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Actress Cat Fight: एक्ट्रेस के बीच कैट फाइट कोई नया किस्सा नहीं है. बॉलीवुड में ये प्रथा सालों से चली आ रही है. ऐसी ही नोंक-झोंक हमेशा रही जया प्रदा और श्रीदेवी के बीच जो एक ऐसे मोड़ पर पहुंचीं जिसके बारे में किसी को पता भी नहीं था. Jaya Prada and Sridevi: श्रीदेवी (Sridevi) और जया प्रदा (Jaya Prada) एक साथ कई फिल्मों में दिखीं. कभी बहनें बनीं तो कभी सहेलियां लेकिन ये भी सच है कि इन दोनों एक्ट्रेस के बीच 36 का आंकड़ा रहा है. वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन दोनों के बीच कभी बातचीत तक करना एक दूसरे से पसंद नहीं किया. यहां तक कि दोनों एक दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं करती थीं. ये देखकर इनके साथ काम करने वाले लोग भी काफी परेशान रहते थे. आखिरकार कई घंटों बाद कमरा खोलने के बारे में जीतेंद्र ने सोचा. आखिरकार कमरा खुला तो वो काफी खुश थे कि शायद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई होगी लेकिन जैसे ही कमरा खुला तो सभी के होश फाख्ता हो गए. दोनों एक्ट्रेस कमरे के अलग अलग कोने में बैठी हुई थीं, चुप थीं और बिल्कुल भी बात नहीं कर रही थीं. ये देखते ही जीतेंद्र ने अपना माथा पकड़ लिया और फिर वो समझ गए कि इनके बीच रिश्ता सुधरने वाला नहीं है. लेकिन इन दोनों के रिश्ते की खास बात ये थी कि बात ना करते हुए भी दोनों ने साथ में खूब काम किया और स्क्रीन पर बेहतरीन बॉन्डिंग दिखाई.
Actress Cat Fight: एक्ट्रेस के बीच कैट फाइट कोई नया किस्सा नहीं है. बॉलीवुड में ये प्रथा सालों से चली आ रही है. ऐसी ही नोंक-झोंक हमेशा रही जया प्रदा और श्रीदेवी के बीच जो एक ऐसे मोड़ पर पहुंचीं जिसके बारे में किसी को पता भी नहीं था. Jaya Prada and Sridevi: श्रीदेवी और जया प्रदा एक साथ कई फिल्मों में दिखीं. कभी बहनें बनीं तो कभी सहेलियां लेकिन ये भी सच है कि इन दोनों एक्ट्रेस के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है. वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन दोनों के बीच कभी बातचीत तक करना एक दूसरे से पसंद नहीं किया. यहां तक कि दोनों एक दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं करती थीं. ये देखकर इनके साथ काम करने वाले लोग भी काफी परेशान रहते थे. आखिरकार कई घंटों बाद कमरा खोलने के बारे में जीतेंद्र ने सोचा. आखिरकार कमरा खुला तो वो काफी खुश थे कि शायद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई होगी लेकिन जैसे ही कमरा खुला तो सभी के होश फाख्ता हो गए. दोनों एक्ट्रेस कमरे के अलग अलग कोने में बैठी हुई थीं, चुप थीं और बिल्कुल भी बात नहीं कर रही थीं. ये देखते ही जीतेंद्र ने अपना माथा पकड़ लिया और फिर वो समझ गए कि इनके बीच रिश्ता सुधरने वाला नहीं है. लेकिन इन दोनों के रिश्ते की खास बात ये थी कि बात ना करते हुए भी दोनों ने साथ में खूब काम किया और स्क्रीन पर बेहतरीन बॉन्डिंग दिखाई.
लोकप्रिया इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए समय-समय पर नए-नए फीचर्स लाता रहता है. अब व्हाट्सऐप एक और धांसू फीचर को लाने की तैयारी में है. इस फीचर में चैट में मैसेज ढूंढना और भी आसान हो जाएगा. इस फीचर पर व्हाट्सऐप कथित तौर पर पिछले 2 वर्षों से काम कर रही थी और आखिरकार ये यूजर्स के लिए लाइव होने वाला है. इस फीचर का नाम 'सर्च फॉर मैसेज बाई डेट' (Search For Message By Date) रखा गया है. आप इसमें किसी भी डेट के मैसेज को बड़ी आसानी से सर्च कर सकेंगे. चलिए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं. इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने मैसेज को चैट में ढूंढना बहुत आसान बना दिया है. जल्द ही व्हाट्सऐप यूजर्स को ये सुविधा मिल जाएगी. मैसेज को खोजने के लिए अब आपको पूरी चैट को खंगालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. आप सीधे तारीख डालकर भी मैसेज को ढूंढ सकेंगे. बता दें कि कंपनी ने इस फीचर को टेस्ट फ्लाईट ऐप पर राॅल आउट कर दिया है. इसे सर्च फॉर मैसेज बाई डेट का नाम दिया गया. कंपनी ने इसे आईओएस 22. 24. 0. 77 के व्हाट्सऐप बीटा पर इसी नाम से लिस्ट किया है. आज इस धांसू फीचर को एंड्राइड टेबलेट सपोर्ट और आईओएस के कम्पेनियन मोड के लिए भी रिलीज किया गया. WABetaInfo की तरफ से जानकारी दी गई कि ये फीचर यूजर्स के लिए प्लेटफाॅर्म एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाने का काम करेगा. यूजर्स सब सीधे किसी भी डेट के मैसेज पर छलांग लगा सकेंगे. उन्हें मैसेज ढूंढने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.
लोकप्रिया इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए समय-समय पर नए-नए फीचर्स लाता रहता है. अब व्हाट्सऐप एक और धांसू फीचर को लाने की तैयारी में है. इस फीचर में चैट में मैसेज ढूंढना और भी आसान हो जाएगा. इस फीचर पर व्हाट्सऐप कथित तौर पर पिछले दो वर्षों से काम कर रही थी और आखिरकार ये यूजर्स के लिए लाइव होने वाला है. इस फीचर का नाम 'सर्च फॉर मैसेज बाई डेट' रखा गया है. आप इसमें किसी भी डेट के मैसेज को बड़ी आसानी से सर्च कर सकेंगे. चलिए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं. इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने मैसेज को चैट में ढूंढना बहुत आसान बना दिया है. जल्द ही व्हाट्सऐप यूजर्स को ये सुविधा मिल जाएगी. मैसेज को खोजने के लिए अब आपको पूरी चैट को खंगालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. आप सीधे तारीख डालकर भी मैसेज को ढूंढ सकेंगे. बता दें कि कंपनी ने इस फीचर को टेस्ट फ्लाईट ऐप पर राॅल आउट कर दिया है. इसे सर्च फॉर मैसेज बाई डेट का नाम दिया गया. कंपनी ने इसे आईओएस बाईस. चौबीस. शून्य. सतहत्तर के व्हाट्सऐप बीटा पर इसी नाम से लिस्ट किया है. आज इस धांसू फीचर को एंड्राइड टेबलेट सपोर्ट और आईओएस के कम्पेनियन मोड के लिए भी रिलीज किया गया. WABetaInfo की तरफ से जानकारी दी गई कि ये फीचर यूजर्स के लिए प्लेटफाॅर्म एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाने का काम करेगा. यूजर्स सब सीधे किसी भी डेट के मैसेज पर छलांग लगा सकेंगे. उन्हें मैसेज ढूंढने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.
Deoghar : फर्जी आर्म्स बेचने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने देवघर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस पर फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस बनाकर बेचने का आरोप है. नगर थाना पुलिस पुलिस की मदद से आरोपी राज किशोर नामक आरोपी को पकड़ा गया. गिरफ्तार आरोपी बिहार के खगड़िया का रहनेवाला है. और देवघर के बिलासी टाउन में छिपकर चार वर्षों से रह रहा था. वह यहां पर रहकर जमीन का कारोबार भी करता था. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को लखनऊ एटीएस पुलिस कोविड जांच कराकर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड के बाद साथ ले गयी. यूपी पुलिस ने बताया कि इस पर फर्जी लाइसेंस रखकर आर्म्स सप्लाई करने सहित धोखाधड़ी व साक्ष्य छिपाने के आरोप हैं. प्राथिमिकी दर्ज है. आरोपी को उसके निवास से सोयी हुई अवस्था में गिरफ्तार किया गया.
Deoghar : फर्जी आर्म्स बेचने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने देवघर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस पर फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस बनाकर बेचने का आरोप है. नगर थाना पुलिस पुलिस की मदद से आरोपी राज किशोर नामक आरोपी को पकड़ा गया. गिरफ्तार आरोपी बिहार के खगड़िया का रहनेवाला है. और देवघर के बिलासी टाउन में छिपकर चार वर्षों से रह रहा था. वह यहां पर रहकर जमीन का कारोबार भी करता था. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को लखनऊ एटीएस पुलिस कोविड जांच कराकर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड के बाद साथ ले गयी. यूपी पुलिस ने बताया कि इस पर फर्जी लाइसेंस रखकर आर्म्स सप्लाई करने सहित धोखाधड़ी व साक्ष्य छिपाने के आरोप हैं. प्राथिमिकी दर्ज है. आरोपी को उसके निवास से सोयी हुई अवस्था में गिरफ्तार किया गया.
भोपाल । निलंबित संयुक्त आयुक्त डॉ. रविकांत द्विवेदी के बेटे अंकित एक बैंक लॉकर की सोमवार को लोकायुक्त पुलिस ने तलाशी ली। इसमें सोने-चांदी के जेवर के साथ कई संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। बताया जाता है कि डॉ. रविकांत द्विवेदी के बेटे अंकित द्विवेदी के नाम से क्षेत्रीय विकास बैंक विदिशा की 1100 क्वार्टर्स में एक लॉकर है। इसकी तलाशी के लिए लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार की शाम को बैंक पहुंची। इस लॉकर में 120 ग्राम वजन के सोने के जेवर के अलावा 150 ग्राम वजन के चांदी के जेवर मिले हैं। यही नहीं इस लॉकर में कई संपत्तियों के दस्तावेज भी लोकायुक्त पुलिस के हाथ लगे हैं। दस्तावेजों में विदिशा की संपत्ति के कागजात होने की बात सामने आई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लोकायुक्त पुलिस द्वारा डॉ. द्विवेदी के घर मारे गए छापे में दो बैंक लॉकर होने की बात सामने आई थी जिनमें से एक उनकी पत्नी मीरा के नाम से था। मीरा के नाम का बैंक लॉकर बैंक ऑफ बड़ौदा शाहपुरा शाखा में था जिसकी तलाशी में लोकायुक्त पुलिस को करीब एक किलो 600 ग्राम सोने के जेवरात और सिक्के मिले थे।
भोपाल । निलंबित संयुक्त आयुक्त डॉ. रविकांत द्विवेदी के बेटे अंकित एक बैंक लॉकर की सोमवार को लोकायुक्त पुलिस ने तलाशी ली। इसमें सोने-चांदी के जेवर के साथ कई संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। बताया जाता है कि डॉ. रविकांत द्विवेदी के बेटे अंकित द्विवेदी के नाम से क्षेत्रीय विकास बैंक विदिशा की एक हज़ार एक सौ क्वार्टर्स में एक लॉकर है। इसकी तलाशी के लिए लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार की शाम को बैंक पहुंची। इस लॉकर में एक सौ बीस ग्राम वजन के सोने के जेवर के अलावा एक सौ पचास ग्राम वजन के चांदी के जेवर मिले हैं। यही नहीं इस लॉकर में कई संपत्तियों के दस्तावेज भी लोकायुक्त पुलिस के हाथ लगे हैं। दस्तावेजों में विदिशा की संपत्ति के कागजात होने की बात सामने आई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लोकायुक्त पुलिस द्वारा डॉ. द्विवेदी के घर मारे गए छापे में दो बैंक लॉकर होने की बात सामने आई थी जिनमें से एक उनकी पत्नी मीरा के नाम से था। मीरा के नाम का बैंक लॉकर बैंक ऑफ बड़ौदा शाहपुरा शाखा में था जिसकी तलाशी में लोकायुक्त पुलिस को करीब एक किलो छः सौ ग्राम सोने के जेवरात और सिक्के मिले थे।
बनारस का एक छोटा सा गांव है ढखवां। शहर से करीब 25 किमी दूर। निषाद समुदाय की बस्ती। यहीं रहती हैं 45 वर्षीय तारा देवी। इनके घर पर भाजपा का झंडा अब भी लहरा रहा है। यह झंडा भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि समूचा परिवार भाजपाई है। तारा के कच्चे मकान के आगे दो बोरे में रखे उपलों को देखकर हमने सवाल किया, "रसोई गैस नहीं है क्या?" इस सवाल पर तारा देवी थोड़ी ठिठकीं। कहा, "हुजूर, महंगाई बहुत है। जब सब्जी के लिए तेल ही नहीं है तो रसोई गैस के लिए हजार रुपये कहां से लाएंगे? कहीं काम भी नहीं मिल रहा है। पाई-पाई के लिए मोहताज हैं।" महंगाई है, बेरोजगारी है और जिंदगी भी कठिन है। फिर वोट किसे दिया? तारा का जवाब था, "मोदी को...भाजपा को...।" तारा को महंगाई की चिंता साल रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल और तेल के साथ नमक भी दे रही है। भाजपा को वोट नहीं देते तो नमकहराम ही तो कहे जाते...।हमारी बिरादरी पहले से ही भाजपा के साथ थी। समूची निषाद बस्ती ने कमल की बटन दबाई, फिर हम दूसरों को वोट कैसे देते?" ढखवां गांव के बीचो-बीच तारा का आधा मकान कच्चा है, आधा पक्का। कई बरस पहले इंदिरा आवास योजना के तहत इन्हें एक छोटा सा कमरा मिला था। दशकों बीत गए, पर उसपर सीमेंट-बालू का पलस्तर नहीं चढ़ सका। तारा बताती हैं, "चुनाव में कोई नेता हमारा दुखड़ा सुनने नहीं आया। निषाद बिरादरी के कुछ लोग भाजपा के लिए वोट मांगने जरूर आए। नए और पक्के मकान का भरोसा दे गए हैं। देखिए कब बनता है?" तारा के पास खड़ीं उनकी देवरनी माधुरी देवी भी यही बात दुहराती हैं। वह कहती हैं, " हमारी बेटी विकलांग हैं। दुश्वारियां ज्यादा हैं। हमें सरकार से नहीं प्रधान से ज्यादा शिकायत है। हम जानते हैं कि पांच किलो राशन से जिंदगी नहीं चलेगी। हमारी असल समस्या नाली की है। चुनाव लड़ने वाले जीतकर चले गए। अब भला हमें कौन पूछेगा? नमक का हक अदा करने के लिए सभी ने भाजपा को वोट दिया तो हमने भी कमल का बटन दबाया।" दरअसल बनारस शहर से करीब 25 किमी दूर है ढखवां बस्ती। गंगा के किनारे बसी इस बस्ती को डाल्फिन मछलियों की वजह से भी जाना जाता है। यूपी सरकार इस गांव को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कर रही है। यहां गंगा के किनारे मंदिरों की श्रृंखला है और उसके ठीक नीचे गंगा, जिसकी मझधार में डाल्फिन मछलिया हर वक्त करतब दिखलाती रहती हैं। निषाद बस्ती के लोग पर्यटकों को नौका विहार कराते हुए डाल्फिन मछलियों का करतब दिखाया करते हैं। नौकायन ही इस बस्ती के तमाम युवकों की आजाविका का साधन है। ढखवां बस्ती के लोगों की जिंदगी में अनगिनत मुश्किलें हैं, लेकिन नमक का कर्ज उतारने के लिए सत्तारूढ़ दल को वोट देने में इन्हें तनिक भी एतराज नहीं है। ढखवां की कांति देवी को इस बात ज्यादा चिंता है कि गंगा कटान के चलते उनका घर नदी में समा जाने की कगार पर पहुंच गया है। कांति कहती हैं, "नाला बन जाता तो हमारा घर बच जाता। चुनाव बीत गया और अब हम किसे खोजेंगे? गद्दी पर बैठने के बाद भला कौन आता है। महंगाई चपी हुई है। 12 किलो सरकारी राशन मिलता है, जिसमें से दो किलो कोटे वाला काट लेता है। आखिर कहां लगाएं गुहार और किससे करें फरियाद। हमने नमक का कर्ज अदा किया है तो मोदी को भी हमारी चिंता होनी ही चाहिए।" ढखवां के पास है चंद्रावती गांव। वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर स्थित इस गांव के ज्यादतर मकानों पर भाजपा के झंडे अभी तक लहरा रहे हैं। यहां मिले विजय कुमार मौर्य। ये कृषक सेवा केंद्र चलाते हैं। इनका समूचा परिवार भाजपाई है, लेकिन इन्हें मोदी-योगी की रीति-नीति पसंद नहीं है। विजय कहते हैं, "हमें समझ में नहीं आ रहा है कि लोग भाजपा के पीछे क्यों भाग रहे हैं? मुफ्त का राशन लोगों को काहिल बना रहा है। यही राशन जब गुलाम बना देगा तब क्या होगा? डबल इंजन की सरकार अगर सचमुच गरीबों का हित चाहती है तो मुफ्त की रोटी नहीं, रोजगार दे। हर आदमी को काम दे, तभी अच्छा समाज बनेगा। महंगाई आसमान छू रही है। समूचे बनारस में साड़ों का जखेड़ा घूम रहा है। फिर भी झूठा दावा किया जा रहा है कि किसानों की आदमनी दोगुनी होगी। मुफ्त का राशन और नमक देकर गरीबों को भरमाया जा रहा है। किसानों, मजदूरों और गरीबों का भ्रम टूटेगा तो तब क्या होगा?" दरअसल, विजय कुमार मौर्य शिक्षित हैं और सपन्न भी। वह कहते हैं, "मतगणना से पहले तक हमें यकीन नहीं था कि अबकी भाजपा फिर सत्ता में आएगी। हमारी बस्ती में साइकिल को वोट भी पड़े, पर समझ में नहीं आया कि भाजपा कैसे चुनाव जीत गई? बड़ी संख्या में लोगों ने चुपके से भाजपा को वोट दे दिया। हमें भी यही लगता है कि भाजपा के नमक बांटने की युक्ति सबसे ज्यादा कारगर साबित हुई।" चंद्रावती में कृषक सेवा केंद्र पर यूरिया उर्वरक खरीदने पहुंचे थे उगापुर के लालजी यादव। लालजी पहड़िया मंडी में पल्लेदारी का काम करते हैं। इन्हें लगता है कि भाजपा ईमानदारी से चुनाव नहीं जीती है। चुनाव में गड़बड़झाला हुआ है। वह सवाल करते हैं कि नमक खिलाकर कोई उसका हक अदा करने की बात भला कौन करता है? लालजी कहते हैं, "चुनाव से पहले बनारस से लगायत कैथी तक सड़क के किनारे आवारा पशुओं का जखेड़ा घूमा करता था। इलेक्शन में सांड जब मुद्दा बनने लगे तो वो अचानक गायब कैसे हो गए? गांवों में बने ज्यादातर गो-आश्रय स्थल भी खाली हैं। गौर करने वाली बात यह है कि किसानों के लिए दिन-रात जी का जंजाल बने ये सांड़ आखिर लापता कैसे हो गए?" लालजी से सवालों का जवाब नियार गांव के बेचन सिंह देते हैं। वह बताते हैं, "पूर्वांचल जब इलेक्शन में आया तो शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने विकास भवन में छुट्टा पशुओं के बाबत नियंत्रण कक्ष खोल दिया। वहां ढेरों शिकायतें पहुंचीं तो छुट्टा पशुओं की धर-पकड़ का अभियान चला। पकड़े गए आवारा पशु कहां रखे गए हैं, यह तो नहीं मालूम, लेकिन उनके आतंक से छोड़ी राहत जरूर मिली है?" कैथी गांव में उगापुर के 34 वर्षीय राज कुमार गोंड एक किसान के यहां काम में जुटे थे। इनके पांच बच्चे हैं। वो बताते हैं, "पूर्वांचल में गोंड समाज की आबादी काफी कम है। सपा ने हमारी बिरादरी को कभी अहमियत नहीं दी। चुनाव के समय भी और चुनाव से पहले भी। इसका मतलब यह नहीं है कि हम कई पीढ़ियों तक सामंतों की गुलामी करते रहें। भाजपा सरकार आई तो हमें आवास मिला और राशन भी। बाबा के बुल्डोजर की सुरक्षा भी मिली। हमारी बिरादरी तो पहले से ही ऐसी है कि जिसका नमक खाती है, उसका हक भी अदा करती है। धरसौना, चोलापुर, दानगंज, हाजीपुर, दमड़ीपुर, रौना गोड़ बिरादरी बहुतायत है और चलकर पूछ लीजिए, हमने मोदी के नमक का हक अदा किया है या नहीं? गोंड समाज ने तो थोक में भाजपा को वोट डाला। सपा तो सिर्फ हवा में ही चुनाव लड़ रही थी, जो हार गई।" कैथी पुल के पास फूलों की माला बेचने वाले छित्तनपुर के 48 वर्षीय बरसाती सोनकर को लगता है कि सपा ने ज्यादातर अयोग्य और नाकारा प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया। खासतौर पर उन्हें जिनके पांव जमीन पर कभी दिखे ही नहीं। सपा प्रत्याशी सुनील सोनकर कभी वोट मांगने आए ही नहीं तो फिर उन्हें वोट क्यों दे देते। इन्हीं के पास फूलों की माला बेचने वाले सोनू सोनकर भाजपा सरकार के कामकाज पर सवाल खड़ा करते मिले। वह कहते हैं, "पूर्वांचल में मुफ्त के राशन और नमक पर लोग फिदा है। लोगों को यह पता नहीं कि सरकार एक ओर देती है तो दूसरी तरफ से वह पैसा गरीबों की जेब से ही खींच लेती है। चाहे खाने-पीने का सामान महंगा करके या फिर डीजल-पेट्रोल का दाम बढ़ाकर। मीडिया भी निष्पक्ष नहीं। वो भी भाजपा सरकार की भाषा ही बोलती है। किस पर यकीन करें और किसपर नहीं? हम तो दिन भर फूलों की माला बेचते हैं, तब मुश्किल से कमा पाते हैं दो-ढाई सौ रुपये।" बनारस के जाने-माने समाजसेवी बल्लभ पांडेय के घर मिले बलिया के रेवती निवासी विजय कुमार पांडेय। इन्होंने कुछ ही देर में चुनावी नक्शा खींच दिया। साफ-साफ कहा, "इलेक्शन जीतना भी एक ट्रिक है। हमें लगता है कि भाजपा के नमक का ट्रिक सबसे असरदार रही। हालांकि सियासी निजाम को देखेंगे तो पाएंगे कि यूपी में हर आठवां विधायक ब्राह्मण है। कम आबादी के बावजूद 403 सीटों में 52 ब्राह्मण और 46 ठाकुर विधायक बने। कुर्मी समाज के लोग गोलबंद हुए तो इस बिरादरी के 41 विधायक चुनाव जीत गए, जबकि इनसे ज्यादा आबादी होने के बावजूद यादव बिरादरी के सिर्फ 27 विधायक चुने गए। यूपी में 34 मुसलमान, 29 जाटव-पासी जीते। वैश्य समुदाय के 22, लोध 18, जाट 15, मौर्य-कुशवाहा 14 निषाद, कश्यप, बिंद मल्लाह सात, तेली, कलवार, सोनार जातियों के छह, गुर्जर सात, भूमिहार पांच, राजभर चार, खटिक पांच, कायस्थ तीन के अलावा सिख व वाल्मीकि समुदाय के लोग एक-एक सीट पर काबिज हुए हैं। वैश्य, ब्राह्मण, राजपूतों के अलावा ज्यादातर गैर-यादव पिछड़ों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया, जिससे भाजपा का मतदान 43 फीसदी तक पहुंच गया।" विजय कुमार पांडेय कहते हैं, "आवास और राशन के साथ बांटे जाने वाले नमक ने इस चुनाव में अहम भूमिका अदा की। खासतौर पर महिलाओं ने नमक का हक अदा किया। अति-पिछड़ी जातियां इसलिए भाजपा के पक्ष में लामबंद हुई क्योंकि उसने लगातार पांच साल तक दलितों और पिछड़ों के घरों में पहुंचकर हिन्दुत्व और देशभक्ति की अलख जगाई। कोई ऐसी बिरादरी नहीं थी, जिनके बीच भाजपा और उनके अनुषांगिक संगठन आरएसएस व विहिप के लोग न गए हों। सपा नेता तो तब दिखे जब इलेक्शन नजदीक आया। पता ही नहीं चला कि वो साढ़े चार साल कहां गायब थे? सपा के खाते में जितनी भी सीटें आईं वो किसान आंदोलन की बदौलत आईं। योगी के बुल्डोजर पर ज्यादा लोग रीझे। सपा ने टिकट भी बांटा तो ऐसे जैसे कोटे की दुकान में गेहूं-चीनी बिकती है। सपा के जो नेता टिकट के लिए महीनों से मुंह बाए खड़े थे, वो निराश लौटे तो भी उनका गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। सपा की अंतर्कलह उसके प्रत्याशियों की नाव डुबोता चला गया। हमें लगता है कि अखिलेश ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव से सिर्फ राजनीतिक दांव-पेंच ही नहीं एक बुरी आदत भी सीखी है। उनके इर्द-गिर्द अब चाटुकारों की एक बड़ी फौज रहती है, जिसके चलते साइकिल का पहिया पंचर होता जा रहा है। अखिलेश को अगर सचमुच लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो चाटुकारों से उन्हें थोड़ी दूरी बनानी होगी।" कारवां मैग्जीन में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो सुनील कश्यप पूर्वांचल समेत समूचे उत्तर प्रदेश में खासतौर पर उन जातियों पर काम करते हैं जो समाज के आखिरी पायदान पर खड़ी हैं। वह कहते हैं, "गरीब तबके के लोगों में नमक ने ज्यादा काम किया। समाज में अभी भोले-भाले लोग ज्यादा हैं। लोग मानते हैं कि जिसका नमक खा लिया है तो उसे अदा करना है। जहां नेता वादे करके तोड़ते हैं, लेकिन गरीब तबका नमक की अदायगी में भी वफादारी दिखाता है। इस चुनाव में नमक की अदायगी का फैक्टर बहुत बड़ा था। चुनाव के समय मैं बनारस में था और एक रिक्शावाले से सवाल किया कि वो वोट किसे देगा? तो उसने तपाक से जवाब दिया कि जिसका नमक खा रहे हैं, उसकी अदायगी तो करनी ही होगी। इलेक्शन से पहले ही यह बात साफ हो गई थी कि नमक की बात बहुत अंदर तक पहुंच चुकी थी।" ये भी देखेंः यूपी में हिन्दुत्व की जीत नहीं, ये नाकारा विपक्ष की हार है! "कास्ट फैक्टर को लेकर जो काम कांशीराम ने किया, भाजपा ने उससे एक कदम आगे बढ़कर गरीब जातियों के उत्थान के लिए काम किया। सरकार ने माटी कला बोर्ड बनाकर कुम्हारों के बीच काम किया तो भेड़ कला बोर्ड बनाकर गड़ेरिय़ों को अपने साथ जोड़ा। इसी तरह नाइयों के लिए केश कला बोर्ड बनाया तो लोहार समुदाय के लिए विश्वकर्मा कला बोर्ड। निषादों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिया। अपनी पहचान के साथ ये जातियां जल्दी खड़े हो गईं। साल 2014 के बाद भाजपा के साथ ये जातियां जुड़ीं तो फिर बाद में हटी नहीं। इन जातियों में असुरक्षा का डर ज्यादा समाया रहता है। इनके लिए सामाजिक सुरक्षा एक बड़ा सवाल था, जिसके चलते गरीब तबके के लोगों ने योगी के बुल्डोजर पर ज्यादा भरोसा किया। हिंदू वर्ण व्यवस्था में निचले पायदान में होने के बावजूद, भाजपा के प्रति गैर-यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों का आकर्षण पहचान की राजनीति के फॉल्ट लाइन की ओर इशारा करता है।" सुनील यह भी कहते हैं, "सामाजिक तौर पर जो जातियां सबसे निचले पायदान पर हैं उनके लिए अनाज और सुरक्षा सबसे बड़ी चीज है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके पास खेती-किसानी नहीं है। साल 1990 के बाद लोहार, बढ़ई, कुम्हार समुदाय को जजमानी के तौर पर हर साल मिलने वाला अनाज बंद हो गया था। गांवों में काम करने वाले शिल्पकारों को किसान पहले एक बार अनाज देते थे, जिससे उनकी आजीविका चला करती थी। कोरोना के संकटकाल में जब उनके सामने भोजन का संकट पैदा हुआ तो मुफ्त का अनाज ही जिंदा रहने का सबसे बड़ा जरिया बना। यह आरोप गलत है कि गरीब तबके के लोग पांच किलो अनाज पर बिक गए। सच यह है कि खाना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है। दूसरी बात, यूपी में ऐसी तमाम जातियां हैं जिनकी आबादी अंगुलियों पर गिनी जा सकती है। इन्हें न गांवों में सम्मान मिलता है और न ही ये ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य और ब्लाक प्रमुख बन पाते हैं। दूसरे समुदायों के मुकाबले ये पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत पीछे हैं। ऐसे में इनके लिए पांच किलो राशन के साथ नमक की प्रतिबद्धता बड़ी चीज है।" पत्रकार सुनील कश्यप बताते है कि उन्होंने यूपी चुनाव से पहले उस फॉल्ट लाइन को समझने की कोशिश की तो पता चला कि भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी जातियों को ज्यादा अहमियत दी। खासतौर पर वो जातियां दो पीढ़ियों से दस्तकारी किया करती थीं। यूपी में इन जातियों में राजनीतिक और सामाजिक चेतना कांशीराम ने पैदा की तो उन्होंने भी अपने नायकों की तलाश शुरू कर दी। यादवों ने भगवान कृष्ण में अपने नायक को पाया तो कुर्मियों ने (जो अपने नाम के साथ पटेल, गंगवार, सचान, कटियार, निरंजन, कनौजिया आदि लगाते हैं) 17वीं शताब्दी के मराठा राजा शिवाजी और शाहुजी महाराज को अपना नायक माना। इसी तरह देश के पहले गृहमंत्री वल्लभभाई पटेल के साथ कांग्रेस पार्टी की एक काल्पनिक नाइंसाफी की कहानी पटेल समाज को बीजेपी से जोड़ती है।" "मल्लाह जाति ने भी रामायण की कथा में राम को सरयू पार कराने वाले केवट में अपना नायक खोज लिया। ओबीसी मौर्य-कुशवाहा, शाक्य-सैनी ने पौराणिक पात्रों में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पात्रों में अपने-अपने नायक खोजे। इन्होंने अपनी पहचान पहले बुद्ध, चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक से मिलाई और फिर अपनी परंपरा के तार 19वीं शताब्दी के सामज सुधारक ज्योति राव फुले से जोड़ा। बुद्ध को अपना आदर्श मानने वाले मौर्य-कुशवाहा को बसपा के आंदोलन ने सामाजिक क्षितिज पर पहचान दिलाई। साल 2012 में इन्होंने समाजवादी पार्टी का साथ दिया। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य की मजबूत साख के चलते भाजपा को वोट दिया। गैर-यादव ओबीसी में कुर्मी और लोध पहले से ही भाजपा के साथ थे। गैर-यादव ओबीसी जातियों में मौर्य-कुशवाहा आरएसएस व बाह्मणों के सबसे प्रबल विरोधी हैं, लेकिन राजनीतिक भागेदारी की चाहत ने इन्हें साल 2017, 2019 और अब 2022 में भाजपा और आरएसएस के करीब ला दिया।" सुनील के मुताबिक, "भाजपा ने कश्यप, निषाद, गडेरिया, राजभर, चौहान और जायसवाल जैसी जातियों को रामायण और अन्य हिंदू कथाओं की छद्म परंपराओं के साथ गूंथ कर एक ऐसी माला तैयार की है जो सामाजिक न्याय की उसी मांग को ध्वस्त कर देती है जिसका पहला ही लक्ष्य ब्राह्मणवादी ऊंच-नीच से मुक्त होकर बराबरी वाले समाज का निर्माण करना है। गडेरिया जातियों को लुभाने के लिए भाजपा ने इस समाज की कुलदेवी महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को काशी विश्वनाथ धाम में जगह देकर इस समाज के लोगों का दिल जीतने का काम किया है। अब से पहले तक कोई भी राजनीतिक दल गडेरिया समाज को यह प्रतिष्ठा और सम्मान नहीं देता था। गडेरिया समाज आमतौर पर पाल, बघेल, धनगर उपनामों से जाना जाता है। इसी तरह चौहानों को पाले में करने के लिए बीजेपी ने ऐतिहासिक नायक पृथ्वीराज चौहान का दामन थामा। 12वीं शताब्दी के अफगान शासक मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के राजनीतिक संघर्ष की ऐतिहासिक और लोक गाथाओं को भाजपा ने यूपी के चौहानों को अपने हिंदुत्व के उद्देश्यों के साथ जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया। यूपी में एक अन्य ओबीसी जाति है कहार, धीवर, कश्यप। खांडसारी का कारोबार करने वाली ये जातिया हमेशा से उपेक्षित रही हैं। माना जाता है कि कश्यप समाज की जातियों का रुख जिस भी पार्टी की तरफ हुआ है वह पार्टी सत्ता में जरूर पहुंची है। इस बार के यूपी चुनाव में 17 वो जातियां निर्णायक साबित हुईं, जिन्हें अनुसूचित जाति में शामिल करने के मामले में अदलती रोक लगा दी गई है।" पिछड़ों में राजभर समाज सियासी तौर अब उठ खड़ा हुआ है। भाजपा ने महाराजा सुहेलदेव राजभर के नाम पर ट्रेन चलाई और डाक टिकट जारी किया। साथ ही बहराइच में सुहेलदेव राजभर की युद्धस्थली में सुहेलदेव का मंदिर और कुठला झील को इस योद्धा के शौर्य और पराक्रम की स्मृतियों के तौर पर संजोने का कार्य शुरू किया। भाजपा ने निषाद, प्रजापति और जायसवाल जैसी गैर-ओबीसी जातियों को भी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देकर वृहद ओबीसी एकता से दूर रखा, जो इस चुनाव में उसके लिए संजीवनी साबित हुई। हालांकि गैर-यादव अन्य पिछड़ा जातियों में सिर्फ जायसवाल ऐसी जाति है जिसके साथ बीजेपी का संबंध ज्यादा पुराना है। इस ओबीसी जाति के साहू, गुप्ता, तेली, हलवाई, कलवार, कलार और अन्य का सभी शहरों की व्यापार मंडलियों पर कब्जा है। नोटबंदी और बाद में जीएसटी से इस तबके को सर्वाधिक नुकसान हुआ, फिर भी भाजपा से इनका मोहभंग नहीं हुआ। बनारस के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार कहते हैं, "सपा सुप्रीमो अपने चुनावी रथ पर सावर होकर समूची यूपी नाप आए, लेकिन उनकी भीड़ से निकला संदेश गांवों और समाज के आखिरी आदमी तक नहीं पहुंच सका। 111 सीटें लेकर सपा गुमान कर सकती है, लेकिन यह नतीजा भविष्य के लिए सुखद नहीं है। अखिलेश के साथ अब न मीडिया है और न ही मुलायम सिंह यादव के जमाने वाले अलग-अलग जाति समूहों के कद्दावर नेता। अखिलेश के साथ अब बेनी प्रसाद वर्मा, जनेश्वर मिश्र, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह, भगवती सिंह, सलीम इकबाल शेरवानी हैं, न आजम खां। इनकी सेल्फ सेंटर्ड राजनीति ने सपा का दिवाला पीटकर रख दिया, क्योंकि वह वह अपने आगे किसी को खड़ा नहीं होने देना चाहते।" "भाजपा ने मुफ्त राशन, कोरोना वैक्सीन, नमक, तेल, पैसा के अलावा छुट्टा पशुओं को पकड़वाने का अभियान चलावाकर वोटरों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की, जबकि अखिलेश इस 'ग़ुस्से' को और भड़काने तथा चुनावी हवा का रुख अपनी तरफ मोड़ने में कामयाब नहीं हो सके। कोरोना के संकटकाल में अखिलेश लोगों के बीच होते और उनके आंसुओं को पोछा होता तो जनता में यह भरोसा जरूर पैदा होता। अखिलेश बहुत देर से चुनावी मैदान में कूदे। इससे पहले मुफ्त राशन के साथ नमक का हक अदा करने की बात हर गरीब की झोपड़ी तक पहुंच गई थी। सपा का बेहद लचर और कमजोर संगठन भाजपा की नमक वाली मुहिम को बेअसर करने में नाकाम साबित हुआ।" अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
बनारस का एक छोटा सा गांव है ढखवां। शहर से करीब पच्चीस किमी दूर। निषाद समुदाय की बस्ती। यहीं रहती हैं पैंतालीस वर्षीय तारा देवी। इनके घर पर भाजपा का झंडा अब भी लहरा रहा है। यह झंडा भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि समूचा परिवार भाजपाई है। तारा के कच्चे मकान के आगे दो बोरे में रखे उपलों को देखकर हमने सवाल किया, "रसोई गैस नहीं है क्या?" इस सवाल पर तारा देवी थोड़ी ठिठकीं। कहा, "हुजूर, महंगाई बहुत है। जब सब्जी के लिए तेल ही नहीं है तो रसोई गैस के लिए हजार रुपये कहां से लाएंगे? कहीं काम भी नहीं मिल रहा है। पाई-पाई के लिए मोहताज हैं।" महंगाई है, बेरोजगारी है और जिंदगी भी कठिन है। फिर वोट किसे दिया? तारा का जवाब था, "मोदी को...भाजपा को...।" तारा को महंगाई की चिंता साल रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल और तेल के साथ नमक भी दे रही है। भाजपा को वोट नहीं देते तो नमकहराम ही तो कहे जाते...।हमारी बिरादरी पहले से ही भाजपा के साथ थी। समूची निषाद बस्ती ने कमल की बटन दबाई, फिर हम दूसरों को वोट कैसे देते?" ढखवां गांव के बीचो-बीच तारा का आधा मकान कच्चा है, आधा पक्का। कई बरस पहले इंदिरा आवास योजना के तहत इन्हें एक छोटा सा कमरा मिला था। दशकों बीत गए, पर उसपर सीमेंट-बालू का पलस्तर नहीं चढ़ सका। तारा बताती हैं, "चुनाव में कोई नेता हमारा दुखड़ा सुनने नहीं आया। निषाद बिरादरी के कुछ लोग भाजपा के लिए वोट मांगने जरूर आए। नए और पक्के मकान का भरोसा दे गए हैं। देखिए कब बनता है?" तारा के पास खड़ीं उनकी देवरनी माधुरी देवी भी यही बात दुहराती हैं। वह कहती हैं, " हमारी बेटी विकलांग हैं। दुश्वारियां ज्यादा हैं। हमें सरकार से नहीं प्रधान से ज्यादा शिकायत है। हम जानते हैं कि पांच किलो राशन से जिंदगी नहीं चलेगी। हमारी असल समस्या नाली की है। चुनाव लड़ने वाले जीतकर चले गए। अब भला हमें कौन पूछेगा? नमक का हक अदा करने के लिए सभी ने भाजपा को वोट दिया तो हमने भी कमल का बटन दबाया।" दरअसल बनारस शहर से करीब पच्चीस किमी दूर है ढखवां बस्ती। गंगा के किनारे बसी इस बस्ती को डाल्फिन मछलियों की वजह से भी जाना जाता है। यूपी सरकार इस गांव को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कर रही है। यहां गंगा के किनारे मंदिरों की श्रृंखला है और उसके ठीक नीचे गंगा, जिसकी मझधार में डाल्फिन मछलिया हर वक्त करतब दिखलाती रहती हैं। निषाद बस्ती के लोग पर्यटकों को नौका विहार कराते हुए डाल्फिन मछलियों का करतब दिखाया करते हैं। नौकायन ही इस बस्ती के तमाम युवकों की आजाविका का साधन है। ढखवां बस्ती के लोगों की जिंदगी में अनगिनत मुश्किलें हैं, लेकिन नमक का कर्ज उतारने के लिए सत्तारूढ़ दल को वोट देने में इन्हें तनिक भी एतराज नहीं है। ढखवां की कांति देवी को इस बात ज्यादा चिंता है कि गंगा कटान के चलते उनका घर नदी में समा जाने की कगार पर पहुंच गया है। कांति कहती हैं, "नाला बन जाता तो हमारा घर बच जाता। चुनाव बीत गया और अब हम किसे खोजेंगे? गद्दी पर बैठने के बाद भला कौन आता है। महंगाई चपी हुई है। बारह किलो सरकारी राशन मिलता है, जिसमें से दो किलो कोटे वाला काट लेता है। आखिर कहां लगाएं गुहार और किससे करें फरियाद। हमने नमक का कर्ज अदा किया है तो मोदी को भी हमारी चिंता होनी ही चाहिए।" ढखवां के पास है चंद्रावती गांव। वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर स्थित इस गांव के ज्यादतर मकानों पर भाजपा के झंडे अभी तक लहरा रहे हैं। यहां मिले विजय कुमार मौर्य। ये कृषक सेवा केंद्र चलाते हैं। इनका समूचा परिवार भाजपाई है, लेकिन इन्हें मोदी-योगी की रीति-नीति पसंद नहीं है। विजय कहते हैं, "हमें समझ में नहीं आ रहा है कि लोग भाजपा के पीछे क्यों भाग रहे हैं? मुफ्त का राशन लोगों को काहिल बना रहा है। यही राशन जब गुलाम बना देगा तब क्या होगा? डबल इंजन की सरकार अगर सचमुच गरीबों का हित चाहती है तो मुफ्त की रोटी नहीं, रोजगार दे। हर आदमी को काम दे, तभी अच्छा समाज बनेगा। महंगाई आसमान छू रही है। समूचे बनारस में साड़ों का जखेड़ा घूम रहा है। फिर भी झूठा दावा किया जा रहा है कि किसानों की आदमनी दोगुनी होगी। मुफ्त का राशन और नमक देकर गरीबों को भरमाया जा रहा है। किसानों, मजदूरों और गरीबों का भ्रम टूटेगा तो तब क्या होगा?" दरअसल, विजय कुमार मौर्य शिक्षित हैं और सपन्न भी। वह कहते हैं, "मतगणना से पहले तक हमें यकीन नहीं था कि अबकी भाजपा फिर सत्ता में आएगी। हमारी बस्ती में साइकिल को वोट भी पड़े, पर समझ में नहीं आया कि भाजपा कैसे चुनाव जीत गई? बड़ी संख्या में लोगों ने चुपके से भाजपा को वोट दे दिया। हमें भी यही लगता है कि भाजपा के नमक बांटने की युक्ति सबसे ज्यादा कारगर साबित हुई।" चंद्रावती में कृषक सेवा केंद्र पर यूरिया उर्वरक खरीदने पहुंचे थे उगापुर के लालजी यादव। लालजी पहड़िया मंडी में पल्लेदारी का काम करते हैं। इन्हें लगता है कि भाजपा ईमानदारी से चुनाव नहीं जीती है। चुनाव में गड़बड़झाला हुआ है। वह सवाल करते हैं कि नमक खिलाकर कोई उसका हक अदा करने की बात भला कौन करता है? लालजी कहते हैं, "चुनाव से पहले बनारस से लगायत कैथी तक सड़क के किनारे आवारा पशुओं का जखेड़ा घूमा करता था। इलेक्शन में सांड जब मुद्दा बनने लगे तो वो अचानक गायब कैसे हो गए? गांवों में बने ज्यादातर गो-आश्रय स्थल भी खाली हैं। गौर करने वाली बात यह है कि किसानों के लिए दिन-रात जी का जंजाल बने ये सांड़ आखिर लापता कैसे हो गए?" लालजी से सवालों का जवाब नियार गांव के बेचन सिंह देते हैं। वह बताते हैं, "पूर्वांचल जब इलेक्शन में आया तो शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने विकास भवन में छुट्टा पशुओं के बाबत नियंत्रण कक्ष खोल दिया। वहां ढेरों शिकायतें पहुंचीं तो छुट्टा पशुओं की धर-पकड़ का अभियान चला। पकड़े गए आवारा पशु कहां रखे गए हैं, यह तो नहीं मालूम, लेकिन उनके आतंक से छोड़ी राहत जरूर मिली है?" कैथी गांव में उगापुर के चौंतीस वर्षीय राज कुमार गोंड एक किसान के यहां काम में जुटे थे। इनके पांच बच्चे हैं। वो बताते हैं, "पूर्वांचल में गोंड समाज की आबादी काफी कम है। सपा ने हमारी बिरादरी को कभी अहमियत नहीं दी। चुनाव के समय भी और चुनाव से पहले भी। इसका मतलब यह नहीं है कि हम कई पीढ़ियों तक सामंतों की गुलामी करते रहें। भाजपा सरकार आई तो हमें आवास मिला और राशन भी। बाबा के बुल्डोजर की सुरक्षा भी मिली। हमारी बिरादरी तो पहले से ही ऐसी है कि जिसका नमक खाती है, उसका हक भी अदा करती है। धरसौना, चोलापुर, दानगंज, हाजीपुर, दमड़ीपुर, रौना गोड़ बिरादरी बहुतायत है और चलकर पूछ लीजिए, हमने मोदी के नमक का हक अदा किया है या नहीं? गोंड समाज ने तो थोक में भाजपा को वोट डाला। सपा तो सिर्फ हवा में ही चुनाव लड़ रही थी, जो हार गई।" कैथी पुल के पास फूलों की माला बेचने वाले छित्तनपुर के अड़तालीस वर्षीय बरसाती सोनकर को लगता है कि सपा ने ज्यादातर अयोग्य और नाकारा प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया। खासतौर पर उन्हें जिनके पांव जमीन पर कभी दिखे ही नहीं। सपा प्रत्याशी सुनील सोनकर कभी वोट मांगने आए ही नहीं तो फिर उन्हें वोट क्यों दे देते। इन्हीं के पास फूलों की माला बेचने वाले सोनू सोनकर भाजपा सरकार के कामकाज पर सवाल खड़ा करते मिले। वह कहते हैं, "पूर्वांचल में मुफ्त के राशन और नमक पर लोग फिदा है। लोगों को यह पता नहीं कि सरकार एक ओर देती है तो दूसरी तरफ से वह पैसा गरीबों की जेब से ही खींच लेती है। चाहे खाने-पीने का सामान महंगा करके या फिर डीजल-पेट्रोल का दाम बढ़ाकर। मीडिया भी निष्पक्ष नहीं। वो भी भाजपा सरकार की भाषा ही बोलती है। किस पर यकीन करें और किसपर नहीं? हम तो दिन भर फूलों की माला बेचते हैं, तब मुश्किल से कमा पाते हैं दो-ढाई सौ रुपये।" बनारस के जाने-माने समाजसेवी बल्लभ पांडेय के घर मिले बलिया के रेवती निवासी विजय कुमार पांडेय। इन्होंने कुछ ही देर में चुनावी नक्शा खींच दिया। साफ-साफ कहा, "इलेक्शन जीतना भी एक ट्रिक है। हमें लगता है कि भाजपा के नमक का ट्रिक सबसे असरदार रही। हालांकि सियासी निजाम को देखेंगे तो पाएंगे कि यूपी में हर आठवां विधायक ब्राह्मण है। कम आबादी के बावजूद चार सौ तीन सीटों में बावन ब्राह्मण और छियालीस ठाकुर विधायक बने। कुर्मी समाज के लोग गोलबंद हुए तो इस बिरादरी के इकतालीस विधायक चुनाव जीत गए, जबकि इनसे ज्यादा आबादी होने के बावजूद यादव बिरादरी के सिर्फ सत्ताईस विधायक चुने गए। यूपी में चौंतीस मुसलमान, उनतीस जाटव-पासी जीते। वैश्य समुदाय के बाईस, लोध अट्ठारह, जाट पंद्रह, मौर्य-कुशवाहा चौदह निषाद, कश्यप, बिंद मल्लाह सात, तेली, कलवार, सोनार जातियों के छह, गुर्जर सात, भूमिहार पांच, राजभर चार, खटिक पांच, कायस्थ तीन के अलावा सिख व वाल्मीकि समुदाय के लोग एक-एक सीट पर काबिज हुए हैं। वैश्य, ब्राह्मण, राजपूतों के अलावा ज्यादातर गैर-यादव पिछड़ों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया, जिससे भाजपा का मतदान तैंतालीस फीसदी तक पहुंच गया।" विजय कुमार पांडेय कहते हैं, "आवास और राशन के साथ बांटे जाने वाले नमक ने इस चुनाव में अहम भूमिका अदा की। खासतौर पर महिलाओं ने नमक का हक अदा किया। अति-पिछड़ी जातियां इसलिए भाजपा के पक्ष में लामबंद हुई क्योंकि उसने लगातार पांच साल तक दलितों और पिछड़ों के घरों में पहुंचकर हिन्दुत्व और देशभक्ति की अलख जगाई। कोई ऐसी बिरादरी नहीं थी, जिनके बीच भाजपा और उनके अनुषांगिक संगठन आरएसएस व विहिप के लोग न गए हों। सपा नेता तो तब दिखे जब इलेक्शन नजदीक आया। पता ही नहीं चला कि वो साढ़े चार साल कहां गायब थे? सपा के खाते में जितनी भी सीटें आईं वो किसान आंदोलन की बदौलत आईं। योगी के बुल्डोजर पर ज्यादा लोग रीझे। सपा ने टिकट भी बांटा तो ऐसे जैसे कोटे की दुकान में गेहूं-चीनी बिकती है। सपा के जो नेता टिकट के लिए महीनों से मुंह बाए खड़े थे, वो निराश लौटे तो भी उनका गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। सपा की अंतर्कलह उसके प्रत्याशियों की नाव डुबोता चला गया। हमें लगता है कि अखिलेश ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव से सिर्फ राजनीतिक दांव-पेंच ही नहीं एक बुरी आदत भी सीखी है। उनके इर्द-गिर्द अब चाटुकारों की एक बड़ी फौज रहती है, जिसके चलते साइकिल का पहिया पंचर होता जा रहा है। अखिलेश को अगर सचमुच लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो चाटुकारों से उन्हें थोड़ी दूरी बनानी होगी।" कारवां मैग्जीन में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो सुनील कश्यप पूर्वांचल समेत समूचे उत्तर प्रदेश में खासतौर पर उन जातियों पर काम करते हैं जो समाज के आखिरी पायदान पर खड़ी हैं। वह कहते हैं, "गरीब तबके के लोगों में नमक ने ज्यादा काम किया। समाज में अभी भोले-भाले लोग ज्यादा हैं। लोग मानते हैं कि जिसका नमक खा लिया है तो उसे अदा करना है। जहां नेता वादे करके तोड़ते हैं, लेकिन गरीब तबका नमक की अदायगी में भी वफादारी दिखाता है। इस चुनाव में नमक की अदायगी का फैक्टर बहुत बड़ा था। चुनाव के समय मैं बनारस में था और एक रिक्शावाले से सवाल किया कि वो वोट किसे देगा? तो उसने तपाक से जवाब दिया कि जिसका नमक खा रहे हैं, उसकी अदायगी तो करनी ही होगी। इलेक्शन से पहले ही यह बात साफ हो गई थी कि नमक की बात बहुत अंदर तक पहुंच चुकी थी।" ये भी देखेंः यूपी में हिन्दुत्व की जीत नहीं, ये नाकारा विपक्ष की हार है! "कास्ट फैक्टर को लेकर जो काम कांशीराम ने किया, भाजपा ने उससे एक कदम आगे बढ़कर गरीब जातियों के उत्थान के लिए काम किया। सरकार ने माटी कला बोर्ड बनाकर कुम्हारों के बीच काम किया तो भेड़ कला बोर्ड बनाकर गड़ेरिय़ों को अपने साथ जोड़ा। इसी तरह नाइयों के लिए केश कला बोर्ड बनाया तो लोहार समुदाय के लिए विश्वकर्मा कला बोर्ड। निषादों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिया। अपनी पहचान के साथ ये जातियां जल्दी खड़े हो गईं। साल दो हज़ार चौदह के बाद भाजपा के साथ ये जातियां जुड़ीं तो फिर बाद में हटी नहीं। इन जातियों में असुरक्षा का डर ज्यादा समाया रहता है। इनके लिए सामाजिक सुरक्षा एक बड़ा सवाल था, जिसके चलते गरीब तबके के लोगों ने योगी के बुल्डोजर पर ज्यादा भरोसा किया। हिंदू वर्ण व्यवस्था में निचले पायदान में होने के बावजूद, भाजपा के प्रति गैर-यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों का आकर्षण पहचान की राजनीति के फॉल्ट लाइन की ओर इशारा करता है।" सुनील यह भी कहते हैं, "सामाजिक तौर पर जो जातियां सबसे निचले पायदान पर हैं उनके लिए अनाज और सुरक्षा सबसे बड़ी चीज है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके पास खेती-किसानी नहीं है। साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे के बाद लोहार, बढ़ई, कुम्हार समुदाय को जजमानी के तौर पर हर साल मिलने वाला अनाज बंद हो गया था। गांवों में काम करने वाले शिल्पकारों को किसान पहले एक बार अनाज देते थे, जिससे उनकी आजीविका चला करती थी। कोरोना के संकटकाल में जब उनके सामने भोजन का संकट पैदा हुआ तो मुफ्त का अनाज ही जिंदा रहने का सबसे बड़ा जरिया बना। यह आरोप गलत है कि गरीब तबके के लोग पांच किलो अनाज पर बिक गए। सच यह है कि खाना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है। दूसरी बात, यूपी में ऐसी तमाम जातियां हैं जिनकी आबादी अंगुलियों पर गिनी जा सकती है। इन्हें न गांवों में सम्मान मिलता है और न ही ये ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य और ब्लाक प्रमुख बन पाते हैं। दूसरे समुदायों के मुकाबले ये पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत पीछे हैं। ऐसे में इनके लिए पांच किलो राशन के साथ नमक की प्रतिबद्धता बड़ी चीज है।" पत्रकार सुनील कश्यप बताते है कि उन्होंने यूपी चुनाव से पहले उस फॉल्ट लाइन को समझने की कोशिश की तो पता चला कि भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी जातियों को ज्यादा अहमियत दी। खासतौर पर वो जातियां दो पीढ़ियों से दस्तकारी किया करती थीं। यूपी में इन जातियों में राजनीतिक और सामाजिक चेतना कांशीराम ने पैदा की तो उन्होंने भी अपने नायकों की तलाश शुरू कर दी। यादवों ने भगवान कृष्ण में अपने नायक को पाया तो कुर्मियों ने सत्रहवीं शताब्दी के मराठा राजा शिवाजी और शाहुजी महाराज को अपना नायक माना। इसी तरह देश के पहले गृहमंत्री वल्लभभाई पटेल के साथ कांग्रेस पार्टी की एक काल्पनिक नाइंसाफी की कहानी पटेल समाज को बीजेपी से जोड़ती है।" "मल्लाह जाति ने भी रामायण की कथा में राम को सरयू पार कराने वाले केवट में अपना नायक खोज लिया। ओबीसी मौर्य-कुशवाहा, शाक्य-सैनी ने पौराणिक पात्रों में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पात्रों में अपने-अपने नायक खोजे। इन्होंने अपनी पहचान पहले बुद्ध, चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक से मिलाई और फिर अपनी परंपरा के तार उन्नीसवीं शताब्दी के सामज सुधारक ज्योति राव फुले से जोड़ा। बुद्ध को अपना आदर्श मानने वाले मौर्य-कुशवाहा को बसपा के आंदोलन ने सामाजिक क्षितिज पर पहचान दिलाई। साल दो हज़ार बारह में इन्होंने समाजवादी पार्टी का साथ दिया। साल दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य की मजबूत साख के चलते भाजपा को वोट दिया। गैर-यादव ओबीसी में कुर्मी और लोध पहले से ही भाजपा के साथ थे। गैर-यादव ओबीसी जातियों में मौर्य-कुशवाहा आरएसएस व बाह्मणों के सबसे प्रबल विरोधी हैं, लेकिन राजनीतिक भागेदारी की चाहत ने इन्हें साल दो हज़ार सत्रह, दो हज़ार उन्नीस और अब दो हज़ार बाईस में भाजपा और आरएसएस के करीब ला दिया।" सुनील के मुताबिक, "भाजपा ने कश्यप, निषाद, गडेरिया, राजभर, चौहान और जायसवाल जैसी जातियों को रामायण और अन्य हिंदू कथाओं की छद्म परंपराओं के साथ गूंथ कर एक ऐसी माला तैयार की है जो सामाजिक न्याय की उसी मांग को ध्वस्त कर देती है जिसका पहला ही लक्ष्य ब्राह्मणवादी ऊंच-नीच से मुक्त होकर बराबरी वाले समाज का निर्माण करना है। गडेरिया जातियों को लुभाने के लिए भाजपा ने इस समाज की कुलदेवी महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को काशी विश्वनाथ धाम में जगह देकर इस समाज के लोगों का दिल जीतने का काम किया है। अब से पहले तक कोई भी राजनीतिक दल गडेरिया समाज को यह प्रतिष्ठा और सम्मान नहीं देता था। गडेरिया समाज आमतौर पर पाल, बघेल, धनगर उपनामों से जाना जाता है। इसी तरह चौहानों को पाले में करने के लिए बीजेपी ने ऐतिहासिक नायक पृथ्वीराज चौहान का दामन थामा। बारहवीं शताब्दी के अफगान शासक मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के राजनीतिक संघर्ष की ऐतिहासिक और लोक गाथाओं को भाजपा ने यूपी के चौहानों को अपने हिंदुत्व के उद्देश्यों के साथ जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया। यूपी में एक अन्य ओबीसी जाति है कहार, धीवर, कश्यप। खांडसारी का कारोबार करने वाली ये जातिया हमेशा से उपेक्षित रही हैं। माना जाता है कि कश्यप समाज की जातियों का रुख जिस भी पार्टी की तरफ हुआ है वह पार्टी सत्ता में जरूर पहुंची है। इस बार के यूपी चुनाव में सत्रह वो जातियां निर्णायक साबित हुईं, जिन्हें अनुसूचित जाति में शामिल करने के मामले में अदलती रोक लगा दी गई है।" पिछड़ों में राजभर समाज सियासी तौर अब उठ खड़ा हुआ है। भाजपा ने महाराजा सुहेलदेव राजभर के नाम पर ट्रेन चलाई और डाक टिकट जारी किया। साथ ही बहराइच में सुहेलदेव राजभर की युद्धस्थली में सुहेलदेव का मंदिर और कुठला झील को इस योद्धा के शौर्य और पराक्रम की स्मृतियों के तौर पर संजोने का कार्य शुरू किया। भाजपा ने निषाद, प्रजापति और जायसवाल जैसी गैर-ओबीसी जातियों को भी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देकर वृहद ओबीसी एकता से दूर रखा, जो इस चुनाव में उसके लिए संजीवनी साबित हुई। हालांकि गैर-यादव अन्य पिछड़ा जातियों में सिर्फ जायसवाल ऐसी जाति है जिसके साथ बीजेपी का संबंध ज्यादा पुराना है। इस ओबीसी जाति के साहू, गुप्ता, तेली, हलवाई, कलवार, कलार और अन्य का सभी शहरों की व्यापार मंडलियों पर कब्जा है। नोटबंदी और बाद में जीएसटी से इस तबके को सर्वाधिक नुकसान हुआ, फिर भी भाजपा से इनका मोहभंग नहीं हुआ। बनारस के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार कहते हैं, "सपा सुप्रीमो अपने चुनावी रथ पर सावर होकर समूची यूपी नाप आए, लेकिन उनकी भीड़ से निकला संदेश गांवों और समाज के आखिरी आदमी तक नहीं पहुंच सका। एक सौ ग्यारह सीटें लेकर सपा गुमान कर सकती है, लेकिन यह नतीजा भविष्य के लिए सुखद नहीं है। अखिलेश के साथ अब न मीडिया है और न ही मुलायम सिंह यादव के जमाने वाले अलग-अलग जाति समूहों के कद्दावर नेता। अखिलेश के साथ अब बेनी प्रसाद वर्मा, जनेश्वर मिश्र, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह, भगवती सिंह, सलीम इकबाल शेरवानी हैं, न आजम खां। इनकी सेल्फ सेंटर्ड राजनीति ने सपा का दिवाला पीटकर रख दिया, क्योंकि वह वह अपने आगे किसी को खड़ा नहीं होने देना चाहते।" "भाजपा ने मुफ्त राशन, कोरोना वैक्सीन, नमक, तेल, पैसा के अलावा छुट्टा पशुओं को पकड़वाने का अभियान चलावाकर वोटरों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की, जबकि अखिलेश इस 'ग़ुस्से' को और भड़काने तथा चुनावी हवा का रुख अपनी तरफ मोड़ने में कामयाब नहीं हो सके। कोरोना के संकटकाल में अखिलेश लोगों के बीच होते और उनके आंसुओं को पोछा होता तो जनता में यह भरोसा जरूर पैदा होता। अखिलेश बहुत देर से चुनावी मैदान में कूदे। इससे पहले मुफ्त राशन के साथ नमक का हक अदा करने की बात हर गरीब की झोपड़ी तक पहुंच गई थी। सपा का बेहद लचर और कमजोर संगठन भाजपा की नमक वाली मुहिम को बेअसर करने में नाकाम साबित हुआ।" अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा में शुक्रवार को सूजुकी मोटर्स की ओर से गुजरात स्थित स्टेट आफ आर्ट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए कैंपस प्लेसमेंट का आयोजन किया गया। इसमें मोटर मेकेनिक, फीटर, टर्नर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, वायरमैन ट्रेड्स के करीब 150 प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान लिखित और मौखिक परीक्षा के आधार पर 35 प्रशिक्षु सुजुकी प्लांट के लिए चयनित हुए। चयनित प्रशिक्षुओं को मौके पर कंपनी की ओर से ऑफर लैटर प्रदान किया गया। इन चयनित अभ्यर्थियों को 19400 मासिक कुल वेतन दिया जाएगा। कंपनी की तरफ से एक हजार रुपए मासिक शुल्क पर होस्टल की सुविधा उपलब्ध होगी। प्लांट में आठ घंटे की ड्यूटी ली जाएगी। प्रशिक्षुओं से कोई ओवरटाइम नहीं करवाया जाएगा। यह नियुक्तियां आरम्ंा में सात महीने तक तदर्थ आधार पर कंपनी रोल पर रहेंगी। इसके उपरांत संतोषजनक कार्य होने पर अभ्यर्थियों की सेवाओं को नियमित किया जाएगा। संस्थान के प्लेसमेंट सेल के अधिकारी वेद प्रकाश महाजन और सुषमा कुमरी ने बताया कि सूजुकी मोट्र्स द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को प्लांट में ज्वाइंन करने के लिए चंबा से गुजरात प्लांट तक के लिए स्पेशल बस सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। उधर, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा के प्रधानाचार्य विपिन शर्मा ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने बताया कि परिसर में आगामी दिनों में भी नामी कंपनियों के कैंपस प्लेसमेंट का आयोजन करवाकर युवाओं को रोजगार मुहैया करवाया जाएगा।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा में शुक्रवार को सूजुकी मोटर्स की ओर से गुजरात स्थित स्टेट आफ आर्ट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए कैंपस प्लेसमेंट का आयोजन किया गया। इसमें मोटर मेकेनिक, फीटर, टर्नर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, वायरमैन ट्रेड्स के करीब एक सौ पचास प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान लिखित और मौखिक परीक्षा के आधार पर पैंतीस प्रशिक्षु सुजुकी प्लांट के लिए चयनित हुए। चयनित प्रशिक्षुओं को मौके पर कंपनी की ओर से ऑफर लैटर प्रदान किया गया। इन चयनित अभ्यर्थियों को उन्नीस हज़ार चार सौ मासिक कुल वेतन दिया जाएगा। कंपनी की तरफ से एक हजार रुपए मासिक शुल्क पर होस्टल की सुविधा उपलब्ध होगी। प्लांट में आठ घंटे की ड्यूटी ली जाएगी। प्रशिक्षुओं से कोई ओवरटाइम नहीं करवाया जाएगा। यह नियुक्तियां आरम्ंा में सात महीने तक तदर्थ आधार पर कंपनी रोल पर रहेंगी। इसके उपरांत संतोषजनक कार्य होने पर अभ्यर्थियों की सेवाओं को नियमित किया जाएगा। संस्थान के प्लेसमेंट सेल के अधिकारी वेद प्रकाश महाजन और सुषमा कुमरी ने बताया कि सूजुकी मोट्र्स द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को प्लांट में ज्वाइंन करने के लिए चंबा से गुजरात प्लांट तक के लिए स्पेशल बस सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। उधर, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा के प्रधानाचार्य विपिन शर्मा ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने बताया कि परिसर में आगामी दिनों में भी नामी कंपनियों के कैंपस प्लेसमेंट का आयोजन करवाकर युवाओं को रोजगार मुहैया करवाया जाएगा।
जातीय जनगणना को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गर्माने लगी है। विपक्ष दलों के इस मुद्दे पर लगातार बयानों के बाद अब बीजेपी भी आक्रामक रुख अपनाने को तैयार में है। बता दें कि जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पहले कर्नाटक में राहुल गांधी ने इसके समर्थन में बयान दिया और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसको लेकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी। हालाँकि बीजेपी ने इससे निपटने के लिए अपना प्लान तैयार कर लिया है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी जातिगत जनगणना पर कांग्रेस के दोहरे मानदंडों का पर्दाफाश करने के लिए प्लान तैयार कर चुकी है। पार्टी का मानना है कि जातिगत जनगणना मुद्दे पर कांग्रेस बीजेपी पर दबाव डालने का प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के मुताबिक 1951 में जब अनौपचारिक रूप से जाति जनगणना की बात उठी थी तब बतौर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उसका विरोध किया था। बाद में 27 जून 1961 को मुख्यमंत्रियों के लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने आरक्षण को लेकर राजनीति पर चिंता जताई थी। इस पत्र में नेहरू ने आगाह किया था कि देश को नंबर वन बनना है तो प्रतिभा को आगे बढ़ाना होगा। बाद में इंदिरा गांधी ने भी जातिगत आधार पर आरक्षण देने की सिफारिश करने वाली मंडल कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की थी। इंदिरा गांधी सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। भाजपा ने अपने प्रवक्ताओं के लिए तैयार एक नोट में बीजेपी ने लिखा है कि इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद राजीव सरकार ने भी मंडल आयोग की रिपोर्ट पर अमल नहीं किया था। केवल यही नहीं, जब वीपी सिंह सरकार ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया तो बतौर नेता विपक्ष राजीव गांधी ने इसे देश को बांटने का प्रयास बताया था और कहा था कि यह प्रयास अंग्रेजों के प्रयास से अलग नहीं है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के इस आंतरिक नोट में लिखा गया है कि बतौर गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने 2010 में तत्कालीन कानून मंत्री वीरप्पा मोइली को नेहरू की सोच के बारे में बताया था और जातिगत जनगणना की मांग के गंभीर परिणाम के प्रति चेताया था। पे नाऊ पर क्लिक करे।
जातीय जनगणना को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गर्माने लगी है। विपक्ष दलों के इस मुद्दे पर लगातार बयानों के बाद अब बीजेपी भी आक्रामक रुख अपनाने को तैयार में है। बता दें कि जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पहले कर्नाटक में राहुल गांधी ने इसके समर्थन में बयान दिया और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसको लेकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी। हालाँकि बीजेपी ने इससे निपटने के लिए अपना प्लान तैयार कर लिया है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी जातिगत जनगणना पर कांग्रेस के दोहरे मानदंडों का पर्दाफाश करने के लिए प्लान तैयार कर चुकी है। पार्टी का मानना है कि जातिगत जनगणना मुद्दे पर कांग्रेस बीजेपी पर दबाव डालने का प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के मुताबिक एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में जब अनौपचारिक रूप से जाति जनगणना की बात उठी थी तब बतौर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उसका विरोध किया था। बाद में सत्ताईस जून एक हज़ार नौ सौ इकसठ को मुख्यमंत्रियों के लिखे पत्र में पंडित नेहरू ने आरक्षण को लेकर राजनीति पर चिंता जताई थी। इस पत्र में नेहरू ने आगाह किया था कि देश को नंबर वन बनना है तो प्रतिभा को आगे बढ़ाना होगा। बाद में इंदिरा गांधी ने भी जातिगत आधार पर आरक्षण देने की सिफारिश करने वाली मंडल कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की थी। इंदिरा गांधी सरकार ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। भाजपा ने अपने प्रवक्ताओं के लिए तैयार एक नोट में बीजेपी ने लिखा है कि इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद राजीव सरकार ने भी मंडल आयोग की रिपोर्ट पर अमल नहीं किया था। केवल यही नहीं, जब वीपी सिंह सरकार ने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया तो बतौर नेता विपक्ष राजीव गांधी ने इसे देश को बांटने का प्रयास बताया था और कहा था कि यह प्रयास अंग्रेजों के प्रयास से अलग नहीं है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के इस आंतरिक नोट में लिखा गया है कि बतौर गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दो हज़ार दस में तत्कालीन कानून मंत्री वीरप्पा मोइली को नेहरू की सोच के बारे में बताया था और जातिगत जनगणना की मांग के गंभीर परिणाम के प्रति चेताया था। पे नाऊ पर क्लिक करे।
यमुना के बढ़ते जलस्तर ने दिल्ली की चिंताएं बढ़ाई हैं, पिछले 3 दिनों से अलग-अलग हिस्सों में पानी भरा हुआ है. यमुना से सटे इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं. दिल्ली में पिछले तीन दिनों से बाढ़ के हालात हैं, राजधानी का एक बड़ा हिस्सा इस वक्त जलमग्न हो गया है. पहले लगातार हुई बारिश और फिर यमुना के बढ़े जलस्तर ने दिल्ली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एक तरफ दिल्ली में लोग इस मुश्किल से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर राजनीति भी हावी है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर दिल्ली में जानबूझकर बाढ़ जैसे हालात बनाने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि जो पानी यूपी में जाना चाहिए, उसे भी दिल्ली में डायवर्ट किया जा रहा है. दरअसल, दिल्ली में यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की वजह से निचले इलाकों में पानी भर रहा है. कश्मीरी गेट से लेकर आईटीओ और राजघाट तक हालात खराब हैं. इस बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसके जरिए दावा किया गया है कि हथिनीकुंड बैराज से दिल्ली में ज्यादा पानी भेजा जा रहा है, जबकि यूपी वाला हिस्सा सूखा पड़ा है. ये भी पढ़ेंः दिल्ली की बाढ़ ने क्यों याद दिलाया मुगलकाल? संजय सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली की बाढ़ में केंद्र सरकार की साजिश है, जब दिल्ली में बारिश नहीं हो रही है तो जानबूझकर पानी छोड़कर ऐसे हालात क्यों बनाए जा रहे हैं. संजय सिंह ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें एक व्यक्ति हथिनीकुंड बैराज का नज़ारा दिखाता है, जिसमें दिल्ली की ओर पानी छोड़ा जा रहा है जबकि यूपी जाने वाली नहर खाली है. हथनीकुण्ड बैराज से लोगों ने वीडियो बनाकर भेजा है जिसमें साफ़-साफ़ दिख रहा है कि BJP ने साज़िश के तहत यमुना का सारा पानी दिल्ली में भेजा है। जबकि उनके पास यूपी के सहारनपुर वाली नहर में पानी भेजने का विकल्प था तो क्यों नहीं भेजा ? मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 12 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी थी. इसमें उन्होंने हथिनीकुंड बैराज से कम गति से पानी छोड़ने की अपील की थी, ताकि दिल्ली में पानी ना भर सके. बता दें कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर 209 मीटर के करीब पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 204 मीटर के करीब है. गुरुवार को यह स्तर पीक पर जाने के बाद शुक्रवार को कुछ हदतक कंट्रोल में आया, लेकिन राजधानी में हालात अभी तक सुधरे नहीं हैं. यूपी को बचाया, दिल्ली को डुबाया? दरअसल, दिल्ली की यमुना में जो पानी आता है वह हथिनीकुंड बैराज के रास्ते आता है. हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा जाता है जो यमुना में जाता है. राजधानी से करीब 250 किमी. दूर इस बैराज से दो हिस्सों में पानी भेजा जाता है, एक हिस्सा दिल्ली की ओर बढ़ता है जो राजधानी को पार करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाता है और मथुरा से मिलता है. हथिनीकुंड बैराज का एक हिस्सा सहारनपुर, शामली और बागपत होते हुए आगे बढ़ता है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि हरियाणा सरकार द्वारा हथिनीकुंड से सारा पानी दिल्ली वाली नहर में छोड़ा जा रहा है, यही वजह है कि दिल्ली में यमुना इस तरह तांडव मचा रही है. हालांकि, पश्चिमी यूपी के भी कुछ इलाकों में यमुना में बढ़ते जल की वजह से पानी भरने की खबरें आई हैं. नोएडा, सहारनपुर में यमुना से सटे कुछ हिस्सों में जलजमाव हुआ था और कॉलोनियों में पानी भर गया था. सहारनपुर के कई गांवों में पानी पहुंचने की वजह से सरकार द्वारा राहत बचाव का काम भी किया जा रहा है. कैसे काम करता है हथिनीकुंड बैराज? हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज अक्सर सुर्खियों में बना रहता है. पहाड़ों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हुई तो पानी का बहाव तेज हो गया, जिसकी वजह से भारी मात्रा में हथिनीकुंड बैराज पर पानी आया. क्योंकि यह एक बांध नहीं है, इसलिए यहां 10 लाख क्यूसेक से अधिक पानी रोकने की क्षमता नहीं है. ऐसे में यहां से सिर्फ पानी के बहाव की गति ही तय होती है. हथिनीकुंड बैराज पर कुल 18 गेट हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार खोला जाता है. हाल ही में जब भारी बारिश की वजह से पानी आया, तब लगातार यहां से पानी छोड़ा गया जिस वजह से यमुना में पानी के सभी रिकॉर्ड टूट गए. 11 जुलाई को बैराज से दिल्ली की ओर करीब 3 लाख क्यूसेक से अधिक पानी 2 घंटे तक लगातार छोड़ा गया था, जिसका असर ये हुआ कि दिल्ली के निचले इलाके पूरी तरह से प्रभावित हो गए.
