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का सच्चा हित साधते थे । उनके संघ को राजत्व प्रात होता था । इन गणराज्यो में निम्नलिखित विशेष उल्लेखनीय थेः(१) लिच्छवि अथवा वज्जिय गणराज्य - इस राज क्षत्रिय कुलों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे, जो 'राजा' कहलाते थे । वे आठ क्षत्रियकुल (१) वृजि, (२) लिच्छवि, (३) ज्ञात्रिक, (४) विदेही, (५) उग्र, (६) भोग, (७) इक्ष्वाकु, और (८) कौरव नामक थे । इनमे लिच्छवि क्षत्रिय प्रमुख थे । उनकी राजधानी वैशाली उस समय का एक प्रधान नगर था । उसके देवमंदिर और राजमहल अनूठी कारीगरी के बने हुए थे । लिच्छवि क्षत्रिय परिश्रमो, धीर-वीर, समृद्धिशाली और शिक्षा सम्पन्न होने के साथ ही धार्मिक रुचि और भाव को रखने वाले थे । वे वड़े स्वातंत्र्यप्रिय और स्वाभिमानी थे । किसी की आधीनता स्वीकार करना उनके लिए सुगम नहीं था। उस समय के क्षत्रियों में उनकी विशेष प्रतिष्ठा और मान्यता थी । प्राचीन काल से वे जैन धर्म के उपासक थे । उनमे राजा चेटक प्रमुख थे । संभवत वे ही उस समय वज्जिय राजसंघ के प्रधान राजा थे । जैनशास्त्रों में उन्हें इक्ष्वाकुवंशी वशिष्ट गोत्री क्षत्रिय लिखा है । 'उत्तर पुराण' (पृ० ६४६ ) मे इन्हें सोमवंशी लिखा है, जो इत्वाकुवंश का एक भेद है। चेटक की रानी का नाम भद्रा अथवा सुभद्रा था। वह एक पतिव्रता रसरणी थी। दोनों ही पति-पत्नी जिनेन्द्र भगवान के अनन्य भक्त थे। उनकी सन्तान भी उन्हीं के अनुरूप अर्हन्तभक्ति--परायण थी । चेटक स्वय पराक्रमी, वीर योद्धा थे। उनके पुत्र भी वैसे ही थे । सिंह सिंह नामक उनके पुत्र वज्जिय राजसघ की सेना के सेनापति थे । उनके नौ भाई ( १ ) धन ( २ ) दन्तभद्र (3) उपेन्द्र, (४) सुदत्त, (५) सुकुंभोज, (६) अकंपन (७) सुपतंग, (८) प्रभंजन और ( ६ ) प्रभास नामक थे । सिंहभद्र की सात चहने थीं; जिनमें सबसे बड़ी त्रिशला प्रियकारिणो भगवान् सहावीर की माता थीं । अवशेष मृगावती, सुप्रभा प्रभावती, चेलनी, ज्येष्टा और चंदना नामक थीं । मृगावती कौशाम्बी के राजा शतानीक को व्याहीं थीं । वत्सराज उदयन् उन्हीं के पुत्र थे । सुप्रभा का विवाह दशार्ण देश के राजा दशरथ के साथ हुआ था । प्रभावती राजकुमारी सिंधु-सौवीर अथवा कच्छदेश के राजा उदयन के राजमहलों की राजरानी थीं । चेलनी मगध के सम्राट् श्रेणिक की पटरानी हुई थीं । ज्येष्ठा और चढ़ना आजन्म ब्रह्मचारिणी रही थीं । लिच्छवि क्षत्रियों की सधि नौ मल्लकि और कौशल के गण राजाओं से हुई थी । उनकी शक्ति संगठित और वल अतुल था । मगध सम्राट ने कई दफा उनपर आक्रमण किया, परन्तु वह सफल मनोरथ नहीं हुए १ [२] शाक्य गणराज्य में म गौतमबुद्ध का जन्म हुआ था । कपिलवस्तु उसकी राजधानी थी । शुद्धोदन उसके प्रमुख राजा थे। (३) मल्ल गणराज्य - में मल्लवंशीय क्षत्रियों का चाहुल्य था । उसमें नौ क्षत्रिय राजा मिलकर राज प्रबन्ध करते थे ।
का सच्चा हित साधते थे । उनके संघ को राजत्व प्रात होता था । इन गणराज्यो में निम्नलिखित विशेष उल्लेखनीय थेः लिच्छवि अथवा वज्जिय गणराज्य - इस राज क्षत्रिय कुलों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे, जो 'राजा' कहलाते थे । वे आठ क्षत्रियकुल वृजि, लिच्छवि, ज्ञात्रिक, विदेही, उग्र, भोग, इक्ष्वाकु, और कौरव नामक थे । इनमे लिच्छवि क्षत्रिय प्रमुख थे । उनकी राजधानी वैशाली उस समय का एक प्रधान नगर था । उसके देवमंदिर और राजमहल अनूठी कारीगरी के बने हुए थे । लिच्छवि क्षत्रिय परिश्रमो, धीर-वीर, समृद्धिशाली और शिक्षा सम्पन्न होने के साथ ही धार्मिक रुचि और भाव को रखने वाले थे । वे वड़े स्वातंत्र्यप्रिय और स्वाभिमानी थे । किसी की आधीनता स्वीकार करना उनके लिए सुगम नहीं था। उस समय के क्षत्रियों में उनकी विशेष प्रतिष्ठा और मान्यता थी । प्राचीन काल से वे जैन धर्म के उपासक थे । उनमे राजा चेटक प्रमुख थे । संभवत वे ही उस समय वज्जिय राजसंघ के प्रधान राजा थे । जैनशास्त्रों में उन्हें इक्ष्वाकुवंशी वशिष्ट गोत्री क्षत्रिय लिखा है । 'उत्तर पुराण' मे इन्हें सोमवंशी लिखा है, जो इत्वाकुवंश का एक भेद है। चेटक की रानी का नाम भद्रा अथवा सुभद्रा था। वह एक पतिव्रता रसरणी थी। दोनों ही पति-पत्नी जिनेन्द्र भगवान के अनन्य भक्त थे। उनकी सन्तान भी उन्हीं के अनुरूप अर्हन्तभक्ति--परायण थी । चेटक स्वय पराक्रमी, वीर योद्धा थे। उनके पुत्र भी वैसे ही थे । सिंह सिंह नामक उनके पुत्र वज्जिय राजसघ की सेना के सेनापति थे । उनके नौ भाई धन दन्तभद्र उपेन्द्र, सुदत्त, सुकुंभोज, अकंपन सुपतंग, प्रभंजन और प्रभास नामक थे । सिंहभद्र की सात चहने थीं; जिनमें सबसे बड़ी त्रिशला प्रियकारिणो भगवान् सहावीर की माता थीं । अवशेष मृगावती, सुप्रभा प्रभावती, चेलनी, ज्येष्टा और चंदना नामक थीं । मृगावती कौशाम्बी के राजा शतानीक को व्याहीं थीं । वत्सराज उदयन् उन्हीं के पुत्र थे । सुप्रभा का विवाह दशार्ण देश के राजा दशरथ के साथ हुआ था । प्रभावती राजकुमारी सिंधु-सौवीर अथवा कच्छदेश के राजा उदयन के राजमहलों की राजरानी थीं । चेलनी मगध के सम्राट् श्रेणिक की पटरानी हुई थीं । ज्येष्ठा और चढ़ना आजन्म ब्रह्मचारिणी रही थीं । लिच्छवि क्षत्रियों की सधि नौ मल्लकि और कौशल के गण राजाओं से हुई थी । उनकी शक्ति संगठित और वल अतुल था । मगध सम्राट ने कई दफा उनपर आक्रमण किया, परन्तु वह सफल मनोरथ नहीं हुए एक [दो] शाक्य गणराज्य में म गौतमबुद्ध का जन्म हुआ था । कपिलवस्तु उसकी राजधानी थी । शुद्धोदन उसके प्रमुख राजा थे। मल्ल गणराज्य - में मल्लवंशीय क्षत्रियों का चाहुल्य था । उसमें नौ क्षत्रिय राजा मिलकर राज प्रबन्ध करते थे ।
मिलजुल मन हिन्दी के विख्यात साहित्यकार मृदुला गर्ग द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2013 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। . 1 संबंधः साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी। साहित्य अकादमी पुरस्कार, सन् १९५४ से प्रत्येक वर्ष भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को दिया जाता है, जिसमें एक ताम्रपत्र के साथ नक़द राशि दी जाती है। नक़द राशि इस समय एक लाख रुपए हैं। साहित्य अकादेमी द्वारा अनुवाद पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार एवं युवा लेखन पुरस्कार भी प्रतिवर्ष विभिन्न भारतीय भाषाओं में दिए जाते हैं, इन तीनों पुरस्कारों के अंतर्गत सम्मान राशि पचास हजार नियत है। .
मिलजुल मन हिन्दी के विख्यात साहित्यकार मृदुला गर्ग द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् दो हज़ार तेरह में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। . एक संबंधः साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी। साहित्य अकादमी पुरस्कार, सन् एक हज़ार नौ सौ चौवन से प्रत्येक वर्ष भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को दिया जाता है, जिसमें एक ताम्रपत्र के साथ नक़द राशि दी जाती है। नक़द राशि इस समय एक लाख रुपए हैं। साहित्य अकादेमी द्वारा अनुवाद पुरस्कार, बाल साहित्य पुरस्कार एवं युवा लेखन पुरस्कार भी प्रतिवर्ष विभिन्न भारतीय भाषाओं में दिए जाते हैं, इन तीनों पुरस्कारों के अंतर्गत सम्मान राशि पचास हजार नियत है। .
Don't Miss! देश में इस समय चल रहे लॉकडाउन को लेकर लगभग सभी सितारे घर पर हैं और फिल्मों की रिलीज तक रुक गई हैं। गौरतलब है कि फैंस यही सोच रहे हैं कि कितनी जल्दी ये समस्या खत्म हो और वो अपने फेवरिट सुपरस्टार्स की फिल्मों का आनंद लें। अगर सबकुछ सही रहता तो सुपरस्टार अक्षय कुमार की फिल्म सूर्यवंशी अब तक रिलीज हो चुकी होती। इसके अलावा रणवीर सिंह की फिल्म 83 द फिल्म को लेकर भी धमाका हुआ होता। बता दें कि ये दोनों रिलायंस एंटरटेनमेंट की फिल्में हैं। रिलायंस एंटरटेनमेंट ने हाल ही में इस बात को लेकर खुलासा किया है कि लॉकडाउन के बाद सबसे पहले उनकी ये दोनों फिल्में रिलीज होगींं। बता दें कि इस फिल्म अक्षय कुमार के साथ साथ सुपरस्टार अजय देवगन और रणवीर सिंह भी नजर आने वाले हैं। लीड एक्ट्रेस की बात करें तो कैटरीना कैफ धमाका करने वाली हैं।
Don't Miss! देश में इस समय चल रहे लॉकडाउन को लेकर लगभग सभी सितारे घर पर हैं और फिल्मों की रिलीज तक रुक गई हैं। गौरतलब है कि फैंस यही सोच रहे हैं कि कितनी जल्दी ये समस्या खत्म हो और वो अपने फेवरिट सुपरस्टार्स की फिल्मों का आनंद लें। अगर सबकुछ सही रहता तो सुपरस्टार अक्षय कुमार की फिल्म सूर्यवंशी अब तक रिलीज हो चुकी होती। इसके अलावा रणवीर सिंह की फिल्म तिरासी द फिल्म को लेकर भी धमाका हुआ होता। बता दें कि ये दोनों रिलायंस एंटरटेनमेंट की फिल्में हैं। रिलायंस एंटरटेनमेंट ने हाल ही में इस बात को लेकर खुलासा किया है कि लॉकडाउन के बाद सबसे पहले उनकी ये दोनों फिल्में रिलीज होगींं। बता दें कि इस फिल्म अक्षय कुमार के साथ साथ सुपरस्टार अजय देवगन और रणवीर सिंह भी नजर आने वाले हैं। लीड एक्ट्रेस की बात करें तो कैटरीना कैफ धमाका करने वाली हैं।
रायपुर. प्रदेश में जन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बीमा कंपनियों को इससे बाहर निकाल दिया है. इस तरह करीब 250 से 300 करोड़ रुपये सालाना बचाकर इसका लाभ जनता तक पहुंचाने की मंशा दिखाई है. छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में कुल छह योजनाएं चला रही थीं. जिसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, संजीवनी सहायता कोष, मुख्यमंत्री बाल ह्रदय सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) हैं. इन योजनाओं में 50 हज़ार तक का इलाज इंश्योरेंस मॉडल पर और उससे ज़्यादा ट्रस्ट मॉडल से चला रही थी. कैबिनेट ने अब इंश्योरेंस मॉडल को बंद करके पूरा इलाज ट्र्स्ट मॉडल पर चलाने का ऐलान किया है. इसके अलावा गंभीर बीमारियों के इलाज में खर्च की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिये हैं. इसके लिए सालाना सरकार 845 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी. इसमें से केंद्र का योगदान 283 करोड़ रुपये का था जिसमें से आयुष्मान योजना के लिए 277 करोड़ रुपये का प्रावधान था. बाकी 562 करोड़ राज्य अपने मद से देती थी. इसमें से बीमा कंपनियों को करीब 720 करोड़ रुपये का भुगतान प्रीमियम के रुप में होता था. जबकि करीब 15 प्रतिशत राशि यानि करीब बची हुई सवा सौ करोड़ राशि उनके प्रशासकीय लागत मद में जाती थी. इस तरह सरकार ने बीमा कंपनियों को बाहर करके सीधा 125 करोड़ रुपये बचा लिए. इसी तरह हर साल बीमा के प्रीमियम की राशि कंपनियां 200 से 300 रुपये बढ़ा ले रही थी. इन्श्योरेंस कंपनियों ने अब तक सरकार से 9 राउंड में सरकारी स्कीमों के लिए पैसे लिए हैं. चूंकि ये राशि सालाना भुगतान नहीं होती थी. इसलिए सरकार ने प्रीमियम के रुप में दी जाने वाली राशि की गणना राउंड में की है. पांचवें राउंड में 55 लाख परिवारों को बीमा के दायरे में लाते हुए 366 रुपये प्रति परिवार की दर से इंश्योरेंस कंपनियों को दिए गए. जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 के दौरान सातवें राउंड में प्रीमियम की दर 609 रुपये हो गई. अक्टूबर 2017 सितंबर 18 तक चले 8 वें राउंड में प्रीमियम की दर 804 रुपये हो गई. जबकि 9वें राउंड में सितंबर 2018 से सितंबर 2019 के दौरान ये प्रीमियम करीब 1100 रुपये का हो गया था. उम्मीद की जा रही थी इस साल बीमा प्रीमियम की दर 1300 से 1400 रुपये के बीच होती. यानि इस साल प्रीमियम की दर करीब 150-200 करोड़ बढ़ जाती. इस तरह सरकार ने प्रीमियम की बढ़ने की संभावित ये राशि भी बचा ली. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस तरह सरकार ने बीमा कंपनियों को बाहर करके करीब 25 फीसदी राशि बचा ली. जो लोगों के इलाज में सीधे खर्च कर दी जाएगी. दरअसल, राज्य में बीमा के जो आंकड़े हैं वो बेहद चौंकाने वाले हैं. पिछले साल राज्य में बीमा कंपनियों ने करीब 7. 20 लाख क्लेम स्वीकार किए. जिसमें से 5. 60 लाख क्लेम प्राइवेट हास्पिटलों का था जबकि 1. 62 लाख क्लेम सरकारी अस्पतालों का था. दिलचस्प बात है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले कुल 12 लाख मरीज़ों ने बीमा के लिए दावा किया था. जिसमें से केवल 1. 62 लाख स्वीकृत किए गए. बाकी 10 लाख अस्वीकृत हो गए. लिहाज़ा सरकार ने तय किया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृण करके वहां ज़्यादा पैसे खर्च किया जाए. स्वास्थ्य विभाग ने बीमा कंपनियों को हटाने के फैसला की एक वजह दुनिया के तमाम देशों में स्वास्थ्य बीमा का बुरी तरह धराशाई होना है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका है. अमेरिका में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर 10 हज़ार डॉलर खर्च किये जाते हैं लेकिन वो टॉप 25 में भी नहीं है. जबकि सरकारी खर्चे से स्वास्थ्य को चलाने वाले ब्रिटेन में प्रति व्यक्ति 5 हज़ार डॉलर खर्च किया जाता है और वो इस क्षेत्र में दुनिया के टॉप 5 देशों में शुमार है. जर्मनी और फ्रांस में स्वास्थ्य सुविधाएं बीमा आधारित हैं लेकिन वो सरकारी हैं. जबकि थाइलैंड और क्यूबा जैसे देश में सरकारी व्यवस्था के ज़रिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को मयस्सर है.
रायपुर. प्रदेश में जन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बीमा कंपनियों को इससे बाहर निकाल दिया है. इस तरह करीब दो सौ पचास से तीन सौ करोड़ रुपये सालाना बचाकर इसका लाभ जनता तक पहुंचाने की मंशा दिखाई है. छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में कुल छह योजनाएं चला रही थीं. जिसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, संजीवनी सहायता कोष, मुख्यमंत्री बाल ह्रदय सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम हैं. इन योजनाओं में पचास हज़ार तक का इलाज इंश्योरेंस मॉडल पर और उससे ज़्यादा ट्रस्ट मॉडल से चला रही थी. कैबिनेट ने अब इंश्योरेंस मॉडल को बंद करके पूरा इलाज ट्र्स्ट मॉडल पर चलाने का ऐलान किया है. इसके अलावा गंभीर बीमारियों के इलाज में खर्च की सीमा बढ़ाकर बीस लाख रुपये कर दिये हैं. इसके लिए सालाना सरकार आठ सौ पैंतालीस करोड़ रुपये खर्च कर रही थी. इसमें से केंद्र का योगदान दो सौ तिरासी करोड़ रुपये का था जिसमें से आयुष्मान योजना के लिए दो सौ सतहत्तर करोड़ रुपये का प्रावधान था. बाकी पाँच सौ बासठ करोड़ राज्य अपने मद से देती थी. इसमें से बीमा कंपनियों को करीब सात सौ बीस करोड़ रुपये का भुगतान प्रीमियम के रुप में होता था. जबकि करीब पंद्रह प्रतिशत राशि यानि करीब बची हुई सवा सौ करोड़ राशि उनके प्रशासकीय लागत मद में जाती थी. इस तरह सरकार ने बीमा कंपनियों को बाहर करके सीधा एक सौ पच्चीस करोड़ रुपये बचा लिए. इसी तरह हर साल बीमा के प्रीमियम की राशि कंपनियां दो सौ से तीन सौ रुपयापये बढ़ा ले रही थी. इन्श्योरेंस कंपनियों ने अब तक सरकार से नौ राउंड में सरकारी स्कीमों के लिए पैसे लिए हैं. चूंकि ये राशि सालाना भुगतान नहीं होती थी. इसलिए सरकार ने प्रीमियम के रुप में दी जाने वाली राशि की गणना राउंड में की है. पांचवें राउंड में पचपन लाख परिवारों को बीमा के दायरे में लाते हुए तीन सौ छयासठ रुपयापये प्रति परिवार की दर से इंश्योरेंस कंपनियों को दिए गए. जनवरी दो हज़ार सत्रह से दिसंबर दो हज़ार सत्रह के दौरान सातवें राउंड में प्रीमियम की दर छः सौ नौ रुपयापये हो गई. अक्टूबर दो हज़ार सत्रह सितंबर अट्ठारह तक चले आठ वें राउंड में प्रीमियम की दर आठ सौ चार रुपयापये हो गई. जबकि नौवें राउंड में सितंबर दो हज़ार अट्ठारह से सितंबर दो हज़ार उन्नीस के दौरान ये प्रीमियम करीब एक हज़ार एक सौ रुपयापये का हो गया था. उम्मीद की जा रही थी इस साल बीमा प्रीमियम की दर एक हज़ार तीन सौ से एक हज़ार चार सौ रुपयापये के बीच होती. यानि इस साल प्रीमियम की दर करीब एक सौ पचास-दो सौ करोड़ बढ़ जाती. इस तरह सरकार ने प्रीमियम की बढ़ने की संभावित ये राशि भी बचा ली. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस तरह सरकार ने बीमा कंपनियों को बाहर करके करीब पच्चीस फीसदी राशि बचा ली. जो लोगों के इलाज में सीधे खर्च कर दी जाएगी. दरअसल, राज्य में बीमा के जो आंकड़े हैं वो बेहद चौंकाने वाले हैं. पिछले साल राज्य में बीमा कंपनियों ने करीब सात. बीस लाख क्लेम स्वीकार किए. जिसमें से पाँच. साठ लाख क्लेम प्राइवेट हास्पिटलों का था जबकि एक. बासठ लाख क्लेम सरकारी अस्पतालों का था. दिलचस्प बात है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले कुल बारह लाख मरीज़ों ने बीमा के लिए दावा किया था. जिसमें से केवल एक. बासठ लाख स्वीकृत किए गए. बाकी दस लाख अस्वीकृत हो गए. लिहाज़ा सरकार ने तय किया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृण करके वहां ज़्यादा पैसे खर्च किया जाए. स्वास्थ्य विभाग ने बीमा कंपनियों को हटाने के फैसला की एक वजह दुनिया के तमाम देशों में स्वास्थ्य बीमा का बुरी तरह धराशाई होना है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका है. अमेरिका में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर दस हज़ार डॉलर खर्च किये जाते हैं लेकिन वो टॉप पच्चीस में भी नहीं है. जबकि सरकारी खर्चे से स्वास्थ्य को चलाने वाले ब्रिटेन में प्रति व्यक्ति पाँच हज़ार डॉलर खर्च किया जाता है और वो इस क्षेत्र में दुनिया के टॉप पाँच देशों में शुमार है. जर्मनी और फ्रांस में स्वास्थ्य सुविधाएं बीमा आधारित हैं लेकिन वो सरकारी हैं. जबकि थाइलैंड और क्यूबा जैसे देश में सरकारी व्यवस्था के ज़रिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को मयस्सर है.
बेंगलुरु. बेंगलुरु में एयरो इंडिया शो चल रहा है। इसी दौरान भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 48 हजार करोड़ रु में 83 तेजस विमान खरीदने के लिए डील की है। इस डील के मुताबिक, एक तेजस विमान की कीमत 309 करोड़ रुपए होगी। यह जानकारी एचएएल के सीएमडी आर माधवन ने दी। प्रोजेक्ट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके -1 ए के घटकों की कीमतों का खुलासा करते हुए, माधवन ने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा प्रदान किए गए अनुबंध की कुल कीमत का आधा हिस्सा ज्यादातर पुर्जों, कर घटक और जमीन के उपकरणों से बना है जो 22,000 करोड़ रुपये में आता है। 83 LCA तेजस के लिए वास्तविक कीमत 25,000 करोड़ रुपए है। एलसीए तेजस एमके-1 ए प्रोजेक्ट के तहत कीमत की विभिन्न घटकों का खुलासा करते हुए माधवन ने कहा, 48 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे में इसकी डिजाइन और डेवलेपमेंट के लिए करीब 2500 करोड़ रुपए एयरनोटिक्स डेवलेपमेंट एजेंसी को दिए जाएंगे और 2250 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा के विनियम पर खर्च होंगे। कब मिलेंगे विमान? वायुसेना को पहला तेजस विमान 36 महीने के अंतर मिल जाएगा। जबकि पहला विमान मिलने के 6 साल के अंदर सभी विमान मिल जाएंगे। 460 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का एक पारिस्थितिकी तंत्र इस परियोजना के लिए साथ आया है। यह संख्या साल के अंत तक बढ़कर 560-600 तक पहुंचने की संभावना है। कुल परियोजना लागत में से, 6,000 करोड़ रुपए MSMEs पारिस्थितिकी तंत्र में जाएंगे जबकि 3,000 करोड़ रुपए अन्य छोटी घरेलू कंपनियों में जाएंगे। माधवन ने कहा, कई देशों ने तेजस को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है, इनमें से ज्यादातर एशिया के देश हैं। हालांकि, अभी ऑर्डर मिलना बाकी है। उन्होंने बताया कि ये ऑर्डर सरकार और सरकार के बीच चर्चा के बाद फाइनल होंगे। उन्होंने कहा, एचएएल ने इसके लिए तैयारी भी कर ली है, ताकि तेजस का निर्यात किया जा सके। महत्वाकांक्षी तेजस एमके -2 की डिजाइन और विकास चल रहा है, जिसका अगले साल अगस्त तक पूरा होने की संभावना है और इसकी पहली उड़ान दिसंबर 2023 में अस्थायी रूप से तय की गई है। 4 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने एचएएल को 70 हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर 40 बेसिक ट्रेनर एयरक्रॉफ्ट के लिए प्रस्ताव दिया है। अब उत्पादन को लेकर अनुबंध की ओर औपचारिक प्रक्रिया शुरू होनी है। इसके तहत डील के दो साल के भीतर वितरण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इन 70 एयरक्रॉफ्ट के बाद 36 और ट्रेनी विमानों का ऑर्डर दिया जाना है। शुरुआत में डिजाइन बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स में तैयार होगी, वहीं, नाशिक में प्रोडक्शन होगा। इस एयर शो में भारत का पहला सेमी स्टेल्थ ड्रोन का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। ये भविष्य में आसमानी जंग का सबसे प्रमुख हथियार होगा। इस ड्र्रोन को वॉरियर नाम दिया गया है। यह एक स्वदेशी हथियार निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। यह ड्रोन मानव रहित होगा। इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत है कि ये दुश्मन के वायु क्षेत्र में तेजस के फाइटर पायलट के साथ मिलकर सुरक्षा के भारी इंतजामों के बीच भी मिशन को अंजाम दे सकता है। इस वॉरियर डड्रोन के लिए एचएएल ने 400 करोड़ रुपए इंवेस्ट किए हैं। इस एयर शो में एचएएल ने हेलिकॉप्टर ड्रोन कॉन्सेप्ट RUAV का प्रदर्शन किया है। इसके जरिए ऊंची जगहों पर आसानी से सामान पहुंचाया जा सकता है। सर्वेलांस के सहारे चलने वाला यह RUAV 150 किलोग्राम वजन ले जाने में सक्षम है। यह 18000 फीट की ऊंचाई तक आसानी से जा सकता है। माना जा रहा है कि यह सियाचिन में तैनात सैनिकों के लिए यह काफी अहम भूमिका निभाएगा।
बेंगलुरु. बेंगलुरु में एयरो इंडिया शो चल रहा है। इसी दौरान भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से अड़तालीस हजार करोड़ रु में तिरासी तेजस विमान खरीदने के लिए डील की है। इस डील के मुताबिक, एक तेजस विमान की कीमत तीन सौ नौ करोड़ रुपए होगी। यह जानकारी एचएएल के सीएमडी आर माधवन ने दी। प्रोजेक्ट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके -एक ए के घटकों की कीमतों का खुलासा करते हुए, माधवन ने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा प्रदान किए गए अनुबंध की कुल कीमत का आधा हिस्सा ज्यादातर पुर्जों, कर घटक और जमीन के उपकरणों से बना है जो बाईस,शून्य करोड़ रुपये में आता है। तिरासी LCA तेजस के लिए वास्तविक कीमत पच्चीस,शून्य करोड़ रुपए है। एलसीए तेजस एमके-एक ए प्रोजेक्ट के तहत कीमत की विभिन्न घटकों का खुलासा करते हुए माधवन ने कहा, अड़तालीस हजार करोड़ रुपये के इस सौदे में इसकी डिजाइन और डेवलेपमेंट के लिए करीब दो हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपए एयरनोटिक्स डेवलेपमेंट एजेंसी को दिए जाएंगे और दो हज़ार दो सौ पचास करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा के विनियम पर खर्च होंगे। कब मिलेंगे विमान? वायुसेना को पहला तेजस विमान छत्तीस महीने के अंतर मिल जाएगा। जबकि पहला विमान मिलने के छः साल के अंदर सभी विमान मिल जाएंगे। चार सौ साठ से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का एक पारिस्थितिकी तंत्र इस परियोजना के लिए साथ आया है। यह संख्या साल के अंत तक बढ़कर पाँच सौ साठ-छः सौ तक पहुंचने की संभावना है। कुल परियोजना लागत में से, छः,शून्य करोड़ रुपए MSMEs पारिस्थितिकी तंत्र में जाएंगे जबकि तीन,शून्य करोड़ रुपए अन्य छोटी घरेलू कंपनियों में जाएंगे। माधवन ने कहा, कई देशों ने तेजस को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है, इनमें से ज्यादातर एशिया के देश हैं। हालांकि, अभी ऑर्डर मिलना बाकी है। उन्होंने बताया कि ये ऑर्डर सरकार और सरकार के बीच चर्चा के बाद फाइनल होंगे। उन्होंने कहा, एचएएल ने इसके लिए तैयारी भी कर ली है, ताकि तेजस का निर्यात किया जा सके। महत्वाकांक्षी तेजस एमके -दो की डिजाइन और विकास चल रहा है, जिसका अगले साल अगस्त तक पूरा होने की संभावना है और इसकी पहली उड़ान दिसंबर दो हज़ार तेईस में अस्थायी रूप से तय की गई है। चार फरवरी को भारतीय वायुसेना ने एचएएल को सत्तर हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर चालीस बेसिक ट्रेनर एयरक्रॉफ्ट के लिए प्रस्ताव दिया है। अब उत्पादन को लेकर अनुबंध की ओर औपचारिक प्रक्रिया शुरू होनी है। इसके तहत डील के दो साल के भीतर वितरण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इन सत्तर एयरक्रॉफ्ट के बाद छत्तीस और ट्रेनी विमानों का ऑर्डर दिया जाना है। शुरुआत में डिजाइन बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स में तैयार होगी, वहीं, नाशिक में प्रोडक्शन होगा। इस एयर शो में भारत का पहला सेमी स्टेल्थ ड्रोन का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। ये भविष्य में आसमानी जंग का सबसे प्रमुख हथियार होगा। इस ड्र्रोन को वॉरियर नाम दिया गया है। यह एक स्वदेशी हथियार निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। यह ड्रोन मानव रहित होगा। इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत है कि ये दुश्मन के वायु क्षेत्र में तेजस के फाइटर पायलट के साथ मिलकर सुरक्षा के भारी इंतजामों के बीच भी मिशन को अंजाम दे सकता है। इस वॉरियर डड्रोन के लिए एचएएल ने चार सौ करोड़ रुपए इंवेस्ट किए हैं। इस एयर शो में एचएएल ने हेलिकॉप्टर ड्रोन कॉन्सेप्ट RUAV का प्रदर्शन किया है। इसके जरिए ऊंची जगहों पर आसानी से सामान पहुंचाया जा सकता है। सर्वेलांस के सहारे चलने वाला यह RUAV एक सौ पचास किलोग्रामग्राम वजन ले जाने में सक्षम है। यह अट्ठारह हज़ार फीट की ऊंचाई तक आसानी से जा सकता है। माना जा रहा है कि यह सियाचिन में तैनात सैनिकों के लिए यह काफी अहम भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नवरात्रि के पहले दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता से बातचीत करते हुए कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई की तुलना महाभारत से भी की। उन्होंने कहा कि महाभारत का युद्ध 18 दिन में जीता गया था। आज कोरोना के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, उसमें 21 दिन लगने वाले हैं। हमारा प्रयास है इसे 21 दिन में जीत लिया जाए। महाभारत का युद्ध 18 दिन में जीता गया था। आज कोरोना के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, हमारा प्रयास है कि इसे 21 दिन में जीत लिया जाए। कोरोना वायरस के कारण इसी लॉकडाउन को देखते हुए रामायण और महाभारत को फिर से रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। रामायण और महाभारत के समय सड़कों पर एक दम सन्नाटा होता था, कर्फ्यू सा माहौल होता था। लोग रामायण और महाभारत के समय घर से नहीं निकलते थे। इसी कारण सोशल नेटवर्किंग साइट पर लोगों ने मांग की है कि दूरदर्शन पर रामानन्द सागर की रामायण और बीआर चोपड़ा की महाभारत को फिर से प्रसारित किया जाए। @shashidigital Sir, भारत सरकार से प्रार्थना रामानंद सागर की रामायण दोबारा TV पर लगातार चलवा दे, समय भी कटेगा और नई पीढ़ी को इसका ज्ञान भी मिलेगा। ? ? इसपर प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने कहा है कि इन दोनों लोकप्रिय धारावाहिकों के राइट्स को लेकर बात हो रही है। आज इन दोनों की धारावाहिकों की समय सारिणी साझा किए जाने की उम्मीद है। रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण साल 1987 और बीआर चोपड़ा की महाभारत का प्रसारण साल 1988 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था। उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन के दौरान एक बार फिर से लोग घर से बाहर नहीं निकलेंगे और कोरोना को मात दे देंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नवरात्रि के पहले दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता से बातचीत करते हुए कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई की तुलना महाभारत से भी की। उन्होंने कहा कि महाभारत का युद्ध अट्ठारह दिन में जीता गया था। आज कोरोना के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, उसमें इक्कीस दिन लगने वाले हैं। हमारा प्रयास है इसे इक्कीस दिन में जीत लिया जाए। महाभारत का युद्ध अट्ठारह दिन में जीता गया था। आज कोरोना के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, हमारा प्रयास है कि इसे इक्कीस दिन में जीत लिया जाए। कोरोना वायरस के कारण इसी लॉकडाउन को देखते हुए रामायण और महाभारत को फिर से रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। रामायण और महाभारत के समय सड़कों पर एक दम सन्नाटा होता था, कर्फ्यू सा माहौल होता था। लोग रामायण और महाभारत के समय घर से नहीं निकलते थे। इसी कारण सोशल नेटवर्किंग साइट पर लोगों ने मांग की है कि दूरदर्शन पर रामानन्द सागर की रामायण और बीआर चोपड़ा की महाभारत को फिर से प्रसारित किया जाए। @shashidigital Sir, भारत सरकार से प्रार्थना रामानंद सागर की रामायण दोबारा TV पर लगातार चलवा दे, समय भी कटेगा और नई पीढ़ी को इसका ज्ञान भी मिलेगा। ? ? इसपर प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने कहा है कि इन दोनों लोकप्रिय धारावाहिकों के राइट्स को लेकर बात हो रही है। आज इन दोनों की धारावाहिकों की समय सारिणी साझा किए जाने की उम्मीद है। रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण साल एक हज़ार नौ सौ सत्तासी और बीआर चोपड़ा की महाभारत का प्रसारण साल एक हज़ार नौ सौ अठासी में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था। उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन के दौरान एक बार फिर से लोग घर से बाहर नहीं निकलेंगे और कोरोना को मात दे देंगे।
प्रत्येक प्राणी के हृदय में परिस्थितियों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के भावों का उदय हुआ करता है और इन भावों को दूसरों पर प्रकट करने की भी प्रत्येक प्राणी को आवश्यकता होती है। एक समय वह था जब मनुष्य एक विकसित और शक्ति सम्पन्न प्राणी नहीं था। वह जंगलों में रहता था और जंगली जानवरों का शिकार कर उन्हीं के चर्म से अपने शरीर को ढंकता था। संकेत ही उसके भाव प्रकाशन थे, जिसके चिह्न आज भी गुफ़ाओं, कंदराओं में पाए जाते हैं परन्तु धीरे-धीरे वह आगे बढ़ा और सभ्यता की ओर चला उसने अपनी भाव प्रकाशन प्रणाली में उन्नति की और जीभ, कंठ, आदि का सहारा लेकर उसने नई-नई ध्वनियों को जन्म दिया। ये ध्वनियाँ ही भाषा के नाम से पुकारी जाने लगीं। प्रत्येक भाषा का विकास बोलियों से ही होता है। जब बोलियों के व्याकरण का मानकीकरण हो जाता है और उस बोली के बोलने या लिखने वाले इसका ठीक से अनुकरण करते हुए व्यवहार करते हैं तथा वह बोली भावाभ्यक्ति में इतनी सक्षम हो जाती है कि लिखित साहित्य का रूप धारण कर सके तो उसे भाषा का स्तर प्राप्त हो जाता है। किसी बोली का महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि समाजिक व्यवहार और शिक्षा व साहित्य में उसका क्या महत्व है। अनेक बोलियाँ मिलकर किसी एक भाषा को समृद्ध करती हैं। इसी प्रकार एक समृद्ध भाषा अपनी बोलियों को समृद्ध करती है। अतः कहा जा सकता है कि भाषा व बोलियाँ परस्पर एक दूसरे को समृद्ध करते हैं। पशु-पक्षी अपनी भावाभिव्यक्तियों के लिए जिन ध्वनियों का प्रयोग करते हैं उन्हें भी बोली कहते हैं। इन बोलियों का भी नाम होता है जैसे शेर की बोली को दहाड़ना कहते हैं, हाथी की बोली को चिंघाड़ना और घोड़े की बोली को हिनहिनाना। . 2 संबंधोंः हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य, उपभाषा विज्ञान। हिन्दी की अनेक बोलियाँ (उपभाषाएँ) हैं, जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, झारखंडी, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में अत्यंत उच्च श्रेणी के साहित्य की रचना हुई है। ऐसी बोलियों में ब्रजभाषा और अवधी प्रमुख हैं। यह बोलियाँ हिन्दी की विविधता हैं और उसकी शक्ति भी। वे हिन्दी की जड़ों को गहरा बनाती हैं। हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उपबोलियाँ हैं जो न केवल अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं वरन स्वतंत्रता संग्राम, जनसंघर्ष, वर्तमान के बाजारवाद के खिलाफ भी उसका रचना संसार सचेत है। मोटे तौर पर हिंद (भारत) की किसी भाषा को 'हिंदी' कहा जा सकता है। अंग्रेजी शासन के पूर्व इसका प्रयोग इसी अर्थ में किया जाता था। पर वर्तमानकाल में सामान्यतः इसका व्यवहार उस विस्तृत भूखंड को भाषा के लिए होता है जो पश्चिम में जैसलमेर, उत्तर पश्चिम में अंबाला, उत्तर में शिमला से लेकर नेपाल की तराई, पूर्व में भागलपुर, दक्षिण पूर्व में रायपुर तथा दक्षिण-पश्चिम में खंडवा तक फैली हुई है। हिंदी के मुख्य दो भेद हैं - पश्चिमी हिंदी तथा पूर्वी हिंदी। . उपभाषा विज्ञान या बोली विज्ञान (Dialectology) भाषाविज्ञान की एक है शाखा जो बोलियों को भौगोलिक वितरण और व्याकरण की दृष्टि से अपने अध्ययन का लक्ष्य बनाती है। भौगोलिक वितरण पर विचार करते हुए सामाजिक वर्गों, जातीय स्तरों, व्यावसायिक वैविध्यों और धार्मिक, सांस्कृतिक विशेषताओं का भी ध्यान रखा जाता है। इन सब के अतिरिक्त बोली विज्ञान का एक लक्ष्य और भी है जिसे कोशविज्ञान (lexicology) का अंग माना जाता है। इसमें विभिन्न बोलियों के शब्दों को ध्वन्यात्मक प्रतिलेखन (Phonetic Transcription) में संगृहीत कर उनकी संकेतसीमा (Referent Range) स्पष्ट की जाती है। .
प्रत्येक प्राणी के हृदय में परिस्थितियों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के भावों का उदय हुआ करता है और इन भावों को दूसरों पर प्रकट करने की भी प्रत्येक प्राणी को आवश्यकता होती है। एक समय वह था जब मनुष्य एक विकसित और शक्ति सम्पन्न प्राणी नहीं था। वह जंगलों में रहता था और जंगली जानवरों का शिकार कर उन्हीं के चर्म से अपने शरीर को ढंकता था। संकेत ही उसके भाव प्रकाशन थे, जिसके चिह्न आज भी गुफ़ाओं, कंदराओं में पाए जाते हैं परन्तु धीरे-धीरे वह आगे बढ़ा और सभ्यता की ओर चला उसने अपनी भाव प्रकाशन प्रणाली में उन्नति की और जीभ, कंठ, आदि का सहारा लेकर उसने नई-नई ध्वनियों को जन्म दिया। ये ध्वनियाँ ही भाषा के नाम से पुकारी जाने लगीं। प्रत्येक भाषा का विकास बोलियों से ही होता है। जब बोलियों के व्याकरण का मानकीकरण हो जाता है और उस बोली के बोलने या लिखने वाले इसका ठीक से अनुकरण करते हुए व्यवहार करते हैं तथा वह बोली भावाभ्यक्ति में इतनी सक्षम हो जाती है कि लिखित साहित्य का रूप धारण कर सके तो उसे भाषा का स्तर प्राप्त हो जाता है। किसी बोली का महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि समाजिक व्यवहार और शिक्षा व साहित्य में उसका क्या महत्व है। अनेक बोलियाँ मिलकर किसी एक भाषा को समृद्ध करती हैं। इसी प्रकार एक समृद्ध भाषा अपनी बोलियों को समृद्ध करती है। अतः कहा जा सकता है कि भाषा व बोलियाँ परस्पर एक दूसरे को समृद्ध करते हैं। पशु-पक्षी अपनी भावाभिव्यक्तियों के लिए जिन ध्वनियों का प्रयोग करते हैं उन्हें भी बोली कहते हैं। इन बोलियों का भी नाम होता है जैसे शेर की बोली को दहाड़ना कहते हैं, हाथी की बोली को चिंघाड़ना और घोड़े की बोली को हिनहिनाना। . दो संबंधोंः हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य, उपभाषा विज्ञान। हिन्दी की अनेक बोलियाँ हैं, जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, झारखंडी, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में अत्यंत उच्च श्रेणी के साहित्य की रचना हुई है। ऐसी बोलियों में ब्रजभाषा और अवधी प्रमुख हैं। यह बोलियाँ हिन्दी की विविधता हैं और उसकी शक्ति भी। वे हिन्दी की जड़ों को गहरा बनाती हैं। हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उपबोलियाँ हैं जो न केवल अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं वरन स्वतंत्रता संग्राम, जनसंघर्ष, वर्तमान के बाजारवाद के खिलाफ भी उसका रचना संसार सचेत है। मोटे तौर पर हिंद की किसी भाषा को 'हिंदी' कहा जा सकता है। अंग्रेजी शासन के पूर्व इसका प्रयोग इसी अर्थ में किया जाता था। पर वर्तमानकाल में सामान्यतः इसका व्यवहार उस विस्तृत भूखंड को भाषा के लिए होता है जो पश्चिम में जैसलमेर, उत्तर पश्चिम में अंबाला, उत्तर में शिमला से लेकर नेपाल की तराई, पूर्व में भागलपुर, दक्षिण पूर्व में रायपुर तथा दक्षिण-पश्चिम में खंडवा तक फैली हुई है। हिंदी के मुख्य दो भेद हैं - पश्चिमी हिंदी तथा पूर्वी हिंदी। . उपभाषा विज्ञान या बोली विज्ञान भाषाविज्ञान की एक है शाखा जो बोलियों को भौगोलिक वितरण और व्याकरण की दृष्टि से अपने अध्ययन का लक्ष्य बनाती है। भौगोलिक वितरण पर विचार करते हुए सामाजिक वर्गों, जातीय स्तरों, व्यावसायिक वैविध्यों और धार्मिक, सांस्कृतिक विशेषताओं का भी ध्यान रखा जाता है। इन सब के अतिरिक्त बोली विज्ञान का एक लक्ष्य और भी है जिसे कोशविज्ञान का अंग माना जाता है। इसमें विभिन्न बोलियों के शब्दों को ध्वन्यात्मक प्रतिलेखन में संगृहीत कर उनकी संकेतसीमा स्पष्ट की जाती है। .
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के दौरान सियासी बयानबाजी से पारा चढ़ा हुआ है। इसी सियासी बयानबाजी में अब बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि रायबरेली में दबंगों ने कई दलितों को मार-मार कर अधमरा कर दिया है। बसपा प्रमुख के इन आरोपों पर अब रायबरेली पुलिस ने जवाब दिया है। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि यूपी के रायबरेली में दबंगों ने कई दलितों को मार-मार कर अधमरा कर दिया। इसी प्रकार प्रदेश में आए दिन दलितों पर अत्याचार व हत्या की घटनाएं आम हो गई हैं। यह बेहद दुखद शर्मनाक और निंदनीय हैं। सरकार इनके मामले में पूरी तत्परता व गंभीरता दिखाए तथा सख्त कदम उठाए। मायावती के इस आरोप पर रायबरेली पुलिस ने जवाब दिया है। पुलिस ने ट्विटर पर एफआरआर दर्ज करने की जानकारी देते हुए लिखा, "12 नवंबर को थाना डीह इलाके में दो पक्षों में कहासुनी और मारपीट हुई थी। जिसमें विनोद कुमार और प्रकाश कुमार को गंभीर चोटें आई हैं। दोनों का इलाज चल रहा है। इसके लिए जिला अस्पताल रायबरेली ले जाया गया है। पुलिस ने कहा की, "वादी राजेंद्र पासी निवासी नया माजरे व थाना देह रायबरेली की लिखित तहरीर के आधार पर धारा 147, 308, 323, 504, 506 व 3(1) डी. कानून एवं मौके पर ही आदेश से संबंधित कोई समस्या नहीं है।
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के दौरान सियासी बयानबाजी से पारा चढ़ा हुआ है। इसी सियासी बयानबाजी में अब बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि रायबरेली में दबंगों ने कई दलितों को मार-मार कर अधमरा कर दिया है। बसपा प्रमुख के इन आरोपों पर अब रायबरेली पुलिस ने जवाब दिया है। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि यूपी के रायबरेली में दबंगों ने कई दलितों को मार-मार कर अधमरा कर दिया। इसी प्रकार प्रदेश में आए दिन दलितों पर अत्याचार व हत्या की घटनाएं आम हो गई हैं। यह बेहद दुखद शर्मनाक और निंदनीय हैं। सरकार इनके मामले में पूरी तत्परता व गंभीरता दिखाए तथा सख्त कदम उठाए। मायावती के इस आरोप पर रायबरेली पुलिस ने जवाब दिया है। पुलिस ने ट्विटर पर एफआरआर दर्ज करने की जानकारी देते हुए लिखा, "बारह नवंबर को थाना डीह इलाके में दो पक्षों में कहासुनी और मारपीट हुई थी। जिसमें विनोद कुमार और प्रकाश कुमार को गंभीर चोटें आई हैं। दोनों का इलाज चल रहा है। इसके लिए जिला अस्पताल रायबरेली ले जाया गया है। पुलिस ने कहा की, "वादी राजेंद्र पासी निवासी नया माजरे व थाना देह रायबरेली की लिखित तहरीर के आधार पर धारा एक सौ सैंतालीस, तीन सौ आठ, तीन सौ तेईस, पाँच सौ चार, पाँच सौ छः व तीन डी. कानून एवं मौके पर ही आदेश से संबंधित कोई समस्या नहीं है।
'सुष्ठु दतं गुरुणा, दुष्टु प्रतीच्छितं कलुषितान्तरात्मना' अर्थात् गुरु के द्वारा अच्छे भावों से दिया गया आगम बुरे भावों से ग्रहण करना। ऐसा करने से अतिचारों की संख्या चौदह के बजाय तेरह ही रह जाती है। मलधारी श्री हेमचन्द्ररि द्वारा विरचित, आगमोदय समिति द्वारा विक्रम संवत् १९७६ में प्रकाशित हरिभद्रीयावश्यक टिप्पणी, पृष्ठ १०८ में नीचे लिखे अनुसार खुलासा किया हैशङ्का - ये चौदह पद तभी पूरे हो सकते हैं जब 'सुट्टु दिए दुट्टु पडिच्छियं' ये दो पद अलग अलग अशातना (अतिचार) के रूप में गिने जाएं, किन्तु यह ठीक नहीं है क्योंकि 'सुष्टु दत्तं' का अर्थ है ज्ञान को भली प्रकार देना और यह अशातना नहीं है। उत्तर - यह शङ्का तभी हो सकती है जब सुट्टु शब्द का अर्थ शोभन रूप से या भली प्रकार किया जाय किन्तु यहाँ इस का अर्थ भली प्रकार नहीं है। यहाँ इसका अर्थ अतिरेक अर्थात् अधिक है अर्थात् थोड़े श्रुत के लिए योग्य पात्र को अधिक पढ़ाना ज्ञान की अशातना ( अतिचार ) है । १ ) काले कसज्मा- जिस सूत्र के पढ़ने का जो काले न हो उस समय उसे पढ़ना। सूत्र दो प्रकार के हैं कालिक और उत्कालिक । जिन सूत्रों को पढ़ने के लिए प्रातःकाल, 'सायकाल आदि निश्चित समय का विधान है वे कालिक कहे जाते है । जिन के लिए समय की कोई मर्यादा नहीं है वे उत्कालिक कहे जाते हैं । कालिक सूत्रों को उनके लिए निश्चित समय के अतिरिक्त पढ़ना अतिचार है। ( १२ ) काले न ओ सज्झाओ जिस सत्र के लिए जो काल निश्चित किया गया है उस समय स्वाध्याय न करना । (१३) अज्झाए सज्झायो - असा अर्थात् ऐसा कारण
'सुष्ठु दतं गुरुणा, दुष्टु प्रतीच्छितं कलुषितान्तरात्मना' अर्थात् गुरु के द्वारा अच्छे भावों से दिया गया आगम बुरे भावों से ग्रहण करना। ऐसा करने से अतिचारों की संख्या चौदह के बजाय तेरह ही रह जाती है। मलधारी श्री हेमचन्द्ररि द्वारा विरचित, आगमोदय समिति द्वारा विक्रम संवत् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में प्रकाशित हरिभद्रीयावश्यक टिप्पणी, पृष्ठ एक सौ आठ में नीचे लिखे अनुसार खुलासा किया हैशङ्का - ये चौदह पद तभी पूरे हो सकते हैं जब 'सुट्टु दिए दुट्टु पडिच्छियं' ये दो पद अलग अलग अशातना के रूप में गिने जाएं, किन्तु यह ठीक नहीं है क्योंकि 'सुष्टु दत्तं' का अर्थ है ज्ञान को भली प्रकार देना और यह अशातना नहीं है। उत्तर - यह शङ्का तभी हो सकती है जब सुट्टु शब्द का अर्थ शोभन रूप से या भली प्रकार किया जाय किन्तु यहाँ इस का अर्थ भली प्रकार नहीं है। यहाँ इसका अर्थ अतिरेक अर्थात् अधिक है अर्थात् थोड़े श्रुत के लिए योग्य पात्र को अधिक पढ़ाना ज्ञान की अशातना है । एक ) काले कसज्मा- जिस सूत्र के पढ़ने का जो काले न हो उस समय उसे पढ़ना। सूत्र दो प्रकार के हैं कालिक और उत्कालिक । जिन सूत्रों को पढ़ने के लिए प्रातःकाल, 'सायकाल आदि निश्चित समय का विधान है वे कालिक कहे जाते है । जिन के लिए समय की कोई मर्यादा नहीं है वे उत्कालिक कहे जाते हैं । कालिक सूत्रों को उनके लिए निश्चित समय के अतिरिक्त पढ़ना अतिचार है। काले न ओ सज्झाओ जिस सत्र के लिए जो काल निश्चित किया गया है उस समय स्वाध्याय न करना । अज्झाए सज्झायो - असा अर्थात् ऐसा कारण
गोविन्द राम (चर्चा । योगदान) गोविन्द राम (चर्चा । योगदान) ।पंक्ति 9: ।पंक्ति 9: "आपका शाप मुझे तब तक हानि नहीं पहुँचा सकता माते! जब तक कि मैं उसे स्वीकार न कर लूँ। मैं साक्षात् ईश्वर हूँ और आप नश्वर, मृत्युलोक की शरीरधारी स्त्री मात्र, तदैव आपका शाप, द्वापर युग में अवतरित मेरे के पूर्णावतार, अर्थात समस्त कलाओं से युक्त अवतार, 'कृष्ण' को प्रभावित करने में सक्षम नहीं होगा, फिर भी आप निश्चिंत रहें, मेरी कोई आयोजना ऐसी नहीं जिससे मैं अपनी उपस्थिति को एक माँ से श्रेष्ठ स्थापित करने का प्रयत्न करूँ। इसलिए माते! मैं आपके शाप को विनम्रता से स्वीकार करता हूँ। अब यदुकुल वंश का समूल नाश वैसे ही होना अवश्यंभावी है जैसा आपके शाप में संकल्पित है।"
गोविन्द राम गोविन्द राम ।पंक्ति नौ: ।पंक्ति नौ: "आपका शाप मुझे तब तक हानि नहीं पहुँचा सकता माते! जब तक कि मैं उसे स्वीकार न कर लूँ। मैं साक्षात् ईश्वर हूँ और आप नश्वर, मृत्युलोक की शरीरधारी स्त्री मात्र, तदैव आपका शाप, द्वापर युग में अवतरित मेरे के पूर्णावतार, अर्थात समस्त कलाओं से युक्त अवतार, 'कृष्ण' को प्रभावित करने में सक्षम नहीं होगा, फिर भी आप निश्चिंत रहें, मेरी कोई आयोजना ऐसी नहीं जिससे मैं अपनी उपस्थिति को एक माँ से श्रेष्ठ स्थापित करने का प्रयत्न करूँ। इसलिए माते! मैं आपके शाप को विनम्रता से स्वीकार करता हूँ। अब यदुकुल वंश का समूल नाश वैसे ही होना अवश्यंभावी है जैसा आपके शाप में संकल्पित है।"
मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी छात्रा जिम में जाती थी। वहां पर जयदेवीनगर निवासी भरत यादव ट्रेनर था। पीड़िता के अनुसार गत 12 अक्टूबर को वह जिम में बेहोश हो गई थी। उपचार के नाम पर ट्रेनर उसे पीवीएस रोड पर स्थित अपने भाई के होटल में ले गया। मेरठ, जागरण संवाददाता। छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपित जिम ट्रेनर को जेल भेज दिया गया है। मुकदमे में उसका होटल संचालक भाई भी नामजद है, लेकिन पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके पीछे पुलिस का कोई खेल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। पुलिस उसकी संलिप्तता जांच की बात कह रही है। नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर निवासी छात्रा 'द पंपिंग जोन' जिम में जाती थी। वहां पर जयदेवीनगर निवासी भरत यादव जिम ट्रेनर था। पीड़िता ने बताया कि 12 अक्टूबर को वह जिम में बेहोश हो गई थी। उपचार के नाम पर ट्रेनर उसे पीवीएस रोड पर स्थित अपने भाई राजीव उर्फ टीटू के मैग्नम होटल में ले गया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला दिया, जिससे वह बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपित जिम ट्रेनर ने दुष्कर्म किया और वीडियो बना ली। इसकी जानकारी उसने स्वजन को दी, जिसके बाद उन्होंने दोनों भाइयों के विरुद्ध मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने शनिवार देर रात जिम ट्रेनर भरत यादव और उसके होटल संचालक भाई राजीव को पकड़ लिया था, लेकिन रविवार को जिम ट्रेनर को ही कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। मुकदमे में होटल संचालक भी नामजद है। उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके पीछे पुलिस का कोई खेल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। 24 घंटे बाद भी पुलिस कुछ तय नहीं कर सकी है। थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ ने बताया कि होटल संचालक की संलिप्तता की जांच की जा रही है। इसके बाद ही उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। स्वजन ने बताया कि मुकदमा दर्ज कराने के बाद से उनको धमकी मिल रही है। उन्होंने पीछे हटने से मना कर दिया तो आरोपित की ओर से शादी करने का भी प्रस्ताव दिया गया। जिसे स्वजन ने इन्कार कर दिया। इसकी शिकायत पुलिस से कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि सभी बिंदु पर जांच की जा रही है। होटल और जिम में लगे सीसीटीवी की फुटेज देखी जा रही है। साथ ही आरोपित जिम ट्रेनर का मोबाइल भी चेक किया जाएगा।
मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी छात्रा जिम में जाती थी। वहां पर जयदेवीनगर निवासी भरत यादव ट्रेनर था। पीड़िता के अनुसार गत बारह अक्टूबर को वह जिम में बेहोश हो गई थी। उपचार के नाम पर ट्रेनर उसे पीवीएस रोड पर स्थित अपने भाई के होटल में ले गया। मेरठ, जागरण संवाददाता। छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपित जिम ट्रेनर को जेल भेज दिया गया है। मुकदमे में उसका होटल संचालक भाई भी नामजद है, लेकिन पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके पीछे पुलिस का कोई खेल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। पुलिस उसकी संलिप्तता जांच की बात कह रही है। नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर निवासी छात्रा 'द पंपिंग जोन' जिम में जाती थी। वहां पर जयदेवीनगर निवासी भरत यादव जिम ट्रेनर था। पीड़िता ने बताया कि बारह अक्टूबर को वह जिम में बेहोश हो गई थी। उपचार के नाम पर ट्रेनर उसे पीवीएस रोड पर स्थित अपने भाई राजीव उर्फ टीटू के मैग्नम होटल में ले गया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला दिया, जिससे वह बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपित जिम ट्रेनर ने दुष्कर्म किया और वीडियो बना ली। इसकी जानकारी उसने स्वजन को दी, जिसके बाद उन्होंने दोनों भाइयों के विरुद्ध मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने शनिवार देर रात जिम ट्रेनर भरत यादव और उसके होटल संचालक भाई राजीव को पकड़ लिया था, लेकिन रविवार को जिम ट्रेनर को ही कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। मुकदमे में होटल संचालक भी नामजद है। उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इसके पीछे पुलिस का कोई खेल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। चौबीस घंटाटे बाद भी पुलिस कुछ तय नहीं कर सकी है। थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ ने बताया कि होटल संचालक की संलिप्तता की जांच की जा रही है। इसके बाद ही उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। स्वजन ने बताया कि मुकदमा दर्ज कराने के बाद से उनको धमकी मिल रही है। उन्होंने पीछे हटने से मना कर दिया तो आरोपित की ओर से शादी करने का भी प्रस्ताव दिया गया। जिसे स्वजन ने इन्कार कर दिया। इसकी शिकायत पुलिस से कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि सभी बिंदु पर जांच की जा रही है। होटल और जिम में लगे सीसीटीवी की फुटेज देखी जा रही है। साथ ही आरोपित जिम ट्रेनर का मोबाइल भी चेक किया जाएगा।
26 जून 1960। मैनपुरी के करहल का जैन इंटर कॉलेज। कैंपस में कवि सम्मेलन चल रहा था। यहां उस वक्त के मशहूर कवि दामोदर स्वरूप विद्रोही भी मौजूद थे। वो मंच पर पहुंचे और अपनी लिखी कविता 'दिल्ली की गद्दी सावधान' पढ़ना शुरू की। कविता सरकार के खिलाफ थी। इसलिए वहां तैनात UP पुलिस का इंस्पेक्टर मंच पर गया और उन्हें कविता पढ़ने से रोकने लगा। वो नहीं माने तो उनका माइक छीन लिया। इंस्पेक्टर ने कवि को डांटते हुए कहा कि आप सरकार के खिलाफ कविता नहीं पढ़ सकते। मंच पर बहस हो ही रही थी कि दर्शकों के बीच बैठा 21 साल का पहलवान दौड़ते हुए मंच पर पहुंचा। 10 सेकेंड में उस नौजवान ने इंस्पेक्टर को उठाकर मंच पर पटक दिया। ये नौजवान कोई और नहीं बल्कि मुलायम सिंह यादव थे। तारीख 4 मार्च 1984, दिन रविवार। नेताजी की इटावा और मैनपुरी में रैली थी। रैली के बाद वो मैनपुरी में अपने एक दोस्त से मिलने गए। दोस्त से मुलाकात के बाद वो 1 किलोमीटर ही चले थे कि उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। गोली मारने वाले छोटेलाल और नेत्रपाल नेताजी की गाड़ी के सामने कूद गए। करीब आधे घंटे तक छोटेलाल, नेत्रपाल और पुलिसवालों के बीच फायरिंग चलती रही। छोटेलाल नेताजी के ही साथ चलता था, इसलिए उसे पता था कि वह गाड़ी में किधर बैठे हैं। यही वजह है कि उन दोनों ने 9 गोलियां गाड़ी के उस हिस्से पर चलाईं, जहां नेताजी बैठा करते थे, लेकिन लगातार फायरिंग से ड्राइवर का ध्यान हटा और उनकी गाड़ी डिस्बैलेंस होकर सूखे नाले में गिर गई। नेताजी तुरंत समझ गए कि उनकी हत्या की साजिश की गई है। उन्होंने तुरंत सबकी जान बचाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो जोर-जोर से चिल्लाएं 'नेताजी मर गए। उन्हें गोली लग गई। नेताजी नहीं रहे। ' जब नेताजी के सभी समर्थकों ने ये चिल्लाना शुरू किया तो हमलावरों को लगा कि नेताजी सच में मर गए। उन्हें मरा हुआ समझकर हमलावरों ने गोलियां चलानी बंद कर दीं और वहां से भागने लगे, लेकिन पुलिस की गोली लगने से छोटेलाल की उसी जगह मौत हो गई और नेत्रपाल बुरी तरह घायल हो गया। इसके बाद सुरक्षाकर्मी नेताजी को एक जीप में 5 किलोमीटर दूर कुर्रा पुलिस स्टेशन तक ले गए। 1989 में लोकदल से मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 90 का दौर शुरू होते-होते देशभर में मंडल-कमंडल की लड़ाई शुरू हो गई। ऐसे में 1990 में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवा की। 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई। कारसेवक पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ मस्जिद की ओर बढ़ रहे थे। मुलायम सिंह यादव ने सख्त फैसला लेते हुए प्रशासन को गोली चलाने का आदेश दिया। पुलिस की गोलियों से 6 कारसेवकों की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद फिर 2 नवंबर 1990 को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए, मुलायम के आदेश पर पुलिस को एक बार फिर गोली चलानी पड़ी, जिसमें करीब एक दर्जन कारसेवकों की मौत हो गई। कारसेवकों पर गोली चलवाने के फैसले ने मुलायम को हिंदू विरोधी बना दिया। विरोधियों ने उन्हें 'मुल्ला मुलायम' बना दिया। हालांकि बाद में बाद में मुलायम ने कहा था कि ये फैसला कठिन था, लेकिन मुलायम को इसका राजनीतिक लाभ भी हुआ था। कारसेवकों के विवादिच ढांचे के करीब पहुंचने के बाद मुलायम ने सुरक्षाबलों को गोली चलाने का निर्देश दे दिया। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई में 16 कारसेवकों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। बाद में मुलायम ने बताया कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 28 लोग मारे गए थे। 1956 में राम मनोहर लोहिया और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर समझौते के तहत एक साथ आने की प्लानिंग कर रहे थे। हालांकि इसी बीच अंबेडकर का निधन हो गया और लोहिया की दलित-पिछड़ा जोड़ की प्लानिंग सफल नहीं हो सकी। 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद मुलायम ने लोहिया के इस प्लान को अमल में लाने की दिशा में काम शुरू कर दिए। मुलायम ने तब के बड़े दलित नेता कांशीराम के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। मुलायम के इस मास्टर स्ट्रोक का असर चुनावी रिजल्ट पर भी दिखा। 422 सीटों वाली विधानसभा में सपा-बसपा गठबंधन को 176 सीटें मिली, जबकि भाजपा बहुमत से दूर हो गई। मुलायम ने अन्य छोटे दलों को साथ मिलाकर सत्ता में वापसी कर ली। मुलायम के सत्ता में आने के बाद UP में एक स्लोगन- 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम', खूब चर्चित हुआ। साल था 2009। भाजपा छोड़ एटा से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कल्याण सिंह के समर्थन में मुलायम ने जनसभा कर दी। कल्याण बाबरी मस्जिद विध्वंस के वक्त मुख्यमंत्री थे और अवमानना के मामले में सजा भी काट चुके थे। कल्याण सिंह के समर्थन देने के फैसले पर पार्टी के भीतर ही बगावत हो गई। सीनियर नेता आजम खान ने मुलायम पर सरेराह निशाना साधा। चुनाव में भी मुलायम को इसका नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि मुलायम के समर्थन से कल्याण सिंह चुनाव जीत गए। मुलायम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें. . This website follows the DNPA Code of Ethics.
