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गूगल के प्योर इंड्रॉयड फ्लैगशिप फोन्स बाजार में उपलब्ध हैं. हम गूगल पिक्सल 3 और पिक्सल 3 XL की सबसे पहली जानकारी लाएं हैं. भारी भरकम दाम वाले इस फोन में शानदार फीचर हैं. साथ ही हमने नोकिया 3. 1 का रिव्यू किया. 3500 mah बैट्री वाले इस बजट स्मार्ट फोन में एचजी प्लस डिसप्ले है, लेकिन क्या हमें यह प्रभावित कर पाया बताएंगे इस शो में. बाजार में एमआई बैंड 3 ने भी दस्तक दे दी है. सेल गुरु में इसे भी चेक करेंगे. हम यह भी बताएंगे कि आप अपना ऑनलाइन डेटा कैसे सुरक्षित रखें.
गूगल के प्योर इंड्रॉयड फ्लैगशिप फोन्स बाजार में उपलब्ध हैं. हम गूगल पिक्सल तीन और पिक्सल तीन XL की सबसे पहली जानकारी लाएं हैं. भारी भरकम दाम वाले इस फोन में शानदार फीचर हैं. साथ ही हमने नोकिया तीन. एक का रिव्यू किया. तीन हज़ार पाँच सौ mah बैट्री वाले इस बजट स्मार्ट फोन में एचजी प्लस डिसप्ले है, लेकिन क्या हमें यह प्रभावित कर पाया बताएंगे इस शो में. बाजार में एमआई बैंड तीन ने भी दस्तक दे दी है. सेल गुरु में इसे भी चेक करेंगे. हम यह भी बताएंगे कि आप अपना ऑनलाइन डेटा कैसे सुरक्षित रखें.
Pitru Paksha 2023 Dates: पितृ पक्ष शुरू होने वाले हैं, वैसे तो ये पूरे 15 दिन ही महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन इनकी कुछ तिथियों को विशेष माना गया है. इन तिथियों में कोई गलती करना पितरों को नाराज कर सकता है. Pitru Paksha ke Niyam: भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ होता है और अश्विन मास की अमावस्या पर समाप्त होते हैं. इसे सर्व पितृ अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या या महालया भी कहते हैं. इस साल 29 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं और 14 अक्टूबर 2023 को पितृ पक्ष समाप्त होगा. पितृ पक्ष के 15 दिन बहुत खास होते हैं और यह पूर्वजों को समर्पित होते हैं. इन 15 दिनों में पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करना और श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान किया जाता है. इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. उनके आशीर्वाद से घर में खुशहाली, समृद्धि और बरकत आती है. यदि पितृ पक्ष के पूरे 15 दिन आप तर्पण आदि कार्य ना कर पाएं तो इसकी 3 विशेष तिथियों पर जरूर ये काम कर लें. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की इन 3 तिथियों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. वैसे तो पितृ पक्ष की सभी तिथियां महत्वपूर्ण हैं, साथ ही जिस तिथि में पूर्वजों की मृत्यु हुई हो उस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. लेकिन इसके अलावा भी पितृ पक्ष की कुछ तिथियां विशेष होती हैं. जिसमें पितरों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान करना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष की सबसे अहम तिथियां कौनसी हैं. 1. भरणी श्राद्धः इस साल चतुर्थी तिथि के दिन भरणी श्राद्ध किया जाएगा. इस साल 2 अक्टूबर 2023 को भरणी श्राद्ध किया जाएगा. परिजन की मृत्यु के एक साल बाद भरणी श्राद्ध करना जरूरी होता है. खासतौर पर ऐसे मृतक जो अविवाहित होते हैं, उनका श्राद्ध पंचमी तिथि को किया जाता है लेकिन उस दिन यदि भरणी नक्षत्र हो तो बहुत अच्छा होता है. इसके अलावा मान्यता है कि गया या पुष्कर में भरणी श्राद्ध करने से मृतक की आत्मा को मोक्ष मिलता है. 2. नवमी श्राद्धः पितृ पक्ष की नवमी तिथि को नवमी श्राद्ध, मातृ श्राद्ध या मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है. इस साल 7 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध है. इस तिथि पर परिवार की मातृ पितर जैसे मां, दादी, नानी पक्ष का श्राद्ध किया जाता है. यह दिन माता पितरों को समर्पित होता है. इस दिन माता पितरों का श्राद्ध ना करने से वे नाराज हो जाती हैं और बड़ा पितृ दोष लगाती हैं. 3. सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्धः आश्विन अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्ध होता है. इस साल 14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या है. सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध करते हैं, जिनके निधन की तिथि मालूम नहीं होती है या किसी कारण से उस तिथि पर श्राद्ध ना कर पाएं तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर सकते हैं. इसके अलावा अपने सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए इस अमावस्या को श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि करते हैं. इस दिन श्राद्ध कर्म जरूर कर लेने चाहिए, वरना पितृ नाराज हो सकते हैं. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
Pitru Paksha दो हज़ार तेईस Dates: पितृ पक्ष शुरू होने वाले हैं, वैसे तो ये पूरे पंद्रह दिन ही महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन इनकी कुछ तिथियों को विशेष माना गया है. इन तिथियों में कोई गलती करना पितरों को नाराज कर सकता है. Pitru Paksha ke Niyam: भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ होता है और अश्विन मास की अमावस्या पर समाप्त होते हैं. इसे सर्व पितृ अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या या महालया भी कहते हैं. इस साल उनतीस सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं और चौदह अक्टूबर दो हज़ार तेईस को पितृ पक्ष समाप्त होगा. पितृ पक्ष के पंद्रह दिन बहुत खास होते हैं और यह पूर्वजों को समर्पित होते हैं. इन पंद्रह दिनों में पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करना और श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान किया जाता है. इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. उनके आशीर्वाद से घर में खुशहाली, समृद्धि और बरकत आती है. यदि पितृ पक्ष के पूरे पंद्रह दिन आप तर्पण आदि कार्य ना कर पाएं तो इसकी तीन विशेष तिथियों पर जरूर ये काम कर लें. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की इन तीन तिथियों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. वैसे तो पितृ पक्ष की सभी तिथियां महत्वपूर्ण हैं, साथ ही जिस तिथि में पूर्वजों की मृत्यु हुई हो उस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. लेकिन इसके अलावा भी पितृ पक्ष की कुछ तिथियां विशेष होती हैं. जिसमें पितरों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान करना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष की सबसे अहम तिथियां कौनसी हैं. एक. भरणी श्राद्धः इस साल चतुर्थी तिथि के दिन भरणी श्राद्ध किया जाएगा. इस साल दो अक्टूबर दो हज़ार तेईस को भरणी श्राद्ध किया जाएगा. परिजन की मृत्यु के एक साल बाद भरणी श्राद्ध करना जरूरी होता है. खासतौर पर ऐसे मृतक जो अविवाहित होते हैं, उनका श्राद्ध पंचमी तिथि को किया जाता है लेकिन उस दिन यदि भरणी नक्षत्र हो तो बहुत अच्छा होता है. इसके अलावा मान्यता है कि गया या पुष्कर में भरणी श्राद्ध करने से मृतक की आत्मा को मोक्ष मिलता है. दो. नवमी श्राद्धः पितृ पक्ष की नवमी तिथि को नवमी श्राद्ध, मातृ श्राद्ध या मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है. इस साल सात अक्टूबर को नवमी श्राद्ध है. इस तिथि पर परिवार की मातृ पितर जैसे मां, दादी, नानी पक्ष का श्राद्ध किया जाता है. यह दिन माता पितरों को समर्पित होता है. इस दिन माता पितरों का श्राद्ध ना करने से वे नाराज हो जाती हैं और बड़ा पितृ दोष लगाती हैं. तीन. सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्धः आश्विन अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्ध होता है. इस साल चौदह अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या है. सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध करते हैं, जिनके निधन की तिथि मालूम नहीं होती है या किसी कारण से उस तिथि पर श्राद्ध ना कर पाएं तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर सकते हैं. इसके अलावा अपने सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए इस अमावस्या को श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि करते हैं. इस दिन श्राद्ध कर्म जरूर कर लेने चाहिए, वरना पितृ नाराज हो सकते हैं.
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 से 14 नवंबर के दौरान फिलीपीन्स की यात्रा पर जाएंगे। मोदी रविवार को तीन दिवसीय यात्रा के दौरान फिलीपीन्स पहुचेंगे। यहां पर मोदी 15वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और 12वें पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान मोदी राष्ट्रपति रॉड्रिगो ड्यूटेटे के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। इस दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों व आपसी हित के संबंधों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा मोदी वहां पर कई बड़े नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। आसियान में शामिल 10 सदस्य देश है-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। इन सभी देशों के प्रमुख इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। नरेन्द्र मोदी का यह पहला आधिकारिक फिलीपीन्स दौरा होगा। विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीति सरन ने मीडिया को बताया कि पीएम मोदी 15वें आसियान-भारत शिखर बैठक और 12वें ईस्ट एशिया शिखर बैठक में भाग लेने के लिए वहां जा रहे है। गौरतलब है कि मोदी चौथी बार भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान आसियान के 50 साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर आयोजित कार्यक्रम में भी मोदी के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इसके अलावा मोदी इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट जायेंगे जो कि चावल के शोध के क्षेत्र में विषय का अग्रणी देश है। आसियान देशों के विकास के लिए ये सम्मेलन आयोजित किया जाता है। भारत इस दौरान आसियान देशों के साथ संबंध अधिक मजबूत करने की कोशिश करेगा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बारह से चौदह नवंबर के दौरान फिलीपीन्स की यात्रा पर जाएंगे। मोदी रविवार को तीन दिवसीय यात्रा के दौरान फिलीपीन्स पहुचेंगे। यहां पर मोदी पंद्रहवें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और बारहवें पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान मोदी राष्ट्रपति रॉड्रिगो ड्यूटेटे के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। इस दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों व आपसी हित के संबंधों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा मोदी वहां पर कई बड़े नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। आसियान में शामिल दस सदस्य देश है-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। इन सभी देशों के प्रमुख इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। नरेन्द्र मोदी का यह पहला आधिकारिक फिलीपीन्स दौरा होगा। विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीति सरन ने मीडिया को बताया कि पीएम मोदी पंद्रहवें आसियान-भारत शिखर बैठक और बारहवें ईस्ट एशिया शिखर बैठक में भाग लेने के लिए वहां जा रहे है। गौरतलब है कि मोदी चौथी बार भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान आसियान के पचास साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर आयोजित कार्यक्रम में भी मोदी के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इसके अलावा मोदी इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट जायेंगे जो कि चावल के शोध के क्षेत्र में विषय का अग्रणी देश है। आसियान देशों के विकास के लिए ये सम्मेलन आयोजित किया जाता है। भारत इस दौरान आसियान देशों के साथ संबंध अधिक मजबूत करने की कोशिश करेगा।
खबर तमिलनाडु से है, जहां पर मामल्लपुरम इलाके में मछुआरे रोज की तरह समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। लेकिन इस बार उनके हाथों मछली नहीं, बल्कि उन्हें कुछ ऐसी चीज मिली जिसे देख लो चौंक गए। मामल्लपुरमः खबर तमिलनाडु से है, जहां पर मामल्लपुरम इलाके में मछुआरे रोज की तरह समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। लेकिन इस बार उनके हाथों मछली नहीं, बल्कि उन्हें कुछ ऐसी चीज मिली जिसे देख लो चौंक गए। दरअसल, चेंगलपट्टू जिले के मामल्लपुरम इलाके में जब मछुआरे मछली पकड़ने गए तो उनके जाल में एक भारी चीज मिली। जब उनके जाल में वो भारी चीज फंसी तो उन्हें लगा कि उन्हें भारी मछली हाथ लगी है। लेकिन जब उन्होंने जाल बाहर निकाला तो उसमें भारी मात्रा में हरे रंग के पैकेट दिखे। जब तट लाकर उन पैकेट्स की जांच की गई तो पता चला कि वो चीनी चाय के पैकेट्स थे। उनके अंदर मेथाफेटामाइन मिला। जो कि एक तरफ की ड्रग होती है। इसे क्रिस्टर मेथ के नाम से भी जाना जाता है। मछुआरों को करीब 78 किलोग्राम की मात्रा में वो ड्रग मिली। जिसकी बाजार में कीमत करीब 230 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके बाद मछुआरों को पुलिस को इसकी जानकारी दी और उन्हें सारे ड्रग दे दिए हैं। जिन पैकेट्स में ड्रग बरामद हुई हैं, वो चीनी चाय के पैकेट्स हैं। राज्य की नार्कोटिक्स इंटेलिजेंस ब्यूरो क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, यह काफी हाई-वैल्यू ड्रग है। इस एक किलो ड्रग की कीमत तीन करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। पुलिस को शक है कि इन ड्रग्स को श्रीलंका होते हुए मलेशिया पहुंचाया जाने वाला था। इस ड्रग का उपयोग ज्यादातर रेव पार्टियों में किया जाता है। यह मनुष्य के नर्वस सिस्टम पर बुरा असर डालता है। इस ड्रग के साथ पकड़े जाने पर व्यक्ति को 20 साल की जेल और दो लाख रुपये जुर्माना देना होता है या फिर दोनों सजा दी जा सकती है। वहीं अगर व्यक्ति कई बार गलती करता है तो उसे मौत की सजा भी दी जा सकती है। बता दें कि बीते दिनों तमिलनाडु के रामनाथापुरम में भी पुलिस ने 11. 4 किलोग्राम ड्रग्स और 1. 5 टन रेड सैंडर्स पकड़े थे। ये सभी श्रीलंका जा रहे थे। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें ।
खबर तमिलनाडु से है, जहां पर मामल्लपुरम इलाके में मछुआरे रोज की तरह समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। लेकिन इस बार उनके हाथों मछली नहीं, बल्कि उन्हें कुछ ऐसी चीज मिली जिसे देख लो चौंक गए। मामल्लपुरमः खबर तमिलनाडु से है, जहां पर मामल्लपुरम इलाके में मछुआरे रोज की तरह समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। लेकिन इस बार उनके हाथों मछली नहीं, बल्कि उन्हें कुछ ऐसी चीज मिली जिसे देख लो चौंक गए। दरअसल, चेंगलपट्टू जिले के मामल्लपुरम इलाके में जब मछुआरे मछली पकड़ने गए तो उनके जाल में एक भारी चीज मिली। जब उनके जाल में वो भारी चीज फंसी तो उन्हें लगा कि उन्हें भारी मछली हाथ लगी है। लेकिन जब उन्होंने जाल बाहर निकाला तो उसमें भारी मात्रा में हरे रंग के पैकेट दिखे। जब तट लाकर उन पैकेट्स की जांच की गई तो पता चला कि वो चीनी चाय के पैकेट्स थे। उनके अंदर मेथाफेटामाइन मिला। जो कि एक तरफ की ड्रग होती है। इसे क्रिस्टर मेथ के नाम से भी जाना जाता है। मछुआरों को करीब अठहत्तर किलोग्रामग्राम की मात्रा में वो ड्रग मिली। जिसकी बाजार में कीमत करीब दो सौ तीस करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके बाद मछुआरों को पुलिस को इसकी जानकारी दी और उन्हें सारे ड्रग दे दिए हैं। जिन पैकेट्स में ड्रग बरामद हुई हैं, वो चीनी चाय के पैकेट्स हैं। राज्य की नार्कोटिक्स इंटेलिजेंस ब्यूरो क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, यह काफी हाई-वैल्यू ड्रग है। इस एक किलो ड्रग की कीमत तीन करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। पुलिस को शक है कि इन ड्रग्स को श्रीलंका होते हुए मलेशिया पहुंचाया जाने वाला था। इस ड्रग का उपयोग ज्यादातर रेव पार्टियों में किया जाता है। यह मनुष्य के नर्वस सिस्टम पर बुरा असर डालता है। इस ड्रग के साथ पकड़े जाने पर व्यक्ति को बीस साल की जेल और दो लाख रुपये जुर्माना देना होता है या फिर दोनों सजा दी जा सकती है। वहीं अगर व्यक्ति कई बार गलती करता है तो उसे मौत की सजा भी दी जा सकती है। बता दें कि बीते दिनों तमिलनाडु के रामनाथापुरम में भी पुलिस ने ग्यारह. चार किलोग्रामग्राम ड्रग्स और एक. पाँच टन रेड सैंडर्स पकड़े थे। ये सभी श्रीलंका जा रहे थे। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें ।
इन पाँचों प्रकारों में सिद्ध पना नहीं, क्योंकि सर्वथा शरीर के परित्यागने से सिद्ध होता है। जहां शरीर नहीं तहां इन्द्रिय भी कोई नहीं । इसी वास्ते सिद्ध अतींद्रिय हैं। [३] १. पृथि - वीकाय, २. धपूकाय, ३. तेजःकाय, ४. पवनकाय, ५. वनस्पतिकाय, ६. सकाय । इन छे ही कार्यों के जीवों में सिद्धपना नहीं। क्योंकि सिद्ध जो हैं, सो अंकाय - काय रहित हैं । [ ४ ] काय, वचन अरु मन के भेद से योग तीन हैं । उस में केवल काययोग वाले एकेंद्रिय जीव हैं, अरु काय वचन योग वाले द्वींद्रियादि प्रसंशी पंचेंद्रिय पर्यंत जीव हैं, अरु काय, वचन, मन योग वाले संज्ञी पंचेन्द्रिय प्रर्याप्त जीव हैं। इन तीनों योगों में सिद्धपने की सत्ता नहीं । क्योंकि सिद्ध प्रयोगी हैं, अरु अयोगीपना तो काय वचन ..अरु मन के प्रभाव से होता है । [५] स्त्री, पुरुष, नपुंसक, इन तीनों वेदों में सिद्ध प्रद की सत्ता का अभाव है, क्यों कि सिद्ध जो हैं, सो पूर्वोक्त हेतु से अवेदी हैं।[ ६ ] क्रोध, मान, माया, लोभ, इन चारों कषायों में सिद्धपना नहीं है, क्योंकि सिंद्ध अकषायी हैं, सो अकषायिपना फर्म के प्रभाव से होता है। [७] मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवलज्ञान, यह पांच प्रकार का ज्ञान है प्रज्ञान, श्रुत प्रज्ञान, विभंगज्ञान, यह तीन अज्ञान हैं। उस में आादि के चारों ज्ञानों में रु तीनों प्रज्ञानों में सिद्धपना इन पाँचों प्रकारों में सिद्ध पना नहीं, क्योंकि सर्वथा शरीर के परित्यागने से सिद्ध होता है। जहां शरीर नहीं तहां इन्द्रिय भी कोई नहीं । इसी वास्ते सिद्ध अतींद्रिय हैं। [३] १. पृथि - वीकाय, २. अप्काय, ३. तेजःकाय, ४. पवनकाय, ५. वनस्पतिकाय, ६. सकाय । इन छे ही कार्यों के जीवों में सिद्धपना नहीं क्योंकि सिद्ध जो हैं, सो अंकाय - काय रहित हैं। [ ४ ] काय, वचन अहं मन के भेद से योग तीन हैं । उस में केवल काययोग वाले एकेंद्रिय जीव है, अरु काय बचन योग वाले छींद्रियादि असंज्ञी पंचेंद्रिय पर्यंत जीव हैं, अरु काय, वचन, मन योग वाले संज्ञी पंचेन्द्रिय प्रर्याप्त जीव हैं । इन तीनों योगों में सिद्धपने की सत्ता नहीं । क्योंकि सिद्ध प्रयोगी हैं, अरु अयोगीपना तो काय वचन ...अरु मन के प्रभाव से होता है । [५] स्त्री, पुरुष, नपुंसक, इन तीनों वेदों में सिद्ध प्रद की सत्ता का अभाव है, क्यों कि सिद्ध जो हैं, सो पूर्वोक्त हेतु से प्रवेदी हैं।[६] क्रोध, मान, माया, लोभ, इन चारों कषायों में सिद्धपना नहीं है, क्योंकि सिद्ध कषायी हैं, सो अकषायिपना कर्म के प्रभाव ..से होता है। [७] मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवलशान, यह पांच प्रकार का ज्ञान है । रुमति अज्ञान, श्रुत प्रज्ञान, विभंगज्ञान, यह तीन अज्ञान हैं। उस में आदि के चारों ज्ञानों में तीनों प्रज्ञानों में सिद्धपना नहीं । सिद्ध जो है, सो नोभव्य न्रोअभव्य है । यह आप्त वचन भी है। [१२] क्षायिक, चायोपशमिक, उपशम, सास्वादन, अरु वेदक, यह पांच प्रकार का सम्यक्त्व है । इन का विपक्षी एक मिथ्यात्व, दूसरा सम्यक्त्व मिथ्यात्व - मिश्र है । • तिन में से क्षायिक वर्जित चार सम्यक्त्व अरु मिथ्यात्व, तथा मिश्र, इन में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि यह सर्व क्षायोपशमिकादि भाववर्ती हैं । और क्षायिक सम्यक्त्व में सिद्ध पद है। क्षायिक सम्यक्त्व भी दो तरें का है । एक शुद्ध, दूसरा अशुद्ध । तहां शुद्ध, अपाय, सत् द्रव्य रहित भवस्थ केवलियों के है । अरु सिद्धों के शुद्ध जीव स्वभावरूप सम्यक् दृष्टि है, सादि अपर्यवसान है । अरु अशुद्ध अपाय सहचारिणी श्रेणिकादिकों की तरें सम्यक् दृष्टि होना, यह क्षायिक सादि सपर्यवसान है । तहां अशुद्ध क्षायिक में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि उस के अपाय सहचारी हैं । अरु शुद्ध क्षायिक ' में तो सिद्ध सत्ता का विरोध नहीं, क्योंकि सिद्ध अवस्था में भी शुद्ध क्षायिक रहता है। अपाय मतिज्ञानांश का नामः है । अरु सतू द्रव्य शुद्ध सम्यक्त्व के दलियों का नाम है । इन दोनों का अभाव होने से क्षायिक सम्यक्त्व के होता है । [१३] संज्ञा यद्यपि तीन प्रकार की है - १. हेतुवादोपदेशिनी, २. दृष्टिवादोपदेशिनी, ३. दीर्घकालिकी; तो भी दीर्घकालिकी संज्ञा करके जो संज्ञी हैं, वे ही व्यवहार में प्रायः नहीं । सिद्ध जो है, सो नोभव्य नोअभव्य है । यह आप्त वचन भी है। [१२] क्षायिक, क्षायोपशमिक, उपशम, सास्वादन, अरु वेदक, यह पांच प्रकार का सम्यक्त्व है । इन का विपक्षी एक मिथ्यात्व, दूसरा सम्यक्त्व मिथ्यात्व - मिश्र है । • तिन में से क्षायिक वर्जित चार सम्यक्त्व अरु मिथ्यात्व, तथा मिश्र, इन में सिद्ध पद नहीं । क्योंकि यह सर्व क्षायोपरामिकादि भाववर्ती हैं। और क्षायिक सम्यक्त्व में सिद्ध पद है । क्षायिक सम्यक्त्व भी दो तरें का है । एक शुद्ध, दूसरा अशुद्ध । तहां शुद्ध, अपाय, सत् द्रव्य रहित भवस्थ केवलियों के है । अरु सिद्धों के शुद्ध जीव स्वभावरूप सम्यक् दृष्टि है, सादि अपर्यवसान है । अरु अशुद्ध अपाय सहचारिणी श्रेणिकादिकों की तरें सम्यक् दृष्टि होना, यह क्षायिक सादि सपर्यवसान है । तहां अशुद्ध क्षायिक में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि उस के अपाय सहचारी हैं। अरु शुद्ध क्षायिक में तो सिद्ध सत्ता का विरोध नहीं, क्योंकि सिद्ध अवस्था में भी शुद्ध क्षायिक रहता है । अपाय मतिज्ञानांश का नाम है । अरु सतु द्रव्य शुद्ध सम्यक्त्व के दलियों का नाम है । इन दोनों का अभाव होने से क्षायिक सम्यक्त्व के होता है । [१३] संज्ञा यद्यपि तीन प्रकार की है- १. हेतुवादोपदेशिनी, २.. दृष्टिवादोपदेशिनी, ३. दीर्घकालिकी; तो भी दीर्घकालिकी संज्ञा करके जो संज्ञी हैं, वे ही व्यवहार में प्रायः के अनंतवें भाग में हैं । आठमा भाव द्वार-सो सिद्ध को क्षायिक और पारिणामिक भाव है, शेष भाव नहीं । नवमा अल्प बहुत्वद्वार - सो सर्व से थोडे अनंतर सिद्ध हैं। अनंतरसिद्ध उन को कहते हैं कि जिन कों, सिद्ध हुए एक समय हुआ है, तिन से परंपरा सिद्ध अनंत गुणे हुए हैं । छः मास सिद्ध होने में उत्कृष्ट अंतर होता है । यह मोचतत्व का स्वरूप संक्षेप मात्र से लिखा है, जेकर विशेष करके सिद्ध का स्वरूप देखना होवे, तदा नंदीसूत्र, प्रज्ञापनासूत्र, सिद्धप्राभृतसूत्र, सिद्धपंचाशिका, देवाचार्यकृत नवतत्त्वं प्रकरण की वृत्ति देख लेनी । इति श्री तपागच्छीय मुनिश्रीवुद्धिविजय शिष्य सुनि • आनंदविजय - आत्माराम विरचिते जैनतत्त्वादशे पंचमः परिच्छेदः संपूर्णः" के अनंतवें भाग में हैं। आठमा भाव द्वार सो सिद्ध को क्षायिक और पारिणामिक भाव है, शेष भाव नहीं । नवमा अल्प बहुत्वद्वार - सो सर्व से थोडे अनंतरसिद्ध हैं। अनंतर सिद्ध उन को कहते हैं कि जिन कों, सिद्ध हुए एक समय हुआ है, तिन से परंपरा सिद्ध अनंत गुणे हुए हैं । छः मास सिद्ध होने में उत्कृष्ट अंतर होता है। यह मोचतत्त्व का स्वरूप संक्षेप मात्र से लिखा है, जेकर विशेष करके सिद्ध का स्वरूप देखना होवे, तदा नंदीसूत्र, प्रज्ञापनासूत्र, सिद्धप्राभृतसूत्र, सिद्धपंचाशिका, देवाचार्यकृत नवतत्त्व प्रकरण की वृत्ति देख लेनी । इति श्री तपागच्छीय मुनिश्रीबुद्धिविजय शिष्य मुनि · आनंदविजय - आत्माराम विरचिते जैनतत्त्वादशे पंचमः परिच्छेदः संपूर्णः की हो सो व्यक्रमिथ्यात्व है । उपलक्षण से जीवादि नव पदार्थों में जिस की श्रद्धा नहीं, अर जिनोक तत्व से जो विपरीत प्ररूपणा करनी, नया जिनोक तत्व में संख्य रखना, जिनक तत्व में दूषणों का आरोप करना, इत्यादि । Fथा क्षभिप्रालिका जो पांच मियान्य हैं. उन में प धनायोगिक तो अव्यक मिथ्यात्व है शेष चार भेद व्यक मिथ्यात्य के है । तथा "अधस्मे धम्मसपणा" इत्यादि । यस प्रकार का जो मिथ्यात्व है, सो सर्व व्यक्त मिथ्या है । अपर-दूसरा जो अनादि काल में मोहनीय तिरूप आत्मा के गुण का आच्छादक, जीव के साथ सहा अविनाभायी है, सो अव्यक्त मिथ्यात्व है । अय मिथ्याय की गुण स्थान किस रीति से कहते हैं, सो दिखते हैं । अनादि काल में अव्यवहार राशिवर्ती जीव में सदा से ही अय्यन मिथ्यात्व रहता है, परंतु उस में व्यक मिथ्यात्व बुद्धि की जो ग्रामि है, उसी को मिथ्यात्य गुणस्थान के नाम में कहा है । देवगुरुपर्मपीः । निम्नम् ।। [ गुण० प्रा० श्ये० ६ की वृत्ति] ।हमा समप्रभ इस प्रकार हैःदम मित्रपक्ष में गद्दाः - प्रथम्मे धम्मवण्णा धम्मे अधम्मगण्णा मागे मग्गवण्णा गणे उम्मन्गवण्णा अजीवेमु जीवराण्णा : प्रोषणा साइम साहुगण्णा, साहुमुआसाहुसण्या प्रमुत्तेसु व्यक्रमिथ्यात्व है । उपलक्षण से जीवादि जय पदार्थों में जिस की श्रद्धा नहीं, अग जिनोक तत्व से जो विपरीत प्ररूपणा करनी, तथा जिनोक तत्व में संशय रखनानक तत्व में का आरोप करना, इत्यादि । Fथा अभिप्रालिका िजो पांच मान्य हैं. उन में पक धनाभोगिक at as प्यार भेद व्यक मिथ्यात्व के हैं। तथा "अधम्मे धम्मसण्णा" इत्यादि । यश प्रकार का जो मिथ्या है, सो सर्व व्यक्त मियान्य में । अपर-दूसरा, जो अनादि काल में मोहनीय मति रूप. सतरूप आत्मा के गुण का आच्छादक, जीव के साथ सहा अविनाभायी है, सो अव्यक्त मिथ्यात्व है अय मिथ्यात्य को गुण स्थान किंस रीति में कहते हैं, सो लिखते हैं । अनादि काल में अव्यवहार राशिवर्ती जीव में सदा से ही अव्यक्त मिथ्यात्व रहता है, परंतु उस में व्यक मिथ्यात्व बुद्धि की जो प्राति है. उसी को मिथ्यात्य गुणस्थान के नाम में कहा है । देवगुरुपर्वधीः । नम् ॥ [ गुप० प्रा० श्ये० ६ की पूति] ।हमा समान प्रकार हैः-- दमो में गद्दाः - अपम्मे भम्राण्णा धम्मे अधम्मगण्णा उमाणे गग्गसण्णा गणे उम्मग्गवण्णा अजीवेस जीवसण्णा : पे प्रोषणा साइनु साहुमण्णा साहुमुआसाहुसण्णा प्रमुत्तेसु षष्ठ परिच्छेदः. ही मिथ्यात्व करके मोहित जीव धर्माधर्म को सम्यक् - भली प्रकार नहीं जानता है । यदाहः - * मिथ्यात्वेनालीढचित्ता नितांतं, तत्वातत्त्वं जानते नैव जीवाः । किं जात्यंधाः कुत्रचिद्वस्तुजाते, रम्यारम्यं व्यक्तिमासादयेयुः ।। श्लो० ८ की वृत्ति ] अभव्य जीवों की अपेक्षा जो मिथ्यात्व है; तथा सामान्य प्रकार से जो अव्यक्त मिथ्यात्व है, इन की स्थिति अनादि अनंत है, परन्तु भव्य जीवों की अपेक्षा वह स्थिति अनादि सांत है । यह स्थिति सामान्य प्रकार से मिथ्यात्व की अपेक्षा दिखलाई है । जेकर मिथ्यात्व गुणस्थानक की स्थिति का विचार करिये तो भव्य जीवों की अपेक्षा वह अनादि सांत और सादि सांत भी है । तथा अभव्य जीवों की अपेक्षा अनादि अनंत है । मिथ्यात्व गुणस्थानक में रहा. हुआ जीव एक सौ बीस बंधप्रायोग्य कर्मप्रकृतियों में से तीर्थकर नाम कर्म की प्रकृति, आहारक शरीर, आहार कोपांग, यह तीन प्रकृति नहीं बांधता है, शेष एक सौ सतरां * भावार्थः - मिथ्यात्वग्रसितचित्त जीव तत्त्वातत्त्व का किंचित् भी विचार नहीं कर सकते । जैसे कि जन्मांध प्राणी रम्यारम्य वस्तु का ज्ञान नहीं कर सकते ।
इन पाँचों प्रकारों में सिद्ध पना नहीं, क्योंकि सर्वथा शरीर के परित्यागने से सिद्ध होता है। जहां शरीर नहीं तहां इन्द्रिय भी कोई नहीं । इसी वास्ते सिद्ध अतींद्रिय हैं। [तीन] एक. पृथि - वीकाय, दो. धपूकाय, तीन. तेजःकाय, चार. पवनकाय, पाँच. वनस्पतिकाय, छः. सकाय । इन छे ही कार्यों के जीवों में सिद्धपना नहीं। क्योंकि सिद्ध जो हैं, सो अंकाय - काय रहित हैं । [ चार ] काय, वचन अरु मन के भेद से योग तीन हैं । उस में केवल काययोग वाले एकेंद्रिय जीव हैं, अरु काय वचन योग वाले द्वींद्रियादि प्रसंशी पंचेंद्रिय पर्यंत जीव हैं, अरु काय, वचन, मन योग वाले संज्ञी पंचेन्द्रिय प्रर्याप्त जीव हैं। इन तीनों योगों में सिद्धपने की सत्ता नहीं । क्योंकि सिद्ध प्रयोगी हैं, अरु अयोगीपना तो काय वचन ..अरु मन के प्रभाव से होता है । [पाँच] स्त्री, पुरुष, नपुंसक, इन तीनों वेदों में सिद्ध प्रद की सत्ता का अभाव है, क्यों कि सिद्ध जो हैं, सो पूर्वोक्त हेतु से अवेदी हैं।[ छः ] क्रोध, मान, माया, लोभ, इन चारों कषायों में सिद्धपना नहीं है, क्योंकि सिंद्ध अकषायी हैं, सो अकषायिपना फर्म के प्रभाव से होता है। [सात] मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवलज्ञान, यह पांच प्रकार का ज्ञान है प्रज्ञान, श्रुत प्रज्ञान, विभंगज्ञान, यह तीन अज्ञान हैं। उस में आादि के चारों ज्ञानों में रु तीनों प्रज्ञानों में सिद्धपना इन पाँचों प्रकारों में सिद्ध पना नहीं, क्योंकि सर्वथा शरीर के परित्यागने से सिद्ध होता है। जहां शरीर नहीं तहां इन्द्रिय भी कोई नहीं । इसी वास्ते सिद्ध अतींद्रिय हैं। [तीन] एक. पृथि - वीकाय, दो. अप्काय, तीन. तेजःकाय, चार. पवनकाय, पाँच. वनस्पतिकाय, छः. सकाय । इन छे ही कार्यों के जीवों में सिद्धपना नहीं क्योंकि सिद्ध जो हैं, सो अंकाय - काय रहित हैं। [ चार ] काय, वचन अहं मन के भेद से योग तीन हैं । उस में केवल काययोग वाले एकेंद्रिय जीव है, अरु काय बचन योग वाले छींद्रियादि असंज्ञी पंचेंद्रिय पर्यंत जीव हैं, अरु काय, वचन, मन योग वाले संज्ञी पंचेन्द्रिय प्रर्याप्त जीव हैं । इन तीनों योगों में सिद्धपने की सत्ता नहीं । क्योंकि सिद्ध प्रयोगी हैं, अरु अयोगीपना तो काय वचन ...अरु मन के प्रभाव से होता है । [पाँच] स्त्री, पुरुष, नपुंसक, इन तीनों वेदों में सिद्ध प्रद की सत्ता का अभाव है, क्यों कि सिद्ध जो हैं, सो पूर्वोक्त हेतु से प्रवेदी हैं।[छः] क्रोध, मान, माया, लोभ, इन चारों कषायों में सिद्धपना नहीं है, क्योंकि सिद्ध कषायी हैं, सो अकषायिपना कर्म के प्रभाव ..से होता है। [सात] मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवलशान, यह पांच प्रकार का ज्ञान है । रुमति अज्ञान, श्रुत प्रज्ञान, विभंगज्ञान, यह तीन अज्ञान हैं। उस में आदि के चारों ज्ञानों में तीनों प्रज्ञानों में सिद्धपना नहीं । सिद्ध जो है, सो नोभव्य न्रोअभव्य है । यह आप्त वचन भी है। [बारह] क्षायिक, चायोपशमिक, उपशम, सास्वादन, अरु वेदक, यह पांच प्रकार का सम्यक्त्व है । इन का विपक्षी एक मिथ्यात्व, दूसरा सम्यक्त्व मिथ्यात्व - मिश्र है । • तिन में से क्षायिक वर्जित चार सम्यक्त्व अरु मिथ्यात्व, तथा मिश्र, इन में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि यह सर्व क्षायोपशमिकादि भाववर्ती हैं । और क्षायिक सम्यक्त्व में सिद्ध पद है। क्षायिक सम्यक्त्व भी दो तरें का है । एक शुद्ध, दूसरा अशुद्ध । तहां शुद्ध, अपाय, सत् द्रव्य रहित भवस्थ केवलियों के है । अरु सिद्धों के शुद्ध जीव स्वभावरूप सम्यक् दृष्टि है, सादि अपर्यवसान है । अरु अशुद्ध अपाय सहचारिणी श्रेणिकादिकों की तरें सम्यक् दृष्टि होना, यह क्षायिक सादि सपर्यवसान है । तहां अशुद्ध क्षायिक में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि उस के अपाय सहचारी हैं । अरु शुद्ध क्षायिक ' में तो सिद्ध सत्ता का विरोध नहीं, क्योंकि सिद्ध अवस्था में भी शुद्ध क्षायिक रहता है। अपाय मतिज्ञानांश का नामः है । अरु सतू द्रव्य शुद्ध सम्यक्त्व के दलियों का नाम है । इन दोनों का अभाव होने से क्षायिक सम्यक्त्व के होता है । [तेरह] संज्ञा यद्यपि तीन प्रकार की है - एक. हेतुवादोपदेशिनी, दो. दृष्टिवादोपदेशिनी, तीन. दीर्घकालिकी; तो भी दीर्घकालिकी संज्ञा करके जो संज्ञी हैं, वे ही व्यवहार में प्रायः नहीं । सिद्ध जो है, सो नोभव्य नोअभव्य है । यह आप्त वचन भी है। [बारह] क्षायिक, क्षायोपशमिक, उपशम, सास्वादन, अरु वेदक, यह पांच प्रकार का सम्यक्त्व है । इन का विपक्षी एक मिथ्यात्व, दूसरा सम्यक्त्व मिथ्यात्व - मिश्र है । • तिन में से क्षायिक वर्जित चार सम्यक्त्व अरु मिथ्यात्व, तथा मिश्र, इन में सिद्ध पद नहीं । क्योंकि यह सर्व क्षायोपरामिकादि भाववर्ती हैं। और क्षायिक सम्यक्त्व में सिद्ध पद है । क्षायिक सम्यक्त्व भी दो तरें का है । एक शुद्ध, दूसरा अशुद्ध । तहां शुद्ध, अपाय, सत् द्रव्य रहित भवस्थ केवलियों के है । अरु सिद्धों के शुद्ध जीव स्वभावरूप सम्यक् दृष्टि है, सादि अपर्यवसान है । अरु अशुद्ध अपाय सहचारिणी श्रेणिकादिकों की तरें सम्यक् दृष्टि होना, यह क्षायिक सादि सपर्यवसान है । तहां अशुद्ध क्षायिक में सिद्ध पद नहीं। क्योंकि उस के अपाय सहचारी हैं। अरु शुद्ध क्षायिक में तो सिद्ध सत्ता का विरोध नहीं, क्योंकि सिद्ध अवस्था में भी शुद्ध क्षायिक रहता है । अपाय मतिज्ञानांश का नाम है । अरु सतु द्रव्य शुद्ध सम्यक्त्व के दलियों का नाम है । इन दोनों का अभाव होने से क्षायिक सम्यक्त्व के होता है । [तेरह] संज्ञा यद्यपि तीन प्रकार की है- एक. हेतुवादोपदेशिनी, दो.. दृष्टिवादोपदेशिनी, तीन. दीर्घकालिकी; तो भी दीर्घकालिकी संज्ञा करके जो संज्ञी हैं, वे ही व्यवहार में प्रायः के अनंतवें भाग में हैं । आठमा भाव द्वार-सो सिद्ध को क्षायिक और पारिणामिक भाव है, शेष भाव नहीं । नवमा अल्प बहुत्वद्वार - सो सर्व से थोडे अनंतर सिद्ध हैं। अनंतरसिद्ध उन को कहते हैं कि जिन कों, सिद्ध हुए एक समय हुआ है, तिन से परंपरा सिद्ध अनंत गुणे हुए हैं । छः मास सिद्ध होने में उत्कृष्ट अंतर होता है । यह मोचतत्व का स्वरूप संक्षेप मात्र से लिखा है, जेकर विशेष करके सिद्ध का स्वरूप देखना होवे, तदा नंदीसूत्र, प्रज्ञापनासूत्र, सिद्धप्राभृतसूत्र, सिद्धपंचाशिका, देवाचार्यकृत नवतत्त्वं प्रकरण की वृत्ति देख लेनी । इति श्री तपागच्छीय मुनिश्रीवुद्धिविजय शिष्य सुनि • आनंदविजय - आत्माराम विरचिते जैनतत्त्वादशे पंचमः परिच्छेदः संपूर्णः" के अनंतवें भाग में हैं। आठमा भाव द्वार सो सिद्ध को क्षायिक और पारिणामिक भाव है, शेष भाव नहीं । नवमा अल्प बहुत्वद्वार - सो सर्व से थोडे अनंतरसिद्ध हैं। अनंतर सिद्ध उन को कहते हैं कि जिन कों, सिद्ध हुए एक समय हुआ है, तिन से परंपरा सिद्ध अनंत गुणे हुए हैं । छः मास सिद्ध होने में उत्कृष्ट अंतर होता है। यह मोचतत्त्व का स्वरूप संक्षेप मात्र से लिखा है, जेकर विशेष करके सिद्ध का स्वरूप देखना होवे, तदा नंदीसूत्र, प्रज्ञापनासूत्र, सिद्धप्राभृतसूत्र, सिद्धपंचाशिका, देवाचार्यकृत नवतत्त्व प्रकरण की वृत्ति देख लेनी । इति श्री तपागच्छीय मुनिश्रीबुद्धिविजय शिष्य मुनि · आनंदविजय - आत्माराम विरचिते जैनतत्त्वादशे पंचमः परिच्छेदः संपूर्णः की हो सो व्यक्रमिथ्यात्व है । उपलक्षण से जीवादि नव पदार्थों में जिस की श्रद्धा नहीं, अर जिनोक तत्व से जो विपरीत प्ररूपणा करनी, नया जिनोक तत्व में संख्य रखना, जिनक तत्व में दूषणों का आरोप करना, इत्यादि । Fथा क्षभिप्रालिका जो पांच मियान्य हैं. उन में प धनायोगिक तो अव्यक मिथ्यात्व है शेष चार भेद व्यक मिथ्यात्य के है । तथा "अधस्मे धम्मसपणा" इत्यादि । यस प्रकार का जो मिथ्यात्व है, सो सर्व व्यक्त मिथ्या है । अपर-दूसरा जो अनादि काल में मोहनीय तिरूप आत्मा के गुण का आच्छादक, जीव के साथ सहा अविनाभायी है, सो अव्यक्त मिथ्यात्व है । अय मिथ्याय की गुण स्थान किस रीति से कहते हैं, सो दिखते हैं । अनादि काल में अव्यवहार राशिवर्ती जीव में सदा से ही अय्यन मिथ्यात्व रहता है, परंतु उस में व्यक मिथ्यात्व बुद्धि की जो ग्रामि है, उसी को मिथ्यात्य गुणस्थान के नाम में कहा है । देवगुरुपर्मपीः । निम्नम् ।। [ गुणशून्य प्राशून्य श्येशून्य छः की वृत्ति] ।हमा समप्रभ इस प्रकार हैःदम मित्रपक्ष में गद्दाः - प्रथम्मे धम्मवण्णा धम्मे अधम्मगण्णा मागे मग्गवण्णा गणे उम्मन्गवण्णा अजीवेमु जीवराण्णा : प्रोषणा साइम साहुगण्णा, साहुमुआसाहुसण्या प्रमुत्तेसु व्यक्रमिथ्यात्व है । उपलक्षण से जीवादि जय पदार्थों में जिस की श्रद्धा नहीं, अग जिनोक तत्व से जो विपरीत प्ररूपणा करनी, तथा जिनोक तत्व में संशय रखनानक तत्व में का आरोप करना, इत्यादि । Fथा अभिप्रालिका िजो पांच मान्य हैं. उन में पक धनाभोगिक at as प्यार भेद व्यक मिथ्यात्व के हैं। तथा "अधम्मे धम्मसण्णा" इत्यादि । यश प्रकार का जो मिथ्या है, सो सर्व व्यक्त मियान्य में । अपर-दूसरा, जो अनादि काल में मोहनीय मति रूप. सतरूप आत्मा के गुण का आच्छादक, जीव के साथ सहा अविनाभायी है, सो अव्यक्त मिथ्यात्व है अय मिथ्यात्य को गुण स्थान किंस रीति में कहते हैं, सो लिखते हैं । अनादि काल में अव्यवहार राशिवर्ती जीव में सदा से ही अव्यक्त मिथ्यात्व रहता है, परंतु उस में व्यक मिथ्यात्व बुद्धि की जो प्राति है. उसी को मिथ्यात्य गुणस्थान के नाम में कहा है । देवगुरुपर्वधीः । नम् ॥ [ गुपशून्य प्राशून्य श्येशून्य छः की पूति] ।हमा समान प्रकार हैः-- दमो में गद्दाः - अपम्मे भम्राण्णा धम्मे अधम्मगण्णा उमाणे गग्गसण्णा गणे उम्मग्गवण्णा अजीवेस जीवसण्णा : पे प्रोषणा साइनु साहुमण्णा साहुमुआसाहुसण्णा प्रमुत्तेसु षष्ठ परिच्छेदः. ही मिथ्यात्व करके मोहित जीव धर्माधर्म को सम्यक् - भली प्रकार नहीं जानता है । यदाहः - * मिथ्यात्वेनालीढचित्ता नितांतं, तत्वातत्त्वं जानते नैव जीवाः । किं जात्यंधाः कुत्रचिद्वस्तुजाते, रम्यारम्यं व्यक्तिमासादयेयुः ।। श्लोशून्य आठ की वृत्ति ] अभव्य जीवों की अपेक्षा जो मिथ्यात्व है; तथा सामान्य प्रकार से जो अव्यक्त मिथ्यात्व है, इन की स्थिति अनादि अनंत है, परन्तु भव्य जीवों की अपेक्षा वह स्थिति अनादि सांत है । यह स्थिति सामान्य प्रकार से मिथ्यात्व की अपेक्षा दिखलाई है । जेकर मिथ्यात्व गुणस्थानक की स्थिति का विचार करिये तो भव्य जीवों की अपेक्षा वह अनादि सांत और सादि सांत भी है । तथा अभव्य जीवों की अपेक्षा अनादि अनंत है । मिथ्यात्व गुणस्थानक में रहा. हुआ जीव एक सौ बीस बंधप्रायोग्य कर्मप्रकृतियों में से तीर्थकर नाम कर्म की प्रकृति, आहारक शरीर, आहार कोपांग, यह तीन प्रकृति नहीं बांधता है, शेष एक सौ सतरां * भावार्थः - मिथ्यात्वग्रसितचित्त जीव तत्त्वातत्त्व का किंचित् भी विचार नहीं कर सकते । जैसे कि जन्मांध प्राणी रम्यारम्य वस्तु का ज्ञान नहीं कर सकते ।
निर्माण के लिए कंक्रीट का सर्वव्यापी उपयोगविभिन्न भवन संरचनाओं ने दिखाया कि यह सामग्री असामान्य रूप से मजबूत और टिकाऊ है। लेकिन मूल घटकों की एक छोटी सी लागत और ताकत का एक बड़ा मार्जिन के साथ, जलवायु, रासायनिक या यांत्रिक कारकों के प्रभाव में ठोस सतहों में अभी भी टूटने की क्षमता है। चिप्स और गोले के सभी प्रकार हैं। इसके अलावा, कंक्रीट से बने उत्पादों की सतह धूल और दरार इकट्ठा करना शुरू कर देती है। धूल गठन से बचने के लिए और सतह को काम करने की स्थिति में रखने के लिए, बिल्डर्स कंक्रीट के लिए प्रजनन के रूप में ऐसे उपयोगी रासायनिक समाधान का उपयोग करते हैं। विशेष संरचना महत्वपूर्ण रूप से शब्द का विस्तार करती हैपूरी संरचना की सेवा, लगभग पूरी तरह से धूल को हटा देती है और बाद के रंग और वार्निश कोटिंग्स के साथ कंक्रीट के आसंजन में सुधार करती है। नए ढांचे के निर्माण, और पुराने लोगों की बहाली के लिए दोनों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक उद्योग विभिन्न कार्यात्मक अभिविन्यास के कई अपर्याप्त समाधान पैदा करता है। उन्हें कंक्रीट के ग्रेड, आवेदन और संचालन की शर्तों, सतह की सुरक्षा और लक्ष्य निर्धारित करने के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। सार्वभौमिक संरचना में केवल प्रजनन होता हैकंक्रीट के लिए polyurethane। यह एक घटक सामग्री पूरी तरह से पूरी तरह से अवशोषित है और पर्याप्त गहराई में प्रवेश करती है। एक विशेष रूप से मजबूत परत बनाकर, यह प्रजनन पर्यावरण में निहित नमी से बातचीत नहीं करता है, और घनत्व के किसी भी स्तर की सतह पर सुरक्षा के निर्माण की अनुमति देता है। कोटिंग लोचदार है और महत्वपूर्ण तापमान परिवर्तनों का सामना करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह शर्तों का सामना कर सकते हैंनमी। 3 से 5 मिमी ठोस परत की गहराई तक गर्भवती पर्याप्त संसाधन के साथ बढ़ाया यांत्रिक प्रभावों विभिन्न 10 साल से भी अधिक abrasives पर अपनी ताकत रखता है। साल के किसी भी समय ठोस पर polyurethane संसेचन लागू करें, ताकि वे भी कम तापमान पर, वांछित गहराई तक घुसना करने में सक्षम हैं। प्रत्येक ठोस निर्माण से सुरक्षा की आवश्यकता होती हैकई प्रतिकूल प्रभाव, लेकिन विशेष रूप से सीमेंट की सतह पर आक्रामक सामान्य पानी काम करता है। यहां तक कि नमी की थोड़ी मात्रा भी ऑपरेटिंग समय को कम से कम कर सकती है। पानी, छिद्रपूर्ण आधार penetrating, जमने पर तनाव की एक निश्चित राशि बनाता है, और कंक्रीट दरार और पतन शुरू होता है। कंक्रीट के लिए विशेष impregnation आवश्यक हैयह आउटडोर उपयोग के लिए संरचनाओं के निर्माण में मौजूद होना चाहिए। ठोस समाधान भीग सतहों या बाहर की दुनिया में बिछाने सुरक्षात्मक संरचनाओं संसाधित नहीं कर रहे हैं, जो उनके तेजी से पहनते हैं और सतह धूल की उपस्थिति की ओर जाता है के लिए व्यक्तिगत टाइल्स के रूप में सबसे ठोस कवर में। एक विशेष सुरक्षात्मक यौगिक शीर्ष परत की रक्षा करता हैपानी के हानिकारक प्रभाव से उत्पाद और उपस्थिति को बरकरार रखता है। इसके अलावा, ठोस संरचनाओं में इस्पात सुदृढीकरण की संक्षारण संरक्षण होता है। उत्पादों क्लोराइड या सोडियम तत्वों की संरचना में जोड़ा गया आंतरिक छिद्रों में नमी के प्रवेश में वृद्धि, जंग का कारण बन सकता है और जीवन को छोटा कर सकता है। इस तरह के additives के साथ, कंक्रीट के लिए विशेष impregnation बस जरूरी है। रासायनिक संरचनाएं जो सामग्री से रक्षा करती हैंनमी के प्रवेश, निर्माण में आमतौर पर हाइड्रोफोबिसर कहा जाता है। वे न केवल संरचनाओं को क्रैकिंग और विनाश से बचाते हैं, बल्कि नमक की धब्बे, यानी नमक की धब्बे को भी रोकते हैं। यह उच्च है और ठोस सतह की बाहरी परत का विनाश कर सकता है। नमी से कंक्रीट के लिए कोई भी प्रजनन उनके गठन को रोक देगा। एक विशेष टिकाऊ को समर्पित और बनाने के लिएसतह परत बहुत प्रभावी है और कंक्रीट "प्रोटेक्सिल" के लिए प्रत्यारोपण भी सार्वभौमिक है। कार्बनिक आधार पर यह तरल अक्सर औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पुरानी और नई इमारतों में कंक्रीट फर्श के संगठन में उपयोग किया जाता है। कोटिंग के कम घर्षण और परिवहन से यांत्रिक प्रभावों के लिए उच्च प्रतिरोध, रासायनिक उद्योग में और महान पेटेंसी के स्थानों में गोदामों के निर्माण में इस तरह के प्रजनन का उपयोग करना संभव बनाता है। इंप्रेग्नेशन "प्रोटेक्सिल" नए के लिए बहुत अच्छा काम करता हैऔर मोज़ेक फर्श बहाल और अच्छी तरह से पॉलिश करने योग्य है। जब दवा का उचित भंडारण मनाया जाता है, तो इसके उपयोगी गुण आधा साल तक बनाए रखा जाता है। इस तरह के प्रजनन के साथ कवर सतह 7-8 साल से अधिक के लिए संरक्षित है। नमी से कंक्रीट के लिए "प्रोटेक्सिल" भी एक उत्कृष्ट प्रजनन है। इसकी नमी-सबूत और ताकत बढ़ाने वाले गुणों को आधुनिक निर्माण में बहुत अच्छा आवेदन मिला है। बिल्डरों और फिनिशर का विशेष ध्यानकंक्रीट "मोनोलिथ-एम" के लिए प्रजनन के लायक है। पुरानी ठोस सतहों की रक्षा करने और नए कवर करने के लिए इस दवा का उपयोग दोनों संभव है। यह प्रजनन सतह परत में सबसे गहराई से प्रवेश करता है और दीर्घकालिक प्रदर्शन विशेषताओं के साथ एक घनी संरचना बनाता है। मंजिलों को प्रत्यारोपण "मोनोलिट-एम" के साथ इलाज किया जाता है, नहींसंरक्षक के प्रभाव में बिगड़ती है। तैयारी भी रासायनिक और तेल उत्पादों से कंक्रीट कोटिंग की पूरी तरह से रक्षा करता है। कंक्रीट के लिए इस तरह के प्रत्यारोपण का उपयोग बड़े व्यापारिक हॉल में, पुलों पर कोटिंग के संगठन में, लोडिंग और अनलोडिंग सामानों के औद्योगिक क्षेत्रों में और बड़े परिवहन भार के साथ अन्य समान स्थानों में किया जाता है।
निर्माण के लिए कंक्रीट का सर्वव्यापी उपयोगविभिन्न भवन संरचनाओं ने दिखाया कि यह सामग्री असामान्य रूप से मजबूत और टिकाऊ है। लेकिन मूल घटकों की एक छोटी सी लागत और ताकत का एक बड़ा मार्जिन के साथ, जलवायु, रासायनिक या यांत्रिक कारकों के प्रभाव में ठोस सतहों में अभी भी टूटने की क्षमता है। चिप्स और गोले के सभी प्रकार हैं। इसके अलावा, कंक्रीट से बने उत्पादों की सतह धूल और दरार इकट्ठा करना शुरू कर देती है। धूल गठन से बचने के लिए और सतह को काम करने की स्थिति में रखने के लिए, बिल्डर्स कंक्रीट के लिए प्रजनन के रूप में ऐसे उपयोगी रासायनिक समाधान का उपयोग करते हैं। विशेष संरचना महत्वपूर्ण रूप से शब्द का विस्तार करती हैपूरी संरचना की सेवा, लगभग पूरी तरह से धूल को हटा देती है और बाद के रंग और वार्निश कोटिंग्स के साथ कंक्रीट के आसंजन में सुधार करती है। नए ढांचे के निर्माण, और पुराने लोगों की बहाली के लिए दोनों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक उद्योग विभिन्न कार्यात्मक अभिविन्यास के कई अपर्याप्त समाधान पैदा करता है। उन्हें कंक्रीट के ग्रेड, आवेदन और संचालन की शर्तों, सतह की सुरक्षा और लक्ष्य निर्धारित करने के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। सार्वभौमिक संरचना में केवल प्रजनन होता हैकंक्रीट के लिए polyurethane। यह एक घटक सामग्री पूरी तरह से पूरी तरह से अवशोषित है और पर्याप्त गहराई में प्रवेश करती है। एक विशेष रूप से मजबूत परत बनाकर, यह प्रजनन पर्यावरण में निहित नमी से बातचीत नहीं करता है, और घनत्व के किसी भी स्तर की सतह पर सुरक्षा के निर्माण की अनुमति देता है। कोटिंग लोचदार है और महत्वपूर्ण तापमान परिवर्तनों का सामना करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह शर्तों का सामना कर सकते हैंनमी। तीन से पाँच मिमी ठोस परत की गहराई तक गर्भवती पर्याप्त संसाधन के साथ बढ़ाया यांत्रिक प्रभावों विभिन्न दस साल से भी अधिक abrasives पर अपनी ताकत रखता है। साल के किसी भी समय ठोस पर polyurethane संसेचन लागू करें, ताकि वे भी कम तापमान पर, वांछित गहराई तक घुसना करने में सक्षम हैं। प्रत्येक ठोस निर्माण से सुरक्षा की आवश्यकता होती हैकई प्रतिकूल प्रभाव, लेकिन विशेष रूप से सीमेंट की सतह पर आक्रामक सामान्य पानी काम करता है। यहां तक कि नमी की थोड़ी मात्रा भी ऑपरेटिंग समय को कम से कम कर सकती है। पानी, छिद्रपूर्ण आधार penetrating, जमने पर तनाव की एक निश्चित राशि बनाता है, और कंक्रीट दरार और पतन शुरू होता है। कंक्रीट के लिए विशेष impregnation आवश्यक हैयह आउटडोर उपयोग के लिए संरचनाओं के निर्माण में मौजूद होना चाहिए। ठोस समाधान भीग सतहों या बाहर की दुनिया में बिछाने सुरक्षात्मक संरचनाओं संसाधित नहीं कर रहे हैं, जो उनके तेजी से पहनते हैं और सतह धूल की उपस्थिति की ओर जाता है के लिए व्यक्तिगत टाइल्स के रूप में सबसे ठोस कवर में। एक विशेष सुरक्षात्मक यौगिक शीर्ष परत की रक्षा करता हैपानी के हानिकारक प्रभाव से उत्पाद और उपस्थिति को बरकरार रखता है। इसके अलावा, ठोस संरचनाओं में इस्पात सुदृढीकरण की संक्षारण संरक्षण होता है। उत्पादों क्लोराइड या सोडियम तत्वों की संरचना में जोड़ा गया आंतरिक छिद्रों में नमी के प्रवेश में वृद्धि, जंग का कारण बन सकता है और जीवन को छोटा कर सकता है। इस तरह के additives के साथ, कंक्रीट के लिए विशेष impregnation बस जरूरी है। रासायनिक संरचनाएं जो सामग्री से रक्षा करती हैंनमी के प्रवेश, निर्माण में आमतौर पर हाइड्रोफोबिसर कहा जाता है। वे न केवल संरचनाओं को क्रैकिंग और विनाश से बचाते हैं, बल्कि नमक की धब्बे, यानी नमक की धब्बे को भी रोकते हैं। यह उच्च है और ठोस सतह की बाहरी परत का विनाश कर सकता है। नमी से कंक्रीट के लिए कोई भी प्रजनन उनके गठन को रोक देगा। एक विशेष टिकाऊ को समर्पित और बनाने के लिएसतह परत बहुत प्रभावी है और कंक्रीट "प्रोटेक्सिल" के लिए प्रत्यारोपण भी सार्वभौमिक है। कार्बनिक आधार पर यह तरल अक्सर औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पुरानी और नई इमारतों में कंक्रीट फर्श के संगठन में उपयोग किया जाता है। कोटिंग के कम घर्षण और परिवहन से यांत्रिक प्रभावों के लिए उच्च प्रतिरोध, रासायनिक उद्योग में और महान पेटेंसी के स्थानों में गोदामों के निर्माण में इस तरह के प्रजनन का उपयोग करना संभव बनाता है। इंप्रेग्नेशन "प्रोटेक्सिल" नए के लिए बहुत अच्छा काम करता हैऔर मोज़ेक फर्श बहाल और अच्छी तरह से पॉलिश करने योग्य है। जब दवा का उचित भंडारण मनाया जाता है, तो इसके उपयोगी गुण आधा साल तक बनाए रखा जाता है। इस तरह के प्रजनन के साथ कवर सतह सात-आठ साल से अधिक के लिए संरक्षित है। नमी से कंक्रीट के लिए "प्रोटेक्सिल" भी एक उत्कृष्ट प्रजनन है। इसकी नमी-सबूत और ताकत बढ़ाने वाले गुणों को आधुनिक निर्माण में बहुत अच्छा आवेदन मिला है। बिल्डरों और फिनिशर का विशेष ध्यानकंक्रीट "मोनोलिथ-एम" के लिए प्रजनन के लायक है। पुरानी ठोस सतहों की रक्षा करने और नए कवर करने के लिए इस दवा का उपयोग दोनों संभव है। यह प्रजनन सतह परत में सबसे गहराई से प्रवेश करता है और दीर्घकालिक प्रदर्शन विशेषताओं के साथ एक घनी संरचना बनाता है। मंजिलों को प्रत्यारोपण "मोनोलिट-एम" के साथ इलाज किया जाता है, नहींसंरक्षक के प्रभाव में बिगड़ती है। तैयारी भी रासायनिक और तेल उत्पादों से कंक्रीट कोटिंग की पूरी तरह से रक्षा करता है। कंक्रीट के लिए इस तरह के प्रत्यारोपण का उपयोग बड़े व्यापारिक हॉल में, पुलों पर कोटिंग के संगठन में, लोडिंग और अनलोडिंग सामानों के औद्योगिक क्षेत्रों में और बड़े परिवहन भार के साथ अन्य समान स्थानों में किया जाता है।
श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के आवास में जमकर उत्पात मचाया है। घर के हर हिस्से में प्रदर्शनकारी घुस गए। स्विमिंग पूल, जिम और किचन का उन्होंने खूब इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं एक वीडियो सामने आया है जिसमें प्रदर्शनकारी एक बेड पर कुश्ती करते नजर आये। इसको लेकर विवेक अग्निहोत्री ने तंज कसा है। दरअसल प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रधानमंत्री आवास में घुसकर डेरा डाल लिया है। प्रदर्शनकारियों के लिए वहीं पर खाना बनाया जा रहा है, स्विमिंग में वह नहा रहे हैं। इतना ही नहीं पीएम आवास में मौजूद हर सुख सुविधा का लाभ लेते प्रदर्शनकारी नजर आये। इस पर विवेक अग्निहोत्री ने तंज कसते हुए इसे पंजाब का भविष्य बताया है। बता दें कि श्रीलंका में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के इस्तीफे के बाद ही वह सरकारी इमारतों से कब्जा छोड़ेंगे क्योंकि उन्हें अब नेताओं पर भरोसा नहीं है। प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा करने के बाद आंदोलनकारी जनता ने राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया। बता दें कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री किसी गुप्त स्थान पर निकल गए हैं और दोनों ने इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है।
श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के आवास में जमकर उत्पात मचाया है। घर के हर हिस्से में प्रदर्शनकारी घुस गए। स्विमिंग पूल, जिम और किचन का उन्होंने खूब इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं एक वीडियो सामने आया है जिसमें प्रदर्शनकारी एक बेड पर कुश्ती करते नजर आये। इसको लेकर विवेक अग्निहोत्री ने तंज कसा है। दरअसल प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रधानमंत्री आवास में घुसकर डेरा डाल लिया है। प्रदर्शनकारियों के लिए वहीं पर खाना बनाया जा रहा है, स्विमिंग में वह नहा रहे हैं। इतना ही नहीं पीएम आवास में मौजूद हर सुख सुविधा का लाभ लेते प्रदर्शनकारी नजर आये। इस पर विवेक अग्निहोत्री ने तंज कसते हुए इसे पंजाब का भविष्य बताया है। बता दें कि श्रीलंका में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के इस्तीफे के बाद ही वह सरकारी इमारतों से कब्जा छोड़ेंगे क्योंकि उन्हें अब नेताओं पर भरोसा नहीं है। प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा करने के बाद आंदोलनकारी जनता ने राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया। बता दें कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री किसी गुप्त स्थान पर निकल गए हैं और दोनों ने इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है।
18 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन को तीव्रता काफी बढ़ती जा रही है. इस बीच किसानों के समर्थन में पंजाब के DIG इस्तीफा दे कर आंदोलन में कूद पड़े हैं. DIG (जेल) लखमिंदर सिंह जाखड़( Lakhwindar Singh Jakhar) ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ADGP (जेल) पीके सिन्हा ने इस्तीफे की कॉपी मिलने की पुष्टि की है। लखमिंदर ने लिखा कि प्रदेश के किसान परेशान हैं। ठंड में खुले आसमान के नीचे सड़कों पर बैठे हैं। मैं खुद एक किसान का बेटा हूं, इसलिए इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहता हूं। तुरंत प्रभाव से पदमुक्त करें, ताकि दिल्ली जाकर अपने किसान भाइयों के साथ मिलकर अपने हक के लिए लड़ सकूं। भारत के किसान मोदी सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 18 दिनों से सड़क पर हैं. उन्होंने सड़क पर ही खाना बनाने से ले कर खेती तक शुरू कर दिया है. उधर केंद्र सरकार नित नये प्रस्ताव ले कर किसानों के समक्ष पेश हो रही है लेकिन किसान कृषि कानून रद्द करने के सिवा किसी पेशकश पर तैयार नहीं हो रहे हैं. पंजाब में किसानों के आंदोलन को भरपूर समर्थन मिल रहा है। राजनीति से लेकर खेल जगत तक किसानों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पद्मभूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार व एक अखबार के संपादक ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाने का एलान पहले ही कर चुके हैं.
अट्ठारह दिनों से चल रहे किसान आंदोलन को तीव्रता काफी बढ़ती जा रही है. इस बीच किसानों के समर्थन में पंजाब के DIG इस्तीफा दे कर आंदोलन में कूद पड़े हैं. DIG लखमिंदर सिंह जाखड़ ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ADGP पीके सिन्हा ने इस्तीफे की कॉपी मिलने की पुष्टि की है। लखमिंदर ने लिखा कि प्रदेश के किसान परेशान हैं। ठंड में खुले आसमान के नीचे सड़कों पर बैठे हैं। मैं खुद एक किसान का बेटा हूं, इसलिए इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहता हूं। तुरंत प्रभाव से पदमुक्त करें, ताकि दिल्ली जाकर अपने किसान भाइयों के साथ मिलकर अपने हक के लिए लड़ सकूं। भारत के किसान मोदी सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अट्ठारह दिनों से सड़क पर हैं. उन्होंने सड़क पर ही खाना बनाने से ले कर खेती तक शुरू कर दिया है. उधर केंद्र सरकार नित नये प्रस्ताव ले कर किसानों के समक्ष पेश हो रही है लेकिन किसान कृषि कानून रद्द करने के सिवा किसी पेशकश पर तैयार नहीं हो रहे हैं. पंजाब में किसानों के आंदोलन को भरपूर समर्थन मिल रहा है। राजनीति से लेकर खेल जगत तक किसानों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पद्मभूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार व एक अखबार के संपादक ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाने का एलान पहले ही कर चुके हैं.
