परिवार द्वारा आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गयी एफआईआर के मुताबिक, 14 अप्रैल को विनोद मेघवाल और उनके भाई मुकेश मेघवाल ने अपनी जाति के ही कुछ अन्य युवाओं के साथ मिलकर गांव में ही भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई और अपने मकान पर आंबेडकर का बैनर भी लगाया था।
एफआईआर के मुताबिक 24 मई 2021 को स्थानीय युवक राकेश सिहाग और उनके भाई अनिल सिहाग उनके घर पहुंचे और घर के बाहर लगे बाबा साहेब के बैनर को फाड़ दिए। FIR में मृतक विनोद के परिजनों ने जानकारी दी है कि राकेश सिहाग और अनिल सिहाग जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। पोस्टर फाड़ने की घटना के बाद दोनों पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद पंचायत ने दोनों को बुलाकर राजीनामा करवाया था।
मृतक विनोद के परिजनों द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक इस घटना के बाद 5 जून की शाम को राकेश सिहाग और उसके कुछ साथियों ने विनोद मेघवाल और उसके मुकेश मेघवाल को उनके खेत के पास रोका और गाली-गलौच के साथ-साथ मारपीट भी शुरू कर दी। राकेश सिहाग और उसके साथियों ने विनोद और मुकेश को बुरी तरह पीटा। विनोद मेघवाल के सिर पर लाठियों से बुरी तरह वार किया गया, जिससे उसकी हालत बहुत खराब हो गयी। उसे मरा हुआ जानकार हमलावर वहां से भाग गये।
परिवार वाले विनोद को गंभीर हालत में स्थानीय रावतसर अस्पताल ले गये, जहां से स्थिति क्रिटिकल होने के कारण उसे हनुमानगढ़ अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जिसके अगले ही दिन यानी 6 जून को इलाज के दौरान विनोद मेघवाल की मौत हो गयी।
आरोपियों पर इस मामले में धारा 302 और SC-ST ऐक्ट समेत तमाम धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने परिवार द्वारा नामजद 4 आरोपियों में से 2 अनिल सिहाग और राकेश सिहाग को गिरफ्तार कर लिया है।
परिजनों द्वारा दर्ज एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब पिछड़ी जाति के युवाओं ने विनोद और उसके भाई पर हमला किया तो वो लोग मारपीट और जातिवादी गालियां देने के साथ लगातार एक ही बात कह रहे थे कि आज हम तुम्हें तुम्हारा अंबेडकरवाद याद दिलायेंगे।
विनोद मेघवाल की मौत के बाद मेघवाल समाज और भीम आर्मी ने स्थानीय स्तर पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आंबेडकर का बैनर फाड़ने वाली बात से माहौल वहां पहले ही तनावपूर्ण था और विनोद की मौत के बाद तनाव और ज्यादा बढ़ गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मामले में DSP रणवीर मीणा ने पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द निलंबित किया जाये। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग उठायी है।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद ट्वीटर पर #JusticeForVinod ट्रेंड करने लगा और लोग लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। भीम आर्मी ने इसके बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन की भी अपील की।
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जनज्वार। दलितों के साथ उच्च जातियों द्वारा उत्पीड़न की तमाम खबरें आये दिन मीडिया की सुर्खियां बनती रहती हैं, मगर अब पिछड़ी जातियां भी दलितों का शोषण करने में बढ़-चढ़कर सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के हनुमानगढ़ से सामने आ रहा है, जहां पिछड़े समुदाय के लोगों ने दलित युवक को इसलिए नृशंसता से पीटा, क्योंकि उसने अपने मकान पर अंबेडकर का पोस्टर लगाया था। एक दिन बाद गंभीर रूप से घायल दलित युवक की मौत भी हो गयी। मीडिया में आ रही जानकारी के मुताबिक यह घटना राजस्थान के हनुमानगढ़ में पाँच जून को पिछड़ी जाति से संबंध रखने वाले समुदाय के लोगों ने विनोद नाम के युवक की पीट-पीटकर हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने अपने घर पर अंबेडकर का पोस्टर लगाया था। मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक दलित युवक विनोद मेघवाल राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला था और भीम आर्मी से जुड़ा हुआ था। विनोद मेघवाले के परिवार द्वारा आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गयी एफआईआर के मुताबिक, चौदह अप्रैल को विनोद मेघवाल और उनके भाई मुकेश मेघवाल ने अपनी जाति के ही कुछ अन्य युवाओं के साथ मिलकर गांव में ही भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई और अपने मकान पर आंबेडकर का बैनर भी लगाया था। एफआईआर के मुताबिक चौबीस मई दो हज़ार इक्कीस को स्थानीय युवक राकेश सिहाग और उनके भाई अनिल सिहाग उनके घर पहुंचे और घर के बाहर लगे बाबा साहेब के बैनर को फाड़ दिए। FIR में मृतक विनोद के परिजनों ने जानकारी दी है कि राकेश सिहाग और अनिल सिहाग जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। पोस्टर फाड़ने की घटना के बाद दोनों पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद पंचायत ने दोनों को बुलाकर राजीनामा करवाया था। मृतक विनोद के परिजनों द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक इस घटना के बाद पाँच जून की शाम को राकेश सिहाग और उसके कुछ साथियों ने विनोद मेघवाल और उसके मुकेश मेघवाल को उनके खेत के पास रोका और गाली-गलौच के साथ-साथ मारपीट भी शुरू कर दी। राकेश सिहाग और उसके साथियों ने विनोद और मुकेश को बुरी तरह पीटा। विनोद मेघवाल के सिर पर लाठियों से बुरी तरह वार किया गया, जिससे उसकी हालत बहुत खराब हो गयी। उसे मरा हुआ जानकार हमलावर वहां से भाग गये। परिवार वाले विनोद को गंभीर हालत में स्थानीय रावतसर अस्पताल ले गये, जहां से स्थिति क्रिटिकल होने के कारण उसे हनुमानगढ़ अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जिसके अगले ही दिन यानी छः जून को इलाज के दौरान विनोद मेघवाल की मौत हो गयी। आरोपियों पर इस मामले में धारा तीन सौ दो और SC-ST ऐक्ट समेत तमाम धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने परिवार द्वारा नामजद चार आरोपियों में से दो अनिल सिहाग और राकेश सिहाग को गिरफ्तार कर लिया है। परिजनों द्वारा दर्ज एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब पिछड़ी जाति के युवाओं ने विनोद और उसके भाई पर हमला किया तो वो लोग मारपीट और जातिवादी गालियां देने के साथ लगातार एक ही बात कह रहे थे कि आज हम तुम्हें तुम्हारा अंबेडकरवाद याद दिलायेंगे। विनोद मेघवाल की मौत के बाद मेघवाल समाज और भीम आर्मी ने स्थानीय स्तर पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आंबेडकर का बैनर फाड़ने वाली बात से माहौल वहां पहले ही तनावपूर्ण था और विनोद की मौत के बाद तनाव और ज्यादा बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मामले में DSP रणवीर मीणा ने पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द निलंबित किया जाये। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवार के लिए पचास लाख रुपये मुआवजे की भी मांग उठायी है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ट्वीटर पर #JusticeForVinod ट्रेंड करने लगा और लोग लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। भीम आर्मी ने इसके बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन की भी अपील की।
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हाल ही में तलाक लेने वाली बिग बॉस सीजन-5 की विजेता और टीवी शो 'कुमकुम' से फेमस हुईं ऐक्ट्रेस जूही परमार ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी बेटी का एक वीडियो पोस्ट किया है. जी हाँ, इस विडियो को देखकर ऐसा लग रहा है कि जूही की 6 साल की बेटी समायरा चीजों को जल्द सीख लेती हैं और उसे किसी भी काम को सीखने में देर नहीं लगती है. आप देख सकते हैं इस विडियो में जूही की बेटी समायरा योग के मुश्किल आसन बड़ी आसानी से करती दिखाई दे रही हैं और अपनी पोस्ट में जूही ने बताया है कि 'समायरा थोड़े समय के लिए उनकी दोस्त आश्का गोराडिया के घर पर रही थी। इसी दौरान समायरा ने योग के कई मुश्किल आसन सीखे थे। '
आप सभी को बता दें कि जूही ने अपनी बेटी के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए आश्का को धन्यवाद भी कहा है वहीं वह अपनी बेटी का पूरा ध्यान रखती हैं.
कपिल के शो में सलमान ने लगाया खूब पैसा, सिद्धू को कहा गेटआउट!
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हाल ही में तलाक लेने वाली बिग बॉस सीजन-पाँच की विजेता और टीवी शो 'कुमकुम' से फेमस हुईं ऐक्ट्रेस जूही परमार ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी बेटी का एक वीडियो पोस्ट किया है. जी हाँ, इस विडियो को देखकर ऐसा लग रहा है कि जूही की छः साल की बेटी समायरा चीजों को जल्द सीख लेती हैं और उसे किसी भी काम को सीखने में देर नहीं लगती है. आप देख सकते हैं इस विडियो में जूही की बेटी समायरा योग के मुश्किल आसन बड़ी आसानी से करती दिखाई दे रही हैं और अपनी पोस्ट में जूही ने बताया है कि 'समायरा थोड़े समय के लिए उनकी दोस्त आश्का गोराडिया के घर पर रही थी। इसी दौरान समायरा ने योग के कई मुश्किल आसन सीखे थे। ' आप सभी को बता दें कि जूही ने अपनी बेटी के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए आश्का को धन्यवाद भी कहा है वहीं वह अपनी बेटी का पूरा ध्यान रखती हैं. कपिल के शो में सलमान ने लगाया खूब पैसा, सिद्धू को कहा गेटआउट!
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हरियाणा के कैथल जिले का सुल्तान 'झोटा' ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. कुछ दिन पहले सुल्तान का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई.
कैथलः हरियाणा के कैथल जिले का सुल्तान 'झोटा' ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. कुछ दिन पहले सुल्तान का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई. बता दें कि बुढ़ाखेड़ा गांव के सुल्तान बुल ने कैथल का ही नहीं, पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है. सुल्तान के मालिक नरेश का कहना है कि सुल्तान जैसा, ना कोई था और शायद ना कोई होगा. उसी के वजह से आज पूरे उत्तरी हरियाणा में लोग हमें जानते हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक नरेश ने सुल्तान को बचपन से पाला है. लेकिन, आज उसके जाने के बाद परिवार में चारों तरफ उदासी छाई हुई है. नरेश हमेशा सुल्तान का खाली खूंटे को निहारता रहता है और हर वक्त उसकी तस्वीर और अवार्ड देखता रहता हैं. कहते हैं कि सुल्तान नरेश के परिवार का इतना नाम रोशन किया, जिसकी आज हर कोई मिसाल देता है.
कहते हैं कि पशु मेलों में तहलका मचाने वाले सुल्तान ने हर एक प्रतियोगिता में झंडे गाड़े हैं. आपको यह जानकार हैरानी होगी की सुल्तान ने हरियाणा की एक म्यूजिक एलबम में भी रोल अदा किया है. नरेश का कहना है कि सुल्तान के चले जाने का दुःख इतना है कि उसकी याद दिल से जाती ही नहीं.
उन्होंने कहा कि अब वो कोशिश करेंगे कि किसी को परवरिश देकर उसके जैसा बनाये, लेकिन उसकी कमी तो पूरी नही होगी. नरेश की आंखों के सामने ही सुल्तान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई जिसका दुख असहनीय है. उनकी मौत पर दुख जताने पशु प्रेमी दूर-दूर से पहुंच रहे हैं.
आपको बता दें कि सुल्तान के सीमन से लाखों की कमाई थी. क्योंकि सुल्तान एक साल में 30 हजार सीमेन की डोज देता था, जो लाखों में बिकता था. सुल्तान साल 2013 में हुई राष्ट्रीय पशु सौंदर्य प्रतियोगिता में झज्जर, करनाल और हिसार में राष्ट्रीय विजेता भी रह चुका है.
तो वहीं, राजस्थान के पुष्कर मेले में एक पशु प्रेमी व्यक्ति का सुल्तान पर दिल आ गया था जिसकी उसने 21 करोड़ा रुपए लगाई थी. लेकिन नरेश ने कहा कि सुल्तान उसका बेटा है और बेटों की कोई कीमत नहीं हुआ करती. नरेश व उसके भाई सुलतान की देखभाल अपने बेटे की तरह ही करते थे.
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हरियाणा के कैथल जिले का सुल्तान 'झोटा' ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. कुछ दिन पहले सुल्तान का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई. कैथलः हरियाणा के कैथल जिले का सुल्तान 'झोटा' ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. कुछ दिन पहले सुल्तान का दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई. बता दें कि बुढ़ाखेड़ा गांव के सुल्तान बुल ने कैथल का ही नहीं, पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है. सुल्तान के मालिक नरेश का कहना है कि सुल्तान जैसा, ना कोई था और शायद ना कोई होगा. उसी के वजह से आज पूरे उत्तरी हरियाणा में लोग हमें जानते हैं. मिली जानकारी के मुताबिक नरेश ने सुल्तान को बचपन से पाला है. लेकिन, आज उसके जाने के बाद परिवार में चारों तरफ उदासी छाई हुई है. नरेश हमेशा सुल्तान का खाली खूंटे को निहारता रहता है और हर वक्त उसकी तस्वीर और अवार्ड देखता रहता हैं. कहते हैं कि सुल्तान नरेश के परिवार का इतना नाम रोशन किया, जिसकी आज हर कोई मिसाल देता है. कहते हैं कि पशु मेलों में तहलका मचाने वाले सुल्तान ने हर एक प्रतियोगिता में झंडे गाड़े हैं. आपको यह जानकार हैरानी होगी की सुल्तान ने हरियाणा की एक म्यूजिक एलबम में भी रोल अदा किया है. नरेश का कहना है कि सुल्तान के चले जाने का दुःख इतना है कि उसकी याद दिल से जाती ही नहीं. उन्होंने कहा कि अब वो कोशिश करेंगे कि किसी को परवरिश देकर उसके जैसा बनाये, लेकिन उसकी कमी तो पूरी नही होगी. नरेश की आंखों के सामने ही सुल्तान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई जिसका दुख असहनीय है. उनकी मौत पर दुख जताने पशु प्रेमी दूर-दूर से पहुंच रहे हैं. आपको बता दें कि सुल्तान के सीमन से लाखों की कमाई थी. क्योंकि सुल्तान एक साल में तीस हजार सीमेन की डोज देता था, जो लाखों में बिकता था. सुल्तान साल दो हज़ार तेरह में हुई राष्ट्रीय पशु सौंदर्य प्रतियोगिता में झज्जर, करनाल और हिसार में राष्ट्रीय विजेता भी रह चुका है. तो वहीं, राजस्थान के पुष्कर मेले में एक पशु प्रेमी व्यक्ति का सुल्तान पर दिल आ गया था जिसकी उसने इक्कीस करोड़ा रुपए लगाई थी. लेकिन नरेश ने कहा कि सुल्तान उसका बेटा है और बेटों की कोई कीमत नहीं हुआ करती. नरेश व उसके भाई सुलतान की देखभाल अपने बेटे की तरह ही करते थे.
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मेष : शनिवार को जातक को किसी भी तरह के शारीरिक कष्ट की आशंका है। बेचैनी रहेगी। छोटी-मोटी यात्रा हो सकती है। विद्यार्थी को सफलता हासिल करेगा। नौकरी में कोई नया काम हो सकता है। आय बढ़ेगा। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा।
वृष : शनिवार को जातक को किसी लंबी व्यावसायिक यात्रा पर जाना पड़ सकता हैं। कानूनी कामों में गति आएगी। भूमि व भवन संबंधी कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। कार्य की प्रशंसा होगी। आय के नए साधन प्राप्त हो सकते हैं। प्रसन्नता रहेगी।
मिथुन : शनिवार को जातक को पहले की गई मेहनत फल प्राप्त होगा। समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। बिजनेस अच्छा चलेगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से मनोनुकूल लाभ होगा। प्रसन्नता रहेगी।
कर्क : शनिवार को जातक किसी विवाद को बढ़ावा न दें। मेहनत का फल कम प्राप्त होगा। थकान व कमजोरी होगी हैं। कोई बुरी खबर मिल सकती है। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। आय में निश्चितता रहेगी। बिजनेस ठीक चलेगा।
सिंह : शनिवार को जातक को नौकरी में अधिकारी की बात सुननी पड़ेगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। निवेश लाभदायक रहेगा। अचानक से लाभ मिलेगा। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से हानि पहुंच सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। बाहर ना जाएं सेहत को नुकसान होगा।
कन्या : शनिवार को जातक रचनात्मक कार्य में सफल रहेंगे। चित्रकारी व संगीत आदि में रुचि रहेगी। नए विचार मन में आएंगे। घर पर ही पार्टी व पिकनिक जैसा माहौल बनाएंगे। जल्दबाजी न करें। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति से मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। बिजनेस मनोनुकूल चलेगा।
तुला : शनिवार को जातक बिना किसी बात के अधिक व्यय होंगे। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कोई पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकती है। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। मानसिक बेचैनी रहेगी। बिजनेस अच्छा चलेगा। जोखिम न लें।
वृश्चिक : शनिवार को जातक को कोई पुराना उधार आसानी से मिलेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। नए कार्य मिलेंगे। भाग्य का साथ रहेगा, भरपूर प्रयास करें। शत्रु पस्त होंगे। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। सेहत का ख्याल रखें।
धनु : शनिवार को जातक को आर्थिक उन्नति के लिए नई योजना बनेगी जिसका तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। नए अनुबंध हो सकते हैं। दोस्तों का सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर जीवन सुखमय होगा। सेहत का ख्याल रखें।
मकर : शनिवार को जातक को किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। थकान व कमजोरी रह सकती है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कानूनी कामों में अनुकूलता रहेगी। विवाद में विजय प्राप्त होगी। आय में नए स्रोत प्राप्त होंगे।
कुंभ : शनिवार को जातक को किसी काम के प्रति अधिक मेहनत करना पड़ेगा। टेक्निकल चीजों के इस्तेमाल में सावधानी रखें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। विवाद हो सकता है। महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें। आय में निश्चितता बनी रहेगी।
मीन : शनिवार को अविवाहित जातक को विवाह प्रस्ताव मिल सकता है। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर खुशी का माहौल रहेगा। दोस्तों का सहयोग प्राप्त होगा। निवेश लाभदायक रहेगा। सेहत ना बचें।
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मेष : शनिवार को जातक को किसी भी तरह के शारीरिक कष्ट की आशंका है। बेचैनी रहेगी। छोटी-मोटी यात्रा हो सकती है। विद्यार्थी को सफलता हासिल करेगा। नौकरी में कोई नया काम हो सकता है। आय बढ़ेगा। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। वृष : शनिवार को जातक को किसी लंबी व्यावसायिक यात्रा पर जाना पड़ सकता हैं। कानूनी कामों में गति आएगी। भूमि व भवन संबंधी कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। कार्य की प्रशंसा होगी। आय के नए साधन प्राप्त हो सकते हैं। प्रसन्नता रहेगी। मिथुन : शनिवार को जातक को पहले की गई मेहनत फल प्राप्त होगा। समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। बिजनेस अच्छा चलेगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से मनोनुकूल लाभ होगा। प्रसन्नता रहेगी। कर्क : शनिवार को जातक किसी विवाद को बढ़ावा न दें। मेहनत का फल कम प्राप्त होगा। थकान व कमजोरी होगी हैं। कोई बुरी खबर मिल सकती है। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। आय में निश्चितता रहेगी। बिजनेस ठीक चलेगा। सिंह : शनिवार को जातक को नौकरी में अधिकारी की बात सुननी पड़ेगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। निवेश लाभदायक रहेगा। अचानक से लाभ मिलेगा। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से हानि पहुंच सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। बाहर ना जाएं सेहत को नुकसान होगा। कन्या : शनिवार को जातक रचनात्मक कार्य में सफल रहेंगे। चित्रकारी व संगीत आदि में रुचि रहेगी। नए विचार मन में आएंगे। घर पर ही पार्टी व पिकनिक जैसा माहौल बनाएंगे। जल्दबाजी न करें। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति से मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। बिजनेस मनोनुकूल चलेगा। तुला : शनिवार को जातक बिना किसी बात के अधिक व्यय होंगे। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कोई पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकती है। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। मानसिक बेचैनी रहेगी। बिजनेस अच्छा चलेगा। जोखिम न लें। वृश्चिक : शनिवार को जातक को कोई पुराना उधार आसानी से मिलेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। नए कार्य मिलेंगे। भाग्य का साथ रहेगा, भरपूर प्रयास करें। शत्रु पस्त होंगे। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। सेहत का ख्याल रखें। धनु : शनिवार को जातक को आर्थिक उन्नति के लिए नई योजना बनेगी जिसका तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। नए अनुबंध हो सकते हैं। दोस्तों का सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर जीवन सुखमय होगा। सेहत का ख्याल रखें। मकर : शनिवार को जातक को किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। थकान व कमजोरी रह सकती है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कानूनी कामों में अनुकूलता रहेगी। विवाद में विजय प्राप्त होगी। आय में नए स्रोत प्राप्त होंगे। कुंभ : शनिवार को जातक को किसी काम के प्रति अधिक मेहनत करना पड़ेगा। टेक्निकल चीजों के इस्तेमाल में सावधानी रखें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। विवाद हो सकता है। महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें। आय में निश्चितता बनी रहेगी। मीन : शनिवार को अविवाहित जातक को विवाह प्रस्ताव मिल सकता है। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर खुशी का माहौल रहेगा। दोस्तों का सहयोग प्राप्त होगा। निवेश लाभदायक रहेगा। सेहत ना बचें।
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भारतीय साहित्यशास्त्र के अध्ययन में यह मेरा तीमरा प्रयास है, जिसे मै साहित्यिकसमाज सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ । इसके पूर्व नै धनञ्जय के सावलोक दशस्पक की हिंदी व्याख्या 'हिंदी दशरूपक' तथा ध्वनिसम्प्रदाय के शब्दशक्तिसवधी विचारों पर 'न्वनिसम्प्रदाय और उसके सिद्धात, भाग १ ( शब्दशक्तिविवेचन ) विद्वानों के सम्मुस प्रस्तुत कर चुका हूँ। 'ध्वनिमम्प्रदाय और उसके सिद्धात भाग १ मेरा डाक्टरेट का प्रवध है तथा इसे नागरीप्रचारिणी सभा ने प्रकाशित किया है। 'हिंदी दशरूपक' पर उत्तरप्रदेश सरकार ने पुरस्कार घोषित कर मुझे प्रोत्साहन दिया है। विद्वानों ने इन दोनों ग्रन्थों को समुचित प्रोत्साहन देकर मेरे उत्साह में अभिवृद्धि की है। अब मै भारतीय माहित्यशाल विषयक इस तीसरे पुष्प को लेकर उपस्थित हो रहा हूँ । प्रस्तुत व्याख्या के गुण-दोपों के विषय में मुझे कुछ नहीं कहना है। मैंने यहाँ टीक उसी शैली का आश्रय लिया है जो 'हिंदी दशरूपक' में पाई जाती है। किंतु 'हिंदी दशम्पक' मे इस व्याख्या में एक विशिष्टता मिलेगी। तत्तत् लकार के साथ मैंने विस्तृत टिप्पणियों की योजना कर मम्मट, रुय्यक, पंडितराज जगनाथ आदि के अलंकारसंबधी नतों के साथ दीक्षित के नतों की तुलनात्मक समालोचना की है । इसके अतिरिक्त कुवलयानद की उपलब्ध दो टीसओ-गंगाधर वाजपेयी कृत रसिकरजनी तथा चैंद्यनाथ तत्पत् कृत अलकारचन्द्रिश - का समुचित उपयोग कर उनके मतों का भी सक्त किया गया ह जाता है, विद्वानों को ये दोनों बातें चिर प्रतीत होगी। अलावडा गहन
है तथा कलकारों की बारीकियों के विषय में स्वय अधिकारीगरों में भी ऐनन्य नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में नहीं पुठ टि रह जाना भर होना
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भारतीय साहित्यशास्त्र के अध्ययन में यह मेरा तीमरा प्रयास है, जिसे मै साहित्यिकसमाज सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ । इसके पूर्व नै धनञ्जय के सावलोक दशस्पक की हिंदी व्याख्या 'हिंदी दशरूपक' तथा ध्वनिसम्प्रदाय के शब्दशक्तिसवधी विचारों पर 'न्वनिसम्प्रदाय और उसके सिद्धात, भाग एक विद्वानों के सम्मुस प्रस्तुत कर चुका हूँ। 'ध्वनिमम्प्रदाय और उसके सिद्धात भाग एक मेरा डाक्टरेट का प्रवध है तथा इसे नागरीप्रचारिणी सभा ने प्रकाशित किया है। 'हिंदी दशरूपक' पर उत्तरप्रदेश सरकार ने पुरस्कार घोषित कर मुझे प्रोत्साहन दिया है। विद्वानों ने इन दोनों ग्रन्थों को समुचित प्रोत्साहन देकर मेरे उत्साह में अभिवृद्धि की है। अब मै भारतीय माहित्यशाल विषयक इस तीसरे पुष्प को लेकर उपस्थित हो रहा हूँ । प्रस्तुत व्याख्या के गुण-दोपों के विषय में मुझे कुछ नहीं कहना है। मैंने यहाँ टीक उसी शैली का आश्रय लिया है जो 'हिंदी दशरूपक' में पाई जाती है। किंतु 'हिंदी दशम्पक' मे इस व्याख्या में एक विशिष्टता मिलेगी। तत्तत् लकार के साथ मैंने विस्तृत टिप्पणियों की योजना कर मम्मट, रुय्यक, पंडितराज जगनाथ आदि के अलंकारसंबधी नतों के साथ दीक्षित के नतों की तुलनात्मक समालोचना की है । इसके अतिरिक्त कुवलयानद की उपलब्ध दो टीसओ-गंगाधर वाजपेयी कृत रसिकरजनी तथा चैंद्यनाथ तत्पत् कृत अलकारचन्द्रिश - का समुचित उपयोग कर उनके मतों का भी सक्त किया गया ह जाता है, विद्वानों को ये दोनों बातें चिर प्रतीत होगी। अलावडा गहन है तथा कलकारों की बारीकियों के विषय में स्वय अधिकारीगरों में भी ऐनन्य नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में नहीं पुठ टि रह जाना भर होना
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(जी. एन. एस) ता. 24 मुंबई अबू धाबी में आगामी फिल्म 'रेस 3' के एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग कर रहीं बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडिज की आंख में चोट लग गई। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर के संवेदनशील हिस्से में चोट लगने के चलते उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद, उन्हें छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वह जल्द ही सेट पर लौट आईं और शूटिंग शुरू की।
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ता. चौबीस मुंबई अबू धाबी में आगामी फिल्म 'रेस तीन' के एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग कर रहीं बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडिज की आंख में चोट लग गई। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर के संवेदनशील हिस्से में चोट लगने के चलते उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद, उन्हें छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वह जल्द ही सेट पर लौट आईं और शूटिंग शुरू की।
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इस पत्र को पढ़ने के बाद मुनि जीतमल की मुद्रा गम्भीर हो गई । वे दो क्षण के लिए स्तब्ध से रहे । उनका मानस इस आकस्मिक उपलब्ध दायित्व की एषणा में लग गया ।
वड़े पत्र में लिखा था - ऋषि जीतमल से सुख- प्रश्न विदित हो । तुम पर मेरा बहुत ध्यान है, दिन - दिन प्रेम वढ रहा है । तुम बहुत प्रसन्न रहना । यहां शीघ्र आ जाओ । शरीर का यत्न करना । तुम्हारे आने से सब काम अच्छे होगे। अधिक रसायन उत्पन्न होगा । कोई कमी नही रहेगी । तुम्हारी और मेरी भावना एक है । शेष समाचार छोटे पत्र मे है । वह तुम जान लेना । उसे अपने मन में रखना । मूल वात यह है कि तुम्हे शीघ्रातिशीघ्र यहा आना है। विलम्ब नही करना है । मुनि सरूपचंद पर मेरी दृष्टि बहुत अनुकूल है । साध्वी दीपांजी तुम से बहुत प्रसन्न है । उनकी वंदना स्वीकार कर लेना । उदयपुर में अच्छा उपकार हुआ है। मेरा यह जिनशासन का भार तुम्हारे कंधों पर है ।
मुनिवर ने आचार्यवर के दोनों पत्र पढ़ । सारी स्थिति ज्ञात हो गई । उन्होंने अपने सहवर्ती तीन साधुओं से कहा - तुम धीमे-धीमे आना । हम लोग लम्बे-लम्बे विहार कर आचार्यवर के पास शीघ्र पहुंच रहे है । मुनिवर एक साधु को साथ ले आगे बढ गये । आपने एक संकल्प किया - आचार्यवर के दर्शन नही होगे तब तक मार्ग मे आने वाले गावो में एक दिन से अधिक नही रहूंगा । किसी भी गांव में दूसरे दिन न आहार करू गा और न पानी पीऊंगा । इस संकल्प के साथ आपकी यात्रा शुरू हुई । जोधपुर, पाली होते हुए मेवाड़ पहुंचे । नाथद्वारा में एक रात का प्रवास कर उसके वाहरी भाग में गए । उधर आचार्यवर उदयपुर से विहार कर नाथद्वारा के वाहरी भाग मे पहुचे। मुनि जीतमल ने वही आचार्यवर के दर्शन किए । ने उन्होने अत्यन्त आनन्द का अनुभव किया । आचार्यवर भी बहुत प्रसन्न हुए । सारा वातावरण उत्साह से भर गया । मुनिवर आचार्यवर के साथ फिर नाथद्वारा में आए । आचार्यवर ने मुनि जीतमल के युवाचार्यपद पर किए गए मनोनयन की घोषणा कर दी । समूचे संघ में मुनि जीतमल की जय का स्वर गूज उठा । प्रसन्न था आकाश, प्रसन्न थी धरती, प्रसन्न था
वातावरण । मुनि जीतमल के मनोनयन में कुछ वाधाएं थी । वाधाओं के बादल फट गए । इसलिए प्रसन्न था आकाश । वे सर्वंसह थे इसलिए उनके मनोनयन से प्रसन्न थी सर्व संघभूमि । उनकी सृजनात्मक शक्ति और कृतित्व की सुरभि से सुरभित था वातावरण, इसलिए वह भी प्रसन्न था । प्रसन्नता की परिस्थिति में मुनि जीतमल अव युवाचार्यपद पर अभिषिक्त हो गए ।
युवाचार्यपद की कसौटी
आचार्य अपने उत्तराधिकारी का मनोनयन करते है, यह कोई आकस्मिक घटना नही है । वे मनोनीत किये जाने वाले व्यक्ति का दीर्घकाल तक परीक्षण करते है, उसे विभिन्न कसौटियों से कसते है । ऋषिराय ने अपने युवाचार्य को जिन कसौटियो से कसा था, वे ये है :
१. विनय और अनुशासन ।
२. गण के प्रति वात्सल्य !
३. आचार - कुशलता, संयम-कुशलता । ४. प्रवचन की योग्यता ।
५. गण के संचालन में निपुणता ।
६. आवश्यक साधन-सामग्री के संकलन की क्षमता । ७. आचरणात्मक और क्रियात्मक क्षमता ।
८. धैर्य ।
९. पराक्रम ।
१०. गम्भीरता ।
११. गण के प्रति समर्पण ।
गण- संचालन की क्षमता हर किसी में नहीं होती । उसके लिए विशेष योग्यता की अपेक्षा होती है । आगम साहित्य में उसकी छह कसौटिया वतलाई गई हैं । गण का सचालन वही कर सकता है जो श्रद्धाशील होता है, सत्यवादी होता है, मेधावी होता है, बहुश्रुत होता है, शक्तिशाली होता है,
६० : प्रज्ञापुरुष नयाचार्य
कलहरहित होता है । '
आचार्यवर ने इन आगमिक मानको का उपयोग कर मुनि जीतमल को युवाचार्य के पद पर अभिषिक्त कर दिया । आचार्यवर ने मुनि जीतमल का मनोनयन उनके परोक्ष में किया। इस मनोनयन की सबसे पहले जानकारी मुनि सरूपचंद को हुई, मुनि जीतमल को वाद मे हुई। वे पाच-छह मास तक अज्ञात अवस्था मे युवाचार्य रहे । अज्ञात के ज्ञात हो जाने पर सघ को एक आश्वासन मिला । कुछ व्यक्ति अन्यमनस्कता और संदेह को लिए हुए भी थे । कुछ लोग चाहते थे कि मुनि जीतमल को आचार्य पद न मिले, वह किसी दूसरे को मिले । कुछ व्यक्ति इस संदेह मे थे कि इतने बड़े-बड़े साधुओं पर मुनि जीतमल कैसे अनुशासन कर पाएंगे ? इन दोनो प्रतिक्रियाओं के साथ नियति जुड़ी हुई नही थी । उस नियति ने आचार्यवर ऋषिराय को आश्वस्त किया और मुनि जीतमल के भविष्य में शासन के विकास का प्रतिबिब देखा ।
१. ठाण ६।१ : छहि ठाणेहि सपण्णे अणगारे अरिहति गण धारित्तए, त जहा - सड्टी पुरिसजाते, सच्चे पुरिसजाते, मेहावी पुरिसजाते, बहुस्सुते पुरिसजाते, सत्तिम, अप्पाधिकरणे ।
युवाचार्यपद पर मनोनयन : ६९
आचार्यपद का अभिषेक
जयाचार्यं पन्द्रह वर्ष तक युवाचार्य अवस्था मे रहे। इस अवधि मे वे ऋषिराय के साथ बहुत कम रहे । उन्होने स्वतन्त्र विहार कर अनेक जनपदों को प्रतिबुद्ध किया । थली प्रदेश ( तत्कालीन बीकानेर राज्य) मे उनकी प्रेरणा से धर्म की व्यापक चेतना जागृत हुई । आचार्यवर ऋषिराय ने सं० १९०८ का चातुर्मासिक प्रवास उदयपुर मे किया । चातुर्मास सम्पन्न होने पर आचार्यवर जनपद विहार करते-करते छोटी रावलिया पहुचे । उन्हें कभीकभी श्वास का प्रकोप हो जाता था । माघ कृष्णा चतुर्दशी का दिन । आचार्यवर ने संध्याकालीन प्रतिक्रमण बैठे-बैठे किया। उनके शरीर मे कोई विशेष व्याधि नही थी, कोई विशेष उपद्रव नही था । सामान्य था स्वास्थ्य और शान्त था मानस । आयुष्य की समाप्ति ही उनके अवसान का कारण वनी । प्रतिक्रमण के पश्चात् सोने की इच्छा हुई । उन्होंने साधुओं से कहा - प्रमार्जनी लाओ । साधुओ ने वह प्रस्तुत कर दी । स्थान का प्रमार्जन कर वे लेट गए । लेटते ही पसीने से भीग गए, श्वास का प्रकोप बढ़ गया। उन्होंने कहा - अब तक सोने पर श्वास का प्रकोप नही होता था । आज यह पहली बार हुआ है । वे तत्काल बैठ गए । कुछ साधु उनके पीछे सहारा दिये बैठे थे । वैठे-बैठे वे महाप्रयाण कर गए । स० १९०८ माघ कृष्णा चतुर्दशी, एक मुहूर्त रात्री के लगभग ।' आचार्यवर का महाप्रयाण, युवाचार्य की अनुपस्थिति । आचार्यवर मेवाड में थे, युवाचार्य थली प्रदेश में । माघ के कृष्णपक्ष में युवाचार्यवर वीदासर में विराज रहे थे । माघ शुक्ला अष्टमी के दिन एक पत्र आया । उसमें समाचार था - १. आ.२९ ३५-४६ [ ऋषिरायचरित ढा० १३] ।
पक्षायुरूप नवाचार्य
आचार्यवर ऋषिराय का माघ कृष्णा चतुर्दशी के दिन स्वर्गवास हो गया । आचार्यवर के स्वर्गवास का समाचार युवाचार्य को दस दिन के बाद मिला । सीमित संचार - साधनों की परिस्थिति में इसे आश्चर्य नहीं कहा जा सकता ।
आचार्यवर के स्वर्गवास का सवाद सुन युवाचार्य को मानसिक आघात जैसा लगा । उन्होंने उस घटना को दृढ़ता के साथ सहा । उस सवेदना के अवसर पर युवाचार्य ने उपवास किया और आचार्यवर के प्रति श्रद्धासिक्त भावाजली समर्पित की । अब युवाचार्य सहज ही आचार्य हो गए। फिर भी औपचारिकता पूर्वक आचार्यपद पर आसीन होना अभी शेष था । माघ शुक्ला पूर्णिमा, वृहस्पतिवार, पुष्य नक्षत्र, विष्टिकरण, शुभ मुहूर्त और शुभ वेला मे चतुर्विध तीर्थ के समक्ष युवाचार्य आचार्यपद पर विराजमान हुए । उस समय साधु-साध्वियों ने उनका अभिनन्दन किया ।
'जय जय नंद ! जय जय भद्र ! भद्रं ते । अजित पर विजय पाएं, विजित की रक्षा करे ।'
इस अभिनंदन पदावली का स्वर गूज उठा। जन-जन का मन उत्साहित हो गया । बीदासर के राजा भी उस पदारोहण समारोह में उपस्थित थे । यह पदारोहण एक धर्माचार्य का था, इसलिए इसमे त्याग - वैराग्य के विकास का उपक्रम भी चला । मुनि रामजी ने जीवन पर्यत बेले-बेले की तपस्या ( दो दिन का उपवास और तीसरे दिन आहार, फिर दो दिन का उपवास और तीसरे दिन आहार ) का सकल्प लिया । अन्य लोगो ने भो नाना प्रकार के त्याग किए । आचार्यवर उस दिन अनेक घरो मे स्वयं गोचरी (आहार और वस्त्र लाने के लिए ) गये । इससे जनता मे प्रसन्नता लहर दौड़ गई।' जयाचार्य आचार्यपद पर आसीन हुए उस समय उनके पास साधु-साध्वियों के वर्ग कम थे । वे आचार्यवर ऋषिराय के पास पहुचे हुए थे । वे ऋषिराय के स्वर्गवास के वाद जयाचार्य के पास नही पहुच पाए, उससे पहले ही युवाचार्य का आचार्य पदारोहण अभिषेक सम्पन्न हो गया । आचार्यवर वीदासर से विहार कर लाडणू पहुचे । वहा मेवाड़ से आने वाले साधु-साध्वियों के वर्गो ने आचार्यवर के दर्शन किए । वहा साबुओं की संख्या चालीस और साध्वियों की संख्या चवांलीस हो गई ।' आने वाले साधुओ ने
आचार्यपद का अनिषेक : ७१
असंतोष की भाषा मे कहा- 'आप हमारे आने से पहले ही पदासीन हो गये । हमारे मन की बात मन मे रह गई ।' आचार्यवर ने कहा - 'तुम लोग होते तो क्या करते ?' साधु वोले - 'हम पट्टोत्सव मनाते, अभिनंदन करते, नई चादर ओढाते ।' आचार्यवर ने मुस्कराते हुए कहा - 'ये सव तुम अब भी कर सकते हो । वात संपन्न हो गई । शोभाचन्दजी बैगानी ने प्रार्थना कीआचार्यप्रवर ! एक वार फिर वीदासर पधारें और वहां कोई वड़ा आयोजन करें । वे वड़े शासन - भक्त और समर्थ व्यक्ति थे । आचार्यवर उनको प्रार्थना स्वीकार कर सुजानगढ़ से वीदासर पधारे । वहा मेवाड़ से आए हुए साधु-साध्वियों ने पट्टोत्सव मनाया ।
कुछ साधु सोचते थे - जयाचार्य का पदारोहण हमारी कुछ शर्तो को स्वीकारने के बाद ही हो सकेगा । किन्तु दूरदर्शी और नीतिज्ञ शास्ता ने ऐसा अवसरही नही दिया । वे इस प्रकार के चिन्तन से अनभिज्ञ नही थे । उनकी अभिज्ञता और विज्ञता ने सूझ-बूझ से काम लिया । शर्त्त मनवाने की वात सोचने वाले साधुओं के आगमन से पूर्व ही पदारोहण - विधि संपन्न हो गई । इसके साथ उनके मानसिक स्वप्न भी संपन्न हो गए । जयाचार्यं शर्तो के बारे में जानते थे । वे शर्ते संघ की एकता के लिए हितकर नही थी । आचार्यवर का ध्यान उन शर्तो में नही उलझा । उन्होने अपनी पूरी शक्ति संघ के विकास की दिशा में लगा दी ।
७२ प्रज्ञापुरुष नयाचार्य