यमुना के बढ़ते जलस्तर ने दिल्ली की चिंताएं बढ़ाई हैं, पिछले तीन दिनों से अलग-अलग हिस्सों में पानी भरा हुआ है. यमुना से सटे इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं. दिल्ली में पिछले तीन दिनों से बाढ़ के हालात हैं, राजधानी का एक बड़ा हिस्सा इस वक्त जलमग्न हो गया है. पहले लगातार हुई बारिश और फिर यमुना के बढ़े जलस्तर ने दिल्ली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एक तरफ दिल्ली में लोग इस मुश्किल से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर राजनीति भी हावी है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर दिल्ली में जानबूझकर बाढ़ जैसे हालात बनाने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि जो पानी यूपी में जाना चाहिए, उसे भी दिल्ली में डायवर्ट किया जा रहा है. दरअसल, दिल्ली में यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की वजह से निचले इलाकों में पानी भर रहा है. कश्मीरी गेट से लेकर आईटीओ और राजघाट तक हालात खराब हैं. इस बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसके जरिए दावा किया गया है कि हथिनीकुंड बैराज से दिल्ली में ज्यादा पानी भेजा जा रहा है, जबकि यूपी वाला हिस्सा सूखा पड़ा है. ये भी पढ़ेंः दिल्ली की बाढ़ ने क्यों याद दिलाया मुगलकाल? संजय सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली की बाढ़ में केंद्र सरकार की साजिश है, जब दिल्ली में बारिश नहीं हो रही है तो जानबूझकर पानी छोड़कर ऐसे हालात क्यों बनाए जा रहे हैं. संजय सिंह ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें एक व्यक्ति हथिनीकुंड बैराज का नज़ारा दिखाता है, जिसमें दिल्ली की ओर पानी छोड़ा जा रहा है जबकि यूपी जाने वाली नहर खाली है. हथनीकुण्ड बैराज से लोगों ने वीडियो बनाकर भेजा है जिसमें साफ़-साफ़ दिख रहा है कि BJP ने साज़िश के तहत यमुना का सारा पानी दिल्ली में भेजा है। जबकि उनके पास यूपी के सहारनपुर वाली नहर में पानी भेजने का विकल्प था तो क्यों नहीं भेजा ? मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बारह जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी थी. इसमें उन्होंने हथिनीकुंड बैराज से कम गति से पानी छोड़ने की अपील की थी, ताकि दिल्ली में पानी ना भर सके. बता दें कि दिल्ली में यमुना का जलस्तर दो सौ नौ मीटर के करीब पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान दो सौ चार मीटर के करीब है. गुरुवार को यह स्तर पीक पर जाने के बाद शुक्रवार को कुछ हदतक कंट्रोल में आया, लेकिन राजधानी में हालात अभी तक सुधरे नहीं हैं. यूपी को बचाया, दिल्ली को डुबाया? दरअसल, दिल्ली की यमुना में जो पानी आता है वह हथिनीकुंड बैराज के रास्ते आता है. हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा जाता है जो यमुना में जाता है. राजधानी से करीब दो सौ पचास किमी. दूर इस बैराज से दो हिस्सों में पानी भेजा जाता है, एक हिस्सा दिल्ली की ओर बढ़ता है जो राजधानी को पार करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाता है और मथुरा से मिलता है. हथिनीकुंड बैराज का एक हिस्सा सहारनपुर, शामली और बागपत होते हुए आगे बढ़ता है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि हरियाणा सरकार द्वारा हथिनीकुंड से सारा पानी दिल्ली वाली नहर में छोड़ा जा रहा है, यही वजह है कि दिल्ली में यमुना इस तरह तांडव मचा रही है. हालांकि, पश्चिमी यूपी के भी कुछ इलाकों में यमुना में बढ़ते जल की वजह से पानी भरने की खबरें आई हैं. नोएडा, सहारनपुर में यमुना से सटे कुछ हिस्सों में जलजमाव हुआ था और कॉलोनियों में पानी भर गया था. सहारनपुर के कई गांवों में पानी पहुंचने की वजह से सरकार द्वारा राहत बचाव का काम भी किया जा रहा है. कैसे काम करता है हथिनीकुंड बैराज? हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज अक्सर सुर्खियों में बना रहता है. पहाड़ों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हुई तो पानी का बहाव तेज हो गया, जिसकी वजह से भारी मात्रा में हथिनीकुंड बैराज पर पानी आया. क्योंकि यह एक बांध नहीं है, इसलिए यहां दस लाख क्यूसेक से अधिक पानी रोकने की क्षमता नहीं है. ऐसे में यहां से सिर्फ पानी के बहाव की गति ही तय होती है. हथिनीकुंड बैराज पर कुल अट्ठारह गेट हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार खोला जाता है. हाल ही में जब भारी बारिश की वजह से पानी आया, तब लगातार यहां से पानी छोड़ा गया जिस वजह से यमुना में पानी के सभी रिकॉर्ड टूट गए. ग्यारह जुलाई को बैराज से दिल्ली की ओर करीब तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी दो घंटाटे तक लगातार छोड़ा गया था, जिसका असर ये हुआ कि दिल्ली के निचले इलाके पूरी तरह से प्रभावित हो गए.
KATIHAR: बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा सरकार आए दिन करती है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतन पड़ रहा है। यह तस्वीर बिहार के कटिहार जिले से आई है जो सरकार के दावों को पोल खोलने का काम कर रही है। सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है जिसके कारण लोग अपने जुगाड़ से अस्पताल तक मरीज को लेकर पहुंच रहे हैं। कोई ठेला तो कोई रिक्शा या ऑटो से मरीज को कटिहार सदर अस्पताल लेकर पहुंचते नजर आते हैं। सदर अस्पताल में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं रहने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कटिहार की दो तस्वीर हम आपकों दिखा रहे हैं। एक तस्वीर में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के हफलागंज निवासी मोहम्मद आलम हैं जो अपनी बीमार मां को ठेले पर लादकर खुद चलाते हुए सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचा। जब आलम से बात की गयी तो पता चला कि एंबुलेंस नहीं मिली तब मजबूरन उसे ठेले से अपनी मां को अस्पताल लाना पड़ा। वही दूसरी तस्वीर भी सदर अस्पताल कटिहार की है जहां आजमनगर से आए मरीज को एम्बुलेंस नहीं मिला। मरीज को सदर अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया था लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीज के परिजन अस्पताल परिसर में भटकते रहे। स्टेचर पर परिजन मरीज को लेकर एम्बुेलेंस का इंतजार करते दिखे। इसे लेकर परिजनों में आक्रोश भी देखने को मिला। बता दें कि कटिहार में कुल 33 एम्बुलेंस है जिसमें 9 खराब है बाकी 24 एम्बुलेंस चालु हालत में है इसके बावजूद लोग इसकी सेवा से वंचित हैं। कटिहार सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था से मरीज के परिजन परेशान हैं इनकी सुध तक लेने वाला कोई नहीं है। बता दें कि भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक यानि CAG की रिपोर्ट ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सामने लाकर रख दी है।
KATIHAR: बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा सरकार आए दिन करती है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतन पड़ रहा है। यह तस्वीर बिहार के कटिहार जिले से आई है जो सरकार के दावों को पोल खोलने का काम कर रही है। सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है जिसके कारण लोग अपने जुगाड़ से अस्पताल तक मरीज को लेकर पहुंच रहे हैं। कोई ठेला तो कोई रिक्शा या ऑटो से मरीज को कटिहार सदर अस्पताल लेकर पहुंचते नजर आते हैं। सदर अस्पताल में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं रहने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कटिहार की दो तस्वीर हम आपकों दिखा रहे हैं। एक तस्वीर में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के हफलागंज निवासी मोहम्मद आलम हैं जो अपनी बीमार मां को ठेले पर लादकर खुद चलाते हुए सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचा। जब आलम से बात की गयी तो पता चला कि एंबुलेंस नहीं मिली तब मजबूरन उसे ठेले से अपनी मां को अस्पताल लाना पड़ा। वही दूसरी तस्वीर भी सदर अस्पताल कटिहार की है जहां आजमनगर से आए मरीज को एम्बुलेंस नहीं मिला। मरीज को सदर अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया था लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीज के परिजन अस्पताल परिसर में भटकते रहे। स्टेचर पर परिजन मरीज को लेकर एम्बुेलेंस का इंतजार करते दिखे। इसे लेकर परिजनों में आक्रोश भी देखने को मिला। बता दें कि कटिहार में कुल तैंतीस एम्बुलेंस है जिसमें नौ खराब है बाकी चौबीस एम्बुलेंस चालु हालत में है इसके बावजूद लोग इसकी सेवा से वंचित हैं। कटिहार सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था से मरीज के परिजन परेशान हैं इनकी सुध तक लेने वाला कोई नहीं है। बता दें कि भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक यानि CAG की रिपोर्ट ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सामने लाकर रख दी है।
Super Hit songs in 2022: साल 2022 का दौर अब खत्म होने को है और ये साल किसी के लिए अच्छा तो किसी के लिए बुरा साबित हुआ होगा. फिर भी जाने वाले साल के साथ आने वाले साल (Welcome 2023) का इंतजार उम्मीद के साथ हर किसी को होता है. अगर साल 2022 में इंटरनेट (Internet Popular songs in 2022) पर सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों की बात करें तो इस साल कई गाने सुपरहिट रहे. चलिए आपको उन गानों के बारे में बताते हैं. श्रीवल्ली (Srivalli Song) दिसंबर, 2021 में रिलीज हुई फिल्म पुष्पा का सुपरहिट गाना Srivalli Song टॉप ट्रेंड पर रहा. यूट्यूब पर इसको 50 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है. इसके व्यूज हर दिन बढ़ते हैं और अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की फिल्म पुष्का का सिर्फ ये गाना नहीं बल्कि सभी गाने काफी पसंद किए गए. यह भी पढ़ेंः Year Ender 2022: इस साल ये 7 फिल्में रहीं सुपर फ्लॉप, बॉक्स ऑफिस पर औंधें मुंह गिरीं! अरबिक कुथू (Arbic Kuthu) यूट्यूब पर इस साल तमिल गाना Arbic Kuthu काफी बार सुना गया. लिरिक वीडियो को 49 करोड़ बार देखा गया और अभी तक इसके वीडियो सॉन्ग को 30 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. कच्चा बादाम (Kacha Badam) पश्चिम बंगाल के Bhuban Badyakar एक आम वेंडर थे लेकिन उनका मूंगफली बेचने के अंदाज ने उन्हें सेलिब्रिटी बना दिया. एक म्यजिक कंपनी ने उनसे उस गाने के राइट्स खरीद लिए और यूट्यूब पर इस गाने को 30 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया. कोका-कोला (Bhojpuri Song Coka Cola) खेसारी लाल यादव का सुपरहिट गाना यूट्यूब पर 30 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया. ये गाना म्यूजिक एल्बम का है जिसे हर भाषा के लोग पसंद कर रहे हैं. ये गाना सोशल मीडिया पर खूब सुनने को मिला. मनिके मागे हिते (Manike Mage Hithe) श्रीलंकन सिंगर योहानी का गाना जिसके लिरिक्स किसी को समझ नहीं आए लेकिन इस गाने को यूट्यूब पर खूब सुनने को मिला. इस गाने को अजय देवगन की फिल्म थैंक गॉड पर लिया गया जिसका हिंदी वर्जन बना. यह भी पढ़ेंः Year Ender 2022: इस साल ट्रेंडिंग में रहे ये 5 शानदार YouTube वीडियो, देखकर आ जाएगा मजा! जानकारी के लिए बता दें, साल 2022 में वैसे कई सारे गानों को सुना गया लेकिन इन गानों ने ना सिर्फ यूट्यूब पर धमाल मचाया बल्कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और भी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धूम मचाई. ये पांचों गाने हर किसी को पसंद आए और फिल्म से ज्यादा इन गानों को लोगों ने पहचाना.
Super Hit songs in दो हज़ार बाईस: साल दो हज़ार बाईस का दौर अब खत्म होने को है और ये साल किसी के लिए अच्छा तो किसी के लिए बुरा साबित हुआ होगा. फिर भी जाने वाले साल के साथ आने वाले साल का इंतजार उम्मीद के साथ हर किसी को होता है. अगर साल दो हज़ार बाईस में इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों की बात करें तो इस साल कई गाने सुपरहिट रहे. चलिए आपको उन गानों के बारे में बताते हैं. श्रीवल्ली दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस में रिलीज हुई फिल्म पुष्पा का सुपरहिट गाना Srivalli Song टॉप ट्रेंड पर रहा. यूट्यूब पर इसको पचास करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है. इसके व्यूज हर दिन बढ़ते हैं और अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्का का सिर्फ ये गाना नहीं बल्कि सभी गाने काफी पसंद किए गए. यह भी पढ़ेंः Year Ender दो हज़ार बाईस: इस साल ये सात फिल्में रहीं सुपर फ्लॉप, बॉक्स ऑफिस पर औंधें मुंह गिरीं! अरबिक कुथू यूट्यूब पर इस साल तमिल गाना Arbic Kuthu काफी बार सुना गया. लिरिक वीडियो को उनचास करोड़ बार देखा गया और अभी तक इसके वीडियो सॉन्ग को तीस करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. कच्चा बादाम पश्चिम बंगाल के Bhuban Badyakar एक आम वेंडर थे लेकिन उनका मूंगफली बेचने के अंदाज ने उन्हें सेलिब्रिटी बना दिया. एक म्यजिक कंपनी ने उनसे उस गाने के राइट्स खरीद लिए और यूट्यूब पर इस गाने को तीस करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया. कोका-कोला खेसारी लाल यादव का सुपरहिट गाना यूट्यूब पर तीस करोड़ से ज्यादा बार देखा गया. ये गाना म्यूजिक एल्बम का है जिसे हर भाषा के लोग पसंद कर रहे हैं. ये गाना सोशल मीडिया पर खूब सुनने को मिला. मनिके मागे हिते श्रीलंकन सिंगर योहानी का गाना जिसके लिरिक्स किसी को समझ नहीं आए लेकिन इस गाने को यूट्यूब पर खूब सुनने को मिला. इस गाने को अजय देवगन की फिल्म थैंक गॉड पर लिया गया जिसका हिंदी वर्जन बना. यह भी पढ़ेंः Year Ender दो हज़ार बाईस: इस साल ट्रेंडिंग में रहे ये पाँच शानदार YouTube वीडियो, देखकर आ जाएगा मजा! जानकारी के लिए बता दें, साल दो हज़ार बाईस में वैसे कई सारे गानों को सुना गया लेकिन इन गानों ने ना सिर्फ यूट्यूब पर धमाल मचाया बल्कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और भी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धूम मचाई. ये पांचों गाने हर किसी को पसंद आए और फिल्म से ज्यादा इन गानों को लोगों ने पहचाना.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
उपक्षेत्र अंबाड़ा के अंतर्गत आने वाली मोहन कालरी की भूमिगत मुआरी कोयला खदान में बीती रात अचानक रूप फाल हुआ, जिसकी वजह से एलएचडी ऑपरेटर परसराम के शरीर व हाथों पर गंभीर चोटें आई एवं एलएचडी के केएनपी के ऊपर भारी पत्थर गिरने से नुकसान हुआ है। घायल वेकोलि कर्मचारी को बड़कुही चिकित्सालय में प्रथम उपचार किया गया लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर के हॉस्पिटल में रेफर किया गया। गौरतलब है कि 30/5 सेक्शन 31 -1/2 लेवल 3डीप में यह हादसा हुआ। ज्ञात हो कि वेकोलि प्रबंधन मजदूरों से काम तो लेता है लेकिन कहीं ना कहीं उनकी सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरतता है अब तो स्थितियां यह हो गई है कि जो जिम्मेदार अधिकारी हैं वह खदान का मुंह कई कई दिनों तक नहीं देखते हैं जिसकी वजह से सुरक्षा में सेंध लगती हुई नजर आ रही है। इसी का खामियाजा आज इस वेकोलि कर्मचारी को भुगतना पड़ा जो कि कहीं ना कहीं रूफ में सपोर्ट ना होने की वजह से यह फाल हुआ जिसकी चपेट में वेकोलि कर्मचारी आ गया वेकोलि के उच्च अधिकारियों को इस मामले से सबक लेते हुए कहीं ना कहीं मजदूरों की सुरक्षा व खदान के अंदर सपोर्ट व अन्य व्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए नहीं तो इस तरह के हादसे कभी भी होते रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उपक्षेत्र अंबाड़ा के अंतर्गत आने वाली मोहन कालरी की भूमिगत मुआरी कोयला खदान में बीती रात अचानक रूप फाल हुआ, जिसकी वजह से एलएचडी ऑपरेटर परसराम के शरीर व हाथों पर गंभीर चोटें आई एवं एलएचडी के केएनपी के ऊपर भारी पत्थर गिरने से नुकसान हुआ है। घायल वेकोलि कर्मचारी को बड़कुही चिकित्सालय में प्रथम उपचार किया गया लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर के हॉस्पिटल में रेफर किया गया। गौरतलब है कि तीस/पाँच सेक्शन इकतीस -एक/दो लेवल तीनडीप में यह हादसा हुआ। ज्ञात हो कि वेकोलि प्रबंधन मजदूरों से काम तो लेता है लेकिन कहीं ना कहीं उनकी सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरतता है अब तो स्थितियां यह हो गई है कि जो जिम्मेदार अधिकारी हैं वह खदान का मुंह कई कई दिनों तक नहीं देखते हैं जिसकी वजह से सुरक्षा में सेंध लगती हुई नजर आ रही है। इसी का खामियाजा आज इस वेकोलि कर्मचारी को भुगतना पड़ा जो कि कहीं ना कहीं रूफ में सपोर्ट ना होने की वजह से यह फाल हुआ जिसकी चपेट में वेकोलि कर्मचारी आ गया वेकोलि के उच्च अधिकारियों को इस मामले से सबक लेते हुए कहीं ना कहीं मजदूरों की सुरक्षा व खदान के अंदर सपोर्ट व अन्य व्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए नहीं तो इस तरह के हादसे कभी भी होते रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
( २२ ) "धरती और अम्बर" अनादि काल से एक दूसरे की ओर झाकने वाले धरती श्री प्रकाश ने एक दिन रात्रि की नीरवता मे परस्पर वार्तालाप प्रारम्भ कर दिया । धरती ने आकाश से कहा- गगन भैया । मुझे अनन्त काल हो गया इस प्रकार रहते रहते । मेरी छाती पर कभी पहाड बन गए तो कभी समुद्र वन गए । पहाड के स्थान पर समुद्र बन गए तो समुद्र के स्थान पर पहाड बन गए । प्रमशान शहर बन गया औौर शहर श्मशान बन गया । लेकिन मैंने किसी के साथ भी स्थायी लगाव नहीं रंगा, इसीलिये वे सब तो ढह गए, किन्तु मै तो उसी रूप मे हू जिम मे पहले थी । वरती की बात सुनकर प्रवर ने कहा- धरती वहिन । वन-वस तुम्हारी तरह ही मै हूँ । मेरे स्थान पर भी वादन बनते हे विजदिया चमकती है, तूफान याते है, लेकिन मै भी उनसे अपना अभिन्न सम्बन्ध नहीं जोड़ता हूं, त मन ने मेरा निश्व ल्प उन सबसे हटार प्रकट हो ही [ प्रति भी गहा उठी आश्चर्य इन बात का है कि धरती-अवर के अन्दर कैसी भी स्थिति घटित होने पर भी वे अपना स्वरूप नही छोडते है । अत आज भी वे अपनी उसी शान मे आदमी के सामने खड़े है । किन्तु सोचने समझने की शक्ति रखने वाला त्रादमी जिससे भी जुड़ता है चाहे माता हो पिता हो, भाई बहिन पत्नी कि वा धन हो बस उसी मै ग्रासक्त वन तन्मय हो जाता है । परिणाम स्वरूप आज तक वह अपनी निजी शक्ति को प्रकट ही नहीं कर पा रहा है । इघर मे उपर मुख की फिराक मे दुख की गलियों में भटक रहा है । बिना नीव के मकान ढह जाता है, बिना आधार के पानी वह जाता है। अन्तरग की ठोसता नही होगी जब तक, विना आधार का उत्थान ढह जाता है ।। उगता हुआ सूर्य कमल को खिला रहा है, उल्लू की घाखो को अन्धेरा दिखला रहा है । महावीर का संदेश भी जन भी जन मानस को, पापपुण्य की परिधि वनला रहा है ।। प्रकृति भी मुखर हो उही ]
"धरती और अम्बर" अनादि काल से एक दूसरे की ओर झाकने वाले धरती श्री प्रकाश ने एक दिन रात्रि की नीरवता मे परस्पर वार्तालाप प्रारम्भ कर दिया । धरती ने आकाश से कहा- गगन भैया । मुझे अनन्त काल हो गया इस प्रकार रहते रहते । मेरी छाती पर कभी पहाड बन गए तो कभी समुद्र वन गए । पहाड के स्थान पर समुद्र बन गए तो समुद्र के स्थान पर पहाड बन गए । प्रमशान शहर बन गया औौर शहर श्मशान बन गया । लेकिन मैंने किसी के साथ भी स्थायी लगाव नहीं रंगा, इसीलिये वे सब तो ढह गए, किन्तु मै तो उसी रूप मे हू जिम मे पहले थी । वरती की बात सुनकर प्रवर ने कहा- धरती वहिन । वन-वस तुम्हारी तरह ही मै हूँ । मेरे स्थान पर भी वादन बनते हे विजदिया चमकती है, तूफान याते है, लेकिन मै भी उनसे अपना अभिन्न सम्बन्ध नहीं जोड़ता हूं, त मन ने मेरा निश्व ल्प उन सबसे हटार प्रकट हो ही [ प्रति भी गहा उठी आश्चर्य इन बात का है कि धरती-अवर के अन्दर कैसी भी स्थिति घटित होने पर भी वे अपना स्वरूप नही छोडते है । अत आज भी वे अपनी उसी शान मे आदमी के सामने खड़े है । किन्तु सोचने समझने की शक्ति रखने वाला त्रादमी जिससे भी जुड़ता है चाहे माता हो पिता हो, भाई बहिन पत्नी कि वा धन हो बस उसी मै ग्रासक्त वन तन्मय हो जाता है । परिणाम स्वरूप आज तक वह अपनी निजी शक्ति को प्रकट ही नहीं कर पा रहा है । इघर मे उपर मुख की फिराक मे दुख की गलियों में भटक रहा है । बिना नीव के मकान ढह जाता है, बिना आधार के पानी वह जाता है। अन्तरग की ठोसता नही होगी जब तक, विना आधार का उत्थान ढह जाता है ।। उगता हुआ सूर्य कमल को खिला रहा है, उल्लू की घाखो को अन्धेरा दिखला रहा है । महावीर का संदेश भी जन भी जन मानस को, पापपुण्य की परिधि वनला रहा है ।। प्रकृति भी मुखर हो उही ]
बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है. उन्होंने ये बयान पश्चिम बंगाल में चौथे फेज की वोटिंग के दौरान कोच बिहार में हुई हिंसा को लेकर दिया था. दिलीप घोष ने कहा कि अगर शरारती लड़के नहीं मानते हैं और कानून को अपने हाथ में लेते हैं, तो अगले फेज में भी कोच बिहार जैसी घटना हो सकती है. दरअसल, 10 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की 44 सीटों के लिए वोटिंग हुई. उस दिन कोच बिहार के सितालकुची में हिंसा भड़क गई. इसके बाद केंद्रीय बलों ने गोली चलाई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई. इसी घटना को लेकर दिलीप घोष का बयान सामने आया है. उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर में एक कार्यक्रम में दिलीप घोष ने कहा, "ये शरारती लड़के यहां कहां से आते हैं? इन शरारती लड़कों को सितालकुची में गोलियां मारी गईं. ये लड़के ज्यादा समय तक बंगाल में नहीं रहेंगे. इन शरारती लड़कों को लगता था कि चुनाव ड्यूटी में लगे केंद्रीय बलों के जवानों ने हाथ में राइफल सिर्फ दिखाने के लिए रखी हैं. सितालकुची की घटना देखने के बाद वो दोबारा ऐसी गलती करने की हिम्मत नहीं करेंगे. " उन्होंने कहा कि जो कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत करेगा, उसके साथ ऐसा ही होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि 5वें फेज में भी ऐसी घटना हो सकती है. दिलीप घोष यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, "दीदी (ममता बनर्जी) डर गई हैं. इसलिए वो चुनाव आयोग की नजर में आने के लिए कानून तोड़ने की कोशिश कर रही हैं. वो दिन गए, जब लोग उनसे डरते थे. अब लोग सुबह से लाइन में खड़े हो जाते हैं और अपना वोट डालते हैं. " उन्होंने लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि 17 तारीख को आप सुबह से लाइन में लगकर अपना वोट डालेंगे. वहां केंद्रीय बलों के जवान होंगे. कोई आपको नहीं डरा पाएगा. हम वहां रहेंगे. अगर कोई ऐसा करता है, तो आपने देखा कि सितालुकची में क्या हुआ. हर जगह सितालकुची बन जाएगी. " तृणमूल कांग्रेस ने दिलीप घोष को गिरफ्तार करने की मांग की है. टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर राय ने कहा, "ये पूरी तरह से भड़काऊ भाषण है. इस तरह के भड़काऊ भाषण और उकसावे वाले भाषण के लिए अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और दिलीप घोष को गिरफ्तार करना चाहिए. " वहीं, जादवपुर सीट से सीपीएम उम्मीदवार सुजान चक्रवर्ती ने इसे गैरजिम्मेदाराना बयान बताया है. उन्होंने कहा कि इस बयान से बीजेपी का फासीवादी चेहरा सामने आया है.
बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है. उन्होंने ये बयान पश्चिम बंगाल में चौथे फेज की वोटिंग के दौरान कोच बिहार में हुई हिंसा को लेकर दिया था. दिलीप घोष ने कहा कि अगर शरारती लड़के नहीं मानते हैं और कानून को अपने हाथ में लेते हैं, तो अगले फेज में भी कोच बिहार जैसी घटना हो सकती है. दरअसल, दस अप्रैल को पश्चिम बंगाल की चौंतालीस सीटों के लिए वोटिंग हुई. उस दिन कोच बिहार के सितालकुची में हिंसा भड़क गई. इसके बाद केंद्रीय बलों ने गोली चलाई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई. इसी घटना को लेकर दिलीप घोष का बयान सामने आया है. उत्तर चौबीस परगना जिले के बारानगर में एक कार्यक्रम में दिलीप घोष ने कहा, "ये शरारती लड़के यहां कहां से आते हैं? इन शरारती लड़कों को सितालकुची में गोलियां मारी गईं. ये लड़के ज्यादा समय तक बंगाल में नहीं रहेंगे. इन शरारती लड़कों को लगता था कि चुनाव ड्यूटी में लगे केंद्रीय बलों के जवानों ने हाथ में राइफल सिर्फ दिखाने के लिए रखी हैं. सितालकुची की घटना देखने के बाद वो दोबारा ऐसी गलती करने की हिम्मत नहीं करेंगे. " उन्होंने कहा कि जो कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत करेगा, उसके साथ ऐसा ही होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि पाँचवें फेज में भी ऐसी घटना हो सकती है. दिलीप घोष यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, "दीदी डर गई हैं. इसलिए वो चुनाव आयोग की नजर में आने के लिए कानून तोड़ने की कोशिश कर रही हैं. वो दिन गए, जब लोग उनसे डरते थे. अब लोग सुबह से लाइन में खड़े हो जाते हैं और अपना वोट डालते हैं. " उन्होंने लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि सत्रह तारीख को आप सुबह से लाइन में लगकर अपना वोट डालेंगे. वहां केंद्रीय बलों के जवान होंगे. कोई आपको नहीं डरा पाएगा. हम वहां रहेंगे. अगर कोई ऐसा करता है, तो आपने देखा कि सितालुकची में क्या हुआ. हर जगह सितालकुची बन जाएगी. " तृणमूल कांग्रेस ने दिलीप घोष को गिरफ्तार करने की मांग की है. टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर राय ने कहा, "ये पूरी तरह से भड़काऊ भाषण है. इस तरह के भड़काऊ भाषण और उकसावे वाले भाषण के लिए अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और दिलीप घोष को गिरफ्तार करना चाहिए. " वहीं, जादवपुर सीट से सीपीएम उम्मीदवार सुजान चक्रवर्ती ने इसे गैरजिम्मेदाराना बयान बताया है. उन्होंने कहा कि इस बयान से बीजेपी का फासीवादी चेहरा सामने आया है.
नई दिल्ली। श्रद्धा मर्डर केस में दिल्ली पुलिस आरोपी आफताब से लगातार पूछताछ कर रही है. पूछताछ में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब आफताब ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने श्रद्धा की हत्या के बाद शव के टुकड़े करने में 10 घंटे लगाए. इस बीच जब वो थक गया, तो उसने रेस्ट भी किया. इसके बाद उसने बीयर और सिगरेट पी. उसने शव के टुकड़े को घंटों पानी से धोया. आफताब ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने शव के टुकड़े करने के बाद ऑनलाइन खाना मंगवाया. इसके बाद उसने नेटफ्लिक्स पर मूवी देखी. आफताब ने पुलिस को बताया की उसने सबूत और साक्ष्य मिटाने के लिए ब्लीच पाउडर का इस्तेमाल किया. इसके अलावा उसने केमिकल का भी इस्तेमाल किया, ताकि खून का एक भी दाग फर्श पर न रहे. मुंबई की रहने वाली श्रद्धा वॉल्कर आफताब के साथ दिल्ली के महरौली में एक फ्लैट में लिव इन में रहती थी. आरोप है कि आफताब ने 18 मई को श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी थी. आफताब के मुताबिक, श्रद्धा उस पर शादी को लेकर दबाव डाल रही थी. आफताब ने इसके बाद श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े किए. उसने टुकड़ों को रखने के लिए एक फ्रिज भी खरीदा था. आफताब ने श्रद्धा के शव के टुकड़ों को फ्रिज में रखा था. वह रोज रात में शव के टुकड़े को महरौली स्थित जंगल में फेंकने जाता था. उसने ऐसा करीब 20 दिन तक किया. पुलिस के मुताबिक, आफताब हत्या के बाद भी उसी फ्लैट में रहता रहा और ऑनलाइन ऐप के जरिए खाना ऑर्डर करता था. वह 9 जून तक श्रद्धा की हत्या के बाद उसका सोशल मीडिया अकाउंट चलाता रहा और उसके दोस्तों से बात करता रहा. उसने श्रद्धा के अकाउंट से पैसे भी ट्रांसफर किए. पुलिस के मुताबिक, आफताब इस दौरान दूसरी लड़कियों के साथ भी संपर्क में रहा और उन्हें भी अपने घर पर लाता था. श्रद्धा के बचपन के दोस्त लक्ष्मण नाडर की चिंता ने ही श्रद्धा हत्याकांड का पर्दाफाश कराया. परिवार से तो दिल्ली आने के बाद श्रद्धा ने बातचीत करना बंद कर दिया था. मगर, वह अपने बचपन के दोस्त लक्ष्मण से संपर्क में थी. श्रद्धा ने बॉयफ्रेंड आफताब के व्यवहार के बारे में लक्ष्मण को भी बताया था. मगर, बाद में लक्ष्मण के मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया. कई दिनों तक लक्ष्मण का संपर्क श्रद्धा से नहीं हो सका. तब उसे लगा कि कहीं कुछ तो गलत है. फिर श्रद्धा के भाई और पिता को बताया कि श्रद्धा संपर्क नहीं हो पा रहा है और उसका फोन भी बंद आ रहा है. इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और श्रद्धा की बेहरमी से हत्या किए जाने के मामले का खुलासा हुआ.
नई दिल्ली। श्रद्धा मर्डर केस में दिल्ली पुलिस आरोपी आफताब से लगातार पूछताछ कर रही है. पूछताछ में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब आफताब ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने श्रद्धा की हत्या के बाद शव के टुकड़े करने में दस घंटाटे लगाए. इस बीच जब वो थक गया, तो उसने रेस्ट भी किया. इसके बाद उसने बीयर और सिगरेट पी. उसने शव के टुकड़े को घंटों पानी से धोया. आफताब ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने शव के टुकड़े करने के बाद ऑनलाइन खाना मंगवाया. इसके बाद उसने नेटफ्लिक्स पर मूवी देखी. आफताब ने पुलिस को बताया की उसने सबूत और साक्ष्य मिटाने के लिए ब्लीच पाउडर का इस्तेमाल किया. इसके अलावा उसने केमिकल का भी इस्तेमाल किया, ताकि खून का एक भी दाग फर्श पर न रहे. मुंबई की रहने वाली श्रद्धा वॉल्कर आफताब के साथ दिल्ली के महरौली में एक फ्लैट में लिव इन में रहती थी. आरोप है कि आफताब ने अट्ठारह मई को श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी थी. आफताब के मुताबिक, श्रद्धा उस पर शादी को लेकर दबाव डाल रही थी. आफताब ने इसके बाद श्रद्धा के शव के पैंतीस टुकड़े किए. उसने टुकड़ों को रखने के लिए एक फ्रिज भी खरीदा था. आफताब ने श्रद्धा के शव के टुकड़ों को फ्रिज में रखा था. वह रोज रात में शव के टुकड़े को महरौली स्थित जंगल में फेंकने जाता था. उसने ऐसा करीब बीस दिन तक किया. पुलिस के मुताबिक, आफताब हत्या के बाद भी उसी फ्लैट में रहता रहा और ऑनलाइन ऐप के जरिए खाना ऑर्डर करता था. वह नौ जून तक श्रद्धा की हत्या के बाद उसका सोशल मीडिया अकाउंट चलाता रहा और उसके दोस्तों से बात करता रहा. उसने श्रद्धा के अकाउंट से पैसे भी ट्रांसफर किए. पुलिस के मुताबिक, आफताब इस दौरान दूसरी लड़कियों के साथ भी संपर्क में रहा और उन्हें भी अपने घर पर लाता था. श्रद्धा के बचपन के दोस्त लक्ष्मण नाडर की चिंता ने ही श्रद्धा हत्याकांड का पर्दाफाश कराया. परिवार से तो दिल्ली आने के बाद श्रद्धा ने बातचीत करना बंद कर दिया था. मगर, वह अपने बचपन के दोस्त लक्ष्मण से संपर्क में थी. श्रद्धा ने बॉयफ्रेंड आफताब के व्यवहार के बारे में लक्ष्मण को भी बताया था. मगर, बाद में लक्ष्मण के मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया. कई दिनों तक लक्ष्मण का संपर्क श्रद्धा से नहीं हो सका. तब उसे लगा कि कहीं कुछ तो गलत है. फिर श्रद्धा के भाई और पिता को बताया कि श्रद्धा संपर्क नहीं हो पा रहा है और उसका फोन भी बंद आ रहा है. इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और श्रद्धा की बेहरमी से हत्या किए जाने के मामले का खुलासा हुआ.
चर्चा में क्यों? यदि व्यक्ति के सामने किसी पक्ष का चयन करने हेतु सीमित विकल्प दिये जाएँ, तो वह उस कार्य में बहुत कम कमियाँ निकालता है या उसे उसके वास्तविक स्वरूप में ही स्वीकार कर लेता है। ऐसा ही एक उदाहरण हमें लक्षद्वीप की मेलोन तितलीफिश (melon butterfly fish) के संदर्भ में नज़र आता है। मुद्दा क्या है? - प्रक्षालित प्रवाल भित्तियों (bleached coral reefs) जहाँ न्यूनतम खाद्य संसाधन पाए जाते हैं, में पाई जाने वाली ये मछलियाँ जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री चट्टानों (reefs) जो होने वाले नुकसान के अनुकूल होने के लिये अपने आहार और खाने के स्वरूप में परिवर्तन करती रहती हैं। - जलवायु परिवर्तन से प्रेरित महासागरीय गर्मी प्रवाल विरंजन (bleaching) का कारण बन सकती है, जो प्रवाल खंड (coral patch) पर दबाव देती है और उन्हें मृत्यु की तरफ उन्मुख करती है। - भारतीय प्रवाल प्रणाली में विरंजन कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2010 की विरंजन घटना ने लक्षद्वीप द्वीप समूह की कई समुद्री चट्टानों में प्रवाल खंडों को खत्म कर दिया था, जोकि प्रवाल को भोजन के रूप में प्रयोग करने वाली विशेष प्रकार की मछलियों, जैसे- मेलोन तितलीफिश के लिये विनाशकारी साबित हो सकता है। - बेंगलुरू के प्रकृति संरक्षण फाउंडेशन (NCF) और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) के वैज्ञानिकों द्वारा गौण गतिविधियों वाली तीन चट्टानों (reefs), कद्मत के द्वीप (केवल 7% प्रवाल क्षेत्र, यहाँ प्रवाल मृत्यु अधिकतम होती है, इसलिये यहाँ संसाधन भी कम मात्रा में पाए जाते हैं), लक्षद्वीप में बित्रा और कावारत्ती (कद्मत से चार गुना अधिक प्रवाल वाला एवं सबसे कम प्रवाल मृत्यु वाला क्षेत्र) में जीवित प्रवाल क्षेत्रों तथा तितलीफिश की संख्या के संबंध में एक अध्ययन किया गया। - इस अध्ययन के दौरान आश्चर्यजनक रूप से, यह जानकारी प्राप्त हुई कि चट्टानों में प्रवाल क्षेत्रों की संख्या में बड़े अंतर के बावजूद, मेलोन तितलीफ़िश की संख्या तीनों क्षेत्रों में एक-समान ही पाई गईं। - इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा जारी एक अंतर्जलीय (under water) वीडियो में मछलियों के व्यवहार को दर्शाया गया है। - वीडियो फुटेज में मेलोन तितलीफिश (melon butterfly fish) की 58 प्रजातियों द्वारा खाए गए प्रवालों की प्रजातियों, मछली द्वारा भोजन करने में लगे समय और भोजन प्राप्त करने के लिये जीवित प्रवाल खंडों तक उनकी यात्रा में लगे समय को दर्ज़ किया गया। - कम संसाधनों वाली चट्टानों में, मछलियों द्वारा जिन प्रवाल प्रजातियों का उपभोग किया गया, उन्हें कावारत्ती जैसे संसाधन समृद्ध चट्टानों में स्पष्ट रूप से छोड़ दिया गया। - मछलियों ने संसाधन विहीन क्षेत्रों में यात्रा पर अधिक तथा भोजन की तलाश में कम समय बिताया, जिससे उनके लिये खाद्य प्रबंधन काफी मुश्किल और प्रभावशाली ढंग से महँगा साबित हुआ। - यह अध्ययन एथोलॉजी (Ethology) नामक एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ। प्रवाल भित्तियाँ क्या हैं? - प्रवाल भित्तियाँ या मूंगे की चट्टानें (Coral reefs) समुद्र के भीतर स्थित प्रवाल जीवों द्वारा छोड़े गए कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती हैं। प्रवाल कठोर संरचना वाले चूना प्रधान जीव (सिलेन्ट्रेटा पोलिप्स) होते हैं। इन प्रवालों की कठोर सतह के अंदर सहजीवी संबंध से रंगीन शैवाल जूजैंथिली (Zooxanthellae) पाए जाते हैं। - प्रवाल भित्तियों को विश्व के सागरीय जैव विविधता का उष्णस्थल (Hotspot) माना जाता है तथा इन्हें समुद्रीय वर्षावन भी कहा जाता है। - प्रवाल मुख्य रूप से उष्णकटिबंधों में पाए जाते हैं, क्योंकि इनके जीवित रहने के लिये 20°C - 21°C तापक्रम की आवश्यकता होती है। - प्रवाल कम गहराई पर पाए जाते हैं, क्योंकि अधिक गहराई पर सूर्य के प्रकाश व ऑक्सीजन की कमी होती है। - प्रवालों के विकास के लिये स्वच्छ एवं अवसादरहित जल आवश्यक है, क्योंकि अवसादों के कारण प्रवालों का मुख बंद हो जाता है और वे मर जाते हैं। - प्रवाल भितियों का निर्माण कोरल पॉलिप्स नामक जीवों के कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित अस्थि-पंजरों के अलावा, कार्बोनेट तलछट से भी होता है जो इन जीवों के ऊपर हज़ारों वर्षों से जमा हो रही है। जलवायु परिवर्तन से क्या प्रभाव पड़ता है? - महासागर में कार्बन डाइऑक्साइड के विलयन से महासागरों की अम्लीयता बढ़ जाती है, जिससे प्रवालों की मृत्यु हो जाती है। - प्रवाल खनन, अपरदन आदि को रोकने हेतु बनाए गए रोधिका, स्पीडबोट के द्वारा होने वाले गाद निक्षेपण के कारण भी प्रवालों की मौत हो जाती है। - द्वीप निर्माण करने वाले प्रवाल 64° F या 18° C से नीचे के तापमान को सहन नहीं कर पाते हैं। कई प्रवाल 23° से 29° C तक और कुछ अल्पावधि के लिये 40°C तक के तापमान को सहन कर पाते हैं लेकिन, इससे अधिक तापमान प्रवाल द्वीपों के लिये खतरनाक साबित होता है। - वहीं औद्योगिक संकुलों से निकलने वाला जल भी इनके अस्तित्व के लिये संकट का कारक होता है। - इसके अतिरिक्त, आए दिन होने वाली तेल रिसाव की घटनाएँ, बढ़ता मत्स्यन एवं पर्यटन आदि के कारण भी प्रवाल द्वीप बहुत गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
चर्चा में क्यों? यदि व्यक्ति के सामने किसी पक्ष का चयन करने हेतु सीमित विकल्प दिये जाएँ, तो वह उस कार्य में बहुत कम कमियाँ निकालता है या उसे उसके वास्तविक स्वरूप में ही स्वीकार कर लेता है। ऐसा ही एक उदाहरण हमें लक्षद्वीप की मेलोन तितलीफिश के संदर्भ में नज़र आता है। मुद्दा क्या है? - प्रक्षालित प्रवाल भित्तियों जहाँ न्यूनतम खाद्य संसाधन पाए जाते हैं, में पाई जाने वाली ये मछलियाँ जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री चट्टानों जो होने वाले नुकसान के अनुकूल होने के लिये अपने आहार और खाने के स्वरूप में परिवर्तन करती रहती हैं। - जलवायु परिवर्तन से प्रेरित महासागरीय गर्मी प्रवाल विरंजन का कारण बन सकती है, जो प्रवाल खंड पर दबाव देती है और उन्हें मृत्यु की तरफ उन्मुख करती है। - भारतीय प्रवाल प्रणाली में विरंजन कोई नई बात नहीं है। वर्ष दो हज़ार दस की विरंजन घटना ने लक्षद्वीप द्वीप समूह की कई समुद्री चट्टानों में प्रवाल खंडों को खत्म कर दिया था, जोकि प्रवाल को भोजन के रूप में प्रयोग करने वाली विशेष प्रकार की मछलियों, जैसे- मेलोन तितलीफिश के लिये विनाशकारी साबित हो सकता है। - बेंगलुरू के प्रकृति संरक्षण फाउंडेशन और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज के वैज्ञानिकों द्वारा गौण गतिविधियों वाली तीन चट्टानों , कद्मत के द्वीप , लक्षद्वीप में बित्रा और कावारत्ती में जीवित प्रवाल क्षेत्रों तथा तितलीफिश की संख्या के संबंध में एक अध्ययन किया गया। - इस अध्ययन के दौरान आश्चर्यजनक रूप से, यह जानकारी प्राप्त हुई कि चट्टानों में प्रवाल क्षेत्रों की संख्या में बड़े अंतर के बावजूद, मेलोन तितलीफ़िश की संख्या तीनों क्षेत्रों में एक-समान ही पाई गईं। - इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा जारी एक अंतर्जलीय वीडियो में मछलियों के व्यवहार को दर्शाया गया है। - वीडियो फुटेज में मेलोन तितलीफिश की अट्ठावन प्रजातियों द्वारा खाए गए प्रवालों की प्रजातियों, मछली द्वारा भोजन करने में लगे समय और भोजन प्राप्त करने के लिये जीवित प्रवाल खंडों तक उनकी यात्रा में लगे समय को दर्ज़ किया गया। - कम संसाधनों वाली चट्टानों में, मछलियों द्वारा जिन प्रवाल प्रजातियों का उपभोग किया गया, उन्हें कावारत्ती जैसे संसाधन समृद्ध चट्टानों में स्पष्ट रूप से छोड़ दिया गया। - मछलियों ने संसाधन विहीन क्षेत्रों में यात्रा पर अधिक तथा भोजन की तलाश में कम समय बिताया, जिससे उनके लिये खाद्य प्रबंधन काफी मुश्किल और प्रभावशाली ढंग से महँगा साबित हुआ। - यह अध्ययन एथोलॉजी नामक एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ। प्रवाल भित्तियाँ क्या हैं? - प्रवाल भित्तियाँ या मूंगे की चट्टानें समुद्र के भीतर स्थित प्रवाल जीवों द्वारा छोड़े गए कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती हैं। प्रवाल कठोर संरचना वाले चूना प्रधान जीव होते हैं। इन प्रवालों की कठोर सतह के अंदर सहजीवी संबंध से रंगीन शैवाल जूजैंथिली पाए जाते हैं। - प्रवाल भित्तियों को विश्व के सागरीय जैव विविधता का उष्णस्थल माना जाता है तथा इन्हें समुद्रीय वर्षावन भी कहा जाता है। - प्रवाल मुख्य रूप से उष्णकटिबंधों में पाए जाते हैं, क्योंकि इनके जीवित रहने के लिये बीस डिग्री सेल्सियस - इक्कीस डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता होती है। - प्रवाल कम गहराई पर पाए जाते हैं, क्योंकि अधिक गहराई पर सूर्य के प्रकाश व ऑक्सीजन की कमी होती है। - प्रवालों के विकास के लिये स्वच्छ एवं अवसादरहित जल आवश्यक है, क्योंकि अवसादों के कारण प्रवालों का मुख बंद हो जाता है और वे मर जाते हैं। - प्रवाल भितियों का निर्माण कोरल पॉलिप्स नामक जीवों के कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित अस्थि-पंजरों के अलावा, कार्बोनेट तलछट से भी होता है जो इन जीवों के ऊपर हज़ारों वर्षों से जमा हो रही है। जलवायु परिवर्तन से क्या प्रभाव पड़ता है? - महासागर में कार्बन डाइऑक्साइड के विलयन से महासागरों की अम्लीयता बढ़ जाती है, जिससे प्रवालों की मृत्यु हो जाती है। - प्रवाल खनन, अपरदन आदि को रोकने हेतु बनाए गए रोधिका, स्पीडबोट के द्वारा होने वाले गाद निक्षेपण के कारण भी प्रवालों की मौत हो जाती है। - द्वीप निर्माण करने वाले प्रवाल चौंसठ° F या अट्ठारह° C से नीचे के तापमान को सहन नहीं कर पाते हैं। कई प्रवाल तेईस° से उनतीस° C तक और कुछ अल्पावधि के लिये चालीस डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन कर पाते हैं लेकिन, इससे अधिक तापमान प्रवाल द्वीपों के लिये खतरनाक साबित होता है। - वहीं औद्योगिक संकुलों से निकलने वाला जल भी इनके अस्तित्व के लिये संकट का कारक होता है। - इसके अतिरिक्त, आए दिन होने वाली तेल रिसाव की घटनाएँ, बढ़ता मत्स्यन एवं पर्यटन आदि के कारण भी प्रवाल द्वीप बहुत गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
रसो को ज्ञानन्दरपता शब्दो मे नही है। क्योकि उन लोक्कि तथा शास्त्रीय शब्दो का प्रयोग करने वाले उन व्यक्तियों ने उन ग्रयों का साधारण्य उपपादन कम रसप्रतीति नहीं की है। अत उनके द्वारा प्रयुक्त शब्द रसप्रतीति के उच्छलनभूत नहीं है और न गुणालङ्कारसस्कृत शब्द ही हैं । रसो की आनन्दरूपता अभिनवगुप्त के अनुसार शृङ्गार, करुण आदि सभी रस आनन्दरूप हैं। सभी का आनन्द मे ही पर्यवसान है क्योकि साधारणीकृत विभावादि उपायो से सामाजिवहृदय मे पहिले से ही सस्काररूप में विद्यमान रति देशकालव्यक्तिविशेषादि सभी विशेषताओं से रहित होकर रतित्वरूप से हो अभिव्यक्त होती है । उसमे तन्मयोभाव के द्वारा जब सामाजिक का चित्त रजोगुण व तमोगुण के अभिभव से युक्त सत्त्वगुण की प्रधानता से अन्तर्मुख होकर ग्रात्मा मे निमग्न होता है तब वह साधारणीकृत रतिविशष्ट आनन्दघन, सविद्रप ( ज्ञानरूप ) आत्मा की अनुभूति करता है। आत्मा आनन्दघन है, प्रत आनन्द को हो प्रतीति होती है किसी प्रकार के दुख की नही । यद्यपि रसास्वादनवेला मे सामाजिक का चित्त परिपक्व योगी की तरह शुद्ध आत्मा की अनुभूति नहीं करता किन्तु साधारणीकृत रत्यादि भावो की भी । अन्यथा ब्रह्मास्वाद और रसास्वाद म किसी प्रकार का अन्तर न होने से रस ब्रह्मास्वादसहोदर न कहा जाता । अत वहाँ सुखदु खात्मक रत्यादि भावो की भी स्थिति होने से सुख के साथ दुख की प्रतीति भी संभावित है, अत रस को इस तरह एकान्तत मानन्दरूप नहीं माना जा सकता । तथापि रत्यादि भावो की सुखद् खात्मकता लोक मे है। अर्थात जब रत्यादिभाव लोक से सम्बद्ध होते हैं तभी लौकिक सुखदु ख के जनक होते हैं। सर्वविध लोकसम्बन्ध से हट जाने पर उनमे न सुसात्मकता रहती है और न दुखात्मकता । जैसे पुत्रोत्पत्ति सुखजनन है विन्तु वह सुखजनक तभी है जब पुत्र के साथ हमारा स्वत्वसम्बन्ध जुड़ा हुआ है । उसके हट जाने पर उसमे सुखजनकता नही । जैसे स्वत्वसम्बन्धरहिन पडौसी के लिए वह पुत्र सुखजनक नहीं है। इसी प्रकार पुत्रवियोग शोक का जनव उसी व्यक्ति के प्रति है जिसके साथ उसका स्वत्वसम्बन्ध है। उस सम्बन्ध के हट जाने पर वह शोवजन नही होता जैसे पड़ौसी को। इससे सिद्ध है विलौकिक पदार्थ तभी तक सुखजनव व दु सजनव है जन उनके साथ व्यक्ति का स्वकीय व परकीयत्व सम्बन्ध बना हुआ है। उसके हट जाने पर न वे सुसजनव हैं और न दुसजनन । जैसे उदामीन योगी को सासारिव पदार्थ न सुखजना हैं और न दु सजनव । यह स्थिति तो लोन मे रहते हुए भी देखी जाती है। इसी प्रकार रसास्वादनवाल मे मास्वाद्यमान रत्यादि लोविन सर्वविध विशेषताम्रा का परित्याग वर लोत्रमन्वन्धरहित हो गये हैं प्रत उन साधारणीकृन भावो में उस समय न सुजनाता है और मदु यजनवता । इन्दुमतीको मृत्यु पर वो शोर तभी दुमजना है जबकि उमा इन्दुमनो से व इन्दुमतीको मृत्युरूप वारण मे तथा मृत्युपूर्व इन्दुमती रससिद्धात को शास्त्रीय समोक्षा के साथ घनिष्ठ प्रेमालापो को स्मृति से सम्बन्ध हैं। इन सव लोक्वस्तुग्री और लोकपरिस्थितियों के सम्बन्ध के दूर हो जाने पर निरपेक्ष शोकभाव कभी दु खजनव नही हो सकता और काव्य मे साधारणीकृत विभावादि से व्यक्तिविशेषसम्बन्धरहित शोकसस्कार के उदय पर तन्मयीभाव से सामाजिकात्मा के उसमे निमग्न होने पर उसमे कदापि दुखजनक्ता नही रहती । अत रसास्वादनकाल में साधारणीकृत रूप से उद्बुद्ध शोकादिभाव लोकसम्बन्धराहित्य के कारण दु खजनव नही होते । उस समय आनन्दघन शोकादिप्रतीति का ही आस्वाद होता है। इस प्रतीति में आनन्दघनता आनन्दरूप आत्मा के कारण है। इसीलिए अभिवगुप्त ने कहा है - 'अस्मन्मते संवेदनमेवानन्दघनमास्वाद्यते । तत्र वा दुःखाशका । केवर तस्यैव चित्रताकरणे रतिशोकादिवासनाव्यापार, तदुद्बोधने चाभिनयादिव्यापार । ( अ भा पृ २९२ ) तात्पर्य यह है कि रसास्वादनवेला मे अभिनयादिव्यापार से उद्बुद्ध सस्काररूप साधारणीकृत रतिशोकादि भावों का भी सम्बन्ध रहता है। वे भाव सर्वविधलोवसम्बन्धातीत होने से सुखदु खजनक्ता से तो रहित हैं किन्तु उस नानन्द मे स्वोपरजन द्वारा वैचित्र्य पैदा करते हैं अत वह शुद्ध श्रात्मप्रतीति न रहकर रत्यादि म चित्रित (शवलित) प्रात्मप्रतीति होती है। इसीलिए इस प्रतीनि को ब्रह्मास्वाद न कहकर ब्रह्मास्वादसहोदर वहा जाता है। और इसी कारण सभो रमो मे ग्रात्मप्रतीति के एकरूप होने पर भी उसमे वैचित्र्यजनक रत्यादिसस्वार के कारण उसके शृङ्गार, हास्य, वरुण आदि विभिन्न नाम भी हो गये हैं। श्रानन्दघनप्रतीति या सवेदन मे वैचित्र्य पैदा करने वाले भाव रत्यादि ९ हैं । इमलिए तज्जनित वैचित्र्य के कारण वह प्रतीति नवधा विभक्त हो जाती है। इसलिए शृङ्गार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्य, अद्भुत व शान्त ये ९ होरस हैं । अभिनवगुप्त का कथन है कि लोक मे भी लौकिक शोक की चर्वणा करते हुए तन्मयीभाव के द्वारा उस शोक से सम्बन्धित स्व, पर आदि व्यक्तिविशेषो का, शोव के कारण मृतव्यक्ति आदि लोकवस्तुओं का तथा लौकिक परिस्थितियो का परिहार हो जाता है तब एक मात्र शोक को चर्वणा रह जाती है और इसी में शो वरनेवाले व्यक्ति की हृदय विश्रान्ति हो जाती है । तथा उस समय उसे शोषजन्य दुम का लेशमात्र भी भान नहीं होता और सुख का ही भान होता है, क्योंकि निविघ्न हृदयविश्रान्ति ही माख्य-शास्त्र के अनुसार सुख का स्वरूप है। इस प्रकार वरपरस मे एवधन शोक की चर्वणा जब सामाजिक को होती है तब शोरसविच्चवणा मे सामाजिक की निर्विघ्न हृदयविश्रान्ति हो जाने से वरणादि रस भी मानन्दरूप ही है। १ तत्र सवॅडमो मुखप्रधाना । स्वमविच्चणारूपस्यैव घनस्य प्रवाश्यानमारत्वात् । यथा हि एकघनशाम विच्चवर्णपि रोवे स्त्रीवादस्य हृदयविश्रान्तिरतराष विश्रालिशरीरत्वान गुणस्य (म भापृ २८२)
रसो को ज्ञानन्दरपता शब्दो मे नही है। क्योकि उन लोक्कि तथा शास्त्रीय शब्दो का प्रयोग करने वाले उन व्यक्तियों ने उन ग्रयों का साधारण्य उपपादन कम रसप्रतीति नहीं की है। अत उनके द्वारा प्रयुक्त शब्द रसप्रतीति के उच्छलनभूत नहीं है और न गुणालङ्कारसस्कृत शब्द ही हैं । रसो की आनन्दरूपता अभिनवगुप्त के अनुसार शृङ्गार, करुण आदि सभी रस आनन्दरूप हैं। सभी का आनन्द मे ही पर्यवसान है क्योकि साधारणीकृत विभावादि उपायो से सामाजिवहृदय मे पहिले से ही सस्काररूप में विद्यमान रति देशकालव्यक्तिविशेषादि सभी विशेषताओं से रहित होकर रतित्वरूप से हो अभिव्यक्त होती है । उसमे तन्मयोभाव के द्वारा जब सामाजिक का चित्त रजोगुण व तमोगुण के अभिभव से युक्त सत्त्वगुण की प्रधानता से अन्तर्मुख होकर ग्रात्मा मे निमग्न होता है तब वह साधारणीकृत रतिविशष्ट आनन्दघन, सविद्रप आत्मा की अनुभूति करता है। आत्मा आनन्दघन है, प्रत आनन्द को हो प्रतीति होती है किसी प्रकार के दुख की नही । यद्यपि रसास्वादनवेला मे सामाजिक का चित्त परिपक्व योगी की तरह शुद्ध आत्मा की अनुभूति नहीं करता किन्तु साधारणीकृत रत्यादि भावो की भी । अन्यथा ब्रह्मास्वाद और रसास्वाद म किसी प्रकार का अन्तर न होने से रस ब्रह्मास्वादसहोदर न कहा जाता । अत वहाँ सुखदु खात्मक रत्यादि भावो की भी स्थिति होने से सुख के साथ दुख की प्रतीति भी संभावित है, अत रस को इस तरह एकान्तत मानन्दरूप नहीं माना जा सकता । तथापि रत्यादि भावो की सुखद् खात्मकता लोक मे है। अर्थात जब रत्यादिभाव लोक से सम्बद्ध होते हैं तभी लौकिक सुखदु ख के जनक होते हैं। सर्वविध लोकसम्बन्ध से हट जाने पर उनमे न सुसात्मकता रहती है और न दुखात्मकता । जैसे पुत्रोत्पत्ति सुखजनन है विन्तु वह सुखजनक तभी है जब पुत्र के साथ हमारा स्वत्वसम्बन्ध जुड़ा हुआ है । उसके हट जाने पर उसमे सुखजनकता नही । जैसे स्वत्वसम्बन्धरहिन पडौसी के लिए वह पुत्र सुखजनक नहीं है। इसी प्रकार पुत्रवियोग शोक का जनव उसी व्यक्ति के प्रति है जिसके साथ उसका स्वत्वसम्बन्ध है। उस सम्बन्ध के हट जाने पर वह शोवजन नही होता जैसे पड़ौसी को। इससे सिद्ध है विलौकिक पदार्थ तभी तक सुखजनव व दु सजनव है जन उनके साथ व्यक्ति का स्वकीय व परकीयत्व सम्बन्ध बना हुआ है। उसके हट जाने पर न वे सुसजनव हैं और न दुसजनन । जैसे उदामीन योगी को सासारिव पदार्थ न सुखजना हैं और न दु सजनव । यह स्थिति तो लोन मे रहते हुए भी देखी जाती है। इसी प्रकार रसास्वादनवाल मे मास्वाद्यमान रत्यादि लोविन सर्वविध विशेषताम्रा का परित्याग वर लोत्रमन्वन्धरहित हो गये हैं प्रत उन साधारणीकृन भावो में उस समय न सुजनाता है और मदु यजनवता । इन्दुमतीको मृत्यु पर वो शोर तभी दुमजना है जबकि उमा इन्दुमनो से व इन्दुमतीको मृत्युरूप वारण मे तथा मृत्युपूर्व इन्दुमती रससिद्धात को शास्त्रीय समोक्षा के साथ घनिष्ठ प्रेमालापो को स्मृति से सम्बन्ध हैं। इन सव लोक्वस्तुग्री और लोकपरिस्थितियों के सम्बन्ध के दूर हो जाने पर निरपेक्ष शोकभाव कभी दु खजनव नही हो सकता और काव्य मे साधारणीकृत विभावादि से व्यक्तिविशेषसम्बन्धरहित शोकसस्कार के उदय पर तन्मयीभाव से सामाजिकात्मा के उसमे निमग्न होने पर उसमे कदापि दुखजनक्ता नही रहती । अत रसास्वादनकाल में साधारणीकृत रूप से उद्बुद्ध शोकादिभाव लोकसम्बन्धराहित्य के कारण दु खजनव नही होते । उस समय आनन्दघन शोकादिप्रतीति का ही आस्वाद होता है। इस प्रतीति में आनन्दघनता आनन्दरूप आत्मा के कारण है। इसीलिए अभिवगुप्त ने कहा है - 'अस्मन्मते संवेदनमेवानन्दघनमास्वाद्यते । तत्र वा दुःखाशका । केवर तस्यैव चित्रताकरणे रतिशोकादिवासनाव्यापार, तदुद्बोधने चाभिनयादिव्यापार । तात्पर्य यह है कि रसास्वादनवेला मे अभिनयादिव्यापार से उद्बुद्ध सस्काररूप साधारणीकृत रतिशोकादि भावों का भी सम्बन्ध रहता है। वे भाव सर्वविधलोवसम्बन्धातीत होने से सुखदु खजनक्ता से तो रहित हैं किन्तु उस नानन्द मे स्वोपरजन द्वारा वैचित्र्य पैदा करते हैं अत वह शुद्ध श्रात्मप्रतीति न रहकर रत्यादि म चित्रित प्रात्मप्रतीति होती है। इसीलिए इस प्रतीनि को ब्रह्मास्वाद न कहकर ब्रह्मास्वादसहोदर वहा जाता है। और इसी कारण सभो रमो मे ग्रात्मप्रतीति के एकरूप होने पर भी उसमे वैचित्र्यजनक रत्यादिसस्वार के कारण उसके शृङ्गार, हास्य, वरुण आदि विभिन्न नाम भी हो गये हैं। श्रानन्दघनप्रतीति या सवेदन मे वैचित्र्य पैदा करने वाले भाव रत्यादि नौ हैं । इमलिए तज्जनित वैचित्र्य के कारण वह प्रतीति नवधा विभक्त हो जाती है। इसलिए शृङ्गार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्य, अद्भुत व शान्त ये नौ होरस हैं । अभिनवगुप्त का कथन है कि लोक मे भी लौकिक शोक की चर्वणा करते हुए तन्मयीभाव के द्वारा उस शोक से सम्बन्धित स्व, पर आदि व्यक्तिविशेषो का, शोव के कारण मृतव्यक्ति आदि लोकवस्तुओं का तथा लौकिक परिस्थितियो का परिहार हो जाता है तब एक मात्र शोक को चर्वणा रह जाती है और इसी में शो वरनेवाले व्यक्ति की हृदय विश्रान्ति हो जाती है । तथा उस समय उसे शोषजन्य दुम का लेशमात्र भी भान नहीं होता और सुख का ही भान होता है, क्योंकि निविघ्न हृदयविश्रान्ति ही माख्य-शास्त्र के अनुसार सुख का स्वरूप है। इस प्रकार वरपरस मे एवधन शोक की चर्वणा जब सामाजिक को होती है तब शोरसविच्चवणा मे सामाजिक की निर्विघ्न हृदयविश्रान्ति हो जाने से वरणादि रस भी मानन्दरूप ही है। एक तत्र सवॅडमो मुखप्रधाना । स्वमविच्चणारूपस्यैव घनस्य प्रवाश्यानमारत्वात् । यथा हि एकघनशाम विच्चवर्णपि रोवे स्त्रीवादस्य हृदयविश्रान्तिरतराष विश्रालिशरीरत्वान गुणस्य
Andre Russell: कैरेबियाई स्टार बल्लेबाज़ आंद्रे रसल अपनी पावर हिटिंग के लिए जाने जाते हैं। रसल किसी भी बॉलिंग अटैक के खिलाफ अपनी आक्रमक बल्लेबाज़ी के दम पर टीम को मैच जितवाने का दम रखते हैं। ऐसा ही एक बार फिर देखने को मिला है। दरअसल, बीते शनिवार (3 दिसंबर) को रसल का तूफान अबू धाबी टी10 लीग में देखने को मिला जिसके दौरान उन्होंने तूफानी पचासा जड़कर डेक्कन ग्लेडिएटर्स को टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा दिया। जड़े 7 चौके 4 छक्केः आंद्रे रसल ने इस मैच में 32 गेंदों पर चौके छक्को की बरसात करके 63 रन ठोके। इस दौरान रसल का स्ट्राइक रेट 196.87 का रहा। कैरेबियाई पावर हिटर के बैट से 7 चौके और 4 छक्के निकले, यानी अपनी पारी के दौरान उन्होंने महज़ 11 गेंदों पर ही 52 रन ठोक दिये। इस इनिंग के दम पर ग्लेडिएटर्स ने यह मैच 4 गेंद बाकी रहते जीत लिया, हालांकि इससे पहले रसल करीम जनत के ओवर में आउट हो गए थे।
Andre Russell: कैरेबियाई स्टार बल्लेबाज़ आंद्रे रसल अपनी पावर हिटिंग के लिए जाने जाते हैं। रसल किसी भी बॉलिंग अटैक के खिलाफ अपनी आक्रमक बल्लेबाज़ी के दम पर टीम को मैच जितवाने का दम रखते हैं। ऐसा ही एक बार फिर देखने को मिला है। दरअसल, बीते शनिवार को रसल का तूफान अबू धाबी टीदस लीटरग में देखने को मिला जिसके दौरान उन्होंने तूफानी पचासा जड़कर डेक्कन ग्लेडिएटर्स को टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा दिया। जड़े सात चौके चार छक्केः आंद्रे रसल ने इस मैच में बत्तीस गेंदों पर चौके छक्को की बरसात करके तिरेसठ रन ठोके। इस दौरान रसल का स्ट्राइक रेट एक सौ छियानवे.सत्तासी का रहा। कैरेबियाई पावर हिटर के बैट से सात चौके और चार छक्के निकले, यानी अपनी पारी के दौरान उन्होंने महज़ ग्यारह गेंदों पर ही बावन रन ठोक दिये। इस इनिंग के दम पर ग्लेडिएटर्स ने यह मैच चार गेंद बाकी रहते जीत लिया, हालांकि इससे पहले रसल करीम जनत के ओवर में आउट हो गए थे।
