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नांदगांव खंडेश्वर/दि. १५ - भाजपा सरकार के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पक्ष द्वारा कल देशभर में निषेध दिन मनाया गया था. इसी कडी में नांदगांव खंडेश्वर तहसील अंतर्गत आने वाले शिवनी रसुलापुर में भी निषेध दिन मनाया गया और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया गया. नांदगांव खंडेश्वर तहसील शाखा द्वारा १ व ३ जून को केंद्र सरकार द्वारा किसानों के विरोध में निकाले गए अध्यादेश को रद्द करने की मांग की गई. साथ ही सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण बंद करने की मांग भी की गई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. इस समय विनोद तरहेकर, विनोद चोपकर, अमोल राजकुले, बाबाराव इंगले, मोरेश्वर वंजारी, विकास दादरवाडे उपस्थित थे.
नांदगांव खंडेश्वर/दि. पंद्रह - भाजपा सरकार के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पक्ष द्वारा कल देशभर में निषेध दिन मनाया गया था. इसी कडी में नांदगांव खंडेश्वर तहसील अंतर्गत आने वाले शिवनी रसुलापुर में भी निषेध दिन मनाया गया और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया गया. नांदगांव खंडेश्वर तहसील शाखा द्वारा एक व तीन जून को केंद्र सरकार द्वारा किसानों के विरोध में निकाले गए अध्यादेश को रद्द करने की मांग की गई. साथ ही सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण बंद करने की मांग भी की गई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. इस समय विनोद तरहेकर, विनोद चोपकर, अमोल राजकुले, बाबाराव इंगले, मोरेश्वर वंजारी, विकास दादरवाडे उपस्थित थे.
बिलासपुर-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य पर डाक विभाग पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर विजेता चुने जाने पर 50 हजार का इनाम मिलेगा। प्रिय बापू आप अमर हैं विषय पर पत्र लिख कर आप भी 50 हजार रुपए तक का इनाम पा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पत्रों से अटूट संबंध रहा है। यही कारण है कि उनकी 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में डाक विभाग के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। डाक सर्किल हमीरपुर के प्रवर अधीक्षक भवानी प्रसाद ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रत्येक आयु वर्ग के प्रतिभागी भाग ले सकते हैं। पहला वर्ग 18 वर्ष तक के लोगों का है तो दूसरा वर्ग 18 वर्ष से अधिक आयु वालों का होगा। पत्र डाक विभाग द्वारा जारी अंतर्देशीय पत्र अथवा लिफाफे में ही स्वीकार्य होगा। इसमें क्रमशः 500 और 1000 शब्दों में अंग्रेजी, हिंदी या स्थानीय भाषा में हाथ से पत्र लिखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पत्र भेजने की अंतिम तिथि 30 नवंबर रहेगी। प्रिय बापू आप अमर हैं विषय पर आधारित प्रतियोगिता में बच्चे पत्र लिखेंगे। उन्होंने बताया कि हस्त लिखित पत्र हिंदी, अंग्रेजी में संबंधित अधीक्षक डाकघर कार्यालय के पते पर रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट, साधारण डाक और स्वयं भी कार्यालय जाकर जमा कर सकते हैं। पत्र में प्रतिभागी को उम्र के संबंध में स्वं हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र देना होगा कि पहली जनवरी 2019 को उसकी 18 साल है। सर्वश्रेष्ठ तीन पत्रों को 25 हजार, दस हजार और पांच हजार रुपए की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को 50 हजार रुपए इनाम मिलेगा। डाक विभाग ने लोगों में पत्र लेखन की आदत डालने और इसे बढ़ावा देने के लिए 'ढाई आखर' नाम से पत्र लेखन प्रतियोगिता शुरू की है। दो वर्गों में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में विजेताओं को नकद पुरूस्कार दिए जाएंगे। प्रवर अधीक्षक भवानी प्रसाद ने बताया कि सर्किल और राष्ट्रीय स्तर पर विजेताओं के लिए अलग-अलग राशि इनाम के तौर पर निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को 50 हजार, द्वितीय को 25 हजार और तृतीय विजेता को दस हजार रुपए इनाम के तौर पर दिए जाएंगे। इसके अलावा सर्किल लेवल पर प्रथम विजेता को 25 हजार, द्वितीय को दस हजार और तृतीय विजेता को पांच हजार रुपए की नकद राशि मिलेगी। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर परिणाम घोषित करने की तिथि 31 जनवरी 2020 तथा राष्ट्रीय स्तर पर 31 मार्च 2020 होगी। सर्किल लेवल पर चुने गए टॉप थ्री खतों को मूल्यांकन के लिए राष्ट्र स्तर के लिए भी भेजा जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को 50 हजार, द्वितीय को 25 हजार और तृतीय विजेता को दस हजार रुपए और सर्किल स्तर पर प्रथम विजेता को 25 हजार, द्वितीय को दस हजार और तृतीय विजेता को पांच हजार रुपए की नकद राशि बतौर पुरस्कार मिलेगी।
बिलासपुर-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती के उपलक्ष्य पर डाक विभाग पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर विजेता चुने जाने पर पचास हजार का इनाम मिलेगा। प्रिय बापू आप अमर हैं विषय पर पत्र लिख कर आप भी पचास हजार रुपए तक का इनाम पा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पत्रों से अटूट संबंध रहा है। यही कारण है कि उनकी एक सौ पचासवीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में डाक विभाग के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। डाक सर्किल हमीरपुर के प्रवर अधीक्षक भवानी प्रसाद ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रत्येक आयु वर्ग के प्रतिभागी भाग ले सकते हैं। पहला वर्ग अट्ठारह वर्ष तक के लोगों का है तो दूसरा वर्ग अट्ठारह वर्ष से अधिक आयु वालों का होगा। पत्र डाक विभाग द्वारा जारी अंतर्देशीय पत्र अथवा लिफाफे में ही स्वीकार्य होगा। इसमें क्रमशः पाँच सौ और एक हज़ार शब्दों में अंग्रेजी, हिंदी या स्थानीय भाषा में हाथ से पत्र लिखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पत्र भेजने की अंतिम तिथि तीस नवंबर रहेगी। प्रिय बापू आप अमर हैं विषय पर आधारित प्रतियोगिता में बच्चे पत्र लिखेंगे। उन्होंने बताया कि हस्त लिखित पत्र हिंदी, अंग्रेजी में संबंधित अधीक्षक डाकघर कार्यालय के पते पर रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट, साधारण डाक और स्वयं भी कार्यालय जाकर जमा कर सकते हैं। पत्र में प्रतिभागी को उम्र के संबंध में स्वं हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र देना होगा कि पहली जनवरी दो हज़ार उन्नीस को उसकी अट्ठारह साल है। सर्वश्रेष्ठ तीन पत्रों को पच्चीस हजार, दस हजार और पांच हजार रुपए की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को पचास हजार रुपए इनाम मिलेगा। डाक विभाग ने लोगों में पत्र लेखन की आदत डालने और इसे बढ़ावा देने के लिए 'ढाई आखर' नाम से पत्र लेखन प्रतियोगिता शुरू की है। दो वर्गों में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में विजेताओं को नकद पुरूस्कार दिए जाएंगे। प्रवर अधीक्षक भवानी प्रसाद ने बताया कि सर्किल और राष्ट्रीय स्तर पर विजेताओं के लिए अलग-अलग राशि इनाम के तौर पर निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को पचास हजार, द्वितीय को पच्चीस हजार और तृतीय विजेता को दस हजार रुपए इनाम के तौर पर दिए जाएंगे। इसके अलावा सर्किल लेवल पर प्रथम विजेता को पच्चीस हजार, द्वितीय को दस हजार और तृतीय विजेता को पांच हजार रुपए की नकद राशि मिलेगी। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर परिणाम घोषित करने की तिथि इकतीस जनवरी दो हज़ार बीस तथा राष्ट्रीय स्तर पर इकतीस मार्च दो हज़ार बीस होगी। सर्किल लेवल पर चुने गए टॉप थ्री खतों को मूल्यांकन के लिए राष्ट्र स्तर के लिए भी भेजा जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम विजेता को पचास हजार, द्वितीय को पच्चीस हजार और तृतीय विजेता को दस हजार रुपए और सर्किल स्तर पर प्रथम विजेता को पच्चीस हजार, द्वितीय को दस हजार और तृतीय विजेता को पांच हजार रुपए की नकद राशि बतौर पुरस्कार मिलेगी।
Don't Miss! 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' जैसी फिल्में नहीं करेंगे अक्षय कुमार! अक्षय कुमार ने इस साल बैक टू बैक दो सुपरहिट फिल्में दी हैं। जबकि उनके पास फिलहाल दो सालों तक फिल्मों की लाइन लगी है। हाल ही में रिलीज टॉयलेट एक प्रेम कथा सुपरहिट साबित हो चुकी है। ऐसे में अक्षय कुमार का कहना है कि अब वे कुछ अलग करना चाहते हैं। जी हां, अक्षय कुमार ने कहा है कि, मैं अब एक पागलपन से भरपूर कॉमेडी फिल्म करना चाहता हूं। अब वह समय आ गया है। मुझे बैलेंस बनाकर फिल्में करना अच्छा लगता है। मैं सिर्फ गंभीर या सामाजिक मुद्दों पर ही फिल्में नहीं बनाना चाहता। मैं सच में जल्दी ही एक फुल कॉमेडी फिल्म करना चाहता हूं। हम्मम.. वहीं, हाल में साजिद खान ने भी हाउसफुल 4 के निर्देशन को कंफर्म किया है। कहीं ये तो नहीं कि अक्षय कुमार हाउसफुल 4 की ही हिंट दे रहे हों। खैर, कोई शक नहीं कि यदि अक्षय कॉमेडी फिल्म लेकर आएंगे तो फैंस को बेहद खुशी होगी।
Don't Miss! 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' जैसी फिल्में नहीं करेंगे अक्षय कुमार! अक्षय कुमार ने इस साल बैक टू बैक दो सुपरहिट फिल्में दी हैं। जबकि उनके पास फिलहाल दो सालों तक फिल्मों की लाइन लगी है। हाल ही में रिलीज टॉयलेट एक प्रेम कथा सुपरहिट साबित हो चुकी है। ऐसे में अक्षय कुमार का कहना है कि अब वे कुछ अलग करना चाहते हैं। जी हां, अक्षय कुमार ने कहा है कि, मैं अब एक पागलपन से भरपूर कॉमेडी फिल्म करना चाहता हूं। अब वह समय आ गया है। मुझे बैलेंस बनाकर फिल्में करना अच्छा लगता है। मैं सिर्फ गंभीर या सामाजिक मुद्दों पर ही फिल्में नहीं बनाना चाहता। मैं सच में जल्दी ही एक फुल कॉमेडी फिल्म करना चाहता हूं। हम्मम.. वहीं, हाल में साजिद खान ने भी हाउसफुल चार के निर्देशन को कंफर्म किया है। कहीं ये तो नहीं कि अक्षय कुमार हाउसफुल चार की ही हिंट दे रहे हों। खैर, कोई शक नहीं कि यदि अक्षय कॉमेडी फिल्म लेकर आएंगे तो फैंस को बेहद खुशी होगी।
यह काफी सॉफ्ट और स्मूद मटेरियल वाले हैंडबैग है। इनके एक से बढ़कर एक कलर और डिजाइन यहां आपको मिलेंगे। अगर आप एसबीआई की क्रेडिट या डेबिट कार्ड से शॉपिंग करती हैं तो आपको 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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- 8 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 8 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सोमवार को मुंबई में हुए चौथे चरण के मतदान में जहां बॉलीवुड के सितारे वोटिंग देते नजर आए, वहीं सभी की नजरें अक्षय कुमार को ढूंढ़ रही थीं। जबकि ट्विंकल खन्ना को पोलिंग बूथ पर देखा गया। हाल ही में जब एक इवेंट के दौरान अक्षय कुमार ने इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल को पूरी तरह से टाल दिया। अक्षय के इस रिएक्शन से सभी फैंस हैरान हैं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। फिल्म 'ब्लैंक (Blank)' की स्क्रीनिंग के दौरान अक्षय कुमार पत्रकारों से मुखातिब हुए तो उनसे मतदान ना करने को लेकर सवाल किया गया। इस पर अक्षय अचानक उखड़ गए और मुस्कराते हुए पत्रकार को 'चलिए, चलिए. . ' करते हुए वहां से निकल गए। लोगों का मानना है कि बॉलीवुड में आज के समय में सबसे ज्यादा देशभक्ति फिल्में करने वाले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इंटरव्यू करने वाले और फैंस से मतदान करने की गुजारिश करने वाले अक्षय कुमार ने खुद क्यों नहीं वोट दिया। अक्षय कुमार ने लोकसभा चुवान से पहले ट्वीट किया था- 'लोकतंत्र की असली पहचान चुनावी प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी में है. . हमारे राष्ट्र और मतदान करने वालों के बीच वोटिंग एक सुपरहिट 'प्रेम कथा' होनी चाहिए. . '
- आठ hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - आठ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सोमवार को मुंबई में हुए चौथे चरण के मतदान में जहां बॉलीवुड के सितारे वोटिंग देते नजर आए, वहीं सभी की नजरें अक्षय कुमार को ढूंढ़ रही थीं। जबकि ट्विंकल खन्ना को पोलिंग बूथ पर देखा गया। हाल ही में जब एक इवेंट के दौरान अक्षय कुमार ने इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल को पूरी तरह से टाल दिया। अक्षय के इस रिएक्शन से सभी फैंस हैरान हैं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। फिल्म 'ब्लैंक ' की स्क्रीनिंग के दौरान अक्षय कुमार पत्रकारों से मुखातिब हुए तो उनसे मतदान ना करने को लेकर सवाल किया गया। इस पर अक्षय अचानक उखड़ गए और मुस्कराते हुए पत्रकार को 'चलिए, चलिए. . ' करते हुए वहां से निकल गए। लोगों का मानना है कि बॉलीवुड में आज के समय में सबसे ज्यादा देशभक्ति फिल्में करने वाले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इंटरव्यू करने वाले और फैंस से मतदान करने की गुजारिश करने वाले अक्षय कुमार ने खुद क्यों नहीं वोट दिया। अक्षय कुमार ने लोकसभा चुवान से पहले ट्वीट किया था- 'लोकतंत्र की असली पहचान चुनावी प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी में है. . हमारे राष्ट्र और मतदान करने वालों के बीच वोटिंग एक सुपरहिट 'प्रेम कथा' होनी चाहिए. . '
गुरुग्राम (हप्र) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डाॅक्टर्स ने उन्हें कुछ दिन होम आईसोलेशन में रहने की सलाह दी है। बताते हैं कि चार दिन पहले भी उनका एक टेस्ट हुआ था जिसमें रिपोर्ट नेगेटिव थी, लेकिन डाॅक्टर्स की सलाह पर वह अस्पताल में ही रहे। अब दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट भी नेगेटिव आने पर करीब साढ़े 5 बजे गृहमंत्री को छुट्टी दे दी गई है। खुद अमित शाह ने अस्पताल से छुट्टी मिलने की जानकारी ट्वीट कर भी दी है।
गुरुग्राम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डाॅक्टर्स ने उन्हें कुछ दिन होम आईसोलेशन में रहने की सलाह दी है। बताते हैं कि चार दिन पहले भी उनका एक टेस्ट हुआ था जिसमें रिपोर्ट नेगेटिव थी, लेकिन डाॅक्टर्स की सलाह पर वह अस्पताल में ही रहे। अब दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट भी नेगेटिव आने पर करीब साढ़े पाँच बजे गृहमंत्री को छुट्टी दे दी गई है। खुद अमित शाह ने अस्पताल से छुट्टी मिलने की जानकारी ट्वीट कर भी दी है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां एक बुजुर्ग दंपति की उनके विकलांग बेटे के सामने गला दबाकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड के पीछे संपत्ति का विवाद बताया जा रहा है. डबल मर्डर की यह वारदात जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक थाना क्षेत्र में हुई. पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अशोक गुप्ता ने बताया कि 70 वर्षीय प्रभातीलाल कुमावत और उनकी 68 वर्षीय पत्नी सरजू देवी कुमावत की घर में ही गला दबाकर हत्या कर दी गई. वारदात को दंपति के विकलांग बेटे के सामने अंजाम दिया गया. पुलिस उपायुक्त के मुताबिक प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि सम्पत्ति के विवाद के चलते दंपति की हत्या की गई है. मृतकों के दो बेटे हैं, जिनमें से एक विकलांग है. विकलांग पुत्र दंपति के साथ रहता था. मृतक अपनी जमीन और मकान बेचना चाहता था. जिसके लिये वह कई लोगों के सम्पर्क में था. पुलिस के मुताबिक जानकारी मिली है कि मृतक ने जमीन बेचने के लिए अग्रिम राशि ले ली और जमीन को क्रेता के पक्ष में हस्तांतरित नहीं किया. हत्या के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है. थानाधिकारी कंवरपाल सिंह ने बताया कि शुक्रवार की सुबह घरवालों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर दंपति के शव कब्जे लेकर पोस्टमार्टम के लिये सवाई मानसिंह अस्पताल भेजे. अब पुलिस इस मामले की जांच पड़ताल कर रही है.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां एक बुजुर्ग दंपति की उनके विकलांग बेटे के सामने गला दबाकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड के पीछे संपत्ति का विवाद बताया जा रहा है. डबल मर्डर की यह वारदात जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक थाना क्षेत्र में हुई. पुलिस उपायुक्त अशोक गुप्ता ने बताया कि सत्तर वर्षीय प्रभातीलाल कुमावत और उनकी अड़सठ वर्षीय पत्नी सरजू देवी कुमावत की घर में ही गला दबाकर हत्या कर दी गई. वारदात को दंपति के विकलांग बेटे के सामने अंजाम दिया गया. पुलिस उपायुक्त के मुताबिक प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि सम्पत्ति के विवाद के चलते दंपति की हत्या की गई है. मृतकों के दो बेटे हैं, जिनमें से एक विकलांग है. विकलांग पुत्र दंपति के साथ रहता था. मृतक अपनी जमीन और मकान बेचना चाहता था. जिसके लिये वह कई लोगों के सम्पर्क में था. पुलिस के मुताबिक जानकारी मिली है कि मृतक ने जमीन बेचने के लिए अग्रिम राशि ले ली और जमीन को क्रेता के पक्ष में हस्तांतरित नहीं किया. हत्या के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है. थानाधिकारी कंवरपाल सिंह ने बताया कि शुक्रवार की सुबह घरवालों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर दंपति के शव कब्जे लेकर पोस्टमार्टम के लिये सवाई मानसिंह अस्पताल भेजे. अब पुलिस इस मामले की जांच पड़ताल कर रही है.
नयी दिल्ली, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक जाकर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की । श्री शाह ने इस मौके पर पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों और उनके परिजनों के प्रति समूचे राष्ट्र की ओर से कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के निस्वार्थ भाव से औऱ निश्चय के साथ राष्ट्र सेवा करने के कारण ही देश बिना किसी अड़चन के प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। पुलिस के जवान सीमाओँ की सुरक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नक्सलियों और उग्रवादियों के साथ लोहा ले रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में वे आतंकवादियों के दांत खट्टे कर रहे हैं। मानव तस्करी, मादक पदार्थों तथा जाली मुद्रा की तस्करी पर अंकुश लगाने का काम भी पुलिस कर रही है। अब तक 34844 पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है और इस सूची में आज 292 शहदों के नाम और जुड़ गये हैं। उन्होंने कहा कि देश में अभी एक लाख की आबादी पर 144 पुलिसकर्मी हैं। इस कारण पुलिसकर्मियों पर दबाव है और उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती हैं। सरकार उनकी इस समस्या का समाधान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार उनके कल्याण के लिए अनेक योजना बना रही है और उन्हें कर्त्तव्य निर्वहन के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध करा रही। उन्होंने जावनों को आश्वस्त किया कि उनके स्वास्थ्य, परिजनों की सुविधा और निवास की जरूरतों को पूरा करने में सरकार पीछे नहीं हटेगी।
नयी दिल्ली, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक जाकर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की । श्री शाह ने इस मौके पर पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों और उनके परिजनों के प्रति समूचे राष्ट्र की ओर से कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के निस्वार्थ भाव से औऱ निश्चय के साथ राष्ट्र सेवा करने के कारण ही देश बिना किसी अड़चन के प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। पुलिस के जवान सीमाओँ की सुरक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नक्सलियों और उग्रवादियों के साथ लोहा ले रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में वे आतंकवादियों के दांत खट्टे कर रहे हैं। मानव तस्करी, मादक पदार्थों तथा जाली मुद्रा की तस्करी पर अंकुश लगाने का काम भी पुलिस कर रही है। अब तक चौंतीस हज़ार आठ सौ चौंतालीस पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है और इस सूची में आज दो सौ बानवे शहदों के नाम और जुड़ गये हैं। उन्होंने कहा कि देश में अभी एक लाख की आबादी पर एक सौ चौंतालीस पुलिसकर्मी हैं। इस कारण पुलिसकर्मियों पर दबाव है और उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती हैं। सरकार उनकी इस समस्या का समाधान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार उनके कल्याण के लिए अनेक योजना बना रही है और उन्हें कर्त्तव्य निर्वहन के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध करा रही। उन्होंने जावनों को आश्वस्त किया कि उनके स्वास्थ्य, परिजनों की सुविधा और निवास की जरूरतों को पूरा करने में सरकार पीछे नहीं हटेगी।
नई दिल्लीः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत अभी तक नाजुक बनी हुई है। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उनके स्वास्थ्य में अभी कोई सुधार नहीं हुआ है। वहीं वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी आज एम्स पहुंचे। पिछले करीब 24 घंटे में मोदी दूसरी बार एम्स गए। मोदी करीब 45 मिनट तक एम्स में रूके, इस दौरान उनके साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी थे। पीएम ने अटल जी के रिश्तेदारों से भी मुलाकात की। बता दें कि शाह सहित गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी सुबह से ही एम्स में मौजूद थे। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आज सुबह एम्स में वाजपेयी का हालचाल जानने पहुंचे। भाजपा के 93 वर्षीय अनुभवी नेता को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम करती है। 2009 में उन्हें आघात आया था, जिसके बाद उन्हें लोगों को जानने-पहचानने सहित कई तरह की समस्याएं होने लगीं। बाद में उन्हें डिमेशिया की दिक्कत हो गई। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार शाम वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्स गए थे। मोदी के अलावा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, रेल मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, विज्ञान और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन, प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह और स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी वाजपेयी के गिरते स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
नई दिल्लीः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत अभी तक नाजुक बनी हुई है। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उनके स्वास्थ्य में अभी कोई सुधार नहीं हुआ है। वहीं वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी आज एम्स पहुंचे। पिछले करीब चौबीस घंटाटे में मोदी दूसरी बार एम्स गए। मोदी करीब पैंतालीस मिनट तक एम्स में रूके, इस दौरान उनके साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी थे। पीएम ने अटल जी के रिश्तेदारों से भी मुलाकात की। बता दें कि शाह सहित गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी सुबह से ही एम्स में मौजूद थे। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आज सुबह एम्स में वाजपेयी का हालचाल जानने पहुंचे। भाजपा के तिरानवे वर्षीय अनुभवी नेता को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद ग्यारह जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम करती है। दो हज़ार नौ में उन्हें आघात आया था, जिसके बाद उन्हें लोगों को जानने-पहचानने सहित कई तरह की समस्याएं होने लगीं। बाद में उन्हें डिमेशिया की दिक्कत हो गई। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार शाम वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्स गए थे। मोदी के अलावा केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, रेल मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, विज्ञान और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन, प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह और स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी वाजपेयी के गिरते स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
शिमलाः प्रदेश में कोरोना से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। रोजाना ही यहां कोरोना से मौतें हो रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में फिर कोरोना से 7 लोगों की मौतें हो गई है। इनमें 3 संक्रमितों ने आईजीएमसी, एक ने सरकाघाट, 2 ने सोलन व एक ने हमीरपुर में दम तोड़ दिया है। आईजीएमसी में पहली मौत निरमंड कुल्लू के रहने वाले 65 वर्षीय व्यक्ति की हुई है। इस व्यक्ति को 21 अक्तूबर को आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था। यह कोरोना के साथ निमोनिया से भी ग्रसित था। इसे सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही थी लेकिन सुबह के समय इसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और मौत हो गई। वहीं दूसरी मौत संजौली के रहने वाले 85 वर्षीय व्यक्ति की हुई है। उक्त व्यक्ति 28 अक्तूबर को आईजीएमसी के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। व्यक्ति को कोरोना के साथ टायबटीज की बीमारी भी थी। तीसरी मौत चिडग़ांव क्षेत्र के 74 वर्षीय व्यक्ति की हुई है। चौथी मौत सरकाघाट नागरिक अस्पताल में तताहर 66 वर्षीय व्यक्ति की हुई है। उक्त व्यक्ति की सांस फूल रहा थी, जिस पर उसेे नागरिक अस्पताल सरकाघाट पहुंचाया गया, जहां पर पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। बाद में जब इसका सैंपल लिया गया तो इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। पांचवीं मौत सोलन के रहने वाले 60 वर्षीय के व्यक्ति और छठी मौत भी सोलन जिला में शिमला के दरोटी गांव के रहने वाले 65 व्यक्ति की हुई है। इसके अलावा सातवीं मौत हमीरपुर के वार्ड नंबर-के रहने वाले 80 वर्षीय व्यक्ति की हुई है। प्रदेश में अब तक कोरोना से 356 लोगों की मौतें हो चुकी है। वीरवार को प्रदेश में 20 अध्यापकों सहित कोरोना के 458 नए मामले सामने आए हैं। संक्रमितों में शिमला के 107, मंडी के 81, कांगड़ा के 64, सोलन के 52, हमीरपुर के 44, कुल्लू के 42, बिलासपुर 22, चम्बा के 20, सिरमौर के 17, ऊना के 7 व किन्नौर के 2 लोग शामिल हंै। प्रदेश में अब कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा 23823 पहुंच गया है जबकि एक्टिव केस 3682 हो गए हैं। Breaking: HP में कोरोना ने फिर ली 7 लोगों की जान, 458 नए संक्रमित मरीज आए सामने Reviewed by Himachal Fast News on 06 November Rating:
शिमलाः प्रदेश में कोरोना से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। रोजाना ही यहां कोरोना से मौतें हो रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में फिर कोरोना से सात लोगों की मौतें हो गई है। इनमें तीन संक्रमितों ने आईजीएमसी, एक ने सरकाघाट, दो ने सोलन व एक ने हमीरपुर में दम तोड़ दिया है। आईजीएमसी में पहली मौत निरमंड कुल्लू के रहने वाले पैंसठ वर्षीय व्यक्ति की हुई है। इस व्यक्ति को इक्कीस अक्तूबर को आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था। यह कोरोना के साथ निमोनिया से भी ग्रसित था। इसे सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही थी लेकिन सुबह के समय इसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और मौत हो गई। वहीं दूसरी मौत संजौली के रहने वाले पचासी वर्षीय व्यक्ति की हुई है। उक्त व्यक्ति अट्ठाईस अक्तूबर को आईजीएमसी के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। व्यक्ति को कोरोना के साथ टायबटीज की बीमारी भी थी। तीसरी मौत चिडग़ांव क्षेत्र के चौहत्तर वर्षीय व्यक्ति की हुई है। चौथी मौत सरकाघाट नागरिक अस्पताल में तताहर छयासठ वर्षीय व्यक्ति की हुई है। उक्त व्यक्ति की सांस फूल रहा थी, जिस पर उसेे नागरिक अस्पताल सरकाघाट पहुंचाया गया, जहां पर पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। बाद में जब इसका सैंपल लिया गया तो इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। पांचवीं मौत सोलन के रहने वाले साठ वर्षीय के व्यक्ति और छठी मौत भी सोलन जिला में शिमला के दरोटी गांव के रहने वाले पैंसठ व्यक्ति की हुई है। इसके अलावा सातवीं मौत हमीरपुर के वार्ड नंबर-के रहने वाले अस्सी वर्षीय व्यक्ति की हुई है। प्रदेश में अब तक कोरोना से तीन सौ छप्पन लोगों की मौतें हो चुकी है। वीरवार को प्रदेश में बीस अध्यापकों सहित कोरोना के चार सौ अट्ठावन नए मामले सामने आए हैं। संक्रमितों में शिमला के एक सौ सात, मंडी के इक्यासी, कांगड़ा के चौंसठ, सोलन के बावन, हमीरपुर के चौंतालीस, कुल्लू के बयालीस, बिलासपुर बाईस, चम्बा के बीस, सिरमौर के सत्रह, ऊना के सात व किन्नौर के दो लोग शामिल हंै। प्रदेश में अब कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा तेईस हज़ार आठ सौ तेईस पहुंच गया है जबकि एक्टिव केस तीन हज़ार छः सौ बयासी हो गए हैं। Breaking: HP में कोरोना ने फिर ली सात लोगों की जान, चार सौ अट्ठावन नए संक्रमित मरीज आए सामने Reviewed by Himachal Fast News on छः नवंबरember Rating:
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के इंडस्ट्रियल एरिया परवाणू में सोमवार को एक टूल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि कंपनी प्रबंधन को फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा। शुरुआती जांच से लग रहा है क यह आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ, जबकि 2 लाख की संपत्ति जल जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। सेक्टर-3 स्थित AB टूल कंपनी प्रबंधन के सौरभ जैन ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में दूसरी मंज़िल पर आग लग गई, जहां पेंट, थिनर व अन्य सामग्री रखी जाती है। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है, लेकिन लगभग 2 लाख के क़रीब का नुकसान हुआ है, हालांकि करोड़ों की सम्पति जलने से बचाई गई। यह एक मैकेनिकल उद्योग है, जहां लोहे-केमिकल का अधिक इस्तेमाल होता है। परवाणू के फायर ब्रिगेड ऑफिसर टेक चंद ने बताया कि उन्हें सूचना मिलते ही हमारे फायर ब्रिगेड के जवान गाड़ी सहित मौके पर पहुंचे। उसके बाद दूसरा टर्नआउट 7 क्रू मेंबर के साथ उक्त घटना स्थल पर पहुंचा। टेक चंद ने जानकारी देते हुए बताया कि AB टूल कंपनी की दूसरी मंज़िल पर आग लगी थी, जहां ऑटो क्राफ्ट कास्टिंग मशीन, थिन्नर व पेंट रखा हुआ था। उन्होंने बताया कि लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। इस घटना में एक व्यक्ति आग से झुलस गया, जिसे ESI अस्पताल ले जाया गया। कंपनी का लगभग 2 लाख का नुकसान हुआ है और लगभग 9 करोड़ के क़रीब संपत्ति को बचा लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के इंडस्ट्रियल एरिया परवाणू में सोमवार को एक टूल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि कंपनी प्रबंधन को फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा। शुरुआती जांच से लग रहा है क यह आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ, जबकि दो लाख की संपत्ति जल जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। सेक्टर-तीन स्थित AB टूल कंपनी प्रबंधन के सौरभ जैन ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में दूसरी मंज़िल पर आग लग गई, जहां पेंट, थिनर व अन्य सामग्री रखी जाती है। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है, लेकिन लगभग दो लाख के क़रीब का नुकसान हुआ है, हालांकि करोड़ों की सम्पति जलने से बचाई गई। यह एक मैकेनिकल उद्योग है, जहां लोहे-केमिकल का अधिक इस्तेमाल होता है। परवाणू के फायर ब्रिगेड ऑफिसर टेक चंद ने बताया कि उन्हें सूचना मिलते ही हमारे फायर ब्रिगेड के जवान गाड़ी सहित मौके पर पहुंचे। उसके बाद दूसरा टर्नआउट सात क्रू मेंबर के साथ उक्त घटना स्थल पर पहुंचा। टेक चंद ने जानकारी देते हुए बताया कि AB टूल कंपनी की दूसरी मंज़िल पर आग लगी थी, जहां ऑटो क्राफ्ट कास्टिंग मशीन, थिन्नर व पेंट रखा हुआ था। उन्होंने बताया कि लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। इस घटना में एक व्यक्ति आग से झुलस गया, जिसे ESI अस्पताल ले जाया गया। कंपनी का लगभग दो लाख का नुकसान हुआ है और लगभग नौ करोड़ के क़रीब संपत्ति को बचा लिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रधानमंत्री 9 जून को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में बॉयोटेक स्टार्टअप प्रदर्शनी-2022 का उद्घाटन करेंगे। इस दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन जैव प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद कर रहे हैं। परिषद के दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रदर्शनी की थीम है- 'बॉयोटेक स्टार्टअप नवाचारः आत्मनिर्भर भारत के लिये'। यह प्रदर्शनी उद्यमियों, निवेशकों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्त्ताओं, बॉयोइन्क्यूबेटर, विनिर्माताओं, नियामकों और सरकारी कर्मियों को एक मंच पर लाएगी। इस प्रदर्शनी में लगभग 300 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वास्थ्य देखभाल, जेनोमिक्स, जैव-फार्मा, कृषि, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, कचरे से संपदा, स्वच्छ ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को प्रदर्शित किया जाएगा। जैव प्रौद्योगिकी वह तकनीक है जो विभिन्न उत्पादों को विकसित करने या बनाने के लिये जैविक प्रणालियों, जीवित जीवों या इसके कुछ हिस्सों का उपयोग करती है। जैव प्रौद्योगिकी के तहत बायोफार्मास्यूटिकल्स का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन करने हेतु आनुवंशिक रूप से संशोधित रोगाणुओं, कवक, पौधों और जानवरों का उपयोग किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में रोग की चिकित्सा, निदान, आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें, प्रसंस्कृत खाद्य, बायोरेमेडिएशन, अपशिष्ट उपचार और ऊर्जा उत्पादन आदि शामिल हैं। कज़ाखस्तान में बोलाट तुर्लिखानोव कप कुश्ती प्रतियोगिता में भारत 12 पदक जीतकर दूसरे स्थान पर रहा। इसमें कुल छह स्वर्ण, एक रजत और पाँच कांस्य पदक शामिल हैं। भारत के छह स्वर्ण पदकों में से पाँच पदक महिला प्रतिभागियों ने अपने नाम किये। 14 पदकों के साथ ईरान पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। सरिता मोर ने 59 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनीषा ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में सीनियर्स में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। मानसी अहलावत ने 57 और साक्षी मलिक ने 62 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किये। दिव्या काकरान ने भी 68 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। पुरुष वर्ग में अमन सहरावत ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वहीं 65 किलोग्राम भार वर्ग में बजरंग पुनिया ने, 125 किलोग्राम भार वर्ग में मोहित ग्रेवाल ने और 63 किलोग्राम भार वर्ग में नीरज ने कांस्य पदक अपने नाम किये। बोलाट तुर्लिखानोव कप कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन कज़ाखस्तान के अलमाटी में 2 से 5 जून तक किया गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-NHAI ने रिकॉर्ड 105 घंटे 33 मिनट (लगभग 5 दिन) में 75 किलोमीटर लंबी बिटुमिनस कंक्रीट रोड का निर्माण कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। 03 जून, 2022 से शुरू हुए इस कार्य के संपन्न होने पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने प्राधिकरण, इंज़ीनियरों, ठेकेदारों और मज़दूरों के दल को बधाई दी। महाराष्ट्र के पश्चिम विदर्भ में अमरावती और अकोला के बीच NH-53 सेक्शन पर सिंगल लेन की यह परियोजना आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत पूरी की गई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का गठन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1988 के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, अनुरक्षण और प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए किया गया था। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का आरंभ वर्ष 1958 में हुआ था. यह विश्व रिकॉर्ड वर्ष 1998 तक 'द गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉर्ड' के नाम से जाना जाता था और इसके बाद इसका नाम 'द गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' हो गया। यह एक तरह की रिकॉर्ड बुक है, जिसे प्रतिवर्ष पुनः संपादित किया जाता है और नए-नए वर्ल्ड रिकॉर्ड इसमें शामिल किये जाते हैं। इसके अंतर्गत मनुष्य द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड और विभिन्न प्राकृतिक रिकॉर्ड को शामिल किया जाता है। यह बुक ख़ुद भी एक विश्व रिकॉर्ड बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नौ जून को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में बॉयोटेक स्टार्टअप प्रदर्शनी-दो हज़ार बाईस का उद्घाटन करेंगे। इस दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन जैव प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद कर रहे हैं। परिषद के दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रदर्शनी की थीम है- 'बॉयोटेक स्टार्टअप नवाचारः आत्मनिर्भर भारत के लिये'। यह प्रदर्शनी उद्यमियों, निवेशकों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्त्ताओं, बॉयोइन्क्यूबेटर, विनिर्माताओं, नियामकों और सरकारी कर्मियों को एक मंच पर लाएगी। इस प्रदर्शनी में लगभग तीन सौ स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वास्थ्य देखभाल, जेनोमिक्स, जैव-फार्मा, कृषि, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, कचरे से संपदा, स्वच्छ ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को प्रदर्शित किया जाएगा। जैव प्रौद्योगिकी वह तकनीक है जो विभिन्न उत्पादों को विकसित करने या बनाने के लिये जैविक प्रणालियों, जीवित जीवों या इसके कुछ हिस्सों का उपयोग करती है। जैव प्रौद्योगिकी के तहत बायोफार्मास्यूटिकल्स का औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन करने हेतु आनुवंशिक रूप से संशोधित रोगाणुओं, कवक, पौधों और जानवरों का उपयोग किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में रोग की चिकित्सा, निदान, आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें, प्रसंस्कृत खाद्य, बायोरेमेडिएशन, अपशिष्ट उपचार और ऊर्जा उत्पादन आदि शामिल हैं। कज़ाखस्तान में बोलाट तुर्लिखानोव कप कुश्ती प्रतियोगिता में भारत बारह पदक जीतकर दूसरे स्थान पर रहा। इसमें कुल छह स्वर्ण, एक रजत और पाँच कांस्य पदक शामिल हैं। भारत के छह स्वर्ण पदकों में से पाँच पदक महिला प्रतिभागियों ने अपने नाम किये। चौदह पदकों के साथ ईरान पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। सरिता मोर ने उनसठ किलोग्रामग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि मनीषा ने पैंसठ किलोग्रामग्राम भार वर्ग में सीनियर्स में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। मानसी अहलावत ने सत्तावन और साक्षी मलिक ने बासठ किलोग्रामग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किये। दिव्या काकरान ने भी अड़सठ किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। पुरुष वर्ग में अमन सहरावत ने सत्तावन किलोग्रामग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वहीं पैंसठ किलोग्रामग्राम भार वर्ग में बजरंग पुनिया ने, एक सौ पच्चीस किलोग्रामग्राम भार वर्ग में मोहित ग्रेवाल ने और तिरेसठ किलोग्रामग्राम भार वर्ग में नीरज ने कांस्य पदक अपने नाम किये। बोलाट तुर्लिखानोव कप कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन कज़ाखस्तान के अलमाटी में दो से पाँच जून तक किया गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-NHAI ने रिकॉर्ड एक सौ पाँच घंटाटे तैंतीस मिनट में पचहत्तर किलोग्राममीटर लंबी बिटुमिनस कंक्रीट रोड का निर्माण कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। तीन जून, दो हज़ार बाईस से शुरू हुए इस कार्य के संपन्न होने पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने प्राधिकरण, इंज़ीनियरों, ठेकेदारों और मज़दूरों के दल को बधाई दी। महाराष्ट्र के पश्चिम विदर्भ में अमरावती और अकोला के बीच NH-तिरेपन सेक्शन पर सिंगल लेन की यह परियोजना आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत पूरी की गई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का गठन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ अठासी के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, अनुरक्षण और प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए किया गया था। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का आरंभ वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में हुआ था. यह विश्व रिकॉर्ड वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे तक 'द गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉर्ड' के नाम से जाना जाता था और इसके बाद इसका नाम 'द गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' हो गया। यह एक तरह की रिकॉर्ड बुक है, जिसे प्रतिवर्ष पुनः संपादित किया जाता है और नए-नए वर्ल्ड रिकॉर्ड इसमें शामिल किये जाते हैं। इसके अंतर्गत मनुष्य द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड और विभिन्न प्राकृतिक रिकॉर्ड को शामिल किया जाता है। यह बुक ख़ुद भी एक विश्व रिकॉर्ड बन चुकी है।
जाति गणना पर फिर गरजे राहुल, जितनी आबादी उतनी हिस्सेदारी। कहा हमें दलित, ओबीसी को शक्ति देनी है। प्रेस वार्ता में कहा जाति गणना से प्रधानमंत्री भाग रहे। राहुल गांधी ने जाति गणना को अच्छे से धर लिया है। उन्होंने शुक्रवार को विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि जाति गणना से ही पता चलेगा कि किसी कितनी आबादी है। जिसकी जितनी आबादी है, उसे उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति गणना कराने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग रहे हैं, इसीलिए महिला आरक्षण को टाल दिया। महिलाओं को आरक्षण दस साल में मिलेगा या प्रंद्रह साल में कोई नहीं जानता। उन्होंने कहा कि जाति गणना की रिपोर्ट सरकार जारी करे और नई जनगणना जाति के आधार पर कराए। राहुल गांधी ने कहा कि आजादी का आंदोलन हिंदुस्तान के लोगों के हाथ में शक्ति सौंपने का एक तरीका था। जातिगत जनगणना से जो डेटा निकलेगा, वह हिन्दुस्तान की जनता को और शक्ति सौंपने का एक तरीका है। हमें हिंदुस्तान के OBC, दलित, आदिवासियों और महिलाओं को शक्ति देनी है। पत्रकार के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आएगी तो जातिगत जनगणना कराएंगे। देश को पता चलेगा कि OBC, दलित और आदिवासी कितने हैं। उन्हें देश चलाने में भागीदारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग गिना रहे हैं कि हमारे इतने सांसद पिछड़ी जाति के हैं। लेकिन सवाल है कि क्या सरकार की नीतियां बनाने में उनकी कोई भागीदारी है। कहा कि आप किसी भी BJP के MP से पूछ लीजिए कि वो कोई निर्णय लेते हैं? कानून बनाने में भाग लेते हैं? बिल्कुल नहीं। OBC के MP's को मूर्ति बना रखा है, जिनके पास पावर बिल्कुल नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि वो OBC के लिए बहुत काम करते हैं। अगर वे OBC के लिए काम करते हैं, तो 90 सचिवों में से सिर्फ 3 सचिव OBC से क्यों हैं? ये OBC आफिसर्स देश के बजट का कितना और क्या कंट्रोल कर रहे हैं? मुझे ये पता लगाना है कि हिन्दुस्तान में OBC कितने हैं और जितने हैं उतनी भागीदारी उन्हें मिलनी चाहिए। संसद के इस विशेष सत्र का मुख्य मुद्दा महिला आरक्षण था। लेकिन इसके साथ दो शर्तें भी थीं कि महिला आरक्षण करने से पहले जनगणना और परिसीमन करवाना होगा, जिसे करने में कई साल लगेंगे। सच्चाई ये है कि महिला आरक्षण को आज लागू किया जा सकता है। संसद और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है। लेकिन मोदी सरकार ये नहीं करना चाहती, वो सिर्फ गुमराह कर रही है। गुमराह किस चीज से- जातिगत जनगणना से।
जाति गणना पर फिर गरजे राहुल, जितनी आबादी उतनी हिस्सेदारी। कहा हमें दलित, ओबीसी को शक्ति देनी है। प्रेस वार्ता में कहा जाति गणना से प्रधानमंत्री भाग रहे। राहुल गांधी ने जाति गणना को अच्छे से धर लिया है। उन्होंने शुक्रवार को विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि जाति गणना से ही पता चलेगा कि किसी कितनी आबादी है। जिसकी जितनी आबादी है, उसे उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति गणना कराने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग रहे हैं, इसीलिए महिला आरक्षण को टाल दिया। महिलाओं को आरक्षण दस साल में मिलेगा या प्रंद्रह साल में कोई नहीं जानता। उन्होंने कहा कि जाति गणना की रिपोर्ट सरकार जारी करे और नई जनगणना जाति के आधार पर कराए। राहुल गांधी ने कहा कि आजादी का आंदोलन हिंदुस्तान के लोगों के हाथ में शक्ति सौंपने का एक तरीका था। जातिगत जनगणना से जो डेटा निकलेगा, वह हिन्दुस्तान की जनता को और शक्ति सौंपने का एक तरीका है। हमें हिंदुस्तान के OBC, दलित, आदिवासियों और महिलाओं को शक्ति देनी है। पत्रकार के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आएगी तो जातिगत जनगणना कराएंगे। देश को पता चलेगा कि OBC, दलित और आदिवासी कितने हैं। उन्हें देश चलाने में भागीदारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग गिना रहे हैं कि हमारे इतने सांसद पिछड़ी जाति के हैं। लेकिन सवाल है कि क्या सरकार की नीतियां बनाने में उनकी कोई भागीदारी है। कहा कि आप किसी भी BJP के MP से पूछ लीजिए कि वो कोई निर्णय लेते हैं? कानून बनाने में भाग लेते हैं? बिल्कुल नहीं। OBC के MP's को मूर्ति बना रखा है, जिनके पास पावर बिल्कुल नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि वो OBC के लिए बहुत काम करते हैं। अगर वे OBC के लिए काम करते हैं, तो नब्बे सचिवों में से सिर्फ तीन सचिव OBC से क्यों हैं? ये OBC आफिसर्स देश के बजट का कितना और क्या कंट्रोल कर रहे हैं? मुझे ये पता लगाना है कि हिन्दुस्तान में OBC कितने हैं और जितने हैं उतनी भागीदारी उन्हें मिलनी चाहिए। संसद के इस विशेष सत्र का मुख्य मुद्दा महिला आरक्षण था। लेकिन इसके साथ दो शर्तें भी थीं कि महिला आरक्षण करने से पहले जनगणना और परिसीमन करवाना होगा, जिसे करने में कई साल लगेंगे। सच्चाई ये है कि महिला आरक्षण को आज लागू किया जा सकता है। संसद और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है। लेकिन मोदी सरकार ये नहीं करना चाहती, वो सिर्फ गुमराह कर रही है। गुमराह किस चीज से- जातिगत जनगणना से।
विधायकों की पेंशन के बाद पंजाब सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की जनता को राशन लेने के लिए राशन की दुकानों के बाहर लाइन लगानी नहीं पड़ेगी। बल्कि राशन उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐलान किया है कि पंजाब में राशन की डोर स्टेप डिलीवरी शुरू की जाएगी। सीएम भगवंत मान ने कहा कि सरकार घर-घर राशन पहुंचाएगी। इस काम को अधिकारी ही करेंगे। मान ने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने ये स्कीम चालू की थी लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली में स्कीम को रोक दिया था।
विधायकों की पेंशन के बाद पंजाब सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की जनता को राशन लेने के लिए राशन की दुकानों के बाहर लाइन लगानी नहीं पड़ेगी। बल्कि राशन उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐलान किया है कि पंजाब में राशन की डोर स्टेप डिलीवरी शुरू की जाएगी। सीएम भगवंत मान ने कहा कि सरकार घर-घर राशन पहुंचाएगी। इस काम को अधिकारी ही करेंगे। मान ने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने ये स्कीम चालू की थी लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली में स्कीम को रोक दिया था।
फ़िलिस्तीन मुक्ति मोर्चा के क्रियान्वयन समिति के सचिव ने सोमवार को नार्वे के विदेशमंत्री के साथ भेंट में कहा कि बैतुल मुकद्दस के खिलाफ ट्रम्प के निर्णय से क्षेत्र में युद्ध और हिंसा अधिक होगी। समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार साएब उरैक़ात ने रामल्लाह में नार्वे के विदेशमंत्री से भेंट में कहा कि युद्ध सदैव एक पक्ष या संबंधित पक्षों की ओर से कानून के उल्लंघन के परिणाम में होता है। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सुरक्षा का अर्थ शांति की सुरक्षा है और फिलिस्तीन मुक्ति मोर्चा फिलिस्तीन से संबंधित समस्त समस्याओं के आखिरी समाधान के एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स कराये जाने के प्रयास में है। रामल्लाह जाने से पहले नार्वे के विदेशमंत्री ने तेलअवीव में जायोनी प्रधानमंत्री से भेंटवार्ता की थी। नार्वे के विदेश मंत्री फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास से भेंटवार्ता करने वाले हैं। ज्ञात रहे कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पैमाने पर वाले विरोधों के बावजूद 6 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बैतुल मुकद्दस को जायोनी शासन की राजधानी घोषित कर दिया था।
फ़िलिस्तीन मुक्ति मोर्चा के क्रियान्वयन समिति के सचिव ने सोमवार को नार्वे के विदेशमंत्री के साथ भेंट में कहा कि बैतुल मुकद्दस के खिलाफ ट्रम्प के निर्णय से क्षेत्र में युद्ध और हिंसा अधिक होगी। समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार साएब उरैक़ात ने रामल्लाह में नार्वे के विदेशमंत्री से भेंट में कहा कि युद्ध सदैव एक पक्ष या संबंधित पक्षों की ओर से कानून के उल्लंघन के परिणाम में होता है। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सुरक्षा का अर्थ शांति की सुरक्षा है और फिलिस्तीन मुक्ति मोर्चा फिलिस्तीन से संबंधित समस्त समस्याओं के आखिरी समाधान के एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स कराये जाने के प्रयास में है। रामल्लाह जाने से पहले नार्वे के विदेशमंत्री ने तेलअवीव में जायोनी प्रधानमंत्री से भेंटवार्ता की थी। नार्वे के विदेश मंत्री फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास से भेंटवार्ता करने वाले हैं। ज्ञात रहे कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पैमाने पर वाले विरोधों के बावजूद छः दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बैतुल मुकद्दस को जायोनी शासन की राजधानी घोषित कर दिया था।
२५२ भारतीय और योरोपीय शिक्षाका इतिहास बन्धन- मुक्त करने का प्रयास किया वहीं दूसरी और उसने उस साधारण मानव-समाजकी स्थिति सुधारनेका कोई यत्न नहीं किया जो अभीतक दरिद्र, अपढ़ और चारों ओरसे पीड़ित था । रूसो इस बुद्धिवादी और विवेकवादी प्रवृत्तिके विरुद्ध जीन जेक्स रूसो ( १७१२ - १७२८ ई० ) ने अपना मनोवेगवाद और प्रकृतिवादका झंडा उठाया । २५ जून सन् १९१२ को इतालिया ( इटली ) के जिनेवा नगरमें रूसोका जन्म हुआ। उसकी माता उसे बचपन में ही छोड़कर चल बसी अतः उसका पालन-पोषण उसकी कोमल हृदया बुत्रा और उसके फक्कड़ पिताने किया । जब वह केवल छः वर्षका था, तभी उसके पिताने अपनी स्त्री द्वारा संकलित भोंडी, अश्लील और उत्तेजक प्रेमकथाएँ सुना-सुनाकर उसके भोले-भाले मस्तिष्क में बचपन में ही कुरुचिपूर्ण साहित्य कूट-कूटकर भर दिया। बचपनमें ही उसने अपने पिताको उपन्यासोंसे भरी आलमारी पढ़कर समाप्त कर दी। इसके पश्चात् वह अपने दादाके पुस्तक संग्रहकी श्रोर श्राकृष्ट हुआ । इन पुस्तकोंमें उसे प्लुतार्क द्वारा लिखित 'महापुरुषोंका जीवन-चरित' ( प्लुतार्क्स' लाइन्ज़ श्रौफ़ ग्रेट मैन् ) और 'ईसाई धर्म तथा साम्राज्य के इतिहास का ज्ञान प्राप्त हुआ। रूसोके चरित्रपर इस साहित्यका अत्यन्त गम्भीर प्रभाव पड़ा और उसका कोमल हृदय वीरताके भावसे श्रोत-प्रोत हो गया । सन् १७२० में रूसोके पिताको कुछ कारणवश जिनेवा छोड़ देना और रूसो अपने मामाके पुत्रके साथ बोसी नामके गाँवमें दो वर्ष रहा । यहाँपर ये दोनों लातिन घोखनेकी अपेक्षा बोसीके प्राकृतिक -सौंदर्यका आनन्द लेते रहे। एक बार उसपर दुष्टता करनेका झूठा आरोप लगाया गया और उसे दंड भी दिया गया। उसका बाल-हृदय उस कठोर दंडसे तिलमिला उठा और उसने यह परिणाम निकाला कि "मनुष्य की गतिमेँ नियम-बद्धता, बाह्याडम्बर, उपदेश और दंडका प्रयोग
दो सौ बावन भारतीय और योरोपीय शिक्षाका इतिहास बन्धन- मुक्त करने का प्रयास किया वहीं दूसरी और उसने उस साधारण मानव-समाजकी स्थिति सुधारनेका कोई यत्न नहीं किया जो अभीतक दरिद्र, अपढ़ और चारों ओरसे पीड़ित था । रूसो इस बुद्धिवादी और विवेकवादी प्रवृत्तिके विरुद्ध जीन जेक्स रूसो ने अपना मनोवेगवाद और प्रकृतिवादका झंडा उठाया । पच्चीस जून सन् एक हज़ार नौ सौ बारह को इतालिया के जिनेवा नगरमें रूसोका जन्म हुआ। उसकी माता उसे बचपन में ही छोड़कर चल बसी अतः उसका पालन-पोषण उसकी कोमल हृदया बुत्रा और उसके फक्कड़ पिताने किया । जब वह केवल छः वर्षका था, तभी उसके पिताने अपनी स्त्री द्वारा संकलित भोंडी, अश्लील और उत्तेजक प्रेमकथाएँ सुना-सुनाकर उसके भोले-भाले मस्तिष्क में बचपन में ही कुरुचिपूर्ण साहित्य कूट-कूटकर भर दिया। बचपनमें ही उसने अपने पिताको उपन्यासोंसे भरी आलमारी पढ़कर समाप्त कर दी। इसके पश्चात् वह अपने दादाके पुस्तक संग्रहकी श्रोर श्राकृष्ट हुआ । इन पुस्तकोंमें उसे प्लुतार्क द्वारा लिखित 'महापुरुषोंका जीवन-चरित' और 'ईसाई धर्म तथा साम्राज्य के इतिहास का ज्ञान प्राप्त हुआ। रूसोके चरित्रपर इस साहित्यका अत्यन्त गम्भीर प्रभाव पड़ा और उसका कोमल हृदय वीरताके भावसे श्रोत-प्रोत हो गया । सन् एक हज़ार सात सौ बीस में रूसोके पिताको कुछ कारणवश जिनेवा छोड़ देना और रूसो अपने मामाके पुत्रके साथ बोसी नामके गाँवमें दो वर्ष रहा । यहाँपर ये दोनों लातिन घोखनेकी अपेक्षा बोसीके प्राकृतिक -सौंदर्यका आनन्द लेते रहे। एक बार उसपर दुष्टता करनेका झूठा आरोप लगाया गया और उसे दंड भी दिया गया। उसका बाल-हृदय उस कठोर दंडसे तिलमिला उठा और उसने यह परिणाम निकाला कि "मनुष्य की गतिमेँ नियम-बद्धता, बाह्याडम्बर, उपदेश और दंडका प्रयोग
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजा की तारीख और उसके मुहूर्त पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसको लेकर मध्य प्रदेश में सियासत गर्म है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा बार बार मुहूर्त को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर भाजपा ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। जब ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे, तो असुर और राक्षस आकर उसमें विघ्न डालते थे, कांग्रेस के नेता यही चरितार्थ कर रहे हैं। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशान साधा। उन्होंने लिखा-कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। अरे कांग्रेसियों, राम का नाम लेने से ही समय शुभ हो जाता है! उन्होंने आगे लिखा-इस निकृष्ट सोच और सनातन धर्म की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ का नतीजा है कि आज सम्पूर्ण कांग्रेस अपने पतन की ओर अग्रसर है। कांग्रेस के लिए राम, राजनीति के विषय होंगे लेकिन हमारे लिए राम, भक्ति और आस्था के विषय हैं। शिवराज ने लिखा- कांग्रेस के ही कुछ अतिउत्साही नेताओं ने नारा दिया था,'मंदिर वहीं बनाएंगे,लेकिन तारीख नहीं बताएंगे! ' वह शुभ घड़ी आई तो उनके पेट में दर्द होने लगा है। पौराणिक काल में जब ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे, तो असुर और राक्षस आकर उसमें विघ्न डालते थे, कांग्रेस के नेता यही चरितार्थ कर रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम अखिल कोटि ब्रह्मांड नायक हैं,लेकिन "भाजपा"अपने राजनैतिक स्वार्थ और सत्ता के अहंकार में, सनातन धर्म की मान्यताओं और शास्त्रीय मर्यादाओं को ताक पे रख कर "रामलला" पर अवैध "क़ब्ज़ा" करना चाहती है,जिसे ये देश कभी माफ़ नहीं करेगा'। आगे ट्वीट में दिग्विजय ने लिखा है कि सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नज़र अंदाज करने का नतीजा। 1- राम मंदिर के समस्त पुजारी कोरोना पोजिटिव । 2- उत्तर प्रदेश की मंत्री कमला रानी वरुण का कोरोना से स्वर्गवास। 3- उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। 4- भारत के गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। 5- मध्यप्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में । 6- कर्नाटक के भाजपा के मुख्यमंत्री कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। अमित शाह गृहमंत्री हैं ना कि प्रधानमंत्री। क्षमा करें। कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। अरे कांग्रेसियों, राम का नाम लेने से ही समय शुभ हो जाता है! कांग्रेस के ही कुछ अतिउत्साही नेताओं ने नारा दिया था,'मंदिर वहीं बनाएंगे,लेकिन तारीख नहीं बताएंगे! ' वह शुभ घड़ी आई तो उनके पेट में दर्द होने लगा है। कपिल सिब्बल जी ने रामलला के विरुद्ध खड़े होकर सनातन आस्था का अपमान किया। कमलनाथ जी भगवान राम को राजनीतिक स्टंट बताते हैं। एक मिस्टर बंटाधार हैं जिन्हें राम नाम में सिर्फ राजनीति दिखाई देती है। राहुल बाबा तो यह तक कह चुके हैं कि लोग मंदिर लड़कियों को छेड़ने जाते हैं।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजा की तारीख और उसके मुहूर्त पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसको लेकर मध्य प्रदेश में सियासत गर्म है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा बार बार मुहूर्त को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर भाजपा ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। जब ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे, तो असुर और राक्षस आकर उसमें विघ्न डालते थे, कांग्रेस के नेता यही चरितार्थ कर रहे हैं। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशान साधा। उन्होंने लिखा-कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। अरे कांग्रेसियों, राम का नाम लेने से ही समय शुभ हो जाता है! उन्होंने आगे लिखा-इस निकृष्ट सोच और सनातन धर्म की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ का नतीजा है कि आज सम्पूर्ण कांग्रेस अपने पतन की ओर अग्रसर है। कांग्रेस के लिए राम, राजनीति के विषय होंगे लेकिन हमारे लिए राम, भक्ति और आस्था के विषय हैं। शिवराज ने लिखा- कांग्रेस के ही कुछ अतिउत्साही नेताओं ने नारा दिया था,'मंदिर वहीं बनाएंगे,लेकिन तारीख नहीं बताएंगे! ' वह शुभ घड़ी आई तो उनके पेट में दर्द होने लगा है। पौराणिक काल में जब ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे, तो असुर और राक्षस आकर उसमें विघ्न डालते थे, कांग्रेस के नेता यही चरितार्थ कर रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम अखिल कोटि ब्रह्मांड नायक हैं,लेकिन "भाजपा"अपने राजनैतिक स्वार्थ और सत्ता के अहंकार में, सनातन धर्म की मान्यताओं और शास्त्रीय मर्यादाओं को ताक पे रख कर "रामलला" पर अवैध "क़ब्ज़ा" करना चाहती है,जिसे ये देश कभी माफ़ नहीं करेगा'। आगे ट्वीट में दिग्विजय ने लिखा है कि सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को नज़र अंदाज करने का नतीजा। एक- राम मंदिर के समस्त पुजारी कोरोना पोजिटिव । दो- उत्तर प्रदेश की मंत्री कमला रानी वरुण का कोरोना से स्वर्गवास। तीन- उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। चार- भारत के गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। पाँच- मध्यप्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कोरोना पोजिटिव अस्पताल में । छः- कर्नाटक के भाजपा के मुख्यमंत्री कोरोना पोजिटिव अस्पताल में। त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। अमित शाह गृहमंत्री हैं ना कि प्रधानमंत्री। क्षमा करें। कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं। अरे कांग्रेसियों, राम का नाम लेने से ही समय शुभ हो जाता है! कांग्रेस के ही कुछ अतिउत्साही नेताओं ने नारा दिया था,'मंदिर वहीं बनाएंगे,लेकिन तारीख नहीं बताएंगे! ' वह शुभ घड़ी आई तो उनके पेट में दर्द होने लगा है। कपिल सिब्बल जी ने रामलला के विरुद्ध खड़े होकर सनातन आस्था का अपमान किया। कमलनाथ जी भगवान राम को राजनीतिक स्टंट बताते हैं। एक मिस्टर बंटाधार हैं जिन्हें राम नाम में सिर्फ राजनीति दिखाई देती है। राहुल बाबा तो यह तक कह चुके हैं कि लोग मंदिर लड़कियों को छेड़ने जाते हैं।
CBI: अदालत रविशंकर गुप्ता की इस दलील से सहमत थी कि उनके पास उच्च योग्यता है और उन्हें देश से बाहर यात्रा करने की आवश्यकता है। वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं। मुंबई की एक विशेष अदालत ने नीरव मोदी की फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी को बड़ी राहत दी है। उनके खिलाफ सीबीआई की ओर से जारी लुक आउट सर्कुलर को रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अदालत रविशंकर गुप्ता की इस दलील से सहमत थी कि उनके पास उच्च योग्यता है और उन्हें देश से बाहर यात्रा करने की आवश्यकता है। वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं। गुप्ता ने कहा था कि वह पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष 31 बार पेश हुए थे। लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) को रद्द करने की मांग करते हुए नोएडा के 53 वर्षीय कार्यकारी ने कहा कि उनके काम की प्रकृति भारत से बाहर यात्रा करना है, लेकिन वह परिपत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने में असमर्थ हैं। हालांकि, सीबीआई ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि गुप्ता नीरव मोदी की कंपनी के वित्त पोषण का काम संभाल रहे थे, जिसने 150 फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग का इस्तेमाल कर के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से 6,498. 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। अदालत ने कहा कि अगर एलओसी हटा दिया जाता है तो गुप्ता अन्य आरोपियों की तरह देश छोड़कर भाग सकते हैं और आगे की जांच के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। विशेष अदालत ने कहा कि गुप्ता मामले में न तो आरोपी हैं और न ही गवाह हैं और इस मामले के संबंध में 30 से अधिक बार जांच अधिकारी के कार्यालय में उपस्थित हुए हैं। अदालत ने परिपत्र को रद्द करते हुए कहा, 'अगर आवेदक के खिलाफ जारी एलओसी रद्द नहीं की जाती है या वापस नहीं ली जाती है, तो इससे उसका करियर प्रभावित होगा। हालांकि अदालत ने गुप्ता को उसकी अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया है।
CBI: अदालत रविशंकर गुप्ता की इस दलील से सहमत थी कि उनके पास उच्च योग्यता है और उन्हें देश से बाहर यात्रा करने की आवश्यकता है। वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं। मुंबई की एक विशेष अदालत ने नीरव मोदी की फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी को बड़ी राहत दी है। उनके खिलाफ सीबीआई की ओर से जारी लुक आउट सर्कुलर को रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अदालत रविशंकर गुप्ता की इस दलील से सहमत थी कि उनके पास उच्च योग्यता है और उन्हें देश से बाहर यात्रा करने की आवश्यकता है। वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं। गुप्ता ने कहा था कि वह पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो के समक्ष इकतीस बार पेश हुए थे। लुक आउट सर्कुलर को रद्द करने की मांग करते हुए नोएडा के तिरेपन वर्षीय कार्यकारी ने कहा कि उनके काम की प्रकृति भारत से बाहर यात्रा करना है, लेकिन वह परिपत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने में असमर्थ हैं। हालांकि, सीबीआई ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि गुप्ता नीरव मोदी की कंपनी के वित्त पोषण का काम संभाल रहे थे, जिसने एक सौ पचास फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग का इस्तेमाल कर के पंजाब नेशनल बैंक से छः,चार सौ अट्ठानवे. बीस करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। अदालत ने कहा कि अगर एलओसी हटा दिया जाता है तो गुप्ता अन्य आरोपियों की तरह देश छोड़कर भाग सकते हैं और आगे की जांच के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। विशेष अदालत ने कहा कि गुप्ता मामले में न तो आरोपी हैं और न ही गवाह हैं और इस मामले के संबंध में तीस से अधिक बार जांच अधिकारी के कार्यालय में उपस्थित हुए हैं। अदालत ने परिपत्र को रद्द करते हुए कहा, 'अगर आवेदक के खिलाफ जारी एलओसी रद्द नहीं की जाती है या वापस नहीं ली जाती है, तो इससे उसका करियर प्रभावित होगा। हालांकि अदालत ने गुप्ता को उसकी अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया है।
जल ही जीवन है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन अफसोस की बात है कि कुदरत की इस अनमोल नेमत को सहेजने और किफायत से ुुबरतने के मामले में हम निहायत लापरवाह साबित हुए हैं। आज भूमिगत जल निरंतर नीचे जा रहा है जो गंभीर चिंता का विषय है। इसके चलते भविष्य में विश्व के अधिकतर देशों को जल संकट की विकट समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक ने दावा किया है कि कैलिफोर्निया के पास कुछ ही वर्षों का जल भंडार शेष है। मानव जाति तेजी के साथ विकास की ओर अग्रसर तो है पर उससे लगातार प्राकृतिक धरोहरें छिनती जा रही हैं। जल सहित अन्य प्राकृतिक धरोहरों का दुरुपयोग, उन्हें दूषित करना और गैर प्राकृतिक ढंग से दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। आखिर कब तक हम अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारते रहेंगे?
जल ही जीवन है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन अफसोस की बात है कि कुदरत की इस अनमोल नेमत को सहेजने और किफायत से ुुबरतने के मामले में हम निहायत लापरवाह साबित हुए हैं। आज भूमिगत जल निरंतर नीचे जा रहा है जो गंभीर चिंता का विषय है। इसके चलते भविष्य में विश्व के अधिकतर देशों को जल संकट की विकट समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक ने दावा किया है कि कैलिफोर्निया के पास कुछ ही वर्षों का जल भंडार शेष है। मानव जाति तेजी के साथ विकास की ओर अग्रसर तो है पर उससे लगातार प्राकृतिक धरोहरें छिनती जा रही हैं। जल सहित अन्य प्राकृतिक धरोहरों का दुरुपयोग, उन्हें दूषित करना और गैर प्राकृतिक ढंग से दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। आखिर कब तक हम अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारते रहेंगे?