छब्बीस जून एक हज़ार नौ सौ साठ। मैनपुरी के करहल का जैन इंटर कॉलेज। कैंपस में कवि सम्मेलन चल रहा था। यहां उस वक्त के मशहूर कवि दामोदर स्वरूप विद्रोही भी मौजूद थे। वो मंच पर पहुंचे और अपनी लिखी कविता 'दिल्ली की गद्दी सावधान' पढ़ना शुरू की। कविता सरकार के खिलाफ थी। इसलिए वहां तैनात UP पुलिस का इंस्पेक्टर मंच पर गया और उन्हें कविता पढ़ने से रोकने लगा। वो नहीं माने तो उनका माइक छीन लिया। इंस्पेक्टर ने कवि को डांटते हुए कहा कि आप सरकार के खिलाफ कविता नहीं पढ़ सकते। मंच पर बहस हो ही रही थी कि दर्शकों के बीच बैठा इक्कीस साल का पहलवान दौड़ते हुए मंच पर पहुंचा। दस सेकेंड में उस नौजवान ने इंस्पेक्टर को उठाकर मंच पर पटक दिया। ये नौजवान कोई और नहीं बल्कि मुलायम सिंह यादव थे। तारीख चार मार्च एक हज़ार नौ सौ चौरासी, दिन रविवार। नेताजी की इटावा और मैनपुरी में रैली थी। रैली के बाद वो मैनपुरी में अपने एक दोस्त से मिलने गए। दोस्त से मुलाकात के बाद वो एक किलोग्राममीटर ही चले थे कि उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। गोली मारने वाले छोटेलाल और नेत्रपाल नेताजी की गाड़ी के सामने कूद गए। करीब आधे घंटे तक छोटेलाल, नेत्रपाल और पुलिसवालों के बीच फायरिंग चलती रही। छोटेलाल नेताजी के ही साथ चलता था, इसलिए उसे पता था कि वह गाड़ी में किधर बैठे हैं। यही वजह है कि उन दोनों ने नौ गोलियां गाड़ी के उस हिस्से पर चलाईं, जहां नेताजी बैठा करते थे, लेकिन लगातार फायरिंग से ड्राइवर का ध्यान हटा और उनकी गाड़ी डिस्बैलेंस होकर सूखे नाले में गिर गई। नेताजी तुरंत समझ गए कि उनकी हत्या की साजिश की गई है। उन्होंने तुरंत सबकी जान बचाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो जोर-जोर से चिल्लाएं 'नेताजी मर गए। उन्हें गोली लग गई। नेताजी नहीं रहे। ' जब नेताजी के सभी समर्थकों ने ये चिल्लाना शुरू किया तो हमलावरों को लगा कि नेताजी सच में मर गए। उन्हें मरा हुआ समझकर हमलावरों ने गोलियां चलानी बंद कर दीं और वहां से भागने लगे, लेकिन पुलिस की गोली लगने से छोटेलाल की उसी जगह मौत हो गई और नेत्रपाल बुरी तरह घायल हो गया। इसके बाद सुरक्षाकर्मी नेताजी को एक जीप में पाँच किलोग्राममीटर दूर कुर्रा पुलिस स्टेशन तक ले गए। एक हज़ार नौ सौ नवासी में लोकदल से मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। नब्बे का दौर शुरू होते-होते देशभर में मंडल-कमंडल की लड़ाई शुरू हो गई। ऐसे में एक हज़ार नौ सौ नब्बे में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवा की। तीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई। कारसेवक पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ मस्जिद की ओर बढ़ रहे थे। मुलायम सिंह यादव ने सख्त फैसला लेते हुए प्रशासन को गोली चलाने का आदेश दिया। पुलिस की गोलियों से छः कारसेवकों की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद फिर दो नवंबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए, मुलायम के आदेश पर पुलिस को एक बार फिर गोली चलानी पड़ी, जिसमें करीब एक दर्जन कारसेवकों की मौत हो गई। कारसेवकों पर गोली चलवाने के फैसले ने मुलायम को हिंदू विरोधी बना दिया। विरोधियों ने उन्हें 'मुल्ला मुलायम' बना दिया। हालांकि बाद में बाद में मुलायम ने कहा था कि ये फैसला कठिन था, लेकिन मुलायम को इसका राजनीतिक लाभ भी हुआ था। कारसेवकों के विवादिच ढांचे के करीब पहुंचने के बाद मुलायम ने सुरक्षाबलों को गोली चलाने का निर्देश दे दिया। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई में सोलह कारसेवकों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। बाद में मुलायम ने बताया कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में अट्ठाईस लोग मारे गए थे। एक हज़ार नौ सौ छप्पन में राम मनोहर लोहिया और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर समझौते के तहत एक साथ आने की प्लानिंग कर रहे थे। हालांकि इसी बीच अंबेडकर का निधन हो गया और लोहिया की दलित-पिछड़ा जोड़ की प्लानिंग सफल नहीं हो सकी। एक हज़ार नौ सौ बानवे में बाबरी विध्वंस के बाद मुलायम ने लोहिया के इस प्लान को अमल में लाने की दिशा में काम शुरू कर दिए। मुलायम ने तब के बड़े दलित नेता कांशीराम के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। मुलायम के इस मास्टर स्ट्रोक का असर चुनावी रिजल्ट पर भी दिखा। चार सौ बाईस सीटों वाली विधानसभा में सपा-बसपा गठबंधन को एक सौ छिहत्तर सीटें मिली, जबकि भाजपा बहुमत से दूर हो गई। मुलायम ने अन्य छोटे दलों को साथ मिलाकर सत्ता में वापसी कर ली। मुलायम के सत्ता में आने के बाद UP में एक स्लोगन- 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम', खूब चर्चित हुआ। साल था दो हज़ार नौ। भाजपा छोड़ एटा से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कल्याण सिंह के समर्थन में मुलायम ने जनसभा कर दी। कल्याण बाबरी मस्जिद विध्वंस के वक्त मुख्यमंत्री थे और अवमानना के मामले में सजा भी काट चुके थे। कल्याण सिंह के समर्थन देने के फैसले पर पार्टी के भीतर ही बगावत हो गई। सीनियर नेता आजम खान ने मुलायम पर सरेराह निशाना साधा। चुनाव में भी मुलायम को इसका नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि मुलायम के समर्थन से कल्याण सिंह चुनाव जीत गए। मुलायम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें. . This website follows the DNPA Code of Ethics.
= मोमिन की नमाज़ और मगरिब के वक्त बाहर चला जाए.' (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. ३, सफहा नं. ३८३/६१३) 'जिस शख़्स ने जोह्र और इशा की नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ ली हो, फिर दूसरी जमाअत काइम हो, तो नफूल की निय्यत से जमाअत में शामिल हो जाए, और अगर दोबारा भी फर्ज़ की निय्यत से शामिल हुआ, जब भी नफूल अदा होंगे, क्योंकि फर्ज़ की तकरार (पुनरावर्तन-Repetition) नहीं हो सकती. और हदीस शरीफ में है कि "ला युसल्ली - बा' दा - सलातिन - मिस्लहा" (अनुवाद) "नमाज़ (फर्ज़) के बाद उसके मिस्ल न पढ़ा जाए. " (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. ३, सफहा नं. ४५२) 'अगर किसी ने तन्हा (अकैले) फर्ज़ शुरू कर दिये और उसके फर्ज् शुरू करने के बाद जमाअत काइम हुई, तो अगर तन्हा पढ़ने वाले ने पहली ` रकअत का सजदा न किया हो, तो उसे शरीअते - मुताह्हरा हुक्म फरमाती है कि निय्यत तोड़ दे और जमाअत में शामिल हो जाए, बल्कि यहां तक हुक्म `है कि मग्रिब और फज्र में तो जब तक दूसरी रकअत का सजदा न किया * हो, तो निय्यत तोड़ कर जमाअत में मिल जाए और बाकी तीन (३) 'नमाज़ों या'नी ज़ोह्र, अस्र और इशा में अगर दो (२) रकअत भी पढ़ चुका हो, तो उन्हें नफ्ल ठहेरा कर जब तक तीसरी (३) रकअत का सजदा न किया हो, निय्यत तोड़कर जमाअत में शरीक हो जाए.' (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. ३, सफहा नं. ३८३) "नमाज़े - पंजगाना ( पांच वक्त) और जुम्आ की नमाज़ के लिये अज़ान सुन्नते-मोअक्केदा और क़रीबुल - वुजूब (वाजिब के समीप) है और यूंही इक़ामत या'नी तकबीर देना भी. " (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. २, सफहा ४२०) "मस्जिद में पांचों (५) वक्त जमाअत से पहले अज़ान देना सुन्नतेमोअक्केदा और क़रीबुल वुजूब है और उसको छोड़ना बहुत बुरा है. यहां तक कि हज़रत इमाम मुहम्मद रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो ने फरमाया कि; "अगर किसी शहर के लोग अज़ान देना छोड़ दें, तो मैं उन पर जेहाद करूंगा." हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसउद रदीय्यल्लाहो तआला अन्हों ने फरमाया कि महोल्ले की अज़ान हमें 'किफायत' (Sufficience) करती है. मुसाफिर को तर्फे अज़ान की इजाजत है, लैकिन अगर इक़ामत भी तर्क करेगा, तो मकरूह है.' (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. २, सफहा नं. ४२४) "इक़ामत (तकबीर) खड़े होकर सुनना मकरूह है. यहां तक कि ओलोमाए-दीन ने फरमाय है कि अगर इक़ामत (तकबीर) हो रही हो और उस वक़्त कोई शख़्स मस्जिद में आया, तो वोह जहां हो वहीं बैठ जाए और जब मुकब्बिर या'नी तकबीर कहनेवाला 'हय्या - अलल-फलाह' पर पहुंचे, उस वक्त सब "मुक्तदीयों के साथ खड़ा हो जाए.' (फतावा रज़वीया, जिल्द नं. २, सफहा नं. ४१९) प्रकरण (१३) 'इमामत के मसाइल' 'इमामत की दो (२) किस्में (प्रकार) हैं. १. इमामते कुब्रा (बड़ी इमामत) २. इमामते सुगुरा (छोटी इमामत) 'इमामते-कुब्रा या'नी हुजूरे- अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम की 'नियाबते - मुत्लका' (विशाल प्रतिनिधित्वVicegerency) कि हुजूरे अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम की नियाबत की वजह से वोह इमाम मुसलमानों के $ तमाम दीनी और दुन्यवी उमूर (कामों-Matters) में शरीअत के मुताबिक (अनुसरण-Confirmity ) "तसरूफे आम' (अमर्यादित सत्ता-Unlimited Power) का इख़्तियार (अधिकार) रखे और गैर मासियत ( निष्पाप - Sinless ) बाबतों में उसकी इताअत (आज्ञा पालन-Obediance) तमाम जहां (विश्व-World) के मुसलमानों पर फर्ज है. जैसे कि खोलोफाए-राशेदीन, हज़रत सय्येदुना इमाम हसन, हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ वगैरह और हज़रत इमाम मेहदी रदीय्यल्लाहो तआला अन्हुम.' " इस वक्त हम इमामते कुब्रा के मुतअल्लिक कुछ भी बयान (वर्णन) नहीं करते बल्कि इमामते- सुगरा के मुतअल्लिक गुफतगु (चर्चा) करते हैं. ' "इमामते-सुगुरा या'नी नमाज़ की इमामत. और नमाज़ की इमामत का मतलब येह है कि दूसरों (अन्य लोगों) की नमाज़ों का उसकी नमाज़ से वाबस्ता (संलग्नित-Fastened) होना या'नी इमाम अपनी नमाज़ पढ़ने के साथ साथ दूसरे लोगों को भी नमाज़ पढ़ाए. ' 'मर्दों की इमामत करने के लिये इमाम होने के लिये छेः (६) शर्तें हैं. इस्लाम या'नी सुन्नी सहीहुल अकीदा होना, मुर्तद, मुनाफिक और बदमज़हब शख़्स इमाम नहीं हो सकता. बुलूग या'नी बालिग (पुख़्ता उम्र- Adult) होना. ना - बालिग (सगीर उम्र -Tender Age) इमामत नहीं कर सकता. आक़िल होना या'नी उसकी अक्ल सलामत हो, मजनून या पागल शख़्स इमाम बनने की सलाहियत (योग्यता - Qualification) नहीं मर्द होना, औरत मर्दों की इमामत नहीं कर सकती. क़िरअत करने पर कुदरत (शक्तिमान) होना. मा'जूर न होना (या'नी शारीरिक खोड़ वाला, अपंग- Physically Handicapped) न हो. (बहारे-शरीअत, हिस्सा-३, सफहा-१०९) "औरतों (स्त्रियों ) की इमामत करने के लिये मर्द होना शर्त नहीं. औरत भी औरतों की इमामत कर सकती है, अगरचे उसकी इमामत मकरूह है.' (हवाला : सदर/Ditto) "ना-बालिगों के इमाम के लिये बालिग होना शर्त नहीं. अगर कोई समज़दार ना-बालिग़ तहारत, नमाज़ और इमामत के मसाइल से वाक़फीयत (जानकारी) रखता है, तो वोह ना-बालिगों की इमामत कर सकता है.' ( बहारे - शरीअत, हिस्सा-३, सफहा-११०, रदुल मोहतार ) इमामत के मुतअल्लिक अहादीसे-करीमा "तिब्रानी ने मोअजमे- कबीर में हज़रत मरषद बिन अबी मरषद अल ग़नवी रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत की कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो = मोमिन की नमाज़ तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'अगर तुम्हें अपनी नमाज़ों का क़बूल होना पसन्द हो, तो चाहिये कि तुम्हारे औलोमा तुम्हारी इमामत करें कि वोह तुम्हारे वास्ता (मध्यस्थी - Mediator) और सफीर (एलची-Envoy) हैं, तुम्हारे और तुम्हारे रब तबारक व तआला के दरमियान. " (बः हवाला : फतावा रज़वीया, जिल्द नं. ३, सफहा नं. १९५) 'हाकिम ने 'मुस्तदरक' में रिवायत की कि हुजूरे- अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि 'अगर तुम्हें खुश आए कि खुदा तुम्हारी नमाज़ कुबूल फरमाए, तो चाहिये कि तुम्हारे बेहतर (उत्तम) तुम्हारी इमामत करें कि वोह तुम्हारे सफीर हैं, तुम्हारे और तुम्हारे रब के दरमियान." (बः हवाला : फतावा रज्वीया, जिल्द नं. ३, सफहा नं. १७२) 'इमाम अहमद और इब्ने माजा हज़रत सल्मा बिन्ते अल-हिर रदीय्यल्लाहो तआला अन्हा से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'कयामत की अलामत (निशानी) से है कि एहले -मस्जिद आपस में इमामत को एक दूसरे पर डालेंगे, मगर किसी को इमाम नहीं पायेंगे कि उनको नमाज़ पढ़ा दे.' (या'नी किसी में भी इमामत की • सलाहियत न होगी कि वोह इमामत कर सके.) 'इमाम तिरमीज़ी हज़रत अब उमामा रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया 'कि; 'तीन शख़्सों की नमाज़ कानों (कान-Ear) से आगे नहीं बढ़ती. (१) भागा हुआ गुलाम यहां तक कि वापस आए. (२) वोह औरत जो इस हालत में रात गुज़ारे कि उसका शौहर (पति- Husband) उस पर नाराज़ हो. (३) किसी गिरोह (समुदाय) का वोह इमाम कि लोग उसकी इमामत से किराहत (घृणा-Abhor) करते हों.' (या'नी' किसी शरई क़बाहत की वजह से ) 'इमाम बुख़ारी और इमाम मुस्लिम वगैरह ने हज़रत अबू हुरैरह रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत की कि हुजूरे - अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; ' जब कोई औरों (दूसरों) को नमाज़ पढ़ाए, तो तख़फीफ करे (या'नी नमाज़ बहुत लम्बी न पढ़ाए) कि उन में बीमार, कमज़ोर और बूढ़ा होता है और जब अपनी पढ़े, तो जिस क़दर चाहे 'तूल' दे.' (या'नी जब अकैला नमाज़ पढ़े तब जितनी चाहे उत्नी लम्बी पढ़े.) 'इमाम मालिक हज़रत अनस रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'जो मुक्तदी इमाम से पहले अपना सर उठाता और झुकाता है, उसकी पैशानी के बाल शैतान के हाथ में हैं.'
= मोमिन की नमाज़ और मगरिब के वक्त बाहर चला जाए.' 'जिस शख़्स ने जोह्र और इशा की नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ ली हो, फिर दूसरी जमाअत काइम हो, तो नफूल की निय्यत से जमाअत में शामिल हो जाए, और अगर दोबारा भी फर्ज़ की निय्यत से शामिल हुआ, जब भी नफूल अदा होंगे, क्योंकि फर्ज़ की तकरार नहीं हो सकती. और हदीस शरीफ में है कि "ला युसल्ली - बा' दा - सलातिन - मिस्लहा" "नमाज़ के बाद उसके मिस्ल न पढ़ा जाए. " 'अगर किसी ने तन्हा फर्ज़ शुरू कर दिये और उसके फर्ज् शुरू करने के बाद जमाअत काइम हुई, तो अगर तन्हा पढ़ने वाले ने पहली ` रकअत का सजदा न किया हो, तो उसे शरीअते - मुताह्हरा हुक्म फरमाती है कि निय्यत तोड़ दे और जमाअत में शामिल हो जाए, बल्कि यहां तक हुक्म `है कि मग्रिब और फज्र में तो जब तक दूसरी रकअत का सजदा न किया * हो, तो निय्यत तोड़ कर जमाअत में मिल जाए और बाकी तीन 'नमाज़ों या'नी ज़ोह्र, अस्र और इशा में अगर दो रकअत भी पढ़ चुका हो, तो उन्हें नफ्ल ठहेरा कर जब तक तीसरी रकअत का सजदा न किया हो, निय्यत तोड़कर जमाअत में शरीक हो जाए.' "नमाज़े - पंजगाना और जुम्आ की नमाज़ के लिये अज़ान सुन्नते-मोअक्केदा और क़रीबुल - वुजूब है और यूंही इक़ामत या'नी तकबीर देना भी. " "मस्जिद में पांचों वक्त जमाअत से पहले अज़ान देना सुन्नतेमोअक्केदा और क़रीबुल वुजूब है और उसको छोड़ना बहुत बुरा है. यहां तक कि हज़रत इमाम मुहम्मद रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो ने फरमाया कि; "अगर किसी शहर के लोग अज़ान देना छोड़ दें, तो मैं उन पर जेहाद करूंगा." हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसउद रदीय्यल्लाहो तआला अन्हों ने फरमाया कि महोल्ले की अज़ान हमें 'किफायत' करती है. मुसाफिर को तर्फे अज़ान की इजाजत है, लैकिन अगर इक़ामत भी तर्क करेगा, तो मकरूह है.' "इक़ामत खड़े होकर सुनना मकरूह है. यहां तक कि ओलोमाए-दीन ने फरमाय है कि अगर इक़ामत हो रही हो और उस वक़्त कोई शख़्स मस्जिद में आया, तो वोह जहां हो वहीं बैठ जाए और जब मुकब्बिर या'नी तकबीर कहनेवाला 'हय्या - अलल-फलाह' पर पहुंचे, उस वक्त सब "मुक्तदीयों के साथ खड़ा हो जाए.' प्रकरण 'इमामत के मसाइल' 'इमामत की दो किस्में हैं. एक. इमामते कुब्रा दो. इमामते सुगुरा 'इमामते-कुब्रा या'नी हुजूरे- अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम की 'नियाबते - मुत्लका' कि हुजूरे अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम की नियाबत की वजह से वोह इमाम मुसलमानों के $ तमाम दीनी और दुन्यवी उमूर में शरीअत के मुताबिक "तसरूफे आम' का इख़्तियार रखे और गैर मासियत बाबतों में उसकी इताअत तमाम जहां के मुसलमानों पर फर्ज है. जैसे कि खोलोफाए-राशेदीन, हज़रत सय्येदुना इमाम हसन, हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ वगैरह और हज़रत इमाम मेहदी रदीय्यल्लाहो तआला अन्हुम.' " इस वक्त हम इमामते कुब्रा के मुतअल्लिक कुछ भी बयान नहीं करते बल्कि इमामते- सुगरा के मुतअल्लिक गुफतगु करते हैं. ' "इमामते-सुगुरा या'नी नमाज़ की इमामत. और नमाज़ की इमामत का मतलब येह है कि दूसरों की नमाज़ों का उसकी नमाज़ से वाबस्ता होना या'नी इमाम अपनी नमाज़ पढ़ने के साथ साथ दूसरे लोगों को भी नमाज़ पढ़ाए. ' 'मर्दों की इमामत करने के लिये इमाम होने के लिये छेः शर्तें हैं. इस्लाम या'नी सुन्नी सहीहुल अकीदा होना, मुर्तद, मुनाफिक और बदमज़हब शख़्स इमाम नहीं हो सकता. बुलूग या'नी बालिग होना. ना - बालिग इमामत नहीं कर सकता. आक़िल होना या'नी उसकी अक्ल सलामत हो, मजनून या पागल शख़्स इमाम बनने की सलाहियत नहीं मर्द होना, औरत मर्दों की इमामत नहीं कर सकती. क़िरअत करने पर कुदरत होना. मा'जूर न होना न हो. "औरतों की इमामत करने के लिये मर्द होना शर्त नहीं. औरत भी औरतों की इमामत कर सकती है, अगरचे उसकी इमामत मकरूह है.' "ना-बालिगों के इमाम के लिये बालिग होना शर्त नहीं. अगर कोई समज़दार ना-बालिग़ तहारत, नमाज़ और इमामत के मसाइल से वाक़फीयत रखता है, तो वोह ना-बालिगों की इमामत कर सकता है.' इमामत के मुतअल्लिक अहादीसे-करीमा "तिब्रानी ने मोअजमे- कबीर में हज़रत मरषद बिन अबी मरषद अल ग़नवी रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत की कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो = मोमिन की नमाज़ तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'अगर तुम्हें अपनी नमाज़ों का क़बूल होना पसन्द हो, तो चाहिये कि तुम्हारे औलोमा तुम्हारी इमामत करें कि वोह तुम्हारे वास्ता और सफीर हैं, तुम्हारे और तुम्हारे रब तबारक व तआला के दरमियान. " 'हाकिम ने 'मुस्तदरक' में रिवायत की कि हुजूरे- अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि 'अगर तुम्हें खुश आए कि खुदा तुम्हारी नमाज़ कुबूल फरमाए, तो चाहिये कि तुम्हारे बेहतर तुम्हारी इमामत करें कि वोह तुम्हारे सफीर हैं, तुम्हारे और तुम्हारे रब के दरमियान." 'इमाम अहमद और इब्ने माजा हज़रत सल्मा बिन्ते अल-हिर रदीय्यल्लाहो तआला अन्हा से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'कयामत की अलामत से है कि एहले -मस्जिद आपस में इमामत को एक दूसरे पर डालेंगे, मगर किसी को इमाम नहीं पायेंगे कि उनको नमाज़ पढ़ा दे.' 'इमाम तिरमीज़ी हज़रत अब उमामा रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया 'कि; 'तीन शख़्सों की नमाज़ कानों से आगे नहीं बढ़ती. भागा हुआ गुलाम यहां तक कि वापस आए. वोह औरत जो इस हालत में रात गुज़ारे कि उसका शौहर उस पर नाराज़ हो. किसी गिरोह का वोह इमाम कि लोग उसकी इमामत से किराहत करते हों.' 'इमाम बुख़ारी और इमाम मुस्लिम वगैरह ने हज़रत अबू हुरैरह रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत की कि हुजूरे - अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; ' जब कोई औरों को नमाज़ पढ़ाए, तो तख़फीफ करे कि उन में बीमार, कमज़ोर और बूढ़ा होता है और जब अपनी पढ़े, तो जिस क़दर चाहे 'तूल' दे.' 'इमाम मालिक हज़रत अनस रदीय्यल्लाहो तआला अन्हो से रावी कि हुजूरे-अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहे वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि; 'जो मुक्तदी इमाम से पहले अपना सर उठाता और झुकाता है, उसकी पैशानी के बाल शैतान के हाथ में हैं.'
मुण्डक २ ख २, मं० ११ (हृदय) में आकाश ( हृदयाकाश) में रहता है । वह मनोमय ( मन प्रधान होकर) इन्द्रियों के शरीर का नेता बनता है । वह अन्न (शरीर) में रहता है, हृदय के बहुत ही निकट, उसके विज्ञान से धीर पुरुप उस अमृत को देखते हैं जो आनन्दरूप (आनन्द से भरा हुआ) प्रतीत होता है ॥ ७ ॥ तव हृदय की ग्रन्थि खुल जाती है, सारे संशय कट जाते हैं, और उस के कर्म्म क्षीण हो जाते हैं जब उसने पर ( बड़े, ज्येष्ठ ब्रह्म, शुद्ध ब्रह्म) और अवर f (छोटे शवल) को देख लिया है ॥ ८ ॥ हिरण्मये परे कोशे विरजं ब्रह्म निष्कलम् । तच्छुभ्रं ज्योतिषां ज्योतिस्तद्यदात्मविदो विदुः ॥ ९ ॥ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमभिः । तमेव भान्त मनुभाति सर्वे तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ।।१०।। ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद् ब्रह्म पश्चाद् ब्रह्म दक्षिणतश्चोत्तरेण । अधश्चोर्ध्वं च प्रसृतं ब्रह्मवेदं विश्वमिदं वरिष्ठम् ॥ ११ ॥ सब से ऊंचे सुनहरी कोश (मियान) में जो बिना धूलि (= अविद्या आदि दोपों) के है, और बिना अवयवों के है । वह शुद्ध है, ज्योतियों का ज्योति है । वह है, जिसको ये जानते हैं, जिन्होंने • आत्मा को जाना है ॥९॥ न वहां सूर्य्य चमकता है; न चन्द्र और 'तारे, न ही ये चिजलियें चमकती हैं, यह अग्नि तो कहाँ ! उसी के 'ही चमकने पर यह सब कुछ चमकता है। उसी की चमक से यह सब चमकता है ॥१०॥ ब्रह्म ही यह अमृत रूप सामने है, ब्रह्म पीछे * परमात्मज्ञान का फल कहते हैं जन्म के हेतु नहीं रहते ॥ + देखो कठ० उप०५ १.१५, श्वेता० उप०६।१४, गीता १५ ६ ॥ : मुण्डके उपनिषद्, है, ब्रह्म दाएं और बाएं है । यह नीचे और ऊपर फैला हुआ है, ब्रह्म ही यह सच कुछ है । यह सब से उत्तम है ॥११॥ • * तीसरा मुण्डक - पहला खण्ड द्धा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते । तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्त्यनश्नन्नन्यो अभिचाकशीति समाने वृक्षे पुरुषो निममोऽनीशया शोचति मुह्यमानः। जुष्टं यदा पश्यत्यन्यमीशमस्य महिमानमिति वीतशोकः ॥ २ ॥ यदा पश्यः पश्यते रुक्मवर्ण कर्तारमीशं पुरुषं ब्रह्मयोनिम् । तदा विद्धान् पुण्यपापे विधूय निरञ्जनः परमं साम्यमुपैति ॥३॥ प्राणो ह्येष यः सर्वभूतैर्विभाति विजानन विद्वान् भवते नातिवादी । आत्मक्रीड आत्मरतिः क्रियावानेष ब्रह्मविदां वरिष्ठ : दो पक्षी जो सदा साथ रहने वाले मित्र हैं, दोनों एक वृक्ष को अलिङ्गन किये हुए हैं। उनमें से एक स्वादु फलको खाता है, दूसरा न खाता हुआ (केवल) देखता (ही) है ॥ १॥ उसी वृक्ष पर * परा विद्या का उपदेश करते हुए यह बतलाया है, कि परमात्मदर्शन का उपाय ओंकार की उपासना है। अब यह वतलाएगे, कि जीवात्मा और परमात्मा एक साथ ही रहते हैं । जोवात्मा शोक में इसलिये हैं, कि वह अपने साथी को नहीं देखता है, जय उसको देखता है, तो शोक उस से परे हट जाता है । जो चाहता है, कि उसके दर्शन करू, उसको सदा सचाई और तप आदि का जीवन विताना चाहिये इत्यादि ॥ ↑ दो पक्षी, जीवात्मा और परमात्मा हैं । वृक्ष शरीर है, जिस पर इन दोनों का घोंसला है । जीवात्मा इस में अपने कर्मों
मुण्डक दो ख दो, मंशून्य ग्यारह में आकाश में रहता है । वह मनोमय इन्द्रियों के शरीर का नेता बनता है । वह अन्न में रहता है, हृदय के बहुत ही निकट, उसके विज्ञान से धीर पुरुप उस अमृत को देखते हैं जो आनन्दरूप प्रतीत होता है ॥ सात ॥ तव हृदय की ग्रन्थि खुल जाती है, सारे संशय कट जाते हैं, और उस के कर्म्म क्षीण हो जाते हैं जब उसने पर और अवर f को देख लिया है ॥ आठ ॥ हिरण्मये परे कोशे विरजं ब्रह्म निष्कलम् । तच्छुभ्रं ज्योतिषां ज्योतिस्तद्यदात्मविदो विदुः ॥ नौ ॥ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमभिः । तमेव भान्त मनुभाति सर्वे तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ।।दस।। ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद् ब्रह्म पश्चाद् ब्रह्म दक्षिणतश्चोत्तरेण । अधश्चोर्ध्वं च प्रसृतं ब्रह्मवेदं विश्वमिदं वरिष्ठम् ॥ ग्यारह ॥ सब से ऊंचे सुनहरी कोश में जो बिना धूलि के है, और बिना अवयवों के है । वह शुद्ध है, ज्योतियों का ज्योति है । वह है, जिसको ये जानते हैं, जिन्होंने • आत्मा को जाना है ॥नौ॥ न वहां सूर्य्य चमकता है; न चन्द्र और 'तारे, न ही ये चिजलियें चमकती हैं, यह अग्नि तो कहाँ ! उसी के 'ही चमकने पर यह सब कुछ चमकता है। उसी की चमक से यह सब चमकता है ॥दस॥ ब्रह्म ही यह अमृत रूप सामने है, ब्रह्म पीछे * परमात्मज्ञान का फल कहते हैं जन्म के हेतु नहीं रहते ॥ + देखो कठशून्य उपपाँच एक.पंद्रह, श्वेताशून्य उपछः।चौदह, गीता पंद्रह छः ॥ : मुण्डके उपनिषद्, है, ब्रह्म दाएं और बाएं है । यह नीचे और ऊपर फैला हुआ है, ब्रह्म ही यह सच कुछ है । यह सब से उत्तम है ॥ग्यारह॥ • * तीसरा मुण्डक - पहला खण्ड द्धा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते । तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्त्यनश्नन्नन्यो अभिचाकशीति समाने वृक्षे पुरुषो निममोऽनीशया शोचति मुह्यमानः। जुष्टं यदा पश्यत्यन्यमीशमस्य महिमानमिति वीतशोकः ॥ दो ॥ यदा पश्यः पश्यते रुक्मवर्ण कर्तारमीशं पुरुषं ब्रह्मयोनिम् । तदा विद्धान् पुण्यपापे विधूय निरञ्जनः परमं साम्यमुपैति ॥तीन॥ प्राणो ह्येष यः सर्वभूतैर्विभाति विजानन विद्वान् भवते नातिवादी । आत्मक्रीड आत्मरतिः क्रियावानेष ब्रह्मविदां वरिष्ठ : दो पक्षी जो सदा साथ रहने वाले मित्र हैं, दोनों एक वृक्ष को अलिङ्गन किये हुए हैं। उनमें से एक स्वादु फलको खाता है, दूसरा न खाता हुआ देखता है ॥ एक॥ उसी वृक्ष पर * परा विद्या का उपदेश करते हुए यह बतलाया है, कि परमात्मदर्शन का उपाय ओंकार की उपासना है। अब यह वतलाएगे, कि जीवात्मा और परमात्मा एक साथ ही रहते हैं । जोवात्मा शोक में इसलिये हैं, कि वह अपने साथी को नहीं देखता है, जय उसको देखता है, तो शोक उस से परे हट जाता है । जो चाहता है, कि उसके दर्शन करू, उसको सदा सचाई और तप आदि का जीवन विताना चाहिये इत्यादि ॥ ↑ दो पक्षी, जीवात्मा और परमात्मा हैं । वृक्ष शरीर है, जिस पर इन दोनों का घोंसला है । जीवात्मा इस में अपने कर्मों
महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 15 नए मामले सामने के बाद राज्य में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 89 हो गई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मुंबई में 14 नए मामले और पुणे में एक नया मामला सामने आया है। कोविड-19 से महाराष्ट्र में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने महाराष्ट्र में तीन और प्रयोगशालाओं को कोविड-19 जांच करने की अनुमति दे दी है। एक मंत्री ने बताया कि अब तक महाराष्ट्र में रोजाना 100 नमूनों की जांच हो पा रही थी लेकिन तीन नई जगहों पर जांच की सुविधा शुरू होने से रोजाना करीब 600 नमूनों की जांच हो सकेगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने कहा कि इनमें से दो प्रयोगशालाएं पुणे जबकि एक मुंबई में है। एक आधिकारिक बयान में देशमुख ने कहा कि अब तक हम रोजाना 100 नमूनों की जांच कर रहे थे। आईसीएमआर ने पुणे के सासून अस्पताल और बीजे मेडिकल कॉलेज के साथ ही मुंबई की हाफकिन संस्था को भी कोविड-19 की जांच की अनुमति दे दी है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में जांच क्षमता 100 नमूनों के मुकाबले बढ़कर 600 तक हो पाएगी। बयान में कहा गया कि राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में भी जांच प्रयोगशालाएं बनाने की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में सीआरपीसी की धारा 144 लागू की है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक है। राज्य में कोविड-19 से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह घोषणा करते हुए कहा कि सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करने के लिए सोमवार से राज्य के शहरी क्षेत्रों में कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन और निजी बस सेवाएं पूरी तरह से बंद रहेंगी। उन्होंने कहा कि किराने का सामान, सब्जी विक्रेता, बैंक और प्रमुख वित्तीय सेवाएं जैसी आवश्यक सेवाएं संचालित होती रहेंगी। ठाकरे ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 'घर से काम करने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने संकेत दिये कि यदि जरूरत हुई तो शहरी क्षेत्रों में लॉकडाउन की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए, मुझे कठिन समय के दौरान लोगों की भागीदारी और सहायता की आवश्यकता है। ठाकरे ने कहा, जिन लोगों को घर पर पृथक रहने की सलाह दी गई है उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के साथ घुलना-मिलना नहीं चाहिए। उन्होंने उद्योगों को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखने के लिए भी कहा। मुख्यमंत्री ने कहा, 'कुछ कंपनियों और कार्यालयों में कामकाज नहीं होगा लेकिन इन प्रतिष्ठानों को मानवीय आधार पर अपने कर्मचारियों को कम से कम मूल वेतन का भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैंने व्यक्तिगत रूप से राज्य कर्मचारियों को भी कम कर दिया है। कुछ दिन पहले, हम 50 प्रतिशत क्षमता पर कार्यालय चला रहे थे। सोमवार से सरकार के केवल पांच फीसदी कर्मचारी काम पर आएंगे। अपने फैसले का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने यह निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि हम एक ऐसे चरण में हैं जहां वायरस के संक्रमण के बढ़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे टालने के लिए कुछ यूरोपीय देशों की तरह महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में पूरी तरह से लॉकडाउन करने का निर्णय लिया है।
महाराष्ट्र में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस संक्रमण के पंद्रह नए मामले सामने के बाद राज्य में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर नवासी हो गई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मुंबई में चौदह नए मामले और पुणे में एक नया मामला सामने आया है। कोविड-उन्नीस से महाराष्ट्र में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने महाराष्ट्र में तीन और प्रयोगशालाओं को कोविड-उन्नीस जांच करने की अनुमति दे दी है। एक मंत्री ने बताया कि अब तक महाराष्ट्र में रोजाना एक सौ नमूनों की जांच हो पा रही थी लेकिन तीन नई जगहों पर जांच की सुविधा शुरू होने से रोजाना करीब छः सौ नमूनों की जांच हो सकेगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने कहा कि इनमें से दो प्रयोगशालाएं पुणे जबकि एक मुंबई में है। एक आधिकारिक बयान में देशमुख ने कहा कि अब तक हम रोजाना एक सौ नमूनों की जांच कर रहे थे। आईसीएमआर ने पुणे के सासून अस्पताल और बीजे मेडिकल कॉलेज के साथ ही मुंबई की हाफकिन संस्था को भी कोविड-उन्नीस की जांच की अनुमति दे दी है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में जांच क्षमता एक सौ नमूनों के मुकाबले बढ़कर छः सौ तक हो पाएगी। बयान में कहा गया कि राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में भी जांच प्रयोगशालाएं बनाने की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में सीआरपीसी की धारा एक सौ चौंतालीस लागू की है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक है। राज्य में कोविड-उन्नीस से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह घोषणा करते हुए कहा कि सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करने के लिए सोमवार से राज्य के शहरी क्षेत्रों में कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन और निजी बस सेवाएं पूरी तरह से बंद रहेंगी। उन्होंने कहा कि किराने का सामान, सब्जी विक्रेता, बैंक और प्रमुख वित्तीय सेवाएं जैसी आवश्यक सेवाएं संचालित होती रहेंगी। ठाकरे ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 'घर से काम करने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने संकेत दिये कि यदि जरूरत हुई तो शहरी क्षेत्रों में लॉकडाउन की अवधि इकतीस मार्च तक बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए, मुझे कठिन समय के दौरान लोगों की भागीदारी और सहायता की आवश्यकता है। ठाकरे ने कहा, जिन लोगों को घर पर पृथक रहने की सलाह दी गई है उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के साथ घुलना-मिलना नहीं चाहिए। उन्होंने उद्योगों को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखने के लिए भी कहा। मुख्यमंत्री ने कहा, 'कुछ कंपनियों और कार्यालयों में कामकाज नहीं होगा लेकिन इन प्रतिष्ठानों को मानवीय आधार पर अपने कर्मचारियों को कम से कम मूल वेतन का भुगतान करना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैंने व्यक्तिगत रूप से राज्य कर्मचारियों को भी कम कर दिया है। कुछ दिन पहले, हम पचास प्रतिशत क्षमता पर कार्यालय चला रहे थे। सोमवार से सरकार के केवल पांच फीसदी कर्मचारी काम पर आएंगे। अपने फैसले का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने यह निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि हम एक ऐसे चरण में हैं जहां वायरस के संक्रमण के बढ़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे टालने के लिए कुछ यूरोपीय देशों की तरह महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में पूरी तरह से लॉकडाउन करने का निर्णय लिया है।
Fathers Day 2023 बॉलीवुड फिल्मों में अमरीश पुरी से लेकर अमिताभ बच्चन तक ने पिता के ऐसे किरदार निभाए हैं जो हमेशा के लिए यादगार बन गए हों। फादर्स डे के मौके पर ऐसे ही कुछ कलाकारों की बात करेंगे जिन्होंने खूबसूरती से पर्दे पर पिता का रोल निभाया है। नई दिल्ली, जेएनएन। Happy Father's Day 2023: आज (18 जून) को पूरे भारत में फादर्स डे (Father's Day) मनाया जा रहा है। पिता को एक मजबूत व्यक्तित्व वाला इंसान माना जाता है, जो अपने परिवार की खुशियों के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। यह वो दिन होता है, जो हमें याद दिलाता है कि पिता द्वारा दिया गया ज्ञान, उनकी स्ट्रिक्टनेस, और उनका गाइडेंस हमे सही रास्ते पर लाने के लिए कितना सही और जरूरी होता है। फादर्स डे को सेलिब्रेट करने के कई बेहतरीन तरीके हो सकते हैं। इस मौके पर पिता के साथ बैठकर कुछ ऐसी फिल्में देखी जा सकती हैं, जिनमें फादर के विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया हो। इस स्पेशल डे पर हम बात करेंगे ऐसे ही कुछ एक्टर्स की, जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से पिता के किरदार को खूबसूरती से पर्दे पर दिखाया हो। 1995 में रिलीज हुई इस फिल्म को आज भी लोग देखना पसंद करते हैं। इस मूवी में अमरीश पुरी ने काजोल के पिता का रोल प्ले किया था, जो कड़क स्वभाव वाले हैं, लेकिन दिल से हिंदुस्तानी हैं। यह फिल्म उनके बिना शायद अधूरी ही रहती। मूवी के अंत में एक डायलॉग है, जिसमें अमरीश पुरी, काजोल से कहते हैं 'जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी। ' अगर अमरीश पुरी का किरदार एक ऐसे पिता का नहीं होता, जो स्ट्रिक्ट है, तो शायद इस डायलॉग का भी कोई मतलब नहीं रह जाता। आलोक नाथ की छवि आदर्श पिता की है। उन्होंने अलग तरह के पिता की भूमिका निभाई है। फिल्म 'हम आपके हैं कौन' और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे पिता की भूमिका निभाई, जो अपने परिवार के प्रति पूरी तरह से समर्पित है। आलोक नाथ ने अधिकतर सरल स्वभाव के पिता वाले रोल किए हैं। फिल्मों के अलावा उन्होंने 'सपना बाबुल का' जैसे कुछ टीवी शो में भी पिता की भूमिका निभाई। ये आलोक नाथ के अभिनय का अंदाज ही है, जिसने उन्हें पिता के रोल में बेशुमार लोकप्रियता दी। अमिताभ बच्चन भी सिल्वर स्क्रीन पर कई बार फादर बन चुके हैं। 'कभी खुशी कभी गम' में यशवर्धन रायचंद की भूमिका हो या 'बाबुल' में बलराज कपूर का रोल हो। अमिताभ ने पिता के रोल में भी अपने अभिनय को बखूबी साबित किया। ऐसी ही उनकी एक फिल्म है 'पीकू'। इसके बिग बी के करियर की बेस्ट फिल्मों में से एक माना जाता है। 2015 में आई इस मूवी में अमिताभ ने भास्कर बनर्जी का रोल अदा किया था, जो पीकू (दीपिका पादुकोण) से इतना प्यार करते हैं कि उसकी शादी तक होने से डरते हैं। फिल्म में दोनों की बॉन्डिंग देखते ही बनती है। आमिर खान ने यूं तो हीरो वाले रोल ही ज्यादा किए हैं। लेकिन 2016 में आई 'दंगल' में उन्होंने दो बेटियों के पिता का रोल प्ले किया था। पर्दे पर आमिर खान ने महावीर सिंह फोगाट की भूमिका अदा की थी, जो अपनी बेटियों (गीता और बबीता) में कुश्ती लड़ने की क्षमता देखता है, तो उन्हें पहलवान बनाकर देश के लिए गोल्ड मेडल लाने के लिए ट्रेनिंग देता है। लोगों के बीच 'कालीन भइया' के नाम से चर्चित पंकज त्रिपाठी ने लगभग हर तरह के किरदार निभाए हैं। निगेटिव से लेकर कॉमेडी तक के रोल में पंकज त्रिपाठी बखूबी जमे हैं। इसके अलावा उन्हें फिल्म 'गुंजन सक्सेना- द कार्गिल गर्ल' में जाहन्वी कपूर के पिता (अनूप सक्सेना) की भूमिका में देखा गया था। पंकज त्रिपाठी का यह किरदार एक ऐसे पिता का था, जो अपनी बेटी को शादी के लिए घर गृहस्थी संभालने की नसीहत न देते हुए उसके सपनों को पूरा करने में मदद करता है। 'गुंजन सक्सेना' उस लड़की की कहानी है, जो कॉकपिट के जीवन से आकर्षित होने के बाद पायलट बनने का सपना देखती है। खूब मेहनत कर वह इस सपना को पूरा करती है और कारगिल युद्ध में अपने देश की सेवा करती है।
Fathers Day दो हज़ार तेईस बॉलीवुड फिल्मों में अमरीश पुरी से लेकर अमिताभ बच्चन तक ने पिता के ऐसे किरदार निभाए हैं जो हमेशा के लिए यादगार बन गए हों। फादर्स डे के मौके पर ऐसे ही कुछ कलाकारों की बात करेंगे जिन्होंने खूबसूरती से पर्दे पर पिता का रोल निभाया है। नई दिल्ली, जेएनएन। Happy Father's Day दो हज़ार तेईस: आज को पूरे भारत में फादर्स डे मनाया जा रहा है। पिता को एक मजबूत व्यक्तित्व वाला इंसान माना जाता है, जो अपने परिवार की खुशियों के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। यह वो दिन होता है, जो हमें याद दिलाता है कि पिता द्वारा दिया गया ज्ञान, उनकी स्ट्रिक्टनेस, और उनका गाइडेंस हमे सही रास्ते पर लाने के लिए कितना सही और जरूरी होता है। फादर्स डे को सेलिब्रेट करने के कई बेहतरीन तरीके हो सकते हैं। इस मौके पर पिता के साथ बैठकर कुछ ऐसी फिल्में देखी जा सकती हैं, जिनमें फादर के विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया हो। इस स्पेशल डे पर हम बात करेंगे ऐसे ही कुछ एक्टर्स की, जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से पिता के किरदार को खूबसूरती से पर्दे पर दिखाया हो। एक हज़ार नौ सौ पचानवे में रिलीज हुई इस फिल्म को आज भी लोग देखना पसंद करते हैं। इस मूवी में अमरीश पुरी ने काजोल के पिता का रोल प्ले किया था, जो कड़क स्वभाव वाले हैं, लेकिन दिल से हिंदुस्तानी हैं। यह फिल्म उनके बिना शायद अधूरी ही रहती। मूवी के अंत में एक डायलॉग है, जिसमें अमरीश पुरी, काजोल से कहते हैं 'जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी। ' अगर अमरीश पुरी का किरदार एक ऐसे पिता का नहीं होता, जो स्ट्रिक्ट है, तो शायद इस डायलॉग का भी कोई मतलब नहीं रह जाता। आलोक नाथ की छवि आदर्श पिता की है। उन्होंने अलग तरह के पिता की भूमिका निभाई है। फिल्म 'हम आपके हैं कौन' और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे पिता की भूमिका निभाई, जो अपने परिवार के प्रति पूरी तरह से समर्पित है। आलोक नाथ ने अधिकतर सरल स्वभाव के पिता वाले रोल किए हैं। फिल्मों के अलावा उन्होंने 'सपना बाबुल का' जैसे कुछ टीवी शो में भी पिता की भूमिका निभाई। ये आलोक नाथ के अभिनय का अंदाज ही है, जिसने उन्हें पिता के रोल में बेशुमार लोकप्रियता दी। अमिताभ बच्चन भी सिल्वर स्क्रीन पर कई बार फादर बन चुके हैं। 'कभी खुशी कभी गम' में यशवर्धन रायचंद की भूमिका हो या 'बाबुल' में बलराज कपूर का रोल हो। अमिताभ ने पिता के रोल में भी अपने अभिनय को बखूबी साबित किया। ऐसी ही उनकी एक फिल्म है 'पीकू'। इसके बिग बी के करियर की बेस्ट फिल्मों में से एक माना जाता है। दो हज़ार पंद्रह में आई इस मूवी में अमिताभ ने भास्कर बनर्जी का रोल अदा किया था, जो पीकू से इतना प्यार करते हैं कि उसकी शादी तक होने से डरते हैं। फिल्म में दोनों की बॉन्डिंग देखते ही बनती है। आमिर खान ने यूं तो हीरो वाले रोल ही ज्यादा किए हैं। लेकिन दो हज़ार सोलह में आई 'दंगल' में उन्होंने दो बेटियों के पिता का रोल प्ले किया था। पर्दे पर आमिर खान ने महावीर सिंह फोगाट की भूमिका अदा की थी, जो अपनी बेटियों में कुश्ती लड़ने की क्षमता देखता है, तो उन्हें पहलवान बनाकर देश के लिए गोल्ड मेडल लाने के लिए ट्रेनिंग देता है। लोगों के बीच 'कालीन भइया' के नाम से चर्चित पंकज त्रिपाठी ने लगभग हर तरह के किरदार निभाए हैं। निगेटिव से लेकर कॉमेडी तक के रोल में पंकज त्रिपाठी बखूबी जमे हैं। इसके अलावा उन्हें फिल्म 'गुंजन सक्सेना- द कार्गिल गर्ल' में जाहन्वी कपूर के पिता की भूमिका में देखा गया था। पंकज त्रिपाठी का यह किरदार एक ऐसे पिता का था, जो अपनी बेटी को शादी के लिए घर गृहस्थी संभालने की नसीहत न देते हुए उसके सपनों को पूरा करने में मदद करता है। 'गुंजन सक्सेना' उस लड़की की कहानी है, जो कॉकपिट के जीवन से आकर्षित होने के बाद पायलट बनने का सपना देखती है। खूब मेहनत कर वह इस सपना को पूरा करती है और कारगिल युद्ध में अपने देश की सेवा करती है।
सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की मदद से यूजर्स आपात स्थितियों में इमरजेंसी सर्विस जैसे एंबुलेंस या पुलिस से बिना वाई-फाई या नेटवर्क भी संपर्क कर सकते हैं। इस सर्विस के तहत यूजर्स अपनी लोकेशन दोस्तों और परिवार के साथ शेयर भी कर सकते हैं। Apple ने अपनी SOS इमरजेंसी सैटेलाइट सर्विस को छह नए देशों के लिए जारी करने की घोषणा की है। सैटेलाइट SOS सर्विस के तहत यूजर्स नेटवर्क ना होने की स्थिति में इमरजेंसी सेवाओं के लिए संपर्क कर सकते हैं। इस फीचर की मदद से यूजर्स सिर्फ मैसेज ही नहीं भेज सकेंगे बल्कि कॉल भी कर सकेंगे। इमरजेंसी SOS सैटेलाइट सर्विस iPhone 14 और iPhone 14 Pro मॉडल में है। इसके लिए iOS 16. 1 का इससे बाद के ओएस का होना जरूरी है। एपल ने SOS सैटेलाइट फीचर को सबसे पहले अमेरिका और कनाडा के लिए जारी किया था। उसके बाद इसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और आयरलैंड के लिए जारी किया गया और अब इसे ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, इटली, लक्समबर्ग, नीदरलैंड और पुर्तगाल के लिए जारी किया गया है। नए अपडेट के साथ ही कंपनी iPhone 14 और iPhone 14 Plus को नए येल्लो कलर में पेश किया है। सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की मदद से यूजर्स आपात स्थितियों में इमरजेंसी सर्विस जैसे एंबुलेंस या पुलिस से बिना वाई-फाई या नेटवर्क भी संपर्क कर सकते हैं। इस सर्विस के तहत यूजर्स अपनी लोकेशन दोस्तों और परिवार के साथ शेयर भी कर सकते हैं। सैटेलाइट इमरजेंसी SOS सर्विस फोन और सैटेलाइट के बीच एक कनेक्शन स्थापित करता है और सैटेलाइट सिग्नल को सर्च करता है। इस सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले एपल ने कहा है कि आईफोन में अपनी मेडिकल आईडी, इमरजेंसी कॉन्टेक्ट नंबर आदि को सेव कर लें। सैटेलाइट इमरजेंसी SOS इस्तेमाल के लिए एपल ने iPhone को पॉकेट में रखने से मना किया है। इससे सैटेलाइट से कनेक्ट होने में परेशानी हो सकती है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ-साथ यूजर्स को क्रैश डिटेक्शन फीचर भी मिलता है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की मदद से यूजर्स आपात स्थितियों में इमरजेंसी सर्विस जैसे एंबुलेंस या पुलिस से बिना वाई-फाई या नेटवर्क भी संपर्क कर सकते हैं। इस सर्विस के तहत यूजर्स अपनी लोकेशन दोस्तों और परिवार के साथ शेयर भी कर सकते हैं। Apple ने अपनी SOS इमरजेंसी सैटेलाइट सर्विस को छह नए देशों के लिए जारी करने की घोषणा की है। सैटेलाइट SOS सर्विस के तहत यूजर्स नेटवर्क ना होने की स्थिति में इमरजेंसी सेवाओं के लिए संपर्क कर सकते हैं। इस फीचर की मदद से यूजर्स सिर्फ मैसेज ही नहीं भेज सकेंगे बल्कि कॉल भी कर सकेंगे। इमरजेंसी SOS सैटेलाइट सर्विस iPhone चौदह और iPhone चौदह Pro मॉडल में है। इसके लिए iOS सोलह. एक का इससे बाद के ओएस का होना जरूरी है। एपल ने SOS सैटेलाइट फीचर को सबसे पहले अमेरिका और कनाडा के लिए जारी किया था। उसके बाद इसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और आयरलैंड के लिए जारी किया गया और अब इसे ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, इटली, लक्समबर्ग, नीदरलैंड और पुर्तगाल के लिए जारी किया गया है। नए अपडेट के साथ ही कंपनी iPhone चौदह और iPhone चौदह Plus को नए येल्लो कलर में पेश किया है। सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की मदद से यूजर्स आपात स्थितियों में इमरजेंसी सर्विस जैसे एंबुलेंस या पुलिस से बिना वाई-फाई या नेटवर्क भी संपर्क कर सकते हैं। इस सर्विस के तहत यूजर्स अपनी लोकेशन दोस्तों और परिवार के साथ शेयर भी कर सकते हैं। सैटेलाइट इमरजेंसी SOS सर्विस फोन और सैटेलाइट के बीच एक कनेक्शन स्थापित करता है और सैटेलाइट सिग्नल को सर्च करता है। इस सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले एपल ने कहा है कि आईफोन में अपनी मेडिकल आईडी, इमरजेंसी कॉन्टेक्ट नंबर आदि को सेव कर लें। सैटेलाइट इमरजेंसी SOS इस्तेमाल के लिए एपल ने iPhone को पॉकेट में रखने से मना किया है। इससे सैटेलाइट से कनेक्ट होने में परेशानी हो सकती है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ-साथ यूजर्स को क्रैश डिटेक्शन फीचर भी मिलता है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मुंबई. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की यादगार फिल्म सूर्यवंशम (Sooryavansham) को रिलीज हुए 21 साल हो चुके हैं। सूर्यवंशम की गिनती यूं तो फ्लॉप फिल्मों में की जाती है लेकिन अमिताभ के करियर में इस फिल्म को हिट माना जाता है। ये एक ऐसी फिल्म जिसने बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन किया लेकिन शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने इस फिल्म को नहीं देखा हो। टीवी पर ये अब तक की सबसे ज्यादा दिखाई जाने वाली फिल्म बन चुकी है। फिल्म में अमिताभ का डबल रोल था और उनकी पत्नी का किरदार साउथ एक्ट्रेस सौंद्रर्या (Soundarya) और जया सुधा (Jayasudha) ने निभाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म से रेखा (Rekha) का संबंध भी है। आपको बता दें कि फिल्म में अमिताभ में पत्नी का किरदार निभाने वाली दोनों एक्ट्रेस यानी सौंदर्या और जया सुधा को रेखा ने अपनी आवाज दी थी। हो सकता है कि यह बात किसी ने नोटिस नहीं की हो। यह फिल्म टीवी पर इतनी बार आ चुकी है कि अब तो लोगों को इसके किरदारों के नाम मसलन हीरा ठाकुर, राधा, गौरी, भानुप्रताप और मेजर रंजीत लोगों की जुबान पर रहते हैं। हालांकि आज भी कई लोग ये बात नहीं जानते कि यह फिल्म बार-बार टीवी पर क्यों दिखाई जाती है। टीवी पर सूर्यवंशम के बार-बार दिखाए जाने की जो वजह सामने आई वो ये है कि यह फिल्म 21 मई 1999 को रिलीज हुई थी और उसी साल सोनी टीवी के मैक्स चैनल को लॉन्च किया गया था। मतलब फिल्म और चैनल दोनों सेम ईयर में ही आए थे। इसे दिखाने की एक वजह ये भी सामने आई थी कि जिस चैनल पर यह फिल्म आती है उसने इसके 100 साल के राइट्स खरीद रखे हैं। इसी वजह से यह फिल्म बार-बार दिखाई जाती है। बता दें कि फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डबल रोल किया था। सूर्यवंशम इंडियन मूवी चैनल पर सबसे ज्यादा टेलीकास्ट होने वाली फिल्म है। इस फिल्म को ग्रामीण इलाकों में भी काफी पसंद किया जाता है। फिल्म के 18 साल पूरे होने के मौके पर अमिताभ बच्चन ने खुद ट्वीट कर फिल्म की तारीफ की थी। फिल्म की लीड एक्ट्रेस सौंदर्या रघु (राधा) अब इस दुनिया में नहीं हैं। 17 अप्रैल, 2004 को बेंगलुरु के पास एक प्लेन क्रैश हादसे में सौंदर्या की मौत हो गई थी। सौंदर्या ने 1992 में फिल्म 'गंधर्वा' से इंडस्ट्री में कदम रखा था। सौंदर्या ने कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम को मिलाकर 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। सौंदर्या को 6 साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके थे। हालांकि साउथ में एक्टिव रहीं सौंदर्या की 'सूर्यवंशम' पहली और आखिरी बॉलीवुड फिल्म थी। शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म में पहले अमिताभ और अभिषेक बच्चन को बाप-बेटे की जोड़ी के रूप में लिया जाना था। हालांकि बाद में अमिताभ ने ही डबल रोल किया। सूर्यवंशम का बजट उस दौर में 7 करोड़ रुपए था, जबकि फिल्म ने करीब 13 करोड़ रुपए की कमाई की थी।