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इस पत्र को पढ़ने के बाद मुनि जीतमल की मुद्रा गम्भीर हो गई । वे दो क्षण के लिए स्तब्ध से रहे । उनका मानस इस आकस्मिक उपलब्ध दायित्व की एषणा में लग गया । वड़े पत्र में लिखा था - ऋषि जीतमल से सुख- प्रश्न विदित हो । तुम पर मेरा बहुत ध्यान है, दिन - दिन प्रेम वढ रहा है । तुम बहुत प्रसन्न रहना । यहां शीघ्र आ जाओ । शरीर का यत्न करना । तुम्हारे आने से सब काम अच्छे होगे। अधिक रसायन उत्पन्न होगा । कोई कमी नही रहेगी । तुम्हारी और मेरी भावना एक है । शेष समाचार छोटे पत्र मे है । वह तुम जान लेना । उसे अपने मन में रखना । मूल वात यह है कि तुम्हे शीघ्रातिशीघ्र यहा आना है। विलम्ब नही करना है । मुनि सरूपचंद पर मेरी दृष्टि बहुत अनुकूल है । साध्वी दीपांजी तुम से बहुत प्रसन्न है । उनकी वंदना स्वीकार कर लेना । उदयपुर में अच्छा उपकार हुआ है। मेरा यह जिनशासन का भार तुम्हारे कंधों पर है । मुनिवर ने आचार्यवर के दोनों पत्र पढ़ । सारी स्थिति ज्ञात हो गई । उन्होंने अपने सहवर्ती तीन साधुओं से कहा - तुम धीमे-धीमे आना । हम लोग लम्बे-लम्बे विहार कर आचार्यवर के पास शीघ्र पहुंच रहे है । मुनिवर एक साधु को साथ ले आगे बढ गये । आपने एक संकल्प किया - आचार्यवर के दर्शन नही होगे तब तक मार्ग मे आने वाले गावो में एक दिन से अधिक नही रहूंगा । किसी भी गांव में दूसरे दिन न आहार करू गा और न पानी पीऊंगा । इस संकल्प के साथ आपकी यात्रा शुरू हुई । जोधपुर, पाली होते हुए मेवाड़ पहुंचे । नाथद्वारा में एक रात का प्रवास कर उसके वाहरी भाग में गए । उधर आचार्यवर उदयपुर से विहार कर नाथद्वारा के वाहरी भाग मे पहुचे। मुनि जीतमल ने वही आचार्यवर के दर्शन किए । ने उन्होने अत्यन्त आनन्द का अनुभव किया । आचार्यवर भी बहुत प्रसन्न हुए । सारा वातावरण उत्साह से भर गया । मुनिवर आचार्यवर के साथ फिर नाथद्वारा में आए । आचार्यवर ने मुनि जीतमल के युवाचार्यपद पर किए गए मनोनयन की घोषणा कर दी । समूचे संघ में मुनि जीतमल की जय का स्वर गूज उठा । प्रसन्न था आकाश, प्रसन्न थी धरती, प्रसन्न था वातावरण । मुनि जीतमल के मनोनयन में कुछ वाधाएं थी । वाधाओं के बादल फट गए । इसलिए प्रसन्न था आकाश । वे सर्वंसह थे इसलिए उनके मनोनयन से प्रसन्न थी सर्व संघभूमि । उनकी सृजनात्मक शक्ति और कृतित्व की सुरभि से सुरभित था वातावरण, इसलिए वह भी प्रसन्न था । प्रसन्नता की परिस्थिति में मुनि जीतमल अव युवाचार्यपद पर अभिषिक्त हो गए । युवाचार्यपद की कसौटी आचार्य अपने उत्तराधिकारी का मनोनयन करते है, यह कोई आकस्मिक घटना नही है । वे मनोनीत किये जाने वाले व्यक्ति का दीर्घकाल तक परीक्षण करते है, उसे विभिन्न कसौटियों से कसते है । ऋषिराय ने अपने युवाचार्य को जिन कसौटियो से कसा था, वे ये है : एक. विनय और अनुशासन । दो. गण के प्रति वात्सल्य ! तीन. आचार - कुशलता, संयम-कुशलता । चार. प्रवचन की योग्यता । पाँच. गण के संचालन में निपुणता । छः. आवश्यक साधन-सामग्री के संकलन की क्षमता । सात. आचरणात्मक और क्रियात्मक क्षमता । आठ. धैर्य । नौ. पराक्रम । दस. गम्भीरता । ग्यारह. गण के प्रति समर्पण । गण- संचालन की क्षमता हर किसी में नहीं होती । उसके लिए विशेष योग्यता की अपेक्षा होती है । आगम साहित्य में उसकी छह कसौटिया वतलाई गई हैं । गण का सचालन वही कर सकता है जो श्रद्धाशील होता है, सत्यवादी होता है, मेधावी होता है, बहुश्रुत होता है, शक्तिशाली होता है, साठ : प्रज्ञापुरुष नयाचार्य कलहरहित होता है । ' आचार्यवर ने इन आगमिक मानको का उपयोग कर मुनि जीतमल को युवाचार्य के पद पर अभिषिक्त कर दिया । आचार्यवर ने मुनि जीतमल का मनोनयन उनके परोक्ष में किया। इस मनोनयन की सबसे पहले जानकारी मुनि सरूपचंद को हुई, मुनि जीतमल को वाद मे हुई। वे पाच-छह मास तक अज्ञात अवस्था मे युवाचार्य रहे । अज्ञात के ज्ञात हो जाने पर सघ को एक आश्वासन मिला । कुछ व्यक्ति अन्यमनस्कता और संदेह को लिए हुए भी थे । कुछ लोग चाहते थे कि मुनि जीतमल को आचार्य पद न मिले, वह किसी दूसरे को मिले । कुछ व्यक्ति इस संदेह मे थे कि इतने बड़े-बड़े साधुओं पर मुनि जीतमल कैसे अनुशासन कर पाएंगे ? इन दोनो प्रतिक्रियाओं के साथ नियति जुड़ी हुई नही थी । उस नियति ने आचार्यवर ऋषिराय को आश्वस्त किया और मुनि जीतमल के भविष्य में शासन के विकास का प्रतिबिब देखा । एक. ठाण छः।एक : छहि ठाणेहि सपण्णे अणगारे अरिहति गण धारित्तए, त जहा - सड्टी पुरिसजाते, सच्चे पुरिसजाते, मेहावी पुरिसजाते, बहुस्सुते पुरिसजाते, सत्तिम, अप्पाधिकरणे । युवाचार्यपद पर मनोनयन : उनहत्तर आचार्यपद का अभिषेक जयाचार्यं पन्द्रह वर्ष तक युवाचार्य अवस्था मे रहे। इस अवधि मे वे ऋषिराय के साथ बहुत कम रहे । उन्होने स्वतन्त्र विहार कर अनेक जनपदों को प्रतिबुद्ध किया । थली प्रदेश मे उनकी प्रेरणा से धर्म की व्यापक चेतना जागृत हुई । आचार्यवर ऋषिराय ने संशून्य एक हज़ार नौ सौ आठ का चातुर्मासिक प्रवास उदयपुर मे किया । चातुर्मास सम्पन्न होने पर आचार्यवर जनपद विहार करते-करते छोटी रावलिया पहुचे । उन्हें कभीकभी श्वास का प्रकोप हो जाता था । माघ कृष्णा चतुर्दशी का दिन । आचार्यवर ने संध्याकालीन प्रतिक्रमण बैठे-बैठे किया। उनके शरीर मे कोई विशेष व्याधि नही थी, कोई विशेष उपद्रव नही था । सामान्य था स्वास्थ्य और शान्त था मानस । आयुष्य की समाप्ति ही उनके अवसान का कारण वनी । प्रतिक्रमण के पश्चात् सोने की इच्छा हुई । उन्होंने साधुओं से कहा - प्रमार्जनी लाओ । साधुओ ने वह प्रस्तुत कर दी । स्थान का प्रमार्जन कर वे लेट गए । लेटते ही पसीने से भीग गए, श्वास का प्रकोप बढ़ गया। उन्होंने कहा - अब तक सोने पर श्वास का प्रकोप नही होता था । आज यह पहली बार हुआ है । वे तत्काल बैठ गए । कुछ साधु उनके पीछे सहारा दिये बैठे थे । वैठे-बैठे वे महाप्रयाण कर गए । सशून्य एक हज़ार नौ सौ आठ माघ कृष्णा चतुर्दशी, एक मुहूर्त रात्री के लगभग ।' आचार्यवर का महाप्रयाण, युवाचार्य की अनुपस्थिति । आचार्यवर मेवाड में थे, युवाचार्य थली प्रदेश में । माघ के कृष्णपक्ष में युवाचार्यवर वीदासर में विराज रहे थे । माघ शुक्ला अष्टमी के दिन एक पत्र आया । उसमें समाचार था - एक. आ.उनतीस पैंतीस-छियालीस [ ऋषिरायचरित ढाशून्य तेरह] । पक्षायुरूप नवाचार्य आचार्यवर ऋषिराय का माघ कृष्णा चतुर्दशी के दिन स्वर्गवास हो गया । आचार्यवर के स्वर्गवास का समाचार युवाचार्य को दस दिन के बाद मिला । सीमित संचार - साधनों की परिस्थिति में इसे आश्चर्य नहीं कहा जा सकता । आचार्यवर के स्वर्गवास का सवाद सुन युवाचार्य को मानसिक आघात जैसा लगा । उन्होंने उस घटना को दृढ़ता के साथ सहा । उस सवेदना के अवसर पर युवाचार्य ने उपवास किया और आचार्यवर के प्रति श्रद्धासिक्त भावाजली समर्पित की । अब युवाचार्य सहज ही आचार्य हो गए। फिर भी औपचारिकता पूर्वक आचार्यपद पर आसीन होना अभी शेष था । माघ शुक्ला पूर्णिमा, वृहस्पतिवार, पुष्य नक्षत्र, विष्टिकरण, शुभ मुहूर्त और शुभ वेला मे चतुर्विध तीर्थ के समक्ष युवाचार्य आचार्यपद पर विराजमान हुए । उस समय साधु-साध्वियों ने उनका अभिनन्दन किया । 'जय जय नंद ! जय जय भद्र ! भद्रं ते । अजित पर विजय पाएं, विजित की रक्षा करे ।' इस अभिनंदन पदावली का स्वर गूज उठा। जन-जन का मन उत्साहित हो गया । बीदासर के राजा भी उस पदारोहण समारोह में उपस्थित थे । यह पदारोहण एक धर्माचार्य का था, इसलिए इसमे त्याग - वैराग्य के विकास का उपक्रम भी चला । मुनि रामजी ने जीवन पर्यत बेले-बेले की तपस्या का सकल्प लिया । अन्य लोगो ने भो नाना प्रकार के त्याग किए । आचार्यवर उस दिन अनेक घरो मे स्वयं गोचरी गये । इससे जनता मे प्रसन्नता लहर दौड़ गई।' जयाचार्य आचार्यपद पर आसीन हुए उस समय उनके पास साधु-साध्वियों के वर्ग कम थे । वे आचार्यवर ऋषिराय के पास पहुचे हुए थे । वे ऋषिराय के स्वर्गवास के वाद जयाचार्य के पास नही पहुच पाए, उससे पहले ही युवाचार्य का आचार्य पदारोहण अभिषेक सम्पन्न हो गया । आचार्यवर वीदासर से विहार कर लाडणू पहुचे । वहा मेवाड़ से आने वाले साधु-साध्वियों के वर्गो ने आचार्यवर के दर्शन किए । वहा साबुओं की संख्या चालीस और साध्वियों की संख्या चवांलीस हो गई ।' आने वाले साधुओ ने आचार्यपद का अनिषेक : इकहत्तर असंतोष की भाषा मे कहा- 'आप हमारे आने से पहले ही पदासीन हो गये । हमारे मन की बात मन मे रह गई ।' आचार्यवर ने कहा - 'तुम लोग होते तो क्या करते ?' साधु वोले - 'हम पट्टोत्सव मनाते, अभिनंदन करते, नई चादर ओढाते ।' आचार्यवर ने मुस्कराते हुए कहा - 'ये सव तुम अब भी कर सकते हो । वात संपन्न हो गई । शोभाचन्दजी बैगानी ने प्रार्थना कीआचार्यप्रवर ! एक वार फिर वीदासर पधारें और वहां कोई वड़ा आयोजन करें । वे वड़े शासन - भक्त और समर्थ व्यक्ति थे । आचार्यवर उनको प्रार्थना स्वीकार कर सुजानगढ़ से वीदासर पधारे । वहा मेवाड़ से आए हुए साधु-साध्वियों ने पट्टोत्सव मनाया । कुछ साधु सोचते थे - जयाचार्य का पदारोहण हमारी कुछ शर्तो को स्वीकारने के बाद ही हो सकेगा । किन्तु दूरदर्शी और नीतिज्ञ शास्ता ने ऐसा अवसरही नही दिया । वे इस प्रकार के चिन्तन से अनभिज्ञ नही थे । उनकी अभिज्ञता और विज्ञता ने सूझ-बूझ से काम लिया । शर्त्त मनवाने की वात सोचने वाले साधुओं के आगमन से पूर्व ही पदारोहण - विधि संपन्न हो गई । इसके साथ उनके मानसिक स्वप्न भी संपन्न हो गए । जयाचार्यं शर्तो के बारे में जानते थे । वे शर्ते संघ की एकता के लिए हितकर नही थी । आचार्यवर का ध्यान उन शर्तो में नही उलझा । उन्होने अपनी पूरी शक्ति संघ के विकास की दिशा में लगा दी । बहत्तर प्रज्ञापुरुष नयाचार्य
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इंफाल : मणिपुर के इंफाल में सोमवार सुबह हथियारबंद दो समूहों के बीच गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए। यह घटना कांगचुप इलाके में हुई। घायलों को इंफाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई है। वहीं आइएएनएस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए लूटे गए 790 अत्याधुनिक और स्वचालित हथियार के साथ ही 10,648 गोलाबारूद बरामद किए हैं। राज्य में तीन मई को जातीय हिंसा भड़कने पर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों से ये लूटे गए थे। इसके साथ ही उग्रवादियों के कई कैंप भी ध्वस्त कर दिए गए। रविवार को गुस्साए ग्रामीणों ने काकचिंग जिले के सुगनु में कुकी उग्रवादियों के खाली पड़े कैंप में आग लगा दी। नाजरेथ कैंप में मौजूद उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी के बाद उग्रवादी कैंप छोड़कर भाग गए थे। वहीं, नासरत इलाके में उग्रवादियों के बेस कैंप को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया।
मणिपुर के काकचिंग जिले के सुगनु में असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के बीच झड़प की खबर को सेना ने खारिज कर दिया है। कोलकाता मुख्यालय स्थित सेना के पूर्वी कमान के सूत्रों ने कहा कि इस तरह की कोई झड़प नहीं हुई है और वर्ष 2021 का पंजाब से जुड़ा एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा जिसमें दुर्घटना में घायल को दिखाया गया है। यह वीडियो झूठा है। दरअसल, सुगनु पुलिस स्टेशन गेट पर राज्य पुलिस और असम राइफल्स के जवानों के बीच पार्किंग को लेकर बहस का वीडियो प्रसारित हो रहा है। इसमें कोई हाथापाई नजर नहीं आ रही है। सूत्रों की ओर से कहा गया है कि तनाव भरे माहौल में इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। सही वीडियो में अधिकारी हालात को संभालने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं।
मणिपुर में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया कि तीन मई के बाद से बंद इंटरनेट के कारण उनका जीवन और आजीवका प्रभावित हो रही है। इस बीच मणिपुर सरकार ने सोमवार को सातवीं बार इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को 10 जून तक बढ़ा दिया है। ¨हसा की छिटपुट घटनाओं के बीच अफवाहों, वीडियो, फोटो और संदेशों को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने ऐसा निर्णय लिया है।
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इंफाल : मणिपुर के इंफाल में सोमवार सुबह हथियारबंद दो समूहों के बीच गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए। यह घटना कांगचुप इलाके में हुई। घायलों को इंफाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई है। वहीं आइएएनएस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए लूटे गए सात सौ नब्बे अत्याधुनिक और स्वचालित हथियार के साथ ही दस,छः सौ अड़तालीस गोलाबारूद बरामद किए हैं। राज्य में तीन मई को जातीय हिंसा भड़कने पर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों से ये लूटे गए थे। इसके साथ ही उग्रवादियों के कई कैंप भी ध्वस्त कर दिए गए। रविवार को गुस्साए ग्रामीणों ने काकचिंग जिले के सुगनु में कुकी उग्रवादियों के खाली पड़े कैंप में आग लगा दी। नाजरेथ कैंप में मौजूद उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी के बाद उग्रवादी कैंप छोड़कर भाग गए थे। वहीं, नासरत इलाके में उग्रवादियों के बेस कैंप को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया। मणिपुर के काकचिंग जिले के सुगनु में असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के बीच झड़प की खबर को सेना ने खारिज कर दिया है। कोलकाता मुख्यालय स्थित सेना के पूर्वी कमान के सूत्रों ने कहा कि इस तरह की कोई झड़प नहीं हुई है और वर्ष दो हज़ार इक्कीस का पंजाब से जुड़ा एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा जिसमें दुर्घटना में घायल को दिखाया गया है। यह वीडियो झूठा है। दरअसल, सुगनु पुलिस स्टेशन गेट पर राज्य पुलिस और असम राइफल्स के जवानों के बीच पार्किंग को लेकर बहस का वीडियो प्रसारित हो रहा है। इसमें कोई हाथापाई नजर नहीं आ रही है। सूत्रों की ओर से कहा गया है कि तनाव भरे माहौल में इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। सही वीडियो में अधिकारी हालात को संभालने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। मणिपुर में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया कि तीन मई के बाद से बंद इंटरनेट के कारण उनका जीवन और आजीवका प्रभावित हो रही है। इस बीच मणिपुर सरकार ने सोमवार को सातवीं बार इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को दस जून तक बढ़ा दिया है। ¨हसा की छिटपुट घटनाओं के बीच अफवाहों, वीडियो, फोटो और संदेशों को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने ऐसा निर्णय लिया है।
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Small Cell Cancer Symptoms: स्मोकिंग के दौरान छोड़ा जाने वाला धुआं सांस के द्वारा दूसरों के भीतर जाता है।
Small Cell Cancer Symptoms: अगर आप धूम्रपान करने वालों में से हैं तो आप को कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं। लंग कैंसर उनमे से सबसे आम है। आज हम आपको धूम्रपान और एससीएलएस जोखिम स्तर, और उसके जोखिम को कम करने के तरीके बताने जा रहे हैं।
स्मॉल सेल कार्सिनोमा (एससीएलसी) सभी फेफड़ों के कैंसर के 10% से 15% के बीच होता है। आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर के इस आक्रामक रूप के दो प्रकार मौजूद हैंः
तेजी से बढ़ने वाले ये कैंसर बेहद घातक होते हैं। वास्तव में, निदान के समय, एससीएलसी वाले लगभग 70% लोगों में उनके कैंसर का मेटास्टेटिक फैलाव होता है। विकिरण और कीमोथेरेपी से थोड़ी राहत मिलती है।
धूम्रपान केवल SCLC जोखिम कारक नहीं है। अन्य जोखिम कारक नीचे दिए गए हैं।
स्मोकिंग के दौरान छोड़ा जाने वाला धुआं सांस के द्वारा दूसरों के भीतर जाता है। सेकेंड हैंड धुएं और फेफड़ों के कैंसर के बीच संबंध सर्वविदित है - लगभग 7,300 लोग हर साल फेफड़ों के कैंसर के पुराने धुएं से संबंधित रूपों से मर जाते हैं - लेकिन ऐसे प्रमाण बढ़ रहे हैं जो आक्रामक एससीएलसी के बढ़ते कारण के रूप में निष्क्रिय धुएं के संपर्क में आने की ओर इशारा करते हैं।
इससे भी अधिक, सेकेंड हैंड धुएं से अस्थमा, वातस्फीति और सीओपीडी से कई बीमारियां होती हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं और आपके जीवन की गुणवत्ता में काफी कमी आ सकती है।
रेडॉन एक रेडियोधर्मी रसायन है जो जमीन की मिट्टी में पाया जाता है। यह यू. एस. में फेफड़ों के कैंसर का दूसरा प्रमुख कारण है और धूम्रपान न करने वालों में कैंसर का पहला प्रमुख कारण है।
उच्च रेडॉन का स्तर फेफड़ों में जमा हो सकता है जब यह निष्क्रिय, गंधहीन, रंगहीन गैस इमारत की नींव में दरार या छेद के माध्यम से घर के अंदर फंस जाती है। थोड़े समय के लिए रेडॉन एक्सपोजर हानिरहित हो सकता है। फिर भी, यदि एक विस्तारित अवधि के लिए उजागर किया जाता है, तो ये हानिकारक कण फेफड़ों की परत में प्रवेश कर सकते हैं और विकिरण छोड़ सकते हैं, आपके सेल के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर ट्यूमर बना सकते हैं।
एस्बेस्टस कैंसर के सबसे आम कारणों में से एक है, जो सभी मामलों में 18% और प्रति वर्ष लगभग 3,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है। यह तीन प्रकार के फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता हैः गैर-छोटी कोशिका, छोटी कोशिका और मेसोथेलियोमा। ये कैंसर आमतौर पर एक्सपोजर के 15 या अधिक वर्षों बाद विकसित होते हैं।
सीमेंट, फर्श की टाइलों और पाइपों जैसी निर्माण सामग्री में इसके उपयोग पर नियमों के कारण आज एस्बेस्टस फाइबर को अंदर लेना कम आम है। हालाँकि, पुराने घरों (1980 के दशक से पहले निर्मित) में यह अभी भी एक समस्या है। जिन घरों का निरीक्षण नहीं किया गया है या जिन्हें फिर से बनाया जा रहा है, उनके परिणामस्वरूप आप अनजाने में इस कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ के जहरीले स्तर को सांस ले सकते हैं।
आवासीय वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर शहरी अमेरिकी शहरों और दुनिया भर में चिंता का एक बढ़ता हुआ कारण है। कैलिफ़ोर्निया में, 350, 000 से अधिक लोगों को देखने वाले एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहते थे, उनमें एससीएलसी, एनएससीएलसी और एडेनोकार्सिनोमा विकसित होने की संभावना अधिक थी। हालांकि, संघ प्रारंभिक चरण के गैर-छोटे सेल कैंसर वाले लोगों के लिए थे, विशेष रूप से एडेनोकार्सिनोमा।
इसी तरह के परिणाम दक्षिण कोरियाई अध्ययन में पाए गए, जिसमें पाया गया कि वायु प्रदूषण सभी फेफड़ों के कैंसर के मामलों का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है, जिसकी उच्चतम दर घनी आबादी वाले शहरी केंद्रों के आसपास है।
आर्सेनिक के लिए लगातार संपर्क - आमतौर पर दूषित पानी या व्यावसायिक जोखिम के अनजाने अंतर्ग्रहण के माध्यम से - आजीवन गैर-धूम्रपान करने वालों में एससीएलसी के विकास से जुड़ा हुआ है।
ध्यान दें, केस रिपोर्ट्स ने एससीएलसी के ऐसे मामलों की पहचान की है जो अस्थमा के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक चीनी दवाओं में पाए जाने वाले आर्सेनिक के लंबे समय तक संपर्क में रहने के बाद 30 वर्षों में उत्पन्न होते हैं।
रेडिएशन थेरेपी आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला फेफड़ों के कैंसर का इलाज है, जो मुश्किल से दिखने वाले फेफड़ों के कैंसर कोशिकाओं को मारने, पुनरावृत्ति को कम करने या आपके कैंसर के वापस आने की संभावना को कम करने के लिए उपचार के दौरान या बाद में शुरू किया जाता है।
विकिरण चिकित्सा एक्स-रे की उच्च खुराक का उपयोग तेजी से विभाजित होने वाले कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाने के लिए करती है, इस प्रक्रिया में उन्हें नष्ट कर देती है। विकिरण चिकित्सा शायद ही कभी फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है, विशेष रूप से छोटे सेल उपप्रकार, लेकिन यदि ऐसा होता है, तो यह आमतौर पर इलाज किए जा रहे एक से अलग होता है।
कभी-कभी आपके आनुवंशिकी आपको फेफड़ों के कैंसर का शिकार कर सकते हैं। यह उन व्यक्तियों में अधिक होने की संभावना है, जिनके परिवार के तत्काल गैर-धूम्रपान करने वाले सदस्य हैं जिन्हें फेफड़ों का कैंसर है या हुआ है। कुछ विरासत में मिले उत्परिवर्तन माता-पिता से उनके बच्चों में पारित किए जा सकते हैं, हालांकि इन जीनों और फेफड़ों के कैंसर के सटीक विकास के बीच संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
राष्ट्रव्यापी स्वीडिश परिवार-कैंसर डेटाबेस के अंतर्राष्ट्रीय डेटा में फेफड़ों के कैंसर से प्रभावित माता-पिता की संतानों के लिए फेफड़ों के कैंसर का 1. 77% बढ़ा जोखिम और इससे भी अधिक जोखिम-भाई बहनों के बीच 2. 15% पाया गया। फेफड़े के कैंसर के पारिवारिक रूप कई गैर-आनुवंशिक कारकों से प्रभावित हो सकते हैं, जिसमें समान जीवन शैली, जैसे आहार और व्यायाम, और समान वातावरण, जैसे उच्च स्तर के इनडोर और बाहरी वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहना शामिल है।
धूम्रपान छोड़ना, उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्र से बाहर जाना और मास्क पहनना, और आम तौर पर स्वस्थ जीवन जीना जिसमें सही खाना और व्यायाम करना शामिल है, आपके फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने के तरीके हैं, भले ही आप अपने आनुवंशिक प्रोफ़ाइल के आधार पर उच्च जोखिम में हों।
यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो क्या आपको फेफड़ों का कैंसर हो सकता है?
एस्बेस्टस, रेडॉन, सेकेंड हैंड स्मोक और वायु प्रदूषण जैसे जहरीले पदार्थों के संपर्क में आना उन लोगों में फेफड़ों के कैंसर के सामान्य कारण हैं, जिनका धूम्रपान का इतिहास नहीं है।
जो लोग अक्सर कार्यस्थल में निम्नलिखित, अक्सर रेडियोधर्मी पदार्थों के संपर्क में आते हैं, उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होता हैः
नॉन-स्मॉल सेल कार्सिनोमा (NSCLC) घातक लंग नियोप्लाज्म का सबसे आम प्रकार है, जो सभी फेफड़ों के कैंसर का 80% से 85% है। जबकि वर्तमान और पूर्व धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान करते समय या छोड़ने के वर्षों बाद इस प्रकार का कैंसर हो सकता है, अधिकांश गैर-धूम्रपान से संबंधित फेफड़ों के कैंसर भी इसी श्रेणी में आते हैं। एनएससीएलसी के तीन मुख्य प्रकार हैंः
अन्य फेफड़े के ट्यूमर जो फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं उनमें लिम्फोमा, एडेनोइड सिस्टिक कार्सिनोमा और सार्कोमा शामिल हैं। इन ट्यूमर के कारणों को आनुवंशिक स्थितियों या अज्ञातहेतुक कारणों से जोड़ा जा सकता है।
नीचे दो तरीके दिए गए हैं जिनसे आप फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।
तंबाकू उत्पादों के हानिकारक रसायन एससीएलसी के सबसे बड़े दोषी हैं। जबकि धूम्रपान कभी नहीं करना और जल्दी छोड़ना फेफड़ों के कैंसर को रोकने के दो सबसे अच्छे तरीके हैं, नए शोध से पता चलता है कि किसी भी बिंदु पर छोड़ना-फेफड़े के कैंसर के निदान के बाद भी-आपके समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण में काफी सुधार हो सकता है, जीवन को लम्बा खींच सकता है और बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम कर सकता है।
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण सूक्ष्म और गैर-विशिष्ट हो सकते हैं। अपने लक्षणों को किसी और चीज़ से जोड़ना आम बात है - भले ही आप लंबे समय से धूम्रपान करने वाले हों - जैसे अस्थमा या निमोनिया, लेकिन फेफड़ों के कैंसर के कई ऐसे संकेत हैं जिनसे आप अवगत होना चाहते हैं और जिन्हें आप अनदेखा नहीं करना चाहते हैं, जिनमें शामिल हैंः
-खून खांसी (हेमोप्टाइसिस)
-स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़े के कैंसर का एक आक्रामक रूप है जो मुख्य रूप से सिगरेट पीने के कारण होता है।
जब आप फेफड़ों के कैंसर के बारे में सोचते हैं, तो आप शायद पारंपरिक सिगरेट के बारे में सोचते हैं, लेकिन किशोर और युवा वयस्क आबादी में लोकप्रियता में वृद्धि के साथ ई-सिगरेट, वेप पेन और हुक्का केंद्र स्तर पर ले जा रहे हैं। ये तंबाकू उत्पाद पारंपरिक सिगरेट की तुलना में और भी अधिक अनियंत्रित हैं, इसलिए शरीर को होने वाले समग्र नुकसान अज्ञात हैं। इससे भी अधिक, फलों के स्वाद और भ्रामक विपणन रणनीतियाँ कभी-कभी युवाओं को यह सोचने के लिए प्रेरित कर सकती हैं कि ये उत्पाद उनके मुकाबले कम हानिकारक हैं।
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Small Cell Cancer Symptoms: स्मोकिंग के दौरान छोड़ा जाने वाला धुआं सांस के द्वारा दूसरों के भीतर जाता है। Small Cell Cancer Symptoms: अगर आप धूम्रपान करने वालों में से हैं तो आप को कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं। लंग कैंसर उनमे से सबसे आम है। आज हम आपको धूम्रपान और एससीएलएस जोखिम स्तर, और उसके जोखिम को कम करने के तरीके बताने जा रहे हैं। स्मॉल सेल कार्सिनोमा सभी फेफड़ों के कैंसर के दस% से पंद्रह% के बीच होता है। आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर के इस आक्रामक रूप के दो प्रकार मौजूद हैंः तेजी से बढ़ने वाले ये कैंसर बेहद घातक होते हैं। वास्तव में, निदान के समय, एससीएलसी वाले लगभग सत्तर% लोगों में उनके कैंसर का मेटास्टेटिक फैलाव होता है। विकिरण और कीमोथेरेपी से थोड़ी राहत मिलती है। धूम्रपान केवल SCLC जोखिम कारक नहीं है। अन्य जोखिम कारक नीचे दिए गए हैं। स्मोकिंग के दौरान छोड़ा जाने वाला धुआं सांस के द्वारा दूसरों के भीतर जाता है। सेकेंड हैंड धुएं और फेफड़ों के कैंसर के बीच संबंध सर्वविदित है - लगभग सात,तीन सौ लोग हर साल फेफड़ों के कैंसर के पुराने धुएं से संबंधित रूपों से मर जाते हैं - लेकिन ऐसे प्रमाण बढ़ रहे हैं जो आक्रामक एससीएलसी के बढ़ते कारण के रूप में निष्क्रिय धुएं के संपर्क में आने की ओर इशारा करते हैं। इससे भी अधिक, सेकेंड हैंड धुएं से अस्थमा, वातस्फीति और सीओपीडी से कई बीमारियां होती हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं और आपके जीवन की गुणवत्ता में काफी कमी आ सकती है। रेडॉन एक रेडियोधर्मी रसायन है जो जमीन की मिट्टी में पाया जाता है। यह यू. एस. में फेफड़ों के कैंसर का दूसरा प्रमुख कारण है और धूम्रपान न करने वालों में कैंसर का पहला प्रमुख कारण है। उच्च रेडॉन का स्तर फेफड़ों में जमा हो सकता है जब यह निष्क्रिय, गंधहीन, रंगहीन गैस इमारत की नींव में दरार या छेद के माध्यम से घर के अंदर फंस जाती है। थोड़े समय के लिए रेडॉन एक्सपोजर हानिरहित हो सकता है। फिर भी, यदि एक विस्तारित अवधि के लिए उजागर किया जाता है, तो ये हानिकारक कण फेफड़ों की परत में प्रवेश कर सकते हैं और विकिरण छोड़ सकते हैं, आपके सेल के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर ट्यूमर बना सकते हैं। एस्बेस्टस कैंसर के सबसे आम कारणों में से एक है, जो सभी मामलों में अट्ठारह% और प्रति वर्ष लगभग तीन,शून्य मौतों के लिए जिम्मेदार है। यह तीन प्रकार के फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता हैः गैर-छोटी कोशिका, छोटी कोशिका और मेसोथेलियोमा। ये कैंसर आमतौर पर एक्सपोजर के पंद्रह या अधिक वर्षों बाद विकसित होते हैं। सीमेंट, फर्श की टाइलों और पाइपों जैसी निर्माण सामग्री में इसके उपयोग पर नियमों के कारण आज एस्बेस्टस फाइबर को अंदर लेना कम आम है। हालाँकि, पुराने घरों में यह अभी भी एक समस्या है। जिन घरों का निरीक्षण नहीं किया गया है या जिन्हें फिर से बनाया जा रहा है, उनके परिणामस्वरूप आप अनजाने में इस कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ के जहरीले स्तर को सांस ले सकते हैं। आवासीय वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर शहरी अमेरिकी शहरों और दुनिया भर में चिंता का एक बढ़ता हुआ कारण है। कैलिफ़ोर्निया में, तीन सौ पचास, शून्य से अधिक लोगों को देखने वाले एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहते थे, उनमें एससीएलसी, एनएससीएलसी और एडेनोकार्सिनोमा विकसित होने की संभावना अधिक थी। हालांकि, संघ प्रारंभिक चरण के गैर-छोटे सेल कैंसर वाले लोगों के लिए थे, विशेष रूप से एडेनोकार्सिनोमा। इसी तरह के परिणाम दक्षिण कोरियाई अध्ययन में पाए गए, जिसमें पाया गया कि वायु प्रदूषण सभी फेफड़ों के कैंसर के मामलों का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है, जिसकी उच्चतम दर घनी आबादी वाले शहरी केंद्रों के आसपास है। आर्सेनिक के लिए लगातार संपर्क - आमतौर पर दूषित पानी या व्यावसायिक जोखिम के अनजाने अंतर्ग्रहण के माध्यम से - आजीवन गैर-धूम्रपान करने वालों में एससीएलसी के विकास से जुड़ा हुआ है। ध्यान दें, केस रिपोर्ट्स ने एससीएलसी के ऐसे मामलों की पहचान की है जो अस्थमा के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक चीनी दवाओं में पाए जाने वाले आर्सेनिक के लंबे समय तक संपर्क में रहने के बाद तीस वर्षों में उत्पन्न होते हैं। रेडिएशन थेरेपी आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला फेफड़ों के कैंसर का इलाज है, जो मुश्किल से दिखने वाले फेफड़ों के कैंसर कोशिकाओं को मारने, पुनरावृत्ति को कम करने या आपके कैंसर के वापस आने की संभावना को कम करने के लिए उपचार के दौरान या बाद में शुरू किया जाता है। विकिरण चिकित्सा एक्स-रे की उच्च खुराक का उपयोग तेजी से विभाजित होने वाले कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाने के लिए करती है, इस प्रक्रिया में उन्हें नष्ट कर देती है। विकिरण चिकित्सा शायद ही कभी फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है, विशेष रूप से छोटे सेल उपप्रकार, लेकिन यदि ऐसा होता है, तो यह आमतौर पर इलाज किए जा रहे एक से अलग होता है। कभी-कभी आपके आनुवंशिकी आपको फेफड़ों के कैंसर का शिकार कर सकते हैं। यह उन व्यक्तियों में अधिक होने की संभावना है, जिनके परिवार के तत्काल गैर-धूम्रपान करने वाले सदस्य हैं जिन्हें फेफड़ों का कैंसर है या हुआ है। कुछ विरासत में मिले उत्परिवर्तन माता-पिता से उनके बच्चों में पारित किए जा सकते हैं, हालांकि इन जीनों और फेफड़ों के कैंसर के सटीक विकास के बीच संबंध स्थापित नहीं किया गया है। राष्ट्रव्यापी स्वीडिश परिवार-कैंसर डेटाबेस के अंतर्राष्ट्रीय डेटा में फेफड़ों के कैंसर से प्रभावित माता-पिता की संतानों के लिए फेफड़ों के कैंसर का एक. सतहत्तर% बढ़ा जोखिम और इससे भी अधिक जोखिम-भाई बहनों के बीच दो. पंद्रह% पाया गया। फेफड़े के कैंसर के पारिवारिक रूप कई गैर-आनुवंशिक कारकों से प्रभावित हो सकते हैं, जिसमें समान जीवन शैली, जैसे आहार और व्यायाम, और समान वातावरण, जैसे उच्च स्तर के इनडोर और बाहरी वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहना शामिल है। धूम्रपान छोड़ना, उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्र से बाहर जाना और मास्क पहनना, और आम तौर पर स्वस्थ जीवन जीना जिसमें सही खाना और व्यायाम करना शामिल है, आपके फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने के तरीके हैं, भले ही आप अपने आनुवंशिक प्रोफ़ाइल के आधार पर उच्च जोखिम में हों। यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो क्या आपको फेफड़ों का कैंसर हो सकता है? एस्बेस्टस, रेडॉन, सेकेंड हैंड स्मोक और वायु प्रदूषण जैसे जहरीले पदार्थों के संपर्क में आना उन लोगों में फेफड़ों के कैंसर के सामान्य कारण हैं, जिनका धूम्रपान का इतिहास नहीं है। जो लोग अक्सर कार्यस्थल में निम्नलिखित, अक्सर रेडियोधर्मी पदार्थों के संपर्क में आते हैं, उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होता हैः नॉन-स्मॉल सेल कार्सिनोमा घातक लंग नियोप्लाज्म का सबसे आम प्रकार है, जो सभी फेफड़ों के कैंसर का अस्सी% से पचासी% है। जबकि वर्तमान और पूर्व धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान करते समय या छोड़ने के वर्षों बाद इस प्रकार का कैंसर हो सकता है, अधिकांश गैर-धूम्रपान से संबंधित फेफड़ों के कैंसर भी इसी श्रेणी में आते हैं। एनएससीएलसी के तीन मुख्य प्रकार हैंः अन्य फेफड़े के ट्यूमर जो फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं उनमें लिम्फोमा, एडेनोइड सिस्टिक कार्सिनोमा और सार्कोमा शामिल हैं। इन ट्यूमर के कारणों को आनुवंशिक स्थितियों या अज्ञातहेतुक कारणों से जोड़ा जा सकता है। नीचे दो तरीके दिए गए हैं जिनसे आप फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। तंबाकू उत्पादों के हानिकारक रसायन एससीएलसी के सबसे बड़े दोषी हैं। जबकि धूम्रपान कभी नहीं करना और जल्दी छोड़ना फेफड़ों के कैंसर को रोकने के दो सबसे अच्छे तरीके हैं, नए शोध से पता चलता है कि किसी भी बिंदु पर छोड़ना-फेफड़े के कैंसर के निदान के बाद भी-आपके समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण में काफी सुधार हो सकता है, जीवन को लम्बा खींच सकता है और बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम कर सकता है। फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण सूक्ष्म और गैर-विशिष्ट हो सकते हैं। अपने लक्षणों को किसी और चीज़ से जोड़ना आम बात है - भले ही आप लंबे समय से धूम्रपान करने वाले हों - जैसे अस्थमा या निमोनिया, लेकिन फेफड़ों के कैंसर के कई ऐसे संकेत हैं जिनसे आप अवगत होना चाहते हैं और जिन्हें आप अनदेखा नहीं करना चाहते हैं, जिनमें शामिल हैंः -खून खांसी -स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़े के कैंसर का एक आक्रामक रूप है जो मुख्य रूप से सिगरेट पीने के कारण होता है। जब आप फेफड़ों के कैंसर के बारे में सोचते हैं, तो आप शायद पारंपरिक सिगरेट के बारे में सोचते हैं, लेकिन किशोर और युवा वयस्क आबादी में लोकप्रियता में वृद्धि के साथ ई-सिगरेट, वेप पेन और हुक्का केंद्र स्तर पर ले जा रहे हैं। ये तंबाकू उत्पाद पारंपरिक सिगरेट की तुलना में और भी अधिक अनियंत्रित हैं, इसलिए शरीर को होने वाले समग्र नुकसान अज्ञात हैं। इससे भी अधिक, फलों के स्वाद और भ्रामक विपणन रणनीतियाँ कभी-कभी युवाओं को यह सोचने के लिए प्रेरित कर सकती हैं कि ये उत्पाद उनके मुकाबले कम हानिकारक हैं।
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महुआ तेल की श्रेणी- इस श्रेणी के तेल अध-जमे होते हैं। उनका सावुन भी जल्दी बनता और उसमें दाना भी जल्दी पड़ता है। इस श्रेणी में महुए का तेल भारत के साबुन उद्योग के लिए एक महत्त्वपूर्ण चिकनाई है । इन तेलों के साबुन मूंगफली की श्रेणी और चरबी की श्रेणी के दरमियानी होते हैं। उनसे अच्छा मलाई-सा झाग बनता है और वे नहाने तथा धोने दोनों में काम दे सकते हैं।
चरबी की श्रेणी मूंगफली के और अन्य वनस्पतियों के तेलों में ओलीक तेजाब की बड़ी मात्रा होती है, परन्तु इस श्रेणी की चिकनाइयों में ओलीइन थोडी और स्टीअरीन व पॉमिटीन बड़ी मात्रा में होते हैं । ये तेल ठोस जमे हुए होते हैं । इस श्रेणी के चिकने तेज़ाब-स्टीअरिक व पॉमिटिक ऐसिड - ज्यादा गरमी देने से पिघलते हैं । इस श्रेणी के तेलों में खार के हलके घोल से 'सैपोनिफिकेशन' ( साबुन बनने की क्रिया ) शुरू हो जाता है । डूपा चरखी और कोकम वटर में तो 'सैपोनिफिकेशन ' ( साबुन बनने की क्रिया ) झट शुरू हो जाती है, क्योंकि इन दोनों में शुद्ध चिकने तेजाबों की खासी मात्रा सदा मौजूद रहती है ।
इस श्रेणी के साबुन सख्त होते हैं, परन्तु उनसे झाग अच्छा नहीं बनता । हाँ, अन्य तेलों को उनमें मिला दिया जाय तो उनका झाग भी मलाई सरीखा और टिकाऊ हो जाता है । ये साबुन थोड़ा ही नमक मिलाने से विना कठिनाई दानेदार बन जाते हैं । साधारणतया इन सावुनों का रङ्ग सफेद होता है। चरबी के साबुन पानी में कम घुलते हैं और सख्त पानी में तो इनसे दही-सा बन जाता है। इसलिए चरबी को मूंगफली या अन्य तेलों में मिला देते हैं । इसमें से ९ प्रतिशत ग्लिसरीन निकलता है ।
अलसी के तेल की श्रेणी - इस श्रेणी के तेल साधारणतया सख्त साबुन बनाने के काम के नहीं हैं। इन साबुनों की टिकिया नहीं बनती। ये बहुत नरम - वैजलीन सरीखे-होते हैं। तो भी ये नरम साबुनों के व्यापारिक उपयोगों में बरते जाते हैं ... अलसी के साबुन से एक खास कित्म की बदबू आती है । इन तेलों में साबुन - क्रिया (सैपोनिफिकेशन) झट शुरू हो जाती है। साबुनं
बहुतायत से उपजता है । समुद्र किनारे का नमकीन हवा-पानी इस फल को बहुतायत से उपजाने के लिये विशेष अनुकूल है। देश के अन्दरूनी भाग में यह इतनी अधिकता से नहीं उपजता । इसका पेड लम्बा, ऊंचा चला जाता है और अपनी जात के अनुसार छठे से बारहवें वर्ष में फल देने लगता है। इसकी जातियां भी २५-३० हैं। जहां यह पेड़ होता है, वहां के आर्थिक जीवन को बनाने बिगाड़ने में बड़ा भारी भाग लेता है, क्योंकि इसका कोई हिस्सा ऐसा नहीं जो किसी ने किसी काम न आता हो । इसीलिये इसको सचमुच कल्पवृक्ष कह सकते हैं । फल के ऊपर एक रेशेदार सख्त छिलका होता है, जिसमें से अलग करके रस्से आदि बनाये जाते हैं । रेशा अलग करने के बाद, फल के दो टुकड़े कर दिये जाते हैं और उन्हें धूप में सूखने को रख दिया जाता है। सूखकर अन्दर का नरम गूदा सख्त छिलके से आप ही अलग हो जाता है, और यही खोपरा कहलाता है । सख्त छिलके ज्यादातर ईन्धन के काम आते हैं । ग्रामीण लोग उनके प्याले प्यालियां भी बना लेते हैं। उनके वटन तथा अन्य अनेक सुन्दर वस्तुएं भी बनती हैं । इन छिलकों से एक खास कोयला बनाया जाता 1 उसमें गैसे चूसने और रंग जब करने की शक्ति बहुत होती है । अतः यह कोयला, दुर्गन्ध दूर करने तथा रंग उड़ाने के काम भी आता है । छिलकों को जलाते हुए जो तेल निकलता है वह दवाई के तौर पर काम आता है ।+²
लूखे खोपरे में लगभग ६५% तेल होता है और कोल्हू में पेरने से ६०% निकल भी आता है । १० से १२% तके तेल खली में भी रह जाता है। इसलिये यह एक उत्तम भोज्य पदार्थ का काम देती है। हरे नारियल में से ताज़ा नरम गूदा खुरच कर और उसे पानी में उबालकर भी तेल निकाला जाता है । इस तरह तेल पानी के ऊपर आ जाता है और वहां से उसे इकट्ठा कर लिया जाता है । नारियल के तेल की एक खासियत यह है कि वह लगभग २० डिग्री
s थर्मामीटरों पर निशान कई प्रकार के लगाये जाते हैं। एक तरीका यह 2 कि पानी जमने का साप-मान शून्य डिग्री और उदलने का १०० डिग्री मानकर निशान लगाये जायें। इसे सेण्टीग्रेड कहते हैं। दूसरा तरीका यह है कि पानी जमने के तापमान को ३२ डिग्री और उबलने के तापमान को २१२ डिग्री मानकर निधान लगाये जायें। इसे फारनहाइट करते हैं। जिस भहमामीटर से नाप लिया जाय, उसीधा नाम लेका शह डिग्री की जाती है ।
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महुआ तेल की श्रेणी- इस श्रेणी के तेल अध-जमे होते हैं। उनका सावुन भी जल्दी बनता और उसमें दाना भी जल्दी पड़ता है। इस श्रेणी में महुए का तेल भारत के साबुन उद्योग के लिए एक महत्त्वपूर्ण चिकनाई है । इन तेलों के साबुन मूंगफली की श्रेणी और चरबी की श्रेणी के दरमियानी होते हैं। उनसे अच्छा मलाई-सा झाग बनता है और वे नहाने तथा धोने दोनों में काम दे सकते हैं। चरबी की श्रेणी मूंगफली के और अन्य वनस्पतियों के तेलों में ओलीक तेजाब की बड़ी मात्रा होती है, परन्तु इस श्रेणी की चिकनाइयों में ओलीइन थोडी और स्टीअरीन व पॉमिटीन बड़ी मात्रा में होते हैं । ये तेल ठोस जमे हुए होते हैं । इस श्रेणी के चिकने तेज़ाब-स्टीअरिक व पॉमिटिक ऐसिड - ज्यादा गरमी देने से पिघलते हैं । इस श्रेणी के तेलों में खार के हलके घोल से 'सैपोनिफिकेशन' शुरू हो जाता है । डूपा चरखी और कोकम वटर में तो 'सैपोनिफिकेशन ' झट शुरू हो जाती है, क्योंकि इन दोनों में शुद्ध चिकने तेजाबों की खासी मात्रा सदा मौजूद रहती है । इस श्रेणी के साबुन सख्त होते हैं, परन्तु उनसे झाग अच्छा नहीं बनता । हाँ, अन्य तेलों को उनमें मिला दिया जाय तो उनका झाग भी मलाई सरीखा और टिकाऊ हो जाता है । ये साबुन थोड़ा ही नमक मिलाने से विना कठिनाई दानेदार बन जाते हैं । साधारणतया इन सावुनों का रङ्ग सफेद होता है। चरबी के साबुन पानी में कम घुलते हैं और सख्त पानी में तो इनसे दही-सा बन जाता है। इसलिए चरबी को मूंगफली या अन्य तेलों में मिला देते हैं । इसमें से नौ प्रतिशत ग्लिसरीन निकलता है । अलसी के तेल की श्रेणी - इस श्रेणी के तेल साधारणतया सख्त साबुन बनाने के काम के नहीं हैं। इन साबुनों की टिकिया नहीं बनती। ये बहुत नरम - वैजलीन सरीखे-होते हैं। तो भी ये नरम साबुनों के व्यापारिक उपयोगों में बरते जाते हैं ... अलसी के साबुन से एक खास कित्म की बदबू आती है । इन तेलों में साबुन - क्रिया झट शुरू हो जाती है। साबुनं बहुतायत से उपजता है । समुद्र किनारे का नमकीन हवा-पानी इस फल को बहुतायत से उपजाने के लिये विशेष अनुकूल है। देश के अन्दरूनी भाग में यह इतनी अधिकता से नहीं उपजता । इसका पेड लम्बा, ऊंचा चला जाता है और अपनी जात के अनुसार छठे से बारहवें वर्ष में फल देने लगता है। इसकी जातियां भी पच्चीस-तीस हैं। जहां यह पेड़ होता है, वहां के आर्थिक जीवन को बनाने बिगाड़ने में बड़ा भारी भाग लेता है, क्योंकि इसका कोई हिस्सा ऐसा नहीं जो किसी ने किसी काम न आता हो । इसीलिये इसको सचमुच कल्पवृक्ष कह सकते हैं । फल के ऊपर एक रेशेदार सख्त छिलका होता है, जिसमें से अलग करके रस्से आदि बनाये जाते हैं । रेशा अलग करने के बाद, फल के दो टुकड़े कर दिये जाते हैं और उन्हें धूप में सूखने को रख दिया जाता है। सूखकर अन्दर का नरम गूदा सख्त छिलके से आप ही अलग हो जाता है, और यही खोपरा कहलाता है । सख्त छिलके ज्यादातर ईन्धन के काम आते हैं । ग्रामीण लोग उनके प्याले प्यालियां भी बना लेते हैं। उनके वटन तथा अन्य अनेक सुन्दर वस्तुएं भी बनती हैं । इन छिलकों से एक खास कोयला बनाया जाता एक उसमें गैसे चूसने और रंग जब करने की शक्ति बहुत होती है । अतः यह कोयला, दुर्गन्ध दूर करने तथा रंग उड़ाने के काम भी आता है । छिलकों को जलाते हुए जो तेल निकलता है वह दवाई के तौर पर काम आता है ।+² लूखे खोपरे में लगभग पैंसठ% तेल होता है और कोल्हू में पेरने से साठ% निकल भी आता है । दस से बारह% तके तेल खली में भी रह जाता है। इसलिये यह एक उत्तम भोज्य पदार्थ का काम देती है। हरे नारियल में से ताज़ा नरम गूदा खुरच कर और उसे पानी में उबालकर भी तेल निकाला जाता है । इस तरह तेल पानी के ऊपर आ जाता है और वहां से उसे इकट्ठा कर लिया जाता है । नारियल के तेल की एक खासियत यह है कि वह लगभग बीस डिग्री s थर्मामीटरों पर निशान कई प्रकार के लगाये जाते हैं। एक तरीका यह दो कि पानी जमने का साप-मान शून्य डिग्री और उदलने का एक सौ डिग्री मानकर निशान लगाये जायें। इसे सेण्टीग्रेड कहते हैं। दूसरा तरीका यह है कि पानी जमने के तापमान को बत्तीस डिग्री और उबलने के तापमान को दो सौ बारह डिग्री मानकर निधान लगाये जायें। इसे फारनहाइट करते हैं। जिस भहमामीटर से नाप लिया जाय, उसीधा नाम लेका शह डिग्री की जाती है । JAN Tee at zशून्यuy ở thời là một tuyệt đông thì tôi bắc ngày thu ngườ
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नई दिल्लीः केरल की सत्तारूढ़ माकपा की छात्र इकाई एसएफआई (SFI ) के छात्रों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। क्योंकि, कुछ प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के वायनाड कार्यालय कथित रूप से प्रवेश किया और उसमें तोड़फोड़ (Rahul Gandhi's Office Vandalized) की। भारतीय युवा कांग्रेस ने एक ट्वीट में आरोप लगाया कि, राहुल गांधी के वायनाड कार्यालय की दीवार पर चढ़कर गुंडों ने एसएफआई के झंडे पकड़ लिए और तोड़फोड़ की।
#WATCH । Kerala: Congress MP Rahul Gandhi's office in Wayanad vandalised.