कभी-कभी यह 'पराहम्' का खुला विरोध करके फूट पड़ता है। कभी-कभी इसकी अभिव्यक्ति छद्मवेष में होती है। उदाहरणतया, जब पिता अपने क्रोध को दूर करने के लिये बच्चे को पीटता है। ऐसी अवस्था में 'अहम्' को अपने कार्य के आधार का शान नहीं होता। फायड ने 'इड' की तुलना घोड़े तथा 'अहम्' की तुलना घुड़सवार से को है। उसका कथन है कि 'अहम्' का कार्य घड़सवार जैसा है, अर्थात् घोड़े, जो 'इ' है, का मार्गदर्शन करना। परन्तु कभी-कभी घुड़सवार को भांति 'अहम्' घोड़े अर्थात् 'इड' को अपनी इच्छानुसार मार्गदर्शित करने में असफल हो जाता है जिससे उसे विवशतया 'इस' को उसी दिशा अथवा मामूली भिन्न दिशा की ओर जाने देना पड़ता है जिस ओर वह जाने के लिये दृढप्रतिज्ञ है ।'1'इड', एवं 'अहम्' के संघर्ष से मनोविक्षिप्ति का जन्म होता है। फायड का निष्कर्ष है कि 'इड', 'अहम्' एवम् 'पराहम्' के अन्तर्द्वन्द्व की प्रक्रिया में ही व्यक्ति का समाजीकरण होता है । ३. समाजीकरण के अभिकरण (Agencies of Socialization ) समाजीकरण की प्रक्रिया केवल बचपन में ही नहीं, अपितु जीवन पर्यन्त क्रियाशील रहती है। यह जन्म से आरम्भ होकर व्यक्ति की मृत्यु तकं निरन्तर चलती रहती है। यह अविराम प्रक्रिया है। कुछ समय पूर्व 'समाजीकरण शब्द वयस्कों द्वारा सीखे गये अनुभवो के लिये प्रयुक्त नहीं होता था; इसे केवल बच्चों द्वारा सीखे गये अनुभवों के लिये सीमित रखा गया । परन्तु हाल में समाजीकरण की अवधारणा को विस्तृत किया गया है जिससे वयस्क आचरण को भी इसमे सम्मिलित किया जाता है। अब इसे अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया समझा जाता जिसके द्वारा किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके समूहों, जिनका यह सदस्य है, के सदस्यों की प्रत्याशाओं के अनुरूप ढाला जाता है।" विचारकों ने इस प्रक्रिया की व्याख्या केवल बच्चो के सन्दर्भ में इसलिए की है, क्योंकि उसमें ऐसे जटिल तत्वों का अभाव होता है जो उस समय उत्पन्न हो जाते हैं जब व्यक्ति 'आत्म' तथा दूसरों के बारे में चेतन हो जाता है। जब व्यक्ति पुस्तकें पढ़ना और कहानियाँ सुनना आरम्भ कर देता है तथा एक आदर्श समाज की कल्पना करने योग्य हो जाता है, तो उस समय वस्तुनिष्ठ तत्वो को वस्तुपरक तथ्यों से पृथक् करना तथा बच्चे के समाजीकरण में उनके क्रमशः योगदान का मूल्याकन करना कठिन हो जाता है । चूँकि समाजीकरण समाज के लिये एक महत्वपूर्ण विषय है, अतएव यह वांछनीय ही है कि बच्चे का समाजीकरण केवल आकस्मिक घटना पर न छोड़ा जाय, बल्कि संस्थागत माध्यमों द्वारा नियंत्रित होना चाहिये । बच्चा क्या बनने जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण बात है मपेक्षतया इसके कि वह क्या है । समाजीकरण के द्वारा ही बच्चा समाज का उपयोगी सदस्य बनता है और सामाजिक परिपक्वता प्राप्त करता है । अतएव यह जानना परमावश्यक है कि बच्चे का समाजीकरण कौन करता है ? 1. Gillin and Gillin, An Introduction to Soclology, p. 575. बच्चे के समाजीकरण के दो मुख्य स्रोत हैं। प्रथम, वे लोग हैं जो बच्चे के ऊपर सत्ता रखते हैं, दूसरे वे लोग हैं जिनको सत्ता उसके समान है। प्रथम श्रेणी मे माता-पिता, शिक्षक, वृद्धजन एवं राज्य आते हैं। दूसरी श्रेणी में क्रीड़ा-संगी, मित्र एवं क्लब के साथी सम्मिलित हैं। उसके प्रशिक्षण का महत्व एवं इसकी अंतःवस्तु इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके समाजीकरण का स्रोत क्या है। पहली श्रेणी के सम्बन्ध बाध्यता के जबकि दूसरी श्रेणी के सम्बन्ध सहयोग के तत्व पर आधारित हैं। बाध्यता के सम्बन्ध का आधार सत्ताधारी व्यक्तियों के प्रति एकपक्षीय आदर है, जबकि सहयोग का सम्बन्ध समान व्यक्तियों के बीच पारस्परिक सद्भावना पर आधारित है। पहली श्रेणी के अंतर्गत आचरण के नियमों को श्रेष्ठ, निरंकुश एवं बाह्य समझा जाता है, परन्तु दूसरी श्रेणी के नियमों को स्वयमेव कोई श्रेष्ठता अथवा पूर्णता नही होती, वे केवल सहयोग के क्रियात्मक नियम होते हैं। बच्चे पर सत्ता रखने वाले व्यक्ति सामान्यतया आयु मे बड़े होते हैं, जबकि उसके साथ समता रखने वाले उसको ही आयु के होते हैं । सत्तायुक्त विधियों द्वारा ही समाजीकरण क्यों हो, इसके कई कारण हैं। संस्कृति में प्रत्याशित व्यवहार के प्रतिमान सहज नहीं होते, कभी-कभी ये प्राणिशास्त्रीय प्रवृत्ति के विपरीत होते हैं । अतएव यह आवश्यक है कि जिन व्यक्तियों को बच्चे के समाजीकरण का दायित्व सौपा गया है, उन्हे आदेश देने का अधिकार होना चाहिये । ऐसा अधिकार केवल आयु में बड़े व्यक्तियों को ही दिया जा सकता है, क्योंकि जब समाजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है तब शिशु से छोटा कोई अन्य नही होता और बराबर आयु वालों के साथ सहयोग करने की समर्थता उसमें नहीं होती । इसलिए माता-पिता पहले व्यक्ति होते हैं जो बच्चे का समाजीकरण करते हैं। वे केवल परिवार-व्यवस्था में ही उससे घनिष्ठ सम्बन्धित नही होते, अपितु प्राकृतिक रूप से भी अन्यों की अपेक्षा उसके अधिक निकट होते है। माता, पिता से पहले, समाजीकरण की प्रक्रिया को आरम्भ करती है। उससे ही बच्चे को प्रथमतम सामाजिक अभिप्रेरणा मिलती है। वह इन अभिप्रेरणाओ की नकल करता है। माता-पिता तथा बच्चे के बीच आयु एवं अनुभव का व्यापक अन्तर होने के कारण वह उनके द्वारा संचारित सभी बातों के तर्क एवं स्वरूप को समझने में असमर्थ होता है। यदि बच्चा नियमों का पालन नहीं करता तो उसे बाध्य किया जाता है, क्योंकि सामाजिक दृष्टिकोण से अनिवार्य बात यह नहीं है कि बच्चे को अपने व्यक्तित्व के प्रकटीकरण के लिये वर्जन ( taboo ) से मुक्त किया जाय, बल्कि अनिवार्य यह है कि उसे जनरीतियों एवं रूड़ियों का पालन करना सिखाया जाय तथा उसे वचपन की मूर्खताओ से सुरक्षित रखा जाय। अतएव बच्चा उनसे पहले जो कुछ ग्रहण करता है, वह अधिकांशतया बन्धन की नैतिकता है। समाज किसी प्रकार की जोखिम उठाये बिना अपनी संस्कृति के मूल्यवान् तत्व बच्चे को सचारित कर देता है। इस प्रकार सामाजिक नैतिकता विवेकशील समझ का विषय न होकर सवेदनशील दायित्व का विषय है । बच्चा कुछ बातें जो वह सत्ताधारी व्यक्तियों से नहीं सोख सकता, अपने हमजोलियों से सीखता है। उनसे वह सहकारी नैतिकता तथा संस्कृति की कुछ अनौपचारिक बातें, यथा मामूली जनरीतियों, शोक, सनकें, परितुष्टि की गुप्त विधियाँ और निषिद्ध शान सीखता है। सामाजिक दृष्टिकोण सेनाको जानकारी आवश्यक है। उदाहरण के लिए, हमारे समाज में लैंगिक सम्बन्धों का ज्ञान नवयुवक के लिए अवांछनीय समझा जाता है जब तक उसका विवाह नहीं हो जाता। यदि ऐसे ज्ञान को विवाह तक पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाय तो यौन जीवन के बहुत से कार्यों की पूर्ति विवाह के बाद कठिन हो जायेगी । अतएव यौन ज्ञान को पूर्णतमा बहिष्कृत नहीं किया गया, यद्यपि औपचारिक रूप से इसे अवांछनीय समझा जाता है। यह ज्ञान बच्चा अपने हमजोलियों से प्राप्त करता है, यद्यपि बच्चा अपने समान आयु वाले बच्चे से इतना ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। तथापि "जहाँ तक बच्चा समान आयु वाले समूह से सहकारी प्रयत्नों के अंगस्वरूप नियमों को समझना सीखता है। जहाँ तक वह सत्ताधारी व्यक्तियों के संरक्षण या पराश्रय की हीनता के बिना अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीखता है, उस सीमा तक वह कुछ मूल्यवान् बातें सीखता है जो सत्तायुक्त सम्बन्ध व्यवस्था में सीखना यदि असम्भव नही तो कठिन अवश्य है ।" इस प्रकार, सतायुक्त एवं समतायुक्त दोनों प्रकार के सम्बन्ध बच्चे के समाजीकरण में योगदान करते हैं। ऐसी बातें जिनके संचार में अनुशासन एवं दायित्व निहित होते हैं, सप्तायुक्त सम्बन्धियों को जबकि अन्य बातें समतायुक्त सम्ब न्धियों को सुपुर्द की जाती हैं । समाजीकरण की प्रमुख एजेन्सियाँ संक्षिप्त रूप में निम्नलिखित हैं-(i) परिवार ( Family )-परिवार प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण संस्था है, जो बच्चे के समाजीकरण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी है । माता-पिता का बच्चे के साथ न केवल घनिष्ठ सम्बन्ध होता है, अपितु ये दूसरों की अपेक्षा अधिक उसके निकट भी होते हैं। बच्चा, माता-पिता से अपनी भाषा एवं बोली सीखता है। उसे सामाजिक नैतिकता सिखाई जाती है। वह सत्ताधारी मनुष्यों के प्रति आदरभावना सीखता है। परिवार में वह अनेक नागरिक गुणों को भी सीखता है । परिवार को ठीक ही नागरिक गुणों की पाठशाला कहा गया है। बच्चा सहयोग, सहकारिता, सहिष्णुता, आत्म-बलिदान, स्नेह आदि के प्रथम पाठ परिवार में ही सीखता है । पारिवारिक वातावरण बच्चे के विकास को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि व्यक्ति जो कुछ है, वह परिवार के कारण है। बुरे परिवार में बच्चा बुरी आदतें सीखता है जबकि अच्छे परिवार में यह अच्छी बातें सीखता है। बाल अपराध का एक कारण बुरा पारिवारिक वातावरण होता है। जीवन-साथी का चयन करते समय माता-पिता लड़के-लड़की के परिवार के इतिहास को जानने का प्रयास करते हैं, ताकि उससे उन्हें अच्छी या बुरी बातों का पता लग सके। माता-पिता तथा बच्चे के बीच सम्बन्ध बाध्यता का सम्बन्ध है। माता-पिता आयु में बड़े होने के कारण उसे आज्ञापालन का आदेश देने का अधिकार रखते हैं। यदि बच्चा उनके आदेश का पालन नहीं करता तो उसे दण्ड दिया जाता 1. Davis, Kingsley, Human Society. p. 218. है। माता-पिता मे से माता का स्थान समाजीकरण की प्रक्रिया में पिता से पूर्व आता है। परिवार जीवन पर्यन्त व्यक्तित्व को प्रभावित करता रहता है। समाज में परिवार के महत्व के ऊपर काफी साहित्य प्राप्त है । (ii) शिक्षण संस्थाएं ( Educational institutions ) समाजीकरण का अगला अभिकरण स्कूल है। स्कूल में बच्चा शिक्षा प्राप्त करता है जो उसके विचारो एवं दृष्टिकोणों को प्रभावित करती है। अच्छी शिक्षा बच्चे को अच्छा नागरिक बना सकती है, जबकि बुरी शिक्षा उसे अपराधी बना सकती है। शिक्षा का समाजीकरण में महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा की सुनियोजित प्रणाली समाजीकृत व्यक्तियों को जन्म दे सकती है । (iii) फ्रीड़ा-साथी अथवा मित्र (Playmates and friends ) क्रीड़ासाथी एवं मित्र भी समाजीकरण के प्रमुख अभिकरण है। बच्चे तथा उसके फ्रीड़ासाथी के बीच समानता का सम्बन्ध होता है। यह सहयोग एवं पारस्परिक सद्भावना पर आधारित है। उनकी आयु लगभग समान होती है । बच्चा अपने साथियों एवं मित्रों से वह सब कुछ ग्रहण करता है जो वह माता-पिता से ग्रहण नहीं कर सकता । उनसे वह सहकारी नैतिकता तथा संस्कृति की कुछ अनौपचारिक बातें, यथा फैशन, सनकें, कामतुष्टि के ढंग एवं निषिद्ध ज्ञान सीखता है। इस प्रकार का ज्ञान सामाजिक दृष्टिकोण से आवश्यक है। उदाहरणतया, लैंगिक ज्ञान हमारे समाज मे विवाह से पूर्व निषिद्ध माना जाता है । यदि यह ज्ञान पूर्णतया बंद कर दिया जाय तो लैंगिक जीवन के अनेक कार्य विवाह के बाद पूरे करना कठिन हो जायगा । बच्चा इस ज्ञान को अपने साथियों एवं मित्रों से प्राप्त करता है । (iv) चवं ( Church ) - चर्च से तात्पर्य धार्मिक संस्थाओं से है । प्रारम्भिक समाज में धर्म ने एकता के बन्धन का महत्वपूर्ण कार्य किया था। यद्यपि आधुनिक समाज में धर्म का महत्व कम हो गया है, तथापि यह हमारे विश्वासों एवं जीवन के ढंगों को प्रभावित करता है। प्रत्येक परिवार में कुछ न कुछ धार्मिक क्रियाएँ किसी न किसी अवसर पर होती हैं। बच्चा अपने माता-पिता को मन्दिर जाते तथा धार्मिक संस्कार करते देखता है। वह धार्मिक प्रवचनों को सुनता है जो उसके जीवन की दिशा को निर्धारित तथा उसके विचारों को प्रभावित कर सकते हैं । (v) राज्य ( Stare ) --राज्य एक सत्तायुक्त एजेन्सी है । यह लोगों के लिए कानूनों का निर्माण करती है, तथा उनसे अपेक्षित आचरण के नियमों को निर्धारित करती है। लोगों को इन कानूनों का अवश्यमेव पालन करना पड़ता है । यदि उनका आचरण राज्य के कानूनों के अनुरूप नहीं होता तो उन्हें दण्ड दिया जाता है। इस प्रकार, राज्य भी हमारे व्यवहार को ढालता है । उपर्युक्त एजेन्सियों के अतिरिक्त, आर्थिक संस्थाएँ, सांस्कृतिक सस्थाएँ, विवाह, पड़ोस तथा नातेदारी समूह भी समाजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह भी ध्यान में रखा जाय कि इन एजेंसियों को सुदक्ष ढंग से कार्य करना चाहिये, ताकि समाजीकृत प्राणियों का निर्माण हो सके । आधुनिक समाज को समाजीकरण को अनेक समस्याओं को हल करना है। तदर्थ इसे इन सभी अभिकरणों को अधिक क्रियाशील एवं प्रभावशील बनाना होगा । ४. समाजीकरण के तत्व (Elements of Socialization ) ऊपर हमने समाजीकरण की प्रक्रिया, जैसे यह समाज मे कार्य करती है, का वर्णन किया है। समाजीकरण में सबसे पहली प्रेरणा बच्चे को माँ से मिलती है । परन्तु जैसे ही उसके सम्बन्ध विस्तृत होते हैं। पिता, भाई और बहनें, साथी, अध्यापक और पुलिस का सिपाही आदि दूसरे व्यक्ति उसके व्यवहार को ढालना आरम्भ कर देते हैं । व्यक्ति की समाजीकरण प्रक्रिया में तीन तत्व कार्य करते हैं। ये है -- ( १ ) व्यक्ति की शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक बपौती, (२) पर्यावरण जिसमें उसका जन्म हुआ है, तथा (३) संस्कृति जिसमें वह इन तत्वो की क्रिया प्रतिक्रिया के कारण रहता है। क्रिया प्रतिक्रिया की प्रक्रिया बड़ी जटिल होती है, जो व्यक्ति के निर्माण तथा समाज में उसकी स्थिति को काफी हद तक निर्धारित करती है। आइये, इस प्रक्रिया का सूक्ष्म अध्ययन करें । बच्चा अपने परिवार के पर्यावरण मे कुछ जन्मजात शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को लेकर जन्म लेता है। अपनी क्षमताओं के अनुसार वह परिवार को संस्कृति को ग्रहण करता है। यदि उसकी शारीरिक एवं मानसिक क्षमताएँ उत्तम नहीं होती तो वह अपने पर्यावरण से लाभ नहीं उठा सकता। इसके विपरीत, यदि उसके परिवार का वातावरण अच्छा नहीं है, तो अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं के बावजूद भी वह अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता। मानव-व्यक्तित्व के विकास में पर्यावरणीय प्रेरणा को महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छा स्कूल, सामाजिक समानता, राजनीतिक स्वतन्त्रता, संक्षेप में, अच्छा वातावरण बहुत कुछ सीमा तक इस बात का निर्धारण करता है कि बच्चे पर सामाजिक या आत्मकेन्द्रित शक्तियों में किसका प्रभाव अधिक पड़ेगा। मनोवैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि व्यक्ति समाज में वैसा व्यवहार करता है, जैसा वह परिवार में ढल जाता है । हैलो एवं ग्रोनर (Healy and Bronner ) ने बतलाया है कि बाल-अपराधी अधि कांशतः उन परिवारों से होते हैं जो किसी समय सामाजिक सम्बन्धों की पूर्ति में किसी बाधा के शिकार रहे हैं। वेश्यावृत्ति की समस्या माता-पिता, बच्चे के सम्बन्ध की समस्या कहो जाती है। जिस प्रकार मरुस्थल में पुप्प अपनी सुगन्ध को प्रकट नही कर सकता और अनदेखा मुरझा जाता है, उसी प्रकार यदि उपयुक्ततावरण न मिले तो मनुष्य अपनी प्रतिभा को चमका नही सक्ता । परन्तु जैसा हमने ऊपर बतलाया है, केवल उपयुक्त वातावरण ही व्यक्तित्व का विकास नहीं कर सकता, यदि मनुष्य में उचित मानसिक एवं शारीरिक क्षमताएँ न हों । पर्यावरण पर समूह का प्रभाव पड़ता है, क्योंकि प्रत्येक समूह को अपनी विशिष्ट संस्कृति होती है। मनुष्य समूह में रहता है, अत. उसे अपने समूह के रीतिरिवाजों, विश्वासो तथा आदर्शों का पालन करना पड़ता है। सामाजिक प्रकृति का विकास समूह जीवन में एवं उसके माध्यम से होता है। डब्लू आई० थामस (w I. Thomas ) ने परिस्थिति की परिभाषा (definition of the situation ) शब्दावली की रचना की जिससे उसका अभिप्राय था कि बच्चा जिस स्थिति में स्वर्य को पाता है, उस स्थिति का निर्धारण उसके लिए पूर्व ही हो चुका होता है तथा उसे जिन नियमों के अनुसार आचरण करना है, उनका निर्धारण भी उस समूह के द्वारा जिसमें उसका जन्म होता है, किया जाता है। बच्चे को समूह द्वारा निर्धारित नियमों के प्रतिकूल अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने की बहुत कम छूट होती है । उसको इच्छाओ एव क्रियाओ में बाधा पड़नी आरम्भ हो जाती है और धीरे-धीरे पारिवारिक परिओं, स्कूल के क्रीड़ा-साथियों, पठन, औपचारिक शिक्षण एवं स्वीकृति तथा अन्वीकृति के अनौपचारिक चिह्नों द्वारा वयस्कता की ओर बढ़ते हुए सदस्य समाज की नियमावली को सोख लेते हैं। इस प्रकार, समूह के प्रभाव भी मानव-व्यक्तित्व के विकास को निर्धारित करते हैं। अतः उपर्युक्त तीन तत्वों की अन्तःक्रिया के फलस्वरूप मानव प्राणी सामाजिक प्राणी बनता है। समाजीकरण की प्रक्रिया की व्याख्या करते समय कुछ समाजशास्त्रियों ने धौये तत्व-व्यक्ति के अनुभव का भी वर्णन किया है। कभी-कभी यह देखा गया है कि उपयुक्त वातावरण के होते हुए भी मनुष्य अपनी मानसिक एवं शारीरिक क्षमतायो का पूर्ण लाभ नहीं उठा पाता, क्योंकि अपने निजी अनुभव के कारण वह उस वाताके वरण से अलग रहता है। यदि किसी बच्ने को पढ़ने के लिए बाध्य किया जाय तो वह पढ़ाई को शारीरिक दण्ड के साथ सम्बद्ध समझने लगता है और भगोडा बन जाता है। ज्यों-ज्यों मनुष्य मे परिपक्वता बढती जाती है, वह एक के बाद दूसरे कठोर अनुभव प्राप्त करता जाता है, कभी-कभी उसकी बहुप्रिय वस्तु भी उससे छिन जाती जिस कारण वह दूसरों के कल्याण में अधिक रुचि लेने लगता है। कभी-कभी दुःख भी मनुष्य का समाजीकरण कर देता है। ५. समाजीकरण का महत्व (Role of Socialization ) मानव-व्यवहार एवं मानव-मनोवृत्ति के विकास में समाजीकरण का महत्व 'अन्ना' (Anna ) तथा 'इजाबेला (Isabela ) के दो उदाहरणों से दिखाया जा सकता है। एक अवैध बच्ची अन्ना को ऊपर के कमरे में अकेला बंद रखा गया। जब लगभग छः वर्ष की आयु मे उसे कमरे से निकाला गया, अन्ना नही बोल सकती थी, न हो चल-फिर सकती थी और न वह कोई ऐसा कार्य कर सकती थी जिससे उसकी बुद्धि का पता लगे। यह भावनाशून्य और प्रत्येक वस्तु के प्रति विरक्त थी । वह अपनी ओर से कोई कार्य नहीं कर सकती थी। इससे स्पष्ट है कि समाजीकरण के अभाव में केवल शारीरिक या प्राणिशास्त्रीय साधन पूर्ण व्यक्तित्व के विकास में योग नहीं दे सकते । संवहनात्मक सम्पर्क समाजीकरण का केन्द्रबिन्दु है । इजावेला साढ़े छ वर्ष की आयु में मिली थी। अन्ना के समान वह भी एक अवैध सन्तान थी और इसी कारण एकान्त में रखी गयी थी। जब वह मिली तो उसे किसी भी प्रकार के सम्बन्धों का ज्ञान नहीं था । किसी भी नवागन्तुक के प्रति उसका व्यवहार जंगली जानवर जैसा था। जब उसके प्रशिक्षण की एक व्यवस्थित और क्षमतापूर्ण योजना बनाई गयी तो आरम्भ में तो यह कार्य निराशाजनक लगा, लेकिन धीरे-धीरे स्तर तक पहुंच गई। मिलने गये नाड़े आठ वर्ष की आयु तक वह एक सामान्य इजारेला के उदाहरण कपष्ट कि छ. वर्ष की आयु तक की पृथकता जिसमें किसी प्रकार की वाणी को नहीं किया गया, इसके बाद में प्राप्ति का निषेध नहीं करती। किन्तु यह चाहना बहुत कठिन है कि किस आयु तक समाज से बिल्कुल पृथक् रहने पर भी मनुष्य नमाज को संस्कृति भीखने योग्य रह जाता है । इतना तो निश्चय प्रतीत होता है कि पन्द्रह वर्ष की पृथकता के बाद ऐसा सम्भव नही होगा, सम्भवतः दस वर्ष की आयु तक पृषक रहने पर भी ऐमा हो हो । हाँ, ये दोनों उदाहरण अनोखे रूप से व्यक्तित्व के विकास में समाजीकरण के महत्व को स्पष्ट करते हैं। इनके माध्यम से मानव-व्यक्तित्व के विकास में दो कारको को "भुर्त रूप से विभक्त करके देखा जाना सम्भव है, जो अन्यथा विश्लेषण द्वारा हो पृथक किये जाते है। यह कारक जीव-जननिक (bio-genic) तथा समाज-जननिक (sociogenic) है।" संक्षेप में, व्यक्तित्व के विकास में समाजीकरण का महत्वपूर्ण भाग है । ६. प्रौढ़ों का समाजीकरण (Socialization of Adults ) अभी तक हम बच्चो के समाजीकरण की चर्चा कर रहे थे, परन्तु जैसा पूर्व मे ही कहा जा चुका है, समाजीकरण एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। यह किसी आयु-विशेष पर समाप्त नहीं हो जाती है, परन्तु जीवन पर्यन्त चलती रहती है। प्रौढ़ों • का समाजीकरण बच्चों के समाजीकरण से सरल है, प्रथमतया इसलिए कि प्रौढ़ साधारणतया अपने द्वारा पूर्वपरिलक्षित लक्ष्य की ओर कार्य करने को प्रेरित होता है; दूसरे, इसलिए कि जिस भूमिका को वह अन्तरीकृत करने का प्रयत्न कर रहा है, वह उसके व्यक्तित्व में पूर्वविद्यमान भूमिकाओं से काफी समानताएँ रखती हैं। तोसरे, इसलिए कि समाजीकरण का अभिकर्ता भाषण के द्वारा उससे सुगमता से वातचीत कर सकता है । हाँ, प्रौढो का समाजीकरण एक लम्बी एव कठिन प्रक्रिया हो सकता है । ऐसा विशेषतया तब होता है जब सोखी जाने वाली भूमिकाएं कठिन हों, तथा भूमिका के दायित्व कठोर हों। इसके अतिरिक्त, प्रौढ़ों में उनके आदर्श एवं दृष्टिकोण पहले ही घर कर चुके हैं, अतएव जब सीखे जाने वाले आदर्श एवं दृष्टिकोण व्यक्तित्व मे पूर्व निहित आदर्शों के विपरीत होते हैं तो प्रौढों के समाजीकरण की प्रक्रिया कठिन हो जाती है । समाज में समाजीकृत वृत्तियों के महत्व को कम नहीं किया जा सकता । समाजीकृत दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति कभी भी ऐसा कार्य नहीं करेगा जो समाज के लिये हानिकारक हो । वह कोई ऐसा व्यापार-कार्य भी नही करेगा जो सामाजिक हित की दृष्टि से अनुत्पादक हो अथवा जो अस्वस्थ प्रतियोगिता पर आधारित हो । समाजीकृत नागरिक सामाजिक कल्याण को अपने व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा अधिक को कम करके निकटता की वृद्धि करता है। आधुनिक समाज को अभी बचपन एवं यौवन के सभी स्तरों पर समाजीकरण की समस्याओं को हल करना है। यह कहना कठिन है कि कोई भी समाज व्यक्ति की क्षमताओं का पूर्ण लाभ उठाता है। समाजीकरण में सुधार मानव प्रकृति एवं मानव समाज के भावी परिवर्तन के लिये सबसे चडी सम्भावना प्रदान करता है । ७. वैयक्तिकरण (Individualisation ) इस अध्याय को समाप्त करने से पूर्व, वैयक्तिकरण तथा इसकी क्रिया-प्रणाली की व्याख्या करना उचित होगा। वैयक्तिकरण वह सामाजिक प्रक्रिया जो मनुष्य को उसके समूह से न्यूनाधिक स्वतन्त्र बना देती है तथा उनमे स्वय की आत्म चेतना का विकास हो जाता है। मैफाइवर (Maclver ) के अनुसार, "वैयक्तिकरण एक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य अधिक स्वायत्त अथवा आत्म-निर्णयकारी हो जाते हैं, जिसमे वे केवल अनुकरणीयता या बाह्य अनुशास्ति लिये मानकों की स्वीकृति से आगे बढ़ जाते हैं, जिसमे वे परम्पराओं एव प्रयाओं द्वारा अपने जीवन के नियमन में कम बाधित होते हैं, विचार एवं मत के मामलों में सत्ता एवं आदेश के कम अधीन होते हैं, तथा इस बात को मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति एक अलग प्राणी है जो अपने जीवन के लक्ष्यों की पूर्ति तभी कर सकता है जब वह स्वयं इनके बारे में चेतनायुक्त हो तथा ये स्वयं उसके द्वारा चाही गयी हों "" वैयक्तिकरण एक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य स्वयं को जानने लगता है तथा वान्तरिक दायित्व की भावना ग्रहण करता है । यह स्वयं को जान लेने की प्रक्रिया है। जब व्यक्ति किसी कार्य को केवल इसलिए नहीं पता कि दूसरे भी उसे कर रहे हैं, अपितु इसलिए करता है क्योंकि उसकी अन्तरात्मा उसे ऐसा करने की स्वीकृति देती है। वह अपने व्यक्तित्व के बल पर चलता है जो उसका एक गुण है। समाजीकरण मनुष्य का दूसरों के साथ सम्बन्ध स्थापित करता है, जबकि वैयक्तिकरण उसे स्वायत्त अथवा आत्मनिर्धारक बनाता है। वैयक्तिकरण की प्रक्रिया को समझने से पूर्व दो भ्रामक धारणाओं को दूर कर लेना श्रेयस्कर होगा। प्रथमतया, यह धारणा, कि वैयक्तिकरण स्वयं व्यक्ति द्वारा अकेले रूप में चालित प्रक्रिया है; दूसरी व्याख्या यह कि वैयक्तिकरण पूर्वप्रचलित विचारों के द्वारा फैलायी गयो मानसिक प्रक्रिया है। जब व्यक्ति आत्म की प्राप्ति कर लेता है, तो उसका अर्थ यह नहीं होता कि व्यक्ति अपने समूह के प्रभाव से पूर्णतया मुक्त हो गया है। न केवल स्वयं व्यक्ति, अपितु समाज भी उसे दायित्व की आन्तरिक भावना को प्राप्त करने तथा स्वयं को जानने में उसकी सहायता करता है। इस प्रकार, वैयक्तिकरण की प्रक्रिया व्यक्ति एवं समाज दोनों के द्वारा चलाई जाती है। द्वितीय, समाजशास्त्री का कार्य केवल यह नहीं है कि वह किसी समय प्रचलित विचारों को मालूम करे, अपितु उसे इस बात की भी खोज करनी होती है कि इन विचारों का 1. Macīver, The Elements of Soclal Science, p. 144. समाजशास्त्र के सिधान्त जन्म कैसे हुआ। स्वयं विचार वैयक्तिकरण का विकास नही करते; वे तो व्यक्तिकरण की प्रक्रिया को केवल मात्र मानसिक अभिव्यक्तियाँ होते हैं। वैयक्तिकरण के पक्ष (Aspects of Individualisation) मानहीम ( Mannheim ) ने वैयक्तिकरण को चार प्रमुख स्वरूपों में विभेदित किया है। ये हैं -- (१) दूसरे लोगों से विभिन्न ढंग से सीखने की प्रक्रिया से वैयक्तिकरण, (२) आत्म-सम्बन्धी क्रियाओं के नये रूपों के स्तर पर वैयक्तिकरण, (३) वस्तुओं के माध्यम से वैयक्तिकरण, (४) आत्म-गंभीरता के रूप में वैयक्तिकरण--- जिसका अभिप्राय है आत्म-सम्बन्धी अनुभवों को ग्रहण करना तथा वैयक्तिकरण की शक्तियों का अपने भीतर एवं इर्द-गिर्द उन्नयन करना। ये सब प्रक्रियाएँ नितान्त मिन्न घटनाएँ हैं। वैयक्तिकरण के पहले स्वरूप में दूसरे व्यक्तियों से भिन्न बनने की प्रक्रिया सम्मिलित है। व्यक्तियों के बाह्य विभेद नये समूहों को रचना करते हैं। आधुनिक औद्योगिक समाज की विशेषता, श्रम-विभाजन ने ऐसे समूहों के विकास को बढ़ावा दिया है। ये समूह आन्तरिक संरचना एवं विनियमों की मात्रा एवं गम्भीरता के अनुपात में अपने सदस्यों को न्यूनाधिक वैयक्तिकता की अनुमति दे देते हैं। इन दो तत्वों अर्थात् बाह्य विभेद एवं श्रम विभाजन के अतिरिक्त तीसरा तत्व भी है जो प्रकारों के बाह्य भेद को जन्म देता है। यह है-सम्पकों का अभाव । ऐसे व्यक्ति जो दूसरे व्यक्तियों से अलग रहते हैं, उनका व्यक्तित्व भिन्न प्रकार का होता है। प्रजातन्त्रीकरण, स्वतन्त्र प्रतियोगिता एवं सामाजिक गतिशीलता भी वैयक्तिकरण को, जो मन बनने की प्रक्रिया है, आगे बढाते है । अपने विशिष्ट गुणों से परिचित होना तथा आत्म-मूल्याकन के एक नये प्रकार का जन्म भी वैयक्तिकरण है। व्यक्ति स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ एवं अलग मानता है तथा अपना मूल्यांकन ऊंचे शब्दों में करता है। वह अपने जीवन एवं चरित्र को अनुपम समझने लगता है । वैयक्तिकरण की इस प्रक्रिया की कुछ पूर्व शर्तें हैं-~- प्रसिद्ध अभिजात वर्ग की दूरी एवं कठोर विभेदीकरण, समूह का इस प्रकार संगठन कि कुछ लोगो को निरंकुश बनने का अवसर प्राप्त हो सके, दरवारी व्यक्तियों का एक ऐसा समूह जहाँ निरकुण शासक को यदि ईश्वर नही तो शक्तिशाली होने का भ्रम हो सके । ये पूर्व व्यक्ति को निरंकुश बना देती हैं, जिसको शक्ति शारीरिक बल एवं आध्यात्मिक अवपीड़न पर आधारित होती है । इतिहास ऐसे अत्याचारियों के उदाहरणों से भरा पड़ा है जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते थे और अनुभव करते थे कि उनका जीवन और चरित्र अनुपम है। यह आत्माभिमान की भावना है । असुरखनीपाल (Assurbanipal) (८८५-८६० बी० सी०) के इतिवृत्त से उद्धृत निम्न पैरा REATfeera की इस भावना का स्पष्ट उदाहरण है - "मैं राजा हूँ। मैं स्वामी हूँ। मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। मैं महान् शक्तिशाली हूँ। मैं प्रसिद्ध है, कुलीन हूँ, युद्ध का स्वामी हूँ। मैं एक सिंह हूँ। मेरी नियुक्ति स्वयं ईश्वर । मैं अजेय शस्त्र हूं जो शत्रुओं के क्षेत्र को भग्नावशेष कर देता है । मैंने पकड़ कर धम्मों पर टाँग दिया। मैंने उनके खून से पहाड़ों को ऊन की तरह रेंग दिया । उनमें से बहुतों की खाल उधेड़ कर मैंने दीवारों को बैंक दिया। मैंने जीवित शरीरों से स्तम्भ बनाया और एक दूसरे स्तम्भ की रचना उनके सिरों से की। परन्तु बीच में मैंने उनके सिरों को अंगूर की बेल पर टाँग दिया। मैने अपनी शाही ठाठ की एक बड़ी तस्वीर बनायी और उस पर अपनी शक्ति एवं प्रभुता को खुदवाया। मेरा चेहरा भग्नावशेषों पर चमकता है। अपनी क्रोध-पिपासा को प्रात, करने में मुझे सन्तुष्टि मिलती है ।" वैयक्तिकरण का तीसरा स्वरूप वस्तुओं द्वारा इच्छाओं का वैयक्तिकरण है। कुछ लोग कुछेक व्यक्तियों एवं वस्तुओं के प्रति स्थिर भावना बना लेते हैं । मनोवैज्ञानिक विश्लेषकों ने इसे 'निर्धारित काम-वासना' (libido fixations) का दिया है। कृपक एवं जमींदार अभिजात वर्ग की इच्छाएँ नगरों के गतिशील धनी लोगों की अपेक्षा अधिक स्थिर होती हैं । वैयक्तिक रूचि को अनेक तत्व जैसे सम्पत्ति, उत्पादन एवं वितरण की प्रक्रिया प्रभावित करते हैं । सामाजिक गतिशीलता भी व्यक्ति को विशिष्ट अभिलाषाओं से बाँधे रखती है। पारिवारिक परिस्थितियां भी व्यक्ति की इच्छाओं को रूप प्रदान करती हैं । विरक्ति या एकान्तवासी बनने की भावना व्यक्ति को अन्तर्खाजी और अन्तमुखी बना सकती है। बड़े नगरों में जहाँ मैत्री वातावरण का अभाव है, विमुखता एवं अस्त-व्यस्तता है तथा जहाँ समुदाय का अपने सदस्यों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं है, वहाँ विरक्ति की भावना अधिक विशिष्ट है । ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति के अन्दर अकेलेपन मा आशिक अलगाव की भावना उत्पन्न हो जाती है। इससे व्यक्ति अन्तखोजी बन जाता है जो वैयक्तिकरण का ही एक रूप है । १. समाजीकरण का क्या अर्थ है ? समाजीकरण, समाजवाद एवं सामाजिकता में अन्तर स्पष्ट कीजिए । २ समाजीकरण की प्रक्रिया का सोदाहरण वर्णन कीजिए । ३. समाजीकरण की प्रक्रिया में भाग लेने वाले तत्वों की व्याख्या कीजिए । ४. वैयक्तिकरण एवं समाजीकरण में क्या अन्तर है ? वैयक्तिकरण की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए । ५. समाजीकरण के प्रमुख अभिकरणों की व्याख्या कीजिए । ६. समाजीकरण के विभिन्न सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए । अध्याय ७ [ INTERESTS AND A1TITUDES ] समाज मूलतः एक मानसिक घटना-वस्तु है । इसका वास्तविक स्वरूप उन प्राणियों, जिनसे इसका निर्माण होता है की मनःस्थिति में निहित होता है। समाज के इस स्वरूप से, रुचियों और मनोवृत्तियों की दो अवधारणाओं का जन्म होता है । में दोनों अवधारणाएँ मुख्यतः मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, परन्तु क्योंकि सामाजिक सम्बन्धों का व्यवहार करने वाले व्यक्तियों को प्रकृति तथा उनकी वैयक्तिक जागरूकता के रूप का अध्ययन किये बिना अच्छी प्रकार नही समझा जा सकता, अतएव समाजशास्त्र का विद्यार्थी मनोविज्ञान का विद्यार्थी भी होता है। इसलिए उसे रुचियो और मनोवृत्तियों, जो हमारे व्यवहा हमारे व्यवहार को ढालती हैं तथा सामाजिक सम्बन्धों को निर्धारित करती हैं, की अवधारणाओं को समझना चाहिये । मैकाइवर ने इस विषय का व्यापक विश्लेषण किया है । १. रुचि और मनोवृत्ति का अर्थ Meaning of Interest and Attitude) रुचि वस्तुपरक, मनोवृत्ति व्यक्तिनिष्ठ ( Interest objective, attitude subjective ) -- रुचि का अर्थ है, "कोई लक्ष्य या पदार्थ जो व्यक्ति को इसकी प्राप्ति हेतु कार्य की प्रेरणा देता है। मनोवृत्ति मानव प्राणी के अन्दर चेतना की स्थिति है। यह व्यक्ति की भावनाओं, विचारों एव पूर्ववृत्तियों की कुछेक नियमित ताओं को निर्दिष्ट करती है जिनके द्वारा मनुष्य अपने पर्यावरण के किसी पक्ष की और कार्य करता है ।"* यह पदार्थों के सम्बन्ध में एक विषयी प्रतिक्रिया है । थामस एवं जननेकी ( Thomas and Znaniecki) के अनुसार, "मनोवृत्ति किसी मूल्य प्रति व्यक्ति के मन की स्थिति है।" यह विशिष्ट व्यक्तियों या पदार्थों के प्रति व्यवहार का रूप या भावना है। यह सामान्यतया 'काल्पनिक रचना' है, जिसे प्रत्यक्षतः देखा नहीं जा सकता, परन्तु मौखिक अभिव्यक्ति अथवा प्रत्यक्ष व्यवहार से अनुमानित किया जा सकता है। रुचि, दूसरी ओर, मनोवृत्ति का विषय है। यह इच्छा का कोई भी पदार्थ है। यह वस्तुगत है, ऐसो वस्तु जिसकी इच्छा की जाती है तथा जिसे पाने का प्रयत्न किया जाता है। सभी मनोवृत्तियों मे पदार्थ निहित होते हैं जिनकी ओर वे निर्दिष्ट करती हैं, परन्तु यह मन की स्थिति है, पदार्थ नही, जिसे मनोवृत्ति कहा जाता है। यह आवश्यक नहीं कि पदार्थ भौतिक बाह्य तथ्य हों; ये अभौतिक भी हो सकते हैं, उदाहरणतया वैज्ञानिक सिद्धान्त अथवा धार्मिक विश्वास पदार्थ अपने व्यापक अर्थ में वह वस्तुएँ होती हैं जिन पर मनुष्य ध्यान देता है और ये पदार्थ व्यक्ति 1. Secord and Bukman, Social Psychology, p. 97. 2 R. H. Thouless (Quoted), General and Soclal Psychology, p. 101.
कभी-कभी यह 'पराहम्' का खुला विरोध करके फूट पड़ता है। कभी-कभी इसकी अभिव्यक्ति छद्मवेष में होती है। उदाहरणतया, जब पिता अपने क्रोध को दूर करने के लिये बच्चे को पीटता है। ऐसी अवस्था में 'अहम्' को अपने कार्य के आधार का शान नहीं होता। फायड ने 'इड' की तुलना घोड़े तथा 'अहम्' की तुलना घुड़सवार से को है। उसका कथन है कि 'अहम्' का कार्य घड़सवार जैसा है, अर्थात् घोड़े, जो 'इ' है, का मार्गदर्शन करना। परन्तु कभी-कभी घुड़सवार को भांति 'अहम्' घोड़े अर्थात् 'इड' को अपनी इच्छानुसार मार्गदर्शित करने में असफल हो जाता है जिससे उसे विवशतया 'इस' को उसी दिशा अथवा मामूली भिन्न दिशा की ओर जाने देना पड़ता है जिस ओर वह जाने के लिये दृढप्रतिज्ञ है ।'एक'इड', एवं 'अहम्' के संघर्ष से मनोविक्षिप्ति का जन्म होता है। फायड का निष्कर्ष है कि 'इड', 'अहम्' एवम् 'पराहम्' के अन्तर्द्वन्द्व की प्रक्रिया में ही व्यक्ति का समाजीकरण होता है । तीन. समाजीकरण के अभिकरण समाजीकरण की प्रक्रिया केवल बचपन में ही नहीं, अपितु जीवन पर्यन्त क्रियाशील रहती है। यह जन्म से आरम्भ होकर व्यक्ति की मृत्यु तकं निरन्तर चलती रहती है। यह अविराम प्रक्रिया है। कुछ समय पूर्व 'समाजीकरण शब्द वयस्कों द्वारा सीखे गये अनुभवो के लिये प्रयुक्त नहीं होता था; इसे केवल बच्चों द्वारा सीखे गये अनुभवों के लिये सीमित रखा गया । परन्तु हाल में समाजीकरण की अवधारणा को विस्तृत किया गया है जिससे वयस्क आचरण को भी इसमे सम्मिलित किया जाता है। अब इसे अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया समझा जाता जिसके द्वारा किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके समूहों, जिनका यह सदस्य है, के सदस्यों की प्रत्याशाओं के अनुरूप ढाला जाता है।" विचारकों ने इस प्रक्रिया की व्याख्या केवल बच्चो के सन्दर्भ में इसलिए की है, क्योंकि उसमें ऐसे जटिल तत्वों का अभाव होता है जो उस समय उत्पन्न हो जाते हैं जब व्यक्ति 'आत्म' तथा दूसरों के बारे में चेतन हो जाता है। जब व्यक्ति पुस्तकें पढ़ना और कहानियाँ सुनना आरम्भ कर देता है तथा एक आदर्श समाज की कल्पना करने योग्य हो जाता है, तो उस समय वस्तुनिष्ठ तत्वो को वस्तुपरक तथ्यों से पृथक् करना तथा बच्चे के समाजीकरण में उनके क्रमशः योगदान का मूल्याकन करना कठिन हो जाता है । चूँकि समाजीकरण समाज के लिये एक महत्वपूर्ण विषय है, अतएव यह वांछनीय ही है कि बच्चे का समाजीकरण केवल आकस्मिक घटना पर न छोड़ा जाय, बल्कि संस्थागत माध्यमों द्वारा नियंत्रित होना चाहिये । बच्चा क्या बनने जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण बात है मपेक्षतया इसके कि वह क्या है । समाजीकरण के द्वारा ही बच्चा समाज का उपयोगी सदस्य बनता है और सामाजिक परिपक्वता प्राप्त करता है । अतएव यह जानना परमावश्यक है कि बच्चे का समाजीकरण कौन करता है ? एक. Gillin and Gillin, An Introduction to Soclology, p. पाँच सौ पचहत्तर. बच्चे के समाजीकरण के दो मुख्य स्रोत हैं। प्रथम, वे लोग हैं जो बच्चे के ऊपर सत्ता रखते हैं, दूसरे वे लोग हैं जिनको सत्ता उसके समान है। प्रथम श्रेणी मे माता-पिता, शिक्षक, वृद्धजन एवं राज्य आते हैं। दूसरी श्रेणी में क्रीड़ा-संगी, मित्र एवं क्लब के साथी सम्मिलित हैं। उसके प्रशिक्षण का महत्व एवं इसकी अंतःवस्तु इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके समाजीकरण का स्रोत क्या है। पहली श्रेणी के सम्बन्ध बाध्यता के जबकि दूसरी श्रेणी के सम्बन्ध सहयोग के तत्व पर आधारित हैं। बाध्यता के सम्बन्ध का आधार सत्ताधारी व्यक्तियों के प्रति एकपक्षीय आदर है, जबकि सहयोग का सम्बन्ध समान व्यक्तियों के बीच पारस्परिक सद्भावना पर आधारित है। पहली श्रेणी के अंतर्गत आचरण के नियमों को श्रेष्ठ, निरंकुश एवं बाह्य समझा जाता है, परन्तु दूसरी श्रेणी के नियमों को स्वयमेव कोई श्रेष्ठता अथवा पूर्णता नही होती, वे केवल सहयोग के क्रियात्मक नियम होते हैं। बच्चे पर सत्ता रखने वाले व्यक्ति सामान्यतया आयु मे बड़े होते हैं, जबकि उसके साथ समता रखने वाले उसको ही आयु के होते हैं । सत्तायुक्त विधियों द्वारा ही समाजीकरण क्यों हो, इसके कई कारण हैं। संस्कृति में प्रत्याशित व्यवहार के प्रतिमान सहज नहीं होते, कभी-कभी ये प्राणिशास्त्रीय प्रवृत्ति के विपरीत होते हैं । अतएव यह आवश्यक है कि जिन व्यक्तियों को बच्चे के समाजीकरण का दायित्व सौपा गया है, उन्हे आदेश देने का अधिकार होना चाहिये । ऐसा अधिकार केवल आयु में बड़े व्यक्तियों को ही दिया जा सकता है, क्योंकि जब समाजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है तब शिशु से छोटा कोई अन्य नही होता और बराबर आयु वालों के साथ सहयोग करने की समर्थता उसमें नहीं होती । इसलिए माता-पिता पहले व्यक्ति होते हैं जो बच्चे का समाजीकरण करते हैं। वे केवल परिवार-व्यवस्था में ही उससे घनिष्ठ सम्बन्धित नही होते, अपितु प्राकृतिक रूप से भी अन्यों की अपेक्षा उसके अधिक निकट होते है। माता, पिता से पहले, समाजीकरण की प्रक्रिया को आरम्भ करती है। उससे ही बच्चे को प्रथमतम सामाजिक अभिप्रेरणा मिलती है। वह इन अभिप्रेरणाओ की नकल करता है। माता-पिता तथा बच्चे के बीच आयु एवं अनुभव का व्यापक अन्तर होने के कारण वह उनके द्वारा संचारित सभी बातों के तर्क एवं स्वरूप को समझने में असमर्थ होता है। यदि बच्चा नियमों का पालन नहीं करता तो उसे बाध्य किया जाता है, क्योंकि सामाजिक दृष्टिकोण से अनिवार्य बात यह नहीं है कि बच्चे को अपने व्यक्तित्व के प्रकटीकरण के लिये वर्जन से मुक्त किया जाय, बल्कि अनिवार्य यह है कि उसे जनरीतियों एवं रूड़ियों का पालन करना सिखाया जाय तथा उसे वचपन की मूर्खताओ से सुरक्षित रखा जाय। अतएव बच्चा उनसे पहले जो कुछ ग्रहण करता है, वह अधिकांशतया बन्धन की नैतिकता है। समाज किसी प्रकार की जोखिम उठाये बिना अपनी संस्कृति के मूल्यवान् तत्व बच्चे को सचारित कर देता है। इस प्रकार सामाजिक नैतिकता विवेकशील समझ का विषय न होकर सवेदनशील दायित्व का विषय है । बच्चा कुछ बातें जो वह सत्ताधारी व्यक्तियों से नहीं सोख सकता, अपने हमजोलियों से सीखता है। उनसे वह सहकारी नैतिकता तथा संस्कृति की कुछ अनौपचारिक बातें, यथा मामूली जनरीतियों, शोक, सनकें, परितुष्टि की गुप्त विधियाँ और निषिद्ध शान सीखता है। सामाजिक दृष्टिकोण सेनाको जानकारी आवश्यक है। उदाहरण के लिए, हमारे समाज में लैंगिक सम्बन्धों का ज्ञान नवयुवक के लिए अवांछनीय समझा जाता है जब तक उसका विवाह नहीं हो जाता। यदि ऐसे ज्ञान को विवाह तक पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाय तो यौन जीवन के बहुत से कार्यों की पूर्ति विवाह के बाद कठिन हो जायेगी । अतएव यौन ज्ञान को पूर्णतमा बहिष्कृत नहीं किया गया, यद्यपि औपचारिक रूप से इसे अवांछनीय समझा जाता है। यह ज्ञान बच्चा अपने हमजोलियों से प्राप्त करता है, यद्यपि बच्चा अपने समान आयु वाले बच्चे से इतना ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। तथापि "जहाँ तक बच्चा समान आयु वाले समूह से सहकारी प्रयत्नों के अंगस्वरूप नियमों को समझना सीखता है। जहाँ तक वह सत्ताधारी व्यक्तियों के संरक्षण या पराश्रय की हीनता के बिना अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीखता है, उस सीमा तक वह कुछ मूल्यवान् बातें सीखता है जो सत्तायुक्त सम्बन्ध व्यवस्था में सीखना यदि असम्भव नही तो कठिन अवश्य है ।" इस प्रकार, सतायुक्त एवं समतायुक्त दोनों प्रकार के सम्बन्ध बच्चे के समाजीकरण में योगदान करते हैं। ऐसी बातें जिनके संचार में अनुशासन एवं दायित्व निहित होते हैं, सप्तायुक्त सम्बन्धियों को जबकि अन्य बातें समतायुक्त सम्ब न्धियों को सुपुर्द की जाती हैं । समाजीकरण की प्रमुख एजेन्सियाँ संक्षिप्त रूप में निम्नलिखित हैं- परिवार -परिवार प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण संस्था है, जो बच्चे के समाजीकरण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी है । माता-पिता का बच्चे के साथ न केवल घनिष्ठ सम्बन्ध होता है, अपितु ये दूसरों की अपेक्षा अधिक उसके निकट भी होते हैं। बच्चा, माता-पिता से अपनी भाषा एवं बोली सीखता है। उसे सामाजिक नैतिकता सिखाई जाती है। वह सत्ताधारी मनुष्यों के प्रति आदरभावना सीखता है। परिवार में वह अनेक नागरिक गुणों को भी सीखता है । परिवार को ठीक ही नागरिक गुणों की पाठशाला कहा गया है। बच्चा सहयोग, सहकारिता, सहिष्णुता, आत्म-बलिदान, स्नेह आदि के प्रथम पाठ परिवार में ही सीखता है । पारिवारिक वातावरण बच्चे के विकास को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि व्यक्ति जो कुछ है, वह परिवार के कारण है। बुरे परिवार में बच्चा बुरी आदतें सीखता है जबकि अच्छे परिवार में यह अच्छी बातें सीखता है। बाल अपराध का एक कारण बुरा पारिवारिक वातावरण होता है। जीवन-साथी का चयन करते समय माता-पिता लड़के-लड़की के परिवार के इतिहास को जानने का प्रयास करते हैं, ताकि उससे उन्हें अच्छी या बुरी बातों का पता लग सके। माता-पिता तथा बच्चे के बीच सम्बन्ध बाध्यता का सम्बन्ध है। माता-पिता आयु में बड़े होने के कारण उसे आज्ञापालन का आदेश देने का अधिकार रखते हैं। यदि बच्चा उनके आदेश का पालन नहीं करता तो उसे दण्ड दिया जाता एक. Davis, Kingsley, Human Society. p. दो सौ अट्ठारह. है। माता-पिता मे से माता का स्थान समाजीकरण की प्रक्रिया में पिता से पूर्व आता है। परिवार जीवन पर्यन्त व्यक्तित्व को प्रभावित करता रहता है। समाज में परिवार के महत्व के ऊपर काफी साहित्य प्राप्त है । शिक्षण संस्थाएं समाजीकरण का अगला अभिकरण स्कूल है। स्कूल में बच्चा शिक्षा प्राप्त करता है जो उसके विचारो एवं दृष्टिकोणों को प्रभावित करती है। अच्छी शिक्षा बच्चे को अच्छा नागरिक बना सकती है, जबकि बुरी शिक्षा उसे अपराधी बना सकती है। शिक्षा का समाजीकरण में महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा की सुनियोजित प्रणाली समाजीकृत व्यक्तियों को जन्म दे सकती है । फ्रीड़ा-साथी अथवा मित्र क्रीड़ासाथी एवं मित्र भी समाजीकरण के प्रमुख अभिकरण है। बच्चे तथा उसके फ्रीड़ासाथी के बीच समानता का सम्बन्ध होता है। यह सहयोग एवं पारस्परिक सद्भावना पर आधारित है। उनकी आयु लगभग समान होती है । बच्चा अपने साथियों एवं मित्रों से वह सब कुछ ग्रहण करता है जो वह माता-पिता से ग्रहण नहीं कर सकता । उनसे वह सहकारी नैतिकता तथा संस्कृति की कुछ अनौपचारिक बातें, यथा फैशन, सनकें, कामतुष्टि के ढंग एवं निषिद्ध ज्ञान सीखता है। इस प्रकार का ज्ञान सामाजिक दृष्टिकोण से आवश्यक है। उदाहरणतया, लैंगिक ज्ञान हमारे समाज मे विवाह से पूर्व निषिद्ध माना जाता है । यदि यह ज्ञान पूर्णतया बंद कर दिया जाय तो लैंगिक जीवन के अनेक कार्य विवाह के बाद पूरे करना कठिन हो जायगा । बच्चा इस ज्ञान को अपने साथियों एवं मित्रों से प्राप्त करता है । चवं - चर्च से तात्पर्य धार्मिक संस्थाओं से है । प्रारम्भिक समाज में धर्म ने एकता के बन्धन का महत्वपूर्ण कार्य किया था। यद्यपि आधुनिक समाज में धर्म का महत्व कम हो गया है, तथापि यह हमारे विश्वासों एवं जीवन के ढंगों को प्रभावित करता है। प्रत्येक परिवार में कुछ न कुछ धार्मिक क्रियाएँ किसी न किसी अवसर पर होती हैं। बच्चा अपने माता-पिता को मन्दिर जाते तथा धार्मिक संस्कार करते देखता है। वह धार्मिक प्रवचनों को सुनता है जो उसके जीवन की दिशा को निर्धारित तथा उसके विचारों को प्रभावित कर सकते हैं । राज्य --राज्य एक सत्तायुक्त एजेन्सी है । यह लोगों के लिए कानूनों का निर्माण करती है, तथा उनसे अपेक्षित आचरण के नियमों को निर्धारित करती है। लोगों को इन कानूनों का अवश्यमेव पालन करना पड़ता है । यदि उनका आचरण राज्य के कानूनों के अनुरूप नहीं होता तो उन्हें दण्ड दिया जाता है। इस प्रकार, राज्य भी हमारे व्यवहार को ढालता है । उपर्युक्त एजेन्सियों के अतिरिक्त, आर्थिक संस्थाएँ, सांस्कृतिक सस्थाएँ, विवाह, पड़ोस तथा नातेदारी समूह भी समाजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह भी ध्यान में रखा जाय कि इन एजेंसियों को सुदक्ष ढंग से कार्य करना चाहिये, ताकि समाजीकृत प्राणियों का निर्माण हो सके । आधुनिक समाज को समाजीकरण को अनेक समस्याओं को हल करना है। तदर्थ इसे इन सभी अभिकरणों को अधिक क्रियाशील एवं प्रभावशील बनाना होगा । चार. समाजीकरण के तत्व ऊपर हमने समाजीकरण की प्रक्रिया, जैसे यह समाज मे कार्य करती है, का वर्णन किया है। समाजीकरण में सबसे पहली प्रेरणा बच्चे को माँ से मिलती है । परन्तु जैसे ही उसके सम्बन्ध विस्तृत होते हैं। पिता, भाई और बहनें, साथी, अध्यापक और पुलिस का सिपाही आदि दूसरे व्यक्ति उसके व्यवहार को ढालना आरम्भ कर देते हैं । व्यक्ति की समाजीकरण प्रक्रिया में तीन तत्व कार्य करते हैं। ये है -- व्यक्ति की शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक बपौती, पर्यावरण जिसमें उसका जन्म हुआ है, तथा संस्कृति जिसमें वह इन तत्वो की क्रिया प्रतिक्रिया के कारण रहता है। क्रिया प्रतिक्रिया की प्रक्रिया बड़ी जटिल होती है, जो व्यक्ति के निर्माण तथा समाज में उसकी स्थिति को काफी हद तक निर्धारित करती है। आइये, इस प्रक्रिया का सूक्ष्म अध्ययन करें । बच्चा अपने परिवार के पर्यावरण मे कुछ जन्मजात शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को लेकर जन्म लेता है। अपनी क्षमताओं के अनुसार वह परिवार को संस्कृति को ग्रहण करता है। यदि उसकी शारीरिक एवं मानसिक क्षमताएँ उत्तम नहीं होती तो वह अपने पर्यावरण से लाभ नहीं उठा सकता। इसके विपरीत, यदि उसके परिवार का वातावरण अच्छा नहीं है, तो अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं के बावजूद भी वह अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता। मानव-व्यक्तित्व के विकास में पर्यावरणीय प्रेरणा को महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छा स्कूल, सामाजिक समानता, राजनीतिक स्वतन्त्रता, संक्षेप में, अच्छा वातावरण बहुत कुछ सीमा तक इस बात का निर्धारण करता है कि बच्चे पर सामाजिक या आत्मकेन्द्रित शक्तियों में किसका प्रभाव अधिक पड़ेगा। मनोवैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि व्यक्ति समाज में वैसा व्यवहार करता है, जैसा वह परिवार में ढल जाता है । हैलो एवं ग्रोनर ने बतलाया है कि बाल-अपराधी अधि कांशतः उन परिवारों से होते हैं जो किसी समय सामाजिक सम्बन्धों की पूर्ति में किसी बाधा के शिकार रहे हैं। वेश्यावृत्ति की समस्या माता-पिता, बच्चे के सम्बन्ध की समस्या कहो जाती है। जिस प्रकार मरुस्थल में पुप्प अपनी सुगन्ध को प्रकट नही कर सकता और अनदेखा मुरझा जाता है, उसी प्रकार यदि उपयुक्ततावरण न मिले तो मनुष्य अपनी प्रतिभा को चमका नही सक्ता । परन्तु जैसा हमने ऊपर बतलाया है, केवल उपयुक्त वातावरण ही व्यक्तित्व का विकास नहीं कर सकता, यदि मनुष्य में उचित मानसिक एवं शारीरिक क्षमताएँ न हों । पर्यावरण पर समूह का प्रभाव पड़ता है, क्योंकि प्रत्येक समूह को अपनी विशिष्ट संस्कृति होती है। मनुष्य समूह में रहता है, अत. उसे अपने समूह के रीतिरिवाजों, विश्वासो तथा आदर्शों का पालन करना पड़ता है। सामाजिक प्रकृति का विकास समूह जीवन में एवं उसके माध्यम से होता है। डब्लू आईशून्य थामस ने परिस्थिति की परिभाषा शब्दावली की रचना की जिससे उसका अभिप्राय था कि बच्चा जिस स्थिति में स्वर्य को पाता है, उस स्थिति का निर्धारण उसके लिए पूर्व ही हो चुका होता है तथा उसे जिन नियमों के अनुसार आचरण करना है, उनका निर्धारण भी उस समूह के द्वारा जिसमें उसका जन्म होता है, किया जाता है। बच्चे को समूह द्वारा निर्धारित नियमों के प्रतिकूल अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने की बहुत कम छूट होती है । उसको इच्छाओ एव क्रियाओ में बाधा पड़नी आरम्भ हो जाती है और धीरे-धीरे पारिवारिक परिओं, स्कूल के क्रीड़ा-साथियों, पठन, औपचारिक शिक्षण एवं स्वीकृति तथा अन्वीकृति के अनौपचारिक चिह्नों द्वारा वयस्कता की ओर बढ़ते हुए सदस्य समाज की नियमावली को सोख लेते हैं। इस प्रकार, समूह के प्रभाव भी मानव-व्यक्तित्व के विकास को निर्धारित करते हैं। अतः उपर्युक्त तीन तत्वों की अन्तःक्रिया के फलस्वरूप मानव प्राणी सामाजिक प्राणी बनता है। समाजीकरण की प्रक्रिया की व्याख्या करते समय कुछ समाजशास्त्रियों ने धौये तत्व-व्यक्ति के अनुभव का भी वर्णन किया है। कभी-कभी यह देखा गया है कि उपयुक्त वातावरण के होते हुए भी मनुष्य अपनी मानसिक एवं शारीरिक क्षमतायो का पूर्ण लाभ नहीं उठा पाता, क्योंकि अपने निजी अनुभव के कारण वह उस वाताके वरण से अलग रहता है। यदि किसी बच्ने को पढ़ने के लिए बाध्य किया जाय तो वह पढ़ाई को शारीरिक दण्ड के साथ सम्बद्ध समझने लगता है और भगोडा बन जाता है। ज्यों-ज्यों मनुष्य मे परिपक्वता बढती जाती है, वह एक के बाद दूसरे कठोर अनुभव प्राप्त करता जाता है, कभी-कभी उसकी बहुप्रिय वस्तु भी उससे छिन जाती जिस कारण वह दूसरों के कल्याण में अधिक रुचि लेने लगता है। कभी-कभी दुःख भी मनुष्य का समाजीकरण कर देता है। पाँच. समाजीकरण का महत्व मानव-व्यवहार एवं मानव-मनोवृत्ति के विकास में समाजीकरण का महत्व 'अन्ना' तथा 'इजाबेला के दो उदाहरणों से दिखाया जा सकता है। एक अवैध बच्ची अन्ना को ऊपर के कमरे में अकेला बंद रखा गया। जब लगभग छः वर्ष की आयु मे उसे कमरे से निकाला गया, अन्ना नही बोल सकती थी, न हो चल-फिर सकती थी और न वह कोई ऐसा कार्य कर सकती थी जिससे उसकी बुद्धि का पता लगे। यह भावनाशून्य और प्रत्येक वस्तु के प्रति विरक्त थी । वह अपनी ओर से कोई कार्य नहीं कर सकती थी। इससे स्पष्ट है कि समाजीकरण के अभाव में केवल शारीरिक या प्राणिशास्त्रीय साधन पूर्ण व्यक्तित्व के विकास में योग नहीं दे सकते । संवहनात्मक सम्पर्क समाजीकरण का केन्द्रबिन्दु है । इजावेला साढ़े छ वर्ष की आयु में मिली थी। अन्ना के समान वह भी एक अवैध सन्तान थी और इसी कारण एकान्त में रखी गयी थी। जब वह मिली तो उसे किसी भी प्रकार के सम्बन्धों का ज्ञान नहीं था । किसी भी नवागन्तुक के प्रति उसका व्यवहार जंगली जानवर जैसा था। जब उसके प्रशिक्षण की एक व्यवस्थित और क्षमतापूर्ण योजना बनाई गयी तो आरम्भ में तो यह कार्य निराशाजनक लगा, लेकिन धीरे-धीरे स्तर तक पहुंच गई। मिलने गये नाड़े आठ वर्ष की आयु तक वह एक सामान्य इजारेला के उदाहरण कपष्ट कि छ. वर्ष की आयु तक की पृथकता जिसमें किसी प्रकार की वाणी को नहीं किया गया, इसके बाद में प्राप्ति का निषेध नहीं करती। किन्तु यह चाहना बहुत कठिन है कि किस आयु तक समाज से बिल्कुल पृथक् रहने पर भी मनुष्य नमाज को संस्कृति भीखने योग्य रह जाता है । इतना तो निश्चय प्रतीत होता है कि पन्द्रह वर्ष की पृथकता के बाद ऐसा सम्भव नही होगा, सम्भवतः दस वर्ष की आयु तक पृषक रहने पर भी ऐमा हो हो । हाँ, ये दोनों उदाहरण अनोखे रूप से व्यक्तित्व के विकास में समाजीकरण के महत्व को स्पष्ट करते हैं। इनके माध्यम से मानव-व्यक्तित्व के विकास में दो कारको को "भुर्त रूप से विभक्त करके देखा जाना सम्भव है, जो अन्यथा विश्लेषण द्वारा हो पृथक किये जाते है। यह कारक जीव-जननिक तथा समाज-जननिक है।" संक्षेप में, व्यक्तित्व के विकास में समाजीकरण का महत्वपूर्ण भाग है । छः. प्रौढ़ों का समाजीकरण अभी तक हम बच्चो के समाजीकरण की चर्चा कर रहे थे, परन्तु जैसा पूर्व मे ही कहा जा चुका है, समाजीकरण एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। यह किसी आयु-विशेष पर समाप्त नहीं हो जाती है, परन्तु जीवन पर्यन्त चलती रहती है। प्रौढ़ों • का समाजीकरण बच्चों के समाजीकरण से सरल है, प्रथमतया इसलिए कि प्रौढ़ साधारणतया अपने द्वारा पूर्वपरिलक्षित लक्ष्य की ओर कार्य करने को प्रेरित होता है; दूसरे, इसलिए कि जिस भूमिका को वह अन्तरीकृत करने का प्रयत्न कर रहा है, वह उसके व्यक्तित्व में पूर्वविद्यमान भूमिकाओं से काफी समानताएँ रखती हैं। तोसरे, इसलिए कि समाजीकरण का अभिकर्ता भाषण के द्वारा उससे सुगमता से वातचीत कर सकता है । हाँ, प्रौढो का समाजीकरण एक लम्बी एव कठिन प्रक्रिया हो सकता है । ऐसा विशेषतया तब होता है जब सोखी जाने वाली भूमिकाएं कठिन हों, तथा भूमिका के दायित्व कठोर हों। इसके अतिरिक्त, प्रौढ़ों में उनके आदर्श एवं दृष्टिकोण पहले ही घर कर चुके हैं, अतएव जब सीखे जाने वाले आदर्श एवं दृष्टिकोण व्यक्तित्व मे पूर्व निहित आदर्शों के विपरीत होते हैं तो प्रौढों के समाजीकरण की प्रक्रिया कठिन हो जाती है । समाज में समाजीकृत वृत्तियों के महत्व को कम नहीं किया जा सकता । समाजीकृत दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति कभी भी ऐसा कार्य नहीं करेगा जो समाज के लिये हानिकारक हो । वह कोई ऐसा व्यापार-कार्य भी नही करेगा जो सामाजिक हित की दृष्टि से अनुत्पादक हो अथवा जो अस्वस्थ प्रतियोगिता पर आधारित हो । समाजीकृत नागरिक सामाजिक कल्याण को अपने व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा अधिक को कम करके निकटता की वृद्धि करता है। आधुनिक समाज को अभी बचपन एवं यौवन के सभी स्तरों पर समाजीकरण की समस्याओं को हल करना है। यह कहना कठिन है कि कोई भी समाज व्यक्ति की क्षमताओं का पूर्ण लाभ उठाता है। समाजीकरण में सुधार मानव प्रकृति एवं मानव समाज के भावी परिवर्तन के लिये सबसे चडी सम्भावना प्रदान करता है । सात. वैयक्तिकरण इस अध्याय को समाप्त करने से पूर्व, वैयक्तिकरण तथा इसकी क्रिया-प्रणाली की व्याख्या करना उचित होगा। वैयक्तिकरण वह सामाजिक प्रक्रिया जो मनुष्य को उसके समूह से न्यूनाधिक स्वतन्त्र बना देती है तथा उनमे स्वय की आत्म चेतना का विकास हो जाता है। मैफाइवर के अनुसार, "वैयक्तिकरण एक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य अधिक स्वायत्त अथवा आत्म-निर्णयकारी हो जाते हैं, जिसमे वे केवल अनुकरणीयता या बाह्य अनुशास्ति लिये मानकों की स्वीकृति से आगे बढ़ जाते हैं, जिसमे वे परम्पराओं एव प्रयाओं द्वारा अपने जीवन के नियमन में कम बाधित होते हैं, विचार एवं मत के मामलों में सत्ता एवं आदेश के कम अधीन होते हैं, तथा इस बात को मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति एक अलग प्राणी है जो अपने जीवन के लक्ष्यों की पूर्ति तभी कर सकता है जब वह स्वयं इनके बारे में चेतनायुक्त हो तथा ये स्वयं उसके द्वारा चाही गयी हों "" वैयक्तिकरण एक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य स्वयं को जानने लगता है तथा वान्तरिक दायित्व की भावना ग्रहण करता है । यह स्वयं को जान लेने की प्रक्रिया है। जब व्यक्ति किसी कार्य को केवल इसलिए नहीं पता कि दूसरे भी उसे कर रहे हैं, अपितु इसलिए करता है क्योंकि उसकी अन्तरात्मा उसे ऐसा करने की स्वीकृति देती है। वह अपने व्यक्तित्व के बल पर चलता है जो उसका एक गुण है। समाजीकरण मनुष्य का दूसरों के साथ सम्बन्ध स्थापित करता है, जबकि वैयक्तिकरण उसे स्वायत्त अथवा आत्मनिर्धारक बनाता है। वैयक्तिकरण की प्रक्रिया को समझने से पूर्व दो भ्रामक धारणाओं को दूर कर लेना श्रेयस्कर होगा। प्रथमतया, यह धारणा, कि वैयक्तिकरण स्वयं व्यक्ति द्वारा अकेले रूप में चालित प्रक्रिया है; दूसरी व्याख्या यह कि वैयक्तिकरण पूर्वप्रचलित विचारों के द्वारा फैलायी गयो मानसिक प्रक्रिया है। जब व्यक्ति आत्म की प्राप्ति कर लेता है, तो उसका अर्थ यह नहीं होता कि व्यक्ति अपने समूह के प्रभाव से पूर्णतया मुक्त हो गया है। न केवल स्वयं व्यक्ति, अपितु समाज भी उसे दायित्व की आन्तरिक भावना को प्राप्त करने तथा स्वयं को जानने में उसकी सहायता करता है। इस प्रकार, वैयक्तिकरण की प्रक्रिया व्यक्ति एवं समाज दोनों के द्वारा चलाई जाती है। द्वितीय, समाजशास्त्री का कार्य केवल यह नहीं है कि वह किसी समय प्रचलित विचारों को मालूम करे, अपितु उसे इस बात की भी खोज करनी होती है कि इन विचारों का एक. Macīver, The Elements of Soclal Science, p. एक सौ चौंतालीस. समाजशास्त्र के सिधान्त जन्म कैसे हुआ। स्वयं विचार वैयक्तिकरण का विकास नही करते; वे तो व्यक्तिकरण की प्रक्रिया को केवल मात्र मानसिक अभिव्यक्तियाँ होते हैं। वैयक्तिकरण के पक्ष मानहीम ने वैयक्तिकरण को चार प्रमुख स्वरूपों में विभेदित किया है। ये हैं -- दूसरे लोगों से विभिन्न ढंग से सीखने की प्रक्रिया से वैयक्तिकरण, आत्म-सम्बन्धी क्रियाओं के नये रूपों के स्तर पर वैयक्तिकरण, वस्तुओं के माध्यम से वैयक्तिकरण, आत्म-गंभीरता के रूप में वैयक्तिकरण--- जिसका अभिप्राय है आत्म-सम्बन्धी अनुभवों को ग्रहण करना तथा वैयक्तिकरण की शक्तियों का अपने भीतर एवं इर्द-गिर्द उन्नयन करना। ये सब प्रक्रियाएँ नितान्त मिन्न घटनाएँ हैं। वैयक्तिकरण के पहले स्वरूप में दूसरे व्यक्तियों से भिन्न बनने की प्रक्रिया सम्मिलित है। व्यक्तियों के बाह्य विभेद नये समूहों को रचना करते हैं। आधुनिक औद्योगिक समाज की विशेषता, श्रम-विभाजन ने ऐसे समूहों के विकास को बढ़ावा दिया है। ये समूह आन्तरिक संरचना एवं विनियमों की मात्रा एवं गम्भीरता के अनुपात में अपने सदस्यों को न्यूनाधिक वैयक्तिकता की अनुमति दे देते हैं। इन दो तत्वों अर्थात् बाह्य विभेद एवं श्रम विभाजन के अतिरिक्त तीसरा तत्व भी है जो प्रकारों के बाह्य भेद को जन्म देता है। यह है-सम्पकों का अभाव । ऐसे व्यक्ति जो दूसरे व्यक्तियों से अलग रहते हैं, उनका व्यक्तित्व भिन्न प्रकार का होता है। प्रजातन्त्रीकरण, स्वतन्त्र प्रतियोगिता एवं सामाजिक गतिशीलता भी वैयक्तिकरण को, जो मन बनने की प्रक्रिया है, आगे बढाते है । अपने विशिष्ट गुणों से परिचित होना तथा आत्म-मूल्याकन के एक नये प्रकार का जन्म भी वैयक्तिकरण है। व्यक्ति स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ एवं अलग मानता है तथा अपना मूल्यांकन ऊंचे शब्दों में करता है। वह अपने जीवन एवं चरित्र को अनुपम समझने लगता है । वैयक्तिकरण की इस प्रक्रिया की कुछ पूर्व शर्तें हैं-~- प्रसिद्ध अभिजात वर्ग की दूरी एवं कठोर विभेदीकरण, समूह का इस प्रकार संगठन कि कुछ लोगो को निरंकुश बनने का अवसर प्राप्त हो सके, दरवारी व्यक्तियों का एक ऐसा समूह जहाँ निरकुण शासक को यदि ईश्वर नही तो शक्तिशाली होने का भ्रम हो सके । ये पूर्व व्यक्ति को निरंकुश बना देती हैं, जिसको शक्ति शारीरिक बल एवं आध्यात्मिक अवपीड़न पर आधारित होती है । इतिहास ऐसे अत्याचारियों के उदाहरणों से भरा पड़ा है जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते थे और अनुभव करते थे कि उनका जीवन और चरित्र अनुपम है। यह आत्माभिमान की भावना है । असुरखनीपाल के इतिवृत्त से उद्धृत निम्न पैरा REATfeera की इस भावना का स्पष्ट उदाहरण है - "मैं राजा हूँ। मैं स्वामी हूँ। मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। मैं महान् शक्तिशाली हूँ। मैं प्रसिद्ध है, कुलीन हूँ, युद्ध का स्वामी हूँ। मैं एक सिंह हूँ। मेरी नियुक्ति स्वयं ईश्वर । मैं अजेय शस्त्र हूं जो शत्रुओं के क्षेत्र को भग्नावशेष कर देता है । मैंने पकड़ कर धम्मों पर टाँग दिया। मैंने उनके खून से पहाड़ों को ऊन की तरह रेंग दिया । उनमें से बहुतों की खाल उधेड़ कर मैंने दीवारों को बैंक दिया। मैंने जीवित शरीरों से स्तम्भ बनाया और एक दूसरे स्तम्भ की रचना उनके सिरों से की। परन्तु बीच में मैंने उनके सिरों को अंगूर की बेल पर टाँग दिया। मैने अपनी शाही ठाठ की एक बड़ी तस्वीर बनायी और उस पर अपनी शक्ति एवं प्रभुता को खुदवाया। मेरा चेहरा भग्नावशेषों पर चमकता है। अपनी क्रोध-पिपासा को प्रात, करने में मुझे सन्तुष्टि मिलती है ।" वैयक्तिकरण का तीसरा स्वरूप वस्तुओं द्वारा इच्छाओं का वैयक्तिकरण है। कुछ लोग कुछेक व्यक्तियों एवं वस्तुओं के प्रति स्थिर भावना बना लेते हैं । मनोवैज्ञानिक विश्लेषकों ने इसे 'निर्धारित काम-वासना' का दिया है। कृपक एवं जमींदार अभिजात वर्ग की इच्छाएँ नगरों के गतिशील धनी लोगों की अपेक्षा अधिक स्थिर होती हैं । वैयक्तिक रूचि को अनेक तत्व जैसे सम्पत्ति, उत्पादन एवं वितरण की प्रक्रिया प्रभावित करते हैं । सामाजिक गतिशीलता भी व्यक्ति को विशिष्ट अभिलाषाओं से बाँधे रखती है। पारिवारिक परिस्थितियां भी व्यक्ति की इच्छाओं को रूप प्रदान करती हैं । विरक्ति या एकान्तवासी बनने की भावना व्यक्ति को अन्तर्खाजी और अन्तमुखी बना सकती है। बड़े नगरों में जहाँ मैत्री वातावरण का अभाव है, विमुखता एवं अस्त-व्यस्तता है तथा जहाँ समुदाय का अपने सदस्यों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं है, वहाँ विरक्ति की भावना अधिक विशिष्ट है । ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति के अन्दर अकेलेपन मा आशिक अलगाव की भावना उत्पन्न हो जाती है। इससे व्यक्ति अन्तखोजी बन जाता है जो वैयक्तिकरण का ही एक रूप है । एक. समाजीकरण का क्या अर्थ है ? समाजीकरण, समाजवाद एवं सामाजिकता में अन्तर स्पष्ट कीजिए । दो समाजीकरण की प्रक्रिया का सोदाहरण वर्णन कीजिए । तीन. समाजीकरण की प्रक्रिया में भाग लेने वाले तत्वों की व्याख्या कीजिए । चार. वैयक्तिकरण एवं समाजीकरण में क्या अन्तर है ? वैयक्तिकरण की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए । पाँच. समाजीकरण के प्रमुख अभिकरणों की व्याख्या कीजिए । छः. समाजीकरण के विभिन्न सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए । अध्याय सात [ INTERESTS AND AएकTITUDES ] समाज मूलतः एक मानसिक घटना-वस्तु है । इसका वास्तविक स्वरूप उन प्राणियों, जिनसे इसका निर्माण होता है की मनःस्थिति में निहित होता है। समाज के इस स्वरूप से, रुचियों और मनोवृत्तियों की दो अवधारणाओं का जन्म होता है । में दोनों अवधारणाएँ मुख्यतः मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, परन्तु क्योंकि सामाजिक सम्बन्धों का व्यवहार करने वाले व्यक्तियों को प्रकृति तथा उनकी वैयक्तिक जागरूकता के रूप का अध्ययन किये बिना अच्छी प्रकार नही समझा जा सकता, अतएव समाजशास्त्र का विद्यार्थी मनोविज्ञान का विद्यार्थी भी होता है। इसलिए उसे रुचियो और मनोवृत्तियों, जो हमारे व्यवहा हमारे व्यवहार को ढालती हैं तथा सामाजिक सम्बन्धों को निर्धारित करती हैं, की अवधारणाओं को समझना चाहिये । मैकाइवर ने इस विषय का व्यापक विश्लेषण किया है । एक. रुचि और मनोवृत्ति का अर्थ Meaning of Interest and Attitude) रुचि वस्तुपरक, मनोवृत्ति व्यक्तिनिष्ठ -- रुचि का अर्थ है, "कोई लक्ष्य या पदार्थ जो व्यक्ति को इसकी प्राप्ति हेतु कार्य की प्रेरणा देता है। मनोवृत्ति मानव प्राणी के अन्दर चेतना की स्थिति है। यह व्यक्ति की भावनाओं, विचारों एव पूर्ववृत्तियों की कुछेक नियमित ताओं को निर्दिष्ट करती है जिनके द्वारा मनुष्य अपने पर्यावरण के किसी पक्ष की और कार्य करता है ।"* यह पदार्थों के सम्बन्ध में एक विषयी प्रतिक्रिया है । थामस एवं जननेकी के अनुसार, "मनोवृत्ति किसी मूल्य प्रति व्यक्ति के मन की स्थिति है।" यह विशिष्ट व्यक्तियों या पदार्थों के प्रति व्यवहार का रूप या भावना है। यह सामान्यतया 'काल्पनिक रचना' है, जिसे प्रत्यक्षतः देखा नहीं जा सकता, परन्तु मौखिक अभिव्यक्ति अथवा प्रत्यक्ष व्यवहार से अनुमानित किया जा सकता है। रुचि, दूसरी ओर, मनोवृत्ति का विषय है। यह इच्छा का कोई भी पदार्थ है। यह वस्तुगत है, ऐसो वस्तु जिसकी इच्छा की जाती है तथा जिसे पाने का प्रयत्न किया जाता है। सभी मनोवृत्तियों मे पदार्थ निहित होते हैं जिनकी ओर वे निर्दिष्ट करती हैं, परन्तु यह मन की स्थिति है, पदार्थ नही, जिसे मनोवृत्ति कहा जाता है। यह आवश्यक नहीं कि पदार्थ भौतिक बाह्य तथ्य हों; ये अभौतिक भी हो सकते हैं, उदाहरणतया वैज्ञानिक सिद्धान्त अथवा धार्मिक विश्वास पदार्थ अपने व्यापक अर्थ में वह वस्तुएँ होती हैं जिन पर मनुष्य ध्यान देता है और ये पदार्थ व्यक्ति एक. Secord and Bukman, Social Psychology, p. सत्तानवे. दो R. H. Thouless , General and Soclal Psychology, p. एक सौ एक.