मुंबई. अमिताभ बच्चन की यादगार फिल्म सूर्यवंशम को रिलीज हुए इक्कीस साल हो चुके हैं। सूर्यवंशम की गिनती यूं तो फ्लॉप फिल्मों में की जाती है लेकिन अमिताभ के करियर में इस फिल्म को हिट माना जाता है। ये एक ऐसी फिल्म जिसने बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन किया लेकिन शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने इस फिल्म को नहीं देखा हो। टीवी पर ये अब तक की सबसे ज्यादा दिखाई जाने वाली फिल्म बन चुकी है। फिल्म में अमिताभ का डबल रोल था और उनकी पत्नी का किरदार साउथ एक्ट्रेस सौंद्रर्या और जया सुधा ने निभाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म से रेखा का संबंध भी है। आपको बता दें कि फिल्म में अमिताभ में पत्नी का किरदार निभाने वाली दोनों एक्ट्रेस यानी सौंदर्या और जया सुधा को रेखा ने अपनी आवाज दी थी। हो सकता है कि यह बात किसी ने नोटिस नहीं की हो। यह फिल्म टीवी पर इतनी बार आ चुकी है कि अब तो लोगों को इसके किरदारों के नाम मसलन हीरा ठाकुर, राधा, गौरी, भानुप्रताप और मेजर रंजीत लोगों की जुबान पर रहते हैं। हालांकि आज भी कई लोग ये बात नहीं जानते कि यह फिल्म बार-बार टीवी पर क्यों दिखाई जाती है। टीवी पर सूर्यवंशम के बार-बार दिखाए जाने की जो वजह सामने आई वो ये है कि यह फिल्म इक्कीस मई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को रिलीज हुई थी और उसी साल सोनी टीवी के मैक्स चैनल को लॉन्च किया गया था। मतलब फिल्म और चैनल दोनों सेम ईयर में ही आए थे। इसे दिखाने की एक वजह ये भी सामने आई थी कि जिस चैनल पर यह फिल्म आती है उसने इसके एक सौ साल के राइट्स खरीद रखे हैं। इसी वजह से यह फिल्म बार-बार दिखाई जाती है। बता दें कि फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डबल रोल किया था। सूर्यवंशम इंडियन मूवी चैनल पर सबसे ज्यादा टेलीकास्ट होने वाली फिल्म है। इस फिल्म को ग्रामीण इलाकों में भी काफी पसंद किया जाता है। फिल्म के अट्ठारह साल पूरे होने के मौके पर अमिताभ बच्चन ने खुद ट्वीट कर फिल्म की तारीफ की थी। फिल्म की लीड एक्ट्रेस सौंदर्या रघु अब इस दुनिया में नहीं हैं। सत्रह अप्रैल, दो हज़ार चार को बेंगलुरु के पास एक प्लेन क्रैश हादसे में सौंदर्या की मौत हो गई थी। सौंदर्या ने एक हज़ार नौ सौ बानवे में फिल्म 'गंधर्वा' से इंडस्ट्री में कदम रखा था। सौंदर्या ने कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम को मिलाकर एक सौ से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। सौंदर्या को छः साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके थे। हालांकि साउथ में एक्टिव रहीं सौंदर्या की 'सूर्यवंशम' पहली और आखिरी बॉलीवुड फिल्म थी। शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म में पहले अमिताभ और अभिषेक बच्चन को बाप-बेटे की जोड़ी के रूप में लिया जाना था। हालांकि बाद में अमिताभ ने ही डबल रोल किया। सूर्यवंशम का बजट उस दौर में सात करोड़ रुपए था, जबकि फिल्म ने करीब तेरह करोड़ रुपए की कमाई की थी।
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार के बाद अब जनपद की रिजर्व पुलिस लाइन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट मानकों के आधार पर ख्याति मिली है। बेहतर प्रबंधन, प्रशिक्षण, सेवाओं व सुविधाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ;आईएसओद्ध ने रिजर्व पुलिस लाइन को आईएसओ-9001 सर्टिफिकेट प्रदान किया है। इससे पुलिस विभाग में हर्ष और उल्लास का माहौल है। पुलिस अफसरों ने इस उपलब्धि के लिए सीओ लाइन और प्रतिसार निरीक्षक के प्रयासों को भी सराहा। रिजर्व पुलिस लाइन के सभागार में शुक्रवार को आयोजित मीटिंग के दौरान एसपी क्राइम प्रशांत कुमार प्रसाद और एएसपी सीओ सिटी आयुष विक्रम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन द्वारा मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन को आईएसओ-9001-2015 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है, जिससे मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन आईएसओ प्रमाणित पुलिस लाइन बन गई है। इससे पहले आईएसओ की टीम द्वारा जनपदीय पुलिस लाइन का बेहद बारीकी से निरीक्षण करने के बाद यह पाया कि संगठन के मानकों पर रिजर्व पुलिस लाइन पूरी तरह से खरी उतरती है जिस आधार पर टीम ने पुलिस लाइन को प्रमाणित किया है। उन्होंने बताया कि हाॅक आई सर्टिफिकेशन द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन मुजफ्फरनगर को आईएसओ 9001-2015 प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया गया है। आईएसओ का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में स्थित है। यह संगठन विभिन्न मानकों के अनुरूप किसी निकाय की विशिष्ट विशेषताओं का आंकलन करती है। उन्होंने बताया कि जनपदीय पुलिस लाइन को बेहतर प्रबंधन, प्रशिक्षण, सेवाएं व सुविधाओं के लिए यह आईएसओ प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में जिला प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित है, जिसमें समय-समय पर विवेचकों व पुलिसकर्मियों को साइबर, सर्विलांस, महिला सम्बन्धी अपराधों व अन्य विषयों की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे उनकी दक्षता व कार्यकुशलता बेहतर हो सके। इसके साथ ही पुलिस लाइन में शारीरिक फिटनेस के लिए जिम, पौष्टिक भोजन के लिए कैफे, पुलिसकर्मियों के रहने के लिए साफ, सुंदर व मूलभूत सुविधाओं युक्त आदर्श बैरक, लाइब्रेरी, केन्टीन, बारबर शाॅप, फैमिली पार्क, बच्चों के लिए किडस जोन आदि सुविधाएं मौजूद हैं। पुलिसकर्मियों व उनके परिवारजन को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जनपदवासियों को समय-समय पर साइबर अपराधों से बचाव, ट्रैफिक नियमों की जानकारी, अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव हेतु जागरुक करने के लिए यहां पर अनेक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण का आयोजन भी किया जाता है।
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार के बाद अब जनपद की रिजर्व पुलिस लाइन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट मानकों के आधार पर ख्याति मिली है। बेहतर प्रबंधन, प्रशिक्षण, सेवाओं व सुविधाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ;आईएसओद्ध ने रिजर्व पुलिस लाइन को आईएसओ-नौ हज़ार एक सर्टिफिकेट प्रदान किया है। इससे पुलिस विभाग में हर्ष और उल्लास का माहौल है। पुलिस अफसरों ने इस उपलब्धि के लिए सीओ लाइन और प्रतिसार निरीक्षक के प्रयासों को भी सराहा। रिजर्व पुलिस लाइन के सभागार में शुक्रवार को आयोजित मीटिंग के दौरान एसपी क्राइम प्रशांत कुमार प्रसाद और एएसपी सीओ सिटी आयुष विक्रम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन द्वारा मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन को आईएसओ-नौ हज़ार एक-दो हज़ार पंद्रह सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है, जिससे मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन आईएसओ प्रमाणित पुलिस लाइन बन गई है। इससे पहले आईएसओ की टीम द्वारा जनपदीय पुलिस लाइन का बेहद बारीकी से निरीक्षण करने के बाद यह पाया कि संगठन के मानकों पर रिजर्व पुलिस लाइन पूरी तरह से खरी उतरती है जिस आधार पर टीम ने पुलिस लाइन को प्रमाणित किया है। उन्होंने बताया कि हाॅक आई सर्टिफिकेशन द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन मुजफ्फरनगर को आईएसओ नौ हज़ार एक-दो हज़ार पंद्रह प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया गया है। आईएसओ का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में स्थित है। यह संगठन विभिन्न मानकों के अनुरूप किसी निकाय की विशिष्ट विशेषताओं का आंकलन करती है। उन्होंने बताया कि जनपदीय पुलिस लाइन को बेहतर प्रबंधन, प्रशिक्षण, सेवाएं व सुविधाओं के लिए यह आईएसओ प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में जिला प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित है, जिसमें समय-समय पर विवेचकों व पुलिसकर्मियों को साइबर, सर्विलांस, महिला सम्बन्धी अपराधों व अन्य विषयों की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे उनकी दक्षता व कार्यकुशलता बेहतर हो सके। इसके साथ ही पुलिस लाइन में शारीरिक फिटनेस के लिए जिम, पौष्टिक भोजन के लिए कैफे, पुलिसकर्मियों के रहने के लिए साफ, सुंदर व मूलभूत सुविधाओं युक्त आदर्श बैरक, लाइब्रेरी, केन्टीन, बारबर शाॅप, फैमिली पार्क, बच्चों के लिए किडस जोन आदि सुविधाएं मौजूद हैं। पुलिसकर्मियों व उनके परिवारजन को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जनपदवासियों को समय-समय पर साइबर अपराधों से बचाव, ट्रैफिक नियमों की जानकारी, अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव हेतु जागरुक करने के लिए यहां पर अनेक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण का आयोजन भी किया जाता है।
kaudu. I am ƏMANNA VEST KAAPEL लुनती इत्यादि । प्रजादि सर्वनामस्थान विभक्ति-लुनते, लुनतः, लुनतोः, लुन॒ति । 'अनुम् ग्रहण इसलिये है कितुदन्ती, नुदन्ती इत्यादि में नदी उदात्त न हो । 'नद्यजादि' ग्रहण इसलिए है कि - तुदद्भ्यम्, तुदद्भिः यहां विभक्ति उदात्त न हो ॥ ३८ ॥ ३६ - वा० - नद्यजाद्युदात्तत्वे बृहन्महतोरुपसंख्यानम् ॥ जो वृहत् और महत् शब्द से परे नदी और प्रजादि असर्वनामस्थान विभक्ति है, वह उदात्त हो । जैसे - बृहती, महती, बृहता बृहते, महता, मह॒ते इत्यादि । पृषत् आदि शब्दों को शतृ प्रत्ययान्त के सब कार्य होते हैं, फिर इस वात्तिक के कहने का प्रयोजन यह है कि पृषत् आदि सब शब्दों से परे नदी और दिविभक्ति उदात्त न हो किन्तु बृहत् और महत् से ही हो ।। ३६ ।। ४० - उदात्तयणो हत्पूर्वात् ॥ ० ६ । १ । १७४ ।। हल वर्ण जिसके पूर्व हो ऐसा जो उदात्त के स्थान में यण्, उससे परे जो नदीसंज्ञक प्रत्यय और प्रजादि असर्वनामस्थान विभक्ति सो उदात्त हो । जैसे नदी - कुर्त्री, हुर्त्री, पक्त्री, लवित्री, प्रसवित्री इत्यादि । यहां सर्वत्र तृच् अन्तोदात्त के स्थान में यण् हुआ है । प्रजादि सर्वनामस्थान विभक्ति- कर्जा, कर्त्रे, कर्त्री, लवित्रा, लवित्रे, लवित्रोः इत्यादि । यहां 'उदात्त' १ वर्तमाने पृषद्बृहन्महज्जगच्छतृवच्च ।। [ उ० २ १८४ । सूत्रविहित पृषत् बृहत् महत् जगत् चार शब्द ।। ग्रहण इसलिये है कि - कर्त्री, छत्री, कर्त्री, छत्री यहां तृन्नन्त शब्दों के आधुदात्त होने से अनुदात्त के स्थान में यण् हुआ है । यहां 'हल्पूर्व' ग्रहण इसलिये है कि बहुतितव, बहुति॒ितवे॑ यहां उदात्त के स्थान में बहुतितउ शब्द के उकार को यण् तो हुआ है परन्तु वह उदात्त केवल अच् था, [र्थात् उससे पूर्व कोई हल न था ] फिर विभक्ति को उदात्त का निषेध होके आष्टमिक [ ८ । २ । ४ ] सूत्र से स्वरित होता है ॥ ४० ॥ ४१ - वा० - नकारग्रहणं च कर्त्तव्यम् ।। जो नकारान्त से परे नदीसंज्ञक प्रत्यय हो वह उदात्त हो । [ जैसे - ] वाकूपत्नी, चित्पत्नी ॥ ४१ ।। ४२ - ह्रस्वनुभ्यां मतुप् ॥ ० ६ । १ । १७६ ।। जो ह्रस्वान्त अन्तोदात्त प्रातिपदिक और नु का आगम इन से परे जो मतुप् प्रत्यय हो तो वह उदात्त हो । पित् प्रत्यय के अनुदात्त होने का यह अपवाद है। [जैसे - ] ह्रस्व - अग्निमान्, वायुमान, भानुमान, कर्तमान् इत्यादि । नुट् अ॒ह्म॒ण्वतो, शीर्षण्वतः मूर्धन्वतो॑ ॥ ४२ ॥ ४३ वा० - मतुबुदात्तत्वे रेग्रहणम् ।। [ अ० ६ । १ । १७६ ] रे शब्द से परे जो मतुप् हो तो वह भी उदात्त हो । [ जैसे --- ] आ रे॒वाने॑ तु नो विशः । यहां रेवान् शब्द में ह्रस्व के नहीं होने से प्राप्त नहीं था ॥ ४३ ।। ४४ - वा० - त्रिप्रतिषेधश्च ।। । ० ६ । १ । १७६ ]
kaudu. I am ƏMANNA VEST KAAPEL लुनती इत्यादि । प्रजादि सर्वनामस्थान विभक्ति-लुनते, लुनतः, लुनतोः, लुन॒ति । 'अनुम् ग्रहण इसलिये है कितुदन्ती, नुदन्ती इत्यादि में नदी उदात्त न हो । 'नद्यजादि' ग्रहण इसलिए है कि - तुदद्भ्यम्, तुदद्भिः यहां विभक्ति उदात्त न हो ॥ अड़तीस ॥ छत्तीस - वाशून्य - नद्यजाद्युदात्तत्वे बृहन्महतोरुपसंख्यानम् ॥ जो वृहत् और महत् शब्द से परे नदी और प्रजादि असर्वनामस्थान विभक्ति है, वह उदात्त हो । जैसे - बृहती, महती, बृहता बृहते, महता, मह॒ते इत्यादि । पृषत् आदि शब्दों को शतृ प्रत्ययान्त के सब कार्य होते हैं, फिर इस वात्तिक के कहने का प्रयोजन यह है कि पृषत् आदि सब शब्दों से परे नदी और दिविभक्ति उदात्त न हो किन्तु बृहत् और महत् से ही हो ।। छत्तीस ।। चालीस - उदात्तयणो हत्पूर्वात् ॥ शून्य छः । एक । एक सौ चौहत्तर ।। हल वर्ण जिसके पूर्व हो ऐसा जो उदात्त के स्थान में यण्, उससे परे जो नदीसंज्ञक प्रत्यय और प्रजादि असर्वनामस्थान विभक्ति सो उदात्त हो । जैसे नदी - कुर्त्री, हुर्त्री, पक्त्री, लवित्री, प्रसवित्री इत्यादि । यहां सर्वत्र तृच् अन्तोदात्त के स्थान में यण् हुआ है । प्रजादि सर्वनामस्थान विभक्ति- कर्जा, कर्त्रे, कर्त्री, लवित्रा, लवित्रे, लवित्रोः इत्यादि । यहां 'उदात्त' एक वर्तमाने पृषद्बृहन्महज्जगच्छतृवच्च ।। [ उशून्य दो एक सौ चौरासी । सूत्रविहित पृषत् बृहत् महत् जगत् चार शब्द ।। ग्रहण इसलिये है कि - कर्त्री, छत्री, कर्त्री, छत्री यहां तृन्नन्त शब्दों के आधुदात्त होने से अनुदात्त के स्थान में यण् हुआ है । यहां 'हल्पूर्व' ग्रहण इसलिये है कि बहुतितव, बहुति॒ितवे॑ यहां उदात्त के स्थान में बहुतितउ शब्द के उकार को यण् तो हुआ है परन्तु वह उदात्त केवल अच् था, [र्थात् उससे पूर्व कोई हल न था ] फिर विभक्ति को उदात्त का निषेध होके आष्टमिक [ आठ । दो । चार ] सूत्र से स्वरित होता है ॥ चालीस ॥ इकतालीस - वाशून्य - नकारग्रहणं च कर्त्तव्यम् ।। जो नकारान्त से परे नदीसंज्ञक प्रत्यय हो वह उदात्त हो । [ जैसे - ] वाकूपत्नी, चित्पत्नी ॥ इकतालीस ।। बयालीस - ह्रस्वनुभ्यां मतुप् ॥ शून्य छः । एक । एक सौ छिहत्तर ।। जो ह्रस्वान्त अन्तोदात्त प्रातिपदिक और नु का आगम इन से परे जो मतुप् प्रत्यय हो तो वह उदात्त हो । पित् प्रत्यय के अनुदात्त होने का यह अपवाद है। [जैसे - ] ह्रस्व - अग्निमान्, वायुमान, भानुमान, कर्तमान् इत्यादि । नुट् अ॒ह्म॒ण्वतो, शीर्षण्वतः मूर्धन्वतो॑ ॥ बयालीस ॥ तैंतालीस वाशून्य - मतुबुदात्तत्वे रेग्रहणम् ।। [ अशून्य छः । एक । एक सौ छिहत्तर ] रे शब्द से परे जो मतुप् हो तो वह भी उदात्त हो । [ जैसे --- ] आ रे॒वाने॑ तु नो विशः । यहां रेवान् शब्द में ह्रस्व के नहीं होने से प्राप्त नहीं था ॥ तैंतालीस ।। चौंतालीस - वाशून्य - त्रिप्रतिषेधश्च ।। । शून्य छः । एक । एक सौ छिहत्तर ]
ट्वीट छोड़ने से पहले अनुराग ने लिखा था- इस नए भारत के लिए आप सभी को बधाई मुझे उम्मीद है कि आप आगे बढ़ेंगे। ये मेरा आखिरी ट्वीट हो सकता है क्योंकि मैं ट्विटर छोड़ रहा हूं। अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। हमेशा हर मुद्दे पर वह अपने विचार खुलकर सोशल मीडिया पर रखते हैं। मगर हाल ही में कुछ ऐसा हुआ है कि अनुराग ने अपने ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया है। शनिवार को अनुराग ने अपने ट्विटर को डिलीट किया है। जिसके बाद से लगातार उनके इस एक्ट पर लोग कमेंट कर रहे हैं। अनुराग के ट्विटर से जाने के बाद फिल्म मेकर अशोक पंडित ने इसपर कमेंट किया। ट्वीट करके सबसे पहले उन्होंने अनुराग के इस एक्ट को नौटंकी बताया। इसके बाद अशोक पंडित ने लिखा , 'अनुराग इससे पहले भी ट्विटर छोड़ चुके हैं। जब उनकी फिल्म Bombay Velvet एक डिजास्टर हुई तब उन्होंने ऐसा ही कुछ किया था। निश्चित रूप से अपनी अगली रिलीज से पहले वह वापस आ जाएंगे। ' This is how #UrbanNaxals remain in news. वहीं अनुराग के इस एक्टर पर बोलते हुए फिल्म मेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा, 'ये बिल्कुल गलत है। जब मुझे असॉल्ट किया गया था तब तुम मन ही मन इसकी खुशियां मना रहे थे। अब तुम अपनी विक्टिम बनने का नाटक करे हो। ऐसा कोई भी सेलेब्स नहीं है जिसे ट्रोल ना किया गया हो या धमकी ना मिली हो। आओ मेरा मैसेज देख तुम्हें तसल्ली होगी। पीछे हटने वाले कभी जीतते नहीं और जीतने वाले कभी पीछे नहीं हटते। ' There is no celeb who is not trolled/threatened. Come and check my DM, you will feel better. झूठी चिट्ठियाँ लिखोगे तो लोग ऊँगली उठाएँगे ही। और मैदान छोड़ के भागना था तो झूठी चिट्ठी लिखी ही क्यों? क्या हुआ, अब Minority के लिए सारी हमदर्दी उड़न छू? ऐसे आएगा क्या Revolution? वहीं दूसा ट्वीट करके विवेक ने लिखा, 'Comrade, जब अपनी बात पे लड़ने की हिम्मत ही नहीं तो फिर पॉलिटिक्स पे बेवजह बोलते ही क्यों हो। झूठी चिट्ठियां लिखोगे तो लोग ऊंगली उठाएंगे ही। और मैदान छोड़ के भागना था तो झूठी चिट्ठी लिखी ही क्यों? क्या हुआ, अब Minority के लिए सारी हमदर्दी उड़न छू? ऐसे आएगा क्या Revolution? ' ट्वीट छोड़ने से पहले अनुराग ने लिखा था- इस नए भारत के लिए आप सभी को बधाई मुझे उम्मीद है कि आप आगे बढ़ेंगे। ये मेरा आखिरी ट्वीट हो सकता है क्योंकि मैं ट्विटर छोड़ रहा हूं। कुछ दिनों पहले अनुराग की बेटी को रेप करने की धमकी दी गई थी जिसके बाद उन्होंने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी। अब आखिरकार अनुराग ने अपना ट्विटर ही डिलीट कर दिया है।
ट्वीट छोड़ने से पहले अनुराग ने लिखा था- इस नए भारत के लिए आप सभी को बधाई मुझे उम्मीद है कि आप आगे बढ़ेंगे। ये मेरा आखिरी ट्वीट हो सकता है क्योंकि मैं ट्विटर छोड़ रहा हूं। अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। हमेशा हर मुद्दे पर वह अपने विचार खुलकर सोशल मीडिया पर रखते हैं। मगर हाल ही में कुछ ऐसा हुआ है कि अनुराग ने अपने ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया है। शनिवार को अनुराग ने अपने ट्विटर को डिलीट किया है। जिसके बाद से लगातार उनके इस एक्ट पर लोग कमेंट कर रहे हैं। अनुराग के ट्विटर से जाने के बाद फिल्म मेकर अशोक पंडित ने इसपर कमेंट किया। ट्वीट करके सबसे पहले उन्होंने अनुराग के इस एक्ट को नौटंकी बताया। इसके बाद अशोक पंडित ने लिखा , 'अनुराग इससे पहले भी ट्विटर छोड़ चुके हैं। जब उनकी फिल्म Bombay Velvet एक डिजास्टर हुई तब उन्होंने ऐसा ही कुछ किया था। निश्चित रूप से अपनी अगली रिलीज से पहले वह वापस आ जाएंगे। ' This is how #UrbanNaxals remain in news. वहीं अनुराग के इस एक्टर पर बोलते हुए फिल्म मेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा, 'ये बिल्कुल गलत है। जब मुझे असॉल्ट किया गया था तब तुम मन ही मन इसकी खुशियां मना रहे थे। अब तुम अपनी विक्टिम बनने का नाटक करे हो। ऐसा कोई भी सेलेब्स नहीं है जिसे ट्रोल ना किया गया हो या धमकी ना मिली हो। आओ मेरा मैसेज देख तुम्हें तसल्ली होगी। पीछे हटने वाले कभी जीतते नहीं और जीतने वाले कभी पीछे नहीं हटते। ' There is no celeb who is not trolled/threatened. Come and check my DM, you will feel better. झूठी चिट्ठियाँ लिखोगे तो लोग ऊँगली उठाएँगे ही। और मैदान छोड़ के भागना था तो झूठी चिट्ठी लिखी ही क्यों? क्या हुआ, अब Minority के लिए सारी हमदर्दी उड़न छू? ऐसे आएगा क्या Revolution? वहीं दूसा ट्वीट करके विवेक ने लिखा, 'Comrade, जब अपनी बात पे लड़ने की हिम्मत ही नहीं तो फिर पॉलिटिक्स पे बेवजह बोलते ही क्यों हो। झूठी चिट्ठियां लिखोगे तो लोग ऊंगली उठाएंगे ही। और मैदान छोड़ के भागना था तो झूठी चिट्ठी लिखी ही क्यों? क्या हुआ, अब Minority के लिए सारी हमदर्दी उड़न छू? ऐसे आएगा क्या Revolution? ' ट्वीट छोड़ने से पहले अनुराग ने लिखा था- इस नए भारत के लिए आप सभी को बधाई मुझे उम्मीद है कि आप आगे बढ़ेंगे। ये मेरा आखिरी ट्वीट हो सकता है क्योंकि मैं ट्विटर छोड़ रहा हूं। कुछ दिनों पहले अनुराग की बेटी को रेप करने की धमकी दी गई थी जिसके बाद उन्होंने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी। अब आखिरकार अनुराग ने अपना ट्विटर ही डिलीट कर दिया है।
प्रतिहत होय के सूर्य कूं प्राप्त होवै हैं । यह दृष्टविरुद्ध है । काहे तैं सूर्य की किरणा सकल नेत्ररश्मि का प्रतिघातक हैं । तिन का पराभव करके प्रतिहत नेत्ररश्मि सूर्य मंडल कुं प्राप्त होवै हैं । यह दृष्टविरुद्ध हि है । किंच साक्षात् चंद्रदर्शन तैं नेत्र मै शीतलता दृष्ट है। बिंव प्रतिबिंब के अभेद पक्ष मै चंद्र के प्रतिबिंब का दर्शन होवै तिस काल मै बी चंद्रबिंब तैं नेत्र का संबंध विद्यमान है । यातें शीतलता मानी चाहिये । सो बी दृष्ट विरुद्ध है । काहे तैं अधोमुख हुवा पुरुष जलाशयादिकन मै चंद्र प्रतिबिंव कं निरंतर देखै तिस काल मै नेत्र मै शीतलता दृष्ट नहि । किंच जलसंबंध तैं नेत्ररश्मि का प्रतिघात माने शिलादि संबंध सै तौ अवश्य मान्या चाहिये । प्रतिहत नेत्ररश्मि का नयनगोलकादिकन सै संबंध मान्या चाहिये । संबंध सै तिन का प्रत्यक्ष बी मान्या चाहिये । सों बी दृष्टविरुद्ध है। काहे तैं शिलादिकन सै नेत्र के संबंध काल मै नयनगोलकादिकन का प्रत्यक्ष दृष्ट नहि । जो दोप तैं प्रत्यक्ष का प्रतिबंध कहें तो संभव नहि । काहे तैं शुक्ति रजतादि भ्रम होवै तहां दोप तैं विशेष अंश के ज्ञान का हि प्रतिबंध दृष्ट है। सामान्य अंश के ज्ञान का प्रतिबंध दृष्ट नहि । यार्ते शिलादि संबंध काल मै सामान्य मुखत्वादिरूप तैं हि स्त्रमुख का साक्षात्कार हुवा चाहिये । इस रीति सै बिंब प्रतिबिंब का अभेदवाद दृष्ट विरुद्ध है । मिथ्या प्रतिबिंध की उपपत्ति पक्ष मै किंचित् वी दृष्ट विरोध होवै नहि । तथा हि-जो या पक्ष मै पूर्व अक्लृप्त की कल्पनारूप गौरव कहा द्रव्यगत महत्व औ उद्भूतरूप द्रव्य के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै हि कारण प्रसिद्ध हैं। खाश्रयद्रव्य के प्रतिबिंबाध्यास मै हेतु प्रसिद्ध नहि । तामै तिन कूं हेतु मानना अक्लृप्त कल्पना है । तैसे कुड्यादिक इंद्रिय संबंध के विघटन द्वारा हि घटादिप्रत्यक्ष के प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । साक्षात् प्रतिबंधक प्रसिद्ध नहि । प्रतिबिंबाध्यास की उत्पत्ति मै तिन कूं साक्षात् प्रतिबंधक मानना बी अप्रसिद्ध की हि कल्पना है । सो संभवै नहि । काहे तैं अंतर सुखादि प्रत्यक्ष की हेतुता हि मन मै प्रसिद्ध है । बाह्यपदार्थ के प्रत्यक्ष की हेतुता प्रसिद्ध नहि। परंतु फल बल तैं आकाश गोचर प्रत्यक्ष की हेतुता बी माने हैं। तैसे द्रव्यगत मह त्वादिक यद्यपि खाश्रयगोचर साक्षात्कार के हि कारण प्रसिद्ध हैं । स्वाश्रयद्रव्य के प्रतिबिंबाध्यास मै कारण प्रसिद्ध नहि । तथापि जा द्रव्य मै महत्व औ उद्भूतरूप होवें चाक्षुप प्रतिबिंब बी ताका हि दृष्ट है । अन्य का नहि । यातैं फल बल तैं स्वाश्रय द्रव्य के प्रतिबिंब मै थी कारण मानै अप्रसिद्ध दोष नहि। औ खाकार वृत्ति से स्वकी हि अपरोक्षता प्रसिद्ध है। अन्याकार वृत्ति सै अन्य परोक्षता प्रसिद्ध नहि। परंतु फल बल तैं हि आलोक कार चाक्षुपवृत्ति से आकाश की बी अपरोक्षता माने हैं। तैसे कुड्यादिक यद्यपि व्यवहित वस्तु के साक्षात्कार मै इंद्रिय संबंध के विघटन द्वारा हि प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । काहे तैं जैसे त्वगिद्रिय विषयकं प्रात होय के हि घटादि विषय के प्रत्यक्ष का हेतु दृष्ट है । तैसे नेत्रादिक बी स्वविषय कूं प्राप्त होय के हि ताके साक्षात्कार के हेतु माने चाहिये । औ विषय सै इंद्रिय का संबंध हि प्राप्ति है । यात व्यवहित वस्तु के साक्षात्कार मै संबंध विघटन द्वारा हि कुड्यादिक प्रतिबंधक सिद्ध होवै हैं । याहि तैं प्रतिविवाभ्यास की उत्पत्ति मै कुड्यादिक साक्षात् प्रतिबंधक माने घटादि प्रत्यक्ष मै बी साक्षात् प्रतिबंधक होने तैं इंद्रिय संबंध मात्र मै कारणता का लोप होवैगा । यह कहना बी संभवै नहि । इस रीति सै व्यवहित वस्तु के प्रत्यक्ष मै संबंध विघटन द्वारा कुड्यादिक प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । तैसे प्रति विवाध्यास की उत्पत्ति मै बी संबंध विघटन द्वारा हि प्रतिबंधक माने व्यवहित का बी प्रतिबिंव हुवा चाहिये । काहे तैं मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्तिपक्ष मै इंद्रिय संबंध हेतु नहि माने हैं । याहि तैं कुड्यादिक संबंध विघटन द्वारा प्रतिबंधक कहने बी नहि संभवै हैं । साक्षात् बी प्रतिबंधक नहि माने व्यवहित का बी प्रतिबिंब अवश्य हुवा चाहिये । औ अव्यवहित पदार्थ का हि प्रतिदृष्ट है । व्यवहित का दृष्ट नहि । यातें फल बल तैं व्यवहित वस्तु के प्रति बिंबाध्यास मै कुड्यादिक साक्षात् प्रतिबंधक मानै बी अप्रसिद्धि दोष नहि । इस रीति से मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्ति मै बिंबरूप द्रव्यगत अव्यवहितत्व, महत्व, उद्भूतरूप हेतु हैं । यात प्रत नेत्ररश्मि का बिंब से संबंध नहि माने व्यवहित पदार्थ का, तैसे परमाणु औ वायु का बी चाक्षुष प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । यह कहना बी नहि संभव है । उलटा प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध माने हि व्यवहितादिकन का प्रतिबिंब हुना चाहिये । तथा हि - साक्षात् सूर्य के दर्शन वास्ते ताके सन्मुख नेत्र का प्रक्षेप होवै है । प्रतिबिंबरूप सूर्य के दर्शन वास्ते नेत्रप्रक्षेप की अपेक्षा नहि । किंतु अधोमुख हुवा पुरुष जल कूं देखै तब तासै प्रतिहत नेत्र की रश्मि ऊपरि जाय के आकाशस्थ सूर्य कूं विषय करे हैं । औ अपने पार्श्वस्थ पुरुष के दर्शन वास्ते नेत्र का तिर्यक् प्रक्षेप होवै है । दर्पण मै खमुख के प्रतिबिंब कूं देखे तिस काल मै पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंब की बी प्रतीति होवै है । तामै क्षेत्र के तिर्यक् प्रक्षेप की अपेक्षा नहि । किंतु दर्पण तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि हि पार्श्वस्थ पुरुष कूं विषय करे हैं। औ बिंब का प्रत्यक्ष हि प्रतिबिंब का प्रत्यक्ष है । यार्ते नेत्र के तिर्यक् प्रक्षेप विना हि पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंव की प्रतीति संभवै है । इस रीति से जहां होवै तहां हि प्रतिहत नेत्ररश्मि का गमन माने हैं। सन्मुख प्रतिहत नेत्ररश्मि का पुनः शरीर के अंतर हि हावै यह नियम नहि माने हैं। या पृष्ठभाग सै माहत पदार्थ का बी ताके सन्मुख नेत्र प्रक्षेप विना हि प्रतिहत नेत्ररश्मि के संबंध तैं दर्पणादिकन मै अवश्य प्रतिबिंव भ्रम हुवा चाहिये । औ मलिन दर्पण मै गौर मुख का श्याम प्रतिबिंब होवै तहां प्रतिबिंव के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै मुखगत गौररूप का उपयोग तो कहना संभवै नहि । किंतु आरोपित पीतरूप विशिष्ट शंख का चाक्षुप प्रत्यक्ष होवै है । तैसे आरोपित श्यामरूप विशिष्ट हि चिंब मुख का चाक्षुप प्रतिबिंव भ्रम कहना होवैगा। तैसे दर्पणगत श्यामता विशिष्ट वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये। काहे तैं आरोपित नीलताविशिष्ट नीरूप ची आकाश का चाक्षुप प्रत्यक्ष माने हैं। तैसे आरोपित श्यामताविशिष्ट नीरूप वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम संभवै है । इस रीति से प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध माने पृष्ठभाग से व्यवहित पदार्थ का तैसे नीरूप वायु आदिकन का बी चाक्षुप प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये। और जो प्रतिहत नेत्र का वि संबंध नहि मानने मै दोप कहा । इंद्रिय के संबंध विना पदार्थ का अनुभव होवै नहि । यात कल्पित प्रतिबिंब के सजातीय मुखादिक हैं। तिन का पूर्व अनुभव के अभाव तैं अभ्यास के कारण संस्कार का असंभव होवैगा। सो बी नहि संभव है । काहे ते पुरुष सामान्य के अनु. भव तैं संस्कार होवै तासै हि पूर्व अननुभूत पुरुष का बी स्वप्न मै अभ्यास होवे है । तैसे मुख सामान्य के अनुभव. जन्य संस्कार तैं हि दर्पण मै मुख विशेष का प्रति बिंबाध्यास संभवै है । प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध मानना निष्फल है। परंतु इतना भेद है - खप्न मै शुभाशुभ का हेतु अदृष्ट है। तासै पुरुष विशेष का अभ्यास होवै है । प्रतिबिंबाध्यास स्थल मै मुखविशेष के प्रतिबिंधाध्यास मै बिंब उपाधि का संबंध हेतु है । यार्तें पुरुष सामान्य के अनुभवजन्य संस्कार तैं स्वप्न मै अनियत हि पुरुष का अध्यास होवै है । तैसे मुखसामान्य के अनु भव तैं संस्कार होवै तासै प्रति बिंबाध्यास माने चैत्रमुख औ दर्पण के संबंध तैं अनियत हि मुख का प्रति विचाध्यास हुवा चाहिये । नियम तैं चैत्रमुख का हि प्रति चिंबाध्यास नहि हुवा चाहिये । यह शंका संभवै नहि । और जो पूर्व शंकावादी ने कहा है । स्वरूप से प्रतिबिंब मिथ्या माने ब्रह्म का प्रतिबिंव जीव बी मिथ्या हि मानना होवैगा । या ब्रह्मभावापचिरूप मोक्ष का हि अभाव होवैगा । सो बी संभवै नहि । काहे तैं त्रिविध जीववाद मै यद्यपि प्रति बिवरूप जीव मिथ्या है । तथापि देह द्वयावच्छिन्न कूटस्थ चेतनरूप पारमार्थिक जीव सत्य है । ताका ब्रह्मभावापत्तिरूप मोक्ष संभवै है । यार्ते विंव र्ते भिन्न प्रति} रूप से मिथ्या है । यह पक्ष निर्दोष है । इस रीति सै विंध से भिन्न प्रतिबिंब मिथ्या सिद्ध हुवा, औ कोई ग्रंथकार तौ बिंब से भिन्न प्रतिबिंब कं छायारूप मान के सत्य कहे हैं। सो असंगत है। काहे तैं शरीरादिकन तैं आलोक के निरोध तैं छाया होवै है । सो अंधकाररूप होने तैं ताका नियम तैं नीलरूप हि होवै है । रूपांतर होवै नहि । औ प्रतिबिंब का रूप नील हि होवै यह नियम. नहि । किंतु श्वेत पदार्थ का प्रतिबिंब श्वेत हि होवै है । रक्त का रक्त हि होवै है । पीत पदार्थ का पीत हि प्रतिबिंब होवै है । नील का नील हि होवै है। औ नेत्रांदिकन की छाया हि होवै नहि । तिन के प्रतिबिंब कूं तौ छायारूप कहना सर्वथा असंगत है । यात बी प्रतिबिंब कूं छायारूपता कथन असंगत है । और जो अंधकार की न्याई प्रतिबिंब कं द्रव्यांतर रूप मान के सत्य सिद्ध करे हैं सो बी असंगत है । काहे तैं शुक्ति रजत की न्याईं प्रतिबिंब का वाघ होवै है यातैं सत्यसिद्ध होवै नहि । किंच प्रतिबिंब मै रूप परिमाण प्रत्यङ् मुखवादिक धर्म प्रतीत होवै हैं । ताकूं द्रव्यांतररूप मान के तामै रूपादिक नहि माने द्रव्यांतररूप मानना निष्फल होवैगा । प्रतिबिंध मै रूपादिक माने ताकूं सत्य कहना संभवै नहि । काहे तैं एक हि अल्प परिमाणवाले दर्पण मै महत् परिमाणवाले अनेक मुखन के अनेक प्रतिबिंब युगपत् असंकीर्ण प्रतीत होवै हैं । तात्पर्य यह एक बी विशाल दर्पण मै तो अनेक प्रतिबिंध असंकीर्ण स्थित होय सके हैं। अल्प परिमाणवाले अनेक दर्पण होवें तहां बी एक एक दर्पण मै एक एक प्रतिबिंत्र की असंकीर्ण स्थिति संभव है। अल्प परिमाणवाले एक दर्पण मै बी क्रम तैं अनेक प्रतिबिंध असंकीर्ण स्थित होय सके हैं । परंतु अल्प परिमाणवाले एक दर्पण मैं महत् परिमाणवाले अनेक प्रतिबिंब युगपत् असंकीर्ण स्थित होय सर्कै नहि । औ मिथ्या प्रतिबिंब पक्ष मै तौ ग्रह दोष नहि। काहे तैं खप्न मै खल्पनाडिदेश मै महत् परिमाणवाले अनेक मिथ्या गज रथादिक युगपत् असंकीर्ण प्रतीत होवै हैं । तैसे अल्प परिमाणवाले दर्पण मै बी विशाल अनेक प्रतिबिंबन की युगपत् प्रतीति संभत्रै । औ पूर्व की न्याई अधिकृत हि दर्पण मै निम्नोन्नत अनेकविध अवयववाले सत्य द्रव्यांतररूप प्रतिबिंब की उत्पत्ति कहना सर्वथा विरुद्ध है । किंच एक हि दर्पण मै सित रक्त पीतादि अनेकविध वर्णादि युक्त अनेक प्रतिबिंब प्रतीत होवै हैं । तिन की उत्पत्ति मै दर्पण के मध्य ताके संनिहित तिस प्रकार का कारण प्रतीत होवै नहि । तात्पर्य यह दर्पण के समान वर्णवाले हि· प्रतिबिंच होवें तब तौ दर्पण मै तादृश वर्ण युक्त कारण का संभव बी होवै । परंतु दर्पण के रूप तैं विलक्षण नाना रूपवाले प्रतिबिंध प्रतीत होवै हैं । औ बिंवरूप मुखादिकन मै तौ यद्यपि सित पीत रक्तादि अनेकविध वर्णादिक हैं वी परंतु कार्यदेश मै कारण चाहिये । कार्य प्रतिबिंब दर्पण के अंतर ताके पृष्ठ. भाग मै संनिहित प्रतीत होत्रै हैं । तिन का कारण बी तहां हि हुवा चाहिये। मुखादिक बिंब तिन के अग्रभाग मै बाह्य प्रतीत होवै हैं । या निमित्त तौ संभवैं बी हैं। परंतु उपा दान संभवै नहि । यातें सामग्री के अभाव तैं बी सत्य द्रव्यांतररूप प्रतिबिंत्र की उत्पत्ति कहना संभवै नहिं । इस रीति से युक्ति विरोध तैं औ प्रमाण के अभाव तैं बी विंब से भिन्न प्रतिबिंब सत्यत्ववाद असंगत है । मिथ्या प्रतिबिंव पक्ष हि समीचीन है। इस रीति से अद्वैत विद्याकार विद्यारण्यस्वामी आदिकन के तात्पर्य निरूपण मै प्रतिचिंच कूं स्वरूप सै मिथ्या सिद्ध करे हैं। परंतु बिंब प्रतिबिंब के अभेदपक्ष मै जो दोप कहे हैं विं प्रतिबिंध का भेद प्रतीत होवै है । तिन मै द्विवादिक प्रतीत होवै हैं । अभेदपक्ष मै ताका विरोध होवैगा । सो दोप संभवै नहि । काहे तैं जैसे नेत्रदोष तैं एक हि चन्द्रमा मै भेद सहित द्विवादिकन का भ्रम होवै है । तैसे बिंध उपाधि की संनिधिरूप दोष तैं मुखादिक चिंत्र मै भेदसहित द्विवादिंकन की प्रतीति भ्रमरूप संभवै है । याहि तैं सादृश्य प्रतीति बी भ्रमरूप हि है । तासै श्री बिंब सै भिन्न प्रतिबिंवस्वरूप सै मिथ्या सिद्ध होवै नहि या 'दर्पणे ममं मुखं भाति' इत्यादि अभेदव्यवहार कूं गौण कहना संभवै नहि किंतु मुख्य हि मान्या चाहिये । जो प्रतिबिंब गोचर वालप्रवृत्ति आदिकन तैं भेदव्यवहार कूं मुख्य सिद्ध किया सो वी नहि संभव है। काहे तैं विंब मै दर्पणादिस्थल भ्रम तैं हि बालप्रवृत्ति आदिक संभवै हैं । यातैं परीक्षक प्रवृत्ति की अन्यथासिद्धि पूर्व कहि है। तैसे बालप्रवृत्ति आदिक बी अन्यथा हि सिद्ध होय सके हैं । तिन सैं बी भेदव्यवहार मुख्य सिद्ध होय सके नहि । उलटा अभेद गोचर अनुभव पूर्व अनेक कहे हैं। और लाघव तैं बी अभेद्रव्यवहार हि मुख्य सिद्ध होवै है । किंच मुखादिक बिंब तैं प्रतिबिंब का भेद भ्रम होवै है । स्वभाव सै तिन का सदा अभेद है । तैसे जीव ब्रह्म का भेद भ्रम सिद्ध है । तिन का अभेद स्वाभाविक है । इस रीति से लौकिक विच प्रतिबिंध का अभेद मानै वैदिक जीव ब्रह्म के अभेद मै अनुकूल युक्ति मिले है । औ प्रतिबिंच जीव का हि ब्रह्म सै अभेद संभव हुये तासै भिन्न पारमार्थिक जीव का अंगीकार गौरवग्रस्त है । यार्ते बी विंध प्रतिबिंब का अभेद स्वाभाविक हि मान्या चाहिये । एक एव हि भूतात्मा भूते भूते व्यवस्थितः । एकधा बहुधा चैव दृश्यते जलचन्द्रवत् ॥ यथाह्ययंज्योतिरात्माविवस्वान्नयोभिन्नाबहुधैकोऽनुगच्छन् । उपाधिना क्रियते भेदरूपो देवः क्षेत्रेष्वेवमजोऽयमात्मा ॥ इत्यादि श्रुतिवाक्यन का बी चित्र प्रतिबिंव के अभेद ( ३७३ ) मैहि तात्पर्य है। काहे तैं साभाव से एक हि चंद्रादिकन मै नानाल औपाधिक है । तैसे चेतन आत्मा स्वभाव से एक है । तामै औपाधिक नानात्व है। यह श्रुतिवाक्यन का अर्थ सिद्ध होवै है । सो विंध प्रतिबिंध के भेदपक्ष मै संभवै नहि । काहे तैं भेदपक्ष मै बिंब एक है । प्रतिबिंब नाना है । यह सिद्ध होवै है । एक मै हि औपाधिक नानात्व सिद्ध होवै नहि । बिंब प्रति विंव के अभेदपक्ष मै एक मै औपाधिक नानात्व स्पष्ट हि सिद्ध होवे है । या कारण तैं हि भामति निबंधादिकन मै बहुत स्थान मै यह कहा है - यद्यपि जीव ईश्वर का वास्तव सै अभेद हि है । तथापि लौकिक बिंब प्रतिबिंव की न्याई कल्पितभेद होने तैं तिन के धर्मन की व्यवस्था संभवै है । यातैं अभेदपक्ष हि समीचीन है। विद्यारण्य स्वामी आदिकन ने बिंध प्रतिबिंब का भेद मान के स्वरूप सै मिथ्या प्रतिबिंध की उत्पत्ति कहि है । सो मंद अधिकारी के वास्ते कहि है। काहे तैं धर्मी के भेदस्थल मै हि विरुद्ध धर्मन का असंकर लोक मै प्रसिद्ध है। धर्मी के अभेदस्थल मै प्रसिद्ध नहि । या कर्तृत्व भोक्तृत्वादि संसार का आश्रय मिथ्या चिदाभास है। सत् चित् आनंद. रूप आत्मा असंग होने तैं ताका आश्रय नहि । या प्रक्रिया तैं मंद अधिकारी कुं अनायास तैं बोध होवै है। तैसे ब्रह्म का प्रतिबिंब होने तैं आत्मा स्वर्भाव सै तौ ब्रह्म( ३७४ ) रूप हि है । अंतःकरण के संबंध तैं तामै संसार है । या प्रक्रिया तैं होवै नहि । यातैं अनायास तैं मंद कृं बोध होवै या अभिप्राय तैं पंचदशी आदिक ग्रंथन मै धार्मभेद की सिद्धि वास्ते मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्ति कहि है। यातें विरोध नहि। और जो कहा सूर्य की किरणा सकल नेत्ररश्मि का प्रतिघातक हैं। जल तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि तिन का पराभव करके तिन के अंतर्गत सूर्यमंडल कूं प्राप्त होवै हैं । यह कहना दृष्ट विरुद्ध है । सो बी संभवै नहि । काहे तैं जैसे स्वभाव सै सूर्य की किरणा तृणादिकन का दाह नहि करे हैं । सूर्यकांतमणि तैं प्रतिहत हुयी करे हैं। तैसे स्वभाव सै तौ नेत्र की रश्मि सूर्यकिरणा का पराभव नहि करे हैं। परंतु जलादि उपाधि तैं प्रतिहत हुयी करे हैं। यह दृष्ट के अनुसार कल्पना संभवै है । यातैं विरोध नहि । और जो कहा चंद्रप्रतिबिंब के दर्शनकाल मै वी मै चंद्रमा से नेत्र का संबंध विद्यमान है । यातैं नेत्र शीतलता हुयी चाहिये । सो बी नहि संभवै है । काहे तैं चंद्रमा के संबंध र्ते नेत्र मै शीतलता मानै तब प्रतिबिंब दर्शनकाल मै वी शीतलता हुयी चाहिये । परंतु चंद्रकिरणा के निरंतर संबंध तैं नेत्र मै शीतलता माने हैं चंद्र. चंद्रसंबंध तैं नहि माने हैं। औ अधोमुख हुवा पुरुप प्रतिबिंव कूं देखै तिसकाल मै ताके नेत्र सै चंद्रकिरणा का निरंतर संबंध है नहि । यार्तें प्रतिबिंब दर्शनकाल मै ( ३७५ ) शीतलता की आपत्ति नहि। और जो कहा जल संबंध तैं नेत्ररश्मि का प्रतिघात माने शीलादि संबंध से तौ अवश्य मान्या चाहिये । प्रतिहत नेत्ररश्मि तैं संबंध द्वारा नयनगोलकादिकन का साक्षात्कार हुवा चाहिये । सो वी संभवै नहि । काहे तैं दृष्ट के अनुसार कल्पना हुयी चाहिये । जलादिक स्वच्छ उपाधि मै प्रतिबिंध दृष्ट है। शिलादिकन मै दृष्ट नहि । यातै प्रतिबिंव के योग्य स्वच्छ द्रव्य तें हि नेत्ररश्मि का प्रतिघात होवै है । मलिन शिलादिकन तैं होवै नहि । इस रीति सै दृष्ट के अनुसार पदार्थ का स्वभाव मानने मै दोप नहि। और जो कहा जहां चिंत्र होवै तहां हि प्रतिहत नेत्ररश्मि का गमन माने पृष्ठभाग तैं व्यवहित पदार्थ का वी प्रतिहत नेत्ररश्मि के संबंध तैं प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । सो बी नहि संभव है। काहे तैं प्रति हत नेत्ररश्मि की विदेश मै प्राप्ति होवै है । या पक्ष मैवी विंध प्राप्ति मै व्यवधान का अंभाव चाहिये । अधो-' मुख पुरुष जल मै सूर्य के प्रतिबिंब कूं देखै तहां व्यव धान का अभाव विद्यमान है । यातें जल तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि कूं सूर्य की प्राप्ति संभवै है । दर्पण मै ऋजुनेत्र से स्वप्रतिबिंब की न्याईं पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंव कूं बी देखे है। तहां वी व्यवधान का अभाव विद्यमान है। यार्तें दर्पण तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि कूं पार्श्वस्थ पुरुष की प्राप्ति वी संभव है। परंतु पृष्ठभाग तैं व्यवहित वस्तु की प्राप्ति मै शरीर औ ताके अवयव हि व्यवधान हैं। यातें दर्पण । तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि ताकूं प्राप्त होवैं नहि । याहि तैं ताके प्रतिबिंव भ्रम की बी आपत्ति नहि। और जो कहा द्रव्य के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै द्रव्यगत हि उद्भूतरूप कारण होवै यह नियम नहि । काहे तैं कल्पित पीतरूप विशिष्ट शंख का चाक्षुप प्रत्यक्ष माने हैं। आरोपित नीलरूप विशिष्ट आकाश का चाक्षुष प्रत्यक्ष माने हैं। मलिन दर्पण मै गौरमुख के श्याम प्रतिबिंब का चाक्षुप प्रत्यक्ष होवै है। तहां कहूं. बी आश्रयगत उद्भूतरूप कारण नहि । तैसे कल्पितरूप विशिष्ट नीरूप वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । काहे तैं द्रव्य के चाक्षुष प्रतिबिंब भ्रम मै द्रव्यगत महत्व कारण है । तैसे द्रव्यगत हि उद्भूतरूप वी कारण होवै तब तौ नीरूप का चाक्षुप प्रतिबिंव भ्रम नहि बी संभवै । परंतु गौरमुख का श्याम 'चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम होवै । तामै मुखगत गौररूप कारण नहि । किंतु मुख दर्पण की संनिधि तैं दर्पणगत श्यामरूप का मुख मै आरोप होवै है। आरोपित श्यामरूप विशिष्ट मुख का चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम होवै है। वैसे कल्पितरूप विशिष्ट नीरूप द्रव्य का वी चाक्षुष प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये । सो ची संभवै नहि । काहे तैं कल्पित पीतादि रूप विशिष्ट शंखादिकंन का चाक्षुप प्रत्यक्ष उपाध्याय माने हैं। प्राचीन आचार्य तिन का साक्षिरूप प्रत्यक्ष
