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पावंटा साहिब में सनातन धर्म सभा के द्वारा संचालित गीता भवन मंदिर में नव मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन गुरुवार को बड़ी धूमधाम से किया गया। आयोजन के दौरान सुबह आठ बजे यमुना घाट पर नव मूर्तियों का अभिषेक व हवन करने के साथ नगर परिक्रमा व निशान शोभायात्रा निकाली गई जिसमें हजारों की तदाद में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान राधे राधे , जय श्री राम के जयकारों से पांवटा शहर गूंज उठा। यह शोभा यात्रा साढ़े गयारह बजे बद्रीपुर शिव मंदिर से होकर बाजार होते हुए गीता भवन मंदिर तक पहुंची जहां इन मूर्तियों का पूजन शुरू हुआ। आयोजकों ने बताया कि 20 जनवरी से 25 जनवरी तक मुख्य कार्यक्रम का आयोजन रहेगा, जिसमें नव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पूजन सुबह आठ बजे से शुरुआत होगा जबकि सायं की आरती होगी। वहीं गुरुवार 26 जनवरी को साढ़े नौ बजे हवन शुरू करने के साथ भव्य संकीर्तन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति होगी। नवनिर्मित गीता भवन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संकीर्तन महोत्सव का आयोजन भी करवाया जा रहा है। शिवलिंग और शिव परिवार,हनुमान जी एलक्ष्मी नारायण जी,दुर्गा माता,राम दरबार,राधा कृष्ण और खाटू श्याम बाबा जी नव ग्रह ये मूर्तियां स्थापित होगी। संचालन सनातन धर्म सभा की देखरेख में किया जा रहा है। मंदिर भवन का निर्माण अभी तक तकरीबन तीन करोड़ तक हो चुका है,जिसमें मध्यम वर्ग के लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी की गयी है। यहां एक हाल भी बना है जिसमें कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाएगा। सनातन धर्मा सभा के प्रधान राजेंद्र अग्रवाल, अनिल गुप्ता, दिनेश गुप्ता, मयंक महावर,अजय संसरवाल, नीरभ गुप्ता, अजय मंगल, मुकेश गुप्ता, राकेश कश्यप, गर्वित गुप्ता, मयंक सिंघल,नीरज गुप्ता आदि कार्यक्रम का संचालन करेंगे।
पावंटा साहिब में सनातन धर्म सभा के द्वारा संचालित गीता भवन मंदिर में नव मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन गुरुवार को बड़ी धूमधाम से किया गया। आयोजन के दौरान सुबह आठ बजे यमुना घाट पर नव मूर्तियों का अभिषेक व हवन करने के साथ नगर परिक्रमा व निशान शोभायात्रा निकाली गई जिसमें हजारों की तदाद में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान राधे राधे , जय श्री राम के जयकारों से पांवटा शहर गूंज उठा। यह शोभा यात्रा साढ़े गयारह बजे बद्रीपुर शिव मंदिर से होकर बाजार होते हुए गीता भवन मंदिर तक पहुंची जहां इन मूर्तियों का पूजन शुरू हुआ। आयोजकों ने बताया कि बीस जनवरी से पच्चीस जनवरी तक मुख्य कार्यक्रम का आयोजन रहेगा, जिसमें नव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पूजन सुबह आठ बजे से शुरुआत होगा जबकि सायं की आरती होगी। वहीं गुरुवार छब्बीस जनवरी को साढ़े नौ बजे हवन शुरू करने के साथ भव्य संकीर्तन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति होगी। नवनिर्मित गीता भवन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संकीर्तन महोत्सव का आयोजन भी करवाया जा रहा है। शिवलिंग और शिव परिवार,हनुमान जी एलक्ष्मी नारायण जी,दुर्गा माता,राम दरबार,राधा कृष्ण और खाटू श्याम बाबा जी नव ग्रह ये मूर्तियां स्थापित होगी। संचालन सनातन धर्म सभा की देखरेख में किया जा रहा है। मंदिर भवन का निर्माण अभी तक तकरीबन तीन करोड़ तक हो चुका है,जिसमें मध्यम वर्ग के लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी की गयी है। यहां एक हाल भी बना है जिसमें कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाएगा। सनातन धर्मा सभा के प्रधान राजेंद्र अग्रवाल, अनिल गुप्ता, दिनेश गुप्ता, मयंक महावर,अजय संसरवाल, नीरभ गुप्ता, अजय मंगल, मुकेश गुप्ता, राकेश कश्यप, गर्वित गुप्ता, मयंक सिंघल,नीरज गुप्ता आदि कार्यक्रम का संचालन करेंगे।
रांचीः राष्ट्रीय अध्यक्ष दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के लिए बिहार से रांची आ रहे पार्टी के एक नेता विजेंद्र यादव की रविवार को सड़क हादसे में मौत हो गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले टिकट की इच्छा को लेकर ससाराम जिले के पूर्व जिला पार्षद सह आरजेडी नेता विजेंद्र यादव अपने करीबियों के साथ कार से रांची आ रहे थे. बताया गया है कि हजारीबाग के बरही थाना क्षेत्र के बरसोत के निकट उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि कार में सवार दो अन्य लोग घायल हो गये. घायलों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया है.
रांचीः राष्ट्रीय अध्यक्ष दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के लिए बिहार से रांची आ रहे पार्टी के एक नेता विजेंद्र यादव की रविवार को सड़क हादसे में मौत हो गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले टिकट की इच्छा को लेकर ससाराम जिले के पूर्व जिला पार्षद सह आरजेडी नेता विजेंद्र यादव अपने करीबियों के साथ कार से रांची आ रहे थे. बताया गया है कि हजारीबाग के बरही थाना क्षेत्र के बरसोत के निकट उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि कार में सवार दो अन्य लोग घायल हो गये. घायलों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया है.
हज हाउस की तर्ज पर करीब नौ हजार वर्ग मीटर भूमि पर बने कैलाश मानसरोवर भवन में 300 कमरे हैं। यहां यात्रियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी। लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अराजकता की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। पिछले तीन साल में काूनन की व्यवस्था में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर देश की आत्मा है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के विकास में यहां के जनप्रतिनिधियों का भी बडा योगदान है। वह आज गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थें। 132 करोड की लागत से बने इस भवन को इंदिरापुरम में बनाया गया है। इस भवन में तीन सौ लोगों के ठहरने की व्ववस्था होगी। यह भी बताना जरूरी है कि लखनऊ और गाजियाबाद में पिछली सपा सरकार में हज हाउस का निर्माण कराया गया था। हज हाउस का करीब 51 करोड़ की लागत से निर्माण कराया गया था। 4. 3 एकड़ में बने इस हज हाउस में ग्राउंड प्लस 6 फ्लोर बनाए गए हैं, जिसमें 47 डॉरमेट्री हॉल और 36 वीआईपी कमरे भी शामिल हैं। इस हज हाउस में करीब 2000 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। यह हज हाउस पूरी सुविधाओं से लैस है। जिसका उद्घाटन सितंबर 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा किया गया था। इस मौके पर योगी ने कहा कि जिन्हे भारत का विकास अच्छा नहीं लगता उनकी दिन रात की नींद पूरी तरह से समाप्त हो गयी है वहीं वह देश के खिलाफ षडयन्त्र रचने में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने नियमों के तहत ही इसे बनवाया है हज हाउस की तरह नहीं बनवाया। उन्होंने कहा कि भारत का कण कण षंकर है। योगी ने कहा कि पूर्व की सरकारों में कामों को लटकाया जाता था। लेकिन मेरी डिक्शनरी में न शब्द नही है। इसलिए तीन साल के अंदर कैलाश मानसरोवर का काम पूरा कराया गया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक लम्बी लडाई लडी है। जल्द की कोरोना की वैक्सीन आने वाली है। थोडे से धैर्य की और जरूरत है फिर हम लोग इस पर विजय प्राप्त कर लेगे। हज हाउस की तर्ज पर इंदिरापुरम के शक्तिखंड-4 में करीब नौ हजार वर्ग मीटर भूमि पर बने कैलाश मानसरोवर भवन में 300 कमरे हैं। भवन में कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अन्य महीनों में उत्तराखंड के चार धाम यात्रा और कश्मीर में बाबा अमरनाथ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इस भवन में रुकने की सुविधा दी जाएगी। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
हज हाउस की तर्ज पर करीब नौ हजार वर्ग मीटर भूमि पर बने कैलाश मानसरोवर भवन में तीन सौ कमरे हैं। यहां यात्रियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी। लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अराजकता की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। पिछले तीन साल में काूनन की व्यवस्था में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर देश की आत्मा है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के विकास में यहां के जनप्रतिनिधियों का भी बडा योगदान है। वह आज गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थें। एक सौ बत्तीस करोड की लागत से बने इस भवन को इंदिरापुरम में बनाया गया है। इस भवन में तीन सौ लोगों के ठहरने की व्ववस्था होगी। यह भी बताना जरूरी है कि लखनऊ और गाजियाबाद में पिछली सपा सरकार में हज हाउस का निर्माण कराया गया था। हज हाउस का करीब इक्यावन करोड़ की लागत से निर्माण कराया गया था। चार. तीन एकड़ में बने इस हज हाउस में ग्राउंड प्लस छः फ्लोर बनाए गए हैं, जिसमें सैंतालीस डॉरमेट्री हॉल और छत्तीस वीआईपी कमरे भी शामिल हैं। इस हज हाउस में करीब दो हज़ार लोग एक साथ बैठ सकते हैं। यह हज हाउस पूरी सुविधाओं से लैस है। जिसका उद्घाटन सितंबर दो हज़ार सोलह में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा किया गया था। इस मौके पर योगी ने कहा कि जिन्हे भारत का विकास अच्छा नहीं लगता उनकी दिन रात की नींद पूरी तरह से समाप्त हो गयी है वहीं वह देश के खिलाफ षडयन्त्र रचने में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने नियमों के तहत ही इसे बनवाया है हज हाउस की तरह नहीं बनवाया। उन्होंने कहा कि भारत का कण कण षंकर है। योगी ने कहा कि पूर्व की सरकारों में कामों को लटकाया जाता था। लेकिन मेरी डिक्शनरी में न शब्द नही है। इसलिए तीन साल के अंदर कैलाश मानसरोवर का काम पूरा कराया गया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक लम्बी लडाई लडी है। जल्द की कोरोना की वैक्सीन आने वाली है। थोडे से धैर्य की और जरूरत है फिर हम लोग इस पर विजय प्राप्त कर लेगे। हज हाउस की तर्ज पर इंदिरापुरम के शक्तिखंड-चार में करीब नौ हजार वर्ग मीटर भूमि पर बने कैलाश मानसरोवर भवन में तीन सौ कमरे हैं। भवन में कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अन्य महीनों में उत्तराखंड के चार धाम यात्रा और कश्मीर में बाबा अमरनाथ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इस भवन में रुकने की सुविधा दी जाएगी। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
संयोजक की चक-चक महामूर्ख सम्मेलन में आये हुए सभी मूर्खों को मेरा नही नहीं यह शब्द में नही लिखूंगा, वैसे होता यह है कि मैं तो इस कार्यक्रम के लिए पूरे वर्ष भ मूर्ख बना रहता हू, लेकिन आप सभी लोग समय आने पर आगे बढ कर आ जाते है। स्थिति यह है कि जयपुर की इम सास्कृतिक और सामाजिक गतिविधियो यो मागे बढाने तथा बहुरगी रूप देने मे हम लोग (तरुण समाज के सभी कार्यकर्ता ) कुछ भी कसर नही उठा रखते है । लेकिन इसके बावजूद भी कुछ ऐसे लोगो की कमी नहीं है जो साधन-सम्पन्न होने के बावजूद भी सिर्फ ऐसे ही कार्यक्रमो मे मदद देते हैं जिन्हे उन्हे प्रकारान्तर से कोई फायदा हो । भाई, ऐसे जन-रजन के कार्यक्रम में हम कहा किसी को 'ऑॉटलाइज कर सकते हैं ? लेकिन हमारी मान्यता है कि ऐसे लोग मात्र यही धारणा लेकर चलते हैं तो श्राने वाले समय में उनका क्या हुआ हो माता है, वे स्वय ही सोच ले । ऐसा जन-रजन का नि शुल्क कार्यक्रम क्या कभी राजस्थान में हुआ है और नही हुआ तो ऐसा कार्यक्रम क्या स्वयसेवी और कर्मयोगी कार्यकर्ता विना सम्भव हो सकता है - मीधा सा उत्तर है 'नहीं' । लेकिन हमे गौरव है कि जयपुर जनता और कुछ सरल हृदयी लोग जो यह मान कर चलते है चलना ही चाहिये और स्वत आगे वढ कर अपना सहयोग देने है उसने हमारा मनो वल ऊँचा उठता है और नि सदेह वे बधाई के पात्र हैं। मैं इस अवसर पर राज्य के कर्मठ मुख्यमंत्री माननीय हरिदेव जोशी विशेष आभार प्रदर्शित करूंगा जो राज्य की सामाजिक और सास्कृतिक मे के विशेष रुचि लेते है और इसी दृष्टिकोण मे उन्होंने इस जन-रजन के अपनी व्यक्तिगत रुचि ली है तथा इसे ग्रागे वहाने मे नि सकोच महायता दी । इमी सदर्भ मे, परामर्श समिति के श्रादरणीय सदस्य श्री मन्नान सुराणा, उमरावमल चोरडिया, लाभचंद लोढा, ताराचंद मालू मावान र मगल बिहारी, हरिदत्त गुप्ता, डॉ के सी कोटिया एवं मनोगन्द्र न अनुप्रहीत हू जिन्होंने स्वम आगे बढ़ कर इस जन-सम्मेलनको आगे सक्रिय सहयोग दिया। ये लोग नि मन्देहमा के इस नगर को गास्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने हैं।
संयोजक की चक-चक महामूर्ख सम्मेलन में आये हुए सभी मूर्खों को मेरा नही नहीं यह शब्द में नही लिखूंगा, वैसे होता यह है कि मैं तो इस कार्यक्रम के लिए पूरे वर्ष भ मूर्ख बना रहता हू, लेकिन आप सभी लोग समय आने पर आगे बढ कर आ जाते है। स्थिति यह है कि जयपुर की इम सास्कृतिक और सामाजिक गतिविधियो यो मागे बढाने तथा बहुरगी रूप देने मे हम लोग कुछ भी कसर नही उठा रखते है । लेकिन इसके बावजूद भी कुछ ऐसे लोगो की कमी नहीं है जो साधन-सम्पन्न होने के बावजूद भी सिर्फ ऐसे ही कार्यक्रमो मे मदद देते हैं जिन्हे उन्हे प्रकारान्तर से कोई फायदा हो । भाई, ऐसे जन-रजन के कार्यक्रम में हम कहा किसी को 'ऑॉटलाइज कर सकते हैं ? लेकिन हमारी मान्यता है कि ऐसे लोग मात्र यही धारणा लेकर चलते हैं तो श्राने वाले समय में उनका क्या हुआ हो माता है, वे स्वय ही सोच ले । ऐसा जन-रजन का नि शुल्क कार्यक्रम क्या कभी राजस्थान में हुआ है और नही हुआ तो ऐसा कार्यक्रम क्या स्वयसेवी और कर्मयोगी कार्यकर्ता विना सम्भव हो सकता है - मीधा सा उत्तर है 'नहीं' । लेकिन हमे गौरव है कि जयपुर जनता और कुछ सरल हृदयी लोग जो यह मान कर चलते है चलना ही चाहिये और स्वत आगे वढ कर अपना सहयोग देने है उसने हमारा मनो वल ऊँचा उठता है और नि सदेह वे बधाई के पात्र हैं। मैं इस अवसर पर राज्य के कर्मठ मुख्यमंत्री माननीय हरिदेव जोशी विशेष आभार प्रदर्शित करूंगा जो राज्य की सामाजिक और सास्कृतिक मे के विशेष रुचि लेते है और इसी दृष्टिकोण मे उन्होंने इस जन-रजन के अपनी व्यक्तिगत रुचि ली है तथा इसे ग्रागे वहाने मे नि सकोच महायता दी । इमी सदर्भ मे, परामर्श समिति के श्रादरणीय सदस्य श्री मन्नान सुराणा, उमरावमल चोरडिया, लाभचंद लोढा, ताराचंद मालू मावान र मगल बिहारी, हरिदत्त गुप्ता, डॉ के सी कोटिया एवं मनोगन्द्र न अनुप्रहीत हू जिन्होंने स्वम आगे बढ़ कर इस जन-सम्मेलनको आगे सक्रिय सहयोग दिया। ये लोग नि मन्देहमा के इस नगर को गास्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों में सहयोग देने हैं।
आईपीएल 2022 में शानदार गेंदबाजी कर रहे युजवेंद्र चहल का फार्म लगता है आईपील के बाद चला सा गया है। आईपीएल में स्टार गेंदबाज और पर्पल कैप अपने नाम करने वाले युजवेंद्र चहल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली जा रही सीरीज में उतने घातक नजर नहीं आ रहे हैं। सीरीज के पहले मैच में युववेंद्र चहल की जमकर पिटाई हुई। कप्तान ऋषभ पंत ने उन्हें केवल दो ही ओवर कराए। तीसरा ओवर तक दिया गया, जब दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए केवल चार रन की जरूरत थी। इसके बाद दूसरे मैच में भी उन्होंने खूब रन दिए। इस मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए और एक विकेट अपने नाम किया। अभी सीरीज के तीन और मैच बाकी हैं, देखना होगा कि उसमें युजी चहल का प्रदर्शन कैसा रहता है। इस बीच युजवेंद्र चहल ने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से मिलने और बात करने को लेकर एक वाकया याद किया है। इस दौरान युवजवेंद्र चहल ने एमएस धोनी की जमकर तारीफ की और बताया कि जब उन्होंने एमएस धोनी को सर कहा तो धोनी ने क्या जवाब दिया। टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने बताया है कि वह एमएस धोनी के स्वभाव से प्रभावित हैं। एक बार एमएस धोनी को युजवेंद्र चहल ने उन्हें फोन किया और तो धोनी ने कहा कि मुझे जो मर्जी बुलाओ, लेकिन सर मत बुलाओ। युजवेंद्र चहल ने जून 2016 में जिम्बाब्वे के दौरे पर महेंद्र सिंह धोनी से वनडे कैप हासिल की थी और बाद में उन्हें टी20 में इंग्लैंड के खिलाफ मौका दिया गया था। युजवेंद्र चहल ने एक यूट्यूब शो पर कहा कि मुझे महान एमएस धोनी से वनडे कैप प्राप्त हुई। वह एक लीजेंड है और मैं पहली बार उनके साथ खेला था। मैं उसके सामने बात भी नहीं कर पा रहा था। वह इतनी अच्छी तरह से बात करते हैं कि आपको आश्चर्य होता है कि क्या वह वास्तव में महेंद्र सिंह धोनी हैं। युजी चहल ने आगे कहा कि जब मैं जिम्बाब्वे में पहली बार उनसे मिला था, तो मैं उन्हें माही सर कहता था। बाद में उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि माही, धोनी, महेंद्र सिंह धोनी या भाई आप जो चाहते हैं मुझे बुलाओ। लेकिन सर नहीं। आईपीएल 2022 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेले युजवेंद्र चहल ने इस साल सबसे ज्यादा विकेट अपने नाम किए हैं। उन्होंने कुल 27 विकेट अपने नाम किए और पर्पल कैप भी जीती। युजवेंद्र चहल ने पूर्व विश्व कप विजेता कप्तान एमएस धोनी के साथ खेलते हुए 46 वनडे मैचों में 25. 32 की औसत और 4. 92 की इकॉनमी से 81 विकेट लिए हैं। (ians inputs)
आईपीएल दो हज़ार बाईस में शानदार गेंदबाजी कर रहे युजवेंद्र चहल का फार्म लगता है आईपील के बाद चला सा गया है। आईपीएल में स्टार गेंदबाज और पर्पल कैप अपने नाम करने वाले युजवेंद्र चहल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली जा रही सीरीज में उतने घातक नजर नहीं आ रहे हैं। सीरीज के पहले मैच में युववेंद्र चहल की जमकर पिटाई हुई। कप्तान ऋषभ पंत ने उन्हें केवल दो ही ओवर कराए। तीसरा ओवर तक दिया गया, जब दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए केवल चार रन की जरूरत थी। इसके बाद दूसरे मैच में भी उन्होंने खूब रन दिए। इस मैच में उन्होंने चार ओवर में उनचास रन दिए और एक विकेट अपने नाम किया। अभी सीरीज के तीन और मैच बाकी हैं, देखना होगा कि उसमें युजी चहल का प्रदर्शन कैसा रहता है। इस बीच युजवेंद्र चहल ने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से मिलने और बात करने को लेकर एक वाकया याद किया है। इस दौरान युवजवेंद्र चहल ने एमएस धोनी की जमकर तारीफ की और बताया कि जब उन्होंने एमएस धोनी को सर कहा तो धोनी ने क्या जवाब दिया। टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने बताया है कि वह एमएस धोनी के स्वभाव से प्रभावित हैं। एक बार एमएस धोनी को युजवेंद्र चहल ने उन्हें फोन किया और तो धोनी ने कहा कि मुझे जो मर्जी बुलाओ, लेकिन सर मत बुलाओ। युजवेंद्र चहल ने जून दो हज़ार सोलह में जिम्बाब्वे के दौरे पर महेंद्र सिंह धोनी से वनडे कैप हासिल की थी और बाद में उन्हें टीबीस में इंग्लैंड के खिलाफ मौका दिया गया था। युजवेंद्र चहल ने एक यूट्यूब शो पर कहा कि मुझे महान एमएस धोनी से वनडे कैप प्राप्त हुई। वह एक लीजेंड है और मैं पहली बार उनके साथ खेला था। मैं उसके सामने बात भी नहीं कर पा रहा था। वह इतनी अच्छी तरह से बात करते हैं कि आपको आश्चर्य होता है कि क्या वह वास्तव में महेंद्र सिंह धोनी हैं। युजी चहल ने आगे कहा कि जब मैं जिम्बाब्वे में पहली बार उनसे मिला था, तो मैं उन्हें माही सर कहता था। बाद में उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि माही, धोनी, महेंद्र सिंह धोनी या भाई आप जो चाहते हैं मुझे बुलाओ। लेकिन सर नहीं। आईपीएल दो हज़ार बाईस में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेले युजवेंद्र चहल ने इस साल सबसे ज्यादा विकेट अपने नाम किए हैं। उन्होंने कुल सत्ताईस विकेट अपने नाम किए और पर्पल कैप भी जीती। युजवेंद्र चहल ने पूर्व विश्व कप विजेता कप्तान एमएस धोनी के साथ खेलते हुए छियालीस वनडे मैचों में पच्चीस. बत्तीस की औसत और चार. बानवे की इकॉनमी से इक्यासी विकेट लिए हैं।
[षष्टमको, यहां तक कि हवा - बयार, पेड़-पौधों, थाली - लोटा एवं समस्त जड़चेतन को गालियां सुनाते रहते हैं। गाली तो कोई स्वीकारता नहीं । गाली तो गाली देने वाले को ही पड़ती है। परन्तु प्रमादी आदमी को इसका कहां ख्याल है ! कितने लोगों को तो सुबह से शाम तक अर्थात वे जब तक जागते रहते टट्टी-पेशाब त्यागने की इन्द्रियों के नाम ही याद रहते हैं। वे उन्हीं नामों से अपनी वाणियों को हर समय सुशोभित करते रहते हैं कितने लोग हर समय अश्लील शब्दों से मजाक करते रहने में ही अपनी शूर वीरता समझते हैं । कितने लोग ऐसे जोर-जोर से चिल्लाते हैं कि बैठा हुआ कौआ भी भयभीत होकर भाग जाये । कितने घरों की बातचीत बराबर दूसरों के घरों में सुनायी पड़ती है। ये सब कुबोल हैं। ऐसा व्यवहार करने वाले का व्यक्तित्व गिर जाता है। मनुष्य का मन चंचल है । वह क्षण-क्षण कहां भटक जाता है कोई ठिकाना नहीं। इसी मन की चंचलता में पड़ा व्यक्ति भटकता रहता है । यह मन का भटकाव ही वाणी के भटकाव में कारण है। मन की चंचलता से आदमी निरन्तर चक्कर काट रहा है। "मन के घाले भरमत फिरे " बड़ा मार्मिक वचन है। संसार के सारे मनुष्य मन के भ्रम में पड़े हुए भटक रहे हैं । "कालहिं देत हिंडोल" मन काल के झूले में मनुष्य को झुलाता है । काल है कल्पनाएं। हर्ष-शोक, राग-द्वेष कल्पनाएं हैं। इन कल्पनाओं के हिंडोले जिनमें व्यक्ति रात-दिन झूलता है। मन की मानी हुई अनुकूलता को पाकर हर्ष, प्रतिकूलता तो पाकर शोक, अपना मानकर राग तथा विरोधी मानकर द्वेष - यह सब मन का ही तो प्रपंच है। इन्हीं हिंडोले में पड़ा जीव निरन्तर झूला झूलता है। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन को संयत करे और वाणी को वश में करे । सत्य, मिष्ट, संयत एवं कम बोलने से व्यक्तित्व उभरता है। उसकी बातों का समाज में वजन होता है । वह लोकप्रिय होता है। घर में, परिवार में, अपने लोगों में उतने ही स्वर में बातें करना चाहिए कि जिसे वे लोग आराम से सुन लें जिन्हें हम सुनाना चाहते हैं। बातों में कटुता, अश्शील एवं नोंकझोंक न हों । व्यवहार में परस्पर ऊंच-नीच हो जाने पर उन बातों को मन में बनाये न रखे, अन्यथा उन भावनाओं को लेकर बातें भी इस तरह निकलेंगी जिससे व्यवहार खराब हो जायेगा । एक साथ रहने से व्यवहार में कभी ऊंचा-नीचा हो जाना सहज है। परन्तु इन बातों को लेकर परस्पर कसक, ताना एवं नोंक-झोंक की बातें नहीं होना चाहिए । मनुष्य केवल वाणी का सुधार कर ले तो उसका बहुत व्यवहार सुधर जाये । वाणी सुधार के लिए मन को वश में करना ही पड़ेगा ।
[षष्टमको, यहां तक कि हवा - बयार, पेड़-पौधों, थाली - लोटा एवं समस्त जड़चेतन को गालियां सुनाते रहते हैं। गाली तो कोई स्वीकारता नहीं । गाली तो गाली देने वाले को ही पड़ती है। परन्तु प्रमादी आदमी को इसका कहां ख्याल है ! कितने लोगों को तो सुबह से शाम तक अर्थात वे जब तक जागते रहते टट्टी-पेशाब त्यागने की इन्द्रियों के नाम ही याद रहते हैं। वे उन्हीं नामों से अपनी वाणियों को हर समय सुशोभित करते रहते हैं कितने लोग हर समय अश्लील शब्दों से मजाक करते रहने में ही अपनी शूर वीरता समझते हैं । कितने लोग ऐसे जोर-जोर से चिल्लाते हैं कि बैठा हुआ कौआ भी भयभीत होकर भाग जाये । कितने घरों की बातचीत बराबर दूसरों के घरों में सुनायी पड़ती है। ये सब कुबोल हैं। ऐसा व्यवहार करने वाले का व्यक्तित्व गिर जाता है। मनुष्य का मन चंचल है । वह क्षण-क्षण कहां भटक जाता है कोई ठिकाना नहीं। इसी मन की चंचलता में पड़ा व्यक्ति भटकता रहता है । यह मन का भटकाव ही वाणी के भटकाव में कारण है। मन की चंचलता से आदमी निरन्तर चक्कर काट रहा है। "मन के घाले भरमत फिरे " बड़ा मार्मिक वचन है। संसार के सारे मनुष्य मन के भ्रम में पड़े हुए भटक रहे हैं । "कालहिं देत हिंडोल" मन काल के झूले में मनुष्य को झुलाता है । काल है कल्पनाएं। हर्ष-शोक, राग-द्वेष कल्पनाएं हैं। इन कल्पनाओं के हिंडोले जिनमें व्यक्ति रात-दिन झूलता है। मन की मानी हुई अनुकूलता को पाकर हर्ष, प्रतिकूलता तो पाकर शोक, अपना मानकर राग तथा विरोधी मानकर द्वेष - यह सब मन का ही तो प्रपंच है। इन्हीं हिंडोले में पड़ा जीव निरन्तर झूला झूलता है। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन को संयत करे और वाणी को वश में करे । सत्य, मिष्ट, संयत एवं कम बोलने से व्यक्तित्व उभरता है। उसकी बातों का समाज में वजन होता है । वह लोकप्रिय होता है। घर में, परिवार में, अपने लोगों में उतने ही स्वर में बातें करना चाहिए कि जिसे वे लोग आराम से सुन लें जिन्हें हम सुनाना चाहते हैं। बातों में कटुता, अश्शील एवं नोंकझोंक न हों । व्यवहार में परस्पर ऊंच-नीच हो जाने पर उन बातों को मन में बनाये न रखे, अन्यथा उन भावनाओं को लेकर बातें भी इस तरह निकलेंगी जिससे व्यवहार खराब हो जायेगा । एक साथ रहने से व्यवहार में कभी ऊंचा-नीचा हो जाना सहज है। परन्तु इन बातों को लेकर परस्पर कसक, ताना एवं नोंक-झोंक की बातें नहीं होना चाहिए । मनुष्य केवल वाणी का सुधार कर ले तो उसका बहुत व्यवहार सुधर जाये । वाणी सुधार के लिए मन को वश में करना ही पड़ेगा ।
सिडनी - । वैज्ञानिकों ने कुछ भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई औषधीय पौधे के अर्क तैयार किए हैं, जो मधुमेह की रोकथाम में मददगार हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया के स्विनबर्न प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 12 औषधीय पौधों के अर्क की जांच की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कार्बोहाइड्रेट उपापचय में सक्रिय दो प्रमुख एन्जाइम्स को मंद करने का गुण है या नहीं, जो रक्त शर्करा और मधुमेह रोग को प्रभावित करते हैं। यह अर्क ऑस्ट्रेलिया के सात प्राचीन औषधीय पौधों और पांच भारतीय आयुर्वेदिक पौधों से निकाले गए हैं। बीएमसी कॉम्पलीमेंट्री एंड ऑल्टरनेटिव मेडिसिन पत्रिका की रपट के मुताबिक, इन अर्को में ऑस्ट्रलियाई सैंडलवुड (चंदन) और भारतीय कीनो ट्री के अर्क दोनों एंजाइम्स को मंद करने में काफी प्रभावी रहे हैं। स्विनबर्न विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के सहलेखक एंजो पालोमबो ने कहा, मधुमेह विश्व के जन स्वास्थ्य के बोझ का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त करीब विश्वभर में 18 करोड़ से ज्यादा लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। स्वीनबर्न के एक कथन के मुताबिक, पालोमोबा ने कहा, आठ सौ से ज्यादा पौधे पारंपरिक तौर पर किसी न किसी रूप में मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन बगैर किसी कुप्रभाव के इस रोग पर नियंत्रण कर पाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
सिडनी - । वैज्ञानिकों ने कुछ भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई औषधीय पौधे के अर्क तैयार किए हैं, जो मधुमेह की रोकथाम में मददगार हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया के स्विनबर्न प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बारह औषधीय पौधों के अर्क की जांच की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कार्बोहाइड्रेट उपापचय में सक्रिय दो प्रमुख एन्जाइम्स को मंद करने का गुण है या नहीं, जो रक्त शर्करा और मधुमेह रोग को प्रभावित करते हैं। यह अर्क ऑस्ट्रेलिया के सात प्राचीन औषधीय पौधों और पांच भारतीय आयुर्वेदिक पौधों से निकाले गए हैं। बीएमसी कॉम्पलीमेंट्री एंड ऑल्टरनेटिव मेडिसिन पत्रिका की रपट के मुताबिक, इन अर्को में ऑस्ट्रलियाई सैंडलवुड और भारतीय कीनो ट्री के अर्क दोनों एंजाइम्स को मंद करने में काफी प्रभावी रहे हैं। स्विनबर्न विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के सहलेखक एंजो पालोमबो ने कहा, मधुमेह विश्व के जन स्वास्थ्य के बोझ का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त करीब विश्वभर में अट्ठारह करोड़ से ज्यादा लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। स्वीनबर्न के एक कथन के मुताबिक, पालोमोबा ने कहा, आठ सौ से ज्यादा पौधे पारंपरिक तौर पर किसी न किसी रूप में मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन बगैर किसी कुप्रभाव के इस रोग पर नियंत्रण कर पाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
नई दिल्ली। दीवाली का त्यौहार आने वाला है. लोग घरों में मिठाइयां बनाने की तैयारी में लग चुके हैं. कोरोना के बाद से ही लोग अब बाहर का लेने की अपेक्षा घर में मिठाइयां बनाना पसंद करते हैं. आपने गुजराती डिशेज का नाम तो बेहद सुना होगा. जैसे- ढोकला, फाफड़ा, जलेबी, उंधियू (सब्जी) आदि, लेकिन आज हम आपके लिए गुजरात की एक स्पेशल मिठाई लेकर आए हैं. जिसका नाम है 'मोहनथाल'. यह एक ट्रेडिशनल स्वीट डिश है जो बेसन, घी, चीनी और मेवे के साथ बनाई जाती है. यह समृद्ध, टेस्टी है और कुछ ही समय में हमारे मुंह में मेल्ट हो जाता है. इसका एक यूनिक क्रीमी टेस्ट है जो हर तालू पर एक मजबूत छाप छोड़ता है. और यही वजह है कि हर त्योहार या खास मौके पर फैली मिठाइयों में मोहनथाल का अखंड स्थान बना रहता है. आइए जानते हैं मोहनथाल के बारे में...टेस्टी मोहनथाल खाने के लिए तैयार है. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इस मोहनथाल को 10 दिनों तक स्टोर कर सकते हैं. - एक बाउल में बेसन का आटा लें और इसमें दूध और घी का मिक्स डाल दें. सब कुछ अच्छी तरह मिला लें, 10 मिनट के लिए रेस्ट दें. - अब मिक्स को ग्राइंडिंग जार में डालें और ब्लेंड करें. - कढ़ाई में घी डालें और पिसा हुआ बेसन डाल दें. लगातार हिलाओ, तब तक पकाएं जब तक कि यह नरम और फ्लॉफी न हो जाए. - सॉफ्ट और क्रीमी बनावट पाने के लिए धीरे-धीरे दूध डालें और मिलाएं. - जब मिक्स्चर से तेल छूटने लगे तो आंच बंद कर दें और कुछ देर से चलाएं. - बर्फी की ट्रे को ग्रीस करके बटर पेपर रख दें. . एक तरफ रख दें. - चीनी की चाशनी बनाएं और बेसन के मिक्स्चर में डालें और एक मिनट तक पकाएं. - मिक्स्चर को ट्रे में डालें और इसे सेट होने दें. - इसके ऊपर चांदी का वर्क डालकर बर्फी काट लें.
नई दिल्ली। दीवाली का त्यौहार आने वाला है. लोग घरों में मिठाइयां बनाने की तैयारी में लग चुके हैं. कोरोना के बाद से ही लोग अब बाहर का लेने की अपेक्षा घर में मिठाइयां बनाना पसंद करते हैं. आपने गुजराती डिशेज का नाम तो बेहद सुना होगा. जैसे- ढोकला, फाफड़ा, जलेबी, उंधियू आदि, लेकिन आज हम आपके लिए गुजरात की एक स्पेशल मिठाई लेकर आए हैं. जिसका नाम है 'मोहनथाल'. यह एक ट्रेडिशनल स्वीट डिश है जो बेसन, घी, चीनी और मेवे के साथ बनाई जाती है. यह समृद्ध, टेस्टी है और कुछ ही समय में हमारे मुंह में मेल्ट हो जाता है. इसका एक यूनिक क्रीमी टेस्ट है जो हर तालू पर एक मजबूत छाप छोड़ता है. और यही वजह है कि हर त्योहार या खास मौके पर फैली मिठाइयों में मोहनथाल का अखंड स्थान बना रहता है. आइए जानते हैं मोहनथाल के बारे में...टेस्टी मोहनथाल खाने के लिए तैयार है. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इस मोहनथाल को दस दिनों तक स्टोर कर सकते हैं. - एक बाउल में बेसन का आटा लें और इसमें दूध और घी का मिक्स डाल दें. सब कुछ अच्छी तरह मिला लें, दस मिनट के लिए रेस्ट दें. - अब मिक्स को ग्राइंडिंग जार में डालें और ब्लेंड करें. - कढ़ाई में घी डालें और पिसा हुआ बेसन डाल दें. लगातार हिलाओ, तब तक पकाएं जब तक कि यह नरम और फ्लॉफी न हो जाए. - सॉफ्ट और क्रीमी बनावट पाने के लिए धीरे-धीरे दूध डालें और मिलाएं. - जब मिक्स्चर से तेल छूटने लगे तो आंच बंद कर दें और कुछ देर से चलाएं. - बर्फी की ट्रे को ग्रीस करके बटर पेपर रख दें. . एक तरफ रख दें. - चीनी की चाशनी बनाएं और बेसन के मिक्स्चर में डालें और एक मिनट तक पकाएं. - मिक्स्चर को ट्रे में डालें और इसे सेट होने दें. - इसके ऊपर चांदी का वर्क डालकर बर्फी काट लें.
नई दिल्लीः कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि आज विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, आप उसे भली-भांति जानते हैं। अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी रहे हैं। जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया। पीएम मोदी नवेमेरी सभी देशवासियों से प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अब एक भी मरीज बढ़ता है तो ये हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। 1- अपने घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। विशेषकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पुरानी बीमारी हो, उनकी हमें Extra Care करनी है, उन्हें कोरोना से बहुत बचाकर रखना है। 3-अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, आयुष मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें, गर्म पानी, काढ़ा, इनका निरंतर सेवन करें। 4-कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद करने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल App जरूर डाउनलोड करें। दूसरों को भी इस App को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें। 5-जितना हो सके उतने गरीब परिवार की देखरेख करें, उनके भोजन की आवश्यकता पूरी करें। उन्होंने कहा- पूरी निष्ठा के साथ 3 मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें,जहां हैं, वहां रहें, सुरक्षित रहें। 'वयं राष्ट्रे जागृयाम', हम सभी राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे।
नई दिल्लीः कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि आज विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, आप उसे भली-भांति जानते हैं। अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी रहे हैं। जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ पाँच सौ पचास केस थे, तभी भारत ने इक्कीस दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया। पीएम मोदी नवेमेरी सभी देशवासियों से प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अब एक भी मरीज बढ़ता है तो ये हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। एक- अपने घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। विशेषकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पुरानी बीमारी हो, उनकी हमें Extra Care करनी है, उन्हें कोरोना से बहुत बचाकर रखना है। तीन-अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, आयुष मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें, गर्म पानी, काढ़ा, इनका निरंतर सेवन करें। चार-कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद करने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल App जरूर डाउनलोड करें। दूसरों को भी इस App को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें। पाँच-जितना हो सके उतने गरीब परिवार की देखरेख करें, उनके भोजन की आवश्यकता पूरी करें। उन्होंने कहा- पूरी निष्ठा के साथ तीन मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें,जहां हैं, वहां रहें, सुरक्षित रहें। 'वयं राष्ट्रे जागृयाम', हम सभी राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
काकीनाड़ा,आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में मंगलवार को एक पर्यटक बस के खाई में गिरने से सात लोगों की मौत हो गयी और पांच अन्य घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह सभी यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक बस में 12 लोग सवार थे और यह हादसा होने के बाद चालाक मौके से फरार हो गया। बस में सवार लोग भद्रचालम में श्रीराम के दर्शन कर लौट रहे थे और अन्नावरन मंदिर जा रहे थे। लेकिन वाल्मिकी पड़ाड़ी पर पहुंचने के दौरान चालक ने नियंत्रण खो बैठा और बस 32 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और एक की ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
काकीनाड़ा,आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में मंगलवार को एक पर्यटक बस के खाई में गिरने से सात लोगों की मौत हो गयी और पांच अन्य घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह सभी यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक बस में बारह लोग सवार थे और यह हादसा होने के बाद चालाक मौके से फरार हो गया। बस में सवार लोग भद्रचालम में श्रीराम के दर्शन कर लौट रहे थे और अन्नावरन मंदिर जा रहे थे। लेकिन वाल्मिकी पड़ाड़ी पर पहुंचने के दौरान चालक ने नियंत्रण खो बैठा और बस बत्तीस मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और एक की ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
डाली। वह एक चट्टान का सहारा लेकर उठने का प्रयत्न कर रही थी। चंद्रवर्मा ने उसे अपने हाथ का सहारा दिया और किसी तरह खड़ा किया । चंद्रवर्मा भी अचानक कापालिनी को वहाँ पाकर चकित रह गया। उसे कल्पना तक न थी कि वह उस प्रदेश में कापालिनी को देख सकेगा । उसे अपने समीप पाकर चंद्रवर्मा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और एकटक उसकी आँखों में ताकता रह गया । "चंद्रवर्मा, मुझे जिस दुर्भाग्य देवी ने ग्रास रखा है, लगता है उसी ने तुम्हें भी अपने फन्दे में कस लिया है। मांत्रिक शंखु ने इस आखिरी क्षण में हमारे सारे प्रयत्नों पर पानी फेर दिया। इस वक्त हम दोनों ही अपनी पहले की असहाय स्थिति में आगये हैं। हमने अपने निजी स्थानों को छोड़ा, अनेक मुसीबतों और ख़तरों का सामना किया और किसी तरह शंखु के पहाड़ तक पहुँचे भी, पर अंत में हमें निराशा और दुख ही हाथ लगे हैं।" कापालिनी ने कहा । कापालिनी के मुख से ये बातें सुनकर चंद्रवर्मा समझ गया कि उसका प्रयत्न विफल हो गया है। वह सरोवर में उठ रही ऊँची लहरों की ओर देखने लगा जो मंत्रगृह के गिरने के कारण उत्पन्न हो रही थीं । उसने गहरा निःस्वास छोड़ा और कापालिनी से पूछा, "क्या मंत्रगृह के साथ अपूर्व शक्तिवाला वह शंख भी सरोवर में डूब गया है ? क्या इसी कारण तुम इतनी निराश हो गयी हो, कापालिनी !" "हाँ, यही सच है ! शंखु के मंत्र-गृह में अपूर्व शक्तियों वाला शंख ही नहीं, बल्कि अत्यन्त महान शक्तियों से सम्पन्न और भी अनेक चीजें थीं। पर मैंने केवल उस शंख की ही कामना की थी। मैं चाहती थी उन अपूर्व शक्तियों वाली दूसरी असंख्य वस्तुओं से मैं तुम्हें तुम्हारे राज्य को वापस दिलवा दूँगी। तुम उनकी सहायता से अपने शत्रुओं को आसानी से जीत सकते थे। पर खेद की बात है कि अब वे सब इस मंत्रगृह के साथ सरोवर के अतल में में चली गयी हैं। अब तुम और मैं फिर से अपनी पूर्व स्थिति में ही आगये हैं।" कापालिनी ने
डाली। वह एक चट्टान का सहारा लेकर उठने का प्रयत्न कर रही थी। चंद्रवर्मा ने उसे अपने हाथ का सहारा दिया और किसी तरह खड़ा किया । चंद्रवर्मा भी अचानक कापालिनी को वहाँ पाकर चकित रह गया। उसे कल्पना तक न थी कि वह उस प्रदेश में कापालिनी को देख सकेगा । उसे अपने समीप पाकर चंद्रवर्मा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और एकटक उसकी आँखों में ताकता रह गया । "चंद्रवर्मा, मुझे जिस दुर्भाग्य देवी ने ग्रास रखा है, लगता है उसी ने तुम्हें भी अपने फन्दे में कस लिया है। मांत्रिक शंखु ने इस आखिरी क्षण में हमारे सारे प्रयत्नों पर पानी फेर दिया। इस वक्त हम दोनों ही अपनी पहले की असहाय स्थिति में आगये हैं। हमने अपने निजी स्थानों को छोड़ा, अनेक मुसीबतों और ख़तरों का सामना किया और किसी तरह शंखु के पहाड़ तक पहुँचे भी, पर अंत में हमें निराशा और दुख ही हाथ लगे हैं।" कापालिनी ने कहा । कापालिनी के मुख से ये बातें सुनकर चंद्रवर्मा समझ गया कि उसका प्रयत्न विफल हो गया है। वह सरोवर में उठ रही ऊँची लहरों की ओर देखने लगा जो मंत्रगृह के गिरने के कारण उत्पन्न हो रही थीं । उसने गहरा निःस्वास छोड़ा और कापालिनी से पूछा, "क्या मंत्रगृह के साथ अपूर्व शक्तिवाला वह शंख भी सरोवर में डूब गया है ? क्या इसी कारण तुम इतनी निराश हो गयी हो, कापालिनी !" "हाँ, यही सच है ! शंखु के मंत्र-गृह में अपूर्व शक्तियों वाला शंख ही नहीं, बल्कि अत्यन्त महान शक्तियों से सम्पन्न और भी अनेक चीजें थीं। पर मैंने केवल उस शंख की ही कामना की थी। मैं चाहती थी उन अपूर्व शक्तियों वाली दूसरी असंख्य वस्तुओं से मैं तुम्हें तुम्हारे राज्य को वापस दिलवा दूँगी। तुम उनकी सहायता से अपने शत्रुओं को आसानी से जीत सकते थे। पर खेद की बात है कि अब वे सब इस मंत्रगृह के साथ सरोवर के अतल में में चली गयी हैं। अब तुम और मैं फिर से अपनी पूर्व स्थिति में ही आगये हैं।" कापालिनी ने
इस प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर क्रिस वान होलेन और मैगी हसन के साथ ही अमेरिकी उप राजदूत पाल जोंस शामिल थे। उन्होंने पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद का दौरा किया। अमेरिका के एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किये जाने के बाद जमीनी स्तर पर हालात का पता लगाने और लोगों की भावनाओं को जानने के लिये रविवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर क्रिस वान होलेन और मैगी हसन के साथ ही अमेरिकी उप राजदूत पाल जोंस शामिल थे। उन्होंने पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद का दौरा किया। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य भारत द्वारा पांच अगस्त को लिये गए फैसले के बाद जमीनी स्थिति देखना और जनता की भावनाओं को समझना था। भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को रद्द कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने का फैसला किया था जिसके बाद से कश्मीर में सामान्य जनजीवन प्रभावित है। भारत के इस फैसले का पाकिस्तान विरोध कर रहा है और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है। विदेश विभाग ने कहा, "अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि वे मानवाधिकार की चिंताओं को साझा करते हैं और भारत से यह अनुरोध जारी रखेंगे कि वह इस दिशा में पहले कदम के तहत कर्फ्यू हटा ले और सभी कैदियों को रिहा करे। उन्होंने इस विवाद के समाधान में जुटे रहने के अपने संकल्प को भी दोहराया। " प्रतिनिधिमंडल ने पाक अधिकृत कश्मीर के नेता सरदार मसूद खान और राजा फारूक हैदर से भी मुलाकात की।
इस प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर क्रिस वान होलेन और मैगी हसन के साथ ही अमेरिकी उप राजदूत पाल जोंस शामिल थे। उन्होंने पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद का दौरा किया। अमेरिका के एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किये जाने के बाद जमीनी स्तर पर हालात का पता लगाने और लोगों की भावनाओं को जानने के लिये रविवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर क्रिस वान होलेन और मैगी हसन के साथ ही अमेरिकी उप राजदूत पाल जोंस शामिल थे। उन्होंने पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद का दौरा किया। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य भारत द्वारा पांच अगस्त को लिये गए फैसले के बाद जमीनी स्थिति देखना और जनता की भावनाओं को समझना था। भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के अधिकतर प्रावधानों को रद्द कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने का फैसला किया था जिसके बाद से कश्मीर में सामान्य जनजीवन प्रभावित है। भारत के इस फैसले का पाकिस्तान विरोध कर रहा है और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है। विदेश विभाग ने कहा, "अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि वे मानवाधिकार की चिंताओं को साझा करते हैं और भारत से यह अनुरोध जारी रखेंगे कि वह इस दिशा में पहले कदम के तहत कर्फ्यू हटा ले और सभी कैदियों को रिहा करे। उन्होंने इस विवाद के समाधान में जुटे रहने के अपने संकल्प को भी दोहराया। " प्रतिनिधिमंडल ने पाक अधिकृत कश्मीर के नेता सरदार मसूद खान और राजा फारूक हैदर से भी मुलाकात की।
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहत अब कुछ कम हो गई है। लेकिन अब भी हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं। गाइडलाइन में साफ कहा गया कि संक्रमित बच्चों को एंटी वायरल रेमडेसिविर नहीं दी जाए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने 18 वर्ष से कम बच्चों में कोविड-19 को लेकर कुछ गाइडलाइन जारी किया है। गाइडलाइन के अनुसार, बच्चों के इलाज के लिए रेमडेसिविर के उपयोग के लिए मनाही है वहीं एचआरसीटी को बढ़ावा देने की बात कही गई है। बच्चों की शारीरिक क्षमता को देखने के लिए 6 मिनट का वॉक टेस्ट लेने की सलाह दी गई है। बच्चों में कार्डियो-पलमोनरी एक्सरसाइज टोलरेंस की जांच करने के लिए बच्चों की उंगली में पल्स ऑक्सीमीटर लगा कर उनसे 6 मिनट तक लगातार चलाने के निर्देश दिये हैं। 6 मिनट लगातार चलने के बाद अगर उनका सैचुरेशन 94 प्रतिशत से कम होता है, 3-5 प्रतिशत तक नीचे चला जाता है या बच्चों को चक्कर आ रहा है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वह हाइपोक्सिक की तरफ अग्रसर हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। मंत्रालय ने साफ कहा कि ज्यादा गंभीर मरीजों को ही स्टेरॉयड दी जाए। डीडीएचएस ने यह साफ मना किया है कि लोग खुद से स्टेरॉयड का इस्तेमाल बच्चों के लिए ना करें। एसिंप्टोमेटिक और कोविड-19 के माइल्ड केसेज के लिए स्टेरॉयड हानिकारक साबित हो सकता है। इसके साथ जो बच्चे माइल्ड कोविड से पीड़ित होंगे उन्हें बुखार के लिए है 4 से 6 घंटे के बीच पेरासिटामोल 10-15 एमजी/केजी/डोज दिया जाएगा। यहां जानें डीजीएचएस ने और क्या गाइडलाइंस जारी किए हैं।
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहत अब कुछ कम हो गई है। लेकिन अब भी हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं। गाइडलाइन में साफ कहा गया कि संक्रमित बच्चों को एंटी वायरल रेमडेसिविर नहीं दी जाए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने अट्ठारह वर्ष से कम बच्चों में कोविड-उन्नीस को लेकर कुछ गाइडलाइन जारी किया है। गाइडलाइन के अनुसार, बच्चों के इलाज के लिए रेमडेसिविर के उपयोग के लिए मनाही है वहीं एचआरसीटी को बढ़ावा देने की बात कही गई है। बच्चों की शारीरिक क्षमता को देखने के लिए छः मिनट का वॉक टेस्ट लेने की सलाह दी गई है। बच्चों में कार्डियो-पलमोनरी एक्सरसाइज टोलरेंस की जांच करने के लिए बच्चों की उंगली में पल्स ऑक्सीमीटर लगा कर उनसे छः मिनट तक लगातार चलाने के निर्देश दिये हैं। छः मिनट लगातार चलने के बाद अगर उनका सैचुरेशन चौरानवे प्रतिशत से कम होता है, तीन-पाँच प्रतिशत तक नीचे चला जाता है या बच्चों को चक्कर आ रहा है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वह हाइपोक्सिक की तरफ अग्रसर हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। मंत्रालय ने साफ कहा कि ज्यादा गंभीर मरीजों को ही स्टेरॉयड दी जाए। डीडीएचएस ने यह साफ मना किया है कि लोग खुद से स्टेरॉयड का इस्तेमाल बच्चों के लिए ना करें। एसिंप्टोमेटिक और कोविड-उन्नीस के माइल्ड केसेज के लिए स्टेरॉयड हानिकारक साबित हो सकता है। इसके साथ जो बच्चे माइल्ड कोविड से पीड़ित होंगे उन्हें बुखार के लिए है चार से छः घंटाटे के बीच पेरासिटामोल दस-पंद्रह एमजी/केजी/डोज दिया जाएगा। यहां जानें डीजीएचएस ने और क्या गाइडलाइंस जारी किए हैं।
दिल दिया है (2006)(U/A) *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
दिल दिया है *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
चाईबासा : चाईबासा सदर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित बड़ालगिया छऊ रोजो मेला के समापन समारोह शुक्रवार को हुआ। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि विधायक दीपक बिरुवा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जल्द ही पूर्ण कराने की घोषणा किए। विधायक दीपक बिरुवा ने कहा कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र अंजदबेड़ा से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली अतिआवश्यक सड़क चाईबासा के रवींद्र भवन चौक तक बनेगी। वहीं बड़ालगिया रोरो होते हुए अंजदबेड़ा तक सड़क निर्माण होगा। विधायक श्री बिरुवा ने भरी भीड़ में घोषणा किए कि केबी उच्च विद्यालय परिसर जनपयोगी सामुदायिक शौचालय का निर्माण इसी वर्ष कराया जाएगा। मेला में अपने नृत्य से मंत्रमुग्ध करने वाले छऊ कलाकारों के लिए विधायक दीपक बिरुवा ने छऊ समिति को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सहयोग देने की बात कही। वहीं सुदूरवर्ती क्षेत्र के मद्देनजर जनहित में विधायक निधि से एक एंबुलेंस देने की घोषणा रोजो मेला के समापन समारोह में की। समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि एसडीपीओ दिलीप खालखो ने कहा कि रोजो मेला हमारी भाषा संस्कृति को जीवट बनाती है, साथ ही एक दूसरे से मेलजोल बढ़ाने का माध्यम है। मेला को शांति पूर्वक सफल बनाने के लिए आयोजन समिति बधाई के पात्र हैं। एसडीपीओ दिलीप खालखो ने कहा कि पुलिस आपकी सेवा के लिए ही है। वैसे असामाजिक तत्व जो समाज को विखंडित करने का काम करते हैं वैसे लोगों की सूचना पुलिस को जरूर देने की अपील एसडीपीओ ने की। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष सुबोध सिरका, सचिव मुकेश सुंडी, कोषाध्यक्ष प्राण सुंडी, मानकी हेमंत लाल सुंडी, राजा सुंडी, सेबोन बोयपाई, राजेश तुंबलिया, सुनील लोहार, रंजीत, सुजीत सुंडी आदि की अहम भूमिका रही।
चाईबासा : चाईबासा सदर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित बड़ालगिया छऊ रोजो मेला के समापन समारोह शुक्रवार को हुआ। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि विधायक दीपक बिरुवा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जल्द ही पूर्ण कराने की घोषणा किए। विधायक दीपक बिरुवा ने कहा कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र अंजदबेड़ा से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली अतिआवश्यक सड़क चाईबासा के रवींद्र भवन चौक तक बनेगी। वहीं बड़ालगिया रोरो होते हुए अंजदबेड़ा तक सड़क निर्माण होगा। विधायक श्री बिरुवा ने भरी भीड़ में घोषणा किए कि केबी उच्च विद्यालय परिसर जनपयोगी सामुदायिक शौचालय का निर्माण इसी वर्ष कराया जाएगा। मेला में अपने नृत्य से मंत्रमुग्ध करने वाले छऊ कलाकारों के लिए विधायक दीपक बिरुवा ने छऊ समिति को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सहयोग देने की बात कही। वहीं सुदूरवर्ती क्षेत्र के मद्देनजर जनहित में विधायक निधि से एक एंबुलेंस देने की घोषणा रोजो मेला के समापन समारोह में की। समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि एसडीपीओ दिलीप खालखो ने कहा कि रोजो मेला हमारी भाषा संस्कृति को जीवट बनाती है, साथ ही एक दूसरे से मेलजोल बढ़ाने का माध्यम है। मेला को शांति पूर्वक सफल बनाने के लिए आयोजन समिति बधाई के पात्र हैं। एसडीपीओ दिलीप खालखो ने कहा कि पुलिस आपकी सेवा के लिए ही है। वैसे असामाजिक तत्व जो समाज को विखंडित करने का काम करते हैं वैसे लोगों की सूचना पुलिस को जरूर देने की अपील एसडीपीओ ने की। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष सुबोध सिरका, सचिव मुकेश सुंडी, कोषाध्यक्ष प्राण सुंडी, मानकी हेमंत लाल सुंडी, राजा सुंडी, सेबोन बोयपाई, राजेश तुंबलिया, सुनील लोहार, रंजीत, सुजीत सुंडी आदि की अहम भूमिका रही।
Ranchi: 2019 विधानसभा चुनाव में कांके विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे सुरेश बैठा की इलेक्शन पिटीशन पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई जारी रही. बुधवार की सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक समरी लाल की ओर से सूची में दिए गए गवाह की जगह दूसरे गवाह को प्रस्तुत किया गया. जिसपर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की. साथ ही समरी लाल के वकील को यह हिदायत दी कि कोर्ट को गुमराह न करें. जिसपर समरी लाल के अधिवक्ता ने अदालत से माफी मांगी. दरअसल, समरी लाल की ओर से जिस गवाह को कोर्ट में गवाही देना था, उसकी जगह किसी और गवाह को गवाही देने के लिए बुला लिया गया, और इसकी जानकारी कोर्ट को नहीं दी गई. जिसपर कोर्ट ने नाराजगी दिखायी. याचिकाकर्ता सुरेश बैठा की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, विभास सिन्हा और अविनाश अखौरी ने पक्ष रखा. वहीं समरी लाल की ओर से अधिवक्ता अमर कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा. बता दें कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में कांके विधानसभा की आरक्षित सीट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुरेश बैठा और बीजेपी के प्रत्याशी समरी लाल चुनाव लड़े थे. मतगणना के बाद भाजपा के प्रत्याशी समरी लाल को निर्वाचित घोषित किया गया. जिसके बाद सुरेश बैठा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर समरी लाल के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की है. इसके पीछे उन्होंने आधार दिया है कि समरी लाल द्वारा चुनाव के दौरान दिया गया जाति प्रमाण पत्र गलत है.
Ranchi: दो हज़ार उन्नीस विधानसभा चुनाव में कांके विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे सुरेश बैठा की इलेक्शन पिटीशन पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई जारी रही. बुधवार की सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक समरी लाल की ओर से सूची में दिए गए गवाह की जगह दूसरे गवाह को प्रस्तुत किया गया. जिसपर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की. साथ ही समरी लाल के वकील को यह हिदायत दी कि कोर्ट को गुमराह न करें. जिसपर समरी लाल के अधिवक्ता ने अदालत से माफी मांगी. दरअसल, समरी लाल की ओर से जिस गवाह को कोर्ट में गवाही देना था, उसकी जगह किसी और गवाह को गवाही देने के लिए बुला लिया गया, और इसकी जानकारी कोर्ट को नहीं दी गई. जिसपर कोर्ट ने नाराजगी दिखायी. याचिकाकर्ता सुरेश बैठा की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, विभास सिन्हा और अविनाश अखौरी ने पक्ष रखा. वहीं समरी लाल की ओर से अधिवक्ता अमर कुमार सिन्हा ने पक्ष रखा. बता दें कि वर्ष दो हज़ार उन्नीस के विधानसभा चुनाव में कांके विधानसभा की आरक्षित सीट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुरेश बैठा और बीजेपी के प्रत्याशी समरी लाल चुनाव लड़े थे. मतगणना के बाद भाजपा के प्रत्याशी समरी लाल को निर्वाचित घोषित किया गया. जिसके बाद सुरेश बैठा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर समरी लाल के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की है. इसके पीछे उन्होंने आधार दिया है कि समरी लाल द्वारा चुनाव के दौरान दिया गया जाति प्रमाण पत्र गलत है.
साधक चारित्र से भोग वासनाओ का निग्रह करता है । चारित्र हीन को मोक्ष नहीं मिलता । जो अपनी देखता है, चारित्र सम्पन्नता से जीवन में निर्मल गुण पैदा होता है । ६५६ एक ही चारित्र है । ज्ञान और चारित्र ही मोक्ष है । आत्मा के लिए यही उसके लिए किसी भी प्रकार का भय नहीं सामायिक कही गयी है ।
साधक चारित्र से भोग वासनाओ का निग्रह करता है । चारित्र हीन को मोक्ष नहीं मिलता । जो अपनी देखता है, चारित्र सम्पन्नता से जीवन में निर्मल गुण पैदा होता है । छः सौ छप्पन एक ही चारित्र है । ज्ञान और चारित्र ही मोक्ष है । आत्मा के लिए यही उसके लिए किसी भी प्रकार का भय नहीं सामायिक कही गयी है ।
Seraikela (Bhagya Sagar Singh) : सरायकेला नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी लगातार हो रही भारी बारिश पर नगर पंचायत क्षेत्र का मुआयना किया. मुआयना के क्रम में सरायकेला व्यवहार न्यायालय परिसर में जल-जमाव और टापू में तब्दील होने पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि विगत वर्ष सरायकेला बार एसोसिएशन और हमारी लिखित शिकायत एवं मांग पर जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया था. उपायुक्त के निर्देश के बावजूद भवन निर्माण विभाग द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को कछुए गति से पूरा करने का काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक कोर्ट परिसर में जल-जमाव की समस्या के निराकरण हेतु कोर्ट परिसर को ऊंचा किया जाना है. लेकिन भवन विभाग द्वारा प्राक्कलन में परिसर को ऊंचा करने से संबंधित किसी प्रकार की योजना नहीं है. इस अनुपयोगी प्राक्कलन (DPR) व भवन विभाग के अभियंताओं की लापरवाही से सरायकेला सिविल कोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान का तालाब में तब्दील होना बेहद शर्मनाक है. नगरपंचायत उपाध्यक्ष ने इस विषय को लेकर उपायुक्त से भवन निर्माण विभाग के संबंधित लापरवाह अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
Seraikela : सरायकेला नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी लगातार हो रही भारी बारिश पर नगर पंचायत क्षेत्र का मुआयना किया. मुआयना के क्रम में सरायकेला व्यवहार न्यायालय परिसर में जल-जमाव और टापू में तब्दील होने पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि विगत वर्ष सरायकेला बार एसोसिएशन और हमारी लिखित शिकायत एवं मांग पर जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया था. उपायुक्त के निर्देश के बावजूद भवन निर्माण विभाग द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को कछुए गति से पूरा करने का काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक कोर्ट परिसर में जल-जमाव की समस्या के निराकरण हेतु कोर्ट परिसर को ऊंचा किया जाना है. लेकिन भवन विभाग द्वारा प्राक्कलन में परिसर को ऊंचा करने से संबंधित किसी प्रकार की योजना नहीं है. इस अनुपयोगी प्राक्कलन व भवन विभाग के अभियंताओं की लापरवाही से सरायकेला सिविल कोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान का तालाब में तब्दील होना बेहद शर्मनाक है. नगरपंचायत उपाध्यक्ष ने इस विषय को लेकर उपायुक्त से भवन निर्माण विभाग के संबंधित लापरवाह अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
PATNA: पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर के पास वाहन चेकिंग के दौरान हथियार और गोली के साथ एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उसने अपना नाम दीपक कुमार बताया। इसने खुद को औरंगाबाद जिले के गोह थाना के तहत चपरा गांव के रहने वाले सुदामा यादव का बेटा बताया है। मामले के सामने आने के बाद से पुलिस ने अपनी चौकसी और बढ़ा दी है। फिलहाल पकड़े गए युवक से कोतवाली थाना में पूछताछ चल रही है। रामनवमी से पहले पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस राइफल की कागजात की जानकारी में जुटी है। एसएसपी मनु महाराज के निर्देश पर मंदिर आसपास के पूरे इलाके में शनिवार को चेकिंग चलाई गई। शहर में विशेष जांच टीम बनाई गई है। हनुमान मंदिर में रामनवमी के दिन जुटने वाली भीड़ को देखते हुए इलाके में विशेष जांच टीम लगाई गई थी। एक टीम मंदिर परिसर और आसपास की जांच कर रही थी। इसी चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति की चहलकदमी को लेकर जांच टीम को पुलिस पर शक हुआ। जब उसकी जांच की गई तो उसके पास से बंदूक और जिंदा कारतूस को बरामद किया गया।
PATNA: पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर के पास वाहन चेकिंग के दौरान हथियार और गोली के साथ एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उसने अपना नाम दीपक कुमार बताया। इसने खुद को औरंगाबाद जिले के गोह थाना के तहत चपरा गांव के रहने वाले सुदामा यादव का बेटा बताया है। मामले के सामने आने के बाद से पुलिस ने अपनी चौकसी और बढ़ा दी है। फिलहाल पकड़े गए युवक से कोतवाली थाना में पूछताछ चल रही है। रामनवमी से पहले पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस राइफल की कागजात की जानकारी में जुटी है। एसएसपी मनु महाराज के निर्देश पर मंदिर आसपास के पूरे इलाके में शनिवार को चेकिंग चलाई गई। शहर में विशेष जांच टीम बनाई गई है। हनुमान मंदिर में रामनवमी के दिन जुटने वाली भीड़ को देखते हुए इलाके में विशेष जांच टीम लगाई गई थी। एक टीम मंदिर परिसर और आसपास की जांच कर रही थी। इसी चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति की चहलकदमी को लेकर जांच टीम को पुलिस पर शक हुआ। जब उसकी जांच की गई तो उसके पास से बंदूक और जिंदा कारतूस को बरामद किया गया।
[ भाग I-खण्ड 1] (क) उत्पादन, क्षमता उपयोग के संबंध में घरेलू उद्योग को कोई क्षति नहीं हुई है । बिक्री लागतों में वृद्धि स्थिर लागत में वृद्धि और कम उत्पादन के कारण हुई है । क्षति का प्रमुख कारण वैश्विक मंदी रहा है । (ख) ऐसे देशों, जिन पर पहले से पाटनरोधीशुल्क लागू है, से आयात जांच अवधि में लगभग 52% रहा है जो संबद्ध देशों से आयातों से अधिक है । कारणात्मक संबंध की जांच करते समय इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए । (ग) क्षति अवधि के दौरान संबद्ध वस्तु के सीमाशुल्क में भारी गिरावट आई है जो संभवतः घरेलू उद्योग की क्षति का कारण हो सकता है । 53. पी टी टी फेनोल कंपनी लि., थाइलैंड और मै. मितसुई एंड कंपनी, जापान और मै. मित्सुई एंड कंपनी पी टी ई लि., सिंगापुर ने निम्नानुसार अनुरोध किया है :प्राधिकारी को घरेलू उद्योग को हुई क्षति की जांच करते समय पाटन से इतर कारकों की जांच करनी चाहिए क्योंकि अधिकांश देशों पर पहले से पाटनरोधी शुल्क लागू है । प्रारंभिक जांच परिणाम में भारतीय उत्पादन के संबंध में आयात समर्थक कंपनी के उत्पादन को अलग रखकर ज्ञात किए गए थे । भारतीय उद्योग का क्षमता उपयोग समग्र रूप से केवल आवेदक से बेहतर है । (घ) अधिकांश क्षति संबंधी मापदंड घरेलू उद्योग को क्षति न होने या कम क्षति होने की ओर संकेत करते हैं । प्रारंभिक जांच परिणामों में काफी विसंगतियां हैं और याचिकाकर्ता द्वारा अतिरिक्त आंकड़े उपब्ध कराए गए हैं । प्राधिकारी को शुल्क लगाने से पहले निम्नवर्ती उपभोक्ता उद्योग के संकट पर विचार करना चाहिए क्योंकि वह बिसफेनोल-ए, भेषज और विलायक जैसे अनेक उत्पादों हेतु आपूर्ति करता है । देश में मांग को पूरा करने के लिए भारतीय उत्पादकों के पास पर्याप्त क्षमता नहीं है । (छ) क्षति संबंधी विश्लेषण मूल याचिका में प्रदत्त आंकड़ों के आधार पर किया जा सकता है, जिनके आधार पर यह मामला शुरू किया गया था और न कि संशोधित जांच अवधि के आंकड़ों के आधार पर (ज) याचिका में दिए गए क्षति संबंधी आंकड़े केवल याचिकाकर्ताओं के लिए दिए गए हैं और
[ भाग I-खण्ड एक] उत्पादन, क्षमता उपयोग के संबंध में घरेलू उद्योग को कोई क्षति नहीं हुई है । बिक्री लागतों में वृद्धि स्थिर लागत में वृद्धि और कम उत्पादन के कारण हुई है । क्षति का प्रमुख कारण वैश्विक मंदी रहा है । ऐसे देशों, जिन पर पहले से पाटनरोधीशुल्क लागू है, से आयात जांच अवधि में लगभग बावन% रहा है जो संबद्ध देशों से आयातों से अधिक है । कारणात्मक संबंध की जांच करते समय इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए । क्षति अवधि के दौरान संबद्ध वस्तु के सीमाशुल्क में भारी गिरावट आई है जो संभवतः घरेलू उद्योग की क्षति का कारण हो सकता है । तिरेपन. पी टी टी फेनोल कंपनी लि., थाइलैंड और मै. मितसुई एंड कंपनी, जापान और मै. मित्सुई एंड कंपनी पी टी ई लि., सिंगापुर ने निम्नानुसार अनुरोध किया है :प्राधिकारी को घरेलू उद्योग को हुई क्षति की जांच करते समय पाटन से इतर कारकों की जांच करनी चाहिए क्योंकि अधिकांश देशों पर पहले से पाटनरोधी शुल्क लागू है । प्रारंभिक जांच परिणाम में भारतीय उत्पादन के संबंध में आयात समर्थक कंपनी के उत्पादन को अलग रखकर ज्ञात किए गए थे । भारतीय उद्योग का क्षमता उपयोग समग्र रूप से केवल आवेदक से बेहतर है । अधिकांश क्षति संबंधी मापदंड घरेलू उद्योग को क्षति न होने या कम क्षति होने की ओर संकेत करते हैं । प्रारंभिक जांच परिणामों में काफी विसंगतियां हैं और याचिकाकर्ता द्वारा अतिरिक्त आंकड़े उपब्ध कराए गए हैं । प्राधिकारी को शुल्क लगाने से पहले निम्नवर्ती उपभोक्ता उद्योग के संकट पर विचार करना चाहिए क्योंकि वह बिसफेनोल-ए, भेषज और विलायक जैसे अनेक उत्पादों हेतु आपूर्ति करता है । देश में मांग को पूरा करने के लिए भारतीय उत्पादकों के पास पर्याप्त क्षमता नहीं है । क्षति संबंधी विश्लेषण मूल याचिका में प्रदत्त आंकड़ों के आधार पर किया जा सकता है, जिनके आधार पर यह मामला शुरू किया गया था और न कि संशोधित जांच अवधि के आंकड़ों के आधार पर याचिका में दिए गए क्षति संबंधी आंकड़े केवल याचिकाकर्ताओं के लिए दिए गए हैं और
इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की टीम हैदराबाद एफसी (एचएफसी) के मुख्य कोच मैनुअल मारक्वेज ने भारतीय फुटबॉल टीम की सराहना करते हुए कहा है कि फीफा विश्व कप 2022 और एएफसी एशियन कप 2023 के क्वालीफायर्स में भारत का तीसरे स्थान पर रहना योग्य रहा। भारत को क्वालीफायर्स में एशिया चैंपियन कतर के हाथों 0-1 से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद टीम ने बांग्लादेश को 2-0 से हराया और अफगानिस्तान के साथ 1-1 से ड्रॉ खेला। यह भी पढ़ें- अगले सीजन से IPL में दो नई फ्रेंचाइजों को किया जाएगा शामिल? मैनुअल ने कहा, "मैंने बांग्लादेश और अफगानिस्तान के खिलाफ भारत के मैच को देखा और मैंने भारतीय युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन का काफी आनंद लिया। कतर के खिलाफ मैच असली टेस्ट था। भारत का लक्ष्य ग्रुप में जितना हो सके ऊपर रहना था और मेरा मानना है कि तीसरे स्थान पर रहना उनके लिए योग्य रहा। " भारत ग्रुप ई में सात अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा जबकि कतर के 22 अंक और ओमान के 18 अंक थे। मैनुअल ने कहा, "मेरा मानना है कि आईएसएल का ऑफ सीजन लंबे समय तक रहना खिलाड़ियों के लिए आदर्श नहीं है। लेकिन इससे वे अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता पाते हैं। "
इंडियन सुपर लीग की टीम हैदराबाद एफसी के मुख्य कोच मैनुअल मारक्वेज ने भारतीय फुटबॉल टीम की सराहना करते हुए कहा है कि फीफा विश्व कप दो हज़ार बाईस और एएफसी एशियन कप दो हज़ार तेईस के क्वालीफायर्स में भारत का तीसरे स्थान पर रहना योग्य रहा। भारत को क्वालीफायर्स में एशिया चैंपियन कतर के हाथों शून्य-एक से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद टीम ने बांग्लादेश को दो-शून्य से हराया और अफगानिस्तान के साथ एक-एक से ड्रॉ खेला। यह भी पढ़ें- अगले सीजन से IPL में दो नई फ्रेंचाइजों को किया जाएगा शामिल? मैनुअल ने कहा, "मैंने बांग्लादेश और अफगानिस्तान के खिलाफ भारत के मैच को देखा और मैंने भारतीय युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन का काफी आनंद लिया। कतर के खिलाफ मैच असली टेस्ट था। भारत का लक्ष्य ग्रुप में जितना हो सके ऊपर रहना था और मेरा मानना है कि तीसरे स्थान पर रहना उनके लिए योग्य रहा। " भारत ग्रुप ई में सात अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा जबकि कतर के बाईस अंक और ओमान के अट्ठारह अंक थे। मैनुअल ने कहा, "मेरा मानना है कि आईएसएल का ऑफ सीजन लंबे समय तक रहना खिलाड़ियों के लिए आदर्श नहीं है। लेकिन इससे वे अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता पाते हैं। "
मीठे में जलेबी खाना किसे पसंद नहीं होता. हलवाई की क्रिस्पी जलेबी का स्वाद बेहद उम्दा लगता है. जलेबी को लोग घर में बनाने से बचते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि घर की जलेबी में हलवाई वाला स्वाद नहीं आ पाएगा. असल में जलेबी बनाना बेहद आसान है. अगर कुछ टिप्स फॉलो करके बनाएंगे तो हलवाई की जलेबी भी फेल हो जाएगी. 1 कप मैदा, 1/2 कप चीनी, 1/2 कप पानी, 1/4 टीस्पून से कम बेकिंग पाउडर, 1/4 चम्मच कॉर्न स्टार्च, 1 कप दही, 1 चुटकी फूड कलर, एक कोन, तेल जरूरत के अनुसार. जलेबी का यीस्ट तैयार करने के लिए एक बर्तन में 1 कप मैदा, कॉर्न स्टार्च, बेकिंग पाउडर, पीला रंग, दही और पानी डालकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. मैदे में गुठलियां खत्म होने तक घोल को अच्छी तरह फेंटते रहें. ध्यान रहे घोल ज्यादा गाढ़ा या पतला न हो. इसके बाद घोल को करीब 12 घंटे के लिए ढककर रख दें. जब घोल में खमीर उठ जाए तो वह जलेबी बनाने के लिए तैयार है. खमीर उठे मैदे के मिक्सचर को एक बार फिर से अच्छी तरह फेंट लें. अब मीडियम आंच पर पैन में चीनी डाल दें. इसमें पानी डालकर चाशनी बनने के लिए रख दें. इसमें तार की कोई जरूरत नहीं है. अब गैस पर एक भारी तले वाली कढ़ाही चढ़ाएं, इसमें तेल डालकर अच्छी तरह गर्म कर लें. बैटर को कोन में भरें और गोल-गोल करके तेल में जलेबी की शेप देते हुए बैटर को फैलाएं. जलेबी बनाने के लिए एक अलग तरह का कपड़ा बाजार में मिलता है. आप इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं. दोनों तरफ से सुनहरा होने के बाद जलेबियां चाशनी में डाल दें. तैयार हैं कुरकुरी जलेबी. गरमागरम सर्व करें.
मीठे में जलेबी खाना किसे पसंद नहीं होता. हलवाई की क्रिस्पी जलेबी का स्वाद बेहद उम्दा लगता है. जलेबी को लोग घर में बनाने से बचते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि घर की जलेबी में हलवाई वाला स्वाद नहीं आ पाएगा. असल में जलेबी बनाना बेहद आसान है. अगर कुछ टिप्स फॉलो करके बनाएंगे तो हलवाई की जलेबी भी फेल हो जाएगी. एक कप मैदा, एक/दो कप चीनी, एक/दो कप पानी, एक/चार टीस्पून से कम बेकिंग पाउडर, एक/चार चम्मच कॉर्न स्टार्च, एक कप दही, एक चुटकी फूड कलर, एक कोन, तेल जरूरत के अनुसार. जलेबी का यीस्ट तैयार करने के लिए एक बर्तन में एक कप मैदा, कॉर्न स्टार्च, बेकिंग पाउडर, पीला रंग, दही और पानी डालकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. मैदे में गुठलियां खत्म होने तक घोल को अच्छी तरह फेंटते रहें. ध्यान रहे घोल ज्यादा गाढ़ा या पतला न हो. इसके बाद घोल को करीब बारह घंटाटे के लिए ढककर रख दें. जब घोल में खमीर उठ जाए तो वह जलेबी बनाने के लिए तैयार है. खमीर उठे मैदे के मिक्सचर को एक बार फिर से अच्छी तरह फेंट लें. अब मीडियम आंच पर पैन में चीनी डाल दें. इसमें पानी डालकर चाशनी बनने के लिए रख दें. इसमें तार की कोई जरूरत नहीं है. अब गैस पर एक भारी तले वाली कढ़ाही चढ़ाएं, इसमें तेल डालकर अच्छी तरह गर्म कर लें. बैटर को कोन में भरें और गोल-गोल करके तेल में जलेबी की शेप देते हुए बैटर को फैलाएं. जलेबी बनाने के लिए एक अलग तरह का कपड़ा बाजार में मिलता है. आप इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं. दोनों तरफ से सुनहरा होने के बाद जलेबियां चाशनी में डाल दें. तैयार हैं कुरकुरी जलेबी. गरमागरम सर्व करें.