यह कोई रहस्य नहीं अच्छी तरह चुने हुए कांच आप पूरी तरह से खुशबू और एक अच्छा पेय का स्वाद की सराहना करने की अनुमति देता है। रॉक्सी - चश्मा, जो सबसे लोकप्रिय में से एक माना जाता है कुकवेयर के प्रकार डिस्टिल्ड स्पिरिट के लिए, लंबे समय से किसी भी सभ्य बार की एक विशेषता बन गए हैं। क्या पेय एक गिलास में परोसा जा सकता है? एक क्लासिक रॉक्स (कांच) क्या है? तस्वीरें नीचे प्रकाशित किया, यह स्पष्ट रूप से समझाया गया है। हम बारीकी से देखने के। क्या कुकवेयर चट्टानों कहा जाता है? चश्मा "त्वरित सेवा" - व्हिस्की और अन्य कठिन शराब के लिए सबसे आम दुनिया भर में बर्तन - चिकनी सीधे तरफा के साथ एक सरल लम्बी शंकु के आकार कप। स्लाइस या एक पारदर्शी चश्मा चट्टानों में बर्फ के क्यूब्स के साथ व्हिस्की देखा जा सकता है न केवल बार में, लेकिन स्क्रीन परः कांच इस तरह लंबे समय तक विज्ञापनों में और हॉलीवुड की फिल्मों में एक क्लासिक चरित्र किया गया है। चट्टानों चश्मा मोटी कांच के बने होते हैं, इसलिए बहुत मजबूत, बार के लिए लगभग अविनाशी व्यंजन माना जाता है। मुख्य विशेषता एक काफी मोटी कांच तल, जिससे बर्फ धीरे-धीरे पेय में विलीन है। पारंपरिक Roxa मात्रा - 250 मिलीलीटर, लेकिन आज वहाँ 120 से 400 मिलीलीटर से मात्रा में इस तरह के व्यंजनों की कई भिन्न रूप हैं। कैसे क्लासिक रॉक्सी किया था? "चट्टानों पर" चट्टानों पर व्हिस्की की आपूर्ति, यह है कि, के लिए चश्मा, पिछली सदी के बाद से अपने इतिहास अग्रणी। इस तरह के बर्तन वाइल्ड वेस्ट, जब बर्फ के chipped हिस्सा व्हिस्की के साथ एक गिलास में रखा गया था के सैलून में सबसे लोकप्रिय पेय में से एक की आपूर्ति के लिए करना है। वहाँ एक संस्करण है कि पहले रॉक्सी आविष्कारशील अमेरिकी शराब परोसने नीचे खाली बोतल से बना, इस तरह से हो रही है व्यंजन, जो सस्ता है, और इसे तोड़ने के एक दया नहीं है। यह इन गुणों तो आज दुनिया चट्टानों के आसपास से प्रेम के लिए है। चश्मा सबसे अधिक उच्च यातायात के साथ प्रतिष्ठानों पीने में उपयोग किया जाता है। चट्टानों प्रपत्र आप बर्फ और पेय पदार्थों में जल्दी से उन्हें मिश्रण करने की अनुमति देता है, और कांच की मोटाई इस क्लासिक पकवान मजबूत और मजबूत हो। क्या चट्टानों में पेय डालना की सिफारिश की है? अनुभवी महान शराब की सस्ती से मिश्रित पेय - चश्मे मुख्य रूप से व्हिस्की के विभिन्न प्रकार की आपूर्ति करना है। धुंध और चट्टानों पर - - undiluted और चाकू क्यूब्स या बर्फ गांठ Roxa में पेय के शास्त्रीय फ़ीड ले गए। इसी प्रकार एक गिलास चट्टानों आत्माओं रम, जिन, ब्रांडी को खिलाया जा सकता। यह एक मुख्य घटक के रूप व्हिस्की के साथ, घोला जा सकता है के आधार आत्माओं के लिए रॉक्सी उपयोग करने के लिए स्वीकार्य सबसे अधिक बार है।
यह कोई रहस्य नहीं अच्छी तरह चुने हुए कांच आप पूरी तरह से खुशबू और एक अच्छा पेय का स्वाद की सराहना करने की अनुमति देता है। रॉक्सी - चश्मा, जो सबसे लोकप्रिय में से एक माना जाता है कुकवेयर के प्रकार डिस्टिल्ड स्पिरिट के लिए, लंबे समय से किसी भी सभ्य बार की एक विशेषता बन गए हैं। क्या पेय एक गिलास में परोसा जा सकता है? एक क्लासिक रॉक्स क्या है? तस्वीरें नीचे प्रकाशित किया, यह स्पष्ट रूप से समझाया गया है। हम बारीकी से देखने के। क्या कुकवेयर चट्टानों कहा जाता है? चश्मा "त्वरित सेवा" - व्हिस्की और अन्य कठिन शराब के लिए सबसे आम दुनिया भर में बर्तन - चिकनी सीधे तरफा के साथ एक सरल लम्बी शंकु के आकार कप। स्लाइस या एक पारदर्शी चश्मा चट्टानों में बर्फ के क्यूब्स के साथ व्हिस्की देखा जा सकता है न केवल बार में, लेकिन स्क्रीन परः कांच इस तरह लंबे समय तक विज्ञापनों में और हॉलीवुड की फिल्मों में एक क्लासिक चरित्र किया गया है। चट्टानों चश्मा मोटी कांच के बने होते हैं, इसलिए बहुत मजबूत, बार के लिए लगभग अविनाशी व्यंजन माना जाता है। मुख्य विशेषता एक काफी मोटी कांच तल, जिससे बर्फ धीरे-धीरे पेय में विलीन है। पारंपरिक Roxa मात्रा - दो सौ पचास मिलीलीटर, लेकिन आज वहाँ एक सौ बीस से चार सौ मिलीलीटर से मात्रा में इस तरह के व्यंजनों की कई भिन्न रूप हैं। कैसे क्लासिक रॉक्सी किया था? "चट्टानों पर" चट्टानों पर व्हिस्की की आपूर्ति, यह है कि, के लिए चश्मा, पिछली सदी के बाद से अपने इतिहास अग्रणी। इस तरह के बर्तन वाइल्ड वेस्ट, जब बर्फ के chipped हिस्सा व्हिस्की के साथ एक गिलास में रखा गया था के सैलून में सबसे लोकप्रिय पेय में से एक की आपूर्ति के लिए करना है। वहाँ एक संस्करण है कि पहले रॉक्सी आविष्कारशील अमेरिकी शराब परोसने नीचे खाली बोतल से बना, इस तरह से हो रही है व्यंजन, जो सस्ता है, और इसे तोड़ने के एक दया नहीं है। यह इन गुणों तो आज दुनिया चट्टानों के आसपास से प्रेम के लिए है। चश्मा सबसे अधिक उच्च यातायात के साथ प्रतिष्ठानों पीने में उपयोग किया जाता है। चट्टानों प्रपत्र आप बर्फ और पेय पदार्थों में जल्दी से उन्हें मिश्रण करने की अनुमति देता है, और कांच की मोटाई इस क्लासिक पकवान मजबूत और मजबूत हो। क्या चट्टानों में पेय डालना की सिफारिश की है? अनुभवी महान शराब की सस्ती से मिश्रित पेय - चश्मे मुख्य रूप से व्हिस्की के विभिन्न प्रकार की आपूर्ति करना है। धुंध और चट्टानों पर - - undiluted और चाकू क्यूब्स या बर्फ गांठ Roxa में पेय के शास्त्रीय फ़ीड ले गए। इसी प्रकार एक गिलास चट्टानों आत्माओं रम, जिन, ब्रांडी को खिलाया जा सकता। यह एक मुख्य घटक के रूप व्हिस्की के साथ, घोला जा सकता है के आधार आत्माओं के लिए रॉक्सी उपयोग करने के लिए स्वीकार्य सबसे अधिक बार है।
राज्यप्राप्तिदोषका दुरपनेयत्य मा० प्या० दो० १७८में भरतजीकी उफिस संगत उपर्युक्त बोहेका भाव इस प्रकार कहा जायगा 'ग्रहग्रहीत'-केकेपीपुत्रस्वसे सम्बन्धित ( चौ० १में ) कहा उद्गार ग्रहग्रहीतकी स्थिति है। 'वातवस'-कुटिलम तिमस्वसे सम्बन्धित ( पी० २से ४ सफमें ) कहा उद्गार कैकेयीकी उक्ति ( 'तास बात में सकल सेवारी ) से संगत वातव्याधि है। 'बीछीमार' - 'रामविमुख गतलाज से सम्बन्धित ( चौ० ५ में ) कहा उद्गार गुरुजीकी उकि ( 'तुम्ह कहूँ सुक्न्तु सुजसु नहि दोपू' ) से संगत वीष्ठीमार की पीडाके समान है । 'पिआइस बारुली' - चाहत सुसु माहिसे अधमके राज से सम्बन्धित ( चो० ६से ८ तकमें कही ) पासे सम्मत राजपदप्राप्ति मदिरापानके समान है, जैसा लक्ष्मणजीकी उफि केहि न राजमद दीन्ह कलकू' (ची० १ यो० २२९ ) में कहा गया है। भरतजीके कहनेका भाव है कि उपयुक्त तीन दोपोंसे तो यह ( भरतजी ) प्रस्त हैं ही चौथा दोप राजपदग्रहणप्रयुक्त स्वामिद्रोहरूस महादोप होगा जिसका उपचार सम्भव नहीं, तब उनको चिकित्सा असाम्य हो जायगी । नास्तिवम एवं आस्तिक्यको विवेहस्थितिमें अन्तर ज्ञातव्य है कि अध्यात्मशानकी प्राप्ति होनेपर वर्णाश्रमप्रधान आस्तिकको प्रवृति सदाचारमें दृढ़ होने से सोयानाका विरोध नहीं करेगी । नास्तिक्यमें ब्रह्मज्ञान हानेपर यथेच्छाघरमक दृढ़ संस्कारसे लोकयात्रा के विरुद्ध आचरण में ही नास्तिक्की प्रवृत्ति रहेगी। इसका उदाहरण घुडालाके योगवासिष्ठोक चरित्र से प्रसिद्ध है । अत जिस प्रकार नास्ति को अध्यास्मशानकी ओर प्रवृत्त कराना स्थापी लोकयात्रा निरर्थक है उसी प्रकार वारुणीरूपराज्यप्रदानके द्वारा कैकेयीप्रसूत्व के रहते ग्रहग्रहीतकी चिकित्सा करना भरतजी व्यर्थ समझते है । निष्क यह कि कैकेयीप्रसूत्वदोपके रहते भरतजीको स्थिति यथेच्छाचारी नास्तिवके समान है। संगति भरतजी कहते हैं कि उन्हें कैकेयी-दोपकी चिकित्सा के रूप में ब्रह्माजीने रामभ्रातृत्व दिया है वही योग्य है । ' चौ० -फैकइसुमनमोगु जग मोई। धतुर विरचि बोन्ह मोहि सोई ॥१॥ बसरयतनय राम-कधु भाई । वोन्ह मोहि विधि धादि बड़ाई ।। २ ।। भावार्य फेकेपीपुत्र के लिए संसारमें जा योग्य है वही चतुर ब्रह्माजीने मुझे दिया है। विधाताने मुझे राजा वशरथ का पुत्र और श्रीरामफा छोटा भाई होनेकी १ पौ० ३४ यो० ३६में राजाको उक्ति करिहहि भाइ सकल सेवकाई से समम्बित है ।
राज्यप्राप्तिदोषका दुरपनेयत्य माशून्य प्याशून्य दोशून्य एक सौ अठहत्तरमें भरतजीकी उफिस संगत उपर्युक्त बोहेका भाव इस प्रकार कहा जायगा 'ग्रहग्रहीत'-केकेपीपुत्रस्वसे सम्बन्धित कहा उद्गार ग्रहग्रहीतकी स्थिति है। 'वातवस'-कुटिलम तिमस्वसे सम्बन्धित कहा उद्गार कैकेयीकी उक्ति से संगत वातव्याधि है। 'बीछीमार' - 'रामविमुख गतलाज से सम्बन्धित कहा उद्गार गुरुजीकी उकि से संगत वीष्ठीमार की पीडाके समान है । 'पिआइस बारुली' - चाहत सुसु माहिसे अधमके राज से सम्बन्धित पासे सम्मत राजपदप्राप्ति मदिरापानके समान है, जैसा लक्ष्मणजीकी उफि केहि न राजमद दीन्ह कलकू' में कहा गया है। भरतजीके कहनेका भाव है कि उपयुक्त तीन दोपोंसे तो यह प्रस्त हैं ही चौथा दोप राजपदग्रहणप्रयुक्त स्वामिद्रोहरूस महादोप होगा जिसका उपचार सम्भव नहीं, तब उनको चिकित्सा असाम्य हो जायगी । नास्तिवम एवं आस्तिक्यको विवेहस्थितिमें अन्तर ज्ञातव्य है कि अध्यात्मशानकी प्राप्ति होनेपर वर्णाश्रमप्रधान आस्तिकको प्रवृति सदाचारमें दृढ़ होने से सोयानाका विरोध नहीं करेगी । नास्तिक्यमें ब्रह्मज्ञान हानेपर यथेच्छाघरमक दृढ़ संस्कारसे लोकयात्रा के विरुद्ध आचरण में ही नास्तिक्की प्रवृत्ति रहेगी। इसका उदाहरण घुडालाके योगवासिष्ठोक चरित्र से प्रसिद्ध है । अत जिस प्रकार नास्ति को अध्यास्मशानकी ओर प्रवृत्त कराना स्थापी लोकयात्रा निरर्थक है उसी प्रकार वारुणीरूपराज्यप्रदानके द्वारा कैकेयीप्रसूत्व के रहते ग्रहग्रहीतकी चिकित्सा करना भरतजी व्यर्थ समझते है । निष्क यह कि कैकेयीप्रसूत्वदोपके रहते भरतजीको स्थिति यथेच्छाचारी नास्तिवके समान है। संगति भरतजी कहते हैं कि उन्हें कैकेयी-दोपकी चिकित्सा के रूप में ब्रह्माजीने रामभ्रातृत्व दिया है वही योग्य है । ' चौशून्य -फैकइसुमनमोगु जग मोई। धतुर विरचि बोन्ह मोहि सोई ॥एक॥ बसरयतनय राम-कधु भाई । वोन्ह मोहि विधि धादि बड़ाई ।। दो ।। भावार्य फेकेपीपुत्र के लिए संसारमें जा योग्य है वही चतुर ब्रह्माजीने मुझे दिया है। विधाताने मुझे राजा वशरथ का पुत्र और श्रीरामफा छोटा भाई होनेकी एक पौशून्य चौंतीस योशून्य छत्तीसमें राजाको उक्ति करिहहि भाइ सकल सेवकाई से समम्बित है ।
पूर्व सैनिक राम किशन के परिवार को एक करोड़ रुपए देने के मामले में दिल्ली सरकार ने पलटी मारी है। दिल्ली हाईकोर्ट में सरकार ने कहा है कि हमने सिर्फ ऐलान किया है। प्रस्ताव एलजी के पास भेजा जाएगा वही अंतिम फैसला लेंगे। इससे पहले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिवार को एक करोड़ रूपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने के दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में आज एक जनहित याचिका दायर की गयी। जनहित याचिका में ग्रेवाल को शहीद घोषित करने के केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के फैसले का भी विरोध किया गया है। सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार ग्रेवाल ने पिछले दिनों कथित रुप से एक रैंक एक पेंंशन (ओआरओपी) के मुद्दे को लेकर आत्महत्या कर ली थी। याचिका पर सात नवंबर को सुनवाई होने की संभावना है। वकील अवध कौशिक ने यह याचिका दायर की है जो इससे पहले भी आत्महत्या करने वाले दो लोगों के परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने के दिल्ली सरकार के ऐसे ही फैसलों को चुनौती दे चुके हैं। नयी याचिका में कौशिक ने दावा किया है कि पूर्व सैनिक के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देकर केजरीवाल और उनकी सरकार आत्महत्या के कृत्य का महिमामंडन कर रही है। उसका समर्थन कर रही है और उसका प्रचार कर रही है। उन्होंने अदालत से दिल्ली सरकार के इस फैसले को रद्द करने के लिए निर्देश देने की मांग करते हुए कहा कि यह 'सार्वजनिक धन की हेराफेरी' है।
पूर्व सैनिक राम किशन के परिवार को एक करोड़ रुपए देने के मामले में दिल्ली सरकार ने पलटी मारी है। दिल्ली हाईकोर्ट में सरकार ने कहा है कि हमने सिर्फ ऐलान किया है। प्रस्ताव एलजी के पास भेजा जाएगा वही अंतिम फैसला लेंगे। इससे पहले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिवार को एक करोड़ रूपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने के दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में आज एक जनहित याचिका दायर की गयी। जनहित याचिका में ग्रेवाल को शहीद घोषित करने के केजरीवाल और आम आदमी पार्टी सरकार के फैसले का भी विरोध किया गया है। सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार ग्रेवाल ने पिछले दिनों कथित रुप से एक रैंक एक पेंंशन के मुद्दे को लेकर आत्महत्या कर ली थी। याचिका पर सात नवंबर को सुनवाई होने की संभावना है। वकील अवध कौशिक ने यह याचिका दायर की है जो इससे पहले भी आत्महत्या करने वाले दो लोगों के परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने के दिल्ली सरकार के ऐसे ही फैसलों को चुनौती दे चुके हैं। नयी याचिका में कौशिक ने दावा किया है कि पूर्व सैनिक के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देकर केजरीवाल और उनकी सरकार आत्महत्या के कृत्य का महिमामंडन कर रही है। उसका समर्थन कर रही है और उसका प्रचार कर रही है। उन्होंने अदालत से दिल्ली सरकार के इस फैसले को रद्द करने के लिए निर्देश देने की मांग करते हुए कहा कि यह 'सार्वजनिक धन की हेराफेरी' है।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? अक्षय कुमार को लगातार सफलता पर सफलता मिले जा रही है और उनके आगे फिलहाल कोई टिकता नहीं नजर आ रहा है। अब इतनी सफलता के बाद एक पार्टी तो अक्षय कुमार की तरफ से भी बनती है। उन्होंने यही किया। संडे को सुपर संडे बनाते हुए अक्षय कुमार ने अपने दोस्तों के लिए शानदार पार्टी रखी। सबसे मजेदार बात ये है कि इस पार्टी में उनके हॉलीवुड दोस्त तो पहुंचे ही साथ ही खूब मस्ती भी की। अक्षय कुमार की रूस्तम की सक्सेस पार्टी में पहुंचे हॉलीवुड एक्टर विल स्मिथ। विल स्मिथ इन दिनों भारत में ही हैं। साथ ही पहुंचे बॉलीवुड के कई जाने माने स्टार्स। अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना की इस शानदार पार्टी में कई स्टार्स पहुंचे। स्टार्स क्या कहिए दोस्तों की टोली पहुंची और तस्वीरें देखकर लग रहा है कि उन्होंने खूब इंज्वॉय भी किया। वैसे देखा जाए तो विल स्मिथ ने इस पार्टी को और भी शानदार बना दिया। आगे की स्लाइड्स पर देखिए अक्षय कुमार की इस शानदार पार्टी की तस्वीरें। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? अक्षय कुमार को लगातार सफलता पर सफलता मिले जा रही है और उनके आगे फिलहाल कोई टिकता नहीं नजर आ रहा है। अब इतनी सफलता के बाद एक पार्टी तो अक्षय कुमार की तरफ से भी बनती है। उन्होंने यही किया। संडे को सुपर संडे बनाते हुए अक्षय कुमार ने अपने दोस्तों के लिए शानदार पार्टी रखी। सबसे मजेदार बात ये है कि इस पार्टी में उनके हॉलीवुड दोस्त तो पहुंचे ही साथ ही खूब मस्ती भी की। अक्षय कुमार की रूस्तम की सक्सेस पार्टी में पहुंचे हॉलीवुड एक्टर विल स्मिथ। विल स्मिथ इन दिनों भारत में ही हैं। साथ ही पहुंचे बॉलीवुड के कई जाने माने स्टार्स। अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना की इस शानदार पार्टी में कई स्टार्स पहुंचे। स्टार्स क्या कहिए दोस्तों की टोली पहुंची और तस्वीरें देखकर लग रहा है कि उन्होंने खूब इंज्वॉय भी किया। वैसे देखा जाए तो विल स्मिथ ने इस पार्टी को और भी शानदार बना दिया। आगे की स्लाइड्स पर देखिए अक्षय कुमार की इस शानदार पार्टी की तस्वीरें। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
ओकलैंड पुलिस को 510-777-8570 पर कॉल करने के लिए कहा जाता है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड में पुलिस ने कहा कि वे उस ड्राइवर की तलाश कर रहे हैं जिसने हिट एंड रन में एक 100 वर्षीय व्यक्ति को टक्कर मार कर मार डाला। पुलिस के अनुसार, ओकलैंड के 100 वर्षीय त्ज़ु-ता को को रविवार सुबह 7 बजे के बाद एक चौराहे पर मारा गया। पुलिस ने बताया कि को के सिर में गंभीर चोट लगी थी। पुलिस ने मंगलवार को संदिग्ध की कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसे टैन या सफेद मिनी कूपर बताया गया है। ओकलैंड पुलिस ने घातक हिट-एंड-रन के सिलसिले में वांछित एक कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें 100 वर्षीय जू-टा को की मौत हो गई थी। ओकलैंड पुलिस ने घातक हिट-एंड-रन के सिलसिले में वांछित एक कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें 100 वर्षीय जू-टा को की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 10,000 डॉलर तक का इनाम दिया जा सकता है। जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति को ओकलैंड पुलिस को 510-777-8570 पर कॉल करने के लिए कहा जाता है।
ओकलैंड पुलिस को पाँच सौ दस-सात सौ सतहत्तर-आठ हज़ार पाँच सौ सत्तर पर कॉल करने के लिए कहा जाता है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड में पुलिस ने कहा कि वे उस ड्राइवर की तलाश कर रहे हैं जिसने हिट एंड रन में एक एक सौ वर्षीय व्यक्ति को टक्कर मार कर मार डाला। पुलिस के अनुसार, ओकलैंड के एक सौ वर्षीय त्ज़ु-ता को को रविवार सुबह सात बजे के बाद एक चौराहे पर मारा गया। पुलिस ने बताया कि को के सिर में गंभीर चोट लगी थी। पुलिस ने मंगलवार को संदिग्ध की कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसे टैन या सफेद मिनी कूपर बताया गया है। ओकलैंड पुलिस ने घातक हिट-एंड-रन के सिलसिले में वांछित एक कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें एक सौ वर्षीय जू-टा को की मौत हो गई थी। ओकलैंड पुलिस ने घातक हिट-एंड-रन के सिलसिले में वांछित एक कार की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें एक सौ वर्षीय जू-टा को की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को दस,शून्य डॉलर तक का इनाम दिया जा सकता है। जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति को ओकलैंड पुलिस को पाँच सौ दस-सात सौ सतहत्तर-आठ हज़ार पाँच सौ सत्तर पर कॉल करने के लिए कहा जाता है।
कमजोर मांग के चलते 6 दिनों बाद ज्वैलर्स बाजार में सोने के भाव में सुधार तो चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर मांग के चलते 6 दिनों बाद ज्वैलर्स बाजार में सोने के भाव में सुधार तो चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। अफगान नेशनल आर्मी में काम करने वाली 20 महिलाओं का बैच भारत के तमिलनाडु राज्य में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। भारत को नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। कई सालों बाद नेपाल को आखिरकार एक स्थिर सरकार मिल सकती है। किसी भी होटल, रेस्तरां या मल्टीप्लेक्स में एमआरपी रेट से ज्यादा के कीमत पर मिनरल वाटर बेचने पर जेल हो सकती है। सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत के पास कुशल राजनियकों व राजनेताओं की भरमार है।
कमजोर मांग के चलते छः दिनों बाद ज्वैलर्स बाजार में सोने के भाव में सुधार तो चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर मांग के चलते छः दिनों बाद ज्वैलर्स बाजार में सोने के भाव में सुधार तो चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। अफगान नेशनल आर्मी में काम करने वाली बीस महिलाओं का बैच भारत के तमिलनाडु राज्य में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। भारत को नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। कई सालों बाद नेपाल को आखिरकार एक स्थिर सरकार मिल सकती है। किसी भी होटल, रेस्तरां या मल्टीप्लेक्स में एमआरपी रेट से ज्यादा के कीमत पर मिनरल वाटर बेचने पर जेल हो सकती है। सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत के पास कुशल राजनियकों व राजनेताओं की भरमार है।
राजधानी लखनऊ में बेखौफ चोरों के हौसले बुलंद, पुलिस थाने की जीप लेकर चलते बने. . उत्तर प्रदेश की राजधानी में लगता है की चोर कुछ ज्यादा ही बेखौफ हो गए इसलिए चोर पुलिस के नाक के नीचे ही चोरी की घटना को अंजाम दे रहे हैं। लखनऊः बिगड़ते कानून व्यवस्था का जीता जागता उदाहरण सोमवार को राजधानी लखनऊ से सामने आया जह चोर पुलिस थाने से ही जीप उठा कर ले गए और तैनात सिपाही बस देखता ही रह गया। दरअसल महिला सम्मान प्रकोष्ठ डीजी के कार्यालय के गैराज में जीप नंबर यूपी 32 बीजी 790 खड़ी थी और चोरों की नजर उसपर पर गयी फिर क्या था चोर बड़े ही शातिराना तरीके से गैराज में घुसे और जीप को लेकर चलते बने और मौके पर मौजूद पीएसी की एक बटालियन देखती रह गयी। दारोगा रामसागर यादव ने महानगर कोतवाली में इस मामले में शिकायत दर्ज करा दी है। खबर फैलते ही लखनऊ के बार्डर को सील कर दिया गया है और आसपास के जिलों में चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया है। राजधानी में यह चोरी की कोई पहली वारदात नही है इससे पहले भी गाजीपुर इलाके से पुलिस की सरकारी जीप चोरी हो गई थी और अब इस घटना ने पुलिस की सक्रियता की पोल खोल कर रख दी थी। पिछले दिनों हजरतगंज इलाके से ही एसपी हरदोई रहे राजीव मेहरोत्रा की सरकारी भी जीप चोरी हो गई थी जिसे पुलिस ने नेपाल से कटी हालत में बरामद करने का दावा किया था। फिलहाल जीप चोरी होने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में पुलिस ने शहर की घेराबंदी कर चेकिंग शुरू कराई लेकिन कोई सुराग अभी तक हाथ नहीं लग पाया है।
राजधानी लखनऊ में बेखौफ चोरों के हौसले बुलंद, पुलिस थाने की जीप लेकर चलते बने. . उत्तर प्रदेश की राजधानी में लगता है की चोर कुछ ज्यादा ही बेखौफ हो गए इसलिए चोर पुलिस के नाक के नीचे ही चोरी की घटना को अंजाम दे रहे हैं। लखनऊः बिगड़ते कानून व्यवस्था का जीता जागता उदाहरण सोमवार को राजधानी लखनऊ से सामने आया जह चोर पुलिस थाने से ही जीप उठा कर ले गए और तैनात सिपाही बस देखता ही रह गया। दरअसल महिला सम्मान प्रकोष्ठ डीजी के कार्यालय के गैराज में जीप नंबर यूपी बत्तीस बीजी सात सौ नब्बे खड़ी थी और चोरों की नजर उसपर पर गयी फिर क्या था चोर बड़े ही शातिराना तरीके से गैराज में घुसे और जीप को लेकर चलते बने और मौके पर मौजूद पीएसी की एक बटालियन देखती रह गयी। दारोगा रामसागर यादव ने महानगर कोतवाली में इस मामले में शिकायत दर्ज करा दी है। खबर फैलते ही लखनऊ के बार्डर को सील कर दिया गया है और आसपास के जिलों में चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया है। राजधानी में यह चोरी की कोई पहली वारदात नही है इससे पहले भी गाजीपुर इलाके से पुलिस की सरकारी जीप चोरी हो गई थी और अब इस घटना ने पुलिस की सक्रियता की पोल खोल कर रख दी थी। पिछले दिनों हजरतगंज इलाके से ही एसपी हरदोई रहे राजीव मेहरोत्रा की सरकारी भी जीप चोरी हो गई थी जिसे पुलिस ने नेपाल से कटी हालत में बरामद करने का दावा किया था। फिलहाल जीप चोरी होने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में पुलिस ने शहर की घेराबंदी कर चेकिंग शुरू कराई लेकिन कोई सुराग अभी तक हाथ नहीं लग पाया है।
सरकारी बैंकों की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक लाख करोड़ रुपए का जो पैकेज घोषित किया है, वह एक जरूरी कदम था जो काफी पहले उठाया जाना चाहिए था। इस वक्त आधे से ज्यादा यानी ग्यारह सरकारी बैंकों की माली हालत खस्ता है। डूबते कर्ज और कुप्रबंधन की वजह से इन बैंकों की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि अगर वक्त रहते इन्हें मदद नहीं मिलती तो थोड़े समय बाद ये कारोबार करने की स्थिति में शायद ही रह पाते। इसलिए देर आयद दुरुस्त आयद की तर्ज पर सरकार एक लाख करोड़ रुपए की पूंजी बैंकिंग प्रणाली में डालेगी। इसमें से अस्सी हजार करोड़ रुपए बांड के जरिए जुटाए जाएंगे। इसके अलावा 8139 करोड़ रुपए सरकार अपने खजाने से देगी और बाकी दस हजार करोड़ रुपए का बंदोबस्त सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेच कर करेगी। यह मदद इसी वित्तवर्ष में दी जाएगी। दस बैंक ऐसे हैं जिन्हें साढ़े चार हजार करोड़ से ज्यादा की मदद देनी पड़ी है। सबसे खस्ता हालत आईडीबीआई बैंक की है। इसके निजीकरण तक पर विचार होने लगा था। अब इसे 10160 करोड़ रुपए की संजीवनी दी गई है। बैंक आॅफ इंडिया को 9232 करोड़ और एसबीआई को 8800 करोड़ रुपए दिए गए हैं। बैंकों की कमर तोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका उनकी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) और बैंकिंग प्रणाली के कुप्रबंधन की रही है। पिछले तीन सालों में एनपीए जिस रफ्तार से बढ़ा है, वह भयावह है। अप्रैल 2015 में एनपीए पौने तीन लाख करोड़ रुपए था, जो दो साल के भीतर ही यानी जून 2017 में 7. 33 लाख करोड़ तक पहुंच गया। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि अगले दो महीनों में यह नौ लाख करोड़ से ऊपर निकल जाएगा। हालात इतने विकट और चुनौतीपूर्ण हैं कि बैंकिंग व्यवस्था कब धराशायी हो जाए, कोई नहीं जानता। यह वह डूबी हुई रकम है जिसकी वसूली बैंकों के लिए एक दुःस्वप्न ही है। इसलिए बांड जारी करना ही सरकार को एकमात्र उपाय लगा जो फिलहाल बैंकों को इस संकट से उबार सकता है। बैंकों का सरोकार बड़े और कॉरपोरेट ग्राहकों से कहीं ज्यादा आम जनता से है, या होना चाहिए। आज भी लोगों को अपना पैसा बैंकों के पास ही सबसे ज्यादा सुरक्षित लगता है। यही साख और विश्वसनीयता बैंकों की सबसे बड़ी पूंजी भी है, जिसके भरोसे भारत में बैंक टिके हुए हैं। लेकिन जब से यह सुनने-पढ़ने में आ रहा है कि बड़े कर्जदार मौज काट रहे हैं और उनसे कर्ज वसूली बैंकों के बूते से बाहर की बात हो गई है तब से आम लोगों का बैंकों पर भरोसा कमजोर हुआ है। न जाने किस दिन बैंक दिवालिया हो जाएं और उनमें रखा पैसा डूब जाए! इसके अलावा बैंक अब ऐसे नियम-कायदे कानून थोपने लगे हैं जिनका बोझ अंततः खाताधारकों पर ही पड़ रहा है और इससे बैंकों को होने वाली आमद उस घाटे की भरपाई करेगी जो एनपीए से हुआ है। पर यह तो वही बात हुई कि करे कोई भरे कोई! इसलिए बैंकों को ही ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि कर्जदार बच कर भाग न पाएं और आमजन का भरोसा भी बना रहे।
सरकारी बैंकों की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक लाख करोड़ रुपए का जो पैकेज घोषित किया है, वह एक जरूरी कदम था जो काफी पहले उठाया जाना चाहिए था। इस वक्त आधे से ज्यादा यानी ग्यारह सरकारी बैंकों की माली हालत खस्ता है। डूबते कर्ज और कुप्रबंधन की वजह से इन बैंकों की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि अगर वक्त रहते इन्हें मदद नहीं मिलती तो थोड़े समय बाद ये कारोबार करने की स्थिति में शायद ही रह पाते। इसलिए देर आयद दुरुस्त आयद की तर्ज पर सरकार एक लाख करोड़ रुपए की पूंजी बैंकिंग प्रणाली में डालेगी। इसमें से अस्सी हजार करोड़ रुपए बांड के जरिए जुटाए जाएंगे। इसके अलावा आठ हज़ार एक सौ उनतालीस करोड़ रुपए सरकार अपने खजाने से देगी और बाकी दस हजार करोड़ रुपए का बंदोबस्त सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेच कर करेगी। यह मदद इसी वित्तवर्ष में दी जाएगी। दस बैंक ऐसे हैं जिन्हें साढ़े चार हजार करोड़ से ज्यादा की मदद देनी पड़ी है। सबसे खस्ता हालत आईडीबीआई बैंक की है। इसके निजीकरण तक पर विचार होने लगा था। अब इसे दस हज़ार एक सौ साठ करोड़ रुपए की संजीवनी दी गई है। बैंक आॅफ इंडिया को नौ हज़ार दो सौ बत्तीस करोड़ और एसबीआई को आठ हज़ार आठ सौ करोड़ रुपए दिए गए हैं। बैंकों की कमर तोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका उनकी गैर-निष्पादित आस्तियों और बैंकिंग प्रणाली के कुप्रबंधन की रही है। पिछले तीन सालों में एनपीए जिस रफ्तार से बढ़ा है, वह भयावह है। अप्रैल दो हज़ार पंद्रह में एनपीए पौने तीन लाख करोड़ रुपए था, जो दो साल के भीतर ही यानी जून दो हज़ार सत्रह में सात. तैंतीस लाख करोड़ तक पहुंच गया। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि अगले दो महीनों में यह नौ लाख करोड़ से ऊपर निकल जाएगा। हालात इतने विकट और चुनौतीपूर्ण हैं कि बैंकिंग व्यवस्था कब धराशायी हो जाए, कोई नहीं जानता। यह वह डूबी हुई रकम है जिसकी वसूली बैंकों के लिए एक दुःस्वप्न ही है। इसलिए बांड जारी करना ही सरकार को एकमात्र उपाय लगा जो फिलहाल बैंकों को इस संकट से उबार सकता है। बैंकों का सरोकार बड़े और कॉरपोरेट ग्राहकों से कहीं ज्यादा आम जनता से है, या होना चाहिए। आज भी लोगों को अपना पैसा बैंकों के पास ही सबसे ज्यादा सुरक्षित लगता है। यही साख और विश्वसनीयता बैंकों की सबसे बड़ी पूंजी भी है, जिसके भरोसे भारत में बैंक टिके हुए हैं। लेकिन जब से यह सुनने-पढ़ने में आ रहा है कि बड़े कर्जदार मौज काट रहे हैं और उनसे कर्ज वसूली बैंकों के बूते से बाहर की बात हो गई है तब से आम लोगों का बैंकों पर भरोसा कमजोर हुआ है। न जाने किस दिन बैंक दिवालिया हो जाएं और उनमें रखा पैसा डूब जाए! इसके अलावा बैंक अब ऐसे नियम-कायदे कानून थोपने लगे हैं जिनका बोझ अंततः खाताधारकों पर ही पड़ रहा है और इससे बैंकों को होने वाली आमद उस घाटे की भरपाई करेगी जो एनपीए से हुआ है। पर यह तो वही बात हुई कि करे कोई भरे कोई! इसलिए बैंकों को ही ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि कर्जदार बच कर भाग न पाएं और आमजन का भरोसा भी बना रहे।
मध्यप्रदेश के मंडला में एक अनोखी शादी हुई, जहां मेंढक दूल्हा बना और मेंढकी दुल्हनिया बनी। दरअसल, ये शादी बारिश के लिए किया गया एक अनूठा टोटका है। जिले में बारिश न होने से हाहाकार मचा हुआ है। एक तरफ गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है। परेशान किसान अब बारिश कराने के लिए तरह-तरह के टोटके कर इंद्र देवता को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि मेढ़क-मेढ़की की शादी कराने से बारिश होती है और यह एक पुरानी परंपरा है। बारिश नहीं होने से लोग बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। गर्मी एवं धान की फसल बर्बाद होने से त्रस्त किसान अब बारिश कराने के लिए तरह-तरह के टोटके कर इंद्र देवता को मनाने का जतन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये एक वर्षों पुरानी परंपरा है और मेढ़क मेढ़की की शादी कराने से इन्द्र देव खुश होते हैं और बारिश होती है। मंडला से 12 किलोमीटर दूर लिमरुआ गाँव के ग्रामीणों ने बारिश ना होने के कारण अपनी परंपरा के अनुसार मेढ़क-मेढ़की की शादी कारवाई। बच्चों ने अपने कंधों मे मूसर को रखा, मूसर वो होता है जिससे धान कुटी जाती है। इसके बाद मूसर के बीचों-बीच मेढ़क औऱ मेढकी को धागे से बांधा। परंपरा के अनुसार इस अनूठे विवाह की शुरुवात शिव मंदिर से होती हैं औऱ विवाह होने के बाद इसी मंदिर मे समाप्ति भी होती है। इस विवाह मे बच्चे बुजर्ग सभी शामिल होते हैं। अर्धनग्न अवस्था मे बच्चे होते हैं जो की मूसर को कंधों मे लेकर घर-घर जाते हैं। घर के सदस्यों के द्वारा इन बच्चों को नहला दिया जाता हैं। ग्रामीण घरों मे पहुंचकर जोर से बोलते हैं, "नंदकरानी पानी दो, धान कोदो उगन द।" ग्रामीणों का कहना हैं वे इस परंपरा को वर्षों से निभाते आ रहे हैं और ऐसा करने से इन्द्र देवता खुश होते हैं औऱ फिर बारिश होती है। ये भी पढ़ेंः
मध्यप्रदेश के मंडला में एक अनोखी शादी हुई, जहां मेंढक दूल्हा बना और मेंढकी दुल्हनिया बनी। दरअसल, ये शादी बारिश के लिए किया गया एक अनूठा टोटका है। जिले में बारिश न होने से हाहाकार मचा हुआ है। एक तरफ गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ किसानों के खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है। परेशान किसान अब बारिश कराने के लिए तरह-तरह के टोटके कर इंद्र देवता को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि मेढ़क-मेढ़की की शादी कराने से बारिश होती है और यह एक पुरानी परंपरा है। बारिश नहीं होने से लोग बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। गर्मी एवं धान की फसल बर्बाद होने से त्रस्त किसान अब बारिश कराने के लिए तरह-तरह के टोटके कर इंद्र देवता को मनाने का जतन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये एक वर्षों पुरानी परंपरा है और मेढ़क मेढ़की की शादी कराने से इन्द्र देव खुश होते हैं और बारिश होती है। मंडला से बारह किलोग्राममीटर दूर लिमरुआ गाँव के ग्रामीणों ने बारिश ना होने के कारण अपनी परंपरा के अनुसार मेढ़क-मेढ़की की शादी कारवाई। बच्चों ने अपने कंधों मे मूसर को रखा, मूसर वो होता है जिससे धान कुटी जाती है। इसके बाद मूसर के बीचों-बीच मेढ़क औऱ मेढकी को धागे से बांधा। परंपरा के अनुसार इस अनूठे विवाह की शुरुवात शिव मंदिर से होती हैं औऱ विवाह होने के बाद इसी मंदिर मे समाप्ति भी होती है। इस विवाह मे बच्चे बुजर्ग सभी शामिल होते हैं। अर्धनग्न अवस्था मे बच्चे होते हैं जो की मूसर को कंधों मे लेकर घर-घर जाते हैं। घर के सदस्यों के द्वारा इन बच्चों को नहला दिया जाता हैं। ग्रामीण घरों मे पहुंचकर जोर से बोलते हैं, "नंदकरानी पानी दो, धान कोदो उगन द।" ग्रामीणों का कहना हैं वे इस परंपरा को वर्षों से निभाते आ रहे हैं और ऐसा करने से इन्द्र देवता खुश होते हैं औऱ फिर बारिश होती है। ये भी पढ़ेंः
देश में कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में बड़ी गिरावट देखी गई है लेकिन कई जगहों पर कोरोना का संक्रमण पिक पर है. जहां एक ओर राजधानी दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा था. वहां अब संक्रमण तेजी से घरते हुए दिख रहा है. राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में भी संक्रमण में काफी कमी हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, ओढ़िशा, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में नए मामलों के अलावा केस पॉजिटिविटी में भी कमी देखने को मिल रही है. राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले 24 घंटे में 5 हजार से भी कम मामले आए हैं. दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 4,291 नए मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि 34 लोगों की कोरोना से मौत हुई है. वहीं, 9,397 लोग कोरोना से ठीक हुए हैं. राजधानी में अब कुल 33,175 सक्रिय कोरोना के मामले हैं और पॉजिटिविटी रेट 9. 56 प्रतिशत पहुंच गया है. वहीं, पश्चिम बंगाल में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3,608 नए मामले दर्ज किए गए हैं. यहां 36 लोगों की मौत हुई है. जबकि 15,216 कोरोना मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां कोरोना के कुल संक्रिय मामलों की संख्या 55,725 हो गई है. यहां संक्रमण दर 9. 02 प्रतिशत पहुंच गया है. महाराष्ट्र में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े थे और रोजोना 45 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे थे लेकिन अब मामलों में कमी दर्ज की गई है. यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के 25,425 नए मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि 36,708 कोरोना मरीज ठीक हुए हैं. यहां 42 लोगों की एक दिन में मौत हुई है. यहां कोरोना के कुल सक्रिय मामले 2,87,397 हैं. हालांकि, केरल में कोरोना के मामलों में अभी भी काफी तेजी देखी जा रही है. यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के 51,739 मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि यहां 42,653 कोरोना मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां 11 कोरोना मरीजों की मौत हुई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में केस और पॉजिटिविटी रेट बढ़ रहे है.
देश में कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में बड़ी गिरावट देखी गई है लेकिन कई जगहों पर कोरोना का संक्रमण पिक पर है. जहां एक ओर राजधानी दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा था. वहां अब संक्रमण तेजी से घरते हुए दिख रहा है. राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में भी संक्रमण में काफी कमी हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, ओढ़िशा, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में नए मामलों के अलावा केस पॉजिटिविटी में भी कमी देखने को मिल रही है. राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले चौबीस घंटाटे में पाँच हजार से भी कम मामले आए हैं. दिल्ली में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के चार,दो सौ इक्यानवे नए मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि चौंतीस लोगों की कोरोना से मौत हुई है. वहीं, नौ,तीन सौ सत्तानवे लोग कोरोना से ठीक हुए हैं. राजधानी में अब कुल तैंतीस,एक सौ पचहत्तर सक्रिय कोरोना के मामले हैं और पॉजिटिविटी रेट नौ. छप्पन प्रतिशत पहुंच गया है. वहीं, पश्चिम बंगाल में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के तीन,छः सौ आठ नए मामले दर्ज किए गए हैं. यहां छत्तीस लोगों की मौत हुई है. जबकि पंद्रह,दो सौ सोलह कोरोना मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां कोरोना के कुल संक्रिय मामलों की संख्या पचपन,सात सौ पच्चीस हो गई है. यहां संक्रमण दर नौ. दो प्रतिशत पहुंच गया है. महाराष्ट्र में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े थे और रोजोना पैंतालीस हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे थे लेकिन अब मामलों में कमी दर्ज की गई है. यहां पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के पच्चीस,चार सौ पच्चीस नए मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि छत्तीस,सात सौ आठ कोरोना मरीज ठीक हुए हैं. यहां बयालीस लोगों की एक दिन में मौत हुई है. यहां कोरोना के कुल सक्रिय मामले दो,सत्तासी,तीन सौ सत्तानवे हैं. हालांकि, केरल में कोरोना के मामलों में अभी भी काफी तेजी देखी जा रही है. यहां पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के इक्यावन,सात सौ उनतालीस मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि यहां बयालीस,छः सौ तिरेपन कोरोना मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां ग्यारह कोरोना मरीजों की मौत हुई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में केस और पॉजिटिविटी रेट बढ़ रहे है.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स होटल में रोटी बनाते समय आटे पर थूक रहा है. जिसके बाद अब पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है (Social Media Video Viral), जिसमें एक व्यक्ति एक होटल में रोटी बनाते समय आटे पर थूक रहा है (Spitting on Flour). वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा था. जिसके बाद शख्स की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी. अब मामले में पुलिस ने गाजियाबाद (Ghaziabad) से आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है. समाचार एजेंसी एएनआई को लोनी के सीओ (Loni CO) रजनीश उपाध्याय (Rajneesh Upadhiyai) ने बताया कि यह मामला सामने आने के बाद हमने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी. मामले का संज्ञान लेते हुए हमें गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित एक होटल का वह वीडियो मिला. सीओ ने बताया कि हमने आरोपी व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. पूछताछ के बाद अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले भी गाजियाबाद से एक ऐसा ही वीडियो सामने आया था, जिसमें एक शख्स थूक लगाकर रोटी और नान बना रहा था. वायरल वीडियो में शख्स तंदूरी रोटी बनाता दिख रहा था. रोटी बनाने के दौरान वो आटे से बनी हुई कच्ची रोटी पर थूकता है और फिर उसे भट्टी में पकने के लिए डाल देता है. रेस्टोरेंट में और भी कई लोग खड़े नजर आ रहे हैं. बता दें कि इसी साल फरवरी में उत्तर प्रदेश के मेरठ से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था. जहां एक शादी समारोह में रोटी बनाते समय आटे पर थूकते हुए कैमरे में कैद होने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था (Meerut Flour Spitting Case). आरोपी की पहचान नौशाद के रूप में हुई थी. तब कोरोना की लहर चल रही थी ऐसे में हिंदू जागरण मंच मेरठ के प्रमुख सचिन सिरोही की पुलिस शिकायत में नौशाद पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया गया था.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स होटल में रोटी बनाते समय आटे पर थूक रहा है. जिसके बाद अब पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है , जिसमें एक व्यक्ति एक होटल में रोटी बनाते समय आटे पर थूक रहा है . वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा था. जिसके बाद शख्स की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी. अब मामले में पुलिस ने गाजियाबाद से आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है. समाचार एजेंसी एएनआई को लोनी के सीओ रजनीश उपाध्याय ने बताया कि यह मामला सामने आने के बाद हमने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी. मामले का संज्ञान लेते हुए हमें गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित एक होटल का वह वीडियो मिला. सीओ ने बताया कि हमने आरोपी व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. पूछताछ के बाद अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले भी गाजियाबाद से एक ऐसा ही वीडियो सामने आया था, जिसमें एक शख्स थूक लगाकर रोटी और नान बना रहा था. वायरल वीडियो में शख्स तंदूरी रोटी बनाता दिख रहा था. रोटी बनाने के दौरान वो आटे से बनी हुई कच्ची रोटी पर थूकता है और फिर उसे भट्टी में पकने के लिए डाल देता है. रेस्टोरेंट में और भी कई लोग खड़े नजर आ रहे हैं. बता दें कि इसी साल फरवरी में उत्तर प्रदेश के मेरठ से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था. जहां एक शादी समारोह में रोटी बनाते समय आटे पर थूकते हुए कैमरे में कैद होने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था . आरोपी की पहचान नौशाद के रूप में हुई थी. तब कोरोना की लहर चल रही थी ऐसे में हिंदू जागरण मंच मेरठ के प्रमुख सचिन सिरोही की पुलिस शिकायत में नौशाद पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया गया था.
क्या बेहतर पशु चिकित्सा क्लिनिक (टॉम्स्क)? कहाँ पशुओं के उपचार के लिए? पालतू जानवर अक्सर विशेष देखभाल और ध्यान की आवश्यकता है। और हर अच्छा मेजबान अपने पालतू जानवरों के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार है, केवल वह, पीड़ित नहीं था चोट नहीं है, याद आती नहीं है, और वह एक महान जीवन और मजेदार रहता था। यह ध्यान देने योग्य है कि टॉम्स्क साझा संस्थानों (अस्पतालों) के निवासियों के दो प्रकार में, एक मदद का सहारा कर सकते हैं और पूरी तरह से दौर मिलता है। हाल ही पशुओं के प्रति उनकी लापरवाही चक्कर और सबसे महत्वपूर्ण बात, वे अपने "undertreated" के लिए बहुत सारा पैसा ले। यह लेख क्लिनिक के प्रत्येक प्रकार की जांच करेंगे। "TomVetTsentr" यह पशु चिकित्सा क्लिनिक (टॉम्स्क) एक व्यावसायिक संघ नहीं है। क्या इस संस्था बनाई है? पशु चिकित्सा सेवा को पूरा करने के - प्रशासन राज्य उनके तत्काल दायित्व पूरा करने में मदद करने के लिए बड़ी उम्मीदें व्यक्त करता है। "समाज की भलाई के लिए TomVetTsentr 'काम करता हैः घटनाओं की एक किस्म बनाने के लिए,,, बुरा उत्पादों लड़ने में मदद करता सार्वजनिक समन्वय का आयोजन करता है, ताकि लोगों को पशुओं के रोगों और उनके रोकथाम के प्रति अधिक जागरूक। यह पशु चिकित्सा क्लिनिक (टॉम्स्क) कई योग्य डॉक्टरों के लिए काम करने के लिए एक पसंदीदा जगह बन गया है। नेटवर्क, करार दिया "TomVetTsentr" केवल उच्च गुणवत्ता और आयातित दवाओं के साथ काम करता है। उपचार, ज़ाहिर है, थोड़ा और अधिक महंगा खर्च होंगे, लेकिन गारंटी सब हो जाता है कि अच्छी तरह से करने के लिए एक पालतू जानवर बहुत अधिक है, और यह वास्तव में इसके लायक है। समय की न्यूनतम राशि के लिए कंपनी टॉम्स्क निवासियों के एक नेता बनने और उसके गंभीर इरादा साबित करने के लिए सफल रही है। यह पशु चिकित्सा क्लिनिक (टॉम्स्क) 2006 में खोला गया था। वह शहर भर में और उपभोक्ताओं के बीच मांग में जाना जाता है। टीम बस ठीक काम कर रहा है। डॉक्टरों और नर्सों लगातार उनकी योग्यता के स्तर को बढ़ाने के कौशल में सुधार। क्लिनिक अच्छे से अधिक की समीक्षा। खराब प्रदर्शन के बारे में शिकायतें बहुत छोटा है। कई लोगों का कहना है कि अगर पशु चिड़ियाघर क्लिनिक में मदद नहीं की, यह संभावना नहीं है कि अपने पालतू बिल्कुल मदद कर सकता है। लोग सराहना करते हैं और इस संस्था संजोना। दुर्भाग्य से, इस तरह के एक प्रतिष्ठा टॉम्स्क में कई पशु चिकित्सा क्लीनिक का दावा नहीं कर सकते। उनमें से समीक्षा, कमजोर कर रहे हैं वहाँ नकारात्मक टिप्पणी की एक बहुत कुछ है। बेशक, यह उनके गरीब क्वालीफाइंग स्तर का संकेत नहीं है, लेकिन चिड़ियाघर क्लिनिक वास्तव में उच्च गुणवत्ता और शक्तिशाली काम किया ही नहीं। "ओह कैसे यह दर्द होता है" दुर्भाग्य से, यह टॉम्स्क के शहर के पशु चिकित्सा क्लीनिक का सबसे बुरा में से एक है। आप इसे की समीक्षा को देखें, तो आप जल्दी से इस की पुष्टि कर सकते हैं। संचालन गलत तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, दवाओं, रीडिंग के अनुसार निर्दिष्ट नहीं किए जाते इसके अलावा, हाथ पर विश्लेषण करती है देना नहीं है। पशु चिकित्सा क्लिनिक "ओह यह कैसे दर्द होता है" (टॉम्स्क), उसका सबसे अच्छा पक्ष को दिखाने में नाकाम रहे। और सबसे महत्वपूर्ण बात - डॉक्टरों शायद ही सही निदान डाल सकता है। बेशक, कुछ ऐसे मामले हैं जब अस्पताल पशु मदद की है। लेकिन उन काफी छोटा है, इसलिए यह विचार करने लायक है, और अगर ले अपने पालतू जानवरों के लिए यहाँ की जरूरत है। हम डॉक्टरों ने यहां काम करते हैं, कुछ आश्चर्यजनक रूप से अनुकूल के बारे में बात है, लेकिन कर्मचारियों के सबसे खराब जानवरों को संदर्भित करता है। क्या आश्चर्य की बात है कि पशु चिकित्सा क्लिनिक (टॉम्स्क) सेवा के लिए बहुत सारा पैसा लेता है।
क्या बेहतर पशु चिकित्सा क्लिनिक ? कहाँ पशुओं के उपचार के लिए? पालतू जानवर अक्सर विशेष देखभाल और ध्यान की आवश्यकता है। और हर अच्छा मेजबान अपने पालतू जानवरों के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार है, केवल वह, पीड़ित नहीं था चोट नहीं है, याद आती नहीं है, और वह एक महान जीवन और मजेदार रहता था। यह ध्यान देने योग्य है कि टॉम्स्क साझा संस्थानों के निवासियों के दो प्रकार में, एक मदद का सहारा कर सकते हैं और पूरी तरह से दौर मिलता है। हाल ही पशुओं के प्रति उनकी लापरवाही चक्कर और सबसे महत्वपूर्ण बात, वे अपने "undertreated" के लिए बहुत सारा पैसा ले। यह लेख क्लिनिक के प्रत्येक प्रकार की जांच करेंगे। "TomVetTsentr" यह पशु चिकित्सा क्लिनिक एक व्यावसायिक संघ नहीं है। क्या इस संस्था बनाई है? पशु चिकित्सा सेवा को पूरा करने के - प्रशासन राज्य उनके तत्काल दायित्व पूरा करने में मदद करने के लिए बड़ी उम्मीदें व्यक्त करता है। "समाज की भलाई के लिए TomVetTsentr 'काम करता हैः घटनाओं की एक किस्म बनाने के लिए,,, बुरा उत्पादों लड़ने में मदद करता सार्वजनिक समन्वय का आयोजन करता है, ताकि लोगों को पशुओं के रोगों और उनके रोकथाम के प्रति अधिक जागरूक। यह पशु चिकित्सा क्लिनिक कई योग्य डॉक्टरों के लिए काम करने के लिए एक पसंदीदा जगह बन गया है। नेटवर्क, करार दिया "TomVetTsentr" केवल उच्च गुणवत्ता और आयातित दवाओं के साथ काम करता है। उपचार, ज़ाहिर है, थोड़ा और अधिक महंगा खर्च होंगे, लेकिन गारंटी सब हो जाता है कि अच्छी तरह से करने के लिए एक पालतू जानवर बहुत अधिक है, और यह वास्तव में इसके लायक है। समय की न्यूनतम राशि के लिए कंपनी टॉम्स्क निवासियों के एक नेता बनने और उसके गंभीर इरादा साबित करने के लिए सफल रही है। यह पशु चिकित्सा क्लिनिक दो हज़ार छः में खोला गया था। वह शहर भर में और उपभोक्ताओं के बीच मांग में जाना जाता है। टीम बस ठीक काम कर रहा है। डॉक्टरों और नर्सों लगातार उनकी योग्यता के स्तर को बढ़ाने के कौशल में सुधार। क्लिनिक अच्छे से अधिक की समीक्षा। खराब प्रदर्शन के बारे में शिकायतें बहुत छोटा है। कई लोगों का कहना है कि अगर पशु चिड़ियाघर क्लिनिक में मदद नहीं की, यह संभावना नहीं है कि अपने पालतू बिल्कुल मदद कर सकता है। लोग सराहना करते हैं और इस संस्था संजोना। दुर्भाग्य से, इस तरह के एक प्रतिष्ठा टॉम्स्क में कई पशु चिकित्सा क्लीनिक का दावा नहीं कर सकते। उनमें से समीक्षा, कमजोर कर रहे हैं वहाँ नकारात्मक टिप्पणी की एक बहुत कुछ है। बेशक, यह उनके गरीब क्वालीफाइंग स्तर का संकेत नहीं है, लेकिन चिड़ियाघर क्लिनिक वास्तव में उच्च गुणवत्ता और शक्तिशाली काम किया ही नहीं। "ओह कैसे यह दर्द होता है" दुर्भाग्य से, यह टॉम्स्क के शहर के पशु चिकित्सा क्लीनिक का सबसे बुरा में से एक है। आप इसे की समीक्षा को देखें, तो आप जल्दी से इस की पुष्टि कर सकते हैं। संचालन गलत तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, दवाओं, रीडिंग के अनुसार निर्दिष्ट नहीं किए जाते इसके अलावा, हाथ पर विश्लेषण करती है देना नहीं है। पशु चिकित्सा क्लिनिक "ओह यह कैसे दर्द होता है" , उसका सबसे अच्छा पक्ष को दिखाने में नाकाम रहे। और सबसे महत्वपूर्ण बात - डॉक्टरों शायद ही सही निदान डाल सकता है। बेशक, कुछ ऐसे मामले हैं जब अस्पताल पशु मदद की है। लेकिन उन काफी छोटा है, इसलिए यह विचार करने लायक है, और अगर ले अपने पालतू जानवरों के लिए यहाँ की जरूरत है। हम डॉक्टरों ने यहां काम करते हैं, कुछ आश्चर्यजनक रूप से अनुकूल के बारे में बात है, लेकिन कर्मचारियों के सबसे खराब जानवरों को संदर्भित करता है। क्या आश्चर्य की बात है कि पशु चिकित्सा क्लिनिक सेवा के लिए बहुत सारा पैसा लेता है।
IPL 2022 के 15वें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स ने दिल्ली कैपिटल्स (LSG vs DC) को मुंबई में 6 विकेट से हराया और लगातार तीसरी जीत दर्ज की। दिल्ली कैपिटल्स ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 149/3 का स्कोर बनाया, जिसके जवाब में लखनऊ सुपरजायंट्स ने आखिरी ओवर में चार विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। क्विंटन डी कॉक ने 80 रनों की शानदार पारी खेली। लखनऊ के कप्तान केएल राहुल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और टीम में मनीष पांडे की जगह कृष्णप्पा गौतम को शामिल किया गया। दिल्ली कैपिटल्स की टीम में भी तीन बदलाव हुए और टिम साइफर्ट, खलील अहमद एवं मंदीप सिंह की जगह डेविड वॉर्नर, एनरिक नॉर्टजे और सरफ़राज़ खान को शामिल किया। दिल्ली कैपिटल्स को पृथ्वी शॉ ने तेज़ शुरुआत दिलाई और पावरप्ले के 6 ओवर के बाद स्कोर 52/0 था। पृथ्वी ने सिर्फ 30 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 34 गेंदों में 61 रनों की धुआंधार पारी खेलकर आठवें ओवर में 67 के स्कोर पर आउट हुए। नौवें ओवर में 69 के स्कोर पर डेविड वॉर्नर भी 12 गेंदों में सिर्फ 4 रन बनाकर आउट हुए। 11वें ओवर में 74 के स्कोर पर रोवमन पॉवेल भी 10 गेंदों में सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हुए। ऋषभ पंत ने यहाँ से सरफ़राज़ खान के साथ टीम को संभाला और 16वें ओवर में स्कोर 100 के पार पहुंचा। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 75 रनों की अविजित साझेदारी निभाई और इसी वजह से दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपरजायंट्स के सामने 150 रनों का लक्ष्य रखा। ऋषभ पंत ने 36 गेंदों में 39 और सरफ़राज़ खान ने 28 गेंदों में 36 रन बनाये। लखनऊ की तरफ से रवि बिश्नोई ने दो और कृष्णप्पा गौतम ने एक विकेट लिया। लक्ष्य के जवाब में क्विंटन डी कॉक ने केएल राहुल (24 गेंद 24) के साथ पहले विकेट के लिए 73 रन जोड़े और पावरप्ले के 6 ओवर के बाद लखनऊ सुपरजायंट्स का स्कोर 48/0 था। 10वें ओवर में केएल राहुल एक धीमी पारी खेलकर कुलदीप यादव की गेंद पर आउट हुए और उसके बाद 13वें ओवर में 86 के स्कोर पर एविन लुईस (13 गेंद 5) भी धीमी पारी खेलकर ललित यादव की गेंद पर आउट हुए। हालाँकि क्विंटन डी कॉक ने 36 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 14वें ओवर में टीम को 100 के पार पहुंचाया। डी कॉक ने 52 गेंदों में 9 चौके और 2 छक्कों की मदद से 80 रन बनाये और 16वें ओवर में 122 के स्कोर पर आउट हुए। यहाँ से क्रुणाल पांड्या (14 गेंद 19*) ने दीपक हूडा (13 गेंद 11) के साथ मिलकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। आखिरी ओवर में दीपक हूडा आउट हुए, लेकिन आयुष बदोनी (10*) ने चौका और छक्का लगाकर दो गेंद शेष रहते टीम को जीत दिला दी। दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से कुलदीप यादव ने दो और ललित यादव एवं शार्दुल ठाकुर ने एक-एक विकेट लिया।
IPL दो हज़ार बाईस के पंद्रहवें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स ने दिल्ली कैपिटल्स को मुंबई में छः विकेट से हराया और लगातार तीसरी जीत दर्ज की। दिल्ली कैपिटल्स ने पहले खेलते हुए बीस ओवर में एक सौ उनचास/तीन का स्कोर बनाया, जिसके जवाब में लखनऊ सुपरजायंट्स ने आखिरी ओवर में चार विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। क्विंटन डी कॉक ने अस्सी रनों की शानदार पारी खेली। लखनऊ के कप्तान केएल राहुल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और टीम में मनीष पांडे की जगह कृष्णप्पा गौतम को शामिल किया गया। दिल्ली कैपिटल्स की टीम में भी तीन बदलाव हुए और टिम साइफर्ट, खलील अहमद एवं मंदीप सिंह की जगह डेविड वॉर्नर, एनरिक नॉर्टजे और सरफ़राज़ खान को शामिल किया। दिल्ली कैपिटल्स को पृथ्वी शॉ ने तेज़ शुरुआत दिलाई और पावरप्ले के छः ओवर के बाद स्कोर बावन/शून्य था। पृथ्वी ने सिर्फ तीस गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और चौंतीस गेंदों में इकसठ रनों की धुआंधार पारी खेलकर आठवें ओवर में सरसठ के स्कोर पर आउट हुए। नौवें ओवर में उनहत्तर के स्कोर पर डेविड वॉर्नर भी बारह गेंदों में सिर्फ चार रन बनाकर आउट हुए। ग्यारहवें ओवर में चौहत्तर के स्कोर पर रोवमन पॉवेल भी दस गेंदों में सिर्फ तीन रन बनाकर आउट हुए। ऋषभ पंत ने यहाँ से सरफ़राज़ खान के साथ टीम को संभाला और सोलहवें ओवर में स्कोर एक सौ के पार पहुंचा। दोनों ने चौथे विकेट के लिए पचहत्तर रनों की अविजित साझेदारी निभाई और इसी वजह से दिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपरजायंट्स के सामने एक सौ पचास रनों का लक्ष्य रखा। ऋषभ पंत ने छत्तीस गेंदों में उनतालीस और सरफ़राज़ खान ने अट्ठाईस गेंदों में छत्तीस रन बनाये। लखनऊ की तरफ से रवि बिश्नोई ने दो और कृष्णप्पा गौतम ने एक विकेट लिया। लक्ष्य के जवाब में क्विंटन डी कॉक ने केएल राहुल के साथ पहले विकेट के लिए तिहत्तर रन जोड़े और पावरप्ले के छः ओवर के बाद लखनऊ सुपरजायंट्स का स्कोर अड़तालीस/शून्य था। दसवें ओवर में केएल राहुल एक धीमी पारी खेलकर कुलदीप यादव की गेंद पर आउट हुए और उसके बाद तेरहवें ओवर में छियासी के स्कोर पर एविन लुईस भी धीमी पारी खेलकर ललित यादव की गेंद पर आउट हुए। हालाँकि क्विंटन डी कॉक ने छत्तीस गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और चौदहवें ओवर में टीम को एक सौ के पार पहुंचाया। डी कॉक ने बावन गेंदों में नौ चौके और दो छक्कों की मदद से अस्सी रन बनाये और सोलहवें ओवर में एक सौ बाईस के स्कोर पर आउट हुए। यहाँ से क्रुणाल पांड्या ने दीपक हूडा के साथ मिलकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। आखिरी ओवर में दीपक हूडा आउट हुए, लेकिन आयुष बदोनी ने चौका और छक्का लगाकर दो गेंद शेष रहते टीम को जीत दिला दी। दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से कुलदीप यादव ने दो और ललित यादव एवं शार्दुल ठाकुर ने एक-एक विकेट लिया।
करुणामूलक संघ के प्रदेशअध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि आश्रित लंबे अरसे से करुणामूलक आधार पर भर्तियां करने की मांग कर रहे हैं और इस दौरान विधायकों, मंत्रीयों और मुख्यमंत्री से मिलकर भी काफी बार बात को रखा गया है। लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जिसके चलते करुणा मुल्क संघ 30 जुलाई से क्रमिक अनशन पर बैठा है। आज क्रमिक अनशन का 13 वां दिन शुरू हो गया। प्रदेश में करुणामूलक आधार पर 4500 आश्रितों को नौकरियां नहीं मिली हैं और विभागों, बोर्डों, निगमों में पद खाली चल रहे हैं। आश्रितों ने मांग की है कि करुणामूलक आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जायें। बता दें कि आश्रितों को 15 वर्ष से भी अधिक का समय आवेदन किए हुए हो गया है। लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है। सरकार आश्रितों को नौकरी देकर जल्द राहत देने के लिए काम करें। उधर करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामलों पर अभी सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। 1) समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नोकरियों के केसों को जो 7/03/2019 की पॉलिसी मे आ रहे हैं उनको One Time Settlement के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जाएं। 3) योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणीयो में नौकरी दी जाऐ । 6) जिनके कोर्ट केस वहाल हो गए हैं उन्हे भी नियुक्तियां दी जाए।
करुणामूलक संघ के प्रदेशअध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि आश्रित लंबे अरसे से करुणामूलक आधार पर भर्तियां करने की मांग कर रहे हैं और इस दौरान विधायकों, मंत्रीयों और मुख्यमंत्री से मिलकर भी काफी बार बात को रखा गया है। लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जिसके चलते करुणा मुल्क संघ तीस जुलाई से क्रमिक अनशन पर बैठा है। आज क्रमिक अनशन का तेरह वां दिन शुरू हो गया। प्रदेश में करुणामूलक आधार पर चार हज़ार पाँच सौ आश्रितों को नौकरियां नहीं मिली हैं और विभागों, बोर्डों, निगमों में पद खाली चल रहे हैं। आश्रितों ने मांग की है कि करुणामूलक आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जायें। बता दें कि आश्रितों को पंद्रह वर्ष से भी अधिक का समय आवेदन किए हुए हो गया है। लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है। सरकार आश्रितों को नौकरी देकर जल्द राहत देने के लिए काम करें। उधर करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामलों पर अभी सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। एक) समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नोकरियों के केसों को जो सात मार्च दो हज़ार उन्नीस की पॉलिसी मे आ रहे हैं उनको One Time Settlement के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियां दी जाएं। तीन) योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणीयो में नौकरी दी जाऐ । छः) जिनके कोर्ट केस वहाल हो गए हैं उन्हे भी नियुक्तियां दी जाए।
Sonipat News: प्रदेश की सरकार लगातार किसानों को जहर मुक्त खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया गया है. इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों को छोड़कर जहर मुक्त खेती करना है. Sonipat News: आधुनिकता के इस युग में जहां बेशुमार रासायनिक खाद खेतों में डाले जा रही हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे में नेचुरल और जहर मुक्त खेती करने वाले किसान विजय सरोहा मिसाल बने हुए हैं और आसपास के क्षेत्र में सीजन की सब्जियां डिमांड पर बिक रही हैं. बाजार में बिकने वाले भाव पर ही अपनी सब्जियां दे रहे हैं, हालांकि लौकी और तोरी समेत कई प्रकार की फसल उगा रखी हैं, मौजूदा समय में जहां खेतों में बारिश और बाढ़ से काफी फसलें तबाह हुई है ऐसे में आधुनिक तकनीक से बांस बेल चढ़ाकर खेती से काफी मुनाफा कमा रहे हैं. प्रदेश की सरकार लगातार किसानों को जहर मुक्त खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया गया है. जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में इस प्रकार के किसानों को चिह्नित करके उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने को लेकर ट्रेनिंग करवाई जा रही है. इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों को छोड़कर जहर मुक्त खेती करना है. अब धीरे-धीरे किसान जहर मुक्त खेती की तरफ अग्रसर हो रहे हैं, जिसका जीता-जागता उदाहरण सोनीपत के गांव बैयापुर के रहने वाले विजय सरोहा है. विजय सरोहा ने 4 साल पहले जहर मुक्त और नेचुरल खेती के लिए अपने खेत में 2 एकड़ भूमि पर शुरुआत की थी. शुरुआती तौर पर कई साल बीत जाने के बाद भी उत्पादन ज्यादा नहीं हो पाया, लेकिन किसान विजय की मेहनत और लगन ने आज उसे जहर मुक्त खेती से अच्छा मुनाफा देना शुरू किया है. आज हर कोई अच्छी और जहर मुक्त खेती की सब्जियां खाना पसंद कर रहा है. बशर्ते लोग कोई भी कीमत देने के लिए तैयार हो जाते हैं. क्योंकि आधुनिकता के इस युग में लोग बीमारियों से ज्यादा घिर रहे हैं. इसका बड़ा कारण रासायनिक खादों से तैयार फसलें भी हैं और इसी वजह से लगातार मामले बढ़ते जा रहे हैं और वहीं लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहे, एक अच्छी सोच के साथ विजय सरोहा आधुनिक और जहर मुक्त खेती कर रहे हैं. एक तरफ जहां गांव में धान की फसल उगाते थे, जिसके कारण काफी पानी की खपत होती थी. ऐसे में प्रदेश सरकार की मुहिम मेरा पानी मेरी विरासत को सार्थक करते हुए धान की खेती छोड़कर आधुनिक और जहर मुक्त खेती की तरफ अग्रसर हुए हैं और ऐसे में किसान विजय सरोहा अपने खेतों में दिन रात मेहनत करते हैं और तब जाकर बिना रासायनिक खादों के नेचुरल खेती कर रहे हैं. हालांकि, नेचुरल खेती में मेन पावर की ज्यादा जरूरत होती है. क्योंकि खेतों में खरपतवार को हटाने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ता है. इसीलिए लोगों का भी विजय सरोहा की खेती के लिए आकर्षण बढ़ रहा है और विजय सरोहा को क्षेत्र से बाहर बाजार में जाकर अपनी सब्जियां नहीं बेचनी पड़ती है, बल्कि लोग उनके फार्म हाउस से ही लौकी और तोरी जैसी सब्जियां खरीद कर ले जाते हैं और इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य सुधार हो रहा है बल्कि विजय सरोहा समाज में एक नई क्रांति लेकर आ रहे हैं. इसी वजह से अन्य किसान भी नेचुरल फार्मिंग की तरफ धीरे-धीरे अग्रसर हो रही है. वही नेचुरल फार्मिंग के कारण किसान मित्र कीटों व अन्य जीव-जंतुओं की संख्या भी खेतों में देखी जा सकती है और इससे किसानों की खेती में फसल के नुकसान दायक है. अब खेत में किसान मित्र जीव जंतु आना शुरू कर गए हैं. (इनपुटः सुनिल कुमार)
Sonipat News: प्रदेश की सरकार लगातार किसानों को जहर मुक्त खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया गया है. इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों को छोड़कर जहर मुक्त खेती करना है. Sonipat News: आधुनिकता के इस युग में जहां बेशुमार रासायनिक खाद खेतों में डाले जा रही हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे में नेचुरल और जहर मुक्त खेती करने वाले किसान विजय सरोहा मिसाल बने हुए हैं और आसपास के क्षेत्र में सीजन की सब्जियां डिमांड पर बिक रही हैं. बाजार में बिकने वाले भाव पर ही अपनी सब्जियां दे रहे हैं, हालांकि लौकी और तोरी समेत कई प्रकार की फसल उगा रखी हैं, मौजूदा समय में जहां खेतों में बारिश और बाढ़ से काफी फसलें तबाह हुई है ऐसे में आधुनिक तकनीक से बांस बेल चढ़ाकर खेती से काफी मुनाफा कमा रहे हैं. प्रदेश की सरकार लगातार किसानों को जहर मुक्त खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया गया है. जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में इस प्रकार के किसानों को चिह्नित करके उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने को लेकर ट्रेनिंग करवाई जा रही है. इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों को छोड़कर जहर मुक्त खेती करना है. अब धीरे-धीरे किसान जहर मुक्त खेती की तरफ अग्रसर हो रहे हैं, जिसका जीता-जागता उदाहरण सोनीपत के गांव बैयापुर के रहने वाले विजय सरोहा है. विजय सरोहा ने चार साल पहले जहर मुक्त और नेचुरल खेती के लिए अपने खेत में दो एकड़ भूमि पर शुरुआत की थी. शुरुआती तौर पर कई साल बीत जाने के बाद भी उत्पादन ज्यादा नहीं हो पाया, लेकिन किसान विजय की मेहनत और लगन ने आज उसे जहर मुक्त खेती से अच्छा मुनाफा देना शुरू किया है. आज हर कोई अच्छी और जहर मुक्त खेती की सब्जियां खाना पसंद कर रहा है. बशर्ते लोग कोई भी कीमत देने के लिए तैयार हो जाते हैं. क्योंकि आधुनिकता के इस युग में लोग बीमारियों से ज्यादा घिर रहे हैं. इसका बड़ा कारण रासायनिक खादों से तैयार फसलें भी हैं और इसी वजह से लगातार मामले बढ़ते जा रहे हैं और वहीं लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहे, एक अच्छी सोच के साथ विजय सरोहा आधुनिक और जहर मुक्त खेती कर रहे हैं. एक तरफ जहां गांव में धान की फसल उगाते थे, जिसके कारण काफी पानी की खपत होती थी. ऐसे में प्रदेश सरकार की मुहिम मेरा पानी मेरी विरासत को सार्थक करते हुए धान की खेती छोड़कर आधुनिक और जहर मुक्त खेती की तरफ अग्रसर हुए हैं और ऐसे में किसान विजय सरोहा अपने खेतों में दिन रात मेहनत करते हैं और तब जाकर बिना रासायनिक खादों के नेचुरल खेती कर रहे हैं. हालांकि, नेचुरल खेती में मेन पावर की ज्यादा जरूरत होती है. क्योंकि खेतों में खरपतवार को हटाने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ता है. इसीलिए लोगों का भी विजय सरोहा की खेती के लिए आकर्षण बढ़ रहा है और विजय सरोहा को क्षेत्र से बाहर बाजार में जाकर अपनी सब्जियां नहीं बेचनी पड़ती है, बल्कि लोग उनके फार्म हाउस से ही लौकी और तोरी जैसी सब्जियां खरीद कर ले जाते हैं और इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य सुधार हो रहा है बल्कि विजय सरोहा समाज में एक नई क्रांति लेकर आ रहे हैं. इसी वजह से अन्य किसान भी नेचुरल फार्मिंग की तरफ धीरे-धीरे अग्रसर हो रही है. वही नेचुरल फार्मिंग के कारण किसान मित्र कीटों व अन्य जीव-जंतुओं की संख्या भी खेतों में देखी जा सकती है और इससे किसानों की खेती में फसल के नुकसान दायक है. अब खेत में किसान मित्र जीव जंतु आना शुरू कर गए हैं.
मिथिला हिन्दी न्यूज :- बिहार के वैशाली से बड़ी खबर आ रही है जहां एक मां ने अपनी बेटी पर बड़ा आरोप लगाया है। शादीशुदा बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहनों को पति के साथ मिलकर गायब कर दिया है। यही नहीं मां ने अपनी बड़ी बेटी, उसके पति पर यह आरोप लगाया है कि दोनों मिलकर मेरी छोटी बच्चियों से गंदा काम करवाना चाहते हैं। खबर के मुताबिक राजापाकर के बरांटी ओपी क्षेत्र के बरांटी गांव निवासी बैद्यनाथ चौधरी की पत्नी रीता देवी ने ओपी में अपनी पुत्री के गायब कर दिए जाने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्राथमिकी में कहा गया है कि रात्रि को खा-पीकर मैं एवं मेरी पुत्री अपने-अपने कमरे में सोने चली गई थी। जब रात्रि के 11 बजे वह अपनी दोनों पुत्री को देखने गई तो देखा कि उनकी शादीशुदा बेटी सुनीता देवी, पति पिंटू राय एवं उनकी दो छोटी बेटी अमृता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी बिछावन पर से गायब थी। काफी खोजबीन की लेकिन उनका पता नहीं चला। मां का कहना है कि मुझे पता चला कि मेरी बड़ी पुत्री सुनीता देवी, पति पिंटू राय एवं पिंटू राय पिता रामचंद्र राय, ग्राम चंदवारा थाना करताहां एवं पांच-छह अज्ञात व्यक्तियों ने मेरी दोनों बेटियों को बहला-फुसलाकर गलत काम करने एवं बेच देने की नीयत से अपहरण कर घर से भगाकर ले गई है। इसके साथ ही मां ने अपनी बेटी पर दो लाख की फिरौती मांगने का भी आरोप लगाया है। रीता देवी का कहना है कि सुनीता देवी ने मेरे मोबाइल पर दो लाख रुपये की मांग भी की है और धमकी दी है कि पैसे नहीं देने पर दोनों बच्ची को बेच देंगे। रीता देवी ने आवेदन में जांच कर पुत्री की बरामदगी की गुहार लगाई है। दर्ज प्राथमिकी के आलोक में बरांटी ओपी की पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मिथिला हिन्दी न्यूज :- बिहार के वैशाली से बड़ी खबर आ रही है जहां एक मां ने अपनी बेटी पर बड़ा आरोप लगाया है। शादीशुदा बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहनों को पति के साथ मिलकर गायब कर दिया है। यही नहीं मां ने अपनी बड़ी बेटी, उसके पति पर यह आरोप लगाया है कि दोनों मिलकर मेरी छोटी बच्चियों से गंदा काम करवाना चाहते हैं। खबर के मुताबिक राजापाकर के बरांटी ओपी क्षेत्र के बरांटी गांव निवासी बैद्यनाथ चौधरी की पत्नी रीता देवी ने ओपी में अपनी पुत्री के गायब कर दिए जाने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्राथमिकी में कहा गया है कि रात्रि को खा-पीकर मैं एवं मेरी पुत्री अपने-अपने कमरे में सोने चली गई थी। जब रात्रि के ग्यारह बजे वह अपनी दोनों पुत्री को देखने गई तो देखा कि उनकी शादीशुदा बेटी सुनीता देवी, पति पिंटू राय एवं उनकी दो छोटी बेटी अमृता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी बिछावन पर से गायब थी। काफी खोजबीन की लेकिन उनका पता नहीं चला। मां का कहना है कि मुझे पता चला कि मेरी बड़ी पुत्री सुनीता देवी, पति पिंटू राय एवं पिंटू राय पिता रामचंद्र राय, ग्राम चंदवारा थाना करताहां एवं पांच-छह अज्ञात व्यक्तियों ने मेरी दोनों बेटियों को बहला-फुसलाकर गलत काम करने एवं बेच देने की नीयत से अपहरण कर घर से भगाकर ले गई है। इसके साथ ही मां ने अपनी बेटी पर दो लाख की फिरौती मांगने का भी आरोप लगाया है। रीता देवी का कहना है कि सुनीता देवी ने मेरे मोबाइल पर दो लाख रुपये की मांग भी की है और धमकी दी है कि पैसे नहीं देने पर दोनों बच्ची को बेच देंगे। रीता देवी ने आवेदन में जांच कर पुत्री की बरामदगी की गुहार लगाई है। दर्ज प्राथमिकी के आलोक में बरांटी ओपी की पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अग्निपथ योजना के खिलाफ यूपी में सुबह से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। यूपी के बलिया में विरोध के वीडियो में युवकों को रेलवे स्टेशन पर दुकानों और बेंचों को लाठियों से तोड़ते हुए देखा जा सकता है। बलिया में 'अग्निपथ' पर बवाल शुक्रवार सुबह से ही शुरू हो गया है। युवकों ने बलिया-वाराणसी मेमू व बलिया-शाहगंज ट्रेन में तोड़फोड़ की है। प्लेटफार्म की दुकानों व निजी बस को भी तोड़ा। पुलिस, पुलिस चौकी, मालगोदाम, सड़कों पर भी पथराव हो रहा है। वहीं पुलिस ने एक्शन में आकर सौ से अधिक युवक हिरासत में लिए हैं। इलाके में रुक-रुक कर बवाल अब भी जारी है। सुबह स्टेडियम में जुटे युवक अचानक स्टेशन की ओर बढ़े और जमकर बवाल काटा। वॉशिंटपिट में खड़ी एक ट्रेन में आग भी लगा दी गई। इसमें एक बोगी पूरी तरह जल गई और अन्य बोगियों को काटकर अलग किया गया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आज सुबह नई सैन्य भर्ती नीति, अग्निपथ के विरोध में भीड़ ने एक ट्रेन में तोड़फोड़ की। भीड़ ने रेलवे स्टेशन की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया, इससे पहले कि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। बलिया पुलिस प्रमुख ने कहा कि वे उनसे बात करने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने में सफल रहे। प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने पूर्वी यूपी जिले में रेलवे स्टेशन के बाहर सड़कों पर लाठी-डंडों के साथ पुलिस से बहस की। विरोध के वीडियो में युवकों को रेलवे स्टेशन पर दुकानों और बेंचों को लाठियों से तोड़ते हुए दिखाया गया है। बलिया की जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने कहा कि पुलिस भीड़ को बड़े पैमाने पर नुकसान से बचाने में कामयाब रही। हम लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। बलिया पुलिस प्रमुख राज करण नैयर ने कहा कि वे पुरुषों की पहचान करने के लिए विरोध के वीडियो की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम उन्हें ढूंढेंगे और कार्रवाई करेंगे। आज का विरोध बिहार के कई हिस्सों में सेना के उम्मीदवारों द्वारा रेल और सड़क यातायात को बाधित करने के एक दिन बाद आया है। विरोध हरियाणा और यूपी में भी फैल गया था। प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव और हिंसा के बाद हरियाणा के पलवल जिले में 24 घंटे के लिए फोन इंटरनेट और एसएमएस बंद कर दिया गया है। अग्निपथ में चार साल की अवधि के लिए अनुबंध पर जवानों की भर्ती का प्रस्ताव है, जिसके बाद अधिकांश के लिए ग्रेच्युटी और पेंशन लाभ के बिना अनिवार्य सेवानिवृत्ति हो जाएगी। नई योजना का उद्देश्य सरकार के भारी वेतन और पेंशन बिलों में कटौती करना और हथियार खरीदने के लिए धन मुक्त करना है। सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के बाद एकमुश्त छूट के रूप में अग्निपथ भर्ती के लिए आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 कर दी है। सरकार ने इस योजना का 10 सूत्रीय बचाव भी किया है और रंगरूटों को आश्वासन दिया है कि वे सेना में अपने चार साल पूरे करने के बाद खुद को मुश्किल में नहीं पाएंगे।
अग्निपथ योजना के खिलाफ यूपी में सुबह से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। यूपी के बलिया में विरोध के वीडियो में युवकों को रेलवे स्टेशन पर दुकानों और बेंचों को लाठियों से तोड़ते हुए देखा जा सकता है। बलिया में 'अग्निपथ' पर बवाल शुक्रवार सुबह से ही शुरू हो गया है। युवकों ने बलिया-वाराणसी मेमू व बलिया-शाहगंज ट्रेन में तोड़फोड़ की है। प्लेटफार्म की दुकानों व निजी बस को भी तोड़ा। पुलिस, पुलिस चौकी, मालगोदाम, सड़कों पर भी पथराव हो रहा है। वहीं पुलिस ने एक्शन में आकर सौ से अधिक युवक हिरासत में लिए हैं। इलाके में रुक-रुक कर बवाल अब भी जारी है। सुबह स्टेडियम में जुटे युवक अचानक स्टेशन की ओर बढ़े और जमकर बवाल काटा। वॉशिंटपिट में खड़ी एक ट्रेन में आग भी लगा दी गई। इसमें एक बोगी पूरी तरह जल गई और अन्य बोगियों को काटकर अलग किया गया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आज सुबह नई सैन्य भर्ती नीति, अग्निपथ के विरोध में भीड़ ने एक ट्रेन में तोड़फोड़ की। भीड़ ने रेलवे स्टेशन की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया, इससे पहले कि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। बलिया पुलिस प्रमुख ने कहा कि वे उनसे बात करने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने में सफल रहे। प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने पूर्वी यूपी जिले में रेलवे स्टेशन के बाहर सड़कों पर लाठी-डंडों के साथ पुलिस से बहस की। विरोध के वीडियो में युवकों को रेलवे स्टेशन पर दुकानों और बेंचों को लाठियों से तोड़ते हुए दिखाया गया है। बलिया की जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने कहा कि पुलिस भीड़ को बड़े पैमाने पर नुकसान से बचाने में कामयाब रही। हम लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। बलिया पुलिस प्रमुख राज करण नैयर ने कहा कि वे पुरुषों की पहचान करने के लिए विरोध के वीडियो की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम उन्हें ढूंढेंगे और कार्रवाई करेंगे। आज का विरोध बिहार के कई हिस्सों में सेना के उम्मीदवारों द्वारा रेल और सड़क यातायात को बाधित करने के एक दिन बाद आया है। विरोध हरियाणा और यूपी में भी फैल गया था। प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव और हिंसा के बाद हरियाणा के पलवल जिले में चौबीस घंटाटे के लिए फोन इंटरनेट और एसएमएस बंद कर दिया गया है। अग्निपथ में चार साल की अवधि के लिए अनुबंध पर जवानों की भर्ती का प्रस्ताव है, जिसके बाद अधिकांश के लिए ग्रेच्युटी और पेंशन लाभ के बिना अनिवार्य सेवानिवृत्ति हो जाएगी। नई योजना का उद्देश्य सरकार के भारी वेतन और पेंशन बिलों में कटौती करना और हथियार खरीदने के लिए धन मुक्त करना है। सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के बाद एकमुश्त छूट के रूप में अग्निपथ भर्ती के लिए आयु सीमा इक्कीस से बढ़ाकर तेईस कर दी है। सरकार ने इस योजना का दस सूत्रीय बचाव भी किया है और रंगरूटों को आश्वासन दिया है कि वे सेना में अपने चार साल पूरे करने के बाद खुद को मुश्किल में नहीं पाएंगे।
और राक्षसी घर आने पर रोने और पश्चाताप करने लगी। इस कथा में राक्षसी तामसिक प्रवृतियों की प्रतीक है और वह मायावी भी है। "रोटी" का गायब होना और उसकी जगह रोटियों का पेड़ उग आना- यह सब जादूई कार्य उस राक्षसी द्वारा ही किया जाता है। परंतु उसका कार्य समाज विरोधी एवं तामसिक है, अतः उसे उसकी सजा मिलती है। दूसरे के बच्चे का अहित सोचने पर उसकी अपनी लड़की का ही अहित हो जाता है। 3. राजकुमारी और मंत्री के लड़के की कथा - इस कहानी में राजकुमारी और मन्त्री के लड़के के प्रेम-परिणय की रोचक कथा है। दोनों के दाम्पत्य जीवन में राक्षस का प्रवेश होता है, जो राजकुमारी को छीन कर उसे अपना बनाना चाहता है। पर अन्त में उसका अपने छः भाइयों के साथ अन्त हो जाता है। राक्षसों की माता द्वारा किये गये छलपूर्ण कार्यों का अन्त हो जाता है और राजकुमारी अपने पति मंत्री के लड़के के साथ सुख से जीवन यापन करती है। इसमें भी राक्षस कुल की नयी पीढ़ी का नाश दिखलाया गया है। नयी पीढ़ी में कोई राक्षस अथवा राक्षसी प्रवृत्ति न जन्म ले और उसका विकास न हो, यह इस कथा में निहित है। इस कथानक के अनुसार एक मंत्री का पुत्र राजा की एक लड़की के प्रेमपाश में बद्ध होकर उसे लेकर घोड़े पर भाग निकला। राजकुमारी के पास एक ऐसी तलवार थी, जो एक ही वार में पत्थर को भी काट सकती थी। सात कोस जाने के बाद उन्हें एक राक्षसी मिली जिसके सात लड़के थे। सबसे छोटा "दमगुड़गुड़िया" अविवाहित था। उसी से राजकुमारी की शादी कर देने की योजना राक्षसी ने बनायी। जब राजकुमारी और मंत्रीपुत्र चले गये तो उसके सातों लड़कों ने उसका पीछा किया। राजकुमारी ने अपनी चतुराई से छः लड़कों को मार कर खत्म कर दिया। पर दमगुड़गुड़िया बच गया और उसने धोखे से मंत्री पुत्र को मारकर राजकुमारी को अपने अधिकार में कर लिया। परंतु थोड़े दिनों बाद ही राजकुमारी ने उसे मार दिया। उसने "मरांगबोंगा" की आराधना की और उसका पति ( मंत्रीपुत्र ) जीवित हो गया। "मरांगबोंगा" बूढ़ी औरत के वेश में आये थे। उन लोगों ने उनकी आराधना की। बाद में दोनों उस राक्षसप्रदेश में राजा-रानी की तरह रहने लगे और राज्य करने लगे। * 1 द अफेयर्स ऑफ द ट्राइब- श्री धीरेन्द्रनाथ मजुमदार, पृ. ३३८-३४२ इस कहानी से मिलती-जुलती कहानी "लोमन और राक्षस" मुण्डा जाति में लोक-कथा के रूप में प्रचलित है। इस कथा में भी "रोटी का पेड़" की जगह "रूपये का पेड़" वर्णित है जो एक राक्षस का मायावी कार्य है। इस कथा का पात्र "लोमन" अपने गुण से राक्षस को प्रभावित करता है और अन्त में उसे मार डालता है। (छ) हास्य (मुर्ख ) कथा - "हो" जनजाति के लोग भी हास्य-व्यंग्य प्रिय होते हैं। उनमें अपनी जाति के प्रति महत् भावना होती है और वे "हो" आदिवासी के अतिरिक्त अपने क्षेत्र के या ग्राम में बसने वाले अन्य सभी जातियों को अपने से निम्न कोटि का मानते हैं। "पान" या "तांती" "हो" समाज में "पिआयं" के नाम से जाना जाता है जो अपने को अधिक चतुर समझता है। परंतु "हो" लोग उन्हें मूर्ख समझते हैं। "गोप" या "गौड़" जाति के लोग मुख्यतः पशु-पालन या चरवाहा का कार्य करते हैं। उन्हें भी "हो" मन्दबुद्धि मानते हैं । "हो" लोक-कथाओं में या उनके धार्मिक कृत्यों में इन जातियों को "हो" समाज में अलग एवं दूर रखा जाता है। "सोहराई" के अवसर पर "गोवाबोंगा" या "गोटोबोंगा" की पूजा के समय, मवेशियों को सजाया जाता है, "गौड़" या "गोप" लोग भी उसमें सम्मिलित होते हैं। हास्य कथाओं में "पान" या "तांती" जाति की मूर्खता, कायरता एवं विपन्नता पर व्यंग्य एवं उपहास की कहानियाँ मिलती है। कुछ कथाओं में व्यक्ति विशेष की मूर्खता का भी उपहास किया गया है। कुछ कथाओं में पशुओं की मूर्खता को भी हास्य का विषय बनाया गया है। 1. पान द्वारा मच्छरों का शिकार - यह एक जाति कथा होते हुए भी हास्य एवं मूर्ख कथा की श्रेणी में आती है। इस कहानी में "पान" लोगों की मूर्खता पर व्यंग्य किया गया है। मच्छरों को मारने के लिये तीर-धनुष को व्यवहृत करने का निर्णय पान जाति के लोगों द्वारा लिया गया, जो एक मूर्खतापूर्ण निर्णय था। उनकी मूर्खता के कारण एक पान के शरीर पर बैठे मच्छर को तीर से मारने में वह पान मार * 1 मुण्डा लोक कथाएँ - श्री जगदीश त्रिगुणायत, पृ. २५५-२५७ * 2 मैन इन इण्डिया - वॉल्यूम १, संख्या २, जून १६२१- श्री एस. सी. राय, पृ. ४६-५० "पान" या "तांती" कभी भी तीरन्दाज नहीं हो सकता, यह "हो" समाज की मान्यता है। "हो" जनजाति के लोग बहुत ही सधे हुए तीर चलाने वाले होते हैं। उनका निशाना अचूक होता है। इस कहानी में पान द्वारा तीर का प्रयोग मच्छरों के लिये करना मूर्खता एवं कायरता दोनों का द्योतक है। 2. पान और गिरगिट - इस कथा में "पान" को अत्यन्त डरपोक एवं मूर्ख सिद्ध किया गया है। एक पान जब कपड़ा बेचने जा रहा था तो उसे रास्ते में एक गिरगिट मिला। गिरगिट अपने स्वभाव के अनुकूल अपना सिर हिला रहा था । "पान" उससे भयभीत हो गया। उसने उससे पूछा - "क्या तुम मुझे खाना चाहते हो" उसके सिर हिलाने पर पुनः पूछा- "तुम मेरा कपड़ा और मुझे भी निगल जाना चाहते हो" गिरगिट के इस प्रश्न पर भी सिर हिलाने पर वह कपड़ा छोड़कर भाग खड़ा हुआ। इस प्रकार गिरगिट जैसे छोटे जानवर से इतना अधिक भयभीत एवं आतंकित होना कायरता से अधिक मूर्खता का द्योतक है। "पान" का गिरगिट से डर जाना उसकी कायरता एवं मूर्खता का ही द्योतक है, जो "हो समाज में व्यंग्य-विनोद का साधन है। मुण्डा समाज में भी "पेड़ाएँ आट्टेटेंगा" नाम से "पान और गिरगिट" की कथा प्रचलित है। उक्त कथा में भी गिरगिट से भयभीत होकर पान का ( तांती का ) भागना एवं बाद में भय से मर जाना दर्शाया गया है। इसमें मूर्खता एवं कायरता की पराकाष्ठा (क्लाइमेक्स) उभर कर सामने आयी है। 3. पान और पियाज रोटी - इस कहानी में "पान की मूर्खता एवं विपन्नता" पर व्यंग्य किया गया है। एक पान अपनी ससुराल में प्याज-रोटी खाकर ही काफी प्रसन्न हुआ। वह खाना उसे इतना प्रिय लगा कि उसका नाम "पियाज-रोटी" रटता हुआ घर की ओर वापस चल दिया। पर रास्ते में जब वह भूल गया, तो पुनः उसने अपने सास से जाकर पूछा। दुबारा भूलने पर इस शब्द को वह एक पानी के गड्ढ़े में खोजने लगा और अपने साथ एक राहगीर को भी मूर्ख बनाया। जब राहगीर को पान के मुँह से प्याज की गंध आयी तो उसने पूछ दिया- "क्या तुमने प्याज-रोटी खायी है" मैन इन इण्डिया - वॉल्यूम १, संख्या २, जून १६२१ - श्री एस. सी. राय, पृ. ५० *2 मुण्डा लोक कथाएँ - श्री जगदीश त्रिगुणायत, पृ. ५०२-५०३
और राक्षसी घर आने पर रोने और पश्चाताप करने लगी। इस कथा में राक्षसी तामसिक प्रवृतियों की प्रतीक है और वह मायावी भी है। "रोटी" का गायब होना और उसकी जगह रोटियों का पेड़ उग आना- यह सब जादूई कार्य उस राक्षसी द्वारा ही किया जाता है। परंतु उसका कार्य समाज विरोधी एवं तामसिक है, अतः उसे उसकी सजा मिलती है। दूसरे के बच्चे का अहित सोचने पर उसकी अपनी लड़की का ही अहित हो जाता है। तीन. राजकुमारी और मंत्री के लड़के की कथा - इस कहानी में राजकुमारी और मन्त्री के लड़के के प्रेम-परिणय की रोचक कथा है। दोनों के दाम्पत्य जीवन में राक्षस का प्रवेश होता है, जो राजकुमारी को छीन कर उसे अपना बनाना चाहता है। पर अन्त में उसका अपने छः भाइयों के साथ अन्त हो जाता है। राक्षसों की माता द्वारा किये गये छलपूर्ण कार्यों का अन्त हो जाता है और राजकुमारी अपने पति मंत्री के लड़के के साथ सुख से जीवन यापन करती है। इसमें भी राक्षस कुल की नयी पीढ़ी का नाश दिखलाया गया है। नयी पीढ़ी में कोई राक्षस अथवा राक्षसी प्रवृत्ति न जन्म ले और उसका विकास न हो, यह इस कथा में निहित है। इस कथानक के अनुसार एक मंत्री का पुत्र राजा की एक लड़की के प्रेमपाश में बद्ध होकर उसे लेकर घोड़े पर भाग निकला। राजकुमारी के पास एक ऐसी तलवार थी, जो एक ही वार में पत्थर को भी काट सकती थी। सात कोस जाने के बाद उन्हें एक राक्षसी मिली जिसके सात लड़के थे। सबसे छोटा "दमगुड़गुड़िया" अविवाहित था। उसी से राजकुमारी की शादी कर देने की योजना राक्षसी ने बनायी। जब राजकुमारी और मंत्रीपुत्र चले गये तो उसके सातों लड़कों ने उसका पीछा किया। राजकुमारी ने अपनी चतुराई से छः लड़कों को मार कर खत्म कर दिया। पर दमगुड़गुड़िया बच गया और उसने धोखे से मंत्री पुत्र को मारकर राजकुमारी को अपने अधिकार में कर लिया। परंतु थोड़े दिनों बाद ही राजकुमारी ने उसे मार दिया। उसने "मरांगबोंगा" की आराधना की और उसका पति जीवित हो गया। "मरांगबोंगा" बूढ़ी औरत के वेश में आये थे। उन लोगों ने उनकी आराधना की। बाद में दोनों उस राक्षसप्रदेश में राजा-रानी की तरह रहने लगे और राज्य करने लगे। * एक द अफेयर्स ऑफ द ट्राइब- श्री धीरेन्द्रनाथ मजुमदार, पृ. तीन सौ अड़तीस-तीन सौ बयालीस इस कहानी से मिलती-जुलती कहानी "लोमन और राक्षस" मुण्डा जाति में लोक-कथा के रूप में प्रचलित है। इस कथा में भी "रोटी का पेड़" की जगह "रूपये का पेड़" वर्णित है जो एक राक्षस का मायावी कार्य है। इस कथा का पात्र "लोमन" अपने गुण से राक्षस को प्रभावित करता है और अन्त में उसे मार डालता है। हास्य कथा - "हो" जनजाति के लोग भी हास्य-व्यंग्य प्रिय होते हैं। उनमें अपनी जाति के प्रति महत् भावना होती है और वे "हो" आदिवासी के अतिरिक्त अपने क्षेत्र के या ग्राम में बसने वाले अन्य सभी जातियों को अपने से निम्न कोटि का मानते हैं। "पान" या "तांती" "हो" समाज में "पिआयं" के नाम से जाना जाता है जो अपने को अधिक चतुर समझता है। परंतु "हो" लोग उन्हें मूर्ख समझते हैं। "गोप" या "गौड़" जाति के लोग मुख्यतः पशु-पालन या चरवाहा का कार्य करते हैं। उन्हें भी "हो" मन्दबुद्धि मानते हैं । "हो" लोक-कथाओं में या उनके धार्मिक कृत्यों में इन जातियों को "हो" समाज में अलग एवं दूर रखा जाता है। "सोहराई" के अवसर पर "गोवाबोंगा" या "गोटोबोंगा" की पूजा के समय, मवेशियों को सजाया जाता है, "गौड़" या "गोप" लोग भी उसमें सम्मिलित होते हैं। हास्य कथाओं में "पान" या "तांती" जाति की मूर्खता, कायरता एवं विपन्नता पर व्यंग्य एवं उपहास की कहानियाँ मिलती है। कुछ कथाओं में व्यक्ति विशेष की मूर्खता का भी उपहास किया गया है। कुछ कथाओं में पशुओं की मूर्खता को भी हास्य का विषय बनाया गया है। एक. पान द्वारा मच्छरों का शिकार - यह एक जाति कथा होते हुए भी हास्य एवं मूर्ख कथा की श्रेणी में आती है। इस कहानी में "पान" लोगों की मूर्खता पर व्यंग्य किया गया है। मच्छरों को मारने के लिये तीर-धनुष को व्यवहृत करने का निर्णय पान जाति के लोगों द्वारा लिया गया, जो एक मूर्खतापूर्ण निर्णय था। उनकी मूर्खता के कारण एक पान के शरीर पर बैठे मच्छर को तीर से मारने में वह पान मार * एक मुण्डा लोक कथाएँ - श्री जगदीश त्रिगुणायत, पृ. दो सौ पचपन-दो सौ सत्तावन * दो मैन इन इण्डिया - वॉल्यूम एक, संख्या दो, जून एक हज़ार छः सौ इक्कीस- श्री एस. सी. राय, पृ. छियालीस-पचास "पान" या "तांती" कभी भी तीरन्दाज नहीं हो सकता, यह "हो" समाज की मान्यता है। "हो" जनजाति के लोग बहुत ही सधे हुए तीर चलाने वाले होते हैं। उनका निशाना अचूक होता है। इस कहानी में पान द्वारा तीर का प्रयोग मच्छरों के लिये करना मूर्खता एवं कायरता दोनों का द्योतक है। दो. पान और गिरगिट - इस कथा में "पान" को अत्यन्त डरपोक एवं मूर्ख सिद्ध किया गया है। एक पान जब कपड़ा बेचने जा रहा था तो उसे रास्ते में एक गिरगिट मिला। गिरगिट अपने स्वभाव के अनुकूल अपना सिर हिला रहा था । "पान" उससे भयभीत हो गया। उसने उससे पूछा - "क्या तुम मुझे खाना चाहते हो" उसके सिर हिलाने पर पुनः पूछा- "तुम मेरा कपड़ा और मुझे भी निगल जाना चाहते हो" गिरगिट के इस प्रश्न पर भी सिर हिलाने पर वह कपड़ा छोड़कर भाग खड़ा हुआ। इस प्रकार गिरगिट जैसे छोटे जानवर से इतना अधिक भयभीत एवं आतंकित होना कायरता से अधिक मूर्खता का द्योतक है। "पान" का गिरगिट से डर जाना उसकी कायरता एवं मूर्खता का ही द्योतक है, जो "हो समाज में व्यंग्य-विनोद का साधन है। मुण्डा समाज में भी "पेड़ाएँ आट्टेटेंगा" नाम से "पान और गिरगिट" की कथा प्रचलित है। उक्त कथा में भी गिरगिट से भयभीत होकर पान का भागना एवं बाद में भय से मर जाना दर्शाया गया है। इसमें मूर्खता एवं कायरता की पराकाष्ठा उभर कर सामने आयी है। तीन. पान और पियाज रोटी - इस कहानी में "पान की मूर्खता एवं विपन्नता" पर व्यंग्य किया गया है। एक पान अपनी ससुराल में प्याज-रोटी खाकर ही काफी प्रसन्न हुआ। वह खाना उसे इतना प्रिय लगा कि उसका नाम "पियाज-रोटी" रटता हुआ घर की ओर वापस चल दिया। पर रास्ते में जब वह भूल गया, तो पुनः उसने अपने सास से जाकर पूछा। दुबारा भूलने पर इस शब्द को वह एक पानी के गड्ढ़े में खोजने लगा और अपने साथ एक राहगीर को भी मूर्ख बनाया। जब राहगीर को पान के मुँह से प्याज की गंध आयी तो उसने पूछ दिया- "क्या तुमने प्याज-रोटी खायी है" मैन इन इण्डिया - वॉल्यूम एक, संख्या दो, जून एक हज़ार छः सौ इक्कीस - श्री एस. सी. राय, पृ. पचास *दो मुण्डा लोक कथाएँ - श्री जगदीश त्रिगुणायत, पृ. पाँच सौ दो-पाँच सौ तीन
हिमाचल प्रदेश के मनाली में लगातार हो रही बारिश से रोहतांग जाने वाली सड़क मार्ग पर राक्षी ढांक के पास पहाड़ी से चट्टानें गिरी है. चट्टानें गिरने से एनएच 505 ग्राम्फू-काजा मार्ग यातायात के लिए अवरूद्ध हो गया है. घटना में किसी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ. वहीं, लगातार हो रही बरसात की वजह से जगह-जगह भूस्खलन और सड़कें धंसने का सिलसिला जारी है. जिला प्रसाशन लाहौल स्पीति ने घरों से बाहर निकलने पर लोगों को एहतियात बरतने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी है. बता दें कि जिला कुल्लू में रूक-रूककर हो रही बारिश का क्रम जारी है. ऐसे में जिला प्रशासन ने लोगों को एहतियात के तौर पर नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है. कुल्लू जिले में लगातार बारिश बागवानी के लिए भी आफत बन गई है.