प्रतिहत होय के सूर्य कूं प्राप्त होवै हैं । यह दृष्टविरुद्ध है । काहे तैं सूर्य की किरणा सकल नेत्ररश्मि का प्रतिघातक हैं । तिन का पराभव करके प्रतिहत नेत्ररश्मि सूर्य मंडल कुं प्राप्त होवै हैं । यह दृष्टविरुद्ध हि है । किंच साक्षात् चंद्रदर्शन तैं नेत्र मै शीतलता दृष्ट है। बिंव प्रतिबिंब के अभेद पक्ष मै चंद्र के प्रतिबिंब का दर्शन होवै तिस काल मै बी चंद्रबिंब तैं नेत्र का संबंध विद्यमान है । यातें शीतलता मानी चाहिये । सो बी दृष्ट विरुद्ध है । काहे तैं अधोमुख हुवा पुरुष जलाशयादिकन मै चंद्र प्रतिबिंव कं निरंतर देखै तिस काल मै नेत्र मै शीतलता दृष्ट नहि । किंच जलसंबंध तैं नेत्ररश्मि का प्रतिघात माने शिलादि संबंध सै तौ अवश्य मान्या चाहिये । प्रतिहत नेत्ररश्मि का नयनगोलकादिकन सै संबंध मान्या चाहिये । संबंध सै तिन का प्रत्यक्ष बी मान्या चाहिये । सों बी दृष्टविरुद्ध है। काहे तैं शिलादिकन सै नेत्र के संबंध काल मै नयनगोलकादिकन का प्रत्यक्ष दृष्ट नहि । जो दोप तैं प्रत्यक्ष का प्रतिबंध कहें तो संभव नहि । काहे तैं शुक्ति रजतादि भ्रम होवै तहां दोप तैं विशेष अंश के ज्ञान का हि प्रतिबंध दृष्ट है। सामान्य अंश के ज्ञान का प्रतिबंध दृष्ट नहि । यार्ते शिलादि संबंध काल मै सामान्य मुखत्वादिरूप तैं हि स्त्रमुख का साक्षात्कार हुवा चाहिये । इस रीति सै बिंब प्रतिबिंब का अभेदवाद दृष्ट विरुद्ध है । मिथ्या प्रतिबिंध की उपपत्ति पक्ष मै किंचित् वी दृष्ट विरोध होवै नहि । तथा हि-जो या पक्ष मै पूर्व अक्लृप्त की कल्पनारूप गौरव कहा द्रव्यगत महत्व औ उद्भूतरूप द्रव्य के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै हि कारण प्रसिद्ध हैं। खाश्रयद्रव्य के प्रतिबिंबाध्यास मै हेतु प्रसिद्ध नहि । तामै तिन कूं हेतु मानना अक्लृप्त कल्पना है । तैसे कुड्यादिक इंद्रिय संबंध के विघटन द्वारा हि घटादिप्रत्यक्ष के प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । साक्षात् प्रतिबंधक प्रसिद्ध नहि । प्रतिबिंबाध्यास की उत्पत्ति मै तिन कूं साक्षात् प्रतिबंधक मानना बी अप्रसिद्ध की हि कल्पना है । सो संभवै नहि । काहे तैं अंतर सुखादि प्रत्यक्ष की हेतुता हि मन मै प्रसिद्ध है । बाह्यपदार्थ के प्रत्यक्ष की हेतुता प्रसिद्ध नहि। परंतु फल बल तैं आकाश गोचर प्रत्यक्ष की हेतुता बी माने हैं। तैसे द्रव्यगत मह त्वादिक यद्यपि खाश्रयगोचर साक्षात्कार के हि कारण प्रसिद्ध हैं । स्वाश्रयद्रव्य के प्रतिबिंबाध्यास मै कारण प्रसिद्ध नहि । तथापि जा द्रव्य मै महत्व औ उद्भूतरूप होवें चाक्षुप प्रतिबिंब बी ताका हि दृष्ट है । अन्य का नहि । यातैं फल बल तैं स्वाश्रय द्रव्य के प्रतिबिंब मै थी कारण मानै अप्रसिद्ध दोष नहि। औ खाकार वृत्ति से स्वकी हि अपरोक्षता प्रसिद्ध है। अन्याकार वृत्ति सै अन्य परोक्षता प्रसिद्ध नहि। परंतु फल बल तैं हि आलोक कार चाक्षुपवृत्ति से आकाश की बी अपरोक्षता माने हैं। तैसे कुड्यादिक यद्यपि व्यवहित वस्तु के साक्षात्कार मै इंद्रिय संबंध के विघटन द्वारा हि प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । काहे तैं जैसे त्वगिद्रिय विषयकं प्रात होय के हि घटादि विषय के प्रत्यक्ष का हेतु दृष्ट है । तैसे नेत्रादिक बी स्वविषय कूं प्राप्त होय के हि ताके साक्षात्कार के हेतु माने चाहिये । औ विषय सै इंद्रिय का संबंध हि प्राप्ति है । यात व्यवहित वस्तु के साक्षात्कार मै संबंध विघटन द्वारा हि कुड्यादिक प्रतिबंधक सिद्ध होवै हैं । याहि तैं प्रतिविवाभ्यास की उत्पत्ति मै कुड्यादिक साक्षात् प्रतिबंधक माने घटादि प्रत्यक्ष मै बी साक्षात् प्रतिबंधक होने तैं इंद्रिय संबंध मात्र मै कारणता का लोप होवैगा । यह कहना बी संभवै नहि । इस रीति सै व्यवहित वस्तु के प्रत्यक्ष मै संबंध विघटन द्वारा कुड्यादिक प्रतिबंधक प्रसिद्ध हैं । तैसे प्रति विवाध्यास की उत्पत्ति मै बी संबंध विघटन द्वारा हि प्रतिबंधक माने व्यवहित का बी प्रतिबिंव हुवा चाहिये । काहे तैं मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्तिपक्ष मै इंद्रिय संबंध हेतु नहि माने हैं । याहि तैं कुड्यादिक संबंध विघटन द्वारा प्रतिबंधक कहने बी नहि संभवै हैं । साक्षात् बी प्रतिबंधक नहि माने व्यवहित का बी प्रतिबिंब अवश्य हुवा चाहिये । औ अव्यवहित पदार्थ का हि प्रतिदृष्ट है । व्यवहित का दृष्ट नहि । यातें फल बल तैं व्यवहित वस्तु के प्रति बिंबाध्यास मै कुड्यादिक साक्षात् प्रतिबंधक मानै बी अप्रसिद्धि दोष नहि । इस रीति से मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्ति मै बिंबरूप द्रव्यगत अव्यवहितत्व, महत्व, उद्भूतरूप हेतु हैं । यात प्रत नेत्ररश्मि का बिंब से संबंध नहि माने व्यवहित पदार्थ का, तैसे परमाणु औ वायु का बी चाक्षुष प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । यह कहना बी नहि संभव है । उलटा प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध माने हि व्यवहितादिकन का प्रतिबिंब हुना चाहिये । तथा हि - साक्षात् सूर्य के दर्शन वास्ते ताके सन्मुख नेत्र का प्रक्षेप होवै है । प्रतिबिंबरूप सूर्य के दर्शन वास्ते नेत्रप्रक्षेप की अपेक्षा नहि । किंतु अधोमुख हुवा पुरुष जल कूं देखै तब तासै प्रतिहत नेत्र की रश्मि ऊपरि जाय के आकाशस्थ सूर्य कूं विषय करे हैं । औ अपने पार्श्वस्थ पुरुष के दर्शन वास्ते नेत्र का तिर्यक् प्रक्षेप होवै है । दर्पण मै खमुख के प्रतिबिंब कूं देखे तिस काल मै पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंब की बी प्रतीति होवै है । तामै क्षेत्र के तिर्यक् प्रक्षेप की अपेक्षा नहि । किंतु दर्पण तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि हि पार्श्वस्थ पुरुष कूं विषय करे हैं। औ बिंब का प्रत्यक्ष हि प्रतिबिंब का प्रत्यक्ष है । यार्ते नेत्र के तिर्यक् प्रक्षेप विना हि पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंव की प्रतीति संभवै है । इस रीति से जहां होवै तहां हि प्रतिहत नेत्ररश्मि का गमन माने हैं। सन्मुख प्रतिहत नेत्ररश्मि का पुनः शरीर के अंतर हि हावै यह नियम नहि माने हैं। या पृष्ठभाग सै माहत पदार्थ का बी ताके सन्मुख नेत्र प्रक्षेप विना हि प्रतिहत नेत्ररश्मि के संबंध तैं दर्पणादिकन मै अवश्य प्रतिबिंव भ्रम हुवा चाहिये । औ मलिन दर्पण मै गौर मुख का श्याम प्रतिबिंब होवै तहां प्रतिबिंव के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै मुखगत गौररूप का उपयोग तो कहना संभवै नहि । किंतु आरोपित पीतरूप विशिष्ट शंख का चाक्षुप प्रत्यक्ष होवै है । तैसे आरोपित श्यामरूप विशिष्ट हि चिंब मुख का चाक्षुप प्रतिबिंव भ्रम कहना होवैगा। तैसे दर्पणगत श्यामता विशिष्ट वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये। काहे तैं आरोपित नीलताविशिष्ट नीरूप ची आकाश का चाक्षुप प्रत्यक्ष माने हैं। तैसे आरोपित श्यामताविशिष्ट नीरूप वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम संभवै है । इस रीति से प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध माने पृष्ठभाग से व्यवहित पदार्थ का तैसे नीरूप वायु आदिकन का बी चाक्षुप प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये। और जो प्रतिहत नेत्र का वि संबंध नहि मानने मै दोप कहा । इंद्रिय के संबंध विना पदार्थ का अनुभव होवै नहि । यात कल्पित प्रतिबिंब के सजातीय मुखादिक हैं। तिन का पूर्व अनुभव के अभाव तैं अभ्यास के कारण संस्कार का असंभव होवैगा। सो बी नहि संभव है । काहे ते पुरुष सामान्य के अनु. भव तैं संस्कार होवै तासै हि पूर्व अननुभूत पुरुष का बी स्वप्न मै अभ्यास होवे है । तैसे मुख सामान्य के अनुभव. जन्य संस्कार तैं हि दर्पण मै मुख विशेष का प्रति बिंबाध्यास संभवै है । प्रतिहत नेत्ररश्मि का बिंब तैं संबंध मानना निष्फल है। परंतु इतना भेद है - खप्न मै शुभाशुभ का हेतु अदृष्ट है। तासै पुरुष विशेष का अभ्यास होवै है । प्रतिबिंबाध्यास स्थल मै मुखविशेष के प्रतिबिंधाध्यास मै बिंब उपाधि का संबंध हेतु है । यार्तें पुरुष सामान्य के अनुभवजन्य संस्कार तैं स्वप्न मै अनियत हि पुरुष का अध्यास होवै है । तैसे मुखसामान्य के अनु भव तैं संस्कार होवै तासै प्रति बिंबाध्यास माने चैत्रमुख औ दर्पण के संबंध तैं अनियत हि मुख का प्रति विचाध्यास हुवा चाहिये । नियम तैं चैत्रमुख का हि प्रति चिंबाध्यास नहि हुवा चाहिये । यह शंका संभवै नहि । और जो पूर्व शंकावादी ने कहा है । स्वरूप से प्रतिबिंब मिथ्या माने ब्रह्म का प्रतिबिंव जीव बी मिथ्या हि मानना होवैगा । या ब्रह्मभावापचिरूप मोक्ष का हि अभाव होवैगा । सो बी संभवै नहि । काहे तैं त्रिविध जीववाद मै यद्यपि प्रति बिवरूप जीव मिथ्या है । तथापि देह द्वयावच्छिन्न कूटस्थ चेतनरूप पारमार्थिक जीव सत्य है । ताका ब्रह्मभावापत्तिरूप मोक्ष संभवै है । यार्ते विंव र्ते भिन्न प्रति} रूप से मिथ्या है । यह पक्ष निर्दोष है । इस रीति सै विंध से भिन्न प्रतिबिंब मिथ्या सिद्ध हुवा, औ कोई ग्रंथकार तौ बिंब से भिन्न प्रतिबिंब कं छायारूप मान के सत्य कहे हैं। सो असंगत है। काहे तैं शरीरादिकन तैं आलोक के निरोध तैं छाया होवै है । सो अंधकाररूप होने तैं ताका नियम तैं नीलरूप हि होवै है । रूपांतर होवै नहि । औ प्रतिबिंब का रूप नील हि होवै यह नियम. नहि । किंतु श्वेत पदार्थ का प्रतिबिंब श्वेत हि होवै है । रक्त का रक्त हि होवै है । पीत पदार्थ का पीत हि प्रतिबिंब होवै है । नील का नील हि होवै है। औ नेत्रांदिकन की छाया हि होवै नहि । तिन के प्रतिबिंब कूं तौ छायारूप कहना सर्वथा असंगत है । यात बी प्रतिबिंब कूं छायारूपता कथन असंगत है । और जो अंधकार की न्याई प्रतिबिंब कं द्रव्यांतर रूप मान के सत्य सिद्ध करे हैं सो बी असंगत है । काहे तैं शुक्ति रजत की न्याईं प्रतिबिंब का वाघ होवै है यातैं सत्यसिद्ध होवै नहि । किंच प्रतिबिंब मै रूप परिमाण प्रत्यङ् मुखवादिक धर्म प्रतीत होवै हैं । ताकूं द्रव्यांतररूप मान के तामै रूपादिक नहि माने द्रव्यांतररूप मानना निष्फल होवैगा । प्रतिबिंध मै रूपादिक माने ताकूं सत्य कहना संभवै नहि । काहे तैं एक हि अल्प परिमाणवाले दर्पण मै महत् परिमाणवाले अनेक मुखन के अनेक प्रतिबिंब युगपत् असंकीर्ण प्रतीत होवै हैं । तात्पर्य यह एक बी विशाल दर्पण मै तो अनेक प्रतिबिंध असंकीर्ण स्थित होय सके हैं। अल्प परिमाणवाले अनेक दर्पण होवें तहां बी एक एक दर्पण मै एक एक प्रतिबिंत्र की असंकीर्ण स्थिति संभव है। अल्प परिमाणवाले एक दर्पण मै बी क्रम तैं अनेक प्रतिबिंध असंकीर्ण स्थित होय सके हैं । परंतु अल्प परिमाणवाले एक दर्पण मैं महत् परिमाणवाले अनेक प्रतिबिंब युगपत् असंकीर्ण स्थित होय सर्कै नहि । औ मिथ्या प्रतिबिंब पक्ष मै तौ ग्रह दोष नहि। काहे तैं खप्न मै खल्पनाडिदेश मै महत् परिमाणवाले अनेक मिथ्या गज रथादिक युगपत् असंकीर्ण प्रतीत होवै हैं । तैसे अल्प परिमाणवाले दर्पण मै बी विशाल अनेक प्रतिबिंबन की युगपत् प्रतीति संभत्रै । औ पूर्व की न्याई अधिकृत हि दर्पण मै निम्नोन्नत अनेकविध अवयववाले सत्य द्रव्यांतररूप प्रतिबिंब की उत्पत्ति कहना सर्वथा विरुद्ध है । किंच एक हि दर्पण मै सित रक्त पीतादि अनेकविध वर्णादि युक्त अनेक प्रतिबिंब प्रतीत होवै हैं । तिन की उत्पत्ति मै दर्पण के मध्य ताके संनिहित तिस प्रकार का कारण प्रतीत होवै नहि । तात्पर्य यह दर्पण के समान वर्णवाले हि· प्रतिबिंच होवें तब तौ दर्पण मै तादृश वर्ण युक्त कारण का संभव बी होवै । परंतु दर्पण के रूप तैं विलक्षण नाना रूपवाले प्रतिबिंध प्रतीत होवै हैं । औ बिंवरूप मुखादिकन मै तौ यद्यपि सित पीत रक्तादि अनेकविध वर्णादिक हैं वी परंतु कार्यदेश मै कारण चाहिये । कार्य प्रतिबिंब दर्पण के अंतर ताके पृष्ठ. भाग मै संनिहित प्रतीत होत्रै हैं । तिन का कारण बी तहां हि हुवा चाहिये। मुखादिक बिंब तिन के अग्रभाग मै बाह्य प्रतीत होवै हैं । या निमित्त तौ संभवैं बी हैं। परंतु उपा दान संभवै नहि । यातें सामग्री के अभाव तैं बी सत्य द्रव्यांतररूप प्रतिबिंत्र की उत्पत्ति कहना संभवै नहिं । इस रीति से युक्ति विरोध तैं औ प्रमाण के अभाव तैं बी विंब से भिन्न प्रतिबिंब सत्यत्ववाद असंगत है । मिथ्या प्रतिबिंव पक्ष हि समीचीन है। इस रीति से अद्वैत विद्याकार विद्यारण्यस्वामी आदिकन के तात्पर्य निरूपण मै प्रतिचिंच कूं स्वरूप सै मिथ्या सिद्ध करे हैं। परंतु बिंब प्रतिबिंब के अभेदपक्ष मै जो दोप कहे हैं विं प्रतिबिंध का भेद प्रतीत होवै है । तिन मै द्विवादिक प्रतीत होवै हैं । अभेदपक्ष मै ताका विरोध होवैगा । सो दोप संभवै नहि । काहे तैं जैसे नेत्रदोष तैं एक हि चन्द्रमा मै भेद सहित द्विवादिकन का भ्रम होवै है । तैसे बिंध उपाधि की संनिधिरूप दोष तैं मुखादिक चिंत्र मै भेदसहित द्विवादिंकन की प्रतीति भ्रमरूप संभवै है । याहि तैं सादृश्य प्रतीति बी भ्रमरूप हि है । तासै श्री बिंब सै भिन्न प्रतिबिंवस्वरूप सै मिथ्या सिद्ध होवै नहि या 'दर्पणे ममं मुखं भाति' इत्यादि अभेदव्यवहार कूं गौण कहना संभवै नहि किंतु मुख्य हि मान्या चाहिये । जो प्रतिबिंब गोचर वालप्रवृत्ति आदिकन तैं भेदव्यवहार कूं मुख्य सिद्ध किया सो वी नहि संभव है। काहे तैं विंब मै दर्पणादिस्थल भ्रम तैं हि बालप्रवृत्ति आदिक संभवै हैं । यातैं परीक्षक प्रवृत्ति की अन्यथासिद्धि पूर्व कहि है। तैसे बालप्रवृत्ति आदिक बी अन्यथा हि सिद्ध होय सके हैं । तिन सैं बी भेदव्यवहार मुख्य सिद्ध होय सके नहि । उलटा अभेद गोचर अनुभव पूर्व अनेक कहे हैं। और लाघव तैं बी अभेद्रव्यवहार हि मुख्य सिद्ध होवै है । किंच मुखादिक बिंब तैं प्रतिबिंब का भेद भ्रम होवै है । स्वभाव सै तिन का सदा अभेद है । तैसे जीव ब्रह्म का भेद भ्रम सिद्ध है । तिन का अभेद स्वाभाविक है । इस रीति से लौकिक विच प्रतिबिंध का अभेद मानै वैदिक जीव ब्रह्म के अभेद मै अनुकूल युक्ति मिले है । औ प्रतिबिंच जीव का हि ब्रह्म सै अभेद संभव हुये तासै भिन्न पारमार्थिक जीव का अंगीकार गौरवग्रस्त है । यार्ते बी विंध प्रतिबिंब का अभेद स्वाभाविक हि मान्या चाहिये । एक एव हि भूतात्मा भूते भूते व्यवस्थितः । एकधा बहुधा चैव दृश्यते जलचन्द्रवत् ॥ यथाह्ययंज्योतिरात्माविवस्वान्नयोभिन्नाबहुधैकोऽनुगच्छन् । उपाधिना क्रियते भेदरूपो देवः क्षेत्रेष्वेवमजोऽयमात्मा ॥ इत्यादि श्रुतिवाक्यन का बी चित्र प्रतिबिंव के अभेद मैहि तात्पर्य है। काहे तैं साभाव से एक हि चंद्रादिकन मै नानाल औपाधिक है । तैसे चेतन आत्मा स्वभाव से एक है । तामै औपाधिक नानात्व है। यह श्रुतिवाक्यन का अर्थ सिद्ध होवै है । सो विंध प्रतिबिंध के भेदपक्ष मै संभवै नहि । काहे तैं भेदपक्ष मै बिंब एक है । प्रतिबिंब नाना है । यह सिद्ध होवै है । एक मै हि औपाधिक नानात्व सिद्ध होवै नहि । बिंब प्रति विंव के अभेदपक्ष मै एक मै औपाधिक नानात्व स्पष्ट हि सिद्ध होवे है । या कारण तैं हि भामति निबंधादिकन मै बहुत स्थान मै यह कहा है - यद्यपि जीव ईश्वर का वास्तव सै अभेद हि है । तथापि लौकिक बिंब प्रतिबिंव की न्याई कल्पितभेद होने तैं तिन के धर्मन की व्यवस्था संभवै है । यातैं अभेदपक्ष हि समीचीन है। विद्यारण्य स्वामी आदिकन ने बिंध प्रतिबिंब का भेद मान के स्वरूप सै मिथ्या प्रतिबिंध की उत्पत्ति कहि है । सो मंद अधिकारी के वास्ते कहि है। काहे तैं धर्मी के भेदस्थल मै हि विरुद्ध धर्मन का असंकर लोक मै प्रसिद्ध है। धर्मी के अभेदस्थल मै प्रसिद्ध नहि । या कर्तृत्व भोक्तृत्वादि संसार का आश्रय मिथ्या चिदाभास है। सत् चित् आनंद. रूप आत्मा असंग होने तैं ताका आश्रय नहि । या प्रक्रिया तैं मंद अधिकारी कुं अनायास तैं बोध होवै है। तैसे ब्रह्म का प्रतिबिंब होने तैं आत्मा स्वर्भाव सै तौ ब्रह्म रूप हि है । अंतःकरण के संबंध तैं तामै संसार है । या प्रक्रिया तैं होवै नहि । यातैं अनायास तैं मंद कृं बोध होवै या अभिप्राय तैं पंचदशी आदिक ग्रंथन मै धार्मभेद की सिद्धि वास्ते मिथ्या प्रतिबिंव की उत्पत्ति कहि है। यातें विरोध नहि। और जो कहा सूर्य की किरणा सकल नेत्ररश्मि का प्रतिघातक हैं। जल तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि तिन का पराभव करके तिन के अंतर्गत सूर्यमंडल कूं प्राप्त होवै हैं । यह कहना दृष्ट विरुद्ध है । सो बी संभवै नहि । काहे तैं जैसे स्वभाव सै सूर्य की किरणा तृणादिकन का दाह नहि करे हैं । सूर्यकांतमणि तैं प्रतिहत हुयी करे हैं। तैसे स्वभाव सै तौ नेत्र की रश्मि सूर्यकिरणा का पराभव नहि करे हैं। परंतु जलादि उपाधि तैं प्रतिहत हुयी करे हैं। यह दृष्ट के अनुसार कल्पना संभवै है । यातैं विरोध नहि । और जो कहा चंद्रप्रतिबिंब के दर्शनकाल मै वी मै चंद्रमा से नेत्र का संबंध विद्यमान है । यातैं नेत्र शीतलता हुयी चाहिये । सो बी नहि संभवै है । काहे तैं चंद्रमा के संबंध र्ते नेत्र मै शीतलता मानै तब प्रतिबिंब दर्शनकाल मै वी शीतलता हुयी चाहिये । परंतु चंद्रकिरणा के निरंतर संबंध तैं नेत्र मै शीतलता माने हैं चंद्र. चंद्रसंबंध तैं नहि माने हैं। औ अधोमुख हुवा पुरुप प्रतिबिंव कूं देखै तिसकाल मै ताके नेत्र सै चंद्रकिरणा का निरंतर संबंध है नहि । यार्तें प्रतिबिंब दर्शनकाल मै शीतलता की आपत्ति नहि। और जो कहा जल संबंध तैं नेत्ररश्मि का प्रतिघात माने शीलादि संबंध से तौ अवश्य मान्या चाहिये । प्रतिहत नेत्ररश्मि तैं संबंध द्वारा नयनगोलकादिकन का साक्षात्कार हुवा चाहिये । सो वी संभवै नहि । काहे तैं दृष्ट के अनुसार कल्पना हुयी चाहिये । जलादिक स्वच्छ उपाधि मै प्रतिबिंध दृष्ट है। शिलादिकन मै दृष्ट नहि । यातै प्रतिबिंव के योग्य स्वच्छ द्रव्य तें हि नेत्ररश्मि का प्रतिघात होवै है । मलिन शिलादिकन तैं होवै नहि । इस रीति सै दृष्ट के अनुसार पदार्थ का स्वभाव मानने मै दोप नहि। और जो कहा जहां चिंत्र होवै तहां हि प्रतिहत नेत्ररश्मि का गमन माने पृष्ठभाग तैं व्यवहित पदार्थ का वी प्रतिहत नेत्ररश्मि के संबंध तैं प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । सो बी नहि संभव है। काहे तैं प्रति हत नेत्ररश्मि की विदेश मै प्राप्ति होवै है । या पक्ष मैवी विंध प्राप्ति मै व्यवधान का अंभाव चाहिये । अधो-' मुख पुरुष जल मै सूर्य के प्रतिबिंब कूं देखै तहां व्यव धान का अभाव विद्यमान है । यातें जल तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि कूं सूर्य की प्राप्ति संभवै है । दर्पण मै ऋजुनेत्र से स्वप्रतिबिंब की न्याईं पार्श्वस्थ पुरुष के प्रतिबिंव कूं बी देखे है। तहां वी व्यवधान का अभाव विद्यमान है। यार्तें दर्पण तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि कूं पार्श्वस्थ पुरुष की प्राप्ति वी संभव है। परंतु पृष्ठभाग तैं व्यवहित वस्तु की प्राप्ति मै शरीर औ ताके अवयव हि व्यवधान हैं। यातें दर्पण । तैं प्रतिहत नेत्ररश्मि ताकूं प्राप्त होवैं नहि । याहि तैं ताके प्रतिबिंव भ्रम की बी आपत्ति नहि। और जो कहा द्रव्य के चाक्षुप प्रत्यक्ष मै द्रव्यगत हि उद्भूतरूप कारण होवै यह नियम नहि । काहे तैं कल्पित पीतरूप विशिष्ट शंख का चाक्षुप प्रत्यक्ष माने हैं। आरोपित नीलरूप विशिष्ट आकाश का चाक्षुष प्रत्यक्ष माने हैं। मलिन दर्पण मै गौरमुख के श्याम प्रतिबिंब का चाक्षुप प्रत्यक्ष होवै है। तहां कहूं. बी आश्रयगत उद्भूतरूप कारण नहि । तैसे कल्पितरूप विशिष्ट नीरूप वायु आदिकन का वी चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम हुवा चाहिये । काहे तैं द्रव्य के चाक्षुष प्रतिबिंब भ्रम मै द्रव्यगत महत्व कारण है । तैसे द्रव्यगत हि उद्भूतरूप वी कारण होवै तब तौ नीरूप का चाक्षुप प्रतिबिंव भ्रम नहि बी संभवै । परंतु गौरमुख का श्याम 'चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम होवै । तामै मुखगत गौररूप कारण नहि । किंतु मुख दर्पण की संनिधि तैं दर्पणगत श्यामरूप का मुख मै आरोप होवै है। आरोपित श्यामरूप विशिष्ट मुख का चाक्षुप प्रतिबिंब भ्रम होवै है। वैसे कल्पितरूप विशिष्ट नीरूप द्रव्य का वी चाक्षुष प्रतिबिंध भ्रम हुवा चाहिये । सो ची संभवै नहि । काहे तैं कल्पित पीतादि रूप विशिष्ट शंखादिकंन का चाक्षुप प्रत्यक्ष उपाध्याय माने हैं। प्राचीन आचार्य तिन का साक्षिरूप प्रत्यक्ष
- और फिर महेश की बात है। उस पर उन्हें कितनी आशाएँ हैं। देवराज-- (एकदम उदास होता है) हां, शारदा । तुम ठीक कहती हो । आशा सब कुछ करा लेती है..... [ तभी रमेश का तेज स्वर पास श्राता है । ] रमेश - चाची, चाची-ई-ई....... ! शारदा - क्या है रमेश ? [ रमेश का प्रवेश ] रमेश - चाची, तुम जा रही हो। मैं भी चलूंगा । शारदा - (हँसकर) चलेगा ? रमेश - हाँ । शारदा - जीजी से पूछा तूने । रमेश - पूछा था चाची । भाभी ने कहा है जी करता है तो चला जा । शारदा - (दयराज से) इसे ले चलो जी । अकेले जी भी नहीं लगेगा और फिर. । देवराज - तो ले चलो । लेकिन मुझे एक काम याद आ गया । जरा बाजार हो आऊँ । भाभी के पास सन्ध्या को चलेगे । रमेश- चाचाजी, भाभी ने कहा है शाम को खाना वहीं खाना । शारदा छारे, पर अब तू मेरा काम करना, चल । [शारदा नुकराती मुस्कराती उसे पकड़कर अन्दर ले जाती है । देवराज एक बार उन्हें देखकर हंसता है फिर उदास होवर बाहर चला जाता है। दूर क घण्टा पंजता है
- और फिर महेश की बात है। उस पर उन्हें कितनी आशाएँ हैं। देवराज-- हां, शारदा । तुम ठीक कहती हो । आशा सब कुछ करा लेती है..... [ तभी रमेश का तेज स्वर पास श्राता है । ] रमेश - चाची, चाची-ई-ई....... ! शारदा - क्या है रमेश ? [ रमेश का प्रवेश ] रमेश - चाची, तुम जा रही हो। मैं भी चलूंगा । शारदा - चलेगा ? रमेश - हाँ । शारदा - जीजी से पूछा तूने । रमेश - पूछा था चाची । भाभी ने कहा है जी करता है तो चला जा । शारदा - इसे ले चलो जी । अकेले जी भी नहीं लगेगा और फिर. । देवराज - तो ले चलो । लेकिन मुझे एक काम याद आ गया । जरा बाजार हो आऊँ । भाभी के पास सन्ध्या को चलेगे । रमेश- चाचाजी, भाभी ने कहा है शाम को खाना वहीं खाना । शारदा छारे, पर अब तू मेरा काम करना, चल । [शारदा नुकराती मुस्कराती उसे पकड़कर अन्दर ले जाती है । देवराज एक बार उन्हें देखकर हंसता है फिर उदास होवर बाहर चला जाता है। दूर क घण्टा पंजता है
डूंगरपुर, (निसं) : शिकार और पानी की तलाश में यहां गांव में घुसे पैंथर ने बुधवार को हमला कर एक दर्जन ग्रामीणों को घायल कर दिया। हमलावर पैंथर को लोगों ने पुलिस और वन अधिकारियों के सामने घेरकर पत्थरों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना बिछिवाड़ा थाना क्षेत्र के पालपादर स्थित रोजेला फला गांव की है। जानकारी के अनुसार सुबह बोरवेल से कुछ महिलाएं पानी भर रहीं थी। अचानक पैंथर वहां आ गया और उसने महिलाओं पर हमला बोल दिया। इसके बाद पैंथर गांव की ओर चला गया। जहां घर में घुस गया और वहां आंगन में बैठी कुकरी पत्नी नाना मसार और उसके बेटे बसु,बकसी पर हमला कर दिया। घर में अचानक घुसे पैंथर से डरे बकसी ने जैसे-तैसे बाहर निकल कर जान बचाई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। सूचना पर बिछीवाड़ा रेंजर भैरूलाल तंवर और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू टीम बुलाई। रेस्क्यू टीम के शूटर सतनाम सिंह ने पैंथर को ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया लेकिन मकान की छत से केलू हटाने के दौरान बघेरे ने टीम पर भी हमला बोल दिया,जिससे एक सदस्य भी घायल हो गया। इसी बीच पैंथर छलांग लगाते हुए छत के रास्ते बाहर निकला। बाहर निकले पैंथर पर ग्रामीणों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। जिससे वह घायल होकर अचेत हो गया। घायल पैंथर को बिछीवाड़ा पशु चिकित्सालय लाया गया जहां उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पहले भी उतार चुके मौत के घाट । उल्लेखनीय है कि करीब 4 वर्ष पूर्व भी सदर थाना क्षेत्र के माथुगामड़ा में भी गांव में घुसी मादा पैंथर की ग्रामीणों ने पत्थर मार कर हत्या कर दी थी। वहीं हाल में सरिस्का वन्य क्षेत्र में ग्रामीण पर हमला करने पर लोगों ने पैंथर को जलाकर मार दिया था।
डूंगरपुर, : शिकार और पानी की तलाश में यहां गांव में घुसे पैंथर ने बुधवार को हमला कर एक दर्जन ग्रामीणों को घायल कर दिया। हमलावर पैंथर को लोगों ने पुलिस और वन अधिकारियों के सामने घेरकर पत्थरों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना बिछिवाड़ा थाना क्षेत्र के पालपादर स्थित रोजेला फला गांव की है। जानकारी के अनुसार सुबह बोरवेल से कुछ महिलाएं पानी भर रहीं थी। अचानक पैंथर वहां आ गया और उसने महिलाओं पर हमला बोल दिया। इसके बाद पैंथर गांव की ओर चला गया। जहां घर में घुस गया और वहां आंगन में बैठी कुकरी पत्नी नाना मसार और उसके बेटे बसु,बकसी पर हमला कर दिया। घर में अचानक घुसे पैंथर से डरे बकसी ने जैसे-तैसे बाहर निकल कर जान बचाई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। सूचना पर बिछीवाड़ा रेंजर भैरूलाल तंवर और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू टीम बुलाई। रेस्क्यू टीम के शूटर सतनाम सिंह ने पैंथर को ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया लेकिन मकान की छत से केलू हटाने के दौरान बघेरे ने टीम पर भी हमला बोल दिया,जिससे एक सदस्य भी घायल हो गया। इसी बीच पैंथर छलांग लगाते हुए छत के रास्ते बाहर निकला। बाहर निकले पैंथर पर ग्रामीणों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। जिससे वह घायल होकर अचेत हो गया। घायल पैंथर को बिछीवाड़ा पशु चिकित्सालय लाया गया जहां उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पहले भी उतार चुके मौत के घाट । उल्लेखनीय है कि करीब चार वर्ष पूर्व भी सदर थाना क्षेत्र के माथुगामड़ा में भी गांव में घुसी मादा पैंथर की ग्रामीणों ने पत्थर मार कर हत्या कर दी थी। वहीं हाल में सरिस्का वन्य क्षेत्र में ग्रामीण पर हमला करने पर लोगों ने पैंथर को जलाकर मार दिया था।
जयपुर कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के निर्देश पर आज पुलिस ने चारों जिलों के चार सर्किल में बदमाशों के घर पर दबिश और सर्च का ऑपरेशन चलाया। यह ऑपरेशन आर्म्स एक्ट,चैन स्नैचर,गैंग,एनडीपीएस में अपराध कर चुके बदमाशों के ठिकाने पर की गई। पुलिस ने चारों सर्किल से 150 से अधिक बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके पास से मादक पदार्थ,शराब,हथियार, वाहन बरामद किए। एडिशनल पुलिस कमिश्नर कैलाश चंद बिश्नोई ने बताया कि शहर में समय-समय पर बदमाशों के ठिकाने पर दबिश दी जा रही हैं। जिससे अधिकांश बदमाशों ने बदमाशी का रास्ता बदल लिया हैं। लेकिन उसके बाद भी कुछ लोग हैं जो सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में चारों जिलों के डीसीपी को अपने इलाके के एक सर्किल में यह ऑपरेशन करने निर्देश दिए गए। जिस पर आज सुबह 5बजे से डीएसटी और सीएसटी की टीमों ने बदमाशों के घरों पर दबिश देना शुरू किया। बिश्नोई ने बताया कि ईस्ट जिले में सांगानेर सर्किल में सर्च ऑपरेशन कराया गया। जहां से पुलिस ने 20 के बदमाशों को गिरफ्तार किया हैं। जिन से ज्यादा वाहन चोर हैं। वैस्ट जिला पुलिस ने झोटवाड़ा सर्किल में सर्च कराया जिस में पुलिस ने 51 बदमाशों को गिरफ्तार किया हैं। जिस में लूट,स्नैचिंग के बदमाश शामिल हैं। नॉर्थ जिले में पुलिस ने शास्त्री नगर सर्किल में सर्च कराया इस दौरान पुलिस ने 45 से अधिक बदमशों को गिरफ्तार किया जिनके पास से शराब और नशे की कई खेप मिली। वहीं साउथ जिले में मानसरोवर सर्किल में पुलिस ने सर्च कराया इस दौरान पुलिस ने 40 से अधिक बदमाशों को गिरफ्तार किया जिस में हथियार,शराब और गैंग बनाकर वारदात करने वाले बदमाश शामिल हैं। जयपुर के चारों जिलों में यह सर्च सीएसटी और डीएसटी के इनपुट के आधार पर किया गया। पुलिस के पास सूचना थी की इन इलाकों में कुछ बाहर राज्यों और जिलों के बदमाश हो सकते हैं। इस आधार पर पुलिस ने अल सुबह रेड की। हालांकि कुछ बाहरी राज्यों और जिले के बदमाश पुलिस के हाथ लगे लेकिन कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया हैं। पुलिस ने हरमाड़ा के पास से एक बदमाश को गिरफ्तार किया जिसके बाद से पुलिस ने 40 से अधिक कारतूस बरामद किए हैं। यह बदमाश इतने अधिक कारतूसों का क्या करने वाला था कहां से लाया था इसे लेकर इससे सीएसटी और डीएसटी के पुलिस अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जयपुर कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के निर्देश पर आज पुलिस ने चारों जिलों के चार सर्किल में बदमाशों के घर पर दबिश और सर्च का ऑपरेशन चलाया। यह ऑपरेशन आर्म्स एक्ट,चैन स्नैचर,गैंग,एनडीपीएस में अपराध कर चुके बदमाशों के ठिकाने पर की गई। पुलिस ने चारों सर्किल से एक सौ पचास से अधिक बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके पास से मादक पदार्थ,शराब,हथियार, वाहन बरामद किए। एडिशनल पुलिस कमिश्नर कैलाश चंद बिश्नोई ने बताया कि शहर में समय-समय पर बदमाशों के ठिकाने पर दबिश दी जा रही हैं। जिससे अधिकांश बदमाशों ने बदमाशी का रास्ता बदल लिया हैं। लेकिन उसके बाद भी कुछ लोग हैं जो सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में चारों जिलों के डीसीपी को अपने इलाके के एक सर्किल में यह ऑपरेशन करने निर्देश दिए गए। जिस पर आज सुबह पाँचबजे से डीएसटी और सीएसटी की टीमों ने बदमाशों के घरों पर दबिश देना शुरू किया। बिश्नोई ने बताया कि ईस्ट जिले में सांगानेर सर्किल में सर्च ऑपरेशन कराया गया। जहां से पुलिस ने बीस के बदमाशों को गिरफ्तार किया हैं। जिन से ज्यादा वाहन चोर हैं। वैस्ट जिला पुलिस ने झोटवाड़ा सर्किल में सर्च कराया जिस में पुलिस ने इक्यावन बदमाशों को गिरफ्तार किया हैं। जिस में लूट,स्नैचिंग के बदमाश शामिल हैं। नॉर्थ जिले में पुलिस ने शास्त्री नगर सर्किल में सर्च कराया इस दौरान पुलिस ने पैंतालीस से अधिक बदमशों को गिरफ्तार किया जिनके पास से शराब और नशे की कई खेप मिली। वहीं साउथ जिले में मानसरोवर सर्किल में पुलिस ने सर्च कराया इस दौरान पुलिस ने चालीस से अधिक बदमाशों को गिरफ्तार किया जिस में हथियार,शराब और गैंग बनाकर वारदात करने वाले बदमाश शामिल हैं। जयपुर के चारों जिलों में यह सर्च सीएसटी और डीएसटी के इनपुट के आधार पर किया गया। पुलिस के पास सूचना थी की इन इलाकों में कुछ बाहर राज्यों और जिलों के बदमाश हो सकते हैं। इस आधार पर पुलिस ने अल सुबह रेड की। हालांकि कुछ बाहरी राज्यों और जिले के बदमाश पुलिस के हाथ लगे लेकिन कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया हैं। पुलिस ने हरमाड़ा के पास से एक बदमाश को गिरफ्तार किया जिसके बाद से पुलिस ने चालीस से अधिक कारतूस बरामद किए हैं। यह बदमाश इतने अधिक कारतूसों का क्या करने वाला था कहां से लाया था इसे लेकर इससे सीएसटी और डीएसटी के पुलिस अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बैठ गया और थोड़े ही समय में उसने मेरी के देखे हुए सभी भवनों से भिन्न ठीक वैसा ही घर खींच दिया, जो वह चाहती थी। जब वह मकान बन गया, नब उनमे वे तब वस्तुएँ विद्यमान थीं जो उसकी अनदेखी नोटबुक में लिखी हुई थीं। डॉन निश्चय ही अपने व्यवसाय में सफल है; केवल रूपमान-निर्माता या अन्वेषक के रूप में ही नहीं... वरन् अन्य रूपों में भी । अपने पति की विचित्र भिन्न योग्यताओं के सम्बन्ध में उसका निर्णय निश्चय ही पक्षपातपूर्ण था किन्तु बार-बार यह निश्चय हो चुका था और अभी उस पेटेट के मुकदमे में भी स्पष्ट हो गया था। इस मुकदमे से पूर्व मेरी को विश्वास था कि डॉन को पेटेंट के कानून का बहुत कम ज्ञान है । वह बहुत-सी पोथियाँ घर उठा लाया था । मेरी ने उसे उपयुक्त प्रसंग खोज निकालने के लिए अपनी सहायता भी देनी चाही थी, किन्तु उसने उसे टाल दिया । उसने इधर-उधर पन्ने उलटपलट लिये और एक भी नोट नहीं बनाया। फिर भी जब इस विजय पर फीडरल क्लव में उत्सव मनाया गया, तब विल्मिग्टन कानूनी फर्म के जिस वृद्ध भागीदार ने ट्रेडवे की ओरसे मुकदमा लड़ा था, उसने मेरी को समझाते हुए कहा था"श्रीमती वॉलिंग ? तुम्हारे पति ने ठीक व्यवसाय नहीं चुना है। जितने लोगोंको मैंने देखा है उनमें सबसे अच्छा कानूनी मस्तिष्क उनका है, बहुत ऊँचा । मैं तो यहाँ तक कह सकता हूँ, कि मेरे अपने साथी वकीलों में भी बहुतों से बहुत ऊँचा ।" आज रातको, उसने आशा की थी कि डॉन उसी भाव से घर लौटेगा, जिसमें वह गया है, ऐवरी बुलार्ड की मृत्यु के भयानक संवाद से धुँधले मस्तिष्कवाला होकर । उसके आगमन की प्रतीक्षा करते समय उसने अपने मन में बहुत सी बातें एकत्र कर रखी थी कि उसका दुःख कम करने के लिए मैं क्याक्या कहूँगी । पर कोई भी बात कही नहीं गयी । वे दोनों लगभग एक घंटे से ऊपर बातचीत करते रहे; किन्तु ऐवरी बुलार्ड की मृत्यु की बात कभी सीधे आयी नहीं । वह जानती थी कि डॉन को अब भी दुःख है, किन्तु वह इतना गहरा गड़ा हुआ प्रतीत हुआ कि अब उभाड़ा नहीं जा सकता । उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ.... इससे पहले भी बहुत बार ऐसी घटना हो चुकी थी। आज रातको उन्होंने इस विषय पर बातें की थीं कि ट्रेडवे कॉर्पोरेशन का नया अध्यक्ष कौन होगा। पर वह उस व्यवस्थित और क्रमिक रीतिसे नहीं हुई जिस रीतिसे वह बात करना चाहती थी। उन सब बातों को इकट्ठा करके उसने परिणाम निकाला कि एल्डर्सन तो इस दौड़से बाहर है और ग्रिम ही
बैठ गया और थोड़े ही समय में उसने मेरी के देखे हुए सभी भवनों से भिन्न ठीक वैसा ही घर खींच दिया, जो वह चाहती थी। जब वह मकान बन गया, नब उनमे वे तब वस्तुएँ विद्यमान थीं जो उसकी अनदेखी नोटबुक में लिखी हुई थीं। डॉन निश्चय ही अपने व्यवसाय में सफल है; केवल रूपमान-निर्माता या अन्वेषक के रूप में ही नहीं... वरन् अन्य रूपों में भी । अपने पति की विचित्र भिन्न योग्यताओं के सम्बन्ध में उसका निर्णय निश्चय ही पक्षपातपूर्ण था किन्तु बार-बार यह निश्चय हो चुका था और अभी उस पेटेट के मुकदमे में भी स्पष्ट हो गया था। इस मुकदमे से पूर्व मेरी को विश्वास था कि डॉन को पेटेंट के कानून का बहुत कम ज्ञान है । वह बहुत-सी पोथियाँ घर उठा लाया था । मेरी ने उसे उपयुक्त प्रसंग खोज निकालने के लिए अपनी सहायता भी देनी चाही थी, किन्तु उसने उसे टाल दिया । उसने इधर-उधर पन्ने उलटपलट लिये और एक भी नोट नहीं बनाया। फिर भी जब इस विजय पर फीडरल क्लव में उत्सव मनाया गया, तब विल्मिग्टन कानूनी फर्म के जिस वृद्ध भागीदार ने ट्रेडवे की ओरसे मुकदमा लड़ा था, उसने मेरी को समझाते हुए कहा था"श्रीमती वॉलिंग ? तुम्हारे पति ने ठीक व्यवसाय नहीं चुना है। जितने लोगोंको मैंने देखा है उनमें सबसे अच्छा कानूनी मस्तिष्क उनका है, बहुत ऊँचा । मैं तो यहाँ तक कह सकता हूँ, कि मेरे अपने साथी वकीलों में भी बहुतों से बहुत ऊँचा ।" आज रातको, उसने आशा की थी कि डॉन उसी भाव से घर लौटेगा, जिसमें वह गया है, ऐवरी बुलार्ड की मृत्यु के भयानक संवाद से धुँधले मस्तिष्कवाला होकर । उसके आगमन की प्रतीक्षा करते समय उसने अपने मन में बहुत सी बातें एकत्र कर रखी थी कि उसका दुःख कम करने के लिए मैं क्याक्या कहूँगी । पर कोई भी बात कही नहीं गयी । वे दोनों लगभग एक घंटे से ऊपर बातचीत करते रहे; किन्तु ऐवरी बुलार्ड की मृत्यु की बात कभी सीधे आयी नहीं । वह जानती थी कि डॉन को अब भी दुःख है, किन्तु वह इतना गहरा गड़ा हुआ प्रतीत हुआ कि अब उभाड़ा नहीं जा सकता । उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ.... इससे पहले भी बहुत बार ऐसी घटना हो चुकी थी। आज रातको उन्होंने इस विषय पर बातें की थीं कि ट्रेडवे कॉर्पोरेशन का नया अध्यक्ष कौन होगा। पर वह उस व्यवस्थित और क्रमिक रीतिसे नहीं हुई जिस रीतिसे वह बात करना चाहती थी। उन सब बातों को इकट्ठा करके उसने परिणाम निकाला कि एल्डर्सन तो इस दौड़से बाहर है और ग्रिम ही
आपके किसी काम में दोस्त बहुत मददगार रहेगा। आप के खर्चे एक एक बढ़ेंगे, जिन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होगा। सेहत में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है, कुछ लोग बाहर जाने की खबर सुनकर खुश हो सकते हैं। शादीशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन में आज का दिन खुशियां खोलेगा और आपका जीवन साथी बहुत प्यार भरा बातें करेगा। व्यवसाय के लिए आज कुछ नई सोच का समय होगा। आपको भी लाभ होगा। आप किसी महत्वपूर्ण यात्रा पर जा सकते हैं, जिसके परिणामजे आपके हाथ में होंगे। प्रेम जीवन बिता रहे लोग रिश्ते में बढ़ते हुए गलतफहमी और विरोधाभास से दुखी हो सकते हैं, जबकि शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन किसी गलतफहमी का शिकार हो सकता है। आप काफी हंसी मजाक के मूड में होंगे और अपने आसपास की ओर से लोगों को खुश रखने की कोशिश करेंगे। परिवार का माहौल टेंशन से भरा हो सकता है, इसलिए आपको अपने हल्के अंदाज से सब को खुश रखने की कोशिश करनी होगी। आपके काम को लेकर स्थितियां आज बहुत कुछ अच्छा दिखा रही हैं, इसलिए इस समय का पूरा फायदा उठाएं। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज का दिन बहुत ही खुशनुमा होगा और अपने जीवन साथी के साथ अपने संबंधों में घनिष्ठता आएगी और संतान से प्रेम जताएंगे। आपकी किस्मत भी साथ देगी। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज आप काफी गंभीर मुद्रा में रहेंगे और अपने आसपास की ओर जाने वाली चीजों पर आपका पूरा ध्यान रहेगा। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, तो आज का दिन आपको उनका इंतजार करना पड़ेगा, संभव है कि उनसे बात आज ना हो पाए। आज का दिन आप को बड़ा अच्छा महसूस होगा, लेकिन मानसिक रूप से कुछ ऐसी बातें आपके दिमाग में चलती रहेंगी, जो आपका काफी समय और ऊर्जा नष्ट करेगे, इसलिए अपने काम पर ध्यान जरूर दें क्योंकि उसको लेकर आपको विनम्र होना जरूरी है। आपका इनकम आज अच्छी तरह से होगा। कुछ ऐसे काम होंगे, जो आप अपने आप को इनकम को बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। विवाहशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन को देखें, तो आज थोड़ी सावधानी रखें। बनाएगे। शादीशुदा जीवन को लेकर आपकी जो धारणाएं हैं। आज वह संशोधितगी और आप अपने जीवनसाथी से काफी निकटता महसूस करेंगे। आप समझेंगे कि दांपत्य जीवन वास्तव में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आपके किसी काम में दोस्त बहुत मददगार रहेगा। आप के खर्चे एक एक बढ़ेंगे, जिन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होगा। सेहत में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है, कुछ लोग बाहर जाने की खबर सुनकर खुश हो सकते हैं। शादीशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन में आज का दिन खुशियां खोलेगा और आपका जीवन साथी बहुत प्यार भरा बातें करेगा। व्यवसाय के लिए आज कुछ नई सोच का समय होगा। आपको भी लाभ होगा। आप किसी महत्वपूर्ण यात्रा पर जा सकते हैं, जिसके परिणामजे आपके हाथ में होंगे। प्रेम जीवन बिता रहे लोग रिश्ते में बढ़ते हुए गलतफहमी और विरोधाभास से दुखी हो सकते हैं, जबकि शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन किसी गलतफहमी का शिकार हो सकता है। आप काफी हंसी मजाक के मूड में होंगे और अपने आसपास की ओर से लोगों को खुश रखने की कोशिश करेंगे। परिवार का माहौल टेंशन से भरा हो सकता है, इसलिए आपको अपने हल्के अंदाज से सब को खुश रखने की कोशिश करनी होगी। आपके काम को लेकर स्थितियां आज बहुत कुछ अच्छा दिखा रही हैं, इसलिए इस समय का पूरा फायदा उठाएं। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज का दिन बहुत ही खुशनुमा होगा और अपने जीवन साथी के साथ अपने संबंधों में घनिष्ठता आएगी और संतान से प्रेम जताएंगे। आपकी किस्मत भी साथ देगी। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज आप काफी गंभीर मुद्रा में रहेंगे और अपने आसपास की ओर जाने वाली चीजों पर आपका पूरा ध्यान रहेगा। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, तो आज का दिन आपको उनका इंतजार करना पड़ेगा, संभव है कि उनसे बात आज ना हो पाए। आज का दिन आप को बड़ा अच्छा महसूस होगा, लेकिन मानसिक रूप से कुछ ऐसी बातें आपके दिमाग में चलती रहेंगी, जो आपका काफी समय और ऊर्जा नष्ट करेगे, इसलिए अपने काम पर ध्यान जरूर दें क्योंकि उसको लेकर आपको विनम्र होना जरूरी है। आपका इनकम आज अच्छी तरह से होगा। कुछ ऐसे काम होंगे, जो आप अपने आप को इनकम को बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। विवाहशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन को देखें, तो आज थोड़ी सावधानी रखें। बनाएगे। शादीशुदा जीवन को लेकर आपकी जो धारणाएं हैं। आज वह संशोधितगी और आप अपने जीवनसाथी से काफी निकटता महसूस करेंगे। आप समझेंगे कि दांपत्य जीवन वास्तव में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच खेला जा रहा है। इंग्लैंड के साउथैम्पटन में खिताबी जंग जारी है, जहां वैसे तो इन्द्र देवता ने काफी हद तक अपना रौद्र रूप दिखाते हुए मैच को बर्बाद किया है। लेकिन जो खेल हुआ वहां इंग्लैंड की कंडीशन के अनुसार जबरदस्त स्विंग गेंदबाजी देखने को मिली। इंग्लैंड की सरजमीं पर गेंदबाजों को जबरदस्त स्विंग हासिल होती है, ऐसे में पहले से ही इसका अनुमान था. न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने कंडीशन का जबरदस्त फायदा उठाते हुए अपनी स्विंग गेंदबाजी का नमूना पेश किया। वहीं दूसरी तरफ भारतीय टीम के गेंदबाजों को ज्यादा स्विंग हासिल नहीं हो सकी। भारत ने इस मैच में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा को मौका दिया। तीनों ही गेंदबाजों का नाम विश्वस्तरीय माना जाता है। भारत के गेंदबाजों को इस स्विंग कंडीशन में पहली सफलता के लिए 34 ओवर का इंतजार करना पड़ा और वो पहला विकेट भी स्पिन गेंदबाज ने दिलाया। इसी बात का कारण न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर साइमन डूल ने बताया है। साइमन डूल ने भारत के गेंदबाजों को स्विंग नहीं मिलने का कारण बताया है। जिसमें उन्होंने अभ्यास की कमी को प्रमुख वजह माना।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच खेला जा रहा है। इंग्लैंड के साउथैम्पटन में खिताबी जंग जारी है, जहां वैसे तो इन्द्र देवता ने काफी हद तक अपना रौद्र रूप दिखाते हुए मैच को बर्बाद किया है। लेकिन जो खेल हुआ वहां इंग्लैंड की कंडीशन के अनुसार जबरदस्त स्विंग गेंदबाजी देखने को मिली। इंग्लैंड की सरजमीं पर गेंदबाजों को जबरदस्त स्विंग हासिल होती है, ऐसे में पहले से ही इसका अनुमान था. न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने कंडीशन का जबरदस्त फायदा उठाते हुए अपनी स्विंग गेंदबाजी का नमूना पेश किया। वहीं दूसरी तरफ भारतीय टीम के गेंदबाजों को ज्यादा स्विंग हासिल नहीं हो सकी। भारत ने इस मैच में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा को मौका दिया। तीनों ही गेंदबाजों का नाम विश्वस्तरीय माना जाता है। भारत के गेंदबाजों को इस स्विंग कंडीशन में पहली सफलता के लिए चौंतीस ओवर का इंतजार करना पड़ा और वो पहला विकेट भी स्पिन गेंदबाज ने दिलाया। इसी बात का कारण न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर साइमन डूल ने बताया है। साइमन डूल ने भारत के गेंदबाजों को स्विंग नहीं मिलने का कारण बताया है। जिसमें उन्होंने अभ्यास की कमी को प्रमुख वजह माना।
भुवनेश्वर, (भाषा)। कांग्रेस के वरिष्" नेता और महाराष्ट्र व गोवा के पूर्व राज्यपाल सेनायांग्बा चुबातोशी जमीर ःएस सी जमीर ःने आज ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। नगालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे जमीर को आज यहां राज भवन में उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चोकलिंगम नागप्पन ने इस पद की शपथ दिलाई। जमीर से पहले 82 वर्षीय मुरलीधर चंदकांत भंडारे यहां के राज्यपाल थे। उनका कार्यकाल पिछले साल 20 अगस्त को ही खत्म हो चुका था, लेकिन वे जमीर की नियुक्ति तक इस पद पर बने हुए थे। आधुनिक नगालैंउ के वास्तुकार माने जाने वाले जमीर इस उत्तर-पूर्वी राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भी रह चुके हैं। वर्ष 1961 में जमीर पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के संसदीय सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया। उस समय प्रधानमंत्री के पास ही विदेश मंत्रालय का प्रभार था। इसके बाद उन्हें रेल उप मंत्री बनाया गया। उन्होंने केंद में श्रम एवं पुनर्वास, सामुदायिक विकास व सहयोग और खाद्य एवं कृषि जैसे कई मंत्रालयों में भी सेवा दी। इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ साथ कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
भुवनेश्वर, । कांग्रेस के वरिष्" नेता और महाराष्ट्र व गोवा के पूर्व राज्यपाल सेनायांग्बा चुबातोशी जमीर ःएस सी जमीर ःने आज ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। नगालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे जमीर को आज यहां राज भवन में उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चोकलिंगम नागप्पन ने इस पद की शपथ दिलाई। जमीर से पहले बयासी वर्षीय मुरलीधर चंदकांत भंडारे यहां के राज्यपाल थे। उनका कार्यकाल पिछले साल बीस अगस्त को ही खत्म हो चुका था, लेकिन वे जमीर की नियुक्ति तक इस पद पर बने हुए थे। आधुनिक नगालैंउ के वास्तुकार माने जाने वाले जमीर इस उत्तर-पूर्वी राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भी रह चुके हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकसठ में जमीर पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के संसदीय सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया। उस समय प्रधानमंत्री के पास ही विदेश मंत्रालय का प्रभार था। इसके बाद उन्हें रेल उप मंत्री बनाया गया। उन्होंने केंद में श्रम एवं पुनर्वास, सामुदायिक विकास व सहयोग और खाद्य एवं कृषि जैसे कई मंत्रालयों में भी सेवा दी। इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ साथ कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
Fried Ice Cream: क्या आपने कभी फ्राइड आइसक्रीम के बारे में सुना है? केवल इतने में कर सकते हैं टेस्ट! Trending Video On Internet: सोशल मीडिया पर खाने की एक से बढ़कर एक चीज की रेसेपीज मौजूद रहती हैं. ऐसे में आपने कभी फ्राइड आइसक्रीम (Fried Ice Cream) के बारे में सुना है. अगर आप भी एक फूडी हैं तो आपको एक बार तो इसे जरूर ट्राई (Try) करना चाहिए. Foodies Must Try This Ice Cream: इस वीडियो में एक शख्स को आइसक्रीम के एक स्कूप को निकालकर उससे एक रोल (Roll) बनाते हुए देखा जा सकता है. इस रोल में वो कई सारी चीजों (Different Items) को मिक्स करता है. इसे देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे कौन सी खाने की चीज (Food) तैयार होने वाली है. सब चीजों को रोल के साथ मिलाकर ये इस रोल को गर्म तेल वाली कढ़ाई में डाल देता है और इस क्रिस्पी से लड्डू जैसे दिखने वाले रोल को अच्छे से फ्राई (Fry) करता है. जब ये रोल गोल्डन ब्राउन हो जाता है तब इसे कढ़ाई से बाहर निकाला जाता है. इस रोल को एक कटोरी में रखकर इसके ऊपर चॉकलेट सिरप (Chocolate Syrup) डाला जाता है. इस सब के बाद अब ये आइसक्रीम (Ice Cream) खाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. देखने में ये बड़ी टेस्टी लग रही है. इस वीडियो को देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ सकता है. भले ही इसका तरीका अजीब था लेकिन इसके टेस्ट (Taste) के बहुत से लोग दीवाने हैं. इतना ही नहीं इस वीडियो को भी कई लोगों ने पसंद (Like) किया है. इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि ये आइसक्रीम केवल 99 रुपये में खरीदी जा सकती है. खाने के शौकीन (Foodie) अक्सर कुछ ना कुछ नया ट्राई करने के लिए उतावले रहते हैं. इस वीडियो ने ऐसे लोगों को अच्छा खासा लालच दिलाया है. लेकिन कुछ लोगों (Social Media Users) ने इस तरह से आइसक्रीम बनाने के लिए वीडियो की आलोचना (Criticise) भी की.