उत्तर प्रदेश में चार चरणों के मतदान संपन्न हो चुके हैं। प्रतापगढ़ के कुंडा को कथित तौर पर ताकतवर कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का गढ़ माना जता है। यहां दशकों से 'राजा बनाम अन्य' की लड़ाई चली आ रही है। इस चुनाव में यहां की लड़ाई को 'ठाकुर बनाम यादव' बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि वर्षों बाद समाजवादी पार्टी ने राजा भैया के पूर्व सहयोगी गुलशन यादव को चुनावी अखाड़े में उतारने करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि दो दशकों से सपा ने राजा भैया के खिलाफ इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। राजा भैया, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, दोनों की राह उस समय अगल हो गई जब राजा भैया ने कथित तौर पर 2018 में भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। उसके बाद से दुश्मनी बढ़ती गई। अखिलेश यादव ने पिछले साल प्रतापगढ़ में ही उन्हें सार्वजनिक रूप से पहचानने से इनकार कर दिया। अखिलेश यादव ने कहा, "राजा भैया. . . कौन राजा भैया? " राजा भैया ने 2018 में अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की स्थापना की और इस बार 18 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। सपा अपने यादव-मुस्लिम समीकरण पर काफी हद तक भरोसा करते हुए समर्थन हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 3. 51 लाख मतदाता हैं। यहां सबसे प्रभावशाली गुट यादवों का है। इनकी संख्या 80,000 के करीब है। इसके बाद यहां ब्राह्मण और पटेल हैं। इस सीट पर केवल 10,000 ठाकुर हैं। राजा भैया ने 2017 में 1. 35 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। गुलशन यादव नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हैं। दूसरी ओर बीजेपी ने शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी की पत्नी सिंधुजा मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने पहले यादव के खिलाफ बसपा का प्रतिनिधित्व किया है। बसपा ने मोहम्मद फहीम को उम्मीदवार बनाया है। ग्राम प्रधान सौरभ सिंह ने कहा, "हो सकता है कि वह इस बार 1. 5 लाख वोटों से नहीं जीतेंगे। यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसे यहां के स्थानीय लोग चाहते हासिल करना चाहते हैं। राजा भैया को कोई हराने वाला नहीं है। "
उत्तर प्रदेश में चार चरणों के मतदान संपन्न हो चुके हैं। प्रतापगढ़ के कुंडा को कथित तौर पर ताकतवर कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का गढ़ माना जता है। यहां दशकों से 'राजा बनाम अन्य' की लड़ाई चली आ रही है। इस चुनाव में यहां की लड़ाई को 'ठाकुर बनाम यादव' बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि वर्षों बाद समाजवादी पार्टी ने राजा भैया के पूर्व सहयोगी गुलशन यादव को चुनावी अखाड़े में उतारने करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि दो दशकों से सपा ने राजा भैया के खिलाफ इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। राजा भैया, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, दोनों की राह उस समय अगल हो गई जब राजा भैया ने कथित तौर पर दो हज़ार अट्ठारह में भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। उसके बाद से दुश्मनी बढ़ती गई। अखिलेश यादव ने पिछले साल प्रतापगढ़ में ही उन्हें सार्वजनिक रूप से पहचानने से इनकार कर दिया। अखिलेश यादव ने कहा, "राजा भैया. . . कौन राजा भैया? " राजा भैया ने दो हज़ार अट्ठारह में अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की स्थापना की और इस बार अट्ठारह सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। सपा अपने यादव-मुस्लिम समीकरण पर काफी हद तक भरोसा करते हुए समर्थन हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग तीन. इक्यावन लाख मतदाता हैं। यहां सबसे प्रभावशाली गुट यादवों का है। इनकी संख्या अस्सी,शून्य के करीब है। इसके बाद यहां ब्राह्मण और पटेल हैं। इस सीट पर केवल दस,शून्य ठाकुर हैं। राजा भैया ने दो हज़ार सत्रह में एक. पैंतीस लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। गुलशन यादव नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हैं। दूसरी ओर बीजेपी ने शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी की पत्नी सिंधुजा मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने पहले यादव के खिलाफ बसपा का प्रतिनिधित्व किया है। बसपा ने मोहम्मद फहीम को उम्मीदवार बनाया है। ग्राम प्रधान सौरभ सिंह ने कहा, "हो सकता है कि वह इस बार एक. पाँच लाख वोटों से नहीं जीतेंगे। यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसे यहां के स्थानीय लोग चाहते हासिल करना चाहते हैं। राजा भैया को कोई हराने वाला नहीं है। "
है और न इस में उसकी कोशिश को कुछ दखल है सिर्फ अल्लाह तआला की रहनुमाई और तकदीरे इलाही पर इस का मदार है अल्लाह ही ने उसको भेजा है गोया वह अल्लाह का भेजा हुआ एक तोहफा है पस इस तोहफा के हुस्ने कबूल की यही एक सूरत है कि मुरीद के साथ भलाई से पेश आए उसको आदाब सिखाए और उसको रूहानी और अखलाकी तरंबीयत करे इस से यह साबित होता है कि मुरीद के माल और खिदमत से गरज नहीं रखना चाहिए यहां सिर्फ एक सूरत में इस का जवाज़ है कि अल्लाह तआला ने शैख़ को इसका हुक्म दे दिया हो और उसकी माली पेशकश के क़बूल करने की उसको ख़बर दे दी हो और मुरीद का भलाई और उसकी नजात इस अम्र से वाबस्ता कर दी हो इस सूरत में उससे बचने और उसके माल को वापस लौटा देना दुरूस्त नहीं । मुरीद किस को बनाया जाए मुरीद के इन्तिख़ाब के सिलसिले में शैख़ को एहतियात रखना चाहिए ऐसा न करे कि जो भी मिले उसको मुरीद बना ले बल्कि इस अम्र में भी अल्लाह के हुक्म और तकदीर का मुंतज़िर रहे और अल्लाह तआला जिस की रहनुमाई फ़रमा कर इसको शैख़ की ख़िदमत में भेजे और शैख के कमालात या ज़ाहिरी हालत को इस में दख़ल न हो उसको मुरीद बनाए और उसकी तरबीयत करे, इस सूरत में उसकी तरबीयत और अदब आमोज़ी की तौफीक अल्लाह की तरफ से होगी वरना नहीं । शैख़ पर लाज़िम है कि हत्तल मक़दूर मुरीद की तरबीयत में कसूर न करे अगर मुरीद से इताअते इलाही में सुस्ती या कसूर हो जाए तो तुन्हाई के वक्त उससे तौबा कराए और खुद भी उसके लिए माफ़ी तलब करे, मुरीदों के राज़ की निगहदाश्त शेख के लिए ज़रूरी है कि यह मुरीद की अमानत है। अगर कोई मुरीद मकरूहाते शरईया में से किसी मकरूह का मुरतकिब हो तो तन्हाई में उसको नसीहत करे और उसको इसके इआदा से बाज़ रखे ख़्वाह वह अम्र मकरूह जिस का इरतिकाब किया है उसूली हो या फ़ोई। मुरीद को कभी ऐसा दावा न करने दे जिस का वह खुद अहल नहीं है, मुरीद को ताकीद करे कि वह अपने अमल पर ग़रूर व तकब्बुर न करे, पसन्दी से बचे शैख़ को चाहिए कि मुरीद के अहवाल आमाल को उसकी नज़र में हक़ीर व बे माया दिखाए ताकि वह बेचारा ओजुब व ग़रूर में मुब्तिला होकर तबाह न हो जाए खुद पसन्दी बंदे को अल्लाह तआला की नज़रों से गिरा देती है। अगर तरबीयत इजतेमाई मक़सूद हो इन्फेरादी मतलूब न हो तो सब मुरीदों को जमा करके बिला तअय्युन व तख़सीस कहे कि तुम में से बाज़ लोग मुद्दई हैं या यह बात कहतें हैं या ऐसा करते हैं गरज़ इस सिलसिले के तमाम मफ़ासिद और बुराईयों को बयान कर के उनको नसीहत करे और बुराईयों से बचने की तलकीन करे मगर किसी फ़र्द की तख़सीस व तअय्युन न करे इस तर्ज़े अमल से इस्लाह भी हो जाएगी और किसी के दिल में नफ़रत भी पैदा नहीं होगी अगर बद खुल्की से काम लेगा, जज़ तौबीख़ करेगा तो या उनके असरार को फ़ाश करेगा या उन पर खुल्लम खुल्ला नुक्ता चीनी करेगा और उनकी बुराईयों का तज़किरा दूसरों से करेगा तो इस तर्जे अमल से शैख़ की मोहब्बत से उनके दिलों में नफरत पैदा होगी। अहले तरीक़त के मसलक में यह अमल मुरीदों पर तोहमत तराशी कहलाता है और औलिया अल्लाह की मोहब्बत का जो बीज मुरीदों के दिल में बोया जाता है इस अमल से उसकी नश्व व नुमा नहीं होती है, लिहाजा पीरे तरीक़त को इस सिलसिले में पूरी एहतियात रखना चाहिए, अगर ऐसी सूरत पेश आए कि शैख़ मग़लूबुल हाल हो जाए और इसका तदारूक उसके बस की बात न हो तो फिर शैख़ को मरतबए इरशाद और मसनदे तरीक़त से अलग हो जाना चाहिए और अलग हो कर अपने नफ्स को मुजाहिदा और रियाज़त में मशगूल करके और खुद किसी शैख़ की जुस्तजू करे ताकि उसको मोअद्दब, मुहज्ज़ब और सहीहुल हाल बना दे ऐसे ख़तरात जब उसके पास हों तो वह शैख़ बनने का अहल नहीं है इस लिए मुरीदों की राह में उसको रूकावट नहीं बनना चाहिए । बाब 26 अवामुन्नास, अगुनिया, और फुकरा के साथ तर्जे मुआशरत दोस्तों के साथ सूफी की रविश राहे तरीक़त के राह रौ के लिए ज़रूरी है कि दोस्तों की मुसाहिबत में ईसार, जवानमर्दी, दरगुज़र और ख़िदमत गुज़ारी से काम ले, अपना हक़ किसी पर न समझे और न किसी से अपने हक का मुतालबा करे, बल्कि इसके बर अक्स यह समझे कि हर शख़्स का उस पर हक़ है और उसके अदा करने में कोताही न करे। दोस्ती और मुसाहिबत के हुकूक में से यह भी है कि दोस्तों की हर बात और फेअल से मुवाफ़क़त का इज़हार करे (बशर्ते कि वह शरीअत के ख़िलाफ़ न हो) ख्वाह उसका अपना नुकसान हो मगर हमेशा उसका साथ दे अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उनकी ख़ातिर उसकी तौजीह करे और उनकी तरफ से उज ख्वाही करे, उनके साथ नफ़रत और जंग का ख़्याल भी न करे उनके ओयूब की तरफ से आंखें बन्द कर लें। तशद्दुद हमेशा दोस्तों के दिलों की पासदारी करे जो बात दोस्त को पसन्द न हो इससे इजतेनाब करे ख़्वाह उस में उसकी भलाई ही क्यों न हो, किसी दोस्त की तरफ से दिल में कीना न रखे अगर किसी के दिल में उसकी तरफ से नागवारी और ना खुशी पैदा हो जाए तो उसके साथ इस तरह पेश आए की उसके दिल से शिकायत दूर हो जाए, अगर कोई दोस्त उसकी ग़ीबत करे और उस ग़ीबत से उसके दिल में नागवारी का अहसास हो तो अपनी तरफ से इस कबीदगी का इज़हार न होने पाए बल्कि बरताव पहले जैसा ही रखे। गैरों के साथ बरताव गैरों के साथ बरताव और मुआशरती ताल्लुक का तकाज़ा यह है कि उनसे अपना राज़ छुपाये, उन के साथ शफ़क़त और मेहरबानी से पेश आए, उनका माल बतौरे अमानत अगर हो तो उनके सुपुर्द कर दे तरीक़त व मारफ्त के अहकाम उनसे पोशीदा रखे उनकी बद अख़लाकी पर सब्र करे उन पर अपनी बरतरी का ख़्याल भी दिल में न लाए बल्कि कहे कि अल्लाह उन से दर गुंज़र फरमाएगा ऐ मेरे नफ़्स तुझ से हर छोटी बड़ी बात की पुरशिश होगी और हर शय की तुझ से हिसाब फहमी होगी। अल्लाह तआला ना वाकिफ की इन बातों से दर गुज़र फरमाएगा कि वह इन बातों के जाने वाले नहीं हैं लेकिन जानने वालों से हिसाब फहमी होगी पस अवाम की तो परवाह भी नहीं की जाती अलबत्ता ख़्वास एक बड़े ख़तरे में हैं। उमरा के साथ सोहबत अंगनिया और दौलतमंदों के ख़िलाफ़ हुज्जत पेश करे उनसे ताल्लुक मुनक्तअ करे, उनकी दौलत
है और न इस में उसकी कोशिश को कुछ दखल है सिर्फ अल्लाह तआला की रहनुमाई और तकदीरे इलाही पर इस का मदार है अल्लाह ही ने उसको भेजा है गोया वह अल्लाह का भेजा हुआ एक तोहफा है पस इस तोहफा के हुस्ने कबूल की यही एक सूरत है कि मुरीद के साथ भलाई से पेश आए उसको आदाब सिखाए और उसको रूहानी और अखलाकी तरंबीयत करे इस से यह साबित होता है कि मुरीद के माल और खिदमत से गरज नहीं रखना चाहिए यहां सिर्फ एक सूरत में इस का जवाज़ है कि अल्लाह तआला ने शैख़ को इसका हुक्म दे दिया हो और उसकी माली पेशकश के क़बूल करने की उसको ख़बर दे दी हो और मुरीद का भलाई और उसकी नजात इस अम्र से वाबस्ता कर दी हो इस सूरत में उससे बचने और उसके माल को वापस लौटा देना दुरूस्त नहीं । मुरीद किस को बनाया जाए मुरीद के इन्तिख़ाब के सिलसिले में शैख़ को एहतियात रखना चाहिए ऐसा न करे कि जो भी मिले उसको मुरीद बना ले बल्कि इस अम्र में भी अल्लाह के हुक्म और तकदीर का मुंतज़िर रहे और अल्लाह तआला जिस की रहनुमाई फ़रमा कर इसको शैख़ की ख़िदमत में भेजे और शैख के कमालात या ज़ाहिरी हालत को इस में दख़ल न हो उसको मुरीद बनाए और उसकी तरबीयत करे, इस सूरत में उसकी तरबीयत और अदब आमोज़ी की तौफीक अल्लाह की तरफ से होगी वरना नहीं । शैख़ पर लाज़िम है कि हत्तल मक़दूर मुरीद की तरबीयत में कसूर न करे अगर मुरीद से इताअते इलाही में सुस्ती या कसूर हो जाए तो तुन्हाई के वक्त उससे तौबा कराए और खुद भी उसके लिए माफ़ी तलब करे, मुरीदों के राज़ की निगहदाश्त शेख के लिए ज़रूरी है कि यह मुरीद की अमानत है। अगर कोई मुरीद मकरूहाते शरईया में से किसी मकरूह का मुरतकिब हो तो तन्हाई में उसको नसीहत करे और उसको इसके इआदा से बाज़ रखे ख़्वाह वह अम्र मकरूह जिस का इरतिकाब किया है उसूली हो या फ़ोई। मुरीद को कभी ऐसा दावा न करने दे जिस का वह खुद अहल नहीं है, मुरीद को ताकीद करे कि वह अपने अमल पर ग़रूर व तकब्बुर न करे, पसन्दी से बचे शैख़ को चाहिए कि मुरीद के अहवाल आमाल को उसकी नज़र में हक़ीर व बे माया दिखाए ताकि वह बेचारा ओजुब व ग़रूर में मुब्तिला होकर तबाह न हो जाए खुद पसन्दी बंदे को अल्लाह तआला की नज़रों से गिरा देती है। अगर तरबीयत इजतेमाई मक़सूद हो इन्फेरादी मतलूब न हो तो सब मुरीदों को जमा करके बिला तअय्युन व तख़सीस कहे कि तुम में से बाज़ लोग मुद्दई हैं या यह बात कहतें हैं या ऐसा करते हैं गरज़ इस सिलसिले के तमाम मफ़ासिद और बुराईयों को बयान कर के उनको नसीहत करे और बुराईयों से बचने की तलकीन करे मगर किसी फ़र्द की तख़सीस व तअय्युन न करे इस तर्ज़े अमल से इस्लाह भी हो जाएगी और किसी के दिल में नफ़रत भी पैदा नहीं होगी अगर बद खुल्की से काम लेगा, जज़ तौबीख़ करेगा तो या उनके असरार को फ़ाश करेगा या उन पर खुल्लम खुल्ला नुक्ता चीनी करेगा और उनकी बुराईयों का तज़किरा दूसरों से करेगा तो इस तर्जे अमल से शैख़ की मोहब्बत से उनके दिलों में नफरत पैदा होगी। अहले तरीक़त के मसलक में यह अमल मुरीदों पर तोहमत तराशी कहलाता है और औलिया अल्लाह की मोहब्बत का जो बीज मुरीदों के दिल में बोया जाता है इस अमल से उसकी नश्व व नुमा नहीं होती है, लिहाजा पीरे तरीक़त को इस सिलसिले में पूरी एहतियात रखना चाहिए, अगर ऐसी सूरत पेश आए कि शैख़ मग़लूबुल हाल हो जाए और इसका तदारूक उसके बस की बात न हो तो फिर शैख़ को मरतबए इरशाद और मसनदे तरीक़त से अलग हो जाना चाहिए और अलग हो कर अपने नफ्स को मुजाहिदा और रियाज़त में मशगूल करके और खुद किसी शैख़ की जुस्तजू करे ताकि उसको मोअद्दब, मुहज्ज़ब और सहीहुल हाल बना दे ऐसे ख़तरात जब उसके पास हों तो वह शैख़ बनने का अहल नहीं है इस लिए मुरीदों की राह में उसको रूकावट नहीं बनना चाहिए । बाब छब्बीस अवामुन्नास, अगुनिया, और फुकरा के साथ तर्जे मुआशरत दोस्तों के साथ सूफी की रविश राहे तरीक़त के राह रौ के लिए ज़रूरी है कि दोस्तों की मुसाहिबत में ईसार, जवानमर्दी, दरगुज़र और ख़िदमत गुज़ारी से काम ले, अपना हक़ किसी पर न समझे और न किसी से अपने हक का मुतालबा करे, बल्कि इसके बर अक्स यह समझे कि हर शख़्स का उस पर हक़ है और उसके अदा करने में कोताही न करे। दोस्ती और मुसाहिबत के हुकूक में से यह भी है कि दोस्तों की हर बात और फेअल से मुवाफ़क़त का इज़हार करे ख्वाह उसका अपना नुकसान हो मगर हमेशा उसका साथ दे अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उनकी ख़ातिर उसकी तौजीह करे और उनकी तरफ से उज ख्वाही करे, उनके साथ नफ़रत और जंग का ख़्याल भी न करे उनके ओयूब की तरफ से आंखें बन्द कर लें। तशद्दुद हमेशा दोस्तों के दिलों की पासदारी करे जो बात दोस्त को पसन्द न हो इससे इजतेनाब करे ख़्वाह उस में उसकी भलाई ही क्यों न हो, किसी दोस्त की तरफ से दिल में कीना न रखे अगर किसी के दिल में उसकी तरफ से नागवारी और ना खुशी पैदा हो जाए तो उसके साथ इस तरह पेश आए की उसके दिल से शिकायत दूर हो जाए, अगर कोई दोस्त उसकी ग़ीबत करे और उस ग़ीबत से उसके दिल में नागवारी का अहसास हो तो अपनी तरफ से इस कबीदगी का इज़हार न होने पाए बल्कि बरताव पहले जैसा ही रखे। गैरों के साथ बरताव गैरों के साथ बरताव और मुआशरती ताल्लुक का तकाज़ा यह है कि उनसे अपना राज़ छुपाये, उन के साथ शफ़क़त और मेहरबानी से पेश आए, उनका माल बतौरे अमानत अगर हो तो उनके सुपुर्द कर दे तरीक़त व मारफ्त के अहकाम उनसे पोशीदा रखे उनकी बद अख़लाकी पर सब्र करे उन पर अपनी बरतरी का ख़्याल भी दिल में न लाए बल्कि कहे कि अल्लाह उन से दर गुंज़र फरमाएगा ऐ मेरे नफ़्स तुझ से हर छोटी बड़ी बात की पुरशिश होगी और हर शय की तुझ से हिसाब फहमी होगी। अल्लाह तआला ना वाकिफ की इन बातों से दर गुज़र फरमाएगा कि वह इन बातों के जाने वाले नहीं हैं लेकिन जानने वालों से हिसाब फहमी होगी पस अवाम की तो परवाह भी नहीं की जाती अलबत्ता ख़्वास एक बड़े ख़तरे में हैं। उमरा के साथ सोहबत अंगनिया और दौलतमंदों के ख़िलाफ़ हुज्जत पेश करे उनसे ताल्लुक मुनक्तअ करे, उनकी दौलत
जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों (बीटेक को छोड़कर) के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर तीन जुलाई कर दी है। विश्वविद्यालय सर्टिफिकेट डिप्लोमा स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों सहित 60 से अधिक पाठ्यक्रमों पर दाखिले की पेशकश की है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष से नई शिक्षा नीति के अनुरूप तीन और चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रोग्राम की शुरूआत की गई है। फरीदाबाद, जागरण संवाददाता। जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों (बीटेक को छोड़कर) के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर तीन जुलाई कर दी है। पीजी पाठ्यक्रमों के लिए जारी प्रवेश परीक्षा के कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। डीन (अकादमिक मामले) प्रो. आशुतोष दीक्षित ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों सहित 60 से अधिक पाठ्यक्रमों पर दाखिले की पेशकश की है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष से नई शिक्षा नीति के अनुरूप तीन और चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रोग्राम की शुरूआत की गई है, जिससे विद्यार्थियों को मुख्य डिग्री के साथ- चुनिंदा विषयों में माइनर डिग्री करने तथा मल्टीपल एंट्री व एग्जिट विकल्पों की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय नए सत्र से बीएससी (विजुअल कम्युनिकेशन एंड मल्टीमीडिया टेक्नोलॉजी), कचरा प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा तथा एप्लाइड मैकेनिक्स एवं मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग में सर्टिफिकेट के रूप में नए पाठ्यक्रम भी शुरू कर रहा है। विश्वविद्यालय ने दाखिला संबंधी पूछताछ के लिए हेल्पलाइन नंबर 7428954273 जारी किया है।
जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर तीन जुलाई कर दी है। विश्वविद्यालय सर्टिफिकेट डिप्लोमा स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों सहित साठ से अधिक पाठ्यक्रमों पर दाखिले की पेशकश की है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष से नई शिक्षा नीति के अनुरूप तीन और चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रोग्राम की शुरूआत की गई है। फरीदाबाद, जागरण संवाददाता। जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर तीन जुलाई कर दी है। पीजी पाठ्यक्रमों के लिए जारी प्रवेश परीक्षा के कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। डीन प्रो. आशुतोष दीक्षित ने बताया कि शैक्षणिक सत्र दो हज़ार तेईस-चौबीस में विश्वविद्यालय सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों सहित साठ से अधिक पाठ्यक्रमों पर दाखिले की पेशकश की है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष से नई शिक्षा नीति के अनुरूप तीन और चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रोग्राम की शुरूआत की गई है, जिससे विद्यार्थियों को मुख्य डिग्री के साथ- चुनिंदा विषयों में माइनर डिग्री करने तथा मल्टीपल एंट्री व एग्जिट विकल्पों की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय नए सत्र से बीएससी , कचरा प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा तथा एप्लाइड मैकेनिक्स एवं मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग में सर्टिफिकेट के रूप में नए पाठ्यक्रम भी शुरू कर रहा है। विश्वविद्यालय ने दाखिला संबंधी पूछताछ के लिए हेल्पलाइन नंबर सात चार दो आठ नौ पाँच चार दो सात तीन जारी किया है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत आजकल सुर्खियों में हैं। उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री के ड्रग्स कल्चर का पर्दाफाश कर लोगों को चौंका दिया है। इसके साथ ही कंगना रनौत ने बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े कई खुलासे किए हैं। हाल ही में कंगना 4 दिनों के लिए मुंबई आई थीं। उनके ऑफिस पर बीएमसी ने बुलडोजर चला दिया था। महाराष्ट्र सरकार के साथ कंगना की जुबानी जंग भी जारी है। अब डायरेक्टर निखिल द्विवेदी ने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कुछ ट्वीट किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म जगत के एक-एक व्यक्ति ने सारे भारतवर्ष का निर्माण किया है। हर चीज में हमारा भी उसी तरह योगदान है। आपको बनाने में भी। आपकी फिल्मों की टिकट भी हमने खरीदी हैं। मगर कल को आप कुछ गलत करें या सही तो हम सम्पूर्ण फिल्मजगत को न तो दोषी ठहरा सकते हैं न दाद दे सकते है। कंगना रनौत भी चुप बैठने वालों में से कहां। उन्होंने निखिल द्विवेदी को जवाब देते हुए लिखा कि क्या निर्माण किया? आइटम नम्बर्ज़ का? अधिकतर वाहियात फ़िल्मों का? ड्रग्स कल्चर का? देशद्रोह और टेररिज़म का? बॉलीवुड पर दुनिया हंसती है, देश का हर जगह मखौल बनाया जाता है, पैसे और नाम तो दवूद ने भी कमाया है मगर इज़्ज़त चाहिए तो उसे कमाने की कोशिश करो काली करतूतें छुपाने की नहीं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत आजकल सुर्खियों में हैं। उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री के ड्रग्स कल्चर का पर्दाफाश कर लोगों को चौंका दिया है। इसके साथ ही कंगना रनौत ने बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े कई खुलासे किए हैं। हाल ही में कंगना चार दिनों के लिए मुंबई आई थीं। उनके ऑफिस पर बीएमसी ने बुलडोजर चला दिया था। महाराष्ट्र सरकार के साथ कंगना की जुबानी जंग भी जारी है। अब डायरेक्टर निखिल द्विवेदी ने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कुछ ट्वीट किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म जगत के एक-एक व्यक्ति ने सारे भारतवर्ष का निर्माण किया है। हर चीज में हमारा भी उसी तरह योगदान है। आपको बनाने में भी। आपकी फिल्मों की टिकट भी हमने खरीदी हैं। मगर कल को आप कुछ गलत करें या सही तो हम सम्पूर्ण फिल्मजगत को न तो दोषी ठहरा सकते हैं न दाद दे सकते है। कंगना रनौत भी चुप बैठने वालों में से कहां। उन्होंने निखिल द्विवेदी को जवाब देते हुए लिखा कि क्या निर्माण किया? आइटम नम्बर्ज़ का? अधिकतर वाहियात फ़िल्मों का? ड्रग्स कल्चर का? देशद्रोह और टेररिज़म का? बॉलीवुड पर दुनिया हंसती है, देश का हर जगह मखौल बनाया जाता है, पैसे और नाम तो दवूद ने भी कमाया है मगर इज़्ज़त चाहिए तो उसे कमाने की कोशिश करो काली करतूतें छुपाने की नहीं।
भोपाल। देश में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहली बार ग्लोबल स्तर पर श्रीराम रन का आयोजन किया जा रहा है। यह रन रामनवमी के अवसर पर 21 अप्रैल को शुरू होगी। देश के लाखों करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बने भगवान राम के नाम पर यह दौड़ कोविड 19 के कारण वर्चुअली आयोजित हो रही है। श्रीराम रन की शुरूआत 21 अप्रैल को सुबह 5 बजे से होगी, जो उसी दिन रात 10 बजे तक चलेगी। इसका आयोजन राम आस्था मिशन फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। रन में भारत सहित विश्व के 52 देशों के लोग एक साथ अपने आराध्य देव के लिए दौड़ लगाएंगे। खास बात यह है कि श्रीराम रन तीन अलग-अलग कैटेगरी 1 किमी, 5 किमी और 9 किमी में आयोजित होगी। जिसमें प्रतिभागी अपनी इच्छानुसार कैटेगरी का चयन कर सकते हैं। इस श्रीराम रन में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को प्री- रजिस्ट्रेशन कराना होगा। श्रीराम रन के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो 15 अप्रैल तक चलेगी। प्रतिभागी www. shriramrun. com पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। राम आस्था मिशन फाउंडेशन के सह संस्थापक डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यह पहला मौका है जब लोग आस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वच्छता के लिए एकजुट होकर दौड़ लगाएंगे। दौड़ के माध्यम से स्वच्छता का संदेश भी दिया जाएगा ताकि जो लोग जहां दौड़ रहे हैं उस स्थान को साफ और स्वच्छ रखे। श्रीराम रन में रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रतिभागियों के नाम पर एक पेड़ लगाया जाएगा। यह पेड़ देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार होने वाले रामवन में लगाए जाएंगे। इससे पर्यावरण को लाभ होगा और देश में कई रामवन भी स्थापित होंगे। वहीं, 17 अक्टूबर 2021 के बाद श्रीराम रन हर वर्ष दशहरा उत्सव के बाद आने वाले रविवार को आयोजित होगी।
भोपाल। देश में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहली बार ग्लोबल स्तर पर श्रीराम रन का आयोजन किया जा रहा है। यह रन रामनवमी के अवसर पर इक्कीस अप्रैल को शुरू होगी। देश के लाखों करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बने भगवान राम के नाम पर यह दौड़ कोविड उन्नीस के कारण वर्चुअली आयोजित हो रही है। श्रीराम रन की शुरूआत इक्कीस अप्रैल को सुबह पाँच बजे से होगी, जो उसी दिन रात दस बजे तक चलेगी। इसका आयोजन राम आस्था मिशन फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। रन में भारत सहित विश्व के बावन देशों के लोग एक साथ अपने आराध्य देव के लिए दौड़ लगाएंगे। खास बात यह है कि श्रीराम रन तीन अलग-अलग कैटेगरी एक किमी, पाँच किमी और नौ किमी में आयोजित होगी। जिसमें प्रतिभागी अपनी इच्छानुसार कैटेगरी का चयन कर सकते हैं। इस श्रीराम रन में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को प्री- रजिस्ट्रेशन कराना होगा। श्रीराम रन के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो पंद्रह अप्रैल तक चलेगी। प्रतिभागी www. shriramrun. com पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। राम आस्था मिशन फाउंडेशन के सह संस्थापक डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यह पहला मौका है जब लोग आस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वच्छता के लिए एकजुट होकर दौड़ लगाएंगे। दौड़ के माध्यम से स्वच्छता का संदेश भी दिया जाएगा ताकि जो लोग जहां दौड़ रहे हैं उस स्थान को साफ और स्वच्छ रखे। श्रीराम रन में रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रतिभागियों के नाम पर एक पेड़ लगाया जाएगा। यह पेड़ देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार होने वाले रामवन में लगाए जाएंगे। इससे पर्यावरण को लाभ होगा और देश में कई रामवन भी स्थापित होंगे। वहीं, सत्रह अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस के बाद श्रीराम रन हर वर्ष दशहरा उत्सव के बाद आने वाले रविवार को आयोजित होगी।
IPL 2022 के मेगा ऑक्शन में जहां एक तरफ कई युवा और अनकैप्ड प्लेयर्स पर फ्रेंचाइजी ने जमकर बोली लगाई है, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी प्लेयर्स रह गये, जिनपर फ्रेंचाइजी ने बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं दिखायी। ऐसे ही ऑस्ट्रेलिया के दो गेंदबाज है, जिन्हे खरीदने में फ्रेंचाइजी ने बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं दिखायी थी। इस बार IPL 2022 के लिए ऑक्शन में 204 प्लेयर्स पर ही फ्रेंचाइजी ने बोली लगाई, जिसमे कई ऐसे प्लेयर्स रह गये जिनके ऊपर किसी भी फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगायी। इस सूचि में ऑस्ट्रेलिया के दो दिग्गज गेंदबाज केन रिचर्डसन और एडम जम्पा शामिल है। IPL 2022 के ऑक्शन में किसी भी फ्रेंचाइजी ने इन दो गेंदबाजो पर बोली लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। इसके बाद केन रिचर्डसन ने अपने और जम्पा के अनसोल्ड रहने के पीछे का कारण सबको बताया है। IPL 2022 के ऑक्शन में ऑस्ट्रेलिया के दो दिग्गज गेंदबाज केन रिचर्डसन और एडम जम्पा अनसोल्ड रह गये। इन दोनो प्लेयर्स पर किसी भी टीम ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया, जिस पर रिचर्डसन ने अपने और जम्पा के अनसोल्ड रहने के पीछे का कारण बताया। दरअसल IPL 2021 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने केन रिचर्डसन और एडम जम्पा को अपने साथ जोड़ा था, लेकिन पिछले सीजन में इन खिलाड़ियों को टीम में ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिल पाया था। इसके बाद कोविड-19 की वजह से IPL 2021 के दूसरे फेज में इन खिलाड़ियों ने अपना नाम वापस ले लिया था। इस साल कोई खरीददार नहीं मिलने पर रिचर्डसन ने यही बताया कि पिछले साल नाम वापस लेने की वजह से IPL 2022 में किसी भी फ्रेंचाइजी ने उन्हे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने पिछले सीजन में एडम जम्पा और केन रिचर्डसन को अपने साथ जोड़ा था। लेकिन इन दोनो प्लेयर्स ने कोविड की वजह से IPL 2021 को बीच में ही छोड़ने का फैसला किया था। IPL 2022 के ऑक्शन में अनसोल्ड रहने पर रिचर्डसन ने कहा कि उन्हें पिछले सीजन में कोविड की वजह से टूर्नामेंट को बीच में छोड़कर जाना पड़ा था। उस समय वहां रहना हमारी प्राथमिकता थी, हमें ऑस्ट्रेलिया वापस जाना था। रिचर्डसन ने आगे कहा- लगता है इसी वजह से कि इस बार भी ये प्लेयर्स वापस नहीं आयेंगे ऐसा सोचकर फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगाया। उन्होने अपनी बातो पर कहा कि वह केवल यही अनुमान लगा रहे हैं कि यह एक कारण हो सकता है उनके अनसोल्ड रहने का, हालांकि अभी तक किसी भी फ्रेंचाइजी से इसके बारे में कोई बात नहीं हुई है। IPL 2022 के लिए 590 प्लेयर्स का नाम ही शॉटलिस्ट हुआ था, जिसमें केवल 204 प्लेयर्स पर ही फ्रेंचाइजी ने अपनी दिलचस्पी दिखायी। इस ऑक्शन में 400 के करीब खिलाड़ी अनसोल्ड रह गये और इन पर किसी भी टीम ने बोली नहीं लगायी। ऑक्शन में मुंबई इंडियंस ने ईशान किशन पर बड़ी बोली लगाकर अपने साथ जोड़ा है। ऑक्शन के बाद सभी को IPL 2022 का बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही IPL 2022 का शेड्यूल सामने आ जायेगा।
IPL दो हज़ार बाईस के मेगा ऑक्शन में जहां एक तरफ कई युवा और अनकैप्ड प्लेयर्स पर फ्रेंचाइजी ने जमकर बोली लगाई है, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी प्लेयर्स रह गये, जिनपर फ्रेंचाइजी ने बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं दिखायी। ऐसे ही ऑस्ट्रेलिया के दो गेंदबाज है, जिन्हे खरीदने में फ्रेंचाइजी ने बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं दिखायी थी। इस बार IPL दो हज़ार बाईस के लिए ऑक्शन में दो सौ चार प्लेयर्स पर ही फ्रेंचाइजी ने बोली लगाई, जिसमे कई ऐसे प्लेयर्स रह गये जिनके ऊपर किसी भी फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगायी। इस सूचि में ऑस्ट्रेलिया के दो दिग्गज गेंदबाज केन रिचर्डसन और एडम जम्पा शामिल है। IPL दो हज़ार बाईस के ऑक्शन में किसी भी फ्रेंचाइजी ने इन दो गेंदबाजो पर बोली लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। इसके बाद केन रिचर्डसन ने अपने और जम्पा के अनसोल्ड रहने के पीछे का कारण सबको बताया है। IPL दो हज़ार बाईस के ऑक्शन में ऑस्ट्रेलिया के दो दिग्गज गेंदबाज केन रिचर्डसन और एडम जम्पा अनसोल्ड रह गये। इन दोनो प्लेयर्स पर किसी भी टीम ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया, जिस पर रिचर्डसन ने अपने और जम्पा के अनसोल्ड रहने के पीछे का कारण बताया। दरअसल IPL दो हज़ार इक्कीस में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने केन रिचर्डसन और एडम जम्पा को अपने साथ जोड़ा था, लेकिन पिछले सीजन में इन खिलाड़ियों को टीम में ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिल पाया था। इसके बाद कोविड-उन्नीस की वजह से IPL दो हज़ार इक्कीस के दूसरे फेज में इन खिलाड़ियों ने अपना नाम वापस ले लिया था। इस साल कोई खरीददार नहीं मिलने पर रिचर्डसन ने यही बताया कि पिछले साल नाम वापस लेने की वजह से IPL दो हज़ार बाईस में किसी भी फ्रेंचाइजी ने उन्हे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने पिछले सीजन में एडम जम्पा और केन रिचर्डसन को अपने साथ जोड़ा था। लेकिन इन दोनो प्लेयर्स ने कोविड की वजह से IPL दो हज़ार इक्कीस को बीच में ही छोड़ने का फैसला किया था। IPL दो हज़ार बाईस के ऑक्शन में अनसोल्ड रहने पर रिचर्डसन ने कहा कि उन्हें पिछले सीजन में कोविड की वजह से टूर्नामेंट को बीच में छोड़कर जाना पड़ा था। उस समय वहां रहना हमारी प्राथमिकता थी, हमें ऑस्ट्रेलिया वापस जाना था। रिचर्डसन ने आगे कहा- लगता है इसी वजह से कि इस बार भी ये प्लेयर्स वापस नहीं आयेंगे ऐसा सोचकर फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगाया। उन्होने अपनी बातो पर कहा कि वह केवल यही अनुमान लगा रहे हैं कि यह एक कारण हो सकता है उनके अनसोल्ड रहने का, हालांकि अभी तक किसी भी फ्रेंचाइजी से इसके बारे में कोई बात नहीं हुई है। IPL दो हज़ार बाईस के लिए पाँच सौ नब्बे प्लेयर्स का नाम ही शॉटलिस्ट हुआ था, जिसमें केवल दो सौ चार प्लेयर्स पर ही फ्रेंचाइजी ने अपनी दिलचस्पी दिखायी। इस ऑक्शन में चार सौ के करीब खिलाड़ी अनसोल्ड रह गये और इन पर किसी भी टीम ने बोली नहीं लगायी। ऑक्शन में मुंबई इंडियंस ने ईशान किशन पर बड़ी बोली लगाकर अपने साथ जोड़ा है। ऑक्शन के बाद सभी को IPL दो हज़ार बाईस का बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही IPL दो हज़ार बाईस का शेड्यूल सामने आ जायेगा।
सोलन - ठोडो मैदान स्थित पार्टी कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा जिला सोलन की बैठक रविवार को जिलाध्यक्ष भरत साहनी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष विशाल चौहान, उपाध्यक्ष विषय ठाकुर, प्रदेश सचिव एवं प्रभारी सोलन जिला अभीत धूमल, विस्तारक भाजपा जिला सोलन अनिल कौशल ने विशेष रूप से भाग लिया। इस मौके पर मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष ने जहां कार्यकर्ताओं में जोश भरा,वहीं प्रधानमंत्री की शिमला में होने वाली रैली को लेकर जरूरी टिप्स भी दिए। विशाल चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रिज मैदान शिमला में 27 अप्रैल को होने जा रही विशाल रैली ऐतिहासिक होगी। उन्होंने कहा कि इस रैली के सफल आयोजन में भाजयुमो अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए सभी कार्यकर्ता 27 अप्रैल को रैली स्थित रिज मैदान में पहुंचे। विशाल चौहान ने कहा कि शिमला रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे,बल्कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का भी इस रैली से श्रीगणेश करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वह केंद्र सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएं। इस मौके पर बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष भरत साहनी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की रैली में ज्यादा से ज्यादा युवाओं की भागीदारी को सुनिश्चित बनाने के लिए प्रत्येक मंडल से कम से एक एक हजार कार्यकर्ता रैली में हिस्सा लेंगे। जिला के सभी पांचों मंडलों से पांच हजार कार्यकर्ता रैली में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित बनाएं। उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री की रैली को सफल बनाने में युवा मोर्चा अहम भूमिका निभाएगा। बैठक में जिला महामंत्री राजीव शर्मा, जिला उपाध्यक्ष रूपराम शर्मा, विनोद ठाकुर, दिशु शर्मा, जिला सचिव अनूप चौहान, निशांत ठाकुर, नीलम, हीना, अभिषेक ठाकुर, विक्रम आनंद, सत्यंम गुप्ता, खेमचंद, गोपाल बंसल, सुनील शर्मा, सौरभ धीमान, मनोज चौहान सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सोलन - ठोडो मैदान स्थित पार्टी कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा जिला सोलन की बैठक रविवार को जिलाध्यक्ष भरत साहनी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष विशाल चौहान, उपाध्यक्ष विषय ठाकुर, प्रदेश सचिव एवं प्रभारी सोलन जिला अभीत धूमल, विस्तारक भाजपा जिला सोलन अनिल कौशल ने विशेष रूप से भाग लिया। इस मौके पर मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष ने जहां कार्यकर्ताओं में जोश भरा,वहीं प्रधानमंत्री की शिमला में होने वाली रैली को लेकर जरूरी टिप्स भी दिए। विशाल चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रिज मैदान शिमला में सत्ताईस अप्रैल को होने जा रही विशाल रैली ऐतिहासिक होगी। उन्होंने कहा कि इस रैली के सफल आयोजन में भाजयुमो अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए सभी कार्यकर्ता सत्ताईस अप्रैल को रैली स्थित रिज मैदान में पहुंचे। विशाल चौहान ने कहा कि शिमला रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे,बल्कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का भी इस रैली से श्रीगणेश करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वह केंद्र सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएं। इस मौके पर बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष भरत साहनी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की रैली में ज्यादा से ज्यादा युवाओं की भागीदारी को सुनिश्चित बनाने के लिए प्रत्येक मंडल से कम से एक एक हजार कार्यकर्ता रैली में हिस्सा लेंगे। जिला के सभी पांचों मंडलों से पांच हजार कार्यकर्ता रैली में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित बनाएं। उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री की रैली को सफल बनाने में युवा मोर्चा अहम भूमिका निभाएगा। बैठक में जिला महामंत्री राजीव शर्मा, जिला उपाध्यक्ष रूपराम शर्मा, विनोद ठाकुर, दिशु शर्मा, जिला सचिव अनूप चौहान, निशांत ठाकुर, नीलम, हीना, अभिषेक ठाकुर, विक्रम आनंद, सत्यंम गुप्ता, खेमचंद, गोपाल बंसल, सुनील शर्मा, सौरभ धीमान, मनोज चौहान सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
एक माफिया अतीक अहमद के टीवी कवरेज के बारे में सुना तो आज कुछ पोस्ट्स बहुत तकलीफ के साथ लिख दीं। ऐसी भाषा लिखना ,जिसके पक्षधर आप खुद भी न हों ,बहुत तकलीफ देता है। क्योंकि यह सब सस्ते कटाक्ष से ज्यादा कुछ नहीं होता पर अतीक अहमद के टीवी कवरेज ने जितना शर्मसार किया है वह अभूतपूर्व है। रेटिंग की भूख कहें या अडानी से ध्यान बांटने की कोशिश या राहुल गांधी को स्पेस न देने की साजिश ...जो भी हो आज की यह पत्रकारिता लोकतंत्र के ताबूत को ढोने वाली बड़ी ताकत बन रही है। मन में सवाल उठ रहा है कि हमने- आपने आजादी की लड़ाई तो नहीं लड़ी लेकिन क्या हम इस आजादी को गंवाने का जुर्म अपने सीने पर टांगने वाले हैं ? गुलामी आज अंगरेज के नाम से नहीं आ रही है। आज की गुलामी मूढ़ता और अवैज्ञानिकता के रास्ते, सांप्रदायिकता ,नफरत और अंधविश्वास पर सवार हो कर उन्माद के हथियार के साथ आ रही है। इस गुलामी की मंजिल तानाशाही है और यह सामने दिख रही है । जी बिल्कुल सामने ही...आपके टीवी स्क्रीन पर ! आप न देख पा रहे हों तो यह निकट दृष्टि दोष है। ये आर्यभट्ट और वराहमिहिर का देश है। ये सीवी रमन , होमी जहांगीर भाभा, विक्रम साराभाई,अब्दुल कलाम जैसों का देश है। ये जगदीश चंद्र बसु से लेकर जयंत नार्लीकर और सलीम अली तक का देश है। ये मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या का देश है। ये रामानुजन और हरगोविंद खुराना का देश है। ये देश शांति स्वरूप भटनागर का है। ये कबीर और रसखान का देश है। ये गांधी,नेहरू और टैगोर का देश है। सूची इतनी लंबी है कि पढ़ते पढ़ते हमें अपने वर्तमान पर शर्म आयेगी । ये वो थे जिन्हें गर्व से हम अपनी वैज्ञानिक चेतना के पहरेदार कहते हैं -आज भी । दुर्भाग्य से आज इस सूची की चर्चा भी उस दिन हो रही है जब तीन साल पहले पूरे देश को कोरोना के दौरान ताली थाली बजाते हुए अवैज्ञानिकता के घूरे में धकेल दिया गया था ! हम सबने टीवी पर देखा ही था। इस अवैज्ञानिकता के प्रसार में आज देश का मीडिया जितनी शिद्दत से लगा है उसकी मिसाल शायद ही दुनिया में कहीं मिले। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के मामले में आज हिंदुस्तान तलहटी में जगह तलाश रहा है ,यही तो इस देश की पत्रकारिता का मूत्र-काल है! आज भारतीय मीडिया की शिनाख्त सिर्फ अवैज्ञानिकता का ढोल पीटने वाले ढोलचियों में नहीं होती बल्कि सत्ता के सामने रेंगते ऐसे कार्पोरेट मीडिया की तरह होती है जिस पर बाकायदा जनांदोलनों को कुचलने का , विपक्ष की आवाज को दबाने का, कार्पोरेट सेवा में लीन रहने का संगीन आरोप है। ऐसा मीडिया ना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है ना देश के लिए,सच तो यह है कि किसी एक देश में मीडिया की दुर्दशा हर उस लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है जो दुनिया में कहीं भी अस्तित्व में हो। हमारी राजनीतिक पसंद,नापसंद अलग-अलग हो सकती है। हम ढेर सारे मतभेदों के बीच सद्भाव के साथ जीने वाला समाज होना चाहते हैं। हम मतभेदों का सम्मान करने वाले समाज हों तो यह देश की ताकत होगा। लेकिन हमको कूढ़ मगज समाज बनाने की साजिशें हों तो सतर्क होना चाहिए और सोचना चाहिए कि ऐसी साजिशें क्या सिर्फ व्यवसायिक जरूरत हैं ? नहीं ! दरअसल ऐसी साजिशें देश को तानाशाही के रास्ते ढकलने का जतन हैं। दुर्भाग्य से आज मीडिया और खासतौर पर टीवी तो ऐसी साजिशों के लिए बड़ा औजार बन गया है। आजादी के बाद तो लक्ष्य यही था कि देश ज्ञान के रास्ते आधुनिक समाज की नींव रखने के इरादे से आगे बढ़े लेकिन वो कौन हैं जो आज आधुनिक , वैज्ञानिक और नए नए अविष्कार करते समाज की जगह कूपमण्डूक समाज चाहते हैं ? और क्या मीडिया नासमझी में इस चाहत का साथी बन बैठा है ? आपको आज के न्यूजरूम की कार्यप्रणाली को बहुत गंभीरता से समझना होगा। अगर लोकतंत्र की ताजी हवा चाहिए तो आज के न्यूजरूम की घुटन को महसूस करना होगा और इस बारे में जागरूक भी होना होगा। आज का न्यूजरूम आमतौर पर देश की एक ऐसी सरकार चला रही है जिसके इरादें साफ हैं। छोटे, कम पूंजी के मीडिया हाउस फिर भी किसी तरह खुद को बचा कर रखे हुए हैं । पर बड़ी पूंजी और सत्ता-कार्पोरेट जुगलबंदी ने एक ऐसा मीडिया खड़ा कर दिया है जो देश को ,इस महान देश को,इस लोकतंत्र को,अभूतपूर्व शहदातों ,त्याग और बलिदान से हासिल इस महान लोकतंत्र को सीमित हाथों में सौंपने की साजिशों का कठपुतली बन गया है ! पूछिए अपने आप से कि इस मीडिया में अब खोजी पत्रकारिता की जगह हिंदू मुसलमान ने या दंगा भड़काऊ खबरों ने क्यों ले ली है? इसी सवाल में आज के बहुत से, बल्कि अधिकांश बड़े न्यूजरूम की हकीकत की हकीकत छिपी है। अपने आसपास , अपने परिचित या किसी रिश्तेदार से जो रिपोर्टर है,बड़े सपने के साथ पत्रकारिता करने आया है उसके सपनों का हश्र जानिए। फर्स्ट हैंड सूचनाएं लीजिए,खुद एहसास होगा कि कैसे एक बड़े डिजाइन के आप भी टूल बनते जा रहे हैं । पढ़िए उन पत्रकारों को जो सीमित संसाधनों के बीच सोशल मीडिया पर पत्रकारिता को जिंदा रखे हुए हैं उसमें जी रहे हैं। ऐसे ढेर सारे पत्रकार हैं जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट से पहले ही अडानी की करतूतें खोल रहे थे लेकिन वो किसी बड़े न्यूज रूम का हिस्सा नहीं थे। हो नहीं सकते थे। एक बड़े अखबार ने कोरोना काल में हौसला दिखाया था लेकिन उस हौसले पर बुलडोजर चल गया। बीबीसी का मामला तो ताजा है। न्यूजरूम आज रेवेन्यू से अधिक एक देश की ताकतवर सत्ता के आगे दम तोड रहा है। जैसे जैसे न्यूज रूम का दम निकलेगा,वैसे वैसे लोकतंत्र भी कमज़ोर ही होगा। कमज़ोर न्यूज रूम लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का कमरा नहीं रह जाता । वहां सिर्फ सत्ता की स्वर लहरियां और ईमानदार, पर बेबस पत्रकारों का रूदन ही गूंजता है। यह सब आपको अंधेरे में रखने के लिए, आपको अंधेरे में रख कर हो रहा है। राहुल गांधी जब लोकतंत्र की चिंता करते हैं और उस चिंता के मुकाबले अतीक अहमद का मूत्र विसर्जन जब सबसे बड़ी खबर बन जाए तो सबसे पहले चिंतित आपको होना चाहिए। क्योंकि पत्रकारिता का यह मूत्र-काल लोकतंत्र के विनाश का काल बनने में पूरी मदद करेगा।
एक माफिया अतीक अहमद के टीवी कवरेज के बारे में सुना तो आज कुछ पोस्ट्स बहुत तकलीफ के साथ लिख दीं। ऐसी भाषा लिखना ,जिसके पक्षधर आप खुद भी न हों ,बहुत तकलीफ देता है। क्योंकि यह सब सस्ते कटाक्ष से ज्यादा कुछ नहीं होता पर अतीक अहमद के टीवी कवरेज ने जितना शर्मसार किया है वह अभूतपूर्व है। रेटिंग की भूख कहें या अडानी से ध्यान बांटने की कोशिश या राहुल गांधी को स्पेस न देने की साजिश ...जो भी हो आज की यह पत्रकारिता लोकतंत्र के ताबूत को ढोने वाली बड़ी ताकत बन रही है। मन में सवाल उठ रहा है कि हमने- आपने आजादी की लड़ाई तो नहीं लड़ी लेकिन क्या हम इस आजादी को गंवाने का जुर्म अपने सीने पर टांगने वाले हैं ? गुलामी आज अंगरेज के नाम से नहीं आ रही है। आज की गुलामी मूढ़ता और अवैज्ञानिकता के रास्ते, सांप्रदायिकता ,नफरत और अंधविश्वास पर सवार हो कर उन्माद के हथियार के साथ आ रही है। इस गुलामी की मंजिल तानाशाही है और यह सामने दिख रही है । जी बिल्कुल सामने ही...आपके टीवी स्क्रीन पर ! आप न देख पा रहे हों तो यह निकट दृष्टि दोष है। ये आर्यभट्ट और वराहमिहिर का देश है। ये सीवी रमन , होमी जहांगीर भाभा, विक्रम साराभाई,अब्दुल कलाम जैसों का देश है। ये जगदीश चंद्र बसु से लेकर जयंत नार्लीकर और सलीम अली तक का देश है। ये मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या का देश है। ये रामानुजन और हरगोविंद खुराना का देश है। ये देश शांति स्वरूप भटनागर का है। ये कबीर और रसखान का देश है। ये गांधी,नेहरू और टैगोर का देश है। सूची इतनी लंबी है कि पढ़ते पढ़ते हमें अपने वर्तमान पर शर्म आयेगी । ये वो थे जिन्हें गर्व से हम अपनी वैज्ञानिक चेतना के पहरेदार कहते हैं -आज भी । दुर्भाग्य से आज इस सूची की चर्चा भी उस दिन हो रही है जब तीन साल पहले पूरे देश को कोरोना के दौरान ताली थाली बजाते हुए अवैज्ञानिकता के घूरे में धकेल दिया गया था ! हम सबने टीवी पर देखा ही था। इस अवैज्ञानिकता के प्रसार में आज देश का मीडिया जितनी शिद्दत से लगा है उसकी मिसाल शायद ही दुनिया में कहीं मिले। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के मामले में आज हिंदुस्तान तलहटी में जगह तलाश रहा है ,यही तो इस देश की पत्रकारिता का मूत्र-काल है! आज भारतीय मीडिया की शिनाख्त सिर्फ अवैज्ञानिकता का ढोल पीटने वाले ढोलचियों में नहीं होती बल्कि सत्ता के सामने रेंगते ऐसे कार्पोरेट मीडिया की तरह होती है जिस पर बाकायदा जनांदोलनों को कुचलने का , विपक्ष की आवाज को दबाने का, कार्पोरेट सेवा में लीन रहने का संगीन आरोप है। ऐसा मीडिया ना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है ना देश के लिए,सच तो यह है कि किसी एक देश में मीडिया की दुर्दशा हर उस लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है जो दुनिया में कहीं भी अस्तित्व में हो। हमारी राजनीतिक पसंद,नापसंद अलग-अलग हो सकती है। हम ढेर सारे मतभेदों के बीच सद्भाव के साथ जीने वाला समाज होना चाहते हैं। हम मतभेदों का सम्मान करने वाले समाज हों तो यह देश की ताकत होगा। लेकिन हमको कूढ़ मगज समाज बनाने की साजिशें हों तो सतर्क होना चाहिए और सोचना चाहिए कि ऐसी साजिशें क्या सिर्फ व्यवसायिक जरूरत हैं ? नहीं ! दरअसल ऐसी साजिशें देश को तानाशाही के रास्ते ढकलने का जतन हैं। दुर्भाग्य से आज मीडिया और खासतौर पर टीवी तो ऐसी साजिशों के लिए बड़ा औजार बन गया है। आजादी के बाद तो लक्ष्य यही था कि देश ज्ञान के रास्ते आधुनिक समाज की नींव रखने के इरादे से आगे बढ़े लेकिन वो कौन हैं जो आज आधुनिक , वैज्ञानिक और नए नए अविष्कार करते समाज की जगह कूपमण्डूक समाज चाहते हैं ? और क्या मीडिया नासमझी में इस चाहत का साथी बन बैठा है ? आपको आज के न्यूजरूम की कार्यप्रणाली को बहुत गंभीरता से समझना होगा। अगर लोकतंत्र की ताजी हवा चाहिए तो आज के न्यूजरूम की घुटन को महसूस करना होगा और इस बारे में जागरूक भी होना होगा। आज का न्यूजरूम आमतौर पर देश की एक ऐसी सरकार चला रही है जिसके इरादें साफ हैं। छोटे, कम पूंजी के मीडिया हाउस फिर भी किसी तरह खुद को बचा कर रखे हुए हैं । पर बड़ी पूंजी और सत्ता-कार्पोरेट जुगलबंदी ने एक ऐसा मीडिया खड़ा कर दिया है जो देश को ,इस महान देश को,इस लोकतंत्र को,अभूतपूर्व शहदातों ,त्याग और बलिदान से हासिल इस महान लोकतंत्र को सीमित हाथों में सौंपने की साजिशों का कठपुतली बन गया है ! पूछिए अपने आप से कि इस मीडिया में अब खोजी पत्रकारिता की जगह हिंदू मुसलमान ने या दंगा भड़काऊ खबरों ने क्यों ले ली है? इसी सवाल में आज के बहुत से, बल्कि अधिकांश बड़े न्यूजरूम की हकीकत की हकीकत छिपी है। अपने आसपास , अपने परिचित या किसी रिश्तेदार से जो रिपोर्टर है,बड़े सपने के साथ पत्रकारिता करने आया है उसके सपनों का हश्र जानिए। फर्स्ट हैंड सूचनाएं लीजिए,खुद एहसास होगा कि कैसे एक बड़े डिजाइन के आप भी टूल बनते जा रहे हैं । पढ़िए उन पत्रकारों को जो सीमित संसाधनों के बीच सोशल मीडिया पर पत्रकारिता को जिंदा रखे हुए हैं उसमें जी रहे हैं। ऐसे ढेर सारे पत्रकार हैं जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट से पहले ही अडानी की करतूतें खोल रहे थे लेकिन वो किसी बड़े न्यूज रूम का हिस्सा नहीं थे। हो नहीं सकते थे। एक बड़े अखबार ने कोरोना काल में हौसला दिखाया था लेकिन उस हौसले पर बुलडोजर चल गया। बीबीसी का मामला तो ताजा है। न्यूजरूम आज रेवेन्यू से अधिक एक देश की ताकतवर सत्ता के आगे दम तोड रहा है। जैसे जैसे न्यूज रूम का दम निकलेगा,वैसे वैसे लोकतंत्र भी कमज़ोर ही होगा। कमज़ोर न्यूज रूम लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का कमरा नहीं रह जाता । वहां सिर्फ सत्ता की स्वर लहरियां और ईमानदार, पर बेबस पत्रकारों का रूदन ही गूंजता है। यह सब आपको अंधेरे में रखने के लिए, आपको अंधेरे में रख कर हो रहा है। राहुल गांधी जब लोकतंत्र की चिंता करते हैं और उस चिंता के मुकाबले अतीक अहमद का मूत्र विसर्जन जब सबसे बड़ी खबर बन जाए तो सबसे पहले चिंतित आपको होना चाहिए। क्योंकि पत्रकारिता का यह मूत्र-काल लोकतंत्र के विनाश का काल बनने में पूरी मदद करेगा।
हांगकांग, 9 जुलाई (आईएएनएस)। हांगकांग के नेता कैरी लैम ने मंगलवार को घोषित किया कि अत्यधिक विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल जिसने कई बड़े विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, उसे समाप्त किया जा रहा है। दक्षिण चीन मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मांग के बाद यह बिल प्रभावी ढंग से वापस ले लिया गया। लैम पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में एक शीर्ष-स्तरीय जांच स्थापित नहीं करने पर डटे रहे। लैम ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, "सरकार की ईमानदारी या चिंताओं के बारे में अभी भी संदेह है कि सरकार विधान परिषद के साथ प्रक्रिया को दोबारा शुरू करेगी या नहीं" उन्होंने कहा, "मैं यहां दोहराता हूं, ऐसी कोई योजना नहीं है। बिल समाप्त हो चुका है। चाइना मॉर्निग पोस्ट के अनुसार, इस बिल के विरोध में कई जगहों पर लाखों लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, जिसमें दीवारों पर बिल हटाने संबंधी नारे लिखने के अलावा हांगकांग के आधिकारिक प्रतीक चिन्ह, उपकरण, फर्नीचर और कार्य क्षेत्रों को भी नष्ट कर दिया गया था।
हांगकांग, नौ जुलाई । हांगकांग के नेता कैरी लैम ने मंगलवार को घोषित किया कि अत्यधिक विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल जिसने कई बड़े विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, उसे समाप्त किया जा रहा है। दक्षिण चीन मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मांग के बाद यह बिल प्रभावी ढंग से वापस ले लिया गया। लैम पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में एक शीर्ष-स्तरीय जांच स्थापित नहीं करने पर डटे रहे। लैम ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, "सरकार की ईमानदारी या चिंताओं के बारे में अभी भी संदेह है कि सरकार विधान परिषद के साथ प्रक्रिया को दोबारा शुरू करेगी या नहीं" उन्होंने कहा, "मैं यहां दोहराता हूं, ऐसी कोई योजना नहीं है। बिल समाप्त हो चुका है। चाइना मॉर्निग पोस्ट के अनुसार, इस बिल के विरोध में कई जगहों पर लाखों लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, जिसमें दीवारों पर बिल हटाने संबंधी नारे लिखने के अलावा हांगकांग के आधिकारिक प्रतीक चिन्ह, उपकरण, फर्नीचर और कार्य क्षेत्रों को भी नष्ट कर दिया गया था।
बाइडेन ने दिया जेलेंस्की को झटका, नहीं मिलेगा F-16 फाइटर जेट, जाने क्या है माजरा? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को एफ-16 फाइटर जेट देने से मना कर दिया है. जेलेंस्की तकरीबन 11 महीनों से इस फाइटर जेट की मांग कर रहे थे. यूक्रेन में जारी जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को एक और झटका दे दिया है. 30 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने साफतौर पर कहा कि वो यूक्रेन को एफ-16 लड़ाकू विमान नहीं देंगे. हालांकि यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि जंग में एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ अमेरिका की अगुवाई में सारे पश्चिमी देश. अमेरिका के साथ जर्मनी ब्रिटेन फ्रांस और नाटो तकरीबन सभी देश रूस के खिलाफ इस जंग में खड़े हैं. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्या है इस फाइटर जेट में जो इसे अमेरिका ने यूक्रेन को देने से मना कर दिया.