वहीं,केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, राहुल गांधी के कार्यालय पर हुए अपराध की कड़ी निंदा करते हैं। हमारे देश में, सभी को अपनी राय रखने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, इसका परिणाम अधिक नहीं होना चाहिए। यह गलत प्रवृत्ति है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्लीः केरल की सत्तारूढ़ माकपा की छात्र इकाई एसएफआई के छात्रों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। क्योंकि, कुछ प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के वायनाड कार्यालय कथित रूप से प्रवेश किया और उसमें तोड़फोड़ की। भारतीय युवा कांग्रेस ने एक ट्वीट में आरोप लगाया कि, राहुल गांधी के वायनाड कार्यालय की दीवार पर चढ़कर गुंडों ने एसएफआई के झंडे पकड़ लिए और तोड़फोड़ की। #WATCH । Kerala: Congress MP Rahul Gandhi's office in Wayanad vandalised. वहीं,केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, राहुल गांधी के कार्यालय पर हुए अपराध की कड़ी निंदा करते हैं। हमारे देश में, सभी को अपनी राय रखने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, इसका परिणाम अधिक नहीं होना चाहिए। यह गलत प्रवृत्ति है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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पांवटा साहिब में माजरा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक व्यक्ति रमजान निवासी जगतपुर को 143 प्रोविन प्लस नशीले कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि रमजान अपनी मोटरसाइकिल (एचपी 17ई-0224) पर नशीले कैप्सूल लेकर जा रहा है, जिसके बाद माजरा थाने के थाना प्रभारी एएसआई सेवा सिंह व एचसी महिंद्र सिंह ने माजरा मेलियों के पास रमजान को मोटरसाइकिल पर देर शाम आते हुए रोका और उसके मोटरसाइकिल की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान उसके पास से छह रैपर 143 नशीले कैप्सूल बरामद किए गए, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी रमजान के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा बीर बहादुर सिंह ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से आरोपी को न्यायालय ने चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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पांवटा साहिब में माजरा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक व्यक्ति रमजान निवासी जगतपुर को एक सौ तैंतालीस प्रोविन प्लस नशीले कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि रमजान अपनी मोटरसाइकिल पर नशीले कैप्सूल लेकर जा रहा है, जिसके बाद माजरा थाने के थाना प्रभारी एएसआई सेवा सिंह व एचसी महिंद्र सिंह ने माजरा मेलियों के पास रमजान को मोटरसाइकिल पर देर शाम आते हुए रोका और उसके मोटरसाइकिल की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास से छह रैपर एक सौ तैंतालीस नशीले कैप्सूल बरामद किए गए, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी रमजान के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा बीर बहादुर सिंह ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से आरोपी को न्यायालय ने चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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शाह और ठाकरे के बीच बुधवार रात को दो घंटे चली बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'दो नेताओं ने बंद कमरे में मुलाकात की. तीसरा व्यक्ति नहीं जान सकता कि क्या चर्चा हुई. ' बताया जा रहा है कि करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक के दौरान महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस बाहर ही बैठे रहें.
वहीं, बीजेपी ने कहा कि शाह और ठाकरे की बीच की बैठक अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले उसके 'सम्पर्क फॉर समर्थन' अभियान को लेकर थी जिसका नेतृत्व शाह कर रहे हैं. इसे बहुत महत्वपूर्ण बैठक के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि केंद्र और राज्य स्तर पर गठबंधन सहयोगी होने के बावजूद बीजेपी और शिवसेना के संबंधों में खटास आई है.
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शाह और ठाकरे के बीच बुधवार रात को दो घंटे चली बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'दो नेताओं ने बंद कमरे में मुलाकात की. तीसरा व्यक्ति नहीं जान सकता कि क्या चर्चा हुई. ' बताया जा रहा है कि करीब चालीस मिनट तक चली इस बैठक के दौरान महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस बाहर ही बैठे रहें. वहीं, बीजेपी ने कहा कि शाह और ठाकरे की बीच की बैठक अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले उसके 'सम्पर्क फॉर समर्थन' अभियान को लेकर थी जिसका नेतृत्व शाह कर रहे हैं. इसे बहुत महत्वपूर्ण बैठक के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि केंद्र और राज्य स्तर पर गठबंधन सहयोगी होने के बावजूद बीजेपी और शिवसेना के संबंधों में खटास आई है. .
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सियासी बवंडर में फंसे सिद्धू... कुर्सी जाने के पूरे आसार!
नई दिल्ली। कांग्रेस पर खुद को भारत विरोधी संगठन के रूप में बदलने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने सोमवार को पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा दक्षिण भारत की तुलना पाकिस्तान से करने पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग की।
इसके साथ ही भाजपा ने सिद्धू को हटाने की मांग की। भाजपा प्रवक्ता जी. वी. एल. नरसिम्हा राव ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस एक दोहरी रणनीति अपना रही है, जिसमें वह पाकिस्तान के प्रति 'प्यार' दिखाकर और 'भारत तोड़े अभियान' के जरिए वहां की राजनीति में घुसने का प्रयास कर रही है।
सिद्धू ने हाल ही में कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य समारोह में पाकिस्तान और दक्षिण भारत की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की संस्कृति दक्षिण भारत की तुलना में पंजाब से ज्यादा मिलती-जुलती है।
सिद्धू पर निशाना साधते हुए, राव ने कहा कि उनकी तुलना करने की कोशिश भारत के विभिन्न भागों के लोगों के दिमाग में जहर भरने का प्रयास था। इसके साथ ही दक्षिण भारत की नकारात्मक व विपरीत छवि बनाने का प्रयास था।
उन्होंने कहा, "आपको(राहुल को) माफी मांगनी चाहिए और आपको सिद्धू को पंजाब के मंत्रिमंडल से बाहर करना चाहिए। सिद्धू को निलंबित करने से कम कुछ भी पंजाब के लोगों को संतुष्टि प्रदान नहीं करेगा।
यह भी पढ़ेंः- एएमयू मामले को लेकर कश्मीर विश्वविद्यालय में छात्रों का मौन जुलूस, खड़े हुए ये सवाल!
यह भी पढ़ेंः- ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस ऐलान से किसानों के खिले चेहरे, आएंगे 'अच्छे दिन'!
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सियासी बवंडर में फंसे सिद्धू... कुर्सी जाने के पूरे आसार! नई दिल्ली। कांग्रेस पर खुद को भारत विरोधी संगठन के रूप में बदलने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने सोमवार को पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा दक्षिण भारत की तुलना पाकिस्तान से करने पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग की। इसके साथ ही भाजपा ने सिद्धू को हटाने की मांग की। भाजपा प्रवक्ता जी. वी. एल. नरसिम्हा राव ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस एक दोहरी रणनीति अपना रही है, जिसमें वह पाकिस्तान के प्रति 'प्यार' दिखाकर और 'भारत तोड़े अभियान' के जरिए वहां की राजनीति में घुसने का प्रयास कर रही है। सिद्धू ने हाल ही में कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य समारोह में पाकिस्तान और दक्षिण भारत की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की संस्कृति दक्षिण भारत की तुलना में पंजाब से ज्यादा मिलती-जुलती है। सिद्धू पर निशाना साधते हुए, राव ने कहा कि उनकी तुलना करने की कोशिश भारत के विभिन्न भागों के लोगों के दिमाग में जहर भरने का प्रयास था। इसके साथ ही दक्षिण भारत की नकारात्मक व विपरीत छवि बनाने का प्रयास था। उन्होंने कहा, "आपको माफी मांगनी चाहिए और आपको सिद्धू को पंजाब के मंत्रिमंडल से बाहर करना चाहिए। सिद्धू को निलंबित करने से कम कुछ भी पंजाब के लोगों को संतुष्टि प्रदान नहीं करेगा। यह भी पढ़ेंः- एएमयू मामले को लेकर कश्मीर विश्वविद्यालय में छात्रों का मौन जुलूस, खड़े हुए ये सवाल! यह भी पढ़ेंः- ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस ऐलान से किसानों के खिले चेहरे, आएंगे 'अच्छे दिन'!
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कम्पित करठ से शेखर बोले- सुन! यह क्यो साई हो ? जाओ, माता के पास जाओ ।।
नेत्रों को नीचे किए हुए सुधा बोली- 'प्रभु । आज के लिए तो अपराधिनी को क्षमा करो। चरण कमल पूजने की आज्ञा देकर व्याज इस दासी को कृतार्थ होने दो ।'
शेखर चुप रहे । तब सुधा ने हाथ में लिए हुए कुड्कुम से शेखर के दोनों पैर रँगे । अनेक दिनों बाद माज सुधा स्वामी के चरण पर गिर पड़ी। फिर उसने उठ कर कहा'हृदयेश ! मेरी पूजा समाप्त हो गई। में जाती है ।'
सुधा चलो गई । ऊर्ध्व-यावद्ध दृष्टि से देखते हुए शेवर अचल अटल भाव से बैठे रहे ।
इस घटना को हुए कितने ही दिन व्यतीत हो गए । परन्तु शशिशेखर के हृदय का दुर्दमनीय वेग किसी प्रकार शान्त न हो सका । कितनी ही नीरव भिक्षाओंों ने, तथा कितनी ही बार कातर नयनों की दृष्टि ने उनके हृदय-पटल पर कुछ भी प्रभाव न जमा पाया । एक हो चिन्ता -- एक ही भावना -- के कारण शेखर की देह जीर्ण होने लगी। जब तक ये इस यातना को सह सके, उन्होंने चुपचाप सहन किया। परन्तु जय यह यातना हो गई, तर एक रात को उन्होंन तीर्थराज प्रयाग की ओर प्रस्थान किया।
समय शुभ या मला था। हज़ारों यात्री, सप्यासी प्रभृति यहाँ पहुए थे । अनन्त जन राशि में उम महानाय का तथा पुण्यपीयूवाहिनी आयी और यमुना का सगम । यमुना के जाहरी व शुभ्र जल मे मिलन । यह दृश्य बहुत ही सुन्दर
तथा मनारम था।
कुछ दिन ता शशिशेखर न किसी न किसी तरह व्यतीत किए। नवीन स्थल पर नवीन दृश्य देखकर किसका हृदय पुत्रवित नहीं होता। शेखरन बहुरिधि सन्यासियों के साथ इतरतत परिभ्रमण कर मन का बहुत कुछ स्थिर किया। परन्तु यह गिरता तिन दिन व लिए जी । शान्ति का फिर नाश हामगा। गणिशखर अस्थिर जित मे दश विदेश में परिभ्रमण करन लग ।
सुधा व हृत्य में भाव उठा- उन्हें एक गर और द पाती तो अच्छा होता। उनमे हुए बहुत दिन हा गए । उस तेल चित्र व समय वैठकर सुधा वद्दन लगी- 'भगिना ! तुम जैसी भाग्यश्रीता संसार में वन्य है । तुमन पति व हृदय मन्दिर में स्थान-लाभ किया। मै हृत भागिनी हूँ जा तुम्हारा हथ्य छीनन का प्रयत्न करती हूँ ।
सुवा औरन न सकी। नयन मोचित अश्रुधारा स
उसका वक्षस्थल भीग गया। सुधा फिर कम्पित कण्ठ से बोली- 'वहन ! मैं तुम्हारी वस्तु पाने की इच्छा नहीं करती
। परन्तु उस अमूल्य रत्न को आराधना करने की इच्छा अवश्य है। क्या यह इच्छा पूर्ण करोगी?' इतने में पीछे से ननद ने कहा - 'बहू । क्यो रोती हो' ? आंसू पोंछ कर सुधा ने उत्तर दिया- 'हृदय जिस व्यथा से व्यथित हो रहा है, उसे क्या कह कर समझाऊँ ? स्त्री होकर भी मेरा हृदय विदीर्ण नहीं होता ! इस कष्ट से पत्थर, वृक्ष प्रभृति भी फट जाते । क्या उनकी ख़बर पाने का कुछ उपाय नही " ने धीरे से कहा- 'बहू, क्या तू पागल हो जायगी ? चल सारा दिन बीत गया । कुछ खायगी भी ? चल खा ले। दादा की ख़बर साई है। आजकल वृन्दावन मे है । उत्तेजित स्पर से सुधा ने सुधा-वर्पण किया- तुम माता जी से कहो, में उन्हें देखने जाऊँगी । शैवलिनी ने कहा- बहू ! तू निश्चय पागल हो गई है। दो दिन के बाद दादा स्वयं घरया जायँगे' ।
'अच्छा, यही सही । मे जाकर रविशेश्वर से कहती हूँ । तू तब तक चल । खाना खा' ।
रवि शशिशेखर के कनिष्ठ भाता है। सुधा ने नाम मात्र भोजन किया। सती का स्वामी से वियोग होने के कार
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कम्पित करठ से शेखर बोले- सुन! यह क्यो साई हो ? जाओ, माता के पास जाओ ।। नेत्रों को नीचे किए हुए सुधा बोली- 'प्रभु । आज के लिए तो अपराधिनी को क्षमा करो। चरण कमल पूजने की आज्ञा देकर व्याज इस दासी को कृतार्थ होने दो ।' शेखर चुप रहे । तब सुधा ने हाथ में लिए हुए कुड्कुम से शेखर के दोनों पैर रँगे । अनेक दिनों बाद माज सुधा स्वामी के चरण पर गिर पड़ी। फिर उसने उठ कर कहा'हृदयेश ! मेरी पूजा समाप्त हो गई। में जाती है ।' सुधा चलो गई । ऊर्ध्व-यावद्ध दृष्टि से देखते हुए शेवर अचल अटल भाव से बैठे रहे । इस घटना को हुए कितने ही दिन व्यतीत हो गए । परन्तु शशिशेखर के हृदय का दुर्दमनीय वेग किसी प्रकार शान्त न हो सका । कितनी ही नीरव भिक्षाओंों ने, तथा कितनी ही बार कातर नयनों की दृष्टि ने उनके हृदय-पटल पर कुछ भी प्रभाव न जमा पाया । एक हो चिन्ता -- एक ही भावना -- के कारण शेखर की देह जीर्ण होने लगी। जब तक ये इस यातना को सह सके, उन्होंने चुपचाप सहन किया। परन्तु जय यह यातना हो गई, तर एक रात को उन्होंन तीर्थराज प्रयाग की ओर प्रस्थान किया। समय शुभ या मला था। हज़ारों यात्री, सप्यासी प्रभृति यहाँ पहुए थे । अनन्त जन राशि में उम महानाय का तथा पुण्यपीयूवाहिनी आयी और यमुना का सगम । यमुना के जाहरी व शुभ्र जल मे मिलन । यह दृश्य बहुत ही सुन्दर तथा मनारम था। कुछ दिन ता शशिशेखर न किसी न किसी तरह व्यतीत किए। नवीन स्थल पर नवीन दृश्य देखकर किसका हृदय पुत्रवित नहीं होता। शेखरन बहुरिधि सन्यासियों के साथ इतरतत परिभ्रमण कर मन का बहुत कुछ स्थिर किया। परन्तु यह गिरता तिन दिन व लिए जी । शान्ति का फिर नाश हामगा। गणिशखर अस्थिर जित मे दश विदेश में परिभ्रमण करन लग । सुधा व हृत्य में भाव उठा- उन्हें एक गर और द पाती तो अच्छा होता। उनमे हुए बहुत दिन हा गए । उस तेल चित्र व समय वैठकर सुधा वद्दन लगी- 'भगिना ! तुम जैसी भाग्यश्रीता संसार में वन्य है । तुमन पति व हृदय मन्दिर में स्थान-लाभ किया। मै हृत भागिनी हूँ जा तुम्हारा हथ्य छीनन का प्रयत्न करती हूँ । सुवा औरन न सकी। नयन मोचित अश्रुधारा स उसका वक्षस्थल भीग गया। सुधा फिर कम्पित कण्ठ से बोली- 'वहन ! मैं तुम्हारी वस्तु पाने की इच्छा नहीं करती । परन्तु उस अमूल्य रत्न को आराधना करने की इच्छा अवश्य है। क्या यह इच्छा पूर्ण करोगी?' इतने में पीछे से ननद ने कहा - 'बहू । क्यो रोती हो' ? आंसू पोंछ कर सुधा ने उत्तर दिया- 'हृदय जिस व्यथा से व्यथित हो रहा है, उसे क्या कह कर समझाऊँ ? स्त्री होकर भी मेरा हृदय विदीर्ण नहीं होता ! इस कष्ट से पत्थर, वृक्ष प्रभृति भी फट जाते । क्या उनकी ख़बर पाने का कुछ उपाय नही " ने धीरे से कहा- 'बहू, क्या तू पागल हो जायगी ? चल सारा दिन बीत गया । कुछ खायगी भी ? चल खा ले। दादा की ख़बर साई है। आजकल वृन्दावन मे है । उत्तेजित स्पर से सुधा ने सुधा-वर्पण किया- तुम माता जी से कहो, में उन्हें देखने जाऊँगी । शैवलिनी ने कहा- बहू ! तू निश्चय पागल हो गई है। दो दिन के बाद दादा स्वयं घरया जायँगे' । 'अच्छा, यही सही । मे जाकर रविशेश्वर से कहती हूँ । तू तब तक चल । खाना खा' । रवि शशिशेखर के कनिष्ठ भाता है। सुधा ने नाम मात्र भोजन किया। सती का स्वामी से वियोग होने के कार
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बकरा ईद का त्योहार बस एक दिन बाद ही है। ऐसे में महिलाओं ने पूरी तैयारियां कर ली होंगी। पकवानों की लिस्ट से लेकर घर की सजावट पर पूरा फोकस होगा। लेकिन इसके साथ ही खुद पर ध्यान देना भी जरूरी है। बिना सजे-धजे कोई भी त्योहार कंप्लीट नहीं होता। वैसे तो ईद वगैरह के मौके पर लड़कियां पूरी तरह से ट्रेडिशनल कपड़ों में ही तैयार होना पसंद करती है। लेकिन अगर आप थोड़ा मॉडर्न और स्टाइलिश लुक चाहती हैं तो इस बार पलाजो और लांग जैकेट को पहन सकती है। ये आउटफिट काफी ज्यादा ट्रेंड में है और आपको स्टाइलिश दिखाने में मदद करेगा। तो अगर आप पलाजो और लांग ओवरकोट को पहनने वाली हैं तो सारा अली खान से लेकर अनन्या पांडे के ये 3 लुक्स को कॉपी कर सकती है। जिसमे हेयर से लेकर मेकअप के लिए परफेक्ट आइडिया मिल जाएगा।
सारा अली खान अक्सर अपने ट्रेडिशनल कपड़ों की वजह से सुर्खियों में रहती हैं। एयरपोर्ट पर हो या फिर मूवी के प्रमोशन में उनका कुर्ता सेट कई बार लड़कियों को इंप्रेस कर जाता है। जिसके साथ वो मोजरी पेयर करना पसंद करती है। बेबी पिंक कलर के इस चिकनकारी लांग जैकेट और पैंट सेट में सारा अली खान अट्रैक्टिव दिख रही है। जिसके साथ सारा ने सिल्वर ज्वैलरी को पेयर किया है। वहीं बालों को लो मेसी पोनीटेल में बांधा है। सारा अली खान का ये क्लीन लुक फेस्टिव सीजन के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। जिसे आप भी आसानी से ट्राई कर सकती है।
त्योहार के मौके पर चिकनकारी कपड़े खूबसूरत लगते हैं। ये आपको सिंपल और एलिगेंट दिखाते हैं। तो अगर आप हैवी ईयररिंग्स की शौकीन हैं तो इस तरह के फ्लेयर वाले पैंट और लांग ओवरजैकेट के साथ पेयर कर सकती हैं। साथ ही बालों को बिल्कुल स्ट्रेट ओपन करें। ये काफी खूबसूरत लगता है देखने में।
अनन्या पांडे का रेशमी धागों की कढ़ाई वाला ये ब्लैक एंड व्हाईट पलाजो सेट काफी खूबसूरत है। जिसे उन्होंने नो ज्वैलरी के साथ पहना है। फुल स्लीव और वाइड लेग पलाजो कंफर्टेबल और स्टाइलिश दिख रहा है। वहीं बालों को मेसी वेट ओपन स्टाइल किया गया है। छोटे बालों वाली गर्ल्स इस तरह से रेडी होकर खूबसूरत नजर आएंगी।
आप चाहे तो लांग जैकेट को सारा अली खान की तरह फ्रंट से बटन अप करके ट्रेडिशनल और मॉडर्न लुक दे सकती हैं। ये आपके क्रॉप टॉप के साथ खूबसूरत लगेगा।
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बकरा ईद का त्योहार बस एक दिन बाद ही है। ऐसे में महिलाओं ने पूरी तैयारियां कर ली होंगी। पकवानों की लिस्ट से लेकर घर की सजावट पर पूरा फोकस होगा। लेकिन इसके साथ ही खुद पर ध्यान देना भी जरूरी है। बिना सजे-धजे कोई भी त्योहार कंप्लीट नहीं होता। वैसे तो ईद वगैरह के मौके पर लड़कियां पूरी तरह से ट्रेडिशनल कपड़ों में ही तैयार होना पसंद करती है। लेकिन अगर आप थोड़ा मॉडर्न और स्टाइलिश लुक चाहती हैं तो इस बार पलाजो और लांग जैकेट को पहन सकती है। ये आउटफिट काफी ज्यादा ट्रेंड में है और आपको स्टाइलिश दिखाने में मदद करेगा। तो अगर आप पलाजो और लांग ओवरकोट को पहनने वाली हैं तो सारा अली खान से लेकर अनन्या पांडे के ये तीन लुक्स को कॉपी कर सकती है। जिसमे हेयर से लेकर मेकअप के लिए परफेक्ट आइडिया मिल जाएगा। सारा अली खान अक्सर अपने ट्रेडिशनल कपड़ों की वजह से सुर्खियों में रहती हैं। एयरपोर्ट पर हो या फिर मूवी के प्रमोशन में उनका कुर्ता सेट कई बार लड़कियों को इंप्रेस कर जाता है। जिसके साथ वो मोजरी पेयर करना पसंद करती है। बेबी पिंक कलर के इस चिकनकारी लांग जैकेट और पैंट सेट में सारा अली खान अट्रैक्टिव दिख रही है। जिसके साथ सारा ने सिल्वर ज्वैलरी को पेयर किया है। वहीं बालों को लो मेसी पोनीटेल में बांधा है। सारा अली खान का ये क्लीन लुक फेस्टिव सीजन के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। जिसे आप भी आसानी से ट्राई कर सकती है। त्योहार के मौके पर चिकनकारी कपड़े खूबसूरत लगते हैं। ये आपको सिंपल और एलिगेंट दिखाते हैं। तो अगर आप हैवी ईयररिंग्स की शौकीन हैं तो इस तरह के फ्लेयर वाले पैंट और लांग ओवरजैकेट के साथ पेयर कर सकती हैं। साथ ही बालों को बिल्कुल स्ट्रेट ओपन करें। ये काफी खूबसूरत लगता है देखने में। अनन्या पांडे का रेशमी धागों की कढ़ाई वाला ये ब्लैक एंड व्हाईट पलाजो सेट काफी खूबसूरत है। जिसे उन्होंने नो ज्वैलरी के साथ पहना है। फुल स्लीव और वाइड लेग पलाजो कंफर्टेबल और स्टाइलिश दिख रहा है। वहीं बालों को मेसी वेट ओपन स्टाइल किया गया है। छोटे बालों वाली गर्ल्स इस तरह से रेडी होकर खूबसूरत नजर आएंगी। आप चाहे तो लांग जैकेट को सारा अली खान की तरह फ्रंट से बटन अप करके ट्रेडिशनल और मॉडर्न लुक दे सकती हैं। ये आपके क्रॉप टॉप के साथ खूबसूरत लगेगा।
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Durga Ashtami 2022 Date, Time, Puja Muhurat: नवरात्रि में अष्टमी तिथि बेहद खास मानी जाती है। कई लोग इस दिन कन्याओं का पूजन भी करते हैं। इस बार महा अष्टमी पर बेहद शुभ योग का संयोग भी बन रहा है।
- इस साल महाअष्टमी 3 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
- हिंदू पंचांग अनुसार इस दिन शोभन योग भी बन रहा है।
- इस योग को बेहद शुभ माना जाता है।
Durga Ashtami 2022 Date, Time, Puja Muhurat: इस बार शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू हुई है और इसकी समाप्ति 5 अक्टूबर को होगी। धार्मिक मान्यताओं अनुसार नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की विधि विधान पूजा करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। इस पावन पर्व के आखिरी दो दिन यानी अष्टमी और नवमी तिथि सबसे ज्यादा खास मानी जाती है। क्योंकि इस दौरान कन्या पूजा किया जाता है। खास बात ये है कि इस साल दुर्गा अष्टमी पर बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। बताया जा रहा है कि इस शुभ योग में मां अंबे की पूजा बेहद ही फलदायी साबित होगी।
कब है दुर्गा अष्टमी ( Navratri Durga Ashtami 2022)?
इस साल महाअष्टमी 3 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग अनुसार इस दिन शोभन योग भी बन रहा है। शोभन योग 2 अक्टूबर 2022 की शाम 5 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा और इसकी समाप्ति 3 अक्टूबर 2022 की दोपहर 2 बजकर 22 मिनट पर होगी।
नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के मां गौरी स्वरूप की अराधना की जाती है। मान्यताओं अनुसार मां गौरी माता पार्वती के 16 वर्ष का अविवाहित रुप हैं। अधिकतर लोग इस दिन छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन करते हैं। उन्हें खाना खिलाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
क्या होता है शोभन योग? शुभ कार्यों को करने के लिए ये योग बेहद ही शुभ माना जाता है। इस योग में यात्रा मंगलमय साबित होती है। क्योंकि इस योग में यात्रा करने से मार्ग में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होती। जिन जातकों की कुंडली में शोभन योग होता है उन्हें अपने बच्चों से बेहद सुख प्राप्त होता है।
अष्टमी पर कन्या पूजनः नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कई लोग अष्टमी तिथि पर भी कन्या पूजन करते हैं। कन्या पूजन में 2 से 9 वर्ष की आयु की कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें साक्षात् माँ का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। सबसे पहले उनके पांव धोये जाते हैं। फिर माथे पर तिलक लगाया जाता है, उनकी आरती उतारी जाती है। फिर उन्हें भोजन कराया जाता है। खाने में हलवा, पूरी, प्रसाद, चना दिया जाता है। अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है। )
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Durga Ashtami दो हज़ार बाईस Date, Time, Puja Muhurat: नवरात्रि में अष्टमी तिथि बेहद खास मानी जाती है। कई लोग इस दिन कन्याओं का पूजन भी करते हैं। इस बार महा अष्टमी पर बेहद शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। - इस साल महाअष्टमी तीन अक्टूबर को मनाई जाएगी। - हिंदू पंचांग अनुसार इस दिन शोभन योग भी बन रहा है। - इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। Durga Ashtami दो हज़ार बाईस Date, Time, Puja Muhurat: इस बार शारदीय नवरात्रि छब्बीस सितंबर से शुरू हुई है और इसकी समाप्ति पाँच अक्टूबर को होगी। धार्मिक मान्यताओं अनुसार नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की विधि विधान पूजा करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। इस पावन पर्व के आखिरी दो दिन यानी अष्टमी और नवमी तिथि सबसे ज्यादा खास मानी जाती है। क्योंकि इस दौरान कन्या पूजा किया जाता है। खास बात ये है कि इस साल दुर्गा अष्टमी पर बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। बताया जा रहा है कि इस शुभ योग में मां अंबे की पूजा बेहद ही फलदायी साबित होगी। कब है दुर्गा अष्टमी ? इस साल महाअष्टमी तीन अक्टूबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग अनुसार इस दिन शोभन योग भी बन रहा है। शोभन योग दो अक्टूबर दो हज़ार बाईस की शाम पाँच बजकर चौदह मिनट से शुरू होगा और इसकी समाप्ति तीन अक्टूबर दो हज़ार बाईस की दोपहर दो बजकर बाईस मिनट पर होगी। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के मां गौरी स्वरूप की अराधना की जाती है। मान्यताओं अनुसार मां गौरी माता पार्वती के सोलह वर्ष का अविवाहित रुप हैं। अधिकतर लोग इस दिन छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन करते हैं। उन्हें खाना खिलाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। क्या होता है शोभन योग? शुभ कार्यों को करने के लिए ये योग बेहद ही शुभ माना जाता है। इस योग में यात्रा मंगलमय साबित होती है। क्योंकि इस योग में यात्रा करने से मार्ग में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होती। जिन जातकों की कुंडली में शोभन योग होता है उन्हें अपने बच्चों से बेहद सुख प्राप्त होता है। अष्टमी पर कन्या पूजनः नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कई लोग अष्टमी तिथि पर भी कन्या पूजन करते हैं। कन्या पूजन में दो से नौ वर्ष की आयु की कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें साक्षात् माँ का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। सबसे पहले उनके पांव धोये जाते हैं। फिर माथे पर तिलक लगाया जाता है, उनकी आरती उतारी जाती है। फिर उन्हें भोजन कराया जाता है। खाने में हलवा, पूरी, प्रसाद, चना दिया जाता है। अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। ट्रेंडिंगः
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भागवत पुराण हिंदुओं के अठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवतम या केवल भागवतम भी कहा जाता है। भागवत पुराण का मुख्य विषय भक्ति है। भागवत पुराण में, विष्णु अवतार श्री कृष्ण को सभी देवताओं के देवता और स्वयं भगवान के रूप में दर्शाया गया है। इससे रास भवन की भक्ति देखने को मिलती है। परंपरागत रूप से भागवत पुराण के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। भागवत पुराण की कथा में भगवान शुकदेव महाराज परीक्षित को भक्ति का मार्ग बताते हैं और उन्हें मोक्ष की ओर ले जाते हैं। भागवत पुराण के प्रत्येक श्लोक में श्री कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रकाश है। इसमें, बहुत ज्ञान के साथ और निम्नलिखित तत्वों के साथ प्रेरणादायक उपाख्यानों और कहानियों का एक अद्भुत संग्रह हैः दिव्य कृपा, सिद्ध-भक्ति, मर्यादा-मार्ग (विनय का मार्ग), द्वैत और गैर-प्राप्त करने के तरीके द्वैत। आइए बात करते हैं भागवत पुराण के विभिन्न पहलुओं और श्रीमद्भागवतम् महापुराण के महत्व की।
चौराहों और चौराहों पर अंकित श्रीमद्भागवत पुराण को हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ होने का दर्जा प्राप्त है। भागवत पुराण वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। वेदों, उपनिषदों और दर्शन के गूढ़ और रहस्यमय विषयों को भागवत पुराण में बहुत ही सरलता से संदर्भित किया गया है। इस महान ग्रंथ को हम भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश भी कह सकते हैं। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक सीमाओं को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। इस पुराण में सकाम कर्म, द्वैत-अद्वैत, निष्काम कर्म, भक्ति, कृपा, सिद्धि साधना, ज्ञान साधना, मर्यादा, व्यक्त-अव्यक्त और निर्गुण-सगुण रहस्य विस्तार से देखने को मिलते हैं।
श्रीमद्भागवत पुराण का वर्णन और अर्थ काव्यात्मक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। यह ज्ञान का अखूट भण्डार है। यह पुराण सब प्रकार का कल्याण करने वाला और मन को शांत करने वाला है। भागवत पुराण ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का एक महान ग्रंथ है। इस पुराण में बारह स्कंध हैं, जिनमें केवल विष्णु के अवतारों का वर्णन है। सूत जी ने नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों की प्रार्थना पर इस पुराण के माध्यम से श्रीकृष्ण के चौबीस अवतारों की कथा कही है। श्रीमद्भागवत पुराण में श्रीकृष्ण के दिव्य और अलौकिक स्वरूप का बार-बार वर्णन किया गया है।
श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य जन्म के दोषों का नाश हो जाता है। इसका पालन करने से प्राणियों का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। ऐसा माना जाता है कि कलियुग में भागवत पुराण का विशेष महत्व है। इसके अध्ययन से मनुष्य सांसारिक कष्टों के सागर को पार कर जाता है। सोए हुए मानव ज्ञान भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जाग्रत हो जाते हैं। कहा जाता है कि भागवत कथा मनुष्य के उद्धार के लिए एक कल्पवृक्ष के समान है, जिसके द्वारा सभी मानव इच्छाओं को पूरा किया जा सकता है। भागवत कथा का सार मोक्ष का स्रोत माना गया है।
सर्वप्रथम भागवत के अमृत वचनों को सुनकर महाराज परीक्षित ने मोक्ष की प्राप्ति की। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी पौराणिक ग्रंथों और पुराणों में देखा जा सकता है। श्रीमद्भागवत की कथा के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार भागवत कलियुग में भगवान विष्णु का ही रूप है। यदि सच्चे मन से इसका स्मरण किया जाए तो यह करोड़ों पुण्यों के फल के समान हो जाता है। कहा जाता है कि भागवत कथा को सुनने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जीव का कल्याण संभव है। आइए हम भागवत पुराण के खंडों पर करीब से नज़र डालें।
गुप्त ब्रह्म तत्व युक्त भागवत पुराण अनेक प्रकार से पुण्य पुराण है। जैसे गंगा नदियों के लिए है, काशी तीर्थों के लिए है, वैसे ही भागवत पुराण शास्त्रों के लिए है। यह हिंदू समाज का सबसे सम्मानित और पूजनीय ग्रंथ है। इस पुराण में 12 स्कंद (भाग) हैं जिनमें विष्णु के 24 अवतारों की कथा वर्णित है। पहले स्कंध में भक्ति योग और वैराग्य की चर्चा की गई है। साथ ही भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में भी जानकारी मिलती है। दूसरे खंड में योग द्वारा शरीर के त्याग और प्राकृतिक सृष्टि की उत्पत्ति के बारे में है। श्रीमद्भागवत 10 विषयों पर केन्द्रित है।
कलियुग में भागवत कथा सुनने के महत्व पर बहुत बल दिया गया है। इसके प्रयोग से हम सभी दुखों, कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। भागवत कथा सुनने के लाभ इस प्रकार हैं।
श्रीमद्भागवत की कथा सुनने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। भगवान की दिव्य कथाओं को सुनकर, एक व्यक्ति सर्वोच्च भगवान के लिए तीव्र करुणा या प्रेम का अनुभव करता है।
श्रीमद्भागवत की कथा का पाठ करने से व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। भागवत का श्रवण करने से मनुष्य पृथ्वी पर सभी प्रकार के सुखों को भोगकर परलोक में श्रेष्ठता को प्राप्त करता है।
श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीने की सीख देती है और मृत्यु के भय को दूर करने के साथ-साथ पितृ दोष से भी मुक्ति दिलाती है।
जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में कोई भी अच्छा काम नहीं किया है, हमेशा दुराचार में लिप्त रहा है, जो हमेशा क्रोध की आग में जलता रहा है, जो व्यभिचारी बन गया है, अगर उस व्यक्ति को भी भागवत की कथा सुनने को मिल जाए, तो वह भी पापों से मुक्त हो जाता है।
जो सत्य मार्ग से भटक जाते हैं, माता-पिता से भी द्वेष करने लगे हैं, धर्म का पालन नहीं करते, वे भी भागवत कथा सुनने से पवित्र हो जाते हैं।
मन, वचन, बुद्धि से किया हुआ कोई भी पाप कर्म जैसे चोरी करना, षड़यन्त्र करना, दूसरों के धन से जीवन यापन करना, यहाँ तक कि ब्राह्मण की हत्या करने वाला भी यदि सच्चे मन से भागवत कथा सुनता या पढ़ता है तो उसका जीवन भी पवित्र हो जाता है।
यदि भागवत की कथा किसी ऐसे व्यक्ति के नाम से की जाती है जो मृत्यु के बाद प्रेत-योनि में प्रवेश कर गया है (उसके द्वारा किए गए गलत कार्यों के कारण), तो वह भी भूत-प्रेत से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है .