सौंदर्य से सम्पन्न है। उसके जन्म पर कवि ने उसे 'भूमण्डल की मुँदरी का सुघर नगीना' कहा है। बड़ीं होने पर वह किरणजाल सी उज्ज्वल दिखलाई देती हैं, उसके अंग प्रत्यंग में चपला खेलती है। उसका यौवन घनघटा सा उठता है । उसपर भगवान ने उसे वह भोलापन दिया है जो 'सुन्दरता कहँ सुन्दर करई ।' पर नूरजहाँ के चरित्र का प्राण है उसके हृदय का अंन्द्र । किसी के भी जीवन का यह सबसे बड़ा अभिशाप है कि उसका प्रेम किसी से हो, विवाह किसी से । मेहर इसी प्रकार की एक अभिशापग्रसित नारी है। इस पर भी अँधेरी रात में वेश बदल कर उसके पति की हत्या करने की इच्छा से आने वाले अपने प्रेमी को करारा जवाब देकर उसने जो कर्तव्य की वेदी पर प्रेम का वलिदान किया है, उसके कारण वह कितनी कौतुक की वस्तु लगती है, कितनी प्यारी और प्रशंसनीय । यह नहीं कि उसके जीवन में मानसिक दुर्बलता न आई हो । एक बार वह संबंध विच्छेद की बात भी सोचती है, पर 'उसका उत्तरदायित्व उस पर नहीं, उसके पति पर है । अफग था स्वभाव का रूखा, हृदयहीन, अत्याचारी । कला उसके लिये बला, प्रेम पागलपन, संगीत और साहित्य से उसे चिद, रमणी कामपूर्ति का साधन । कहाँ तक क्षोभ उत्पन्न न होता। दोनों का संयोग ऐसा था जैसे कौए की चोंच में अंगूर । मेहर का वह क्षणिक आवेश था । पति की मृत्यु के उपरांत भी उसने अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है - एक चार तो श्रात्मघात के लिए सन्नद्ध होकर भी । अन्त में जहांगीर अपने कौशल से ही उस पर विजय प्राप्त करने में सफल होता है और प्रेम भावना सतीत्व भावना को दवा देती है। वहाँ न झुकने पर नूरजहाँ देवी तो हो जाती पर पत्थर की । वहाँ पराजय ही प्यारी लगती है 1 विश्वास नहीं होता कि विवाहोपरान्त अन्य सुखद स्मृतियों के साथ सलीम की स्मृति को विदा करने में वह पूर्ण रूप से समर्थ हुई थी। इस कराहने को तो सुनियेप्यारे दामन की पट्टी से, याँधे घोटों को टीस विदा । उस मर् प्रदेश में खोई, सरिताधारा के वारीश विदा । वे हिचकी धनकर आते हैं, सू यनकर होनप विदा । वे पीछा बनकर उठते हैं, किस्मत धनकर सौगए, विटा । शहजादा है । इस फाव्य में तीन रमणीमृत्तियों हैं- प्रभारली, मेहरुन्निसा और जमीला । कवि ने तीनों के साथ उसके 'चुम्बन' 'आलिङ्गन' को दिखाया अथवा बताया है। उस जैसी स्थिति के व्यक्तियों या ऐसा चरित्र र है अथवा उन्हें ऐसी सुविधाएँ रहती हैं यही दिसाना कवि लक्ष्य है। जमीला के प्रति पोई गहरी अनुभूति उसके हृदय में नहीं है। सबसे प्रथम अनारकली उसके जीवन में है और घोधी की भाँति उसके अस्तित्व को भवभोर देती है। फिर मेटरन्निसा का भोला सोन्दर्य उसे मस्त यना देता है। जैसे शांधी उतरने पर वृक्ष फिर अपनी शान्त स्थिति में आर मलियानिल के भोषों या स्वागत करता है उसकार सतीम ने अनार के पाकेको पोषित किया है । यादर्श प्रेमी न होने पर भी सलीमश्च । माग विश्राम है कि यदि अमार भारती हो सही की सौंदर्य से सम्पन्न है। उसके जन्म पर कवि ने उसे 'भूमण्डल की मुँ दरी का सुघर नगीना' कहा है । वड़ी होने पर वह किरणजाल सी उज्ज्वल दिखलाई देती हैं, उसके अंग प्रत्यंग में चपला खेलती है। उसका यौवन घनघटा सा उठता है। उसपर भगवान ने उसे वह भोलापन दिया है जो 'सुन्दरता कहँ सुन्दर करई ।' पर नूरजहाँ के चरित्र का प्राण है उसके हृदय का अंत । किसी के भी जीवन का यह सबसे बड़ा अभिशाप है कि उसका प्रेम किसी से हो, विवाह किसी से । मेहर इसी प्रकार की एक अभिशापग्रसित नारी है। इस पर भी अँधेरी रात में वेश बदल कर उसके पति की हत्या करने की इच्छा से आने वाले अपने प्रेमी को करारा जवाब देकर उसने जो कर्तव्य की वेदी पर प्रेम का चलिदान किया है, उसके कारण वह कितनी कौतुक की वस्तु लगती है, कितनी प्यारी और प्रशंसनीय । यह नहीं कि उसके जीवन में मानसिक दुर्बलता न आई हो । एक बार वह संबंध विच्छेद की बात भी सोचती है, पर उसका उत्तरदायित्व उस पर नहीं, उसके पति पर है। अन था स्वभाव का रुख, हृदयहीन, अत्याचारी । कला उसके लिये 'यला, प्रेम पागलपन, संगीत और साहित्य से उसे चिढ़, रमणी कामपूर्ति का साधन । कहाँ तक क्षोभ उत्पन्न न होता। दोनों का संयोग ऐसा था जैसे कौए की चोंच में अंगूर । मेहर का वह क्षणिक आवेश था। पति की मृत्यु के उपरांत भी उसने अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है - एक बार तो श्रात्मघात के लिए सन्नद्ध होकर भी। ग्रन्त में जहांगीर अपने कौशल से ही उस पर विजय प्राप्त करने में सफल होता है और प्रेम भावना सतीत्व भावना को दवा देती है। वहाँ न झुकने पर नूरजहाँ देवी तो हो जाती पर पत्थर की । वहाँ पराजय ही प्यारी लगती है ।
सौंदर्य से सम्पन्न है। उसके जन्म पर कवि ने उसे 'भूमण्डल की मुँदरी का सुघर नगीना' कहा है। बड़ीं होने पर वह किरणजाल सी उज्ज्वल दिखलाई देती हैं, उसके अंग प्रत्यंग में चपला खेलती है। उसका यौवन घनघटा सा उठता है । उसपर भगवान ने उसे वह भोलापन दिया है जो 'सुन्दरता कहँ सुन्दर करई ।' पर नूरजहाँ के चरित्र का प्राण है उसके हृदय का अंन्द्र । किसी के भी जीवन का यह सबसे बड़ा अभिशाप है कि उसका प्रेम किसी से हो, विवाह किसी से । मेहर इसी प्रकार की एक अभिशापग्रसित नारी है। इस पर भी अँधेरी रात में वेश बदल कर उसके पति की हत्या करने की इच्छा से आने वाले अपने प्रेमी को करारा जवाब देकर उसने जो कर्तव्य की वेदी पर प्रेम का वलिदान किया है, उसके कारण वह कितनी कौतुक की वस्तु लगती है, कितनी प्यारी और प्रशंसनीय । यह नहीं कि उसके जीवन में मानसिक दुर्बलता न आई हो । एक बार वह संबंध विच्छेद की बात भी सोचती है, पर 'उसका उत्तरदायित्व उस पर नहीं, उसके पति पर है । अफग था स्वभाव का रूखा, हृदयहीन, अत्याचारी । कला उसके लिये बला, प्रेम पागलपन, संगीत और साहित्य से उसे चिद, रमणी कामपूर्ति का साधन । कहाँ तक क्षोभ उत्पन्न न होता। दोनों का संयोग ऐसा था जैसे कौए की चोंच में अंगूर । मेहर का वह क्षणिक आवेश था । पति की मृत्यु के उपरांत भी उसने अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है - एक चार तो श्रात्मघात के लिए सन्नद्ध होकर भी । अन्त में जहांगीर अपने कौशल से ही उस पर विजय प्राप्त करने में सफल होता है और प्रेम भावना सतीत्व भावना को दवा देती है। वहाँ न झुकने पर नूरजहाँ देवी तो हो जाती पर पत्थर की । वहाँ पराजय ही प्यारी लगती है एक विश्वास नहीं होता कि विवाहोपरान्त अन्य सुखद स्मृतियों के साथ सलीम की स्मृति को विदा करने में वह पूर्ण रूप से समर्थ हुई थी। इस कराहने को तो सुनियेप्यारे दामन की पट्टी से, याँधे घोटों को टीस विदा । उस मर् प्रदेश में खोई, सरिताधारा के वारीश विदा । वे हिचकी धनकर आते हैं, सू यनकर होनप विदा । वे पीछा बनकर उठते हैं, किस्मत धनकर सौगए, विटा । शहजादा है । इस फाव्य में तीन रमणीमृत्तियों हैं- प्रभारली, मेहरुन्निसा और जमीला । कवि ने तीनों के साथ उसके 'चुम्बन' 'आलिङ्गन' को दिखाया अथवा बताया है। उस जैसी स्थिति के व्यक्तियों या ऐसा चरित्र र है अथवा उन्हें ऐसी सुविधाएँ रहती हैं यही दिसाना कवि लक्ष्य है। जमीला के प्रति पोई गहरी अनुभूति उसके हृदय में नहीं है। सबसे प्रथम अनारकली उसके जीवन में है और घोधी की भाँति उसके अस्तित्व को भवभोर देती है। फिर मेटरन्निसा का भोला सोन्दर्य उसे मस्त यना देता है। जैसे शांधी उतरने पर वृक्ष फिर अपनी शान्त स्थिति में आर मलियानिल के भोषों या स्वागत करता है उसकार सतीम ने अनार के पाकेको पोषित किया है । यादर्श प्रेमी न होने पर भी सलीमश्च । माग विश्राम है कि यदि अमार भारती हो सही की सौंदर्य से सम्पन्न है। उसके जन्म पर कवि ने उसे 'भूमण्डल की मुँ दरी का सुघर नगीना' कहा है । वड़ी होने पर वह किरणजाल सी उज्ज्वल दिखलाई देती हैं, उसके अंग प्रत्यंग में चपला खेलती है। उसका यौवन घनघटा सा उठता है। उसपर भगवान ने उसे वह भोलापन दिया है जो 'सुन्दरता कहँ सुन्दर करई ।' पर नूरजहाँ के चरित्र का प्राण है उसके हृदय का अंत । किसी के भी जीवन का यह सबसे बड़ा अभिशाप है कि उसका प्रेम किसी से हो, विवाह किसी से । मेहर इसी प्रकार की एक अभिशापग्रसित नारी है। इस पर भी अँधेरी रात में वेश बदल कर उसके पति की हत्या करने की इच्छा से आने वाले अपने प्रेमी को करारा जवाब देकर उसने जो कर्तव्य की वेदी पर प्रेम का चलिदान किया है, उसके कारण वह कितनी कौतुक की वस्तु लगती है, कितनी प्यारी और प्रशंसनीय । यह नहीं कि उसके जीवन में मानसिक दुर्बलता न आई हो । एक बार वह संबंध विच्छेद की बात भी सोचती है, पर उसका उत्तरदायित्व उस पर नहीं, उसके पति पर है। अन था स्वभाव का रुख, हृदयहीन, अत्याचारी । कला उसके लिये 'यला, प्रेम पागलपन, संगीत और साहित्य से उसे चिढ़, रमणी कामपूर्ति का साधन । कहाँ तक क्षोभ उत्पन्न न होता। दोनों का संयोग ऐसा था जैसे कौए की चोंच में अंगूर । मेहर का वह क्षणिक आवेश था। पति की मृत्यु के उपरांत भी उसने अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है - एक बार तो श्रात्मघात के लिए सन्नद्ध होकर भी। ग्रन्त में जहांगीर अपने कौशल से ही उस पर विजय प्राप्त करने में सफल होता है और प्रेम भावना सतीत्व भावना को दवा देती है। वहाँ न झुकने पर नूरजहाँ देवी तो हो जाती पर पत्थर की । वहाँ पराजय ही प्यारी लगती है ।
क्या हो रहा है वायरल : Current Affairs Special (DU) नाम के यूट्यूब चैनल पर दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार सभी स्टूडेंट्स के खाते में 7 लाख रुपए ट्रांसफर कर रही है। 6 नवंबर 2020 को अपलोड किए गए वीडियो में दावा है कि केंद्र सरकार जीवन लक्ष्य योजना के तहत सभी छात्रों को 7 लाख रुपए देगी। बताया गया है कि स्टूडेंट्स को 18 वर्ष की आयु से 625 रुपए प्रतिमाह भरने होंगे। फिर जब स्टूडेंट 35 वर्ष का हो जाएगा, तब उसे सरकार की तरफ से 7 लाख रुपए मिलेंगे। और सच क्या है ? This website follows the DNPA Code of Ethics.
क्या हो रहा है वायरल : Current Affairs Special नाम के यूट्यूब चैनल पर दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार सभी स्टूडेंट्स के खाते में सात लाख रुपए ट्रांसफर कर रही है। छः नवंबर दो हज़ार बीस को अपलोड किए गए वीडियो में दावा है कि केंद्र सरकार जीवन लक्ष्य योजना के तहत सभी छात्रों को सात लाख रुपए देगी। बताया गया है कि स्टूडेंट्स को अट्ठारह वर्ष की आयु से छः सौ पच्चीस रुपयापए प्रतिमाह भरने होंगे। फिर जब स्टूडेंट पैंतीस वर्ष का हो जाएगा, तब उसे सरकार की तरफ से सात लाख रुपए मिलेंगे। और सच क्या है ? This website follows the DNPA Code of Ethics.
व्हिस्की एक सज्जन का पेय है, खासकर लोकप्रियआपराधिक समुदायों के बीच पिछली शताब्दी के 20-दशक में था। 1 9वीं शताब्दी के बाद से यह पेय सबसे प्रसिद्ध ब्रांड है, जो "जॉनी वाकर" है, जिसका नाम इसके संस्थापक जॉन वॉकर के नाम पर रखा गया है। मशहूर मिश्रित व्हिस्की "ब्लू लेबल", साथ ही "लाल लेबल" और "ब्लैक लेबल" पूरी दुनिया में बेचे जाते हैं; इसकी लोकप्रियता तैयारी की विशेष तकनीक और मादक कच्चे माल की गुणवत्ता के कारण है। जॉन वॉकर एक युवा और साहसी उत्तराधिकारी हैकिराने का व्यवसाय - विभिन्न प्रकार की चाय मिश्रण करने में लगा हुआ था। इतनी छोटी उम्र के बावजूद (लड़का मुश्किल से पंद्रह वर्ष तक पहुंच गया), जॉनी के पास पहले से ही एक संपन्न किराने की दुकान थी। 1836 में लाभदायक व्यवसाय के शीर्ष पर वाकर अलेक्जेंडर के पुत्रों में से एक है - कम उपहार और संसाधनकारी व्यक्ति नहीं। वह वह था जिसने मिश्रित एकल माल्ट व्हिस्की का उत्पादन शुरू किया, जिसे ब्रांड ओल्ड हाइलैंड के नाम से बनाया गया और जल्द ही लोकप्रियता प्राप्त हुई। अल्कोहल का पहला रिलीज बैच जॉन वॉकर की मृत्यु के 10 साल बाद 1867 दिनांकित है। 39 साल बाद, 1 9 08 में, जॉनी के पोतेअपने पिता के व्यवसाय को जारी रखा, मूल नाम जॉनी वाकर पेटेंट किया, और इस तरह कंपनी को "जॉनी वाकर एंड संस" दुनिया भर में जाना जाता है। 1 9 0 9 में, भाइयों वाकर अलेक्जेंडर जूनियर और जॉर्ज ने अपने पहले से ही लोकप्रिय, मादक पेय का नाम बदल दियाः जॉनी वॉकर बहुत विशेष ओल्ड हाईलैंड व्हिस्की और अतिरिक्त विशेष ओल्ड हाइलैंड व्हिस्की। इसके बजाए, व्हिस्की ब्रांड लाल लेबल और ब्लैक लेबल के तहत दिखाई दिए, और बाद में कंपनी ने मजबूत पेय पदार्थों की अन्य किस्मों का उत्पादन शुरू कियाः व्हिस्की "ब्लू लेबल", "ग्रीन लेबल", "गोल्ड लेबल"। 1 99 7 से, और आज तक, मूल कंपनी स्वादिष्ट स्कॉटिश आत्माओं के उत्पादन में लगी हुई है, डायजेओ है। आंकड़ों के अनुसार, ज्ञात से शराबनिर्माता दुनिया में सबसे अधिक मांग और खरीदे जाने वाले में से एक बना हुआ है। सबसे महंगा ब्रांड व्हिस्की "ब्लू लेबल" हैं, जिसकी कीमत 200 डॉलर से है, एक्सपोजर और क्षमता के आधार पर। ब्लू लेबल की विशिष्ट विशेषता यह है कियह आधे शताब्दी के संपर्क में, व्हिस्की की कई किस्मों को जोड़ती है। उच्च लागत के बावजूद, इस श्रेणी के पेय की मांग इस दिन नहीं आती है। व्हिस्की "जॉनी वॉकर ब्लू लेबल" - यह कुलीन शराब है, जो connoisseurs के लिए इरादा है। स्वादिष्ट स्कॉच की एक बोतल की औसत कीमत परशराब की उम्र बढ़ने, शराब की उम्र बढ़ने, साथ ही साथ पेय के उद्देश्य को प्रभावित करता है, - उपहार लपेटने से सामान्य से कई गुना अधिक खर्च हो सकता है। शराब में विशेषज्ञता रखने वाले रूसी स्टोर में, व्हिस्की "ब्लू लेबल" बेचते हैं, जिसकी कीमत 10 से 30 हजार rubles और अधिक होती है। मिश्रित व्हिस्की के स्वाद, रंग और गंध के साथनीला लेबल स्वाद और अन्य पेय "जॉनी वाकर" की सुगंध से अलग है। एम्बर प्रतिबिंब के साथ गोल्डन, शहद, गहरा रंग इस ब्रांड के अल्कोहल की एक विशिष्ट विशेषता है। व्हिस्की "ब्लू लेबल" में धुआं के हल्के नोट्स के साथ एक तीखा, शेरी और देवदार का समृद्ध स्वाद है। कड़वा, डार्क चॉकलेट और ओक के बाद का पेय पेय को मूल बनाता है, और इसका स्वाद अवर्णनीय और अपरिवर्तनीय है। बाद में लकड़ी की धुंध को छोड़कर लंबे समय तक चलने वाला, अविभाज्य है। ब्लू लेबल 35 अवयवों से बना है,पहले तीन साल के लिए ओक बैरल में वृद्ध। मिश्रित पेय कम से कम 25 वर्षों के संपर्क के साथ विशेष रूप से व्हिस्की से बने होते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अल्कोहल ब्रांड "जॉनी वॉकर ब्लू लेबल" - यह एक वास्तविक, क्लासिक स्कॉच व्हिस्की है, जिसमें इसके अंतर्निहित रंग, गंध और स्वाद है। तैयार उत्पाद विशेष ग्लास की बोतलों में डाला जाता है जिसमें हथियारों के कोट या पैदल चलने वाले व्यक्ति की छवि होती है, और फिर एक स्टॉपर से चिपक जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्कॉटलैंड से एक पेय की आवश्यकता हैस्थानीय वसंत पानी की इसकी अनूठी विशेषताओं। यह उनके लिए धन्यवाद है कि जॉनी वाकर उत्पाद महान हो जाता है, क्योंकि किसी भी देश में किसी भी शराब उत्पादक स्वाद और अन्य गुणों के लिए एक समान उत्पाद का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं। शराब के लोकप्रिय प्रकार, अतिरिक्त- और प्रीमियम-वर्गजालसाजी के अधीन - बख्शा और लक्जरी स्कॉटिश पेय नहीं है। असल में टकसाली शराब सामान्य शराब मदद करने के लिए, हानिरहित खाद्य योज्य और स्वाद होता है प्राप्त कर लेता है सुगंध, स्वाद और रंग, थोड़ा मिलते-जुलते व्हिस्की अनुभवहीन उपयोगकर्ता। लेकिन यह होता है कि कम करने के लिए नकली निर्माताओं के उत्पादन की लागत मेथनॉल के उपयोग का सहारा लिया - मानव जीव मजबूत विषाक्तता में फोन करने वाले के साथ संपर्क में हानिकारक पदार्थ है, जो के परिणामों मृत्यु तक बहुत दुख की बात हो सकती है। दिखने में मेथनॉल और bootleggers के अपने प्रयोग की वजह से इथेनॉल से अलग नहीं गंध नकली शराब के लिए काफी मुश्किल प्रकट करते हैं। मूल व्हिस्की "ब्लू लेबल", जिसमें से एक नकली हैरूस सहित कई देशों में आम है, बाहरी विशेषताओं से भी अंतर करना आसान है। सबसे पहले आपको ध्यान देना चाहिए उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना, उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना, उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना। हालांकि, उद्यमी धोखाधड़ी करने वालों को बनाने और उत्पादित करना सीखा। एक और महत्वपूर्ण बातः निर्माता के अनुसार, "ब्लू लेबल", 0.7 और 1.75 लीटर के कंटेनर में उत्पादित होता है, और नकली मुख्य रूप से व्हिस्की "ब्लू लेबल" 0.5 लीटर के रूप में पाया जाता है। इस तरह की "गुणवत्ता" शराब की एक बोतल लेबल पर उत्तल अक्षरों की अनुपस्थिति के साथ-साथ हथियार या व्यक्ति के चलने वाले व्यक्ति के मूल कोट की पहचान से अलग है, क्योंकि अधिकांश बूटलॉग नकली ग्लास पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।
व्हिस्की एक सज्जन का पेय है, खासकर लोकप्रियआपराधिक समुदायों के बीच पिछली शताब्दी के बीस-दशक में था। एक नौवीं शताब्दी के बाद से यह पेय सबसे प्रसिद्ध ब्रांड है, जो "जॉनी वाकर" है, जिसका नाम इसके संस्थापक जॉन वॉकर के नाम पर रखा गया है। मशहूर मिश्रित व्हिस्की "ब्लू लेबल", साथ ही "लाल लेबल" और "ब्लैक लेबल" पूरी दुनिया में बेचे जाते हैं; इसकी लोकप्रियता तैयारी की विशेष तकनीक और मादक कच्चे माल की गुणवत्ता के कारण है। जॉन वॉकर एक युवा और साहसी उत्तराधिकारी हैकिराने का व्यवसाय - विभिन्न प्रकार की चाय मिश्रण करने में लगा हुआ था। इतनी छोटी उम्र के बावजूद , जॉनी के पास पहले से ही एक संपन्न किराने की दुकान थी। एक हज़ार आठ सौ छत्तीस में लाभदायक व्यवसाय के शीर्ष पर वाकर अलेक्जेंडर के पुत्रों में से एक है - कम उपहार और संसाधनकारी व्यक्ति नहीं। वह वह था जिसने मिश्रित एकल माल्ट व्हिस्की का उत्पादन शुरू किया, जिसे ब्रांड ओल्ड हाइलैंड के नाम से बनाया गया और जल्द ही लोकप्रियता प्राप्त हुई। अल्कोहल का पहला रिलीज बैच जॉन वॉकर की मृत्यु के दस साल बाद एक हज़ार आठ सौ सरसठ दिनांकित है। उनतालीस साल बाद, एक नौ आठ में, जॉनी के पोतेअपने पिता के व्यवसाय को जारी रखा, मूल नाम जॉनी वाकर पेटेंट किया, और इस तरह कंपनी को "जॉनी वाकर एंड संस" दुनिया भर में जाना जाता है। एक नौ शून्य नौ में, भाइयों वाकर अलेक्जेंडर जूनियर और जॉर्ज ने अपने पहले से ही लोकप्रिय, मादक पेय का नाम बदल दियाः जॉनी वॉकर बहुत विशेष ओल्ड हाईलैंड व्हिस्की और अतिरिक्त विशेष ओल्ड हाइलैंड व्हिस्की। इसके बजाए, व्हिस्की ब्रांड लाल लेबल और ब्लैक लेबल के तहत दिखाई दिए, और बाद में कंपनी ने मजबूत पेय पदार्थों की अन्य किस्मों का उत्पादन शुरू कियाः व्हिस्की "ब्लू लेबल", "ग्रीन लेबल", "गोल्ड लेबल"। एक निन्यानवे सात से, और आज तक, मूल कंपनी स्वादिष्ट स्कॉटिश आत्माओं के उत्पादन में लगी हुई है, डायजेओ है। आंकड़ों के अनुसार, ज्ञात से शराबनिर्माता दुनिया में सबसे अधिक मांग और खरीदे जाने वाले में से एक बना हुआ है। सबसे महंगा ब्रांड व्हिस्की "ब्लू लेबल" हैं, जिसकी कीमत दो सौ डॉलर से है, एक्सपोजर और क्षमता के आधार पर। ब्लू लेबल की विशिष्ट विशेषता यह है कियह आधे शताब्दी के संपर्क में, व्हिस्की की कई किस्मों को जोड़ती है। उच्च लागत के बावजूद, इस श्रेणी के पेय की मांग इस दिन नहीं आती है। व्हिस्की "जॉनी वॉकर ब्लू लेबल" - यह कुलीन शराब है, जो connoisseurs के लिए इरादा है। स्वादिष्ट स्कॉच की एक बोतल की औसत कीमत परशराब की उम्र बढ़ने, शराब की उम्र बढ़ने, साथ ही साथ पेय के उद्देश्य को प्रभावित करता है, - उपहार लपेटने से सामान्य से कई गुना अधिक खर्च हो सकता है। शराब में विशेषज्ञता रखने वाले रूसी स्टोर में, व्हिस्की "ब्लू लेबल" बेचते हैं, जिसकी कीमत दस से तीस हजार rubles और अधिक होती है। मिश्रित व्हिस्की के स्वाद, रंग और गंध के साथनीला लेबल स्वाद और अन्य पेय "जॉनी वाकर" की सुगंध से अलग है। एम्बर प्रतिबिंब के साथ गोल्डन, शहद, गहरा रंग इस ब्रांड के अल्कोहल की एक विशिष्ट विशेषता है। व्हिस्की "ब्लू लेबल" में धुआं के हल्के नोट्स के साथ एक तीखा, शेरी और देवदार का समृद्ध स्वाद है। कड़वा, डार्क चॉकलेट और ओक के बाद का पेय पेय को मूल बनाता है, और इसका स्वाद अवर्णनीय और अपरिवर्तनीय है। बाद में लकड़ी की धुंध को छोड़कर लंबे समय तक चलने वाला, अविभाज्य है। ब्लू लेबल पैंतीस अवयवों से बना है,पहले तीन साल के लिए ओक बैरल में वृद्ध। मिश्रित पेय कम से कम पच्चीस वर्षों के संपर्क के साथ विशेष रूप से व्हिस्की से बने होते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अल्कोहल ब्रांड "जॉनी वॉकर ब्लू लेबल" - यह एक वास्तविक, क्लासिक स्कॉच व्हिस्की है, जिसमें इसके अंतर्निहित रंग, गंध और स्वाद है। तैयार उत्पाद विशेष ग्लास की बोतलों में डाला जाता है जिसमें हथियारों के कोट या पैदल चलने वाले व्यक्ति की छवि होती है, और फिर एक स्टॉपर से चिपक जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्कॉटलैंड से एक पेय की आवश्यकता हैस्थानीय वसंत पानी की इसकी अनूठी विशेषताओं। यह उनके लिए धन्यवाद है कि जॉनी वाकर उत्पाद महान हो जाता है, क्योंकि किसी भी देश में किसी भी शराब उत्पादक स्वाद और अन्य गुणों के लिए एक समान उत्पाद का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं। शराब के लोकप्रिय प्रकार, अतिरिक्त- और प्रीमियम-वर्गजालसाजी के अधीन - बख्शा और लक्जरी स्कॉटिश पेय नहीं है। असल में टकसाली शराब सामान्य शराब मदद करने के लिए, हानिरहित खाद्य योज्य और स्वाद होता है प्राप्त कर लेता है सुगंध, स्वाद और रंग, थोड़ा मिलते-जुलते व्हिस्की अनुभवहीन उपयोगकर्ता। लेकिन यह होता है कि कम करने के लिए नकली निर्माताओं के उत्पादन की लागत मेथनॉल के उपयोग का सहारा लिया - मानव जीव मजबूत विषाक्तता में फोन करने वाले के साथ संपर्क में हानिकारक पदार्थ है, जो के परिणामों मृत्यु तक बहुत दुख की बात हो सकती है। दिखने में मेथनॉल और bootleggers के अपने प्रयोग की वजह से इथेनॉल से अलग नहीं गंध नकली शराब के लिए काफी मुश्किल प्रकट करते हैं। मूल व्हिस्की "ब्लू लेबल", जिसमें से एक नकली हैरूस सहित कई देशों में आम है, बाहरी विशेषताओं से भी अंतर करना आसान है। सबसे पहले आपको ध्यान देना चाहिए उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना, उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना, उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करना। हालांकि, उद्यमी धोखाधड़ी करने वालों को बनाने और उत्पादित करना सीखा। एक और महत्वपूर्ण बातः निर्माता के अनुसार, "ब्लू लेबल", शून्य.सात और एक दशमलव पचहत्तर लीटरटर के कंटेनर में उत्पादित होता है, और नकली मुख्य रूप से व्हिस्की "ब्लू लेबल" शून्य दशमलव पाँच लीटरटर के रूप में पाया जाता है। इस तरह की "गुणवत्ता" शराब की एक बोतल लेबल पर उत्तल अक्षरों की अनुपस्थिति के साथ-साथ हथियार या व्यक्ति के चलने वाले व्यक्ति के मूल कोट की पहचान से अलग है, क्योंकि अधिकांश बूटलॉग नकली ग्लास पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।
"Detraleks" - शिरापरक कमी में जटिल उपचार में इस्तेमाल एक दवा। क्या अद्वितीय है उपाय, वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए कितना समय है, दवा, मरीजों और चिकित्सकों के बारे में कुछ राय इस लेख में पाया जा सकता है। इस विकृति तथ्य यह है कि नसों में दबाव बढ़ा पोत दीवार फोड़ और यह विकृत से उठता है। तो वियना त्वचा (लाठी) और मोड़ से ऊपर उठकर शुरू होता है। इसके अलावा, एक कमजोर दीवार सूजन के साथ जहाजों में होता है मस्तिष्क को संकेत की आपूर्ति। इन संकेतों हम पैरों में दर्द के रूप में देखते हैं। ताकि वैरिकाज़ नसों - न केवल बदसूरत लेकिन यह भी स्वास्थ्य और भलाई के लिए खतरनाक है। व्यापक इस रोग को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया उपचार। "Detraleks" - वैरिकाज़ नसों, के इलाज में इस्तेमाल दवाओं में से एक। इस का मतलब है वराइसेस पर आवेदन अच्छे परिणाम देता है, देखते हैं कि दोनों रोगियों और उनके चिकित्सकों। फ्रांस दवा में बनाया गया "Detraleks" शिरापरक और के उपचार के लिए इरादा है लसीका वाहिकाओं। वह निम्नलिखित प्रभाव होते हैंः • लोचदार वाहिकाओं बनाता है; • सूजन के स्थल पर दर्द से राहत; • सूजन और पैरों में भारीपन को नष्ट; • वैरिकाज़ नसों की जटिलता से बचाता है; • वैरिकाज़ नसों के विकास को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए; • लसीका जल निकासी को बेहतर बनाता है; • नसों (नसों खाली) से रक्त का बहिर्वाह को तेज करता है। यह venotonic एजेंट रक्त या इसकी निरंतरता की संरचना को प्रभावित नहीं करता, एक सुरक्षित दवा किया जा रहा है उन है कि पतली रक्त की तुलना में। कैसे जब varices, उपचार के प्रभाव को महसूस करने और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता "Detraleks" लेने के लिए? इस तरह की सिफारिशें केवल phlebologist चिकित्सक या संवहनी सर्जन दिया जा सकता है। इन पेशेवरों वैरिकाज़ नसों की समस्या के बारे किसी को भी की तुलना में बेहतर जानते हैं, और केवल उनके परामर्श, परीक्षा और उपचार से सुरक्षा की निगरानी और देखभाल की गुणवत्ता को सुनिश्चित करेगा। "Detraleks" की विशिष्टता तथ्य यह है कि अपने सक्रिय पदार्थ सब्जी मूल के हैं और सुरक्षित हो पाया में निहित है। इसके अलावा, अध्ययन है कि वैरिकाज़ नसों से पता चला है - रोग के भड़काऊ प्रकृति, और इसलिए इलाज के लिए उचित उपाय की आवश्यकता है। "Detraleks" दोनों एक टॉनिक, और रक्त वाहिकाओं पर विरोधी भड़काऊ प्रभाव है। दवा की गोली जठरांत्र संबंधी मार्ग में घुल, छोटे कणों, जो दवा जल्दी से संवहनी दीवार घुसना और रोगग्रस्त क्षेत्र पर एक उपचारात्मक प्रभाव की अनुमति देता है में विभाजित किया जा रहा। टेबलेट अंडाकार गुलाबी नारंगी खोल एक पैकेज में 30 या 60 टुकड़े में पैक किया। 450 मिलीग्राम और hesperidin - - 50 मिलीग्राम dismin: एक गोली सक्रिय पदार्थ शामिल हैं। ये घटक दवा की सब्जी मूल के हैं और शरीर के लिए हानिकारक हैं। एक साथ इन पदार्थों रक्त वाहिकाओं पर सबसे प्रभावी प्रभाव है। Diosmin इस प्रकार संचालितः • संवहनी स्वर दीवारों बढ़ जाती है; • नसों की पारगम्यता कम कर देता है; • अपने ठहराव को रोकने, रक्त प्रवाह में सुधार; • वाहिनियों की दीवारों पर रक्तचाप कम करता है। Hesperidin एक समान तरीके से रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता हैः • मजबूत संवहनी दीवार बनाने; • संवहनी लोच (टोन) बढ़ जाती है; • रक्त परिसंचरण में सुधार। "Detraleks" में इस तरह के पदार्थ एक दूसरे के पूरक हैं और विभिन्न जहाजों varices में एक अच्छा उपचारात्मक प्रभाव है। सहायक रचना गोलियाँ "Detraleks": मैग्नीशियम स्टीयरेट, जिलेटिन, माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज, शुद्ध पानी, सोडियम carboxymethylstarch। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? दवा एक चिकित्सक द्वारा निर्धारित और उसके खुराक और उपचार की अवधि का निर्धारण किया जाता है। दो गोलियाँ "Detraleks" एक दिन एक दिन और एक रात ले, पानी के साथ,: आमतौर पर, सर्किट शिरापरक या लसीका कमी प्राप्त इस प्रकार का मतलब है। यह एक साथ दो गोलियाँ लेने के लिए संभव है, यह रक्त वाहिकाओं पर दवा के प्रभाव को, जो नैदानिक साबित हो चुका है की प्रभावशीलता के लिए इष्टतम खुराक प्रदान करता है। "Detraleks" जरूरी भोजन के साथ लिया जाना चाहिएः यह अपच की संभावना कम हो जाएगा - शिरापरक के लिए साधन के अनुसार उपचार के दुष्प्रभाव। दवा अक्सर दिलाई जब नसों, बवासीर, क्रोनिक शिरापरक या लसीका कमी विस्तार हो रहा है। दवा के लिए निर्देश के अनुसार को खत्म करने और पुरानी शिरापरक रोगों के लक्षणों को कम दर्शाया गया है। कैसे वैरिकाज़ नसों और कैसे के साथ "Detraleks" लेने के लिए समझने के लिए वहाँ नसों के साथ समस्याओं रहे हैं? शिरापरक या लसीका कमी की अभिव्यक्तिः • दर्द; पैरों में ऐंठन •; • पैरों में भारीपन, • सूजन; • निचले अंगों की थकान; • सूजन; • पौष्टिकता संबंधी शिरापरक अल्सर; • पौष्टिकता त्वचा परिवर्तन। इन लक्षणों का पता लगाने पर एक डॉक्टर जो इलाज के लिए दवा लिख जाएगा परामर्श करना चाहिए। नैदानिक अध्ययन अपेक्षाकृत सुरक्षित "detraleks" सिद्ध कर दिया है। हालांकि, कोई भी किसी भी दवाओं के साथ इलाज के दौरान अलग-अलग असहिष्णुता से और साइड इफेक्ट की घटना पर प्रतिरक्षा है। "Detraleks" का उपयोग करने के लिए मतभेद में शामिल हैंः • रचना के घटकों के असहिष्णुता; • स्तनपान; • गर्भावस्था; • 18 वर्ष की आयु। गर्भावस्था में, इस दवा एक डॉक्टर के अनुमोदन में सावधानी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, और गर्भावस्था उपचार "detraleks" की तीसरी तिमाही माता और भ्रूण के लिए सुरक्षित माना जाता है। शिरापरक डेटा साधन के उपचार में साइड इफेक्ट भी संभव है, लेकिन बहुत दुर्लभ हैं। किसी भी अन्य दवाओं, आंत में अवशोषित की तरह, "Detraleks" पाचन संबंधी विकार पैदा कर सकता हैः उल्टी, दस्त, मतली और कभी कभी बृहदांत्रशोथ। इसका दुष्प्रभाव सिरदर्द और चक्कर आना, बेचैनी प्रकट हो सकता है। कभी कभी दवा खुजली, लाल चकत्ते या पित्ती की घटना का कारण बनता है, लेकिन यह बहुत कम ही होता है। जब इन और अन्य नकारात्मक लक्षण गोलियाँ लेने बंद करो और अपने चिकित्सक से बताना चाहिए। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? विशेषज्ञों का भोजन के दौरान एक गोली दिन में दो बार, "detraleks" के साथ उपचार प्राप्त शुरू करने के लिए सलाह देते हैं। यह तथ्य यह है कि अलग-अलग मामलों में दवा की रचना के कुछ घटकों खराब रोगी द्वारा सहन किया जा सकता है के कारण है। इस संबंध में ध्यान धीरे-धीरे एक उपाय स्वीकार करते हैं और स्थिति और रोगियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए लिया जाना चाहिए। ये अनुशंसाएं किसी भी दवा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, पहली बार के लिए रोगी ले। अज्ञात जीव दवाओं की उच्च खुराक गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकता है और एलर्जी असहिष्णुता रचना घटकों के मामले में हो सकता है, खुजली और दाने के अलावा, यह घुटन के रूप में प्रकट कर सकते हैं। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? दवा उपचार के दौरान चिकित्सक द्वारा निर्धारित किया। पाठ्यक्रम के रूप में वह रोगी की जांच करता है, विश्लेषण और निरीक्षण प्रदान करती है और निर्धारित करता है कि उपचार के प्रभाव, इस प्रकार की दवा की लंबाई की स्थापना। यह याद रखना होगा कि कुछ गोलियां बीमारी से निपटने के लिए, चाहे कितना प्रभावी वे हो सकता है सक्षम नहीं हैं। आमतौर पर, इसके अलावा में वैरिकाज़ नसों की एक जटिल उपचार में "detraleks" निर्धारित करने के लिए और अन्य दवाओं भी संपीड़न अंडरवियर और मध्यम व्यायाम पहनने की सिफारिश की है। मुझे कब तक वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" ले जा सकते हैं? दो महीने - इस दवा के साथ इलाज की न्यूनतम पाठ्यक्रम। लेकिन अक्सर यह बहुत लंबे समय तक पीने के लिए, और कभी कभी एक पूरे वर्ष के लिए ले। बाद उपचार के मुख्य पाठ्यक्रम पारित हो जाता है, इन गोलियों की रोकथाम के लिए उपयोग करने के लिए सिफारिश की है। वैरिकाज़ नसों की रोकथाम के लिए "Detraleks" लेना चाहते? वैरिकाज़ नसों को रोकने या इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए हर छह महीने में "Detraleks" पीने के लिए एक या दो महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इस मामले में, प्रति दिन केवल दो गोलियाँः एक - दिन और एक - शाम में। दवा के लिए भोजन के दौरान लिया दवा अपच का कारण नहीं था। स्वागत के दौरान, वैरिकाज़ नसों के साथ "detraleks" योजना चिकित्सक द्वारा निर्धारित का पालन करना चाहिए, और उपचार में बाधा के लिए या दवा की दैनिक आवश्यकता से अधिक करने के लिए। इन गोलियों के इस्तेमाल के शरीर से किसी भी नकारात्मक संकेत से पता चला रहे हैं, तो आप इस दवा को लेने बंद करो और एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए, उसे आने वाली समस्याओं के बारे में सूचित करने। गंभीर साइड इफेक्ट या व्यक्ति डॉक्टर के पास असहिष्णुता के कारण वैरिकाज़ नसों से रोगी के लिए एक और दवा लिख सकते हैं। अगर पैरों में नसों बाहर ज्यादा चिपके रहते हैं, वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" करता है? कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" गोली लेने के लिए? वराइसेस छोटे और बड़े दोनों रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। उच्च दबाव की छोटी रक्त वाहिकाओं वे संवहनी शुद्ध रूप में तब्दील कर रहे हैं। उनके स्थान पर घाव पैदा हो सकता है - संकेत है कि इसकी दीवारों की कमजोरी की वजह से लाल रक्त कोशिकाओं (एरिथ्रोसाइट्स) जहाज से बाहर। मेजर नसों आमादा हैं, विकृत और त्वचा के स्तर से ऊपर उठकर। छोटे जहाजों की वैरिकाज़ नसों के बाहरी अभिव्यक्तियों के साथ सामना "Detraleks" मदद करने के लिए सूजन और दर्द को दूर, और अन्य अप्रिय लक्षण खत्म करने, लेकिन त्वचा पोत ऊपर ऊंचा में "भरने", वह नहीं कर सकता। यह सर्जरी की आवश्यकता है। लेकिन फिर भी एक या अधिक नसों उपचार के मजबूत उभड़ा साथ venotoniki यह ज़रूरत से ज़्यादा नहीं होगा। आखिरकार, यह शिरापरक कमी जटिलताओं की रोकथाम के लिए भी इरादा और अन्य संवहनी क्षेत्रों में इस तरह के एक रोग के उद्भव को रोकने के है। चिकित्सक सवाल में उपचार के लिए एक दवा निर्धारित करता है, तो कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" बनाने के लिए? कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? अंदर, एक भोजन के दौरान, एक समय में 1-2 गोलियाँ, पीने का पानी। वैरिकाज़ नसों के उपचार में अधिक से अधिक 4 गोलियाँ - दिन। तीव्र बवासीर तैयारी के उपचार के लिए एक और योजना के अनुसार किया जाता है। उपचार के दौरान अनियमितताएं अस्वीकार्य हैंः टूट जाता है या शाम खुराक से अधिक (यदि आप सुबह ले जाना भूल गया) नकारात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं (मैं एक गोली लेना भूल गया)। लंच या डिनर के समय के साथ दवाओं के उपयोग से संबद्ध करने का सबसे आसान तरीका है, आप भी एक श्रव्य अनुस्मारक फोन रख सकते हैं। तीव्र बवासीर में भोजन के साथ एक दिन में तीन गोलियाँ दो बार "Detraleks" लेने के लिए निर्धारित है। इस तरह के एक योजना के आवेदन में, लोड हो रहा है खुराक तैयार करने में सूजन साइटों रक्तस्रावी पर कार्रवाई और दर्द कम हो जाएगा। बवासीर पुरानी पीने दवा 2 गोलियाँ 2 बार एक दिन एक साथ ले जाना चाहिए जब एक भोजन के साथ। "Detraleks" ध्यान दें निम्नलिखित बातों के बारे में प्रशंसापत्रः - इन गोलियों के बुनियादी निर्माण वनस्पति मूल की है; - इस दवा के उपयोग के प्रभाव उपचार के लगभग एक महीने आता है; - प्राप्त करने के बाद "detraleks" पैर कम और भिनभिना चोट; - दवा संवहनी नेटवर्क से छुटकारा पाने में मदद करता है, त्वचा के नीचे खून बह रहा है; - उपचार की गोलियाँ "Detraleks" काफी लंबी - कुछ ही महीनों, लेकिन प्रभाव इसके लायक है; - एक महंगी दवा, लेकिन प्रभावी; - ठीक है, कि इस उपकरण, गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में लेने की अनुमति दी जाती है जब वैरिकाज़ नसों और बवासीर अधिक होने की संभावना की उपस्थिति। डॉक्टरों की समीक्षा निम्नलिखित बातों का सुझावः - चिकित्सकीय सिद्ध "Detraleks" रक्त वाहिकाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैः दोनों शिरापरक और लसीका; - इस venotoniki जब सही ढंग से इस्तेमाल जटिलताओं और परिणाम है कि वैरिकाज़ नसों जरूरत पर जोर देता के कई से बचने कर सकते हैं; - "Detraleks" पहले दो गोलियाँ प्राप्त करने के बाद नसों का इलाज करने के लिए शुरू होता है, लेकिन रोगी उपचार के एक महीने के बारे में बाद उसके प्रभाव महसूस होगा; - दवा शायद ही कभी अपनी पुस्तिका में वर्णित है, रोगियों में दुष्प्रभाव का कारण बनता है। उपचार "detraleks" वैरिकाज़ नसों कई मामलों में प्रभावी परिणाम देता है, लेकिन इस तरह के चिकित्सा की नियुक्ति और नियंत्रण विशेषज्ञ चाहिए। शिरापरक दवा, कब तक "Detraleks" लेने के लिए जब varices, क्या परीक्षण आप पारित करने के लिए और क्या निरीक्षण पारित करने के लिए, निर्धारित करने के लिए कैसे उपचार प्रगति पर है की जरूरत के रूप में नियुक्त किया जा सकता है कौन - सभी चिकित्सक द्वारा हल, आत्म उपचार अस्वीकार्य है।
"Detraleks" - शिरापरक कमी में जटिल उपचार में इस्तेमाल एक दवा। क्या अद्वितीय है उपाय, वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए कितना समय है, दवा, मरीजों और चिकित्सकों के बारे में कुछ राय इस लेख में पाया जा सकता है। इस विकृति तथ्य यह है कि नसों में दबाव बढ़ा पोत दीवार फोड़ और यह विकृत से उठता है। तो वियना त्वचा और मोड़ से ऊपर उठकर शुरू होता है। इसके अलावा, एक कमजोर दीवार सूजन के साथ जहाजों में होता है मस्तिष्क को संकेत की आपूर्ति। इन संकेतों हम पैरों में दर्द के रूप में देखते हैं। ताकि वैरिकाज़ नसों - न केवल बदसूरत लेकिन यह भी स्वास्थ्य और भलाई के लिए खतरनाक है। व्यापक इस रोग को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया उपचार। "Detraleks" - वैरिकाज़ नसों, के इलाज में इस्तेमाल दवाओं में से एक। इस का मतलब है वराइसेस पर आवेदन अच्छे परिणाम देता है, देखते हैं कि दोनों रोगियों और उनके चिकित्सकों। फ्रांस दवा में बनाया गया "Detraleks" शिरापरक और के उपचार के लिए इरादा है लसीका वाहिकाओं। वह निम्नलिखित प्रभाव होते हैंः • लोचदार वाहिकाओं बनाता है; • सूजन के स्थल पर दर्द से राहत; • सूजन और पैरों में भारीपन को नष्ट; • वैरिकाज़ नसों की जटिलता से बचाता है; • वैरिकाज़ नसों के विकास को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए; • लसीका जल निकासी को बेहतर बनाता है; • नसों से रक्त का बहिर्वाह को तेज करता है। यह venotonic एजेंट रक्त या इसकी निरंतरता की संरचना को प्रभावित नहीं करता, एक सुरक्षित दवा किया जा रहा है उन है कि पतली रक्त की तुलना में। कैसे जब varices, उपचार के प्रभाव को महसूस करने और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता "Detraleks" लेने के लिए? इस तरह की सिफारिशें केवल phlebologist चिकित्सक या संवहनी सर्जन दिया जा सकता है। इन पेशेवरों वैरिकाज़ नसों की समस्या के बारे किसी को भी की तुलना में बेहतर जानते हैं, और केवल उनके परामर्श, परीक्षा और उपचार से सुरक्षा की निगरानी और देखभाल की गुणवत्ता को सुनिश्चित करेगा। "Detraleks" की विशिष्टता तथ्य यह है कि अपने सक्रिय पदार्थ सब्जी मूल के हैं और सुरक्षित हो पाया में निहित है। इसके अलावा, अध्ययन है कि वैरिकाज़ नसों से पता चला है - रोग के भड़काऊ प्रकृति, और इसलिए इलाज के लिए उचित उपाय की आवश्यकता है। "Detraleks" दोनों एक टॉनिक, और रक्त वाहिकाओं पर विरोधी भड़काऊ प्रभाव है। दवा की गोली जठरांत्र संबंधी मार्ग में घुल, छोटे कणों, जो दवा जल्दी से संवहनी दीवार घुसना और रोगग्रस्त क्षेत्र पर एक उपचारात्मक प्रभाव की अनुमति देता है में विभाजित किया जा रहा। टेबलेट अंडाकार गुलाबी नारंगी खोल एक पैकेज में तीस या साठ टुकड़े में पैक किया। चार सौ पचास मिलीग्राम और hesperidin - - पचास मिलीग्राम dismin: एक गोली सक्रिय पदार्थ शामिल हैं। ये घटक दवा की सब्जी मूल के हैं और शरीर के लिए हानिकारक हैं। एक साथ इन पदार्थों रक्त वाहिकाओं पर सबसे प्रभावी प्रभाव है। Diosmin इस प्रकार संचालितः • संवहनी स्वर दीवारों बढ़ जाती है; • नसों की पारगम्यता कम कर देता है; • अपने ठहराव को रोकने, रक्त प्रवाह में सुधार; • वाहिनियों की दीवारों पर रक्तचाप कम करता है। Hesperidin एक समान तरीके से रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता हैः • मजबूत संवहनी दीवार बनाने; • संवहनी लोच बढ़ जाती है; • रक्त परिसंचरण में सुधार। "Detraleks" में इस तरह के पदार्थ एक दूसरे के पूरक हैं और विभिन्न जहाजों varices में एक अच्छा उपचारात्मक प्रभाव है। सहायक रचना गोलियाँ "Detraleks": मैग्नीशियम स्टीयरेट, जिलेटिन, माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज, शुद्ध पानी, सोडियम carboxymethylstarch। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? दवा एक चिकित्सक द्वारा निर्धारित और उसके खुराक और उपचार की अवधि का निर्धारण किया जाता है। दो गोलियाँ "Detraleks" एक दिन एक दिन और एक रात ले, पानी के साथ,: आमतौर पर, सर्किट शिरापरक या लसीका कमी प्राप्त इस प्रकार का मतलब है। यह एक साथ दो गोलियाँ लेने के लिए संभव है, यह रक्त वाहिकाओं पर दवा के प्रभाव को, जो नैदानिक साबित हो चुका है की प्रभावशीलता के लिए इष्टतम खुराक प्रदान करता है। "Detraleks" जरूरी भोजन के साथ लिया जाना चाहिएः यह अपच की संभावना कम हो जाएगा - शिरापरक के लिए साधन के अनुसार उपचार के दुष्प्रभाव। दवा अक्सर दिलाई जब नसों, बवासीर, क्रोनिक शिरापरक या लसीका कमी विस्तार हो रहा है। दवा के लिए निर्देश के अनुसार को खत्म करने और पुरानी शिरापरक रोगों के लक्षणों को कम दर्शाया गया है। कैसे वैरिकाज़ नसों और कैसे के साथ "Detraleks" लेने के लिए समझने के लिए वहाँ नसों के साथ समस्याओं रहे हैं? शिरापरक या लसीका कमी की अभिव्यक्तिः • दर्द; पैरों में ऐंठन •; • पैरों में भारीपन, • सूजन; • निचले अंगों की थकान; • सूजन; • पौष्टिकता संबंधी शिरापरक अल्सर; • पौष्टिकता त्वचा परिवर्तन। इन लक्षणों का पता लगाने पर एक डॉक्टर जो इलाज के लिए दवा लिख जाएगा परामर्श करना चाहिए। नैदानिक अध्ययन अपेक्षाकृत सुरक्षित "detraleks" सिद्ध कर दिया है। हालांकि, कोई भी किसी भी दवाओं के साथ इलाज के दौरान अलग-अलग असहिष्णुता से और साइड इफेक्ट की घटना पर प्रतिरक्षा है। "Detraleks" का उपयोग करने के लिए मतभेद में शामिल हैंः • रचना के घटकों के असहिष्णुता; • स्तनपान; • गर्भावस्था; • अट्ठारह वर्ष की आयु। गर्भावस्था में, इस दवा एक डॉक्टर के अनुमोदन में सावधानी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, और गर्भावस्था उपचार "detraleks" की तीसरी तिमाही माता और भ्रूण के लिए सुरक्षित माना जाता है। शिरापरक डेटा साधन के उपचार में साइड इफेक्ट भी संभव है, लेकिन बहुत दुर्लभ हैं। किसी भी अन्य दवाओं, आंत में अवशोषित की तरह, "Detraleks" पाचन संबंधी विकार पैदा कर सकता हैः उल्टी, दस्त, मतली और कभी कभी बृहदांत्रशोथ। इसका दुष्प्रभाव सिरदर्द और चक्कर आना, बेचैनी प्रकट हो सकता है। कभी कभी दवा खुजली, लाल चकत्ते या पित्ती की घटना का कारण बनता है, लेकिन यह बहुत कम ही होता है। जब इन और अन्य नकारात्मक लक्षण गोलियाँ लेने बंद करो और अपने चिकित्सक से बताना चाहिए। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? विशेषज्ञों का भोजन के दौरान एक गोली दिन में दो बार, "detraleks" के साथ उपचार प्राप्त शुरू करने के लिए सलाह देते हैं। यह तथ्य यह है कि अलग-अलग मामलों में दवा की रचना के कुछ घटकों खराब रोगी द्वारा सहन किया जा सकता है के कारण है। इस संबंध में ध्यान धीरे-धीरे एक उपाय स्वीकार करते हैं और स्थिति और रोगियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए लिया जाना चाहिए। ये अनुशंसाएं किसी भी दवा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, पहली बार के लिए रोगी ले। अज्ञात जीव दवाओं की उच्च खुराक गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकता है और एलर्जी असहिष्णुता रचना घटकों के मामले में हो सकता है, खुजली और दाने के अलावा, यह घुटन के रूप में प्रकट कर सकते हैं। कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? दवा उपचार के दौरान चिकित्सक द्वारा निर्धारित किया। पाठ्यक्रम के रूप में वह रोगी की जांच करता है, विश्लेषण और निरीक्षण प्रदान करती है और निर्धारित करता है कि उपचार के प्रभाव, इस प्रकार की दवा की लंबाई की स्थापना। यह याद रखना होगा कि कुछ गोलियां बीमारी से निपटने के लिए, चाहे कितना प्रभावी वे हो सकता है सक्षम नहीं हैं। आमतौर पर, इसके अलावा में वैरिकाज़ नसों की एक जटिल उपचार में "detraleks" निर्धारित करने के लिए और अन्य दवाओं भी संपीड़न अंडरवियर और मध्यम व्यायाम पहनने की सिफारिश की है। मुझे कब तक वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" ले जा सकते हैं? दो महीने - इस दवा के साथ इलाज की न्यूनतम पाठ्यक्रम। लेकिन अक्सर यह बहुत लंबे समय तक पीने के लिए, और कभी कभी एक पूरे वर्ष के लिए ले। बाद उपचार के मुख्य पाठ्यक्रम पारित हो जाता है, इन गोलियों की रोकथाम के लिए उपयोग करने के लिए सिफारिश की है। वैरिकाज़ नसों की रोकथाम के लिए "Detraleks" लेना चाहते? वैरिकाज़ नसों को रोकने या इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए हर छह महीने में "Detraleks" पीने के लिए एक या दो महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इस मामले में, प्रति दिन केवल दो गोलियाँः एक - दिन और एक - शाम में। दवा के लिए भोजन के दौरान लिया दवा अपच का कारण नहीं था। स्वागत के दौरान, वैरिकाज़ नसों के साथ "detraleks" योजना चिकित्सक द्वारा निर्धारित का पालन करना चाहिए, और उपचार में बाधा के लिए या दवा की दैनिक आवश्यकता से अधिक करने के लिए। इन गोलियों के इस्तेमाल के शरीर से किसी भी नकारात्मक संकेत से पता चला रहे हैं, तो आप इस दवा को लेने बंद करो और एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए, उसे आने वाली समस्याओं के बारे में सूचित करने। गंभीर साइड इफेक्ट या व्यक्ति डॉक्टर के पास असहिष्णुता के कारण वैरिकाज़ नसों से रोगी के लिए एक और दवा लिख सकते हैं। अगर पैरों में नसों बाहर ज्यादा चिपके रहते हैं, वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" करता है? कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" गोली लेने के लिए? वराइसेस छोटे और बड़े दोनों रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। उच्च दबाव की छोटी रक्त वाहिकाओं वे संवहनी शुद्ध रूप में तब्दील कर रहे हैं। उनके स्थान पर घाव पैदा हो सकता है - संकेत है कि इसकी दीवारों की कमजोरी की वजह से लाल रक्त कोशिकाओं जहाज से बाहर। मेजर नसों आमादा हैं, विकृत और त्वचा के स्तर से ऊपर उठकर। छोटे जहाजों की वैरिकाज़ नसों के बाहरी अभिव्यक्तियों के साथ सामना "Detraleks" मदद करने के लिए सूजन और दर्द को दूर, और अन्य अप्रिय लक्षण खत्म करने, लेकिन त्वचा पोत ऊपर ऊंचा में "भरने", वह नहीं कर सकता। यह सर्जरी की आवश्यकता है। लेकिन फिर भी एक या अधिक नसों उपचार के मजबूत उभड़ा साथ venotoniki यह ज़रूरत से ज़्यादा नहीं होगा। आखिरकार, यह शिरापरक कमी जटिलताओं की रोकथाम के लिए भी इरादा और अन्य संवहनी क्षेत्रों में इस तरह के एक रोग के उद्भव को रोकने के है। चिकित्सक सवाल में उपचार के लिए एक दवा निर्धारित करता है, तो कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" बनाने के लिए? कैसे वैरिकाज़ नसों के साथ "Detraleks" लेने के लिए? अंदर, एक भोजन के दौरान, एक समय में एक-दो गोलियाँ, पीने का पानी। वैरिकाज़ नसों के उपचार में अधिक से अधिक चार गोलियाँ - दिन। तीव्र बवासीर तैयारी के उपचार के लिए एक और योजना के अनुसार किया जाता है। उपचार के दौरान अनियमितताएं अस्वीकार्य हैंः टूट जाता है या शाम खुराक से अधिक नकारात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं । लंच या डिनर के समय के साथ दवाओं के उपयोग से संबद्ध करने का सबसे आसान तरीका है, आप भी एक श्रव्य अनुस्मारक फोन रख सकते हैं। तीव्र बवासीर में भोजन के साथ एक दिन में तीन गोलियाँ दो बार "Detraleks" लेने के लिए निर्धारित है। इस तरह के एक योजना के आवेदन में, लोड हो रहा है खुराक तैयार करने में सूजन साइटों रक्तस्रावी पर कार्रवाई और दर्द कम हो जाएगा। बवासीर पुरानी पीने दवा दो गोलियाँ दो बार एक दिन एक साथ ले जाना चाहिए जब एक भोजन के साथ। "Detraleks" ध्यान दें निम्नलिखित बातों के बारे में प्रशंसापत्रः - इन गोलियों के बुनियादी निर्माण वनस्पति मूल की है; - इस दवा के उपयोग के प्रभाव उपचार के लगभग एक महीने आता है; - प्राप्त करने के बाद "detraleks" पैर कम और भिनभिना चोट; - दवा संवहनी नेटवर्क से छुटकारा पाने में मदद करता है, त्वचा के नीचे खून बह रहा है; - उपचार की गोलियाँ "Detraleks" काफी लंबी - कुछ ही महीनों, लेकिन प्रभाव इसके लायक है; - एक महंगी दवा, लेकिन प्रभावी; - ठीक है, कि इस उपकरण, गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में लेने की अनुमति दी जाती है जब वैरिकाज़ नसों और बवासीर अधिक होने की संभावना की उपस्थिति। डॉक्टरों की समीक्षा निम्नलिखित बातों का सुझावः - चिकित्सकीय सिद्ध "Detraleks" रक्त वाहिकाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैः दोनों शिरापरक और लसीका; - इस venotoniki जब सही ढंग से इस्तेमाल जटिलताओं और परिणाम है कि वैरिकाज़ नसों जरूरत पर जोर देता के कई से बचने कर सकते हैं; - "Detraleks" पहले दो गोलियाँ प्राप्त करने के बाद नसों का इलाज करने के लिए शुरू होता है, लेकिन रोगी उपचार के एक महीने के बारे में बाद उसके प्रभाव महसूस होगा; - दवा शायद ही कभी अपनी पुस्तिका में वर्णित है, रोगियों में दुष्प्रभाव का कारण बनता है। उपचार "detraleks" वैरिकाज़ नसों कई मामलों में प्रभावी परिणाम देता है, लेकिन इस तरह के चिकित्सा की नियुक्ति और नियंत्रण विशेषज्ञ चाहिए। शिरापरक दवा, कब तक "Detraleks" लेने के लिए जब varices, क्या परीक्षण आप पारित करने के लिए और क्या निरीक्षण पारित करने के लिए, निर्धारित करने के लिए कैसे उपचार प्रगति पर है की जरूरत के रूप में नियुक्त किया जा सकता है कौन - सभी चिकित्सक द्वारा हल, आत्म उपचार अस्वीकार्य है।
सेवानिवृत्त होने के बाद म्यूज़ियम में तब्दील होगा या कबाड़ बनकर रह जाएगा आईएनएस विराट? लखनऊ। करीब 57 वर्ष पुराना भारत का गौरव विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विराट आज भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने जा रहा है। 27 साल ब्रिटिश आर्मी की रॉयल नौसेना से जुड़े रहने के बाद करीब 30 साल भारतीय नौसेना के लिए अपनी सेवाएं दीं। इसके सेवानिवृत्त होने के पहले ही भारत के सबसे पुराने युद्धपोत के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे है। इसे एक होटल, एक म्यूजियम में तब्दील किया जाएगा या फिर मोटरबाइक में इस्तेमाल होने वाली धातु बनकर रह जाएगा, इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है। विराट के बड़े आकार और उसकी उम्र के चलते इसकी देखरेख की कीमत बढ़ती जा रही है जिसके चलते 2014 में एक रिव्यू बोर्ड ने इसे सेवानिवृत्त करने का फैसला लिया था। 2015 में इस जहाज़ को आंध्र सरकार को दे दिया गया था और घोषणा की गई थी कि इसे म्यूज़ियम में बदल दिया जाएगा। उस समय बताया गया था कि इस जहाज़ की रीफिटिंग का खर्चा 20 करोड़ आएगा लेकिन बाद में आंध्र प्रदेश सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट में 1,000 करोड़ का खर्च बताया। -आईएनएस विराट का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है। ये दुनिया का एकलौता ऐसा जहाज है जो इतने लंबे समय तक सीमा की सुरक्षा में डंटा रहा। इसे 'ग्रेट ओल्ड लेडी' के नाम से भी जाना जाता है। -ब्रिटिश नौसेना में इस युद्धपोत को 1959 में शामिल किया गया था तब इसका नाम एचएमएस हर्मिस था। रॉयल नेवी के फॉक लैंड सैन्य अभियान (1982) में इस युद्धपोत ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। -भारतीय नौसेना में इसे 1987 में शामिल किया गया। भारत ने 1987 में 465 मिलियन अमेरिकी डॉलर में इसे ख़रीदा और इसे नाम आईएनएस विराट नाम दिया। इसे ख़रीदते वक्त सिर्फ पांच साल तक इसे इस्तेमाल करने की योजना थी लेकिन 30 साल तक इसने सेवा दी। -यह फौलादी प्रहरी करीब 24000 टन वजनी है। 227 मीटर लंबे, 27.4 मीटर चौड़े इस विमानवाहक पोत का नौसैनिक कोड R-22 है। विराट में एक बार में 43 अधिकारियों समेत 1350 नौसैनिक एक साथ काम करते थे। इसे कमांड करने वाले कई अधिकारी नौसेना प्रमुख तक बने। -आईएनएस विराट ने 1989 के ऑपरेशन जुपिटर (श्रीलंका में भारतीय शांति सेना भेजे जाने का अभियान) और 1999 में ऑपरेशन विजय ( कारगिल युद्ध) के दौरान अहम भूमिका निभाई। -आखिरी बार अपने इंजन के दम पर विराट ने आखिरी सफर मुंबई से कोच्चि तक का किया था जहां इसे जरूरी मरम्मत और ड्राय डॉकिंग के लिए भेजा गया था। विराट इस आखिरी सफर पर 23 जुलाई 2016 को रवाना हुआ था। बाद में अक्टूबर 2016 में कोच्चि से तीन नौकाओं के सहारे खींचकर मुंबई लाया गया।
सेवानिवृत्त होने के बाद म्यूज़ियम में तब्दील होगा या कबाड़ बनकर रह जाएगा आईएनएस विराट? लखनऊ। करीब सत्तावन वर्ष पुराना भारत का गौरव विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विराट आज भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने जा रहा है। सत्ताईस साल ब्रिटिश आर्मी की रॉयल नौसेना से जुड़े रहने के बाद करीब तीस साल भारतीय नौसेना के लिए अपनी सेवाएं दीं। इसके सेवानिवृत्त होने के पहले ही भारत के सबसे पुराने युद्धपोत के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे है। इसे एक होटल, एक म्यूजियम में तब्दील किया जाएगा या फिर मोटरबाइक में इस्तेमाल होने वाली धातु बनकर रह जाएगा, इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है। विराट के बड़े आकार और उसकी उम्र के चलते इसकी देखरेख की कीमत बढ़ती जा रही है जिसके चलते दो हज़ार चौदह में एक रिव्यू बोर्ड ने इसे सेवानिवृत्त करने का फैसला लिया था। दो हज़ार पंद्रह में इस जहाज़ को आंध्र सरकार को दे दिया गया था और घोषणा की गई थी कि इसे म्यूज़ियम में बदल दिया जाएगा। उस समय बताया गया था कि इस जहाज़ की रीफिटिंग का खर्चा बीस करोड़ आएगा लेकिन बाद में आंध्र प्रदेश सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट में एक,शून्य करोड़ का खर्च बताया। -आईएनएस विराट का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है। ये दुनिया का एकलौता ऐसा जहाज है जो इतने लंबे समय तक सीमा की सुरक्षा में डंटा रहा। इसे 'ग्रेट ओल्ड लेडी' के नाम से भी जाना जाता है। -ब्रिटिश नौसेना में इस युद्धपोत को एक हज़ार नौ सौ उनसठ में शामिल किया गया था तब इसका नाम एचएमएस हर्मिस था। रॉयल नेवी के फॉक लैंड सैन्य अभियान में इस युद्धपोत ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। -भारतीय नौसेना में इसे एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में शामिल किया गया। भारत ने एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में चार सौ पैंसठ मिलियन अमेरिकी डॉलर में इसे ख़रीदा और इसे नाम आईएनएस विराट नाम दिया। इसे ख़रीदते वक्त सिर्फ पांच साल तक इसे इस्तेमाल करने की योजना थी लेकिन तीस साल तक इसने सेवा दी। -यह फौलादी प्रहरी करीब चौबीस हज़ार टन वजनी है। दो सौ सत्ताईस मीटर लंबे, सत्ताईस दशमलव चार मीटर चौड़े इस विमानवाहक पोत का नौसैनिक कोड R-बाईस है। विराट में एक बार में तैंतालीस अधिकारियों समेत एक हज़ार तीन सौ पचास नौसैनिक एक साथ काम करते थे। इसे कमांड करने वाले कई अधिकारी नौसेना प्रमुख तक बने। -आईएनएस विराट ने एक हज़ार नौ सौ नवासी के ऑपरेशन जुपिटर और एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में ऑपरेशन विजय के दौरान अहम भूमिका निभाई। -आखिरी बार अपने इंजन के दम पर विराट ने आखिरी सफर मुंबई से कोच्चि तक का किया था जहां इसे जरूरी मरम्मत और ड्राय डॉकिंग के लिए भेजा गया था। विराट इस आखिरी सफर पर तेईस जुलाई दो हज़ार सोलह को रवाना हुआ था। बाद में अक्टूबर दो हज़ार सोलह में कोच्चि से तीन नौकाओं के सहारे खींचकर मुंबई लाया गया।
मैं तो यह समझता हूँ कि युवा नेतत्व ही गलत हाथो मे पड गया है और कुछ थोडे-से शक्तिशाली और समय लोग अपने को सभी छात्रो वा ठेकेदार ममयने लगे हैं । प्रोफेसर रगनाथन से एक पुस्तक लेकर प्रशात यूनियन भवन की जोर चल पडा जहा उसे रमाकात के मिलने की आशा थी । वह जामुनवाली सड़क को पार कर हो रहा था कि तभी एक जोरदार घनघनाहट के साथ अनेक फायर ब्रिगेड की गाडियो ने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया और साथ ही पुलिस तथा पी० ए० सी० के भारी दस्तो न अपनी भारी गाडिया सहित विश्वविद्यालय को घेर लिया। छात्रो से तत्काल युनिवर्सिटी ॠम्पस खाली वग्ने के आदेश जारी किये जाने लगे । "आग नग गयी - पुलिस आ गयी" की आवाजो के साथ वोलाहल बढता जा रहा था । " रजिस्ट्रार आफिस जल रहा है", एक छात्र बताते हुए भागा । "कशियस आफिस में आग लग गयी ।" एक दूसरे छात्र ने सूचना दी। "एक्जामिनेशन सेक्शन जलकर राख हो गया और कनिंग वालेज के क्लासवाय के मुख्य भवन में भी आग की लपटें उठ रही हैं।" एक और खबर आयी । 'भागो भागो' की आवाजो के साथ छात्रो को अनेक टोलिया बाहर की ओर भाग रही थी क्यापि सारी युनिवर्सिटी को अब तक पुलिस ने अपने अधिकार में ले लिया था । बुछ ही देर म सारा विश्वविद्यालय एवं सनि शिविर के रूप मे परिवर्तित हो गया । लाउडस्पीकर पर होस्टलवासियों के लिए एलान हो रहा था कि वे दो घण्टे वे अदर होस्टल खाली कर दें क्योकि विश्वविद्यालय अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। छात्र नेता और उनके साथी ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किय जा रहे थे। चारो ओर आतर आर तनाव की स्थिति थी। पुलिस और पी० ए० सी० के जवानो ने जगह जगह अपन तम्बू और क्नात गाड दिय थे और अस्थायी उम्प पायानय जोर वायरलेस स्टेशन स्थापित हो गये थे। चारो ओर वेवल साकी वरदी ही दिखायी पड रही थी । एकाएक प्रशात को छात्रों की एक भीड फाटक को ओर भागतो दिखायी पड़ी। उस भोड म उसे रमाकात भी दिखलायी पडा, जिसके ११० / नयो दिना
मैं तो यह समझता हूँ कि युवा नेतत्व ही गलत हाथो मे पड गया है और कुछ थोडे-से शक्तिशाली और समय लोग अपने को सभी छात्रो वा ठेकेदार ममयने लगे हैं । प्रोफेसर रगनाथन से एक पुस्तक लेकर प्रशात यूनियन भवन की जोर चल पडा जहा उसे रमाकात के मिलने की आशा थी । वह जामुनवाली सड़क को पार कर हो रहा था कि तभी एक जोरदार घनघनाहट के साथ अनेक फायर ब्रिगेड की गाडियो ने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया और साथ ही पुलिस तथा पीशून्य एशून्य सीशून्य के भारी दस्तो न अपनी भारी गाडिया सहित विश्वविद्यालय को घेर लिया। छात्रो से तत्काल युनिवर्सिटी ॠम्पस खाली वग्ने के आदेश जारी किये जाने लगे । "आग नग गयी - पुलिस आ गयी" की आवाजो के साथ वोलाहल बढता जा रहा था । " रजिस्ट्रार आफिस जल रहा है", एक छात्र बताते हुए भागा । "कशियस आफिस में आग लग गयी ।" एक दूसरे छात्र ने सूचना दी। "एक्जामिनेशन सेक्शन जलकर राख हो गया और कनिंग वालेज के क्लासवाय के मुख्य भवन में भी आग की लपटें उठ रही हैं।" एक और खबर आयी । 'भागो भागो' की आवाजो के साथ छात्रो को अनेक टोलिया बाहर की ओर भाग रही थी क्यापि सारी युनिवर्सिटी को अब तक पुलिस ने अपने अधिकार में ले लिया था । बुछ ही देर म सारा विश्वविद्यालय एवं सनि शिविर के रूप मे परिवर्तित हो गया । लाउडस्पीकर पर होस्टलवासियों के लिए एलान हो रहा था कि वे दो घण्टे वे अदर होस्टल खाली कर दें क्योकि विश्वविद्यालय अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। छात्र नेता और उनके साथी ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किय जा रहे थे। चारो ओर आतर आर तनाव की स्थिति थी। पुलिस और पीशून्य एशून्य सीशून्य के जवानो ने जगह जगह अपन तम्बू और क्नात गाड दिय थे और अस्थायी उम्प पायानय जोर वायरलेस स्टेशन स्थापित हो गये थे। चारो ओर वेवल साकी वरदी ही दिखायी पड रही थी । एकाएक प्रशात को छात्रों की एक भीड फाटक को ओर भागतो दिखायी पड़ी। उस भोड म उसे रमाकात भी दिखलायी पडा, जिसके एक सौ दस / नयो दिना
भोपाल । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में भारतीय जनता पार्टी के नेता द्वारा अपने परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ आत्महत्या करने के मामले में सियासत हो रही है। राजधानी के नजदीक स्थित विदिशा जिले में भाजपा के नगर मंडल उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ जहरीला पदार्थ खाकर बीते रोज आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है जिसमें कहा गया है कि बच्चों की लाइलाज बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। भाजपा नेता के अपने परिवार के सदस्यों के साथ आत्महत्या करने का मामला सामने आने पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हनुमा आचार्य ने ट्वीट कर कहा कि अभी अभी अपने शहर विदिशा से एक हृदय विदारक घटना सुनी है कि विदिशा के पूर्व बीजेपी पार्षद संजीव मिश्रा ने अपनी पत्नी और दो बच्चों सहित खाया जहर। गणतंत्र दिवस के दिन चारों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। क्यों अपने पार्षद का दुख तक न जान सके विदिशा को अपना जताने वाले शिवराज सिंह चौहान? कांग्रेस नेत्री के ट्वीट पर भाजपा के प्रदेष प्रवक्ता डा हितेष वाजपेयी ने जवाब में कहा, मौत पर राजनीतिक रोटियां सेकने वाली लज्जाजनक हरकत से पहले जान लो कि उनका बेटा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित था जिससे पूरा परिवार डिप्रेशन मे था। कभी टाइम निकाल कर घर हो आती तो पता चलता न? पर हो तो कुण्ठित कांग्रेसी ही न! (आईएएनएस)
भोपाल । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में भारतीय जनता पार्टी के नेता द्वारा अपने परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ आत्महत्या करने के मामले में सियासत हो रही है। राजधानी के नजदीक स्थित विदिशा जिले में भाजपा के नगर मंडल उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ जहरीला पदार्थ खाकर बीते रोज आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है जिसमें कहा गया है कि बच्चों की लाइलाज बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। भाजपा नेता के अपने परिवार के सदस्यों के साथ आत्महत्या करने का मामला सामने आने पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हनुमा आचार्य ने ट्वीट कर कहा कि अभी अभी अपने शहर विदिशा से एक हृदय विदारक घटना सुनी है कि विदिशा के पूर्व बीजेपी पार्षद संजीव मिश्रा ने अपनी पत्नी और दो बच्चों सहित खाया जहर। गणतंत्र दिवस के दिन चारों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। क्यों अपने पार्षद का दुख तक न जान सके विदिशा को अपना जताने वाले शिवराज सिंह चौहान? कांग्रेस नेत्री के ट्वीट पर भाजपा के प्रदेष प्रवक्ता डा हितेष वाजपेयी ने जवाब में कहा, मौत पर राजनीतिक रोटियां सेकने वाली लज्जाजनक हरकत से पहले जान लो कि उनका बेटा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित था जिससे पूरा परिवार डिप्रेशन मे था। कभी टाइम निकाल कर घर हो आती तो पता चलता न? पर हो तो कुण्ठित कांग्रेसी ही न!