सरदार पटेल ने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी। सरदार पटेल एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। हालांकि अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से इस किसान के बेटे सरदार पटेल हर देशवासी के दिल में बस गए। लौहपुरुष ने महिलाओं पर अत्याचार और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अंग्रेजों से मुक्ति पाने वाला भारत देश का हर नागरिक सरदार पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री के रुप में देखने लगा था। कांग्रेस में भी सभी का सोचना था कि वह ही देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने अपना नाम प्रधानमंत्री की रेस से पीछे कर लिया। इनकी जयंती को एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता हैं। सरदार पटेल की 147वीं जयंती पर देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में स्टौच्यू ऑफ यूनिटी पर उन्हें श्रद्धाजंलि दी। साथ ही पीएम मोदी केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस में शामिल हुए। इसके साथ ही गृहमंत्री अमित शाह ने पटेल चौक पर लौह पुरुष को श्रद्धाजंलि दी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इन्हें श्रद्धाजंलि दी।
सरदार पटेल ने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी। सरदार पटेल एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। हालांकि अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से इस किसान के बेटे सरदार पटेल हर देशवासी के दिल में बस गए। लौहपुरुष ने महिलाओं पर अत्याचार और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अंग्रेजों से मुक्ति पाने वाला भारत देश का हर नागरिक सरदार पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री के रुप में देखने लगा था। कांग्रेस में भी सभी का सोचना था कि वह ही देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने अपना नाम प्रधानमंत्री की रेस से पीछे कर लिया। इनकी जयंती को एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता हैं। सरदार पटेल की एक सौ सैंतालीसवीं जयंती पर देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में स्टौच्यू ऑफ यूनिटी पर उन्हें श्रद्धाजंलि दी। साथ ही पीएम मोदी केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस में शामिल हुए। इसके साथ ही गृहमंत्री अमित शाह ने पटेल चौक पर लौह पुरुष को श्रद्धाजंलि दी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इन्हें श्रद्धाजंलि दी।
जिस उम्र में लोग अपने घर में खेलते कुदते हैं यानी की मां- पिता जी के प्यार दूलार में रहते हैं उस उम्र में बिहार के छोरे ने अपनी प्रतिभा का लोहा सात समंदर पार मनवाया है. बिहार के भागलपुर के रहने वाले नलीनाक्ष (Nalinaksha) ने गोल्फ स्टीक हाथ में लिया था तब उसने सोचा भी नहीं होगा कि सात समंदर पार जलवा होगा. भागलपुर (Bhagalpur) के रहने वाले नलीनाक्ष ने ऐसा निशाना लगाया कि उनका चयन यूएस किड्स जूनियर गोल्फ विश्व चैंपियनशिप (US Kids Junior Golf World Championships) में हो गया. यह बिहार के साथ ही देश के लिए गौरब का पल है. आपको बता दें कि बिहार के लाल नलीनाक्ष 4 अगस्त को US किड्स जूनियर गोल्ड वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. बता दें कि इससे पहले बिहार के लाल 7 मई को टेक्सास ओपन (Texas Open) में अपना जलवा दिखाएंगे. मीडिया में चल रही खबरों की माने तो बिहार का लाल नलीनाक्ष प्रदेश का पहला ऐसा बच्चा है जो मात्र 7 साल की उम्र में अमेरिका में अपना जलवा दिखाएंगे. बता दें कि नलीनाक्ष के चयन के बाद से भागलपुर और पूर्णिया में खुशी की लहर है. बता दें कि नलीनाक्ष अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में रहता है. उनके पिता नीरज मधु जुवेनाइल कोर्ट में एपीपी हैं. जबकि उनकी मां बैंक में जॉव करती है. नाती के चयन को लेकर बोलते हुए नाना राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि नलीनाक्ष पिछले 2 साल से गोल्फ खेल रहा है. वह अंडर 10 वर्ग में एक दर्जन से अधिक प्रतियोगिता अपने नाम कर चुका है. उन्होंने यह भी कहा है कि वह अपने वर्ग में नेशनल चैंपियन रहा है. दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता के बाद उसका चयन अमेरिका और टेक्सास ओपन किड्स जूनियर गोल्फ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2022 में हुआ है. नलीनाक्ष ने चयन के बाद एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि नमस्कार, " मैं नलीनाक्ष हूं. मैं सात साल का हूं. मेरे पापा ने मुझे गोल्फ खेलना सिखाया. इसके बाद मेरा इंट्रेस्ट बढ़ता गया. मैंने कई सारे टूर्नामेंट जीते. मैंने यूएस चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है. मैंने यूरोप, कनाडा और कई अन्य देश के टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया है. किसी भी परिवार में अगर बेटे या बेटी का प्रदर्शन शानदार हो तो परिवार के लोगों को खुशी तो होती ही है. नलीनाक्ष को लेकर बोलते हुए उनके नाना राजेंद्र प्रसाद बताते हैं कि वह दूसरी क्लास में पढ़ता है जब उसको समय मिलता है तो वह गोल्फ खेलता है. उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली के एक बड़े कोच मोहित बिंद्रा की नजर इसपर पड़ी. उसके बाद उन्होंने नलीनाक्ष के पिता को बताया कि आपका बच्चा बेहतर गोल्फ खेल सकता है इसको कोचिंग की जरूरत है. जिसके बाद परिवार को लोगों ने कहा कि मैं इतनी महंगी फीस नहीं दे सकता हूं तब कोच ने अपनी फीस आधी कर दी. इसके बाद नलीनाक्ष का चयन यूएस कि़ड्स गोल्फ चैंपियनशिप में हुआ.
जिस उम्र में लोग अपने घर में खेलते कुदते हैं यानी की मां- पिता जी के प्यार दूलार में रहते हैं उस उम्र में बिहार के छोरे ने अपनी प्रतिभा का लोहा सात समंदर पार मनवाया है. बिहार के भागलपुर के रहने वाले नलीनाक्ष ने गोल्फ स्टीक हाथ में लिया था तब उसने सोचा भी नहीं होगा कि सात समंदर पार जलवा होगा. भागलपुर के रहने वाले नलीनाक्ष ने ऐसा निशाना लगाया कि उनका चयन यूएस किड्स जूनियर गोल्फ विश्व चैंपियनशिप में हो गया. यह बिहार के साथ ही देश के लिए गौरब का पल है. आपको बता दें कि बिहार के लाल नलीनाक्ष चार अगस्त को US किड्स जूनियर गोल्ड वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. बता दें कि इससे पहले बिहार के लाल सात मई को टेक्सास ओपन में अपना जलवा दिखाएंगे. मीडिया में चल रही खबरों की माने तो बिहार का लाल नलीनाक्ष प्रदेश का पहला ऐसा बच्चा है जो मात्र सात साल की उम्र में अमेरिका में अपना जलवा दिखाएंगे. बता दें कि नलीनाक्ष के चयन के बाद से भागलपुर और पूर्णिया में खुशी की लहर है. बता दें कि नलीनाक्ष अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में रहता है. उनके पिता नीरज मधु जुवेनाइल कोर्ट में एपीपी हैं. जबकि उनकी मां बैंक में जॉव करती है. नाती के चयन को लेकर बोलते हुए नाना राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि नलीनाक्ष पिछले दो साल से गोल्फ खेल रहा है. वह अंडर दस वर्ग में एक दर्जन से अधिक प्रतियोगिता अपने नाम कर चुका है. उन्होंने यह भी कहा है कि वह अपने वर्ग में नेशनल चैंपियन रहा है. दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता के बाद उसका चयन अमेरिका और टेक्सास ओपन किड्स जूनियर गोल्फ वर्ल्ड चैंपियनशिप दो हज़ार बाईस में हुआ है. नलीनाक्ष ने चयन के बाद एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि नमस्कार, " मैं नलीनाक्ष हूं. मैं सात साल का हूं. मेरे पापा ने मुझे गोल्फ खेलना सिखाया. इसके बाद मेरा इंट्रेस्ट बढ़ता गया. मैंने कई सारे टूर्नामेंट जीते. मैंने यूएस चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है. मैंने यूरोप, कनाडा और कई अन्य देश के टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया है. किसी भी परिवार में अगर बेटे या बेटी का प्रदर्शन शानदार हो तो परिवार के लोगों को खुशी तो होती ही है. नलीनाक्ष को लेकर बोलते हुए उनके नाना राजेंद्र प्रसाद बताते हैं कि वह दूसरी क्लास में पढ़ता है जब उसको समय मिलता है तो वह गोल्फ खेलता है. उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली के एक बड़े कोच मोहित बिंद्रा की नजर इसपर पड़ी. उसके बाद उन्होंने नलीनाक्ष के पिता को बताया कि आपका बच्चा बेहतर गोल्फ खेल सकता है इसको कोचिंग की जरूरत है. जिसके बाद परिवार को लोगों ने कहा कि मैं इतनी महंगी फीस नहीं दे सकता हूं तब कोच ने अपनी फीस आधी कर दी. इसके बाद नलीनाक्ष का चयन यूएस कि़ड्स गोल्फ चैंपियनशिप में हुआ.
PATNA : बिहार में कोरोना काल के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल उठ रहे हैं. बिहार में आम लोगों के साथ-साथ ख़ास लोगों को भी स्वास्थ्य व्यवस्था की उदासीनता का शिकार होना पड़ रहा है. पीएमसीएच से जुड़ी हुई एक ऐसी घटना सामने आई है, जो काफी हैरान करने वाली है. दरअसल, आरजेडी विधायक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं. विधायक का कहना है कि उनकी मां का ठीक से इलाज नहीं हो रहा है. बिहार सरकार ने उन्हें मरने के लिए छोड़ा है. भोजपुर जिले के बड़हरा सीट से विजयी आरजेडी विधायक सरोज यादव ने बिहार सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सारे सवाल खड़ा किये हैं. आरजेडी विधायक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए यह आरोप लगाया है कि पीएमसीएच में उनकी बीमार मां का इलाज सही तरीके से नहीं किया जा रहा है. विधायक ने आरोप लगाया है कि उनकी मां की स्थिति इतनी ख़राब होने के बावजूद भी कोई भी डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहे हैं. यहां तक कि पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट भी उनके फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं. आरजेडी विधायक ने फर्स्ट बिहार झारखंड को बताया कि उनकी मां की हालत बहुत ख़राब है. वह पीएमसीएच हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर हैं. उन्होंने सीएम से बात की. सीएम के असिस्टेंट से भी उन्होंने बातचीत की. लेकिन फिर भी उन्हें कोई प्रॉपर डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं. न्यूरो फिजिसियन और गेस्ट्रोलॉजी के एचओडी डॉ विजय प्रकाश नहीं मिले रहे हैं. सीएम के असिस्टेंट दिनेश राय ने उनसे कहा कि सुबह 10 बजे डॉक्टर मिलेंगे. लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आया. राजद विधायक ने कहा कि उनकी मां वेंटिलेटर पर हैं. अगर वेंटिलेटर से हटा दिया जाये तो तत्काल उनकी मौत हो जाएगी. लेकिन फिर भी कोई उनकी मदद नहीं कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्री के यहां फोन करने पर उनका फोन काट दिया जाता है. विधायक ने कहा कि वह पूरी तरह बेबस हैं, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह किससे गुहार लगाने जाएं. स्थिति ऐसी है कि वह अपनी मां को पीएमसीएच से हटा भी नहीं सकते हैं.
PATNA : बिहार में कोरोना काल के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल उठ रहे हैं. बिहार में आम लोगों के साथ-साथ ख़ास लोगों को भी स्वास्थ्य व्यवस्था की उदासीनता का शिकार होना पड़ रहा है. पीएमसीएच से जुड़ी हुई एक ऐसी घटना सामने आई है, जो काफी हैरान करने वाली है. दरअसल, आरजेडी विधायक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं. विधायक का कहना है कि उनकी मां का ठीक से इलाज नहीं हो रहा है. बिहार सरकार ने उन्हें मरने के लिए छोड़ा है. भोजपुर जिले के बड़हरा सीट से विजयी आरजेडी विधायक सरोज यादव ने बिहार सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सारे सवाल खड़ा किये हैं. आरजेडी विधायक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए यह आरोप लगाया है कि पीएमसीएच में उनकी बीमार मां का इलाज सही तरीके से नहीं किया जा रहा है. विधायक ने आरोप लगाया है कि उनकी मां की स्थिति इतनी ख़राब होने के बावजूद भी कोई भी डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहे हैं. यहां तक कि पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट भी उनके फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं. आरजेडी विधायक ने फर्स्ट बिहार झारखंड को बताया कि उनकी मां की हालत बहुत ख़राब है. वह पीएमसीएच हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर हैं. उन्होंने सीएम से बात की. सीएम के असिस्टेंट से भी उन्होंने बातचीत की. लेकिन फिर भी उन्हें कोई प्रॉपर डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं. न्यूरो फिजिसियन और गेस्ट्रोलॉजी के एचओडी डॉ विजय प्रकाश नहीं मिले रहे हैं. सीएम के असिस्टेंट दिनेश राय ने उनसे कहा कि सुबह दस बजे डॉक्टर मिलेंगे. लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आया. राजद विधायक ने कहा कि उनकी मां वेंटिलेटर पर हैं. अगर वेंटिलेटर से हटा दिया जाये तो तत्काल उनकी मौत हो जाएगी. लेकिन फिर भी कोई उनकी मदद नहीं कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्री के यहां फोन करने पर उनका फोन काट दिया जाता है. विधायक ने कहा कि वह पूरी तरह बेबस हैं, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह किससे गुहार लगाने जाएं. स्थिति ऐसी है कि वह अपनी मां को पीएमसीएच से हटा भी नहीं सकते हैं.
ICC World Cup 2019 Final overthrow: क्रिकेट के लिए नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने बड़ा फैसला लिया है। वह ICC Cricket World Cup 2019 के फाइनल में विवादास्पद ओवरथ्रो की अगले महीने यानी सितंबर में समीक्षा करेगा। इस साल 14 जुलाई को लार्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 241 रन का लक्ष्य दिया था। इंग्लैंड की टीम को जीत के लिए जब 3 गेंद पर 9 रन की जरूरत थी। बेन स्टोक्स ने मिड विकेट की ओर शॉट खेला और रन के लिए दौड़ पड़े। वे पहला रन पूरा करने के बाद दूसरे रन के लिए फिर दौड़ पड़े। इस बीच, न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने गेंद को फील्ड कर स्टोक्स को आउट करने के लिए थ्रो किया। हालांकि, गेंद स्टोक्स के बल्ले से लगते हुई बाउंड्री के पार चली गई। स्टोक्स 2 रन ले चुके थे, इसलिए अंपायर ने बैट्समैन के खाते में 6 रन जोड़ने का फैसला दिया था। हालांकि, इसके बाद भी वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला टाई हो गया था। बाद में सुपर ओवर हुआ। सुपर ओवर में भी दोनों टीमों ने बराबर रन बनाए। इसके बाद ज्यादा बाउंड्री लगाने के आधार पर इंग्लैंड को चैंपियन घोषित किया गया था। इंग्लैंड की टीम ने 26 और न्यूजीलैंड की टीम ने 17 बाउंड्री लगाई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, MCC की ओर जारी बयान में कहा गया है कि वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी (WCC) ने क्रिकेट विश्व कप फाइनल के ओवरथ्रो के बारे में 19. 8 नियम के बारे में बात की है। कमेटी का मानना है कि नियम स्पष्ट है। इसके बावजूद सितंबर में इस मामले की समीक्षा होनी चाहिए। इंग्लैंड को विजेता घोषित करने के तरीके की कई लोगों ने आलोचना की थी। इसमें सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर भी शामिल थे। तेंदुलकर का मत था कि सुपर ओवर टाई होने के बाद एक और सुपर ओवर कराया जाना चाहिए था। न्यूजीलैंड के मीडिया ने भी इस फैसले को लेकर आईसीसी की काफी लानत मलानत की थी।
ICC World Cup दो हज़ार उन्नीस Final overthrow: क्रिकेट के लिए नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने बड़ा फैसला लिया है। वह ICC Cricket World Cup दो हज़ार उन्नीस के फाइनल में विवादास्पद ओवरथ्रो की अगले महीने यानी सितंबर में समीक्षा करेगा। इस साल चौदह जुलाई को लार्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को दो सौ इकतालीस रन का लक्ष्य दिया था। इंग्लैंड की टीम को जीत के लिए जब तीन गेंद पर नौ रन की जरूरत थी। बेन स्टोक्स ने मिड विकेट की ओर शॉट खेला और रन के लिए दौड़ पड़े। वे पहला रन पूरा करने के बाद दूसरे रन के लिए फिर दौड़ पड़े। इस बीच, न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने गेंद को फील्ड कर स्टोक्स को आउट करने के लिए थ्रो किया। हालांकि, गेंद स्टोक्स के बल्ले से लगते हुई बाउंड्री के पार चली गई। स्टोक्स दो रन ले चुके थे, इसलिए अंपायर ने बैट्समैन के खाते में छः रन जोड़ने का फैसला दिया था। हालांकि, इसके बाद भी वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला टाई हो गया था। बाद में सुपर ओवर हुआ। सुपर ओवर में भी दोनों टीमों ने बराबर रन बनाए। इसके बाद ज्यादा बाउंड्री लगाने के आधार पर इंग्लैंड को चैंपियन घोषित किया गया था। इंग्लैंड की टीम ने छब्बीस और न्यूजीलैंड की टीम ने सत्रह बाउंड्री लगाई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, MCC की ओर जारी बयान में कहा गया है कि वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी ने क्रिकेट विश्व कप फाइनल के ओवरथ्रो के बारे में उन्नीस. आठ नियम के बारे में बात की है। कमेटी का मानना है कि नियम स्पष्ट है। इसके बावजूद सितंबर में इस मामले की समीक्षा होनी चाहिए। इंग्लैंड को विजेता घोषित करने के तरीके की कई लोगों ने आलोचना की थी। इसमें सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर भी शामिल थे। तेंदुलकर का मत था कि सुपर ओवर टाई होने के बाद एक और सुपर ओवर कराया जाना चाहिए था। न्यूजीलैंड के मीडिया ने भी इस फैसले को लेकर आईसीसी की काफी लानत मलानत की थी।
अमरावती/दि. 23- केंद्र व राज्य सरकार ने कम आय वाले परिवार के लिए निःशुल्क व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उपचार की सुविधा कर रखी है. इन दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों को केंद्र की आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री तथा राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के कार्ड बनाने का आवाहन विभागीय व्यवस्थापक सुनील सुखदेव वाठोरे ने किया है. महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना व आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना के विभागीय व्यवस्थापक सुनील वाठोरे ने अमरावती मंडल व्दारा लिए गए साक्षात्कार में बताया कि, केंद्र की प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना में आयुष्मान भारत नामक कार्ड तैयार किया जाता है. इस कार्ड को बनाने के लिए जिले के नागरिक समीप के सेतू केंद्र में जा सकते है. लाभार्थी का नाम वर्ष 2011 की जनगणना में शामिल हुआ रहना आवश्यक है. इस योजना का लाभ लेने के लिए हर नागरिक को पहले आयुष्मान कार्ड तैयार करना आवश्यक है. इसके लिए राशन कार्ड अथवा प्रधानमंत्री महोदय का पत्र व वैध पहचानपत्र (आधार कार्ड) पास में रहना अनिवार्य है. आधार कार्ड व राशन कार्ड ले जाने के बाद यदि जनगणना की सूची में नागरिकों का नाम है तो उनका ई-कार्ड तैयार होने रजिस्ट्रेशन हो जाता है और यह कार्ड तत्काल निःशुल्क प्राप्त होता है. आयुष्मान भारत का यह ई-कार्ड तैयार होने के बाद संबंधित लाभार्थी 5 लाख रुपए तक निःशुल्क स्वास्थ्य उपचार करवा सकता है. इसी तरह महाराष्ट्र राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना है. इस योजना के तहत जिले के नागरिक डेढ लाख रुपए तक अपना उपचार निःशुल्क सरकारी व निजी अस्पतालों मेंं करवा सकते है. इस योजना का ई-कार्ड तैयार करने के लिए पिले, केसरी, अंत्योदय अन्न योजना, अन्नपूर्णा योजना के राशनकार्ड में नाम रहना आवश्यक है. जिनके पास सफेद राशन कार्ड है और जो किसान है उन्हें सातबारा का दाखिला आवश्यक है. वह इस योजना का लाभ ले सकते है. शासकीय अनाथआश्रम के विद्यार्थी, शासकीय आश्रमशाला के विद्यार्थी, शाासकीय महिला आश्रम शाला की महिलाएं, शासकीय वृद्धाश्रम के वरिष्ठ नागरिक, सूचना व जनसंपर्क कार्यालय के मानक के मुताबिक पत्रकार, महाराष्ट्र इमारत व अन्य बांधकाम कामगार कल्याणकारी मंडल के पास पंजीकृत जीवित कामगार तथा उनके परिवार, संबंधित संस्था अथवा प्राधिकरण के पास के पहचानपत्र के मुताबिक लाभार्थी पात्र होंगे. इस योजना का लाभ लेने के लिए वैध राशनकार्ड और आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता कार्ड में से कोई भी एक पहचानपत्र अनिवार्य है. केंद्र व राज्य सरकार की आयुष्मान भारत तथा महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के तहत लाभार्थी कैंसर, हृदयरोग शस्त्रक्रिया, मूत्रपिंड व मूत्रमार्ग विकार शस्त्रक्रिया, मस्तिष्क विकार, अस्थी व्यंग, प्लास्टिक सर्जरी, झुलसे मरीज, स्त्रीरोग, बाल रोग, त्वचा रोग, मोतिबिंद, कृत्रिम अवयव, फुफ्फुस बीमारी के उपचार, एंडोक्राइन, इंटरवेशनल रेडियोलॉजी व होमेटोलॉजी के अलावा ज्वॉइंट प्रत्यारोपण (गुडधा, कोहनी), छोटे बच्चों का कैंसर उपचार, मानसिक रोग का समावेश आदि सहित महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना में 996 उपचार के लिए प्रतिवर्ष 15 लाख रुपए तक बीमा सुरक्षा तथा आयुष्यमान भारत प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना के तहत अतिरिक्त 213 उपचार सहित कुल 1209 उपचार के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए की वैद्यकीय सुरक्षा नागरिकों के लिए रखी गई है. केंद्र व राज्य सरकार की इन दोनों स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लेने के लिए नागरिक समीप के शासकीय अस्पताल अथवा जिला अस्पताल से संपर्क कर सकते है. साथ ही आप इन दोनों योजनाओें के तहत लाभार्थी है अथवा नहीं यह जानने के लिए www. mera. pmjay. gov. in पर जाकर जानकारी ली जा सकती है. इसके अलावा अधिक जानकारी के लिएwww. jeevandayee. gov. in and www. pmjay. gov. in वेबसाइट पर देखा जा सकता है. आयुष्मान भारत व महात्मा ज्योतिराव फुले स्वास्थ्य योजना का लाभ लाभार्थी जिले के शासकीय व निजी सहित कुल 23 अस्पतालों से ले सकते हैं. इनमें 10 शासकीय अस्पतालोें मेें अमरावती का जिला सामान्य अस्पताल, सुपरस्पेशालिटी अस्पताल, जिला महिला अस्पताल (डफरीन), दर्यापुर का उपजिला अस्पताल, अचलपुर उपजिला अस्पताल, मोर्शी उपजिला अस्पताल, धारणी उपजिला अस्पताल, चांदुर बाजार ग्रामीण रुग्णालय, नांदगांव खंडेश्वर ग्रामीण रुग्णालय, वरुड ग्रामीण रुग्णालय के अलावा 13 निजी अस्पतालों में अमरावती का आरोग्यमय इंस्टिट्यूटड मेडिकल साइंसेस, देशमुख आय हॉस्पीटल, डॉ. पंजाराब देशमुख हॉस्पीटल एण्ड कॉलेजस, धारणी का सुशीला नायर हॉस्पीटल, हायटेक मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल, मातृछाया हॉस्पीटल, भंसाली मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल (परतवाडा), बेस्ट मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल, संकल्प डायलीसिस सेंटर, श्री संत अच्युत महाराज रुग्णालय, सुजान कैंसर हॉस्पीटल, एकता हॉस्पीटल (दर्यापुर) और खेरडे बाल रुग्णालय (वरुड) का समावेश है. केंद्र सरकार के आयुषमान भारत व राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवानंद टाकसाले के मार्गदर्शन में इस योजना की जानकारी जिले के सभी लाभार्थियों तक पहुंचाने का कार्य विभागीय व्यवस्थापक सुनील सुखदेव वाठोरे के जरिए चलाया जा रहा है. वाठोरे ने आवाहन किया है कि, जिले में आयुष्मान भारत के 10 लाख 69 हजार 900 लाभार्थी है. इनमें से 33 प्रतिशत लाभार्थियों के ई-कार्ड बन चुके है. लेकिन अन्य लाभार्थियों को खुद समीप के सेतू केंद्र व शासकीय अस्पताल जाकर यह ई-कार्ड बना लें.
अमरावती/दि. तेईस- केंद्र व राज्य सरकार ने कम आय वाले परिवार के लिए निःशुल्क व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उपचार की सुविधा कर रखी है. इन दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों को केंद्र की आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री तथा राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के कार्ड बनाने का आवाहन विभागीय व्यवस्थापक सुनील सुखदेव वाठोरे ने किया है. महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना व आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना के विभागीय व्यवस्थापक सुनील वाठोरे ने अमरावती मंडल व्दारा लिए गए साक्षात्कार में बताया कि, केंद्र की प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना में आयुष्मान भारत नामक कार्ड तैयार किया जाता है. इस कार्ड को बनाने के लिए जिले के नागरिक समीप के सेतू केंद्र में जा सकते है. लाभार्थी का नाम वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना में शामिल हुआ रहना आवश्यक है. इस योजना का लाभ लेने के लिए हर नागरिक को पहले आयुष्मान कार्ड तैयार करना आवश्यक है. इसके लिए राशन कार्ड अथवा प्रधानमंत्री महोदय का पत्र व वैध पहचानपत्र पास में रहना अनिवार्य है. आधार कार्ड व राशन कार्ड ले जाने के बाद यदि जनगणना की सूची में नागरिकों का नाम है तो उनका ई-कार्ड तैयार होने रजिस्ट्रेशन हो जाता है और यह कार्ड तत्काल निःशुल्क प्राप्त होता है. आयुष्मान भारत का यह ई-कार्ड तैयार होने के बाद संबंधित लाभार्थी पाँच लाख रुपए तक निःशुल्क स्वास्थ्य उपचार करवा सकता है. इसी तरह महाराष्ट्र राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना है. इस योजना के तहत जिले के नागरिक डेढ लाख रुपए तक अपना उपचार निःशुल्क सरकारी व निजी अस्पतालों मेंं करवा सकते है. इस योजना का ई-कार्ड तैयार करने के लिए पिले, केसरी, अंत्योदय अन्न योजना, अन्नपूर्णा योजना के राशनकार्ड में नाम रहना आवश्यक है. जिनके पास सफेद राशन कार्ड है और जो किसान है उन्हें सातबारा का दाखिला आवश्यक है. वह इस योजना का लाभ ले सकते है. शासकीय अनाथआश्रम के विद्यार्थी, शासकीय आश्रमशाला के विद्यार्थी, शाासकीय महिला आश्रम शाला की महिलाएं, शासकीय वृद्धाश्रम के वरिष्ठ नागरिक, सूचना व जनसंपर्क कार्यालय के मानक के मुताबिक पत्रकार, महाराष्ट्र इमारत व अन्य बांधकाम कामगार कल्याणकारी मंडल के पास पंजीकृत जीवित कामगार तथा उनके परिवार, संबंधित संस्था अथवा प्राधिकरण के पास के पहचानपत्र के मुताबिक लाभार्थी पात्र होंगे. इस योजना का लाभ लेने के लिए वैध राशनकार्ड और आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता कार्ड में से कोई भी एक पहचानपत्र अनिवार्य है. केंद्र व राज्य सरकार की आयुष्मान भारत तथा महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के तहत लाभार्थी कैंसर, हृदयरोग शस्त्रक्रिया, मूत्रपिंड व मूत्रमार्ग विकार शस्त्रक्रिया, मस्तिष्क विकार, अस्थी व्यंग, प्लास्टिक सर्जरी, झुलसे मरीज, स्त्रीरोग, बाल रोग, त्वचा रोग, मोतिबिंद, कृत्रिम अवयव, फुफ्फुस बीमारी के उपचार, एंडोक्राइन, इंटरवेशनल रेडियोलॉजी व होमेटोलॉजी के अलावा ज्वॉइंट प्रत्यारोपण , छोटे बच्चों का कैंसर उपचार, मानसिक रोग का समावेश आदि सहित महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना में नौ सौ छियानवे उपचार के लिए प्रतिवर्ष पंद्रह लाख रुपए तक बीमा सुरक्षा तथा आयुष्यमान भारत प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य योजना के तहत अतिरिक्त दो सौ तेरह उपचार सहित कुल एक हज़ार दो सौ नौ उपचार के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष पाँच लाख रुपए की वैद्यकीय सुरक्षा नागरिकों के लिए रखी गई है. केंद्र व राज्य सरकार की इन दोनों स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लेने के लिए नागरिक समीप के शासकीय अस्पताल अथवा जिला अस्पताल से संपर्क कर सकते है. साथ ही आप इन दोनों योजनाओें के तहत लाभार्थी है अथवा नहीं यह जानने के लिए www. mera. pmjay. gov. in पर जाकर जानकारी ली जा सकती है. इसके अलावा अधिक जानकारी के लिएwww. jeevandayee. gov. in and www. pmjay. gov. in वेबसाइट पर देखा जा सकता है. आयुष्मान भारत व महात्मा ज्योतिराव फुले स्वास्थ्य योजना का लाभ लाभार्थी जिले के शासकीय व निजी सहित कुल तेईस अस्पतालों से ले सकते हैं. इनमें दस शासकीय अस्पतालोें मेें अमरावती का जिला सामान्य अस्पताल, सुपरस्पेशालिटी अस्पताल, जिला महिला अस्पताल , दर्यापुर का उपजिला अस्पताल, अचलपुर उपजिला अस्पताल, मोर्शी उपजिला अस्पताल, धारणी उपजिला अस्पताल, चांदुर बाजार ग्रामीण रुग्णालय, नांदगांव खंडेश्वर ग्रामीण रुग्णालय, वरुड ग्रामीण रुग्णालय के अलावा तेरह निजी अस्पतालों में अमरावती का आरोग्यमय इंस्टिट्यूटड मेडिकल साइंसेस, देशमुख आय हॉस्पीटल, डॉ. पंजाराब देशमुख हॉस्पीटल एण्ड कॉलेजस, धारणी का सुशीला नायर हॉस्पीटल, हायटेक मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल, मातृछाया हॉस्पीटल, भंसाली मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल , बेस्ट मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पीटल, संकल्प डायलीसिस सेंटर, श्री संत अच्युत महाराज रुग्णालय, सुजान कैंसर हॉस्पीटल, एकता हॉस्पीटल और खेरडे बाल रुग्णालय का समावेश है. केंद्र सरकार के आयुषमान भारत व राज्य की महात्मा ज्योतिराव फुले जनस्वास्थ्य योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवानंद टाकसाले के मार्गदर्शन में इस योजना की जानकारी जिले के सभी लाभार्थियों तक पहुंचाने का कार्य विभागीय व्यवस्थापक सुनील सुखदेव वाठोरे के जरिए चलाया जा रहा है. वाठोरे ने आवाहन किया है कि, जिले में आयुष्मान भारत के दस लाख उनहत्तर हजार नौ सौ लाभार्थी है. इनमें से तैंतीस प्रतिशत लाभार्थियों के ई-कार्ड बन चुके है. लेकिन अन्य लाभार्थियों को खुद समीप के सेतू केंद्र व शासकीय अस्पताल जाकर यह ई-कार्ड बना लें.
फतेहगढ़ साहिब - पंजाब की फतेहगढ़ साहिब लोकसभा सीट पर परंपरागत कांग्रेस तथा अकाली दल-भाजपा गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। चुनाव मैदान में कांग्रेस के पूर्व प्रधान एवं राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो के बेटे बनदीप दूलो को आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। आप के दो फाड़ होने तथा हाल में दो विधायकों के कांग्रेस में शामिल हो जाने से पार्टी कमजोर हुई है। कुछ सीटों पर तो आप प्रत्याशियों को अपनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है । आप ने इस सीट पर तीन उम्मीदवार बदले हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में आप की नीतियों से प्रभावित होकर पंजाब की जनता ने आप प्रत्याशी को जिताया था। कांग्रेस तथा अकाली दल ने पूर्व आईएएस अधिकारियों को अपना प्रत्याशी बनाया है । पिछली बार इस सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह खालसा जीते थे। इस बार राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा अकाली गठबंधन के बीच ही है। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस डा. अमर सिंह तथा अकाली गठबंधन ने पूर्व आईएएस दरबारा सिंह गुरु को मैदान में उतारा है। आप ने बनदीप सिंह दूलो कांग्रेस के सचिव पद छोड़कर आप में हाल में शामिल हुए और शामिल होते ही उन्हें टिकट दे दिया गया। पंजाब डेमोक्रेटिक अलाइंस के मनविंदर सिंह ग्यासपुरा सहित पंद्रह अन्य दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। दोनों ब्यूरोक्रेट पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सफल नहीं हो सके । डा. सिंह ने लुधियाना जिले की रायकोट सीट तथा श्री गुरू ने फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना सीट पर चुनाव लड़ा था। इस सीट पर नौ विधानसभा फतेहगढ साहिब, बस्सी पठाना, अमलोह, खन्ना, साहनेवाल, समराला, पायल और रायकोट तथा अमरगढ़ पड़ते हैं । इस सीट पर 14,74,947 मतदाता हैं ।
फतेहगढ़ साहिब - पंजाब की फतेहगढ़ साहिब लोकसभा सीट पर परंपरागत कांग्रेस तथा अकाली दल-भाजपा गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। चुनाव मैदान में कांग्रेस के पूर्व प्रधान एवं राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो के बेटे बनदीप दूलो को आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। आप के दो फाड़ होने तथा हाल में दो विधायकों के कांग्रेस में शामिल हो जाने से पार्टी कमजोर हुई है। कुछ सीटों पर तो आप प्रत्याशियों को अपनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है । आप ने इस सीट पर तीन उम्मीदवार बदले हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में आप की नीतियों से प्रभावित होकर पंजाब की जनता ने आप प्रत्याशी को जिताया था। कांग्रेस तथा अकाली दल ने पूर्व आईएएस अधिकारियों को अपना प्रत्याशी बनाया है । पिछली बार इस सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह खालसा जीते थे। इस बार राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा अकाली गठबंधन के बीच ही है। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस डा. अमर सिंह तथा अकाली गठबंधन ने पूर्व आईएएस दरबारा सिंह गुरु को मैदान में उतारा है। आप ने बनदीप सिंह दूलो कांग्रेस के सचिव पद छोड़कर आप में हाल में शामिल हुए और शामिल होते ही उन्हें टिकट दे दिया गया। पंजाब डेमोक्रेटिक अलाइंस के मनविंदर सिंह ग्यासपुरा सहित पंद्रह अन्य दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। दोनों ब्यूरोक्रेट पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सफल नहीं हो सके । डा. सिंह ने लुधियाना जिले की रायकोट सीट तथा श्री गुरू ने फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना सीट पर चुनाव लड़ा था। इस सीट पर नौ विधानसभा फतेहगढ साहिब, बस्सी पठाना, अमलोह, खन्ना, साहनेवाल, समराला, पायल और रायकोट तथा अमरगढ़ पड़ते हैं । इस सीट पर चौदह,चौहत्तर,नौ सौ सैंतालीस मतदाता हैं ।
भारतीय साधना और मंत तुलसी अतिरिक्त किसी अन्य देवता के लिए मेरा मस्तक नहीं झुकेगा । संत कवि दरिया ने 'एक वह एक हैं टेक कोई गहें के द्वारा एकमात्र परब्रह्म की स्थापना की हैं। इस प्रकार निर्गुण काव्य वहुदेववाद के प्रत्याख्यान के साथ ऐकेश्वरवाद की प्रतिष्ठा करता हैं । निगण काव्य का ऐकेश्वर या परब्रह्म अव्यक्त निगण ब्रह्म है । कवीर ने 'अविगत अलख अभेद विधाता' कहकर अव्यक्त निग ण निराकार अखण्ड परब्रह्म का प्रतिपादन किया है। धर्मदास ने भी 'अविगत से परिचै भई' तो आवागमन निवारि" के द्वारा अव्यक्त ब्रह्म की उपासना से मोक्ष का वर्णन किया है । सुन्दरदास ने 'अव्यक्त पुरुप अगम अपारा' कहकर परब्रह्म को अव्यक्त ही निर्धारित किया है और कहा है कि बुद्धिगोचर होने के कारण वह वर्णनातीत हैं । यथार्थ यही हैं कि परब्रह्म के अव्यक्त निर्गुण स्वरूप को व्यक्त करने में वाणी सर्वदा असमर्थ रही है । इद्रियातीत ब्रह्म को न तो बुद्धि द्वारा ग्रहण किया जा सकता है और न है वाणी द्वारा व्यक्त किया जा सकता है । इसी कठिनाई के कारण सत्यान्वेषी साधकों को निपेधमुखेन ब्रह्म का वर्णन करना पड़ा है। 'परमात्मा यह है' न कहकर वे कहते हैं 'परमात्मा यह नहीं है। उपनिपदों में इस प्रणाली का प्रयोग किया गया है और सन्तों ने भी इस सम्बन्ध में परम्परा का अनुसरण ही किया है । कवीर ने कहा है कि न वह वालक है न बूढा, न उसकी माप है, २ - यह सिर नवे त राम कू नाहीं गिरियो टूट । आनदेव नहि परसिये, यह तन जायो छूट -सन्त वानी संग्रह, प्रथम भाग, पृ० १४७ । ३ - दरिया साहव की शब्दावली, पृ० १० । ४~-कबीर ग्रन्थावली, पृ० १० । ५ - धर्म दास की शब्दावली, पृ० ७७ । ६-- अव्यक्त पुरुष अगम अपारा । कैसे के करिये निर्द्वारा । आदि अन्त कछ, जाइ न जानी । मध्य चरित्र सु अकय कहानी ।। -सुन्दर ग्रन्थावलो, प्रथम खण्ड, ९९ - १००। ७-ना हम वार मूढ़ हम नाहीं, ना हमरे चिलकाई हो । फवीर ग्रन्थावली, पृ० १०४ ।
भारतीय साधना और मंत तुलसी अतिरिक्त किसी अन्य देवता के लिए मेरा मस्तक नहीं झुकेगा । संत कवि दरिया ने 'एक वह एक हैं टेक कोई गहें के द्वारा एकमात्र परब्रह्म की स्थापना की हैं। इस प्रकार निर्गुण काव्य वहुदेववाद के प्रत्याख्यान के साथ ऐकेश्वरवाद की प्रतिष्ठा करता हैं । निगण काव्य का ऐकेश्वर या परब्रह्म अव्यक्त निगण ब्रह्म है । कवीर ने 'अविगत अलख अभेद विधाता' कहकर अव्यक्त निग ण निराकार अखण्ड परब्रह्म का प्रतिपादन किया है। धर्मदास ने भी 'अविगत से परिचै भई' तो आवागमन निवारि" के द्वारा अव्यक्त ब्रह्म की उपासना से मोक्ष का वर्णन किया है । सुन्दरदास ने 'अव्यक्त पुरुप अगम अपारा' कहकर परब्रह्म को अव्यक्त ही निर्धारित किया है और कहा है कि बुद्धिगोचर होने के कारण वह वर्णनातीत हैं । यथार्थ यही हैं कि परब्रह्म के अव्यक्त निर्गुण स्वरूप को व्यक्त करने में वाणी सर्वदा असमर्थ रही है । इद्रियातीत ब्रह्म को न तो बुद्धि द्वारा ग्रहण किया जा सकता है और न है वाणी द्वारा व्यक्त किया जा सकता है । इसी कठिनाई के कारण सत्यान्वेषी साधकों को निपेधमुखेन ब्रह्म का वर्णन करना पड़ा है। 'परमात्मा यह है' न कहकर वे कहते हैं 'परमात्मा यह नहीं है। उपनिपदों में इस प्रणाली का प्रयोग किया गया है और सन्तों ने भी इस सम्बन्ध में परम्परा का अनुसरण ही किया है । कवीर ने कहा है कि न वह वालक है न बूढा, न उसकी माप है, दो - यह सिर नवे त राम कू नाहीं गिरियो टूट । आनदेव नहि परसिये, यह तन जायो छूट -सन्त वानी संग्रह, प्रथम भाग, पृशून्य एक सौ सैंतालीस । तीन - दरिया साहव की शब्दावली, पृशून्य दस । चार~-कबीर ग्रन्थावली, पृशून्य दस । पाँच - धर्म दास की शब्दावली, पृशून्य सतहत्तर । छः-- अव्यक्त पुरुष अगम अपारा । कैसे के करिये निर्द्वारा । आदि अन्त कछ, जाइ न जानी । मध्य चरित्र सु अकय कहानी ।। -सुन्दर ग्रन्थावलो, प्रथम खण्ड, निन्यानवे - एक सौ। सात-ना हम वार मूढ़ हम नाहीं, ना हमरे चिलकाई हो । फवीर ग्रन्थावली, पृशून्य एक सौ चार ।
आज यूपी में कई पत्रकार सपा की दलाली करने में व्यस्त हैं। ये लोग पत्रकार जगेंद्र सिंह की शहादत को भुलाकर उनका अपमान कर रहे हैं। लेकिन यूपी के ढेर सारे पत्रकार याद रखें हुए हैं वो बर्बरता जिसे सपा के लोगों ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के साथ की थी। अगर सपाइयों की कमर न तोड़ी गई तो वो बर्बरता कल के दिन आपके साथ भी होगी। तब आपको पश्चाताप होगा कि हम उन लोगों की दलाली कर रहे थे जिन्होंने यूपी में कानून का नहीं, गुंडों एवं हत्यारों का राज चला रखा है। इसीलिए यूपी के पत्रकारों को शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या को याद रखकर इस चुनाव में पत्रकारिता करने की जरूरत है। सपा के गुंडाराज, बलात्कारराज, लूट, हत्या, भ्रष्टाचार, दबंगई, अपहरण को यूपी की जनता के सामने ना लाकर सपा की दलाली करने वाले पत्रकारों पर धिक्कार है। बरेली : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह मर्डर केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर जबरन दो गवाहों के कोर्ट में बयान कराने का दबाव बना रहे हैं। इन गवाहों के बयान के जरिए वह खुद को केस से बचाना चाहते हैं, लेकिन बरेली के पुलिस अधिकारियों ने आईओ को बिना किसी दवाब के सही जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मारे जाने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस उस याचिका पर सुनवाई के बाद जारी कि जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार को जलाए जाने और उनकी हत्या के मामले की स्वतंत्र जांच के लिये जगेंद्र के बेटे द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने की परिस्थितियों की सीबीआई जांच हेतु दायर याचिका पर विचार करने का निश्चय किया. इससे पहले याचिका दायर कर पत्रकारों की सेफ्टी के लिए गाइडलाइंस बनाए जाने की बात कही गई है. New Delhi: The Supreme Court on Friday decided to entertain a plea seeking CBI probe into the circumstances leading to the withdrawal of a petition by a journalist's son, who had sought an independent probe into the alleged burning and murder case of his father in which a state minister and five others have been booked. An application filed by a Lucknow scribe has claimed that the son of slain journalist, Jagendra Singh, was pressurised and threatened by the alleged killers of his father, following which he had written a letter to his lawyer on July 23 wishing to withdraw the petition. लखनऊ : शाहजहांपुर के दिवंगत पत्रकार जागेंद्र सिंह के बेटे के अचानक मंत्री राममूर्ति वर्मा के पक्ष में बयान देने के बाद आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में जागेंद्र के लड़कों सहित सभी गवाहों की रक्षा करने और सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को उपयुक्त माहौल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के बेटे ने कहा है कि उसे सीबीआई जांच नहीं करानी क्योंकि उसके पिता कन्फयूज्ड थे और इसी मतिभ्रम के कारण उन्होंने आत्मदाह किया था। उन्हें किसी ने जलाया नहीं और मंत्री एकदम निर्दोष है। शाहजहांपुर (उ. प्र. ) : जिंदा जलाकर मारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार को धमकाया जा रहा है। घटना की सीबीआई जांच करने की मांग करते हुए जगेंद्र के बेटे राहुल ने पिछले दोनो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। तभी से परिवार पर दबाव डाला जा हा है कि वे समझौता कर लें अन्यथा उनके साथ अच्छा न होगा। बताया जा रहा है कि जगेंद्र के दोनो बेटे पिछले कई दिनो से लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। जगेन्द्र के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। अब हमारे और आपके सड़क पर उतरने का वक्त है... पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च का कार्यक्रम तय किया गया है जो 8 जुलाई को यानि कल होना है. इसमें आप भी आइए. चुप रहने, घर बैठे का वक्त नहीं है अब. देश भर में पत्रकारों की लगातार जघन्य तरीके से हत्याएं हो रही हैं. जगेंद्र सिंह, संदीप कोठारी, अक्षय सिंह... समेत दर्जनों हत्या-उत्पीड़न के मामले हैं. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है. अभी तक तो यूपी सरकार की किरकिरी कराने वाले चाचा जान ने कल्वे जव्वाद पर हमला बंद भी नहीं किया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम मूर्ति वर्मा का पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में नामजद होना यूपी सरकार के लिए एक चिंता का सवाल बन गया है । सरकार पत्रकार हत्याकांड में नामजद मंत्री पर कत्तई एक्शन न लेने के मूड में है । अगर नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों पर गौर किया जाय तो प्रतिवर्ष जितने पत्रकारों के देश भर में उत्पीड़न के मामले प्रकाश में आते हैं, उसके 72 % मामले अकेले यूपी के होते हैं, जो राज्य के वजीर ए आलम अखिलेश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। क्या अखिलेश के अंदर शासन व सत्ता को सुचारु रूप से चल़ाने का म़ाद्दा खत्म हो चुका है? क्या युवा शक्ति के आकलन में कोई सेंध है? कुछ मित्रों को लगता है कि जागेन्द्र के परिवारों को 30 लाख रूपये, दो बच्चों को सरकारी नौकरी और उसके घर की दूसरे से कब्जायी पांच एकड़ जमीन को छ़ुडवाने के सरकारी फैसले के बाद उनका परिवार संतुष्ट है और सरकार भी हल्की हो गयी है। ऐसे लोगों को लगता है कि यह तो धोखाबाजी हो गयी। जागेन्द्र के लिए जंग लड़ी हम सब लोगों ने और मलायी काट लिया उसके घरवालों ने, सरकार ने और सरकारी दलाल पत्रकारों ने। उन्हें लगता है कि अब यह सारा मामला ठण्डा हो चुका है और इस देश में अब इसके बाद कुछ भी नहीं हो सकता है। क्योंकि लोगों ने एक-दूसरे को खरीद-बेच लिया है। उत्तरप्रदेश के जगेंद्र सिंह और मध्यप्रदेश के संदीप कोठारी की हत्याओं में एक समानता है और वह है दोनों अपने - अपने राज्यों के खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिख रहे थे। ये वो माफिया है जिसकी सरपरस्ती भारत के हर राज्य में पॉवरफुल मंत्रियों नेताओं के पास होती है। ये माफिया इतना बेखौफ है कि पत्रकार तो बहुत दूर की बात है अगर कोई पुलिस अधिकारी, तहसीलदार या अन्य कोई इनके क्षेत्र में कार्रवाई के लिये घुस जाये तो ये दिनदहाडे ट्रेक्टर, डंफर से उसे कुचलने में कोताही नहीं बरतते। मैं हमेशा कहता हूँ कि अच्छा, बुरा कुछ नहीं होता। अति ही बुराई है। सद्कर्म की भी अति हो जाये, तो परिणाम नकारात्मक ही आता है। आप आगे को भागिए और भागते रहिये, तो एक दिन लौट कर वहीं आ जायेंगे, जहां से चले थे, ऐसे ही पीछे को दौड़ने पर होगा। पीछे को दौड़ने वाला भी रुके न, तो वो भी एक दिन वहीं आ जायेगा, जहां से भागा था, इसीलिए बीच की अवस्था को शिखर कहा जाता है, संतुलन जीवन की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है। शिखर पर ठहरे रहना होता है, मतलब संतुलन बनाये रखना होता है, लेकिन कोई शिखर पर पहुंचने के बाद भी संतुलन न बना सके, तो उस पार नीचे जाने का ही रास्ता होता है फिर। खैर, मन धर्म-अध्यात्म और कर्म पर चर्चा का नहीं है। मन है शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र कांड पर बात करने का। इस प्रकरण में भी समाजसेवा की थोड़ी अति हो गई, जिससे परिणाम अपेक्षित नहीं आ पा रहा है। लखनऊ के चर्चित अधिवक्ता प्रिंस लेनिन ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में ही गहन अध्ययन के बाद जगेन्द्र प्रकरण में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सरकार से जवाब माँगा गया। आशा थी कि बहस के बाद सीबीआई जांच के आदेश हो जायेंगे, उससे पहले दिल्ली के पत्रकार सतीश जैन ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। अमर शहीद पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार द्वारा मुआवजा स्वीकार कर लेने व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बात को मानकर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही जाँच से संतुष्ट होने की बात को दिल का ताड़ बनाकर पेश करने वाले साथियों से मेरा एक प्रश्न है। इन बातों को स्वीकार करने के अलावा उन गरीब, कमजोर, डरे हुए लोगों के पास क्या कोई दूसरा विकल्प था। जगेन्द्र को जिन्दा जला देने वाली घटना को आत्महत्या साबित करने में जुटी यूपी पुलिस के कार्य क्षेत्र में उनको सुरक्षित रहना है या नहीं? इनका फैसला समाजवादी पार्टी के तथाकथित गुंडों एव खाकी के द्वारा ही तो किया जाना है। जिन्दा रहना है तो बात मानो वर्ना कौन बचायेगा हम जगेन्द्र के परिवार को कही भी दोषी साबित नहीं कर सकते। लाश पर रोटियां कैसे सेंकी जाती हैं, उसका सबसे ज्वलंत प्रमाण है जगेन्द्र सिंह हत्याकांड। छुटभैये पत्रकारों और नेताओं से लेकर प्रेसकौंसिल के खलीफाओं तक ने खूब फायदा उठाया इस प्रकरण का। जिन सरदार शर्मा के खिलाफ अपने जीवित रहते जगेन्द्र सिंह मोर्चा खोले रहे, हर कोई उन्ही से जाके पूछता रहा- जगेन्द्र पत्रकार था, तो कैसे? लखनऊ की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट ने जगेंद्र हत्याकांड को खुदकुशी करार दिया है। बताया गया है कि जगेन्द्र ने खुद आग लगाई थी. छाती के बाईं तरफ से आग से जलने के निशान पाए गए हैं. गौरतलब है कि जगेन्द्र ने घायल होने के बाद बयान दिया था और यूपी के मंत्री राममूर्ति वर्मा और यूपी पुलिस पर आग लगाने का आरोप लगाया था। नई दिल्लीः पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के आरोपी मंत्री पर तो अभी तक कार्रवाई नहीं हुई लेकिन परिवार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीस लाख रुपए के मुआवजे और घर के दो लोगों को नौकरी का भरोसा दे दिया है. इसके बाद परिवार ने धरना खत्म कर दिया है. नई दिल्ली : शाहजहांपुर के जुझारू पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। इससे हत्याकांड के आरोपी मंत्री और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी आसान होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। कोर्ट ने हत्याकांड के संबंध में यूपी सरकार, केंद्र सरकार और प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब कर लिया है। वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है - "यूपी के डीजीपी अरविन्द जैन की पुलिस का कमाल यहां शाहजहांपुर में देखें तो आप दांतों तले उंगलियां कुचल डालेंगे, जहां मंत्री का इशारा था, अपराधी मोहरा बना था और अपराधी बना डाला गया हत्या का जरिया। सिर्फ दो दिन तक पुलिस ने एक सीधी-सच्ची एफआईआर को टाल दिया और उसकी जगह में एक नयी रिपोर्ट दर्ज लिख डालीा ताना-बाना इतना जबर्दस्त बुना गया कि उसके बल पर मंत्री-अपराधी-पत्रकार और पुलिस की साजिशों से जगेन्द्र सिंह के खिलाफ डेथ-वारण्ट तामील करा दिया। अब मैं इस प्रकरण पर सीधे अदालत में ही पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा हूं, जिसमें डीजीपी अरविन्द जैन भी शामिल होंगे, जिन्होंने जान-बूझ कर भी एक असल मामले की तहरीर को मनचाहे तरीके से बदलवा दिया। उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार की जलने के बाद हुई मौत से ठीक पहले पत्रकार के अंतिम बयान में यह कहा जाना कि "मुझको गिरफ्तार करना था... तो कर लेते मगर पीटा क्यों ? और आग क्यों लगा दी? ", इतने सवालों को खड़ा कर देता है कि न तो उत्तर प्रदेश सरकार उनका जवाब दे पाएगी न ही पत्रकारिता जगत के दिग्गज! अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था, कि मध्य प्रदेश में भाजपा शासित सरकार की नाकामी के तौर पर एक पत्रकार की जली हुई लाश बरामद हुई, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि खनन माफिया ने पहले पत्रकार का अपहरण किया और बाद में जलाकर मारा और लाश को दबा दिया। सरकार सपा की हो या बीजेपी की, पत्रकार कहां सुरक्षित है. . ? ये समझ में नहीं आ रहा ! और इसके लिए दोषी कौन है. . ? ये भी साफ नहीं हो रहा है ! बालाघाट (मप्र) : पत्रकार संदीप कोठारी हत्याकांड के संबंध में कटंगी के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जे एस मरकाम ने बताया कि पुलिस को पता चला है कि तीनों गिरफ्तार आरोपी अवैध खनन और चिटफंड के कारोबार से जुड़े हुए हैं और पत्रकार पर उनके खिलाफ अवैध खनन का एक स्थानीय अदालत में दर्ज प्रकरण वापस लेने का दबाव बना रहे थे। संदीप इसके लिए राजी नहीं था और संभवतः उसे इसकी ही कीमत चुकानी पड़ी है। शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार को धमकी और लालच देने का सिलसिला जारी है। मृतक के परिजनों ने धमकाने की शिकायत पुलिस में दी है। पिछले सात दिनों से धरने पर बैठे परिजनों ने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार भी कर दिया। जिले के तमाम पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार किया। इस दौरान पत्रकारों ने हवन पूजन कर 13 ब्राह्मणों को भोजन भी कराया। यह है एक निर्भीक पत्रकार को जिन्दा फूंकने के लिए हत्यारे मंत्री-माफिया-पुलिस और पत्रकारों की चौकड़ी का जिन्दा सुबूत। यह सुबूत है कि कैसे जगेन्द्र सिंह को मंत्री और पुलिसवालों ने अंतहीन उत्पीड़न और मारक तनाव दिये, बल्कि यूपी सरकार में सच बोलने वालों को हश्र क्या होता है। एक बहुत बड़ी खबर मध्य प्रदेश से आ रही है. यहां बालाघाट के एक पत्रकार संदीप कोठारी को माफियाओं ने जला कर मार डाला है. नई दुनिया और पत्रिका जैसे अखबारों में काम कर चुके संदीप की खबरों से माफिया नाराज थे. संदीप बालाघाट के कटंगी कस्बे में कार्यरत थे. बताया जा रहा है कि माफियाओं ने इन्हें किसी बहाने से बुलाया और बहका कर महाराष्ट्र के नागपुर की तरफ ले गए. मध्य प्रदेश की सीमा से बाहर निकलने ही सूनसान इलाका देखकर माफियाओं ने पहले संदीप कोठारी को जिंदा जलाया उसके बाद जमीन में दफना दिया. इस सनसनीखेज और हृदयविदारक घटना जिसकी मिल रही है वह स्तब्ध है. शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को प्रदेश सरकार ने ठुकरा दिया है। अब देश-प्रदेश के आंदोलित पत्रकारों और संगठनों की निगाह 25 जून को इस मामले की हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रदेश सरकार का एक आरोपी राममूर्ति वर्मा के होने से इस मांग को ठुकराए जाने की मुख्य वजह माना जार हा है। हत्याकांड में कोतवाली प्रभारी समेत पांच पुलिस वाले भी अभियुक्त हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है लेकिन एक भी हत्यारोपी अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है। लगता है लोगों का इतिहासबोध कमजोर पड़ता जा रहा है। पढ़ने की शगल खत्म होती जा रही है, खास तौर पर राजनीतिक जीवधारी, अब किताबों से दूर होते जा रहें हैं। राजनीति की नई कोपलें तो अपनी इतिहास और भूगोल दोनों की सामान्य जानकारी से भी दूर होती जा रही हैं। वर्तमान में जीने वाली पीढ़ी अतीत से शायद कुछ सीखना ही नहीं चाहती। जबकि पहले के राजनेता अध्ययन में रूचि लेते थे और देश व दुनिया के इतिहास और आंदोलन की कहानी पढ़ते थें, पढ़ते ही नहीं थे, बल्कि अध्ययन से अपनी विचारधारा को भी परिपक्व और पुष्ट करते थें। गाँधी, नेहरू, लोहिया, जे. पी, दीन दयाल उपाध्याय आदि अनेक राजनेता और 'जननायक' स्वअध्ययन में गहरी रूचि लेने वाले थे। चौरी-चौरा हत्याकाण्ड में पकड़े गये 170 लोगों पर भी जघन्य आरोप लगे थे और अंग्रेजी हुकूमत ने इन सब को फांसी पर लटका देने का हुक्म दे दिया था। लेकिन उस समय महामना मदनमोहन मालवीय ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर इन वकालत की पुरानी डिग्री निकाली और बिना कोई पारिश्रमिक हासिल किये, इनमें से 151 लोगों को फांसी के फंदे से आजाद कराने के लिए जी-जान लड़ा दिया। अलीगढ़ : बुधवार सुबह लगभग 11. 00 बजे सेंटर पाइन्ट चैराहे पर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, रीजनल इलैक्ट्रानिक मीडिया, अलीगढ़ इलैक्ट्रोनिक मीडिया, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन व गणेश शंकर विद्यार्थी प्रैस क्लब के पदाधिकारी, शहर के पत्रकारों ने जगेंद्र हत्याकांड पर जुलूस निकाल कर कड़ा विरोध प्रकट किय। सीतापुर : पत्रकार जगेन्द्र सिंह हत्या कांड के विरोध में मंगलवार देर शाम पत्रकारों, समाज सेवियों व व्यापारियों ने लालबाग चैराहे से शहीद लालबाग पार्क तक कैंडिल मार्च निकाला। निर्ममता से मारे गए पत्रकार जगेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। पत्रकारों ने कहा कि लगातार हमले हो रहे हैं और सरकार खामोश है। ऐसे वक्त में सभी पत्रकारों को एकजुट रहने की जरूरत है। Ved Ratna Shukla : वर्मा जी को राम-राम कहलवा भेजिएगा... सरकार बहादुर कहिए तो आपके चरणों में लोट जाऊं... क्या धांसू काम किया है. मन कर रहा है नाचूं! सरकार बहादुर ने दो कौड़ी के पत्रकारों के लिए मशीनरी टाइट कर दिया. गजब! महिलाओं के लिए भी हेल्पलाइन शुरू की थी आपने. यकीन मानिए तबसे महिलाएं रातभर पैदल, स्कूटी से अकेले-दुकेले घूम रही हैं एकदम निश्चिंत-महफूज. आपके इकबाल से उनकी तरफ अब कोई आंख उठाकर देखता भी नहीं. वो कहते हैं न कि यही तो रामराज है. हालांकि मोहनलालगंज. 'पत्रकार जगेंद्र सिंह को किसी ने नहीं जलाया, उसने ही खुद को आग के हवाले किया। इस प्रकरण में कोई हत्यारा नहीं है और न ही कोई दोषी है। सब निर्दोष हैं, न राममूर्ति वर्मा का इसमें कोई हाथ है, और न ही उनके करीबी गुफरान का, बस यही सच है, जो मैं कह रही हूं। ' ये कहना किसी और का नहीं बल्कि जगेंद्र की एक महिला सुपरिचित का है। दुनिया भर में चर्चित शाहजहाँपुर के पत्रकार जगेन्द्र हत्या कांड को 'हत्या और आत्म हत्या' के बीच उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रभावशाली नामजद आरोपी, पुलिस और कुछ मीडिया संस्थान शर्मनाक तरीके से दिवंगत पत्रकार का चरित्र हनन तक करने लगे हैं, जबकि बड़ा कारण हत्या, आत्म हत्या और चरित्र नहीं, बल्कि मृत्यु है। बड़ी बात यह नहीं है, जगेन्द्र मरे कैसे? बड़ी बात यह बात है कि जगेन्द्र मरे क्यों? पत्रकारों की लड़ाई नहीं, पत्रकारिता को कलंकित करने में जुटे हैं बड़े नेता। इन नेता जी की जिम्मेदारी मानी जाती है कि वे कम से कम अपनी बिरादरी के लोगों के प्रति थोड़ी संवेदनशीलता और संवेदना रखेंगे और पत्रकारों पर होने वाले अन्याय-अत्याचार पर अपनी आवाज निकालेंगे। लेकिन खुद को बड़ा पत्रकार मानने-कहलाने वाले यह पत्रकार-अगुआ लोग न सिर्फ इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं, बल्कि जागेन्द्र की लाश को खरीदने-बेचने की गुपचुप कवायद में भी जुटे हैं। जागेन्द्र सिंह के जिन्दा-दाहकाण्ड वाले हौलनाक हादसे के बाद इन इस पत्रकार-शिरोमणि ने ठीक वही स्टैण्ड लिया, जो सरकार के इशारे पर यूपी पुलिस कर रही है। बजाय इसके कि जिन्दा जागेन्द्र को मौत की नींद सुलाने वाले अपराधियों पर यह पत्रकार-नेता आंदोलन करते और हुंकारें भरते, इन लोगों ने पूरे मामले की आग पर ही पानी फेर दिया। पत्रकारिता को कलंकित करते इन पत्रकारों ने इस मामले में जो करतूत की है, उससे बड़े से बड़ा दलाल भी शरमा जाएगा। वाराणसी : सोशल मीडिया जर्नलिस्ट अवनिन्द्र कुमार सिंह ने पत्रकार जगेंद्र सिंह मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल राम नाइक और उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को पत्र लिख कर मांग की है कि सीबीआई जांच कराई जाए, तभी ऐसे क्रूरतम कृत्य की सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव से मदद मिलने के बजाय सरकार अपनी हठधर्मिता पर उतारू है। सपा के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ने जो बयान जगेंद्र की हत्या को लेकर दिया, वह शाहजहांपुर ही नहीं, पूरे देश को शर्मसार करने वाला है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जून 2015 में एक पत्रकार को जिंदा जलाकर मार दिया जाता है। लोगों को पता था कि ऐसा हो सकता है, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। हत्या के बाद बेशर्मी की हद देखिए कि पत्रकार बिरादरी ने जगेंद्र को कलमकार मानने से ही इनकार कर दिया। अपनों की बेरुखी एक जुनूनी को ले डूबी। जाइये, नहीं करते राज्यमंत्री को बर्खास्त, नहीं भेजते जेल... अब जो करना है, मीडिया कर ले। कुछ ऐसे ही भाव थे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा व सरकार में नम्बर दो के दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के। सोशल मीडिया पर खिलने वाले पत्रकार के मामले में एनडीटीवी वाले रवीश कुमार ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम खुला पत्र लिखा और कहा कि अगर राज्यमंत्री पर कार्रवाई करें तो संबंधित पत्र के साथ मेरा पत्र नत्थी कर दें। यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के परिजनों को भरोसा दिया है कि वह घटना की विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात करेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहराइच में गत दिवस संकेतों में कहा कि हमारी सरकार के कुछ लोग गलत काम कर रहे हैं। उधर, जगेंद्र सिंह का परिवार पिछले कई दिनो से धरने पर बैठा है लेकिन आरोपी मंत्री के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट तलब कर ली है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 24 जून को होगी। पूरे उत्तर प्रदेश में, लगभग हर जनपद में पत्रकार संगठन मौत के घाट उतारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार का साथ दे रहे हैं तथा आन्दोलनरत हैं, परन्तु लखनऊ के कई पत्रकार संगठन बिलकुल मौन हैं। सहायता करना तो दूर, यहां तक कि जगेन्द्र सिंह में ही कमियां गिनाते फिर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि पति/पिता की मृत्यु का दर्द उसकी निर्बल विधवा तथा अनाथ हुए बच्चे ही जान सकते हैं और आज उत्तर प्रदेश के माहौल में यह दिन किसी अन्य का भी आ सकता है। पिछले दस दिनों में तीन पत्रकारों पर हमले हुए हैं, यह अच्छा संकेत नहीं है। लगभग दो-ढाई वर्ष पुरानी बात होगी. फेसबुक पर किसी ने एक समाचार का लिंक शेयर किया कि काकोरी कांड के अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की पौत्रवधू की झोपड़ी गाँव के दबंगों ने जला दी है. कड़कड़ाती सर्दी में खुले आसमान के नीचे शहीद के वंशज रात गुजारने को मजबूर हैं . समाचार पढ़कर धक्का लगा . समाचार का स्रोत थे शाहजहांपुर समाचार के नाम से फेसबुक पर सक्रिय जगेन्द्र सिंह . मैं उन दिनों किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संयोजन में व्यस्त था पर मैंने सोशल मीडिया पर मुहिम चलायी और मेरी उस मुहिम में जगेन्द्रसिंह, सिराज फैसल खान, अमित त्यागी, भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ अधिकारी श्रीकांत मिश्र कान्त आदि जुड़े. कोडरमा (झारखण्ड) : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या को लेकर कोडरमा जिले के पत्रकारों ने समाहरणालय परिसर में सांकेतिक धरना दिया। इसके पहले सूचना भवन स्थित पत्रकार सदन में पत्रकारों ने शोक सभा भी की और पत्रकार जगेन्द्र सिंह की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। धरना प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों ने गजेन्द्र की हत्या के आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा और पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर उन्हें जेल भेजने, मृतक पत्रकार के परिजनों को 50 लाख रुपया मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। जौनपुर : जनपद के पत्रकारों ने शाहजहांपुर के साथी जगेन्द्र सिंह की गत दिवस की गयी निर्मम हत्या के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान जहां पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में घूमकर प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, वहीं पुतला फूंकने के बाद मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधित 4 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट धर्मेन्द्र सिंह को सौंपा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता को पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या के मामले में चल रही जांच प्रगति के बारे में 24 जून तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल और न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की अवकाश कालीन पीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया. यह याचिका "वी द पीपुल" नामक सामाजिक संगठन के महासचिव प्रिंस लेनिन की तरफ से दाखिल की गयी है. इस याचिका में उन्होंने अदालत से जगेन्द्र सिंह की कथित हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने तथा मृतक पत्रकार के परिजनों को समुचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रदेश सरकार को आदेश देने का आग्रह किया है. Kumar Sauvir : अब इस बहस का क्या मतलब कि शाहजहांपुर के पत्रकार जागेन्द्र सिंह ने आत्मदाह किया, या फिर उसे फूंक डाला गया था। खास तौर पर तब, जबकि बुरी तरह झुलसे जागेन्द्र ने लखनऊ के सिविल अस्पताल में अपना जो मृत्यु-पूर्व बयान कई लोगों के मोबाइल पर दर्ज कराया था, उसमें उसने साफ-साफ कहा था कि उसे जिन्दा फूंकने की कोशिश की गयी थी। मगर अब इस काण्ड को दबाने और उन्हें दोषियों को जेल भेजने की कवायद करने के बजाय, जो लोग इस मामले का खुलासा करने में जुटे हैं, उन्हें सपा-विरोधी मानसिकता से ग्रसित होने का आरोप लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, शाहजहांपुर और बरेली से लेकर लखनऊ तक पत्रकारों का एक खेमा इस मामले पर पुलिस और प्रशासन की दलाल-बैसाखी बन कर बाकायदा खुलेआम पैरवी में जुटा हुआ है। इन लोगों का मकसद सिर्फ यह है कि इस बर्बर दाह-काण्ड पर राख डालने की कोशिश की जाए। इसके लिए नये-नये तरीके-तर्क बुने जा रहे हैं। वाराणसी। 'इस समय आदमी के लिए सबसे बड़ा अपराध है, निरपराध होना, जो निरपराध होंगे मारे जायेंगे? ' सोचने पर विवश करने वाली कविता के इन पंक्तियों के साथ शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह के हत्या के विरोध में मंगलवार की शाम शहर के पत्रकारों, रंगकर्मियों, अध्यापकों, बुद्धिजीवियों ने संयुक्त रूप से दशाश्वमेध स्थित चितरंजन पार्क से लहुराबीर स्थित शहीद चन्द्रशेखर आजाद पार्क तक 'वक्त नहीं चुप रहने का' विरोध मार्च निकाल कर हस्ताक्षर अभियान चलाया। (यूपी के शाहजहांपुर जिले के पत्रकार जगेंद्र के हत्यारे मंत्री को बर्खास्त कराने और जेल भिजवाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर मीडियाकर्मियों के प्रदर्शन का एक दृश्य) Yashwant Singh : नीचे दिए गए तीन वीडियो खासकर अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव के लिए हैं जिनके आंखों पर सत्ता का नशा चढ़ा हुआ है, जिनके चेहरे पर ताकत का अहंकार पुता हुआ है, जिनके चाल-ढाल में अमरता की अदा लिपटी हुई है, जिनके बयानों में नश्वरता का नक्शा खिंचा होता है. इनके हाथ में यूपी की सत्ता क्या आ गई है, जैसे ये मनुष्येतर हो गए हैं. जैसे ये अपने आप में हर शख्स के भाग्य नियंता हो गए हैं, जिनको चाहेंगे जीने का हक देंगे, जिनको चाहेंगे जिंदा जलवा डालेंगे. ऐसी सोच समझ वाले अहंकारियों का संपूर्ण नाश होता है एक न एक दिन. (यूपी के शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के खिलाफ दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की एक तस्वीर. वरिष्ठ पत्रकार रुबी अरुण समेत कई महिला पत्रकारों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया. ) Kumar Sauvir : यकीन मानिये कि मुझे कत्तई कोई भी जानकारी नहीं है कि आप दलाल-बेईमान हैं या फिर ईमानदार। लेकिन आज मैं दावे के साथ कहना चाहता हूं कि हमारी पूरी की पूरी न सही, लेकिन अधिकांश पत्रकार-बिरादरी सिर्फ दलाली ही करती है। बेईमानी तो इनके रग-रग में रच-बस चुकी है। गौर कीजिए ना कि शाहजहांपुर के जांबाज, लेखनी-सैनानी और जुझारू पत्रकार जागेन्द्र सिंह ने सत्य-उद्घाटन के लिए अपनी जान दे दी, मगर सत्य के सामने सिर नहीं झुकाया। नतीजा, मंत्री राममूर्ति वर्मा के इशारे पर उसके पालतू पुलिस कोतवाल, पत्रकार और अपराधियों ने उसे जिन्दा फूंक डाला। : प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा, अभिव्यक्ति की आजादी को सुरक्षा देने की मांग : सपा कार्यालय ने नहीं स्वीकार किया ज्ञापन, कहा लखनऊ जाओ : नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों और शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की नृशंस हत्या के विरोध में सोमवार को दिल्ली जंतर-मंतर पर करीब दो सौ पत्रकारों ने प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की कि पत्रकारों पर हो रहे राजनीतिक हमलों पर लगाम लगाई जाए और जगेंद्र सिंह हत्याकांड के दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो. वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाजों को दबाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. प्रदर्शन के बाद पत्रकारों की ओर से उनकी सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी को सुनिश्चित करने को लेकर एक ज्ञापन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सौंपा गया जबकि समाजवादी पार्टी के कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करने से इनकार कर दिया और ज्ञापन सौंपने गए पत्रकारों से कहा कि ज्ञापन सौंपना है तो लखनऊ जाओ. Mukesh Yadav : जंतर मंतर पर प्रदर्शन के साथ साथ यह निर्णय भी हो ही जाना चाहिए कि जब तक जगेंद्र का हत्यारोपित यूपी सरकार का मंत्री हटा नहीं दिया जाता, कोई भी मीडिया माध्यम अखिलेश यादव सरकार की कवरेज नहीं करेगा। इसके लिए तमाम मीडिया संगठनों पर दबाव बनाया जाए। साथ ही वेस्टेड इंटरेस्ट वाले एडिटर्स गिल्ड और एनबीए को बाध्य किया जाए कि वे जगेंद्र प्रकरण में शामिल उक्त मंत्री के हटने तक यूपी सरकार की कवरेज रोकने के लिए गाइडलाइंस जारी करें। क्योंकि ध्यान रहे अखिलेश सरकार तो हर रोज अपनी विदाई की पटकथा खुद ही लिख रही है। इस पटकथा को सूबे की पीड़ित जनता जल्दी ही साकार कर देगी। लेकिन ये लालची मीडिया संगठन, जिनके लिए पत्रकारों की सुरक्षा कोई मुद्दा ही नहीं है, कहीं नहीं जाने वाले। इसलिए इन्हें एक्सपोज करने का भी यह एक उचित अवसर है। इस क्रूर व्यवस्था में, जहाँ सच के लिए कोई जगह ही नहीं है, अगर आज इतना भी हो जाए तो एक उम्मीद बंधती है! बाकि इस भ्रष्ट सिस्टम में सत्य के दीवानों के लिए जगेंद्र होना ही नियति है। Arvind Pathik : लगभग दो ढाई वर्ष पुरानी बात होगी. फेसबुक पर किसी ने एक समाचार का लिंक शेयर किया कि काकोरी कांड के अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की पौत्रवधु की झोपडी गाँव के दबंगों ने जला दी है. कड़कड़ाती सर्दी में खुले आसमान के नीचे शहीद के वंशज रात गुजारने को मजबूर हैं. समाचार पढकर धक्का लगा. समाचार का स्रोत थे 'शाहजहांपुर समाचार' के नाम से फेसबुक पर सक्रिय जगेन्द्र सिह. मैं उन दिनों किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संयोजन में व्यस्त था पर मैंने सोशल मीडिया पर मुहिम चलायी और मेरी उस मुहिम में जगेन्द्र सिंह, सिराज फैसल खान, अमित त्यागी, भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ अधिकारी श्रीकांत मिश्र 'कान्त' आदि जुड़े. (पत्रकार जगेंद्र के हत्यारे मंत्री को बर्खास्त करने और जेल भेजने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को संबोधित करते प्रेस क्लब आफ इंडिया के महासचिव नदीम अहमद काजमी) पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार दिए जाने के कुकृत्य के खिलाफ पूरे देश में उबाल है. दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद अब तय किया गया है कि 19 जून को शाम पांच बजे से प्रेस क्लब आफ इंडिया में एक बैठक का आयोजन किया जाएगा. इस बैठक के बाद एक विरोध मार्च निकाला जाएगा जो मुलायम सिंह यादव के दिल्ली स्थित आवास तक जाएगा. लखनऊ : जगेन्द्र सिंह हत्याकांड की जांच में आई PCI (प्रेस काउंसिल आफ इंडिया) की टीम के गठन पर ही सवाल उठ रहे हैं. इसके एक सदस्य है रिटायर्ड फोटोग्राफर एस एन सिन्हा जिनकी अध्यक्षता वाली इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन ने डेढ़ वर्ष पूर्व शाहजहांपुर में अपना सम्मलेन कराया था. इसमें अभियुक्त मंत्री राम मूर्ति वर्मा ने सहायता और शिरकत करी थी. दूसरी सदस्य सुमन गुप्ता हैं, जो दैनिक जनमोर्चा से जुड़ी हैं. शाहजहांपुर (उ. प्र. ) के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड के आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा और आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सपरिवार धरने पर बैठीं सुमन धरना स्थल पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं। आनन-फानन में पास के डॉक्टरो की टीम बुलाकर उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। पल्स रेट डाऊन होने से उनकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन परिवारवाले राजी नहीं हुए और धरनास्थल पर ही इलाज करने की जिद पर अड़े रहे। उधर, मंत्री के विरोधी एवं सपा से निष्कासित पूर्व विधायक और देवेंद्र पाल सिंह भी धरने पर बैठ गए हैं। बदायूं : मालवीय आवास गृह पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर पत्रकारों ने पहले शाहजहांपुर निवासी पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या पर गुस्से का इजहार किया, फिर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। लखनऊ : कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव से शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार डालने के आरोपी पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा को हटाये जाने की सम्भावना के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जांच पूरी हुए बगैर किसी भी मंत्री को नहीं हटाया जाएगा। उधर न्याय पाने के लिए पत्रकार जगेंद्र सिंह का पूरा परिवार धरने पर बैठ गया है। मृत्योपरान्त किसी व्यक्ति को वास्तविक पहचान दिलाते हुए शहीद के तौर पर सम्मानित करना और अपने पापों का सार्वजनिक क्षमा-याचना करते हुए पश्चाताप करना बड़ी बात माना जाती है। इतिहास तो ऐसे मामलों से भरा पड़ा हुआ है, जब सरकार या किसी समुदाय ने किसी को मार डाला, लेकिन बाद में उसके लिए माफी मांग ली। ठीक ऐसा ही मामला है शाहजहांपुर के जांबाज शहीद पत्रकार जागेन्द्र सिंह और उसके प्रति मीडिया के नजरिये का। इसी मीडिया ने पहले तो उसे ब्लैकमेलर और अपराध के तौर पर पेश किया था। फेसबुक आदि सोशल साइट पर अपना पेज बना कर खबरों की दुनिया में हंगामा करने वाले जागेन्द्र सिंह को शाहजहांपुर से लेकर बरेली और लखनऊ-दिल्ली तक की मीडिया ने उसे पत्रकार मानने से ही इनकार कर लिया था। लेकिन जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया, तो मीडिया ने जागेन्द्र सिह को पत्रकार के तौर पर सम्बोधन दे दिया। गोंडा (उ. प्र. ) : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह हत्याकांड के विरोध में रविवार को यहां के पत्रकारों ने मौन जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट में धरना दिया। पत्रकारों ने जगेंद्र को जलाकर मार डालने की साजिश रचने वाले राज्य सरकार के मंत्री राम मूर्ति वर्मा को मंत्रिपरिषद से तत्काल बर्खास्त करने, घटना की सीबीआइ से जांच, निलम्बित पुलिस कर्मियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने तथा मृतक पत्रकार के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। पत्रकारों ने तय किया कि पीड़ित परिवार को गोंडा से आर्थिक सहायता भी भेजी जाएगी। हाथरस : शहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह की जलाकर हत्या किये जाने से स्थानीय मीडियाकर्मियों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को प्रेस क्लब सिकंदराराऊ द्वारा उपजिलाधिकारी एनपी पाण्डेय को प्रदेश के राज्यपाल के नाम सम्बोधित एक ज्ञापन सौंप कर कार्यवाही तथा पीड़ित परिवार को 25 लाख रूपये मुआवजा दिये जाने की मांग की गई। पत्रकारों ने काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया। बहुत दिलचस्प है शाहजहांपुर में नेता-पुलिस-अपराधी-पत्रकार गठजोड़। लाखों की रकम खुद डकार लेना चाहते थे चुनिन्दा नेता-पत्रकार। शाहजहांपुर में तीन पत्रकारों का एक गुट बन गया था। जागेन्द्र सिंह, अमित भदौरिया और राजू मिश्र। यह करीब चार साल पहले की बात है। इनमें सबसे ज्यादा तेज-तर्रार था जागेन्द्र। खुटार के मूलतः जागेन्द्र को पत्रकार की दुनिया में सबसे पहले अमर उजाला के प्रभारी अरूण पाराशरी ने प्रवेश कराया था। कल आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने पत्रकार जगेन्द्र सिंह के गाँव खुटार जा कर उनके परिवार वालों से मिल कर मौजूदा स्थिति, विवेचना और उनकी सुरक्षा के बारे में जानकारी ली. स्थितियों पर उन्होंने पूरी तरह असंतोष जाहिर करते हुए मुआवज़े और घटना की सीबीआई जांच की मांग की. प्रजातांत्रिक भारत का सिस्टम भी अजब - गजब है। देश की राजधानी दिल्ली की सरकार में एक मंत्री की डिग्री फेक होने के कारण उन्हें जेल में डाला गया है और पूछताछ जारी है तो दूसरी तरफ उत्तरप्रदेश की सरकार है,जिसमें उसके एक मंत्री और के गुर्गों द्वारा एक पत्रकार को जिंदा जला दिया गया उसकी मौत हो गई आरोप साबित हैं सबकी आंखों के सामने फिर भी समाजवादी सरकार के नेता कहते हैं क्या एफआईआर दर्ज होने से कोई आरोपी साबित हो जाता है। सुनते आये हैं जो आया है वो जाएगा भी। सभी को जाना है लेकिन किस तरह से ? क्षमा करेंगे, एक और चला गया, पहले भी कई गए हैं। एकता के नारे लगाये जा रहे हैं। हक़ और बदले की भी बातें हो रहीं। कोई कम तो कोई ज्यादा आक्रमक भी है, जमात के लोग अपने अपने अंदाज में अपने अपने झंडे भी बुलंद कर रहे हैं। परिणाम की सुधि किसे है, ये बड़ा प्रश्न हो सकता है। लखनऊ : आईजी कानून-व्यवस्था ए. सतीश गणेश ने बताया कि शाहजहांपुर के पत्रकार हत्याकांड में इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। तफ्तीश में तेजी से जुटी पुलिस फिलहाल मंत्री राममूर्ति वर्मा से पूछताछ नहीं करेगी। जांच में अगर सुबूत और साक्ष्य मिले तभी पूछताछ होगी। लखनऊ : शाहजंहापुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह की जिंदा जलाकर हत्या कर दिए जाने पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने गहरा दुख व्यक्त किया है। आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अजेय नहीं है और उसे जनमत का सम्मान करना चाहिए। यह अफसोसनाक है कि पत्रकार की हत्या के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा को सरकार अपने मंत्रिमण्डल में बनाए हुए है और जिन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज है, उन्हें निलंम्बित तक नहीं किया गया है। मैं खुद को गुनेहगार मान रहा हूँ, क्योंकि मै "जगेन्द्र सिंह" की समय पर सहायता नहीं कर पाया। यह बात अलग है कि मैं लखनऊ के बाहर था, पर वह कोई उचित तर्क नहीं हो सकता। सात दिनों तक लखनऊ के अस्पताल में शाहजहाँपुर का एक खोजी पत्रकार जगेन्द्र सिंह ज़िन्दगी से जूझता रहा, उसके घर में घुस कर जलाने वाले आज़ाद हैं। सिर्फ इसलिए की एक राज्यमंत्री की दबंगई थी। जगेन्द्र सिंह घोटोलो का भंडाफोड़ करता रहा। मेरठ : यहां के पत्रकारों में शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या से जबरदस्त गुस्सा है। पत्रकारों का सत्याग्रह शुरू हो गया है। इसी क्रम में शुक्रवार 12जून को पूर्वाह्न 11 बजे शहर के लगभग सभी प्रमुख पत्रकार और मीडियाकर्मचारी जिला कलेक्ट्रेट में जुटे। शाहजहांपुर (उ. प्र. ) : ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन शाहजहांपुर के आह्वान पर जगेन्द्र सिंह के परिजनों को न्याय, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, जगेन्द्र सिंह के बच्चों के लिये शासन से 50 लाख रूपये का मुआवजा, एक बेटे या बेटी को नौकरी दिलाने की मांग करते हुए पत्रकारों ने कैंडिल जुलूस निकाला। वो सफेद झूठ बोल रहे हैं, जो कह रहे हैं कि जागेन्द्र सिंह का धन्धा उगाही, वसूली और रंगदारी ही था। सच बात तो यह है कि शाहजहांपुर की ही पुलिस ने उसके ऊपर लगे एक मुकदमे में उसे पूरी तरह निर्दोष पाया था। लेकिन इस तथ्य के बावजूद चंद पुलिस और अपराधियों द्वारा पेट्रोल डाल कर सरेआम फूंक डाले गये शाहजहांपुर के जांबाज पत्रकार जागेन्द्र सिंह को अब ब्लैकमेलर, उगाही करने वाला और रंगदारी वसूली करने वाले अपराधी के तौर पर पेश करने की कवायद चल रही है। मकसद यह कि किसी न किसी तरीके से इस मामले पर मंत्री राममूर्ति वर्मा की खाल बचा ली जाए। उधर पता चला है कि समाजवादी पार्टी ने अपने एक स्थानीय नेता और ददरौल से विधानसभा चुनाव लड़ चुके देवेन्द्र पाल को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। Kumar Sauvir : बेशर्मी की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं शाहजहांपुर के पत्रकारों ने। जो पत्रकार था, उसे पत्रकार मानने से तैयार नहीं थी यह पत्रकार-बिरादरी और जो पत्रकार नहीं हैं, उन्हें जबरिया पत्रकार का तमगा देने पर आमादा थे यही लोग। पत्रकारिता के नाम पर कलंक बने इन्हीं हत्यारेनुमा पत्रकारों ने पुलिस, अफसर, नेता और मन्त्री की चौकड़ी तैयार कर ऐसा जाल बुन डाला, जिस शिकंजे में जागेन्द्र सिंह को जकड़ लिया गया और दिन-दहाड़े उसे पेट्रोल डाल कर जिन्दा फूंक दिया गया। इतना ही नहीं, जागेन्द्र सिंह की मौत के बाद अब इन्हीं पत्रकारों ने उसके नाम पर मर्सिया भी पढ़ना शुरू कर दिया है। हैरत की बात है कि जागेन्द्र सिंह की हत्या के बाद जिले के एक भी अधिकारी ने जागेन्द्र के घर जाने की जहमत नहीं फरमायी, लेकिन मूल कारणों को खोजना-विश्लेषण करने के बजाय अब इन्हीं पत्रकारों की टोलियां अब जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक और यहां के नेताओं की ओर से प्रतिनिधिमण्डल बना कर जागेन्द्र सिंह के घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, यही पत्रकार अब इन अफसरों-नेताओं की ओर से आश्वासन तक दे रहे हैं कि जागेन्द्र की पत्नी को अनुग्रह दिलाया जाएगा, पीडि़त परिवार को मकान दिया जाएगा, उसे जमीन मुहैया करायी जाएगी और आश्रित लोगों को सरकारी नौकरी दिलायी जाएगी। अलीगढ़ : पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड के विरोध में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने अध्यक्ष सुबोध सुहृद के नेतृत्व में बुधवार को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन कमिश्नरी पर ज्वांइट कमिश्नर राजाराम को दिया। ज्ञापन में समिति के पदाधिकारियों ने मांग की कि प्रदेश में हो रहे पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने के लिए एक संस्था का गठन किया जाना चाहिए और मृत पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवारीजनों को मुआवजा व आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। Palash Biswas : शाहजहांपुर में सोशल मीडिया के पत्रकार को मंत्री के गुर्गों और पुलिसे के द्वारा उसके घर में जिन्दा जला कर मार देने की घटना रौंगटे खड़ा कर देने वाली हैl साथ ही यह उत्तर प्रदेश कि सरकार के साथ साथ प्रदेश के पत्रकारों के चरित्र को भी उजागर करती हैl साथियों, याद करें जब मजीठिया की लड़ाई में पत्रकारों की अगुवाई करने वाले भड़ास के यशवंत को मालिकों की रंजिश की वजह से जेलयात्रा करनी पड़ी, तो हमने सभी साथियों से आग्रह किया था कि हमें एकजुट होकर अपने साथियों पर होने वाले हमले के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। हम शुरू से पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर वैकल्पिक मीडिया के हक में लामबंदी की अपील करते रहे हैं। हम लामबंद होते तो हमारे साथी रोज-रोज मारे नहीं जाते। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने शाहजहाँपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या के दोषियों की अविलंम्ब गिरफ़्तारी की मांग करते हुए मृतक के परिजनों को 25 लाख की आर्थिक सहायता की मांग की है । यूनियन अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने एक बयान जारी कर इस मामले में दर्ज एफआईआर में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है । आईएफडब्लूजे के सेक्रेटरी (दक्षिण) क़ादरख़ान असदुल्लाह ने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं अन्य प्रदेशों में हुई शोक सभाओं में पत्रकारों ने घटना पर गुस्सा जताते हुए तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गाजीपुर (उ. प्र. ) : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड पर यहां विरोध प्रकट करते हुए पत्रकारों ने कचहरी कैम्प कार्यालय पर शोकसभा की। बैठक में पत्रकारों ने इसे चौथे स्तम्भ पर करारा आघात करार दिया। पत्रकारों ने राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा और कोतवाल श्रीप्रकाश राय के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की मांग के साथ ही घटना की जांच सीबीआई से कराने, परिजनों को सुरक्षा मुहैया कराने, नौकरी के साथ 50 लाख रूपये का मुआवजा एवं जगेंद्र के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिए जाने की मांग की है। वाराणसी : शाहजहाँपुर के सोशल मीडिया पत्रकार जोगेन्द्र सिंह प्रकरण में सरकार की सच्चाई और मंत्री की मनमानी खुल कर सामने आ गई है। अब समाजवादी पार्टी के नेता पत्रकारों को गालियां देने लगे हैं और मंत्री धमकियां दिलवा रहा है। लखनऊ प्रेस क्लब में कल मीटिंग कर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आगाह कर दिया है कि सरकार इस हरकत को नहीं रोकती तो कीमत चुकानी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव की सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाल श्रीप्रकाश राय और मंत्री के चार अन्य गुर्गों के खिलाफ पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाकर मारने के मामले में खुटार थाने में रिपोर्ट दर्ज तो दर्ज हो गई, अब देखिए इस मामले का अंत किस तरह होता है। चाहिए तो था कि हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही मंत्री को सरकार से बाहर कर दिया जाता, और उसके बाद जांच अमिताभ ठाकुर जैसे किसी ईमानदार आईपीएस से कराई जाती। लेकिन ऐसा कहां संभव है। मंत्री हत्यारोपी है, उस पर और भी कई मामले पहले से सुर्खियों में हैं। हकीकत है कि सब हाथीदांत जैसा चलता लग रहा है। जब सारे छंटे-छंटाए सियासत के टीलों पर सुस्ता रहे हैं, जिसकी नकाब हटाओ, वही अपराधियों के सरगना जैसा, तो फिर ऐसी जांच की संभावना कहां बचती है। आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने शाहजहाँपुर निवासी सोशल मीडिया पत्रकार जगेन्द्र सिंह की मौत के बाद दर्ज किये गए एफआईआर को देर से उठाया गया कदम बताया है और इस बात पर कष्ट व्यक्त किया है कि जगेन्द्र के जीते जी उनका मुक़दमा दर्ज नहीं हुआ. खुटार (शाहजहांपुर)। पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। उनके बुजुर्ग पिता सुमेर सिंह ने मंत्री राममूर्ति वर्मा और षडयंत्रकारी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल न भेजने पर सपरिवार डीएम कार्यालय पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मंत्री और पुलिस ने मिलकर उनके बेटे को मार डाला है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी की है। दलाल पत्रकारों की साजिस के चलते शाहजहांपुर में एक जांबाज पत्रकार जगेन्द्र भ्रष्ट मंत्री और भ्रष्ट पुलिस की साजिश का शिकार होकर दम तोड़ दिया 22 मई को सूबे के वरिष्ठ अधिकारियों को भेंजे पत्र में जता दी थी अपनी हत्या की आशंका। मंत्री के इशारे पर पुलिस ने रची जलाने की साजिश, अब इस पूरे मामले में सरकार मौन क्यों है? शाहजहाँपुर निवासी सोशल मीडिया पत्रकार जगेन्द्र सिंह, जो 01 जून 2015 को दिन में अपने आवास विकास कॉलोनी, सदर बाज़ार स्थित मकान में सदर कोतवाल श्रीप्रकाश राय द्वारा दी गयी दबिश के दौरान आग लगने से लगभग 60 फीसदी जल गए थे, की आज सिविल अस्पताल, लखनऊ में मौत हो गयी. शाहजहांपुर (उ. प्र. ) : जागेंद्र सिंह आत्मदाह प्रकरण से क्षुब्ध पत्रकारों ने काली पट्टियां बांधकर ऑल प्रेस एवं राइटर्स एसोसिएशन के बैनर तले कलक्ट्रेट में प्रदर्शन और डीएम, एसपी से वार्ता न हो पाने पर दो घंटे तक धरना भी दिया। आखिरकार पत्रकारों के पांच सदस्यीय शिष्टमंडल से विकास भवन के फर्स्ट फ्लोर पर वार्ता करते हुए जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने ज्ञापन लेने के साथ ही आश्वासन दिया कि जगेंद्र का बेहतर इलाज कराया जाएगा और जांच पूरी होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इस बीच एसपी बबलू कुमार ने इसी मामले में कोतवाल श्रीप्रकाश राय को लाइन हाजिर कर दिया है।