भागवत कथा करवाने के लिए सर्वप्रथम विद्वान ब्राह्मणों से या पंचांग से शुभ मुहूर्त/मुहूर्त प्राप्त कर लेना चाहिए। वैसे तो भागवत पुराण कथा के आयोजन के लिए श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, अगहन, माघ, फाल्गुन, बैसाख और ज्येष्ठ मास विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। लेकिन विद्वानों के अनुसार किसी भी दिन जब आप भागवत कथा प्रारंभ करते हैं तो वह सबसे शुभ दिन होता है।
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किसी पवित्र स्थान पर ही करना चाहिए। वैसे भागवत कथा को अपनी जन्मभूमि में कराने का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही तीर्थ स्थानों पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी विशेष फलदायी माना जाता है। वैसे तो भागवत कथा के स्थान के संबंध में कोई विशेष नियम नहीं है, फिर भी यदि आप अधिक पुण्य कमाना चाहते हैं तो किसी तीर्थ स्थान पर इसका आयोजन करना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक धर्मावलंबियों को कथा का लाभ मिल सके। साथ ही सनातन धर्म के अनुसार पुराणों का पाठ ऐसे स्थान पर करना चाहिए जहां मन को शांति मिले। एक बार जब आपने भागवत कथा को धारण करने के लिए स्थान का चयन कर लिया है, तो सबसे पहले जमीन को गाय के गोबर से लेप करें। इसके ऊपर एक मंडप और गुंबद के आकार का छत्र लगाएं और पितरों के बैठने के लिए हनुमान जी की ध्वजा और सात गांठ वाला बांस लगाएं।
भागवत कथा का वक्ता विद्वान, शास्त्रों का ज्ञाता, देवताओं का भक्त, सदाचारी और मधुरभाषी होना चाहिए। भागवत का वर्णन करने वाले वक्ता को शास्त्रों और वेदों का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। एक बार भागवत कथा शुरू होने के बाद, ब्राह्मण और यजमान दोनों को सात दिनों तक उपवास करना चाहिए। अगर और कोई समस्या न हो तो एक समय में एक ही समय भोजन करें।
गणेश, नवग्रह, योगिनी, क्षेत्रपाल, बटुक, तुलसी, विष्णु, शंकर आदि की पूजा करके भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए। कथा के दिनों में श्रोता और वक्ता को दाढ़ी नहीं बनानी चाहिए, जंक फूड आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। भागवत कथा की अवधि में सात्विक आहार अपनाकर शुद्ध और अहिंसक आचरण करना चाहिए। कथा चरण में हो सके तो प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और धूम्रपान से बचना चाहिए।
भागवत पुराण वैष्णव हिंदू भक्ति प्रणाली के आधार पर स्थित है। यह कृष्ण और भगवान विष्णु के अन्य अवतारों के बारे में है। यह सबसे अच्छे और सबसे लोकप्रिय भक्ति ग्रंथों में से एक माना जाता है।
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भागवत पुराण हिंदुओं के अठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवतम या केवल भागवतम भी कहा जाता है। भागवत पुराण का मुख्य विषय भक्ति है। भागवत पुराण में, विष्णु अवतार श्री कृष्ण को सभी देवताओं के देवता और स्वयं भगवान के रूप में दर्शाया गया है। इससे रास भवन की भक्ति देखने को मिलती है। परंपरागत रूप से भागवत पुराण के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। भागवत पुराण की कथा में भगवान शुकदेव महाराज परीक्षित को भक्ति का मार्ग बताते हैं और उन्हें मोक्ष की ओर ले जाते हैं। भागवत पुराण के प्रत्येक श्लोक में श्री कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रकाश है। इसमें, बहुत ज्ञान के साथ और निम्नलिखित तत्वों के साथ प्रेरणादायक उपाख्यानों और कहानियों का एक अद्भुत संग्रह हैः दिव्य कृपा, सिद्ध-भक्ति, मर्यादा-मार्ग , द्वैत और गैर-प्राप्त करने के तरीके द्वैत। आइए बात करते हैं भागवत पुराण के विभिन्न पहलुओं और श्रीमद्भागवतम् महापुराण के महत्व की। चौराहों और चौराहों पर अंकित श्रीमद्भागवत पुराण को हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ होने का दर्जा प्राप्त है। भागवत पुराण वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। वेदों, उपनिषदों और दर्शन के गूढ़ और रहस्यमय विषयों को भागवत पुराण में बहुत ही सरलता से संदर्भित किया गया है। इस महान ग्रंथ को हम भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश भी कह सकते हैं। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक सीमाओं को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। इस पुराण में सकाम कर्म, द्वैत-अद्वैत, निष्काम कर्म, भक्ति, कृपा, सिद्धि साधना, ज्ञान साधना, मर्यादा, व्यक्त-अव्यक्त और निर्गुण-सगुण रहस्य विस्तार से देखने को मिलते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण का वर्णन और अर्थ काव्यात्मक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। यह ज्ञान का अखूट भण्डार है। यह पुराण सब प्रकार का कल्याण करने वाला और मन को शांत करने वाला है। भागवत पुराण ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का एक महान ग्रंथ है। इस पुराण में बारह स्कंध हैं, जिनमें केवल विष्णु के अवतारों का वर्णन है। सूत जी ने नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों की प्रार्थना पर इस पुराण के माध्यम से श्रीकृष्ण के चौबीस अवतारों की कथा कही है। श्रीमद्भागवत पुराण में श्रीकृष्ण के दिव्य और अलौकिक स्वरूप का बार-बार वर्णन किया गया है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य जन्म के दोषों का नाश हो जाता है। इसका पालन करने से प्राणियों का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। ऐसा माना जाता है कि कलियुग में भागवत पुराण का विशेष महत्व है। इसके अध्ययन से मनुष्य सांसारिक कष्टों के सागर को पार कर जाता है। सोए हुए मानव ज्ञान भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जाग्रत हो जाते हैं। कहा जाता है कि भागवत कथा मनुष्य के उद्धार के लिए एक कल्पवृक्ष के समान है, जिसके द्वारा सभी मानव इच्छाओं को पूरा किया जा सकता है। भागवत कथा का सार मोक्ष का स्रोत माना गया है। सर्वप्रथम भागवत के अमृत वचनों को सुनकर महाराज परीक्षित ने मोक्ष की प्राप्ति की। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी पौराणिक ग्रंथों और पुराणों में देखा जा सकता है। श्रीमद्भागवत की कथा के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार भागवत कलियुग में भगवान विष्णु का ही रूप है। यदि सच्चे मन से इसका स्मरण किया जाए तो यह करोड़ों पुण्यों के फल के समान हो जाता है। कहा जाता है कि भागवत कथा को सुनने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जीव का कल्याण संभव है। आइए हम भागवत पुराण के खंडों पर करीब से नज़र डालें। गुप्त ब्रह्म तत्व युक्त भागवत पुराण अनेक प्रकार से पुण्य पुराण है। जैसे गंगा नदियों के लिए है, काशी तीर्थों के लिए है, वैसे ही भागवत पुराण शास्त्रों के लिए है। यह हिंदू समाज का सबसे सम्मानित और पूजनीय ग्रंथ है। इस पुराण में बारह स्कंद हैं जिनमें विष्णु के चौबीस अवतारों की कथा वर्णित है। पहले स्कंध में भक्ति योग और वैराग्य की चर्चा की गई है। साथ ही भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों के बारे में भी जानकारी मिलती है। दूसरे खंड में योग द्वारा शरीर के त्याग और प्राकृतिक सृष्टि की उत्पत्ति के बारे में है। श्रीमद्भागवत दस विषयों पर केन्द्रित है। कलियुग में भागवत कथा सुनने के महत्व पर बहुत बल दिया गया है। इसके प्रयोग से हम सभी दुखों, कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। भागवत कथा सुनने के लाभ इस प्रकार हैं। श्रीमद्भागवत की कथा सुनने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। भगवान की दिव्य कथाओं को सुनकर, एक व्यक्ति सर्वोच्च भगवान के लिए तीव्र करुणा या प्रेम का अनुभव करता है। श्रीमद्भागवत की कथा का पाठ करने से व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। भागवत का श्रवण करने से मनुष्य पृथ्वी पर सभी प्रकार के सुखों को भोगकर परलोक में श्रेष्ठता को प्राप्त करता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीने की सीख देती है और मृत्यु के भय को दूर करने के साथ-साथ पितृ दोष से भी मुक्ति दिलाती है। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में कोई भी अच्छा काम नहीं किया है, हमेशा दुराचार में लिप्त रहा है, जो हमेशा क्रोध की आग में जलता रहा है, जो व्यभिचारी बन गया है, अगर उस व्यक्ति को भी भागवत की कथा सुनने को मिल जाए, तो वह भी पापों से मुक्त हो जाता है। जो सत्य मार्ग से भटक जाते हैं, माता-पिता से भी द्वेष करने लगे हैं, धर्म का पालन नहीं करते, वे भी भागवत कथा सुनने से पवित्र हो जाते हैं। मन, वचन, बुद्धि से किया हुआ कोई भी पाप कर्म जैसे चोरी करना, षड़यन्त्र करना, दूसरों के धन से जीवन यापन करना, यहाँ तक कि ब्राह्मण की हत्या करने वाला भी यदि सच्चे मन से भागवत कथा सुनता या पढ़ता है तो उसका जीवन भी पवित्र हो जाता है। यदि भागवत की कथा किसी ऐसे व्यक्ति के नाम से की जाती है जो मृत्यु के बाद प्रेत-योनि में प्रवेश कर गया है , तो वह भी भूत-प्रेत से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है . भागवत कथा करवाने के लिए सर्वप्रथम विद्वान ब्राह्मणों से या पंचांग से शुभ मुहूर्त/मुहूर्त प्राप्त कर लेना चाहिए। वैसे तो भागवत पुराण कथा के आयोजन के लिए श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, अगहन, माघ, फाल्गुन, बैसाख और ज्येष्ठ मास विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। लेकिन विद्वानों के अनुसार किसी भी दिन जब आप भागवत कथा प्रारंभ करते हैं तो वह सबसे शुभ दिन होता है। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किसी पवित्र स्थान पर ही करना चाहिए। वैसे भागवत कथा को अपनी जन्मभूमि में कराने का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही तीर्थ स्थानों पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी विशेष फलदायी माना जाता है। वैसे तो भागवत कथा के स्थान के संबंध में कोई विशेष नियम नहीं है, फिर भी यदि आप अधिक पुण्य कमाना चाहते हैं तो किसी तीर्थ स्थान पर इसका आयोजन करना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक धर्मावलंबियों को कथा का लाभ मिल सके। साथ ही सनातन धर्म के अनुसार पुराणों का पाठ ऐसे स्थान पर करना चाहिए जहां मन को शांति मिले। एक बार जब आपने भागवत कथा को धारण करने के लिए स्थान का चयन कर लिया है, तो सबसे पहले जमीन को गाय के गोबर से लेप करें। इसके ऊपर एक मंडप और गुंबद के आकार का छत्र लगाएं और पितरों के बैठने के लिए हनुमान जी की ध्वजा और सात गांठ वाला बांस लगाएं। भागवत कथा का वक्ता विद्वान, शास्त्रों का ज्ञाता, देवताओं का भक्त, सदाचारी और मधुरभाषी होना चाहिए। भागवत का वर्णन करने वाले वक्ता को शास्त्रों और वेदों का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। एक बार भागवत कथा शुरू होने के बाद, ब्राह्मण और यजमान दोनों को सात दिनों तक उपवास करना चाहिए। अगर और कोई समस्या न हो तो एक समय में एक ही समय भोजन करें। गणेश, नवग्रह, योगिनी, क्षेत्रपाल, बटुक, तुलसी, विष्णु, शंकर आदि की पूजा करके भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए। कथा के दिनों में श्रोता और वक्ता को दाढ़ी नहीं बनानी चाहिए, जंक फूड आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। भागवत कथा की अवधि में सात्विक आहार अपनाकर शुद्ध और अहिंसक आचरण करना चाहिए। कथा चरण में हो सके तो प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और धूम्रपान से बचना चाहिए। भागवत पुराण वैष्णव हिंदू भक्ति प्रणाली के आधार पर स्थित है। यह कृष्ण और भगवान विष्णु के अन्य अवतारों के बारे में है। यह सबसे अच्छे और सबसे लोकप्रिय भक्ति ग्रंथों में से एक माना जाता है।
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खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप किया जाता है, लेकिन त्वचा की सेहत के लिए इसे हटाना भी जरूरी है. रात को बिना मेकअप हटाए सोने से त्वचा के छिद्र बंद हो सकते हैं. इससे त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिस कारण त्वचा खुद को रिपेयर नहीं कर पाती है और त्वचा बेजान नजर आने लगती है. साथ ही मेकअप में मौजूद केमिकल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे त्वचा पर मुंहासे, झुर्रियां व दाग-धब्बे उभर आते हैं. जिस प्रकार त्वचा के टाइप के अनुसार मेकअप किया जाता है, उसी प्रकार त्वचा के टाइप के अनुसार मेकअप हटाने के तरीके भी अलग-अलग हैं.
(और पढ़ें - फंक्शन में अलग दिखने को शहनाज हुसैन के टिप्स)
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खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप किया जाता है, लेकिन त्वचा की सेहत के लिए इसे हटाना भी जरूरी है. रात को बिना मेकअप हटाए सोने से त्वचा के छिद्र बंद हो सकते हैं. इससे त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिस कारण त्वचा खुद को रिपेयर नहीं कर पाती है और त्वचा बेजान नजर आने लगती है. साथ ही मेकअप में मौजूद केमिकल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे त्वचा पर मुंहासे, झुर्रियां व दाग-धब्बे उभर आते हैं. जिस प्रकार त्वचा के टाइप के अनुसार मेकअप किया जाता है, उसी प्रकार त्वचा के टाइप के अनुसार मेकअप हटाने के तरीके भी अलग-अलग हैं.
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• महाराज युधिष्ठिरके जीवनसे आदर्श नीतिकी शिक्षा
वीरश्रेष्ठ बन्धुओ शरणागतकी यथाशक्ति रक्षा करना सभी क्षत्रिय राजाआका महान् कर्तव्य है। शत्रुको रक्षा करनेका माहात्म्य तो और भी बड़ा है। जिन पुण्यकर्मोके द्वारा वरप्राप्ति, राज्यप्राप्ति और पुत्रप्राप्ति हो सकती है, उन सबके माहात्म्य एक साथ मिलकर शत्रुरक्षाके अकले माहात्म्यके बराबर हैं। यदि यह यज्ञ मॅन आरम्भ न किया हाता तो स्वय ही उस यदी दुर्योधनको छुडानक लिय दौड पडता, पर अब विवशता है। इसीलिये कहता हूँ, वारवरो, जाआ- जल्दी जाओ, ह कुरुनन्दन भीमसेन ! यदि वह गन्धर्वराज समझानेस न माने तो तुम लोग अपना प्रवल पराक्रम दिखाकर किसी तरह अपन भाई दुर्योधनको उसको कैदसे छुडाओ।" इस प्रकार अजातशत्रु धमराजक इन वचनाको सुनकर भीमसन आदि चारा भाइयाके मुखपर प्रसन्नता छा गयी। उन लोगाके अधर और भुजदण्ड एक साथ फड़क उठ। उन सबकी ओरसे महाबीर अर्जुनन कहा - 'महाराज। आपकी जा आज्ञा । यदि गन्धर्वराज समझान-बुझानपर दुर्योधनका छोड दग, तब तो ठीक हो है, नहीं तो यह पृथ्वीमाता गन्धर्वराजका रक्त- पान करगी।' अर्जुनकी इस प्रतिज्ञाको सुनकर दुर्योधनक बूढे मन्त्री आदिका शान्ति मिली। इधर ये चारा पराक्रमी पाण्डव दुर्योधनका मुक्त करनक लिय चल पड़ । सामना हानेपर अजुनन धमराजक आज्ञानुसार दुर्योधनको या हो मुक्त कर दनके लिये गन्धर्वोको बहुत समझाया परतु उन्होंने इनकी एक न सुनी। तब लाचार होकर अर्जुनने घार युद्धद्वारा गन्धर्वोको परास्त कर दिया। तत्पश्चात् परास्त चित्रसेनने अपना परिचय दिया और दुर्योधन आदिको कैद करनका कारण बताया। यह सुनकर पाण्डवोका बडा आश्चर्य हुआ। वे चिनसन और दुर्योधन आदिको लेकर धर्मराजक पास आये। धर्मराजने दुर्योधनकी सारी करतूत सुनकर भी बड़े प्रमके साथ दुर्योधन और उसके सब साथी बदियाको मुक्त करा दिया। फिर उसको स्नेहपूर्वक आश्वासन देते हुए उन्हान सबको घर जानेकी आज्ञा दे दी। दुर्योधन लज्जित होकर सबके साथ घर लौट गया। ऋषि-मुनि तथा ब्राह्मण लोग धर्मराज युधिष्ठिरकी प्रशसा करने लगे।
यह है महाराज युधिष्ठिरक आदर्श जावनकी एक घटना । निर्वैरता तथा धमपालनका अनूठा उदाहरण उनके मनम दुष्ट दुर्योधनकी काली करतूताको सुनकर क्राधकी छायाका भी स्पर्श नहीं हुआ। इतना ही नहीं, उसक दोषाकी और उनकी दृष्टि भी नहीं गयी । बल्कि उनका हृदय उलटे दयासे भर गया। उन्होंने जल्दी हो उसका गन्धवराजके कठिन वन्धनस मुक्त करवा दिया। यहीं तक नहीं उनका इस क्रियासे दुर्योधन दुखी और लज्जित न हो, इसके लिये उन्हाने प्रेमपूर्ण वचनासे उसको आश्वासन भी दिया। मित्राकी तो वात ही क्या दु खम पडे हुए शत्रुआके प्रति भी हमारा क्या कर्तव्य है, इसकी शिक्षा स्पष्टरूपसे हम धर्मराज युधिष्ठिर दे रहे हैं। धैर्य नीति
यह बात तो ससारमे प्रसिद्ध ही है कि दुर्योधनन कर्णकी सम्मतिसे शकुनिके द्वारा धर्मराज युधिष्ठिरको छलसे जुएम हराकर दावॅपर रखी हुई द्रोपदीको जीत लिया था। उसके पश्चात् दुर्योधनको आज्ञासे दु शासनने द्रौपदीको केश पकड़कर खींचते हुए भरी सभाम उपस्थित किया । द्रौपदी अपनी लाज बचानेक लिये रुदन करती हुई पुकारने लगी । सारी सभा द्रौपदीकी व्याकुलतासे भरे हुए करुणापूर्ण रुदनको देखकर दुखी हो रही थी। किंतु दुर्योधनक भयसे विदुर और विकर्णके सिवा किसीने भी उसक इस घृणित कुकर्मका विरोध तक नहीं किया । द्रोपदी उस समय रजस्वला थी और उसके शरीरपर एक ही वस्त्र था । एसो अवस्थाम भी दु शासनने भरी सभामे उसका वस्त्र खींचकर
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• महाराज युधिष्ठिरके जीवनसे आदर्श नीतिकी शिक्षा वीरश्रेष्ठ बन्धुओ शरणागतकी यथाशक्ति रक्षा करना सभी क्षत्रिय राजाआका महान् कर्तव्य है। शत्रुको रक्षा करनेका माहात्म्य तो और भी बड़ा है। जिन पुण्यकर्मोके द्वारा वरप्राप्ति, राज्यप्राप्ति और पुत्रप्राप्ति हो सकती है, उन सबके माहात्म्य एक साथ मिलकर शत्रुरक्षाके अकले माहात्म्यके बराबर हैं। यदि यह यज्ञ मॅन आरम्भ न किया हाता तो स्वय ही उस यदी दुर्योधनको छुडानक लिय दौड पडता, पर अब विवशता है। इसीलिये कहता हूँ, वारवरो, जाआ- जल्दी जाओ, ह कुरुनन्दन भीमसेन ! यदि वह गन्धर्वराज समझानेस न माने तो तुम लोग अपना प्रवल पराक्रम दिखाकर किसी तरह अपन भाई दुर्योधनको उसको कैदसे छुडाओ।" इस प्रकार अजातशत्रु धमराजक इन वचनाको सुनकर भीमसन आदि चारा भाइयाके मुखपर प्रसन्नता छा गयी। उन लोगाके अधर और भुजदण्ड एक साथ फड़क उठ। उन सबकी ओरसे महाबीर अर्जुनन कहा - 'महाराज। आपकी जा आज्ञा । यदि गन्धर्वराज समझान-बुझानपर दुर्योधनका छोड दग, तब तो ठीक हो है, नहीं तो यह पृथ्वीमाता गन्धर्वराजका रक्त- पान करगी।' अर्जुनकी इस प्रतिज्ञाको सुनकर दुर्योधनक बूढे मन्त्री आदिका शान्ति मिली। इधर ये चारा पराक्रमी पाण्डव दुर्योधनका मुक्त करनक लिय चल पड़ । सामना हानेपर अजुनन धमराजक आज्ञानुसार दुर्योधनको या हो मुक्त कर दनके लिये गन्धर्वोको बहुत समझाया परतु उन्होंने इनकी एक न सुनी। तब लाचार होकर अर्जुनने घार युद्धद्वारा गन्धर्वोको परास्त कर दिया। तत्पश्चात् परास्त चित्रसेनने अपना परिचय दिया और दुर्योधन आदिको कैद करनका कारण बताया। यह सुनकर पाण्डवोका बडा आश्चर्य हुआ। वे चिनसन और दुर्योधन आदिको लेकर धर्मराजक पास आये। धर्मराजने दुर्योधनकी सारी करतूत सुनकर भी बड़े प्रमके साथ दुर्योधन और उसके सब साथी बदियाको मुक्त करा दिया। फिर उसको स्नेहपूर्वक आश्वासन देते हुए उन्हान सबको घर जानेकी आज्ञा दे दी। दुर्योधन लज्जित होकर सबके साथ घर लौट गया। ऋषि-मुनि तथा ब्राह्मण लोग धर्मराज युधिष्ठिरकी प्रशसा करने लगे। यह है महाराज युधिष्ठिरक आदर्श जावनकी एक घटना । निर्वैरता तथा धमपालनका अनूठा उदाहरण उनके मनम दुष्ट दुर्योधनकी काली करतूताको सुनकर क्राधकी छायाका भी स्पर्श नहीं हुआ। इतना ही नहीं, उसक दोषाकी और उनकी दृष्टि भी नहीं गयी । बल्कि उनका हृदय उलटे दयासे भर गया। उन्होंने जल्दी हो उसका गन्धवराजके कठिन वन्धनस मुक्त करवा दिया। यहीं तक नहीं उनका इस क्रियासे दुर्योधन दुखी और लज्जित न हो, इसके लिये उन्हाने प्रेमपूर्ण वचनासे उसको आश्वासन भी दिया। मित्राकी तो वात ही क्या दु खम पडे हुए शत्रुआके प्रति भी हमारा क्या कर्तव्य है, इसकी शिक्षा स्पष्टरूपसे हम धर्मराज युधिष्ठिर दे रहे हैं। धैर्य नीति यह बात तो ससारमे प्रसिद्ध ही है कि दुर्योधनन कर्णकी सम्मतिसे शकुनिके द्वारा धर्मराज युधिष्ठिरको छलसे जुएम हराकर दावॅपर रखी हुई द्रोपदीको जीत लिया था। उसके पश्चात् दुर्योधनको आज्ञासे दु शासनने द्रौपदीको केश पकड़कर खींचते हुए भरी सभाम उपस्थित किया । द्रौपदी अपनी लाज बचानेक लिये रुदन करती हुई पुकारने लगी । सारी सभा द्रौपदीकी व्याकुलतासे भरे हुए करुणापूर्ण रुदनको देखकर दुखी हो रही थी। किंतु दुर्योधनक भयसे विदुर और विकर्णके सिवा किसीने भी उसक इस घृणित कुकर्मका विरोध तक नहीं किया । द्रोपदी उस समय रजस्वला थी और उसके शरीरपर एक ही वस्त्र था । एसो अवस्थाम भी दु शासनने भरी सभामे उसका वस्त्र खींचकर
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इस बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के अलावा सभी राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारी, विभिन्न मोर्चां के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेशों के संगठन महामंत्री भी हिस्सा लेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक का उद्घाटन करेंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा, राज्य विधानसभा चुनावों के अगले दौर के अलावा आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया जाएगा और विभिन्न संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के अलावा सभी राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारी, विभिन्न मोर्चां के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेशों के संगठन महामंत्री भी हिस्सा लेंगे. पार्टी ने एक बयान में कहा कि मोदी गुजरात विधानसभा चुनाव में मतदान करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे और देश भर से पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं की बैठक का उद्घाटन करेंगे तथा उसे संबोधित करेंगे.
पार्टी के नेता साल भर संगठनात्मक कार्यों में लगे रहते हैं और यह बैठक जायजा लेने की कवायद के तौर पर काम करेगी. पिछले लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी को हार मिली थी, वहां अपनी स्थिति मजबूत करने और 2024 में जीत सुनिश्चित करने के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रियों सहित पार्टी के नेताओं के विभिन्न समूह भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के अलावा त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं.
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब अहमदाबाद, वडोदरा और गांधीनगर सहित गुजरात के 14 जिलों की 93 सीटों पर मतदान हो रहे हैं. सुबह आठ बजे से मतदान आरंभ हुआ. इन क्षेत्रों में शाम पांच बजे तक वोट डाले जाएंगे. गुजरात के साथ ही हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती बृहस्पतिवार यानी आठ दिसंबर को होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ-साथ पांच राज्यों की छह विधानसभा सीट और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए सोमवार को हो रहे मतदान में लोगों से बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की. पीएम मोदी ट्वीट किया, 'गुजरात चुनाव के दूसरे चरण में मतदान करने वाले सभी लोगों, विशेष रूप से युवा और महिला मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने का आग्रह करता हूं.' पीएम मोदी ने कहा, भारत में विभिन्न स्थानों पर उपचुनाव भी हो रहे हैं. मैं इन सीट पर उपचुनाव के लिए लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने का अनुरोध करता हूं.
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इस बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के अलावा सभी राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारी, विभिन्न मोर्चां के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेशों के संगठन महामंत्री भी हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक का उद्घाटन करेंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा, राज्य विधानसभा चुनावों के अगले दौर के अलावा आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया जाएगा और विभिन्न संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों के अलावा सभी राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारी, विभिन्न मोर्चां के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेशों के संगठन महामंत्री भी हिस्सा लेंगे. पार्टी ने एक बयान में कहा कि मोदी गुजरात विधानसभा चुनाव में मतदान करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे और देश भर से पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं की बैठक का उद्घाटन करेंगे तथा उसे संबोधित करेंगे. पार्टी के नेता साल भर संगठनात्मक कार्यों में लगे रहते हैं और यह बैठक जायजा लेने की कवायद के तौर पर काम करेगी. पिछले लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी को हार मिली थी, वहां अपनी स्थिति मजबूत करने और दो हज़ार चौबीस में जीत सुनिश्चित करने के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रियों सहित पार्टी के नेताओं के विभिन्न समूह भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के अलावा त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब अहमदाबाद, वडोदरा और गांधीनगर सहित गुजरात के चौदह जिलों की तिरानवे सीटों पर मतदान हो रहे हैं. सुबह आठ बजे से मतदान आरंभ हुआ. इन क्षेत्रों में शाम पांच बजे तक वोट डाले जाएंगे. गुजरात के साथ ही हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती बृहस्पतिवार यानी आठ दिसंबर को होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ-साथ पांच राज्यों की छह विधानसभा सीट और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए सोमवार को हो रहे मतदान में लोगों से बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की. पीएम मोदी ट्वीट किया, 'गुजरात चुनाव के दूसरे चरण में मतदान करने वाले सभी लोगों, विशेष रूप से युवा और महिला मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने का आग्रह करता हूं.' पीएम मोदी ने कहा, भारत में विभिन्न स्थानों पर उपचुनाव भी हो रहे हैं. मैं इन सीट पर उपचुनाव के लिए लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने का अनुरोध करता हूं.
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OTT Bold Actress: ऐसे में इन शो और फिल्म में में काम करने वाली एक्ट्रेस के भी फैंस की संख्या काफी अधिक है। यहां हम आपको बताने वाले हैं कुछ ऐसे कलाकारों का नाम जिन्होंने बोल्डनेस कंटेंट में सभी हदें पार की हैं।
Ott Releases: अगर आप Vikrant Rona, Akhanda और Badhaai Do जैसी बेहतरीन फिल्मों को सिनेमाघर में नहीं देख पाएं हैं तो इन ओटीटी प्लेटफार्म पर जाकर तुरंत देखें दक्षिण भाषा इंडस्ट्री की कुछ चुंनिंदा फिल्म लेकर आए हैं जो की आपको ओटीटी पर देखने को मिल जाएंगी। इसलिए अगर आप फिल्मों को ओटीटी पर देखने का मन बना रहे हैं तो इन फिल्मों को जरूर देखें।
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OTT Bold Actress: ऐसे में इन शो और फिल्म में में काम करने वाली एक्ट्रेस के भी फैंस की संख्या काफी अधिक है। यहां हम आपको बताने वाले हैं कुछ ऐसे कलाकारों का नाम जिन्होंने बोल्डनेस कंटेंट में सभी हदें पार की हैं। Ott Releases: अगर आप Vikrant Rona, Akhanda और Badhaai Do जैसी बेहतरीन फिल्मों को सिनेमाघर में नहीं देख पाएं हैं तो इन ओटीटी प्लेटफार्म पर जाकर तुरंत देखें दक्षिण भाषा इंडस्ट्री की कुछ चुंनिंदा फिल्म लेकर आए हैं जो की आपको ओटीटी पर देखने को मिल जाएंगी। इसलिए अगर आप फिल्मों को ओटीटी पर देखने का मन बना रहे हैं तो इन फिल्मों को जरूर देखें।
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ओमिक्रॉन वेरिएंट के मद्देनजर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांच की तैयारी जोरशोर से चल रही है.
मेरठ. भारत में ओमिक्रॉन की दस्तक के बाद यूपी में हाईअलर्ट है. मेरठ का स्वास्थ्य महकमा भी इस नई आफत को लेकर चौकन्ना है. यहां विदेश यात्रा करने वाले हर शख्स की टेस्टिंग की जा रही है. 15 दिनों में मेरठ पहुंचे तकरीबन 325 लोगों की टेस्टिंग स्वास्थ्य विभाग कर रहा है. लेकिन इस बीच हेल्थ डिपार्टमेंट के सामने एक बड़ी समस्या ये आ गई है कि विदेश यात्रा कर मेरठ लौटे कई लोगों के मोबाइल नंबर में गलत पाए गए, जिससे उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है. सीएमओ डॉक्टर अखिलेश मोहन ने बताया कि विदेश यात्रा से लौटे कई लोगों के मोबाइल नंबर गलत हैं. अब टीम को इनके घर जाना पड़ रहा है. ताकि इनकी पहचान और टेस्टिंग हो सके. अगर ये घर भी नहीं मिलते हैं, तो एलआईयू को सूचना दी जा रही है.
सीएमओ ने बताया कि विदेश यात्रा कर मेरठ लौटे सभी 325 लोगों की टेस्टिंग कराई जा रह है. इन 325 यात्रियों में साउथ अफ्रीका से लौटे 7 यात्री भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान अगर कोई यात्री कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसकी जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जाएगी. आस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, कनाडा, जर्मनी, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, मॉरिशस, नेपाल नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पोलैंड. कतर, रूस, सउदी अरब, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, यूएएई, यूके और यूएसए से यात्री मेरठ पहुंचे हैं.
ओमिक्रॉन की दस्तक के मद्देनजर अस्पतालों में तैयारियां और पुख्ता की जा रही हैं. सीएमओ ने बताया कि ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में चालू अवस्था में हैं. साथ ही जिले में 3000 से ज्यादा लोगों को ऑक्सीजन युक्त बेड उपलब्ध कराने की सुविधा है. न्यूज18 की टीम ने मेरठ के प्यारेलाल शर्मा जिला चिकित्सालय और एक अन्य अस्पताल का जायजा लिया तो हमें ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट चालू अवस्था में मिले.
मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉक्टर अशोक तालियान ने बताया कि विदेश से लौटे इन सभी यात्रियों की 8 दिन तक लगातार निगरानी की जाएगी. मंडलीय सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि ओमिक्रॉन को लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज और एक प्राइवेट अस्पताल में अलग वॉर्ड भी बना दिए गए हैं. साथ ही अलग-अलग अस्पतालों में इंतजामों की बात करते हुए उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर ऑक्सीजन प्लांट्स तैयार हैं. मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि सभी 36 प्रभारी चिकित्साधिकारियों के साथ मीटिंग की गई है. निगरानी समितियों को अलर्ट कर दिया गया है. अगर कोई लक्षणयुक्त मरीज मिलता है तो उसकी विशेष जांच होगी. बड़ी संख्या में वीटीएम किट मंगाई गई है. मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलोजी लैब जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए सैंपल एनआइवी पुणे या पीजीआइ लखनऊ भेजेगी.
वहीं सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नए कोरोना वैरिएंट को देखते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर फोकस्ड सैंपलिंग करेगा. अस्पतालों में हेल्थकेयर वर्करों और हास्टल में रहने वाले छात्रों की भी जांच होगी. वहीं, संस्थानों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सैंपलिंग की जाएगी.
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ओमिक्रॉन वेरिएंट के मद्देनजर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांच की तैयारी जोरशोर से चल रही है. मेरठ. भारत में ओमिक्रॉन की दस्तक के बाद यूपी में हाईअलर्ट है. मेरठ का स्वास्थ्य महकमा भी इस नई आफत को लेकर चौकन्ना है. यहां विदेश यात्रा करने वाले हर शख्स की टेस्टिंग की जा रही है. पंद्रह दिनों में मेरठ पहुंचे तकरीबन तीन सौ पच्चीस लोगों की टेस्टिंग स्वास्थ्य विभाग कर रहा है. लेकिन इस बीच हेल्थ डिपार्टमेंट के सामने एक बड़ी समस्या ये आ गई है कि विदेश यात्रा कर मेरठ लौटे कई लोगों के मोबाइल नंबर में गलत पाए गए, जिससे उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है. सीएमओ डॉक्टर अखिलेश मोहन ने बताया कि विदेश यात्रा से लौटे कई लोगों के मोबाइल नंबर गलत हैं. अब टीम को इनके घर जाना पड़ रहा है. ताकि इनकी पहचान और टेस्टिंग हो सके. अगर ये घर भी नहीं मिलते हैं, तो एलआईयू को सूचना दी जा रही है. सीएमओ ने बताया कि विदेश यात्रा कर मेरठ लौटे सभी तीन सौ पच्चीस लोगों की टेस्टिंग कराई जा रह है. इन तीन सौ पच्चीस यात्रियों में साउथ अफ्रीका से लौटे सात यात्री भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान अगर कोई यात्री कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसकी जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जाएगी. आस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, कनाडा, जर्मनी, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, मॉरिशस, नेपाल नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पोलैंड. कतर, रूस, सउदी अरब, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, यूएएई, यूके और यूएसए से यात्री मेरठ पहुंचे हैं. ओमिक्रॉन की दस्तक के मद्देनजर अस्पतालों में तैयारियां और पुख्ता की जा रही हैं. सीएमओ ने बताया कि ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में चालू अवस्था में हैं. साथ ही जिले में तीन हज़ार से ज्यादा लोगों को ऑक्सीजन युक्त बेड उपलब्ध कराने की सुविधा है. न्यूजअट्ठारह की टीम ने मेरठ के प्यारेलाल शर्मा जिला चिकित्सालय और एक अन्य अस्पताल का जायजा लिया तो हमें ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट चालू अवस्था में मिले. मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉक्टर अशोक तालियान ने बताया कि विदेश से लौटे इन सभी यात्रियों की आठ दिन तक लगातार निगरानी की जाएगी. मंडलीय सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि ओमिक्रॉन को लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज और एक प्राइवेट अस्पताल में अलग वॉर्ड भी बना दिए गए हैं. साथ ही अलग-अलग अस्पतालों में इंतजामों की बात करते हुए उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर ऑक्सीजन प्लांट्स तैयार हैं. मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि सभी छत्तीस प्रभारी चिकित्साधिकारियों के साथ मीटिंग की गई है. निगरानी समितियों को अलर्ट कर दिया गया है. अगर कोई लक्षणयुक्त मरीज मिलता है तो उसकी विशेष जांच होगी. बड़ी संख्या में वीटीएम किट मंगाई गई है. मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलोजी लैब जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच के लिए सैंपल एनआइवी पुणे या पीजीआइ लखनऊ भेजेगी. वहीं सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नए कोरोना वैरिएंट को देखते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर फोकस्ड सैंपलिंग करेगा. अस्पतालों में हेल्थकेयर वर्करों और हास्टल में रहने वाले छात्रों की भी जांच होगी. वहीं, संस्थानों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सैंपलिंग की जाएगी. .
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भारत और श्रीलंका के बीच तीसरा वनडे मुकाबला कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारत ने तीसरे वनडे मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया है।
टीम इंडिया के लिए इस मुकाबले में 5 खिलाड़ी डेब्यू कर रहे हैं। संजू सैमसन, नितीश राना, चेतन सकारिया, के गौतम, राहुल चाहर टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह कारनामा इससे पहले 41 साल पहले हुआ है जब वनडे में एक साथ पांच खिलाड़ियों ने टीम के लिए डेब्यू किया है। साल 1980 में सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर पांच खिलाड़ियों को उनका वनडे डेब्यू कराया था।
इन पांच खिलाड़ियों में दिलीप जोशी, कीर्ति आजाद, रोजर बिन्नी, संदीप पाटिल और तिरुमला श्रीनिवास का नाम शामिल है।
भारत ने इस मैच में श्रीलंका के खिलाफ कुल 6 बदलाव किए है जिसमें नवदीप सैनी ने पहले ही अपना वनडे डेब्यू कर लिया है। इस वनडे सीरीज को भारत ने पहले ही अपने नाम कर लिया है।
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भारत और श्रीलंका के बीच तीसरा वनडे मुकाबला कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारत ने तीसरे वनडे मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। टीम इंडिया के लिए इस मुकाबले में पाँच खिलाड़ी डेब्यू कर रहे हैं। संजू सैमसन, नितीश राना, चेतन सकारिया, के गौतम, राहुल चाहर टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह कारनामा इससे पहले इकतालीस साल पहले हुआ है जब वनडे में एक साथ पांच खिलाड़ियों ने टीम के लिए डेब्यू किया है। साल एक हज़ार नौ सौ अस्सी में सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर पांच खिलाड़ियों को उनका वनडे डेब्यू कराया था। इन पांच खिलाड़ियों में दिलीप जोशी, कीर्ति आजाद, रोजर बिन्नी, संदीप पाटिल और तिरुमला श्रीनिवास का नाम शामिल है। भारत ने इस मैच में श्रीलंका के खिलाफ कुल छः बदलाव किए है जिसमें नवदीप सैनी ने पहले ही अपना वनडे डेब्यू कर लिया है। इस वनडे सीरीज को भारत ने पहले ही अपने नाम कर लिया है।
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शिमला - भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम शिमला के चुनाव को लेकर पांच और वार्डों से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा चुनाव को लेकर अब तक करीबन सभी वार्डों से प्रत्याशी उतार चुकी है। भाजपा ने नगर निगम चुनाव के लिए जिन पांच वार्डों से प्रत्याशियों का चयन किया है, उसमें वार्ड -14 राम बाजार से दीपक श्रीधर को, वार्ड -33 खलिनी से पूर्णमल को और वार्ड -34 कनलोग से बृजबाला सूद, वार्ड-चार अनाडेल से कुसुम सरदेट और वार्ड -12 फागली से जगजीत सिंह बग्गा को उतारा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बताया कि पार्टी ने करीबन सभी वार्डों से भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का चयन कर दिया है।
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शिमला - भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम शिमला के चुनाव को लेकर पांच और वार्डों से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा चुनाव को लेकर अब तक करीबन सभी वार्डों से प्रत्याशी उतार चुकी है। भाजपा ने नगर निगम चुनाव के लिए जिन पांच वार्डों से प्रत्याशियों का चयन किया है, उसमें वार्ड -चौदह राम बाजार से दीपक श्रीधर को, वार्ड -तैंतीस खलिनी से पूर्णमल को और वार्ड -चौंतीस कनलोग से बृजबाला सूद, वार्ड-चार अनाडेल से कुसुम सरदेट और वार्ड -बारह फागली से जगजीत सिंह बग्गा को उतारा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बताया कि पार्टी ने करीबन सभी वार्डों से भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का चयन कर दिया है। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
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रिसर्चः क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति को दिन में कितने समय तक चलना चाहिए?
चलने के कई फायदे हैं। चलने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक है। क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति को दिन में कितने समय तक चलना चाहिए?
एक अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति को हर दिन 15 मिनट के लिए चलना चाहिए। हर व्यक्ति को सप्ताह में 90 मिनट चलना चाहिए। हर दिन 15 मिनट के लिए धीरे-धीरे चलना, समय से पहले मृत्यु दर को 14 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इस प्रकार की जीवनशैली अपनाने वालों का जीवनकाल तीन साल बढ़ जाता है।
केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के. के. अग्रवाल ने द लांसेट में प्रकाशित एक रिसर्च का हवाला देकर इस बात की पुष्टि की। अग्रवाल ने कहा कि हर दिन चलने वाले 15 फीसदी लोगों को कैंसर होने की संभावना कम होती है।
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रिसर्चः क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति को दिन में कितने समय तक चलना चाहिए? चलने के कई फायदे हैं। चलने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक है। क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति को दिन में कितने समय तक चलना चाहिए? एक अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति को हर दिन पंद्रह मिनट के लिए चलना चाहिए। हर व्यक्ति को सप्ताह में नब्बे मिनट चलना चाहिए। हर दिन पंद्रह मिनट के लिए धीरे-धीरे चलना, समय से पहले मृत्यु दर को चौदह प्रतिशत तक कम कर सकता है। इस प्रकार की जीवनशैली अपनाने वालों का जीवनकाल तीन साल बढ़ जाता है। केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के. के. अग्रवाल ने द लांसेट में प्रकाशित एक रिसर्च का हवाला देकर इस बात की पुष्टि की। अग्रवाल ने कहा कि हर दिन चलने वाले पंद्रह फीसदी लोगों को कैंसर होने की संभावना कम होती है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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सवालः प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- संसदीय समिति की चेतावनी अनसुनी कर क्यों घटाए बेड?
प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बार फिर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने शनिवार (5 जून) को कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की संख्या कम पड़ जाने का उल्लेख किया। साथ ही, सवाल पूछा कि आखिर पहली लहर के बाद विशेषज्ञों और संसदीय समिति की चेतावनियों को अनसुना करते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या क्यों घटाई गई? प्रियंका गांधी ने सरकार से प्रश्न करने की अपनी श्रृंखला 'जिम्मेदार कौन' के तहत किए गए फेसबुक पोस्ट में यह भी पूछा कि क्या देश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री निवास और नई संसद का निर्माण है?
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे उसी समय देश में ऑक्सीजन, आईसीयू एवं वेंटिलेटर बेडों की संख्या कम की जा रही थी, लेकिन झूठे प्रचार में लिप्त सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'सितंबर 2020 में भारत में 2,47,972 ऑक्सीजन बेड थे, जो 28 जनवरी 2021 तक 36 प्रतिशत घटकर 1,57,344 रह गए। इसी दौरान आईसीयू बेड 66,638 से 46 प्रतिशत घटकर 36,008 और वेंटिलेटर बेड 33,024 से 28 प्रतिशत घटकर 23,618 रह गए। '
प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी। इसके बावजूद सरकार का ध्यान कहीं और था। ' प्रियंका गांधी ने कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता और आम लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा, 'जिस समय देश भर में लाखों लोग अस्पतालों में बिस्तरों की गुहार लगा रहे थे उस समय सरकार के आरोग्य सेतु जैसे ऐप और अन्य डाटाबेस किसी काम के नहीं निकले। '
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया, '2014 में सरकार में आते ही स्वास्थ्य बजट में 20 प्रतिशत की कटौती करने वाली मोदी सरकार ने 2014 में 15 एम्स बनाने की घोषणा की थी। इनमें से एक भी एम्स आज सक्रिय अस्पताल के रूप में काम नहीं कर रहा है। 2018 से ही संसद की स्थायी समिति ने एम्स अस्पतालों में शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों की कमी की बात सरकार के सामने रखी है, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना कर दिया। ' उन्होंने सरकार से पूछा, 'तैयारी के लिए एक साल होने के बावजूद आखिर क्यों केंद्र सरकार ने यह समय 'हम कोरोना से युद्ध जीत गए हैं' जैसी झूठी बयानबाजी में गुजार दिया। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम क्यों होने दी? ' प्रियंका ने यह सवाल भी किया कि मोदी सरकार ने विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति की चेतावनी को नकारते भारत के हर ज़िले में उन्नत स्वास्थ सुविधाओं को उपलब्ध करने का कार्य क्यों नहीं किया?
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सवालः प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- संसदीय समिति की चेतावनी अनसुनी कर क्यों घटाए बेड? प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बार फिर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की संख्या कम पड़ जाने का उल्लेख किया। साथ ही, सवाल पूछा कि आखिर पहली लहर के बाद विशेषज्ञों और संसदीय समिति की चेतावनियों को अनसुना करते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या क्यों घटाई गई? प्रियंका गांधी ने सरकार से प्रश्न करने की अपनी श्रृंखला 'जिम्मेदार कौन' के तहत किए गए फेसबुक पोस्ट में यह भी पूछा कि क्या देश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री निवास और नई संसद का निर्माण है? प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी से युद्ध जीत लेने की घोषणा कर रहे थे उसी समय देश में ऑक्सीजन, आईसीयू एवं वेंटिलेटर बेडों की संख्या कम की जा रही थी, लेकिन झूठे प्रचार में लिप्त सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'सितंबर दो हज़ार बीस में भारत में दो,सैंतालीस,नौ सौ बहत्तर ऑक्सीजन बेड थे, जो अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक छत्तीस प्रतिशत घटकर एक,सत्तावन,तीन सौ चौंतालीस रह गए। इसी दौरान आईसीयू बेड छयासठ,छः सौ अड़तीस से छियालीस प्रतिशत घटकर छत्तीस,आठ और वेंटिलेटर बेड तैंतीस,चौबीस से अट्ठाईस प्रतिशत घटकर तेईस,छः सौ अट्ठारह रह गए। ' प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'पिछले साल स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति ने कोरोना की भयावहता का जिक्र करते हुए अस्पताल के बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी। इसके बावजूद सरकार का ध्यान कहीं और था। ' प्रियंका गांधी ने कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता और आम लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा, 'जिस समय देश भर में लाखों लोग अस्पतालों में बिस्तरों की गुहार लगा रहे थे उस समय सरकार के आरोग्य सेतु जैसे ऐप और अन्य डाटाबेस किसी काम के नहीं निकले। ' कांग्रेस महासचिव ने दावा किया, 'दो हज़ार चौदह में सरकार में आते ही स्वास्थ्य बजट में बीस प्रतिशत की कटौती करने वाली मोदी सरकार ने दो हज़ार चौदह में पंद्रह एम्स बनाने की घोषणा की थी। इनमें से एक भी एम्स आज सक्रिय अस्पताल के रूप में काम नहीं कर रहा है। दो हज़ार अट्ठारह से ही संसद की स्थायी समिति ने एम्स अस्पतालों में शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों की कमी की बात सरकार के सामने रखी है, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना कर दिया। ' उन्होंने सरकार से पूछा, 'तैयारी के लिए एक साल होने के बावजूद आखिर क्यों केंद्र सरकार ने यह समय 'हम कोरोना से युद्ध जीत गए हैं' जैसी झूठी बयानबाजी में गुजार दिया। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम क्यों होने दी? ' प्रियंका ने यह सवाल भी किया कि मोदी सरकार ने विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मामलों की संसद की स्थायी समिति की चेतावनी को नकारते भारत के हर ज़िले में उन्नत स्वास्थ सुविधाओं को उपलब्ध करने का कार्य क्यों नहीं किया? हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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शिमला -एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी में अकादमी से ब्रेक लेते हुए नवरात्र के उपलक्ष्य पर डांडिया इवनिंग का आयोजन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों द्वारा सरस्वती व दुर्गा मां की आरती व भजनों की प्रस्तुति दी गई। यही नहीं छात्रों द्वारा भक्ति संगीत के साथ डांडिया डांस व गरबा डांस की प्रस्तुति से सभागार में बैठे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एपीजी शिमला के कुलपति प्रो. आरके चौधरी ने डांडिया इवनिंग कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ दुर्गा, लक्ष्मी व सरस्वती देवी के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्रों को नवरात्र के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवरात्र हिंदुओं का प्रसिद्ध पर्व है, इन्हें हर साल मनाया जाता है। डांडियां इवनिंग कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में मौजूद विदेशी छात्रों ने भी भाग लेकर नवरात्र के उपलक्ष्य में इस आयोजन की शोभा बढ़ा दी। इस अवसर पर एपीजी के रजिस्ट्रार डा. आरके कायस्था, परीक्षा नियंत्रक ज्योत्सना गौतम, पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. रमेश चौहान एवं विभिन्न विभागों के डीन्स व अध्यक्ष, नॉन टीचिंग स्टाफ के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सभी छात्रों ने डांडिया डांस में भाग लिया।
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शिमला -एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी में अकादमी से ब्रेक लेते हुए नवरात्र के उपलक्ष्य पर डांडिया इवनिंग का आयोजन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों द्वारा सरस्वती व दुर्गा मां की आरती व भजनों की प्रस्तुति दी गई। यही नहीं छात्रों द्वारा भक्ति संगीत के साथ डांडिया डांस व गरबा डांस की प्रस्तुति से सभागार में बैठे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एपीजी शिमला के कुलपति प्रो. आरके चौधरी ने डांडिया इवनिंग कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ दुर्गा, लक्ष्मी व सरस्वती देवी के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्रों को नवरात्र के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवरात्र हिंदुओं का प्रसिद्ध पर्व है, इन्हें हर साल मनाया जाता है। डांडियां इवनिंग कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में मौजूद विदेशी छात्रों ने भी भाग लेकर नवरात्र के उपलक्ष्य में इस आयोजन की शोभा बढ़ा दी। इस अवसर पर एपीजी के रजिस्ट्रार डा. आरके कायस्था, परीक्षा नियंत्रक ज्योत्सना गौतम, पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष डा. रमेश चौहान एवं विभिन्न विभागों के डीन्स व अध्यक्ष, नॉन टीचिंग स्टाफ के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सभी छात्रों ने डांडिया डांस में भाग लिया।
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प्रियंका ने शेयर की बेटी की फोटोः बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली प्रियंका चोपड़ा हाल ही में मां बनी हैं. 'मदर्स डे' के मौके पर उन्होंने अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा की पहली तस्वीर फैन्स के साथ शेयर की.