मानसून की लेटलतीफी को देखते हुए इसके भारत में आने और जाने की तारीखें नए सिरे से तय करने के लिए मौसम विभाग कर रहा है अध्ययन। लखनऊ। शीतला प्रसाद ने इस साल धान की नर्सरी तो समय पर बो दी, लेकिन धान की रोपाई समय पर नहीं कर पाए, क्योंकि उन्हें इंतजार था कि मानसून आने के बाद बारिश शुरू हो उसके बाद खेतों में धान लगाएं। शीतला प्रसाद पिछले कई वर्षों से ऐसा झेल रहे हैं, मानसून की लुकाछिपी से उनकी फसल चौपट हो जा रही है। "पिछले कई सालों से समय पर बारिश होती ही नहीं, बारिश कब होगी पता ही नहीं चल पाता। पहले लगातार धीरे-धीरे बारिश होती थी, अब अचानक से तेज बारिश हो जाती है, तो जल्दी खत्म," यूपी के बाराबंकी जिले के गाँव देवरा में रहने वाले शीतला प्रसाद मिश्र बताते हैं। शीतला प्रसाद मिश्र की कहानी भारत के लाखों किसानों का दर्द बयां करती है जो मानसून की बदली गतिविधियों से परेशान बर्बाद हो चले हैं। मानसून के बदले मिजाज को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग ने अब इसके भारत में आने और लौटने की तारीखों सहित बारिश के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए एक कमेटी बनाई है, जो यह अध्ययन करेगी कि मानसून के भारत में दखिल होने और विदा लेने की तारीखों में कितना अंतर आया है। मौसम विभाग की कमेटी की रिपोर्ट के बाद हो सकता है कि भारत में मानसून के दाखिल होने और विदा लेने की तारीखों का नए सिरे से ऐलान किया जा सकता है। नई दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक एम. महापात्रा ने 'गाँव कनेक्शन' को फोन पर बताया, "मानसून में आए बदलावों के साथ ही इसके आने और जाने की दोनों तारीखें शामिल हैं। बारिश कहां ज्यादा हो रही है, कहां कम? इन सभी कारणों का कमेटी अध्ययन करेगी। अगर कुछ बदलाव होता है तो बताया जाएगा।" भारत में मानसून के केरल से दाखिल होने की तारीख एक जून है और राजस्थान से वापस लौटने की तारीख 30 सितंबर। जैसा कि पिछले पिछले कई सालों के पैटर्न को देखें तो मानसून लगतार देरी से दस्तक दे रहा है इससे तारीखें आगे बढ़ाई जा सकती हैं। वर्ष 2019 में केरल में मानसून करीब 18 जून को पहुंचा, जिसके बाद आगे बढ़ा, इसका मुख्य कारण था कि अरब सागर में चक्रवात 'वायु' ने मानसून को लाने वाली हवाओं का रास्ता रोक दिया। इन चक्रवाती हवाओं ने मानसून को केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 21 जून तक रोके रखा। महाराष्ट्र के वर्धा जिले के वायसर में रहने वाले किसान विजय जौदानिया ने फोन पर विदर्भ समेत पूरे राज्य के मौसम के पैटर्न के बारे में समझाते हुए कहा, "अब बारिश के दिन कम हो रहे हैं, और कम दिनों में ज्यादा बारिश हो रही है। विदर्भ में जून-जुलाई सूखा गया, अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश हुई।" किसान विजय जौदानिया की इस बात का समर्थन मौसम की जानकारी देने वाली निजी संस्था स्काईमेट संस्था के प्रमुख महेश पहलावत भी करते हैं। "अगर लंबे समय अंतराल का औसत (एलपीए) निकाला जाए, तो साफ है कि बारिश कम हो रही है। यह क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के कारण हो रहा है। पहले लगातार बारिश होती थी, लेकिन अभी चक्रवात ज्यादा मजबूत हो रहे हैं, इसलिए कम दिनों में अधिक बारिश होती है," महेश पहलावत समझाते हैं। कम समय में अधिक बारिश होने से किसानों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। इसे समझाते हुए महेश पहलावत कहते हैं, "जब कई हफ्तों की बारिश 24 घंटे में ही हो जाएगी तो पानी ज़मीन सोख नहीं पाएगी और यह पानी नदियों और समंदर में बह जाता है। रिमझिम बारिश नहीं होने और अधिक पानी अचानक बरसने से बाढ़ जैसे हालात जल्दी-जल्दी आते हैं।" वह आगे कहते हैं, "जैसे इस साल पटना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और राजस्थान में बाढ़ थी, तो कई राज्यों में उसी समय सूखे जैसे हालात थे।" वर्ष 2019 में जून माह में मानसून के देर से आने और कम बारिश से पूरे भारत में 33 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो कि पिछले पांच सालों में सबसे कम है। जून में महाराष्ट्र और केरला में सूखे के जैसी स्थिति बनी रही। क्लाइमेट चेंज के असर को इसके लिए मुख्य कारण मानते हुए महेश पहलावत कहते हैं, "भारत में अब बारिश क्षेत्रवार होती है। जैसे किसी शहर में आधे में बारिश होती है, तो आधा सूखा पड़ा रहता है। यह सब क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) की वजह से है। कहीं अधिक बारिश होती है, तो कहीं कम।" भारतीय मौसम विभाग और क्लाइमेट रिसर्च यूनिट (सीआरयू) के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर नेचर काम्युनिकेशन में छपे एक रिसर्च पेपर के अनुसार जलवायु परिवर्तन के असर से दक्षिण-पश्चिम मानसून से होने वाली बारिश लगतार कमजोर हुई है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही जून से लेकर सितंबर तक 75 प्रतिशत बारिश होती है। भारतीय उप महाद्वीप में भी सबसे अधिक वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। हालांकि, किसान विजय जौदानिया पर मौसम विभाग द्वारा मानसून की आवा-जाही को लेकर की जा रही माथापच्ची का कोई असर नहीं दिखता। वह कहते हैं, "मौसम विभाग की भविष्यवाणी सटीक न बैठने से इस संस्था पर से लोगों का भरोसा उठ सा गया है। अगर मानसून के आने की तारीखों में बदलाव कर भी देंगे तो उससे किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। मानसून विभाग की भविष्यवाणी सटीक नहीं होती।" जिस समय से भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों को दर्ज किया जा रहा है, उसके अनुसार वर्ष 2019 में सबसे देरी से (10 अक्टूबर) मानसून की वापसी हुई। मानसून की बदलती चाल को समझने के लिए भारतीय मौसम विभाग द्वारा किए जा रहे अध्ययन के बारे में कृषि मामलों के जानकार देविंदर शर्मा कहते हैं, "मानसून की तारीखों में बदलाव के लिए किसान को खेती में बदलाव करने के साथ-साथ कृषि विभाग के अनुसंधान विभाग को भी ज्यादा बदलाव करने होंगे। रिसर्च टीम को बीजों की ऐसी किस्में निकालनी होंगी कि जो इस बदले पैटर्न के हिसाब से फिट हो पाएं।" देविंदर शर्मा आगे कहते हैं, "अच्छा होगा कि भारतीय मौसम विभाग, कृषि वैज्ञानिकों के साथ मिल कर ही मानसून की नई तारीखों की घोषणा करें। साथ ही कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिकों के साथ बैठकें भी होनी चाहिए ताकि रिसर्च एक ही दिशा में हो।" मानसून के समय पर आने और होने वाली बारिश का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी रहता है। वर्ष 2018 में विश्व बैंक की रिपोर्ट 'साउथ एशिया हॉटस्पाटः द इंपैक्ट ऑफ टेम्परेचर एंड प्रेसिपिटेशन चेंजेज ऑन लिविंग स्टैंडर्ड्स' (तापमान और बारिश में बदलाव से जीवनस्तर पर असर) के अनुसार मानसून की चाल बदलने से दक्षिण एशिया की करीब आधी आबादी का जीवनस्तर गिरेगा। मौसम में बदलाव से कृषि उत्पादों में आई गिरावट, श्रम उत्पादकता में कमी, और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ेंगी। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में देश भर में वार्षिक वर्षा समान्य से कम रही, देश के 36 जोन में से केवल एक केरल में ही वर्षा अधिक रही। 23 प्रभागों में समान्य और 12 में वर्षा कम रही। मानसून की चाल को लेकर भारतीय मौसम विभाग द्वारा बनाई गई कमेटी के अध्ययन के बारे में आईएमडी पुणे के जलवायु रिसर्च एवं सर्विसेज के प्रमुख डॉ. डीएस पई ने अधिक न बताते हुए कहा, "कमेटी की रिपोर्ट के बाद, नए साल की शुरुआत में इस पर कुछ फैसला हो सकेगा, जिसके बाद इसे लागू किया जा सकता है।"
मानसून की लेटलतीफी को देखते हुए इसके भारत में आने और जाने की तारीखें नए सिरे से तय करने के लिए मौसम विभाग कर रहा है अध्ययन। लखनऊ। शीतला प्रसाद ने इस साल धान की नर्सरी तो समय पर बो दी, लेकिन धान की रोपाई समय पर नहीं कर पाए, क्योंकि उन्हें इंतजार था कि मानसून आने के बाद बारिश शुरू हो उसके बाद खेतों में धान लगाएं। शीतला प्रसाद पिछले कई वर्षों से ऐसा झेल रहे हैं, मानसून की लुकाछिपी से उनकी फसल चौपट हो जा रही है। "पिछले कई सालों से समय पर बारिश होती ही नहीं, बारिश कब होगी पता ही नहीं चल पाता। पहले लगातार धीरे-धीरे बारिश होती थी, अब अचानक से तेज बारिश हो जाती है, तो जल्दी खत्म," यूपी के बाराबंकी जिले के गाँव देवरा में रहने वाले शीतला प्रसाद मिश्र बताते हैं। शीतला प्रसाद मिश्र की कहानी भारत के लाखों किसानों का दर्द बयां करती है जो मानसून की बदली गतिविधियों से परेशान बर्बाद हो चले हैं। मानसून के बदले मिजाज को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग ने अब इसके भारत में आने और लौटने की तारीखों सहित बारिश के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए एक कमेटी बनाई है, जो यह अध्ययन करेगी कि मानसून के भारत में दखिल होने और विदा लेने की तारीखों में कितना अंतर आया है। मौसम विभाग की कमेटी की रिपोर्ट के बाद हो सकता है कि भारत में मानसून के दाखिल होने और विदा लेने की तारीखों का नए सिरे से ऐलान किया जा सकता है। नई दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एम. महापात्रा ने 'गाँव कनेक्शन' को फोन पर बताया, "मानसून में आए बदलावों के साथ ही इसके आने और जाने की दोनों तारीखें शामिल हैं। बारिश कहां ज्यादा हो रही है, कहां कम? इन सभी कारणों का कमेटी अध्ययन करेगी। अगर कुछ बदलाव होता है तो बताया जाएगा।" भारत में मानसून के केरल से दाखिल होने की तारीख एक जून है और राजस्थान से वापस लौटने की तारीख तीस सितंबर। जैसा कि पिछले पिछले कई सालों के पैटर्न को देखें तो मानसून लगतार देरी से दस्तक दे रहा है इससे तारीखें आगे बढ़ाई जा सकती हैं। वर्ष दो हज़ार उन्नीस में केरल में मानसून करीब अट्ठारह जून को पहुंचा, जिसके बाद आगे बढ़ा, इसका मुख्य कारण था कि अरब सागर में चक्रवात 'वायु' ने मानसून को लाने वाली हवाओं का रास्ता रोक दिया। इन चक्रवाती हवाओं ने मानसून को केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में इक्कीस जून तक रोके रखा। महाराष्ट्र के वर्धा जिले के वायसर में रहने वाले किसान विजय जौदानिया ने फोन पर विदर्भ समेत पूरे राज्य के मौसम के पैटर्न के बारे में समझाते हुए कहा, "अब बारिश के दिन कम हो रहे हैं, और कम दिनों में ज्यादा बारिश हो रही है। विदर्भ में जून-जुलाई सूखा गया, अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश हुई।" किसान विजय जौदानिया की इस बात का समर्थन मौसम की जानकारी देने वाली निजी संस्था स्काईमेट संस्था के प्रमुख महेश पहलावत भी करते हैं। "अगर लंबे समय अंतराल का औसत निकाला जाए, तो साफ है कि बारिश कम हो रही है। यह क्लाइमेट चेंज के कारण हो रहा है। पहले लगातार बारिश होती थी, लेकिन अभी चक्रवात ज्यादा मजबूत हो रहे हैं, इसलिए कम दिनों में अधिक बारिश होती है," महेश पहलावत समझाते हैं। कम समय में अधिक बारिश होने से किसानों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। इसे समझाते हुए महेश पहलावत कहते हैं, "जब कई हफ्तों की बारिश चौबीस घंटाटे में ही हो जाएगी तो पानी ज़मीन सोख नहीं पाएगी और यह पानी नदियों और समंदर में बह जाता है। रिमझिम बारिश नहीं होने और अधिक पानी अचानक बरसने से बाढ़ जैसे हालात जल्दी-जल्दी आते हैं।" वह आगे कहते हैं, "जैसे इस साल पटना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और राजस्थान में बाढ़ थी, तो कई राज्यों में उसी समय सूखे जैसे हालात थे।" वर्ष दो हज़ार उन्नीस में जून माह में मानसून के देर से आने और कम बारिश से पूरे भारत में तैंतीस प्रतिशत कम बारिश हुई, जो कि पिछले पांच सालों में सबसे कम है। जून में महाराष्ट्र और केरला में सूखे के जैसी स्थिति बनी रही। क्लाइमेट चेंज के असर को इसके लिए मुख्य कारण मानते हुए महेश पहलावत कहते हैं, "भारत में अब बारिश क्षेत्रवार होती है। जैसे किसी शहर में आधे में बारिश होती है, तो आधा सूखा पड़ा रहता है। यह सब क्लाइमेट चेंज की वजह से है। कहीं अधिक बारिश होती है, तो कहीं कम।" भारतीय मौसम विभाग और क्लाइमेट रिसर्च यूनिट के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर नेचर काम्युनिकेशन में छपे एक रिसर्च पेपर के अनुसार जलवायु परिवर्तन के असर से दक्षिण-पश्चिम मानसून से होने वाली बारिश लगतार कमजोर हुई है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही जून से लेकर सितंबर तक पचहत्तर प्रतिशत बारिश होती है। भारतीय उप महाद्वीप में भी सबसे अधिक वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। हालांकि, किसान विजय जौदानिया पर मौसम विभाग द्वारा मानसून की आवा-जाही को लेकर की जा रही माथापच्ची का कोई असर नहीं दिखता। वह कहते हैं, "मौसम विभाग की भविष्यवाणी सटीक न बैठने से इस संस्था पर से लोगों का भरोसा उठ सा गया है। अगर मानसून के आने की तारीखों में बदलाव कर भी देंगे तो उससे किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। मानसून विभाग की भविष्यवाणी सटीक नहीं होती।" जिस समय से भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों को दर्ज किया जा रहा है, उसके अनुसार वर्ष दो हज़ार उन्नीस में सबसे देरी से मानसून की वापसी हुई। मानसून की बदलती चाल को समझने के लिए भारतीय मौसम विभाग द्वारा किए जा रहे अध्ययन के बारे में कृषि मामलों के जानकार देविंदर शर्मा कहते हैं, "मानसून की तारीखों में बदलाव के लिए किसान को खेती में बदलाव करने के साथ-साथ कृषि विभाग के अनुसंधान विभाग को भी ज्यादा बदलाव करने होंगे। रिसर्च टीम को बीजों की ऐसी किस्में निकालनी होंगी कि जो इस बदले पैटर्न के हिसाब से फिट हो पाएं।" देविंदर शर्मा आगे कहते हैं, "अच्छा होगा कि भारतीय मौसम विभाग, कृषि वैज्ञानिकों के साथ मिल कर ही मानसून की नई तारीखों की घोषणा करें। साथ ही कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिकों के साथ बैठकें भी होनी चाहिए ताकि रिसर्च एक ही दिशा में हो।" मानसून के समय पर आने और होने वाली बारिश का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी रहता है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में विश्व बैंक की रिपोर्ट 'साउथ एशिया हॉटस्पाटः द इंपैक्ट ऑफ टेम्परेचर एंड प्रेसिपिटेशन चेंजेज ऑन लिविंग स्टैंडर्ड्स' के अनुसार मानसून की चाल बदलने से दक्षिण एशिया की करीब आधी आबादी का जीवनस्तर गिरेगा। मौसम में बदलाव से कृषि उत्पादों में आई गिरावट, श्रम उत्पादकता में कमी, और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ेंगी। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में देश भर में वार्षिक वर्षा समान्य से कम रही, देश के छत्तीस जोन में से केवल एक केरल में ही वर्षा अधिक रही। तेईस प्रभागों में समान्य और बारह में वर्षा कम रही। मानसून की चाल को लेकर भारतीय मौसम विभाग द्वारा बनाई गई कमेटी के अध्ययन के बारे में आईएमडी पुणे के जलवायु रिसर्च एवं सर्विसेज के प्रमुख डॉ. डीएस पई ने अधिक न बताते हुए कहा, "कमेटी की रिपोर्ट के बाद, नए साल की शुरुआत में इस पर कुछ फैसला हो सकेगा, जिसके बाद इसे लागू किया जा सकता है।"
प्रेस, इलाहाबाद ) भी अच्छी वाल पत्रिकाएँ निकली थी, किन्तु बन्द हो गई। महिला पत्रिकाएँ महिलाओं की अच्छी पत्रिकाओं की बड़ी आवश्यकता है । 'अंगज' (दिल्ली), 'अम्बिका' (दिल्ली) आदि अच्छी पत्रिकाएं निकलती थी, परन्तु चली नही । आर्यमहिला' (वाराणसी), 'ऊषा' (इन्दौर), 'धरती' (नई दिल्ली), 'मनोरमा' (माया प्रेस, इलाहाबाद), 'महिला प्रगति के पथ पर' (नई दिल्ली) आदि कुछ पत्रिकाएँ निकल रही है। फिल्म पत्रिकाएँ फिल्मों के प्रचार और अभिनेता-अभिनेत्रियों के विषय में व्यापक जिज्ञासा का लाभ उठाकर बहुत-मी फिल्मी पत्रिकाएँ निकली, वंद भी हुई और आज भी निकल रही है। जिनमें से कुछ हैं- 'उर्वशी' (वम्बई), 'चित्रा' (दिल्ली), 'चित्रलेखा', 'छायाकार', 'नवचित्रपट', 'प्रिय', 'फिल्माजलि', 'फिल्मी कलियाँ', 'फिल्मी दुनिया', 'युग छाया', 'रग भूमि', 'सिनेल' और 'सुपमा' (दिल्ली), 'माधुरी' (बम्बई), 'मेनका' : (बम्बई), 'रमा' (वाराणसी), 'सिनेरिपोर्टर' (नई दिल्ली) आदि । इन सभी में हलके स्तर की सामग्री रहती है। केवल 'माधुरी' पत्रिका ही फिल्मों के सम्बन्धों में स्वस्थ सामग्री देती है और उसे स्तरीय पत्रिका कहा जा सकता है । इनके अतिरिक्त खेल, ज्योतिप, विधि, कामकला आदि की पत्रिकाएँ भी निकलती हैं। विधि के क्षेत्र में निकल रही 'उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका' और 'उच्चतम न्यायालय निर्णय पत्रिका' विशेष रूप से प्रामाणिक सामग्री दे रही है । उपरोक्त अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि सन् १९७३ मे १२,६५३ समाचार पत्नों की तुलना में १९७४ के अन्त में १२,१८५ समाचार पत्र थे। इनमें लगभग एकतिहाई समाचार पत्र दिल्ली, बम्बई, कलकत्ता और मद्रास से प्रकाशित होते हैं। समाचार-पत्नी के भाषावार अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि सन् १९७४ मे हिन्दी में सर्वाधिक संख्या ३,२०० पत्रिकाएँ प्रकाशित हुई । इसके पश्चात् अंग्रेजी में २,४५३, उर्दू मे ६१५, बगला मे ७३६, मराठी में ७१७, गुजराती में ५६६, तमिल मे ५२७, मलयालम मे ४६५, तेलुगु में ४२५, कन्नड़ में ३३१ और पंजाबी में २६५ समाचार पत्र प्रकाशित हुए। दो भाषाओं वाले समाचार पत्र ६८६ थे । प्रेस कानून कुछ प्रेस कानूनो में परिवर्तन लाने के लिए ८ दिसम्बर, १९७५ को तीन अध्यादेश जारी किए गए । एक अध्यादेश का उद्देश्य ससदीय कार्यवाही ( प्रकाशन सुरक्षा) अधिनियम १९५६ को रद्द करना तथा दूसरे का उद्देश्य १६६५ के प्रेस परिषद् अधिनियम का रद्द करना था। उनका स्थान फरवरी, १९७६ में संसद द्वारा अनुमोदित विधेयक ने ले लिया है ।
प्रेस, इलाहाबाद ) भी अच्छी वाल पत्रिकाएँ निकली थी, किन्तु बन्द हो गई। महिला पत्रिकाएँ महिलाओं की अच्छी पत्रिकाओं की बड़ी आवश्यकता है । 'अंगज' , 'अम्बिका' आदि अच्छी पत्रिकाएं निकलती थी, परन्तु चली नही । आर्यमहिला' , 'ऊषा' , 'धरती' , 'मनोरमा' , 'महिला प्रगति के पथ पर' आदि कुछ पत्रिकाएँ निकल रही है। फिल्म पत्रिकाएँ फिल्मों के प्रचार और अभिनेता-अभिनेत्रियों के विषय में व्यापक जिज्ञासा का लाभ उठाकर बहुत-मी फिल्मी पत्रिकाएँ निकली, वंद भी हुई और आज भी निकल रही है। जिनमें से कुछ हैं- 'उर्वशी' , 'चित्रा' , 'चित्रलेखा', 'छायाकार', 'नवचित्रपट', 'प्रिय', 'फिल्माजलि', 'फिल्मी कलियाँ', 'फिल्मी दुनिया', 'युग छाया', 'रग भूमि', 'सिनेल' और 'सुपमा' , 'माधुरी' , 'मेनका' : , 'रमा' , 'सिनेरिपोर्टर' आदि । इन सभी में हलके स्तर की सामग्री रहती है। केवल 'माधुरी' पत्रिका ही फिल्मों के सम्बन्धों में स्वस्थ सामग्री देती है और उसे स्तरीय पत्रिका कहा जा सकता है । इनके अतिरिक्त खेल, ज्योतिप, विधि, कामकला आदि की पत्रिकाएँ भी निकलती हैं। विधि के क्षेत्र में निकल रही 'उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका' और 'उच्चतम न्यायालय निर्णय पत्रिका' विशेष रूप से प्रामाणिक सामग्री दे रही है । उपरोक्त अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि सन् एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर मे बारह,छः सौ तिरेपन समाचार पत्नों की तुलना में एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर के अन्त में बारह,एक सौ पचासी समाचार पत्र थे। इनमें लगभग एकतिहाई समाचार पत्र दिल्ली, बम्बई, कलकत्ता और मद्रास से प्रकाशित होते हैं। समाचार-पत्नी के भाषावार अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि सन् एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर मे हिन्दी में सर्वाधिक संख्या तीन,दो सौ पत्रिकाएँ प्रकाशित हुई । इसके पश्चात् अंग्रेजी में दो,चार सौ तिरेपन, उर्दू मे छः सौ पंद्रह, बगला मे सात सौ छत्तीस, मराठी में सात सौ सत्रह, गुजराती में पाँच सौ छयासठ, तमिल मे पाँच सौ सत्ताईस, मलयालम मे चार सौ पैंसठ, तेलुगु में चार सौ पच्चीस, कन्नड़ में तीन सौ इकतीस और पंजाबी में दो सौ पैंसठ समाचार पत्र प्रकाशित हुए। दो भाषाओं वाले समाचार पत्र छः सौ छियासी थे । प्रेस कानून कुछ प्रेस कानूनो में परिवर्तन लाने के लिए आठ दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को तीन अध्यादेश जारी किए गए । एक अध्यादेश का उद्देश्य ससदीय कार्यवाही अधिनियम एक हज़ार नौ सौ छप्पन को रद्द करना तथा दूसरे का उद्देश्य एक हज़ार छः सौ पैंसठ के प्रेस परिषद् अधिनियम का रद्द करना था। उनका स्थान फरवरी, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में संसद द्वारा अनुमोदित विधेयक ने ले लिया है ।
देवास। मध्यप्रदेश के देवास शहर की पहचान पूरे देश में भयावह जल संकट वाले शहर के रूप में रही है। अस्सी के दशक से लेकर अब तक बीते चालीस सालों में यहां हर साल पानी की जबर्दस्त किल्लत बनी रहती है। कभी ट्रेन से तो कभी सवा सौ किमी दूर नर्मदा नदी से और कभी 65 किमी दूर गंभीर नदी से यहाँ के लोगों की प्यास बुझाने की कोशिशें की जाती रही है। जल संकट से परेशान हो चुके यहाँ के लोगों को अब बूँद-बूँद पानी की कीमत समझ आने लगी है। शहर में एक मोहल्ले के लोगों ने इस हफ़्ते करीब तीन सौ साल पुरानी एक बावड़ी को पुनर्जीवित कर दिया। बीते पचास-साठ सालों से इस बावड़ी में पूरे मोहल्ले का कचरा फेंका जाता रहा और इसके आसपास इतने झाड-झंखाड़ उग आए थे कि बावड़ी की पहचान ही खत्म हो गई थी। अपनी कॉलोनी की बावड़ी को बचाने के लिए यहाँ के रहवासी एकजुट हुए और उन्होंने श्रमदान कर इसकी गंदगी साफ़ की और अब इसे सहेजकर सजाया संवारा जा रहा है। इस काम में स्थानीय नगर निगम ने भी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद की। नगर निगम आयुक्त ने खुद आगे बढ़कर अपने अमले के साथ श्रमदान भी किया तथा लोगों को अपने पारम्परिक जल स्रोत को सहेजने के काम की तारीफ़ करते हुए इसे अनुकरणीय बताया। जहाँ कुछ दिनों पहले तक नाक पर रुमाल रखकर आना पड़ता था, आज वहाँ बदले हुए हालात में कालोनी ही नहीं शहर के दूसरे हिस्सों से भी लोग शाम के समय घूमने आ रहे हैं। बावड़ी को साफ़ सुथरा कर अब लोग बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने नगर निगम के सहयोग से बावड़ी के आसपास एक बगीचा भी बनाया है और अब इसमें पौधरोपण किया जा रहा है। शाम के समय रंग-बिरंगी रोशनी से यह जगह रौनक हो उठती है। बावड़ी की दीवारों पर सुंदर कला कृतियाँ बनाई जा रही हैं। शाम के समय बिजली की चमक दमक में इसे देखना अपनी तरह का अलग अनुभव है। 1734 में तत्कालीन देवास जूनियर रियासत के समय राजखर्च से इसका निर्माण किया गया था। यह ऐतिहासिक महत्त्व की है और करीब ढाई सौ सालों तक यह बावड़ी लोगों के लिए पानी का खजाना सहेजती रही। उन्नीस सौ सत्तर के दशक में देवास शहर के विस्तार के साथ परम्परागत जल स्रोतों की जगह घर-घर पाइपलाइन के जरिये नल जल योजना शुरू की गई. जब लोगों को घर के दरवाज़े पर ही पानी मिलने लगा तो उन्होंने पानी का मोल समझा ही नहीं, पुराने जल स्रोत लगातार उपेक्षित होते चले गए. धीरे-धीरे ये इतने हाशिए पर चले गए कि समाज ने इन्हें भूला दिया और इनमें पानी की नीली लहरों की जगह गंदगी और कूड़ा करकट समाने लगा। इस बावड़ी के साथ भी ऐसा ही हुआ। बुजुर्ग बताते हैं कि कभी देवास की पहचान यहाँ की रियासतकालीन समृद्ध बावडियों से होती थी। यहाँ करीब सौ से ज़्यादा बावड़ियाँ हुआ करती थी और सब एक से बढ़कर एक। इनमें पूरे साल पानी भरा रहता था और लोग इनका उपयोग पेयजल तथा खेती के काम में किया करते थे। पुराने पीढ़ी की आँखों में आज भी उन वैभवशाली बावडियों का पानी हिलोरें मारता है। देवास रियासत के रिकार्ड के मुताबिक दो सौ से तीन सौ साल पहले माता टेकरी से बहकर आने वाले बरसाती पानी के उपयोग के लिए कुछ बड़े तालाब और बड़ी संख्या में कुँए-बावड़ियाँ तत्कालीन रियासतदारों ने बनवाए थे। यही वजह थी कि उन दिनों बुरे से बुरे हालात में भी लोगों को पीने के पानी की कभी कमी महसूस नहीं हुई. दो-ढाई सौ सालों तक इन कुँए बावडियों का खूब सम्मान रहा और इन्होने भी पानी के खजाने को दिल खोलकर लोगों को बाँटा। शहर में बीते तीस सालों में स्थिति बद से बदतर हुई है। अस्सी के दशक में तो हमारी प्यास बुझाने के लिए प्रदेश की सरकार ने ट्रेन की बोगियों में पानी लाकर वितरित करवाया। यहाँ के उद्योगों के लिए बीओटी योजना में सवा सौ किमी दूर नेमावर के तट से नर्मदा नदी का पानी देवास लाना पड़ा। इसी तरह शाजापुर जिले के गंभीर डेम से 65 किमी पाइपलाइन डालकर शहर के पूर्वी भाग की प्यास बुझाई गई. क्षिप्रा जल आवर्धन योजना से भी क्षिप्रा नदी का पानी कई दिनों तक लाना पड़ा। क्षिप्रा नदी के सूखने के साथ नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना से नर्मदा का बेशकीमती पानी भी फिलहाल देवास शहर को पेयजल के लिए दिया जा रहा है। इसी दौरान इंदौर में नर्मदा के तृतीय चरण से मिलने वाले पानी का भी एक बड़ा हिस्सा पाइपलाइन से देवास पहुँचाया जाता रहा है। अरबों रूपये की इन योजनाओं से देवास के जल संकट का कोई स्थाई समाधान नहीं हो सका। इन तमाम प्रयासों का कोई बड़ा फायदा लोगों को नहीं मिला और आज भी स्थिति वही ढांक के तीन पाट की तरह से बनी हुई है। अभी जनवरी महीने से ही शहर में पानी की किल्लत की गूँज सुनाई देने लगी है। हैरत की बात यह है कि इन तमाम श्रमसाध्य और खर्चीले उपायों पर तो सरकारों ने बहुत ध्यान दिया लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि शहर के परम्परागत जल स्रोतों की भी सुध ली जाए. पानी की कमी से उबरने का एकमेव सहारा नर्मदा या दूसरी नदियों को मान लिया गया, जबकि शहर के कई कुँए और दर्जनों बावड़ियाँ अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाती रही। बाद के सालों में लोगों ने अपने पानी की चिंता सरकार के भरोसे छोड़ दी और सरकारों ने सिर्फ़ जमीनी पानी के अधिक से अधिक उलीचने और नदियों से पाइपलाइन में भरकर लाने की रिवायत को बढ़ावा दिया। जल संकट से निबटने की ये तकनीक सरल थी लेकिन इसके दूरगामी परिणामों की अनदेखी की गई. इससे एक तरफ हमारे परम्परागत जल स्रोत पिछड़ कर समाज से करीब-करीब उपेक्षित हो गए, वहीं हजारों सालों से धरती की नसों में धीरे-धीरे इकट्ठा हुआ पानी का संग्रह तेज़ी से खत्म होने लगा तथा जल स्तर लगातार कम होता चला गया। इसी कारण नदियाँ भी सिकुड़ गई और पहले की तरह वे सदानीरा नहीं रह पाई. हमारा समाज भी नलों से आने वाले पानी पर ही निर्भर हो गया। जल संकट का लगातार कई सालों से सामना कर रहे देवास शहर के लोगों की यह पहल भले ही छोटी हो लेकिन समस्या के स्थाई निदान की दिशा में ऐसे छोटे-छोटे कदम बड़े साबित हो सकते हैं। एक मोहल्ले के लोगों की जल चेतना को पूरे समाज को अंगीकार करने की ज़रूरत है। प्राकृतिक और परम्परागत जल स्रोतों की उपेक्षा ने हमारे आसपास पानी की किल्लत को बढ़ा दिया है। यदि हम इनका सम्मान करना सीख जाएँगे तो काफी हद तक बारिश के पानी को इनमें सहेज सकेंगे। यह बाकी समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी हो सकती है।
देवास। मध्यप्रदेश के देवास शहर की पहचान पूरे देश में भयावह जल संकट वाले शहर के रूप में रही है। अस्सी के दशक से लेकर अब तक बीते चालीस सालों में यहां हर साल पानी की जबर्दस्त किल्लत बनी रहती है। कभी ट्रेन से तो कभी सवा सौ किमी दूर नर्मदा नदी से और कभी पैंसठ किमी दूर गंभीर नदी से यहाँ के लोगों की प्यास बुझाने की कोशिशें की जाती रही है। जल संकट से परेशान हो चुके यहाँ के लोगों को अब बूँद-बूँद पानी की कीमत समझ आने लगी है। शहर में एक मोहल्ले के लोगों ने इस हफ़्ते करीब तीन सौ साल पुरानी एक बावड़ी को पुनर्जीवित कर दिया। बीते पचास-साठ सालों से इस बावड़ी में पूरे मोहल्ले का कचरा फेंका जाता रहा और इसके आसपास इतने झाड-झंखाड़ उग आए थे कि बावड़ी की पहचान ही खत्म हो गई थी। अपनी कॉलोनी की बावड़ी को बचाने के लिए यहाँ के रहवासी एकजुट हुए और उन्होंने श्रमदान कर इसकी गंदगी साफ़ की और अब इसे सहेजकर सजाया संवारा जा रहा है। इस काम में स्थानीय नगर निगम ने भी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद की। नगर निगम आयुक्त ने खुद आगे बढ़कर अपने अमले के साथ श्रमदान भी किया तथा लोगों को अपने पारम्परिक जल स्रोत को सहेजने के काम की तारीफ़ करते हुए इसे अनुकरणीय बताया। जहाँ कुछ दिनों पहले तक नाक पर रुमाल रखकर आना पड़ता था, आज वहाँ बदले हुए हालात में कालोनी ही नहीं शहर के दूसरे हिस्सों से भी लोग शाम के समय घूमने आ रहे हैं। बावड़ी को साफ़ सुथरा कर अब लोग बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने नगर निगम के सहयोग से बावड़ी के आसपास एक बगीचा भी बनाया है और अब इसमें पौधरोपण किया जा रहा है। शाम के समय रंग-बिरंगी रोशनी से यह जगह रौनक हो उठती है। बावड़ी की दीवारों पर सुंदर कला कृतियाँ बनाई जा रही हैं। शाम के समय बिजली की चमक दमक में इसे देखना अपनी तरह का अलग अनुभव है। एक हज़ार सात सौ चौंतीस में तत्कालीन देवास जूनियर रियासत के समय राजखर्च से इसका निर्माण किया गया था। यह ऐतिहासिक महत्त्व की है और करीब ढाई सौ सालों तक यह बावड़ी लोगों के लिए पानी का खजाना सहेजती रही। उन्नीस सौ सत्तर के दशक में देवास शहर के विस्तार के साथ परम्परागत जल स्रोतों की जगह घर-घर पाइपलाइन के जरिये नल जल योजना शुरू की गई. जब लोगों को घर के दरवाज़े पर ही पानी मिलने लगा तो उन्होंने पानी का मोल समझा ही नहीं, पुराने जल स्रोत लगातार उपेक्षित होते चले गए. धीरे-धीरे ये इतने हाशिए पर चले गए कि समाज ने इन्हें भूला दिया और इनमें पानी की नीली लहरों की जगह गंदगी और कूड़ा करकट समाने लगा। इस बावड़ी के साथ भी ऐसा ही हुआ। बुजुर्ग बताते हैं कि कभी देवास की पहचान यहाँ की रियासतकालीन समृद्ध बावडियों से होती थी। यहाँ करीब सौ से ज़्यादा बावड़ियाँ हुआ करती थी और सब एक से बढ़कर एक। इनमें पूरे साल पानी भरा रहता था और लोग इनका उपयोग पेयजल तथा खेती के काम में किया करते थे। पुराने पीढ़ी की आँखों में आज भी उन वैभवशाली बावडियों का पानी हिलोरें मारता है। देवास रियासत के रिकार्ड के मुताबिक दो सौ से तीन सौ साल पहले माता टेकरी से बहकर आने वाले बरसाती पानी के उपयोग के लिए कुछ बड़े तालाब और बड़ी संख्या में कुँए-बावड़ियाँ तत्कालीन रियासतदारों ने बनवाए थे। यही वजह थी कि उन दिनों बुरे से बुरे हालात में भी लोगों को पीने के पानी की कभी कमी महसूस नहीं हुई. दो-ढाई सौ सालों तक इन कुँए बावडियों का खूब सम्मान रहा और इन्होने भी पानी के खजाने को दिल खोलकर लोगों को बाँटा। शहर में बीते तीस सालों में स्थिति बद से बदतर हुई है। अस्सी के दशक में तो हमारी प्यास बुझाने के लिए प्रदेश की सरकार ने ट्रेन की बोगियों में पानी लाकर वितरित करवाया। यहाँ के उद्योगों के लिए बीओटी योजना में सवा सौ किमी दूर नेमावर के तट से नर्मदा नदी का पानी देवास लाना पड़ा। इसी तरह शाजापुर जिले के गंभीर डेम से पैंसठ किमी पाइपलाइन डालकर शहर के पूर्वी भाग की प्यास बुझाई गई. क्षिप्रा जल आवर्धन योजना से भी क्षिप्रा नदी का पानी कई दिनों तक लाना पड़ा। क्षिप्रा नदी के सूखने के साथ नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना से नर्मदा का बेशकीमती पानी भी फिलहाल देवास शहर को पेयजल के लिए दिया जा रहा है। इसी दौरान इंदौर में नर्मदा के तृतीय चरण से मिलने वाले पानी का भी एक बड़ा हिस्सा पाइपलाइन से देवास पहुँचाया जाता रहा है। अरबों रूपये की इन योजनाओं से देवास के जल संकट का कोई स्थाई समाधान नहीं हो सका। इन तमाम प्रयासों का कोई बड़ा फायदा लोगों को नहीं मिला और आज भी स्थिति वही ढांक के तीन पाट की तरह से बनी हुई है। अभी जनवरी महीने से ही शहर में पानी की किल्लत की गूँज सुनाई देने लगी है। हैरत की बात यह है कि इन तमाम श्रमसाध्य और खर्चीले उपायों पर तो सरकारों ने बहुत ध्यान दिया लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि शहर के परम्परागत जल स्रोतों की भी सुध ली जाए. पानी की कमी से उबरने का एकमेव सहारा नर्मदा या दूसरी नदियों को मान लिया गया, जबकि शहर के कई कुँए और दर्जनों बावड़ियाँ अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाती रही। बाद के सालों में लोगों ने अपने पानी की चिंता सरकार के भरोसे छोड़ दी और सरकारों ने सिर्फ़ जमीनी पानी के अधिक से अधिक उलीचने और नदियों से पाइपलाइन में भरकर लाने की रिवायत को बढ़ावा दिया। जल संकट से निबटने की ये तकनीक सरल थी लेकिन इसके दूरगामी परिणामों की अनदेखी की गई. इससे एक तरफ हमारे परम्परागत जल स्रोत पिछड़ कर समाज से करीब-करीब उपेक्षित हो गए, वहीं हजारों सालों से धरती की नसों में धीरे-धीरे इकट्ठा हुआ पानी का संग्रह तेज़ी से खत्म होने लगा तथा जल स्तर लगातार कम होता चला गया। इसी कारण नदियाँ भी सिकुड़ गई और पहले की तरह वे सदानीरा नहीं रह पाई. हमारा समाज भी नलों से आने वाले पानी पर ही निर्भर हो गया। जल संकट का लगातार कई सालों से सामना कर रहे देवास शहर के लोगों की यह पहल भले ही छोटी हो लेकिन समस्या के स्थाई निदान की दिशा में ऐसे छोटे-छोटे कदम बड़े साबित हो सकते हैं। एक मोहल्ले के लोगों की जल चेतना को पूरे समाज को अंगीकार करने की ज़रूरत है। प्राकृतिक और परम्परागत जल स्रोतों की उपेक्षा ने हमारे आसपास पानी की किल्लत को बढ़ा दिया है। यदि हम इनका सम्मान करना सीख जाएँगे तो काफी हद तक बारिश के पानी को इनमें सहेज सकेंगे। यह बाकी समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी हो सकती है।
शिमला - राज्यपाल आचार्य देवव्रत से बुधवार को राजभवन में नागालैंड के किसानों ने भेंट की। भारतीय सेना की इकाई 44 असम रायफल्स आपरेशन सद्भावना परियोजना के अंतर्गत तीन से 10 नवंबर तक नागालैंड के सभी 11 जिलों के 22 किसानों के एक दल के लिए हिमाचल प्रदेश में इकाई स्टाफ सहित राष्ट्रीय एकीकरण यात्रा का आयोजन करवा रही हैं। नागालैंड के किसानों से राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का सबसे प्रगतिशील राज्य है तथा सभी पहाड़ी राज्यों में विकास के संदर्भ में आदर्श प्रदेश बन कर उभरा है। प्रदेश ने बागबानी तथा कृषि क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है, जिससे प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। उन्होंने नागालैंड में सेब और किवी की खेती आरंभ करने का सुझाव दिया, क्योंकि नागालैंड में फलों के उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि को अपनाने पर बल दिया और कहा कि कृषि क्षेत्र में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि अपनाकर और प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था का सृजन कर किसानों को कृषक गतिविधियों के लिए ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होती। 44 असम रायफल्स के मेजर गुलशन कुमार ने शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पर बहुमूल्य सुझाव देने के लिए राज्यपाल का आभार व्यक्त किया।
शिमला - राज्यपाल आचार्य देवव्रत से बुधवार को राजभवन में नागालैंड के किसानों ने भेंट की। भारतीय सेना की इकाई चौंतालीस असम रायफल्स आपरेशन सद्भावना परियोजना के अंतर्गत तीन से दस नवंबर तक नागालैंड के सभी ग्यारह जिलों के बाईस किसानों के एक दल के लिए हिमाचल प्रदेश में इकाई स्टाफ सहित राष्ट्रीय एकीकरण यात्रा का आयोजन करवा रही हैं। नागालैंड के किसानों से राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का सबसे प्रगतिशील राज्य है तथा सभी पहाड़ी राज्यों में विकास के संदर्भ में आदर्श प्रदेश बन कर उभरा है। प्रदेश ने बागबानी तथा कृषि क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है, जिससे प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। उन्होंने नागालैंड में सेब और किवी की खेती आरंभ करने का सुझाव दिया, क्योंकि नागालैंड में फलों के उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि को अपनाने पर बल दिया और कहा कि कृषि क्षेत्र में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि अपनाकर और प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था का सृजन कर किसानों को कृषक गतिविधियों के लिए ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होती। चौंतालीस असम रायफल्स के मेजर गुलशन कुमार ने शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पर बहुमूल्य सुझाव देने के लिए राज्यपाल का आभार व्यक्त किया।
- 6 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 6 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? नए साल के मौके पर इस समय सभी सितारे अपनी अपनी तरह से एंजॉय करते नजर आ रहे हैँ। किसी ने फैमिली हॉलीडे प्लान किया है तो कोई अपने खास दोस्त के साथ मस्ती करता नजर आ रहा है। ऐसे में कुछ तस्वीरें अभिनेत्री कियारा आडवाणी की वायरल हो रही हैं जो कि शानदार हैं। हाल ही में उन्होने एक तस्वीर साझा की है जिसमें वो काफी बोल्ड एंड सेक्सी नजर आ रहीं हैं। कियारा आडवाणी ने इंस्टाग्राम पर इस खूबसूरत तस्वीर साझा किया है जिसको फैंस पसंद कर रहे हैँ। कियारा आडवाणी कुछ दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर रही हैं। उनको लेकर एक खबर ये भी चर्चा में है कि वो अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा को डेट कर रहीं हैं और इस समय उन्ही के साथ मालदीव में मौजूद हैं। हालांकि दोनों ने इस बात का खुलासा नहीं किया है और ना ही इस बारे में काफी बात की है। कियारा आडवाणी की पर्सनल लाइफ की बात करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि अभिनेत्री बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे अशोक कुमार की पोती हैं। हाल ही में वो कई फिल्मों का हिस्सा रहीं हैं लेकिन कबीर सिंह में उनकी परफॉर्मेंस काफी पसंद की गई थी। वर्कफ्रंट की बात करें तो कियारा आडवाणी इस समय जुग जुग जियो, भूल भुलैया 2 और शेरशाह को लेकर चर्टा में चल रही हैं।
- छः hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - छः hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? नए साल के मौके पर इस समय सभी सितारे अपनी अपनी तरह से एंजॉय करते नजर आ रहे हैँ। किसी ने फैमिली हॉलीडे प्लान किया है तो कोई अपने खास दोस्त के साथ मस्ती करता नजर आ रहा है। ऐसे में कुछ तस्वीरें अभिनेत्री कियारा आडवाणी की वायरल हो रही हैं जो कि शानदार हैं। हाल ही में उन्होने एक तस्वीर साझा की है जिसमें वो काफी बोल्ड एंड सेक्सी नजर आ रहीं हैं। कियारा आडवाणी ने इंस्टाग्राम पर इस खूबसूरत तस्वीर साझा किया है जिसको फैंस पसंद कर रहे हैँ। कियारा आडवाणी कुछ दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर रही हैं। उनको लेकर एक खबर ये भी चर्चा में है कि वो अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा को डेट कर रहीं हैं और इस समय उन्ही के साथ मालदीव में मौजूद हैं। हालांकि दोनों ने इस बात का खुलासा नहीं किया है और ना ही इस बारे में काफी बात की है। कियारा आडवाणी की पर्सनल लाइफ की बात करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि अभिनेत्री बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे अशोक कुमार की पोती हैं। हाल ही में वो कई फिल्मों का हिस्सा रहीं हैं लेकिन कबीर सिंह में उनकी परफॉर्मेंस काफी पसंद की गई थी। वर्कफ्रंट की बात करें तो कियारा आडवाणी इस समय जुग जुग जियो, भूल भुलैया दो और शेरशाह को लेकर चर्टा में चल रही हैं।
दो साल दो माह 24 दिन बाद जेल से रिहा हुए सपा के कद्दावर नेता और विधायक आजम खां शुक्रवार दोपहर करीब पौने दो बजे रामपुर पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उनका फूल बरसाकर स्वागत किया। घर पहुंचकर आजम खां ने प्रेसवार्ता में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट को शुक्रिया कहा। इसके बाद उन्होंने बताया कि मेरी तबियत खराब है। तकलीफ भी बहुत है। हमारा मिशन कभी राजनीतिक नहीं रहा। 40 साल के सियासी सफर में कभी कोई गलत काम नहीं किया। हमने अपना शहर कैसे बसाया था, देख सकते हैं। हमारा बुनियादी मकसद था लोगों की सेवा करना। सबसे पहले मुझ पर आठ केस दर्ज किए गए। सभी मामलों में वादी पक्ष ने केस वापस ले लिए। हमने जो जमीन ली उसके पैसे दिए। मैंने कभी किसी की जमीन नहीं हड़पी। रामपुर पहुंचने पर आजम खां ने कहा कि हमारे, हमारे परिवार के साथ जो हुआ उसे भूल नहीं सकते। हमारे शहर को उजाड़ दिया गया। मेरा 40 साल का सफर बेकार नहीं जाएगा। मेरा वक्त फिर लौटकर आएगा। जेल में किस तरह उन्होंने समय बिताया इस बारे में भी लोगों को बताया। आजम ने कहा कि रात होती थी तो सुबह और सुबह होती थी तो रात का इंतजार करते थे। मुझे सजायाफ्ता कैदी की तरह जेल में रखा गया। इस दौरान उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया पर कहा कि सबसे ज्यादा जुल्म तो मेरे अपनों ने किए हैं। आजम का ये बयान सीधे तौर पर सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। आजम लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की। आजम खां के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में 89 मामले दर्ज किए गए थे। जिसमें जमानत होने में करीब सवा दो साल का समय लग गया। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट से शत्रु संपत्ति मामले में जमानत मिलने और गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से रामपुर पब्लिक स्कूल के मामले में अंतरिम जमानत मिलने के बाद गुरुवार शाम को ही रामपुर कोर्ट से आजम खां की रिहाई के परवाने सीतापुर जेल प्रशासन के लिए विशेष संदेशवाहक के जरिए भेज दिए गए थे। जिसके बाद शुक्रवार सुबह आजम खां सीतापुर जेल से रिहा हो गए। इस दौरान उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला आजम और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी सीतापुर जेल पहुंचे और आजम खां के रिहा होने के बाद उनके साथ रामपुर के लिए रवाना हुए।
दो साल दो माह चौबीस दिन बाद जेल से रिहा हुए सपा के कद्दावर नेता और विधायक आजम खां शुक्रवार दोपहर करीब पौने दो बजे रामपुर पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उनका फूल बरसाकर स्वागत किया। घर पहुंचकर आजम खां ने प्रेसवार्ता में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट को शुक्रिया कहा। इसके बाद उन्होंने बताया कि मेरी तबियत खराब है। तकलीफ भी बहुत है। हमारा मिशन कभी राजनीतिक नहीं रहा। चालीस साल के सियासी सफर में कभी कोई गलत काम नहीं किया। हमने अपना शहर कैसे बसाया था, देख सकते हैं। हमारा बुनियादी मकसद था लोगों की सेवा करना। सबसे पहले मुझ पर आठ केस दर्ज किए गए। सभी मामलों में वादी पक्ष ने केस वापस ले लिए। हमने जो जमीन ली उसके पैसे दिए। मैंने कभी किसी की जमीन नहीं हड़पी। रामपुर पहुंचने पर आजम खां ने कहा कि हमारे, हमारे परिवार के साथ जो हुआ उसे भूल नहीं सकते। हमारे शहर को उजाड़ दिया गया। मेरा चालीस साल का सफर बेकार नहीं जाएगा। मेरा वक्त फिर लौटकर आएगा। जेल में किस तरह उन्होंने समय बिताया इस बारे में भी लोगों को बताया। आजम ने कहा कि रात होती थी तो सुबह और सुबह होती थी तो रात का इंतजार करते थे। मुझे सजायाफ्ता कैदी की तरह जेल में रखा गया। इस दौरान उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया पर कहा कि सबसे ज्यादा जुल्म तो मेरे अपनों ने किए हैं। आजम का ये बयान सीधे तौर पर सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। आजम लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की। आजम खां के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में नवासी मामले दर्ज किए गए थे। जिसमें जमानत होने में करीब सवा दो साल का समय लग गया। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट से शत्रु संपत्ति मामले में जमानत मिलने और गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से रामपुर पब्लिक स्कूल के मामले में अंतरिम जमानत मिलने के बाद गुरुवार शाम को ही रामपुर कोर्ट से आजम खां की रिहाई के परवाने सीतापुर जेल प्रशासन के लिए विशेष संदेशवाहक के जरिए भेज दिए गए थे। जिसके बाद शुक्रवार सुबह आजम खां सीतापुर जेल से रिहा हो गए। इस दौरान उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला आजम और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी सीतापुर जेल पहुंचे और आजम खां के रिहा होने के बाद उनके साथ रामपुर के लिए रवाना हुए।
आगरा। ताज के शहर आगरा की हवा में जहर घुला हुआ है। साल दर साल शहर की वायु गुणवत्ता बद से बदतर होती जा रही है, वहीं यमुना नदी में सीवर गिरकर नाले में तब्दील कर चुका है। नवंबर के महीने में दिवाली से पहले और तीसरे सप्ताह में प्रदूषण स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में 4 दिन हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, 13 दिन बेहद खराब श्रेणी में और 9 दिन खराब श्रेणी में रही। बीते साल 2019 में शहर में न सीवर-पानी की लाइनों की खोदाई ज्यादा थी और न ही सड़क पर जाम था। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पूरे महीने (नवंबर) ठीक रही। बीते साल नवंबर में 6 दिन तक हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक और अच्छी रही। 12 दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर रहा और 11 दिन हवा खराब श्रेणी में रही। केवल एक दिन ही वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंचा, जबकि इस साल 13 दिनों तक बेहद खराब श्रेणी रही। धूल के गुबार उड़ने पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आगरा स्मार्ट सिटी, एडीए और जलनिगम पर 32 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन सरकारी विभागों ने धूल नियंत्रण के उपाय फिर भी नहीं किए। जुर्माना लगने के बाद भी एयर एक्शन प्लान में सरकारी विभागों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, जबकि शहर की हवा की गुणवत्ता पूरे महीने में 26 दिन तक खराब स्तर पर बनी रही। आरटीओ, नगर निगम, जलनिगम, एनएचएआई ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं।
आगरा। ताज के शहर आगरा की हवा में जहर घुला हुआ है। साल दर साल शहर की वायु गुणवत्ता बद से बदतर होती जा रही है, वहीं यमुना नदी में सीवर गिरकर नाले में तब्दील कर चुका है। नवंबर के महीने में दिवाली से पहले और तीसरे सप्ताह में प्रदूषण स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में चार दिन हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, तेरह दिन बेहद खराब श्रेणी में और नौ दिन खराब श्रेणी में रही। बीते साल दो हज़ार उन्नीस में शहर में न सीवर-पानी की लाइनों की खोदाई ज्यादा थी और न ही सड़क पर जाम था। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पूरे महीने ठीक रही। बीते साल नवंबर में छः दिन तक हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक और अच्छी रही। बारह दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर रहा और ग्यारह दिन हवा खराब श्रेणी में रही। केवल एक दिन ही वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंचा, जबकि इस साल तेरह दिनों तक बेहद खराब श्रेणी रही। धूल के गुबार उड़ने पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आगरा स्मार्ट सिटी, एडीए और जलनिगम पर बत्तीस लाख रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन सरकारी विभागों ने धूल नियंत्रण के उपाय फिर भी नहीं किए। जुर्माना लगने के बाद भी एयर एक्शन प्लान में सरकारी विभागों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, जबकि शहर की हवा की गुणवत्ता पूरे महीने में छब्बीस दिन तक खराब स्तर पर बनी रही। आरटीओ, नगर निगम, जलनिगम, एनएचएआई ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं।
टाहलीवाल - हरोली ब्लॉक के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाथू की खिलाड़ी मानसी राजपूत अंडर-19 के तहत दिल्ली में तीन से नौ जनवरी तक होने जा रही राष्ट्रीय स्तर की हैंडबाल प्रतियोगिता में खेलेगी। कोचिंग कैंप बिलासपुर के मोरसिंघी में 24 दिसंबर से शुरू होगा। बाथू स्कूल के डीपी रामपाल ने बताया कि उनके विद्यालय से अंडर-14 वर्ग में दो महिला खिलाड़ी काजल और पायल का भी हैंडबाल प्रतियोगिता के राष्ट्र स्तरीय स्तर के लिए चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि इन दोनों खिलाडि़यों का कोचिंग कैंप भी बिलासपुर के मोरसिंघी में 18 दिसंबर से शुरू हो चुका है। ये दोनों खिलाड़ी मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 29 दिसंबर से दो जनवरी तक होने जा रही हैंडबाल की राष्ट्रीय स्तर की अंडर-14 प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। विद्यालय की प्रिंसीपल नीलम वर्मा ने इन खिलाडि़यों के सफल भविष्य की कामना की है।
टाहलीवाल - हरोली ब्लॉक के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाथू की खिलाड़ी मानसी राजपूत अंडर-उन्नीस के तहत दिल्ली में तीन से नौ जनवरी तक होने जा रही राष्ट्रीय स्तर की हैंडबाल प्रतियोगिता में खेलेगी। कोचिंग कैंप बिलासपुर के मोरसिंघी में चौबीस दिसंबर से शुरू होगा। बाथू स्कूल के डीपी रामपाल ने बताया कि उनके विद्यालय से अंडर-चौदह वर्ग में दो महिला खिलाड़ी काजल और पायल का भी हैंडबाल प्रतियोगिता के राष्ट्र स्तरीय स्तर के लिए चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि इन दोनों खिलाडि़यों का कोचिंग कैंप भी बिलासपुर के मोरसिंघी में अट्ठारह दिसंबर से शुरू हो चुका है। ये दोनों खिलाड़ी मध्य प्रदेश के शिवपुरी में उनतीस दिसंबर से दो जनवरी तक होने जा रही हैंडबाल की राष्ट्रीय स्तर की अंडर-चौदह प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। विद्यालय की प्रिंसीपल नीलम वर्मा ने इन खिलाडि़यों के सफल भविष्य की कामना की है।
उद्योगपतियों का जीवन दूर से देखने में भले रंगीन लगता हो लेकिन यहां आप पढ़ेंगे उन 5 अरबपतियों के जीवन का दुखांत जो उन्होंने खुद लिखा. आम तौर पर लोगों को लगता है कि पैसा हर समस्या का समाधान है लेकिन ऐसा नहीं है. बड़ा कारोबार बड़ी देनदारियां और बड़ा तनाव भी लाता है. सीसीडी के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ जिस तरह अचानक गुम हो गए हैं उसके पीछे बिज़नेस से जुड़ी समस्याओं को ही वजह माना जा रहा है. खुद उनका लिखा सुसाइड नोट भी इसी की तस्दीक करता है. पॉल कैसल लंदन के मशहूर प्रॉपर्टी टायकून थे. प्राइवेट जेट, फरारी और बेंटले कारें, स्विट्ज़रलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन में जायदाद उनकी संपत्ति की गवाही देने के लिए काफी हैं. 54 साल के पॉल ने 2010 में लंदन की अंडरग्राउंड ट्रेन के सामने कूद कर जान दे दी थी. पोलो के शौकीन पॉल की तस्वीरें प्रिंस चार्ल्स के साथ भी हैं जिनमें दोनों खेल के दौरान गुफ्तगू कर रहे हैं. पॉल के बेहद कर्मठ होने की बात आम थी, लेकिन आखिरी कुछ सालों के दौरान उनकी प्रॉपर्टी डील लगातार फेल होती रहीं. उन्होंने गैस और ऑयल सर्वे कंपनी में निवेश की बड़ी रकम भी खो दी. निजी जीवन में भी वो संकट से गुज़र रहे थे. तीन बार तलाक के बाद चौथी शादी करने वाले थे. इसके अलावा दिल से संबंधित बीमारी और ट्यूमर ने उनकी सेहत बिगाड़ रखी थी. आखिरकार पॉल ने मर जाने का फैसला लिया और सब को चौंकाते हुए ट्रेन से कट कर जान दे दी. फाल्कनस्टर एक डाटा स्टोरेज कंपनी है. उसके प्रेसिडेंट और सीईओ रहे हुएई ने सितंबर 2011 में अपनी छाती से सटाकर गोली चलाई और जान दे दी. इस घटना से पहले वो अपने खिलाफ एक मुकदमा दर्ज होने पर कंपनी छोड़ चुके थे. दरअसल कंपनी में ही उनका तख्तापलट कर दिया गया था जिससे वो उबरे नहीं थे. जब उन्होंने अपनी जान दी तब वो अपने 17 करोड़ रुपए के घर के लॉन में बैठे थे. ताइवान में पैदा हुए हुएई ने अमेरिका में पढ़ाई लिखाई की थी. ब्रिटेन के अरबपति जोनाथन रैथ ने 35 साल की उम्र में खुद को गोली मारकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी. उन्होंने अपने पीछे कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा. ये 2009 का दिसंबर था. दो साल पहले उन्होंने अपने पिता का बिज़नेस करीब 3 अरब 16 करोड़ रुपए में बेचा था और अब शूटिंग का अपना काम जमा रहे थे. उनके किसी करीबी को अंदाज़ा ही नहीं लगा कि वो क्यों खुदकुशी करने के फैसले पर पहुंचे थे. हर किसी की नज़र में वो अमीर और शूटिंग के शौकीन शख्स के तौर पर मशहूर थे. अंत में सब इसी नतीजे पर पहुंचे कि अपने पिता की मौत का सदमा उन्हें गहरे अवसाद तक ले गया था. ब्लैक पोलैंड में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने अमेरिका में सफलतापूर्वक व्यापार किया था. उनकी कंपनी का नाम यूनाइटेड ब्रांड्स था जो फल उगाने और निर्यात का काम करती थी. उन्होंने फरवरी 1975 में 53 साल की उम्र में न्यूयॉर्क की ऊंची इमारत से छलांग लगाकर मौत को गले लगा लिया था. मौत से पहले उन्होंने खिड़की का शीशा अपने ब्रीफकेस से तोड़ा था. ब्लैक ने दूध की बोतलों की कैप बनाने से काम शुरू किया था और फिर वो धीरे-धीरे अमेरिका के बड़े कारोबारी होते चले गए. उनकी कंपनी घाटे में जाने लगी कि तभी 1974 में फीफी नाम के तूफान ने होंडुरास में केले के पेड़ों को तबाह कर दिया. कंपनी ने 1974 की पहली तिमाही में ही पौने 3 अरब रुपए का घाटा उठाया था. ब्लैक की मौत के हफ्ते भर बाद ये खुलासा भी हुआ कि उनकी कंपनी ने होंडुरास के तत्कालीन राष्ट्रपति को इसलिए घूस दी थी ताकि वो केले के निर्यात पर टैक्स घटा दें. 49 साल के बुमीस्टर का शव ब्रिटेन के बर्कशायर में उनकी गुमशुदगी के हफ्ते भर बाद बरामद हुआ था. वो अपनी लाइसेंसी बंदूक के साथ घर से निकल गए थे. बुमीस्टर के शव पर गोलियों के निशान मिले थे. ये बात जून 2009 की है. बुमीस्टर एबीएन एमरो के बोर्ड मेंबर थे, जिसे रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंट ने टेकओवर कर लिया था. बुमीस्टर की सैलरी करीब 3 करोड़ 70 लाख रुपए थी. मौत से 3 महीने पहले उनकी नौकरी जा चुकी थी. उनकी खुदकुशी के पीछे यही वजह मानी गई.