आज यूपी में कई पत्रकार सपा की दलाली करने में व्यस्त हैं। ये लोग पत्रकार जगेंद्र सिंह की शहादत को भुलाकर उनका अपमान कर रहे हैं। लेकिन यूपी के ढेर सारे पत्रकार याद रखें हुए हैं वो बर्बरता जिसे सपा के लोगों ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के साथ की थी। अगर सपाइयों की कमर न तोड़ी गई तो वो बर्बरता कल के दिन आपके साथ भी होगी। तब आपको पश्चाताप होगा कि हम उन लोगों की दलाली कर रहे थे जिन्होंने यूपी में कानून का नहीं, गुंडों एवं हत्यारों का राज चला रखा है। इसीलिए यूपी के पत्रकारों को शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या को याद रखकर इस चुनाव में पत्रकारिता करने की जरूरत है। सपा के गुंडाराज, बलात्कारराज, लूट, हत्या, भ्रष्टाचार, दबंगई, अपहरण को यूपी की जनता के सामने ना लाकर सपा की दलाली करने वाले पत्रकारों पर धिक्कार है। बरेली : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह मर्डर केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर जबरन दो गवाहों के कोर्ट में बयान कराने का दबाव बना रहे हैं। इन गवाहों के बयान के जरिए वह खुद को केस से बचाना चाहते हैं, लेकिन बरेली के पुलिस अधिकारियों ने आईओ को बिना किसी दवाब के सही जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मारे जाने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस उस याचिका पर सुनवाई के बाद जारी कि जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार को जलाए जाने और उनकी हत्या के मामले की स्वतंत्र जांच के लिये जगेंद्र के बेटे द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने की परिस्थितियों की सीबीआई जांच हेतु दायर याचिका पर विचार करने का निश्चय किया. इससे पहले याचिका दायर कर पत्रकारों की सेफ्टी के लिए गाइडलाइंस बनाए जाने की बात कही गई है. New Delhi: The Supreme Court on Friday decided to entertain a plea seeking CBI probe into the circumstances leading to the withdrawal of a petition by a journalist's son, who had sought an independent probe into the alleged burning and murder case of his father in which a state minister and five others have been booked. An application filed by a Lucknow scribe has claimed that the son of slain journalist, Jagendra Singh, was pressurised and threatened by the alleged killers of his father, following which he had written a letter to his lawyer on July तेईस wishing to withdraw the petition. लखनऊ : शाहजहांपुर के दिवंगत पत्रकार जागेंद्र सिंह के बेटे के अचानक मंत्री राममूर्ति वर्मा के पक्ष में बयान देने के बाद आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में जागेंद्र के लड़कों सहित सभी गवाहों की रक्षा करने और सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को उपयुक्त माहौल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के बेटे ने कहा है कि उसे सीबीआई जांच नहीं करानी क्योंकि उसके पिता कन्फयूज्ड थे और इसी मतिभ्रम के कारण उन्होंने आत्मदाह किया था। उन्हें किसी ने जलाया नहीं और मंत्री एकदम निर्दोष है। शाहजहांपुर : जिंदा जलाकर मारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार को धमकाया जा रहा है। घटना की सीबीआई जांच करने की मांग करते हुए जगेंद्र के बेटे राहुल ने पिछले दोनो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। तभी से परिवार पर दबाव डाला जा हा है कि वे समझौता कर लें अन्यथा उनके साथ अच्छा न होगा। बताया जा रहा है कि जगेंद्र के दोनो बेटे पिछले कई दिनो से लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। जगेन्द्र के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। अब हमारे और आपके सड़क पर उतरने का वक्त है... पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च का कार्यक्रम तय किया गया है जो आठ जुलाई को यानि कल होना है. इसमें आप भी आइए. चुप रहने, घर बैठे का वक्त नहीं है अब. देश भर में पत्रकारों की लगातार जघन्य तरीके से हत्याएं हो रही हैं. जगेंद्र सिंह, संदीप कोठारी, अक्षय सिंह... समेत दर्जनों हत्या-उत्पीड़न के मामले हैं. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है. अभी तक तो यूपी सरकार की किरकिरी कराने वाले चाचा जान ने कल्वे जव्वाद पर हमला बंद भी नहीं किया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम मूर्ति वर्मा का पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में नामजद होना यूपी सरकार के लिए एक चिंता का सवाल बन गया है । सरकार पत्रकार हत्याकांड में नामजद मंत्री पर कत्तई एक्शन न लेने के मूड में है । अगर नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों पर गौर किया जाय तो प्रतिवर्ष जितने पत्रकारों के देश भर में उत्पीड़न के मामले प्रकाश में आते हैं, उसके बहत्तर % मामले अकेले यूपी के होते हैं, जो राज्य के वजीर ए आलम अखिलेश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। क्या अखिलेश के अंदर शासन व सत्ता को सुचारु रूप से चल़ाने का म़ाद्दा खत्म हो चुका है? क्या युवा शक्ति के आकलन में कोई सेंध है? कुछ मित्रों को लगता है कि जागेन्द्र के परिवारों को तीस लाख रूपये, दो बच्चों को सरकारी नौकरी और उसके घर की दूसरे से कब्जायी पांच एकड़ जमीन को छ़ुडवाने के सरकारी फैसले के बाद उनका परिवार संतुष्ट है और सरकार भी हल्की हो गयी है। ऐसे लोगों को लगता है कि यह तो धोखाबाजी हो गयी। जागेन्द्र के लिए जंग लड़ी हम सब लोगों ने और मलायी काट लिया उसके घरवालों ने, सरकार ने और सरकारी दलाल पत्रकारों ने। उन्हें लगता है कि अब यह सारा मामला ठण्डा हो चुका है और इस देश में अब इसके बाद कुछ भी नहीं हो सकता है। क्योंकि लोगों ने एक-दूसरे को खरीद-बेच लिया है। उत्तरप्रदेश के जगेंद्र सिंह और मध्यप्रदेश के संदीप कोठारी की हत्याओं में एक समानता है और वह है दोनों अपने - अपने राज्यों के खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिख रहे थे। ये वो माफिया है जिसकी सरपरस्ती भारत के हर राज्य में पॉवरफुल मंत्रियों नेताओं के पास होती है। ये माफिया इतना बेखौफ है कि पत्रकार तो बहुत दूर की बात है अगर कोई पुलिस अधिकारी, तहसीलदार या अन्य कोई इनके क्षेत्र में कार्रवाई के लिये घुस जाये तो ये दिनदहाडे ट्रेक्टर, डंफर से उसे कुचलने में कोताही नहीं बरतते। मैं हमेशा कहता हूँ कि अच्छा, बुरा कुछ नहीं होता। अति ही बुराई है। सद्कर्म की भी अति हो जाये, तो परिणाम नकारात्मक ही आता है। आप आगे को भागिए और भागते रहिये, तो एक दिन लौट कर वहीं आ जायेंगे, जहां से चले थे, ऐसे ही पीछे को दौड़ने पर होगा। पीछे को दौड़ने वाला भी रुके न, तो वो भी एक दिन वहीं आ जायेगा, जहां से भागा था, इसीलिए बीच की अवस्था को शिखर कहा जाता है, संतुलन जीवन की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है। शिखर पर ठहरे रहना होता है, मतलब संतुलन बनाये रखना होता है, लेकिन कोई शिखर पर पहुंचने के बाद भी संतुलन न बना सके, तो उस पार नीचे जाने का ही रास्ता होता है फिर। खैर, मन धर्म-अध्यात्म और कर्म पर चर्चा का नहीं है। मन है शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र कांड पर बात करने का। इस प्रकरण में भी समाजसेवा की थोड़ी अति हो गई, जिससे परिणाम अपेक्षित नहीं आ पा रहा है। लखनऊ के चर्चित अधिवक्ता प्रिंस लेनिन ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में ही गहन अध्ययन के बाद जगेन्द्र प्रकरण में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सरकार से जवाब माँगा गया। आशा थी कि बहस के बाद सीबीआई जांच के आदेश हो जायेंगे, उससे पहले दिल्ली के पत्रकार सतीश जैन ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। अमर शहीद पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार द्वारा मुआवजा स्वीकार कर लेने व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बात को मानकर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही जाँच से संतुष्ट होने की बात को दिल का ताड़ बनाकर पेश करने वाले साथियों से मेरा एक प्रश्न है। इन बातों को स्वीकार करने के अलावा उन गरीब, कमजोर, डरे हुए लोगों के पास क्या कोई दूसरा विकल्प था। जगेन्द्र को जिन्दा जला देने वाली घटना को आत्महत्या साबित करने में जुटी यूपी पुलिस के कार्य क्षेत्र में उनको सुरक्षित रहना है या नहीं? इनका फैसला समाजवादी पार्टी के तथाकथित गुंडों एव खाकी के द्वारा ही तो किया जाना है। जिन्दा रहना है तो बात मानो वर्ना कौन बचायेगा हम जगेन्द्र के परिवार को कही भी दोषी साबित नहीं कर सकते। लाश पर रोटियां कैसे सेंकी जाती हैं, उसका सबसे ज्वलंत प्रमाण है जगेन्द्र सिंह हत्याकांड। छुटभैये पत्रकारों और नेताओं से लेकर प्रेसकौंसिल के खलीफाओं तक ने खूब फायदा उठाया इस प्रकरण का। जिन सरदार शर्मा के खिलाफ अपने जीवित रहते जगेन्द्र सिंह मोर्चा खोले रहे, हर कोई उन्ही से जाके पूछता रहा- जगेन्द्र पत्रकार था, तो कैसे? लखनऊ की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट ने जगेंद्र हत्याकांड को खुदकुशी करार दिया है। बताया गया है कि जगेन्द्र ने खुद आग लगाई थी. छाती के बाईं तरफ से आग से जलने के निशान पाए गए हैं. गौरतलब है कि जगेन्द्र ने घायल होने के बाद बयान दिया था और यूपी के मंत्री राममूर्ति वर्मा और यूपी पुलिस पर आग लगाने का आरोप लगाया था। नई दिल्लीः पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के आरोपी मंत्री पर तो अभी तक कार्रवाई नहीं हुई लेकिन परिवार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीस लाख रुपए के मुआवजे और घर के दो लोगों को नौकरी का भरोसा दे दिया है. इसके बाद परिवार ने धरना खत्म कर दिया है. नई दिल्ली : शाहजहांपुर के जुझारू पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। इससे हत्याकांड के आरोपी मंत्री और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी आसान होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। कोर्ट ने हत्याकांड के संबंध में यूपी सरकार, केंद्र सरकार और प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब कर लिया है। वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है - "यूपी के डीजीपी अरविन्द जैन की पुलिस का कमाल यहां शाहजहांपुर में देखें तो आप दांतों तले उंगलियां कुचल डालेंगे, जहां मंत्री का इशारा था, अपराधी मोहरा बना था और अपराधी बना डाला गया हत्या का जरिया। सिर्फ दो दिन तक पुलिस ने एक सीधी-सच्ची एफआईआर को टाल दिया और उसकी जगह में एक नयी रिपोर्ट दर्ज लिख डालीा ताना-बाना इतना जबर्दस्त बुना गया कि उसके बल पर मंत्री-अपराधी-पत्रकार और पुलिस की साजिशों से जगेन्द्र सिंह के खिलाफ डेथ-वारण्ट तामील करा दिया। अब मैं इस प्रकरण पर सीधे अदालत में ही पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा हूं, जिसमें डीजीपी अरविन्द जैन भी शामिल होंगे, जिन्होंने जान-बूझ कर भी एक असल मामले की तहरीर को मनचाहे तरीके से बदलवा दिया। उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार की जलने के बाद हुई मौत से ठीक पहले पत्रकार के अंतिम बयान में यह कहा जाना कि "मुझको गिरफ्तार करना था... तो कर लेते मगर पीटा क्यों ? और आग क्यों लगा दी? ", इतने सवालों को खड़ा कर देता है कि न तो उत्तर प्रदेश सरकार उनका जवाब दे पाएगी न ही पत्रकारिता जगत के दिग्गज! अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था, कि मध्य प्रदेश में भाजपा शासित सरकार की नाकामी के तौर पर एक पत्रकार की जली हुई लाश बरामद हुई, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि खनन माफिया ने पहले पत्रकार का अपहरण किया और बाद में जलाकर मारा और लाश को दबा दिया। सरकार सपा की हो या बीजेपी की, पत्रकार कहां सुरक्षित है. . ? ये समझ में नहीं आ रहा ! और इसके लिए दोषी कौन है. . ? ये भी साफ नहीं हो रहा है ! बालाघाट : पत्रकार संदीप कोठारी हत्याकांड के संबंध में कटंगी के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जे एस मरकाम ने बताया कि पुलिस को पता चला है कि तीनों गिरफ्तार आरोपी अवैध खनन और चिटफंड के कारोबार से जुड़े हुए हैं और पत्रकार पर उनके खिलाफ अवैध खनन का एक स्थानीय अदालत में दर्ज प्रकरण वापस लेने का दबाव बना रहे थे। संदीप इसके लिए राजी नहीं था और संभवतः उसे इसकी ही कीमत चुकानी पड़ी है। शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार को धमकी और लालच देने का सिलसिला जारी है। मृतक के परिजनों ने धमकाने की शिकायत पुलिस में दी है। पिछले सात दिनों से धरने पर बैठे परिजनों ने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार भी कर दिया। जिले के तमाम पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार किया। इस दौरान पत्रकारों ने हवन पूजन कर तेरह ब्राह्मणों को भोजन भी कराया। यह है एक निर्भीक पत्रकार को जिन्दा फूंकने के लिए हत्यारे मंत्री-माफिया-पुलिस और पत्रकारों की चौकड़ी का जिन्दा सुबूत। यह सुबूत है कि कैसे जगेन्द्र सिंह को मंत्री और पुलिसवालों ने अंतहीन उत्पीड़न और मारक तनाव दिये, बल्कि यूपी सरकार में सच बोलने वालों को हश्र क्या होता है। एक बहुत बड़ी खबर मध्य प्रदेश से आ रही है. यहां बालाघाट के एक पत्रकार संदीप कोठारी को माफियाओं ने जला कर मार डाला है. नई दुनिया और पत्रिका जैसे अखबारों में काम कर चुके संदीप की खबरों से माफिया नाराज थे. संदीप बालाघाट के कटंगी कस्बे में कार्यरत थे. बताया जा रहा है कि माफियाओं ने इन्हें किसी बहाने से बुलाया और बहका कर महाराष्ट्र के नागपुर की तरफ ले गए. मध्य प्रदेश की सीमा से बाहर निकलने ही सूनसान इलाका देखकर माफियाओं ने पहले संदीप कोठारी को जिंदा जलाया उसके बाद जमीन में दफना दिया. इस सनसनीखेज और हृदयविदारक घटना जिसकी मिल रही है वह स्तब्ध है. शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को प्रदेश सरकार ने ठुकरा दिया है। अब देश-प्रदेश के आंदोलित पत्रकारों और संगठनों की निगाह पच्चीस जून को इस मामले की हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रदेश सरकार का एक आरोपी राममूर्ति वर्मा के होने से इस मांग को ठुकराए जाने की मुख्य वजह माना जार हा है। हत्याकांड में कोतवाली प्रभारी समेत पांच पुलिस वाले भी अभियुक्त हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है लेकिन एक भी हत्यारोपी अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है। लगता है लोगों का इतिहासबोध कमजोर पड़ता जा रहा है। पढ़ने की शगल खत्म होती जा रही है, खास तौर पर राजनीतिक जीवधारी, अब किताबों से दूर होते जा रहें हैं। राजनीति की नई कोपलें तो अपनी इतिहास और भूगोल दोनों की सामान्य जानकारी से भी दूर होती जा रही हैं। वर्तमान में जीने वाली पीढ़ी अतीत से शायद कुछ सीखना ही नहीं चाहती। जबकि पहले के राजनेता अध्ययन में रूचि लेते थे और देश व दुनिया के इतिहास और आंदोलन की कहानी पढ़ते थें, पढ़ते ही नहीं थे, बल्कि अध्ययन से अपनी विचारधारा को भी परिपक्व और पुष्ट करते थें। गाँधी, नेहरू, लोहिया, जे. पी, दीन दयाल उपाध्याय आदि अनेक राजनेता और 'जननायक' स्वअध्ययन में गहरी रूचि लेने वाले थे। चौरी-चौरा हत्याकाण्ड में पकड़े गये एक सौ सत्तर लोगों पर भी जघन्य आरोप लगे थे और अंग्रेजी हुकूमत ने इन सब को फांसी पर लटका देने का हुक्म दे दिया था। लेकिन उस समय महामना मदनमोहन मालवीय ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर इन वकालत की पुरानी डिग्री निकाली और बिना कोई पारिश्रमिक हासिल किये, इनमें से एक सौ इक्यावन लोगों को फांसी के फंदे से आजाद कराने के लिए जी-जान लड़ा दिया। अलीगढ़ : बुधवार सुबह लगभग ग्यारह. शून्य बजे सेंटर पाइन्ट चैराहे पर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, रीजनल इलैक्ट्रानिक मीडिया, अलीगढ़ इलैक्ट्रोनिक मीडिया, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन व गणेश शंकर विद्यार्थी प्रैस क्लब के पदाधिकारी, शहर के पत्रकारों ने जगेंद्र हत्याकांड पर जुलूस निकाल कर कड़ा विरोध प्रकट किय। सीतापुर : पत्रकार जगेन्द्र सिंह हत्या कांड के विरोध में मंगलवार देर शाम पत्रकारों, समाज सेवियों व व्यापारियों ने लालबाग चैराहे से शहीद लालबाग पार्क तक कैंडिल मार्च निकाला। निर्ममता से मारे गए पत्रकार जगेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। पत्रकारों ने कहा कि लगातार हमले हो रहे हैं और सरकार खामोश है। ऐसे वक्त में सभी पत्रकारों को एकजुट रहने की जरूरत है। Ved Ratna Shukla : वर्मा जी को राम-राम कहलवा भेजिएगा... सरकार बहादुर कहिए तो आपके चरणों में लोट जाऊं... क्या धांसू काम किया है. मन कर रहा है नाचूं! सरकार बहादुर ने दो कौड़ी के पत्रकारों के लिए मशीनरी टाइट कर दिया. गजब! महिलाओं के लिए भी हेल्पलाइन शुरू की थी आपने. यकीन मानिए तबसे महिलाएं रातभर पैदल, स्कूटी से अकेले-दुकेले घूम रही हैं एकदम निश्चिंत-महफूज. आपके इकबाल से उनकी तरफ अब कोई आंख उठाकर देखता भी नहीं. वो कहते हैं न कि यही तो रामराज है. हालांकि मोहनलालगंज. 'पत्रकार जगेंद्र सिंह को किसी ने नहीं जलाया, उसने ही खुद को आग के हवाले किया। इस प्रकरण में कोई हत्यारा नहीं है और न ही कोई दोषी है। सब निर्दोष हैं, न राममूर्ति वर्मा का इसमें कोई हाथ है, और न ही उनके करीबी गुफरान का, बस यही सच है, जो मैं कह रही हूं। ' ये कहना किसी और का नहीं बल्कि जगेंद्र की एक महिला सुपरिचित का है। दुनिया भर में चर्चित शाहजहाँपुर के पत्रकार जगेन्द्र हत्या कांड को 'हत्या और आत्म हत्या' के बीच उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रभावशाली नामजद आरोपी, पुलिस और कुछ मीडिया संस्थान शर्मनाक तरीके से दिवंगत पत्रकार का चरित्र हनन तक करने लगे हैं, जबकि बड़ा कारण हत्या, आत्म हत्या और चरित्र नहीं, बल्कि मृत्यु है। बड़ी बात यह नहीं है, जगेन्द्र मरे कैसे? बड़ी बात यह बात है कि जगेन्द्र मरे क्यों? पत्रकारों की लड़ाई नहीं, पत्रकारिता को कलंकित करने में जुटे हैं बड़े नेता। इन नेता जी की जिम्मेदारी मानी जाती है कि वे कम से कम अपनी बिरादरी के लोगों के प्रति थोड़ी संवेदनशीलता और संवेदना रखेंगे और पत्रकारों पर होने वाले अन्याय-अत्याचार पर अपनी आवाज निकालेंगे। लेकिन खुद को बड़ा पत्रकार मानने-कहलाने वाले यह पत्रकार-अगुआ लोग न सिर्फ इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं, बल्कि जागेन्द्र की लाश को खरीदने-बेचने की गुपचुप कवायद में भी जुटे हैं। जागेन्द्र सिंह के जिन्दा-दाहकाण्ड वाले हौलनाक हादसे के बाद इन इस पत्रकार-शिरोमणि ने ठीक वही स्टैण्ड लिया, जो सरकार के इशारे पर यूपी पुलिस कर रही है। बजाय इसके कि जिन्दा जागेन्द्र को मौत की नींद सुलाने वाले अपराधियों पर यह पत्रकार-नेता आंदोलन करते और हुंकारें भरते, इन लोगों ने पूरे मामले की आग पर ही पानी फेर दिया। पत्रकारिता को कलंकित करते इन पत्रकारों ने इस मामले में जो करतूत की है, उससे बड़े से बड़ा दलाल भी शरमा जाएगा। वाराणसी : सोशल मीडिया जर्नलिस्ट अवनिन्द्र कुमार सिंह ने पत्रकार जगेंद्र सिंह मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल राम नाइक और उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को पत्र लिख कर मांग की है कि सीबीआई जांच कराई जाए, तभी ऐसे क्रूरतम कृत्य की सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव से मदद मिलने के बजाय सरकार अपनी हठधर्मिता पर उतारू है। सपा के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ने जो बयान जगेंद्र की हत्या को लेकर दिया, वह शाहजहांपुर ही नहीं, पूरे देश को शर्मसार करने वाला है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जून दो हज़ार पंद्रह में एक पत्रकार को जिंदा जलाकर मार दिया जाता है। लोगों को पता था कि ऐसा हो सकता है, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। हत्या के बाद बेशर्मी की हद देखिए कि पत्रकार बिरादरी ने जगेंद्र को कलमकार मानने से ही इनकार कर दिया। अपनों की बेरुखी एक जुनूनी को ले डूबी। जाइये, नहीं करते राज्यमंत्री को बर्खास्त, नहीं भेजते जेल... अब जो करना है, मीडिया कर ले। कुछ ऐसे ही भाव थे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा व सरकार में नम्बर दो के दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के। सोशल मीडिया पर खिलने वाले पत्रकार के मामले में एनडीटीवी वाले रवीश कुमार ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम खुला पत्र लिखा और कहा कि अगर राज्यमंत्री पर कार्रवाई करें तो संबंधित पत्र के साथ मेरा पत्र नत्थी कर दें। यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के परिजनों को भरोसा दिया है कि वह घटना की विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात करेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहराइच में गत दिवस संकेतों में कहा कि हमारी सरकार के कुछ लोग गलत काम कर रहे हैं। उधर, जगेंद्र सिंह का परिवार पिछले कई दिनो से धरने पर बैठा है लेकिन आरोपी मंत्री के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट तलब कर ली है। मामले की अगली सुनवाई आगामी चौबीस जून को होगी। पूरे उत्तर प्रदेश में, लगभग हर जनपद में पत्रकार संगठन मौत के घाट उतारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार का साथ दे रहे हैं तथा आन्दोलनरत हैं, परन्तु लखनऊ के कई पत्रकार संगठन बिलकुल मौन हैं। सहायता करना तो दूर, यहां तक कि जगेन्द्र सिंह में ही कमियां गिनाते फिर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि पति/पिता की मृत्यु का दर्द उसकी निर्बल विधवा तथा अनाथ हुए बच्चे ही जान सकते हैं और आज उत्तर प्रदेश के माहौल में यह दिन किसी अन्य का भी आ सकता है। पिछले दस दिनों में तीन पत्रकारों पर हमले हुए हैं, यह अच्छा संकेत नहीं है। लगभग दो-ढाई वर्ष पुरानी बात होगी. फेसबुक पर किसी ने एक समाचार का लिंक शेयर किया कि काकोरी कांड के अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की पौत्रवधू की झोपड़ी गाँव के दबंगों ने जला दी है. कड़कड़ाती सर्दी में खुले आसमान के नीचे शहीद के वंशज रात गुजारने को मजबूर हैं . समाचार पढ़कर धक्का लगा . समाचार का स्रोत थे शाहजहांपुर समाचार के नाम से फेसबुक पर सक्रिय जगेन्द्र सिंह . मैं उन दिनों किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संयोजन में व्यस्त था पर मैंने सोशल मीडिया पर मुहिम चलायी और मेरी उस मुहिम में जगेन्द्रसिंह, सिराज फैसल खान, अमित त्यागी, भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ अधिकारी श्रीकांत मिश्र कान्त आदि जुड़े. कोडरमा : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या को लेकर कोडरमा जिले के पत्रकारों ने समाहरणालय परिसर में सांकेतिक धरना दिया। इसके पहले सूचना भवन स्थित पत्रकार सदन में पत्रकारों ने शोक सभा भी की और पत्रकार जगेन्द्र सिंह की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। धरना प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों ने गजेन्द्र की हत्या के आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा और पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर उन्हें जेल भेजने, मृतक पत्रकार के परिजनों को पचास लाख रुपया मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। जौनपुर : जनपद के पत्रकारों ने शाहजहांपुर के साथी जगेन्द्र सिंह की गत दिवस की गयी निर्मम हत्या के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान जहां पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में घूमकर प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, वहीं पुतला फूंकने के बाद मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधित चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट धर्मेन्द्र सिंह को सौंपा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता को पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या के मामले में चल रही जांच प्रगति के बारे में चौबीस जून तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल और न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की अवकाश कालीन पीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया. यह याचिका "वी द पीपुल" नामक सामाजिक संगठन के महासचिव प्रिंस लेनिन की तरफ से दाखिल की गयी है. इस याचिका में उन्होंने अदालत से जगेन्द्र सिंह की कथित हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने तथा मृतक पत्रकार के परिजनों को समुचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रदेश सरकार को आदेश देने का आग्रह किया है. Kumar Sauvir : अब इस बहस का क्या मतलब कि शाहजहांपुर के पत्रकार जागेन्द्र सिंह ने आत्मदाह किया, या फिर उसे फूंक डाला गया था। खास तौर पर तब, जबकि बुरी तरह झुलसे जागेन्द्र ने लखनऊ के सिविल अस्पताल में अपना जो मृत्यु-पूर्व बयान कई लोगों के मोबाइल पर दर्ज कराया था, उसमें उसने साफ-साफ कहा था कि उसे जिन्दा फूंकने की कोशिश की गयी थी। मगर अब इस काण्ड को दबाने और उन्हें दोषियों को जेल भेजने की कवायद करने के बजाय, जो लोग इस मामले का खुलासा करने में जुटे हैं, उन्हें सपा-विरोधी मानसिकता से ग्रसित होने का आरोप लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, शाहजहांपुर और बरेली से लेकर लखनऊ तक पत्रकारों का एक खेमा इस मामले पर पुलिस और प्रशासन की दलाल-बैसाखी बन कर बाकायदा खुलेआम पैरवी में जुटा हुआ है। इन लोगों का मकसद सिर्फ यह है कि इस बर्बर दाह-काण्ड पर राख डालने की कोशिश की जाए। इसके लिए नये-नये तरीके-तर्क बुने जा रहे हैं। वाराणसी। 'इस समय आदमी के लिए सबसे बड़ा अपराध है, निरपराध होना, जो निरपराध होंगे मारे जायेंगे? ' सोचने पर विवश करने वाली कविता के इन पंक्तियों के साथ शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह के हत्या के विरोध में मंगलवार की शाम शहर के पत्रकारों, रंगकर्मियों, अध्यापकों, बुद्धिजीवियों ने संयुक्त रूप से दशाश्वमेध स्थित चितरंजन पार्क से लहुराबीर स्थित शहीद चन्द्रशेखर आजाद पार्क तक 'वक्त नहीं चुप रहने का' विरोध मार्च निकाल कर हस्ताक्षर अभियान चलाया। Yashwant Singh : नीचे दिए गए तीन वीडियो खासकर अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव के लिए हैं जिनके आंखों पर सत्ता का नशा चढ़ा हुआ है, जिनके चेहरे पर ताकत का अहंकार पुता हुआ है, जिनके चाल-ढाल में अमरता की अदा लिपटी हुई है, जिनके बयानों में नश्वरता का नक्शा खिंचा होता है. इनके हाथ में यूपी की सत्ता क्या आ गई है, जैसे ये मनुष्येतर हो गए हैं. जैसे ये अपने आप में हर शख्स के भाग्य नियंता हो गए हैं, जिनको चाहेंगे जीने का हक देंगे, जिनको चाहेंगे जिंदा जलवा डालेंगे. ऐसी सोच समझ वाले अहंकारियों का संपूर्ण नाश होता है एक न एक दिन. Kumar Sauvir : यकीन मानिये कि मुझे कत्तई कोई भी जानकारी नहीं है कि आप दलाल-बेईमान हैं या फिर ईमानदार। लेकिन आज मैं दावे के साथ कहना चाहता हूं कि हमारी पूरी की पूरी न सही, लेकिन अधिकांश पत्रकार-बिरादरी सिर्फ दलाली ही करती है। बेईमानी तो इनके रग-रग में रच-बस चुकी है। गौर कीजिए ना कि शाहजहांपुर के जांबाज, लेखनी-सैनानी और जुझारू पत्रकार जागेन्द्र सिंह ने सत्य-उद्घाटन के लिए अपनी जान दे दी, मगर सत्य के सामने सिर नहीं झुकाया। नतीजा, मंत्री राममूर्ति वर्मा के इशारे पर उसके पालतू पुलिस कोतवाल, पत्रकार और अपराधियों ने उसे जिन्दा फूंक डाला। : प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा, अभिव्यक्ति की आजादी को सुरक्षा देने की मांग : सपा कार्यालय ने नहीं स्वीकार किया ज्ञापन, कहा लखनऊ जाओ : नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों और शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की नृशंस हत्या के विरोध में सोमवार को दिल्ली जंतर-मंतर पर करीब दो सौ पत्रकारों ने प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की कि पत्रकारों पर हो रहे राजनीतिक हमलों पर लगाम लगाई जाए और जगेंद्र सिंह हत्याकांड के दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो. वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाजों को दबाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. प्रदर्शन के बाद पत्रकारों की ओर से उनकी सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी को सुनिश्चित करने को लेकर एक ज्ञापन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सौंपा गया जबकि समाजवादी पार्टी के कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करने से इनकार कर दिया और ज्ञापन सौंपने गए पत्रकारों से कहा कि ज्ञापन सौंपना है तो लखनऊ जाओ. Mukesh Yadav : जंतर मंतर पर प्रदर्शन के साथ साथ यह निर्णय भी हो ही जाना चाहिए कि जब तक जगेंद्र का हत्यारोपित यूपी सरकार का मंत्री हटा नहीं दिया जाता, कोई भी मीडिया माध्यम अखिलेश यादव सरकार की कवरेज नहीं करेगा। इसके लिए तमाम मीडिया संगठनों पर दबाव बनाया जाए। साथ ही वेस्टेड इंटरेस्ट वाले एडिटर्स गिल्ड और एनबीए को बाध्य किया जाए कि वे जगेंद्र प्रकरण में शामिल उक्त मंत्री के हटने तक यूपी सरकार की कवरेज रोकने के लिए गाइडलाइंस जारी करें। क्योंकि ध्यान रहे अखिलेश सरकार तो हर रोज अपनी विदाई की पटकथा खुद ही लिख रही है। इस पटकथा को सूबे की पीड़ित जनता जल्दी ही साकार कर देगी। लेकिन ये लालची मीडिया संगठन, जिनके लिए पत्रकारों की सुरक्षा कोई मुद्दा ही नहीं है, कहीं नहीं जाने वाले। इसलिए इन्हें एक्सपोज करने का भी यह एक उचित अवसर है। इस क्रूर व्यवस्था में, जहाँ सच के लिए कोई जगह ही नहीं है, अगर आज इतना भी हो जाए तो एक उम्मीद बंधती है! बाकि इस भ्रष्ट सिस्टम में सत्य के दीवानों के लिए जगेंद्र होना ही नियति है। Arvind Pathik : लगभग दो ढाई वर्ष पुरानी बात होगी. फेसबुक पर किसी ने एक समाचार का लिंक शेयर किया कि काकोरी कांड के अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की पौत्रवधु की झोपडी गाँव के दबंगों ने जला दी है. कड़कड़ाती सर्दी में खुले आसमान के नीचे शहीद के वंशज रात गुजारने को मजबूर हैं. समाचार पढकर धक्का लगा. समाचार का स्रोत थे 'शाहजहांपुर समाचार' के नाम से फेसबुक पर सक्रिय जगेन्द्र सिह. मैं उन दिनों किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संयोजन में व्यस्त था पर मैंने सोशल मीडिया पर मुहिम चलायी और मेरी उस मुहिम में जगेन्द्र सिंह, सिराज फैसल खान, अमित त्यागी, भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ अधिकारी श्रीकांत मिश्र 'कान्त' आदि जुड़े. पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार दिए जाने के कुकृत्य के खिलाफ पूरे देश में उबाल है. दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद अब तय किया गया है कि उन्नीस जून को शाम पांच बजे से प्रेस क्लब आफ इंडिया में एक बैठक का आयोजन किया जाएगा. इस बैठक के बाद एक विरोध मार्च निकाला जाएगा जो मुलायम सिंह यादव के दिल्ली स्थित आवास तक जाएगा. लखनऊ : जगेन्द्र सिंह हत्याकांड की जांच में आई PCI की टीम के गठन पर ही सवाल उठ रहे हैं. इसके एक सदस्य है रिटायर्ड फोटोग्राफर एस एन सिन्हा जिनकी अध्यक्षता वाली इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन ने डेढ़ वर्ष पूर्व शाहजहांपुर में अपना सम्मलेन कराया था. इसमें अभियुक्त मंत्री राम मूर्ति वर्मा ने सहायता और शिरकत करी थी. दूसरी सदस्य सुमन गुप्ता हैं, जो दैनिक जनमोर्चा से जुड़ी हैं. शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड के आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा और आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सपरिवार धरने पर बैठीं सुमन धरना स्थल पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं। आनन-फानन में पास के डॉक्टरो की टीम बुलाकर उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। पल्स रेट डाऊन होने से उनकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन परिवारवाले राजी नहीं हुए और धरनास्थल पर ही इलाज करने की जिद पर अड़े रहे। उधर, मंत्री के विरोधी एवं सपा से निष्कासित पूर्व विधायक और देवेंद्र पाल सिंह भी धरने पर बैठ गए हैं। बदायूं : मालवीय आवास गृह पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर पत्रकारों ने पहले शाहजहांपुर निवासी पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या पर गुस्से का इजहार किया, फिर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को पच्चीस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। लखनऊ : कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव से शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार डालने के आरोपी पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा को हटाये जाने की सम्भावना के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जांच पूरी हुए बगैर किसी भी मंत्री को नहीं हटाया जाएगा। उधर न्याय पाने के लिए पत्रकार जगेंद्र सिंह का पूरा परिवार धरने पर बैठ गया है। मृत्योपरान्त किसी व्यक्ति को वास्तविक पहचान दिलाते हुए शहीद के तौर पर सम्मानित करना और अपने पापों का सार्वजनिक क्षमा-याचना करते हुए पश्चाताप करना बड़ी बात माना जाती है। इतिहास तो ऐसे मामलों से भरा पड़ा हुआ है, जब सरकार या किसी समुदाय ने किसी को मार डाला, लेकिन बाद में उसके लिए माफी मांग ली। ठीक ऐसा ही मामला है शाहजहांपुर के जांबाज शहीद पत्रकार जागेन्द्र सिंह और उसके प्रति मीडिया के नजरिये का। इसी मीडिया ने पहले तो उसे ब्लैकमेलर और अपराध के तौर पर पेश किया था। फेसबुक आदि सोशल साइट पर अपना पेज बना कर खबरों की दुनिया में हंगामा करने वाले जागेन्द्र सिंह को शाहजहांपुर से लेकर बरेली और लखनऊ-दिल्ली तक की मीडिया ने उसे पत्रकार मानने से ही इनकार कर लिया था। लेकिन जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया, तो मीडिया ने जागेन्द्र सिह को पत्रकार के तौर पर सम्बोधन दे दिया। गोंडा : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह हत्याकांड के विरोध में रविवार को यहां के पत्रकारों ने मौन जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट में धरना दिया। पत्रकारों ने जगेंद्र को जलाकर मार डालने की साजिश रचने वाले राज्य सरकार के मंत्री राम मूर्ति वर्मा को मंत्रिपरिषद से तत्काल बर्खास्त करने, घटना की सीबीआइ से जांच, निलम्बित पुलिस कर्मियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने तथा मृतक पत्रकार के परिवार को पचास लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। पत्रकारों ने तय किया कि पीड़ित परिवार को गोंडा से आर्थिक सहायता भी भेजी जाएगी। हाथरस : शहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह की जलाकर हत्या किये जाने से स्थानीय मीडियाकर्मियों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को प्रेस क्लब सिकंदराराऊ द्वारा उपजिलाधिकारी एनपी पाण्डेय को प्रदेश के राज्यपाल के नाम सम्बोधित एक ज्ञापन सौंप कर कार्यवाही तथा पीड़ित परिवार को पच्चीस लाख रूपये मुआवजा दिये जाने की मांग की गई। पत्रकारों ने काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया। बहुत दिलचस्प है शाहजहांपुर में नेता-पुलिस-अपराधी-पत्रकार गठजोड़। लाखों की रकम खुद डकार लेना चाहते थे चुनिन्दा नेता-पत्रकार। शाहजहांपुर में तीन पत्रकारों का एक गुट बन गया था। जागेन्द्र सिंह, अमित भदौरिया और राजू मिश्र। यह करीब चार साल पहले की बात है। इनमें सबसे ज्यादा तेज-तर्रार था जागेन्द्र। खुटार के मूलतः जागेन्द्र को पत्रकार की दुनिया में सबसे पहले अमर उजाला के प्रभारी अरूण पाराशरी ने प्रवेश कराया था। कल आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने पत्रकार जगेन्द्र सिंह के गाँव खुटार जा कर उनके परिवार वालों से मिल कर मौजूदा स्थिति, विवेचना और उनकी सुरक्षा के बारे में जानकारी ली. स्थितियों पर उन्होंने पूरी तरह असंतोष जाहिर करते हुए मुआवज़े और घटना की सीबीआई जांच की मांग की. प्रजातांत्रिक भारत का सिस्टम भी अजब - गजब है। देश की राजधानी दिल्ली की सरकार में एक मंत्री की डिग्री फेक होने के कारण उन्हें जेल में डाला गया है और पूछताछ जारी है तो दूसरी तरफ उत्तरप्रदेश की सरकार है,जिसमें उसके एक मंत्री और के गुर्गों द्वारा एक पत्रकार को जिंदा जला दिया गया उसकी मौत हो गई आरोप साबित हैं सबकी आंखों के सामने फिर भी समाजवादी सरकार के नेता कहते हैं क्या एफआईआर दर्ज होने से कोई आरोपी साबित हो जाता है। सुनते आये हैं जो आया है वो जाएगा भी। सभी को जाना है लेकिन किस तरह से ? क्षमा करेंगे, एक और चला गया, पहले भी कई गए हैं। एकता के नारे लगाये जा रहे हैं। हक़ और बदले की भी बातें हो रहीं। कोई कम तो कोई ज्यादा आक्रमक भी है, जमात के लोग अपने अपने अंदाज में अपने अपने झंडे भी बुलंद कर रहे हैं। परिणाम की सुधि किसे है, ये बड़ा प्रश्न हो सकता है। लखनऊ : आईजी कानून-व्यवस्था ए. सतीश गणेश ने बताया कि शाहजहांपुर के पत्रकार हत्याकांड में इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। तफ्तीश में तेजी से जुटी पुलिस फिलहाल मंत्री राममूर्ति वर्मा से पूछताछ नहीं करेगी। जांच में अगर सुबूत और साक्ष्य मिले तभी पूछताछ होगी। लखनऊ : शाहजंहापुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह की जिंदा जलाकर हत्या कर दिए जाने पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट ने गहरा दुख व्यक्त किया है। आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अजेय नहीं है और उसे जनमत का सम्मान करना चाहिए। यह अफसोसनाक है कि पत्रकार की हत्या के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा को सरकार अपने मंत्रिमण्डल में बनाए हुए है और जिन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज है, उन्हें निलंम्बित तक नहीं किया गया है। मैं खुद को गुनेहगार मान रहा हूँ, क्योंकि मै "जगेन्द्र सिंह" की समय पर सहायता नहीं कर पाया। यह बात अलग है कि मैं लखनऊ के बाहर था, पर वह कोई उचित तर्क नहीं हो सकता। सात दिनों तक लखनऊ के अस्पताल में शाहजहाँपुर का एक खोजी पत्रकार जगेन्द्र सिंह ज़िन्दगी से जूझता रहा, उसके घर में घुस कर जलाने वाले आज़ाद हैं। सिर्फ इसलिए की एक राज्यमंत्री की दबंगई थी। जगेन्द्र सिंह घोटोलो का भंडाफोड़ करता रहा। मेरठ : यहां के पत्रकारों में शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या से जबरदस्त गुस्सा है। पत्रकारों का सत्याग्रह शुरू हो गया है। इसी क्रम में शुक्रवार बारहजून को पूर्वाह्न ग्यारह बजे शहर के लगभग सभी प्रमुख पत्रकार और मीडियाकर्मचारी जिला कलेक्ट्रेट में जुटे। शाहजहांपुर : ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन शाहजहांपुर के आह्वान पर जगेन्द्र सिंह के परिजनों को न्याय, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, जगेन्द्र सिंह के बच्चों के लिये शासन से पचास लाख रूपये का मुआवजा, एक बेटे या बेटी को नौकरी दिलाने की मांग करते हुए पत्रकारों ने कैंडिल जुलूस निकाला। वो सफेद झूठ बोल रहे हैं, जो कह रहे हैं कि जागेन्द्र सिंह का धन्धा उगाही, वसूली और रंगदारी ही था। सच बात तो यह है कि शाहजहांपुर की ही पुलिस ने उसके ऊपर लगे एक मुकदमे में उसे पूरी तरह निर्दोष पाया था। लेकिन इस तथ्य के बावजूद चंद पुलिस और अपराधियों द्वारा पेट्रोल डाल कर सरेआम फूंक डाले गये शाहजहांपुर के जांबाज पत्रकार जागेन्द्र सिंह को अब ब्लैकमेलर, उगाही करने वाला और रंगदारी वसूली करने वाले अपराधी के तौर पर पेश करने की कवायद चल रही है। मकसद यह कि किसी न किसी तरीके से इस मामले पर मंत्री राममूर्ति वर्मा की खाल बचा ली जाए। उधर पता चला है कि समाजवादी पार्टी ने अपने एक स्थानीय नेता और ददरौल से विधानसभा चुनाव लड़ चुके देवेन्द्र पाल को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। Kumar Sauvir : बेशर्मी की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं शाहजहांपुर के पत्रकारों ने। जो पत्रकार था, उसे पत्रकार मानने से तैयार नहीं थी यह पत्रकार-बिरादरी और जो पत्रकार नहीं हैं, उन्हें जबरिया पत्रकार का तमगा देने पर आमादा थे यही लोग। पत्रकारिता के नाम पर कलंक बने इन्हीं हत्यारेनुमा पत्रकारों ने पुलिस, अफसर, नेता और मन्त्री की चौकड़ी तैयार कर ऐसा जाल बुन डाला, जिस शिकंजे में जागेन्द्र सिंह को जकड़ लिया गया और दिन-दहाड़े उसे पेट्रोल डाल कर जिन्दा फूंक दिया गया। इतना ही नहीं, जागेन्द्र सिंह की मौत के बाद अब इन्हीं पत्रकारों ने उसके नाम पर मर्सिया भी पढ़ना शुरू कर दिया है। हैरत की बात है कि जागेन्द्र सिंह की हत्या के बाद जिले के एक भी अधिकारी ने जागेन्द्र के घर जाने की जहमत नहीं फरमायी, लेकिन मूल कारणों को खोजना-विश्लेषण करने के बजाय अब इन्हीं पत्रकारों की टोलियां अब जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक और यहां के नेताओं की ओर से प्रतिनिधिमण्डल बना कर जागेन्द्र सिंह के घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, यही पत्रकार अब इन अफसरों-नेताओं की ओर से आश्वासन तक दे रहे हैं कि जागेन्द्र की पत्नी को अनुग्रह दिलाया जाएगा, पीडि़त परिवार को मकान दिया जाएगा, उसे जमीन मुहैया करायी जाएगी और आश्रित लोगों को सरकारी नौकरी दिलायी जाएगी। अलीगढ़ : पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड के विरोध में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने अध्यक्ष सुबोध सुहृद के नेतृत्व में बुधवार को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन कमिश्नरी पर ज्वांइट कमिश्नर राजाराम को दिया। ज्ञापन में समिति के पदाधिकारियों ने मांग की कि प्रदेश में हो रहे पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने के लिए एक संस्था का गठन किया जाना चाहिए और मृत पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवारीजनों को मुआवजा व आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। Palash Biswas : शाहजहांपुर में सोशल मीडिया के पत्रकार को मंत्री के गुर्गों और पुलिसे के द्वारा उसके घर में जिन्दा जला कर मार देने की घटना रौंगटे खड़ा कर देने वाली हैl साथ ही यह उत्तर प्रदेश कि सरकार के साथ साथ प्रदेश के पत्रकारों के चरित्र को भी उजागर करती हैl साथियों, याद करें जब मजीठिया की लड़ाई में पत्रकारों की अगुवाई करने वाले भड़ास के यशवंत को मालिकों की रंजिश की वजह से जेलयात्रा करनी पड़ी, तो हमने सभी साथियों से आग्रह किया था कि हमें एकजुट होकर अपने साथियों पर होने वाले हमले के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। हम शुरू से पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर वैकल्पिक मीडिया के हक में लामबंदी की अपील करते रहे हैं। हम लामबंद होते तो हमारे साथी रोज-रोज मारे नहीं जाते। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने शाहजहाँपुर के पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या के दोषियों की अविलंम्ब गिरफ़्तारी की मांग करते हुए मृतक के परिजनों को पच्चीस लाख की आर्थिक सहायता की मांग की है । यूनियन अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने एक बयान जारी कर इस मामले में दर्ज एफआईआर में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है । आईएफडब्लूजे के सेक्रेटरी क़ादरख़ान असदुल्लाह ने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं अन्य प्रदेशों में हुई शोक सभाओं में पत्रकारों ने घटना पर गुस्सा जताते हुए तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गाजीपुर : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड पर यहां विरोध प्रकट करते हुए पत्रकारों ने कचहरी कैम्प कार्यालय पर शोकसभा की। बैठक में पत्रकारों ने इसे चौथे स्तम्भ पर करारा आघात करार दिया। पत्रकारों ने राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा और कोतवाल श्रीप्रकाश राय के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की मांग के साथ ही घटना की जांच सीबीआई से कराने, परिजनों को सुरक्षा मुहैया कराने, नौकरी के साथ पचास लाख रूपये का मुआवजा एवं जगेंद्र के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिए जाने की मांग की है। वाराणसी : शाहजहाँपुर के सोशल मीडिया पत्रकार जोगेन्द्र सिंह प्रकरण में सरकार की सच्चाई और मंत्री की मनमानी खुल कर सामने आ गई है। अब समाजवादी पार्टी के नेता पत्रकारों को गालियां देने लगे हैं और मंत्री धमकियां दिलवा रहा है। लखनऊ प्रेस क्लब में कल मीटिंग कर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आगाह कर दिया है कि सरकार इस हरकत को नहीं रोकती तो कीमत चुकानी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव की सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाल श्रीप्रकाश राय और मंत्री के चार अन्य गुर्गों के खिलाफ पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाकर मारने के मामले में खुटार थाने में रिपोर्ट दर्ज तो दर्ज हो गई, अब देखिए इस मामले का अंत किस तरह होता है। चाहिए तो था कि हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही मंत्री को सरकार से बाहर कर दिया जाता, और उसके बाद जांच अमिताभ ठाकुर जैसे किसी ईमानदार आईपीएस से कराई जाती। लेकिन ऐसा कहां संभव है। मंत्री हत्यारोपी है, उस पर और भी कई मामले पहले से सुर्खियों में हैं। हकीकत है कि सब हाथीदांत जैसा चलता लग रहा है। जब सारे छंटे-छंटाए सियासत के टीलों पर सुस्ता रहे हैं, जिसकी नकाब हटाओ, वही अपराधियों के सरगना जैसा, तो फिर ऐसी जांच की संभावना कहां बचती है। आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने शाहजहाँपुर निवासी सोशल मीडिया पत्रकार जगेन्द्र सिंह की मौत के बाद दर्ज किये गए एफआईआर को देर से उठाया गया कदम बताया है और इस बात पर कष्ट व्यक्त किया है कि जगेन्द्र के जीते जी उनका मुक़दमा दर्ज नहीं हुआ. खुटार । पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। उनके बुजुर्ग पिता सुमेर सिंह ने मंत्री राममूर्ति वर्मा और षडयंत्रकारी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल न भेजने पर सपरिवार डीएम कार्यालय पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मंत्री और पुलिस ने मिलकर उनके बेटे को मार डाला है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी की है। दलाल पत्रकारों की साजिस के चलते शाहजहांपुर में एक जांबाज पत्रकार जगेन्द्र भ्रष्ट मंत्री और भ्रष्ट पुलिस की साजिश का शिकार होकर दम तोड़ दिया बाईस मई को सूबे के वरिष्ठ अधिकारियों को भेंजे पत्र में जता दी थी अपनी हत्या की आशंका। मंत्री के इशारे पर पुलिस ने रची जलाने की साजिश, अब इस पूरे मामले में सरकार मौन क्यों है? शाहजहाँपुर निवासी सोशल मीडिया पत्रकार जगेन्द्र सिंह, जो एक जून दो हज़ार पंद्रह को दिन में अपने आवास विकास कॉलोनी, सदर बाज़ार स्थित मकान में सदर कोतवाल श्रीप्रकाश राय द्वारा दी गयी दबिश के दौरान आग लगने से लगभग साठ फीसदी जल गए थे, की आज सिविल अस्पताल, लखनऊ में मौत हो गयी. शाहजहांपुर : जागेंद्र सिंह आत्मदाह प्रकरण से क्षुब्ध पत्रकारों ने काली पट्टियां बांधकर ऑल प्रेस एवं राइटर्स एसोसिएशन के बैनर तले कलक्ट्रेट में प्रदर्शन और डीएम, एसपी से वार्ता न हो पाने पर दो घंटे तक धरना भी दिया। आखिरकार पत्रकारों के पांच सदस्यीय शिष्टमंडल से विकास भवन के फर्स्ट फ्लोर पर वार्ता करते हुए जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने ज्ञापन लेने के साथ ही आश्वासन दिया कि जगेंद्र का बेहतर इलाज कराया जाएगा और जांच पूरी होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इस बीच एसपी बबलू कुमार ने इसी मामले में कोतवाल श्रीप्रकाश राय को लाइन हाजिर कर दिया है।
आरोपियों ने लड़की को धमकी दी कि अगर वह किसी से इस बात का जिक्र करेगी तो गैंगरेप के विडियो को इंटरनेट पर अपलोड कर देंगे। लड़की ने बताया कि वह 27 जनवरी को जब शाम को आठ बजे ट्यूशन से घर लौट रही थी तो 18 वर्षीय सुजय और अन्य ने उसे पकड़ लिया और एक खाली मकान में ले गए। वहां सुरजीत और अन्य लड़का भी था। तीनों ने बारी-बारी से लड़की से रेप किया और विडियो भी बनाई।
आरोपियों ने लड़की को धमकी दी कि अगर वह किसी से इस बात का जिक्र करेगी तो गैंगरेप के विडियो को इंटरनेट पर अपलोड कर देंगे। लड़की ने बताया कि वह सत्ताईस जनवरी को जब शाम को आठ बजे ट्यूशन से घर लौट रही थी तो अट्ठारह वर्षीय सुजय और अन्य ने उसे पकड़ लिया और एक खाली मकान में ले गए। वहां सुरजीत और अन्य लड़का भी था। तीनों ने बारी-बारी से लड़की से रेप किया और विडियो भी बनाई।
चर्चा में क्यों? 15 नवंबर, 2023 को बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि माता सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी ज़िला के पुनौरा धाम को बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा विकसित किया जाएगा। - जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि पुनौरा धाम को विकसित करने के संबंध में राज्य पर्यटन विकास निगम ने टेंडर निकाला है। टेंडर की पूरी प्रक्रिया दिसंबर के अंत तक पूरी हो जाएगी। वहीं, योजना पूरा करने की अवधि 24 महीने निर्धारित की गई है। - पुनौरा धाम विकास योजना पर 67.39 करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा और इसका कार्यान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से किया जाएगा। - राज्य सरकार पुनौरा धाम को पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यहाँ सभी तरह की जरूरी सुविधाओं का विकास होगा। इसके बाद यह जन्मस्थली धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। पूरे देश-दुनिया से भी यहां श्रद्धालु पहुँचेंगे। - विदित हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में कैबिनेट की बैठक में सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में माता सीता के जन्मस्थान के विकास के लिये 72 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। - योजना के अनुसार 72 करोड़ की राशि से पुनौरा धाम को विश्वस्तरीय सुविधा से लैश और सुसज्जित किया जाएगा। इसके तहत कॉलमयुक्त कोलोनेड परिक्रमा पथ का निर्माण, सीता वाटिका, लव-कुश वाटिका, जानकी महोत्सव क्षेत्र का विकास किया जाएगा। - मंदिर परिसर में सुंदर वास्तुशिल्प से सुसज्जित दीवारें होंगी। मंडप व आंतरिक सड़क का निर्माण किया जाएगा। मंदिर में आने वाले स्थानीय व बाहरी श्रद्धालुओं के वाहनों लगाने के लिये अत्याधुनिक पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिये आवासन, खान-पान आदि की भी व्यवस्था की जाएगी। - मंदिर परिसर में माता सीता पर आधारित थ्रीडी एनिमेशन शो का भी निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही डिस्प्लेकियोस्क व पाथ-वे भी बनाया जाएगा। बच्चों के लिये अलग सेप्लेएरिया डेवलप किया जाएगा, जिससे बच्चे खेल-खेल में माता सीता के संबंध में जानकारी प्राप्त करें। - पूरे मंदिर परिसर में बेहतर भित्ति चित्रकला, मूर्तिकला एवं अन्य कलात्मक कार्य किये जाएंगे, जिससे कि पर्यटक आकर्षित हों। इन कलाओं के माध्यम से माता सीता के जीवन की भी जानकारी होगी। साथ ही, लैंडस्केपिंग व थिमेटिक गेट भी बनाएँ जाएँगे।
चर्चा में क्यों? पंद्रह नवंबर, दो हज़ार तेईस को बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि माता सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी ज़िला के पुनौरा धाम को बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा विकसित किया जाएगा। - जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि पुनौरा धाम को विकसित करने के संबंध में राज्य पर्यटन विकास निगम ने टेंडर निकाला है। टेंडर की पूरी प्रक्रिया दिसंबर के अंत तक पूरी हो जाएगी। वहीं, योजना पूरा करने की अवधि चौबीस महीने निर्धारित की गई है। - पुनौरा धाम विकास योजना पर सरसठ.उनतालीस करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा और इसका कार्यान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से किया जाएगा। - राज्य सरकार पुनौरा धाम को पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यहाँ सभी तरह की जरूरी सुविधाओं का विकास होगा। इसके बाद यह जन्मस्थली धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। पूरे देश-दुनिया से भी यहां श्रद्धालु पहुँचेंगे। - विदित हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में कैबिनेट की बैठक में सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में माता सीता के जन्मस्थान के विकास के लिये बहत्तर करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। - योजना के अनुसार बहत्तर करोड़ की राशि से पुनौरा धाम को विश्वस्तरीय सुविधा से लैश और सुसज्जित किया जाएगा। इसके तहत कॉलमयुक्त कोलोनेड परिक्रमा पथ का निर्माण, सीता वाटिका, लव-कुश वाटिका, जानकी महोत्सव क्षेत्र का विकास किया जाएगा। - मंदिर परिसर में सुंदर वास्तुशिल्प से सुसज्जित दीवारें होंगी। मंडप व आंतरिक सड़क का निर्माण किया जाएगा। मंदिर में आने वाले स्थानीय व बाहरी श्रद्धालुओं के वाहनों लगाने के लिये अत्याधुनिक पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिये आवासन, खान-पान आदि की भी व्यवस्था की जाएगी। - मंदिर परिसर में माता सीता पर आधारित थ्रीडी एनिमेशन शो का भी निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही डिस्प्लेकियोस्क व पाथ-वे भी बनाया जाएगा। बच्चों के लिये अलग सेप्लेएरिया डेवलप किया जाएगा, जिससे बच्चे खेल-खेल में माता सीता के संबंध में जानकारी प्राप्त करें। - पूरे मंदिर परिसर में बेहतर भित्ति चित्रकला, मूर्तिकला एवं अन्य कलात्मक कार्य किये जाएंगे, जिससे कि पर्यटक आकर्षित हों। इन कलाओं के माध्यम से माता सीता के जीवन की भी जानकारी होगी। साथ ही, लैंडस्केपिंग व थिमेटिक गेट भी बनाएँ जाएँगे।
बढ़ी हुई खाद्य सुरक्षा और पहुंच के कारण पिछले दशक की तुलना में, 2017 में कम कुपोषित और एनीमिया बीमारी से ग्रसित भारतियों का नेतृत्व हुआ है, लेकिन भारत को अपने पोषण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए और कुछ करने की जरूरत है, ऐसा 2018 वैश्विक पोषण रिपोर्ट (जीएनआर 2018) में प्रकाशित किया गया है। भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तहत नौ पोषण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है - जोकि बच्चों में बड़े हुए वजन को घटाना, महिलाओं और पुरुषों के बीच मधुमेह, प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया और महिलाओं और पुरुषों के बीच मोटापा और स्तनपान में वृद्धि जैसी बिमारियों को कम करने के लक्ष्य को, रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक पूरा कर दिया जाएगा। 2025 तक कुपोषण के सभी रूपों को कम करने के लिए 2012 और 2013 में डब्ल्यूएचओ सदस्य देशों द्वारा नौ लक्ष्यों को अपनाया गया था। शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सरकारी प्रतिनिधियों समेत जीएनआर के स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह द्वारा संकलित पांचवीं ऐसी रिपोर्ट, 29 नवंबर 2018 को बैंकाक, थाईलैंड में 'भूख और कुपोषण के अंत में तेजी लाने' सम्मेलन में जारी की गई थी। सम्मेलन संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा आयोजित किया गया था। भारत ने कम कद वाले बच्चों की गणना में सुधार दिखाया है, लेकिन 46. 6 मिलियन बच्चों का कद अभी भी कम है, रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में ही 30. 9% कम कद वाले बच्चों की संख्या देखी गई है। हालांकि, भारत ने छह अन्य वैश्विक पोषण लक्ष्यों से संबंधित कोई प्रगति या गिरावट के पैरामीटर नहीं दिखाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 194 देशों में से केवल 94 ऐसे देश हैं जो इन नौ वैश्विक पोषण लक्ष्यों में से एक लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के निर्देशक और केंद्र के निर्देशक कोरिन्ना हॉक्स का कहना है कि " भले ही पूरी दुनिया में बच्चों में कम कद जैसी बीमारी में गिरावट देखी गई है , लेकिन महिलाओं में एनीमिया और कम वज़न में ऐसा प्रभाव काफी धीमा रहा है। 2015-17 में एफएओ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 195. 9 मिलियन कुपोषित लोग थे - या जीर्ण पौष्टिक कमी वाले लोग - 2005-07 में 204. 1 मिलियन से भी नीचे थे। 2005-07 में अनावश्यकता का प्रसार 20. 7% से घटकर 2015-17 में 14. 8% हो गया है। हालांकि, भारत में कुपोषण के वैश्विक स्तर पर 23. 8% से भागीदार है और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा कुपोषित लोगों की संख्या में आता है, ऐसा एफएओ द्वारा बताया गया है। 2015 में, भारत सहित सभी डब्ल्यूएचओ सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया, जिसमें 2030 तक भूख व कुपोषित से ग्रसित आबादी में शून्य प्राप्त करना शामिल है। इंडियास्पेंड के विश्लेषण से पता चलता है कि 2030 तक शून्य भूख हासिल करने के लिए, भारत को रोजाना भूख से 48,370 लोगों को उठाना होगा। 2015 से 2017 तक कुपोषित आबादी में भारत की कमी 3. 9 मिलियन थी, जो प्रति दिन करीब 10,685 लोगों की है - 2030 तक लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक चौथाई से भी कम आवश्यक है। यहां तक कि कुपोषित आबादी में इसकी सबसे ज्यादा कमी - 2006 में 15. 2 मिलियन- 2008 - भारत भूख से प्रति दिन केवल 41,644 लोगों को उठा सकता है। 27 नवम्बर , 2018 को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में एफएओ और आईएफपीआरआई ने कहा कि 2017 में करीब 821 मिलियन लोग कुपोषित थे - 2016 में 804 मिलियन से ऊपर और आठ साल पहले के स्तर के बराबर - वैश्विक कुपोषण को ख़त्म करने का लक्ष्य खतरे में है। जबकि अफ्रीका में कुपोषित लोगों की संख्या सबसे अधिक है - कुल आबादी का 21% - दक्षिण अमेरिका की स्थिति भी खराब हो रही है, जबकि एशिया में खाद्य प्रवृत्ति और पोषण के अनुसार एशिया में घटती प्रवृत्ति धीमी हो गई है ऐसा विश्व रिपोर्ट, 2018 में बताया गया है। एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुपोषित लोगों की बढ़ती संख्ह्या में वैश्विक प्रवृत्ति के लिए संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक मंदी मुख्य कारण थे। 2017 में भारत में कुपोषण, मृत्यु और विकलांगता का शीर्ष कारण था, इसके बाद 2017 के वाशिंगटन विश्वविद्यालय द्वारा रोग अध्ययन के वैश्विक बर्डन के अनुसार, खराब आहार विकल्पों सहित आहार संबंधी जोखिमों का पालन किया गया है। एक दशक पहले की तुलना में 2015-16 में मोटापा और अधिक वजन पुरुषों और महिलाओं में क्रमशः 9. 6 और 8 प्रतिशत अंक बढ़ गया, जबकि गैर-संक्रमणीय बीमारियां 2016 में सभी मौतों की 61% के लिए जिम्मेदार थीं। बच्चों में कुपोषण और बीमारी को रोकने के लिए सबसे शुरुआती हस्तक्षेपों में से एक स्तनपान है; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के मंत्रालय के मुताबिक, अभी तक केवल 54. 9% भारतीय बच्चे ही स्तनपान पा रहे हैं और केवल 41. 6% बच्चे जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की सुविधा पा रहे हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि, केवल 10% से कम बच्चों को देश में पर्याप्त पोषण मिलता है। इसके अलावा, भारत 2020 तक पैक किए गए भोजन के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है, लेकिन 9 प्रमुख भारतीय खाद्य और पेय कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले पेय पदार्थों में से केवल 12% और 16% खाद्य पदार्थ "उच्च पौष्टिक गुणवत्ता" के थे, ऐसा एक्सेस के अनुसार पोषण सूचकांक भारत स्पॉटलाइट, 2016 में बताया गया है। भारत ने कुपोषण दरों में धीमी गिरावट की प्रवृत्ति का सामना करने के प्रयास किए हैं। पोशन अभियान - राष्ट्रीय पोषण मिशन - मार्च 2018 में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण को कम करने के उद्देश्य से जीएनआर 2018 के अनुसार भारत मीठे पेय पदार्थों पर चीनी कर लगाने के लिए 59 देशों में से एक बन गया। माल और सेवा कर 2017 में सॉफ्ट ड्रिंक पर 32% से 40% की वृद्धि हुई थी। हालांकि, 2025 तक कुपोषण के सभी रूपों को कम करने और 2030 तक शून्य भूख प्राप्त करने पर प्रगति को तेज करने के लिए, भारत कई और सफलताओं से सीख सकता है। बांग्लादेश में बच्चे के वजन में सबसे तेज कमी और इतिहास में बच्चों के कम कद में देखी गई है। आईएफपीआरआई और एफएओ के एक बयान में कहा गया है कि 2004 में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम कद, 2014 में 55. 5% थी, जो 2014 में 36. 1% हो गई थी, "बड़े पैमाने पर कृषि और पोषण में सुधार के लिए नवीन सार्वजनिक नीतियों का उपयोग करके"। जबकि कृषि नीतियों को सहायक नीतियों द्वारा बढ़ाया गया था, परिवार नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूल की उपस्थिति बढ़ने, पीने के पानी और स्वच्छता तक पहुंच और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसी अन्य नीतियों ने भी भूमिका निभाई थी। चीन में, यह उच्च आर्थिक विकास था (2005 में प्रति व्यक्ति आय 5,060 डॉलर से बढ़कर 2017 में 16,760 डॉलर हो गई) जिसने भूख और गरीबी दोनों में से लाखों लोगों को हटा दिया। एफएओ के अनुसार, ब्राजील और इथियोपिया ने अपने खाद्य प्रणालियों को बदल दिया और कृषि अनुसंधान और विकास और सामाजिक संरक्षण कार्यक्रमों में लक्षित निवेश के माध्यम से भूख के खतरे को कम कर दिया। "1980 के दशक के मध्य से शुरू होने और दो दशकों से अधिक समय तक, ब्राजील में फसल उत्पादन 77% बढ़ गया और वह - 2003 में स्थापित देश के फोम शून्य कार्यक्रम के साथ संयुक्त, लाभार्थियों को सामाजिक सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करने के लिए- बयान में कहा गया है कि भूख और कुपोषण लगभग दस वर्षों में खत्म हो गया है"।
बढ़ी हुई खाद्य सुरक्षा और पहुंच के कारण पिछले दशक की तुलना में, दो हज़ार सत्रह में कम कुपोषित और एनीमिया बीमारी से ग्रसित भारतियों का नेतृत्व हुआ है, लेकिन भारत को अपने पोषण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए और कुछ करने की जरूरत है, ऐसा दो हज़ार अट्ठारह वैश्विक पोषण रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया है। भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत नौ पोषण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है - जोकि बच्चों में बड़े हुए वजन को घटाना, महिलाओं और पुरुषों के बीच मधुमेह, प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया और महिलाओं और पुरुषों के बीच मोटापा और स्तनपान में वृद्धि जैसी बिमारियों को कम करने के लक्ष्य को, रिपोर्ट के अनुसार दो हज़ार पच्चीस तक पूरा कर दिया जाएगा। दो हज़ार पच्चीस तक कुपोषण के सभी रूपों को कम करने के लिए दो हज़ार बारह और दो हज़ार तेरह में डब्ल्यूएचओ सदस्य देशों द्वारा नौ लक्ष्यों को अपनाया गया था। शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सरकारी प्रतिनिधियों समेत जीएनआर के स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह द्वारा संकलित पांचवीं ऐसी रिपोर्ट, उनतीस नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को बैंकाक, थाईलैंड में 'भूख और कुपोषण के अंत में तेजी लाने' सम्मेलन में जारी की गई थी। सम्मेलन संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा आयोजित किया गया था। भारत ने कम कद वाले बच्चों की गणना में सुधार दिखाया है, लेकिन छियालीस. छः मिलियन बच्चों का कद अभी भी कम है, रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में ही तीस. नौ% कम कद वाले बच्चों की संख्या देखी गई है। हालांकि, भारत ने छह अन्य वैश्विक पोषण लक्ष्यों से संबंधित कोई प्रगति या गिरावट के पैरामीटर नहीं दिखाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक सौ चौरानवे देशों में से केवल चौरानवे ऐसे देश हैं जो इन नौ वैश्विक पोषण लक्ष्यों में से एक लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के निर्देशक और केंद्र के निर्देशक कोरिन्ना हॉक्स का कहना है कि " भले ही पूरी दुनिया में बच्चों में कम कद जैसी बीमारी में गिरावट देखी गई है , लेकिन महिलाओं में एनीमिया और कम वज़न में ऐसा प्रभाव काफी धीमा रहा है। दो हज़ार पंद्रह-सत्रह में एफएओ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एक सौ पचानवे. नौ मिलियन कुपोषित लोग थे - या जीर्ण पौष्टिक कमी वाले लोग - दो हज़ार पाँच-सात में दो सौ चार. एक मिलियन से भी नीचे थे। दो हज़ार पाँच-सात में अनावश्यकता का प्रसार बीस. सात% से घटकर दो हज़ार पंद्रह-सत्रह में चौदह. आठ% हो गया है। हालांकि, भारत में कुपोषण के वैश्विक स्तर पर तेईस. आठ% से भागीदार है और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा कुपोषित लोगों की संख्या में आता है, ऐसा एफएओ द्वारा बताया गया है। दो हज़ार पंद्रह में, भारत सहित सभी डब्ल्यूएचओ सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र के सत्रह सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया, जिसमें दो हज़ार तीस तक भूख व कुपोषित से ग्रसित आबादी में शून्य प्राप्त करना शामिल है। इंडियास्पेंड के विश्लेषण से पता चलता है कि दो हज़ार तीस तक शून्य भूख हासिल करने के लिए, भारत को रोजाना भूख से अड़तालीस,तीन सौ सत्तर लोगों को उठाना होगा। दो हज़ार पंद्रह से दो हज़ार सत्रह तक कुपोषित आबादी में भारत की कमी तीन. नौ मिलियन थी, जो प्रति दिन करीब दस,छः सौ पचासी लोगों की है - दो हज़ार तीस तक लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक चौथाई से भी कम आवश्यक है। यहां तक कि कुपोषित आबादी में इसकी सबसे ज्यादा कमी - दो हज़ार छः में पंद्रह. दो मिलियन- दो हज़ार आठ - भारत भूख से प्रति दिन केवल इकतालीस,छः सौ चौंतालीस लोगों को उठा सकता है। सत्ताईस नवम्बर , दो हज़ार अट्ठारह को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में एफएओ और आईएफपीआरआई ने कहा कि दो हज़ार सत्रह में करीब आठ सौ इक्कीस मिलियन लोग कुपोषित थे - दो हज़ार सोलह में आठ सौ चार मिलियन से ऊपर और आठ साल पहले के स्तर के बराबर - वैश्विक कुपोषण को ख़त्म करने का लक्ष्य खतरे में है। जबकि अफ्रीका में कुपोषित लोगों की संख्या सबसे अधिक है - कुल आबादी का इक्कीस% - दक्षिण अमेरिका की स्थिति भी खराब हो रही है, जबकि एशिया में खाद्य प्रवृत्ति और पोषण के अनुसार एशिया में घटती प्रवृत्ति धीमी हो गई है ऐसा विश्व रिपोर्ट, दो हज़ार अट्ठारह में बताया गया है। एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुपोषित लोगों की बढ़ती संख्ह्या में वैश्विक प्रवृत्ति के लिए संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक मंदी मुख्य कारण थे। दो हज़ार सत्रह में भारत में कुपोषण, मृत्यु और विकलांगता का शीर्ष कारण था, इसके बाद दो हज़ार सत्रह के वाशिंगटन विश्वविद्यालय द्वारा रोग अध्ययन के वैश्विक बर्डन के अनुसार, खराब आहार विकल्पों सहित आहार संबंधी जोखिमों का पालन किया गया है। एक दशक पहले की तुलना में दो हज़ार पंद्रह-सोलह में मोटापा और अधिक वजन पुरुषों और महिलाओं में क्रमशः नौ. छः और आठ प्रतिशत अंक बढ़ गया, जबकि गैर-संक्रमणीय बीमारियां दो हज़ार सोलह में सभी मौतों की इकसठ% के लिए जिम्मेदार थीं। बच्चों में कुपोषण और बीमारी को रोकने के लिए सबसे शुरुआती हस्तक्षेपों में से एक स्तनपान है; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मंत्रालय के मुताबिक, अभी तक केवल चौवन. नौ% भारतीय बच्चे ही स्तनपान पा रहे हैं और केवल इकतालीस. छः% बच्चे जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की सुविधा पा रहे हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि, केवल दस% से कम बच्चों को देश में पर्याप्त पोषण मिलता है। इसके अलावा, भारत दो हज़ार बीस तक पैक किए गए भोजन के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है, लेकिन नौ प्रमुख भारतीय खाद्य और पेय कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले पेय पदार्थों में से केवल बारह% और सोलह% खाद्य पदार्थ "उच्च पौष्टिक गुणवत्ता" के थे, ऐसा एक्सेस के अनुसार पोषण सूचकांक भारत स्पॉटलाइट, दो हज़ार सोलह में बताया गया है। भारत ने कुपोषण दरों में धीमी गिरावट की प्रवृत्ति का सामना करने के प्रयास किए हैं। पोशन अभियान - राष्ट्रीय पोषण मिशन - मार्च दो हज़ार अट्ठारह में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण को कम करने के उद्देश्य से जीएनआर दो हज़ार अट्ठारह के अनुसार भारत मीठे पेय पदार्थों पर चीनी कर लगाने के लिए उनसठ देशों में से एक बन गया। माल और सेवा कर दो हज़ार सत्रह में सॉफ्ट ड्रिंक पर बत्तीस% से चालीस% की वृद्धि हुई थी। हालांकि, दो हज़ार पच्चीस तक कुपोषण के सभी रूपों को कम करने और दो हज़ार तीस तक शून्य भूख प्राप्त करने पर प्रगति को तेज करने के लिए, भारत कई और सफलताओं से सीख सकता है। बांग्लादेश में बच्चे के वजन में सबसे तेज कमी और इतिहास में बच्चों के कम कद में देखी गई है। आईएफपीआरआई और एफएओ के एक बयान में कहा गया है कि दो हज़ार चार में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम कद, दो हज़ार चौदह में पचपन. पाँच% थी, जो दो हज़ार चौदह में छत्तीस. एक% हो गई थी, "बड़े पैमाने पर कृषि और पोषण में सुधार के लिए नवीन सार्वजनिक नीतियों का उपयोग करके"। जबकि कृषि नीतियों को सहायक नीतियों द्वारा बढ़ाया गया था, परिवार नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूल की उपस्थिति बढ़ने, पीने के पानी और स्वच्छता तक पहुंच और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसी अन्य नीतियों ने भी भूमिका निभाई थी। चीन में, यह उच्च आर्थिक विकास था जिसने भूख और गरीबी दोनों में से लाखों लोगों को हटा दिया। एफएओ के अनुसार, ब्राजील और इथियोपिया ने अपने खाद्य प्रणालियों को बदल दिया और कृषि अनुसंधान और विकास और सामाजिक संरक्षण कार्यक्रमों में लक्षित निवेश के माध्यम से भूख के खतरे को कम कर दिया। "एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक के मध्य से शुरू होने और दो दशकों से अधिक समय तक, ब्राजील में फसल उत्पादन सतहत्तर% बढ़ गया और वह - दो हज़ार तीन में स्थापित देश के फोम शून्य कार्यक्रम के साथ संयुक्त, लाभार्थियों को सामाजिक सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करने के लिए- बयान में कहा गया है कि भूख और कुपोषण लगभग दस वर्षों में खत्म हो गया है"।
West Bengal TMC Leader Anubrata Mondal: पश्चिम बंगाल में पशु तस्करी के मामले में टीएमसी के नेता अनुब्रत मंडल को सीबीआई ने पांचवीं बार तलब किया था, लेकिन बुधवार को भी वह हाजिर नहीं हुए और शारीरिक अस्वस्थता के कारण अस्पताल में भर्ती हो गए. पश्चिम बंगाल के बीरभूम के तृणमूल कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है. सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में उन्हें बुधवार को सीबीआई कार्यालय में तलब किया था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए और अपने फ्लैट से सीधे कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल पहुंचे और वहां चिकित्सा के लिए भर्ती हो गये. फिलहाल एसएसकेएम अस्पताल के वुडवर्न वार्ड में उनका इलाज चल रहा है. उनकी चिकित्सा पर निगरानी के लिए एक मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है. वह पूरी तरह से डॉक्टरों की निगरानी में हैं. बुधवार दोपहर एसएसकेएम में अनुब्रत मंडल से मिलने उनके पहुंचे. वहां से वे निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय गए. वहीं पर उन्होंने अनुब्रत मंडल की ओर से सीबीआई को एक पत्र दिया. तृणमूल नेता ने कहा कि उनकी इच्छा बावजूद वह अपनी शारीरिक बीमारी के कारण सीबीआई कार्यालय में पेश नहीं हो सके. उन्होंने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी से उसे पेश होने के लिए चार हफ्ते का समय देने को कहा है. एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार सीबीआई ने बुधवार को अनुब्रत को पशु तस्करी मामले में पूछताछ के लिए कोलकाता के निजाम पैलेस में पेश होने को कहा था. रात में वह चिनार पार्क स्थित अपने घर पर थे. अनुब्रत मंडल के करीबी रिश्तेदारों ने दावा किया कि वह बुधवार सुबह निजाम पैलेस के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन अंतिम समय में स्थिति बदल गई. बुधवार की सुबह अचानक सीने में दर्द शुरू हो गया. नतीजतन उनकी कार चिनार पार्क से निकली, लेकिन निजाम पैलेस की जगह एसएसकेएम पहुंच गई. अनुब्रत मंडल ने एक पत्र में सीबीआई को यह भी बताया. उन्होंने लिखा कि उनके पास सीबीआई के सामने पेश होने की इच्छा है, लेकिन यह संभव नहीं हो सका क्योंकि उन्हें बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसलिए, अगर सीबीआई चाहे तो वे अस्पताल आ सकते हैं और उससे पूछताछ कर सकते हैं. वह सहमत है. इससे पहले सीबीआई ने पशु तस्करी के एक मामले में अनुब्रत को चार बार समन भेजा था. वह बीमारी के कारण चार बार सीबीआई कार्यालय में पेश नहीं हो पाये. उन्हें बुधवार को पांचवीं बार निजाम पैलेस में बुलाया गया था.