हिमाचल प्रदेश के मनाली में लगातार हो रही बारिश से रोहतांग जाने वाली सड़क मार्ग पर राक्षी ढांक के पास पहाड़ी से चट्टानें गिरी है. चट्टानें गिरने से एनएच पाँच सौ पाँच ग्राम्फू-काजा मार्ग यातायात के लिए अवरूद्ध हो गया है. घटना में किसी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ. वहीं, लगातार हो रही बरसात की वजह से जगह-जगह भूस्खलन और सड़कें धंसने का सिलसिला जारी है. जिला प्रसाशन लाहौल स्पीति ने घरों से बाहर निकलने पर लोगों को एहतियात बरतने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी है. बता दें कि जिला कुल्लू में रूक-रूककर हो रही बारिश का क्रम जारी है. ऐसे में जिला प्रशासन ने लोगों को एहतियात के तौर पर नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है. कुल्लू जिले में लगातार बारिश बागवानी के लिए भी आफत बन गई है.
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मुर्शिदाबाद में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की कथित हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी कहीं नहीं दिखेंगी। राज्य चुनाव आयोग भी कहीं नहीं दिखेगा। उन्होंने सवाल किया कि बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे। कोलकाता, एएनआइ। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दिन हुई हिंसा को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है। 'बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे? ' अधीर रंजन चौधरी ने पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मुर्शिदाबाद में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की कथित हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा, "कल यहां एक 62 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। हत्या का उद्देश्य यह था कि इन्हें मार कर तीन-चार बूथ पर कब्जा किया जा सके। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी कहीं नहीं दिखेंगी, राज्य चुनाव आयोग कहीं नहीं दिखेगा। बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे? " 'हम हत्या के खिलाफ आंदोलन करेंगे' कांग्रेस सांसद ने कहा कि चुनाव से पहले और चुनाव के बाद हिंसा जारी रहती है। तृणमूल और पुलिस दोनों में कोई फर्क नहीं है। जो काम तृणमूल नहीं कर पाती है, वह पुलिस कर देती है। इस हत्या के खिलाफ हम सड़क और कोर्ट तक जाएंगे। हम आंदोलन करेंगे। " पंचायत चुनाव के दौरान 20 जिलों में व्यापक हिंसा, मतपत्रों की लूट और धांधली हुई। मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, मालदा, दक्षिण 24 परगना, उत्तरी दिनाजपुर और नादिया जैसे कई जिलों से बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों को नुकसान पहुंचाने और पीठासीन अधिकारियों पर हमले की खबरें आईं। पंचायत चुनाव में हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने राज्य चुनाव आयोग पर निशाना साधा। वहीं, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भी राज्य चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि संवेदनशील मतदान केंद्रों पर बीएसएफ के बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे बूथों को केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंप दिया गया। बीएसएफ के डीआइजी एसएस गुलेरिया ने कहा कि बीएसएफ ने राज्य चुनाव आयोग को कई पत्र लिखकर संवेदनशील मतदान केंद्रों के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन 7 जून को छोड़कर कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्हें केवल ऐसे बूथों की संख्या के बारे में बताया गया था, लेकिन उनके स्थान के बारे में कुछ नहीं बताया गया।
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मुर्शिदाबाद में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की कथित हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी कहीं नहीं दिखेंगी। राज्य चुनाव आयोग भी कहीं नहीं दिखेगा। उन्होंने सवाल किया कि बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे। कोलकाता, एएनआइ। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दिन हुई हिंसा को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है। 'बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे? ' अधीर रंजन चौधरी ने पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मुर्शिदाबाद में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की कथित हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा, "कल यहां एक बासठ वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। हत्या का उद्देश्य यह था कि इन्हें मार कर तीन-चार बूथ पर कब्जा किया जा सके। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी कहीं नहीं दिखेंगी, राज्य चुनाव आयोग कहीं नहीं दिखेगा। बंगाल में और कितने लोग मारे जाएंगे? " 'हम हत्या के खिलाफ आंदोलन करेंगे' कांग्रेस सांसद ने कहा कि चुनाव से पहले और चुनाव के बाद हिंसा जारी रहती है। तृणमूल और पुलिस दोनों में कोई फर्क नहीं है। जो काम तृणमूल नहीं कर पाती है, वह पुलिस कर देती है। इस हत्या के खिलाफ हम सड़क और कोर्ट तक जाएंगे। हम आंदोलन करेंगे। " पंचायत चुनाव के दौरान बीस जिलों में व्यापक हिंसा, मतपत्रों की लूट और धांधली हुई। मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, मालदा, दक्षिण चौबीस परगना, उत्तरी दिनाजपुर और नादिया जैसे कई जिलों से बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों को नुकसान पहुंचाने और पीठासीन अधिकारियों पर हमले की खबरें आईं। पंचायत चुनाव में हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने राज्य चुनाव आयोग पर निशाना साधा। वहीं, सीमा सुरक्षा बल ने भी राज्य चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि संवेदनशील मतदान केंद्रों पर बीएसएफ के बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे बूथों को केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंप दिया गया। बीएसएफ के डीआइजी एसएस गुलेरिया ने कहा कि बीएसएफ ने राज्य चुनाव आयोग को कई पत्र लिखकर संवेदनशील मतदान केंद्रों के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन सात जून को छोड़कर कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्हें केवल ऐसे बूथों की संख्या के बारे में बताया गया था, लेकिन उनके स्थान के बारे में कुछ नहीं बताया गया।
शाश्वत है ईश्वरता शाश्वत है रे ईश्वरता ! विश्व में... ईश्वरता शाश्वत है रे ! जिन ऐश्वर्यों को हम समझते शाश्वत वे काल की वैश्वानल ज्वालिकाओं में जल जायेंगे रे ! शाश्वतता को उच्छ्वास ईश्वरता को निश्वास बना कर जीना हीचेतना शक्ति है रे ! जीवद्विमुक्ति है रे ! आनंद तत्व हीआद्यंत सत्य है - सत्य स्वरूप ही -
शाश्वत है ईश्वरता शाश्वत है रे ईश्वरता ! विश्व में... ईश्वरता शाश्वत है रे ! जिन ऐश्वर्यों को हम समझते शाश्वत वे काल की वैश्वानल ज्वालिकाओं में जल जायेंगे रे ! शाश्वतता को उच्छ्वास ईश्वरता को निश्वास बना कर जीना हीचेतना शक्ति है रे ! जीवद्विमुक्ति है रे ! आनंद तत्व हीआद्यंत सत्य है - सत्य स्वरूप ही -
छ लेश्याको थोकड़ी । [१६६ जाफेरी उतकृष्टी १० सागर, पल्योपमरे असं ख्यात में भाग अधिक । कृष्ण लेश्यारी स्थिति जगन १० सागर उतकृष्ठी ३३ सागर पल्योपम, अन्तर मुहूर्त अधिक । छद्मस्थ मनुष्य तथा तीर्यचरी लेश्यारी स्थिति-पेहलड़ी पांच लेश्यारी स्थिति---जगन तथा उतकृष्टी अन्तर मुहूर्त शुक्ल लेश्यारी स्थिति केवली आश्री जगन अन्तर मुहूर्त उतफ्रुष्टी नव वर्ष उणी कोड़ पूर्वरी । देवतारी लेश्यारी स्थिति भवनपति, वाणव्यंतर ए दोयमें कृष्ण लेश्यारी स्थिति जगन १० हजार वर्ष री उतकृष्टी पलरे असंख्यातमें भाग, नीज लश्यारी स्थिति जगन कृष्ण लश्याकी उतकृष्टी स्थितिसें एक समय अधिक अने उतकृष्ठी पलरे असंख्य भाग, कापोल लश्यारी स्थिति जगन नील लेश्यारी उतकृष्टी द्ध लेश्याको थोकड़ो । एक समय अधिक, उतकृष्टी पलरें शसंख्या में भाग, तेजु लेश्यारी स्थिति जगन १० (दस) हजार वर्षरी उतकृष्टी २ सागर पल्योपम अने पलरे असंख्य भाग अधिक, वेमाणिक देवतारी स्थिति-पद्म लोश्यारीजगन, तेजु लेश्यारी उतकृष्टी स्थितिसें एक समय अधिक उतकृष्टी १० सागर अने अन्तर मुहूर्त अधिक, (वॅाणिक देवतारी स्थिति ) शुक्र लेश्यारी-जगन, पद्म लेश्यारी उतकृष्टी स्थिति एक समय अधिक उतकृष्टी ३३ सागर घोपम अन्तर मुहूर्त अधिक। (१०) दसमी गति द्वार । श्यारे पहले समय और हेलो समय जीव न मरे और न उपजे विनमें (कम
छ लेश्याको थोकड़ी । [एक सौ छयासठ जाफेरी उतकृष्टी दस सागर, पल्योपमरे असं ख्यात में भाग अधिक । कृष्ण लेश्यारी स्थिति जगन दस सागर उतकृष्ठी तैंतीस सागर पल्योपम, अन्तर मुहूर्त अधिक । छद्मस्थ मनुष्य तथा तीर्यचरी लेश्यारी स्थिति-पेहलड़ी पांच लेश्यारी स्थिति---जगन तथा उतकृष्टी अन्तर मुहूर्त शुक्ल लेश्यारी स्थिति केवली आश्री जगन अन्तर मुहूर्त उतफ्रुष्टी नव वर्ष उणी कोड़ पूर्वरी । देवतारी लेश्यारी स्थिति भवनपति, वाणव्यंतर ए दोयमें कृष्ण लेश्यारी स्थिति जगन दस हजार वर्ष री उतकृष्टी पलरे असंख्यातमें भाग, नीज लश्यारी स्थिति जगन कृष्ण लश्याकी उतकृष्टी स्थितिसें एक समय अधिक अने उतकृष्ठी पलरे असंख्य भाग, कापोल लश्यारी स्थिति जगन नील लेश्यारी उतकृष्टी द्ध लेश्याको थोकड़ो । एक समय अधिक, उतकृष्टी पलरें शसंख्या में भाग, तेजु लेश्यारी स्थिति जगन दस हजार वर्षरी उतकृष्टी दो सागर पल्योपम अने पलरे असंख्य भाग अधिक, वेमाणिक देवतारी स्थिति-पद्म लोश्यारीजगन, तेजु लेश्यारी उतकृष्टी स्थितिसें एक समय अधिक उतकृष्टी दस सागर अने अन्तर मुहूर्त अधिक, शुक्र लेश्यारी-जगन, पद्म लेश्यारी उतकृष्टी स्थिति एक समय अधिक उतकृष्टी तैंतीस सागर घोपम अन्तर मुहूर्त अधिक। दसमी गति द्वार । श्यारे पहले समय और हेलो समय जीव न मरे और न उपजे विनमें (कम
सीबीआई ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ के लिए 8 सदस्यीय टीम का गठन किया है. कोयला कांड में सीबीआई ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सीबीआई की टीम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के कालीघाट स्थित शांतिनिकेतन हाउसिंग कंप्लेक्स पहुंची है और अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ कर रही है. सोमवार को अभिषेक बनर्जी की साली मेनका गंभीर से लगभग घंटे तक पूछताछ की थी. बता दें कि सीबीआई की टीम पहुंचने के पहले सीएम ममता बनर्जी अभिषेक के घर गई थीं और उनका उत्साह बढ़ाया था. सीएम के अभिषेक बनर्जी के घर से निकलने के लगभग चार मिनट के बाद सीबीआई की टीम पहुंची. बता दें कि सीबीआई ने रविवार को रुजिरा बनर्जी को नोटिस दिया था और पूछताछ की इच्छा जाहिर की थी. उस नोटिस के जवाब में रुजिता बनर्जी ने जवाब भेजा था, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई की टीम उनके आवास पर सुबह 11 बजे से 3 बजे के बीच आ सकती है. उसी के मद्देनजर सीबीआई की टीम पूछताछ के लिए पहुंची है. सीबीआई ने पूछताछ के लिए आठ सदस्यीय टीम का गठन किया है. लगभग 10 अधिकारियों की टीम पूछताछ के लिए पहुंचीं. सूत्रों का कहना है कि रुजिता बनर्जी से पूछताछ की रिकार्डिंग की जा रही है और लिखित बयान दर्ज किया जा रहा है. पूछताछ के दौरान रुजिरा के वकील भी उपस्थित हैं. पूछताछ के दौरान उनकी बहन से मेनका गंभीर से प्राप्त जानकारी का मिलान किया जा रहा है. साथ ही उनके एकाउंट से लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है. मेनका गंभीर से पूछताछ के लिए सीबीआई के सात अधिकारी गए थे. उनकी अधिकारियों को रुजिरा बनर्जी से पूछताछ के लिए भेजा गया है.सीबीआई की टीम अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिता बनर्जी से पूछताछ से मिले तथ्यों का मिलान करेगी और यदि कोई अंतर रहा, तो इस बारे में उनसे पूछताछ करेगी. इस दौरान उनके रुजिरा बनर्जी के वकील भी उपस्थित रहने की संभावना है. इस बीच, सीबीआई की पूछताछ के मद्देनजर अभिषेक बनर्जी के आवास की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. कोयला तस्करी कांड के आरोपी विनय मिश्रा अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं. सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि विनय मिश्रा टीएमसी नेता और कोयला माफिया लाला के बीच लिंकमैन का काम करता था. सीबीआई को अंदेशा है कि रुजिरा बनर्जी के बैंकांक और लंदन एकाउंट में लेनदेन हुए हैं. यह लेनदेन कोयला तस्करी से जुड़ा हुआ है.
सीबीआई ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ के लिए आठ सदस्यीय टीम का गठन किया है. कोयला कांड में सीबीआई ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. सीबीआई की टीम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित शांतिनिकेतन हाउसिंग कंप्लेक्स पहुंची है और अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ कर रही है. सोमवार को अभिषेक बनर्जी की साली मेनका गंभीर से लगभग घंटे तक पूछताछ की थी. बता दें कि सीबीआई की टीम पहुंचने के पहले सीएम ममता बनर्जी अभिषेक के घर गई थीं और उनका उत्साह बढ़ाया था. सीएम के अभिषेक बनर्जी के घर से निकलने के लगभग चार मिनट के बाद सीबीआई की टीम पहुंची. बता दें कि सीबीआई ने रविवार को रुजिरा बनर्जी को नोटिस दिया था और पूछताछ की इच्छा जाहिर की थी. उस नोटिस के जवाब में रुजिता बनर्जी ने जवाब भेजा था, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई की टीम उनके आवास पर सुबह ग्यारह बजे से तीन बजे के बीच आ सकती है. उसी के मद्देनजर सीबीआई की टीम पूछताछ के लिए पहुंची है. सीबीआई ने पूछताछ के लिए आठ सदस्यीय टीम का गठन किया है. लगभग दस अधिकारियों की टीम पूछताछ के लिए पहुंचीं. सूत्रों का कहना है कि रुजिता बनर्जी से पूछताछ की रिकार्डिंग की जा रही है और लिखित बयान दर्ज किया जा रहा है. पूछताछ के दौरान रुजिरा के वकील भी उपस्थित हैं. पूछताछ के दौरान उनकी बहन से मेनका गंभीर से प्राप्त जानकारी का मिलान किया जा रहा है. साथ ही उनके एकाउंट से लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है. मेनका गंभीर से पूछताछ के लिए सीबीआई के सात अधिकारी गए थे. उनकी अधिकारियों को रुजिरा बनर्जी से पूछताछ के लिए भेजा गया है.सीबीआई की टीम अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिता बनर्जी से पूछताछ से मिले तथ्यों का मिलान करेगी और यदि कोई अंतर रहा, तो इस बारे में उनसे पूछताछ करेगी. इस दौरान उनके रुजिरा बनर्जी के वकील भी उपस्थित रहने की संभावना है. इस बीच, सीबीआई की पूछताछ के मद्देनजर अभिषेक बनर्जी के आवास की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. कोयला तस्करी कांड के आरोपी विनय मिश्रा अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं. सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि विनय मिश्रा टीएमसी नेता और कोयला माफिया लाला के बीच लिंकमैन का काम करता था. सीबीआई को अंदेशा है कि रुजिरा बनर्जी के बैंकांक और लंदन एकाउंट में लेनदेन हुए हैं. यह लेनदेन कोयला तस्करी से जुड़ा हुआ है.
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रात लगभग 9.30 बजे जोरदार बारिश हुई। कुछ ही देर की बारिश में गड्ढों में पानी जमा हो गया। भोपाल सहित रायसेन और ग्वालियर में भी तेज बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग ने बारिश के लिए एक हफ्ते का अलर्ट जारी किया है। जरूर पढ़ें- Mahakal Lok: क्या होता है "लोक" का मतलब ! इधर भांडेर में आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक खेत में काम करते वक्त आकाशीय बिजली गिरने से किसान की मौत हुई। यह दुरसड़ा थाना क्षेत्र के बागुधन गांव का मामला बताया जा रहा है। भाण्डेर अनुभाग के थाना दुरसड़ा क्षेत्र में ग्राम बागुधन में शाम 4 बजे करीब की यह घटना बताई जा रही है। 37 वर्षीय किसान मलखान अहिरवार यहां खेत पर काम कर रहा था, तभी उसके ऊपर आकाशीय बिजली गिर गई, जिससे किसान गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया। उधर सागर में मौसम भी मौसम का बदला मिजाज नजर आया। यहां जोरदार गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। यहां तेज बारिश होने से सड़कों पर पानी भर गया। वहीं निचले इलाकों की कॉलोनियों में पानी भर गया। यहां अक्टूबर महीने में 104 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। सागर में सोमवार को एक बार फिर सुबह से धूप खिलने के बाद शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदला व जमकर वर्षा हुई। शाम चार बजे के बाद काले-घने बादल छा गए। बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हुई और बिजली की चमक और बादलों की गरज के साथ तेज वर्षा शुरू हो गई। इस दौरान करीब आधे घंटे तक हुई जोरदार वर्षा से शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी। सिविल लाइन, कटरा बाजार और रेलवे स्टेशन मार्ग पर सड़कों पर पानी भर गया। वहीं मौसम खुलने के बाद धूप की आस लगाए बैठे किसान फिर चिंतित हुए। कई किसानों की फसल अभी कट नहीं पाई हैं। लगातार वर्षा से फसलें प्रभावित हैं। वे मौसम खुलने की आस लगाए हैं, लेकिन इस साल अक्टूबर में लगातार वर्षा हो रही है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रात लगभग नौ.तीस बजे जोरदार बारिश हुई। कुछ ही देर की बारिश में गड्ढों में पानी जमा हो गया। भोपाल सहित रायसेन और ग्वालियर में भी तेज बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग ने बारिश के लिए एक हफ्ते का अलर्ट जारी किया है। जरूर पढ़ें- Mahakal Lok: क्या होता है "लोक" का मतलब ! इधर भांडेर में आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक खेत में काम करते वक्त आकाशीय बिजली गिरने से किसान की मौत हुई। यह दुरसड़ा थाना क्षेत्र के बागुधन गांव का मामला बताया जा रहा है। भाण्डेर अनुभाग के थाना दुरसड़ा क्षेत्र में ग्राम बागुधन में शाम चार बजे करीब की यह घटना बताई जा रही है। सैंतीस वर्षीय किसान मलखान अहिरवार यहां खेत पर काम कर रहा था, तभी उसके ऊपर आकाशीय बिजली गिर गई, जिससे किसान गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया। उधर सागर में मौसम भी मौसम का बदला मिजाज नजर आया। यहां जोरदार गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। यहां तेज बारिश होने से सड़कों पर पानी भर गया। वहीं निचले इलाकों की कॉलोनियों में पानी भर गया। यहां अक्टूबर महीने में एक सौ चार मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। सागर में सोमवार को एक बार फिर सुबह से धूप खिलने के बाद शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदला व जमकर वर्षा हुई। शाम चार बजे के बाद काले-घने बादल छा गए। बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हुई और बिजली की चमक और बादलों की गरज के साथ तेज वर्षा शुरू हो गई। इस दौरान करीब आधे घंटे तक हुई जोरदार वर्षा से शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी। सिविल लाइन, कटरा बाजार और रेलवे स्टेशन मार्ग पर सड़कों पर पानी भर गया। वहीं मौसम खुलने के बाद धूप की आस लगाए बैठे किसान फिर चिंतित हुए। कई किसानों की फसल अभी कट नहीं पाई हैं। लगातार वर्षा से फसलें प्रभावित हैं। वे मौसम खुलने की आस लगाए हैं, लेकिन इस साल अक्टूबर में लगातार वर्षा हो रही है।
लॉ स्कूल में जाना विशेष रूप से शुरुआत में, एक जबरदस्त प्रक्रिया की तरह महसूस कर सकता है। आप महसूस कर सकते हैं कि आप पर्वत के रास्ते पर चढ़ने के लिए बहुत अधिक देख रहे हैं। लेकिन पहाड़ को स्केल करना सिर्फ एक कदम से शुरू होता है, फिर दूसरा और दूसरा, और आखिरकार, ये कदम आपको शीर्ष पर ले जाते हैं। यहां कुछ ऐसे हैं जो आपको कानून स्कूल द्वारा स्वीकृति के लिए नेतृत्व करेंगे। महाविद्यालय जाओ। सभी कानून स्कूलों की आवश्यकता होती है कि छात्रों को कम से कम स्नातक की डिग्री प्राप्त करें। आपको संभवतः सर्वश्रेष्ठ कॉलेज में भाग लेना चाहिए और उच्चतम ग्रेड संभव प्राप्त करना चाहिए। आपका जीपीए आपके आवेदन में दो सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक होगा, लेकिन आपको प्रीला में प्रमुख नहीं होना चाहिए। उन क्षेत्रों में अपने स्नातक प्रमुख और पाठ्यक्रम चुनें जिनमें आपको लगता है कि आप उत्कृष्ट होंगे। अपने अंडरग्रेड वर्षों के दौरान कानून स्कूल के लिए सर्वश्रेष्ठ तरीके से तैयार कैसे हो सकते हैं, इसके लिए एक समयरेखा तैयार करें। एलएसएटी लो। आपके लॉ स्कूल आवेदन में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक आपका एलएसएटी स्कोर है। यदि आप वर्तमान में कॉलेज में हैं, तो एलएसएटी लेने का सबसे अच्छा समय आपके जूनियर वर्ष या आपके वरिष्ठ वर्ष के पतन के बाद गर्मियों में होता है। एलएसएटी लेने का सबसे अच्छा समय है। अगर आप पहले से ही स्नातक हो चुके हैं तो आप पतन स्कूल शुरू करना चाहते हैं, जिसके दौरान आप गर्मी या गिरावट से पहले गिर जाते हैं। अच्छी तरह से तैयार करें और एलएसएटी को फिर से लेने का फैसला करने से पहले स्कूलों को एकाधिक एलएसएटी स्कोर कैसे संभालते हैं, इस पर पढ़ना सुनिश्चित करें। आपको इस समय एलएसडीएएस के साथ भी पंजीकरण करना चाहिए। चुनें कि आप कहां आवेदन करने जा रहे हैं। जब आप निर्णय ले रहे हैं कि कानून स्कूल में आवेदन करना है, तो ऐसे कई कारक हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए। उन स्कूलों पर जाने पर विचार करें जो आपकी रूचि रखते हैं - और कम से कम कानून स्कूल रैंकिंग पर कुछ ध्यान देते हैं। अपना व्यक्तिगत विवरण लिखें। आपका व्यक्तिगत विवरण आपके एलएसएटी स्कोर और आपके जीपीए के पीछे तीसरे स्थान पर आता है। कुछ लेखन संकेतों के साथ brainstorming से शुरू करें और लेखन प्राप्त करें! कुछ विषयों और सामान्य गलतियों से बचने के लिए सुनिश्चित होने के लिए, एक महान व्यक्तिगत कथन लिखने के लिए कुछ सुझावों का अनुसंधान करें। समय सीमा से पहले अपने आवेदनों को अच्छी तरह खत्म करें। जल्द से जल्द सिफारिशों के लिए पूछना सुनिश्चित करें कि आपके रेफरी के पास उत्कृष्ट अक्षरों को लिखने के लिए पर्याप्त समय है। साथ ही, "अतिरिक्त एक्स" लॉ स्कूल स्टेटमेंट और / या एक परिशिष्ट जैसे किसी भी अतिरिक्त बयान की आवश्यकता हो सकती है। प्रतिलेखों का अनुरोध करें और सुनिश्चित करें कि आपके आवेदन फ़ाइलों में कानून स्कूल जो भी चाहते हैं, वह समय सीमा से पहले ही अच्छी तरह से है। व्यवस्थित फैशन में उपरोक्त सभी चरणों को पूरा करने के बाद, आप भरोसा कर सकते हैं कि आपने कानून स्कूल में आने की संभावना को अधिकतम कर दिया है। सौभाग्य! - जैसे ही आपने ऐसा करने का निर्णय लिया है, कानून स्कूलों में आवेदन करने की तैयारी करना शुरू करें। - अनुप्रयोगों में भेजने के आखिरी मिनट तक प्रतीक्षा न करें। कई स्कूलों में प्रवेश नीतियां रोलिंग होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों को स्वीकार करते हैं। - अपने आवेदन पैकेट, विशेष रूप से अपने व्यक्तिगत विवरण को प्रमाणित करने के लिए किसी को अच्छी आंख वाले किसी के पास रखें।
लॉ स्कूल में जाना विशेष रूप से शुरुआत में, एक जबरदस्त प्रक्रिया की तरह महसूस कर सकता है। आप महसूस कर सकते हैं कि आप पर्वत के रास्ते पर चढ़ने के लिए बहुत अधिक देख रहे हैं। लेकिन पहाड़ को स्केल करना सिर्फ एक कदम से शुरू होता है, फिर दूसरा और दूसरा, और आखिरकार, ये कदम आपको शीर्ष पर ले जाते हैं। यहां कुछ ऐसे हैं जो आपको कानून स्कूल द्वारा स्वीकृति के लिए नेतृत्व करेंगे। महाविद्यालय जाओ। सभी कानून स्कूलों की आवश्यकता होती है कि छात्रों को कम से कम स्नातक की डिग्री प्राप्त करें। आपको संभवतः सर्वश्रेष्ठ कॉलेज में भाग लेना चाहिए और उच्चतम ग्रेड संभव प्राप्त करना चाहिए। आपका जीपीए आपके आवेदन में दो सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक होगा, लेकिन आपको प्रीला में प्रमुख नहीं होना चाहिए। उन क्षेत्रों में अपने स्नातक प्रमुख और पाठ्यक्रम चुनें जिनमें आपको लगता है कि आप उत्कृष्ट होंगे। अपने अंडरग्रेड वर्षों के दौरान कानून स्कूल के लिए सर्वश्रेष्ठ तरीके से तैयार कैसे हो सकते हैं, इसके लिए एक समयरेखा तैयार करें। एलएसएटी लो। आपके लॉ स्कूल आवेदन में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक आपका एलएसएटी स्कोर है। यदि आप वर्तमान में कॉलेज में हैं, तो एलएसएटी लेने का सबसे अच्छा समय आपके जूनियर वर्ष या आपके वरिष्ठ वर्ष के पतन के बाद गर्मियों में होता है। एलएसएटी लेने का सबसे अच्छा समय है। अगर आप पहले से ही स्नातक हो चुके हैं तो आप पतन स्कूल शुरू करना चाहते हैं, जिसके दौरान आप गर्मी या गिरावट से पहले गिर जाते हैं। अच्छी तरह से तैयार करें और एलएसएटी को फिर से लेने का फैसला करने से पहले स्कूलों को एकाधिक एलएसएटी स्कोर कैसे संभालते हैं, इस पर पढ़ना सुनिश्चित करें। आपको इस समय एलएसडीएएस के साथ भी पंजीकरण करना चाहिए। चुनें कि आप कहां आवेदन करने जा रहे हैं। जब आप निर्णय ले रहे हैं कि कानून स्कूल में आवेदन करना है, तो ऐसे कई कारक हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए। उन स्कूलों पर जाने पर विचार करें जो आपकी रूचि रखते हैं - और कम से कम कानून स्कूल रैंकिंग पर कुछ ध्यान देते हैं। अपना व्यक्तिगत विवरण लिखें। आपका व्यक्तिगत विवरण आपके एलएसएटी स्कोर और आपके जीपीए के पीछे तीसरे स्थान पर आता है। कुछ लेखन संकेतों के साथ brainstorming से शुरू करें और लेखन प्राप्त करें! कुछ विषयों और सामान्य गलतियों से बचने के लिए सुनिश्चित होने के लिए, एक महान व्यक्तिगत कथन लिखने के लिए कुछ सुझावों का अनुसंधान करें। समय सीमा से पहले अपने आवेदनों को अच्छी तरह खत्म करें। जल्द से जल्द सिफारिशों के लिए पूछना सुनिश्चित करें कि आपके रेफरी के पास उत्कृष्ट अक्षरों को लिखने के लिए पर्याप्त समय है। साथ ही, "अतिरिक्त एक्स" लॉ स्कूल स्टेटमेंट और / या एक परिशिष्ट जैसे किसी भी अतिरिक्त बयान की आवश्यकता हो सकती है। प्रतिलेखों का अनुरोध करें और सुनिश्चित करें कि आपके आवेदन फ़ाइलों में कानून स्कूल जो भी चाहते हैं, वह समय सीमा से पहले ही अच्छी तरह से है। व्यवस्थित फैशन में उपरोक्त सभी चरणों को पूरा करने के बाद, आप भरोसा कर सकते हैं कि आपने कानून स्कूल में आने की संभावना को अधिकतम कर दिया है। सौभाग्य! - जैसे ही आपने ऐसा करने का निर्णय लिया है, कानून स्कूलों में आवेदन करने की तैयारी करना शुरू करें। - अनुप्रयोगों में भेजने के आखिरी मिनट तक प्रतीक्षा न करें। कई स्कूलों में प्रवेश नीतियां रोलिंग होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों को स्वीकार करते हैं। - अपने आवेदन पैकेट, विशेष रूप से अपने व्यक्तिगत विवरण को प्रमाणित करने के लिए किसी को अच्छी आंख वाले किसी के पास रखें।
नई कविता आन्दोलन में कुंवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं. Poet Kunwar Narayan: कुंवर नारायण का कविता संग्रह 'सब इतना असमाप्त' राजकमल प्रकाशन (Rajkamal Prakashan) से छपकर आया है. इस संग्रह के लिए अधिकांश कविताओं का चयन उन्होंने करवा लिया था. कुंवर नारायण ने कुछ गीत और गज़ल भी लिखी हैं जिन्हें इस संग्रह में शामिल किया गया. कुंवर जी कभी भी अपने लेखन को प्रकाशित कराने की उत्सुकता में नहीं रहे हैं. इसलिए कई बार उनकी लिखी हुई सामग्री फाइलों में रह जाती थी. 19 सितंबर, 1927 को अयोध्या, फैजाबाद (Ayodhya) में पैदान हुए कुंवर नारायण हिन्दी साहित्य (Hindi Sahitya) एक सशक्त हस्ताक्षर थे. नई कविता आन्दोलन में कुंवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं. उन्होंने हिंदी की तमाम विधाओं- कविता, कहानी, आलोचना, निबंध, डायरी, सिनेमा और कला पर लिखा है. दुनिया की कई भाषाओं में उनकी रचनाएं अनूदित हुई हैं. हिंदी साहित्य की सेवा के लिए कुंवर नारायण को साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi Award), कबीर सम्मान, पद्म भूषण (Padma Bhushan), साहित्य का सर्वोच्च सम्मान वरिष्ठ फेलोशिप और ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया. वरिष्ठ साहित्यकार ओम निश्चल (Om Nishchal) कुंवर नारायण के बारे में लिखते हैं- कुंवर नारायण के शुरुआती वर्ष अयोध्या और फैजाबाद में बीते. बाद में वे लखनऊ (Lucknow) चल गए वहां करीब पांच दशकों तक लेखन कार्य से जुड़े रहे. उन्होंने अपना अधिकांश लेखन कार्य लखनऊ में हीं पूरा किया. लखनऊ के बाद वे दिल्ली आकर बस गए. होते हैं प्राण। जहां एक घाव बचा रह गया था। दोस्त और प्रियजन हैं। सब की अपनी-अपनी लड़ाई है। ईश्वर साक्षी है। .
नई कविता आन्दोलन में कुंवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं. Poet Kunwar Narayan: कुंवर नारायण का कविता संग्रह 'सब इतना असमाप्त' राजकमल प्रकाशन से छपकर आया है. इस संग्रह के लिए अधिकांश कविताओं का चयन उन्होंने करवा लिया था. कुंवर नारायण ने कुछ गीत और गज़ल भी लिखी हैं जिन्हें इस संग्रह में शामिल किया गया. कुंवर जी कभी भी अपने लेखन को प्रकाशित कराने की उत्सुकता में नहीं रहे हैं. इसलिए कई बार उनकी लिखी हुई सामग्री फाइलों में रह जाती थी. उन्नीस सितंबर, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस को अयोध्या, फैजाबाद में पैदान हुए कुंवर नारायण हिन्दी साहित्य एक सशक्त हस्ताक्षर थे. नई कविता आन्दोलन में कुंवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं. उन्होंने हिंदी की तमाम विधाओं- कविता, कहानी, आलोचना, निबंध, डायरी, सिनेमा और कला पर लिखा है. दुनिया की कई भाषाओं में उनकी रचनाएं अनूदित हुई हैं. हिंदी साहित्य की सेवा के लिए कुंवर नारायण को साहित्य अकादमी , कबीर सम्मान, पद्म भूषण , साहित्य का सर्वोच्च सम्मान वरिष्ठ फेलोशिप और ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया. वरिष्ठ साहित्यकार ओम निश्चल कुंवर नारायण के बारे में लिखते हैं- कुंवर नारायण के शुरुआती वर्ष अयोध्या और फैजाबाद में बीते. बाद में वे लखनऊ चल गए वहां करीब पांच दशकों तक लेखन कार्य से जुड़े रहे. उन्होंने अपना अधिकांश लेखन कार्य लखनऊ में हीं पूरा किया. लखनऊ के बाद वे दिल्ली आकर बस गए. होते हैं प्राण। जहां एक घाव बचा रह गया था। दोस्त और प्रियजन हैं। सब की अपनी-अपनी लड़ाई है। ईश्वर साक्षी है। .
पैन इंडिया स्टार पूजा हेगड़े की फिल्म "किसी का भाई किसी की जान" को देखने के लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म का एक और गाना रिलीज हो चुका है, जिससे देख फैंस की बेसब्री और बढ़ा रही है। रानी मुखर्जी-अभिनीत "मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे" के निर्माताओं ने अपने पिछले सुंदर गीत "शुभो शुभो" की सफलता के बाद अपना नवीनतम गीत "माँ के दिल से" जारी किया है। ब्रेकआउट गीत "उड़जा" गायक ने भारतीय संगीत को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार किया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अजय देवगन ने "भोला" की शूटिंग से कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। यह गीत आपको भोलेनाथ की एक आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाएगा। रंजीत बावा एक बार फिर रोमांटिक डांस ट्रैक 'रेट्रो' के साथ हम सभी का दिल जीतने के लिए तैयार हैं। वेब म्यूजिक के ऑफिसियल यूट्यूब पर रिलीज रितेश पांडेय का यह गाना रिलीज के साथ ही हंगामा मचा रहा है। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार और इमरान हाशमी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म "सेल्फी" को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हंसल मेहता की आगामी फिल्म 'फ़राज़' जो 3 फरवरी को रिलीज़ होने के लिए तैयार है। इसका पहला गाना आज रिलीज कर दिया गया है। मशहूर लोक सिंगर मामे खान टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत उत्साहित राजस्थानी ट्रैक 'ऊमड़ घूमड़' के साथ लौट आए हैं। पॉपुलर सिंगर जुबिन नौटियाल और योहानी की जोड़ी एक बार फिर देखने को मिल रही है। नाटू-नाटू सॉन्ग को गोल्डन ग्लोब 2023 में मिले अवॉर्ड के बाद लोग फिल्म की टीम को शुभकामनाएं दे रहे हैं। 'पठान' फिल्म के बेशर्म रंग सॉन्ग पर वीडियो बनाकर वायरल होने वाले व्यक्ति का नाम इब्राहिम कादरी है। पाकिस्तानी गायक सज्जाद अली ने फिल्म पठान के गाने 'बेशरम रंग' को अपने पुराने गाने की तरह बताया है। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में "पठान" फिल्म पर एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि दीपिका पादुकोण ने "बेशर्म रंग" सॉन्ग में जो बिकिनी पहनी है वह भगवा रंग नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म का चिश्ती रंग है। 'पठान' फिल्म के विवाद में भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने अब अपने विचार सबसे साथ साझा किए हैं। पायल रोहतगी और शर्लिन चोपड़ा के बाद शक्तिमान फेम मुकेश खन्ना भी "पठान" फिल्म के विवाद में उतर आए है। मुकेश खन्ना ने शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म के पहले गाने "बेशर्म रंग" को अश्लील बताया है। शाहरुख खान के फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। शाहरुख अब अपनी अपकमिंग फिल्म "पठान" को फीफा वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल्स में प्रमोट करने वाले है। करण कुंद्रा के प्रशंसक उनके नये म्यूजिक वीडियो बेचारी से खुश। इस खास अंदाज में शहनाज गिल सिद्धार्थ शुक्ला को श्रद्धांजलि देंगी। सिंगिंग सेंसेशन, सुक्रिति और प्रक्रिति कक्कड़ 30 सितंबर को अपने लेटेस्ट ट्रैक मजनू को रिलीज करने के लिए हैं पूरी तरह तैयार। ध्वनि भानुशाली के साथ गुरफतेह पीरजादा का नया वाइब्रेंट नवरात्रि गीत 'मेहंदी' हुआ रिलीज। अपने स्टाइल स्टेटमेंट से लोगों को दीवाना बनाने वाली टीवी जगत की फैशनिस्टा हिना खान की तस्वीरें खूब चर्चा में बनी रहती हैं। अपने फैंस के बीच चर्चा में बने रहने के लिए हिना आए दिन दिलचस्प पोस्ट शेयर करती हैं। करण कुंद्रा के 'ना मार' गाने को 10 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। आसिम रियाज का नया रैप सॉन्ग Built in Pain हुआ रिलीज। अपने स्टाइल स्टेटमेंट से लोगों को दीवाना बनाने वाली टीवी जगत की फैशनिस्टा हिना खान की तस्वीरें खूब चर्चा में बनी रहती हैं। अपने फैंस के बीच चर्चा में बने रहने के लिए हिना आए दिन दिलचस्प पोस्ट शेयर करती हैं। टाइगर श्रॉफ के साथ जैकी भगनानी ने स्वतंत्रता दिवस से पहले हर भारतीय को समर्पित "वंदे मातरम" का दिल छू लेने वाला वर्शन किया रिलीज़! साथ क्या निभाओगे का फर्स्ट लुक हुआ रिलीज़ - सोनू सूद और निधि अग्रवाल नजर आयेंगे इस म्यूजिक विडियो में। फिल्म 'माय फ्रेंड गणेशा" के डायरेक्टर राजीव एस रूइआ के निर्देशन में बना गाना 'मेन्टल' रिलीज हो गया है। इस गाने को सिंगर देव नेगी ने अपनी आवाज दी है तो वही अभिनेता देव शर्मा और अभिनेत्री प्रीति गोस्वामी मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं।
पैन इंडिया स्टार पूजा हेगड़े की फिल्म "किसी का भाई किसी की जान" को देखने के लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म का एक और गाना रिलीज हो चुका है, जिससे देख फैंस की बेसब्री और बढ़ा रही है। रानी मुखर्जी-अभिनीत "मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे" के निर्माताओं ने अपने पिछले सुंदर गीत "शुभो शुभो" की सफलता के बाद अपना नवीनतम गीत "माँ के दिल से" जारी किया है। ब्रेकआउट गीत "उड़जा" गायक ने भारतीय संगीत को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार किया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अजय देवगन ने "भोला" की शूटिंग से कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। यह गीत आपको भोलेनाथ की एक आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाएगा। रंजीत बावा एक बार फिर रोमांटिक डांस ट्रैक 'रेट्रो' के साथ हम सभी का दिल जीतने के लिए तैयार हैं। वेब म्यूजिक के ऑफिसियल यूट्यूब पर रिलीज रितेश पांडेय का यह गाना रिलीज के साथ ही हंगामा मचा रहा है। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार और इमरान हाशमी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म "सेल्फी" को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हंसल मेहता की आगामी फिल्म 'फ़राज़' जो तीन फरवरी को रिलीज़ होने के लिए तैयार है। इसका पहला गाना आज रिलीज कर दिया गया है। मशहूर लोक सिंगर मामे खान टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत उत्साहित राजस्थानी ट्रैक 'ऊमड़ घूमड़' के साथ लौट आए हैं। पॉपुलर सिंगर जुबिन नौटियाल और योहानी की जोड़ी एक बार फिर देखने को मिल रही है। नाटू-नाटू सॉन्ग को गोल्डन ग्लोब दो हज़ार तेईस में मिले अवॉर्ड के बाद लोग फिल्म की टीम को शुभकामनाएं दे रहे हैं। 'पठान' फिल्म के बेशर्म रंग सॉन्ग पर वीडियो बनाकर वायरल होने वाले व्यक्ति का नाम इब्राहिम कादरी है। पाकिस्तानी गायक सज्जाद अली ने फिल्म पठान के गाने 'बेशरम रंग' को अपने पुराने गाने की तरह बताया है। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में "पठान" फिल्म पर एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि दीपिका पादुकोण ने "बेशर्म रंग" सॉन्ग में जो बिकिनी पहनी है वह भगवा रंग नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म का चिश्ती रंग है। 'पठान' फिल्म के विवाद में भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने अब अपने विचार सबसे साथ साझा किए हैं। पायल रोहतगी और शर्लिन चोपड़ा के बाद शक्तिमान फेम मुकेश खन्ना भी "पठान" फिल्म के विवाद में उतर आए है। मुकेश खन्ना ने शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म के पहले गाने "बेशर्म रंग" को अश्लील बताया है। शाहरुख खान के फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। शाहरुख अब अपनी अपकमिंग फिल्म "पठान" को फीफा वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के फाइनल्स में प्रमोट करने वाले है। करण कुंद्रा के प्रशंसक उनके नये म्यूजिक वीडियो बेचारी से खुश। इस खास अंदाज में शहनाज गिल सिद्धार्थ शुक्ला को श्रद्धांजलि देंगी। सिंगिंग सेंसेशन, सुक्रिति और प्रक्रिति कक्कड़ तीस सितंबर को अपने लेटेस्ट ट्रैक मजनू को रिलीज करने के लिए हैं पूरी तरह तैयार। ध्वनि भानुशाली के साथ गुरफतेह पीरजादा का नया वाइब्रेंट नवरात्रि गीत 'मेहंदी' हुआ रिलीज। अपने स्टाइल स्टेटमेंट से लोगों को दीवाना बनाने वाली टीवी जगत की फैशनिस्टा हिना खान की तस्वीरें खूब चर्चा में बनी रहती हैं। अपने फैंस के बीच चर्चा में बने रहने के लिए हिना आए दिन दिलचस्प पोस्ट शेयर करती हैं। करण कुंद्रा के 'ना मार' गाने को दस मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। आसिम रियाज का नया रैप सॉन्ग Built in Pain हुआ रिलीज। अपने स्टाइल स्टेटमेंट से लोगों को दीवाना बनाने वाली टीवी जगत की फैशनिस्टा हिना खान की तस्वीरें खूब चर्चा में बनी रहती हैं। अपने फैंस के बीच चर्चा में बने रहने के लिए हिना आए दिन दिलचस्प पोस्ट शेयर करती हैं। टाइगर श्रॉफ के साथ जैकी भगनानी ने स्वतंत्रता दिवस से पहले हर भारतीय को समर्पित "वंदे मातरम" का दिल छू लेने वाला वर्शन किया रिलीज़! साथ क्या निभाओगे का फर्स्ट लुक हुआ रिलीज़ - सोनू सूद और निधि अग्रवाल नजर आयेंगे इस म्यूजिक विडियो में। फिल्म 'माय फ्रेंड गणेशा" के डायरेक्टर राजीव एस रूइआ के निर्देशन में बना गाना 'मेन्टल' रिलीज हो गया है। इस गाने को सिंगर देव नेगी ने अपनी आवाज दी है तो वही अभिनेता देव शर्मा और अभिनेत्री प्रीति गोस्वामी मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं।
चुवाड़ी-चंबा जिला के प्रवेश द्वार सांझी नाला और हटली चैक पोस्ट के माध्यम से रविवार को महाराष्ट्र, पंजाब व चेन्नई से 35 लोग घर वापस पहुंचे हैं। इन चैक पोस्टों पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों द्धारा लोगों की जांच पडताल के बाद निगरानी हेतु बार्डर बफर क्वारंटाइन केंद्र भेज दिया गया है। इसके अलावा रविवार को हिमाचल के विभिन्न जिलों से करीब 65 लोगों ने इन चैक पोस्टों के माध्यम से जिला में प्रवेश किया है। जानकारी के अनुसार रविवार को सांझी नाला चैक पोस्ट से महाराष्ट्र, चेन्नई व पंजाब से 29 लोग पहुंचे हैं, जबकि हटली बैरियर के जरिए छह लोग आए हैं। इन लोगों की चैक पोस्ट पर थर्मल स्कैनिंग के जरिए स्वास्थ्य जांच के बाद वाहनों के जरिए नजदीकी बार्डर बफर क्वारंटाइन केंद्र में शिफट कर दिया गया। जहां आगामी चौदह दिनों तक यह इन केंद्रों में प्रशासन की निगरानी में रहेंगें। इसके अलावा रविवार को ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से हटली चैक पोस्ट पर 30 लोगों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई है। सांझी नाला चैक पोस्ट के जरिए चंबा जिला में आने वाले लोगों का आंकडा 35 के आस- पास रहा है। उधर, सांझी नाला चैक पोस्ट प्रभारी एवं नायब तहसीलदार चुवाडी आशीष ठाकुर ने बताया कि बाहरी राज्यों से आए लोगों को बार्डर बफर क्वारंटाइन में भेजा गया हैं, जबकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों को होम क्वारंटाइन में रहने के निर्देश देकर घर भेजा गया है। बहरहाल, रविवार को हटली व सांझी नाला चैक पोस्ट से बाहरी राज्यों से 35 और प्रदेश के विभिन्न जिलों से 65 लोगों ने एंट्री की है। चंबा। राइजिंग स्टार पब्लिक स्कूल चंबा के आठवीं कक्षा के छात्र पुष्कर बिजलवान ने पेंटिंग के माध्यम से वैश्विक कोरोना वायरस महामारी से लोगों की जिदंगियां बचाने में जुटे डाक्टरों, नर्सिग स्टाफ व पुलिस कर्मचारी आदि कोरोना योद्धाओं को सलाम ठोंका है। पुष्कर बिजलवान का कहना है कि यही लोग इस विकट परिस्थिति में लोगों को इस महामारी की चपेट में आने और बचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। पुष्कर बिजलवान ने साथ ही लोगों से भी कोरोना वायरस संक्त्रमण से बचाव को लेकर जारी सरकारी व प्रशासनिक हिदायतों का पालन करने का आह्वान भी किया है।
चुवाड़ी-चंबा जिला के प्रवेश द्वार सांझी नाला और हटली चैक पोस्ट के माध्यम से रविवार को महाराष्ट्र, पंजाब व चेन्नई से पैंतीस लोग घर वापस पहुंचे हैं। इन चैक पोस्टों पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों द्धारा लोगों की जांच पडताल के बाद निगरानी हेतु बार्डर बफर क्वारंटाइन केंद्र भेज दिया गया है। इसके अलावा रविवार को हिमाचल के विभिन्न जिलों से करीब पैंसठ लोगों ने इन चैक पोस्टों के माध्यम से जिला में प्रवेश किया है। जानकारी के अनुसार रविवार को सांझी नाला चैक पोस्ट से महाराष्ट्र, चेन्नई व पंजाब से उनतीस लोग पहुंचे हैं, जबकि हटली बैरियर के जरिए छह लोग आए हैं। इन लोगों की चैक पोस्ट पर थर्मल स्कैनिंग के जरिए स्वास्थ्य जांच के बाद वाहनों के जरिए नजदीकी बार्डर बफर क्वारंटाइन केंद्र में शिफट कर दिया गया। जहां आगामी चौदह दिनों तक यह इन केंद्रों में प्रशासन की निगरानी में रहेंगें। इसके अलावा रविवार को ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से हटली चैक पोस्ट पर तीस लोगों ने अपनी एंट्री दर्ज करवाई है। सांझी नाला चैक पोस्ट के जरिए चंबा जिला में आने वाले लोगों का आंकडा पैंतीस के आस- पास रहा है। उधर, सांझी नाला चैक पोस्ट प्रभारी एवं नायब तहसीलदार चुवाडी आशीष ठाकुर ने बताया कि बाहरी राज्यों से आए लोगों को बार्डर बफर क्वारंटाइन में भेजा गया हैं, जबकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों को होम क्वारंटाइन में रहने के निर्देश देकर घर भेजा गया है। बहरहाल, रविवार को हटली व सांझी नाला चैक पोस्ट से बाहरी राज्यों से पैंतीस और प्रदेश के विभिन्न जिलों से पैंसठ लोगों ने एंट्री की है। चंबा। राइजिंग स्टार पब्लिक स्कूल चंबा के आठवीं कक्षा के छात्र पुष्कर बिजलवान ने पेंटिंग के माध्यम से वैश्विक कोरोना वायरस महामारी से लोगों की जिदंगियां बचाने में जुटे डाक्टरों, नर्सिग स्टाफ व पुलिस कर्मचारी आदि कोरोना योद्धाओं को सलाम ठोंका है। पुष्कर बिजलवान का कहना है कि यही लोग इस विकट परिस्थिति में लोगों को इस महामारी की चपेट में आने और बचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। पुष्कर बिजलवान ने साथ ही लोगों से भी कोरोना वायरस संक्त्रमण से बचाव को लेकर जारी सरकारी व प्रशासनिक हिदायतों का पालन करने का आह्वान भी किया है।
मान सरोवर की यात्रा पर गए यात्रियों का एक बड़ा जत्था मंगलवार को नेपाल से भारत के लिए रवाना हुआ तथा इन यात्रियों की अगुवाई के लिए भारतीय दूतावास के निर्देश पर अधिकारियों की टीम देश की रुपईडीहा सीमा पर मुस्तैद रही। आधिकारिक सत्रों ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य की ओर भेजने के लिए रोडवेज की 10 बसें भी लगाई गई हैं। वहीं यात्रा के दौरान एक यात्री की मौत होने के चलते उसके शव को भी सुरक्षित भेजा जाएगा। मृतक यात्री आंध्रप्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मानसरोवर की यात्रा पर बीते पखवारे श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था नेपालगंज होते हुए मानसरोवर को गया था। यात्रा पूरी करने के बाद कैलाश मानसरोवर से यात्री नेपाल से होते हुए भारत के लिए रवाना हुए। भारतीय दूतावास की ओर से इन यात्रियों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उसी के तहत बहराइच के मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कुमार, उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ यादव, परिवहन निगम के रीजनल मैनेजर प्रभाकर मिश्रा, एआरएम इरफान समेत कई अधिकारी मंगलवार को रुपईडीहा पहुंचे। मुख्य राजस्व अधिकारी ने बताया कि मानसरोवर से आने वाले यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए 10 रोडवेज बसों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि आज देर शाम तक आने वाले जत्थे में 103 यात्री शामिल हैं। इसके अलावा आंध्रप्रदेश निवासी एक यात्री की मानसरोवर में मौत भी हुई है। उसके शव को सुरक्षित आंध्र प्रदेश भेजने की व्यवस्था की गई है। इस मौके पर नेपाल सीमा में नेपाली अधिकारी भी मौजूद रहे। नेपालगंज प्रहरी कार्यालय इंचार्ज सुनील शाह ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में आंध्रप्रदेश निवासी 57 वर्षीय सत्यलक्ष्मी नारायण सुब्बा का निधन हुआ है। उनका पोस्टमार्टम चीन में किया गया। दोनों देशों के दूतावास की मंत्रणा के बाद शव को हवाई जहाज से नेपाल के रांझा एयरपोर्ट लाया गया है। वहां से भारतीय एंबुलेंस के द्वारा शव भारत भेजने की तैयारी की जा रही है। गौर हो कि नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले डेढ़ हजार से अधिक भारतीय तीर्थयात्री नेपाल चीन सीमा के दोनों ओर फंस गये हैं थे। भारतीय दूतावास ने यात्रियों की मदद के लिए एक टीम तैनात की थी। बता दें कि कैलाश मानसरोवर यात्रा हर साल जून और सितंबर के बीच दो अलग-अलग रास्तों लिपुलेख पास (उत्तराखंड) और नाथू ला पास (सिक्किम) के जरिए चीनी सरकार के सहयोग से विदेश मंत्रालय द्वारा यात्रा आयोजित की जाती है। नाथू ला रास्ता साल 2015 में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए खोला गया था। यह रास्ता पार करने के बाद, तीर्थयात्रियों को कैलाश ले जाया जाता है।
मान सरोवर की यात्रा पर गए यात्रियों का एक बड़ा जत्था मंगलवार को नेपाल से भारत के लिए रवाना हुआ तथा इन यात्रियों की अगुवाई के लिए भारतीय दूतावास के निर्देश पर अधिकारियों की टीम देश की रुपईडीहा सीमा पर मुस्तैद रही। आधिकारिक सत्रों ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य की ओर भेजने के लिए रोडवेज की दस बसें भी लगाई गई हैं। वहीं यात्रा के दौरान एक यात्री की मौत होने के चलते उसके शव को भी सुरक्षित भेजा जाएगा। मृतक यात्री आंध्रप्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मानसरोवर की यात्रा पर बीते पखवारे श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था नेपालगंज होते हुए मानसरोवर को गया था। यात्रा पूरी करने के बाद कैलाश मानसरोवर से यात्री नेपाल से होते हुए भारत के लिए रवाना हुए। भारतीय दूतावास की ओर से इन यात्रियों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उसी के तहत बहराइच के मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कुमार, उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ यादव, परिवहन निगम के रीजनल मैनेजर प्रभाकर मिश्रा, एआरएम इरफान समेत कई अधिकारी मंगलवार को रुपईडीहा पहुंचे। मुख्य राजस्व अधिकारी ने बताया कि मानसरोवर से आने वाले यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दस रोडवेज बसों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि आज देर शाम तक आने वाले जत्थे में एक सौ तीन यात्री शामिल हैं। इसके अलावा आंध्रप्रदेश निवासी एक यात्री की मानसरोवर में मौत भी हुई है। उसके शव को सुरक्षित आंध्र प्रदेश भेजने की व्यवस्था की गई है। इस मौके पर नेपाल सीमा में नेपाली अधिकारी भी मौजूद रहे। नेपालगंज प्रहरी कार्यालय इंचार्ज सुनील शाह ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में आंध्रप्रदेश निवासी सत्तावन वर्षीय सत्यलक्ष्मी नारायण सुब्बा का निधन हुआ है। उनका पोस्टमार्टम चीन में किया गया। दोनों देशों के दूतावास की मंत्रणा के बाद शव को हवाई जहाज से नेपाल के रांझा एयरपोर्ट लाया गया है। वहां से भारतीय एंबुलेंस के द्वारा शव भारत भेजने की तैयारी की जा रही है। गौर हो कि नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले डेढ़ हजार से अधिक भारतीय तीर्थयात्री नेपाल चीन सीमा के दोनों ओर फंस गये हैं थे। भारतीय दूतावास ने यात्रियों की मदद के लिए एक टीम तैनात की थी। बता दें कि कैलाश मानसरोवर यात्रा हर साल जून और सितंबर के बीच दो अलग-अलग रास्तों लिपुलेख पास और नाथू ला पास के जरिए चीनी सरकार के सहयोग से विदेश मंत्रालय द्वारा यात्रा आयोजित की जाती है। नाथू ला रास्ता साल दो हज़ार पंद्रह में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए खोला गया था। यह रास्ता पार करने के बाद, तीर्थयात्रियों को कैलाश ले जाया जाता है।
सिंगल पेरेंट बनने का फैसला लेकर IVF टेक्नोलॉजी की मदद लेने वाले तुषार कपूर बॉलीवुड के पहले सेलिब्रिटी हैं। इनसे पहले आमिर खान और शाहरुख खान भी इस टेक्नोलॉजी की मदद ले चुके हैं। लेकिन दोनों ही शादीशुदा हैं। आमिर के बेटे आजाद 5 साल के हो चुके हैं और शाहरुख के क्यूट अबराम 3 साल के हैं। दोनों ही अकसर बी-टाउन पार्टीज और इवेंट्स में दिख जाते हैं। अबराम ने तो अभी से अच्छी खासी फैन फॉलोइंग बना ली है। शाहरुख और गौरी जब भी अबराम की कोई तस्वीर ट्वीट करते हैं तो वह सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो अगले किंग खान हो सकते हैं अबराम।
सिंगल पेरेंट बनने का फैसला लेकर IVF टेक्नोलॉजी की मदद लेने वाले तुषार कपूर बॉलीवुड के पहले सेलिब्रिटी हैं। इनसे पहले आमिर खान और शाहरुख खान भी इस टेक्नोलॉजी की मदद ले चुके हैं। लेकिन दोनों ही शादीशुदा हैं। आमिर के बेटे आजाद पाँच साल के हो चुके हैं और शाहरुख के क्यूट अबराम तीन साल के हैं। दोनों ही अकसर बी-टाउन पार्टीज और इवेंट्स में दिख जाते हैं। अबराम ने तो अभी से अच्छी खासी फैन फॉलोइंग बना ली है। शाहरुख और गौरी जब भी अबराम की कोई तस्वीर ट्वीट करते हैं तो वह सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो अगले किंग खान हो सकते हैं अबराम।
नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को रूस के पांच बैंकों- रोसिया, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रोम्सवाजबैंक और ब्लैक सी बैंक के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की। उन्होंने इसे 'हम जो करने के लिए तैयार हैं उसका पहला बैराज' कहा। बीबीसी ने बताया कि तीन व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों की भी घोषणा की गई है। यूके सरकार ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का विवरण प्रकाशित किया है। यह तीन व्यक्तियों - गेनाडी टिमचेंको, बोरिस रोटेनबर्ग और इगोर रोटेनबर्ग की संपत्ति को फ्रीज कर देगा। लिबरल डेमोक्रेट नेता एड डेवी ने यूके के पीएम के बयान का स्वागत किया, लेकिन उनसे प्रतिबंधों पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने ब्रिटेन से पुतिन के 'क्रोनियों' की संपत्ति जब्त करने और इन 'कुलीन वर्गो' को देश से बाहर निकालने का आह्वान किया। डेवी ने यह भी पूछा कि क्या जॉनसन यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल को सेंट पीटर्सबर्ग से स्थानांतरित करने के लिए जोर देंगे। जवाब में पीएम ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह 'अकल्पनीय' है कि एक संप्रभु देश (यूक्रेन) पर रूसी आक्रमण के बाद प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट हो सकते हैं। रूसी धन के बारे में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन 'लंदन में गलत तरीके से अर्जित' और पुतिन के 'क्रोनीज' पर नकेल कस रहा है। ब्रिटेन के कई सांसदों ने इस बात पर चिंता जताई है कि मंगलवार को घोषित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। बीबीसी ने बताया कि कुछ लोग अधिकांश रूसी बैंकों को और अधिक व्यक्तियों के साथ काली सूची में डालने की मांग कर रहे हैं। एक सुझाव है कि मंगलवार दोपहर को जो घोषणा की गई है, वह एक निवारक के लिए पर्याप्त नहीं है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रतिबंधों का पहला बैराज है, यदि रूसी कार्रवाई बढ़ती है तो वह और अधिक कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को रूस के पांच बैंकों- रोसिया, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रोम्सवाजबैंक और ब्लैक सी बैंक के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की। उन्होंने इसे 'हम जो करने के लिए तैयार हैं उसका पहला बैराज' कहा। बीबीसी ने बताया कि तीन व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों की भी घोषणा की गई है। यूके सरकार ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का विवरण प्रकाशित किया है। यह तीन व्यक्तियों - गेनाडी टिमचेंको, बोरिस रोटेनबर्ग और इगोर रोटेनबर्ग की संपत्ति को फ्रीज कर देगा। लिबरल डेमोक्रेट नेता एड डेवी ने यूके के पीएम के बयान का स्वागत किया, लेकिन उनसे प्रतिबंधों पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने ब्रिटेन से पुतिन के 'क्रोनियों' की संपत्ति जब्त करने और इन 'कुलीन वर्गो' को देश से बाहर निकालने का आह्वान किया। डेवी ने यह भी पूछा कि क्या जॉनसन यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल को सेंट पीटर्सबर्ग से स्थानांतरित करने के लिए जोर देंगे। जवाब में पीएम ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह 'अकल्पनीय' है कि एक संप्रभु देश पर रूसी आक्रमण के बाद प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट हो सकते हैं। रूसी धन के बारे में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन 'लंदन में गलत तरीके से अर्जित' और पुतिन के 'क्रोनीज' पर नकेल कस रहा है। ब्रिटेन के कई सांसदों ने इस बात पर चिंता जताई है कि मंगलवार को घोषित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। बीबीसी ने बताया कि कुछ लोग अधिकांश रूसी बैंकों को और अधिक व्यक्तियों के साथ काली सूची में डालने की मांग कर रहे हैं। एक सुझाव है कि मंगलवार दोपहर को जो घोषणा की गई है, वह एक निवारक के लिए पर्याप्त नहीं है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रतिबंधों का पहला बैराज है, यदि रूसी कार्रवाई बढ़ती है तो वह और अधिक कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
लखनऊ। बंथरा इलाके में शराब पीने का विरोध करने पर एक अधेड़ ने शुक्रवार तड़के आम के पेड़ में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। काकोरी इलाके के ईंटगांव निवासी सोनेलाल 40 पिछले 10 वर्षों से बंथरा इलाके में रामचौरा रोड स्थित नगवा नाले के पास अपनी पत्नी केशकली, बेटी काजल 16, प्रज्ञा 14, प्रांसी 12 और बेटे सत्यम 10 व शिवम 08 के साथ रहता था। पुलिस के मुताबिक सोनेलाल गुरुवार रात शराब के नशे में घर पहुंचा और केश कली के ऊपर भड़क गया। जब केश कली ने शराब का विरोध किया तो दोनों के बीच शराब को लेकर कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद घर के सभी सदस्य अपने अपने कमरे में सो गए। सोनेलाल शुक्रवार सुबह घर से शौच के लिए निकला, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटा। कुछ देर बाद उधर से गुजर रहे राहगीरों ने सोनेलाल को घर से कुछ दूरी पर स्थित आम के पेड़ से मफलर के सहारे मृत अवस्था में लटका देख इसकी सूचना उसके परिजनों और पुलिस को दी। सोनेलाल को फांसी लगाकर जान गवाने की जानकारी पाकर उसके परिजनों के होश उड़ गए और वह आनन-फानन मौके पर पहुंचे। वहीं सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पेड़ से नीचे उतरवाया और छानबीन करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
लखनऊ। बंथरा इलाके में शराब पीने का विरोध करने पर एक अधेड़ ने शुक्रवार तड़के आम के पेड़ में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। काकोरी इलाके के ईंटगांव निवासी सोनेलाल चालीस पिछले दस वर्षों से बंथरा इलाके में रामचौरा रोड स्थित नगवा नाले के पास अपनी पत्नी केशकली, बेटी काजल सोलह, प्रज्ञा चौदह, प्रांसी बारह और बेटे सत्यम दस व शिवम आठ के साथ रहता था। पुलिस के मुताबिक सोनेलाल गुरुवार रात शराब के नशे में घर पहुंचा और केश कली के ऊपर भड़क गया। जब केश कली ने शराब का विरोध किया तो दोनों के बीच शराब को लेकर कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद घर के सभी सदस्य अपने अपने कमरे में सो गए। सोनेलाल शुक्रवार सुबह घर से शौच के लिए निकला, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटा। कुछ देर बाद उधर से गुजर रहे राहगीरों ने सोनेलाल को घर से कुछ दूरी पर स्थित आम के पेड़ से मफलर के सहारे मृत अवस्था में लटका देख इसकी सूचना उसके परिजनों और पुलिस को दी। सोनेलाल को फांसी लगाकर जान गवाने की जानकारी पाकर उसके परिजनों के होश उड़ गए और वह आनन-फानन मौके पर पहुंचे। वहीं सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को पेड़ से नीचे उतरवाया और छानबीन करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
रिचर्ड वेड फर्ले कैलिफ़ोर्निया के सनीवेल में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम्स लैब्स (ईएसएल) में सात सहकर्मियों की 1 9 88 की हत्याओं के लिए जिम्मेदार एक बड़े हत्यारे हैं। हत्याओं के कारण क्या एक सह-कार्यकर्ता की निरंतर चल रही थी। रिचर्ड वेड फेर्ले का जन्म 25 जुलाई, 1 9 48 को टेक्सास में लेकलैंड वायुसेना बेस में हुआ था। उनके पिता वायुसेना में एक विमान मैकेनिक थे, और उनकी मां एक गृहस्थ थीं। उनके छह बच्चे थे, जिनमें से रिचर्ड सबसे बड़ा था। परिवार अक्सर पेटलुमा, कैलिफोर्निया में बसने से पहले चले गए, जब फर्ली आठ साल की थीं। फर्ले की मां के मुताबिक, घर में बहुत प्यार था, लेकिन परिवार ने थोड़ा सा स्नेह दिखाया। अपने बचपन और किशोरों के वर्षों के दौरान, फर्ली एक शांत, अच्छी तरह से व्यवहार करने वाला लड़का था जिसने अपने माता-पिता से थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता थी। हाईस्कूल में, उन्होंने गणित और रसायन शास्त्र में रूचि दिखाई और अपनी पढ़ाई गंभीरता से ली। उन्होंने धूम्रपान नहीं किया, पीया, या नशीली दवाओं का उपयोग नहीं किया, और टेबल टेनिस और शतरंज खेलने, फोटोग्राफी में डबिंग और बेकिंग के साथ खुद का मनोरंजन किया। उन्होंने 520 हाई स्कूल के छात्रों में से 61 वें स्नातक की उपाधि प्राप्त की। मित्रों और पड़ोसियों के मुताबिक, कभी-कभी अपने भाइयों के साथ घबराहट के अलावा, वह एक अहिंसक, अच्छी तरह से मज़ेदार और सहायक युवा व्यक्ति थे। फर्ले ने 1 9 66 में हाईस्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और सांता रोजा कम्युनिटी कॉलेज में भाग लिया, लेकिन एक साल बाद बाहर निकल गया और अमेरिकी नौसेना में शामिल हो गया जहां वह दस साल तक रहा। फर्ले ने नौसेना सबमरीन स्कूल में छः कक्षा में अपनी कक्षा में स्नातक की उपाधि प्राप्त की लेकिन स्वेच्छा से वापस ले लिया। बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें एक क्रिप्टोलॉजिक तकनीशियन बनने के लिए प्रशिक्षित किया गया - एक व्यक्ति जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाए रखता है। वह जानकारी जिसे वह उजागर किया गया था उसे अत्यधिक वर्गीकृत किया गया था। वह शीर्ष गुप्त सुरक्षा मंजूरी के लिए योग्यता प्राप्त की। सुरक्षा मंजूरी के इस स्तर के लिए योग्यता व्यक्तियों की जांच हर पांच साल में दोहराई गई थी। 1 9 77 में अपने निर्वहन के बाद, फर्ले ने सैन जोस में एक घर खरीदा और कैलिफ़ोर्निया के सनीवेल में एक रक्षा ठेकेदार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम्स लेबोरेटरी (ईएसएल) में एक सॉफ्टवेयर तकनीशियन के रूप में काम करना शुरू किया। ईएसएल रणनीतिक सिग्नल प्रोसेसिंग सिस्टम के विकास में शामिल था और अमेरिकी सेना को रणनीतिक पुनर्जागरण प्रणाली का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता था। ईएसएल में फर्ले में शामिल अधिकांश काम को "राष्ट्रीय रक्षा के लिए महत्वपूर्ण" और अत्यधिक संवेदनशील बताया गया था। उन उपकरणों पर उनके काम को शामिल करने में सेना ने दुश्मन बलों के स्थान और ताकत को निर्धारित करने में सक्षम बनाया। 1 9 84 तक, फर्ले को इस काम के लिए चार ईएसएल प्रदर्शन मूल्यांकन प्राप्त हुए। वह स्कोर 99 प्रतिशत, 96 प्रतिशत, 96. 5 प्रतिशत, और 98 प्रतिशत थे। फर्ले अपने कुछ सहकर्मियों के साथ मित्र थे, लेकिन कुछ ने उन्हें अहंकारी, अहंकारी और उबाऊ पाया। उन्हें अपने बंदूक संग्रह और उनकी अच्छी निशानेबाज़ी के बारे में उत्साहित होना पसंद आया। लेकिन फ़र्ले के साथ मिलकर काम करने वाले अन्य लोगों ने उन्हें अपने काम और आम तौर पर एक अच्छा लड़का के बारे में ईमानदार होने के लिए पाया। हालांकि, यह सब बदल गया, 1 9 84 से शुरू हुआ। 1 9 84 के वसंत में, फर्ले को ईएसएल कर्मचारी लौरा ब्लैक से पेश किया गया था। वह 22 साल की थी, एथलेटिक, सुंदर, स्मार्ट और एक साल से कम समय के लिए एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में काम कर रही थी। फर्ले के लिए, यह पहली नजर में प्यार था। ब्लैक के लिए, यह चार साल के लंबे दुःस्वप्न की शुरुआत थी। अगले चार सालों तक, लौरा ब्लैक के लिए फर्ले का आकर्षण एक निरंतर जुनून में बदल गया। पहले ब्लैक विनम्रतापूर्वक अपने निमंत्रण को अस्वीकार कर देगा, लेकिन जब वह उसे समझने में असमर्थ था या उसे स्वीकार नहीं कर पाया, तो उसने उससे बेहतर तरीके से संवाद करना बंद कर दिया। फर्ले ने उसे एक सप्ताह में औसतन पत्र लिखना शुरू किया। उसने अपनी मेज पर पेस्ट्री छोड़ी। उसने उसे दबाने और बार-बार अपने घर से घुमाया। वह उसी दिन एक एरोबिक्स कक्षा में शामिल हो गया जिसमें वह शामिल हो गई। उनकी कॉल इतनी परेशान हो गई कि लौरा एक असूचीबद्ध संख्या में बदल गया। अपने डंठल की वजह से, लॉरा जुलाई 1 9 85 और फरवरी 1 9 88 के बीच तीन बार चले गए, लेकिन फर्ले ने हर बार अपना नया पता पाया और काम पर अपने डेस्क से इसे चुरा लेने के बाद अपने घरों में से एक को चाबी प्राप्त की। 1 9 84 और फरवरी 1 9 88 के पतन के बीच, उन्हें उनसे लगभग 150 से 200 पत्र प्राप्त हुए, जिनमें उन्होंने दो पत्रों को वर्जीनिया में अपने माता-पिता के घर भेज दिया, जहां वह दिसंबर 1 9 84 में जा रही थीं। उन्होंने उन्हें अपने माता-पिता के पते के साथ प्रदान नहीं किया था। ब्लैक के कुछ सहकर्मियों ने ब्लैक के उत्पीड़न के बारे में फर्ले से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने या तो अपमानजनक रूप से या हिंसक कृत्यों को करने की धमकी देकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। अक्टूबर 1 9 85 में, ब्लैक मानव संसाधन विभाग की सहायता के लिए बदल गया। मानव संसाधनों के साथ पहली बैठक के दौरान, फर्ले अपने घर के बाद और उसके काम कंप्यूटर का उपयोग करके ब्लैक को पत्र और उपहार भेजना बंद कर दिया, लेकिन दिसंबर 1 9 85 में, वह अपनी पुरानी आदतों पर वापस आ गया। मानव संसाधन दिसंबर 1 9 85 में और फिर जनवरी 1 9 86 में फिर से कदम उठाए, हर बार फर्ले को एक लिखित चेतावनी जारी करते हुए। जनवरी 1 9 86 की बैठक के बाद, फर्ले ने अपने अपार्टमेंट के बाहर पार्किंग स्थल पर ब्लैक का सामना किया। वार्तालाप के दौरान, ब्लैक ने कहा कि फर्ले ने बंदूकें का उल्लेख किया, उसे बताया कि वह अब उससे पूछने जा रहा था कि क्या करना है, बल्कि उसे बताएं कि क्या करना है। उस सप्ताह के अंत में उन्हें उससे एक पत्र मिला, जिसमें कहा गया कि वह उसे मार नहीं पाएंगे, लेकिन उनके पास "विकल्पों की पूरी श्रृंखला थी, प्रत्येक खराब और बदतर हो रहा था। " उसने उसे चेतावनी दी कि, "मैं अपनी बंदूकें करता हूं और मैं उनके साथ अच्छा हूं," और उससे पूछा कि उसे "धक्का" न दें। उन्होंने आगे कहा कि यदि उनमें से कोई भी उपज नहीं करता है, "बहुत जल्द मैं दबाव में फंस जाता हूं और अमोक को अपने रास्ते में सबकुछ नष्ट कर देता हूं जब तक कि पुलिस मुझे पकड़ न दे और मुझे मार डाले। " फरवरी 1 9 86 के मध्य में, फर्ले ने मानव संसाधन प्रबंधकों में से एक का सामना किया और उन्हें बताया कि ईएसएल को अन्य व्यक्तियों के साथ अपने रिश्तों को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं था। मैनेजर ने फर्ले को चेतावनी दी कि यौन उत्पीड़न अवैध था और अगर वह अकेले काले नहीं छोड़ा, तो उसका आचरण उसकी समाप्ति का कारण बन जाएगा। फर्ले ने उसे बताया कि अगर उसे ईएसएल से समाप्त कर दिया गया था, तो उसके पास रहने के लिए और कुछ नहीं होगा, कि उसके पास बंदूकें थीं और उन्हें इस्तेमाल करने से डर नहीं था, और वह "लोगों को उनके साथ ले जाएगा। " मैनेजर ने उससे सीधे पूछा कि क्या वह कह रहा था कि वह उसे मार देगा , जिस पर फर्ले ने हाँ का जवाब दिया था, लेकिन वह दूसरों को भी ले जाएगा। फर्ले ने ब्लैक डंठल जारी रखा, और मई 1 9 86 में, ईएसएल के साथ नौ साल बाद, उसे निकाल दिया गया। निकाल दिया जा रहा है Farley के जुनून को ईंधन भरने लग रहा था। अगले 18 महीनों के लिए, उन्होंने ब्लैक डंठल जारी रखा, और उनके साथ उनके संचार अधिक आक्रामक और धमकी बन गए। उन्होंने ईएसएल पार्किंग स्थल के आसपास छिपकर समय बिताया। 1 9 86 की गर्मियों में, फर्ले ने मेई चांग नाम की एक महिला से डेटिंग शुरू की, लेकिन उन्होंने ब्लैक को परेशान करना जारी रखा। उन्हें वित्तीय समस्याएं भी थीं। उसने अपना घर, उसकी कार और उसके कंप्यूटर को खो दिया और उसने पिछले करों में $ 20,000 से अधिक का भुगतान किया। इनमें से कोई भी ब्लैक के उत्पीड़न को रोक नहीं पाया, और जुलाई 1 9 87 में, उसने उसे लिखा, उसे चेतावनी देने के लिए चेतावनी दी। उन्होंने लिखा, "यह वास्तव में आपके लिए नहीं हो सकता है कि अगर मैं फैसला करता हूं कि मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है तो मैं आपको परेशान करने के लिए कितना दूर हूं। " अगले कई महीनों में इसी लाइन के साथ पत्र जारी रहे। नवंबर 1 9 87 में फर्ले ने लिखा, "आपने मुझे नौकरी की लागत, इक्विटी करों में चालीस हजार डॉलर का भुगतान नहीं किया है, और एक फौजदारी है। फिर भी मैं तुम्हें अभी भी पसंद करता हूं। आप यह जानना क्यों चाहते हैं कि मैं कितना दूर जाऊंगा? " उन्होंने पत्र को समाप्त कर दिया, "मुझे बिल्कुल चारों ओर धक्का नहीं दिया जाएगा, और मैं अच्छा होने से थक गया हूं। " एक और पत्र में, उसने उसे बताया कि वह उसे मारना नहीं चाहता था क्योंकि वह चाहता था कि उसे अपने रोमांटिक संकेतों का जवाब न देने के परिणामों पर खेद पड़े। जनवरी में, लौरा को अपनी कार पर एक नोट मिला, जिसमें उसकी अपार्टमेंट कुंजी संलग्न की एक प्रति थी। डरते हुए और उसकी भेद्यता से पूरी तरह से अवगत होने पर उसने एक वकील की मदद लेने का फैसला किया। 8 फरवरी, 1 9 88 को, उन्हें रिचर्ड फर्ले के खिलाफ एक अस्थायी संयम आदेश दिया गया था, जिसमें शामिल था कि वह उससे 300 गज दूर रहें और किसी भी तरह से उससे संपर्क न करें। फर्ले को संयम के आदेश के एक दिन बाद उन्होंने अपने बदला लेने की योजना शुरू कर दी। उन्होंने बंदूकें और गोला बारूद में $ 2,000 से अधिक खरीदे। उन्होंने अपने वकील से संपर्क किया ताकि लौरा अपनी इच्छानुसार हटा दिया जा सके। उन्होंने लॉरा के वकील को यह भी एक पैकेज भेजा कि उनका प्रमाण था कि वह और लौरा का गुप्त संबंध था। रोकथाम के आदेश की अदालत की तारीख 17 फरवरी, 1 9 88 थी। 16 फरवरी को, फर्ले एक किराए पर मोटर घर में ईएसएल चली गई। वह अपने कंधे, काले चमड़े के दस्ताने, और उसके सिर और कान के आस-पास के चारों ओर एक स्कार्फ पर फंसे हुए एक भारित बैंडोलर के साथ सैन्य थकावट में पहना था। मोटर घर छोड़ने से पहले, उसने 12-गेज बेनेली दंगा अर्द्ध स्वचालित शॉटगन, एक रग्जर एम -77। 22-250 राइफल के साथ एक स्कोप के साथ खुद को सशस्त्र बनाया, एक मॉसबर्ग 12-गेज पंप एक्शन शॉटगन, एक सेंटीनेल। 22 डब्लूएमआर रिवाल्वर , एक स्मिथ एंड वेसन . 357 मैग्नम रिवाल्वर, ब्राउनिंग . 380 एसीपी पिस्तौल और स्मिथ एंड वेसन 9 मिमी पिस्तौल। उन्होंने अपने बेल्ट में एक चाकू भी लगाया, एक धूम्रपान बम और एक गैसोलीन कंटेनर पकड़ा, और फिर ईएसएल के प्रवेश द्वार के लिए नेतृत्व किया। जैसे ही फर्ले ने ईएसएल पार्किंग स्थल में अपना रास्ता बनाया, उन्होंने गोली मार दी और अपने पहले शिकार लैरी केन को गोली मार दी और कवर के लिए डक गए अन्य लोगों की शूटिंग जारी रखी। उन्होंने सुरक्षा ग्लास के माध्यम से विस्फोट करके इमारत में प्रवेश किया और श्रमिकों और उपकरणों पर शूटिंग पर रखा। उन्होंने लौरा ब्लैक के कार्यालय में अपना रास्ता बना दिया। उसने अपने कार्यालय में दरवाजा बंद करके खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसने इसके माध्यम से गोली मार दी। फिर उसने सीधे ब्लैक पर गोली मार दी। एक गोली मिस गई और दूसरे ने उसके कंधे को तोड़ दिया, और वह बेहोश हो गई। उसने उसे छोड़ दिया और इमारत के माध्यम से चले गए, कमरे में कमरे में जा रहे थे, उन लोगों पर शूटिंग कर दी जिन्हें उन्होंने डेस्क के नीचे छुपाया या ऑफिस दरवाजे के पीछे बाधित किया। जब SWAT टीम पहुंची, तो फर्ली इमारत के अंदर कदम पर रहने से अपने स्निपर्स से बचने में कामयाब रहे। एक बंधक वार्ताकार फर्ले के साथ संपर्क करने में सक्षम था, और दोनों ने पांच घंटे की घेराबंदी के दौरान बातचीत की और बंद कर दिया। फर्ले ने वार्ताकार से कहा कि वह उपकरण शूट करने के लिए ईएसएल गए थे और उनके मन में विशिष्ट लोग थे। इसने बाद में फर्ले के वकील का खंडन किया जिसने रक्षा का उपयोग किया कि फर्ले वहां लौरा ब्लैक के सामने खुद को मारने के लिए वहां गया था, लोगों पर गोली मार नहीं। वार्ताकार के साथ अपनी बातचीत के दौरान, फर्ले ने सात लोगों की हत्या के लिए कभी भी कोई पछतावा व्यक्त नहीं किया और स्वीकार किया कि उन्हें लौरा ब्लैक को छोड़कर पीड़ितों में से कोई भी नहीं जानता था। भूख अंततः तबाही खत्म हो गया है। फर्ली भूख लगी थी और एक सैंडविच के लिए कहा था। उन्होंने सैंडविच के बदले में आत्मसमर्पण किया। लौरा ब्लैक समेत सात लोग मारे गए और चार घायल हो गए। पीड़ित पीड़ितोंः घायल लौरा ब्लैक, ग्रेगरी स्कॉट, रिचर्ड टाउन्सले और पैटी मार्कोट थे। फर्ले पर सात मौतों की पूंजी हत्या, एक घातक हथियार, दूसरी डिग्री चोरी, और बर्बरता के साथ हमला किया गया था। परीक्षण के दौरान, यह स्पष्ट हो गया कि फर्ले अभी भी ब्लैक के साथ अपने गैर-रिश्ते के बारे में इनकार कर रहा था। उन्हें अपने अपराध की गहराई की समझ में कमी महसूस हुई। उन्होंने एक और कैदी को बताया, "मुझे लगता है कि यह मेरा पहला अपराध है क्योंकि वे उदार होना चाहिए। " उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने इसे फिर से किया, तो उन्हें उस पर "पुस्तक फेंकना" चाहिए। एक जूरी ने उसे सभी आरोपों के दोषी पाया, और 17 जनवरी 1 99 2 को, फर्ले को मौत की सजा सुनाई गई । 2 जुलाई, 200 9 को, कैलिफ़ोर्निया सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मृत्युदंड अपील से इनकार कर दिया। 2013 तक, सैन क्वींटिन जेल में फर्ले की मौत की पंक्ति पर है।