बाइडेन ने दिया जेलेंस्की को झटका, नहीं मिलेगा F-सोलह फाइटर जेट, जाने क्या है माजरा? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को एफ-सोलह फाइटर जेट देने से मना कर दिया है. जेलेंस्की तकरीबन ग्यारह महीनों से इस फाइटर जेट की मांग कर रहे थे. यूक्रेन में जारी जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को एक और झटका दे दिया है. तीस जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने साफतौर पर कहा कि वो यूक्रेन को एफ-सोलह लड़ाकू विमान नहीं देंगे. हालांकि यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि जंग में एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ अमेरिका की अगुवाई में सारे पश्चिमी देश. अमेरिका के साथ जर्मनी ब्रिटेन फ्रांस और नाटो तकरीबन सभी देश रूस के खिलाफ इस जंग में खड़े हैं. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्या है इस फाइटर जेट में जो इसे अमेरिका ने यूक्रेन को देने से मना कर दिया.
चर्चा में क्यों? 4 जुलाई, 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रवींद्र भवन, भोपाल में आईटीआई उत्तीर्ण राज कुशवाह का स्वयं योजना के पोर्टल पर पंजीयन कराकर 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' का शुभारंभ किया। - मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी योजना का लाभ ले सकेंगे। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में 18 से 29 वर्ष के युवा पात्र होंगे। - इस योजना में कक्षा 12वीं उत्तीर्ण को 8 हज़ार रुपए, आईटीआई उत्तीर्ण को 8 हज़ार 500, डिप्लोमा उत्तीर्ण को 9 हज़ार रुपए, स्नातक या उच्च शिक्षित को 10 हज़ार रूपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। - युवाओं को रोज़गार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिये 700 कोर्सेस चयनित किये गए हैं। इसमें सभी प्रकार के उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सर्विस सेक्टर आदि को शामिल किया गया है। पोर्टल पर युवा अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार गतिविधि चुन सकेंगे। - समग्र पोर्टल पर आधार ई-केवायसी आवश्यक है। पंजीयन के लिये मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी जरूरी है और बैंक खाता आधार से लिंक हो एवं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में सक्षम होना चाहिये। - इस योजना में अब तक 10 हज़ार 432 प्रतिष्ठानों ने पंजीयन करा लिया है और 34 हज़ार 785 वेकेंसी चिह्नित हैं। प्रदेश के साथ ही प्रदेश के बाहर के प्रतिष्ठानों को भी योजना से जोड़ा जा रहा है। - 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और युवाओं के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इससे युवाओं को काम सीखने का मौका मिलेगा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्किल्ड मेनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
चर्चा में क्यों? चार जुलाई, दो हज़ार तेईस को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रवींद्र भवन, भोपाल में आईटीआई उत्तीर्ण राज कुशवाह का स्वयं योजना के पोर्टल पर पंजीयन कराकर 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' का शुभारंभ किया। - मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी योजना का लाभ ले सकेंगे। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में अट्ठारह से उनतीस वर्ष के युवा पात्र होंगे। - इस योजना में कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण को आठ हज़ार रुपए, आईटीआई उत्तीर्ण को आठ हज़ार पाँच सौ, डिप्लोमा उत्तीर्ण को नौ हज़ार रुपए, स्नातक या उच्च शिक्षित को दस हज़ार रूपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। - युवाओं को रोज़गार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिये सात सौ कोर्सेस चयनित किये गए हैं। इसमें सभी प्रकार के उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सर्विस सेक्टर आदि को शामिल किया गया है। पोर्टल पर युवा अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार गतिविधि चुन सकेंगे। - समग्र पोर्टल पर आधार ई-केवायसी आवश्यक है। पंजीयन के लिये मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी जरूरी है और बैंक खाता आधार से लिंक हो एवं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में सक्षम होना चाहिये। - इस योजना में अब तक दस हज़ार चार सौ बत्तीस प्रतिष्ठानों ने पंजीयन करा लिया है और चौंतीस हज़ार सात सौ पचासी वेकेंसी चिह्नित हैं। प्रदेश के साथ ही प्रदेश के बाहर के प्रतिष्ठानों को भी योजना से जोड़ा जा रहा है। - 'मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना' व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और युवाओं के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इससे युवाओं को काम सीखने का मौका मिलेगा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्किल्ड मेनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
पुनाईचक में मोहनपुर संप हाउस के पास बाइकर्स गैंग के सदस्यों में हुए खूनी संघर्ष में युवक अमन कुमार (22) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अमन का भी एक बाइकर्स गैंग से कनेक्शन था। बाइक सवार दो अपराधियों ने बुधवार की देर रात 11 बजे नजदीक से उसके कंधे के पास गोली मार दी। वारदात के बाद बाइक सवार अपराधी भाग गए। गोली लगने के बाद युवक को चचेरा भाई एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सचिवालय डीएसपी राजेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि अमन एक बाइक पर अन्य दो लड़कों के साथ कहीं जा रहा था। बाइक अमन चला रहा था। उसके पीछे बैठे युवक रिशु के मुताबिक, जैसे ही वे लोग मोहनपुर संप हाउस के पास पहुंचे, वैसे ही बाइक सवार दो लड़कों ने अमन को गोली मार दी और भाग गए। अमन के चचेरे भाई विशाल ने पुलिस को बताया कि गोली चलाने के बाद अपराधी दोबारा आए और उसकी भी पिटाई की। आसपास के लोगों से पुलिस को इस घटना की सूचना मिली। फौरन पुलिस टीम अस्पताल पहुंची, जहां शव को जब्त कर उसे पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेज दिया गया।
पुनाईचक में मोहनपुर संप हाउस के पास बाइकर्स गैंग के सदस्यों में हुए खूनी संघर्ष में युवक अमन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अमन का भी एक बाइकर्स गैंग से कनेक्शन था। बाइक सवार दो अपराधियों ने बुधवार की देर रात ग्यारह बजे नजदीक से उसके कंधे के पास गोली मार दी। वारदात के बाद बाइक सवार अपराधी भाग गए। गोली लगने के बाद युवक को चचेरा भाई एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सचिवालय डीएसपी राजेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि अमन एक बाइक पर अन्य दो लड़कों के साथ कहीं जा रहा था। बाइक अमन चला रहा था। उसके पीछे बैठे युवक रिशु के मुताबिक, जैसे ही वे लोग मोहनपुर संप हाउस के पास पहुंचे, वैसे ही बाइक सवार दो लड़कों ने अमन को गोली मार दी और भाग गए। अमन के चचेरे भाई विशाल ने पुलिस को बताया कि गोली चलाने के बाद अपराधी दोबारा आए और उसकी भी पिटाई की। आसपास के लोगों से पुलिस को इस घटना की सूचना मिली। फौरन पुलिस टीम अस्पताल पहुंची, जहां शव को जब्त कर उसे पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेज दिया गया।
नई दिल्ली. पोलैंड की महिला भाला फेंक एथलीट मारिया आंद्रेजिक ने आठ महीने के एक बच्चे के दिल की सर्जरी के लिए अपना सिल्वर मेडल नीलाम कर दिया है. मारिया यह मेडल हाल ही में जापान की राजधानी टोक्यो ओलंपिक में खेलों में जीती थी. उन्होंने मेडल की नीलामी से ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा (250,000 पाउंड) की राशि हासिल की है, जबकि बच्चे की सर्जरी के लिए करीब दो करोड़ 86 लाख रुपये (280,000 पाउंड) की जरूरत है. मारिया 2016 के रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहीं थी. इसके बाद वह बोन कैंसर से जूझ रही थी. 2018 में उन्होंने बोन कैंसर को मात देने के बाद फिर इसे ट्रैक पर वापसी की थी. 25 साल की मारिया टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद एक अजनबी की मदद करना चाहती थी और उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर कहा कि यह पहला फंडराइज़र था. वह जिसके लिए फंड इकट्ठा करना चाहती थी, उसका अमेरिका के स्टैनफोर्ड अस्पताल में दिल की सर्जरी होनी है. मारिया ने सोमवार को कंफर्म करते हुए कहा कि पोलैंड की स्टोर जाबका ने मेडल की बोली लगाई है और उसने राशि का भुगतान करके मेडल ले लिया है.
नई दिल्ली. पोलैंड की महिला भाला फेंक एथलीट मारिया आंद्रेजिक ने आठ महीने के एक बच्चे के दिल की सर्जरी के लिए अपना सिल्वर मेडल नीलाम कर दिया है. मारिया यह मेडल हाल ही में जापान की राजधानी टोक्यो ओलंपिक में खेलों में जीती थी. उन्होंने मेडल की नीलामी से ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि हासिल की है, जबकि बच्चे की सर्जरी के लिए करीब दो करोड़ छियासी लाख रुपये की जरूरत है. मारिया दो हज़ार सोलह के रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहीं थी. इसके बाद वह बोन कैंसर से जूझ रही थी. दो हज़ार अट्ठारह में उन्होंने बोन कैंसर को मात देने के बाद फिर इसे ट्रैक पर वापसी की थी. पच्चीस साल की मारिया टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद एक अजनबी की मदद करना चाहती थी और उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर कहा कि यह पहला फंडराइज़र था. वह जिसके लिए फंड इकट्ठा करना चाहती थी, उसका अमेरिका के स्टैनफोर्ड अस्पताल में दिल की सर्जरी होनी है. मारिया ने सोमवार को कंफर्म करते हुए कहा कि पोलैंड की स्टोर जाबका ने मेडल की बोली लगाई है और उसने राशि का भुगतान करके मेडल ले लिया है.
शिवपुराण की एक कथा के मुताबिक एक बार राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया था. इस यज्ञ के दौरान अपने और अपने पति शिव का अपमान न सह पाने की वजह से माता सती ने हवन कुंड की पवित्र अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया. माता सती के आत्मदाह की खबर सुनते ही शिव क्रोध में आकर तांडव करने लगे. उनके तांडव से पूरे संसार में हाहाकार मच गया. इससे घबराए देवताओं ने भगवान शिव से तांडव रोकने का आग्रह किया. जिसके बाद शांत होकर हज़ारों वर्षों के लिए भोलेनाथ समाधि में लीन हो गए.
शिवपुराण की एक कथा के मुताबिक एक बार राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया था. इस यज्ञ के दौरान अपने और अपने पति शिव का अपमान न सह पाने की वजह से माता सती ने हवन कुंड की पवित्र अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया. माता सती के आत्मदाह की खबर सुनते ही शिव क्रोध में आकर तांडव करने लगे. उनके तांडव से पूरे संसार में हाहाकार मच गया. इससे घबराए देवताओं ने भगवान शिव से तांडव रोकने का आग्रह किया. जिसके बाद शांत होकर हज़ारों वर्षों के लिए भोलेनाथ समाधि में लीन हो गए.
उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन खतरनाकर मूड़ में है। इंटर कांटीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे परीक्षण के बाद वो सफेद ड्रेस में तालियां बजाता दिखा। उसके बाद वहां की सरकारी न्यूज एजेंसी ने किम के हवाले से कहा कि वो नार्थ कोरिया को परमाणु शक्ति बनाने जा रहा है। किम जोंग-उन ने अमेरिका की सरजमीं पर हमला करने के लिए बनाई गई नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे परीक्षण का निरीक्षण किया। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी कि उसने देश की परमाणु युद्ध से जुड़ी क्षमताओं को और बढ़ाने का संकल्प लिया। सरकारी मीडिया ने किम के हवाले से कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप के सुरक्षा माहौल में दुश्मन देशों की तरफ से गंभीर खतरा उत्पन्न किया जा रहा है, इसलिए परमाणु युद्ध से निपटने की अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने ह्वासोंग-18 आईसीबीएम के सफल प्रक्षेपण की पुष्टि करने के बाद किम का बयान साझा किया। प्रक्षेपण के तुरंत बाद उत्तर कोरिया के पड़ोसी देशों ने सबसे पहले इसकी सूचना दी थी। केसीएनए के अनुसार प्रक्षेपण का मकसद मिसाइल की ताकत की पहचान करना था। किम ने इस प्रक्षेपण को उत्तर कोरिया की रणनीतिक ताकतों को बढ़ावा देने के प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। उसका कहना था कि उत्तर कोरिया यहीं पर रुकने वाला नहीं है। वो अपनी क्षमताओं में और ज्यादा इजाफा करता रहेगा। यह प्रक्षेपण ऐसे समय में किया गया जब उत्तर कोरिया ने इस सप्ताह की शुरुआत में कई बयान जारी कर अमेरिका पर उसके देश की जासूसी करने के लिए सैन्य विमान उड़ाने का आरोप लगाया गया था। उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के आरोपों को खारिज कर उसे शत्रुता बढ़ाने वाले किसी भी कृत्य या बयानबाजी से दूर रहने को कहा था।
उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन खतरनाकर मूड़ में है। इंटर कांटीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे परीक्षण के बाद वो सफेद ड्रेस में तालियां बजाता दिखा। उसके बाद वहां की सरकारी न्यूज एजेंसी ने किम के हवाले से कहा कि वो नार्थ कोरिया को परमाणु शक्ति बनाने जा रहा है। किम जोंग-उन ने अमेरिका की सरजमीं पर हमला करने के लिए बनाई गई नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे परीक्षण का निरीक्षण किया। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी कि उसने देश की परमाणु युद्ध से जुड़ी क्षमताओं को और बढ़ाने का संकल्प लिया। सरकारी मीडिया ने किम के हवाले से कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप के सुरक्षा माहौल में दुश्मन देशों की तरफ से गंभीर खतरा उत्पन्न किया जा रहा है, इसलिए परमाणु युद्ध से निपटने की अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने ह्वासोंग-अट्ठारह आईसीबीएम के सफल प्रक्षेपण की पुष्टि करने के बाद किम का बयान साझा किया। प्रक्षेपण के तुरंत बाद उत्तर कोरिया के पड़ोसी देशों ने सबसे पहले इसकी सूचना दी थी। केसीएनए के अनुसार प्रक्षेपण का मकसद मिसाइल की ताकत की पहचान करना था। किम ने इस प्रक्षेपण को उत्तर कोरिया की रणनीतिक ताकतों को बढ़ावा देने के प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। उसका कहना था कि उत्तर कोरिया यहीं पर रुकने वाला नहीं है। वो अपनी क्षमताओं में और ज्यादा इजाफा करता रहेगा। यह प्रक्षेपण ऐसे समय में किया गया जब उत्तर कोरिया ने इस सप्ताह की शुरुआत में कई बयान जारी कर अमेरिका पर उसके देश की जासूसी करने के लिए सैन्य विमान उड़ाने का आरोप लगाया गया था। उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के आरोपों को खारिज कर उसे शत्रुता बढ़ाने वाले किसी भी कृत्य या बयानबाजी से दूर रहने को कहा था।
7th Pay Commission:हिमाचल दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को खुशखबरी दी. कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की गई है. फिलहाल यह 31 फीसदी डीए है. . इसे बढ़ाकर 34 फीसदी कर दिया गया है. राजधानी से 325 किलोमीटर दूर लाहौल-स्पीति जिले के काजा में 76वें हिमाचल दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर 12 हजार फीट की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उसके बाद सीएम ने राज्य के 2. 15 लाख कर्मचारियों और 90 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिठाई दी. डीए में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. डीए में वृद्धि के साथ-साथ, जैसा कि घोषणापत्र में वादा किया गया था, राज्य सरकार ने स्पीति घाटी में दूसरे चरण में जून से 18 वर्ष से अधिक आयु की 9,000 महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक भत्ता देने की भी घोषणा की है। हर घर लक्ष्मी, नारी सम्मान निधि कार्यक्रम के तहत सरकार इस क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद कर रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने 50 बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और सुक्खू काजा में एक कॉलेज की भी घोषणा की। राज्य सरकार स्पीति घाटी में रंगरिक में एक हवाई पट्टी विकसित करने के मुद्दे को रक्षा मंत्रालय के ध्यान में लाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण के तहत पिनवैली में अतरगु से मिट्टी तक 34 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण किया जा रहा है. साथ ही भावा को दुनिया की सबसे ऊंची मिट्टी से जोडऩे के लिए सड़क निर्माण को भी सरकार प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुनिया की सबसे ऊंची सड़क होगी। उन्होंने खुलासा किया कि पुरानी पेंशन योजना को पुनर्जीवित करने का वादा पूरा किया गया है और इससे 1. 36 लाख सरकारी कर्मचारियों को लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में 2. 31 लाख महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से 1500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधवा और एकल नारी आवास योजना के तहत इस वित्तीय वर्ष में 7 हजार महिलाओं को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार देने के लिए लैंड होल्डिंग सीलिंग एक्ट, 1972 में संशोधन किया गया।
सातth Pay Commission:हिमाचल दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को खुशखबरी दी. कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन फीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की गई है. फिलहाल यह इकतीस फीसदी डीए है. . इसे बढ़ाकर चौंतीस फीसदी कर दिया गया है. राजधानी से तीन सौ पच्चीस किलोग्राममीटर दूर लाहौल-स्पीति जिले के काजा में छिहत्तरवें हिमाचल दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर बारह हजार फीट की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उसके बाद सीएम ने राज्य के दो. पंद्रह लाख कर्मचारियों और नब्बे हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिठाई दी. डीए में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर पाँच सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. डीए में वृद्धि के साथ-साथ, जैसा कि घोषणापत्र में वादा किया गया था, राज्य सरकार ने स्पीति घाटी में दूसरे चरण में जून से अट्ठारह वर्ष से अधिक आयु की नौ,शून्य महिलाओं को एक,पाँच सौ रुपयापये मासिक भत्ता देने की भी घोषणा की है। हर घर लक्ष्मी, नारी सम्मान निधि कार्यक्रम के तहत सरकार इस क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद कर रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने पचास बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सुक्खू काजा में एक कॉलेज की भी घोषणा की। राज्य सरकार स्पीति घाटी में रंगरिक में एक हवाई पट्टी विकसित करने के मुद्दे को रक्षा मंत्रालय के ध्यान में लाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण के तहत पिनवैली में अतरगु से मिट्टी तक चौंतीस करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण किया जा रहा है. साथ ही भावा को दुनिया की सबसे ऊंची मिट्टी से जोडऩे के लिए सड़क निर्माण को भी सरकार प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुनिया की सबसे ऊंची सड़क होगी। उन्होंने खुलासा किया कि पुरानी पेंशन योजना को पुनर्जीवित करने का वादा पूरा किया गया है और इससे एक. छत्तीस लाख सरकारी कर्मचारियों को लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में दो. इकतीस लाख महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये प्रति माह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधवा और एकल नारी आवास योजना के तहत इस वित्तीय वर्ष में सात हजार महिलाओं को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार देने के लिए लैंड होल्डिंग सीलिंग एक्ट, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में संशोधन किया गया।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
अजमेर के चन्दवरदाई नगर हरिओम कॉलोनी में चोर दिनदहाड़े बैंक कर्मचारी के मकान के ताले तोड़कर चोरी की वारदात अंजाम दे गए। चोर मकान से नकदी के अलावा करीब 25 तोला सोने के आभूषण चुरा ले गए। परिवार शाम को घर लौटा तो चोरी का पता चला। रामगंज थाना पुलिस ने रिपोर्ट पर चोरी का मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में जुटी है। हरिओम कॉलोनी] गली नम्बर 3 निवासी बैंककर्मी सोहनलाल सुनारीवाल ने बताया कि वह रविवार सुबह 9. 30 बजे परिवार के साथ पहाडग़ंज स्थित अपने पुश्तैनी मकान पर चला गया। देर शाम घर लौटा तो मकान के ताले टूटे मिले। चोर गिरोह इत्मिनान से चोरी की वारदात अंजाम दे गए। चोर अलमारी के लॉकर को तोड़कर करीब 25-30 तोला सोने के आभूषण व 50 हजार रुपए की नकदी चोरी कर ले गए। सूचना पर देर रात रामगंज थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पीडि़त की रिपोर्ट पर चोरी का मुकदमा दर्जकर अनुसंधान शुरू कर दिया। पुलिस क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगालने में जुटी है। बैंक कर्मी सुनारीवाल ने बताया कि चोर संभवतः रैकी कर मकान के मुख्यद्वार का ताला तोड़कर दाखिल हुए। अन्दर से दरवाजा बंद कर कमरों की तलाशी ली और कीमती सामान समेटा। चोर जाते समय बैडरूम के पीछे का दरवाजा खोलकर निकल गए। हरिओम कॉलोनी के सचिव सागर मीणा ने बताया कि पूर्व में भी क्षेत्र में चोरी की वारदातें हो चुकी है। चोरों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। लगातार चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस को जल्द इस ओर ध्यान देना चाहिए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अजमेर के चन्दवरदाई नगर हरिओम कॉलोनी में चोर दिनदहाड़े बैंक कर्मचारी के मकान के ताले तोड़कर चोरी की वारदात अंजाम दे गए। चोर मकान से नकदी के अलावा करीब पच्चीस तोला सोने के आभूषण चुरा ले गए। परिवार शाम को घर लौटा तो चोरी का पता चला। रामगंज थाना पुलिस ने रिपोर्ट पर चोरी का मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में जुटी है। हरिओम कॉलोनी] गली नम्बर तीन निवासी बैंककर्मी सोहनलाल सुनारीवाल ने बताया कि वह रविवार सुबह नौ. तीस बजे परिवार के साथ पहाडग़ंज स्थित अपने पुश्तैनी मकान पर चला गया। देर शाम घर लौटा तो मकान के ताले टूटे मिले। चोर गिरोह इत्मिनान से चोरी की वारदात अंजाम दे गए। चोर अलमारी के लॉकर को तोड़कर करीब पच्चीस-तीस तोला सोने के आभूषण व पचास हजार रुपए की नकदी चोरी कर ले गए। सूचना पर देर रात रामगंज थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पीडि़त की रिपोर्ट पर चोरी का मुकदमा दर्जकर अनुसंधान शुरू कर दिया। पुलिस क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगालने में जुटी है। बैंक कर्मी सुनारीवाल ने बताया कि चोर संभवतः रैकी कर मकान के मुख्यद्वार का ताला तोड़कर दाखिल हुए। अन्दर से दरवाजा बंद कर कमरों की तलाशी ली और कीमती सामान समेटा। चोर जाते समय बैडरूम के पीछे का दरवाजा खोलकर निकल गए। हरिओम कॉलोनी के सचिव सागर मीणा ने बताया कि पूर्व में भी क्षेत्र में चोरी की वारदातें हो चुकी है। चोरों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। लगातार चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस को जल्द इस ओर ध्यान देना चाहिए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
"ऐं, यह 'पैन फ्रैंड' क्या चीज होती है?" विमला देवी ने खोजी निगाहों से बेटे की तरफ देखा. "मां, पैन फ्रैंड यानी कि पत्र मित्र," राकेश ने हंसते हुए कहा. "अच्छाअच्छा, जब मुकेश छोटा था तब वह भी बाल पत्रिकाओं से बच्चों के पते ढूंढ़ढूंढ़ कर पत्र मित्र बनाया करता था और उन्हें पत्र भेजा करता था," विमला देवी ने याद करते हुए कहा. "बचपन के औपचारिक पत्र मित्र समय के साथसाथ छूटते चले जाते हैं. भाभी की तरह उन के लगातार पत्र नहीं आते," कहते हुए राकेश ने बाहर की राह ली और विमला देवी अकेली आंगन में बैठी रह गईं. सर्दियों के गुनगुने दिन धूप ढलते ही बीत जाते हैं. विभा ने जब तक चायनाश्ते के बरतन समेटे, सांझ ढल चुकी थी. वह फिर रात का खाना बनाने में व्यस्त हो गई. मुकेश को बढि़या खाना खाने का शौक भी था और वह दफ्तर से लौट कर जल्दी ही रात का खाना खाने का आदी भी था. "अच्छा," विभा ने मुकेश के हाथ से कोट ले कर अलमारी में टांगते हुए कहा. अगले दिन सुबह मुकेश को दफ्तर भेज कर विभा अपने भैयाभाभी से मिलने तिलक नगर चली गई. वे दक्षिण भारत घूम कर लौटे थे और घर के सदस्यों के लिए तरहतरह के उपहार लाए थे. विभा अपने लिए लाई गई मैसूर जार्जेट की साड़ी देख कर खिल उठी थी.
"ऐं, यह 'पैन फ्रैंड' क्या चीज होती है?" विमला देवी ने खोजी निगाहों से बेटे की तरफ देखा. "मां, पैन फ्रैंड यानी कि पत्र मित्र," राकेश ने हंसते हुए कहा. "अच्छाअच्छा, जब मुकेश छोटा था तब वह भी बाल पत्रिकाओं से बच्चों के पते ढूंढ़ढूंढ़ कर पत्र मित्र बनाया करता था और उन्हें पत्र भेजा करता था," विमला देवी ने याद करते हुए कहा. "बचपन के औपचारिक पत्र मित्र समय के साथसाथ छूटते चले जाते हैं. भाभी की तरह उन के लगातार पत्र नहीं आते," कहते हुए राकेश ने बाहर की राह ली और विमला देवी अकेली आंगन में बैठी रह गईं. सर्दियों के गुनगुने दिन धूप ढलते ही बीत जाते हैं. विभा ने जब तक चायनाश्ते के बरतन समेटे, सांझ ढल चुकी थी. वह फिर रात का खाना बनाने में व्यस्त हो गई. मुकेश को बढि़या खाना खाने का शौक भी था और वह दफ्तर से लौट कर जल्दी ही रात का खाना खाने का आदी भी था. "अच्छा," विभा ने मुकेश के हाथ से कोट ले कर अलमारी में टांगते हुए कहा. अगले दिन सुबह मुकेश को दफ्तर भेज कर विभा अपने भैयाभाभी से मिलने तिलक नगर चली गई. वे दक्षिण भारत घूम कर लौटे थे और घर के सदस्यों के लिए तरहतरह के उपहार लाए थे. विभा अपने लिए लाई गई मैसूर जार्जेट की साड़ी देख कर खिल उठी थी.
सिर्फ 17 साल की एज में आशा पारेख फिल्मी हीरोइन बन गई। दिल देके देखो के हीरो थे शम्मी कपूर। फिल्म हिट रही और इसके बाद आशा ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। बल्कि नसीर की अगली 6 फिल्मों की मुख्य हीरोइन आशा पारेख ही रहीं। यह फिल्में थीं-: "जब प्यार किसी से होता है" देवानंद, "फिर वही दिल लाया हूं" जॉय मुखर्जी, "तीसरी मंजिल" शम्मी कपूर, "बहारों के सपने " राजेश खन्ना, प्यार का मौसम शशि कपूर , "कारवां" जीतेन्द्र।
सिर्फ सत्रह साल की एज में आशा पारेख फिल्मी हीरोइन बन गई। दिल देके देखो के हीरो थे शम्मी कपूर। फिल्म हिट रही और इसके बाद आशा ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। बल्कि नसीर की अगली छः फिल्मों की मुख्य हीरोइन आशा पारेख ही रहीं। यह फिल्में थीं-: "जब प्यार किसी से होता है" देवानंद, "फिर वही दिल लाया हूं" जॉय मुखर्जी, "तीसरी मंजिल" शम्मी कपूर, "बहारों के सपने " राजेश खन्ना, प्यार का मौसम शशि कपूर , "कारवां" जीतेन्द्र।
Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बरही, करियातपुर निवासी दिवंगत रुपेश पांडे की माता उर्मिला पांडे एवं पिता सिकंदर पांडे ने मुलाकात की. मुख्यमंत्री से रूपेश पांडे की मां ने दिवंगत पुत्र के लिए न्याय मांगा. परिजनों ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया, जिससे उनके पुत्र को न्याय मिल सके. मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया कि परामर्श के बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी. रूपेश मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की जाएगी. मुख्यमंत्री ने रूपेश की मां के स्थायी जीवन यापन की व्यवस्था के लिए उपायुक्त हजारीबाग को निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन हजारीबाग द्वारा उर्मिला देवी की स्थायी आजीविका के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस मौके पर बरही विधायक उमाशंकर अकेला, गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू एवं अन्य उपस्थित थे.
Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बरही, करियातपुर निवासी दिवंगत रुपेश पांडे की माता उर्मिला पांडे एवं पिता सिकंदर पांडे ने मुलाकात की. मुख्यमंत्री से रूपेश पांडे की मां ने दिवंगत पुत्र के लिए न्याय मांगा. परिजनों ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया, जिससे उनके पुत्र को न्याय मिल सके. मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया कि परामर्श के बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी. रूपेश मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की जाएगी. मुख्यमंत्री ने रूपेश की मां के स्थायी जीवन यापन की व्यवस्था के लिए उपायुक्त हजारीबाग को निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन हजारीबाग द्वारा उर्मिला देवी की स्थायी आजीविका के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस मौके पर बरही विधायक उमाशंकर अकेला, गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू एवं अन्य उपस्थित थे.
Quick links: बिहार में शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध (Liquor Ban In Bihar) लगाया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य से जहरीली शराब पीने की वजह से मौत के मामले सामने आते रहते हैं। इसी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'बिहार में गली-गली शराब मिलता है। वाह नीतीश कुमार, ये है आपके सपनों का बिहार।' बता दें कि हाल ही में सीएम नीतीश (CM Nitish Kumar) शराबबंदी को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने शराबबंदी के खिलाफ सख्ती से कानून लागू करने के निर्देश दिए। इसके बावजदू राज्य से शराब की अवैध बिक्री से जुड़ी कई खबरें सामने आती रहती हैं। जिसे लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विपक्षी दलों के नेता हमला बोलते रहते हैं। तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo (कू) पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'वाह रे नीतीश कुमार ये है आपके सपनों का बिहार, गली- गली में शराब मिलता है और नीतीश कुमार कहते हैं सपनों का बिहार। आपने बच्चों को यतीम बनाया शर्म करो या डूब मरो नीतीश कुमार।' तेज प्रताप यादव ने जो वीडियो शेयर किया है उसमें देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति शराब पीकर हंगामा कर रहे हैं। वहीं वीडियो में तेज प्रताप यादव एक बच्चे से बात भी करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में नीतीश कुमार बच्चे से कह रहे हैं कोई व्यक्ति तुम्हे मारेगा और धमकाएगा तो मुझे आकर बता देना। कोई रोकेगा तो कह देना कि भईया से मुझे मिलना है। इस दौरान तेज प्रताप यादव से बच्चे से पूछते हैं कि 'पढ़ते हो, इस दौरान वो ये भी पूछते नजर आ रहे हैं कि तुम्हारे पिता कब से शराब का सेवन कर रहे हैं। इस दौरान बच्चा उनके सवालों का जवाब भी दे रहा है।'
Quick links: बिहार में शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य से जहरीली शराब पीने की वजह से मौत के मामले सामने आते रहते हैं। इसी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'बिहार में गली-गली शराब मिलता है। वाह नीतीश कुमार, ये है आपके सपनों का बिहार।' बता दें कि हाल ही में सीएम नीतीश शराबबंदी को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने शराबबंदी के खिलाफ सख्ती से कानून लागू करने के निर्देश दिए। इसके बावजदू राज्य से शराब की अवैध बिक्री से जुड़ी कई खबरें सामने आती रहती हैं। जिसे लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विपक्षी दलों के नेता हमला बोलते रहते हैं। तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 'वाह रे नीतीश कुमार ये है आपके सपनों का बिहार, गली- गली में शराब मिलता है और नीतीश कुमार कहते हैं सपनों का बिहार। आपने बच्चों को यतीम बनाया शर्म करो या डूब मरो नीतीश कुमार।' तेज प्रताप यादव ने जो वीडियो शेयर किया है उसमें देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति शराब पीकर हंगामा कर रहे हैं। वहीं वीडियो में तेज प्रताप यादव एक बच्चे से बात भी करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में नीतीश कुमार बच्चे से कह रहे हैं कोई व्यक्ति तुम्हे मारेगा और धमकाएगा तो मुझे आकर बता देना। कोई रोकेगा तो कह देना कि भईया से मुझे मिलना है। इस दौरान तेज प्रताप यादव से बच्चे से पूछते हैं कि 'पढ़ते हो, इस दौरान वो ये भी पूछते नजर आ रहे हैं कि तुम्हारे पिता कब से शराब का सेवन कर रहे हैं। इस दौरान बच्चा उनके सवालों का जवाब भी दे रहा है।'
हिलेरी क्लिंटन के साथ राष्ट्रपति की बहस के दौरान ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया था, जिसके बाद लीड्स ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि वह गुस्से में थी क्योंकि ट्रंप झूठ बोल रहा था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर एक महिला ने मंगलवार को न्यूयॉर्क सिविल ट्रायल में बताया कि 1970 के दशक के अंत में उन्होंने एक फ्लाइट में यात्रा के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया था. जेसिका लीड्स ने पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ लेखिका ई. जीन कैरोल के रेप और मानहानि के मुकदमे में गवाही देते हुए ये आरोप लगाया. हालांकि डोनाल्ड ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. वहीं ऐसे किसी भी दावे पर कभी भी आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया गया है. लीड्स ने मैनहट्टन की कोर्ट को बताया कि ट्रम्प ने 1978 या 1979 में न्यूयॉर्क जाने वाली एक उड़ान के बिजनेस क्लास में उनकी स्कर्ट पर हाथ रखा था. अब 81 साल की लीड्स ने कहा कि उस यात्रा के पहले ट्रंप से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई थी, यह अचानक हुआ था. उन्होंने कहा इस दौरान ट्रंप ने उनके साथ अश्लील हरकते कीं. ये भी पढ़ेंः मुस्लिम मेयर को बाइडेन की ईद पार्टी में नहीं मिली एंट्री, लेकिन क्यों? लीड्स ने पहली बार 2016 के चुनाव में न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में आरोप लगाया था. वहीं दर्जनों महिलाओं ने ट्रंप पर यौन दुराचार का आरोप लगाया. हालांकि हिलेरी क्लिंटन के साथ राष्ट्रपति की बहस के दौरान ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया था, जिसके बाद लीड्स ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि वह गुस्से में थी क्योंकि ट्रंप झूठ बोल रहा था. लीड्स को कैरोल के वकीलों ने गवाही देने के लिए बुलाया था ताकि जूरी के सामने इस बात को साबित किया जा सके कि ट्रम्प यौन उत्पीड़न में शामिल हैं. 79 वर्षीय कैरोल ने ट्रम्प पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में मैनहट्टन में लक्ज़री बर्गडॉर्फ गुडमैन डिपार्टमेंटल स्टोर के चेंजिंग रूम में उनका यौन उत्पीड़न किया था. बता दें कि ट्रम्प ने बार-बार आरोपों का खंडन किया है. न्यूयॉर्क में पिछले साल के अंत में कैरोल ने अपना मुकदमा दायर किया. दरअसल नए नियम के तहत लंबे वक्त पहले यौन उत्पीड़न के शिकार लोग भी मुकदमा दर्ज करा सकते हैं. यह मामला ट्रम्प के सामने आने वाली कई कानूनी चुनौतियों में से एक है क्योंकि 76 वर्षीय रिपब्लिकन नेता अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को जीतकर व्हाइट हाउस में वापसी चाहते हैं. वहीं पिछले महीने उन्होंने 2016 के मतदान से ठीक पहले एक पोर्न स्टार को पैसे देने से जुड़े एक आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया गया था. इसके अलावा ट्रम्प के दक्षिणी राज्य जॉर्जिया में 2020 के चुनावी नतीजों के बाद प्रदर्शन, व्हाइट हाउस से लिए गए दस्तावेजों के कथित गलत संचालन और 6 जनवरी, 2021 को उनके समर्थकों द्वारा यूएस कैपिटल पर हमले में उनकी भागीदारी की भी जांच की जा रही है.
हिलेरी क्लिंटन के साथ राष्ट्रपति की बहस के दौरान ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया था, जिसके बाद लीड्स ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि वह गुस्से में थी क्योंकि ट्रंप झूठ बोल रहा था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर एक महिला ने मंगलवार को न्यूयॉर्क सिविल ट्रायल में बताया कि एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक के अंत में उन्होंने एक फ्लाइट में यात्रा के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया था. जेसिका लीड्स ने पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ लेखिका ई. जीन कैरोल के रेप और मानहानि के मुकदमे में गवाही देते हुए ये आरोप लगाया. हालांकि डोनाल्ड ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. वहीं ऐसे किसी भी दावे पर कभी भी आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया गया है. लीड्स ने मैनहट्टन की कोर्ट को बताया कि ट्रम्प ने एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर या एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में न्यूयॉर्क जाने वाली एक उड़ान के बिजनेस क्लास में उनकी स्कर्ट पर हाथ रखा था. अब इक्यासी साल की लीड्स ने कहा कि उस यात्रा के पहले ट्रंप से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई थी, यह अचानक हुआ था. उन्होंने कहा इस दौरान ट्रंप ने उनके साथ अश्लील हरकते कीं. ये भी पढ़ेंः मुस्लिम मेयर को बाइडेन की ईद पार्टी में नहीं मिली एंट्री, लेकिन क्यों? लीड्स ने पहली बार दो हज़ार सोलह के चुनाव में न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में आरोप लगाया था. वहीं दर्जनों महिलाओं ने ट्रंप पर यौन दुराचार का आरोप लगाया. हालांकि हिलेरी क्लिंटन के साथ राष्ट्रपति की बहस के दौरान ट्रम्प ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया था, जिसके बाद लीड्स ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि वह गुस्से में थी क्योंकि ट्रंप झूठ बोल रहा था. लीड्स को कैरोल के वकीलों ने गवाही देने के लिए बुलाया था ताकि जूरी के सामने इस बात को साबित किया जा सके कि ट्रम्प यौन उत्पीड़न में शामिल हैं. उन्यासी वर्षीय कैरोल ने ट्रम्प पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक के मध्य में मैनहट्टन में लक्ज़री बर्गडॉर्फ गुडमैन डिपार्टमेंटल स्टोर के चेंजिंग रूम में उनका यौन उत्पीड़न किया था. बता दें कि ट्रम्प ने बार-बार आरोपों का खंडन किया है. न्यूयॉर्क में पिछले साल के अंत में कैरोल ने अपना मुकदमा दायर किया. दरअसल नए नियम के तहत लंबे वक्त पहले यौन उत्पीड़न के शिकार लोग भी मुकदमा दर्ज करा सकते हैं. यह मामला ट्रम्प के सामने आने वाली कई कानूनी चुनौतियों में से एक है क्योंकि छिहत्तर वर्षीय रिपब्लिकन नेता अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को जीतकर व्हाइट हाउस में वापसी चाहते हैं. वहीं पिछले महीने उन्होंने दो हज़ार सोलह के मतदान से ठीक पहले एक पोर्न स्टार को पैसे देने से जुड़े एक आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया गया था. इसके अलावा ट्रम्प के दक्षिणी राज्य जॉर्जिया में दो हज़ार बीस के चुनावी नतीजों के बाद प्रदर्शन, व्हाइट हाउस से लिए गए दस्तावेजों के कथित गलत संचालन और छः जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को उनके समर्थकों द्वारा यूएस कैपिटल पर हमले में उनकी भागीदारी की भी जांच की जा रही है.
फरीदाबाद, 4 फरवरी (हप्र) सराय ख्वाजा स्थित अग्रवाल ज्वैलर्स में 29 जनवरी को 40 लाख रुपये के आभूषण चोरी के आरोप में गिरफ्तार चोर ने क्राइम ब्रांच को दिलचस्प जानकारी दी है। बुलंदशहर यूपी निवासी आरोपी राशिद ने क्राइम ब्रांच को बताया कि चोरी के आभूषणों से वह ज्वैलरी शोरूम खोलना चाहता था। उसने नोएडा में परी चौक के पास दुकान भी किराये पर ले ली थी। यहीं फ्लैट किराये पर लेकर वह पत्नी व बच्चों के साथ रहने लगा था। दो दिन पहले क्राइम ब्रांच ने आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया था। बृहस्पतिवार को उससे चोरी का सारा माल बरामद कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपी पहले भी दिल्ली, गाजियाबाद, पानीपत और अलवर में ज्वैलरी शोरूम में चोरी कर चुका है। उसके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज हैं।
फरीदाबाद, चार फरवरी सराय ख्वाजा स्थित अग्रवाल ज्वैलर्स में उनतीस जनवरी को चालीस लाख रुपये के आभूषण चोरी के आरोप में गिरफ्तार चोर ने क्राइम ब्रांच को दिलचस्प जानकारी दी है। बुलंदशहर यूपी निवासी आरोपी राशिद ने क्राइम ब्रांच को बताया कि चोरी के आभूषणों से वह ज्वैलरी शोरूम खोलना चाहता था। उसने नोएडा में परी चौक के पास दुकान भी किराये पर ले ली थी। यहीं फ्लैट किराये पर लेकर वह पत्नी व बच्चों के साथ रहने लगा था। दो दिन पहले क्राइम ब्रांच ने आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया था। बृहस्पतिवार को उससे चोरी का सारा माल बरामद कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपी पहले भी दिल्ली, गाजियाबाद, पानीपत और अलवर में ज्वैलरी शोरूम में चोरी कर चुका है। उसके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज हैं।
राम रहीम की के खास बॉडीगार्ड ओम बुडानिया को पंचकूला की क्राइम ब्रांच पुलिस ने शुक्रवार को हिरासम में ले लिया है. साध्वी रेप केस में दोषी जेल में कैद राम रहीम की के खास बॉडीगार्ड ओम बुडानिया को पंचकूला की क्राइम ब्रांच पुलिस ने शुक्रवार को हिरासत में ले लिया है. बुडानिया राजस्थान पुलिस का सिपाही है. पंचकूला हिंसा और हनीप्रीत इंसा की फरारी में क्राइम ब्रांच को ओम बुडानियां से अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह प्रकरण की जांच कर रही क्राइम ब्रांच पुलिस ने बुडानिया को पूछताछ के लिए एक दिन पहले हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक को ईमेल कर पंचकूला बुलाया था. जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ पुलिस का सिपाही ओम बुडानिया राम रहीम का बेहद नजदीकी था. कई सालों से राजस्थान पुलिस की तरफ से बाबा का अंगरक्षक था और ड्यूटी करते-करते वो बाबा का भक्त बन गया. बाबा को सजा सुनाने के बाद से हनुमानगढ़ पुलिस लाइन में तैनात था. हरियाणा के सिरसा में डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के परिसरों में तीन दिनों से चल रहा तलाशी अभियान रविवार शाम समाप्त हो गया. वहीं हरियाणा पुलिस ने पंचकूला हिंसा के सिलसिले में डेरा के एक वरिष्ठ सदस्य गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है जबकि डेरा प्रमुख की गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत इंसा को पकड़ने के लिए छापे मारे जा रहे हैं. .
राम रहीम की के खास बॉडीगार्ड ओम बुडानिया को पंचकूला की क्राइम ब्रांच पुलिस ने शुक्रवार को हिरासम में ले लिया है. साध्वी रेप केस में दोषी जेल में कैद राम रहीम की के खास बॉडीगार्ड ओम बुडानिया को पंचकूला की क्राइम ब्रांच पुलिस ने शुक्रवार को हिरासत में ले लिया है. बुडानिया राजस्थान पुलिस का सिपाही है. पंचकूला हिंसा और हनीप्रीत इंसा की फरारी में क्राइम ब्रांच को ओम बुडानियां से अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह प्रकरण की जांच कर रही क्राइम ब्रांच पुलिस ने बुडानिया को पूछताछ के लिए एक दिन पहले हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक को ईमेल कर पंचकूला बुलाया था. जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ पुलिस का सिपाही ओम बुडानिया राम रहीम का बेहद नजदीकी था. कई सालों से राजस्थान पुलिस की तरफ से बाबा का अंगरक्षक था और ड्यूटी करते-करते वो बाबा का भक्त बन गया. बाबा को सजा सुनाने के बाद से हनुमानगढ़ पुलिस लाइन में तैनात था. हरियाणा के सिरसा में डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के परिसरों में तीन दिनों से चल रहा तलाशी अभियान रविवार शाम समाप्त हो गया. वहीं हरियाणा पुलिस ने पंचकूला हिंसा के सिलसिले में डेरा के एक वरिष्ठ सदस्य गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है जबकि डेरा प्रमुख की गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत इंसा को पकड़ने के लिए छापे मारे जा रहे हैं. .