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब प्रियंका ने अपनी बेटी को गले लगाया है। 8 मई को प्रियंका और निक ने अपनी बेटी की पहली झलक देखी। निक और प्रियंका ने साझा किया कि कैसे उनका बच्चा अस्पताल में 100 से अधिक दिनों के बाद पहली बार घर आया। तस्वीरों की बात करें तो इसमें निक और प्रियंका एक साथ बैठे हैं। प्रियंका की गोद में उनकी बेटी मालती है, जिसे उन्होंने थामे रखा है। हालांकि फोटो में निक और प्रियंका ने इमोजी से बच्ची का चेहरा ढक रखा है. प्रियंका अपने बच्चे को पकड़े हुए हैं और निक उनकी बेटी को प्यार से देख रहे हैं।
प्रियंका ने फोटो शेयर करते हुए फैंस के साथ मां होने का अहसास शेयर किया है. "मदर्स डे पर, मैं आपको बताना चाहती हूं कि हम पिछले कुछ महीनों से रोलर कोस्टर राइड पर हैं," उसने लिखा। हम जानते हैं कि अन्य लोगों ने इसका अनुभव किया होगा। एनआईसीयू में 100 से अधिक दिनों के बाद, हमारी सबसे छोटी बेटी आखिरकार घर आ गई है। हमारे पिछले कुछ महीने चुनौतियों से भरे रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा ने आगे लिखा, 'अब एक बात साफ है कि हर पल सही और कीमती है. हम बहुत खुश हैं कि हमारा बच्चा आखिरकार घर आ गया है। हम लॉस एंजिल्स में रे रेडी चिल्ड्रन ला जोला और सीडर सिनाई अस्पताल के हर डॉक्टर, नर्स और विशेषज्ञ को उनकी निस्वार्थ मदद के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। हमारे जीवन का अगला अध्याय अभी शुरू हुआ है।
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प्रियंका ने शेयर की बेटी की फोटोः बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली प्रियंका चोपड़ा हाल ही में मां बनी हैं. 'मदर्स डे' के मौके पर उन्होंने अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा की पहली तस्वीर फैन्स के साथ शेयर की. उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब प्रियंका ने अपनी बेटी को गले लगाया है। आठ मई को प्रियंका और निक ने अपनी बेटी की पहली झलक देखी। निक और प्रियंका ने साझा किया कि कैसे उनका बच्चा अस्पताल में एक सौ से अधिक दिनों के बाद पहली बार घर आया। तस्वीरों की बात करें तो इसमें निक और प्रियंका एक साथ बैठे हैं। प्रियंका की गोद में उनकी बेटी मालती है, जिसे उन्होंने थामे रखा है। हालांकि फोटो में निक और प्रियंका ने इमोजी से बच्ची का चेहरा ढक रखा है. प्रियंका अपने बच्चे को पकड़े हुए हैं और निक उनकी बेटी को प्यार से देख रहे हैं। प्रियंका ने फोटो शेयर करते हुए फैंस के साथ मां होने का अहसास शेयर किया है. "मदर्स डे पर, मैं आपको बताना चाहती हूं कि हम पिछले कुछ महीनों से रोलर कोस्टर राइड पर हैं," उसने लिखा। हम जानते हैं कि अन्य लोगों ने इसका अनुभव किया होगा। एनआईसीयू में एक सौ से अधिक दिनों के बाद, हमारी सबसे छोटी बेटी आखिरकार घर आ गई है। हमारे पिछले कुछ महीने चुनौतियों से भरे रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा ने आगे लिखा, 'अब एक बात साफ है कि हर पल सही और कीमती है. हम बहुत खुश हैं कि हमारा बच्चा आखिरकार घर आ गया है। हम लॉस एंजिल्स में रे रेडी चिल्ड्रन ला जोला और सीडर सिनाई अस्पताल के हर डॉक्टर, नर्स और विशेषज्ञ को उनकी निस्वार्थ मदद के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। हमारे जीवन का अगला अध्याय अभी शुरू हुआ है।
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स्थिति जिस प्रकार सुरक्षित व सुदृढ हो गई थी, कैसर विलियम द्विताय के समय में उसमें यह भारी परिवर्तन आ गया था ।
से फ्रास क परराष्ट्र सचिव देल्कास की नीति कुशलता से यूरोपियन राजनीति में एक अन्य महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुआ । किन परिस्थितियों में बिस्मार्क ने इटली को अपने गुट में शामिल कर लिया था, इसका उल्लेख हम पहले कर चुके हैं। उत्तरी अफाका म मास और इटली के पारस्परिक विरोध के कारण ही विश्मार्क की यह सुवर्णावसर प्राप्त हो गया था । पर १६०२ में देवास ने इटली के साथ समझौता कर लिया । इटली को ट्रिपोली में मनमानी करन का हुक दे दिया गया और बदले में फास ने मोरका में मनमानी करने का हक प्राप्त कर लिया। इस प्रकार इग्लो की फ्रास से भी मिनता स्थापित हो गई। यद्यपि इटली अब भी जर्मनी के गुट में शामिल था, पर प्रास के साथ भी उसका विरोध नहीं रहा था ।
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स्थिति जिस प्रकार सुरक्षित व सुदृढ हो गई थी, कैसर विलियम द्विताय के समय में उसमें यह भारी परिवर्तन आ गया था । से फ्रास क परराष्ट्र सचिव देल्कास की नीति कुशलता से यूरोपियन राजनीति में एक अन्य महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुआ । किन परिस्थितियों में बिस्मार्क ने इटली को अपने गुट में शामिल कर लिया था, इसका उल्लेख हम पहले कर चुके हैं। उत्तरी अफाका म मास और इटली के पारस्परिक विरोध के कारण ही विश्मार्क की यह सुवर्णावसर प्राप्त हो गया था । पर एक हज़ार छः सौ दो में देवास ने इटली के साथ समझौता कर लिया । इटली को ट्रिपोली में मनमानी करन का हुक दे दिया गया और बदले में फास ने मोरका में मनमानी करने का हक प्राप्त कर लिया। इस प्रकार इग्लो की फ्रास से भी मिनता स्थापित हो गई। यद्यपि इटली अब भी जर्मनी के गुट में शामिल था, पर प्रास के साथ भी उसका विरोध नहीं रहा था ।
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करेलिया गणराज्य के मध्य भाग में जिले मूल्यों Segezha का शहर है। वहाँ के बारे में तीस हजार लोग हैं। Segezha में लुगदी और कागज मिल - बस्ती मुख्य उद्यम के साथ एकल उद्योग कस्बों को दर्शाता है।
निपटान सुंदर करेलियन प्रकृति के साथ एक क्षेत्र में स्थित हैः यहाँ एक ही नाम के नदी झील Vygozero में बहता है। यह बड़े पानी और वन संसाधनों के एक बड़े लुगदी और कागज मिल इन क्षेत्रों में निर्माण की पहचान की उपस्थिति है। वहाँ प्रवेश और लकड़ी प्रसंस्करण में शामिल उद्यमों की एक बहुत कुछ है।
लेनिनग्राद, आर्कान्जेस्क और मरमंस्क - Segezha (करेलिया) के शहर में एक रेलवे स्टेशन है, पड़ोसी क्षेत्रों की बस्तियों के साथ एक नियमित रेल कनेक्शन का आयोजन किया। शहर के माध्यम से संघीय महत्व "कोला", सेंट पीटर्सबर्ग और मरमंस्क जोड़ने का ऑटोमोबाइल मार्ग चला जाता है। स्थानीय सड़क नेटवर्क आप शहर के सभी क्षेत्रों के लिए परिवहन लिंक व्यवस्थित करने के लिए अनुमति देता है, वहाँ भी एक बस स्टेशन है।
गांव के सुविधाजनक स्थान, बड़ी कंपनियों की उपस्थिति पता चलता है कि Segezha में होटलों किसी भी मौसम में दावा किया है। शहर के व्यवसाय क्षेत्र में कई आतिथ्य प्रतिष्ठानों की पेशकश है कि आरामदायक आवास का प्रतिनिधित्व करती है।
होटल "Segezha में" मेहमानों के एक आरामदायक वातावरण, शांति और स्थिरता देता है। होटल, शहर के केंद्र के और राजमार्ग "कोला" से करीब एक शांत स्थान में, निम्न पते पर पार्क के पास हैः उल। -संवर्धन, 4. संस्थान अपनी बंद कर दिया और रक्षा की पार्किंग स्थल है। होटल के परिसर, मेहमानों के लिए कमरे उपलब्ध कराने के अलावा, एक ब्यूटी सैलून का लाभ लेने के, नामस्रोत रेस्तरां का दौरा प्रदान करता है। अतिथियों को अलग-अलग श्रेणियों स्वीकार करता है और बच्चों और लोगों को अकेले यात्रा के साथ मेहमानों निपटान समूहों, जोड़ों प्रदान करता है।
मेहमान किताब करने के लिए चुन सकते हैं 55 कमरों प्रस्तुत करता है। उनमें से किसी को बुक करें और प्रस्तावित नियमों और शर्तों से परिचित होने के लिए फोन पर हो सकता है। कर्मचारी भी भुगतान की शर्तों और अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश होटल "Segezha में" के बारे में जानकारी प्रदान करेगा। फ़ोन होटल आधिकारिक वेबसाइट पर निर्दिष्ट किया जा सकता।
लक्जरी कमरे - दो परिवार, बड़े और छोटे। वे एक सुखद डिजाइन, सुंदर फर्नीचर और वस्त्रों से की जाती है। परिवार सुइट में एक खाट और बाथरूम में एक खेल क्षेत्र के साथ सुसज्जित है, वहाँ अतिरिक्त, बच्चों के अनुकूल सिंक और शौचालय हैं। यहाँ मेहमान एक हेयर ड्रायर, फ्रिज, केतली और बर्तन का उपयोग कर सकते हैं। केबल टीवी और वायरलेस इंटरनेट अवकाश मेहमानों व्यवस्थित करने में मदद करने के लिए।
श्रेणी में "सुपीरियर" शायद डबल और सिंगल आवास। वहाँ एक बिस्तर (दो सिंगल बेड या एक अर्ध), अलमारी, डेस्क, फ्रिज है। प्रत्येक कमरे में एक बाथरूम है। मेहमानों के लिए एक हेयर ड्रायर, एक टीवी और मुफ्त वाई-फाई का आनंद लें।
"अर्थव्यवस्था" की श्रेणी दोनों ट्रिपल और चौगुनी बस्ती निवासियों भी शामिल है। अपने स्वयं के शौचालय और शॉवर, मेहमानों के लिए बेड, एकल चरण और दो कहानी के साथ इस कमरे में। साथ ही एक उच्च श्रेणी के है, जहां मेहमानों ऑनलाइन जाने और टीवी शो देख सकते हैं की अपार्टमेंट के रूप में।
होटल "Segezha में" मेहमानों के आराम के बारे में परवाह है और निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करता हैः
- यहां निवास क्रेडिट कार्ड द्वारा भुगतान किया जा सकता है;
- प्रत्येक अतिथि, कमरे में अपने भोजन को व्यवस्थित कर सकते कैफे से भोजन के आदेश;
- एक साफ दिखने में कपड़े लाने के कमरे में अतिथि के अनुरोध पर लॉन्ड्री सेवा का भुगतान इस्त्री सुविधाओं के प्रदान करने में सहायता करने के लिए;
- व्यवस्थापक टैक्सी और पत्राचार के वितरण की व्यवस्था;
- क़ीमती सामान और दस्तावेजों के लिए, आप होटल सुरक्षित उपयोग कर सकते हैं।
एक अच्छा समय है, मेहमानों के लिए कैफे जटिल यात्रा कर सकते हैं। मेनू में - यूरोपीय, रूसी और करेलियन व्यंजनों की व्यंजन। यहाँ यह मेनू से जटिल नाश्ता और रात का भोजन के लिए भुगतान या बर्तन चयन करने के लिए संभव है। दो बैंक्वेट हॉल कैफे, 70 लोगों को, समारोह यहां अनुमति देते हैं।
होटल एक पूल है। स्थानीय बार पेय की एक चयन प्रदान करता है। मेहमानों के लिए एक असली खुशी स्पा के लिए उपयोग हो जाता है। एक जिम और एक अवरक्त सौना, सूर्य, पेशेवर ब्यूटिशन और मालिश करने वाली महिलाओं की सेवाओं मेहमानों के आराम और बहुत अच्छी लग रही करने की अनुमति देगा।
क्या मेहमानों को होटल के बारे में कहा?
होटल "Segezha में" गुणवत्ता सेवा और आराम प्रदान करता है। इस ग्राहक ने समीक्षा कि यहां अपने प्रवास का मूल्यांकन अधिक बार मूल्यांकन में "बहुत अच्छा" और Segezha में एक लंबे समय के लिए बंद करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प के रूप में इस जगह को चिह्नित इसका सबूत है। कई आगंतुकों इस संपत्ति शहर में सबसे अच्छा कहा जाता है।
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करेलिया गणराज्य के मध्य भाग में जिले मूल्यों Segezha का शहर है। वहाँ के बारे में तीस हजार लोग हैं। Segezha में लुगदी और कागज मिल - बस्ती मुख्य उद्यम के साथ एकल उद्योग कस्बों को दर्शाता है। निपटान सुंदर करेलियन प्रकृति के साथ एक क्षेत्र में स्थित हैः यहाँ एक ही नाम के नदी झील Vygozero में बहता है। यह बड़े पानी और वन संसाधनों के एक बड़े लुगदी और कागज मिल इन क्षेत्रों में निर्माण की पहचान की उपस्थिति है। वहाँ प्रवेश और लकड़ी प्रसंस्करण में शामिल उद्यमों की एक बहुत कुछ है। लेनिनग्राद, आर्कान्जेस्क और मरमंस्क - Segezha के शहर में एक रेलवे स्टेशन है, पड़ोसी क्षेत्रों की बस्तियों के साथ एक नियमित रेल कनेक्शन का आयोजन किया। शहर के माध्यम से संघीय महत्व "कोला", सेंट पीटर्सबर्ग और मरमंस्क जोड़ने का ऑटोमोबाइल मार्ग चला जाता है। स्थानीय सड़क नेटवर्क आप शहर के सभी क्षेत्रों के लिए परिवहन लिंक व्यवस्थित करने के लिए अनुमति देता है, वहाँ भी एक बस स्टेशन है। गांव के सुविधाजनक स्थान, बड़ी कंपनियों की उपस्थिति पता चलता है कि Segezha में होटलों किसी भी मौसम में दावा किया है। शहर के व्यवसाय क्षेत्र में कई आतिथ्य प्रतिष्ठानों की पेशकश है कि आरामदायक आवास का प्रतिनिधित्व करती है। होटल "Segezha में" मेहमानों के एक आरामदायक वातावरण, शांति और स्थिरता देता है। होटल, शहर के केंद्र के और राजमार्ग "कोला" से करीब एक शांत स्थान में, निम्न पते पर पार्क के पास हैः उल। -संवर्धन, चार. संस्थान अपनी बंद कर दिया और रक्षा की पार्किंग स्थल है। होटल के परिसर, मेहमानों के लिए कमरे उपलब्ध कराने के अलावा, एक ब्यूटी सैलून का लाभ लेने के, नामस्रोत रेस्तरां का दौरा प्रदान करता है। अतिथियों को अलग-अलग श्रेणियों स्वीकार करता है और बच्चों और लोगों को अकेले यात्रा के साथ मेहमानों निपटान समूहों, जोड़ों प्रदान करता है। मेहमान किताब करने के लिए चुन सकते हैं पचपन कमरों प्रस्तुत करता है। उनमें से किसी को बुक करें और प्रस्तावित नियमों और शर्तों से परिचित होने के लिए फोन पर हो सकता है। कर्मचारी भी भुगतान की शर्तों और अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश होटल "Segezha में" के बारे में जानकारी प्रदान करेगा। फ़ोन होटल आधिकारिक वेबसाइट पर निर्दिष्ट किया जा सकता। लक्जरी कमरे - दो परिवार, बड़े और छोटे। वे एक सुखद डिजाइन, सुंदर फर्नीचर और वस्त्रों से की जाती है। परिवार सुइट में एक खाट और बाथरूम में एक खेल क्षेत्र के साथ सुसज्जित है, वहाँ अतिरिक्त, बच्चों के अनुकूल सिंक और शौचालय हैं। यहाँ मेहमान एक हेयर ड्रायर, फ्रिज, केतली और बर्तन का उपयोग कर सकते हैं। केबल टीवी और वायरलेस इंटरनेट अवकाश मेहमानों व्यवस्थित करने में मदद करने के लिए। श्रेणी में "सुपीरियर" शायद डबल और सिंगल आवास। वहाँ एक बिस्तर , अलमारी, डेस्क, फ्रिज है। प्रत्येक कमरे में एक बाथरूम है। मेहमानों के लिए एक हेयर ड्रायर, एक टीवी और मुफ्त वाई-फाई का आनंद लें। "अर्थव्यवस्था" की श्रेणी दोनों ट्रिपल और चौगुनी बस्ती निवासियों भी शामिल है। अपने स्वयं के शौचालय और शॉवर, मेहमानों के लिए बेड, एकल चरण और दो कहानी के साथ इस कमरे में। साथ ही एक उच्च श्रेणी के है, जहां मेहमानों ऑनलाइन जाने और टीवी शो देख सकते हैं की अपार्टमेंट के रूप में। होटल "Segezha में" मेहमानों के आराम के बारे में परवाह है और निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करता हैः - यहां निवास क्रेडिट कार्ड द्वारा भुगतान किया जा सकता है; - प्रत्येक अतिथि, कमरे में अपने भोजन को व्यवस्थित कर सकते कैफे से भोजन के आदेश; - एक साफ दिखने में कपड़े लाने के कमरे में अतिथि के अनुरोध पर लॉन्ड्री सेवा का भुगतान इस्त्री सुविधाओं के प्रदान करने में सहायता करने के लिए; - व्यवस्थापक टैक्सी और पत्राचार के वितरण की व्यवस्था; - क़ीमती सामान और दस्तावेजों के लिए, आप होटल सुरक्षित उपयोग कर सकते हैं। एक अच्छा समय है, मेहमानों के लिए कैफे जटिल यात्रा कर सकते हैं। मेनू में - यूरोपीय, रूसी और करेलियन व्यंजनों की व्यंजन। यहाँ यह मेनू से जटिल नाश्ता और रात का भोजन के लिए भुगतान या बर्तन चयन करने के लिए संभव है। दो बैंक्वेट हॉल कैफे, सत्तर लोगों को, समारोह यहां अनुमति देते हैं। होटल एक पूल है। स्थानीय बार पेय की एक चयन प्रदान करता है। मेहमानों के लिए एक असली खुशी स्पा के लिए उपयोग हो जाता है। एक जिम और एक अवरक्त सौना, सूर्य, पेशेवर ब्यूटिशन और मालिश करने वाली महिलाओं की सेवाओं मेहमानों के आराम और बहुत अच्छी लग रही करने की अनुमति देगा। क्या मेहमानों को होटल के बारे में कहा? होटल "Segezha में" गुणवत्ता सेवा और आराम प्रदान करता है। इस ग्राहक ने समीक्षा कि यहां अपने प्रवास का मूल्यांकन अधिक बार मूल्यांकन में "बहुत अच्छा" और Segezha में एक लंबे समय के लिए बंद करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प के रूप में इस जगह को चिह्नित इसका सबूत है। कई आगंतुकों इस संपत्ति शहर में सबसे अच्छा कहा जाता है।
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पाकिस्तान से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, पाकिस्तान में एक बाढ़ पीड़ित नाबालिग हिंदू लड़की को सिंध में राशन देने के बहाने दो लड़के अपने साथ ले गए और दो दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया. जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यक समाज को टारगेट किया जा रहा है.
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पाकिस्तान से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, पाकिस्तान में एक बाढ़ पीड़ित नाबालिग हिंदू लड़की को सिंध में राशन देने के बहाने दो लड़के अपने साथ ले गए और दो दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया. जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यक समाज को टारगेट किया जा रहा है.
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खबर के मुताबिक बिहार सरकार ने साफ़ कर दिया हैं की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया जायेगा। साथ ही साथ इसे गंभीर कदाचार मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकार के इस आदेश से समूह 'ग' के कर्मियों और अधिकारियों हड़कंप मच गया हैं। मिली जानकारी के अनुसार हर साल फरवरी महीने तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को संपत्ति का ब्यौरा जमा करना होता हैं। लेकिन कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसा नहीं करते हैं।
आपको बता दें की नीतीश सरकार अब ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कारवाई करने की तैयारी कर रही हैं। इसको लेकर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य सचिव और विभागाध्यक्ष के साथ ही प्रमंडलीय आयुक्त और जिला पदाधिकारियों को पत्र जारी किया हैं तथा तुरंत एक्शन लेने को कहा गया हैं।
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खबर के मुताबिक बिहार सरकार ने साफ़ कर दिया हैं की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया जायेगा। साथ ही साथ इसे गंभीर कदाचार मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार के इस आदेश से समूह 'ग' के कर्मियों और अधिकारियों हड़कंप मच गया हैं। मिली जानकारी के अनुसार हर साल फरवरी महीने तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को संपत्ति का ब्यौरा जमा करना होता हैं। लेकिन कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसा नहीं करते हैं। आपको बता दें की नीतीश सरकार अब ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कारवाई करने की तैयारी कर रही हैं। इसको लेकर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य सचिव और विभागाध्यक्ष के साथ ही प्रमंडलीय आयुक्त और जिला पदाधिकारियों को पत्र जारी किया हैं तथा तुरंत एक्शन लेने को कहा गया हैं।
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अहमदाबाद। बीते सप्ताह चीन से गुजरात लौटी एक मेडिकल छात्रा में कोरोना के लक्षण पाए जाने की आशंका के चलते उसे उपचार के लिए राजकोट सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। राजकोट के जेतपुर की 21 वर्षीय मेडिकल छात्रा गत 2 जनवरी को चीन से भारत लौटी थी, चीन तथा मुंबई में उसका मेडिकल चैक अप किया गया लेकिन यहां लौटने के बाद उसे सर्दी, खांसी व बुखार होने लगी। कोरोना के लक्षणों की आशंका के चलते उसे शनिवार दोपहर राजकोट के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है। छात्रा का ब्लड सेम्पल पूणे लेबोरेटरी में भेजा गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद कोरोना संक्रमण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी लेकिन छात्रा में इसके लक्षण के चलते राजकोट प्रशासन व लोगों में हडकंप जरुर मच गया है।
केंद्र सरकार अपने विज्ञापनों में भले संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे स्लोगन का प्रचार करती रही लेकिन गुजरात सरकार ने आदिवासी बहुल दाहोद जिले में कुपोषित बच्चों को अंडा देने से साफ इनकार किया है। सरकार की ओर से बच्चों को पोष्टिक आहार व दूध पहले से दिया जा रहा है।
दाहोद जिले में अतिकूपाषित बच्चों को नाश्ते में अंडा देने की खबरों के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के कार्यालय से स्पष्ट किया गया कि राज्य में सुपोषण अभियान के जरिए कूपोषित व अतिकूपोषित बच्चों को नाश्ते में पौष्टिक आहार व दूध दिया जा रहा है।
आंगनवाडियों में बच्चों को फल व फास्ट फूड खाद्य सामग्री दी जा रही है ऐसे में बच्चों को नाश्ते में अंडा दिए जाने की बात पूरी तरह बेबुनियाद है। गौरतलब है कि गुजरात शाकाहारी बहुल प्रदेश है तथा मुख्यमंत्री रुपाणी खुद जैन समुदाय से आते हैं तथा शाकाहार, अहिंसा व जीवदया का गंभीरता से पालन करते हैं।
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अहमदाबाद। बीते सप्ताह चीन से गुजरात लौटी एक मेडिकल छात्रा में कोरोना के लक्षण पाए जाने की आशंका के चलते उसे उपचार के लिए राजकोट सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। राजकोट के जेतपुर की इक्कीस वर्षीय मेडिकल छात्रा गत दो जनवरी को चीन से भारत लौटी थी, चीन तथा मुंबई में उसका मेडिकल चैक अप किया गया लेकिन यहां लौटने के बाद उसे सर्दी, खांसी व बुखार होने लगी। कोरोना के लक्षणों की आशंका के चलते उसे शनिवार दोपहर राजकोट के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है। छात्रा का ब्लड सेम्पल पूणे लेबोरेटरी में भेजा गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद कोरोना संक्रमण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी लेकिन छात्रा में इसके लक्षण के चलते राजकोट प्रशासन व लोगों में हडकंप जरुर मच गया है। केंद्र सरकार अपने विज्ञापनों में भले संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे स्लोगन का प्रचार करती रही लेकिन गुजरात सरकार ने आदिवासी बहुल दाहोद जिले में कुपोषित बच्चों को अंडा देने से साफ इनकार किया है। सरकार की ओर से बच्चों को पोष्टिक आहार व दूध पहले से दिया जा रहा है। दाहोद जिले में अतिकूपाषित बच्चों को नाश्ते में अंडा देने की खबरों के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के कार्यालय से स्पष्ट किया गया कि राज्य में सुपोषण अभियान के जरिए कूपोषित व अतिकूपोषित बच्चों को नाश्ते में पौष्टिक आहार व दूध दिया जा रहा है। आंगनवाडियों में बच्चों को फल व फास्ट फूड खाद्य सामग्री दी जा रही है ऐसे में बच्चों को नाश्ते में अंडा दिए जाने की बात पूरी तरह बेबुनियाद है। गौरतलब है कि गुजरात शाकाहारी बहुल प्रदेश है तथा मुख्यमंत्री रुपाणी खुद जैन समुदाय से आते हैं तथा शाकाहार, अहिंसा व जीवदया का गंभीरता से पालन करते हैं।
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श्रीनगरः जम्मू कश्मीर में भारी बर्फ़बारी और समूचे उत्तर भारत में हो रही छिटपुट बारिश की वजह से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है. कश्मीर में दो महीने से भी ज्यादा समय से शीतलहर का प्रकोप है। इस बीच दुनिया के दूसरे सबसे ठंडे इलाके द्रास में पारा शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
मौसम विभाग के अनुसार करगिल जिले के द्रास इलाके में रविवार रात न्यूनतम तापमान शून्य से 31. 4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाके में रविवार को अधिकतम तापमान शून्य से नीचे 12. 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं लेह जिले में बीती रात पारा गिरकर शून्य से 15. 9 डिग्री सेल्सियस नीचे जबकि रविवार को अधिकतम तापमान शून्य से दो डिग्री नीचे दर्ज किया गया था।
श्रीनगर में रविवार रात को न्यूनतम तापमान शून्य से 3. 5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है, जो शनिवार रात के तापमान 1. 4 डिग्री सेल्सियस से दो डिग्री कम है। जम्मू कश्मीर के दूसरे इलाके भी अतिशीत की मार झेल रहे हैं. कश्मीर के काजीगुंड में पारा लुढ़ककर शून्य से 5 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है जबकि नजदीकी कोकेरनाग कस्बे में रविवार रात को तापमान शून्य से नीचे 3. 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा कस्बे में पारा शून्य से 6. 3 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है जो शनिवार रात को शून्य से 6. 5 डिग्री सेल्सियस नीचे था। श्रीनगर में रविवार रात को न्यूनतम तापमान शून्य से 3. 5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उत्तर कश्मीर के मशहूर स्की रिजॉर्ट गुलमर्ग में रविवार रात पारा लुढ़ककर शून्य से 12. 6 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है जबकि दक्षिण कश्मीर के पर्यटक स्थल पहलगाम में तापमान शून्य से 13. 6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है।
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श्रीनगरः जम्मू कश्मीर में भारी बर्फ़बारी और समूचे उत्तर भारत में हो रही छिटपुट बारिश की वजह से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है. कश्मीर में दो महीने से भी ज्यादा समय से शीतलहर का प्रकोप है। इस बीच दुनिया के दूसरे सबसे ठंडे इलाके द्रास में पारा शून्य से इकतीस डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार करगिल जिले के द्रास इलाके में रविवार रात न्यूनतम तापमान शून्य से इकतीस. चार डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाके में रविवार को अधिकतम तापमान शून्य से नीचे बारह. पाँच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं लेह जिले में बीती रात पारा गिरकर शून्य से पंद्रह. नौ डिग्री सेल्सियस नीचे जबकि रविवार को अधिकतम तापमान शून्य से दो डिग्री नीचे दर्ज किया गया था। श्रीनगर में रविवार रात को न्यूनतम तापमान शून्य से तीन. पाँच डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है, जो शनिवार रात के तापमान एक. चार डिग्री सेल्सियस से दो डिग्री कम है। जम्मू कश्मीर के दूसरे इलाके भी अतिशीत की मार झेल रहे हैं. कश्मीर के काजीगुंड में पारा लुढ़ककर शून्य से पाँच डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है जबकि नजदीकी कोकेरनाग कस्बे में रविवार रात को तापमान शून्य से नीचे तीन. सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा कस्बे में पारा शून्य से छः. तीन डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है जो शनिवार रात को शून्य से छः. पाँच डिग्री सेल्सियस नीचे था। श्रीनगर में रविवार रात को न्यूनतम तापमान शून्य से तीन. पाँच डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उत्तर कश्मीर के मशहूर स्की रिजॉर्ट गुलमर्ग में रविवार रात पारा लुढ़ककर शून्य से बारह. छः डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है जबकि दक्षिण कश्मीर के पर्यटक स्थल पहलगाम में तापमान शून्य से तेरह. छः डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है।
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कोरोना काल ने भले ही व्यक्ति को कुछ सीख दी हो या नहीं। लेकिन स्वास्थ्य को लेकर अब हर कोई सज़ग हो चला है। हर व्यक्ति भले वह ग़रीब-अमीर कोई भी हो, वह अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो गया है। वैसे अंग्रेजी में एक बड़ी अच्छी कहावत भी है, हैल्थ इज वैल्थ। " तो आइए हम जानते हैं कि कैसे हर सुबह खाली पेट अख़रोट खाना आपके स्वस्थ को बना सकता है निरोगी और कैसे अख़रोट का इस्तेमाल दूर भगा सकता है कैंसर जैसी भयंकर बीमारी? मालूम हो कि अखरोट ड्राई फ्रूट्स की श्रेणी में आता है। जिसे "विटमिन्स का राजा" कहा जाता है।
वहीं अख़रोट में पाएं जाने वाले तत्वों की करें। तो इसमें फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन्स और मिनरल्स काफ़ी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे न सिर्फ़ हमारा दिमाग़ मज़बूत बनता है, अपितु मेमोरी के लिए भी काफ़ी फायदेमंद होता है। इसके अलावा बात करें तो कहीं न कहीं अख़रोट का सेवन सम्पूर्ण मानव शरीर के लिए लाभदायक होता है। इसके नित्य सेवन से कई प्रकार की बीमारियों से निज़ात भी मिल जाती है। बशर्तें की आप अखरोट को सीधे खाने की बजाय उसे भिगोकर खाएं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अख़रोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो कि हार्ट को स्वस्थ बनाता है। ऐसे में अगर अपने दिल को मजबूत बनाना है तो अख़रोट का सेवन व्यक्ति को ज़रूर करना चाहिए। हाँ यहां विशेष बात यह है कि अख़रोट को सामान्य रुप से न खाते हुए भिगोकर खाएं तो वह ज़्यादा फायदेमंद होता है। अब सामान्य व्यक्ति का सवाल हो सकता कि अख़रोट प्रतिदिन कैसे खा सकते। यह तो महंगा मिलता है। ऐसे में बता दें कि महंगे-सस्ते की कोई बात नहीं होती, क्योंकि अगर स्वस्थ रहेंगे तभी तो मस्त रहेंगे और वैसे भी सिर्फ़ 2 भीगे अखरोट ही तो रोज़ाना खाना है। फ़िर उसके बाद देखिए कैसे आपके स्वास्थ्य में बदलाव आता है। अख़रोट में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में प्रोटीन, वसा, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट हैं। इतना ही नहीं इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, कॉपर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, फॉस्फोरस, सेलेनियम और जिंक भी पाया जाता है। जो शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं।
कई अध्ययन में यह बात सामने आ चुकी है कि अखरोट का सेवन करने से ब्रेस्ट कैंसर, प्रॉस्टेट कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। अखरोट में "पॉलिफेनॉल इलागिटैनिन्स" पाए जाते हैं जो कई तरह के कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है। वहीं अखरोट खाने से हॉर्मोन से जु़ड़े कैंसर का खतरा भी कम होता है। इतना ही नहीं हड्डियों और दांतों को भी अख़रोट मज़बूत बनाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि दरअसल अखरोट में "अल्फा-लिनोलेनिक एसिड" पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करने में सक्षम होता है। वहीं अगर आप मोटापे का शिकार हैं या लगातार वज़न बढ़ने से परेशान हैं तो हर सुबह दो भीगे अख़रोट खाने से आपकी यह समस्या भी कम हो सकती है।
इसके अलावा डायबिटीज में भी फायदेमंद होता है अख़रोट। आज भारत मे डायबिटीज की समस्या काफ़ी बढ़ रही। ऐसे में डायबिटीज से छुटकारा पाना है तो अख़रोट का इस्तेमाल किया जा सकता है। कई सर्वे यह बताते हैं कि जो लोग रोजाना 2 से 3 चम्मच अखरोट का सेवन करते हैं, उनमें "टाइप-2 डायबीटीज" होने का खतरा कम हो जाता है। अखरोट ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है जिससे डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है। अख़रोट पाचन प्रणाली को भी मज़बूत बनाता है। जिससे कब्ज़ जैसे रोगों से भी छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में अगर अख़रोट को विटमिन्स का राजा कहा जाता है। तो उसके गुण हैं भी वैसे ही। कुल-मिलाकर अख़रोट का सेवन कहीं से भी नुकसानदेह नहीं। फ़िर करिए हर रोज़ दो भीगे अख़रोट का सेवन और रहेगी आपकी निरोगी काया। बस एक बात का ध्यान रहें कि किसी प्रकार की एलर्जी वग़ैरह है तो अख़रोट का सेवन डॉक्टर के परामर्श पर लें, वैसे भी कहते हैं कि कुछ भी स्वास्थ्य की दृष्टि से लेने की सोच रहें तो पहले चिकित्सीय सलाह लेनी ज़रूरी होती है।
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कोरोना काल ने भले ही व्यक्ति को कुछ सीख दी हो या नहीं। लेकिन स्वास्थ्य को लेकर अब हर कोई सज़ग हो चला है। हर व्यक्ति भले वह ग़रीब-अमीर कोई भी हो, वह अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो गया है। वैसे अंग्रेजी में एक बड़ी अच्छी कहावत भी है, हैल्थ इज वैल्थ। " तो आइए हम जानते हैं कि कैसे हर सुबह खाली पेट अख़रोट खाना आपके स्वस्थ को बना सकता है निरोगी और कैसे अख़रोट का इस्तेमाल दूर भगा सकता है कैंसर जैसी भयंकर बीमारी? मालूम हो कि अखरोट ड्राई फ्रूट्स की श्रेणी में आता है। जिसे "विटमिन्स का राजा" कहा जाता है। वहीं अख़रोट में पाएं जाने वाले तत्वों की करें। तो इसमें फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन्स और मिनरल्स काफ़ी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे न सिर्फ़ हमारा दिमाग़ मज़बूत बनता है, अपितु मेमोरी के लिए भी काफ़ी फायदेमंद होता है। इसके अलावा बात करें तो कहीं न कहीं अख़रोट का सेवन सम्पूर्ण मानव शरीर के लिए लाभदायक होता है। इसके नित्य सेवन से कई प्रकार की बीमारियों से निज़ात भी मिल जाती है। बशर्तें की आप अखरोट को सीधे खाने की बजाय उसे भिगोकर खाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अख़रोट में ओमेगा-तीन फैटी एसिड होता है, जो कि हार्ट को स्वस्थ बनाता है। ऐसे में अगर अपने दिल को मजबूत बनाना है तो अख़रोट का सेवन व्यक्ति को ज़रूर करना चाहिए। हाँ यहां विशेष बात यह है कि अख़रोट को सामान्य रुप से न खाते हुए भिगोकर खाएं तो वह ज़्यादा फायदेमंद होता है। अब सामान्य व्यक्ति का सवाल हो सकता कि अख़रोट प्रतिदिन कैसे खा सकते। यह तो महंगा मिलता है। ऐसे में बता दें कि महंगे-सस्ते की कोई बात नहीं होती, क्योंकि अगर स्वस्थ रहेंगे तभी तो मस्त रहेंगे और वैसे भी सिर्फ़ दो भीगे अखरोट ही तो रोज़ाना खाना है। फ़िर उसके बाद देखिए कैसे आपके स्वास्थ्य में बदलाव आता है। अख़रोट में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में प्रोटीन, वसा, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट हैं। इतना ही नहीं इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, कॉपर, ओमेगा-तीन फैटी एसिड, मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, फॉस्फोरस, सेलेनियम और जिंक भी पाया जाता है। जो शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। कई अध्ययन में यह बात सामने आ चुकी है कि अखरोट का सेवन करने से ब्रेस्ट कैंसर, प्रॉस्टेट कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। अखरोट में "पॉलिफेनॉल इलागिटैनिन्स" पाए जाते हैं जो कई तरह के कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है। वहीं अखरोट खाने से हॉर्मोन से जु़ड़े कैंसर का खतरा भी कम होता है। इतना ही नहीं हड्डियों और दांतों को भी अख़रोट मज़बूत बनाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि दरअसल अखरोट में "अल्फा-लिनोलेनिक एसिड" पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करने में सक्षम होता है। वहीं अगर आप मोटापे का शिकार हैं या लगातार वज़न बढ़ने से परेशान हैं तो हर सुबह दो भीगे अख़रोट खाने से आपकी यह समस्या भी कम हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज में भी फायदेमंद होता है अख़रोट। आज भारत मे डायबिटीज की समस्या काफ़ी बढ़ रही। ऐसे में डायबिटीज से छुटकारा पाना है तो अख़रोट का इस्तेमाल किया जा सकता है। कई सर्वे यह बताते हैं कि जो लोग रोजाना दो से तीन चम्मच अखरोट का सेवन करते हैं, उनमें "टाइप-दो डायबीटीज" होने का खतरा कम हो जाता है। अखरोट ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है जिससे डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है। अख़रोट पाचन प्रणाली को भी मज़बूत बनाता है। जिससे कब्ज़ जैसे रोगों से भी छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में अगर अख़रोट को विटमिन्स का राजा कहा जाता है। तो उसके गुण हैं भी वैसे ही। कुल-मिलाकर अख़रोट का सेवन कहीं से भी नुकसानदेह नहीं। फ़िर करिए हर रोज़ दो भीगे अख़रोट का सेवन और रहेगी आपकी निरोगी काया। बस एक बात का ध्यान रहें कि किसी प्रकार की एलर्जी वग़ैरह है तो अख़रोट का सेवन डॉक्टर के परामर्श पर लें, वैसे भी कहते हैं कि कुछ भी स्वास्थ्य की दृष्टि से लेने की सोच रहें तो पहले चिकित्सीय सलाह लेनी ज़रूरी होती है।
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नई दिल्ली : मानसून और चाय से बेहतरीन जोड़ी शायद फिल्मों की दुनिया में भी नहीं मिलती है. बारिश को देखते ही सभी भारतीयों के मन में चाय का ख्याल तो जरूर आता है. ऐसा होते ही उसके साथ खाने वाले कई स्वादिष्ट व्यंजन और स्नैक्स का स्वाद भी आपकी जुबान पर दौड़ लगाता होगा. लेकिन आपको चाय पीने में भी कुछ सावधानियां रखने की जरूरत है. जी हां! हम जो कुछ भी खाते पीते हैं उसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. कई बार हम जुबान की मान कर अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा देते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही व्यंजनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें किसी भी हाल में चाय के साथ नहीं खाना चाहिए.
ये सुनने में जितना अटपटा लगता है उतना ही सेहत के लिए भी हानिकारक है. अगर आप चाय के साथ हल्दी का सेवन करेंगे तो यह आपकी सेहत को बेहद बिगाड़ सकता है. दरअसल, हल्दी सेहत के लिए एक अच्छा पदार्थ जरूर है लेकिन चाय के साथ इससे पेट को क्षति पहुंचती है.
कई बार आपने नींबू चाय या लेमन टी के बारे में सुना होगा. लोग इसे बड़े ही शौक से पीते हैं. बता दें ये चाय बिना दूध वाली होती है. जब आप दूध वाली चाय में नींबू मिलाते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान होता है. इसके सेवन से आपकी तबीयत बिगड़ सकती है.
आपने ठंडा गरम के बारे में तो सुना होगा. अक्सर लोग ठंडी चीज़ों के बाद गरम और गरम चीज़ों के तुरंत बाद ठंडी चीज़ें खाने से बचते हैं. यहीं कारण है कि चाय के साथ भी ठंडी चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर आपको चाय के साथ कुछ ठंडा खाना है तो पहले इसे पिए फिर एक घंटे तक इंतज़ार करें. क्योंकि चाय पीने से 1 घंटे पहले ठंडा नहीं पीना चाहिए और न ही चाय पीने के बाद इसका सेवन करना चाहिए. इससे आपकी सेहत पर बेहद नकारात्मक असर पड़ता है.
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नई दिल्ली : मानसून और चाय से बेहतरीन जोड़ी शायद फिल्मों की दुनिया में भी नहीं मिलती है. बारिश को देखते ही सभी भारतीयों के मन में चाय का ख्याल तो जरूर आता है. ऐसा होते ही उसके साथ खाने वाले कई स्वादिष्ट व्यंजन और स्नैक्स का स्वाद भी आपकी जुबान पर दौड़ लगाता होगा. लेकिन आपको चाय पीने में भी कुछ सावधानियां रखने की जरूरत है. जी हां! हम जो कुछ भी खाते पीते हैं उसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. कई बार हम जुबान की मान कर अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा देते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही व्यंजनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें किसी भी हाल में चाय के साथ नहीं खाना चाहिए. ये सुनने में जितना अटपटा लगता है उतना ही सेहत के लिए भी हानिकारक है. अगर आप चाय के साथ हल्दी का सेवन करेंगे तो यह आपकी सेहत को बेहद बिगाड़ सकता है. दरअसल, हल्दी सेहत के लिए एक अच्छा पदार्थ जरूर है लेकिन चाय के साथ इससे पेट को क्षति पहुंचती है. कई बार आपने नींबू चाय या लेमन टी के बारे में सुना होगा. लोग इसे बड़े ही शौक से पीते हैं. बता दें ये चाय बिना दूध वाली होती है. जब आप दूध वाली चाय में नींबू मिलाते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान होता है. इसके सेवन से आपकी तबीयत बिगड़ सकती है. आपने ठंडा गरम के बारे में तो सुना होगा. अक्सर लोग ठंडी चीज़ों के बाद गरम और गरम चीज़ों के तुरंत बाद ठंडी चीज़ें खाने से बचते हैं. यहीं कारण है कि चाय के साथ भी ठंडी चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर आपको चाय के साथ कुछ ठंडा खाना है तो पहले इसे पिए फिर एक घंटे तक इंतज़ार करें. क्योंकि चाय पीने से एक घंटाटे पहले ठंडा नहीं पीना चाहिए और न ही चाय पीने के बाद इसका सेवन करना चाहिए. इससे आपकी सेहत पर बेहद नकारात्मक असर पड़ता है.