रिचर्ड वेड फर्ले कैलिफ़ोर्निया के सनीवेल में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम्स लैब्स में सात सहकर्मियों की एक नौ अठासी की हत्याओं के लिए जिम्मेदार एक बड़े हत्यारे हैं। हत्याओं के कारण क्या एक सह-कार्यकर्ता की निरंतर चल रही थी। रिचर्ड वेड फेर्ले का जन्म पच्चीस जुलाई, एक नौ अड़तालीस को टेक्सास में लेकलैंड वायुसेना बेस में हुआ था। उनके पिता वायुसेना में एक विमान मैकेनिक थे, और उनकी मां एक गृहस्थ थीं। उनके छह बच्चे थे, जिनमें से रिचर्ड सबसे बड़ा था। परिवार अक्सर पेटलुमा, कैलिफोर्निया में बसने से पहले चले गए, जब फर्ली आठ साल की थीं। फर्ले की मां के मुताबिक, घर में बहुत प्यार था, लेकिन परिवार ने थोड़ा सा स्नेह दिखाया। अपने बचपन और किशोरों के वर्षों के दौरान, फर्ली एक शांत, अच्छी तरह से व्यवहार करने वाला लड़का था जिसने अपने माता-पिता से थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता थी। हाईस्कूल में, उन्होंने गणित और रसायन शास्त्र में रूचि दिखाई और अपनी पढ़ाई गंभीरता से ली। उन्होंने धूम्रपान नहीं किया, पीया, या नशीली दवाओं का उपयोग नहीं किया, और टेबल टेनिस और शतरंज खेलने, फोटोग्राफी में डबिंग और बेकिंग के साथ खुद का मनोरंजन किया। उन्होंने पाँच सौ बीस हाई स्कूल के छात्रों में से इकसठ वें स्नातक की उपाधि प्राप्त की। मित्रों और पड़ोसियों के मुताबिक, कभी-कभी अपने भाइयों के साथ घबराहट के अलावा, वह एक अहिंसक, अच्छी तरह से मज़ेदार और सहायक युवा व्यक्ति थे। फर्ले ने एक नौ छयासठ में हाईस्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और सांता रोजा कम्युनिटी कॉलेज में भाग लिया, लेकिन एक साल बाद बाहर निकल गया और अमेरिकी नौसेना में शामिल हो गया जहां वह दस साल तक रहा। फर्ले ने नौसेना सबमरीन स्कूल में छः कक्षा में अपनी कक्षा में स्नातक की उपाधि प्राप्त की लेकिन स्वेच्छा से वापस ले लिया। बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें एक क्रिप्टोलॉजिक तकनीशियन बनने के लिए प्रशिक्षित किया गया - एक व्यक्ति जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाए रखता है। वह जानकारी जिसे वह उजागर किया गया था उसे अत्यधिक वर्गीकृत किया गया था। वह शीर्ष गुप्त सुरक्षा मंजूरी के लिए योग्यता प्राप्त की। सुरक्षा मंजूरी के इस स्तर के लिए योग्यता व्यक्तियों की जांच हर पांच साल में दोहराई गई थी। एक नौ सतहत्तर में अपने निर्वहन के बाद, फर्ले ने सैन जोस में एक घर खरीदा और कैलिफ़ोर्निया के सनीवेल में एक रक्षा ठेकेदार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम्स लेबोरेटरी में एक सॉफ्टवेयर तकनीशियन के रूप में काम करना शुरू किया। ईएसएल रणनीतिक सिग्नल प्रोसेसिंग सिस्टम के विकास में शामिल था और अमेरिकी सेना को रणनीतिक पुनर्जागरण प्रणाली का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता था। ईएसएल में फर्ले में शामिल अधिकांश काम को "राष्ट्रीय रक्षा के लिए महत्वपूर्ण" और अत्यधिक संवेदनशील बताया गया था। उन उपकरणों पर उनके काम को शामिल करने में सेना ने दुश्मन बलों के स्थान और ताकत को निर्धारित करने में सक्षम बनाया। एक नौ चौरासी तक, फर्ले को इस काम के लिए चार ईएसएल प्रदर्शन मूल्यांकन प्राप्त हुए। वह स्कोर निन्यानवे प्रतिशत, छियानवे प्रतिशत, छियानवे. पाँच प्रतिशत, और अट्ठानवे प्रतिशत थे। फर्ले अपने कुछ सहकर्मियों के साथ मित्र थे, लेकिन कुछ ने उन्हें अहंकारी, अहंकारी और उबाऊ पाया। उन्हें अपने बंदूक संग्रह और उनकी अच्छी निशानेबाज़ी के बारे में उत्साहित होना पसंद आया। लेकिन फ़र्ले के साथ मिलकर काम करने वाले अन्य लोगों ने उन्हें अपने काम और आम तौर पर एक अच्छा लड़का के बारे में ईमानदार होने के लिए पाया। हालांकि, यह सब बदल गया, एक नौ चौरासी से शुरू हुआ। एक नौ चौरासी के वसंत में, फर्ले को ईएसएल कर्मचारी लौरा ब्लैक से पेश किया गया था। वह बाईस साल की थी, एथलेटिक, सुंदर, स्मार्ट और एक साल से कम समय के लिए एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में काम कर रही थी। फर्ले के लिए, यह पहली नजर में प्यार था। ब्लैक के लिए, यह चार साल के लंबे दुःस्वप्न की शुरुआत थी। अगले चार सालों तक, लौरा ब्लैक के लिए फर्ले का आकर्षण एक निरंतर जुनून में बदल गया। पहले ब्लैक विनम्रतापूर्वक अपने निमंत्रण को अस्वीकार कर देगा, लेकिन जब वह उसे समझने में असमर्थ था या उसे स्वीकार नहीं कर पाया, तो उसने उससे बेहतर तरीके से संवाद करना बंद कर दिया। फर्ले ने उसे एक सप्ताह में औसतन पत्र लिखना शुरू किया। उसने अपनी मेज पर पेस्ट्री छोड़ी। उसने उसे दबाने और बार-बार अपने घर से घुमाया। वह उसी दिन एक एरोबिक्स कक्षा में शामिल हो गया जिसमें वह शामिल हो गई। उनकी कॉल इतनी परेशान हो गई कि लौरा एक असूचीबद्ध संख्या में बदल गया। अपने डंठल की वजह से, लॉरा जुलाई एक नौ पचासी और फरवरी एक नौ अठासी के बीच तीन बार चले गए, लेकिन फर्ले ने हर बार अपना नया पता पाया और काम पर अपने डेस्क से इसे चुरा लेने के बाद अपने घरों में से एक को चाबी प्राप्त की। एक नौ चौरासी और फरवरी एक नौ अठासी के पतन के बीच, उन्हें उनसे लगभग एक सौ पचास से दो सौ पत्र प्राप्त हुए, जिनमें उन्होंने दो पत्रों को वर्जीनिया में अपने माता-पिता के घर भेज दिया, जहां वह दिसंबर एक नौ चौरासी में जा रही थीं। उन्होंने उन्हें अपने माता-पिता के पते के साथ प्रदान नहीं किया था। ब्लैक के कुछ सहकर्मियों ने ब्लैक के उत्पीड़न के बारे में फर्ले से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने या तो अपमानजनक रूप से या हिंसक कृत्यों को करने की धमकी देकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। अक्टूबर एक नौ पचासी में, ब्लैक मानव संसाधन विभाग की सहायता के लिए बदल गया। मानव संसाधनों के साथ पहली बैठक के दौरान, फर्ले अपने घर के बाद और उसके काम कंप्यूटर का उपयोग करके ब्लैक को पत्र और उपहार भेजना बंद कर दिया, लेकिन दिसंबर एक नौ पचासी में, वह अपनी पुरानी आदतों पर वापस आ गया। मानव संसाधन दिसंबर एक नौ पचासी में और फिर जनवरी एक नौ छियासी में फिर से कदम उठाए, हर बार फर्ले को एक लिखित चेतावनी जारी करते हुए। जनवरी एक नौ छियासी की बैठक के बाद, फर्ले ने अपने अपार्टमेंट के बाहर पार्किंग स्थल पर ब्लैक का सामना किया। वार्तालाप के दौरान, ब्लैक ने कहा कि फर्ले ने बंदूकें का उल्लेख किया, उसे बताया कि वह अब उससे पूछने जा रहा था कि क्या करना है, बल्कि उसे बताएं कि क्या करना है। उस सप्ताह के अंत में उन्हें उससे एक पत्र मिला, जिसमें कहा गया कि वह उसे मार नहीं पाएंगे, लेकिन उनके पास "विकल्पों की पूरी श्रृंखला थी, प्रत्येक खराब और बदतर हो रहा था। " उसने उसे चेतावनी दी कि, "मैं अपनी बंदूकें करता हूं और मैं उनके साथ अच्छा हूं," और उससे पूछा कि उसे "धक्का" न दें। उन्होंने आगे कहा कि यदि उनमें से कोई भी उपज नहीं करता है, "बहुत जल्द मैं दबाव में फंस जाता हूं और अमोक को अपने रास्ते में सबकुछ नष्ट कर देता हूं जब तक कि पुलिस मुझे पकड़ न दे और मुझे मार डाले। " फरवरी एक नौ छियासी के मध्य में, फर्ले ने मानव संसाधन प्रबंधकों में से एक का सामना किया और उन्हें बताया कि ईएसएल को अन्य व्यक्तियों के साथ अपने रिश्तों को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं था। मैनेजर ने फर्ले को चेतावनी दी कि यौन उत्पीड़न अवैध था और अगर वह अकेले काले नहीं छोड़ा, तो उसका आचरण उसकी समाप्ति का कारण बन जाएगा। फर्ले ने उसे बताया कि अगर उसे ईएसएल से समाप्त कर दिया गया था, तो उसके पास रहने के लिए और कुछ नहीं होगा, कि उसके पास बंदूकें थीं और उन्हें इस्तेमाल करने से डर नहीं था, और वह "लोगों को उनके साथ ले जाएगा। " मैनेजर ने उससे सीधे पूछा कि क्या वह कह रहा था कि वह उसे मार देगा , जिस पर फर्ले ने हाँ का जवाब दिया था, लेकिन वह दूसरों को भी ले जाएगा। फर्ले ने ब्लैक डंठल जारी रखा, और मई एक नौ छियासी में, ईएसएल के साथ नौ साल बाद, उसे निकाल दिया गया। निकाल दिया जा रहा है Farley के जुनून को ईंधन भरने लग रहा था। अगले अट्ठारह महीनों के लिए, उन्होंने ब्लैक डंठल जारी रखा, और उनके साथ उनके संचार अधिक आक्रामक और धमकी बन गए। उन्होंने ईएसएल पार्किंग स्थल के आसपास छिपकर समय बिताया। एक नौ छियासी की गर्मियों में, फर्ले ने मेई चांग नाम की एक महिला से डेटिंग शुरू की, लेकिन उन्होंने ब्लैक को परेशान करना जारी रखा। उन्हें वित्तीय समस्याएं भी थीं। उसने अपना घर, उसकी कार और उसके कंप्यूटर को खो दिया और उसने पिछले करों में बीस डॉलर,शून्य से अधिक का भुगतान किया। इनमें से कोई भी ब्लैक के उत्पीड़न को रोक नहीं पाया, और जुलाई एक नौ सत्तासी में, उसने उसे लिखा, उसे चेतावनी देने के लिए चेतावनी दी। उन्होंने लिखा, "यह वास्तव में आपके लिए नहीं हो सकता है कि अगर मैं फैसला करता हूं कि मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है तो मैं आपको परेशान करने के लिए कितना दूर हूं। " अगले कई महीनों में इसी लाइन के साथ पत्र जारी रहे। नवंबर एक नौ सत्तासी में फर्ले ने लिखा, "आपने मुझे नौकरी की लागत, इक्विटी करों में चालीस हजार डॉलर का भुगतान नहीं किया है, और एक फौजदारी है। फिर भी मैं तुम्हें अभी भी पसंद करता हूं। आप यह जानना क्यों चाहते हैं कि मैं कितना दूर जाऊंगा? " उन्होंने पत्र को समाप्त कर दिया, "मुझे बिल्कुल चारों ओर धक्का नहीं दिया जाएगा, और मैं अच्छा होने से थक गया हूं। " एक और पत्र में, उसने उसे बताया कि वह उसे मारना नहीं चाहता था क्योंकि वह चाहता था कि उसे अपने रोमांटिक संकेतों का जवाब न देने के परिणामों पर खेद पड़े। जनवरी में, लौरा को अपनी कार पर एक नोट मिला, जिसमें उसकी अपार्टमेंट कुंजी संलग्न की एक प्रति थी। डरते हुए और उसकी भेद्यता से पूरी तरह से अवगत होने पर उसने एक वकील की मदद लेने का फैसला किया। आठ फरवरी, एक नौ अठासी को, उन्हें रिचर्ड फर्ले के खिलाफ एक अस्थायी संयम आदेश दिया गया था, जिसमें शामिल था कि वह उससे तीन सौ गज दूर रहें और किसी भी तरह से उससे संपर्क न करें। फर्ले को संयम के आदेश के एक दिन बाद उन्होंने अपने बदला लेने की योजना शुरू कर दी। उन्होंने बंदूकें और गोला बारूद में दो डॉलर,शून्य से अधिक खरीदे। उन्होंने अपने वकील से संपर्क किया ताकि लौरा अपनी इच्छानुसार हटा दिया जा सके। उन्होंने लॉरा के वकील को यह भी एक पैकेज भेजा कि उनका प्रमाण था कि वह और लौरा का गुप्त संबंध था। रोकथाम के आदेश की अदालत की तारीख सत्रह फरवरी, एक नौ अठासी थी। सोलह फरवरी को, फर्ले एक किराए पर मोटर घर में ईएसएल चली गई। वह अपने कंधे, काले चमड़े के दस्ताने, और उसके सिर और कान के आस-पास के चारों ओर एक स्कार्फ पर फंसे हुए एक भारित बैंडोलर के साथ सैन्य थकावट में पहना था। मोटर घर छोड़ने से पहले, उसने बारह-गेज बेनेली दंगा अर्द्ध स्वचालित शॉटगन, एक रग्जर एम -सतहत्तर। बाईस-दो सौ पचास राइफल के साथ एक स्कोप के साथ खुद को सशस्त्र बनाया, एक मॉसबर्ग बारह-गेज पंप एक्शन शॉटगन, एक सेंटीनेल। बाईस डब्लूएमआर रिवाल्वर , एक स्मिथ एंड वेसन . तीन सौ सत्तावन मैग्नम रिवाल्वर, ब्राउनिंग . तीन सौ अस्सी एसीपी पिस्तौल और स्मिथ एंड वेसन नौ मिमी पिस्तौल। उन्होंने अपने बेल्ट में एक चाकू भी लगाया, एक धूम्रपान बम और एक गैसोलीन कंटेनर पकड़ा, और फिर ईएसएल के प्रवेश द्वार के लिए नेतृत्व किया। जैसे ही फर्ले ने ईएसएल पार्किंग स्थल में अपना रास्ता बनाया, उन्होंने गोली मार दी और अपने पहले शिकार लैरी केन को गोली मार दी और कवर के लिए डक गए अन्य लोगों की शूटिंग जारी रखी। उन्होंने सुरक्षा ग्लास के माध्यम से विस्फोट करके इमारत में प्रवेश किया और श्रमिकों और उपकरणों पर शूटिंग पर रखा। उन्होंने लौरा ब्लैक के कार्यालय में अपना रास्ता बना दिया। उसने अपने कार्यालय में दरवाजा बंद करके खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसने इसके माध्यम से गोली मार दी। फिर उसने सीधे ब्लैक पर गोली मार दी। एक गोली मिस गई और दूसरे ने उसके कंधे को तोड़ दिया, और वह बेहोश हो गई। उसने उसे छोड़ दिया और इमारत के माध्यम से चले गए, कमरे में कमरे में जा रहे थे, उन लोगों पर शूटिंग कर दी जिन्हें उन्होंने डेस्क के नीचे छुपाया या ऑफिस दरवाजे के पीछे बाधित किया। जब SWAT टीम पहुंची, तो फर्ली इमारत के अंदर कदम पर रहने से अपने स्निपर्स से बचने में कामयाब रहे। एक बंधक वार्ताकार फर्ले के साथ संपर्क करने में सक्षम था, और दोनों ने पांच घंटे की घेराबंदी के दौरान बातचीत की और बंद कर दिया। फर्ले ने वार्ताकार से कहा कि वह उपकरण शूट करने के लिए ईएसएल गए थे और उनके मन में विशिष्ट लोग थे। इसने बाद में फर्ले के वकील का खंडन किया जिसने रक्षा का उपयोग किया कि फर्ले वहां लौरा ब्लैक के सामने खुद को मारने के लिए वहां गया था, लोगों पर गोली मार नहीं। वार्ताकार के साथ अपनी बातचीत के दौरान, फर्ले ने सात लोगों की हत्या के लिए कभी भी कोई पछतावा व्यक्त नहीं किया और स्वीकार किया कि उन्हें लौरा ब्लैक को छोड़कर पीड़ितों में से कोई भी नहीं जानता था। भूख अंततः तबाही खत्म हो गया है। फर्ली भूख लगी थी और एक सैंडविच के लिए कहा था। उन्होंने सैंडविच के बदले में आत्मसमर्पण किया। लौरा ब्लैक समेत सात लोग मारे गए और चार घायल हो गए। पीड़ित पीड़ितोंः घायल लौरा ब्लैक, ग्रेगरी स्कॉट, रिचर्ड टाउन्सले और पैटी मार्कोट थे। फर्ले पर सात मौतों की पूंजी हत्या, एक घातक हथियार, दूसरी डिग्री चोरी, और बर्बरता के साथ हमला किया गया था। परीक्षण के दौरान, यह स्पष्ट हो गया कि फर्ले अभी भी ब्लैक के साथ अपने गैर-रिश्ते के बारे में इनकार कर रहा था। उन्हें अपने अपराध की गहराई की समझ में कमी महसूस हुई। उन्होंने एक और कैदी को बताया, "मुझे लगता है कि यह मेरा पहला अपराध है क्योंकि वे उदार होना चाहिए। " उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने इसे फिर से किया, तो उन्हें उस पर "पुस्तक फेंकना" चाहिए। एक जूरी ने उसे सभी आरोपों के दोषी पाया, और सत्रह जनवरी एक निन्यानवे दो को, फर्ले को मौत की सजा सुनाई गई । दो जुलाई, दो सौ नौ को, कैलिफ़ोर्निया सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मृत्युदंड अपील से इनकार कर दिया। दो हज़ार तेरह तक, सैन क्वींटिन जेल में फर्ले की मौत की पंक्ति पर है।
गोरखपुर टैराकोटा क्राफ्ट को जीआई पंजीकरण मिल गया है। इसके साथ ही यह देश के बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार हो गया है। सैकड़ों साल पुराने विश्व प्रसिद्ध हस्त शिल्प गोरखपुर के टेराकोटा को कानूनी रूप से नई पहचान मिल गई है। जी आई यानी भौगोलिक संकेतक पंजीकरण की लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए यह क्राफ्ट यह दर्जा हासिल कर सका है। जीआई करने कि पूरी प्रक्रिया को लगभग 2 वर्ष पूर्व सितंबर 2018 में नाबार्ड के सहयोग से और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के दिशा निर्देश में काम शुरू हुआ। जिला उद्योग केंद्र के जागरूकता के साथ ही संस्था लक्ष्मी टेराकोटा मूर्ति कला केंद्र औरंगाबाद गुलरिया गोरखपुर के आवेदन के साथ शुरूआत की गई। गोरखपुर के 'टेराकोटा कारीगरी' को 'बौद्धिक संपदा अधिकार' का दर्जा प्राप्त हुआ है। कानूनी दस्तावेज पदमश्री डॉ रजनीकांत के दिशा निर्देश में तैयार हुआ, जिसे चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में दाखिल किया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए अंततः इस विश्व प्रसिद्ध शिल्प को जीआई पंजीकरण संख्या 619 के साथ क्लास 21 के अन्तर्गत पंजीकृत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद का यह प्रथम जीआई पंजीकृत उत्पाद है। इससे सीएम के निर्देश पर एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल है। कुछ माह पूर्व, नाबार्ड यूपी के द्वारा गोरखपुर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विशाल प्रदर्शनी और क्रेडिट कैंप आयोजित किया गया था। जिसमे टेराकोटा क्राफ्ट के साथ ही पूर्वांचल के सभी जीआई पंजीकृत उत्पादो को भी स्टॉल मिला था। इस क्राफ्ट के लिए पूरे गोरखपुर जनपद को ही पंजीकृत किया गया है। सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात यह है कि जीआई पंजीकृत उत्पाद किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं बल्कि इससे जुड़े सभी उत्पादको, निर्यातकों, का अधिकार होता है। अब आने वाले समय में इससे जुड़े शिल्पियों, ट्रेड से जुड़े लोगो को जी आई अधिकृत यूजर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी जिसमे जिला उद्योग केंद्र और नाबार्ड का सहयोग लिया जाएगा । गोरखपुर के इस क्राफ्ट के साथ ही अब पूर्वांचल के कुल 13 उत्पादों को जीआई का दर्जा हासिल हो गया है। इनमें कालानमक चावल, बनारसी साड़ी, मेटल क्राफ्ट, गुलाबी मीनाकारी, स्टोन शिल्प, चुनार बलुआ पत्थर, ग्लास बीड्स, भदोही कालीन, मिर्ज़ापुर दरी, गाजीपुर वाल हैंगिंग, निज़ामाबाद आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और इलाहाबाद का अमरूद शामिल है। इसको लेकर अब उत्तर प्रदेश में कुल 26 जीआई उत्पाद हो गए, जिसमे 14 ओडीओपी उत्पाद भी है। 10 अन्य जनपदों के 10 ओडीओपी उत्पादों की जी आई पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
गोरखपुर टैराकोटा क्राफ्ट को जीआई पंजीकरण मिल गया है। इसके साथ ही यह देश के बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार हो गया है। सैकड़ों साल पुराने विश्व प्रसिद्ध हस्त शिल्प गोरखपुर के टेराकोटा को कानूनी रूप से नई पहचान मिल गई है। जी आई यानी भौगोलिक संकेतक पंजीकरण की लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए यह क्राफ्ट यह दर्जा हासिल कर सका है। जीआई करने कि पूरी प्रक्रिया को लगभग दो वर्ष पूर्व सितंबर दो हज़ार अट्ठारह में नाबार्ड के सहयोग से और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के दिशा निर्देश में काम शुरू हुआ। जिला उद्योग केंद्र के जागरूकता के साथ ही संस्था लक्ष्मी टेराकोटा मूर्ति कला केंद्र औरंगाबाद गुलरिया गोरखपुर के आवेदन के साथ शुरूआत की गई। गोरखपुर के 'टेराकोटा कारीगरी' को 'बौद्धिक संपदा अधिकार' का दर्जा प्राप्त हुआ है। कानूनी दस्तावेज पदमश्री डॉ रजनीकांत के दिशा निर्देश में तैयार हुआ, जिसे चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में दाखिल किया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए अंततः इस विश्व प्रसिद्ध शिल्प को जीआई पंजीकरण संख्या छः सौ उन्नीस के साथ क्लास इक्कीस के अन्तर्गत पंजीकृत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद का यह प्रथम जीआई पंजीकृत उत्पाद है। इससे सीएम के निर्देश पर एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल है। कुछ माह पूर्व, नाबार्ड यूपी के द्वारा गोरखपुर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विशाल प्रदर्शनी और क्रेडिट कैंप आयोजित किया गया था। जिसमे टेराकोटा क्राफ्ट के साथ ही पूर्वांचल के सभी जीआई पंजीकृत उत्पादो को भी स्टॉल मिला था। इस क्राफ्ट के लिए पूरे गोरखपुर जनपद को ही पंजीकृत किया गया है। सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात यह है कि जीआई पंजीकृत उत्पाद किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं बल्कि इससे जुड़े सभी उत्पादको, निर्यातकों, का अधिकार होता है। अब आने वाले समय में इससे जुड़े शिल्पियों, ट्रेड से जुड़े लोगो को जी आई अधिकृत यूजर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी जिसमे जिला उद्योग केंद्र और नाबार्ड का सहयोग लिया जाएगा । गोरखपुर के इस क्राफ्ट के साथ ही अब पूर्वांचल के कुल तेरह उत्पादों को जीआई का दर्जा हासिल हो गया है। इनमें कालानमक चावल, बनारसी साड़ी, मेटल क्राफ्ट, गुलाबी मीनाकारी, स्टोन शिल्प, चुनार बलुआ पत्थर, ग्लास बीड्स, भदोही कालीन, मिर्ज़ापुर दरी, गाजीपुर वाल हैंगिंग, निज़ामाबाद आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और इलाहाबाद का अमरूद शामिल है। इसको लेकर अब उत्तर प्रदेश में कुल छब्बीस जीआई उत्पाद हो गए, जिसमे चौदह ओडीओपी उत्पाद भी है। दस अन्य जनपदों के दस ओडीओपी उत्पादों की जी आई पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
Hockey World Cup 2023: कॉमनवेल्थ गेम्स में दमदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली भारतीय हॉकी टीम 13 जनवरी से आयोजित किए जाने वाले हॉकी वर्ल्ड कप 2023 के लिए ओडिशा पहुंच गई है। इस विश्वकप का लगातार दूसरी बार भारत में आयोजन किया जा रहा है। टूर्नामेंट भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम और राउरकेला में बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस टूर्नामेंट में बेहतर परफॉर्म करने के लिए भारतीय टीम को प्रोत्साहित करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बड़े ईनाम का ऐलान किया है। दरअसल ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हॉकी के बेहद बड़े प्रेमी है और वे हमेशा भारतीय हॉकी के विकास के लिए घोषणाएं करते रहते हैं। ऐसे में गुरुवार को पटनायक ने राउरकेला में हॉकी विश्व कप विलेज का उद्घाटन किया। इस समारोह में उन्होंने राष्ट्रीय टीम द्वारा प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीतने पर प्रत्येक खिलाड़ी को एक करोड़ रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। विश्व कप विलेज को राउरकेला में रिकॉर्ड नौ महीने के भीतर विकसित किया गया है और इसमें हॉकी विश्व कप के स्तर के अनुरूप सभी सुविधाओं के साथ 225 कमरे हैं। विश्व कप विलेज में आगामी हॉकी विश्व कप की टीमें और अधिकारी रहेंगे। सीएम ने इस अवसर पर विश्व कप गांव में समायोजित राष्ट्रीय पुरुष हॉकी टीम से बातचीत की और नकद पुरस्कार की घोषणा की। डिफेंडर्स- जरमनप्रीत सिंह, सुरेंद्र कुमार, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), वरुण कुमार, अमित रोहिदास (उप-कप्तान), नीलम संजीप. मिडफील्डर- मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, नीलकांत शर्मा, शमशेर सिंह, विवेक सागर प्रसाद, आकाशदीप सिंह. फॉरवर्ड- मनदीप सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, अभिषेक और सुखजीत सिंह.
Hockey World Cup दो हज़ार तेईस: कॉमनवेल्थ गेम्स में दमदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली भारतीय हॉकी टीम तेरह जनवरी से आयोजित किए जाने वाले हॉकी वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के लिए ओडिशा पहुंच गई है। इस विश्वकप का लगातार दूसरी बार भारत में आयोजन किया जा रहा है। टूर्नामेंट भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम और राउरकेला में बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस टूर्नामेंट में बेहतर परफॉर्म करने के लिए भारतीय टीम को प्रोत्साहित करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बड़े ईनाम का ऐलान किया है। दरअसल ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हॉकी के बेहद बड़े प्रेमी है और वे हमेशा भारतीय हॉकी के विकास के लिए घोषणाएं करते रहते हैं। ऐसे में गुरुवार को पटनायक ने राउरकेला में हॉकी विश्व कप विलेज का उद्घाटन किया। इस समारोह में उन्होंने राष्ट्रीय टीम द्वारा प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीतने पर प्रत्येक खिलाड़ी को एक करोड़ रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की। विश्व कप विलेज को राउरकेला में रिकॉर्ड नौ महीने के भीतर विकसित किया गया है और इसमें हॉकी विश्व कप के स्तर के अनुरूप सभी सुविधाओं के साथ दो सौ पच्चीस कमरे हैं। विश्व कप विलेज में आगामी हॉकी विश्व कप की टीमें और अधिकारी रहेंगे। सीएम ने इस अवसर पर विश्व कप गांव में समायोजित राष्ट्रीय पुरुष हॉकी टीम से बातचीत की और नकद पुरस्कार की घोषणा की। डिफेंडर्स- जरमनप्रीत सिंह, सुरेंद्र कुमार, हरमनप्रीत सिंह , वरुण कुमार, अमित रोहिदास , नीलम संजीप. मिडफील्डर- मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, नीलकांत शर्मा, शमशेर सिंह, विवेक सागर प्रसाद, आकाशदीप सिंह. फॉरवर्ड- मनदीप सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, अभिषेक और सुखजीत सिंह.
विशाल जहाज टाइटैनिक के खंडहर को देखने के पर्यटन अभियान का विफल होना बहुत दुखद है। अब तक केवल कुछ ही लोगों ने सागर तले पड़े टाइटैनिक के मलबे को देखा है। वहां पहुंचना कभी आसान नहीं रहा। भारी वित्तीय संसाधन और विशेषज्ञों की मदद से ही वहां जाने का जोखिम उठाया जा सकता है। एक पर्यटन और अनुसंधान कंपनी ओशनगेट एक्सपेडिशंस ने आठ-दिवसीय मिशन की पेशकश की थी, जिसकी लागत प्रति व्यक्ति 2. 5 लाख डॉलर थी। इस रोमांचक व जोखिम भरे अभियान में चुनिंदा पांच लोग शामिल हुए थे। एक बहुत छोटी पनडुब्बी से समुद्र की सतह से 13,000 फीट से अधिक नीचे जाना था। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पांच सीट वाला कार्बन फाइबर और टाइटेनियम से बना यह पनडुब्बी जलयान या सबमर्सिबल अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया। पता नहीं कहां खो गया, जिसकी तलाश जारी है। अनेक देशों के विशेषज्ञ अपने संसाधनों के साथ इस तलाश में जुटे हैं। बुधवार को एक आशा जगी थी, समुद्र से कुछ आवाजें भी सुनाई पड़ी थीं, पर इसकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। चार दिन से तलाश जारी है। रहस्य और चिंताएं गहराती जा रही हैं। शायद इस पर्यटन अभियान की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन इस पर दुनिया के पांच दिग्गज यात्री सवार हैं, तो दुख की लहर दौड़ गई। सबमर्सिबल में फ्रांसीसी गोताखोर पॉल-हेनरी नार्गोलेट भी सवार हैं, जो टाइटैनिक के मलबे तक 35 बार गोते लगा चुके हैं। फ्रांसीसी नौसेना में 22 साल बिताने वाले नार्गोलेट ने बचने के प्रयास जरूर किए होंगे और सहयात्रियों को भी बचाने की कोशिश की होगी। ब्रिटिश अरबपति खोजकर्ता हामिश हार्डिंग भी सबमर्सिबल में हैं। हार्डिंग को रोमांच बहुत पसंद है। वह ऐसे विचित्र अभियान पर जाते रहे हैं और प्रशांत महासागर में सबसे निचली सतह तक की यात्रा कर चुके हैं। वह तो अंतरिक्ष यात्रा के लिए भी भुगतान कर चुके हैं। पाकिस्तान के लिए भी बहुत दुख की बात है कि वहां के अमीर उद्यमी शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान भी सबमर्सिबल में मौजूद हैं। ओशनगेट के सीईओ और संस्थापक स्टॉकटन रश भी यात्रियों में शामिल बताए जा रहे हैं, जो लापता जलयान टाइटन को पहले चला चुके हैं। दरअसल, इस छोटे जलयान में ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं, इसके अंदर बस पांच लोगों के पालथी मारकर बैठने भर की जगह है, शौच के लिए एक स्थान है, पर इसके जरिये समुद्र के नीचे बहुत कम समय के लिए ही रहा जा सकता है। जाहिर है, इस हादसे के बाद सवालों का अंबार लग गया है और जवाबों का टोटा है। रोमांचकारी पर्यटन का क्षेत्र दुनिया में जिस तेजी से विकसित हो रहा है, उसे लेकर पहले भी चिंता का इजहार किया गया है। खतरा उठाते हुए पर्यटन का कीर्तिमान बनाने की धुन बहुतों को परेशान किए रहती है। ऐसे तमाम लोगों को अपनी सुरक्षा के बारे में ज्यादा चिंतित होना चाहिए। साथ ही, रोमांचक पर्यटन के क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों को भी अपनी क्षमता का आकलन करना चाहिए। कोताही बरतने वाली या दोषी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जीवन का कोई विकल्प नहीं है। पहले ऐसे अभियानों पर केवल विशेषज्ञ जाया करते थे, पर अब पैसे खर्च करके जाने का बढ़ता चलन समीक्षा की मांग करता है। पर्यटन मनोरंजन या ज्ञानवर्द्धन तक सीमित रहे, तो अच्छा है। पर्यटन क्षेत्र में किसी भी तरह के अतिरेक को स्वीकार करना आपराधिक लापरवाही से कम नहीं है। यह सबक लेने का समय है।
विशाल जहाज टाइटैनिक के खंडहर को देखने के पर्यटन अभियान का विफल होना बहुत दुखद है। अब तक केवल कुछ ही लोगों ने सागर तले पड़े टाइटैनिक के मलबे को देखा है। वहां पहुंचना कभी आसान नहीं रहा। भारी वित्तीय संसाधन और विशेषज्ञों की मदद से ही वहां जाने का जोखिम उठाया जा सकता है। एक पर्यटन और अनुसंधान कंपनी ओशनगेट एक्सपेडिशंस ने आठ-दिवसीय मिशन की पेशकश की थी, जिसकी लागत प्रति व्यक्ति दो. पाँच लाख डॉलर थी। इस रोमांचक व जोखिम भरे अभियान में चुनिंदा पांच लोग शामिल हुए थे। एक बहुत छोटी पनडुब्बी से समुद्र की सतह से तेरह,शून्य फीट से अधिक नीचे जाना था। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पांच सीट वाला कार्बन फाइबर और टाइटेनियम से बना यह पनडुब्बी जलयान या सबमर्सिबल अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया। पता नहीं कहां खो गया, जिसकी तलाश जारी है। अनेक देशों के विशेषज्ञ अपने संसाधनों के साथ इस तलाश में जुटे हैं। बुधवार को एक आशा जगी थी, समुद्र से कुछ आवाजें भी सुनाई पड़ी थीं, पर इसकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। चार दिन से तलाश जारी है। रहस्य और चिंताएं गहराती जा रही हैं। शायद इस पर्यटन अभियान की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन इस पर दुनिया के पांच दिग्गज यात्री सवार हैं, तो दुख की लहर दौड़ गई। सबमर्सिबल में फ्रांसीसी गोताखोर पॉल-हेनरी नार्गोलेट भी सवार हैं, जो टाइटैनिक के मलबे तक पैंतीस बार गोते लगा चुके हैं। फ्रांसीसी नौसेना में बाईस साल बिताने वाले नार्गोलेट ने बचने के प्रयास जरूर किए होंगे और सहयात्रियों को भी बचाने की कोशिश की होगी। ब्रिटिश अरबपति खोजकर्ता हामिश हार्डिंग भी सबमर्सिबल में हैं। हार्डिंग को रोमांच बहुत पसंद है। वह ऐसे विचित्र अभियान पर जाते रहे हैं और प्रशांत महासागर में सबसे निचली सतह तक की यात्रा कर चुके हैं। वह तो अंतरिक्ष यात्रा के लिए भी भुगतान कर चुके हैं। पाकिस्तान के लिए भी बहुत दुख की बात है कि वहां के अमीर उद्यमी शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान भी सबमर्सिबल में मौजूद हैं। ओशनगेट के सीईओ और संस्थापक स्टॉकटन रश भी यात्रियों में शामिल बताए जा रहे हैं, जो लापता जलयान टाइटन को पहले चला चुके हैं। दरअसल, इस छोटे जलयान में ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं, इसके अंदर बस पांच लोगों के पालथी मारकर बैठने भर की जगह है, शौच के लिए एक स्थान है, पर इसके जरिये समुद्र के नीचे बहुत कम समय के लिए ही रहा जा सकता है। जाहिर है, इस हादसे के बाद सवालों का अंबार लग गया है और जवाबों का टोटा है। रोमांचकारी पर्यटन का क्षेत्र दुनिया में जिस तेजी से विकसित हो रहा है, उसे लेकर पहले भी चिंता का इजहार किया गया है। खतरा उठाते हुए पर्यटन का कीर्तिमान बनाने की धुन बहुतों को परेशान किए रहती है। ऐसे तमाम लोगों को अपनी सुरक्षा के बारे में ज्यादा चिंतित होना चाहिए। साथ ही, रोमांचक पर्यटन के क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों को भी अपनी क्षमता का आकलन करना चाहिए। कोताही बरतने वाली या दोषी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जीवन का कोई विकल्प नहीं है। पहले ऐसे अभियानों पर केवल विशेषज्ञ जाया करते थे, पर अब पैसे खर्च करके जाने का बढ़ता चलन समीक्षा की मांग करता है। पर्यटन मनोरंजन या ज्ञानवर्द्धन तक सीमित रहे, तो अच्छा है। पर्यटन क्षेत्र में किसी भी तरह के अतिरेक को स्वीकार करना आपराधिक लापरवाही से कम नहीं है। यह सबक लेने का समय है।
बगहा के जंगलों में आदमखोर बाघ का आतंक. बगहा. वाल्मिकी टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर आस पास के गांवों में आदमखोर बाघ लोगों को अपना शिकार बनाता जा रहा है. अब तक 7 मानव जीवन को खत्म कर चुका यह नरभक्षी बाघ अब किसी तरह से काबू में नहीं आ रहा है. ग्रामीण अब इसके विरुद्ध गोलबंद हो रहे हैं और वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की तैयारी करने लगे हैं. इस बीच स्थानीय निवासियों में आक्रोश को देखते हुए आदमखोर बाघ को मारने का आदेश दे दिया गया है. चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने नरभक्षी बाघ को मारने के लिए शूटर की टीम भी गठित कर दी है. शुक्रवार शाम से ऑपरेशन बाघ को तलाश कर ढेर करने का काम होगा शुरू. वन पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव अरविंद चौधरी ने इसकी जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि फॉरेस्ट विभाग और बगहा पुलिस की टीम ऑपरेशन को अंजाम देगी. बता दें कि गत12 सितंबर से लगातार इस आदमखोर बाघ का आतंक जारी है. वन विभाग को रेस्क्यू करने में अब तक सफलता नहीं मिल सकी जिसकी लिखित सूचना एनटीसीए को दे दी गई है. दरअसल, बगहा क्षेत्र में ही अब तक 7 लोगों को यह अपना शिकार बना चुका है. एक बार फिर इस नरभक्षी बाघ ने एक युवक का शिकार कर लिया है. शौच करने गए संजय महतो नाम के एक युवक पर नरभक्षी बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इससे पहले गुरुवार को भी घर में सो रही एक लड़की को बाघ ने अपना शिकार बना लिया था. बता दें कि एक के बाद एक 7 लोगों के इस नरभक्षी बाघ का शिकार बन जाने से बगहा के जंगल किनारे बसे गांवों में आज हर ओर दहशत है. भय का माहौल है. हर जगह एक ही आवाज आ रही है- भागो बाघ आया. दिन हो या फिर रात, बाघ की चहलकदमी ने ग्रामीणों के साथ वनकर्मियों की भी नींद उड़ा रखी है. खेतों में ग्रामीण जाने से परहेज कर रहे हैं और गांवों में लोग घर से भी झुंड बनाकर निकल रहे हैं. रेस्क्यू के बाद बाघ ने अपना ठिकाना बदल लिया है और अब नए इलाकों में दहशत फैला रखी है. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
बगहा के जंगलों में आदमखोर बाघ का आतंक. बगहा. वाल्मिकी टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर आस पास के गांवों में आदमखोर बाघ लोगों को अपना शिकार बनाता जा रहा है. अब तक सात मानव जीवन को खत्म कर चुका यह नरभक्षी बाघ अब किसी तरह से काबू में नहीं आ रहा है. ग्रामीण अब इसके विरुद्ध गोलबंद हो रहे हैं और वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की तैयारी करने लगे हैं. इस बीच स्थानीय निवासियों में आक्रोश को देखते हुए आदमखोर बाघ को मारने का आदेश दे दिया गया है. चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने नरभक्षी बाघ को मारने के लिए शूटर की टीम भी गठित कर दी है. शुक्रवार शाम से ऑपरेशन बाघ को तलाश कर ढेर करने का काम होगा शुरू. वन पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव अरविंद चौधरी ने इसकी जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि फॉरेस्ट विभाग और बगहा पुलिस की टीम ऑपरेशन को अंजाम देगी. बता दें कि गतबारह सितंबर से लगातार इस आदमखोर बाघ का आतंक जारी है. वन विभाग को रेस्क्यू करने में अब तक सफलता नहीं मिल सकी जिसकी लिखित सूचना एनटीसीए को दे दी गई है. दरअसल, बगहा क्षेत्र में ही अब तक सात लोगों को यह अपना शिकार बना चुका है. एक बार फिर इस नरभक्षी बाघ ने एक युवक का शिकार कर लिया है. शौच करने गए संजय महतो नाम के एक युवक पर नरभक्षी बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इससे पहले गुरुवार को भी घर में सो रही एक लड़की को बाघ ने अपना शिकार बना लिया था. बता दें कि एक के बाद एक सात लोगों के इस नरभक्षी बाघ का शिकार बन जाने से बगहा के जंगल किनारे बसे गांवों में आज हर ओर दहशत है. भय का माहौल है. हर जगह एक ही आवाज आ रही है- भागो बाघ आया. दिन हो या फिर रात, बाघ की चहलकदमी ने ग्रामीणों के साथ वनकर्मियों की भी नींद उड़ा रखी है. खेतों में ग्रामीण जाने से परहेज कर रहे हैं और गांवों में लोग घर से भी झुंड बनाकर निकल रहे हैं. रेस्क्यू के बाद बाघ ने अपना ठिकाना बदल लिया है और अब नए इलाकों में दहशत फैला रखी है. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में हाथियों की दहशत है। यहां जो काम सरकारी अमला नहीं कर पाए वो काम गजराज ने कर दिखाया है। हाथियों की धमक ने धमतरी जिले के कई गांवों में शराबबंदी करा दी है, जिसके चलते कई गांवों में महुआ शराब बनाने के लिए न चूल्हों पर हंडी चढ़ रही है और न ही गलियों में महुआ शराब की महक आ रही है। रायपुरः छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में हाथियों की वजह से दहशत का माहौल है। यहां जो काम सरकारी अमला नहीं कर पाए वो काम गजराज ने कर दिखाया है। हाथियों की धमक ने धमतरी जिले के कई गांवों में शराबबंदी करा दी है, जिसके चलते कई गांवों में महुआ शराब बनाने के लिए न चूल्हों पर हंडी चढ़ रही है और न ही गलियों में महुआ शराब की महक आ रही है। अब गांव वालों ने हाथियों के खौफ से महुआ शराब से तौबा कर ली है। दरअसल, महुआ का महक मिलते ही हाथियों का गिरोह यहां के लोगों के घरों पर धावा बोल देता है। कच्ची दीवारें तोड़कर महुआ खा जाते हैं। अब ऐसे में गांव वालों ने परिवार और मकान बचाने के लिए महुआ शराब से तौबा कर ली है। लोगों के पास विकल्प भी नहीं है। इन्हें डर है कि कहीं हाथी महुए की महक से गांवों में न धमक जाएं। इन दिनों हाथियों के दो दल धमतरी जिले के नगरी और धमतरी अनुविभाग (ब्लाक) में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि 27 हाथियों का दल यहां के जंगल में घूम रहा है। हाथियों का यह गिरोह दो महीने से यहां डटा है। अत्यंत पिछड़ी जनजाति में शामिल कमार भी यहां रहते हैं। ग्रामीणों में हाथियों की इतनी दहशत है कि अपने परिवार, मकान व फसल को बचाने के लिए महुए की शराब बनाना तो दूर उन्होंने शराब पीना भी छोड़ दिया है। गांव में कोई महुआ शराब बना भी नहीं रहा है। याद रहे छत्तीसगढ़ के आबकारी कानून में कमारों को स्वयं के उपयोग के लिए सीमित मात्रा में शराब बनाने की इजाजत है।
छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में हाथियों की दहशत है। यहां जो काम सरकारी अमला नहीं कर पाए वो काम गजराज ने कर दिखाया है। हाथियों की धमक ने धमतरी जिले के कई गांवों में शराबबंदी करा दी है, जिसके चलते कई गांवों में महुआ शराब बनाने के लिए न चूल्हों पर हंडी चढ़ रही है और न ही गलियों में महुआ शराब की महक आ रही है। रायपुरः छत्तीसगढ़ राज्य के कई जिलों में हाथियों की वजह से दहशत का माहौल है। यहां जो काम सरकारी अमला नहीं कर पाए वो काम गजराज ने कर दिखाया है। हाथियों की धमक ने धमतरी जिले के कई गांवों में शराबबंदी करा दी है, जिसके चलते कई गांवों में महुआ शराब बनाने के लिए न चूल्हों पर हंडी चढ़ रही है और न ही गलियों में महुआ शराब की महक आ रही है। अब गांव वालों ने हाथियों के खौफ से महुआ शराब से तौबा कर ली है। दरअसल, महुआ का महक मिलते ही हाथियों का गिरोह यहां के लोगों के घरों पर धावा बोल देता है। कच्ची दीवारें तोड़कर महुआ खा जाते हैं। अब ऐसे में गांव वालों ने परिवार और मकान बचाने के लिए महुआ शराब से तौबा कर ली है। लोगों के पास विकल्प भी नहीं है। इन्हें डर है कि कहीं हाथी महुए की महक से गांवों में न धमक जाएं। इन दिनों हाथियों के दो दल धमतरी जिले के नगरी और धमतरी अनुविभाग में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि सत्ताईस हाथियों का दल यहां के जंगल में घूम रहा है। हाथियों का यह गिरोह दो महीने से यहां डटा है। अत्यंत पिछड़ी जनजाति में शामिल कमार भी यहां रहते हैं। ग्रामीणों में हाथियों की इतनी दहशत है कि अपने परिवार, मकान व फसल को बचाने के लिए महुए की शराब बनाना तो दूर उन्होंने शराब पीना भी छोड़ दिया है। गांव में कोई महुआ शराब बना भी नहीं रहा है। याद रहे छत्तीसगढ़ के आबकारी कानून में कमारों को स्वयं के उपयोग के लिए सीमित मात्रा में शराब बनाने की इजाजत है।
पिछले 12 जनवरी को संपन्न जूनियर एंड मास्टर नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का खिताब राखी शर्मा ने जीत लिया है। यह खिताब जीतने वाली राखी प्रदेश की पहली महिला हैं जिसने राज्य का नाम रोशन किया है। कोयंबटूर में 7 जनवरी से 12 जनवरी तक चले इस चैंपियनशिप में राखी ने 72 किलोग्राम के वर्ग में स्ट्रोंग वूमन ऑफ इंडिया का खिताब अपने नाम कर लिया। इस प्रतिस्पर्द्धा में 120 किलो वर्ग में लकी अहमद तथा 84 किलो वर्ग में मुरचाना सहरिया को स्वर्ण पदक मिला। वहीं अंजन बुजरबरुवा(74 किलो) को रजत, त्रैलोक्य गोगोई(66 किलो), सफीकुर रहमान(83 किलो) और अजीत कुमार बरुवा(93 किलो) कांस्य पदक हासिल किया। अनुपम शर्मा ने कोच के रूप में प्रदेश की टीम को बेहतर नेतृत्व प्रदान किया।
पिछले बारह जनवरी को संपन्न जूनियर एंड मास्टर नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का खिताब राखी शर्मा ने जीत लिया है। यह खिताब जीतने वाली राखी प्रदेश की पहली महिला हैं जिसने राज्य का नाम रोशन किया है। कोयंबटूर में सात जनवरी से बारह जनवरी तक चले इस चैंपियनशिप में राखी ने बहत्तर किलोग्रामग्राम के वर्ग में स्ट्रोंग वूमन ऑफ इंडिया का खिताब अपने नाम कर लिया। इस प्रतिस्पर्द्धा में एक सौ बीस किलो वर्ग में लकी अहमद तथा चौरासी किलो वर्ग में मुरचाना सहरिया को स्वर्ण पदक मिला। वहीं अंजन बुजरबरुवा को रजत, त्रैलोक्य गोगोई, सफीकुर रहमान और अजीत कुमार बरुवा कांस्य पदक हासिल किया। अनुपम शर्मा ने कोच के रूप में प्रदेश की टीम को बेहतर नेतृत्व प्रदान किया।
रक्षा बंधन त्योहार से पहले प्रदेशवासियों को योगी सरकार का यह बड़ा तोहफा है। जानकारी के लिए बता दें कि देश के सबसे बड़े राज्य में दो दिन का वीकेंड कर्फ्यू अनलॉक प्रक्रिया के दौरान भी लागू था। जब स्थिति कंट्रोल में आने लगी, तब सरकार द्वारा मॉल और मल्टीप्लेक्स खोलने की अनुमति मिली। वहीं बाजार भी खोल दिए गए थे। लेकिन अब जब यूपी के 60 जिले कोरोना मुक्त बताए जा रहे हैं, ऐसे में सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू (शनिवार और रविवार) में भी बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। नई दिल्ली : कुछ दिनों पहले (11 अगस्त) ही प्रदेश में शनिवार का कोरोना कर्फ्यू हटा दिया गया था। जिससे अब यह कर्फ्यू सिर्फ रविवार को ही लग रहा था। हालांकि अब योगी सरकार ने रक्षा बंधन त्योहार से प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। जिससे अब रविवार को भी सभी चीजें सामान्य रूप से चल सकेंगी। यानी अब योगी सरकार ने रविवार को भी लॉकडाउन खत्म करने का निर्णय लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि रक्षा बंधन त्योहार से पहले प्रदेशवासियों को योगी सरकार का यह बड़ा तोहफा है। जानकारी के लिए बता दें कि देश के सबसे बड़े राज्य में दो दिन का वीकेंड कर्फ्यू अनलॉक प्रक्रिया के दौरान भी लागू था। जब स्थिति कंट्रोल में आने लगी, तब सरकार द्वारा मॉल और मल्टीप्लेक्स खोलने की अनुमति मिली। वहीं बाजार भी खोल दिए गए थे। लेकिन अब जब यूपी के 60 जिले कोरोना मुक्त बताए जा रहे हैं, ऐसे में सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू (शनिवार और रविवार) में भी बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि कोविड पर नियंत्रण के लिए एग्रेसिव ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट के साथ-साथ तेज टीकाकरण को यूपी ने बेहतर ढंग से करके दिखाया है। राज्य में अब तक 07 करोड़ 01 लाख 69 हजार से ज्यादा कोविड सैंपल की जांच की जा चुकी है। इसके अलावा 06 करोड़ 24 लाख से ज्यादा वैक्सीन लोगों को लगाई जा चुकी हैं। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों की संख्या जल्द ही एक करोड़ के पार हो जाएगी। बता दें कि देशभर में अब तक कोरोना वैक्सीन की 57 करोड़ 22 लाख 81 हजार 488 डोज दी गई हैं, जिसमें से 12 करोड़ 77 लाख 95 हजार 457 लोग दोनों डोज ले चुके हैं। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को राज्य में 25 लोग कोरोना वायरस (Coronavirus in Uttar Pradesh) से संक्रमित पाए गए थे। इस दौरान 35 लोग ठीक हुए, जबकि 2 मरीजों की जान चली गई। अब तक उत्तर प्रदेश में कोविड-19 से 17. 09 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 16. 85 लाख ठीक हो चुके हैं, जबकि 22,789 मरीजों ने दम तोड़ दिया। उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के 407 एक्टिव केस मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की बेहतर होती स्थिति के मद्देनजर रविवार को होने वाली साप्ताहिक बंदी को खत्म कर दिया गया है। अब से सभी शहरों और वहां के बाजारों में पहले से तय साप्ताहिक बंदी के दिन ही अवकाश रहेगा। इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। योगी सरकार की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि लगातार की गईं कोशिशों से कोरोना की दूसरी लहर के कारण बने हालातों के बाद से जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। आज प्रदेश के 15 जिलों अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बस्ती, देवरिया, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, महोबा, मिर्जापुर, संतकबीरनगर, श्रावस्ती और शामली में कोविड का एक भी मरीज नहीं बचा है। ये जिले कोरोना मुक्त हैं। भारत में कोरोना के मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के कुल 36,571 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इसमें करीब 58 फीसदी नए मामले अकेले केरल में मिले हैं। देश में ज्यादातर राज्यों में कोरोना के नए मामलों में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद सिर्फ 5 राज्यों में ही 85 फीसद केस दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार रिकवरी रेट बढ़कर 97. 54 % हो गई है। वहीं, देश में वर्तमान में सक्रिय मामलों का आंकड़ा 3,63,605 है जो पिछले 150 दिनों में सबसे कम है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान 36,555 मरीज ठीक हुए, जिसके साथ ही कुल ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 3,15,61,635 हो गई।
रक्षा बंधन त्योहार से पहले प्रदेशवासियों को योगी सरकार का यह बड़ा तोहफा है। जानकारी के लिए बता दें कि देश के सबसे बड़े राज्य में दो दिन का वीकेंड कर्फ्यू अनलॉक प्रक्रिया के दौरान भी लागू था। जब स्थिति कंट्रोल में आने लगी, तब सरकार द्वारा मॉल और मल्टीप्लेक्स खोलने की अनुमति मिली। वहीं बाजार भी खोल दिए गए थे। लेकिन अब जब यूपी के साठ जिले कोरोना मुक्त बताए जा रहे हैं, ऐसे में सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू में भी बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। नई दिल्ली : कुछ दिनों पहले ही प्रदेश में शनिवार का कोरोना कर्फ्यू हटा दिया गया था। जिससे अब यह कर्फ्यू सिर्फ रविवार को ही लग रहा था। हालांकि अब योगी सरकार ने रक्षा बंधन त्योहार से प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। जिससे अब रविवार को भी सभी चीजें सामान्य रूप से चल सकेंगी। यानी अब योगी सरकार ने रविवार को भी लॉकडाउन खत्म करने का निर्णय लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि रक्षा बंधन त्योहार से पहले प्रदेशवासियों को योगी सरकार का यह बड़ा तोहफा है। जानकारी के लिए बता दें कि देश के सबसे बड़े राज्य में दो दिन का वीकेंड कर्फ्यू अनलॉक प्रक्रिया के दौरान भी लागू था। जब स्थिति कंट्रोल में आने लगी, तब सरकार द्वारा मॉल और मल्टीप्लेक्स खोलने की अनुमति मिली। वहीं बाजार भी खोल दिए गए थे। लेकिन अब जब यूपी के साठ जिले कोरोना मुक्त बताए जा रहे हैं, ऐसे में सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू में भी बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि कोविड पर नियंत्रण के लिए एग्रेसिव ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट के साथ-साथ तेज टीकाकरण को यूपी ने बेहतर ढंग से करके दिखाया है। राज्य में अब तक सात करोड़ एक लाख उनहत्तर हजार से ज्यादा कोविड सैंपल की जांच की जा चुकी है। इसके अलावा छः करोड़ चौबीस लाख से ज्यादा वैक्सीन लोगों को लगाई जा चुकी हैं। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों की संख्या जल्द ही एक करोड़ के पार हो जाएगी। बता दें कि देशभर में अब तक कोरोना वैक्सीन की सत्तावन करोड़ बाईस लाख इक्यासी हजार चार सौ अठासी डोज दी गई हैं, जिसमें से बारह करोड़ सतहत्तर लाख पचानवे हजार चार सौ सत्तावन लोग दोनों डोज ले चुके हैं। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को राज्य में पच्चीस लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इस दौरान पैंतीस लोग ठीक हुए, जबकि दो मरीजों की जान चली गई। अब तक उत्तर प्रदेश में कोविड-उन्नीस से सत्रह. नौ लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें सोलह. पचासी लाख ठीक हो चुके हैं, जबकि बाईस,सात सौ नवासी मरीजों ने दम तोड़ दिया। उत्तर प्रदेश में कोविड-उन्नीस के चार सौ सात एक्टिव केस मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में कोविड-उन्नीस की बेहतर होती स्थिति के मद्देनजर रविवार को होने वाली साप्ताहिक बंदी को खत्म कर दिया गया है। अब से सभी शहरों और वहां के बाजारों में पहले से तय साप्ताहिक बंदी के दिन ही अवकाश रहेगा। इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। योगी सरकार की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि लगातार की गईं कोशिशों से कोरोना की दूसरी लहर के कारण बने हालातों के बाद से जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। आज प्रदेश के पंद्रह जिलों अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बस्ती, देवरिया, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, महोबा, मिर्जापुर, संतकबीरनगर, श्रावस्ती और शामली में कोविड का एक भी मरीज नहीं बचा है। ये जिले कोरोना मुक्त हैं। भारत में कोरोना के मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले चौबीस घंटाटे में देश में कोरोना के कुल छत्तीस,पाँच सौ इकहत्तर मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इसमें करीब अट्ठावन फीसदी नए मामले अकेले केरल में मिले हैं। देश में ज्यादातर राज्यों में कोरोना के नए मामलों में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद सिर्फ पाँच राज्यों में ही पचासी फीसद केस दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार रिकवरी रेट बढ़कर सत्तानवे. चौवन % हो गई है। वहीं, देश में वर्तमान में सक्रिय मामलों का आंकड़ा तीन,तिरेसठ,छः सौ पाँच है जो पिछले एक सौ पचास दिनों में सबसे कम है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान छत्तीस,पाँच सौ पचपन मरीज ठीक हुए, जिसके साथ ही कुल ठीक होने वाले मरीजों की संख्या तीन,पंद्रह,इकसठ,छः सौ पैंतीस हो गई।
कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा कि राम का जन्मस्थान कहाँ है? तो वकील एस सी वैद्यनाथन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राम का जन्मस्थान बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे है। "2019 में दोबारा सरकार में आने पर भाजपा एक नया संविधान लिख सकती है, जिससे राष्ट्र पाकिस्तान बनने के मार्ग पर बढ़ जाएगा। फिर, राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सामने करने वाला कोई नहीं होगा। " डॉ. असगर विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने से चार दिन पहले ही सूचना निदेशक नियुक्त की गईं थी। उनका काम लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करना था। पिछले 8 दिन से उनका काम लोगों की परेशानियाँ सुनना और उसका समाधान निकालना है। यूपी में बीजेपी के सत्ता पर आसीन होने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव कार्यक्रम के समय श्री रामचंद्र एयरपोर्ट के निर्माण की घोषणा की थी। आरोपी को जामुन, बरगद, आम, महुआ, गूलर, पिलखन और सागौन वगैरह के 50 पौधे लगाने होंगे। वन विभाग को इन पौधों की 6 महीने तक देखभाल करनी होगी। राष्ट्र के नाम सम्बोधन में पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए कंपनियों से आगे आने की अपील की थी। अम्बानी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में उद्योग स्थापित करने और रोजगार को बढ़ावा देने का जो स्वप्न देखा है, रिलायंस परिवार उसे पूरा करने को प्रतिबद्ध है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंगला दिल्ली के लुटियन जोन के एपीजी अब्दुल कलाम रोड पर है और यह संपत्ति मोजर बेयर ग्रुप की कंपनी रामा एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसके मालिक और प्रवर्तक रतुल पुरी के पिता दीपक पुरी हैं। गंगाराम अस्पताल के पेडिएट्रिक्ट कार्डिएक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. राजा जोशी की अगुवाई में इलाज शुरू हुआ। जब जाँच हुई तो पता चला 2 साल की स्टैश का तो दिल का आधा हिस्सा ही जन्म से गायब है। जिस कारण वह बार-बार नीली पड़ती थी और उसको पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने पर उसकी साँस भी फूलने लगती थी।
कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा कि राम का जन्मस्थान कहाँ है? तो वकील एस सी वैद्यनाथन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राम का जन्मस्थान बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे है। "दो हज़ार उन्नीस में दोबारा सरकार में आने पर भाजपा एक नया संविधान लिख सकती है, जिससे राष्ट्र पाकिस्तान बनने के मार्ग पर बढ़ जाएगा। फिर, राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सामने करने वाला कोई नहीं होगा। " डॉ. असगर विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने से चार दिन पहले ही सूचना निदेशक नियुक्त की गईं थी। उनका काम लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करना था। पिछले आठ दिन से उनका काम लोगों की परेशानियाँ सुनना और उसका समाधान निकालना है। यूपी में बीजेपी के सत्ता पर आसीन होने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव कार्यक्रम के समय श्री रामचंद्र एयरपोर्ट के निर्माण की घोषणा की थी। आरोपी को जामुन, बरगद, आम, महुआ, गूलर, पिलखन और सागौन वगैरह के पचास पौधे लगाने होंगे। वन विभाग को इन पौधों की छः महीने तक देखभाल करनी होगी। राष्ट्र के नाम सम्बोधन में पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए कंपनियों से आगे आने की अपील की थी। अम्बानी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में उद्योग स्थापित करने और रोजगार को बढ़ावा देने का जो स्वप्न देखा है, रिलायंस परिवार उसे पूरा करने को प्रतिबद्ध है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंगला दिल्ली के लुटियन जोन के एपीजी अब्दुल कलाम रोड पर है और यह संपत्ति मोजर बेयर ग्रुप की कंपनी रामा एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसके मालिक और प्रवर्तक रतुल पुरी के पिता दीपक पुरी हैं। गंगाराम अस्पताल के पेडिएट्रिक्ट कार्डिएक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. राजा जोशी की अगुवाई में इलाज शुरू हुआ। जब जाँच हुई तो पता चला दो साल की स्टैश का तो दिल का आधा हिस्सा ही जन्म से गायब है। जिस कारण वह बार-बार नीली पड़ती थी और उसको पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने पर उसकी साँस भी फूलने लगती थी।
अगर आप सोने की खरीदारी करने की सोच रहे हैं तो तुरंत खरीदारी कर लें क्योंकि इस समय सोना अपने रिकार्ड स्तर से 11,000 रुपये सस्ते रेट पर मिल रहा है. यूएस फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करने के फैसले से सोने की कीमतों में जो उछाल दिखा था वो टिक नहीं पाया और एकबार फिर से सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ने लगी है. डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़त ने सोने पर दबाव बनाया लेकिन क्या ये सोने-चांदी में खरीदारी का सही मौका है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसार गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोना 105 रुपये बढ़कर 44,509 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया. पिछले कारोबार में कीमती धातु 44,404 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी. 1 मार्च को 1,755. 25 डॉलर के उच्चतम स्तर को छूने के बाद सोना 0. 9 फीसदी घटकर 1,729. 31 डॉलर प्रति औंस था. अमेरिकी सोना वायदा 0. 1फीसदी बढ़कर 1,728. 50 डॉलर पर बंद हुआ. भारतीय अपनी सोने और चांदी की जरूरतों का थोक आयात करता है. जुलाई 2019 से ड्यूटी 10 फीसदी बढ़ी थी, इसलिए सोने की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई. 1 फरवरी को पेश बजट में सरकार ने कस्टम ड्यूटी में कटौती की है. सोने पर आयात शुल्क को 7. 5 फीसदी तक कम करना जेम्स एंड ज्वैलरी उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग थी. अधिक आयात शुल्क न केवल अप्रत्यक्ष रूप से अवैध सोने के लेनदेन को बढ़ावा दे रहा था, बल्कि सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रहा था. माना जा रहा है कि इससे तस्करी पर भी लगाम लगेगी.
अगर आप सोने की खरीदारी करने की सोच रहे हैं तो तुरंत खरीदारी कर लें क्योंकि इस समय सोना अपने रिकार्ड स्तर से ग्यारह,शून्य रुपयापये सस्ते रेट पर मिल रहा है. यूएस फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करने के फैसले से सोने की कीमतों में जो उछाल दिखा था वो टिक नहीं पाया और एकबार फिर से सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ने लगी है. डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़त ने सोने पर दबाव बनाया लेकिन क्या ये सोने-चांदी में खरीदारी का सही मौका है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसार गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोना एक सौ पाँच रुपयापये बढ़कर चौंतालीस,पाँच सौ नौ रुपयापये प्रति दस ग्राम हो गया. पिछले कारोबार में कीमती धातु चौंतालीस,चार सौ चार रुपयापये प्रति दस ग्राम पर बंद हुई थी. एक मार्च को एक,सात सौ पचपन. पच्चीस डॉलर के उच्चतम स्तर को छूने के बाद सोना शून्य. नौ फीसदी घटकर एक,सात सौ उनतीस. इकतीस डॉलर प्रति औंस था. अमेरिकी सोना वायदा शून्य. एकफीसदी बढ़कर एक,सात सौ अट्ठाईस. पचास डॉलर पर बंद हुआ. भारतीय अपनी सोने और चांदी की जरूरतों का थोक आयात करता है. जुलाई दो हज़ार उन्नीस से ड्यूटी दस फीसदी बढ़ी थी, इसलिए सोने की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई. एक फरवरी को पेश बजट में सरकार ने कस्टम ड्यूटी में कटौती की है. सोने पर आयात शुल्क को सात. पाँच फीसदी तक कम करना जेम्स एंड ज्वैलरी उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग थी. अधिक आयात शुल्क न केवल अप्रत्यक्ष रूप से अवैध सोने के लेनदेन को बढ़ावा दे रहा था, बल्कि सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रहा था. माना जा रहा है कि इससे तस्करी पर भी लगाम लगेगी.