West Bengal TMC Leader Anubrata Mondal: पश्चिम बंगाल में पशु तस्करी के मामले में टीएमसी के नेता अनुब्रत मंडल को सीबीआई ने पांचवीं बार तलब किया था, लेकिन बुधवार को भी वह हाजिर नहीं हुए और शारीरिक अस्वस्थता के कारण अस्पताल में भर्ती हो गए. पश्चिम बंगाल के बीरभूम के तृणमूल कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है. सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में उन्हें बुधवार को सीबीआई कार्यालय में तलब किया था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए और अपने फ्लैट से सीधे कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल पहुंचे और वहां चिकित्सा के लिए भर्ती हो गये. फिलहाल एसएसकेएम अस्पताल के वुडवर्न वार्ड में उनका इलाज चल रहा है. उनकी चिकित्सा पर निगरानी के लिए एक मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है. वह पूरी तरह से डॉक्टरों की निगरानी में हैं. बुधवार दोपहर एसएसकेएम में अनुब्रत मंडल से मिलने उनके पहुंचे. वहां से वे निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय गए. वहीं पर उन्होंने अनुब्रत मंडल की ओर से सीबीआई को एक पत्र दिया. तृणमूल नेता ने कहा कि उनकी इच्छा बावजूद वह अपनी शारीरिक बीमारी के कारण सीबीआई कार्यालय में पेश नहीं हो सके. उन्होंने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी से उसे पेश होने के लिए चार हफ्ते का समय देने को कहा है. एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार सीबीआई ने बुधवार को अनुब्रत को पशु तस्करी मामले में पूछताछ के लिए कोलकाता के निजाम पैलेस में पेश होने को कहा था. रात में वह चिनार पार्क स्थित अपने घर पर थे. अनुब्रत मंडल के करीबी रिश्तेदारों ने दावा किया कि वह बुधवार सुबह निजाम पैलेस के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन अंतिम समय में स्थिति बदल गई. बुधवार की सुबह अचानक सीने में दर्द शुरू हो गया. नतीजतन उनकी कार चिनार पार्क से निकली, लेकिन निजाम पैलेस की जगह एसएसकेएम पहुंच गई. अनुब्रत मंडल ने एक पत्र में सीबीआई को यह भी बताया. उन्होंने लिखा कि उनके पास सीबीआई के सामने पेश होने की इच्छा है, लेकिन यह संभव नहीं हो सका क्योंकि उन्हें बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसलिए, अगर सीबीआई चाहे तो वे अस्पताल आ सकते हैं और उससे पूछताछ कर सकते हैं. वह सहमत है. इससे पहले सीबीआई ने पशु तस्करी के एक मामले में अनुब्रत को चार बार समन भेजा था. वह बीमारी के कारण चार बार सीबीआई कार्यालय में पेश नहीं हो पाये. उन्हें बुधवार को पांचवीं बार निजाम पैलेस में बुलाया गया था.
राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके 9 मॉल एवेन्यू आवास पर पहुंचे। इस दौरान अखिलेश यादव के आने की भी संभावना थी, लेकिन वह नहीं आए। चर्चाएं है कि दोनों के बीच में पश्चिमी यूपी के कई सीटों पर स्थानीय समीकरण को लेकर चर्चा हुई है। बता दें कि कल यानि रविवार को बसपा उम्मीदवारों की लिस्ट की घोषणा होने वाली है। इससे पहले मायावती अपने उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानीय समीकरण को सुनिश्चित कर लेना चाहती हैं। जयंत चौधरी की गठबंधन में शामिल होने के बाद मायावती से पहली मुलाकात है। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को सपा-बसपा गठबंधन में तीन सीट मिली हैं। इनमें मुजफ्फरनगर से पार्टी के अध्यक्ष अजित सिंह और बागपत से जयंत चौधरी चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं। इन्हें तीसरी सीट मथुरा मिली है। वहीं, खबरें हैं कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही सपा और बसपा में कुछ प्रत्याशियों के नामों पर विरोध भी शुरू हो गया है। उधर, कई सीटों पर बसपा के नेताओं ने भी सपा प्रत्याशियों का विरोध जताया है। सूत्रों के मुताबिक, सुल्तानपुर से बसपा प्रत्याशी चंद्रभान सिंह उर्फ सोनू का सपा कर रही विरोध, तो सपा प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज और रामजीलाल सुमन का भी बसपा के ओर से विरोध हो रहा है। बलिया और जौनपुर सीट पर सपा बसपा गठबंधन में पेंच फंस गया है। ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके नौ मॉल एवेन्यू आवास पर पहुंचे। इस दौरान अखिलेश यादव के आने की भी संभावना थी, लेकिन वह नहीं आए। चर्चाएं है कि दोनों के बीच में पश्चिमी यूपी के कई सीटों पर स्थानीय समीकरण को लेकर चर्चा हुई है। बता दें कि कल यानि रविवार को बसपा उम्मीदवारों की लिस्ट की घोषणा होने वाली है। इससे पहले मायावती अपने उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानीय समीकरण को सुनिश्चित कर लेना चाहती हैं। जयंत चौधरी की गठबंधन में शामिल होने के बाद मायावती से पहली मुलाकात है। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय लोकदल को सपा-बसपा गठबंधन में तीन सीट मिली हैं। इनमें मुजफ्फरनगर से पार्टी के अध्यक्ष अजित सिंह और बागपत से जयंत चौधरी चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं। इन्हें तीसरी सीट मथुरा मिली है। वहीं, खबरें हैं कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही सपा और बसपा में कुछ प्रत्याशियों के नामों पर विरोध भी शुरू हो गया है। उधर, कई सीटों पर बसपा के नेताओं ने भी सपा प्रत्याशियों का विरोध जताया है। सूत्रों के मुताबिक, सुल्तानपुर से बसपा प्रत्याशी चंद्रभान सिंह उर्फ सोनू का सपा कर रही विरोध, तो सपा प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज और रामजीलाल सुमन का भी बसपा के ओर से विरोध हो रहा है। बलिया और जौनपुर सीट पर सपा बसपा गठबंधन में पेंच फंस गया है। This website uses cookies.
'बिग बॉस 13' से सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज कौर गिल का नाम एक साथ ऐसा जुड़ा कि हर तरफ इनकी ही चर्चा हो रही है। हर कोई इन दोनों को एक साथ देखना चाहता है। यहां तक कि इन दोनों की शादी कब हो रही है ये सवाल भी इन दोनों से कई बार पूछा गया। हाल ही में सिद्धार्थ शुक्ला से शहनाज से प्यार और शादी से जुड़ा सवाल पूछा गया। इस सवाल के जवाब में अभिनेता ने ऐसी बात कह दी जिसे जानकर आपको बिल्कुल भी यकीन नहीं होगा।
'बिग बॉस तेरह' से सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज कौर गिल का नाम एक साथ ऐसा जुड़ा कि हर तरफ इनकी ही चर्चा हो रही है। हर कोई इन दोनों को एक साथ देखना चाहता है। यहां तक कि इन दोनों की शादी कब हो रही है ये सवाल भी इन दोनों से कई बार पूछा गया। हाल ही में सिद्धार्थ शुक्ला से शहनाज से प्यार और शादी से जुड़ा सवाल पूछा गया। इस सवाल के जवाब में अभिनेता ने ऐसी बात कह दी जिसे जानकर आपको बिल्कुल भी यकीन नहीं होगा।
जो गाय काट रहे हैं गाय का दर्द नहीं जानते। गाय का लाभ नहीं जानते। जो पशु-पक्षी, जीव-जंतु मारते हैं उन्हें सत्यपरक तनिक भी ज्ञान नहीं है। जो वृक्ष-वन काट रहे हैं, कुएं, तालाब पाट रहे हैं, वे भी प्राणवायु नहीं पाएंगे। कोई भी माफिया या वीआईपी कर्मफल से बच नहीं पाएगा। रोग, शोक, मृत्यु, वृद्धावस्था से कोई बच नहीं पाएगा। बेहतर होगा जल, जमीन, जंगल प्रधान सभी का जीवन हो। हम प्रकृति को कभी नहीं जीत सकते। मात्र रूप ही बदल सकते हैं। -रजत कुमार, 278, भूड़ बरेली (उप्र)। दिल्ली विश्वविद्यालय भारत में सर्वोच्च दिल्ली विश्वविद्यालय में उप स्वास्थ्य केंद्र को बड़े अस्पताल में परिवर्तन करें ताकि चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके। दिल्ली विश्वविद्यालय भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। इस प्रकार से दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पर प्रत्येक दिन सैकड़ों की संख्या में विभिन्न रोगों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस प्रकार से दर्जनों के आसपास डाक्टर तथा यहां पर कर्मचारी काम करते हैं परन्तु अब प्रश्न उठता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में हजारों के आसपास शैक्षिक तथा गैर शैक्षिक वर्ग की सरकारी आवास भी हैं तथा इस तरह से दर्जनों के आसपास छात्रावास भी हैं लेकिन इस तरह से उसके पश्चात भी इनका अपना कोई अस्पताल नहीं है जबकि यहां पर प्रत्येक वर्ष सैकड़ों की तादाद में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। ऐसे में उप स्वास्थ्य केंद्र को बड़े अस्पताल में परिवर्तन किया जाए और उसमें महिलाओं के लिए प्रसूति केंद्र खोला जाना चाहिए जोकि इस प्रकार से बहुत ही अनिवार्य है। अनेक बार इस तरह से चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय-समय पर आने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों में दिल्ली विश्वविद्यालय में उप स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस प्रकार से दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि यहां पर 100 बिस्तर वाले अस्पताल का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके। -शरद चंद झा, रामजस कॉलेज, दिल्ली। माओवादियों की अति माओवादियों ने फिर घात लगाकर बिहार के औरंगाबाद जिले के नवी नगर में हमला कर पुलिस के साथ जवानों को विस्फोट कर जान से मार दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। पुलिस वालों की हत्या की माओवादियों द्वारा। वे बार-बार हमारे सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर उनकी चुन-चुन कर हत्या कर रहे हैं और हमारी सरकार बस नीतियां बनाने में मशगूल है। जब तक उनकी नीतियों की बात जनता को पता चलती है तब तक पांच-दस जवान और मारे जा चुके होते हैं। सरकार विदेशी आतंकियों को तो क्या रोकेगी जब उससे अपने ही मुट्ठीभर अतिवादी काबू नहीं किए जा रहे और मामले को लटकाने की नीति यदि अपनाई जा रही है तो यह समय आने पर खतरनाक साबित होगी, इसलिए अच्छा होगा कि समय रहते इन अतिवादियों पर काबू पा लिया जाए। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली। नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर तीखा प्रहार कर रहे हैं जब व्यक्ति अधिक बोले तो उसे आइना दिखाना जरूरी हो जाता है। कुछ ऐसे ही शख्स नरेंद्र मोदी हैं। वह जमकर कांग्रेस पर प्रहार करते हैं। उनका सबसे अधिक निशाना कांग्रेस के वंशवाद पर रहता है वह राहुल को शहजादा कहते हैं। ऐसा कहकर वह वंशवाद की राजनीति के विरोध में जागरण करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी का वंशवाद नहीं दिखता। मेनका गांधी भाजपा की चर्चित नेत्री हैं। वह सांसद हैं, उनके पुत्र वरुण सांसद हैं। जाहिर है कि यह आगामी चुनाव में भी उम्मीदवार होंगे और वरुण की पत्नी भी आगामी चुनाव से राजनीति में आगाज कर रही हैं। राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया की सरकार है। वह मुख्यमंत्री ही क्यों, उनका पूरा वंश सत्ता के इर्द-गिर्द रहा है। पंजाब में पिता मुख्यमंत्री है, उनका पुत्र राजनीति का ककहरा सीख रहा है। जाहिर है कि वह उनकी गद्दी संभालेगा। भाजपा के यह उदाहरण सिर्प चर्चित लोगों के हैं। अन्य पार्टियों में भी वंशवाद है। आपको सिर्प कांग्रेस में ही शहजादे दिखते हैं। अपनी पार्टी के शहजादे भी तो देख लें। -दिलीप गुप्ता, छोटी वमनपुरी, बरेली (उप्र)। हिन्दी और उर्दू का झगड़ा उर्दू का जन्म हिन्दुस्तान में हुआ। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि हिन्दुस्तान के अलावा यह भाषा किसी अन्य देश में नहीं बोली जाती। पाकिस्तान को इस मामले में अलग देश मान लेना केवल बात की बात है। इसमें कोई शक नहीं कि उर्दू एक निहायत रची संवरी भाषा है। इसमें सफाई और सरलता स्वाभाविक रूप से है। उर्दू का जन्म हिन्दू और मुसलमानों के सम्पर्प में आने से हुआ। इसमें अरबी, फारसी, हिन्दी या संस्कृत के शब्द हैं। संसार में अधिकांश जीवित भाषाओं के बारे में कहना चाहूंगा कि हर भाषा में कुछ शब्द दूसरी भाषाओं के मिले होते हैं। कोई भी भाषा आसमान से नहीं टपकती है। जब भी अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले व्यक्ति आपस में मिलते हैं तो एक तीसरी भाषा का निर्माण करते हैं। शुरू-शुरू में यह भाषा अपरिमाणित और कामचलाऊ होती है परन्तु धीरे-धीरे उसमें सुधार और निखार पैदा होता है। फिर विद्वान भी उसमें रुचि लेने लगते हैं। बाद में वही भाषा साहित्यक बन जाती है। संस्कृत का उदाहरण लीजिए संस्कृत का पितृ शब्द फारसी में पिदर और अंग्रेजी में फादर हो गया। यह कहना कि यह दोनों शब्द संस्कृत के हैं और फारसी अंग्रेजी कोई भाषा ही नहीं है हठधर्मी के सिवाय और क्या है? हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है। यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है। गुजारिश है कि उर्दू का तिरस्कार न कीजिए। उर्दू वालों ने अब फारसी और अरबी शब्दों की जगह हिन्दी और संस्कृत शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। हिन्दी को उर्दू से बहुत कुछ मिल सकता है। किसी भी भाषा का अपमान राष्ट्र के अपमान जैसा है। -आनंद मोहन भटनागर, लखनऊ। आर्थिक प्रगति की राह में बड़ा रोड़ा? आर्थिक वृद्धि दर आज पांच फीसद से भी नीचे सिमट चुकी है। नीतिगत अनिर्णय, परियोजनाओं की मंजूरी में देरी और भारी-भरकम घोटालों के खुलासे ने मिलकर ऐसा माहौल बना दिया है कि विदेशी निवेशकों को कौन कहे, घरेलू निवेशक भी अपना पैसा नए प्रोजेक्ट्स में लगाने से हिचकिचा रहे हैं। कहने का आशय यह है कि राजनीतिक स्थिरता आर्थिक वृद्धि में एक फैक्टर तो है, लेकिन ऐसा होना बेहतरी की गारंटी नहीं है। हालांकि राजन की इस बात में पूरी सचाई है कि महंगाई देश की आर्थिक प्रगति की राह में बड़ा रोड़ा बन गई है। रिजर्व बैंक ने अपने स्तर पर बार-बार ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिश की है, लेकिन महंगाई तो काबू में आई नहीं, उल्टे महंगे कर्ज की मार से उद्योग जगत से लेकर आम लोगों तक का पसीना छूट गया। जिस बढ़ते अनुत्पादक कर्ज (एनपीए) को राजन देश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं उसके भी मूल में महंगा कर्ज और आर्थिक सुस्ती ही प्रमुख वजहें हैं। विडंबना है कि जिस महंगाई के कारण आम लोगों से लेकर अर्थव्यवस्था तक का दम फूल गया, केंद्रीय सत्ता पर काबिज दल को उसकी चिंता विधानसभा चुनावों में पराजय के बाद हुई है। बहरहाल, बेहतर होगा कि आम चुनाव के बाद देश को स्थिर सरकार मिले, लेकिन जरूरी यह भी होगा कि उसकी कार्यप्रणाली और रवैया मौजूदा स्थिर सरकार से अलग रहे। -सुभाष बुड़ावन वाला, 18, शांतिनाथ कार्नर, खाचरौद। राजनीति से लेकर समाज तक में आया बदलाव आम आदमी पार्टी के आने से पहले भी इस देश में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं, लेकिन जड़ व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी का आक्रोश इतने प्रभावी ढंग से इससे पहले शायद ही दिखा हो। विधानसभा चुनावों में ज्यादातर जगह भारी संख्या में मतदान इस जागरुकता का ही नतीजा है। न्यायपालिका तो पहले से ही न्याय दिलाने में आगे रही है, सीबीआई और कैग जैसी संस्थाएं भी पारदर्शिता की लड़ाई में अब पीछे नहीं हैं। भारी जन दबाव के कारण ही संसद को पिछले साल अपराध कानून संशोधन, खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, पेंशन और लोकपाल जैसे विधेयक पारित करने पड़े। जो लोग 2012 में निर्भया के हक की लड़ाई को सड़कों पर ले आए थे, विगत वर्ष उन्हीं में से बहुतों को धारा 377 पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरोध में गली-कूचों में देखा गया। जो स्थापित राजनीतिक पार्टियां पहले कहती थीं कि भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं रहा, अब वही दल अपने विवादास्पद फैसले पलटते दिखाई देते हैं। लेकिन बहुत कुछ बदलना अभी शेष है। मसलन, सांप्रदायिक दंगे अब भी सिर्प कड़वी हकीकत हैं। -नलिनी गुप्ता, पंजाबी बाग, दिल्ली।
जो गाय काट रहे हैं गाय का दर्द नहीं जानते। गाय का लाभ नहीं जानते। जो पशु-पक्षी, जीव-जंतु मारते हैं उन्हें सत्यपरक तनिक भी ज्ञान नहीं है। जो वृक्ष-वन काट रहे हैं, कुएं, तालाब पाट रहे हैं, वे भी प्राणवायु नहीं पाएंगे। कोई भी माफिया या वीआईपी कर्मफल से बच नहीं पाएगा। रोग, शोक, मृत्यु, वृद्धावस्था से कोई बच नहीं पाएगा। बेहतर होगा जल, जमीन, जंगल प्रधान सभी का जीवन हो। हम प्रकृति को कभी नहीं जीत सकते। मात्र रूप ही बदल सकते हैं। -रजत कुमार, दो सौ अठहत्तर, भूड़ बरेली । दिल्ली विश्वविद्यालय भारत में सर्वोच्च दिल्ली विश्वविद्यालय में उप स्वास्थ्य केंद्र को बड़े अस्पताल में परिवर्तन करें ताकि चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके। दिल्ली विश्वविद्यालय भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। इस प्रकार से दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पर प्रत्येक दिन सैकड़ों की संख्या में विभिन्न रोगों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस प्रकार से दर्जनों के आसपास डाक्टर तथा यहां पर कर्मचारी काम करते हैं परन्तु अब प्रश्न उठता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में हजारों के आसपास शैक्षिक तथा गैर शैक्षिक वर्ग की सरकारी आवास भी हैं तथा इस तरह से दर्जनों के आसपास छात्रावास भी हैं लेकिन इस तरह से उसके पश्चात भी इनका अपना कोई अस्पताल नहीं है जबकि यहां पर प्रत्येक वर्ष सैकड़ों की तादाद में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। ऐसे में उप स्वास्थ्य केंद्र को बड़े अस्पताल में परिवर्तन किया जाए और उसमें महिलाओं के लिए प्रसूति केंद्र खोला जाना चाहिए जोकि इस प्रकार से बहुत ही अनिवार्य है। अनेक बार इस तरह से चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय-समय पर आने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों में दिल्ली विश्वविद्यालय में उप स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस प्रकार से दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि यहां पर एक सौ बिस्तर वाले अस्पताल का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके। -शरद चंद झा, रामजस कॉलेज, दिल्ली। माओवादियों की अति माओवादियों ने फिर घात लगाकर बिहार के औरंगाबाद जिले के नवी नगर में हमला कर पुलिस के साथ जवानों को विस्फोट कर जान से मार दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। पुलिस वालों की हत्या की माओवादियों द्वारा। वे बार-बार हमारे सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर उनकी चुन-चुन कर हत्या कर रहे हैं और हमारी सरकार बस नीतियां बनाने में मशगूल है। जब तक उनकी नीतियों की बात जनता को पता चलती है तब तक पांच-दस जवान और मारे जा चुके होते हैं। सरकार विदेशी आतंकियों को तो क्या रोकेगी जब उससे अपने ही मुट्ठीभर अतिवादी काबू नहीं किए जा रहे और मामले को लटकाने की नीति यदि अपनाई जा रही है तो यह समय आने पर खतरनाक साबित होगी, इसलिए अच्छा होगा कि समय रहते इन अतिवादियों पर काबू पा लिया जाए। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली। नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर तीखा प्रहार कर रहे हैं जब व्यक्ति अधिक बोले तो उसे आइना दिखाना जरूरी हो जाता है। कुछ ऐसे ही शख्स नरेंद्र मोदी हैं। वह जमकर कांग्रेस पर प्रहार करते हैं। उनका सबसे अधिक निशाना कांग्रेस के वंशवाद पर रहता है वह राहुल को शहजादा कहते हैं। ऐसा कहकर वह वंशवाद की राजनीति के विरोध में जागरण करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी का वंशवाद नहीं दिखता। मेनका गांधी भाजपा की चर्चित नेत्री हैं। वह सांसद हैं, उनके पुत्र वरुण सांसद हैं। जाहिर है कि यह आगामी चुनाव में भी उम्मीदवार होंगे और वरुण की पत्नी भी आगामी चुनाव से राजनीति में आगाज कर रही हैं। राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया की सरकार है। वह मुख्यमंत्री ही क्यों, उनका पूरा वंश सत्ता के इर्द-गिर्द रहा है। पंजाब में पिता मुख्यमंत्री है, उनका पुत्र राजनीति का ककहरा सीख रहा है। जाहिर है कि वह उनकी गद्दी संभालेगा। भाजपा के यह उदाहरण सिर्प चर्चित लोगों के हैं। अन्य पार्टियों में भी वंशवाद है। आपको सिर्प कांग्रेस में ही शहजादे दिखते हैं। अपनी पार्टी के शहजादे भी तो देख लें। -दिलीप गुप्ता, छोटी वमनपुरी, बरेली । हिन्दी और उर्दू का झगड़ा उर्दू का जन्म हिन्दुस्तान में हुआ। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि हिन्दुस्तान के अलावा यह भाषा किसी अन्य देश में नहीं बोली जाती। पाकिस्तान को इस मामले में अलग देश मान लेना केवल बात की बात है। इसमें कोई शक नहीं कि उर्दू एक निहायत रची संवरी भाषा है। इसमें सफाई और सरलता स्वाभाविक रूप से है। उर्दू का जन्म हिन्दू और मुसलमानों के सम्पर्प में आने से हुआ। इसमें अरबी, फारसी, हिन्दी या संस्कृत के शब्द हैं। संसार में अधिकांश जीवित भाषाओं के बारे में कहना चाहूंगा कि हर भाषा में कुछ शब्द दूसरी भाषाओं के मिले होते हैं। कोई भी भाषा आसमान से नहीं टपकती है। जब भी अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले व्यक्ति आपस में मिलते हैं तो एक तीसरी भाषा का निर्माण करते हैं। शुरू-शुरू में यह भाषा अपरिमाणित और कामचलाऊ होती है परन्तु धीरे-धीरे उसमें सुधार और निखार पैदा होता है। फिर विद्वान भी उसमें रुचि लेने लगते हैं। बाद में वही भाषा साहित्यक बन जाती है। संस्कृत का उदाहरण लीजिए संस्कृत का पितृ शब्द फारसी में पिदर और अंग्रेजी में फादर हो गया। यह कहना कि यह दोनों शब्द संस्कृत के हैं और फारसी अंग्रेजी कोई भाषा ही नहीं है हठधर्मी के सिवाय और क्या है? हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है। यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है। गुजारिश है कि उर्दू का तिरस्कार न कीजिए। उर्दू वालों ने अब फारसी और अरबी शब्दों की जगह हिन्दी और संस्कृत शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। हिन्दी को उर्दू से बहुत कुछ मिल सकता है। किसी भी भाषा का अपमान राष्ट्र के अपमान जैसा है। -आनंद मोहन भटनागर, लखनऊ। आर्थिक प्रगति की राह में बड़ा रोड़ा? आर्थिक वृद्धि दर आज पांच फीसद से भी नीचे सिमट चुकी है। नीतिगत अनिर्णय, परियोजनाओं की मंजूरी में देरी और भारी-भरकम घोटालों के खुलासे ने मिलकर ऐसा माहौल बना दिया है कि विदेशी निवेशकों को कौन कहे, घरेलू निवेशक भी अपना पैसा नए प्रोजेक्ट्स में लगाने से हिचकिचा रहे हैं। कहने का आशय यह है कि राजनीतिक स्थिरता आर्थिक वृद्धि में एक फैक्टर तो है, लेकिन ऐसा होना बेहतरी की गारंटी नहीं है। हालांकि राजन की इस बात में पूरी सचाई है कि महंगाई देश की आर्थिक प्रगति की राह में बड़ा रोड़ा बन गई है। रिजर्व बैंक ने अपने स्तर पर बार-बार ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिश की है, लेकिन महंगाई तो काबू में आई नहीं, उल्टे महंगे कर्ज की मार से उद्योग जगत से लेकर आम लोगों तक का पसीना छूट गया। जिस बढ़ते अनुत्पादक कर्ज को राजन देश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं उसके भी मूल में महंगा कर्ज और आर्थिक सुस्ती ही प्रमुख वजहें हैं। विडंबना है कि जिस महंगाई के कारण आम लोगों से लेकर अर्थव्यवस्था तक का दम फूल गया, केंद्रीय सत्ता पर काबिज दल को उसकी चिंता विधानसभा चुनावों में पराजय के बाद हुई है। बहरहाल, बेहतर होगा कि आम चुनाव के बाद देश को स्थिर सरकार मिले, लेकिन जरूरी यह भी होगा कि उसकी कार्यप्रणाली और रवैया मौजूदा स्थिर सरकार से अलग रहे। -सुभाष बुड़ावन वाला, अट्ठारह, शांतिनाथ कार्नर, खाचरौद। राजनीति से लेकर समाज तक में आया बदलाव आम आदमी पार्टी के आने से पहले भी इस देश में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं, लेकिन जड़ व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी का आक्रोश इतने प्रभावी ढंग से इससे पहले शायद ही दिखा हो। विधानसभा चुनावों में ज्यादातर जगह भारी संख्या में मतदान इस जागरुकता का ही नतीजा है। न्यायपालिका तो पहले से ही न्याय दिलाने में आगे रही है, सीबीआई और कैग जैसी संस्थाएं भी पारदर्शिता की लड़ाई में अब पीछे नहीं हैं। भारी जन दबाव के कारण ही संसद को पिछले साल अपराध कानून संशोधन, खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, पेंशन और लोकपाल जैसे विधेयक पारित करने पड़े। जो लोग दो हज़ार बारह में निर्भया के हक की लड़ाई को सड़कों पर ले आए थे, विगत वर्ष उन्हीं में से बहुतों को धारा तीन सौ सतहत्तर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरोध में गली-कूचों में देखा गया। जो स्थापित राजनीतिक पार्टियां पहले कहती थीं कि भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं रहा, अब वही दल अपने विवादास्पद फैसले पलटते दिखाई देते हैं। लेकिन बहुत कुछ बदलना अभी शेष है। मसलन, सांप्रदायिक दंगे अब भी सिर्प कड़वी हकीकत हैं। -नलिनी गुप्ता, पंजाबी बाग, दिल्ली।
कोलकाताः भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में मजबूती से वापसी करेगी। टेस्ट सीरीज के पहले दो मैचों में बुरी तरह हार के बाद टीम को तीसरा टेस्ट मैच 24 जनवरी से खेलना है जबकि वनडे सीरीज 1 फरवरी से शुरू होगी। अय्यर ने कहा, " टीम मजबूती से वापसी करेगी। हम टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब नहीं रहे इसलिये हम वनडे में मजबूती से वापसी करना चाहेंगे। " उन्होंने कहा कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की वापसी से टीम का मनोबल बढ़ेगा।
कोलकाताः भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में मजबूती से वापसी करेगी। टेस्ट सीरीज के पहले दो मैचों में बुरी तरह हार के बाद टीम को तीसरा टेस्ट मैच चौबीस जनवरी से खेलना है जबकि वनडे सीरीज एक फरवरी से शुरू होगी। अय्यर ने कहा, " टीम मजबूती से वापसी करेगी। हम टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब नहीं रहे इसलिये हम वनडे में मजबूती से वापसी करना चाहेंगे। " उन्होंने कहा कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की वापसी से टीम का मनोबल बढ़ेगा।
वाशिंगटन. चैटजीपीटी का विकास करने वाली कंपनी ओपनएआई के विरूद्ध अमेरिका के संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) ने उपभोक्ता संरक्षण नियमों के उल्लंघन और गलत सूचनाएं देने के मुद्दे में जांच प्रारम्भ कर दी है. ओपनएआई ने पिछले वर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित मॉडल चैटजीपीटी को पेश किया था. उसके बाद से ही यह चैटबोट लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि इस दौरान चैटजीपीटी पर जारी कुछ सूचनाओं को लेकर प्रश्न भी उठे हैं. इस बीच एफटीसी ने चैटजीपीटी की निर्माता कंपनी ओपनएआई को 20 पृष्ठों का एक नोटिस भेजकर कई मुद्दों पर उत्तर देने को बोला है. इस नोटिस में एआई प्रौद्योगिकी, उत्पादों, उपभोक्ताओं, निजता की सुरक्षा के तरीकों और डेटा सुरक्षा प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है. एफटीसी के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को ओपनएआई के विरूद्ध जांच प्रारम्भ होने पर कोई टिप्पणी नहीं की. अमेरिकी समाचारपत्र द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, एफटीसी यह जांच कर रहा है कि ओपनएआई कहीं निजता या डेटा सुरक्षा के अनुचित या भ्रामक तौर-तरीकों या कंज़्यूमरों के हितों को हानि पहुंचाने वाले ढंग तो नहीं अपना रहा है. जांच प्रारम्भ होने की रिपोर्ट सामने आने पर ओपनएआई के संस्थापक सैम आल्टमैन ने एक ट्वीट में अपनी निराशा जाहिर की. उन्होंने बोला कि इस कदम से भरोसा पैदा करने में सहायता नहीं मिलेगी लेकिन कंपनी व्यापार आयोग के साथ मिलकर काम करेगी. इसके पहले मई में आल्टमैन अमेरिकी कांग्रेस पार्टी के समक्ष पेश हो चुके हैं. इसके अतिरिक्त उन्होंने यूरोपीय राष्ट्रों एवं हिंदुस्तान की भी यात्राएं कर एआई पर नियमन की वकालत की है. दरअसल चैटजीपीटी एवं कुछ अन्य एआई समाधानों के तेजी से बढ़ते उपयोग और उनके संभावित खतरों को लेकर लगातार आवाजें उठती रही हैं.
वाशिंगटन. चैटजीपीटी का विकास करने वाली कंपनी ओपनएआई के विरूद्ध अमेरिका के संघीय व्यापार आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण नियमों के उल्लंघन और गलत सूचनाएं देने के मुद्दे में जांच प्रारम्भ कर दी है. ओपनएआई ने पिछले वर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित मॉडल चैटजीपीटी को पेश किया था. उसके बाद से ही यह चैटबोट लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि इस दौरान चैटजीपीटी पर जारी कुछ सूचनाओं को लेकर प्रश्न भी उठे हैं. इस बीच एफटीसी ने चैटजीपीटी की निर्माता कंपनी ओपनएआई को बीस पृष्ठों का एक नोटिस भेजकर कई मुद्दों पर उत्तर देने को बोला है. इस नोटिस में एआई प्रौद्योगिकी, उत्पादों, उपभोक्ताओं, निजता की सुरक्षा के तरीकों और डेटा सुरक्षा प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है. एफटीसी के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को ओपनएआई के विरूद्ध जांच प्रारम्भ होने पर कोई टिप्पणी नहीं की. अमेरिकी समाचारपत्र द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, एफटीसी यह जांच कर रहा है कि ओपनएआई कहीं निजता या डेटा सुरक्षा के अनुचित या भ्रामक तौर-तरीकों या कंज़्यूमरों के हितों को हानि पहुंचाने वाले ढंग तो नहीं अपना रहा है. जांच प्रारम्भ होने की रिपोर्ट सामने आने पर ओपनएआई के संस्थापक सैम आल्टमैन ने एक ट्वीट में अपनी निराशा जाहिर की. उन्होंने बोला कि इस कदम से भरोसा पैदा करने में सहायता नहीं मिलेगी लेकिन कंपनी व्यापार आयोग के साथ मिलकर काम करेगी. इसके पहले मई में आल्टमैन अमेरिकी कांग्रेस पार्टी के समक्ष पेश हो चुके हैं. इसके अतिरिक्त उन्होंने यूरोपीय राष्ट्रों एवं हिंदुस्तान की भी यात्राएं कर एआई पर नियमन की वकालत की है. दरअसल चैटजीपीटी एवं कुछ अन्य एआई समाधानों के तेजी से बढ़ते उपयोग और उनके संभावित खतरों को लेकर लगातार आवाजें उठती रही हैं.
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया फेरू एह बात के दोहरवले बाड़न कि बिहार के विशेष राज्य के दर्जा ना दिहल जा सके. काहे कि विशेष राज्य ला जरूरी शर्त बिहार पूरा ना करे. एह ला पहाड़ी भा दिक्कत वाला इलाका, आबादी के कम घनत्व, बड़हन जनजाति आबादी, पड़ोसी देशन से लागल सीमा, आ राज्य के खराब माली हालत के शर्त होला. हालांकि मोंटेक सिंह मनलन कि विकास में बिहार बहुते पीछे छूट गइल बा आ ओकर प्रति व्यक्ति आमदनी राष्ट्रीय औसत से कम बा. बिहार के अधिका आर्थिक समर्थन के जरुरतो मानत बावे योजना आयोग.
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया फेरू एह बात के दोहरवले बाड़न कि बिहार के विशेष राज्य के दर्जा ना दिहल जा सके. काहे कि विशेष राज्य ला जरूरी शर्त बिहार पूरा ना करे. एह ला पहाड़ी भा दिक्कत वाला इलाका, आबादी के कम घनत्व, बड़हन जनजाति आबादी, पड़ोसी देशन से लागल सीमा, आ राज्य के खराब माली हालत के शर्त होला. हालांकि मोंटेक सिंह मनलन कि विकास में बिहार बहुते पीछे छूट गइल बा आ ओकर प्रति व्यक्ति आमदनी राष्ट्रीय औसत से कम बा. बिहार के अधिका आर्थिक समर्थन के जरुरतो मानत बावे योजना आयोग.
टी20 वर्ल्डकप 2022 में रविवार (6 नवंबर) को भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना पांचवा और आखिरी मुकाबला खेलेगी. बांग्लादेश के खिलाफ एडिलेड में अपनी तीसरी जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेलने मेलबर्न पहुंच गई है. मैच से पहले विराट कोहली, केएल राहुल और अन्य टीम के खिलाड़ी शुक्रवार को पहला अभ्यास सत्र शुरू करेंगे. रोहित की अगुवाई वाली टीम ग्रुप स्टेज का आखिर मुकाबला जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत के साथ खत्म करना चाहेगी. भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. अबतक खेले गए चार में से 3 मैच जीतकर टीम इंडिया प्वाइंट्स टेवल में ग्रुप 2 के शीर्ष पर काबिज हो गई है. भारत ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को मात देने के बाद नीदरलैंड और बांग्लादेश के खिलाफ जीत दर्ज की है. हालांकि, भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में हार का सामना करना पड़ा था. वहीं जिम्बाब्वे टीम भी इस टूर्नामेंट में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. जिम्बाब्वे ने अपने शुरुआती मुकाबले में पाकिस्तान को 1 रन से मात देकर बड़ा उलटफेर किया था. टीम के लिए सिकंदर रजा काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं. गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है. भारतीय टीम ने यहां खेले गए कुल पांच टी20आई मैचों में से तीन मैच में जीत हासिल की है. टीम इंडिया ने इस टूर्नामेंट में इसी मैदान पर पाकिस्तान को चार विकेट से मात दी थी. इस मैच में विराट कोहली ने नाबाद 82 रनों की शानदार पारी खेली थी. वहीं कोहली के अलावा सूर्यकुमार यादव भी ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे है. विराट ने इस वर्ल्ड कप की चार पारियों में से तीन पारी में अर्धशतक जड़ा है. जबकि सूर्या के नाम भी दो अर्धशतक है. वहीं गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार शानदार प्रदर्शन कर रहे है. टीम इंडिया रविवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.
टीबीस वर्ल्डकप दो हज़ार बाईस में रविवार को भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना पांचवा और आखिरी मुकाबला खेलेगी. बांग्लादेश के खिलाफ एडिलेड में अपनी तीसरी जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेलने मेलबर्न पहुंच गई है. मैच से पहले विराट कोहली, केएल राहुल और अन्य टीम के खिलाड़ी शुक्रवार को पहला अभ्यास सत्र शुरू करेंगे. रोहित की अगुवाई वाली टीम ग्रुप स्टेज का आखिर मुकाबला जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत के साथ खत्म करना चाहेगी. भारतीय टीम ने टीबीस वर्ल्ड कप में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. अबतक खेले गए चार में से तीन मैच जीतकर टीम इंडिया प्वाइंट्स टेवल में ग्रुप दो के शीर्ष पर काबिज हो गई है. भारत ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को मात देने के बाद नीदरलैंड और बांग्लादेश के खिलाफ जीत दर्ज की है. हालांकि, भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में हार का सामना करना पड़ा था. वहीं जिम्बाब्वे टीम भी इस टूर्नामेंट में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. जिम्बाब्वे ने अपने शुरुआती मुकाबले में पाकिस्तान को एक रन से मात देकर बड़ा उलटफेर किया था. टीम के लिए सिकंदर रजा काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं. गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है. भारतीय टीम ने यहां खेले गए कुल पांच टीबीसआई मैचों में से तीन मैच में जीत हासिल की है. टीम इंडिया ने इस टूर्नामेंट में इसी मैदान पर पाकिस्तान को चार विकेट से मात दी थी. इस मैच में विराट कोहली ने नाबाद बयासी रनों की शानदार पारी खेली थी. वहीं कोहली के अलावा सूर्यकुमार यादव भी ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे है. विराट ने इस वर्ल्ड कप की चार पारियों में से तीन पारी में अर्धशतक जड़ा है. जबकि सूर्या के नाम भी दो अर्धशतक है. वहीं गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार शानदार प्रदर्शन कर रहे है. टीम इंडिया रविवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन 'जल्द या बाद में' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक और बैठक होने को लेकर आशावादी हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, किम ने रविवार को प्योंगयांग में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ हुई बैठक पर संतोष जाहिर किया। जिन्हें उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण मुद्दे को हल करने के प्रस्ताव के बारे में समझाया। पोम्पियो ने सियोल में कहा कि उन्होंने किम के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में चर्चा की, जिसे लेकर उत्तर कोरिया द्वारा कदम उठाया जाना जरूरी है।
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन 'जल्द या बाद में' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक और बैठक होने को लेकर आशावादी हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, किम ने रविवार को प्योंगयांग में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ हुई बैठक पर संतोष जाहिर किया। जिन्हें उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण मुद्दे को हल करने के प्रस्ताव के बारे में समझाया। पोम्पियो ने सियोल में कहा कि उन्होंने किम के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में चर्चा की, जिसे लेकर उत्तर कोरिया द्वारा कदम उठाया जाना जरूरी है।
Dhanbad : झरिया के जोरापोखर थाना क्षेत्र के बरारी चानक के पास अपराधियों ने एक युवक पर गोली चला दी. हालांकि इस घटना में युवक बाल-बाल बच गया. बताया जाता है कि बनियाहिर न्यू कॉलोनी के रहने वाले स्कार्पियो चालक जाफर खान को निशाना बनाकर यह गोली चलायी गयी थी. घटना को लेकर जाफर खान ने बताया कि जब मैं बरारी चानक के समीप अपनी स्कॉर्पियो धोने के लिए जा रहा था तभी रास्ते में दो तीन युवकों ने हमारी गाड़ी रुकवायी. फिर मेरी जेब से दो हजार रुपये निकाल लिये. मैंने जब इसका विरोध किया तो उन्होंने मुझ पर फायरिंग कर दी. जाफर ने बताया कि अपराधियों ने तीन राउंड फायरिंग की. वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा. जाफर के अनुसार इस घटना में उसकी स्कॉर्पियो का बंपर और शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है. जाफर ने पहले घटना की जानकारी परिजनों को दी. परिजन वहां पहुंचे और मामले की शिकायत पुलिस से की. जानकारी मिलने के बाद जोड़ापोखर थाना की पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. इससे पूर्व में लोदना मोड़ में गोली चलने और भुजाली चलने की घटना घट चुकी है. जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. सूत्रों के अनुसार जोरापोखर थाना क्षेत्र में चोरी और गोली चलाने की घटना आम हो गयी है. वहीं इस घटना को लेकर जब सिंदरी डीएसपी अजीत कुमार सिन्हा से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो डीएसपी ने कहा कि जोड़ापोखर थाना प्रभारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जायेगा, उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
Dhanbad : झरिया के जोरापोखर थाना क्षेत्र के बरारी चानक के पास अपराधियों ने एक युवक पर गोली चला दी. हालांकि इस घटना में युवक बाल-बाल बच गया. बताया जाता है कि बनियाहिर न्यू कॉलोनी के रहने वाले स्कार्पियो चालक जाफर खान को निशाना बनाकर यह गोली चलायी गयी थी. घटना को लेकर जाफर खान ने बताया कि जब मैं बरारी चानक के समीप अपनी स्कॉर्पियो धोने के लिए जा रहा था तभी रास्ते में दो तीन युवकों ने हमारी गाड़ी रुकवायी. फिर मेरी जेब से दो हजार रुपये निकाल लिये. मैंने जब इसका विरोध किया तो उन्होंने मुझ पर फायरिंग कर दी. जाफर ने बताया कि अपराधियों ने तीन राउंड फायरिंग की. वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा. जाफर के अनुसार इस घटना में उसकी स्कॉर्पियो का बंपर और शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है. जाफर ने पहले घटना की जानकारी परिजनों को दी. परिजन वहां पहुंचे और मामले की शिकायत पुलिस से की. जानकारी मिलने के बाद जोड़ापोखर थाना की पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. इससे पूर्व में लोदना मोड़ में गोली चलने और भुजाली चलने की घटना घट चुकी है. जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. सूत्रों के अनुसार जोरापोखर थाना क्षेत्र में चोरी और गोली चलाने की घटना आम हो गयी है. वहीं इस घटना को लेकर जब सिंदरी डीएसपी अजीत कुमार सिन्हा से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो डीएसपी ने कहा कि जोड़ापोखर थाना प्रभारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जायेगा, उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
नई दिल्लीः बॉलीवुड सिंगिंग सेंसेशन नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) और रोहनप्रीत सिंह का नया गाना 'ख्याल रख्या कर' (Khyaal Rakhya Kar Song) रिलीज हो गया है. बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस गाने को लेकर काफी बज था. दरअसल, नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने गाने को रिवील करने से पहले रोहनप्रीत के साथ एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वो प्रेग्नेंट नजर आ रही थीं. दर्शकों ने दोनों की इस तस्वीर को देखकर नेहा को प्रेग्नेंट समझ लिया था. नेहा कक्कड़ 'ख्याल रख्या कर' (Khyaal Rakhya Kar Song) के वीडियो में प्रेग्नेंट लड़की का किरदार निभा रही हैं. वीडियो में कभी नेहा बीवी तो कभी मां के किरदार में नजर आ रही हैं. गाने को नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत ने मिलकर गाया है. वीडियो रिलीज होते ही ट्विटर पर ये गाना ट्रेंड होने लगा है. दर्शकों को दोनों का ये गाना काफी पसंद आ रहा है. यूट्यूब पर रिलीज होते ही वीडियो को 1 लाख व्यूज मिल चुके हैं. बता दें कि इससे पहले नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) और रोहनप्रीत सिंह (Rohanpreet Singh) की जोड़ी 'नेहू दा व्याह' सॉन्ग में नजर आई थी. इस गाने के दौरान ही दोनों की बीच प्यार हुआ था जिसके बाद अक्टूबर के महीने में नेहा और रोहनप्रीत ने शादी रचाई. दोनों की शादी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए. नेहा कक्कड़ इन दिनों पति रोहनप्रीत सिंह (Rohanpreet Singh) के साथ वीडियो और तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं. इंस्टाग्राम पर नेहा के 50 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.
नई दिल्लीः बॉलीवुड सिंगिंग सेंसेशन नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह का नया गाना 'ख्याल रख्या कर' रिलीज हो गया है. बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस गाने को लेकर काफी बज था. दरअसल, नेहा कक्कड़ ने गाने को रिवील करने से पहले रोहनप्रीत के साथ एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वो प्रेग्नेंट नजर आ रही थीं. दर्शकों ने दोनों की इस तस्वीर को देखकर नेहा को प्रेग्नेंट समझ लिया था. नेहा कक्कड़ 'ख्याल रख्या कर' के वीडियो में प्रेग्नेंट लड़की का किरदार निभा रही हैं. वीडियो में कभी नेहा बीवी तो कभी मां के किरदार में नजर आ रही हैं. गाने को नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत ने मिलकर गाया है. वीडियो रिलीज होते ही ट्विटर पर ये गाना ट्रेंड होने लगा है. दर्शकों को दोनों का ये गाना काफी पसंद आ रहा है. यूट्यूब पर रिलीज होते ही वीडियो को एक लाख व्यूज मिल चुके हैं. बता दें कि इससे पहले नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह की जोड़ी 'नेहू दा व्याह' सॉन्ग में नजर आई थी. इस गाने के दौरान ही दोनों की बीच प्यार हुआ था जिसके बाद अक्टूबर के महीने में नेहा और रोहनप्रीत ने शादी रचाई. दोनों की शादी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए. नेहा कक्कड़ इन दिनों पति रोहनप्रीत सिंह के साथ वीडियो और तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं. इंस्टाग्राम पर नेहा के पचास मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
तुरही क्रेन की तरह पक्षियों से संबंधित हैंपरिवार Psophiidae और एक ही जीनस सोफिया में शामिल किया गया। वे अमेज़ॅन बेसिन में रहते हैं। पाइप की आवाज से जुड़े पुरुष चिल्लाहट के लिए ऐसा असामान्य नाम दिया गया था। पंख का रंग काला है, लेकिन अलग रंग हैपंखों के भीतरी पक्ष ने उन्हें तीन प्रकारों में विभाजित करने के कारण के रूप में कार्य कियाः सिरपियन ट्रम्पेटर, हरा पंख वाला ट्रम्पेटर, सफेद पंख वाला ट्रम्पेटर। हैचिंग के दौरान सभी प्रकार की लड़कियों में ब्लैक-ब्राउन फ्लफ होता है, जो केवल 1.5 महीनों के बाद एक विशेष पंख वाली प्रजातियों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। एक अनिच्छुक पक्षी अनिच्छा से उड़ाता है। वह जंगल के निचले स्तर में खाना पसंद करती है। बंदरों, तोतों और ऊपरी जंगल के स्तर के अन्य निवासियों के साथ-साथ विभिन्न कीड़े और उनके लार्वा द्वारा फलों, नटों के टुकड़े, उनके आहार को बनाते हैं। इन पक्षियों के समूहों में एक पदानुक्रम विकसित किया गया है। कमजोर व्यक्ति क्रॉच, प्रभावशाली के पास, और बाद वाले अपने पंखों के साथ थोड़ा सा झुकाव। नेता समय-समय पर भोजन की मांग करता है, जो उसके अधीनस्थ स्वेच्छा से उसे लाते हैं। अपने खाली समय में, समूह के सदस्य काल्पनिक झगड़े, झुकाव पंखों की व्यवस्था कर सकते हैं, नकली हमले बना सकते हैं। नाइट ट्रम्पेटर एक पेड़ पर एक पक्षी रखती है। कुछ समय बाद, समूह के सदस्यों से डूब रहे हैं, जो उनके क्षेत्र में आदेश की गवाही देते हैं। पक्षी के सामाजिक संगठन द्वारा ट्रम्पेटर अलग हैपक्षियों के कई प्रतिनिधियों से। सहकारी बहुभुज के लिए, यानी कई मजबूत पुरुषों के साथ प्रमुख महिला का सहवास, उनकी प्रकृति उन्हें लाया। अस्तित्व के इस तरह से, शिकारियों से संतान को बचाने की संभावना में काफी वृद्धि हुई है। चिनाई में अंडे लगभग 3 हैं। समय-समय पर ऊष्मायन मादा और समूह के सभी पुरुषों द्वारा किया जाता है। यह अवधि लगभग 27 दिन तक चलती है। शुरुआती चरण में लड़कियों को पकड़ना पूरी तरह से वयस्कों पर निर्भर करता है।
तुरही क्रेन की तरह पक्षियों से संबंधित हैंपरिवार Psophiidae और एक ही जीनस सोफिया में शामिल किया गया। वे अमेज़ॅन बेसिन में रहते हैं। पाइप की आवाज से जुड़े पुरुष चिल्लाहट के लिए ऐसा असामान्य नाम दिया गया था। पंख का रंग काला है, लेकिन अलग रंग हैपंखों के भीतरी पक्ष ने उन्हें तीन प्रकारों में विभाजित करने के कारण के रूप में कार्य कियाः सिरपियन ट्रम्पेटर, हरा पंख वाला ट्रम्पेटर, सफेद पंख वाला ट्रम्पेटर। हैचिंग के दौरान सभी प्रकार की लड़कियों में ब्लैक-ब्राउन फ्लफ होता है, जो केवल एक.पाँच महीनों के बाद एक विशेष पंख वाली प्रजातियों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। एक अनिच्छुक पक्षी अनिच्छा से उड़ाता है। वह जंगल के निचले स्तर में खाना पसंद करती है। बंदरों, तोतों और ऊपरी जंगल के स्तर के अन्य निवासियों के साथ-साथ विभिन्न कीड़े और उनके लार्वा द्वारा फलों, नटों के टुकड़े, उनके आहार को बनाते हैं। इन पक्षियों के समूहों में एक पदानुक्रम विकसित किया गया है। कमजोर व्यक्ति क्रॉच, प्रभावशाली के पास, और बाद वाले अपने पंखों के साथ थोड़ा सा झुकाव। नेता समय-समय पर भोजन की मांग करता है, जो उसके अधीनस्थ स्वेच्छा से उसे लाते हैं। अपने खाली समय में, समूह के सदस्य काल्पनिक झगड़े, झुकाव पंखों की व्यवस्था कर सकते हैं, नकली हमले बना सकते हैं। नाइट ट्रम्पेटर एक पेड़ पर एक पक्षी रखती है। कुछ समय बाद, समूह के सदस्यों से डूब रहे हैं, जो उनके क्षेत्र में आदेश की गवाही देते हैं। पक्षी के सामाजिक संगठन द्वारा ट्रम्पेटर अलग हैपक्षियों के कई प्रतिनिधियों से। सहकारी बहुभुज के लिए, यानी कई मजबूत पुरुषों के साथ प्रमुख महिला का सहवास, उनकी प्रकृति उन्हें लाया। अस्तित्व के इस तरह से, शिकारियों से संतान को बचाने की संभावना में काफी वृद्धि हुई है। चिनाई में अंडे लगभग तीन हैं। समय-समय पर ऊष्मायन मादा और समूह के सभी पुरुषों द्वारा किया जाता है। यह अवधि लगभग सत्ताईस दिन तक चलती है। शुरुआती चरण में लड़कियों को पकड़ना पूरी तरह से वयस्कों पर निर्भर करता है।
रहा था। स्वर्गीय पति की स्मृति वेदना पहले जैसी उत्कट नहीं थी। वह अब कभी-कभी सास-ससुर से हँसकर बात कर लेती। बच्चे के साथ कभी घोड़े का खेल, तो कभी श्रांख मिचौनी खेलती। फिर भी समय विताना उसके लिए कठिन था। सुबह उठकर घर मे झाडू देती, रांगोली माँड़ती। इस बीच सास-ससुर नहा-धो लेते । ससुर पूजाघर मे होते और सास रसोईघर में अन्य कार्य लक्ष्मी करती। बच्चे को कपड़े पहनाकर खुद स्नान करती। फिर सबके कपड़े धोकर सुखाने ढालती। बस, यही उसका घर का काम होता था। बाकी समय कैसे बीते ? सास कभी-कभी शतरज खेलती । लेकिन कात्यायनी को उसमे रुचि नहीं थी । पति के देहान्त के बाद कात्यायनी के पिता उसे कुछ दिनों के लिए अपने साथ श्रीरंगपट्टण ले गये थे। लेकिन उसे वहाँ भी शांति न मिली। वहीं उसकी सौतेली माँ जो थी । 'माँ' उम्र में उससे भाठ वर्ष बडी थी । पिता, आचार में ससुर से भी बढ़कर थे। सास के प्राचार और पिता को शुद्धाचारिता में बड़ा अंतर था । अगर श्रोत्रियजी अपने भाचरण को प्रकाश प्रदान करने वाले धर्म के प्रत सत्त्व को पहचानने का प्रयत्न करते, तो वकील श्रीकंठय्य धर्म के बाहरी रूप का हर तरह से पालन करते नजुंड की मृत्यु के पश्चात् श्रीकठय्य कात्यायनी के पुनः विवाह के पक्ष में थे, लेकिन श्रोत्रियजी ने इसे कोई महत्व नही दिया । पिता के घर अधिक दिन न रह, वह नजनगुडू लौट आई । कभीकभी वह अकेली हो बगीचे में जाती और पौधो की क्यारियाँ बनाती । घास-तिनके बाहर फेंकती । पौधो को सोचती। घर के पिछवाड़े भोगराचमेली की लताश्रो में सुन्दर सुगंधित फूल खिलते । कात्यायनी इनमें भरपूर पानी डालती । लेकिन बगीचे मे काम करते-करते पति की याद भा जाती । पहले वे दोनो मिलकर सीचते थे । फूलों से लदे कुटिया के भाकार के मोगरे के पौधों की ओट में फूल चुनते समय कई बार उन्होंने छेड़-छाड की थी। इस पर वह कृत्रिम क्रोध प्रकट करती थी । मब जव कभी वह बगीचे में प्राती, वे स्मृतियाँ उभर आतीं। बगीचे में हरे-भरे पौधे लहलहा रहे थे। फसल कटने के बाद घर के पिछवाड़े का जो खेत सूखकर वजर-सा दिखाई देता था, मव हरा-भरा
रहा था। स्वर्गीय पति की स्मृति वेदना पहले जैसी उत्कट नहीं थी। वह अब कभी-कभी सास-ससुर से हँसकर बात कर लेती। बच्चे के साथ कभी घोड़े का खेल, तो कभी श्रांख मिचौनी खेलती। फिर भी समय विताना उसके लिए कठिन था। सुबह उठकर घर मे झाडू देती, रांगोली माँड़ती। इस बीच सास-ससुर नहा-धो लेते । ससुर पूजाघर मे होते और सास रसोईघर में अन्य कार्य लक्ष्मी करती। बच्चे को कपड़े पहनाकर खुद स्नान करती। फिर सबके कपड़े धोकर सुखाने ढालती। बस, यही उसका घर का काम होता था। बाकी समय कैसे बीते ? सास कभी-कभी शतरज खेलती । लेकिन कात्यायनी को उसमे रुचि नहीं थी । पति के देहान्त के बाद कात्यायनी के पिता उसे कुछ दिनों के लिए अपने साथ श्रीरंगपट्टण ले गये थे। लेकिन उसे वहाँ भी शांति न मिली। वहीं उसकी सौतेली माँ जो थी । 'माँ' उम्र में उससे भाठ वर्ष बडी थी । पिता, आचार में ससुर से भी बढ़कर थे। सास के प्राचार और पिता को शुद्धाचारिता में बड़ा अंतर था । अगर श्रोत्रियजी अपने भाचरण को प्रकाश प्रदान करने वाले धर्म के प्रत सत्त्व को पहचानने का प्रयत्न करते, तो वकील श्रीकंठय्य धर्म के बाहरी रूप का हर तरह से पालन करते नजुंड की मृत्यु के पश्चात् श्रीकठय्य कात्यायनी के पुनः विवाह के पक्ष में थे, लेकिन श्रोत्रियजी ने इसे कोई महत्व नही दिया । पिता के घर अधिक दिन न रह, वह नजनगुडू लौट आई । कभीकभी वह अकेली हो बगीचे में जाती और पौधो की क्यारियाँ बनाती । घास-तिनके बाहर फेंकती । पौधो को सोचती। घर के पिछवाड़े भोगराचमेली की लताश्रो में सुन्दर सुगंधित फूल खिलते । कात्यायनी इनमें भरपूर पानी डालती । लेकिन बगीचे मे काम करते-करते पति की याद भा जाती । पहले वे दोनो मिलकर सीचते थे । फूलों से लदे कुटिया के भाकार के मोगरे के पौधों की ओट में फूल चुनते समय कई बार उन्होंने छेड़-छाड की थी। इस पर वह कृत्रिम क्रोध प्रकट करती थी । मब जव कभी वह बगीचे में प्राती, वे स्मृतियाँ उभर आतीं। बगीचे में हरे-भरे पौधे लहलहा रहे थे। फसल कटने के बाद घर के पिछवाड़े का जो खेत सूखकर वजर-सा दिखाई देता था, मव हरा-भरा
जजिया कर वैसे तो भारत मे मोहम्मद बिन कासिम ने ही लगाना शुरू किया था परन्तु वो यह कर ब्राह्मणों से नही लेता था ।फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सर्वप्रथम इसे ब्राह्मणो से भी वसूला। हालाँकि मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में जजिया कर लगाना शुरू कर दिया था, लेकिन उसने यह कर ब्राह्मणों से नहीं लिया। फिरोज शाह तुगलक ने सबसे पहले इसे ब्राह्मणों से भी एकत्र किया था।
जजिया कर वैसे तो भारत मे मोहम्मद बिन कासिम ने ही लगाना शुरू किया था परन्तु वो यह कर ब्राह्मणों से नही लेता था ।फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सर्वप्रथम इसे ब्राह्मणो से भी वसूला। हालाँकि मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में जजिया कर लगाना शुरू कर दिया था, लेकिन उसने यह कर ब्राह्मणों से नहीं लिया। फिरोज शाह तुगलक ने सबसे पहले इसे ब्राह्मणों से भी एकत्र किया था।
इंटरनेट डेस्क। गर्मी के मौसम में भी लोगों को सेहत से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियेां का सामना करना पड़ जाता है। इस मौसम मं लू लगने और डिहाइड्रेशन की समस्या होना काफी आम है। इससे बचने के लिए शरीर का हाइड्रेटेड रहना बहुत ही जरूरी है। आज हम आपको एक चीज के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने में बहुत ही उपयोगी है। इसका सेवन करने से व्यक्ति की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। आज हम आपको बेल के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जो गर्मियों के मौसम का बेहतरीन फल है। इस फल में कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं। विटामिन-सी, प्रोटीन, बीटा कैरोटीन से भरपूर ये फल हमें कई बीमारियों से बचाता है। ये शरीर को ठंडा रखने में भी उपयोगी है। आपको गर्मी के मौसम में इस फल को अपनी डाइट में जरूर ही शामिल करना चाहिए। Copyright @ 2023 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
इंटरनेट डेस्क। गर्मी के मौसम में भी लोगों को सेहत से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियेां का सामना करना पड़ जाता है। इस मौसम मं लू लगने और डिहाइड्रेशन की समस्या होना काफी आम है। इससे बचने के लिए शरीर का हाइड्रेटेड रहना बहुत ही जरूरी है। आज हम आपको एक चीज के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने में बहुत ही उपयोगी है। इसका सेवन करने से व्यक्ति की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। आज हम आपको बेल के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जो गर्मियों के मौसम का बेहतरीन फल है। इस फल में कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं। विटामिन-सी, प्रोटीन, बीटा कैरोटीन से भरपूर ये फल हमें कई बीमारियों से बचाता है। ये शरीर को ठंडा रखने में भी उपयोगी है। आपको गर्मी के मौसम में इस फल को अपनी डाइट में जरूर ही शामिल करना चाहिए। Copyright @ दो हज़ार तेईस Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
पुरुषों के अत्याचार सहने पड़े हैं। अब समाज उनके लिए कौन सी नीति निर्दिष्ट करना चाहती है ? क्या वह उन्हें यथेष्ट स्वाधीनता देने के लिए उद्यत है ? हिन्दू समाज की सब से बड़ी विशेषता यह है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता के आदर्शों से अभी तक उसका सम्बन्ध बना हुआ है । सीता और सावित्री काव्यों के पात्र नहीं हैं। उन्हीं की पतिभक्ति और पातिव्रत के आदर्श पर हिन्दू-नारी का जीवन ठहरा हुआ है । भगवान् रामचन्द्र या कृष्णचन्द्र केवल पूजनीय नहीं हैं, अनुकरणीय हैं । हिन्दूमात्र का विश्वास है कि धर्म की ही रक्षा के लिए ये सब पृथ्वी पर अवतीर्ण हुए थे। इसी से पति-भक्ति और पति-सेवा में ही लोग स्त्रीजीवन की सफलता देखते हैं। ब्राह्मणों को भूसुर मानकर वे अभी तक उन्हें पूज्य समझते हैं। उनका विश्वास है कि प्राचीन काल की जो रीति या नीति है वह सर्वथा निर्दोष है। उनका कथन है कि भारतवर्ष ने प्राचीनकाल में ही अपनी एक विशेष सभ्यता स्थापित कर ली है। उस सभ्यता का मूल धर्म है। प्राचीनकाल से आज तक उसने अपनी इस विशेषता को नहीं छोड़ा है। उसकी यह विशेषता उसके प्राचीन साहित्य के आदर्श चरित्रों में प्रकट हुई है । भगवान् रामचन्द्र, भीष्म पितामह, धर्मराज युधिष्ठिर आदि के पुनीत चरित्रों से यह जाना जा सकता है कि हिन्दू समाज का लक्ष्य क्या है। पाश्चात्य सभ्यता के श्रादर्शों से हमारे समाज का कल्याण नहीं हो सकता। हिन्दू धर्म में श्राचार की बड़ी महिमा है। वही परम धर्म माना गया है। आचार भ्रष्ट लोगों से समाज में दुर्नीति ही फैल सकती है। यह कुसंस्कार नहीं है, जातीय संस्कार है। समाज में सदैव प्रचार की पवित्रता की रक्षा की जानी चाहिए । सामाजिक बन्धनों में शिथिलता आने से ही समाज की मर्यादा भङ्ग हो जाती है । परन्तु धर्म और प्रचार में भेद क्या है ? क्या सदाचार से प्रतिरिक्त कोई धर्म है ? सदाचार के लिए क्या न्याय, दया, क्षमा, शौर्य, परोपकार, धैर्य, इन्द्रिय दमन आदि गुणों के अतिरिक्त भी किसी
पुरुषों के अत्याचार सहने पड़े हैं। अब समाज उनके लिए कौन सी नीति निर्दिष्ट करना चाहती है ? क्या वह उन्हें यथेष्ट स्वाधीनता देने के लिए उद्यत है ? हिन्दू समाज की सब से बड़ी विशेषता यह है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता के आदर्शों से अभी तक उसका सम्बन्ध बना हुआ है । सीता और सावित्री काव्यों के पात्र नहीं हैं। उन्हीं की पतिभक्ति और पातिव्रत के आदर्श पर हिन्दू-नारी का जीवन ठहरा हुआ है । भगवान् रामचन्द्र या कृष्णचन्द्र केवल पूजनीय नहीं हैं, अनुकरणीय हैं । हिन्दूमात्र का विश्वास है कि धर्म की ही रक्षा के लिए ये सब पृथ्वी पर अवतीर्ण हुए थे। इसी से पति-भक्ति और पति-सेवा में ही लोग स्त्रीजीवन की सफलता देखते हैं। ब्राह्मणों को भूसुर मानकर वे अभी तक उन्हें पूज्य समझते हैं। उनका विश्वास है कि प्राचीन काल की जो रीति या नीति है वह सर्वथा निर्दोष है। उनका कथन है कि भारतवर्ष ने प्राचीनकाल में ही अपनी एक विशेष सभ्यता स्थापित कर ली है। उस सभ्यता का मूल धर्म है। प्राचीनकाल से आज तक उसने अपनी इस विशेषता को नहीं छोड़ा है। उसकी यह विशेषता उसके प्राचीन साहित्य के आदर्श चरित्रों में प्रकट हुई है । भगवान् रामचन्द्र, भीष्म पितामह, धर्मराज युधिष्ठिर आदि के पुनीत चरित्रों से यह जाना जा सकता है कि हिन्दू समाज का लक्ष्य क्या है। पाश्चात्य सभ्यता के श्रादर्शों से हमारे समाज का कल्याण नहीं हो सकता। हिन्दू धर्म में श्राचार की बड़ी महिमा है। वही परम धर्म माना गया है। आचार भ्रष्ट लोगों से समाज में दुर्नीति ही फैल सकती है। यह कुसंस्कार नहीं है, जातीय संस्कार है। समाज में सदैव प्रचार की पवित्रता की रक्षा की जानी चाहिए । सामाजिक बन्धनों में शिथिलता आने से ही समाज की मर्यादा भङ्ग हो जाती है । परन्तु धर्म और प्रचार में भेद क्या है ? क्या सदाचार से प्रतिरिक्त कोई धर्म है ? सदाचार के लिए क्या न्याय, दया, क्षमा, शौर्य, परोपकार, धैर्य, इन्द्रिय दमन आदि गुणों के अतिरिक्त भी किसी