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noupoman Ka ( उभ० ) १. भिखमंगा / भिखमंगिनः भिखारी / भिखारिन ; २. याचक / याचिका; निवेदक/ निवेदिका ; -nuyarb ( पू० ) भीख माँगना । rompomárses १ = npocrirrica; २. दे०
noupbir ।। arb (१०) कूदना ; उछलना; yu ( पु . ० ), - VHBA ( स्त्री० ) उछलनेवाला / वाली । nonpbickars ( १० ) छिड़कना; II. róIOBy omeKOTóHOM सिर पर ओडीक्लोन छिड़कना । roupárars (g० ) छिपाना ; - cA (आत्म० ) छिपना ।
nonyrán (g०) तोता । попудрить nony upurs (पू० ) पाउडर लगाना; -CH (०) अपने मुँह पर पाउडर लगाना । nonyasp3án ( स्त्री० ) लोकप्रिय बनाने की क्रिया ।
nonynápa।।ocTL ( स्त्री० ) लोकप्रियता ; जनप्रियता; - Exñ (वि०) लोकप्रिय । nonycrárebcTBOBaTh ( अपू० ) ( वर्त ०
- -CTByFO) देखी अनदेखी करना ; चरमपोशी करना ; ( किसीकी तरफ़ से ) करना । nónyery ( क्रि० वि० ) व्यर्थ । nonyTE।। 0 ( क्रि० वि०) जाते-जाते ; रास्ते में; संयोगवश ; साथ ही ; - bl ( वि० ) : BaMeráHIIe यूँ ही कही हुई बात / अचिन्तित उक्ति; - BII Bérep अनुकूल वायु । nonyrga ।।K ( 50 ) - ura (स्त्री० ) सहयात्री ;
सफ़र का साथी ।
noublrárb ( ५० ) आजमाना; तक़दीर आजमाना ।
HOULITáTbes दे० HbITáTICA.
nonbrrK ।।a ( स्त्री० ) यत्न ; प्रयत्न ; génars, mpegmpHHHHáTs - y यत्न करना ; HeynáyHag n असफल प्रयत्न ।
nopla ( स्त्री० ) १. समय ;
NéTHAA 1. गर्मी
का समय ; २. n. Th जाने का समय हो गया ; [] Ha népBLIX - àx पहले पहल ; B (cántyio ) nópy ठीक समय पर ; मo Kakix nop ? कब तक ? ; c KaKfix, c Korópsix nop ? कब से ? ; c 3THx nop उस समय से / तब से ; no crux Hop अब तक ; nopóī, - óro समय-समय पर / कभी-कभी ।
HombixuBaTI (अपू०) (सिगरेट या हुक्के का )
कश लगाना ।
nopa6órars ( पू० ) थोड़ा-सा काम करना । nopañorkrens ( 5 ० ) , - nnga ( स्त्री० ) दास बनानेवाला / वाली ; विजेता / विजेत्री । nopañommárs (अपू०), ropañorárs (g० ) ( भवि० ropañomy, nopañoráuus ) दास
ropaBHÁTics ( प्रात्म० पू०) (के) बराबर होना ।
nopagérs दे० papers. Hopáporarz (CH ) दे० nopakárs ( अपू० ) , ( भवि० mopary, मारना ; ( शत्रु से) लोहा लेना ; ( गोली आदि) मारना ; n yerb लक्ष्य बेधना ; २. आश्चर्यान्वित करना; चकित करना ; ३. ( चिकि०) प्रभावित होना; -ex ( आत्म० ) १. चकित होना; आश्चर्यान्वित होना ; २. nopawárs का कर्मवाच्य ।
nopakéne ( पुं० ) पराजयवादी । nopakén ne (नपुं० ) १. पराजय ; हार; हानि; गोली मारने की क्रिया ; naHecrá . पराजित करना / हराना; norepnérs 11 पराजित होना / हारना ; २. ( चिकि० ) प्रभावित होना; -yecKu (त्रि०) पराजयवादी; - ecTBO (नपुं० )
पराजयवाद ।
nopazáreb HbIE ( वि० ) चकित करनेवाला ; आश्चर्यान्वित करनेवाला ।
nopa3árs (ca) दे० nopakárs (ca).
nonárnTbcs (g० ) दे० nÁTTECH.
nopa3MbienTB ( पू० ) ( -पर) विचार करना ।
nonÚTHIü (वि०) : ugri Ha II अपनी बात nopanéune ( नपुं ० ) १. घायल करने की क्रिया ;
से फिर जाना ।
२. घाव ।
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noupoman Ka एक. भिखमंगा / भिखमंगिनः भिखारी / भिखारिन ; दो. याचक / याचिका; निवेदक/ निवेदिका ; -nuyarb भीख माँगना । rompomárses एक = npocrirrica; दो. देशून्य noupbir ।। arb कूदना ; उछलना; yu , - VHBA उछलनेवाला / वाली । nonpbickars छिड़कना; II. róIOBy omeKOTóHOM सिर पर ओडीक्लोन छिड़कना । roupárars छिपाना ; - cA छिपना । nonyrán तोता । попудрить nony upurs पाउडर लगाना; -CH अपने मुँह पर पाउडर लगाना । nonyaspतीनán लोकप्रिय बनाने की क्रिया । nonynápa।।ocTL लोकप्रियता ; जनप्रियता; - Exñ लोकप्रिय । nonycrárebcTBOBaTh देखी अनदेखी करना ; चरमपोशी करना ; करना । nónyery व्यर्थ । nonyTE।। शून्य जाते-जाते ; रास्ते में; संयोगवश ; साथ ही ; - bl : BaMeráHIIe यूँ ही कही हुई बात / अचिन्तित उक्ति; - BII Bérep अनुकूल वायु । nonyrga ।।K - ura सहयात्री ; सफ़र का साथी । noublrárb आजमाना; तक़दीर आजमाना । HOULITáTbes देशून्य HbITáTICA. nonbrrK ।।a यत्न ; प्रयत्न ; génars, mpegmpHHHHáTs - y यत्न करना ; HeynáyHag n असफल प्रयत्न । nopla एक. समय ; NéTHAA एक. गर्मी का समय ; दो. n. Th जाने का समय हो गया ; [] Ha népBLIX - àx पहले पहल ; B nópy ठीक समय पर ; मo Kakix nop ? कब तक ? ; c KaKfix, c Korópsix nop ? कब से ? ; c तीनTHx nop उस समय से / तब से ; no crux Hop अब तक ; nopóī, - óro समय-समय पर / कभी-कभी । HombixuBaTI कश लगाना । nopaछःórars थोड़ा-सा काम करना । nopañorkrens , - nnga दास बनानेवाला / वाली ; विजेता / विजेत्री । nopañommárs , ropañorárs दास ropaBHÁTics बराबर होना । nopagérs देशून्य papers. Hopáporarz देशून्य nopakárs , लोहा लेना ; मारना ; n yerb लक्ष्य बेधना ; दो. आश्चर्यान्वित करना; चकित करना ; तीन. प्रभावित होना; -ex एक. चकित होना; आश्चर्यान्वित होना ; दो. nopawárs का कर्मवाच्य । nopakéne पराजयवादी । nopakén ne एक. पराजय ; हार; हानि; गोली मारने की क्रिया ; naHecrá . पराजित करना / हराना; norepnérs ग्यारह पराजित होना / हारना ; दो. प्रभावित होना; -yecKu पराजयवादी; - ecTBO पराजयवाद । nopazáreb HbIE चकित करनेवाला ; आश्चर्यान्वित करनेवाला । nopaतीनárs देशून्य nopakárs . nonárnTbcs देशून्य nÁTTECH. nopaतीनMbienTB विचार करना । nonÚTHIü : ugri Ha II अपनी बात nopanéune एक. घायल करने की क्रिया ; से फिर जाना । दो. घाव ।
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आईएएस अधिकारियों की तुनकमिजाजी और अहंकार से लगातार पीड़ित होते सूबे के पीसीएस अधिकारियों का गुस्सा अपने एसोशियेशन पर भी फूट रहा है। कानपुर में तैनात दो पीसीएस अधिकारियों के साथ हुई घटना ने इस संवर्ग के अधिकारीयों के सब्र का पैमाना छलका दिया है। घर से बेदखल पीडि़त कानपुर के पूर्व सी0डी0ओ0 राजेन्द्र सिंह यादव और गनर वापसी से आहत एवं क्षुब्ध नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह दोनों ही इस सारे प्रकरण को यह देखकर जोड़ते हैं कि चूंकि इस वक्त उनका एसोसिएशन निष्क्रियता के चरम पर है, जिसके चलते आइएएस अफसर अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
दोनों ही इस घटना के लिए अपने पीसीएस एसोसिएशन को ही दोषी ठहरा रहे हैं। दोनों अधिकारीयों का यही कहना है कि उनका एसोसिएशन यदि आज एक्टिव होता तो ऐसी हिमाकत करने की किसी की हिम्मत न पड़ती। राजेन्द्र सिंह का तो यही कहना है कि आईएएस से सभी डरते हैं। उनके खिलाफ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं है। राजेन्द्र सिंह कानपुर के जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब द्वारा मकान खाली कराने के आदेश के संदर्भ में कहते हैं कि जिस तरह भारी फोर्स भेजकर मेरा सामान निकलवाया और जब्त करवाया गया वह कहीं से भी न्याय संगत और तर्क संगत नहीं है।
भारी फोर्स किस लिए भेजी गई थी? क्या मैं चोर, डकैत हूं या फिर कोई आतंकवादी? मेरे साथ इस तरह के सुलूक की आवश्यकता नहीं थी। मैंने तो अपना सामान पैक तक कर लिया था। अपने साथ हुई बर्बर और घिनौनी कार्रवाई के विरुद्घ मैं न्याय पाने और अपने को सही साबित करने का पूरा जोर लगाये बैठा हूं। मैं न्याय के साथ हूं, इसीलिए कानपुर से तबादले के बाद भी लड़ाई लड़ रहा हूं, मुझे किसी का डर नहीं है। मैं सत्य और सही के साथ हूं।
राजेन्द्र सिंह इस समय पंचायती राज विभाग में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत है।
राजेन्द्र सिंह के इस मुहिम में कई वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी एवं पीसीएस संघ के पूर्व अध्यक्ष भी उनके साथ हैं। सभी का यही कहना है कि यह लड़ाई तो उनके संवर्ग के मान-सम्मान की है। एक वरिष्ठ पीसीएस का तो यहां तक कहना है कि आज यदि संघ सक्रिय होता तो किसी भी अधिकारी के साथ ऐसी घटना नहीं घटती। संघ के पदाधिकारियों को कानपुर की इन दोनों घटनाओं ने एक चुनौती दे दी है। इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। या फिर उन्हें संघ छोड़ देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में बड़े और छोटे अधिकारी एक दुसरे के विरुद्ध इस कदर मोर्चा खोले हुए हैं कि बहस और विवाद का एक लम्बा सिलसिला चल निकला है यद्यपि जहाँ प्रशासनिक अधिकारीयों के बीच सहजता, सद्भाव और संवेदनशीलता का होना जरूरी होता है, वहीं ऐसा न होने से अप्रिय घटनाओं के चलते विकास कार्यों का बाधित होना लाजमी है।
राजेन्द्र सिंह यादव यहां बतौर मुख्य विकास अधिकारी अक्टूबर 2013 में नियुक्त हुए थे। इसी के साथ 19 अगस्त 2014 से उनके पास प्रबंध निदेशक हथकरघा एंव यूपिका का अतिरिक्त प्रभार भी मिला हुआ था। उन्हें मुख्य विकास अधिकारी से रूप में प्रशंसा भी शासन द्वारा मिली थी। लेकिन उनका मानना है कि कुछ ऐसे भी अधिकारी थे जिन्हें उनके विकास कार्यों में गहरी रूचि को लेकर एतराज था। ऐसे लोगों ने गोलबन्द होकर जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के कान भरने शुरू कर दिए उनके बहकावे में आकर जिलाधिकारी ने शासन को यह लिख भेजा कि राजेन्द्र सिंह हथकरघा विभाग के दायित्वों का बहाना बनाकर प्रायः जनपद से बाहर रहते हैं, जिसके चलते विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, यह शिकायत ऐसे समय की गई जब विकास कार्यों में कानपुर नगर पूरे प्रदेश में आठवें नम्बर पर था। इस परिचय में उनके मुख्य विकास अधिकारी का चार्ज लेकर 21 जनवरी 2015 को आईएएस अधिकारी शम्भू कुमार की नियुक्ति हो गयी। शम्भू कुमार को वहीं बंगला एलाट कर दिया गया जिसमें राजेन्द्र सिंह रहते थे। राजेन्द्र सिंह को यूपिका से प्रबंध निदेशक के पद पर रहने के चलते रावतपुर स्थित आफीसर्स कालोनी में आवास आवंटित कर दिया गया। लेकिन पूर्व सीडीओ ने यह बंगला यह कहकर खाली नहीं किया कि मेरी बड़ी बेटी की 10 मार्च 2015 से वार्षिक परीक्षाएं होनी है।
इसके बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने और फिर नाजिर आादि ने उन्हें सूचित किया कि जिलाधिकरी चाहती है कि नये मुख्य विकास अधिकारी का सामान रखने के लिए दो कमरे खाली कर दें लेकिन इस पर भी राजेन्द्र सिंह की असमर्थता ने जिलाधिकारी का पारा गरम कर दिया।
फिर नतीजा यह निकला कि प्रतिदिन कोई न कोई आकर यह भी होमगार्ड एंव चपरासी आकर उन्हें बंगला खाली करने की धमकी देने लगे थे। इन कृत्यों से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ले ली। हाईकोर्ट ने उन्हें 23 मार्च 2015 तक इस बंगले में रहने की इजाजत दे दी थी। लेकिन राजेन्द्र सिंह बच्चों की परीक्षा में व्यस्तता के चलते उक्त तारीख को अपना सामान नहीं हटा सके थे।
अपनी विवश्ता के लिए उन्होंने सिविय मिस. मोडीफिकेशन एप्लीकेशन नं. 09038 उच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया और यह अनुरोध भी किया कि फाइनल शिफ्टिंग के लिए थोड़ा और समय दिया जाए। इसकी जानकारी भी उन्होंने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एंव प्रभारी अधिकारी आवास-एसीमए-6 को दे दी। इसके बाद राजेन्द्र सिंह ने काफी भागदौड़ कर लखनऊ में मकान भी खोज लिया तथा परिवार को भी लखनऊ शिफ्ट कर दिया। वह अपना सामान शिफ्ट कर चुके थे और जल्द ही बंगला भी खाली करने वाले थे। इस बीच 08/04/2015 को प्रमुख सचिव हथकरघा एंव वस्त्रोद्योग ने लखनऊ में एक मीटिंग बुला ली और वह इसमें भाग लेने राजधानी चले आए, लेकिन जिलाधिकारी को न जाने क्या सूझा कि उन्होंने डीडीओ सिटी मजिस्ट्रेट एसीएम-6 एंव सीओ कोतवाली सहित भारी फोर्स उनके बंगले पर भेजकर जबरदस्ती सामान बाहर करवा दिया।
जिलाधिकारी के आदेश का पालन करते हुए न केवल अधिकारियों ने उनका सामान बंगल से बाहर ही कराया बल्कि शम्भू सिंह का सामान भी बंगले में शिफ्ट करा दिया। गार्ड और नौकर की बात माने तो उन्हें बंगले में ही एक तरह से बंधक ना दिया गया था। इसकी सूचना नौकर गुड्डू और गार्ड उमेश पाठक ने अपने परिजनों को देते हुए कहा कि वे बंगले मे फंसे हुए हैं, उन्हें यहां से निकालने में मदद करें। इस दौरान इन लोगों से सादे कागज पर हस्ताक्षर भी करा लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब राजेन्द्र सिंह कानपुर लौटे तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था क्योंकि वह अपने को पूरी तरह बेइज्जत महसूस कर रहे थे। वह अपना सामान भी चाहते थे लेकिन कोई सक्षम अधिकारी न होने से वह अपना सामान भी नहीं ले पाये।
राजेन्द्र सिंह का तो खुला आरोप है कि जिलाधिकरी ने मेरे साथ खुन्नस निकाली है क्योंकि भेदभावपूर्ण तरीके से मेरे विरुद्घ कार्रवाई किए जाने को लेकर १४ बिन्दुओं पर मुख्य सचिव सहित तमाम आला अधिकारियों को सूचना भी दे दी है। राजेन्द्र सिंह अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर इस कदर डरे और सहमे हुए हैं कि वह अपना सामान भी नहीं ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि सामान दिलाने के लिए कोई सक्षम अधिकारी नियुक्त किया जाए। फिलहाल मुझे न तो मेरा सामान ही दिया जा रहा है और न ही इसाके बारे में कुछ बताया ही जा रहा है। 1997 बैच के राजेन्द्र सिंह ने पीसीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, लेकिन अध्यक्ष द्वारा उदासीनता ओर उपेक्षापूर्ण रवैये से वह काफी आहत है।
कानपुर से नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह भी राजेन्द्र सिंह की ही तरह अपमानित हुए हैं। उनसे तो उनका गनर ही छीन लिया गया है। इसके चलते दुखी और निराश उमेश प्रताप सिंह ने भी अपने एसोसिएशन से कुछ करने की गुहार लगायी लेकिन उन्हें भी निराशा का सामना करना पड़ा। उमेश प्रताप सिंह का तो कहना है कि गनर यदि वापस लेना ही था तेा एक महीने बाद यह कार्रवाई होती तो मुझे कोई एतराज न होता, लेकिन विगत १५ मई को आयुक्त, कानपुर मण्डल की अध्यक्षता में कानपुर समग्र विकास योजना की आयोजित बैठक के दौरान जब मैंने ए टू जेड व उनके प्रतिनिधियों के विरुद्घ प्राथमिकी दर्ज न होने के संबंध में जिलाधिकरी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से चर्चा की तो इसके बाद ही 16 मई को भले ही प्राथमिकी दर्ज हो सकी, लेकिन बदले की नियत से 20 मई को मेरी सुरक्षा में तैनात गनर को पुलिस प्रशासन द्वारा वापस बुला लिया गया। उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि फोर्स के लिए मैं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के दरवाजे पर चक्कर नहीं लगाऊंगा। लेकिन मैंने जब अपने एसोसिएशन के अध्यक्ष से अपने साथ हुई ज्यादती का हवाला दिया तो उन्होंने व्यक्तिगत मतभेद बताकर पल्ला झाड़ लिया।
उमेश प्रताप सिंह तो अपने एसोसिएशन से इस कदर खफा हैं कि उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि एसोसिएशन की मरणासन्नता एवं निष्क्रियता से कैडर का कोइ गांव सम्मान नहीं रह गया है। अब तो हर पीसीएस को अपनी लड़ाई खुद ही लडऩे के लिए तैयार रहना होगा लेकिन एसोसिएशन का नया चुनाव हो ताकि लड़ाकू और जागरूक अधिकारी चुने जाएं। यदि शीघ्र एसोसिएशन की बैठक नही हुई तो कानूनी कार्रवाई करने से भी मैं पीछे नहीं हटूंगा। इस एसोसिएशन के प्रति मेरा पूरा विरेध है क्योंकि यह केवल कागजों तक सिमटा हुआ है मैं तो नोटिस देकर चुनाव की मांग करता हूं और यदि निकट भविष्य में संवैधानिक तरीके से चुनाव नहीं हुए तो मैं सीधा कोर्ट चला जाऊंगा उस एसोसिएशन का क्या फायदा जिसमें कभी कभार होने वाली बैठकों में चार आदमी भी कायदे के न जुटते हों।
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आईएएस अधिकारियों की तुनकमिजाजी और अहंकार से लगातार पीड़ित होते सूबे के पीसीएस अधिकारियों का गुस्सा अपने एसोशियेशन पर भी फूट रहा है। कानपुर में तैनात दो पीसीएस अधिकारियों के साथ हुई घटना ने इस संवर्ग के अधिकारीयों के सब्र का पैमाना छलका दिया है। घर से बेदखल पीडि़त कानपुर के पूर्व सीशून्यडीशून्यओशून्य राजेन्द्र सिंह यादव और गनर वापसी से आहत एवं क्षुब्ध नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह दोनों ही इस सारे प्रकरण को यह देखकर जोड़ते हैं कि चूंकि इस वक्त उनका एसोसिएशन निष्क्रियता के चरम पर है, जिसके चलते आइएएस अफसर अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। दोनों ही इस घटना के लिए अपने पीसीएस एसोसिएशन को ही दोषी ठहरा रहे हैं। दोनों अधिकारीयों का यही कहना है कि उनका एसोसिएशन यदि आज एक्टिव होता तो ऐसी हिमाकत करने की किसी की हिम्मत न पड़ती। राजेन्द्र सिंह का तो यही कहना है कि आईएएस से सभी डरते हैं। उनके खिलाफ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं है। राजेन्द्र सिंह कानपुर के जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब द्वारा मकान खाली कराने के आदेश के संदर्भ में कहते हैं कि जिस तरह भारी फोर्स भेजकर मेरा सामान निकलवाया और जब्त करवाया गया वह कहीं से भी न्याय संगत और तर्क संगत नहीं है। भारी फोर्स किस लिए भेजी गई थी? क्या मैं चोर, डकैत हूं या फिर कोई आतंकवादी? मेरे साथ इस तरह के सुलूक की आवश्यकता नहीं थी। मैंने तो अपना सामान पैक तक कर लिया था। अपने साथ हुई बर्बर और घिनौनी कार्रवाई के विरुद्घ मैं न्याय पाने और अपने को सही साबित करने का पूरा जोर लगाये बैठा हूं। मैं न्याय के साथ हूं, इसीलिए कानपुर से तबादले के बाद भी लड़ाई लड़ रहा हूं, मुझे किसी का डर नहीं है। मैं सत्य और सही के साथ हूं। राजेन्द्र सिंह इस समय पंचायती राज विभाग में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत है। राजेन्द्र सिंह के इस मुहिम में कई वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी एवं पीसीएस संघ के पूर्व अध्यक्ष भी उनके साथ हैं। सभी का यही कहना है कि यह लड़ाई तो उनके संवर्ग के मान-सम्मान की है। एक वरिष्ठ पीसीएस का तो यहां तक कहना है कि आज यदि संघ सक्रिय होता तो किसी भी अधिकारी के साथ ऐसी घटना नहीं घटती। संघ के पदाधिकारियों को कानपुर की इन दोनों घटनाओं ने एक चुनौती दे दी है। इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। या फिर उन्हें संघ छोड़ देना चाहिए। उत्तर प्रदेश में बड़े और छोटे अधिकारी एक दुसरे के विरुद्ध इस कदर मोर्चा खोले हुए हैं कि बहस और विवाद का एक लम्बा सिलसिला चल निकला है यद्यपि जहाँ प्रशासनिक अधिकारीयों के बीच सहजता, सद्भाव और संवेदनशीलता का होना जरूरी होता है, वहीं ऐसा न होने से अप्रिय घटनाओं के चलते विकास कार्यों का बाधित होना लाजमी है। राजेन्द्र सिंह यादव यहां बतौर मुख्य विकास अधिकारी अक्टूबर दो हज़ार तेरह में नियुक्त हुए थे। इसी के साथ उन्नीस अगस्त दो हज़ार चौदह से उनके पास प्रबंध निदेशक हथकरघा एंव यूपिका का अतिरिक्त प्रभार भी मिला हुआ था। उन्हें मुख्य विकास अधिकारी से रूप में प्रशंसा भी शासन द्वारा मिली थी। लेकिन उनका मानना है कि कुछ ऐसे भी अधिकारी थे जिन्हें उनके विकास कार्यों में गहरी रूचि को लेकर एतराज था। ऐसे लोगों ने गोलबन्द होकर जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के कान भरने शुरू कर दिए उनके बहकावे में आकर जिलाधिकारी ने शासन को यह लिख भेजा कि राजेन्द्र सिंह हथकरघा विभाग के दायित्वों का बहाना बनाकर प्रायः जनपद से बाहर रहते हैं, जिसके चलते विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, यह शिकायत ऐसे समय की गई जब विकास कार्यों में कानपुर नगर पूरे प्रदेश में आठवें नम्बर पर था। इस परिचय में उनके मुख्य विकास अधिकारी का चार्ज लेकर इक्कीस जनवरी दो हज़ार पंद्रह को आईएएस अधिकारी शम्भू कुमार की नियुक्ति हो गयी। शम्भू कुमार को वहीं बंगला एलाट कर दिया गया जिसमें राजेन्द्र सिंह रहते थे। राजेन्द्र सिंह को यूपिका से प्रबंध निदेशक के पद पर रहने के चलते रावतपुर स्थित आफीसर्स कालोनी में आवास आवंटित कर दिया गया। लेकिन पूर्व सीडीओ ने यह बंगला यह कहकर खाली नहीं किया कि मेरी बड़ी बेटी की दस मार्च दो हज़ार पंद्रह से वार्षिक परीक्षाएं होनी है। इसके बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने और फिर नाजिर आादि ने उन्हें सूचित किया कि जिलाधिकरी चाहती है कि नये मुख्य विकास अधिकारी का सामान रखने के लिए दो कमरे खाली कर दें लेकिन इस पर भी राजेन्द्र सिंह की असमर्थता ने जिलाधिकारी का पारा गरम कर दिया। फिर नतीजा यह निकला कि प्रतिदिन कोई न कोई आकर यह भी होमगार्ड एंव चपरासी आकर उन्हें बंगला खाली करने की धमकी देने लगे थे। इन कृत्यों से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ले ली। हाईकोर्ट ने उन्हें तेईस मार्च दो हज़ार पंद्रह तक इस बंगले में रहने की इजाजत दे दी थी। लेकिन राजेन्द्र सिंह बच्चों की परीक्षा में व्यस्तता के चलते उक्त तारीख को अपना सामान नहीं हटा सके थे। अपनी विवश्ता के लिए उन्होंने सिविय मिस. मोडीफिकेशन एप्लीकेशन नं. नौ हज़ार अड़तीस उच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया और यह अनुरोध भी किया कि फाइनल शिफ्टिंग के लिए थोड़ा और समय दिया जाए। इसकी जानकारी भी उन्होंने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एंव प्रभारी अधिकारी आवास-एसीमए-छः को दे दी। इसके बाद राजेन्द्र सिंह ने काफी भागदौड़ कर लखनऊ में मकान भी खोज लिया तथा परिवार को भी लखनऊ शिफ्ट कर दिया। वह अपना सामान शिफ्ट कर चुके थे और जल्द ही बंगला भी खाली करने वाले थे। इस बीच आठ अप्रैल दो हज़ार पंद्रह को प्रमुख सचिव हथकरघा एंव वस्त्रोद्योग ने लखनऊ में एक मीटिंग बुला ली और वह इसमें भाग लेने राजधानी चले आए, लेकिन जिलाधिकारी को न जाने क्या सूझा कि उन्होंने डीडीओ सिटी मजिस्ट्रेट एसीएम-छः एंव सीओ कोतवाली सहित भारी फोर्स उनके बंगले पर भेजकर जबरदस्ती सामान बाहर करवा दिया। जिलाधिकारी के आदेश का पालन करते हुए न केवल अधिकारियों ने उनका सामान बंगल से बाहर ही कराया बल्कि शम्भू सिंह का सामान भी बंगले में शिफ्ट करा दिया। गार्ड और नौकर की बात माने तो उन्हें बंगले में ही एक तरह से बंधक ना दिया गया था। इसकी सूचना नौकर गुड्डू और गार्ड उमेश पाठक ने अपने परिजनों को देते हुए कहा कि वे बंगले मे फंसे हुए हैं, उन्हें यहां से निकालने में मदद करें। इस दौरान इन लोगों से सादे कागज पर हस्ताक्षर भी करा लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब राजेन्द्र सिंह कानपुर लौटे तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था क्योंकि वह अपने को पूरी तरह बेइज्जत महसूस कर रहे थे। वह अपना सामान भी चाहते थे लेकिन कोई सक्षम अधिकारी न होने से वह अपना सामान भी नहीं ले पाये। राजेन्द्र सिंह का तो खुला आरोप है कि जिलाधिकरी ने मेरे साथ खुन्नस निकाली है क्योंकि भेदभावपूर्ण तरीके से मेरे विरुद्घ कार्रवाई किए जाने को लेकर चौदह बिन्दुओं पर मुख्य सचिव सहित तमाम आला अधिकारियों को सूचना भी दे दी है। राजेन्द्र सिंह अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर इस कदर डरे और सहमे हुए हैं कि वह अपना सामान भी नहीं ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि सामान दिलाने के लिए कोई सक्षम अधिकारी नियुक्त किया जाए। फिलहाल मुझे न तो मेरा सामान ही दिया जा रहा है और न ही इसाके बारे में कुछ बताया ही जा रहा है। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे बैच के राजेन्द्र सिंह ने पीसीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, लेकिन अध्यक्ष द्वारा उदासीनता ओर उपेक्षापूर्ण रवैये से वह काफी आहत है। कानपुर से नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह भी राजेन्द्र सिंह की ही तरह अपमानित हुए हैं। उनसे तो उनका गनर ही छीन लिया गया है। इसके चलते दुखी और निराश उमेश प्रताप सिंह ने भी अपने एसोसिएशन से कुछ करने की गुहार लगायी लेकिन उन्हें भी निराशा का सामना करना पड़ा। उमेश प्रताप सिंह का तो कहना है कि गनर यदि वापस लेना ही था तेा एक महीने बाद यह कार्रवाई होती तो मुझे कोई एतराज न होता, लेकिन विगत पंद्रह मई को आयुक्त, कानपुर मण्डल की अध्यक्षता में कानपुर समग्र विकास योजना की आयोजित बैठक के दौरान जब मैंने ए टू जेड व उनके प्रतिनिधियों के विरुद्घ प्राथमिकी दर्ज न होने के संबंध में जिलाधिकरी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से चर्चा की तो इसके बाद ही सोलह मई को भले ही प्राथमिकी दर्ज हो सकी, लेकिन बदले की नियत से बीस मई को मेरी सुरक्षा में तैनात गनर को पुलिस प्रशासन द्वारा वापस बुला लिया गया। उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि फोर्स के लिए मैं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के दरवाजे पर चक्कर नहीं लगाऊंगा। लेकिन मैंने जब अपने एसोसिएशन के अध्यक्ष से अपने साथ हुई ज्यादती का हवाला दिया तो उन्होंने व्यक्तिगत मतभेद बताकर पल्ला झाड़ लिया। उमेश प्रताप सिंह तो अपने एसोसिएशन से इस कदर खफा हैं कि उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि एसोसिएशन की मरणासन्नता एवं निष्क्रियता से कैडर का कोइ गांव सम्मान नहीं रह गया है। अब तो हर पीसीएस को अपनी लड़ाई खुद ही लडऩे के लिए तैयार रहना होगा लेकिन एसोसिएशन का नया चुनाव हो ताकि लड़ाकू और जागरूक अधिकारी चुने जाएं। यदि शीघ्र एसोसिएशन की बैठक नही हुई तो कानूनी कार्रवाई करने से भी मैं पीछे नहीं हटूंगा। इस एसोसिएशन के प्रति मेरा पूरा विरेध है क्योंकि यह केवल कागजों तक सिमटा हुआ है मैं तो नोटिस देकर चुनाव की मांग करता हूं और यदि निकट भविष्य में संवैधानिक तरीके से चुनाव नहीं हुए तो मैं सीधा कोर्ट चला जाऊंगा उस एसोसिएशन का क्या फायदा जिसमें कभी कभार होने वाली बैठकों में चार आदमी भी कायदे के न जुटते हों।
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350 किलो गांजा उड़ीसा से आगरा ले जाया जा रहा था। गांजे को दिल्ली और दिल्ली से सटे इलाके आगरा, गाजियाबाद सहित अन्य जगहों पर बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गांजा एक ट्रक से बरामद किया है।
भदोही उत्तर प्रदेश के भदोही में पुलिस ने तस्करी के लिए ले जाई जा रही 35 लाख कीमत की 350 किलो गांजे की बरामदगी करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी ट्रक के माध्यम से गांजे की बड़ी खेप नैशनल हाइवे-19 के रास्ते उड़ीसा से आगरा ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों और बरामद गांजे की खेप को मीडिया के सामने पेश करते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि थाना ऊंज और क्राइम ब्रांच टीम को सूचना मिली कि एक ट्रक से गांजे की बड़ी खेप तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने घेराबंदी कर नवधन में हाइवे पर ट्रक को रोका और चेकिंग के बाद ट्रक से 11 बोरी में भरे 350 किलो गांजा बरामद किया गया। गांजा ले जा रहे पवन कुमार यादव निवासी आगरा और प्रवेंद्र सिंह निवासी हाथरस को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी पवन ने बताया कि हम लोगों का गंजा तस्करी का एक गैंग है। इसमे प्रवेंद्र और शनि उड़ीसा निवासी विष्णु चौधरी उर्फ केपी भाई से सस्ते दाम पर गांजा लेकर आगरा, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में महंगे दाम पर बेच देते हैं।
गांजा बेचने पर जो पैसा मिलता है उसे आपस मे बांट लेते हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिन दो अभियुक्तों का नाम प्रकाश में आया है उनकी तलाश की जा रही है। सफलता प्राप्त करने वाली टीम को प्रशस्ति पत्र और 25 हजार का इनाम दिया जाएगा।
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तीन सौ पचास किलो गांजा उड़ीसा से आगरा ले जाया जा रहा था। गांजे को दिल्ली और दिल्ली से सटे इलाके आगरा, गाजियाबाद सहित अन्य जगहों पर बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गांजा एक ट्रक से बरामद किया है। भदोही उत्तर प्रदेश के भदोही में पुलिस ने तस्करी के लिए ले जाई जा रही पैंतीस लाख कीमत की तीन सौ पचास किलो गांजे की बरामदगी करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी ट्रक के माध्यम से गांजे की बड़ी खेप नैशनल हाइवे-उन्नीस के रास्ते उड़ीसा से आगरा ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों और बरामद गांजे की खेप को मीडिया के सामने पेश करते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि थाना ऊंज और क्राइम ब्रांच टीम को सूचना मिली कि एक ट्रक से गांजे की बड़ी खेप तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने घेराबंदी कर नवधन में हाइवे पर ट्रक को रोका और चेकिंग के बाद ट्रक से ग्यारह बोरी में भरे तीन सौ पचास किलो गांजा बरामद किया गया। गांजा ले जा रहे पवन कुमार यादव निवासी आगरा और प्रवेंद्र सिंह निवासी हाथरस को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी पवन ने बताया कि हम लोगों का गंजा तस्करी का एक गैंग है। इसमे प्रवेंद्र और शनि उड़ीसा निवासी विष्णु चौधरी उर्फ केपी भाई से सस्ते दाम पर गांजा लेकर आगरा, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में महंगे दाम पर बेच देते हैं। गांजा बेचने पर जो पैसा मिलता है उसे आपस मे बांट लेते हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिन दो अभियुक्तों का नाम प्रकाश में आया है उनकी तलाश की जा रही है। सफलता प्राप्त करने वाली टीम को प्रशस्ति पत्र और पच्चीस हजार का इनाम दिया जाएगा।
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हजारीबागः बरही थाना के जवाहर घाटी पुल के समीप तिलैया डैम (Tilaiya Dam) में एक व्यक्ति की डूबने से रविवार को मौत हो गई। वह डैम में नहाने गया था।
उसकी पहचान बिहार के नालंदा जिले के इतसांग ग्राम निवासी शंकर मिस्त्री के 42 वर्षीय पुत्र सुजीत मिस्त्री के रूप में हुई है।
बताया गया है कि शंकर नालंदा के मिरचाइगंज निवासी बहनोई अनिल शर्मा व कुछ मित्रों के साथ रामगढ जिला के रजरप्पा मंदिर (Rajrappa Temple) में पूजा अर्चना के बाद एक बोलेरो वाहन से घर लौट रहा था। इसी दौरान डैम में तीन मित्रों के साथ नहाने गया।
वह गहरे पानी में चला गया। हादसे के वक्त उसका जीजा डैम के ही किनारे वाहन में बैठा था।
घटना की खबर मिलते ही बरही पुलिस घटनास्थल पर पहंचकर शव को पोस्टमार्टम (Post mortem) के लिए मेडिकल कालेज भेज दिया। उसके बहनोई से पुलिस पूछताछ कर रही है।
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हजारीबागः बरही थाना के जवाहर घाटी पुल के समीप तिलैया डैम में एक व्यक्ति की डूबने से रविवार को मौत हो गई। वह डैम में नहाने गया था। उसकी पहचान बिहार के नालंदा जिले के इतसांग ग्राम निवासी शंकर मिस्त्री के बयालीस वर्षीय पुत्र सुजीत मिस्त्री के रूप में हुई है। बताया गया है कि शंकर नालंदा के मिरचाइगंज निवासी बहनोई अनिल शर्मा व कुछ मित्रों के साथ रामगढ जिला के रजरप्पा मंदिर में पूजा अर्चना के बाद एक बोलेरो वाहन से घर लौट रहा था। इसी दौरान डैम में तीन मित्रों के साथ नहाने गया। वह गहरे पानी में चला गया। हादसे के वक्त उसका जीजा डैम के ही किनारे वाहन में बैठा था। घटना की खबर मिलते ही बरही पुलिस घटनास्थल पर पहंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कालेज भेज दिया। उसके बहनोई से पुलिस पूछताछ कर रही है।
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नई दिल्ली (एएनआई/पीटीआई)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने रेलवे के लिए 1,10,055 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है। जिसमें से रेलवे 1,07,100 करोड़ रुपये पूंजी बनाने के लिए खर्च करेगी। केंद्रीय बजट 2021-22 पेश करते हुए, सीतारमण ने कहा कि सरकार की योजना 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने की है।
वित्त मंत्री ने कहा, 'भारतीय रेलवे ने भारत के लिए 2030 के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है। यह योजना 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने की है। जिसमें मेक इन इंडिया को सक्षम करने के लिए उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करना काफी महत्वपूर्ण है। " वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे को और मजबूत करने के लिए, उच्च-घनत्व नेटवर्क और रेलवे के अत्यधिक उपयोग किए गए नेटवर्क मार्गों को स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के साथ प्रदान किया जाएगा जिससे मानव त्रुटि के कारण होने वाले ट्रेन हादसों को रोका जा सकेगा।
सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, "सड़क के बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए मार्च 2022 तक 8,500 किमी लंबी सड़क और राजमार्ग परियोजनाएं प्रदान की जाएंगी। " उन्होंने यह भी घोषणा की कि केरल में 65,000 करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में 25,000 करोड़ रुपये भी खर्च किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने असम में सड़क परियोजनाओं के लिए 3,400 करोड़ रुपये के आवंटन की भी घोषणा की। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की।
पिछले महीने, सड़क परिवहन, राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका मंत्रालय मार्च तक सड़क निर्माण का लक्ष्य 40 किमी प्रतिदिन ले जाने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि एनएचएआई के पास अगले पांच वर्षों में 60,000 किलोमीटर राजमार्ग बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 2,500 किलोमीटर एक्सप्रेस राजमार्ग शामिल हैं। इनमें 9,000 किमी के आर्थिक गलियारे और 2,000 किमी की प्रत्येक रणनीतिक सीमा सड़क और तटीय सड़क शामिल हैं। इनके अलावा, 100 पर्यटन स्थलों और 45 शहरों को राजमार्गों के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
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नई दिल्ली । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने रेलवे के लिए एक,दस,पचपन करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है। जिसमें से रेलवे एक,सात,एक सौ करोड़ रुपये पूंजी बनाने के लिए खर्च करेगी। केंद्रीय बजट दो हज़ार इक्कीस-बाईस पेश करते हुए, सीतारमण ने कहा कि सरकार की योजना दो हज़ार तीस तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने की है। वित्त मंत्री ने कहा, 'भारतीय रेलवे ने भारत के लिए दो हज़ार तीस के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है। यह योजना दो हज़ार तीस तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने की है। जिसमें मेक इन इंडिया को सक्षम करने के लिए उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करना काफी महत्वपूर्ण है। " वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे को और मजबूत करने के लिए, उच्च-घनत्व नेटवर्क और रेलवे के अत्यधिक उपयोग किए गए नेटवर्क मार्गों को स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के साथ प्रदान किया जाएगा जिससे मानव त्रुटि के कारण होने वाले ट्रेन हादसों को रोका जा सकेगा। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, "सड़क के बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए मार्च दो हज़ार बाईस तक आठ,पाँच सौ किमी लंबी सड़क और राजमार्ग परियोजनाएं प्रदान की जाएंगी। " उन्होंने यह भी घोषणा की कि केरल में पैंसठ,शून्य करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में पच्चीस,शून्य करोड़ रुपये भी खर्च किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने असम में सड़क परियोजनाओं के लिए तीन,चार सौ करोड़ रुपये के आवंटन की भी घोषणा की। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने के लिए अट्ठारह,शून्य करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की। पिछले महीने, सड़क परिवहन, राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका मंत्रालय मार्च तक सड़क निर्माण का लक्ष्य चालीस किमी प्रतिदिन ले जाने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि एनएचएआई के पास अगले पांच वर्षों में साठ,शून्य किलोग्राममीटर राजमार्ग बनाने का लक्ष्य है, जिसमें दो,पाँच सौ किलोग्राममीटर एक्सप्रेस राजमार्ग शामिल हैं। इनमें नौ,शून्य किमी के आर्थिक गलियारे और दो,शून्य किमी की प्रत्येक रणनीतिक सीमा सड़क और तटीय सड़क शामिल हैं। इनके अलावा, एक सौ पर्यटन स्थलों और पैंतालीस शहरों को राजमार्गों के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
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नमन्ते प्राणिनः । प्रभूतं हिरण्यं दानसे प्राणी अपने प्रति विनीत हो जाते
तस्मादन्यपरेणापि शास्त्रेण विद्या प्राप्त्युपायदानप्रदर्शनार्था आख्यायिका
हैं। यहाँ बहुत से सुवर्ण और सहस्त्र गौओंका दान देखा जाता है; अतः यहाँ शास्त्रका प्रतिपाद्य विषय दूसरा होनेपर भी यह आख्यायिका विद्याप्राप्तिके उपायभूत दानको प्रदर्शित करनेके लिये आरम्भ की गयी है।
आरब्धा ।
अपि च तद्विद्यसंयोगस्तैश्च सह
न्यायविद्यायां दृष्टः;
नध्याये प्राबल्येन प्रदर्श्यते । प्रत्यक्षा च विद्वन्संयोगे प्रज्ञावृद्धिः तस्माद् विद्याप्राप्त्युपायप्रदर्शनार्थेव
आख्यायिका ।
इसके सिवा किसी विद्यामें निष्णात पुरुषोंका संयोग और उनके साथ वाद करना भी न्यायविद्यामें विद्याप्राप्तिका उपाय देखा गया है; और वह वाद इस अध्यायमें बड़ी प्रौढिके साथ दिखाया जाता है। विद्वानोंके संयोगसे प्रज्ञाको वृद्धि होती है - यह तो प्रत्यक्ष ही है। अतः यह आख्यायिका विद्याप्राप्तिका उपाय प्रदर्शित करनेके लिये ही है।
राजा जनकका सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मवेत्ताको सहस्त्र गौएँ दान करनेकी घोषणा करना
ॐ जनको ह वैदेहो बहुदक्षिणेन यज्ञेनेजे तत्र ह कुरुपञ्चालानां ब्राह्मणा अभिसमेता बभूवुस्तस्य ह जनकस्य वैदेहस्य विजिज्ञासा बभूव कः स्विदेषां ब्राह्मणानामनूचानतम इति स ह गवार सहस्त्रमवरुरोध दश दश पादा एकैकस्याः शृङ्गयोराबद्धा बभूवुः ॥ १ ॥
विदेहदेशमें रहनेवाले राजा जनकने एक बड़ी दक्षिणावाले यज्ञद्वारा यजन किया। उसमें कुरु और पाञ्चाल देशोंके ब्राह्मण एकत्रित हुए। उस
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नमन्ते प्राणिनः । प्रभूतं हिरण्यं दानसे प्राणी अपने प्रति विनीत हो जाते तस्मादन्यपरेणापि शास्त्रेण विद्या प्राप्त्युपायदानप्रदर्शनार्था आख्यायिका हैं। यहाँ बहुत से सुवर्ण और सहस्त्र गौओंका दान देखा जाता है; अतः यहाँ शास्त्रका प्रतिपाद्य विषय दूसरा होनेपर भी यह आख्यायिका विद्याप्राप्तिके उपायभूत दानको प्रदर्शित करनेके लिये आरम्भ की गयी है। आरब्धा । अपि च तद्विद्यसंयोगस्तैश्च सह न्यायविद्यायां दृष्टः; नध्याये प्राबल्येन प्रदर्श्यते । प्रत्यक्षा च विद्वन्संयोगे प्रज्ञावृद्धिः तस्माद् विद्याप्राप्त्युपायप्रदर्शनार्थेव आख्यायिका । इसके सिवा किसी विद्यामें निष्णात पुरुषोंका संयोग और उनके साथ वाद करना भी न्यायविद्यामें विद्याप्राप्तिका उपाय देखा गया है; और वह वाद इस अध्यायमें बड़ी प्रौढिके साथ दिखाया जाता है। विद्वानोंके संयोगसे प्रज्ञाको वृद्धि होती है - यह तो प्रत्यक्ष ही है। अतः यह आख्यायिका विद्याप्राप्तिका उपाय प्रदर्शित करनेके लिये ही है। राजा जनकका सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मवेत्ताको सहस्त्र गौएँ दान करनेकी घोषणा करना ॐ जनको ह वैदेहो बहुदक्षिणेन यज्ञेनेजे तत्र ह कुरुपञ्चालानां ब्राह्मणा अभिसमेता बभूवुस्तस्य ह जनकस्य वैदेहस्य विजिज्ञासा बभूव कः स्विदेषां ब्राह्मणानामनूचानतम इति स ह गवार सहस्त्रमवरुरोध दश दश पादा एकैकस्याः शृङ्गयोराबद्धा बभूवुः ॥ एक ॥ विदेहदेशमें रहनेवाले राजा जनकने एक बड़ी दक्षिणावाले यज्ञद्वारा यजन किया। उसमें कुरु और पाञ्चाल देशोंके ब्राह्मण एकत्रित हुए। उस
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Tea-Makeing Tips: भारत में चाय का बहुत महत्व है. आपके घर कोई मेहमान आए, या आप किसी के घर जाएं, मेहमानों को खुश करने के लिए अच्छी चाय परोसी जाती है। भारतीय लोगों के लिए चाय सिर्फ सिरदर्द दूर करने का जरिया नहीं है, बल्कि एक इमोशन है। ज्यादातर लोग दूध, चीनी, अदरक और चायपत्ती की मदद से ही चाय तैयार करते हैं। लेकिन ऐसी और भी कई चीजें हैं, जिन्हें चाय में मिलाकर आप इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
अगर आप अपनी नियमित चाय को एक अलग स्वाद देना चाहते हैं, तो यहां 10 चीजें हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं। हालांकि कुछ लोगों को उनकी सादा चाय पसंद होती है, लेकिन फिर भी आप चाय में इन चीजों को मिलाकर इसका स्वाद बढ़ा सकते हैं।
चाय का स्वाद बढ़ाने और गले की खराश को दूर करने के लिए काले नमक का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा होता है।
अगर आपके गले में खराश है तो आप अपनी चाय में काली मिर्च मिलाकर पीएं। इससे स्वाद तो बढ़ेगा ही साथ ही गला भी ठीक हो जाएगा।
अगर आप चाय में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद होगा।
इलायची आपकी चाय का स्वाद बढ़ाने में काफी हद तक मददगार होती है। आप इसे नियमित रूप से भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
चाय को रिफ्रेशिंग फील देने के लिए पुदीना एक बेहतर विकल्प है । चाय में कुछ पुदीने की पत्तियां इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा सकती हैं।
सर्दी और फ्लू से पीड़ित लोग चाय में लौंग डालकर पी सकते हैं। इससे आपकी चाय का स्वाद कई गुना बढ़ जाएगा।
अगर आप चाय बनाते समय सीमित मात्रा में दालचीनी डालेंगे तो आपको इससे काफी फायदा मिलेगा। चाय बनाते समय इसकी मात्रा का अवश्य ध्यान रखें।
एक कप चाय में एक चक्र फूल इसका स्वाद बढ़ाने के लिए काफी है । अगर आप इसे डालकर चाय पीना शुरू करते हैं, तो आपको इसकी आदत भी पड़ सकती है।
केसर आपकी चाय के स्वाद को कई गुना बढ़ाने में मदद करता है. चाय में मौजूद केसर की दो से तीन किस्में ही इसका स्वाद बदल सकती हैं। यह बहुत फायदेमंद भी होता है।
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Tea-Makeing Tips: भारत में चाय का बहुत महत्व है. आपके घर कोई मेहमान आए, या आप किसी के घर जाएं, मेहमानों को खुश करने के लिए अच्छी चाय परोसी जाती है। भारतीय लोगों के लिए चाय सिर्फ सिरदर्द दूर करने का जरिया नहीं है, बल्कि एक इमोशन है। ज्यादातर लोग दूध, चीनी, अदरक और चायपत्ती की मदद से ही चाय तैयार करते हैं। लेकिन ऐसी और भी कई चीजें हैं, जिन्हें चाय में मिलाकर आप इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं। अगर आप अपनी नियमित चाय को एक अलग स्वाद देना चाहते हैं, तो यहां दस चीजें हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं। हालांकि कुछ लोगों को उनकी सादा चाय पसंद होती है, लेकिन फिर भी आप चाय में इन चीजों को मिलाकर इसका स्वाद बढ़ा सकते हैं। चाय का स्वाद बढ़ाने और गले की खराश को दूर करने के लिए काले नमक का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा होता है। अगर आपके गले में खराश है तो आप अपनी चाय में काली मिर्च मिलाकर पीएं। इससे स्वाद तो बढ़ेगा ही साथ ही गला भी ठीक हो जाएगा। अगर आप चाय में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद होगा। इलायची आपकी चाय का स्वाद बढ़ाने में काफी हद तक मददगार होती है। आप इसे नियमित रूप से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चाय को रिफ्रेशिंग फील देने के लिए पुदीना एक बेहतर विकल्प है । चाय में कुछ पुदीने की पत्तियां इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा सकती हैं। सर्दी और फ्लू से पीड़ित लोग चाय में लौंग डालकर पी सकते हैं। इससे आपकी चाय का स्वाद कई गुना बढ़ जाएगा। अगर आप चाय बनाते समय सीमित मात्रा में दालचीनी डालेंगे तो आपको इससे काफी फायदा मिलेगा। चाय बनाते समय इसकी मात्रा का अवश्य ध्यान रखें। एक कप चाय में एक चक्र फूल इसका स्वाद बढ़ाने के लिए काफी है । अगर आप इसे डालकर चाय पीना शुरू करते हैं, तो आपको इसकी आदत भी पड़ सकती है। केसर आपकी चाय के स्वाद को कई गुना बढ़ाने में मदद करता है. चाय में मौजूद केसर की दो से तीन किस्में ही इसका स्वाद बदल सकती हैं। यह बहुत फायदेमंद भी होता है।
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Ghatshila (Rajesh Chowbey) : झारखंड श्रमिक संघ का धरना प्रदर्शन छठे दिन सोमवार को भी जारी रहा. झारखंड मुक्ति मोर्चा के धालभूमगढ़ प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन चंद्र हांसदा ने अपना समर्थन श्रमिक संघ को दिया. हांसदा ने धरनाृ-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड श्रमिक संघ के समर्थन में झारखंड मुक्ति मोर्चा भी शामिल हो गया है. उन्होंने कहा कि एक तरफ झारखंड सरकार मजदूरों के लिए सुविधा दे रही है. मजदूरों का श्रम कार्ड बना रही है और रोजगार के लिए लोन दे रही है. वहीं दूसरी तरफ आईसीसी कंपनी प्रबंधक इस तरह का रवैया हमारे मजदूर के साथ कर रही है जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा बर्दाश्त नहीं करेगा.