Fried Ice Cream: क्या आपने कभी फ्राइड आइसक्रीम के बारे में सुना है? केवल इतने में कर सकते हैं टेस्ट! Trending Video On Internet: सोशल मीडिया पर खाने की एक से बढ़कर एक चीज की रेसेपीज मौजूद रहती हैं. ऐसे में आपने कभी फ्राइड आइसक्रीम के बारे में सुना है. अगर आप भी एक फूडी हैं तो आपको एक बार तो इसे जरूर ट्राई करना चाहिए. Foodies Must Try This Ice Cream: इस वीडियो में एक शख्स को आइसक्रीम के एक स्कूप को निकालकर उससे एक रोल बनाते हुए देखा जा सकता है. इस रोल में वो कई सारी चीजों को मिक्स करता है. इसे देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे कौन सी खाने की चीज तैयार होने वाली है. सब चीजों को रोल के साथ मिलाकर ये इस रोल को गर्म तेल वाली कढ़ाई में डाल देता है और इस क्रिस्पी से लड्डू जैसे दिखने वाले रोल को अच्छे से फ्राई करता है. जब ये रोल गोल्डन ब्राउन हो जाता है तब इसे कढ़ाई से बाहर निकाला जाता है. इस रोल को एक कटोरी में रखकर इसके ऊपर चॉकलेट सिरप डाला जाता है. इस सब के बाद अब ये आइसक्रीम खाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. देखने में ये बड़ी टेस्टी लग रही है. इस वीडियो को देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ सकता है. भले ही इसका तरीका अजीब था लेकिन इसके टेस्ट के बहुत से लोग दीवाने हैं. इतना ही नहीं इस वीडियो को भी कई लोगों ने पसंद किया है. इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि ये आइसक्रीम केवल निन्यानवे रुपयापये में खरीदी जा सकती है. खाने के शौकीन अक्सर कुछ ना कुछ नया ट्राई करने के लिए उतावले रहते हैं. इस वीडियो ने ऐसे लोगों को अच्छा खासा लालच दिलाया है. लेकिन कुछ लोगों ने इस तरह से आइसक्रीम बनाने के लिए वीडियो की आलोचना भी की.
Bollywood News: 53 साल की उम्र में इरफान खान (Irrfan Khan) का निधन मुंबई में स्थित एक अस्पताल में हुआ। Bollywood News: बीते बुधवार बॉलीवुड के गलियारे से पहली दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। इस दिन दिग्गज अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) का निधन हो गया। जबकि इसके ठीक दूसरे दिन ही ऋषि कपूर के निधन की दुखद जानकारी सामने आ गई। जिससे पूरे देश सन्न रह गया। इरफान खान ने मुंबई स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांसें ली। इरफान खान 53 साल के थे। उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर था। जिसके इलाज के चलते वो करीब डेढ साल लंदन में भी रहे थे। बीमारी के बीच ठीक होकर इरफान खान ने फिल्मी पर्दे पर दोबारा वापसी की भी कोशिश की। लेकिन वो जल्दी ठीक नहीं हो पाए। बीते बुधवार कोलन इंफेक्शन के बढ़ने के बाद परिवार वालों ने उनको अस्पताल में भर्ती कराया था। जिसके बीच वो जिंदगी की जंग हार बैठे। इरफान खान अपने पीछे पत्नी सुतापा सिकदर और दो बेटे- बाबिल और अयान को छोड़ गए हैं। लेकिन इस बीच अब मीडिया में ये खबरें सामने आ रही हैं कि निधन के बाद एक्टर अपने परिवार के लिए कितनी संपत्ति छोड़ गए है। खबरों की मानें तो, अभिनेता इरफान खान परिवार के लिए करीब 320 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी छोड़ गए है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर के पास मुंबई में जुहू स्थित एक आलीशान फ्लैट है। इरफान खान एक दिग्गज अभिनेता थे। जिन्होंने कम समय में ही बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा था। उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए लोग मुंहमांगी रकम देने के लिए तैयार रहते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर एक फिल्म के लिए तकरीबन 15 करोड़ रुपये चार्ज करते थे। इसके अलावा वो किसी इवेंट का हिस्सा बनने के लिए और विज्ञापनों के लिए अच्छी रकम मिलती थी। कहा जाता है कि इरफान खान सिर्फ एक एड शूट के लिए 5 करोड़ रुपये लेते थे। ऐसे में उन्होंने कई शानदार फिल्में अपने चाहने वालों को दी। वो हॉलीवुड तक अपने नाम का डंका बजा चुके थे। फिल्म जुरासिक वर्ल्ड और द नेमसेक जैसी हॉलीवुड फिल्मों में इरफान खान की एक्टिंग का करिश्मा दिखा था। इसके अलावा भी एक्टर ने कई हॉलीवुड प्रोजेक्ट किए है। लेकिन अब जब वो इस दुनिया में नहीं है तो अपने पीछे परिवार के लिए जिंदगी की गाढ़ी कमाई छोड़ गए है। दुखद है कि महान कलाकार की अंतिम यात्रा में महज चंद लोग ही शामिल हो पाए थे। एक्टर की अंतिम विदाई में कोरोना वायरल लॉकडाउन के चलते चंद लोग ही शामिल हुए थे। उनके शव को वर्सोवा के कब्रिस्तान में दफनाया गया है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Bollywood News: तिरेपन साल की उम्र में इरफान खान का निधन मुंबई में स्थित एक अस्पताल में हुआ। Bollywood News: बीते बुधवार बॉलीवुड के गलियारे से पहली दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। इस दिन दिग्गज अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया। जबकि इसके ठीक दूसरे दिन ही ऋषि कपूर के निधन की दुखद जानकारी सामने आ गई। जिससे पूरे देश सन्न रह गया। इरफान खान ने मुंबई स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांसें ली। इरफान खान तिरेपन साल के थे। उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर था। जिसके इलाज के चलते वो करीब डेढ साल लंदन में भी रहे थे। बीमारी के बीच ठीक होकर इरफान खान ने फिल्मी पर्दे पर दोबारा वापसी की भी कोशिश की। लेकिन वो जल्दी ठीक नहीं हो पाए। बीते बुधवार कोलन इंफेक्शन के बढ़ने के बाद परिवार वालों ने उनको अस्पताल में भर्ती कराया था। जिसके बीच वो जिंदगी की जंग हार बैठे। इरफान खान अपने पीछे पत्नी सुतापा सिकदर और दो बेटे- बाबिल और अयान को छोड़ गए हैं। लेकिन इस बीच अब मीडिया में ये खबरें सामने आ रही हैं कि निधन के बाद एक्टर अपने परिवार के लिए कितनी संपत्ति छोड़ गए है। खबरों की मानें तो, अभिनेता इरफान खान परिवार के लिए करीब तीन सौ बीस करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी छोड़ गए है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर के पास मुंबई में जुहू स्थित एक आलीशान फ्लैट है। इरफान खान एक दिग्गज अभिनेता थे। जिन्होंने कम समय में ही बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा था। उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए लोग मुंहमांगी रकम देने के लिए तैयार रहते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर एक फिल्म के लिए तकरीबन पंद्रह करोड़ रुपये चार्ज करते थे। इसके अलावा वो किसी इवेंट का हिस्सा बनने के लिए और विज्ञापनों के लिए अच्छी रकम मिलती थी। कहा जाता है कि इरफान खान सिर्फ एक एड शूट के लिए पाँच करोड़ रुपये लेते थे। ऐसे में उन्होंने कई शानदार फिल्में अपने चाहने वालों को दी। वो हॉलीवुड तक अपने नाम का डंका बजा चुके थे। फिल्म जुरासिक वर्ल्ड और द नेमसेक जैसी हॉलीवुड फिल्मों में इरफान खान की एक्टिंग का करिश्मा दिखा था। इसके अलावा भी एक्टर ने कई हॉलीवुड प्रोजेक्ट किए है। लेकिन अब जब वो इस दुनिया में नहीं है तो अपने पीछे परिवार के लिए जिंदगी की गाढ़ी कमाई छोड़ गए है। दुखद है कि महान कलाकार की अंतिम यात्रा में महज चंद लोग ही शामिल हो पाए थे। एक्टर की अंतिम विदाई में कोरोना वायरल लॉकडाउन के चलते चंद लोग ही शामिल हुए थे। उनके शव को वर्सोवा के कब्रिस्तान में दफनाया गया है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Domestic Airfares Increased: देश के भीतर अब उड़ान भरना महंगा हो गया है. एविएशन मिनिस्ट्री ने गुरुवार देर रात डोमेस्टिक एयर फेयर्स के न्यूनतम और अधिकतम दोनों स्तरों में 12. 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. सरकार ने एयरलाइंस को 7. 5% अधिक डोमेस्टिक फ्लाइट ऑपरेट करने की अनुमति देने के साथ किराए में बढ़ोतरी की है. डोमेस्टिक फ्लाइट की कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट अब 65% से बढ़कर 72. 5% हो गई है. कोविड महामारी को देखते हुए एविएशन मिनिस्ट्री लगातार डोमेस्टिक फेयर और कैपेसिटी दोनों को रेग्यूलेट कर रही है. सरकार ने 1 जून, 2021 को डोमेस्टिक एयर फेयर्स में 15% की बढ़ोतरी की थी, जबकि कोरोना की दूसरी लहर की वजह से फ्लाइट्स को प्री-कोविड लेवल के 80% से घटाकर 50% कर दिया गया था. 5 जुलाई को कैपेसिटी को बढ़ाकर 65% कर दिया गया. अब ये कैपेसिटी 72. 5% कर दी गई है. सरकार के किराए बढ़ाए जाने के बाद दिल्ली-मुंबई का वन-वे मिनिमम फेयर 4,700 रुपये से बढ़कर 5287. 5 रुपये हो गया है. वहीं मैक्सिमम फेयर 13,000 रुपये से बढ़कर 14,625 रुपये. इसमें टैक्स शामिल नहीं है. जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इस साल एयर फेयर्स में यह चौथी बढ़ोतरी है. किसी भी एयरलाइन का सबसे ज्यादा खर्च फ्यूल पर ही होता है. भारत की ज्यादातर एयरलाइन महामारी के दौरान सरकार से किसी भी वित्तीय सहायता के अभाव में सरवाइव करने के लिए संघर्ष कर रही हैं. 25 मई, 2020 को दो महीने के ब्रेक के बाद जब शेड्यूल डोमेस्टिक फ्लाइट्स फिर से शुरू हुईं थी, तो सरकार ने एयरलाइनों को कोविड के समय से पहले की फ्लाइट्स की तुलना में एक-तिहाई फ्लाइट्स के साथ शुरू करने को कहा था. इसके साथ ही सरकार ने फेयर बैंड भी तय किया था ताकि दो चीजें सुनिश्चित हो सके. पहली यह कि कोई भी एयरलाइन पैसेंजर से मनमाना किराया न वसूल सके. दूसरी यह कि जो भी एयरलाइन फाइनेंशियली मजबूत है वो किराए को इतना ज्यादा कम न कर दें कि आर्थिक रूप से कमजोर एयरलाइन पर इसका असर पड़े और वह बैंकरप्ट हो जाए. कई एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटर सरकार से इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण से मुक्त करने के लिए कह रहे हैं. एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि इस सेक्टर के रिवाइवल के लिए किराया तय करने की जिम्मेदारी मार्केट पर छोड़ दी जाना चाहिए. एयरलाइन और होटल समेत पूरी ट्रैवल इंडस्ट्री को ऐसा लगता है कि उनका अस्तित्व डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पर टिका हुआ है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल ट्रैवल को पूरी तरह से खुलने में समय लग सकता है. महामारी की वजह से कई देशों में भारतीय पर्यटकों को अनुमति नहीं दी जा रही है.
Domestic Airfares Increased: देश के भीतर अब उड़ान भरना महंगा हो गया है. एविएशन मिनिस्ट्री ने गुरुवार देर रात डोमेस्टिक एयर फेयर्स के न्यूनतम और अधिकतम दोनों स्तरों में बारह. पाँच प्रतिशत की बढ़ोतरी की. सरकार ने एयरलाइंस को सात. पाँच% अधिक डोमेस्टिक फ्लाइट ऑपरेट करने की अनुमति देने के साथ किराए में बढ़ोतरी की है. डोमेस्टिक फ्लाइट की कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट अब पैंसठ% से बढ़कर बहत्तर. पाँच% हो गई है. कोविड महामारी को देखते हुए एविएशन मिनिस्ट्री लगातार डोमेस्टिक फेयर और कैपेसिटी दोनों को रेग्यूलेट कर रही है. सरकार ने एक जून, दो हज़ार इक्कीस को डोमेस्टिक एयर फेयर्स में पंद्रह% की बढ़ोतरी की थी, जबकि कोरोना की दूसरी लहर की वजह से फ्लाइट्स को प्री-कोविड लेवल के अस्सी% से घटाकर पचास% कर दिया गया था. पाँच जुलाई को कैपेसिटी को बढ़ाकर पैंसठ% कर दिया गया. अब ये कैपेसिटी बहत्तर. पाँच% कर दी गई है. सरकार के किराए बढ़ाए जाने के बाद दिल्ली-मुंबई का वन-वे मिनिमम फेयर चार,सात सौ रुपयापये से बढ़कर पाँच हज़ार दो सौ सत्तासी. पाँच रुपयापये हो गया है. वहीं मैक्सिमम फेयर तेरह,शून्य रुपयापये से बढ़कर चौदह,छः सौ पच्चीस रुपयापये. इसमें टैक्स शामिल नहीं है. जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इस साल एयर फेयर्स में यह चौथी बढ़ोतरी है. किसी भी एयरलाइन का सबसे ज्यादा खर्च फ्यूल पर ही होता है. भारत की ज्यादातर एयरलाइन महामारी के दौरान सरकार से किसी भी वित्तीय सहायता के अभाव में सरवाइव करने के लिए संघर्ष कर रही हैं. पच्चीस मई, दो हज़ार बीस को दो महीने के ब्रेक के बाद जब शेड्यूल डोमेस्टिक फ्लाइट्स फिर से शुरू हुईं थी, तो सरकार ने एयरलाइनों को कोविड के समय से पहले की फ्लाइट्स की तुलना में एक-तिहाई फ्लाइट्स के साथ शुरू करने को कहा था. इसके साथ ही सरकार ने फेयर बैंड भी तय किया था ताकि दो चीजें सुनिश्चित हो सके. पहली यह कि कोई भी एयरलाइन पैसेंजर से मनमाना किराया न वसूल सके. दूसरी यह कि जो भी एयरलाइन फाइनेंशियली मजबूत है वो किराए को इतना ज्यादा कम न कर दें कि आर्थिक रूप से कमजोर एयरलाइन पर इसका असर पड़े और वह बैंकरप्ट हो जाए. कई एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटर सरकार से इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण से मुक्त करने के लिए कह रहे हैं. एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि इस सेक्टर के रिवाइवल के लिए किराया तय करने की जिम्मेदारी मार्केट पर छोड़ दी जाना चाहिए. एयरलाइन और होटल समेत पूरी ट्रैवल इंडस्ट्री को ऐसा लगता है कि उनका अस्तित्व डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पर टिका हुआ है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल ट्रैवल को पूरी तरह से खुलने में समय लग सकता है. महामारी की वजह से कई देशों में भारतीय पर्यटकों को अनुमति नहीं दी जा रही है.
तो फिर किस दृष्टिकोण से व्यक्ति अपने सुख को लात मारकर अन्य के लिये सचेष्ट होगा। अतः सुखवादी आधार पर यह कदापि सम्भव नहीं । पूर्णतावाद ने तो अपना दृष्टिकोण ही बदल लिया है । इसके अनुसार सर्वोच्च आदर्श सुख-प्राति नहीं, वरन आत्मप्रति (Self-Realization) यात्म-पूर्ति (Self-Perfection) है । हमने अपने व्यक्तित्व और मनुष्य के अंतर को देखा है। व्यक्तियों मे तर है; पर तभी तक, जबकि वे इन्द्रियो द्वारा संचालित होते हैं । व्यक्तित्व ही एक व्यक्ति को दूसरे से अलग करता है । ऐसी परिस्थिति में आपस मे व्यक्तियों में संघर्ष और स्पर्धा की भावना रहती है । वे साथ मिलकर नहीं चल सकते । पर व्यक्तियों मे जहाँ विभिन्नता है, वहाँ समानता भी है । मनुष्यत्व एक ऐसा गुण है, जो सभी व्यक्तियों से वर्त्तमान होता है । मनुष्यत्व के कारण ही व्यक्ति विवेक द्वारा संचालित होता है। उसकी इन्द्रियाँ नियंत्रित हो जाती हैं। चूँ कि मनुष्य समाज से अलग रह नहीं सकता; अतः उसके मर्श की पूर्ति समाज में ही हो सकती है । यहाँ वह समाज के व्यक्तियों का प्रतिद्वन्द्वी नहीं होता, वरन् उनका सहायक होता है और, साथ ही, समाज में अपना भी सहायक पा लेता है । उसका मनुष्यत्व उसे इस चीज के लिये प्रेरित करता है कि के लिये आत्म-त्याग और परार्थ के लिये, आत्म-श्याग ही तो मनुष्यता का लक्षण है । अतः आत्म-प्राप्ति एक ऐसा नैतिक आदर्श है, जिसकी प्राप्ति स्वार्थ और परार्थ के संघर्ष से नहीं, वरन् एकीकरण से होता है । इस प्रकार यह सिद्धांत स्वार्थ और परार्थ से संधि कराने में सफल होता है । सुखवाद और विवेकवाद में सन्धि Reconciliation between Hedonism and Rationalism सुखवाद और विवेकवाद के संघर्ष से भी हम परिचित हैं। सुखवादियों के अनुसार जीवन की बागडोर इन्द्रियों के हाथ होनी चाहिये, तो दूसरी ओर, विवेकवादियों के मत में इन्द्रियाँ हमे नीचे गिराती है । अतः उनका विनाश ही हमारा चरम आदर्श है । जीवन में इच्छा का कोई स्थान नहीं होना चाहिये । परन्तु जैसाकि सेथ (Jeth) महोदय ने कहा है कि यह समस्या और भी है। जीवन के सम्बन्ध मे उनलोगो; का यह दृष्टिकोण उनके व्यक्ति के सम्बन्ध के विचारों का नतीजा है । "व्यक्ति या आत्म (Self) क्या है ? किस आत्मा की पूर्ति हमारा आदर्श है? सुखवाद का उत्तर है- ऐन्द्रिक (Sentient) व्यक्ति की पूर्ति । विवेकवाद का कहना है बौद्धिक (Rational) व्यक्ति की पूर्त्ति; परन्तु पूर्णतावाद के अनुसार सम्पूर्ण व्यक्ति अर्थात् ऐन्द्रिक और बौद्धिक दोनों ही की पूर्ति हमारा आदर्श है । " १ इस प्रकार पूर्णतावादके अनुसार मनुष्य के दोनो ही बुद्धि की पूर्ति होनी चाहिये । इन्द्रियाँ और इच्छाए निरर्थक नहीं । जीवन मे उनकी सार्थकता है । यह सही है कि जीवन में बुद्धि का स्थान ऊँचा है । इच्छा को उसके नियन्त्रण में रहना ही चाहिये । परन्तु काण्ट की यह भूल थी कि उसने इच्छा को अनिवार्यतः बुरा ही माना । जिस प्रकार गंदगी कोई चीज नहीं, वरन् किसी वस्तु का अनुचित स्थान में रहना ही गंदगी है, उसी प्रकार इच्छाए बुरी नहीं होती, वरन् उनका अनियन्त्रित होना ही उन्हें बुरा बना देता है । इसे हम उदाहरण द्वारा समझें । जब तक भोजन की सामग्रियाँ रसोईघर मे उचित ढंग से रखी रहती हैं, उन्हें कोई गंदा नहीं कहता । परन्तु उसी खाने को यदि सड़क पर अनुचित स्थानों पर अनुचित ढंग से फेंक दिया जाता है, तो वह गन्दगी की संज्ञा ग्रहण कर लेता है । इसका अर्थ है कि भोजन में गन्दा नहीं है, वरन् अनुचित स्थान और १ " The qustion is : what is the self ? Which self is to be realized? Hedonism answers: Th, sentient self; Rationalism answers : The rational self; Eudaemonism the total self, ration and sentient."
तो फिर किस दृष्टिकोण से व्यक्ति अपने सुख को लात मारकर अन्य के लिये सचेष्ट होगा। अतः सुखवादी आधार पर यह कदापि सम्भव नहीं । पूर्णतावाद ने तो अपना दृष्टिकोण ही बदल लिया है । इसके अनुसार सर्वोच्च आदर्श सुख-प्राति नहीं, वरन आत्मप्रति यात्म-पूर्ति है । हमने अपने व्यक्तित्व और मनुष्य के अंतर को देखा है। व्यक्तियों मे तर है; पर तभी तक, जबकि वे इन्द्रियो द्वारा संचालित होते हैं । व्यक्तित्व ही एक व्यक्ति को दूसरे से अलग करता है । ऐसी परिस्थिति में आपस मे व्यक्तियों में संघर्ष और स्पर्धा की भावना रहती है । वे साथ मिलकर नहीं चल सकते । पर व्यक्तियों मे जहाँ विभिन्नता है, वहाँ समानता भी है । मनुष्यत्व एक ऐसा गुण है, जो सभी व्यक्तियों से वर्त्तमान होता है । मनुष्यत्व के कारण ही व्यक्ति विवेक द्वारा संचालित होता है। उसकी इन्द्रियाँ नियंत्रित हो जाती हैं। चूँ कि मनुष्य समाज से अलग रह नहीं सकता; अतः उसके मर्श की पूर्ति समाज में ही हो सकती है । यहाँ वह समाज के व्यक्तियों का प्रतिद्वन्द्वी नहीं होता, वरन् उनका सहायक होता है और, साथ ही, समाज में अपना भी सहायक पा लेता है । उसका मनुष्यत्व उसे इस चीज के लिये प्रेरित करता है कि के लिये आत्म-त्याग और परार्थ के लिये, आत्म-श्याग ही तो मनुष्यता का लक्षण है । अतः आत्म-प्राप्ति एक ऐसा नैतिक आदर्श है, जिसकी प्राप्ति स्वार्थ और परार्थ के संघर्ष से नहीं, वरन् एकीकरण से होता है । इस प्रकार यह सिद्धांत स्वार्थ और परार्थ से संधि कराने में सफल होता है । सुखवाद और विवेकवाद में सन्धि Reconciliation between Hedonism and Rationalism सुखवाद और विवेकवाद के संघर्ष से भी हम परिचित हैं। सुखवादियों के अनुसार जीवन की बागडोर इन्द्रियों के हाथ होनी चाहिये, तो दूसरी ओर, विवेकवादियों के मत में इन्द्रियाँ हमे नीचे गिराती है । अतः उनका विनाश ही हमारा चरम आदर्श है । जीवन में इच्छा का कोई स्थान नहीं होना चाहिये । परन्तु जैसाकि सेथ महोदय ने कहा है कि यह समस्या और भी है। जीवन के सम्बन्ध मे उनलोगो; का यह दृष्टिकोण उनके व्यक्ति के सम्बन्ध के विचारों का नतीजा है । "व्यक्ति या आत्म क्या है ? किस आत्मा की पूर्ति हमारा आदर्श है? सुखवाद का उत्तर है- ऐन्द्रिक व्यक्ति की पूर्ति । विवेकवाद का कहना है बौद्धिक व्यक्ति की पूर्त्ति; परन्तु पूर्णतावाद के अनुसार सम्पूर्ण व्यक्ति अर्थात् ऐन्द्रिक और बौद्धिक दोनों ही की पूर्ति हमारा आदर्श है । " एक इस प्रकार पूर्णतावादके अनुसार मनुष्य के दोनो ही बुद्धि की पूर्ति होनी चाहिये । इन्द्रियाँ और इच्छाए निरर्थक नहीं । जीवन मे उनकी सार्थकता है । यह सही है कि जीवन में बुद्धि का स्थान ऊँचा है । इच्छा को उसके नियन्त्रण में रहना ही चाहिये । परन्तु काण्ट की यह भूल थी कि उसने इच्छा को अनिवार्यतः बुरा ही माना । जिस प्रकार गंदगी कोई चीज नहीं, वरन् किसी वस्तु का अनुचित स्थान में रहना ही गंदगी है, उसी प्रकार इच्छाए बुरी नहीं होती, वरन् उनका अनियन्त्रित होना ही उन्हें बुरा बना देता है । इसे हम उदाहरण द्वारा समझें । जब तक भोजन की सामग्रियाँ रसोईघर मे उचित ढंग से रखी रहती हैं, उन्हें कोई गंदा नहीं कहता । परन्तु उसी खाने को यदि सड़क पर अनुचित स्थानों पर अनुचित ढंग से फेंक दिया जाता है, तो वह गन्दगी की संज्ञा ग्रहण कर लेता है । इसका अर्थ है कि भोजन में गन्दा नहीं है, वरन् अनुचित स्थान और एक " The qustion is : what is the self ? Which self is to be realized? Hedonism answers: Th, sentient self; Rationalism answers : The rational self; Eudaemonism the total self, ration and sentient."
छात्र, खास कर जो किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हो कठोर अध्ययन कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं। ऐसे बच्चों का ज्यादा समय पढ़ाई में जाता है। कोई पूरे दिन पढ़ता है कोई रात में तो कोई सुबह। वैसे तो बच्चे अपने सहुलियत के हिसाब से पढ़ना पसंद करते हैं, जिससे उनके सोने और जागने का समय अलग होता है। लेकिन प्रतियोगी बच्चों को यह जानना बेहद ही जरूरी है कि सुबह सही समय पर उठना हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद ही फायदेमंद है। ऐसा माना जाता है कि सुबह 4.30 बजे उठने वाले बच्चों का दिमाग अन्य बच्चों के मुकाबले में ज्यादा तेज होता है। अध्ययन का आदर्श समय सुबह का ही होता है। दरअसल सुबह जल्दी उठने के कई सारे फायदे हैं। यह समय बेहद ही शांतिपूर्ण होता है जिसकी वजह से आप बिना किसी परेशानी के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। वहीं, इस समय मन कम भटकता है इसलिए आप पूरे कॉन्संट्रेशन के साथ पढ़ाई कर पाते हैं। परंपरागत रूप से, सुबह का समय वह समय माना जाता है जब हमारा दिमाग तरोताजा और सतर्क होता है। सुबह के समय हमारा दिमाग तरोताजा रहता है और हमारी अल्पकालिक स्मृति मजबूत होती है। ऐसी भी मान्यता है कि अंधेरे की तुलना में सूरज की रोशनी दिमाग को अधिक सतर्क रहने में मदद करती है। लेकिन हर कोई एक ही पैटर्न का पालन नहीं करता है। कुछ लोग रात में अधिक उत्पादक होते हैं। बहुत सारे अध्ययनों से पता चलता है कि मस्तिष्क सुबह में सूचनाओं को बेहतर ढंग से संसाधित करता है, लेकिन यह क्रोनोटाइप (एक निश्चित समय पर सोने के लिए शरीर की प्राकृतिक प्रवृत्ति) की अवधारणा के कारण भिन्न होता है,।
छात्र, खास कर जो किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हो कठोर अध्ययन कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं। ऐसे बच्चों का ज्यादा समय पढ़ाई में जाता है। कोई पूरे दिन पढ़ता है कोई रात में तो कोई सुबह। वैसे तो बच्चे अपने सहुलियत के हिसाब से पढ़ना पसंद करते हैं, जिससे उनके सोने और जागने का समय अलग होता है। लेकिन प्रतियोगी बच्चों को यह जानना बेहद ही जरूरी है कि सुबह सही समय पर उठना हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद ही फायदेमंद है। ऐसा माना जाता है कि सुबह चार.तीस बजे उठने वाले बच्चों का दिमाग अन्य बच्चों के मुकाबले में ज्यादा तेज होता है। अध्ययन का आदर्श समय सुबह का ही होता है। दरअसल सुबह जल्दी उठने के कई सारे फायदे हैं। यह समय बेहद ही शांतिपूर्ण होता है जिसकी वजह से आप बिना किसी परेशानी के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। वहीं, इस समय मन कम भटकता है इसलिए आप पूरे कॉन्संट्रेशन के साथ पढ़ाई कर पाते हैं। परंपरागत रूप से, सुबह का समय वह समय माना जाता है जब हमारा दिमाग तरोताजा और सतर्क होता है। सुबह के समय हमारा दिमाग तरोताजा रहता है और हमारी अल्पकालिक स्मृति मजबूत होती है। ऐसी भी मान्यता है कि अंधेरे की तुलना में सूरज की रोशनी दिमाग को अधिक सतर्क रहने में मदद करती है। लेकिन हर कोई एक ही पैटर्न का पालन नहीं करता है। कुछ लोग रात में अधिक उत्पादक होते हैं। बहुत सारे अध्ययनों से पता चलता है कि मस्तिष्क सुबह में सूचनाओं को बेहतर ढंग से संसाधित करता है, लेकिन यह क्रोनोटाइप की अवधारणा के कारण भिन्न होता है,।
कि आपके शरीर को उठाकर नीचे डाल दिया है। यह मैंने अच्छा नहीं किया। मैंने अपना विचार त्याग दिया । यदि विचार किये होता तो सम्भवतः मुझसे ऐसी भूल कदापि न होती । सो कृपाकर आप मुझे क्षमा करें । श्री योगवाशिष्ठ भाषा, निर्वाण - प्रकरण- उत्तराद्ध का सरसठवां सगँ समाप्त ॥३७॥ अरसठवाँ सर्ग हे रामजी ! जब इस प्रकार मुझसे कहकर वह तपस्वी चुप हो गया तब मैंने उससे कहा - हे साधो ! तुम बड़े ही विचारवान् हो । वती बातों की चिन्ता क्यों करते हो विचारवान पुरुष गई बात की. "चिता नहीं करते । तुम तो अपनी भूल कहते हो, परन्तु मुझसे भी तो भूल हुई है, मैंने भी तो बिना बिचारे ही तुम्हारी कुटी को गिरा दिया है। यदि मैं तनिक भी विचार किये होता तो वह मेरी कुटी कि जिसमें बैठे हुए आनन्द लाभं कर रहे थे कदापि न गिरने पाती क्योंकि वह तो मेर ही संकल्प में स्थित थी । यदि मैं विचार किये होता तो वह कैसे गिरती । फिर भी जो होना था सो हो गया, उस की चिन्ता त्यागकर बम की सुधि लीजिये और जहां जाना ही अपने स्थान को जाओ मैं भी अपने लोक को जाता हूँ । हे (रामजी ! जब मैंने ऐसा कहा तब वह तपस्वी वहां से उठा और मैं भी उसके साथ ही आकाश को उड़ा । चलते २ हम दोनों बहुत ही दूर चले गये और मार्ग में हमने कितने ही लोकालोक के दृश्य देखे कि जिन सबका वर्णन ही असम्भव है। निदान वह अपने लोक को और मैं अपने स्थान को चला आया। वशिष्ठजी के ऐसा कहने पर रामजी ने पूछा हे मुनीश्वर ! आपका पञ्च भौतिक शरीर तो पृथ्वी पर गिर पड़ा था । फिर आपने किस शरीर से सब यात्रा की । वशिष्ठजी कहने लगे हे रामजी । वह शरीर तो गिर गया था परन्तु मेरा अन्तवाहक शरीर तो नहीं गिरा था न, उस शरीर से मैंने सब लोकों और सव देवताओं के सव स्थान देख लिये । इस पर यदि तुम यह कहो कि अन्तवाहक शरीर से मैंने उस तपस्वी को कैसे देखा तो इसका उत्तर यह सुनो कि मेरा संकल्प सच्चा था और उससे मैंने जो चाहा सो देख लिया और इसी प्रकार संकल्प की सत्यता से ही उस सिद्ध ने भी मुझे देख लिया था । इस प्रकार हम दोनों के संकल्प सत्य और एक दूसरे के अनुरूप और मिलते जुलते थे कि जिस कारण हम दोनों ने एक दूसरे को देखा । संकल्प की समानता और एकता एक दूसरे को मिला देती है। चाहे कोई कैसा भी तपस्वी क्यों न हो यदि उसका संकल्प इतना बलवान न हो कि वह दूसरे के संकल्पको न जान सके तो उसकी समस्त सिद्धता व्यर्थ है । संकल्प की दृढ़ता ही एक दूसरे को खींचती है। संकल्प से तुम जिसको चाहों उसे अपनी ओर खींच सकते हो, उससे जो चाहो सो काम करा ले सकते हो । हां, संकल्प में उतनी दृढ़ता, उतनी शक्ति और उतनी ही सत्यता तथा उतना अभ्यास होना चाहिये । फिर जिसको चाहो उसको भली भांति अपनी ओर खींच लो। करके देखो. कुछ भी कठिन नहीं है। जिसका संकल्प वली होता है उसी की जय होती है । मेरा संकल्प वलवान था, मेरे ही कुटी में वह स्थित था इस कारण मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया । हे रामजी ! अन्तवाहकता एवं संकल्प शक्ति में ही सब कुछ स्थित है । जिसको यह अवस्था प्राप्त रहती है उसको ऐसे २ प्रसङ्ग तो क्या हैं बड़े से बड़े प्रसङ्ग भी अल्प होजाते हैं और उसे भूत भविष्य और वर्तमान तीनों काल का ज्ञान वना रहता है। परन्तु जो दिन रात सांसारिक व्यवहारों में ही लगा हुआ है उसको तो नेत्रों के सन्मुख समक्ष वाले वर्तमान पदार्थ ही भासते हैं, इससे वह कुछ नहीं कर सकता परन्तु जो समाधिस्त है वह क्या नहीं कर सकता। मैं तो कुटी में अपना शरीर छोड़कर इधर उधर घूम रहा था कि जिससे में समाधि से परांमुख था और मेरी अवस्था चंचल हो गई थी और वह तपस्वी समाधि में रहकर अपने संकल्पों में ऐसा बलवान होरहा था कि उसने मेरे शरीर को नीचे गिरा दिया । यदि मैं पहले ही के समान अपनी समाधि में लगा रहता तो वह मुझे कैसे गिरा पाता। मेरे संकल्प की निर्बलता ने ही मेरी कुटिया को गिराया । परन्तु मेरा पूर्व का किया हुआ संकल्प इतना बजवान और निर्मल था कि मेरे स्मरण करते ही वह आ गया और जिस रूप में मैंने चाहा उस तपस्वी को देख लिया । हे रामजी संकल्प शक्ति से क्या नहीं हो सकता । यह जो इन्द्रलोक और कुचेर आदिक देवताओं के स्थान देखे वह सब मेरी अन्तवाहकता के ही गुण थे । मैं सबको ही देखता था और मुझे कोई न देखता था । जैसे स्वप्न में कोई शब्द करे और उसका शब्द किसी जाग्रत वाले को सुनाई नहीं पड़ता और जैसे संकल्प रहित वालों को किसी दूसरे की सृष्टि और उसके व्यवहार का शब्द नहीं जान पड़ता वैसे ही मुझको कोई न जानता था । तब सबसे पहले मैंने पिशाच शरीर धारण करके आकाश विचरण किया और उस अवस्था में मैंने देयों के स्थान देखे, परन्तु मुझे कोई न देख सका । इस पर रामजी ने पूछा - हे भगवन् ! पिशाच कैसे होते हैं, पिशाच की कोई जाति होती है और यदि जाति होती हैं तो उनके क्या कर्म धर्म हैं ? वशिष्ठजी कहने लगे -- हे रामजी ! पिशाच का कोई कार - - प्रकार नहीं होता फिर भी जैसा रूप धारण करते हैं वैसा सुनो। कोई पिशाच आकाश की नाई शून्य होते हैं और कोई छायारूप से भय दिखलाते हैं और कोई वादल के समान होते हैं और कोई कौवे के रूप में भय देते हैं । इसी प्रकार का भिन्न भिन्न रूप धारण करके वे सबको देखते हैं परन्तु उनको कोई नहीं देखता । वे शीत उष्ण से सर्वदा ही दुःखी रहते हैं और काम, क्रोध, लोभ मोह दिइच्छाओं से वे सर्वदा ही तपते रहते हैं। ठण्डा पानी और भोजन वे भी चाहते हैं और चे भी नगरों, वृक्षों और वनों में ही वास करते हैं। कभी वे कुत्ते के रूप में दिखलाई पड़ते हैं और कभी स्थिर आदि रूप धारण कर लेते हैं । वे किसी २ के मनमें प्रवेश कर जाते हैं और इसी प्रकार वे मन्त्र-तन्त्र और पूजा पाठ से सन्तुष्ट होजाया करते हैं । इनमें भी उत्तम, मध्यम और निकृष्ट होते हैं। उत्तम जाति वाले देव स्थानों में और मध्यम मनुष्यों में तथा नीच जाति वाले नरक स्थल में वास किया करते हैं। इनकी भी उत्पत्ति उसी अवैत्य शुद्ध चिन्मात्र से होती है । हे रामजी ! वह अपना आप शुद्ध और कल्प वृक्ष के समान ही चैतन्य और वर दाता हैं । उससे जैसी इच्छा एवं वासना की जाये बैसा प्राप्त होता है। उसमें न तो कहीं पिशाच हैं, न कहीं जगत है । ब्रह्मसत्ता ही स्वतः अपने आपमें स्थित है। उसी आत्मतत्व में जो किंचन हुआ है उसी 'अहं' को जीव कहते हैं । फिर उसी 'अहं' अर्थात् जीव की दृढ़ता से मन हुआ जो कि ब्रह्मारूप से स्थित हो रहा है । उसी ब्रह्मा ने मनोराज से जगत को उत्पन्न किया है और वही ब्रह्मा जगतरूप से स्थित हुआ है । अतः ब्रह्म में i ब्रह्म ही स्थित है। उस ब्रह्माका शरीर अन्तवाहक और केवल आकाश रूप है । उसी की संकल्प दृढ़ता से यह आधिभौतिक जगत दृढ़ हुआ है परन्तु यह सव.. कुछ मनरूप और दीर्घकाल के स्वप्नवत ही है । जात है इसी कारण इतना दृढ़ भास रहा है । हे रामजी ! इस ब्रह्मरूपी शरीर में जो संकल्प का अहंकार हुआ है इसीसे यह जगत और आधिभौतिकता भास रही है। परन्तु कुछ उत्पन्न नहीं, हुआ, सव संकल्परूप ही है । न में हूँ, न तुम हो, न जगत है -- सब कुछ ब्रह्मही है। जैसे आकाश और शून्यता में कुछ भेद नहीं है, वायु और उसकी गमनतामें कुछ भेद नहीं हैं, वैसेही ब्रह्म और जगत में कुछ भेद नहीं है। ब्रह्मा और जगत दोनों ही कुछ उपजे नहीं है। दोनोंही ब्रह्म तो भिन्नता भ्रान्ति से भासित रहे हैं । पञ्चभूत और मन इन्हीं छहों को जगत कहा जाता है। इनमें जो चेतन्य भास रहा है उसी को नाम परमपद है । हे रामजी ! जब तुम आत्मपद में जागृत होवोगे, तब पञ्चभूत ही भासित होगा और जब आत्मपद को जानोगे तब पञ्चभूत भी आत्मा से भिन्न ही भासित होगा। सबका अधष्ठान सत्ता ही है । आत्मप्रमाद से ही संसार भासित होरहा है । जब तक आत्मा में प्रमाद है तब तक संसार का भ्रम कदापि नहीं मिटता । परन्तु यह निराकार जगत संकल्प मात्र ही है । संकल्प की दृढ़ता से ही प्रकाश में स्थूलता दृष्टि आ रही है । ज्ञान ज्ञान किसी काल में भी जगत कुछ है नहीं परन्तु अज्ञानी को दृढ़ भास रहा है। जैसे मनोराज का रचा हुआ जगत उसी के हृदय में बसा है अन्य के नहीं . वैसे ही जो अज्ञान की निद्रा में सोया है उसीके हृदय में यह जगत भासता है, ज्ञानी के नहीं । ज्ञानी के लिये तो यह सारा जगत प्रकाश रूप ही है. । हे रामजी ! इस पर तुम कह सकते हो कि जब संकल्प बन्धन रूप ही है तब चाहे कोई अन्तवाहक रहे या तपस्वी सबके लिये ही वह दुःखकर है ? परन्तु यह प्रसङ्ग ऐसे नहीं है । सबका संकल्प दुःखदायी नहीं होता । उन्हीं का संकल्प दुःखदायक होता है कि जो स्वरूप से गिरे हुए हैं । परन्तु जो स्वरूप से नहीं गिरे हैं, विचारवान हैं, ज्ञानी हैं उनको संकल्प दुःखजनक नहीं होता । ऐसा होता तो ब्रह्मा भी बन्धन में पड़ जाता क्योंकि उसने संकल्पवश सृष्टि की रचना की है । पर नहीं, ब्रह्मा अपने स्वरूप में जागृत है, इस कारण उसे कोई बन्धन नहीं होता । अन्ततः स्वरूप ही तो अहं से संकल्परूप हुआ है। अन्यथा आत्मा में न जगत है न जगत का आदि, मध्य ही कुछ है । सब होना न होना अ ही में स्थित है । तब जब कि सब कुछ सर्वात्मा ही है तो रागद्वेष भी किसको होगा ? सब कुछ अपना आप ही तो हैं । उसीके संवेदन, उसीकी किंचनता से यह जगत स्फुरित हुआ है । हे रामजी ! यह सारा जगत उस ब्रह्म का संकल्प मात्र ही है कि जिसमें यह सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, रुद्र, और आदि भास रहे हैं । संकल्प । की दृढ़ता से अपनी ग्राधिभौतिकता दृढ़ हुई । परन्तु यह सब कुछ उत्पन्न नहीं हुआ है, भ्रान्ति से ही भास रहा है। जैसे जल में फेन और बुदबुदे कुछ भिन्न नहीं है सव जलरूप ही है, वैसे ही यह सारा जगत यात्मरूप ही है इसमें कुछ भिन्नता नहीं है । जैसे स्वप्न सृष्टि विना कारण ही होती है वैसे ही यह जगत भी विना कारण ही संकल्पवश उत्पन्न हो गया है । तव ब्रह्मा से लेकर कीट पतङ्ग आदिक यह जो कुछ जगत जैसे संकल्पवश उत्पन्न हुआ है ऐसे ही यह पिशाच भी उत्पन्न हो गये हैं, इसके अतिरिक्त पिशाचों की उत्पत्ति का और कोई कारण अथवा और कोई तथ्य नहीं है। आत्मा में जैसी किंचनता होती है वैसा ही भासता है । परन्तु उसमें पृथ्वी आदिक तत्वों की कोई भी वातविकता नहीं है और यह ब्रह्मा आदिक जगत कुछ उत्पन्न नहीं हुआ है, सवं कुछ भ्रम मात्र ही है । परन्तु हे रामजी ! यह जितने भी शरीरधारी हैं सव शरीर रहित ही हैं, अन्तवाहक शरीर सभी को प्राप्त है जैसे ब्रह्माजी अन्तवाहक हैं वैसे ही उनसे उत्पन्न होने वाले जितने भी मनुष्य हैं सव वाहक ही परन्तु संकल्प की दृढ़ता ने ही इनमें आधिभौतिकता दृढ़ कर दी है। और इस प्रकार सभी जीवों का संकल्प भिन्न २ और अपने ही में स्थित है । जिसका जैसा संकल्प होता है उसको वैसी सृष्टि प्राप्त होती है । इस पर यदि तुम यह कहो कि जब सब की सृष्टि अलग २ है तो सब जीव इकट्ठे ही क्यों दृष्टि आते हैं तो इसका उत्तर यह है कि जैसे एक नगरवासी किसी दूसरे के नगर में जाकर उसके पास बैठे तो वह दोनों ही एकत्र स्थान में ही कहलायेंगे वैसे ही यह जीव इकट्ठा ही भासते हैं । परन्तु वे एकत्र रहकर भी अपनी २ सृष्टि को नहीं जानते क्योंकि उनकी वासना मलिन है, उनका संकल्प भ्रमपूर्ण है, निर्मल और सत्य नहीं है । वे अपनी अन्तवाहकता को भूले हुए हैं, उनको प्राधिभौतिक दृढ़ हो रहा है, फिर वे एक दूसरे की सृष्टि को कैसे जान सकते हैं । जिसको जैसे अनुभव का अभ्यास होता है उसको वैसा ही भासता है । इसी प्रकार पिशाच योनि जो है वह अन्धकार पूर्ण है और इसी से वे अन्धकारों में ही प्रकट होते हैं । चाहे मध्याह्न ही क्यों न होवे । यदि सूर्य की उस प्रखरता के आगे पिशाच आकर खड़ा हो जावे तो वहां अन्धकार ही हो जाता है । पिशाच ऐसे ही तमरूप होते हैं । जैसे उल्लू को सूर्य प्रकाश में भी नहीं दिखलाई पड़ता वैसे ही पिशाच को भी प्रकाश में नहीं दिखलाई पड़ता। क्योंकि पिशाच सर्वथा ही तमरूप हैं उनको सर्वथा अन्धकार ही दिखलाई पड़ता है । कारण कि उनका ओज तमरूप ही है । हे रामजी ! जिसको जैसा निश्चय होता है उसको वैसा ही भासता है । परन्तु हमें तो सर्वथा आत्मा का ही निश्रय रहता है । श्री योगवाशिष्ठ भाषा, निर्वाण-प्रकरण- उत्तरार्द्ध का अरसठवां सर्ग समाप्त ॥१८॥ उनहत्तरखाँ सर्ग भीतरी बातें हे रामजी ! इसी प्रकार अन्तवाहक शरीर धारण कर समस्त लोकालोक में विचर कर सबको देखता रहा, परन्तु, मुझे कोई न देख पाता था । मैंने सूर्य, चन्द्रमा, - कुबेर, सिद्ध, गन्धर्व, ऋषि, मुनि, ब्रह्मा और विष्णु तथा रुद्र आदि सबको देखा परन्तु वे लोग मुझे किसी प्रकार भी न देख सके । एक बार तो मैंने जाकर इन्द्र का शरीर पकड़ कर जोर से हिलाया भी परन्तु वह मुझे न देख सका । तब कुछ दिन के पश्चात् मुझे इस बात का प्रबल मोह उत्पन्न हुआ कि यहां तो मैं इतने काल तक रहा भी परन्तु कोई मुझे न जान सका अर्थात् मेरा किसी से परोक्ष परिचय नहीं हुआ। तब उस हेतु से मैंने यह इच्छा की कि सब मुझे देखें । मैं शिव संकल्प था, इससे मुझे सब देखने लगे । आकाश, पाताल और मृत्युलोक में भी मुझे. सब जान गये। जहां-जहाँ मैंने संकल्प किया वहां-वहां मैं प्रकट रूप से सबको दिखाई पड़ने लगा । परन्तु मुझे फिर भी अपना स्वरूप ही ज्ञात हुआ । हे रामजी ! मेरा यह वशिष्ठ नाम ऐसा ही है .कि जैसे जेवरी में सर्व भासित होवे ऐसा ही में ब्रह्मरूप ही हूं । अन्य लोग मुझे भले ही वशिष्ठमुनि जानें और तुम भी उन्हीं वालों की तरह मुझे वैसे ही आकार वाले वशिष्ठ समझो परन्तु मेरे लिये आधिभौतिक और अन्तवाहक दोनों शरीर चिदाकाश की किंचनता ही भासते हैं। मैं सर्वदा ही निराकार और तरूप ही हूँ। हमारी और तुम्हारी चेष्टा में कुछ भी अन्तर नहीं है परन्तु मुझे सर्वदा आत्मपद का ही निश्चय रहता हैं और इसी कारण से मैं जीवन्मुक्त होकर विचरता हूँ। किन्तु अज्ञानी को क्रिया में द्वौत का भान होता है और हमको अक्रिया में अ ही भासता है और इस प्रकार हमें ब्रह्मा भी अद्भुत रूप भासता है और उसका जगत भी रूप ही है। जैसे समुद्र और तरङ्ग में कुछ भेद नहीं होता वैसे ही ब्रह्म और जगत में कुछ भेद नहीं है में चिदाकाश हूँ और मुझमें फुरना कुछ नहीं हैं । फुरना होने से ही जगत भासता है । ब्रह्मा और उसका जगत् संकल्प की दृढ़ता से ही ऐसा आधिभौतिक भास रहा है अन्यथा न तो कोई ब्रह्मा उत्पन्न हुआ है और न कोई जगत ही उत्पन्न हुआ है । सब कुछ चिदानन्द स्वरूप ब्रह्म ही अपने आप में स्थित है जो सर्वदा एक रस रहने वाला है । सृष्टि की आदिम अव से लेकर कल्प पर्यन्त जितने भी क्षोभ होते हैं वे सव आत्मा में कुछ हैं नहीं। वह सर्वदा ही एक रस रहने वाला अन उपजा ही अज्ञान से भासित हो रहा है। जब आत्म-ज्ञान होता है तब न तो जगत रहता हैन जगत बुद्धि ही रहती है, तब सब कुछ ब्रह्म ही ब्रह्म भासता है। किन्तु ज्ञको तो कारण सहित जगत ही भासता है । यह महारामायण शास्त्र ज्ञान को दूर करने वाला है, इसके पढ़ने