उद्योगपतियों का जीवन दूर से देखने में भले रंगीन लगता हो लेकिन यहां आप पढ़ेंगे उन पाँच अरबपतियों के जीवन का दुखांत जो उन्होंने खुद लिखा. आम तौर पर लोगों को लगता है कि पैसा हर समस्या का समाधान है लेकिन ऐसा नहीं है. बड़ा कारोबार बड़ी देनदारियां और बड़ा तनाव भी लाता है. सीसीडी के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ जिस तरह अचानक गुम हो गए हैं उसके पीछे बिज़नेस से जुड़ी समस्याओं को ही वजह माना जा रहा है. खुद उनका लिखा सुसाइड नोट भी इसी की तस्दीक करता है. पॉल कैसल लंदन के मशहूर प्रॉपर्टी टायकून थे. प्राइवेट जेट, फरारी और बेंटले कारें, स्विट्ज़रलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन में जायदाद उनकी संपत्ति की गवाही देने के लिए काफी हैं. चौवन साल के पॉल ने दो हज़ार दस में लंदन की अंडरग्राउंड ट्रेन के सामने कूद कर जान दे दी थी. पोलो के शौकीन पॉल की तस्वीरें प्रिंस चार्ल्स के साथ भी हैं जिनमें दोनों खेल के दौरान गुफ्तगू कर रहे हैं. पॉल के बेहद कर्मठ होने की बात आम थी, लेकिन आखिरी कुछ सालों के दौरान उनकी प्रॉपर्टी डील लगातार फेल होती रहीं. उन्होंने गैस और ऑयल सर्वे कंपनी में निवेश की बड़ी रकम भी खो दी. निजी जीवन में भी वो संकट से गुज़र रहे थे. तीन बार तलाक के बाद चौथी शादी करने वाले थे. इसके अलावा दिल से संबंधित बीमारी और ट्यूमर ने उनकी सेहत बिगाड़ रखी थी. आखिरकार पॉल ने मर जाने का फैसला लिया और सब को चौंकाते हुए ट्रेन से कट कर जान दे दी. फाल्कनस्टर एक डाटा स्टोरेज कंपनी है. उसके प्रेसिडेंट और सीईओ रहे हुएई ने सितंबर दो हज़ार ग्यारह में अपनी छाती से सटाकर गोली चलाई और जान दे दी. इस घटना से पहले वो अपने खिलाफ एक मुकदमा दर्ज होने पर कंपनी छोड़ चुके थे. दरअसल कंपनी में ही उनका तख्तापलट कर दिया गया था जिससे वो उबरे नहीं थे. जब उन्होंने अपनी जान दी तब वो अपने सत्रह करोड़ रुपए के घर के लॉन में बैठे थे. ताइवान में पैदा हुए हुएई ने अमेरिका में पढ़ाई लिखाई की थी. ब्रिटेन के अरबपति जोनाथन रैथ ने पैंतीस साल की उम्र में खुद को गोली मारकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी. उन्होंने अपने पीछे कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा. ये दो हज़ार नौ का दिसंबर था. दो साल पहले उन्होंने अपने पिता का बिज़नेस करीब तीन अरब सोलह करोड़ रुपए में बेचा था और अब शूटिंग का अपना काम जमा रहे थे. उनके किसी करीबी को अंदाज़ा ही नहीं लगा कि वो क्यों खुदकुशी करने के फैसले पर पहुंचे थे. हर किसी की नज़र में वो अमीर और शूटिंग के शौकीन शख्स के तौर पर मशहूर थे. अंत में सब इसी नतीजे पर पहुंचे कि अपने पिता की मौत का सदमा उन्हें गहरे अवसाद तक ले गया था. ब्लैक पोलैंड में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने अमेरिका में सफलतापूर्वक व्यापार किया था. उनकी कंपनी का नाम यूनाइटेड ब्रांड्स था जो फल उगाने और निर्यात का काम करती थी. उन्होंने फरवरी एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में तिरेपन साल की उम्र में न्यूयॉर्क की ऊंची इमारत से छलांग लगाकर मौत को गले लगा लिया था. मौत से पहले उन्होंने खिड़की का शीशा अपने ब्रीफकेस से तोड़ा था. ब्लैक ने दूध की बोतलों की कैप बनाने से काम शुरू किया था और फिर वो धीरे-धीरे अमेरिका के बड़े कारोबारी होते चले गए. उनकी कंपनी घाटे में जाने लगी कि तभी एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में फीफी नाम के तूफान ने होंडुरास में केले के पेड़ों को तबाह कर दिया. कंपनी ने एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर की पहली तिमाही में ही पौने तीन अरब रुपए का घाटा उठाया था. ब्लैक की मौत के हफ्ते भर बाद ये खुलासा भी हुआ कि उनकी कंपनी ने होंडुरास के तत्कालीन राष्ट्रपति को इसलिए घूस दी थी ताकि वो केले के निर्यात पर टैक्स घटा दें. उनचास साल के बुमीस्टर का शव ब्रिटेन के बर्कशायर में उनकी गुमशुदगी के हफ्ते भर बाद बरामद हुआ था. वो अपनी लाइसेंसी बंदूक के साथ घर से निकल गए थे. बुमीस्टर के शव पर गोलियों के निशान मिले थे. ये बात जून दो हज़ार नौ की है. बुमीस्टर एबीएन एमरो के बोर्ड मेंबर थे, जिसे रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंट ने टेकओवर कर लिया था. बुमीस्टर की सैलरी करीब तीन करोड़ सत्तर लाख रुपए थी. मौत से तीन महीने पहले उनकी नौकरी जा चुकी थी. उनकी खुदकुशी के पीछे यही वजह मानी गई.
बवासीर मतलब पाइल्स (Piles) रोग का जिक्र आने पर लोग अक्सर संकोच में पड़ जाते हैं. दुनिया में आजकल बहुत लोग इस कठिनाई का सामना कर रहे हैं किन्तु लज्जा के कारण वे किसी से यह परेशानी बता नहीं पाते तथा न ही चिकित्सक से संपर्क करते. जिसके चलते उनकी कठिनाई बढती चली जाती है. असल में यह रोग खानपान एवं लाइफस्टाइल से जुड़ी है. यदि हम इन दोनों को ठीक कर लें तो यह कठिनाई भी अपने आप खत्म हो जाती है. * कम कर दें चाय- कॉफी का सेवनः- पाइल्स की कठिनाई तब उत्पन्न होती है, जब कोई आदमी अधिक मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन आरम्भ कर देता है. असल में चाय-कॉफी में कैफीन होता है. जिनके अधिक सेवन से शरीर में पानी की कमी हो जाती है एवं मल त्याग करने में कठिनाई आने लगती है. लिहाजा कोशिश करें कि इनका सेवन न्यूनतम करें. * बेकरी प्रोडक्ट्स से करें तौबाः- बेकरी में बने हुए केक, पेस्ट्री, ब्रेड जैसे फूड्स पचने में बहुत वक़्त लेते हैं. इसके कारण पेट के पाचन तंत्र पर उल्टा असर पड़ता है तथा शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. यदि आप रोजाना इन चीजों को खाते हैं तो इससे बवासीर की रोग उभरने में अधिक देर नहीं लगती है. * इन सब्जियों को खाने से बचेंः- कई ऐसी सब्जियां हैं, जिन्हें खाने से गैस-एसिडिटी, अपच एवं डकारें आने की कठिनाई बढ़ जाती है. इनमें शिमला मिर्च, फूलगोभी, आलू, पत्ता गोभी जैसी सब्जियां सम्मिलित हैं. इन सब्जियों को नियमित खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे पाइल्स की कठिनाई बन जाती है. * तले-भुने भोजन से परहेजः- अधिक मसालेदार एवं तला-भुना भोजन हमेशा हानिकारक होता है. इसके चलते शरीर में फैट बढ़ जाता है, साथ ही वे आसानी से पच भी नहीं पाते. ऐसा भोजन खाने से कब्ज की परेशानी आरम्भ हो जाती है, जो आगे चलकर बवासीर का रूप ले लेती है. यदि आप इस रोग को स्वयं से दूर रखना चाहते हैं तो तले-भुने भोजन को अवॉइड करना आरम्भ कर दें.
बवासीर मतलब पाइल्स रोग का जिक्र आने पर लोग अक्सर संकोच में पड़ जाते हैं. दुनिया में आजकल बहुत लोग इस कठिनाई का सामना कर रहे हैं किन्तु लज्जा के कारण वे किसी से यह परेशानी बता नहीं पाते तथा न ही चिकित्सक से संपर्क करते. जिसके चलते उनकी कठिनाई बढती चली जाती है. असल में यह रोग खानपान एवं लाइफस्टाइल से जुड़ी है. यदि हम इन दोनों को ठीक कर लें तो यह कठिनाई भी अपने आप खत्म हो जाती है. * कम कर दें चाय- कॉफी का सेवनः- पाइल्स की कठिनाई तब उत्पन्न होती है, जब कोई आदमी अधिक मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन आरम्भ कर देता है. असल में चाय-कॉफी में कैफीन होता है. जिनके अधिक सेवन से शरीर में पानी की कमी हो जाती है एवं मल त्याग करने में कठिनाई आने लगती है. लिहाजा कोशिश करें कि इनका सेवन न्यूनतम करें. * बेकरी प्रोडक्ट्स से करें तौबाः- बेकरी में बने हुए केक, पेस्ट्री, ब्रेड जैसे फूड्स पचने में बहुत वक़्त लेते हैं. इसके कारण पेट के पाचन तंत्र पर उल्टा असर पड़ता है तथा शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. यदि आप रोजाना इन चीजों को खाते हैं तो इससे बवासीर की रोग उभरने में अधिक देर नहीं लगती है. * इन सब्जियों को खाने से बचेंः- कई ऐसी सब्जियां हैं, जिन्हें खाने से गैस-एसिडिटी, अपच एवं डकारें आने की कठिनाई बढ़ जाती है. इनमें शिमला मिर्च, फूलगोभी, आलू, पत्ता गोभी जैसी सब्जियां सम्मिलित हैं. इन सब्जियों को नियमित खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे पाइल्स की कठिनाई बन जाती है. * तले-भुने भोजन से परहेजः- अधिक मसालेदार एवं तला-भुना भोजन हमेशा हानिकारक होता है. इसके चलते शरीर में फैट बढ़ जाता है, साथ ही वे आसानी से पच भी नहीं पाते. ऐसा भोजन खाने से कब्ज की परेशानी आरम्भ हो जाती है, जो आगे चलकर बवासीर का रूप ले लेती है. यदि आप इस रोग को स्वयं से दूर रखना चाहते हैं तो तले-भुने भोजन को अवॉइड करना आरम्भ कर दें.
रामकुमार नायक/सूरजपुर. अक्सर लोग प्यार के जुनून में कुछ भी कर गुजरते हैं. ऐसा ही एक मामला यहां भी सामने आया है, जहां एक प्रेमिका ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पूर्व प्रेमी की हत्या कर दी. सूरजपुर में शादीशुदा महिला की यह करतूत चर्चा का विषय बनी हुई है. जानकारी के अनुसार, महिला, उसका प्रेमी और महिला का पूर्व प्रेमी तीनों साथ में बैठकर शराब पी रहे थे. आरोप है कि इसके बाद महिला और उसके प्रेमी ने पूर्व प्रेमी सुंदर साय का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या कर शव को बोरे में भरकर पानी में फेंक दिया था. शव मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. पूरा मामला सूरजपूर के विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है. 30 अप्रैल को ही परिजनों ने लक्ष्मणपुर निवासी सुंदर साय के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी. इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. कुछ दिन बाद उसका शव कमलपुर खदान में पानी से भरे गड्ढे में मिला. आस-पास लोगों ने ही बोरे में बंधी लाश देखी थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई थी. विश्रामपुर थाना प्रभारी केडी बनर्जी ने बताया कि शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई, जिसमें पुलिस को पता चला कि सुंदर साय की पत्नी का निधन 2014 में हो गया था. तब से उसका प्रेम प्रसंग कमलपुर निवासी 40 वर्षीय भगमेन बाई से चल रहा था. कुछ समय पहले विवाद के बाद से भगमेन बाई 26 वर्षीय सोमार साय से प्रेम करने लगी थी. भगमेन बाई शादी के बाद से पति को छोड़कर अकेली रहती थी. ये सब जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने भगमेन बाई और सोमार साय को हिरासत में लिया. हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि 25 अप्रैल की शाम को सुंदर साय भगमेन बाई के घर गया था. उसने साथ में शराब और मुर्गा रखा था. उसने कहा कि चलो शराब पीते हैं. इस पर भगमेन ने अपने प्रेमी को फोन कर बुला लिया. फिर तीनों ने मिलकर घर से कुछ दूर पर ही स्थिति सुनसान जगह पर शराब पी और मुर्गा भी खाया. इसके बाद भगमेन के घर आने जाने को लेकर विवाद हुआ. मौके पर भगमेन बाई ने सोमार के साथ मिलकर सुंदर का गला घोंट दिया. इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद शव को खदान के अंदर पानी में फेंक दिया था. .
रामकुमार नायक/सूरजपुर. अक्सर लोग प्यार के जुनून में कुछ भी कर गुजरते हैं. ऐसा ही एक मामला यहां भी सामने आया है, जहां एक प्रेमिका ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पूर्व प्रेमी की हत्या कर दी. सूरजपुर में शादीशुदा महिला की यह करतूत चर्चा का विषय बनी हुई है. जानकारी के अनुसार, महिला, उसका प्रेमी और महिला का पूर्व प्रेमी तीनों साथ में बैठकर शराब पी रहे थे. आरोप है कि इसके बाद महिला और उसके प्रेमी ने पूर्व प्रेमी सुंदर साय का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या कर शव को बोरे में भरकर पानी में फेंक दिया था. शव मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. पूरा मामला सूरजपूर के विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है. तीस अप्रैल को ही परिजनों ने लक्ष्मणपुर निवासी सुंदर साय के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी. इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. कुछ दिन बाद उसका शव कमलपुर खदान में पानी से भरे गड्ढे में मिला. आस-पास लोगों ने ही बोरे में बंधी लाश देखी थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई थी. विश्रामपुर थाना प्रभारी केडी बनर्जी ने बताया कि शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई, जिसमें पुलिस को पता चला कि सुंदर साय की पत्नी का निधन दो हज़ार चौदह में हो गया था. तब से उसका प्रेम प्रसंग कमलपुर निवासी चालीस वर्षीय भगमेन बाई से चल रहा था. कुछ समय पहले विवाद के बाद से भगमेन बाई छब्बीस वर्षीय सोमार साय से प्रेम करने लगी थी. भगमेन बाई शादी के बाद से पति को छोड़कर अकेली रहती थी. ये सब जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने भगमेन बाई और सोमार साय को हिरासत में लिया. हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि पच्चीस अप्रैल की शाम को सुंदर साय भगमेन बाई के घर गया था. उसने साथ में शराब और मुर्गा रखा था. उसने कहा कि चलो शराब पीते हैं. इस पर भगमेन ने अपने प्रेमी को फोन कर बुला लिया. फिर तीनों ने मिलकर घर से कुछ दूर पर ही स्थिति सुनसान जगह पर शराब पी और मुर्गा भी खाया. इसके बाद भगमेन के घर आने जाने को लेकर विवाद हुआ. मौके पर भगमेन बाई ने सोमार के साथ मिलकर सुंदर का गला घोंट दिया. इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद शव को खदान के अंदर पानी में फेंक दिया था. .
देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे आफ इंडिया स्टेडियम में पशुपालन विभाग की ओर से विभिन्न योजनाओं का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकापर्ण किया। इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि जिस भी योजना का शिलान्यास करेंगे उसका लोकार्पण भी करेंगे। जागरण संवाददाता, देहरादूनः उत्तराखंड में पशु चिकित्सा के लिए मोबाइल चिकित्सा इकाई की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सर्वे स्टेडियम में 60 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने गोट वैली योजना की भी शुरुआत की। वहीं, पशुलोक ऋषिकेश में हीफर रियरिंग फार्म, उत्तराखंड पशु चिकित्सा परिषद के परिसर में नवीन प्रशिक्षण केंद्र व राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजना के तहत एकत्रीकरण सह प्रजनन फार्म का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत श्यामपुर में अतिहिमीकृत वीर्य प्रयोगशाला का भी शिलान्यास किया। यह घोषणा की कि पशु चिकित्सकों को भी एनपीए दिया जाएगा। पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल चिकित्सा इकाईयों से राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाएं एवं पशुपालन संबंधी अन्य विभागीय सेवाएं आसानी से प्रदान की जा सकेंगी। इसके लिए टोल फ्री नंबर 1962 जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत नेशनल डिजिटल लाइवस्टाक मिशन को चंपावत एवं ऊधमसिंह नगर में भी शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन एवं कृषि उत्तराखंड के लाखों परिवारों की आर्थिकी की रीढ़ है। 80 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्रदान करने वाला पशुपालन व्यवसाय न केवल उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, बल्कि संतुलित पोषण का भी मुख्य आधार है। पशुपालन व्यवसाय का राज्य सकल घरेलू उत्पादन में तीन प्रतिशत योगदान है। पशुपालन व्यवसाय में निवेश ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का भी मुख्य साधन हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पहली बार डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक पशु को एक विशिष्ट टैग लगाया जा रहा है। डेयरी व्यवसाय क्षेत्र के लिए विकसित किया गया डिजिटल पेमेंट सिस्टम भी बदलते भारत का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को डेयरी क्षेत्र की वास्तविक नायिका बताया है, क्योंकि आज भी पशुओं की देखभाल अधिकतर मातृशक्ति ही करती हैं। गांवों में मातृशक्ति को सबसे अधिक समस्या चूल्हे पर खाना बनाने से होती थी, पर केंद्र सरकार ने जो गोवर्धन योजना प्रारंभ की है, उससे गावों में गोबर गैस प्लांट लगाकर इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने लंपी स्किन डिजीज को पूरी तरह से नियंत्रित करने में सफलता मिल गई है। प्रदेश में लगभग छह लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। कहा, जैविक कृषि का मुख्य आधार भी पशुधन ही है। इसके लिए पशुओं के गोबर को जैविक फार्म्स तक पहुंचाने के लिए भी सरकार विशेष प्रयास कर रही है। यह आशा व्यक्त की कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नवीन प्रयासों से न केवल राज्य में युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि ग्रामीण आर्थिकी भी मजबूत होगी और रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी। इस दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी, पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा, महापौर सुनील उनियाल गामा, विधायक उमेश शर्मा काऊ, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, केंद्र के सचिव पशुपालन राजेश कुमार, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, बीवीआरसी पुरुषोत्तम, निदेशक पशुपालन डा. प्रेम कुमार आदि उपस्थित थे। केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान ने कहा कि राज्य में 95 विकासखंड हैं। ऐसे में उत्तराखंड को 35 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन और दिए जाएंगे। एंबुलेंस में तैनात संविदा पशु चिकित्सक को न्यूनतम 56 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसकी अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी। कहा कि राज्य में केंद्र की मदद से वन हेल्थ प्रोग्राम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जाएगा। कालसी पशु प्रजनन फार्म को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के सफल क्रियान्वयन एवं प्रशिक्षण के लिए सेंटर फार एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक हैं। इन्हें साथ मिलकर चलने की जरूरत। चुटकी लेते कहा कि बड़े भाई, कृषि विभाग ने पशुपालन के साथ वही बर्ताव किया, जो कभी यूपी ने उत्तराखंड के साथ किया था। तभी दोनों अलग हुए। उन्होंने कहा कि पशुपालन पर बजट खर्च अभी भी कम है। जबकि ये पलायन को रोकने में मददगार है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में लोग की आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। पशुपालन के माध्यम से मातृशक्ति को सशक्त बनाने एवं रिवर्स माइग्रेशन की पहल की गई है। इसी क्रम में बागेश्वर से गोट वैली की शुरुआत की गई है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, अल्मोड़ा व ऊधमसिंह में भी योजना संचालित की जाएगी। इस योजना को हब एंड स्पोक माडल के तहत एक ब्रीड मल्टीप्लायर फार्म के साथ जोड़ते हुए चलाया जाएगा। संघ के सदस्यों को 20 प्लस वन की 100 यूनिट उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का प्रयास है कि गाय के साथ ही बकरी के दूध को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाए।
देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे आफ इंडिया स्टेडियम में पशुपालन विभाग की ओर से विभिन्न योजनाओं का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकापर्ण किया। इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि जिस भी योजना का शिलान्यास करेंगे उसका लोकार्पण भी करेंगे। जागरण संवाददाता, देहरादूनः उत्तराखंड में पशु चिकित्सा के लिए मोबाइल चिकित्सा इकाई की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सर्वे स्टेडियम में साठ मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने गोट वैली योजना की भी शुरुआत की। वहीं, पशुलोक ऋषिकेश में हीफर रियरिंग फार्म, उत्तराखंड पशु चिकित्सा परिषद के परिसर में नवीन प्रशिक्षण केंद्र व राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजना के तहत एकत्रीकरण सह प्रजनन फार्म का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत श्यामपुर में अतिहिमीकृत वीर्य प्रयोगशाला का भी शिलान्यास किया। यह घोषणा की कि पशु चिकित्सकों को भी एनपीए दिया जाएगा। पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल चिकित्सा इकाईयों से राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाएं एवं पशुपालन संबंधी अन्य विभागीय सेवाएं आसानी से प्रदान की जा सकेंगी। इसके लिए टोल फ्री नंबर एक हज़ार नौ सौ बासठ जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत नेशनल डिजिटल लाइवस्टाक मिशन को चंपावत एवं ऊधमसिंह नगर में भी शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन एवं कृषि उत्तराखंड के लाखों परिवारों की आर्थिकी की रीढ़ है। अस्सी प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्रदान करने वाला पशुपालन व्यवसाय न केवल उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, बल्कि संतुलित पोषण का भी मुख्य आधार है। पशुपालन व्यवसाय का राज्य सकल घरेलू उत्पादन में तीन प्रतिशत योगदान है। पशुपालन व्यवसाय में निवेश ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का भी मुख्य साधन हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पहली बार डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक पशु को एक विशिष्ट टैग लगाया जा रहा है। डेयरी व्यवसाय क्षेत्र के लिए विकसित किया गया डिजिटल पेमेंट सिस्टम भी बदलते भारत का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को डेयरी क्षेत्र की वास्तविक नायिका बताया है, क्योंकि आज भी पशुओं की देखभाल अधिकतर मातृशक्ति ही करती हैं। गांवों में मातृशक्ति को सबसे अधिक समस्या चूल्हे पर खाना बनाने से होती थी, पर केंद्र सरकार ने जो गोवर्धन योजना प्रारंभ की है, उससे गावों में गोबर गैस प्लांट लगाकर इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने लंपी स्किन डिजीज को पूरी तरह से नियंत्रित करने में सफलता मिल गई है। प्रदेश में लगभग छह लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। कहा, जैविक कृषि का मुख्य आधार भी पशुधन ही है। इसके लिए पशुओं के गोबर को जैविक फार्म्स तक पहुंचाने के लिए भी सरकार विशेष प्रयास कर रही है। यह आशा व्यक्त की कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नवीन प्रयासों से न केवल राज्य में युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि ग्रामीण आर्थिकी भी मजबूत होगी और रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को नई गति मिलेगी। इस दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी, पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा, महापौर सुनील उनियाल गामा, विधायक उमेश शर्मा काऊ, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, केंद्र के सचिव पशुपालन राजेश कुमार, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, बीवीआरसी पुरुषोत्तम, निदेशक पशुपालन डा. प्रेम कुमार आदि उपस्थित थे। केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान ने कहा कि राज्य में पचानवे विकासखंड हैं। ऐसे में उत्तराखंड को पैंतीस मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन और दिए जाएंगे। एंबुलेंस में तैनात संविदा पशु चिकित्सक को न्यूनतम छप्पन हजार रुपये दिए जाएंगे। इसकी अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी। कहा कि राज्य में केंद्र की मदद से वन हेल्थ प्रोग्राम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जाएगा। कालसी पशु प्रजनन फार्म को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के सफल क्रियान्वयन एवं प्रशिक्षण के लिए सेंटर फार एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक हैं। इन्हें साथ मिलकर चलने की जरूरत। चुटकी लेते कहा कि बड़े भाई, कृषि विभाग ने पशुपालन के साथ वही बर्ताव किया, जो कभी यूपी ने उत्तराखंड के साथ किया था। तभी दोनों अलग हुए। उन्होंने कहा कि पशुपालन पर बजट खर्च अभी भी कम है। जबकि ये पलायन को रोकने में मददगार है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में लोग की आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। पशुपालन के माध्यम से मातृशक्ति को सशक्त बनाने एवं रिवर्स माइग्रेशन की पहल की गई है। इसी क्रम में बागेश्वर से गोट वैली की शुरुआत की गई है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, अल्मोड़ा व ऊधमसिंह में भी योजना संचालित की जाएगी। इस योजना को हब एंड स्पोक माडल के तहत एक ब्रीड मल्टीप्लायर फार्म के साथ जोड़ते हुए चलाया जाएगा। संघ के सदस्यों को बीस प्लस वन की एक सौ यूनिट उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का प्रयास है कि गाय के साथ ही बकरी के दूध को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाए।
श्रीनगर (Srinagar)। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में सैन्य यूनिट (military unit ) के पास पुराने पुंछ (Poonch) में रविवार आधी रात तीन संदिग्धों (midnight three suspects) को देखे जाने के बाद पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान (search operation) चलाया गया। सैन्य यूनिट के पास एक स्कूल के करीब संदिग्धों को देखे जाने के बाद स्कूल को भी घेरकर तलाशी ली गई। देर रात तक तलाशी अभियान जारी रहा। बताते हैं कि कुछ लोगों ने नानक एकेडमी स्कूल के पास तीन लोगों को सैन्य वर्दी में देखा। इसके बाद उन्होंने फोन कर सैन्य यूनिट से यह जानकारी ली की कि उनके जवान इलाके में घूम तो नहीं रहे हैं। इसके बाद सैन्य यूनिट से बताया गया कि रात में जवान बाहर नहीं रहते हैं। आतंकियों की आशंका पर तत्काल सेना, पुलिस, सीआरपीएफ ने पूरे पुरानी पुंछ इलाके को घेर लिया। डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई। चप्पे चप्पे को खंगालने का काम शुरू कर दिया गया। दरअसल, जिस जगह संदिग्ध देखे गए वहां से सैन्य यूनिट बिल्कुल पास है। बेतार नाला भी है जो एलओसी से लगता है। राजोरी-पुंछ को आतंकी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए तत्काल सुरक्षा बलों ने हरकत में आते हुए तलाशी शुरू कर दी कि किसी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके। पुंछ जिले के मेंढर में पूर्व डिग्री कॉलेज के करीब कृषि विभाग की भूमि से बरामद दो पुराने हथगोलों को सेना ने रविवार को कस्बे के बाहर सुरक्षित स्थान पर ले जाकर नष्ट कर दिया। इनसे हुई जोरदार आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। गौरतलब है कि मेंढर कस्बे स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज के पास कृषि विभाग की भूमि पर जब कुछ लोग काम कर रहे थे तो उन्हें वहां दो पुराने हथगोले दिखाई दिए। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। कुछ समय बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उन हथगोलों को कब्जे में लिया, और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। आज सेना के बम निरोधक दस्ते ने उन हथगोलों को कस्बे के बाहर खाली स्थान पर ले जाकर उनमें विस्फोट कर नष्ट कर दिया। कस्बा निवासियों का कहना है कि शुक्र है कि समय रहते ये हथगोले मिल गए। अगर यह किसी बच्चे को मिलते तो वह इनसे छेड़छाड़ करते, और कोई बड़ा हादसा हो सकता था। Share:
श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर में सैन्य यूनिट के पास पुराने पुंछ में रविवार आधी रात तीन संदिग्धों को देखे जाने के बाद पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान चलाया गया। सैन्य यूनिट के पास एक स्कूल के करीब संदिग्धों को देखे जाने के बाद स्कूल को भी घेरकर तलाशी ली गई। देर रात तक तलाशी अभियान जारी रहा। बताते हैं कि कुछ लोगों ने नानक एकेडमी स्कूल के पास तीन लोगों को सैन्य वर्दी में देखा। इसके बाद उन्होंने फोन कर सैन्य यूनिट से यह जानकारी ली की कि उनके जवान इलाके में घूम तो नहीं रहे हैं। इसके बाद सैन्य यूनिट से बताया गया कि रात में जवान बाहर नहीं रहते हैं। आतंकियों की आशंका पर तत्काल सेना, पुलिस, सीआरपीएफ ने पूरे पुरानी पुंछ इलाके को घेर लिया। डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई। चप्पे चप्पे को खंगालने का काम शुरू कर दिया गया। दरअसल, जिस जगह संदिग्ध देखे गए वहां से सैन्य यूनिट बिल्कुल पास है। बेतार नाला भी है जो एलओसी से लगता है। राजोरी-पुंछ को आतंकी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए तत्काल सुरक्षा बलों ने हरकत में आते हुए तलाशी शुरू कर दी कि किसी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके। पुंछ जिले के मेंढर में पूर्व डिग्री कॉलेज के करीब कृषि विभाग की भूमि से बरामद दो पुराने हथगोलों को सेना ने रविवार को कस्बे के बाहर सुरक्षित स्थान पर ले जाकर नष्ट कर दिया। इनसे हुई जोरदार आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। गौरतलब है कि मेंढर कस्बे स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज के पास कृषि विभाग की भूमि पर जब कुछ लोग काम कर रहे थे तो उन्हें वहां दो पुराने हथगोले दिखाई दिए। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। कुछ समय बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उन हथगोलों को कब्जे में लिया, और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। आज सेना के बम निरोधक दस्ते ने उन हथगोलों को कस्बे के बाहर खाली स्थान पर ले जाकर उनमें विस्फोट कर नष्ट कर दिया। कस्बा निवासियों का कहना है कि शुक्र है कि समय रहते ये हथगोले मिल गए। अगर यह किसी बच्चे को मिलते तो वह इनसे छेड़छाड़ करते, और कोई बड़ा हादसा हो सकता था। Share:
बॉलीवुड डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म भीड़ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। ये फिल्म देश में लॉकडाउन के दौरान हुए हालातों को पर्दे पर पेश करने वाली है। Bheed Trailer Release Video: राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर स्टारर, डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म भीड़ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज से शुरू हुआ यह ट्रेलर इतना जबरदस्त है कि इसे देखने के बाद किसी का भी दिल सिहर उठेगा। इसमें दिखाए गए सीन सभी को उस गुजरे हुए वक्त में ले जाएंगे जहां सभी ने लॉकडाउन के दर्द को झेला है। यह ट्रेलर 2 मिनट 39 सेकंड का है जिसे फिलहाल सिनेमाघरों में चल रही रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर की मूवी तू झूठी मैं मक्कार के दौरान भी दिखाया जा रहा है। रॉमकॉम फिल्म के बीच में दर्शकों के सामने पेश किया जा रहा है यह ट्रेलर निश्चित तौर पर उथल पुथल मचा देने वाला है। फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज से हो रही है। जिसमें वह कहते हैं कि आज रात 12 बजे से संपूर्ण देश में लॉकडाउन लगने वाला है। इसके बाद यह ट्रेलर दर्शकों को उस दौर में ले जाएगा जहां लाखों लोगों ने अपनों को खो दिया और कुछ गिरते संभलते इस वक्त से बाहर आए। फिल्म में दिखाया जाने वाला एक-एक सीन किसी लेखक की कहानी का हिस्सा नहीं है बल्कि वह मंजर है जिसे इस देश के हर व्यक्ति ने देखा है। किस तरह से सब कुछ बंद हो जाने के बाद अलग-अलग शहरों और गांवों में फंसे लोग अपने परिवार के पास जाने के लिए तरस रहे थे। बीमारी की चपेट में आए लाखों लोगों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। यह ऐसे मंजर है जो किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अपनी इस फिल्म के जरिए अनुभव सिन्हा समाज के उस उपेक्षित वर्ग की स्थिति को दर्शकों के सामने पेश करना चाहते हैं जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। अलग-अलग तरह के मुद्दों से जूझ रहे हमारे देश में यह वर्ग अदृश्य था। भीड़ की कहानी उन्हीं को प्रकाश में लाने की एक कोशिश है जिसे लोग भूल चुके हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म को ब्लैक एंड व्हाइट में शूट किया गया है जो दर्शकों को इससे अच्छी तरह जोड़ेगा। ट्रेलर में भूमि पेडनेकर का एक डायलॉग है जिसमें वह कह रही हैं कि 3-4 दिन से सलवार में अखबार घुसाए हुई थी बच्ची। इसके अलावा कई ऐसे सीन है जिन्हें देखकर कोई भी हैरान हो सकता है। राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर दोनों ही इस फिल्म का हिस्सा बनने और अनुभव सिन्हा के साथ काम करने की बात पर बहुत खुश है। दोनों का यही कहना है कि जिंदगी के इस कहानी को पर्दे पर पेश करना एक बेहतरीन अनुभव था और दर्शकों का इस पर रिएक्शन देखने के लिए यह दोनों कलाकार बेताब हैं। राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर के साथ इस फिल्म में दीया मिर्जा, पंकज कपूर, आशुतोष राणा, वीरेंद्र सक्सेना, आदित्य श्रीवास्तव, कृतिका कामरा, करण पंडित जैसे सितारे नजर आने वाले हैं। फिल्म 24 मार्च 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
बॉलीवुड डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म भीड़ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। ये फिल्म देश में लॉकडाउन के दौरान हुए हालातों को पर्दे पर पेश करने वाली है। Bheed Trailer Release Video: राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर स्टारर, डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म भीड़ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज से शुरू हुआ यह ट्रेलर इतना जबरदस्त है कि इसे देखने के बाद किसी का भी दिल सिहर उठेगा। इसमें दिखाए गए सीन सभी को उस गुजरे हुए वक्त में ले जाएंगे जहां सभी ने लॉकडाउन के दर्द को झेला है। यह ट्रेलर दो मिनट उनतालीस सेकंड का है जिसे फिलहाल सिनेमाघरों में चल रही रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर की मूवी तू झूठी मैं मक्कार के दौरान भी दिखाया जा रहा है। रॉमकॉम फिल्म के बीच में दर्शकों के सामने पेश किया जा रहा है यह ट्रेलर निश्चित तौर पर उथल पुथल मचा देने वाला है। फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज से हो रही है। जिसमें वह कहते हैं कि आज रात बारह बजे से संपूर्ण देश में लॉकडाउन लगने वाला है। इसके बाद यह ट्रेलर दर्शकों को उस दौर में ले जाएगा जहां लाखों लोगों ने अपनों को खो दिया और कुछ गिरते संभलते इस वक्त से बाहर आए। फिल्म में दिखाया जाने वाला एक-एक सीन किसी लेखक की कहानी का हिस्सा नहीं है बल्कि वह मंजर है जिसे इस देश के हर व्यक्ति ने देखा है। किस तरह से सब कुछ बंद हो जाने के बाद अलग-अलग शहरों और गांवों में फंसे लोग अपने परिवार के पास जाने के लिए तरस रहे थे। बीमारी की चपेट में आए लाखों लोगों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। यह ऐसे मंजर है जो किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अपनी इस फिल्म के जरिए अनुभव सिन्हा समाज के उस उपेक्षित वर्ग की स्थिति को दर्शकों के सामने पेश करना चाहते हैं जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। अलग-अलग तरह के मुद्दों से जूझ रहे हमारे देश में यह वर्ग अदृश्य था। भीड़ की कहानी उन्हीं को प्रकाश में लाने की एक कोशिश है जिसे लोग भूल चुके हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म को ब्लैक एंड व्हाइट में शूट किया गया है जो दर्शकों को इससे अच्छी तरह जोड़ेगा। ट्रेलर में भूमि पेडनेकर का एक डायलॉग है जिसमें वह कह रही हैं कि तीन-चार दिन से सलवार में अखबार घुसाए हुई थी बच्ची। इसके अलावा कई ऐसे सीन है जिन्हें देखकर कोई भी हैरान हो सकता है। राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर दोनों ही इस फिल्म का हिस्सा बनने और अनुभव सिन्हा के साथ काम करने की बात पर बहुत खुश है। दोनों का यही कहना है कि जिंदगी के इस कहानी को पर्दे पर पेश करना एक बेहतरीन अनुभव था और दर्शकों का इस पर रिएक्शन देखने के लिए यह दोनों कलाकार बेताब हैं। राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर के साथ इस फिल्म में दीया मिर्जा, पंकज कपूर, आशुतोष राणा, वीरेंद्र सक्सेना, आदित्य श्रीवास्तव, कृतिका कामरा, करण पंडित जैसे सितारे नजर आने वाले हैं। फिल्म चौबीस मार्च दो हज़ार तेईस को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा या क़ौमी असेम्ब्ली (قومی اسمبلی; National Assembly, नैशनल असेम्ब्ली) पाकिस्तान की द्वीसदनीय संसद(मजलिस-ए शूरा), जिसका उच्चसदन सेनेट है, का निम्नसदन है। उर्दू भाषा मैं इसे कौमी इस्म्ब्ली कहा जाता हैं। इसमें कुल 342 आसन हैं, जिन में से 242 चुनाव के जरये चुने जाते हैं और बाक़ी के 70 महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। क़ौमी इस्म्ब्ली पाकिस्तान की संधीय विधायिका की वह इकाई है, जिसे जनता द्वारा चुना जाता है(यह पाकिस्तान में लोकसभा की जोड़ीदार है)। . 27 संबंधोंः नवाज़ शरीफ़, नेशनल पार्टी (पाकिस्तान), पाकिस्तान, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (शहीद भुट्टो), पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ), पाकिस्तान मुस्लिम लीग (जे), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क़ाफ़, पाकिस्तान में चुनाव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान की सेनेट, पख़्तूनख़्वा मिल्ली अवामी पार्टी, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी, मजलिस-ए-शूरा, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट, मुर्तज़ा जावेद अब्बासी, लोक सभा, सरदार अयाज़ सादिक़, सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल, जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान, जमीयतुल उलेमा-ए-इस्लाम (ऍफ़), ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग, इस्लामाबाद, अवामी नेशनल पार्टी, अवामी जम्हूरी इत्तेहाद पाकिस्तान, उर्दू भाषा। मियां मोहम्मद नवाज़ शरीफ़ (उर्दूः میاں محمد نواز شریف) (जन्म लाहौर; 25 दिसम्बर 1949), पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) के वरिष्ठ नेता है। वे दो बार पहले भी प्रधानमन्त्री रह चुके हैं - 1 नवम्बर 1990 से 18 जुलाई 1993 तक (12 वें प्रधानमंत्री) और 17 फ़रवरी 1997 से 12 अक्टूबर 1999 (14 वें प्रधानमंत्री)। शरीफ पाकिस्तान के पहले ऐसे नेता हैं, जो 5 जून 2013 काे तीसरी बार 27 वें प्रधानमंत्री बने हैं। 2016 मे पानमा पेपर लीक में नाम आने के बाद 2017 में सुप्रीम काेर्ट ने प्रधानमंत्री के पद के लिए अयोग करार दिया 28 जुलाई 2017 में नवाज़ शरीफ काे प्रधानमंत्री के पद से हटाना पड़ा, नवाज़ शरीफ को वर्ष 2000 में तत्कालीन सैन्य शासक मुशर्रफ़ ने निर्वासित कर दिया था, इसके पहले उनकी निर्वाचित सरकार को भी बर्खास्त कर दिया गया था। इस तख्तापलट के बाद पाकिस्तान की आतंक-विरोधी अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी करार दिया था। सऊदी अरब की मध्यस्तता से शरीफ़ को जेल से बचाकर सऊदी अरब के जेद्दा नगर में निर्वासित किया गया। अगस्त 23, 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ़ को पाकिस्तान वापस आने की इजाज़त दी। सितम्बर 10, 2007 को शरीफ सात वर्षों के निर्वासन के बाद इस्लामाबाद वापस लौटे, पर उन्हें हवाई-अड्डे से ही तुरन्त जेद्दा वापस भेज दिया गया। . नेशनल पार्टी (पाकिस्तान) पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। श्रेणीःपाकिस्तान के राजनैतिक दल. इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (शहीद भुट्टो) पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ) पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग (जे) पाकिस्तान मुस्लिम लीग(जे), एक पाकिस्तानी राजनीतिक दाल थी, जिसे १९९३ में स्थापित किया गया था। २००४ में यह पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) में, सम्मिलित हो गयी। यह पाकिस्तान मुस्लिम लीग के मूल गोठों में से एक थी। इससे, एकमात्र मुस्लिम लीग के तौर पर १९९८ में बनाया गया था, जब, मुहम्मद खान जुनेजो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। सितम्बर १९८८ में, इस पार्टी ने ग़ुलाम मुस्तफ़ा जतोई की नेशनल पीपल्स पार्टी और क़ाज़ी हुसैन अहमद की जमात-ए-इस्लामी के साथ मिल कर, इस्लामी जम्हूरी इत्तेहाद नामक एक रूढ़िवादी गठबंधन दाल बनाया था, इसे मूलतः, बेनज़ीर भुट्टो के पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के विरोध में बनायगया था। उस समय, नवाज़ शरीफ पीपीपी के बहार एक सबसे लोकप्रिय नेता बन कर उबरे थे, और अंत्यतः, १९९० में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। जब जुनेजो ने ज़िया-उल-हक़ को बर्खास्त कर दिया, तो, नवाज़ शरीफ ने पीएमएल(जे) से बहार निकल कर एक और दाल तैयार कर लिया, जिसका नाम रखा पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़), जोकि असल पाकिस्तान मुस्लिम लीग से भी अधिक रसूक्दार बाद कर उबरी। जुनिओ की मृत्यु के पश्चात, इस पार्टी को हामिद नासिर चट्ठा और इक़बाल अहमद खान जैसे अनुयायिओं ने इस पार्टी को पुनःस्थापित किया। पीएमएल(जुनेजो) में एक बंटवारे की स्थिति पैदा हो गयउ जब, मंज़ूर वट्टू ने अपने चचेरे भाई, हामिद चट्ठा से अलग हो कर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (जिन्नाह) बना लिया। यह टकराव, पार्टी की अध्यक्षता को ले कर उत्पन्न हुई थी। ऐसा उस वर्ष ही हुआ था, जब, केंद्र और प्रान्त के बीच मतभेद के कारण वट्टू को पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया था। २००२ में इस पार्टी ने क़ौमी असेम्बली में दो २ आसान ग्रहण कर पाने में कामयाब हुई। २००४ में, यह पीएमएल(क्यू) के साथ मिट कर, संयुक्त पाकिस्तान मुस्लिम लीग का गठन किया। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। नवाज़ और क़ैद-ए-आजम इसकी दो विभक्तियाँ हैं। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग क्यू या पाकिस्तान मुस्लिम लीग कायदे आजम, पाकिस्तान की एक प्रबुद्ध और उदारवादी पार्टी है। कि इस मुस्लिम लीग का एक धड़ा है जो पाकिस्तान की स्थापना संभव बनाया। (देखेंः स्थापना पाकिस्तान, मुस्लिम लीग)। इस दल आम तौर पर एक प्रबुद्ध माना जाता है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) या क्यू लीग की स्थापना 2001 में उस समय हुई जब समय मुस्लिम लीग कई गुटों में बंट चुकी थी, जिनमें से क्यू लीग के लिए सबसे कम जन समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ और मुस्लिम लीग (क्यू) को एक दूसरे की जबरदस्त समर्थन हासिल है। अब मूल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कई सदस्यों क्यू लीग का हिस्सा बन चुके हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ का समर्थन करते हैं। चौधरी शुजात हुसैन (बाएं) और मुशाहिद हुसैन (दाएं) भारत यात्रा के अवसर पर राष्ट्रपति मुशर्रफ ने 2006 में अपनी आत्मकथा 'इन द लाइन ऑफ फायर, ए मीमवायर' में खुलासा किया कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) का गठन उनके इशारे पर हुई थी। वह लिखते हैं कि नवाज शरीफ के निर्वासन के बाद उन्होंने सोचा कि इस देश में एक ऐसी पार्टी होनी चाहिए जो इन दो दलों (पीपुल्स पार्टी और पीएमएल एन) का मुकाबला कर सके और इस अवसर पर उनके प्रमुख सचिव तारिक़ अज़ीज़ ने चौधरी शुजात हुसैन के जनरल मुशर्रफ से मुलाकात की व्यवस्था की जिसके बाद यह पार्टी अस्तित्व में आई। . राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में शूरा के लिए नहीं चुना है। पाकिस्तान की संसद आम चुनाव द्वारा स्थापित किये गये निचले सदन जबकि प्रांतीय सदनों के सदस्यों द्वारा सदन के लिए नहीं चुना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री निचले सदन में चुना जाता है जबकि राष्ट्रपति का चयन निर्वाचन कॉलेज द्वारा किया जाता है। प्रांतीय और राष्ट्रीय सदनों के अलावा पाकिस्तान में पांच हजार से अधिक चयनित नगर निगम सरकारें भी काम कर रही हैं। पाकिस्तान में कई राजनीतिक दल हैं। आमतौर पर कोई भी एक पार्टी बहुमत हासिल नहीं करती और आम चुनाव के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन का गठन जरूरी है। . पाकिस्तान के प्रधान मंत्री (وزیر اعظم پاکستان - ) इस्लामी गणतंत्र पाकिस्तान की सरकार का मुखिया होता है। राष्ट्रीय विधानसभा के सदस्यों द्वारा प्रधानमंत्री का चयन किया जाता है। प्रधानमंत्री का ये पद पाँच वर्षके लिए होता है। प्रधानमंत्री अपनी सहायता के लिए मंत्रियों का चयन करता है। . सेनेट, (سینیٹ) या आइवान-ए बाला पाकिस्तान (ایوانِ بالا پاکستان) पाकिस्तान की द्वीसदनीय विधियिका का उच्चसदन है। इसके चुनाव त्रिवर्षीय अवधी पश्चात, आधे संख्या के सीटों के लिए आयोजित किए जाते है। यहाँ सदस्यों क कार्यकाल 6 वर्ष होता है। सीनेट के अध्यक्ष देश के राष्ट्रपति का अभिनय होते हैं। इसे 1973 में स्थापित किया गया था पाकिस्तान के संविधान में से नेट से संबंधित सारे प्रावधान अनुच्छेद 59 मैं दिए गए हैं। पाकिस्तान के संसद भवन में सेनेट का कक्ष पूर्वी भाग में है। सीनेट को ऐसे कई विशेष अधिकार दिये गए हैं, जो नैशनल असेम्ब्ली के पास नहीं है। इस संसदीय बिल बनाने के रूप में एक कानून के लिए मजबूर किया जा रहा की शक्तियों को भी शामिल है। सीनेट में हर तीन साल पर सीनेट की आधे सीटों के लिए चुनाव आयोजित की जाती हैं और प्रत्येक सीनेटर छह वर्ष की अवधि के लिये चुना जाता है। संविधान में सेनेट भंग करने का कोई भी प्रावधान नहीं दिया गया है, बल्की, इसमें इसे भंग करने पर मनाही है। . पख़्तूनख़्वा मिली अवामी पार्टी पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल है। मुहम्मद ख़ान अचकज़ई इस दल के मुखिया हैं। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। श्रेणीःपाकिस्तान के राजनैतिक दल. मजलिस-ए-शूरा (उर्दू) यानी पाकिस्तान की संसद पाकिस्तान में संघीय स्तर पर सर्वोच्च विधायी संस्था है। इस संस्थान में दो सदन हैं, निचले सदन या कौमी एसेंबली और ऊपरी सदन या सीनेट। पाकिस्तान का संविधान की धारा 50 के मुताबिक़ राष्ट्रपति भी मजलिस-ए-शूरा का हिस्सा हैं। इसकी दोनों सदनों में से निम्नसदन नैशनल असेम्बली एक अस्थाई इकाई है, और प्रती पाँचवे वर्ष, आम निर्वाचन द्वारा यह परिवर्तित होती रहती है, वहीं उच्चसदन सेनेट एक स्थाई इकाई है, जो कभी भंग नहीं होती है, परंतु भाग-दर-भाग इसके सदस्यों को बदल दिया जाता है। संसद की दोनों सदनों हेतु सभागृह इस्लामाबाद को पार्लिआमेंट हाउस में है। 1960 में संसद के आसन को कराँची से इस्लामाबाद लाया गया था। . मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट का ध्वज मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एम क्यू एम; उर्दूः متحدہ قومی موومنٹ) पाकिस्तान का एक सेक्युलर राजनीतिक दल है। यह मुखयतः उर्दूभाषी मुजाहिरों (भारत से आये शरणार्थियों) का दल है। वर्तमान समय में यह दल सिन्ध प्रान्त का दूसरा सबसे बड़ा दल है जिसके पास १३० में से ५४ सीटें हैं। यह पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली में चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। . मुर्तज़ा जावेद अब्बासी एक पाकिस्तानी राजनेता और पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के पूर्व सदस्य थे। उन्हें 24 अगस्त 2015 - 9 नवंबर 2015, के बीच पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया था। पाकिस्तान की क़ौमी असेंबली के अध्यक्ष का पद, पाकिस्तान की संविधान द्वारा स्थापित एक संवैधानिक पद है, जोकी पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के सभापति एवं अधिष्ठाता होते हैं। . लोक सभा, भारतीय संसद का निचला सदन है। भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज्य सभा है। लोक सभा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से गठित होती है। भारतीय संविधान के अनुसार सदन में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 तक हो सकती है, जिसमें से 530 सदस्य विभिन्न राज्यों का और 20 सदस्य तक केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की स्थिति में भारत का राष्ट्रपति यदि चाहे तो आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो प्रतिनिधियों को लोकसभा के लिए मनोनीत कर सकता है। लोकसभा की कार्यावधि 5 वर्ष है परंतु इसे समय से पूर्व भंग किया जा सकता है . सरदार अयाज़ सादिक पाकिस्तान के क़ौमी असेम्बली के वर्तमान सभापति हैं। वह पहली बार ३ जून २०१३ को फहमीदा मिर्जा के बाद क़ौमी असेम्बली के उन्नीसवीं सभापति बने, उनका पहला कार्यकाल 22 अगस्त 2015 को समाप्त हुआ। वह दूसरी बार, 9 नवंबर 2015 को पुनः इस पद पर काबिज़ हुए। लाहौर से नेशनल असेंबली के असेम्बली क्षेत्र १२२ से पंजाब (पाकिस्तान) के राष्ट्रीय विधानसभा अध्यक्ष अयाज सादिक २०१३ में ९३ हजार ३ से ८९ वोट लेकर सदस्य नेशनल असेंबली चुने गए थे। इस चुनाव को इमरान खान ने चुनाव न्यायाधिकरण में चयालनज किया था। चुनाव ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश काज़िम अली मलिक ने कथित धांधली के मामले में दायर याचिका पर क्षेत्र के चुनाव को निरस्त करते हुए दोबारा मतदान कराने का अगस्त २०१५ में आदेश दिया था। सरदार अयाज सादिक तीसरी बार इस क्षेत्र में २०१३ में चुने गए थे। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . जमात ए इस्लामी पाकिस्तान की सबसे बड़ी और पुरानी सैद्धांतिक इस्लामी पुनरुद्धार आंदोलन है जिसका शुरुआत बीसवीं सदी के इस्लामी विचारक सैयद अहमद, जो समकालीन इस्लाम पुनर्जीवित संघर्ष के नायक माने जाते हैं ने पाकिस्तान की स्थापना से पहले 3 शाबान 1360 हिजरी (26 अगस्त 1941 ई।) को लाहौर में किया था। जमाते इस्लामी पाकिस्तान आधी सदी से अधिक समय से दुनिया भर में इस्लामी पुनरुद्धार के लिए शांतिपूर्ण रूप से प्रयासरत कुछ इस्लामी आंदोलनों में शुमार की जाती है। . जमीयतुल उलेमा-ए-इस्लाम (ऍफ़) पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . इस्लामाबाद की फैज़ल मस्जिद इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी है। भारत विभाजन के पश्चात पाकिस्तान को एक राजधानी नगर की आवश्यकता थी। ना तो लाहौर और न ही कराची जैसे नगर इस हेतु सही पाए गए अंतः एक नए नगर की स्थापना का निर्णय लिया गया जो पूरी तरह से नियोजित हो। इस कार्य हेतु फ़्रांसीसी नगर नियोजक तथा वास्तुकार ली कार्बूजियर की सेवा ली गई। इन्हीं महोदय ने भारत में चंडीगढ़ की स्थापना की योजना बनाई थी। इस कारण ये दोनों नगर देखने में एक जैसे लगते हैं। २००९ के अनुमान अनुसार इस नगर की जनसंख्या ६,७३,७६६ है। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . उर्दू भाषा हिन्द आर्य भाषा है। उर्दू भाषा हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप मानी जाती है। उर्दू में संस्कृत के तत्सम शब्द न्यून हैं और अरबी-फ़ारसी और संस्कृत से तद्भव शब्द अधिक हैं। ये मुख्यतः दक्षिण एशिया में बोली जाती है। यह भारत की शासकीय भाषाओं में से एक है, तथा पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। इस के अतिरिक्त भारत के राज्य तेलंगाना, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त शासकीय भाषा है। . यहां पुनर्निर्देश करता हैः नैशनल असेम्ब्ली (पाकिस्तान), पाकिस्तान के राष्ट्रीय विधानसभा, पाकिस्तान की नैशनल असेम्बली, पाकिस्तान की नेशनल असैंबली, पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली, पाकिस्तान की क़ौमी असेम्ब्ली, पाकिस्तान की क़ौमी असेंबली, क़ौमी असेम्बली (पाकिस्तान)।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा या क़ौमी असेम्ब्ली पाकिस्तान की द्वीसदनीय संसद, जिसका उच्चसदन सेनेट है, का निम्नसदन है। उर्दू भाषा मैं इसे कौमी इस्म्ब्ली कहा जाता हैं। इसमें कुल तीन सौ बयालीस आसन हैं, जिन में से दो सौ बयालीस चुनाव के जरये चुने जाते हैं और बाक़ी के सत्तर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। क़ौमी इस्म्ब्ली पाकिस्तान की संधीय विधायिका की वह इकाई है, जिसे जनता द्वारा चुना जाता है। . सत्ताईस संबंधोंः नवाज़ शरीफ़, नेशनल पार्टी , पाकिस्तान, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी , पाकिस्तान मुस्लिम लीग , पाकिस्तान मुस्लिम लीग , पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क़ाफ़, पाकिस्तान में चुनाव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान की सेनेट, पख़्तूनख़्वा मिल्ली अवामी पार्टी, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी, मजलिस-ए-शूरा, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट, मुर्तज़ा जावेद अब्बासी, लोक सभा, सरदार अयाज़ सादिक़, सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल, जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान, जमीयतुल उलेमा-ए-इस्लाम , ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग, इस्लामाबाद, अवामी नेशनल पार्टी, अवामी जम्हूरी इत्तेहाद पाकिस्तान, उर्दू भाषा। मियां मोहम्मद नवाज़ शरीफ़ , पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता है। वे दो बार पहले भी प्रधानमन्त्री रह चुके हैं - एक नवम्बर एक हज़ार नौ सौ नब्बे से अट्ठारह जुलाई एक हज़ार नौ सौ तिरानवे तक और सत्रह फ़रवरी एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे से बारह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे । शरीफ पाकिस्तान के पहले ऐसे नेता हैं, जो पाँच जून दो हज़ार तेरह काे तीसरी बार सत्ताईस वें प्रधानमंत्री बने हैं। दो हज़ार सोलह मे पानमा पेपर लीक में नाम आने के बाद दो हज़ार सत्रह में सुप्रीम काेर्ट ने प्रधानमंत्री के पद के लिए अयोग करार दिया अट्ठाईस जुलाई दो हज़ार सत्रह में नवाज़ शरीफ काे प्रधानमंत्री के पद से हटाना पड़ा, नवाज़ शरीफ को वर्ष दो हज़ार में तत्कालीन सैन्य शासक मुशर्रफ़ ने निर्वासित कर दिया था, इसके पहले उनकी निर्वाचित सरकार को भी बर्खास्त कर दिया गया था। इस तख्तापलट के बाद पाकिस्तान की आतंक-विरोधी अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी करार दिया था। सऊदी अरब की मध्यस्तता से शरीफ़ को जेल से बचाकर सऊदी अरब के जेद्दा नगर में निर्वासित किया गया। अगस्त तेईस, दो हज़ार सात में सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ़ को पाकिस्तान वापस आने की इजाज़त दी। सितम्बर दस, दो हज़ार सात को शरीफ सात वर्षों के निर्वासन के बाद इस्लामाबाद वापस लौटे, पर उन्हें हवाई-अड्डे से ही तुरन्त जेद्दा वापस भेज दिया गया। . नेशनल पार्टी पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। श्रेणीःपाकिस्तान के राजनैतिक दल. इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। बीस करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् एक हज़ार नौ सौ तीस में कवि मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् एक हज़ार नौ सौ तैंतीस में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान शब्द का सृजन किया। सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग पाकिस्तान मुस्लिम लीग, एक पाकिस्तानी राजनीतिक दाल थी, जिसे एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में स्थापित किया गया था। दो हज़ार चार में यह पाकिस्तान मुस्लिम लीग में, सम्मिलित हो गयी। यह पाकिस्तान मुस्लिम लीग के मूल गोठों में से एक थी। इससे, एकमात्र मुस्लिम लीग के तौर पर एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में बनाया गया था, जब, मुहम्मद खान जुनेजो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। सितम्बर एक हज़ार नौ सौ अठासी में, इस पार्टी ने ग़ुलाम मुस्तफ़ा जतोई की नेशनल पीपल्स पार्टी और क़ाज़ी हुसैन अहमद की जमात-ए-इस्लामी के साथ मिल कर, इस्लामी जम्हूरी इत्तेहाद नामक एक रूढ़िवादी गठबंधन दाल बनाया था, इसे मूलतः, बेनज़ीर भुट्टो के पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के विरोध में बनायगया था। उस समय, नवाज़ शरीफ पीपीपी के बहार एक सबसे लोकप्रिय नेता बन कर उबरे थे, और अंत्यतः, एक हज़ार नौ सौ नब्बे में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। जब जुनेजो ने ज़िया-उल-हक़ को बर्खास्त कर दिया, तो, नवाज़ शरीफ ने पीएमएल से बहार निकल कर एक और दाल तैयार कर लिया, जिसका नाम रखा पाकिस्तान मुस्लिम लीग , जोकि असल पाकिस्तान मुस्लिम लीग से भी अधिक रसूक्दार बाद कर उबरी। जुनिओ की मृत्यु के पश्चात, इस पार्टी को हामिद नासिर चट्ठा और इक़बाल अहमद खान जैसे अनुयायिओं ने इस पार्टी को पुनःस्थापित किया। पीएमएल में एक बंटवारे की स्थिति पैदा हो गयउ जब, मंज़ूर वट्टू ने अपने चचेरे भाई, हामिद चट्ठा से अलग हो कर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग बना लिया। यह टकराव, पार्टी की अध्यक्षता को ले कर उत्पन्न हुई थी। ऐसा उस वर्ष ही हुआ था, जब, केंद्र और प्रान्त के बीच मतभेद के कारण वट्टू को पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया था। दो हज़ार दो में इस पार्टी ने क़ौमी असेम्बली में दो दो आसान ग्रहण कर पाने में कामयाब हुई। दो हज़ार चार में, यह पीएमएल के साथ मिट कर, संयुक्त पाकिस्तान मुस्लिम लीग का गठन किया। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। नवाज़ और क़ैद-ए-आजम इसकी दो विभक्तियाँ हैं। . पाकिस्तान मुस्लिम लीग क्यू या पाकिस्तान मुस्लिम लीग कायदे आजम, पाकिस्तान की एक प्रबुद्ध और उदारवादी पार्टी है। कि इस मुस्लिम लीग का एक धड़ा है जो पाकिस्तान की स्थापना संभव बनाया। । इस दल आम तौर पर एक प्रबुद्ध माना जाता है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग या क्यू लीग की स्थापना दो हज़ार एक में उस समय हुई जब समय मुस्लिम लीग कई गुटों में बंट चुकी थी, जिनमें से क्यू लीग के लिए सबसे कम जन समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ और मुस्लिम लीग को एक दूसरे की जबरदस्त समर्थन हासिल है। अब मूल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कई सदस्यों क्यू लीग का हिस्सा बन चुके हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ का समर्थन करते हैं। चौधरी शुजात हुसैन और मुशाहिद हुसैन भारत यात्रा के अवसर पर राष्ट्रपति मुशर्रफ ने दो हज़ार छः में अपनी आत्मकथा 'इन द लाइन ऑफ फायर, ए मीमवायर' में खुलासा किया कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग का गठन उनके इशारे पर हुई थी। वह लिखते हैं कि नवाज शरीफ के निर्वासन के बाद उन्होंने सोचा कि इस देश में एक ऐसी पार्टी होनी चाहिए जो इन दो दलों का मुकाबला कर सके और इस अवसर पर उनके प्रमुख सचिव तारिक़ अज़ीज़ ने चौधरी शुजात हुसैन के जनरल मुशर्रफ से मुलाकात की व्यवस्था की जिसके बाद यह पार्टी अस्तित्व में आई। . राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में शूरा के लिए नहीं चुना है। पाकिस्तान की संसद आम चुनाव द्वारा स्थापित किये गये निचले सदन जबकि प्रांतीय सदनों के सदस्यों द्वारा सदन के लिए नहीं चुना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री निचले सदन में चुना जाता है जबकि राष्ट्रपति का चयन निर्वाचन कॉलेज द्वारा किया जाता है। प्रांतीय और राष्ट्रीय सदनों के अलावा पाकिस्तान में पांच हजार से अधिक चयनित नगर निगम सरकारें भी काम कर रही हैं। पाकिस्तान में कई राजनीतिक दल हैं। आमतौर पर कोई भी एक पार्टी बहुमत हासिल नहीं करती और आम चुनाव के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन का गठन जरूरी है। . पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इस्लामी गणतंत्र पाकिस्तान की सरकार का मुखिया होता है। राष्ट्रीय विधानसभा के सदस्यों द्वारा प्रधानमंत्री का चयन किया जाता है। प्रधानमंत्री का ये पद पाँच वर्षके लिए होता है। प्रधानमंत्री अपनी सहायता के लिए मंत्रियों का चयन करता है। . सेनेट, या आइवान-ए बाला पाकिस्तान पाकिस्तान की द्वीसदनीय विधियिका का उच्चसदन है। इसके चुनाव त्रिवर्षीय अवधी पश्चात, आधे संख्या के सीटों के लिए आयोजित किए जाते है। यहाँ सदस्यों क कार्यकाल छः वर्ष होता है। सीनेट के अध्यक्ष देश के राष्ट्रपति का अभिनय होते हैं। इसे एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में स्थापित किया गया था पाकिस्तान के संविधान में से नेट से संबंधित सारे प्रावधान अनुच्छेद उनसठ मैं दिए गए हैं। पाकिस्तान के संसद भवन में सेनेट का कक्ष पूर्वी भाग में है। सीनेट को ऐसे कई विशेष अधिकार दिये गए हैं, जो नैशनल असेम्ब्ली के पास नहीं है। इस संसदीय बिल बनाने के रूप में एक कानून के लिए मजबूर किया जा रहा की शक्तियों को भी शामिल है। सीनेट में हर तीन साल पर सीनेट की आधे सीटों के लिए चुनाव आयोजित की जाती हैं और प्रत्येक सीनेटर छह वर्ष की अवधि के लिये चुना जाता है। संविधान में सेनेट भंग करने का कोई भी प्रावधान नहीं दिया गया है, बल्की, इसमें इसे भंग करने पर मनाही है। . पख़्तूनख़्वा मिली अवामी पार्टी पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल है। मुहम्मद ख़ान अचकज़ई इस दल के मुखिया हैं। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी। श्रेणीःपाकिस्तान के राजनैतिक दल. मजलिस-ए-शूरा यानी पाकिस्तान की संसद पाकिस्तान में संघीय स्तर पर सर्वोच्च विधायी संस्था है। इस संस्थान में दो सदन हैं, निचले सदन या कौमी एसेंबली और ऊपरी सदन या सीनेट। पाकिस्तान का संविधान की धारा पचास के मुताबिक़ राष्ट्रपति भी मजलिस-ए-शूरा का हिस्सा हैं। इसकी दोनों सदनों में से निम्नसदन नैशनल असेम्बली एक अस्थाई इकाई है, और प्रती पाँचवे वर्ष, आम निर्वाचन द्वारा यह परिवर्तित होती रहती है, वहीं उच्चसदन सेनेट एक स्थाई इकाई है, जो कभी भंग नहीं होती है, परंतु भाग-दर-भाग इसके सदस्यों को बदल दिया जाता है। संसद की दोनों सदनों हेतु सभागृह इस्लामाबाद को पार्लिआमेंट हाउस में है। एक हज़ार नौ सौ साठ में संसद के आसन को कराँची से इस्लामाबाद लाया गया था। . मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट का ध्वज मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट पाकिस्तान का एक सेक्युलर राजनीतिक दल है। यह मुखयतः उर्दूभाषी मुजाहिरों का दल है। वर्तमान समय में यह दल सिन्ध प्रान्त का दूसरा सबसे बड़ा दल है जिसके पास एक सौ तीस में से चौवन सीटें हैं। यह पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली में चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। . मुर्तज़ा जावेद अब्बासी एक पाकिस्तानी राजनेता और पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के पूर्व सदस्य थे। उन्हें चौबीस अगस्त दो हज़ार पंद्रह - नौ नवंबर दो हज़ार पंद्रह, के बीच पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया था। पाकिस्तान की क़ौमी असेंबली के अध्यक्ष का पद, पाकिस्तान की संविधान द्वारा स्थापित एक संवैधानिक पद है, जोकी पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली के सभापति एवं अधिष्ठाता होते हैं। . लोक सभा, भारतीय संसद का निचला सदन है। भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज्य सभा है। लोक सभा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से गठित होती है। भारतीय संविधान के अनुसार सदन में सदस्यों की अधिकतम संख्या पाँच सौ बावन तक हो सकती है, जिसमें से पाँच सौ तीस सदस्य विभिन्न राज्यों का और बीस सदस्य तक केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की स्थिति में भारत का राष्ट्रपति यदि चाहे तो आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो प्रतिनिधियों को लोकसभा के लिए मनोनीत कर सकता है। लोकसभा की कार्यावधि पाँच वर्ष है परंतु इसे समय से पूर्व भंग किया जा सकता है . सरदार अयाज़ सादिक पाकिस्तान के क़ौमी असेम्बली के वर्तमान सभापति हैं। वह पहली बार तीन जून दो हज़ार तेरह को फहमीदा मिर्जा के बाद क़ौमी असेम्बली के उन्नीसवीं सभापति बने, उनका पहला कार्यकाल बाईस अगस्त दो हज़ार पंद्रह को समाप्त हुआ। वह दूसरी बार, नौ नवंबर दो हज़ार पंद्रह को पुनः इस पद पर काबिज़ हुए। लाहौर से नेशनल असेंबली के असेम्बली क्षेत्र एक सौ बाईस से पंजाब के राष्ट्रीय विधानसभा अध्यक्ष अयाज सादिक दो हज़ार तेरह में तिरानवे हजार तीन से नवासी वोट लेकर सदस्य नेशनल असेंबली चुने गए थे। इस चुनाव को इमरान खान ने चुनाव न्यायाधिकरण में चयालनज किया था। चुनाव ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश काज़िम अली मलिक ने कथित धांधली के मामले में दायर याचिका पर क्षेत्र के चुनाव को निरस्त करते हुए दोबारा मतदान कराने का अगस्त दो हज़ार पंद्रह में आदेश दिया था। सरदार अयाज सादिक तीसरी बार इस क्षेत्र में दो हज़ार तेरह में चुने गए थे। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . जमात ए इस्लामी पाकिस्तान की सबसे बड़ी और पुरानी सैद्धांतिक इस्लामी पुनरुद्धार आंदोलन है जिसका शुरुआत बीसवीं सदी के इस्लामी विचारक सैयद अहमद, जो समकालीन इस्लाम पुनर्जीवित संघर्ष के नायक माने जाते हैं ने पाकिस्तान की स्थापना से पहले तीन शाबान एक हज़ार तीन सौ साठ हिजरी को लाहौर में किया था। जमाते इस्लामी पाकिस्तान आधी सदी से अधिक समय से दुनिया भर में इस्लामी पुनरुद्धार के लिए शांतिपूर्ण रूप से प्रयासरत कुछ इस्लामी आंदोलनों में शुमार की जाती है। . जमीयतुल उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . इस्लामाबाद की फैज़ल मस्जिद इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी है। भारत विभाजन के पश्चात पाकिस्तान को एक राजधानी नगर की आवश्यकता थी। ना तो लाहौर और न ही कराची जैसे नगर इस हेतु सही पाए गए अंतः एक नए नगर की स्थापना का निर्णय लिया गया जो पूरी तरह से नियोजित हो। इस कार्य हेतु फ़्रांसीसी नगर नियोजक तथा वास्तुकार ली कार्बूजियर की सेवा ली गई। इन्हीं महोदय ने भारत में चंडीगढ़ की स्थापना की योजना बनाई थी। इस कारण ये दोनों नगर देखने में एक जैसे लगते हैं। दो हज़ार नौ के अनुमान अनुसार इस नगर की जनसंख्या छः,तिहत्तर,सात सौ छयासठ है। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनैतिक दल। . उर्दू भाषा हिन्द आर्य भाषा है। उर्दू भाषा हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप मानी जाती है। उर्दू में संस्कृत के तत्सम शब्द न्यून हैं और अरबी-फ़ारसी और संस्कृत से तद्भव शब्द अधिक हैं। ये मुख्यतः दक्षिण एशिया में बोली जाती है। यह भारत की शासकीय भाषाओं में से एक है, तथा पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। इस के अतिरिक्त भारत के राज्य तेलंगाना, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त शासकीय भाषा है। . यहां पुनर्निर्देश करता हैः नैशनल असेम्ब्ली , पाकिस्तान के राष्ट्रीय विधानसभा, पाकिस्तान की नैशनल असेम्बली, पाकिस्तान की नेशनल असैंबली, पाकिस्तान की क़ौमी असेम्बली, पाकिस्तान की क़ौमी असेम्ब्ली, पाकिस्तान की क़ौमी असेंबली, क़ौमी असेम्बली ।