गजानन माधव मुक्तिबोध उन गिने चुने कवियों में थे जिन्होंने विज्ञान और फैंटेसी के आधुनिक तथा कलात्मक बिंब और भाव कविता में लिए। उनकी एक कविता 'मुझे मालूम नहीं' में मनुष्य की उस असहायता का चित्रण है जिसमें वह यथास्थिति तोड़ नहीं पाता। वह दूसरों के बने नियमों तथा संकेतों से चलता है। उसके स्वयं की सोच दूसरों की सोच पर आधारित होता है। दूसरों की सोच सत्ता के आसपास का चरित्र होता है। सत्ता अपने को स्थापित करने के लिए मनुष्य के सोच की स्थिरीकरण करती है। परन्तु मनुष्य की चेतना कभी कभी चिंगारी की भांति इस बात का अहसास कराती है कि वह जो सामने का सत्य है उससे आगे भी कुछ है। संवेदनहीन होते व्यक्ति की संवेदना को वह चिंगारी पल भर के लिए जागृत करती है। पुनः एक बनाने का यत्न है अविरत! (संग्रह : चाँद का मुँह टेढ़ा है, पृष्ठ - 74) वह निचला-निचला भेद, (भूरी भूरी खाक धूल, पृष्ठ-७५) मुक्तिबोध की कविता 'भविष्यधारा' की इन पंक्तियों में एक बड़े सीवर का चित्र है। मनुष्यता, मानवीय गुण, परोपकार की भावना, सामाजिक सरोकार लगता है जैसे एक बड़ी सीवर लाइन की तलहटी में समा गये हैं। मूल्यहीन समाज, चारों तरफ फैला गहन अंधकार, अनाचार यह सब कैसे साफ होगा इसके लिए ' मैन होल' से सीवर लाइन में घुसना होगा, भूत की तरह बनना और सनना होगा कीचड़ में तभी मनों मैल निकल पायेगा। समाज में व्याप्त बुराइयों, असंगतियों, विसंगतियों को आसानी से तो कदापि नहीं मिटाया जा सकता। उसके लिए तो बहुत बड़े प्रयत्न की आवश्यकता है, लगन की आवश्यकता है, इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। महज रोते रहने से ही तो समाज में व्याप्त असमानता और असहजता दूर नहीं हो सकती। उसके लिए पौरुष, सामर्थ्य और मनोबल वांछित है तभी मैल निकाला जा सकता है। यह कार्य इतना आसान नहीं है इसमें बहुत लोगों को लगना होगा। उनकी कविताओं में सूक्ष्म और स्थूल वैज्ञानिकता और रूमानीपन साथ-साथ मिलते हैं। कहीं-कहीं कविताएं साधारण सी जिज्ञासा से प्रारंभ होकर गहन रहस्य की सृष्टि भी कर जाती हैं। कहा जा सकता है ये कविताएं निराला की संवेदनशीलता और कबीर के अक्खड़पन का अद्भुत सम्मिश्रण हैं। "विचित्र प्रोसेशन/ गंभीर क्वीक मार्च कलाखतू वाला जरीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड दल/ बैंड के लोगों के चेहरे/ मिलते हैं मेरे देखे हुओं से/ लगता है उनमें कई प्रतिष्ठित पत्रकार/ इसी नगर के/ बड़े-बड़े नाम अरे/ कैसे शामिल हो गए इस बैंड दल में। भई वाह! उनमें कई प्रकाण्ड आलोचक, विचारक, जगमगाते कविगण। मंत्री भी, उद्योगपति और विद्वान। यहां तक कि शहर का हत्यारा कुख्यात डोमा जी उस्ताद। यह है हमारा, हमारी नैतिकता का असली चेहरा बड़ी-बड़ी बातें करने वाले साहित्यकार, पत्रकार अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए हत्यारों के साथ हो लेते हैं। खड़ी हैं सिर झुकाए सब कतारें। "मुक्तिबोध की हर कविता एक आईना है - गोल, तिरछा, चौकोर, लम्बा आईना । उसमें चेहरा या चेहरे देखे जा सकते हैं । कुछ लोग इन आईनों में अपनी सूरत देखने से घबरायेंगे और कुछ अपनी निरीह-प्यारी गऊ-सूरत को देखकर आत्मदर्शन के सुख क अनुभव करेंगे। मुक्तिबोध ने आरोप, आक्षेप के लिये या भय का सृजन करने के लिये कविता नहीं लिखी - फिर भी समय की विद्रूपता ने चित्रों का आकार ग्रहण किया है - आईनों का । 'अंधेरे में' कविता इस संग्रह का सबसे बड़ा और भयजन्य आईना है ... अमृता भारती। सातवें दशक के मध्य में धर्मयुग, ज्ञानोदय, लहर, नव भारत टाइम्स - साप्ताहिक, मासिक और दैनिक प्रायः सभी पत्र पत्रिकाओं में गजानन माधव मुक्तिबोध (13 नवंबर 1917- 11 सितंबर 1964) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो उठे थे, क्यों ? सब एकाएक उनका परिचय पाठकों को देने लगे और दिल्ली की साहित्यिक दुनिया में एक नई हलचल सी आ गई ! 'मुक्तिबोध हिन्दी संसार की एक घटना बन गये। कुछ ऐसी घटना जिसकी ओर से आंखें मूंद लेना असंभव था। उनका एकनिष्ठ संघर्ष, उनकी अटूट सचाई, उनका पूरा जीवन, सभी एक साथ हमारी भावनाओं के केन्द्रीय मंच पर सामने आ गये और सभी ने उनके कवि होने को नई दृष्टि से देखा। कैसा जीवन था वह और ऐसे उसका अंत क्यों हुआ ? और वह समुचित ख्याति से अब तक वंचित क्यों रहा ?' यह तल्ख टिप्पणी शमशेर बहादुर सिंह की है जो उन्होंने बड़े बेबाक ढंग से हिन्दी जगत के साहित्यकारों की निस्संगता पर कही है। जमीन में गड़कर भी। वे जुबां बेबस सलाम में, दरबारे आम में। 'चांद का मुंह टेढ़ा है' के प्रकाशन के पन्द्रह-सोलह बरस बाद 'भूरी भूरी खाक धूल' की कविताओं में जाना वयस्कता से बचपन में लौटने जैसा रोमांचक अनुभव है। इसमें एक तरफ तो छायावादी संस्कारों से मुक्त होने की छटपटाहट है और दूसरी तरफ अपनी काव्य-परम्परा के रूप में उसे स्वायत्त कर लेने की तड़प भी। एक तरफ समाजवादी जीवनादर्शों की खुली स्वीकृति है तो दूसरी तरफ जीवन-विवेक को साहित्य-विवेक की तरह ही लेने की जिद। कवि अंगारों की तरह उड़ तिर कर चुपचाप और चोरी-चोरी हमारी छत पर आना चाहता है- लेकिन अपनी कविता से हमें जलाने के लिए नहीं। द्वंद्वस्थिति में स्थापित उसका वजनदार लोहा भयंकर अग्नि-क्रियाओं में तेज धकेला जाकर पिघलते और दमकते तेज-पुंज, गहन अनुभव का छोटा सा दोहा बनना चाहता है। (ओ अप्रस्तुत श्रोता : पृ. 47-48) जिन्दगी की लड़ाई में बुरी तरह हारकर मुक्तिबोध कविता में जीत जाते हैं। कविता उनके लिए हारिल की लकड़ी थी। किसी ने उनका साथ नहीं दिया। मन, विचार और सपनों के लोक में सिर्फ कविता उनके साथ थी जिसके सहारे उन्होंने अपने आकुल हृदय के भीतर ऐसे उधार और मुक्त समाज को रच लिया जहां वे जी सकते थे। सारी अनगढ़ता के बावजूद 'भूरी भूरी खाक धूल' की कविताओं में प्यार से धड़कता बेहद संवेदनशील मन छाह से लहराता दिखाई देता है जिसमें जोखिम से भरे ढेर सारे फैसले लेने का बेपरवाह साहस है। भावना और विचारों की आत्मसिद्धि एक दिन चुपचाप ही किस तरह रचना को बड़ा कर जाती है यह देखने के लिए भूरी भूरी खाक धूल की बारीक चलनी से धीरज से चालना होगा। निश्चय ही सोने के असंख्य कण हाथ लगेंगे। 'चांद का मुंह टेढ़ा है' की तुलना में इस संग्रह की कविताएं मुखर प्रगतिवादी बल्कि कुछ तो भविष्यवादी भी लगती हैं। इस संग्रह की राजनीतिक आशा की बेहद मुखर और लाउड कविताओं के बरक्स चाँद का मुंह टेढ़ा है की कविताओं को रखकर देखने से जाहिर हो जाता है कि मुक्तिबोध ने दस-पन्द्रह बरस के छोटे से काल-खण्ड में ही कितना लम्बा सफर तय किया था- वह भी निपट अकेले। बड़ी कविता निर्मम आत्मदान माँगती है। सचमुच मुक्तिबोध ने अपने को मारकर कविता को जिला लिया- हम लोगों तक पहुंचाने के लिए। अगर किसी हद तक 'एक साहित्यिक की डायरी', 'चांद का मुंह टेढ़ा है' की कुंजी है तो 'नये साहित्य का सौन्दर्य-शास्त्र', 'भूरी भूरी खाक धूल की'। और बैलगाड़ी के पहिये भी बहुत बार/ ठीक यहीं टूटते/ होती है डाकेजनी/ चट्टान अंधेरी पर/ इसीलिए राइफल सम्हाले/ सावधान चलते हैं/ चलना ही पड़ता है/ क्या करें।/ जीवन के तथ्यों के/ सामान्यीकरणों का/ करना ही पड़ता है हमें असामान्यीकरण। (इसी बैलगाड़ी को : पृ. 30) प्रमोद वर्मा कहते हैं कि 'मुक्तिबोध की कविता में आत्मसाक्षात्कार के भीतर सचित्र साक्षात्कार जितना उनका खुद का है, उससे कहीं ज्यादा दूसरों का या अपने वर्ग का है। मैं क्या करता था अब तक, जैसे सवाल वे अपने से ही नहीं अपने वर्ग से भी पूछते हैं। भक्त कवियों की तरह उनकी भी आत्म-ग्लानि निजी नहीं है। न उनकी व्यापक खोज मात्र अपनी अस्मिता की खोज हो। जहां तक उनका व्यक्तिगत सवाल है उन्होंने हमेशा बेशक तकलीफ भरी लेकिन बेहद साफ-सुथरी जिन्दगी ही जीने की कोशिश की थी। कम से कम समझौते करते हुए। तरक्की की गोल-गोल घुमावदार चक्करदार सीढिय़ों पर चढऩे से हमेशा इंकार किया। जीवन की तथाकथित सफलता को पाने की फुर्सत कभी नहीं निकाली। अपने वर्ग का चारित्रिक पतन उनकी कविता में कभी क्षोभ तो कभी दुखभरे प्रश्नों में बदलकर बार-बार आता है' : अपन दोनों भाई हैं/ और दोनों दुखी हैं/ दोनों ही कष्टग्रस्त/ फिर भी तुम लड़ते हो हमसे/ वे गेहूं जल्दी से जल्दी मंडी ले जाना चाहते हैं/ ताकि मूल्यों के गिरने से पहले उसका देश में सब जगह बंटना संभव हो सके/ जो इसके आड़े आते हैं उनसे मुक्तिबोध का कोई समझौता नहीं हो सकता/ क्षमा करो तुम मेरे बंधु और मित्र हो/ इसीलिए सबसे अधिक दुःखदायी भयानक शत्रु हो। मुक्तिबोध और लम्बी कविता हिन्दी में एक तरह में समानार्थी शब्द बन गए । अपनी डायरी में उन्होंने लिखा भी है कि यथार्थ के तत्व परस्पर गुम्फित होते हैं और पूरा यथार्थ गतिशील, इसलिए जब तक पूरे का पूरा यथार्थ अभिव्यक्त न हो जाये कविता अधूरी ही रहती है। ऐसी अधूरी कविताओं से उनका बस्ता भर पड़ा था जिन्हें पूरी करने का वक्त वे नहीं निकाल पाये। अधूरी होने के बावजूद मुक्तिबोध के मन में इनके प्रति बड़ा मोह था और वे चाहते थे कि उनके पहले संग्रह में भी इनमें से कुछ जरूर ही प्रकाशित करा दी जायें। अपनी छोटी कविताओं को भी मुक्तिबोध अधूरी ही मानते थे। मेरे खयाल से उनकी सभी छोटी कविताएं अधूरी लम्बी कविताएं नहीं हैं। उनकी भावावेशमूलक रचनाएं अपने आप में सम्पूर्ण हैं जिनमें से कई इस संग्रह की शोभा हैं जैसे 'साँझ और पुराना मैं' या 'साँझ उतरी रंग लेकर', उदासी का शीर्षक रचनाएं। भूरी भूरी खाक धूल में संग्रहीत लम्बी कविताएं चाँद का मुंह टेढ़ा है की तुलना में कमजोर, शिथिल और बिखरी-बिखरी सी जान पड़ती है। कारण स्पष्ट है। कवि के जीवन के उत्तर-काल की होने के कारण चाँद का मुंह टेढ़ा है की लम्बी कविताएं फिनिश्ड रचनाएं हैं और खाट पकडऩे के पहले कवि ने उनका अन्तिम प्रारूप तैयार कर लिया था। शेष कविताओं पर काम करने का वक्त उन्हें नहीं मिल पाया। लम्बी कविता को साधने के लिए मुक्तिबोध नाटकीयता के अलावा अपनी सेंसुअसनेस का भी भरपूर उपयोग करते हैं। इस कला में महारत उन्हें अपने जीवन के अन्तिम वर्षों में ही हासिल हुई। परवर्ती लम्बी कविताओं में उनकी लिरिकल प्रवृत्ति एकदम घुल-मिल गयी है। शायद इसीलिए अपने अन्तिम वर्षों में उन्हें शुद्ध लिरिकल रचनाएं लिखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। इसके विपरीत भूरी भूरी खाक धूल में प्रगीतात्मक रचनाओं के अलावा विशिष्ट मनःस्थितियों के भी अनेक चित्र मिल जाएंगे जिनका होना, संभव है कुछ लोगों को चौंकाये लेकिन इनका होना अकारण नहीं है। उदासी और अनमनेपन की ये कविताएं अपने स्वाद और रंग में उनकी जानी-पहचानी और मशहूर रचनाओं में बहुत भिन्न है। मनुष्य के भीतर के फूटनेवाला शब्द कैसे मन आत्मा की हजार-हजार भाषा बोल लेता है चाँद का मुंह टेढ़ा है पढ़ते हुए इसका अनुभव बखूबी होता चलता है लेकिन 'सांझ और पुराना मैं' जैसी कविताओं की भाषा जितनी करुण है उतनी ही तरल-पारदर्शी। शब्द यहां संगीत में बदल गये हैं- बेहद मोहक और सरल संगीत में : आभाओं के उस विदा-काल में अकस्मात्/ गंभीर मान में डूब अकेले होते से/ वे राहों के पीपल अशांत/ बेनाम मंदिरों के ऊँचे वीरान शिखर/ प्राचीन बेखबर मस्जिद के गुम्बद विशाल/ गहरे अरूप के श्याम-छाप/ रंग विलीन होकर असंग होते/ मेरा होता है घना साथ क्यों उसी समय/ सबसे होता एकाग्र संग/ मुंद जाते हैं जब दिशा-नयन/ खुल जाता है मेरे मन का एकांत भवन/ अब तक अनजाने मर्म नाम ले ले कर क्यों/ पुकारते हैं मुझको/ मानो उनमें जा बसने को बुला रहे हों। अपने इसी लिरिसिज्म को कवि जब उत्तर-काल में अपनी लम्बी रचना के कथ्य में घुला देता है तो वह कुछ इस रूप में सामने आता है : सूनी है रात अजीब है फैलाव/ सर्द अंधेरा/ ढीलीआँखों से देखते हैं विश्व/उदास तारे/ हर बार सोच और हर बार अफसोस/ हर बार फिक्र/ के कारण बढ़े हुए दर्द का मानो कि दूर वहां दूर वहां/ अंधियारा पीपल देता है पहरा/ हवाओं की निःसंग लहरों में कांपती/ कुत्तों की दूर-दूर अलग-अलग आवाज काँपती है दूरियां गूंजते हैं फासले/ बाहर कोई नहीं कोई नहीं बाहर। (अँधेरे में : पृ. 273) मुरली मनोहर प्रसाद सिंह का मानना है कि 1959 से 1964 के बीच मुक्तिबोध ने लगभग 65 कविताएँ लिखी हैं, जिनमें 'एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्मकथन', 'दिमागी गुहा अंधकार का ओरांग-उटांग', 'ओ काव्यात्मन् फणिधर', 'चकमक की चिनगारियाँ', 'एक स्वप्नकथा', 'ब्रह्मराक्षस', 'अंधेरे में', 'लकड़ी का रावण' और 'भूल-गलती' जैसी अधिकांश लम्बी कविताएँ शामिल हैं। विसंगतियों को नई काव्यभाषा और फैंटेसी के रूपक-बिम्ब -प्रतीक के माध्यम से मुक्तिबोध आत्मसंघर्ष की व्याप्ति, नीरंध्र अंधलोक और मक्कार शासकवर्ग की छलना के नये उद्धाटित सत्य अंकित किये हैं। इन्हीं रचनाओं के भाष्य के क्रम में आधुनिकतावादी और कलावादी अपने विरसे में मुक्तिबोध की उपलब्धियों को हड़पने की कोशिश करते रहे हैं। अगर इन रचनाओं के युग-संदर्भ, सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल के घटना-प्रसंग को ध्यान में रखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि समाजवाद के लिए संघर्ष की उदविग्नता इन कविताओं का प्राणतत्व है। रूपवादी दृष्टि से मुक्तिबोध के काव्योत्कर्ष को सिर्फ भाशा-शैली, रूपक, बिम्ब, प्रतीक और फैंटेसी में ढूंढना एकांगी विश्लेषण की ओर ले जाता है। उनकी कहानियों, अपूर्ण उपन्यास, समालोचनात्मक निबंध और डायरियों को कविताओं के साथ-साथ पुनर्पाठ करने पर कहीं संदेह नहीं रह जाता कि वे पश्चिम के किसी प्रतिक्रियावादी दर्शन के शिकार नहीं हुए थे। मुक्तिबोध के लेखन का बहुत थोड़ा हिस्सा उनके जीवन-काल में प्रकाशित हो सका था। जब उनकी कविता की पहली किताब छपी तब वे होश-हवास खो चुके थे। एक तरह से उनका सारे का सारा रचनात्मक लेखन उनके मरने के बाद ही सामने आया। आता जा रहा है। मरणोत्तर प्रकाशन के बारे में जाहिर है हम जितनी भी एहतियात बरतें, थोड़ी होगी क्योंकि हमारे पास जानने का साधन नहीं होता कि जीवित रहता तो कवि अपने लिखे का कितना हिस्सा किस रूप में प्रकाशित कराने का फैसला करता। खासतौर से मुक्तिबोध जैसे कवि के बारे में तो हम अपने को हमेशा ही संशय और दुविधा की स्थिति में पाते हैं। वे दूसरों को लेकर जितने उदार थे खुद को लेकर उतने ही निर्मम और निर्मोही। जो लोग उनकी रचना-प्रक्रिया से परिचित हैं, जानते हैं कि अपनी हर रचना वे कई-कई बार लिखते थे। कविता ही नहीं गद्य भी। 'कामायनी एक पुनर्विचार' किताब-रूप में उन्होंने सन् 50 के आसपास ही लिख डाली थी और वह मुद्रित भी हो चुकी थी। लेकिन किन्हीं कारणों से प्रकाशित नहीं हो सकी। कोई दस बरस बाद जब उसके प्रकाशन का डौल जमा तो मुक्तिबोध ने संशोधन के लिए एक महीने का समय मांग कर पूरी की पूरी किताब नये सिरे से लिखी। 'वसुधा' में प्रकाशित डायरी-अंशों और 'एक साहित्यिक की डायरी' के प्रारूपों को आमने-सामने रखकर इसे अच्छी तरह समझा जा सकता है। कविता के मामले में तो वे और भी सतर्क और चौकस थे। जब तक पूरी तरह संतुष्ट न हो जाएं कि उनका अभिप्राय शब्द के खांचे में एकदम ठीक-ठीक बैठ गया है, वे अपनी रचना को अधूरी या 'अन्डर रिपेयर' कहते थे। दोबारा-तिबारा लिखी जाने पर उनकी मूल रचना सर्वथा नया रूपाकार पा पाती। मुक्तिबोध की पांडुलिपियों को खंगालते हुए किसी भी दूसरे आदमी के लिए तय करना सचमुच बहुत मुश्किल है कि उनकी रचना का कौन-सा प्रारूप अंतिम है। जीवित होते तो शायद उनके लिए भी यह तय करना बहुत आसान न होता। (शैलेंद्र चौहान साहित्यकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)
गजानन माधव मुक्तिबोध उन गिने चुने कवियों में थे जिन्होंने विज्ञान और फैंटेसी के आधुनिक तथा कलात्मक बिंब और भाव कविता में लिए। उनकी एक कविता 'मुझे मालूम नहीं' में मनुष्य की उस असहायता का चित्रण है जिसमें वह यथास्थिति तोड़ नहीं पाता। वह दूसरों के बने नियमों तथा संकेतों से चलता है। उसके स्वयं की सोच दूसरों की सोच पर आधारित होता है। दूसरों की सोच सत्ता के आसपास का चरित्र होता है। सत्ता अपने को स्थापित करने के लिए मनुष्य के सोच की स्थिरीकरण करती है। परन्तु मनुष्य की चेतना कभी कभी चिंगारी की भांति इस बात का अहसास कराती है कि वह जो सामने का सत्य है उससे आगे भी कुछ है। संवेदनहीन होते व्यक्ति की संवेदना को वह चिंगारी पल भर के लिए जागृत करती है। पुनः एक बनाने का यत्न है अविरत! वह निचला-निचला भेद, मुक्तिबोध की कविता 'भविष्यधारा' की इन पंक्तियों में एक बड़े सीवर का चित्र है। मनुष्यता, मानवीय गुण, परोपकार की भावना, सामाजिक सरोकार लगता है जैसे एक बड़ी सीवर लाइन की तलहटी में समा गये हैं। मूल्यहीन समाज, चारों तरफ फैला गहन अंधकार, अनाचार यह सब कैसे साफ होगा इसके लिए ' मैन होल' से सीवर लाइन में घुसना होगा, भूत की तरह बनना और सनना होगा कीचड़ में तभी मनों मैल निकल पायेगा। समाज में व्याप्त बुराइयों, असंगतियों, विसंगतियों को आसानी से तो कदापि नहीं मिटाया जा सकता। उसके लिए तो बहुत बड़े प्रयत्न की आवश्यकता है, लगन की आवश्यकता है, इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। महज रोते रहने से ही तो समाज में व्याप्त असमानता और असहजता दूर नहीं हो सकती। उसके लिए पौरुष, सामर्थ्य और मनोबल वांछित है तभी मैल निकाला जा सकता है। यह कार्य इतना आसान नहीं है इसमें बहुत लोगों को लगना होगा। उनकी कविताओं में सूक्ष्म और स्थूल वैज्ञानिकता और रूमानीपन साथ-साथ मिलते हैं। कहीं-कहीं कविताएं साधारण सी जिज्ञासा से प्रारंभ होकर गहन रहस्य की सृष्टि भी कर जाती हैं। कहा जा सकता है ये कविताएं निराला की संवेदनशीलता और कबीर के अक्खड़पन का अद्भुत सम्मिश्रण हैं। "विचित्र प्रोसेशन/ गंभीर क्वीक मार्च कलाखतू वाला जरीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड दल/ बैंड के लोगों के चेहरे/ मिलते हैं मेरे देखे हुओं से/ लगता है उनमें कई प्रतिष्ठित पत्रकार/ इसी नगर के/ बड़े-बड़े नाम अरे/ कैसे शामिल हो गए इस बैंड दल में। भई वाह! उनमें कई प्रकाण्ड आलोचक, विचारक, जगमगाते कविगण। मंत्री भी, उद्योगपति और विद्वान। यहां तक कि शहर का हत्यारा कुख्यात डोमा जी उस्ताद। यह है हमारा, हमारी नैतिकता का असली चेहरा बड़ी-बड़ी बातें करने वाले साहित्यकार, पत्रकार अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए हत्यारों के साथ हो लेते हैं। खड़ी हैं सिर झुकाए सब कतारें। "मुक्तिबोध की हर कविता एक आईना है - गोल, तिरछा, चौकोर, लम्बा आईना । उसमें चेहरा या चेहरे देखे जा सकते हैं । कुछ लोग इन आईनों में अपनी सूरत देखने से घबरायेंगे और कुछ अपनी निरीह-प्यारी गऊ-सूरत को देखकर आत्मदर्शन के सुख क अनुभव करेंगे। मुक्तिबोध ने आरोप, आक्षेप के लिये या भय का सृजन करने के लिये कविता नहीं लिखी - फिर भी समय की विद्रूपता ने चित्रों का आकार ग्रहण किया है - आईनों का । 'अंधेरे में' कविता इस संग्रह का सबसे बड़ा और भयजन्य आईना है ... अमृता भारती। सातवें दशक के मध्य में धर्मयुग, ज्ञानोदय, लहर, नव भारत टाइम्स - साप्ताहिक, मासिक और दैनिक प्रायः सभी पत्र पत्रिकाओं में गजानन माधव मुक्तिबोध विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो उठे थे, क्यों ? सब एकाएक उनका परिचय पाठकों को देने लगे और दिल्ली की साहित्यिक दुनिया में एक नई हलचल सी आ गई ! 'मुक्तिबोध हिन्दी संसार की एक घटना बन गये। कुछ ऐसी घटना जिसकी ओर से आंखें मूंद लेना असंभव था। उनका एकनिष्ठ संघर्ष, उनकी अटूट सचाई, उनका पूरा जीवन, सभी एक साथ हमारी भावनाओं के केन्द्रीय मंच पर सामने आ गये और सभी ने उनके कवि होने को नई दृष्टि से देखा। कैसा जीवन था वह और ऐसे उसका अंत क्यों हुआ ? और वह समुचित ख्याति से अब तक वंचित क्यों रहा ?' यह तल्ख टिप्पणी शमशेर बहादुर सिंह की है जो उन्होंने बड़े बेबाक ढंग से हिन्दी जगत के साहित्यकारों की निस्संगता पर कही है। जमीन में गड़कर भी। वे जुबां बेबस सलाम में, दरबारे आम में। 'चांद का मुंह टेढ़ा है' के प्रकाशन के पन्द्रह-सोलह बरस बाद 'भूरी भूरी खाक धूल' की कविताओं में जाना वयस्कता से बचपन में लौटने जैसा रोमांचक अनुभव है। इसमें एक तरफ तो छायावादी संस्कारों से मुक्त होने की छटपटाहट है और दूसरी तरफ अपनी काव्य-परम्परा के रूप में उसे स्वायत्त कर लेने की तड़प भी। एक तरफ समाजवादी जीवनादर्शों की खुली स्वीकृति है तो दूसरी तरफ जीवन-विवेक को साहित्य-विवेक की तरह ही लेने की जिद। कवि अंगारों की तरह उड़ तिर कर चुपचाप और चोरी-चोरी हमारी छत पर आना चाहता है- लेकिन अपनी कविता से हमें जलाने के लिए नहीं। द्वंद्वस्थिति में स्थापित उसका वजनदार लोहा भयंकर अग्नि-क्रियाओं में तेज धकेला जाकर पिघलते और दमकते तेज-पुंज, गहन अनुभव का छोटा सा दोहा बनना चाहता है। जिन्दगी की लड़ाई में बुरी तरह हारकर मुक्तिबोध कविता में जीत जाते हैं। कविता उनके लिए हारिल की लकड़ी थी। किसी ने उनका साथ नहीं दिया। मन, विचार और सपनों के लोक में सिर्फ कविता उनके साथ थी जिसके सहारे उन्होंने अपने आकुल हृदय के भीतर ऐसे उधार और मुक्त समाज को रच लिया जहां वे जी सकते थे। सारी अनगढ़ता के बावजूद 'भूरी भूरी खाक धूल' की कविताओं में प्यार से धड़कता बेहद संवेदनशील मन छाह से लहराता दिखाई देता है जिसमें जोखिम से भरे ढेर सारे फैसले लेने का बेपरवाह साहस है। भावना और विचारों की आत्मसिद्धि एक दिन चुपचाप ही किस तरह रचना को बड़ा कर जाती है यह देखने के लिए भूरी भूरी खाक धूल की बारीक चलनी से धीरज से चालना होगा। निश्चय ही सोने के असंख्य कण हाथ लगेंगे। 'चांद का मुंह टेढ़ा है' की तुलना में इस संग्रह की कविताएं मुखर प्रगतिवादी बल्कि कुछ तो भविष्यवादी भी लगती हैं। इस संग्रह की राजनीतिक आशा की बेहद मुखर और लाउड कविताओं के बरक्स चाँद का मुंह टेढ़ा है की कविताओं को रखकर देखने से जाहिर हो जाता है कि मुक्तिबोध ने दस-पन्द्रह बरस के छोटे से काल-खण्ड में ही कितना लम्बा सफर तय किया था- वह भी निपट अकेले। बड़ी कविता निर्मम आत्मदान माँगती है। सचमुच मुक्तिबोध ने अपने को मारकर कविता को जिला लिया- हम लोगों तक पहुंचाने के लिए। अगर किसी हद तक 'एक साहित्यिक की डायरी', 'चांद का मुंह टेढ़ा है' की कुंजी है तो 'नये साहित्य का सौन्दर्य-शास्त्र', 'भूरी भूरी खाक धूल की'। और बैलगाड़ी के पहिये भी बहुत बार/ ठीक यहीं टूटते/ होती है डाकेजनी/ चट्टान अंधेरी पर/ इसीलिए राइफल सम्हाले/ सावधान चलते हैं/ चलना ही पड़ता है/ क्या करें।/ जीवन के तथ्यों के/ सामान्यीकरणों का/ करना ही पड़ता है हमें असामान्यीकरण। प्रमोद वर्मा कहते हैं कि 'मुक्तिबोध की कविता में आत्मसाक्षात्कार के भीतर सचित्र साक्षात्कार जितना उनका खुद का है, उससे कहीं ज्यादा दूसरों का या अपने वर्ग का है। मैं क्या करता था अब तक, जैसे सवाल वे अपने से ही नहीं अपने वर्ग से भी पूछते हैं। भक्त कवियों की तरह उनकी भी आत्म-ग्लानि निजी नहीं है। न उनकी व्यापक खोज मात्र अपनी अस्मिता की खोज हो। जहां तक उनका व्यक्तिगत सवाल है उन्होंने हमेशा बेशक तकलीफ भरी लेकिन बेहद साफ-सुथरी जिन्दगी ही जीने की कोशिश की थी। कम से कम समझौते करते हुए। तरक्की की गोल-गोल घुमावदार चक्करदार सीढिय़ों पर चढऩे से हमेशा इंकार किया। जीवन की तथाकथित सफलता को पाने की फुर्सत कभी नहीं निकाली। अपने वर्ग का चारित्रिक पतन उनकी कविता में कभी क्षोभ तो कभी दुखभरे प्रश्नों में बदलकर बार-बार आता है' : अपन दोनों भाई हैं/ और दोनों दुखी हैं/ दोनों ही कष्टग्रस्त/ फिर भी तुम लड़ते हो हमसे/ वे गेहूं जल्दी से जल्दी मंडी ले जाना चाहते हैं/ ताकि मूल्यों के गिरने से पहले उसका देश में सब जगह बंटना संभव हो सके/ जो इसके आड़े आते हैं उनसे मुक्तिबोध का कोई समझौता नहीं हो सकता/ क्षमा करो तुम मेरे बंधु और मित्र हो/ इसीलिए सबसे अधिक दुःखदायी भयानक शत्रु हो। मुक्तिबोध और लम्बी कविता हिन्दी में एक तरह में समानार्थी शब्द बन गए । अपनी डायरी में उन्होंने लिखा भी है कि यथार्थ के तत्व परस्पर गुम्फित होते हैं और पूरा यथार्थ गतिशील, इसलिए जब तक पूरे का पूरा यथार्थ अभिव्यक्त न हो जाये कविता अधूरी ही रहती है। ऐसी अधूरी कविताओं से उनका बस्ता भर पड़ा था जिन्हें पूरी करने का वक्त वे नहीं निकाल पाये। अधूरी होने के बावजूद मुक्तिबोध के मन में इनके प्रति बड़ा मोह था और वे चाहते थे कि उनके पहले संग्रह में भी इनमें से कुछ जरूर ही प्रकाशित करा दी जायें। अपनी छोटी कविताओं को भी मुक्तिबोध अधूरी ही मानते थे। मेरे खयाल से उनकी सभी छोटी कविताएं अधूरी लम्बी कविताएं नहीं हैं। उनकी भावावेशमूलक रचनाएं अपने आप में सम्पूर्ण हैं जिनमें से कई इस संग्रह की शोभा हैं जैसे 'साँझ और पुराना मैं' या 'साँझ उतरी रंग लेकर', उदासी का शीर्षक रचनाएं। भूरी भूरी खाक धूल में संग्रहीत लम्बी कविताएं चाँद का मुंह टेढ़ा है की तुलना में कमजोर, शिथिल और बिखरी-बिखरी सी जान पड़ती है। कारण स्पष्ट है। कवि के जीवन के उत्तर-काल की होने के कारण चाँद का मुंह टेढ़ा है की लम्बी कविताएं फिनिश्ड रचनाएं हैं और खाट पकडऩे के पहले कवि ने उनका अन्तिम प्रारूप तैयार कर लिया था। शेष कविताओं पर काम करने का वक्त उन्हें नहीं मिल पाया। लम्बी कविता को साधने के लिए मुक्तिबोध नाटकीयता के अलावा अपनी सेंसुअसनेस का भी भरपूर उपयोग करते हैं। इस कला में महारत उन्हें अपने जीवन के अन्तिम वर्षों में ही हासिल हुई। परवर्ती लम्बी कविताओं में उनकी लिरिकल प्रवृत्ति एकदम घुल-मिल गयी है। शायद इसीलिए अपने अन्तिम वर्षों में उन्हें शुद्ध लिरिकल रचनाएं लिखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। इसके विपरीत भूरी भूरी खाक धूल में प्रगीतात्मक रचनाओं के अलावा विशिष्ट मनःस्थितियों के भी अनेक चित्र मिल जाएंगे जिनका होना, संभव है कुछ लोगों को चौंकाये लेकिन इनका होना अकारण नहीं है। उदासी और अनमनेपन की ये कविताएं अपने स्वाद और रंग में उनकी जानी-पहचानी और मशहूर रचनाओं में बहुत भिन्न है। मनुष्य के भीतर के फूटनेवाला शब्द कैसे मन आत्मा की हजार-हजार भाषा बोल लेता है चाँद का मुंह टेढ़ा है पढ़ते हुए इसका अनुभव बखूबी होता चलता है लेकिन 'सांझ और पुराना मैं' जैसी कविताओं की भाषा जितनी करुण है उतनी ही तरल-पारदर्शी। शब्द यहां संगीत में बदल गये हैं- बेहद मोहक और सरल संगीत में : आभाओं के उस विदा-काल में अकस्मात्/ गंभीर मान में डूब अकेले होते से/ वे राहों के पीपल अशांत/ बेनाम मंदिरों के ऊँचे वीरान शिखर/ प्राचीन बेखबर मस्जिद के गुम्बद विशाल/ गहरे अरूप के श्याम-छाप/ रंग विलीन होकर असंग होते/ मेरा होता है घना साथ क्यों उसी समय/ सबसे होता एकाग्र संग/ मुंद जाते हैं जब दिशा-नयन/ खुल जाता है मेरे मन का एकांत भवन/ अब तक अनजाने मर्म नाम ले ले कर क्यों/ पुकारते हैं मुझको/ मानो उनमें जा बसने को बुला रहे हों। अपने इसी लिरिसिज्म को कवि जब उत्तर-काल में अपनी लम्बी रचना के कथ्य में घुला देता है तो वह कुछ इस रूप में सामने आता है : सूनी है रात अजीब है फैलाव/ सर्द अंधेरा/ ढीलीआँखों से देखते हैं विश्व/उदास तारे/ हर बार सोच और हर बार अफसोस/ हर बार फिक्र/ के कारण बढ़े हुए दर्द का मानो कि दूर वहां दूर वहां/ अंधियारा पीपल देता है पहरा/ हवाओं की निःसंग लहरों में कांपती/ कुत्तों की दूर-दूर अलग-अलग आवाज काँपती है दूरियां गूंजते हैं फासले/ बाहर कोई नहीं कोई नहीं बाहर। मुरली मनोहर प्रसाद सिंह का मानना है कि एक हज़ार नौ सौ उनसठ से एक हज़ार नौ सौ चौंसठ के बीच मुक्तिबोध ने लगभग पैंसठ कविताएँ लिखी हैं, जिनमें 'एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्मकथन', 'दिमागी गुहा अंधकार का ओरांग-उटांग', 'ओ काव्यात्मन् फणिधर', 'चकमक की चिनगारियाँ', 'एक स्वप्नकथा', 'ब्रह्मराक्षस', 'अंधेरे में', 'लकड़ी का रावण' और 'भूल-गलती' जैसी अधिकांश लम्बी कविताएँ शामिल हैं। विसंगतियों को नई काव्यभाषा और फैंटेसी के रूपक-बिम्ब -प्रतीक के माध्यम से मुक्तिबोध आत्मसंघर्ष की व्याप्ति, नीरंध्र अंधलोक और मक्कार शासकवर्ग की छलना के नये उद्धाटित सत्य अंकित किये हैं। इन्हीं रचनाओं के भाष्य के क्रम में आधुनिकतावादी और कलावादी अपने विरसे में मुक्तिबोध की उपलब्धियों को हड़पने की कोशिश करते रहे हैं। अगर इन रचनाओं के युग-संदर्भ, सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल के घटना-प्रसंग को ध्यान में रखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि समाजवाद के लिए संघर्ष की उदविग्नता इन कविताओं का प्राणतत्व है। रूपवादी दृष्टि से मुक्तिबोध के काव्योत्कर्ष को सिर्फ भाशा-शैली, रूपक, बिम्ब, प्रतीक और फैंटेसी में ढूंढना एकांगी विश्लेषण की ओर ले जाता है। उनकी कहानियों, अपूर्ण उपन्यास, समालोचनात्मक निबंध और डायरियों को कविताओं के साथ-साथ पुनर्पाठ करने पर कहीं संदेह नहीं रह जाता कि वे पश्चिम के किसी प्रतिक्रियावादी दर्शन के शिकार नहीं हुए थे। मुक्तिबोध के लेखन का बहुत थोड़ा हिस्सा उनके जीवन-काल में प्रकाशित हो सका था। जब उनकी कविता की पहली किताब छपी तब वे होश-हवास खो चुके थे। एक तरह से उनका सारे का सारा रचनात्मक लेखन उनके मरने के बाद ही सामने आया। आता जा रहा है। मरणोत्तर प्रकाशन के बारे में जाहिर है हम जितनी भी एहतियात बरतें, थोड़ी होगी क्योंकि हमारे पास जानने का साधन नहीं होता कि जीवित रहता तो कवि अपने लिखे का कितना हिस्सा किस रूप में प्रकाशित कराने का फैसला करता। खासतौर से मुक्तिबोध जैसे कवि के बारे में तो हम अपने को हमेशा ही संशय और दुविधा की स्थिति में पाते हैं। वे दूसरों को लेकर जितने उदार थे खुद को लेकर उतने ही निर्मम और निर्मोही। जो लोग उनकी रचना-प्रक्रिया से परिचित हैं, जानते हैं कि अपनी हर रचना वे कई-कई बार लिखते थे। कविता ही नहीं गद्य भी। 'कामायनी एक पुनर्विचार' किताब-रूप में उन्होंने सन् पचास के आसपास ही लिख डाली थी और वह मुद्रित भी हो चुकी थी। लेकिन किन्हीं कारणों से प्रकाशित नहीं हो सकी। कोई दस बरस बाद जब उसके प्रकाशन का डौल जमा तो मुक्तिबोध ने संशोधन के लिए एक महीने का समय मांग कर पूरी की पूरी किताब नये सिरे से लिखी। 'वसुधा' में प्रकाशित डायरी-अंशों और 'एक साहित्यिक की डायरी' के प्रारूपों को आमने-सामने रखकर इसे अच्छी तरह समझा जा सकता है। कविता के मामले में तो वे और भी सतर्क और चौकस थे। जब तक पूरी तरह संतुष्ट न हो जाएं कि उनका अभिप्राय शब्द के खांचे में एकदम ठीक-ठीक बैठ गया है, वे अपनी रचना को अधूरी या 'अन्डर रिपेयर' कहते थे। दोबारा-तिबारा लिखी जाने पर उनकी मूल रचना सर्वथा नया रूपाकार पा पाती। मुक्तिबोध की पांडुलिपियों को खंगालते हुए किसी भी दूसरे आदमी के लिए तय करना सचमुच बहुत मुश्किल है कि उनकी रचना का कौन-सा प्रारूप अंतिम है। जीवित होते तो शायद उनके लिए भी यह तय करना बहुत आसान न होता।
KANPUR: शहर के सबसे बड़े रेफरल सेंटर एलएलआर हॉस्पिटल में किडनी के क्रिटिकल पेशेंट्स को अस्पताल में ही तीन जगहों पर डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इसके साथ की केपीएस इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन में नई नेफ्रोलॉजी यूनिट में किडनी पेशेंट्स के इलाज का पूरा इंतजाम भी होगा। अस्पताल में अब 9 डायलिसिस मशीनें हैं। जिससे अब 24 घंटे डायलिसिस की सुविधा भी क्रिटिकल पेशेंट्स को मिल सकेगी। इसके लिए मेडिसिन आईसीयू और न्यूरो कोविड आईसीयू में भी एक- एक बेड की डायलिसिस यूनिट काम करने लगी है। इसके साथ ही 10 बेड के एचडीयू में भी क्रिटिकल किडनी पेशेंट्स का इलाज हो सकेगा। दिवंगत यदुपति सिंहानिया की याद में जेके गु्रप की ओर से किए गए दान से इसे तैयार किया गया है। इस एयरकंडीशंड एचडीयू में सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन लाइन से लेकर वेंटीलेटर और मल्टी पैरा मॉनीटर जैसी सुविधाएं भी हैं। एलएलआर अस्पताल के केपीएम इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन में पहले 4 बेड की डायलिसिस यूनिट थी। जेके ग्रुप से मिली मदद के बाद यहां अब 6 मशीनें हैं। इसमें से हेपेटाइटिस पेशेंट्स के डायलिसिस के लिए भी एक मशीन को अलग रखा गया है। नए उपकरण, सुविधाएं और विशेषज्ञ मिलने के बाद नई नेफ्रोलॉजी यूनिट तैयार हो गई है। जिसमें दो सुपरस्पेशलिस्ट भी हैं। इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन की डायरेक्टर प्रो। रिचा गिरि ने जानकारी दी कि डायलिसिस यूनिट के लिए ज्यादा क्षमता के नए आरओ प्लांट को लगाए गए हैं। इसी तरह मेडिसिन आईसीयू व न्यूरो कोविड आईसीयू में भी डायलिसिस के लिए आरओ प्लांट लग चुका है। ऐसे में किडनी पेशेंट्स के ट्रीटमेंट के लिए अब काफी बेहतर सुविधाएं है। नेफ्रोलॉजी यूनिट के लिए 10 बेड का एचडीयू भी तैयार है। जिसमें फाउलर बेड के साथ वेंटीलेटर, मल्टी पैरा मॉनीटर और सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन जैसी सुविधाएं हैं। इसका फायदा किडनी पेशेंट्स को मिलेगा। उन्हें सरकारी दरों पर ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। डायलिसिस के दौरान किडनी पेशेंट्स में फिश्चुला भी बनता है। जिसके इलाज के लिए कई बार पेशेंट्स को कार्डियोलॉजी भेजना पड़ता है। वहीं जल्द ही नेफ्रोलॉजी यूनिट के साथ एक माइनर ओटी भी तैयार किया जाएगा। जिससे फिश्चुला की प्रॉब्लम होने पर पेशेंट्स को कार्डियोलॉजी नहीं भेजना पड़ेगा। माइनर ओटी में ही इलाज हो जाएगा। एलएलआर हॉस्पिटल में मेडिसिन आईसीयू, एनेस्थीसिया आईसीयू और न्यूरो कोविड आईसीयू में भी एक-एक डायलिसिस मशीनें हैं। जिसके साथ ही आरओ सिस्टम भी इंस्टॉल किया जा चुका है। न्यूरो कोविड आईसीयू में तो पीजीआई सैफई से भी क्रिटिकल कोविड पेशेंट्स को डायलिसिस के लिए भेजा जा रहा है। अस्पताल में किडनी पेशेंट्स के ट्रीटमेंट के लिए अब पहले से बेहतर सुविधाएं हैं। साथ ही मेडिसिन विभाग में नई नेफ्रोलॉजी यूनिट भी तैयार हो गई है। जिसमें किडनी पेशेंट्स को राउंड ओ क्लॉक ट्रीटमेंट मिल सकेगा।
KANPUR: शहर के सबसे बड़े रेफरल सेंटर एलएलआर हॉस्पिटल में किडनी के क्रिटिकल पेशेंट्स को अस्पताल में ही तीन जगहों पर डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इसके साथ की केपीएस इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन में नई नेफ्रोलॉजी यूनिट में किडनी पेशेंट्स के इलाज का पूरा इंतजाम भी होगा। अस्पताल में अब नौ डायलिसिस मशीनें हैं। जिससे अब चौबीस घंटाटे डायलिसिस की सुविधा भी क्रिटिकल पेशेंट्स को मिल सकेगी। इसके लिए मेडिसिन आईसीयू और न्यूरो कोविड आईसीयू में भी एक- एक बेड की डायलिसिस यूनिट काम करने लगी है। इसके साथ ही दस बेड के एचडीयू में भी क्रिटिकल किडनी पेशेंट्स का इलाज हो सकेगा। दिवंगत यदुपति सिंहानिया की याद में जेके गु्रप की ओर से किए गए दान से इसे तैयार किया गया है। इस एयरकंडीशंड एचडीयू में सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन लाइन से लेकर वेंटीलेटर और मल्टी पैरा मॉनीटर जैसी सुविधाएं भी हैं। एलएलआर अस्पताल के केपीएम इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन में पहले चार बेड की डायलिसिस यूनिट थी। जेके ग्रुप से मिली मदद के बाद यहां अब छः मशीनें हैं। इसमें से हेपेटाइटिस पेशेंट्स के डायलिसिस के लिए भी एक मशीन को अलग रखा गया है। नए उपकरण, सुविधाएं और विशेषज्ञ मिलने के बाद नई नेफ्रोलॉजी यूनिट तैयार हो गई है। जिसमें दो सुपरस्पेशलिस्ट भी हैं। इंस्टीटयूट ऑफ मेडिसिन की डायरेक्टर प्रो। रिचा गिरि ने जानकारी दी कि डायलिसिस यूनिट के लिए ज्यादा क्षमता के नए आरओ प्लांट को लगाए गए हैं। इसी तरह मेडिसिन आईसीयू व न्यूरो कोविड आईसीयू में भी डायलिसिस के लिए आरओ प्लांट लग चुका है। ऐसे में किडनी पेशेंट्स के ट्रीटमेंट के लिए अब काफी बेहतर सुविधाएं है। नेफ्रोलॉजी यूनिट के लिए दस बेड का एचडीयू भी तैयार है। जिसमें फाउलर बेड के साथ वेंटीलेटर, मल्टी पैरा मॉनीटर और सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन जैसी सुविधाएं हैं। इसका फायदा किडनी पेशेंट्स को मिलेगा। उन्हें सरकारी दरों पर ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। डायलिसिस के दौरान किडनी पेशेंट्स में फिश्चुला भी बनता है। जिसके इलाज के लिए कई बार पेशेंट्स को कार्डियोलॉजी भेजना पड़ता है। वहीं जल्द ही नेफ्रोलॉजी यूनिट के साथ एक माइनर ओटी भी तैयार किया जाएगा। जिससे फिश्चुला की प्रॉब्लम होने पर पेशेंट्स को कार्डियोलॉजी नहीं भेजना पड़ेगा। माइनर ओटी में ही इलाज हो जाएगा। एलएलआर हॉस्पिटल में मेडिसिन आईसीयू, एनेस्थीसिया आईसीयू और न्यूरो कोविड आईसीयू में भी एक-एक डायलिसिस मशीनें हैं। जिसके साथ ही आरओ सिस्टम भी इंस्टॉल किया जा चुका है। न्यूरो कोविड आईसीयू में तो पीजीआई सैफई से भी क्रिटिकल कोविड पेशेंट्स को डायलिसिस के लिए भेजा जा रहा है। अस्पताल में किडनी पेशेंट्स के ट्रीटमेंट के लिए अब पहले से बेहतर सुविधाएं हैं। साथ ही मेडिसिन विभाग में नई नेफ्रोलॉजी यूनिट भी तैयार हो गई है। जिसमें किडनी पेशेंट्स को राउंड ओ क्लॉक ट्रीटमेंट मिल सकेगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री कवासी लखमा हमेशा अपने बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं। चाहे वो बारिश के लिए भगवान को फोन करना हो या तिरंगा फहराने के लिए दिया गया विवादित बयान हो। वो अक्सर कुछ न कुछ ऐसा कह देते हैं कि लोगों के निशान पर आ ही जाते हैं। अब मंत्री ने बैंक को लेकर ऐसा बचकाना बयान दिया है कि आप उसे सुनकर अपना सिर पकड़ लेंगे। वहीं मौका मिलते ही बीजेपी ने मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए बदजुबान घोषित कर दिया है। तो चलिए पहले जानते हैं कि आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने क्या कहा। जगदलपुर के एक कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री से पूछा गया कि बैंक कब तक खोले जाएंगे। फिर क्या बिना रुके मंत्री जी बोलते चले गए। उन्होंने कहा कि काम चल रहा है. . लगातार कमिश्नर और कलेक्टर लगातार अपना काम कर रहे हैं. . काम की एक प्रक्रिया होती हैं...अब बच्चा भी एक दिन में पैदा नहीं होता है। शादी के बाद एक बार में बहू से बात करोगे क्या? तो बैंक कैसे खुलेगा। लेकिन हां बैंक जरूर खुलेंगे...और भी मांगों को पूरा किया जाएगा। मंत्री का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बस्तर आए थे तो उन्होंने 16 नए बैंक खोलने की घोषणा की थी हालांकि कुछ काम नहीं हो पाया था। ये पहली बार नहीं है जब आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने ऐसा अजीबोगरीब बयान दिया हो। इससे पहले वो बारिश को लेकर भी अजीबोगरीब बयान दे चुके हैं। सूखे को लेकर उन्होंने कहा था कि इस पर हमारा बस नहीं है. . देखते हैं भगवान को फोन लगाते हैं...क्या पता अच्छी बारिश हो जाए। वहीं हाल ही में तिरंगे को लेकर मंत्री ने कहा था कि तिरंगे पर भाजपा का अधिकार नहीं है बल्कि कांग्रेस का अधिकार है। तिरंगे पर सबसे पहला हक तो कांग्रेस पार्टी का है उसके बाद देश की जनता का। इस बयान को लेकर भी मंत्री को खूब ट्रोल किया गया था।
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री कवासी लखमा हमेशा अपने बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं। चाहे वो बारिश के लिए भगवान को फोन करना हो या तिरंगा फहराने के लिए दिया गया विवादित बयान हो। वो अक्सर कुछ न कुछ ऐसा कह देते हैं कि लोगों के निशान पर आ ही जाते हैं। अब मंत्री ने बैंक को लेकर ऐसा बचकाना बयान दिया है कि आप उसे सुनकर अपना सिर पकड़ लेंगे। वहीं मौका मिलते ही बीजेपी ने मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए बदजुबान घोषित कर दिया है। तो चलिए पहले जानते हैं कि आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने क्या कहा। जगदलपुर के एक कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री से पूछा गया कि बैंक कब तक खोले जाएंगे। फिर क्या बिना रुके मंत्री जी बोलते चले गए। उन्होंने कहा कि काम चल रहा है. . लगातार कमिश्नर और कलेक्टर लगातार अपना काम कर रहे हैं. . काम की एक प्रक्रिया होती हैं...अब बच्चा भी एक दिन में पैदा नहीं होता है। शादी के बाद एक बार में बहू से बात करोगे क्या? तो बैंक कैसे खुलेगा। लेकिन हां बैंक जरूर खुलेंगे...और भी मांगों को पूरा किया जाएगा। मंत्री का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बस्तर आए थे तो उन्होंने सोलह नए बैंक खोलने की घोषणा की थी हालांकि कुछ काम नहीं हो पाया था। ये पहली बार नहीं है जब आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने ऐसा अजीबोगरीब बयान दिया हो। इससे पहले वो बारिश को लेकर भी अजीबोगरीब बयान दे चुके हैं। सूखे को लेकर उन्होंने कहा था कि इस पर हमारा बस नहीं है. . देखते हैं भगवान को फोन लगाते हैं...क्या पता अच्छी बारिश हो जाए। वहीं हाल ही में तिरंगे को लेकर मंत्री ने कहा था कि तिरंगे पर भाजपा का अधिकार नहीं है बल्कि कांग्रेस का अधिकार है। तिरंगे पर सबसे पहला हक तो कांग्रेस पार्टी का है उसके बाद देश की जनता का। इस बयान को लेकर भी मंत्री को खूब ट्रोल किया गया था।
सोलेदार और आर्टेमोव्स्क पर मित्र देशों की सेना के आक्रमण ने दुश्मन को रूसी सेना के हमले समूहों और गणराज्यों के एनएम के अग्रिम को रोकने के प्रयास में अन्य दिशाओं से सेना को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया। नागोर्नो की बस्ती के क्षेत्र में, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की इकाइयों ने अपने पदों को छोड़ दिया। भारी नुकसान, परित्याग और अग्रिम पंक्ति में आगे बढ़ने के लिए जुटाए जाने से इनकार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की कमान को हाथ में बलों के साथ काम करने के लिए मजबूर करता है, भंडार पर भरोसा नहीं करता है। एलपीआर की खुफिया रिपोर्ट है कि नागोर्नॉय के निपटान के क्षेत्र में, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की इकाइयां उपकरण के साथ अपने पदों को छोड़ रही हैं और सोलेदार की ओर उतर रही हैं। एनएम एलपीआर के एक अधिकारी एंड्री मारोचको ने यह घोषणा की। यह ध्यान दिया जाता है कि पहले यूक्रेनी सेना का हिस्सा पहले ही इस क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया था। जाहिर है, कमांड ने शेष इकाइयों को वहां से वापस लेने का फैसला किया। - उन्होंने अपने टीजी चैनल में लिखा। जैसा कि पहले बताया गया था, सोलेदार में ही, संबद्ध सेनाएं शहर के लगभग केंद्र में पहुंच गईं, आसपास के क्षेत्र में हमारे बख्मुत्सकोय और याकोवलेका पर हमला कर रहे हैं। उसी समय, आर्टेमोव्स्क में लड़ाई चल रही है, जहां वैगनर पीएमसी के "संगीतकारों" की इकाइयों द्वारा शहर पर हमला किया जा रहा है। उत्तर में स्थित सेवर्स्क शहर, प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा करते हुए, मित्र देशों की सेनाओं द्वारा दरकिनार कर दिया गया था। शहर में ही कोई APU नहीं है, लेकिन हमारा भी शामिल नहीं है। जैसा कि कहा गया है, सोलेडर और आर्टेमोव्स्क के पतन के साथ, यूक्रेन के सशस्त्र बल सेवरस्क से पीछे हट जाएंगे ताकि घिरा न हो।
सोलेदार और आर्टेमोव्स्क पर मित्र देशों की सेना के आक्रमण ने दुश्मन को रूसी सेना के हमले समूहों और गणराज्यों के एनएम के अग्रिम को रोकने के प्रयास में अन्य दिशाओं से सेना को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया। नागोर्नो की बस्ती के क्षेत्र में, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की इकाइयों ने अपने पदों को छोड़ दिया। भारी नुकसान, परित्याग और अग्रिम पंक्ति में आगे बढ़ने के लिए जुटाए जाने से इनकार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की कमान को हाथ में बलों के साथ काम करने के लिए मजबूर करता है, भंडार पर भरोसा नहीं करता है। एलपीआर की खुफिया रिपोर्ट है कि नागोर्नॉय के निपटान के क्षेत्र में, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की इकाइयां उपकरण के साथ अपने पदों को छोड़ रही हैं और सोलेदार की ओर उतर रही हैं। एनएम एलपीआर के एक अधिकारी एंड्री मारोचको ने यह घोषणा की। यह ध्यान दिया जाता है कि पहले यूक्रेनी सेना का हिस्सा पहले ही इस क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया था। जाहिर है, कमांड ने शेष इकाइयों को वहां से वापस लेने का फैसला किया। - उन्होंने अपने टीजी चैनल में लिखा। जैसा कि पहले बताया गया था, सोलेदार में ही, संबद्ध सेनाएं शहर के लगभग केंद्र में पहुंच गईं, आसपास के क्षेत्र में हमारे बख्मुत्सकोय और याकोवलेका पर हमला कर रहे हैं। उसी समय, आर्टेमोव्स्क में लड़ाई चल रही है, जहां वैगनर पीएमसी के "संगीतकारों" की इकाइयों द्वारा शहर पर हमला किया जा रहा है। उत्तर में स्थित सेवर्स्क शहर, प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा करते हुए, मित्र देशों की सेनाओं द्वारा दरकिनार कर दिया गया था। शहर में ही कोई APU नहीं है, लेकिन हमारा भी शामिल नहीं है। जैसा कि कहा गया है, सोलेडर और आर्टेमोव्स्क के पतन के साथ, यूक्रेन के सशस्त्र बल सेवरस्क से पीछे हट जाएंगे ताकि घिरा न हो।
हैं इसी लिये उन दोनोंका मिलकर द्वयणुक कहलाता है । परन्तु मूर्तिवाले कर्मसे अमूर्तआत्माका बन्ध कभी नहीं हो सक्ता ? उत्तरनैवं यतः स्वतः सिद्धः स्वभावोतर्कगोचरः । तस्मादर्हति नाक्षेपं चेत्परीक्षां च सोर्हति ॥ ५३ ॥ अर्थ-- कर्मका जीवात्माके साथ बन्ध नहीं हो सक्ता है ऐसी शङ्का करना ठीक नहीं है। क्योंकि जीव-कर्मका बंध अनादिसे स्वयं सिद्ध है यह एक स्वाभाविक बात है, और स्वभाव किमीका कैसा ही क्यों न हो, उसमें किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सकती । जीव का बन्ध अनादिकालसे हो रहा है यह अशुद्ध जीवात्माका स्वभाव ही है और कर्मका भी यह स्वभाव है कि वह अशुद्ध जीवात्मासे संयुक्त हो जाता है तथा जीवकी अशुद्धता अनादि कालसे है, इसलिये इस स्वाभाविक विषयमे आक्षेप करना व्यर्थ है । यदि कोई इस बातकी ( जीव - कर्मका बंध कैसे हुआ ) परीक्षा ही करना चाहे तो उस अनादिकालीन धरूप स्वभावकी परीक्षा भी हो सकती है । स्वभावका उदाहरण अग्नेयं यथा लक्ष्म न केनाप्यर्जितं हि तत् । एवं विधः स्वभावाडा न चेत्स्पर्शेन स्पृश्यताम् ॥ ५४ ॥ अर्थ - जिस प्रकार अग्निका उष्ण लक्षणं है। वह किमीने कहींसे लाकर नहीं रक्खा है। इस प्रकारका अग्निका स्वभाव ही है कि वह गर्म रहती है। यदि कोई यह शंका करे कि अग्नि क्यों गर्म है ? तो इसका उत्तर यही हो सकता है कि अग्निका स्वभाव ऐसा है । " ऐसा स्वभाव क्यों है" यदि ऐसी तर्कणा उठाई जाय तो यही कहना पड़ेगा कि नहीं मानते हो तो छूकर देखलो, स्पर्श करनसे हाथ जलन लगता है इस लिये अनि गर्म है । यह निर्णीत अग्निका स्वभाव ही है । द्दान्ततथानादिः स्वतो बन्धो जीवपुद्गलकर्मणोः । कुतः केन कृतः कुत्र प्रश्नोयं व्योमपुष्पवत् ॥ ५५ ॥ अर्थ - जिस प्रकार अग्निमें स्वयं सिद्ध उष्णता है, उसी प्रकार जीव और पुद्गल कर्मका भी अनादिसे स्वयं मिद्ध बन्ध हो रहा है। जिस प्रकार अग्निके उष्णपने में किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सकी है उसी प्रकार जीव और कर्मके बन्नमें भी किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सक्ती है । फिर यह बन्ध कहांसे हुआ ? किसने किया ? कहां किया ? आदि
हैं इसी लिये उन दोनोंका मिलकर द्वयणुक कहलाता है । परन्तु मूर्तिवाले कर्मसे अमूर्तआत्माका बन्ध कभी नहीं हो सक्ता ? उत्तरनैवं यतः स्वतः सिद्धः स्वभावोतर्कगोचरः । तस्मादर्हति नाक्षेपं चेत्परीक्षां च सोर्हति ॥ तिरेपन ॥ अर्थ-- कर्मका जीवात्माके साथ बन्ध नहीं हो सक्ता है ऐसी शङ्का करना ठीक नहीं है। क्योंकि जीव-कर्मका बंध अनादिसे स्वयं सिद्ध है यह एक स्वाभाविक बात है, और स्वभाव किमीका कैसा ही क्यों न हो, उसमें किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सकती । जीव का बन्ध अनादिकालसे हो रहा है यह अशुद्ध जीवात्माका स्वभाव ही है और कर्मका भी यह स्वभाव है कि वह अशुद्ध जीवात्मासे संयुक्त हो जाता है तथा जीवकी अशुद्धता अनादि कालसे है, इसलिये इस स्वाभाविक विषयमे आक्षेप करना व्यर्थ है । यदि कोई इस बातकी परीक्षा ही करना चाहे तो उस अनादिकालीन धरूप स्वभावकी परीक्षा भी हो सकती है । स्वभावका उदाहरण अग्नेयं यथा लक्ष्म न केनाप्यर्जितं हि तत् । एवं विधः स्वभावाडा न चेत्स्पर्शेन स्पृश्यताम् ॥ चौवन ॥ अर्थ - जिस प्रकार अग्निका उष्ण लक्षणं है। वह किमीने कहींसे लाकर नहीं रक्खा है। इस प्रकारका अग्निका स्वभाव ही है कि वह गर्म रहती है। यदि कोई यह शंका करे कि अग्नि क्यों गर्म है ? तो इसका उत्तर यही हो सकता है कि अग्निका स्वभाव ऐसा है । " ऐसा स्वभाव क्यों है" यदि ऐसी तर्कणा उठाई जाय तो यही कहना पड़ेगा कि नहीं मानते हो तो छूकर देखलो, स्पर्श करनसे हाथ जलन लगता है इस लिये अनि गर्म है । यह निर्णीत अग्निका स्वभाव ही है । द्दान्ततथानादिः स्वतो बन्धो जीवपुद्गलकर्मणोः । कुतः केन कृतः कुत्र प्रश्नोयं व्योमपुष्पवत् ॥ पचपन ॥ अर्थ - जिस प्रकार अग्निमें स्वयं सिद्ध उष्णता है, उसी प्रकार जीव और पुद्गल कर्मका भी अनादिसे स्वयं मिद्ध बन्ध हो रहा है। जिस प्रकार अग्निके उष्णपने में किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सकी है उसी प्रकार जीव और कर्मके बन्नमें भी किसी प्रकारकी शंका नहीं हो सक्ती है । फिर यह बन्ध कहांसे हुआ ? किसने किया ? कहां किया ? आदि
नई दिल्लीः भारतीय सर्राफा बाजार में धनतेरस के दिन एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त देखने को मिल रही है. बीते दिन की तुलना में सोना-चांदी की कीमत में मामूली बढ़त देखने को मिली है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, आज (02 नवंबर 2021) यानी धनतेरस के दिन 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने का भाव 47904 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो सोमवार शाम को 47754 रुपये प्रति 10 ग्राम था. वहीं, चांदी की कीमतें भी बढ़ी है. चांदी 64402 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो बीते दिन शाम को 64196 रुपये प्रति किलो थी. हालांकि, बीते कारोबारी हफ्ते के मुकाबले सोना-चांदी अब भी सस्ते हैं. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates. com पर जारी ताजा कीमतों से अलग-अलग कैरेट के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. ये सभी भाव टैक्स और मेकिंग चार्ज के पहले के होते हैं. आपको बता दें कि IBJA द्वारा जारी किए गए भाव पूरे देश में सर्वमान्य हैं, किन्तु इसकी कीमतों में वस्तु एवं सेवा कर (GST) शामिल नहीं होती है. बता दें कि गहने खरीदने के वक़्त सोने या चांदी के रेट टैक्स समेत होने की वजह से अधिक होते हैं.
नई दिल्लीः भारतीय सर्राफा बाजार में धनतेरस के दिन एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों में बढ़त देखने को मिल रही है. बीते दिन की तुलना में सोना-चांदी की कीमत में मामूली बढ़त देखने को मिली है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, आज यानी धनतेरस के दिन नौ सौ निन्यानवे शुद्धता वाले चौबीस कैरेट सोने का भाव सैंतालीस हज़ार नौ सौ चार रुपयापये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया है, जो सोमवार शाम को सैंतालीस हज़ार सात सौ चौवन रुपयापये प्रति दस ग्राम था. वहीं, चांदी की कीमतें भी बढ़ी है. चांदी चौंसठ हज़ार चार सौ दो रुपयापये प्रति किलो हो गई है, जो बीते दिन शाम को चौंसठ हज़ार एक सौ छियानवे रुपयापये प्रति किलो थी. हालांकि, बीते कारोबारी हफ्ते के मुकाबले सोना-चांदी अब भी सस्ते हैं. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates. com पर जारी ताजा कीमतों से अलग-अलग कैरेट के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. ये सभी भाव टैक्स और मेकिंग चार्ज के पहले के होते हैं. आपको बता दें कि IBJA द्वारा जारी किए गए भाव पूरे देश में सर्वमान्य हैं, किन्तु इसकी कीमतों में वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं होती है. बता दें कि गहने खरीदने के वक़्त सोने या चांदी के रेट टैक्स समेत होने की वजह से अधिक होते हैं.
तुलसी का पौधा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके आलावा तुलसी का उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. तुलसी के अनेकों लाभ की वजह से तुलसी की खेती (Basil Cultivation ) किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होती है, साथ ही इसकी खेती के लिए बहुत कम रखरखाव की आवश्यकता होती है. तो ऐसे में जो भी किसान तुलसी की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए आज हम तुलसी की खेती के बारे में अधिक जानकारी लेकर आये हैं. मिट्टी (soil) तुलसी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की आवश्यकता (Soil Requirement) होती है, साथ ही मिट्टी बलुई और दोमट अच्छी मानी जाती है. वहीँ, मिट्टी का पीएच मान पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए 5. 5-7 के बीच सबसे उपयुक्त होता है. बुवाई (sowing) बीजों के माध्यम से नर्सरी तैयार की जाती (Nursery Is Raised Through Seeds) है, इसलिए बीज को 60 सेंटीमीटर की दूरी पर बोना चाहिए एवं पौधे को 30 से. मी. की दूरी पर लगाना चाहिए. वहीं, अच्छी उपज के लिए बुवाई से पहले मिट्टी में 15 टन गोबर की खाद डालें. तुलसी के बीजों को तैयार क्यारियों में सुविधाजनक स्थान पर बोयें. बीज मानसून से 8 सप्ताह पहले क्यारियों में बोया जाता है. बीजों को 2 सेमी की गहराई पर बोया जाता है. इसके बाद गोबर की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर फैला दी जाती है. स्प्रिंकलर होज़ से सिंचाई की जाती है. रोपाई (Plantation) रोपाई से 15-20 दिन पहले, 2% यूरिया घोल लगाने से स्वस्थ पौध देने में मदद मिलती है. रोपाई अप्रैल के मध्य में की जाती है. इसके अलावा रोपाई से 24 घंटे पहले सीडिंग बेड को पानी दें. सिंचाई (Irrigation) गर्मियों में प्रति माह 3 सिंचाई करें और बरसात के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है. एक वर्ष में 12-15 सिंचाई देनी चाहिए. पहली सिंचाई रोपाई के बाद और दूसरी सिंचाई पौध की खेती के दौरान करनी चाहिए. ध्यान रहे कि 2 सिंचाई अवश्य करें और फिर मौसम के आधार पर शेष सिंचाई करें. अच्छी कमाई कर सकते हैं (Earn Profit) तुलसी की फसल से दो तरह के उत्पाद मिलते हैं, पहला बीज और दूसरा पत्ते. तुलसी के बीजों की बात करें, तो इसे सीधे बाजार में बेचा जा सकता है, जबकि पत्तों से तेल प्राप्त किया जा सकता है. मंडियों में बीज का भाव करीब 150 से 200 रुपये प्रति किलो है. इसके तेल का भाव 700 से 800 रुपये प्रति किलो है. अगर आप इसके आधार पर आंकड़े जुटाते हैं, तो 2 से 2. 25 लाख तक आसानी से कमाया जा सकता है. कितना आता है खर्च (How Much Does It Cost) पौधे लगाने के बाद पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद की जाती है. इसके बाद मिट्टी की नमी के मुताबिक सिंचाई की जाती है. तुलसी का पौधा पूरी तरह तैयार होने में 100 दिन लेता है. जिसके बाद उन्हें काटा जाता है. इसकी तुड़ाई करने के लिए तेज़ धुप वाला दिन सबसे उपयुक्त होता है. 1 बीघा जमीन पर इसकी खेती करने पर करीब 1500 रुपये का खर्च आता है.
तुलसी का पौधा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके आलावा तुलसी का उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. तुलसी के अनेकों लाभ की वजह से तुलसी की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होती है, साथ ही इसकी खेती के लिए बहुत कम रखरखाव की आवश्यकता होती है. तो ऐसे में जो भी किसान तुलसी की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए आज हम तुलसी की खेती के बारे में अधिक जानकारी लेकर आये हैं. मिट्टी तुलसी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है, साथ ही मिट्टी बलुई और दोमट अच्छी मानी जाती है. वहीँ, मिट्टी का पीएच मान पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए पाँच. पाँच-सात के बीच सबसे उपयुक्त होता है. बुवाई बीजों के माध्यम से नर्सरी तैयार की जाती है, इसलिए बीज को साठ सेंटीमीटर की दूरी पर बोना चाहिए एवं पौधे को तीस से. मी. की दूरी पर लगाना चाहिए. वहीं, अच्छी उपज के लिए बुवाई से पहले मिट्टी में पंद्रह टन गोबर की खाद डालें. तुलसी के बीजों को तैयार क्यारियों में सुविधाजनक स्थान पर बोयें. बीज मानसून से आठ सप्ताह पहले क्यारियों में बोया जाता है. बीजों को दो सेमी की गहराई पर बोया जाता है. इसके बाद गोबर की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर फैला दी जाती है. स्प्रिंकलर होज़ से सिंचाई की जाती है. रोपाई रोपाई से पंद्रह-बीस दिन पहले, दो% यूरिया घोल लगाने से स्वस्थ पौध देने में मदद मिलती है. रोपाई अप्रैल के मध्य में की जाती है. इसके अलावा रोपाई से चौबीस घंटाटे पहले सीडिंग बेड को पानी दें. सिंचाई गर्मियों में प्रति माह तीन सिंचाई करें और बरसात के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है. एक वर्ष में बारह-पंद्रह सिंचाई देनी चाहिए. पहली सिंचाई रोपाई के बाद और दूसरी सिंचाई पौध की खेती के दौरान करनी चाहिए. ध्यान रहे कि दो सिंचाई अवश्य करें और फिर मौसम के आधार पर शेष सिंचाई करें. अच्छी कमाई कर सकते हैं तुलसी की फसल से दो तरह के उत्पाद मिलते हैं, पहला बीज और दूसरा पत्ते. तुलसी के बीजों की बात करें, तो इसे सीधे बाजार में बेचा जा सकता है, जबकि पत्तों से तेल प्राप्त किया जा सकता है. मंडियों में बीज का भाव करीब एक सौ पचास से दो सौ रुपयापये प्रति किलो है. इसके तेल का भाव सात सौ से आठ सौ रुपयापये प्रति किलो है. अगर आप इसके आधार पर आंकड़े जुटाते हैं, तो दो से दो. पच्चीस लाख तक आसानी से कमाया जा सकता है. कितना आता है खर्च पौधे लगाने के बाद पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद की जाती है. इसके बाद मिट्टी की नमी के मुताबिक सिंचाई की जाती है. तुलसी का पौधा पूरी तरह तैयार होने में एक सौ दिन लेता है. जिसके बाद उन्हें काटा जाता है. इसकी तुड़ाई करने के लिए तेज़ धुप वाला दिन सबसे उपयुक्त होता है. एक बीघा जमीन पर इसकी खेती करने पर करीब एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये का खर्च आता है.
शिक्षा का आज के जीवन में बहुत महत्व है. शिक्षा का महत्व युगों से चले आ रहा है. कहते हैं कि जितना अधिक हम अपने जीवन में ज्ञान प्राप्त करते हैं उतना ही अधिक हम अपने जीवन में विकास करते हैं. अच्छे पढ़े-लिखे का मतलब केवल यह नहीं होता कि प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त संगठन या संस्था में नौकरी करना. हालांकि इसका यह भी अर्थ होता है कि जीवन में अच्छा और सामाजिक व्यक्ति बनना. कहते हैं कि देश चलाने के लिए और देश की अर्थव्यवस्था समझने के लिए नेताओं का पढ़ा-लिखा होना बेहद जरूरी है. लेकिन हमारे देश में कुछ नेता ऐसे हैं जो कम-पढ़े लिखे होने के बावजूद देश चला रहे हैं. इनमे से कुछ नेताओं ने तो देश के लिए अच्छा काम किया है वहीं कुछ नेता ऐसे हैं जिन्होंने देश का बंटाधार कर दिया है. आज के इस पोस्ट में हम आपको राजनीति जगत के कुछ ऐसे महान लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जो देश चलाने का तो पता नहीं लेकिन पढ़ाई-लिखाई में जीरो थे. बीजेपी की तेजतर्रार नेता और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने केवल 5वीं तक पढ़ाई की है. बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री मेनिका गांधी केवल 12वीं पास हैं. बता दें, मेनिका गांधी संजय गांधी की पत्नी हैं. लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी एक टाइम में बिहार की मुख्यमंत्री हुआ करती थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि इतने बड़े राज्य का जिम्मा लेने वाली पूर्व मुख्यमंत्री कभी स्कूल भी नहीं गयी. राबड़ी देवी ने कोई पढ़ाई नहीं की है. करुणानिधि कर्णाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इन्होने हाई स्कूल करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. मोदी सरकार में खाद्य प्रशंसकरण उद्योग स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने इंटरमीडिएट किया है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने हाई स्कूल के बाद पढ़ाई को अलविदा कह दिया था. अनंत गीते शिवसेना के सांसद और एनडीए सरकार में उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्री हैं. इनकी भी पढ़ाई हाई स्कूल तक हुई है. लालू यादव के छोटे बेटे और आरजेडी सुप्रीमो तेजस्वी यादव केवल 9वीं पास है. वहीं, उनके भाई तेज प्रताप ने 12वीं तक पढ़ाई की है. पढ़ें कम पढ़े-लिखे लोग ये 5 क्षेत्र चुनकर कर कमा सकते हैं अच्छे-खासे पैसे, जानिए कैसे? दोस्तों, उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा. पसंद आने पर लाइक और शेयर करना न भूलें.
शिक्षा का आज के जीवन में बहुत महत्व है. शिक्षा का महत्व युगों से चले आ रहा है. कहते हैं कि जितना अधिक हम अपने जीवन में ज्ञान प्राप्त करते हैं उतना ही अधिक हम अपने जीवन में विकास करते हैं. अच्छे पढ़े-लिखे का मतलब केवल यह नहीं होता कि प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त संगठन या संस्था में नौकरी करना. हालांकि इसका यह भी अर्थ होता है कि जीवन में अच्छा और सामाजिक व्यक्ति बनना. कहते हैं कि देश चलाने के लिए और देश की अर्थव्यवस्था समझने के लिए नेताओं का पढ़ा-लिखा होना बेहद जरूरी है. लेकिन हमारे देश में कुछ नेता ऐसे हैं जो कम-पढ़े लिखे होने के बावजूद देश चला रहे हैं. इनमे से कुछ नेताओं ने तो देश के लिए अच्छा काम किया है वहीं कुछ नेता ऐसे हैं जिन्होंने देश का बंटाधार कर दिया है. आज के इस पोस्ट में हम आपको राजनीति जगत के कुछ ऐसे महान लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जो देश चलाने का तो पता नहीं लेकिन पढ़ाई-लिखाई में जीरो थे. बीजेपी की तेजतर्रार नेता और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने केवल पाँचवीं तक पढ़ाई की है. बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री मेनिका गांधी केवल बारहवीं पास हैं. बता दें, मेनिका गांधी संजय गांधी की पत्नी हैं. लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी एक टाइम में बिहार की मुख्यमंत्री हुआ करती थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि इतने बड़े राज्य का जिम्मा लेने वाली पूर्व मुख्यमंत्री कभी स्कूल भी नहीं गयी. राबड़ी देवी ने कोई पढ़ाई नहीं की है. करुणानिधि कर्णाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इन्होने हाई स्कूल करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. मोदी सरकार में खाद्य प्रशंसकरण उद्योग स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने इंटरमीडिएट किया है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने हाई स्कूल के बाद पढ़ाई को अलविदा कह दिया था. अनंत गीते शिवसेना के सांसद और एनडीए सरकार में उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्री हैं. इनकी भी पढ़ाई हाई स्कूल तक हुई है. लालू यादव के छोटे बेटे और आरजेडी सुप्रीमो तेजस्वी यादव केवल नौवीं पास है. वहीं, उनके भाई तेज प्रताप ने बारहवीं तक पढ़ाई की है. पढ़ें कम पढ़े-लिखे लोग ये पाँच क्षेत्र चुनकर कर कमा सकते हैं अच्छे-खासे पैसे, जानिए कैसे? दोस्तों, उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा. पसंद आने पर लाइक और शेयर करना न भूलें.