कि आपके शरीर को उठाकर नीचे डाल दिया है। यह मैंने अच्छा नहीं किया। मैंने अपना विचार त्याग दिया । यदि विचार किये होता तो सम्भवतः मुझसे ऐसी भूल कदापि न होती । सो कृपाकर आप मुझे क्षमा करें । श्री योगवाशिष्ठ भाषा, निर्वाण - प्रकरण- उत्तराद्ध का सरसठवां सगँ समाप्त ॥सैंतीस॥ अरसठवाँ सर्ग हे रामजी ! जब इस प्रकार मुझसे कहकर वह तपस्वी चुप हो गया तब मैंने उससे कहा - हे साधो ! तुम बड़े ही विचारवान् हो । वती बातों की चिन्ता क्यों करते हो विचारवान पुरुष गई बात की. "चिता नहीं करते । तुम तो अपनी भूल कहते हो, परन्तु मुझसे भी तो भूल हुई है, मैंने भी तो बिना बिचारे ही तुम्हारी कुटी को गिरा दिया है। यदि मैं तनिक भी विचार किये होता तो वह मेरी कुटी कि जिसमें बैठे हुए आनन्द लाभं कर रहे थे कदापि न गिरने पाती क्योंकि वह तो मेर ही संकल्प में स्थित थी । यदि मैं विचार किये होता तो वह कैसे गिरती । फिर भी जो होना था सो हो गया, उस की चिन्ता त्यागकर बम की सुधि लीजिये और जहां जाना ही अपने स्थान को जाओ मैं भी अपने लोक को जाता हूँ । हे (रामजी ! जब मैंने ऐसा कहा तब वह तपस्वी वहां से उठा और मैं भी उसके साथ ही आकाश को उड़ा । चलते दो हम दोनों बहुत ही दूर चले गये और मार्ग में हमने कितने ही लोकालोक के दृश्य देखे कि जिन सबका वर्णन ही असम्भव है। निदान वह अपने लोक को और मैं अपने स्थान को चला आया। वशिष्ठजी के ऐसा कहने पर रामजी ने पूछा हे मुनीश्वर ! आपका पञ्च भौतिक शरीर तो पृथ्वी पर गिर पड़ा था । फिर आपने किस शरीर से सब यात्रा की । वशिष्ठजी कहने लगे हे रामजी । वह शरीर तो गिर गया था परन्तु मेरा अन्तवाहक शरीर तो नहीं गिरा था न, उस शरीर से मैंने सब लोकों और सव देवताओं के सव स्थान देख लिये । इस पर यदि तुम यह कहो कि अन्तवाहक शरीर से मैंने उस तपस्वी को कैसे देखा तो इसका उत्तर यह सुनो कि मेरा संकल्प सच्चा था और उससे मैंने जो चाहा सो देख लिया और इसी प्रकार संकल्प की सत्यता से ही उस सिद्ध ने भी मुझे देख लिया था । इस प्रकार हम दोनों के संकल्प सत्य और एक दूसरे के अनुरूप और मिलते जुलते थे कि जिस कारण हम दोनों ने एक दूसरे को देखा । संकल्प की समानता और एकता एक दूसरे को मिला देती है। चाहे कोई कैसा भी तपस्वी क्यों न हो यदि उसका संकल्प इतना बलवान न हो कि वह दूसरे के संकल्पको न जान सके तो उसकी समस्त सिद्धता व्यर्थ है । संकल्प की दृढ़ता ही एक दूसरे को खींचती है। संकल्प से तुम जिसको चाहों उसे अपनी ओर खींच सकते हो, उससे जो चाहो सो काम करा ले सकते हो । हां, संकल्प में उतनी दृढ़ता, उतनी शक्ति और उतनी ही सत्यता तथा उतना अभ्यास होना चाहिये । फिर जिसको चाहो उसको भली भांति अपनी ओर खींच लो। करके देखो. कुछ भी कठिन नहीं है। जिसका संकल्प वली होता है उसी की जय होती है । मेरा संकल्प वलवान था, मेरे ही कुटी में वह स्थित था इस कारण मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया । हे रामजी ! अन्तवाहकता एवं संकल्प शक्ति में ही सब कुछ स्थित है । जिसको यह अवस्था प्राप्त रहती है उसको ऐसे दो प्रसङ्ग तो क्या हैं बड़े से बड़े प्रसङ्ग भी अल्प होजाते हैं और उसे भूत भविष्य और वर्तमान तीनों काल का ज्ञान वना रहता है। परन्तु जो दिन रात सांसारिक व्यवहारों में ही लगा हुआ है उसको तो नेत्रों के सन्मुख समक्ष वाले वर्तमान पदार्थ ही भासते हैं, इससे वह कुछ नहीं कर सकता परन्तु जो समाधिस्त है वह क्या नहीं कर सकता। मैं तो कुटी में अपना शरीर छोड़कर इधर उधर घूम रहा था कि जिससे में समाधि से परांमुख था और मेरी अवस्था चंचल हो गई थी और वह तपस्वी समाधि में रहकर अपने संकल्पों में ऐसा बलवान होरहा था कि उसने मेरे शरीर को नीचे गिरा दिया । यदि मैं पहले ही के समान अपनी समाधि में लगा रहता तो वह मुझे कैसे गिरा पाता। मेरे संकल्प की निर्बलता ने ही मेरी कुटिया को गिराया । परन्तु मेरा पूर्व का किया हुआ संकल्प इतना बजवान और निर्मल था कि मेरे स्मरण करते ही वह आ गया और जिस रूप में मैंने चाहा उस तपस्वी को देख लिया । हे रामजी संकल्प शक्ति से क्या नहीं हो सकता । यह जो इन्द्रलोक और कुचेर आदिक देवताओं के स्थान देखे वह सब मेरी अन्तवाहकता के ही गुण थे । मैं सबको ही देखता था और मुझे कोई न देखता था । जैसे स्वप्न में कोई शब्द करे और उसका शब्द किसी जाग्रत वाले को सुनाई नहीं पड़ता और जैसे संकल्प रहित वालों को किसी दूसरे की सृष्टि और उसके व्यवहार का शब्द नहीं जान पड़ता वैसे ही मुझको कोई न जानता था । तब सबसे पहले मैंने पिशाच शरीर धारण करके आकाश विचरण किया और उस अवस्था में मैंने देयों के स्थान देखे, परन्तु मुझे कोई न देख सका । इस पर रामजी ने पूछा - हे भगवन् ! पिशाच कैसे होते हैं, पिशाच की कोई जाति होती है और यदि जाति होती हैं तो उनके क्या कर्म धर्म हैं ? वशिष्ठजी कहने लगे -- हे रामजी ! पिशाच का कोई कार - - प्रकार नहीं होता फिर भी जैसा रूप धारण करते हैं वैसा सुनो। कोई पिशाच आकाश की नाई शून्य होते हैं और कोई छायारूप से भय दिखलाते हैं और कोई वादल के समान होते हैं और कोई कौवे के रूप में भय देते हैं । इसी प्रकार का भिन्न भिन्न रूप धारण करके वे सबको देखते हैं परन्तु उनको कोई नहीं देखता । वे शीत उष्ण से सर्वदा ही दुःखी रहते हैं और काम, क्रोध, लोभ मोह दिइच्छाओं से वे सर्वदा ही तपते रहते हैं। ठण्डा पानी और भोजन वे भी चाहते हैं और चे भी नगरों, वृक्षों और वनों में ही वास करते हैं। कभी वे कुत्ते के रूप में दिखलाई पड़ते हैं और कभी स्थिर आदि रूप धारण कर लेते हैं । वे किसी दो के मनमें प्रवेश कर जाते हैं और इसी प्रकार वे मन्त्र-तन्त्र और पूजा पाठ से सन्तुष्ट होजाया करते हैं । इनमें भी उत्तम, मध्यम और निकृष्ट होते हैं। उत्तम जाति वाले देव स्थानों में और मध्यम मनुष्यों में तथा नीच जाति वाले नरक स्थल में वास किया करते हैं। इनकी भी उत्पत्ति उसी अवैत्य शुद्ध चिन्मात्र से होती है । हे रामजी ! वह अपना आप शुद्ध और कल्प वृक्ष के समान ही चैतन्य और वर दाता हैं । उससे जैसी इच्छा एवं वासना की जाये बैसा प्राप्त होता है। उसमें न तो कहीं पिशाच हैं, न कहीं जगत है । ब्रह्मसत्ता ही स्वतः अपने आपमें स्थित है। उसी आत्मतत्व में जो किंचन हुआ है उसी 'अहं' को जीव कहते हैं । फिर उसी 'अहं' अर्थात् जीव की दृढ़ता से मन हुआ जो कि ब्रह्मारूप से स्थित हो रहा है । उसी ब्रह्मा ने मनोराज से जगत को उत्पन्न किया है और वही ब्रह्मा जगतरूप से स्थित हुआ है । अतः ब्रह्म में i ब्रह्म ही स्थित है। उस ब्रह्माका शरीर अन्तवाहक और केवल आकाश रूप है । उसी की संकल्प दृढ़ता से यह आधिभौतिक जगत दृढ़ हुआ है परन्तु यह सव.. कुछ मनरूप और दीर्घकाल के स्वप्नवत ही है । जात है इसी कारण इतना दृढ़ भास रहा है । हे रामजी ! इस ब्रह्मरूपी शरीर में जो संकल्प का अहंकार हुआ है इसीसे यह जगत और आधिभौतिकता भास रही है। परन्तु कुछ उत्पन्न नहीं, हुआ, सव संकल्परूप ही है । न में हूँ, न तुम हो, न जगत है -- सब कुछ ब्रह्मही है। जैसे आकाश और शून्यता में कुछ भेद नहीं है, वायु और उसकी गमनतामें कुछ भेद नहीं हैं, वैसेही ब्रह्म और जगत में कुछ भेद नहीं है। ब्रह्मा और जगत दोनों ही कुछ उपजे नहीं है। दोनोंही ब्रह्म तो भिन्नता भ्रान्ति से भासित रहे हैं । पञ्चभूत और मन इन्हीं छहों को जगत कहा जाता है। इनमें जो चेतन्य भास रहा है उसी को नाम परमपद है । हे रामजी ! जब तुम आत्मपद में जागृत होवोगे, तब पञ्चभूत ही भासित होगा और जब आत्मपद को जानोगे तब पञ्चभूत भी आत्मा से भिन्न ही भासित होगा। सबका अधष्ठान सत्ता ही है । आत्मप्रमाद से ही संसार भासित होरहा है । जब तक आत्मा में प्रमाद है तब तक संसार का भ्रम कदापि नहीं मिटता । परन्तु यह निराकार जगत संकल्प मात्र ही है । संकल्प की दृढ़ता से ही प्रकाश में स्थूलता दृष्टि आ रही है । ज्ञान ज्ञान किसी काल में भी जगत कुछ है नहीं परन्तु अज्ञानी को दृढ़ भास रहा है। जैसे मनोराज का रचा हुआ जगत उसी के हृदय में बसा है अन्य के नहीं . वैसे ही जो अज्ञान की निद्रा में सोया है उसीके हृदय में यह जगत भासता है, ज्ञानी के नहीं । ज्ञानी के लिये तो यह सारा जगत प्रकाश रूप ही है. । हे रामजी ! इस पर तुम कह सकते हो कि जब संकल्प बन्धन रूप ही है तब चाहे कोई अन्तवाहक रहे या तपस्वी सबके लिये ही वह दुःखकर है ? परन्तु यह प्रसङ्ग ऐसे नहीं है । सबका संकल्प दुःखदायी नहीं होता । उन्हीं का संकल्प दुःखदायक होता है कि जो स्वरूप से गिरे हुए हैं । परन्तु जो स्वरूप से नहीं गिरे हैं, विचारवान हैं, ज्ञानी हैं उनको संकल्प दुःखजनक नहीं होता । ऐसा होता तो ब्रह्मा भी बन्धन में पड़ जाता क्योंकि उसने संकल्पवश सृष्टि की रचना की है । पर नहीं, ब्रह्मा अपने स्वरूप में जागृत है, इस कारण उसे कोई बन्धन नहीं होता । अन्ततः स्वरूप ही तो अहं से संकल्परूप हुआ है। अन्यथा आत्मा में न जगत है न जगत का आदि, मध्य ही कुछ है । सब होना न होना अ ही में स्थित है । तब जब कि सब कुछ सर्वात्मा ही है तो रागद्वेष भी किसको होगा ? सब कुछ अपना आप ही तो हैं । उसीके संवेदन, उसीकी किंचनता से यह जगत स्फुरित हुआ है । हे रामजी ! यह सारा जगत उस ब्रह्म का संकल्प मात्र ही है कि जिसमें यह सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, रुद्र, और आदि भास रहे हैं । संकल्प । की दृढ़ता से अपनी ग्राधिभौतिकता दृढ़ हुई । परन्तु यह सब कुछ उत्पन्न नहीं हुआ है, भ्रान्ति से ही भास रहा है। जैसे जल में फेन और बुदबुदे कुछ भिन्न नहीं है सव जलरूप ही है, वैसे ही यह सारा जगत यात्मरूप ही है इसमें कुछ भिन्नता नहीं है । जैसे स्वप्न सृष्टि विना कारण ही होती है वैसे ही यह जगत भी विना कारण ही संकल्पवश उत्पन्न हो गया है । तव ब्रह्मा से लेकर कीट पतङ्ग आदिक यह जो कुछ जगत जैसे संकल्पवश उत्पन्न हुआ है ऐसे ही यह पिशाच भी उत्पन्न हो गये हैं, इसके अतिरिक्त पिशाचों की उत्पत्ति का और कोई कारण अथवा और कोई तथ्य नहीं है। आत्मा में जैसी किंचनता होती है वैसा ही भासता है । परन्तु उसमें पृथ्वी आदिक तत्वों की कोई भी वातविकता नहीं है और यह ब्रह्मा आदिक जगत कुछ उत्पन्न नहीं हुआ है, सवं कुछ भ्रम मात्र ही है । परन्तु हे रामजी ! यह जितने भी शरीरधारी हैं सव शरीर रहित ही हैं, अन्तवाहक शरीर सभी को प्राप्त है जैसे ब्रह्माजी अन्तवाहक हैं वैसे ही उनसे उत्पन्न होने वाले जितने भी मनुष्य हैं सव वाहक ही परन्तु संकल्प की दृढ़ता ने ही इनमें आधिभौतिकता दृढ़ कर दी है। और इस प्रकार सभी जीवों का संकल्प भिन्न दो और अपने ही में स्थित है । जिसका जैसा संकल्प होता है उसको वैसी सृष्टि प्राप्त होती है । इस पर यदि तुम यह कहो कि जब सब की सृष्टि अलग दो है तो सब जीव इकट्ठे ही क्यों दृष्टि आते हैं तो इसका उत्तर यह है कि जैसे एक नगरवासी किसी दूसरे के नगर में जाकर उसके पास बैठे तो वह दोनों ही एकत्र स्थान में ही कहलायेंगे वैसे ही यह जीव इकट्ठा ही भासते हैं । परन्तु वे एकत्र रहकर भी अपनी दो सृष्टि को नहीं जानते क्योंकि उनकी वासना मलिन है, उनका संकल्प भ्रमपूर्ण है, निर्मल और सत्य नहीं है । वे अपनी अन्तवाहकता को भूले हुए हैं, उनको प्राधिभौतिक दृढ़ हो रहा है, फिर वे एक दूसरे की सृष्टि को कैसे जान सकते हैं । जिसको जैसे अनुभव का अभ्यास होता है उसको वैसा ही भासता है । इसी प्रकार पिशाच योनि जो है वह अन्धकार पूर्ण है और इसी से वे अन्धकारों में ही प्रकट होते हैं । चाहे मध्याह्न ही क्यों न होवे । यदि सूर्य की उस प्रखरता के आगे पिशाच आकर खड़ा हो जावे तो वहां अन्धकार ही हो जाता है । पिशाच ऐसे ही तमरूप होते हैं । जैसे उल्लू को सूर्य प्रकाश में भी नहीं दिखलाई पड़ता वैसे ही पिशाच को भी प्रकाश में नहीं दिखलाई पड़ता। क्योंकि पिशाच सर्वथा ही तमरूप हैं उनको सर्वथा अन्धकार ही दिखलाई पड़ता है । कारण कि उनका ओज तमरूप ही है । हे रामजी ! जिसको जैसा निश्चय होता है उसको वैसा ही भासता है । परन्तु हमें तो सर्वथा आत्मा का ही निश्रय रहता है । श्री योगवाशिष्ठ भाषा, निर्वाण-प्रकरण- उत्तरार्द्ध का अरसठवां सर्ग समाप्त ॥अट्ठारह॥ उनहत्तरखाँ सर्ग भीतरी बातें हे रामजी ! इसी प्रकार अन्तवाहक शरीर धारण कर समस्त लोकालोक में विचर कर सबको देखता रहा, परन्तु, मुझे कोई न देख पाता था । मैंने सूर्य, चन्द्रमा, - कुबेर, सिद्ध, गन्धर्व, ऋषि, मुनि, ब्रह्मा और विष्णु तथा रुद्र आदि सबको देखा परन्तु वे लोग मुझे किसी प्रकार भी न देख सके । एक बार तो मैंने जाकर इन्द्र का शरीर पकड़ कर जोर से हिलाया भी परन्तु वह मुझे न देख सका । तब कुछ दिन के पश्चात् मुझे इस बात का प्रबल मोह उत्पन्न हुआ कि यहां तो मैं इतने काल तक रहा भी परन्तु कोई मुझे न जान सका अर्थात् मेरा किसी से परोक्ष परिचय नहीं हुआ। तब उस हेतु से मैंने यह इच्छा की कि सब मुझे देखें । मैं शिव संकल्प था, इससे मुझे सब देखने लगे । आकाश, पाताल और मृत्युलोक में भी मुझे. सब जान गये। जहां-जहाँ मैंने संकल्प किया वहां-वहां मैं प्रकट रूप से सबको दिखाई पड़ने लगा । परन्तु मुझे फिर भी अपना स्वरूप ही ज्ञात हुआ । हे रामजी ! मेरा यह वशिष्ठ नाम ऐसा ही है .कि जैसे जेवरी में सर्व भासित होवे ऐसा ही में ब्रह्मरूप ही हूं । अन्य लोग मुझे भले ही वशिष्ठमुनि जानें और तुम भी उन्हीं वालों की तरह मुझे वैसे ही आकार वाले वशिष्ठ समझो परन्तु मेरे लिये आधिभौतिक और अन्तवाहक दोनों शरीर चिदाकाश की किंचनता ही भासते हैं। मैं सर्वदा ही निराकार और तरूप ही हूँ। हमारी और तुम्हारी चेष्टा में कुछ भी अन्तर नहीं है परन्तु मुझे सर्वदा आत्मपद का ही निश्चय रहता हैं और इसी कारण से मैं जीवन्मुक्त होकर विचरता हूँ। किन्तु अज्ञानी को क्रिया में द्वौत का भान होता है और हमको अक्रिया में अ ही भासता है और इस प्रकार हमें ब्रह्मा भी अद्भुत रूप भासता है और उसका जगत भी रूप ही है। जैसे समुद्र और तरङ्ग में कुछ भेद नहीं होता वैसे ही ब्रह्म और जगत में कुछ भेद नहीं है में चिदाकाश हूँ और मुझमें फुरना कुछ नहीं हैं । फुरना होने से ही जगत भासता है । ब्रह्मा और उसका जगत् संकल्प की दृढ़ता से ही ऐसा आधिभौतिक भास रहा है अन्यथा न तो कोई ब्रह्मा उत्पन्न हुआ है और न कोई जगत ही उत्पन्न हुआ है । सब कुछ चिदानन्द स्वरूप ब्रह्म ही अपने आप में स्थित है जो सर्वदा एक रस रहने वाला है । सृष्टि की आदिम अव से लेकर कल्प पर्यन्त जितने भी क्षोभ होते हैं वे सव आत्मा में कुछ हैं नहीं। वह सर्वदा ही एक रस रहने वाला अन उपजा ही अज्ञान से भासित हो रहा है। जब आत्म-ज्ञान होता है तब न तो जगत रहता हैन जगत बुद्धि ही रहती है, तब सब कुछ ब्रह्म ही ब्रह्म भासता है। किन्तु ज्ञको तो कारण सहित जगत ही भासता है । यह महारामायण शास्त्र ज्ञान को दूर करने वाला है, इसके पढ़ने
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (सन २०१४) अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसेः- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो. धर्मशास्त्र संस्कृत ग्रन्थों का एक वर्ग है, जो कि शास्त्र का ही एक प्रकार है। इसमें सभी स्मृतियाँ सम्मिलित हैं। यह वह शास्त्र है जो हिन्दुओं के धर्म का ज्ञान सम्मिलित किये हुए हैं, धर्म शब्द में यहाँ पारंपरिक अर्थ में धर्म तथा साथ ही कानूनी कर्तव्य भी सम्मिलित हैं। धर्मशास्त्रों का बृहद् पाठ भारत की ब्राह्मण परंपरा का अंग है, तथा यह विद्वत्परंपरा की देन एवं एक विशद तंत्र है। इसके गहन न्यायशास्त्रीय विवेचन के कारण प्रारंभिक ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा यह हिंदुओं के लिए कानून के रूप में माना गया था तब से लेकर आज भी धर्मशास्त्र को हिन्दू विधिसंहिता के रूप में देखा जाता है। धर्मशास्त्र में उपस्थित रिलीजन व कानून के बीच जो अंतर किया जाता है, दरअसल वह कृत्रिम है और बार-बार उसपर प्रश्न उठाये गये हैं। जबकि कुछ लोग, धर्मशास्त्र में धार्मिक व धर्मनिरपेक्ष कानूनों के बीच अंतर रखा गया है ऐसा पक्ष लेते हैं। धर्मशास्त्र हिन्दू परंपरा में महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि- एक, यह एक आदर्श गृहस्थ के लिए धार्मिक नियमों का स्रोत है, तथा दूसरे, यह धर्म, विधि, आचारशास्त्र आदि से संबंधित हिंदू ज्ञान का सुसंहत रूप है। "पांडुरंग वामन काणे, सामाजिक सुधार को समर्पित एक महान विद्वान्, ने इस पुरानी परंपरा को जारी रखा है। उनका धर्मशास्त्र का इतिहास, पाँच भागों में प्रकाशित है, प्राचीन भारत के सामाजिक विधियों तथा प्रथाओं का विश्वकोश है। इससे हमें प्राचीन भारत में सामाजिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।" . अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। अर्थशास्त्र 96 संबंध है और धर्मशास्त्र 5 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (96 + 5)। यह लेख अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसेः- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो. धर्मशास्त्र संस्कृत ग्रन्थों का एक वर्ग है, जो कि शास्त्र का ही एक प्रकार है। इसमें सभी स्मृतियाँ सम्मिलित हैं। यह वह शास्त्र है जो हिन्दुओं के धर्म का ज्ञान सम्मिलित किये हुए हैं, धर्म शब्द में यहाँ पारंपरिक अर्थ में धर्म तथा साथ ही कानूनी कर्तव्य भी सम्मिलित हैं। धर्मशास्त्रों का बृहद् पाठ भारत की ब्राह्मण परंपरा का अंग है, तथा यह विद्वत्परंपरा की देन एवं एक विशद तंत्र है। इसके गहन न्यायशास्त्रीय विवेचन के कारण प्रारंभिक ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा यह हिंदुओं के लिए कानून के रूप में माना गया था तब से लेकर आज भी धर्मशास्त्र को हिन्दू विधिसंहिता के रूप में देखा जाता है। धर्मशास्त्र में उपस्थित रिलीजन व कानून के बीच जो अंतर किया जाता है, दरअसल वह कृत्रिम है और बार-बार उसपर प्रश्न उठाये गये हैं। जबकि कुछ लोग, धर्मशास्त्र में धार्मिक व धर्मनिरपेक्ष कानूनों के बीच अंतर रखा गया है ऐसा पक्ष लेते हैं। धर्मशास्त्र हिन्दू परंपरा में महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि- एक, यह एक आदर्श गृहस्थ के लिए धार्मिक नियमों का स्रोत है, तथा दूसरे, यह धर्म, विधि, आचारशास्त्र आदि से संबंधित हिंदू ज्ञान का सुसंहत रूप है। "पांडुरंग वामन काणे, सामाजिक सुधार को समर्पित एक महान विद्वान्, ने इस पुरानी परंपरा को जारी रखा है। उनका धर्मशास्त्र का इतिहास, पाँच भागों में प्रकाशित है, प्राचीन भारत के सामाजिक विधियों तथा प्रथाओं का विश्वकोश है। इससे हमें प्राचीन भारत में सामाजिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।" . अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र आम में शून्य बातें हैं । अर्थशास्त्र छियानवे संबंध है और धर्मशास्त्र पाँच है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
बढ़ता हुआ वजन आपकी सेहत के साथ-साथ आपकी पर्सनालिटी पर भी बुरा असर डालता है. मोटापे के कारण आपको कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. आजकल लोग मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए वर्कआउट, डाइटिंग या दवाइयों का इस्तेमाल भी करते हैं. जिससे आपकी सेहत को और भी नुकसान हो सकते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से सिर्फ 1 महीने में आपका वजन कम हो जाएगा. 1- अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो आधे नींबू का रस, एक चम्मच अदरक, धनिया और एक कप पानी को मिलाकर ब्लेंड कर ले. अब इसे रात में खाना खाने के बाद पिए. लगातार एक महीने तक इस ड्रिंक को पीने से आपका वजन कम हो जाएगा. 2- खीरे और नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं. खीरे और नींबू के रस का सेवन करने से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. और फैट बर्न होता है. इसे बनाने के लिए आधे निम्बू का रस और एक चम्मच खीरे का रस ले ले. अब इसे एक गिलास पानी में मिलाकर पिए. रोजाना इसका सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपका मोटापा कम हो जाएगा.
बढ़ता हुआ वजन आपकी सेहत के साथ-साथ आपकी पर्सनालिटी पर भी बुरा असर डालता है. मोटापे के कारण आपको कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. आजकल लोग मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए वर्कआउट, डाइटिंग या दवाइयों का इस्तेमाल भी करते हैं. जिससे आपकी सेहत को और भी नुकसान हो सकते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से सिर्फ एक महीने में आपका वजन कम हो जाएगा. एक- अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो आधे नींबू का रस, एक चम्मच अदरक, धनिया और एक कप पानी को मिलाकर ब्लेंड कर ले. अब इसे रात में खाना खाने के बाद पिए. लगातार एक महीने तक इस ड्रिंक को पीने से आपका वजन कम हो जाएगा. दो- खीरे और नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं. खीरे और नींबू के रस का सेवन करने से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. और फैट बर्न होता है. इसे बनाने के लिए आधे निम्बू का रस और एक चम्मच खीरे का रस ले ले. अब इसे एक गिलास पानी में मिलाकर पिए. रोजाना इसका सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपका मोटापा कम हो जाएगा.
(एक्ज़िम बैंक, नाबार्ड, एनएचबी तथा सिडबी) कृपया 1 जुलाई 2014 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि.सं.एफआईडी.एफआईसी.1/01.02.00/2014-15 देखें, जिसमें वित्तीय संस्थाओं को संसाधन जुटाने संबंधी मानदंडों के संबंध में 30 जून 2014 तक जारी अनुदेश/दिशानिर्देश दिए गए हैं। इस मास्टर परिपत्र में उपर्युक्त विषय पर 30 जून 2015 तक जारी अनुदेशों को शामिल किया गया है। (सुधा दामोदर) विशेषीकृत वित्तीय संस्थाओं को अपनी अल्पावधि तथा दीर्घावधि संसाधन आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सहायता देने के लिए ताकि वित्तीय संस्थाओं को उनकी संबंधित संविधि के अनुसार जिन परिचालनों, उद्देश्य तथा लक्ष्यों के साथ स्थापित किया गया था उनसे संबद्ध ऋण की क्षेत्रीय आवश्यकताओं को वित्तीय संस्थाएं पूरा कर सकें। इस परिपत्र का उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा बॉण्ड जारी करने के संबंध में उनके बीच विनियामक मानदंडों में व्यापक एकरूपता लाकर उन्हें एक समान अवसर दिलाना भी है। इस मास्टर परिपत्र में अनुबंध 4 में सूचीबद्ध परिपत्रों में निहित वित्तीय संस्थाओं द्वारा संसाधन जुटाने के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए सभी अनुदेशों /दिशानिर्देशों को समेकित तथा अद्यतन किया गया है। सभी अखिल भारतीय मीयादी ऋणदात्री तथा पुनर्वित्त प्रदान करनेवाली संस्थाएं अर्थात, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय आवास बैंक(एनएचबी) तथा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी)। सभी वित्तीय संस्थाएं चाहे वे सांविधिक निकाय हो या लिमिटेड कंपनियां, 1998 से भारतीय रिजर्व बैंक के विनियमन के अधीन हैं। वित्तीय संस्थाएं वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और निधि जुटाने हेतु संसाधन आवंटन, आदि में मददगार होती हैं। प्रारंभ में भारतीय रिज़र्व बैंक ने चयनित वित्तीय संस्थाओं के लिए लिखतवार वह सीमा निर्धारित की थी जहां तक विनिर्दिष्ट लिखत के जरिए वित्तीय संस्थाएं संसाधन जुटा सकती थीं। मई 1997 में लिखतवार अधिकतम सीमा के स्थान पर "अंब्रेला सीमा" निर्धारित की गयी जो संबंधित वित्तीय संस्था की 'निवल स्वाधिकृत निधि' से संबद्ध थी और जो विनिर्दिष्ट लिखत के जरिए वित्तीय संस्था द्वारा उधार लेने के लिए समग्र अधिकतम सीमा थी। 'अंब्रेला सीमा' की प्रणाली अब भी लागू है, हालांकि पिछले वर्षों में इस सीमा के अंतर्गत कुछ अतिरिक्त लिखतों को शामिल किया गया है । 'अंब्रेला सीमा' में वर्तमान में पांच लिखतें शामिल हैं - अर्थात् मीयादी जमा, मीयादी मुद्रा उधार, जमा प्रमाण पत्र (सीडी), वाणिज्यिक पत्र और अंतर-कंपनी जमा (आईसीडी)। इन विनिर्दिष्ट लिखतों के जरिए जुटाये जानेवाले कुल उधार कभी भी संबंधित वित्तीय संस्था के नवीनतम लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार निवल स्वाधिकृत निधि के 100 प्रतिशत अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एकल वित्तीय संस्था के लिए अनुमोदित राशि से अधिक नहीं होने चाहिए। इनमें से प्रत्येक लिखत से संबंधित शर्तें नीचे दी गयी हैं : वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर मीयादी जमाराशियां स्वीकार कर सकती है अर्थात् अन्य लिखतों, जैसे मीयादी मुद्रा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाण पत्र और अंतर-कंपनी जमा के साथ मीयादी जमा, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। i) जमाकर्ता के निधन, मेडिकल अनिवार्यता, शैक्षिक व्यय तथा अन्य ऐसे कारणों से एक वर्ष पूर्ण होने से पहले परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण के मामले में निम्नलिखित मानदंड लागू किए जाएं : (ख) छह महीने और एक वर्ष के बीच परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण - ब्याज का भुगताना 4.0 प्रतिशत की दर से किया जाए। (ii) 1 वर्ष से अधिक के लिए, वित्तीय संस्थाएं, जमाराशियों के परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण पर उनकी अपनी दंडस्वरूप ब्याज दर निश्चित करने के लिए स्वतंत्र हैं। ।सेबी द्वारा अनुमोदित रेटिंग एजेन्सियों से रेटिंग अनिवार्य है। स्वीकृत मीयादी जमाराशियों पर वित्तीय संस्थाओं द्वारा कोई भी ऋण प्रदान नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर मीयादी मुद्रा जुटा सकती है अर्थात् अन्य लिखतों, जैसे मीयादी जमा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाण पत्र और अंतर-कंपनी जमा के साथ मीयादी मुद्रा उधार, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। ।वित्तीय संस्थाओं को ब्याज दर निश्चित करने की स्वतंत्रता है। वित्तीय संस्थाएं अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से ही 'मीयादी मुद्रा' उधार लेने के लिए पात्र हैं। 2.3 जमा प्रमाण पत्र (सीडी) जमा प्रमाण पत्र उन चयनित अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी किये जा सकते हैं जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंदर अल्पावधि संसाधन जुटाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमति दी है। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर जमा प्रमाण पत्र जारी कर सकती है, अर्थात् अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, वाणिज्यिक पत्र और अंतर कंपनी जमा सहित जारी किये जानेवाले जमा प्रमाण पत्र, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। जमा प्रमाण पत्र की न्यूनतम राशि एक लाख रुपये होनी चाहिए अर्थात् एकल अभिदाता से स्वीकार की जा सकने वाली न्यूनतम जमाराशि 1 लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। जारी किये जानेवाले जमा प्रमाण पत्र 1 लाख रुपये के गुणजों में होंगे। ।कौन अभिदान कर सकता है ? जमा प्रमाण पत्र एकल व्यक्तियों (अवयस्कों को छोड़कर), निगमों, कंपनियों, न्यासों, निधियों, संघों आदि को जारी किये जा सकते हैं । अनिवासी भारतीय भी जमा प्रमाण पत्रों में अभिदान कर सकते हैं लेकिन, केवल अप्रत्यावर्तनीय आधार पर और इस बात का प्रमाणपत्र पर स्पष्टतः उल्लेख किया जाए। ऐसे जमा प्रमाणपत्र अनुषंगी बाज़ार में किसी दूसरे अनिवासी भारतीय को परांकित नहीं किए जा सकते हैं। वित्तीय संस्थाएं जारी करने की तारीख से 1 वर्ष से अन्यून अवधि और 3 वर्ष से अनधिक अवधि के लिए जमा प्रमाण पत्र जारी कर सकती हैं । जमा प्रमाण पत्र अंकित मूल्य पर बट्टा काटकर जारी किये जाने चाहिए, परंतु उन्हें कूपन युक्त लिखत के रूप में भी जारी किया जा सकता है। वित्तीय संस्थाओं को अस्थिर दर के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति है, बशर्ते अस्थिर दर निर्धारित करने की पद्धति वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी तथा बाज़ार आधारित हो। वित्तीय संस्थाएं बट्टा/कूपन दर निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं । वित्तीय संस्थाओं द्वारा जमा प्रमाण पत्र केवल अमूर्त (डिमटेरिअलाइज़ड) रूप में ही जारी किये जाने चाहिए। तथापि, डिपॉजिटरीज एक्ट, 1996 के अनुसार निवेशकों को प्रमाण पत्र भौतिक रूप में प्राप्त करने का विकल्प है । तदनुसार, यदि निवेशक भौतिक रूप में प्रमाण पत्र का आग्रह करे तो वित्तीय संस्था ऐसे प्रसंगों की अलग से सूचना मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय बाज़ार विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय कार्यालय, फोर्ट, मुंबई-400001 को देनी होगी । साथ ही, जमा प्रमाण पत्र जारी किये जाने पर स्टांप ड्यूटी भी लगेगी। बैंकों/वित्तीय संस्थाओं द्वारा अपनाए जाने के लिए एक फार्मेट अनुबंध-। (अनुसूची-।) में संलग्न है। जमा प्रमाणपत्रों की चुकौती के लिए कोई रियायत अवधि नहीं दी जाएगी। यदि परिपक्वता की तिथि छुट्टी के दिन पड़ती हो, तो जारीकर्ता वित्तीय संस्था को इसका भुगतान उसके तुरंत बाद के कार्यदिवस पर करना होगा। अतः वित्तीय संस्थाओं को जमा की अवधि का निर्धारण इस प्रकार करना चाहिए कि परिपक्वता तिथि अवकाश के दिन न पडे ताकि छूट / ब्याज दर के नुकसान से बचा जा सके। भौतिक जमा प्रमाणपत्रों को परांकन तथा सुपुर्दगी द्वारा मुक्त रूप से अंतरित किया जा सकता है। जमा प्रमाण पत्रों को अन्य डिमेट प्रतिभूतियों पर लागू क्रियाविधि के अनुसार अंतरित किया जा सकता है । जमा प्रमाण पत्रों के लिए कोई अवरुद्धता अवधि नहीं है । वित्तीय संस्था जमा प्रमाण पत्रों पर न तो ऋण प्रदान कर सकती हैं और न ही अपने जमा प्रमाण पत्रों की परिपक्वता अवधि से पहले पुनर्खरीद कर सकती हैं। इस संबंध में वित्तीय संस्थाएं निर्धारित आय मुद्रा बाज़ार और व्युत्पन्न (डेरिवेटिव्ज) संघ (एफआइएमएमडीए) द्वारा 20 जून 2002 को जारी किए गए, समय समय पर संशोधित विस्तृत दिशानिर्देश देखें। 2.4 वाणिज्यिक पत्र (सीपी) जिन अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंतर्गत संसाधन जुटाने की अनुमति दी गयी है वे वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए पात्र हैं। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंदर वाणिज्यिक पत्र जारी कर सकती हैं, अर्थात् अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, जमा प्रमाण पत्र और अंतर कंपनी जमा सहित जारी किये जानेवाले वाणिज्यिक पत्र, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। वाणिज्यिक पत्रों के निर्गम द्वारा प्रस्तावित कुल राशि जारीकर्ता द्वारा निर्गम को अभिदान हेतु खोले जाने की तारीख से दो सप्ताह की अवधि के भीतर जुटायी जानी चाहिए। वाणिज्यिक पत्र एक ही तारीख को या अलग-अलग तारीखों को अंशों में जारी किये जा सकते हैं, बशर्ते अलग-अलग तारीखों के मामले में प्रत्येक वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता तारीख समान हो। नवीकरण सहित वाणिज्यिक पत्र के प्रत्येक निर्गम को नये निर्गम के रूप में माना जाना चाहिए। वाणिज्यिक पत्र 5 लाख रुपये या उसके गुणजों के मूल्यवर्ग में जारी किये जा सकते हैं । एकल निवेशक द्वारा निवेश की गयी राशि 5 लाख रुपये (अंकित मूल्य) से कम नहीं होनी चाहिए। क. प्रत्येक जारीकर्ता वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए एक आईपीए नियुक्त करेगा। ख. जारीकर्ता को मानक बाज़ार व्यवहार के अनुसार संभावित निवेशकों को अपनी अद्यतन वित्तीय स्थिति की जानकारी देनी चाहिए। ग. निवेशक और जारीकर्ता के बीच सौदे की आपस में पुष्टि होने के बाद जारीकर्ता आईपीए के माध्यम से निक्षेपागार में निवेशक के डी-मैट खाते में वाणिज्यिक पत्र जमा करने की व्यवस्था करेगा। घ. जारीकर्ता निवेशक को इस आशय के आईपीए प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि देगा कि जारीकर्ता का आईपीए के साथ वैध करार है तथा दस्तावेज अनुबंध-। (अनुसूची III) में दिए गए फार्मेट के अनुसार सही है। वित्तीय संस्था वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए सेबी के पास पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से किसी एक से क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करेंगी । रेटिंग सिम्बल तथा सेबी द्वारा निर्धारित परिभाषा के अनुसार न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग 'ए3' होगी । सीपी के निर्गम के समय निर्गमकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह से प्राप्त रेटिंग बनी हुई है तथा उसकी समीक्षा का समय नहीं हुआ है । ।कौन अभिदान कर सकता है ? वाणिज्यिक पत्र व्यक्तियों, बैंकिंग कंपनियों, भारत में पंजीकृत अथवा निगमित अन्य कंपनी निकायों तथा अनिगमित निकायों, अनिवासी भारतीयों (एनआरआइ) तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों को जारी किये जा सकते हैं तथा वे उन्हें धारित कर सकते हैं। तथापि, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा किये जानेवाले निवेश उनके निवेशों के लिए भारतीय प्रतिभूति तथा एक्सचेंज बोर्ड द्वारा निर्धारित उच्चतम सीमा तथा समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999, विदेशी मुद्रा (जमा) विनियम, 2000 और विदेशी मुद्रा प्रबंध(भारत के बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण या निर्गम) विनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन होंगे। वाणिज्यिक पत्र निर्गम की तारीख से न्यूनतम 7 दिनों की तथा अधिकतम एक वर्ष की परिपक्वता अवधि के बीच की परिपक्वताओं के लिए जारी किये जा सकते हैं । तथापि वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता अवधि, निर्गमकर्ता की क्रेडिट रेटिंग की वैधता की तारीख के आगे नहीं बढ़ायी जानी चाहिए। वाणिज्यिक पत्र अंकित मूल्य पर बट्टे पर जारी किये जाएं तथा बट्टे की दर वित्तीय संस्था द्वारा निर्धारित की जाए। भौतिक स्वरूप में वाणिज्यिक पत्र, परांकन तथा सुपुर्दगी द्वारा मुक्त रूप से अंतरणीय होंगे। अमूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र की अंतरणीयता एफआइएमएमडीए द्वारा जारी दिशानिर्देशों द्वारा नियंत्रित होगी। क. वाणिज्यिक पत्र, सेबी द्वारा अनुमोदित तथा सेबी में पंजीकृत किसी भी निक्षेपागार के माध्यम से वचन पत्र या प्रॉमिसरी नोट के रूप में अथवा अमूर्त रूप में जारी किये जाएंगे जैसाकि इन निदेशों की अनुबंध 1 (अनुसूची ।।) में विनिर्दिष्ट किया गया है, बशर्ते कि सभी आरबीआई विनियमित संस्थाएं ऐसे निक्षेपागारों के माध्यम से सीपी का सौदा और धारण केवल अमूर्त रूप में ही कर सकते हैं। ख. सभी आरबीआई विनियमित संस्थाओं द्वारा नए निवेश केवल अमूर्त रूप में ही किए जाएंगे। बैंकेतर संस्थाएं जिनमें कंपनियां शामिल हैं, वाणिज्यिक पत्र निर्गम के लिए ऋण संवर्धन हेतु बिना शर्त तथा अप्रतिसंहरणीय गारंटी प्रदान कर सकती हैं, बशर्ते, (i) निर्गमकर्ता, वाणिज्यिक पत्र के निर्गम के लिए निर्धारित पात्रता के मानदंडों को पूरा करता है । (iii) वाणिज्यिक पत्र के प्रस्ताव दस्तावेज़ में गारंटी देनेवाली कंपनी की निवल संपत्ति, उन कंपनियों के नाम, जिन्हें गारंटीदाता ने इसी प्रकार की गारंटियां जारी की हैं, गारंटी देनेवाली कंपनी द्वारा प्रस्तावित गारंटियों की सीमा तथा किन परिस्थितियों में गारंटी लागू की जाएगी उन्हें स्पष्टतः प्रकट किया गया हो। क. वाणिज्यिक पत्र के सभी ओटीसी सौदे एफआईएमएमडीए प्लेटफॉर्म पर सौदा होने के 15 मिनट के भीतर रिपोर्ट किए जाएंगे। ख. वाणिज्यिक पत्र के ओटीसी सौदों का निपटान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के समाशोधन गृह, अर्थात् भारतीय राष्ट्रीय प्रतिभूति समाशोधन निगम लिमिटेड (एनएससीसीएल), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के समाशोधन गृह अर्थात् इंडियन क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन लि.(आईसीसीएल) और एमसीएक्स स्टाक एक्सचेंज के समाशोधन गृह अर्थात् एमसीएक्स-एसएक्स क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन लि.(सीसीएल) के माध्यम से, एनएससीसीएल, आईसीसीएल तथा सीसीएल द्वारा समय समय पर विनिर्दिष्ट मानदंड़ों के आधार पर किया जाएगा। ग. वाणिज्यिक पत्र में ओटीसी सौदों के लिए भुगतान चक्र टी+0 अथवा टी+1 होगा। क. वाणिज्यिक पत्र में निवेशकर्ता (प्राथमिक अभिदाता) आईपीए के माध्यम से जारीकर्ता के खाते में वाणिज्यिक पत्र का बट्टागत मूल्य अदा करेगा। ख. मूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र को धारित करने वाला निवेशक परिपक्वता पर उक्त लिखत को आइपीए के जरिए जारीकर्ता को चुकौती के लिए प्रस्तुत करेगा। ग. अमूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र का धारक वाणिज्यिक पत्र का मोचन कराएगा तथा आईपीए के जरिए भुगतान प्राप्त करेगा। क. जारीकर्ता उनके द्वारा निवेशकों को जारी वाणिज्यिक पत्रों की परिपक्वता अवधि से पूर्व वापसी खरीद कर सकते हैं। ख. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद द्वितीयक बाजार के जरिए तथा चालू बाजार दर पर की जाएगी। ग. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद उसे जारी करने की तारीख से न्यूनतम 7 दिन की अवधि से पूर्व नहीं की जाएगी। घ. जारीकर्ता की गई वापसी खरीद की सूचना आईपीए को देगा। ङ. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद निदेशक मंडल से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद की जानी चाहिए। जारीकर्ता, आईपीए तथा सीआरए के कर्तव्य और दायित्व नीचे दिए गए हैंः जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया गया है। क. आईपीए यह सुनिश्चित करेगा कि जारीकर्ता के पास आरबीआई द्वारा निर्धारित न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग है तथा वाणिज्यिक पत्र जारी करके जुटाई गई राशि विशिष्ट रेटिंग के लिए सीआरए द्वारा दर्शाई गई मात्रा अथवा इसके निदेशक मंडल द्वारा दिए गए अनुमोदन, इनमें से जो भी कम हो, के भीतर है। ख. आईपीए यह प्रमाणित करेगा कि उसका जारीकर्ता के साथ वैध करार है अनुबंध 1 (अनुसूची III) ग. आईपीए यह सत्यापित करेगा कि जारीकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज, अर्थात् बोर्ड संकल्प की प्रति, प्राधिकृत निष्पादकों के हस्ताक्षर (जब वाणिज्यिक पत्र मूर्त रूप में जारी किया जाता है) सही हैं, और इस आशय का प्रमाणपत्र जारी करेगा। घ. आईपीए द्वारा सत्यापित मूल दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियां आईपीए की अभिरक्षा में रखी जाएंगी। ङ. आईपीए के रूप में कार्य करने वाले सभी अनुसूचित बैंक/वित्तीय संस्थाएं वाणिज्यिक पत्र जारी करने की तारीख से दो दिन के भीतर वाणिज्यिक पत्र जारी करने संबंधी ब्योरा आरबीआई के ऑन-लाइन रिटर्न फाइलिंग सिस्टम (ओआरएफएस) में रिपोर्ट करेंगे। ) को इन दिशानिर्देशों के अनुबंध-I (अनुसूची IV) में दिए गया फॉर्मेट में रिपोर्ट करेगा। ) को इन दिशानिर्देशों के अनुबंध-I (अनुसूची V) में दिए गए फॉर्मेट में रिपोर्ट करेगा। क. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां पूंजी बाजार लिखतों की रेटिंग करने हेतु सेबी द्वारा सीआरए के लिए बनाई गई आचार-संहिता का पालन करेंगी, जो वाणिज्यिक पत्रों की रेटिंग के लिए भी लागू होगी। ख. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को रेटिंग की वैधता अवधि का निर्धारण करने का अधिकार होगा, जो कि जारीकर्ता की मजबूती के बारे में उनकी समझ पर निर्भर करेगा; तथा वे रेटिंग के समय वह तारीख स्पष्ट रूप से बताएंगे, जब रेटिंग की समीक्षा की जानी है। ग. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां नियमित अंतराल पर पिछले कार्य-निष्पादन की तुलना में जारीकर्ताओं को दी गई रेटिंग पर निगरानी रखेंगे तथा अपने प्रकाशनों और वेब-साइट के जरिए रेटिंग में संशोधन को सार्वजनिक करेंगे। किसी भी जारीकर्ता के पास हामीदारीकृत अथवा सह-स्वीकृत वाणिज्यिक पत्र का निर्गम नहीं होगा । क. वाणिज्यिक पत्रों के लिए मानकीकृत क्रिया-विधि तथा प्रलेखीकरण का निर्धारण भारतीय नियत आय मुद्रा बाज़ार और व्युत्पन्नी संघ (एफआईएमएमडीए) के साथ परामर्श करके अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार किया गया है। ख. जारीकर्ता/आईपीए एफआईएमएमडीए द्वारा समय-समय पर जारी परिचालनगत दिशा-निर्देशों का पालन भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से करेंगे। 2.5 अंतर कंपनी जमाराशियां (आईसीडी) भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय संस्थाओं द्वारा अंतर कंपनी जमाराशियों (आइसीडी) के माध्यम से संसाधन जुटाने के लिए कोई मानदंड निर्धारित नहीं किये हैं। तथापि, जिन वित्तीय संस्थाओं का कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत कंपनी के रूप में विन्यास हुआ है, वे उक्त अधिनियम के अंतर्गत अनुमति के अनुसार अंतर कंपनी जमाराशियां जारी करने के लिए पात्र हैं। अंतर कंपनी जमाराशियों के माध्यम से जुटायी गयी राशि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित समग्र अंब्रेला सीमा के भीतर होनी चाहिए। इस प्रकार, अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, जमा प्रमाणपत्र (सीडी) तथा वाणिज्यिक पत्र (सीपी) सहित अंतर कंपनी जमाराशियां का निर्गम, लेखा परीक्षा किये गये अद्यतन तुलन पत्र के अनुसार उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए । 3.1 वित्तीय संस्थाओं को बांडों के निर्गम से, चाहे सार्वजनिक निर्गम अथवा निजी तौर पर आबंटन द्वारा हों, संसाधन जुटाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करने के अधीन रिज़र्व बैंक का निर्गम-वार पूर्वानुमोदन/पंजीकरण मांगने की आवश्यकता नहीं है : बांड की न्यूनतम परिपक्वता अवधि 3 वर्ष होनी चाहिए; खरीद /विक्रय अथवा दोनों विकल्प वाले बांडों के संबंध में, वह विकल्प बांड के निर्गम की तारीख से एक वर्ष समाप्त होने के पूर्व प्रयोज्य नहीं होना चाहिए; निर्गम की तारीख से एक वर्ष समाप्त होने से पूर्व बांड पर `एक्ज़िट' विकल्प प्रस्तावित नहीं किया जाना चाहिए । 3.2 वित्तीय संस्था द्वारा किसी विशिष्ट समय पर जुटाये गये कुल संसाधन, जिनमें रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित `अम्ब्रेला' सीमा के अंतर्गत जुटायी गयी निधियां शामिल हैं, का बकाया उसके नवीनतम लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के 10 गुना अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एकल वित्तीय संस्था के लिए अनुमोदित राशि से अधिक नहीं होना चाहिए । 3.3 संसाधन जुटाने के लिए निर्धारित सीमा, केवल एक समर्थकारी व्यवस्था है । वित्तीय संस्थाओं को सूचित किया जाता है कि वे अपनी संसाधनों की आवश्यकताओं तथा परिपक्वता ढांचा तथा उस पर प्रस्तावित ब्याज की गणना वास्तविक आधार पर करें, जो अन्य बातों के साथ-साथ सुदृढ एएलएम/जोखिम प्रबंधन प्रणाली पर आधारित हों । 3.4 वित्तीय संस्थाओं को अस्थिर दर बांड के मामले में चयनित `संदर्भ दर' तथा अस्थिर दर निर्धारण की पद्धतियों के संबंध में रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन लेना चाहिए। बाद के अलग-अलग निर्गमों के लिए तब तक उक्त अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी जब तक आधार संदर्भ दर तथा अस्थिर दर निर्धारण की पद्धति अपरिवर्तित बनी रहती है । 3.5 वित्तीय संस्थाओं को अन्य विनियामक प्राधिकरण, जैसे सेबी आदि के विवेकपूर्ण मानदंडों का अनुपालन भी करना चाहिए । 3.6 वित्तीय संस्थाओं को चाहिए कि वे जुटाये गये संसाधनों के ब्यौरों के मासिक विवरण अनुबंध 3 तथा 4 में दिये गये फॉर्मेट में भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करें। महीने के अंत की स्थिति को दर्शाने वाले विवरण, दूसरे महीने के 10वें दिन अथवा उसके पूर्व प्रस्तुत किये जाने चाहिए। बांड के सार्वजनिक निर्गम से संबंधित ब्यौरे उस महीने के विवरण में शामिल किये जाएं जिसमें संबंधित निर्गम बंद हुआ है । 3.7 यह विवरण मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय संस्था प्रभाग, बैंकिंग विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, 13वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन, फोर्ट, मुंबई - 400001 को भेजें। फैक्स सं. 22701238 । ।परिपत्र सं.