झांसी में एक लेखपाल का रिश्वत मांगते हुए वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें वह एक युवक से काम के बदले में रुपए की डिमांड कर रहा है। युवक के चेक लेने के लिए कहा तो आरोपी लेखपाल एस के गौर बोला कि रिश्वत चेक में नहीं, कैश में जाती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
झांसी में एक लेखपाल का रिश्वत मांगते हुए वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें वह एक युवक से काम के बदले में रुपए की डिमांड कर रहा है। युवक के चेक लेने के लिए कहा तो आरोपी लेखपाल एस के गौर बोला कि रिश्वत चेक में नहीं, कैश में जाती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
सुपरस्टार रजनीकांत को गुरुवार की रात को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जैसे ही यह खबर सामने आई उनके फैन्स परेशान हो गए और उनकी सलामती की दुआ करने लगे। अब रजनीकांत के करीबी और अभिनेता वाई जी महेंद्रन ने बताया है कि रजनीकांत की तबीयत फिलहाल ठीक है और वह आराम कर रहे हैं। वाई. जी महेंद्रन ने कहा, 'वह अभी अस्पताल में आराम कर रहे हैं। मुझे उनके इलाज के बारे में नहीं पता है, लेकिन वह ठीक हैं। अन्नात्थे की रिलीज से पहले उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। ' मालूम हो कि रजनीकांत की आने वाली फिल्म 'अन्नाथे' है। फिल्म 4 नवंबर 2021 को रिलीज होगी। रजनीकांत के अस्पताल में भर्ती होने पर उनकी पत्नी लता ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि यह एक रूटीन चेकअप है। वहीं कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इससे पहले बीते साल दिसंबर में ब्लड प्रेशर की समस्या के चलते रजनीकांत को हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि दो दिनों के भीतर ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। हाल ही में रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था और उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।
सुपरस्टार रजनीकांत को गुरुवार की रात को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जैसे ही यह खबर सामने आई उनके फैन्स परेशान हो गए और उनकी सलामती की दुआ करने लगे। अब रजनीकांत के करीबी और अभिनेता वाई जी महेंद्रन ने बताया है कि रजनीकांत की तबीयत फिलहाल ठीक है और वह आराम कर रहे हैं। वाई. जी महेंद्रन ने कहा, 'वह अभी अस्पताल में आराम कर रहे हैं। मुझे उनके इलाज के बारे में नहीं पता है, लेकिन वह ठीक हैं। अन्नात्थे की रिलीज से पहले उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। ' मालूम हो कि रजनीकांत की आने वाली फिल्म 'अन्नाथे' है। फिल्म चार नवंबर दो हज़ार इक्कीस को रिलीज होगी। रजनीकांत के अस्पताल में भर्ती होने पर उनकी पत्नी लता ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि यह एक रूटीन चेकअप है। वहीं कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इससे पहले बीते साल दिसंबर में ब्लड प्रेशर की समस्या के चलते रजनीकांत को हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि दो दिनों के भीतर ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। हाल ही में रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था और उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।
घरेलू क्रिकेट की मजबूत टीमें सौराष्ट्र और कर्नाटक जब गुरूवार को शुरू होने वाले पांच दिवसीय रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में एक दूसरे के आमने सामने होंगी तो सभी की निगाहें भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और मयंक अग्रवाल के प्रदर्शन पर लगी होंगी। पुजारा बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं, ऑस्ट्रेलिया में वो भारत की ओर से तीन शतक जड़कर सबसे ज्यादा रन जुटाने वाले खिलाड़ी रहे जिससे देश ने पहली टेस्ट सीरीज अपने नाम की। टेस्ट सीरीज के तुरंत बाद पुजारा ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच में भी सौराष्ट्र के लिये अहम भूमिका अदा की थी। उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद 67 रन बनाये जिससे सौराष्ट्र ने उत्तर प्रदेश को छह विकेट से हराया। मेहमान टीम के मध्यक्रम में शेल्डन जैक्सन जैसे खिलाड़ी भी मौजूद हैं जो उसे मजबूती प्रदान करते हैं। कर्नाटक के बल्लेबाज मयंक अग्रवाल की रणजी सेमीफाइनल में एक अच्छी पारी उनका भारतीय टीम में स्थान पक्का करने में मदद करेगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में खेली गयी टेस्ट सीरीज में तीन पारियां खेलीं और इनमें 195 रन बनाये। यह स्थानीय खिलाड़ी अंगूठे में चोट लगने के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने के कुछ दिन पहले ही स्वदेश लौटा। इसके कारण वो राजस्थान के खिलाफ रणजी क्वार्टरफाइनल मैच भी नहीं खेल सका। अग्रवाल के अलावा कप्तान मनीष पांडे भी अच्छी फॉर्म जारी रखना चाहेंगे जो टीम के लिये लगातार रन जुटा रहे हैं। विनय कुमार और करूण नायर अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं जो कर्नाटक की ओर से खेलेंगे। तेज गेंदबाज विनय और अभिमन्यु मिथुन अच्छी फॉर्म में हैं जबकि आलराउंडर कृष्णप्पा गौतम से भी टीम की उम्मीदें लगी होंगी।
घरेलू क्रिकेट की मजबूत टीमें सौराष्ट्र और कर्नाटक जब गुरूवार को शुरू होने वाले पांच दिवसीय रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में एक दूसरे के आमने सामने होंगी तो सभी की निगाहें भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और मयंक अग्रवाल के प्रदर्शन पर लगी होंगी। पुजारा बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं, ऑस्ट्रेलिया में वो भारत की ओर से तीन शतक जड़कर सबसे ज्यादा रन जुटाने वाले खिलाड़ी रहे जिससे देश ने पहली टेस्ट सीरीज अपने नाम की। टेस्ट सीरीज के तुरंत बाद पुजारा ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच में भी सौराष्ट्र के लिये अहम भूमिका अदा की थी। उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद सरसठ रन बनाये जिससे सौराष्ट्र ने उत्तर प्रदेश को छह विकेट से हराया। मेहमान टीम के मध्यक्रम में शेल्डन जैक्सन जैसे खिलाड़ी भी मौजूद हैं जो उसे मजबूती प्रदान करते हैं। कर्नाटक के बल्लेबाज मयंक अग्रवाल की रणजी सेमीफाइनल में एक अच्छी पारी उनका भारतीय टीम में स्थान पक्का करने में मदद करेगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में खेली गयी टेस्ट सीरीज में तीन पारियां खेलीं और इनमें एक सौ पचानवे रन बनाये। यह स्थानीय खिलाड़ी अंगूठे में चोट लगने के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने के कुछ दिन पहले ही स्वदेश लौटा। इसके कारण वो राजस्थान के खिलाफ रणजी क्वार्टरफाइनल मैच भी नहीं खेल सका। अग्रवाल के अलावा कप्तान मनीष पांडे भी अच्छी फॉर्म जारी रखना चाहेंगे जो टीम के लिये लगातार रन जुटा रहे हैं। विनय कुमार और करूण नायर अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं जो कर्नाटक की ओर से खेलेंगे। तेज गेंदबाज विनय और अभिमन्यु मिथुन अच्छी फॉर्म में हैं जबकि आलराउंडर कृष्णप्पा गौतम से भी टीम की उम्मीदें लगी होंगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Bihar Patna Rains, Flood, Uttar Pradesh Weather Forecast Today Updates: मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के मुताबिक- आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, बिजनौर जिले और आसपास के इलाकों में भारी बारिश होगी। बिहार में बीते कई दिनों से जारी भारी बारिश के चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। राज्य के 3 जिलों में पिछले 48 घंटों से हो रही बारिश से कम से करीब 40 लोगों की मौत हो गई है। राजधानी पटना में के कई इलाकों में चार से छह फीट गहरे जलभराव से लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खुद बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी अपने पटना स्थित आवास में फंस गए थे, जिनको बचाने के लिए एनडीआरएफ को उतरना पड़ा। इस बीच पीएम मोदी ने सीएम नीतीश से बात की और हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। वहीं उत्तर प्रदेश में कई दिनों से जारी भारी बारिश के बाद कई जिले जलमग्न हो गया। बिहार में अधिकारियों का कहना है कि 1975 की बाढ़ के बाद से राज्य की राजधानी में इस तरह के जलभराव नहीं देखा गया है। बिहार सरकार ने वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों से खाद्य पैकेट और दवाइयां वितरित और एयरड्रॉपिंग के लिए कहा है। पटना जिला प्रशासन ने मंगलवार तक सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। यूपी में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 104 हो गई है। जिसमें सोनभद्र से सोमवार को चार और मौतें हुई हैं जबकि राज्य के पूर्वी जिलों में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
Bihar Patna Rains, Flood, Uttar Pradesh Weather Forecast Today Updates: मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के मुताबिक- आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, बिजनौर जिले और आसपास के इलाकों में भारी बारिश होगी। बिहार में बीते कई दिनों से जारी भारी बारिश के चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। राज्य के तीन जिलों में पिछले अड़तालीस घंटाटों से हो रही बारिश से कम से करीब चालीस लोगों की मौत हो गई है। राजधानी पटना में के कई इलाकों में चार से छह फीट गहरे जलभराव से लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खुद बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी अपने पटना स्थित आवास में फंस गए थे, जिनको बचाने के लिए एनडीआरएफ को उतरना पड़ा। इस बीच पीएम मोदी ने सीएम नीतीश से बात की और हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। वहीं उत्तर प्रदेश में कई दिनों से जारी भारी बारिश के बाद कई जिले जलमग्न हो गया। बिहार में अधिकारियों का कहना है कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर की बाढ़ के बाद से राज्य की राजधानी में इस तरह के जलभराव नहीं देखा गया है। बिहार सरकार ने वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों से खाद्य पैकेट और दवाइयां वितरित और एयरड्रॉपिंग के लिए कहा है। पटना जिला प्रशासन ने मंगलवार तक सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। यूपी में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या एक सौ चार हो गई है। जिसमें सोनभद्र से सोमवार को चार और मौतें हुई हैं जबकि राज्य के पूर्वी जिलों में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
गांव मतलोडा पानीपत निवासी रामेहर परिवार के छह बच्चों समेत 14 लोग रविवार को सत्रहवी पर रिश्तेदारी में गांव धडोली आए हुए थे। दोपहर बाद सभी इको गाड़ी में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। जींद-सफीदों मार्ग पर उनकी सामने से आर रही दूसरी इको गाड़ी से टक्कर हो गई। हरिभूमि न्यूज. जींद। गांव रजाना कलां के निकट जींद-सफीदों मार्ग पर रविवार दोपहर बाद दो गाड़ियों की आमने-सामने की भिड़ंत में 14 लोग घायल हो गए। जिसमें एक गाड़ी में सवार दस घायल एक ही परिवार के हैं। जो सत्रहवीं में शामिल होकर गाड़ी से वापस घर लौट रहे थे। सभी घायलों को सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पिल्लूखेड़ा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। गांव मतलोडा पानीपत निवासी रामेहर परिवार के छह बच्चों समेत 14 लोग रविवार को सत्रहवी पर रिश्तेदारी में गांव धडोली आए हुए थे। दोपहर बाद सभी इको गाड़ी में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। जींद-सफीदों मार्ग पर उनकी सामने से आर रही दूसरी इको गाड़ी से टक्कर हो गई। जिसमें गांव मतलोडा निवासी रामेहर, उसका बेटा अशोक, मनीष, रमेश, पुत्रवधु सुमन, आशु, सुनीता, पौत्री अंजू तथा चालक सोनू घायल हो गए। जबकि बच्चे बाल-बाल बच गए। वहीं दूसरी गाड़ी में सवार पटियाला चौक निवासी वंदना, हर्ष, माधव तथा हार्दिक घायल हो गए। माधव परिवार के सदस्यों के साथ पानीपत से गाड़ी में सवार होकर जीद लौट रहा था। राहगीरों ने दोनों गाड़ियों के सभी घायलों को सामान्य अस्पताल पहुंचाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गांव मतलोडा निवासी मनीष ने बताया कि उसकी पत्नी आशु की दादी का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। रविवार का गांव धड़ोली में सत्रहवीं रखी गई। जिसमें उनका पूरा परिवार शामिल था। वापसी के दौरान सामने से आ रही दूसरी गाड़ी से उनकी गाड़ी की भिड़ंत हो गई। जिसमें उसके परिवार के दस लोग घायल हो गए। पिल्लूखेड़ा थाना प्रभारी रविंद्र ने बताया कि घायलों को सामान्य अस्पताल ले जाया गया है। सभी घायल खतरे से बाहर है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
गांव मतलोडा पानीपत निवासी रामेहर परिवार के छह बच्चों समेत चौदह लोग रविवार को सत्रहवी पर रिश्तेदारी में गांव धडोली आए हुए थे। दोपहर बाद सभी इको गाड़ी में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। जींद-सफीदों मार्ग पर उनकी सामने से आर रही दूसरी इको गाड़ी से टक्कर हो गई। हरिभूमि न्यूज. जींद। गांव रजाना कलां के निकट जींद-सफीदों मार्ग पर रविवार दोपहर बाद दो गाड़ियों की आमने-सामने की भिड़ंत में चौदह लोग घायल हो गए। जिसमें एक गाड़ी में सवार दस घायल एक ही परिवार के हैं। जो सत्रहवीं में शामिल होकर गाड़ी से वापस घर लौट रहे थे। सभी घायलों को सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पिल्लूखेड़ा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। गांव मतलोडा पानीपत निवासी रामेहर परिवार के छह बच्चों समेत चौदह लोग रविवार को सत्रहवी पर रिश्तेदारी में गांव धडोली आए हुए थे। दोपहर बाद सभी इको गाड़ी में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। जींद-सफीदों मार्ग पर उनकी सामने से आर रही दूसरी इको गाड़ी से टक्कर हो गई। जिसमें गांव मतलोडा निवासी रामेहर, उसका बेटा अशोक, मनीष, रमेश, पुत्रवधु सुमन, आशु, सुनीता, पौत्री अंजू तथा चालक सोनू घायल हो गए। जबकि बच्चे बाल-बाल बच गए। वहीं दूसरी गाड़ी में सवार पटियाला चौक निवासी वंदना, हर्ष, माधव तथा हार्दिक घायल हो गए। माधव परिवार के सदस्यों के साथ पानीपत से गाड़ी में सवार होकर जीद लौट रहा था। राहगीरों ने दोनों गाड़ियों के सभी घायलों को सामान्य अस्पताल पहुंचाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गांव मतलोडा निवासी मनीष ने बताया कि उसकी पत्नी आशु की दादी का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। रविवार का गांव धड़ोली में सत्रहवीं रखी गई। जिसमें उनका पूरा परिवार शामिल था। वापसी के दौरान सामने से आ रही दूसरी गाड़ी से उनकी गाड़ी की भिड़ंत हो गई। जिसमें उसके परिवार के दस लोग घायल हो गए। पिल्लूखेड़ा थाना प्रभारी रविंद्र ने बताया कि घायलों को सामान्य अस्पताल ले जाया गया है। सभी घायल खतरे से बाहर है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के सदमे से आज तक लोग उबर नहीं पाए हैं। वहीं, हर किसी को शहनाज गिल की चिंता भी सता रही है। बीते दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि वो काम पर जल्द ही वापस लौट सकती हैं. . . इस बीच एक्टर कुशाल टंडन के एक पोस्ट ने सभी को इमोशनल कर दिया है। उन्होंने फैंस को बताया है कि सिद्धार्थ के लिए शहनाज कितनी अहमियत रखती थीं। उनका ये पोस्ट इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा में आ गया है। इस पोस्ट को कई लोग रीट्वीट करते दिखाई दे रहे हैं। इसे रीट्वीट करते हुए कई फैंस सिद्धार्थ-शहनाज के रिश्ते पर इमोशनल पोस्ट करते दिख रहे हैं। बता दें कि सिद्धार्थ के निधन के बाद शहनाज गिल की दिल तोड़ देने वाली तस्वीरें सामने आई थीं। कई सेलेब्रिटीज ने भी दुख जाहिर करते हुए बताया था कि शहनाज गिल का हंसता हुआ चेहरा दर्द से भर गया है। सभी ने ये भी जाहिर किया था इस मुश्किल वक्त में वो सिद्धार्थ के परिवार और शहनाज के साथ खड़े रहेंगे।
अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के सदमे से आज तक लोग उबर नहीं पाए हैं। वहीं, हर किसी को शहनाज गिल की चिंता भी सता रही है। बीते दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि वो काम पर जल्द ही वापस लौट सकती हैं. . . इस बीच एक्टर कुशाल टंडन के एक पोस्ट ने सभी को इमोशनल कर दिया है। उन्होंने फैंस को बताया है कि सिद्धार्थ के लिए शहनाज कितनी अहमियत रखती थीं। उनका ये पोस्ट इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा में आ गया है। इस पोस्ट को कई लोग रीट्वीट करते दिखाई दे रहे हैं। इसे रीट्वीट करते हुए कई फैंस सिद्धार्थ-शहनाज के रिश्ते पर इमोशनल पोस्ट करते दिख रहे हैं। बता दें कि सिद्धार्थ के निधन के बाद शहनाज गिल की दिल तोड़ देने वाली तस्वीरें सामने आई थीं। कई सेलेब्रिटीज ने भी दुख जाहिर करते हुए बताया था कि शहनाज गिल का हंसता हुआ चेहरा दर्द से भर गया है। सभी ने ये भी जाहिर किया था इस मुश्किल वक्त में वो सिद्धार्थ के परिवार और शहनाज के साथ खड़े रहेंगे।
राम मंदिर आंदोलन ने कई बड़े दंगों की नीव रखी. हिंदू-मुस्लिमों में टेंशन 30 अक्टूबर 1990 को ही शुरू हो गई थी जब कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर गुंबद तोड़ा और वहां भगवा फहराया. इसकी प्रतिक्रिया में कई शहरों में दंगे हुए. इसके बाद 6 दिसंबर 1992 की घटना ने तो दोनों समुदायों के बीच नफरत और बढ़ा दी. जिससे दंगे हुए और हज़ारों लोग मारे गए. हैदराबाद में 134 लोगों की मौत हो गई. अलीगढ़ में 11, गोंडा में 42, बिजनौर में 40 और कानपुर में 20 की मौत हुई. सूरत में 150 लोगों की मौत हुई. कर्नाटक में 73, जयपुर में 28, कोलकाता में 35 और भोपाल में 142 लोग दंगों में मारे गए. 12 मार्च 1993 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक के बाद एक 13 बम धमाके हुए. जिसमें 257 लोगों की मौत हुई और करीब डेढ़ हजार लोग घायल हुए. बंगलुरु में 1994 में दंगा हुआ जिसमें 30 लोग मारे गए. साल 2002 में कारसेवक साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से अयोध्या से गुजरात लौट रहे थे. इसी बीच गोधरा में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस ट्रेन की कई बोगियों को जला दिया. इस घटना में 59 कारसेवकों की मौत हो गई. बाद में प्रतिकार के रूप में यह घटना एक बड़े दंगे के रूप में बदल गई. जिसमें करीब 2000 लोगों की जानें गईं और लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा. "30 अक्टूबर से पहले ही हिंदी के दो प्रमुख अख़बार. . अपनी कारसेवा शुरू कर चुके थे. . 30 अक्टूबर से पहले अखबार या तो सुरक्षाबलों पर कारसेवकों को सताने का इल्ज़ाम लगा रहे थे या उनके आत्मविश्वास को कमज़ोर करने के लिए उन्हें क़ानून और व्यवस्था का एजेंट बताने में लगे हुए थे. मसलन यह प्रचार किया जा रहा था कि जो भी व्यक्ति आते-जाते राम का नाम भी लेता है यानी राम-राम या जै सियाराम कहता है और यहां तक कि अर्थी ले जाते समय राम नाम सत्य है कहता है तो पुलिस उसे तंग करती है. एक अखबार. . . ने पुलिस पर इल्ज़ाम लगाया कि वह कारसेवकों को राम के बजाय मुलायम का नाम लेने पर मजबूर कर रही है. " "एक के बाद एक ख़बरें छापी जा रही थीं कि आंदोलन को मुसलमानों का कितना समर्थन मिल रहा है. लखनऊ के एक अखबार. . . ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया था कि लालकृष्ण आडवाणी का रथ ड्राइव करने वाला मुसलमान ड्राइवर किस प्रकार अन्य मुसलमानों को कारसेवा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. " प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इनमें से कई अख़बारों को सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का जिम्मेदार ठहराया. विवादित स्थल पर सुप्रीम कोर्ट में बौद्धों ने भी दावा जताया है. अयोध्या के याचिकाकर्ता विनीत कुमार मौर्य आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की खुदाई में मिले गोलाकार स्तूप, दीवार और खंभों को बौद्ध विहार से जुड़ा बताते हैं. उनका कहना है कि ये विशिष्टताएं न मंदिर की हैं और न मस्जिद की. चीनी यात्रियों (फाह्यान, ह्वेनसांग) के यात्रा वृतांत, त्रिपिटक साहित्य भी अयोध्या की विवादित भूमि को बौद्धस्थल बताते हैं. विवादित स्थल के नीचे क्या है? विवादित स्थल के नीचे क्या है इसका पता किया गया, ताकि विवाद खत्म हो जाए. जनवरी 2003 में रेडियो तरंगों के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं? इसके बाद 12 मार्च से 7 अगस्त 2003 के बीच 82 स्थानों पर खुदाई की गई. इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इस काम को अंजाम दिया. पहला मुक़दमाः विश्व हिंदू परिषद की वेबसाइट के मुताबिक, पहला मुक़दमा (नियमित वाद क्रमांक 2/1950) एक दर्शनार्थी भक्त गोपाल सिंह विशारद ने 16 जनवरी, 1950 ई. को सिविल जज, फ़ैज़ाबाद की अदालत में दायर किया था. वे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन ज़िला गोंडा, वर्तमान ज़िला बलरामपुर के निवासी और हिंदू महासभा, गोंडा के ज़िलाध्यक्ष थे. गोपाल सिंह विशारद 14 जनवरी, 1950 को जब भगवान के दर्शन करने श्रीराम जन्मभूमि जा रहे थे, तब पुलिस ने उनको रोका. पुलिस अन्य दर्शनार्थियों को भी रोक रही थी. वेबसाइट पर लिखी जानकारी के मुताबिक़ अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस देने के आदेश दिए. तब तक के लिए 16 जनवरी, 1950 को ही गोपाल सिंह विशारद के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी कर दिया. भक्तों के लिए पूजा-अर्चना चालू हो गई. सिविल जज ने ही 3 मार्च, 1951 को अपने अंतरिम आदेश की पुष्टि कर दी. मुस्लिम समाज के कुछ लोग इस आदेश के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चले गए. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मूथम व न्यायमूर्ति रघुवर दयाल की पीठ ने 26 अप्रैल, 1955 को अपने आदेश के द्वारा सिविल जज के आदेश को पुष्ट कर दिया. ढांचे के अंदर निर्बाध पूजा-अर्चना का अधिकार सुरक्षित हो गया. इसी आदेश के आधार पर आज तक रामलला की पूजा-अर्चना हो रही है. केस नंबर 197: बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद शाम सवा पांच बजे थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या में अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और अन्य मामलों में केस दर्ज किया गया. केस नंबर 198: इसके कुछ ही देर बाद 198 नंबर केस दर्ज हुआ. इसमें नामजद हुए अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा. आठ लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भडकाने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद गिरवाने का मुकदमा दर्ज हुआ. जबकि, अलग से 47 केस पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने मारपीट, कैमरा तोड़ने और छीनने आदि के अलग से दर्ज करवाए. मुकदमे के ट्रायल के लिए ललितपुर में विशेष अदालत स्थापित की गई. बाद में यह रायबरेली स्थानांतरित कर दी गई. सरकार ने बाद में सभी केस सीबीआई को जांच के लिए दे दिए. उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 सितंबर 1993 को 48 मुकदमों के ट्रायल के लिए लखनऊ में स्पेशल कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी की. लेकिन इस अधिसूचना में केस नंबर 198 शामिल नहीं था, जिसका ट्रायल रायबरेली की स्पेशल कोर्ट में चल रहा था. फिर सीबीआई ने सभी 49 मामलों में चालीस अभियुक्तों के खिलाफ संयुक्त चार्जशीट फाइल की.
राम मंदिर आंदोलन ने कई बड़े दंगों की नीव रखी. हिंदू-मुस्लिमों में टेंशन तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को ही शुरू हो गई थी जब कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर गुंबद तोड़ा और वहां भगवा फहराया. इसकी प्रतिक्रिया में कई शहरों में दंगे हुए. इसके बाद छः दिसंबर एक हज़ार नौ सौ बानवे की घटना ने तो दोनों समुदायों के बीच नफरत और बढ़ा दी. जिससे दंगे हुए और हज़ारों लोग मारे गए. हैदराबाद में एक सौ चौंतीस लोगों की मौत हो गई. अलीगढ़ में ग्यारह, गोंडा में बयालीस, बिजनौर में चालीस और कानपुर में बीस की मौत हुई. सूरत में एक सौ पचास लोगों की मौत हुई. कर्नाटक में तिहत्तर, जयपुर में अट्ठाईस, कोलकाता में पैंतीस और भोपाल में एक सौ बयालीस लोग दंगों में मारे गए. बारह मार्च एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक के बाद एक तेरह बम धमाके हुए. जिसमें दो सौ सत्तावन लोगों की मौत हुई और करीब डेढ़ हजार लोग घायल हुए. बंगलुरु में एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में दंगा हुआ जिसमें तीस लोग मारे गए. साल दो हज़ार दो में कारसेवक साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से अयोध्या से गुजरात लौट रहे थे. इसी बीच गोधरा में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस ट्रेन की कई बोगियों को जला दिया. इस घटना में उनसठ कारसेवकों की मौत हो गई. बाद में प्रतिकार के रूप में यह घटना एक बड़े दंगे के रूप में बदल गई. जिसमें करीब दो हज़ार लोगों की जानें गईं और लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा. "तीस अक्टूबर से पहले ही हिंदी के दो प्रमुख अख़बार. . अपनी कारसेवा शुरू कर चुके थे. . तीस अक्टूबर से पहले अखबार या तो सुरक्षाबलों पर कारसेवकों को सताने का इल्ज़ाम लगा रहे थे या उनके आत्मविश्वास को कमज़ोर करने के लिए उन्हें क़ानून और व्यवस्था का एजेंट बताने में लगे हुए थे. मसलन यह प्रचार किया जा रहा था कि जो भी व्यक्ति आते-जाते राम का नाम भी लेता है यानी राम-राम या जै सियाराम कहता है और यहां तक कि अर्थी ले जाते समय राम नाम सत्य है कहता है तो पुलिस उसे तंग करती है. एक अखबार. . . ने पुलिस पर इल्ज़ाम लगाया कि वह कारसेवकों को राम के बजाय मुलायम का नाम लेने पर मजबूर कर रही है. " "एक के बाद एक ख़बरें छापी जा रही थीं कि आंदोलन को मुसलमानों का कितना समर्थन मिल रहा है. लखनऊ के एक अखबार. . . ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया था कि लालकृष्ण आडवाणी का रथ ड्राइव करने वाला मुसलमान ड्राइवर किस प्रकार अन्य मुसलमानों को कारसेवा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. " प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इनमें से कई अख़बारों को सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का जिम्मेदार ठहराया. विवादित स्थल पर सुप्रीम कोर्ट में बौद्धों ने भी दावा जताया है. अयोध्या के याचिकाकर्ता विनीत कुमार मौर्य आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की खुदाई में मिले गोलाकार स्तूप, दीवार और खंभों को बौद्ध विहार से जुड़ा बताते हैं. उनका कहना है कि ये विशिष्टताएं न मंदिर की हैं और न मस्जिद की. चीनी यात्रियों के यात्रा वृतांत, त्रिपिटक साहित्य भी अयोध्या की विवादित भूमि को बौद्धस्थल बताते हैं. विवादित स्थल के नीचे क्या है? विवादित स्थल के नीचे क्या है इसका पता किया गया, ताकि विवाद खत्म हो जाए. जनवरी दो हज़ार तीन में रेडियो तरंगों के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं? इसके बाद बारह मार्च से सात अगस्त दो हज़ार तीन के बीच बयासी स्थानों पर खुदाई की गई. इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इस काम को अंजाम दिया. पहला मुक़दमाः विश्व हिंदू परिषद की वेबसाइट के मुताबिक, पहला मुक़दमा एक दर्शनार्थी भक्त गोपाल सिंह विशारद ने सोलह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचास ई. को सिविल जज, फ़ैज़ाबाद की अदालत में दायर किया था. वे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन ज़िला गोंडा, वर्तमान ज़िला बलरामपुर के निवासी और हिंदू महासभा, गोंडा के ज़िलाध्यक्ष थे. गोपाल सिंह विशारद चौदह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचास को जब भगवान के दर्शन करने श्रीराम जन्मभूमि जा रहे थे, तब पुलिस ने उनको रोका. पुलिस अन्य दर्शनार्थियों को भी रोक रही थी. वेबसाइट पर लिखी जानकारी के मुताबिक़ अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस देने के आदेश दिए. तब तक के लिए सोलह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचास को ही गोपाल सिंह विशारद के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी कर दिया. भक्तों के लिए पूजा-अर्चना चालू हो गई. सिविल जज ने ही तीन मार्च, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को अपने अंतरिम आदेश की पुष्टि कर दी. मुस्लिम समाज के कुछ लोग इस आदेश के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चले गए. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मूथम व न्यायमूर्ति रघुवर दयाल की पीठ ने छब्बीस अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ पचपन को अपने आदेश के द्वारा सिविल जज के आदेश को पुष्ट कर दिया. ढांचे के अंदर निर्बाध पूजा-अर्चना का अधिकार सुरक्षित हो गया. इसी आदेश के आधार पर आज तक रामलला की पूजा-अर्चना हो रही है. केस नंबर एक सौ सत्तानवे: बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद शाम सवा पांच बजे थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या में अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और अन्य मामलों में केस दर्ज किया गया. केस नंबर एक सौ अट्ठानवे: इसके कुछ ही देर बाद एक सौ अट्ठानवे नंबर केस दर्ज हुआ. इसमें नामजद हुए अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा. आठ लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भडकाने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद गिरवाने का मुकदमा दर्ज हुआ. जबकि, अलग से सैंतालीस केस पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने मारपीट, कैमरा तोड़ने और छीनने आदि के अलग से दर्ज करवाए. मुकदमे के ट्रायल के लिए ललितपुर में विशेष अदालत स्थापित की गई. बाद में यह रायबरेली स्थानांतरित कर दी गई. सरकार ने बाद में सभी केस सीबीआई को जांच के लिए दे दिए. उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ सितंबर एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को अड़तालीस मुकदमों के ट्रायल के लिए लखनऊ में स्पेशल कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी की. लेकिन इस अधिसूचना में केस नंबर एक सौ अट्ठानवे शामिल नहीं था, जिसका ट्रायल रायबरेली की स्पेशल कोर्ट में चल रहा था. फिर सीबीआई ने सभी उनचास मामलों में चालीस अभियुक्तों के खिलाफ संयुक्त चार्जशीट फाइल की.
तिरूनेलवेल्ली, सलेम (तमिलनाडु) : द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने अपने पिता और दिवंगत एम. करूणानिधि की "अनावश्यक आलोचना" पर मंगलवार को दुख प्रकट किया। मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने आरोप लगाया था कि द्रमुक नेता को उनके निधन से दो वर्ष पहले "नजरबंद" किया गया था। द्रमुक ने पलानीस्वामी के बयान के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके पद को शोभा नहीं देता। तिरूनेलवेल्ली में एक चुनावी रैली में स्टालिन ने उन "खबरों" का जिक्र किया जिसमें करूणानिधि को निशाना बनाया गया था। उनका इशारा पलानीस्वामी के बयान की तरफ था। नीलगिरी में एक चुनावी रैली में सोमवार को मुख्यमंत्री ने आरोप लगाए थे कि करूणानिधि को उनके निधन से दो वर्ष पहले "नजरबंद" किया गया था जबकि इलाज के लिए उन्हें विदेश ले जाया जा सकता था। स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि करूणानिधि को आज भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए तमिलों द्वारा याद किया जाता है। द्रमुक ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देती। द्रमुक के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के सदस्य त्रिची शिवा ने कहा कि पलानीस्वामी का बयान "सीमा रेखा के उल्लंघन" के बराबर है और उन्होंने पूछा कि दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता का विदेश में उपचार क्यों नहीं कराया गया? उन्होंने कहा कि स्टालिन कड़ी मेहनत से पार्टी प्रमुख बने हैं और पार्टी ने उन्हें स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी ने उन्हें स्वीकार किया है। यह कहना कि (करूणानिधि को) नजरबंद किया गया था, सीमा रेखा का उल्लंघन है। " उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस तरह के बयान मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को शोभा नहीं देते।
तिरूनेलवेल्ली, सलेम : द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने अपने पिता और दिवंगत एम. करूणानिधि की "अनावश्यक आलोचना" पर मंगलवार को दुख प्रकट किया। मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने आरोप लगाया था कि द्रमुक नेता को उनके निधन से दो वर्ष पहले "नजरबंद" किया गया था। द्रमुक ने पलानीस्वामी के बयान के लिए उनकी आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके पद को शोभा नहीं देता। तिरूनेलवेल्ली में एक चुनावी रैली में स्टालिन ने उन "खबरों" का जिक्र किया जिसमें करूणानिधि को निशाना बनाया गया था। उनका इशारा पलानीस्वामी के बयान की तरफ था। नीलगिरी में एक चुनावी रैली में सोमवार को मुख्यमंत्री ने आरोप लगाए थे कि करूणानिधि को उनके निधन से दो वर्ष पहले "नजरबंद" किया गया था जबकि इलाज के लिए उन्हें विदेश ले जाया जा सकता था। स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि करूणानिधि को आज भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए तमिलों द्वारा याद किया जाता है। द्रमुक ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देती। द्रमुक के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के सदस्य त्रिची शिवा ने कहा कि पलानीस्वामी का बयान "सीमा रेखा के उल्लंघन" के बराबर है और उन्होंने पूछा कि दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता का विदेश में उपचार क्यों नहीं कराया गया? उन्होंने कहा कि स्टालिन कड़ी मेहनत से पार्टी प्रमुख बने हैं और पार्टी ने उन्हें स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी ने उन्हें स्वीकार किया है। यह कहना कि नजरबंद किया गया था, सीमा रेखा का उल्लंघन है। " उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस तरह के बयान मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को शोभा नहीं देते।
आस-पास के घरों को सुरक्षा के लिए लिहाज से खाली करने की कारवाई चल रही हैं। इससे पूर्व बुधवार को श्याम नगर,जनपथ स्थित बहुमंजिला इमारत के ई-ब्लॉक के 18 फ्लैट्स के हिस्से को नियंत्रित विस्फोटक तकनीक से उड़ाने के लिए इंदौर से आए विशेषज्ञ एस.बी. सरवटे और जेडीए टीम बुधवार को दिनभर जुटी रही। कर विस्फोटक भरा जाएगा। बुधवार शाम को टेस्टिंग ब्लास्ट में कुछ कमी रह जाने के बाद छेद संख्या बढ़ाने का निर्णय किया गया। पहले पहली मंजिल केहिस्से में ही विस्फोट किया जाएगा। पहली मंजिल के पिलर ध्वस्त होने के कारण इमारत थोड़ी कमजोर हो जाएगी, लेकिन गिरेगी नहीं, क्योंकि भूतल और ऊपरी मंजिल के पिलर की पकड़ बनी रहेगी। इसके बाद भूतल और दूसरी मंजिल को ध्वस्त किया जाएगा, जिससे पूरी इमारत धाराशायी हो जाएगी। विस्फोट में इम्पलोजन (अन्तः विस्फोट) और आइसोलेशन इंजीनियरिंग का उपयोग होगा। इससे विस्फोट के समय अधिकतम 100 मीटर दायरे तक ही इसका असर होगा। पिलरों में विस्फोटक इस तरह से भरा जाएगा, जिससे इमारत का हिस्सा सीधे नाले की तरफ गिरे। जेडीए ने कोटपूतली से पचास किलो विस्फोटक मंगाया है। जेडीए अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई अमानीशाह नाले की 210 फीट चौड़ाई के आधार पर हो रही और सेन्टर लाइन से 105 फीट दायरे में बी, ई, एफ तीन ब्लॉक का बड़ा हिस्सा आ रहा है। जिसमें करीब 63 फ्लैट शामिल हैं। हांलाकि, जेडीए ने मंगलवार को इस जमीन की 90 बी व लीज डीड निरस्त कर दी, जिसके बाद जमीन पर निर्मित सभी निर्माण अवैध हो गया। ई ब्लॉक का आधा हिस्सा ही सेन्टर लाइन से 105 फीट के दायरे में आ रहा है। ऎसे में प्रभावित हिस्से को दूसरे हिस्से से अलग करना होगा, जिससे दूसरा हिस्सा नहीं टूटे। इसके लिए आइसोलेशन तकनीक अपनाई जाएगी। इसमें दोनों हिस्सों के बीच बने बीम को काटकर विस्फोटक भरा जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद इम्पलोशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें इमारत के भूतल सहित दो मंजिला में लगे सभी पिलर किए गए छेद में 100 से 150 ग्राम तक विस्फोटक भरकर एक-दूसरे को इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग से कनेक्ट किया जाएगा और रिमोट कंट्रोल से उड़ाया जाएगा। इस तकनीक से बिल्डिंग के गिरते समय कंक्रीट-पत्थर, लोहा व अन्य सामान बाहर की तरफ नहीं फैलकर अंदर की ओर ही रहेंगे। विशेषज्ञ सरवटे ने बताया कि बी ब्लॉक लम्बाई में है, जिसके चलते इसके आधे हिस्से को पूरी से काटना पड़ेगा। इसमें काफी समय लगेगा और कई तकनीकी उलझन भी हैं। उन्होंने बताया कि जेडीए अधिकारियों से बातचीत करने के बाद ही इन ब्लॉक्स को ध्वस्त करने की कार्रवाई होगी। बहुमंजिला इमारत को विस्फोटक से उड़ाने की खबर शहर में आग की तरह फैल गई और लोग इस संबंध में एक-दूसरे से जानकारी लेते रहे। मौके पर भी लोगों का जमघट लगा रहा और कौतूहलवश कई लोग तो इमारत के अंदर ही घुस आए, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने बाहर निकाला। इस बीच आस-पास के लोग घर की छतों पर डटे रहे। इमारत को उड़ाने से पहले उसके 100 मीटर दायरे के हिस्से को खाली कराया जाएगा। दक्षिण हिस्से की तरफ ही एक कॉलोनी है, जिनके एक दर्जन से अधिक घर इस दायरे में आ रहे हैं। पुलिस प्रशासन विस्फोट से एक घंटे पहले यह काम करेगा। जेडीए प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि विस्फोट के समय इमारत या नजदीकी घरों में न रहें। इस बहुमंजिला अपार्टमेंट की भूमि की 90 बी व लीजडीड निरस्त करने के खिलाफ संबंधित फर्म मानसरोवर हैरिटेज इन प्राइवेट लिमिटेड को जेडीए अपीलीय अधिकरण से राहत नहीं मिली। फर्म की ओर से स्थगन आदेश के लिए अधिकरण में अपील की गई थी। इमारत- 9 मंजिला (भूमिगत 2 मंजिला अतिरिक्त)
आस-पास के घरों को सुरक्षा के लिए लिहाज से खाली करने की कारवाई चल रही हैं। इससे पूर्व बुधवार को श्याम नगर,जनपथ स्थित बहुमंजिला इमारत के ई-ब्लॉक के अट्ठारह फ्लैट्स के हिस्से को नियंत्रित विस्फोटक तकनीक से उड़ाने के लिए इंदौर से आए विशेषज्ञ एस.बी. सरवटे और जेडीए टीम बुधवार को दिनभर जुटी रही। कर विस्फोटक भरा जाएगा। बुधवार शाम को टेस्टिंग ब्लास्ट में कुछ कमी रह जाने के बाद छेद संख्या बढ़ाने का निर्णय किया गया। पहले पहली मंजिल केहिस्से में ही विस्फोट किया जाएगा। पहली मंजिल के पिलर ध्वस्त होने के कारण इमारत थोड़ी कमजोर हो जाएगी, लेकिन गिरेगी नहीं, क्योंकि भूतल और ऊपरी मंजिल के पिलर की पकड़ बनी रहेगी। इसके बाद भूतल और दूसरी मंजिल को ध्वस्त किया जाएगा, जिससे पूरी इमारत धाराशायी हो जाएगी। विस्फोट में इम्पलोजन और आइसोलेशन इंजीनियरिंग का उपयोग होगा। इससे विस्फोट के समय अधिकतम एक सौ मीटर दायरे तक ही इसका असर होगा। पिलरों में विस्फोटक इस तरह से भरा जाएगा, जिससे इमारत का हिस्सा सीधे नाले की तरफ गिरे। जेडीए ने कोटपूतली से पचास किलो विस्फोटक मंगाया है। जेडीए अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई अमानीशाह नाले की दो सौ दस फीट चौड़ाई के आधार पर हो रही और सेन्टर लाइन से एक सौ पाँच फीट दायरे में बी, ई, एफ तीन ब्लॉक का बड़ा हिस्सा आ रहा है। जिसमें करीब तिरेसठ फ्लैट शामिल हैं। हांलाकि, जेडीए ने मंगलवार को इस जमीन की नब्बे बी व लीज डीड निरस्त कर दी, जिसके बाद जमीन पर निर्मित सभी निर्माण अवैध हो गया। ई ब्लॉक का आधा हिस्सा ही सेन्टर लाइन से एक सौ पाँच फीट के दायरे में आ रहा है। ऎसे में प्रभावित हिस्से को दूसरे हिस्से से अलग करना होगा, जिससे दूसरा हिस्सा नहीं टूटे। इसके लिए आइसोलेशन तकनीक अपनाई जाएगी। इसमें दोनों हिस्सों के बीच बने बीम को काटकर विस्फोटक भरा जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद इम्पलोशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें इमारत के भूतल सहित दो मंजिला में लगे सभी पिलर किए गए छेद में एक सौ से एक सौ पचास ग्राम तक विस्फोटक भरकर एक-दूसरे को इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग से कनेक्ट किया जाएगा और रिमोट कंट्रोल से उड़ाया जाएगा। इस तकनीक से बिल्डिंग के गिरते समय कंक्रीट-पत्थर, लोहा व अन्य सामान बाहर की तरफ नहीं फैलकर अंदर की ओर ही रहेंगे। विशेषज्ञ सरवटे ने बताया कि बी ब्लॉक लम्बाई में है, जिसके चलते इसके आधे हिस्से को पूरी से काटना पड़ेगा। इसमें काफी समय लगेगा और कई तकनीकी उलझन भी हैं। उन्होंने बताया कि जेडीए अधिकारियों से बातचीत करने के बाद ही इन ब्लॉक्स को ध्वस्त करने की कार्रवाई होगी। बहुमंजिला इमारत को विस्फोटक से उड़ाने की खबर शहर में आग की तरह फैल गई और लोग इस संबंध में एक-दूसरे से जानकारी लेते रहे। मौके पर भी लोगों का जमघट लगा रहा और कौतूहलवश कई लोग तो इमारत के अंदर ही घुस आए, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने बाहर निकाला। इस बीच आस-पास के लोग घर की छतों पर डटे रहे। इमारत को उड़ाने से पहले उसके एक सौ मीटर दायरे के हिस्से को खाली कराया जाएगा। दक्षिण हिस्से की तरफ ही एक कॉलोनी है, जिनके एक दर्जन से अधिक घर इस दायरे में आ रहे हैं। पुलिस प्रशासन विस्फोट से एक घंटे पहले यह काम करेगा। जेडीए प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि विस्फोट के समय इमारत या नजदीकी घरों में न रहें। इस बहुमंजिला अपार्टमेंट की भूमि की नब्बे बी व लीजडीड निरस्त करने के खिलाफ संबंधित फर्म मानसरोवर हैरिटेज इन प्राइवेट लिमिटेड को जेडीए अपीलीय अधिकरण से राहत नहीं मिली। फर्म की ओर से स्थगन आदेश के लिए अधिकरण में अपील की गई थी। इमारत- नौ मंजिला
इंग्लैंड ने रविवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मैच में पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 138 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 5 विकेट खोकर और 6 गेंद शेष रहते जीत हासिल की. बेन स्टोक्स ने 49 गेंदों में नाबाद 52 रन बनाकर इंग्लैंड को 138 रन के लक्ष्य का पीछा करने में मदद की. हारिस राउफ ने 4 ओवर में 23 रन देकर 2 अहम विकेट चटकाए. हालांकि वह इंग्लैंड के खिलाफ 2022 टी20 विश्व कप फाइनल में अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए. सैम करन को प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मैच में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 20 ओवर में 8 विकेट पर 137 रन पर रोक दिया. पाकिस्तान के लिए शान मसूद 28 गेंदों पर 38 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे. सैम कुरेन ने फाइनल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ अपने चार ओवरों में 12 रन देकर 3 विकेट लिए.
इंग्लैंड ने रविवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मैच में पाकिस्तान को पाँच विकेट से हराकर दूसरी बार टीबीस वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ एक सौ अड़तीस रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाँच विकेट खोकर और छः गेंद शेष रहते जीत हासिल की. बेन स्टोक्स ने उनचास गेंदों में नाबाद बावन रन बनाकर इंग्लैंड को एक सौ अड़तीस रन के लक्ष्य का पीछा करने में मदद की. हारिस राउफ ने चार ओवर में तेईस रन देकर दो अहम विकेट चटकाए. हालांकि वह इंग्लैंड के खिलाफ दो हज़ार बाईस टीबीस विश्व कप फाइनल में अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए. सैम करन को प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मैच में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ सैंतीस रन पर रोक दिया. पाकिस्तान के लिए शान मसूद अट्ठाईस गेंदों पर अड़तीस रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे. सैम कुरेन ने फाइनल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ अपने चार ओवरों में बारह रन देकर तीन विकेट लिए.
WTC Final 2023 में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के हाथों 209 रनों से करारी मात झेलनी पड़ी। इस हार ने भारत के टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर काफी सवाल खड़े कर दिए। फ़ाइनल मैच में टीम के सीनियर खिलाड़ी ही अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम साबित हुए। खिलाड़ियों की बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में ही समस्या दिखी। ऐसे में तीन ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस मैच के जरिये भारत के लिए अपना आखिरी ICC टूर्नामेंट खेल लिया है और अब उनके पास संन्यास के आलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इस लिस्ट में पहला नाम उमेश यादव (Umesh Yadav) का आता है, जो फ़ाइनल मैच में बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए। इस गेंदबाज को देखकर ऐसा लगता है कि या तो ये सिफारिश पर टीम इंडिया में जगह बनाता है या BCCI को धोखा देकर टीम में आता है क्योंकि उमेश क दो मैच में शानदार प्रदर्शन करते हैं, टीम इंडिया में जगह बनाते हैं और वहां ख़राब प्रदर्शन कर टीम को मैच हरवा देते हैं। WTC Final 2023 में उन्होंने पहली पारी में उन्होंने एक भी विकेट नहीं निकाला जबकि दूसरी पारी में वो मात्र 2 विकेट ही हासिल कर पाए। कंगारुओं ने तो इन्हें धूनकर रख दिया था। पूरे मैच में यादव ने 131 रन लुटा दिए। से में अब लगता नहीं है कि वो WTC 2023-25 में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। इस लिस्ट में दूसरा नाम चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) का है, जिनका टेस्ट करियर WTC Final 2023 के साथ ही खत्म हो चुका है। इस फ़ाइनल मुकाबले में पुजारा बुरी तरह फ्लॉप रहे। दोनों पारियों में वो गैरजिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हुए। पुजारा काफी पहले ही टीम इंडिया से बाहर हो जाते लेकिन काउंटी ने इनकी इज्जत बचा ली क्योंकि वहां वो शतक पर शतक बना रहे थे। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के बाद पुजारा इंग्लैंड चले गए थे, ताकि वहां रहकर वो इंग्लैंड की परिस्तिथियों से वाकिफ हो सकें लेकिन लगा नहीं कि उन्होंने कुछ सीखा भी। पुजारा का सारा अनुभव मिट्टी में मिल गया। उन्हें देखकर लगा भी नहीं कि वो जीतने आए हैं। पहली पारी में 14 रन बनाने वाले पुजारा दूसरी पारी में 27 रन बनाकर पवेलियन लौटे। ऐसे में अब लगता नहीं है कि वो WTC 2023-25 में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। इस लिस्ट में तीसरा नाम अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) का है, जिनका टेस्ट करियर WTC Final 2023 के साथ ही खत्म हो चुका है। रहाणे ही एक इकलौते खिलाड़ी थे, जिन्होंने फ़ाइनल मैच में टीम इंडिया की लाज बचाई थी। उन्होंने फ़ाइनल मैच की पहली पारी में 89 रन जबकि दूसरी पारी में 46 रन की पारी खेली थी। कुल मिलाकर उन्होंने 135 रन बनाए थे। रहाणे ने कमबैक करते हुए बड़ी पारी खेली। हालांकि, इसके बावजूद भी वो संन्यास ले सकते हैं क्योंकि श्रेयस अय्यर के वापस आने की सूरत में उनका बाहर होना तय है। साथ ही उनकी उम्र भी ज्यादा हो चुकी है। वो 35 साल के हैं। ऐसे में अब लगता नहीं है कि वो WTC 2023-25 में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
WTC Final दो हज़ार तेईस में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के हाथों दो सौ नौ रनों से करारी मात झेलनी पड़ी। इस हार ने भारत के टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर काफी सवाल खड़े कर दिए। फ़ाइनल मैच में टीम के सीनियर खिलाड़ी ही अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम साबित हुए। खिलाड़ियों की बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में ही समस्या दिखी। ऐसे में तीन ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस मैच के जरिये भारत के लिए अपना आखिरी ICC टूर्नामेंट खेल लिया है और अब उनके पास संन्यास के आलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इस लिस्ट में पहला नाम उमेश यादव का आता है, जो फ़ाइनल मैच में बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए। इस गेंदबाज को देखकर ऐसा लगता है कि या तो ये सिफारिश पर टीम इंडिया में जगह बनाता है या BCCI को धोखा देकर टीम में आता है क्योंकि उमेश क दो मैच में शानदार प्रदर्शन करते हैं, टीम इंडिया में जगह बनाते हैं और वहां ख़राब प्रदर्शन कर टीम को मैच हरवा देते हैं। WTC Final दो हज़ार तेईस में उन्होंने पहली पारी में उन्होंने एक भी विकेट नहीं निकाला जबकि दूसरी पारी में वो मात्र दो विकेट ही हासिल कर पाए। कंगारुओं ने तो इन्हें धूनकर रख दिया था। पूरे मैच में यादव ने एक सौ इकतीस रन लुटा दिए। से में अब लगता नहीं है कि वो WTC दो हज़ार तेईस-पच्चीस में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। इस लिस्ट में दूसरा नाम चेतेश्वर पुजारा का है, जिनका टेस्ट करियर WTC Final दो हज़ार तेईस के साथ ही खत्म हो चुका है। इस फ़ाइनल मुकाबले में पुजारा बुरी तरह फ्लॉप रहे। दोनों पारियों में वो गैरजिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हुए। पुजारा काफी पहले ही टीम इंडिया से बाहर हो जाते लेकिन काउंटी ने इनकी इज्जत बचा ली क्योंकि वहां वो शतक पर शतक बना रहे थे। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के बाद पुजारा इंग्लैंड चले गए थे, ताकि वहां रहकर वो इंग्लैंड की परिस्तिथियों से वाकिफ हो सकें लेकिन लगा नहीं कि उन्होंने कुछ सीखा भी। पुजारा का सारा अनुभव मिट्टी में मिल गया। उन्हें देखकर लगा भी नहीं कि वो जीतने आए हैं। पहली पारी में चौदह रन बनाने वाले पुजारा दूसरी पारी में सत्ताईस रन बनाकर पवेलियन लौटे। ऐसे में अब लगता नहीं है कि वो WTC दो हज़ार तेईस-पच्चीस में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। इस लिस्ट में तीसरा नाम अजिंक्य रहाणे का है, जिनका टेस्ट करियर WTC Final दो हज़ार तेईस के साथ ही खत्म हो चुका है। रहाणे ही एक इकलौते खिलाड़ी थे, जिन्होंने फ़ाइनल मैच में टीम इंडिया की लाज बचाई थी। उन्होंने फ़ाइनल मैच की पहली पारी में नवासी रन जबकि दूसरी पारी में छियालीस रन की पारी खेली थी। कुल मिलाकर उन्होंने एक सौ पैंतीस रन बनाए थे। रहाणे ने कमबैक करते हुए बड़ी पारी खेली। हालांकि, इसके बावजूद भी वो संन्यास ले सकते हैं क्योंकि श्रेयस अय्यर के वापस आने की सूरत में उनका बाहर होना तय है। साथ ही उनकी उम्र भी ज्यादा हो चुकी है। वो पैंतीस साल के हैं। ऐसे में अब लगता नहीं है कि वो WTC दो हज़ार तेईस-पच्चीस में नजर आने वाले हैं। अगर वो संन्यास लेते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
दीखते हैं क्योंकि 'जीका' के बदले 'जी की' ऐसा होना इसलिए उचित है कि 'भावति' यह क्रियाद्योतक विशेषण है 'बात' की विशेषता बतलाता है। क्योंकि अर्थ ऐसा है कि 'हे प्रानप्रिय जी की भावती बात सुनो' तो 'जीकी' के बदले 'जी का' इसलिए कहा गया है कि उत्तर की चौपाई में 'टीका' पद है। सो अनुप्रास के कारण स्त्रीलिंग को पुल्लिंग कर देना पड़ा । ऐसे ही 'मोरी' का विशेष्य पद 'मनोरथ' है, और वह पुँल्लिंग है । होना चाहिए था 'मोरा'; परन्तु पूर्व की चौपाई में 'जोरी' आया है इस कारण इसको 'मोरी' कर देना पड़ा। ऐसे ही अन्यत्र भी समझ लेना चाहिए । फिर कारकों के अर्थ का भी बदलाव नहीं होता। जिस कारक का जिस अर्थ में प्रयोग होना हमने अपने 'भाषातत्त्वप्रकाश' में बतलाया है वही अर्थ मानस आदि छंद-ग्रंथों में भी जानना चाहिए । पदों का जो कुछ बदलाव मानस में देखा जाता है सो वचन और विभक्ति के बदलाव के कारण, और कभी कभी अनुप्रास अथवा कवि की स्वतंत्रता के कारण हुआ है । यह बात 'भाषातत्त्वप्रकाश' में बतलाई गई है कि एकवचन में संज्ञा का कुछ बदलाव नहीं होता। मानस में एकवचन का कोई चिह्न नहीं होता। बहुवचन के कारण जो रूप में बदलाव • दीखता है उसी को आगे दिखलाते हैं । (चौ०) विदुषन प्रभु विराटमय दीशा (अर्थ) १ प्रभु २ पंडितों को ३ विराट-स्वरूप ४ दिखाई पड़े ।
दीखते हैं क्योंकि 'जीका' के बदले 'जी की' ऐसा होना इसलिए उचित है कि 'भावति' यह क्रियाद्योतक विशेषण है 'बात' की विशेषता बतलाता है। क्योंकि अर्थ ऐसा है कि 'हे प्रानप्रिय जी की भावती बात सुनो' तो 'जीकी' के बदले 'जी का' इसलिए कहा गया है कि उत्तर की चौपाई में 'टीका' पद है। सो अनुप्रास के कारण स्त्रीलिंग को पुल्लिंग कर देना पड़ा । ऐसे ही 'मोरी' का विशेष्य पद 'मनोरथ' है, और वह पुँल्लिंग है । होना चाहिए था 'मोरा'; परन्तु पूर्व की चौपाई में 'जोरी' आया है इस कारण इसको 'मोरी' कर देना पड़ा। ऐसे ही अन्यत्र भी समझ लेना चाहिए । फिर कारकों के अर्थ का भी बदलाव नहीं होता। जिस कारक का जिस अर्थ में प्रयोग होना हमने अपने 'भाषातत्त्वप्रकाश' में बतलाया है वही अर्थ मानस आदि छंद-ग्रंथों में भी जानना चाहिए । पदों का जो कुछ बदलाव मानस में देखा जाता है सो वचन और विभक्ति के बदलाव के कारण, और कभी कभी अनुप्रास अथवा कवि की स्वतंत्रता के कारण हुआ है । यह बात 'भाषातत्त्वप्रकाश' में बतलाई गई है कि एकवचन में संज्ञा का कुछ बदलाव नहीं होता। मानस में एकवचन का कोई चिह्न नहीं होता। बहुवचन के कारण जो रूप में बदलाव • दीखता है उसी को आगे दिखलाते हैं । विदुषन प्रभु विराटमय दीशा एक प्रभु दो पंडितों को तीन विराट-स्वरूप चार दिखाई पड़े ।
एक वीडियो वायरल से रातों - रात फेमस हुई टिकटॉक गर्ल निशा गुरागेन इंस्टाग्राम पर अपने नए - नए अवतार अपलोड्स करती रहती हैं। हम आपको दिखा रहे हैं, उनकी लेटेस्ट अदाएं। निशा ने अपनी शिक्षा मुंबई के एक निजी स्कूल से पूरी की और कॉमर्स में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की। निशा ने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया है। वह कथित तौर पर सिंगल हैं। हालांकि उसके साथी टिक टॉक स्टार विशाल पांडे के साथ डेटिंग की अफवाहें हैं। निशा की कम हीं तस्वीरें हैं जिसमें वह अपनी फैमिली के साथ दिख रही हों। निशा एक इवेंट का 1.5 से 2 लाख रुपए लेती हैं। निशा ने अपने टिक टॉक वीडियोज के जरिए स्टारडम हासिल करने के बाद म्यूजिक वीडियो में भी किस्मत आजमाया। वह पहली बार 2019 में पंजाबी म्यूजिक एल्बम में नजर आईं। वह पहली बार 2019 में पंजाबी म्यूजिक एल्बम में नजर आईं। इसके बाद उन्होंने सुख संधू द्वारा जट्ट वी जट्टा नाम की एक दूसरे म्यूजिक वीडियो में नजर आईं। निशा कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 2 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। हाल ही में टिकटॉक सुपरस्टार निशा गुरगैन के नाम से सोशल मीडिया में एक अश्लील एमएमएस वायरल हो रहा है। हालांकि एमएमएस वायरल होने के बाद निशा ने साफ किया है कि वीडियो में दिख रही लड़की वह नहीं हैं। एमएमएस के बाद निशा ने एक वीडियो डालकर कहा इसे शेयर करना बंद करें। एक लैटर भी निशा के नाम से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि यह वीडियो उसी का है। कुछ लोगों का कहना है स्टारडम और फॉलोइंग बढ़ाने के लिए यह किया गया। टिकटॉक बैन होने के बाद अभी तक निशा की प्रतिक्रिया नहीं आई है। निशा गुरगैन (Nisha Guragain) एक लोकप्रिय टिक टॉक स्टार हैं। वह इंस्टाग्राम इन्फ्यूएंसर भी हैं। निशा को मॉडलिंग और डांस का बहुत शौक है। 23 साल की निशा का जन्म 1 अक्टूबर 1997 को मुंबई में हुआ था। उनका जन्म और पालन-पोषण एक नेपाली परिवार में हुआ था। निशा के माता-पिता के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने अपने पहले के कुछ वीडियो और सोशल मीडिया तस्वीरों में मां के साथ तस्वीरें शेयर की हैं।
एक वीडियो वायरल से रातों - रात फेमस हुई टिकटॉक गर्ल निशा गुरागेन इंस्टाग्राम पर अपने नए - नए अवतार अपलोड्स करती रहती हैं। हम आपको दिखा रहे हैं, उनकी लेटेस्ट अदाएं। निशा ने अपनी शिक्षा मुंबई के एक निजी स्कूल से पूरी की और कॉमर्स में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की। निशा ने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया है। वह कथित तौर पर सिंगल हैं। हालांकि उसके साथी टिक टॉक स्टार विशाल पांडे के साथ डेटिंग की अफवाहें हैं। निशा की कम हीं तस्वीरें हैं जिसमें वह अपनी फैमिली के साथ दिख रही हों। निशा एक इवेंट का एक.पाँच से दो लाख रुपए लेती हैं। निशा ने अपने टिक टॉक वीडियोज के जरिए स्टारडम हासिल करने के बाद म्यूजिक वीडियो में भी किस्मत आजमाया। वह पहली बार दो हज़ार उन्नीस में पंजाबी म्यूजिक एल्बम में नजर आईं। वह पहली बार दो हज़ार उन्नीस में पंजाबी म्यूजिक एल्बम में नजर आईं। इसके बाद उन्होंने सुख संधू द्वारा जट्ट वी जट्टा नाम की एक दूसरे म्यूजिक वीडियो में नजर आईं। निशा कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैं। इंस्टाग्राम पर उनके दो मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। हाल ही में टिकटॉक सुपरस्टार निशा गुरगैन के नाम से सोशल मीडिया में एक अश्लील एमएमएस वायरल हो रहा है। हालांकि एमएमएस वायरल होने के बाद निशा ने साफ किया है कि वीडियो में दिख रही लड़की वह नहीं हैं। एमएमएस के बाद निशा ने एक वीडियो डालकर कहा इसे शेयर करना बंद करें। एक लैटर भी निशा के नाम से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि यह वीडियो उसी का है। कुछ लोगों का कहना है स्टारडम और फॉलोइंग बढ़ाने के लिए यह किया गया। टिकटॉक बैन होने के बाद अभी तक निशा की प्रतिक्रिया नहीं आई है। निशा गुरगैन एक लोकप्रिय टिक टॉक स्टार हैं। वह इंस्टाग्राम इन्फ्यूएंसर भी हैं। निशा को मॉडलिंग और डांस का बहुत शौक है। तेईस साल की निशा का जन्म एक अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे को मुंबई में हुआ था। उनका जन्म और पालन-पोषण एक नेपाली परिवार में हुआ था। निशा के माता-पिता के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने अपने पहले के कुछ वीडियो और सोशल मीडिया तस्वीरों में मां के साथ तस्वीरें शेयर की हैं।
प्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेत्री मेग रयान1 9 नवंबर, 1 9 61 को फेयरफील्ड, कनेक्टिकट, यूएसए में पैदा हुआ। पूरा नाम मार्गरेट मैरी एमिली एनी खैर है। उसका मंच नाम, अभिनेत्री अंग्रेजी शब्द जर्मनी (जर्मनी) के आंग्राम से ली गई। मेग के पिता, हैरी खैर ने गणित पढ़ायाहाईस्कूल, और उनकी मां सुसान हिरा जॉर्डन एक कास्टिंग एजेंट थीं। भविष्य की अभिनेत्री के अलावा, परिवार के तीन बच्चे थे। मेग दो बहनों, एनी और दाना के साथ बड़े हुए, और उनके भाई एंड्रयू के साथ, जो समय के साथ प्रसिद्ध बैंडियन बैंड और बिली पिलीग्रिम के एकल कलाकार बने। माता-पिता ने कैथोलिक विश्वास में बच्चों को उठाया, नियमित रूप से रविवार की पूजा सेवाओं में भाग लेने की कोशिश की और बच्चों को ईसाई नैतिकता के लिए सिखाया। मदर मेग ने अपने बच्चों के हितों में हस्तक्षेप नहीं कियाऔर उन्हें जीवन में अपने स्वयं के पथ चयन करने की अनुमति। वह दृढ़ता से एक अभिनेत्री बनने की इच्छा का समर्थन किया, और मार्गरेट अपने अभिनय की मूल बातें गुरु, के रूप में बचपन से ही वह अपने आप को इस क्षेत्र में खोजने की कोशिश कर रहा था मदद की। धन्यवाद अपने समर्थन और समझ, मेग रयान, जिसका फिल्मोग्राफी विविध और समृद्ध है, एक अभिनेत्री बनने के लिए, निर्भीकता विभिन्न शैलियों में अपने हाथ की कोशिश की, जानते हुए भी कि करीबी लोग आवश्यक रूप तिरस्कार करने के लिए कुछ भी नहीं है इसके बारे में अनुमोदन, और। स्कूल में लड़की ने बहुत अच्छी तरह से अध्ययन किया था, थाएक उत्कृष्ट छात्र और शिक्षकों और सहपाठियों के साथ अच्छी तरह से मिला। 1 9 7 9 में, मेग ने कनेक्टिकट विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के संकाय में प्रवेश किया, सफलतापूर्वक 2 वर्षों तक अध्ययन किया, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया। शिक्षा उनकी अभिनेत्री खत्म नहीं हुई है, अभिनय करने के लिए उपज। इसलिए, एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में आखिरी अंतिम परीक्षाओं से कुछ समय पहले, लड़की ने अचानक अपने जीवन को बदलने और अभिनय कौशल का अध्ययन शुरू करने का फैसला किया। मेग रयान के साथ फिल्में हमेशा आकर्षित करती हैंसार्वजनिक और आलोचकों का ध्यान। अभिनेत्री के उत्कृष्ट व्यक्तित्व, उसके सुंदरता और क्षमता पूरी तरह से भूमिका प्रत्येक सिनेमाटोग्राफिक आकर्षण और एक विशेष मामला है, जो दुनिया भर में फिल्म सितारों के कई प्रशंसकों के दिलों को जीता पर लगाए गए करने के लिए इस्तेमाल करने के लिए। उल्लेखनीय बाह्य डेटा के अलावा, अभिनेत्री असाधारण आकर्षण है और स्क्रीन पर काफी अलग हो सकता है, हमेशा एक वास्तविक जीवन शेष। मेग रयान, जिनकी फिल्मोग्राफी में शामिल हैंबिली क्रिस्टल, निकोलस केज, टॉम हैंक्स, Klayan केविन Timm Robbinson, टॉम क्रूज, एंथनी एडवर्ड्स और कई अन्य लोगों, हमेशा आसान की तरह प्रसिद्ध और प्रतिभाशाली अभिनेताओं के साथ कई सहयोग फिल्मों पर उनकी टीम के साथियों के साथ संपर्क खोजने के लिए। यह आसान आसान है और पूरे दल की भावनात्मक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव शूटिंग बनाता है। मेग रयान, जिनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्में 90 के दशक में गिर गईंसालों, अभी भी उनकी प्रतिभा की बहुमुखी प्रतिभा के साथ प्रशंसकों को आश्चर्यचकित करता है और अक्सर अलग-अलग भूमिकाओं में खुद को कोशिश करता है। अभिनेत्री की लचीलापन और रचनात्मकता ने उन्हें विभिन्न फिल्म त्यौहारों, दर्शकों के प्यार, लाभदायक अनुबंधों के लिए बहुत सारे पुरस्कारों की गारंटी दी। 1 9 8 9 में रोमांटिक कॉमेडी "जब हैरी मेट सैली" में अभिनय करने वाली पहली भूमिका भी दुनिया सिनेमा के क्लासिक के रूप में कुछ क्षणों में पहचानी गई थी। अमेरिकी लोगों की विशेष लोकप्रियता और प्यारअभिनेत्री जीता, रोमांटिक मेलोड्रामा "स्लीप्लेस इन सिएटल" में अभिनय किया, जो इसकी शैली में एक पंथ बन गया। ओलिवर स्टोन "डोरज़" की फिल्म में नशीली दवाओं के नशे की भूमिका से डरते नहीं हैं और "जब एक आदमी एक औरत से प्यार करता है," मेग रयान एक हल्के ढंग से बहुत ही आकर्षक छवि में दिखाई नहीं देता है। हालांकि, अपने प्रशंसकों के लिए सब कुछ में कामुक, कमजोर और सकारात्मक बने रहे। छवि में उपयोग करने के लिए एक अभिनेत्री की क्षमता और उसकी प्रत्येक नायिका की छवि मास्टर करने की क्षमता उसकी निस्संदेह प्रतिभा और जबरदस्त करिश्मा के बारे में बताती है। मेग रयान फिल्मों में लगातार उपस्थिति के साथ प्रशंसकों को आश्चर्यचकित नहीं करना बंद कर देता है। अक्सर यह कॉमेडी फिल्मों या मेलोड्राम में भूमिकाओं के साथ दर्शकों को प्रसन्न करता है। हम मेग रयान की नवीनतम फिल्मों पर आपका ध्यान प्रस्तुत करते हैं। उनकी सूची निम्नानुसार हैः - थ्रिलर "जुनून का डार्क साइड"; - बाईपिक "भाग्य के खिलाफ"; - कॉमेडी "डील"; - कॉमेडी "माई मॉम का नया प्रेमी"; - कॉमेडी "अरे, तलाक!"; - मेलोड्रामा "महिलाएं" और अन्य। विभिन्न शैलियों की अभिनेत्री की सफल भूमिका के अलावा, मेगरयान, जिसकी फिल्मोग्राफी बहुत व्यापक है, खुद को निर्माता के रूप में कोशिश करती है। उसका कामः "फ्रांसीसी चुंबन", "उत्तरी लाइट्स", "लॉस्ट सोल्स", "वेडिंग प्लानर", "रेगिस्तान ऑफ द रेगिस्तान", "प्रवेश"। ये फिल्में "स्वादिष्ट" कहानियों के प्रशंसकों के बीच एक बड़ी सफलता हैं।