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम मंडी के रामनगर में एक हादसा हुआ है। बताया जा रहा है कि यहां एक गैस सिलेंडर फटने के कारण लगी आग में उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो भाइयों का परिवार झुलस गया। घायलों में दो दंपति और उनके छह बच्चे शामिल हैं। हादसा सुबह 9 बजे के आसपास हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कमरे बंद होने के कारण किसी को भी बचाने का मौका नहीं मिला। योगेश कुमार और राकेश कुमार रामनगर में भवानी नामक व्यक्ति के घर पर दो कमरों में किराए पर रहते थे। योगेश ने बताया कि सुबह जब वह खाना खा रहे थे तो एकाएक जोरदार धमाका हुआ और दोनों कमरों में आग लग गई। सर्दी के कारण कमरे बंद थे। इस कारण धमाका इतना जोरदार था कि धमाके के साथ बच्चे सड़क पर आकर गिरे। धमाके की आवाज़ सुनकर आस पास कर लोग वहां की ओर भागे। आस पास के लोगों ने बताया कि उन्होंने बच्चों को उठाया। जिस समय आग लगी राकेश कुमार कमरे के अंदर था। सभी को तुरंत जोनल अस्पताल मंडी लाया गया। यहां पर तुंरत चिकित्सकों उपचार शुरू कर दिया। दोनों भाई योगेश और राकेश मंडी शहर में रेहड़ी फड़ी लगाते हैं। सभी लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम मंडी के रामनगर में एक हादसा हुआ है। बताया जा रहा है कि यहां एक गैस सिलेंडर फटने के कारण लगी आग में उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो भाइयों का परिवार झुलस गया। घायलों में दो दंपति और उनके छह बच्चे शामिल हैं। हादसा सुबह नौ बजे के आसपास हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कमरे बंद होने के कारण किसी को भी बचाने का मौका नहीं मिला। योगेश कुमार और राकेश कुमार रामनगर में भवानी नामक व्यक्ति के घर पर दो कमरों में किराए पर रहते थे। योगेश ने बताया कि सुबह जब वह खाना खा रहे थे तो एकाएक जोरदार धमाका हुआ और दोनों कमरों में आग लग गई। सर्दी के कारण कमरे बंद थे। इस कारण धमाका इतना जोरदार था कि धमाके के साथ बच्चे सड़क पर आकर गिरे। धमाके की आवाज़ सुनकर आस पास कर लोग वहां की ओर भागे। आस पास के लोगों ने बताया कि उन्होंने बच्चों को उठाया। जिस समय आग लगी राकेश कुमार कमरे के अंदर था। सभी को तुरंत जोनल अस्पताल मंडी लाया गया। यहां पर तुंरत चिकित्सकों उपचार शुरू कर दिया। दोनों भाई योगेश और राकेश मंडी शहर में रेहड़ी फड़ी लगाते हैं। सभी लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
Corona Crisis : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोरोना के जिस स्वरूप (स्ट्रेन) ने भारत में कहर ढाया है, वही स्वरूप दुनिया के 12 से ज्यादा देशों में पाया गया है। स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 का स्वरूप बी. 1. 617 पहली बार भारत में मिला। अमेरिका के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ एवं ह्वाइट हाउस के चीफी मेडिकल अधिकारी डॉक्टर एंथनी फौसी का कहना है कि भारत की स्वदेश निर्मित कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन कोविड-19 के 617 प्रकारों को निष्प्रभावी करने में कारगर पाई गई है। महाराष्ट्र में 28 अप्रैल को कोविड से रिकॉर्ड मौतें हुई है। यहां आज रिकॉर्ड 63,309 नए केस सामने आए हैं और 24 घंटे में 985 लोगों की मौत हुई है। जब से महामारी आई है तब से आज एक दिन अधिकतम लोगों की जानें गई हैं। 18 साल से 45 साल तक के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए 28 अप्रैल को शाम 4 बजे से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। मात्र तीन घंटे (शाम 4 बजे से रात 7 बजे तक) में Co-WIN पर 79,65,720 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इसमें ज्यादातर 18-44 आयु वर्ग के हैं। आरएस शर्मा ने ट्वीट किया कि प्रति सेकंड 55,000 हिट्स का ट्रैफिक देखा है। उम्मीद के मुताबिक सिस्टम काम कर रहा है।
Corona Crisis : विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना के जिस स्वरूप ने भारत में कहर ढाया है, वही स्वरूप दुनिया के बारह से ज्यादा देशों में पाया गया है। स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि कोविड-उन्नीस का स्वरूप बी. एक. छः सौ सत्रह पहली बार भारत में मिला। अमेरिका के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ एवं ह्वाइट हाउस के चीफी मेडिकल अधिकारी डॉक्टर एंथनी फौसी का कहना है कि भारत की स्वदेश निर्मित कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन कोविड-उन्नीस के छः सौ सत्रह प्रकारों को निष्प्रभावी करने में कारगर पाई गई है। महाराष्ट्र में अट्ठाईस अप्रैल को कोविड से रिकॉर्ड मौतें हुई है। यहां आज रिकॉर्ड तिरेसठ,तीन सौ नौ नए केस सामने आए हैं और चौबीस घंटाटे में नौ सौ पचासी लोगों की मौत हुई है। जब से महामारी आई है तब से आज एक दिन अधिकतम लोगों की जानें गई हैं। अट्ठारह साल से पैंतालीस साल तक के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए अट्ठाईस अप्रैल को शाम चार बजे से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। मात्र तीन घंटे में Co-WIN पर उन्यासी,पैंसठ,सात सौ बीस रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इसमें ज्यादातर अट्ठारह-चौंतालीस आयु वर्ग के हैं। आरएस शर्मा ने ट्वीट किया कि प्रति सेकंड पचपन,शून्य हिट्स का ट्रैफिक देखा है। उम्मीद के मुताबिक सिस्टम काम कर रहा है।
• सबसे पहले एक मध्यम आकार के बर्तन में 30 ग्राम खसखस की सूखी जड़ व 1 लीटर पानी डालें। • अब मीडियम आंच पर इस काढ़े को उबलने दें। • इसे तब तक उबलने दें जब तक कि पानी आधा न रह जाए और फिर आंच बंद कर दें। • अगर आप कब्ज और सूजन की समस्या से जूझ रहे हैं तो आप इस ड्रिंक में थोड़ा-सा शहद और नींबू का रस मिलाएं। पेट में दर्द, कब्ज, सूजन और सिरदर्द की समस्या रहती हैं तो आधा गिलास यह ड्रिंक पीएं। इससे आपको राहत मिलेगी। वहीं, इसके शीतलन गुण पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। यह आपके तंत्रिका तंत्र को शांत करने करती है और इससे दिमाग में रक्त संचार भी बेहतर होता है। इससे आप स्ट्रेस , डिप्रेशन से बचे रहते हैं। अगर आपको भी नींद नहीं आती या सोते-सोते उठ जाते हैं तो रात को सोने से पहले खसखस की ड्रिंक पीएं। इससे आपको अनिद्रा से छुटकारा मिलेगा। खसखस का पानी पीने से आंतें साफ हो जाती है। यह किडनी को डिटॉक्स करने में भी मददगार है, जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं। एंटीऑक्सीडेंट और क्षारीय गुणों से भरपूर खसखस की ड्रिंक गर्मी के मौसम में बहुत फायदेमंद है। यह शरीर को ठंडा रखती है और इससे बॉडी हाइड्रेट भी रहती है।
• सबसे पहले एक मध्यम आकार के बर्तन में तीस ग्राम खसखस की सूखी जड़ व एक लीटरटर पानी डालें। • अब मीडियम आंच पर इस काढ़े को उबलने दें। • इसे तब तक उबलने दें जब तक कि पानी आधा न रह जाए और फिर आंच बंद कर दें। • अगर आप कब्ज और सूजन की समस्या से जूझ रहे हैं तो आप इस ड्रिंक में थोड़ा-सा शहद और नींबू का रस मिलाएं। पेट में दर्द, कब्ज, सूजन और सिरदर्द की समस्या रहती हैं तो आधा गिलास यह ड्रिंक पीएं। इससे आपको राहत मिलेगी। वहीं, इसके शीतलन गुण पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। यह आपके तंत्रिका तंत्र को शांत करने करती है और इससे दिमाग में रक्त संचार भी बेहतर होता है। इससे आप स्ट्रेस , डिप्रेशन से बचे रहते हैं। अगर आपको भी नींद नहीं आती या सोते-सोते उठ जाते हैं तो रात को सोने से पहले खसखस की ड्रिंक पीएं। इससे आपको अनिद्रा से छुटकारा मिलेगा। खसखस का पानी पीने से आंतें साफ हो जाती है। यह किडनी को डिटॉक्स करने में भी मददगार है, जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं। एंटीऑक्सीडेंट और क्षारीय गुणों से भरपूर खसखस की ड्रिंक गर्मी के मौसम में बहुत फायदेमंद है। यह शरीर को ठंडा रखती है और इससे बॉडी हाइड्रेट भी रहती है।
अनिल एस साक्षी श्रीनगर। कश्मीर के बदलते हालात ने विदेशी आतंकवादियों को परेशान कर दिया है। नतीजतन वे वापस लौटने की इच्छा पकट करने लगे हैं। जैश-ए-मुहम्मद और लश्करे तौयबा के कुछ आतंकवादी वापस लौटने में कामयाब भी रहे हैं। इस बात की पुष्टि अगर पकड़े गए आतंकवादियों के संदेश करते हैं तो रक्षा सूत्र भी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इसके पति जानकारी उपलब्ध नहीं है कि कितने विदेशी आतंकवादी वापस लौटने में कामयाब हुए हैं लेकिन वे इतना दावा जरूर करते हैं कि सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण वापस लौटने वालों की संख्या अधिक नहीं हो सकती है। पाक अधिकृत कश्मीर और घर वापसी का आतंकवादियों का सिलसिला सीजफायर की परिस्स्थितियों के बाद पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से उनकी मदद को रोक दिए जाने तथा आतंकी नेताओं के पति सूचनाएं भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुहैया करवाने के बाद आरंभ हुआ है। हालांकि इसे भी भूला नहीं जा सकता कि कश्मीर में आज विदेशी आतंकवादियों का जमावड़ा लगा हुआ है। अभी तक घर वापसी को लेकर विदेशी आतंकवादी बंटे हुए थे क्योंकि उनमें से अधिकतर कश्मीर को सुरक्षित तथा आरामगाह मानते रहे हैं और अब जबकि सीजफायर के बाद जब भारतीय सुरक्षाबलों के हौंसलें सीमा पार से रूकी मदद और सीमा पार से मिली सूचनाओं के कारण बढ़े तो विदेशी आतंकवादियों के हौंसलें पस्त होने लगे। मजेदार बात उनकी पाकिस्तान वापसी की यह है कि आतंकवादियों के पकड़े गए संदेशों का विश्लेषण करें तो सीजफायर के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी आतंकवादी वापस पाक कब्जे वाले कश्मीर में चले गए हैं। उन्होंने उन दुर्गम रास्तों का इस्तेमाल किया था जहां फिलहाल तारबंदी का कार्य बर्पबारी के कारण नहीं हो पाया है। ऐसे आतंकवादियों के पति जानकारी तभी मिली जब उन्हेंने वायरलेस के माध्यम से कश्मीर में रूके पड़े अपने अन्य साथियों को उन रास्तों की जानकारी गुप्त कोडों में दी जिन्हें वे सुरक्षित वापसी के लिए अति सुरक्षित मानते हैं। हालांकि सुरक्षाधिकारी कहते हैं कि आतंकवादियों की एक छोटी सी संख्या वापस लौटने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ दिनों में वापस लौटने का पयास कितने आतंकवादियों ने किया फिलहाल इसके पति कोई जानकारी उपलब्ध करवाने में सुरक्षाबल अपने आपको असहाय पाते हैं। मगर वे इतनी जानकारी अवश्य देते हैं कि वापस लौटने वालों ने उन रास्तों का इस्तेमाल जरूर किया जहां भयानक सर्दी के कारण हमेशा ही सतर्पता व चौकसी ढीली पड़ जाती है और इस बार वैसे भी सीमाओं पर जारी सीजफायर की परिस्थिति के कारण उनके लिए रास्ते आसान हो चुके हैं। एक सूत्र के मुताबिक, कुछ दिन पहले एलओसी पर जिन पांच आतंकियों को मार गिराया था वे भी वापस लौटने की कोशिश में थे और यह चौंकाने वाला रहस्योदघाटन है कि उनकी घर वापसी के पति सूचना कश्मीरी आतंकवादियों ने दी थी। ऐसा इसलिए है क्योंकि कश्मीरी आतंकी जानते हैं कि अगर विदेशी आतंकी घर वापस लौट गए तो कश्मीर में से आतंकवाद समाप्त हो जाएगा और फिर आतंकवाद के नाम पर खुलने वाली उनकी दुकानें पूरी तरह से बंद हो जाएंगीं। वैसे भी कश्मीरी आतंकवादी ऐसी भूमिकाएं पहले भी निभाते रहे हैं। इतना जरूर है कि सुरक्षाबल इन खबरों से पसन्न हैं कि विदेशी आतंकवादी कश्मीर को छोड़ कर वापस पाकिस्तान तथा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में लौटने के इच्छुक हैं। एक अधिकारी का तो यहां तक कहना थाः'अगर वे वापस जाना चाहते हैं तो उनकी वापसी सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए ताकि अपने गले से बला टल जाए। ` शायद यही कारण है कि वापस लौटने वालों को नजरंअदाज किया जा रहा है और उन्हें रोकने का कोई पयास नहीं हो रहा है।
अनिल एस साक्षी श्रीनगर। कश्मीर के बदलते हालात ने विदेशी आतंकवादियों को परेशान कर दिया है। नतीजतन वे वापस लौटने की इच्छा पकट करने लगे हैं। जैश-ए-मुहम्मद और लश्करे तौयबा के कुछ आतंकवादी वापस लौटने में कामयाब भी रहे हैं। इस बात की पुष्टि अगर पकड़े गए आतंकवादियों के संदेश करते हैं तो रक्षा सूत्र भी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इसके पति जानकारी उपलब्ध नहीं है कि कितने विदेशी आतंकवादी वापस लौटने में कामयाब हुए हैं लेकिन वे इतना दावा जरूर करते हैं कि सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण वापस लौटने वालों की संख्या अधिक नहीं हो सकती है। पाक अधिकृत कश्मीर और घर वापसी का आतंकवादियों का सिलसिला सीजफायर की परिस्स्थितियों के बाद पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से उनकी मदद को रोक दिए जाने तथा आतंकी नेताओं के पति सूचनाएं भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुहैया करवाने के बाद आरंभ हुआ है। हालांकि इसे भी भूला नहीं जा सकता कि कश्मीर में आज विदेशी आतंकवादियों का जमावड़ा लगा हुआ है। अभी तक घर वापसी को लेकर विदेशी आतंकवादी बंटे हुए थे क्योंकि उनमें से अधिकतर कश्मीर को सुरक्षित तथा आरामगाह मानते रहे हैं और अब जबकि सीजफायर के बाद जब भारतीय सुरक्षाबलों के हौंसलें सीमा पार से रूकी मदद और सीमा पार से मिली सूचनाओं के कारण बढ़े तो विदेशी आतंकवादियों के हौंसलें पस्त होने लगे। मजेदार बात उनकी पाकिस्तान वापसी की यह है कि आतंकवादियों के पकड़े गए संदेशों का विश्लेषण करें तो सीजफायर के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी आतंकवादी वापस पाक कब्जे वाले कश्मीर में चले गए हैं। उन्होंने उन दुर्गम रास्तों का इस्तेमाल किया था जहां फिलहाल तारबंदी का कार्य बर्पबारी के कारण नहीं हो पाया है। ऐसे आतंकवादियों के पति जानकारी तभी मिली जब उन्हेंने वायरलेस के माध्यम से कश्मीर में रूके पड़े अपने अन्य साथियों को उन रास्तों की जानकारी गुप्त कोडों में दी जिन्हें वे सुरक्षित वापसी के लिए अति सुरक्षित मानते हैं। हालांकि सुरक्षाधिकारी कहते हैं कि आतंकवादियों की एक छोटी सी संख्या वापस लौटने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ दिनों में वापस लौटने का पयास कितने आतंकवादियों ने किया फिलहाल इसके पति कोई जानकारी उपलब्ध करवाने में सुरक्षाबल अपने आपको असहाय पाते हैं। मगर वे इतनी जानकारी अवश्य देते हैं कि वापस लौटने वालों ने उन रास्तों का इस्तेमाल जरूर किया जहां भयानक सर्दी के कारण हमेशा ही सतर्पता व चौकसी ढीली पड़ जाती है और इस बार वैसे भी सीमाओं पर जारी सीजफायर की परिस्थिति के कारण उनके लिए रास्ते आसान हो चुके हैं। एक सूत्र के मुताबिक, कुछ दिन पहले एलओसी पर जिन पांच आतंकियों को मार गिराया था वे भी वापस लौटने की कोशिश में थे और यह चौंकाने वाला रहस्योदघाटन है कि उनकी घर वापसी के पति सूचना कश्मीरी आतंकवादियों ने दी थी। ऐसा इसलिए है क्योंकि कश्मीरी आतंकी जानते हैं कि अगर विदेशी आतंकी घर वापस लौट गए तो कश्मीर में से आतंकवाद समाप्त हो जाएगा और फिर आतंकवाद के नाम पर खुलने वाली उनकी दुकानें पूरी तरह से बंद हो जाएंगीं। वैसे भी कश्मीरी आतंकवादी ऐसी भूमिकाएं पहले भी निभाते रहे हैं। इतना जरूर है कि सुरक्षाबल इन खबरों से पसन्न हैं कि विदेशी आतंकवादी कश्मीर को छोड़ कर वापस पाकिस्तान तथा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में लौटने के इच्छुक हैं। एक अधिकारी का तो यहां तक कहना थाः'अगर वे वापस जाना चाहते हैं तो उनकी वापसी सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए ताकि अपने गले से बला टल जाए। ` शायद यही कारण है कि वापस लौटने वालों को नजरंअदाज किया जा रहा है और उन्हें रोकने का कोई पयास नहीं हो रहा है।
IPL 2022 के 31वें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स का सामना रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ (LKN vs BLR) मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में है। केएल राहुल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और दोनों टीमों ने पिछले मैच की प्लेइंग XI में कोई बदलाव नहीं किया। आईपीएल में दोनों टीमों के बीच यह पहला मैच है, क्योंकि लखनऊ की टीम का यह डेब्यू सीजन है। आईपीएल के 15वें सीजन में Lucknow Super Giants और Royal Challengers Bangalore ने अभी तक 6-6 मैच खेले हैं और 4-4 जीत दर्ज किये हैं, लेकिन नेट रन रेट के कारण LSG तीसरे और RCB चौथे स्थान पर है।
IPL दो हज़ार बाईस के इकतीसवें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स का सामना रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में है। केएल राहुल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और दोनों टीमों ने पिछले मैच की प्लेइंग XI में कोई बदलाव नहीं किया। आईपीएल में दोनों टीमों के बीच यह पहला मैच है, क्योंकि लखनऊ की टीम का यह डेब्यू सीजन है। आईपीएल के पंद्रहवें सीजन में Lucknow Super Giants और Royal Challengers Bangalore ने अभी तक छः-छः मैच खेले हैं और चार-चार जीत दर्ज किये हैं, लेकिन नेट रन रेट के कारण LSG तीसरे और RCB चौथे स्थान पर है।
निर्देशक अनुराग बासु और अभिनेता रणबीर कपूर की जोड़ी ने 'बर्फी' के बाद 'जग्गा जासूस' से वापसी की है। इस फिल्म को बनने में साढ़े तीन साल का वक्त लगा है। फिल्म की कहानी की बात करें तो यह जग्गा की कहानी है, जो अपने लापता पिता की खोज में है। पिता पुत्र की कहानी होने के साथ-साथ हथियारों की स्मग्लिंग, बागची का सीक्रेट मिशन, मर्डर मिस्ट्री जैसे सब प्लॉट्स भी कहानी से जुड़े हैं। अपनी रोचक कहानी और दर्शक को बांधकर रखने वाली प्रस्तुति की वजह से यह मौजूदा दौर की फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की प्रस्तुति में एडवेंचर के साथ इमोशन को भी अहमियत दी गई है। रणबीर कपूर ने एक बार फिर कमाल के अभिनय का परिचय दिया है। कैटरीना का काम भी अच्छा है। सौरभ शुक्ला, शाश्वत चटर्जी, रजतवा चटर्जी अपने उम्दा अभिनय से जग्गा की जर्नी और फिल्म को खास बना जाते हैं। यह फिल्म बड़ों ही नहीं बच्चों को भी खूब लुभाएगी। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
निर्देशक अनुराग बासु और अभिनेता रणबीर कपूर की जोड़ी ने 'बर्फी' के बाद 'जग्गा जासूस' से वापसी की है। इस फिल्म को बनने में साढ़े तीन साल का वक्त लगा है। फिल्म की कहानी की बात करें तो यह जग्गा की कहानी है, जो अपने लापता पिता की खोज में है। पिता पुत्र की कहानी होने के साथ-साथ हथियारों की स्मग्लिंग, बागची का सीक्रेट मिशन, मर्डर मिस्ट्री जैसे सब प्लॉट्स भी कहानी से जुड़े हैं। अपनी रोचक कहानी और दर्शक को बांधकर रखने वाली प्रस्तुति की वजह से यह मौजूदा दौर की फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की प्रस्तुति में एडवेंचर के साथ इमोशन को भी अहमियत दी गई है। रणबीर कपूर ने एक बार फिर कमाल के अभिनय का परिचय दिया है। कैटरीना का काम भी अच्छा है। सौरभ शुक्ला, शाश्वत चटर्जी, रजतवा चटर्जी अपने उम्दा अभिनय से जग्गा की जर्नी और फिल्म को खास बना जाते हैं। यह फिल्म बड़ों ही नहीं बच्चों को भी खूब लुभाएगी। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अनुषांगिक इकाई झारखंड श्रमिक संघ के केंद्रीय कार्यकारिणी समिति का विस्तार कर दिया है. झामुमो सांसद विजय हांसदा, विधायक रामदास सोरेन और मथुरा प्रसाद महतो संघ के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. इसके अलावा संघ में महासचिव, संयुक्त महासचिव, संगठन सचिव, सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यालय सचिव सहित कार्यकारिणी सदस्य भी नियुक्त हुए हैं. कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या कुल 11 है. झारखंड श्रमिक संघ के अध्यक्ष झामुमो सुप्रीम शिबू सोरेन हैं. बता दें कि बीते 15 जुलाई 2022 को जमशेदपुर स्थित माईकल जॉन ऑडिटोरियम हॉल में झारखंड श्रमिक संघ का 9वां केंद्रीय महाधिवेशन हुआ था. महाधिवेशन में लिए निर्णय के तहत ही आज केंद्रीय कार्यकारिणी समिति का विस्तार किया गया है. समिति के उपाध्यक्ष - घाटशिला विधायक रामदास सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो,
Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा की अनुषांगिक इकाई झारखंड श्रमिक संघ के केंद्रीय कार्यकारिणी समिति का विस्तार कर दिया है. झामुमो सांसद विजय हांसदा, विधायक रामदास सोरेन और मथुरा प्रसाद महतो संघ के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. इसके अलावा संघ में महासचिव, संयुक्त महासचिव, संगठन सचिव, सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यालय सचिव सहित कार्यकारिणी सदस्य भी नियुक्त हुए हैं. कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या कुल ग्यारह है. झारखंड श्रमिक संघ के अध्यक्ष झामुमो सुप्रीम शिबू सोरेन हैं. बता दें कि बीते पंद्रह जुलाई दो हज़ार बाईस को जमशेदपुर स्थित माईकल जॉन ऑडिटोरियम हॉल में झारखंड श्रमिक संघ का नौवां केंद्रीय महाधिवेशन हुआ था. महाधिवेशन में लिए निर्णय के तहत ही आज केंद्रीय कार्यकारिणी समिति का विस्तार किया गया है. समिति के उपाध्यक्ष - घाटशिला विधायक रामदास सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो,
फैशन और स्टाइल के महा मेले बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक का आज आखिरी दिन है। दिग्गज और क्रिएटिव डिजायनर्स की शानदार आउटफिट में अभिनेत्रियों ने ग्लैमर का तड़का लगाते हुए जब रैंप पर वॉक की तो देखने वालों की नजरे उनपर ही टिक गई। दीया मिर्जा को इस दौरान खूबसूरत लहंगे में देखा गया , वहीं गोहर खान ने भी अपनी अदाओं से रैंप पर आग लगा दी। बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने एक बार फिर अपने ट्रेडिशनल लुक से फैंस का दिल चुरा लिया। बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक 2021 के रैंप पर उतरी दीया गोल्डन लहंगे में बेहद कमाल की लग रही थी। संजीव मारवाह के इस ट्रेडिशनल आउटफिट को उन्होंने गजरे के साथ स्टाइल किया। कुंदन ज्वैलरी और डायमंड स्टेटमेंट चूड़ियों ने उनके लुक को कम्पलीट किया। रॉयल एथनिक आउटफिट्स में वह किसी परी से कम नहीं लग रह थी। बॉलीवुड एक्ट्रेस वाणी कपूर के ग्लैमरस अंदाज ने तो शो में तहलका ही मचा दिया। ब्लैक शॉर्ट ड्रेस में वह बेहद ही गॉर्जियस लग रही थी। स्ट्रीक्स प्रोफेशनल एक्स रॉकी स्टार की शो स्टॉपर बनी वाणी कपूर की ब्लैक ऑफ शोल्डर शिमर ड्रेस ने पूरी लाइमलाइट ही लूट ली। उनके नीले रंग के बाल काफी attractive लग रहे थे। एक्ट्रेस गौहर खान की बात करें तो वह एक शॉल के रूप में लिपटे दुपट्टे के साथ मैरून शेड प्रिंटेड लहंगा में कमाल की नजर आई। इस खूबसूरत लहंगे के साथ उन्होंने दुपट्टा को जिस तरह से कैरी किया हुआ था वह काफी रॉयल लग रहा था। ऐसे में उनकी मुस्कान ने तो चार- चांद लगा दिए।
फैशन और स्टाइल के महा मेले बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक का आज आखिरी दिन है। दिग्गज और क्रिएटिव डिजायनर्स की शानदार आउटफिट में अभिनेत्रियों ने ग्लैमर का तड़का लगाते हुए जब रैंप पर वॉक की तो देखने वालों की नजरे उनपर ही टिक गई। दीया मिर्जा को इस दौरान खूबसूरत लहंगे में देखा गया , वहीं गोहर खान ने भी अपनी अदाओं से रैंप पर आग लगा दी। बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने एक बार फिर अपने ट्रेडिशनल लुक से फैंस का दिल चुरा लिया। बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक दो हज़ार इक्कीस के रैंप पर उतरी दीया गोल्डन लहंगे में बेहद कमाल की लग रही थी। संजीव मारवाह के इस ट्रेडिशनल आउटफिट को उन्होंने गजरे के साथ स्टाइल किया। कुंदन ज्वैलरी और डायमंड स्टेटमेंट चूड़ियों ने उनके लुक को कम्पलीट किया। रॉयल एथनिक आउटफिट्स में वह किसी परी से कम नहीं लग रह थी। बॉलीवुड एक्ट्रेस वाणी कपूर के ग्लैमरस अंदाज ने तो शो में तहलका ही मचा दिया। ब्लैक शॉर्ट ड्रेस में वह बेहद ही गॉर्जियस लग रही थी। स्ट्रीक्स प्रोफेशनल एक्स रॉकी स्टार की शो स्टॉपर बनी वाणी कपूर की ब्लैक ऑफ शोल्डर शिमर ड्रेस ने पूरी लाइमलाइट ही लूट ली। उनके नीले रंग के बाल काफी attractive लग रहे थे। एक्ट्रेस गौहर खान की बात करें तो वह एक शॉल के रूप में लिपटे दुपट्टे के साथ मैरून शेड प्रिंटेड लहंगा में कमाल की नजर आई। इस खूबसूरत लहंगे के साथ उन्होंने दुपट्टा को जिस तरह से कैरी किया हुआ था वह काफी रॉयल लग रहा था। ऐसे में उनकी मुस्कान ने तो चार- चांद लगा दिए।
बॉलीवुड से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने खुदकुशी कर ली है। उनका परिवार इस खबर को सुनकर सदमे में है। सुशांत की बहन नीतू सिंह भी अपने भाई के यूं चले जाने से सदमे में है। अब हाल ही में ये पता चला की सुशांत फिल्म 'वंदे भारतम' से बतौर निर्माता आगाज करने वाले थे.
बॉलीवुड से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने खुदकुशी कर ली है। उनका परिवार इस खबर को सुनकर सदमे में है। सुशांत की बहन नीतू सिंह भी अपने भाई के यूं चले जाने से सदमे में है। अब हाल ही में ये पता चला की सुशांत फिल्म 'वंदे भारतम' से बतौर निर्माता आगाज करने वाले थे.
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की फिल्म 'पठान' ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड्स धव्स्त कर दिए हैं. इन दिनों दुनियाभर में SRK का जादू चल रहा है. रिकॉर्ड ब्रेकिंग कमाई के साथ मात्र 5 दिन में 'पठान' ने वर्ल्ड वाइड 542 करोड़ की कमाई कर ली है. 'पठान' ने अपने 5वें दिन में 100 करोड़ से ज्यादा कमाई की है. भारत में फिल्म ने 60. 75 करोड़ नेट दर्ज किया वहीं हिंदी दर्शकों में इसने 58. 50 की कमाई के साथ नये रिकॉर्ड कायम किए हैं. 'पठान' को 5 दिन का एक्सटेंडेड वीकेंड मिला है. 5वें दिन का ओवरसीज ग्रॉस 42 करोड़ है. वहीं रिलीज के चौथे दिन कुल कलेक्शन 112 करोड़ था. भारत में पठान ने पांच दिनों में 250 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. नॉन हॉलीडे पर 'पठान' बॉक्स ऑफिस कलेक्शन भी तेजी से आगे बढ़ा है. केवल 5 दिनों में 250 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली यह सबसे तेज हिंदी फिल्म है. साथ ही 'पठान' एकमात्र ऐसी हिंदी फिल्म है जिसने 5 दिनों के भीतर ऐसा जादू कर दिखाया है. यशराज फिल्म्स के सीईओ अक्षय विधानी कहते हैं, "YRF में, हमें गर्व है कि पठान दुनिया भर में लोगों का मनोरंजन कर रहा है, लोगों को सिनेमाघरों तक खींच रहा है और उन्हें जीवन भर का अनुभव दे रहा है! YRF स्पाई यूनिवर्स की फिल्मों ने भी हर बार ब्लॉकबस्टर दर्ज की है. 'पठान' में देश के सबसे बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम अहम रोल में हैं. पठान से पहले कोई भी हिंदी फिल्म वीकेंड पर इतना कलेक्शन नहीं कर पाई है. ओपनिंग वीकएंड पर 'पठान' हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है.
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की फिल्म 'पठान' ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड्स धव्स्त कर दिए हैं. इन दिनों दुनियाभर में SRK का जादू चल रहा है. रिकॉर्ड ब्रेकिंग कमाई के साथ मात्र पाँच दिन में 'पठान' ने वर्ल्ड वाइड पाँच सौ बयालीस करोड़ की कमाई कर ली है. 'पठान' ने अपने पाँचवें दिन में एक सौ करोड़ से ज्यादा कमाई की है. भारत में फिल्म ने साठ. पचहत्तर करोड़ नेट दर्ज किया वहीं हिंदी दर्शकों में इसने अट्ठावन. पचास की कमाई के साथ नये रिकॉर्ड कायम किए हैं. 'पठान' को पाँच दिन का एक्सटेंडेड वीकेंड मिला है. पाँचवें दिन का ओवरसीज ग्रॉस बयालीस करोड़ है. वहीं रिलीज के चौथे दिन कुल कलेक्शन एक सौ बारह करोड़ था. भारत में पठान ने पांच दिनों में दो सौ पचास करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. नॉन हॉलीडे पर 'पठान' बॉक्स ऑफिस कलेक्शन भी तेजी से आगे बढ़ा है. केवल पाँच दिनों में दो सौ पचास करोड़ क्लब में शामिल होने वाली यह सबसे तेज हिंदी फिल्म है. साथ ही 'पठान' एकमात्र ऐसी हिंदी फिल्म है जिसने पाँच दिनों के भीतर ऐसा जादू कर दिखाया है. यशराज फिल्म्स के सीईओ अक्षय विधानी कहते हैं, "YRF में, हमें गर्व है कि पठान दुनिया भर में लोगों का मनोरंजन कर रहा है, लोगों को सिनेमाघरों तक खींच रहा है और उन्हें जीवन भर का अनुभव दे रहा है! YRF स्पाई यूनिवर्स की फिल्मों ने भी हर बार ब्लॉकबस्टर दर्ज की है. 'पठान' में देश के सबसे बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम अहम रोल में हैं. पठान से पहले कोई भी हिंदी फिल्म वीकेंड पर इतना कलेक्शन नहीं कर पाई है. ओपनिंग वीकएंड पर 'पठान' हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है.
२०४ । आग और आंसू उसे आ जाने तो दीजिए । लेकिन आप मुझे रोकिए टोकिएगा नही । आखिर में उसका बाप हूँ । मुझसे बिना कुछ पूछे-आछे जो जी में आये कर बैठने की उसे हिम्मत कैसे हुई, मैं देखूंगा ! आप आराम से अब सो जाइए । कोई चिन्ता की बात नहीं । - और उन्होंने पीछे को करवट बदल ली । आसमान हल्का और साफ़ हो गया। जैसे उसका बुखार उतर गया हो । हल्की-हल्की साफ़ हवा चल रही थी । ताक पर रखी लालटेन खामोश जल रही थी । रानीजी योंही बोलीं- लेकिन मुझे सकून नही । लल्लनजी को भी मेरी कोई परवाह नहीं रही। वर्ना वह इस तरह मुँह मोड़ने की न सोचता । जाने उसके मन में क्या है ? हाय, मैं कैसे जोऊंगी ? गर्मी की छुट्टियों में वह बिना वहाँ आये पहाड़ चला गया । तभी मुझे खटका हुआ था.... जाने कोई भी उनको बात सुन रहा था कि नहीं, वस, मुंदरी और बदमिया की चूड़ियाँ अलग-अलग स्वरों में झन्न झन्न बज रही थी । रानीजी आप हो बड़बड़ाती-बड़बड़ाती खामोश चिन्तन में डूब गयो । अन्तहीन, खामोश चिन्तन से बढ़कर नोंद का कोई और दुश्मन नहीं । बड़े सरकार को पूरी फ़ौज मोर्चे पर भिड़ गयी थी । सिपहसालार अपने-अपने मोर्चे पर भिडे हुए फ़ौजियों को हुक्म दे रहे थे । और बड़े सरकार दीवानखाने के ओसारे में तखत पर बैठे जोरों से पान चबा रहे थे और फ़र्शो गुड़गुड़ा रहे थे। उनकी चौड़ी पेशानी पर परेशानी को कुछ रेखाएँ दिखायी पड़ रही थीं, रह-रहकर किसी-न-किसी को बुलाकर वह पूछ लेते कि कितना काम हो गया, कितना बाक़ी है । मन्दिर हेडक्वार्टर बना हुआ था। पीपल के पेड़-तले चबूतरे पर बादामी कागज की नेवतेवाली पुरानी बही खोले हुए कारिन्दा बैठा था। इस बहो में उन सबके नाम दर्ज थे, जिनसे किसी भी तरह को राह रस्म बडे सरकार की थी। हर नाम के आगे वह चीज-बस्त भी दर्ज थो, जो बड़े सरकार के यहाँ कुछ पड़ने पर नेवते के रूप में उसके यहाँ से आयो थो । नाम नेवते का था, लेकिन बड़ी सख्ती से यह बंधी हुई चोज-बस्त असामियों से वसूल की जाती यो । उससे ज्यादा हो जाय, तो शाबाश, लेकिन कम हो तो आफ़त । यह बँधेज एक तरह से इस्तभरारी बन्दोबस्त की तरह था । इसमें कमी किसी प्रकार भी न हो सकती थी। हाँ, महाजनी और जमींदारो और रईसों की बात और थी । वे जितना चाहे, नेवते में भेजते थे और साथ ही यह उम्मीद भी रखते थे कि उनके यहाँ भो कुछ पड़ने पर बड़े सरकार के यहाँ से नवते में उतना हो लोटेगा । असामियों के सामने तो लौटने का कोई सवाल हो नेवता देने वालों का तांता बँधा हुआ था। कारिन्दा नाम देवा, नेवते की चीज-चस्त देखता, फिर लाये हुए नेवते को २०६ । आग और आंसू करता । ठोक होने पर मन्दिर की ओर भेज देता । कम होने पर डांटकर वहता - तुम्हारे यहाँ से हमेशा इतना मिलता आया है। इतना ही क्यों ? जाओ, जल्दी पूरा करके लाओ, वर्ना समझोगे ! इस समझने का मतलब हर असामी जानता था। यह बात बड़े सरकार तक पहुँचती थी, खेत तक निकाला जा सकता था, पिटाई भी हो सकती थो, गाली-गलौज को बात तो साधारण । सो भर-सक असामी यह नौबत न आने देते । जैसे भी होता, किसो से माँग चुटकर, कर्जउधार लेकर भी इसे पूरा करते । मन्दिर में कई कमरे नेवतों के सामान रखने के लिए खाली कर दिये गये थे । हर कमरे पर एक आदमी तैनात था । वह सामान लेकर अन्दर रख देता । घी, दूध, दही के लिए एक कमरा, तरकारियों के लिए दूसरा, अनाज के लिए तीसरा, मर-मसालों के लिए चौथा, पत्तल-पुरवों के लिए पांचवा आदि-आदि । सबसे ज्यादा शोर दूध-दही वाले कमरे के सामने था सब ठाक़ोद कर रहे थे कि उनकी कहतरी कहीं टूट या गायब न हो जाय, जैसे दूधदही से कहतरी ही ज्यादा कीमती हो । या शायद इसलिए हो कि दूधदही तो गया ही, कहतरी तो वापस मिलनी है। या यह भी तो मशहूर है कि ग्वाला दूध-दही से भले ही बाज़ आये, लेकिन अपनी दूध पिलाई कहतरी को वह जान के पीछे रखता है। हर कहतरी पर पहचान के लिए तरह-तरह के रङ्ग-बिरङ्गी निशान बने हुए थे और जिन पर निशान नहीं थे, उनकी गरदन में तरह-तरह की रस्सियौ बेंधी हुई थी। फिर भी उन्हें हर था, कि कहतरी कहीं सो न जाय, अदला-बदला न हो जाय । यह मोर्चा पुजारोजी सँभाले हुए थे । बाग में वैद्यत्री डटे हुए थे। सफाई हो चुकी थी । कहने से शामि याना अभी नहीं माया था उत्तर के कोने में बड़े-बड़े बन रहे थे । कस्चे से इसवाई मा गये थे। जरूरत के मुताबिक वे माग और आँसू । २०७ चूल्हे बनवा रहे थे और सर सामान का इन्तजाम कर रहे थे। मिठाइयाँ और नमकीन वगैरह अभी से बनना शुरू हो जायगा । इनारे की जगत पर सौदागर पहलवान अपनी टुकड़ो को लिये बरतनों को सफ़ाई पर जुटा था। छोटे-बड़े सैकड़ों किस्म के बरतनों का ढेर लगा हुआ था । दीवानखाने और ऐशगाह की सफ़ाई-सजावट बेंगा करा रहा था । यहाँ बडे ही नाजुक और टुनुक चीजें थीं, चुने हुए होशियार आदमो इसलिए उसे मिले थे । पटवारी कुछ जवानों के साथ सामान खरीदने कस्बे गया हुआ था । सहन में बोसियों जवान और लड़के झंडी- पताका बनाने में लगे हुए थे । शम्भू एक टुकड़ो लेकर जिले पर गया था। उसे खास-खास चीजें लानी थी । उसे लाडली रंडी को भी पक्का करना था, अफसरों से मिलना था और स्टेशन पर लल्लनजी का स्वागत भी करना था और मुमकिन हो, तो उसी के साथ लौट आना भी था । शम्भू को हर काम में पूरी दिलचस्पी थी । लेकिन सच पूछा जाय, तो वह लल्लनजी से जल्द-से-जल्द मिलने को बेचैन था । वह उससे मिलते ही शकुन्तला माथुर के बारे में पूछना चाहता था, जिसके पीछे-पीछे लल्लनजो युनवर्सिटी से सीधे मसूरी गया था और वहाँ से एक बार के अलावा किसी चिट्ठी मे उसका, बार-बार शम्भू के ताकीद करने पर भी कोई जिक्र न किया था । 'लल्लनजी ने अचानक जो कमीशन में जाने की तय कर ली थी, उसके पोछे शायद, शम्भू को पूरा शक था, शकुन्तला का भी कोई हाथ हो । हो सकता है कि उस आफत की परकाला ने उसे जुल दे दिया हो और वह बेटा एक सच्चे निराश प्रेमी की तरह शहादत का जाम उठा लेने को तैयार हो गये हों। जो भी हो, शम्भू सब बातें जानने को उतावला हो रहा था। गोरो-चिट्टो, हर अंग से सांचे में ढनी शकुन्तला माथुर २०८ । आग और आंसू चमकोली, चंचल आँखें ! यह आँखें क्या थीं, मानो उनमें सवालक पारा भरा हो, जो एक क्षण को भी स्थिर होना हो न जानती थीं। अव्वलन तो उनसे कोई आँख मिलाने की हिम्मत न करता और कहीं कोई जाने या अनजाने उनको जद में आ गया, तो समझ लो गया ! कितनों को उन्होंने शहीद बनाकर छोड़ा, यह किसी से भी मालूम हो सकता था । शकुन्तला एक बहुत बड़े अफसर को लडकी थी । वह कार में युनिवर्सिटी आती थी । उसको राह से विद्यार्थियों की भीड़ घंट जाती थो, जैसे वह कोई रानो हो । हुस्न को शान किसी को देखनी हो, तो वह शकुन्तला को चलते हुए देखे । वह एक बिजनो थो. चमके तो अस चौंधिया जायें और चौंध से आदमी सँभले कि गायब ! मिलाने की भले ही किसी में हिम्मत न हो, वह आँखें इतनी मशहूर हो चुकी थी, कि उन्हें कम-से-कम एक बार देखे बिना कोई भो न रह सकता था। जैसे आगरा जाकर कोई ताज न देखे, वैसे ही युनिवर्सिटी में आकर कोई उसको आँखें न देखे, यह कैसे मुमकिन पर। शम्भू और लल्लनजी ने भी वह आँखें कई बार देखी थीं। दो साल का उनका साथ रहा था। वह अपने पिता के लखनऊ से तबदला होन पर यहाँ आयी थी और एम० ए० के पहले साल मे नाम लिखाया था कितने ही विद्यार्थी तो उसी के कारण अपना विषय बदलकर इतिहास के दर्जे में आ गये थे। उनमें किसी की भी आशा पूरी न हुई थी, यह सम है। लेकिन एक आध्यात्मिक सुख और सन्तोष और गर्व तो उसके दर्जे में बैठने या उसके दर्जे के होने या छुपे-लुके मिलता हो था । शम्भू बनिया था। हर चीज को सोच-समझकर, नाप-जोस कर हो ग्रहण करने को उसको आदत बन गयी थो । कम-से-कम ऐसा ही वह कहना था। लेकिन बात जो दरअसल थी, वह उसके ठिगने कद और छोटे-छोटे बालों और ऐसे छोटे से चेहरे को थी, जिसे विधाता ने कहाँ इस तरह एक हल्को सो ऐंठ दे दी थी कि कभी यह भौहों पर माग और आँसू । २०६ दिखायी दे जाती, तो कभी आँखों पर और कभी नाक पर, तो कभी होंठों पर और कभी ठुड्डो पर और कभी-कभी तो पूरे चेहरे पर वह इस तरह प्रकट हो जाती कि देखनेवाले आँख मूंद लें। उसके बाप बड़े ही दानिशमन्द आदमी थे । उन्होंने शुरू-शुरू में ही जिन्दगी के कुछ बहुत हो नायाब और बेशकीमत नुस्खे शम्भू की छुट्टी में पिला दिये थे । मसलन, उन्होने शम्भू से कहा था कि बेटा, अव्वलन तो बनिये के लडके को जियादा पढ़ने की जरूरत ही नहीं। फिर भी अगर तुम पढ़ना ही चाहते हो, तो जरूर पढ़ो। लेकिन इस बात का धियान तुम्हें बराबर रखना पड़ेगा कि पढ़ना खास काम है और सब बातें नहीं ! रहो - सहो सादगी से, सादा खाओ और सादा पहनो । जैसे भी हो, कम-से-कम खर्च करो । कपड़े कम रखो, ताकि धुलाई का खर्च जियादा न हो । ठोक बात तो यह होगी कि तुम खुद अपने हाथ से अपने कपड़े साफ करो । धोबो का झंझट ही क्यों पाला जाय। अपने हाथ से काम करने की बात ही कुछ और होती है। इससे तबीयत साफ रहती है, सफाई की आदत पड़ती है, और देह में फुर्वी आती है। और हाँ, इन बालों को कभी भी बढ़ने न देना । यही सभी खुराफात को जड़ है। इन्हों से सौक सुरू होता है और फिर ऐसे बढ़ता जाता है, जिसका कहो अन्त नहीं । और फिर छोटे-छोटे बाल रखने के फायदे भी बहुत हैं, सिर हल्का रहता है, दिमाग पर बोझ नहीं पड़ता, तेल का खर्च कम होता है, और कधी करने में वक्त जाया नहीं होता। मामान अपने पास कम-से-कम रखो। इससे चोरी जाने का कोई डर नही रहता । सफ़र में इतना ही सामान लेकर चलो कि कुली की जरूरत न पड़े। सिनेमा देखने से आँखें खराब हो जाती हैं और होटल में खाने से पेट आदि-आदि । और सबसे महत्वपूर्ण काम जो उन्होंने किया था, वह यह कि शम्भू का ब्याह तेरह साल की उम्र में ही खूब धूमधाम से कर दिया था। उसमें उन्हे इतना दहेज मिला था कि जदार में शोर मच गया था। शम्भू को पत्नी, लक्ष्मी, बहुत बड़े घर को बेटी थी, जवान थी और बहुळ २१० । आग और आंगू दो सुन्दर थी। यह कुछ वैसा ही था, जैसे कौवे के गले में सुहारी। लक्ष्मो इतनी सलीकेदार थी कि अपना सारा सौन्दर्य और योवन सदा भारी-भरकम, सुनहले जेवरों और कीमती कपड़ों और लम्बे घूंघट के ढाँके रहती थी । सब उसके शील को प्रसंशा करते । उसने आते ही शम्भू को कुछ इस तरह दबोच लिया कि वह बेचारा जिंदगो-मर के लिए पिस- पिसाकर रह गया । और सबसे अधिक प्रशंसा की बात जो उसने को, वह यह कि दो साल गुजरते गुजरते ही एक बेटा अपनी सास की गोद में डाल दिया। सब निहाल हो उठे । सो, समझदार शम्भू को आफत की परकाला शकुन्तला माथुर में कोई ख़ास दिलचस्पी न हो, तो इसमें आश्चर्य को कोई बात नहीं । फिर भी उसे लल्लनजी में तो दिलचस्पो यो । वह चाहता था कि कुँवारा, बड़े बाप का बेटा और रूप-गुण में लाखों में एक लल्लनजी ज़रूर शकुन्तला माथुर में दिलचस्पी ले । आप अगर पूछें कि इससे शम्भू को क्या लेना-देना था ? तो जवाब में फिर वही आध्यात्मिक सुख, सन्तोष और गर्व की बात दुहरानी पडेगी । लेकिन लल्लन का भी अपना एक जीवन दर्शन था। गुलशन के 'फूलों में हो सैर करना उसे अच्छा लगता था, आसमान के चाँद-सिठारों की ओर हाथ लपकाना उसके वसूलों के खिलाफ़ था । वह ऐसे फूलों को पसन्द करता था, जिन्हें जब चाहे देखे, जब चाहे तोडकर सूंघे या कोट में लगा ले और जब मुरझा जायँ, फेंक दे। वह कोई ऐसी इल्लव पालने के सख्त खिलाफ था, जो उसके गले पड़ जाय और जिन्दगी मुश्किल कर दे । शम्भू ने जब उसे बहुत उकसाया, तो आखिर उसने कहा- तुम तो जानते ही हो, मैं ऐसे पचडों में नहीं पड़ता। पता नही, वपा समझठी है वह अपने को ! ~~भाई, अपने को वह कुछ समझती है, तो इसमें कोई गलतो नहीं करती। भगवान ने उसे वह चीज दो है कि अगर वह अपने को कुछ न समझती, उभो ताज्जुब होता । - तो आखिर में भी तो कुछ हूँ ? - क्यों नहीं, क्यों नहीं ! तभी तो कहता हूँ । लोहा हो लोहे को काटता है। सच कहता हूँ, यार, मुझसे उसको अकड़ नहीं देखी जाती । अगर तुमने उसे सीधा न किया, तो समझ लो कुछ न किया ।- मुझे भरें पर न चढ़ाओ, ऐसी गोलियाँ मैं नहीं खेलता। ऐसी अकड़-फूं को दूर ही से सलाम करता हूँ । - अब मैं तुमसे क्या कहूँ 1.... लेकिन, यार, तुम्हें एक बात शायद मालूम नहीं । उसे भी बता डालो । आग और आंसू । २११ ---क्या फ़ायदा ? जाने ही दो । जब तुम्हें ज़रा भी दिलचस्पी नहीं, तो बात करना ही बेकार है । -~-लेकिन तुम्हारी यह बात गलत है। तुम यह जानते हो, कि मैं हर हसीन चीज में दिलचस्पी रखता हूँ । - दिलचस्पियाँ भी कई तरह की होती है । - गिना डालो । - गिनाना गया है । मैं तो तुम्हारी दिलचस्पी के बारे में कह रहा था। तुम्हारी दिलचस्पी बेहद आसानपसन्द है । - सो तो है । - फिर इसमें तारीफ़ की क्या बात है ? ~-मैंने तारीफ़ चाही ही कब ? -- लेकिन मैं वो चाहता हूँ कि मेरा दोस्त कम-से-कम एक तो सारोफ़ का काम कर डाले । सच कहता हूँ, होरो बन जाओगे ! और फिर यह उतनी मुश्किल नहीं, जितनी तुम समझते हो। भी हूँ ! -यह तुमसे किसने कहा कि मैं इसे मुश्किल समझता हूँ ? --तुमसे तो, यार, बात करना ही मुश्किल है । आ भी हूँ, जा यही तो मेरी फिलासफ़ो है : गुलशन-परस्त हूँ, मगर गुल हो नहीं भजीज
दो सौ चार । आग और आंसू उसे आ जाने तो दीजिए । लेकिन आप मुझे रोकिए टोकिएगा नही । आखिर में उसका बाप हूँ । मुझसे बिना कुछ पूछे-आछे जो जी में आये कर बैठने की उसे हिम्मत कैसे हुई, मैं देखूंगा ! आप आराम से अब सो जाइए । कोई चिन्ता की बात नहीं । - और उन्होंने पीछे को करवट बदल ली । आसमान हल्का और साफ़ हो गया। जैसे उसका बुखार उतर गया हो । हल्की-हल्की साफ़ हवा चल रही थी । ताक पर रखी लालटेन खामोश जल रही थी । रानीजी योंही बोलीं- लेकिन मुझे सकून नही । लल्लनजी को भी मेरी कोई परवाह नहीं रही। वर्ना वह इस तरह मुँह मोड़ने की न सोचता । जाने उसके मन में क्या है ? हाय, मैं कैसे जोऊंगी ? गर्मी की छुट्टियों में वह बिना वहाँ आये पहाड़ चला गया । तभी मुझे खटका हुआ था.... जाने कोई भी उनको बात सुन रहा था कि नहीं, वस, मुंदरी और बदमिया की चूड़ियाँ अलग-अलग स्वरों में झन्न झन्न बज रही थी । रानीजी आप हो बड़बड़ाती-बड़बड़ाती खामोश चिन्तन में डूब गयो । अन्तहीन, खामोश चिन्तन से बढ़कर नोंद का कोई और दुश्मन नहीं । बड़े सरकार को पूरी फ़ौज मोर्चे पर भिड़ गयी थी । सिपहसालार अपने-अपने मोर्चे पर भिडे हुए फ़ौजियों को हुक्म दे रहे थे । और बड़े सरकार दीवानखाने के ओसारे में तखत पर बैठे जोरों से पान चबा रहे थे और फ़र्शो गुड़गुड़ा रहे थे। उनकी चौड़ी पेशानी पर परेशानी को कुछ रेखाएँ दिखायी पड़ रही थीं, रह-रहकर किसी-न-किसी को बुलाकर वह पूछ लेते कि कितना काम हो गया, कितना बाक़ी है । मन्दिर हेडक्वार्टर बना हुआ था। पीपल के पेड़-तले चबूतरे पर बादामी कागज की नेवतेवाली पुरानी बही खोले हुए कारिन्दा बैठा था। इस बहो में उन सबके नाम दर्ज थे, जिनसे किसी भी तरह को राह रस्म बडे सरकार की थी। हर नाम के आगे वह चीज-बस्त भी दर्ज थो, जो बड़े सरकार के यहाँ कुछ पड़ने पर नेवते के रूप में उसके यहाँ से आयो थो । नाम नेवते का था, लेकिन बड़ी सख्ती से यह बंधी हुई चोज-बस्त असामियों से वसूल की जाती यो । उससे ज्यादा हो जाय, तो शाबाश, लेकिन कम हो तो आफ़त । यह बँधेज एक तरह से इस्तभरारी बन्दोबस्त की तरह था । इसमें कमी किसी प्रकार भी न हो सकती थी। हाँ, महाजनी और जमींदारो और रईसों की बात और थी । वे जितना चाहे, नेवते में भेजते थे और साथ ही यह उम्मीद भी रखते थे कि उनके यहाँ भो कुछ पड़ने पर बड़े सरकार के यहाँ से नवते में उतना हो लोटेगा । असामियों के सामने तो लौटने का कोई सवाल हो नेवता देने वालों का तांता बँधा हुआ था। कारिन्दा नाम देवा, नेवते की चीज-चस्त देखता, फिर लाये हुए नेवते को दो सौ छः । आग और आंसू करता । ठोक होने पर मन्दिर की ओर भेज देता । कम होने पर डांटकर वहता - तुम्हारे यहाँ से हमेशा इतना मिलता आया है। इतना ही क्यों ? जाओ, जल्दी पूरा करके लाओ, वर्ना समझोगे ! इस समझने का मतलब हर असामी जानता था। यह बात बड़े सरकार तक पहुँचती थी, खेत तक निकाला जा सकता था, पिटाई भी हो सकती थो, गाली-गलौज को बात तो साधारण । सो भर-सक असामी यह नौबत न आने देते । जैसे भी होता, किसो से माँग चुटकर, कर्जउधार लेकर भी इसे पूरा करते । मन्दिर में कई कमरे नेवतों के सामान रखने के लिए खाली कर दिये गये थे । हर कमरे पर एक आदमी तैनात था । वह सामान लेकर अन्दर रख देता । घी, दूध, दही के लिए एक कमरा, तरकारियों के लिए दूसरा, अनाज के लिए तीसरा, मर-मसालों के लिए चौथा, पत्तल-पुरवों के लिए पांचवा आदि-आदि । सबसे ज्यादा शोर दूध-दही वाले कमरे के सामने था सब ठाक़ोद कर रहे थे कि उनकी कहतरी कहीं टूट या गायब न हो जाय, जैसे दूधदही से कहतरी ही ज्यादा कीमती हो । या शायद इसलिए हो कि दूधदही तो गया ही, कहतरी तो वापस मिलनी है। या यह भी तो मशहूर है कि ग्वाला दूध-दही से भले ही बाज़ आये, लेकिन अपनी दूध पिलाई कहतरी को वह जान के पीछे रखता है। हर कहतरी पर पहचान के लिए तरह-तरह के रङ्ग-बिरङ्गी निशान बने हुए थे और जिन पर निशान नहीं थे, उनकी गरदन में तरह-तरह की रस्सियौ बेंधी हुई थी। फिर भी उन्हें हर था, कि कहतरी कहीं सो न जाय, अदला-बदला न हो जाय । यह मोर्चा पुजारोजी सँभाले हुए थे । बाग में वैद्यत्री डटे हुए थे। सफाई हो चुकी थी । कहने से शामि याना अभी नहीं माया था उत्तर के कोने में बड़े-बड़े बन रहे थे । कस्चे से इसवाई मा गये थे। जरूरत के मुताबिक वे माग और आँसू । दो सौ सात चूल्हे बनवा रहे थे और सर सामान का इन्तजाम कर रहे थे। मिठाइयाँ और नमकीन वगैरह अभी से बनना शुरू हो जायगा । इनारे की जगत पर सौदागर पहलवान अपनी टुकड़ो को लिये बरतनों को सफ़ाई पर जुटा था। छोटे-बड़े सैकड़ों किस्म के बरतनों का ढेर लगा हुआ था । दीवानखाने और ऐशगाह की सफ़ाई-सजावट बेंगा करा रहा था । यहाँ बडे ही नाजुक और टुनुक चीजें थीं, चुने हुए होशियार आदमो इसलिए उसे मिले थे । पटवारी कुछ जवानों के साथ सामान खरीदने कस्बे गया हुआ था । सहन में बोसियों जवान और लड़के झंडी- पताका बनाने में लगे हुए थे । शम्भू एक टुकड़ो लेकर जिले पर गया था। उसे खास-खास चीजें लानी थी । उसे लाडली रंडी को भी पक्का करना था, अफसरों से मिलना था और स्टेशन पर लल्लनजी का स्वागत भी करना था और मुमकिन हो, तो उसी के साथ लौट आना भी था । शम्भू को हर काम में पूरी दिलचस्पी थी । लेकिन सच पूछा जाय, तो वह लल्लनजी से जल्द-से-जल्द मिलने को बेचैन था । वह उससे मिलते ही शकुन्तला माथुर के बारे में पूछना चाहता था, जिसके पीछे-पीछे लल्लनजो युनवर्सिटी से सीधे मसूरी गया था और वहाँ से एक बार के अलावा किसी चिट्ठी मे उसका, बार-बार शम्भू के ताकीद करने पर भी कोई जिक्र न किया था । 'लल्लनजी ने अचानक जो कमीशन में जाने की तय कर ली थी, उसके पोछे शायद, शम्भू को पूरा शक था, शकुन्तला का भी कोई हाथ हो । हो सकता है कि उस आफत की परकाला ने उसे जुल दे दिया हो और वह बेटा एक सच्चे निराश प्रेमी की तरह शहादत का जाम उठा लेने को तैयार हो गये हों। जो भी हो, शम्भू सब बातें जानने को उतावला हो रहा था। गोरो-चिट्टो, हर अंग से सांचे में ढनी शकुन्तला माथुर दो सौ आठ । आग और आंसू चमकोली, चंचल आँखें ! यह आँखें क्या थीं, मानो उनमें सवालक पारा भरा हो, जो एक क्षण को भी स्थिर होना हो न जानती थीं। अव्वलन तो उनसे कोई आँख मिलाने की हिम्मत न करता और कहीं कोई जाने या अनजाने उनको जद में आ गया, तो समझ लो गया ! कितनों को उन्होंने शहीद बनाकर छोड़ा, यह किसी से भी मालूम हो सकता था । शकुन्तला एक बहुत बड़े अफसर को लडकी थी । वह कार में युनिवर्सिटी आती थी । उसको राह से विद्यार्थियों की भीड़ घंट जाती थो, जैसे वह कोई रानो हो । हुस्न को शान किसी को देखनी हो, तो वह शकुन्तला को चलते हुए देखे । वह एक बिजनो थो. चमके तो अस चौंधिया जायें और चौंध से आदमी सँभले कि गायब ! मिलाने की भले ही किसी में हिम्मत न हो, वह आँखें इतनी मशहूर हो चुकी थी, कि उन्हें कम-से-कम एक बार देखे बिना कोई भो न रह सकता था। जैसे आगरा जाकर कोई ताज न देखे, वैसे ही युनिवर्सिटी में आकर कोई उसको आँखें न देखे, यह कैसे मुमकिन पर। शम्भू और लल्लनजी ने भी वह आँखें कई बार देखी थीं। दो साल का उनका साथ रहा था। वह अपने पिता के लखनऊ से तबदला होन पर यहाँ आयी थी और एमशून्य एशून्य के पहले साल मे नाम लिखाया था कितने ही विद्यार्थी तो उसी के कारण अपना विषय बदलकर इतिहास के दर्जे में आ गये थे। उनमें किसी की भी आशा पूरी न हुई थी, यह सम है। लेकिन एक आध्यात्मिक सुख और सन्तोष और गर्व तो उसके दर्जे में बैठने या उसके दर्जे के होने या छुपे-लुके मिलता हो था । शम्भू बनिया था। हर चीज को सोच-समझकर, नाप-जोस कर हो ग्रहण करने को उसको आदत बन गयी थो । कम-से-कम ऐसा ही वह कहना था। लेकिन बात जो दरअसल थी, वह उसके ठिगने कद और छोटे-छोटे बालों और ऐसे छोटे से चेहरे को थी, जिसे विधाता ने कहाँ इस तरह एक हल्को सो ऐंठ दे दी थी कि कभी यह भौहों पर माग और आँसू । दो सौ छः दिखायी दे जाती, तो कभी आँखों पर और कभी नाक पर, तो कभी होंठों पर और कभी ठुड्डो पर और कभी-कभी तो पूरे चेहरे पर वह इस तरह प्रकट हो जाती कि देखनेवाले आँख मूंद लें। उसके बाप बड़े ही दानिशमन्द आदमी थे । उन्होंने शुरू-शुरू में ही जिन्दगी के कुछ बहुत हो नायाब और बेशकीमत नुस्खे शम्भू की छुट्टी में पिला दिये थे । मसलन, उन्होने शम्भू से कहा था कि बेटा, अव्वलन तो बनिये के लडके को जियादा पढ़ने की जरूरत ही नहीं। फिर भी अगर तुम पढ़ना ही चाहते हो, तो जरूर पढ़ो। लेकिन इस बात का धियान तुम्हें बराबर रखना पड़ेगा कि पढ़ना खास काम है और सब बातें नहीं ! रहो - सहो सादगी से, सादा खाओ और सादा पहनो । जैसे भी हो, कम-से-कम खर्च करो । कपड़े कम रखो, ताकि धुलाई का खर्च जियादा न हो । ठोक बात तो यह होगी कि तुम खुद अपने हाथ से अपने कपड़े साफ करो । धोबो का झंझट ही क्यों पाला जाय। अपने हाथ से काम करने की बात ही कुछ और होती है। इससे तबीयत साफ रहती है, सफाई की आदत पड़ती है, और देह में फुर्वी आती है। और हाँ, इन बालों को कभी भी बढ़ने न देना । यही सभी खुराफात को जड़ है। इन्हों से सौक सुरू होता है और फिर ऐसे बढ़ता जाता है, जिसका कहो अन्त नहीं । और फिर छोटे-छोटे बाल रखने के फायदे भी बहुत हैं, सिर हल्का रहता है, दिमाग पर बोझ नहीं पड़ता, तेल का खर्च कम होता है, और कधी करने में वक्त जाया नहीं होता। मामान अपने पास कम-से-कम रखो। इससे चोरी जाने का कोई डर नही रहता । सफ़र में इतना ही सामान लेकर चलो कि कुली की जरूरत न पड़े। सिनेमा देखने से आँखें खराब हो जाती हैं और होटल में खाने से पेट आदि-आदि । और सबसे महत्वपूर्ण काम जो उन्होंने किया था, वह यह कि शम्भू का ब्याह तेरह साल की उम्र में ही खूब धूमधाम से कर दिया था। उसमें उन्हे इतना दहेज मिला था कि जदार में शोर मच गया था। शम्भू को पत्नी, लक्ष्मी, बहुत बड़े घर को बेटी थी, जवान थी और बहुळ दो सौ दस । आग और आंगू दो सुन्दर थी। यह कुछ वैसा ही था, जैसे कौवे के गले में सुहारी। लक्ष्मो इतनी सलीकेदार थी कि अपना सारा सौन्दर्य और योवन सदा भारी-भरकम, सुनहले जेवरों और कीमती कपड़ों और लम्बे घूंघट के ढाँके रहती थी । सब उसके शील को प्रसंशा करते । उसने आते ही शम्भू को कुछ इस तरह दबोच लिया कि वह बेचारा जिंदगो-मर के लिए पिस- पिसाकर रह गया । और सबसे अधिक प्रशंसा की बात जो उसने को, वह यह कि दो साल गुजरते गुजरते ही एक बेटा अपनी सास की गोद में डाल दिया। सब निहाल हो उठे । सो, समझदार शम्भू को आफत की परकाला शकुन्तला माथुर में कोई ख़ास दिलचस्पी न हो, तो इसमें आश्चर्य को कोई बात नहीं । फिर भी उसे लल्लनजी में तो दिलचस्पो यो । वह चाहता था कि कुँवारा, बड़े बाप का बेटा और रूप-गुण में लाखों में एक लल्लनजी ज़रूर शकुन्तला माथुर में दिलचस्पी ले । आप अगर पूछें कि इससे शम्भू को क्या लेना-देना था ? तो जवाब में फिर वही आध्यात्मिक सुख, सन्तोष और गर्व की बात दुहरानी पडेगी । लेकिन लल्लन का भी अपना एक जीवन दर्शन था। गुलशन के 'फूलों में हो सैर करना उसे अच्छा लगता था, आसमान के चाँद-सिठारों की ओर हाथ लपकाना उसके वसूलों के खिलाफ़ था । वह ऐसे फूलों को पसन्द करता था, जिन्हें जब चाहे देखे, जब चाहे तोडकर सूंघे या कोट में लगा ले और जब मुरझा जायँ, फेंक दे। वह कोई ऐसी इल्लव पालने के सख्त खिलाफ था, जो उसके गले पड़ जाय और जिन्दगी मुश्किल कर दे । शम्भू ने जब उसे बहुत उकसाया, तो आखिर उसने कहा- तुम तो जानते ही हो, मैं ऐसे पचडों में नहीं पड़ता। पता नही, वपा समझठी है वह अपने को ! ~~भाई, अपने को वह कुछ समझती है, तो इसमें कोई गलतो नहीं करती। भगवान ने उसे वह चीज दो है कि अगर वह अपने को कुछ न समझती, उभो ताज्जुब होता । - तो आखिर में भी तो कुछ हूँ ? - क्यों नहीं, क्यों नहीं ! तभी तो कहता हूँ । लोहा हो लोहे को काटता है। सच कहता हूँ, यार, मुझसे उसको अकड़ नहीं देखी जाती । अगर तुमने उसे सीधा न किया, तो समझ लो कुछ न किया ।- मुझे भरें पर न चढ़ाओ, ऐसी गोलियाँ मैं नहीं खेलता। ऐसी अकड़-फूं को दूर ही से सलाम करता हूँ । - अब मैं तुमसे क्या कहूँ एक.... लेकिन, यार, तुम्हें एक बात शायद मालूम नहीं । उसे भी बता डालो । आग और आंसू । दो सौ ग्यारह ---क्या फ़ायदा ? जाने ही दो । जब तुम्हें ज़रा भी दिलचस्पी नहीं, तो बात करना ही बेकार है । -~-लेकिन तुम्हारी यह बात गलत है। तुम यह जानते हो, कि मैं हर हसीन चीज में दिलचस्पी रखता हूँ । - दिलचस्पियाँ भी कई तरह की होती है । - गिना डालो । - गिनाना गया है । मैं तो तुम्हारी दिलचस्पी के बारे में कह रहा था। तुम्हारी दिलचस्पी बेहद आसानपसन्द है । - सो तो है । - फिर इसमें तारीफ़ की क्या बात है ? ~-मैंने तारीफ़ चाही ही कब ? -- लेकिन मैं वो चाहता हूँ कि मेरा दोस्त कम-से-कम एक तो सारोफ़ का काम कर डाले । सच कहता हूँ, होरो बन जाओगे ! और फिर यह उतनी मुश्किल नहीं, जितनी तुम समझते हो। भी हूँ ! -यह तुमसे किसने कहा कि मैं इसे मुश्किल समझता हूँ ? --तुमसे तो, यार, बात करना ही मुश्किल है । आ भी हूँ, जा यही तो मेरी फिलासफ़ो है : गुलशन-परस्त हूँ, मगर गुल हो नहीं भजीज
I&B Ministry Twitter Account Hacked: सूचना और प्रसारण मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट को हैक कर लिया गया था। हैकर ने अकाउंट का नाम बदलकर Elon Musk रख दिया था। हालांकि बाद में अकाउंट को Restore कर लिया गया है। हैकर ने अकाउंट का नाम बदल कर Elon Musk रख दिया था। I&B Ministry Twitter Account Hacked:खबरों के अनुसार अकाउंट को हैक करने के बाद उससे 'ग्रेट जॉब' के ट्वीट हो रहे थे। गौरतलब है कि ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले हैकर्स ने मंत्रालय के प्रोफाइल पर एलन मस्क के नाम के साथ मछली की प्रोफाइल फोटो लगा दी थी। बताते चलें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर अकाउंट हैकर्स द्वारा हैक कर लिया गया था। उसके बाद रात 2 बजकर 11 मिनट पर इससे ट्वीट किया गया था। ट्वीट में दावा किया गया था कि 'भारत ने बिटकॉइन को ऑफिशियली कानूनी मान्यता प्रदान कर दी है और सरकार 500 बिटकॉइन खरीदकर लोगों को बांट रही है। वहीं कुछ मिनट बाद यह ट्वीट डिलीट कर दिया गया था।
I&B Ministry Twitter Account Hacked: सूचना और प्रसारण मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट को हैक कर लिया गया था। हैकर ने अकाउंट का नाम बदलकर Elon Musk रख दिया था। हालांकि बाद में अकाउंट को Restore कर लिया गया है। हैकर ने अकाउंट का नाम बदल कर Elon Musk रख दिया था। I&B Ministry Twitter Account Hacked:खबरों के अनुसार अकाउंट को हैक करने के बाद उससे 'ग्रेट जॉब' के ट्वीट हो रहे थे। गौरतलब है कि ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले हैकर्स ने मंत्रालय के प्रोफाइल पर एलन मस्क के नाम के साथ मछली की प्रोफाइल फोटो लगा दी थी। बताते चलें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर अकाउंट हैकर्स द्वारा हैक कर लिया गया था। उसके बाद रात दो बजकर ग्यारह मिनट पर इससे ट्वीट किया गया था। ट्वीट में दावा किया गया था कि 'भारत ने बिटकॉइन को ऑफिशियली कानूनी मान्यता प्रदान कर दी है और सरकार पाँच सौ बिटकॉइन खरीदकर लोगों को बांट रही है। वहीं कुछ मिनट बाद यह ट्वीट डिलीट कर दिया गया था।
स्वतंत्रता दिवस पर सरकार ने 1380 पुलिसकर्मियों की बहादुरी के लिए पदक प्रदान करने का फैसला किया है। Independence Day 2021: देश आजादी का 75वां साल मना रहा है, स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे। उससे पहले सरकार ने 1380 पुलिसकर्मियों की बहादुरी के लिए पदक प्रदान करने का फैसला किया है। जिसमें 628 पुलिसवालों को वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक से नवाजा जाएगा। जबकि 662 जवानों को वीरता पुरस्कार दिया जाएगा। यूपी के जिन अफसरों को राष्ट्रपति पदक मिला है उनमें नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह, सीबीसीआईडी की एसपी गीता सिंह, देवरिया के सब इंस्पेक्टर वाजिद अली खान, प्लाटून कमांडर जगत नारायण मिश्रा का नाम शामिल है। वहीं, प्रदेश के 73 पुलिस कर्मियों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पदक दिया जाएगा। आईपीएस अजय कुमार साहनी, (इस वक्त जौनपुर के एसपी हैं)। आईपीएस बिजेन्द्र पाल राना। आईपीएस अक्षय शर्मा। आईपीएस भूपेंद्र कुमार शर्मा। आईपीएस सुनील नागर। आईपीएस तस्लीम खान। आईपीएस प्रमेश कुमार शुक्ला। आईपीएस पंकज मिश्रा। आईपीएस शैलेंद्र कुमार। वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कमेंडेशन डिस्क की घोषणा कर दी गई है। इसमें 42 प्लेटिनम,114 गोल्ड, 277 सिल्वर डिस्क की घोषणा की गई है। जिसमें डीजी चंद्रप्रकाश, एडीजी बीके मौर्या को प्लेटिनम डिस्क, जबकि एसपी बलरामपुर हेमंत कुटियाल को प्लेटिनम डिस्क, एएसपी एटीएस राहुल श्रीवास्तव को प्लेटिनम डिस्क, एसीपी स्वतंत्र सिंह को भी प्लेटिनम कमेंडेशन डिस्क, लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह और डीआईजी जे रविंद्र गौड़ को गोल्ड डिस्क के लिए नामित किया गया है। जबकि इंस्पेक्टर आलोक पाठक को गोल्ड कमेंडेशन डिस्क, आईजी एटीएस जीके गोस्वामी को सिल्वर कमेंडेशन डिस्क, एडीजी भानु भास्कर को सिल्वर कमेंडेशन डिस्क, जेसीपी एलओ लखनऊ पीयूष मोरडिया को सिल्वर डिस्क से नवाजा जाएगा। जिन 1380 पुलिसकर्मियों का नाम बहादुरी पदक के लिए नामित किया गया है उनमें 6 दिल्ली पुलिस के जवान शामिल हैं। दिल्ली दंगों में शहीद हुए रतन लाल को बहादुरी पदक मिलेगा। घायल अमित शर्मा, अनुज कुमार को भी इस सम्मान से नवाजा जाएगा। बता दें विशिष्ट सेवा के लिए 88 कर्मियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा, जबकि 662 पुलिसकर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक दिया जाएगा। जम्मू कश्मीर पुलिस के 256 कर्मियों को भी इस साल वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 23 जवान भी देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित होंगे। इनमें से 20 आईटीबीपी के ऐसे जवान हैं, जिन्होंने मई-जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प में अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया था। आतंक का पर्याय बने खूंखार अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराने वाले उत्तर प्रदेश के बरेली परिक्षेत्र के आईजी रमित शर्मा के कार्यालय में तैनात उमेश त्यागी को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गृह मंत्रालय भारत सरकार के उत्कृष्ट सेवा पदक से नवाजा जायेगा। उमेश त्यागी को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के उत्कृष्ट सेवा पदक के लिए 2019 में चयनित किया गया था। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, रामपुर, बरेली आदि जनपदों में अपराधियों के लिए यमराज बने उमेश त्यागी ने एक दो नहीं, बल्कि 13 एनकाउंटर किये हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक उमेश त्यागी ने कई खूंखार अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया है। टीम उमेश त्यागी ने उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल के कुख्यात प्रकाश पांडेय गैंग का सफाया करने के साथ ही रामपुर में बाबा हरि गिरि का एनकाउंटर किया। इसी के साथ नरेशा धीमर और सर्वेशा धीमर जैसे इनामी अपराधियों को ढेर किया। नरेशा धीमर एक लाख का इनामी अपराधी था, जिसको कई जिलों की पुलिस सरगर्मी से ढूंढ रही थी। उसे भी टीम उमेश त्यागी ने मार गिराया था। गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से उत्कृष्ट सेवा पदक के लिए उमेश त्यागी का चयन करने पर पुलिस विभाग से जुड़े तमाम वर्दी वालों ने उमेश त्यागी को बधाइयां दी हैं। उत्तर प्रदेश कैडर वर्ष 1995 बैच के पुलिस अधिकारियों में शुमार गौतमबुद्धनगर के प्रथम पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह को स्वतंत्रता दिवस 2021 के अवसर पर पुलिस विभाग में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से अलंकृत किया जा रहा है। जनपद अलीगढ़ के मूल निवासी आलोक सिंह की बतौर एएसपी पहली तैनाती सहारनपुर में हुई थी जहां पर सरसावा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने आतंकियों को पकड़ा था। उस मुठभेड़ में एक निरीक्षक गोली लगने से घायल हो गये थे। इसके अलावा सोनभद्र जिले में नक्सल क्षेत्रों में असाधारण क्षमता व साहस का परिचय देते हुए 3 नक्सलियों को मार गिराया था। पीएसी के जवानों से लूटी हुई राइफल भी बरामद की गयी थी। एसएसपी कानपुर रहते हुये आतंक का पर्याय बन चुके बावरिया गैंग का सफाया किया। बाराबंकी में तैनाती के दौरान नशे का कारोबार करने वाले ड्रग्स माफियाओं पर नकेल कसी। मेरठ में तैनाती के दौरान 3 मर्डर के आरोपी हाजी इजलाल की करोड़ों की सम्पत्ति कुर्क की गयी। वर्ष 2019 में अयोध्या जैसे संवेदनशील मुद्दे के मामले में फैसला आने के समय मेरठ में आईजी रहते हुए उन्होंने दोनों पक्षों में सामंजस्य बनाये रखते हुए शांति व्यवस्था कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इन्हीं साहसी कार्यों के लिये आलोक सिंह पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर को राष्ट्रपति द्वारा द्बारा वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है। आलोक सिह कौशाम्बी, बागपत, बस्ती, सोनभद्र, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बिजनौर, कानपुर, मेरठ के कप्तान रह चुके हैं। इसके अलावा वह लखनऊ में सहायक पुलिस अधीक्षक होते हुए सीओ अलीगंज रहे थे तथा पीएसी की 32वीं बटालियन व 35वीं बटालियन में वह सेनानायक भी रहे हैं। कोरोना की पहली लहर में लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने के साथ प्रवासी व सैकड़ों पलायन करने वाले लोगों को गंतव्य पहुंचवाया था। डायल-112 के जरिए लोगों की मदद की। दूसरी लहर में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करना। लॉ एंड आर्डर की स्थिति को कायम रखना। पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने कोरोना वारियर्स पुलिसकर्मियों व उनके परिवार के लिए विशेष टीकाकरण कैम्प व कोविड अस्पताल की भी व्यवस्था की, जिसके परिणामस्वरूप कोविड फ्रंटलाइन वारियर्स पुलिसकर्मियों का समय से वैक्सीनेशन हुआ व पुलिस परिवार कोरोना महामारी की चपेट में आने से बच गया, उन्होंने पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए डयूटी पर कार्यरत पुलिसकर्मियों के लिए भोजन, मास्क, सेनेटाइजर व फेस शील्ड आदि की व्यवस्था की तथा समय समय पर पुलिसकर्मियों के लिए कोविड टेस्टिंग कैंप का भी आयोजन कराया। आलोक सिह कानपुर व मेरठ रेंज के आईजी भी रह चुके है। उन्हें 26 जनवरी, 2021 को गृहमंत्री का उत्कृष्ट सेवा पदक। वर्ष 2017 में डीजीपी सिल्वर डिस्क। वर्ष 2019 में गोल्ड डिस्क। वर्ष 2021 में प्लेटिनम डिस्क से भी सम्मानित किया जा चुका है। आलोक सिंह द्वारा इटली और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पुलिस ट्रेनिंग भी ली गई है। एयर इंडिया में वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक सुरक्षा निदेशक भी रह चुके हैं। स्वतंत्रता दिवस पर अच्छा काम करने वाले पुलिस कर्मियों, दरोगाओं, थाना प्रभारियों और बड़े बड़े अफसरों को किसी न किसी पुलिस अवार्ड से हर साल नवाजा जाता है। इस साल 15 अगस्त को एक ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर को गृह मंत्रालय ने बेस्ट पुलिस विवेचक अवार्ड के लिए चुना है जिसने एक ब्लाइंड मर्डर के आरोपी को एक बाल के सहारे न सिर्फ सलाखों तक पहुंचाया बल्कि उस दरिंदे को कानून से फांसी की सजा दिलाकर वर्दी का फर्ज निभाया। जी हां, बात कर रहे है थाना शहर कोतवाली बिजनौर में तैनात प्रभारी निरीक्षक राधेश्याम की। राधेश्याम का नाम साल 2020-21 में यूपी की बेस्ट 8 विवेचनाओं में प्रथम स्थान मिला है। 15 अगस्त पर इंस्पेक्टर कोतवाली शहर राधेश्याम को बेस्ट इन्वेस्टिगेशन मेडल अवार्ड से नवाजा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूपी पुलिस को भेजा बेस्ट इन्वेस्टिगेशन मेडल अवार्ड। साल 2019 में रामपुर जिले में मासूम के अपहरण दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में बिजनौर कोतवाली शहर में तैनात इंस्पेक्टर राधेश्याम ने विवेचना की थी। इंस्पेक्टर ने विवेचना कर आरोपी को फांसी की सजा दिलाई थी। बिजनौर पुलिस लाइन्स में परेड के दौरान मिलेगा बेस्ट विवेचना मेडल अवार्ड व पुलिस सराहनीय अवार्ड। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राधेश्याम को बेस्ट विवेचक मेडल के लिए चुना गया है। जोकि कल 15 अगस्त को एसपी द्वारा पुलिस लाइन में परेड के दौरान दिया जाएगा। दरअसल साल 2019 को रामपुर जिले के सिविल लाइन इलाके के कांशीराम कालोनी के रहने वाले शरीफ पुत्र मुन्ना ने 8 मई, 2019 को अपनी 6 साल के मासूम बच्ची की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मासूम की काफी तलाश की, लेकिन कई दिनों तक मासूम का कुछ पता नहीं चला। फिर मासूम बच्ची के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच टीम बनाई और शक के आधार पर कई युवकों को उठाकर पूछताछ की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। फिर ये जांच यूपी पुलिस इंस्पेक्टर राधेश्याम को सौंपी गई। विवेचक इंस्पेक्टर राधेश्याम ने शक के आधार पर वहीं के रहने वाले नाजिल को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो नाजिल ने जो खुलासा किया वो बेहद ही चौंकाने वाला था। नाजिल की निशानदेही पर मासूम बच्ची का सड़ा गला शव बरामद किया गया।
स्वतंत्रता दिवस पर सरकार ने एक हज़ार तीन सौ अस्सी पुलिसकर्मियों की बहादुरी के लिए पदक प्रदान करने का फैसला किया है। Independence Day दो हज़ार इक्कीस: देश आजादी का पचहत्तरवां साल मना रहा है, स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे। उससे पहले सरकार ने एक हज़ार तीन सौ अस्सी पुलिसकर्मियों की बहादुरी के लिए पदक प्रदान करने का फैसला किया है। जिसमें छः सौ अट्ठाईस पुलिसवालों को वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक से नवाजा जाएगा। जबकि छः सौ बासठ जवानों को वीरता पुरस्कार दिया जाएगा। यूपी के जिन अफसरों को राष्ट्रपति पदक मिला है उनमें नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह, सीबीसीआईडी की एसपी गीता सिंह, देवरिया के सब इंस्पेक्टर वाजिद अली खान, प्लाटून कमांडर जगत नारायण मिश्रा का नाम शामिल है। वहीं, प्रदेश के तिहत्तर पुलिस कर्मियों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पदक दिया जाएगा। आईपीएस अजय कुमार साहनी, । आईपीएस बिजेन्द्र पाल राना। आईपीएस अक्षय शर्मा। आईपीएस भूपेंद्र कुमार शर्मा। आईपीएस सुनील नागर। आईपीएस तस्लीम खान। आईपीएस प्रमेश कुमार शुक्ला। आईपीएस पंकज मिश्रा। आईपीएस शैलेंद्र कुमार। वहीं पुलिस महानिदेशक कमेंडेशन डिस्क की घोषणा कर दी गई है। इसमें बयालीस प्लेटिनम,एक सौ चौदह गोल्ड, दो सौ सतहत्तर सिल्वर डिस्क की घोषणा की गई है। जिसमें डीजी चंद्रप्रकाश, एडीजी बीके मौर्या को प्लेटिनम डिस्क, जबकि एसपी बलरामपुर हेमंत कुटियाल को प्लेटिनम डिस्क, एएसपी एटीएस राहुल श्रीवास्तव को प्लेटिनम डिस्क, एसीपी स्वतंत्र सिंह को भी प्लेटिनम कमेंडेशन डिस्क, लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह और डीआईजी जे रविंद्र गौड़ को गोल्ड डिस्क के लिए नामित किया गया है। जबकि इंस्पेक्टर आलोक पाठक को गोल्ड कमेंडेशन डिस्क, आईजी एटीएस जीके गोस्वामी को सिल्वर कमेंडेशन डिस्क, एडीजी भानु भास्कर को सिल्वर कमेंडेशन डिस्क, जेसीपी एलओ लखनऊ पीयूष मोरडिया को सिल्वर डिस्क से नवाजा जाएगा। जिन एक हज़ार तीन सौ अस्सी पुलिसकर्मियों का नाम बहादुरी पदक के लिए नामित किया गया है उनमें छः दिल्ली पुलिस के जवान शामिल हैं। दिल्ली दंगों में शहीद हुए रतन लाल को बहादुरी पदक मिलेगा। घायल अमित शर्मा, अनुज कुमार को भी इस सम्मान से नवाजा जाएगा। बता दें विशिष्ट सेवा के लिए अठासी कर्मियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा, जबकि छः सौ बासठ पुलिसकर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक दिया जाएगा। जम्मू कश्मीर पुलिस के दो सौ छप्पन कर्मियों को भी इस साल वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के तेईस जवान भी देश की आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगांठ पर वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित होंगे। इनमें से बीस आईटीबीपी के ऐसे जवान हैं, जिन्होंने मई-जून दो हज़ार बीस में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प में अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया था। आतंक का पर्याय बने खूंखार अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराने वाले उत्तर प्रदेश के बरेली परिक्षेत्र के आईजी रमित शर्मा के कार्यालय में तैनात उमेश त्यागी को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गृह मंत्रालय भारत सरकार के उत्कृष्ट सेवा पदक से नवाजा जायेगा। उमेश त्यागी को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के उत्कृष्ट सेवा पदक के लिए दो हज़ार उन्नीस में चयनित किया गया था। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, रामपुर, बरेली आदि जनपदों में अपराधियों के लिए यमराज बने उमेश त्यागी ने एक दो नहीं, बल्कि तेरह एनकाउंटर किये हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक उमेश त्यागी ने कई खूंखार अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया है। टीम उमेश त्यागी ने उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल के कुख्यात प्रकाश पांडेय गैंग का सफाया करने के साथ ही रामपुर में बाबा हरि गिरि का एनकाउंटर किया। इसी के साथ नरेशा धीमर और सर्वेशा धीमर जैसे इनामी अपराधियों को ढेर किया। नरेशा धीमर एक लाख का इनामी अपराधी था, जिसको कई जिलों की पुलिस सरगर्मी से ढूंढ रही थी। उसे भी टीम उमेश त्यागी ने मार गिराया था। गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से उत्कृष्ट सेवा पदक के लिए उमेश त्यागी का चयन करने पर पुलिस विभाग से जुड़े तमाम वर्दी वालों ने उमेश त्यागी को बधाइयां दी हैं। उत्तर प्रदेश कैडर वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे बैच के पुलिस अधिकारियों में शुमार गौतमबुद्धनगर के प्रथम पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह को स्वतंत्रता दिवस दो हज़ार इक्कीस के अवसर पर पुलिस विभाग में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से अलंकृत किया जा रहा है। जनपद अलीगढ़ के मूल निवासी आलोक सिंह की बतौर एएसपी पहली तैनाती सहारनपुर में हुई थी जहां पर सरसावा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने आतंकियों को पकड़ा था। उस मुठभेड़ में एक निरीक्षक गोली लगने से घायल हो गये थे। इसके अलावा सोनभद्र जिले में नक्सल क्षेत्रों में असाधारण क्षमता व साहस का परिचय देते हुए तीन नक्सलियों को मार गिराया था। पीएसी के जवानों से लूटी हुई राइफल भी बरामद की गयी थी। एसएसपी कानपुर रहते हुये आतंक का पर्याय बन चुके बावरिया गैंग का सफाया किया। बाराबंकी में तैनाती के दौरान नशे का कारोबार करने वाले ड्रग्स माफियाओं पर नकेल कसी। मेरठ में तैनाती के दौरान तीन मर्डर के आरोपी हाजी इजलाल की करोड़ों की सम्पत्ति कुर्क की गयी। वर्ष दो हज़ार उन्नीस में अयोध्या जैसे संवेदनशील मुद्दे के मामले में फैसला आने के समय मेरठ में आईजी रहते हुए उन्होंने दोनों पक्षों में सामंजस्य बनाये रखते हुए शांति व्यवस्था कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इन्हीं साहसी कार्यों के लिये आलोक सिंह पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर को राष्ट्रपति द्वारा द्बारा वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है। आलोक सिह कौशाम्बी, बागपत, बस्ती, सोनभद्र, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बिजनौर, कानपुर, मेरठ के कप्तान रह चुके हैं। इसके अलावा वह लखनऊ में सहायक पुलिस अधीक्षक होते हुए सीओ अलीगंज रहे थे तथा पीएसी की बत्तीसवीं बटालियन व पैंतीसवीं बटालियन में वह सेनानायक भी रहे हैं। कोरोना की पहली लहर में लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने के साथ प्रवासी व सैकड़ों पलायन करने वाले लोगों को गंतव्य पहुंचवाया था। डायल-एक सौ बारह के जरिए लोगों की मदद की। दूसरी लहर में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करना। लॉ एंड आर्डर की स्थिति को कायम रखना। पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने कोरोना वारियर्स पुलिसकर्मियों व उनके परिवार के लिए विशेष टीकाकरण कैम्प व कोविड अस्पताल की भी व्यवस्था की, जिसके परिणामस्वरूप कोविड फ्रंटलाइन वारियर्स पुलिसकर्मियों का समय से वैक्सीनेशन हुआ व पुलिस परिवार कोरोना महामारी की चपेट में आने से बच गया, उन्होंने पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए डयूटी पर कार्यरत पुलिसकर्मियों के लिए भोजन, मास्क, सेनेटाइजर व फेस शील्ड आदि की व्यवस्था की तथा समय समय पर पुलिसकर्मियों के लिए कोविड टेस्टिंग कैंप का भी आयोजन कराया। आलोक सिह कानपुर व मेरठ रेंज के आईजी भी रह चुके है। उन्हें छब्बीस जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को गृहमंत्री का उत्कृष्ट सेवा पदक। वर्ष दो हज़ार सत्रह में डीजीपी सिल्वर डिस्क। वर्ष दो हज़ार उन्नीस में गोल्ड डिस्क। वर्ष दो हज़ार इक्कीस में प्लेटिनम डिस्क से भी सम्मानित किया जा चुका है। आलोक सिंह द्वारा इटली और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पुलिस ट्रेनिंग भी ली गई है। एयर इंडिया में वर्ष दो हज़ार चौदह से वर्ष दो हज़ार सत्रह तक सुरक्षा निदेशक भी रह चुके हैं। स्वतंत्रता दिवस पर अच्छा काम करने वाले पुलिस कर्मियों, दरोगाओं, थाना प्रभारियों और बड़े बड़े अफसरों को किसी न किसी पुलिस अवार्ड से हर साल नवाजा जाता है। इस साल पंद्रह अगस्त को एक ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर को गृह मंत्रालय ने बेस्ट पुलिस विवेचक अवार्ड के लिए चुना है जिसने एक ब्लाइंड मर्डर के आरोपी को एक बाल के सहारे न सिर्फ सलाखों तक पहुंचाया बल्कि उस दरिंदे को कानून से फांसी की सजा दिलाकर वर्दी का फर्ज निभाया। जी हां, बात कर रहे है थाना शहर कोतवाली बिजनौर में तैनात प्रभारी निरीक्षक राधेश्याम की। राधेश्याम का नाम साल दो हज़ार बीस-इक्कीस में यूपी की बेस्ट आठ विवेचनाओं में प्रथम स्थान मिला है। पंद्रह अगस्त पर इंस्पेक्टर कोतवाली शहर राधेश्याम को बेस्ट इन्वेस्टिगेशन मेडल अवार्ड से नवाजा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूपी पुलिस को भेजा बेस्ट इन्वेस्टिगेशन मेडल अवार्ड। साल दो हज़ार उन्नीस में रामपुर जिले में मासूम के अपहरण दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में बिजनौर कोतवाली शहर में तैनात इंस्पेक्टर राधेश्याम ने विवेचना की थी। इंस्पेक्टर ने विवेचना कर आरोपी को फांसी की सजा दिलाई थी। बिजनौर पुलिस लाइन्स में परेड के दौरान मिलेगा बेस्ट विवेचना मेडल अवार्ड व पुलिस सराहनीय अवार्ड। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राधेश्याम को बेस्ट विवेचक मेडल के लिए चुना गया है। जोकि कल पंद्रह अगस्त को एसपी द्वारा पुलिस लाइन में परेड के दौरान दिया जाएगा। दरअसल साल दो हज़ार उन्नीस को रामपुर जिले के सिविल लाइन इलाके के कांशीराम कालोनी के रहने वाले शरीफ पुत्र मुन्ना ने आठ मई, दो हज़ार उन्नीस को अपनी छः साल के मासूम बच्ची की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मासूम की काफी तलाश की, लेकिन कई दिनों तक मासूम का कुछ पता नहीं चला। फिर मासूम बच्ची के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच टीम बनाई और शक के आधार पर कई युवकों को उठाकर पूछताछ की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। फिर ये जांच यूपी पुलिस इंस्पेक्टर राधेश्याम को सौंपी गई। विवेचक इंस्पेक्टर राधेश्याम ने शक के आधार पर वहीं के रहने वाले नाजिल को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो नाजिल ने जो खुलासा किया वो बेहद ही चौंकाने वाला था। नाजिल की निशानदेही पर मासूम बच्ची का सड़ा गला शव बरामद किया गया।
तीन तलाक पर नया कानून बनने के बाद राजधानी में ट्रिपल तलाक का दूसरा मामला सामने आया है। शाहदरा जिले के गांधी नगर इलाके में दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर शनिवार एक युवक ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल दिया। इसके बाद कोई संबंध नहीं रखने का हवाला देते हुए घर से निकाल दी। पीड़िता की शिकायत पर गांधी नगर थाना पुलिस ने 4 ऑफ द मुस्लिम वूमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) एक्ट-2019 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी पति आरिफ मलिक (22) को हिरासत में ले लिया। जिला पुलिस उपायुक्त मेघना यादव का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, लोनी (गाजियाबाद) निवासी बबली (20) की शादी गांधी नगर निवासी आरिफ मलिक से दिसंबर 2017 में हुई थी। आरोप है कि शादी से पूर्व आरिफ के परिजनों ने उसे एमबीबीएस डॉक्टर बताया था। इसी वजह से परिवार ने दान-दहेज देने के अलावा पांच लाख रुपये कैश दिया। बाद में पता चला कि उसका पति झोलाछाप है। शादी हो जाने के बाद बबली और उसके परिवार ने कुछ नहीं बोला। उधर, आरिफ और उसका परिवार बबली के परिवार से लगातार दहेज की मांग करता रहा। कुछ दिनों से परिवार अब बड़ी कार की डिमांड कर रहा था। परेशान होने के बाद बबली करीब आठ माह पूर्व अपने मायके में रह रही थी। शनिवार को आरिफ ने कॉल कर अपनी ससुराल वालों से बबली को भेजने के लिए कहा। परिवार उसे गांधी नगर ले गया। आरोप है कि वहां पहुंचने पर दोबारा कार की डिमांड की जाने लगी। पीड़िता ने इंकार किया तो शाम करीब 6. 30 बजे आरोपी ने कहा कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वह बबली को तलाक देता है। इसके बाद आरोपी ने तीन तलाक देकर बबली को चले जाने के लिए कह दिया। आरोपी ने कहा कि अब उसका बबली से कोई संबंध भी नहीं है। परिजन बबली को लेकर गांधी नगर थाने पहुंचे, जहां छानबीन के बाद आरोपी आरिफ के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया गया। जिला पुलिस उपायुक्त का कहना है कि फिलहाल पति को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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लंदन : मार्क्स एंड स्पेंसर पर इसके शाकाहारी बिरयानी रैप पर सांस्कृतिक समायोजन का आरोप लगाया गया है। यह बिरयानी रैप, जिसकी कीमत 2. 80 पाउंड है और सुपरमार्केट की नई प्लांट किचन रेंज का हिस्सा है जो मीठे आलू, मसालेदार बासमती चावल, एक प्रकार का अनाज और भुनी हुई लाल मिर्च से बना है। एक शीर्ष शेफ और एक भारतीय रेस्तरां सोशल मीडिया पर इसे अशोभनीय कहा। कुकबुक इंडियन किचन की लेखिका मौनिका गोवर्धन को लिखा "धन्यवाद, लेकिन मैं अपनी बिरयानी को एक कटोरे में चावल के साथ रैप करती हूं। उन्होंने कहा "ज्यादातर जगहों पर मटन या चिकन परोसी जाती है। कई स्तरों पर यह गलत है! बिरयानी को चावल की जरूरत होती है, यह रोटी में नहीं भरी जाती है और इसमें लेटस शामिल नहीं होता है। " उन्होंने कहा कि बिरयानी एक व्यंजन है, स्वाद नहीं। उनकी टिप्पणी पर लंदन के सोहो में एक भारतीय रेस्तरां दार्जिलिंग एक्सप्रेस के एक प्रवक्ता ने ट्वीट किया : "एसओ कई स्तरों पर यह गलत है - आप अपने रैपर @marksandspencer को डिजाइन करने के लिए किसे भुगतान कर रहे हैं? "आपको गंभीरता से अपने selection विदेशी' रैप के चयन पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह बिरयानी नहीं है - आप उस व्यंजन पर कोई शोध करने की जहमत उठाए बिना किसी व्यंजन से उपयुक्त नाम नहीं लेते हैं। " अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने सुपरमार्केट के गलत होने का आरोप लगाया, यह देखते हुए कि रैप को "स्वीट पोटैटो बिरयानी" के रूप में बेचा जा रहा है।
लंदन : मार्क्स एंड स्पेंसर पर इसके शाकाहारी बिरयानी रैप पर सांस्कृतिक समायोजन का आरोप लगाया गया है। यह बिरयानी रैप, जिसकी कीमत दो. अस्सी पाउंड है और सुपरमार्केट की नई प्लांट किचन रेंज का हिस्सा है जो मीठे आलू, मसालेदार बासमती चावल, एक प्रकार का अनाज और भुनी हुई लाल मिर्च से बना है। एक शीर्ष शेफ और एक भारतीय रेस्तरां सोशल मीडिया पर इसे अशोभनीय कहा। कुकबुक इंडियन किचन की लेखिका मौनिका गोवर्धन को लिखा "धन्यवाद, लेकिन मैं अपनी बिरयानी को एक कटोरे में चावल के साथ रैप करती हूं। उन्होंने कहा "ज्यादातर जगहों पर मटन या चिकन परोसी जाती है। कई स्तरों पर यह गलत है! बिरयानी को चावल की जरूरत होती है, यह रोटी में नहीं भरी जाती है और इसमें लेटस शामिल नहीं होता है। " उन्होंने कहा कि बिरयानी एक व्यंजन है, स्वाद नहीं। उनकी टिप्पणी पर लंदन के सोहो में एक भारतीय रेस्तरां दार्जिलिंग एक्सप्रेस के एक प्रवक्ता ने ट्वीट किया : "एसओ कई स्तरों पर यह गलत है - आप अपने रैपर @marksandspencer को डिजाइन करने के लिए किसे भुगतान कर रहे हैं? "आपको गंभीरता से अपने selection विदेशी' रैप के चयन पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह बिरयानी नहीं है - आप उस व्यंजन पर कोई शोध करने की जहमत उठाए बिना किसी व्यंजन से उपयुक्त नाम नहीं लेते हैं। " अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने सुपरमार्केट के गलत होने का आरोप लगाया, यह देखते हुए कि रैप को "स्वीट पोटैटो बिरयानी" के रूप में बेचा जा रहा है।
MNS Leader Ameya Khopkar Thratens On The Legend of Maula Jatt India Release मेकर्स द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट को 23 दिसंबर को देश के सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले ही बखेड़ा खड़ा होता हुआ नजर आ रहा हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। MNS Leader Ameya Khopkar Thratens On The Legend of Maula Jatt India Release: पाकिस्तानी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' पूरी दुनिया में डंका बजा रही हैं। फिल्म की कहानी को हर तरफ सराहना मिली है। फिल्म ने वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है और अब जल्दी ही भारत में भी दस्तक देने वाली है। फिल्म के मेकर्स 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' को 23 दिसंबर को देश के सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले ही बखेड़ा खड़ा हो गया है क्योंकि पाकिस्तानी फिल्म के रिलीज पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक नेता ने धमकी दे डाली है। 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' 13 अक्टूबर को पाकिस्तान के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में फवाद खान और माहिरा खान मुख्य किरदारों में हैं। देश-विदेश में कामयाबी के झंडे गाड़ने के बाद फिल्म भारत में भी रिलीज होने वाली है, लेकिन यह बात महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमेय खोपकर को नागवार गुजरी। शुक्रवार को एक स्टेटमेंट जारी करते हुए अमेय खोपकर ने खुले तौर पर धमकी दे डाली कि उनकी पार्टी एक पाकिस्तानी एक्टर की पाकिस्तानी फिल्म को भारत में रिलीज नहीं होने देगी। पेशे से खुद भी फिल्म निर्माता अमेय खोपकर ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष राज ठाकरे के आदेशानुसार मनसे इस फिल्म को भारत में कहीं भी प्रदर्शित नहीं होने देगी। अमेय खोपकर ने ट्वीट करते हुए कहा, "पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान की पाकिस्तानी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' को भारत में रिलीज करने की योजना है। सबसे ज्यादा गुस्सा दिलाने वाली बात यह है कि एक भारतीय कंपनी इस प्लान को आगे लेकर जा रही है। राज साहब के आदेश के बाद हम इस फिल्म को भारत में कहीं भी रिलीज नहीं होने देंगे। " अमेय खोपकर ने एक अन्य ट्वीट में फवाद खान के फैंस को खरी-खोटी सुनात हुए उन्हें देशद्रोही बताया और फिल्म देखने के लिए पाकिस्तान जाने की बात कही। खोपकर ने लिखा, "फवाद खान के फैंस, देशद्रोही पाकिस्तान जाकर फिल्म देख सकते हैं। " बता दें कि 'द लेजेंड ऑफ मौला जट्ट' पाकिस्तानी फिल्म इतिहास की सबसे ज्यादा बजट वाली फिल्म है। बिलाल लशारी (Bilal Lashari) के निर्देशन में बनी ये फिल्म 1979 में आई पाकिस्तानी क्लासिक फिल्म 'मौला जट' का रीमेक है। फिल्म अब तक पाकिस्तान में 80 करोड़ एवं अन्य देशों में 120 करोड़, यानी कुल 200 करोड़ का बिजनेस कर चुकी है।
MNS Leader Ameya Khopkar Thratens On The Legend of Maula Jatt India Release मेकर्स द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट को तेईस दिसंबर को देश के सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले ही बखेड़ा खड़ा होता हुआ नजर आ रहा हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। MNS Leader Ameya Khopkar Thratens On The Legend of Maula Jatt India Release: पाकिस्तानी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' पूरी दुनिया में डंका बजा रही हैं। फिल्म की कहानी को हर तरफ सराहना मिली है। फिल्म ने वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है और अब जल्दी ही भारत में भी दस्तक देने वाली है। फिल्म के मेकर्स 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' को तेईस दिसंबर को देश के सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले ही बखेड़ा खड़ा हो गया है क्योंकि पाकिस्तानी फिल्म के रिलीज पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक नेता ने धमकी दे डाली है। 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' तेरह अक्टूबर को पाकिस्तान के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में फवाद खान और माहिरा खान मुख्य किरदारों में हैं। देश-विदेश में कामयाबी के झंडे गाड़ने के बाद फिल्म भारत में भी रिलीज होने वाली है, लेकिन यह बात महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता अमेय खोपकर को नागवार गुजरी। शुक्रवार को एक स्टेटमेंट जारी करते हुए अमेय खोपकर ने खुले तौर पर धमकी दे डाली कि उनकी पार्टी एक पाकिस्तानी एक्टर की पाकिस्तानी फिल्म को भारत में रिलीज नहीं होने देगी। पेशे से खुद भी फिल्म निर्माता अमेय खोपकर ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष राज ठाकरे के आदेशानुसार मनसे इस फिल्म को भारत में कहीं भी प्रदर्शित नहीं होने देगी। अमेय खोपकर ने ट्वीट करते हुए कहा, "पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान की पाकिस्तानी फिल्म 'द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट' को भारत में रिलीज करने की योजना है। सबसे ज्यादा गुस्सा दिलाने वाली बात यह है कि एक भारतीय कंपनी इस प्लान को आगे लेकर जा रही है। राज साहब के आदेश के बाद हम इस फिल्म को भारत में कहीं भी रिलीज नहीं होने देंगे। " अमेय खोपकर ने एक अन्य ट्वीट में फवाद खान के फैंस को खरी-खोटी सुनात हुए उन्हें देशद्रोही बताया और फिल्म देखने के लिए पाकिस्तान जाने की बात कही। खोपकर ने लिखा, "फवाद खान के फैंस, देशद्रोही पाकिस्तान जाकर फिल्म देख सकते हैं। " बता दें कि 'द लेजेंड ऑफ मौला जट्ट' पाकिस्तानी फिल्म इतिहास की सबसे ज्यादा बजट वाली फिल्म है। बिलाल लशारी के निर्देशन में बनी ये फिल्म एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में आई पाकिस्तानी क्लासिक फिल्म 'मौला जट' का रीमेक है। फिल्म अब तक पाकिस्तान में अस्सी करोड़ एवं अन्य देशों में एक सौ बीस करोड़, यानी कुल दो सौ करोड़ का बिजनेस कर चुकी है।
पूर्णियाः-07 जून(राजेश कुमार झा) बड़हरा कोठी (रघुवंशनगर ओपी) थाना अंतर्गत अपहरण की घटना का किया गया पर्दाफाश। तीन (03) अपहरणकर्ता को किया गया गिरफ्तार. बताते चलें कि दिनांक-27. 05. 2023 बरहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक अपहरण की घटना को अंजाम दिया गया था. जिस संदर्भ में बड़हरा कोठी थाना कांड संख्या-214/23 दिनांक-27. 05. 23 धारा-363/365 भा द वि दर्ज किया गया. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पूर्णियाॅं आमिर जावेद द्वारा कांड के सफल उदभेदन हेतु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धमदाहा रमेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया. जिसके सदस्य पु0 नि0 सुनील कुमार मंडल,थानाध्यक्ष रघुवंशनगर ओपी धन प्रसाद,स0 अ0 नि0 कमला कांत शर्मा,स0 अ0 नि0 विश्वजीत सिंह एवं अन्य पुलिस बल शामिल थे. गठित पुलिस टीम के द्वारा अनुसंधान के क्रम में मानवीय साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर कांड का सफल उदभेदन करते हुए तीन (03) अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. अनुसंधान के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार दो अभियुक्तों के द्वारा स्वीकार किया कि अपहरण नही किया गया बल्कि जिसका अपहरण का आरोप है. दोनों अपहरणकर्ता एवं अपहृत,तीनो एक चोरों का गिरोह है. उनके द्वारा मोबाइल पर बोले कि सांसद अपने पोते को मारने के लिये 4 लाख में सुपारी दिया है,यदि अपहृत अपने नाना रामबाग वाले के घर से 50 हज़ार चुरा कर देगा तो,4 लाख में आधा हिस्सा देंगे. दोनो ओरलाह आकर अपहृत को ले गए और उनके नाना के घर से 50 हज़ार रुपये और दो लैपटॉप चोरी किये फिर आपस मे बांट लिए. तत्पश्चात अपहृत अपने हिस्से का रुपया लेकर दिल्ली चला गया. खूब मौज-मस्ती किया. और जब रुपया ख़त्म हो गया तो वापस आ गया. बेलोरी में अपने बड़े papa के घर आ गया सूचना मिलने पर उसे 5/6/23 को पकड़ा गया. उसने भी अपना दोष स्वीकार कर लिया.