उन्होंने ने कहा कि आईसीसी कंपनी के अस्थायी ठेका कर्मी झारखंड श्रमिक संघ के प्रखंड अध्यक्ष काजल, सचिव फेबियन तिर्की के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन इस प्रचंड गर्मी में परिवार के साथ कर रही है जो काफी संघर्षपूर्ण है. क्योंकि मजदूर भाई अपना हक और अधिकार की मांग कर रहे है. प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल नहीं होती है तो श्रमिक संघ अनिश्चितकाल के लिए हुड़का जाम करने की तैयारी में है. जिसका समर्थन झारखंड मुक्ति मोर्चा पूर्ण रूप से करेगा. धरना-प्रदर्शन में काफी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे.
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Ghatshila : झारखंड श्रमिक संघ का धरना प्रदर्शन छठे दिन सोमवार को भी जारी रहा. झारखंड मुक्ति मोर्चा के धालभूमगढ़ प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन चंद्र हांसदा ने अपना समर्थन श्रमिक संघ को दिया. हांसदा ने धरनाृ-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड श्रमिक संघ के समर्थन में झारखंड मुक्ति मोर्चा भी शामिल हो गया है. उन्होंने कहा कि एक तरफ झारखंड सरकार मजदूरों के लिए सुविधा दे रही है. मजदूरों का श्रम कार्ड बना रही है और रोजगार के लिए लोन दे रही है. वहीं दूसरी तरफ आईसीसी कंपनी प्रबंधक इस तरह का रवैया हमारे मजदूर के साथ कर रही है जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने ने कहा कि आईसीसी कंपनी के अस्थायी ठेका कर्मी झारखंड श्रमिक संघ के प्रखंड अध्यक्ष काजल, सचिव फेबियन तिर्की के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन इस प्रचंड गर्मी में परिवार के साथ कर रही है जो काफी संघर्षपूर्ण है. क्योंकि मजदूर भाई अपना हक और अधिकार की मांग कर रहे है. प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल नहीं होती है तो श्रमिक संघ अनिश्चितकाल के लिए हुड़का जाम करने की तैयारी में है. जिसका समर्थन झारखंड मुक्ति मोर्चा पूर्ण रूप से करेगा. धरना-प्रदर्शन में काफी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे.
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BANKA : बांका/धोरैया थाना क्षेत्र के बिशनपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर एक व्यक्ति की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या कर दी गई । पुलिस ने घटनास्थल से एक पिस्टल एवं कारतूस बरामद किया है । घटना को अंजाम देने के बाद इसमें शामिल लोग फरार हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार बुधवार की दोपहर दो चचेरे भाईयों के बीच मन्नीहाट के समीप जमीन पर खूंटा गाड़ने के सवाल को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप धारण कर लिया। इसी दौरान एक पक्ष द्वारा 45 वर्ष मो. हाशिम शेख के ऊपर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया गया। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जख्मी अवस्था में परिजनों द्वारा उसे धोरैया अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मायागंज भागलपुर रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस के द्वारा उसे मायागंज अस्पताल ले जाया गया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी।
घटना की जानकारी के उपरांत थानाध्यक्ष अशोक कुमार , एसआई सुभाष पासवान एवं एएसआई भूषण प्रसाद सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे जहां से एक पिस्टल तथा गोली बरामद किया गया है। दिनदहाड़े इस तरह की हुई वारदात से बिशनपुर एवं मन्नीहाट में दहशत का माहौल व्याप्त है। बताया गया कि मन्नीहाट के समीप बिशनपुर के लोगों की जमीन है जहां खूंटा गाड़ने के सवाल को लेकर दो गोतिया के बीच विवाद उत्पन्न हो गया जिससे इतनी बड़ी घटना घटी।
बताया जाता है कि तीन-चार माह से उक्त जमीन को लेकर कुछ विवाद चल रहा था वहीं मारपीट के दौरान हासिम के छोटे भाई की पत्नी बीबी सबिला खातुन भी जख्मी हो गई। इस संबंध में थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि मृतक का पोस्टमार्टम भागलपुर में कराया जा चुका है। घटनास्थल से एक पिस्टल और दो गोली बरामद किया गया है। आवेदन मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। वहीं देर शाम बांका एसडीपीओ बिपिन बिहारी भी गांव पहुंचे तथा मामले की तहकीकात कर पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापामारी अभियान चला रही है।
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BANKA : बांका/धोरैया थाना क्षेत्र के बिशनपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर एक व्यक्ति की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या कर दी गई । पुलिस ने घटनास्थल से एक पिस्टल एवं कारतूस बरामद किया है । घटना को अंजाम देने के बाद इसमें शामिल लोग फरार हो गए हैं। जानकारी के अनुसार बुधवार की दोपहर दो चचेरे भाईयों के बीच मन्नीहाट के समीप जमीन पर खूंटा गाड़ने के सवाल को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप धारण कर लिया। इसी दौरान एक पक्ष द्वारा पैंतालीस वर्ष मो. हाशिम शेख के ऊपर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया गया। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जख्मी अवस्था में परिजनों द्वारा उसे धोरैया अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मायागंज भागलपुर रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस के द्वारा उसे मायागंज अस्पताल ले जाया गया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। घटना की जानकारी के उपरांत थानाध्यक्ष अशोक कुमार , एसआई सुभाष पासवान एवं एएसआई भूषण प्रसाद सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे जहां से एक पिस्टल तथा गोली बरामद किया गया है। दिनदहाड़े इस तरह की हुई वारदात से बिशनपुर एवं मन्नीहाट में दहशत का माहौल व्याप्त है। बताया गया कि मन्नीहाट के समीप बिशनपुर के लोगों की जमीन है जहां खूंटा गाड़ने के सवाल को लेकर दो गोतिया के बीच विवाद उत्पन्न हो गया जिससे इतनी बड़ी घटना घटी। बताया जाता है कि तीन-चार माह से उक्त जमीन को लेकर कुछ विवाद चल रहा था वहीं मारपीट के दौरान हासिम के छोटे भाई की पत्नी बीबी सबिला खातुन भी जख्मी हो गई। इस संबंध में थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि मृतक का पोस्टमार्टम भागलपुर में कराया जा चुका है। घटनास्थल से एक पिस्टल और दो गोली बरामद किया गया है। आवेदन मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। वहीं देर शाम बांका एसडीपीओ बिपिन बिहारी भी गांव पहुंचे तथा मामले की तहकीकात कर पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापामारी अभियान चला रही है।
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Don't Miss!
इनता तो दावा कि आप इस वीडियो को देखने के बाद तैमूर को भूल जायेंगे। ये सुपरस्टार की बेटी तैमूर को क्यूटनेस में कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ रही हैं।
सच में इससे प्यारा वीडियो कोई हो ही नहीं सकता है। हम बात कर रहे हैं सुमित संभाल लेगा कि मानसी पारेख की। जो कि अपने इंस्टाग्राम पर बेटी की कई तस्वीर और वीडियो अपलोड करती रहती हैं।
इस वीडियो में मानसी फिटनेस के लिए एक्सरसाइज कर रही हैं।तभी इस एक्सरसाइज के दौरान उनकी बेटी निरवी बालकनी में आ जाती हैं।
वहां अपने मां को एक्सरसाइज करता हुआ देखकर उन्हें परेशान करना शुरू कर देती हैं। लेकिन ये परेशानी 2018 का सबसे क्यूट वीडियो बन चुका है।
आप भी देखिए मानती और उनकी बेटी का ये प्यारा क्यूट वीडियो जो कि अब तेजी से वायरल हो रहा है। इसे देखते ही आपका दिन बन जाएगा। गौरतलब है कि उन्होंने बेटी निरवी का सोशल मीडिया नाम निरवीग्राम भी रखा है।बुधवार को मानसी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया है।
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Don't Miss! इनता तो दावा कि आप इस वीडियो को देखने के बाद तैमूर को भूल जायेंगे। ये सुपरस्टार की बेटी तैमूर को क्यूटनेस में कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ रही हैं। सच में इससे प्यारा वीडियो कोई हो ही नहीं सकता है। हम बात कर रहे हैं सुमित संभाल लेगा कि मानसी पारेख की। जो कि अपने इंस्टाग्राम पर बेटी की कई तस्वीर और वीडियो अपलोड करती रहती हैं। इस वीडियो में मानसी फिटनेस के लिए एक्सरसाइज कर रही हैं।तभी इस एक्सरसाइज के दौरान उनकी बेटी निरवी बालकनी में आ जाती हैं। वहां अपने मां को एक्सरसाइज करता हुआ देखकर उन्हें परेशान करना शुरू कर देती हैं। लेकिन ये परेशानी दो हज़ार अट्ठारह का सबसे क्यूट वीडियो बन चुका है। आप भी देखिए मानती और उनकी बेटी का ये प्यारा क्यूट वीडियो जो कि अब तेजी से वायरल हो रहा है। इसे देखते ही आपका दिन बन जाएगा। गौरतलब है कि उन्होंने बेटी निरवी का सोशल मीडिया नाम निरवीग्राम भी रखा है।बुधवार को मानसी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया है।
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न बिसराया परन्तु वे सब निपट डर गये और भागने का मन किया और ईसा के संग मरने न चाहते थे ॥
परन्तु पतरस ने उन दुष्टों के चाकरों में से एक के कान को खड्ग' से उड़ा दिया और बुह चाहता था कि उन से युद्ध करे पर ईसा ने उससे कहा कि अपना खड्न मियान में कर और मेरे कारण उन से बुद्ध न कर यदि मैं चाहूं तो सहस्रों दूत युद्ध के लिये यहां मंगा सक्ता हूं परन्तु पिता की आज्ञा के समान मैं अपना प्राण प्रायश्चित्त में देने को प्रसन्न हूं तब मैं ईसा ने उस मनुष्य का कान के चंगा किया इतने में पतरस आदिक शिष्य ईसा को उन दुष्टों के संग अकेला छोड़के भाग गये तब उन दुष्टों ने उस को बांधा और यरूसलम को ले चले परन्तु ईसा भेड़ के बच्चे की नाई कोमलता से उन के संग हो लिया ।
सैंतीसवां पाठ ।।
पतरस का मुकरना ॥
वे अधम दुष्ट लोग जो ईसा के के शत्रु थे रात भर जागते रहे क्योंकि उन्हों ने चाकर पठाये थे कि ईसा को पकड़ लावें और वे सब चंडाल एक सुन्दर घर में बैठे वाती करते और ईसा के घर आने की बाट
जोहते थ ।।
और आपस में यह कह रहे थे कि जब वह आवे हम उसे न्यायौ के पास पकड़ ले जायेंगे और उसे घात करेंगे ॥
इतने में दुष्ट चाकरों ने ईसा को लाय खड़ा किया उसे देखते ही सब अधम्म हर्षित भये और ईसा को उस बड़ी केोठरी के बीच में खड़ा किया और उसे घुडुकके पूछा कि क्या तू परमेश्वर का पुत्र
ईसा ने उन्हें उत्तर देके कहा कि हां मैं हूं और एक दिन तुम मुझे दूतों के संग आकाश के मेघों में आते देखोगे तब ही तुम जानोंगे कि मैं परमेश्वर का पुत्र हं ।
• तब सब अभिमानी अति क्रोधित भये ॥
और कहा कि तुम सुनते हो बुद्द क्या कहता है इतने में सब एक संग चिल्लाये कि वह अपने को परमेश्वर का पुत्र ठहराता है सो निःसन्देह हम उसे न्यायी के पास धर लेजायेंगे जिसतें वह घात किया जाय ॥
परन्त ईसा चपचाप खड़ा रहा और एक बात भी न
बाला ॥
इस समय शिष्य कहां थे ॥ कहीं दूर भाग गये थे 11
क्या पतरस भी भाग गया था ॥
पतरस ने तो बाचा दिई थी कि मैं ईसा के संग मरने को
सिद्ध हूं पर वह भी भाग गया ॥
अन्त को पतरस के मन में आया कि मैं ईसा को जायके ढूंढ़ और देखूं कि वे चण्डाल लोग ईसा से क्या कर रहे हैं ।
सो पतरस यरूसलम में पहुंचके उस घर में आया पहिले बुह दलान में गया जहां सब दुष्ट चाकर बैठे आग ताप रहे थे और वहां का एक द्वार खुला था जिसमे पतरस ने ईसा को देखा कि वुह चण्डालों के सन्मुख खड़ा है। पतरस को यह भरोसा था कि उसे कोई न पहचानेगा कि वुद्ध ईसा के शिष्यों में से है कहीं ऐसा न हो कि वुह मारा जाय सा ज्यों हीं वुह बैठके आग तापने लगा एक सहेली ने आके उससे पूछा कि तू भी ईसा के शिष्यों में से है ॥ पतरस निपट डर गया और सन्मुख मुकरके कहा मैं नहीं हूं और उस मनुष्य को जिसे तू कहती है मैं नहीं जानता ॥ तब पतरस वहां से उठके ओसारे में आया और एक दूसरी सहेली ने उसे कहा कि निःसन्देह तं ईसा के शिष्यों में से है ।
पतरस ने मुकरके कहा मैं नहीं हूं सो वह फिर जाके आग तापने और चाकरों से बतलाने लगा ।
पर जिन्हों ने उसे बाटिका में देखा था उसे पहचाना और उस के पास आके कहने लगे निश्चय तभी उन में से और एक ने यह भी कहा कि मैं ने तुझ को उस बाटिका
में देखा था ॥
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न बिसराया परन्तु वे सब निपट डर गये और भागने का मन किया और ईसा के संग मरने न चाहते थे ॥ परन्तु पतरस ने उन दुष्टों के चाकरों में से एक के कान को खड्ग' से उड़ा दिया और बुह चाहता था कि उन से युद्ध करे पर ईसा ने उससे कहा कि अपना खड्न मियान में कर और मेरे कारण उन से बुद्ध न कर यदि मैं चाहूं तो सहस्रों दूत युद्ध के लिये यहां मंगा सक्ता हूं परन्तु पिता की आज्ञा के समान मैं अपना प्राण प्रायश्चित्त में देने को प्रसन्न हूं तब मैं ईसा ने उस मनुष्य का कान के चंगा किया इतने में पतरस आदिक शिष्य ईसा को उन दुष्टों के संग अकेला छोड़के भाग गये तब उन दुष्टों ने उस को बांधा और यरूसलम को ले चले परन्तु ईसा भेड़ के बच्चे की नाई कोमलता से उन के संग हो लिया । सैंतीसवां पाठ ।। पतरस का मुकरना ॥ वे अधम दुष्ट लोग जो ईसा के के शत्रु थे रात भर जागते रहे क्योंकि उन्हों ने चाकर पठाये थे कि ईसा को पकड़ लावें और वे सब चंडाल एक सुन्दर घर में बैठे वाती करते और ईसा के घर आने की बाट जोहते थ ।। और आपस में यह कह रहे थे कि जब वह आवे हम उसे न्यायौ के पास पकड़ ले जायेंगे और उसे घात करेंगे ॥ इतने में दुष्ट चाकरों ने ईसा को लाय खड़ा किया उसे देखते ही सब अधम्म हर्षित भये और ईसा को उस बड़ी केोठरी के बीच में खड़ा किया और उसे घुडुकके पूछा कि क्या तू परमेश्वर का पुत्र ईसा ने उन्हें उत्तर देके कहा कि हां मैं हूं और एक दिन तुम मुझे दूतों के संग आकाश के मेघों में आते देखोगे तब ही तुम जानोंगे कि मैं परमेश्वर का पुत्र हं । • तब सब अभिमानी अति क्रोधित भये ॥ और कहा कि तुम सुनते हो बुद्द क्या कहता है इतने में सब एक संग चिल्लाये कि वह अपने को परमेश्वर का पुत्र ठहराता है सो निःसन्देह हम उसे न्यायी के पास धर लेजायेंगे जिसतें वह घात किया जाय ॥ परन्त ईसा चपचाप खड़ा रहा और एक बात भी न बाला ॥ इस समय शिष्य कहां थे ॥ कहीं दूर भाग गये थे ग्यारह क्या पतरस भी भाग गया था ॥ पतरस ने तो बाचा दिई थी कि मैं ईसा के संग मरने को सिद्ध हूं पर वह भी भाग गया ॥ अन्त को पतरस के मन में आया कि मैं ईसा को जायके ढूंढ़ और देखूं कि वे चण्डाल लोग ईसा से क्या कर रहे हैं । सो पतरस यरूसलम में पहुंचके उस घर में आया पहिले बुह दलान में गया जहां सब दुष्ट चाकर बैठे आग ताप रहे थे और वहां का एक द्वार खुला था जिसमे पतरस ने ईसा को देखा कि वुह चण्डालों के सन्मुख खड़ा है। पतरस को यह भरोसा था कि उसे कोई न पहचानेगा कि वुद्ध ईसा के शिष्यों में से है कहीं ऐसा न हो कि वुह मारा जाय सा ज्यों हीं वुह बैठके आग तापने लगा एक सहेली ने आके उससे पूछा कि तू भी ईसा के शिष्यों में से है ॥ पतरस निपट डर गया और सन्मुख मुकरके कहा मैं नहीं हूं और उस मनुष्य को जिसे तू कहती है मैं नहीं जानता ॥ तब पतरस वहां से उठके ओसारे में आया और एक दूसरी सहेली ने उसे कहा कि निःसन्देह तं ईसा के शिष्यों में से है । पतरस ने मुकरके कहा मैं नहीं हूं सो वह फिर जाके आग तापने और चाकरों से बतलाने लगा । पर जिन्हों ने उसे बाटिका में देखा था उसे पहचाना और उस के पास आके कहने लगे निश्चय तभी उन में से और एक ने यह भी कहा कि मैं ने तुझ को उस बाटिका में देखा था ॥
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ब्रिटेन में कुत्तों को भी डिप्रेशन हो रहा है.
लियॉन टावर्स एक डॉग बिहेवियरिस्ट हैं.
वो डॉग ओनर्स से आग्रह कर रही हैं कि गर्मी में कुत्तों को भी वैकेशन पर ले जाएं.
उन्होंने बताया कि 100 में से 99 कुत्तों को पर्याप्त मेंटल स्टिम्यूलेशन नहीं मिल रहा है.
अगर कुत्ता पूरे दिन सिर्फ सो रहा है, तो मुमकिन है कि वो डिप्रेस्ड है.
कुत्तों को भी रोज़मर्रा की दिनचर्या से मुक्त करना जरूरी है.
उसे नए दृश्यों और गंधों वाले वातावरण में ले जाने से उसका स्वास्थ्य सुधरता है.
कुत्तों के लिए वैकेशन की सबसे अच्छी एक्टिविटी तैराकी है.
समुद्र तट कुत्तों के लिए बहुत अच्छा है, उन्हें रेत पर और खारे पानी में चलने से फायदा होगा.
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ब्रिटेन में कुत्तों को भी डिप्रेशन हो रहा है. लियॉन टावर्स एक डॉग बिहेवियरिस्ट हैं. वो डॉग ओनर्स से आग्रह कर रही हैं कि गर्मी में कुत्तों को भी वैकेशन पर ले जाएं. उन्होंने बताया कि एक सौ में से निन्यानवे कुत्तों को पर्याप्त मेंटल स्टिम्यूलेशन नहीं मिल रहा है. अगर कुत्ता पूरे दिन सिर्फ सो रहा है, तो मुमकिन है कि वो डिप्रेस्ड है. कुत्तों को भी रोज़मर्रा की दिनचर्या से मुक्त करना जरूरी है. उसे नए दृश्यों और गंधों वाले वातावरण में ले जाने से उसका स्वास्थ्य सुधरता है. कुत्तों के लिए वैकेशन की सबसे अच्छी एक्टिविटी तैराकी है. समुद्र तट कुत्तों के लिए बहुत अच्छा है, उन्हें रेत पर और खारे पानी में चलने से फायदा होगा.
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लखीमपुरः लखीमपुर जिला प्रशासन और वन विभाग के लखीमपुर डिवीजन ने मंगलवार को ऐतिहासिक पाभा आरक्षित वन में 450 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराने के लिए बड़े पैमाने पर निष्कासन अभियान चलाया।
सहायक वन संरक्षक, लखीमपुर वन प्रमंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार पाभा आरक्षित वन के कुल 450 हेक्टेयर क्षेत्र पर वर्षों से कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर रखा गया था।
विशेष रूप से, 6 मार्च, 1941 को बनाए जाने पर पाभा आरक्षित वन का वास्तविक क्षेत्र 4625. 87 हेक्टेयर था। आरक्षित वन असम में जंगली भैंसों का निवास स्थान था। प्रशासन ने दो चरणों में बेदखली अभियान चलाया। मोहघुली में मंगलवार को प्रशासन ने 202 परिवारों को बेदखल कर 200 हेक्टेयर जमीन खाली कराने का अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान वन भूमि में अतिक्रमणकारियों की सरसों की खेती को नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने अतिक्रमणकारियों को फिर से बसने न देने के लिए घरों को भी तोड़ दिया।
बेदखली का दूसरा चरण बुधवार को जंगल के आधाखाना क्षेत्र में 299 घरों को बेदखल कर 250 हेक्टेयर जमीन मुक्त करने का है।
लोगों ने 2006 के वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि पर अपने अधिकार का दावा किया। लेकिन संबंधित प्राधिकरण द्वारा उनके आवेदनों को खारिज कर दिया गया। राज्य सरकार ने तब उन लोगों को बेदखल करने का फैसला किया। अवैध रूप से बसने वालों में राज्य के विभिन्न हिस्सों के लोग और स्थानीय लोग शामिल हैं।
सूत्रों ने कहा कि प्रशासन ने अभ्यास में राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के 600 से अधिक कर्मियों को तैनात किया।
लखीमपुर के उपायुक्त सुमित सत्तावन ने कहा कि अतिक्रमित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दो साल पहले वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्र खाली करने के लिए सूचित किया गया था। सोमवार को कई 'अवैध आबादियों' ने अपना सामान उठा लिया।
अभियान के दौरान वन संरक्षक बंकिम सरमाह, मंडल वन अधिकारी अशोक देव चौधरी, सहायक वन संरक्षक अच्युत कुमार दास, लखीमपुर एसपी बीएम राजखोवा, 13वीं असम पुलिस बटालियन के कमांडेंट, नाओबोइचा राजस्व मंडल के अंचल अधिकारी सहित कई अन्य प्रशासनिक व सुरक्षाकर्मी अधिकारी रहे क्षेत्र में मौजूद रहे।
एएनआई कहते हैंः "हम लगभग 450 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराएंगे। मूल रूप से लगभग 500 परिवार थे, लेकिन नोटिस जारी करने के बाद लगभग 300 परिवारों ने क्षेत्र छोड़ दिया। और कई परिवारों ने आज सुबह भी क्षेत्र छोड़ दिया। हमने सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, लखीमपुर के एसपी बीएम राजखोवा ने कहा, "लेकिन किसी अप्रिय स्थिति की कोई खबर नहीं है। "
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लखीमपुरः लखीमपुर जिला प्रशासन और वन विभाग के लखीमपुर डिवीजन ने मंगलवार को ऐतिहासिक पाभा आरक्षित वन में चार सौ पचास हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराने के लिए बड़े पैमाने पर निष्कासन अभियान चलाया। सहायक वन संरक्षक, लखीमपुर वन प्रमंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार पाभा आरक्षित वन के कुल चार सौ पचास हेक्टेयर क्षेत्र पर वर्षों से कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर रखा गया था। विशेष रूप से, छः मार्च, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस को बनाए जाने पर पाभा आरक्षित वन का वास्तविक क्षेत्र चार हज़ार छः सौ पच्चीस. सत्तासी हेक्टेयर था। आरक्षित वन असम में जंगली भैंसों का निवास स्थान था। प्रशासन ने दो चरणों में बेदखली अभियान चलाया। मोहघुली में मंगलवार को प्रशासन ने दो सौ दो परिवारों को बेदखल कर दो सौ हेक्टेयर जमीन खाली कराने का अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान वन भूमि में अतिक्रमणकारियों की सरसों की खेती को नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने अतिक्रमणकारियों को फिर से बसने न देने के लिए घरों को भी तोड़ दिया। बेदखली का दूसरा चरण बुधवार को जंगल के आधाखाना क्षेत्र में दो सौ निन्यानवे घरों को बेदखल कर दो सौ पचास हेक्टेयर जमीन मुक्त करने का है। लोगों ने दो हज़ार छः के वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि पर अपने अधिकार का दावा किया। लेकिन संबंधित प्राधिकरण द्वारा उनके आवेदनों को खारिज कर दिया गया। राज्य सरकार ने तब उन लोगों को बेदखल करने का फैसला किया। अवैध रूप से बसने वालों में राज्य के विभिन्न हिस्सों के लोग और स्थानीय लोग शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि प्रशासन ने अभ्यास में राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के छः सौ से अधिक कर्मियों को तैनात किया। लखीमपुर के उपायुक्त सुमित सत्तावन ने कहा कि अतिक्रमित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दो साल पहले वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्र खाली करने के लिए सूचित किया गया था। सोमवार को कई 'अवैध आबादियों' ने अपना सामान उठा लिया। अभियान के दौरान वन संरक्षक बंकिम सरमाह, मंडल वन अधिकारी अशोक देव चौधरी, सहायक वन संरक्षक अच्युत कुमार दास, लखीमपुर एसपी बीएम राजखोवा, तेरहवीं असम पुलिस बटालियन के कमांडेंट, नाओबोइचा राजस्व मंडल के अंचल अधिकारी सहित कई अन्य प्रशासनिक व सुरक्षाकर्मी अधिकारी रहे क्षेत्र में मौजूद रहे। एएनआई कहते हैंः "हम लगभग चार सौ पचास हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराएंगे। मूल रूप से लगभग पाँच सौ परिवार थे, लेकिन नोटिस जारी करने के बाद लगभग तीन सौ परिवारों ने क्षेत्र छोड़ दिया। और कई परिवारों ने आज सुबह भी क्षेत्र छोड़ दिया। हमने सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, लखीमपुर के एसपी बीएम राजखोवा ने कहा, "लेकिन किसी अप्रिय स्थिति की कोई खबर नहीं है। "
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- #BhopalMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'?
Bhopal ki news: राजधानी भोपाल में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है दिन में तेज धूप के अलावा निर्माण कार्य के चलते धूल और वायु प्रदूषण के कारण गले में खराश, जुकाम, खासी, बदन दर्द और बुखार, अस्थमा अटैक जैसे मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही छोटे बच्चों में वायरल के साथ उल्टी दस्त और पानी की कमी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
अस्पतालों में हाल यह है कि जेपी अस्पताल में बच्चों के लिए आरक्षित 25 डेट को बढ़ाकर 40 कर दिया गया है इसके बाद भी सभी भरे हुए हैं इतना ही नहीं अस्पताल में बच्चों की ओपीडी भी 70 से बढ़कर डेढ़ सौ के पार पहुंच गई है जिसमें 70 फीट जी के करीब बच्चे वायरल बुखार के आ रहे हैं। बदलते मौसम के कारण आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जेपी अस्पताल के डॉ राकेश श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ती गर्मी के चलते अस्पताल में उल्टी दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं। समय-समय पर बच्चों को पानी पिलाए, जिससे उन में पानी की कमी ना हो सके। कमरे के तापमान को सामान्य बनाए रखें रात को तेज ऐसी में बच्चों को ना सुलाएं बच्चों का स्वास्थ्य जरा सा भी बदलाव देखे तो डॉक्टर को दिखाएं, जिससे समय रहते बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
जेपी अस्पताल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पीयूष पंचरत्न ने बताया कि वर्तमान में सबसे अधिक मामले बच्चों में वायरल और उल्टी दस्त के आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे गर्मी से हो रहे हैं। यह सीजनल रोग है इसमें सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में बच्चों की ओपीडी संख्या 70 से बढ़ाकर 150 के पार पहुंच गई है।
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- #BhopalMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'? Bhopal ki news: राजधानी भोपाल में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है दिन में तेज धूप के अलावा निर्माण कार्य के चलते धूल और वायु प्रदूषण के कारण गले में खराश, जुकाम, खासी, बदन दर्द और बुखार, अस्थमा अटैक जैसे मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही छोटे बच्चों में वायरल के साथ उल्टी दस्त और पानी की कमी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में हाल यह है कि जेपी अस्पताल में बच्चों के लिए आरक्षित पच्चीस डेट को बढ़ाकर चालीस कर दिया गया है इसके बाद भी सभी भरे हुए हैं इतना ही नहीं अस्पताल में बच्चों की ओपीडी भी सत्तर से बढ़कर डेढ़ सौ के पार पहुंच गई है जिसमें सत्तर फीट जी के करीब बच्चे वायरल बुखार के आ रहे हैं। बदलते मौसम के कारण आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जेपी अस्पताल के डॉ राकेश श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ती गर्मी के चलते अस्पताल में उल्टी दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं। समय-समय पर बच्चों को पानी पिलाए, जिससे उन में पानी की कमी ना हो सके। कमरे के तापमान को सामान्य बनाए रखें रात को तेज ऐसी में बच्चों को ना सुलाएं बच्चों का स्वास्थ्य जरा सा भी बदलाव देखे तो डॉक्टर को दिखाएं, जिससे समय रहते बीमारी को फैलने से रोका जा सके। जेपी अस्पताल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पीयूष पंचरत्न ने बताया कि वर्तमान में सबसे अधिक मामले बच्चों में वायरल और उल्टी दस्त के आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे गर्मी से हो रहे हैं। यह सीजनल रोग है इसमें सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में बच्चों की ओपीडी संख्या सत्तर से बढ़ाकर एक सौ पचास के पार पहुंच गई है।
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एंड्रॉइड 11 अब आधिकारिक और लाइव है और सभी अग्रणी स्मार्टफोन कंपनियां एंड्रॉइड 11 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ अपने बीटा प्रोग्राम लॉन्च कर रही हैं। लगभग सभी ओईएम ने अपना बीटा पंजीकरण शुरू कर दिया है। Xiaomi ने कुछ दिन पहले ही बीटा भर्तियाँ शुरू की हैं, OnePlus ने उपयोगकर्ताओं के लिए Android 11. को आज़माने के लिए OxygenOS ओपन बीटा का खुलासा किया है। OPPO ने हाल ही में अपने प्लेटफ़ॉर्म पर Android 11 बीटा पंजीकरण की भी घोषणा की है। एंड्रॉइड 11 के लिए बीटा संस्करण वर्तमान में ओप्पो की फ्लैगशिप श्रृंखला जैसे फाइंडएक्स 2, ऐस 2 और रेनो 3 श्रृंखला तक सीमित है।
वास्तव में, ओप्पो ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, ColorOS के नवीनतम संस्करण के लॉन्च की तारीख की भी घोषणा की है। इस शब्द में यह है कि वे एंड्रॉइड 11 पर आधारित ओएस का एक स्थिर संस्करण लॉन्च करने वाले पहले व्यक्ति होंगे। एक अन्य इंटरस्टिंग बिंदु है, इस लॉन्च के लिए ओप्पो और कलरओएस ने लिया है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, ओप्पो अपने स्वयं के कस्टम यूजर-इंटरफेस का उपयोग लोकप्रिय रूप से ColorOS के रूप में जाना जाता है। नवीनतम यूज्रेड ने एक महीने पहले घोषित किया था कलर ओएस 7.2, लोकप्रिय और हल्के कलरओएस 7 का एक संस्करण। हालांकि उपयोगकर्ता ओप्पो को ColorOS 8 लॉन्च करने की उम्मीद कर रहे थे, कंपनी ने सीधे ColorOS 11 को बंद कर दिया है।
तकनीकी रूप से, इस कदम के लिए कोई विशेष कारण नहीं है और जबकि विपक्ष सुविधाओं और अभिरुचियों की मेजबानी करेगा, कंपनी के लिए इसका नाम ColorOS 11 रखना प्रासंगिकता में आसानी है। ColorOS 11 एंड्रॉइड 11 के शीर्ष पर बनाया जाएगा और यह उपयोगकर्ताओं को याद रखने के लिए एक आसान अनुनाद होगा।
टेक जगत में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। कई कंपनियों ने अतीत में अपने संस्करण या मॉडल के लिए अल्फा अंकों को कूद लिया है। हुआवेई जैसी कंपनियों ने एंड्रॉइड 8.0 Oreo के लॉन्च के साथ EMUI 8 को स्थानांतरित किया, EMUI 5 से एंड्रॉइड नौगट के साथ। अभी हाल ही में, OnePlus जो OxygenOS 5 पर थे, ने Android 9.0 Pie के लॉन्च के साथ Oxygen OS 9 पर छलांग लगाई।
OPPO ने 14 सितंबर को सुबह 9 बजे GMT पर विश्व स्तर पर ColorOS 11 लॉन्च करने की घोषणा की है। हमारे पास समर्थित डिवाइस, रोल-आउट योजना और नई उपयोगकर्ता-इंटरफ़ेस लाने वाली सुविधाएँ जैसी अधिक जानकारी होगी।
आप ColorOS 8 से 11 में कूदने के बारे में क्या सोचते हैं? हमें नीचे टिप्पणी अनुभाग में अपनी राय बताएं।
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एंड्रॉइड ग्यारह अब आधिकारिक और लाइव है और सभी अग्रणी स्मार्टफोन कंपनियां एंड्रॉइड ग्यारह ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ अपने बीटा प्रोग्राम लॉन्च कर रही हैं। लगभग सभी ओईएम ने अपना बीटा पंजीकरण शुरू कर दिया है। Xiaomi ने कुछ दिन पहले ही बीटा भर्तियाँ शुरू की हैं, OnePlus ने उपयोगकर्ताओं के लिए Android ग्यारह. को आज़माने के लिए OxygenOS ओपन बीटा का खुलासा किया है। OPPO ने हाल ही में अपने प्लेटफ़ॉर्म पर Android ग्यारह बीटा पंजीकरण की भी घोषणा की है। एंड्रॉइड ग्यारह के लिए बीटा संस्करण वर्तमान में ओप्पो की फ्लैगशिप श्रृंखला जैसे फाइंडएक्स दो, ऐस दो और रेनो तीन श्रृंखला तक सीमित है। वास्तव में, ओप्पो ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, ColorOS के नवीनतम संस्करण के लॉन्च की तारीख की भी घोषणा की है। इस शब्द में यह है कि वे एंड्रॉइड ग्यारह पर आधारित ओएस का एक स्थिर संस्करण लॉन्च करने वाले पहले व्यक्ति होंगे। एक अन्य इंटरस्टिंग बिंदु है, इस लॉन्च के लिए ओप्पो और कलरओएस ने लिया है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, ओप्पो अपने स्वयं के कस्टम यूजर-इंटरफेस का उपयोग लोकप्रिय रूप से ColorOS के रूप में जाना जाता है। नवीनतम यूज्रेड ने एक महीने पहले घोषित किया था कलर ओएस सात.दो, लोकप्रिय और हल्के कलरओएस सात का एक संस्करण। हालांकि उपयोगकर्ता ओप्पो को ColorOS आठ लॉन्च करने की उम्मीद कर रहे थे, कंपनी ने सीधे ColorOS ग्यारह को बंद कर दिया है। तकनीकी रूप से, इस कदम के लिए कोई विशेष कारण नहीं है और जबकि विपक्ष सुविधाओं और अभिरुचियों की मेजबानी करेगा, कंपनी के लिए इसका नाम ColorOS ग्यारह रखना प्रासंगिकता में आसानी है। ColorOS ग्यारह एंड्रॉइड ग्यारह के शीर्ष पर बनाया जाएगा और यह उपयोगकर्ताओं को याद रखने के लिए एक आसान अनुनाद होगा। टेक जगत में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। कई कंपनियों ने अतीत में अपने संस्करण या मॉडल के लिए अल्फा अंकों को कूद लिया है। हुआवेई जैसी कंपनियों ने एंड्रॉइड आठ.शून्य Oreo के लॉन्च के साथ EMUI आठ को स्थानांतरित किया, EMUI पाँच से एंड्रॉइड नौगट के साथ। अभी हाल ही में, OnePlus जो OxygenOS पाँच पर थे, ने Android नौ.शून्य Pie के लॉन्च के साथ Oxygen OS नौ पर छलांग लगाई। OPPO ने चौदह सितंबर को सुबह नौ बजे GMT पर विश्व स्तर पर ColorOS ग्यारह लॉन्च करने की घोषणा की है। हमारे पास समर्थित डिवाइस, रोल-आउट योजना और नई उपयोगकर्ता-इंटरफ़ेस लाने वाली सुविधाएँ जैसी अधिक जानकारी होगी। आप ColorOS आठ से ग्यारह में कूदने के बारे में क्या सोचते हैं? हमें नीचे टिप्पणी अनुभाग में अपनी राय बताएं।
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अमित पवार, बैतूल। मुलताई के दांतोरा का एक परिवार महाराष्ट्र में कार समेत नदी में बह गया। पुलिस ने नदी से 3 शव निकाल लिए हैं। बाकी लोगों की तलाश जारी है। घटना का वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि कार में 8 लोग सवार थे। वहीं इस हादसे की जानकारी मिलते ही गांव में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के अनुसार, दतोरा गांव का रहने वाला मधुकर परिवार पारिवारिक समारोह में शामिल होने महाराष्ट्र के नांदा गांव जा रहा था। तभी नागपुर-सावनेर हाईवे में नदी पर बने पुल से निकलते समय उनकी कार बह गई। पुल के ऊपर से पानी का बहाव तेज चल रहा था। इस कारण ड्राइवर संतुलन खो बैठा और कार नदी में बह गई।
स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने रेस्क्यू कर 3 लोगों के शव बरामद कर लिए हैं। बाकी 5 लोगों की तलाश जारी है। नदी में बहने वालों में 3 महिलाएं, 4 पुरुष और एक बालक शामिल है। फिलहाल रेस्क्यू जारी है।
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अमित पवार, बैतूल। मुलताई के दांतोरा का एक परिवार महाराष्ट्र में कार समेत नदी में बह गया। पुलिस ने नदी से तीन शव निकाल लिए हैं। बाकी लोगों की तलाश जारी है। घटना का वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि कार में आठ लोग सवार थे। वहीं इस हादसे की जानकारी मिलते ही गांव में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार, दतोरा गांव का रहने वाला मधुकर परिवार पारिवारिक समारोह में शामिल होने महाराष्ट्र के नांदा गांव जा रहा था। तभी नागपुर-सावनेर हाईवे में नदी पर बने पुल से निकलते समय उनकी कार बह गई। पुल के ऊपर से पानी का बहाव तेज चल रहा था। इस कारण ड्राइवर संतुलन खो बैठा और कार नदी में बह गई। स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने रेस्क्यू कर तीन लोगों के शव बरामद कर लिए हैं। बाकी पाँच लोगों की तलाश जारी है। नदी में बहने वालों में तीन महिलाएं, चार पुरुष और एक बालक शामिल है। फिलहाल रेस्क्यू जारी है।
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इस समय बॉलीवुड से लेकर टीवी जगत तक कई चर्चित जोड़ियां एक दूसरे के साथ हाल ही में या तो शादी के बंधन में बंध चुकी हैं या फिर बंधने जा रही हैं। इन्हीं में से टीवी जगत की मशहूर अभिनेत्री हैं अंकिता लोखंडे। जिन्होंने सीरियल पवित्र रिश्ता से अर्चना के नाम से लोगों के दिलों में जगह बनाई है। अंकिता अपनी खूबसूरती, फिटनेस के लिए तो जानी ही जाती हैं साथ ही में वे अपने अभिनय और पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में बनी रहती हैं। पवित्र रिश्ता की फेम एक्ट्रेस और टीवी की फेवरेट बहु के रूप में घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली अंकिता अब बहुत जल्द विक्की जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। ऐसे में फैंस को उनकी शादी से जुड़ी हर जानकारी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अंकिता ने सोशल मीडिया पर अपनी शादी के फंक्शन की खूबसूरत मेमोरीज शेयर की हैं।
टीवी जगत की ये खूबसूरत अदाकारा जल्दी ही विक्की जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही है। ऐसे में फैंस के बीच उनकी शादी को लेकर बज बना हुआ है। फैंस अपनी फेवरेट एक्ट्रेस की शादी से जुड़ी हर खबर के बारे में जानना चाहते हैं। अंकिता भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और फोटो व वीडियोज के जरिए अपने फैंस को अपडेट देती रहती हैं।
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इस समय बॉलीवुड से लेकर टीवी जगत तक कई चर्चित जोड़ियां एक दूसरे के साथ हाल ही में या तो शादी के बंधन में बंध चुकी हैं या फिर बंधने जा रही हैं। इन्हीं में से टीवी जगत की मशहूर अभिनेत्री हैं अंकिता लोखंडे। जिन्होंने सीरियल पवित्र रिश्ता से अर्चना के नाम से लोगों के दिलों में जगह बनाई है। अंकिता अपनी खूबसूरती, फिटनेस के लिए तो जानी ही जाती हैं साथ ही में वे अपने अभिनय और पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में बनी रहती हैं। पवित्र रिश्ता की फेम एक्ट्रेस और टीवी की फेवरेट बहु के रूप में घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली अंकिता अब बहुत जल्द विक्की जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। ऐसे में फैंस को उनकी शादी से जुड़ी हर जानकारी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अंकिता ने सोशल मीडिया पर अपनी शादी के फंक्शन की खूबसूरत मेमोरीज शेयर की हैं। टीवी जगत की ये खूबसूरत अदाकारा जल्दी ही विक्की जैन के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही है। ऐसे में फैंस के बीच उनकी शादी को लेकर बज बना हुआ है। फैंस अपनी फेवरेट एक्ट्रेस की शादी से जुड़ी हर खबर के बारे में जानना चाहते हैं। अंकिता भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और फोटो व वीडियोज के जरिए अपने फैंस को अपडेट देती रहती हैं।
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दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के मद्देनजर यातायात पाबंदियों के मद्देनजर वाहन चालकों को संयम बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को विजय चौक से इंडिया गेट तक राजपथ पर परेड का अभ्यास होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेपाली समकक्ष के पी शर्मा ओली मंगलवार को जोगबनी-विराटनगर में दूसरी एकीकृत निगरानी चौकी का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण व्यापार और लोगों की आवाजाही की सुगमता के लिये भारत की सहायता से किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों प्रधानमंत्री नेपाल में भारत की सहायता से भूकंप के बाद बनाए गए घरों के निर्माण की प्रगति को देखेंगे। इसमें कहा गया कि भारत ने गोरखा और नुवाकोट जिलों में 50000 घरों के निर्माण की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी जिसमें से 45,000 घर पूरे कर लिये गए हैं।