कांग्रेस के महासचिव के. सी वेणुगोपाल की ओर से जारी एक लेटर के अनुसार पवन खेड़ा की इस पद पर नियुक्ति को पार्टी प्रेजिडेंट सोनिया गांधी ने अपनी मंजूरी दे दी है। नेशनल हेराल्ड केस में सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने दिल्ली में पेशी हुई। यह इस आयोजन का नौवां एडिशन है। जूरी की अध्यक्षता आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरपर्सन हर्ष गोयनका करेंगे। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके सांसद बेटे राहुल गांधी को तलब किया है। रूटलेज पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित डॉ. ऐश्वर्या पंडित की इस पुस्तक का बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया गया। दिल्ली में 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' (IIC) के सेमिनार हॉल में शाम छह बजे से आयोजित एक कार्यक्रम में की जाएगी इस किताब की लॉन्चिंग। कांग्रेस का चौथा चिंतन शिविर अरसे बाद कुछ स्पष्ट और ठोस संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। इस शिविर में लंबे समय से दल में अनेक मसलों पर छाया कुहासा दूर होता दिखाई दे रहा है। एमओयू पर आईआईएमसी की ओर से महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने हस्ताक्षर किए। 'मन्नतें फाउंडेशन' की ओर से आगरा के होटल क्रिस्टल सरोवर में आयोजित एक समारोह में उन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दिल्ली में स्थित 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' में 27 अप्रैल 2022 को आयोजित एक कार्यक्रम में इस लिस्ट में शामिल हुए 40 प्रतिभाशाली पत्रकारों के नामों की घोषणा की गई और उन्हें सम्मानित भी किया गया। दिल्ली स्थित 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' (IIC) में 28 अप्रैल 2022 को आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि होंगे। साल 2020 व 2021 में पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) ने अपने इंडिया अवॉर्ड की घोषणा कर दी है। हिंदी न्यूज चैनल 'टीवी9 भारतवर्ष' के पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने प्रेस वार्ता में जब प्रियंका गांधी से कहा कि आपके ट्वीट से हिजाब पर बहस छिड़ गई तो वह गुस्सा हो गईं। न्यूज24 की एडिटर-इन-चीफ अनुराधा प्रसाद ने प्रियंका गांधी से पूछा कि कभी ऐसा मौका आया जब सभी को साथ आना पड़ा, तो आप अखिलेश को समर्थन देंगी? 'इंडियाकास्ट' से पहले अनुज गांधी देश की प्रमुख केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी DEN Networks में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। तृणमूल कांग्रेस की नेत्री ममता बनर्जी के तेवर इन दिनों हैरान करने वाले हैं। चंद रोज पहले तक वे यूपीए के बारे में कुछ नहीं बोलती थीं।
कांग्रेस के महासचिव के. सी वेणुगोपाल की ओर से जारी एक लेटर के अनुसार पवन खेड़ा की इस पद पर नियुक्ति को पार्टी प्रेजिडेंट सोनिया गांधी ने अपनी मंजूरी दे दी है। नेशनल हेराल्ड केस में सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रवर्तन निदेशालय के सामने दिल्ली में पेशी हुई। यह इस आयोजन का नौवां एडिशन है। जूरी की अध्यक्षता आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरपर्सन हर्ष गोयनका करेंगे। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके सांसद बेटे राहुल गांधी को तलब किया है। रूटलेज पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित डॉ. ऐश्वर्या पंडित की इस पुस्तक का बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया गया। दिल्ली में 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' के सेमिनार हॉल में शाम छह बजे से आयोजित एक कार्यक्रम में की जाएगी इस किताब की लॉन्चिंग। कांग्रेस का चौथा चिंतन शिविर अरसे बाद कुछ स्पष्ट और ठोस संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। इस शिविर में लंबे समय से दल में अनेक मसलों पर छाया कुहासा दूर होता दिखाई दे रहा है। एमओयू पर आईआईएमसी की ओर से महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने हस्ताक्षर किए। 'मन्नतें फाउंडेशन' की ओर से आगरा के होटल क्रिस्टल सरोवर में आयोजित एक समारोह में उन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दिल्ली में स्थित 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' में सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को आयोजित एक कार्यक्रम में इस लिस्ट में शामिल हुए चालीस प्रतिभाशाली पत्रकारों के नामों की घोषणा की गई और उन्हें सम्मानित भी किया गया। दिल्ली स्थित 'इंडिया इंटरनेशनल सेंटर' में अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि होंगे। साल दो हज़ार बीस व दो हज़ार इक्कीस में पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट ने अपने इंडिया अवॉर्ड की घोषणा कर दी है। हिंदी न्यूज चैनल 'टीवीनौ भारतवर्ष' के पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने प्रेस वार्ता में जब प्रियंका गांधी से कहा कि आपके ट्वीट से हिजाब पर बहस छिड़ गई तो वह गुस्सा हो गईं। न्यूजचौबीस की एडिटर-इन-चीफ अनुराधा प्रसाद ने प्रियंका गांधी से पूछा कि कभी ऐसा मौका आया जब सभी को साथ आना पड़ा, तो आप अखिलेश को समर्थन देंगी? 'इंडियाकास्ट' से पहले अनुज गांधी देश की प्रमुख केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी DEN Networks में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। तृणमूल कांग्रेस की नेत्री ममता बनर्जी के तेवर इन दिनों हैरान करने वाले हैं। चंद रोज पहले तक वे यूपीए के बारे में कुछ नहीं बोलती थीं।
त्रिपोली - लीबिया में मेडिटेरनियन सी तट पर एक नौका के डूब जाने से उसमें सवार करीब 130 शरणार्थियों के मरने की आशंका है। गैरसरकारी संगठन एसओएस मेडिटेरनी ने यह जानकारी दी। संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक ओसीन वाइकिंग नौका बुधवार को त्रिपोली के उत्तर-पूर्व में मेडिटेरनियन सी तट के समीप समुद्र में डूब गई। नौका में करीब 130 लोग सवार थे। काफी खोजबीन के बाद इन लोगों का पता नहीं चला।
त्रिपोली - लीबिया में मेडिटेरनियन सी तट पर एक नौका के डूब जाने से उसमें सवार करीब एक सौ तीस शरणार्थियों के मरने की आशंका है। गैरसरकारी संगठन एसओएस मेडिटेरनी ने यह जानकारी दी। संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक ओसीन वाइकिंग नौका बुधवार को त्रिपोली के उत्तर-पूर्व में मेडिटेरनियन सी तट के समीप समुद्र में डूब गई। नौका में करीब एक सौ तीस लोग सवार थे। काफी खोजबीन के बाद इन लोगों का पता नहीं चला।
भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड योजना के तहत मप्र के 6 हजार 227 व्यापारियों ने लगभग 368 करोड़ रुपए का रिफंड मांगा है। यह रिफंड अधिक भुगतान करने वाले व्यापारियों और स्पेशल ईकोनॉमिक जोन (एसईजेड) या निर्यातकों को किया जा रहा है। व्यापारियों को रिफंड करने के मामले में मप्र देश में सबसे आगे है। छह जून तक ज्यादा भुगतान करने के कारण दिए जाने वाले रिफंड के मामले में मप्र देश में पहले नंबर है, वहीं निर्यातकों को रिफंड देने के मामले में गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अधिक भुगतान के कारण रिफंड के मामलों में राज्य सरकार ने 364 व्यापारियों को 13 करोड़ 55 लाख रुपए से ज्यादा के नकद रिफंड के आदेश दिए गए हैं। वहीं 49 निर्यातकों को करीब 14 करोड़ रुपए का रिफंड दे चुकी है। 6 हजार 227 व्यापरियों द्वारा क्लेम किए गए रिफंड का कुछ हिस्सा केंद्र सरकार देगी, वहीं कुछ हिस्सा मप्र सरकार देगी। केंद्र सरकार करीब 2003 व्यापारियों को 175 करोड़ रुपए का रिफंड देगी, वहीं राज्य सरकार 4224 व्यापारियों को 192 करोड़ रुपए का रिफंड देगी। जीएसटी रिफंड योजना में एक बड़ी समस्या यह भी आ रही है कि ज्यादातर व्यापारियों ने रिफंड के लिए ऑनलाइन तो आवेदन कर दिया, लेकिन उसे मैनुअली जमा नहीं कराया। इस वजह से कई व्यापारियों को रिफंड नहीं मिल पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 6227 में से 1573 व्यापारियों ने ही जीएसटी रिफंड के लिए मैनुअली आवेदन जमा किया है। इसमें से 1286 आवेदन रिफंड के लिए स्वीकृत हो चुके हैं। गौरतलब है कि रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मैनुअली भी फॉर्म जमा करना सरकार ने अनिवार्य किया है।
भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर रिफंड योजना के तहत मप्र के छः हजार दो सौ सत्ताईस व्यापारियों ने लगभग तीन सौ अड़सठ करोड़ रुपए का रिफंड मांगा है। यह रिफंड अधिक भुगतान करने वाले व्यापारियों और स्पेशल ईकोनॉमिक जोन या निर्यातकों को किया जा रहा है। व्यापारियों को रिफंड करने के मामले में मप्र देश में सबसे आगे है। छह जून तक ज्यादा भुगतान करने के कारण दिए जाने वाले रिफंड के मामले में मप्र देश में पहले नंबर है, वहीं निर्यातकों को रिफंड देने के मामले में गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अधिक भुगतान के कारण रिफंड के मामलों में राज्य सरकार ने तीन सौ चौंसठ व्यापारियों को तेरह करोड़ पचपन लाख रुपए से ज्यादा के नकद रिफंड के आदेश दिए गए हैं। वहीं उनचास निर्यातकों को करीब चौदह करोड़ रुपए का रिफंड दे चुकी है। छः हजार दो सौ सत्ताईस व्यापरियों द्वारा क्लेम किए गए रिफंड का कुछ हिस्सा केंद्र सरकार देगी, वहीं कुछ हिस्सा मप्र सरकार देगी। केंद्र सरकार करीब दो हज़ार तीन व्यापारियों को एक सौ पचहत्तर करोड़ रुपए का रिफंड देगी, वहीं राज्य सरकार चार हज़ार दो सौ चौबीस व्यापारियों को एक सौ बानवे करोड़ रुपए का रिफंड देगी। जीएसटी रिफंड योजना में एक बड़ी समस्या यह भी आ रही है कि ज्यादातर व्यापारियों ने रिफंड के लिए ऑनलाइन तो आवेदन कर दिया, लेकिन उसे मैनुअली जमा नहीं कराया। इस वजह से कई व्यापारियों को रिफंड नहीं मिल पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक छः हज़ार दो सौ सत्ताईस में से एक हज़ार पाँच सौ तिहत्तर व्यापारियों ने ही जीएसटी रिफंड के लिए मैनुअली आवेदन जमा किया है। इसमें से एक हज़ार दो सौ छियासी आवेदन रिफंड के लिए स्वीकृत हो चुके हैं। गौरतलब है कि रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मैनुअली भी फॉर्म जमा करना सरकार ने अनिवार्य किया है।
(जी. एन. एस) ता. 28 बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला आया है। यहां मृत बेटे की नौकरी बहू को न मिल जाए, इसलिए ससुरालवालों ने बहू की शादी की फर्जी फोटो कोर्ट में सबूत के रूप में पेश कर दी। तस्वीर में महिला की शादी फिल्म स्टार सलमान खान से होना दिखाया गया है। फोटो पेश कर ससुराल पक्ष ने दावा किया है कि उनकी बहू पहले से शादीशुदा है।
ता. अट्ठाईस बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला आया है। यहां मृत बेटे की नौकरी बहू को न मिल जाए, इसलिए ससुरालवालों ने बहू की शादी की फर्जी फोटो कोर्ट में सबूत के रूप में पेश कर दी। तस्वीर में महिला की शादी फिल्म स्टार सलमान खान से होना दिखाया गया है। फोटो पेश कर ससुराल पक्ष ने दावा किया है कि उनकी बहू पहले से शादीशुदा है।
सर्दियों का मौसम शुरू हो चूका है, वहीं पहाड़ों पर बर्फ गिरने के साथ ही मैदानी क्षेत्रों की शीत लहर तेज हो गई है. जिसकी वजह से तापमान बहुत तेजी से नीचे आ गया है. ऐसे वक़्त हमें अपने सेहत का सबसे अधिक ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. ठंड के दिनों में की गई एक छोटी सी त्रुटि भी बहुत खतरनाक साबित हो सकती है. कई व्यक्तियों की यह धारणा होती है कि ठंड के सीजन में शरीर को गर्म रखने के लिए अधिक खाना चाहिए, जिससे शरीर की गर्मी बनी रहती है. यदि आप सर्दियों के चलते खाने पर अधिक ध्यान देकर एक्सरसाइज पर कम ध्यान दे रहे हैं तो आने वाले वक़्त में इससे आपको ही हानि होने वाली है. सर्दियों के पश्चात् आपका बहुत वजन बढ़ सकता है. जिसे कम करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ सकती है. ठंड के आरम्भ के साथ ही लोग अक्सर पानी का उपयोग कम कर देते हैं. लोगों का सोचना है कि गर्मियों के दिनों में पसीना अधिक निकलने की वजह से अधिक पानी पीते हैं, वहीं सर्दियों में कम पानी की आवश्यकता होती है. बता दें कि हमें प्रतिदिन 6 से 8 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए. इससे हमारा शरीर हाइड्रेट रहता है तथा डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है. सर्दियों के आरम्भ के साथ कई लोग अपनी सहूलियत के लिए गर्म पानी से नहाना आरम्भ कर देते हैं. ऐसा करने से भले ही शरीर ठंड से बच जाता है मगर दूसरी तरफ इससे बहुत हानि भी होती है. गर्म पानी से नहाने की वजह से हमारी त्वचा बहुत ड्राई और रूखी हो जाती है. कभी कभी अधिक गर्म पानी से नहाने की वजह से स्किन सेल्स डैमेज हो जाते हैं. सर्दियों में त्वचा में नमी समाप्त हो जाने की वजह से यह रूखी हो जाती है. जिसकी वजह से कई लोग क्रीम का उपयोग इसे हील करने के लिए करते हैं. कुछ लोग दिन में कई बार क्रीम का उपयोग करते हैं. जिससे त्वचा पर एलर्जी हो सकती है. इसलिए त्वचा को ड्राई होने से बचाने तथा मॉइश्चर बनाए रखने के लिए सीमित मात्रा में इसका उपयोग करें. ठंड में सभी लोग अधिक कपड़े पहनने की सलाह देते हैं. वहीं अधिकतर गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है. ऐसा करने से हम बॉडी को बहुत हानि पहुंचाते हैं. ठंड के सीजन में अधिक गर्म कपड़े पहनने से हम शरीर की ठंड प्रतिरोधक क्षमता तो बहुत कम कर देते हैं. साथ ही इससे ठंड लगने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. दरअसल अधिक गर्म कपड़े पहनने से शरीर से तेजी से पलीना बाहर निकलता है. जो ठंड के सीजन में ठंड लगने के लिए काफी बड़ा कारक होता है.
सर्दियों का मौसम शुरू हो चूका है, वहीं पहाड़ों पर बर्फ गिरने के साथ ही मैदानी क्षेत्रों की शीत लहर तेज हो गई है. जिसकी वजह से तापमान बहुत तेजी से नीचे आ गया है. ऐसे वक़्त हमें अपने सेहत का सबसे अधिक ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. ठंड के दिनों में की गई एक छोटी सी त्रुटि भी बहुत खतरनाक साबित हो सकती है. कई व्यक्तियों की यह धारणा होती है कि ठंड के सीजन में शरीर को गर्म रखने के लिए अधिक खाना चाहिए, जिससे शरीर की गर्मी बनी रहती है. यदि आप सर्दियों के चलते खाने पर अधिक ध्यान देकर एक्सरसाइज पर कम ध्यान दे रहे हैं तो आने वाले वक़्त में इससे आपको ही हानि होने वाली है. सर्दियों के पश्चात् आपका बहुत वजन बढ़ सकता है. जिसे कम करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ सकती है. ठंड के आरम्भ के साथ ही लोग अक्सर पानी का उपयोग कम कर देते हैं. लोगों का सोचना है कि गर्मियों के दिनों में पसीना अधिक निकलने की वजह से अधिक पानी पीते हैं, वहीं सर्दियों में कम पानी की आवश्यकता होती है. बता दें कि हमें प्रतिदिन छः से आठ गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए. इससे हमारा शरीर हाइड्रेट रहता है तथा डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है. सर्दियों के आरम्भ के साथ कई लोग अपनी सहूलियत के लिए गर्म पानी से नहाना आरम्भ कर देते हैं. ऐसा करने से भले ही शरीर ठंड से बच जाता है मगर दूसरी तरफ इससे बहुत हानि भी होती है. गर्म पानी से नहाने की वजह से हमारी त्वचा बहुत ड्राई और रूखी हो जाती है. कभी कभी अधिक गर्म पानी से नहाने की वजह से स्किन सेल्स डैमेज हो जाते हैं. सर्दियों में त्वचा में नमी समाप्त हो जाने की वजह से यह रूखी हो जाती है. जिसकी वजह से कई लोग क्रीम का उपयोग इसे हील करने के लिए करते हैं. कुछ लोग दिन में कई बार क्रीम का उपयोग करते हैं. जिससे त्वचा पर एलर्जी हो सकती है. इसलिए त्वचा को ड्राई होने से बचाने तथा मॉइश्चर बनाए रखने के लिए सीमित मात्रा में इसका उपयोग करें. ठंड में सभी लोग अधिक कपड़े पहनने की सलाह देते हैं. वहीं अधिकतर गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है. ऐसा करने से हम बॉडी को बहुत हानि पहुंचाते हैं. ठंड के सीजन में अधिक गर्म कपड़े पहनने से हम शरीर की ठंड प्रतिरोधक क्षमता तो बहुत कम कर देते हैं. साथ ही इससे ठंड लगने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. दरअसल अधिक गर्म कपड़े पहनने से शरीर से तेजी से पलीना बाहर निकलता है. जो ठंड के सीजन में ठंड लगने के लिए काफी बड़ा कारक होता है.
नई दिल्ली। यह बात और सवाल थोड़ा अजीब है पर हर हद पर सच है। हर मां-बाप ये सोंचते हैं कि उनका बेटा और बेटी उनकी जद में रहे। इसके लिए वो परेशान रहते हैं। वैसे भी ये जमाना बड़ा अजीब है, जो गलत को गलत और सही को सही नहीं कहता। बल्कि कई बार सही को गलत और गलत को सही मान लेता है। आज के दौर में भी एक लड़का और लड़की को साथ में पार्क में बैठने पर भी एतराज मानता है। अगर कोई लड़का लड़की अपनी मर्जी से किसी पार्क में बैठ के बात करना चाहें तो वो नहीं कर सकते क्योंकि आज भी कुछ नजरें ऐसी होती हैं जो उन्हें परेशान कर देती हैं और कई बार उन्हें लोगों की छोटी मानसिकता का शिकार हो जाना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि इन्हें परेशान करने वाले केवल आम लोग ही होते हैं बल्कि हमारा प्रशासन भी इनकी हिफाजत करने के वजाय उल्टा इन्हीं को कई बार ठाणे में बिठा देता है और उनका तर्क होता है कि उन्हें इस तरह पार्क में नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि फिर छेड़खानी होती है, तो फिर उन्हें ही परेशानी होती है। लड़का और लड़की चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते। ऐसा नहीं है कि ये सब छोटे शहरों का ही मामला है, ये सब बड़े शहरों में भी होता है। बड़े शहरों से भी आये दिन इस तरह की ख़बरें आती रहती हैं।
नई दिल्ली। यह बात और सवाल थोड़ा अजीब है पर हर हद पर सच है। हर मां-बाप ये सोंचते हैं कि उनका बेटा और बेटी उनकी जद में रहे। इसके लिए वो परेशान रहते हैं। वैसे भी ये जमाना बड़ा अजीब है, जो गलत को गलत और सही को सही नहीं कहता। बल्कि कई बार सही को गलत और गलत को सही मान लेता है। आज के दौर में भी एक लड़का और लड़की को साथ में पार्क में बैठने पर भी एतराज मानता है। अगर कोई लड़का लड़की अपनी मर्जी से किसी पार्क में बैठ के बात करना चाहें तो वो नहीं कर सकते क्योंकि आज भी कुछ नजरें ऐसी होती हैं जो उन्हें परेशान कर देती हैं और कई बार उन्हें लोगों की छोटी मानसिकता का शिकार हो जाना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि इन्हें परेशान करने वाले केवल आम लोग ही होते हैं बल्कि हमारा प्रशासन भी इनकी हिफाजत करने के वजाय उल्टा इन्हीं को कई बार ठाणे में बिठा देता है और उनका तर्क होता है कि उन्हें इस तरह पार्क में नहीं बैठना चाहिए। क्योंकि फिर छेड़खानी होती है, तो फिर उन्हें ही परेशानी होती है। लड़का और लड़की चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते। ऐसा नहीं है कि ये सब छोटे शहरों का ही मामला है, ये सब बड़े शहरों में भी होता है। बड़े शहरों से भी आये दिन इस तरह की ख़बरें आती रहती हैं।
इसमें कोई शक नहीं है कि प्रियंका चोपड़ा जोनास ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपना नाम बनाया है। वहीं, पीसी उन चार भारतीय महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बीबीसी की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में जगह बनाई है। पीसी को यह जानकर गर्व होगा कि वह इस सूची में जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय अभिनेत्री हैं। इस लिस्ट में मशहूर सिंगर बिली इलिश और हॉलीवुड आइकन रीटा मोरेनो जैसे नाम शामिल हैं। सूची में शेष 3 भारतीय महिलाओं में एयरोनॉटिकल इंजीनियर सिरिशा बंदला, लेखिका गीतांजलि श्री और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहा जावले का नाम शामिल है। इस लिस्ट में प्रियंका चोपड़ा को बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार माना जाता है जिन्होंने 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। बता दें कि प्रियंका ने साल 2002 में बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रियंका चोपड़ा ने साल 2015 में अमेरिकन ड्रामा सीरीज 'क्वांटिको' में काम किया और खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद उन्होंने भारत में अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी भी शुरू की। पीसी बच्चों के अधिकारों और लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली यूनिसेफ सद्भावना राजदूत भी हैं। इस लिस्ट में प्रियंका का नाम उनके फैंस के लिए बड़ी खबर है। वहीं प्रियंका चोपड़ा के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह अगले साल फरहान अख्तर की फिल्म 'जी ले जरा' की शूटिंग शुरू करेंगी, जिसमें उनके साथ आलिया भट्ट और कटरीना कैफ होंगी. कैफ) भी प्रमुख भूमिका में हैं।
इसमें कोई शक नहीं है कि प्रियंका चोपड़ा जोनास ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपना नाम बनाया है। वहीं, पीसी उन चार भारतीय महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बीबीसी की एक सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में जगह बनाई है। पीसी को यह जानकर गर्व होगा कि वह इस सूची में जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय अभिनेत्री हैं। इस लिस्ट में मशहूर सिंगर बिली इलिश और हॉलीवुड आइकन रीटा मोरेनो जैसे नाम शामिल हैं। सूची में शेष तीन भारतीय महिलाओं में एयरोनॉटिकल इंजीनियर सिरिशा बंदला, लेखिका गीतांजलि श्री और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहा जावले का नाम शामिल है। इस लिस्ट में प्रियंका चोपड़ा को बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार माना जाता है जिन्होंने साठ से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। बता दें कि प्रियंका ने साल दो हज़ार दो में बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रियंका चोपड़ा ने साल दो हज़ार पंद्रह में अमेरिकन ड्रामा सीरीज 'क्वांटिको' में काम किया और खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद उन्होंने भारत में अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी भी शुरू की। पीसी बच्चों के अधिकारों और लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली यूनिसेफ सद्भावना राजदूत भी हैं। इस लिस्ट में प्रियंका का नाम उनके फैंस के लिए बड़ी खबर है। वहीं प्रियंका चोपड़ा के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह अगले साल फरहान अख्तर की फिल्म 'जी ले जरा' की शूटिंग शुरू करेंगी, जिसमें उनके साथ आलिया भट्ट और कटरीना कैफ होंगी. कैफ) भी प्रमुख भूमिका में हैं।
Bigg Boss 16: बिग बॉस-16 का सफ़र धीरे-धीरे अपनी मंज़िल तक बढ़ रहा है. बिग बॉस के घर में आपके भी कई फ़ेवरेट कंटेस्टेंट होंगे, लेकिन-लेकिन यहां एक पेंच. वो ये कि ये इतना झगड़ते हैं कि कई बार ऐसा लगता है कि क्या सच में हमारा फ़ेवरेट कंटेस्टेंट यही है. इस सीज़न एक नहीं कई बार ऐसा हुआ कि झगड़ा शुरू किसी ने किया और उसका ख़ामियाजा पूरे घरवालों को भुगतना पड़ा. सभी एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे. चलिए नज़र डालते हैं कुछ ऐसी ही फ़ाइट्स पर जिनकी वजह से पूरे घरवालों के रिश्तों के बीच पड़ गई दरार. अर्चना किचन में निम्रत के साथ लड़ रही थीं, तभी पता नहीं अर्चना को क्या हुआ कि वो शिव से भिड़ गईं. बात हाथापाई तक पहुंच गई थी. इस फ़ाइट की वजह से सभी घरवालों का मूड ख़राब हो गया ये दो टीम में बंट गए. सुंबुल और गोरी नागोरी की किचन में एक टॉवल के लिए झगड़ बैठे. तब बात इतनी बढ़ गई की श्रीजीता ने गोरी को स्टैंडर्ड लैस बोल दिया फिर बात बढ़ गई और ये झगड़ा सुंबुल, गोरी, श्रीजिता और स्टैन यानी सबका झगड़ा बन गया. प्रियंका ने शालीन के प्रोटीन रिक्वायरमेंट पर कमेंट किया. फिर बात अंडे और चिकन की होने लगी कि उन्हें नहीं मिलता. देखते ही देखते ये बहस तेज़ हो गई गौरव, अंकित और निम्रत भी इस लड़ाई में कूद गए. जब भी कोई लड़ाई होती है तो बाहरी लोग उसे शांत करवाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बिग बॉस के घर मे ऐसा नहीं होता. यहां बीच-बचाव करने वाले ही लड़ने लग जाते हैं जैसा शालीन और स्टैन की फ़ाइट में देखने को मिला. दोनों एक दूसरे को गालियां तक दे रहे थे, बीच बचाव करने वाले आए और वो भी झगड़ने लगे. शिव और शालीन भी एक दूसरे एक आमने सामने आ गए. साजिद ने इनडायरेक्टली अर्चना को कुछ कहा. अर्चना कहा चुप रहने वाली थीं. उन्होंने भी करारा जवाब दिया. बात इतनी बढ़ गई कि दोनों एक दूसरे मां-बाप को झगड़े में घसीट लाए. यहां किसी ने किसी का साइड तो नहीं लिया. लेकिन सब फिर से दो धड़ों में बंट गए. Dekhiye #BiggBoss16 Mon-Fri raat 10 baje aur Sat-Sun raat 9. 30 baje, sirf #Colors par. किचन में चीनी के लिए अर्चना और प्रियंका लड़ गईं. अर्चना पर चीनी के ज़्यादा पराठे खाने का इल्ज़ाम लगा. इसलिए चीनी ख़त्म हो रही थी तो टीना की चीनी कॉमन एरिया में रखने की बात हुई. टीना ने भी करारा जवाब दिया. इस चीनी की जंग में टीना, सौंदर्या, अर्चना और प्रियंका आपस में भिड़ गईं. बस अपनी Glamm Selfie इंस्टाग्राम पर #BiggBossMyGlammQueen के साथ पोस्ट करें और आप पा सकती हैं Glamm Makeover और बिग बॉस के सेट पर सलमान खान से मिलने का मौका! Excited! ? इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए MyGlamm के Instagram पेज पर जाएं.
Bigg Boss सोलह: बिग बॉस-सोलह का सफ़र धीरे-धीरे अपनी मंज़िल तक बढ़ रहा है. बिग बॉस के घर में आपके भी कई फ़ेवरेट कंटेस्टेंट होंगे, लेकिन-लेकिन यहां एक पेंच. वो ये कि ये इतना झगड़ते हैं कि कई बार ऐसा लगता है कि क्या सच में हमारा फ़ेवरेट कंटेस्टेंट यही है. इस सीज़न एक नहीं कई बार ऐसा हुआ कि झगड़ा शुरू किसी ने किया और उसका ख़ामियाजा पूरे घरवालों को भुगतना पड़ा. सभी एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे. चलिए नज़र डालते हैं कुछ ऐसी ही फ़ाइट्स पर जिनकी वजह से पूरे घरवालों के रिश्तों के बीच पड़ गई दरार. अर्चना किचन में निम्रत के साथ लड़ रही थीं, तभी पता नहीं अर्चना को क्या हुआ कि वो शिव से भिड़ गईं. बात हाथापाई तक पहुंच गई थी. इस फ़ाइट की वजह से सभी घरवालों का मूड ख़राब हो गया ये दो टीम में बंट गए. सुंबुल और गोरी नागोरी की किचन में एक टॉवल के लिए झगड़ बैठे. तब बात इतनी बढ़ गई की श्रीजीता ने गोरी को स्टैंडर्ड लैस बोल दिया फिर बात बढ़ गई और ये झगड़ा सुंबुल, गोरी, श्रीजिता और स्टैन यानी सबका झगड़ा बन गया. प्रियंका ने शालीन के प्रोटीन रिक्वायरमेंट पर कमेंट किया. फिर बात अंडे और चिकन की होने लगी कि उन्हें नहीं मिलता. देखते ही देखते ये बहस तेज़ हो गई गौरव, अंकित और निम्रत भी इस लड़ाई में कूद गए. जब भी कोई लड़ाई होती है तो बाहरी लोग उसे शांत करवाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बिग बॉस के घर मे ऐसा नहीं होता. यहां बीच-बचाव करने वाले ही लड़ने लग जाते हैं जैसा शालीन और स्टैन की फ़ाइट में देखने को मिला. दोनों एक दूसरे को गालियां तक दे रहे थे, बीच बचाव करने वाले आए और वो भी झगड़ने लगे. शिव और शालीन भी एक दूसरे एक आमने सामने आ गए. साजिद ने इनडायरेक्टली अर्चना को कुछ कहा. अर्चना कहा चुप रहने वाली थीं. उन्होंने भी करारा जवाब दिया. बात इतनी बढ़ गई कि दोनों एक दूसरे मां-बाप को झगड़े में घसीट लाए. यहां किसी ने किसी का साइड तो नहीं लिया. लेकिन सब फिर से दो धड़ों में बंट गए. Dekhiye #BiggBossसोलह Mon-Fri raat दस baje aur Sat-Sun raat नौ. तीस baje, sirf #Colors par. किचन में चीनी के लिए अर्चना और प्रियंका लड़ गईं. अर्चना पर चीनी के ज़्यादा पराठे खाने का इल्ज़ाम लगा. इसलिए चीनी ख़त्म हो रही थी तो टीना की चीनी कॉमन एरिया में रखने की बात हुई. टीना ने भी करारा जवाब दिया. इस चीनी की जंग में टीना, सौंदर्या, अर्चना और प्रियंका आपस में भिड़ गईं. बस अपनी Glamm Selfie इंस्टाग्राम पर #BiggBossMyGlammQueen के साथ पोस्ट करें और आप पा सकती हैं Glamm Makeover और बिग बॉस के सेट पर सलमान खान से मिलने का मौका! Excited! ? इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए MyGlamm के Instagram पेज पर जाएं.
कांग्रेस नेता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की 'हैसियत' पर उठाए सवाल, पूछा- चोरी-छिपे ग्वालियर क्यों आते हैं? भितरवार से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव ने बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर फिर से निशाना साधा है। लाखन सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि बीजेपी में जाने के बाद से सिंधिया चोरी-छिपे ग्वालियर आते हैं और चले जाते हैं। कई बार तो सिंधिया रात को पहुंचते हैं और लोगों को इसका पता भी नहीं चलता। लाखन सिंह यादव ने इसी बहाने सिंधिया की बीजेपी में हैसियत पर भी सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि सिंधिया जब कांग्रेस में थे, तब उनके ग्वालियर आने पर बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता उन्हें रिसीव करने पहुंचते थे। लेकिन ऐसा नहीं होता। अब तो गिने-चुने लोग ही उनके साथ होते हैं। लाखन सिंह यादव ने आगे कहा कि बीजेपी कैडर आधारित पार्टी है और सिंधिया को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस नेता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की 'हैसियत' पर उठाए सवाल, पूछा- चोरी-छिपे ग्वालियर क्यों आते हैं? भितरवार से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव ने बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर फिर से निशाना साधा है। लाखन सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि बीजेपी में जाने के बाद से सिंधिया चोरी-छिपे ग्वालियर आते हैं और चले जाते हैं। कई बार तो सिंधिया रात को पहुंचते हैं और लोगों को इसका पता भी नहीं चलता। लाखन सिंह यादव ने इसी बहाने सिंधिया की बीजेपी में हैसियत पर भी सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि सिंधिया जब कांग्रेस में थे, तब उनके ग्वालियर आने पर बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता उन्हें रिसीव करने पहुंचते थे। लेकिन ऐसा नहीं होता। अब तो गिने-चुने लोग ही उनके साथ होते हैं। लाखन सिंह यादव ने आगे कहा कि बीजेपी कैडर आधारित पार्टी है और सिंधिया को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेगी।
विधिविधायक विधिविधायकः ६२ ॥ इन तीनों में से विधिवाक्य का लक्षशा करते हैं; इष्टसिद्धि के बोधक (विधिलिए-तमादिकृत्य) प्रत्यय जिस दाका में हों, उसे विधिवाक्य कहते हैं; यथा देात्र या वर्ग कामः इत्यादि इस वाक्यात किया है धान से विधि लि३ के प्रथमपुरुष का एकवचन आके बनी है; इस मियर विधिवाक्य है; विधि में कहे अर्थको स्तुति करके शीशम करना अर्थवाद का प्रयोजन है ६२ ।। स्ततिर्निन्दा परकृतिः पुरा कल्प३त्पर्थवादः ६३ ॥ यह अर्थवाद स्तुति, निंदा, परकृति और प्रकल्प ३१ भेद से चार प्रकार का है, उनमें से विधि के अर्थ की जो सा तात् प्रशंसा करे, उसे स्तुति वाक्य कहते हैं, यथा सब की प्राप्ति के अर्थ और सब को जीतने के अर्थ देवताओं ने सर्व जिन नामो यज्ञ से सब का यजन (राजन) किया; क्योंकि । इस यज्ञ से मनुष्य सब का जीतलता है और सब को प्रात होता है; नकरने से अनिष्टानि) दिखा कर जो बाक्य विधि के अर्थ का प्रदत्त करावे, उसे निंदा वाक्य कहते हैं यथा यह उपातिष्टामयज्ञ संपूर्ण यतों में प्रथम (प्रधान) है, जो मनुष्य इस ज्यातिष्टाम) के किये बिना श्रन्य यज्ञ को करता है; वह नरक में पड़ता है, इत्यादि और जो वा का मनुष्यों के कर्मों में परस्पर विरोध दिखावे उभे पर कृति कहते हैं; यथा हवन कर के कोई तो क्या मजा) को खवे से प्रीता पात्र में डालते हैं; और कोई छून के डालते हैं चश्क यध्वर्यु तो चनको दी डाल के कन्द नेहैं,
विधिविधायक विधिविधायकः बासठ ॥ इन तीनों में से विधिवाक्य का लक्षशा करते हैं; इष्टसिद्धि के बोधक प्रत्यय जिस दाका में हों, उसे विधिवाक्य कहते हैं; यथा देात्र या वर्ग कामः इत्यादि इस वाक्यात किया है धान से विधि लितीन के प्रथमपुरुष का एकवचन आके बनी है; इस मियर विधिवाक्य है; विधि में कहे अर्थको स्तुति करके शीशम करना अर्थवाद का प्रयोजन है बासठ ।। स्ततिर्निन्दा परकृतिः पुरा कल्पतीनत्पर्थवादः तिरेसठ ॥ यह अर्थवाद स्तुति, निंदा, परकृति और प्रकल्प इकतीस भेद से चार प्रकार का है, उनमें से विधि के अर्थ की जो सा तात् प्रशंसा करे, उसे स्तुति वाक्य कहते हैं, यथा सब की प्राप्ति के अर्थ और सब को जीतने के अर्थ देवताओं ने सर्व जिन नामो यज्ञ से सब का यजन किया; क्योंकि । इस यज्ञ से मनुष्य सब का जीतलता है और सब को प्रात होता है; नकरने से अनिष्टानि) दिखा कर जो बाक्य विधि के अर्थ का प्रदत्त करावे, उसे निंदा वाक्य कहते हैं यथा यह उपातिष्टामयज्ञ संपूर्ण यतों में प्रथम है, जो मनुष्य इस ज्यातिष्टाम) के किये बिना श्रन्य यज्ञ को करता है; वह नरक में पड़ता है, इत्यादि और जो वा का मनुष्यों के कर्मों में परस्पर विरोध दिखावे उभे पर कृति कहते हैं; यथा हवन कर के कोई तो क्या मजा) को खवे से प्रीता पात्र में डालते हैं; और कोई छून के डालते हैं चश्क यध्वर्यु तो चनको दी डाल के कन्द नेहैं,
पटना। बिहार में राजनीतिक दल किसी भी मुद्दे पर सियासत करने से नहीं पीछे नहीं रहते हैं। इस बीच, अब प्रदेश में 'आम' पर सियासत शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा में जारी मानसून सत्र के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों को पौधे लगाने के लिए जागरूक करने के लिए कृषि विभाग द्वारा आम के पौधे देने के लिए विधानमंडल परिसर लाया गया। सरकार की इस पहल को लेकर बिहार की सियासत गर्म हो गई। कृषि विभाग द्वारा बुधवार को सभी सदस्यों को आम की एक टोकरी और आम के दो पौधे दिए जा रहे हैं। सरकार की इस पहल को लेकर विपक्ष अब सरकार पर निशाना साध रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इसे एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जोड़ते हुए कहा कि एक तरफ प्रदेश में गरीब के बच्चे मर रहे हैं, वहीं सरकार आम खा रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि जो आम खाएगा उन्हें गरीब बच्चों की हाय लगेगी। इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने भी भाजपा और जद (यू) पर आम को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत का पाप धोने के लिए आम बांटे जा रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग यह आम खाएंगे, उनका पेट भी खराब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आम के पौधे वितरित करने से पौधे लगाने का संदेश पूरे राज्य में जाएगा और लोग इसे लेकर जागरूक होंगे। गौरतलब है कि बिहार में एईएस से अब तक 160 बच्चों की मौत हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे पर अड़ी हुई है।
पटना। बिहार में राजनीतिक दल किसी भी मुद्दे पर सियासत करने से नहीं पीछे नहीं रहते हैं। इस बीच, अब प्रदेश में 'आम' पर सियासत शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा में जारी मानसून सत्र के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों को पौधे लगाने के लिए जागरूक करने के लिए कृषि विभाग द्वारा आम के पौधे देने के लिए विधानमंडल परिसर लाया गया। सरकार की इस पहल को लेकर बिहार की सियासत गर्म हो गई। कृषि विभाग द्वारा बुधवार को सभी सदस्यों को आम की एक टोकरी और आम के दो पौधे दिए जा रहे हैं। सरकार की इस पहल को लेकर विपक्ष अब सरकार पर निशाना साध रही है। राष्ट्रीय जनता दल की नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इसे एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से जोड़ते हुए कहा कि एक तरफ प्रदेश में गरीब के बच्चे मर रहे हैं, वहीं सरकार आम खा रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि जो आम खाएगा उन्हें गरीब बच्चों की हाय लगेगी। इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने भी भाजपा और जद पर आम को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत का पाप धोने के लिए आम बांटे जा रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग यह आम खाएंगे, उनका पेट भी खराब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आम के पौधे वितरित करने से पौधे लगाने का संदेश पूरे राज्य में जाएगा और लोग इसे लेकर जागरूक होंगे। गौरतलब है कि बिहार में एईएस से अब तक एक सौ साठ बच्चों की मौत हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे पर अड़ी हुई है।
LUCKNOW (1 Nov): यातायात माह के आरंभ के कुछ देर बाद ही गोमतीनगर विस्तार पुलिस ने जनेश्वर मिश्र पार्क के पास स्टंटबाज युवकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान तेज रफ्तार में कलाबाजी करते हुए छह युवकों को दबोचा गया। वहीं कुछ वहां से भाग निकले। पुलिस ने मौके से 8 बाइक सीज की हैं। इंस्पेक्टर गोमतीनगर विस्तार अखिलेश चंद्र पांडेय के मुताबिक संडे को अक्सर जनेश्वर मिश्र पार्क व फ्लाईओवर के आसपास स्पोर्ट्स व रेसर बाइक लेकर दर्जनों युवक जुटते हैं। यहां पर अक्सर तेज रफ्तार में बाइकों की रेस होती है। इस दौरान कलाबाजी भी की जाती हैं। इसकी सूचना रविवार दोपहर में पुलिस को राहगीरों ने दी। सूचना मिलने के बाद दरोगा रमेश पटेल, जितेंद्र कुमार दीक्षित के नेतृत्व में टीम बनाई गई। टीम ने दोनों तरफ से घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की। इस दौरान पार्क के सामने व फ्लाईओवर के नीचे कुछ युवक स्टंट करते हुए दिखे। पुलिस को वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने घेराबंदी कर छह लोगों को पकड़ लिया। वहीं मौके से 8 बाइक भी बरामद की। इंस्पेक्टर अखिलेश चंद्र पांडेय के मुताबिक पकड़े गये युवकों में विश्वासखंड निवासी शुभांकर मित्तल, अलीगंज फैलुल्लागंज पुरनिया का अनुराग कन्नौजिया, खरगापुर का रुद्रांश त्रिपाठी, विरामखंड का युयूत्सू सिंह, पुन्नापुर हरदोई का अजय और विभूतिखंड हैनीमैन चौराहा के पास का चंदन शामिल हैं। पुलिस ने सभी गिरफ्तार युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया है। पकड़े गये युवकों की उम्र 18 से 26 साल के बीच है।
LUCKNOW : यातायात माह के आरंभ के कुछ देर बाद ही गोमतीनगर विस्तार पुलिस ने जनेश्वर मिश्र पार्क के पास स्टंटबाज युवकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान तेज रफ्तार में कलाबाजी करते हुए छह युवकों को दबोचा गया। वहीं कुछ वहां से भाग निकले। पुलिस ने मौके से आठ बाइक सीज की हैं। इंस्पेक्टर गोमतीनगर विस्तार अखिलेश चंद्र पांडेय के मुताबिक संडे को अक्सर जनेश्वर मिश्र पार्क व फ्लाईओवर के आसपास स्पोर्ट्स व रेसर बाइक लेकर दर्जनों युवक जुटते हैं। यहां पर अक्सर तेज रफ्तार में बाइकों की रेस होती है। इस दौरान कलाबाजी भी की जाती हैं। इसकी सूचना रविवार दोपहर में पुलिस को राहगीरों ने दी। सूचना मिलने के बाद दरोगा रमेश पटेल, जितेंद्र कुमार दीक्षित के नेतृत्व में टीम बनाई गई। टीम ने दोनों तरफ से घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की। इस दौरान पार्क के सामने व फ्लाईओवर के नीचे कुछ युवक स्टंट करते हुए दिखे। पुलिस को वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने घेराबंदी कर छह लोगों को पकड़ लिया। वहीं मौके से आठ बाइक भी बरामद की। इंस्पेक्टर अखिलेश चंद्र पांडेय के मुताबिक पकड़े गये युवकों में विश्वासखंड निवासी शुभांकर मित्तल, अलीगंज फैलुल्लागंज पुरनिया का अनुराग कन्नौजिया, खरगापुर का रुद्रांश त्रिपाठी, विरामखंड का युयूत्सू सिंह, पुन्नापुर हरदोई का अजय और विभूतिखंड हैनीमैन चौराहा के पास का चंदन शामिल हैं। पुलिस ने सभी गिरफ्तार युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया है। पकड़े गये युवकों की उम्र अट्ठारह से छब्बीस साल के बीच है।
टोनी आलम, एएनएम न्यूज़ : तृणमूल (TMC) नेतृत्व पर panchayat elections के लिए भाजपा (BJP) द्वारा नामांकित दो उम्मीदवारों को धमकाने और पीटने का आरोप (Accused) लगाया गया है। विधायक अग्निमित्रा पाल ने इसका विरोध जताया। दुर्गापुर (Durgpur) फरीदपुर ब्लॉक के कांटाबेरिया क्षेत्र के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के दो भाजपा उम्मीदवारों संतोष गोनी और टुम्पा सेन को तृणमूल उम्मीदवारों ने कथित तौर पर धमकी दी है। बीजेपी प्रत्याशियों ने पिटाई का आरोप लगाया है। बीजेपी विधायक अग्नि मित्र पाल ने पुलिस (Police) पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कटाबेरिया इलाके में धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ किया कि अगर पुलिस ने उनके प्रत्याशियों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो वे थाने का भी घेराव करेंगे और आंदोलन करेंगे। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। अगर पुलिस ने उनके प्रत्याशियों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो वे थाने का भी घेराव करेंगे और आंदोलन करेंगे। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
टोनी आलम, एएनएम न्यूज़ : तृणमूल नेतृत्व पर panchayat elections के लिए भाजपा द्वारा नामांकित दो उम्मीदवारों को धमकाने और पीटने का आरोप लगाया गया है। विधायक अग्निमित्रा पाल ने इसका विरोध जताया। दुर्गापुर फरीदपुर ब्लॉक के कांटाबेरिया क्षेत्र के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के दो भाजपा उम्मीदवारों संतोष गोनी और टुम्पा सेन को तृणमूल उम्मीदवारों ने कथित तौर पर धमकी दी है। बीजेपी प्रत्याशियों ने पिटाई का आरोप लगाया है। बीजेपी विधायक अग्नि मित्र पाल ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कटाबेरिया इलाके में धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ किया कि अगर पुलिस ने उनके प्रत्याशियों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो वे थाने का भी घेराव करेंगे और आंदोलन करेंगे। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। अगर पुलिस ने उनके प्रत्याशियों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो वे थाने का भी घेराव करेंगे और आंदोलन करेंगे। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
बेस्ट के निजीकरण के विरोध में गुरुवार को बेस्ट कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा की थी लेकिन कोर्ट के आदेश के कुछ ही देर बाद इस हड़ताल की घोषणा को पीछे ले लिया गया। बुधवार दोपहर में बेस्ट कर्मचारी कृती समिती और बेस्ट प्रशासन के बीच बैठक हुई थी जिसमें बेस्ट के निजीकरण के मुद्दे पर बात होना था लेकिन इस मीटिंग में कई मुद्दों पर आपसी सहमति न बन पाने के कारण बेस्ट यूनियन ने गुरुवार को हड़ताल करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के विरोध में बेस्ट प्रशासन ने ओद्योगिक कोर्ट में जाकर शिकायत की। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक हड़ताल नहीं करने का आदेश दिया साथ ही बेस्ट के लिए किराये पर बसों को नहीं लेने का आदेश भी बेस्ट प्रशासन को दिया। सोमवार 12 फरवरी को बेस्ट समिति ने मुंबई में 450 प्राइवेट मिनी बसों को चलाने की मंजूरी दी थी। बेस्ट समिति के इस निर्णय का बेस्ट कर्मचारी कृति समिति ने जोरदार विरोध किया था। जिसके बाद कई बैठके और मीटिंग हुई लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। बैठक बेनतीजा होने के बाद समिति की तरफ से 14 जनवरी आधी रात के बाद हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गयी। इस हड़ताल में बेस्ट के 32 हजार कर्मचारी हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन बेस्ट प्रशासन इस हड़ताल के विरोध में ओद्योगिक कोर्ट से शिकायत की और आखिर कोर्ट ने अगले सुनवाई तक हड़ताल नहीं करने का आदेश दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी।
बेस्ट के निजीकरण के विरोध में गुरुवार को बेस्ट कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा की थी लेकिन कोर्ट के आदेश के कुछ ही देर बाद इस हड़ताल की घोषणा को पीछे ले लिया गया। बुधवार दोपहर में बेस्ट कर्मचारी कृती समिती और बेस्ट प्रशासन के बीच बैठक हुई थी जिसमें बेस्ट के निजीकरण के मुद्दे पर बात होना था लेकिन इस मीटिंग में कई मुद्दों पर आपसी सहमति न बन पाने के कारण बेस्ट यूनियन ने गुरुवार को हड़ताल करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के विरोध में बेस्ट प्रशासन ने ओद्योगिक कोर्ट में जाकर शिकायत की। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक हड़ताल नहीं करने का आदेश दिया साथ ही बेस्ट के लिए किराये पर बसों को नहीं लेने का आदेश भी बेस्ट प्रशासन को दिया। सोमवार बारह फरवरी को बेस्ट समिति ने मुंबई में चार सौ पचास प्राइवेट मिनी बसों को चलाने की मंजूरी दी थी। बेस्ट समिति के इस निर्णय का बेस्ट कर्मचारी कृति समिति ने जोरदार विरोध किया था। जिसके बाद कई बैठके और मीटिंग हुई लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। बैठक बेनतीजा होने के बाद समिति की तरफ से चौदह जनवरी आधी रात के बाद हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गयी। इस हड़ताल में बेस्ट के बत्तीस हजार कर्मचारी हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन बेस्ट प्रशासन इस हड़ताल के विरोध में ओद्योगिक कोर्ट से शिकायत की और आखिर कोर्ट ने अगले सुनवाई तक हड़ताल नहीं करने का आदेश दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई पाँच मार्च को होगी।
ततस्तालध्वजो रामस्तयोयुद्ध उपस्थिते । श्रुत्वा तच्छिष्ययो राजनाजगाम हलायुधः ।। - महा० शल्य, ३४-२ प्राचीन भारतीय संग्राम का सामान्य परिचय मनुष्य वही है जो अपना काम साधने के लिए अपमान की परवाह नहीं करता । शुक्र भारत के (मोकिवेली ) थे। उनकी नीति भारत को अधिक नहीं भाती थी। सभ्यता अधिकतर उनकी नीति का अनुसरण करती थी । अतः वे उनके आचार्य समझे जाते हैं । कौटिल्य ने भी युद्ध की पूरी चर्चा की है। वह भी कूट-युद्ध के पक्षपाती थे। निर्बल शासक को सबल शत्रु के प्रति सदा कूटनीति का ही प्रयोग करना चाहिए । सोये शत्रु का भी वध करना उनकी दृष्टि में न्यायसंगत था । युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखाना भारतीय नीति-शास्त्र में अपमानजनक समझा जाता है। संग्रामेष्वनिवर्त्तित्वं प्रजानां चैव पालनम् । शुश्रूषा ब्राह्मणानां च राज्ञां श्र यस्करं परम् ॥ युद्ध यमानाः परं शक्त्या स्वर्ग यान्त्यपरांमुखाः ॥ युद्ध में पीठ नहीं दिखाना, पुत्रवत् प्रजा का पालन करना तथा शानियों की तन, मन, एवं वचन से श्रद्धापूर्वक सेवा करना शासकों का परम धर्म तथा कर्त्तव्य है। सारी शक्ति लगाकर लड़ता हुआ युद्ध अपरांमुख शासक स्वर्गगामी होता है। जो मातृभूमि के लिए प्राणों का विसर्जन करते हैं और विषाक्त शस्त्रों का प्रयोग नहीं करते, वे योगी की भाँति स्वर्ग उपलब्ध करते हैं । दो ही व्यक्ति सूर्यलोक से परे स्वगलोक प्राप्त करते हैं - एक योगी युद्धक्षेत्र से मित्रों को धोखा देकर नौ-दो-ग्यारह होनेवाले सैनिक दूसरा सैनिक । नरक प्राप्त करते हैं । - शुक्रनीति क्षत्रियों के लिए लड़ने से बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है। युद्ध स्वर्ग का द्वार है। भगवद्गीता केवल पाशविक शक्ति के प्रदर्शन के लिए युद्ध छेड़ना पाप है । 'यतो धर्मस्ततो जयः' की मंजुल घोषणा महाभारत बार-बार करता है। शुक्राचार्य को छोड़कर प्रायः सभी हमारे आचार्य यही सम्मति देते हैं कि खूब सोचसमझकर युद्ध छेड़ना चाहिए । रूसो (Ronsseau) के मत से युद्ध मनुष्य-मनुष्य के बीच नहीं, वरन् राष्ट्र राष्ट्र के बीच संबंध है। अतः शत्रु के राज्य के प्रत्येक व्यक्ति और उसकी सम्पत्ति पर श्राघात नहीं करना चाहिए । पर, यह सिद्धांत कदाचित् ही पश्चिमीय देशों में मान्य समझा गया है। प्राचीन भारत में जो युद्ध होते थे, उनमें सर्वसाधारण को कष्ट कम पहुँचाया जाता था। महाभारत पाण्डु-पुत्रों के हक की प्राप्ति के लिए हुआ था। कुरुक्षेत्र के विस्तृत मैदान में - जो जनवर्ग के आवास से बहुत दूर था- भारत की क्षति नहीं पहुँचाना ही संभवतः उद्देश्य रहा होगा।
ततस्तालध्वजो रामस्तयोयुद्ध उपस्थिते । श्रुत्वा तच्छिष्ययो राजनाजगाम हलायुधः ।। - महाशून्य शल्य, चौंतीस-दो प्राचीन भारतीय संग्राम का सामान्य परिचय मनुष्य वही है जो अपना काम साधने के लिए अपमान की परवाह नहीं करता । शुक्र भारत के थे। उनकी नीति भारत को अधिक नहीं भाती थी। सभ्यता अधिकतर उनकी नीति का अनुसरण करती थी । अतः वे उनके आचार्य समझे जाते हैं । कौटिल्य ने भी युद्ध की पूरी चर्चा की है। वह भी कूट-युद्ध के पक्षपाती थे। निर्बल शासक को सबल शत्रु के प्रति सदा कूटनीति का ही प्रयोग करना चाहिए । सोये शत्रु का भी वध करना उनकी दृष्टि में न्यायसंगत था । युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखाना भारतीय नीति-शास्त्र में अपमानजनक समझा जाता है। संग्रामेष्वनिवर्त्तित्वं प्रजानां चैव पालनम् । शुश्रूषा ब्राह्मणानां च राज्ञां श्र यस्करं परम् ॥ युद्ध यमानाः परं शक्त्या स्वर्ग यान्त्यपरांमुखाः ॥ युद्ध में पीठ नहीं दिखाना, पुत्रवत् प्रजा का पालन करना तथा शानियों की तन, मन, एवं वचन से श्रद्धापूर्वक सेवा करना शासकों का परम धर्म तथा कर्त्तव्य है। सारी शक्ति लगाकर लड़ता हुआ युद्ध अपरांमुख शासक स्वर्गगामी होता है। जो मातृभूमि के लिए प्राणों का विसर्जन करते हैं और विषाक्त शस्त्रों का प्रयोग नहीं करते, वे योगी की भाँति स्वर्ग उपलब्ध करते हैं । दो ही व्यक्ति सूर्यलोक से परे स्वगलोक प्राप्त करते हैं - एक योगी युद्धक्षेत्र से मित्रों को धोखा देकर नौ-दो-ग्यारह होनेवाले सैनिक दूसरा सैनिक । नरक प्राप्त करते हैं । - शुक्रनीति क्षत्रियों के लिए लड़ने से बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है। युद्ध स्वर्ग का द्वार है। भगवद्गीता केवल पाशविक शक्ति के प्रदर्शन के लिए युद्ध छेड़ना पाप है । 'यतो धर्मस्ततो जयः' की मंजुल घोषणा महाभारत बार-बार करता है। शुक्राचार्य को छोड़कर प्रायः सभी हमारे आचार्य यही सम्मति देते हैं कि खूब सोचसमझकर युद्ध छेड़ना चाहिए । रूसो के मत से युद्ध मनुष्य-मनुष्य के बीच नहीं, वरन् राष्ट्र राष्ट्र के बीच संबंध है। अतः शत्रु के राज्य के प्रत्येक व्यक्ति और उसकी सम्पत्ति पर श्राघात नहीं करना चाहिए । पर, यह सिद्धांत कदाचित् ही पश्चिमीय देशों में मान्य समझा गया है। प्राचीन भारत में जो युद्ध होते थे, उनमें सर्वसाधारण को कष्ट कम पहुँचाया जाता था। महाभारत पाण्डु-पुत्रों के हक की प्राप्ति के लिए हुआ था। कुरुक्षेत्र के विस्तृत मैदान में - जो जनवर्ग के आवास से बहुत दूर था- भारत की क्षति नहीं पहुँचाना ही संभवतः उद्देश्य रहा होगा।
PATNA : पटना नगर निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज से शुरू हो गई है. निगम के साडे 6000 चतुर्थवर्गीय कर्मी आज से हड़ताल पर चले गए हैं. फिर से हड़ताल से राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. पटना नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ ने दैनिक कर्मियों की सेवा नियमित करने समान काम के लिए समान वेतन और 18000 रुपये मासिक मजदूरी का आदेश जारी करने जैसी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है. निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मी इसके पहले भी या मांग करते रहे हैं. जब पिछली बार इन्होंने हड़ताल पर जाने का फैसला किया था. तो निगम के पदाधिकारियों ने मान मनौवल कर उन्हें मना लिया था. यह भरोसा दिया गया था कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा. लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद एक बार फिर निगम कर्मियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है. पटना नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पीके आजाद भारतीय और महासचिव नंद किशोर दास के मुताबिक के एजेंसी कर्मियों के साथ मनमाना बर्ताव किया जा रहा है. सेवा की कोई गारंटी नहीं है. एजेंसी मनमाने तरीके से कर्मियों को रखती और हटाती है. साथ ही साथ बोनस देने की घोषणा के बावजूद अब तक राशि नहीं दी गई. संघ ने दावा किया है कि सभी अंचल और जलापूर्ति शाखा के कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे.
PATNA : पटना नगर निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज से शुरू हो गई है. निगम के साडे छः हज़ार चतुर्थवर्गीय कर्मी आज से हड़ताल पर चले गए हैं. फिर से हड़ताल से राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. पटना नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ ने दैनिक कर्मियों की सेवा नियमित करने समान काम के लिए समान वेतन और अट्ठारह हज़ार रुपयापये मासिक मजदूरी का आदेश जारी करने जैसी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है. निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मी इसके पहले भी या मांग करते रहे हैं. जब पिछली बार इन्होंने हड़ताल पर जाने का फैसला किया था. तो निगम के पदाधिकारियों ने मान मनौवल कर उन्हें मना लिया था. यह भरोसा दिया गया था कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा. लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद एक बार फिर निगम कर्मियों ने अपनी पंद्रह सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है. पटना नगर निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पीके आजाद भारतीय और महासचिव नंद किशोर दास के मुताबिक के एजेंसी कर्मियों के साथ मनमाना बर्ताव किया जा रहा है. सेवा की कोई गारंटी नहीं है. एजेंसी मनमाने तरीके से कर्मियों को रखती और हटाती है. साथ ही साथ बोनस देने की घोषणा के बावजूद अब तक राशि नहीं दी गई. संघ ने दावा किया है कि सभी अंचल और जलापूर्ति शाखा के कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे.
दिल्लीः हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल गर्म है. राज्य के पुलिस प्रमुख संजय कुंडू खुद को कांग्रेस के क्रॉसहेयर में फंसा पा रहे हैं. पार्टी ने चुनाव आयोग (ईसी) से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ कुंडू की कथित निकटता और पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक 'घोटाले' में संदेह के चलते उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की है. पत्र में 12 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले उनके तबादले की भी मांग की गई है. तीन नवंबर को चुनाव आयोग को अपनी शिकायत में राज्य कांग्रेस ने तर्क दिया है कि कुंडू ने हिमाचल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किए जाने से पहले मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में कार्य किया है. मतदान के दौरान पुलिस की तैनाती के प्रभारी के रूप में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. डीजीपी को हटाने के मामले को मजबूत बनाते हुए पत्र में इस साल की शुरुआत से पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में उनकी संभावित संलिप्तता के बारे में भी शिकायत की गई है. राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने हिमाचल के मुख्य सचिव आरडी धीमान को जवाब देने के लिए लिखा है. लेकिन आयोग के रिमाइंडर के बावजूद यह जवाब अभी तक नहीं नहीं मिला है. दिप्रिंट से बात करते हुए हिमाचल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि कुंडू के डीजीपी के कार्यकाल के दौरान पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती के पेपर लीक हो गए थे. इस मामले में सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार किया गया था. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. उधर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है. कौन हैं संजय कुंडू? 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजय कुंडू 2018 में उस समय खबरों में आए जब जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जल्दी वापस बुला लिया और उन्हें सीएम का अतिरिक्त प्रधान सचिव नियुक्त किया- एक पद जो आमतौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों के पास जाता है. उन्हें कराधान, उत्पाद शुल्क और सतर्कता जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रभारी भी बनाया गया था. जनवरी 2019 में उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया, जिससे इस धारणा को और बल मिल गया कि वह ठाकुर के करीबी हैं. कुंडू जून 2020 में अपने पेशे में लौट आए थे. तब उन्हें राज्य का डीजीपी नियुक्त किया गया था. समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मई 2018 में सहायक टाउन प्लानर शैल बाला शर्मा की गोली मारकर हुई मौत के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष में आक्रोश फैल हुआ था. तब कुंडू को दिल्ली से हिमाचल वापस लाया गया था. 2016 में जल संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से पहले, कुंडू ने हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त डीजीपी के रूप में कार्य किया था और संयुक्त राष्ट्र के साथ एक उप पुलिस आयुक्त के रूप में सूडान में एक कार्यकाल भी पूरा किया था. 2005-06 में वह मिनेसोटा विश्वविद्यालय में ह्यूबर्ट एच हम्फ्री स्कूल ऑफ पब्लिक अफेयर्स में फुलब्राइट छात्रवृत्ति योजना के तहत एक फैलो थे. इस साल मार्च में राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस के लिए भी मसला खड़ा हो गया, जब 1700 कांस्टेबलों की भर्ती के लिए एक परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया. इस मामले में अब तक 171 से अधिक गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं. मई में हिमाचल सरकार ने राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष जेपी सिंह का तबादला कर दिया था लेकिन चुनाव नजदीक आते ही यह मामला कांग्रेस के लिए चर्चा का विषय बन गया. हालांकि मामले की जांच कर रही एसआईटी ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है. लेकिन कांग्रेस नेताओं ने घोषणा के बावजूद सीबीआई जांच नहीं होने की ओर इशारा किया और राज्य सरकार एवं शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और 'कवर अप' करने का आरोप लगाया है. आम आदमी पार्टी के नेता आई डी भंडारी, जिन्होंने पिछली प्रेम कुमार धूमल सरकार के दौरान डीजीपी के रूप में काम किया था, ने कहा कि अभी भी 'मामले में कई चीजें सामने आ सकती हैं'. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुंडू पर लगाए गए आरोपों में दम नहीं है, क्योंकि वह एक 'ईमानदार अधिकारी' है. राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार पेपर लीक घोटाले को लेकर सरगर्मी तेज होने के बीच कुंडू ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से सेवा मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्र में डीजी के स्तर पर उनके नाम शामिल किए जाने की लिस्ट को मंजूरी दे दी है. (इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
दिल्लीः हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल गर्म है. राज्य के पुलिस प्रमुख संजय कुंडू खुद को कांग्रेस के क्रॉसहेयर में फंसा पा रहे हैं. पार्टी ने चुनाव आयोग से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ कुंडू की कथित निकटता और पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक 'घोटाले' में संदेह के चलते उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की है. पत्र में बारह नवंबर को होने वाले मतदान से पहले उनके तबादले की भी मांग की गई है. तीन नवंबर को चुनाव आयोग को अपनी शिकायत में राज्य कांग्रेस ने तर्क दिया है कि कुंडू ने हिमाचल के पुलिस महानिदेशक नियुक्त किए जाने से पहले मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में कार्य किया है. मतदान के दौरान पुलिस की तैनाती के प्रभारी के रूप में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. डीजीपी को हटाने के मामले को मजबूत बनाते हुए पत्र में इस साल की शुरुआत से पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में उनकी संभावित संलिप्तता के बारे में भी शिकायत की गई है. राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने हिमाचल के मुख्य सचिव आरडी धीमान को जवाब देने के लिए लिखा है. लेकिन आयोग के रिमाइंडर के बावजूद यह जवाब अभी तक नहीं नहीं मिला है. दिप्रिंट से बात करते हुए हिमाचल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि कुंडू के डीजीपी के कार्यकाल के दौरान पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती के पेपर लीक हो गए थे. इस मामले में सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार किया गया था. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. उधर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है. कौन हैं संजय कुंडू? एक हज़ार नौ सौ नवासी बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी संजय कुंडू दो हज़ार अट्ठारह में उस समय खबरों में आए जब जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जल्दी वापस बुला लिया और उन्हें सीएम का अतिरिक्त प्रधान सचिव नियुक्त किया- एक पद जो आमतौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पास जाता है. उन्हें कराधान, उत्पाद शुल्क और सतर्कता जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रभारी भी बनाया गया था. जनवरी दो हज़ार उन्नीस में उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया, जिससे इस धारणा को और बल मिल गया कि वह ठाकुर के करीबी हैं. कुंडू जून दो हज़ार बीस में अपने पेशे में लौट आए थे. तब उन्हें राज्य का डीजीपी नियुक्त किया गया था. समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मई दो हज़ार अट्ठारह में सहायक टाउन प्लानर शैल बाला शर्मा की गोली मारकर हुई मौत के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष में आक्रोश फैल हुआ था. तब कुंडू को दिल्ली से हिमाचल वापस लाया गया था. दो हज़ार सोलह में जल संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से पहले, कुंडू ने हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त डीजीपी के रूप में कार्य किया था और संयुक्त राष्ट्र के साथ एक उप पुलिस आयुक्त के रूप में सूडान में एक कार्यकाल भी पूरा किया था. दो हज़ार पाँच-छः में वह मिनेसोटा विश्वविद्यालय में ह्यूबर्ट एच हम्फ्री स्कूल ऑफ पब्लिक अफेयर्स में फुलब्राइट छात्रवृत्ति योजना के तहत एक फैलो थे. इस साल मार्च में राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस के लिए भी मसला खड़ा हो गया, जब एक हज़ार सात सौ कांस्टेबलों की भर्ती के लिए एक परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया. इस मामले में अब तक एक सौ इकहत्तर से अधिक गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं. मई में हिमाचल सरकार ने राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष जेपी सिंह का तबादला कर दिया था लेकिन चुनाव नजदीक आते ही यह मामला कांग्रेस के लिए चर्चा का विषय बन गया. हालांकि मामले की जांच कर रही एसआईटी ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है. लेकिन कांग्रेस नेताओं ने घोषणा के बावजूद सीबीआई जांच नहीं होने की ओर इशारा किया और राज्य सरकार एवं शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और 'कवर अप' करने का आरोप लगाया है. आम आदमी पार्टी के नेता आई डी भंडारी, जिन्होंने पिछली प्रेम कुमार धूमल सरकार के दौरान डीजीपी के रूप में काम किया था, ने कहा कि अभी भी 'मामले में कई चीजें सामने आ सकती हैं'. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुंडू पर लगाए गए आरोपों में दम नहीं है, क्योंकि वह एक 'ईमानदार अधिकारी' है. राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार पेपर लीक घोटाले को लेकर सरगर्मी तेज होने के बीच कुंडू ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से सेवा मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्र में डीजी के स्तर पर उनके नाम शामिल किए जाने की लिस्ट को मंजूरी दे दी है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। बैठक में महिला अपराध, अपराधियों पर एक्शन और अपराध नियंत्रण अहम मुद्दा रहा। सीएम योगी ने महिला अपराधों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को जमकर लताड़ा। - 'अगर शासन ने निर्देश नहीं दिया होता तो तुम अपराधियों की आरती उतार रहे थे क्या" करीब 3 घंटे चली इस बैठक में सीएम योगी ने अंबेडकर नगर की घटना का सात बार जिक्र किया। सीएम ने एसपी को फटकार लगाते हुए कहा दुपट्टा खींचे जाने की घटना के बाद देरी से एक्शन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अगर शासन ने निर्देश नहीं दिया होता तो तुम अपराधियों की आरती उतार रहे थे क्या। इसके बाद सीएम के निशाने पर हाथरस के एसपी भी आ गए। सीएम ने हाथरस के एसपी से पूछा गोकशी कैसे हो रही है' इस पर हाथरस के एसपी ने बताया कि सर 30 किलो ही तो ले जा रहे थे । सीएम योगी ने एसपी का जवाब सुनते ही उनकी क्लास लगा दी। सीएम ने कहा यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बलरामपुर और महाराजगंज में लूट की घटनाएं बढ़ने को लेकर सीएम ने दोनों अफसरों से कहा की जिले की पुलिसिंग फेल है। इसके अलावा चंदौली जिले के एसपी को लगातार बढ़ रहे हत्या के केस के मामलों में फटकार लगाई गई। सबसे पहले प्रयागराज के कमिश्नर को फटकार मिली। कटिहार गैंग के पकड़े जाने को लेकर पुलिस कमिश्नर ने सीएम को जानकारी दी तो लंबित पड़ी विवेचनाओं को लेकर सीएम योगी ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। सुल्तानपुर में डॉक्टर की हत्या और आगरा की घटना पर भी सीएम योगी ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। बैठक में महिला अपराध, अपराधियों पर एक्शन और अपराध नियंत्रण अहम मुद्दा रहा। सीएम योगी ने महिला अपराधों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को जमकर लताड़ा। - 'अगर शासन ने निर्देश नहीं दिया होता तो तुम अपराधियों की आरती उतार रहे थे क्या" करीब तीन घंटाटे चली इस बैठक में सीएम योगी ने अंबेडकर नगर की घटना का सात बार जिक्र किया। सीएम ने एसपी को फटकार लगाते हुए कहा दुपट्टा खींचे जाने की घटना के बाद देरी से एक्शन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अगर शासन ने निर्देश नहीं दिया होता तो तुम अपराधियों की आरती उतार रहे थे क्या। इसके बाद सीएम के निशाने पर हाथरस के एसपी भी आ गए। सीएम ने हाथरस के एसपी से पूछा गोकशी कैसे हो रही है' इस पर हाथरस के एसपी ने बताया कि सर तीस किलो ही तो ले जा रहे थे । सीएम योगी ने एसपी का जवाब सुनते ही उनकी क्लास लगा दी। सीएम ने कहा यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बलरामपुर और महाराजगंज में लूट की घटनाएं बढ़ने को लेकर सीएम ने दोनों अफसरों से कहा की जिले की पुलिसिंग फेल है। इसके अलावा चंदौली जिले के एसपी को लगातार बढ़ रहे हत्या के केस के मामलों में फटकार लगाई गई। सबसे पहले प्रयागराज के कमिश्नर को फटकार मिली। कटिहार गैंग के पकड़े जाने को लेकर पुलिस कमिश्नर ने सीएम को जानकारी दी तो लंबित पड़ी विवेचनाओं को लेकर सीएम योगी ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। सुल्तानपुर में डॉक्टर की हत्या और आगरा की घटना पर भी सीएम योगी ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
पांवटा साहिब - पांवटा साहिब में स्वतंत्रता दिवस पर दो अलग-अलग हादसों में दो लोगों की मौत हुई है। जबकि एक युवक घायल हो गया है। इसमे एक मौत जहां यमुना नदी में डूबने से हुई, वहीं दूसरी मौत सड़क दुर्घटना में हुई है। पुलिस ने दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए है। पुलिस मामलों की जांच कर रही है। दिन की पहली घटना मंगलवार सुबह करीब दस बजे उस समय हुई जब नशे की हालत में एक रिक्शा चालक राम सिंह निवासी वार्ड नंबर-10 देईजी साहिबा मंदिर के नीचे बने घाट पर नहाने उतर गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान अचानक नदी के पानी बढ़ गया और वह बहाव की चपेट में आ गया। दूसरी घटना मंगलवार देर शाम को यहां के यमुना बैरियर के पास घटित हुई। यहां पर एक युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। मृतक की पहचान कर्मचंद पुत्र राम प्रसाद रामपुर बंजार, धौलाकुआं, के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक युवक बाइक में देहरादून की ओर से पांवटा साहिब आ रहे था। अचानक यमुना बैरियर पर उसका संतुलन बिगड़ गया और पीछे बैठा युवक सड़क पर गिर गया। इस बीच सामने की ओर से आ रहे ट्रक के नीचे आ गया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, ट्रक चालक मौके से ट्रक लेकर फरार हो गया। पुलिस की मुस्तैदी के कारण ट्रक के परिचालक को दस किलोमीटर दूर देहरादून के कुंजा में दबोच लिया गया जबकि चालक फरार होने में कामयाब हो गया। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने बताया कि आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि दोनों ही बाइक सवारों ने हेल्मेट नहीं पहना था, जिस कारण पीछे बैठे व्यक्ति की जान नहीं बच पाई। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
पांवटा साहिब - पांवटा साहिब में स्वतंत्रता दिवस पर दो अलग-अलग हादसों में दो लोगों की मौत हुई है। जबकि एक युवक घायल हो गया है। इसमे एक मौत जहां यमुना नदी में डूबने से हुई, वहीं दूसरी मौत सड़क दुर्घटना में हुई है। पुलिस ने दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए है। पुलिस मामलों की जांच कर रही है। दिन की पहली घटना मंगलवार सुबह करीब दस बजे उस समय हुई जब नशे की हालत में एक रिक्शा चालक राम सिंह निवासी वार्ड नंबर-दस देईजी साहिबा मंदिर के नीचे बने घाट पर नहाने उतर गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान अचानक नदी के पानी बढ़ गया और वह बहाव की चपेट में आ गया। दूसरी घटना मंगलवार देर शाम को यहां के यमुना बैरियर के पास घटित हुई। यहां पर एक युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। मृतक की पहचान कर्मचंद पुत्र राम प्रसाद रामपुर बंजार, धौलाकुआं, के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक युवक बाइक में देहरादून की ओर से पांवटा साहिब आ रहे था। अचानक यमुना बैरियर पर उसका संतुलन बिगड़ गया और पीछे बैठा युवक सड़क पर गिर गया। इस बीच सामने की ओर से आ रहे ट्रक के नीचे आ गया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, ट्रक चालक मौके से ट्रक लेकर फरार हो गया। पुलिस की मुस्तैदी के कारण ट्रक के परिचालक को दस किलोमीटर दूर देहरादून के कुंजा में दबोच लिया गया जबकि चालक फरार होने में कामयाब हो गया। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने बताया कि आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि दोनों ही बाइक सवारों ने हेल्मेट नहीं पहना था, जिस कारण पीछे बैठे व्यक्ति की जान नहीं बच पाई। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
- महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र के कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग हाईवे 86 पर तेज रफ्तार ट्रक ने मजदूरों से भरी पिकअप में जोरदार टक्कर मार दी. सड़क हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि करीब 11 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. मजदूरों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर घायलों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है. मामला महोबा शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर सूरज चौकी के पास का है. जहां पर मजदूरों से भरी पिकअप बसोरा गांव से आ रही थी. इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक ने मजदूरों से भरी इस पिकअप में जोरदार टक्कर मार दी. ट्रक की टक्कर से घायल मजदूरों में चीख पुकार मच गई. राहगीरों और ग्रामीणों की मदद से मौके पर पहुंची सरकारी एंबुलेंस के जरिए सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दरअसल, ये सभी मजदूर सदर तहसील के बसोरा गांव में हर घर जल योजना के तहत पानी की टंकी के निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे. 4 दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते काम बंद होने के कारण ये सभी मजदूर घर वापस आ रहे थे, तभी मजदूरों से भरी पिकअप में ट्रक ने सीधी टक्कर मार दी. हादसे में राजेश और सुरेंद्र नाम के मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि, दीपू, जीतेंद्र, रमाकांत, सागर, राम प्रकाश, अनिल बिहार के रहने वाले अली को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
- महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र के कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग हाईवे छियासी पर तेज रफ्तार ट्रक ने मजदूरों से भरी पिकअप में जोरदार टक्कर मार दी. सड़क हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि करीब ग्यारह मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. मजदूरों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर घायलों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है. मामला महोबा शहर से करीब छः किलोग्राममीटर दूर सूरज चौकी के पास का है. जहां पर मजदूरों से भरी पिकअप बसोरा गांव से आ रही थी. इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक ने मजदूरों से भरी इस पिकअप में जोरदार टक्कर मार दी. ट्रक की टक्कर से घायल मजदूरों में चीख पुकार मच गई. राहगीरों और ग्रामीणों की मदद से मौके पर पहुंची सरकारी एंबुलेंस के जरिए सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दरअसल, ये सभी मजदूर सदर तहसील के बसोरा गांव में हर घर जल योजना के तहत पानी की टंकी के निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे. चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते काम बंद होने के कारण ये सभी मजदूर घर वापस आ रहे थे, तभी मजदूरों से भरी पिकअप में ट्रक ने सीधी टक्कर मार दी. हादसे में राजेश और सुरेंद्र नाम के मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि, दीपू, जीतेंद्र, रमाकांत, सागर, राम प्रकाश, अनिल बिहार के रहने वाले अली को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
जिस तरह से देश में राष्ट्रपति का पद बहुत सम्मान और गरिमा का पद होता है, ठीक वैसे ही किसी भी राज्य में राज्यपाल का पद बहुत सम्मानित और गरिमा पूर्ण होता है. लेकिन राज्यपाल को उस राज्य में नियुक्त नहीं किया किया जा सकता जहाँ का वह निवासी है. किसी भी राज्य का राज्यपाल उस राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन राज्यपाल उस राज्य का क्यों नहीं हो सकता जिस राज्य में उसे नियुक्त किया जाता है. जहाँ का निवासी होता है, उस राज्य में राज्यपाल नियुक्त ना करने का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि राज्यपाल केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. उसके पद पर बना रहना पूरी तरह से राष्ट्रपति पर निर्भर करता है. जिस राज्य में हम रहते हैं, वहां पर राजनीति के प्रति या किसी जाति विशेष के प्रति एक धारणा बनने की संभावना रहती है तथा कहीं ना कहीं राज्य में किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है. इन सबसे बचने के लिए ही राज्यपाल को उस राज्य में राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाता, जहाँ का वह स्थायी निवासी होता है. अगर किसी दूसरे राज्य में राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तो वहां की राजनीति से वो प्रभावित नहीं होते हैं तथा राज्य में होने वाली किसी भी समस्या के लिए केंद्र सरकार से चर्चा करके निष्पक्ष रूप से समाधान तक पहुँचा जा सकता है. इसी कारण राज्यपाल को उसके गृह राज्य में नियुक्त नहीं किया जाता. यह भी पढ़ेंः क्या 1951 में नेपाल के राजा त्रिभुवन ने नेपाल को भारत में मिलाने का प्रस्ताव रखा था? जिस राज्य में राज्यपाल बनाया जाता है वह उस राज्य में राजनैतिक तौर पर कभी सक्रिय रहा हो तो भी उस राज्य में उनको राज्यपाल नहीं बनाया जाता है. आरंभ में राज्यपाल मुख्यमंत्री के सलाह करके नियुक्त किया जाता था. लेकिन वर्तमान में मुख्यमंत्री से विचार विमर्श नहीं किया जाता.