पूर्णियाः-सात जून बड़हरा कोठी थाना अंतर्गत अपहरण की घटना का किया गया पर्दाफाश। तीन अपहरणकर्ता को किया गया गिरफ्तार. बताते चलें कि दिनांक-सत्ताईस. पाँच. दो हज़ार तेईस बरहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक अपहरण की घटना को अंजाम दिया गया था. जिस संदर्भ में बड़हरा कोठी थाना कांड संख्या-दो सौ चौदह/तेईस दिनांक-सत्ताईस. पाँच. तेईस धारा-तीन सौ तिरेसठ/तीन सौ पैंसठ भा द वि दर्ज किया गया. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पूर्णियाॅं आमिर जावेद द्वारा कांड के सफल उदभेदन हेतु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धमदाहा रमेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया. जिसके सदस्य पुशून्य निशून्य सुनील कुमार मंडल,थानाध्यक्ष रघुवंशनगर ओपी धन प्रसाद,सशून्य अशून्य निशून्य कमला कांत शर्मा,सशून्य अशून्य निशून्य विश्वजीत सिंह एवं अन्य पुलिस बल शामिल थे. गठित पुलिस टीम के द्वारा अनुसंधान के क्रम में मानवीय साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर कांड का सफल उदभेदन करते हुए तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. अनुसंधान के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार दो अभियुक्तों के द्वारा स्वीकार किया कि अपहरण नही किया गया बल्कि जिसका अपहरण का आरोप है. दोनों अपहरणकर्ता एवं अपहृत,तीनो एक चोरों का गिरोह है. उनके द्वारा मोबाइल पर बोले कि सांसद अपने पोते को मारने के लिये चार लाख में सुपारी दिया है,यदि अपहृत अपने नाना रामबाग वाले के घर से पचास हज़ार चुरा कर देगा तो,चार लाख में आधा हिस्सा देंगे. दोनो ओरलाह आकर अपहृत को ले गए और उनके नाना के घर से पचास हज़ार रुपये और दो लैपटॉप चोरी किये फिर आपस मे बांट लिए. तत्पश्चात अपहृत अपने हिस्से का रुपया लेकर दिल्ली चला गया. खूब मौज-मस्ती किया. और जब रुपया ख़त्म हो गया तो वापस आ गया. बेलोरी में अपने बड़े papa के घर आ गया सूचना मिलने पर उसे पाँच जून तेईस को पकड़ा गया. उसने भी अपना दोष स्वीकार कर लिया.
राम की सेना में सुग्रीव के साथ वानर राज बालि और अप्सरा तारा का पुत्र अंगद भी था। राम और रावण युद्ध के पूर्व भगवान श्रीराम ने अंगद को अपना दूत बनाकर लंका भेजा था। लेकिन सवाल यह उठता है कि हनुमानजी के रहते हुए अंगद को क्यों श्रीराम ने दूत बनाकर भेजा? दरअसल, जब प्रभु श्रीराम लंका पहुंच गए तब उन्होंने रावण के पास अपना दूत भेजने का विचार किया। सभा में सभी ने प्रस्ताव किया कि हनुमानजी को ही दूत बनाकर भेजना चाहिए। लेकिन रामजी ने यह कहा कि अगर रावण के पास फिर से हनुमानजी को भेजा गया तो यह संदेश जाएगा कि राम की सेना में अकेले हनुमान ही महावीर हैं। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति को दूत बनाकर भेजा जाना चहिए जो हनुमान की तरह पराक्रमी और बुद्धिमान हो। ऐसे में प्रभु श्रीराम की नजर अंगद पर जा टिकी। प्रभु श्रीराम ने अंगद से कहा कि हे अंगद! रावण के द्वार जाओ। कुछ सुलह हो जाए, उनके और हमारे विचारों में एकता आ जाए, जाओ तुम उनको शिक्षा दो। ताकी युद्ध ना हो। . . . अंगद ने भी प्रभु श्रीराम के द्वारा सौंपे गए उत्तरदायित्व को बखूबी संभाला। रावण की सभा में अंगद : जब अंगद रावण की सभा में पहुंचे तो वहां नाना प्रकार के वैज्ञानिक भी विराजमान थे, वण और उनके सभी पुत्र विराजमान थे। रावण ने भारी सभा में अंगद का अपमान किया तो अंगद ने भी रावण को खूब खरी खोटी सुनाई जिसके चलते रावण आगबबूला हो गया। रावण ने कहा कि यह क्या उच्चारण कर रहा है? यह कटु उच्चारण कर रहा है। इस मूर्ख वानर को पकड़ लो। तब अंगद ने कहा कि मैं प्राण की एक क्रिया निश्चित कर रहा हूं, यदि चरित्र की उज्ज्वलता है तो मेरा यह पग है इस पग को यदि कोई एक क्षण भी अपने स्थान से दूर कर देगा तो मैं उस समय में माता सीता को त्याग करके राम को अयोध्या ले जाऊंगा। अंगद ने प्राण की क्रिया की और उनका शरीर विशाल एवं बलिष्ठ बन गया। तब उन्होंने भूमि पर अपना पैर स्थिर कर दिया। राजसभा में कोई ऐसा बलिष्ठ नहीं था जो उसके पग को एक क्षण भर भी अपनी स्थिति से दूर कर सके। अंगद का पग जब एक क्षण भर दूर नहीं हुआ तो रावण उस समय स्वतः चला परन्तु रावण के आते ही उन्होंने कहा कि यह अधिराज है, अधिराजों से पग उठवाना सुन्दर नहीं है। उन्होंने अपने पग को अपनी स्थली में नियुक्त कर दिया और कहा कि हे रावण! तुम्हें मेरे चरणों को स्पर्श करना निरर्थक है। यदि तुम राम के चरणों को स्पर्श करो तो तुम्हारा कल्याण हो सकता है। रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया। सरल भाषा में अंत में रावण जब खुद अंगद के पांव उठाने आया तो अंगद ने कहा कि मेरे पांव क्यों पकड़ते हो पकड़ना है तो मेरे स्वामी राम के चरण पकड़ लो वह दयालु और शरणागतवत्सल हैं। उनकी शरण में जाओ तो प्राण बच जाएंगे अन्यथा युद्घ में बंधु-बांधवों समेत मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे। यह सुनकर रावण ने अपनी इज्जत बचाने में ही अपनी भलाई समझी। गोस्वामी तुलसीदास कृत महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में बालि पुत्र अंगद रावण की सभा में रावण को सीख देते हुए बताते हैं कि कौन-से ऐसे 14 दुर्गुण है जिसके होने से मनुष्य मृतक के समान माना जाता है। उक्त चौपाई में उन्हीं चौदह गुणों की चर्चा की गई है।
राम की सेना में सुग्रीव के साथ वानर राज बालि और अप्सरा तारा का पुत्र अंगद भी था। राम और रावण युद्ध के पूर्व भगवान श्रीराम ने अंगद को अपना दूत बनाकर लंका भेजा था। लेकिन सवाल यह उठता है कि हनुमानजी के रहते हुए अंगद को क्यों श्रीराम ने दूत बनाकर भेजा? दरअसल, जब प्रभु श्रीराम लंका पहुंच गए तब उन्होंने रावण के पास अपना दूत भेजने का विचार किया। सभा में सभी ने प्रस्ताव किया कि हनुमानजी को ही दूत बनाकर भेजना चाहिए। लेकिन रामजी ने यह कहा कि अगर रावण के पास फिर से हनुमानजी को भेजा गया तो यह संदेश जाएगा कि राम की सेना में अकेले हनुमान ही महावीर हैं। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति को दूत बनाकर भेजा जाना चहिए जो हनुमान की तरह पराक्रमी और बुद्धिमान हो। ऐसे में प्रभु श्रीराम की नजर अंगद पर जा टिकी। प्रभु श्रीराम ने अंगद से कहा कि हे अंगद! रावण के द्वार जाओ। कुछ सुलह हो जाए, उनके और हमारे विचारों में एकता आ जाए, जाओ तुम उनको शिक्षा दो। ताकी युद्ध ना हो। . . . अंगद ने भी प्रभु श्रीराम के द्वारा सौंपे गए उत्तरदायित्व को बखूबी संभाला। रावण की सभा में अंगद : जब अंगद रावण की सभा में पहुंचे तो वहां नाना प्रकार के वैज्ञानिक भी विराजमान थे, वण और उनके सभी पुत्र विराजमान थे। रावण ने भारी सभा में अंगद का अपमान किया तो अंगद ने भी रावण को खूब खरी खोटी सुनाई जिसके चलते रावण आगबबूला हो गया। रावण ने कहा कि यह क्या उच्चारण कर रहा है? यह कटु उच्चारण कर रहा है। इस मूर्ख वानर को पकड़ लो। तब अंगद ने कहा कि मैं प्राण की एक क्रिया निश्चित कर रहा हूं, यदि चरित्र की उज्ज्वलता है तो मेरा यह पग है इस पग को यदि कोई एक क्षण भी अपने स्थान से दूर कर देगा तो मैं उस समय में माता सीता को त्याग करके राम को अयोध्या ले जाऊंगा। अंगद ने प्राण की क्रिया की और उनका शरीर विशाल एवं बलिष्ठ बन गया। तब उन्होंने भूमि पर अपना पैर स्थिर कर दिया। राजसभा में कोई ऐसा बलिष्ठ नहीं था जो उसके पग को एक क्षण भर भी अपनी स्थिति से दूर कर सके। अंगद का पग जब एक क्षण भर दूर नहीं हुआ तो रावण उस समय स्वतः चला परन्तु रावण के आते ही उन्होंने कहा कि यह अधिराज है, अधिराजों से पग उठवाना सुन्दर नहीं है। उन्होंने अपने पग को अपनी स्थली में नियुक्त कर दिया और कहा कि हे रावण! तुम्हें मेरे चरणों को स्पर्श करना निरर्थक है। यदि तुम राम के चरणों को स्पर्श करो तो तुम्हारा कल्याण हो सकता है। रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया। सरल भाषा में अंत में रावण जब खुद अंगद के पांव उठाने आया तो अंगद ने कहा कि मेरे पांव क्यों पकड़ते हो पकड़ना है तो मेरे स्वामी राम के चरण पकड़ लो वह दयालु और शरणागतवत्सल हैं। उनकी शरण में जाओ तो प्राण बच जाएंगे अन्यथा युद्घ में बंधु-बांधवों समेत मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे। यह सुनकर रावण ने अपनी इज्जत बचाने में ही अपनी भलाई समझी। गोस्वामी तुलसीदास कृत महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में बालि पुत्र अंगद रावण की सभा में रावण को सीख देते हुए बताते हैं कि कौन-से ऐसे चौदह दुर्गुण है जिसके होने से मनुष्य मृतक के समान माना जाता है। उक्त चौपाई में उन्हीं चौदह गुणों की चर्चा की गई है।
मध्यप्रदेश में कैबिनेट का विस्तार हो गया है। शिवराज की टीम में दो मंत्री शामिल किए गए। राजभवन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत मंत्री पद की शपथ दिलाई। दोनों मंत्रियों के शपथ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस राजभवन में मौजूद रहे। कैबिनेट में अब भी 4 पद खाली बचे हैं। उपचुनाव के परिणाम 10 नवंबर को आए थे। इसके बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की चार दौर की बैठकें हुई। सूत्रों ने बताया कि 1 जनवरी को राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति मिली थी। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया।
मध्यप्रदेश में कैबिनेट का विस्तार हो गया है। शिवराज की टीम में दो मंत्री शामिल किए गए। राजभवन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत मंत्री पद की शपथ दिलाई। दोनों मंत्रियों के शपथ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस राजभवन में मौजूद रहे। कैबिनेट में अब भी चार पद खाली बचे हैं। उपचुनाव के परिणाम दस नवंबर को आए थे। इसके बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की चार दौर की बैठकें हुई। सूत्रों ने बताया कि एक जनवरी को राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति मिली थी। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया।
Jaisalmer: जैसलमेर विधानसभा में जैसलमेर प्रिमियर लीग के नाम से क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन होने जा रहा है। इस प्रतियोगिता में 218 क्रिकेट की टीम हिस्सा लेंगी। प्रतियोगिता का उद्घाटन सोमवार की शाम को फतेहगढ़ में हुआ। जैसलमेर प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता के पहले चरण का वकायदा शुरुआत भाजपा जिलाध्यक्ष चन्द्रप्रकाश शारदा की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शारदा ने बोला कि राष्ट्र के यशस्वी पीएम मोदी के युवाओं को समृद्ध बनाने हेतु विजन पर काम रहे हैं,आज़ादी के अमृत महोत्सव पर जैसलमेर के बीजेपी नेता और समाजसेवी पवनकुमार सिंह द्वारा यह आयोजन करवाया जा रहा है, जो युवाओं के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने आयोजकों को शुभकामना देते हुए खिलाड़ियो से खेल भावना से खेलने हेतु अनुरोध किया। आयोजक पवनकुमार सिंह भाटी ने संबोधित करते हुए बोला कि जैसलमेर के युवाओं को खेल में आगे बढ़ाने हेतु वे मिशन पर कार्य कर रहै है। यह आयोजन उसी की एक कड़ी हैं ,भविष्य में और कोशिश किए जाएँगे. उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव एवं हिंदुस्तान के यशस्वी प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नौ वर्ष के सुशासन से प्रभावित होकर इस प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं,इस प्रतियोगिता मे जैसलमेर विधानसभा कि 218 टीम भाग ले रही हैं। जैसलमेर खेल के इतिहास मे सबसे बड़ा आयोजन होने जा रहा है, प्रतियोगिता के प्रथम चरण पंचायत स्तर पर खेला जाएगा, द्वितीय चरण जैसलमेर शहीद पूनम सिंह स्टेडियम मे आयोजित होगा,इस प्रतियोगिता का समाप्ति कार्यक्रम 19 जून को होगा। पवन कुमार सिंह भाटी ने अतिथियों, खिलाड़ियों और दर्शकों का कार्यक्रम में उपस्तिथित रहने के लिए आभार जताया। कार्यक्रम मे वरिष्ठ मेहमान के रूप मे सवाई सिंह गोगली महा मंत्री भाजपा,पूर्व प्रधान सम चूतरा राम जी, मनोहर सिंह दामोंदरा पूर्व अध्यक्ष युवा मोर्चा एवं बीजेपी नेता ,युवा मोर्चा अध्यक्ष उदय सिंह,अध्यक्ष खेल प्रकोष्ठ एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज़िला फुटबॉल संघ मनोहर सिंह कुंडा ने कार्यक्रम मे शिरकत की अन्य गणमान्य नागरिकगन सहित क्षेत्र के सैकड़ों खिलाड़ी मौजूद रहे।
Jaisalmer: जैसलमेर विधानसभा में जैसलमेर प्रिमियर लीग के नाम से क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन होने जा रहा है। इस प्रतियोगिता में दो सौ अट्ठारह क्रिकेट की टीम हिस्सा लेंगी। प्रतियोगिता का उद्घाटन सोमवार की शाम को फतेहगढ़ में हुआ। जैसलमेर प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता के पहले चरण का वकायदा शुरुआत भाजपा जिलाध्यक्ष चन्द्रप्रकाश शारदा की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शारदा ने बोला कि राष्ट्र के यशस्वी पीएम मोदी के युवाओं को समृद्ध बनाने हेतु विजन पर काम रहे हैं,आज़ादी के अमृत महोत्सव पर जैसलमेर के बीजेपी नेता और समाजसेवी पवनकुमार सिंह द्वारा यह आयोजन करवाया जा रहा है, जो युवाओं के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने आयोजकों को शुभकामना देते हुए खिलाड़ियो से खेल भावना से खेलने हेतु अनुरोध किया। आयोजक पवनकुमार सिंह भाटी ने संबोधित करते हुए बोला कि जैसलमेर के युवाओं को खेल में आगे बढ़ाने हेतु वे मिशन पर कार्य कर रहै है। यह आयोजन उसी की एक कड़ी हैं ,भविष्य में और कोशिश किए जाएँगे. उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव एवं हिंदुस्तान के यशस्वी प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नौ वर्ष के सुशासन से प्रभावित होकर इस प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं,इस प्रतियोगिता मे जैसलमेर विधानसभा कि दो सौ अट्ठारह टीम भाग ले रही हैं। जैसलमेर खेल के इतिहास मे सबसे बड़ा आयोजन होने जा रहा है, प्रतियोगिता के प्रथम चरण पंचायत स्तर पर खेला जाएगा, द्वितीय चरण जैसलमेर शहीद पूनम सिंह स्टेडियम मे आयोजित होगा,इस प्रतियोगिता का समाप्ति कार्यक्रम उन्नीस जून को होगा। पवन कुमार सिंह भाटी ने अतिथियों, खिलाड़ियों और दर्शकों का कार्यक्रम में उपस्तिथित रहने के लिए आभार जताया। कार्यक्रम मे वरिष्ठ मेहमान के रूप मे सवाई सिंह गोगली महा मंत्री भाजपा,पूर्व प्रधान सम चूतरा राम जी, मनोहर सिंह दामोंदरा पूर्व अध्यक्ष युवा मोर्चा एवं बीजेपी नेता ,युवा मोर्चा अध्यक्ष उदय सिंह,अध्यक्ष खेल प्रकोष्ठ एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज़िला फुटबॉल संघ मनोहर सिंह कुंडा ने कार्यक्रम मे शिरकत की अन्य गणमान्य नागरिकगन सहित क्षेत्र के सैकड़ों खिलाड़ी मौजूद रहे।
बालों को पेंट करने के लिए आजकल सुबह धोने के रूप में प्राकृतिक बन गया। और कुछ महिलाएं पहले से ही प्राकृतिक रंग में खुद को याद रखती हैं, बालों को पेंट करने के साधनों का आशीर्वाद अब बहुत अधिक है। सच्चाई एक चुनना है - यह बहुत मुश्किल है। प्राकृतिक बालों के रंग होते हैं (उदाहरण के लिए, हेन्ना), लेकिन उनके पास सीमित संख्या में रंग होते हैं, अमोनिया के साथ पेंट होते हैं, लेकिन वे बालों को खराब करते हैं, और कोई अमोनिया नहीं होता है, लेकिन वे बालों को और भी खराब करते हैं। मंचों पर आप अक्सर इस नाम के साथ एक विषय पा सकते हैंः "अच्छे बाल रंग की सलाह दें"। इस विषय को पढ़ने के बाद, आप शायद ही कभी अपने आप को निर्विवाद निष्कर्ष निकाल सकते हैं, कुछ महिलाएं एक ब्रांड की प्रशंसा करती हैं, अन्य - अन्य, और दूसरों को सलाह दी जाती है कि वे खुद को मूर्ख न करें और सैलून में जाएं, जहां वे सबसे अच्छे पेशेवर बाल डाई पेंट करेंगे। बाल डाई कैसे चुनें? यह निर्धारित करने के लिए कि आपके बालों को रंग देने के लिए कौन सा रंग सबसे अच्छा है, आपको यह जानना होगा कि तीन प्रकार के बाल रंग हैंः - पहले स्तर के लिए बालों के रंग - बालों को टिनटिंग के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे पेंट अस्थिर हैं, और, एक नियम के रूप में, वे पानी के साथ 6-8 संपर्कों के बाद धोए जाते हैं। ये पेंट सबसे सुरक्षित हैं, उनमें अमोनिया और हाइड्रोजन पेरोक्साइड नहीं होता है - यानी बालों के लिए हानिकारक पदार्थ होते हैं; - दूसरे स्तर के बाल रंग - आपको बालों के रंग को पहले स्तर के रंगों से थोड़ा लंबा रखने की अनुमति देता है, लेकिन अंत में वे सब धोए जाते हैं। इन पेंट्स में हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है, जो पेंट को 2 महीने तक धोने की अनुमति नहीं देता है; - तीसरे स्तर के बालों के रंग - लगातार पेंट्स, रंगे हुए बालों पर प्रभाव तब तक बना रहता है जब तक वे पुनर्निर्मित या कट नहीं होते। लेकिन ऐसे पेंट्स के लिए एक महत्वपूर्ण नुकसान है - उनमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड और अमोनिया दोनों शामिल हैं (बाद में अक्सर अमीन्स द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है)। सभी प्रकार के पेंट्स के फायदे और नुकसान होते हैं। आपको बालों के डाई का चयन करना चाहिए, इस पर निर्भर करता है कि आप किस परिणाम को प्राप्त करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप बालों को एक विशेष घटना (शादी, स्नातक, आदि) में एक स्वर से हल्का करना चाहते हैं, तो आप पहले स्तर के रंग को बेहतर तरीके से लेंगे। और यदि आप श्यामला से गोरा या इसके विपरीत बदलना चाहते हैं, तो केवल तीसरा स्तर का पेंट आपकी मदद करेगा। लेकिन फिर भी, ध्यान रखें कि बाल रंग कितना अच्छा है, यह पूरी तरह से हानिरहित नहीं हो सकता है। कौन सा रंग बालों को अच्छी तरह से उज्ज्वल करता है? लाइटनिंग हेयर हमेशा एक खतरनाक प्रक्रिया है। इसलिए, पुरानी दादी हाइड्रोजन पेरोक्साइड की मदद से स्पष्टीकरण का तरीका निश्चित रूप से अच्छा नहीं है। आधुनिक कॉस्मेटोलॉजी कंपनियां स्पष्टीकरण के लिए अपने रंग पेश करती हैं। दूसरों के बीच, कई अच्छे ब्रांड हैं, जिनकी प्रभावशीलता इन फर्मों की प्रतिष्ठा से गारंटीकृत है। इसलिए, स्पष्टीकरण के लिए, ऐसे निर्माताओं से पेंट लेना बेहतर हैः गार्नियर, पैलेट, वेला और लो ओरियल। Bezammiachnyh बाल रंगों में निम्नलिखित निर्माताओं की पहचान की जा सकती हैः श्वार्ज़कोफ और हेनकेल, लो ओरियल और मैट्रिक्स। पहली जगह गार्नियर से बाल डाई थी। इसे 20% उत्तरदाताओं द्वारा पसंद किया गया था। दूसरी जगह लो ओरियल से पेंट है, इसका उपयोग 17% महिलाओं द्वारा किया जाता है। तीसरा स्थान श्वार्ज़कोफ और हेनकेल द्वारा कब्जा कर लिया गया है, उनके पास 14% से अधिक प्रशंसकों हैं। लंदन से 9% महिलाओं ने सर्वेक्षण पेंट का सर्वेक्षण किया, इसके अनुसार चौथा स्थान है। वेला, सीः एनकेओ और एस्टेल को तत्काल तीन फर्मों का वोट मिला। वे पांचवें स्थान साझा करते हैं।
बालों को पेंट करने के लिए आजकल सुबह धोने के रूप में प्राकृतिक बन गया। और कुछ महिलाएं पहले से ही प्राकृतिक रंग में खुद को याद रखती हैं, बालों को पेंट करने के साधनों का आशीर्वाद अब बहुत अधिक है। सच्चाई एक चुनना है - यह बहुत मुश्किल है। प्राकृतिक बालों के रंग होते हैं , लेकिन उनके पास सीमित संख्या में रंग होते हैं, अमोनिया के साथ पेंट होते हैं, लेकिन वे बालों को खराब करते हैं, और कोई अमोनिया नहीं होता है, लेकिन वे बालों को और भी खराब करते हैं। मंचों पर आप अक्सर इस नाम के साथ एक विषय पा सकते हैंः "अच्छे बाल रंग की सलाह दें"। इस विषय को पढ़ने के बाद, आप शायद ही कभी अपने आप को निर्विवाद निष्कर्ष निकाल सकते हैं, कुछ महिलाएं एक ब्रांड की प्रशंसा करती हैं, अन्य - अन्य, और दूसरों को सलाह दी जाती है कि वे खुद को मूर्ख न करें और सैलून में जाएं, जहां वे सबसे अच्छे पेशेवर बाल डाई पेंट करेंगे। बाल डाई कैसे चुनें? यह निर्धारित करने के लिए कि आपके बालों को रंग देने के लिए कौन सा रंग सबसे अच्छा है, आपको यह जानना होगा कि तीन प्रकार के बाल रंग हैंः - पहले स्तर के लिए बालों के रंग - बालों को टिनटिंग के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे पेंट अस्थिर हैं, और, एक नियम के रूप में, वे पानी के साथ छः-आठ संपर्कों के बाद धोए जाते हैं। ये पेंट सबसे सुरक्षित हैं, उनमें अमोनिया और हाइड्रोजन पेरोक्साइड नहीं होता है - यानी बालों के लिए हानिकारक पदार्थ होते हैं; - दूसरे स्तर के बाल रंग - आपको बालों के रंग को पहले स्तर के रंगों से थोड़ा लंबा रखने की अनुमति देता है, लेकिन अंत में वे सब धोए जाते हैं। इन पेंट्स में हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है, जो पेंट को दो महीने तक धोने की अनुमति नहीं देता है; - तीसरे स्तर के बालों के रंग - लगातार पेंट्स, रंगे हुए बालों पर प्रभाव तब तक बना रहता है जब तक वे पुनर्निर्मित या कट नहीं होते। लेकिन ऐसे पेंट्स के लिए एक महत्वपूर्ण नुकसान है - उनमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड और अमोनिया दोनों शामिल हैं । सभी प्रकार के पेंट्स के फायदे और नुकसान होते हैं। आपको बालों के डाई का चयन करना चाहिए, इस पर निर्भर करता है कि आप किस परिणाम को प्राप्त करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप बालों को एक विशेष घटना में एक स्वर से हल्का करना चाहते हैं, तो आप पहले स्तर के रंग को बेहतर तरीके से लेंगे। और यदि आप श्यामला से गोरा या इसके विपरीत बदलना चाहते हैं, तो केवल तीसरा स्तर का पेंट आपकी मदद करेगा। लेकिन फिर भी, ध्यान रखें कि बाल रंग कितना अच्छा है, यह पूरी तरह से हानिरहित नहीं हो सकता है। कौन सा रंग बालों को अच्छी तरह से उज्ज्वल करता है? लाइटनिंग हेयर हमेशा एक खतरनाक प्रक्रिया है। इसलिए, पुरानी दादी हाइड्रोजन पेरोक्साइड की मदद से स्पष्टीकरण का तरीका निश्चित रूप से अच्छा नहीं है। आधुनिक कॉस्मेटोलॉजी कंपनियां स्पष्टीकरण के लिए अपने रंग पेश करती हैं। दूसरों के बीच, कई अच्छे ब्रांड हैं, जिनकी प्रभावशीलता इन फर्मों की प्रतिष्ठा से गारंटीकृत है। इसलिए, स्पष्टीकरण के लिए, ऐसे निर्माताओं से पेंट लेना बेहतर हैः गार्नियर, पैलेट, वेला और लो ओरियल। Bezammiachnyh बाल रंगों में निम्नलिखित निर्माताओं की पहचान की जा सकती हैः श्वार्ज़कोफ और हेनकेल, लो ओरियल और मैट्रिक्स। पहली जगह गार्नियर से बाल डाई थी। इसे बीस% उत्तरदाताओं द्वारा पसंद किया गया था। दूसरी जगह लो ओरियल से पेंट है, इसका उपयोग सत्रह% महिलाओं द्वारा किया जाता है। तीसरा स्थान श्वार्ज़कोफ और हेनकेल द्वारा कब्जा कर लिया गया है, उनके पास चौदह% से अधिक प्रशंसकों हैं। लंदन से नौ% महिलाओं ने सर्वेक्षण पेंट का सर्वेक्षण किया, इसके अनुसार चौथा स्थान है। वेला, सीः एनकेओ और एस्टेल को तत्काल तीन फर्मों का वोट मिला। वे पांचवें स्थान साझा करते हैं।
टेनिस खिलाड़ी डेनिस शापोवालोव कोरोना पॉजिटिव निकले. (फोटो साभार-denis. shapovalov) नई दिल्ली. कनाडा के टेनिस स्टार डेनिस शापोवालोव (Denis Shapovalov) ने घोषणा की है कि एटीपी कप के लिये सिडनी पहुंचने के बाद उन्हें कोविड-19 (Covid-19) के परीक्षण में पॉजिटिव पाया गया है. यह 22 वर्षीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया पहुंचने वाली कनाडाई टीम का हिस्सा है. एटीपी कप सिडनी में एक से नौ जनवरी के बीच खेला जाएगा जबकि ऑस्ट्रेलियाई ओपन (Australian Open) 17 जनवरी से मेलबर्न में शुरू होगा. शापोवालोव पिछले सप्ताह अबुधाबी में विश्व टेनिस चैंपियनशिप के प्रदर्शनी मैच में खेले थे जहां उन्होंने तीसरे स्थान के प्लेऑफ मैच में राफेल नडाल को हराया था. . 1 सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, 49 साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया' 220 करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये 32 साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस!
टेनिस खिलाड़ी डेनिस शापोवालोव कोरोना पॉजिटिव निकले. नई दिल्ली. कनाडा के टेनिस स्टार डेनिस शापोवालोव ने घोषणा की है कि एटीपी कप के लिये सिडनी पहुंचने के बाद उन्हें कोविड-उन्नीस के परीक्षण में पॉजिटिव पाया गया है. यह बाईस वर्षीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया पहुंचने वाली कनाडाई टीम का हिस्सा है. एटीपी कप सिडनी में एक से नौ जनवरी के बीच खेला जाएगा जबकि ऑस्ट्रेलियाई ओपन सत्रह जनवरी से मेलबर्न में शुरू होगा. शापोवालोव पिछले सप्ताह अबुधाबी में विश्व टेनिस चैंपियनशिप के प्रदर्शनी मैच में खेले थे जहां उन्होंने तीसरे स्थान के प्लेऑफ मैच में राफेल नडाल को हराया था. . एक सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, उनचास साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया' दो सौ बीस करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये बत्तीस साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस!
बीजिंग, (भाषा)। भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की नौ मई की बीजिंग यात्रा की घोषणा करते हुए चीन ने आज कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाए बगैर लद्दाख की देपसांग घाटी में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ःपीएलएः की मौजूदगी पर उत्पन्न विवाद को बातचीत से सुलझाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मीडिया को बताया कि सलमान खुर्शीद विदेश मंत्री वांग यि के आमंत्रण पर नौ मई को दो दिन की बीजिंग यात्रा पर आ रहे हैं। वह वांग के साथ वार्ता करने के अलावा देश के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं से भी मिलेंगे। चुनयिंग ने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों और परस्पर हितों के मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीनी नेताओं के साथ वार्ता के बाद उसकी विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी। चुनयिंग ने कहा, हम इस यात्रा के माध्यम से चीन-भारत के बीच सामरिकसाझेदारी बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से कोशिश करेंगे। आशा है कि खुर्शीद की यात्रा से चीन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री ली क्विंग के इस महीने के अंत में नई दिल्ली के दौरे पर आने की राह तैयार होगी। हाल में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान प्रधानमंत्री बने ली अपने पहले विदेश दौरे पर भारत आना चाहते हैं। चीन की ओर से यह भारत के साथ मित्रवत संबंधों को बेहतर बनाने का संकेत है। यहां खुर्शीद की यात्रा समाप्त होने के बाद ली की भारत और पाकिस्तान यात्रा की घोषणा किये जाने की संभावना है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने खुर्शीद की बीजिंग यात्रा के महत्व को समझाने के लिये इसे `इस वर्ष चीन और भारत के बीच की हुई महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय वार्ताओं में से एक' बताया और कहा कि दोनों पक्ष लद्दाख क्षेत्र के दौलत बेग ओल्दी में पीएलए के सैनिकों की मौजूदगी के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। चुनयिंग ने कहा, दोस्ताना संबंधों को सक्रियता से बढ़ाने के बीच चीन और भारत शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सीमा विवाद सहित अन्य मतभेदों को सुलझाने के लिए भी सक्रिय हैं। दोनों कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे विवादों का द्विपक्षीय संबंधें के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। भारत चाहता है कि लद्दाख क्षेत्र में अपने शिविर लगाकर बै"s चीनी सैनिक वापस लौट जाएं और नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चीन का कहना है कि उसके सैनिकों ने दोनों देशों की आपसी सहमति से निर्धारित वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं किया है। चुनयिंग ने कहा, चीन-भारत सीमा पर उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए सीमा विवाद मुद्दों पर सलाह एवं समन्वय के लिए तैयार की गई प्रक्रिया के माध्यम से और सीमा पर हो रही बै"कों के जरिए दोनों पक्ष संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थायित्व बनाए रखने के लिए चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तीन फ्लैग बै"कें की हैं। इसके अलावा सीमा विवाद मुद्दों पर सलाह एवं समन्वय के लिए तैयार की गई प्रक्रिया के तहत दोनों देश इसे हल करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों ने आपसी सहमति के आधार पर पिछले वर्ष इस प्रक्रिया को स्थापित किया था। इसके प्रमुख दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारी होते हैं। चुनयिंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों में अच्छी प्रगति हो रही है।
बीजिंग, । भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की नौ मई की बीजिंग यात्रा की घोषणा करते हुए चीन ने आज कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाए बगैर लद्दाख की देपसांग घाटी में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ःपीएलएः की मौजूदगी पर उत्पन्न विवाद को बातचीत से सुलझाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मीडिया को बताया कि सलमान खुर्शीद विदेश मंत्री वांग यि के आमंत्रण पर नौ मई को दो दिन की बीजिंग यात्रा पर आ रहे हैं। वह वांग के साथ वार्ता करने के अलावा देश के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं से भी मिलेंगे। चुनयिंग ने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों और परस्पर हितों के मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीनी नेताओं के साथ वार्ता के बाद उसकी विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी। चुनयिंग ने कहा, हम इस यात्रा के माध्यम से चीन-भारत के बीच सामरिकसाझेदारी बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से कोशिश करेंगे। आशा है कि खुर्शीद की यात्रा से चीन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री ली क्विंग के इस महीने के अंत में नई दिल्ली के दौरे पर आने की राह तैयार होगी। हाल में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान प्रधानमंत्री बने ली अपने पहले विदेश दौरे पर भारत आना चाहते हैं। चीन की ओर से यह भारत के साथ मित्रवत संबंधों को बेहतर बनाने का संकेत है। यहां खुर्शीद की यात्रा समाप्त होने के बाद ली की भारत और पाकिस्तान यात्रा की घोषणा किये जाने की संभावना है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने खुर्शीद की बीजिंग यात्रा के महत्व को समझाने के लिये इसे `इस वर्ष चीन और भारत के बीच की हुई महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय वार्ताओं में से एक' बताया और कहा कि दोनों पक्ष लद्दाख क्षेत्र के दौलत बेग ओल्दी में पीएलए के सैनिकों की मौजूदगी के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। चुनयिंग ने कहा, दोस्ताना संबंधों को सक्रियता से बढ़ाने के बीच चीन और भारत शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सीमा विवाद सहित अन्य मतभेदों को सुलझाने के लिए भी सक्रिय हैं। दोनों कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे विवादों का द्विपक्षीय संबंधें के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। भारत चाहता है कि लद्दाख क्षेत्र में अपने शिविर लगाकर बै"s चीनी सैनिक वापस लौट जाएं और नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चीन का कहना है कि उसके सैनिकों ने दोनों देशों की आपसी सहमति से निर्धारित वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं किया है। चुनयिंग ने कहा, चीन-भारत सीमा पर उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए सीमा विवाद मुद्दों पर सलाह एवं समन्वय के लिए तैयार की गई प्रक्रिया के माध्यम से और सीमा पर हो रही बै"कों के जरिए दोनों पक्ष संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थायित्व बनाए रखने के लिए चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तीन फ्लैग बै"कें की हैं। इसके अलावा सीमा विवाद मुद्दों पर सलाह एवं समन्वय के लिए तैयार की गई प्रक्रिया के तहत दोनों देश इसे हल करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों ने आपसी सहमति के आधार पर पिछले वर्ष इस प्रक्रिया को स्थापित किया था। इसके प्रमुख दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारी होते हैं। चुनयिंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों में अच्छी प्रगति हो रही है।
पेरिस। युरोपियन फुटबाल संघ यूईएफए के अध्यक्ष माइकल प्लाटिनी खेल पंचाट न्यायालय में फीफा द्वारा अपने ऊपर लगाए गए 90 दिनों के अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ अपील करेंगे। प्लाटिनी ने फीफा पर अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में अपनी दावेदारी स्वीकार करने में जानबूझकर देरी किए जाने का आरोप भी लगाया। समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, प्लाटिनी के वकील ने बुधवार को कहा कि फीफा की इथिक्स कमिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ फीफा की अपील कमिटी द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्हें सीएएस का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्लाटिनी को सीएएस में पूरा भरोसा है, क्योंकि यह एक स्वतंत्र न्यायालय है, जो चुनाव प्रक्रिया से मुक्त है। प्लाटिनी के वकील ने कहा कि सीएएस का फैसला आने तक प्लाटिनी फीफा अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी कायम रखेंगे। प्लाटिनी ने कहा कि फीफा अपने संबद्ध घरेलू खेल संघों के जरिए अनुचित व्यवहार कर रही है और एकपक्षीय जांच करवा रही है। गौरतलब है कि फीफा की अपील कमिटी ने प्लाटिनी के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष सेप ब्लाटर की फीफा द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ याचिका बुधवार को खारिज कर दी। गौरतलब है कि व्यापाक भ्रष्टाचार के चलते अध्यक्ष पद से ब्लाटर के इस्तीफा देने की घोषणा के बाद अगले अध्यक्ष पद के लिए चुनाव अगले वर्ष 26 फरवरी को होना है। प्लाटिनी ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन निलंबित होने के चलते उनकी दावेदारी को मान्यता नहीं दी गई है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उनके निलंबन को बढ़ाया भी जा सकता है। नई दिल्ली। चीन के हांग्जो Asian games 2023 के चौथे दिन नेपाल क्रिकेट टीम का मुकाबला मंगोलिया से खेला जा रहा है। इस मैच में मंगोलिया ने टॉस जीतकर पहले नेपाल टीम को बल्लेबाजी करने के लिए उतारा। नेपाल टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इस मैच में रिकॉर्ड्स का अंबार लगा दिया है। नेपाल की टीम में इस मैच में T20I क्रिकेट में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर जड़ दिया है। नेपाल की ओर से एक बल्लेबाज ने शतक और दो ने अर्धशतक लगाए हैं। नेपाल ने मंगोलिया के सामने जीत के लिए 3 विकेट गंवाकर 314 रन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में नेपाल टी20I क्रिकेट में 300 का आंकड़ा पार करने वाली पहले टीम बन गई है। इससे पहले अफगानिस्तान के नाम टी20 का सबसे बड़ा स्कोर दर्ज है। उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 2019 में टी20 में 278 रन का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था। इसके अलावा नेपाल के बल्लेबाज ने टी20 क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। कुशल मल्ला ने 34 गेंदों में शतक पूरा करके वर्ल्ड रिकॉर्ड सेट किया। उन्होंने इस मामले में डेविड मिलर और रोहित शर्मा को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 35 गेंदों में अपना शतक पूरा किया था। इसके अलावा नेपाल ने सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भी बनाया है। दीपेंद्र सिंह ऐरी ने 9 गेंदों में अपना अर्धशतक लगाया। ये टी20 में सबसे कम गेंदों में अर्धशतक पूरा करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने युवराज सिंह का बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। नेपाल क्रिकेट टीम ने टी20 क्रिकेट के तीन बड़े रिकॉर्ड्स पर अपना नाम लिखाते हुए अन्य क्रिकेट टीम के बीच खलबली मचा दी है।
पेरिस। युरोपियन फुटबाल संघ यूईएफए के अध्यक्ष माइकल प्लाटिनी खेल पंचाट न्यायालय में फीफा द्वारा अपने ऊपर लगाए गए नब्बे दिनों के अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ अपील करेंगे। प्लाटिनी ने फीफा पर अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में अपनी दावेदारी स्वीकार करने में जानबूझकर देरी किए जाने का आरोप भी लगाया। समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, प्लाटिनी के वकील ने बुधवार को कहा कि फीफा की इथिक्स कमिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ फीफा की अपील कमिटी द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्हें सीएएस का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्लाटिनी को सीएएस में पूरा भरोसा है, क्योंकि यह एक स्वतंत्र न्यायालय है, जो चुनाव प्रक्रिया से मुक्त है। प्लाटिनी के वकील ने कहा कि सीएएस का फैसला आने तक प्लाटिनी फीफा अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी कायम रखेंगे। प्लाटिनी ने कहा कि फीफा अपने संबद्ध घरेलू खेल संघों के जरिए अनुचित व्यवहार कर रही है और एकपक्षीय जांच करवा रही है। गौरतलब है कि फीफा की अपील कमिटी ने प्लाटिनी के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष सेप ब्लाटर की फीफा द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ याचिका बुधवार को खारिज कर दी। गौरतलब है कि व्यापाक भ्रष्टाचार के चलते अध्यक्ष पद से ब्लाटर के इस्तीफा देने की घोषणा के बाद अगले अध्यक्ष पद के लिए चुनाव अगले वर्ष छब्बीस फरवरी को होना है। प्लाटिनी ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन निलंबित होने के चलते उनकी दावेदारी को मान्यता नहीं दी गई है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उनके निलंबन को बढ़ाया भी जा सकता है। नई दिल्ली। चीन के हांग्जो Asian games दो हज़ार तेईस के चौथे दिन नेपाल क्रिकेट टीम का मुकाबला मंगोलिया से खेला जा रहा है। इस मैच में मंगोलिया ने टॉस जीतकर पहले नेपाल टीम को बल्लेबाजी करने के लिए उतारा। नेपाल टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इस मैच में रिकॉर्ड्स का अंबार लगा दिया है। नेपाल की टीम में इस मैच में TबीसI क्रिकेट में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर जड़ दिया है। नेपाल की ओर से एक बल्लेबाज ने शतक और दो ने अर्धशतक लगाए हैं। नेपाल ने मंगोलिया के सामने जीत के लिए तीन विकेट गंवाकर तीन सौ चौदह रन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में नेपाल टीबीसI क्रिकेट में तीन सौ का आंकड़ा पार करने वाली पहले टीम बन गई है। इससे पहले अफगानिस्तान के नाम टीबीस का सबसे बड़ा स्कोर दर्ज है। उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ दो हज़ार उन्नीस में टीबीस में दो सौ अठहत्तर रन का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था। इसके अलावा नेपाल के बल्लेबाज ने टीबीस क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। कुशल मल्ला ने चौंतीस गेंदों में शतक पूरा करके वर्ल्ड रिकॉर्ड सेट किया। उन्होंने इस मामले में डेविड मिलर और रोहित शर्मा को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने पैंतीस गेंदों में अपना शतक पूरा किया था। इसके अलावा नेपाल ने सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भी बनाया है। दीपेंद्र सिंह ऐरी ने नौ गेंदों में अपना अर्धशतक लगाया। ये टीबीस में सबसे कम गेंदों में अर्धशतक पूरा करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने युवराज सिंह का बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। नेपाल क्रिकेट टीम ने टीबीस क्रिकेट के तीन बड़े रिकॉर्ड्स पर अपना नाम लिखाते हुए अन्य क्रिकेट टीम के बीच खलबली मचा दी है।
कला जगत मानो परम शोक की अवस्था से गुजर रहा है। पुणे के भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पर गजेंद्र चौहान की महाभारतीय छाया पड़ने की खबर से खलबली का-सा माहौल है। इससे जुड़े तमाम पक्ष प्रिंट मीडिया से लेकर विजुअल मीडिया तक छाए हैं। दोनों तरफ तलवारें तनी हुई हैं, न तो छात्र मानने को तैयार हैं, न हमारे युधिष्ठिरजी लाज बचाने के लिए पीछे हट रहे हैं। अब सतह को कुरेद कर परतों को खोलने की जरूरत है। यह समझने की जरूरत है कि इस घटना में प्रतिबंधित किए जाने जैसी बू क्यों आ रही है, वैसी ही जैसी दिल्ली विश्वविद्यालय के अंकुर नामक एक थियेटर सोसाइटी के साथ हुआ था। एक समांतर रेखा खिंचती-सी दिख रही है, जिसमें चौहान को पदभार संभालने ही नहीं दिया जाएगा और अंकुर को मंचन नहीं करने दिया जाएगा, में कोई विशेष फर्क नहीं दिख रहा। आखिर चौहान को जो जिम्मेदारी दी गई, वह है क्या! वह एक प्रशासनिक जिम्मेदारी है, जिसमें वे दूसरों की बौद्धिकता और स्वच्छंदता को कैसे नियंत्रण में ले आएंगे, समझ के बाहर की बात है। दूसरी दलील कि चौहान से पहले कई नामचीन लोगों ने इस संस्थान की शोभा बढ़ाई है, बतौर अध्यक्ष इन महानुभावों ने कौन से झंडे गाड़े, भले उनकी निजी उपलब्धि चाहे जो रही हो। रहा हिंदुत्ववादियों के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के बोलबाले का खतरा, तो यह महज एक खोखला नारा लगता है, क्योंकि राष्ट्र की परिकल्पना के संदर्भ में अभी तक भारतीय परिप्रेक्ष्य में किसी इस्लामी, सिख या क्रिस्तानी सोच से हमारा परिचय नहीं हुआ है। फिर हिंदू सोच के राष्ट्रवाद से ऐसी घिन क्यों? एक स्वर वहां से भी उठे, इससे इतना डर और परहेज क्यों? जब हम टैगोर जैसे मनीषी के राष्ट्रवाद, अंतरराष्ट्रीयतावाद की पहेली को समझते और सराहते रहे, तो फिर आज कलाजगत में तथाकथित राष्ट्रवादियों को महामारी की तरह क्यों देखा जा रहा है? ऐसे में क्या अन्य दृष्टिकोण, जिनमें कुछ नया या अलग करने की संभावना हो, उन्हें जड़ से कुचल डालना कुछ वैसा ही नहीं है, जैसे ब्राह्मणवाद द्वारा दलित आवाज को उठने से पहले ही खत्म कर देना! अभी तक कला, साहित्य और सिनेमा में वामपंथ और उससे जुड़ी हस्तियों का वर्चस्व असह्य बात नहीं रही है, पर आज दक्षिणपंथी तनी हुई मसें, रौब और अकड़ दिखाना निश्चय ही अपने किस्म का एक ब्राह्मणवाद है, वैसा ही ब्राह्मणवाद जिसका वामपंथ हमेशा से विरोध करता रहा है, फिर आज छात्रों को जमीन में लोटने की जरूरत क्यों आन पड़ी? यह जबरदस्त पूर्वग्रह ही तो कहीं दक्षिणपंथियों के राजनीतिक सत्ता को पाते ही, अनाप-शनाप जुमलों, हरकतों और धृष्टता के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि कला, साहित्य और शिक्षा किसी की जागीर होने से रही! फिर कितने भी चौहान आ जाएं इतनी बेताबी क्यों? और अगर यह बेसब्री किसी खतरे का आगाज है, तो फिर जनतांत्रिक और मौलिक तौर पर प्रत्युत्तर तैयार करें, जिद से कभी धाराएं नहीं पलटतीं।
कला जगत मानो परम शोक की अवस्था से गुजर रहा है। पुणे के भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पर गजेंद्र चौहान की महाभारतीय छाया पड़ने की खबर से खलबली का-सा माहौल है। इससे जुड़े तमाम पक्ष प्रिंट मीडिया से लेकर विजुअल मीडिया तक छाए हैं। दोनों तरफ तलवारें तनी हुई हैं, न तो छात्र मानने को तैयार हैं, न हमारे युधिष्ठिरजी लाज बचाने के लिए पीछे हट रहे हैं। अब सतह को कुरेद कर परतों को खोलने की जरूरत है। यह समझने की जरूरत है कि इस घटना में प्रतिबंधित किए जाने जैसी बू क्यों आ रही है, वैसी ही जैसी दिल्ली विश्वविद्यालय के अंकुर नामक एक थियेटर सोसाइटी के साथ हुआ था। एक समांतर रेखा खिंचती-सी दिख रही है, जिसमें चौहान को पदभार संभालने ही नहीं दिया जाएगा और अंकुर को मंचन नहीं करने दिया जाएगा, में कोई विशेष फर्क नहीं दिख रहा। आखिर चौहान को जो जिम्मेदारी दी गई, वह है क्या! वह एक प्रशासनिक जिम्मेदारी है, जिसमें वे दूसरों की बौद्धिकता और स्वच्छंदता को कैसे नियंत्रण में ले आएंगे, समझ के बाहर की बात है। दूसरी दलील कि चौहान से पहले कई नामचीन लोगों ने इस संस्थान की शोभा बढ़ाई है, बतौर अध्यक्ष इन महानुभावों ने कौन से झंडे गाड़े, भले उनकी निजी उपलब्धि चाहे जो रही हो। रहा हिंदुत्ववादियों के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के बोलबाले का खतरा, तो यह महज एक खोखला नारा लगता है, क्योंकि राष्ट्र की परिकल्पना के संदर्भ में अभी तक भारतीय परिप्रेक्ष्य में किसी इस्लामी, सिख या क्रिस्तानी सोच से हमारा परिचय नहीं हुआ है। फिर हिंदू सोच के राष्ट्रवाद से ऐसी घिन क्यों? एक स्वर वहां से भी उठे, इससे इतना डर और परहेज क्यों? जब हम टैगोर जैसे मनीषी के राष्ट्रवाद, अंतरराष्ट्रीयतावाद की पहेली को समझते और सराहते रहे, तो फिर आज कलाजगत में तथाकथित राष्ट्रवादियों को महामारी की तरह क्यों देखा जा रहा है? ऐसे में क्या अन्य दृष्टिकोण, जिनमें कुछ नया या अलग करने की संभावना हो, उन्हें जड़ से कुचल डालना कुछ वैसा ही नहीं है, जैसे ब्राह्मणवाद द्वारा दलित आवाज को उठने से पहले ही खत्म कर देना! अभी तक कला, साहित्य और सिनेमा में वामपंथ और उससे जुड़ी हस्तियों का वर्चस्व असह्य बात नहीं रही है, पर आज दक्षिणपंथी तनी हुई मसें, रौब और अकड़ दिखाना निश्चय ही अपने किस्म का एक ब्राह्मणवाद है, वैसा ही ब्राह्मणवाद जिसका वामपंथ हमेशा से विरोध करता रहा है, फिर आज छात्रों को जमीन में लोटने की जरूरत क्यों आन पड़ी? यह जबरदस्त पूर्वग्रह ही तो कहीं दक्षिणपंथियों के राजनीतिक सत्ता को पाते ही, अनाप-शनाप जुमलों, हरकतों और धृष्टता के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि कला, साहित्य और शिक्षा किसी की जागीर होने से रही! फिर कितने भी चौहान आ जाएं इतनी बेताबी क्यों? और अगर यह बेसब्री किसी खतरे का आगाज है, तो फिर जनतांत्रिक और मौलिक तौर पर प्रत्युत्तर तैयार करें, जिद से कभी धाराएं नहीं पलटतीं।
चेन्नई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया-ए ने एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में हुए दूसरे अनधिकारिक चार दिवसीय टेस्ट मैच के आखिरी दिन शनिवार को भारत-ए को 10 विकेट से हरा दिया और दो मैचों की सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के आगे पहली पारी में 135 रनों पर ढेर होने के बाद भारतीय टीम की दूसरी पारी चौथे दिन सुबह ही 274 रनों पर सिमट गई। कैमरून बैंक्रॉफ्ट (150) की शानदार शतकीय पारी की बदौलत पहली पारी में 349 रन बनाने वाली आस्ट्रेलियाई टीम ने इसके बाद चौथी पारी में मिले 61 रनों के लक्ष्य को बिना कोई विकेट गंवाए मात्र 6.1 ओवरों में हासिल कर लिया। बैंक्रॉफ्ट (नाबाद 21) दूसरी पारी में कप्तान उस्मान ख्वाजा (नाबाद 41) के साथ नाबाद रहे। पहली पारी में भारत के तीन विकेट चटकाने वाले गुरिंधर संधू ने दूसरी पारी में भी दमदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट हासिल किए। संधू के अलावा स्टीव ओ कीफे ने भी चार विकेट चटकाए। ओ कीफे ने पहली पारी में दो विकेट हासिल किए थे। छह विकेट पर 267 रनों से आगे खेलने उतरी भारतीय टीम दिन की पांचवीं गेंद पर स्कोर में बिना कोई इजाफा किए श्रेयष गोपाल का विकेट गंवा बैठी। गोपाल खाता भी नहीं खोल सके। भारतीय पारी चौथे दिन मात्र 5.3 ओवरों तक संघर्ष कर सकी और शेष चार विकेट गंवा दिए। पहली पारी में मात्र 16 रन बना सके भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली ने दूसरी पारी में 45 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली। कोहली के अलावा अभिनव मुकुंद (59) और श्रेयष अय्यर (49) ने अहम पारियां खेलीं।
चेन्नई, एक अगस्त । आस्ट्रेलिया-ए ने एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में हुए दूसरे अनधिकारिक चार दिवसीय टेस्ट मैच के आखिरी दिन शनिवार को भारत-ए को दस विकेट से हरा दिया और दो मैचों की सीरीज एक-शून्य से अपने नाम कर ली। आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के आगे पहली पारी में एक सौ पैंतीस रनों पर ढेर होने के बाद भारतीय टीम की दूसरी पारी चौथे दिन सुबह ही दो सौ चौहत्तर रनों पर सिमट गई। कैमरून बैंक्रॉफ्ट की शानदार शतकीय पारी की बदौलत पहली पारी में तीन सौ उनचास रन बनाने वाली आस्ट्रेलियाई टीम ने इसके बाद चौथी पारी में मिले इकसठ रनों के लक्ष्य को बिना कोई विकेट गंवाए मात्र छः.एक ओवरों में हासिल कर लिया। बैंक्रॉफ्ट दूसरी पारी में कप्तान उस्मान ख्वाजा के साथ नाबाद रहे। पहली पारी में भारत के तीन विकेट चटकाने वाले गुरिंधर संधू ने दूसरी पारी में भी दमदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट हासिल किए। संधू के अलावा स्टीव ओ कीफे ने भी चार विकेट चटकाए। ओ कीफे ने पहली पारी में दो विकेट हासिल किए थे। छह विकेट पर दो सौ सरसठ रनों से आगे खेलने उतरी भारतीय टीम दिन की पांचवीं गेंद पर स्कोर में बिना कोई इजाफा किए श्रेयष गोपाल का विकेट गंवा बैठी। गोपाल खाता भी नहीं खोल सके। भारतीय पारी चौथे दिन मात्र पाँच.तीन ओवरों तक संघर्ष कर सकी और शेष चार विकेट गंवा दिए। पहली पारी में मात्र सोलह रन बना सके भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली ने दूसरी पारी में पैंतालीस रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली। कोहली के अलावा अभिनव मुकुंद और श्रेयष अय्यर ने अहम पारियां खेलीं।
आरिफ खान ने चार साल की उम्र में पहली बार जम्मू-कश्मीर के एक छोटे से पहाड़ी गांव में स्कीइंग की थी। उनका वह कदम उस कठिन यात्रा की शुरुआत थी, जिसका समापन 4 फरवरी को बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक शुरू होने के साथ हुआ। आरिफ शीतकालीन ओलंपिक खेलों के एक सीजन में दो स्पर्धाओं के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय हैं। आरिफ ने यह उपलब्धि हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने भारतीय सैनिकों के साथ ट्रेनिंग की। यही नहीं, उन्होंने शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए अपनी शादी तक टाल दी। स्कीयर आरिफ खान ने शुक्रवार यानी 4 फरवरी 2022 को बीजिंग में शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के दौरान छोटे से चार सदस्यीय भारतीय दल की अगुआई की। आरिफ को स्कीइंग विरासत में मिली है। उनके पिता मोहम्मद यासीन खान गुलमर्ग में एक स्की शॉप और टूर कंपनी चलाते हैं। उनका छोटा बेटा मेराजुदीन राष्ट्रीय स्तर के स्नोबोर्डर हैं। आरिफ खान ने महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। तब वह पहली बार उस टूर्नामेंट में उतरे थे। गुलमर्ग में कई सैन्य और सीमा रक्षक इकाइयां स्थायी रूप से तैनात हैं और कश्मीर के मुख्य शहर श्रीनगर से सड़क पर कई चौकियां हैं। इसका सबसे ऊंचा गोंडोला माउंट अफरवाट पर 3,950 मीटर (13,000 फीट) तक पहुंचता है, जो भारतीय सेना के एलीट हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल का घर है। आरिफ खान कभी-कभी वहां के सैनिकों के साथ भी ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने बीजिंग के लिए क्वालिफाई करने के क्रम में पर्याप्त रैंकिंग अंक हासिल करने के लिए अपनी शादी टाल दी थी। आखिरकार नवंबर 2021 में स्लालोम स्पर्धा के लिए क्वालिफाई और पहली बार ओलंपिक कोटा हासिल किया। हालांकि, आरिफ ज्यादातर यूरोप में कम्पीट करते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं। वह चार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पिछले साल इटली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में रहा था, तब वह 45वें स्थान पर रहे थे। आरिफ खान बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले इकलौते भारतीय हैं। 31 साल के स्कीयर आरिफ खाान ने स्लालोम और जायंट स्लालोम स्पर्धा के लिए क्वालिफाई किया है। भारत ने इन खेलों में एक कोच, एक तकनीशियन और एक टीम मैनेजर समेत 6 सदस्यीय दल भेजा है। आरिफ से पहले शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत के कुल 15 एथलीट्स ने ही हिस्सा लिया है।
आरिफ खान ने चार साल की उम्र में पहली बार जम्मू-कश्मीर के एक छोटे से पहाड़ी गांव में स्कीइंग की थी। उनका वह कदम उस कठिन यात्रा की शुरुआत थी, जिसका समापन चार फरवरी को बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक शुरू होने के साथ हुआ। आरिफ शीतकालीन ओलंपिक खेलों के एक सीजन में दो स्पर्धाओं के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय हैं। आरिफ ने यह उपलब्धि हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने भारतीय सैनिकों के साथ ट्रेनिंग की। यही नहीं, उन्होंने शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए अपनी शादी तक टाल दी। स्कीयर आरिफ खान ने शुक्रवार यानी चार फरवरी दो हज़ार बाईस को बीजिंग में शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के दौरान छोटे से चार सदस्यीय भारतीय दल की अगुआई की। आरिफ को स्कीइंग विरासत में मिली है। उनके पिता मोहम्मद यासीन खान गुलमर्ग में एक स्की शॉप और टूर कंपनी चलाते हैं। उनका छोटा बेटा मेराजुदीन राष्ट्रीय स्तर के स्नोबोर्डर हैं। आरिफ खान ने महज बारह साल की उम्र में राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। तब वह पहली बार उस टूर्नामेंट में उतरे थे। गुलमर्ग में कई सैन्य और सीमा रक्षक इकाइयां स्थायी रूप से तैनात हैं और कश्मीर के मुख्य शहर श्रीनगर से सड़क पर कई चौकियां हैं। इसका सबसे ऊंचा गोंडोला माउंट अफरवाट पर तीन,नौ सौ पचास मीटर तक पहुंचता है, जो भारतीय सेना के एलीट हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल का घर है। आरिफ खान कभी-कभी वहां के सैनिकों के साथ भी ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने बीजिंग के लिए क्वालिफाई करने के क्रम में पर्याप्त रैंकिंग अंक हासिल करने के लिए अपनी शादी टाल दी थी। आखिरकार नवंबर दो हज़ार इक्कीस में स्लालोम स्पर्धा के लिए क्वालिफाई और पहली बार ओलंपिक कोटा हासिल किया। हालांकि, आरिफ ज्यादातर यूरोप में कम्पीट करते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं। वह चार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पिछले साल इटली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में रहा था, तब वह पैंतालीसवें स्थान पर रहे थे। आरिफ खान बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले इकलौते भारतीय हैं। इकतीस साल के स्कीयर आरिफ खाान ने स्लालोम और जायंट स्लालोम स्पर्धा के लिए क्वालिफाई किया है। भारत ने इन खेलों में एक कोच, एक तकनीशियन और एक टीम मैनेजर समेत छः सदस्यीय दल भेजा है। आरिफ से पहले शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत के कुल पंद्रह एथलीट्स ने ही हिस्सा लिया है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दिन-रात जूझ रहे सितारगंज के 70 स्वास्थ्य कर्मियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। इसमें अधिकांश कर्मचारी पिछले एक माह से अपने घर से अलग रहकर दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। सितारगंज में निजी अस्पताल बंद होने से ओपीडी का सारा भार भी सरकारी अस्पताल ही संभाल रहे हैं। स्टॉफ की कमी के वे कारण दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। हौंसले व उत्साह से कार्य कर रहे स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ की सबसे बड़ी चिंता दो माह से वेतन नहीं मिलना बनी हुई है। सीएचसी के अधीन 70 स्वास्थ्य कर्मियों को फरवरी और मार्च माह का वेतन नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कहा फरवरी में आयकर की दिक्कतों और मार्च माह का वेतन बजट नहीं होने के कारण नहीं दिया जा सका है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा सितारगंज क्षेत्र के 70 स्वास्थ्यकर्मी व उनका परिवार भुगत रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन से सभी को इस दौर में पैसे की जरूरत बनी हुई है। केंद्र और प्रदेश सरकार सभी को कोई कमी न हो इसके लिए आर्थिक एवं सामग्री देकर राहत दे रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के इन कर्मचारियों को उनका वेतन तक नहीं मिलना सोचनीय विषय है। सीएमएस डॉ. राजेश आर्य ने कहा 5 कर्मचारियों ने फरवरी में आयकर बचत के लिए सेविंग का विवरण नहीं दिया। इससे सभी 70 स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन नहीं निकला। अभी बजट नहीं है। बजट आते ही दो माह को वेतन दिया जायेगा। वहीं, इस संबंध में सीएमओ डॉ. शैलजा भट्ट से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन व्यस्त होने के चलते उनकी कॉल रिसीव नहीं हुई।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए दिन-रात जूझ रहे सितारगंज के सत्तर स्वास्थ्य कर्मियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। इसमें अधिकांश कर्मचारी पिछले एक माह से अपने घर से अलग रहकर दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। सितारगंज में निजी अस्पताल बंद होने से ओपीडी का सारा भार भी सरकारी अस्पताल ही संभाल रहे हैं। स्टॉफ की कमी के वे कारण दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। हौंसले व उत्साह से कार्य कर रहे स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ की सबसे बड़ी चिंता दो माह से वेतन नहीं मिलना बनी हुई है। सीएचसी के अधीन सत्तर स्वास्थ्य कर्मियों को फरवरी और मार्च माह का वेतन नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कहा फरवरी में आयकर की दिक्कतों और मार्च माह का वेतन बजट नहीं होने के कारण नहीं दिया जा सका है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा सितारगंज क्षेत्र के सत्तर स्वास्थ्यकर्मी व उनका परिवार भुगत रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन से सभी को इस दौर में पैसे की जरूरत बनी हुई है। केंद्र और प्रदेश सरकार सभी को कोई कमी न हो इसके लिए आर्थिक एवं सामग्री देकर राहत दे रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के इन कर्मचारियों को उनका वेतन तक नहीं मिलना सोचनीय विषय है। सीएमएस डॉ. राजेश आर्य ने कहा पाँच कर्मचारियों ने फरवरी में आयकर बचत के लिए सेविंग का विवरण नहीं दिया। इससे सभी सत्तर स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन नहीं निकला। अभी बजट नहीं है। बजट आते ही दो माह को वेतन दिया जायेगा। वहीं, इस संबंध में सीएमओ डॉ. शैलजा भट्ट से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन व्यस्त होने के चलते उनकी कॉल रिसीव नहीं हुई।
विषयोदय टीका विकासपकाचेन लीकुमार्यारेण विनमणामुकवासासमागसौरमेण बिमाचरपल्लगेम, गिमिकोसतगुरास्तमफलेन, मनोभनदक्षिणानिलप्रेरणान्दोलितेन, ललितभुजशाखाप्रतानेन, स्फुरतपनीयमय रश नावेबिकापरीतकामतीरमरितविशालजजनसरोविभूषणेन, मुखरनूपुरमरकृतक लकलेन देवकन्यालतायमेन परिवानामपि परभवस्तूमिर्न कि पुनरितरमानवाना । अपि च तीव्रतरपुंवेदोदयानकजनितचेतोविवाहानां नैवीषधं वामलोचनासंगमः तापप्रकर्षानुमंजस्यात् । रुपयौवनविकासचातुर्यसौभाग्यादीनां प्रकर्षापकर्ष रूपेणावस्थितत्वारङ्गनासु । तास्वाः पश्यतोपि उत्कण्ठानुपरतमुपजायमाना विदाहमावहति दुहं । तांस्त्यवत्वा चेमं यान्ति मूर्ति या डौकन्ते, परवलि निर्वापन्हियन्ते । स्वयं वा दुविमोचतमपातकयमपाश्चेनाकृष्यमाणो विहाय तानि विवृतमुखो, निमिमेषनयनो नितान्तरोदनाच्छादितलोहितलोचना जहाति। तासां तनवोऽपि स्फटिकमालेबोपाश्रितगुणग्राव्यः साश्वास्थिररामाः संध्यासमयजलवलेलेव दुर्लभाषच । स्त्रीवस्त्रगम्बमात्यादींश्च लब्धानप्य पहरन्ति बलिनः इति महन्वयं, न च ते ऽपयन्ति । तदर्जनार्थं षट्कर्मसु प्रयतितव्यं । तानि च संदिग्यफलानि बहुतरायासमूलानि हिसादिसावधक्रियापरतन्त्राणि, दुर्गतिवर्धनानि इत्येवमात्मिका भोगनिर्वजनी शरीरं पुनरियमशुचिनिधानं, आत्मनो महान् भारः, न चात्रास्ति किचित्सारभूतं । सन्निहिताने कापायं व्याविसस्याना क्षेत्र, जराडाकिनीपितृगृहं । कि स्कन्धवाली हैं, मन और नेत्रोंको प्रिय रूप सौन्दर्यरूपी पुष्पोंसे शोभित हैं, विलासरूपी पत्तोंसे वेष्ठित हैं, सौकुमायें उनका अंकुर है, दिशारूपी अंगनाओंके मुखको सुवास जैसी उनकी सुगन्ध है, मूंगेके समान उनके ओष्ठरूपी पल्लव हैं, घने ऊँचे गोल स्तनरूपी फल हैं, कामदेवरूपी दक्षिण वायुको प्रेरणासे वे हिलती हैं, ललित भुजारूपी उनका शाखाविस्तार है, चमकदार सोनेकी करधनीरूपी वेदिकासे घिरे और कामजलसे भरे विशाल जघनरूपी सरोवरसे भूषित है, बजते हुए नूपुररूपी भौरोंकी गुंजारसे गुंजित हैं। ऐसी देवांगनाओंसे घिरे हुए देवोंकी भी जब भोगोंसे तृप्ति नहीं होती तब अन्य मनुष्योंका तो कहना ही क्या है ? तथा जिनका चित्त तीव्रतर पुरुषवेदके उदयरूपी अग्निसे जल रहा है, स्त्रियोंका संगम उनकी औषधी नहीं है। उससे तो उनका सन्ताप और भी अधिक बढ़ेगा; क्योंकि स्त्रियोंमें रूप, यौवन, विलास, चतुरता, सौभाग्य आदि कमती बढ़ती पाया जाता है। उन-उन स्त्रियोंको देखकर निरन्तर उत्कण्ठा उत्पन्न होकर ऐसी दाह होती है जिसको सहना कठिन होता है। वे स्त्रियाँ पतिको छोड़कर चली जाती हैं, या मर जाती हैं अथवा दूसरे बलवान् पुरुष उन्हें हर लेते हैं। अथवा जिससे छूटना किसी भी तरह सम्भव नही है उस मृत्युके फन्देसे खिचकर मनुष्य, मुँह खोले, आँखें पथराये हुए स्वयं, अत्यन्त रुदन करने से लाल आंख हुई स्त्रीको स्वयं छोड़कर चला जाता है। उन स्त्रियोंके शरीर भी स्फटिकको मालाको तरह जो पासमें आता है उसीके गुणोंको ग्रहण करनेवाले होते हैं। जैसे सन्ध्याकालीन मेधोंका रंग अस्थिर होता है वैसे ही स्त्रियोंका अनुराग भी अस्थिर होता है । तथा वे दुर्लभ होती हैं क्योकि स्त्री, वस्त्र, गन्धमाला आदिको बलवान हर लेते हैं और देते नहीं हैं। इस प्रकार बड़ा भय रहता है। स्त्रीको प्राप्तिके लिए छह कर्मोको करना पड़ता है। उनका फल संदिग्ध होता है। उनके लिए बड़ा परिश्रम करना पड़ता है। तथा वे षट्कर्म हिंसा आदि सावडद्य क्रियाके अधीन होते हैं उनमें हिंसा आदि होती है। अतः वे दुर्गतिको बढ़ाते हैं। इत्यादि कथा भोगोंसे वैराग्य उत्पन्न करती है। तथा यह शरीर अपवित्रताकी खान है, आत्माके लिए बड़ा भाररूप है । इसमें कुछ भी सार नहीं है इसके साथ अनेक संकट लगे हैं। क्याधिरूपी धानके १. प्याहर- ज०म० / २, सर्पयन्ति मा० सु० ।
विषयोदय टीका विकासपकाचेन लीकुमार्यारेण विनमणामुकवासासमागसौरमेण बिमाचरपल्लगेम, गिमिकोसतगुरास्तमफलेन, मनोभनदक्षिणानिलप्रेरणान्दोलितेन, ललितभुजशाखाप्रतानेन, स्फुरतपनीयमय रश नावेबिकापरीतकामतीरमरितविशालजजनसरोविभूषणेन, मुखरनूपुरमरकृतक लकलेन देवकन्यालतायमेन परिवानामपि परभवस्तूमिर्न कि पुनरितरमानवाना । अपि च तीव्रतरपुंवेदोदयानकजनितचेतोविवाहानां नैवीषधं वामलोचनासंगमः तापप्रकर्षानुमंजस्यात् । रुपयौवनविकासचातुर्यसौभाग्यादीनां प्रकर्षापकर्ष रूपेणावस्थितत्वारङ्गनासु । तास्वाः पश्यतोपि उत्कण्ठानुपरतमुपजायमाना विदाहमावहति दुहं । तांस्त्यवत्वा चेमं यान्ति मूर्ति या डौकन्ते, परवलि निर्वापन्हियन्ते । स्वयं वा दुविमोचतमपातकयमपाश्चेनाकृष्यमाणो विहाय तानि विवृतमुखो, निमिमेषनयनो नितान्तरोदनाच्छादितलोहितलोचना जहाति। तासां तनवोऽपि स्फटिकमालेबोपाश्रितगुणग्राव्यः साश्वास्थिररामाः संध्यासमयजलवलेलेव दुर्लभाषच । स्त्रीवस्त्रगम्बमात्यादींश्च लब्धानप्य पहरन्ति बलिनः इति महन्वयं, न च ते ऽपयन्ति । तदर्जनार्थं षट्कर्मसु प्रयतितव्यं । तानि च संदिग्यफलानि बहुतरायासमूलानि हिसादिसावधक्रियापरतन्त्राणि, दुर्गतिवर्धनानि इत्येवमात्मिका भोगनिर्वजनी शरीरं पुनरियमशुचिनिधानं, आत्मनो महान् भारः, न चात्रास्ति किचित्सारभूतं । सन्निहिताने कापायं व्याविसस्याना क्षेत्र, जराडाकिनीपितृगृहं । कि स्कन्धवाली हैं, मन और नेत्रोंको प्रिय रूप सौन्दर्यरूपी पुष्पोंसे शोभित हैं, विलासरूपी पत्तोंसे वेष्ठित हैं, सौकुमायें उनका अंकुर है, दिशारूपी अंगनाओंके मुखको सुवास जैसी उनकी सुगन्ध है, मूंगेके समान उनके ओष्ठरूपी पल्लव हैं, घने ऊँचे गोल स्तनरूपी फल हैं, कामदेवरूपी दक्षिण वायुको प्रेरणासे वे हिलती हैं, ललित भुजारूपी उनका शाखाविस्तार है, चमकदार सोनेकी करधनीरूपी वेदिकासे घिरे और कामजलसे भरे विशाल जघनरूपी सरोवरसे भूषित है, बजते हुए नूपुररूपी भौरोंकी गुंजारसे गुंजित हैं। ऐसी देवांगनाओंसे घिरे हुए देवोंकी भी जब भोगोंसे तृप्ति नहीं होती तब अन्य मनुष्योंका तो कहना ही क्या है ? तथा जिनका चित्त तीव्रतर पुरुषवेदके उदयरूपी अग्निसे जल रहा है, स्त्रियोंका संगम उनकी औषधी नहीं है। उससे तो उनका सन्ताप और भी अधिक बढ़ेगा; क्योंकि स्त्रियोंमें रूप, यौवन, विलास, चतुरता, सौभाग्य आदि कमती बढ़ती पाया जाता है। उन-उन स्त्रियोंको देखकर निरन्तर उत्कण्ठा उत्पन्न होकर ऐसी दाह होती है जिसको सहना कठिन होता है। वे स्त्रियाँ पतिको छोड़कर चली जाती हैं, या मर जाती हैं अथवा दूसरे बलवान् पुरुष उन्हें हर लेते हैं। अथवा जिससे छूटना किसी भी तरह सम्भव नही है उस मृत्युके फन्देसे खिचकर मनुष्य, मुँह खोले, आँखें पथराये हुए स्वयं, अत्यन्त रुदन करने से लाल आंख हुई स्त्रीको स्वयं छोड़कर चला जाता है। उन स्त्रियोंके शरीर भी स्फटिकको मालाको तरह जो पासमें आता है उसीके गुणोंको ग्रहण करनेवाले होते हैं। जैसे सन्ध्याकालीन मेधोंका रंग अस्थिर होता है वैसे ही स्त्रियोंका अनुराग भी अस्थिर होता है । तथा वे दुर्लभ होती हैं क्योकि स्त्री, वस्त्र, गन्धमाला आदिको बलवान हर लेते हैं और देते नहीं हैं। इस प्रकार बड़ा भय रहता है। स्त्रीको प्राप्तिके लिए छह कर्मोको करना पड़ता है। उनका फल संदिग्ध होता है। उनके लिए बड़ा परिश्रम करना पड़ता है। तथा वे षट्कर्म हिंसा आदि सावडद्य क्रियाके अधीन होते हैं उनमें हिंसा आदि होती है। अतः वे दुर्गतिको बढ़ाते हैं। इत्यादि कथा भोगोंसे वैराग्य उत्पन्न करती है। तथा यह शरीर अपवित्रताकी खान है, आत्माके लिए बड़ा भाररूप है । इसमें कुछ भी सार नहीं है इसके साथ अनेक संकट लगे हैं। क्याधिरूपी धानके एक. प्याहर- जशून्यमशून्य / दो, सर्पयन्ति माशून्य सुशून्य ।
बिस्फी, निप्र। वरीय उप समाहर्ता नशीन कुमार निशांत ने बीडीओ का पदभार ग्रहण कर लिया है। वे प्रशिक्षु बीडीओ के रूप में ढाई महीने तथा सीओ के रूप में भी ढाई महीने तक काम करेंगे। वे बिहार प्रशासनिक सेवा के 64वीं बैच के अधिकारी है। नशीन कुमार ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का त्वरित गति से निदान करना उनकी प्राथमिकता होगी। प्रखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं को तीव्र गति से कार्यान्वयन किया जाएगा। इसमें जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
बिस्फी, निप्र। वरीय उप समाहर्ता नशीन कुमार निशांत ने बीडीओ का पदभार ग्रहण कर लिया है। वे प्रशिक्षु बीडीओ के रूप में ढाई महीने तथा सीओ के रूप में भी ढाई महीने तक काम करेंगे। वे बिहार प्रशासनिक सेवा के चौंसठवीं बैच के अधिकारी है। नशीन कुमार ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का त्वरित गति से निदान करना उनकी प्राथमिकता होगी। प्रखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं को तीव्र गति से कार्यान्वयन किया जाएगा। इसमें जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
यदि आपको (Sapne me kala saap dekhna) भी अपने सपने में सांप दिखाई दिया हैं तो आइए जाने उसका क्या मतलब निकलता हैं। यदि किसी कारणवश आपको अपने सपने में सांप दिखाई दे तो इसका सीधा सा मतलब हुआ कि यह (Sapne me saap dekhne se kya hota h) आपको भविष्य में हो सकने वाली किसी घटना के लिए पहले से ही सूचित कर दे रहा हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि सपने में सांप दिखना अच्छा माना जाता हैं या बुरा तो इसका कोई निश्चित उत्तर नही हैं। वह निश्चित उत्तर इसलिए नही हैं क्योंकि यह पूर्ण रूप से सांप की अवस्था पर निर्भर करता हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि सपने में सांप किस किस अवस्था में दिख सकता हैं जिस कारण उसका सूचक अलग अलग होगा या फिर वह अलग अलग परिणाम दिखायेगा। सपने में सफेद सांप देखने का क्या अर्थ है? सपने में सफेद सांप देखने का अर्थ हुआ कि बहुत जल्द आपको धन लाभ होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। सपने में सांप पकड़ने का क्या मतलब होता है? सपने में सांप को पकड़ने का मतलब आप बहुत जल्द अपने शात्रों पर विजय प्राप्त कर लेंगे। गर्भवती महिला को सांप देखने से क्या होता है? यदि किसी गर्भवती महिला को अपने सपने में सांप दिख जाए तो उसे देखकर वह डरे नही बल्कि उस सांप की अवस्था को देखकर ऊपर बताया गया सूचक पढ़ें। सपने में सांप दिखने का मतलब अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें? यहां क्लिक करें?