प्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेत्री मेग रयानएक नौ नवंबर, एक नौ इकसठ को फेयरफील्ड, कनेक्टिकट, यूएसए में पैदा हुआ। पूरा नाम मार्गरेट मैरी एमिली एनी खैर है। उसका मंच नाम, अभिनेत्री अंग्रेजी शब्द जर्मनी के आंग्राम से ली गई। मेग के पिता, हैरी खैर ने गणित पढ़ायाहाईस्कूल, और उनकी मां सुसान हिरा जॉर्डन एक कास्टिंग एजेंट थीं। भविष्य की अभिनेत्री के अलावा, परिवार के तीन बच्चे थे। मेग दो बहनों, एनी और दाना के साथ बड़े हुए, और उनके भाई एंड्रयू के साथ, जो समय के साथ प्रसिद्ध बैंडियन बैंड और बिली पिलीग्रिम के एकल कलाकार बने। माता-पिता ने कैथोलिक विश्वास में बच्चों को उठाया, नियमित रूप से रविवार की पूजा सेवाओं में भाग लेने की कोशिश की और बच्चों को ईसाई नैतिकता के लिए सिखाया। मदर मेग ने अपने बच्चों के हितों में हस्तक्षेप नहीं कियाऔर उन्हें जीवन में अपने स्वयं के पथ चयन करने की अनुमति। वह दृढ़ता से एक अभिनेत्री बनने की इच्छा का समर्थन किया, और मार्गरेट अपने अभिनय की मूल बातें गुरु, के रूप में बचपन से ही वह अपने आप को इस क्षेत्र में खोजने की कोशिश कर रहा था मदद की। धन्यवाद अपने समर्थन और समझ, मेग रयान, जिसका फिल्मोग्राफी विविध और समृद्ध है, एक अभिनेत्री बनने के लिए, निर्भीकता विभिन्न शैलियों में अपने हाथ की कोशिश की, जानते हुए भी कि करीबी लोग आवश्यक रूप तिरस्कार करने के लिए कुछ भी नहीं है इसके बारे में अनुमोदन, और। स्कूल में लड़की ने बहुत अच्छी तरह से अध्ययन किया था, थाएक उत्कृष्ट छात्र और शिक्षकों और सहपाठियों के साथ अच्छी तरह से मिला। एक नौ सात नौ में, मेग ने कनेक्टिकट विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के संकाय में प्रवेश किया, सफलतापूर्वक दो वर्षों तक अध्ययन किया, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया। शिक्षा उनकी अभिनेत्री खत्म नहीं हुई है, अभिनय करने के लिए उपज। इसलिए, एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में आखिरी अंतिम परीक्षाओं से कुछ समय पहले, लड़की ने अचानक अपने जीवन को बदलने और अभिनय कौशल का अध्ययन शुरू करने का फैसला किया। मेग रयान के साथ फिल्में हमेशा आकर्षित करती हैंसार्वजनिक और आलोचकों का ध्यान। अभिनेत्री के उत्कृष्ट व्यक्तित्व, उसके सुंदरता और क्षमता पूरी तरह से भूमिका प्रत्येक सिनेमाटोग्राफिक आकर्षण और एक विशेष मामला है, जो दुनिया भर में फिल्म सितारों के कई प्रशंसकों के दिलों को जीता पर लगाए गए करने के लिए इस्तेमाल करने के लिए। उल्लेखनीय बाह्य डेटा के अलावा, अभिनेत्री असाधारण आकर्षण है और स्क्रीन पर काफी अलग हो सकता है, हमेशा एक वास्तविक जीवन शेष। मेग रयान, जिनकी फिल्मोग्राफी में शामिल हैंबिली क्रिस्टल, निकोलस केज, टॉम हैंक्स, Klayan केविन Timm Robbinson, टॉम क्रूज, एंथनी एडवर्ड्स और कई अन्य लोगों, हमेशा आसान की तरह प्रसिद्ध और प्रतिभाशाली अभिनेताओं के साथ कई सहयोग फिल्मों पर उनकी टीम के साथियों के साथ संपर्क खोजने के लिए। यह आसान आसान है और पूरे दल की भावनात्मक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव शूटिंग बनाता है। मेग रयान, जिनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्में नब्बे के दशक में गिर गईंसालों, अभी भी उनकी प्रतिभा की बहुमुखी प्रतिभा के साथ प्रशंसकों को आश्चर्यचकित करता है और अक्सर अलग-अलग भूमिकाओं में खुद को कोशिश करता है। अभिनेत्री की लचीलापन और रचनात्मकता ने उन्हें विभिन्न फिल्म त्यौहारों, दर्शकों के प्यार, लाभदायक अनुबंधों के लिए बहुत सारे पुरस्कारों की गारंटी दी। एक नौ आठ नौ में रोमांटिक कॉमेडी "जब हैरी मेट सैली" में अभिनय करने वाली पहली भूमिका भी दुनिया सिनेमा के क्लासिक के रूप में कुछ क्षणों में पहचानी गई थी। अमेरिकी लोगों की विशेष लोकप्रियता और प्यारअभिनेत्री जीता, रोमांटिक मेलोड्रामा "स्लीप्लेस इन सिएटल" में अभिनय किया, जो इसकी शैली में एक पंथ बन गया। ओलिवर स्टोन "डोरज़" की फिल्म में नशीली दवाओं के नशे की भूमिका से डरते नहीं हैं और "जब एक आदमी एक औरत से प्यार करता है," मेग रयान एक हल्के ढंग से बहुत ही आकर्षक छवि में दिखाई नहीं देता है। हालांकि, अपने प्रशंसकों के लिए सब कुछ में कामुक, कमजोर और सकारात्मक बने रहे। छवि में उपयोग करने के लिए एक अभिनेत्री की क्षमता और उसकी प्रत्येक नायिका की छवि मास्टर करने की क्षमता उसकी निस्संदेह प्रतिभा और जबरदस्त करिश्मा के बारे में बताती है। मेग रयान फिल्मों में लगातार उपस्थिति के साथ प्रशंसकों को आश्चर्यचकित नहीं करना बंद कर देता है। अक्सर यह कॉमेडी फिल्मों या मेलोड्राम में भूमिकाओं के साथ दर्शकों को प्रसन्न करता है। हम मेग रयान की नवीनतम फिल्मों पर आपका ध्यान प्रस्तुत करते हैं। उनकी सूची निम्नानुसार हैः - थ्रिलर "जुनून का डार्क साइड"; - बाईपिक "भाग्य के खिलाफ"; - कॉमेडी "डील"; - कॉमेडी "माई मॉम का नया प्रेमी"; - कॉमेडी "अरे, तलाक!"; - मेलोड्रामा "महिलाएं" और अन्य। विभिन्न शैलियों की अभिनेत्री की सफल भूमिका के अलावा, मेगरयान, जिसकी फिल्मोग्राफी बहुत व्यापक है, खुद को निर्माता के रूप में कोशिश करती है। उसका कामः "फ्रांसीसी चुंबन", "उत्तरी लाइट्स", "लॉस्ट सोल्स", "वेडिंग प्लानर", "रेगिस्तान ऑफ द रेगिस्तान", "प्रवेश"। ये फिल्में "स्वादिष्ट" कहानियों के प्रशंसकों के बीच एक बड़ी सफलता हैं।
हर दिन अधिक से अधिक लोग खेल और एचएलएस के अनुयायी बन जाते हैं। आत्म-विकास और पूर्णता की आकांक्षा के दौरान "शुरुआती" पर प्रश्न हैं, जिनके जवाब वे उलझन में हैं। एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करने का निर्णय लेते समय, एक नियम के रूप में, बड़ी संख्या में प्रश्न उठते हैं, खासकर उचित पोषण से जुड़े लोग। हमारी सिफारिशों के बाद, यह समझना आसान है कि खाने के लिए बेहतर होता हैः प्रशिक्षण या उसके बाद, और शरीर को किस तत्व की आवश्यकता होती है। इस सवाल का जवाब कि क्या प्रशिक्षण के बाद खाना खाया जा सकता है सकारात्मक होगा - सबसे महत्वपूर्ण बात यह जानना है कि आपके आहार में कौन से खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है और इसमें शामिल किया जाना चाहिए। बहुत से लोग सोच रहे हैं कि प्रशिक्षण के बाद कितने मिनट आप खा सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि आपको कक्षा के बाद कम से कम बीस मिनट तक इंतजार करना होगा। वजन कम करने के लिए कसरत के बाद खाने के लिए बेहतर क्या है? उचित पोषण एक अच्छी आकृति की कुंजी है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, सही तरीके से आहार को सही और बनाना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के बाद गिलहरी हो सकती है या नहीं, जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि एथलीट ने किस लक्ष्य को निर्धारित किया है। खेल के बाद पोषण शारीरिक गतिविधि के प्रकार पर निर्भर करता है। यदि द्रव्यमान को बढ़ाने या मांसपेशियों को मजबूत करने का कोई कार्य है, तो अभ्यास के कुछ घंटों के भीतर प्रोटीन में उच्च भोजन खाने के लिए आवश्यक है। कम वसा वाली मछली या मांस, दही, चिकन स्तन या प्रोटीन कॉकटेल। पोषण के इस सिद्धांत को चयापचय खिड़की का नियम कहा जाता है। इसमें मांसपेशियों की सही बहाली होती है। यदि आप समय पर नहीं खाते हैं, तो जिद्दी प्रशिक्षण से भी एक दृश्य परिणाम नहीं होगा। यह इस तथ्य के कारण है कि लोड के बाद आराम, पोषण और सही वसूली के कारण मांसपेशी द्रव्यमान बढ़ता है। सही आहार शरीर को एक नए दिन के लिए तैयार करता है, चयापचय को गति देता है और चयापचय में सुधार करता है। यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक किलोग्राम से छुटकारा पाने के लिए कार्डियो प्रशिक्षण पर जोर देता है, तो पोषण के सिद्धांत अलग-अलग होंगे। मुख्य कार्य "अतिरिक्त" कार्बोहाइड्रेट - ग्लाइकोजन की बहाली होगी। यदि आप अपने भंडार के लिए तैयार नहीं हैं, तो चयापचय प्रक्रिया धीमा हो जाएगी, और धीरज बहुत कम होगा। इस तरह के प्रशिक्षण के 20 मिनट बाद, आपको ताजा निचोड़ा हुआ फल या सब्जी का रस, चिकनी, कार्बोहाइड्रेट या मिल्कशेक के साथ पानी पीना होगा। इस मामले में, जल्दी से पचाने योग्य कार्बोहाइड्रेट से भरे उत्पाद उपयोगी होंगे। अभ्यास के बाद आप क्या नहीं खाते? याद रखें कि अनुचित पोषण, नियमित गहन प्रशिक्षण के साथ भी, आपकी आकृति खराब कर सकता है और शरीर की स्थिति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। - अभ्यास के बाद खाने के लिए कच्ची सब्जियां एक खराब विकल्प हैं। उनमें बहुत कम कैलोरी होती है, इसलिए आप ताकत हासिल नहीं कर सकते हैं और चयापचय दर में सुधार कर सकते हैं। इसके अलावा, कच्चे सब्जियों में प्रोटीन व्यावहारिक रूप से निहित नहीं है। - यदि आप वजन कम नहीं करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन मांसपेशियों के द्रव्यमान का निर्माण करने के लिए, तो सवाल का जवाब है कि क्या प्रशिक्षण के बाद केला खाना संभव है, सकारात्मक में होगा। संतरे, केले, सेब और अन्य फल, व्यायाम के बाद खाया जाता है, मांसपेशी द्रव्यमान में कमी को रोकता है। इसके अलावा, केले प्राकृतिक शक्ति होने के दौरान, कार्बोहाइड्रेट कॉकटेल की तुलना में अपनी ताकत को बहाल नहीं करते हैं। - जिन उत्पादों में बड़ी मात्रा में वसा होता है, वे सूट नहीं करते हैं। भूख शांत हो जाएगी, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान हासिल की गई सभी प्रगति नष्ट हो जाएगी। वसा चयापचय धीमा करते हैं।
हर दिन अधिक से अधिक लोग खेल और एचएलएस के अनुयायी बन जाते हैं। आत्म-विकास और पूर्णता की आकांक्षा के दौरान "शुरुआती" पर प्रश्न हैं, जिनके जवाब वे उलझन में हैं। एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करने का निर्णय लेते समय, एक नियम के रूप में, बड़ी संख्या में प्रश्न उठते हैं, खासकर उचित पोषण से जुड़े लोग। हमारी सिफारिशों के बाद, यह समझना आसान है कि खाने के लिए बेहतर होता हैः प्रशिक्षण या उसके बाद, और शरीर को किस तत्व की आवश्यकता होती है। इस सवाल का जवाब कि क्या प्रशिक्षण के बाद खाना खाया जा सकता है सकारात्मक होगा - सबसे महत्वपूर्ण बात यह जानना है कि आपके आहार में कौन से खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है और इसमें शामिल किया जाना चाहिए। बहुत से लोग सोच रहे हैं कि प्रशिक्षण के बाद कितने मिनट आप खा सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि आपको कक्षा के बाद कम से कम बीस मिनट तक इंतजार करना होगा। वजन कम करने के लिए कसरत के बाद खाने के लिए बेहतर क्या है? उचित पोषण एक अच्छी आकृति की कुंजी है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, सही तरीके से आहार को सही और बनाना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के बाद गिलहरी हो सकती है या नहीं, जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि एथलीट ने किस लक्ष्य को निर्धारित किया है। खेल के बाद पोषण शारीरिक गतिविधि के प्रकार पर निर्भर करता है। यदि द्रव्यमान को बढ़ाने या मांसपेशियों को मजबूत करने का कोई कार्य है, तो अभ्यास के कुछ घंटों के भीतर प्रोटीन में उच्च भोजन खाने के लिए आवश्यक है। कम वसा वाली मछली या मांस, दही, चिकन स्तन या प्रोटीन कॉकटेल। पोषण के इस सिद्धांत को चयापचय खिड़की का नियम कहा जाता है। इसमें मांसपेशियों की सही बहाली होती है। यदि आप समय पर नहीं खाते हैं, तो जिद्दी प्रशिक्षण से भी एक दृश्य परिणाम नहीं होगा। यह इस तथ्य के कारण है कि लोड के बाद आराम, पोषण और सही वसूली के कारण मांसपेशी द्रव्यमान बढ़ता है। सही आहार शरीर को एक नए दिन के लिए तैयार करता है, चयापचय को गति देता है और चयापचय में सुधार करता है। यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक किलोग्राम से छुटकारा पाने के लिए कार्डियो प्रशिक्षण पर जोर देता है, तो पोषण के सिद्धांत अलग-अलग होंगे। मुख्य कार्य "अतिरिक्त" कार्बोहाइड्रेट - ग्लाइकोजन की बहाली होगी। यदि आप अपने भंडार के लिए तैयार नहीं हैं, तो चयापचय प्रक्रिया धीमा हो जाएगी, और धीरज बहुत कम होगा। इस तरह के प्रशिक्षण के बीस मिनट बाद, आपको ताजा निचोड़ा हुआ फल या सब्जी का रस, चिकनी, कार्बोहाइड्रेट या मिल्कशेक के साथ पानी पीना होगा। इस मामले में, जल्दी से पचाने योग्य कार्बोहाइड्रेट से भरे उत्पाद उपयोगी होंगे। अभ्यास के बाद आप क्या नहीं खाते? याद रखें कि अनुचित पोषण, नियमित गहन प्रशिक्षण के साथ भी, आपकी आकृति खराब कर सकता है और शरीर की स्थिति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। - अभ्यास के बाद खाने के लिए कच्ची सब्जियां एक खराब विकल्प हैं। उनमें बहुत कम कैलोरी होती है, इसलिए आप ताकत हासिल नहीं कर सकते हैं और चयापचय दर में सुधार कर सकते हैं। इसके अलावा, कच्चे सब्जियों में प्रोटीन व्यावहारिक रूप से निहित नहीं है। - यदि आप वजन कम नहीं करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन मांसपेशियों के द्रव्यमान का निर्माण करने के लिए, तो सवाल का जवाब है कि क्या प्रशिक्षण के बाद केला खाना संभव है, सकारात्मक में होगा। संतरे, केले, सेब और अन्य फल, व्यायाम के बाद खाया जाता है, मांसपेशी द्रव्यमान में कमी को रोकता है। इसके अलावा, केले प्राकृतिक शक्ति होने के दौरान, कार्बोहाइड्रेट कॉकटेल की तुलना में अपनी ताकत को बहाल नहीं करते हैं। - जिन उत्पादों में बड़ी मात्रा में वसा होता है, वे सूट नहीं करते हैं। भूख शांत हो जाएगी, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान हासिल की गई सभी प्रगति नष्ट हो जाएगी। वसा चयापचय धीमा करते हैं।
6 एक योजना बनाते समय कुछ विनियोग का क्षेत्रीय आयटन आप कैसे निश्चित करेंगे। 7 किसी योजना मे विनियोग की प्राथमिकताओं और तरीके का निश्चय करने मेन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए ? क्या आप इस विचार से सहमत है कि भारतीय योजना निर्माताओं ने भारी और पुँजीग्न उद्योगों शक्ति तथा यातायात को बहुत अधिक ऊंची प्राथमिकता दी है तथा सामाजिक सेवाओं को बहुत कम प्राथमिकता दी है । What considerations should be kept in view in deciding the priorities and pattern of investment in a plan ? Do you think that Indian planners have given too much high priority to heavy and capital goods industries, power and transport and too low priority to social services ? 8 अद्ध विकसित देशों के आर्थिक विकास की योजनाओं में प्राथमिकता के निर्धारण के मानदण्ड की विवेचना कीजिए । Discuss the criteria for determination of priorities in plans for the economic development of developed countries 9 "वस्तु सतुन एव 'वित्तीय सतुलन योजनाओं को समरूप (Consistent) बनाने के लिए अन महत्त्वपूर्ण है।" कीजिए । * Commodity balance and financial balance' are very important for making a plan consistent " Discuss 10 भारत जैमी नियोजित विकासशील अर्थव्यवस्था में 'मूल्म नीति' एव वस्तु नियन्त्रण' को प्रकृति एवं उसके परिणामों का विश्लेषण कीजिए । (1976) Discuss the nature and consequences of 'price policy" and "commodity controls' in a planned developing economy iske India 11 परियोजना मूल्यांकन के विभिन्न मानदण्डो की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए । Discuss critically the various criteria for evaluation of projects 12 इस बात की जाँच कैसे की जा सकती है कि प्रस्तावित वृद्धि दर के लिए आवश्यक धन उपलब्ध है या नहीं ? How can one check whether the required funds are available to finance the postulated rate of growth? 13 किसी योजना को बनाते समय आप विभिन्न क्षेत्रो मे विनियोग के आबटन का निर्धारण कैसे घर ? 14 "राजनीतिक दष्टि से कर लगाने के स्थान पर मुद्रास्फीति आरम्भ करना आसान हो सकता है लेकिन मद्रास्फीति का नियन्त्रण करने उसकी उपाध्यता अधिक से अधिक करने और खसकी हानियाँ कम से कम करने के लिए आवश्यक उपाय निर्धारित और लागू करना करों मे वृद्धि से अधिक आमा नहीं है।" ( लुइस ) समझा दए । It may be easier political y to start an inflation than to tax but the measures which control inflation maximize its usefulness and minimize its disadvantage are no easier to adopt or administer than would be an increase in taxation Explain
छः एक योजना बनाते समय कुछ विनियोग का क्षेत्रीय आयटन आप कैसे निश्चित करेंगे। सात किसी योजना मे विनियोग की प्राथमिकताओं और तरीके का निश्चय करने मेन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए ? क्या आप इस विचार से सहमत है कि भारतीय योजना निर्माताओं ने भारी और पुँजीग्न उद्योगों शक्ति तथा यातायात को बहुत अधिक ऊंची प्राथमिकता दी है तथा सामाजिक सेवाओं को बहुत कम प्राथमिकता दी है । What considerations should be kept in view in deciding the priorities and pattern of investment in a plan ? Do you think that Indian planners have given too much high priority to heavy and capital goods industries, power and transport and too low priority to social services ? आठ अद्ध विकसित देशों के आर्थिक विकास की योजनाओं में प्राथमिकता के निर्धारण के मानदण्ड की विवेचना कीजिए । Discuss the criteria for determination of priorities in plans for the economic development of developed countries नौ "वस्तु सतुन एव 'वित्तीय सतुलन योजनाओं को समरूप बनाने के लिए अन महत्त्वपूर्ण है।" कीजिए । * Commodity balance and financial balance' are very important for making a plan consistent " Discuss दस भारत जैमी नियोजित विकासशील अर्थव्यवस्था में 'मूल्म नीति' एव वस्तु नियन्त्रण' को प्रकृति एवं उसके परिणामों का विश्लेषण कीजिए । Discuss the nature and consequences of 'price policy" and "commodity controls' in a planned developing economy iske India ग्यारह परियोजना मूल्यांकन के विभिन्न मानदण्डो की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए । Discuss critically the various criteria for evaluation of projects बारह इस बात की जाँच कैसे की जा सकती है कि प्रस्तावित वृद्धि दर के लिए आवश्यक धन उपलब्ध है या नहीं ? How can one check whether the required funds are available to finance the postulated rate of growth? तेरह किसी योजना को बनाते समय आप विभिन्न क्षेत्रो मे विनियोग के आबटन का निर्धारण कैसे घर ? चौदह "राजनीतिक दष्टि से कर लगाने के स्थान पर मुद्रास्फीति आरम्भ करना आसान हो सकता है लेकिन मद्रास्फीति का नियन्त्रण करने उसकी उपाध्यता अधिक से अधिक करने और खसकी हानियाँ कम से कम करने के लिए आवश्यक उपाय निर्धारित और लागू करना करों मे वृद्धि से अधिक आमा नहीं है।" समझा दए । It may be easier political y to start an inflation than to tax but the measures which control inflation maximize its usefulness and minimize its disadvantage are no easier to adopt or administer than would be an increase in taxation Explain
सुप्रीम कोर्ट उद्योगपति गौतम अदाणी के कारोबारी समूह को लेकर हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट की जांच की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। याचिका में रिपोर्ट की जांच शीर्ष अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने की मांग की गई है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष वकील विशाल तिवारी ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि मामले में दर्ज अन्य याचिकाओं के साथ उनकी अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई की जाए। तिवारी ने जनहित याचिका में बड़े कारोबारी घरानों को दिए गए 500 करोड़ रुपये से अधिक ऋण की मंजूरी नीति की निगरानी को लेकर एक विशेष समिति गठित करने की भी मांग की है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
सुप्रीम कोर्ट उद्योगपति गौतम अदाणी के कारोबारी समूह को लेकर हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट की जांच की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। याचिका में रिपोर्ट की जांच शीर्ष अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने की मांग की गई है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष वकील विशाल तिवारी ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि मामले में दर्ज अन्य याचिकाओं के साथ उनकी अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई की जाए। तिवारी ने जनहित याचिका में बड़े कारोबारी घरानों को दिए गए पाँच सौ करोड़ रुपये से अधिक ऋण की मंजूरी नीति की निगरानी को लेकर एक विशेष समिति गठित करने की भी मांग की है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
Health Tips: जहां एक ओर शहद कई गुणों से भरपूर होता है और उसके कई फायदों के बारे में आपने सुना होगा. इसका प्रयोग गले की खराश ठीक करने से लेकर मोटापे से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. परन्तु इसके अधिक इस्तेमाल के कई नुक्सान भी हैं. जी हां, हर चीज की तरह शहद की अति भी नुकसानदेह होती है. साथ ही अगर सही तरीके से इसका सेवन नहीं किया गया तो भी ये हानिकारक साबित होता है. आइए जानते हैं इससे होने वाले नुकसान के बारे में. ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग होने की दिक्कत भी हो सकती है. जिसके चलते पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी दिक्कत हो सकती है. इसके साथ ही इसके सेवन से बच्चों में बोटुलिज्म पॉइजनिंग होने का खतरा भी हो सकता है. शहद को वजन घटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की शहद के अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है. शहद चीनी के मुकाबले अच्छा होता है, लेकिन मीठा तो होता ही है. माना जाता है कि 1 चम्मच शहद में 64 कैलोरी होती है. जो आपके वजन को बढ़ाने का काम कर सकती है. कुछ लोगों को शहद के सेवन से एलर्जी हो सकती है. इसलिए ध्यान रखें, जब आप शहद का सेवन करें, तो आपको ध्यान रखना है कि कहीं आपको एलर्जी तो नहीं, जिन लोगों को शहद से एलर्जी होती है. उन्हें चेहरे पर सूजन, उल्टी कि शिकायत हो सकती है. शहद में एसिड पाया जाता है. जरूरत से ज्यादा इसका सेवन करते हैं तो ये आपके दांतों और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है. शहद का सेवन ज्यादा मात्रा में करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने की परेशानी हो सकती है. शहद में कुछ मात्रा में फ्रुक्टोज होता है जिसकी वजह से डाइबिटीज़ के पेशेंट को शहद का सेवन नहीं करना चाहिए. शहद पराग (पोलेन) से बना होता है. ये शर्कारा युक्त तरल पदार्थ होता है. अगर आपको इससे एलर्जी है तो शहद का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है. इसमें सांस लेने में दिक्कत, दानों जैसी समस्या होती है. इसके लिए बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से परामर्श लेकर ही शहद लें. Punjab, Ludhiana, Jalandhar, Amritsar, Patiala, Sangrur, Gurdaspur, Pathankot, Hoshiarpur, Tarn Taran, Firozpur, Fatehgarh Sahib, Faridkot, Moga, Bathinda, Rupnagar, Kapurthala, Badnala, Ambala,Uttar Pradesh, Agra, Bareilly, Banaras, Kashi, Lucknow, Moradabad, Kanpur, Varanasi, Gorakhpur, Bihar, Muzaffarpur, East Champaran, Kanpur, Darbhanga, Samastipur, Nalanda, Patna, Muzaffarpur, Jehanabad, Patna, Nalanda, Araria, Arwal, Aurangabad, Katihar, Kishanganj, Kaimur, Khagaria, Gaya, Gopalganj, Jamui, Jehanabad, Nawada, West Champaran, Purnia, East Champaran, Buxar, Banka, Begusarai, Bhagalpur, Bhojpur, Madhubani, Madhepura, Munger, Rohtas, Lakhisarai, Vaishali, Sheohar, Sheikhpura, Samastipur, Saharsa, Saran, Sitamarhi, Siwan, Supaul,Gujarat, Ahmedabad, Vadodara, Surat, Rajkot, Vadodara, Junagadh, Anand, Jamnagar, Gir Somnath, Mehsana, Kutch, Sabarkantha, Amreli, Kheda, Rajkot, Bhavnagar, Aravalli, Dahod, Banaskantha, Gandhinagar, Bhavnagar, Jamnagar, Valsad, Bharuch , Mahisagar, Patan, Gandhinagar, Navsari, Porbandar, Narmada, Surendranagar, Chhota Udaipur, Tapi, Morbi, Botad, Dang, Rajasthan, Jaipur, Alwar, Udaipur, Kota, Jodhpur, Jaisalmer, Sikar, Jhunjhunu, Sri Ganganagar, Barmer, Hanumangarh, Ajmer, Pali, Bharatpur, Bikaner, Churu, Chittorgarh, Rajsamand, Nagaur, Bhilwara, Tonk, Dausa, Dungarpur, Jhalawar, Banswara, Pratapgarh, Sirohi, Bundi, Baran, Sawai Madhopur, Karauli, Dholpur, Jalore,Haryana, Gurugram, Faridabad, Sonipat, Hisar, Ambala, Karnal, Panipat, Rohtak, Rewari, Panchkula, Kurukshetra, Yamunanagar, Sirsa, Mahendragarh, Bhiwani, Jhajjar, Palwal, Fatehabad, Kaithal, Jind, Nuh, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल,
Health Tips: जहां एक ओर शहद कई गुणों से भरपूर होता है और उसके कई फायदों के बारे में आपने सुना होगा. इसका प्रयोग गले की खराश ठीक करने से लेकर मोटापे से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. परन्तु इसके अधिक इस्तेमाल के कई नुक्सान भी हैं. जी हां, हर चीज की तरह शहद की अति भी नुकसानदेह होती है. साथ ही अगर सही तरीके से इसका सेवन नहीं किया गया तो भी ये हानिकारक साबित होता है. आइए जानते हैं इससे होने वाले नुकसान के बारे में. ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग होने की दिक्कत भी हो सकती है. जिसके चलते पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी दिक्कत हो सकती है. इसके साथ ही इसके सेवन से बच्चों में बोटुलिज्म पॉइजनिंग होने का खतरा भी हो सकता है. शहद को वजन घटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की शहद के अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है. शहद चीनी के मुकाबले अच्छा होता है, लेकिन मीठा तो होता ही है. माना जाता है कि एक चम्मच शहद में चौंसठ कैलोरी होती है. जो आपके वजन को बढ़ाने का काम कर सकती है. कुछ लोगों को शहद के सेवन से एलर्जी हो सकती है. इसलिए ध्यान रखें, जब आप शहद का सेवन करें, तो आपको ध्यान रखना है कि कहीं आपको एलर्जी तो नहीं, जिन लोगों को शहद से एलर्जी होती है. उन्हें चेहरे पर सूजन, उल्टी कि शिकायत हो सकती है. शहद में एसिड पाया जाता है. जरूरत से ज्यादा इसका सेवन करते हैं तो ये आपके दांतों और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है. शहद का सेवन ज्यादा मात्रा में करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने की परेशानी हो सकती है. शहद में कुछ मात्रा में फ्रुक्टोज होता है जिसकी वजह से डाइबिटीज़ के पेशेंट को शहद का सेवन नहीं करना चाहिए. शहद पराग से बना होता है. ये शर्कारा युक्त तरल पदार्थ होता है. अगर आपको इससे एलर्जी है तो शहद का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है. इसमें सांस लेने में दिक्कत, दानों जैसी समस्या होती है. इसके लिए बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से परामर्श लेकर ही शहद लें. Punjab, Ludhiana, Jalandhar, Amritsar, Patiala, Sangrur, Gurdaspur, Pathankot, Hoshiarpur, Tarn Taran, Firozpur, Fatehgarh Sahib, Faridkot, Moga, Bathinda, Rupnagar, Kapurthala, Badnala, Ambala,Uttar Pradesh, Agra, Bareilly, Banaras, Kashi, Lucknow, Moradabad, Kanpur, Varanasi, Gorakhpur, Bihar, Muzaffarpur, East Champaran, Kanpur, Darbhanga, Samastipur, Nalanda, Patna, Muzaffarpur, Jehanabad, Patna, Nalanda, Araria, Arwal, Aurangabad, Katihar, Kishanganj, Kaimur, Khagaria, Gaya, Gopalganj, Jamui, Jehanabad, Nawada, West Champaran, Purnia, East Champaran, Buxar, Banka, Begusarai, Bhagalpur, Bhojpur, Madhubani, Madhepura, Munger, Rohtas, Lakhisarai, Vaishali, Sheohar, Sheikhpura, Samastipur, Saharsa, Saran, Sitamarhi, Siwan, Supaul,Gujarat, Ahmedabad, Vadodara, Surat, Rajkot, Vadodara, Junagadh, Anand, Jamnagar, Gir Somnath, Mehsana, Kutch, Sabarkantha, Amreli, Kheda, Rajkot, Bhavnagar, Aravalli, Dahod, Banaskantha, Gandhinagar, Bhavnagar, Jamnagar, Valsad, Bharuch , Mahisagar, Patan, Gandhinagar, Navsari, Porbandar, Narmada, Surendranagar, Chhota Udaipur, Tapi, Morbi, Botad, Dang, Rajasthan, Jaipur, Alwar, Udaipur, Kota, Jodhpur, Jaisalmer, Sikar, Jhunjhunu, Sri Ganganagar, Barmer, Hanumangarh, Ajmer, Pali, Bharatpur, Bikaner, Churu, Chittorgarh, Rajsamand, Nagaur, Bhilwara, Tonk, Dausa, Dungarpur, Jhalawar, Banswara, Pratapgarh, Sirohi, Bundi, Baran, Sawai Madhopur, Karauli, Dholpur, Jalore,Haryana, Gurugram, Faridabad, Sonipat, Hisar, Ambala, Karnal, Panipat, Rohtak, Rewari, Panchkula, Kurukshetra, Yamunanagar, Sirsa, Mahendragarh, Bhiwani, Jhajjar, Palwal, Fatehabad, Kaithal, Jind, Nuh, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल,
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
आप उसमें केक के ऊपर जिग-जैग डिजाइन बना सकते हैं. केक में चॉकलेट्स या फिर जेम्स लगा दें और फिर क्रीम से 'मेरी क्रिसमस' लिख दें. ऐसा करने से केक और भी अट्रैक्टिव दिखेगा. केक में ओकेजन के एकॉर्डिंग छोटे-छोटे ट्वॉयज का भी यूज कर सकते हैं. जिससे बच्चों को मालूम हो जाए कि आखिर केक किस ओकेजन के लिए काटा जा रहा है. अगर आप केक को डेकोरेट नहीं कर पा रहे हैं तो बेस्ट है कि केक पर चेरीज लगा कर उसे डेकोरेट करें. रेड कलर की चेरी लगने पर केक अट्रैक्टिव दिखता है.
आप उसमें केक के ऊपर जिग-जैग डिजाइन बना सकते हैं. केक में चॉकलेट्स या फिर जेम्स लगा दें और फिर क्रीम से 'मेरी क्रिसमस' लिख दें. ऐसा करने से केक और भी अट्रैक्टिव दिखेगा. केक में ओकेजन के एकॉर्डिंग छोटे-छोटे ट्वॉयज का भी यूज कर सकते हैं. जिससे बच्चों को मालूम हो जाए कि आखिर केक किस ओकेजन के लिए काटा जा रहा है. अगर आप केक को डेकोरेट नहीं कर पा रहे हैं तो बेस्ट है कि केक पर चेरीज लगा कर उसे डेकोरेट करें. रेड कलर की चेरी लगने पर केक अट्रैक्टिव दिखता है.
नितीश राणा ( Image Source : PTI ) KKR Captain Nitish Rana Fined: आईपीएल 2023 का 61वां मुकाबला 14 मई को चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला गया. एमए चिंदबरम स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में केकेआर ने सीएसके को 6 विकेट से हराया. चेन्नई ने पहले बैटिंग करते हुए 6 विकेट पर 144 रन बनाए. कोलकाता ने जीत के लिए 145 रन लक्ष्य 9 गेंद शेष रहते 4 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया. इस हार के बाद सीएसके का प्लेऑफ में जाने का इंतजार बढ़ गया है. वहीं अंतिम चार को दौड़ से बाहर हो चुकी कोलकाता की टीम के लिए यह मैच औपचारिक था. लेकिन केकेआर की जीत का मजा उस वक्त किरकिरा हो गया जब टीम के कप्तान नितीश राणा पर 24 लाख और बाकी खिलाड़ियों पर 6-6 लाख का जुर्माना लगाया गया. इस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स टीम पर दूसरी बार फाइन लगा है. चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मैच के बाद आईपीएल की तरफ से आधिकारिक तौर पर नितीश राणा और टीम के बाकी खिलाड़ियों पर फाइन लगाया गया. इंडियन प्रीमियर लीग की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'नितीश राणा पर धीमी ओवर रेट के चलते जुर्माना लगाया गया है क्योंकि उनकी टीम 14 मई को एमए चिंदबरम स्टेडियम में खेले गए मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में निर्धारित समय में ओवर समाप्त नहीं कर पाई'. बयान में आगे कहा गया, 'आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के धीमी ओवर से संबंधित यह कोलकाता का इस सीजन में यह दूसरा अपराध था. नितीश राणा पर 24 लाख और प्लेइंग इलेवन में शामिल बाकी खिलाड़ियों पर 6-6 लाख रुपये का फाइन लगाया गया है'. कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम आईपीएल 2023 की प्लेऑफ की रेस से बाहर है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई है. मौजूदा समय में केकेआर की टीम 12 अंक के साथ 7वें स्थान पर है. इस सीजन में उसे एक मैच खेलना बाकी है. मान लीजिए अगर कोलकाता की टीम अपना आखिरी मुकाबला जीत भी जाती है तो वह 14 अंक के साथ अपने सफर को समाप्त करेगी. लेकिन 14 अंक के साथ वह प्लेऑफ में क्वालिफाई नहीं कर पाएगी. ऐसे में केकेआर प्लेऑफ की रेस से बाहर है. आईपीएल के 16वें सीजन में केकेआर ने 13 मैच खेले हैं जिनमें 6 जीते और 7 हारे हैं.
नितीश राणा KKR Captain Nitish Rana Fined: आईपीएल दो हज़ार तेईस का इकसठवां मुकाबला चौदह मई को चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला गया. एमए चिंदबरम स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में केकेआर ने सीएसके को छः विकेट से हराया. चेन्नई ने पहले बैटिंग करते हुए छः विकेट पर एक सौ चौंतालीस रन बनाए. कोलकाता ने जीत के लिए एक सौ पैंतालीस रन लक्ष्य नौ गेंद शेष रहते चार विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया. इस हार के बाद सीएसके का प्लेऑफ में जाने का इंतजार बढ़ गया है. वहीं अंतिम चार को दौड़ से बाहर हो चुकी कोलकाता की टीम के लिए यह मैच औपचारिक था. लेकिन केकेआर की जीत का मजा उस वक्त किरकिरा हो गया जब टीम के कप्तान नितीश राणा पर चौबीस लाख और बाकी खिलाड़ियों पर छः-छः लाख का जुर्माना लगाया गया. इस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स टीम पर दूसरी बार फाइन लगा है. चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मैच के बाद आईपीएल की तरफ से आधिकारिक तौर पर नितीश राणा और टीम के बाकी खिलाड़ियों पर फाइन लगाया गया. इंडियन प्रीमियर लीग की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'नितीश राणा पर धीमी ओवर रेट के चलते जुर्माना लगाया गया है क्योंकि उनकी टीम चौदह मई को एमए चिंदबरम स्टेडियम में खेले गए मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में निर्धारित समय में ओवर समाप्त नहीं कर पाई'. बयान में आगे कहा गया, 'आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के धीमी ओवर से संबंधित यह कोलकाता का इस सीजन में यह दूसरा अपराध था. नितीश राणा पर चौबीस लाख और प्लेइंग इलेवन में शामिल बाकी खिलाड़ियों पर छः-छः लाख रुपये का फाइन लगाया गया है'. कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम आईपीएल दो हज़ार तेईस की प्लेऑफ की रेस से बाहर है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई है. मौजूदा समय में केकेआर की टीम बारह अंक के साथ सातवें स्थान पर है. इस सीजन में उसे एक मैच खेलना बाकी है. मान लीजिए अगर कोलकाता की टीम अपना आखिरी मुकाबला जीत भी जाती है तो वह चौदह अंक के साथ अपने सफर को समाप्त करेगी. लेकिन चौदह अंक के साथ वह प्लेऑफ में क्वालिफाई नहीं कर पाएगी. ऐसे में केकेआर प्लेऑफ की रेस से बाहर है. आईपीएल के सोलहवें सीजन में केकेआर ने तेरह मैच खेले हैं जिनमें छः जीते और सात हारे हैं.
प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? पिछली तिमाही की तुलना में अप्रैल-जून 2020 की तिमाही में यूरोज़ोन का सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product-GDP) 12.1% कम हो गया है। प्रमुख बिंदुः - यह यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था में अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है, क्योंकि कोविड-19 में लॉकडाउन के चलते कारोबार बंद हो गया और उपभोक्ता खर्च में निरंतर कमी देखने को मिली है। - यूरोज़ोन में यूरोपीय संघ (EU) के 19 सदस्य शामिल हैं, जो यूरो को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में उपयोग करते हैं। यूरोपीय संघ के 8 सदस्य (बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया और स्वीडन) यूरो का उपयोग नहीं करते हैं। - यूरोपीय संघ के 27 देशों की अर्थव्यवस्था में इसी अवधि के दौरान 11.9% की गिरावट आई है। - वर्तमान में विश्व का कोई भी देश महामारी के प्रभाव से बच नहीं पाया है। स्पेन ने इस क्षेत्र में सबसे अधिक आर्थिक गिरावट (18.5%) का सामना किया। - यूरोपीय सरकारें बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन उपायों के साथ मंदी का मुकाबला कर रही हैं। उन्होंने व्यवसायों को जारी रखने के लिये ऋण जारी किये हैं और श्रमिकों के वेतन का भुगतान करने वाले कार्यक्रमों/योजनाओं का समर्थन कर रही हैं। - यूरोपीय संघ के नेताओं ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बल देने के लिये वर्ष 2021 से 750 बिलियन यूरो के रिकवरी फंड (आम उधारी के माध्यम से) पर सहमति व्यक्त की है। - यूरोपीय सेंट्रल बैंक अर्थव्यवस्था में नव मुद्रित 1.35 ट्रिलियन यूरो का प्रवेश करा रहा है, ताकि उधार की लागत को कम रखने में मदद की जा सके। - यूरोपीय सेंट्रल बैंक (European Central Bank) यूरोपीय संघ का एक आधिकारिक संस्थान और यूरोज़ोन देशों का केंद्रीय बैंक है।
प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? पिछली तिमाही की तुलना में अप्रैल-जून दो हज़ार बीस की तिमाही में यूरोज़ोन का सकल घरेलू उत्पाद बारह.एक% कम हो गया है। प्रमुख बिंदुः - यह यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था में अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है, क्योंकि कोविड-उन्नीस में लॉकडाउन के चलते कारोबार बंद हो गया और उपभोक्ता खर्च में निरंतर कमी देखने को मिली है। - यूरोज़ोन में यूरोपीय संघ के उन्नीस सदस्य शामिल हैं, जो यूरो को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में उपयोग करते हैं। यूरोपीय संघ के आठ सदस्य यूरो का उपयोग नहीं करते हैं। - यूरोपीय संघ के सत्ताईस देशों की अर्थव्यवस्था में इसी अवधि के दौरान ग्यारह.नौ% की गिरावट आई है। - वर्तमान में विश्व का कोई भी देश महामारी के प्रभाव से बच नहीं पाया है। स्पेन ने इस क्षेत्र में सबसे अधिक आर्थिक गिरावट का सामना किया। - यूरोपीय सरकारें बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन उपायों के साथ मंदी का मुकाबला कर रही हैं। उन्होंने व्यवसायों को जारी रखने के लिये ऋण जारी किये हैं और श्रमिकों के वेतन का भुगतान करने वाले कार्यक्रमों/योजनाओं का समर्थन कर रही हैं। - यूरोपीय संघ के नेताओं ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बल देने के लिये वर्ष दो हज़ार इक्कीस से सात सौ पचास बिलियन यूरो के रिकवरी फंड पर सहमति व्यक्त की है। - यूरोपीय सेंट्रल बैंक अर्थव्यवस्था में नव मुद्रित एक.पैंतीस ट्रिलियन यूरो का प्रवेश करा रहा है, ताकि उधार की लागत को कम रखने में मदद की जा सके। - यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोपीय संघ का एक आधिकारिक संस्थान और यूरोज़ोन देशों का केंद्रीय बैंक है।
रवि शास्त्री- भारतीय टीम के मुख्य कोच को दुनिया के बाकी क्रिकेट कोच की तुलना में सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. वे सबसे पहले 2014 में टीम के डायरेक्टर बने थे और दो साल तक इस पद पर रहे थे. फिर 2017 में वे टीम इंडिया के मुख्य कोच बनकर लौटे. रवि शास्त्री के कॉन्ट्रेक्ट के अनुसार, उन्हें बीसीसीआई से सालाना 9.5 से 10 करोड़ रुपये तक मिलते हैं.
रवि शास्त्री- भारतीय टीम के मुख्य कोच को दुनिया के बाकी क्रिकेट कोच की तुलना में सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. वे सबसे पहले दो हज़ार चौदह में टीम के डायरेक्टर बने थे और दो साल तक इस पद पर रहे थे. फिर दो हज़ार सत्रह में वे टीम इंडिया के मुख्य कोच बनकर लौटे. रवि शास्त्री के कॉन्ट्रेक्ट के अनुसार, उन्हें बीसीसीआई से सालाना नौ.पाँच से दस करोड़ रुपये तक मिलते हैं.
MATIC पुलबैक से हालिया लाभ को खतरा है - क्या बैल इसे रोक सकते हैं? अस्वीकरणः प्रस्तुत जानकारी वित्तीय, निवेश, व्यापार या अन्य प्रकार की सलाह नहीं है और केवल लेखक की राय है। - $0.90 को पार करने का प्रयास पटरी से उतर गया। - सप्ताहांत में बिकवाली का दबाव थोड़ा कम हुआ। सप्ताहांत (15/16 जुलाई) में अल्पकालिक बिकवाली का दबाव उजागर हुआ बहुभुज [MATIC] 10% की गिरावट तक। पुलबैक के कारण MATIC ने 13 जुलाई (पिछले गुरुवार) को मूल्य वृद्धि के दौरान प्राप्त हालिया लाभ का कुछ हिस्सा मिटा दिया। लेकिन रिट्रेसमेंट पिछले समर्थन और दिसंबर के निचले स्तर $0.7566 पर पहुंच गया और तेजड़ियों को आकर्षित कर सकता है। इस बीच में, Bitcoin [BTC] अपनी सीमा-बद्ध संरचना का विस्तार किया और लेखन के समय $30.5k की मध्य-सीमा को पार करना बाकी था। क्या बैल दिसंबर के निचले स्तर का बचाव कर सकते हैं? जून के मध्य से, 4-घंटे का चार्ट उच्च ऊंचाई और उच्च निम्न मुद्रित करता है, जो एक अपट्रेंड को दर्शाता है। हालाँकि 13 जुलाई को भारी मूल्य वृद्धि ने बैलों को आगे बढ़ाया, लेकिन वे $0.90 के निशान को पार करने में विफल रहे। वास्तव में, MATIC $0.918 - $0.955 (लाल) के D1 मंदी ऑर्डर ब्लॉक (OB) से नीचे गिरने से पहले सभी जून घाटे को उलटने के करीब था। यह ध्यान देने योग्य है कि 13 जुलाई को बड़े पैमाने पर उछाल ने एक और मंदी वाले ओबी (लाल) को अमान्य कर दिया, जो दिसंबर के निचले स्तर $0.7566 के साथ संरेखित हो गया। लेकिन पुलबैक उपरोक्त स्तर तक कम हो गया - दिसंबर का निचला स्तर, एक महत्वपूर्ण समर्थन जो बैलों को आकर्षित कर सकता है। स्तर पर एक पलटाव आक्रामक बैलों को $0.95 के लक्ष्य (ओवरहेड मंदी ओबी) पर स्थापित कर सकता है। लेकिन रूढ़िवादी खिलाड़ी $0.889 और $0.85 के लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। दिसंबर के निचले स्तर से नीचे का उल्लंघन तेजी की धारणा को अमान्य कर देगा। इस तरह की गिरावट से MATIC $0.71 या $0.65 तक गिर सकता है। इस बीच, ऑन बैलेंस वॉल्यूम थोड़ा कम हो गया, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स तटस्थ स्तर से नीचे फिसल गया - जिससे सप्ताहांत में मांग में गिरावट और खरीदारी का दबाव बढ़ गया। जून 2023 की शुरुआत में यूएस एसईसी द्वारा इसे सुरक्षा के रूप में वर्गीकृत करने के बाद MATIC में निवेशकों का विश्वास कम हो गया। हालांकि, रिपल लैब्स के ऐतिहासिक फैसले के बाद से भावना में सुधार हुआ है, जिससे आत्मविश्वास में और बढ़ोतरी हुई है, जैसा कि बेहतर भारित भावना से पता चलता है। कितना हैं आज के मूल्य के 1,10,100 MATICs? 13 जुलाई को एक्सचेंजों में आपूर्ति में बढ़ोतरी से बढ़ोतरी देखी गई, जो अल्पकालिक बिक्री के दबाव को रेखांकित करती है क्योंकि खिलाड़ी अल्पकालिक लाभ $0.89 के करीब रखते हैं। इसके अलावा, उसी अवधि में फंडिंग दरों में उतार-चढ़ाव आया, जिससे संतुलन शॉर्ट-सेलर्स के पक्ष में झुक गया। लेकिन, $0.7566 के करीब दिसंबर का निचला स्तर देखने लायक महत्वपूर्ण स्तर था।
MATIC पुलबैक से हालिया लाभ को खतरा है - क्या बैल इसे रोक सकते हैं? अस्वीकरणः प्रस्तुत जानकारी वित्तीय, निवेश, व्यापार या अन्य प्रकार की सलाह नहीं है और केवल लेखक की राय है। - शून्य दशमलव नब्बे डॉलर को पार करने का प्रयास पटरी से उतर गया। - सप्ताहांत में बिकवाली का दबाव थोड़ा कम हुआ। सप्ताहांत में अल्पकालिक बिकवाली का दबाव उजागर हुआ बहुभुज [MATIC] दस% की गिरावट तक। पुलबैक के कारण MATIC ने तेरह जुलाई को मूल्य वृद्धि के दौरान प्राप्त हालिया लाभ का कुछ हिस्सा मिटा दिया। लेकिन रिट्रेसमेंट पिछले समर्थन और दिसंबर के निचले स्तर शून्य दशमलव सात हज़ार पाँच सौ छयासठ डॉलर पर पहुंच गया और तेजड़ियों को आकर्षित कर सकता है। इस बीच में, Bitcoin [BTC] अपनी सीमा-बद्ध संरचना का विस्तार किया और लेखन के समय तीस दशमलव पाँच डॉलरk की मध्य-सीमा को पार करना बाकी था। क्या बैल दिसंबर के निचले स्तर का बचाव कर सकते हैं? जून के मध्य से, चार-घंटे का चार्ट उच्च ऊंचाई और उच्च निम्न मुद्रित करता है, जो एक अपट्रेंड को दर्शाता है। हालाँकि तेरह जुलाई को भारी मूल्य वृद्धि ने बैलों को आगे बढ़ाया, लेकिन वे शून्य दशमलव नब्बे डॉलर के निशान को पार करने में विफल रहे। वास्तव में, MATIC शून्य दशमलव नौ सौ अट्ठारह डॉलर - शून्य दशमलव नौ सौ पचपन डॉलर के Dएक मंदी ऑर्डर ब्लॉक से नीचे गिरने से पहले सभी जून घाटे को उलटने के करीब था। यह ध्यान देने योग्य है कि तेरह जुलाई को बड़े पैमाने पर उछाल ने एक और मंदी वाले ओबी को अमान्य कर दिया, जो दिसंबर के निचले स्तर शून्य दशमलव सात हज़ार पाँच सौ छयासठ डॉलर के साथ संरेखित हो गया। लेकिन पुलबैक उपरोक्त स्तर तक कम हो गया - दिसंबर का निचला स्तर, एक महत्वपूर्ण समर्थन जो बैलों को आकर्षित कर सकता है। स्तर पर एक पलटाव आक्रामक बैलों को शून्य दशमलव पचानवे डॉलर के लक्ष्य पर स्थापित कर सकता है। लेकिन रूढ़िवादी खिलाड़ी शून्य दशमलव आठ सौ नवासी डॉलर और शून्य दशमलव पचासी डॉलर के लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। दिसंबर के निचले स्तर से नीचे का उल्लंघन तेजी की धारणा को अमान्य कर देगा। इस तरह की गिरावट से MATIC शून्य दशमलव इकहत्तर डॉलर या शून्य दशमलव पैंसठ डॉलर तक गिर सकता है। इस बीच, ऑन बैलेंस वॉल्यूम थोड़ा कम हो गया, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स तटस्थ स्तर से नीचे फिसल गया - जिससे सप्ताहांत में मांग में गिरावट और खरीदारी का दबाव बढ़ गया। जून दो हज़ार तेईस की शुरुआत में यूएस एसईसी द्वारा इसे सुरक्षा के रूप में वर्गीकृत करने के बाद MATIC में निवेशकों का विश्वास कम हो गया। हालांकि, रिपल लैब्स के ऐतिहासिक फैसले के बाद से भावना में सुधार हुआ है, जिससे आत्मविश्वास में और बढ़ोतरी हुई है, जैसा कि बेहतर भारित भावना से पता चलता है। कितना हैं आज के मूल्य के एक,दस,एक सौ MATICs? तेरह जुलाई को एक्सचेंजों में आपूर्ति में बढ़ोतरी से बढ़ोतरी देखी गई, जो अल्पकालिक बिक्री के दबाव को रेखांकित करती है क्योंकि खिलाड़ी अल्पकालिक लाभ शून्य दशमलव नवासी डॉलर के करीब रखते हैं। इसके अलावा, उसी अवधि में फंडिंग दरों में उतार-चढ़ाव आया, जिससे संतुलन शॉर्ट-सेलर्स के पक्ष में झुक गया। लेकिन, शून्य दशमलव सात हज़ार पाँच सौ छयासठ डॉलर के करीब दिसंबर का निचला स्तर देखने लायक महत्वपूर्ण स्तर था।
नयी दिल्लीः कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर हमला करते है। इस भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर PM मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) के बयान का हवाला देते हुए कहा कि, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को करप्शन से कोई बहुत नफरत नहीं है। ' मालूम हो कि, हाल ही में सत्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा दावा किया था। . @narendramodi जी, पुलवामा हमला और उसमें 40 जांबाजों की शहादत आपकी सरकार की गलती से हुई। अगर हमारे जवानों को एयरक्राफ्ट मिल जाता तो आतंकी साजिश नाकाम हो जाती। आपको तो इस गलती के लिए एक्शन लेना था और आपने ना सिर्फ इस बात को दबाया पर अपनी छवि बचाने में लग गए। भाजपा के राज्यपाल के इस बयान में पीएम मोदी के व्यक्तित्व में शामिल इन्हीं 'गुणों' का बखान है।
नयी दिल्लीः कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते है। इस भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर PM मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बयान का हवाला देते हुए कहा कि, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को करप्शन से कोई बहुत नफरत नहीं है। ' मालूम हो कि, हाल ही में सत्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा दावा किया था। . @narendramodi जी, पुलवामा हमला और उसमें चालीस जांबाजों की शहादत आपकी सरकार की गलती से हुई। अगर हमारे जवानों को एयरक्राफ्ट मिल जाता तो आतंकी साजिश नाकाम हो जाती। आपको तो इस गलती के लिए एक्शन लेना था और आपने ना सिर्फ इस बात को दबाया पर अपनी छवि बचाने में लग गए। भाजपा के राज्यपाल के इस बयान में पीएम मोदी के व्यक्तित्व में शामिल इन्हीं 'गुणों' का बखान है।
नई दिल्लीः आपके पास कोई काम नहीं पैसा कमाने का ख्वाब देख रहे हैं तो कृप्या अब चिंता नहीं करें। हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे आप अमीर बनने का सफर पूरा कर सकते हैं। आप सोच रहे होंगे ऐसा क्या काम है जो पैसा कमा सकते हैं। तरीका भी ऐसा है भईया घर बैठे नोटों की बारिश होगी। दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कुछ वेबसाइट्स ऐसी हैं जो पुराने नोटों की खरीदारी कर रही हैं, जिसके बदले एक नहीं बल्कि कई लाख रुपये दे रही हैं। आपके घर में किसी गुल्लक या जेब में 5 का नोट रखा है तो फिर मौज है, जिसके बदले आराम से 6 लाख रुपये मिल रहे हैं। आपने तनिक भी मौका हाथ से निकाला तो फिर अफसोस करना होगा। नोट की खासियत जानने क लिए आपको हमारा आर्टिकल ध्यान से पढ़ना होगा। वैश्विक बाजार में नोट की सेल करने के लिए आपको कुछ जरूरी बातों को जानना होगा। सेल करने के लिए आपके पास रखे 5 के नोट पर सबसे पहले तो सीरियल नंबर 786 का लिखा होना जरूरी है। इसके बाद आपके नोट पर पीछे की तरफ ट्रैक्टर चलाते हुए किसान की फोटो छपा होना बहुत ही आवश्यक है, जो सुनहरा मौका है। मुस्लिम कम्युनिटी में सीरियल नंबर 786 को बहुत ही लकी और पवित्र माना जाता है। लोग इस नोट की खरीदारी करना पसंद करते हैं। आप तुरंत निकालकर इस नोट की सेल कर सकते हैं, जिसके बदले आराम से 6 लाख रुपये तक मिल रहे हैं। इतना ही नहीं अगर आपके पास ऐसे तीन नोट हैं तो 18 लाख रुपये की इनकम हो जाएगी। जेब में रखा 5 का नोट बेचने के लिए आपको कहीं भी धक्के खाने की जरूरत नहीं है। आप आराम से 5 के नोट की सेल कर सकते हैं, जिसके लिए सबसे पहले ओएलएक्स पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ग्राहक आपसे खुद व खुद संपर्क साधेंगे। आपने तनिक भी बिक्री का मौका हाथ से निकाला तो फिर नहीं मिलेगा। यहां आप मुंह मांगी कीमत पर नोट बेच सकते हैं।
नई दिल्लीः आपके पास कोई काम नहीं पैसा कमाने का ख्वाब देख रहे हैं तो कृप्या अब चिंता नहीं करें। हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे आप अमीर बनने का सफर पूरा कर सकते हैं। आप सोच रहे होंगे ऐसा क्या काम है जो पैसा कमा सकते हैं। तरीका भी ऐसा है भईया घर बैठे नोटों की बारिश होगी। दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कुछ वेबसाइट्स ऐसी हैं जो पुराने नोटों की खरीदारी कर रही हैं, जिसके बदले एक नहीं बल्कि कई लाख रुपये दे रही हैं। आपके घर में किसी गुल्लक या जेब में पाँच का नोट रखा है तो फिर मौज है, जिसके बदले आराम से छः लाख रुपये मिल रहे हैं। आपने तनिक भी मौका हाथ से निकाला तो फिर अफसोस करना होगा। नोट की खासियत जानने क लिए आपको हमारा आर्टिकल ध्यान से पढ़ना होगा। वैश्विक बाजार में नोट की सेल करने के लिए आपको कुछ जरूरी बातों को जानना होगा। सेल करने के लिए आपके पास रखे पाँच के नोट पर सबसे पहले तो सीरियल नंबर सात सौ छियासी का लिखा होना जरूरी है। इसके बाद आपके नोट पर पीछे की तरफ ट्रैक्टर चलाते हुए किसान की फोटो छपा होना बहुत ही आवश्यक है, जो सुनहरा मौका है। मुस्लिम कम्युनिटी में सीरियल नंबर सात सौ छियासी को बहुत ही लकी और पवित्र माना जाता है। लोग इस नोट की खरीदारी करना पसंद करते हैं। आप तुरंत निकालकर इस नोट की सेल कर सकते हैं, जिसके बदले आराम से छः लाख रुपये तक मिल रहे हैं। इतना ही नहीं अगर आपके पास ऐसे तीन नोट हैं तो अट्ठारह लाख रुपये की इनकम हो जाएगी। जेब में रखा पाँच का नोट बेचने के लिए आपको कहीं भी धक्के खाने की जरूरत नहीं है। आप आराम से पाँच के नोट की सेल कर सकते हैं, जिसके लिए सबसे पहले ओएलएक्स पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ग्राहक आपसे खुद व खुद संपर्क साधेंगे। आपने तनिक भी बिक्री का मौका हाथ से निकाला तो फिर नहीं मिलेगा। यहां आप मुंह मांगी कीमत पर नोट बेच सकते हैं।
अर्जुन कपूर बोनी कपूर और मोना शौरी के बेटे हैं। बोनी बॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माता हैं। अब तक वह कई सुपरहिट फिल्में बना चुके हैं। बोनी की जि्ंदगी में श्रीदेवी की एंट्री के बाद उन्होंने पत्नी मोना से तलाक ले लिया था। इसके बाद अर्जुन की जिंदगी में काफी कुछ झेलना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई बार उन्हें स्कूल में माता-पिता के तलाक को लेकर चिढ़ाया भी जाता था।
अर्जुन कपूर बोनी कपूर और मोना शौरी के बेटे हैं। बोनी बॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माता हैं। अब तक वह कई सुपरहिट फिल्में बना चुके हैं। बोनी की जि्ंदगी में श्रीदेवी की एंट्री के बाद उन्होंने पत्नी मोना से तलाक ले लिया था। इसके बाद अर्जुन की जिंदगी में काफी कुछ झेलना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई बार उन्हें स्कूल में माता-पिता के तलाक को लेकर चिढ़ाया भी जाता था।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021: नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की मुख्य परीक्षा का परिणाम आज घोषित हो गया है। नतीजों में श्रुति शर्मा ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके बाद दूसरा स्थान अंकिता अग्रवाल और तीसरे स्थान पर गामिनी सिंघला रही है। फाइनल रिजल्ट में इस बार कुल घोषित चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 685 है। वहीं, 80 अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयन के लिए रिकमंड भी किया गया है। बताया जा रहा है कि अभी फिलहाल एक अभ्यर्थी का रिजल्ट पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 10 अक्टूबर, 2021 को आयोजित की गई थी और उसके परिणाम 29 अक्टूबर को जारी किए गए थे। जिसके बाद मुख्य परीक्षा 7 जनवरी से 16 जनवरी 2022 के बीच आयोजित की गई थी। और इसके परिणाम 17 मार्च, 2022 को घोषित किए गए थे। आखिरी में साक्षात्कार परीक्षा का दौर था जो अप्रैल महीने की 5 तारीख से शुरू हुआ और 26 मई को संपन्न हुआ था। सबसे पहले यूपीएससी (UPSC) की आधिकारिक वेबसाइट- upsc. gov. in पर लॉग ऑन करें। इसके बाद होमपेज पर यूपीएससी सिविल सेवा परिणाम 2021- अंतिम परिणाम पर क्लिक करें। फिर चयनित उम्मीदवारों के विवरण के साथ एक पीडीएफ फाइल प्रदर्शित होगी। उसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट ले लें।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दो हज़ार इक्कीस: नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा का परिणाम आज घोषित हो गया है। नतीजों में श्रुति शर्मा ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके बाद दूसरा स्थान अंकिता अग्रवाल और तीसरे स्थान पर गामिनी सिंघला रही है। फाइनल रिजल्ट में इस बार कुल घोषित चयनित अभ्यर्थियों की संख्या छः सौ पचासी है। वहीं, अस्सी अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयन के लिए रिकमंड भी किया गया है। बताया जा रहा है कि अभी फिलहाल एक अभ्यर्थी का रिजल्ट पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल दस अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को आयोजित की गई थी और उसके परिणाम उनतीस अक्टूबर को जारी किए गए थे। जिसके बाद मुख्य परीक्षा सात जनवरी से सोलह जनवरी दो हज़ार बाईस के बीच आयोजित की गई थी। और इसके परिणाम सत्रह मार्च, दो हज़ार बाईस को घोषित किए गए थे। आखिरी में साक्षात्कार परीक्षा का दौर था जो अप्रैल महीने की पाँच तारीख से शुरू हुआ और छब्बीस मई को संपन्न हुआ था। सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट- upsc. gov. in पर लॉग ऑन करें। इसके बाद होमपेज पर यूपीएससी सिविल सेवा परिणाम दो हज़ार इक्कीस- अंतिम परिणाम पर क्लिक करें। फिर चयनित उम्मीदवारों के विवरण के साथ एक पीडीएफ फाइल प्रदर्शित होगी। उसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट ले लें।
पटना न्यूजः बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) के फिर से गठबंधन की चर्चा के बीच सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि मर जाना कबूल है, लेकिन अब उनके साथ जाना कबूल नहीं। पटना में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी चुनाव तो होने दीजिए, सब पता चल जाएगा। उन्हे बिहार के बारे में कुछ मालूम है? नीतीश कुमार ने कहा कि हमलोग तो अटल जी को मानने वाले थे इसलिए उनके साथ थे। उसके बाद तो हम लोगों ने उन्हें छोड़ दिया था, बाद में पीछे पड़कर 2017 में साथ ले आये, बाद में लग गया कि वे बिल्कुल गलत हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 के चुनाव में जो हमारे साथ किया। हम बनना नहीं चाहते थे मुख्यमंत्री, जबदरस्ती बैठ के लोग मुख्यमंत्री बना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे लोग हमलोग के ही वोट से चुनाव जीते हैं। नीतीश कुमार ने कहा कि मर जाना कबूल है लेकिन उनके साथ जाना कबूल नहीं। ये अच्छी तरह जान लीजिये। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रविवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद भाजपा ने घोषणा कर दी कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बोझ बन गये हैं। भाजपा ने साफ शब्दों में कहा है कि भविष्य में नीतीश कुमार के साथ कतई कोई गठबंधन नहीं होगा।
पटना न्यूजः बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल के फिर से गठबंधन की चर्चा के बीच सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि मर जाना कबूल है, लेकिन अब उनके साथ जाना कबूल नहीं। पटना में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी चुनाव तो होने दीजिए, सब पता चल जाएगा। उन्हे बिहार के बारे में कुछ मालूम है? नीतीश कुमार ने कहा कि हमलोग तो अटल जी को मानने वाले थे इसलिए उनके साथ थे। उसके बाद तो हम लोगों ने उन्हें छोड़ दिया था, बाद में पीछे पड़कर दो हज़ार सत्रह में साथ ले आये, बाद में लग गया कि वे बिल्कुल गलत हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार बीस के चुनाव में जो हमारे साथ किया। हम बनना नहीं चाहते थे मुख्यमंत्री, जबदरस्ती बैठ के लोग मुख्यमंत्री बना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे लोग हमलोग के ही वोट से चुनाव जीते हैं। नीतीश कुमार ने कहा कि मर जाना कबूल है लेकिन उनके साथ जाना कबूल नहीं। ये अच्छी तरह जान लीजिये। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रविवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद भाजपा ने घोषणा कर दी कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बोझ बन गये हैं। भाजपा ने साफ शब्दों में कहा है कि भविष्य में नीतीश कुमार के साथ कतई कोई गठबंधन नहीं होगा।
दीपक कोचर (Deepak Kochhar), NuPower Renewables Pvt. लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ हैं. मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के आरोपों के कारण उनकी पत्नी चंदा कोचर (Chanda Kochhar) ने 2018 में आईसीआईसीआई के एमडी और सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया था. दरअसल उनपर दीपक के फर्म वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को 2009 के दौरान उच्च मूल्य के ऋण देने का आरोप है (Deepak Kochhar, Videocon Fraud Case). कथित ऋण धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े एक मामले में उन्हें दिसंबर 2022 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (ED) ने गिरफ्तार किया था. बाद में, चंदा कोचर और दीपक कोचर को इस मामले में 23 दिसंबर 2022 को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया (Deepak Kochhar and Chanda Kochhar Arrested). दीपक की NuPower Renewables की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी की स्थापना दिसंबर 2008 में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बिजली उत्पादक के रूप में की गई थी. तब से कंपनी के पास तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित परियोजनाओं में लगभग 700 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियां चल रही हैं. NuPower कार्यालय बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ICICI बैंक के कॉर्पोरेट मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है. दीपक कोचर ने जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (जेबीआईएमएस), बॉम्बे विश्वविद्यालय से वित्त में मास्टर डिग्री प्राप्त की है, जहां चंदा कोचर उनकी बैचमेट थीं (Deepak Kochhar Education). दीपक कोचर ने चंदा कोचर से शादी की और उनके दो बच्चे हैं (Deepak Kochhar wife and children). वीडियोकॉन लोन मामले में आरोपी चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि चंदा और दीपक कोचर की गिरफ्तारी कानून के अनुसार नहीं हुई थी. ऐसे में जानना जरूरी है कि सीबीआई से कहां गलती हो गई और किसी को गिरफ्तार करने के नियम क्या होते हैं?
दीपक कोचर , NuPower Renewables Pvt. लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ हैं. मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के कारण उनकी पत्नी चंदा कोचर ने दो हज़ार अट्ठारह में आईसीआईसीआई के एमडी और सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया था. दरअसल उनपर दीपक के फर्म वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को दो हज़ार नौ के दौरान उच्च मूल्य के ऋण देने का आरोप है . कथित ऋण धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े एक मामले में उन्हें दिसंबर दो हज़ार बाईस में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था. बाद में, चंदा कोचर और दीपक कोचर को इस मामले में तेईस दिसंबर दो हज़ार बाईस को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया . दीपक की NuPower Renewables की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी की स्थापना दिसंबर दो हज़ार आठ में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बिजली उत्पादक के रूप में की गई थी. तब से कंपनी के पास तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थित परियोजनाओं में लगभग सात सौ मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियां चल रही हैं. NuPower कार्यालय बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ICICI बैंक के कॉर्पोरेट मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है. दीपक कोचर ने जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज , बॉम्बे विश्वविद्यालय से वित्त में मास्टर डिग्री प्राप्त की है, जहां चंदा कोचर उनकी बैचमेट थीं . दीपक कोचर ने चंदा कोचर से शादी की और उनके दो बच्चे हैं . वीडियोकॉन लोन मामले में आरोपी चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि चंदा और दीपक कोचर की गिरफ्तारी कानून के अनुसार नहीं हुई थी. ऐसे में जानना जरूरी है कि सीबीआई से कहां गलती हो गई और किसी को गिरफ्तार करने के नियम क्या होते हैं?
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि Geekbench पर Samsung Galaxy A31 को 349 सिंगल कोर स्कोर और 1,291 मल्टी कोर स्कोर दिया गया है. लिस्टिंग के अनुसार यह स्मार्टफोन Android 10 ओएस पर आधारित होगा और इसे MediaTek Helio P65 चिपसेट पर पेश किया जाएगा। फोन में 4GB रैम दी जा सकती है. इसके अलावा पावर बैकअप के लिए 5,000mAh की बैटरी उपलब्ध हो सकती है. अगर आपको नही पता तो बता दे कि Samsung Galaxy A31 स्मार्टफोन SafetyKorea सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर लिस्ट हुआ था, जहां दी गई जानकारी के अनुसार इसमें फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया जाएगा. फोन में 48MP का प्राइमरी कैमरा और 5MP का मैक्रो सेंसर दिया जा सकता है. वहीं लिस्टिंग के मुताबिक कंपनी इसे दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च करेगी. दोनों में 4GB रैम के साथ 64GB और 128GB स्टोरेज विकल्प उपलब्ध होंगे. वही बात करें फीचर की तो Galaxy A31 में 25MP का सेल्फी कैमरा दिया जाएगा. फोन में सिक्योरिटी के फिंगरप्रिंट सेंसर उपलब्ध हो सकता है. वहीं कनेक्टिविटी फीचर्स के तौर पर इसमें ड्यूल बैंड वाई-फाई, ब्लूटूथ 5. 0, जीपीएस और यूएसबी टाइप सी पोर्ट दिए जा सकते हैं. वहीं फीचर्स को देखकर कहा जा सकता है कि ये Galaxy A30 का अपग्रेडेड वर्जन हो सकता है जिसे पिछले साल भारतीय बाजार में लॉन्च किया गया था.