दिल्ली चुनाव के मद्देनजर सीएम अरविंद केजरीवाल आज नामांकन दाखिल करेंगे। इसके अलावा बीजेपी के कपिल मिश्रा और राजीव बब्बर भी नामांकन करेंगे। 14 जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप, भाजपा और कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। मतदान आठ फरवरी को होगा जबकि मतगणना 11 फरवरी को की जाएगी। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को ही सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी थी। दिल्ली में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान आठ फरवरी को जबकि वोटों की गिनती 11 फरवरी को होनी है।
नागरिकता संशोधित कानून CAA पर बीजेपी के जन जागरूकता अभियान के तहत आज गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ में जनसभा को संबोधित करेंगे। नागरिकता संशोधित कानून के जागरूकता अभियान के तहत अमित शाह देश भर में रैलियां कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के मद्देनजर यातायात पाबंदियों के मद्देनजर वाहन चालकों को संयम बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को विजय चौक से इंडिया गेट तक राजपथ पर परेड का अभ्यास होगा और इसकी वजह से यातायात के मार्ग में बदलाव कर वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों से जाने की सलाह दी जाती है। पुलिस के अनुसार रफी मार्ग,जनपथ और मानसिंह रोड पर दोनों दिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 वजह वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। राजपथ भी विजय चौक से इंडिया गेट तक यातायात के लिए बंद रहेगा। परामर्श में वाहन चालकों को राजघाट जाने के लिए उत्तर-दक्षिण गलियारे का इस्तेमाल करने की सलाह दी जिसमें रिंग रोड, आश्रम चौक, सराय काले खां, आईपी फ्लाईओवर शामिल है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग मामले की सुनवाई सीनेट 21 जनवरी को शुरू कर सकता है। अमेरिका की 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट पार्टी के पास बहुमत है।
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दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के मद्देनजर यातायात पाबंदियों के मद्देनजर वाहन चालकों को संयम बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को विजय चौक से इंडिया गेट तक राजपथ पर परेड का अभ्यास होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेपाली समकक्ष के पी शर्मा ओली मंगलवार को जोगबनी-विराटनगर में दूसरी एकीकृत निगरानी चौकी का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण व्यापार और लोगों की आवाजाही की सुगमता के लिये भारत की सहायता से किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों प्रधानमंत्री नेपाल में भारत की सहायता से भूकंप के बाद बनाए गए घरों के निर्माण की प्रगति को देखेंगे। इसमें कहा गया कि भारत ने गोरखा और नुवाकोट जिलों में पचास हज़ार घरों के निर्माण की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी जिसमें से पैंतालीस,शून्य घर पूरे कर लिये गए हैं। दिल्ली चुनाव के मद्देनजर सीएम अरविंद केजरीवाल आज नामांकन दाखिल करेंगे। इसके अलावा बीजेपी के कपिल मिश्रा और राजीव बब्बर भी नामांकन करेंगे। चौदह जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप, भाजपा और कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। मतदान आठ फरवरी को होगा जबकि मतगणना ग्यारह फरवरी को की जाएगी। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को ही सभी सत्तर सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी थी। दिल्ली में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान आठ फरवरी को जबकि वोटों की गिनती ग्यारह फरवरी को होनी है। नागरिकता संशोधित कानून CAA पर बीजेपी के जन जागरूकता अभियान के तहत आज गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ में जनसभा को संबोधित करेंगे। नागरिकता संशोधित कानून के जागरूकता अभियान के तहत अमित शाह देश भर में रैलियां कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के मद्देनजर यातायात पाबंदियों के मद्देनजर वाहन चालकों को संयम बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को विजय चौक से इंडिया गेट तक राजपथ पर परेड का अभ्यास होगा और इसकी वजह से यातायात के मार्ग में बदलाव कर वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों से जाने की सलाह दी जाती है। पुलिस के अनुसार रफी मार्ग,जनपथ और मानसिंह रोड पर दोनों दिन सुबह नौ बजे से दोपहर बारह वजह वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। राजपथ भी विजय चौक से इंडिया गेट तक यातायात के लिए बंद रहेगा। परामर्श में वाहन चालकों को राजघाट जाने के लिए उत्तर-दक्षिण गलियारे का इस्तेमाल करने की सलाह दी जिसमें रिंग रोड, आश्रम चौक, सराय काले खां, आईपी फ्लाईओवर शामिल है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग मामले की सुनवाई सीनेट इक्कीस जनवरी को शुरू कर सकता है। अमेरिका की चार सौ पैंतीस सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट पार्टी के पास बहुमत है।
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लखनऊ. यूपी के वन और पर्यावरण विभाग ने पूरे प्रदेश में पराली जलाने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण विभाग के एक आदेश में सभी जिलों के डीएम को आदेश जारी किया गया है कि अपने जिलों के हालातों को देखते हुए स्पेशल डिसीजन लें, जिससे जहरीली हवा के संकट से निपटा जाए।
इससे पहले यूपी को राहत दिलाने के लिए आठ प्वाइंट्स पर योगी सरकार ने एडवायजरी जारी की थी। इसके बाद गुरुवार को भी पर्यावरण विभाग ने अधिकारियों के साथ बैठक की और एनजीटी के आदेश के मद्देनजर में फैसला लिया कि फिलहाल प्रदूषण फैलाने वाली सभी एक्टिविटीज पर रोक लगा दी जाए।
- पराली जलाने पर लगाई जाए रोक।
- 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल गाड़ियों पर रोक लगे।
- सभी निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। हालांकि इस दौरान मजदूरों को उनकी दिहाड़ी मिलती रहेगी।
- हॉट मिक्स प्लांट, धुआं निकालने वाली सभी इंडस्ट्रियल यूनिट, बिल्डिंग मैटेरियल की ढुलाई, खनन और सड़कों का निर्माण अगले आदेश तक बंद किया जाए।
- पर्यावरण विभाग ने आदेश दिए हैं कि NCR में पानी का छिड़काव नियमित तौर पर किया जाए।
पराली को जलाने की नौबत इस वजह से आ रही है कि अब फसल की कटाई हारवेस्टर(बड़ी मशीनों) से हो रही है। यह धान और गेहूं के पौधों को ऊपर-ऊपर से काटता है। इससे एक-डेढ़ फुट तक के ठूंठ रह जाते हैं, जिसे पराली कहते हैं। किसानों अगली का बुवाई से पहले इसमें आग लगा देते हैं। इसकी राख तो मिट्टी में मिल जाती है, लेकिन धुआं स्मॉग के तौर पर इकट्ठा हो जाता है। पहले हाथ से होने वाली कटाई के दौरान ठूंठ भी निकल जाती थी।
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लखनऊ. यूपी के वन और पर्यावरण विभाग ने पूरे प्रदेश में पराली जलाने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण विभाग के एक आदेश में सभी जिलों के डीएम को आदेश जारी किया गया है कि अपने जिलों के हालातों को देखते हुए स्पेशल डिसीजन लें, जिससे जहरीली हवा के संकट से निपटा जाए। इससे पहले यूपी को राहत दिलाने के लिए आठ प्वाइंट्स पर योगी सरकार ने एडवायजरी जारी की थी। इसके बाद गुरुवार को भी पर्यावरण विभाग ने अधिकारियों के साथ बैठक की और एनजीटी के आदेश के मद्देनजर में फैसला लिया कि फिलहाल प्रदूषण फैलाने वाली सभी एक्टिविटीज पर रोक लगा दी जाए। - पराली जलाने पर लगाई जाए रोक। - दस साल पुराने डीजल और पंद्रह साल पुराने पेट्रोल गाड़ियों पर रोक लगे। - सभी निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। हालांकि इस दौरान मजदूरों को उनकी दिहाड़ी मिलती रहेगी। - हॉट मिक्स प्लांट, धुआं निकालने वाली सभी इंडस्ट्रियल यूनिट, बिल्डिंग मैटेरियल की ढुलाई, खनन और सड़कों का निर्माण अगले आदेश तक बंद किया जाए। - पर्यावरण विभाग ने आदेश दिए हैं कि NCR में पानी का छिड़काव नियमित तौर पर किया जाए। पराली को जलाने की नौबत इस वजह से आ रही है कि अब फसल की कटाई हारवेस्टर से हो रही है। यह धान और गेहूं के पौधों को ऊपर-ऊपर से काटता है। इससे एक-डेढ़ फुट तक के ठूंठ रह जाते हैं, जिसे पराली कहते हैं। किसानों अगली का बुवाई से पहले इसमें आग लगा देते हैं। इसकी राख तो मिट्टी में मिल जाती है, लेकिन धुआं स्मॉग के तौर पर इकट्ठा हो जाता है। पहले हाथ से होने वाली कटाई के दौरान ठूंठ भी निकल जाती थी।
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बिधूना। तहसील के थाना बेला क्षेत्र में बेला-बिधूना मार्ग पर बीती रात्रि बांधमऊ गांव के समीप महिला को बचाने के प्रयास में तेज रफ्तार ट्रक ने ट्रैक्टर को टक्कर मार दी। जिसके बाद महिला को रौंद दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। वहीं ट्रैक्टर सवार 4 किसान गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुँची थाना पुलिस ने घायलों को एम्बुलेंस की सहायता से सीएचसी बिधूना में भर्ती कराया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार बिधूना क्षेत्र के गांव खरगपुर निवासी किसान राजेश, संजीव, जयवीर व उमेश रात्रि करीब 3 बजे कन्नौज कोल्ड स्टोरेज में रखे अपने आलू लेकर ट्रैक्टर में लादकर गांव वापस लौट रहे थे। उनका ट्रैक्टर बेला-बिधूना मार्ग पर स्थित गांव बांधमऊ व पुरवा दूजे के बीच पहुंचा था कि तभी बिधूना की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी। जिससे ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गये। वहीं उसमें सवार चारों किसान गंभीर रूप से घायल हो गये।
यही नहीं ट्रैक्टर में टक्कर मारने के बाद अनियंत्रित ट्रक ने वहां से निकल रही एक महिला दीपा शर्मा (45) पत्नी राजेश शर्मा निवासी आदर्श नगर को रौंदता हुआ निकल गया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गयी। इसके बाद चालक व क्लीनर ट्रक को वहीं छोड़कर मौके से भाग गये। वहीं राहगीरों की सूचना पर पहुँची थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर घायलों को सीएचसी बिधूना में भर्ती कराया है। जहां से चारों घायलों को गंभीर हालत में रिम्स सैंफई के लिए रेफर कर दिया गया है।
घटना के बाद लगभग एक घंटे तक मार्ग पर लम्बा जाम लगा रहा। जिससे बेला-बिधूना मार्ग बाधित रहा। मौके पर क्षेत्राधिकारी बिधूना महेन्द्र प्रताप सिंह, कोतवाल बिधूना जीवाराम यादव, थानाध्यक्ष बेला सुरेश चंद्र पहुँचे। क्षेत्राधिकारी बिधूना ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर व घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। ट्रक चालक व क्लीनर फरार है।
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बिधूना। तहसील के थाना बेला क्षेत्र में बेला-बिधूना मार्ग पर बीती रात्रि बांधमऊ गांव के समीप महिला को बचाने के प्रयास में तेज रफ्तार ट्रक ने ट्रैक्टर को टक्कर मार दी। जिसके बाद महिला को रौंद दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। वहीं ट्रैक्टर सवार चार किसान गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुँची थाना पुलिस ने घायलों को एम्बुलेंस की सहायता से सीएचसी बिधूना में भर्ती कराया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। जानकारी के अनुसार बिधूना क्षेत्र के गांव खरगपुर निवासी किसान राजेश, संजीव, जयवीर व उमेश रात्रि करीब तीन बजे कन्नौज कोल्ड स्टोरेज में रखे अपने आलू लेकर ट्रैक्टर में लादकर गांव वापस लौट रहे थे। उनका ट्रैक्टर बेला-बिधूना मार्ग पर स्थित गांव बांधमऊ व पुरवा दूजे के बीच पहुंचा था कि तभी बिधूना की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी। जिससे ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गये। वहीं उसमें सवार चारों किसान गंभीर रूप से घायल हो गये। यही नहीं ट्रैक्टर में टक्कर मारने के बाद अनियंत्रित ट्रक ने वहां से निकल रही एक महिला दीपा शर्मा पत्नी राजेश शर्मा निवासी आदर्श नगर को रौंदता हुआ निकल गया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गयी। इसके बाद चालक व क्लीनर ट्रक को वहीं छोड़कर मौके से भाग गये। वहीं राहगीरों की सूचना पर पहुँची थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर घायलों को सीएचसी बिधूना में भर्ती कराया है। जहां से चारों घायलों को गंभीर हालत में रिम्स सैंफई के लिए रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद लगभग एक घंटे तक मार्ग पर लम्बा जाम लगा रहा। जिससे बेला-बिधूना मार्ग बाधित रहा। मौके पर क्षेत्राधिकारी बिधूना महेन्द्र प्रताप सिंह, कोतवाल बिधूना जीवाराम यादव, थानाध्यक्ष बेला सुरेश चंद्र पहुँचे। क्षेत्राधिकारी बिधूना ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर व घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। ट्रक चालक व क्लीनर फरार है।
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भारत में अपने बूते विकास करने की पूरी क्षमता है। इसके लिए आर्थिक सुधारों और मजबूत आर्थिक नीति की दरकार है। ऐसा कर निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सकता है। बता रहे हैं आकाश प्रकाश संकट के लिए चीन के लोग जिस शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं, वह खतरे और मौके का मिश्रण है और इन परिस्थितियों में दोनों ही भारत पर लागू होते हैं। अगर आर्थिक सुधार के मोर्चे पर हम दोनों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो अर्थव्यवस्था के पास कई साल तक मंदी में फिसल जाने का असली खतरा है। दूसरी ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट भारत के लिए निर्यात आधारित विकास दर के मॉडल वाली अर्थव्यवस्था से अपने आपको अलग करने का असली मौका है। मेरे विचार से खतरा स्पष्ट है, 5 साल तक 8. 5 फीसदी की आर्थिक विकास दर और उत्साहजनक कर राजस्व के बावजूद हमारी राजकोषीय स्थिति जोखिम भरी है। साल 2009 में कुल मिलाकर हमारा राजकोषीय घाटा जीडीपी के 12 फीसदी के स्तर पर रहेगा जो अब तक का रिकॉर्ड होगा। सरकार का अपना अनुमान है कि साल 2010 में यह मामूली गिरकर 10-10. 5 फीसदी पर आ सकता है, बावजूद इसके कि हम जिंसों की कीमत को अनुकूल मानकर चल रहे हैं। दुर्भाग्य से अगर जिंस बाजार में एक बार फिर उछाल आ गया तो इन परिस्थितियों में साल 2010 और भी खराब हो सकता है। आप सवाल कर सकते हैं कि इस समय राजकोषीय स्थिति पर चिंता करने की जरूरत क्या है? क्या पूरी दुनिया में ऐसा नहीं हो रहा है, तो फिर हम अछूते कैसे रह सकते हैं? समस्या यह है कि ऐसे ऊंचे राजकोषीय घाटे की बदौलत हम असुरक्षित हो जाएंगे और विकास दर को बनाए रखने व आधारभूत ढांचे में निवेश की खातिर पूरी तरह से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर निर्भर हो जाएंगे। साल 2003 में 27-28 फीसदी पर रहा बचत का स्तर पिछले साल 35 फीसदी पर पहुंच गया था, यह मुख्य रूप से कॉरपोरेट बचत दर में सुधार की बदौलत संभव हो पाया था, जो कि कुल मिलाकर दोगुना हो गया था। (जीडीपी के प्रतिशत के आधार पर) साथ ही संप्रग सरकार के शुरुआती दिनों में सरकारी सेक्टर में गैर-बचत से बचत की तरफ बढने केकारण भी ऐसा मुमकिन हो पाया था। घरेलू बचत में हमें वास्तव में इतना ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। राजकोषीय स्थिति में कमी आने से सरकार एक बार फिर गैर-बचत की तरफ बढ़ जाएगी। ऐसे में अगर कॉरपोरेट सेक्टर की बात करें तो वहां बचत पिछले साल के मुकाबले आधी रह जाएगी क्योंकि उनके मुनाफेपर भारी असर पड़ा है। इस तरह 35 फीसदी की बचत दर को अगर हम आने वाले साल में 27-28 फीसदी के स्तर पर बनाए रखने में कामयाब रहे तो हम सौभाग्यशाली कहलाएंगे। इस तरह से निवेश की दर भी 37-38 फीसदी से गिरकर 30 फीसदी के आसपास आ जाएगी। विकास और पूंजी निर्माण पर यही असली असर होगा। राजकोष में भारी गिरावट के इस दौर में हम एक और समस्या से घिरने वाले हैं क्योंकि इस साल के लिए सरकारी उधारी तीन लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगी। वैसे साल में जब कॉरपोरेट क्रेडिट की मांग में कमी आ रही है, इस तरह की उधारी घरेलू बचत से पूरी की जा सकती है। लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी, घरेलू बचत कॉरपोरेट इंडिया की विकास की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगी, साथ ही बढ़ते सरकारी खर्चों के संबंध में भी। अगर बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी के प्रवाह के बिना हम 12 फीसदी के राजकोषीय घाटे के वित्त पोषण और 8 फीसदी की जीडीपी वृध्दि दर को बनाए रखना चाहते हैं तो ब्याज दर को उचित दर पर रखे जाने का कोई रास्ता नहीं है। बड़ी संख्या में कॉरपोरेट घरानों ने अपने वित्त की दिशा ऑफशोर यानी विदेशों की ओर मोड़ दी है, उनमें से ज्यादातर अब देश में पुनर्वित्त के जरिए आ रहा है। अगर ब्याज दर में बढ़ोतरी हुई तो यह एक बार फिर विकास, निवेश और कंपनियों के मुनाफे पर अवरोध खड़ा करेगा। अन्य मुद्दा है हमारे आधारभूत संरचना में कमी का। संसाधनों में कमी की वजह से सरकार ने इस बाबत पीपीपी रूट यानी सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी का सहारा लिया था ताकि इसके लिए पूंजी को आकर्षित किया जा सके। बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण अब आधारभूत संरचना के लिए रकम उपलब्ध नहीं है और अब वैश्विक स्तर पर भी पूंजी उपलब्ध है जो इस खाई को पाट सके। आधारभूत संरचना के कई क्षेत्रों को अब भी नीतिगत रूप से पीपीपी के लिए नहीं खोला गया है। इस संबंध में नीति की बाबत विवाद हो सकता है, लेकिन अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार के पास कोई रास्ता नहीं है। सच्चाई यह है कि भारी भरकम राजकोषीय घाटे ने भारत को कॉरपोरेट सेक्टर व आधारभूत संरचना के वित्त पोषण के लिए प्राइवेट विदेशी पूंजी प्रवाह पर निर्भर बना दिया है। मजबूत पूंजी प्रवाह के बिना हम अपनी विकास दर का आकलन करने में सक्षम नहीं हो पा रहे, जैसा कि यह देश अपेक्षा कर रहा है। ऐसे समय में जब हम पूरी तरह पूंजी के प्रवाह पर निर्भर हैं, वैश्विक वातावरण खतरे वाली पूंजी की खातिर ज्यादा प्रतिकूल हो गया है। वर्तमान में लंबी अवधि वाली पूंजी के लिए तरलता के काफी कम स्रोत रह गए हैं या फिर वैसे लोग कम रह गए हैं जो ऐसे खतरे उठाने के लिए तैयार हों। ओईसीडी जहां पूरे बैंकिंग सिस्टम के अर्ध्दराष्ट्रीयकरण की बात कर रहा है, पूंजी देश में वापस लौट जाएगी। हमें इस बात का अहसास करना होगा कि किसी भगवान ने हमें अरबों की पूंजी हासिल करने का अधिकार नहीं दिया है । हमें पूंजी को आकर्षित करने के लिहाज से अपनी नीतियां बनानी होंगी और वैसे वैश्विक वित्तीय निवेशकों में आत्मविश्वास पैदा करना होगा जिन देशों से हमारा कारोबार चलता है। लंबी अवधि के निवेशकों को हमें बताना होगा कि लंबी अवधि तक विकास दर बनाए रखने की जरूरत के हिसाब से हम कठिन आर्थिक फैसले ले सकते हैं। उभरते हुए बाजार में उपलब्ध सीमित पूंजी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए उनसे प्रतिद्वंद्विता करनी होगी। हमारी ढांचागत विकास दर को देखते हुए वैश्विक निवेशक एक बार फिर उत्साहित हो सकते हैं। हमारा मानना है कि निवेशक भारत में बने रहेंगे और यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भी आंशिक रूप से सही है कि वित्तीय पूंजी के मामले में इस तरह की कोई प्रतिबध्दता नहीं है। निवेशक वहीं जाएंगे जहां उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा। ढांचागत राजकोषीय घाटे के मुद्दे से पार पाने के लिए या तो हम अपने खर्चों और सब्सिडी का लक्ष्य तय करें या फिर विनिवेश और सरकारी संपत्ति मसलन स्पेक्ट्रम की बिक्री करें। इन कदमों के अभाव में हम दहाई अंक के राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दर, कमजोर आधारभूत संरचना आदि में उलझ जाएंगे। अगर नई सरकार शिक्षा, श्रम नीति, वित्तीय प्रणाली आदि में दूसरी पीढ़ी के सुधार का काम हाथ में ले तो हम निवेशकों का भरोसा लौटा सकते हैं और वैश्विक पूंजी प्रवाह में अपने हिस्से का दावा कर सकते हैं। भारत की स्थिति मजबूत है। हमारी अर्थव्यवस्था बड़ी है जो निर्यात पर कम से कम निर्भर है। देसी बाजार में 65 फीसदी माल खपत होता है और हमारा जनसंख्या का स्वरूप बताता है कि उपभोग का स्तर मजबूत बना रहेगा और हमारी बैंकिंग प्रणाली दिवालिया होने से बची रहेगी। भारत की स्थिति अलग है और हमारी किस्मत भी काफी हद तक हमारे हाथों में ही है। अच्छी नीति उत्पादकता और विकास दोनों में भारी अंतर ला सकती है। अगर हम आर्थिक सुधार करते हैं और मजबूत आर्थिक नीति बनाते हैं तो हम अच्छी तरह विकास कर सकते हैं और निवेशकों को भी आकर्षित कर सकते हैं। यही मौका है जब हम अपने आपको दूसरे से अलग दिखा सकते हैं।
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भारत में अपने बूते विकास करने की पूरी क्षमता है। इसके लिए आर्थिक सुधारों और मजबूत आर्थिक नीति की दरकार है। ऐसा कर निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सकता है। बता रहे हैं आकाश प्रकाश संकट के लिए चीन के लोग जिस शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं, वह खतरे और मौके का मिश्रण है और इन परिस्थितियों में दोनों ही भारत पर लागू होते हैं। अगर आर्थिक सुधार के मोर्चे पर हम दोनों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो अर्थव्यवस्था के पास कई साल तक मंदी में फिसल जाने का असली खतरा है। दूसरी ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट भारत के लिए निर्यात आधारित विकास दर के मॉडल वाली अर्थव्यवस्था से अपने आपको अलग करने का असली मौका है। मेरे विचार से खतरा स्पष्ट है, पाँच साल तक आठ. पाँच फीसदी की आर्थिक विकास दर और उत्साहजनक कर राजस्व के बावजूद हमारी राजकोषीय स्थिति जोखिम भरी है। साल दो हज़ार नौ में कुल मिलाकर हमारा राजकोषीय घाटा जीडीपी के बारह फीसदी के स्तर पर रहेगा जो अब तक का रिकॉर्ड होगा। सरकार का अपना अनुमान है कि साल दो हज़ार दस में यह मामूली गिरकर दस-दस. पाँच फीसदी पर आ सकता है, बावजूद इसके कि हम जिंसों की कीमत को अनुकूल मानकर चल रहे हैं। दुर्भाग्य से अगर जिंस बाजार में एक बार फिर उछाल आ गया तो इन परिस्थितियों में साल दो हज़ार दस और भी खराब हो सकता है। आप सवाल कर सकते हैं कि इस समय राजकोषीय स्थिति पर चिंता करने की जरूरत क्या है? क्या पूरी दुनिया में ऐसा नहीं हो रहा है, तो फिर हम अछूते कैसे रह सकते हैं? समस्या यह है कि ऐसे ऊंचे राजकोषीय घाटे की बदौलत हम असुरक्षित हो जाएंगे और विकास दर को बनाए रखने व आधारभूत ढांचे में निवेश की खातिर पूरी तरह से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर निर्भर हो जाएंगे। साल दो हज़ार तीन में सत्ताईस-अट्ठाईस फीसदी पर रहा बचत का स्तर पिछले साल पैंतीस फीसदी पर पहुंच गया था, यह मुख्य रूप से कॉरपोरेट बचत दर में सुधार की बदौलत संभव हो पाया था, जो कि कुल मिलाकर दोगुना हो गया था। साथ ही संप्रग सरकार के शुरुआती दिनों में सरकारी सेक्टर में गैर-बचत से बचत की तरफ बढने केकारण भी ऐसा मुमकिन हो पाया था। घरेलू बचत में हमें वास्तव में इतना ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। राजकोषीय स्थिति में कमी आने से सरकार एक बार फिर गैर-बचत की तरफ बढ़ जाएगी। ऐसे में अगर कॉरपोरेट सेक्टर की बात करें तो वहां बचत पिछले साल के मुकाबले आधी रह जाएगी क्योंकि उनके मुनाफेपर भारी असर पड़ा है। इस तरह पैंतीस फीसदी की बचत दर को अगर हम आने वाले साल में सत्ताईस-अट्ठाईस फीसदी के स्तर पर बनाए रखने में कामयाब रहे तो हम सौभाग्यशाली कहलाएंगे। इस तरह से निवेश की दर भी सैंतीस-अड़तीस फीसदी से गिरकर तीस फीसदी के आसपास आ जाएगी। विकास और पूंजी निर्माण पर यही असली असर होगा। राजकोष में भारी गिरावट के इस दौर में हम एक और समस्या से घिरने वाले हैं क्योंकि इस साल के लिए सरकारी उधारी तीन लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगी। वैसे साल में जब कॉरपोरेट क्रेडिट की मांग में कमी आ रही है, इस तरह की उधारी घरेलू बचत से पूरी की जा सकती है। लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी, घरेलू बचत कॉरपोरेट इंडिया की विकास की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगी, साथ ही बढ़ते सरकारी खर्चों के संबंध में भी। अगर बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी के प्रवाह के बिना हम बारह फीसदी के राजकोषीय घाटे के वित्त पोषण और आठ फीसदी की जीडीपी वृध्दि दर को बनाए रखना चाहते हैं तो ब्याज दर को उचित दर पर रखे जाने का कोई रास्ता नहीं है। बड़ी संख्या में कॉरपोरेट घरानों ने अपने वित्त की दिशा ऑफशोर यानी विदेशों की ओर मोड़ दी है, उनमें से ज्यादातर अब देश में पुनर्वित्त के जरिए आ रहा है। अगर ब्याज दर में बढ़ोतरी हुई तो यह एक बार फिर विकास, निवेश और कंपनियों के मुनाफे पर अवरोध खड़ा करेगा। अन्य मुद्दा है हमारे आधारभूत संरचना में कमी का। संसाधनों में कमी की वजह से सरकार ने इस बाबत पीपीपी रूट यानी सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी का सहारा लिया था ताकि इसके लिए पूंजी को आकर्षित किया जा सके। बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण अब आधारभूत संरचना के लिए रकम उपलब्ध नहीं है और अब वैश्विक स्तर पर भी पूंजी उपलब्ध है जो इस खाई को पाट सके। आधारभूत संरचना के कई क्षेत्रों को अब भी नीतिगत रूप से पीपीपी के लिए नहीं खोला गया है। इस संबंध में नीति की बाबत विवाद हो सकता है, लेकिन अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार के पास कोई रास्ता नहीं है। सच्चाई यह है कि भारी भरकम राजकोषीय घाटे ने भारत को कॉरपोरेट सेक्टर व आधारभूत संरचना के वित्त पोषण के लिए प्राइवेट विदेशी पूंजी प्रवाह पर निर्भर बना दिया है। मजबूत पूंजी प्रवाह के बिना हम अपनी विकास दर का आकलन करने में सक्षम नहीं हो पा रहे, जैसा कि यह देश अपेक्षा कर रहा है। ऐसे समय में जब हम पूरी तरह पूंजी के प्रवाह पर निर्भर हैं, वैश्विक वातावरण खतरे वाली पूंजी की खातिर ज्यादा प्रतिकूल हो गया है। वर्तमान में लंबी अवधि वाली पूंजी के लिए तरलता के काफी कम स्रोत रह गए हैं या फिर वैसे लोग कम रह गए हैं जो ऐसे खतरे उठाने के लिए तैयार हों। ओईसीडी जहां पूरे बैंकिंग सिस्टम के अर्ध्दराष्ट्रीयकरण की बात कर रहा है, पूंजी देश में वापस लौट जाएगी। हमें इस बात का अहसास करना होगा कि किसी भगवान ने हमें अरबों की पूंजी हासिल करने का अधिकार नहीं दिया है । हमें पूंजी को आकर्षित करने के लिहाज से अपनी नीतियां बनानी होंगी और वैसे वैश्विक वित्तीय निवेशकों में आत्मविश्वास पैदा करना होगा जिन देशों से हमारा कारोबार चलता है। लंबी अवधि के निवेशकों को हमें बताना होगा कि लंबी अवधि तक विकास दर बनाए रखने की जरूरत के हिसाब से हम कठिन आर्थिक फैसले ले सकते हैं। उभरते हुए बाजार में उपलब्ध सीमित पूंजी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए उनसे प्रतिद्वंद्विता करनी होगी। हमारी ढांचागत विकास दर को देखते हुए वैश्विक निवेशक एक बार फिर उत्साहित हो सकते हैं। हमारा मानना है कि निवेशक भारत में बने रहेंगे और यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भी आंशिक रूप से सही है कि वित्तीय पूंजी के मामले में इस तरह की कोई प्रतिबध्दता नहीं है। निवेशक वहीं जाएंगे जहां उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा। ढांचागत राजकोषीय घाटे के मुद्दे से पार पाने के लिए या तो हम अपने खर्चों और सब्सिडी का लक्ष्य तय करें या फिर विनिवेश और सरकारी संपत्ति मसलन स्पेक्ट्रम की बिक्री करें। इन कदमों के अभाव में हम दहाई अंक के राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दर, कमजोर आधारभूत संरचना आदि में उलझ जाएंगे। अगर नई सरकार शिक्षा, श्रम नीति, वित्तीय प्रणाली आदि में दूसरी पीढ़ी के सुधार का काम हाथ में ले तो हम निवेशकों का भरोसा लौटा सकते हैं और वैश्विक पूंजी प्रवाह में अपने हिस्से का दावा कर सकते हैं। भारत की स्थिति मजबूत है। हमारी अर्थव्यवस्था बड़ी है जो निर्यात पर कम से कम निर्भर है। देसी बाजार में पैंसठ फीसदी माल खपत होता है और हमारा जनसंख्या का स्वरूप बताता है कि उपभोग का स्तर मजबूत बना रहेगा और हमारी बैंकिंग प्रणाली दिवालिया होने से बची रहेगी। भारत की स्थिति अलग है और हमारी किस्मत भी काफी हद तक हमारे हाथों में ही है। अच्छी नीति उत्पादकता और विकास दोनों में भारी अंतर ला सकती है। अगर हम आर्थिक सुधार करते हैं और मजबूत आर्थिक नीति बनाते हैं तो हम अच्छी तरह विकास कर सकते हैं और निवेशकों को भी आकर्षित कर सकते हैं। यही मौका है जब हम अपने आपको दूसरे से अलग दिखा सकते हैं। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में आज सुबह 25 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. आज यानी 9 अप्रैल को हल्के बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है. हाल ही के सैटेलाइट इमेजरी से दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश पर एक तीव्र पैच दिखाई दे रहा है.
मौसम विभाग ने हालांकि बारिश की उम्मीद नहीं जताई थी, बादलों की यह स्थिति लोकल हीटिंग और वातावरण में बढ़े नमी का परिणाम है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख और तल्ख होगा।
शुक्रवार की सुबह आसमान पूरी तरह बादलों की कैद में रहा, रात को अंधड़ और तेज हवाओं के बाद आसमान पूरी तरह बादलों की कैद में आ गया। कई इलाकों में मामूली बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। जबकि तेज हवाओं की वजह से धूल भरी आंधी का अहसास हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार आज मराठवाड़ा, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में आज बारिश की संभावना जताई जा रही है.
यह आंधी भी थोड़ी ही देर में थम भी गई। इसके बाद आसमान बादलों की कैद में रात भर बना रहा, कई इलाकों में इस दौरान बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। सुबह काले बादलों ने मानसून सरीखा अहसास कराया।
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मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में आज सुबह पच्चीस डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. आज यानी नौ अप्रैल को हल्के बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है. हाल ही के सैटेलाइट इमेजरी से दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश पर एक तीव्र पैच दिखाई दे रहा है. मौसम विभाग ने हालांकि बारिश की उम्मीद नहीं जताई थी, बादलों की यह स्थिति लोकल हीटिंग और वातावरण में बढ़े नमी का परिणाम है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख और तल्ख होगा। शुक्रवार की सुबह आसमान पूरी तरह बादलों की कैद में रहा, रात को अंधड़ और तेज हवाओं के बाद आसमान पूरी तरह बादलों की कैद में आ गया। कई इलाकों में मामूली बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। जबकि तेज हवाओं की वजह से धूल भरी आंधी का अहसास हुआ। मौसम विभाग के अनुसार आज मराठवाड़ा, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में आज बारिश की संभावना जताई जा रही है. यह आंधी भी थोड़ी ही देर में थम भी गई। इसके बाद आसमान बादलों की कैद में रात भर बना रहा, कई इलाकों में इस दौरान बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। सुबह काले बादलों ने मानसून सरीखा अहसास कराया।
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बेशक क़ियामत के दिन अल्लाह तआला के कुछ बन्दे अल्लाह तआला के हमनशीन होंगे जो अर्श के दाएं जानिब होंगे और अल्लाह तआला के दोनों हाथ दाहिने ही हैं । वह नूर के मेम्बरों पर बैठे होंगे उनके चेहरे नूर के होंगे, वें न अम्बिया होंगे न शुहदा और न सिद्दीक़ीन । अर्ज किया गया : या रसूलुल्लाह ! वे कौन होंगे? इर्शाद फ़रमायाः ये वह लोग होंगे जो अल्लाह तआला की अजमत व जलाल की वजह से एक दूसरे से मुहब्बत रखते थे। (तवरानी, मज्मउज्ज़वाइद)
192 عن أبي مالك الأشعري رضي الله عنه عن رسول اللہ ﷺﷺ قال: يايها النّاسُ اسمعوا واعـقـلـوا، واعلموا أن الله عز وجل عبادا ليسوا بأنبياء، ولا شهداء، يغبطهم الأنبياء والشهداء على مجالسهم وقربهم من الله فجاء رجل من الأغراب من قاصية الناس والوى بيده إلى نبي الله ﷺ فقال: يا نبي الله! ناس من الناس ليسوا بأنبياء، ولا شهداء، يـغـبـطـهـم الانبياء والشهداء على مجالسهم وقربهم من الله إنعتهم لنا يعنى صفهم لنا، فسر وجه رسول اللہ ﷺ لسؤال الاغرابي، فقال رسول اللہ ﷺ: هم ناس
من أفناء الناس،ونوازع القبائل لم تصل بينهم أرحام متقاربة، تحابوا في الله وتضافوا يضع الله لهم يوم القيامة منابر من نور فيجلسهم عليها، فيجعل وجوههم نورا وثيابهم نورا يـفـزع الناس يوم القيامة ولا يفزعون، وهم أولياء الله الذين لا خوف عليهم ولا
راه احمد ٣٤٣/٥
192 हज़रत अबू मालिक अशअरी से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया : लोगो ! सुनो और समझो, और जान लो कि अल्लाह तआला के कुछ बन्दे ऐसे हैं जो न नबी हैं और न शहीद हैं, उनके बैठने के ख़ास मक़ाम और अल्लाह तआला से उनके ख़ास कुर्ब और ताल्लुक़ की वजह से अम्बिया और शुहदा उन पर से रश्क करेंगे । एक देहाती आदमी ने जो मदीना मुनव्वरा से दूर (देहात का) रहने वाला आया हुआ था, ( मुतवज्जह करने के लिए) अपने हाथ से रसूलुल्लाह की तरफ़ इशारा किया और अर्ज़ कियाः या रसूलुल्लाह! कुछ लोग ऐसे होंगे जो अम्बिया होंगे और न शुहदा । अम्बिया और शुहदा उनके बैठने के ख़ास मक़ाम और उनके अल्लाह तआला से ख़ास कुर्ब और ताल्लुक़ की वजह से उन पर रश्क करेंगे। आप उनका हाल ब्यान फ़रमा दीजिए, यानी उनकी सिफ़ात ब्यान फ़रमा दीजिए। उस देहाती के सवाल से रसूलुल्लाह के मुबारक चेहरे पर ख़ुशी के आसार ज़ाहिर हुए । रसूलुल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया ये आम लोगों में से गैर मारूफ़ अफ़राद और
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बेशक क़ियामत के दिन अल्लाह तआला के कुछ बन्दे अल्लाह तआला के हमनशीन होंगे जो अर्श के दाएं जानिब होंगे और अल्लाह तआला के दोनों हाथ दाहिने ही हैं । वह नूर के मेम्बरों पर बैठे होंगे उनके चेहरे नूर के होंगे, वें न अम्बिया होंगे न शुहदा और न सिद्दीक़ीन । अर्ज किया गया : या रसूलुल्लाह ! वे कौन होंगे? इर्शाद फ़रमायाः ये वह लोग होंगे जो अल्लाह तआला की अजमत व जलाल की वजह से एक दूसरे से मुहब्बत रखते थे। एक सौ बानवे عن أبي مالك الأشعري رضي الله عنه عن رسول اللہ ﷺﷺ قال: يايها النّاسُ اسمعوا واعـقـلـوا، واعلموا أن الله عز وجل عبادا ليسوا بأنبياء، ولا شهداء، يغبطهم الأنبياء والشهداء على مجالسهم وقربهم من الله فجاء رجل من الأغراب من قاصية الناس والوى بيده إلى نبي الله ﷺ فقال: يا نبي الله! ناس من الناس ليسوا بأنبياء، ولا شهداء، يـغـبـطـهـم الانبياء والشهداء على مجالسهم وقربهم من الله إنعتهم لنا يعنى صفهم لنا، فسر وجه رسول اللہ ﷺ لسؤال الاغرابي، فقال رسول اللہ ﷺ: هم ناس من أفناء الناس،ونوازع القبائل لم تصل بينهم أرحام متقاربة، تحابوا في الله وتضافوا يضع الله لهم يوم القيامة منابر من نور فيجلسهم عليها، فيجعل وجوههم نورا وثيابهم نورا يـفـزع الناس يوم القيامة ولا يفزعون، وهم أولياء الله الذين لا خوف عليهم ولا راه احمد तीन सौ तैंतालीस/पाँच एक सौ बानवे हज़रत अबू मालिक अशअरी से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया : लोगो ! सुनो और समझो, और जान लो कि अल्लाह तआला के कुछ बन्दे ऐसे हैं जो न नबी हैं और न शहीद हैं, उनके बैठने के ख़ास मक़ाम और अल्लाह तआला से उनके ख़ास कुर्ब और ताल्लुक़ की वजह से अम्बिया और शुहदा उन पर से रश्क करेंगे । एक देहाती आदमी ने जो मदीना मुनव्वरा से दूर रहने वाला आया हुआ था, अपने हाथ से रसूलुल्लाह की तरफ़ इशारा किया और अर्ज़ कियाः या रसूलुल्लाह! कुछ लोग ऐसे होंगे जो अम्बिया होंगे और न शुहदा । अम्बिया और शुहदा उनके बैठने के ख़ास मक़ाम और उनके अल्लाह तआला से ख़ास कुर्ब और ताल्लुक़ की वजह से उन पर रश्क करेंगे। आप उनका हाल ब्यान फ़रमा दीजिए, यानी उनकी सिफ़ात ब्यान फ़रमा दीजिए। उस देहाती के सवाल से रसूलुल्लाह के मुबारक चेहरे पर ख़ुशी के आसार ज़ाहिर हुए । रसूलुल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया ये आम लोगों में से गैर मारूफ़ अफ़राद और
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शिवपुरी। शिवपुरी जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को दूरूस्त किए जाने हेतु एवं टीकाकरण कार्य में लापरवाही बरतने वाली पांच एएनएम की वेतन काटने की कार्यवाही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एम.एस.सागर द्वारा की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार 0 से लेकर 05 वर्ष तक की आयु के बच्चों के जीवन रक्षा हेतु प्रति मंगलवार एवं शुक्रवार को विधिवत रूप से विशेष व्हीएचएनडी आयोजन के तहत एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता के दल द्वारा टीकाकरण का कार्य किया जाता है।
नरवर विकासखण्ड के खण्ड चिकित्सा अधिकारी द्वारा 28 अप्रैल को भ्रमण के दौरान उपस्वास्थ्य केन्द्र सुनारी, दोनी, वहगवां, पायगा एवं हथेडा का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान इन केन्द्रों पर पदस्थ एएनएम क्रमशः श्रीमती सरोज शर्मा, श्रीमती लक्ष्मी रिटोरिया, श्रीमती शकुंतला चौधरी, श्रीमती सुखदेवी जाटव, श्रीमती सरोजनी अडगले टीकाकरण दिवस के दिन अनुपस्थित पाई गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उक्त एएनएम का एक दिन का वेतन काटने की कार्यवाही की गई है।
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शिवपुरी। शिवपुरी जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को दूरूस्त किए जाने हेतु एवं टीकाकरण कार्य में लापरवाही बरतने वाली पांच एएनएम की वेतन काटने की कार्यवाही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एम.एस.सागर द्वारा की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार शून्य से लेकर पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों के जीवन रक्षा हेतु प्रति मंगलवार एवं शुक्रवार को विधिवत रूप से विशेष व्हीएचएनडी आयोजन के तहत एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता के दल द्वारा टीकाकरण का कार्य किया जाता है। नरवर विकासखण्ड के खण्ड चिकित्सा अधिकारी द्वारा अट्ठाईस अप्रैल को भ्रमण के दौरान उपस्वास्थ्य केन्द्र सुनारी, दोनी, वहगवां, पायगा एवं हथेडा का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान इन केन्द्रों पर पदस्थ एएनएम क्रमशः श्रीमती सरोज शर्मा, श्रीमती लक्ष्मी रिटोरिया, श्रीमती शकुंतला चौधरी, श्रीमती सुखदेवी जाटव, श्रीमती सरोजनी अडगले टीकाकरण दिवस के दिन अनुपस्थित पाई गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उक्त एएनएम का एक दिन का वेतन काटने की कार्यवाही की गई है।
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