यदि आपको भी अपने सपने में सांप दिखाई दिया हैं तो आइए जाने उसका क्या मतलब निकलता हैं। यदि किसी कारणवश आपको अपने सपने में सांप दिखाई दे तो इसका सीधा सा मतलब हुआ कि यह आपको भविष्य में हो सकने वाली किसी घटना के लिए पहले से ही सूचित कर दे रहा हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि सपने में सांप दिखना अच्छा माना जाता हैं या बुरा तो इसका कोई निश्चित उत्तर नही हैं। वह निश्चित उत्तर इसलिए नही हैं क्योंकि यह पूर्ण रूप से सांप की अवस्था पर निर्भर करता हैं। अब यदि आप सोच रहे हैं कि सपने में सांप किस किस अवस्था में दिख सकता हैं जिस कारण उसका सूचक अलग अलग होगा या फिर वह अलग अलग परिणाम दिखायेगा। सपने में सफेद सांप देखने का क्या अर्थ है? सपने में सफेद सांप देखने का अर्थ हुआ कि बहुत जल्द आपको धन लाभ होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। सपने में सांप पकड़ने का क्या मतलब होता है? सपने में सांप को पकड़ने का मतलब आप बहुत जल्द अपने शात्रों पर विजय प्राप्त कर लेंगे। गर्भवती महिला को सांप देखने से क्या होता है? यदि किसी गर्भवती महिला को अपने सपने में सांप दिख जाए तो उसे देखकर वह डरे नही बल्कि उस सांप की अवस्था को देखकर ऊपर बताया गया सूचक पढ़ें। सपने में सांप दिखने का मतलब अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें? यहां क्लिक करें?
Don't Miss! Dalljiet Kaur Video: एक्ट्रेस दलजीत कौर शादी के बंधन में बंध ही गईं। शालीन भनोट की एक्स वाइफ ने अचानक सगाई करके सबको हैरान कर दिया था और अब उन्होंने भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन के साथ शादी करके अपना घर बसा लिया है। Dalljiet Kaur Video: मशहूर एक्ट्रेस दलजीत कौर ने हाल ही में 18 मार्च को ब्रिटेन के बिजनेसमैन निखिल पटेल के साथ शादी के बंधन में बंधी। एक्ट्रेस ने शादी से पहले के फंक्शन्स की कई झलकियां शेयर कीं जिनमें मेहंदी, संगीत और हल्दी शामिल थीं। उन्होंने अपनी शादी की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियोज भी शेयर किए, जहां दलजीत और निखिल एक-दूसरे के लिए बने नजर आ रहे हैं। इस कपल ने अपनी शादी के लिए प्रिस्टिन व्हाइट आउटफिट पहना था और ये दोनों कमाल के लग रहे थे। अब, शादी के बंधन में बंधने के ठीक एक दिन बाद दलजीत कौर और निखिल पटेल अपने हनीमून के लिए बैंकॉक, थाईलैंड के लिए रवाना हो गए हैं। दलजीत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपने फैंस के साथ एक वीडियो शेयर किया। इस क्लिप में, हम निखिल पटेल को दलजीत को खींचते हुए देखते हैं क्योंकि वह लगेज कैरियर पर बैठी हैं। इस वीडियो को बनाते समय नवविवाहित जोड़े अपने शादी के जोड़े में नजर आ रहे हैं। इस क्लिप को शेयर करते हुए, दलजीत ने लिखा, "मिस्टर एंड मिसेज पटेल के रूप में हम कई एडवेंचर में से एक की ओर रवाना हो रहे है। चलो इसे अपना "हनीमून!" कहते हैं। निखिल और दलजीत की प्रेम कहानी के बारे में बात करें तो दोनों लवबर्ड्स 2022 में दुबई में एक आपसी दोस्तों की पार्टी में मिले और जल्द ही उन्हें एक कनेक्शन फील होने लगा। करीब एक साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दलजीत ने 3 जनवरी को नेपाल में निखिल से सगाई की। दलजीत की तरह निखिल की भी एक शादी हो चुकी है और उनकी पिछली शादी से दो बेटियां 13 साल की एरियाना और 8 साल की अनिका हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दलजीत ने पहले एक्टर शालीन भनोट के साथ शादी की थी और इनका एक बेटा भी है जेडन।
Don't Miss! Dalljiet Kaur Video: एक्ट्रेस दलजीत कौर शादी के बंधन में बंध ही गईं। शालीन भनोट की एक्स वाइफ ने अचानक सगाई करके सबको हैरान कर दिया था और अब उन्होंने भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन के साथ शादी करके अपना घर बसा लिया है। Dalljiet Kaur Video: मशहूर एक्ट्रेस दलजीत कौर ने हाल ही में अट्ठारह मार्च को ब्रिटेन के बिजनेसमैन निखिल पटेल के साथ शादी के बंधन में बंधी। एक्ट्रेस ने शादी से पहले के फंक्शन्स की कई झलकियां शेयर कीं जिनमें मेहंदी, संगीत और हल्दी शामिल थीं। उन्होंने अपनी शादी की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियोज भी शेयर किए, जहां दलजीत और निखिल एक-दूसरे के लिए बने नजर आ रहे हैं। इस कपल ने अपनी शादी के लिए प्रिस्टिन व्हाइट आउटफिट पहना था और ये दोनों कमाल के लग रहे थे। अब, शादी के बंधन में बंधने के ठीक एक दिन बाद दलजीत कौर और निखिल पटेल अपने हनीमून के लिए बैंकॉक, थाईलैंड के लिए रवाना हो गए हैं। दलजीत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपने फैंस के साथ एक वीडियो शेयर किया। इस क्लिप में, हम निखिल पटेल को दलजीत को खींचते हुए देखते हैं क्योंकि वह लगेज कैरियर पर बैठी हैं। इस वीडियो को बनाते समय नवविवाहित जोड़े अपने शादी के जोड़े में नजर आ रहे हैं। इस क्लिप को शेयर करते हुए, दलजीत ने लिखा, "मिस्टर एंड मिसेज पटेल के रूप में हम कई एडवेंचर में से एक की ओर रवाना हो रहे है। चलो इसे अपना "हनीमून!" कहते हैं। निखिल और दलजीत की प्रेम कहानी के बारे में बात करें तो दोनों लवबर्ड्स दो हज़ार बाईस में दुबई में एक आपसी दोस्तों की पार्टी में मिले और जल्द ही उन्हें एक कनेक्शन फील होने लगा। करीब एक साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दलजीत ने तीन जनवरी को नेपाल में निखिल से सगाई की। दलजीत की तरह निखिल की भी एक शादी हो चुकी है और उनकी पिछली शादी से दो बेटियां तेरह साल की एरियाना और आठ साल की अनिका हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दलजीत ने पहले एक्टर शालीन भनोट के साथ शादी की थी और इनका एक बेटा भी है जेडन।
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उनकी पर्सनल सिक्योरिटी के अलावा पुलिस ने भी सलमान खान के घर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है. लॉरेंस बिश्नोई ने साल 2018 में सलमान खान को मारने की धमकी दी थी। उनकी पर्सनल सिक्योरिटी के अलावा पुलिस ने भी सलमान के घर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है ताकि किसी तरह की अनहोनी को पहले ही रोका जा सके। ये सब पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसे वाला की हत्या के बाद हुआ। किसी तरह की अनहोनी को पहले ही रोका जा सके. और ये सब हुआ है पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसे वाला की हत्या होने के बाद. इसी साल उनके दोस्त संपत नेहरा ने सलमान के घर की रेकी भी की थी। दबंग खान को निशाना बनाने पूरी प्लानिंग हो चुकी थी। इसी मामले को लेकर लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान खान को जोधपुर में मारने की धमकी दी थी. जिसके बाद भी उनकी सुरक्षा को काफी बढ़ा दिया गया था और अब एक बार फिर सलमान खान की सुरक्षा को फिर से बढ़ाया गया है.
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उनकी पर्सनल सिक्योरिटी के अलावा पुलिस ने भी सलमान खान के घर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है. लॉरेंस बिश्नोई ने साल दो हज़ार अट्ठारह में सलमान खान को मारने की धमकी दी थी। उनकी पर्सनल सिक्योरिटी के अलावा पुलिस ने भी सलमान के घर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है ताकि किसी तरह की अनहोनी को पहले ही रोका जा सके। ये सब पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसे वाला की हत्या के बाद हुआ। किसी तरह की अनहोनी को पहले ही रोका जा सके. और ये सब हुआ है पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसे वाला की हत्या होने के बाद. इसी साल उनके दोस्त संपत नेहरा ने सलमान के घर की रेकी भी की थी। दबंग खान को निशाना बनाने पूरी प्लानिंग हो चुकी थी। इसी मामले को लेकर लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान खान को जोधपुर में मारने की धमकी दी थी. जिसके बाद भी उनकी सुरक्षा को काफी बढ़ा दिया गया था और अब एक बार फिर सलमान खान की सुरक्षा को फिर से बढ़ाया गया है.
चंपावत उपचुनावः सीएम धामी के लिए माहौल बनाने 28 को चंपावत आएंगे योगी आदित्यनाथ! उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थन में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार के लिए आने की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके चम्पावत आने की पोस्टें भी इंटरनेट मीडिया में शेयर करनी शुरू कर दी हैं। लेकिन चुनाव मैंनेजमेंट से जुड़े भाजपा के नेता अभी योगी आदित्यनाथ के चम्पावत आने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष कैलाश सिंह अधिकारी ने बताया कि योगी आदित्यनाथ 28 मई को चम्पावत के मैदानी क्षेत्र टनकपुर बनबसा में रैली कर सकते हैं। कार्यकर्ता उनके आगमन की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष दीप चंद पाठक ने बताया सीएम योगी के चम्पावत आने की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि इसकी पक्की जानकारी वे एक दो दिन बाद ही दे सकते हैं। उन्होंने कहा बीते दिनों उत्तराखंड के दौरे पर आए सीएम योगी ने मुख्यमंत्री धामी को वादा किया था वह चम्पावत उपचुनाव से पहले गोरखनाथ की धरती पर जरूर आएंगे। इसी बात को लेकर संभावना जताई जा रही है कि सीएम योगी मुख्यमंत्री धामी के प्रचार में यहां आ सकते हैं।
चंपावत उपचुनावः सीएम धामी के लिए माहौल बनाने अट्ठाईस को चंपावत आएंगे योगी आदित्यनाथ! उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थन में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार के लिए आने की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके चम्पावत आने की पोस्टें भी इंटरनेट मीडिया में शेयर करनी शुरू कर दी हैं। लेकिन चुनाव मैंनेजमेंट से जुड़े भाजपा के नेता अभी योगी आदित्यनाथ के चम्पावत आने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष कैलाश सिंह अधिकारी ने बताया कि योगी आदित्यनाथ अट्ठाईस मई को चम्पावत के मैदानी क्षेत्र टनकपुर बनबसा में रैली कर सकते हैं। कार्यकर्ता उनके आगमन की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष दीप चंद पाठक ने बताया सीएम योगी के चम्पावत आने की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि इसकी पक्की जानकारी वे एक दो दिन बाद ही दे सकते हैं। उन्होंने कहा बीते दिनों उत्तराखंड के दौरे पर आए सीएम योगी ने मुख्यमंत्री धामी को वादा किया था वह चम्पावत उपचुनाव से पहले गोरखनाथ की धरती पर जरूर आएंगे। इसी बात को लेकर संभावना जताई जा रही है कि सीएम योगी मुख्यमंत्री धामी के प्रचार में यहां आ सकते हैं।
रीवा. ट्रेन सुविधाओं के विस्तार की कड़ी में रीवा से अमृतसर (Rewa Amritsar Train) के लिए रेल चलाने की मांग उठी है। रेल यात्री जन कल्याण संघ रीवा के अध्यक्ष एवं रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश चंद शिवनानी ने रेल मंत्री भारत सरकार, पश्चिम मध्य रेल (WCR) के महाप्रबंधक एवं मण्डल रेल प्रबंधक जबलपुर को पत्र लिख कर रीवा से अमृतसर के लिए सीधी ट्रेन सतना, बाँदा, ग्वालियर, आगरा, मथुरा, नई दिल्ली, लुधियाना, ब्यास के रास्ते चलाए जाने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लुधियाना एवं अमृतसर व्यापार के बहुत बड़े केंद्र है। जहां पर गर्म कपड़े, मशनरी, लोहा एवं स्पोर्ट आयटमो का बहुत बड़ा व्यापार होता है। जिसके कारण पूरे विंध्य से काफी सं या में व्यापारियों का इन दोनों शहरों में आना जाना बना रहता है। इसके साथ ही पंजाब के अमृतसर में विंध्य क्षेत्र से सिख एवं पंजाबी समाज की काफी रिश्तेदारियां है। साथ ही ब्यास स्थित राधास्वामी सत्संग केंद्र है, जो कि बहुत बड़ा आध्यात्मिक केंद्र है। जिसके लिए काफी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन ब्यास तक की यात्रा करते है। विन्ध्य क्षेत्र से अमृतसर के लिए डायरेक्ट ट्रेन न होने के कारण क्षेत्रीय लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस ट्रेन के संचालन से रेलवे के राजस्व में वृद्धि होगी और विंध्य वासियो को अमृतसर तक की सीधी यात्रा का फायदा मिलेगा।
रीवा. ट्रेन सुविधाओं के विस्तार की कड़ी में रीवा से अमृतसर के लिए रेल चलाने की मांग उठी है। रेल यात्री जन कल्याण संघ रीवा के अध्यक्ष एवं रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश चंद शिवनानी ने रेल मंत्री भारत सरकार, पश्चिम मध्य रेल के महाप्रबंधक एवं मण्डल रेल प्रबंधक जबलपुर को पत्र लिख कर रीवा से अमृतसर के लिए सीधी ट्रेन सतना, बाँदा, ग्वालियर, आगरा, मथुरा, नई दिल्ली, लुधियाना, ब्यास के रास्ते चलाए जाने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लुधियाना एवं अमृतसर व्यापार के बहुत बड़े केंद्र है। जहां पर गर्म कपड़े, मशनरी, लोहा एवं स्पोर्ट आयटमो का बहुत बड़ा व्यापार होता है। जिसके कारण पूरे विंध्य से काफी सं या में व्यापारियों का इन दोनों शहरों में आना जाना बना रहता है। इसके साथ ही पंजाब के अमृतसर में विंध्य क्षेत्र से सिख एवं पंजाबी समाज की काफी रिश्तेदारियां है। साथ ही ब्यास स्थित राधास्वामी सत्संग केंद्र है, जो कि बहुत बड़ा आध्यात्मिक केंद्र है। जिसके लिए काफी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन ब्यास तक की यात्रा करते है। विन्ध्य क्षेत्र से अमृतसर के लिए डायरेक्ट ट्रेन न होने के कारण क्षेत्रीय लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस ट्रेन के संचालन से रेलवे के राजस्व में वृद्धि होगी और विंध्य वासियो को अमृतसर तक की सीधी यात्रा का फायदा मिलेगा।
चीनमें बनी कोरोनारूपी जैविक हथियारके इस्तेमालकी आशंका २०१९ में ही उस वक्त होने लगी थी जब ट्रम्प अमेरिका और शी जिनपिंगमें ठनी हुई थी। ऐसा लग रहा था कि कहीं दोनों देशोंके बीच जंग न हो जाय। उसी दौरान गलवानमें सीमा विवादको लेकर भारत और चीनके बीच तनाव जैसे हालात थे। जिस तरह दोनों देशोंकी सेनाएं आमने-सामने थीं, आशंका थी कि कहीं जंग न हो जाय। इसी बीच कोरोना दस्तक देता है और पूरी दुनियामें कहर बरपाने लगता है। कोरोनाके आतंकसे इस वक्त दुनियामें १६ करोड़ लोग संक्रमित हैं। ३६ लाख मरीजोंकी जान जा चुकी है। इनमेंसे छह करोड़ कोरोना केस भारत और अमेरिकामें हैं। सबसे ज्यादा मौतें भी यहीं हुई हैं। वैसे भी वर्तमानमें चीनका दुनिया सबसे बड़े दुश्मन भारत और अमेरिका हैं। यही वजह है कि यह सवाल उठ रहे हैं कि चीनके वुहानसे निकली कोरोना महामारी है या कोई महासाजिश तो नहीं है? अमेरिकी खुफिया एजेंसीकी मानें तो पीएलएसे जुड़े वैज्ञानिक और हथियार विशेषज्ञोंने भी उस दावेका समर्थन किया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना चीनका बायोलॉजिकल वेपन है? क्या चीन वुहानकी लैबमें अब भी जैविक हथियार बना रहा है? क्या चीन तीसरे विश्वयुद्धकी तैयारी इन्हीं जैविक हथियारोंसे कर रहा है? क्या चीन हर वह कोशिश कर रहा है जिससे दुनियाकी राजनीतिको उसकी लैबसे कंट्रोल किया जा सके? रिपोर्टके मुताबिक चीनी वैज्ञानिक और हेल्थ ऑफिसर्स २०१५ में ही कोरोनाके अलग-अलग स्ट्रेनपर चर्चा कर रहे थे। उस समय चीनी वैज्ञानिकोंने कहा था कि तीसरे विश्वयुद्धमें इसे जैविक हथियारकी तरह उपयोग किया जायगा। इस बातपर भी चर्चा हुई थी कि इसमें हेरफेर करके इसे महामारीके तौरपर कैसे बदला जा सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसीमें खुलासा हुआ है कि वल्र्ड वार-३ के अंदेशेमें और उसमें जीत हासिल करनेके लिए चीन जैविक हथियारका सहारा लेगा। बस सही वक्तकी तलाशमें है चीन। वह वक्त आनेके बाद ड्रैगन दुनियाके ऊपर जैविक हथियारका इस्तेमाल कर सकता है। खुले तौरपर चीनके दो दुश्मन हैं। अमेरिका और भारत। कोरोनाकी सबसे ज्यादा तबाही इन्हीं देशोंपर आयी है। दुनियामें कोरोनाके मामलोंमें भी भारत और अमेरिका ही टॉपपर हैं। इसीलिए लगातार अमेरिकी नेता, अधिकारी और खुफिया एजेंसियां यह सवाल उठा रही हैं कि कोरोनाकी शुरुआत कहांसे हुई, इसकी जांच होनी ही चाहिए और चीनका मकसद भी दुनियाके सामने आना चाहिए। वैसे भी इतिहास गवाह है कि जब भी इस तरहकी कोई अनसुलझी पहेली सामने आती है तो साजिशोंकी बू आने लगती है। यह सवाल पूरी दुनियाकी फिजामें तैर रहा है कि कहीं यह किसी जैविक युद्ध या बायोलॉजिकल वारका प्रयोग तो नहीं है या फिर चीनने जैविक आतंकवाद या बायोटेररिज्मकी शुरुआत कर दी है? क्योंकि बायोलॉजिकल वैपन कहर ढानेवाला सस्ता और असरदार हथियार है। यह वह हथियार है जो किसी मिसाइल, बम, गोलीसे भी कई गुना खतरनाक हैं। चीनकी मशहूर वैज्ञानिक और महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येनने अमेरिकी रिपोर्टपर मुहर लगाते हुए कहा है कि चीनने जानबूझकर कोरोना वायरसको दुनियामें फैलाया है। वह चाहता है कि वह युद्धमें जैविक हथियारका इस्तेमाल कर पूरी दुनियापर उसका राज हो। यह अलग बात है कि कोरोनाका प्रसार और उसके बढ़ते प्रकोपको लेकर दुनियाभरके देशोंकी भौंहें एक बार फिर चीनकी ओर तन गयी हैं। इस घातक वायरसको लेकर चीनके दावोंको कोई भी देश माननेको तैयार नहीं है कि यह वुहानके जानवर मार्केटसे पूरी दुनियामें फैला है। हर तरफसे एक ही आवाज उठ रही है कि जिस चीनसे कोरोना वायरस पूरी दुनियामें फैला है, वह इतना सुरक्षित कैसे है? जबकि भारत समेत दुनियाभरके देश पिछले डेढ़-दो सालसे इससे जंग लड़ रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि चीनने इस जैविक हथियार बनाकर दुनियापर हमला कर दिया हो? आशंका है कि चीनके सैन्य वैज्ञानिकोंने तीसरे विश्व युद्धमें जैविक हथियारके इस्तेमालकी भविष्यवाणी भी की थी। चीनी वैज्ञानिकोंने सार्स कोरोना वायरसकी चर्चा जेनेटिक हथियारके नये युगके तौरपर पहले ही कर चुके है। पीएलएके दस्तावेजोंमें इस बातकी चर्चा है कि एक जैविक हमलेसे शत्रुकी स्वास्थ्य व्यवस्थाको ध्वस्त किया जा सकता है। पीएलएके इस दस्तावेजमें अमेरिकी वायुसेनाके कर्नल माइकल जेके अध्ययनका भी जिक्र है, जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तीसरा विश्वयुद्ध जैविक हथियारोंसे लड़ा जायगा। इस रिपोर्टमें यह भी दावा किया गया है कि २००३ में जिस सार्सका चीनपर अटैक हुआ था, वह हो सकता है कि एक जैविक हथियार हो, जिसे आतंकियोंने तैयार किया हो। इन कथित दस्तावेजोंमें इस बातका भी जिक्र किया गया है कि इस वायरसको कृत्रिम रूपसे बदला जा सकता है और इसे आदमीमें बीमारी पैदा करनेवाले वायरसमें बदला जा सकता है। इसके बाद इसका इस्तेमाल एक ऐसे हथियारके रूपमें किया जा सकता है, जिसे दुनियाने पहली बार कभी नहीं देखा होगा। रिपोर्टमें इस बातपर भी सवाल उठाया गया है कि जब भी वायरसकी जांच करनेकी बात आती है तो चीन पीछे हट जाता है। आस्ट्रेलियाई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटरने बताया कि यह वायरस किसी चमगादड़के मार्केटसे नहीं फैल सकता। चीनी रिसर्चपर गहरी स्टडी करनेके बाद रॉबर्टने कहा, वह रिसर्च पेपर बिल्कुल सही है। इससे पता चलता है कि चीनी वैज्ञानिक क्या सोच रहे हैं। पिछले साल अमेरिकाके तबके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पने कई बार सार्वजनिक तौरपर कोरोनाको 'चीनी वायरसÓ कहा था। उन्होंने कहा था, यह चीनकी लैबमें तैयार किया गया और इसकी वजहसे दुनियाका हेल्थ सेक्टर तबाह हो रहा है, कई देशोंकी इकोनॉमी इसे संभाल नहीं पायंगी। ट्रम्पने तो यहांतक कहा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियोंके पास इसके सुबूत हैं और वक्त आनेपर यह दुनियाके सामने रखे जायंगे। फिलहाल, ट्रम्प चुनाव हार गये और बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशनने अबतक इस बारेमें सार्वजनिक तौरपर कुछ नहीं कहा। हालांकि, ब्लूमबर्गने पिछले दिनों एक रिपोर्टमें इस तरफ इशारा किया था कि अमेरिका इस मामलेमें बहुत तेजी और गंभीरतासे जांच कर रहा है। द्वितीय विश्व युद्धमें जब अमेरिकाने जापानके शहर हिरोशिमा और नागासाकीपर परमाणु बम गिराया तो उसके ऐसे दुष्परिणाम सामने आये कि दुनियामें मानवताको बचानेके लिए परमाणु नीतिपर विश्वस्तरीय मंथन हुआ। परमाणु बमपर प्रतिबंधके लिए कड़े नियम-कानून बने। जैविक हथियारोंके प्रतिबंधके लिए विश्वस्तरीय नीति बननी चाहिए। लेकिन यह नीति न लोगोंने बनायी सिर्फ अपनेको ताकतवर दिखानेके लिए। खुद तो परमाणु शक्तिको अपनाते रहे परन्तु विकासशील देशोंको उपदेश देते रहे। इस तानाशाही नीतिका परिणाम यह हुआ कि अधिकतर देशोंने परमाणु बम बना लिया। यहांतक कि आतंकियोंको शरण देनेवाले पाकिस्तानके पास भी परमाणु बम है। यह सब हथियारोंके धंधे और होड़का ही दुष्परिणाम दुनियाके सामने आया है। यह विभिन्न देशोंके शासकोंकी गैर-जवाबदेही, जनहितसे ज्यादा तवज्जो अपने धंधोंको देनेका ही नतीजा है कि जहां पूरी दुनिया कोरोना जैसे जैविक हथियारसे जूझ रही है, वहीं प्रभावशाली देशोंने तीसरे विश्वयुद्धकी भूमिका बना दी है। कोरोनाकी उत्पत्तिने यह साबित कर दिया है कि बारूदके ढेरपर बैठी दुनियाके सामने मौजूदा समयमें सबसे अधिक खतरा जैविक हथियारोंसे है। समस्याके निदानके लिए प्रयास करना प्रकृतिका नियम है। आज परिस्थिति बड़ी विषम है। निदानके लिए प्रयास करनेवाले लोग और तंत्र खुद इस मकडज़ालमें फंसे हुए हैं। इस तरहकी परिस्थितियोंसे निबटनेके लिए बुद्धिजीवी और जागरूक लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। कुछ भी हो प्रकृति और मानवता दोनों खतरेमें है और किसी भी हालतमें इसे बचाना है। इसके लिए विश्वस्तरीय प्रयास होने ही चाहिए।
चीनमें बनी कोरोनारूपी जैविक हथियारके इस्तेमालकी आशंका दो हज़ार उन्नीस में ही उस वक्त होने लगी थी जब ट्रम्प अमेरिका और शी जिनपिंगमें ठनी हुई थी। ऐसा लग रहा था कि कहीं दोनों देशोंके बीच जंग न हो जाय। उसी दौरान गलवानमें सीमा विवादको लेकर भारत और चीनके बीच तनाव जैसे हालात थे। जिस तरह दोनों देशोंकी सेनाएं आमने-सामने थीं, आशंका थी कि कहीं जंग न हो जाय। इसी बीच कोरोना दस्तक देता है और पूरी दुनियामें कहर बरपाने लगता है। कोरोनाके आतंकसे इस वक्त दुनियामें सोलह करोड़ लोग संक्रमित हैं। छत्तीस लाख मरीजोंकी जान जा चुकी है। इनमेंसे छह करोड़ कोरोना केस भारत और अमेरिकामें हैं। सबसे ज्यादा मौतें भी यहीं हुई हैं। वैसे भी वर्तमानमें चीनका दुनिया सबसे बड़े दुश्मन भारत और अमेरिका हैं। यही वजह है कि यह सवाल उठ रहे हैं कि चीनके वुहानसे निकली कोरोना महामारी है या कोई महासाजिश तो नहीं है? अमेरिकी खुफिया एजेंसीकी मानें तो पीएलएसे जुड़े वैज्ञानिक और हथियार विशेषज्ञोंने भी उस दावेका समर्थन किया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना चीनका बायोलॉजिकल वेपन है? क्या चीन वुहानकी लैबमें अब भी जैविक हथियार बना रहा है? क्या चीन तीसरे विश्वयुद्धकी तैयारी इन्हीं जैविक हथियारोंसे कर रहा है? क्या चीन हर वह कोशिश कर रहा है जिससे दुनियाकी राजनीतिको उसकी लैबसे कंट्रोल किया जा सके? रिपोर्टके मुताबिक चीनी वैज्ञानिक और हेल्थ ऑफिसर्स दो हज़ार पंद्रह में ही कोरोनाके अलग-अलग स्ट्रेनपर चर्चा कर रहे थे। उस समय चीनी वैज्ञानिकोंने कहा था कि तीसरे विश्वयुद्धमें इसे जैविक हथियारकी तरह उपयोग किया जायगा। इस बातपर भी चर्चा हुई थी कि इसमें हेरफेर करके इसे महामारीके तौरपर कैसे बदला जा सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसीमें खुलासा हुआ है कि वल्र्ड वार-तीन के अंदेशेमें और उसमें जीत हासिल करनेके लिए चीन जैविक हथियारका सहारा लेगा। बस सही वक्तकी तलाशमें है चीन। वह वक्त आनेके बाद ड्रैगन दुनियाके ऊपर जैविक हथियारका इस्तेमाल कर सकता है। खुले तौरपर चीनके दो दुश्मन हैं। अमेरिका और भारत। कोरोनाकी सबसे ज्यादा तबाही इन्हीं देशोंपर आयी है। दुनियामें कोरोनाके मामलोंमें भी भारत और अमेरिका ही टॉपपर हैं। इसीलिए लगातार अमेरिकी नेता, अधिकारी और खुफिया एजेंसियां यह सवाल उठा रही हैं कि कोरोनाकी शुरुआत कहांसे हुई, इसकी जांच होनी ही चाहिए और चीनका मकसद भी दुनियाके सामने आना चाहिए। वैसे भी इतिहास गवाह है कि जब भी इस तरहकी कोई अनसुलझी पहेली सामने आती है तो साजिशोंकी बू आने लगती है। यह सवाल पूरी दुनियाकी फिजामें तैर रहा है कि कहीं यह किसी जैविक युद्ध या बायोलॉजिकल वारका प्रयोग तो नहीं है या फिर चीनने जैविक आतंकवाद या बायोटेररिज्मकी शुरुआत कर दी है? क्योंकि बायोलॉजिकल वैपन कहर ढानेवाला सस्ता और असरदार हथियार है। यह वह हथियार है जो किसी मिसाइल, बम, गोलीसे भी कई गुना खतरनाक हैं। चीनकी मशहूर वैज्ञानिक और महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येनने अमेरिकी रिपोर्टपर मुहर लगाते हुए कहा है कि चीनने जानबूझकर कोरोना वायरसको दुनियामें फैलाया है। वह चाहता है कि वह युद्धमें जैविक हथियारका इस्तेमाल कर पूरी दुनियापर उसका राज हो। यह अलग बात है कि कोरोनाका प्रसार और उसके बढ़ते प्रकोपको लेकर दुनियाभरके देशोंकी भौंहें एक बार फिर चीनकी ओर तन गयी हैं। इस घातक वायरसको लेकर चीनके दावोंको कोई भी देश माननेको तैयार नहीं है कि यह वुहानके जानवर मार्केटसे पूरी दुनियामें फैला है। हर तरफसे एक ही आवाज उठ रही है कि जिस चीनसे कोरोना वायरस पूरी दुनियामें फैला है, वह इतना सुरक्षित कैसे है? जबकि भारत समेत दुनियाभरके देश पिछले डेढ़-दो सालसे इससे जंग लड़ रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि चीनने इस जैविक हथियार बनाकर दुनियापर हमला कर दिया हो? आशंका है कि चीनके सैन्य वैज्ञानिकोंने तीसरे विश्व युद्धमें जैविक हथियारके इस्तेमालकी भविष्यवाणी भी की थी। चीनी वैज्ञानिकोंने सार्स कोरोना वायरसकी चर्चा जेनेटिक हथियारके नये युगके तौरपर पहले ही कर चुके है। पीएलएके दस्तावेजोंमें इस बातकी चर्चा है कि एक जैविक हमलेसे शत्रुकी स्वास्थ्य व्यवस्थाको ध्वस्त किया जा सकता है। पीएलएके इस दस्तावेजमें अमेरिकी वायुसेनाके कर्नल माइकल जेके अध्ययनका भी जिक्र है, जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तीसरा विश्वयुद्ध जैविक हथियारोंसे लड़ा जायगा। इस रिपोर्टमें यह भी दावा किया गया है कि दो हज़ार तीन में जिस सार्सका चीनपर अटैक हुआ था, वह हो सकता है कि एक जैविक हथियार हो, जिसे आतंकियोंने तैयार किया हो। इन कथित दस्तावेजोंमें इस बातका भी जिक्र किया गया है कि इस वायरसको कृत्रिम रूपसे बदला जा सकता है और इसे आदमीमें बीमारी पैदा करनेवाले वायरसमें बदला जा सकता है। इसके बाद इसका इस्तेमाल एक ऐसे हथियारके रूपमें किया जा सकता है, जिसे दुनियाने पहली बार कभी नहीं देखा होगा। रिपोर्टमें इस बातपर भी सवाल उठाया गया है कि जब भी वायरसकी जांच करनेकी बात आती है तो चीन पीछे हट जाता है। आस्ट्रेलियाई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटरने बताया कि यह वायरस किसी चमगादड़के मार्केटसे नहीं फैल सकता। चीनी रिसर्चपर गहरी स्टडी करनेके बाद रॉबर्टने कहा, वह रिसर्च पेपर बिल्कुल सही है। इससे पता चलता है कि चीनी वैज्ञानिक क्या सोच रहे हैं। पिछले साल अमेरिकाके तबके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पने कई बार सार्वजनिक तौरपर कोरोनाको 'चीनी वायरसÓ कहा था। उन्होंने कहा था, यह चीनकी लैबमें तैयार किया गया और इसकी वजहसे दुनियाका हेल्थ सेक्टर तबाह हो रहा है, कई देशोंकी इकोनॉमी इसे संभाल नहीं पायंगी। ट्रम्पने तो यहांतक कहा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियोंके पास इसके सुबूत हैं और वक्त आनेपर यह दुनियाके सामने रखे जायंगे। फिलहाल, ट्रम्प चुनाव हार गये और बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशनने अबतक इस बारेमें सार्वजनिक तौरपर कुछ नहीं कहा। हालांकि, ब्लूमबर्गने पिछले दिनों एक रिपोर्टमें इस तरफ इशारा किया था कि अमेरिका इस मामलेमें बहुत तेजी और गंभीरतासे जांच कर रहा है। द्वितीय विश्व युद्धमें जब अमेरिकाने जापानके शहर हिरोशिमा और नागासाकीपर परमाणु बम गिराया तो उसके ऐसे दुष्परिणाम सामने आये कि दुनियामें मानवताको बचानेके लिए परमाणु नीतिपर विश्वस्तरीय मंथन हुआ। परमाणु बमपर प्रतिबंधके लिए कड़े नियम-कानून बने। जैविक हथियारोंके प्रतिबंधके लिए विश्वस्तरीय नीति बननी चाहिए। लेकिन यह नीति न लोगोंने बनायी सिर्फ अपनेको ताकतवर दिखानेके लिए। खुद तो परमाणु शक्तिको अपनाते रहे परन्तु विकासशील देशोंको उपदेश देते रहे। इस तानाशाही नीतिका परिणाम यह हुआ कि अधिकतर देशोंने परमाणु बम बना लिया। यहांतक कि आतंकियोंको शरण देनेवाले पाकिस्तानके पास भी परमाणु बम है। यह सब हथियारोंके धंधे और होड़का ही दुष्परिणाम दुनियाके सामने आया है। यह विभिन्न देशोंके शासकोंकी गैर-जवाबदेही, जनहितसे ज्यादा तवज्जो अपने धंधोंको देनेका ही नतीजा है कि जहां पूरी दुनिया कोरोना जैसे जैविक हथियारसे जूझ रही है, वहीं प्रभावशाली देशोंने तीसरे विश्वयुद्धकी भूमिका बना दी है। कोरोनाकी उत्पत्तिने यह साबित कर दिया है कि बारूदके ढेरपर बैठी दुनियाके सामने मौजूदा समयमें सबसे अधिक खतरा जैविक हथियारोंसे है। समस्याके निदानके लिए प्रयास करना प्रकृतिका नियम है। आज परिस्थिति बड़ी विषम है। निदानके लिए प्रयास करनेवाले लोग और तंत्र खुद इस मकडज़ालमें फंसे हुए हैं। इस तरहकी परिस्थितियोंसे निबटनेके लिए बुद्धिजीवी और जागरूक लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। कुछ भी हो प्रकृति और मानवता दोनों खतरेमें है और किसी भी हालतमें इसे बचाना है। इसके लिए विश्वस्तरीय प्रयास होने ही चाहिए।
पंजाब लोक कांग्रेेस के भाजपा में विलय से मौज़ूदा राज्य की राजनीति में किसी उलटफेर की सम्भावना नहीं है। कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने के कई अर्थ हैं। वह पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं और भाजपा मंख भी हैं। हालाँकि कुछ माह पहले गठित अमरिंदर की इस पार्टी का कोई वुजूद नहीं है। लिहाज़ा यह कहना कि विलय से भाजपा को मज़बूती मिलेगी, ठीक नहीं होगा। कैप्टन के साथ दो पूर्व सांसद और आधा दर्ज़न पूर्व विधायक भी भाजपाई हो गये हैं। इससे पहले कांग्रेस के चार पूर्व मंत्री भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। निकट भविष्य में कई और वरिष्ठ कांग्रेसी भी कैप्टन की वजह से भाजपा में आ सकते हैं। कैप्टन की पत्नी और पटियाला से कांग्रेस की सांसद परणीत कौर अभी पार्टी में बनी हुई हैं। वे कब तक कांग्रेस में बनी रह सकती हैं। देर-सबेर उन्हें भी हाथ छोडक़र कमल थामना ही होगा। दरअसल कांग्रेस से भाजपा में आये पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता भाजपा की विचारधारा से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि अपनी उपेक्षा और सत्ता से दूरी के चलते अपने आका से भविष्य की उम्मीद लेकर आये हैं। सवाल यह है कि क्या वे पार्टी की विचारधारा को भी अपना सकेंगे? अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उनके लिए कम-से-कम भाजपा में ज़्यादा अवसर नहीं होंगे। कुछेक को छोडक़र कोई जनाधार वाला नेता नहीं है। कांग्रेस से भाजपा में थोक में शामिल हुए नेताओं में ज़्यादातर कैप्टन के समर्थक हैं। कांग्रेस में कैप्टन के बिना उनका कोई महत्त्व नहीं था। पार्टी में उनकी उपेक्षा होती इससे बेहतर क्यों नहीं पार्टी ही बदल ली जाए? निकट भविष्य में भाजपा राज्य में अपने आधार को मज़बूत कर सकती है और शीर्ष नेतृत्व भी यही चाहता है। राज्य से 13 लोकसभा की सीटें हैं और भाजपा छः से ज़्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। फ़िलहाल यहाँ से सन्नी देओल गुरदासपुर से और सोमप्रकाश होशियारपुर से सांसद हैं। विधानसभा चुनाव में जिस तरह से आम आदमी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आयी है, उस लक्ष्य को पाना आसान भी नहीं है। लेकिन संगरूर लोकसभा उप चुनाव में आम आदमी पार्टी प्रत्याशी की हार और अकाली सिमरनजीत सिंह मान की जीत भाजपा को कुछ उम्मीद बँधाती है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए भाजपा पंजाब में अपने संगठन को मज़बूत और सशक्त नेतृत्व जैसे पहुलओं को ध्यान में रख रही है। संगठनात्मक रूप से मज़बूत मानी जाने वाली भाजपा के पास पंजाब में कोई जनाधार वाला नेता नहीं है। कैप्टन यह कमी पूरी कर सकते हैं। सितंबर, 2021 में कांग्रेस आलाकमान ने कैप्टन को जिस तरह से अपमानित कर मुख्यमंत्री नहीं रहने दिया, वह टीस उनके मन में रही। कैप्टन को कांग्रेस में नहीं; लेकिन राज्य का राजनीति में सक्रिय रहना था। लिहाज़ा उन्हें कोई विकल्प तलाशना ही था। उन्हें भाजपा में ही कुछ सम्भावना दिखी। लिहाज़ा उनकी शीर्ष नेतृत्व से निकटता बढ़ी। विधानसभा चुनाव भी कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर लड़ा। तभी से कयास लगने लगे थे कि देर-सबेर कैप्टन भाजपा में जाएँगे। लेकिन उनसे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ भाजपा में शामिल हो गये। कभी अकाली दल से राजनीति में आये कट्टर कांग्रेसी कैप्टन में नेतृत्व की क्षमता ज़रूर है; लेकिन उम्र के जिस दौर से वह गुज़र रहे हैं, उसमें उनकी सक्रियता ही आड़े आएगी। ऐसे में वह भाजपा के लिए कितने कारगर साबित होंगे, यह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों से स्पष्ट होगा। चूँकि विधानसभा चुनाव तो इसी वर्ष हुए हैं और कैप्टन और उनकी पार्टी का प्रदर्शन शून्य रहा है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से अपमानित अपनी रणनीति से सन् 2002 और सन् 2017 में कांग्रेस को सत्ता में लाने का श्रेय उन्हें ही है। क्या कुछ वैसा करिश्मा वह वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कर सकते हैं? कैप्टन को भाजपा में अहम ज़िम्मेदारी ज़रूर दी जाएगी। वह केंद्रीय राजनीति में जाने के इच्छुक नहीं हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश स्तर पर अहम ज़िम्मेदारी मिल सकती है। उनके अलावा कभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ की योग्यता को देखते हुए ज़िम्मेदारी दी जाएगी। जाखड़ और कैप्टन में तालमेल अच्छा रहा है, लिहाज़ा वह पार्टी को मज़बूती देंगे। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा शीर्ष नेतृत्व पंजाब में पार्टी को आम आदमी पार्टी के मुक़ाबले में खड़ा करना चाहता है। पूर्व मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के पाला बदल से कांग्रेस कमज़ोर हुई है, भाजपा इसी का फ़ायदा उठाना चाहती है। दो सांसद और दो विधायकों वाली भाजपा लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। अगर ऐसा हो सका, तो हरियाणा की तरह भाजपा पंजाब में अपने बूते ही चुनाव लड़ेगी। फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ उसका गठजोड़ रहा है। भाजपा सत्ता में भी भागीदार रही है; लेकिन बावजूद इसके पार्टी का आधार शहरों तक ही सीमित रहा है। आज भी पंजाब में भाजपा का जनाधार शहरों तक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी कहीं नहीं दिखती। तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ शिअद ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। कभी हरियाणा में भी भाजपा सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही है; लेकिन अब वह अपने दम पर मैदान में उतरती है। क्या पता शीर्ष नेतृत्व पंजाब में भी हरियाणा जैसे पहलू को देख रही हो; लेकिन इसके लिए ज़मीनी स्तर पर बहुत मेहनत करने की ज़रूरत है। पंजाब में कभी कांग्रेस और अकाली दल ही आमने-सामने रहते थे। फिर मुक़ाबले में भाजपा को बल मिला और मामला त्रिकोणीय हो गया। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के मुक़ाबले में आने से अब मुक़ाबला त्रिकोणीय नहीं, बल्कि चतुर्कोणीय में बदल गया, जो आगे और दिलचस्प होगा। इस समय प्रदेश में सबसे मज़बूत स्थिति में आम आदमी पार्टी है। अब सरकार के कामकाज पर उसका भविष्य निर्भर करता है। पहला झटका उसे संगरूर उप चुनाव में देखने को मिल चुका है। भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी संगरूर लोकसभा चुनाव सीट ख़ाली हो गयी थी। आम आदमी पार्टी को जीत में कोई संशय नहीं लग रह था; लेकिन नतीजा अप्रत्याशित रहा और यहाँ से अकाली दल मान (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान विजयी रहे। विधानसभा चुनाव के बाद आप के लिए यह सबसे बड़ा झटका रहा। वैसे भी सरकार की लगभग छः माह के शासनकाल में भगवंत मान सरकार की कोई विशेष उपलब्धि नहीं दिख रही है। पंजाब में आप के विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का मामला भी चल रहा है; लेकिन ऐसे आरोपों में ज़्यादा दम नहीं दिखता। 117 में से 92 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं। कितने लोगों की ख़रीद-फ़रोख़्त की जा सकती है? इससे भाजपा को क्या हासिल हो जाएगा? उसके पास तो दो विधायक और कांग्रेस के पास 18 जबकि बहुमत के लिए 59 का जादुई आँकड़ा चाहिए। हाँ, यह आम आदमी पार्टी में फूट पैदा करने और सरकार को अस्थिर करने का कोई प्रयास ज़रूर हो सकता है। पंजाब में भाजपा को पाँव जमाने के लिए गाँवों तक पहुँचना होगा, इसके बिन नेतृत्व चाहे जो करे, अच्छे नतीजे देना मुश्किल का काम है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस से आये इन नेताओं की वजह से पार्टी की पंजाब में पैठ और आधार मज़बूत होने और लोकसभा चुनाव में आधी से ज़्यादा सीटों पर क़ाबिज़ होने की बात कहीं सपना न बनकर रह जाए। फ़िलहाल भाजपा का विधानसभा चुनाव में वोट फ़ीसदी केवल 6. 6 फ़ीसदी है, जबकि इसके मुक़ाबले में आम आदमी पार्टी का 42. 01 फ़ीसदी, कांग्रेस का 22. 98 फ़ीसदी और शिरोमणि अकाली दल का 18. 38 फ़ीसदी है। भाजपा को कमोबेश पंजाब में शून्य से ही शुरुआत करनी है और इसके लिए ज़ोरदार नेतृत्व की ज़रूरत है। पंजाब में अब भी भाजपा को शहरी पार्टी माना जाता है, जबकि राज्य में वही पार्टी सत्ता हासिल करती है, जिसका गाँवों में भरपूर आधार होता है। अभी लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल से ज़्यादा का समय है। इस दौरान पार्टी संगठन में कैप्टन और उनके समर्थकों को क्या और कैसी ज़िम्मेदारी मिलती है, यह देखने की बात होगी। अगर कैप्टन और सुनील जाखड़ के अलावा कई पूर्व मंत्रियों को संगठन में कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी को अपनी जड़े जमाने में मदद मिलेगी। वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे बता देंगे कि कैप्टन और उनके समर्थकों की बदौलत पंजाब में भाजपा ने अपना आधर कितना मज़बूत किया है। जब जब कांग्रेस में कैप्टन को फ्री हैंड मिला है, उन्होंने अच्छे नतीजे दिखाये हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तो कैप्टन समेत थोक में आये कांग्रेसियों की वजह से पार्टी को भविष्य में मज़बूत होता देख रहे हैं।
पंजाब लोक कांग्रेेस के भाजपा में विलय से मौज़ूदा राज्य की राजनीति में किसी उलटफेर की सम्भावना नहीं है। कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने के कई अर्थ हैं। वह पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं और भाजपा मंख भी हैं। हालाँकि कुछ माह पहले गठित अमरिंदर की इस पार्टी का कोई वुजूद नहीं है। लिहाज़ा यह कहना कि विलय से भाजपा को मज़बूती मिलेगी, ठीक नहीं होगा। कैप्टन के साथ दो पूर्व सांसद और आधा दर्ज़न पूर्व विधायक भी भाजपाई हो गये हैं। इससे पहले कांग्रेस के चार पूर्व मंत्री भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। निकट भविष्य में कई और वरिष्ठ कांग्रेसी भी कैप्टन की वजह से भाजपा में आ सकते हैं। कैप्टन की पत्नी और पटियाला से कांग्रेस की सांसद परणीत कौर अभी पार्टी में बनी हुई हैं। वे कब तक कांग्रेस में बनी रह सकती हैं। देर-सबेर उन्हें भी हाथ छोडक़र कमल थामना ही होगा। दरअसल कांग्रेस से भाजपा में आये पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता भाजपा की विचारधारा से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि अपनी उपेक्षा और सत्ता से दूरी के चलते अपने आका से भविष्य की उम्मीद लेकर आये हैं। सवाल यह है कि क्या वे पार्टी की विचारधारा को भी अपना सकेंगे? अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उनके लिए कम-से-कम भाजपा में ज़्यादा अवसर नहीं होंगे। कुछेक को छोडक़र कोई जनाधार वाला नेता नहीं है। कांग्रेस से भाजपा में थोक में शामिल हुए नेताओं में ज़्यादातर कैप्टन के समर्थक हैं। कांग्रेस में कैप्टन के बिना उनका कोई महत्त्व नहीं था। पार्टी में उनकी उपेक्षा होती इससे बेहतर क्यों नहीं पार्टी ही बदल ली जाए? निकट भविष्य में भाजपा राज्य में अपने आधार को मज़बूत कर सकती है और शीर्ष नेतृत्व भी यही चाहता है। राज्य से तेरह लोकसभा की सीटें हैं और भाजपा छः से ज़्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। फ़िलहाल यहाँ से सन्नी देओल गुरदासपुर से और सोमप्रकाश होशियारपुर से सांसद हैं। विधानसभा चुनाव में जिस तरह से आम आदमी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आयी है, उस लक्ष्य को पाना आसान भी नहीं है। लेकिन संगरूर लोकसभा उप चुनाव में आम आदमी पार्टी प्रत्याशी की हार और अकाली सिमरनजीत सिंह मान की जीत भाजपा को कुछ उम्मीद बँधाती है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए भाजपा पंजाब में अपने संगठन को मज़बूत और सशक्त नेतृत्व जैसे पहुलओं को ध्यान में रख रही है। संगठनात्मक रूप से मज़बूत मानी जाने वाली भाजपा के पास पंजाब में कोई जनाधार वाला नेता नहीं है। कैप्टन यह कमी पूरी कर सकते हैं। सितंबर, दो हज़ार इक्कीस में कांग्रेस आलाकमान ने कैप्टन को जिस तरह से अपमानित कर मुख्यमंत्री नहीं रहने दिया, वह टीस उनके मन में रही। कैप्टन को कांग्रेस में नहीं; लेकिन राज्य का राजनीति में सक्रिय रहना था। लिहाज़ा उन्हें कोई विकल्प तलाशना ही था। उन्हें भाजपा में ही कुछ सम्भावना दिखी। लिहाज़ा उनकी शीर्ष नेतृत्व से निकटता बढ़ी। विधानसभा चुनाव भी कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर लड़ा। तभी से कयास लगने लगे थे कि देर-सबेर कैप्टन भाजपा में जाएँगे। लेकिन उनसे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ भाजपा में शामिल हो गये। कभी अकाली दल से राजनीति में आये कट्टर कांग्रेसी कैप्टन में नेतृत्व की क्षमता ज़रूर है; लेकिन उम्र के जिस दौर से वह गुज़र रहे हैं, उसमें उनकी सक्रियता ही आड़े आएगी। ऐसे में वह भाजपा के लिए कितने कारगर साबित होंगे, यह वर्ष दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव नतीजों से स्पष्ट होगा। चूँकि विधानसभा चुनाव तो इसी वर्ष हुए हैं और कैप्टन और उनकी पार्टी का प्रदर्शन शून्य रहा है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से अपमानित अपनी रणनीति से सन् दो हज़ार दो और सन् दो हज़ार सत्रह में कांग्रेस को सत्ता में लाने का श्रेय उन्हें ही है। क्या कुछ वैसा करिश्मा वह वर्ष दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कर सकते हैं? कैप्टन को भाजपा में अहम ज़िम्मेदारी ज़रूर दी जाएगी। वह केंद्रीय राजनीति में जाने के इच्छुक नहीं हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश स्तर पर अहम ज़िम्मेदारी मिल सकती है। उनके अलावा कभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ की योग्यता को देखते हुए ज़िम्मेदारी दी जाएगी। जाखड़ और कैप्टन में तालमेल अच्छा रहा है, लिहाज़ा वह पार्टी को मज़बूती देंगे। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा शीर्ष नेतृत्व पंजाब में पार्टी को आम आदमी पार्टी के मुक़ाबले में खड़ा करना चाहता है। पूर्व मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के पाला बदल से कांग्रेस कमज़ोर हुई है, भाजपा इसी का फ़ायदा उठाना चाहती है। दो सांसद और दो विधायकों वाली भाजपा लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। अगर ऐसा हो सका, तो हरियाणा की तरह भाजपा पंजाब में अपने बूते ही चुनाव लड़ेगी। फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल के साथ उसका गठजोड़ रहा है। भाजपा सत्ता में भी भागीदार रही है; लेकिन बावजूद इसके पार्टी का आधार शहरों तक ही सीमित रहा है। आज भी पंजाब में भाजपा का जनाधार शहरों तक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी कहीं नहीं दिखती। तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ शिअद ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। कभी हरियाणा में भी भाजपा सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही है; लेकिन अब वह अपने दम पर मैदान में उतरती है। क्या पता शीर्ष नेतृत्व पंजाब में भी हरियाणा जैसे पहलू को देख रही हो; लेकिन इसके लिए ज़मीनी स्तर पर बहुत मेहनत करने की ज़रूरत है। पंजाब में कभी कांग्रेस और अकाली दल ही आमने-सामने रहते थे। फिर मुक़ाबले में भाजपा को बल मिला और मामला त्रिकोणीय हो गया। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के मुक़ाबले में आने से अब मुक़ाबला त्रिकोणीय नहीं, बल्कि चतुर्कोणीय में बदल गया, जो आगे और दिलचस्प होगा। इस समय प्रदेश में सबसे मज़बूत स्थिति में आम आदमी पार्टी है। अब सरकार के कामकाज पर उसका भविष्य निर्भर करता है। पहला झटका उसे संगरूर उप चुनाव में देखने को मिल चुका है। भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी संगरूर लोकसभा चुनाव सीट ख़ाली हो गयी थी। आम आदमी पार्टी को जीत में कोई संशय नहीं लग रह था; लेकिन नतीजा अप्रत्याशित रहा और यहाँ से अकाली दल मान के सिमरनजीत सिंह मान विजयी रहे। विधानसभा चुनाव के बाद आप के लिए यह सबसे बड़ा झटका रहा। वैसे भी सरकार की लगभग छः माह के शासनकाल में भगवंत मान सरकार की कोई विशेष उपलब्धि नहीं दिख रही है। पंजाब में आप के विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का मामला भी चल रहा है; लेकिन ऐसे आरोपों में ज़्यादा दम नहीं दिखता। एक सौ सत्रह में से बानवे विधायक आम आदमी पार्टी के हैं। कितने लोगों की ख़रीद-फ़रोख़्त की जा सकती है? इससे भाजपा को क्या हासिल हो जाएगा? उसके पास तो दो विधायक और कांग्रेस के पास अट्ठारह जबकि बहुमत के लिए उनसठ का जादुई आँकड़ा चाहिए। हाँ, यह आम आदमी पार्टी में फूट पैदा करने और सरकार को अस्थिर करने का कोई प्रयास ज़रूर हो सकता है। पंजाब में भाजपा को पाँव जमाने के लिए गाँवों तक पहुँचना होगा, इसके बिन नेतृत्व चाहे जो करे, अच्छे नतीजे देना मुश्किल का काम है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस से आये इन नेताओं की वजह से पार्टी की पंजाब में पैठ और आधार मज़बूत होने और लोकसभा चुनाव में आधी से ज़्यादा सीटों पर क़ाबिज़ होने की बात कहीं सपना न बनकर रह जाए। फ़िलहाल भाजपा का विधानसभा चुनाव में वोट फ़ीसदी केवल छः. छः फ़ीसदी है, जबकि इसके मुक़ाबले में आम आदमी पार्टी का बयालीस. एक फ़ीसदी, कांग्रेस का बाईस. अट्ठानवे फ़ीसदी और शिरोमणि अकाली दल का अट्ठारह. अड़तीस फ़ीसदी है। भाजपा को कमोबेश पंजाब में शून्य से ही शुरुआत करनी है और इसके लिए ज़ोरदार नेतृत्व की ज़रूरत है। पंजाब में अब भी भाजपा को शहरी पार्टी माना जाता है, जबकि राज्य में वही पार्टी सत्ता हासिल करती है, जिसका गाँवों में भरपूर आधार होता है। अभी लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल से ज़्यादा का समय है। इस दौरान पार्टी संगठन में कैप्टन और उनके समर्थकों को क्या और कैसी ज़िम्मेदारी मिलती है, यह देखने की बात होगी। अगर कैप्टन और सुनील जाखड़ के अलावा कई पूर्व मंत्रियों को संगठन में कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी को अपनी जड़े जमाने में मदद मिलेगी। वर्ष दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव के नतीजे बता देंगे कि कैप्टन और उनके समर्थकों की बदौलत पंजाब में भाजपा ने अपना आधर कितना मज़बूत किया है। जब जब कांग्रेस में कैप्टन को फ्री हैंड मिला है, उन्होंने अच्छे नतीजे दिखाये हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तो कैप्टन समेत थोक में आये कांग्रेसियों की वजह से पार्टी को भविष्य में मज़बूत होता देख रहे हैं।
नई दिल्लीः यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि पाकिस्तानी आतंकी हमारे देश में घुसपैठ कर रहे हैं लेकिन हमारे ही देश के नेता उनके नाम से हमें डराकर सेना का अपमान भी कर रहे हैं, पाकिस्तान हमपर तीन बार हमला कर चुका है और तीनों बार हारा है उसके बाद भी सपा सांसद नरेश अग्रवाल हमें पाकिस्तानी फ़ौज का डर दिखा रहे हैं. कल समाजवादी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने जम्मू कश्मीर पर आतंकवादी हमले को लेकर बेतुका बयान दिया. नरेश अग्रवाल ने आज संसद के बाहर कहा, गृह मंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं कि शहादत खाली नहीं जायेगा कोई हमारी तरफ आंख नहीं उठा सकता है। रक्षा मंत्री भी बयान देती हैं, लेकिन आंख तो रोज उठ रही है। उन्होंने भारतीय सेना के के खिलाफ बेतुका बयान देते हुए कहा कई जब आतंकवादी ये हाल कर रहे हैं. तो पाकिस्तानी फौज आएगी तो क्या हालत होगी।
नई दिल्लीः यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि पाकिस्तानी आतंकी हमारे देश में घुसपैठ कर रहे हैं लेकिन हमारे ही देश के नेता उनके नाम से हमें डराकर सेना का अपमान भी कर रहे हैं, पाकिस्तान हमपर तीन बार हमला कर चुका है और तीनों बार हारा है उसके बाद भी सपा सांसद नरेश अग्रवाल हमें पाकिस्तानी फ़ौज का डर दिखा रहे हैं. कल समाजवादी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने जम्मू कश्मीर पर आतंकवादी हमले को लेकर बेतुका बयान दिया. नरेश अग्रवाल ने आज संसद के बाहर कहा, गृह मंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं कि शहादत खाली नहीं जायेगा कोई हमारी तरफ आंख नहीं उठा सकता है। रक्षा मंत्री भी बयान देती हैं, लेकिन आंख तो रोज उठ रही है। उन्होंने भारतीय सेना के के खिलाफ बेतुका बयान देते हुए कहा कई जब आतंकवादी ये हाल कर रहे हैं. तो पाकिस्तानी फौज आएगी तो क्या हालत होगी।
नयी दिल्लीः भारत में आने वाले दिनों में हवाई यात्रियों को तीन और विमानन कंपनियों का विकल्प मिल सकता है क्योंकि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हाल ही में तीन कंपनियों को परिचालन के लिए मंजूरी दी है। नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। सिंधिया ने कहा कि 2014 से पहले डीजीसीए द्वारा समेकित रूप से जारी किए गए पायलट लाइसेंस की संख्या 28,599 थी और आज की तिथि के अनुसार यह संख्या 40,276 है। उन्होंने हालांकि कहा कि पायलटों की मांग, यात्रियों की संख्या तथा विमानन कंपनियों द्वारा विमानों के बेड़े के विस्तार पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि बेड़े के पूर्वानुमान को देखते हुए महसूस किया गया है कि भारत को अगले पांच वर्षों में प्रति वर्ष लगभग 1000 पायलटों की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने बताया कि 2014 में 74 हवाई अड्डों पर परिचालन हो रहा था और अब यह संख्या बढ़कर 142 हो गई है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डा क्षमता को बढ़ाना एक सतत प्रक्रिया है और आगामी पांच वर्षों में सरकार की योजना 220 हवाई अड्डों पर परिचालन करने की है। सिंधिया ने कहा कि विमानों के बेड़े में 2014 से पहले 410 विमान थे जो 25 जुलाई 2022 की स्थिति के अनुसार 686 है। (भाषा)
नयी दिल्लीः भारत में आने वाले दिनों में हवाई यात्रियों को तीन और विमानन कंपनियों का विकल्प मिल सकता है क्योंकि नागर विमानन महानिदेशालय ने हाल ही में तीन कंपनियों को परिचालन के लिए मंजूरी दी है। नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। सिंधिया ने कहा कि दो हज़ार चौदह से पहले डीजीसीए द्वारा समेकित रूप से जारी किए गए पायलट लाइसेंस की संख्या अट्ठाईस,पाँच सौ निन्यानवे थी और आज की तिथि के अनुसार यह संख्या चालीस,दो सौ छिहत्तर है। उन्होंने हालांकि कहा कि पायलटों की मांग, यात्रियों की संख्या तथा विमानन कंपनियों द्वारा विमानों के बेड़े के विस्तार पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि बेड़े के पूर्वानुमान को देखते हुए महसूस किया गया है कि भारत को अगले पांच वर्षों में प्रति वर्ष लगभग एक हज़ार पायलटों की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने बताया कि दो हज़ार चौदह में चौहत्तर हवाई अड्डों पर परिचालन हो रहा था और अब यह संख्या बढ़कर एक सौ बयालीस हो गई है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डा क्षमता को बढ़ाना एक सतत प्रक्रिया है और आगामी पांच वर्षों में सरकार की योजना दो सौ बीस हवाई अड्डों पर परिचालन करने की है। सिंधिया ने कहा कि विमानों के बेड़े में दो हज़ार चौदह से पहले चार सौ दस विमान थे जो पच्चीस जुलाई दो हज़ार बाईस की स्थिति के अनुसार छः सौ छियासी है।
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