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि Geekbench पर Samsung Galaxy Aइकतीस को तीन सौ उनचास सिंगल कोर स्कोर और एक,दो सौ इक्यानवे मल्टी कोर स्कोर दिया गया है. लिस्टिंग के अनुसार यह स्मार्टफोन Android दस ओएस पर आधारित होगा और इसे MediaTek Helio Pपैंसठ चिपसेट पर पेश किया जाएगा। फोन में चारGB रैम दी जा सकती है. इसके अलावा पावर बैकअप के लिए पाँच,शून्यmAh की बैटरी उपलब्ध हो सकती है. अगर आपको नही पता तो बता दे कि Samsung Galaxy Aइकतीस स्मार्टफोन SafetyKorea सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर लिस्ट हुआ था, जहां दी गई जानकारी के अनुसार इसमें फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया जाएगा. फोन में अड़तालीसMP का प्राइमरी कैमरा और पाँचMP का मैक्रो सेंसर दिया जा सकता है. वहीं लिस्टिंग के मुताबिक कंपनी इसे दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च करेगी. दोनों में चारGB रैम के साथ चौंसठGB और एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज विकल्प उपलब्ध होंगे. वही बात करें फीचर की तो Galaxy Aइकतीस में पच्चीसMP का सेल्फी कैमरा दिया जाएगा. फोन में सिक्योरिटी के फिंगरप्रिंट सेंसर उपलब्ध हो सकता है. वहीं कनेक्टिविटी फीचर्स के तौर पर इसमें ड्यूल बैंड वाई-फाई, ब्लूटूथ पाँच. शून्य, जीपीएस और यूएसबी टाइप सी पोर्ट दिए जा सकते हैं. वहीं फीचर्स को देखकर कहा जा सकता है कि ये Galaxy Aतीस का अपग्रेडेड वर्जन हो सकता है जिसे पिछले साल भारतीय बाजार में लॉन्च किया गया था.
RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies नौकरी रिक्ति के लिए, उम्मीदवार नौकरी के विवरण के माध्यम से जा सकते हैं और लिंक का उपयोग करके आवेदन कर सकते हैं। RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती 2023, आवेदन करने की अंतिम तिथि, वेतन, आयु सीमा, और कई अन्य विवरण नीचे दिए गए हैं। उम्मीदवार जो RGU भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें पहले आधिकारिक अधिसूचना से पात्रता की जांच करनी चाहिए। Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता Any Graduate, B. Sc, 12TH, 10TH है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती 2023 का पूरा विवरण देख सकते हैं। RGU भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 27/01/2023 है और RGU भर्ती 2023 रिक्ति गणना 4 है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें RGU में Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा। RGU भर्ती 2023 वेतन Rs. 10,000 - Rs. 15,998 Per Month है। एक बार चुने जाने के बाद, उम्मीदवारों को Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies की स्थिति के लिए RGU में वेतन सीमा के बारे में सूचित किया जाएगा। RGU ने Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies पदों के लिए Doimukh में वैकेंसी नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार यहां स्थान और अन्य विवरण देख सकते हैं और RGU भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 27/01/2023 है, उम्मीदवार Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies के लिए RGU पर आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। How to apply for RGU Recruitment 2023? इच्छुक और योग्य उम्मीदवार उपरोक्त रिक्तियों के लिए 27/01/2023 से पहले आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट rgu. ac. in के माध्यम से, उम्मीदवार ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।
RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies नौकरी रिक्ति के लिए, उम्मीदवार नौकरी के विवरण के माध्यम से जा सकते हैं और लिंक का उपयोग करके आवेदन कर सकते हैं। RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती दो हज़ार तेईस, आवेदन करने की अंतिम तिथि, वेतन, आयु सीमा, और कई अन्य विवरण नीचे दिए गए हैं। उम्मीदवार जो RGU भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें पहले आधिकारिक अधिसूचना से पात्रता की जांच करनी चाहिए। Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता Any Graduate, B. Sc, बारहTH, दसTH है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती दो हज़ार तेईस का पूरा विवरण देख सकते हैं। RGU भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि सत्ताईस जनवरी दो हज़ार तेईस है और RGU भर्ती दो हज़ार तेईस रिक्ति गणना चार है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें RGU में Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा। RGU भर्ती दो हज़ार तेईस वेतन Rs. दस,शून्य - Rs. पंद्रह,नौ सौ अट्ठानवे Per Month है। एक बार चुने जाने के बाद, उम्मीदवारों को Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies की स्थिति के लिए RGU में वेतन सीमा के बारे में सूचित किया जाएगा। RGU ने Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies पदों के लिए Doimukh में वैकेंसी नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार यहां स्थान और अन्य विवरण देख सकते हैं और RGU भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। RGU Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि सत्ताईस जनवरी दो हज़ार तेईस है, उम्मीदवार Laboratory Assistant, Data Entry Operator, More Vacancies के लिए RGU पर आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। How to apply for RGU Recruitment दो हज़ार तेईस? इच्छुक और योग्य उम्मीदवार उपरोक्त रिक्तियों के लिए सत्ताईस जनवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट rgu. ac. in के माध्यम से, उम्मीदवार ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।
dargah of Moinuddin Chishti (Photo Credit: File Pic) नई दिल्लीः अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह ( dargah of Moinuddin Chishti ) में मंदिर होने की बात को लेकर छिड़े विवाद पर आज दरगाह कमेटी व दरगाह से संबंध रखने वाले पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि जिस तरीके से सोशल मीडिया पर हिंदू धार्मिक चिन्ह स्वास्तिक दरगाह का बताया जा रहा है वह पूरी तरीके से गलत है । अजमेर दरगाह दीवान के पुत्र सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बताया कि गरीब नवाज की दरगाह धार्मिक सद्भाव की मिसाल है और ऐसी हरकतों से दरगाह में आने वाले करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है । महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लिखे गए पत्र पर दरगाह कमेटी की ओर से कार्रवाई को लेकर दरगाह कमेटी इस सम्बंध में पदाधिकारियो रायसुमारी करेगी । स्वास्तिक के चिन्ह पर उन्होंने कहा कि दरगाह में ऐसा कोई भी चिन्ह मौजूद नहीं है । वही अंजुमन सैयद जादगान के आदर सैयद मोइन हुसैन चिश्ती ने बताया कि यह सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश है जिस तरीके से सोशल मीडिया पर स्वास्तिक के निशान वाली तस्वीरें वायरल की जा रही हैं उसका दरगाह से कोई संबंध नहीं है ना ही दरगाह में कोई ऐसी जगह है जहां पर ऐसा कोई चिन्ह मौजूद है । उन्होंने कहा कि यह सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश है और ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए । तो दूसरी ओर सुरक्षा के लिहाज से गरीब नवाज की दरगाह के बाहर पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता भी तैनात किया गया है, वही अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा के मौखिक आदेश पर दरगाह के बाहर मीडिया कर्मियों को किसी भी तरह की कवरेज नहीं करने दी जा रही है । शुक्रवार जुम्मे का दिन होने के कारण गरीब नवाज की दरगाह में काफी भीड़ भी देखी गई तो साथ में इस पूरे मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क दिखाई दी ।
dargah of Moinuddin Chishti नई दिल्लीः अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में मंदिर होने की बात को लेकर छिड़े विवाद पर आज दरगाह कमेटी व दरगाह से संबंध रखने वाले पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि जिस तरीके से सोशल मीडिया पर हिंदू धार्मिक चिन्ह स्वास्तिक दरगाह का बताया जा रहा है वह पूरी तरीके से गलत है । अजमेर दरगाह दीवान के पुत्र सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बताया कि गरीब नवाज की दरगाह धार्मिक सद्भाव की मिसाल है और ऐसी हरकतों से दरगाह में आने वाले करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है । महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लिखे गए पत्र पर दरगाह कमेटी की ओर से कार्रवाई को लेकर दरगाह कमेटी इस सम्बंध में पदाधिकारियो रायसुमारी करेगी । स्वास्तिक के चिन्ह पर उन्होंने कहा कि दरगाह में ऐसा कोई भी चिन्ह मौजूद नहीं है । वही अंजुमन सैयद जादगान के आदर सैयद मोइन हुसैन चिश्ती ने बताया कि यह सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश है जिस तरीके से सोशल मीडिया पर स्वास्तिक के निशान वाली तस्वीरें वायरल की जा रही हैं उसका दरगाह से कोई संबंध नहीं है ना ही दरगाह में कोई ऐसी जगह है जहां पर ऐसा कोई चिन्ह मौजूद है । उन्होंने कहा कि यह सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश है और ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए । तो दूसरी ओर सुरक्षा के लिहाज से गरीब नवाज की दरगाह के बाहर पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता भी तैनात किया गया है, वही अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा के मौखिक आदेश पर दरगाह के बाहर मीडिया कर्मियों को किसी भी तरह की कवरेज नहीं करने दी जा रही है । शुक्रवार जुम्मे का दिन होने के कारण गरीब नवाज की दरगाह में काफी भीड़ भी देखी गई तो साथ में इस पूरे मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क दिखाई दी ।
जप आदि कर्म करना, यह भी कर्मयोग है। ईश्वर-लाभ करना ही कर्मयोग का उद्देश है। "भक्ति योग है ईश्वर के नाम-गुणों का कीर्तन करके उन पर पूरा मन लगाना । कलिकाल के लिए भक्ति योग का मार्ग सीधा है । युगधर्म भी यही है। " कर्मयोग बड़ा कठिन है। पहले ही कहा जा चुका है कि समय कहाँ है? शास्त्रों मे जो सब कर्म करने के लिए कहा है, उसका समय कहाँ है ? कलिकाल मे इधर आयु कम है। उस पर अनासक्त होकर फल की कामना न करके कर्म करना बड़ा कठिन है। ईश्वर को बिना पाये कोई अनासक्त नहीं हो सकता । तुम नहीं जानते, परन्तु कहीं न कहीं से आसक्ति आ ही जाती है। "ज्ञानयोग भी इस युग के लिए बड़ा कठिन है। एक तो जीवों के प्राण अन्नगत हो रहे हैं, तिस पर आयु भी कम है; उधर देह बुद्धि किसी तरह जाती नही और देह-बुद्धि के गये बिना ज्ञान होने का नहीं 4 ज्ञानी कहता है, मैं ही वह ब्रह्म हूँ । न मै शरीर हॅू, न भूख हूँ, न तृष्णा हॅू, न रोग हूँ, न शोक हूँ; जन्म, मृत्यु, सुख, दुःख, इन सब से परे हूँ। यदि रोग, शोक, सुख, दुःख, इन सब का बोध रहा, तो तुम ज्ञानी फिर कैसे हो सकोगे ? इधर हाथ कॉटों में छिद रहे हैं, घर घर खून बह रहा है, खूब पीड़ा होती है, फिर भी कहता है, कहाँ ? हाथ तो कटा ही नहीं ! मेरा क्या हुआ है ? " इसीलिए इस युग में भक्तियोग है ! इससे दूसरे मार्गों की अपेक्षा ईश्वर के पास पहुँचने में सुगमता है। ज्ञानयोग या कर्मयोग अथवा दूसरे मार्गों से भी लोग ईश्वर के पास पहुँच सकते हैं, परन्तु इन सब रास्तों से मंजिल पूरी करना बड़ा कठिन है। इस युग के लिए भक्तियोग है। इसका यह अर्थ नहीं है कि भक्त एक जगह जायगा, ज्ञानी या कर्मी दूसरी जगह । इसका तात्पर्य यह है कि जो ब्रह्मज्ञान चाहते हैं, वे अगर भक्ति के मार्ग से चलें तो भी वही ज्ञान उन्हें होगा। भक्तवत्सल अगर चाहेंगे तो वह भी दे सकते हैं। भक्त ईश्वर का साकार रूप देखना चाहता है, उनके साथ बातचीत करना चाहता है - वह बहुधा ब्रह्मज्ञान नहीं चाहता। परन्तु ईश्वर इच्छामय है। उनकी अगर इच्छा हो तो वे भक्त को सब ऐश्वर्यां का अधिकारी कर सकते हैं। भक्ति भी देते हैं और ज्ञान भी । अगर कोई एकवार कलकत्ता आ जाय, तो किले का मैदान, सोसायटी, ( Asiatic Society's Museum ) सब उसे देखने को मिल जाएगा। " पर बात तो यह है कि कलकत्ता किस तरह आया जाय। " संसार की मॉ को पा जाने पर ज्ञान भी पाता है और भक्ति भी । भाव-समाधि के होने पर रूप दर्शन होता है और निर्विकल्प समाधि के होने पर अखण्ड सच्चिदानन्द - दर्शन । तब अहं, नाम और रूप नहीं रह जाते । भक्त कहता है, मॉ, सकाम कर्मों से मुझे बड़ा भय लगता है। उस कर्म में कामना है। उस कर्म के करने से फल भोगना ही पड़ेगा। तिस पर अनासक्त कर्म करना बड़ा कठिन है। उधर सकाम कर्म करूँगा, तो तुम्हें भूल जाऊँगा। चलो ऐसे कर्म से मुझे सख्त नफ़रत है। जब तक तुम्हें न पाऊँ तब तक कर्म घटते जायँ । जितना रह जायगा, उतने को अनासक्त हाकर कर सकूँ । उसके साथ तुम पर मेरी भक्ति भी बढ़ती जाय । और जब तक तुम्ह न पाऊँ तब तक किसी नये कर्म में न फॅसूं। जब तुम स्वयं कोई आज्ञा दोगे, तब काम करूंगा, अन्यथा नही । "
जप आदि कर्म करना, यह भी कर्मयोग है। ईश्वर-लाभ करना ही कर्मयोग का उद्देश है। "भक्ति योग है ईश्वर के नाम-गुणों का कीर्तन करके उन पर पूरा मन लगाना । कलिकाल के लिए भक्ति योग का मार्ग सीधा है । युगधर्म भी यही है। " कर्मयोग बड़ा कठिन है। पहले ही कहा जा चुका है कि समय कहाँ है? शास्त्रों मे जो सब कर्म करने के लिए कहा है, उसका समय कहाँ है ? कलिकाल मे इधर आयु कम है। उस पर अनासक्त होकर फल की कामना न करके कर्म करना बड़ा कठिन है। ईश्वर को बिना पाये कोई अनासक्त नहीं हो सकता । तुम नहीं जानते, परन्तु कहीं न कहीं से आसक्ति आ ही जाती है। "ज्ञानयोग भी इस युग के लिए बड़ा कठिन है। एक तो जीवों के प्राण अन्नगत हो रहे हैं, तिस पर आयु भी कम है; उधर देह बुद्धि किसी तरह जाती नही और देह-बुद्धि के गये बिना ज्ञान होने का नहीं चार ज्ञानी कहता है, मैं ही वह ब्रह्म हूँ । न मै शरीर हॅू, न भूख हूँ, न तृष्णा हॅू, न रोग हूँ, न शोक हूँ; जन्म, मृत्यु, सुख, दुःख, इन सब से परे हूँ। यदि रोग, शोक, सुख, दुःख, इन सब का बोध रहा, तो तुम ज्ञानी फिर कैसे हो सकोगे ? इधर हाथ कॉटों में छिद रहे हैं, घर घर खून बह रहा है, खूब पीड़ा होती है, फिर भी कहता है, कहाँ ? हाथ तो कटा ही नहीं ! मेरा क्या हुआ है ? " इसीलिए इस युग में भक्तियोग है ! इससे दूसरे मार्गों की अपेक्षा ईश्वर के पास पहुँचने में सुगमता है। ज्ञानयोग या कर्मयोग अथवा दूसरे मार्गों से भी लोग ईश्वर के पास पहुँच सकते हैं, परन्तु इन सब रास्तों से मंजिल पूरी करना बड़ा कठिन है। इस युग के लिए भक्तियोग है। इसका यह अर्थ नहीं है कि भक्त एक जगह जायगा, ज्ञानी या कर्मी दूसरी जगह । इसका तात्पर्य यह है कि जो ब्रह्मज्ञान चाहते हैं, वे अगर भक्ति के मार्ग से चलें तो भी वही ज्ञान उन्हें होगा। भक्तवत्सल अगर चाहेंगे तो वह भी दे सकते हैं। भक्त ईश्वर का साकार रूप देखना चाहता है, उनके साथ बातचीत करना चाहता है - वह बहुधा ब्रह्मज्ञान नहीं चाहता। परन्तु ईश्वर इच्छामय है। उनकी अगर इच्छा हो तो वे भक्त को सब ऐश्वर्यां का अधिकारी कर सकते हैं। भक्ति भी देते हैं और ज्ञान भी । अगर कोई एकवार कलकत्ता आ जाय, तो किले का मैदान, सोसायटी, सब उसे देखने को मिल जाएगा। " पर बात तो यह है कि कलकत्ता किस तरह आया जाय। " संसार की मॉ को पा जाने पर ज्ञान भी पाता है और भक्ति भी । भाव-समाधि के होने पर रूप दर्शन होता है और निर्विकल्प समाधि के होने पर अखण्ड सच्चिदानन्द - दर्शन । तब अहं, नाम और रूप नहीं रह जाते । भक्त कहता है, मॉ, सकाम कर्मों से मुझे बड़ा भय लगता है। उस कर्म में कामना है। उस कर्म के करने से फल भोगना ही पड़ेगा। तिस पर अनासक्त कर्म करना बड़ा कठिन है। उधर सकाम कर्म करूँगा, तो तुम्हें भूल जाऊँगा। चलो ऐसे कर्म से मुझे सख्त नफ़रत है। जब तक तुम्हें न पाऊँ तब तक कर्म घटते जायँ । जितना रह जायगा, उतने को अनासक्त हाकर कर सकूँ । उसके साथ तुम पर मेरी भक्ति भी बढ़ती जाय । और जब तक तुम्ह न पाऊँ तब तक किसी नये कर्म में न फॅसूं। जब तुम स्वयं कोई आज्ञा दोगे, तब काम करूंगा, अन्यथा नही । "
एजेंसी/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से विदेश दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। पांच देशों की अपनी तूफानी यात्रा में वे अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मैक्सिकों के दौरे पर होंगे। वे आज सुबह दिल्ली से नाश्ता लेकर निकले, इसके बाद वे लंच अफगानिस्तान में और डिनर कतर में करेंगे। विदेश प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता हेतु स्विट्जरलैंड के सहयोग की चर्चा भी कर सकते हैं। दरअसल वे दोनों ही प्रतिष्ठित समूह के प्रमुख सदस्य भी हैं। वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर बात करेंगे। विदेश यात्रा के पूर्व पड़ाव के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफगानिस्तान पहुंचेंगे। हेरात राज्य में वे अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के ही साथ अफगान-भारत मित्रता सेतु का शुभारंभ करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस बांध का नाम सलमा बांध था। अपनी यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट किया।
एजेंसी/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से विदेश दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। पांच देशों की अपनी तूफानी यात्रा में वे अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मैक्सिकों के दौरे पर होंगे। वे आज सुबह दिल्ली से नाश्ता लेकर निकले, इसके बाद वे लंच अफगानिस्तान में और डिनर कतर में करेंगे। विदेश प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अड़तालीस सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता हेतु स्विट्जरलैंड के सहयोग की चर्चा भी कर सकते हैं। दरअसल वे दोनों ही प्रतिष्ठित समूह के प्रमुख सदस्य भी हैं। वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर बात करेंगे। विदेश यात्रा के पूर्व पड़ाव के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफगानिस्तान पहुंचेंगे। हेरात राज्य में वे अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के ही साथ अफगान-भारत मित्रता सेतु का शुभारंभ करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस बांध का नाम सलमा बांध था। अपनी यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट किया।
गोवा, Pramod sawant पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 4 राज्यों में जीत मिली थी. इन्हीं में से एक गोवा भी है. प्रदेश में आज प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समरोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत10 बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेंगे। शपथ ग्रहण का यह कार्यक्रम गोवा के श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में होगा। इस समारोह को भव्य बनाने के लिए पार्टी ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है. पीएम मोदी के साथ-साथ इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, असम के मुख्यमंत्री हेमंत शर्मा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेश पटेल,कर्नाटक के मुख्यमंत्री व स्वराज मुंबई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी,मणिपुर के वीरेंद्र सिंह शामिल होंगे . प्रमोद सावंत गोवा के सांखालिम से विधायक है. साल 2017 में बीजेपी ने जब दिवंगत मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा में सरकार बनाई थी, तब उन्हें विधानसभा अध्यक्ष चुना गया था. लेकिन मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद सावंत ने मार्च 2019 में पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. गोवा में भाजपा लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने जा रही है. 10 मार्च को आए चुनावी परिणामो के बाद भाजपा को प्रदेश में 20 सीटे प्राप्त हुई थी. इसके बाद पार्टी को गैर-भाजपा विधायकों का समर्थन मिला जिसके बाद पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए कुल 25 सीटे हो गई थी. बीजेपी को यहां क्षेत्रीय संगठन एमजीपी से समर्थन मिला है, जिसके दो विधायक हैं, और तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भगवा दल को समर्थन दिया है. आज प्रदेश में आधिकारिक तौर पर कमल खिल जाएगा और प्रमोद सावंत की फिर एक बार ताजपोशी होगी। गोवा में आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में किसी भी व्यक्ति को काले मास्क, काले कपड़े पहन कर अंदर आने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस बात की जानकारी भारतीय जनता पार्टी के गोवा इकाई के अध्यक्ष सदानंद शेत तनवड़े ने साझा की. 4. अलिक्सो रेजिनाल्ड ( निर्दलीय ) 7. सुदिन ढवलीकर (MGPपार्टी)
गोवा, Pramod sawant पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चार राज्यों में जीत मिली थी. इन्हीं में से एक गोवा भी है. प्रदेश में आज प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समरोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेतदस बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेंगे। शपथ ग्रहण का यह कार्यक्रम गोवा के श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में होगा। इस समारोह को भव्य बनाने के लिए पार्टी ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है. पीएम मोदी के साथ-साथ इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, असम के मुख्यमंत्री हेमंत शर्मा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेश पटेल,कर्नाटक के मुख्यमंत्री व स्वराज मुंबई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी,मणिपुर के वीरेंद्र सिंह शामिल होंगे . प्रमोद सावंत गोवा के सांखालिम से विधायक है. साल दो हज़ार सत्रह में बीजेपी ने जब दिवंगत मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा में सरकार बनाई थी, तब उन्हें विधानसभा अध्यक्ष चुना गया था. लेकिन मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद सावंत ने मार्च दो हज़ार उन्नीस में पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. गोवा में भाजपा लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने जा रही है. दस मार्च को आए चुनावी परिणामो के बाद भाजपा को प्रदेश में बीस सीटे प्राप्त हुई थी. इसके बाद पार्टी को गैर-भाजपा विधायकों का समर्थन मिला जिसके बाद पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए कुल पच्चीस सीटे हो गई थी. बीजेपी को यहां क्षेत्रीय संगठन एमजीपी से समर्थन मिला है, जिसके दो विधायक हैं, और तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भगवा दल को समर्थन दिया है. आज प्रदेश में आधिकारिक तौर पर कमल खिल जाएगा और प्रमोद सावंत की फिर एक बार ताजपोशी होगी। गोवा में आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में किसी भी व्यक्ति को काले मास्क, काले कपड़े पहन कर अंदर आने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस बात की जानकारी भारतीय जनता पार्टी के गोवा इकाई के अध्यक्ष सदानंद शेत तनवड़े ने साझा की. चार. अलिक्सो रेजिनाल्ड सात. सुदिन ढवलीकर
जिले की हनुमान नगर थाना क्षेत्र के लुहारी गांव में बुधवार रात को जहाजपुर के उपप्रधान व उसके भाई पर बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। जिसमें उपप्रधान घायल हो गया। इस हमले के बाद लुहारी गांव में लोगों की भीड़ इक्कठा हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। और उपप्रधान को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस घटना को लेकर उपप्रधान के भाई ने थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है। हनुमान नगर थाने के सब इंस्पेक्टर लीलाराम ने बताया कि गुरुवार को झोपड़ा तन लुहारी निवासी हरजी राम पुत्र नाथूराम मीणा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया कि वह और उसका भाई जहाजपुर उपप्रधान रामप्रसाद मीणा बुधवार रात को लुहारी गांव में एक शादी शादी समारोह में भाग लेने के लिए सावंतगढ़ जा रहे थे। इस दौरान लुहारी गांव के बाहर अचानक से एक गाड़ी में सवार होकर आधा दर्जन से ज्यादा लोग आए। और गाड़ी को रूकवाकर दोनों को नीचे उतारकर मारपीट शुरू कर दी। इसमें दोनों घायल हो गए। बदमाशों द्वारा उपप्रधान की जेब में पड़े 40 हजार व उसके भाई के गले से सोने की चैन व 10 हजार रुपए लूटकर ले गए। प्रार्थी हरजीराम ने सोनू पुत्र लाखाराम, देशराज पुत्र लाखाराम, राजेंद्र पुत्र लाखाराम, दौलत पुत्र मूलचंद मीणा(आयुर्वेद कंपाउंडर), सुरेंद्र पुत्र मूलचंद, नरेंद्र पुत्र मूलचंद, राजेंद्र मीणा, मानसिंह पिता खानाराम मीणा निवासी लुहारी खुर्द के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर दिया है। इस पूरे मामले की जांच हनुमान नगर थाना प्रभारी मोहम्मद इमरान द्वारा की जा रही हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जिले की हनुमान नगर थाना क्षेत्र के लुहारी गांव में बुधवार रात को जहाजपुर के उपप्रधान व उसके भाई पर बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। जिसमें उपप्रधान घायल हो गया। इस हमले के बाद लुहारी गांव में लोगों की भीड़ इक्कठा हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। और उपप्रधान को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस घटना को लेकर उपप्रधान के भाई ने थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है। हनुमान नगर थाने के सब इंस्पेक्टर लीलाराम ने बताया कि गुरुवार को झोपड़ा तन लुहारी निवासी हरजी राम पुत्र नाथूराम मीणा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया कि वह और उसका भाई जहाजपुर उपप्रधान रामप्रसाद मीणा बुधवार रात को लुहारी गांव में एक शादी शादी समारोह में भाग लेने के लिए सावंतगढ़ जा रहे थे। इस दौरान लुहारी गांव के बाहर अचानक से एक गाड़ी में सवार होकर आधा दर्जन से ज्यादा लोग आए। और गाड़ी को रूकवाकर दोनों को नीचे उतारकर मारपीट शुरू कर दी। इसमें दोनों घायल हो गए। बदमाशों द्वारा उपप्रधान की जेब में पड़े चालीस हजार व उसके भाई के गले से सोने की चैन व दस हजार रुपए लूटकर ले गए। प्रार्थी हरजीराम ने सोनू पुत्र लाखाराम, देशराज पुत्र लाखाराम, राजेंद्र पुत्र लाखाराम, दौलत पुत्र मूलचंद मीणा, सुरेंद्र पुत्र मूलचंद, नरेंद्र पुत्र मूलचंद, राजेंद्र मीणा, मानसिंह पिता खानाराम मीणा निवासी लुहारी खुर्द के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर दिया है। इस पूरे मामले की जांच हनुमान नगर थाना प्रभारी मोहम्मद इमरान द्वारा की जा रही हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अपने अनोखे अंदाज से सबको गुदगुदाने वाली टेलीविज़न जगत की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रीय रहती हैं। हाल ही में भारती सिंह ने इंटरनेट पर एक साथ कई तस्वीरें साझा की हैं, जिन्हें देखने के पश्चात् प्रशंसक भी हैरान हो गए हैं। भारती के बोल्ड लुक को देखने के पश्चात् प्रशंसक उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं। वही भारती सिंह ऑफ शोल्डर ड्रेस में बहुत हॉट लग रही हैं। तस्वीरें देखने के पश्चात् उपयोगकर्ता ने कमेंट करते हुए लिखा, 'आग ही लगा दी आपने। ' भारती सिंह के इस अवतार तथा झुकी नजरों को देखने के पश्चात् कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा। भारती सिंह का अवतार देखने में बहुत जबरदस्त लग रहा है उनकी ये सभी तस्वीरें इंटरनेट पर तहलका मचा रही हैं। इसके साथ ही भारती सिंह अपने हाथों में लाल चूड़ा पहने हुए दिखाई दे रही हैं। इन्हीं दिलकश अदाओं पर प्रशंसक भी फिदा हो रहे हैं। भारती सिंह ने इन तस्वीरों को क्लिक करते हुए बहुत लाइट मेकअप किया हुआ है। इसके पश्चात् भी वो बहुत गॉर्जियस लग रही हैं। भारती सिंह की इन सभी तस्वीरों पर प्रशंसक धड़ल्ले से कमेंट्स और लाइक कर रहे हैं। वही भारती सिंह के इस अलग अंदाज को देख कर हर कोई फैंस दंग रह गया, तथा उनकी तारीफ कर रहे है। इंडस्ट्री से गायब हुआ यह एक्टर, बोला- 'शो खत्म हो जाता है और आप भी खत्म हो जाते हैं' एक हुई राज्यसभा और लोकसभा टीवी, नए चैनल का नाम होगा 'संसद TV'
अपने अनोखे अंदाज से सबको गुदगुदाने वाली टेलीविज़न जगत की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रीय रहती हैं। हाल ही में भारती सिंह ने इंटरनेट पर एक साथ कई तस्वीरें साझा की हैं, जिन्हें देखने के पश्चात् प्रशंसक भी हैरान हो गए हैं। भारती के बोल्ड लुक को देखने के पश्चात् प्रशंसक उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं। वही भारती सिंह ऑफ शोल्डर ड्रेस में बहुत हॉट लग रही हैं। तस्वीरें देखने के पश्चात् उपयोगकर्ता ने कमेंट करते हुए लिखा, 'आग ही लगा दी आपने। ' भारती सिंह के इस अवतार तथा झुकी नजरों को देखने के पश्चात् कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा। भारती सिंह का अवतार देखने में बहुत जबरदस्त लग रहा है उनकी ये सभी तस्वीरें इंटरनेट पर तहलका मचा रही हैं। इसके साथ ही भारती सिंह अपने हाथों में लाल चूड़ा पहने हुए दिखाई दे रही हैं। इन्हीं दिलकश अदाओं पर प्रशंसक भी फिदा हो रहे हैं। भारती सिंह ने इन तस्वीरों को क्लिक करते हुए बहुत लाइट मेकअप किया हुआ है। इसके पश्चात् भी वो बहुत गॉर्जियस लग रही हैं। भारती सिंह की इन सभी तस्वीरों पर प्रशंसक धड़ल्ले से कमेंट्स और लाइक कर रहे हैं। वही भारती सिंह के इस अलग अंदाज को देख कर हर कोई फैंस दंग रह गया, तथा उनकी तारीफ कर रहे है। इंडस्ट्री से गायब हुआ यह एक्टर, बोला- 'शो खत्म हो जाता है और आप भी खत्म हो जाते हैं' एक हुई राज्यसभा और लोकसभा टीवी, नए चैनल का नाम होगा 'संसद TV'
बख्शी का तालाब क्षेत्र के इटौंजा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत नगर चौगावां का मजरा खेरिया में कच्ची दीवार ढहने से मासूम की मौत हो गई। गुरुवार को हुई इस घटना के समय मासूम चारपाई पर बैठ कर खेल रहा था। अचानक दीवार ढहने पर घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने मलबे में दबे मासूम को निकाला और उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेन्टर रेफर किया। जहां इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मासूम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इटौंजा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत नगर चौगावां का मजरा खेरिया गांव निवासी सहेष के घर की कच्ची दीवार ढह गई। अचानक दीवार ढहने से घर में अफरातफरी मच गई। कच्ची दीवार के पास सहेष का 4 वर्षीय बेटा दिव्यांश चारपाई पर बैठ कर खेल रहा था, जो दीवार के मलबे में दब गया। आननफानन में परिजनों ने मलबे को हटाकर मासूम को निकाला गम्भीर रूप से घायल दिव्यांश को इलाज के लिए इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मौत की जानकारी पाकर परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जहां शव शुक्रवार को शाम को दाह संस्कार के घर पहुंचा। जानकारी पाकर तहसीलदार बीकेटी राजेश विश्वकर्मा ने शुक्रवार को लेखपाल को भेजकर जांच कराई तथा हर सम्भव सहायता के लिए कहा है। बीडीओ संजीव कुमार गुप्ता ने आवास के लिए मदद का आश्वासन दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बख्शी का तालाब क्षेत्र के इटौंजा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत नगर चौगावां का मजरा खेरिया में कच्ची दीवार ढहने से मासूम की मौत हो गई। गुरुवार को हुई इस घटना के समय मासूम चारपाई पर बैठ कर खेल रहा था। अचानक दीवार ढहने पर घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने मलबे में दबे मासूम को निकाला और उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेन्टर रेफर किया। जहां इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मासूम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इटौंजा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत नगर चौगावां का मजरा खेरिया गांव निवासी सहेष के घर की कच्ची दीवार ढह गई। अचानक दीवार ढहने से घर में अफरातफरी मच गई। कच्ची दीवार के पास सहेष का चार वर्षीय बेटा दिव्यांश चारपाई पर बैठ कर खेल रहा था, जो दीवार के मलबे में दब गया। आननफानन में परिजनों ने मलबे को हटाकर मासूम को निकाला गम्भीर रूप से घायल दिव्यांश को इलाज के लिए इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मौत की जानकारी पाकर परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जहां शव शुक्रवार को शाम को दाह संस्कार के घर पहुंचा। जानकारी पाकर तहसीलदार बीकेटी राजेश विश्वकर्मा ने शुक्रवार को लेखपाल को भेजकर जांच कराई तथा हर सम्भव सहायता के लिए कहा है। बीडीओ संजीव कुमार गुप्ता ने आवास के लिए मदद का आश्वासन दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- कि पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाकी फटकार के बाद अब आनन फानन ने असम पुलिस ने विनीत बगरिया को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बैदुल्ला खान और एक निशांत शर्मा को गिरफ्तार किया है जबकि एक आरोपी एजाज खान फरार है। बगरिया गुरुवार को डिब्रूगढ़ स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए। - वहीं दूसरी घटना असम में नगांव जिले के एक गांव में हुई जहां कंगारू अदालत (अवैध अदालत) के फैसले के बाद एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक जिंदा जलाए जाने वाले 35 वर्षीय रंजीत बोरदोलोई पर एक महिला की हत्या करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने रविवार को बताया कि समागुड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले बोरलालुनगांव और ब्रह्मपुर बमुनी में हुई वारदात में तीन महिलाओं सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह वारदात शनिवार रात को हुई थी।
- कि पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाकी फटकार के बाद अब आनन फानन ने असम पुलिस ने विनीत बगरिया को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बैदुल्ला खान और एक निशांत शर्मा को गिरफ्तार किया है जबकि एक आरोपी एजाज खान फरार है। बगरिया गुरुवार को डिब्रूगढ़ स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए। - वहीं दूसरी घटना असम में नगांव जिले के एक गांव में हुई जहां कंगारू अदालत के फैसले के बाद एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक जिंदा जलाए जाने वाले पैंतीस वर्षीय रंजीत बोरदोलोई पर एक महिला की हत्या करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने रविवार को बताया कि समागुड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले बोरलालुनगांव और ब्रह्मपुर बमुनी में हुई वारदात में तीन महिलाओं सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह वारदात शनिवार रात को हुई थी।
दिलेर समाचार- इन दिनों फिटनेस चैलेंज एक ट्रेंड बना हुआ है जिसे देखो वहीं एक-दूसरे को फिटनेस चैलेंज देने में लगा हुआ है. सबसे पहले तो बता दें कि इसे केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने शुरू किया था. उन्होंने विराट कोहली, साइना नेहवाल और ऋतिक रोशन को ये फिटनेस चैलेंज दिया था. इसेक बाद से ही सेलिब्रिटीज अपने फिटनेस और वर्कआउट के वीडियोज सोशल मीडिया पर पोस्ट करे रहे हैं. फिटलेस चैलेंज एक तरह की एक्टिविटी है जो आपकी फिटनेस को दर्शाती है, इसमें मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग, रनिंग, पुशअप्स, क्रंचेज, स्वीमिंग,साइकिलिंग, आउटडोर गेम्स सहित ऐसी तमाम आदतें जो आपको फिट रखती हैं उन्हें शामिल किया जाता है. इस चैलेंज में आपको ये बताना होता है कि आपको खुद को फिट रखने के लिए क्या करते हैं. आपकी दिनचर्या क्या होती है. किन-किन एक्टिविटीज में आप शामिल होते हैं. कुल मिलाकर कहें तो यह चैलेंज विश्व योग दिवस की तैयारियों के मद्देनजर किया गया है. बता दें कि इस चैलेंज से पीएम नरेंद्र मोदी भी अछूते नहीं है. पीएम मोदी को क्रिकेटर विराट कोहली ने फिटनेस चैलेंज दिया था. पीएम ने विराट का चैलेज कबूल कर लिया है विराट के इस चैलेंज पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "विराट तुम्हारा चैलेंज स्वीकार करता हूं. मैं जल्द ही अपना फिटनेस वीडियो जारी करुंगा. " पीएम मोदी के इस ट्वीट के बाद उनके कई मंत्री भी इस मुहिम में शामिल हो गए. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस चैलेंज को कबूल करते हुए अपनी फिटनेस वीडियो पोस्ट की. उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान को फिटनेस चैलेंज दिया. बता दें कि मनोज तिवारी भोजपुरी और बॉलीवुज के मशहूर गायक भी हैं. महानायक अमिताभ बच्चन भी केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का चैलेंज एक्सेप्ट करते दिखे. उन्होंने अपनी एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "रोज मोबाइल की तरह उठें, खुद को भूलने के लिए उठो , रोज जिम जाओ, साइकिल या कार चलाओ, अपनी अतिरिक्त लोभ को खुद से करें और हर रोज सूर्य को जरूर देखें. "
दिलेर समाचार- इन दिनों फिटनेस चैलेंज एक ट्रेंड बना हुआ है जिसे देखो वहीं एक-दूसरे को फिटनेस चैलेंज देने में लगा हुआ है. सबसे पहले तो बता दें कि इसे केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने शुरू किया था. उन्होंने विराट कोहली, साइना नेहवाल और ऋतिक रोशन को ये फिटनेस चैलेंज दिया था. इसेक बाद से ही सेलिब्रिटीज अपने फिटनेस और वर्कआउट के वीडियोज सोशल मीडिया पर पोस्ट करे रहे हैं. फिटलेस चैलेंज एक तरह की एक्टिविटी है जो आपकी फिटनेस को दर्शाती है, इसमें मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग, रनिंग, पुशअप्स, क्रंचेज, स्वीमिंग,साइकिलिंग, आउटडोर गेम्स सहित ऐसी तमाम आदतें जो आपको फिट रखती हैं उन्हें शामिल किया जाता है. इस चैलेंज में आपको ये बताना होता है कि आपको खुद को फिट रखने के लिए क्या करते हैं. आपकी दिनचर्या क्या होती है. किन-किन एक्टिविटीज में आप शामिल होते हैं. कुल मिलाकर कहें तो यह चैलेंज विश्व योग दिवस की तैयारियों के मद्देनजर किया गया है. बता दें कि इस चैलेंज से पीएम नरेंद्र मोदी भी अछूते नहीं है. पीएम मोदी को क्रिकेटर विराट कोहली ने फिटनेस चैलेंज दिया था. पीएम ने विराट का चैलेज कबूल कर लिया है विराट के इस चैलेंज पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "विराट तुम्हारा चैलेंज स्वीकार करता हूं. मैं जल्द ही अपना फिटनेस वीडियो जारी करुंगा. " पीएम मोदी के इस ट्वीट के बाद उनके कई मंत्री भी इस मुहिम में शामिल हो गए. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस चैलेंज को कबूल करते हुए अपनी फिटनेस वीडियो पोस्ट की. उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान को फिटनेस चैलेंज दिया. बता दें कि मनोज तिवारी भोजपुरी और बॉलीवुज के मशहूर गायक भी हैं. महानायक अमिताभ बच्चन भी केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का चैलेंज एक्सेप्ट करते दिखे. उन्होंने अपनी एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "रोज मोबाइल की तरह उठें, खुद को भूलने के लिए उठो , रोज जिम जाओ, साइकिल या कार चलाओ, अपनी अतिरिक्त लोभ को खुद से करें और हर रोज सूर्य को जरूर देखें. "
वर्षोके बाद अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो पाया है। राम मंदिर निर्माण के लिए धर्म गुरु मोरारी बापू ने अपनी ओर से पांच लाख रुपए देने की घोषणा की। भगवान राम के अनन्य भक्त मुरारी बापूने मंदिर निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए की धनराशि देगें। बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए कई संगठनों ने बड़ी रकम दान करने का प्रस्ताव किया है। बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट ने फरवरी में कहा था कि वह मंदिर के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये का दान देगा। बता दें कि पांच अगस्त को राम मंदिर का शिलान्यास होना है। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होंगे। भूमि पूजन के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ-साथ अन्य लोगों के भी भाग लेने की संभावना है।
वर्षोके बाद अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो पाया है। राम मंदिर निर्माण के लिए धर्म गुरु मोरारी बापू ने अपनी ओर से पांच लाख रुपए देने की घोषणा की। भगवान राम के अनन्य भक्त मुरारी बापूने मंदिर निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए की धनराशि देगें। बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए कई संगठनों ने बड़ी रकम दान करने का प्रस्ताव किया है। बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट ने फरवरी में कहा था कि वह मंदिर के निर्माण के लिए दस करोड़ रुपये का दान देगा। बता दें कि पांच अगस्त को राम मंदिर का शिलान्यास होना है। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होंगे। भूमि पूजन के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ-साथ अन्य लोगों के भी भाग लेने की संभावना है।
मिलाप ज़वेरी निर्देशित मरजावां की रिलीज़ को दो हफ़्ते पूरे हो गये। बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्म ने ठीकठाक कलेक्शन किया है। हालांकि दूसरे हफ़्ते में फ़िल्म के कलेक्शंस में काफ़ी गिरावट दर्ज़ की गयी है। वर्किंग डेज़ में फ़िल्म का प्रतिदिन कलेक्शनएक करोड़ से नीचे चला गया। दूसरे हफ़्ते में शुक्रवार को मरजावां ने 1. 09 करोड़ का कलेक्शन किया था, जबकि शनिवार और रविवार को 1. 64 करोड़ और 2. 32 करोड़ जमा किये। वर्किंग वीक में सोमवार को फ़िल्म ने 88 लाख रुपये, मंगलवार को 94 लाख रुपये, बुधवार को 86 लाख रुपये और गुरुवार को 84 लाख रुपये बटोरे। 14 दिनों में मरजावां ने 46. 44 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। 15 नवंबर को सिनेमाघरों में पहुंची मरजावां ने पहले हफ़्ते में 37. 87 करोड़ का कलेक्शन किया था। फ़िल्म ने 7. 03 करोड़ की ओपनिंग ली थी, जबकि दूसरे दिन शनिवार को 7. 21 करोड़ और तीसरे दिन रविवार को 10. 18 करोड़ का कलेक्शन किया था। इसके बाद वर्किंग वीक में फ़िल्म के कलेक्शंस लगभग स्थिर रहे। सोमवार को 4. 15 करोड़, मंगलवार को 3. 61 करोड़ और बुधवार को 3. 16 करोड़ और गुरुवार को 2. 53 करोड़ जमा कर लिये। पहले हफ़्ते में सिर्फ़ रविवार को मरजावां ने डबल डिजिट कमाई की है।
मिलाप ज़वेरी निर्देशित मरजावां की रिलीज़ को दो हफ़्ते पूरे हो गये। बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्म ने ठीकठाक कलेक्शन किया है। हालांकि दूसरे हफ़्ते में फ़िल्म के कलेक्शंस में काफ़ी गिरावट दर्ज़ की गयी है। वर्किंग डेज़ में फ़िल्म का प्रतिदिन कलेक्शनएक करोड़ से नीचे चला गया। दूसरे हफ़्ते में शुक्रवार को मरजावां ने एक. नौ करोड़ का कलेक्शन किया था, जबकि शनिवार और रविवार को एक. चौंसठ करोड़ और दो. बत्तीस करोड़ जमा किये। वर्किंग वीक में सोमवार को फ़िल्म ने अठासी लाख रुपये, मंगलवार को चौरानवे लाख रुपये, बुधवार को छियासी लाख रुपये और गुरुवार को चौरासी लाख रुपये बटोरे। चौदह दिनों में मरजावां ने छियालीस. चौंतालीस करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। पंद्रह नवंबर को सिनेमाघरों में पहुंची मरजावां ने पहले हफ़्ते में सैंतीस. सत्तासी करोड़ का कलेक्शन किया था। फ़िल्म ने सात. तीन करोड़ की ओपनिंग ली थी, जबकि दूसरे दिन शनिवार को सात. इक्कीस करोड़ और तीसरे दिन रविवार को दस. अट्ठारह करोड़ का कलेक्शन किया था। इसके बाद वर्किंग वीक में फ़िल्म के कलेक्शंस लगभग स्थिर रहे। सोमवार को चार. पंद्रह करोड़, मंगलवार को तीन. इकसठ करोड़ और बुधवार को तीन. सोलह करोड़ और गुरुवार को दो. तिरेपन करोड़ जमा कर लिये। पहले हफ़्ते में सिर्फ़ रविवार को मरजावां ने डबल डिजिट कमाई की है।
जिला बांदा। राशन कार्ड का फारम भरैं मा सिम बेचैं का धन्धा जारी है। अब बात या है कि जेहिके पास मोबाइल निहाय उंई सिम कार्ड का, का आचार डरिहैं। पढ़ौ सिम कार्ड खरीदैं वाले मड़इन से खबर लहरिया के खास मुलाकात। ब्लाक तिंदवारी का गांव शादीमदनपुर के छेद्दी बताइस कि वा राशन कार्ड के फारम भरैं मा डेढ़ सौ रुपिया का नवा सिम कार्ड खरीदिस। सिम कार्ड तब से बंद धरा है। वा गुस्सा मा कहि डारिस कि का, या सिम कार्ड का आचार डाली। जब वहिके पास मोबाइल निहाय। गांव लोहारी के बल्देव अउर रानी का कहब है कि उंई भी एक-एक नई सिम खरीदिन हैं। उनके पास एक सिम का मोबाइल है दूसर सिम कहां डालैं। जिला पूर्ति अधिकारी गौरव प्रकाश चैधरी कहिन कि मोबाइल नंबर फारम भरै मा बहुत जरूरी है। होई सकत है कि या मोबाइल नंबर से सरकार निगरानी रख सकै कि राशन समय से सबका नियमित मिलत है या नहीं। अगर लोगन का या भी फायदा चाहैं का है तौ मोबाइल भी खरीदैं का परी। जिला बांदा। राशन कार्ड का फारम भरैं मा सिम बेचैं का धन्धा जारी है। अब बात या है कि जेहिके पास मोबाइल निहाय उंई सिम कार्ड का, का आचार डरिहैं। पढ़ौ सिम कार्ड खरीदैं वाले मड़इन से खबर लहरिया के खास मुलाकात।
जिला बांदा। राशन कार्ड का फारम भरैं मा सिम बेचैं का धन्धा जारी है। अब बात या है कि जेहिके पास मोबाइल निहाय उंई सिम कार्ड का, का आचार डरिहैं। पढ़ौ सिम कार्ड खरीदैं वाले मड़इन से खबर लहरिया के खास मुलाकात। ब्लाक तिंदवारी का गांव शादीमदनपुर के छेद्दी बताइस कि वा राशन कार्ड के फारम भरैं मा डेढ़ सौ रुपिया का नवा सिम कार्ड खरीदिस। सिम कार्ड तब से बंद धरा है। वा गुस्सा मा कहि डारिस कि का, या सिम कार्ड का आचार डाली। जब वहिके पास मोबाइल निहाय। गांव लोहारी के बल्देव अउर रानी का कहब है कि उंई भी एक-एक नई सिम खरीदिन हैं। उनके पास एक सिम का मोबाइल है दूसर सिम कहां डालैं। जिला पूर्ति अधिकारी गौरव प्रकाश चैधरी कहिन कि मोबाइल नंबर फारम भरै मा बहुत जरूरी है। होई सकत है कि या मोबाइल नंबर से सरकार निगरानी रख सकै कि राशन समय से सबका नियमित मिलत है या नहीं। अगर लोगन का या भी फायदा चाहैं का है तौ मोबाइल भी खरीदैं का परी। जिला बांदा। राशन कार्ड का फारम भरैं मा सिम बेचैं का धन्धा जारी है। अब बात या है कि जेहिके पास मोबाइल निहाय उंई सिम कार्ड का, का आचार डरिहैं। पढ़ौ सिम कार्ड खरीदैं वाले मड़इन से खबर लहरिया के खास मुलाकात।
मैं और छब्बी इंतजार ही करते रह गए कि, वो हमें डांटे-फटकारें, नौकरी से बाहर कर दें। उनके आने के दूसरे ही दिन तोंदियल भी आ गया। अब हम-दोनों कई दिन तक बड़ा अटपटा सा महसूस करते रहे। ज़िंदगी फिर पुराने ढर्रे पर आने लगी। देखते-देखते कई महीने बीत गए लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी मुझे अपने काम के लिए घंटे भर का भी समय नहीं मिला। अंततः छब्बी और मैंने यह योजना बनाई कि, हर हफ्ते छुट्टी वाले दिन वे हमें बाहर घूमने-घामने दो-चार घंटे के लिए जाने दिया करें। हमने सोचा इस दो-चार घंटे में हम-लोग फिल्मी दुनिया के लोगों से संपर्क साधेंगे। जिस दिन बात बन जाएगी उसी दिन रफू-चक्कर हो लेंगे। असल में अब मैं छब्बी के बिना वहां से निकलना भी नहीं चाहता था। एक से भले दो की बात मेरे मन में आ गई थी। बड़ी और पहली बात यह थी कि, छब्बी के दिल में मैंने कहीं गहराई में जगह बना ली थी। वह अब मेरे साथ ऐसे पेश आने लगी थी जैसे कोई खुर्राट पत्नी पति के साथ पेश आती है। अब तोंदियल जरा भी उसको छू लेने, हंसी-मजाक करने की कोशिश करता तो वह उस पर एकदम भड़क उठती थी। जब वह बार-बार यही करने लगी तो अंततः तोंदियल ने हम-दोनों से किनारा कर लिया। बस काम भर का ही हूं... हां... करता, बोलता था। इस बीच एक और नई बात हुई, कि अब मैडम दिन में कई कामों के लिए मुझे इधर-उधर बाहर भी भेजने लगी थीं। आने-जाने के लिए मोटर-साइकिल देतीं और मोबाइल भी। बराबर संपर्क बनाएं रखती थीं। बाहर निकलने से मुझे बंद रहने की घुटन से थोड़ी राहत मिलने लगी थी। मगर अब एक और तरह की घुटन मैं और छब्बी दोनों महसूस करने लगे थे। वह यह कि हम-दोनों ने पति-पत्नी के रिश्ते तो बना लिए थे, लेकिन पति-पत्नी की तरह रहने की जगह नहीं थी। हमने तय किया कि, मैडम से बात करके कहीं किराए पर जगह लेंगे। दोनों की तनख्वाह से किसी तरह गुजर बसर करने लायक कुछ जगह ली जा सकती है। यह सोच कर हमने एक दिन मैडम के सामने अपनी बात रख दी कि, 'हम-दोनों पति-पत्नी बन चुके हैं और अब बाहर कोई जगह किराए पर लेकर रहना चाहते हैं। काम यहां करते रहेंगे।' हमारे इतना कहते ही मैडम ने एक नज़र हम-दोनों पर डाल कर पूछा, 'तुम-दोनों ने कब, कहां कर ली शादी? बताया ही नहीं?' मेरे बोलने से पहले ही छब्बी बिना हिचक बोली, 'मैडम जब आप बाहर गई थीं, उसी बीच हम-दोनों ने तय किया कि, हम पति-पत्नी बनेंगे। फिर यहीं भगवान जी को साक्षी मानकर, माथा नवां कर, पति-पत्नी के रिश्ते मेें बंध गए।' यह सुन कर सुन्दर हिडिम्बा मैडम मुस्कुराईं, गहरी दृष्टि डाल कर बोलीं, 'वेरी नाइस। मगर किसने शादी कराई? तुम्हारी मांग में न सिंदूर, न बिंदी कौन सी रीति-रिवाज से की शादी।' उनके इस प्रश्न से बिना हिचकिचाए छब्बी ने कहा, 'मैडम हमने बस भगवान को साक्षी मान कर अपना रिश्ता बना लिया है, और रही बात सिंदूर, बिंदी की तो मैडम यह सब दिखावे की बातें हैं। हमें दिखावा एकदम समझ में नहीं आता। इसीलिए ऐसी कोई रीति-रस्म हमनें नहीं पूरी की। अब बस आपकी थोड़ी कृपा हो जाए, तो हम-दोनों एक ही छत के नीचे आराम से रहने लगेंगे। बस इतनी मेहरबानी आप कर दें। हम जीवन-भर आपके अहसानमंद रहेंगे।' इस बीच मैं एकदम चुप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे लगा कि, छब्बी सही कोशिश कर रही है। मैडम कुछ देर चुप रहने के बाद बोलीं, 'ठीक है, यहीं-कहीं आसपास कोई जगह ले लो किराए पर। क्योंकि दूर जाओगे तो यहां टाइम से नहीं पहुंच पाओगे। कंवेंस का खर्च अलग बढ़ जाएगा।' मैडम की बात, उनकी बेरूखी से हमें बड़ा धक्का लगा। क्योंकि मैडम ने किराए का मकान दिलवाने में कोई मदद करने से यह कहकर मना कर दिया कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यहां तक कि, पैसे के लिए भी कोई मदद देने को तैयार नहीं हुईं। हम महीने भर हाथ-पैर मार-कर थक गए, लेकिन हमारा जो बजट था, उतने में कोई ठिकाना नहीं मिला। हम पहले ही की तरह, सुन्दर हिडिम्बा मैडम के सोने के पिंजरे में इधर-उधर किसी कोने में दुबकते-फिरते रहे। इन सारी समस्याओं से हम इतना व्याकुल हो उठे कि, मन करता ऊपर से ही नीचे कूद जाएँ। छब्बी तो मुझसे भी ज़्यादा परेशान थी। एक दिन उसने भड़कते हुए कहा, 'सुनो जब यह रानी साहिबा हम-दोनों के लिए कुछ नहीं कर सकतीं, तो यहां ना नौकरी करेंगे, ना रहेंगे। अब चाहे जो भी तकलीफ उठानी पड़े हम इस सोने के पिंजरे का मोह छोड़-छाड़ कर चलते हैं कहीं और, जहां कोई काम मिल सके, और कहीं एक कोना आराम से साथ रहने के लिए।' उसकी बात मुझे सही लगी। मगर मेरे मन के एक कोने में यह घबराहट भी हुई कि, यहां अच्छा खाने-पीने और पैर फैलाने भर की साफ-सुथरी जगह मिल जा रही है। छोड़ने के बाद जाने कहां-कहां ठोकरें खानी पड़े। दर-दर भटकना पड़े। मेरी यह दुविधा छब्बी ने ना जाने कैसे भांप ली। तुरंत बोली, 'क्या सोच रहे हो, डर लग रहा है क्या?' मैंने तुरंत खुद को संभालते हुए कहा, 'नहीं तो, ऐसा क्यों कह रही हो ? मैं तो खुद ही यही चाहता हूं। तुमसे पहले ही कहा था।' फिर हमने दूसरी योजना बना कर जैसे ही अगले महीने तनख्वाह मिली, उसके अगले ही दिन मैडम से कहा कि, 'हम-दोनों नौकरी छोड़कर कहीं, किसी कस्बे में जाकर कुछ काम-धंधा करेंगे। रहने का कोई ठौर ढूढे़ंगे। क्योंकि मुंबई में सब इतना महंगा है कि, यहां हमारा रहना नहीं हो पायेगा।' इस बार मैडम कुछ बहस पर उतर आईं, तो छब्बी भी बिना हिचक बोली, 'मैडम आखिर हम कब-तक ऐसे ही रहेंगे। हम अपना परिवार बसाना चाहते हैं, अपने भविष्य के लिए बच्चे पैदा करना चाहते हैं। इसलिए आपसे यह कह रहे हैं, नहीं तो आप इतने अच्छे से हम-लोगों को रखती हैं, हम क्यों छोड़कर जाने की सोचते। लेकिन सच तो यह भी है ना कि, हम यहां रहकर अपना परिवार, अपने परिवार का सुख तो कभी नहीं पा पाएंगे। इसलिए बस हम पर कृपा करिए।' समीना सुन्दर हिडिम्बा मैडम बड़ी घाघ थीं। वह मेहनती, जांचें-परखे नौकर इतनी आसानी से नहीं छोड़ना चाहती थीं। तो टालती हुई बोलीं, 'ठीक है, अभी रुको, कल बताऊंगी।' हम समझ गए कि, अब यह साहब से बात कर प्रेसर बनाएंगी। रोकने का कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेंगी। मगर हमने भी ठान ली थी कि मानेंगे नहीं। समीना एक बात और बताऊँ, छब्बी जब मैडम से बात कर रही थी तो उसकी एक बात मेरे दिमाग में बैठ गई। बाद में मैंने छब्बी से वह बात पूछी कि, 'यह बताओ, तुम तो कहती हो कि शादी, बच्चे कुछ करना ही नहीं है, तो मैडम से झूठ क्यों बोला कि, परिवार बच्चे आदि करने है? " इस पर वह तन-तनाती हुई बोली, 'तो तुम क्या समझते हो कि, वो इतनी आसानी से मान जाएंगी। फिर वो ही हमसे कौन सा सब सच ही बोलती हैं। जो रुकने को बोला है ना, देखना, निश्चित ही साहब का रौब डलवाएंगी और साहब अपनी ताकत दिखाएगा, हड़काएगा।' उसका मूड देखकर मैंने कहा, 'अच्छा छब्बी, हम-लोग सच में शादी करें, मां-बाप बनें तो कितना बढ़िया रहेगा।' मेरा इतना कहना था कि, छब्बी फिर भड़क उठी। बोली, 'सुन, मुझे जो कहना था वह एक बार कह दिया। दो बार शादी करके, एक बार दो बच्चे पैदा करके मन इतना अघा गया है इन-सब से कि अब इनके बारे में सोचना भी नहीं चाहती। और सुन तू इस होश में न रहना कि, पहले यहां से चलें, फिर शादी, बच्चे के लिए दबाव डालेंगे। अगर तुम्हारे दिमाग में यह बात है, तो साफ कह रही हूं कि, भूल जाओ। अब भी सोच लो, जिस दिन तुम ने यह बात कही, मैं उसी दिन तुम्हें छोड़ कर कहीं और चल दूंगी।' समीना उसकी दृढ़ता देखकर मुझे पक्का यकीन हो गया था कि, यह जो कह रही है, वही करेगी। इरादों की पक्की लग रही है। उस समय मैंने यह कह कर बात खत्म की कि, 'मैंने तो ऐसे ही कह दिया। बाकी यह सब तो पहले ही तय है कि, इन झंझटों में हमें नहीं पड़ना है।' समीना उस रात मुझे बहुत देर तक नींद नहीं आई। मैं छब्बी को लेकर तरह-तरह के ख़यालों में खोया हुआ था। उस बॉलकनी में लेटा यही सोच रहा था कि, इस समय छब्बी के साथ लेटा होता, तो उससे भविष्य को लेकर और बातें करता। लेकिन सुन्दर हिडिम्बा मैडम जी का जंजाल बनी हुई थीं। उस दिन भी बड़ी देर तक अपनी मालिश करवाने के बाद उसे छोड़ा था। थकी-मांदी वह हमेशा की तरह लॉबी में ही सो गई थी। इधर तोंदियल भी एक कोने में सो रहा था। हमारे लिए वह भी मैडम से कम बड़ा जी का जंजाल नहीं था। वह नहीं होता तो चाहे जैसे मैं छब्बी को अपने साथ बालकनी में ही रखता। तभी अचानक ही मेरे दिमाग में यह बात आई कि, छब्बी पिछले कई महीने से मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए हुए है, लेकिन यह अभी तक प्रिग्नेंट नहीं हुई। कहीं इसने कुछ ऐसी-वैसी व्यवस्था तो नहीं करवा रखी है, ऑपरेशन वगैरह, या कुछ और । लेकिन उसके पेट पर ऑपरेशन के तो कोई निशान हैं नहीं । साहब के यहाँ भी सम्बन्ध बनाती रही है, आखिर मामला क्या है ? मेरे दिमाग में यह बात इसलिए ज़्यादा जोर से उभर आई थी क्योंकि सच यही था कि, मेरे मन में यह बात जमी हुई थी कि, जब जीवन एक ढर्रे पर आ जाएगा, तो छब्बी को किसी भी तरह तैयार करूंगा कि, वह बीती बातों को भूल कर फिर से मां बने । जीवन पुरानी बातों को पकड़ कर बैठने के लिए नहीं है। अतीत में हुई अच्छी-बुरी बातों से सबक लेकर भविष्य की सीढियां बनाने के लिए है। अतीत की बातें तो भविष्य के लिए नींव का पत्थर होती हैं। इन्हीं मजबूत पत्थरों से भरी नींव पर हम अपने सपनों का महल बनाते हैं। हमें भी यही करना चाहिए।
मैं और छब्बी इंतजार ही करते रह गए कि, वो हमें डांटे-फटकारें, नौकरी से बाहर कर दें। उनके आने के दूसरे ही दिन तोंदियल भी आ गया। अब हम-दोनों कई दिन तक बड़ा अटपटा सा महसूस करते रहे। ज़िंदगी फिर पुराने ढर्रे पर आने लगी। देखते-देखते कई महीने बीत गए लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी मुझे अपने काम के लिए घंटे भर का भी समय नहीं मिला। अंततः छब्बी और मैंने यह योजना बनाई कि, हर हफ्ते छुट्टी वाले दिन वे हमें बाहर घूमने-घामने दो-चार घंटे के लिए जाने दिया करें। हमने सोचा इस दो-चार घंटे में हम-लोग फिल्मी दुनिया के लोगों से संपर्क साधेंगे। जिस दिन बात बन जाएगी उसी दिन रफू-चक्कर हो लेंगे। असल में अब मैं छब्बी के बिना वहां से निकलना भी नहीं चाहता था। एक से भले दो की बात मेरे मन में आ गई थी। बड़ी और पहली बात यह थी कि, छब्बी के दिल में मैंने कहीं गहराई में जगह बना ली थी। वह अब मेरे साथ ऐसे पेश आने लगी थी जैसे कोई खुर्राट पत्नी पति के साथ पेश आती है। अब तोंदियल जरा भी उसको छू लेने, हंसी-मजाक करने की कोशिश करता तो वह उस पर एकदम भड़क उठती थी। जब वह बार-बार यही करने लगी तो अंततः तोंदियल ने हम-दोनों से किनारा कर लिया। बस काम भर का ही हूं... हां... करता, बोलता था। इस बीच एक और नई बात हुई, कि अब मैडम दिन में कई कामों के लिए मुझे इधर-उधर बाहर भी भेजने लगी थीं। आने-जाने के लिए मोटर-साइकिल देतीं और मोबाइल भी। बराबर संपर्क बनाएं रखती थीं। बाहर निकलने से मुझे बंद रहने की घुटन से थोड़ी राहत मिलने लगी थी। मगर अब एक और तरह की घुटन मैं और छब्बी दोनों महसूस करने लगे थे। वह यह कि हम-दोनों ने पति-पत्नी के रिश्ते तो बना लिए थे, लेकिन पति-पत्नी की तरह रहने की जगह नहीं थी। हमने तय किया कि, मैडम से बात करके कहीं किराए पर जगह लेंगे। दोनों की तनख्वाह से किसी तरह गुजर बसर करने लायक कुछ जगह ली जा सकती है। यह सोच कर हमने एक दिन मैडम के सामने अपनी बात रख दी कि, 'हम-दोनों पति-पत्नी बन चुके हैं और अब बाहर कोई जगह किराए पर लेकर रहना चाहते हैं। काम यहां करते रहेंगे।' हमारे इतना कहते ही मैडम ने एक नज़र हम-दोनों पर डाल कर पूछा, 'तुम-दोनों ने कब, कहां कर ली शादी? बताया ही नहीं?' मेरे बोलने से पहले ही छब्बी बिना हिचक बोली, 'मैडम जब आप बाहर गई थीं, उसी बीच हम-दोनों ने तय किया कि, हम पति-पत्नी बनेंगे। फिर यहीं भगवान जी को साक्षी मानकर, माथा नवां कर, पति-पत्नी के रिश्ते मेें बंध गए।' यह सुन कर सुन्दर हिडिम्बा मैडम मुस्कुराईं, गहरी दृष्टि डाल कर बोलीं, 'वेरी नाइस। मगर किसने शादी कराई? तुम्हारी मांग में न सिंदूर, न बिंदी कौन सी रीति-रिवाज से की शादी।' उनके इस प्रश्न से बिना हिचकिचाए छब्बी ने कहा, 'मैडम हमने बस भगवान को साक्षी मान कर अपना रिश्ता बना लिया है, और रही बात सिंदूर, बिंदी की तो मैडम यह सब दिखावे की बातें हैं। हमें दिखावा एकदम समझ में नहीं आता। इसीलिए ऐसी कोई रीति-रस्म हमनें नहीं पूरी की। अब बस आपकी थोड़ी कृपा हो जाए, तो हम-दोनों एक ही छत के नीचे आराम से रहने लगेंगे। बस इतनी मेहरबानी आप कर दें। हम जीवन-भर आपके अहसानमंद रहेंगे।' इस बीच मैं एकदम चुप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे लगा कि, छब्बी सही कोशिश कर रही है। मैडम कुछ देर चुप रहने के बाद बोलीं, 'ठीक है, यहीं-कहीं आसपास कोई जगह ले लो किराए पर। क्योंकि दूर जाओगे तो यहां टाइम से नहीं पहुंच पाओगे। कंवेंस का खर्च अलग बढ़ जाएगा।' मैडम की बात, उनकी बेरूखी से हमें बड़ा धक्का लगा। क्योंकि मैडम ने किराए का मकान दिलवाने में कोई मदद करने से यह कहकर मना कर दिया कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यहां तक कि, पैसे के लिए भी कोई मदद देने को तैयार नहीं हुईं। हम महीने भर हाथ-पैर मार-कर थक गए, लेकिन हमारा जो बजट था, उतने में कोई ठिकाना नहीं मिला। हम पहले ही की तरह, सुन्दर हिडिम्बा मैडम के सोने के पिंजरे में इधर-उधर किसी कोने में दुबकते-फिरते रहे। इन सारी समस्याओं से हम इतना व्याकुल हो उठे कि, मन करता ऊपर से ही नीचे कूद जाएँ। छब्बी तो मुझसे भी ज़्यादा परेशान थी। एक दिन उसने भड़कते हुए कहा, 'सुनो जब यह रानी साहिबा हम-दोनों के लिए कुछ नहीं कर सकतीं, तो यहां ना नौकरी करेंगे, ना रहेंगे। अब चाहे जो भी तकलीफ उठानी पड़े हम इस सोने के पिंजरे का मोह छोड़-छाड़ कर चलते हैं कहीं और, जहां कोई काम मिल सके, और कहीं एक कोना आराम से साथ रहने के लिए।' उसकी बात मुझे सही लगी। मगर मेरे मन के एक कोने में यह घबराहट भी हुई कि, यहां अच्छा खाने-पीने और पैर फैलाने भर की साफ-सुथरी जगह मिल जा रही है। छोड़ने के बाद जाने कहां-कहां ठोकरें खानी पड़े। दर-दर भटकना पड़े। मेरी यह दुविधा छब्बी ने ना जाने कैसे भांप ली। तुरंत बोली, 'क्या सोच रहे हो, डर लग रहा है क्या?' मैंने तुरंत खुद को संभालते हुए कहा, 'नहीं तो, ऐसा क्यों कह रही हो ? मैं तो खुद ही यही चाहता हूं। तुमसे पहले ही कहा था।' फिर हमने दूसरी योजना बना कर जैसे ही अगले महीने तनख्वाह मिली, उसके अगले ही दिन मैडम से कहा कि, 'हम-दोनों नौकरी छोड़कर कहीं, किसी कस्बे में जाकर कुछ काम-धंधा करेंगे। रहने का कोई ठौर ढूढे़ंगे। क्योंकि मुंबई में सब इतना महंगा है कि, यहां हमारा रहना नहीं हो पायेगा।' इस बार मैडम कुछ बहस पर उतर आईं, तो छब्बी भी बिना हिचक बोली, 'मैडम आखिर हम कब-तक ऐसे ही रहेंगे। हम अपना परिवार बसाना चाहते हैं, अपने भविष्य के लिए बच्चे पैदा करना चाहते हैं। इसलिए आपसे यह कह रहे हैं, नहीं तो आप इतने अच्छे से हम-लोगों को रखती हैं, हम क्यों छोड़कर जाने की सोचते। लेकिन सच तो यह भी है ना कि, हम यहां रहकर अपना परिवार, अपने परिवार का सुख तो कभी नहीं पा पाएंगे। इसलिए बस हम पर कृपा करिए।' समीना सुन्दर हिडिम्बा मैडम बड़ी घाघ थीं। वह मेहनती, जांचें-परखे नौकर इतनी आसानी से नहीं छोड़ना चाहती थीं। तो टालती हुई बोलीं, 'ठीक है, अभी रुको, कल बताऊंगी।' हम समझ गए कि, अब यह साहब से बात कर प्रेसर बनाएंगी। रोकने का कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेंगी। मगर हमने भी ठान ली थी कि मानेंगे नहीं। समीना एक बात और बताऊँ, छब्बी जब मैडम से बात कर रही थी तो उसकी एक बात मेरे दिमाग में बैठ गई। बाद में मैंने छब्बी से वह बात पूछी कि, 'यह बताओ, तुम तो कहती हो कि शादी, बच्चे कुछ करना ही नहीं है, तो मैडम से झूठ क्यों बोला कि, परिवार बच्चे आदि करने है? " इस पर वह तन-तनाती हुई बोली, 'तो तुम क्या समझते हो कि, वो इतनी आसानी से मान जाएंगी। फिर वो ही हमसे कौन सा सब सच ही बोलती हैं। जो रुकने को बोला है ना, देखना, निश्चित ही साहब का रौब डलवाएंगी और साहब अपनी ताकत दिखाएगा, हड़काएगा।' उसका मूड देखकर मैंने कहा, 'अच्छा छब्बी, हम-लोग सच में शादी करें, मां-बाप बनें तो कितना बढ़िया रहेगा।' मेरा इतना कहना था कि, छब्बी फिर भड़क उठी। बोली, 'सुन, मुझे जो कहना था वह एक बार कह दिया। दो बार शादी करके, एक बार दो बच्चे पैदा करके मन इतना अघा गया है इन-सब से कि अब इनके बारे में सोचना भी नहीं चाहती। और सुन तू इस होश में न रहना कि, पहले यहां से चलें, फिर शादी, बच्चे के लिए दबाव डालेंगे। अगर तुम्हारे दिमाग में यह बात है, तो साफ कह रही हूं कि, भूल जाओ। अब भी सोच लो, जिस दिन तुम ने यह बात कही, मैं उसी दिन तुम्हें छोड़ कर कहीं और चल दूंगी।' समीना उसकी दृढ़ता देखकर मुझे पक्का यकीन हो गया था कि, यह जो कह रही है, वही करेगी। इरादों की पक्की लग रही है। उस समय मैंने यह कह कर बात खत्म की कि, 'मैंने तो ऐसे ही कह दिया। बाकी यह सब तो पहले ही तय है कि, इन झंझटों में हमें नहीं पड़ना है।' समीना उस रात मुझे बहुत देर तक नींद नहीं आई। मैं छब्बी को लेकर तरह-तरह के ख़यालों में खोया हुआ था। उस बॉलकनी में लेटा यही सोच रहा था कि, इस समय छब्बी के साथ लेटा होता, तो उससे भविष्य को लेकर और बातें करता। लेकिन सुन्दर हिडिम्बा मैडम जी का जंजाल बनी हुई थीं। उस दिन भी बड़ी देर तक अपनी मालिश करवाने के बाद उसे छोड़ा था। थकी-मांदी वह हमेशा की तरह लॉबी में ही सो गई थी। इधर तोंदियल भी एक कोने में सो रहा था। हमारे लिए वह भी मैडम से कम बड़ा जी का जंजाल नहीं था। वह नहीं होता तो चाहे जैसे मैं छब्बी को अपने साथ बालकनी में ही रखता। तभी अचानक ही मेरे दिमाग में यह बात आई कि, छब्बी पिछले कई महीने से मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए हुए है, लेकिन यह अभी तक प्रिग्नेंट नहीं हुई। कहीं इसने कुछ ऐसी-वैसी व्यवस्था तो नहीं करवा रखी है, ऑपरेशन वगैरह, या कुछ और । लेकिन उसके पेट पर ऑपरेशन के तो कोई निशान हैं नहीं । साहब के यहाँ भी सम्बन्ध बनाती रही है, आखिर मामला क्या है ? मेरे दिमाग में यह बात इसलिए ज़्यादा जोर से उभर आई थी क्योंकि सच यही था कि, मेरे मन में यह बात जमी हुई थी कि, जब जीवन एक ढर्रे पर आ जाएगा, तो छब्बी को किसी भी तरह तैयार करूंगा कि, वह बीती बातों को भूल कर फिर से मां बने । जीवन पुरानी बातों को पकड़ कर बैठने के लिए नहीं है। अतीत में हुई अच्छी-बुरी बातों से सबक लेकर भविष्य की सीढियां बनाने के लिए है। अतीत की बातें तो भविष्य के लिए नींव का पत्थर होती हैं। इन्हीं मजबूत पत्थरों से भरी नींव पर हम अपने सपनों का महल बनाते हैं। हमें भी यही करना चाहिए।
प्रमोशन में कहीं कोई दिक्कत नहीं है और जुलाई से कर्मचारियों के लिए कई प्रमोशन शुरू कर दिए गए हैं. मिड मैनेजमेंट लेवल पर जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी हैं, उनकी सैलरी हाइक सितंबर से शुरू हो जाएगी. सॉफ्टवेयर सर्विस देने वाली कंपनी विप्रो ने कहा है कि पहले जिस सैलरी बढ़ोतरी की बात कही गई है, कंपनी उस पर कायम है और 1 सितंबर से कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिलेगा. विप्रो के मुताबिक, क्वार्टरली प्रमोशन का पहला फेज पूरा कर लिया गया है और अगली सैलरी वृद्धि का ऐलान किया जा चुका है. मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि विप्रो अपने कर्मचारियों के लिए वैरिएबल पेआउट रोकने जा रही है और अप्रैल-जून तिमाही के लिए वैरिएबल पेआउट नहीं दिया जाएगा. इसके जवाब में विप्रो ने कहा है कि ऐसी कोई बात नहीं है और कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी 1 सितंबर से लागू हो जाएगी. 'मिंट' से विप्रो ने कहा है, सैलरी हाइक को लेकर पहले दिए गए बयान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कर्मचारियों के लिए सैलरी वृद्धि की घोषणा में कोई बदलाव नहीं गया है. 1 सितंबर से सैलरी हाइक को प्रभावी माना जाएगा. इसके साथ ही कंपनी ने तिमाही प्रोग्रेसन के पहले फेज को भी पूरा कर लिया है. एक सवाल कर्मचारियों के वैरिएबल पेआउट के बारे में भी पूछा गया कि उसमें क्या बदलाव हुआ है. इस पर कंपनी ने कहा है कि सैलरी वैरिएबल पे क्या होगा, इस बारे में अभी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती. मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया था कि विप्रो जो कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में एक है, अपने कर्मचारियों के वैरिएबल पेमेंट को रोकने जा रही है. दावे में यह भी कहा गया कि मार्जिन के दबाव में कंपनी मिड और सीनियर लेवल कर्मचारियों के वैरिएबल पे पर रोक लगा सकती है. हालांकि विप्रो ने इससे इनकार किया है, लेकिन ये नहीं बताया गया है कि वैरिएबल पे कितना दिया जाएगा. इस साल जून में विप्रो का मार्जिन कम रहा जो कि 15 परसेंट देखा गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में मार्जिन 18.8 परसेंट था. इससे पहले विप्रो ने कहा था कि नए कर्मचारियों का प्रमोशन शुरू किया जा रहा है और इसकी प्रक्रिया इस साल जुलाई से आगे बढ़ाई जा रही है. रिपोर्ट में कह गया है कि कंपनी मिड मैनेजमेंट स्तर के टॉप परफॉर्मर कर्मचारियों को क्वार्टरली प्रमोशन का ऑफर दे रही है. विप्रो ने साफ किया है कि प्रमोशन में कहीं कोई दिक्कत नहीं है और जुलाई से कर्मचारियों के लिए कई प्रमोशन शुरू कर दिए गए हैं. मिड मैनेजमेंट लेवल पर जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी हैं, उनकी सैलरी हाइक सितंबर से शुरू हो जाएगी. विप्रो अपने कर्मचारियों को हर तिमाही वैरिएबल पे देती है. ए, बी और रेनबो बैंड के कर्मचारियों का वैरिएबल पे क्वार्टरली बिलेबल डेज पर निर्भर करता है. बी और सी बैंड के कर्मचारियों का वैरिएबल पे कंपनी के फाइनेंशियल पैरामीटर्स पर निर्भर करता है.