जिस तरह से देश में राष्ट्रपति का पद बहुत सम्मान और गरिमा का पद होता है, ठीक वैसे ही किसी भी राज्य में राज्यपाल का पद बहुत सम्मानित और गरिमा पूर्ण होता है. लेकिन राज्यपाल को उस राज्य में नियुक्त नहीं किया किया जा सकता जहाँ का वह निवासी है. किसी भी राज्य का राज्यपाल उस राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन राज्यपाल उस राज्य का क्यों नहीं हो सकता जिस राज्य में उसे नियुक्त किया जाता है. जहाँ का निवासी होता है, उस राज्य में राज्यपाल नियुक्त ना करने का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि राज्यपाल केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. उसके पद पर बना रहना पूरी तरह से राष्ट्रपति पर निर्भर करता है. जिस राज्य में हम रहते हैं, वहां पर राजनीति के प्रति या किसी जाति विशेष के प्रति एक धारणा बनने की संभावना रहती है तथा कहीं ना कहीं राज्य में किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है. इन सबसे बचने के लिए ही राज्यपाल को उस राज्य में राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाता, जहाँ का वह स्थायी निवासी होता है. अगर किसी दूसरे राज्य में राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तो वहां की राजनीति से वो प्रभावित नहीं होते हैं तथा राज्य में होने वाली किसी भी समस्या के लिए केंद्र सरकार से चर्चा करके निष्पक्ष रूप से समाधान तक पहुँचा जा सकता है. इसी कारण राज्यपाल को उसके गृह राज्य में नियुक्त नहीं किया जाता. यह भी पढ़ेंः क्या एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में नेपाल के राजा त्रिभुवन ने नेपाल को भारत में मिलाने का प्रस्ताव रखा था? जिस राज्य में राज्यपाल बनाया जाता है वह उस राज्य में राजनैतिक तौर पर कभी सक्रिय रहा हो तो भी उस राज्य में उनको राज्यपाल नहीं बनाया जाता है. आरंभ में राज्यपाल मुख्यमंत्री के सलाह करके नियुक्त किया जाता था. लेकिन वर्तमान में मुख्यमंत्री से विचार विमर्श नहीं किया जाता.
Union Budget 2023: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023-24 आने के बाद बोला कि इसमें राष्ट्र के विकास का दृष्टिकोण है. बजट राष्ट्र के सभी 130 करोड़ हिंदुस्तानियों को सशक्त बनाएगा. समाचार एजेंसी एएनआई को दिए बयान में उन्होंने बोला कि "इस बजट में वृद्धि और विकास के लिए एक दृष्टिकोण है. बजट गांव, शहर के लोगों, महिलाओं, अमीर, गरीब, सभी को इससे फायदा होगा. आगे मुख्यमंत्री ने बोला कि यह प्रगतिशील बजट है. मैं पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस तरह की तैयारी के लिए धन्यवाद देता हूं. " इससे पहले पीएम मोदी ने बोला कि केंद्रीय बजट 2023 एक स्थायी भविष्य के लिए है जो 2047 के सपनों को साकार करने में मध्यम वर्ग की क्षमता को रेखांकित करते हुए हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा. प्रधानमंत्री ने बोला कि गवर्नमेंट ने बजट में टेक्नोलॉजी पर फोकस किया है. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह बजट एक स्थायी भविष्य के लिए है जो हरित ऊर्जा, हरित विकास, हरित बुनियादी ढांचे और हरित नौकरियों को प्रोत्साहित करता है. हमने बजट में प्रौद्योगिकी और नयी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है. " आज सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट 2023 पेश किया. यह लगातार तीसरी बार था जब गवर्नमेंट ने पेपरलेस रूप में बजट पेश किया. विशेष रूप से बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है.
Union Budget दो हज़ार तेईस: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को केंद्रीय बजट दो हज़ार तेईस-चौबीस आने के बाद बोला कि इसमें राष्ट्र के विकास का दृष्टिकोण है. बजट राष्ट्र के सभी एक सौ तीस करोड़ हिंदुस्तानियों को सशक्त बनाएगा. समाचार एजेंसी एएनआई को दिए बयान में उन्होंने बोला कि "इस बजट में वृद्धि और विकास के लिए एक दृष्टिकोण है. बजट गांव, शहर के लोगों, महिलाओं, अमीर, गरीब, सभी को इससे फायदा होगा. आगे मुख्यमंत्री ने बोला कि यह प्रगतिशील बजट है. मैं पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस तरह की तैयारी के लिए धन्यवाद देता हूं. " इससे पहले पीएम मोदी ने बोला कि केंद्रीय बजट दो हज़ार तेईस एक स्थायी भविष्य के लिए है जो दो हज़ार सैंतालीस के सपनों को साकार करने में मध्यम वर्ग की क्षमता को रेखांकित करते हुए हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा. प्रधानमंत्री ने बोला कि गवर्नमेंट ने बजट में टेक्नोलॉजी पर फोकस किया है. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह बजट एक स्थायी भविष्य के लिए है जो हरित ऊर्जा, हरित विकास, हरित बुनियादी ढांचे और हरित नौकरियों को प्रोत्साहित करता है. हमने बजट में प्रौद्योगिकी और नयी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है. " आज सुबह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट दो हज़ार तेईस पेश किया. यह लगातार तीसरी बार था जब गवर्नमेंट ने पेपरलेस रूप में बजट पेश किया. विशेष रूप से बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को पाँच लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख रुपये करने की घोषणा की गई है.
बागेश्वर। बाहरी प्रदेशों से लाैटे चार और युवकों को जांच के बाद जिला अस्पताल स्थित कोविड-19 समर्पित अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। चाराें युवा बागेश्वर जिले के हैं। आइसोलेशन वार्ड में पहले से दो लोग भर्ती हैं। संस्थागत क्वारंटीन में भी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। मंगलवार को आइसोलेशन वार्ड में रखे गए चार में से दाे युवा मुरादाबाद तो एक-एक गुजरात और गुरुग्राम से लौटा है। मंगलवार को राेडवेज स्टेशन बिलाैना में जांच के बाद इन लोगों को कोविड-19 समर्पित अस्पताल में आइसाेलेट किया गया। डिप्टी सीएमआे वीके सक्सेना ने बताया कि युवाओं में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार के लक्षण मिले हैं। जिस कारण इन्हें आइसाेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी के सैंपल जांच काे भेजे जा रहे हैं। जिला अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में अब कुल भर्ती राेगियाें की संख्या छह हाे गई है। उधर, बागेश्वर के केएमवीएन गेस्टहाउस स्थित संस्थागत क्वारंटीन के सह प्रभारी डॉ. एजल पटेल ने बताया कि बाहरी प्रदेशों से आए 13 और लोगों को क्वारंटीन किया गया है। संस्थागत क्वारंटीन में 9 लोग पहले से थे। सभी की नियमित जांच हो रही है। किसी में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
बागेश्वर। बाहरी प्रदेशों से लाैटे चार और युवकों को जांच के बाद जिला अस्पताल स्थित कोविड-उन्नीस समर्पित अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। चाराें युवा बागेश्वर जिले के हैं। आइसोलेशन वार्ड में पहले से दो लोग भर्ती हैं। संस्थागत क्वारंटीन में भी संख्या बढ़कर बाईस हो गई है। मंगलवार को आइसोलेशन वार्ड में रखे गए चार में से दाे युवा मुरादाबाद तो एक-एक गुजरात और गुरुग्राम से लौटा है। मंगलवार को राेडवेज स्टेशन बिलाैना में जांच के बाद इन लोगों को कोविड-उन्नीस समर्पित अस्पताल में आइसाेलेट किया गया। डिप्टी सीएमआे वीके सक्सेना ने बताया कि युवाओं में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार के लक्षण मिले हैं। जिस कारण इन्हें आइसाेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी के सैंपल जांच काे भेजे जा रहे हैं। जिला अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में अब कुल भर्ती राेगियाें की संख्या छह हाे गई है। उधर, बागेश्वर के केएमवीएन गेस्टहाउस स्थित संस्थागत क्वारंटीन के सह प्रभारी डॉ. एजल पटेल ने बताया कि बाहरी प्रदेशों से आए तेरह और लोगों को क्वारंटीन किया गया है। संस्थागत क्वारंटीन में नौ लोग पहले से थे। सभी की नियमित जांच हो रही है। किसी में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना आज यूपी का बजट पेश करेंगे। प्रदेश में यह पहला मौका है जब पेपरलेस बजट पेश किया जाएगा। मतलब बजट भाषण के वक्त सुरेश खन्ना के हाथ में कोई कागज नहीं होगा। टैबलेट होगा। चमड़े के बैग से टैबलेट तक की इस यात्रा में पूरे 72 साल लगे हैं। साल दर साल बजट की राशि बढ़ी है। किसी ने एक बार तो किसी ने 11 बार बजट पेश किया। आइए आज बजट से जुड़ी 5 मजेदार बातें जानते हैं। योगी सरकार के पहले कार्यकाल का आखिरी यानी वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 5. 50 लाख करोड़ रुपए का था। उसके पहले यानी 2020-21 का बजट 5. 13 लाख करोड़ रुपए का था। ऐसे में इस बार बजट के 6. 10 लाख करोड़ के होने की संभावना है। चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों के लिए फंड जारी किए जा सकते हैं। यह यूपी का 72वां बजट है। पहला बजट 1952 में तब के सीएम गोविंद वल्लभ पंत ने पेश किया था। 1951 में यूपी में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। कांग्रेस जीती और गोविंद बल्लभ पंत सीएम बने। 14 मार्च 1952 को यूपी का पहला बजट पेश किया गया। यह बजट 149 करोड़ रुपए का था। इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने पर जोर दिया गया था। चीनी मिलों के निर्माण के लिए फंड जारी किए गए थे। 1952 के बजट और 2022 के बजट की तुलना करें तो पता चलता है कि यह बजट करीब 4000 गुना बड़ा हो गया है। गोविंद बल्लभ पंत ने जब पहला बजट पेश किया था, उस वक्त वह चमड़े का बैग लेकर सदन पहुंचे थे। उनके बाद सीएम चंद्रभानु गुप्ता, सम्पूर्णानंद, सुचेता कृपलानी भी चमड़े का बैग लेकर सदन पहुंचे और बजट पेश किया। 1970 में चरण सिंह सीएम बने तो थोड़ा सा बदलाव हुआ और सूटकेस लेकर सदन पहुंचे। उसके बाद वीपी सिंह, मुलायम सिंह, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, मायावती, अखिलेश यादव और अब सुरेश खन्ना, ये सभी लोग सूटकेस लेकर बजट पेश करने सदन पहुंचे। 1860 में भारत पर ब्रिटिश का राज था। ब्रिटेन के चांसलर ऑफ दी एक्सचेकर चीफ विलियम एवर्ट ग्लैडस्टन ने पहली बार बजट पेश किया। बजट से जुड़े कागजात को सदन तक ले जाने के लिए ब्रिटेन की क्वीन ने ग्लैडस्टन को एक चमड़े का बैग दिया था। यह इतना प्रसिद्ध हुआ कि बजट से जुड़े कागज इसी में रखकर ले जाए गए। ब्रिटेन में 2010 तक यह चला। सूटकेस जर्जर हो गया तो इसे म्यूजियम में रखवा दिया गया और एक नए लेदर बैग का इस्तेमाल किया जाने लगा। पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी ने सबसे अधिक 11 बार बजट पेश किया। वह पहली 21 जनवरी 1976 को सीएम बने। मार्च 1976 में पहली बार बजट पेश किया। तीन बार वह सीएम रहे। इस दौरान 4 बार बजट पेश किया। 7 बार वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने यूपी का बजट पेश किया। 2017 में एनडी तिवारी ने बेटे के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। दूसरे नंबर पर मुलायम सिंह यादव हैं। उन्होंने 9 बार बजट पेश किया। उनके बेटे अखिलेश यादव 2012 ने 2017 तक लगातार 5 बार बजट पेश करके इस कड़ी में तीसरे नंबर पर हैं। चौथे नंबर पर मायावती हैं। उन्होंने 4 बार बजट पेश किया। सीएम योगी के कार्यकाल में सुरेश खन्ना बजट पेश करते आ रहे हैं। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट से बजट बुक छपनी बंद हो गई। किताब छपवाने का नियम 1952 के पहले बजट से ही चला आ रहा है। किताब बंद करवाने के पीछे की वजह यूपी बजट ऐप है। यह प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऐप के जरिए बजट संबंधी सभी जानकारी मिल जाती है। 2020-21 के बजट के आंकड़े भी इस ऐप पर उपलब्ध हैं। यूपी के बजट को तैयार करने में 4 महीने का वक्त लगता है। चनाव होने के चलते वित्त वर्ष 2022-23 का बजट मार्च में पेश नहीं हो सका। अगर यह मार्च में जारी होता तो नवंबर में तैयारी शुरू हो जाती है। बजट बनाने वाली टीम पूरी प्रकिया के वक्त मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री से इनपुट लेती रहती है। बजट बनाने और इसे पेश करने से पहले इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के जानकारों से भी वित्त मंत्री चर्चा करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना आज यूपी का बजट पेश करेंगे। प्रदेश में यह पहला मौका है जब पेपरलेस बजट पेश किया जाएगा। मतलब बजट भाषण के वक्त सुरेश खन्ना के हाथ में कोई कागज नहीं होगा। टैबलेट होगा। चमड़े के बैग से टैबलेट तक की इस यात्रा में पूरे बहत्तर साल लगे हैं। साल दर साल बजट की राशि बढ़ी है। किसी ने एक बार तो किसी ने ग्यारह बार बजट पेश किया। आइए आज बजट से जुड़ी पाँच मजेदार बातें जानते हैं। योगी सरकार के पहले कार्यकाल का आखिरी यानी वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस का बजट पाँच. पचास लाख करोड़ रुपए का था। उसके पहले यानी दो हज़ार बीस-इक्कीस का बजट पाँच. तेरह लाख करोड़ रुपए का था। ऐसे में इस बार बजट के छः. दस लाख करोड़ के होने की संभावना है। चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों के लिए फंड जारी किए जा सकते हैं। यह यूपी का बहत्तरवां बजट है। पहला बजट एक हज़ार नौ सौ बावन में तब के सीएम गोविंद वल्लभ पंत ने पेश किया था। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में यूपी में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। कांग्रेस जीती और गोविंद बल्लभ पंत सीएम बने। चौदह मार्च एक हज़ार नौ सौ बावन को यूपी का पहला बजट पेश किया गया। यह बजट एक सौ उनचास करोड़ रुपए का था। इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने पर जोर दिया गया था। चीनी मिलों के निर्माण के लिए फंड जारी किए गए थे। एक हज़ार नौ सौ बावन के बजट और दो हज़ार बाईस के बजट की तुलना करें तो पता चलता है कि यह बजट करीब चार हज़ार गुना बड़ा हो गया है। गोविंद बल्लभ पंत ने जब पहला बजट पेश किया था, उस वक्त वह चमड़े का बैग लेकर सदन पहुंचे थे। उनके बाद सीएम चंद्रभानु गुप्ता, सम्पूर्णानंद, सुचेता कृपलानी भी चमड़े का बैग लेकर सदन पहुंचे और बजट पेश किया। एक हज़ार नौ सौ सत्तर में चरण सिंह सीएम बने तो थोड़ा सा बदलाव हुआ और सूटकेस लेकर सदन पहुंचे। उसके बाद वीपी सिंह, मुलायम सिंह, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, मायावती, अखिलेश यादव और अब सुरेश खन्ना, ये सभी लोग सूटकेस लेकर बजट पेश करने सदन पहुंचे। एक हज़ार आठ सौ साठ में भारत पर ब्रिटिश का राज था। ब्रिटेन के चांसलर ऑफ दी एक्सचेकर चीफ विलियम एवर्ट ग्लैडस्टन ने पहली बार बजट पेश किया। बजट से जुड़े कागजात को सदन तक ले जाने के लिए ब्रिटेन की क्वीन ने ग्लैडस्टन को एक चमड़े का बैग दिया था। यह इतना प्रसिद्ध हुआ कि बजट से जुड़े कागज इसी में रखकर ले जाए गए। ब्रिटेन में दो हज़ार दस तक यह चला। सूटकेस जर्जर हो गया तो इसे म्यूजियम में रखवा दिया गया और एक नए लेदर बैग का इस्तेमाल किया जाने लगा। पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी ने सबसे अधिक ग्यारह बार बजट पेश किया। वह पहली इक्कीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर को सीएम बने। मार्च एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में पहली बार बजट पेश किया। तीन बार वह सीएम रहे। इस दौरान चार बार बजट पेश किया। सात बार वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने यूपी का बजट पेश किया। दो हज़ार सत्रह में एनडी तिवारी ने बेटे के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। दूसरे नंबर पर मुलायम सिंह यादव हैं। उन्होंने नौ बार बजट पेश किया। उनके बेटे अखिलेश यादव दो हज़ार बारह ने दो हज़ार सत्रह तक लगातार पाँच बार बजट पेश करके इस कड़ी में तीसरे नंबर पर हैं। चौथे नंबर पर मायावती हैं। उन्होंने चार बार बजट पेश किया। सीएम योगी के कार्यकाल में सुरेश खन्ना बजट पेश करते आ रहे हैं। वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट से बजट बुक छपनी बंद हो गई। किताब छपवाने का नियम एक हज़ार नौ सौ बावन के पहले बजट से ही चला आ रहा है। किताब बंद करवाने के पीछे की वजह यूपी बजट ऐप है। यह प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऐप के जरिए बजट संबंधी सभी जानकारी मिल जाती है। दो हज़ार बीस-इक्कीस के बजट के आंकड़े भी इस ऐप पर उपलब्ध हैं। यूपी के बजट को तैयार करने में चार महीने का वक्त लगता है। चनाव होने के चलते वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस का बजट मार्च में पेश नहीं हो सका। अगर यह मार्च में जारी होता तो नवंबर में तैयारी शुरू हो जाती है। बजट बनाने वाली टीम पूरी प्रकिया के वक्त मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री से इनपुट लेती रहती है। बजट बनाने और इसे पेश करने से पहले इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के जानकारों से भी वित्त मंत्री चर्चा करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बुजुर्ग की ऑक्सिजन न मिलने से परिवार के सामने ही तड़प तड़प कर मौत हो गई, जिसे लिये अस्पताल की लापरवाही को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। श्रीराम तीर्थ ट्रस्ट बनाकर कथित रूप से चंदा वसूली कर ठगी के आरोप में मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद एक हिंदू नेता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उक्त नेता मुजफ्फरनगर का निवासी कथित ट्रस्ट का अध्यक्ष नरेन्द्र राणा है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। कफील को कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी पार्टियों से सहानुभूति मिल रही है। प्रियंका गांधी इस मामले को लेकर पहले ही कफील के समर्थन मे प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। कांग्रेस विधायक का दावाः चीनी सेना पांच भारतीयों को उठा ले गई ? ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक निनाॅन्ग एरिंग ने यह चैंकाने वाला दावा करते हुए ट्वीट किया है कि चीनी सैनिकों ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के 5 लोगों को का अपहरण कर लिया। पुलिस ने सोनू सक्का के दो साथियों को तमंचा कारतूसों व मृतक की स्कूटी सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मालवीय नगर निवासी 34 वर्षीय डॉक्टर कुश बिहारी पाराशर और अमित सिंह के रूप में हुई। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल काॅलेज में भर्ती गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कोरोना वायरस संक्रमण का हवाला जमानत की याचिका दायर की थी। उत्तरप्रदेश सरकार ने सभी विभागो को इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए तमाम ऐसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। कोरोना काल में गम्भीर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यकता पड़ने पर प्लाज्मा उपलब्ध कराने में यथासंभव सहयोग करेगी। आश्वासन के बावजूद अभी तक उनके बकाया का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते वे आथिक तंगी का शिकार हो गए हैं। निजी क्षेत्र के आरबीएल बैंक ने उपभोक्ताओं को यह सुविधा प्रदान करने की बात कही है।
बुजुर्ग की ऑक्सिजन न मिलने से परिवार के सामने ही तड़प तड़प कर मौत हो गई, जिसे लिये अस्पताल की लापरवाही को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। श्रीराम तीर्थ ट्रस्ट बनाकर कथित रूप से चंदा वसूली कर ठगी के आरोप में मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद एक हिंदू नेता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उक्त नेता मुजफ्फरनगर का निवासी कथित ट्रस्ट का अध्यक्ष नरेन्द्र राणा है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। कफील को कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी पार्टियों से सहानुभूति मिल रही है। प्रियंका गांधी इस मामले को लेकर पहले ही कफील के समर्थन मे प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। कांग्रेस विधायक का दावाः चीनी सेना पांच भारतीयों को उठा ले गई ? ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक निनाॅन्ग एरिंग ने यह चैंकाने वाला दावा करते हुए ट्वीट किया है कि चीनी सैनिकों ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के पाँच लोगों को का अपहरण कर लिया। पुलिस ने सोनू सक्का के दो साथियों को तमंचा कारतूसों व मृतक की स्कूटी सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मालवीय नगर निवासी चौंतीस वर्षीय डॉक्टर कुश बिहारी पाराशर और अमित सिंह के रूप में हुई। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल काॅलेज में भर्ती गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कोरोना वायरस संक्रमण का हवाला जमानत की याचिका दायर की थी। उत्तरप्रदेश सरकार ने सभी विभागो को इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए तमाम ऐसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। कोरोना काल में गम्भीर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यकता पड़ने पर प्लाज्मा उपलब्ध कराने में यथासंभव सहयोग करेगी। आश्वासन के बावजूद अभी तक उनके बकाया का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते वे आथिक तंगी का शिकार हो गए हैं। निजी क्षेत्र के आरबीएल बैंक ने उपभोक्ताओं को यह सुविधा प्रदान करने की बात कही है।
रांगेय राघव (१७ जनवरी, १९२३ - १२ सितंबर, १९६२) हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए।आगरा में जन्मे रांगेय राघव ने हिंदीतर भाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्त्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया। कहानी के पारंपरिक ढाँचे में बदलाव लाते हुए नवीन कथा प्रयोगों द्वारा उसे मौलिक कलेवर में विस्तृत आयाम दिया। रिपोर्ताज लेखन, जीवनचरितात्मक उपन्यास और महायात्रा गाथा की परंपरा डाली। विशिष्ट कथाकार के रूप में उनकी सृजनात्मक संपन्नता प्रेमचंदोत्तर रचनाकारों के लिए बड़ी चुनौती बनी। . 17 संबंधोंः ऐतिहासिक उपन्यास, प्रगतिशील साहित्य के मानदंड, भगवती चरण वर्मा, रांगेय राघव की कृतियां, रिपोर्ताज, समस्त रचनाकार, हिन्दी पुस्तकों की सूची/प, हिन्दी पुस्तकों की सूची/य, हिन्दी पुस्तकों की सूची/श, हिन्दी पुस्तकों की सूची/क, हिन्दी पुस्तकों की सूची/अ, हिन्दी साहित्य का इतिहास, हिन्दी गद्यकार, हिंदी साहित्यकार, गोरखनाथ और उनका युग, अशोक आत्रेय, १७ जनवरी। ऐतिहासिक उपन्यास उपन्यास साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी भी कालखंड विशेष की प्रख्यात् कथा का चित्रण हो। वैसे तो किसी भी कालखंड विशेष का चित्रण ऐतिहासिक उपन्यास हो सकता है। रंगभूमि, बूंद और समुद्र, झूठा सच और उत्तरकथा भी अपने युग का प्रामाणिक चित्रण करने के कारण, ऐतिहासिक उपन्यास हो सकते हैं; किंतु ऐतिहासिक उपन्यास होने के लिए एक अनिवार्य शर्त है - उसकी कथा का प्रख्यात् होना, पाठकों का उससे पूर्व-परिचित होना। . प्रगतिशील साहित्य के मानदण्ड रांगेय राघव की आलोचनात्मक कृति है।. भगवती चरण वर्मा (३० अगस्त १९०३ - ५ अक्टूबर १९८८) हिन्दी के साहित्यकार थे। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७१ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। . यह सूची प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार रांगेय राघव की कृतियों की हैः- . रिपोर्ताज गद्य-लेखन की एक विधा है। रिपोर्ताज फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा का शब्द है। रिपोर्ट किसी घटना के यथातथ्य वर्णन को कहते हैं। रिपोर्ट सामान्य रूप से समाचारपत्र के लिये लिखी जाती है और उसमें साहित्यिकता नहीं होती है। रिपोर्ट के कलात्मक तथा साहित्यिक रूप को रिपोर्ताज कहते हैं। वास्तव में रेखाचित्र की शैली में प्रभावोत्पादक ढंग से लिखे जाने में ही रिपोर्ताज की सार्थकता है। आँखों देखी और कानों सुनी घटनाओं पर भी रिपोर्ताज लिखा जा सकता है। कल्पना के आधार पर रिपोर्ताज नहीं लिखा जा सकता है। घटना प्रधान होने के साथ ही रिपोर्ताज को कथातत्त्व से भी युक्त होना चाहिये। रिपोर्ताज लेखक को पत्रकार तथा कलाकार दोनों की भूमिका निभानी पडती है। रिपोर्ताज लेखक के लिये यह भी आवश्यक है कि वह जनसाधारण के जीवन की सच्ची और सही जानकारी रखे। तभी रिपोर्ताज लेखक प्रभावोत्पादक ढंग से जनजीवन का इतिहास लिख सकता है। . अकारादि क्रम से रचनाकारों की सूची अ. * पंच परमेश्वर - प्रेम चन्द्र. कोई विवरण नहीं। संवाद शीर्षक से कविता संग्रह-ईश्वर दयाल गोस्वाामी. कोई विवरण नहीं। कोई विवरण नहीं। हिन्दी साहित्य पर यदि समुचित परिप्रेक्ष्य में विचार किया जाए तो स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य का इतिहास अत्यंत विस्तृत व प्राचीन है। सुप्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉ० हरदेव बाहरी के शब्दों में, हिन्दी साहित्य का इतिहास वस्तुतः वैदिक काल से आरम्भ होता है। यह कहना ही ठीक होगा कि वैदिक भाषा ही हिन्दी है। इस भाषा का दुर्भाग्य रहा है कि युग-युग में इसका नाम परिवर्तित होता रहा है। कभी 'वैदिक', कभी 'संस्कृत', कभी 'प्राकृत', कभी 'अपभ्रंश' और अब - हिन्दी। आलोचक कह सकते हैं कि 'वैदिक संस्कृत' और 'हिन्दी' में तो जमीन-आसमान का अन्तर है। पर ध्यान देने योग्य है कि हिब्रू, रूसी, चीनी, जर्मन और तमिल आदि जिन भाषाओं को 'बहुत पुरानी' बताया जाता है, उनके भी प्राचीन और वर्तमान रूपों में जमीन-आसमान का अन्तर है; पर लोगों ने उन भाषाओं के नाम नहीं बदले और उनके परिवर्तित स्वरूपों को 'प्राचीन', 'मध्यकालीन', 'आधुनिक' आदि कहा गया, जबकि 'हिन्दी' के सन्दर्भ में प्रत्येक युग की भाषा का नया नाम रखा जाता रहा। हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास के सम्बन्ध में प्रचलित धारणाओं पर विचार करते समय हमारे सामने हिन्दी भाषा की उत्पत्ति का प्रश्न दसवीं शताब्दी के आसपास की प्राकृताभास भाषा तथा अपभ्रंश भाषाओं की ओर जाता है। अपभ्रंश शब्द की व्युत्पत्ति और जैन रचनाकारों की अपभ्रंश कृतियों का हिन्दी से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए जो तर्क और प्रमाण हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रन्थों में प्रस्तुत किये गये हैं उन पर विचार करना भी आवश्यक है। सामान्यतः प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश-अवस्था से ही हिन्दी साहित्य का आविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं शताब्दी से ही पद्य-रचना प्रारम्भ हो गयी थी। साहित्य की दृष्टि से पद्यबद्ध जो रचनाएँ मिलती हैं वे दोहा रूप में ही हैं और उनके विषय, धर्म, नीति, उपदेश आदि प्रमुख हैं। राजाश्रित कवि और चारण नीति, शृंगार, शौर्य, पराक्रम आदि के वर्णन से अपनी साहित्य-रुचि का परिचय दिया करते थे। यह रचना-परम्परा आगे चलकर शौरसेनी अपभ्रंश या 'प्राकृताभास हिन्दी' में कई वर्षों तक चलती रही। पुरानी अपभ्रंश भाषा और बोलचाल की देशी भाषा का प्रयोग निरन्तर बढ़ता गया। इस भाषा को विद्यापति ने देसी भाषा कहा है, किन्तु यह निर्णय करना सरल नहीं है कि हिन्दी शब्द का प्रयोग इस भाषा के लिए कब और किस देश में प्रारम्भ हुआ। हाँ, इतना अवश्य कहा जा सकता है कि प्रारम्भ में हिन्दी शब्द का प्रयोग विदेशी मुसलमानों ने किया था। इस शब्द से उनका तात्पर्य 'भारतीय भाषा' का था। . कोई विवरण नहीं। इस सूची में अन्य भाषाओं में लिखनेवाले वे साहित्यकार भी सम्मिलित हैं जिनकी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद हो चुका है। अकारादि क्रम से रचनाकारों की सूची अ. गोरखनाथ और उनका युग रांगेय राघव की रचना है।. अशोक आत्रेय बहुमुखी प्रतिभा के संस्कृतिकर्मी सातवें दशक के जाने माने वरिष्ठ हिन्दी-कथाकार और (सेवानिवृत्त) पत्रकार हैं । मूलतः कहानीकार होने के अलावा यह कवि, चित्रकार, कला-समीक्षक, रंगकर्मी-निर्देशक, नाटककार, फिल्म-निर्माता, उपन्यासकार और स्तम्भ-लेखक भी हें। . 17 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 17वाँ दिन है। साल में अभी और 348 दिन बाकी हैं (लीप वर्ष 17 जनवरी 1946 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली बैठक हुई .
रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए।आगरा में जन्मे रांगेय राघव ने हिंदीतर भाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्त्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया। कहानी के पारंपरिक ढाँचे में बदलाव लाते हुए नवीन कथा प्रयोगों द्वारा उसे मौलिक कलेवर में विस्तृत आयाम दिया। रिपोर्ताज लेखन, जीवनचरितात्मक उपन्यास और महायात्रा गाथा की परंपरा डाली। विशिष्ट कथाकार के रूप में उनकी सृजनात्मक संपन्नता प्रेमचंदोत्तर रचनाकारों के लिए बड़ी चुनौती बनी। . सत्रह संबंधोंः ऐतिहासिक उपन्यास, प्रगतिशील साहित्य के मानदंड, भगवती चरण वर्मा, रांगेय राघव की कृतियां, रिपोर्ताज, समस्त रचनाकार, हिन्दी पुस्तकों की सूची/प, हिन्दी पुस्तकों की सूची/य, हिन्दी पुस्तकों की सूची/श, हिन्दी पुस्तकों की सूची/क, हिन्दी पुस्तकों की सूची/अ, हिन्दी साहित्य का इतिहास, हिन्दी गद्यकार, हिंदी साहित्यकार, गोरखनाथ और उनका युग, अशोक आत्रेय, सत्रह जनवरी। ऐतिहासिक उपन्यास उपन्यास साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी भी कालखंड विशेष की प्रख्यात् कथा का चित्रण हो। वैसे तो किसी भी कालखंड विशेष का चित्रण ऐतिहासिक उपन्यास हो सकता है। रंगभूमि, बूंद और समुद्र, झूठा सच और उत्तरकथा भी अपने युग का प्रामाणिक चित्रण करने के कारण, ऐतिहासिक उपन्यास हो सकते हैं; किंतु ऐतिहासिक उपन्यास होने के लिए एक अनिवार्य शर्त है - उसकी कथा का प्रख्यात् होना, पाठकों का उससे पूर्व-परिचित होना। . प्रगतिशील साहित्य के मानदण्ड रांगेय राघव की आलोचनात्मक कृति है।. भगवती चरण वर्मा हिन्दी के साहित्यकार थे। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। . यह सूची प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार रांगेय राघव की कृतियों की हैः- . रिपोर्ताज गद्य-लेखन की एक विधा है। रिपोर्ताज फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा का शब्द है। रिपोर्ट किसी घटना के यथातथ्य वर्णन को कहते हैं। रिपोर्ट सामान्य रूप से समाचारपत्र के लिये लिखी जाती है और उसमें साहित्यिकता नहीं होती है। रिपोर्ट के कलात्मक तथा साहित्यिक रूप को रिपोर्ताज कहते हैं। वास्तव में रेखाचित्र की शैली में प्रभावोत्पादक ढंग से लिखे जाने में ही रिपोर्ताज की सार्थकता है। आँखों देखी और कानों सुनी घटनाओं पर भी रिपोर्ताज लिखा जा सकता है। कल्पना के आधार पर रिपोर्ताज नहीं लिखा जा सकता है। घटना प्रधान होने के साथ ही रिपोर्ताज को कथातत्त्व से भी युक्त होना चाहिये। रिपोर्ताज लेखक को पत्रकार तथा कलाकार दोनों की भूमिका निभानी पडती है। रिपोर्ताज लेखक के लिये यह भी आवश्यक है कि वह जनसाधारण के जीवन की सच्ची और सही जानकारी रखे। तभी रिपोर्ताज लेखक प्रभावोत्पादक ढंग से जनजीवन का इतिहास लिख सकता है। . अकारादि क्रम से रचनाकारों की सूची अ. * पंच परमेश्वर - प्रेम चन्द्र. कोई विवरण नहीं। संवाद शीर्षक से कविता संग्रह-ईश्वर दयाल गोस्वाामी. कोई विवरण नहीं। कोई विवरण नहीं। हिन्दी साहित्य पर यदि समुचित परिप्रेक्ष्य में विचार किया जाए तो स्पष्ट होता है कि हिन्दी साहित्य का इतिहास अत्यंत विस्तृत व प्राचीन है। सुप्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉशून्य हरदेव बाहरी के शब्दों में, हिन्दी साहित्य का इतिहास वस्तुतः वैदिक काल से आरम्भ होता है। यह कहना ही ठीक होगा कि वैदिक भाषा ही हिन्दी है। इस भाषा का दुर्भाग्य रहा है कि युग-युग में इसका नाम परिवर्तित होता रहा है। कभी 'वैदिक', कभी 'संस्कृत', कभी 'प्राकृत', कभी 'अपभ्रंश' और अब - हिन्दी। आलोचक कह सकते हैं कि 'वैदिक संस्कृत' और 'हिन्दी' में तो जमीन-आसमान का अन्तर है। पर ध्यान देने योग्य है कि हिब्रू, रूसी, चीनी, जर्मन और तमिल आदि जिन भाषाओं को 'बहुत पुरानी' बताया जाता है, उनके भी प्राचीन और वर्तमान रूपों में जमीन-आसमान का अन्तर है; पर लोगों ने उन भाषाओं के नाम नहीं बदले और उनके परिवर्तित स्वरूपों को 'प्राचीन', 'मध्यकालीन', 'आधुनिक' आदि कहा गया, जबकि 'हिन्दी' के सन्दर्भ में प्रत्येक युग की भाषा का नया नाम रखा जाता रहा। हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास के सम्बन्ध में प्रचलित धारणाओं पर विचार करते समय हमारे सामने हिन्दी भाषा की उत्पत्ति का प्रश्न दसवीं शताब्दी के आसपास की प्राकृताभास भाषा तथा अपभ्रंश भाषाओं की ओर जाता है। अपभ्रंश शब्द की व्युत्पत्ति और जैन रचनाकारों की अपभ्रंश कृतियों का हिन्दी से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए जो तर्क और प्रमाण हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रन्थों में प्रस्तुत किये गये हैं उन पर विचार करना भी आवश्यक है। सामान्यतः प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश-अवस्था से ही हिन्दी साहित्य का आविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं शताब्दी से ही पद्य-रचना प्रारम्भ हो गयी थी। साहित्य की दृष्टि से पद्यबद्ध जो रचनाएँ मिलती हैं वे दोहा रूप में ही हैं और उनके विषय, धर्म, नीति, उपदेश आदि प्रमुख हैं। राजाश्रित कवि और चारण नीति, शृंगार, शौर्य, पराक्रम आदि के वर्णन से अपनी साहित्य-रुचि का परिचय दिया करते थे। यह रचना-परम्परा आगे चलकर शौरसेनी अपभ्रंश या 'प्राकृताभास हिन्दी' में कई वर्षों तक चलती रही। पुरानी अपभ्रंश भाषा और बोलचाल की देशी भाषा का प्रयोग निरन्तर बढ़ता गया। इस भाषा को विद्यापति ने देसी भाषा कहा है, किन्तु यह निर्णय करना सरल नहीं है कि हिन्दी शब्द का प्रयोग इस भाषा के लिए कब और किस देश में प्रारम्भ हुआ। हाँ, इतना अवश्य कहा जा सकता है कि प्रारम्भ में हिन्दी शब्द का प्रयोग विदेशी मुसलमानों ने किया था। इस शब्द से उनका तात्पर्य 'भारतीय भाषा' का था। . कोई विवरण नहीं। इस सूची में अन्य भाषाओं में लिखनेवाले वे साहित्यकार भी सम्मिलित हैं जिनकी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद हो चुका है। अकारादि क्रम से रचनाकारों की सूची अ. गोरखनाथ और उनका युग रांगेय राघव की रचना है।. अशोक आत्रेय बहुमुखी प्रतिभा के संस्कृतिकर्मी सातवें दशक के जाने माने वरिष्ठ हिन्दी-कथाकार और पत्रकार हैं । मूलतः कहानीकार होने के अलावा यह कवि, चित्रकार, कला-समीक्षक, रंगकर्मी-निर्देशक, नाटककार, फिल्म-निर्माता, उपन्यासकार और स्तम्भ-लेखक भी हें। . सत्रह जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का सत्रहवाँ दिन है। साल में अभी और तीन सौ अड़तालीस दिन बाकी हैं (लीप वर्ष सत्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ छियालीस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली बैठक हुई .
शुभकामना के लिए धन्यवाद। जहां तक पार्टी के प्रदर्शन का सवाल है, मैं इतना ही कहूंगी कि हम अपने वैचारिक आदर्श से न कभी डिगे थे, और न कभी डिगेंगे। समाज के सभी वर्ग के लोगों को साथ में लेकर चलना हमारी हमेशा प्राथमिकता रहेगी। हम अपने कार्यकर्ताओं को साथ में लेकर अपनी रणनीति पर विचार करेंगे और अगे बढ़ेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि कांग्रेस में 18 साल रहने के दौरान उन्हें पार्टी से क्या मिला है। वे केंद्र में मंत्री रहे, पार्टी के बड़े पदों पर रहे, पार्टी की नीति निर्धारित करने वाली टीम में उनकी सीधी पहुंच थी। पार्टी में उनकी आवाज का एक खास मतलब था। यह सब उन्हें युवा होने के समय में ही मिला था। आज वे ये आरोप कैसे लगा सकते हैं कि पार्टी ने युवाओं को मौका नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों को इतना ज्यादा हाईलाइट कर दिया कि उसमें जमीनी मुद्दे पीछे रह गए। चुनाव के पहले बेरोजगारी और लोगों को साफ पानी न मिलना बड़ा मुद्दा था, लेकिन भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों ने ही जनता का ध्यान बंटाने के लिए शाहीन बाग जैसे मुद्दों को हवा दी। उसका परिणाम वोटरों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ जिसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा। देखिए, आज जनता को इस बात का अहसास हो रहा है कि दूसरी विचारधाराओं को जगह देने का क्या नुकसान उसे हुआ है। हर तरफ अराजकता की स्थिति है, दंगे हो रहे हैं, बेरोजगारी चरम पर है और समाज के एक वर्ग को दूसरे वर्ग से लड़ाने की पूरी कोशिश की जा रही है। एक पार्टी होने के नाते हम लोगों को इन सच्चाइयों से वाकिफ कराएंगे, लेकिन जनता को भी अब सोचना पड़ेगा कि उसे किस तरह का हिंदुस्तान दिया जा रहा है। चुनाव लड़ने का यह लाभ हुआ है कि बहुत करीब से लोगों को देखने और समझने का मौका मिला है। टीम में युवा और ऊर्जावान साथी हैं। पुराने दिग्गज नेताओं का अनुभव और मार्गदर्शन हमारे साथ है। हम समाज के लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए मुहिम चलाएंगे। हमें पूरा यकीन है कि कांग्रेस जबरदस्त वापसी करने में कामयाब रहेगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
शुभकामना के लिए धन्यवाद। जहां तक पार्टी के प्रदर्शन का सवाल है, मैं इतना ही कहूंगी कि हम अपने वैचारिक आदर्श से न कभी डिगे थे, और न कभी डिगेंगे। समाज के सभी वर्ग के लोगों को साथ में लेकर चलना हमारी हमेशा प्राथमिकता रहेगी। हम अपने कार्यकर्ताओं को साथ में लेकर अपनी रणनीति पर विचार करेंगे और अगे बढ़ेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि कांग्रेस में अट्ठारह साल रहने के दौरान उन्हें पार्टी से क्या मिला है। वे केंद्र में मंत्री रहे, पार्टी के बड़े पदों पर रहे, पार्टी की नीति निर्धारित करने वाली टीम में उनकी सीधी पहुंच थी। पार्टी में उनकी आवाज का एक खास मतलब था। यह सब उन्हें युवा होने के समय में ही मिला था। आज वे ये आरोप कैसे लगा सकते हैं कि पार्टी ने युवाओं को मौका नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों को इतना ज्यादा हाईलाइट कर दिया कि उसमें जमीनी मुद्दे पीछे रह गए। चुनाव के पहले बेरोजगारी और लोगों को साफ पानी न मिलना बड़ा मुद्दा था, लेकिन भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों ने ही जनता का ध्यान बंटाने के लिए शाहीन बाग जैसे मुद्दों को हवा दी। उसका परिणाम वोटरों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ जिसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा। देखिए, आज जनता को इस बात का अहसास हो रहा है कि दूसरी विचारधाराओं को जगह देने का क्या नुकसान उसे हुआ है। हर तरफ अराजकता की स्थिति है, दंगे हो रहे हैं, बेरोजगारी चरम पर है और समाज के एक वर्ग को दूसरे वर्ग से लड़ाने की पूरी कोशिश की जा रही है। एक पार्टी होने के नाते हम लोगों को इन सच्चाइयों से वाकिफ कराएंगे, लेकिन जनता को भी अब सोचना पड़ेगा कि उसे किस तरह का हिंदुस्तान दिया जा रहा है। चुनाव लड़ने का यह लाभ हुआ है कि बहुत करीब से लोगों को देखने और समझने का मौका मिला है। टीम में युवा और ऊर्जावान साथी हैं। पुराने दिग्गज नेताओं का अनुभव और मार्गदर्शन हमारे साथ है। हम समाज के लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए मुहिम चलाएंगे। हमें पूरा यकीन है कि कांग्रेस जबरदस्त वापसी करने में कामयाब रहेगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुधवार को एक आंतकी घटना हो गई जिसमें की एक खूखार आतकंवादियों ने एक नागरिक की हत्या कर दी । पता चला है कि यह घटना कराची शहर की बताई जा रही हैं। हत्यारों ने यह गोलीबारी एक अस्पताल में की जिसमें एक चीनी नागरिक की कथित तौर से मृत्यु हो गई और दो अन्य रूप से घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसएसपी (दक्षिण) असद रजा ने औपचारिक तौर से कहा कि हमलावर कराची के सदर इलाके में स्थित क्लिनिक में मरीज होने का नाटक करते हुए घुसे। वहीं, उन्होंने कहा कि हमले का शिकार हुए एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक महिला समेत दो घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वारदात को अंजाम देने के बाद जब मुख्य रूप से पुष्टि हुई तो पता चला कि हमले में चीनी नागरिक हताहत हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के कराची शहर की स्थानीय पुलिस ने कहा कि हमले के शिकार हुए लोगों की पहचान रोनिल्ड रायमंड चॉ (25) मार्गेड (72) और रिचर्ड (74) के रूप में हुई है। हालांकि, जब वारदात की छानबीन हुई तो डॉक्टरों ने जांच में पता लगाया कि दोनों चीनी नागरिकों के पेट में लगी हुई औऱ उनकी कथित तौर से हालत गंभीर हैं।
भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुधवार को एक आंतकी घटना हो गई जिसमें की एक खूखार आतकंवादियों ने एक नागरिक की हत्या कर दी । पता चला है कि यह घटना कराची शहर की बताई जा रही हैं। हत्यारों ने यह गोलीबारी एक अस्पताल में की जिसमें एक चीनी नागरिक की कथित तौर से मृत्यु हो गई और दो अन्य रूप से घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसएसपी असद रजा ने औपचारिक तौर से कहा कि हमलावर कराची के सदर इलाके में स्थित क्लिनिक में मरीज होने का नाटक करते हुए घुसे। वहीं, उन्होंने कहा कि हमले का शिकार हुए एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक महिला समेत दो घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वारदात को अंजाम देने के बाद जब मुख्य रूप से पुष्टि हुई तो पता चला कि हमले में चीनी नागरिक हताहत हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के कराची शहर की स्थानीय पुलिस ने कहा कि हमले के शिकार हुए लोगों की पहचान रोनिल्ड रायमंड चॉ मार्गेड और रिचर्ड के रूप में हुई है। हालांकि, जब वारदात की छानबीन हुई तो डॉक्टरों ने जांच में पता लगाया कि दोनों चीनी नागरिकों के पेट में लगी हुई औऱ उनकी कथित तौर से हालत गंभीर हैं।
आग्नेय पर्व पहला अध्याय पहला खंड अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये. नि होता सत्सि बर्हिषि.. (१) हे अग्नि! हम सब आप की स्तुति (पूजा) करते हैं. यज्ञ में आप को आमंत्रित करते हैं. आप आ कर कुश (घास) के आसन पर बैठिए. आप हवि (अग्नि में डाली जाने वाली पवित्र चीजें) देवताओं तक पहुंचाइए. (यह माना जाता है कि हम अग्नि में जो पदार्थ डालते हैं, वे अग्नि के द्वारा मंत्र से संबंधित देवता तक पहुंचते हैं). (१) त्वमग्ने यज्ञाना ५ होता विश्वेषा हितः देवेभिर्मानुषे जने.. (२) हे अग्नि! आप यज्ञों के पुरोहित हैं. आप सब का कल्याण करने वाले हैं. देवताओं ने ही आप को मनुष्यों (जनों) के बीच में स्थापित किया है. (२) अग्निं दूत वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. (३) हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले हैं. आप धन के स्वामी हैं. इस यज्ञ को अच्छी तरह करने के लिए हम आप को दूत मान कर भेज रहे हैं. ( हवि अग्नि के माध्यम से संबंधित देवता तक पहुंचती है, इसलिए अग्नि को देवता का दूत माना जाता है). (३) अग्निर्वृत्राणि जङ्घनद् द्रविणस्युर्विपन्यया. समिद्धः शुक्र आहुतः.. (४) हे अग्नि! आप अपने पूजकों को धन देने वाले हैं. समिधा (जिस से यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित की जाती है) से आप को अच्छी तरह प्रकाशित किया गया है. आप हमारी स्तुति से प्रसन्न होइए. यज्ञ में विघ्न डालने वालों (राक्षसों एवं दुष्ट प्रवृत्तियों) को नष्ट कीजिए. (४) प्रेष्ठं वो अतिथि स्तुषे मित्रमिव प्रियम्. अग्ने रथं न वेद्यम्.. (५) हे अग्नि! आप पूजकों को धन देने वाले हैं. उन्हें मित्र की तरह बहुत प्रिय हैं. मेहमान की तरह पूजा करने योग्य हैं. आप हमारी पूजा से प्रसन्न होइए. (५) त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः. उत द्विषो मर्त्यस्य.. (६) हे अग्नि! आप ईर्ष्याद्वेष करने वाले लोगों और दुश्मनों से हमें बचाइए. हे अग्नि! हमें बहुत सुखसंपन्नता प्रदान कीजिए. (६) एह्यू षु ब्रवाणि ते ऽ ग्न इत्थेतरा गिरः एभिर्वर्धास इन्दुभिः.. (७) हे अग्नि! आप पधारिए. हम आप के लिए शुद्ध वाणी से मंत्र पढ़ रहे हैं. आप उन्हें सुनिए. सोमरस से आप समृद्ध बनिए. (७) आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात्. अग्ने त्वां कामये गिरा.. (८) हे अग्नि! हम आप के पुत्र हैं. मन से आप को आमंत्रित करना चाहते हैं. आप श्रेष्ठ जगह से भी हमारे लिए आइए. हम वाणी (मंत्र पाठ) से आप को भजते हैं. (८) त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत. मूर्ध्ना विश्वस्य वाघतः.. (९) हे अग्नि! आप सर्वश्रेष्ठ और सारे संसार के धारक हैं. अथर्वा (ऋषि) ने कमल के पत्तों पर अरणि (लकड़ी) मथ कर आप को उत्पन्न (प्रकाशित) किया. (९) अग्ने विवस्वदा भरास्मभ्यमूतये महे. देवो ह्यसि नो दृशे.. (१०) हे अग्नि! आप हमारी रक्षा कीजिए. स्वर्ग देने वाले इस काम को सिद्ध करिए (साधिए). आप ही हमें राह दिखाने वाले हैं. (१०) दूसरा खंड नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः अमैरमित्रमर्दय.. (१) हे अग्नि! बल चाहने वाले मनुष्य आप को नमस्कार करते हैं. मैं भी आप को नमस्कार करता हूं. आप अपने बल से दुश्मनों का नाश कीजिए. ( १ ) दूतं वो विश्ववेदस हव्यवाहममर्त्यम्. यजिष्ठमृञ्जसे गिरा.. ( २ ) हे अग्नि! आप ज्ञान के स्वामी हैं. आप हवि को देवताओं तक ले जाने वाले हैं. आप देवताओं के दूत हैं. मैं आप की कृपा पाने के लिए प्रार्थना करता हूं. (२) उप त्वा जामयो गिरो देदिशतीर्हविष्कृतः वायोरनीके अस्थिरन्.. (३) हे अग्नि! यजमान की वाणी से प्रकट होने वाली श्रेष्ठ स्तुतियां आप का गुणगान कर रही हैं. हम आप को वायु के पास स्थापित करते हैं. (३) उप त्वाग्ने दिवेदिवे दोषावस्तर्धिया वयम्. नमो भरन्त एमसि.. (४) हे अग्नि! हम आप के सच्चे भक्त हैं. दिनरात आप की पूजा करते हैं. दिनरात आप का गुणगान करते हैं. आप हम पर कृपा करिए. (४) जराबोध तद्विविढि विशेविशे यज्ञियाय. स्तोम s रुद्राय दृशीकम्.. (५) हे अग्नि! हम प्रार्थना कर के आप को आमंत्रित करते हैं. आप हम सब पर कृपा करने के लिए यज्ञ मंडप में आइए. दुष्टों का नाश करने वाले आप को हम सुंदर प्रार्थनाओं से बारबार आमंत्रित कर रहे हैं. (५) प्रति त्यं चारुमध्वरं गोपीथाय प्र हूयसे. मरुद्भिरग्न आ गहि.. (६) हे अग्नि! आप इस उत्तम यज्ञ में सोमपान के लिए बुलाए जाते हैं. आप मरुतों (देवताओं) के साथ आइए. (६) अश्वं न त्वा वारवन्तं वन्दध्या अग्निं नमोभिः सम्राजन्तमध्वराणाम्.. (७) हे अग्नि! आप प्रसिद्ध (यज्ञ के) पूंछ वाले घोड़े के समान हैं. आप यज्ञ के रक्षक हैं. हम प्रार्थनाओं से आप की पूजा व नमस्कार कर रहे हैं. अर्थात् जैसे घोड़ा अपनी पूंछ से कष्ट देने वाले मच्छर आदि हटा देता है, वैसे ही आप अपनी लपटों (ज्वालाओं) से हमारे कष्ट दूर कीजिए. (७) और्वभृगुवच्छुचिमप्नवानवदा हुवे. अग्नि ६ समुद्रवाससम्.. (८) हे अग्नि! आप समुद्र में रहने वाले हैं. भृगु और अप्नवान जैसे ऋषियों ने जिस तरह सच्चे मन से आप की प्रार्थना की, उसी तरह हम भी सच्चे मन से आप की प्रार्थना करते हैं. (८) अग्निमिन्धानो मनसा धिय सचेत मर्त्यः. अग्निमिन्धे विवस्वभिः.. (९) हे अग्नि! मनुष्य मन लगा कर आप को तथा अपनी श्रद्धा को जगाता है. सूर्य की किरणों के साथ आप को प्रकाशित करता है. (९) आदित्प्रत्नस्य रेतसो ज्योतिः पश्यन्ति वासरम्. परो यदिध्यते दिवि.. (१०) हे अग्नि! स्वर्गलोक से ऊपर सूर्य रूप में अग्नि प्रकाशित होती है. तभी सब प्राणी उस प्रकाश वाले तेज का दर्शन करते हैं. (१०) तीसरा खंड अग्निं वो वृधन्तमध्वराणां पुरूतमम्. अच्छा नप्त्रे सहस्वते.. (१) हे ऋत्विजो (उपासको)! अग्नि तुम्हारे अहिंसक यज्ञों में सहायक, श्रेष्ठ (उत्तम), सब के हितकारी व बलशाली हैं. तुम ज्वालाओं (लपटों) से बढ़ते हुए अग्नि की सेवा में जाओ. ( १ ) अग्निस्तिग्मेन शोचिषा य छं सद्विश्वं न्य ३ त्रिणम् अग्निर्नो व सते रयिम् .. ( २ ) अग्नि अपनी तेज लपटों से राक्षसों और अन्य विघ्नों को नष्ट करें. अग्नि हमें सब प्रकार का धन (सुख) प्रदान करें. (२) अग्ने मृड महाँ अस्यय आ देवयुं जनम्. इयेथ बर्हिरासदम्.. (३) हे अग्नि! आप हमें सुख दीजिए. आप महान व गतिशील यानी सामर्थ्यवान हैं. आप देवताओं के दर्शन के इच्छुक यजमान के पास कुश (घास ) के आसन पर विराजने के लिए यहां पधारिए. (३) अग्ने रक्षा णो अछं हसः प्रति स्म देव रीषतः. तपिष्ठैरजरो दह.. (४) हे अग्नि! आप पापों से हमारी रक्षा कीजिए. आप दिव्य तेज वाले हैं. आप अजर (बुढ़ापे से रहित) हैं. आप हमारा नुकसान करने की इच्छा रखने वाले शत्रुओं को अपने तेजताप से भस्म कर दीजिए. (४) अग्ने युङ्क्ष्वा हि ये तवाश्वासो देव साधवः. अरं वहन्त्याशवः.. (५) हे अग्नि! अपने तेज गति वाले श्रेष्ठ और कुशल घोड़ों को (यहां पधारने के लिए) रथ में जोतिए. (५) नि त्वा नक्ष्य विश्पते द्युमन्तं धीमहे वयम्. सुवीरमग्न आहुत.. (६) हे अग्नि! हम आप की शरण में हैं. यजमान आप को आमंत्रित करते हैं. आप की पूजा करते हैं. आप की पूजा से सब प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. हम ने हृदय से आप को यहां स्थापित किया है. (६) अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्. अपा s रेता s सि जिन्वति.. (७) हे अग्नि! आप सर्वोच्च (सब से ऊंचे) हैं. आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक का पालन करने वाले हैं. आप इन के स्वामी हैं. आप जल के सारे जीवों को जीवन देते हैं और काम में लगाते हैं. (७) इममू षु त्वमस्माक¸ सनिं गायत्रं नव्य ६ सम्. अग्ने देवेषु प्र वोचः.. (८) हे अग्नि! आप हमारी इस हवि को देवताओं तक पहुंचाइए. हम गायत्री छंद में आप की प्रार्थना कर रहे हैं. आप हमारी इन दोनों चीजों को देवताओं तक पहुंचा दीजिए. (८) तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गिरः स पावक श्रुधी हवम्.. (९) हे अग्नि! गोपवन ऋषि ने आप को अपनी स्तुति से उत्पन्न किया है. आप अंगों में रस के रूप में निवास करते हैं. आप पवित्र करने वाले हैं. आप हमारी प्रार्थना सुनिए. (९) परि वाजपतिः कविरग्निर्हव्यान्यक्रमीत्. दधद्रत्नानि दाशुषे.. (१०) हे अग्नि! आप सर्वज्ञ व अन्नों के स्वामी हैं. आप हवि के रूप में दिए गए पदार्थों को ******ebook converter DEMO Watermarks*******
आग्नेय पर्व पहला अध्याय पहला खंड अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये. नि होता सत्सि बर्हिषि.. हे अग्नि! हम सब आप की स्तुति करते हैं. यज्ञ में आप को आमंत्रित करते हैं. आप आ कर कुश के आसन पर बैठिए. आप हवि देवताओं तक पहुंचाइए. . त्वमग्ने यज्ञाना पाँच होता विश्वेषा हितः देवेभिर्मानुषे जने.. हे अग्नि! आप यज्ञों के पुरोहित हैं. आप सब का कल्याण करने वाले हैं. देवताओं ने ही आप को मनुष्यों के बीच में स्थापित किया है. अग्निं दूत वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले हैं. आप धन के स्वामी हैं. इस यज्ञ को अच्छी तरह करने के लिए हम आप को दूत मान कर भेज रहे हैं. . अग्निर्वृत्राणि जङ्घनद् द्रविणस्युर्विपन्यया. समिद्धः शुक्र आहुतः.. हे अग्नि! आप अपने पूजकों को धन देने वाले हैं. समिधा से आप को अच्छी तरह प्रकाशित किया गया है. आप हमारी स्तुति से प्रसन्न होइए. यज्ञ में विघ्न डालने वालों को नष्ट कीजिए. प्रेष्ठं वो अतिथि स्तुषे मित्रमिव प्रियम्. अग्ने रथं न वेद्यम्.. हे अग्नि! आप पूजकों को धन देने वाले हैं. उन्हें मित्र की तरह बहुत प्रिय हैं. मेहमान की तरह पूजा करने योग्य हैं. आप हमारी पूजा से प्रसन्न होइए. त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः. उत द्विषो मर्त्यस्य.. हे अग्नि! आप ईर्ष्याद्वेष करने वाले लोगों और दुश्मनों से हमें बचाइए. हे अग्नि! हमें बहुत सुखसंपन्नता प्रदान कीजिए. एह्यू षु ब्रवाणि ते ऽ ग्न इत्थेतरा गिरः एभिर्वर्धास इन्दुभिः.. हे अग्नि! आप पधारिए. हम आप के लिए शुद्ध वाणी से मंत्र पढ़ रहे हैं. आप उन्हें सुनिए. सोमरस से आप समृद्ध बनिए. आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात्. अग्ने त्वां कामये गिरा.. हे अग्नि! हम आप के पुत्र हैं. मन से आप को आमंत्रित करना चाहते हैं. आप श्रेष्ठ जगह से भी हमारे लिए आइए. हम वाणी से आप को भजते हैं. त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत. मूर्ध्ना विश्वस्य वाघतः.. हे अग्नि! आप सर्वश्रेष्ठ और सारे संसार के धारक हैं. अथर्वा ने कमल के पत्तों पर अरणि मथ कर आप को उत्पन्न किया. अग्ने विवस्वदा भरास्मभ्यमूतये महे. देवो ह्यसि नो दृशे.. हे अग्नि! आप हमारी रक्षा कीजिए. स्वर्ग देने वाले इस काम को सिद्ध करिए . आप ही हमें राह दिखाने वाले हैं. दूसरा खंड नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः अमैरमित्रमर्दय.. हे अग्नि! बल चाहने वाले मनुष्य आप को नमस्कार करते हैं. मैं भी आप को नमस्कार करता हूं. आप अपने बल से दुश्मनों का नाश कीजिए. दूतं वो विश्ववेदस हव्यवाहममर्त्यम्. यजिष्ठमृञ्जसे गिरा.. हे अग्नि! आप ज्ञान के स्वामी हैं. आप हवि को देवताओं तक ले जाने वाले हैं. आप देवताओं के दूत हैं. मैं आप की कृपा पाने के लिए प्रार्थना करता हूं. उप त्वा जामयो गिरो देदिशतीर्हविष्कृतः वायोरनीके अस्थिरन्.. हे अग्नि! यजमान की वाणी से प्रकट होने वाली श्रेष्ठ स्तुतियां आप का गुणगान कर रही हैं. हम आप को वायु के पास स्थापित करते हैं. उप त्वाग्ने दिवेदिवे दोषावस्तर्धिया वयम्. नमो भरन्त एमसि.. हे अग्नि! हम आप के सच्चे भक्त हैं. दिनरात आप की पूजा करते हैं. दिनरात आप का गुणगान करते हैं. आप हम पर कृपा करिए. जराबोध तद्विविढि विशेविशे यज्ञियाय. स्तोम s रुद्राय दृशीकम्.. हे अग्नि! हम प्रार्थना कर के आप को आमंत्रित करते हैं. आप हम सब पर कृपा करने के लिए यज्ञ मंडप में आइए. दुष्टों का नाश करने वाले आप को हम सुंदर प्रार्थनाओं से बारबार आमंत्रित कर रहे हैं. प्रति त्यं चारुमध्वरं गोपीथाय प्र हूयसे. मरुद्भिरग्न आ गहि.. हे अग्नि! आप इस उत्तम यज्ञ में सोमपान के लिए बुलाए जाते हैं. आप मरुतों के साथ आइए. अश्वं न त्वा वारवन्तं वन्दध्या अग्निं नमोभिः सम्राजन्तमध्वराणाम्.. हे अग्नि! आप प्रसिद्ध पूंछ वाले घोड़े के समान हैं. आप यज्ञ के रक्षक हैं. हम प्रार्थनाओं से आप की पूजा व नमस्कार कर रहे हैं. अर्थात् जैसे घोड़ा अपनी पूंछ से कष्ट देने वाले मच्छर आदि हटा देता है, वैसे ही आप अपनी लपटों से हमारे कष्ट दूर कीजिए. और्वभृगुवच्छुचिमप्नवानवदा हुवे. अग्नि छः समुद्रवाससम्.. हे अग्नि! आप समुद्र में रहने वाले हैं. भृगु और अप्नवान जैसे ऋषियों ने जिस तरह सच्चे मन से आप की प्रार्थना की, उसी तरह हम भी सच्चे मन से आप की प्रार्थना करते हैं. अग्निमिन्धानो मनसा धिय सचेत मर्त्यः. अग्निमिन्धे विवस्वभिः.. हे अग्नि! मनुष्य मन लगा कर आप को तथा अपनी श्रद्धा को जगाता है. सूर्य की किरणों के साथ आप को प्रकाशित करता है. आदित्प्रत्नस्य रेतसो ज्योतिः पश्यन्ति वासरम्. परो यदिध्यते दिवि.. हे अग्नि! स्वर्गलोक से ऊपर सूर्य रूप में अग्नि प्रकाशित होती है. तभी सब प्राणी उस प्रकाश वाले तेज का दर्शन करते हैं. तीसरा खंड अग्निं वो वृधन्तमध्वराणां पुरूतमम्. अच्छा नप्त्रे सहस्वते.. हे ऋत्विजो ! अग्नि तुम्हारे अहिंसक यज्ञों में सहायक, श्रेष्ठ , सब के हितकारी व बलशाली हैं. तुम ज्वालाओं से बढ़ते हुए अग्नि की सेवा में जाओ. अग्निस्तिग्मेन शोचिषा य छं सद्विश्वं न्य तीन त्रिणम् अग्निर्नो व सते रयिम् .. अग्नि अपनी तेज लपटों से राक्षसों और अन्य विघ्नों को नष्ट करें. अग्नि हमें सब प्रकार का धन प्रदान करें. अग्ने मृड महाँ अस्यय आ देवयुं जनम्. इयेथ बर्हिरासदम्.. हे अग्नि! आप हमें सुख दीजिए. आप महान व गतिशील यानी सामर्थ्यवान हैं. आप देवताओं के दर्शन के इच्छुक यजमान के पास कुश के आसन पर विराजने के लिए यहां पधारिए. अग्ने रक्षा णो अछं हसः प्रति स्म देव रीषतः. तपिष्ठैरजरो दह.. हे अग्नि! आप पापों से हमारी रक्षा कीजिए. आप दिव्य तेज वाले हैं. आप अजर हैं. आप हमारा नुकसान करने की इच्छा रखने वाले शत्रुओं को अपने तेजताप से भस्म कर दीजिए. अग्ने युङ्क्ष्वा हि ये तवाश्वासो देव साधवः. अरं वहन्त्याशवः.. हे अग्नि! अपने तेज गति वाले श्रेष्ठ और कुशल घोड़ों को रथ में जोतिए. नि त्वा नक्ष्य विश्पते द्युमन्तं धीमहे वयम्. सुवीरमग्न आहुत.. हे अग्नि! हम आप की शरण में हैं. यजमान आप को आमंत्रित करते हैं. आप की पूजा करते हैं. आप की पूजा से सब प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. हम ने हृदय से आप को यहां स्थापित किया है. अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्. अपा s रेता s सि जिन्वति.. हे अग्नि! आप सर्वोच्च हैं. आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक का पालन करने वाले हैं. आप इन के स्वामी हैं. आप जल के सारे जीवों को जीवन देते हैं और काम में लगाते हैं. इममू षु त्वमस्माक¸ सनिं गायत्रं नव्य छः सम्. अग्ने देवेषु प्र वोचः.. हे अग्नि! आप हमारी इस हवि को देवताओं तक पहुंचाइए. हम गायत्री छंद में आप की प्रार्थना कर रहे हैं. आप हमारी इन दोनों चीजों को देवताओं तक पहुंचा दीजिए. तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गिरः स पावक श्रुधी हवम्.. हे अग्नि! गोपवन ऋषि ने आप को अपनी स्तुति से उत्पन्न किया है. आप अंगों में रस के रूप में निवास करते हैं. आप पवित्र करने वाले हैं. आप हमारी प्रार्थना सुनिए. परि वाजपतिः कविरग्निर्हव्यान्यक्रमीत्. दधद्रत्नानि दाशुषे.. हे अग्नि! आप सर्वज्ञ व अन्नों के स्वामी हैं. आप हवि के रूप में दिए गए पदार्थों को ******ebook converter DEMO Watermarks*******
क्या मानसिक स्थिति होगी उस मां की जो इस बात से परेशान है कि उसकी बेटी खाती बहुत है। लेकिन ये जानकर भी आपको हैरानी होगी कि आखिर उस मां की बेटी खाती क्या है! 29 साल की उस महिला को अपना घर अभी तक दो बार बदलना पड़ा है और इसका कारण उनकी बेटी है। उसकी बेटी 'फारहा' जब 10 महीने की थी तब वो पैर आ अंगूठा चूसा करती थी। जब उसने इस बात की चिंता जताई, तो लोगों ने बताया कि ये स्वाभाविक है और बच्चे ऐसा करते हैं। जैसे फारहा बड़ी होने लगी वो घर के बाकी सामान भी खाने लगी। उसकी मां ने बताया कि उसने अपनी सैंडल की चिपकने वाली स्ट्रैप भी खा ली। इस बात पर ध्यान तब दिया जब उसने सैंडल देखी। उसकी मां ने बताया कि एक दिन उसने फारहा की पॉटी में कारपेट के धागे देखे थे। जब उसने अपनी बेटी से पूछा कि उसने क्या खाया है, तो उसने कारपेट की तरफ इशारा किया। मां ने गौर किया, तो उसके कारपेट पर दांत के छोटे-छोटे छेद बने थे। पहले तो उसे लगा कि ये दांत आने की वजह से हो रहा है, पर बाद में पता चला कि बच्ची Pica (पिका) नाम की दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में लोगों को वो चीज़ें खाने की इच्छा होती है, जो खाने लायक न हो। फारहा हर वो चीज खा लेती है, जो उसे देखने में अच्छी लगे, जैसे कारपेट, दीवार का किनारा, जूते की स्ट्रैप, खिलौने आदि।
क्या मानसिक स्थिति होगी उस मां की जो इस बात से परेशान है कि उसकी बेटी खाती बहुत है। लेकिन ये जानकर भी आपको हैरानी होगी कि आखिर उस मां की बेटी खाती क्या है! उनतीस साल की उस महिला को अपना घर अभी तक दो बार बदलना पड़ा है और इसका कारण उनकी बेटी है। उसकी बेटी 'फारहा' जब दस महीने की थी तब वो पैर आ अंगूठा चूसा करती थी। जब उसने इस बात की चिंता जताई, तो लोगों ने बताया कि ये स्वाभाविक है और बच्चे ऐसा करते हैं। जैसे फारहा बड़ी होने लगी वो घर के बाकी सामान भी खाने लगी। उसकी मां ने बताया कि उसने अपनी सैंडल की चिपकने वाली स्ट्रैप भी खा ली। इस बात पर ध्यान तब दिया जब उसने सैंडल देखी। उसकी मां ने बताया कि एक दिन उसने फारहा की पॉटी में कारपेट के धागे देखे थे। जब उसने अपनी बेटी से पूछा कि उसने क्या खाया है, तो उसने कारपेट की तरफ इशारा किया। मां ने गौर किया, तो उसके कारपेट पर दांत के छोटे-छोटे छेद बने थे। पहले तो उसे लगा कि ये दांत आने की वजह से हो रहा है, पर बाद में पता चला कि बच्ची Pica नाम की दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में लोगों को वो चीज़ें खाने की इच्छा होती है, जो खाने लायक न हो। फारहा हर वो चीज खा लेती है, जो उसे देखने में अच्छी लगे, जैसे कारपेट, दीवार का किनारा, जूते की स्ट्रैप, खिलौने आदि।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन करने के लिए आने वाले थे तो पंडित नेहरू ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा, "नर्मदा को लेकर सरदार पटेल ने सपना देखा था, लेकिन आपके परिवार ने वह सपना पूरा नहीं होने दिया। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले विधेयक को राज्यसभा में पास होने में रुकावट डालने को लेकर कांग्रेस पर हमलावर होतेहुए मोदी ने कहा कि वह विधेयक को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पास कराएंगे। मोदी ने कहा, "कांग्रेस ओबीसी समुदाय से वोट मांग रही है, लेकिन उनको (कांग्रेस के लोगों को) जवाब देना चाहिए कि उन्होंने इतने वर्षो तक ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा क्यों नहीं देने दिया। हम इसे फिर से चर्चा के लिए लाएंगे। विधेयक लोकसभा में पास हो चुका है और राज्यसभा में में अटका है, जहां कांग्रेस के पास बहुमत है। " प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ओबीसी समुदाय को उनका बकाया हक दिलाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन करने के लिए आने वाले थे तो पंडित नेहरू ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा, "नर्मदा को लेकर सरदार पटेल ने सपना देखा था, लेकिन आपके परिवार ने वह सपना पूरा नहीं होने दिया। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले विधेयक को राज्यसभा में पास होने में रुकावट डालने को लेकर कांग्रेस पर हमलावर होतेहुए मोदी ने कहा कि वह विधेयक को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पास कराएंगे। मोदी ने कहा, "कांग्रेस ओबीसी समुदाय से वोट मांग रही है, लेकिन उनको जवाब देना चाहिए कि उन्होंने इतने वर्षो तक ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा क्यों नहीं देने दिया। हम इसे फिर से चर्चा के लिए लाएंगे। विधेयक लोकसभा में पास हो चुका है और राज्यसभा में में अटका है, जहां कांग्रेस के पास बहुमत है। " प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ओबीसी समुदाय को उनका बकाया हक दिलाना चाहते हैं।
Smriti Mandhana Captain of RCB: आरसीबी ने महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए स्मृति मंधाना को कप्तान नियुक्त किया है। महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए खिलाड़ियों की नीलामी खत्म हो गई है और सभी पांचों फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम बना ली है। अब सभी टीमें अपने कप्तान और प्लेइंग 11 को लेकर फैसला ले रही हैं। इसी कड़ी में आज यानी शनिवार को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपनी टीम के कप्तान की घोषणा की है। आरसीबी ने महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए स्मृति मंधाना को कप्तान नियुक्त किया है। इसी के साथ RCB इस टूर्नामेंट में अपने कप्तान की घोषणा करने वाली पहली टीम बन गई है। फ्रेंचाइजी के पूर्व कप्तान विराट कोहली और मौजूदा कप्तान फाफ डुप्लेसी ने मंधाना को कप्तान बनाए जाने की घोषणा की है। Royal Challengers Bangalore ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें विराट कोहली और फाफ डुप्लेसी ने कप्तानी का ऐलान किया है। आपको बता दें कि Women's IPL auction में टीम इंडिया की स्टार Smriti Mandhana को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम ने 3 करोड़ 40 लाख में अपनी टीम में शामिल किया था। इसी के साथ वह डब्ल्यूपीएल के इतिहास की सबसे महंगे खिलाड़ी बनी थीं। इसके अलावा अगर मंधाना की कप्तानी की बात करें तो मंधाना ने 11 मौकों पर राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है, जिसमें भारत ने पांच मैच जीते हैं। फिलहाल मंधाना साउथ अफ्रीका में हो रहे Women's T20 World Cup 2023 में हिस्सा ले रही हैं। वह वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान भी हैं। मंधाना की गिनती महिला क्रिकेट की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में होती है। उनके नाम 113 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 2,661 रन हैं। गौरतलब है कि महिला प्रीमियर लीग चार मार्च से शुरू होगी। टूर्नामेंट का पहला मैच गुजरात और मुंबई की टीम के बीच खेला जाएगा। लीग का खिताबी मुकाबला 26 मार्च को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। पहले सीजन में दिल्ली कैपिटल्स, गुजरात जायंट्स, मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और यूपी वॉरियर्स कुल 5 टीमें उतारेंगी।
Smriti Mandhana Captain of RCB: आरसीबी ने महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए स्मृति मंधाना को कप्तान नियुक्त किया है। महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए खिलाड़ियों की नीलामी खत्म हो गई है और सभी पांचों फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम बना ली है। अब सभी टीमें अपने कप्तान और प्लेइंग ग्यारह को लेकर फैसला ले रही हैं। इसी कड़ी में आज यानी शनिवार को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपनी टीम के कप्तान की घोषणा की है। आरसीबी ने महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के लिए स्मृति मंधाना को कप्तान नियुक्त किया है। इसी के साथ RCB इस टूर्नामेंट में अपने कप्तान की घोषणा करने वाली पहली टीम बन गई है। फ्रेंचाइजी के पूर्व कप्तान विराट कोहली और मौजूदा कप्तान फाफ डुप्लेसी ने मंधाना को कप्तान बनाए जाने की घोषणा की है। Royal Challengers Bangalore ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें विराट कोहली और फाफ डुप्लेसी ने कप्तानी का ऐलान किया है। आपको बता दें कि Women's IPL auction में टीम इंडिया की स्टार Smriti Mandhana को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम ने तीन करोड़ चालीस लाख में अपनी टीम में शामिल किया था। इसी के साथ वह डब्ल्यूपीएल के इतिहास की सबसे महंगे खिलाड़ी बनी थीं। इसके अलावा अगर मंधाना की कप्तानी की बात करें तो मंधाना ने ग्यारह मौकों पर राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है, जिसमें भारत ने पांच मैच जीते हैं। फिलहाल मंधाना साउथ अफ्रीका में हो रहे Women's Tबीस World Cup दो हज़ार तेईस में हिस्सा ले रही हैं। वह वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान भी हैं। मंधाना की गिनती महिला क्रिकेट की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में होती है। उनके नाम एक सौ तेरह टीबीस अंतरराष्ट्रीय मैचों में दो,छः सौ इकसठ रन हैं। गौरतलब है कि महिला प्रीमियर लीग चार मार्च से शुरू होगी। टूर्नामेंट का पहला मैच गुजरात और मुंबई की टीम के बीच खेला जाएगा। लीग का खिताबी मुकाबला छब्बीस मार्च को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। पहले सीजन में दिल्ली कैपिटल्स, गुजरात जायंट्स, मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और यूपी वॉरियर्स कुल पाँच टीमें उतारेंगी।
सलमान और कटरीना कैफ पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म के प्रमोशन में दलित विरोधी टिप्पणी की थी। सुपरहिट फिल्म 'टाइगर जिंदा है' में दलितों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर दिल्ली की एक अदालत में सलमान खान के खिलाफ याचिका दायर की गई है। इस याचिका में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई है। आपको बता दें कि ये मामला साल 2017 में आई फिल्म 'टाइगर जिंदा है' का है। इस मामले में सलमान खान के साथ अभिनेत्री कटरीना कैफ का भी नाम शामिल है। जानकारी के मुताबिक इस मामले में दिल्ली की अदालत 27 फरवरी को सुनवाई करेगी। इस याचिका में सलमान और कटरीना कैफ पर आरोप लगाया गया हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म के प्रमोशन में ये कथित टिप्पणी की थी। इसके बाद दलितों ने इस कथित जातिगत टिप्पणी को लेकर दिसंबर महीने में फिल्म 'टाइगर जिंदा हैं' और सलमान खान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।
सलमान और कटरीना कैफ पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म के प्रमोशन में दलित विरोधी टिप्पणी की थी। सुपरहिट फिल्म 'टाइगर जिंदा है' में दलितों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर दिल्ली की एक अदालत में सलमान खान के खिलाफ याचिका दायर की गई है। इस याचिका में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई है। आपको बता दें कि ये मामला साल दो हज़ार सत्रह में आई फिल्म 'टाइगर जिंदा है' का है। इस मामले में सलमान खान के साथ अभिनेत्री कटरीना कैफ का भी नाम शामिल है। जानकारी के मुताबिक इस मामले में दिल्ली की अदालत सत्ताईस फरवरी को सुनवाई करेगी। इस याचिका में सलमान और कटरीना कैफ पर आरोप लगाया गया हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म के प्रमोशन में ये कथित टिप्पणी की थी। इसके बाद दलितों ने इस कथित जातिगत टिप्पणी को लेकर दिसंबर महीने में फिल्म 'टाइगर जिंदा हैं' और सलमान खान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।
Deepak Hooda: भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2022 में एक बार फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. आज यानि 4 सितम्बर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में दोनों एक दूसरे के आमने सामने हैं. बाबर आज़म पिछले मैच की हार का बदला लेने के लिए और रोहित फाइनल में जगह बनाने का इरादा लेकर मैदान में आयेंगे. आज कप्तान ने टॉस के समय प्लेइंग 11 में जब दीपक हूड्डा को जगह देने की बात कही तो फैंस ने सोशल मीडिया पर जमकर ख़ुशी जताई है. रोहित शर्मा ने टॉस के समय प्लेइंग 11 में रविन्द्र जडेजा की चोट के चलते बदलाव की घोषणा करते हुए टीम में दीपक हूड्डा को मौका दिए जाने की जानकारी दी. टीम में दीपक हूड्डा को एशिया कप में पहली बार मौका दिया जा रहा है. ऐसे में सोशल मीडिया पर फैंस जमकर उनकी तारीफ़ करने के साथ-साथ उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन के लिए शुभकामनाये भी दे रहे है. Nice to see Deepak Hooda getting the node here. Can provide a decent matchup whenever required. More like he gets replaced by hooda to get those few extra overs in the middle.
Deepak Hooda: भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप दो हज़ार बाईस में एक बार फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. आज यानि चार सितम्बर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में दोनों एक दूसरे के आमने सामने हैं. बाबर आज़म पिछले मैच की हार का बदला लेने के लिए और रोहित फाइनल में जगह बनाने का इरादा लेकर मैदान में आयेंगे. आज कप्तान ने टॉस के समय प्लेइंग ग्यारह में जब दीपक हूड्डा को जगह देने की बात कही तो फैंस ने सोशल मीडिया पर जमकर ख़ुशी जताई है. रोहित शर्मा ने टॉस के समय प्लेइंग ग्यारह में रविन्द्र जडेजा की चोट के चलते बदलाव की घोषणा करते हुए टीम में दीपक हूड्डा को मौका दिए जाने की जानकारी दी. टीम में दीपक हूड्डा को एशिया कप में पहली बार मौका दिया जा रहा है. ऐसे में सोशल मीडिया पर फैंस जमकर उनकी तारीफ़ करने के साथ-साथ उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन के लिए शुभकामनाये भी दे रहे है. Nice to see Deepak Hooda getting the node here. Can provide a decent matchup whenever required. More like he gets replaced by hooda to get those few extra overs in the middle.