कॉकस या कौकसस यूरोप और एशिया की सीमा पर स्थित एक भौगोलिक और राजनैतिक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कॉकस पर्वत शृंखला भी आती है, जिसमें यूरोप का सबसे ऊंचा पहाड़, एल्ब्रुस पर्वत शामिल है। कॉकस के दो मुख्य खंड बताये जाते हैंः उत्तर कॉकस और दक्षिण कॉकस। उत्तर कॉकस में चेचन्या, इन्गुशेतिया, दाग़िस्तान, आदिगेया, काबारदीनो-बल्कारिया, काराचाए-चरकस्सिया, उत्तर ओसेतिया, क्रास्नोदार क्राय और स्ताव्रोपोल क्राय के क्षेत्र आते हैं। दक्षिण कॉकस में आर्मीनिया, अज़रबैजान और जॉर्जिया आते हैं, जिसमें दक्षिण ओसेतिया, अबख़ज़िया और नागोर्नो-काराबाख़ शामिल हैं। . 1991 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
कॉकस या कौकसस यूरोप और एशिया की सीमा पर स्थित एक भौगोलिक और राजनैतिक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कॉकस पर्वत शृंखला भी आती है, जिसमें यूरोप का सबसे ऊंचा पहाड़, एल्ब्रुस पर्वत शामिल है। कॉकस के दो मुख्य खंड बताये जाते हैंः उत्तर कॉकस और दक्षिण कॉकस। उत्तर कॉकस में चेचन्या, इन्गुशेतिया, दाग़िस्तान, आदिगेया, काबारदीनो-बल्कारिया, काराचाए-चरकस्सिया, उत्तर ओसेतिया, क्रास्नोदार क्राय और स्ताव्रोपोल क्राय के क्षेत्र आते हैं। दक्षिण कॉकस में आर्मीनिया, अज़रबैजान और जॉर्जिया आते हैं, जिसमें दक्षिण ओसेतिया, अबख़ज़िया और नागोर्नो-काराबाख़ शामिल हैं। . एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन की दूसरी फिल्म 'फिल्लौरी' 24 मार्च 2017 को रिलीज होगी। फिल्म का निर्देशन अंशाई लाल ने किया है, जबकि इसकी निर्माण अनुष्का शर्मा और उनके भाई कर्नेश की क्लीन स्टेट फिल्म्स और फॉक्स स्टार स्टूडियो ने किया है। फिल्म में अनुष्का के अलावा पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ, लाइफ ऑफ पाई से प्रसिद्धि पाने वाले सूरज शर्मा और मेहरीन पीरजादा ने मुख्य भूमिकायें अदा की हैं। अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा, "फिल्लौरी की रिलीज डेट : मार्च 24, 2017 है। लिख के रखो . . अभी से.... बहुत मजा आने वाला है। " याद हो कि 28 वर्षीय अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने साल 2015 में एनएच-10 से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा था। गौरतलब है कि हाल ही अनुष्का अपनी फिल्म ऐ दिल है मुश्किल में नजर आई थीं। करण जौहर निर्देशित यह फिल्म 28 अक्टूबर को रिलीज हुई थी। फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर, फवाद खान और ऐश्वर्या राय भी फिल्म में नजर आई थीं। यह फिल्म बॉलीवुड स्टार अजय देवगन निर्देशित फिल्म शिवाय के साथ रिलीज हुई थी। फिल्म ने शिवाय की तुलना की अच्छा प्रदर्शन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। फिल्म का संगीत इसे हिट कराने में एक अहम हिस्सा रहा। फिल्म में ज्यादातर रोमेंटिक और एक डांस नंबर 'ब्रेकअप सॉन्ग' था, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन की दूसरी फिल्म 'फिल्लौरी' चौबीस मार्च दो हज़ार सत्रह को रिलीज होगी। फिल्म का निर्देशन अंशाई लाल ने किया है, जबकि इसकी निर्माण अनुष्का शर्मा और उनके भाई कर्नेश की क्लीन स्टेट फिल्म्स और फॉक्स स्टार स्टूडियो ने किया है। फिल्म में अनुष्का के अलावा पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ, लाइफ ऑफ पाई से प्रसिद्धि पाने वाले सूरज शर्मा और मेहरीन पीरजादा ने मुख्य भूमिकायें अदा की हैं। अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा, "फिल्लौरी की रिलीज डेट : मार्च चौबीस, दो हज़ार सत्रह है। लिख के रखो . . अभी से.... बहुत मजा आने वाला है। " याद हो कि अट्ठाईस वर्षीय अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने साल दो हज़ार पंद्रह में एनएच-दस से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा था। गौरतलब है कि हाल ही अनुष्का अपनी फिल्म ऐ दिल है मुश्किल में नजर आई थीं। करण जौहर निर्देशित यह फिल्म अट्ठाईस अक्टूबर को रिलीज हुई थी। फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर, फवाद खान और ऐश्वर्या राय भी फिल्म में नजर आई थीं। यह फिल्म बॉलीवुड स्टार अजय देवगन निर्देशित फिल्म शिवाय के साथ रिलीज हुई थी। फिल्म ने शिवाय की तुलना की अच्छा प्रदर्शन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर एक सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई की। फिल्म का संगीत इसे हिट कराने में एक अहम हिस्सा रहा। फिल्म में ज्यादातर रोमेंटिक और एक डांस नंबर 'ब्रेकअप सॉन्ग' था, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।
नई दिल्ली। भारतीय बाजारों में आज सोने की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला है। इसके बाद भी दिल्ली सर्राफा बाजार में आज 27 अप्रैल 2021 को सोने के भाव (Gold Price Today) 47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे ही बने रहे। चांदी के दाम (Silver Price Today) में भी आज मामूली सुधार हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 46,837 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी 67,635 रुपये प्रति किग्रा पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज गोल्ड की कीमत में भारतीय बाजारों के उलट गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में बड़ी उठापटक नहीं हुई। सोने की नई कीमतें (Gold Price) दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने के भाव में महज 69 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली (Delhi) में 99.9 ग्राम शुद्धता वाले सोने का नया भाव अब 46,906 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले कारोबारी सत्र में सोना 46,837 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव आज गिरकर 1,778 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) तपन पटेल के मुताबिक, कारोबारियों और निवेशकों को अमेरिकी फैडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि इसमें कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में कीमती धातुओं के कारोबार में उठापटक जारी है। लिहाजा, सोने का हाजिर भाव लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है। वहीं, कोरोना वायरस के नए मामलों में आई तेजी के कारण लोग सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं। इससे सोने की कीमतों को समर्थन मिलेगा।
नई दिल्ली। भारतीय बाजारों में आज सोने की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला है। इसके बाद भी दिल्ली सर्राफा बाजार में आज सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार इक्कीस को सोने के भाव सैंतालीस,शून्य रुपयापये प्रति दस ग्राम के नीचे ही बने रहे। चांदी के दाम में भी आज मामूली सुधार हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना छियालीस,आठ सौ सैंतीस रुपयापये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी सरसठ,छः सौ पैंतीस रुपयापये प्रति किग्रा पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज गोल्ड की कीमत में भारतीय बाजारों के उलट गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में बड़ी उठापटक नहीं हुई। सोने की नई कीमतें दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने के भाव में महज उनहत्तर रुपयापये प्रति दस ग्राम की तेजी दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली में निन्यानवे दशमलव नौ ग्राम शुद्धता वाले सोने का नया भाव अब छियालीस,नौ सौ छः रुपयापये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले कारोबारी सत्र में सोना छियालीस,आठ सौ सैंतीस रुपयापये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव आज गिरकर एक,सात सौ अठहत्तर डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट तपन पटेल के मुताबिक, कारोबारियों और निवेशकों को अमेरिकी फैडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि इसमें कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में कीमती धातुओं के कारोबार में उठापटक जारी है। लिहाजा, सोने का हाजिर भाव लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है। वहीं, कोरोना वायरस के नए मामलों में आई तेजी के कारण लोग सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं। इससे सोने की कीमतों को समर्थन मिलेगा।
दांत साफ करने वाले फलः दांतों के पीलेपन से हम में से ज्यादातर लोग परेशान हैं। इसके लिए लोग तरह-तरह के टूथपेस्ट और ब्रश बदल लेते हैं लेकिन फिर भी अंत तक परेशान रहते हैं। ऐसे में दांतों को साफ करने में कुछ फल आपकी मदद कर सकते हैं। जी हां, भले ही आपको हैरानी हो पर फलों में कुछ एक्टिव कंपाउंड होते हैं जो कि आपके दांतों को साफ कर सकते हैं। जैसे कि मैलिक एसिड (malic acid), साइट्रिक एसिड (citric acid) और मैग्नीशियम (magnesium)। ये तीन चीजें जिन भी चीजों में होगा, ये आपके दांतों की सफाई में मदद कर सकते हैं। तो, आइए जानते हैं कौन सा फल खाने से दांत साफ होते हैं (fruits for teeth health) तरबूज में स्ट्रॉबेरी और सेब जैसे फलों की तुलना में ज्यादा मैलिक एसिड होता है। मैलिक एसिड आपके दांतों को हल्का करने और लार उत्पादन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाता है। ये दांतों की सतह से पीलापन हटाने में मदद करता है। साथ ही तरबूज की रेशेदार बनावट आपके दांतों को स्क्रब करती है, जिससे दांतों की चमक लौट आ सकती है। सेब साइट्रिक और मैलिक एसिड दोनों से भरपूर है। साथ ही जब आप इसे खाते हैं तो दांतों में इसका रस लगने से इस पर जमा पीला पदार्थ स्क्रब होने लगता है। ऐसे में लगातार सेब खाना या दांतों पर सेब के छिलके को घिसना, पीलापन कम करने में मदद कर सकता है। स्ट्रॉबेरी में मैलिक एसिड होता है साथ ही इसमें खट्टापन भी है जो कि साइट्रिक एसिड की वजह से है। ये दोनों ही कंपाउंड ब्लीचिंग एजेंट की चरह काम करते हैं और दांतों पर लगे दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकते हैं। आपके दांत पेलिकल या लार वाले प्रोटीन की एक परत से ढके होते हैं। आपकी पेलिकल परत आपके दांतों की रक्षा करती है, लेकिन यह भोजन के रंगों को अवशोषित कर लेती है और दांत पीले पड़ जाते हैं। ऐसे में अनानास में पाए जाने वाला ब्रोमेलेन नामक प्रोटियोलिटिक एंजाइम पेलिकल की परत को साफ करता है और दांतों की चमक बढ़ाता है। तो, ये तमाम फल खाएं और अपने दांतों को साफ रखें।
दांत साफ करने वाले फलः दांतों के पीलेपन से हम में से ज्यादातर लोग परेशान हैं। इसके लिए लोग तरह-तरह के टूथपेस्ट और ब्रश बदल लेते हैं लेकिन फिर भी अंत तक परेशान रहते हैं। ऐसे में दांतों को साफ करने में कुछ फल आपकी मदद कर सकते हैं। जी हां, भले ही आपको हैरानी हो पर फलों में कुछ एक्टिव कंपाउंड होते हैं जो कि आपके दांतों को साफ कर सकते हैं। जैसे कि मैलिक एसिड , साइट्रिक एसिड और मैग्नीशियम । ये तीन चीजें जिन भी चीजों में होगा, ये आपके दांतों की सफाई में मदद कर सकते हैं। तो, आइए जानते हैं कौन सा फल खाने से दांत साफ होते हैं तरबूज में स्ट्रॉबेरी और सेब जैसे फलों की तुलना में ज्यादा मैलिक एसिड होता है। मैलिक एसिड आपके दांतों को हल्का करने और लार उत्पादन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाता है। ये दांतों की सतह से पीलापन हटाने में मदद करता है। साथ ही तरबूज की रेशेदार बनावट आपके दांतों को स्क्रब करती है, जिससे दांतों की चमक लौट आ सकती है। सेब साइट्रिक और मैलिक एसिड दोनों से भरपूर है। साथ ही जब आप इसे खाते हैं तो दांतों में इसका रस लगने से इस पर जमा पीला पदार्थ स्क्रब होने लगता है। ऐसे में लगातार सेब खाना या दांतों पर सेब के छिलके को घिसना, पीलापन कम करने में मदद कर सकता है। स्ट्रॉबेरी में मैलिक एसिड होता है साथ ही इसमें खट्टापन भी है जो कि साइट्रिक एसिड की वजह से है। ये दोनों ही कंपाउंड ब्लीचिंग एजेंट की चरह काम करते हैं और दांतों पर लगे दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकते हैं। आपके दांत पेलिकल या लार वाले प्रोटीन की एक परत से ढके होते हैं। आपकी पेलिकल परत आपके दांतों की रक्षा करती है, लेकिन यह भोजन के रंगों को अवशोषित कर लेती है और दांत पीले पड़ जाते हैं। ऐसे में अनानास में पाए जाने वाला ब्रोमेलेन नामक प्रोटियोलिटिक एंजाइम पेलिकल की परत को साफ करता है और दांतों की चमक बढ़ाता है। तो, ये तमाम फल खाएं और अपने दांतों को साफ रखें।
Don't Miss! अमृता राव ने भले ही बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ खास वक्त ना बिताया हो। लेकिन इसके बावजूद भी उनकी चुनिंदा फिल्मों ने ही उनका करियर एक बेहद ही ऊंचे मुकाम तक पहुंचा दिया। बता दें कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। लेकिन आपको बता दें कि फिल्म विवाह में काम करके उन्होंने रातों-रात सुर्खियां बटोरी और वह सुपरस्टार बन गई। फिल्म विवाह में अमृता राव ने पूनम का किरदार निभाया था। इतना ही नहीं उनके साथ में शाहिद कपूर भी नजर आए। साल 2006 में रिलीज होने वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी तहलका मचा दिया था। इतना ही नहीं पूनम का किरदार दर्शकों को भी खूब पसंद आया था। आज भी हर घर में इस फिल्म को देखा जाता है। विवाह फिल्म में नजर आने के बाद अमृता राव का किरदार लोगों को खूब पसंद आया। इतना ही नहीं उनके जैसी बहू की डिमांड हर कोई करने लगा। साथ ही साथ रियल लाइफ में भी अमृता के घर पर रिश्तो की कतारें लग गई थी। यहां तक कि उनके घर कनाडा से लेकर अमेरिका तक से शादी के प्रपोजल आने लगे। इतना ही नहीं अमृता के घर पर लड़के अपनी मां और घरबार की तस्वीरें भी भेजने लग गए थे। अमृता राव ने राजश्री प्रोडक्शन के यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू दिया जहां पर उन्होंने इन बातों का खुलासा किया था। एक्ट्रेस ने बताया कि विवाह फिल्म में काम करने के बाद में उन्हें बहुत सारे शादी के ऑफर आए। जिससे कि वह परेशान भी हो गई थी। उस वक्त स्मार्टफोन तो नहीं हुआ करते थे तो इसी वजह से मुझे खत आया करते थे। एक्ट्रेस ने बताया कि ज्यादातर लेटर कनाडा और अमेरिका से आया करते थे। अमृता ने इसी के साथ-साथ इस बारे में भी बताया कि "जब भी लड़कों के प्रपोजल आते थे तो वह मुझे अपनी मां की तस्वीरें भी भेजा करते थे। यहां तक कि घर और कारों की तस्वीरें भी भेज दिया करते थे। मुझे उस वक्त इन सभी बातों पर काफी हंसी आया करती थी। लेकिन अब जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे उस एक किरदार की मजबूती का एहसास होने लग जाता है। यही एक वजह थी जिससे कि लड़की मुझसे शादी करना चाह रहे थे और यह भी अनुभव बेहद ही कमाल का रहा।"
Don't Miss! अमृता राव ने भले ही बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ खास वक्त ना बिताया हो। लेकिन इसके बावजूद भी उनकी चुनिंदा फिल्मों ने ही उनका करियर एक बेहद ही ऊंचे मुकाम तक पहुंचा दिया। बता दें कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। लेकिन आपको बता दें कि फिल्म विवाह में काम करके उन्होंने रातों-रात सुर्खियां बटोरी और वह सुपरस्टार बन गई। फिल्म विवाह में अमृता राव ने पूनम का किरदार निभाया था। इतना ही नहीं उनके साथ में शाहिद कपूर भी नजर आए। साल दो हज़ार छः में रिलीज होने वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी तहलका मचा दिया था। इतना ही नहीं पूनम का किरदार दर्शकों को भी खूब पसंद आया था। आज भी हर घर में इस फिल्म को देखा जाता है। विवाह फिल्म में नजर आने के बाद अमृता राव का किरदार लोगों को खूब पसंद आया। इतना ही नहीं उनके जैसी बहू की डिमांड हर कोई करने लगा। साथ ही साथ रियल लाइफ में भी अमृता के घर पर रिश्तो की कतारें लग गई थी। यहां तक कि उनके घर कनाडा से लेकर अमेरिका तक से शादी के प्रपोजल आने लगे। इतना ही नहीं अमृता के घर पर लड़के अपनी मां और घरबार की तस्वीरें भी भेजने लग गए थे। अमृता राव ने राजश्री प्रोडक्शन के यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू दिया जहां पर उन्होंने इन बातों का खुलासा किया था। एक्ट्रेस ने बताया कि विवाह फिल्म में काम करने के बाद में उन्हें बहुत सारे शादी के ऑफर आए। जिससे कि वह परेशान भी हो गई थी। उस वक्त स्मार्टफोन तो नहीं हुआ करते थे तो इसी वजह से मुझे खत आया करते थे। एक्ट्रेस ने बताया कि ज्यादातर लेटर कनाडा और अमेरिका से आया करते थे। अमृता ने इसी के साथ-साथ इस बारे में भी बताया कि "जब भी लड़कों के प्रपोजल आते थे तो वह मुझे अपनी मां की तस्वीरें भी भेजा करते थे। यहां तक कि घर और कारों की तस्वीरें भी भेज दिया करते थे। मुझे उस वक्त इन सभी बातों पर काफी हंसी आया करती थी। लेकिन अब जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे उस एक किरदार की मजबूती का एहसास होने लग जाता है। यही एक वजह थी जिससे कि लड़की मुझसे शादी करना चाह रहे थे और यह भी अनुभव बेहद ही कमाल का रहा।"
नयी दिल्ली, सात जनवरी फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे पर भारत का फ्रांस समर्थन करता रहा है और उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन को कोई "प्रक्रियागत खेल" खेलने नहीं दिया। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) द्वारा आयोजित "फ्रांस और भारत : स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत के साझेदार" विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि फ्रांस 'क्वाड' - अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का समूह- के करीब है और भविष्य में उनके साथ कुछ नौसैनिक अभ्यास भी कर सकता है। फ्रांसीसी नौसेना के ताईवान जलडमरूमध्य में गश्त करने वाली एक मात्र यूरोपीय नौसेना होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उकसावे के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर डालने के लिये है। दिन में आयोजित रणनीतिक संवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अपनी बातचीत के बारे में उन्होंने कहा कि रणनीतिक अवसरों के साथ-साथ द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा संबंधों को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सैन्य सहयोग और हिंद महासागर के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, सात जनवरी फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे पर भारत का फ्रांस समर्थन करता रहा है और उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन को कोई "प्रक्रियागत खेल" खेलने नहीं दिया। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित "फ्रांस और भारत : स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत के साझेदार" विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि फ्रांस 'क्वाड' - अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का समूह- के करीब है और भविष्य में उनके साथ कुछ नौसैनिक अभ्यास भी कर सकता है। फ्रांसीसी नौसेना के ताईवान जलडमरूमध्य में गश्त करने वाली एक मात्र यूरोपीय नौसेना होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उकसावे के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर डालने के लिये है। दिन में आयोजित रणनीतिक संवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अपनी बातचीत के बारे में उन्होंने कहा कि रणनीतिक अवसरों के साथ-साथ द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा संबंधों को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सैन्य सहयोग और हिंद महासागर के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की रविवार को यहां हुई बैठक से संकेत मिले हैं कि भाजपा विरोधी दलों की बहुप्रतीक्षित बैठक यहां 12 जून को हो सकती है। हालांकि जदयू के किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि या खंडन नहीं किया, लेकिन बैठक में मौजूद कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह खुलासा खुद मुख्यमंत्री ने किया है। जद (यू) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार पिछले साल अगस्त में भाजपा से नाता तोड़ने के बाद से "विपक्षी एकता" की वकालत कर रहे हैं। बिहार में सत्ताधारी "महागठबंधन" का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव जैसे भाजपा विरोधी नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। जदयू, राजद, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां एवं अन्य कुछ दल महागठबंधन के घटक हैं। दरअसल, पटना में विपक्षी नेताओं की एक बैठक आयोजित करने का विचार ममता बनर्जी ने दिया था। "विपक्षी एकता" अभियान के हिस्से के रूप में, नीतीश कुमार ने न केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे कांग्रेस के सहयोगियों के साथ, बल्कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जैसे अपने विरोधियों के साथ भी बातचीत की है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की रविवार को यहां हुई बैठक से संकेत मिले हैं कि भाजपा विरोधी दलों की बहुप्रतीक्षित बैठक यहां बारह जून को हो सकती है। हालांकि जदयू के किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि या खंडन नहीं किया, लेकिन बैठक में मौजूद कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह खुलासा खुद मुख्यमंत्री ने किया है। जद के शीर्ष नेता नीतीश कुमार पिछले साल अगस्त में भाजपा से नाता तोड़ने के बाद से "विपक्षी एकता" की वकालत कर रहे हैं। बिहार में सत्ताधारी "महागठबंधन" का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव जैसे भाजपा विरोधी नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। जदयू, राजद, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां एवं अन्य कुछ दल महागठबंधन के घटक हैं। दरअसल, पटना में विपक्षी नेताओं की एक बैठक आयोजित करने का विचार ममता बनर्जी ने दिया था। "विपक्षी एकता" अभियान के हिस्से के रूप में, नीतीश कुमार ने न केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे कांग्रेस के सहयोगियों के साथ, बल्कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जैसे अपने विरोधियों के साथ भी बातचीत की है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
चंडीगढ़। पंजाब में बुधवार को 33 लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुयी है और इसके साथ ही राज्य में कोविड-19 के मरीजों की संख्या बढ़ कर 2,139 हो गयी है । अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी । पंजाब सरकार की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा गया है कि कोविड - 19 के नये मामलों में अमृतसर में 16, पटियाला में सात, पठानकोट में तीन, तरन तारन एवं संगरूर में दो दो जबकि गुरदासपुर, बरनाला और लुधियाना जिलों में एक एक मामले सामने आये हैं । इसमें कहा गया है कि नये मामलों में से एक विदेश से आया है जबकि सात लोग महाराष्ट्र की यात्रा कर चुके हैं। बुलेटिन के अनुसार, बुधवार को अस्पताल से किसी मरीज को छुट्टी नहीं दी गयी है। राज्य में इलाज के बाद ठीक होने वाले लोगों की संख्या 1,918 है । बुलेटिन में कहा गया है कि राज्य में कुल 181 मरीज ऐसे हैं जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के लिहाज से पंजाब में अमृतसर शीर्ष स्थान पर है जहां वायरस के 347 मामले सामने आये हैं । इसके बाद जालंधर, लुधियाना, तरन तारन, गुरदासपुर, होशियारपुर पटियाला का नंबर आता है जहां क्रमशः 230, 176, 156, 133, 110 एवं 115 मामले हैं । अन्य जिलों में भी मामले हैं । बुलेटिन के अनुसार, कुल मामलों में से प्रदेश में अब तक 40 मरीजों की मौत हो चुकी है और एक संक्रमित मामले में हालत नाजुक है और मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है। बुलेटिन के अनुसार, अब तक 72 हजार 468 नमूनों की जांच की जा चुकी है ।
चंडीगढ़। पंजाब में बुधवार को तैंतीस लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुयी है और इसके साथ ही राज्य में कोविड-उन्नीस के मरीजों की संख्या बढ़ कर दो,एक सौ उनतालीस हो गयी है । अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी । पंजाब सरकार की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा गया है कि कोविड - उन्नीस के नये मामलों में अमृतसर में सोलह, पटियाला में सात, पठानकोट में तीन, तरन तारन एवं संगरूर में दो दो जबकि गुरदासपुर, बरनाला और लुधियाना जिलों में एक एक मामले सामने आये हैं । इसमें कहा गया है कि नये मामलों में से एक विदेश से आया है जबकि सात लोग महाराष्ट्र की यात्रा कर चुके हैं। बुलेटिन के अनुसार, बुधवार को अस्पताल से किसी मरीज को छुट्टी नहीं दी गयी है। राज्य में इलाज के बाद ठीक होने वाले लोगों की संख्या एक,नौ सौ अट्ठारह है । बुलेटिन में कहा गया है कि राज्य में कुल एक सौ इक्यासी मरीज ऐसे हैं जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के लिहाज से पंजाब में अमृतसर शीर्ष स्थान पर है जहां वायरस के तीन सौ सैंतालीस मामले सामने आये हैं । इसके बाद जालंधर, लुधियाना, तरन तारन, गुरदासपुर, होशियारपुर पटियाला का नंबर आता है जहां क्रमशः दो सौ तीस, एक सौ छिहत्तर, एक सौ छप्पन, एक सौ तैंतीस, एक सौ दस एवं एक सौ पंद्रह मामले हैं । अन्य जिलों में भी मामले हैं । बुलेटिन के अनुसार, कुल मामलों में से प्रदेश में अब तक चालीस मरीजों की मौत हो चुकी है और एक संक्रमित मामले में हालत नाजुक है और मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है। बुलेटिन के अनुसार, अब तक बहत्तर हजार चार सौ अड़सठ नमूनों की जांच की जा चुकी है ।
U&i हमेशा से अपने आधुनिक गैजेट्स के साथ उपभोक्ताओं को इनोवेशन्स का बेजोड़ अनुभव प्रदान करता रहा है। इस बार ब्राण्ड ने स्मार्ट नैकबैण्ड U&i Prime Shuffle 3 का लॉन्च किया है जो अपने शानदार फीचर्स जैसे आसान पावर कंट्रोल, सुपर फास्ट चार्जिंग के साथ बेहतरीन अनुभव प्रदान करेगा। यह प्रोडक्ट बेहतरीन 150mAh की बैटरी के साथ आता है, तो अब आप इस नैकबैण्ड के साथ लम्बी यात्रा पर अपने पसंदीदा म्युज़िक का आनंद ले सकते हैं, क्यूंकी यह नैकबैण्ड आपको धोखा नहीं देगा। साथ ही इसका प्लेइंग टाईम 15 घण्टे है, आप घंटो तक अपने प्रियजनों के साथ लम्बी बातें कर सकते हैं। और अगर आप इसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो स्टैण्डबाय मोड में यह 400 घण्टे तक चलेगा। आज की तेज़ी से भागती दुनिया में फास्ट चार्जिंग भी बहुत ज़रूरी हो गई है। यह U&i Prime Shuffle 3 नैकबैण्ड माइक्रो USB चार्जिंग टाईप के साथ सिर्फ 30 मिनट में पूरा चार्ज हो जाता है। इतना ही नहीं! इसकी क्विक चार्जिंग बैटरी, केवल 10 मिनट चार्ज करने के बाद 5 घंटे तक का प्लेटाईम देती है। 10 मीटर की ट्रांसमिशन रेंज वाला यह नैकबैण्ड ब्लूटुथ वर्ज़न 5.0 के साथ आता है, जो आसान कनेक्टिविटी तो देता ही है, साथ ही आपको तारों की उलझन से भी दूर रखता है। नैकबैण्ड को एक साथ दो डिवाइसेज़ के साथ कनेक्ट किया जा सकता है, तो यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो अपने गैजेट्स के साथ कॉल्स और म्युज़िक से कनेक्टेड रहना चाहते हैं। आधुनिक फीचर्स से युक्त U&i Prime Shuffle 3 में मैग्नेटिक ईयरबड्स के साथ आता, जब आप इन्हे इस्तेमाल नही कर रहे, तो इन्हे साथ अटैच कर सकते है। तीन आकर्षक रंगों ब्लैक, रैड और ब्लू में उपलब्ध U&i Prime Shuffle 3 की MRP 2,699 रुपये है, हालांकि उपभोक्ता अभी इसे मात्र 499 रुपये की कीमत पर खरीद कर भारी छूट पा सकते हैं। 12 महीने की वारंटी के साथ इसे कंपनी की ऑफिशियल वेबसाईट, Amazon.in और अन्य सभी अग्रणी ऑनलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध है।
U&i हमेशा से अपने आधुनिक गैजेट्स के साथ उपभोक्ताओं को इनोवेशन्स का बेजोड़ अनुभव प्रदान करता रहा है। इस बार ब्राण्ड ने स्मार्ट नैकबैण्ड U&i Prime Shuffle तीन का लॉन्च किया है जो अपने शानदार फीचर्स जैसे आसान पावर कंट्रोल, सुपर फास्ट चार्जिंग के साथ बेहतरीन अनुभव प्रदान करेगा। यह प्रोडक्ट बेहतरीन एक सौ पचासmAh की बैटरी के साथ आता है, तो अब आप इस नैकबैण्ड के साथ लम्बी यात्रा पर अपने पसंदीदा म्युज़िक का आनंद ले सकते हैं, क्यूंकी यह नैकबैण्ड आपको धोखा नहीं देगा। साथ ही इसका प्लेइंग टाईम पंद्रह घण्टे है, आप घंटो तक अपने प्रियजनों के साथ लम्बी बातें कर सकते हैं। और अगर आप इसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो स्टैण्डबाय मोड में यह चार सौ घण्टे तक चलेगा। आज की तेज़ी से भागती दुनिया में फास्ट चार्जिंग भी बहुत ज़रूरी हो गई है। यह U&i Prime Shuffle तीन नैकबैण्ड माइक्रो USB चार्जिंग टाईप के साथ सिर्फ तीस मिनट में पूरा चार्ज हो जाता है। इतना ही नहीं! इसकी क्विक चार्जिंग बैटरी, केवल दस मिनट चार्ज करने के बाद पाँच घंटाटे तक का प्लेटाईम देती है। दस मीटर की ट्रांसमिशन रेंज वाला यह नैकबैण्ड ब्लूटुथ वर्ज़न पाँच.शून्य के साथ आता है, जो आसान कनेक्टिविटी तो देता ही है, साथ ही आपको तारों की उलझन से भी दूर रखता है। नैकबैण्ड को एक साथ दो डिवाइसेज़ के साथ कनेक्ट किया जा सकता है, तो यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो अपने गैजेट्स के साथ कॉल्स और म्युज़िक से कनेक्टेड रहना चाहते हैं। आधुनिक फीचर्स से युक्त U&i Prime Shuffle तीन में मैग्नेटिक ईयरबड्स के साथ आता, जब आप इन्हे इस्तेमाल नही कर रहे, तो इन्हे साथ अटैच कर सकते है। तीन आकर्षक रंगों ब्लैक, रैड और ब्लू में उपलब्ध U&i Prime Shuffle तीन की MRP दो,छः सौ निन्यानवे रुपयापये है, हालांकि उपभोक्ता अभी इसे मात्र चार सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत पर खरीद कर भारी छूट पा सकते हैं। बारह महीने की वारंटी के साथ इसे कंपनी की ऑफिशियल वेबसाईट, Amazon.in और अन्य सभी अग्रणी ऑनलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध है।
भीनमाल । शहर के कृषि मंडी परिसर में रविवार को कांग्रेस कमेटी की ओर से पूर्व मंत्री सूरजपालसिंह चंपावत दासपां की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर व पौधरोपण कार्यक्रम हुआ। शिविर में दर्जनों युवाओं ने उत्साह के साथ रक्तदान दान किया एवं पौधरोपण किया। इस मौके पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह ने कहा कि रक्तदाता होना गर्व की बात है। रक्तदान एक इंसान का दूसरे इंसान के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है। रक्तदान से ज्यादा अनमोल योगदान कुछ और नहीं हो सकता, क्योंकि यह मानव जीवन की रक्षा करता है। रक्तदान न सिर्फ दूसरों की जिंदगी बचाता है, बल्कि यह रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायी माना गया है। इससे जुड़ी भ्रांतियों को मिटाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। वस्तुओं का निर्माण निर्माण फैक्ट्रियों में किया जा सकता है, लेकिन रक्त का निर्माण जीवित व्यक्ति के शरीर में ही हो सकता है। पालिकाध्यक्ष विमला बोहरा ने कहा कि रक्त की एक बूंद से आपातकालीन परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। रक्तदान से शरीर में रक्त संरचण भी ठीक रहता है। युवा कांग्रेस नेता भेरूपालसिंह दासपां व लक्ष्मणसिंह राव ने बताया कि शिविर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ रक्तदान किया। शिविर में 61 यूनिट रक्तदान हुआ। कार्यक्रम के तहत कृषि मंडी परिसर में कार्यकताओं ने विभिन्न किस्म के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस मौके पालिका उपाध्यक्ष प्रेमराज बोहरा, हिन्दूसिंह दूठवा, हाजी सत्तार खां, शेखर व्यास, अधिवक्ता अजमत अली, शिवनायण विश्नोई, भूपेन्द्रसिंह दूदिया, पूर्व कांग्रेस नगर अध्यक्ष कपूरचंद जीनगर, पार्षद तलकाराम रागी, दिनेश बंजारा, महिपालसिंह भाटी, जितेंद्र माली व इकबाल खान मौजूद थे। पूर्व मंत्री के पुण्यतिथि उपलक्ष्य में उपकारागृह में बंदियों को फल वितरण किए। इस मौके उप जेलर सुरज सोनी, मुख्य प्रहरी गजेसिंह, प्रहरी कनिता बेड़ा व प्रताप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। पूर्व मंत्री के पुण्यतिथि उपलक्ष्य में उपकारागृह में बंदियों को फल वितरण किए। इस मौके उप जेलर सुरज सोनी, मुख्य प्रहरी गजेसिंह, प्रहरी कनिता बेड़ा व प्रताप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
भीनमाल । शहर के कृषि मंडी परिसर में रविवार को कांग्रेस कमेटी की ओर से पूर्व मंत्री सूरजपालसिंह चंपावत दासपां की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर व पौधरोपण कार्यक्रम हुआ। शिविर में दर्जनों युवाओं ने उत्साह के साथ रक्तदान दान किया एवं पौधरोपण किया। इस मौके पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह ने कहा कि रक्तदाता होना गर्व की बात है। रक्तदान एक इंसान का दूसरे इंसान के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है। रक्तदान से ज्यादा अनमोल योगदान कुछ और नहीं हो सकता, क्योंकि यह मानव जीवन की रक्षा करता है। रक्तदान न सिर्फ दूसरों की जिंदगी बचाता है, बल्कि यह रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायी माना गया है। इससे जुड़ी भ्रांतियों को मिटाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। वस्तुओं का निर्माण निर्माण फैक्ट्रियों में किया जा सकता है, लेकिन रक्त का निर्माण जीवित व्यक्ति के शरीर में ही हो सकता है। पालिकाध्यक्ष विमला बोहरा ने कहा कि रक्त की एक बूंद से आपातकालीन परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। रक्तदान से शरीर में रक्त संरचण भी ठीक रहता है। युवा कांग्रेस नेता भेरूपालसिंह दासपां व लक्ष्मणसिंह राव ने बताया कि शिविर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ रक्तदान किया। शिविर में इकसठ यूनिट रक्तदान हुआ। कार्यक्रम के तहत कृषि मंडी परिसर में कार्यकताओं ने विभिन्न किस्म के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस मौके पालिका उपाध्यक्ष प्रेमराज बोहरा, हिन्दूसिंह दूठवा, हाजी सत्तार खां, शेखर व्यास, अधिवक्ता अजमत अली, शिवनायण विश्नोई, भूपेन्द्रसिंह दूदिया, पूर्व कांग्रेस नगर अध्यक्ष कपूरचंद जीनगर, पार्षद तलकाराम रागी, दिनेश बंजारा, महिपालसिंह भाटी, जितेंद्र माली व इकबाल खान मौजूद थे। पूर्व मंत्री के पुण्यतिथि उपलक्ष्य में उपकारागृह में बंदियों को फल वितरण किए। इस मौके उप जेलर सुरज सोनी, मुख्य प्रहरी गजेसिंह, प्रहरी कनिता बेड़ा व प्रताप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। पूर्व मंत्री के पुण्यतिथि उपलक्ष्य में उपकारागृह में बंदियों को फल वितरण किए। इस मौके उप जेलर सुरज सोनी, मुख्य प्रहरी गजेसिंह, प्रहरी कनिता बेड़ा व प्रताप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह काफी लंबे समय बाद फिल्म 'साहब बीवी और गैंगस्टर 3' से बॉलीवुड में वापसी करने जा रही है। फिल्म में चित्रांगदा का किरदार अपने प्यार को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला है। फिल्म में चित्रांगदा सिंह ने एक गाना भी किया है। जो साल 1972 में आई फिल्म पाकीजा में मीना कुमारी पर फिल्माए गए गानों की याद दिलाएगा। चित्रांगदा सिंह ने फिल्म पाकीजा के गानों को अपने ऊपर फिल्माए जाने के लिए कड़ी मेहनत की है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता संजय दत्त भी लीड रोल में अभिनय करते नज़र आएंगे। जो फिल्म में एक गैंगस्टर की भूमिका अदा करेंगे। फिल्म में संजय दत्त और चित्रांगदा के अलावा नफीसा अली, दीपक तीजोरी, कबीर बेदी, जिमी शेरगिल और माही गिल अभिनय करते नज़र आएंगे। फिल्म का निर्देशन तिग्मांशु धूलिया ने किया है। जबकि फिल्म को राहुल मित्रा प्रोड्यूस कर रहे है। फिल्म 27 जुलाई से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह काफी लंबे समय बाद फिल्म 'साहब बीवी और गैंगस्टर तीन' से बॉलीवुड में वापसी करने जा रही है। फिल्म में चित्रांगदा का किरदार अपने प्यार को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला है। फिल्म में चित्रांगदा सिंह ने एक गाना भी किया है। जो साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में आई फिल्म पाकीजा में मीना कुमारी पर फिल्माए गए गानों की याद दिलाएगा। चित्रांगदा सिंह ने फिल्म पाकीजा के गानों को अपने ऊपर फिल्माए जाने के लिए कड़ी मेहनत की है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता संजय दत्त भी लीड रोल में अभिनय करते नज़र आएंगे। जो फिल्म में एक गैंगस्टर की भूमिका अदा करेंगे। फिल्म में संजय दत्त और चित्रांगदा के अलावा नफीसा अली, दीपक तीजोरी, कबीर बेदी, जिमी शेरगिल और माही गिल अभिनय करते नज़र आएंगे। फिल्म का निर्देशन तिग्मांशु धूलिया ने किया है। जबकि फिल्म को राहुल मित्रा प्रोड्यूस कर रहे है। फिल्म सत्ताईस जुलाई से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी. सीएम ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लिस्ट जारी की. इस दौरान सीएम ममता ने एक बार फिर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अमित शाह को लोगों को इतना गलत नहीं समझना चाहिए. उनसे कह दो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सभी फोर्सेज को बंगाल में भेज दें, लेकिन जीत टीएमसी की ही होगी. यह चुनाव ज्यादा कठिन होगा के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि नहीं, ये बेहद सॉफ्ट चुनाव होगा, हम जीतेंगे. लोग जानते हैं कि बीजेपी आने का मतलब बंगाल का अंत है. बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा खेलेंगे, लड़ेंगे और जीतेंगे (खेला होबे, देखा होबे, जीता होबे). बंगाल में चाहे 8 चरण में चुनाव हो या फिर 294 चरणों में चुनाव हो, अमित शाह हमसे नहीं जीत सकते हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बंगाल में होने वाली 20 रैलियों पर सवाल हुआ, तो उन्होंने कहा कि वो चाहें 120 रैली कर लें, हम चुनावी जंग के आखिर तक लड़ाई लड़ेंगे. गौरतलब है कि बीते दिनों ही ये जानकारी आई थी कि पीएम मोदी इस बार बंगाल में करीब 20 चुनावी रैली करेंगे. टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वही अधिकारियों को बंगाल में दोबारा क्यों भेजा जा रहा है? मैं निष्पक्ष चुनाव आयोग से सवाल कर रही हूं. हम इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे और जीतेंगे. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी पैसों का इस्तेमाल कर रही है, डिप्टी सीएम की गाड़ियों में पैसा बांटा जा रहा है. बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीएम ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनावी मैदान में होंगी. टीएमसी ने शुक्रवार को कुल 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है, जबकि तीन सीटों को साथियों के लिए छोड़ा गया है. ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि TMC का मेनिफेस्ट नौ मार्च को ही जारी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमने 50 महिलाओं, 42 मुस्लिम, 79 अनुसूचित जाति, 17 अनुसूचित जनजाति के लोगों को टिकट दिया है. सीएम ममता ने कहा कि हम इस बार 27 विधायकों को टिकट नहीं दे रहे. इसके साथ ही हम 80 साल से ऊपर के लोगों को भी टिकट नहीं दे रहे हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी. सीएम ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लिस्ट जारी की. इस दौरान सीएम ममता ने एक बार फिर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अमित शाह को लोगों को इतना गलत नहीं समझना चाहिए. उनसे कह दो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सभी फोर्सेज को बंगाल में भेज दें, लेकिन जीत टीएमसी की ही होगी. यह चुनाव ज्यादा कठिन होगा के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि नहीं, ये बेहद सॉफ्ट चुनाव होगा, हम जीतेंगे. लोग जानते हैं कि बीजेपी आने का मतलब बंगाल का अंत है. बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा खेलेंगे, लड़ेंगे और जीतेंगे . बंगाल में चाहे आठ चरण में चुनाव हो या फिर दो सौ चौरानवे चरणों में चुनाव हो, अमित शाह हमसे नहीं जीत सकते हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बंगाल में होने वाली बीस रैलियों पर सवाल हुआ, तो उन्होंने कहा कि वो चाहें एक सौ बीस रैली कर लें, हम चुनावी जंग के आखिर तक लड़ाई लड़ेंगे. गौरतलब है कि बीते दिनों ही ये जानकारी आई थी कि पीएम मोदी इस बार बंगाल में करीब बीस चुनावी रैली करेंगे. टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वही अधिकारियों को बंगाल में दोबारा क्यों भेजा जा रहा है? मैं निष्पक्ष चुनाव आयोग से सवाल कर रही हूं. हम इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे और जीतेंगे. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी पैसों का इस्तेमाल कर रही है, डिप्टी सीएम की गाड़ियों में पैसा बांटा जा रहा है. बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीएम ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनावी मैदान में होंगी. टीएमसी ने शुक्रवार को कुल दो सौ इक्यानवे उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है, जबकि तीन सीटों को साथियों के लिए छोड़ा गया है. ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि TMC का मेनिफेस्ट नौ मार्च को ही जारी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमने पचास महिलाओं, बयालीस मुस्लिम, उन्यासी अनुसूचित जाति, सत्रह अनुसूचित जनजाति के लोगों को टिकट दिया है. सीएम ममता ने कहा कि हम इस बार सत्ताईस विधायकों को टिकट नहीं दे रहे. इसके साथ ही हम अस्सी साल से ऊपर के लोगों को भी टिकट नहीं दे रहे हैं.
Iran Hijab: हिजाब को लेकर बवाल होना कोई नई बात नहीं है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में इसपर विवाद देखा गया है। ताजा मामला ईरान का है। जहां महिलाएं सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं और हिजाब जला रही हैं। कुछ महिलाओं ने तो गाड़ी के बोनट पर खडे़ होकर हिजाब में आग लगाई है। ये विरोध प्रदर्शन मोरल पुलिसिंग के खिलाफ हो रहे हैं। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए हैं। प्रदर्शनों की शुरुआत देश के पश्चिमी हिस्से से हुई थी। ये वो इलाका है, जिसे कुर्दिस्तान भी कहा जाता है। यहां के लोग कई साल से अलग देश की मांग पर अड़े हुए हैं। हिजाब को लेकर पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब एक 22 साल की महिला को सिर नहीं ढंकने के चलते हिरासत में लिया गया। इसका नाम माहसा अमीनी था। माहसा मूल रूप से कुर्द थीं। हिरासत के दौरान उन्हें यातनाएं दिए जाने के आरोप हैं, जिसके चलते वह कोमा में चली गईं और 16 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। जिसके बाद देश की महिलाओं का गुस्सा भड़क गया। कुर्दिस्तान के शहरों से शुरू हुए प्रदर्शन राजधानी तेहरान तक पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं की मांग है कि हिजाब को अनिवार्य करने के बजाय वैकल्पिक किया जाए। किसके खिलाफ लगाए जा रहे नारे? प्रदर्शनकारी देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं। जिसके चलते उनपर पुलिस ने गोलीबारी की। इस देश में चुनाव होते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था भी है, लेकिन बावजूद इसके सभी अहम फैसले खामनेई लेते हैं। यहां की सरकार के लिए एक हैरान करने वाली बात ये भी है कि महिलाओं के साथ पुरुष भी बढ़ चढ़कर इन प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। कुर्द आबादी वाले इलाकों में सुरक्षाबलों की लोगों के साथ झड़प होने की खबर आई हैं। मृतका माहसा के शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की है। उनके अंतिम संस्कार के बाद प्रदर्शनकारी गवर्नर हाउस के बाहर एकत्रित हुए थे। जहां सुरक्षाकर्मियों ने उनपर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए कुर्द आबादी वाले इलाकों से सोमवार को 250 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। सुरक्षाबल प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं। इनके घरों पर छापेमारी की जा रही है। इस ऑपरेशन में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड भी शामिल हैं। एक कुर्द कार्यकर्ता ने बताया कि सुरक्षाबल उन लोगों को निशाना बना रहे हैं, जो कुर्दों के लिए काम करते हैं। बावजूद इसके जब तक माहसा को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। मामले में पुलिस ने क्या कहा है? ईरान की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की मौत की खबरों को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है लेकिन किसी की जान नहीं गई है। हालांकि ईरान ने मोरल पुलिस यानी नैतिक पुलिस के प्रमुख को निलंबित कर दिया है। लेकिन पुलिस ने माहसा को प्रताड़ित करने के आरोपों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि माहसा की मौत बीमारी की वजह से हुई है, न कि प्रताड़ना की वजह से। सरकार की तरफ से कुर्द के इलाकों इंटरनेट बंद कर दिया गया है। जिसके बाद दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने कहा कि यहां उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट काम कर रही हैं। उनसे इंटरनेट लिया जा सकता है। बता दें ईरान में बेहद सख्त धार्मिक कानून हैं, जिनके चलते महिलाओं पर तमाम तरह की पाबंदी लगी हुई हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले महिलाओं को काफी आजादी थी, लेकिन अब उन्हें बिलकुल भी आजादी नहीं है।
Iran Hijab: हिजाब को लेकर बवाल होना कोई नई बात नहीं है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में इसपर विवाद देखा गया है। ताजा मामला ईरान का है। जहां महिलाएं सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं और हिजाब जला रही हैं। कुछ महिलाओं ने तो गाड़ी के बोनट पर खडे़ होकर हिजाब में आग लगाई है। ये विरोध प्रदर्शन मोरल पुलिसिंग के खिलाफ हो रहे हैं। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें पाँच लोगों की मौत हो गई और अस्सी से ज्यादा घायल हुए हैं। प्रदर्शनों की शुरुआत देश के पश्चिमी हिस्से से हुई थी। ये वो इलाका है, जिसे कुर्दिस्तान भी कहा जाता है। यहां के लोग कई साल से अलग देश की मांग पर अड़े हुए हैं। हिजाब को लेकर पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब एक बाईस साल की महिला को सिर नहीं ढंकने के चलते हिरासत में लिया गया। इसका नाम माहसा अमीनी था। माहसा मूल रूप से कुर्द थीं। हिरासत के दौरान उन्हें यातनाएं दिए जाने के आरोप हैं, जिसके चलते वह कोमा में चली गईं और सोलह सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। जिसके बाद देश की महिलाओं का गुस्सा भड़क गया। कुर्दिस्तान के शहरों से शुरू हुए प्रदर्शन राजधानी तेहरान तक पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं की मांग है कि हिजाब को अनिवार्य करने के बजाय वैकल्पिक किया जाए। किसके खिलाफ लगाए जा रहे नारे? प्रदर्शनकारी देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं। जिसके चलते उनपर पुलिस ने गोलीबारी की। इस देश में चुनाव होते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था भी है, लेकिन बावजूद इसके सभी अहम फैसले खामनेई लेते हैं। यहां की सरकार के लिए एक हैरान करने वाली बात ये भी है कि महिलाओं के साथ पुरुष भी बढ़ चढ़कर इन प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। कुर्द आबादी वाले इलाकों में सुरक्षाबलों की लोगों के साथ झड़प होने की खबर आई हैं। मृतका माहसा के शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की है। उनके अंतिम संस्कार के बाद प्रदर्शनकारी गवर्नर हाउस के बाहर एकत्रित हुए थे। जहां सुरक्षाकर्मियों ने उनपर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए कुर्द आबादी वाले इलाकों से सोमवार को दो सौ पचास से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। सुरक्षाबल प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं। इनके घरों पर छापेमारी की जा रही है। इस ऑपरेशन में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड भी शामिल हैं। एक कुर्द कार्यकर्ता ने बताया कि सुरक्षाबल उन लोगों को निशाना बना रहे हैं, जो कुर्दों के लिए काम करते हैं। बावजूद इसके जब तक माहसा को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। मामले में पुलिस ने क्या कहा है? ईरान की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की मौत की खबरों को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है लेकिन किसी की जान नहीं गई है। हालांकि ईरान ने मोरल पुलिस यानी नैतिक पुलिस के प्रमुख को निलंबित कर दिया है। लेकिन पुलिस ने माहसा को प्रताड़ित करने के आरोपों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि माहसा की मौत बीमारी की वजह से हुई है, न कि प्रताड़ना की वजह से। सरकार की तरफ से कुर्द के इलाकों इंटरनेट बंद कर दिया गया है। जिसके बाद दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने कहा कि यहां उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट काम कर रही हैं। उनसे इंटरनेट लिया जा सकता है। बता दें ईरान में बेहद सख्त धार्मिक कानून हैं, जिनके चलते महिलाओं पर तमाम तरह की पाबंदी लगी हुई हैं। एक हज़ार नौ सौ उन्यासी की इस्लामी क्रांति से पहले महिलाओं को काफी आजादी थी, लेकिन अब उन्हें बिलकुल भी आजादी नहीं है।
हजारीबागः पूरी सृष्टि प्रकृति और पर्यावरण (Environment) पर निर्भर है। जीने के लिए जिस हवा, पानी, खाद्य की जरूरत होती है, वह पर्यावरण की देन है। इनके बिना सृष्टि और किसी जीव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उक्त बातें उपायुक्त नैंसी सहाय (Nancy Sahai) ने पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कहीं। इस अवसर पर उन्होंने जिला समाहरणालय परिसर में फलदार वृक्ष का पौधा लगाकर आमजनों को प्रकृति के प्रति प्रेम और उनके प्रति सुरक्षात्मक रवैया अपनाने की अपील की।
हजारीबागः पूरी सृष्टि प्रकृति और पर्यावरण पर निर्भर है। जीने के लिए जिस हवा, पानी, खाद्य की जरूरत होती है, वह पर्यावरण की देन है। इनके बिना सृष्टि और किसी जीव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उक्त बातें उपायुक्त नैंसी सहाय ने पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कहीं। इस अवसर पर उन्होंने जिला समाहरणालय परिसर में फलदार वृक्ष का पौधा लगाकर आमजनों को प्रकृति के प्रति प्रेम और उनके प्रति सुरक्षात्मक रवैया अपनाने की अपील की।
नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) के लॉन्च इवेंट का दूसरा दिन भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों हस्तियों के साथ एक असाधारण घटना थी, जो 'इंडिया इन फैशन' थीम को ध्यान में रखते हुए शानदार परिधानों में इस अवसर की शोभा बढ़ा रही थी। जहां प्रियंका चोपड़ा बहुरंगी बनारसी प्रिंट बॉटम वाले ऑफ-शोल्डर गाउन में स्टनिंग लग रही थीं, वहीं निक जोनास ने ब्लैक टक्सीडो पहना था। (स्रोतः वरिंदर चावला) आलिया भट्ट इस स्ट्रैपी गोल्डन गाउन में देखने लायक थीं, जो सेक्विन क्रिस्टल से भरा हुआ था और एक दुपट्टे के साथ पेयर किया गया था, जिसमें एक लंबी ट्रेन थी। (स्रोतः वरिंदर चावला) टॉम हॉलैंड काले रंग के टक्सीडो में काले रंग की बो टाई और काले जूतों के साथ सौम्य लग रहे थे। (स्रोतः वरिंदर चावला) जहां राधिका मर्चेंट ने सिल्वर ब्लाउज के साथ सी-ब्लू सेक्विन साड़ी में इसे ब्राइट और ब्यूटीफुल रखा, वहीं अनंत अंबानी ने मैचिंग पजामे के साथ ब्लैक बंदगला चुना। (स्रोतः वरिंदर चावला) अपनी असाधारण शैली को ध्यान में रखते हुए, सोनम कपूर ने सुनहरे रंग की स्ट्रैपलेस टॉप और सुनहरे दुपट्टे के साथ एक बहुरंगी बनारसी स्कर्ट पहनी थी। आनंद आहूजा ने सफेद कुर्ता-पायजामा के ऊपर पहने हुए भूरे रंग के खाकी ब्लेज़र में इसे सरल रखा। (स्रोतः वरिंदर चावला) विक्की कौशल हमेशा की तरह काले कुर्ता-पायजामा और काली जूती के साथ पहने हुए वेलवेट टेक्सचर्ड ब्लैक बंदगले में डैपर दिखे। (स्रोतः वरिंदर चावला) करीना कपूर खान और सैफ अली खान काले पहनावे के पूरक थे। (स्रोतः वरिंदर चावला) लाल रंग के बनारसी वन शोल्डर गाउन में सबा आजाद बेहद खूबसूरत लग रही थीं. ऋतिक रोशन उनके साथ ऑल-ब्लैक पहनावा में थे। (स्रोतः वरिंदर चावला) ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने स्टाइल के अनुरूप एक बार फिर एक भारी अलंकृत काले रंग का सूट पहना। पेस्टल-शेड कुर्ता सेट में आराध्या प्यारी लग रही थीं। (स्रोतः वरिंदर चावला) रेखा ने हमेशा की तरह अपनी ट्रेडमार्क बनारसी साड़ी से हमें प्रभावित किया। एक्सेसरीज की उनकी पसंद ने उनके लुक की पारंपरिक अपील को बढ़ा दिया। (स्रोतः वरिंदर चावला) लॉन्च इवेंट में मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर की जोड़ी बेहद खूबसूरत लग रही थी। (स्रोतः वरिंदर चावला) जहां नव्या नवेली नंदा ने गोल्डन गाउन पहना था, वहीं श्वेता बच्चन ने रेड एम्बेलिश्ड लहंगा सेट चुना। (स्रोतः वरिंदर चावला) सारा अली खान को मैचिंग क्रॉप टॉप के ऊपर पहने हुए एक जटिल कढ़ाई वाली काली लंबी जैकेट पहने देखा गया था। (स्रोतः वरिंदर चावला) माधुरी दीक्षित ढीले पैंट, क्रॉप टॉप और जैकेट के साथ झिलमिलाते पहनावे में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। (स्रोतः वरिंदर चावला) शॉर्ट ट्रेन के साथ स्ट्रैपलेस ब्लैक गाउन में करिश्मा कपूर का जलवा देखते ही बन रहा था। (स्रोतः वरिंदर चावला) शरवरी वाघ ने एक नाटकीय सफेद सेक्विन ब्लाउज के साथ एक सफेद झालरदार साड़ी पहनी थी। (स्रोतः वरिंदर चावला) लॉन्च इवेंट में खुशी कपूर सीक्विन कॉपर गाउन पहने नजर आईं। (स्रोतः वरिंदर चावला)
नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर के लॉन्च इवेंट का दूसरा दिन भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों हस्तियों के साथ एक असाधारण घटना थी, जो 'इंडिया इन फैशन' थीम को ध्यान में रखते हुए शानदार परिधानों में इस अवसर की शोभा बढ़ा रही थी। जहां प्रियंका चोपड़ा बहुरंगी बनारसी प्रिंट बॉटम वाले ऑफ-शोल्डर गाउन में स्टनिंग लग रही थीं, वहीं निक जोनास ने ब्लैक टक्सीडो पहना था। आलिया भट्ट इस स्ट्रैपी गोल्डन गाउन में देखने लायक थीं, जो सेक्विन क्रिस्टल से भरा हुआ था और एक दुपट्टे के साथ पेयर किया गया था, जिसमें एक लंबी ट्रेन थी। टॉम हॉलैंड काले रंग के टक्सीडो में काले रंग की बो टाई और काले जूतों के साथ सौम्य लग रहे थे। जहां राधिका मर्चेंट ने सिल्वर ब्लाउज के साथ सी-ब्लू सेक्विन साड़ी में इसे ब्राइट और ब्यूटीफुल रखा, वहीं अनंत अंबानी ने मैचिंग पजामे के साथ ब्लैक बंदगला चुना। अपनी असाधारण शैली को ध्यान में रखते हुए, सोनम कपूर ने सुनहरे रंग की स्ट्रैपलेस टॉप और सुनहरे दुपट्टे के साथ एक बहुरंगी बनारसी स्कर्ट पहनी थी। आनंद आहूजा ने सफेद कुर्ता-पायजामा के ऊपर पहने हुए भूरे रंग के खाकी ब्लेज़र में इसे सरल रखा। विक्की कौशल हमेशा की तरह काले कुर्ता-पायजामा और काली जूती के साथ पहने हुए वेलवेट टेक्सचर्ड ब्लैक बंदगले में डैपर दिखे। करीना कपूर खान और सैफ अली खान काले पहनावे के पूरक थे। लाल रंग के बनारसी वन शोल्डर गाउन में सबा आजाद बेहद खूबसूरत लग रही थीं. ऋतिक रोशन उनके साथ ऑल-ब्लैक पहनावा में थे। ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने स्टाइल के अनुरूप एक बार फिर एक भारी अलंकृत काले रंग का सूट पहना। पेस्टल-शेड कुर्ता सेट में आराध्या प्यारी लग रही थीं। रेखा ने हमेशा की तरह अपनी ट्रेडमार्क बनारसी साड़ी से हमें प्रभावित किया। एक्सेसरीज की उनकी पसंद ने उनके लुक की पारंपरिक अपील को बढ़ा दिया। लॉन्च इवेंट में मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर की जोड़ी बेहद खूबसूरत लग रही थी। जहां नव्या नवेली नंदा ने गोल्डन गाउन पहना था, वहीं श्वेता बच्चन ने रेड एम्बेलिश्ड लहंगा सेट चुना। सारा अली खान को मैचिंग क्रॉप टॉप के ऊपर पहने हुए एक जटिल कढ़ाई वाली काली लंबी जैकेट पहने देखा गया था। माधुरी दीक्षित ढीले पैंट, क्रॉप टॉप और जैकेट के साथ झिलमिलाते पहनावे में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। शॉर्ट ट्रेन के साथ स्ट्रैपलेस ब्लैक गाउन में करिश्मा कपूर का जलवा देखते ही बन रहा था। शरवरी वाघ ने एक नाटकीय सफेद सेक्विन ब्लाउज के साथ एक सफेद झालरदार साड़ी पहनी थी। लॉन्च इवेंट में खुशी कपूर सीक्विन कॉपर गाउन पहने नजर आईं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा विधायक ननकीराम ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने सीएम के साथ कानून व्यवस्था को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही कंवर ने सीएम से एडीजी मुकेश गुप्ता के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में ब्यूरोक्रेट्स सियासी दंगल में फंसते नजर आ रहे हैं। अफसरों के तबादले हो रहे हैं और उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटाकर अन्य अधिकारियों को वहां बैठाया जा रहा है। सरकार अपने अनुरूप अधिकारियों की पदस्थापना महत्वपूर्ण पदों पर कर रही है। इसी बीच पक्ष और विपक्ष के बीच इन्हीं अधिकारियों को लेकर सियासी खींचातानी भी चल रही है। कोरबा की रामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक ननकी राम कंवर राज्य के पूर्व गृहमंत्री हैं। वे अपने कार्यकाल के दौरान से ही पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट रहे हैं। ननकी ने सीएम भूपेश के साथ मुलाकात के दौरान मिक्की मेहता प्रकरण का हवाला देते हुए इसमें एडीजी मुकेश गुप्ता की भूमिका को संदेह के घेरे में लिया है। सीएम को एक ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने इस मामले में एडीजी गुप्ता की भूमिका पर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। ननकी ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि जिस समय मुकेश गुप्ता रायपुर में एसपी के रूप में पदस्थ थे उस दौरान डॉ मिक्की मेहता नामके शख्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इस मामले में कोई भी अपराध दर्ज नहीं हुआ।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा विधायक ननकीराम ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने सीएम के साथ कानून व्यवस्था को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही कंवर ने सीएम से एडीजी मुकेश गुप्ता के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में ब्यूरोक्रेट्स सियासी दंगल में फंसते नजर आ रहे हैं। अफसरों के तबादले हो रहे हैं और उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटाकर अन्य अधिकारियों को वहां बैठाया जा रहा है। सरकार अपने अनुरूप अधिकारियों की पदस्थापना महत्वपूर्ण पदों पर कर रही है। इसी बीच पक्ष और विपक्ष के बीच इन्हीं अधिकारियों को लेकर सियासी खींचातानी भी चल रही है। कोरबा की रामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक ननकी राम कंवर राज्य के पूर्व गृहमंत्री हैं। वे अपने कार्यकाल के दौरान से ही पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट रहे हैं। ननकी ने सीएम भूपेश के साथ मुलाकात के दौरान मिक्की मेहता प्रकरण का हवाला देते हुए इसमें एडीजी मुकेश गुप्ता की भूमिका को संदेह के घेरे में लिया है। सीएम को एक ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने इस मामले में एडीजी गुप्ता की भूमिका पर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। ननकी ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि जिस समय मुकेश गुप्ता रायपुर में एसपी के रूप में पदस्थ थे उस दौरान डॉ मिक्की मेहता नामके शख्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इस मामले में कोई भी अपराध दर्ज नहीं हुआ।
दिल्ली के कंझावला में हुए भीषण कार एक्सीडेंट को लोग भूल नहीं पाए हैं। इससे पहले ही, दिल्ली में एक और घटना सामने आई है। जहाँ, हॉर्न बजाने के कारण शुरू हुए विवाद के बाद आरोपित कार ड्राइवर ने युवक को कार के बोनट के सहारे आधा किलोमीटर तक घसीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजौरी गार्डन क्षेत्र में हॉर्न बजाने को लेकर दो लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। झगड़े के बीच बात बिगड़ गई। गुस्साए कार ड्राइवर ने वहाँ खड़े युवक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद युवक कार के बोनट में फँस गया। हालाँकि, इसके बाद कार सवार ने गाड़ी रोकने की बजाय युवक को आधा किलोमीटर तक घसीटा है। इस घटना का वीडियो (सीसीटीवी फुटेज) सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पीड़ित युवक कार के बोनट में है। वहीं, कार ड्राइवर तेजी से कार चलाता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 323, 341 और 308 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपित से पूछताछ चल रही है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में यानि 1 जनवरी, 2023 की रात को दिल्ली के कंझावला इलाके में भयानक कार एक्सीडेंट हुआ था। इसमें, अंजलि नामक लड़की की मौत हो गई थी। मृतक लड़की पार्टी के लिए होटल गई थी। जब वह होटल से अपने घर लौट रही थी तब एक कार ने उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद, वह कार में ही फँस गई थी। इसके बाद, आरोपित उसे कार से निकालने के बजाए 12 किलोमीटर तक लगातार घसीटते रहे। इससे उसके पूरे कपड़े फट गई थे। यही नहीं, लगातार घसीटे जाने के कारण षक पैर तक कट गए थे। बाद में, उसकी बॉडी नग्नावस्था में बरामद हुई थी। अजंलि अपने घर में कमाने वाली इकलौती थी। इस मामले में, पुलिस ने दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन, मनोज मित्तल, आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपित बनाया है। इनमें से एक आरोपित अंकुश खन्ना को जमानत मिल गई है।
दिल्ली के कंझावला में हुए भीषण कार एक्सीडेंट को लोग भूल नहीं पाए हैं। इससे पहले ही, दिल्ली में एक और घटना सामने आई है। जहाँ, हॉर्न बजाने के कारण शुरू हुए विवाद के बाद आरोपित कार ड्राइवर ने युवक को कार के बोनट के सहारे आधा किलोमीटर तक घसीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजौरी गार्डन क्षेत्र में हॉर्न बजाने को लेकर दो लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। झगड़े के बीच बात बिगड़ गई। गुस्साए कार ड्राइवर ने वहाँ खड़े युवक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद युवक कार के बोनट में फँस गया। हालाँकि, इसके बाद कार सवार ने गाड़ी रोकने की बजाय युवक को आधा किलोमीटर तक घसीटा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पीड़ित युवक कार के बोनट में है। वहीं, कार ड्राइवर तेजी से कार चलाता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा दो सौ उन्यासी, तीन सौ तेईस, तीन सौ इकतालीस और तीन सौ आठ के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपित से पूछताछ चल रही है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में यानि एक जनवरी, दो हज़ार तेईस की रात को दिल्ली के कंझावला इलाके में भयानक कार एक्सीडेंट हुआ था। इसमें, अंजलि नामक लड़की की मौत हो गई थी। मृतक लड़की पार्टी के लिए होटल गई थी। जब वह होटल से अपने घर लौट रही थी तब एक कार ने उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद, वह कार में ही फँस गई थी। इसके बाद, आरोपित उसे कार से निकालने के बजाए बारह किलोग्राममीटर तक लगातार घसीटते रहे। इससे उसके पूरे कपड़े फट गई थे। यही नहीं, लगातार घसीटे जाने के कारण षक पैर तक कट गए थे। बाद में, उसकी बॉडी नग्नावस्था में बरामद हुई थी। अजंलि अपने घर में कमाने वाली इकलौती थी। इस मामले में, पुलिस ने दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन, मनोज मित्तल, आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपित बनाया है। इनमें से एक आरोपित अंकुश खन्ना को जमानत मिल गई है।
ठाणे. औरंगाबाद नामांतरण (Aurangabad conversion) को लेकर फिर एक बार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट (Balasaheb Thorat) ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, "औरंगाबाद नामांतरण पर चर्चा करने का कोई कारण नहीं है। उसके लिए हमने हमारी भूमिका स्पष्ट है। साथ ही, संभाजी महाराज (Sambhaji Maharaj) के नाम से हमारा विरोध नहीं है, महाराज तो हमारे आराध्य देव हैं। लेकिन, कुछ विषय ऐसे होते हैं जिससे माहौल बिगड़ सकता है। " आज ठाणे स्थित कांग्रेस कार्यालय (Thane Congress Office) में भेंट के दौरान थोराट ने ऐसा कहा।
ठाणे. औरंगाबाद नामांतरण को लेकर फिर एक बार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, "औरंगाबाद नामांतरण पर चर्चा करने का कोई कारण नहीं है। उसके लिए हमने हमारी भूमिका स्पष्ट है। साथ ही, संभाजी महाराज के नाम से हमारा विरोध नहीं है, महाराज तो हमारे आराध्य देव हैं। लेकिन, कुछ विषय ऐसे होते हैं जिससे माहौल बिगड़ सकता है। " आज ठाणे स्थित कांग्रेस कार्यालय में भेंट के दौरान थोराट ने ऐसा कहा।
लखनपुर से लेकर बनिहाल और पुंछ-राजौरी से लेकर डोडा-किश्तवाड़ तक राजमार्गों लिंक मार्गों और शहरों की सड़कों के मुआयने के बाद यह तस्वीर सामने आई कि दूरदराज के क्षेत्रों को छोड़ें राजमार्गों की स्थिति भी सुरक्षा मानकों पर बेहतर नहीं है। जम्मू, जागरण टीम : जम्मू कश्मीर में विकास की रफ्तार को गति मिलने के साथ सड़कों पर वाहनों की रफ्तार भी बढ़ी है! तेजी से चले रहे निर्माण कार्यों में नियमों की अवहेलना अकसर वाहन चालकों की जिंदगी पर भारी पड़ती है। उस पर रफ्तार से हादसों की संख्या भी लगातार खतरनाक स्तर पर बनी है। तीखे मोड़, क्रैश बैरियर और संकेतकों की कमी भी हादसों का मुख्य कारण बनकर उभर रही है। दैनिक जागरण टीम ने सुरक्षित यातायात की महामुहिम के तहत सड़क विशेषज्ञों के साथ प्रदेश में 1300 किलोमीटर से अधिक सड़कों का सुरक्षा आडिट किया। लखनपुर से लेकर बनिहाल और पुंछ-राजौरी से लेकर डोडा-किश्तवाड़ तक राजमार्गों, लिंक मार्गों और शहरों की सड़कों के मुआयने के बाद यह तस्वीर सामने आई कि दूरदराज के क्षेत्रों को छोड़ें राजमार्गों की स्थिति भी सुरक्षा मानकों पर बेहतर नहीं है। निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा नियमों की सीधी अनदेखी की गई है और प्रशासनिक अफसरों और नियमों के अनुपालन करने वाली एजेंसियों का इस पर ध्यान नहीं है। इसके अलावा तीखे मोड़ और राजमार्गों पर क्रैश बैरियर की कमी के अलावा मानवीय भूल अकसर हादसों का कारण बनती है। संकेतकों के इस्तेमाल से इन हादसों में कमी लाई जा सकती है। कुछ स्थानों पर ड्राइवरों की लापरवाही और रफ्तार भी हादसों का कारण बनती रही है। टीम ने इन मार्गों पर 163 हादसों के प्वाइंट खोज निकाले। इसके अलावा राजमार्गों और अन्य प्रमुख मार्गों पर 50 से अधिक अवैध कट मुख्य मार्गों पर सुरक्षित यातायात की राह में बड़ी चुनौती हैं। शहरों में ऐसे अवैध कटों की संख्या और भी कहीं ज्यादा है। बहुत से चौराहों पर ट्रैफिक लाइट की आवश्यकता महसूस की जा रही है और इन चौराहों पर अकसर लोगों को हादसों में जान भी गंवानी पड़ रही है। जम्मू शहर में स्मार्ट ट्रैफिक लाइट प्रबंधन से निश्चित तौर पर कुछ बिंदुओं पर यातायात प्रबंधन बेहतर हुआ है पर अभी भी ऐसे बहुत से खतरनाक मोड़ और चौराहे हैं, जहां प्रबंधन के लिए ट्रैफिक कांस्टेबल भी नहीं दिखता। पठानकोट-जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर लखनपुर से बनिहाल तक कदम-कदम पर हादसों के प्वाइंट हैं। लखनपुर से जम्मू तक राजमार्ग पर कई स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहे हैं और इस दौरान अने कई कट और टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर पर्याप्त संकेतकों के अभाव या गलत संकेतक से हादसे अब सामान्य बात हो गई है। ऊधमपुर में नाशरी टनल को पार करते ही सड़क का सफर खतरों का सफर बन जाता है। दरकते पहाड़ और खस्ताहाल सड़क के कारण नित हादसे होते हैं। यह कह सकते हैं कि नाशरी टनल से आगे लगभग 75 किलोमीटर के सफर में औसतन हर तीन किलोमीटर के दायरे में एक हादसे का प्रमुख प्वाइंट है। - हाईवे पर निर्माण के प्वाइंट की जानकारी देते बोर्ड लगे और टेढे़-मेढ़े कट पर रिफ्लेक्टर लगाएं जाएं ताकि वाहन चालक हादसे के प्वाइंट से पूर्व सतर्क हो सकें। निर्माण के दौरान परिवहन संचालन की बेहतर व व्यवस्थित करने की जिम्मेवारी निर्माण एजेंसी की तय की जाए। - संकेतकों का अभाव हादसों का बड़ा कारण है। - तीखे व तंग मोड़ को चौड़ा किया जाए। - हाईवे पर सर्विस लेन हो ताकि गांवों और अंदरूनी क्षेत्रों से आ रहे लोग सीधे हाईवे पर न आएं। - सड़कों के किनारे खड़े वाहनों को हटाया जाए। - क्रैश बैरियर के साथ सड़क किनारे मार्किंग व रिफ्लेक्टर लगाए जाएं। - ड्राइवरों का नियमित प्रशिक्षण हो और उनके स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था नियमित बनाई जाए। - स्कूलों में दोपहिया वाहनों से आने वाले किशोरों के परिवारों को चेतावनी दी जाए। - 1300 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुरक्षा आडिट दैनिक जागरण टीम के साथ सुरक्षा विशेषज्ञों ने किया। - 3 किलोमीटर पर औसतन एक बड़ा हादसे का प्वाइंट है नाशरी टनल से बनिहाल के बीच।