कृपया एक जुलाई दो हज़ार चौदह का मास्टर परिपत्र बैंपविवि.सं.एफआईडी.एफआईसी.एक/एक.दो.शून्य/दो हज़ार चौदह-पंद्रह देखें, जिसमें वित्तीय संस्थाओं को संसाधन जुटाने संबंधी मानदंडों के संबंध में तीस जून दो हज़ार चौदह तक जारी अनुदेश/दिशानिर्देश दिए गए हैं। इस मास्टर परिपत्र में उपर्युक्त विषय पर तीस जून दो हज़ार पंद्रह तक जारी अनुदेशों को शामिल किया गया है। विशेषीकृत वित्तीय संस्थाओं को अपनी अल्पावधि तथा दीर्घावधि संसाधन आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सहायता देने के लिए ताकि वित्तीय संस्थाओं को उनकी संबंधित संविधि के अनुसार जिन परिचालनों, उद्देश्य तथा लक्ष्यों के साथ स्थापित किया गया था उनसे संबद्ध ऋण की क्षेत्रीय आवश्यकताओं को वित्तीय संस्थाएं पूरा कर सकें। इस परिपत्र का उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा बॉण्ड जारी करने के संबंध में उनके बीच विनियामक मानदंडों में व्यापक एकरूपता लाकर उन्हें एक समान अवसर दिलाना भी है। इस मास्टर परिपत्र में अनुबंध चार में सूचीबद्ध परिपत्रों में निहित वित्तीय संस्थाओं द्वारा संसाधन जुटाने के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए सभी अनुदेशों /दिशानिर्देशों को समेकित तथा अद्यतन किया गया है। सभी अखिल भारतीय मीयादी ऋणदात्री तथा पुनर्वित्त प्रदान करनेवाली संस्थाएं अर्थात, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक , राष्ट्रीय आवास बैंक तथा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक । सभी वित्तीय संस्थाएं चाहे वे सांविधिक निकाय हो या लिमिटेड कंपनियां, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से भारतीय रिजर्व बैंक के विनियमन के अधीन हैं। वित्तीय संस्थाएं वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और निधि जुटाने हेतु संसाधन आवंटन, आदि में मददगार होती हैं। प्रारंभ में भारतीय रिज़र्व बैंक ने चयनित वित्तीय संस्थाओं के लिए लिखतवार वह सीमा निर्धारित की थी जहां तक विनिर्दिष्ट लिखत के जरिए वित्तीय संस्थाएं संसाधन जुटा सकती थीं। मई एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में लिखतवार अधिकतम सीमा के स्थान पर "अंब्रेला सीमा" निर्धारित की गयी जो संबंधित वित्तीय संस्था की 'निवल स्वाधिकृत निधि' से संबद्ध थी और जो विनिर्दिष्ट लिखत के जरिए वित्तीय संस्था द्वारा उधार लेने के लिए समग्र अधिकतम सीमा थी। 'अंब्रेला सीमा' की प्रणाली अब भी लागू है, हालांकि पिछले वर्षों में इस सीमा के अंतर्गत कुछ अतिरिक्त लिखतों को शामिल किया गया है । 'अंब्रेला सीमा' में वर्तमान में पांच लिखतें शामिल हैं - अर्थात् मीयादी जमा, मीयादी मुद्रा उधार, जमा प्रमाण पत्र , वाणिज्यिक पत्र और अंतर-कंपनी जमा । इन विनिर्दिष्ट लिखतों के जरिए जुटाये जानेवाले कुल उधार कभी भी संबंधित वित्तीय संस्था के नवीनतम लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार निवल स्वाधिकृत निधि के एक सौ प्रतिशत अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एकल वित्तीय संस्था के लिए अनुमोदित राशि से अधिक नहीं होने चाहिए। इनमें से प्रत्येक लिखत से संबंधित शर्तें नीचे दी गयी हैं : वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर मीयादी जमाराशियां स्वीकार कर सकती है अर्थात् अन्य लिखतों, जैसे मीयादी मुद्रा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाण पत्र और अंतर-कंपनी जमा के साथ मीयादी जमा, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। i) जमाकर्ता के निधन, मेडिकल अनिवार्यता, शैक्षिक व्यय तथा अन्य ऐसे कारणों से एक वर्ष पूर्ण होने से पहले परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण के मामले में निम्नलिखित मानदंड लागू किए जाएं : छह महीने और एक वर्ष के बीच परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण - ब्याज का भुगताना चार.शून्य प्रतिशत की दर से किया जाए। एक वर्ष से अधिक के लिए, वित्तीय संस्थाएं, जमाराशियों के परिपक्वता अवधि पूर्व आहरण पर उनकी अपनी दंडस्वरूप ब्याज दर निश्चित करने के लिए स्वतंत्र हैं। ।सेबी द्वारा अनुमोदित रेटिंग एजेन्सियों से रेटिंग अनिवार्य है। स्वीकृत मीयादी जमाराशियों पर वित्तीय संस्थाओं द्वारा कोई भी ऋण प्रदान नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर मीयादी मुद्रा जुटा सकती है अर्थात् अन्य लिखतों, जैसे मीयादी जमा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाण पत्र और अंतर-कंपनी जमा के साथ मीयादी मुद्रा उधार, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। ।वित्तीय संस्थाओं को ब्याज दर निश्चित करने की स्वतंत्रता है। वित्तीय संस्थाएं अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से ही 'मीयादी मुद्रा' उधार लेने के लिए पात्र हैं। दो.तीन जमा प्रमाण पत्र जमा प्रमाण पत्र उन चयनित अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी किये जा सकते हैं जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंदर अल्पावधि संसाधन जुटाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमति दी है। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी समग्र अंब्रेला सीमा के अंदर जमा प्रमाण पत्र जारी कर सकती है, अर्थात् अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, वाणिज्यिक पत्र और अंतर कंपनी जमा सहित जारी किये जानेवाले जमा प्रमाण पत्र, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। जमा प्रमाण पत्र की न्यूनतम राशि एक लाख रुपये होनी चाहिए अर्थात् एकल अभिदाता से स्वीकार की जा सकने वाली न्यूनतम जमाराशि एक लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। जारी किये जानेवाले जमा प्रमाण पत्र एक लाख रुपये के गुणजों में होंगे। ।कौन अभिदान कर सकता है ? जमा प्रमाण पत्र एकल व्यक्तियों , निगमों, कंपनियों, न्यासों, निधियों, संघों आदि को जारी किये जा सकते हैं । अनिवासी भारतीय भी जमा प्रमाण पत्रों में अभिदान कर सकते हैं लेकिन, केवल अप्रत्यावर्तनीय आधार पर और इस बात का प्रमाणपत्र पर स्पष्टतः उल्लेख किया जाए। ऐसे जमा प्रमाणपत्र अनुषंगी बाज़ार में किसी दूसरे अनिवासी भारतीय को परांकित नहीं किए जा सकते हैं। वित्तीय संस्थाएं जारी करने की तारीख से एक वर्ष से अन्यून अवधि और तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए जमा प्रमाण पत्र जारी कर सकती हैं । जमा प्रमाण पत्र अंकित मूल्य पर बट्टा काटकर जारी किये जाने चाहिए, परंतु उन्हें कूपन युक्त लिखत के रूप में भी जारी किया जा सकता है। वित्तीय संस्थाओं को अस्थिर दर के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति है, बशर्ते अस्थिर दर निर्धारित करने की पद्धति वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी तथा बाज़ार आधारित हो। वित्तीय संस्थाएं बट्टा/कूपन दर निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं । वित्तीय संस्थाओं द्वारा जमा प्रमाण पत्र केवल अमूर्त रूप में ही जारी किये जाने चाहिए। तथापि, डिपॉजिटरीज एक्ट, एक हज़ार नौ सौ छियानवे के अनुसार निवेशकों को प्रमाण पत्र भौतिक रूप में प्राप्त करने का विकल्प है । तदनुसार, यदि निवेशक भौतिक रूप में प्रमाण पत्र का आग्रह करे तो वित्तीय संस्था ऐसे प्रसंगों की अलग से सूचना मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय बाज़ार विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय कार्यालय, फोर्ट, मुंबई-चार लाख एक को देनी होगी । साथ ही, जमा प्रमाण पत्र जारी किये जाने पर स्टांप ड्यूटी भी लगेगी। बैंकों/वित्तीय संस्थाओं द्वारा अपनाए जाने के लिए एक फार्मेट अनुबंध-। में संलग्न है। जमा प्रमाणपत्रों की चुकौती के लिए कोई रियायत अवधि नहीं दी जाएगी। यदि परिपक्वता की तिथि छुट्टी के दिन पड़ती हो, तो जारीकर्ता वित्तीय संस्था को इसका भुगतान उसके तुरंत बाद के कार्यदिवस पर करना होगा। अतः वित्तीय संस्थाओं को जमा की अवधि का निर्धारण इस प्रकार करना चाहिए कि परिपक्वता तिथि अवकाश के दिन न पडे ताकि छूट / ब्याज दर के नुकसान से बचा जा सके। भौतिक जमा प्रमाणपत्रों को परांकन तथा सुपुर्दगी द्वारा मुक्त रूप से अंतरित किया जा सकता है। जमा प्रमाण पत्रों को अन्य डिमेट प्रतिभूतियों पर लागू क्रियाविधि के अनुसार अंतरित किया जा सकता है । जमा प्रमाण पत्रों के लिए कोई अवरुद्धता अवधि नहीं है । वित्तीय संस्था जमा प्रमाण पत्रों पर न तो ऋण प्रदान कर सकती हैं और न ही अपने जमा प्रमाण पत्रों की परिपक्वता अवधि से पहले पुनर्खरीद कर सकती हैं। इस संबंध में वित्तीय संस्थाएं निर्धारित आय मुद्रा बाज़ार और व्युत्पन्न संघ द्वारा बीस जून दो हज़ार दो को जारी किए गए, समय समय पर संशोधित विस्तृत दिशानिर्देश देखें। दो.चार वाणिज्यिक पत्र जिन अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंतर्गत संसाधन जुटाने की अनुमति दी गयी है वे वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए पात्र हैं। वित्तीय संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निश्चित की गयी अंब्रेला सीमा के अंदर वाणिज्यिक पत्र जारी कर सकती हैं, अर्थात् अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, जमा प्रमाण पत्र और अंतर कंपनी जमा सहित जारी किये जानेवाले वाणिज्यिक पत्र, अद्यतन लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार, उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए। वाणिज्यिक पत्रों के निर्गम द्वारा प्रस्तावित कुल राशि जारीकर्ता द्वारा निर्गम को अभिदान हेतु खोले जाने की तारीख से दो सप्ताह की अवधि के भीतर जुटायी जानी चाहिए। वाणिज्यिक पत्र एक ही तारीख को या अलग-अलग तारीखों को अंशों में जारी किये जा सकते हैं, बशर्ते अलग-अलग तारीखों के मामले में प्रत्येक वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता तारीख समान हो। नवीकरण सहित वाणिज्यिक पत्र के प्रत्येक निर्गम को नये निर्गम के रूप में माना जाना चाहिए। वाणिज्यिक पत्र पाँच लाख रुपये या उसके गुणजों के मूल्यवर्ग में जारी किये जा सकते हैं । एकल निवेशक द्वारा निवेश की गयी राशि पाँच लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। क. प्रत्येक जारीकर्ता वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए एक आईपीए नियुक्त करेगा। ख. जारीकर्ता को मानक बाज़ार व्यवहार के अनुसार संभावित निवेशकों को अपनी अद्यतन वित्तीय स्थिति की जानकारी देनी चाहिए। ग. निवेशक और जारीकर्ता के बीच सौदे की आपस में पुष्टि होने के बाद जारीकर्ता आईपीए के माध्यम से निक्षेपागार में निवेशक के डी-मैट खाते में वाणिज्यिक पत्र जमा करने की व्यवस्था करेगा। घ. जारीकर्ता निवेशक को इस आशय के आईपीए प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि देगा कि जारीकर्ता का आईपीए के साथ वैध करार है तथा दस्तावेज अनुबंध-। में दिए गए फार्मेट के अनुसार सही है। वित्तीय संस्था वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए सेबी के पास पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से किसी एक से क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करेंगी । रेटिंग सिम्बल तथा सेबी द्वारा निर्धारित परिभाषा के अनुसार न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग 'एतीन' होगी । सीपी के निर्गम के समय निर्गमकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह से प्राप्त रेटिंग बनी हुई है तथा उसकी समीक्षा का समय नहीं हुआ है । ।कौन अभिदान कर सकता है ? वाणिज्यिक पत्र व्यक्तियों, बैंकिंग कंपनियों, भारत में पंजीकृत अथवा निगमित अन्य कंपनी निकायों तथा अनिगमित निकायों, अनिवासी भारतीयों तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों को जारी किये जा सकते हैं तथा वे उन्हें धारित कर सकते हैं। तथापि, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा किये जानेवाले निवेश उनके निवेशों के लिए भारतीय प्रतिभूति तथा एक्सचेंज बोर्ड द्वारा निर्धारित उच्चतम सीमा तथा समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे, विदेशी मुद्रा विनियम, दो हज़ार और विदेशी मुद्रा प्रबंध विनियम, दो हज़ार के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन होंगे। वाणिज्यिक पत्र निर्गम की तारीख से न्यूनतम सात दिनों की तथा अधिकतम एक वर्ष की परिपक्वता अवधि के बीच की परिपक्वताओं के लिए जारी किये जा सकते हैं । तथापि वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता अवधि, निर्गमकर्ता की क्रेडिट रेटिंग की वैधता की तारीख के आगे नहीं बढ़ायी जानी चाहिए। वाणिज्यिक पत्र अंकित मूल्य पर बट्टे पर जारी किये जाएं तथा बट्टे की दर वित्तीय संस्था द्वारा निर्धारित की जाए। भौतिक स्वरूप में वाणिज्यिक पत्र, परांकन तथा सुपुर्दगी द्वारा मुक्त रूप से अंतरणीय होंगे। अमूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र की अंतरणीयता एफआइएमएमडीए द्वारा जारी दिशानिर्देशों द्वारा नियंत्रित होगी। क. वाणिज्यिक पत्र, सेबी द्वारा अनुमोदित तथा सेबी में पंजीकृत किसी भी निक्षेपागार के माध्यम से वचन पत्र या प्रॉमिसरी नोट के रूप में अथवा अमूर्त रूप में जारी किये जाएंगे जैसाकि इन निदेशों की अनुबंध एक में विनिर्दिष्ट किया गया है, बशर्ते कि सभी आरबीआई विनियमित संस्थाएं ऐसे निक्षेपागारों के माध्यम से सीपी का सौदा और धारण केवल अमूर्त रूप में ही कर सकते हैं। ख. सभी आरबीआई विनियमित संस्थाओं द्वारा नए निवेश केवल अमूर्त रूप में ही किए जाएंगे। बैंकेतर संस्थाएं जिनमें कंपनियां शामिल हैं, वाणिज्यिक पत्र निर्गम के लिए ऋण संवर्धन हेतु बिना शर्त तथा अप्रतिसंहरणीय गारंटी प्रदान कर सकती हैं, बशर्ते, निर्गमकर्ता, वाणिज्यिक पत्र के निर्गम के लिए निर्धारित पात्रता के मानदंडों को पूरा करता है । वाणिज्यिक पत्र के प्रस्ताव दस्तावेज़ में गारंटी देनेवाली कंपनी की निवल संपत्ति, उन कंपनियों के नाम, जिन्हें गारंटीदाता ने इसी प्रकार की गारंटियां जारी की हैं, गारंटी देनेवाली कंपनी द्वारा प्रस्तावित गारंटियों की सीमा तथा किन परिस्थितियों में गारंटी लागू की जाएगी उन्हें स्पष्टतः प्रकट किया गया हो। क. वाणिज्यिक पत्र के सभी ओटीसी सौदे एफआईएमएमडीए प्लेटफॉर्म पर सौदा होने के पंद्रह मिनट के भीतर रिपोर्ट किए जाएंगे। ख. वाणिज्यिक पत्र के ओटीसी सौदों का निपटान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के समाशोधन गृह, अर्थात् भारतीय राष्ट्रीय प्रतिभूति समाशोधन निगम लिमिटेड , बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के समाशोधन गृह अर्थात् इंडियन क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन लि. और एमसीएक्स स्टाक एक्सचेंज के समाशोधन गृह अर्थात् एमसीएक्स-एसएक्स क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन लि. के माध्यम से, एनएससीसीएल, आईसीसीएल तथा सीसीएल द्वारा समय समय पर विनिर्दिष्ट मानदंड़ों के आधार पर किया जाएगा। ग. वाणिज्यिक पत्र में ओटीसी सौदों के लिए भुगतान चक्र टी+शून्य अथवा टी+एक होगा। क. वाणिज्यिक पत्र में निवेशकर्ता आईपीए के माध्यम से जारीकर्ता के खाते में वाणिज्यिक पत्र का बट्टागत मूल्य अदा करेगा। ख. मूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र को धारित करने वाला निवेशक परिपक्वता पर उक्त लिखत को आइपीए के जरिए जारीकर्ता को चुकौती के लिए प्रस्तुत करेगा। ग. अमूर्त रूप में वाणिज्यिक पत्र का धारक वाणिज्यिक पत्र का मोचन कराएगा तथा आईपीए के जरिए भुगतान प्राप्त करेगा। क. जारीकर्ता उनके द्वारा निवेशकों को जारी वाणिज्यिक पत्रों की परिपक्वता अवधि से पूर्व वापसी खरीद कर सकते हैं। ख. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद द्वितीयक बाजार के जरिए तथा चालू बाजार दर पर की जाएगी। ग. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद उसे जारी करने की तारीख से न्यूनतम सात दिन की अवधि से पूर्व नहीं की जाएगी। घ. जारीकर्ता की गई वापसी खरीद की सूचना आईपीए को देगा। ङ. वाणिज्यिक पत्र की वापसी खरीद निदेशक मंडल से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद की जानी चाहिए। जारीकर्ता, आईपीए तथा सीआरए के कर्तव्य और दायित्व नीचे दिए गए हैंः जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया गया है। क. आईपीए यह सुनिश्चित करेगा कि जारीकर्ता के पास आरबीआई द्वारा निर्धारित न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग है तथा वाणिज्यिक पत्र जारी करके जुटाई गई राशि विशिष्ट रेटिंग के लिए सीआरए द्वारा दर्शाई गई मात्रा अथवा इसके निदेशक मंडल द्वारा दिए गए अनुमोदन, इनमें से जो भी कम हो, के भीतर है। ख. आईपीए यह प्रमाणित करेगा कि उसका जारीकर्ता के साथ वैध करार है अनुबंध एक ग. आईपीए यह सत्यापित करेगा कि जारीकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज, अर्थात् बोर्ड संकल्प की प्रति, प्राधिकृत निष्पादकों के हस्ताक्षर सही हैं, और इस आशय का प्रमाणपत्र जारी करेगा। घ. आईपीए द्वारा सत्यापित मूल दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियां आईपीए की अभिरक्षा में रखी जाएंगी। ङ. आईपीए के रूप में कार्य करने वाले सभी अनुसूचित बैंक/वित्तीय संस्थाएं वाणिज्यिक पत्र जारी करने की तारीख से दो दिन के भीतर वाणिज्यिक पत्र जारी करने संबंधी ब्योरा आरबीआई के ऑन-लाइन रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में रिपोर्ट करेंगे। ) को इन दिशानिर्देशों के अनुबंध-I में दिए गया फॉर्मेट में रिपोर्ट करेगा। ) को इन दिशानिर्देशों के अनुबंध-I में दिए गए फॉर्मेट में रिपोर्ट करेगा। क. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां पूंजी बाजार लिखतों की रेटिंग करने हेतु सेबी द्वारा सीआरए के लिए बनाई गई आचार-संहिता का पालन करेंगी, जो वाणिज्यिक पत्रों की रेटिंग के लिए भी लागू होगी। ख. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को रेटिंग की वैधता अवधि का निर्धारण करने का अधिकार होगा, जो कि जारीकर्ता की मजबूती के बारे में उनकी समझ पर निर्भर करेगा; तथा वे रेटिंग के समय वह तारीख स्पष्ट रूप से बताएंगे, जब रेटिंग की समीक्षा की जानी है। ग. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां नियमित अंतराल पर पिछले कार्य-निष्पादन की तुलना में जारीकर्ताओं को दी गई रेटिंग पर निगरानी रखेंगे तथा अपने प्रकाशनों और वेब-साइट के जरिए रेटिंग में संशोधन को सार्वजनिक करेंगे। किसी भी जारीकर्ता के पास हामीदारीकृत अथवा सह-स्वीकृत वाणिज्यिक पत्र का निर्गम नहीं होगा । क. वाणिज्यिक पत्रों के लिए मानकीकृत क्रिया-विधि तथा प्रलेखीकरण का निर्धारण भारतीय नियत आय मुद्रा बाज़ार और व्युत्पन्नी संघ के साथ परामर्श करके अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार किया गया है। ख. जारीकर्ता/आईपीए एफआईएमएमडीए द्वारा समय-समय पर जारी परिचालनगत दिशा-निर्देशों का पालन भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से करेंगे। दो.पाँच अंतर कंपनी जमाराशियां भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय संस्थाओं द्वारा अंतर कंपनी जमाराशियों के माध्यम से संसाधन जुटाने के लिए कोई मानदंड निर्धारित नहीं किये हैं। तथापि, जिन वित्तीय संस्थाओं का कंपनी अधिनियम एक हज़ार नौ सौ छप्पन के अंतर्गत कंपनी के रूप में विन्यास हुआ है, वे उक्त अधिनियम के अंतर्गत अनुमति के अनुसार अंतर कंपनी जमाराशियां जारी करने के लिए पात्र हैं। अंतर कंपनी जमाराशियों के माध्यम से जुटायी गयी राशि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित समग्र अंब्रेला सीमा के भीतर होनी चाहिए। इस प्रकार, अन्य लिखतों जैसे मीयादी मुद्रा, मीयादी जमा, जमा प्रमाणपत्र तथा वाणिज्यिक पत्र सहित अंतर कंपनी जमाराशियां का निर्गम, लेखा परीक्षा किये गये अद्यतन तुलन पत्र के अनुसार उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए । तीन.एक वित्तीय संस्थाओं को बांडों के निर्गम से, चाहे सार्वजनिक निर्गम अथवा निजी तौर पर आबंटन द्वारा हों, संसाधन जुटाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करने के अधीन रिज़र्व बैंक का निर्गम-वार पूर्वानुमोदन/पंजीकरण मांगने की आवश्यकता नहीं है : बांड की न्यूनतम परिपक्वता अवधि तीन वर्ष होनी चाहिए; खरीद /विक्रय अथवा दोनों विकल्प वाले बांडों के संबंध में, वह विकल्प बांड के निर्गम की तारीख से एक वर्ष समाप्त होने के पूर्व प्रयोज्य नहीं होना चाहिए; निर्गम की तारीख से एक वर्ष समाप्त होने से पूर्व बांड पर `एक्ज़िट' विकल्प प्रस्तावित नहीं किया जाना चाहिए । तीन.दो वित्तीय संस्था द्वारा किसी विशिष्ट समय पर जुटाये गये कुल संसाधन, जिनमें रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित `अम्ब्रेला' सीमा के अंतर्गत जुटायी गयी निधियां शामिल हैं, का बकाया उसके नवीनतम लेखा परीक्षित तुलन पत्र के अनुसार उसकी निवल स्वाधिकृत निधियों के दस गुना अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एकल वित्तीय संस्था के लिए अनुमोदित राशि से अधिक नहीं होना चाहिए । तीन.तीन संसाधन जुटाने के लिए निर्धारित सीमा, केवल एक समर्थकारी व्यवस्था है । वित्तीय संस्थाओं को सूचित किया जाता है कि वे अपनी संसाधनों की आवश्यकताओं तथा परिपक्वता ढांचा तथा उस पर प्रस्तावित ब्याज की गणना वास्तविक आधार पर करें, जो अन्य बातों के साथ-साथ सुदृढ एएलएम/जोखिम प्रबंधन प्रणाली पर आधारित हों । तीन.चार वित्तीय संस्थाओं को अस्थिर दर बांड के मामले में चयनित `संदर्भ दर' तथा अस्थिर दर निर्धारण की पद्धतियों के संबंध में रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन लेना चाहिए। बाद के अलग-अलग निर्गमों के लिए तब तक उक्त अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी जब तक आधार संदर्भ दर तथा अस्थिर दर निर्धारण की पद्धति अपरिवर्तित बनी रहती है । तीन.पाँच वित्तीय संस्थाओं को अन्य विनियामक प्राधिकरण, जैसे सेबी आदि के विवेकपूर्ण मानदंडों का अनुपालन भी करना चाहिए । तीन.छः वित्तीय संस्थाओं को चाहिए कि वे जुटाये गये संसाधनों के ब्यौरों के मासिक विवरण अनुबंध तीन तथा चार में दिये गये फॉर्मेट में भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करें। महीने के अंत की स्थिति को दर्शाने वाले विवरण, दूसरे महीने के दसवें दिन अथवा उसके पूर्व प्रस्तुत किये जाने चाहिए। बांड के सार्वजनिक निर्गम से संबंधित ब्यौरे उस महीने के विवरण में शामिल किये जाएं जिसमें संबंधित निर्गम बंद हुआ है । तीन.सात यह विवरण मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय संस्था प्रभाग, बैंकिंग विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, तेरहवीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन, फोर्ट, मुंबई - चार लाख एक को भेजें। फैक्स सं. दो करोड़ सत्ताईस लाख एक हज़ार दो सौ अड़तीस । ।परिपत्र सं.
केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती को लेकर लाई गई अग्निपथ योजना का जहां देशभर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है। Hind Mazdoor Kisan Samiti supported Agneepath scheme with amendment :-केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती को लेकर लाई गई अग्निपथ योजना का जहां देशभर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें प्रदर्शनकारियों द्वारा कई ट्रेनें और बसों सहित अन्य वाहनों में आगजनी की गई है इसके बावजूद भी सरकार ने अग्नीपथ योजना को वापस न करने की भी घोषणा कर दी है। जहां योजना का देश भर के युवा विरोध करते नजर आ रहे हैं तो वही पश्चिम उत्तर प्रदेश के एक किसान संगठन हिंद मजदूर किसान समिति ने संशोधन के साथ अग्निपथ योजना का समर्थन किया है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर सरकार से अग्निपथ योजना में बदलाव लाने की मांग की है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि अग्नीपथ योजना देश की सुरक्षा और युवाओं के लिए एक अच्छी योजना है मगर इसमें सरकार को कुछ बदलाव करने चाहिए। हिंद मजदूर किसान समिति के प्रदेश प्रवक्ता अमित सिंह ने मीडिया को बताया कि जो इस समय अग्निपथ योजना को लेकर जो विवाद चल रहा है उसको लेकर आज प्रेस वार्ता की गई है पुराने कहां के जो अग्निपथ योजना के तहत सरकार युवाओं को सेना में भर्ती करने का जो काम कर रही है वह कानून हमने पड़ा और संशोधन के साथ हम इस कानून का समर्थन करते हैं। हिंद मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर हमने इस कानून को समझा हम इस कानून में कुछ संशोधन चाहते हैं कि देश में कोई भी चुनाव हो केवल अग्निवीर ही लड़े चाहे वह चुनाव ग्राम पंचायत सदस्य का हो प्रधान का हो विधायक सांसद या प्रधानमंत्री को पहले वह 4 साल की अग्निपथ योजना के तहत नौकरी करने के बाद कि वह राजनीति में आए उन्होंने कहा कि हम युवाओं से कहना चाहते हैं कि वह तोड़फोड़ ना करें भ्रष्ट राजनेता या राजनीति के चक्कर में ना आएं नेताओं की संपत्ति का कोई नुकसान नहीं हो रहा यह पब्लिक की संपत्ति है। पब्लिक ही इसमें परेशान है उन्होंने कहा कि अगर कोई 18 वर्ष की उम्र का युवक अग्निवीर बनता है तो 22 साल का वह रिटायर होकर आ जाएगा अक्सर देखा जाता है कि 18 से 25 वर्ष की उम्र तक के युवा गांव में बेरोजगार घूमते रहते हैं अग्निवीर योजना के तहत उनके सामने एक विकल्प खुल जाएगा कि 4 साल बाद 11 से 1200000 रुपए लेकर आएगा उससे वह अपना रोजगार कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी योजना है लेकिन यह नेताओं पर भी लागू होनी चाहिए राजनेता बनने का मौका उसे ही मिले जो अग्निवीर बनकर 4 साल देश की सेवा करें वही लोग राजनीति में आए भ्रष्ट राजनीति के चलते ही यह तोड़फोड़ और यह नुकसान हो रहा है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारी शालिन्द्र बालियान का कहना है कि वैसे तो हम अग्नीपथ योजना का समर्थन करते हैं। लेकिन संशोधन के साथ जो जो अग्निवीर बने उन्हें ही नेता बनने का मौका मिलना चाहिए और कहा कि नेता तो अपने बच्चों को विदेश भेजेंगे या फिर विधायक बनाएंगे और किसान और मजदूर के बच्चे ट्रेनिंग करके अग्निवीर बनेंगे हम चाहते हैं कि जो भी अग्निवीर की ट्रेनिंग करें उसे ही चुनाव लड़ने का अधिकार हो प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक का चुनाव अग्निवीर ही लड़ सके उन्होंने कहा कि जो हिंसा कर रहे हैं यह सरकार या किसी नेता का नुकसान नहीं है यह आम जनता का नुकसान हो रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती को लेकर लाई गई अग्निपथ योजना का जहां देशभर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है। Hind Mazdoor Kisan Samiti supported Agneepath scheme with amendment :-केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती को लेकर लाई गई अग्निपथ योजना का जहां देशभर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें प्रदर्शनकारियों द्वारा कई ट्रेनें और बसों सहित अन्य वाहनों में आगजनी की गई है इसके बावजूद भी सरकार ने अग्नीपथ योजना को वापस न करने की भी घोषणा कर दी है। जहां योजना का देश भर के युवा विरोध करते नजर आ रहे हैं तो वही पश्चिम उत्तर प्रदेश के एक किसान संगठन हिंद मजदूर किसान समिति ने संशोधन के साथ अग्निपथ योजना का समर्थन किया है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर सरकार से अग्निपथ योजना में बदलाव लाने की मांग की है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि अग्नीपथ योजना देश की सुरक्षा और युवाओं के लिए एक अच्छी योजना है मगर इसमें सरकार को कुछ बदलाव करने चाहिए। हिंद मजदूर किसान समिति के प्रदेश प्रवक्ता अमित सिंह ने मीडिया को बताया कि जो इस समय अग्निपथ योजना को लेकर जो विवाद चल रहा है उसको लेकर आज प्रेस वार्ता की गई है पुराने कहां के जो अग्निपथ योजना के तहत सरकार युवाओं को सेना में भर्ती करने का जो काम कर रही है वह कानून हमने पड़ा और संशोधन के साथ हम इस कानून का समर्थन करते हैं। हिंद मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर हमने इस कानून को समझा हम इस कानून में कुछ संशोधन चाहते हैं कि देश में कोई भी चुनाव हो केवल अग्निवीर ही लड़े चाहे वह चुनाव ग्राम पंचायत सदस्य का हो प्रधान का हो विधायक सांसद या प्रधानमंत्री को पहले वह चार साल की अग्निपथ योजना के तहत नौकरी करने के बाद कि वह राजनीति में आए उन्होंने कहा कि हम युवाओं से कहना चाहते हैं कि वह तोड़फोड़ ना करें भ्रष्ट राजनेता या राजनीति के चक्कर में ना आएं नेताओं की संपत्ति का कोई नुकसान नहीं हो रहा यह पब्लिक की संपत्ति है। पब्लिक ही इसमें परेशान है उन्होंने कहा कि अगर कोई अट्ठारह वर्ष की उम्र का युवक अग्निवीर बनता है तो बाईस साल का वह रिटायर होकर आ जाएगा अक्सर देखा जाता है कि अट्ठारह से पच्चीस वर्ष की उम्र तक के युवा गांव में बेरोजगार घूमते रहते हैं अग्निवीर योजना के तहत उनके सामने एक विकल्प खुल जाएगा कि चार साल बाद ग्यारह से बारह लाख रुपयापए लेकर आएगा उससे वह अपना रोजगार कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी योजना है लेकिन यह नेताओं पर भी लागू होनी चाहिए राजनेता बनने का मौका उसे ही मिले जो अग्निवीर बनकर चार साल देश की सेवा करें वही लोग राजनीति में आए भ्रष्ट राजनीति के चलते ही यह तोड़फोड़ और यह नुकसान हो रहा है हिंद मजदूर किसान समिति के पदाधिकारी शालिन्द्र बालियान का कहना है कि वैसे तो हम अग्नीपथ योजना का समर्थन करते हैं। लेकिन संशोधन के साथ जो जो अग्निवीर बने उन्हें ही नेता बनने का मौका मिलना चाहिए और कहा कि नेता तो अपने बच्चों को विदेश भेजेंगे या फिर विधायक बनाएंगे और किसान और मजदूर के बच्चे ट्रेनिंग करके अग्निवीर बनेंगे हम चाहते हैं कि जो भी अग्निवीर की ट्रेनिंग करें उसे ही चुनाव लड़ने का अधिकार हो प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक का चुनाव अग्निवीर ही लड़ सके उन्होंने कहा कि जो हिंसा कर रहे हैं यह सरकार या किसी नेता का नुकसान नहीं है यह आम जनता का नुकसान हो रहा है।
पश्चात् मेरे लोक में जाता है । उसके पाँच सौ जन्मोंके सत्र पाप मिट जाते हैं और वह मेरा प्रिय भक्त हो जाता है । जिसे प्रातःकाल इस उपाख्यानको नित्य 'बदरिकाश्रम' का माहात्म्य भगवान् वराह कहते हैं - वसुंधरे ! उसी हिमाल्य पर्वतपर एक अत्यन्त गुह्य स्थान है, जो देवताओंके लिये भी दुर्लभ है । इसे 'बदरिकाश्रम' कहते हैं । इसमें संसारसे उद्धार करनेकी दिव्य शक्ति है । जिनकी मुझमें श्रद्धा है, केवल वे ही उस भूमिमे पहुँचने में सफल होते हैं । उसे प्राप्त करनेपर मानवके सभी मनोरथ पूर्ण हो सकते हैं । उस ऊँचे पर्वतशिखरपर 'ब्रह्मकुण्ड' नामका एक प्रसिद्ध स्थान है, जहाँ मैं हिममें स्थित होकर निवास करता हूँ । जो मनुष्य वहाँ तीन राततक उपवास रहकर स्नान करता है, वह 'अग्निष्टोम'यज्ञका फल प्राप्त करता है । मेरे व्रतमें आस्था रखनेवाला जितेन्द्रिय मनुष्यः यदि वहाँ प्राणोका त्याग करता है तो वह सत्यलोकका उल्लङ्घनकर मेरे धामको प्राप्त होता है। मेरे उसी उत्तम क्षेत्रमे एक 'अग्निसत्यपद' नामक स्थान है, जहाँ हिमालयके तीन शृङ्गोंसे विशाल धाराएँ गिरती हैं । मेरे कर्ममें परायण रहनेवाला जो मानव वहाँ तीन राततक निवास कर स्नान करता है, वह सत्यवादी एवं कार्य में परम कुशल होता है । वहाँके जलका स्पर्श करके यदि कोई प्राणोंका त्याग करता है तो वह मेरे लोकमें आनन्दपूर्वक निवास करता है । पढ़ने को मिलता है, उसे मेरा उत्तम स्थान प्राप्त होता है, इसमें कोई संशय नहीं । देवि ! इसी बदरिकाश्रममें 'इन्द्रलोक' नामका भी मेरा एक प्रसिद्ध आश्रम है । वहाँ इन्द्रने मुझे भलीभाँति संतुष्ट किया था । हिमालयके शृङ्गोंसे निरन्तर वहाँ मोटी धाराएँ गिरती हैं । उस विशाल शिलातलपर मेरा धर्म सदा व्यवस्थित रहता है । जो ( अध्याय १४० ) मानव वहाँ एक रात भी रहकर स्नान करता है, वह सत्यवक्ता एवं परम पवित्र होकर 'सत्यलोक में प्रतिष्ठा पाता है । जो वहॉ नित्य व्रत करने के पश्चात् अपने प्राणोंका त्याग करता है, वह मेरे लोकमें जाता है। बदरिकाश्रमसे सम्बन्ध रखनेवाला 'पञ्चशिख' नामका एक ऐसा तीर्थ है, जहाँ हिमालयकी पाँच चोटियोंसे जलकी धाराएँ गिरती है । वे धाराएँ धाराएँ पाँच नदीके रूपमें परिवर्तित हो गयी हैं । वहाँ जो मानव स्नान करता है, वह 'अश्वमेधयज्ञ का फल प्राप्तकर देवताओंके साथ आनन्दका उपभोग करता है । दुष्कर तप करनेके पश्चात् यदि वहाँ कोई प्राण त्याग करता है तो वह खर्गलोकका अतिक्रमण कर मेरे लोकमें प्रतिष्ठित होता है। मेरे उसी क्षेत्रमें 'चतुःस्रोत' नामसे प्रसिद्ध एक स्थान है। जहाँ हिमालयकी चारो दिशाओंसे चार धाराएँ गिरती हैं । जो मनुष्य एक रात भी वहाँ निवास कर स्नान करता है, वह स्वर्गके ऊर्ध्वभागमें आनन्दपूर्वक निवास करता है, और वहाँसे भ्रष्ट होकर मनुष्यलोकमें जन्म लेनेपर मेरा भक्त होता है। फिर संसारके दुष्कर कर्म ( कठिन साधना ) करके प्राणोका त्यागकर स्वर्गका अतिक्रमण कर मेरे लोकको प्राप्त होता है। वसुंधरे ! मेरे उसी क्षेत्रमे एक 'वेदधार' नामका है, जहाँ ब्रह्माजीके मुखसे चारों वेद प्रकट हुए थे । यहाँ चार विशाल धाराएँ ऊँची शिलापर गिरती हैं, जो मनुष्य चार राततक यहाँ रहकर स्नान करता है, वह चारो वेदोंके अध्ययनका अधिकारी होता है । जो मेरा उपासक मनुष्य वहाँ अपने प्राणोंका त्याग * 'वदरिकाश्रम'का माहात्म्य करता है, मेरे लोकमे प्रतिष्ठित होता है । यही द्वादश दिव्य-'कुण्ड' नामक वह स्थान है, जहाँ मैने बारह सूर्योको स्थापित किया था । वहाँके पर्वत शृङ्गकी जड़ विशाल है । इसके नीचे बहुत-सी शिलाएँ हैं। किसी भी द्वादशी तिथिको यदि कोई वहाँ स्नान करता है तो जहाँ द्वादश सूर्य रहते हैं, वह उस लोकमें जाता है, इसमे कोई संशय नहीं । फिर मेरे कर्ममें स्थित रहनेवाला वह मनुष्य प्राणोंका परित्याग कर आदित्योंके पाससे अलग होकर मेरे लोक में प्रतिष्ठित होता है । यहीं 'सोमाभिपेक' नामसे प्रसिद्ध एक तीर्थ है, जहाँ मैने चन्द्रमाका ब्राह्मणों के राजाके रूपमें अभिषेक किया था । उन अत्रिनन्दन चन्द्रमाने मुझे यही संतुष्ट किया था । वसुंधरे ! चौदह करोड़ वपतक तपोऽनुष्ठान कर मेरी कृपासे चन्द्रमाको परम सिद्धि उपलब्ध हुई थी । यह सारा जगत् एवं इसकी उत्तम ओपधियाँ सब उन चन्द्रमाके ही अधिकारमें हैं । इसी स्थानपर इन्द्र, स्कन्द और मरुद्गण प्रकट और विलीन हुआ करते हैं। देवि ! मुझसे सम्बन्ध रखनेवाली वहाँकी सभी वस्तुऍ सोममय होकर अन्तमे मुझमें स्थित हो जायँगी । वहाँ 'सोमगिरि' नामसे प्रसिद्ध एक ऐसा स्थान है, जहाँ भूमिपर, कुण्डमे एवं विशालबनमें भी धाराएँ गिरती हैं । देवि ! यह मै तुमसे वता चुका । जो मानव तीन राततक वहाँ रहकर स्नान करता है, वह सोमलोकको प्राप्तकर आनन्दका उपभोग करता है, इसमे कुछ भी संशय नही । देवि ! फिर अत्यन्त कठोर तप करनेके बाद जब उसकी मृत्यु होती है तो वह चन्द्रलोकका उल्लङ्घन कर मेरे लोकको प्राप्त करता है । देवि ! 'बदरिकाश्रम'मे तपका फल सुनिश्चित है, अतः स्वयं मैने भी वहाँ रहकर बहुत वर्पोतक तपस्या की है । पृथ्वीदेवि ! वहाँपर मै दस करोड़, दस अरव तथा कई पद्म वर्पोतक तप करनेमे तत्पर रहा । उस समय मै ऐसे गुप्त स्थानमे था कि देवतालोग भी मुझे देख न सके । अतः उन्हे महान् दुःख हुआ और अत्यन्त विस्मयमें पड़ गये । वसुंधरे ! मै तो तपमें संलग्न था और सभीको देख रहा था, किंतु मेरी योगमायाके प्रभावसे आवृत होनेके कारण उन सभीको मुझे देखनेकी शक्ति न थी । तब उन सव देवताओने ब्रह्माजीसे कहापितामह ! भगवान् विष्णुके विना जगत्में हमे शान्ति नही मिल रही है । तव देवताओकी बात सुनकर लोक-पितामह ब्रह्मा मुझसे कहनेके लिये उद्यत हुए । देवि ! उस समय मै योगमायाके पटके भीतर छिपा था । अतः ! उन्हे दर्शन न हो हो सका । अतएव देवता, गन्धर्च, सिद्ध और ऋषिगण परम प्रसन्न होकर मेरी स्तुति करनेके लिये चल पड़े । इन्द्रादि सभी देवता वहाँ मेरी प्रार्थना करने लगे। उन्होने स्तुति की - 'नाथ ! आपके अदर्शनमे हम सब महान् दुःखी एवं उत्साहहीन हैं । हमसे कोई भी प्रयत्न होना शक्य नहीं है । हृषीकेश ! आप महान् अनुग्रह करके हमारी रक्षा कीजिये ।' बड़ी आँखोसे शोभा पानेवाली पृथ्वि ! देवताओंकी इस प्रार्थनापर मैने उनपर कृपादृष्टि डाली । मेरे देखते ही वे परम शान्त हो गये । यह इसी उर्वशी तीर्थकी विशेषता है । इस 'उर्वशी कुण्ड'मे जो मानव एक अप्सरा मेरी दाहिनी, जाँघको विदीर्ण कर प्रकट हुई रात भी रहकर स्नान करता है, वह सम्पूर्ण पापोसे देवि ! मेरे इसी बदरिकाश्रमक्षेत्र में 'उर्वशी-कुण्ड' - नामक वह गुप्त क्षेत्र भी है, जहाँ उर्वशी नामकी थी । देवि ! देवताओंका कार्य साधन करनेके लिये मैं वहाँ ( निरन्तर ) तप करता रहता हूँ, पर मुझे कोई नहीं जानता, मै स्वयं ही अपने आपको जानता हूँ । वहाँ मेरे तपस्या करते हुए बहुत वर्ष बीत गये, किंतु इन्द्र, ब्रह्मा एवं महेश्वर आदि देवता भी यह रहस्य न जान सके ।
पश्चात् मेरे लोक में जाता है । उसके पाँच सौ जन्मोंके सत्र पाप मिट जाते हैं और वह मेरा प्रिय भक्त हो जाता है । जिसे प्रातःकाल इस उपाख्यानको नित्य 'बदरिकाश्रम' का माहात्म्य भगवान् वराह कहते हैं - वसुंधरे ! उसी हिमाल्य पर्वतपर एक अत्यन्त गुह्य स्थान है, जो देवताओंके लिये भी दुर्लभ है । इसे 'बदरिकाश्रम' कहते हैं । इसमें संसारसे उद्धार करनेकी दिव्य शक्ति है । जिनकी मुझमें श्रद्धा है, केवल वे ही उस भूमिमे पहुँचने में सफल होते हैं । उसे प्राप्त करनेपर मानवके सभी मनोरथ पूर्ण हो सकते हैं । उस ऊँचे पर्वतशिखरपर 'ब्रह्मकुण्ड' नामका एक प्रसिद्ध स्थान है, जहाँ मैं हिममें स्थित होकर निवास करता हूँ । जो मनुष्य वहाँ तीन राततक उपवास रहकर स्नान करता है, वह 'अग्निष्टोम'यज्ञका फल प्राप्त करता है । मेरे व्रतमें आस्था रखनेवाला जितेन्द्रिय मनुष्यः यदि वहाँ प्राणोका त्याग करता है तो वह सत्यलोकका उल्लङ्घनकर मेरे धामको प्राप्त होता है। मेरे उसी उत्तम क्षेत्रमे एक 'अग्निसत्यपद' नामक स्थान है, जहाँ हिमालयके तीन शृङ्गोंसे विशाल धाराएँ गिरती हैं । मेरे कर्ममें परायण रहनेवाला जो मानव वहाँ तीन राततक निवास कर स्नान करता है, वह सत्यवादी एवं कार्य में परम कुशल होता है । वहाँके जलका स्पर्श करके यदि कोई प्राणोंका त्याग करता है तो वह मेरे लोकमें आनन्दपूर्वक निवास करता है । पढ़ने को मिलता है, उसे मेरा उत्तम स्थान प्राप्त होता है, इसमें कोई संशय नहीं । देवि ! इसी बदरिकाश्रममें 'इन्द्रलोक' नामका भी मेरा एक प्रसिद्ध आश्रम है । वहाँ इन्द्रने मुझे भलीभाँति संतुष्ट किया था । हिमालयके शृङ्गोंसे निरन्तर वहाँ मोटी धाराएँ गिरती हैं । उस विशाल शिलातलपर मेरा धर्म सदा व्यवस्थित रहता है । जो मानव वहाँ एक रात भी रहकर स्नान करता है, वह सत्यवक्ता एवं परम पवित्र होकर 'सत्यलोक में प्रतिष्ठा पाता है । जो वहॉ नित्य व्रत करने के पश्चात् अपने प्राणोंका त्याग करता है, वह मेरे लोकमें जाता है। बदरिकाश्रमसे सम्बन्ध रखनेवाला 'पञ्चशिख' नामका एक ऐसा तीर्थ है, जहाँ हिमालयकी पाँच चोटियोंसे जलकी धाराएँ गिरती है । वे धाराएँ धाराएँ पाँच नदीके रूपमें परिवर्तित हो गयी हैं । वहाँ जो मानव स्नान करता है, वह 'अश्वमेधयज्ञ का फल प्राप्तकर देवताओंके साथ आनन्दका उपभोग करता है । दुष्कर तप करनेके पश्चात् यदि वहाँ कोई प्राण त्याग करता है तो वह खर्गलोकका अतिक्रमण कर मेरे लोकमें प्रतिष्ठित होता है। मेरे उसी क्षेत्रमें 'चतुःस्रोत' नामसे प्रसिद्ध एक स्थान है। जहाँ हिमालयकी चारो दिशाओंसे चार धाराएँ गिरती हैं । जो मनुष्य एक रात भी वहाँ निवास कर स्नान करता है, वह स्वर्गके ऊर्ध्वभागमें आनन्दपूर्वक निवास करता है, और वहाँसे भ्रष्ट होकर मनुष्यलोकमें जन्म लेनेपर मेरा भक्त होता है। फिर संसारके दुष्कर कर्म करके प्राणोका त्यागकर स्वर्गका अतिक्रमण कर मेरे लोकको प्राप्त होता है। वसुंधरे ! मेरे उसी क्षेत्रमे एक 'वेदधार' नामका है, जहाँ ब्रह्माजीके मुखसे चारों वेद प्रकट हुए थे । यहाँ चार विशाल धाराएँ ऊँची शिलापर गिरती हैं, जो मनुष्य चार राततक यहाँ रहकर स्नान करता है, वह चारो वेदोंके अध्ययनका अधिकारी होता है । जो मेरा उपासक मनुष्य वहाँ अपने प्राणोंका त्याग * 'वदरिकाश्रम'का माहात्म्य करता है, मेरे लोकमे प्रतिष्ठित होता है । यही द्वादश दिव्य-'कुण्ड' नामक वह स्थान है, जहाँ मैने बारह सूर्योको स्थापित किया था । वहाँके पर्वत शृङ्गकी जड़ विशाल है । इसके नीचे बहुत-सी शिलाएँ हैं। किसी भी द्वादशी तिथिको यदि कोई वहाँ स्नान करता है तो जहाँ द्वादश सूर्य रहते हैं, वह उस लोकमें जाता है, इसमे कोई संशय नहीं । फिर मेरे कर्ममें स्थित रहनेवाला वह मनुष्य प्राणोंका परित्याग कर आदित्योंके पाससे अलग होकर मेरे लोक में प्रतिष्ठित होता है । यहीं 'सोमाभिपेक' नामसे प्रसिद्ध एक तीर्थ है, जहाँ मैने चन्द्रमाका ब्राह्मणों के राजाके रूपमें अभिषेक किया था । उन अत्रिनन्दन चन्द्रमाने मुझे यही संतुष्ट किया था । वसुंधरे ! चौदह करोड़ वपतक तपोऽनुष्ठान कर मेरी कृपासे चन्द्रमाको परम सिद्धि उपलब्ध हुई थी । यह सारा जगत् एवं इसकी उत्तम ओपधियाँ सब उन चन्द्रमाके ही अधिकारमें हैं । इसी स्थानपर इन्द्र, स्कन्द और मरुद्गण प्रकट और विलीन हुआ करते हैं। देवि ! मुझसे सम्बन्ध रखनेवाली वहाँकी सभी वस्तुऍ सोममय होकर अन्तमे मुझमें स्थित हो जायँगी । वहाँ 'सोमगिरि' नामसे प्रसिद्ध एक ऐसा स्थान है, जहाँ भूमिपर, कुण्डमे एवं विशालबनमें भी धाराएँ गिरती हैं । देवि ! यह मै तुमसे वता चुका । जो मानव तीन राततक वहाँ रहकर स्नान करता है, वह सोमलोकको प्राप्तकर आनन्दका उपभोग करता है, इसमे कुछ भी संशय नही । देवि ! फिर अत्यन्त कठोर तप करनेके बाद जब उसकी मृत्यु होती है तो वह चन्द्रलोकका उल्लङ्घन कर मेरे लोकको प्राप्त करता है । देवि ! 'बदरिकाश्रम'मे तपका फल सुनिश्चित है, अतः स्वयं मैने भी वहाँ रहकर बहुत वर्पोतक तपस्या की है । पृथ्वीदेवि ! वहाँपर मै दस करोड़, दस अरव तथा कई पद्म वर्पोतक तप करनेमे तत्पर रहा । उस समय मै ऐसे गुप्त स्थानमे था कि देवतालोग भी मुझे देख न सके । अतः उन्हे महान् दुःख हुआ और अत्यन्त विस्मयमें पड़ गये । वसुंधरे ! मै तो तपमें संलग्न था और सभीको देख रहा था, किंतु मेरी योगमायाके प्रभावसे आवृत होनेके कारण उन सभीको मुझे देखनेकी शक्ति न थी । तब उन सव देवताओने ब्रह्माजीसे कहापितामह ! भगवान् विष्णुके विना जगत्में हमे शान्ति नही मिल रही है । तव देवताओकी बात सुनकर लोक-पितामह ब्रह्मा मुझसे कहनेके लिये उद्यत हुए । देवि ! उस समय मै योगमायाके पटके भीतर छिपा था । अतः ! उन्हे दर्शन न हो हो सका । अतएव देवता, गन्धर्च, सिद्ध और ऋषिगण परम प्रसन्न होकर मेरी स्तुति करनेके लिये चल पड़े । इन्द्रादि सभी देवता वहाँ मेरी प्रार्थना करने लगे। उन्होने स्तुति की - 'नाथ ! आपके अदर्शनमे हम सब महान् दुःखी एवं उत्साहहीन हैं । हमसे कोई भी प्रयत्न होना शक्य नहीं है । हृषीकेश ! आप महान् अनुग्रह करके हमारी रक्षा कीजिये ।' बड़ी आँखोसे शोभा पानेवाली पृथ्वि ! देवताओंकी इस प्रार्थनापर मैने उनपर कृपादृष्टि डाली । मेरे देखते ही वे परम शान्त हो गये । यह इसी उर्वशी तीर्थकी विशेषता है । इस 'उर्वशी कुण्ड'मे जो मानव एक अप्सरा मेरी दाहिनी, जाँघको विदीर्ण कर प्रकट हुई रात भी रहकर स्नान करता है, वह सम्पूर्ण पापोसे देवि ! मेरे इसी बदरिकाश्रमक्षेत्र में 'उर्वशी-कुण्ड' - नामक वह गुप्त क्षेत्र भी है, जहाँ उर्वशी नामकी थी । देवि ! देवताओंका कार्य साधन करनेके लिये मैं वहाँ तप करता रहता हूँ, पर मुझे कोई नहीं जानता, मै स्वयं ही अपने आपको जानता हूँ । वहाँ मेरे तपस्या करते हुए बहुत वर्ष बीत गये, किंतु इन्द्र, ब्रह्मा एवं महेश्वर आदि देवता भी यह रहस्य न जान सके ।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. कहा कि, कुछ दिनों से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमटता जा रहा है। ऐसे में वो झूठे प्रचार का सहारा लेकर अपने संगठन का गिरता हुआ मनोबल संभालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुई मुठभेड़ को लेकर पुलिस और नक्सली एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस पर जमीन पर नहीं, बल्कि कागजों पर जुबानी वॉर चल रही है। नक्सलियों ने मंगलवार सुबह मुठभेड़ को झूठा करार दिया था। कहा था कि, जवानों ने घर से उठाकर हत्या की है। हालांकि मारे गए दोनों लोगों को नक्सलियों ने अपने संगठन का सदस्य बताया था। वहीं पुलिस ने कहा है कि, माओवादी सिमट रहे हैं, तो झूठा प्रचार कर रहे हैं। मारे गए दोनों नक्सली विस्फोट, ग्रामीणों की हत्या, जवानों पर हमले में शामिल थे। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. कहा कि, कुछ दिनों से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमटता जा रहा है। ऐसे में वो झूठे प्रचार का सहारा लेकर अपने संगठन का गिरता हुआ मनोबल संभालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। कहा कि, सात मई को तेलंगाना राज्य के चेरला क्षेत्र में हुई मुठभेड़ सहित सीमावर्ती राज्य महाराष्ट्र, ओडिशा व अन्य जगहों में हुई मुठभेड़ पर सवाल खड़े कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। बौखलाहट के कारण ग्रामीणों की हत्या, प्रताड़ित करना, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और अन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। नक्सल कमेटी की सचिव गंगा की ओर से जारी किए गए इस प्रेस नोट में कहा गया है कि, जहां पुलिस ने मुठभेड़ की बात की वहां कोई दलम (नक्सली ग्रुप) नहीं था। जवानों ने घर से उठाकर हत्या की है। हालांकि मारे गए दोनों लोगों को नक्सलियों ने अपने संगठन का सदस्य बताया है, लेकिन यह भी कहा है कि वे एक महीने पहले चले गए थे और गांव में सामान्य जीवन जी रहे थे। नक्सलियों ने मानवाधिकार संगठनों से घटनास्थल का दौरा करने की भी मांग की है। बस्तर में हर कोई साधारण जिंदगी नहीं जी सकता। दरअसल, सुकमा के भेज्जी इलाके में सोमवार सुबह करीब 6 बजे पुलिस मुठभेड़ हुई थी। इसमें बताया गया था कि डीआरजी जवानों के साथ हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। इनमें आठ लाख का इनामी गोलापल्ली एलओएस कमांडर मुडकम एर्रा और एलओएस सदस्य भीमे शामिल हैं। जवानों ने मौके से 303, भरमान बंदूक और विस्फोटक मिलने की भी बात कही थी। एसपी सुनील शर्मा खुद पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। इस मुठभेड़ में चार-पांच नक्सलियों के घायल होने का भी दावा किया गया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. कहा कि, कुछ दिनों से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमटता जा रहा है। ऐसे में वो झूठे प्रचार का सहारा लेकर अपने संगठन का गिरता हुआ मनोबल संभालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुई मुठभेड़ को लेकर पुलिस और नक्सली एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस पर जमीन पर नहीं, बल्कि कागजों पर जुबानी वॉर चल रही है। नक्सलियों ने मंगलवार सुबह मुठभेड़ को झूठा करार दिया था। कहा था कि, जवानों ने घर से उठाकर हत्या की है। हालांकि मारे गए दोनों लोगों को नक्सलियों ने अपने संगठन का सदस्य बताया था। वहीं पुलिस ने कहा है कि, माओवादी सिमट रहे हैं, तो झूठा प्रचार कर रहे हैं। मारे गए दोनों नक्सली विस्फोट, ग्रामीणों की हत्या, जवानों पर हमले में शामिल थे। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. कहा कि, कुछ दिनों से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमटता जा रहा है। ऐसे में वो झूठे प्रचार का सहारा लेकर अपने संगठन का गिरता हुआ मनोबल संभालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। कहा कि, सात मई को तेलंगाना राज्य के चेरला क्षेत्र में हुई मुठभेड़ सहित सीमावर्ती राज्य महाराष्ट्र, ओडिशा व अन्य जगहों में हुई मुठभेड़ पर सवाल खड़े कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। बौखलाहट के कारण ग्रामीणों की हत्या, प्रताड़ित करना, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और अन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। नक्सल कमेटी की सचिव गंगा की ओर से जारी किए गए इस प्रेस नोट में कहा गया है कि, जहां पुलिस ने मुठभेड़ की बात की वहां कोई दलम नहीं था। जवानों ने घर से उठाकर हत्या की है। हालांकि मारे गए दोनों लोगों को नक्सलियों ने अपने संगठन का सदस्य बताया है, लेकिन यह भी कहा है कि वे एक महीने पहले चले गए थे और गांव में सामान्य जीवन जी रहे थे। नक्सलियों ने मानवाधिकार संगठनों से घटनास्थल का दौरा करने की भी मांग की है। बस्तर में हर कोई साधारण जिंदगी नहीं जी सकता। दरअसल, सुकमा के भेज्जी इलाके में सोमवार सुबह करीब छः बजे पुलिस मुठभेड़ हुई थी। इसमें बताया गया था कि डीआरजी जवानों के साथ हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। इनमें आठ लाख का इनामी गोलापल्ली एलओएस कमांडर मुडकम एर्रा और एलओएस सदस्य भीमे शामिल हैं। जवानों ने मौके से तीन सौ तीन, भरमान बंदूक और विस्फोटक मिलने की भी बात कही थी। एसपी सुनील शर्मा खुद पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। इस मुठभेड़ में चार-पांच नक्सलियों के घायल होने का भी दावा किया गया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
पाकिस्तानी सैनिकों की गोलाबारी के बाद अपने घर, खड़ी फसल और पशुओं को छोड़ने के लिए मजबूर होने वाले जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गांवों के निवासी अभी भी दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि वे एक दिन अपने घरों को लौट सकें. गांव में प्रवेश करने पर आपको बंद दरवाजे और खाली मकान देखने को मिलेंगे लेकिन यहां पर किसी भी क्षण एक बम विस्फोट से यह शांति भंग होने को लेकर डर व्याप्त है. हमीरपुर गांव छोड़ कर जाने वालों ने 42 वर्षीय तरसेम लाल को पशु चराने का काम दिया है. उन्होंने बताया, "बातचीत शुरू करने से पहले हमें इस दीवार की आड़ ले लेना चाहिए. हम नहीं जानते कि सीमा पार से कब एक बम का गोला यहां आकर फट जाए और हमें घायल कर दे या हमारी जान ले ले. " यह गांव नियंत्रण रेखा से बिल्कुल सटा हुआ है. गांव वालों के गांव छोड़ने के कारण यह वीरान हो गया है कुछ लोग जम्मू चले गये हैं हालांकि अधिकतर लोग प्रशासन द्वारा बनाए गये सुरक्षित घरों में रह रहे हैं.
पाकिस्तानी सैनिकों की गोलाबारी के बाद अपने घर, खड़ी फसल और पशुओं को छोड़ने के लिए मजबूर होने वाले जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गांवों के निवासी अभी भी दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि वे एक दिन अपने घरों को लौट सकें. गांव में प्रवेश करने पर आपको बंद दरवाजे और खाली मकान देखने को मिलेंगे लेकिन यहां पर किसी भी क्षण एक बम विस्फोट से यह शांति भंग होने को लेकर डर व्याप्त है. हमीरपुर गांव छोड़ कर जाने वालों ने बयालीस वर्षीय तरसेम लाल को पशु चराने का काम दिया है. उन्होंने बताया, "बातचीत शुरू करने से पहले हमें इस दीवार की आड़ ले लेना चाहिए. हम नहीं जानते कि सीमा पार से कब एक बम का गोला यहां आकर फट जाए और हमें घायल कर दे या हमारी जान ले ले. " यह गांव नियंत्रण रेखा से बिल्कुल सटा हुआ है. गांव वालों के गांव छोड़ने के कारण यह वीरान हो गया है कुछ लोग जम्मू चले गये हैं हालांकि अधिकतर लोग प्रशासन द्वारा बनाए गये सुरक्षित घरों में रह रहे हैं.
लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है। पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय को निलंबित (Vinay Pandey Suspended) कर दिया गया है। विनय पांडेय बलिया में पेपर लीक, पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने, सरकारी कामों के प्रति लापरवाही बरतने और शासन स्तर के निर्देशों का पालन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय (Vinay Pandey Suspended) इस समय साक्षरता, उर्दू एवं प्रच्य भाषा विभाग के निदेशक थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर इस बारें में जानकारी दी है। माना जा रहा है कि उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉरलेंस की नीति को लेकर आगे चल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। बता दें कि विनय पांडेय को 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटाया गया था। बलिया के पेपर लीक कांड की वजह से सीएम योगी Vinay Pandey से नाराज चल रहे थे। जानकारी के अनुसार विभागीय मंत्री गुलाब देवी भी विनय कुमार पांडे की कार्यशैली से खुश नहीं थीं। 2018 में विनय को निदेशक के पद का कार्यभार मिला था। साल 2021 में उन्हें प्रोन्नत कर निदेशक की जिम्मेदारी मिली। पिछले 5 सालों से यूपी बोर्ड को नकलविहीन छवि बनाने में राज्य सरकार सफल रही थी लेकिन इस साल पेपर लीक कांड हो गया। पेपर लीक कांड को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया था। यही वजह है कि सीएम ने Vinay Pandey को निलबिंत कर दिया। साल 2016 में जब सपा सरकार थी तब हाईकोर्ट ने विनय पांडे को सस्पेंड करने का आदेश दिया था बावजूद इसके सपा ने आदेश का पालन नहीं किया था। बाद में वर्ष 2018 में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी बर्खास्तगी के फैसले पर अमल किया गया और उन्हें निलबिंत कर दिया। उसके बाद विनय कुमार पांडे ने हाईकोर्ट से स्टे लिया और विभाग ने उन्हें दोबारा बहाल करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक का कार्यभार सौंप दिया था। उसके बाद आज सीएम ने पेपर लीक कांड मामले में विनय पांडे के ऊपर कार्रवाई की है। This website uses cookies.
लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है। पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। विनय पांडेय बलिया में पेपर लीक, पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने, सरकारी कामों के प्रति लापरवाही बरतने और शासन स्तर के निर्देशों का पालन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय इस समय साक्षरता, उर्दू एवं प्रच्य भाषा विभाग के निदेशक थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर इस बारें में जानकारी दी है। माना जा रहा है कि उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉरलेंस की नीति को लेकर आगे चल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। बता दें कि विनय पांडेय को इक्कीस अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटाया गया था। बलिया के पेपर लीक कांड की वजह से सीएम योगी Vinay Pandey से नाराज चल रहे थे। जानकारी के अनुसार विभागीय मंत्री गुलाब देवी भी विनय कुमार पांडे की कार्यशैली से खुश नहीं थीं। दो हज़ार अट्ठारह में विनय को निदेशक के पद का कार्यभार मिला था। साल दो हज़ार इक्कीस में उन्हें प्रोन्नत कर निदेशक की जिम्मेदारी मिली। पिछले पाँच सालों से यूपी बोर्ड को नकलविहीन छवि बनाने में राज्य सरकार सफल रही थी लेकिन इस साल पेपर लीक कांड हो गया। पेपर लीक कांड को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया था। यही वजह है कि सीएम ने Vinay Pandey को निलबिंत कर दिया। साल दो हज़ार सोलह में जब सपा सरकार थी तब हाईकोर्ट ने विनय पांडे को सस्पेंड करने का आदेश दिया था बावजूद इसके सपा ने आदेश का पालन नहीं किया था। बाद में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी बर्खास्तगी के फैसले पर अमल किया गया और उन्हें निलबिंत कर दिया। उसके बाद विनय कुमार पांडे ने हाईकोर्ट से स्टे लिया और विभाग ने उन्हें दोबारा बहाल करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक का कार्यभार सौंप दिया था। उसके बाद आज सीएम ने पेपर लीक कांड मामले में विनय पांडे के ऊपर कार्रवाई की है। This website uses cookies.