प्रमोशन में कहीं कोई दिक्कत नहीं है और जुलाई से कर्मचारियों के लिए कई प्रमोशन शुरू कर दिए गए हैं. मिड मैनेजमेंट लेवल पर जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी हैं, उनकी सैलरी हाइक सितंबर से शुरू हो जाएगी. सॉफ्टवेयर सर्विस देने वाली कंपनी विप्रो ने कहा है कि पहले जिस सैलरी बढ़ोतरी की बात कही गई है, कंपनी उस पर कायम है और एक सितंबर से कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिलेगा. विप्रो के मुताबिक, क्वार्टरली प्रमोशन का पहला फेज पूरा कर लिया गया है और अगली सैलरी वृद्धि का ऐलान किया जा चुका है. मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि विप्रो अपने कर्मचारियों के लिए वैरिएबल पेआउट रोकने जा रही है और अप्रैल-जून तिमाही के लिए वैरिएबल पेआउट नहीं दिया जाएगा. इसके जवाब में विप्रो ने कहा है कि ऐसी कोई बात नहीं है और कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी एक सितंबर से लागू हो जाएगी. 'मिंट' से विप्रो ने कहा है, सैलरी हाइक को लेकर पहले दिए गए बयान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कर्मचारियों के लिए सैलरी वृद्धि की घोषणा में कोई बदलाव नहीं गया है. एक सितंबर से सैलरी हाइक को प्रभावी माना जाएगा. इसके साथ ही कंपनी ने तिमाही प्रोग्रेसन के पहले फेज को भी पूरा कर लिया है. एक सवाल कर्मचारियों के वैरिएबल पेआउट के बारे में भी पूछा गया कि उसमें क्या बदलाव हुआ है. इस पर कंपनी ने कहा है कि सैलरी वैरिएबल पे क्या होगा, इस बारे में अभी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती. मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया था कि विप्रो जो कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में एक है, अपने कर्मचारियों के वैरिएबल पेमेंट को रोकने जा रही है. दावे में यह भी कहा गया कि मार्जिन के दबाव में कंपनी मिड और सीनियर लेवल कर्मचारियों के वैरिएबल पे पर रोक लगा सकती है. हालांकि विप्रो ने इससे इनकार किया है, लेकिन ये नहीं बताया गया है कि वैरिएबल पे कितना दिया जाएगा. इस साल जून में विप्रो का मार्जिन कम रहा जो कि पंद्रह परसेंट देखा गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में मार्जिन अट्ठारह.आठ परसेंट था. इससे पहले विप्रो ने कहा था कि नए कर्मचारियों का प्रमोशन शुरू किया जा रहा है और इसकी प्रक्रिया इस साल जुलाई से आगे बढ़ाई जा रही है. रिपोर्ट में कह गया है कि कंपनी मिड मैनेजमेंट स्तर के टॉप परफॉर्मर कर्मचारियों को क्वार्टरली प्रमोशन का ऑफर दे रही है. विप्रो ने साफ किया है कि प्रमोशन में कहीं कोई दिक्कत नहीं है और जुलाई से कर्मचारियों के लिए कई प्रमोशन शुरू कर दिए गए हैं. मिड मैनेजमेंट लेवल पर जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी हैं, उनकी सैलरी हाइक सितंबर से शुरू हो जाएगी. विप्रो अपने कर्मचारियों को हर तिमाही वैरिएबल पे देती है. ए, बी और रेनबो बैंड के कर्मचारियों का वैरिएबल पे क्वार्टरली बिलेबल डेज पर निर्भर करता है. बी और सी बैंड के कर्मचारियों का वैरिएबल पे कंपनी के फाइनेंशियल पैरामीटर्स पर निर्भर करता है.
अहमदाबादः टी20 यानी फटाफट क्रिकेट, कुछ गेंदों में ही यहां खेल बदल जाता है। इसी वजह से इसे युवाओं का खेल भी कहा जाता है। माना जाता है कि सीनियर खिलाड़ी इस खेल की स्पीड को पकड़ नहीं पाते हैं। लेकिन आईपीएल 2023 (IPL 2023) में कुछ अलग ही स्थिति है। अमित मिश्रा और पीयूष चावला के बाद ईशांत शर्मा दिखा रहे हैं कि अनुभव का मतलब क्या होता है। खेल की परिस्थिति कैसी भी हो, अगर अनुभव आपके पास है तो युवा जोश को भी शांत कर सकते हैं। गुजरात टाइटंस और दिल्ली कैपिटल्स के मुकाबले में 105 टेस्ट खेलने वाले ईशांत शर्मा ने सबसे बेहतरीन फिनिशर में शामिल राहुल तेवतिया (Rahul Tewatia) के सामने आखिरी ओवर में 12 रन डिफेंड कर लिया। ईशांत के काम आया अनुभवराहुल तेवितिया ने 19वें ओवर में एनरिच नोर्तजे के खिलाफ लगातार 3 गेंदों पर 3 छक्के मारे थे। आखिरी ओवर में 12 रनों की जरूरत थी। उनका साथ हार्दिक पंड्या दे रहे थे। ऐसे में यह लक्ष्य आसानी से हासिल होता दिख रहा था। लेकिन ईशांत शर्मा के इरादे कुछ और थे। पिछले सीजन उन्हें आईपीएल में खेलने का भी मौका नहीं मिला था। पहली गेंद पर हार्दिक पंड्या ने उनके खिलाफ 2 और दूसरी गेंद पर एक रन लिया। फिर स्ट्राइक पर राहुल तेवितिया आए। तेवतिया ने तीनों छक्के लेग साइड में मारे थे। ऐसे में ईशांत ने उन्हें पहली गेंद ऑफ स्टंप से काफी बाहर यॉर्कर लेंथ पर फेंकी। वह तेवतिया के बल्ले पर भी नहीं लगी। अगली गेंद तेवतिया आगे वाली ही उम्मीद कर रहे थे। वह ऑफ स्टंप के बाहर चले गए लेकिन ईशांत ने गेंद पटक दी। राहुल तेवतिया ने शॉट खेलना चाहा लेकिन गेंद बल्ले से ऊपरी हिस्से में लगने के बाद एक्स्ट्रा कवर के हाथों में चली गई। राशिद ने 2 गेंद पर 3 रन बनाएईशांत शर्मा ने आखिरी दो गेंदों पर राशिद खान उनके सामने थे। इसपर वह सिर्फ 3 ही रन बना पाए। इस तरह ईशांत शर्मा ने आखिरी ओवर में सिर्फ 6 रन दिए और अपनी टीम को 5 रनों से जीत दिला दी। दिल्ली ने पहले खेलते हुए 130 रन बनाए थे। यह आईपीएल इतिहास में दिल्ली का डिफेंड किया गया सबसे छोटा टारगेट है।
अहमदाबादः टीबीस यानी फटाफट क्रिकेट, कुछ गेंदों में ही यहां खेल बदल जाता है। इसी वजह से इसे युवाओं का खेल भी कहा जाता है। माना जाता है कि सीनियर खिलाड़ी इस खेल की स्पीड को पकड़ नहीं पाते हैं। लेकिन आईपीएल दो हज़ार तेईस में कुछ अलग ही स्थिति है। अमित मिश्रा और पीयूष चावला के बाद ईशांत शर्मा दिखा रहे हैं कि अनुभव का मतलब क्या होता है। खेल की परिस्थिति कैसी भी हो, अगर अनुभव आपके पास है तो युवा जोश को भी शांत कर सकते हैं। गुजरात टाइटंस और दिल्ली कैपिटल्स के मुकाबले में एक सौ पाँच टेस्ट खेलने वाले ईशांत शर्मा ने सबसे बेहतरीन फिनिशर में शामिल राहुल तेवतिया के सामने आखिरी ओवर में बारह रन डिफेंड कर लिया। ईशांत के काम आया अनुभवराहुल तेवितिया ने उन्नीसवें ओवर में एनरिच नोर्तजे के खिलाफ लगातार तीन गेंदों पर तीन छक्के मारे थे। आखिरी ओवर में बारह रनों की जरूरत थी। उनका साथ हार्दिक पंड्या दे रहे थे। ऐसे में यह लक्ष्य आसानी से हासिल होता दिख रहा था। लेकिन ईशांत शर्मा के इरादे कुछ और थे। पिछले सीजन उन्हें आईपीएल में खेलने का भी मौका नहीं मिला था। पहली गेंद पर हार्दिक पंड्या ने उनके खिलाफ दो और दूसरी गेंद पर एक रन लिया। फिर स्ट्राइक पर राहुल तेवितिया आए। तेवतिया ने तीनों छक्के लेग साइड में मारे थे। ऐसे में ईशांत ने उन्हें पहली गेंद ऑफ स्टंप से काफी बाहर यॉर्कर लेंथ पर फेंकी। वह तेवतिया के बल्ले पर भी नहीं लगी। अगली गेंद तेवतिया आगे वाली ही उम्मीद कर रहे थे। वह ऑफ स्टंप के बाहर चले गए लेकिन ईशांत ने गेंद पटक दी। राहुल तेवतिया ने शॉट खेलना चाहा लेकिन गेंद बल्ले से ऊपरी हिस्से में लगने के बाद एक्स्ट्रा कवर के हाथों में चली गई। राशिद ने दो गेंद पर तीन रन बनाएईशांत शर्मा ने आखिरी दो गेंदों पर राशिद खान उनके सामने थे। इसपर वह सिर्फ तीन ही रन बना पाए। इस तरह ईशांत शर्मा ने आखिरी ओवर में सिर्फ छः रन दिए और अपनी टीम को पाँच रनों से जीत दिला दी। दिल्ली ने पहले खेलते हुए एक सौ तीस रन बनाए थे। यह आईपीएल इतिहास में दिल्ली का डिफेंड किया गया सबसे छोटा टारगेट है।
मुंगेली जिले में वकील ने एक डॉक्टर पर पत्नी का अपहरण करने का केस दर्ज कराया था. अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है. वकील की पत्नी पुलिस के सामने आ गई है. उन्होंने अपने पति पर मारपीट करने का आरोप लगाया है. साथ ही प्रताड़ना से तंग आकर अपनी मर्जी से जाने की बात कही है. वहीं वकील ने कांग्रेस नेता के दबाव में उल्टा केस दर्ज करने का आरोप लगाया है. वकील संघ ने इस मामले पर पुलिस के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है. मामला बीते 18 दिन पहले का है. जहां वकील पति बेदुराम रात्रे ने कांग्रेस नेता रमेश कश्यप सहित उनके दो अन्य दोस्तों पर पत्नी का अगवा कर ले जाने की शिकायत लोरमी थाने में की थी. इसके बाद आनन-फानन में पीड़ित वकील बेदुराम की पत्नी शुक्रवार को थाना पहुंची. इस दौरान आरोपी रमेश कश्यप कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ तो वहीं शिकायतकर्ता बेदुराम रात्रे भी अन्य वकीलों के साथ न्याय की गुहार लगाने लोरमी थाने पहुंचे थे. इस दौरान पत्नी द्वारा पति पर ही प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दे दिया. इस शिकायत के बाद बेदुराम रात्रे को ही आरोपी बनाते हुए पुलिस ने उनके ही विरुद्ध 498, 323, 506 धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है. वकील की पत्नी शजीकला रात्रे ने बताया कि उनकी शादी 2004 में हुई थी. शादी के बाद उनके पति के द्वारा आए दिन चरित्र शंका को लेकर मारपीट की जाती थी. जिससे तंग आकर 18 दिन पहले पत्नी किसी परिचित के साथ मुंगेली चली गई और मुंगेली में रह रही थी. अपहरण किए जाने के आरोप की जानकारी होने के बाद लोरमी थाने में पहुंचकर पति के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ित करने का केस दर्ज कराया है.
मुंगेली जिले में वकील ने एक डॉक्टर पर पत्नी का अपहरण करने का केस दर्ज कराया था. अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है. वकील की पत्नी पुलिस के सामने आ गई है. उन्होंने अपने पति पर मारपीट करने का आरोप लगाया है. साथ ही प्रताड़ना से तंग आकर अपनी मर्जी से जाने की बात कही है. वहीं वकील ने कांग्रेस नेता के दबाव में उल्टा केस दर्ज करने का आरोप लगाया है. वकील संघ ने इस मामले पर पुलिस के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है. मामला बीते अट्ठारह दिन पहले का है. जहां वकील पति बेदुराम रात्रे ने कांग्रेस नेता रमेश कश्यप सहित उनके दो अन्य दोस्तों पर पत्नी का अगवा कर ले जाने की शिकायत लोरमी थाने में की थी. इसके बाद आनन-फानन में पीड़ित वकील बेदुराम की पत्नी शुक्रवार को थाना पहुंची. इस दौरान आरोपी रमेश कश्यप कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ तो वहीं शिकायतकर्ता बेदुराम रात्रे भी अन्य वकीलों के साथ न्याय की गुहार लगाने लोरमी थाने पहुंचे थे. इस दौरान पत्नी द्वारा पति पर ही प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दे दिया. इस शिकायत के बाद बेदुराम रात्रे को ही आरोपी बनाते हुए पुलिस ने उनके ही विरुद्ध चार सौ अट्ठानवे, तीन सौ तेईस, पाँच सौ छः धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है. वकील की पत्नी शजीकला रात्रे ने बताया कि उनकी शादी दो हज़ार चार में हुई थी. शादी के बाद उनके पति के द्वारा आए दिन चरित्र शंका को लेकर मारपीट की जाती थी. जिससे तंग आकर अट्ठारह दिन पहले पत्नी किसी परिचित के साथ मुंगेली चली गई और मुंगेली में रह रही थी. अपहरण किए जाने के आरोप की जानकारी होने के बाद लोरमी थाने में पहुंचकर पति के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ित करने का केस दर्ज कराया है.
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ एएसपी आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह का तबादला कर दिया गया है. एएसपी चन्द्रमोहन सिंह का दंतेवाड़ा से गरियाबंद तबादला किया गया है. आईपीएस चन्द्र मोहन पर उनकी पत्नी ने प्रताड़ना के आरोप लगाया था. 2014 बैच के आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह पर दंतेवाड़ा थाने में धारा 498 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले भी एएसपी चन्द्रमोहन सिंह पर पुलिस कर्मियों से मारपीट का आरोप लग चुका है. मिली जानकारी के मुताबिक आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह की पत्नी ने शारीरिक शोषण, मारपीट और दहेज की मांग का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी. पत्नी ने चन्द्रमोहन सिंह पर कई और युवतियों के शोषण का आरोप भी लगाया था. आईपीएस की पत्नी और सास ने डीजीपी से मामले की शिकायत की थी. इसके बाद डीजीपी ने परिवार कल्याण समिति को इस मामले के जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अब आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह का दंतेवाड़ा से गरियाबंद तबादला कर दिया गया है. .
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ एएसपी आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह का तबादला कर दिया गया है. एएसपी चन्द्रमोहन सिंह का दंतेवाड़ा से गरियाबंद तबादला किया गया है. आईपीएस चन्द्र मोहन पर उनकी पत्नी ने प्रताड़ना के आरोप लगाया था. दो हज़ार चौदह बैच के आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह पर दंतेवाड़ा थाने में धारा चार सौ अट्ठानवे ए के तहत मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले भी एएसपी चन्द्रमोहन सिंह पर पुलिस कर्मियों से मारपीट का आरोप लग चुका है. मिली जानकारी के मुताबिक आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह की पत्नी ने शारीरिक शोषण, मारपीट और दहेज की मांग का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी. पत्नी ने चन्द्रमोहन सिंह पर कई और युवतियों के शोषण का आरोप भी लगाया था. आईपीएस की पत्नी और सास ने डीजीपी से मामले की शिकायत की थी. इसके बाद डीजीपी ने परिवार कल्याण समिति को इस मामले के जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अब आईपीएस चन्द्रमोहन सिंह का दंतेवाड़ा से गरियाबंद तबादला कर दिया गया है. .
नाशिक : औरंगाबाद शहर (Aurangabad City) में ऑनलाइन सट्टा (Online Betting) लगाने के मामले में तीन बुकी (Bookies) को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। क्रिकेट मैच (Cricket Match) पर फोन पे के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले गिरोह का अब नाशिक कनेक्शन (Nashik Connection) सामने आया है। साइबर पुलिस (Cyber Police) ने नाशिक से आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य बुकी सद्दाम शेख सहित उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस कस्टडी (Police Custody) में भेज दिया है। यह फैसला मुख्य न्यायदंडाधिकारी (Chief Justice) एस डी कुन्हेकर ने सुनाया है। औरंगाबाद शहर के हरसुल परिसर में भारत न्यूजीलैंड टी 20 क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने वाले अड्डे पर पिछले वर्ष 21 नवंबर को छापा मारकर तबरेज खान, वसीम खान और आसिफ शेख को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से पांच मोबाइल, दो बाइक और पांच हजार रुपए कैश सहित कुल 1 लाख 37 हजार रुपए का माल जब्त किया गया था। पुलिस कस्टडी में नाशिक का सद्दाम शेख मुख्य बुकी है। उसका मोबाइल मध्य प्रदेश के दयाल सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है। जबकि फोन पे अकाउंट अमित बुन्हाडे के नाम पर होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने बताया कि सद्दाम शेख के खिलाफ संभाजीनगर में दो केस दर्ज है। इसलिए साइबर पुलिस ने नाशिक से सद्दाम शेख, अमित बुन्हाडे और अमोल कापडणीस को गिरफ्तार किया है। इन सट्टेबाजों ने औरंगाबाद और नाशिक के कितने लोगों से पैसे लेकर सट्टा लगाया, अपराध में इस्तेमाल की गई वेबसाइट किसने और कहां तैयार की, आरोपियों ने इसके अलावा अन्य किसी साइट का इस्तेमाल किया क्या, आरोपियों के और कितने साथी है, अपराध के लिए इस्तेमाल अकाउंट का और किस काम के लिए इस्तेमाल होता था। इन सवालों का जवाब पुलिस तलाश रही है। सट्टा मामले में नाशिक का कनेक्शन सामने आने के बाद नाशिक पुलिस भी सक्रिय हो गई है। पुलिस इस मामले में जुड़े संदिग्ध लोगों पर नजर रख रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में और लोग भी शामिल हो सकते है। एक तरफ औरंगाबाद पुलिस मामले को गंभीरता से जांच रही हैं वहीं नाशिक पुलिस इस मामले को लेकर अलर्ट हो गई है।
नाशिक : औरंगाबाद शहर में ऑनलाइन सट्टा लगाने के मामले में तीन बुकी को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। क्रिकेट मैच पर फोन पे के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले गिरोह का अब नाशिक कनेक्शन सामने आया है। साइबर पुलिस ने नाशिक से आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य बुकी सद्दाम शेख सहित उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। यह फैसला मुख्य न्यायदंडाधिकारी एस डी कुन्हेकर ने सुनाया है। औरंगाबाद शहर के हरसुल परिसर में भारत न्यूजीलैंड टी बीस क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने वाले अड्डे पर पिछले वर्ष इक्कीस नवंबर को छापा मारकर तबरेज खान, वसीम खान और आसिफ शेख को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से पांच मोबाइल, दो बाइक और पांच हजार रुपए कैश सहित कुल एक लाख सैंतीस हजार रुपए का माल जब्त किया गया था। पुलिस कस्टडी में नाशिक का सद्दाम शेख मुख्य बुकी है। उसका मोबाइल मध्य प्रदेश के दयाल सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है। जबकि फोन पे अकाउंट अमित बुन्हाडे के नाम पर होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने बताया कि सद्दाम शेख के खिलाफ संभाजीनगर में दो केस दर्ज है। इसलिए साइबर पुलिस ने नाशिक से सद्दाम शेख, अमित बुन्हाडे और अमोल कापडणीस को गिरफ्तार किया है। इन सट्टेबाजों ने औरंगाबाद और नाशिक के कितने लोगों से पैसे लेकर सट्टा लगाया, अपराध में इस्तेमाल की गई वेबसाइट किसने और कहां तैयार की, आरोपियों ने इसके अलावा अन्य किसी साइट का इस्तेमाल किया क्या, आरोपियों के और कितने साथी है, अपराध के लिए इस्तेमाल अकाउंट का और किस काम के लिए इस्तेमाल होता था। इन सवालों का जवाब पुलिस तलाश रही है। सट्टा मामले में नाशिक का कनेक्शन सामने आने के बाद नाशिक पुलिस भी सक्रिय हो गई है। पुलिस इस मामले में जुड़े संदिग्ध लोगों पर नजर रख रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में और लोग भी शामिल हो सकते है। एक तरफ औरंगाबाद पुलिस मामले को गंभीरता से जांच रही हैं वहीं नाशिक पुलिस इस मामले को लेकर अलर्ट हो गई है।
नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने कामों को लेकर आजकल काफी चर्चाओं में हैं। अब उनके कामों की तुलना , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से होने लगी है। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी आज योगी आदित्यनाथ की और उनके कार्यों की तारीफ की। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदार और मेहनती है उनका प्रशासन लोगों की समस्याओं को खत्म करेगा। उन्होने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों की जमकर तारीफ करते हुये कहा कि उनके नेतृत्व मे उत्तर प्रदेश का विकास होगा।
नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने कामों को लेकर आजकल काफी चर्चाओं में हैं। अब उनके कामों की तुलना , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से होने लगी है। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी आज योगी आदित्यनाथ की और उनके कार्यों की तारीफ की। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदार और मेहनती है उनका प्रशासन लोगों की समस्याओं को खत्म करेगा। उन्होने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों की जमकर तारीफ करते हुये कहा कि उनके नेतृत्व मे उत्तर प्रदेश का विकास होगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 के मैदान-ए-जंग में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा भी उम्मीदवार हैं, जिनके पिता यशवंत सिन्हा बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाए हुए रहते हैं. हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने सोमवार को कहा कि पिता यशवंत सिन्हा का आशीर्वाद उनके साथ है और उम्मीद है कि उनके अभिभावक छह मई को उनके पक्ष में मतदान करेंगे. जयंत सिन्हा ने कहा, 'मेरे पिता यशवंत सिन्हा का आशीर्वाद मेरे साथ है. माता-पिता के साथ कोई राजनीतिक या निजी मतभेद नहीं है और कुछ दिन पहले जब मैंने प्रचार की शुरूआत की तब उनका आशीर्वाद लिया था. ' वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि 2014 के चुनाव के वक्त उनके पिता ने उनके पक्ष में जोर शोर से प्रचार किया था, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और इस बार उन्हें अकेले प्रचार के लिए जाना पड़ रहा है. जयंत सिन्हा ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के ऊर्जावान नेतृत्व के तहत और उनके मार्गदर्शन तथा समर्थन से यह चुनाव लड़ रहा हूं तथा भाजपा के तमाम कार्यकर्ताओं के समर्थन के साथ लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में मुझे कोई दिक्कत नहीं आएगी.
नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के मैदान-ए-जंग में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा भी उम्मीदवार हैं, जिनके पिता यशवंत सिन्हा बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाए हुए रहते हैं. हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने सोमवार को कहा कि पिता यशवंत सिन्हा का आशीर्वाद उनके साथ है और उम्मीद है कि उनके अभिभावक छह मई को उनके पक्ष में मतदान करेंगे. जयंत सिन्हा ने कहा, 'मेरे पिता यशवंत सिन्हा का आशीर्वाद मेरे साथ है. माता-पिता के साथ कोई राजनीतिक या निजी मतभेद नहीं है और कुछ दिन पहले जब मैंने प्रचार की शुरूआत की तब उनका आशीर्वाद लिया था. ' वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि दो हज़ार चौदह के चुनाव के वक्त उनके पिता ने उनके पक्ष में जोर शोर से प्रचार किया था, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और इस बार उन्हें अकेले प्रचार के लिए जाना पड़ रहा है. जयंत सिन्हा ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के ऊर्जावान नेतृत्व के तहत और उनके मार्गदर्शन तथा समर्थन से यह चुनाव लड़ रहा हूं तथा भाजपा के तमाम कार्यकर्ताओं के समर्थन के साथ लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में मुझे कोई दिक्कत नहीं आएगी.
मल्टीमीडिया डेस्क। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार शाम 500 एवं 1000 रुपए के नोटों को बंद किए जाने की घोषणा के बाद पूरे देश की निगाहें इस खबर पर मुड़ गईं। जो व्यक्ति जहां था, वह इसी पर चर्चा करता नज़र आया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कमेंट्स की बाढ़ सी आ गई। फेसबुक एवं व्हाट्सऐप पर ढेर सारे मैसेज आने लगे जिनमें इस नई घोषणा के बारे में रोचक अंदाज में चुटकुले, किस्से और जुमले गढ़े गए। आइये ऐसे ही कुछ कमेंट्स पर नज़र डालते हैं। - आज सुबह मोदी जी ने फ्रिज खोला और दूध की जगह thumbsup निकली और बोला. . . . . - आज रात जिस घर की लाइट जलती हुइ दिखे समझलो नोटो की गिनती चल रही है। - पहला भ्रष्टाचारी :- अरे अब इन नोटों का हम क्या करेंगे...? ? अब वह हँस रहे है जिनके पास नहीं थे। - फिलहाल जिनके पास काला धन नहीं हैं वे whatsup पर है। - गरीब तो रोज ही कल की चिंता में सोता है! आज अमीरो की बारी है! - जिसकी जितनी औकात होती है वो उतने ही बड़े फैसले लेता है,कांग्रेस ने चवन्नी बन्द की थी। - रामदेव का एलान . . . . . . . - मेरे पास गाडी है , बंगला है ,बैंक बैलेंस है , तेरे पास क्या है ? - मोदी ने सच ही कहा था । भाई ना खाऊँगा ,ना खाने दूँगा। - कल सुबह सभी विवाहित पुरुषों को पता चल जायेगा की उनकी पत्नी के पास कितना काला धन है! भाई साहब 500 के छुट्टे हैं! - मेरे पास गाडी है , बंगला है ,बैंक बैलेंस है, तेरे पास क्या है? - शोक समाचार : 10 और 20 व 50 के नोट के दादाजी व 100 के नोट के पुज्य पिताजी श्री 500 के व 1000 के नोट का अभी अभी निधन हो गया है । वे कालेधन के मुख्य संगठक थे वही धन्नासेठो के मसीहा थे । अंतिम यात्रा कल 8 तथा उठावना 11 को होगा। - मोदी ने सच ही कहा था । भाई ना खाऊँगा ,ना खाने दूँगा। - अलग अलग बैंको में 3अकाउंट है सब में 0(जीरो) बैलेंस है। संकट की इस घड़ी में किसी के काम आ सकता हूँ तो जरुर सम्पर्क करें। Thumps-Up निकली और बोला चलो इंडिया आज कुछ तूफानी करते हैं। सोने को लोहा घोषित ना कर दे।
मल्टीमीडिया डेस्क। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार शाम पाँच सौ एवं एक हज़ार रुपयापए के नोटों को बंद किए जाने की घोषणा के बाद पूरे देश की निगाहें इस खबर पर मुड़ गईं। जो व्यक्ति जहां था, वह इसी पर चर्चा करता नज़र आया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कमेंट्स की बाढ़ सी आ गई। फेसबुक एवं व्हाट्सऐप पर ढेर सारे मैसेज आने लगे जिनमें इस नई घोषणा के बारे में रोचक अंदाज में चुटकुले, किस्से और जुमले गढ़े गए। आइये ऐसे ही कुछ कमेंट्स पर नज़र डालते हैं। - आज सुबह मोदी जी ने फ्रिज खोला और दूध की जगह thumbsup निकली और बोला. . . . . - आज रात जिस घर की लाइट जलती हुइ दिखे समझलो नोटो की गिनती चल रही है। - पहला भ्रष्टाचारी :- अरे अब इन नोटों का हम क्या करेंगे...? ? अब वह हँस रहे है जिनके पास नहीं थे। - फिलहाल जिनके पास काला धन नहीं हैं वे whatsup पर है। - गरीब तो रोज ही कल की चिंता में सोता है! आज अमीरो की बारी है! - जिसकी जितनी औकात होती है वो उतने ही बड़े फैसले लेता है,कांग्रेस ने चवन्नी बन्द की थी। - रामदेव का एलान . . . . . . . - मेरे पास गाडी है , बंगला है ,बैंक बैलेंस है , तेरे पास क्या है ? - मोदी ने सच ही कहा था । भाई ना खाऊँगा ,ना खाने दूँगा। - कल सुबह सभी विवाहित पुरुषों को पता चल जायेगा की उनकी पत्नी के पास कितना काला धन है! भाई साहब पाँच सौ के छुट्टे हैं! - मेरे पास गाडी है , बंगला है ,बैंक बैलेंस है, तेरे पास क्या है? - शोक समाचार : दस और बीस व पचास के नोट के दादाजी व एक सौ के नोट के पुज्य पिताजी श्री पाँच सौ के व एक हज़ार के नोट का अभी अभी निधन हो गया है । वे कालेधन के मुख्य संगठक थे वही धन्नासेठो के मसीहा थे । अंतिम यात्रा कल आठ तथा उठावना ग्यारह को होगा। - मोदी ने सच ही कहा था । भाई ना खाऊँगा ,ना खाने दूँगा। - अलग अलग बैंको में तीनअकाउंट है सब में शून्य बैलेंस है। संकट की इस घड़ी में किसी के काम आ सकता हूँ तो जरुर सम्पर्क करें। Thumps-Up निकली और बोला चलो इंडिया आज कुछ तूफानी करते हैं। सोने को लोहा घोषित ना कर दे।
रीवा (Rewa News): जिले में निजी भूमि स्वामियों के सीमांकन का महाअभियान 20 मई को चलाया जायेगा। कलेक्टर प्रतिभा पाल (Rewa Collector Pratibha Pal) के निर्देश पर एक ही दिन में एक हजार से अधिक सीमांकन का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में अपर कलेक्टर नीलमणि अग्निहोत्री ने बताया कि जनसुनवाई तथा सीएम हेल्पलाइन में सीमांकन के लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के तहत सीमांकन के लंबित सभी आवेदन पत्रों के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए 20 मई को विशेष प्रयास किये जायेंगे। सीमांकन के लिए 400 पटवारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ-साथ एसडीएम तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक भी सीमांकन की मानीटरिंग करेंगे। सीमांकन के लिए 8 जिला स्तरीय विशेष सीमांकन दल भी तैनात किये गये हैं। अपर कलेक्टर ने बताया कि सीमांकन के महाअभियान में 20 मई को तहसील त्योंथर में 120, जवा में 130 तथा मऊगंज में 180 सीमांकन के प्रकरण निराकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिन तहसील नईगढ़ी में 80, सिरमौर में 140, सेमरिया में 90, हनुमना में 130, रायपुर कर्चुलियान में 100, तहसील गुढ़ में 101 तथा तहसील हुजूर में 198 सीमांकन का लक्ष्य रखा गया है। अभियान को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही है। लंबित प्रकरणों के आवेदकों को सूचना की तमीली करायी जा रही है। इस महाअभियान के बाद लंबित राजस्व प्रकरणों तथा सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों की संख्या में कमी आयेंगी। सभी तहसीलदार सीमांकन कराके खसरे में उसे दर्ज करायें साथ ही आरसीएमएस पोर्टल पर भी ऑनलाइन निराकरण दर्ज करायें। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान में भी प्रकरणों की निराकरण की जानकारी दर्ज करें।
रीवा : जिले में निजी भूमि स्वामियों के सीमांकन का महाअभियान बीस मई को चलाया जायेगा। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर एक ही दिन में एक हजार से अधिक सीमांकन का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में अपर कलेक्टर नीलमणि अग्निहोत्री ने बताया कि जनसुनवाई तथा सीएम हेल्पलाइन में सीमांकन के लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के तहत सीमांकन के लंबित सभी आवेदन पत्रों के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए बीस मई को विशेष प्रयास किये जायेंगे। सीमांकन के लिए चार सौ पटवारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ-साथ एसडीएम तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक भी सीमांकन की मानीटरिंग करेंगे। सीमांकन के लिए आठ जिला स्तरीय विशेष सीमांकन दल भी तैनात किये गये हैं। अपर कलेक्टर ने बताया कि सीमांकन के महाअभियान में बीस मई को तहसील त्योंथर में एक सौ बीस, जवा में एक सौ तीस तथा मऊगंज में एक सौ अस्सी सीमांकन के प्रकरण निराकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिन तहसील नईगढ़ी में अस्सी, सिरमौर में एक सौ चालीस, सेमरिया में नब्बे, हनुमना में एक सौ तीस, रायपुर कर्चुलियान में एक सौ, तहसील गुढ़ में एक सौ एक तथा तहसील हुजूर में एक सौ अट्ठानवे सीमांकन का लक्ष्य रखा गया है। अभियान को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही है। लंबित प्रकरणों के आवेदकों को सूचना की तमीली करायी जा रही है। इस महाअभियान के बाद लंबित राजस्व प्रकरणों तथा सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों की संख्या में कमी आयेंगी। सभी तहसीलदार सीमांकन कराके खसरे में उसे दर्ज करायें साथ ही आरसीएमएस पोर्टल पर भी ऑनलाइन निराकरण दर्ज करायें। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान में भी प्रकरणों की निराकरण की जानकारी दर्ज करें।
Shelly Oberoi आप की महापौर के आ जाने से यह उम्मीद की जा रही है कि फंड के लिए निगम और दिल्ली सरकार के बीच रार होने की संभावना नहीं के बराबर है। मगर वह सब समस्याएं बरकार हैं जिनसे दिल्ली वाले पिछले 15 साल से जूझ रहे हैं। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आम आदमी पार्टी (आप) की शैली ओबराय (Shelly Oberoi) दिल्ली की महापौर अवश्य बन गई हैं, लेकिन जिस दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर भाजपा ने लगातार डेढ़ दशक तक शासन किया, उसे संभालना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। निगम इन 15 वर्षों में निगम के एकीकरण व उससे पहले भी आर्थिक तंगी व भ्रष्टाचार जैसे कई संघर्षों से जूझा है। यही नहीं, आत्मनिर्भर बन पाने में विफल रहने के कारण आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ने पर दिल्ली की आप सरकार के साथ पैसों को लेकर उसकी खींचतान भी लगातार चलती रही है। सफाई व्यवस्था सुधार पाने में विफल निगम विकास की योजनाओं के मामले में भी हमेशा आर्थिक समस्या में रहा है। ऐसे में इन चुनौतियों से शैली का भी सामना होगा, जिससे उन्हें पार पाना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नगर निगम की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सफाई कर्मचारियों से लेकर अन्य कर्मचारी और डाक्टरों तक को अपने वेतन के लिए जूझना पड़ा है। तीन-तीन माह तक उन्हें वेतन नहीं मिला है। तमाम धरना प्रदर्शन से लेकर हड़ताल तक इसी मुद्दे पर होते रहे हैं। हालांकि इस दौरान नगर निगमों की सत्ता में काबिज रही भाजपा दिल्ली सरकार पर निगम का फंड रोक लेने का आरोप लगाती रही है तो आप सरकार भी आंकड़ों के साथ पूरा फंड देने की बात कहती रही है। आप सरकार कर्मचारियों के वेतन का पैसा दूसरे मदों में खर्च कर देने का आरोप लगाती रही है। अब निगम में आप की महापौर के आ जाने से यह उम्मीद की जा रही है कि फंड के लिए निगम और दिल्ली सरकार के बीच रार होने की संभावना नहीं के बराबर है। मगर वह सब समस्याएं बरकार हैं जिनसे दिल्ली वाले पिछले 15 साल से जूझ रहे हैं। बड़ा मुद्दा यही है कि दिल्ली में कूड़े के पहाड़ कैसे हटेंगे, जिनके नाम पर चुनाव लड़कर आप निगम की सत्ता में आई है। गंदगी की समस्या कैसे दूर होगी? इसके लिए किसी जादू की छड़ी की उम्मीद करना बेईमानी जरूर है मगर इस समस्या को दूर कर पाना आसान भी नहीं होगा। दिल्ली की गंदगी की समस्या दूसरा ऐसा मुद्दा है जो नगर निगम की छवि सबसे अधिक खराब करता है। गंदगी से दिल्ली की जनता परेशान है। यही कारण है कि तमाम प्रयास के बाद भी स्वच्छ सर्वेक्षण में तत्कालीन दिल्ली नगर निगम फिसड्डी रहे हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार भी एक मुद्दा है। इसमें लोगों को सबसे अधिक परेशानी भवन विभाग से है। पार्किंग की कमी एक अलग समस्या है। आवारा पशुओं की समस्या है। दिल्ली में घूमने वाले आवारा कुत्ते, बंदर, गाय व अन्य की समस्या भी हैं। सड़कों और गलियों की खस्ता हालत की भी एक समस्या है। इंस्पेक्टर राज से जूझते व्यापारियों की समस्या दूर करा पाना भी एक चुनौती होगी। महापौर पद के लिए हुए मतदान में एक पार्षद ने क्रास वोटिंग की, जबकि उपमहापौर पद पर आप को दो वोट क्रास वोटिंग में गए। महापौर पद पर आप के 151 वोट थे, लेकिन उसे 150 ही वोट मिले। उपमहापौर पद पर 151 में आप प्रत्याशी को 147 वोट मिले। इसमें दो वोट खाली होने की वजह से रद माने गए, जबकि दो वोट भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में गए। भाजपा के पास 113 ही वोट थे, जिसमें भाजपा को महापौर पद पर 116 वोट मिले। इसी प्रकार उपमहापौर पद पर भी 116 वोट मिले, जबकि भाजपा सांसद गौतम गंभीर उपमहापौर पद पर वोटिंग के दौरान अनुपस्थित थे। महापौर शैली ओबराय का कार्यकाल 31 मार्च तक होगा। अप्रैल में होने वाली सदन की पहली बैठक में नया महापौर चुना जाएगा। एमसीडी नियमानुसार, हर वर्ष महापौर का चुनाव होता है। ऐसे में अप्रैल में होने वाले निगम महापौर के चुनाव में सामान्य श्रेणी के लिए चुनाव होगा। निगम के नियम के अनुसार पहला वर्ष महिला पार्षद के लिए आरक्षित है, जबकि तीसरा वर्ष अनुसूचित जाति के पार्षद के लिए आरक्षित है। उपमहापौर पद पर भी आप ने कब्जा जमाया है। उसके प्रत्याशी आले मोहम्मद इकबाल ने जीत दर्ज की है। उन्हें 147 मत मिले, जबकि प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी कमल बागड़ी को 116 मत मिले हैं। जीत के बाद आले मोहम्मद ने इसे दिल्ली की जनता की जीत बताते हुए कहा कि जिस प्रकार से दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के काम से डंका बजाया है उसी तरह निगम के काम से हम डंका बजाएंगे। महापौर शैली ओबराय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को नमन करते हुए कहा कि मैं दिल्ली की महापौर के रूप में जनता की सेवा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। उन्होंने ट्वीट किया, लोकतंत्र जीता, तानाशाही हारी। लोग जीते, भ्रष्टाचार हारा। सत्य जीता, कानून के दुश्मन हारे। अब काम करना है। 80 दिन जो बर्बाद हुए आने वाले 15 दिन में उसे पूरा करना है। तीन दिनों के भीतर लैंडफिल साइट का दौरा किया जाएगा। इसके साथ ही हम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो 10 गारंटी जारी की हैं, उन्हें पूरा करने के लिए कार्य किया जाएगा।
Shelly Oberoi आप की महापौर के आ जाने से यह उम्मीद की जा रही है कि फंड के लिए निगम और दिल्ली सरकार के बीच रार होने की संभावना नहीं के बराबर है। मगर वह सब समस्याएं बरकार हैं जिनसे दिल्ली वाले पिछले पंद्रह साल से जूझ रहे हैं। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आम आदमी पार्टी की शैली ओबराय दिल्ली की महापौर अवश्य बन गई हैं, लेकिन जिस दिल्ली नगर निगम पर भाजपा ने लगातार डेढ़ दशक तक शासन किया, उसे संभालना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। निगम इन पंद्रह वर्षों में निगम के एकीकरण व उससे पहले भी आर्थिक तंगी व भ्रष्टाचार जैसे कई संघर्षों से जूझा है। यही नहीं, आत्मनिर्भर बन पाने में विफल रहने के कारण आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ने पर दिल्ली की आप सरकार के साथ पैसों को लेकर उसकी खींचतान भी लगातार चलती रही है। सफाई व्यवस्था सुधार पाने में विफल निगम विकास की योजनाओं के मामले में भी हमेशा आर्थिक समस्या में रहा है। ऐसे में इन चुनौतियों से शैली का भी सामना होगा, जिससे उन्हें पार पाना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नगर निगम की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सफाई कर्मचारियों से लेकर अन्य कर्मचारी और डाक्टरों तक को अपने वेतन के लिए जूझना पड़ा है। तीन-तीन माह तक उन्हें वेतन नहीं मिला है। तमाम धरना प्रदर्शन से लेकर हड़ताल तक इसी मुद्दे पर होते रहे हैं। हालांकि इस दौरान नगर निगमों की सत्ता में काबिज रही भाजपा दिल्ली सरकार पर निगम का फंड रोक लेने का आरोप लगाती रही है तो आप सरकार भी आंकड़ों के साथ पूरा फंड देने की बात कहती रही है। आप सरकार कर्मचारियों के वेतन का पैसा दूसरे मदों में खर्च कर देने का आरोप लगाती रही है। अब निगम में आप की महापौर के आ जाने से यह उम्मीद की जा रही है कि फंड के लिए निगम और दिल्ली सरकार के बीच रार होने की संभावना नहीं के बराबर है। मगर वह सब समस्याएं बरकार हैं जिनसे दिल्ली वाले पिछले पंद्रह साल से जूझ रहे हैं। बड़ा मुद्दा यही है कि दिल्ली में कूड़े के पहाड़ कैसे हटेंगे, जिनके नाम पर चुनाव लड़कर आप निगम की सत्ता में आई है। गंदगी की समस्या कैसे दूर होगी? इसके लिए किसी जादू की छड़ी की उम्मीद करना बेईमानी जरूर है मगर इस समस्या को दूर कर पाना आसान भी नहीं होगा। दिल्ली की गंदगी की समस्या दूसरा ऐसा मुद्दा है जो नगर निगम की छवि सबसे अधिक खराब करता है। गंदगी से दिल्ली की जनता परेशान है। यही कारण है कि तमाम प्रयास के बाद भी स्वच्छ सर्वेक्षण में तत्कालीन दिल्ली नगर निगम फिसड्डी रहे हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार भी एक मुद्दा है। इसमें लोगों को सबसे अधिक परेशानी भवन विभाग से है। पार्किंग की कमी एक अलग समस्या है। आवारा पशुओं की समस्या है। दिल्ली में घूमने वाले आवारा कुत्ते, बंदर, गाय व अन्य की समस्या भी हैं। सड़कों और गलियों की खस्ता हालत की भी एक समस्या है। इंस्पेक्टर राज से जूझते व्यापारियों की समस्या दूर करा पाना भी एक चुनौती होगी। महापौर पद के लिए हुए मतदान में एक पार्षद ने क्रास वोटिंग की, जबकि उपमहापौर पद पर आप को दो वोट क्रास वोटिंग में गए। महापौर पद पर आप के एक सौ इक्यावन वोट थे, लेकिन उसे एक सौ पचास ही वोट मिले। उपमहापौर पद पर एक सौ इक्यावन में आप प्रत्याशी को एक सौ सैंतालीस वोट मिले। इसमें दो वोट खाली होने की वजह से रद माने गए, जबकि दो वोट भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में गए। भाजपा के पास एक सौ तेरह ही वोट थे, जिसमें भाजपा को महापौर पद पर एक सौ सोलह वोट मिले। इसी प्रकार उपमहापौर पद पर भी एक सौ सोलह वोट मिले, जबकि भाजपा सांसद गौतम गंभीर उपमहापौर पद पर वोटिंग के दौरान अनुपस्थित थे। महापौर शैली ओबराय का कार्यकाल इकतीस मार्च तक होगा। अप्रैल में होने वाली सदन की पहली बैठक में नया महापौर चुना जाएगा। एमसीडी नियमानुसार, हर वर्ष महापौर का चुनाव होता है। ऐसे में अप्रैल में होने वाले निगम महापौर के चुनाव में सामान्य श्रेणी के लिए चुनाव होगा। निगम के नियम के अनुसार पहला वर्ष महिला पार्षद के लिए आरक्षित है, जबकि तीसरा वर्ष अनुसूचित जाति के पार्षद के लिए आरक्षित है। उपमहापौर पद पर भी आप ने कब्जा जमाया है। उसके प्रत्याशी आले मोहम्मद इकबाल ने जीत दर्ज की है। उन्हें एक सौ सैंतालीस मत मिले, जबकि प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी कमल बागड़ी को एक सौ सोलह मत मिले हैं। जीत के बाद आले मोहम्मद ने इसे दिल्ली की जनता की जीत बताते हुए कहा कि जिस प्रकार से दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के काम से डंका बजाया है उसी तरह निगम के काम से हम डंका बजाएंगे। महापौर शैली ओबराय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को नमन करते हुए कहा कि मैं दिल्ली की महापौर के रूप में जनता की सेवा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। उन्होंने ट्वीट किया, लोकतंत्र जीता, तानाशाही हारी। लोग जीते, भ्रष्टाचार हारा। सत्य जीता, कानून के दुश्मन हारे। अब काम करना है। अस्सी दिन जो बर्बाद हुए आने वाले पंद्रह दिन में उसे पूरा करना है। तीन दिनों के भीतर लैंडफिल साइट का दौरा किया जाएगा। इसके साथ ही हम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो दस गारंटी जारी की हैं, उन्हें पूरा करने के लिए कार्य किया जाएगा।
बॉलीवुड की शानदार अदाकारा काजोल (Kajol) आज सफल एक्ट्रेसेस में से एक हैं. अपनी प्यारी सी स्माइल और बिंदास अंदाज से सभी का दिल जीतने वाली एक्ट्रेस काजोल की एक्टिंग के लाखों लोग दीवाने हैं. काजोल (Kajol) की 'दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे', 'गुप्त- द हिडन ट्रस्ट', 'इश्क़' जैसी तमाम फिल्मों को दर्शक आज भी खूब प्यार करते हैं. काजोल (Kajol) आज अपना 48वां जन्मदिन मना रही हैं. इस मौके पर हम आज काजोल से जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताएंगे. बॉलीवुड से बड़ा पुराना नाता : 05 अगस्त 1974 को मुंबई में जन्मी एक्ट्रेस काजोल (Kajol) का बॉलीवुड से बड़ा पुराना नाता है. दरअसल, काजोल की नानी शोभना समर्थ और मौसी नूतन अपने जमाने की जबरदस्त एक्ट्रेस में से एक थीं. इतना ही नहीं, काजोल (Kajol) की मां मशहूर एक्ट्रेस तनूजा हैं और पिता फिल्म निर्देशक शोमू मुखर्जी हैं. वहीं अब बॉलीवुड में लंबा सफर तय करने वाली एक्ट्रेस काजोल भी शानदार एक्ट्रेसेस में से एक बन गई हैं. कम उम्र में शुरू किया फिल्म दुनिया का सफर : काजोल (Kajol) की स्कूलिंग महाराष्ट्र के पंचगनी जोसेफ कान्वेंट में हुईं. हालांकि काजोल का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था. ऐसे में उन्होंने एक्टिंग को चुना और महज 16 साल की उम्र में फिल्म दुनिया में कदम रखा. फिल्म 'बेखुदी' से बॉलीवुड में काजोल (Kajol) ने डेब्यू किया. फिल्म 'बेखुदी' के बाद काजल साल 1993 में आई फिल्म 'बाजीगर' में शाहरुख खान के अपोजिट नजर आई. इस फिल्म में काजोल की शानदार एक्टिंग ने उन्हें रातों- रातों स्टार बना दिया. उसके बाद ये सफर चालू हुआ और एक से एक शानदार फिल्मों में काजल नजर आईं. नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने वाली महिला : काजोल (Kajol) एक ऐसी महिला है जिन्हें नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने का मौका मिला था. दरअसल फिल्म 'माइ नेम इज़ ख़ान' के रिलीज़ के दौरान साल 2010 में काजोल (Kajol) और शाहरुख़ खान को नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने के लिए इन्वाइट किया गया था. बता दें, नैसडैक एक इलेक्ट्रॉनिक शेयर बाजार है. इसमें 3,700 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध हैं. अवार्ड से नवाजा गया : काजोल (Kajol) को फिल्म 'गुप्तः द हिडन ट्रस्ट' में साल 1998 में नेगेटिव रोल के लिए में बेस्ट परफॉरमेंस फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था. काजल ये अवॉर्ड पाने वाली पहली महिला बनीं. यही नहीं काजल (Kajol) सबसे ज्यादा फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजी जाने वाली एक्ट्रेस हैं. वहीं साल 2011 में पद्म श्री अवॉर्ड से भी काजल (Kajol) को नवाजा जा चुका है. काजोल सोशल एक्टिविटी में भी अपने काम के लिए भी जानी जाती हैं. वो लूम्बा (Loomba) नाम का ट्रस्ट भी चलाती हैं. काजल के इस सामाजिक काम के लिए उन्हें कर्मवीर अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है. करण की लकी चार्म : बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर के लिए काजोल उनकी लकी एक्ट्रेस हैं. करण का कहना है कि, काजल (Kajol) के साथ वो कोई भी फिल्म करते हैं तो वह सुपर हिट साबित होती हैं. चाहे वो 'दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे' हो या 'मई नाम इज खान', 'कुछ कुछ होता है', 'कभी ख़ुशी कभी ग़म', 'माइ नेम इज़ ख़ान' जैसी कई फ़िल्में हो. ऐसी हैं पर्सनल लाइफ : काजोल (Kajol) की पर्सनल लाइफ की बात करें तो काजोल, अजय देवगन के साथ साल 1999 में शादी के बंधन में बंधी. दोनों के दो बच्चे एक बेटी न्यासा और बेटा युग हैं. काजोल अपनी पर्सनल हो या प्रोफेशनल लाइफ दोनों ही मेंटेन रखती हैं. काजोल (Kajol) अजय के साथ कई फिल्मों में भी साथ नजर आ चुकी हैं. जिसमें फिल्म 'इश्क़', 'प्यार तो होना ही था', 'राजू चाचा', 'यु मी और हम', 'दिल क्या करें' और हाल ही में आई फिल्म 'तानाजी' शामिल हैं. दोनों के बीच प्यार खूब देखने को मिलता है. बॉलीवुड और टीवी की अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करेंः
बॉलीवुड की शानदार अदाकारा काजोल आज सफल एक्ट्रेसेस में से एक हैं. अपनी प्यारी सी स्माइल और बिंदास अंदाज से सभी का दिल जीतने वाली एक्ट्रेस काजोल की एक्टिंग के लाखों लोग दीवाने हैं. काजोल की 'दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे', 'गुप्त- द हिडन ट्रस्ट', 'इश्क़' जैसी तमाम फिल्मों को दर्शक आज भी खूब प्यार करते हैं. काजोल आज अपना अड़तालीसवां जन्मदिन मना रही हैं. इस मौके पर हम आज काजोल से जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताएंगे. बॉलीवुड से बड़ा पुराना नाता : पाँच अगस्त एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर को मुंबई में जन्मी एक्ट्रेस काजोल का बॉलीवुड से बड़ा पुराना नाता है. दरअसल, काजोल की नानी शोभना समर्थ और मौसी नूतन अपने जमाने की जबरदस्त एक्ट्रेस में से एक थीं. इतना ही नहीं, काजोल की मां मशहूर एक्ट्रेस तनूजा हैं और पिता फिल्म निर्देशक शोमू मुखर्जी हैं. वहीं अब बॉलीवुड में लंबा सफर तय करने वाली एक्ट्रेस काजोल भी शानदार एक्ट्रेसेस में से एक बन गई हैं. कम उम्र में शुरू किया फिल्म दुनिया का सफर : काजोल की स्कूलिंग महाराष्ट्र के पंचगनी जोसेफ कान्वेंट में हुईं. हालांकि काजोल का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था. ऐसे में उन्होंने एक्टिंग को चुना और महज सोलह साल की उम्र में फिल्म दुनिया में कदम रखा. फिल्म 'बेखुदी' से बॉलीवुड में काजोल ने डेब्यू किया. फिल्म 'बेखुदी' के बाद काजल साल एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में आई फिल्म 'बाजीगर' में शाहरुख खान के अपोजिट नजर आई. इस फिल्म में काजोल की शानदार एक्टिंग ने उन्हें रातों- रातों स्टार बना दिया. उसके बाद ये सफर चालू हुआ और एक से एक शानदार फिल्मों में काजल नजर आईं. नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने वाली महिला : काजोल एक ऐसी महिला है जिन्हें नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने का मौका मिला था. दरअसल फिल्म 'माइ नेम इज़ ख़ान' के रिलीज़ के दौरान साल दो हज़ार दस में काजोल और शाहरुख़ खान को नैसडैक का ओपनिंग बेल बजाने के लिए इन्वाइट किया गया था. बता दें, नैसडैक एक इलेक्ट्रॉनिक शेयर बाजार है. इसमें तीन,सात सौ से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध हैं. अवार्ड से नवाजा गया : काजोल को फिल्म 'गुप्तः द हिडन ट्रस्ट' में साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में नेगेटिव रोल के लिए में बेस्ट परफॉरमेंस फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था. काजल ये अवॉर्ड पाने वाली पहली महिला बनीं. यही नहीं काजल सबसे ज्यादा फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजी जाने वाली एक्ट्रेस हैं. वहीं साल दो हज़ार ग्यारह में पद्म श्री अवॉर्ड से भी काजल को नवाजा जा चुका है. काजोल सोशल एक्टिविटी में भी अपने काम के लिए भी जानी जाती हैं. वो लूम्बा नाम का ट्रस्ट भी चलाती हैं. काजल के इस सामाजिक काम के लिए उन्हें कर्मवीर अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है. करण की लकी चार्म : बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर के लिए काजोल उनकी लकी एक्ट्रेस हैं. करण का कहना है कि, काजल के साथ वो कोई भी फिल्म करते हैं तो वह सुपर हिट साबित होती हैं. चाहे वो 'दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे' हो या 'मई नाम इज खान', 'कुछ कुछ होता है', 'कभी ख़ुशी कभी ग़म', 'माइ नेम इज़ ख़ान' जैसी कई फ़िल्में हो. ऐसी हैं पर्सनल लाइफ : काजोल की पर्सनल लाइफ की बात करें तो काजोल, अजय देवगन के साथ साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में शादी के बंधन में बंधी. दोनों के दो बच्चे एक बेटी न्यासा और बेटा युग हैं. काजोल अपनी पर्सनल हो या प्रोफेशनल लाइफ दोनों ही मेंटेन रखती हैं. काजोल अजय के साथ कई फिल्मों में भी साथ नजर आ चुकी हैं. जिसमें फिल्म 'इश्क़', 'प्यार तो होना ही था', 'राजू चाचा', 'यु मी और हम', 'दिल क्या करें' और हाल ही में आई फिल्म 'तानाजी' शामिल हैं. दोनों के बीच प्यार खूब देखने को मिलता है. बॉलीवुड और टीवी की अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करेंः
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने कहा कि हम एक ऐसे अत्यधिक शक्तिशाली और मानव-प्रधान दुनिया में रहते हैं, जिसमें पर्यावरण संबंधी विषम, आकस्मिक और अपरिवर्तनीय बदलाव काफी अधिक हो रहे हैं। पृथ्वी की पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली मानवीय गतिविधियों के इस विशिष्ट युग में, जिसे भू-वैज्ञानिक युग कहा जाता है, मानवीय व्यवहार से पृथ्वी की प्रणाली में व्यापक बदलाव देखे जा रहे हैं। ऐसे में हमारे लिए उन उद्देश्यों, प्राथमिक मूल्यों और हमारी गतिविधियों से जुड़े मानकों के साथ-साथ ज्ञान प्रणालियों और सत्ता संरचना को फिर से परिभाषित करना जरूरी है। उपराष्ट्रपति महोदय आज हिमाचल प्रदेश के शिमला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की कुल भूमि का 2.4 प्रतिशत हिस्सा है, किन्तु यहां विश्व की 16 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। ऐसे जटिल परिणाम के कारण कई पीढि़यों लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं है। फिलहाल भारत पर्यावरण की स्थिति में तीव्र और व्यापक गिरावट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी बदलावों और जोखिमों का प्रभाव यहां रहने वाले लोग काफी महसूस करते हैं। उनकी आजीविका, आवास स्थल और जीवनाधार-वस्तुतः उनका कुल अस्तित्व, उस पर्यावरण के साथ जुड़ा होता है, जिसमें वे रहते हैं। जबकि ऐसे भंगुर पारिस्थितिकी में रहने वाले लोग असुरक्षित हैं। इसके साथ ही समाज के गरीब और कमजोर तबका किसी प्राकृतिक अथवा मानवनिर्मित पर्यावरण संबंधी खतरे के प्रति और भी अधिक असुरक्षित है। उपराष्ट्रपति ने बताया कि अब ऐसा लगता है कि केवल आर्थिक मूल्यों पर आधारित सतत शासन पर आधारित पहलें अपर्याप्त हैं और आंशिक तौर पर ये अनियमित विकास के कारण हैं। मानवीय खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मूल्य हैं, जैसाकि पारिस्थितिकीय सेवाओं अन्य जीवों के गैर-मानवकेन्द्रित मूल्यों पर आधारित विचार है। अब समय आ गया है कि हम प्राथमिकताओं, मार्गों के साथ-साथ निरंतरता से जुड़े गुणात्मक और मूल्यात्मक लक्ष्यों को फिर से निर्धारित करें। हमें गांधीजी के उस वक्तव्य का अक्षरशः अनुसरण करना चाहिए-'वास्तविक अर्थशास्त्र सामाजिक न्याय के लिये होता है, यह सबसे कमजोर व्यक्ति सहित समान रूप से सबकी भलाई को बढ़ावा देता है और सभ्य जीवन के लिये अनिवार्य है।
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने कहा कि हम एक ऐसे अत्यधिक शक्तिशाली और मानव-प्रधान दुनिया में रहते हैं, जिसमें पर्यावरण संबंधी विषम, आकस्मिक और अपरिवर्तनीय बदलाव काफी अधिक हो रहे हैं। पृथ्वी की पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली मानवीय गतिविधियों के इस विशिष्ट युग में, जिसे भू-वैज्ञानिक युग कहा जाता है, मानवीय व्यवहार से पृथ्वी की प्रणाली में व्यापक बदलाव देखे जा रहे हैं। ऐसे में हमारे लिए उन उद्देश्यों, प्राथमिक मूल्यों और हमारी गतिविधियों से जुड़े मानकों के साथ-साथ ज्ञान प्रणालियों और सत्ता संरचना को फिर से परिभाषित करना जरूरी है। उपराष्ट्रपति महोदय आज हिमाचल प्रदेश के शिमला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के बाईसवें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की कुल भूमि का दो.चार प्रतिशत हिस्सा है, किन्तु यहां विश्व की सोलह प्रतिशत जनसंख्या रहती है। ऐसे जटिल परिणाम के कारण कई पीढि़यों लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं है। फिलहाल भारत पर्यावरण की स्थिति में तीव्र और व्यापक गिरावट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी बदलावों और जोखिमों का प्रभाव यहां रहने वाले लोग काफी महसूस करते हैं। उनकी आजीविका, आवास स्थल और जीवनाधार-वस्तुतः उनका कुल अस्तित्व, उस पर्यावरण के साथ जुड़ा होता है, जिसमें वे रहते हैं। जबकि ऐसे भंगुर पारिस्थितिकी में रहने वाले लोग असुरक्षित हैं। इसके साथ ही समाज के गरीब और कमजोर तबका किसी प्राकृतिक अथवा मानवनिर्मित पर्यावरण संबंधी खतरे के प्रति और भी अधिक असुरक्षित है। उपराष्ट्रपति ने बताया कि अब ऐसा लगता है कि केवल आर्थिक मूल्यों पर आधारित सतत शासन पर आधारित पहलें अपर्याप्त हैं और आंशिक तौर पर ये अनियमित विकास के कारण हैं। मानवीय खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मूल्य हैं, जैसाकि पारिस्थितिकीय सेवाओं अन्य जीवों के गैर-मानवकेन्द्रित मूल्यों पर आधारित विचार है। अब समय आ गया है कि हम प्राथमिकताओं, मार्गों के साथ-साथ निरंतरता से जुड़े गुणात्मक और मूल्यात्मक लक्ष्यों को फिर से निर्धारित करें। हमें गांधीजी के उस वक्तव्य का अक्षरशः अनुसरण करना चाहिए-'वास्तविक अर्थशास्त्र सामाजिक न्याय के लिये होता है, यह सबसे कमजोर व्यक्ति सहित समान रूप से सबकी भलाई को बढ़ावा देता है और सभ्य जीवन के लिये अनिवार्य है।