लखनपुर से लेकर बनिहाल और पुंछ-राजौरी से लेकर डोडा-किश्तवाड़ तक राजमार्गों लिंक मार्गों और शहरों की सड़कों के मुआयने के बाद यह तस्वीर सामने आई कि दूरदराज के क्षेत्रों को छोड़ें राजमार्गों की स्थिति भी सुरक्षा मानकों पर बेहतर नहीं है। जम्मू, जागरण टीम : जम्मू कश्मीर में विकास की रफ्तार को गति मिलने के साथ सड़कों पर वाहनों की रफ्तार भी बढ़ी है! तेजी से चले रहे निर्माण कार्यों में नियमों की अवहेलना अकसर वाहन चालकों की जिंदगी पर भारी पड़ती है। उस पर रफ्तार से हादसों की संख्या भी लगातार खतरनाक स्तर पर बनी है। तीखे मोड़, क्रैश बैरियर और संकेतकों की कमी भी हादसों का मुख्य कारण बनकर उभर रही है। दैनिक जागरण टीम ने सुरक्षित यातायात की महामुहिम के तहत सड़क विशेषज्ञों के साथ प्रदेश में एक हज़ार तीन सौ किलोग्राममीटर से अधिक सड़कों का सुरक्षा आडिट किया। लखनपुर से लेकर बनिहाल और पुंछ-राजौरी से लेकर डोडा-किश्तवाड़ तक राजमार्गों, लिंक मार्गों और शहरों की सड़कों के मुआयने के बाद यह तस्वीर सामने आई कि दूरदराज के क्षेत्रों को छोड़ें राजमार्गों की स्थिति भी सुरक्षा मानकों पर बेहतर नहीं है। निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा नियमों की सीधी अनदेखी की गई है और प्रशासनिक अफसरों और नियमों के अनुपालन करने वाली एजेंसियों का इस पर ध्यान नहीं है। इसके अलावा तीखे मोड़ और राजमार्गों पर क्रैश बैरियर की कमी के अलावा मानवीय भूल अकसर हादसों का कारण बनती है। संकेतकों के इस्तेमाल से इन हादसों में कमी लाई जा सकती है। कुछ स्थानों पर ड्राइवरों की लापरवाही और रफ्तार भी हादसों का कारण बनती रही है। टीम ने इन मार्गों पर एक सौ तिरेसठ हादसों के प्वाइंट खोज निकाले। इसके अलावा राजमार्गों और अन्य प्रमुख मार्गों पर पचास से अधिक अवैध कट मुख्य मार्गों पर सुरक्षित यातायात की राह में बड़ी चुनौती हैं। शहरों में ऐसे अवैध कटों की संख्या और भी कहीं ज्यादा है। बहुत से चौराहों पर ट्रैफिक लाइट की आवश्यकता महसूस की जा रही है और इन चौराहों पर अकसर लोगों को हादसों में जान भी गंवानी पड़ रही है। जम्मू शहर में स्मार्ट ट्रैफिक लाइट प्रबंधन से निश्चित तौर पर कुछ बिंदुओं पर यातायात प्रबंधन बेहतर हुआ है पर अभी भी ऐसे बहुत से खतरनाक मोड़ और चौराहे हैं, जहां प्रबंधन के लिए ट्रैफिक कांस्टेबल भी नहीं दिखता। पठानकोट-जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर लखनपुर से बनिहाल तक कदम-कदम पर हादसों के प्वाइंट हैं। लखनपुर से जम्मू तक राजमार्ग पर कई स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहे हैं और इस दौरान अने कई कट और टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर पर्याप्त संकेतकों के अभाव या गलत संकेतक से हादसे अब सामान्य बात हो गई है। ऊधमपुर में नाशरी टनल को पार करते ही सड़क का सफर खतरों का सफर बन जाता है। दरकते पहाड़ और खस्ताहाल सड़क के कारण नित हादसे होते हैं। यह कह सकते हैं कि नाशरी टनल से आगे लगभग पचहत्तर किलोग्राममीटर के सफर में औसतन हर तीन किलोमीटर के दायरे में एक हादसे का प्रमुख प्वाइंट है। - हाईवे पर निर्माण के प्वाइंट की जानकारी देते बोर्ड लगे और टेढे़-मेढ़े कट पर रिफ्लेक्टर लगाएं जाएं ताकि वाहन चालक हादसे के प्वाइंट से पूर्व सतर्क हो सकें। निर्माण के दौरान परिवहन संचालन की बेहतर व व्यवस्थित करने की जिम्मेवारी निर्माण एजेंसी की तय की जाए। - संकेतकों का अभाव हादसों का बड़ा कारण है। - तीखे व तंग मोड़ को चौड़ा किया जाए। - हाईवे पर सर्विस लेन हो ताकि गांवों और अंदरूनी क्षेत्रों से आ रहे लोग सीधे हाईवे पर न आएं। - सड़कों के किनारे खड़े वाहनों को हटाया जाए। - क्रैश बैरियर के साथ सड़क किनारे मार्किंग व रिफ्लेक्टर लगाए जाएं। - ड्राइवरों का नियमित प्रशिक्षण हो और उनके स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था नियमित बनाई जाए। - स्कूलों में दोपहिया वाहनों से आने वाले किशोरों के परिवारों को चेतावनी दी जाए। - एक हज़ार तीन सौ किलोग्राममीटर लंबी सड़कों का सुरक्षा आडिट दैनिक जागरण टीम के साथ सुरक्षा विशेषज्ञों ने किया। - तीन किलोग्राममीटर पर औसतन एक बड़ा हादसे का प्वाइंट है नाशरी टनल से बनिहाल के बीच।
नई दिल्ली. 55 साल पुराना भूमि विवाद निपटाते हुए सुप्रीम काेर्ट ने एक अहम व्यवस्था दी है। काेर्ट ने कहा कि पिता से बेटों को मिली प्राॅपर्टी, उनकी निजी प्राॅपर्टी नहीं, बल्कि ज्वाइंट फैमिली प्रॉपर्टी होगी। घर के बड़े सदस्यों द्वारा अपनी संतान की सहमति के बिना इस प्राॅपर्टी काे लेकर किया गया एग्रीमेंट मान्य नहीं होगा। जस्टिस एएम खानविलकर और अजय रस्तोगी की बेंच ने डोडा मुनियप्पा बनाम मुनिस्वामी व अन्य केस में दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। काेर्ट ने कहा कि ऐसी प्रॉपर्टी को लेकर किया जाने वाला काेई भी एग्रीमेंट परिवार के सभी सदस्यों की सहमति से ही किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि बेंगलुरू के चिकन्ना नामक व्यक्ति की मौत के बाद उसकी प्राॅपर्टी तीन बेटों पिलप्पा, वेंकटरमनप्पा और मुनिप्पा को मिली। तीनों ने 1950 में इसे बेच दिया। साथ ही शर्त रखी कि खरीदार अगर भविष्य में यह प्राॅपर्टी बेचेगा ताे उन तीनों को ही बेचनी हाेगी। खरीदार ने इस शर्त का उल्लंघन करते हुए 1962 में इसे डोडामुनियप्पा को बेच दिया। इसके खिलाफ चिकन्ना के पौत्र मुनिस्वामी व अन्य 5 पौत्र कोर्ट पहुंचे। निचली अदालत ने इसे ज्वाइंट फैमिली प्राॅपर्टी नहीं मानते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने ज्वाइंट फैमिली प्रॉपर्टी मानते हुए मुनिस्वामी के पक्ष में फैसला दिया। विराेध में डोडामुनियप्पा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले अब अंग्रेजी के अलावा हिंदी सहित छह अन्य भाषाओं में लोगों को उपलब्ध कराने का फैसला किया है। जुलाई के अंत तक सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर हिंदी, असमी, मराठी, कन्नड़, तेलुगु और उड़िया में अनुवादित फैसले उपलब्ध होने शुरू हाे सकते हैं। अभी कोर्ट सिर्फ अंग्रेजी में ही फैसले जारी करता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस सुविधा के लिए एक विशेष साॅफ्टवेयर के इस्तेमाल काे मंजूरी दे दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली. पचपन साल पुराना भूमि विवाद निपटाते हुए सुप्रीम काेर्ट ने एक अहम व्यवस्था दी है। काेर्ट ने कहा कि पिता से बेटों को मिली प्राॅपर्टी, उनकी निजी प्राॅपर्टी नहीं, बल्कि ज्वाइंट फैमिली प्रॉपर्टी होगी। घर के बड़े सदस्यों द्वारा अपनी संतान की सहमति के बिना इस प्राॅपर्टी काे लेकर किया गया एग्रीमेंट मान्य नहीं होगा। जस्टिस एएम खानविलकर और अजय रस्तोगी की बेंच ने डोडा मुनियप्पा बनाम मुनिस्वामी व अन्य केस में दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। काेर्ट ने कहा कि ऐसी प्रॉपर्टी को लेकर किया जाने वाला काेई भी एग्रीमेंट परिवार के सभी सदस्यों की सहमति से ही किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि बेंगलुरू के चिकन्ना नामक व्यक्ति की मौत के बाद उसकी प्राॅपर्टी तीन बेटों पिलप्पा, वेंकटरमनप्पा और मुनिप्पा को मिली। तीनों ने एक हज़ार नौ सौ पचास में इसे बेच दिया। साथ ही शर्त रखी कि खरीदार अगर भविष्य में यह प्राॅपर्टी बेचेगा ताे उन तीनों को ही बेचनी हाेगी। खरीदार ने इस शर्त का उल्लंघन करते हुए एक हज़ार नौ सौ बासठ में इसे डोडामुनियप्पा को बेच दिया। इसके खिलाफ चिकन्ना के पौत्र मुनिस्वामी व अन्य पाँच पौत्र कोर्ट पहुंचे। निचली अदालत ने इसे ज्वाइंट फैमिली प्राॅपर्टी नहीं मानते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने ज्वाइंट फैमिली प्रॉपर्टी मानते हुए मुनिस्वामी के पक्ष में फैसला दिया। विराेध में डोडामुनियप्पा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले अब अंग्रेजी के अलावा हिंदी सहित छह अन्य भाषाओं में लोगों को उपलब्ध कराने का फैसला किया है। जुलाई के अंत तक सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर हिंदी, असमी, मराठी, कन्नड़, तेलुगु और उड़िया में अनुवादित फैसले उपलब्ध होने शुरू हाे सकते हैं। अभी कोर्ट सिर्फ अंग्रेजी में ही फैसले जारी करता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस सुविधा के लिए एक विशेष साॅफ्टवेयर के इस्तेमाल काे मंजूरी दे दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
एक और दो F-35I Adir सेनानी नेवातिम एयरबेस पहुंचे, जहां वे 140 गोल्डन ईगल स्क्वाड्रन का हिस्सा होंगे। जल्द ही, बेस पर 116 स्क्वाड्रन का गठन किया जाएगा, जो इन लड़ाकू विमानों से सुसज्जित इजरायली वायु सेना की दूसरी इकाई बन जाएगा। तिथि करने के लिए, 2010 वर्ष में अनुबंधित अनुबंध के तहत, लॉकहीड मार्टिन ने इजरायली वायु सेना 18 F-35I अदिर सेनानियों को वितरित किया है। इस वर्ष के अंत तक, इज़राइल ने दो और सेनानियों को प्राप्त करने की योजना बनाई है, जिससे उनकी संख्या 20 पर आ गई है। इज़राइली वायु सेना द्वारा आदेशित F-35I Adir सेनानियों की कुल संख्या 50 इकाइयाँ हैं, जिनकी डिलीवरी 2024 वर्ष के लिए निर्धारित है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की पहली जोड़ी ने एक्सएएनयूएमएक्स पर नेवातिम एयरबेस पर एक्सएनयूएमएक्स पर उतरी। एक साल बाद, दिसंबर के आरंभ में 12 में, जब इजरायली वायु सेना को 2016 विमान प्राप्त हुए, कमांड ने लड़ाकू उपयोग के लिए F-2017I अदिर बेड़े की तत्परता की घोषणा की। वर्तमान में, सभी प्राप्त लड़ाके नेवातिम एयरबेस में तैनात एक्सएनयूएमएक्स वें गोल्डन ईगल स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं, दूसरा एफ-एक्सएनयूएमएक्सआई स्क्वाड्रन वहां स्थित होगा। आधार का एक अच्छा स्थान हैः पांचवीं पीढ़ी के इजरायली लड़ाके जॉर्डन, लेबनान और सीरिया के हवाई क्षेत्र में, मिस्र और इराक के अधिकांश क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब और तुर्की के हिस्सों में ईंधन भरने के बिना भी कार्य कर सकते हैं। पहले यह बताया गया था कि इजरायली वायु सेना सेवा में अप्रचलित विमानों को बदलने के लिए एक और एक्सएनयूएमएक्स एफ-एक्सएनयूएमएक्सआई लड़ाकू या उन्नत एफ-एक्सएनयूएमएक्स की खरीद पर विचार कर रही है। सबसे अधिक संभावना है, निर्णय इस वर्ष के अंत से पहले किया जाएगा।
एक और दो F-पैंतीसI Adir सेनानी नेवातिम एयरबेस पहुंचे, जहां वे एक सौ चालीस गोल्डन ईगल स्क्वाड्रन का हिस्सा होंगे। जल्द ही, बेस पर एक सौ सोलह स्क्वाड्रन का गठन किया जाएगा, जो इन लड़ाकू विमानों से सुसज्जित इजरायली वायु सेना की दूसरी इकाई बन जाएगा। तिथि करने के लिए, दो हज़ार दस वर्ष में अनुबंधित अनुबंध के तहत, लॉकहीड मार्टिन ने इजरायली वायु सेना अट्ठारह F-पैंतीसI अदिर सेनानियों को वितरित किया है। इस वर्ष के अंत तक, इज़राइल ने दो और सेनानियों को प्राप्त करने की योजना बनाई है, जिससे उनकी संख्या बीस पर आ गई है। इज़राइली वायु सेना द्वारा आदेशित F-पैंतीसI Adir सेनानियों की कुल संख्या पचास इकाइयाँ हैं, जिनकी डिलीवरी दो हज़ार चौबीस वर्ष के लिए निर्धारित है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की पहली जोड़ी ने एक्सएएनयूएमएक्स पर नेवातिम एयरबेस पर एक्सएनयूएमएक्स पर उतरी। एक साल बाद, दिसंबर के आरंभ में बारह में, जब इजरायली वायु सेना को दो हज़ार सोलह विमान प्राप्त हुए, कमांड ने लड़ाकू उपयोग के लिए F-दो हज़ार सत्रहI अदिर बेड़े की तत्परता की घोषणा की। वर्तमान में, सभी प्राप्त लड़ाके नेवातिम एयरबेस में तैनात एक्सएनयूएमएक्स वें गोल्डन ईगल स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं, दूसरा एफ-एक्सएनयूएमएक्सआई स्क्वाड्रन वहां स्थित होगा। आधार का एक अच्छा स्थान हैः पांचवीं पीढ़ी के इजरायली लड़ाके जॉर्डन, लेबनान और सीरिया के हवाई क्षेत्र में, मिस्र और इराक के अधिकांश क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब और तुर्की के हिस्सों में ईंधन भरने के बिना भी कार्य कर सकते हैं। पहले यह बताया गया था कि इजरायली वायु सेना सेवा में अप्रचलित विमानों को बदलने के लिए एक और एक्सएनयूएमएक्स एफ-एक्सएनयूएमएक्सआई लड़ाकू या उन्नत एफ-एक्सएनयूएमएक्स की खरीद पर विचार कर रही है। सबसे अधिक संभावना है, निर्णय इस वर्ष के अंत से पहले किया जाएगा।
"ठीक है वेटा, हरेक मुसलमान को कित्तूर की इज्जत को बचाने के लिए लडना ही चाहिए । कित्तूर जिन्दाबाद।" वाला ने जोर से पुकारा, "रानीजी जिन्दाबाद । " उसके साथियो ने भी उसके स्वर में स्वर मिलाया। उनके ऊचे स्वर से आकाश गूंज उठा। वैलहोगल के मारुति मंदिर के बाहर का मैदान रण-सज्जा से सज्जित वीरो से भर गया । किसान अपनी खेती छोडकर आ गए । मजदूरो ने अपने औजार छोडकर हाथ मे तलवार पकड ली । खेती का काम करनेवाली स्त्रिया कुदाली, फावडा, बेलचा, सव्वल, लाठी, आदि लेकर आईं । दीक्षितजी के आते ही लोगो ने "कित्तूर की जय ।" के नारे लगाकर उनका अभिवादन किया । नागरकट्टी, रायण्णा, चन्नवसप्पा, गजवीर, बालण्णा के दलो का निरीक्षण करके दीक्षितजी ने एक ऊंचे टीले पर खडे होकर कहा, "कित्तूर राज्य के वीर युवको और युवतियो, हमारी रानी की आज्ञा तुम लोगो ने सुन ली है । कित्तूर पर विपदा के बादल मडरा रहे है । जिन फिरगियो टीपू सुलतान और पेशवा राज्य को मिट्टी में मिला दिया, वे अब कित्तूर निगलने के लिए आ रहे है । फिरगियो ने देखा कि कित्तूर के राजा → है, इसलिए उसे हडपने का यही अनुकूल अवसर है । कम्पनीसरकार यह नही जानती कि हमारे २८६ गावो में रहनेवाले ७५,००० निवासी सारी दुनिया को हिला सकते है । उसको यह जतलाना हमारा कर्तव्य है । "थँकरे की फौज के यहा पढ़चने से पहले ही तुम लोगो को कित्तूर पहुचकर रानीसाहब के हाथ मजबूत करने चाहिए । युद्ध में जान भी चली जाय तो परवा नही । तुम्हारी समाधियों की मिटटी के कण-कण से वीर
"ठीक है वेटा, हरेक मुसलमान को कित्तूर की इज्जत को बचाने के लिए लडना ही चाहिए । कित्तूर जिन्दाबाद।" वाला ने जोर से पुकारा, "रानीजी जिन्दाबाद । " उसके साथियो ने भी उसके स्वर में स्वर मिलाया। उनके ऊचे स्वर से आकाश गूंज उठा। वैलहोगल के मारुति मंदिर के बाहर का मैदान रण-सज्जा से सज्जित वीरो से भर गया । किसान अपनी खेती छोडकर आ गए । मजदूरो ने अपने औजार छोडकर हाथ मे तलवार पकड ली । खेती का काम करनेवाली स्त्रिया कुदाली, फावडा, बेलचा, सव्वल, लाठी, आदि लेकर आईं । दीक्षितजी के आते ही लोगो ने "कित्तूर की जय ।" के नारे लगाकर उनका अभिवादन किया । नागरकट्टी, रायण्णा, चन्नवसप्पा, गजवीर, बालण्णा के दलो का निरीक्षण करके दीक्षितजी ने एक ऊंचे टीले पर खडे होकर कहा, "कित्तूर राज्य के वीर युवको और युवतियो, हमारी रानी की आज्ञा तुम लोगो ने सुन ली है । कित्तूर पर विपदा के बादल मडरा रहे है । जिन फिरगियो टीपू सुलतान और पेशवा राज्य को मिट्टी में मिला दिया, वे अब कित्तूर निगलने के लिए आ रहे है । फिरगियो ने देखा कि कित्तूर के राजा → है, इसलिए उसे हडपने का यही अनुकूल अवसर है । कम्पनीसरकार यह नही जानती कि हमारे दो सौ छियासी गावो में रहनेवाले पचहत्तर,शून्य निवासी सारी दुनिया को हिला सकते है । उसको यह जतलाना हमारा कर्तव्य है । "थँकरे की फौज के यहा पढ़चने से पहले ही तुम लोगो को कित्तूर पहुचकर रानीसाहब के हाथ मजबूत करने चाहिए । युद्ध में जान भी चली जाय तो परवा नही । तुम्हारी समाधियों की मिटटी के कण-कण से वीर
- 52 min ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' Don't Miss! ऋतिक रोशन ने अपना ज़ी सिने बेस्ट एक्टर अवार्ड 'सुपर 30' की पूरी टीम को किया समर्पित! अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए, ऋतिक रोशन को हाल ही में फिल्म सुपर 30 में उनके प्रशंसित प्रदर्शन के लिए एक अन्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से सम्मानित किया गया है। यह फिल्म गणितज्ञ और प्रोफेसर आनंद कुमार की कहानी पर आधारित है। आनंद कुमार के किरदार में ढलते हुए और उनकी भावनाओं का सटीक प्रदर्शन करते हुए, ऋतिक को फिल्म में उनके अभिनय के लिए बेहद सरहाया गया है। अपने स्वीकृति भाषण में, ऋतिक ने अपना पुरस्कार पूरी टीम को समर्पित किया है, जो फिल्म बनाने में शामिल थी। ब्रेकअप पर पहली बार खुलकर बोलीं स्वरा भास्कर- 'मैने किसी का दिल नहीं तोड़ा' एक वीडियो में, ऋतिक ने साझा किया "इस अद्भुत पुरस्कार के लिए ज़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मैं इस पुरस्कार को सुपर 30 की पूरी टीम, विशेष रूप से मेरे निर्देशक को समर्पित करना चाहूंगा। मुझे लगता है कि एक अभिनेता पेंटिंग में सिर्फ एक रंग की तरह होता है। इसलिए मैं यह अपने सभी सह-कलाकारों को, पूरी टीम को और अपने कर्मचारियों को समर्पित करना चाहता हूं, जो यह सुनिश्चित करने में अथक प्रयास करते हैं कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकूं। इसलिए एक बार फिर आपको धन्यवाद देता हूं और आपका शुक्रिया कि आपने मुझे उन लोगों को धन्यवाद देने का मौका दिया जो सही मायने में इस पुरस्कार के हक़दार है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।" ऋतिक हमेशा अपने उस खेल में सबसे आगे रहे हैं जब गुणात्मक के साथ-साथ मनोरंजक कंटेंट पेश करने की बात आती है। 'सुपर 30' में उनकी परफॉर्मेंस को उनके 2 दशक लंबे करियर में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है। अभिनेता अक्सर खुद को किरदार में सहजता से ढालने का कड़ा प्रयास करते है और यह पुरस्कार उनकी इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है! ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह अभिनेता नहीं कर सकता है और ऋतिक ने अपने करियर में कई बार यह साबित किया है। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
- बावन मिनट ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' Don't Miss! ऋतिक रोशन ने अपना ज़ी सिने बेस्ट एक्टर अवार्ड 'सुपर तीस' की पूरी टीम को किया समर्पित! अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए, ऋतिक रोशन को हाल ही में फिल्म सुपर तीस में उनके प्रशंसित प्रदर्शन के लिए एक अन्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से सम्मानित किया गया है। यह फिल्म गणितज्ञ और प्रोफेसर आनंद कुमार की कहानी पर आधारित है। आनंद कुमार के किरदार में ढलते हुए और उनकी भावनाओं का सटीक प्रदर्शन करते हुए, ऋतिक को फिल्म में उनके अभिनय के लिए बेहद सरहाया गया है। अपने स्वीकृति भाषण में, ऋतिक ने अपना पुरस्कार पूरी टीम को समर्पित किया है, जो फिल्म बनाने में शामिल थी। ब्रेकअप पर पहली बार खुलकर बोलीं स्वरा भास्कर- 'मैने किसी का दिल नहीं तोड़ा' एक वीडियो में, ऋतिक ने साझा किया "इस अद्भुत पुरस्कार के लिए ज़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मैं इस पुरस्कार को सुपर तीस की पूरी टीम, विशेष रूप से मेरे निर्देशक को समर्पित करना चाहूंगा। मुझे लगता है कि एक अभिनेता पेंटिंग में सिर्फ एक रंग की तरह होता है। इसलिए मैं यह अपने सभी सह-कलाकारों को, पूरी टीम को और अपने कर्मचारियों को समर्पित करना चाहता हूं, जो यह सुनिश्चित करने में अथक प्रयास करते हैं कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकूं। इसलिए एक बार फिर आपको धन्यवाद देता हूं और आपका शुक्रिया कि आपने मुझे उन लोगों को धन्यवाद देने का मौका दिया जो सही मायने में इस पुरस्कार के हक़दार है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।" ऋतिक हमेशा अपने उस खेल में सबसे आगे रहे हैं जब गुणात्मक के साथ-साथ मनोरंजक कंटेंट पेश करने की बात आती है। 'सुपर तीस' में उनकी परफॉर्मेंस को उनके दो दशक लंबे करियर में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है। अभिनेता अक्सर खुद को किरदार में सहजता से ढालने का कड़ा प्रयास करते है और यह पुरस्कार उनकी इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है! ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह अभिनेता नहीं कर सकता है और ऋतिक ने अपने करियर में कई बार यह साबित किया है। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
नई दिल्ली, भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि उनकी अपार सफलता का राज उनकी जिंदगी में ज्यादा करीबी लोगों का नहीं होना है क्योंकि इसे रूकावटें पैदा होती हैं। कोहली ने बीसीसीआई डाट टीवी को साक्षात्कार में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन से कहा, मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी जिंदगी में ऐसे ज्यादा लोग नहीं हैं जिनके मैं ज्यादा करीब हूं। मुझे लगता है कि इससे मदद मिलती है। अगर आपकी जिंदगी में काफी लोग होते हैं और आप काफी दोस्तों से बातें करते हों तो आपका ध्यान भंग होता है और आपका समय प्रबंधन भी अंसभव बन जाता है। कोहली को लगता है कि किसी को अपनी महत्वकांक्षाओं को सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि बतौर खिलाड़ी, हम पहले ही खुद को सीमित कर देते हैं, बिना यह जाने कि हम कितना कुछ कर सकते हैं। यह ऐसी चीज है जिस पर मैं कभी सीमा नहीं लगाता। यहां तक कि समय प्रबंधन में भी, जिस दिन मैं थोड़ा थक जाता हूं, उसी दिन चीजों को कम करना शुरू कर देता हूं। मैं कभी भी उन चीजों पर सीमायें नहीं लगाता जिन्हें मैं जिंदगी में करना चाहता हूं। कोहली ने कहा, आपको अच्छा संतुलन बनाना होता है और आगे बढ़ना होता है। अब तक यह सही चल रहा है। अब मैं कह सकता हूं कि अभी मैं संतुलन बनाये हूं। सचिन तेंदुलकर के साथ हमेशा होने वाली तुलना के बारे में कोहली ने स्पष्ट किया कि उनकी संख्याओं को हासिल करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा, मैं शायद इतने लंबे (24 वर्षों) समय तक नहीं खेलूं। 200 टेस्ट, 100 अंतरराष्ट्रीय शतक। ये शानदार संख्या है और इसे हासिल करना असंभव होगा। लेकिन हां, मैं अंतर पैदा करना चाहता हूं और हमेशा मानता हूं कि मुझे खेल को बेहतर तरीके से छोड़ना होगा।
नई दिल्ली, भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि उनकी अपार सफलता का राज उनकी जिंदगी में ज्यादा करीबी लोगों का नहीं होना है क्योंकि इसे रूकावटें पैदा होती हैं। कोहली ने बीसीसीआई डाट टीवी को साक्षात्कार में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन से कहा, मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी जिंदगी में ऐसे ज्यादा लोग नहीं हैं जिनके मैं ज्यादा करीब हूं। मुझे लगता है कि इससे मदद मिलती है। अगर आपकी जिंदगी में काफी लोग होते हैं और आप काफी दोस्तों से बातें करते हों तो आपका ध्यान भंग होता है और आपका समय प्रबंधन भी अंसभव बन जाता है। कोहली को लगता है कि किसी को अपनी महत्वकांक्षाओं को सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि बतौर खिलाड़ी, हम पहले ही खुद को सीमित कर देते हैं, बिना यह जाने कि हम कितना कुछ कर सकते हैं। यह ऐसी चीज है जिस पर मैं कभी सीमा नहीं लगाता। यहां तक कि समय प्रबंधन में भी, जिस दिन मैं थोड़ा थक जाता हूं, उसी दिन चीजों को कम करना शुरू कर देता हूं। मैं कभी भी उन चीजों पर सीमायें नहीं लगाता जिन्हें मैं जिंदगी में करना चाहता हूं। कोहली ने कहा, आपको अच्छा संतुलन बनाना होता है और आगे बढ़ना होता है। अब तक यह सही चल रहा है। अब मैं कह सकता हूं कि अभी मैं संतुलन बनाये हूं। सचिन तेंदुलकर के साथ हमेशा होने वाली तुलना के बारे में कोहली ने स्पष्ट किया कि उनकी संख्याओं को हासिल करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा, मैं शायद इतने लंबे समय तक नहीं खेलूं। दो सौ टेस्ट, एक सौ अंतरराष्ट्रीय शतक। ये शानदार संख्या है और इसे हासिल करना असंभव होगा। लेकिन हां, मैं अंतर पैदा करना चाहता हूं और हमेशा मानता हूं कि मुझे खेल को बेहतर तरीके से छोड़ना होगा।
इस आर्टिकल के सहायक लेखक (co-author) हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स (researchers) टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ (editorial staff) द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यहाँ पर 9 रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल १,९८६ बार देखा गया है। हज़ारों कार्स हर साल चोरी होती हैं, और अक्सर इस आशय से कि उनको वापस बेच दिया जाये। अगर आप बाज़ार में पुरानी यूज्ड कार ख़रीदने गए हैं, तब यह देखने के लिए कि कहीं कार चोरी की तो नहीं है, VIN चेक परफ़ॉर्म करिए। आपको अपनी इन्श्युरेंस कंपनी को भी कॉल करना चाहिए, और वेहिकल के टाइटल और सर्विस हिस्टरी को ध्यान से एनालाइज़ करना चाहिए। आप चोरी की कार ख़रीद रहे हैं, इस संबंध में अनेक रेड फ्लैग्स हैं जिनके बारे में आपको पता रहना चाहिए। 1वेहिकल आइडेंटिफ़िकेशन नंबर (VIN) का पता लगाइयेः प्रत्येक कार का VIN होता है, जिसे आपको चेक करना चाहिए ताकि आप सर्च परफ़ॉर्म कर सकें। VIN में 17 कैरेक्टर्स होते हैं तथा वह कार के सोशल सिक्यूरिटी नंबर की तरह होता है। विक्रेता आपको जो भी VIN नंबर दे, उसे यूं ही स्वीकार मत कर लीजिएगा। वेहिकल का अपने आप बारीक निरीक्षण कीजिये और VIN पता लगाइए। आपको VIN निम्न जगहों पर मिल सकता हैः 2चेक कर लीजिये कि VIN के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई हैः[१] X रिसर्च सोर्स पूरे VIN लेबल को वेहिकल पर सिक्यूरली लगा होना चाहिए और उसका कोई भी कोना उखड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। इसके अलावा देखिये कि उसमें कोई स्क्रैचेज़, फाड़ने के निशान, या निकालने के निशान न हों। - इसके अलावा VIN लेबल पर अपनी उँगलियाँ फिराइए। छूने पर उसे बिलकुल स्मूथ होना चाहिए।[२] X रिसर्च सोर्स अगर वह स्क्रैची होगा, तब इसका मतलब है कि उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। - VIN लेबल को किसी स्क्रू या प्लग से छुपा नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हो, तब इसका मतलब है कि मालिक शायद VIN को छुपाने की कोशिश कर रहा है। 3VINchek वेबसाइट को सर्च करिएः नेशनल इन्श्युरेंस क्राइम ब्यूरो (NICB) का एक VINCheck डेटाबेस है जो उन सभी वेहिकल्स का VIN एकत्रित करके रखता जिनकी चोरी होने की सूचना मिली होती है।[३] X रिसर्च सोर्स NICB वेबसाइट पर वीआईएन एंटर करिए। आप 24 घंटों के अंदर पाँच सर्चेज कर सकते हैं। 4फ्रॉड को रिपोर्ट करिएः अगर वेहिकल चोरी की है तब पुलिस को कॉल करिए, और वेहिकल के बारे में रिपोर्ट करिए। यूएसए में आपको 800-835-6422 पर NICB को खबर देनी चाहिए या TIP411 पर गुमनाम टिप देनी चाहिए। - आप अपनी स्थानीय पुलिस को भी कॉल कर सकते हैं। विक्रेता के बारे में जितनी हो सके, उतनी जानकारी शेयर करिएः नाम, पता, एपीयरेंस। - टाइटल सर्च कराने में खर्च होता है, इसलिए दाम और पेमेंट का स्वीकार्य तरीका जानने के लिए पहले ही DMV से बात कर लीजिये। - यह सुनिश्चित कर लीजिये कि विक्रेता की जानकारी टाइटल पर दी गई जानकारी से मैच करती हो।[६] X रिसर्च सोर्स अगर दोनों में कोई अंतर है, तब इसका मतलब कि कार शायद चुराई गई थी। 3अपने मेकेनिक से कहिए कि कार का इंस्पेक्शन करेः अगर VIN के साथ छेड़छाड़ की गई होगी तब आपका मेकेनिक शायद उसे स्पॉट कर सकेगा।[७] X रिसर्च सोर्स इसके अतिरिक्त, आपका मेकेनिक कार की ओवरऑल कंडीशन भी चेक कर सकेगा ताकि आप कोई कबाड़ न खरीद लें। कभी भी बिना अपने मेकेनिक को दिखाये यूज्ड कार न खरीदें। 4कार की सर्विस के रिकॉर्ड का रिव्यू करिएः कार के VIN का उल्लेख उसके उस सर्विस के रिकॉर्ड में भी होना चाहिए, जो कि शायद ओनर आपके साथ शेयर करेगा। यह सुनिश्चित कर लीजिये कि सर्विस के रिकॉर्ड में दिया गया VIN कार में दिखते हुये VIN से मैच करता हो। अगर नहीं करता है, तब शायद कार चोरी की होगी। - इसमें तो कोई संदेह नहीं कि यह छुपाने के लिए कि कार चुराई गई है, कार का ओनर सर्विस रिकॉर्ड में हेरा फेरी करेगा ही। इसलिए आप शायद सर्विस एजेंसी से खुद ही यह जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर सकते हैं। आपको VIN की ज़रूरत तो पड़ेगी ही।[८] X रिसर्च सोर्स जब आपको रिपोर्ट मिले तब सर्विस के रिकॉर्ड में दिये गए कार के विवरण का मिलान उस कार से करिए जो आप खरीदना चाह रहे हैं। 1अगर यूज़र सेल फोन का इस्तेमाल करता है, तब सावधानी से आगे बढ़िएः चोर बहुत इधर उधर घूमते हैं, इसलिए वे अपना बिजनेस सेल फ़ोन से ही करना पसंद करते हैं। या यह भी हो सकता है कि उनके पास शायद फिक्स्ड लाइन फ़ोन हो ही नहीं।[९] X रिसर्च सोर्स जब आप कार को देखें, तब यूज़र से पूछिये कि वो कहाँ रहते और काम करते हैं। अगर वे हिचकिचाते हैं, तब शायद आप चोरी की कार खरीद रहे हैं। 2जिन कार्स के संबंध में अखबारों में या ऑनलाइन विज्ञापन आते हैं, उनसे सावधान रहिएः[१०] X रिसर्च सोर्स हालांकि बहुत सारी वैध सेल्स भी इस तरह होती हैं, मगर अधिकांश चोरी की कारों का विज्ञापन भी ऑनलाइन या अखबारों में दिया जाता है। हमेशा ही किसी विख्यात डीलर या परिचित से ही खरीदना बेहतर होता है। - इन्टरनेट या किसी भी अन्य सोर्स से डीलर की ख्याति का पता लगा लीजिये। 3बिक्री के बिल की मांग करिएः आप बेशक किसी न किसी प्रकार का डॉक्युमेंट चाहेंगे जिससे यह साबित हो सके कि आपने कार खरीदी है। अगर विक्रेट उसे देने में आनाकानी करता है, तब वहाँ से चले जाइए। आम तौर पर आपको बिक्री का एक बिल चाहिए होगा, जिसमें निम्न जानकारी दी गई होः 4कोई भी डील जो इतनी अच्छी हो कि विश्वास करने का मन नहीं करता हो, उससे सावधान रहिएः[११] X रिसर्च सोर्स अगर आप चकित हों कि इतनी बढ़िया डील आपको कैसे मिल रही है, तब कुछ तो गड़बड़ है। सवाल पूछिये कि विक्रेता इतने कम दाम में क्यों बेचने की कोशिश कर रहा है। अगर बात समझ में न आए तब वहाँ से चले जाइए।
इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यहाँ पर नौ रेफरेन्स दिए गए हैं जिन्हे आप आर्टिकल में नीचे देख सकते हैं। यह आर्टिकल एक,नौ सौ छियासी बार देखा गया है। हज़ारों कार्स हर साल चोरी होती हैं, और अक्सर इस आशय से कि उनको वापस बेच दिया जाये। अगर आप बाज़ार में पुरानी यूज्ड कार ख़रीदने गए हैं, तब यह देखने के लिए कि कहीं कार चोरी की तो नहीं है, VIN चेक परफ़ॉर्म करिए। आपको अपनी इन्श्युरेंस कंपनी को भी कॉल करना चाहिए, और वेहिकल के टाइटल और सर्विस हिस्टरी को ध्यान से एनालाइज़ करना चाहिए। आप चोरी की कार ख़रीद रहे हैं, इस संबंध में अनेक रेड फ्लैग्स हैं जिनके बारे में आपको पता रहना चाहिए। एकवेहिकल आइडेंटिफ़िकेशन नंबर का पता लगाइयेः प्रत्येक कार का VIN होता है, जिसे आपको चेक करना चाहिए ताकि आप सर्च परफ़ॉर्म कर सकें। VIN में सत्रह कैरेक्टर्स होते हैं तथा वह कार के सोशल सिक्यूरिटी नंबर की तरह होता है। विक्रेता आपको जो भी VIN नंबर दे, उसे यूं ही स्वीकार मत कर लीजिएगा। वेहिकल का अपने आप बारीक निरीक्षण कीजिये और VIN पता लगाइए। आपको VIN निम्न जगहों पर मिल सकता हैः दोचेक कर लीजिये कि VIN के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई हैः[एक] X रिसर्च सोर्स पूरे VIN लेबल को वेहिकल पर सिक्यूरली लगा होना चाहिए और उसका कोई भी कोना उखड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। इसके अलावा देखिये कि उसमें कोई स्क्रैचेज़, फाड़ने के निशान, या निकालने के निशान न हों। - इसके अलावा VIN लेबल पर अपनी उँगलियाँ फिराइए। छूने पर उसे बिलकुल स्मूथ होना चाहिए।[दो] X रिसर्च सोर्स अगर वह स्क्रैची होगा, तब इसका मतलब है कि उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। - VIN लेबल को किसी स्क्रू या प्लग से छुपा नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हो, तब इसका मतलब है कि मालिक शायद VIN को छुपाने की कोशिश कर रहा है। तीनVINchek वेबसाइट को सर्च करिएः नेशनल इन्श्युरेंस क्राइम ब्यूरो का एक VINCheck डेटाबेस है जो उन सभी वेहिकल्स का VIN एकत्रित करके रखता जिनकी चोरी होने की सूचना मिली होती है।[तीन] X रिसर्च सोर्स NICB वेबसाइट पर वीआईएन एंटर करिए। आप चौबीस घंटाटों के अंदर पाँच सर्चेज कर सकते हैं। चारफ्रॉड को रिपोर्ट करिएः अगर वेहिकल चोरी की है तब पुलिस को कॉल करिए, और वेहिकल के बारे में रिपोर्ट करिए। यूएसए में आपको आठ सौ-आठ सौ पैंतीस-छः हज़ार चार सौ बाईस पर NICB को खबर देनी चाहिए या TIPचार सौ ग्यारह पर गुमनाम टिप देनी चाहिए। - आप अपनी स्थानीय पुलिस को भी कॉल कर सकते हैं। विक्रेता के बारे में जितनी हो सके, उतनी जानकारी शेयर करिएः नाम, पता, एपीयरेंस। - टाइटल सर्च कराने में खर्च होता है, इसलिए दाम और पेमेंट का स्वीकार्य तरीका जानने के लिए पहले ही DMV से बात कर लीजिये। - यह सुनिश्चित कर लीजिये कि विक्रेता की जानकारी टाइटल पर दी गई जानकारी से मैच करती हो।[छः] X रिसर्च सोर्स अगर दोनों में कोई अंतर है, तब इसका मतलब कि कार शायद चुराई गई थी। तीनअपने मेकेनिक से कहिए कि कार का इंस्पेक्शन करेः अगर VIN के साथ छेड़छाड़ की गई होगी तब आपका मेकेनिक शायद उसे स्पॉट कर सकेगा।[सात] X रिसर्च सोर्स इसके अतिरिक्त, आपका मेकेनिक कार की ओवरऑल कंडीशन भी चेक कर सकेगा ताकि आप कोई कबाड़ न खरीद लें। कभी भी बिना अपने मेकेनिक को दिखाये यूज्ड कार न खरीदें। चारकार की सर्विस के रिकॉर्ड का रिव्यू करिएः कार के VIN का उल्लेख उसके उस सर्विस के रिकॉर्ड में भी होना चाहिए, जो कि शायद ओनर आपके साथ शेयर करेगा। यह सुनिश्चित कर लीजिये कि सर्विस के रिकॉर्ड में दिया गया VIN कार में दिखते हुये VIN से मैच करता हो। अगर नहीं करता है, तब शायद कार चोरी की होगी। - इसमें तो कोई संदेह नहीं कि यह छुपाने के लिए कि कार चुराई गई है, कार का ओनर सर्विस रिकॉर्ड में हेरा फेरी करेगा ही। इसलिए आप शायद सर्विस एजेंसी से खुद ही यह जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर सकते हैं। आपको VIN की ज़रूरत तो पड़ेगी ही।[आठ] X रिसर्च सोर्स जब आपको रिपोर्ट मिले तब सर्विस के रिकॉर्ड में दिये गए कार के विवरण का मिलान उस कार से करिए जो आप खरीदना चाह रहे हैं। एकअगर यूज़र सेल फोन का इस्तेमाल करता है, तब सावधानी से आगे बढ़िएः चोर बहुत इधर उधर घूमते हैं, इसलिए वे अपना बिजनेस सेल फ़ोन से ही करना पसंद करते हैं। या यह भी हो सकता है कि उनके पास शायद फिक्स्ड लाइन फ़ोन हो ही नहीं।[नौ] X रिसर्च सोर्स जब आप कार को देखें, तब यूज़र से पूछिये कि वो कहाँ रहते और काम करते हैं। अगर वे हिचकिचाते हैं, तब शायद आप चोरी की कार खरीद रहे हैं। दोजिन कार्स के संबंध में अखबारों में या ऑनलाइन विज्ञापन आते हैं, उनसे सावधान रहिएः[दस] X रिसर्च सोर्स हालांकि बहुत सारी वैध सेल्स भी इस तरह होती हैं, मगर अधिकांश चोरी की कारों का विज्ञापन भी ऑनलाइन या अखबारों में दिया जाता है। हमेशा ही किसी विख्यात डीलर या परिचित से ही खरीदना बेहतर होता है। - इन्टरनेट या किसी भी अन्य सोर्स से डीलर की ख्याति का पता लगा लीजिये। तीनबिक्री के बिल की मांग करिएः आप बेशक किसी न किसी प्रकार का डॉक्युमेंट चाहेंगे जिससे यह साबित हो सके कि आपने कार खरीदी है। अगर विक्रेट उसे देने में आनाकानी करता है, तब वहाँ से चले जाइए। आम तौर पर आपको बिक्री का एक बिल चाहिए होगा, जिसमें निम्न जानकारी दी गई होः चारकोई भी डील जो इतनी अच्छी हो कि विश्वास करने का मन नहीं करता हो, उससे सावधान रहिएः[ग्यारह] X रिसर्च सोर्स अगर आप चकित हों कि इतनी बढ़िया डील आपको कैसे मिल रही है, तब कुछ तो गड़बड़ है। सवाल पूछिये कि विक्रेता इतने कम दाम में क्यों बेचने की कोशिश कर रहा है। अगर बात समझ में न आए तब वहाँ से चले जाइए।
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम गुरुवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष हुए। जैसे ही पूर्व केंद्रीय मंत्री कटघरे की ओर जाने लगे उनके समर्थक उन्हें 'वनक्कम' करने और 'तलाइवा' के नारे लगाने लगे। अदालत कक्ष में बड़ी संख्या में वकीलों, समर्थकों और पत्रकारों की भीड़ मौजूद रही। उनके समर्थक अपने वरिष्ठ नेता की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील अमित महाजन सीबीआई की तरफ से पेश हुए और एक आवेदन दायर कर आगे की न्यायिक रिमांड की मांग की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अर्शदीप खुराना चिदंबरम का पक्ष रखने के लिए अदालत में पेश हुए। अपने काउंसल के माध्यम से चिदंबरम ने नियमित मेडिकल परीक्षण और पर्याप्त पूरक आहार लेने के लिए आवेदन किया। उन्होंने न्यायिक हिरासत में वजन घटने का हवाला दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी। आईएनएक्स मामले में चिदंबरम की भूमिका की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। पूर्व मंत्री वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी एक याचिका पर सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित पड़ी है, जिसपर सुनवाई 23 सितंबर को होनी है। आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में वरिष्ठ नेता को 5 सितंबर को एक अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था। 21 अगस्त की रात को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
नई दिल्ली, उन्नीस सितंबर । पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम गुरुवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष हुए। जैसे ही पूर्व केंद्रीय मंत्री कटघरे की ओर जाने लगे उनके समर्थक उन्हें 'वनक्कम' करने और 'तलाइवा' के नारे लगाने लगे। अदालत कक्ष में बड़ी संख्या में वकीलों, समर्थकों और पत्रकारों की भीड़ मौजूद रही। उनके समर्थक अपने वरिष्ठ नेता की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील अमित महाजन सीबीआई की तरफ से पेश हुए और एक आवेदन दायर कर आगे की न्यायिक रिमांड की मांग की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अर्शदीप खुराना चिदंबरम का पक्ष रखने के लिए अदालत में पेश हुए। अपने काउंसल के माध्यम से चिदंबरम ने नियमित मेडिकल परीक्षण और पर्याप्त पूरक आहार लेने के लिए आवेदन किया। उन्होंने न्यायिक हिरासत में वजन घटने का हवाला दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन अक्टूबर तक बढ़ा दी। आईएनएक्स मामले में चिदंबरम की भूमिका की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो कर रही है। पूर्व मंत्री वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी एक याचिका पर सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित पड़ी है, जिसपर सुनवाई तेईस सितंबर को होनी है। आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में वरिष्ठ नेता को पाँच सितंबर को एक अदालत ने चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था। इक्कीस अगस्त की रात को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से दुखी होकर इसे छोड़ा है. मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत भूषण और दूसरे साथियों पर कई तरह के आरोप लगाए गए, पर उन्हें साबित नहीं किया गया. मेधा पाटकर ने शनिवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी. बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी को अप्रत्याशित कामयाबी मिली, पर उसके बाद कोई ठोस काम नहीं हो पाया. पार्टी में ऐसा कोई फ़ोरम नहीं बचा, जिस पर अपनी बात रखी जा सके. " मेधा पाटकर आम आदमी पार्टी से शुरू से जुड़ी रहीं हैं. 'आरोप साबित नहीं किए गए' मेधा पाटकर ने कहा कि पार्टी के साथियों की घनघोर अवमानना हुई है, जिससे वे काफ़ी आहत हैं. उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कुछ सदस्यों को निकाले जाने की प्ररिया को पूरी तरह ग़लत बताया है. मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि वैकल्पिक राजनीति की बात करने वाली पार्टी के क्रियाकलाप, शैली और इसका कामकाज भी दूसरी पार्टियों से अलग ही होना चाहिए. ऐसा नहीं हुआ. यह पार्टी भी दूसरी पार्टियों की तरह हो गई, ऐसे में वह इस पार्टी में नहीं रहना चाहतीं. मेधा पाटकर ने कहा कि भ्रष्टाचार एक मुद्दा तो है ही, पर इसके साथ व्यवहार भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. इस पर पार्टी नेतृत्व पूरी तरह नाकाम रहा. उन्हें पूरी पार्टी से नहीं, बल्कि इसके नेतृत्व से ही शिकायत है. अरविंद केजरीवाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी एक दिशा थी, जिसस कई साथी सहमत नहीं थे. प्रशांत भूषण भी उनमें एक हैं. पर वह यह नहीं मान सकती कि भूषण ने पार्टी से भितरघात किया है. पाटकर का कहना है कि देश विदेश के कई लोग उनसे बार-बार कह रहे था कि वह कुछ करें, जो उनके लिए मुमकिन नहीं था. इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ना ही बेहतर समझा. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से दुखी होकर इसे छोड़ा है. मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत भूषण और दूसरे साथियों पर कई तरह के आरोप लगाए गए, पर उन्हें साबित नहीं किया गया. मेधा पाटकर ने शनिवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी. बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी को अप्रत्याशित कामयाबी मिली, पर उसके बाद कोई ठोस काम नहीं हो पाया. पार्टी में ऐसा कोई फ़ोरम नहीं बचा, जिस पर अपनी बात रखी जा सके. " मेधा पाटकर आम आदमी पार्टी से शुरू से जुड़ी रहीं हैं. 'आरोप साबित नहीं किए गए' मेधा पाटकर ने कहा कि पार्टी के साथियों की घनघोर अवमानना हुई है, जिससे वे काफ़ी आहत हैं. उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कुछ सदस्यों को निकाले जाने की प्ररिया को पूरी तरह ग़लत बताया है. मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि वैकल्पिक राजनीति की बात करने वाली पार्टी के क्रियाकलाप, शैली और इसका कामकाज भी दूसरी पार्टियों से अलग ही होना चाहिए. ऐसा नहीं हुआ. यह पार्टी भी दूसरी पार्टियों की तरह हो गई, ऐसे में वह इस पार्टी में नहीं रहना चाहतीं. मेधा पाटकर ने कहा कि भ्रष्टाचार एक मुद्दा तो है ही, पर इसके साथ व्यवहार भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. इस पर पार्टी नेतृत्व पूरी तरह नाकाम रहा. उन्हें पूरी पार्टी से नहीं, बल्कि इसके नेतृत्व से ही शिकायत है. अरविंद केजरीवाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी एक दिशा थी, जिसस कई साथी सहमत नहीं थे. प्रशांत भूषण भी उनमें एक हैं. पर वह यह नहीं मान सकती कि भूषण ने पार्टी से भितरघात किया है. पाटकर का कहना है कि देश विदेश के कई लोग उनसे बार-बार कह रहे था कि वह कुछ करें, जो उनके लिए मुमकिन नहीं था. इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ना ही बेहतर समझा.
जिनको दण्ड मिला वह सब पूजा के अधिकारी इतिहास बदलता आजाद देश गौरव पाते आजादी के इस प्रथम द्वन्द्व के इस पुराय दिवस पर के श्रद्धा के फूल लिये गाओ गीत शहीदों का ! पहले खून बहा करता है अमर शहीदों का फिर ही दिन आता है दीवाली का ईदों का ! - श्याम दत्त पराग पतन और उत्थान आज मानव दानवों के चरण-चिन्हों पर चला है के सरोवर में गरल फूला फला है आज धरती पर नल के बीज बोए जा रहे हैं आज मानव के परम सौभाग्य सोए जा रहे हैं आज युग को देख मानवता स्वयं शरमा रही है आज अम्बर में निराशा की घटा चहुं छा रही है। फूल ये सुकुमार से क्यों मौन हैं, मुरझा रहे हैं मधुप, जाने क्यों, चतुर्दिक बेसुरा सा गा रहे हैं चाँद की यह चाँदनी जाने न क्यों है आज भाती दम्भ-प्रतिभा हर तरफ, क्यों दीखती है, मुस्कुराती आज युग की नाव है मंझधार में, इसको संभालो आज पृथ्वी फिर रसातल में गड़ी सी है, निकालो आज रज को पंख दो आकाश का मस्तक सजाओ आज भू-शृंगार करने तारिकाओं को बुलाओ दम्भ का अस्तित्व हर लो, ज्ञान का दीपक जलाओ हर मनुज को दृष्टि देकर मनुजता फिर से लख कौन कहता देवतापन भाग्य का ही खेल सारा कौन कहता उच्च-आसन भाग्य ने पहिले निहारा रत्न धरती पर लुटे हैं, मिल सभी सम्मान कर लें भूमि के इन कंकरों से इक नया निर्माण कर लें साधना से ही जगत में सफलता के फल मिलेंगे प्रेम की वंशी बजेगी, एकता को स्वर मिलेंगे मूक को वाणी मिलेगी ; पंगु गिरिवर पर चढ़ेगा विश्व का प्रत्येक मानव ज्ञान की भाषा पढ़ेगा भावना कर्तव्य को उन्नत बनाती ही रहेगी योग्यतम की कल्पना उत्कर्ष पाती ही रहेगी कथा कहानी, नई पुरानी, से इतिहास रचा जाता है । बूढ़ी नानी की नृप-रानी से इतिहस रचा जाता है । ढली उमर पर, चिता- कबर पर यह इतिहास रचा जाता है । शाम-सहर पर, निशी-वासर पर, यह इतिहास रचा जाता है । - मोहन लाल 'निराश घटना से घटना जुड़ती है, बन जाती है एक कहानी । • जिस के पात्र हुआ करते हैंः तुझ से, मुझ से कितने प्राणी ॥ दो दिन यह गाथा चलती है, मिट जाती रख एक निशानी । ऐसे ही कितने चिन्हों से, यह इतिहास रचा जाता है प्रलय निशा कैसे थी बीती ? सृजन-दिवस कैसे था आया ? श्रद्धा ने बाहें फैला कर क्यों कर मनु को था अपनाया ? कैसे जन्मे जीव धरा पर ? जीवों में मति कैसे आई? बात पुरानी छिड़ जाती है, नव इतिहास रचा जाता
जिनको दण्ड मिला वह सब पूजा के अधिकारी इतिहास बदलता आजाद देश गौरव पाते आजादी के इस प्रथम द्वन्द्व के इस पुराय दिवस पर के श्रद्धा के फूल लिये गाओ गीत शहीदों का ! पहले खून बहा करता है अमर शहीदों का फिर ही दिन आता है दीवाली का ईदों का ! - श्याम दत्त पराग पतन और उत्थान आज मानव दानवों के चरण-चिन्हों पर चला है के सरोवर में गरल फूला फला है आज धरती पर नल के बीज बोए जा रहे हैं आज मानव के परम सौभाग्य सोए जा रहे हैं आज युग को देख मानवता स्वयं शरमा रही है आज अम्बर में निराशा की घटा चहुं छा रही है। फूल ये सुकुमार से क्यों मौन हैं, मुरझा रहे हैं मधुप, जाने क्यों, चतुर्दिक बेसुरा सा गा रहे हैं चाँद की यह चाँदनी जाने न क्यों है आज भाती दम्भ-प्रतिभा हर तरफ, क्यों दीखती है, मुस्कुराती आज युग की नाव है मंझधार में, इसको संभालो आज पृथ्वी फिर रसातल में गड़ी सी है, निकालो आज रज को पंख दो आकाश का मस्तक सजाओ आज भू-शृंगार करने तारिकाओं को बुलाओ दम्भ का अस्तित्व हर लो, ज्ञान का दीपक जलाओ हर मनुज को दृष्टि देकर मनुजता फिर से लख कौन कहता देवतापन भाग्य का ही खेल सारा कौन कहता उच्च-आसन भाग्य ने पहिले निहारा रत्न धरती पर लुटे हैं, मिल सभी सम्मान कर लें भूमि के इन कंकरों से इक नया निर्माण कर लें साधना से ही जगत में सफलता के फल मिलेंगे प्रेम की वंशी बजेगी, एकता को स्वर मिलेंगे मूक को वाणी मिलेगी ; पंगु गिरिवर पर चढ़ेगा विश्व का प्रत्येक मानव ज्ञान की भाषा पढ़ेगा भावना कर्तव्य को उन्नत बनाती ही रहेगी योग्यतम की कल्पना उत्कर्ष पाती ही रहेगी कथा कहानी, नई पुरानी, से इतिहास रचा जाता है । बूढ़ी नानी की नृप-रानी से इतिहस रचा जाता है । ढली उमर पर, चिता- कबर पर यह इतिहास रचा जाता है । शाम-सहर पर, निशी-वासर पर, यह इतिहास रचा जाता है । - मोहन लाल 'निराश घटना से घटना जुड़ती है, बन जाती है एक कहानी । • जिस के पात्र हुआ करते हैंः तुझ से, मुझ से कितने प्राणी ॥ दो दिन यह गाथा चलती है, मिट जाती रख एक निशानी । ऐसे ही कितने चिन्हों से, यह इतिहास रचा जाता है प्रलय निशा कैसे थी बीती ? सृजन-दिवस कैसे था आया ? श्रद्धा ने बाहें फैला कर क्यों कर मनु को था अपनाया ? कैसे जन्मे जीव धरा पर ? जीवों में मति कैसे आई? बात पुरानी छिड़ जाती है, नव इतिहास रचा जाता
काबूलः रविवार को पूर्वी अफगानिस्तान के नांगरहार राज्य की राजधानी जलालाबाद में सिख अल्पसंख्यकों के एक वाहन पर आत्मघाती हमलावर के बम से हमला किया। इस घटना में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई जिनमें स्थानीय सिख व हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के 17 लोग शामिल हैं। मृतकों में सिख समुदाय के एक शीर्ष राजनीतिक नेता भी शामिल हैं। 20 घायलों में भी अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के ही हैं। हालांकि काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने 10 सिख अल्पसंख्यकों की ही मौत की पुष्टि की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा करते हुए मृतकों के परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि हम रविवार को अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यह अफगानिस्तान की बहुसांस्कृतिक संरचना पर हमला है। शोकग्रस्त परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि हमले में घायल लोग जल्द ठीक हो जाएं। अफगानिस्तान के इस दुख भरे क्षण में भारत उसके सहयोग के लिए तैयार है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कड़ी निंदा की है। ये धमाका शहर के मध्य में राज्य के गवर्नर के आवास से थोड़ी दूर स्थित एक बाजार मुखाबेरात स्कवॉयर में हुआ जहां अधिकतर अफगानी अल्पसंख्यक सिखों व हिंदुओं की दुकानें हैं। गवर्नर के प्रवक्ता अताउल्ला खोगयानी ने बताया कि बम इतना शक्तिशाली था कि धमाके में चारों तरफ की दुकानें व मकान ध्वस्त हो गए। राज्य के पुलिस चीफ गुलाम सनायी स्तेनकजाई ने बताया कि आत्मघाती हमलावर ने राष्ट्रपति से मिलने जा रहे सिख अल्पसंख्यकों के वाहन को निशाना बनाया। धमाके की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन जलालाबाद में पिछले कुछ सालों के दौरान इस्लामिक स्टेट आईएस के आतंकियों की उपस्थिति बढ़ी है। माना जा रहा है कि इस हमले में आगामी अक्टूबर में होने जा रहे देश के संसदीय चुनावों में उतरने की घोषणा कर चुके सिख समुदाय के नेता अवतार सिंह खालसा मुख्य निशाना थे जिनकी धमाके में मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि राष्ट्रपति के दौरे के लिए शहर में यातायात को ब्लॉक नहीं किया गया था। राष्ट्रपति के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि गनी एक अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए रविवार की सुबह जलालाबाद पहुंचे थे। ये उनके इस राज्य के दो दिवसीय दौरे के कार्यक्रम का एक हिस्सा था और धमाके के दौरान भी वे नांगरहार राज्य में ही मौजूद थे। लेकिन धमाके के समय वे खतरे से बेहद दूर थे।
काबूलः रविवार को पूर्वी अफगानिस्तान के नांगरहार राज्य की राजधानी जलालाबाद में सिख अल्पसंख्यकों के एक वाहन पर आत्मघाती हमलावर के बम से हमला किया। इस घटना में कम से कम बीस लोगों की मौत हो गई जिनमें स्थानीय सिख व हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के सत्रह लोग शामिल हैं। मृतकों में सिख समुदाय के एक शीर्ष राजनीतिक नेता भी शामिल हैं। बीस घायलों में भी अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के ही हैं। हालांकि काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने दस सिख अल्पसंख्यकों की ही मौत की पुष्टि की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा करते हुए मृतकों के परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि हम रविवार को अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यह अफगानिस्तान की बहुसांस्कृतिक संरचना पर हमला है। शोकग्रस्त परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि हमले में घायल लोग जल्द ठीक हो जाएं। अफगानिस्तान के इस दुख भरे क्षण में भारत उसके सहयोग के लिए तैयार है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कड़ी निंदा की है। ये धमाका शहर के मध्य में राज्य के गवर्नर के आवास से थोड़ी दूर स्थित एक बाजार मुखाबेरात स्कवॉयर में हुआ जहां अधिकतर अफगानी अल्पसंख्यक सिखों व हिंदुओं की दुकानें हैं। गवर्नर के प्रवक्ता अताउल्ला खोगयानी ने बताया कि बम इतना शक्तिशाली था कि धमाके में चारों तरफ की दुकानें व मकान ध्वस्त हो गए। राज्य के पुलिस चीफ गुलाम सनायी स्तेनकजाई ने बताया कि आत्मघाती हमलावर ने राष्ट्रपति से मिलने जा रहे सिख अल्पसंख्यकों के वाहन को निशाना बनाया। धमाके की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन जलालाबाद में पिछले कुछ सालों के दौरान इस्लामिक स्टेट आईएस के आतंकियों की उपस्थिति बढ़ी है। माना जा रहा है कि इस हमले में आगामी अक्टूबर में होने जा रहे देश के संसदीय चुनावों में उतरने की घोषणा कर चुके सिख समुदाय के नेता अवतार सिंह खालसा मुख्य निशाना थे जिनकी धमाके में मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि राष्ट्रपति के दौरे के लिए शहर में यातायात को ब्लॉक नहीं किया गया था। राष्ट्रपति के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि गनी एक अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए रविवार की सुबह जलालाबाद पहुंचे थे। ये उनके इस राज्य के दो दिवसीय दौरे के कार्यक्रम का एक हिस्सा था और धमाके के दौरान भी वे नांगरहार राज्य में ही मौजूद थे। लेकिन धमाके के समय वे खतरे से बेहद दूर थे।
भारत और इंग्लैंड के बीच चेपक में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में मेहमान टीम ने अपना शिकंजा कसा हुआ है। इंग्लिश टीम के कप्तान जो रूट ने 218 रन की पारी खेलकर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया है। मैच के दूसरे दिन जब कोई भारतीय गेंदबाज जो रूट को आउट नहीं कर पा रहा था तो विराट कोहली ने गेंद सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के हाथों में दे दी। रोहित शर्मा ने अभी तक दो ही ओवर डाले हैं जिसमें उन्होंने 7 ही रन दिए हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे वह सुर्खियों में आ गए। दरअसल, चाय से पहले आखिरी गेंद पर रोहित शर्मा ने दिग्गज भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह के ऐक्शन की नकल उतारी। बात मुकाबले की करें तो खबर लिखे जाने तक इंग्लैंड की टीम ने 6 विकेट के नुकसान पर 485 रन बना लिए हैं। क्रीज पर जोस बटलर के साथ डोम बेस मौजूद हैं। इंग्लैंड को इस मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनके कप्तान जो रूट का अहम रोल रहा है। रूट ने अपनी 218 रन की पारी के दौरान 19 चौके और दो छक्के लाए। उनको भारतीय स्पिनर शहबाज नदीम ने एलबीडब्ल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। रूट के अलावा सिबली ने 87 और बेन स्टोक्स ने 82 रन की शानदार पारी खेली। बात भारतीय गेंदबाजों की करें तो जसप्रीत बुमराह, शहबाज नदीम और आर अश्विन को दो-दो विकेट मिले हैं। वहीं इशांत शर्मा और वॉशिंगटन सुंदर अभी तक अपनी पहली विकेट की तलाश में हैं। उम्मीद लगाई जा रही है कि आज के दिन के आखिरी ओवरों में इंग्लैंड पारी घोषित कर भारत को बल्लेबाजी के लिए बुला सकती है। इस दौरान इंग्लिश गेंदबाजों की कोशिश भारत को एक या दो झटके देने की होगी।
भारत और इंग्लैंड के बीच चेपक में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में मेहमान टीम ने अपना शिकंजा कसा हुआ है। इंग्लिश टीम के कप्तान जो रूट ने दो सौ अट्ठारह रन की पारी खेलकर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया है। मैच के दूसरे दिन जब कोई भारतीय गेंदबाज जो रूट को आउट नहीं कर पा रहा था तो विराट कोहली ने गेंद सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के हाथों में दे दी। रोहित शर्मा ने अभी तक दो ही ओवर डाले हैं जिसमें उन्होंने सात ही रन दिए हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे वह सुर्खियों में आ गए। दरअसल, चाय से पहले आखिरी गेंद पर रोहित शर्मा ने दिग्गज भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह के ऐक्शन की नकल उतारी। बात मुकाबले की करें तो खबर लिखे जाने तक इंग्लैंड की टीम ने छः विकेट के नुकसान पर चार सौ पचासी रन बना लिए हैं। क्रीज पर जोस बटलर के साथ डोम बेस मौजूद हैं। इंग्लैंड को इस मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनके कप्तान जो रूट का अहम रोल रहा है। रूट ने अपनी दो सौ अट्ठारह रन की पारी के दौरान उन्नीस चौके और दो छक्के लाए। उनको भारतीय स्पिनर शहबाज नदीम ने एलबीडब्ल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। रूट के अलावा सिबली ने सत्तासी और बेन स्टोक्स ने बयासी रन की शानदार पारी खेली। बात भारतीय गेंदबाजों की करें तो जसप्रीत बुमराह, शहबाज नदीम और आर अश्विन को दो-दो विकेट मिले हैं। वहीं इशांत शर्मा और वॉशिंगटन सुंदर अभी तक अपनी पहली विकेट की तलाश में हैं। उम्मीद लगाई जा रही है कि आज के दिन के आखिरी ओवरों में इंग्लैंड पारी घोषित कर भारत को बल्लेबाजी के लिए बुला सकती है। इस दौरान इंग्लिश गेंदबाजों की कोशिश भारत को एक या दो झटके देने की होगी।
सासू काठा हे गहूँ पोसावि, आपण जास्यां मालबइ, सोनारि भणइ । ( पृ० ५४) झीणा मारू लाल रंगावउ पीया चूनड़ी । (५० ६०) ५. थे तउ अगलां रा खडिया आज्यो, रायजादा लाइज्यो राजि । ( पृ० १६१) ६. वाटका बटाऊ वीरा राजि, वीनती म्हारी कहीयो जाइ, अरै कहीयो जाई, अंब पके दोऊ नीबूअ पके, टपक टपक रस जाइ । ( १० १६१ ) ७. आठ टके कंकणठ लीयउ री नणदी, परकि रह्यउ मोरी बांह, कंकणउ मोल लीयउ । (पू० १६३ ) काव्य विवेचन का एक अंग भावसाम्य भी है। राजस्थानी कवियो की रचनाओं में इस दृष्टि से विचार करते समय कई पक्ष सामने आते हैं। कवि जिनहर्ष संस्कृत के विद्वान थे । अतः यत्र तत्र उन्होंने संस्कृत सुभाषितों का अपनी नीति वाणी में अनुवाद प्रस्तुत किया है :खल संगत तजिये जसा, विद्या सोभत तोय । पन्नग मणि संयुक्त तं, क्युं न भयंकर होय ॥ १६॥ नदी नखी नारी तथा, नागणि खग जसराज । नाई नरपति निगुण नर, आठे करे अकाज ॥३२॥ दोहा बावनी ) दुर्जनः परिहर्तव्यो विद्ययालंकृतो सन् । मणिना भूषितः सर्पः किमसौ न भयङ्कर ॥
सासू काठा हे गहूँ पोसावि, आपण जास्यां मालबइ, सोनारि भणइ । झीणा मारू लाल रंगावउ पीया चूनड़ी । पाँच. थे तउ अगलां रा खडिया आज्यो, रायजादा लाइज्यो राजि । छः. वाटका बटाऊ वीरा राजि, वीनती म्हारी कहीयो जाइ, अरै कहीयो जाई, अंब पके दोऊ नीबूअ पके, टपक टपक रस जाइ । सात. आठ टके कंकणठ लीयउ री नणदी, परकि रह्यउ मोरी बांह, कंकणउ मोल लीयउ । काव्य विवेचन का एक अंग भावसाम्य भी है। राजस्थानी कवियो की रचनाओं में इस दृष्टि से विचार करते समय कई पक्ष सामने आते हैं। कवि जिनहर्ष संस्कृत के विद्वान थे । अतः यत्र तत्र उन्होंने संस्कृत सुभाषितों का अपनी नीति वाणी में अनुवाद प्रस्तुत किया है :खल संगत तजिये जसा, विद्या सोभत तोय । पन्नग मणि संयुक्त तं, क्युं न भयंकर होय ॥ सोलह॥ नदी नखी नारी तथा, नागणि खग जसराज । नाई नरपति निगुण नर, आठे करे अकाज ॥बत्तीस॥ दोहा बावनी ) दुर्जनः परिहर्तव्यो विद्ययालंकृतो सन् । मणिना भूषितः सर्पः किमसौ न भयङ्कर ॥
Akshara-Nirahua Song: भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह और सुपरस्टार निरहुआ की जोड़ी हिट है। दोनों एक साथ पर्दे पर आते हैं तो बवाल मच जाता है। Akshara-Nirahua Song: भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह और सुपरस्टार निरहुआ की जोड़ी हिट है। दोनों एक साथ पर्दे पर आते हैं तो बवाल मच जाता है। अक्षरा सिंह और दिनेश लाल यादव की चाहे कोई फिल्म हो या फिर म्यूजिक वीडियो सामने आते ही दर्शकों के बीच छा जाता है और जमकर धमाल मचाता है। भोजपुरी गाने आजकल खूब ट्रेंडिंग में हैं। यूट्यूब से लेकर हर सोशल प्लेटफॉर्म पर भी भोजपुरी गाने छाए हुए हैं और लोग भी इन गानों पर जमकर रील्स और वीडियोज बना रहें हैं। इसी बीच अक्षरा सिंह और निरहुआ का एक गाना तेजी से वायरल हो रहा है, जो लगभग चार महीने पहले ही रिलीज हुआ था। इस गाने का नाम "तनी देखल करी" है। "तनी देखल करी" गाना जब रिलीज हुआ था, तभी इसने तूफान ला दिया था और अभी भी इसका जबरदस्त क्रेज बना हुआ है। दर्शक इस गाने को रिपीट मोड पर सुन रहें हैं, साथ ही सुपरस्टार निरहुआ और अक्षरा की सिजलिंग केमिस्ट्री की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। "तनी देखल करी" गाने को बहुत ही बढ़िया तरीके से फिल्माया गया है। इस गाने में अक्षरा सिंह आधी रात को निरहुआ से इश्क लड़ाती नजर आ रहीं हैं। वहीं दोनों गाने में धमाकेदार परफॉर्मेंस देते भी दिखाई दे रहें हैं। अक्षरा और निरहुआ की कमाल की केमिस्ट्री देख लोग खूब सीटियां मार रहें हैं। यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहे सॉन्ग "तनी देखल करी" को ओम झा और प्रियंका सिंह ने अपनी आवाज से सजाया है। लिरिक्स अरविंद तिवारी ने लिखें हैं। बताते चलें कि अबतक इस गाने को 7796680 लोगों द्वारा देखा जा चुका है, और 81K लोग लाइक कर चुके हैं, वहीं हजारों कमेंट्स भी आ चुके हैं। अक्षरा और निरहुआ की हॉट और रोमांटिक केमिस्ट्री देख दर्शक बावरे हो गए हैं।
Akshara-Nirahua Song: भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह और सुपरस्टार निरहुआ की जोड़ी हिट है। दोनों एक साथ पर्दे पर आते हैं तो बवाल मच जाता है। Akshara-Nirahua Song: भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह और सुपरस्टार निरहुआ की जोड़ी हिट है। दोनों एक साथ पर्दे पर आते हैं तो बवाल मच जाता है। अक्षरा सिंह और दिनेश लाल यादव की चाहे कोई फिल्म हो या फिर म्यूजिक वीडियो सामने आते ही दर्शकों के बीच छा जाता है और जमकर धमाल मचाता है। भोजपुरी गाने आजकल खूब ट्रेंडिंग में हैं। यूट्यूब से लेकर हर सोशल प्लेटफॉर्म पर भी भोजपुरी गाने छाए हुए हैं और लोग भी इन गानों पर जमकर रील्स और वीडियोज बना रहें हैं। इसी बीच अक्षरा सिंह और निरहुआ का एक गाना तेजी से वायरल हो रहा है, जो लगभग चार महीने पहले ही रिलीज हुआ था। इस गाने का नाम "तनी देखल करी" है। "तनी देखल करी" गाना जब रिलीज हुआ था, तभी इसने तूफान ला दिया था और अभी भी इसका जबरदस्त क्रेज बना हुआ है। दर्शक इस गाने को रिपीट मोड पर सुन रहें हैं, साथ ही सुपरस्टार निरहुआ और अक्षरा की सिजलिंग केमिस्ट्री की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। "तनी देखल करी" गाने को बहुत ही बढ़िया तरीके से फिल्माया गया है। इस गाने में अक्षरा सिंह आधी रात को निरहुआ से इश्क लड़ाती नजर आ रहीं हैं। वहीं दोनों गाने में धमाकेदार परफॉर्मेंस देते भी दिखाई दे रहें हैं। अक्षरा और निरहुआ की कमाल की केमिस्ट्री देख लोग खूब सीटियां मार रहें हैं। यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहे सॉन्ग "तनी देखल करी" को ओम झा और प्रियंका सिंह ने अपनी आवाज से सजाया है। लिरिक्स अरविंद तिवारी ने लिखें हैं। बताते चलें कि अबतक इस गाने को सतहत्तर लाख छियानवे हज़ार छः सौ अस्सी लोगों द्वारा देखा जा चुका है, और इक्यासी केल्विन लोग लाइक कर चुके हैं, वहीं हजारों कमेंट्स भी आ चुके हैं। अक्षरा और निरहुआ की हॉट और रोमांटिक केमिस्ट्री देख दर्शक बावरे हो गए हैं।
नसों को लोड के नीचे सूज गया है - मुझे क्या करना चाहिए? आधुनिक दुनिया में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में नसों और वाहिकाओं के रोग तेजी से पाए जाते हैं। इस तरह के विकृति अदृश्य और बहुत खतरनाक हो सकते हैं। यही कारण है कि पहले परेशान करने वाले लक्षणों के साथ आपको अपने आप को चिकित्सक को दिखाने की जरूरत होती है और परीक्षण किया जाता है। कई महिलाएं और पुरुष सोच रहे हैंः भार के बाद पैरों पर नसों को क्यों झुकाते हैं? इसका उत्तर आपको आज के लेख से प्राप्त होगा इसके अलावा, प्रदान की गई जानकारी आपको इस लक्षण को नष्ट करने के मुख्य तरीकों से परिचित होने की अनुमति देगी। पैरों पर नसें सूजन हो रही हैं : इसका क्या मतलब है? ऐसे संकेत को परेशान करें, दोनों पुरुष और महिलाएं यह बुजुर्ग और युवा लोगों में दिखाई देता है जनसांख्यिकी जनसंख्या समूह के बीच होती है जो एक सक्रिय और निष्क्रिय जीवन शैली का नेतृत्व करती हैं। यदि पैरों पर नसों सूजन हो जाती हैं , तो यह वैरिकाज़ नसों का स्पष्ट संकेत है। पैथोलॉजी के कई चरण हैं अधिक जटिल स्थिति, अधिक चमड़े के नीचे के जहाजों उभड़ा। इसे तुरंत नोट किया जाना चाहिए कि वैरिकाज़ नसों ने आमतौर पर सतही नसों को प्रभावित किया है। लेकिन अगर पैथोलॉजी गहरे जहाजों के पास हो गई है, तो यह मामला अधिक जटिल हो जाता है। यदि शिरा पैरों पर सूज रहे हैं, तो यह नग्न आंखों के लिए ध्यान देने योग्य है। हालांकि, वैरिकाज़ नसों के अन्य लक्षण भी हैं इनमें निचले हाथों में वजन, सूजन, आक्षेप शामिल हैं। कुछ रोगियों को उस जगह में त्वचा की सतह पर गंभीर खुजली का अनुभव होता है जहां पोत बढ़ता है। शिरा सूजन क्यों हो? वैरिकाज़ नसों के गठन और विकास के लिए निम्नलिखित कारण हैंः - आनुवंशिकता (अक्सर महिला लाइन के माध्यम से प्रेषित); - बुरी आदतों (शराब दुरुपयोग और धूम्रपान); - आसीन जीवन शैली (गतिहीन काम, कार पर आंदोलन); - मजबूत शारीरिक गतिविधि (भारोत्तोलन, पेशेवर खेल); - असुविधाजनक और तंग कपड़े पहनना (जीन्स, अंडरवियर); - जूते (उच्च ऊँची एड़ी के जूते, करीब जूते); - अधिक वजन (मोटापे वाले लोगों में, वैरिकाज़ नसों को दो बार बार-बार और तेज़ी से विकसित करना); यदि कई कारक हैं, तो वैरिकाज़ नसों की संभावना बढ़ जाती है। यदि आप ध्यान दें कि व्यायाम के दौरान पैरों पर नसों को फुलाया जाता है (लंबे समय से चलना, प्रशिक्षण, भार उठाना), तो आपको फ़्लाबोलॉजिस्ट या संवहनी सर्जन को यथाशीघ्र देखना चाहिए। केवल एक विशेषज्ञ संवहनी घाव की डिग्री को सही ढंग से निर्धारित करने और उपयुक्त उपचार निर्धारित करने में सक्षम होगा। पैथोलॉजी को खत्म करने के बुनियादी तरीकों पर गौर करें और पैरों पर बढ़ती नसों के साथ क्या करें। यदि बीमारी का प्रारंभिक चरण निर्धारित होता हैः नसों को पैर पर सूजन नहीं होती है, कोई अतिरिक्त लक्षण नहीं हैं और कोई संवहनी तारांकन नहीं है, तो यह विधि आपके लिए है संपीड़न लिनन पहने हुए वैरिकाज़ नसों को पूरी तरह खत्म नहीं करेंगे। हालांकि, ऐसे मोज़ा निचले हिस्सों की नसों को गहरा करते हैं, गहरे जहाजों पर लोड को स्थानांतरित करते हैं। एक सरेस से जोड़ा हुआ या निकासी शिरा की नकल है। यह काफी रोग की प्रगति को रोकता है। संपीड़न लिनन के विभिन्न वर्ग हैं। यह केवल डॉक्टर है जो सही तरह का संग्रहण चुन सकता है। रोग के प्रारंभिक चरणों में और रोकथाम के प्रयोजनों के लिए, प्रथम श्रेणी का चयन किया जाता है। बाद में (अधिक जटिल उपचार के बाद) इसे दूसरी संपीड़न पहनने की सिफारिश की जाती है। जर्सी को खींचने के तीसरे वर्ग को ट्राफीक अल्सर वाले लोगों और गहरे जहाजों की हार के लिए बनाया गया है। उन रोगियों, जिसमें शिराओं को व्यायाम के दौरान पैरों पर फुलाया जाता है, वेनोटोनिक्स निर्धारित हैं। ये दवाएं गोलियां, मलहम और जैल के रूप में निर्मित होती हैं। अक्सर फ़्लेबोलॉजिस्ट जटिल उपचार की सलाह देते हैंः सामयिक आवेदन और मौखिक प्रशासन। सबसे लोकप्रिय दवाएं ट्रोक्वेसेज़िन, डेट्रालेक्स, एंटिस्टैक्स, वेनारस, लियॉटन, हेपरिन और अन्य हैं। खुराक और उपचार की अवधि रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है। सभी वैरोनेटिक्स वैरिकाज़ नसों के लक्षणों को हटाते हैं वे पफपन को खत्म करते हैं, दर्द और ऐंठन को समाप्त करते हैं। एक सकारात्मक प्रभाव पूरे उपचार के दौरान मनाया जाता है। लेकिन जैसे ही आप यौगिकों का उपयोग बंद कर देते हैं, उतना ही गुजरता है दवाएं वैरिकाज़ नसों को पूरी तरह से खत्म करने में असमर्थ हैं लेकिन वे रोकथाम के एक उत्कृष्ट साधन हैं। एंडोएनस लेजर पृथक्करण को आज वैरिकाज़ नसों के उपचार के लिए कम से कम दर्दनाक तरीके के रूप में पहचाना जाता है। ध्यान दें कि यह प्रक्रिया भी महंगा है लिडोकेन की कार्रवाई के तहत सुधार मरीज केवल एक ही दिन अपनी सामान्य जीवन शैली में वापस आ सकते हैं। अक्सर मरीज़ एक विशेषज्ञ के पास प्रश्न पूछते हैंः "क्या होगा अगर मैं चलने पर पैर की नसों में सूजन आती है? " पैथोलॉजी को खत्म करने के तरीकों में से एक शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप के रूप में मान्यता प्राप्त है ऑपरेशन को फ्लेबीक्टोमी कहा जाता है कुछ दशक पहले, विशेषज्ञों को पूरे लेग की लंबाई में कटौती करने की जरूरत थी। अब चीजें कई खंडों में बनाई गई हैं। इसके बाद, एक विशेष साधन शिरा में डाली जाती है, जो एक मोजा की तरह, बदल जाता है और पोत को हटा देता है। इस हेरफेर के बाद की वसूली अवधि संपीड़न बुना हुआ कपड़ा पहनने और वेरोटोनिक्स का उपयोग करने के लिए प्रदान करता है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि में सीमाएं हैं इस के बावजूद, यह विधि वैरिकाज़ नसों के रोगी को सही तरीके से राहत देती है। अधिक नस कभी नहीं सूख जाता है। मैं खुद से क्या कर सकता हूं? उपचार के वर्णित तरीकों के अलावा, पैर पर शिरा के फलाव के साथ क्या किया जा सकता है? यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो फ़्लेबोलॉजिस्ट और संवहनी सर्जन दे सकते हैं। - अपने पैरों को आराम करो कठिन दिन के काम के बाद, हृदय के स्तर के ऊपर अंग को रखें। यह स्थिति पैरों से रक्त का बहिर्वाह बढ़ जाएगी। आप देख सकते हैं कि फैला हुआ नस धधकती हो गई है आप इस स्थिति में कई मिनट के लिए हैं। - आप लोक तरीके का उपयोग करते हैं वैरिकास का उपचार लोक विधि के उपयोग के साथ जोड़ा जा सकता है शहद के टिंचर के साथ प्रभावित क्षेत्रों का स्नेहन, मधु केक का प्रयोग, जड़ी-बूटियों के साथ जड़ी-बूटियों को पोंछते हुए। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि इन तरीकों से दवाओं के उपचार के बिना वैरिकाज़ नसों को खत्म नहीं किया जाएगा। इसलिए, यदि आपके लोड के बाद आपके पैर पर एक सूजन नस है, तो यह वैरिकाज़ नसों के बारे में है आप इसे खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए - आप पहले से ही जानते हैं यदि आप तीव्रता से पीड़ित हैं, संघनन क्षेत्र की लालसा, तापमान में वृद्धि, आपको तत्काल आपातकालीन सहायता के लिए फोन करना चाहिए शायद प्रभावित क्षेत्र में एक थ्रोम्बस पहले से ही बना है। यह विकृति जीवन-धमकी बनती है, इसके लिए आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है अपने स्वास्थ्य को देखो और बीमार मत बनो!