अपनी गलती का नतीजा भुगत रही हूँ। में इन बरदाश्त नही कर सकती ।" वह फूट फूटकर रोने लगी । लेपनव को लगा कि उसने अपार कष्ट भेला है । वह कुछ भी वह नहीं पाया और यूलिया के सामने घुटनो के बल गिर पड़ा । मत रोयो । नहीं नहीं !" उसने धीरे से कहा, "मैंने तुम्हारा अपमान इसलिए किया है कि मैं तुम्ह पागला की तरह प्यार करता हूँ' उसने उसके परों को चूम लिया और गहरे आवेग में उसे सीने मे भीच लिया। "मैं प्रेम की एक चिनगारी मात्र चाहता हूँ," वह फुसफुमाया, "कृपया मरे पास लेट जाम्रो लेट जाओ ! अब यह न कहो कि हमारी शादी एक गलती थी । " लेकिन वह राती रही । लेपतव ने देखा कि उसके सारे प्रेम-स्पर्शो को वह अपनी गलती के लिए दण्ड मानकर भोग रही थी। उसने उस पर वो झटके के साथ खोचकर चिडिया की तरह सिकोड लिया, जिसे उसने चूमा था । सहसा लेपतेव को यूलिया के लिए दुख होने लगा । यूलिया ने लेटकर ओढने से अपने को ढँक लिया । लेपतेव न भी कपडा उतारा और उसकी बगल मे सो गया। सुबह दोना पशोपेश मे थे और समझ नहीं पाते थे कि क्या कह यहां तक कि उस पैर पर वह क्म भार देवर चलती थी, जिस उसने रात को चूमा था । खाने के पहले पनोरोव विदाइ लेन आया। यूलिया के मन में अपने कसबे जाने के लिए गहरी इच्छा पैदा हो गयी थी । वह सोचती रही कि इस निरनर की गलती की भावना और भौडी परिस्थिति से दूर भाग जानातिना अच्छा होगा ? खाते समय यह तय हुआ कि वह पनोरोव के साथ दो या तीन सप्ताह के लिए अपने पिता के पास चली जायगी । तीन साल /
अपनी गलती का नतीजा भुगत रही हूँ। में इन बरदाश्त नही कर सकती ।" वह फूट फूटकर रोने लगी । लेपनव को लगा कि उसने अपार कष्ट भेला है । वह कुछ भी वह नहीं पाया और यूलिया के सामने घुटनो के बल गिर पड़ा । मत रोयो । नहीं नहीं !" उसने धीरे से कहा, "मैंने तुम्हारा अपमान इसलिए किया है कि मैं तुम्ह पागला की तरह प्यार करता हूँ' उसने उसके परों को चूम लिया और गहरे आवेग में उसे सीने मे भीच लिया। "मैं प्रेम की एक चिनगारी मात्र चाहता हूँ," वह फुसफुमाया, "कृपया मरे पास लेट जाम्रो लेट जाओ ! अब यह न कहो कि हमारी शादी एक गलती थी । " लेकिन वह राती रही । लेपतव ने देखा कि उसके सारे प्रेम-स्पर्शो को वह अपनी गलती के लिए दण्ड मानकर भोग रही थी। उसने उस पर वो झटके के साथ खोचकर चिडिया की तरह सिकोड लिया, जिसे उसने चूमा था । सहसा लेपतेव को यूलिया के लिए दुख होने लगा । यूलिया ने लेटकर ओढने से अपने को ढँक लिया । लेपतेव न भी कपडा उतारा और उसकी बगल मे सो गया। सुबह दोना पशोपेश मे थे और समझ नहीं पाते थे कि क्या कह यहां तक कि उस पैर पर वह क्म भार देवर चलती थी, जिस उसने रात को चूमा था । खाने के पहले पनोरोव विदाइ लेन आया। यूलिया के मन में अपने कसबे जाने के लिए गहरी इच्छा पैदा हो गयी थी । वह सोचती रही कि इस निरनर की गलती की भावना और भौडी परिस्थिति से दूर भाग जानातिना अच्छा होगा ? खाते समय यह तय हुआ कि वह पनोरोव के साथ दो या तीन सप्ताह के लिए अपने पिता के पास चली जायगी । तीन साल /
नजर सें टारे टरो नई मोरे बालमा 1 (२) सब के सैयाँ नीरे बसत हैं मो दोखन के दूर घरी घरी पैचाने है # सो हो गए पीयरा मूर । आँगन सूके सूकनो बन सूखे कचनार । गोरी सूखें मायकें हीन पुरुष को नास । हमें सुख नैयाँ सासुरे आये को । (४) नई गोरी नए बालमा नई होरी की झाँक । ऐसी होरी दागियो तोरे कुले नै आबे आँच । समर के यारी करो मोरे बालमा । (५) आग लगी दरयाव में धुआँ न परगट होय । के दिल जाने आपनो के जा पर बीती होय । काऊ ५ की लगन कोऊ का जाने ? (गायक - बवनसिंह दांगी, बिचुवा) इतने में बेड़नी गा उठती हैःभुनसारों चिरैया काय बोली अरे काय बोली कैसी बोली ? भुनसारें चिरैया काय बोली ? ठंडे से पानी गरम कर ल्याये । सपरन न पाये पिया फिर बोली । ताती जलेबी दूधा के लडुआ, जेवन न पाये पिया फिर बोली । १ दोबन दुखनी । २ चाने है = चाह है, आवश्यकता है। ३ सुकना = सुखेना, अनाज । ४ दागियो जलामा ५ काऊ = किसी। पाना पचासी के बीरा लगाये, चाबन ने पाये पिया फिर बोली । भुनसारें चिरैया काय बोली ? प्राज प्रातःकाल से ही एक चिड़िया किसी सुन्दरी के आँगन में बोल रही है। प्रियतम को स्नान कराते समय, भोजन कराते समय, पान खिलाते समय चिड़िया का बोलना युवती को रुचिकर प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि वह उसकी प्रात्मविभोरता में बाधक बन रही है । अब दूसरी टोली की ओर से फाग उठाई जाती हैः दोई नैनों के मारे हमारे जोगी भये घरबारे लाल । जोगी भये घरबारे हमारे जोगी भये पिय प्यारे लाल । अंग भभूत बगल मृगछाला सीस जटा लिपटाने, हमारे जोगी भये घरबारे लाल । बगल लँय सोटा हाथ लँय कुंडी घर घर अलख जगावें । हमारे जोगी... इस रमरणी के नयनों की करामात तो देखो - उसके नयनों की मार से उसका घरवाला जोगी बनकर घर-घर अलख जगाने लगा है। मदमाते नयना जो न करें सो थोड़ा है ! छोटे बलम बड़ी नारे ना, जर जैयो हमारे जोबेना । पानी खों गए पिय सँग लग जाबें, हाथ में ले लँय डोरेना । जय जंयो... गोबर खो गए पिय सँग जो लग गए, सार में मचल गए बालेमा । जर जयो... हमारे खेत में बरिया को पेड़ो, ओई से डार दये पालेना । जर जैयो... कै गोरी तुमरे भाई भतीजे, कै जे तुमारे लालेना । जर जैयो... नै आँय भैया मोरे ललनवाँ, जे तो हमारे बालेमा । जर जैयो... ( गायिका - रामबाई जसोंदन, देवरी ) बुन्देलखंड की अनेक पिछड़ी हुई जातियों में बाल विवाह की प्रथा अब भी जोर पकड़े हुए है । लोकगीतों तथा कहानियों से जाना जाता है कि किसी समय यहाँ 'डलियों भाँवर' पाड़ने की प्रथा थी । अनेक माता-पिता तो गर्भस्थ बच्चों का, यदि दोनों के लड़का-लड़की हो तो, विवाह कर देने की प्रतिज्ञा पहले ही कर बैठते थे । ऊपर के गीत में बड़ी बहू और छोटे पति की विडंबना का सजीव चित्र खींचा गया है । नव-यौवना वधू अपनी उमंगों के हिंडोले में बैठकर भूलती है और ऐसे समय उसका पति बाल-सुलभ मचलाई ठानता है। ऐसी स्थिति में उसका यौवन भार स्वरूप हो उठता है और वह इस अनुपयोगी यौवन के जलभुंज जाने की कामना करती है । उसकी कसक तो उस समय सीमा बार कर जाती है जब राहगीर उससे पूछता है - "यह क्या तुम्हारा लड़का है ?" इस बीच कोई शरीर की क्षरणभंगुरता विषयक फाग छेड़ देता है :तनक भरोसो नैयाँ ए तनको, तनक भरोसो नैयाँ लाल । खा ले पी ले और बिलस ले, संग कछू नै जैहे लाल ।
नजर सें टारे टरो नई मोरे बालमा एक सब के सैयाँ नीरे बसत हैं मो दोखन के दूर घरी घरी पैचाने है # सो हो गए पीयरा मूर । आँगन सूके सूकनो बन सूखे कचनार । गोरी सूखें मायकें हीन पुरुष को नास । हमें सुख नैयाँ सासुरे आये को । नई गोरी नए बालमा नई होरी की झाँक । ऐसी होरी दागियो तोरे कुले नै आबे आँच । समर के यारी करो मोरे बालमा । आग लगी दरयाव में धुआँ न परगट होय । के दिल जाने आपनो के जा पर बीती होय । काऊ पाँच की लगन कोऊ का जाने ? इतने में बेड़नी गा उठती हैःभुनसारों चिरैया काय बोली अरे काय बोली कैसी बोली ? भुनसारें चिरैया काय बोली ? ठंडे से पानी गरम कर ल्याये । सपरन न पाये पिया फिर बोली । ताती जलेबी दूधा के लडुआ, जेवन न पाये पिया फिर बोली । एक दोबन दुखनी । दो चाने है = चाह है, आवश्यकता है। तीन सुकना = सुखेना, अनाज । चार दागियो जलामा पाँच काऊ = किसी। पाना पचासी के बीरा लगाये, चाबन ने पाये पिया फिर बोली । भुनसारें चिरैया काय बोली ? प्राज प्रातःकाल से ही एक चिड़िया किसी सुन्दरी के आँगन में बोल रही है। प्रियतम को स्नान कराते समय, भोजन कराते समय, पान खिलाते समय चिड़िया का बोलना युवती को रुचिकर प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि वह उसकी प्रात्मविभोरता में बाधक बन रही है । अब दूसरी टोली की ओर से फाग उठाई जाती हैः दोई नैनों के मारे हमारे जोगी भये घरबारे लाल । जोगी भये घरबारे हमारे जोगी भये पिय प्यारे लाल । अंग भभूत बगल मृगछाला सीस जटा लिपटाने, हमारे जोगी भये घरबारे लाल । बगल लँय सोटा हाथ लँय कुंडी घर घर अलख जगावें । हमारे जोगी... इस रमरणी के नयनों की करामात तो देखो - उसके नयनों की मार से उसका घरवाला जोगी बनकर घर-घर अलख जगाने लगा है। मदमाते नयना जो न करें सो थोड़ा है ! छोटे बलम बड़ी नारे ना, जर जैयो हमारे जोबेना । पानी खों गए पिय सँग लग जाबें, हाथ में ले लँय डोरेना । जय जंयो... गोबर खो गए पिय सँग जो लग गए, सार में मचल गए बालेमा । जर जयो... हमारे खेत में बरिया को पेड़ो, ओई से डार दये पालेना । जर जैयो... कै गोरी तुमरे भाई भतीजे, कै जे तुमारे लालेना । जर जैयो... नै आँय भैया मोरे ललनवाँ, जे तो हमारे बालेमा । जर जैयो... बुन्देलखंड की अनेक पिछड़ी हुई जातियों में बाल विवाह की प्रथा अब भी जोर पकड़े हुए है । लोकगीतों तथा कहानियों से जाना जाता है कि किसी समय यहाँ 'डलियों भाँवर' पाड़ने की प्रथा थी । अनेक माता-पिता तो गर्भस्थ बच्चों का, यदि दोनों के लड़का-लड़की हो तो, विवाह कर देने की प्रतिज्ञा पहले ही कर बैठते थे । ऊपर के गीत में बड़ी बहू और छोटे पति की विडंबना का सजीव चित्र खींचा गया है । नव-यौवना वधू अपनी उमंगों के हिंडोले में बैठकर भूलती है और ऐसे समय उसका पति बाल-सुलभ मचलाई ठानता है। ऐसी स्थिति में उसका यौवन भार स्वरूप हो उठता है और वह इस अनुपयोगी यौवन के जलभुंज जाने की कामना करती है । उसकी कसक तो उस समय सीमा बार कर जाती है जब राहगीर उससे पूछता है - "यह क्या तुम्हारा लड़का है ?" इस बीच कोई शरीर की क्षरणभंगुरता विषयक फाग छेड़ देता है :तनक भरोसो नैयाँ ए तनको, तनक भरोसो नैयाँ लाल । खा ले पी ले और बिलस ले, संग कछू नै जैहे लाल ।
नई दिल्ली। दिल्ली में सरकार को बनाने को लेकर धर्मसंकट में फंसी आम आदमी पार्टी ने इस पर विचार विमर्श के लिये बुलाई विधायक दल की बैठक बेनतीजा रही। पार्टी संयोजक केजरीवाल ने बीजेपी-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों ही पार्टियां विश्वास करने लायक नहीं हैं, उन्होंने कहा कि हमने जिन 18 मुद्दों को लेकर जो चिट्ठी लिखी, उसका कांग्रेस ने गोलमोल जवाब दिया है, लेकिन बीजेपी ने अभी तक कोई जवाब ही नहीं दिया है। केजरीवाल ने कहा हम सरकार बनाने को तैयार हैं, लेकिन जनता की राय जानने के बाद ही हम फैसला करेंगे। विधायक दल की बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि हमने फैसला किया है आज से लेकर रविवार तक जनता की राय मांगेंगे, 25 लाख चिटि्ठयां लिखकर लोगों से राय जानने के बाद हम सोमवार को फैसला करेंगे । केजरीवाल ने कहा कि जनता के मद्दों को ध्यान में रखकर ही दिल्ली में सरकार बनाएंगे, हम चाहते हैं 18 मुद्दों पर बीजेपी -कांग्रेस दोनों हमारा साथ दे। उन्होंने कहा कि लोगों की राय जानने के लिए दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर हमारी 200 सभाएं भी होंगी। केजरीवाल ने कहा कि देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी कांग्रेस है, इसने पूरे देश को लूट लिया है, क्या इस पार्टी का समर्थन लेना हमारे लिए सही या गलत, इसके बारे में फैसला जनता की राय के बाद ही लेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की संस्कृति में सरकार गिराना बहुत पहले से ही शामिल है, चन्द्रशेखर और चौधरी चरण सिंह की की सरकार को कांग्रेस ने धोखे से गिराया था। लेकिन इतना निश्चित है अगर हम सरकार बना लेते हैं, तो 6 महीने से पहले तो नहीं गिरेगी। दिल्ली 70 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 32(1 अकाली दल)आप 28 , कांग्रेस 8 , और अन्य के दो सदस्य हैं, सबसे बड़े दल बीजेपी ने सरकार बनाने से मना करने के बाद उपराज्यपाल नदीब जंग ने आप पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण भेजा, उपराज्यपाल से मिलकर केजरीवाल ने 10 दिन का समय मांगा है। वहीं नदीब ने विधानसभा को निलंबित रखने तथा दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की है, जिस पर गृह मंत्रालय विचार विमर्श कर रहा है।
नई दिल्ली। दिल्ली में सरकार को बनाने को लेकर धर्मसंकट में फंसी आम आदमी पार्टी ने इस पर विचार विमर्श के लिये बुलाई विधायक दल की बैठक बेनतीजा रही। पार्टी संयोजक केजरीवाल ने बीजेपी-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों ही पार्टियां विश्वास करने लायक नहीं हैं, उन्होंने कहा कि हमने जिन अट्ठारह मुद्दों को लेकर जो चिट्ठी लिखी, उसका कांग्रेस ने गोलमोल जवाब दिया है, लेकिन बीजेपी ने अभी तक कोई जवाब ही नहीं दिया है। केजरीवाल ने कहा हम सरकार बनाने को तैयार हैं, लेकिन जनता की राय जानने के बाद ही हम फैसला करेंगे। विधायक दल की बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि हमने फैसला किया है आज से लेकर रविवार तक जनता की राय मांगेंगे, पच्चीस लाख चिटि्ठयां लिखकर लोगों से राय जानने के बाद हम सोमवार को फैसला करेंगे । केजरीवाल ने कहा कि जनता के मद्दों को ध्यान में रखकर ही दिल्ली में सरकार बनाएंगे, हम चाहते हैं अट्ठारह मुद्दों पर बीजेपी -कांग्रेस दोनों हमारा साथ दे। उन्होंने कहा कि लोगों की राय जानने के लिए दिल्ली की सत्तर विधानसभा सीटों पर हमारी दो सौ सभाएं भी होंगी। केजरीवाल ने कहा कि देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी कांग्रेस है, इसने पूरे देश को लूट लिया है, क्या इस पार्टी का समर्थन लेना हमारे लिए सही या गलत, इसके बारे में फैसला जनता की राय के बाद ही लेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की संस्कृति में सरकार गिराना बहुत पहले से ही शामिल है, चन्द्रशेखर और चौधरी चरण सिंह की की सरकार को कांग्रेस ने धोखे से गिराया था। लेकिन इतना निश्चित है अगर हम सरकार बना लेते हैं, तो छः महीने से पहले तो नहीं गिरेगी। दिल्ली सत्तर विधानसभा सीटों में से बीजेपी बत्तीसआप अट्ठाईस , कांग्रेस आठ , और अन्य के दो सदस्य हैं, सबसे बड़े दल बीजेपी ने सरकार बनाने से मना करने के बाद उपराज्यपाल नदीब जंग ने आप पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण भेजा, उपराज्यपाल से मिलकर केजरीवाल ने दस दिन का समय मांगा है। वहीं नदीब ने विधानसभा को निलंबित रखने तथा दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की है, जिस पर गृह मंत्रालय विचार विमर्श कर रहा है।
अगर विदेश यात्रा के दौरान आपका पासपोर्ट या अन्य जरूरी ट्रैवल डॉक्युमेंट्स गुम जाएं तो, सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत जल्द से जल्द जाकर दर्ज कराएं। इसके बाद उस देश में स्थित अपने भारतीय दूतावास से मदद के लिए संपर्क करें। हाालांकि ऐसी स्थिति में दूतावास जाकर आपको भारत लौटने के लिए ट्रैवल सर्टिफिकेट मिल जाता है और कुछेक परिस्थितियों में तो दूतावास यात्री के टिकट का इंतजाम भी कर देती है। मगर ऐसी परेशानी न पेश आए इसके लिए जहां भी जाएंस, हमेशा अपना पासपोर्ट और डॉक्युमेंट्स को इस तरह ध्यान से रखें जैसे वह आपके शरीर का अभिन्न हिस्सा हो। इन्हें एक तरह से आप अपनी 'सेकंड स्किन' ही मानें, जो कि बेवजह की परेशानियों से आपको बचाने के साथ ही आपके ट्रिप का मजा भी किरकिरा नहीं होने देगी। हमेशा ट्रैवल इंश्योरेंस कराना फायदेमंद रहता है। ऐसे में आप मेडिकल इमर्जेंसी आने पर मंहगे मेडिकल खर्च से बच जाते हैं। और अगर कहीं आप किसी अडवेंचर ट्रिप पर जा रहे हैं तो, फिर यह इंश्योरेंस कराना आपके लिए और भी जरूरी हो जाता है। इसके लिए यात्रियों को इंश्योरेंस कार्ड मिलने पर उसकी कवरेज को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। इसके अलावा आपका क्रेडिट कार्ड, शॉपिंग एक्स्पीरियंस को काफी सुकून भरा बना देते हैं। हालांकि विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और सरचार्ज के कारण यह थोड़ा मंहगा पड़ता है, मगर विदेशी करंसी खत्म होने जाने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हमेशा विदेश जाने से पहले अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के पास अपने पूरे ट्रिप प्रोग्राम, जहां ठहरेंगे उस होटेल की डिटेल्स, पासपोर्ट व डॉक्युमेंट्स की कॉपी, एयर टिकट से जुड़ी जानकारी देकर जाएं। इसके साथ ही सभी जरूरी दस्तोवेज की फोटोकॉपी अपने पास रखना भी न भूलें। ताकि जरूरत पड़ने पर अगर कहीं इंटरनेट की सुविधा न होने से मेल से कोई दस्तावेज की कॉपी निकालना संभव न हो तो, आपके पास उसकी एक कॉपी पहले से रहे। पैसे, पासपोर्ट और जरूरत भर के कपड़े हमेशा अपने एक हैंडबैग में साथ लेकर चलें। ताकि लगेज गुम हो जाने की स्थिति में आपको जब तक सामान न मिले तो, गंदे कपड़ों में भूखे-प्यासे वक्त न गुजारना पड़ जाए। इसके अलावा हमेशा आते-जाते समय सुरक्षा चैकिंग के लिए समय से पहले पहुंचे ताकि आप अपनी फ्लाइट आदि के लिए लेट न हों। इसके अलावा अगर कोई जरूरी दवा रोजाना लेते हैं तो उसे भी अपने उस हैंडबैग में रखना न भूलें।
अगर विदेश यात्रा के दौरान आपका पासपोर्ट या अन्य जरूरी ट्रैवल डॉक्युमेंट्स गुम जाएं तो, सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत जल्द से जल्द जाकर दर्ज कराएं। इसके बाद उस देश में स्थित अपने भारतीय दूतावास से मदद के लिए संपर्क करें। हाालांकि ऐसी स्थिति में दूतावास जाकर आपको भारत लौटने के लिए ट्रैवल सर्टिफिकेट मिल जाता है और कुछेक परिस्थितियों में तो दूतावास यात्री के टिकट का इंतजाम भी कर देती है। मगर ऐसी परेशानी न पेश आए इसके लिए जहां भी जाएंस, हमेशा अपना पासपोर्ट और डॉक्युमेंट्स को इस तरह ध्यान से रखें जैसे वह आपके शरीर का अभिन्न हिस्सा हो। इन्हें एक तरह से आप अपनी 'सेकंड स्किन' ही मानें, जो कि बेवजह की परेशानियों से आपको बचाने के साथ ही आपके ट्रिप का मजा भी किरकिरा नहीं होने देगी। हमेशा ट्रैवल इंश्योरेंस कराना फायदेमंद रहता है। ऐसे में आप मेडिकल इमर्जेंसी आने पर मंहगे मेडिकल खर्च से बच जाते हैं। और अगर कहीं आप किसी अडवेंचर ट्रिप पर जा रहे हैं तो, फिर यह इंश्योरेंस कराना आपके लिए और भी जरूरी हो जाता है। इसके लिए यात्रियों को इंश्योरेंस कार्ड मिलने पर उसकी कवरेज को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। इसके अलावा आपका क्रेडिट कार्ड, शॉपिंग एक्स्पीरियंस को काफी सुकून भरा बना देते हैं। हालांकि विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और सरचार्ज के कारण यह थोड़ा मंहगा पड़ता है, मगर विदेशी करंसी खत्म होने जाने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हमेशा विदेश जाने से पहले अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के पास अपने पूरे ट्रिप प्रोग्राम, जहां ठहरेंगे उस होटेल की डिटेल्स, पासपोर्ट व डॉक्युमेंट्स की कॉपी, एयर टिकट से जुड़ी जानकारी देकर जाएं। इसके साथ ही सभी जरूरी दस्तोवेज की फोटोकॉपी अपने पास रखना भी न भूलें। ताकि जरूरत पड़ने पर अगर कहीं इंटरनेट की सुविधा न होने से मेल से कोई दस्तावेज की कॉपी निकालना संभव न हो तो, आपके पास उसकी एक कॉपी पहले से रहे। पैसे, पासपोर्ट और जरूरत भर के कपड़े हमेशा अपने एक हैंडबैग में साथ लेकर चलें। ताकि लगेज गुम हो जाने की स्थिति में आपको जब तक सामान न मिले तो, गंदे कपड़ों में भूखे-प्यासे वक्त न गुजारना पड़ जाए। इसके अलावा हमेशा आते-जाते समय सुरक्षा चैकिंग के लिए समय से पहले पहुंचे ताकि आप अपनी फ्लाइट आदि के लिए लेट न हों। इसके अलावा अगर कोई जरूरी दवा रोजाना लेते हैं तो उसे भी अपने उस हैंडबैग में रखना न भूलें।
संविधान ने विधायिका एवं उसके सदस्यों को अपनी गरिमा की रक्षा हेतु कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये हैं। इन्ही विशेषाधिकारों के प्रावधानों के तहत हाल ही में कर्नाटक विधानसभा ने दो पत्रकारों को विशेषाधिकारों के उल्लंघन के लिये दोषी ठहराते हुए उन्हें सज़ा सुनाई है। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसा हो चुका है। उदाहरण के लिये वर्ष 2003 में तमिलनाडु विधानसभा ने 'द हिंदू' समाचार पत्र के प्रकाशक, संपादक, कार्यकारी संपादक को अवमानना के आरोप में 15 दिनों के कारावास की सज़ा सुनाई थी। अतः यह मामला एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर विधायी विशेषाधिकार क्या होने चाहिये? - विशेषाधिकार का प्रयोग सबसे पहले इंग्लैंड में किया गया था, जहाँ संसद ने खुद को राजा के अतिक्रमण से बचाने के लिये इन अधिकारों का प्रयोग किया था। इंग्लैंड संसद ने संसद में स्वतंत्र रूप से बोलने और वोट करने के लिये संसद सदस्यों की स्वतंत्रता सहित कई अधिकारों और विशेषाधिकारों का प्रावधान किया था। - इस संदर्भ में यह ध्यान देने योग्य है कि ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1987 में 'संसदीय विशेषाधिकार अधिनियम' पारित किया था। यह अधिनियम कहता है कि "शब्दों या कृत्यों को सदन के खिलाफ अपराध के रूप में इसलिये नहीं लिया जाना चाहिये कि इन शब्दों या कृत्यों के द्वारा संसद, एक सदन, एक समिति या एक सदस्य की आलोचना की गई है। अधिनियम के तहत अधिकतम एक वर्ष के कारावास की सज़ा और 5,000 डॉलर के जुर्माने का उपबंध भी किया गया है। - वर्ष 1999 में ब्रिटिश संसद की एक संयुक्त समिति ने विशेषाधिकार के संहिताकरण की सिफारिश की थी, लेकिन इस सिफारिश को 2013 में गठित एक अन्य समिति ने उलट दिया था। - भारतीय संविधान में अनुच्छेद-105 संसद के तथा अनुच्छेद-194 राज्य विधानमंडलों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को निर्दिष्ट करता है। - संविधान के अन्य प्रावधानों और सदन के स्थायी आदेशों के अधीन संसद में भाषण की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। - संसद में भाषण और मतों की न्यायिक जाँच से छूट प्रदान की गई है। - संसद (और राज्य विधानसभाओं) को विशेषाधिकारों को संहिताकृत करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन तब तक वैसे ही विशेषाधिकार प्राप्त होंगे, जैसे 1950 में ब्रिटिश संसद को प्राप्त थे। - अभी तक न ही संसद और न ही राज्य विधानमंडलों ने अपने विशेषाधिकारों के संहिताकरण हेतु कोई भी कानून पारित किया है। - क्या विशेषाधिकार का उपयोग व्यक्तिगत सदस्य की कार्यवाईयों पर टिप्पणी करने वालों पर करना चाहिये? - विधायिका के सदस्यों और सदन की रक्षा करने वाले विशेषाधिकार क्या होने चाहिए? - अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और विशेषाधिकारों के बीच कैसे संतुलन बैठाया जाए? - एक और मुद्दा यह है कि क्या सदन को किसी व्यक्ति को जेल की सज़ा देने की शक्ति होनी चाहिये। ध्यातव्य है कि ब्रिटिश संसद के पास ऐसी शक्तियाँ हैं, लेकिन उसने वर्ष 1880 के बाद से इसका प्रयोग नहीं किया है। - एक और मूलभूत सवाल यह है कि विशेषाधिकार क्या हैं? एक संहिता की अनुपस्थिति में यह कैसे निर्धारित होगा कि कोई कार्रवाई विशेषाधिकार का उल्लंघन है या नहीं? यही कारण है कि विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध किया जाना चाहिये। - यह स्पष्ट है कि हमारे संविधान निर्माताओं ने विशेषाधिकारों के संहिताकरण का उल्लेख किया था। - संविधान सभा में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि संसद ही शक्तियों और विशेषाधिकारों को परिभाषित करेगी, लेकिन जब तक संसद इस कानून को पारित नहीं कर देती, तब तक 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के ही विशेषाधिकार और शक्तियां लागू रहेंगी। अतः यह एक अस्थायी प्रावधान था। - संसद ने संहिताकरण से संबंधित मुद्दे की जाँच की है। वर्ष 2008 में लोक सभा के विशेषाधिकारों की समिति ने महसूस किया कि संहिताकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। - यह ध्यान देने योग्य है कि सदन ने पहली लोक सभा के बाद ऐसे मामलों में अब तक केवल पाँच बार ही सज़ा की सिफारिश की है। - लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिये यह आवश्यक है कि विधायिका के सदस्यों को बिना किसी अवरोध के अपने विधायी कर्त्तव्यों का पालन करने में सक्षम होना चाहिये तथा कानूनी कार्यवाही के डर के बिना बोलने और मतदान करने की स्वतंत्र होनी चाहिये। अतः विशेषाधिकार का केवल तब उपयोग किया जाना चहिये, जब इसके कारण विधायिका के कार्यो में वास्तविक रुकावट उत्पन्न हो जाए, न कि आम टिप्पणी और आलोचना के खिलाफ। इन मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संसद और विधानमंडलों के लिये यह आवश्यक है कि विशेषाधिकार के संहिताकरण के लिये कानून बनाए। समय की यह मांग है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों और विधायिका के विशेषाधिकारों के बीच सही संतुलन बिठाया जाए। अतः इस दिशा में हमारे नीति-निर्माताओं को विश्व के अन्य देशों में विद्यमान व्यवस्था का सहारा लेते हुए उचित एवं व्यावहरिक कदम उठाने चाहिये।
संविधान ने विधायिका एवं उसके सदस्यों को अपनी गरिमा की रक्षा हेतु कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये हैं। इन्ही विशेषाधिकारों के प्रावधानों के तहत हाल ही में कर्नाटक विधानसभा ने दो पत्रकारों को विशेषाधिकारों के उल्लंघन के लिये दोषी ठहराते हुए उन्हें सज़ा सुनाई है। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसा हो चुका है। उदाहरण के लिये वर्ष दो हज़ार तीन में तमिलनाडु विधानसभा ने 'द हिंदू' समाचार पत्र के प्रकाशक, संपादक, कार्यकारी संपादक को अवमानना के आरोप में पंद्रह दिनों के कारावास की सज़ा सुनाई थी। अतः यह मामला एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर विधायी विशेषाधिकार क्या होने चाहिये? - विशेषाधिकार का प्रयोग सबसे पहले इंग्लैंड में किया गया था, जहाँ संसद ने खुद को राजा के अतिक्रमण से बचाने के लिये इन अधिकारों का प्रयोग किया था। इंग्लैंड संसद ने संसद में स्वतंत्र रूप से बोलने और वोट करने के लिये संसद सदस्यों की स्वतंत्रता सहित कई अधिकारों और विशेषाधिकारों का प्रावधान किया था। - इस संदर्भ में यह ध्यान देने योग्य है कि ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में 'संसदीय विशेषाधिकार अधिनियम' पारित किया था। यह अधिनियम कहता है कि "शब्दों या कृत्यों को सदन के खिलाफ अपराध के रूप में इसलिये नहीं लिया जाना चाहिये कि इन शब्दों या कृत्यों के द्वारा संसद, एक सदन, एक समिति या एक सदस्य की आलोचना की गई है। अधिनियम के तहत अधिकतम एक वर्ष के कारावास की सज़ा और पाँच,शून्य डॉलर के जुर्माने का उपबंध भी किया गया है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में ब्रिटिश संसद की एक संयुक्त समिति ने विशेषाधिकार के संहिताकरण की सिफारिश की थी, लेकिन इस सिफारिश को दो हज़ार तेरह में गठित एक अन्य समिति ने उलट दिया था। - भारतीय संविधान में अनुच्छेद-एक सौ पाँच संसद के तथा अनुच्छेद-एक सौ चौरानवे राज्य विधानमंडलों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को निर्दिष्ट करता है। - संविधान के अन्य प्रावधानों और सदन के स्थायी आदेशों के अधीन संसद में भाषण की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। - संसद में भाषण और मतों की न्यायिक जाँच से छूट प्रदान की गई है। - संसद को विशेषाधिकारों को संहिताकृत करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन तब तक वैसे ही विशेषाधिकार प्राप्त होंगे, जैसे एक हज़ार नौ सौ पचास में ब्रिटिश संसद को प्राप्त थे। - अभी तक न ही संसद और न ही राज्य विधानमंडलों ने अपने विशेषाधिकारों के संहिताकरण हेतु कोई भी कानून पारित किया है। - क्या विशेषाधिकार का उपयोग व्यक्तिगत सदस्य की कार्यवाईयों पर टिप्पणी करने वालों पर करना चाहिये? - विधायिका के सदस्यों और सदन की रक्षा करने वाले विशेषाधिकार क्या होने चाहिए? - अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और विशेषाधिकारों के बीच कैसे संतुलन बैठाया जाए? - एक और मुद्दा यह है कि क्या सदन को किसी व्यक्ति को जेल की सज़ा देने की शक्ति होनी चाहिये। ध्यातव्य है कि ब्रिटिश संसद के पास ऐसी शक्तियाँ हैं, लेकिन उसने वर्ष एक हज़ार आठ सौ अस्सी के बाद से इसका प्रयोग नहीं किया है। - एक और मूलभूत सवाल यह है कि विशेषाधिकार क्या हैं? एक संहिता की अनुपस्थिति में यह कैसे निर्धारित होगा कि कोई कार्रवाई विशेषाधिकार का उल्लंघन है या नहीं? यही कारण है कि विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध किया जाना चाहिये। - यह स्पष्ट है कि हमारे संविधान निर्माताओं ने विशेषाधिकारों के संहिताकरण का उल्लेख किया था। - संविधान सभा में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि संसद ही शक्तियों और विशेषाधिकारों को परिभाषित करेगी, लेकिन जब तक संसद इस कानून को पारित नहीं कर देती, तब तक 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के ही विशेषाधिकार और शक्तियां लागू रहेंगी। अतः यह एक अस्थायी प्रावधान था। - संसद ने संहिताकरण से संबंधित मुद्दे की जाँच की है। वर्ष दो हज़ार आठ में लोक सभा के विशेषाधिकारों की समिति ने महसूस किया कि संहिताकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। - यह ध्यान देने योग्य है कि सदन ने पहली लोक सभा के बाद ऐसे मामलों में अब तक केवल पाँच बार ही सज़ा की सिफारिश की है। - लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिये यह आवश्यक है कि विधायिका के सदस्यों को बिना किसी अवरोध के अपने विधायी कर्त्तव्यों का पालन करने में सक्षम होना चाहिये तथा कानूनी कार्यवाही के डर के बिना बोलने और मतदान करने की स्वतंत्र होनी चाहिये। अतः विशेषाधिकार का केवल तब उपयोग किया जाना चहिये, जब इसके कारण विधायिका के कार्यो में वास्तविक रुकावट उत्पन्न हो जाए, न कि आम टिप्पणी और आलोचना के खिलाफ। इन मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संसद और विधानमंडलों के लिये यह आवश्यक है कि विशेषाधिकार के संहिताकरण के लिये कानून बनाए। समय की यह मांग है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों और विधायिका के विशेषाधिकारों के बीच सही संतुलन बिठाया जाए। अतः इस दिशा में हमारे नीति-निर्माताओं को विश्व के अन्य देशों में विद्यमान व्यवस्था का सहारा लेते हुए उचित एवं व्यावहरिक कदम उठाने चाहिये।
अन्तस्तनौ बुद्धिपुर्यष्टके तत्तन्मायीयवृत्तिनिरोधात् निद्रायाः, बहिस्तनावहन्तावष्टम्भभङ्गात् घूर्णिरिति । एवं हि साक्षादस्य दीक्षा वृत्तेति गुरोराश्वासो भवेत् - इति एवमस्य स्तोभितपाशतया शिवे एव योजनिका जातेति तदैव देहपातः प्रसजेत् ? - इत्याशङ्क्य आहएवं स्तोभितपाशस्य योजितस्यात्मनः शिवे । शेषभोगाय कुर्वीत सृष्टिं संशुद्धतत्त्वगाम् ॥ २०९ ॥ शेषस्य - एतद्देहारम्भकस्य कर्मणः । सृष्टिमिति - अर्थादेतद्देहगतामेव ।। २०९ ॥ एवमपि यदि यदि एतच्चिह्नानुदयात् मन्दशक्तिपातवतः कस्यचित् न अयमेवमावेशो जायते, तदा एवमस्य संस्कारान्तरं कुर्यात्- इत्याहअथवा कस्यचिन्नैवमावेशस्तद्दहेदिमम् । बहिरन्तश्चोक्तशक्तया पतेदित्थं स भूतले ॥ २१० ॥ यस्य त्वेवमपि स्यान्न तमत्रोपलवत्त्यजेत् । युगपदेव ऊर्ध्वाधो वमदग्निपुञ्जस्य ऊर्ध्वमुखस्य त्रिकोणस्य अन्तरुपवेशितं कम्प का, अन्तः शरीर = बुद्धिपुर्यष्टक में तत्तन्मायीय वृत्ति के निरोध से निद्रा का, बाह्यशरीर में अहन्ताभाव के नष्ट होने से घूर्णि का औचित्य है। इस प्रकार इसकी साक्षात् दीक्षा हो गयी - ऐसा गुरु को विश्वास हो जाता है ॥ २०८ ।। पाश के नष्ट हो जाने से शिव में ही योजनिका (दीक्षा) हो गयी इसलिये उसी समय शरीरान्त होने लगेगा? - यह शङ्का कर कहते हैंइस प्रकार नष्टपाश वाले आत्मा, जो कि शिव में योजित है, के शेष भोग के लिये (गुरु) शुद्धतत्त्वगामी सृष्टि करे ॥ २०९ ॥ शेष का = इस शरीर के आरम्भक कर्म के (शेष का) । सृष्टि अर्थात् इस शरीर में ही ॥ २०९ ॥ यदि इन चिह्नों के न प्रकट होने से मन्द शक्तिपात वाले किसी (शिष्य) को यह आवेश न उत्पन्न हो तो इस (शिष्य) का इस प्रकार दूसरा संस्कार करना चाहिये - यह कहते हैंअथवा यदि किसी को ऐसा आवेश न हो तो उक्त रुद्रशक्ति के द्वारा इस (शरीर) को बाहर और अन्दर जलाये । इस प्रकार वह (शिष्य) पृथ्वी पर गिर पड़ता है। और जिसको ऐसा न हो उसे पत्थर के समान छोड़ देना चाहिये ॥ २१०-२११ ॥
अन्तस्तनौ बुद्धिपुर्यष्टके तत्तन्मायीयवृत्तिनिरोधात् निद्रायाः, बहिस्तनावहन्तावष्टम्भभङ्गात् घूर्णिरिति । एवं हि साक्षादस्य दीक्षा वृत्तेति गुरोराश्वासो भवेत् - इति एवमस्य स्तोभितपाशतया शिवे एव योजनिका जातेति तदैव देहपातः प्रसजेत् ? - इत्याशङ्क्य आहएवं स्तोभितपाशस्य योजितस्यात्मनः शिवे । शेषभोगाय कुर्वीत सृष्टिं संशुद्धतत्त्वगाम् ॥ दो सौ नौ ॥ शेषस्य - एतद्देहारम्भकस्य कर्मणः । सृष्टिमिति - अर्थादेतद्देहगतामेव ।। दो सौ नौ ॥ एवमपि यदि यदि एतच्चिह्नानुदयात् मन्दशक्तिपातवतः कस्यचित् न अयमेवमावेशो जायते, तदा एवमस्य संस्कारान्तरं कुर्यात्- इत्याहअथवा कस्यचिन्नैवमावेशस्तद्दहेदिमम् । बहिरन्तश्चोक्तशक्तया पतेदित्थं स भूतले ॥ दो सौ दस ॥ यस्य त्वेवमपि स्यान्न तमत्रोपलवत्त्यजेत् । युगपदेव ऊर्ध्वाधो वमदग्निपुञ्जस्य ऊर्ध्वमुखस्य त्रिकोणस्य अन्तरुपवेशितं कम्प का, अन्तः शरीर = बुद्धिपुर्यष्टक में तत्तन्मायीय वृत्ति के निरोध से निद्रा का, बाह्यशरीर में अहन्ताभाव के नष्ट होने से घूर्णि का औचित्य है। इस प्रकार इसकी साक्षात् दीक्षा हो गयी - ऐसा गुरु को विश्वास हो जाता है ॥ दो सौ आठ ।। पाश के नष्ट हो जाने से शिव में ही योजनिका हो गयी इसलिये उसी समय शरीरान्त होने लगेगा? - यह शङ्का कर कहते हैंइस प्रकार नष्टपाश वाले आत्मा, जो कि शिव में योजित है, के शेष भोग के लिये शुद्धतत्त्वगामी सृष्टि करे ॥ दो सौ नौ ॥ शेष का = इस शरीर के आरम्भक कर्म के । सृष्टि अर्थात् इस शरीर में ही ॥ दो सौ नौ ॥ यदि इन चिह्नों के न प्रकट होने से मन्द शक्तिपात वाले किसी को यह आवेश न उत्पन्न हो तो इस का इस प्रकार दूसरा संस्कार करना चाहिये - यह कहते हैंअथवा यदि किसी को ऐसा आवेश न हो तो उक्त रुद्रशक्ति के द्वारा इस को बाहर और अन्दर जलाये । इस प्रकार वह पृथ्वी पर गिर पड़ता है। और जिसको ऐसा न हो उसे पत्थर के समान छोड़ देना चाहिये ॥ दो सौ दस-दो सौ ग्यारह ॥
राणा - दोनो के सिफारिश की, इसलिए राजपूत अधिकारी ने उसको छोड़ दिया । इसके बाद उस बचे हुए छठे अपराधी को जीवन दान दिये जाने के बदले मे धन्यवाद देने के लिए मेरे पास लाया गया । उसने मेरे सामने इस प्रकार के कभी अपराध न करने की प्रतिज्ञा की । उस युवक अपराधी की अवस्था केवल उन्नीस वर्ष की थी, मझोला कद और शरीर का दुवला-पतला था । परन्तु उसका शरीर गठीला, चेहरा खुश नुमा, चमकदार, खूबसूरत आँखे और वाल घने काले थे । उसको मुखाकृति से प्रकट होता था से कि वह अब भी डरा हुआ है। उसके यौवन की सरलता को दूखकर सहज ही आभास होता था कि उसको अपराधी का ज्ञान नहीं है। मैं इन घटनाओं के सम्बन्ध मे बहुत समय तक सोच विचार करता रहा, इन्ही दिनो मे मुझे यह भी बताया गया कि फोजी टुकडी के लोग और किसी मतलब से नहीं, बल्कि भीलिनियो की खोज मे घूमा करते थे। हत्या के अपराध में मृत्यु दराड अच्छा नही मालूम होता बल्कि ऐसे अपराधो मे जुर्मानों की सजा काफी होती है और घन की चोट कम प्रभावशाली नहीं होती । भीलो के विस्तृत परिवार मे अथवा उनके वश मे सैरिया जाति के लोग भी माने जाते हैं । ये लोग मालवा और हाडौती को एक दूसरे से पृथक करने वाले पहाडो और उनकी ऊंची-नीची जगहो मे बसे हुए है। उनकी कुछ शाखाएं मालवा के किनारे से लेकर चन्देरी और नरवर के साथ-साथ गोहद तक पायी जाती है । कुछ शाखाये बुन्देलखण्ड की पहाडियो मे जाकर मिल गयी है । उनमे पहले कभी सरजा जाति के लोग रहा करते थे । वे लोग अब वहाँ पर नही मिलते । वे लोग मध्य भारत के सैरिया लोग थे । राजपूतो की छत्तोस जातियो मे एक जाति सरीअस्प भी है, सैरिया उसी का सक्षिप्त अथवा छोटा नाम है । पुराने मिले हुए शिला लेखो से पता चलता है कि सैरिया हिन्दुस्तान की पुरानी जातियो मे से एक है। उसके वश परिचय के सम्बन्ध मे अधिक खोज करने की आवश्यकता नही है । अस्प और लव एक ही जाति है । भेद केवल थोडा-सा उच्चारण का है । यह जाति निश्चित रूप से इण्डोसोथिक जाति से सम्बन्ध रखती है । फारसी मे अस्प शब्द का अर्थ घोडा होता है और संस्कृत मे भी अश्व का अर्थ घोडा होता है। यह नाम इस बात का बहुत बड़ा प्रमाण है कि यह जाति मौलिक रप से इण्डो- सीथिक मध्य एशिया की प्राचीन जातियों में चौपायो के नामो के आधार पर नाम रखने की प्रथा थी, इस पर मैं अन्यत्र प्रकाश डाल चुका हूँ । अस्न और अश्व के सिवा ट्रान्सोजाइना (१) के गेटी और जीतो को प्रसिद्ध शाखा नौमरिस अथवा लोमडो एवम् (१) आमू और सर नदियों के बीच का भाग । मुल्तान तथा उत्तरी सिन्धु के बराह अथवा शूकर भो यही अर्थ रखते है । इस प्रकार पशुओं और वनस्पतियों के आधार पर जो नाम रखे जाते थे, उनके विभिन्न प्रकार के अर्थ लगाकर वशो और परिवारों की विभिन्नता मानने की एक प्रथा सर्वत्र पायी जाती जातियो और मनुष्यो के नाम कुछ आधार लेकर रखे जाते है । यह अवस्था संसार की प्रायः सभी जातियों में प्राचीन काल से लेकर अब तक पायी जाती है । इस प्रकार का आधार पूर्वजों के नामो और पदो के आधार पर भो होता है और देवताओं अथवा महापुरुषो के नाम पर भी नाम रखे जाते हैं । इस प्रकार की प्रथाये सभी देशों के समस्त जातियो मे प्राचीन काल से रही है और आज तक उनके अस्तित्व चले जा रहे हैं । कुछ जातियों के नामो के आधार इतने साधारण होते हैं कि जो एक कुतूहल उत्पन्न करते हैं। जैसे प्लाण्टाजैनेट शौर्य को अर्थ देता है । लेकिन उसकी उत्पत्ति बुहारी से है । (१) इण्डस और आक्सस की उत्पत्ति अश्व, लोमडी और शूकर से, सीसोदिया राजपूत वश का उत्पत्ति शशक अर्थात् खरगोश से और कुशवाहा राजपूतो की उत्पत्ति का आधार कुश नामक घास है। इसी प्रकार सभी जातियो, वशो और परिवारों के नामो का आधार कुछ अर्थ रखता है । परन्तु बहुत से नामो के साथ वह उपयुक्त नही मालूम होता । इस सैरिया जाति का निकास और विकास कही से भी हुआ हो, परन्तु उसके जीवन की बहुत सी बाते ठीक उसी प्रकार भी हैं, जैसी कि भील लोगो मे पायी जाती हैं । लेकिन उनमे दुर्गुण नही पाये जाते । सैरिया जाति के लोगो में किसी प्रकार का परहेज नही है । कुत्ता और बिल्ली छोडकर वे लोग सभी कुछ खाते हैं। उनमें खानेपीने की आदते कहाँ से आयी और पश्चिम तथा दक्षिण मे रहने वाले विरादरी के लोगो मे ये बाते पायी जाती हैं या नहीं, यह मैं नहीं जानता । इन लोगो का अधिकांश जीवन शिकार पर निर्भर है । वे शिकार करना खूब जानते भो है । वे लोग नोल गाय और जङ्गली सुअर से लेकर खरगोश तक का शिकार ( १ ) एञ्ज के काउण्ट ( ज्योफी) ने बीरता का परिचायक प्लान्ट जेनिम्लैक ( बुह री की तरह का तुर्रा ) सबसे पहले अपने शिरस्त्राण में रखना आरम्भ किया था । वह जेरूसलम के राजा फुल्क का बेटा था । ज्योफी अत्यन्त सुन्दर था। इसलिये इङ्गलैण्ड के बादशाह हेनरी प्रथम ने अपनी विधवा लडकी एम्प्रेस माड का विवाह उसके साथ कर दिया था । उन दोनों से जो लडका उत्पन्न हुआ, वह हेनरी द्वितीय के नाम से प्रसिद्ध हुआ । वह ११५४ ईसवी में गद्दी पर बैठा और प्लाटा जेनेट वंश का गजा कहलाया । तीन सौ वर्षों तक यह पद इङ्गलैण्ड के बादशाहो की उपाधि वनकर रहा ।
राणा - दोनो के सिफारिश की, इसलिए राजपूत अधिकारी ने उसको छोड़ दिया । इसके बाद उस बचे हुए छठे अपराधी को जीवन दान दिये जाने के बदले मे धन्यवाद देने के लिए मेरे पास लाया गया । उसने मेरे सामने इस प्रकार के कभी अपराध न करने की प्रतिज्ञा की । उस युवक अपराधी की अवस्था केवल उन्नीस वर्ष की थी, मझोला कद और शरीर का दुवला-पतला था । परन्तु उसका शरीर गठीला, चेहरा खुश नुमा, चमकदार, खूबसूरत आँखे और वाल घने काले थे । उसको मुखाकृति से प्रकट होता था से कि वह अब भी डरा हुआ है। उसके यौवन की सरलता को दूखकर सहज ही आभास होता था कि उसको अपराधी का ज्ञान नहीं है। मैं इन घटनाओं के सम्बन्ध मे बहुत समय तक सोच विचार करता रहा, इन्ही दिनो मे मुझे यह भी बताया गया कि फोजी टुकडी के लोग और किसी मतलब से नहीं, बल्कि भीलिनियो की खोज मे घूमा करते थे। हत्या के अपराध में मृत्यु दराड अच्छा नही मालूम होता बल्कि ऐसे अपराधो मे जुर्मानों की सजा काफी होती है और घन की चोट कम प्रभावशाली नहीं होती । भीलो के विस्तृत परिवार मे अथवा उनके वश मे सैरिया जाति के लोग भी माने जाते हैं । ये लोग मालवा और हाडौती को एक दूसरे से पृथक करने वाले पहाडो और उनकी ऊंची-नीची जगहो मे बसे हुए है। उनकी कुछ शाखाएं मालवा के किनारे से लेकर चन्देरी और नरवर के साथ-साथ गोहद तक पायी जाती है । कुछ शाखाये बुन्देलखण्ड की पहाडियो मे जाकर मिल गयी है । उनमे पहले कभी सरजा जाति के लोग रहा करते थे । वे लोग अब वहाँ पर नही मिलते । वे लोग मध्य भारत के सैरिया लोग थे । राजपूतो की छत्तोस जातियो मे एक जाति सरीअस्प भी है, सैरिया उसी का सक्षिप्त अथवा छोटा नाम है । पुराने मिले हुए शिला लेखो से पता चलता है कि सैरिया हिन्दुस्तान की पुरानी जातियो मे से एक है। उसके वश परिचय के सम्बन्ध मे अधिक खोज करने की आवश्यकता नही है । अस्प और लव एक ही जाति है । भेद केवल थोडा-सा उच्चारण का है । यह जाति निश्चित रूप से इण्डोसोथिक जाति से सम्बन्ध रखती है । फारसी मे अस्प शब्द का अर्थ घोडा होता है और संस्कृत मे भी अश्व का अर्थ घोडा होता है। यह नाम इस बात का बहुत बड़ा प्रमाण है कि यह जाति मौलिक रप से इण्डो- सीथिक मध्य एशिया की प्राचीन जातियों में चौपायो के नामो के आधार पर नाम रखने की प्रथा थी, इस पर मैं अन्यत्र प्रकाश डाल चुका हूँ । अस्न और अश्व के सिवा ट्रान्सोजाइना के गेटी और जीतो को प्रसिद्ध शाखा नौमरिस अथवा लोमडो एवम् आमू और सर नदियों के बीच का भाग । मुल्तान तथा उत्तरी सिन्धु के बराह अथवा शूकर भो यही अर्थ रखते है । इस प्रकार पशुओं और वनस्पतियों के आधार पर जो नाम रखे जाते थे, उनके विभिन्न प्रकार के अर्थ लगाकर वशो और परिवारों की विभिन्नता मानने की एक प्रथा सर्वत्र पायी जाती जातियो और मनुष्यो के नाम कुछ आधार लेकर रखे जाते है । यह अवस्था संसार की प्रायः सभी जातियों में प्राचीन काल से लेकर अब तक पायी जाती है । इस प्रकार का आधार पूर्वजों के नामो और पदो के आधार पर भो होता है और देवताओं अथवा महापुरुषो के नाम पर भी नाम रखे जाते हैं । इस प्रकार की प्रथाये सभी देशों के समस्त जातियो मे प्राचीन काल से रही है और आज तक उनके अस्तित्व चले जा रहे हैं । कुछ जातियों के नामो के आधार इतने साधारण होते हैं कि जो एक कुतूहल उत्पन्न करते हैं। जैसे प्लाण्टाजैनेट शौर्य को अर्थ देता है । लेकिन उसकी उत्पत्ति बुहारी से है । इण्डस और आक्सस की उत्पत्ति अश्व, लोमडी और शूकर से, सीसोदिया राजपूत वश का उत्पत्ति शशक अर्थात् खरगोश से और कुशवाहा राजपूतो की उत्पत्ति का आधार कुश नामक घास है। इसी प्रकार सभी जातियो, वशो और परिवारों के नामो का आधार कुछ अर्थ रखता है । परन्तु बहुत से नामो के साथ वह उपयुक्त नही मालूम होता । इस सैरिया जाति का निकास और विकास कही से भी हुआ हो, परन्तु उसके जीवन की बहुत सी बाते ठीक उसी प्रकार भी हैं, जैसी कि भील लोगो मे पायी जाती हैं । लेकिन उनमे दुर्गुण नही पाये जाते । सैरिया जाति के लोगो में किसी प्रकार का परहेज नही है । कुत्ता और बिल्ली छोडकर वे लोग सभी कुछ खाते हैं। उनमें खानेपीने की आदते कहाँ से आयी और पश्चिम तथा दक्षिण मे रहने वाले विरादरी के लोगो मे ये बाते पायी जाती हैं या नहीं, यह मैं नहीं जानता । इन लोगो का अधिकांश जीवन शिकार पर निर्भर है । वे शिकार करना खूब जानते भो है । वे लोग नोल गाय और जङ्गली सुअर से लेकर खरगोश तक का शिकार एञ्ज के काउण्ट ने बीरता का परिचायक प्लान्ट जेनिम्लैक सबसे पहले अपने शिरस्त्राण में रखना आरम्भ किया था । वह जेरूसलम के राजा फुल्क का बेटा था । ज्योफी अत्यन्त सुन्दर था। इसलिये इङ्गलैण्ड के बादशाह हेनरी प्रथम ने अपनी विधवा लडकी एम्प्रेस माड का विवाह उसके साथ कर दिया था । उन दोनों से जो लडका उत्पन्न हुआ, वह हेनरी द्वितीय के नाम से प्रसिद्ध हुआ । वह एक हज़ार एक सौ चौवन ईसवी में गद्दी पर बैठा और प्लाटा जेनेट वंश का गजा कहलाया । तीन सौ वर्षों तक यह पद इङ्गलैण्ड के बादशाहो की उपाधि वनकर रहा ।
टेक न्यूज। Google Pixel 7: गूगल ने पिक्सल-7 (Google Pixel 7) सीरीज के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है और इसी के साथ कंपनी ने भारतीय बाजार में भी इस सीरीज को उतार दिया है। मार्केट में आते ही कस्टमर्स ने इसकी प्री-बुकिंग कर ली। हालांकि, गूगल पिक्सल-7 सीरीज के प्रो मॉडल में कुछ वेरिएंट्स की यूनिट अब भी बची है। गूगल पिक्सल-7 सीरीज की की सेल 13 अक्टूबर को शुरू हो रही है। गूगल ने नए स्मार्टफोन सीरीज पिक्सल-7 को भारत में लॉन्च कर दिया है। इस सीरीज में दो स्मार्टफोन Google Pixel 7 और Google Pixel 7 Pro शामिल हैं। गूगल ने दोनों ही स्मार्टफोन में नया प्रोसेसर दिया है। इस सीरीज के दोनों मॉडल ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर उपलब्ध होंगे। कंपनी ने इस पर प्री-ऑर्डर ऑफर भी दिया है। प्री-ऑर्डर ऑफर के तहत ऐसे कस्टमर्स को फिटबिट इंस्पायर-2 (Fitbit Inspire 2) केवल 4 हजार 999 रुपए मिलेगा। इसके अलाव Google Pixel 7 मॉडल की प्री-बुकिंग पर पिक्सल बड्स ए सीरीज (Pixel Buds A Series) 5 हजार 999 रुपए खर्च करने होंगे। गूगल ने स्मार्टफोन के दाम को भी किफायती रखा है। Google Pixel 7 की शुरुआती कीमत डिस्काउंट के बाद 50 हजार रुपए से कम पर खरीद पाएंगे। इसीलिए लोग कस्टमर्स इस फोन को अच्छा रिस्पॉन्स दे रहे हैं। ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर यह फोन प्री-ऑर्डर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह आउट ऑफ स्टॉक हो चुका है। इसके अलावा, गूगल ने अपने नए Google Pixel 7 सीरीज वाले फोन के रंगों को लेकर खुलासा कर दिया है। इसे अमरीका के साथ-साथ भारत में भी उपलब्ध कराया जाएगा। गूगल ने पिक्सल 7 को तीन रंगों के आप्शन में पेश किया है। इसमें ऑब्सिडियन, लेमनग्रॉस और स्नो कलर शामिल हैं। इसके अलावा, पिक्सल 7 प्रो को तीन रंग ऑब्सिडियन, हेजल और स्नो कलर में रखा गया है। इसके फीचर्स को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
टेक न्यूज। Google Pixel सात: गूगल ने पिक्सल-सात सीरीज के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है और इसी के साथ कंपनी ने भारतीय बाजार में भी इस सीरीज को उतार दिया है। मार्केट में आते ही कस्टमर्स ने इसकी प्री-बुकिंग कर ली। हालांकि, गूगल पिक्सल-सात सीरीज के प्रो मॉडल में कुछ वेरिएंट्स की यूनिट अब भी बची है। गूगल पिक्सल-सात सीरीज की की सेल तेरह अक्टूबर को शुरू हो रही है। गूगल ने नए स्मार्टफोन सीरीज पिक्सल-सात को भारत में लॉन्च कर दिया है। इस सीरीज में दो स्मार्टफोन Google Pixel सात और Google Pixel सात Pro शामिल हैं। गूगल ने दोनों ही स्मार्टफोन में नया प्रोसेसर दिया है। इस सीरीज के दोनों मॉडल ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर उपलब्ध होंगे। कंपनी ने इस पर प्री-ऑर्डर ऑफर भी दिया है। प्री-ऑर्डर ऑफर के तहत ऐसे कस्टमर्स को फिटबिट इंस्पायर-दो केवल चार हजार नौ सौ निन्यानवे रुपयापए मिलेगा। इसके अलाव Google Pixel सात मॉडल की प्री-बुकिंग पर पिक्सल बड्स ए सीरीज पाँच हजार नौ सौ निन्यानवे रुपयापए खर्च करने होंगे। गूगल ने स्मार्टफोन के दाम को भी किफायती रखा है। Google Pixel सात की शुरुआती कीमत डिस्काउंट के बाद पचास हजार रुपए से कम पर खरीद पाएंगे। इसीलिए लोग कस्टमर्स इस फोन को अच्छा रिस्पॉन्स दे रहे हैं। ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर यह फोन प्री-ऑर्डर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह आउट ऑफ स्टॉक हो चुका है। इसके अलावा, गूगल ने अपने नए Google Pixel सात सीरीज वाले फोन के रंगों को लेकर खुलासा कर दिया है। इसे अमरीका के साथ-साथ भारत में भी उपलब्ध कराया जाएगा। गूगल ने पिक्सल सात को तीन रंगों के आप्शन में पेश किया है। इसमें ऑब्सिडियन, लेमनग्रॉस और स्नो कलर शामिल हैं। इसके अलावा, पिक्सल सात प्रो को तीन रंग ऑब्सिडियन, हेजल और स्नो कलर में रखा गया है। इसके फीचर्स को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
डायेरक्टर मोहित सूरी की अपकमिंग फिल्म 'मलंग' का टाइटल ट्रैक 'Hui Malang' रिलीज हो चुका है. इस सौन्ग को खूबसूरत अंदाज में गाया है गायिका असीस कौर ने, गाने के बोल कुणाल वर्मा और हर्ष लिंबाचिया ने लिखे हैंऔर वेद शर्मा ने म्यूजिक दिया है. 'Malang' का नया गाना 'हुई मलंग' को Disha Patani पर फिल्माया गया है. यह एक ग्रूवी सौन्ग है ये गाना प्लेलिस्ट में जगह बनाने के लिए तैयार है.जिसमें दिशा ने अपने सेक्सी और हौट अंदाज से सबको अपना दीवाना बना दिया है. इस गाने में वह बहुत खूबसूरत भी लग रही हैं. फिल्म 'मलंग' का ट्रेलर और पहले रिलीज हो चुके गाने लोगों को काफी पसंद आए हैं. फिल्म में आदित्य रौय कपूर, अनिल कपूर, दिशा पाटनी और कुणाल खेमू मुख्य भूमिकाओं में हैं. फिल्म के इस नए गाने में आपको आदित्य रौय कपूर का भरपूर एक्शन और दिशा पाटनी की जबरदस्त केमेस्ट्री और अदाएं देखने को मिलेंगी. वहीं, दिशा के डांस स्टेप आपको दीवाना बना देंगे. इस मूवी में एली अबराम भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. ये फिल्म टी-सीरीज के भूषण कुमार , कृष्ण कुमार, लव फिल्म्स के लव रंजन, अंकुर गर्ग और नौर्दर्न लाइट्स एंटरटेनमेंट के जे शेवक्रमणी द्वारा निर्मित है और 7 फरवरी को रिलीज होने वाली है. आशिकी 2, हाफ गर्लफ्रेंड और हमारी अधूरी कहानी जैसी रोमांटिक फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर मोहित सूरी इस बार थ्रिलर जौनर की फिल्म 'मलंग' के साथ आगाज करने वाले हैं. 'मलंग' में आदित्य की बौडी शेप और उनके एब्स उनके फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ा रहे हैं. उन्होंने अपनी फिजीक कमाल की बनाई है. अपने किरदार के हिसाब से वह पूरी तरह फिट बैठते हैं.आदित्य का यह दूसरा मौका जब वह मोहित सूरी के साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले दोनोने फिल्म 'आशिकी 2' में काम किया था.
डायेरक्टर मोहित सूरी की अपकमिंग फिल्म 'मलंग' का टाइटल ट्रैक 'Hui Malang' रिलीज हो चुका है. इस सौन्ग को खूबसूरत अंदाज में गाया है गायिका असीस कौर ने, गाने के बोल कुणाल वर्मा और हर्ष लिंबाचिया ने लिखे हैंऔर वेद शर्मा ने म्यूजिक दिया है. 'Malang' का नया गाना 'हुई मलंग' को Disha Patani पर फिल्माया गया है. यह एक ग्रूवी सौन्ग है ये गाना प्लेलिस्ट में जगह बनाने के लिए तैयार है.जिसमें दिशा ने अपने सेक्सी और हौट अंदाज से सबको अपना दीवाना बना दिया है. इस गाने में वह बहुत खूबसूरत भी लग रही हैं. फिल्म 'मलंग' का ट्रेलर और पहले रिलीज हो चुके गाने लोगों को काफी पसंद आए हैं. फिल्म में आदित्य रौय कपूर, अनिल कपूर, दिशा पाटनी और कुणाल खेमू मुख्य भूमिकाओं में हैं. फिल्म के इस नए गाने में आपको आदित्य रौय कपूर का भरपूर एक्शन और दिशा पाटनी की जबरदस्त केमेस्ट्री और अदाएं देखने को मिलेंगी. वहीं, दिशा के डांस स्टेप आपको दीवाना बना देंगे. इस मूवी में एली अबराम भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. ये फिल्म टी-सीरीज के भूषण कुमार , कृष्ण कुमार, लव फिल्म्स के लव रंजन, अंकुर गर्ग और नौर्दर्न लाइट्स एंटरटेनमेंट के जे शेवक्रमणी द्वारा निर्मित है और सात फरवरी को रिलीज होने वाली है. आशिकी दो, हाफ गर्लफ्रेंड और हमारी अधूरी कहानी जैसी रोमांटिक फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर मोहित सूरी इस बार थ्रिलर जौनर की फिल्म 'मलंग' के साथ आगाज करने वाले हैं. 'मलंग' में आदित्य की बौडी शेप और उनके एब्स उनके फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ा रहे हैं. उन्होंने अपनी फिजीक कमाल की बनाई है. अपने किरदार के हिसाब से वह पूरी तरह फिट बैठते हैं.आदित्य का यह दूसरा मौका जब वह मोहित सूरी के साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले दोनोने फिल्म 'आशिकी दो' में काम किया था.
भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सोमवार को कहा कि देश में भगवान राम के साथ-साथ 'रोटी' भी चाहिए, जिसका तात्पर्य उद्योग, धन और रोजगार से है क्योंकि दोनो मिलकर ही भारत की सभ्यता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरे देश के लोगों के मन की इच्छा एवं आकांक्षा थी कि उत्तरप्रदेश के अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बने। 'स्वदेशी जागरण मंच' के स्वावलंबी भारत अभियान के अंतर्गत भोपाल सहित 16 जिलों के जिला रोजगार सृजन केंद्रों के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए होसबाले ने यह बात कही। होसबाले ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को उचित परामर्श दिया जाना चाहिए और लोगों को उन युवाओं का समर्थन करना चाहिए जो जीवन में कुछ करना चाहते हैं। (एजेंसी)
भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सोमवार को कहा कि देश में भगवान राम के साथ-साथ 'रोटी' भी चाहिए, जिसका तात्पर्य उद्योग, धन और रोजगार से है क्योंकि दोनो मिलकर ही भारत की सभ्यता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरे देश के लोगों के मन की इच्छा एवं आकांक्षा थी कि उत्तरप्रदेश के अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बने। 'स्वदेशी जागरण मंच' के स्वावलंबी भारत अभियान के अंतर्गत भोपाल सहित सोलह जिलों के जिला रोजगार सृजन केंद्रों के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए होसबाले ने यह बात कही। होसबाले ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को उचित परामर्श दिया जाना चाहिए और लोगों को उन युवाओं का समर्थन करना चाहिए जो जीवन में कुछ करना चाहते हैं।
वीर अर्जुन संवददाता नई दिल्ली । द्वारका नार्थ के एक प्लाट में लड़की की लाश के मामले में उसी के पेमी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिसे अब काफी अफसोस भी हो रहा है। इस हत्यारे पेमी ने लड़की से प्यार करने के लिए उसके घर आदि के काफी चक्कर भी लगाए थे। उसके लिए उसने अपना व्यवहार भी बदल लिया था। जब वह पास होती तो उससे बिछुड़ने की बात सोचकर उदास हो जाता था। वह कुछ समय से उसको लेकर परेशान भी था। क्योंकि लड़की ने कभी भी प्यार का इजहार नहीं किया और ना ही उसका इजहार कबूल ही किया इसी कारण उसे लगने लगा था कि वह किसी और से प्यार करती है और उसे बेवकुफ बना रही है वारदात करने से पहले उसने काफी सोच समझकर योजना बनाई थी आरोपी लालबहादुर को गिरफतार करके मॅतका का मोबाईल को व उसके खुद के दो मोबाईल को व वारदात में इस्तेमाल टैक्सी बरामद की। आरोपी लालबहादुर चूना भटटी कीर्ति नगर का रहने वाला है। उसकी लड़की (मॅतका सोनू) से पिछले ही साल मुलाकात हुई थी । 7 मई को द्वारका सेम्पटसन के बुद्विक सम्पदा भवन के सामने के एक प्लॉट से सोनू की लाश मिली थी,उसका गला घोट रखा था तथा चेहरे को पत्थर से कुचल रखा था । एसीपी समय सिंह की देखरेख में थानाध्यक्ष नरेश कुमार के निर्देशन में इंस्पेक्टर श्याम की टीम ने सोनू की पहचान करने के लिए दिल्ली व एनसीआर में पोस्टर छपवाएं। इसी दौरान मालूम पड़ा कि कोई ग्रीन कलर टैक्सी वारदात वाली रात को देखी गई थी तभी दिल्ली व आस-पास के इलाकों की ग्रीन कलर की टैक्सियों को खंगाली गई। इसी तलाशी अभियान के तहत मेरु टैक्सी सर्विस पर जाकर जब टैक्सी की छानबीन की तो चालक लालबहादुर गायब पाया साथ ही उसमे लगे जीपीएस से मालूम पड़ा कि वारदात वाले दिन उसी एरिया में टैक्सी गई था उसके काफी ठिकानो पर छापेमारी करके लाल बहादुर को गिरफतार किया। पूछताछ पर मालूम पड़ा कि वह सोनू को प्यार करता था तथा शादी करना चाहता था लेकिन उसके आजकल के आव-भाव से लगता था वह किसी और को प्यार करती है। लेकिन उसके साथ जब रहती थी लगता था ऐसा कुछ नही है। वारदात की रात को वह टैक्सी से मोहन गार्डन डिनर के लिए लाया। दोनो ने टैक्सी में शराब पी।
वीर अर्जुन संवददाता नई दिल्ली । द्वारका नार्थ के एक प्लाट में लड़की की लाश के मामले में उसी के पेमी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिसे अब काफी अफसोस भी हो रहा है। इस हत्यारे पेमी ने लड़की से प्यार करने के लिए उसके घर आदि के काफी चक्कर भी लगाए थे। उसके लिए उसने अपना व्यवहार भी बदल लिया था। जब वह पास होती तो उससे बिछुड़ने की बात सोचकर उदास हो जाता था। वह कुछ समय से उसको लेकर परेशान भी था। क्योंकि लड़की ने कभी भी प्यार का इजहार नहीं किया और ना ही उसका इजहार कबूल ही किया इसी कारण उसे लगने लगा था कि वह किसी और से प्यार करती है और उसे बेवकुफ बना रही है वारदात करने से पहले उसने काफी सोच समझकर योजना बनाई थी आरोपी लालबहादुर को गिरफतार करके मॅतका का मोबाईल को व उसके खुद के दो मोबाईल को व वारदात में इस्तेमाल टैक्सी बरामद की। आरोपी लालबहादुर चूना भटटी कीर्ति नगर का रहने वाला है। उसकी लड़की से पिछले ही साल मुलाकात हुई थी । सात मई को द्वारका सेम्पटसन के बुद्विक सम्पदा भवन के सामने के एक प्लॉट से सोनू की लाश मिली थी,उसका गला घोट रखा था तथा चेहरे को पत्थर से कुचल रखा था । एसीपी समय सिंह की देखरेख में थानाध्यक्ष नरेश कुमार के निर्देशन में इंस्पेक्टर श्याम की टीम ने सोनू की पहचान करने के लिए दिल्ली व एनसीआर में पोस्टर छपवाएं। इसी दौरान मालूम पड़ा कि कोई ग्रीन कलर टैक्सी वारदात वाली रात को देखी गई थी तभी दिल्ली व आस-पास के इलाकों की ग्रीन कलर की टैक्सियों को खंगाली गई। इसी तलाशी अभियान के तहत मेरु टैक्सी सर्विस पर जाकर जब टैक्सी की छानबीन की तो चालक लालबहादुर गायब पाया साथ ही उसमे लगे जीपीएस से मालूम पड़ा कि वारदात वाले दिन उसी एरिया में टैक्सी गई था उसके काफी ठिकानो पर छापेमारी करके लाल बहादुर को गिरफतार किया। पूछताछ पर मालूम पड़ा कि वह सोनू को प्यार करता था तथा शादी करना चाहता था लेकिन उसके आजकल के आव-भाव से लगता था वह किसी और को प्यार करती है। लेकिन उसके साथ जब रहती थी लगता था ऐसा कुछ नही है। वारदात की रात को वह टैक्सी से मोहन गार्डन डिनर के लिए लाया। दोनो ने टैक्सी में शराब पी।
नौणी - हिमाचल का एकमात्र मान्य प्राप्त वर्ल्ड हब एयर होस्टेस इंस्टीच्यूट, जो कि शिक्षा का केंद्र बनकर छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों का भी आकर्षक केंद्र बन रहा है। साथ ही साथ गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर छात्र-छात्राओं ने अपने अध्यापक व अध्यापिकाओं के साथ इस अवसर पर बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान वर्ल्ड हब एयर होस्टेस की डायरेक्टर स्मृति ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की व गणेश चतुर्थी के कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके की गई। डायरेक्टर स्मृति ठाकुर ने छात्रों को गणेश चतुर्थी के महत्त्व के ऊपर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि गणेश भगवान लॉर्ड शिवा के पुत्र रहे हैं और गणेश बुद्धिमता के प्रतीक होने के बावजूद विध्न-विनाशक है। इस अवसर पर वर्ल्ड हब के चेयरमैन विवेक सूद ने स्मृति ठाकुर का धन्यवाद करते हुए गणेश चतुर्थी के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देते हुए सभी छात्र व अध्यापक वर्ग को शुभकामनाएं दी। इस पावन अवसर पर संस्थान के हैड ऑफ दि डिपार्टमेंट बीएस आचार्य, निधि, जागृति, आशा, सोनिया, सुगंध, पूजा, अभिषेक, अंकिता, सरोज, काकुल, अंकिता, राजेश सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
नौणी - हिमाचल का एकमात्र मान्य प्राप्त वर्ल्ड हब एयर होस्टेस इंस्टीच्यूट, जो कि शिक्षा का केंद्र बनकर छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों का भी आकर्षक केंद्र बन रहा है। साथ ही साथ गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर छात्र-छात्राओं ने अपने अध्यापक व अध्यापिकाओं के साथ इस अवसर पर बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान वर्ल्ड हब एयर होस्टेस की डायरेक्टर स्मृति ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की व गणेश चतुर्थी के कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके की गई। डायरेक्टर स्मृति ठाकुर ने छात्रों को गणेश चतुर्थी के महत्त्व के ऊपर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि गणेश भगवान लॉर्ड शिवा के पुत्र रहे हैं और गणेश बुद्धिमता के प्रतीक होने के बावजूद विध्न-विनाशक है। इस अवसर पर वर्ल्ड हब के चेयरमैन विवेक सूद ने स्मृति ठाकुर का धन्यवाद करते हुए गणेश चतुर्थी के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देते हुए सभी छात्र व अध्यापक वर्ग को शुभकामनाएं दी। इस पावन अवसर पर संस्थान के हैड ऑफ दि डिपार्टमेंट बीएस आचार्य, निधि, जागृति, आशा, सोनिया, सुगंध, पूजा, अभिषेक, अंकिता, सरोज, काकुल, अंकिता, राजेश सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटेर रहे हैं नागा साधु. ज्यादातर नागा साधु अपने गढ़े रूप के चलते लोगों के बीच कौतूहल का विषय हैं. प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटेर रहे हैं नागा साधु. ज्यादातर नागा साधु अपने गढ़े रूप के चलते लोगों के बीच कौतूहल का विषय हैं. हम आपके लिए लाएं हैं कुछ ऐसी ही तस्वीरें जिन्हें देख आप भी दांतों तले उंगली दबा लेंगे. पेड़ पर उल्टे लटके इन बाबा को देखिए. इतनी लंबी जटाएं की जमीन छू रही हैं. सर पर रुद्राक्ष से जटाओं को बांधे ये बाबा लगे हाथ अपनी फोटोग्राफी का शौक पूरा करते हुए. कई नागा जंगलों में घूमते-घूमते सालों काट लेते हैं और अगले कुंभ या अर्ध कुंभ में नजर आते हैं. योगासन को आपने बहुत देखें होंगे पर इस तरह का आसन पहली देख रहे होंगे.
प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटेर रहे हैं नागा साधु. ज्यादातर नागा साधु अपने गढ़े रूप के चलते लोगों के बीच कौतूहल का विषय हैं. प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटेर रहे हैं नागा साधु. ज्यादातर नागा साधु अपने गढ़े रूप के चलते लोगों के बीच कौतूहल का विषय हैं. हम आपके लिए लाएं हैं कुछ ऐसी ही तस्वीरें जिन्हें देख आप भी दांतों तले उंगली दबा लेंगे. पेड़ पर उल्टे लटके इन बाबा को देखिए. इतनी लंबी जटाएं की जमीन छू रही हैं. सर पर रुद्राक्ष से जटाओं को बांधे ये बाबा लगे हाथ अपनी फोटोग्राफी का शौक पूरा करते हुए. कई नागा जंगलों में घूमते-घूमते सालों काट लेते हैं और अगले कुंभ या अर्ध कुंभ में नजर आते हैं. योगासन को आपने बहुत देखें होंगे पर इस तरह का आसन पहली देख रहे होंगे.
Car Accident In Uttarakhand: पौड़ी जिले के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। जिससे कार में सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। Car Accident In Uttarakhand: उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में एक दर्दनाक हादसा हो गया है। जानकारी के मुताबिक पौड़ी जिले के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। जिससे कार में सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि 10 अन्य लोग घायल हो गये हैं। बता दें कि हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने रेस्क्यू कर सभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान तीन घायलों ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा अस्पताल में कुछ घायलों की भी हालत गंभीर बतायी जा रही है। लक्ष्मणझूला के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार गोसाईं ने बताया कि दुर्घटना के शिकार लोग नीलकंठ मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ये हादसा रविवार शाम को हुआ है। बताया जा रहा है कि एक परिवार नीलकंठ दर्शन के लिए आ रहा था। लेकिन पीपलकोटी से करीब दो किमी पहले ही उनका वाहन अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर नीचे खाई में गिर गया। स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने रेस्क्यू कार्य शुरू किया। बताया जा रहा है कि हादसे में छः और चार साल के मासूम सहित एक युवती की मौत हो गई है। जबकि 10 लोग घायल हो गए है। जिन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है।
Car Accident In Uttarakhand: पौड़ी जिले के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। जिससे कार में सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। Car Accident In Uttarakhand: उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में एक दर्दनाक हादसा हो गया है। जानकारी के मुताबिक पौड़ी जिले के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। जिससे कार में सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि दस अन्य लोग घायल हो गये हैं। बता दें कि हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने रेस्क्यू कर सभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान तीन घायलों ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा अस्पताल में कुछ घायलों की भी हालत गंभीर बतायी जा रही है। लक्ष्मणझूला के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार गोसाईं ने बताया कि दुर्घटना के शिकार लोग नीलकंठ मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ये हादसा रविवार शाम को हुआ है। बताया जा रहा है कि एक परिवार नीलकंठ दर्शन के लिए आ रहा था। लेकिन पीपलकोटी से करीब दो किमी पहले ही उनका वाहन अनियंत्रित होकर करीब एक सौ पचास मीटर नीचे खाई में गिर गया। स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने रेस्क्यू कार्य शुरू किया। बताया जा रहा है कि हादसे में छः और चार साल के मासूम सहित एक युवती की मौत हो गई है। जबकि दस लोग घायल हो गए है। जिन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है।
'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' की निर्देशिका अपर्णा सेन नयी फ़िल्म 'द जैपनीज वाइफ" अपने दर्शकों के लिए लेकर आ रही हैं. 9 अप्रैल 2010 को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म के कलाकार हैं राहुल बोस, राइमा सेन, चिगुसा ताकाकू और मौसमी चटर्जी. अपर्णा सेन ने अलग-सी प्रेम कहानी पर फिल्म बनायी है. फिल्म सुंदरवन में स्कूली शिक्षक स्नेहमोय और जापानी लड़की मियागे की प्रेम कहानी है. ये दोनों ही पत्रों के माध्यम से एक दूसरे से मिलते हैं और उनमें प्यार हो जाता है. पत्र के माध्यम से ही वो शादी भी कर लेते हैं. उनकी शादी को 15 साल हो चुके हैं जबकि वो आज तक एक दूसरे से कभी नहीं मिले हैं.
'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' की निर्देशिका अपर्णा सेन नयी फ़िल्म 'द जैपनीज वाइफ" अपने दर्शकों के लिए लेकर आ रही हैं. नौ अप्रैल दो हज़ार दस को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म के कलाकार हैं राहुल बोस, राइमा सेन, चिगुसा ताकाकू और मौसमी चटर्जी. अपर्णा सेन ने अलग-सी प्रेम कहानी पर फिल्म बनायी है. फिल्म सुंदरवन में स्कूली शिक्षक स्नेहमोय और जापानी लड़की मियागे की प्रेम कहानी है. ये दोनों ही पत्रों के माध्यम से एक दूसरे से मिलते हैं और उनमें प्यार हो जाता है. पत्र के माध्यम से ही वो शादी भी कर लेते हैं. उनकी शादी को पंद्रह साल हो चुके हैं जबकि वो आज तक एक दूसरे से कभी नहीं मिले हैं.