नसों को लोड के नीचे सूज गया है - मुझे क्या करना चाहिए? आधुनिक दुनिया में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में नसों और वाहिकाओं के रोग तेजी से पाए जाते हैं। इस तरह के विकृति अदृश्य और बहुत खतरनाक हो सकते हैं। यही कारण है कि पहले परेशान करने वाले लक्षणों के साथ आपको अपने आप को चिकित्सक को दिखाने की जरूरत होती है और परीक्षण किया जाता है। कई महिलाएं और पुरुष सोच रहे हैंः भार के बाद पैरों पर नसों को क्यों झुकाते हैं? इसका उत्तर आपको आज के लेख से प्राप्त होगा इसके अलावा, प्रदान की गई जानकारी आपको इस लक्षण को नष्ट करने के मुख्य तरीकों से परिचित होने की अनुमति देगी। पैरों पर नसें सूजन हो रही हैं : इसका क्या मतलब है? ऐसे संकेत को परेशान करें, दोनों पुरुष और महिलाएं यह बुजुर्ग और युवा लोगों में दिखाई देता है जनसांख्यिकी जनसंख्या समूह के बीच होती है जो एक सक्रिय और निष्क्रिय जीवन शैली का नेतृत्व करती हैं। यदि पैरों पर नसों सूजन हो जाती हैं , तो यह वैरिकाज़ नसों का स्पष्ट संकेत है। पैथोलॉजी के कई चरण हैं अधिक जटिल स्थिति, अधिक चमड़े के नीचे के जहाजों उभड़ा। इसे तुरंत नोट किया जाना चाहिए कि वैरिकाज़ नसों ने आमतौर पर सतही नसों को प्रभावित किया है। लेकिन अगर पैथोलॉजी गहरे जहाजों के पास हो गई है, तो यह मामला अधिक जटिल हो जाता है। यदि शिरा पैरों पर सूज रहे हैं, तो यह नग्न आंखों के लिए ध्यान देने योग्य है। हालांकि, वैरिकाज़ नसों के अन्य लक्षण भी हैं इनमें निचले हाथों में वजन, सूजन, आक्षेप शामिल हैं। कुछ रोगियों को उस जगह में त्वचा की सतह पर गंभीर खुजली का अनुभव होता है जहां पोत बढ़ता है। शिरा सूजन क्यों हो? वैरिकाज़ नसों के गठन और विकास के लिए निम्नलिखित कारण हैंः - आनुवंशिकता ; - बुरी आदतों ; - आसीन जीवन शैली ; - मजबूत शारीरिक गतिविधि ; - असुविधाजनक और तंग कपड़े पहनना ; - जूते ; - अधिक वजन ; यदि कई कारक हैं, तो वैरिकाज़ नसों की संभावना बढ़ जाती है। यदि आप ध्यान दें कि व्यायाम के दौरान पैरों पर नसों को फुलाया जाता है , तो आपको फ़्लाबोलॉजिस्ट या संवहनी सर्जन को यथाशीघ्र देखना चाहिए। केवल एक विशेषज्ञ संवहनी घाव की डिग्री को सही ढंग से निर्धारित करने और उपयुक्त उपचार निर्धारित करने में सक्षम होगा। पैथोलॉजी को खत्म करने के बुनियादी तरीकों पर गौर करें और पैरों पर बढ़ती नसों के साथ क्या करें। यदि बीमारी का प्रारंभिक चरण निर्धारित होता हैः नसों को पैर पर सूजन नहीं होती है, कोई अतिरिक्त लक्षण नहीं हैं और कोई संवहनी तारांकन नहीं है, तो यह विधि आपके लिए है संपीड़न लिनन पहने हुए वैरिकाज़ नसों को पूरी तरह खत्म नहीं करेंगे। हालांकि, ऐसे मोज़ा निचले हिस्सों की नसों को गहरा करते हैं, गहरे जहाजों पर लोड को स्थानांतरित करते हैं। एक सरेस से जोड़ा हुआ या निकासी शिरा की नकल है। यह काफी रोग की प्रगति को रोकता है। संपीड़न लिनन के विभिन्न वर्ग हैं। यह केवल डॉक्टर है जो सही तरह का संग्रहण चुन सकता है। रोग के प्रारंभिक चरणों में और रोकथाम के प्रयोजनों के लिए, प्रथम श्रेणी का चयन किया जाता है। बाद में इसे दूसरी संपीड़न पहनने की सिफारिश की जाती है। जर्सी को खींचने के तीसरे वर्ग को ट्राफीक अल्सर वाले लोगों और गहरे जहाजों की हार के लिए बनाया गया है। उन रोगियों, जिसमें शिराओं को व्यायाम के दौरान पैरों पर फुलाया जाता है, वेनोटोनिक्स निर्धारित हैं। ये दवाएं गोलियां, मलहम और जैल के रूप में निर्मित होती हैं। अक्सर फ़्लेबोलॉजिस्ट जटिल उपचार की सलाह देते हैंः सामयिक आवेदन और मौखिक प्रशासन। सबसे लोकप्रिय दवाएं ट्रोक्वेसेज़िन, डेट्रालेक्स, एंटिस्टैक्स, वेनारस, लियॉटन, हेपरिन और अन्य हैं। खुराक और उपचार की अवधि रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है। सभी वैरोनेटिक्स वैरिकाज़ नसों के लक्षणों को हटाते हैं वे पफपन को खत्म करते हैं, दर्द और ऐंठन को समाप्त करते हैं। एक सकारात्मक प्रभाव पूरे उपचार के दौरान मनाया जाता है। लेकिन जैसे ही आप यौगिकों का उपयोग बंद कर देते हैं, उतना ही गुजरता है दवाएं वैरिकाज़ नसों को पूरी तरह से खत्म करने में असमर्थ हैं लेकिन वे रोकथाम के एक उत्कृष्ट साधन हैं। एंडोएनस लेजर पृथक्करण को आज वैरिकाज़ नसों के उपचार के लिए कम से कम दर्दनाक तरीके के रूप में पहचाना जाता है। ध्यान दें कि यह प्रक्रिया भी महंगा है लिडोकेन की कार्रवाई के तहत सुधार मरीज केवल एक ही दिन अपनी सामान्य जीवन शैली में वापस आ सकते हैं। अक्सर मरीज़ एक विशेषज्ञ के पास प्रश्न पूछते हैंः "क्या होगा अगर मैं चलने पर पैर की नसों में सूजन आती है? " पैथोलॉजी को खत्म करने के तरीकों में से एक शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप के रूप में मान्यता प्राप्त है ऑपरेशन को फ्लेबीक्टोमी कहा जाता है कुछ दशक पहले, विशेषज्ञों को पूरे लेग की लंबाई में कटौती करने की जरूरत थी। अब चीजें कई खंडों में बनाई गई हैं। इसके बाद, एक विशेष साधन शिरा में डाली जाती है, जो एक मोजा की तरह, बदल जाता है और पोत को हटा देता है। इस हेरफेर के बाद की वसूली अवधि संपीड़न बुना हुआ कपड़ा पहनने और वेरोटोनिक्स का उपयोग करने के लिए प्रदान करता है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि में सीमाएं हैं इस के बावजूद, यह विधि वैरिकाज़ नसों के रोगी को सही तरीके से राहत देती है। अधिक नस कभी नहीं सूख जाता है। मैं खुद से क्या कर सकता हूं? उपचार के वर्णित तरीकों के अलावा, पैर पर शिरा के फलाव के साथ क्या किया जा सकता है? यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो फ़्लेबोलॉजिस्ट और संवहनी सर्जन दे सकते हैं। - अपने पैरों को आराम करो कठिन दिन के काम के बाद, हृदय के स्तर के ऊपर अंग को रखें। यह स्थिति पैरों से रक्त का बहिर्वाह बढ़ जाएगी। आप देख सकते हैं कि फैला हुआ नस धधकती हो गई है आप इस स्थिति में कई मिनट के लिए हैं। - आप लोक तरीके का उपयोग करते हैं वैरिकास का उपचार लोक विधि के उपयोग के साथ जोड़ा जा सकता है शहद के टिंचर के साथ प्रभावित क्षेत्रों का स्नेहन, मधु केक का प्रयोग, जड़ी-बूटियों के साथ जड़ी-बूटियों को पोंछते हुए। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि इन तरीकों से दवाओं के उपचार के बिना वैरिकाज़ नसों को खत्म नहीं किया जाएगा। इसलिए, यदि आपके लोड के बाद आपके पैर पर एक सूजन नस है, तो यह वैरिकाज़ नसों के बारे में है आप इसे खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए - आप पहले से ही जानते हैं यदि आप तीव्रता से पीड़ित हैं, संघनन क्षेत्र की लालसा, तापमान में वृद्धि, आपको तत्काल आपातकालीन सहायता के लिए फोन करना चाहिए शायद प्रभावित क्षेत्र में एक थ्रोम्बस पहले से ही बना है। यह विकृति जीवन-धमकी बनती है, इसके लिए आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है अपने स्वास्थ्य को देखो और बीमार मत बनो!
भारत और वेस्टइंडीज के बीच आज (बुधवार) शाम 7 बजे से सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे मुकाबला खेला जाएगा। सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की भेट चढ़ गया था, जबकि दूसरे मैच पर भारत ने कब्जा किया। अब विराट कोहली एंड कंपनी इस मैच में जीत दर्ज कर सीरीज पर 2-0 से कब्जा करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। आईये आपको बताते हैं तीसरे वनडे में कैसा हो सकता है भारत का प्लेइंग इलेवन। शिखर धवन और रोहित शर्मा आमतौर पर वनडे क्रिकेट में भारत के लिए ओपनिंग करते हैं। रोहित का तीसरे वनडे में खेलना लगभग तय है। शिखर धवन अबतक वनडे और टी20 दोनों ही सीरीज में रन बनाने के लिए जूझते नजर आए हैं। ऐसे में केएल राहुल को उनके स्थान पर बतौर सलामी बल्लेबाज टीम में जगह दी जा सकती है। राहुल 15 सदस्यीय स्क्वाड का हिस्सा हैं, लेकिन पहले दो मैचों में उन्हें मौका नहीं मिल पाया। तीसरे स्थान पर कप्तान विराट कोहली खुद बल्लेबाजी के लिए आएंगे। पिछले मैच में उन्होंने शतकीय पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। विंडीज तीसरा मुकाबला जीतकर सीरीज को ड्रॉ पर खत्म करने का प्रयास करेगा। ऐसे में इस बात की संभावना न के बराबर ही है कि विराट खुद को आराम देकर रोहित शर्मा से मैच में कप्तानी करने को कहें। रिषभ पंत को पिछले मुकाबले में नंबर-चार पर बल्लेबाजी के लिए जगह दी गई, लेकिन वो इस मैच में फ्लॉप रहे। रिषभ को नंबर चार पर मौका देने की बात कप्तान पहले भी कह चुके हैं, लेकिन श्रेयस अय्यर जैसे होनहार बल्लेबाज को इस स्थान पर मौका देने की बात लगातार क्रिकेट एक्सपर्ट कहते आ रहे हैं। अय्यर ने पिछले मैच में शानदार 71 रन की पारी खेलकर टीम में अपनी दावेदारी मजबूत की है। हालांकि विराट नंबर चार पर रिषभ को कुछ और मौके जरूर देना चाहेंगे। ऐसे में नंबर पांच पर अय्यर को ही बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है। दूसरे वनडे की तर्ज पर इस मुकाबले में भी नंबर छह पर केदार जाधव और सातवें स्थान पर रवींद्र जडेजा को मौका मिल सकता है। बल्ले से अहम योगदान देने के साथ-साथ पिछले मैच में जाधव ने पांच और जडेजा ने चार ओवर गेंदबाजी की थी। दोनों का इस मैच में खेलना तय माना जा रहा है। तेज गेंदबाजी में भारत के 15 सदस्यीय दल में युवा नवदीप सैनी को भी शामिल किया गया था, लेकिन वो अबतक प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मोहम्मद शमी काे आराम देकर सैनी को टीम में जगह मिल सकती है। प्लेइंग इलेवन में भुवनेश्वर कुमार की अगुवाई में खलील अहमद और नवदीप सैनी खेल सकते हैं। अबतक दो मुकाबलों में कुलदीप यादव को स्पेशलिस्ट स्पिन गेंदबाज के रूप में जगह दी गई है। उनका साथ निभाने के लिए ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और केदार जाधव प्लेइंग इलेवन में उपलब्ध हैं। वहीं, 15 सदस्यीय स्क्वाड में युजवेंद्र चहल भी उपलब्ध हैं। इस बात की संभावना कम है कि कुलदीप की जगह चहल को टीम में जगह दी जाए।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच आज शाम सात बजे से सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे मुकाबला खेला जाएगा। सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की भेट चढ़ गया था, जबकि दूसरे मैच पर भारत ने कब्जा किया। अब विराट कोहली एंड कंपनी इस मैच में जीत दर्ज कर सीरीज पर दो-शून्य से कब्जा करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। आईये आपको बताते हैं तीसरे वनडे में कैसा हो सकता है भारत का प्लेइंग इलेवन। शिखर धवन और रोहित शर्मा आमतौर पर वनडे क्रिकेट में भारत के लिए ओपनिंग करते हैं। रोहित का तीसरे वनडे में खेलना लगभग तय है। शिखर धवन अबतक वनडे और टीबीस दोनों ही सीरीज में रन बनाने के लिए जूझते नजर आए हैं। ऐसे में केएल राहुल को उनके स्थान पर बतौर सलामी बल्लेबाज टीम में जगह दी जा सकती है। राहुल पंद्रह सदस्यीय स्क्वाड का हिस्सा हैं, लेकिन पहले दो मैचों में उन्हें मौका नहीं मिल पाया। तीसरे स्थान पर कप्तान विराट कोहली खुद बल्लेबाजी के लिए आएंगे। पिछले मैच में उन्होंने शतकीय पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। विंडीज तीसरा मुकाबला जीतकर सीरीज को ड्रॉ पर खत्म करने का प्रयास करेगा। ऐसे में इस बात की संभावना न के बराबर ही है कि विराट खुद को आराम देकर रोहित शर्मा से मैच में कप्तानी करने को कहें। रिषभ पंत को पिछले मुकाबले में नंबर-चार पर बल्लेबाजी के लिए जगह दी गई, लेकिन वो इस मैच में फ्लॉप रहे। रिषभ को नंबर चार पर मौका देने की बात कप्तान पहले भी कह चुके हैं, लेकिन श्रेयस अय्यर जैसे होनहार बल्लेबाज को इस स्थान पर मौका देने की बात लगातार क्रिकेट एक्सपर्ट कहते आ रहे हैं। अय्यर ने पिछले मैच में शानदार इकहत्तर रन की पारी खेलकर टीम में अपनी दावेदारी मजबूत की है। हालांकि विराट नंबर चार पर रिषभ को कुछ और मौके जरूर देना चाहेंगे। ऐसे में नंबर पांच पर अय्यर को ही बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है। दूसरे वनडे की तर्ज पर इस मुकाबले में भी नंबर छह पर केदार जाधव और सातवें स्थान पर रवींद्र जडेजा को मौका मिल सकता है। बल्ले से अहम योगदान देने के साथ-साथ पिछले मैच में जाधव ने पांच और जडेजा ने चार ओवर गेंदबाजी की थी। दोनों का इस मैच में खेलना तय माना जा रहा है। तेज गेंदबाजी में भारत के पंद्रह सदस्यीय दल में युवा नवदीप सैनी को भी शामिल किया गया था, लेकिन वो अबतक प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मोहम्मद शमी काे आराम देकर सैनी को टीम में जगह मिल सकती है। प्लेइंग इलेवन में भुवनेश्वर कुमार की अगुवाई में खलील अहमद और नवदीप सैनी खेल सकते हैं। अबतक दो मुकाबलों में कुलदीप यादव को स्पेशलिस्ट स्पिन गेंदबाज के रूप में जगह दी गई है। उनका साथ निभाने के लिए ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और केदार जाधव प्लेइंग इलेवन में उपलब्ध हैं। वहीं, पंद्रह सदस्यीय स्क्वाड में युजवेंद्र चहल भी उपलब्ध हैं। इस बात की संभावना कम है कि कुलदीप की जगह चहल को टीम में जगह दी जाए।
नयी दिल्ली। यदि आप शहर में आने जाने के लिए उबर की सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए खास अच्छी है। एप के जरिए टैक्सी बुकिंग सेवा देने वाली अमेरिकी कंपनी उबर आज से दो नई खास सर्विस शुरू की हैं। उबर ने आज एक बयान में कहा कि उसने भारत में अपने एप में दो नये फीचर जारी किए हैं, इसमें पहला है इन एप चैट और दूसरा है मल्टीपल स्टाप फीचर। दूसरी सुविधा मल्टीपल स्टॉपेज को लेकर है। इसके तहत यात्री अनेक स्टाप के फीचर का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे यात्री अपने यात्रा मार्ग में अनेक जगह रुकने का विकल्प ले सकेंगे। यह फीचर्स उनके लिए बेहतर है, जिन्हें शहर में कई जगह काम है या फिर बच्चों को अलग अलग स्कूल से लेना है। हालांकि इस फीचर का इस्तेमाल यात्रा बुकिंग के समय भी किया जा सकेगा। यानी अगर उबर के यात्री को अपनी यात्रा के दौरान बीच में एक या दो जगह रुकना है तो वह स्टाप जोड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि यात्री बीच में स्टाप में तीन मिनट से अधिक समय नहीं लगाए। अतिरिक्त समय खर्च करने पर ग्राहक को इसके लिए अलग से चार्ज देना होगा।
नयी दिल्ली। यदि आप शहर में आने जाने के लिए उबर की सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए खास अच्छी है। एप के जरिए टैक्सी बुकिंग सेवा देने वाली अमेरिकी कंपनी उबर आज से दो नई खास सर्विस शुरू की हैं। उबर ने आज एक बयान में कहा कि उसने भारत में अपने एप में दो नये फीचर जारी किए हैं, इसमें पहला है इन एप चैट और दूसरा है मल्टीपल स्टाप फीचर। दूसरी सुविधा मल्टीपल स्टॉपेज को लेकर है। इसके तहत यात्री अनेक स्टाप के फीचर का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे यात्री अपने यात्रा मार्ग में अनेक जगह रुकने का विकल्प ले सकेंगे। यह फीचर्स उनके लिए बेहतर है, जिन्हें शहर में कई जगह काम है या फिर बच्चों को अलग अलग स्कूल से लेना है। हालांकि इस फीचर का इस्तेमाल यात्रा बुकिंग के समय भी किया जा सकेगा। यानी अगर उबर के यात्री को अपनी यात्रा के दौरान बीच में एक या दो जगह रुकना है तो वह स्टाप जोड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि यात्री बीच में स्टाप में तीन मिनट से अधिक समय नहीं लगाए। अतिरिक्त समय खर्च करने पर ग्राहक को इसके लिए अलग से चार्ज देना होगा।
न्यूयार्क । स्पेन के युवा खिलाड़ी कार्लोस अलकाराज ने घरेलू दावेदार फ्रांसिस तियाफो को मैराथन संघर्ष में 6-7(6), 6-3, 6-1, 6-7(5), 6-3 से हराकर अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने सेमीफाइनल चार घंटे 19 मिनट में जीता और यूएस ओपन के खिताब के लिए उनका नॉर्वे के कैस्पर रुड से मुकाबला होगा। रुड ने रूस के कारेन खाचानोव को 7-6(5), 6-2, 5-7, 6-2 से हराया और अपने दूसरे ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंच गए और उन्होंने एटीपी रैंकिंग में नंबर वन बनाने की अपनी संभावना को मजबूती दे दी है। अलकाराज यदि खिताब जीतते हैं तो वह भी नंबर वन बन सकते हैं। ओपन युग में यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचने वाले अलकाराज दूसरे युवा खिलाड़ी बन गए हैं और अमेरिका के पीट सम्प्रास के साथ जुड़ गए हैं। अलकाराज ने मैच के बाद कहा, "ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। हमें आखिरी बॉल तक लड़ना होता है, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम पांच घंटे लड़ते हैं या छह घंटे। आपको कोर्ट पर अपना सब कुछ देना होता है। " "फ्रांसिस तियाफो ने कोर्ट पर अपना सब कुछ दिया। यह अद्भुत है। " अलकाराज अब लगातार तीन पांच सेट के मुकाबले जीत चुके हैं जो कुल 13 घंटे 28 मिनट चले हैं। यदि वह रविवार को खिताब जीतते हैं तो वह 1973 में एटीपी रैंकिंग शुरू होने के बाद से सबसे युवा विश्व के नंबर एक खिलाड़ी बन जाएंगे। अलकारेज ने कहा, "मुझे अभी एक और मैच खेलना है ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ जो अविश्वसनीय प्रदर्शन कर रहा है,वह फ्रेंच ओपन का फाइनल भी खेल चुका है जबकि मेरे लिए यह पहली बार है। " उन्होंने कहा, "फाइनल में अपना सबकुछ दूंगा। मुझे ग्रैंड स्लैम फाइनल में होने के तनाव को संभालना होगा लेकिन फिलहाल मैं बहुत खुश हूं। मैं इस पल का आनंद लेना चाहता हूं और देखते हैं कि आगे क्या होता है। " इससे पहले पांचवीं सीड रुड ने 27वीं सीड खाचानोव की शक्तिशाली हिटिंग को काबू करते हुए 55 शॉट की मैराथन रैली जीतकर पहला सेट अपने नाम किया। रुड फ्रेंच ओपन फाइनल में स्पेन के दिग्गज राडेल नडाल से हार गए थे और यदि इस बार वह अलकाराज को फाइनल में हराते हैं तो वह विश्व के नंबर एक बनने वाले नॉर्वे के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे। रुड ने मैच के बाद कहा, "मैंने एक अच्छा मैच खेला। शुरूआत में हम दोनों नर्वस थे लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा कि हम दोनों के करियर के लिए यह सबसे बड़ा मैच था। मैं भाग्यशाली रहा कि मैंने पहला सेट जीत लिया जिसने मेरे तनाव को कुछ कम किया। " उन्होंने कहा, "मैंने दूसरे सेट में जबरदस्त प्रदर्शन किया जबकि कारेन ने तीसरे सेट में कमाल दिखाया लेकिन चौथे सेट में मैंने नियंत्रण बना लिया। "
न्यूयार्क । स्पेन के युवा खिलाड़ी कार्लोस अलकाराज ने घरेलू दावेदार फ्रांसिस तियाफो को मैराथन संघर्ष में छः-सात, छः-तीन, छः-एक, छः-सात, छः-तीन से हराकर अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने सेमीफाइनल चार घंटे उन्नीस मिनट में जीता और यूएस ओपन के खिताब के लिए उनका नॉर्वे के कैस्पर रुड से मुकाबला होगा। रुड ने रूस के कारेन खाचानोव को सात-छः, छः-दो, पाँच-सात, छः-दो से हराया और अपने दूसरे ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंच गए और उन्होंने एटीपी रैंकिंग में नंबर वन बनाने की अपनी संभावना को मजबूती दे दी है। अलकाराज यदि खिताब जीतते हैं तो वह भी नंबर वन बन सकते हैं। ओपन युग में यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचने वाले अलकाराज दूसरे युवा खिलाड़ी बन गए हैं और अमेरिका के पीट सम्प्रास के साथ जुड़ गए हैं। अलकाराज ने मैच के बाद कहा, "ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। हमें आखिरी बॉल तक लड़ना होता है, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम पांच घंटे लड़ते हैं या छह घंटे। आपको कोर्ट पर अपना सब कुछ देना होता है। " "फ्रांसिस तियाफो ने कोर्ट पर अपना सब कुछ दिया। यह अद्भुत है। " अलकाराज अब लगातार तीन पांच सेट के मुकाबले जीत चुके हैं जो कुल तेरह घंटाटे अट्ठाईस मिनट चले हैं। यदि वह रविवार को खिताब जीतते हैं तो वह एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में एटीपी रैंकिंग शुरू होने के बाद से सबसे युवा विश्व के नंबर एक खिलाड़ी बन जाएंगे। अलकारेज ने कहा, "मुझे अभी एक और मैच खेलना है ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ जो अविश्वसनीय प्रदर्शन कर रहा है,वह फ्रेंच ओपन का फाइनल भी खेल चुका है जबकि मेरे लिए यह पहली बार है। " उन्होंने कहा, "फाइनल में अपना सबकुछ दूंगा। मुझे ग्रैंड स्लैम फाइनल में होने के तनाव को संभालना होगा लेकिन फिलहाल मैं बहुत खुश हूं। मैं इस पल का आनंद लेना चाहता हूं और देखते हैं कि आगे क्या होता है। " इससे पहले पांचवीं सीड रुड ने सत्ताईसवीं सीड खाचानोव की शक्तिशाली हिटिंग को काबू करते हुए पचपन शॉट की मैराथन रैली जीतकर पहला सेट अपने नाम किया। रुड फ्रेंच ओपन फाइनल में स्पेन के दिग्गज राडेल नडाल से हार गए थे और यदि इस बार वह अलकाराज को फाइनल में हराते हैं तो वह विश्व के नंबर एक बनने वाले नॉर्वे के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे। रुड ने मैच के बाद कहा, "मैंने एक अच्छा मैच खेला। शुरूआत में हम दोनों नर्वस थे लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा कि हम दोनों के करियर के लिए यह सबसे बड़ा मैच था। मैं भाग्यशाली रहा कि मैंने पहला सेट जीत लिया जिसने मेरे तनाव को कुछ कम किया। " उन्होंने कहा, "मैंने दूसरे सेट में जबरदस्त प्रदर्शन किया जबकि कारेन ने तीसरे सेट में कमाल दिखाया लेकिन चौथे सेट में मैंने नियंत्रण बना लिया। "
इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'एपेटाइट' में किया गया है. डंडो ने बताया कि अस्थायी तौर पर कुछ प्रतिभागियों के स्वाद कलिकाओं को मंद कर दिया गया और उसके बाद विभिन्न तरह के चीनी वाले खाद्य पदार्थो को दिया गया. परीक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपना पसंदीदा चीनी स्तर बताया. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों के स्वाद संवेदकों को रोक दिया गया था, उन्होंने ज्यादा मात्रा में चीनी को तरजीह देना शुरू किया.
इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'एपेटाइट' में किया गया है. डंडो ने बताया कि अस्थायी तौर पर कुछ प्रतिभागियों के स्वाद कलिकाओं को मंद कर दिया गया और उसके बाद विभिन्न तरह के चीनी वाले खाद्य पदार्थो को दिया गया. परीक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपना पसंदीदा चीनी स्तर बताया. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों के स्वाद संवेदकों को रोक दिया गया था, उन्होंने ज्यादा मात्रा में चीनी को तरजीह देना शुरू किया.
विटामिन E की हमारी बॉडी में नॉर्मल लेवल रेज़ 5. 5-17 मिलीग्राम/लीटर होती है. Vitamin E Deficiency: बालों की कमजोरी पर विटामिन E (Vitamin E) से जुड़ी चीजों के सेवन का तो आपने भी कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन E अन्य विटामिनों की तरह ही हमारे शरीर के लिए कितना ज़रूरी है. हमारे शरीर को फंक्शन करने के लिए विटामिन E की ज़रूरत पड़ती है. इसी वजह से ये काफी ज़रूरी हो जाता है. विटामिन E मुख्य तौर पर हमारे लिवर (Liver) में जाकर स्टोर होता है. उसके बाद यहीं से हमारी रक्त कोशिकाओं में विटामिन E रिलीज़ होता है. इसे एक्जॉर्ब होने के लिए फैट की ज़रूरत पड़ती है. सामान्य तौर पर विटामिन E की कमी कम ही देखने को मिलती है. हालांकि कुछ प्रीमेच्योर बच्चों में विटामिन E का कम लेवल देखा जाता है. विटामिन E 8 केमिकल फॉर्म में मिलता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड टेस्ट की मदद से डॉक्टर विटामिन E के लेवल का पता लगाते हैं. विटामिन E की हमारी बॉडी में नॉर्मल लेवल रेज़ 5. 5-17 मिलीग्राम/लीटर होती है. 1. मसल्स वीकनेस (Muscle Weakness) - विटामिन E हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central Nervous System) के लिए काफी ज़रूरी होता है. यह बॉडी का मुख्य एंटीऑक्सी़डेंट माना जाता है. इसकी कमी की वजह से ऑक्सी़डेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) पदैा होता है. इस वजह से मसल्स में कमज़ोरी आना शुरू हो जाती है. 2. वॉकिंग (Walking) - हमारे शरीर में अगर विटामिन E की कमी हो जाती है तो इसका असर कुछ विशेष Prkinje न्यूरॉन पर पड़ता है. जिससे ब्रेकडाउन हो जाता है और हमारी सिग्नल को ट्रांसमीट करने की क्षमता पर इसका प्रभाव पड़ता है. ऐसे में चलने में कठनाई होने के साथ ही वॉकिंग कॉर्डिनेशन भी बिगड़ने लगता है. 3. सुन्न होना (Numbness) - विटामिन E की शरीर में कमी होने से यह हमारे नर्व फाइबर्स को डैमेज करती है जो जिस वजह से हमारे दिमाग से शरीर को मिलने वाले सही सिग्नलों में रुकावट आने लगती है. , इस वजह से शरीर का सुन्न होना और बॉडी में सिरहन होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. 4. नज़र बिगड़ना (Vision deterioration) - विटामिन E की कमी का हमारी आंखों पर भी असर होता है. इसकी वजह से रेटिना के लाइट रिसेप्टर्स कमज़ोर हो जाते हैं. इसके अलावा आंखों के अन्य सेल्स में भी कमजोरी आती है. इसकी वजह से समय के साथ ही आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा पैदा हो जाता है. 5. इम्यून सिस्टम (Immune System) - कुछ रिसर्च के अनुसार विटामिन E की कमी की वजह से हमारे इम्यून सेल्स पर भी प्रभाव पड़ता है. खासतौर पर बुजुर्ग लोगों को इस वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. .
विटामिन E की हमारी बॉडी में नॉर्मल लेवल रेज़ पाँच. पाँच-सत्रह मिलीग्राम/लीटर होती है. Vitamin E Deficiency: बालों की कमजोरी पर विटामिन E से जुड़ी चीजों के सेवन का तो आपने भी कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन E अन्य विटामिनों की तरह ही हमारे शरीर के लिए कितना ज़रूरी है. हमारे शरीर को फंक्शन करने के लिए विटामिन E की ज़रूरत पड़ती है. इसी वजह से ये काफी ज़रूरी हो जाता है. विटामिन E मुख्य तौर पर हमारे लिवर में जाकर स्टोर होता है. उसके बाद यहीं से हमारी रक्त कोशिकाओं में विटामिन E रिलीज़ होता है. इसे एक्जॉर्ब होने के लिए फैट की ज़रूरत पड़ती है. सामान्य तौर पर विटामिन E की कमी कम ही देखने को मिलती है. हालांकि कुछ प्रीमेच्योर बच्चों में विटामिन E का कम लेवल देखा जाता है. विटामिन E आठ केमिकल फॉर्म में मिलता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड टेस्ट की मदद से डॉक्टर विटामिन E के लेवल का पता लगाते हैं. विटामिन E की हमारी बॉडी में नॉर्मल लेवल रेज़ पाँच. पाँच-सत्रह मिलीग्राम/लीटर होती है. एक. मसल्स वीकनेस - विटामिन E हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम के लिए काफी ज़रूरी होता है. यह बॉडी का मुख्य एंटीऑक्सी़डेंट माना जाता है. इसकी कमी की वजह से ऑक्सी़डेटिव स्ट्रेस पदैा होता है. इस वजह से मसल्स में कमज़ोरी आना शुरू हो जाती है. दो. वॉकिंग - हमारे शरीर में अगर विटामिन E की कमी हो जाती है तो इसका असर कुछ विशेष Prkinje न्यूरॉन पर पड़ता है. जिससे ब्रेकडाउन हो जाता है और हमारी सिग्नल को ट्रांसमीट करने की क्षमता पर इसका प्रभाव पड़ता है. ऐसे में चलने में कठनाई होने के साथ ही वॉकिंग कॉर्डिनेशन भी बिगड़ने लगता है. तीन. सुन्न होना - विटामिन E की शरीर में कमी होने से यह हमारे नर्व फाइबर्स को डैमेज करती है जो जिस वजह से हमारे दिमाग से शरीर को मिलने वाले सही सिग्नलों में रुकावट आने लगती है. , इस वजह से शरीर का सुन्न होना और बॉडी में सिरहन होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. चार. नज़र बिगड़ना - विटामिन E की कमी का हमारी आंखों पर भी असर होता है. इसकी वजह से रेटिना के लाइट रिसेप्टर्स कमज़ोर हो जाते हैं. इसके अलावा आंखों के अन्य सेल्स में भी कमजोरी आती है. इसकी वजह से समय के साथ ही आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा पैदा हो जाता है. पाँच. इम्यून सिस्टम - कुछ रिसर्च के अनुसार विटामिन E की कमी की वजह से हमारे इम्यून सेल्स पर भी प्रभाव पड़ता है. खासतौर पर बुजुर्ग लोगों को इस वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. .
क्रिस्टिल और फ्रैडी के बीच कुछ नहीं चल रहा है। तो क्या सच में क्रिस्टिल डिसूजा 'रेस 3' स्टार फ्रैडी दारुवाला के साथ इन दिनों रोमांस कर रही है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से मीडिया में रिपोर्ट्स थी कि टीवी एक्ट्रेस क्रिस्टिल डिसूजा करण टैकर से ब्रेकअप के बाद इन दिनों फ्रैडी दारुवाला को डेट कर रही है। ये रिपोर्ट्स मीडिया में जैसे ही आईं एक्ट्रेस ने तुरंत इन खबरों पर अपनी ओर से बयान दिया है। लेकिन ये बयान पढ़ने के बाद आप चौंक जाने वाले हैं। अब इस बयान के बाद तो साफ हो ही गया है कि क्रिस्टिल और फ्रैडी के बीच कुछ नहीं चल रहा है। अरे, चलता तो दूर ये तो एक दूसरे को जानते भी नहीं है। ऐसे में ये खबर सामने कैसे आई ये हम नहीं कह सकते। लेकिन क्रिस्टल ने जरुर अपनी ओर से इन खबरों का जोरदार खंडन कर दिया है। बता दें कि इससे पहले क्रिस्टल अपने को-स्टार करण टैकर को डेट कर रही थी। इनका रिश्ता करीब साल भर तक चला था। लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ कि अचानक इनकी राहें अलग हो गई और इनका ब्रेकअप हो गया। इसके बाद क्रिस्टल और करण ने एक दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो तक कर दिया था। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
क्रिस्टिल और फ्रैडी के बीच कुछ नहीं चल रहा है। तो क्या सच में क्रिस्टिल डिसूजा 'रेस तीन' स्टार फ्रैडी दारुवाला के साथ इन दिनों रोमांस कर रही है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से मीडिया में रिपोर्ट्स थी कि टीवी एक्ट्रेस क्रिस्टिल डिसूजा करण टैकर से ब्रेकअप के बाद इन दिनों फ्रैडी दारुवाला को डेट कर रही है। ये रिपोर्ट्स मीडिया में जैसे ही आईं एक्ट्रेस ने तुरंत इन खबरों पर अपनी ओर से बयान दिया है। लेकिन ये बयान पढ़ने के बाद आप चौंक जाने वाले हैं। अब इस बयान के बाद तो साफ हो ही गया है कि क्रिस्टिल और फ्रैडी के बीच कुछ नहीं चल रहा है। अरे, चलता तो दूर ये तो एक दूसरे को जानते भी नहीं है। ऐसे में ये खबर सामने कैसे आई ये हम नहीं कह सकते। लेकिन क्रिस्टल ने जरुर अपनी ओर से इन खबरों का जोरदार खंडन कर दिया है। बता दें कि इससे पहले क्रिस्टल अपने को-स्टार करण टैकर को डेट कर रही थी। इनका रिश्ता करीब साल भर तक चला था। लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ कि अचानक इनकी राहें अलग हो गई और इनका ब्रेकअप हो गया। इसके बाद क्रिस्टल और करण ने एक दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो तक कर दिया था। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
आईपीएल 2022 (IPL 2022) का आज 59 वां मैच खेला जाएगा। इस मुकाबले में आज मुंबई इंडियंस का सामना करेगी चेन्नई सुपर किंग्स (CSK vs MI) की टीम। खेल। आईपीएल 2022 (IPL 2022) का आज 59 वां मैच खेला जाएगा। इस मुकाबले में आज मुंबई इंडियंस का सामना करेगी चेन्नई सुपर किंग्स (CSK vs MI) की टीम। गौरतलब है कि, इस सीजन दोनों ही टीमों की शुरुआत बेहद खराब हुई थी। टूर्नामेंट में कल यानी 11 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले में दिल्ली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मैच को 8 विकेट से जीत लिया। अब दिल्ली को अपना अलग मैच पंजाब किंग्स के खिलाफ 16 मई को खेलना है। 1. कब होगा मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेले जाने वाला मैच आज यानी 12 मई को खेला जाएगा। 2. किस मैदान पर होगी दोनों टीमों के बीच भिड़ंत? Wankhede Stadium पर होगी मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच भिड़ंत। 3. कितने बजे शुरू होगा मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच यह मैच शाम 7:30 बजे खेला जाएगा जबकि इससे आधे घंटे पहले टॉस होगा। 4. मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच होने वाले मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देखें? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग हॉटस्टार पर देख सकते हैं। मुंबई इंडियंसः रोहित शर्मा (कप्तान), सूर्यकुमार यादव, डिवाल्ड ब्रेविस, ईशान किशन, आर्यन जुयाल, मयंक मार्कंडेय, मुरुगन अश्विन, तिलक वर्मा, रमनदीप सिंह, राहुल बुद्धि, संजय यादव, टिम डेविड, फैबियन एलन, अर्जुन तेंदुलकर, ऋतिक शौकीन, जसप्रीत बुमराह, जोफ्रा आर्चर, अनमोलप्रीत सिंह, काइरन पोलार्ड, डेनियल सैम्स, टाइमल मिल्स, अरशद खान, जयदेव उनादकट, रिले मेरेडिथ, बेसिल थंपी। चेन्नई सुपर किंग्सः रवींद्र जडेजा, एमएस धोनी, ऋतुराज गायकवाड़, ड्वेन ब्रावो, क्रिस जॉर्डन, शिवम दुबे, दीपक चाहर, सिमरजीत सिंह, ड्वेन प्रिटोरियस, अंबाती रायडू, रॉबिन उथप्पा, डेवोन कॉन्वे, मोईन अली, मिचेल सैंटनर, एडम मिल्ने, राजवर्धन हंगरगेकर, प्रशांत सोलंकी, महेश तीक्ष्ण, मुकेश चौधरी, शुभांशु सेनापति, केएम आसिफ, तुषार देशपांडे, सी. हरि निशांत, एन. जगदीशन, के. भगत वर्मा।
आईपीएल दो हज़ार बाईस का आज उनसठ वां मैच खेला जाएगा। इस मुकाबले में आज मुंबई इंडियंस का सामना करेगी चेन्नई सुपर किंग्स की टीम। खेल। आईपीएल दो हज़ार बाईस का आज उनसठ वां मैच खेला जाएगा। इस मुकाबले में आज मुंबई इंडियंस का सामना करेगी चेन्नई सुपर किंग्स की टीम। गौरतलब है कि, इस सीजन दोनों ही टीमों की शुरुआत बेहद खराब हुई थी। टूर्नामेंट में कल यानी ग्यारह अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच खेला गया। इस मुकाबले में दिल्ली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मैच को आठ विकेट से जीत लिया। अब दिल्ली को अपना अलग मैच पंजाब किंग्स के खिलाफ सोलह मई को खेलना है। एक. कब होगा मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेले जाने वाला मैच आज यानी बारह मई को खेला जाएगा। दो. किस मैदान पर होगी दोनों टीमों के बीच भिड़ंत? Wankhede Stadium पर होगी मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच भिड़ंत। तीन. कितने बजे शुरू होगा मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मैच? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच यह मैच शाम सात:तीस बजे खेला जाएगा जबकि इससे आधे घंटे पहले टॉस होगा। चार. मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स के बीच होने वाले मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कहां देखें? मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग हॉटस्टार पर देख सकते हैं। मुंबई इंडियंसः रोहित शर्मा , सूर्यकुमार यादव, डिवाल्ड ब्रेविस, ईशान किशन, आर्यन जुयाल, मयंक मार्कंडेय, मुरुगन अश्विन, तिलक वर्मा, रमनदीप सिंह, राहुल बुद्धि, संजय यादव, टिम डेविड, फैबियन एलन, अर्जुन तेंदुलकर, ऋतिक शौकीन, जसप्रीत बुमराह, जोफ्रा आर्चर, अनमोलप्रीत सिंह, काइरन पोलार्ड, डेनियल सैम्स, टाइमल मिल्स, अरशद खान, जयदेव उनादकट, रिले मेरेडिथ, बेसिल थंपी। चेन्नई सुपर किंग्सः रवींद्र जडेजा, एमएस धोनी, ऋतुराज गायकवाड़, ड्वेन ब्रावो, क्रिस जॉर्डन, शिवम दुबे, दीपक चाहर, सिमरजीत सिंह, ड्वेन प्रिटोरियस, अंबाती रायडू, रॉबिन उथप्पा, डेवोन कॉन्वे, मोईन अली, मिचेल सैंटनर, एडम मिल्ने, राजवर्धन हंगरगेकर, प्रशांत सोलंकी, महेश तीक्ष्ण, मुकेश चौधरी, शुभांशु सेनापति, केएम आसिफ, तुषार देशपांडे, सी. हरि निशांत, एन. जगदीशन, के. भगत वर्मा।
कोपागंज। बीएसएस महाविद्यालय, लाड़नपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तीसरे दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय पाल मौर्या ने किया। इस मौके पर रामप्यारे राय (पूर्व प्रवक्ता) एवं रामअवतार कन्नौजिया (पूर्व प्रवक्ता) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्येय वाक्य है, मैं नहीं आप। जिसके माध्यम से स्वयं सेवक प्रजातांत्रिक ढंग से निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता का समर्थन करता है। हमे सभी मनुष्यों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि मानवता की सेवा की जा सके। यही राष्ट्रीय सेवा योजना का मूलमंत्र है। अन्त में कार्यक्रम अधिकारी ने आये हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डा. रंजना गुप्ता, प्रवक्ता डा. एकनाथ सिंह, डा. सुरेन्द्र यादव, मंजूलता राय, शिविका राय, सतीश राय, अरूणिमा राय, रूबिना ताज, एकबाल अहमद, अमरजीत यादव एवं महाविद्यालय के समस्त स्टाफ रहे।
कोपागंज। बीएसएस महाविद्यालय, लाड़नपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तीसरे दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय पाल मौर्या ने किया। इस मौके पर रामप्यारे राय एवं रामअवतार कन्नौजिया ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्येय वाक्य है, मैं नहीं आप। जिसके माध्यम से स्वयं सेवक प्रजातांत्रिक ढंग से निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता का समर्थन करता है। हमे सभी मनुष्यों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि मानवता की सेवा की जा सके। यही राष्ट्रीय सेवा योजना का मूलमंत्र है। अन्त में कार्यक्रम अधिकारी ने आये हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डा. रंजना गुप्ता, प्रवक्ता डा. एकनाथ सिंह, डा. सुरेन्द्र यादव, मंजूलता राय, शिविका राय, सतीश राय, अरूणिमा राय, रूबिना ताज, एकबाल अहमद, अमरजीत यादव एवं महाविद्यालय के समस्त स्टाफ रहे।
मुंबई. Maharashtra HSC Result 2019 Date: महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (MSBSHSE) एचएससी (HSC) एंड एसएससी (SSC) 2019 रिजल्ट जल्द जारी कर सकता है. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (MSBSHSE) एचएससी (HSC) एंड एसएससी (SSC) 2019 की परीक्षा में जो स्टूडेंट्स उपस्थित हुए थे वो बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट www. mahresult. nic. in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे. हालांकि महाराष्ट्र बोर्ड की तरफ रिजल्ट घोषित करने की अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. सूत्रों की मानें तो इस समय महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (MSBSHSE) एचएससी (HSC) एंड एसएससी (SSC) कॉपियों के मूल्यांकन में जुटा हुआ है. बोर्ड द्वारा लगभग 60 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन भी पूरा कर लिया गया है. जो कॉपियों बची हुई है उनका भी मूल्यांकन जल्द कर लिया जाएगा. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी की परीक्षा में शामिल स्टूडेंट्स सबसे पहले बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं. - महाराष्ट्र बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जानें के बाद रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें. - अपना रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ इंटर करें. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी रिजल्ट 2019 आपके सामने होगा. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी रिजल्ट की एक प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें, क्योंकि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ेगी. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (MSBSHSE) एचएससी (HSC) एंड एसएससी (SSC) कॉपियों का मूल्यांकन करने के बाद रिजल्ट जारी करेगा. रिपोर्ट्स की मानें तो महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन (MSBSHSE) एचएससी (HSC) एंड एसएससी (SSC) का रिजल्ट जून के पहले सप्ताह में जारी कर सकता है. महाराष्ट्र बोर्ड ने पिछले वर्ष एचएससी और एसएससी रिजल्ट 25 मई को जारी किया था. महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी की परीक्षा में इस वर्ष राज्य भर से लाखों लगभग 10 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. महाराष्ट्र बोर्ड की तरफ से एचएससी और एसएससी की परीक्षाएं मार्च में आयोजित की गई थी.
मुंबई. Maharashtra HSC Result दो हज़ार उन्नीस Date: महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन एचएससी एंड एसएससी दो हज़ार उन्नीस रिजल्ट जल्द जारी कर सकता है. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन एचएससी एंड एसएससी दो हज़ार उन्नीस की परीक्षा में जो स्टूडेंट्स उपस्थित हुए थे वो बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट www. mahresult. nic. in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे. हालांकि महाराष्ट्र बोर्ड की तरफ रिजल्ट घोषित करने की अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. सूत्रों की मानें तो इस समय महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन एचएससी एंड एसएससी कॉपियों के मूल्यांकन में जुटा हुआ है. बोर्ड द्वारा लगभग साठ प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन भी पूरा कर लिया गया है. जो कॉपियों बची हुई है उनका भी मूल्यांकन जल्द कर लिया जाएगा. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी की परीक्षा में शामिल स्टूडेंट्स सबसे पहले बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं. - महाराष्ट्र बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जानें के बाद रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें. - अपना रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ इंटर करें. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी रिजल्ट दो हज़ार उन्नीस आपके सामने होगा. - महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी रिजल्ट की एक प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें, क्योंकि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ेगी. महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन एचएससी एंड एसएससी कॉपियों का मूल्यांकन करने के बाद रिजल्ट जारी करेगा. रिपोर्ट्स की मानें तो महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एग्जामिनेशन एचएससी एंड एसएससी का रिजल्ट जून के पहले सप्ताह में जारी कर सकता है. महाराष्ट्र बोर्ड ने पिछले वर्ष एचएससी और एसएससी रिजल्ट पच्चीस मई को जारी किया था. महाराष्ट्र बोर्ड एचएससी और एसएससी की परीक्षा में इस वर्ष राज्य भर से लाखों लगभग दस लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. महाराष्ट्र बोर्ड की तरफ से एचएससी और एसएससी की परीक्षाएं मार्च में आयोजित की गई थी.
India-China । पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच एक बार फिर से चीन की उकसावे वाली हरकतें सामने आई हैं। सेटेलाइट तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि चीन पैंगोंग झील क्षेत्र में LAC के बेहद करीब पुल बना रहा है। तस्वीर से पता चला है कि चीन लद्दाख की पैंगोंग झील के अपने कब्जे वाले क्षेत्र में पुल का निर्माण कर रहा है। यही नहीं ये निर्माण पिछले कुछ महीनों से जारी है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक यह पुल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ेगा, जिससे चीनी सेना को दोनों साइडों तक बहुत जल्दी पहुंचने में मदद मिलेगी। बनकर तैयार हो चुका पुल!गौरतलब है कि यह क्षेत्र पिछले साल दोनों सेनाओं के बीच टकराव का मुख्य बिंदु था। अब कहा जा रहा है कि झील के ऊपर बन रहे इस पुल से चीनी सैनिकों और रसद को वहां पहुंचने के कई रास्ते खुल जाएंगे। पुल निर्माण को लेकर सैटेलाइट तस्वीर जियो इंटेलीजेंस एक्सपर्ट डेमियन सिमोन ने जारी की है। उन्होंने संकेत दिया है कि चीन संभवतः पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर एक पुल का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि यह पुल झील के संकरे रास्ते पर लगभग पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये निर्माण कुछ महीनों से चल रहा है।भारत ने अगस्त 2020 में दक्षिणी तट पर कैलाश रेंज पर प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था, जिससे भारतीय सैनिकों को एक रणनीतिक लाभ मिला था। हालांकि पिछले साल फरवरी में पैंगोंग में डिसएंगेजमेंट यानी सैनिकों की वापसी प्रक्रिया के साथ, भारत तनाव को कम करने के लिए आपसी पुलबैक योजना के हिस्से के रूप में ऊंचाइयों से पीछे हट गया था।चीनी सैनिकों को मिलेगा फायदाअब माना जा रहा है कि ये पुल चीन की सेना को तुरंत एक्शन लेने की सुविधा प्रदान करेगा क्योंकि यह पैंगोंग झील में विवादित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए दूरी और समय में को कम कर देगा। इसके साथ ही ये पुल झील के दोनों किनारों को भी जोड़ देगा, जिससे चीनी सेना किसी भी खतरे से निपटने के लिए दोनों तरफ आसानी से पहुंच सके।चीन ने लागू किया नया कानूनगौरतलब है कि चीन ने 1 जनवरी को अपना नया सीमा कानून लागू किया है जो अपनी सीमा सुरक्षा, गांवों के विकास और सीमाओं के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कहता है और इसने कानून में ऐसी शर्तें भी रखी हैं जिसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में आपातकालीन उपाय किए जा सकें। कानून के लागू होने से ठीक पहले चीन ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदल दिए। हालांकि कानून विशेष रूप से भारत के लिए नहीं है, लेकिन इसके महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं क्योंकि चीन के साथ सीमा विवाद मई 2020 से बढ़ गया है।
India-China । पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच एक बार फिर से चीन की उकसावे वाली हरकतें सामने आई हैं। सेटेलाइट तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि चीन पैंगोंग झील क्षेत्र में LAC के बेहद करीब पुल बना रहा है। तस्वीर से पता चला है कि चीन लद्दाख की पैंगोंग झील के अपने कब्जे वाले क्षेत्र में पुल का निर्माण कर रहा है। यही नहीं ये निर्माण पिछले कुछ महीनों से जारी है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक यह पुल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ेगा, जिससे चीनी सेना को दोनों साइडों तक बहुत जल्दी पहुंचने में मदद मिलेगी। बनकर तैयार हो चुका पुल!गौरतलब है कि यह क्षेत्र पिछले साल दोनों सेनाओं के बीच टकराव का मुख्य बिंदु था। अब कहा जा रहा है कि झील के ऊपर बन रहे इस पुल से चीनी सैनिकों और रसद को वहां पहुंचने के कई रास्ते खुल जाएंगे। पुल निर्माण को लेकर सैटेलाइट तस्वीर जियो इंटेलीजेंस एक्सपर्ट डेमियन सिमोन ने जारी की है। उन्होंने संकेत दिया है कि चीन संभवतः पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर एक पुल का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि यह पुल झील के संकरे रास्ते पर लगभग पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये निर्माण कुछ महीनों से चल रहा है।भारत ने अगस्त दो हज़ार बीस में दक्षिणी तट पर कैलाश रेंज पर प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था, जिससे भारतीय सैनिकों को एक रणनीतिक लाभ मिला था। हालांकि पिछले साल फरवरी में पैंगोंग में डिसएंगेजमेंट यानी सैनिकों की वापसी प्रक्रिया के साथ, भारत तनाव को कम करने के लिए आपसी पुलबैक योजना के हिस्से के रूप में ऊंचाइयों से पीछे हट गया था।चीनी सैनिकों को मिलेगा फायदाअब माना जा रहा है कि ये पुल चीन की सेना को तुरंत एक्शन लेने की सुविधा प्रदान करेगा क्योंकि यह पैंगोंग झील में विवादित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए दूरी और समय में को कम कर देगा। इसके साथ ही ये पुल झील के दोनों किनारों को भी जोड़ देगा, जिससे चीनी सेना किसी भी खतरे से निपटने के लिए दोनों तरफ आसानी से पहुंच सके।चीन ने लागू किया नया कानूनगौरतलब है कि चीन ने एक जनवरी को अपना नया सीमा कानून लागू किया है जो अपनी सीमा सुरक्षा, गांवों के विकास और सीमाओं के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कहता है और इसने कानून में ऐसी शर्तें भी रखी हैं जिसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में आपातकालीन उपाय किए जा सकें। कानून के लागू होने से ठीक पहले चीन ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के पंद्रह स्थानों के नाम बदल दिए। हालांकि कानून विशेष रूप से भारत के लिए नहीं है, लेकिन इसके महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं क्योंकि चीन के साथ सीमा विवाद मई दो हज़ार बीस से बढ़ गया है।
नई दिल्ली : दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिख व्यक्ति और उसके बेटे पर हमला करने के मामले में दोषी पाए जाने पर दिल्ली पुलिस के दो कांस्टेबल बर्खास्त कर दिए गए हैं. पुलिस ने यह जानकारी दी. पिछले महीने 16 जून को एक सिख व्यक्ति और उसके बेटे पर दिन-दहाड़े पिटाई हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उसकी मिनी टैक्सी के एक पीसीआर वैन से टकराने के बाद विवाद बढ़ गया था. पुलिस ने सिख व्यक्ति के व्यवहार पर सवाल उठाए थे, सिख व्यक्ति ने कथित रूप से अपनी तलवार से एक पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया था. मामले में पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने अमित शाह से दखल की मांग की थी. संयुक्त पुलिस आयुक्त ने शुरुआती जांच के बाद कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था. पुलिस के अनुसार, कांस्टेबल पुष्पिंदर शेखावत और कांस्टेबल सत्य प्रकाश को सिख व्यक्ति और उसके नाबालिग बेटे पर हमला किया था. पुलिस ने कहा कि उन्हें 16 जून को घटना के बाद निलंबित कर दिया गया था, और जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. गौरतलब है कि उत्तरी दिल्ली में हुई इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में चालक एक पुलिसकर्मी को तलवार से धमकाते हुए और उसे पकड़ने की कोशिश करने पर पुलिसकर्मी को घायल करते हुए दिख रहा था. इसके जवाब में पुलिसकर्मियों ने चालक को लाठियों से पीटा और लात मारी थी. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली पुलिस द्वारा एक सिख टेंपो चालक की पिटाई की निंदा की थी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दखल देने का आग्रह किया था. उन्होंने ट्वीट किया था जिसके बाद यह मामला और गंभीर हो गया था. (आईएएनएस के इनपुट्स के साथ)
नई दिल्ली : दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिख व्यक्ति और उसके बेटे पर हमला करने के मामले में दोषी पाए जाने पर दिल्ली पुलिस के दो कांस्टेबल बर्खास्त कर दिए गए हैं. पुलिस ने यह जानकारी दी. पिछले महीने सोलह जून को एक सिख व्यक्ति और उसके बेटे पर दिन-दहाड़े पिटाई हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उसकी मिनी टैक्सी के एक पीसीआर वैन से टकराने के बाद विवाद बढ़ गया था. पुलिस ने सिख व्यक्ति के व्यवहार पर सवाल उठाए थे, सिख व्यक्ति ने कथित रूप से अपनी तलवार से एक पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया था. मामले में पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने अमित शाह से दखल की मांग की थी. संयुक्त पुलिस आयुक्त ने शुरुआती जांच के बाद कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था. पुलिस के अनुसार, कांस्टेबल पुष्पिंदर शेखावत और कांस्टेबल सत्य प्रकाश को सिख व्यक्ति और उसके नाबालिग बेटे पर हमला किया था. पुलिस ने कहा कि उन्हें सोलह जून को घटना के बाद निलंबित कर दिया गया था, और जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. गौरतलब है कि उत्तरी दिल्ली में हुई इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में चालक एक पुलिसकर्मी को तलवार से धमकाते हुए और उसे पकड़ने की कोशिश करने पर पुलिसकर्मी को घायल करते हुए दिख रहा था. इसके जवाब में पुलिसकर्मियों ने चालक को लाठियों से पीटा और लात मारी थी. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली पुलिस द्वारा एक सिख टेंपो चालक की पिटाई की निंदा की थी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दखल देने का आग्रह किया था. उन्होंने ट्वीट किया था जिसके बाद यह मामला और गंभीर हो गया था.
यह कि घरेलू उद्योग ने वह सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं जो युक्तिसंगत रूप से उपलब्ध थे, खासकर इस तथ्य पर विचार करते हुए कि घरेलू उद्योग ने इस जांच की अवधि के दौरान संबद्ध देश से संबद्ध वस्तु का स्वयं आयात नहीं किया है। घरेलू उद्योग ने निर्यात कीमत के समायोजन का दावा अपनी बाजार आसूचना में अनुसार किया है जिसे निर्दिष्ट प्राधिकारी की संगत परम्परा के अनुसार जांच की शुरूआत करने के लिए एक पर्याप्त साक्ष्य माना जाता है। यह कि इस विचाराधीन उत्पाद की लागत और कीमत के संबंध में मोटाई आदि के रूप में अंतरों का समाधान करने और समुचित तुलना करने के लिए टन आधार पर प्रदान कराए गए है। यह कि सामान्य मूल्य, गैर-क्षतिकारी कीमत आदि का परिकलन करने के लिए जांच की अवधि की विनिमय दर को अपनाना पाटनरोधी प्राधिकारियों द्वारा अपनाई जा रही एक मानक प्रक्रिया है जो तर्क ठोस आर्थिक और लेखाकरण तर्काधार पर आधारित है। प्राधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया को चीन जन गण. से शीट ग्लास और पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरेबिया आदि से फ्लोट ग्लास जैसे कई मामलों में निरंतर रूप से अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त, इन पक्षकारों ने उक्त अधिगम में किसी विधिक या तर्कसंगत अशक्तता का उल्लेख नहीं किया है। यह कि हितबद्ध पक्षकारों का यह तर्क के इस निर्णायक समीक्षा को खारिज कर दिए जाने की जरूरत है क्योंकि समीक्षा की कार्रवाई को एक वर्ष से अधिक के समय तक नहीं चलाया जा सकता है, क्योंकि नियम 32(2) के साथ पठित अधिनियम की धारा 9क (5) केंद्रीय सरकार पाटनरोधी शुल्क का उदग्रहण केवल एक वर्ष की अवधि के लिए करने की शक्ति प्रदान की गई है, यह तर्क अतर्कित और बिना किसी तर्कसंगत खूबी के है। इस प्रसंग में धारा 9क(5) के प्रावधानों की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया जिसमें स्वयं यह प्रावधान किया गया है कि शुल्क का अधिरोपण इसके अधिरोपण की तारीख से पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। प्रथम परंतुक के अनुसार इस अवधि को अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए पुनः बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते कि उसमें उल्लिखित शर्तें पूरी होती हों। द्वितीय उपबंध में जांच का निष्कर्ष लंबित रहने तक शुल्क के संग्रहण की अवधि को को एक अन्य वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। तदनुसार, यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि किसी जांच की निरंतरता को छह वर्ष की अवधि से अधिक समय तक जारी रखने का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं है, यद्यपि द्वितीय उपबंध के अंतर्गत यह प्रतिबंध हो सकता है कि शुल्क एक वर्ष से अधिक तक के समय के लिए प्रभावी नहीं रखा जा सकता है। स्पष्टतः, वाक्यांश "एक वर्ष से अधिक की अवधि" को शुल्क के संदर्भ में पढ़ा जा सकता है न कि समीक्षा जांच के संदर्भ में। इसके अतिरिक्त, पाटनरोधी नियमावली के नियम 17 की ओर प्राधिकारी का ध्यान आकृष्ट किया जाता है जिसमें जांच को पूरा करने के लिए 18 माह तक की समयावधि की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त, नियम 23 (3) स्पष्टतः यह उल्लेख करता है कि समीक्षा जांच के मामले में नियम 6, 7, 8, 9, 10, 11, 16, 17, 18, 19 और 20 के प्रावधान यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे। तदनुसार, नियम 17 के प्रावधान निर्णायक समीक्षा मामलों पर भी लागू होते है। नियम 17(1) का प्रथम प्रावधान विशेष रूप से यह उल्लेख करता है कि केंद्रीय सरकार जांच को पूरा करने के लिए इस एक वर्ष की अवधि को अगले छह माह तक के लिए पुनः बढ़ा सकती है। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय (कुम्हो पेट्रोकैमिकल्स कंपनी लिमिटेड बनाम भारत संघ के एनबीआर मामले में) के अभी हाल ही के निर्णय की ओर माननीय प्राधिकारी का ध्यान आकृष्ट किया जाता है जिसमें प्राधिकारी को इस तथ्य के बावजूद भी जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी कि पाटनरोधी शुल्क की अवधि पांच वर्ष से अधिक हो रही है। पुनः यह प्रस्तुत किया जाता है कि धारा 9क (5) के उपबंधों, नियम 23 और 17 का केवल सुमेलीकृत निर्वचन ही शुल्क के संग्रहण के परंतुक के साथ पढ़ा जाएगा जो जांच की कार्रवाई पूरी करने की अनुमत अवधि से पृथक है। कोई अन्य निर्वचत निश्चय की धारा 9क ( 5 ) में प्रावधान किए गए घरेलू उद्योग के निहित अधिकारों का उल्लंघन होगा। किसी भी हाल में, नियम 23 के इस ढंग से नहीं पढ़ा जा सकता है जिससे यह विधायिका द्वारा निहित अधिकारों का ध्यान कर ले। विधि की यह एक सुस्थापित प्रक्रिया है कि किसी नियम का निर्वचन इस तरह से नहीं किया जा सकता है जिससे मुख्य अधिनियम के उद्देश्य एवं प्रयोजन हताश हों । इसलिए, यह पर्याप्ततः स्पष्ट है कि निर्णायक समीक्षा मामले में कार्रवाई एक वर्ष से अधिक के समय तक के लिए जारी रखी जा सकती है और इस अधिरोध का सर्वोत्तम उपयोग शुल्क का छह वर्षों से अधिक की अवधि के लिए संग्रहण पर ही किया जा सकता है। अतः प्राधिकारी के समक्ष कोई विधिक अदृढ़ता और कमी नहीं है। यह कि प्राधिकारी ने यह संगत दृष्टिकोण अपनाया है कि पाटनरोधी शुल्क का उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना है और संबद्ध देशों से पाटित आयातों के क्षतिकारी प्रभाव के कारण घरेलू उद्योग को राहत प्रदान करना अथवा शुल्क को वापस लिए जाने की स्थिति में पाटन एवं क्षति की निरंतरता बने रहने / उसकी पुनरावृत्ति होने की चुनौती से राहत प्रदान करना है।
यह कि घरेलू उद्योग ने वह सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं जो युक्तिसंगत रूप से उपलब्ध थे, खासकर इस तथ्य पर विचार करते हुए कि घरेलू उद्योग ने इस जांच की अवधि के दौरान संबद्ध देश से संबद्ध वस्तु का स्वयं आयात नहीं किया है। घरेलू उद्योग ने निर्यात कीमत के समायोजन का दावा अपनी बाजार आसूचना में अनुसार किया है जिसे निर्दिष्ट प्राधिकारी की संगत परम्परा के अनुसार जांच की शुरूआत करने के लिए एक पर्याप्त साक्ष्य माना जाता है। यह कि इस विचाराधीन उत्पाद की लागत और कीमत के संबंध में मोटाई आदि के रूप में अंतरों का समाधान करने और समुचित तुलना करने के लिए टन आधार पर प्रदान कराए गए है। यह कि सामान्य मूल्य, गैर-क्षतिकारी कीमत आदि का परिकलन करने के लिए जांच की अवधि की विनिमय दर को अपनाना पाटनरोधी प्राधिकारियों द्वारा अपनाई जा रही एक मानक प्रक्रिया है जो तर्क ठोस आर्थिक और लेखाकरण तर्काधार पर आधारित है। प्राधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया को चीन जन गण. से शीट ग्लास और पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरेबिया आदि से फ्लोट ग्लास जैसे कई मामलों में निरंतर रूप से अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त, इन पक्षकारों ने उक्त अधिगम में किसी विधिक या तर्कसंगत अशक्तता का उल्लेख नहीं किया है। यह कि हितबद्ध पक्षकारों का यह तर्क के इस निर्णायक समीक्षा को खारिज कर दिए जाने की जरूरत है क्योंकि समीक्षा की कार्रवाई को एक वर्ष से अधिक के समय तक नहीं चलाया जा सकता है, क्योंकि नियम बत्तीस के साथ पठित अधिनियम की धारा नौक केंद्रीय सरकार पाटनरोधी शुल्क का उदग्रहण केवल एक वर्ष की अवधि के लिए करने की शक्ति प्रदान की गई है, यह तर्क अतर्कित और बिना किसी तर्कसंगत खूबी के है। इस प्रसंग में धारा नौक के प्रावधानों की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया जिसमें स्वयं यह प्रावधान किया गया है कि शुल्क का अधिरोपण इसके अधिरोपण की तारीख से पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। प्रथम परंतुक के अनुसार इस अवधि को अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए पुनः बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते कि उसमें उल्लिखित शर्तें पूरी होती हों। द्वितीय उपबंध में जांच का निष्कर्ष लंबित रहने तक शुल्क के संग्रहण की अवधि को को एक अन्य वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। तदनुसार, यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि किसी जांच की निरंतरता को छह वर्ष की अवधि से अधिक समय तक जारी रखने का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं है, यद्यपि द्वितीय उपबंध के अंतर्गत यह प्रतिबंध हो सकता है कि शुल्क एक वर्ष से अधिक तक के समय के लिए प्रभावी नहीं रखा जा सकता है। स्पष्टतः, वाक्यांश "एक वर्ष से अधिक की अवधि" को शुल्क के संदर्भ में पढ़ा जा सकता है न कि समीक्षा जांच के संदर्भ में। इसके अतिरिक्त, पाटनरोधी नियमावली के नियम सत्रह की ओर प्राधिकारी का ध्यान आकृष्ट किया जाता है जिसमें जांच को पूरा करने के लिए अट्ठारह माह तक की समयावधि की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त, नियम तेईस स्पष्टतः यह उल्लेख करता है कि समीक्षा जांच के मामले में नियम छः, सात, आठ, नौ, दस, ग्यारह, सोलह, सत्रह, अट्ठारह, उन्नीस और बीस के प्रावधान यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे। तदनुसार, नियम सत्रह के प्रावधान निर्णायक समीक्षा मामलों पर भी लागू होते है। नियम सत्रह का प्रथम प्रावधान विशेष रूप से यह उल्लेख करता है कि केंद्रीय सरकार जांच को पूरा करने के लिए इस एक वर्ष की अवधि को अगले छह माह तक के लिए पुनः बढ़ा सकती है। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के अभी हाल ही के निर्णय की ओर माननीय प्राधिकारी का ध्यान आकृष्ट किया जाता है जिसमें प्राधिकारी को इस तथ्य के बावजूद भी जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी कि पाटनरोधी शुल्क की अवधि पांच वर्ष से अधिक हो रही है। पुनः यह प्रस्तुत किया जाता है कि धारा नौक के उपबंधों, नियम तेईस और सत्रह का केवल सुमेलीकृत निर्वचन ही शुल्क के संग्रहण के परंतुक के साथ पढ़ा जाएगा जो जांच की कार्रवाई पूरी करने की अनुमत अवधि से पृथक है। कोई अन्य निर्वचत निश्चय की धारा नौक में प्रावधान किए गए घरेलू उद्योग के निहित अधिकारों का उल्लंघन होगा। किसी भी हाल में, नियम तेईस के इस ढंग से नहीं पढ़ा जा सकता है जिससे यह विधायिका द्वारा निहित अधिकारों का ध्यान कर ले। विधि की यह एक सुस्थापित प्रक्रिया है कि किसी नियम का निर्वचन इस तरह से नहीं किया जा सकता है जिससे मुख्य अधिनियम के उद्देश्य एवं प्रयोजन हताश हों । इसलिए, यह पर्याप्ततः स्पष्ट है कि निर्णायक समीक्षा मामले में कार्रवाई एक वर्ष से अधिक के समय तक के लिए जारी रखी जा सकती है और इस अधिरोध का सर्वोत्तम उपयोग शुल्क का छह वर्षों से अधिक की अवधि के लिए संग्रहण पर ही किया जा सकता है। अतः प्राधिकारी के समक्ष कोई विधिक अदृढ़ता और कमी नहीं है। यह कि प्राधिकारी ने यह संगत दृष्टिकोण अपनाया है कि पाटनरोधी शुल्क का उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना है और संबद्ध देशों से पाटित आयातों के क्षतिकारी प्रभाव के कारण घरेलू उद्योग को राहत प्रदान करना अथवा शुल्क को वापस लिए जाने की स्थिति में पाटन एवं क्षति की निरंतरता बने रहने / उसकी पुनरावृत्ति होने की चुनौती से राहत प्रदान करना है।
पहले से ही आतंक की मार झेल रहे मिडिल ईस्ट (Middle East) को एक के बाद एक आए 145 भूकंप के झटकों ने तबाह कर दिया है. तुर्की (Turkey) और सीरिया (Syria) में आए भूकंप में कुल 5 हजार से भी अधिक लोग अपनी जांन गंवा चुके हैं. तुर्की के राष्ट्रपति (Turkey President) तैयप एर्दोगन ने देश में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. मंगलवार की सुबह भी तुर्की में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. तुर्किए के उपराष्ट्रपति ने कहा है कि आपदा में मरने वाले लोगों की संख्या अभी बढ़ेगी. एक आंकड़े के मुताबिक हादसे में कुल 5600 इमारतें जमींदोज होने का अनुमान है. भारत ने भी इस भीषम त्रासदी में मदद के लिए एनडीआरएफ (NDRF) की दो टीमें राहत सामग्री समेत रवाना की हैं. मंगलवार सुबह इंडियन एयर फोर्स के विमान सी-17 से इन टीमों को रवाना किया गया है. इस टीम में स्निफर डॉग भी शामिल हैं. भारत के बाद तुर्की की मदद के लिए अब न्यूजीलैंड (New Zealand) भी आगे आया है. जीलैंड ने रेड क्रीसेंट को 6 लाख 32 हजार डॉलर और सीरियाई अरब रेड क्रिसेंट को 3 लाख 16 हजार डॉलर की मदद देने की घोषणा की है.
पहले से ही आतंक की मार झेल रहे मिडिल ईस्ट को एक के बाद एक आए एक सौ पैंतालीस भूकंप के झटकों ने तबाह कर दिया है. तुर्की और सीरिया में आए भूकंप में कुल पाँच हजार से भी अधिक लोग अपनी जांन गंवा चुके हैं. तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने देश में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. मंगलवार की सुबह भी तुर्की में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. तुर्किए के उपराष्ट्रपति ने कहा है कि आपदा में मरने वाले लोगों की संख्या अभी बढ़ेगी. एक आंकड़े के मुताबिक हादसे में कुल पाँच हज़ार छः सौ इमारतें जमींदोज होने का अनुमान है. भारत ने भी इस भीषम त्रासदी में मदद के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें राहत सामग्री समेत रवाना की हैं. मंगलवार सुबह इंडियन एयर फोर्स के विमान सी-सत्रह से इन टीमों को रवाना किया गया है. इस टीम में स्निफर डॉग भी शामिल हैं. भारत के बाद तुर्की की मदद के लिए अब न्यूजीलैंड भी आगे आया है. जीलैंड ने रेड क्रीसेंट को छः लाख बत्तीस हजार डॉलर और सीरियाई अरब रेड क्रिसेंट को तीन लाख सोलह हजार डॉलर की मदद देने की घोषणा की है.
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर जिले के खुर्जा के मूल निवासी ब्रिजालाल (46) पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर थाने में तैनात थे। उन्हें एलबीएस अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) प्रियंका कश्यप ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मुर्दाघर में भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, ब्रिजालाल पर 30 लाख रुपये का कर्ज था। डीसीपी ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं, जिन्हें सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी कोणों से मामले की जांच कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर जिले के खुर्जा के मूल निवासी ब्रिजालाल पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर थाने में तैनात थे। उन्हें एलबीएस अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस उपायुक्त प्रियंका कश्यप ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मुर्दाघर में भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, ब्रिजालाल पर तीस लाख रुपये का कर्ज था। डीसीपी ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं, जिन्हें सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी कोणों से मामले की जांच कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपात कोष (यूनिसेफ़) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हिंसा के कारण, क़रीब 5 लाख बच्चों की जान को ख़तरा है। फ़्रांस से राफ़ेल युद्धक विमानों की ख़रीद में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में दोबारा सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। तुर्की, क़तर, चीन, जापान और इराक़ ने अलग अलग बयान जारी करके आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित करने के अमरीका के क़दम की कड़ी आलोचना की है। रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर कथित रूप से ग़लत सूचना अपलोड करने के आरोप में कोर्ट के दो पूर्व कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है। अमरीका ने ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स को आतंकी संगठन घोषित किया तो इसे ईरान के ख़िलाफ़ हर तरफ़ से उत्तेजक क़दम उठाने की अमरीकी रणनीति का एक भाग माना जाएगा। अमरीकी सरकार ने ईरान की राष्ट्रीय सेना के एक अंग आईआरजीसी को आतंकवादी गुट घोषित करके एक बहुत ही ख़तरनाक खेल की शुरूआत कर दी है। इस्राईली प्रधान मंत्री नेतनयाहू के भ्रष्टाचार के स्कैंडल में फंसने और आर्थिक चुनौतियों के बाद, इस्राईल में 9 अप्रैल को समय पूर्व संसदीय चुनावों का आयोजन किया गया। इस्लामी कैलेन्डर के शाबान महीने की पहली दहाई में कई महापुरुषों और इमामों के जन्म दिन के उपलक्ष्य में इराक़ और ईरान सहित विश्व के कई देशों में जश्न मनाया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपात कोष ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हिंसा के कारण, क़रीब पाँच लाख बच्चों की जान को ख़तरा है। फ़्रांस से राफ़ेल युद्धक विमानों की ख़रीद में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में दोबारा सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। तुर्की, क़तर, चीन, जापान और इराक़ ने अलग अलग बयान जारी करके आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित करने के अमरीका के क़दम की कड़ी आलोचना की है। रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर कथित रूप से ग़लत सूचना अपलोड करने के आरोप में कोर्ट के दो पूर्व कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है। अमरीका ने ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स को आतंकी संगठन घोषित किया तो इसे ईरान के ख़िलाफ़ हर तरफ़ से उत्तेजक क़दम उठाने की अमरीकी रणनीति का एक भाग माना जाएगा। अमरीकी सरकार ने ईरान की राष्ट्रीय सेना के एक अंग आईआरजीसी को आतंकवादी गुट घोषित करके एक बहुत ही ख़तरनाक खेल की शुरूआत कर दी है। इस्राईली प्रधान मंत्री नेतनयाहू के भ्रष्टाचार के स्कैंडल में फंसने और आर्थिक चुनौतियों के बाद, इस्राईल में नौ अप्रैल को समय पूर्व संसदीय चुनावों का आयोजन किया गया। इस्लामी कैलेन्डर के शाबान महीने की पहली दहाई में कई महापुरुषों और इमामों के जन्म दिन के उपलक्ष्य में इराक़ और ईरान सहित विश्व के कई देशों में जश्न मनाया जा रहा है।
सागर जब आफिस से घर लौटा तो देखा - -पत्नी का अहंकार बहुत बढ़ गया है । वह बैठी बैठी कुढ़ रही है। कुछ बोलती नहीं ! उसका चेहरा तमतमाकर लाल हो गधा है और जैसे पति को देखकर उसका रंग और भी गाढ़ा हो गया हो । मौका ठीक नहीं है। कुछ भी बोलना उचित न होगा । अगर बोला जायगा तो बुराई वापस-उत्तर में मिलेगी । तब भला सागर क्योंकर बोले ? माना, मानसी से बोलना भीष्ट है। किन्तु कुछ तो समय की बात और कुछ हाँ, और क्या बात आगे चलेगी कि बस वह बिगड़ ही उठेगी। भर का थका-माँदा सागर यह सब सत्कार संभाल भी सकेगा ? तक, अप्रत्याशित रूप से, उसके अन्दर ही अन्दर हंसी की एक रेखा उठी और उठकर ज्यों ही बाहर आने को हुई कि उसको मूर्छा-सी आने लगी । बेचारे को इस हंसी-विनोद का मूल्य बड़ा तीखा मिलेगा न ? मुँह छिपा सर से अंग्रेजी टोपी उतार कर हाथ में हिलाते हुए अपने कक्ष में आ ' गया। पहले सूट, फिर टाई, फिर कालर और मोजे सभी कुछ बारी बारी से उतार कर रख दिये । तब कानों में कुछ तीखी-सी आवाज़ • आयी। पूरी बात वह सुन नहीं सका। इतना भर जान सका कि नौकर पर मानसी खफा हो रही है। क्यों, ऐसी क्या बात हो गई, सो वह नहीं जान सका । पर जानने की बात उसके जी में न उठी ही, ऐसी बात नहीं। अभी कुछ समय बाद वह सब कुछ जान-बूझ लेगा। इतनी
सागर जब आफिस से घर लौटा तो देखा - -पत्नी का अहंकार बहुत बढ़ गया है । वह बैठी बैठी कुढ़ रही है। कुछ बोलती नहीं ! उसका चेहरा तमतमाकर लाल हो गधा है और जैसे पति को देखकर उसका रंग और भी गाढ़ा हो गया हो । मौका ठीक नहीं है। कुछ भी बोलना उचित न होगा । अगर बोला जायगा तो बुराई वापस-उत्तर में मिलेगी । तब भला सागर क्योंकर बोले ? माना, मानसी से बोलना भीष्ट है। किन्तु कुछ तो समय की बात और कुछ हाँ, और क्या बात आगे चलेगी कि बस वह बिगड़ ही उठेगी। भर का थका-माँदा सागर यह सब सत्कार संभाल भी सकेगा ? तक, अप्रत्याशित रूप से, उसके अन्दर ही अन्दर हंसी की एक रेखा उठी और उठकर ज्यों ही बाहर आने को हुई कि उसको मूर्छा-सी आने लगी । बेचारे को इस हंसी-विनोद का मूल्य बड़ा तीखा मिलेगा न ? मुँह छिपा सर से अंग्रेजी टोपी उतार कर हाथ में हिलाते हुए अपने कक्ष में आ ' गया। पहले सूट, फिर टाई, फिर कालर और मोजे सभी कुछ बारी बारी से उतार कर रख दिये । तब कानों में कुछ तीखी-सी आवाज़ • आयी। पूरी बात वह सुन नहीं सका। इतना भर जान सका कि नौकर पर मानसी खफा हो रही है। क्यों, ऐसी क्या बात हो गई, सो वह नहीं जान सका । पर जानने की बात उसके जी में न उठी ही, ऐसी बात नहीं। अभी कुछ समय बाद वह सब कुछ जान-बूझ लेगा। इतनी
शिवपुरी। जिले के मायापुर थाना क्षेत्रान्तर्गत भैरोघाटी रोड पर एक शातिर चोर ने घाटी पर लगे लोहे के पाईप चुरा लिये है। पुलिस ने फरियादी रोड़ क पनी के मेनेजर की रिपोर्ट पर आरोपी नामदर्ज आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार जिले के मायापुर थाना क्षेत्र के भैरोघाटी रोड पर पीडव्यलूडी की रोड़ निर्माणाधीन रोड पर घाटी में लगे लोहे के बैरियल को तोड कर बेरियल में लगे लोहे के 15 पाईप को अरविंद जोशी चोरी कर ले गया। उक्त बात की शिकायत बागड कंपनी के मेनेजर विक्रम सिंह लोधी की रिपोर्ट पर आरोपी अंरविंद जोशी के खिलाफ धारा 379 ताहि के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
शिवपुरी। जिले के मायापुर थाना क्षेत्रान्तर्गत भैरोघाटी रोड पर एक शातिर चोर ने घाटी पर लगे लोहे के पाईप चुरा लिये है। पुलिस ने फरियादी रोड़ क पनी के मेनेजर की रिपोर्ट पर आरोपी नामदर्ज आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार जिले के मायापुर थाना क्षेत्र के भैरोघाटी रोड पर पीडव्यलूडी की रोड़ निर्माणाधीन रोड पर घाटी में लगे लोहे के बैरियल को तोड कर बेरियल में लगे लोहे के पंद्रह पाईप को अरविंद जोशी चोरी कर ले गया। उक्त बात की शिकायत बागड कंपनी के मेनेजर विक्रम सिंह लोधी की रिपोर्ट पर आरोपी अंरविंद जोशी के खिलाफ धारा तीन सौ उन्यासी ताहि के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
थालास्सेरी में भंयकर गर्मी और भारी बारिश होती है अतः इन दोनों ही मौसम को नकारें। इस जगह को घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून के बाद का और सर्दियों के अंत के बीच ( अक्टूबर से फरवरी ) का होता है। जो भी पर्यटक थालास्सेरी में अपनी सैर के दौरान यहां के स्थानीय त्यौहारों जैसे - ओणम का मजा उठाना चाहते हैं वह अगस्त से सितम्बर के बीच आने का प्लान बनाएं। थालास्सेरी में गर्मियां, गर्म और शुष्क होती हैं। मार्च के महीने से शुरू होने वाली गर्मी थालास्सेरी में मई के अंत तक पड़ती है। इस सीजन के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। थालास्सेरी की सैर के लिए इस अवधि में आने की सलाह नहीं दी जाती है। जो भी पर्यटक इस मौसम में इस शहर की सैर के लिए आना चाहते हैं वह अपने साथ सूती कपड़ों को लाएं। केरल के अन्य शहरों की तरह, थालास्सेरी में मानसून की शुरूआत जून से होती है और सितम्बर तक होती है। तटीय रेखा की समीपता के कारण, शहर में भारी वर्षा होती है। मानसून के दौरान पर्यटकों को थालास्सेरी को भ्रमण करने की सलाह नहीं दी जाती है क्यूंकि इस दौरान हर समय चिपचिप करने वाली बारिश होती रहती है ऐसे में पर्यटन स्थलों का लुत्फ उठाना संभव नहीं है। थालास्सेरी में सर्दियों के दौरान सबसे खुशनुमा और स्वागत करने वाली जलवायु रहती है। दिसम्बर से यहां सर्दियां दस्तक देती हैं और फरवरी तक पड़ती हैं। इस दौरान तापमान 20 डिग्री से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है। यह मौसम इस क्षेत्र में किलों, बागानों और ऐतिहासिक इमारतों को भ्रमण करने का आदर्श समय है।
थालास्सेरी में भंयकर गर्मी और भारी बारिश होती है अतः इन दोनों ही मौसम को नकारें। इस जगह को घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून के बाद का और सर्दियों के अंत के बीच का होता है। जो भी पर्यटक थालास्सेरी में अपनी सैर के दौरान यहां के स्थानीय त्यौहारों जैसे - ओणम का मजा उठाना चाहते हैं वह अगस्त से सितम्बर के बीच आने का प्लान बनाएं। थालास्सेरी में गर्मियां, गर्म और शुष्क होती हैं। मार्च के महीने से शुरू होने वाली गर्मी थालास्सेरी में मई के अंत तक पड़ती है। इस सीजन के दौरान तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। थालास्सेरी की सैर के लिए इस अवधि में आने की सलाह नहीं दी जाती है। जो भी पर्यटक इस मौसम में इस शहर की सैर के लिए आना चाहते हैं वह अपने साथ सूती कपड़ों को लाएं। केरल के अन्य शहरों की तरह, थालास्सेरी में मानसून की शुरूआत जून से होती है और सितम्बर तक होती है। तटीय रेखा की समीपता के कारण, शहर में भारी वर्षा होती है। मानसून के दौरान पर्यटकों को थालास्सेरी को भ्रमण करने की सलाह नहीं दी जाती है क्यूंकि इस दौरान हर समय चिपचिप करने वाली बारिश होती रहती है ऐसे में पर्यटन स्थलों का लुत्फ उठाना संभव नहीं है। थालास्सेरी में सर्दियों के दौरान सबसे खुशनुमा और स्वागत करने वाली जलवायु रहती है। दिसम्बर से यहां सर्दियां दस्तक देती हैं और फरवरी तक पड़ती हैं। इस दौरान तापमान बीस डिग्री से बत्तीस डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है। यह मौसम इस क्षेत्र में किलों, बागानों और ऐतिहासिक इमारतों को भ्रमण करने का आदर्श समय है।
काम को अच्छी तरह करने के लिए उस में रस लेना चहिए और काम में रस आए इसके लिए काम आप की पसंद का होना चाहिए।जिन लोगों ने राष्ट्र, संस्कृति जैसे निर्माण के बड़े बडे़ काम किए है वे सभी तत्पर और जागृत कार्यकर्त्ता थे।जय जय कार के फेर में न पड़ कर अच्छे फल के लिए कोशिश करते रहें। पीयूष गोयल एक ऐसे किरदार है जो एक ख़ास तरह की कला के जरिए देश विदेश में नाम कमा रहे हैं। दर्पण छवि लेखन और सूक्ष्म वस्तुओं पर महाकाव्य उकेरने वाले श्री गोयल की कला निःसंदेह ईश्वरीय कृपा का प्रतिफल है। है।आज की बातचीत में डॉ दर्शनी प्रिय ने उनकी इस अनूठी कला के बारे में जानने की कोशिश कीः प्रयत्न और चेष्टा जीवन का स्वभाव और गुण है। जब तक जीवन है, प्रयत्न और चेतना स्वाभाविक है। जीवन में एक समय प्रयत्न की असफलता मनुष्य का संपूर्ण जीवन नहीं है।असामर्थ्य स्वीकार करने का अर्थ है, जीवन में प्रयत्नहीन हो जाना, जीवन से उपराम हो जाना। आपने सतत प्रयत्न से विश्व कीर्तिमान बनाया है। असंभव को संभव कर दिखाया आपने। इतनी प्रतिबद्धता कहां से आई ? उत्तरःसच बताऊँ, ये जो जीवन हैं बड़ा आसान नहीं हैं इस जीवन को हमें अपनी सोच से आसान बनाना हैं, और जीवन हमें बहुत कुछ सिखाता भी हैं जो जीवन में आये सुख और दुख से सीख लेते हैं वो कही ना कही मनुष्य को प्रतिबद्धता भी सिखाता हैं.मुझे पता हैं अगर किसी काम को सफल बनाना हैं आपको अपने आपसे आत्मसाक्षात्कार करना होगा और अपने आप से प्रतिबद्ध होना होगा. बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कोएँ ने कंकड़ डाल कर पानी पी लिया था फिर मैं क्यों नहीं, इसी सोच ने मुझे प्रेरित किया और असंभव काम को संभव कर पाया. पर भी संवेदनशील काम कर रहे है।प्रेरणा कहां से मिली? उत्तर.प्रेरणा मुझे मेरे अच्छे दोस्तों से मिली, अगर आपके जीवन में अच्छे व सच्चे दोस्त हैं जो आपको हमेशा आपके काम के प्रति आपको प्रेरित करेंगे और आपका सहयोग भी करेंगे और अगर कही आप ग़लत हैं आपको सचेत भी करेंगे,बस यही से प्रेरणा मिली और संभव हो पाया और ईश्वर के आशीर्वाद से वो काम हो गया जो शायद दुनिया में अभी तक नहीं हुआ हो. दुख सब को मांजता है किंतु जिनको मांजता है यह सीख देता है कि सब को मुक्त रखें।आपकी जीवन यात्रा कैसी रही। कितना संघर्ष रहा। शुरुआत कैसे हुई? उत्तरः जीवन निश्चित रूप से संघर्ष भरा रहा, जीवन में चीजे आसानी से नहीं मिलती, परिश्रम से मिलती हैं मेरी ज़िंदगी एक दिन अचानक बदल गई सन २००० में एक भयंकर दुर्घटना हो गई और ९ महीने खाट पर रहा,सन २००३ में नौकरी चली गई अवसाद हो गया, सच में जीवन बड़ा कठिन लगने लगा, और एक दिन अचानक चमत्कार हो गया, फिर एक मित्र ने श्रीमदभगवद्गीता दी मुझे,मैंने प्रसाद समझ कर ग्रहण किया और पहला पेज तुरंत पढ़ लिया, सभी १८ अध्याय,७०० श्लोक पढ़े अवसाद ख़त्म हो गया,फिर दर्पण छवि में हिन्दी और इंग्लिश में हाथ से लिख दिया और लिखने का सिलसिला शुरू हो गया और ईश्वर के आशीर्वाद से अब तक १७ पुस्तकें लिखी गई हैं. अपने तरह के इस अनूठे कार्य के लिए सरकार,समाज और लोगों से किस तरह का सहयोग मिल रहा ह? उत्तरःइस अनूठे कार्य के लिए अभी तक सरकार की तरफ़ से कोई सहयोग नहीं मिला पर मुझे पूरी उम्मीद हैं एक दिन सरकार इस कार्य को ज़रूर सहरायेगी.जब लोगों को पता चलता हैं कि १७ पुस्तकें हाथ से व अलग-अलग तरीक़े से लिखी गई हैं सबसे ज़्यादा सुई से लिखी पुस्तक के बारे में बात करते हैं, लोग बहुत प्यार करते हैं और समाज भी बहुत मोहब्बत करता हैं वैसे जब मैं लिख रहा था मुझे नहीं पता था इतना प्यार मिलेगा, मैं तो सिर्फ़ ये सोच कर कर रहा था कुछ नया हो रहा हैं. इस क्षेत्र में पदार्पण करने के इच्छुक युवा कलाकारों को क्या सन्देश देना चाहेंगे? उत्तरःसिर्फ़ इसी काम के लिये ही नहीं मैं युवाओं को ये ही कहना चाहूँगा कुछ भी आप करना चाहते हैं (अच्छा, बुरे काम की तो हम बात ही नहीं करेंगे). बस दिल से लगा लो आत्मसाक्षत्कार कर लो,धैर्य रखो,अपने पर विश्वास करो जिस दिन ये चीजे आपके अंदर आ जायेंगी आपको कोई सफल होने से नहीं रोक सकता और एक चीज सपने आपके अपने हैं और आप अपनों के अपने हैं क्यों न अपने सपने पूरे करें. आपको आपके कार्यों के लिए अब तक क्या क्या सम्मान मिला है?अपने कार्य के बारे में संक्षिप्त में बताए? Awards- 1.Limca Book or Records(2Times). 2.World Record.(World Record Association).For writing World First Hand Write Needle book Madhushala 3.Dr.Sarvepalli Radhakrishnan Award-2021. 4.इंडियन बैस्टीज़ अवार्ड- 2021. 5.Fanatixx Spectrum Award. 6.Criticspace Literary Award-2022. 7.Guest of Honour-Tittle( Best Entrepreneur of the Year Award-2022. 8.हिन्द शिरोमणि सम्मान-2023. 9.कबीर कोहिनूर सम्मान-2023. यश प्राप्ति के बाद प्रायः लोग अभिमानी हो जाते है। कार्य प्रसिद्धि ने पीयूष गोयल को कितना बदला है? उत्तरःसच में प्रसिद्धि मिली हैं लोगो का बहुत प्यार मिलता हैं, मैं भगवान से हमेशा ये प्रार्थना करता हूँ मुझे हमेशा ज़मीन से जोड़ कर रखना और किसी के प्रति कोई ग़लत व्यवहार न हो जाये, मैं अच्छी तरह जानता हूँ ज़्यादा हवा में उड़ना .... आना एक दिन ज़मीन पर ही हैं.
काम को अच्छी तरह करने के लिए उस में रस लेना चहिए और काम में रस आए इसके लिए काम आप की पसंद का होना चाहिए।जिन लोगों ने राष्ट्र, संस्कृति जैसे निर्माण के बड़े बडे़ काम किए है वे सभी तत्पर और जागृत कार्यकर्त्ता थे।जय जय कार के फेर में न पड़ कर अच्छे फल के लिए कोशिश करते रहें। पीयूष गोयल एक ऐसे किरदार है जो एक ख़ास तरह की कला के जरिए देश विदेश में नाम कमा रहे हैं। दर्पण छवि लेखन और सूक्ष्म वस्तुओं पर महाकाव्य उकेरने वाले श्री गोयल की कला निःसंदेह ईश्वरीय कृपा का प्रतिफल है। है।आज की बातचीत में डॉ दर्शनी प्रिय ने उनकी इस अनूठी कला के बारे में जानने की कोशिश कीः प्रयत्न और चेष्टा जीवन का स्वभाव और गुण है। जब तक जीवन है, प्रयत्न और चेतना स्वाभाविक है। जीवन में एक समय प्रयत्न की असफलता मनुष्य का संपूर्ण जीवन नहीं है।असामर्थ्य स्वीकार करने का अर्थ है, जीवन में प्रयत्नहीन हो जाना, जीवन से उपराम हो जाना। आपने सतत प्रयत्न से विश्व कीर्तिमान बनाया है। असंभव को संभव कर दिखाया आपने। इतनी प्रतिबद्धता कहां से आई ? उत्तरःसच बताऊँ, ये जो जीवन हैं बड़ा आसान नहीं हैं इस जीवन को हमें अपनी सोच से आसान बनाना हैं, और जीवन हमें बहुत कुछ सिखाता भी हैं जो जीवन में आये सुख और दुख से सीख लेते हैं वो कही ना कही मनुष्य को प्रतिबद्धता भी सिखाता हैं.मुझे पता हैं अगर किसी काम को सफल बनाना हैं आपको अपने आपसे आत्मसाक्षात्कार करना होगा और अपने आप से प्रतिबद्ध होना होगा. बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कोएँ ने कंकड़ डाल कर पानी पी लिया था फिर मैं क्यों नहीं, इसी सोच ने मुझे प्रेरित किया और असंभव काम को संभव कर पाया. पर भी संवेदनशील काम कर रहे है।प्रेरणा कहां से मिली? उत्तर.प्रेरणा मुझे मेरे अच्छे दोस्तों से मिली, अगर आपके जीवन में अच्छे व सच्चे दोस्त हैं जो आपको हमेशा आपके काम के प्रति आपको प्रेरित करेंगे और आपका सहयोग भी करेंगे और अगर कही आप ग़लत हैं आपको सचेत भी करेंगे,बस यही से प्रेरणा मिली और संभव हो पाया और ईश्वर के आशीर्वाद से वो काम हो गया जो शायद दुनिया में अभी तक नहीं हुआ हो. दुख सब को मांजता है किंतु जिनको मांजता है यह सीख देता है कि सब को मुक्त रखें।आपकी जीवन यात्रा कैसी रही। कितना संघर्ष रहा। शुरुआत कैसे हुई? उत्तरः जीवन निश्चित रूप से संघर्ष भरा रहा, जीवन में चीजे आसानी से नहीं मिलती, परिश्रम से मिलती हैं मेरी ज़िंदगी एक दिन अचानक बदल गई सन दो हज़ार में एक भयंकर दुर्घटना हो गई और नौ महीने खाट पर रहा,सन दो हज़ार तीन में नौकरी चली गई अवसाद हो गया, सच में जीवन बड़ा कठिन लगने लगा, और एक दिन अचानक चमत्कार हो गया, फिर एक मित्र ने श्रीमदभगवद्गीता दी मुझे,मैंने प्रसाद समझ कर ग्रहण किया और पहला पेज तुरंत पढ़ लिया, सभी अट्ठारह अध्याय,सात सौ श्लोक पढ़े अवसाद ख़त्म हो गया,फिर दर्पण छवि में हिन्दी और इंग्लिश में हाथ से लिख दिया और लिखने का सिलसिला शुरू हो गया और ईश्वर के आशीर्वाद से अब तक सत्रह पुस्तकें लिखी गई हैं. अपने तरह के इस अनूठे कार्य के लिए सरकार,समाज और लोगों से किस तरह का सहयोग मिल रहा ह? उत्तरःइस अनूठे कार्य के लिए अभी तक सरकार की तरफ़ से कोई सहयोग नहीं मिला पर मुझे पूरी उम्मीद हैं एक दिन सरकार इस कार्य को ज़रूर सहरायेगी.जब लोगों को पता चलता हैं कि सत्रह पुस्तकें हाथ से व अलग-अलग तरीक़े से लिखी गई हैं सबसे ज़्यादा सुई से लिखी पुस्तक के बारे में बात करते हैं, लोग बहुत प्यार करते हैं और समाज भी बहुत मोहब्बत करता हैं वैसे जब मैं लिख रहा था मुझे नहीं पता था इतना प्यार मिलेगा, मैं तो सिर्फ़ ये सोच कर कर रहा था कुछ नया हो रहा हैं. इस क्षेत्र में पदार्पण करने के इच्छुक युवा कलाकारों को क्या सन्देश देना चाहेंगे? उत्तरःसिर्फ़ इसी काम के लिये ही नहीं मैं युवाओं को ये ही कहना चाहूँगा कुछ भी आप करना चाहते हैं . बस दिल से लगा लो आत्मसाक्षत्कार कर लो,धैर्य रखो,अपने पर विश्वास करो जिस दिन ये चीजे आपके अंदर आ जायेंगी आपको कोई सफल होने से नहीं रोक सकता और एक चीज सपने आपके अपने हैं और आप अपनों के अपने हैं क्यों न अपने सपने पूरे करें. आपको आपके कार्यों के लिए अब तक क्या क्या सम्मान मिला है?अपने कार्य के बारे में संक्षिप्त में बताए? Awards- एक.Limca Book or Records. दो.World Record..For writing World First Hand Write Needle book Madhushala तीन.Dr.Sarvepalli Radhakrishnan Award-दो हज़ार इक्कीस. चार.इंडियन बैस्टीज़ अवार्ड- दो हज़ार इक्कीस. पाँच.Fanatixx Spectrum Award. छः.Criticspace Literary Award-दो हज़ार बाईस. सात.Guest of Honour-Tittle( Best Entrepreneur of the Year Award-दो हज़ार बाईस. आठ.हिन्द शिरोमणि सम्मान-दो हज़ार तेईस. नौ.कबीर कोहिनूर सम्मान-दो हज़ार तेईस. यश प्राप्ति के बाद प्रायः लोग अभिमानी हो जाते है। कार्य प्रसिद्धि ने पीयूष गोयल को कितना बदला है? उत्तरःसच में प्रसिद्धि मिली हैं लोगो का बहुत प्यार मिलता हैं, मैं भगवान से हमेशा ये प्रार्थना करता हूँ मुझे हमेशा ज़मीन से जोड़ कर रखना और किसी के प्रति कोई ग़लत व्यवहार न हो जाये, मैं अच्छी तरह जानता हूँ ज़्यादा हवा में उड़ना .... आना एक दिन ज़मीन पर ही हैं.
पिंपरीः पिंपरी-चिंचवड आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय,भारत सरकार ने एक स्मार्ट सिटी योजना (Smart City Plan) तैयार की है। पिंपरी-चिंचवड (Pimpri-Chinchwad) के बाद पुणे (Pune) और सोलापुर स्मार्ट सिटी विकास में अग्रणी शहर हैं। तीनों शहरों के जुलाई 2023 तक पूरी परियोजना को पूरा करने की उम्मीद है। विकास कार्यों (Development Works) की गति को देखते हुए नागरिकों के बीच स्मार्ट सिटी परियोजनाएं नागरिकों के लिए कैसे उपयोगी होगी, इस बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्हाट्सएप, फेसबुक के साथ-साथ प्रिंट मीडिया के माध्यम से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। यह निर्देश गृह निर्माण और शहरी विकास मंत्रालय के स्मार्ट सिटी मिशन निदेशक एवं सहसचिव कुणाल कुमार ने ऑटो कलस्टर, चिंचवड में पिंपरी-चिंचवड और पुणे स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिए। इस दौरान कुणाल कुमार प्रोजेक्टर से सोलर पावर प्रोजेक्ट, स्मार्ट कियोस्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, स्टार्ट अप इनक्यूबेशन सेंटर, म्यूनिसिपल ई-क्लास रूम, स्कूल हेल्थ मॉनिटरिंग, पब्लिक ई-टॉयलेट, सिटी मोबाइल एप और सोशल मीडिया, ई-क्लास रूम, एनवायरनमेंटल सेंसर, स्मार्ट ट्रैफिक, सिटी सर्विलांस, स्मार्ट पार्किंग जिसमें मल्टीलेवल कार पार्क, इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, स्मार्ट वाटर सप्लाई, पब्लिक वाईफाई हॉटस्पॉट, स्मार्ट सीवरेज, आईसीटी इनेबल्ड एसडब्ल्यूएम, स्ट्रीटस्केप सहित अंडरग्राउंड यूटिलिटी, टीयूई पार्क और एबीडी में स्मार्ट टॉयलेट,नगर स्तर सहित जीआईएस सक्षम ईआरपी के अलावा फंडिंग पर भी चर्चा हुई। इससे पूर्व पिंपरी-चिंचवड के पिंपले गुरव और पिंपले सौदागर क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत राजमाता जिजाऊ पार्क और पार्किंग व्यवस्था, सड़क, फुटपाथ, वरिष्ठ नागरिकों के लिए खुले जिम में आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर बैठने की व्यवस्था की गयी थी। उन्होंने शहर में अर्बन स्ट्रीट के तहत निर्मित सड़कों और साइकिल ट्रैकों का भी निरीक्षण किया। साथ ही विकास कार्यों के संबंध में नागरिकों से सीधे बातचीत करके परियोजनाओं के बारे में उनकी प्रतिक्रियाओं को जानने के बारे में प्रशंसा की। महानगरपालिका कमिश्नर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश पाटिल, महानगरपालिका अभियंता और संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजन पाटिल,मुख्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी नीलकंठ पोमन, महाप्रबंधक अशोक भालकर, मुख्य वित्तीय अधिकारी सुनील भोसले, कार्यपालक अभियंता मनोज सेठिया, सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी लक्ष्मीकांत कोल्हे शहर के अधिकारी और सलाहकार प्रतिनिधि उपस्थित थे।
पिंपरीः पिंपरी-चिंचवड आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय,भारत सरकार ने एक स्मार्ट सिटी योजना तैयार की है। पिंपरी-चिंचवड के बाद पुणे और सोलापुर स्मार्ट सिटी विकास में अग्रणी शहर हैं। तीनों शहरों के जुलाई दो हज़ार तेईस तक पूरी परियोजना को पूरा करने की उम्मीद है। विकास कार्यों की गति को देखते हुए नागरिकों के बीच स्मार्ट सिटी परियोजनाएं नागरिकों के लिए कैसे उपयोगी होगी, इस बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्हाट्सएप, फेसबुक के साथ-साथ प्रिंट मीडिया के माध्यम से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। यह निर्देश गृह निर्माण और शहरी विकास मंत्रालय के स्मार्ट सिटी मिशन निदेशक एवं सहसचिव कुणाल कुमार ने ऑटो कलस्टर, चिंचवड में पिंपरी-चिंचवड और पुणे स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिए। इस दौरान कुणाल कुमार प्रोजेक्टर से सोलर पावर प्रोजेक्ट, स्मार्ट कियोस्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, स्टार्ट अप इनक्यूबेशन सेंटर, म्यूनिसिपल ई-क्लास रूम, स्कूल हेल्थ मॉनिटरिंग, पब्लिक ई-टॉयलेट, सिटी मोबाइल एप और सोशल मीडिया, ई-क्लास रूम, एनवायरनमेंटल सेंसर, स्मार्ट ट्रैफिक, सिटी सर्विलांस, स्मार्ट पार्किंग जिसमें मल्टीलेवल कार पार्क, इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, स्मार्ट वाटर सप्लाई, पब्लिक वाईफाई हॉटस्पॉट, स्मार्ट सीवरेज, आईसीटी इनेबल्ड एसडब्ल्यूएम, स्ट्रीटस्केप सहित अंडरग्राउंड यूटिलिटी, टीयूई पार्क और एबीडी में स्मार्ट टॉयलेट,नगर स्तर सहित जीआईएस सक्षम ईआरपी के अलावा फंडिंग पर भी चर्चा हुई। इससे पूर्व पिंपरी-चिंचवड के पिंपले गुरव और पिंपले सौदागर क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत राजमाता जिजाऊ पार्क और पार्किंग व्यवस्था, सड़क, फुटपाथ, वरिष्ठ नागरिकों के लिए खुले जिम में आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर बैठने की व्यवस्था की गयी थी। उन्होंने शहर में अर्बन स्ट्रीट के तहत निर्मित सड़कों और साइकिल ट्रैकों का भी निरीक्षण किया। साथ ही विकास कार्यों के संबंध में नागरिकों से सीधे बातचीत करके परियोजनाओं के बारे में उनकी प्रतिक्रियाओं को जानने के बारे में प्रशंसा की। महानगरपालिका कमिश्नर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश पाटिल, महानगरपालिका अभियंता और संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजन पाटिल,मुख्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी नीलकंठ पोमन, महाप्रबंधक अशोक भालकर, मुख्य वित्तीय अधिकारी सुनील भोसले, कार्यपालक अभियंता मनोज सेठिया, सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी लक्ष्मीकांत कोल्हे शहर के अधिकारी और सलाहकार प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मकर राशि का नक्षत्र बहुत ऊंचा नहीं होता हैक्षितिज रेखा से ऊपर, और उत्तरी और मध्य अक्षांश में यह बिल्कुल अच्छा नहीं दिखता है। इसे खोजने के लिए, आपको मानसिक रूप से नक्षत्र के त्रिभुज के निचले भाग से एक रेखा खींचना चाहिए - ऑल्ला - सितारा अल्टेएर मकड़ी के तारामंडल, जिसमें से एक तस्वीर खगोल विज्ञाने के कई पेजों पर है, ग्रीष्म के दूसरे छमाही के दौरान पूरी तरह से दिखाई देती है। नक्षत्र के नाम का इतिहास काफी दिलचस्प है। जब प्राचीन ग्रीस में खगोलविदों सितारों के नाम दिए, सर्दियों संक्रांति के बिंदु मकर मकर रेखा पर वास्तव में गिर गया और नामित - मकर रेखा, और नक्षत्र ही खगोलीय खगोलीय सूची "Almagest" है, जो पौराणिक टॉलेमी था में शामिल है। "बकरी मछली" या मकर के तारामंडल को दिव्य बकरी अमेलेफी के कारण ऐसा नाम मिला है। एक समय पर, देवी रिया ने उसे बचा लियाज़ीउस का छोटा बेटा अपने गुस्से में पिता क्रोनोस, समय के देवता से। तथ्य यह है कि भगवान को एक बहुत दुःखी भाग्य की भविष्यवाणी की गई थीः अपने ही बेटे को सत्ता से वंचित होना था और इसलिए क्रोनोस ने रिया से पैदा हुए सभी बच्चों को निगल लिया। निराशा में देवी ने बच्चे को छिपा रखा था, और डायपर में एक पत्थर लपेट दिया, जिसे तुरंत देवता ने खा लिया। माँ ने एक पहाड़ी गुफा में क्रेते में बच्चे को छिपा रखा था। और वहां अफलाफ़ा एक बकरी है, या, एक अन्य संस्करण के अनुसार, एक अप्सरा - उसने भविष्य के गरजे के खिलाडी खिलाया था और देवी के वफादार सेवकों ने हथियारों के हथियारों की मदद से और ढाल पर छलनी की, एक छोटे बच्चे की रो रही थी और उसे खुश कर दिया। ज़ीउस जब बड़ा हुआ, तो उन्होंने कृतज्ञता से भरा, गीली नर्स को स्वर्ग में उठाया, औरिगी के नक्षत्र में उसे एक सितारा में बदल दिया। इसी तरह आवश्यक नक्षत्र कैसे दिखाई दिया।
मकर राशि का नक्षत्र बहुत ऊंचा नहीं होता हैक्षितिज रेखा से ऊपर, और उत्तरी और मध्य अक्षांश में यह बिल्कुल अच्छा नहीं दिखता है। इसे खोजने के लिए, आपको मानसिक रूप से नक्षत्र के त्रिभुज के निचले भाग से एक रेखा खींचना चाहिए - ऑल्ला - सितारा अल्टेएर मकड़ी के तारामंडल, जिसमें से एक तस्वीर खगोल विज्ञाने के कई पेजों पर है, ग्रीष्म के दूसरे छमाही के दौरान पूरी तरह से दिखाई देती है। नक्षत्र के नाम का इतिहास काफी दिलचस्प है। जब प्राचीन ग्रीस में खगोलविदों सितारों के नाम दिए, सर्दियों संक्रांति के बिंदु मकर मकर रेखा पर वास्तव में गिर गया और नामित - मकर रेखा, और नक्षत्र ही खगोलीय खगोलीय सूची "Almagest" है, जो पौराणिक टॉलेमी था में शामिल है। "बकरी मछली" या मकर के तारामंडल को दिव्य बकरी अमेलेफी के कारण ऐसा नाम मिला है। एक समय पर, देवी रिया ने उसे बचा लियाज़ीउस का छोटा बेटा अपने गुस्से में पिता क्रोनोस, समय के देवता से। तथ्य यह है कि भगवान को एक बहुत दुःखी भाग्य की भविष्यवाणी की गई थीः अपने ही बेटे को सत्ता से वंचित होना था और इसलिए क्रोनोस ने रिया से पैदा हुए सभी बच्चों को निगल लिया। निराशा में देवी ने बच्चे को छिपा रखा था, और डायपर में एक पत्थर लपेट दिया, जिसे तुरंत देवता ने खा लिया। माँ ने एक पहाड़ी गुफा में क्रेते में बच्चे को छिपा रखा था। और वहां अफलाफ़ा एक बकरी है, या, एक अन्य संस्करण के अनुसार, एक अप्सरा - उसने भविष्य के गरजे के खिलाडी खिलाया था और देवी के वफादार सेवकों ने हथियारों के हथियारों की मदद से और ढाल पर छलनी की, एक छोटे बच्चे की रो रही थी और उसे खुश कर दिया। ज़ीउस जब बड़ा हुआ, तो उन्होंने कृतज्ञता से भरा, गीली नर्स को स्वर्ग में उठाया, औरिगी के नक्षत्र में उसे एक सितारा में बदल दिया। इसी तरह आवश्यक नक्षत्र कैसे दिखाई दिया।
हाल ही में आम जनता के लिए खोले गए सिग्नेचर ब्रिज पर सियासत अभी तक जारी है। ब्रिज के उद्घाटन के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं और भाजपा सांसद मनोज तिवारी के बीच खूब हंगामा हुआ था। जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी। अब खबर आयी है कि पुलिस ने मनोज तिवारी की शिकायत के आधार पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, आप विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की कोशिश के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बता दें कि बीते 4 नवंबर को सीएम अरविंद केजरीवाल ने सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन किया था। बता दें कि इस मामले में आम आदमी पार्टी की तरफ से भी मनोज तिवारी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गई है। आम आदमी पार्टी ने मनोज तिवारी पर मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी के साथ बदतमीजी करने का भी आरोप लगाया है। जिसका वीडियो भी सामने आया था। हालांकि मनोज तिवारी ने इससे इंकार किया है। आप सांसद संजय झा ने भी यह मामला राज्यसभा में उठाने की बात कही है और मनोज तिवारी को कटघरे में खड़ा किया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा भी शिकायत दर्ज करायी गई है।
हाल ही में आम जनता के लिए खोले गए सिग्नेचर ब्रिज पर सियासत अभी तक जारी है। ब्रिज के उद्घाटन के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं और भाजपा सांसद मनोज तिवारी के बीच खूब हंगामा हुआ था। जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी। अब खबर आयी है कि पुलिस ने मनोज तिवारी की शिकायत के आधार पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, आप विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की कोशिश के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। बता दें कि बीते चार नवंबर को सीएम अरविंद केजरीवाल ने सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन किया था। बता दें कि इस मामले में आम आदमी पार्टी की तरफ से भी मनोज तिवारी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गई है। आम आदमी पार्टी ने मनोज तिवारी पर मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी के साथ बदतमीजी करने का भी आरोप लगाया है। जिसका वीडियो भी सामने आया था। हालांकि मनोज तिवारी ने इससे इंकार किया है। आप सांसद संजय झा ने भी यह मामला राज्यसभा में उठाने की बात कही है और मनोज तिवारी को कटघरे में खड़ा किया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा भी शिकायत दर्ज करायी गई है।
कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनियों के साथ नदियों और अन्य जल धाराओं को प्रदूषण से बचाने के लिए जरूरी उपाय किये हैं। ये उपाय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की उस परियोजना के अनुरूप हैं जिसे मंत्रालय ने अनुमोदित किया है। यह सूचना आज राज्यसभा में कोयला राज्य मंत्री श्री प्रतीक प्रकाश बापू पाटिल ने दी। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि समय-समय पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अधिकारी नदियों और जल धाराओं का निरीक्षण करते हैं। इनके पानी की गुणवत्ता की जांच करके उसे विधिक निकायों को भेजा जाता है। मंत्री महोदय ने कहा कि कोल इंडिया की कंपनियां जल धाराओं को प्रदूषण से बचाने के लिए विभिन्न कदम उठाती हैं। सभी कोल वाशरीज क्लोज्ड वाटर सर्किट पर काम करती हैं और उनमें से पानी नहीं निकलता।
कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनियों के साथ नदियों और अन्य जल धाराओं को प्रदूषण से बचाने के लिए जरूरी उपाय किये हैं। ये उपाय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की उस परियोजना के अनुरूप हैं जिसे मंत्रालय ने अनुमोदित किया है। यह सूचना आज राज्यसभा में कोयला राज्य मंत्री श्री प्रतीक प्रकाश बापू पाटिल ने दी। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि समय-समय पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अधिकारी नदियों और जल धाराओं का निरीक्षण करते हैं। इनके पानी की गुणवत्ता की जांच करके उसे विधिक निकायों को भेजा जाता है। मंत्री महोदय ने कहा कि कोल इंडिया की कंपनियां जल धाराओं को प्रदूषण से बचाने के लिए विभिन्न कदम उठाती हैं। सभी कोल वाशरीज क्लोज्ड वाटर सर्किट पर काम करती हैं और उनमें से पानी नहीं निकलता।