9 संबंधोंः टेस्ट क्रिकेट, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय, नाबाद, नीदरलैंड क्रिकेट टीम का संयुक्त अरब अमीरात दौरा, स्वप्निल पाटिल, आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २०, आईसीसी क्रिकेट विश्व कप, १९९६ क्रिकेट विश्व कप, २०१४ आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २०। टेस्ट क्रिकेट, क्रिकेट का सबसे लम्बा स्वरूप होता है। इसे खिलाड़ियों की खेल क्षमता की वास्तविक परीक्षा माना गया है, हालाँकि आजकल इस खेल का एकदिवसीय स्वरूप अधिक लोकप्रिय है। . ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई (ODI) मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ओडीआई (ODI)) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम 50 ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल (एलओआई (LOI))" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते. क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद (not out) कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली. संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट टीम का नीदरलैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. स्वप्निल पाटिल (Swapnil Patil) एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी है जो संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए क्रिकेट खेलते हैं। इन्होंने अपनी टीम संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट टीम के लिए पहला मैच २०१४ में खेला था। . आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २० जो (विश्व २०-२०) के नाम से भी जानी जाती है। यह एक ट्वेन्टी-२० अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप प्रतियोगिता है जिसका संचालन वर्तमान में आईसीसी कर रहा है। वर्तमान में कुल १६ टीमें है जिसमें १० सदस्य टीमें तो पूर्ण आईसीसी की सदस्यता है जबकि ६ अलग है। आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २० हर दो साल बाद आयोजित की जाती है। इसमें सभी २०-२० ओवरों के खेले जाते हैं। अभी तक इसके ७ संस्करण हो चुके हैंलेकिन किसी भी टीम ने २ बार जीत हासिल नहीं की है। इसका पहला संस्करण २००७ में खेला गया था। २००७ जो दक्षिण अफ्रीका में खेला गया था जिसमें भारत ने फाइनल मैच पाकिस्तान को हराकर जीता था। . आईसीसी क्रिकेट विश्व कप एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप है। टूर्नामेंट खेल के शासी निकाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा हर चार साल आयोजित किया जाता है। टूर्नामेंट दुनिया में सबसे ज्यादा देखी गयी खेल स्पर्धाओं में से एक है, यह केवल फीफा विश्व कप और ओलंपिक पीछे है। पहली बार विश्व कप 1975 में इंग्लैंड में आयोजित किया गया था, पहले तीन विश्व कप इंग्लैंड में मेजबानी किए गए थे। लेकिन 1987 टूर्नामेंट के बाद से विश्व कप हर चार साल दूसरे देश में आयोजित किया जाता है। सबसे हाल ही टूर्नामेंट २०१५ में आयोजित की गई थी, यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने मेजबानी की थी और इसे ऑस्ट्रेलिया ने जीता। . १९९६ क्रिकेट विश्व कप, (आधिकारिक तौर पर विल्स विश्व कप) क्रिकेट विश्व कप का छठा संस्करण था। http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about/279/history यह पाकिस्तान, भारत और श्रीलंका में १४ फरवरी से १७ मार्च १९९६ को आयोजित किया गया। http://www.espncricinfo.com/ci/engine/series/60981.html टूर्नामेंट विल्स द्वारा प्रायोजित किया गया था और इसमे बारह टीमो ने भाग लिया था। प्रत्येक मैच ५० ओवर प्रति टीम का था और रंगीन कपड़ों में और सफेद गेंदों के साथ खेली गया था और अधिकतम मैच दूधिया रोशनी (फ्लडलाइट्स) के दौरान खेले गए थे। टूर्नामेंट का फाइनल श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच था, और श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को गद्दाफी स्टेडियम मे खेले गए फाइनल मे ७ विकेट से पराजित कर अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता। http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/65192.html . २०१४ आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २० आईसीसी विश्व ट्वेन्टी २० का पांचवा संस्करण था। जिसे बांग्लादेश ने आयोजित किया था। इसकी शुरुआत १६ मार्च को हुई थी तथा ०६ अप्रैल २०१४ को खेला गया था जिसमें श्रीलंका ने जीत दर्ज की थी। यह बांग्लादेश के आठ शहरों में खेला गया था - ढाका,चिटगांव,रंगपुर,खुलना,बरिसाल,कोक्स बाजार,नारायणगंज और साइलेट थे। आईसीसी ने २०१० में ही यह फैसला कर दिया था कि २०१४ का विश्व कप बांग्लादेश ही खेला जाएगा। .
नौ संबंधोंः टेस्ट क्रिकेट, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय, नाबाद, नीदरलैंड क्रिकेट टीम का संयुक्त अरब अमीरात दौरा, स्वप्निल पाटिल, आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस, आईसीसी क्रिकेट विश्व कप, एक हज़ार नौ सौ छियानवे क्रिकेट विश्व कप, दो हज़ार चौदह आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस। टेस्ट क्रिकेट, क्रिकेट का सबसे लम्बा स्वरूप होता है। इसे खिलाड़ियों की खेल क्षमता की वास्तविक परीक्षा माना गया है, हालाँकि आजकल इस खेल का एकदिवसीय स्वरूप अधिक लोकप्रिय है। . ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम पचास ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल )" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते. क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली. संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट टीम का नीदरलैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. स्वप्निल पाटिल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी है जो संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए क्रिकेट खेलते हैं। इन्होंने अपनी टीम संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट टीम के लिए पहला मैच दो हज़ार चौदह में खेला था। . आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस जो के नाम से भी जानी जाती है। यह एक ट्वेन्टी-बीस अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप प्रतियोगिता है जिसका संचालन वर्तमान में आईसीसी कर रहा है। वर्तमान में कुल सोलह टीमें है जिसमें दस सदस्य टीमें तो पूर्ण आईसीसी की सदस्यता है जबकि छः अलग है। आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस हर दो साल बाद आयोजित की जाती है। इसमें सभी बीस-बीस ओवरों के खेले जाते हैं। अभी तक इसके सात संस्करण हो चुके हैंलेकिन किसी भी टीम ने दो बार जीत हासिल नहीं की है। इसका पहला संस्करण दो हज़ार सात में खेला गया था। दो हज़ार सात जो दक्षिण अफ्रीका में खेला गया था जिसमें भारत ने फाइनल मैच पाकिस्तान को हराकर जीता था। . आईसीसी क्रिकेट विश्व कप एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप है। टूर्नामेंट खेल के शासी निकाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद द्वारा हर चार साल आयोजित किया जाता है। टूर्नामेंट दुनिया में सबसे ज्यादा देखी गयी खेल स्पर्धाओं में से एक है, यह केवल फीफा विश्व कप और ओलंपिक पीछे है। पहली बार विश्व कप एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में इंग्लैंड में आयोजित किया गया था, पहले तीन विश्व कप इंग्लैंड में मेजबानी किए गए थे। लेकिन एक हज़ार नौ सौ सत्तासी टूर्नामेंट के बाद से विश्व कप हर चार साल दूसरे देश में आयोजित किया जाता है। सबसे हाल ही टूर्नामेंट दो हज़ार पंद्रह में आयोजित की गई थी, यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने मेजबानी की थी और इसे ऑस्ट्रेलिया ने जीता। . एक हज़ार नौ सौ छियानवे क्रिकेट विश्व कप, क्रिकेट विश्व कप का छठा संस्करण था। http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about/दो सौ उन्यासी/history यह पाकिस्तान, भारत और श्रीलंका में चौदह फरवरी से सत्रह मार्च एक हज़ार नौ सौ छियानवे को आयोजित किया गया। http://www.espncricinfo.com/ci/engine/series/साठ हज़ार नौ सौ इक्यासी.html टूर्नामेंट विल्स द्वारा प्रायोजित किया गया था और इसमे बारह टीमो ने भाग लिया था। प्रत्येक मैच पचास ओवर प्रति टीम का था और रंगीन कपड़ों में और सफेद गेंदों के साथ खेली गया था और अधिकतम मैच दूधिया रोशनी के दौरान खेले गए थे। टूर्नामेंट का फाइनल श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच था, और श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को गद्दाफी स्टेडियम मे खेले गए फाइनल मे सात विकेट से पराजित कर अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता। http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/पैंसठ हज़ार एक सौ बानवे.html . दो हज़ार चौदह आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस आईसीसी विश्व ट्वेन्टी बीस का पांचवा संस्करण था। जिसे बांग्लादेश ने आयोजित किया था। इसकी शुरुआत सोलह मार्च को हुई थी तथा छः अप्रैल दो हज़ार चौदह को खेला गया था जिसमें श्रीलंका ने जीत दर्ज की थी। यह बांग्लादेश के आठ शहरों में खेला गया था - ढाका,चिटगांव,रंगपुर,खुलना,बरिसाल,कोक्स बाजार,नारायणगंज और साइलेट थे। आईसीसी ने दो हज़ार दस में ही यह फैसला कर दिया था कि दो हज़ार चौदह का विश्व कप बांग्लादेश ही खेला जाएगा। .
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश(Click to expand) ... प्राचीन भारतीय इतिहास के. स्रोत... इतिहास -;विषय-तथा इतिहास में साध्यों का महत्व : ,... , ८ -... इतिहास, शब्द 'इति' 'ह' तथा -आस' इन तीन -शब्दों से मिलकर-.बना हुआ, शब्द है जिसका अर्थ है 'ऐसा निश्चित रूप. से हुआ'। यह स्पष्ट है कि इतिहास पूर्वजों की अध्ययन- करता है। इस अध्ययनःके अन्तर्गत वह उसके-विंविध प्रकार -के कार्यकलारपों, उसके द्वारा निर्मित विविध राजनीतिक एवं सामाजिक संस्थाओं तथा.उसंकी विविध मान्यताओं की चर्चा. करता है। इतिहासकार को अतीत प्रत्यक्ष .रूप में .प्राप्त नहींः होता, अपितु .अतीत के विषय में न 'कुछ साक्ष्य प्राप्त होते हैं, जिनके. आधार-पर-वह, अतीत का निर्माण-करता है।-ये साक्ष्य आधार :पर इतिहास. लिखा- गया या जाना गया, हमें सरलता से प्राप्त नहीं हुआ. और इसीलिए कुछ- समय पूर्व तक -विदेशी विद्वानों. क़ी. यह. मान्यता थी कि भारतीयों का कोई- इतिहास ,ही नहीं .है । यह विचारधारा पाश्चात्य, इतिंहासकारों ,की शायद इसलिए है कि. प्राचीन ' भारतीयों - का - दृष्टिकोण - आध्यात्मिक प्रधान था । वास्तव में , यदि तिथि ' क्रम .के प्रश्न को. पृथक कर दिया जाए तो यह निश्चित :रुप से स्पष्ट हो जाएगा कि प्राचीन -इतिहासकारों में इतिहास बुद्धि का अभाव था, अपितु .यह.प्रमाणित होगा. कि भारत के प्राचीन . ग्रन्थों . में बहुमूल्य . ऐतिहासिक सामग्री निहित, है..जिसे विविध रूपों ..में प्राप्त. किया जा सकता है। ये साक्ष्य विविध रूपों में होते हैं यथा, साहित्यिक रंचनायें अथवा दस्तावेज, स्मारक, सिवके, लेख इत्यादि। इन खंण्ड-खण्ड, प्राप्त साममियों को आधार बनाकर इतिहासकार अतीत में जो. कुछ घटित हुआ -उसको .एक का सरलता से . यहण--करने योग्य रूप में - प्रस्तुत करने की. चेष्टा-करता है। इतिहासकार ,सांधष्यों . को अत्यन्त पवित्र मानता है और अपने प्रत्येक मत एवं कथन के समर्थन में. वह किसी न.किसी साक्ष्य का हवाला देता- है । इतिहासकार -कभी भी. केवल, कल्पना के आधार पर कोई बात. नहीं - कहता । इस प्रकार इतिहास में साक्ष्यों का महत्त्व वेसा ही होता है जैसा कि अदालत में - अपनी बात के समर्थन में वकौल- द्वारा दिए -गए सबूतों का। . ..- . -. ५... ;- प्राचीन भारतीय ' इतिहास के स्रोतों का . वर्गीकरण ... -. . «.. .... ८. ०ः ::. : जहां. तक प्राचीन भारतीय .इतिहास के स्तरोतों का प्रश्न है; इन्हें मुख्य रूप, से. निम्न वर्गों के अन्तर्गत.विभक्त किया जा. सकता है- : पुरातात्विक, साहित्यिक,-विदेशी -विवरण । व 1.. पुरातात्विक- प्राचीन भारतीय इतिहास के ऐसे कई. युग हैं .जिनके .विंषुय. में में मुख्य रूप से पुरातात्विक उत्खननों से. ला ओऑ से जानकारी मिलती है.। "भारत के प्रामैतिहासिक काल के विषय में हमारी जानकारी पुरातात्विक साक्ष्य के ऊपर ही आधारित, है ।..भारतीय सभ्यता के प्रथम चरण सैन्धंव सभ्यता के विषयः में हम. कुछ भी नहीं जान पाते, यदि इसके विपयःमें हमें पुरातात्विक साक्ष्य से संहायत्ता नहीं मिलती ।
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश ... प्राचीन भारतीय इतिहास के. स्रोत... इतिहास -;विषय-तथा इतिहास में साध्यों का महत्व : ,... , आठ -... इतिहास, शब्द 'इति' 'ह' तथा -आस' इन तीन -शब्दों से मिलकर-.बना हुआ, शब्द है जिसका अर्थ है 'ऐसा निश्चित रूप. से हुआ'। यह स्पष्ट है कि इतिहास पूर्वजों की अध्ययन- करता है। इस अध्ययनःके अन्तर्गत वह उसके-विंविध प्रकार -के कार्यकलारपों, उसके द्वारा निर्मित विविध राजनीतिक एवं सामाजिक संस्थाओं तथा.उसंकी विविध मान्यताओं की चर्चा. करता है। इतिहासकार को अतीत प्रत्यक्ष .रूप में .प्राप्त नहींः होता, अपितु .अतीत के विषय में न 'कुछ साक्ष्य प्राप्त होते हैं, जिनके. आधार-पर-वह, अतीत का निर्माण-करता है।-ये साक्ष्य आधार :पर इतिहास. लिखा- गया या जाना गया, हमें सरलता से प्राप्त नहीं हुआ. और इसीलिए कुछ- समय पूर्व तक -विदेशी विद्वानों. क़ी. यह. मान्यता थी कि भारतीयों का कोई- इतिहास ,ही नहीं .है । यह विचारधारा पाश्चात्य, इतिंहासकारों ,की शायद इसलिए है कि. प्राचीन ' भारतीयों - का - दृष्टिकोण - आध्यात्मिक प्रधान था । वास्तव में , यदि तिथि ' क्रम .के प्रश्न को. पृथक कर दिया जाए तो यह निश्चित :रुप से स्पष्ट हो जाएगा कि प्राचीन -इतिहासकारों में इतिहास बुद्धि का अभाव था, अपितु .यह.प्रमाणित होगा. कि भारत के प्राचीन . ग्रन्थों . में बहुमूल्य . ऐतिहासिक सामग्री निहित, है..जिसे विविध रूपों ..में प्राप्त. किया जा सकता है। ये साक्ष्य विविध रूपों में होते हैं यथा, साहित्यिक रंचनायें अथवा दस्तावेज, स्मारक, सिवके, लेख इत्यादि। इन खंण्ड-खण्ड, प्राप्त साममियों को आधार बनाकर इतिहासकार अतीत में जो. कुछ घटित हुआ -उसको .एक का सरलता से . यहण--करने योग्य रूप में - प्रस्तुत करने की. चेष्टा-करता है। इतिहासकार ,सांधष्यों . को अत्यन्त पवित्र मानता है और अपने प्रत्येक मत एवं कथन के समर्थन में. वह किसी न.किसी साक्ष्य का हवाला देता- है । इतिहासकार -कभी भी. केवल, कल्पना के आधार पर कोई बात. नहीं - कहता । इस प्रकार इतिहास में साक्ष्यों का महत्त्व वेसा ही होता है जैसा कि अदालत में - अपनी बात के समर्थन में वकौल- द्वारा दिए -गए सबूतों का। . ..- . -. पाँच... ;- प्राचीन भारतीय ' इतिहास के स्रोतों का . वर्गीकरण ... -. . «.. .... आठ. शून्यः ::. : जहां. तक प्राचीन भारतीय .इतिहास के स्तरोतों का प्रश्न है; इन्हें मुख्य रूप, से. निम्न वर्गों के अन्तर्गत.विभक्त किया जा. सकता है- : पुरातात्विक, साहित्यिक,-विदेशी -विवरण । व एक.. पुरातात्विक- प्राचीन भारतीय इतिहास के ऐसे कई. युग हैं .जिनके .विंषुय. में में मुख्य रूप से पुरातात्विक उत्खननों से. ला ओऑ से जानकारी मिलती है.। "भारत के प्रामैतिहासिक काल के विषय में हमारी जानकारी पुरातात्विक साक्ष्य के ऊपर ही आधारित, है ।..भारतीय सभ्यता के प्रथम चरण सैन्धंव सभ्यता के विषयः में हम. कुछ भी नहीं जान पाते, यदि इसके विपयःमें हमें पुरातात्विक साक्ष्य से संहायत्ता नहीं मिलती ।
PM ने उदयपुर का उदाहरण देते हुए जी-20 के लिए दिए निर्देशकॉफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उदयपुर में आयोजित प्रथम जी-20 शेरपा बैठक का उदाहरण देते हुए सभी जी-20 आयोजनों के डॉक्युमेंटेशन करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि उदयपुर प्रशासन की ओर से यहां की गई व्यवस्थाओं का डॉक्युमेंटेशन उच्च स्तर पर भेज गया है। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता पूरे देश से जुड़ी है। साथ ही यह देश की क्षमता को व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर है। पीएम मोदी ने विभिन्न जी-20 आयोजनों में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से सहयोग की अपील की है। इस दौरान सीएम अशोक गहलोत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता देश के लिए गौरव की बात है। बता दें कि उदयपुर में 4-7 दिसम्बर तक G-20 शेरपा सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में 29 देशों से अतिथि शामिल हुए थे। सम्मेलन में वैश्विक विकास के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मसलों को लेकर चर्चा हुई।
PM ने उदयपुर का उदाहरण देते हुए जी-बीस के लिए दिए निर्देशकॉफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उदयपुर में आयोजित प्रथम जी-बीस शेरपा बैठक का उदाहरण देते हुए सभी जी-बीस आयोजनों के डॉक्युमेंटेशन करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि उदयपुर प्रशासन की ओर से यहां की गई व्यवस्थाओं का डॉक्युमेंटेशन उच्च स्तर पर भेज गया है। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि भारत की जी-बीस अध्यक्षता पूरे देश से जुड़ी है। साथ ही यह देश की क्षमता को व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर है। पीएम मोदी ने विभिन्न जी-बीस आयोजनों में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से सहयोग की अपील की है। इस दौरान सीएम अशोक गहलोत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जी-बीस की अध्यक्षता देश के लिए गौरव की बात है। बता दें कि उदयपुर में चार-सात दिसम्बर तक G-बीस शेरपा सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में उनतीस देशों से अतिथि शामिल हुए थे। सम्मेलन में वैश्विक विकास के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मसलों को लेकर चर्चा हुई।
भांडेर अनुभाग की ग्राम पंचायत कमलापुरी में ग्रामीणों को सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव की अधिकतर गलियां कच्ची पड़ी है। गांव में पर्याप्त पेयजल की व्यावस्था न होने पर इस भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे है। गांव के कई हैंडपंप खराब पड़े है। इन्हें ठीक कराने के लिए स्थानीय लोग कई बार ग्राम पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी अबतक बंद पड़े हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया गया। गलियों में पक्की सीसी रोड न होने से घरों का गंदा पानी 24 घंटे रास्ते में भरा रहता है। इससे ग्रामीणों को निकलने में काफी परेशानी होती है। इसी परेशानी से बचने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही जागरुक होकर नालियों की खुदाई करना शुरूकर दिया है। ताकि गांव में आने वाले लोगों को कि सी प्रकार की कोई परेशानी न हो। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत कमलापुरी में ग्रामीणों की व्याप्त जनसमस्याओं के निराकरण एवं मूलभूत सुविधाऐं मुहैया कराने के लिए हर बार ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी निभाने के लिए नया जनप्रतिनिधि चुना जाता है। चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को विकास कार्य कराने के लिए कई आश्वासन देते है। लेकि न जमीनी स्तर पर विकास कार्य शुन्य पडे है। गांव की अधिकतर गलियां कच्ची पड़ी है। नतीजन लोगों को हर दिन परेशानी का सामना करना पड रहा है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए ग्रामीण खुद पत्नी सहित फावड़ा, तसला उठाकर नाली की खुदाई करने में लग गए। यह वाक्या हैं कमलापुरी ग्राम पंचायत के अंर्तगत आने वाले ग्राम काशीपुर कु आं का। गांव में अभी तक सीसी सडक नहीं बनाई गई। तीस साल पुरानी पत्थर की सड़क पूरी तरह उखड़ ? ई। वहीं तीस साल पुरानी नाली भी मिट्टी से पूर्णत? बन्द हो चुकी है। जिससे घरों से निकलने वाला पानी पूरे रास्ते पर फै लता रहता है। इस समस्या से ग्रामीण काफी परेशान है। ग्रामीण इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच से शिकायत कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी सरपंच ने इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। बंद पड़ी नालियों से हो रही परेशानी से बचने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही जागरुक होकर नालियों की खुदाई करना शुरूकर दिया है। ताकि स्थानीय एवं बाहर से आने वाले लोगों को कि सी प्रकार की कोई परेशानी न हो। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की अधिकतर गलियों में सीसी रोड और नालियों का निर्माण न होने से घरों का गंदा पानी हमेशा बीच रास्ते में भरा रहता है। जिससे लोगों को निकलने में काफी परेशानी होती है। ग्गंदे पानी में मच्छर पनपने के अलावा आस पास के लोगों हमेशा पानी उठने वाली दुर्गंध से काफी परेशानी होती है। इसी परेशानी से बचने के लिए ग्रामीण खुद ही नालियों की ख्ुदाई कर पानी निकासी के इंतजाम कर रहे है। गांव में नालियों का निर्माण न होने की वजह से हमारे घर के सामने हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। जिससे हम लोगों को निकलने में काफी परेशानी होती हैं। हम लोग कई बार सरपंच और सचिव से नाली और सीसी रोड निर्माण की मांग कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी सरपंच ने हमारी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। परेशानी से बचने के लिए स्वयं ही हमने अपनी पत्नी के साथ मिलकर नाली की ख्ुइाई कर दी है। ताकि पानी की निकासी होती रहें। खूजा। आखिल भारतीय कौरव समाज का आदर्श विवाह सम्मेलन ग्राम गैंथरी की माता मंदिर पर 7 मई मंगलवार को आयोजित कि या जा रहा है। जिसमें आखिल भारतीय कौरव जाग्रति मंच एवं गैंथरी ग्राम के सामाजिक सदस्य और बुन्देलखण्ड क्षेत्र के कौरव समाज द्वारा बड़ी तैयारी के साथ कि या जाएगा। कौरव समाज के लोगों ने कार्यक्रम में सभी सजातीय भाईयों और क्षेत्र के लोगों से आग्रह कि या गया है कि वह इस सामूहिक विवाह सम्मेलन मे उपस्थित होकर वर -वधु को आशीर्वाद देकर अपना सहयोग प्रदान करे। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक मौजूद रहेंगे।
भांडेर अनुभाग की ग्राम पंचायत कमलापुरी में ग्रामीणों को सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव की अधिकतर गलियां कच्ची पड़ी है। गांव में पर्याप्त पेयजल की व्यावस्था न होने पर इस भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे है। गांव के कई हैंडपंप खराब पड़े है। इन्हें ठीक कराने के लिए स्थानीय लोग कई बार ग्राम पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी अबतक बंद पड़े हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया गया। गलियों में पक्की सीसी रोड न होने से घरों का गंदा पानी चौबीस घंटाटे रास्ते में भरा रहता है। इससे ग्रामीणों को निकलने में काफी परेशानी होती है। इसी परेशानी से बचने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही जागरुक होकर नालियों की खुदाई करना शुरूकर दिया है। ताकि गांव में आने वाले लोगों को कि सी प्रकार की कोई परेशानी न हो। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत कमलापुरी में ग्रामीणों की व्याप्त जनसमस्याओं के निराकरण एवं मूलभूत सुविधाऐं मुहैया कराने के लिए हर बार ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी निभाने के लिए नया जनप्रतिनिधि चुना जाता है। चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को विकास कार्य कराने के लिए कई आश्वासन देते है। लेकि न जमीनी स्तर पर विकास कार्य शुन्य पडे है। गांव की अधिकतर गलियां कच्ची पड़ी है। नतीजन लोगों को हर दिन परेशानी का सामना करना पड रहा है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए ग्रामीण खुद पत्नी सहित फावड़ा, तसला उठाकर नाली की खुदाई करने में लग गए। यह वाक्या हैं कमलापुरी ग्राम पंचायत के अंर्तगत आने वाले ग्राम काशीपुर कु आं का। गांव में अभी तक सीसी सडक नहीं बनाई गई। तीस साल पुरानी पत्थर की सड़क पूरी तरह उखड़ ? ई। वहीं तीस साल पुरानी नाली भी मिट्टी से पूर्णत? बन्द हो चुकी है। जिससे घरों से निकलने वाला पानी पूरे रास्ते पर फै लता रहता है। इस समस्या से ग्रामीण काफी परेशान है। ग्रामीण इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच से शिकायत कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी सरपंच ने इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। बंद पड़ी नालियों से हो रही परेशानी से बचने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही जागरुक होकर नालियों की खुदाई करना शुरूकर दिया है। ताकि स्थानीय एवं बाहर से आने वाले लोगों को कि सी प्रकार की कोई परेशानी न हो। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की अधिकतर गलियों में सीसी रोड और नालियों का निर्माण न होने से घरों का गंदा पानी हमेशा बीच रास्ते में भरा रहता है। जिससे लोगों को निकलने में काफी परेशानी होती है। ग्गंदे पानी में मच्छर पनपने के अलावा आस पास के लोगों हमेशा पानी उठने वाली दुर्गंध से काफी परेशानी होती है। इसी परेशानी से बचने के लिए ग्रामीण खुद ही नालियों की ख्ुदाई कर पानी निकासी के इंतजाम कर रहे है। गांव में नालियों का निर्माण न होने की वजह से हमारे घर के सामने हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। जिससे हम लोगों को निकलने में काफी परेशानी होती हैं। हम लोग कई बार सरपंच और सचिव से नाली और सीसी रोड निर्माण की मांग कर चुके है। लेकि न इसके बाद भी सरपंच ने हमारी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। परेशानी से बचने के लिए स्वयं ही हमने अपनी पत्नी के साथ मिलकर नाली की ख्ुइाई कर दी है। ताकि पानी की निकासी होती रहें। खूजा। आखिल भारतीय कौरव समाज का आदर्श विवाह सम्मेलन ग्राम गैंथरी की माता मंदिर पर सात मई मंगलवार को आयोजित कि या जा रहा है। जिसमें आखिल भारतीय कौरव जाग्रति मंच एवं गैंथरी ग्राम के सामाजिक सदस्य और बुन्देलखण्ड क्षेत्र के कौरव समाज द्वारा बड़ी तैयारी के साथ कि या जाएगा। कौरव समाज के लोगों ने कार्यक्रम में सभी सजातीय भाईयों और क्षेत्र के लोगों से आग्रह कि या गया है कि वह इस सामूहिक विवाह सम्मेलन मे उपस्थित होकर वर -वधु को आशीर्वाद देकर अपना सहयोग प्रदान करे। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक मौजूद रहेंगे।
जब नोटबंदी हुई थी तो 'सोनम गुप्ता बेवफा है' वाला 10 रुपए का नोट सोशल मीडिया में छा गया था। अब सोशल मीडिया में ऐसे संदेशों की भरमार है जो बताते हैं कि 'ज्योति मौर्या बेवफा है'। दरअसल ऐसा ज्योति के पति आलोक मौर्या जो कि सफाई कर्मचारी हैं का एक रोते हुए वीडियो सामने आने के बाद हुआ। इसमें आलोक ने कहा कि जिस ज्योति को उन्होंने पढ़ाया-लिखाया वह एसडीएम बनने के बाद उन्हें धोखा दे रही है। अपनी पत्नी का होम गार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के साथ अफेयर का दावा किया। दोनों पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। विभागीय जाँच में दुबे को दोषी मानते हुए सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनी इस कहानी में कई मोड़ आ चुके हैं। कई वीडियो, कई दावे, कई चैट, फोन कॉल रिकॉर्डिंग से लेकर वसूली वाली डायरी तक। तलाक की अर्जी से लेकर दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप तक लग चुके हैं। खान सर का दावा है कि इस घटना के कारण करीब 93 पति अपनी पत्नियों का नाम कोचिंग से कटा चुके हैं। ऐसे में भोजपुरी इंडस्ट्री भी कहां पीछे रहने वाली थी। ज्योति और आलोक मौर्या प्रकरण पर भोजपुरी में दर्जनभर गाने अब तक आ चुके हैं। इन पर चालीसा से लेकर आल्हा तक गायकों ने गा दिया है। जब इस कहानी का इतना बाजा बज रहा हो तो भोजपुरी गायक ही क्यों पीछे रहें। ज्योति और आलोक मौर्या प्रकरण पर भोजपुरी में दर्जनभर गाने अब तक आ चुके हैं। चालीसा से लेकर बिरहा तक गायकों ने गा दिया है। इनमें से कई गानों में ज्योति को बेवफा बताया गया है। कुछ में उनके लिए छिनार जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है। कुछ गानों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि बेटी को पढ़ाना चाहिए, न कि पत्नी को। एसडीएम ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या पर बनी चालीसा को चंदा शर्मा ने आवाज दी है। 5 जुलाई को रिलीज हुए इस चालीसा को 12 लाख से ज्यादा व्यूज रिपोर्ट लिखे जाने तक मिल चुके थे। रितीक पांडे ने इस प्रकरण पर जो गाना गाया है वह 'एसडीएम बनते ही भूल गईलु'। इसे लिखा है गुरुदेव ने। साढ़े 6 लाख से ज्यादा व्यूज हासिल कर चुके इस गाने को 29 जून को जारी किया गया था। भोजपुरी के अलावा ज्योति और आलोक मौर्या की कहानी पर आल्हा के भाव में रोशन खरवार का गाया गाना भी खूब चल रहा है। 3 जुलाई को इसे रिलीज किया गया था। 20 लाख से अधिक व्यूज आ चुके हैं। ओमप्रकाश का गाया 'बेवफा एसडीएम ज्योति उर्फ आलोक मौर्या को इंसाफ' गाना भी चर्चा में है। इस बिरहा को 12 जुलाई को ही रिलीज किया गया है और 10 घंटे में ही इसे डेढ़ लाख के करीब व्यूज मिल चुके थे। 'मेहरी को नहीं पढ़ाएँगे' को लाल बाबू और खुशी कक्कड़ ने गाया है। 7 जुलाई को इसे जारी किया गया और करीब 13 लाख व्यूज इसे मिल चुके हैं। यूट्यूब पर आप जैसे ही ज्योति और आलोक मौर्या के नाम से बने भोजपुरी गानों को सर्च करेंगे ऐसे कई गाने मिलेंगे। एसडीएम जइसन मउगी छिनार न मिले, समय समय के खेला बा, बदलल नियतिया एसडीएम साहिबा के, हट गईल एसडीएम ज्योति मौर्या, बेवफा एसडीएम, ज्योति मौर्या छिनार भईली जैसे टाइटल से कई गाने रिलीज किए गए हैं।
जब नोटबंदी हुई थी तो 'सोनम गुप्ता बेवफा है' वाला दस रुपयापए का नोट सोशल मीडिया में छा गया था। अब सोशल मीडिया में ऐसे संदेशों की भरमार है जो बताते हैं कि 'ज्योति मौर्या बेवफा है'। दरअसल ऐसा ज्योति के पति आलोक मौर्या जो कि सफाई कर्मचारी हैं का एक रोते हुए वीडियो सामने आने के बाद हुआ। इसमें आलोक ने कहा कि जिस ज्योति को उन्होंने पढ़ाया-लिखाया वह एसडीएम बनने के बाद उन्हें धोखा दे रही है। अपनी पत्नी का होम गार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के साथ अफेयर का दावा किया। दोनों पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। विभागीय जाँच में दुबे को दोषी मानते हुए सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनी इस कहानी में कई मोड़ आ चुके हैं। कई वीडियो, कई दावे, कई चैट, फोन कॉल रिकॉर्डिंग से लेकर वसूली वाली डायरी तक। तलाक की अर्जी से लेकर दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप तक लग चुके हैं। खान सर का दावा है कि इस घटना के कारण करीब तिरानवे पति अपनी पत्नियों का नाम कोचिंग से कटा चुके हैं। ऐसे में भोजपुरी इंडस्ट्री भी कहां पीछे रहने वाली थी। ज्योति और आलोक मौर्या प्रकरण पर भोजपुरी में दर्जनभर गाने अब तक आ चुके हैं। इन पर चालीसा से लेकर आल्हा तक गायकों ने गा दिया है। जब इस कहानी का इतना बाजा बज रहा हो तो भोजपुरी गायक ही क्यों पीछे रहें। ज्योति और आलोक मौर्या प्रकरण पर भोजपुरी में दर्जनभर गाने अब तक आ चुके हैं। चालीसा से लेकर बिरहा तक गायकों ने गा दिया है। इनमें से कई गानों में ज्योति को बेवफा बताया गया है। कुछ में उनके लिए छिनार जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है। कुछ गानों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि बेटी को पढ़ाना चाहिए, न कि पत्नी को। एसडीएम ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या पर बनी चालीसा को चंदा शर्मा ने आवाज दी है। पाँच जुलाई को रिलीज हुए इस चालीसा को बारह लाख से ज्यादा व्यूज रिपोर्ट लिखे जाने तक मिल चुके थे। रितीक पांडे ने इस प्रकरण पर जो गाना गाया है वह 'एसडीएम बनते ही भूल गईलु'। इसे लिखा है गुरुदेव ने। साढ़े छः लाख से ज्यादा व्यूज हासिल कर चुके इस गाने को उनतीस जून को जारी किया गया था। भोजपुरी के अलावा ज्योति और आलोक मौर्या की कहानी पर आल्हा के भाव में रोशन खरवार का गाया गाना भी खूब चल रहा है। तीन जुलाई को इसे रिलीज किया गया था। बीस लाख से अधिक व्यूज आ चुके हैं। ओमप्रकाश का गाया 'बेवफा एसडीएम ज्योति उर्फ आलोक मौर्या को इंसाफ' गाना भी चर्चा में है। इस बिरहा को बारह जुलाई को ही रिलीज किया गया है और दस घंटाटे में ही इसे डेढ़ लाख के करीब व्यूज मिल चुके थे। 'मेहरी को नहीं पढ़ाएँगे' को लाल बाबू और खुशी कक्कड़ ने गाया है। सात जुलाई को इसे जारी किया गया और करीब तेरह लाख व्यूज इसे मिल चुके हैं। यूट्यूब पर आप जैसे ही ज्योति और आलोक मौर्या के नाम से बने भोजपुरी गानों को सर्च करेंगे ऐसे कई गाने मिलेंगे। एसडीएम जइसन मउगी छिनार न मिले, समय समय के खेला बा, बदलल नियतिया एसडीएम साहिबा के, हट गईल एसडीएम ज्योति मौर्या, बेवफा एसडीएम, ज्योति मौर्या छिनार भईली जैसे टाइटल से कई गाने रिलीज किए गए हैं।
तीन जगहों पर विवाद देवास। कोतवाली थानांतर्गत गुरुवार को तीन जगहों पर विवाद हुए। पुलिस ने बताया कि इटावा स्थित राठौर दूध डेयरी के पास नरेंद्र के साथ आरोपी महेंद्र ने मारपीट की। बालगढ़ रोड स्थित शनि मंदिर के पास प्रकाश चौहा. . . madhya pradeshSat, 17 Jan 2015 01:31 AM (IST) कंटेनर से चुराया मोबाइल का कार्टून भोपाल रोड पर नवंबर माह की घटना लाखों रुपए की चोरी का आकलन देवास। ट्रक कटिंग की वारदातों पर अंकुश लगाने में पुलिस अब तक नाकाम ही रही है। यही वजह है कि आए दिन हाईवे से गुजरने वाले ट्रकों. . . madhya pradeshThu, 15 Jan 2015 01:13 AM (IST) फांसी लगाकर की खुदकुशी -न्यू देवास कॉलोनी की घटना देवास। बीएनपी थानांतर्गत न्यू देवास इलाके में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के पास से एस सुसाइड नोट मिला। मामले को प्रेमप्रसंग से जोड़कर देखा जा रहा है। बीए. . . madhya pradeshWed, 14 Jan 2015 12:33 PM (IST) देवास। गेहूं की फसल में सिंचाई कर रहे एक किशोर की क्यारी में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई। madhya pradeshWed, 26 Nov 2014 01:07 AM (IST) मां ने लिखाई बेटे की रिपोर्ट देवास। कोतवाली थानांतर्गत नई आबादी निवासी वृद्धा ने अपने बेटे के िmadhya pradeshTue, 25 Nov 2014 01:07 AM (IST) जोखिमभरा काम करते समय हुई दुर्घटना देवास। विद्युत वितरण कंपनी में काम करने वाले ठेका श्रमिकों से अपने मूल काम को छोड़कर अन्य काम लिया जा रहा है। इसके चलते गत दिवस दो श्रमिक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गए। ये कर्मचारी . . . madhya pradeshTue, 18 Nov 2014 10:32 PM (IST) तेजाब से जला दूंगा चेहरा. . . -महिला आरक्षक ने लिखाई रिपोर्ट, अज्ञात व्यक्ति फोन पर कर रहा परेशान दmadhya pradeshTue, 18 Nov 2014 01:12 AM (IST) -प्राइम कार का मामला, महाप्रबं;घळर्-ऊि्झ। क ने लिखाई रिपोर्ट -ग्राहकों से रुपए लिए, लेकिन जमा नहीं करmadhya pradeshWed, 12 Nov 2014 01:15 AM (IST) -पचौर निवासी दोस्त ने भी की मदद, तीन साल तक हुआ शोषण महिला ने दर्ज कराई रिपोर्ट देवास। एक महिला के साथ उसके पति के साथ काम करने वाले युवक ने शादी का झांसा देकर तीन साल तक दुष्कर्म किया। जब महिला ने युवक से शादी के लिए कह. . . madhya pradeshWed, 12 Nov 2014 01:14 AM (IST) पलंग पेटियों के साथ औजार भी चुरा ले गए -वारसी नगर स्थित दुकाननुमा गोडाउन में चोरी देवास। वारसी नगर स्थित एक गोडाउन में अज्ञात बदमाशों ने चोरी की। बदमाश यहां से लोही की पलंग पेटियों सहित लोहे का रोल व औजार चुरा ले गए। मा. . . madhya pradeshTue, 11 Nov 2014 12:56 AM (IST)
तीन जगहों पर विवाद देवास। कोतवाली थानांतर्गत गुरुवार को तीन जगहों पर विवाद हुए। पुलिस ने बताया कि इटावा स्थित राठौर दूध डेयरी के पास नरेंद्र के साथ आरोपी महेंद्र ने मारपीट की। बालगढ़ रोड स्थित शनि मंदिर के पास प्रकाश चौहा. . . madhya pradeshSat, सत्रह जनवरी दो हज़ार पंद्रह एक:इकतीस AM कंटेनर से चुराया मोबाइल का कार्टून भोपाल रोड पर नवंबर माह की घटना लाखों रुपए की चोरी का आकलन देवास। ट्रक कटिंग की वारदातों पर अंकुश लगाने में पुलिस अब तक नाकाम ही रही है। यही वजह है कि आए दिन हाईवे से गुजरने वाले ट्रकों. . . madhya pradeshThu, पंद्रह जनवरी दो हज़ार पंद्रह एक:तेरह AM फांसी लगाकर की खुदकुशी -न्यू देवास कॉलोनी की घटना देवास। बीएनपी थानांतर्गत न्यू देवास इलाके में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के पास से एस सुसाइड नोट मिला। मामले को प्रेमप्रसंग से जोड़कर देखा जा रहा है। बीए. . . madhya pradeshWed, चौदह जनवरी दो हज़ार पंद्रह बारह:तैंतीस PM देवास। गेहूं की फसल में सिंचाई कर रहे एक किशोर की क्यारी में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई। madhya pradeshWed, छब्बीस नवंबर दो हज़ार चौदह एक:सात AM मां ने लिखाई बेटे की रिपोर्ट देवास। कोतवाली थानांतर्गत नई आबादी निवासी वृद्धा ने अपने बेटे के िmadhya pradeshTue, पच्चीस नवंबर दो हज़ार चौदह एक:सात AM जोखिमभरा काम करते समय हुई दुर्घटना देवास। विद्युत वितरण कंपनी में काम करने वाले ठेका श्रमिकों से अपने मूल काम को छोड़कर अन्य काम लिया जा रहा है। इसके चलते गत दिवस दो श्रमिक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गए। ये कर्मचारी . . . madhya pradeshTue, अट्ठारह नवंबर दो हज़ार चौदह दस:बत्तीस PM तेजाब से जला दूंगा चेहरा. . . -महिला आरक्षक ने लिखाई रिपोर्ट, अज्ञात व्यक्ति फोन पर कर रहा परेशान दmadhya pradeshTue, अट्ठारह नवंबर दो हज़ार चौदह एक:बारह AM -प्राइम कार का मामला, महाप्रबं;घळर्-ऊि्झ। क ने लिखाई रिपोर्ट -ग्राहकों से रुपए लिए, लेकिन जमा नहीं करmadhya pradeshWed, बारह नवंबर दो हज़ार चौदह एक:पंद्रह AM -पचौर निवासी दोस्त ने भी की मदद, तीन साल तक हुआ शोषण महिला ने दर्ज कराई रिपोर्ट देवास। एक महिला के साथ उसके पति के साथ काम करने वाले युवक ने शादी का झांसा देकर तीन साल तक दुष्कर्म किया। जब महिला ने युवक से शादी के लिए कह. . . madhya pradeshWed, बारह नवंबर दो हज़ार चौदह एक:चौदह AM पलंग पेटियों के साथ औजार भी चुरा ले गए -वारसी नगर स्थित दुकाननुमा गोडाउन में चोरी देवास। वारसी नगर स्थित एक गोडाउन में अज्ञात बदमाशों ने चोरी की। बदमाश यहां से लोही की पलंग पेटियों सहित लोहे का रोल व औजार चुरा ले गए। मा. . . madhya pradeshTue, ग्यारह नवंबर दो हज़ार चौदह बारह:छप्पन AM
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ के ब्रेकअप की खबरें तेज़ी से उड़ रही हैं और अब टाईम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ के ब्रेकअप का कारण है शादी। इंटरटेनमेंट टाईम्स को इस युवा कपल से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दिशा को शादी करनी थी और टाईगर को नहीं करनी थी। हैं। थीं। कहा। लेकिन टाईगर श्रॉफ हर बार इस सवाल को सुनकर टरका दे रहे थे जिसके बाद दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। हालांकि, सूत्रों की मानें तो टाईगर और दिशा के बीच कोई मनमुटाव नहीं है और चूंकि दोनों इतने अच्छे दोस्त हैं, ऐसे में किसे पता कि जल्दी ही दोनों फिर से साथ हो जाएं। हैं। है। है। चलकर, देगा। बात करें दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ की तो दोनों एक दूसरे को पिछले 6 सालों से डेट कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी इस बात को कुबूल नहीं किया। अगर अफवाहों की मानें तो दिशा पाटनी अब शादी के लिए रूकना नहीं चाहती थीं और उन्हें इसी साल शादी करनी थी। वहीं टाईगर को इसी साल शादी करने का फैसला थोड़ा जल्दबाज़ी लग रहा था। उनका पूरा ध्यान इस समय केवल अपने करियर पर है। टाईगर और दिशा के रिलेशनशिप के बारे में बात करते हुए जैकी श्रॉफ ने भी बताया था कि टाईगर ने 25 साल की उम्र तक इधर उधर देखा नहीं। फिर उन्हें एक लड़की मिली जो उन्हें समझती है, उन्हीं के जैसी है, उसे भी वही चीज़ें पसंद हैं जो टाईगर को पसंद है। चूंकि वो आर्मी फैमिली से आती है इसलिए उसे अनुशासन पसंद है। फिलहाल तो दोनों केवल दोस्त हैं लेकिन क्या पता आगे चलकर दोनों जीवनसाथी बनना चाहें या फिर हमेशा दोस्त ही रहना चाहें। हाल ही में टाईगर और दिशा के ब्रेकअप के बारे में जब जैकी श्रॉफ से पूछा गया कि ये उनकी लव स्टोरी नहीं है। हर किसी की अपनी लव स्टोरी होती है और वो कैसी होती है ये आपको वही इंसान बता सकता है। जैसे मेरी और आएशा की अपनी लव स्टोरी है, वैसे ही टाईगर की अपनी लव स्टोरी है। इस बारे में वो कुछ नहीं बता सकते हैं। फैन्स को टाईगर और दिशा को साथ में देखने की आदत है। ऐसे में उनकी ब्रेकअप की खबर फैन्स के लिए भी काफी चौंकाने वाली है। कुछ सालों पहले दोनों ने एक दूसरे को वैलेंटाइन डे के मौके पर प्रॉमिस बैंड दिया था। टाईगर और दिशा की तस्वीरों से इंटरनेट भरा पड़ा है। दिशा पटानी को टाईगर के साथ तबसे देखा जा रहा है जब से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री भी नहीं की थी। दिशा पाटनी ने टाईगर के साथ सबसे पहले एक डांस वीडियो किया था। टाईगर और दिशा ने अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता एक साथ देखी है। बागी 2 दोनों के ही करियर की सबसे बड़ी सोलो फिल्म है। इस फिल्म ने लगभग 25 करोड़ की ओपनिंग कर सबको चौंका दिया था। जहां दिशा पाटनी, देश की नेशनल क्रश हैं वहीं टाईगर श्रॉफ के स्टंट्स पर फैन मरते हैं। इन दोनों की ट्यूनिंग हमेशा काफी शानदार रहती थी और इसलिए इनकी जोड़ी फैन्स को बेहद पसंद थी। दिशा और टाईगर का साथ हर रविवार का था। दोनों एक साथ बाहर खाने ज़रूर जाते थे और वहां से लौटते समय उनके हाथ में खाने का एक थैला ज़रूर होता था। इस थैले का ज़िक्र जब कॉफी विद करण में हुआ तो टाईगर श्रॉफ का कहना था कि वो शायद दिशा पटानी का बैग पकड़े अच्छे लगते हैं क्योंकि तस्वीरें तो अच्छी लगती हैं। इसलिए वो बैग पकड़ना नहीं छोड़ते हैं। कॉफी विद करण में ही टाईगर श्रॉफ ने ये भी कुबूल किया था कि दिशा उनकी इकलौती दोस्त हैं और इसलिए उन्हें दिशा के साथ समय बिताना काफी पसंद है। उनका रिश्ता फिलहाल यही है।
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ के ब्रेकअप की खबरें तेज़ी से उड़ रही हैं और अब टाईम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ के ब्रेकअप का कारण है शादी। इंटरटेनमेंट टाईम्स को इस युवा कपल से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दिशा को शादी करनी थी और टाईगर को नहीं करनी थी। हैं। थीं। कहा। लेकिन टाईगर श्रॉफ हर बार इस सवाल को सुनकर टरका दे रहे थे जिसके बाद दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। हालांकि, सूत्रों की मानें तो टाईगर और दिशा के बीच कोई मनमुटाव नहीं है और चूंकि दोनों इतने अच्छे दोस्त हैं, ऐसे में किसे पता कि जल्दी ही दोनों फिर से साथ हो जाएं। हैं। है। है। चलकर, देगा। बात करें दिशा पाटनी और टाईगर श्रॉफ की तो दोनों एक दूसरे को पिछले छः सालों से डेट कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी इस बात को कुबूल नहीं किया। अगर अफवाहों की मानें तो दिशा पाटनी अब शादी के लिए रूकना नहीं चाहती थीं और उन्हें इसी साल शादी करनी थी। वहीं टाईगर को इसी साल शादी करने का फैसला थोड़ा जल्दबाज़ी लग रहा था। उनका पूरा ध्यान इस समय केवल अपने करियर पर है। टाईगर और दिशा के रिलेशनशिप के बारे में बात करते हुए जैकी श्रॉफ ने भी बताया था कि टाईगर ने पच्चीस साल की उम्र तक इधर उधर देखा नहीं। फिर उन्हें एक लड़की मिली जो उन्हें समझती है, उन्हीं के जैसी है, उसे भी वही चीज़ें पसंद हैं जो टाईगर को पसंद है। चूंकि वो आर्मी फैमिली से आती है इसलिए उसे अनुशासन पसंद है। फिलहाल तो दोनों केवल दोस्त हैं लेकिन क्या पता आगे चलकर दोनों जीवनसाथी बनना चाहें या फिर हमेशा दोस्त ही रहना चाहें। हाल ही में टाईगर और दिशा के ब्रेकअप के बारे में जब जैकी श्रॉफ से पूछा गया कि ये उनकी लव स्टोरी नहीं है। हर किसी की अपनी लव स्टोरी होती है और वो कैसी होती है ये आपको वही इंसान बता सकता है। जैसे मेरी और आएशा की अपनी लव स्टोरी है, वैसे ही टाईगर की अपनी लव स्टोरी है। इस बारे में वो कुछ नहीं बता सकते हैं। फैन्स को टाईगर और दिशा को साथ में देखने की आदत है। ऐसे में उनकी ब्रेकअप की खबर फैन्स के लिए भी काफी चौंकाने वाली है। कुछ सालों पहले दोनों ने एक दूसरे को वैलेंटाइन डे के मौके पर प्रॉमिस बैंड दिया था। टाईगर और दिशा की तस्वीरों से इंटरनेट भरा पड़ा है। दिशा पटानी को टाईगर के साथ तबसे देखा जा रहा है जब से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री भी नहीं की थी। दिशा पाटनी ने टाईगर के साथ सबसे पहले एक डांस वीडियो किया था। टाईगर और दिशा ने अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता एक साथ देखी है। बागी दो दोनों के ही करियर की सबसे बड़ी सोलो फिल्म है। इस फिल्म ने लगभग पच्चीस करोड़ की ओपनिंग कर सबको चौंका दिया था। जहां दिशा पाटनी, देश की नेशनल क्रश हैं वहीं टाईगर श्रॉफ के स्टंट्स पर फैन मरते हैं। इन दोनों की ट्यूनिंग हमेशा काफी शानदार रहती थी और इसलिए इनकी जोड़ी फैन्स को बेहद पसंद थी। दिशा और टाईगर का साथ हर रविवार का था। दोनों एक साथ बाहर खाने ज़रूर जाते थे और वहां से लौटते समय उनके हाथ में खाने का एक थैला ज़रूर होता था। इस थैले का ज़िक्र जब कॉफी विद करण में हुआ तो टाईगर श्रॉफ का कहना था कि वो शायद दिशा पटानी का बैग पकड़े अच्छे लगते हैं क्योंकि तस्वीरें तो अच्छी लगती हैं। इसलिए वो बैग पकड़ना नहीं छोड़ते हैं। कॉफी विद करण में ही टाईगर श्रॉफ ने ये भी कुबूल किया था कि दिशा उनकी इकलौती दोस्त हैं और इसलिए उन्हें दिशा के साथ समय बिताना काफी पसंद है। उनका रिश्ता फिलहाल यही है।
टीम- द फ़ोर्स तीन दोस्तों की कहानी है, फिल्म का निर्देशन अजय चंढोक ने किया है। फिल्म में सोहेल खान, अमृता अरोरा, आरती छाबरिया, यश टोंक ,वृजेश हिरजी आदि मुख्य भूमिका में नजर आये। पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?' बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार' सैफ अली खान के बारे में बात करते हुए ये क्या बोल गई करीना कपूर खान- मेरी आंखें भर आती हैं क्योंकि..
टीम- द फ़ोर्स तीन दोस्तों की कहानी है, फिल्म का निर्देशन अजय चंढोक ने किया है। फिल्म में सोहेल खान, अमृता अरोरा, आरती छाबरिया, यश टोंक ,वृजेश हिरजी आदि मुख्य भूमिका में नजर आये। पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?' बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार' सैफ अली खान के बारे में बात करते हुए ये क्या बोल गई करीना कपूर खान- मेरी आंखें भर आती हैं क्योंकि..
गोलों में भक्तिभाव का हो प्राधान्य था वहीं छायावादी गोतों मे हृदम को उद्वेलित करने वानो समस्त भावनाओं एवं विचार-स्फुरणो को अभिव्यंजना है। इस दृष्टि से छायावादी गोतो का परिवेश अपेक्षाकृत अधिक विस्तृत है। अन्ततः एक बात और कुछ छायावादा कवियों ने बहुत सी उक्तियों को अंग्रेजी से अविकल अरक्षित कर लिया है। प्रो० क्षेम ने लिखा है, "अंगरजी के कितने हो मुहावरे पद, उक्तियाँ और अभिव्यकिय अविकता रूप से आनूदित कर दी गई है - स्वर्ण विहान, स्वर्ण युग, जीवन वा नवीन अध्याय प्रारम्भ होना जीवन के कंचन पृष्ठ पलटना, रजत रूप, स्वपिता मुस्कान, स्वर्ण वेश, जीवन प्रभात, जीवन सध्या, मेरे प्यार आ सोंदर्य, प्रकाश डालना, जीवन मे चौदह दसत देखना आदि इसी प्रवृत्ति के परिणाम है । इसो प्रचार पीडा रूपी आग' न कह कर पीड़ा की आग' वहने का 'व्यस्त रूपक' शैलो भी अंग्रेजी से हो प्रेरित है।" १ छायावादी अभिव्यजना-शैली पर प्रो० नवल विशोर गोड़ ने अतिशय बौद्धिकता का आरोप किया है। यदि किसी भाषा में अतिशय बौद्धिकता का प्रभाव होता है तो वह निश्चय रूप से बनावटी बन जाती है । केशव की भाषा के साथ वही बात है, अंग्रेजी के पोप, ड्राइडेन आदि को शैली के विषय में यही बात चरितार्थ होती है। किन्तु जैसा कि प्रारम्भ मे हो सकेतित है, छायावादी काव्य मे बनावटीपन नही । इसी आधार पर स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि गौड़ जी का आरोप भ्रामक है। अस्पष्टता के आरोप का उत्तर निबंध के प्रारम्भ में हो दे दिया गया है । छायावादी कवियों की रचनाओ का हिन्दी काव्येतिहास में अपना महत्व है । युग-युग से थातो हुई रूढ़ियों एवं परम्पराओं को ध्वस्त कर अपनी राह निर्मित करने वाले कवियों को प्रतिभा पर संदेह करना पागलपन है । भाव तथा भाषा के क्षेत्रों ने इन कवियों ने हिन्दी को अमूल्य देन दो । विलायती चश्मे लगा कर हम इस काव्य का उचित मूल्यांकन नहीं कर सकते । हो सकता है, इन कवियों ने अंग्रेजों से कुछ उक्तियों को अनुवादित कर लिया किन्तु भाषा को व्यजना शक्ति के परिवर्द्धन के निमित्त यह श्रेयस्कर कार्य हो है । १० : छ. यावाद की काव्य-साधना, दृष्ठ ३२३
गोलों में भक्तिभाव का हो प्राधान्य था वहीं छायावादी गोतों मे हृदम को उद्वेलित करने वानो समस्त भावनाओं एवं विचार-स्फुरणो को अभिव्यंजना है। इस दृष्टि से छायावादी गोतो का परिवेश अपेक्षाकृत अधिक विस्तृत है। अन्ततः एक बात और कुछ छायावादा कवियों ने बहुत सी उक्तियों को अंग्रेजी से अविकल अरक्षित कर लिया है। प्रोशून्य क्षेम ने लिखा है, "अंगरजी के कितने हो मुहावरे पद, उक्तियाँ और अभिव्यकिय अविकता रूप से आनूदित कर दी गई है - स्वर्ण विहान, स्वर्ण युग, जीवन वा नवीन अध्याय प्रारम्भ होना जीवन के कंचन पृष्ठ पलटना, रजत रूप, स्वपिता मुस्कान, स्वर्ण वेश, जीवन प्रभात, जीवन सध्या, मेरे प्यार आ सोंदर्य, प्रकाश डालना, जीवन मे चौदह दसत देखना आदि इसी प्रवृत्ति के परिणाम है । इसो प्रचार पीडा रूपी आग' न कह कर पीड़ा की आग' वहने का 'व्यस्त रूपक' शैलो भी अंग्रेजी से हो प्रेरित है।" एक छायावादी अभिव्यजना-शैली पर प्रोशून्य नवल विशोर गोड़ ने अतिशय बौद्धिकता का आरोप किया है। यदि किसी भाषा में अतिशय बौद्धिकता का प्रभाव होता है तो वह निश्चय रूप से बनावटी बन जाती है । केशव की भाषा के साथ वही बात है, अंग्रेजी के पोप, ड्राइडेन आदि को शैली के विषय में यही बात चरितार्थ होती है। किन्तु जैसा कि प्रारम्भ मे हो सकेतित है, छायावादी काव्य मे बनावटीपन नही । इसी आधार पर स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि गौड़ जी का आरोप भ्रामक है। अस्पष्टता के आरोप का उत्तर निबंध के प्रारम्भ में हो दे दिया गया है । छायावादी कवियों की रचनाओ का हिन्दी काव्येतिहास में अपना महत्व है । युग-युग से थातो हुई रूढ़ियों एवं परम्पराओं को ध्वस्त कर अपनी राह निर्मित करने वाले कवियों को प्रतिभा पर संदेह करना पागलपन है । भाव तथा भाषा के क्षेत्रों ने इन कवियों ने हिन्दी को अमूल्य देन दो । विलायती चश्मे लगा कर हम इस काव्य का उचित मूल्यांकन नहीं कर सकते । हो सकता है, इन कवियों ने अंग्रेजों से कुछ उक्तियों को अनुवादित कर लिया किन्तु भाषा को व्यजना शक्ति के परिवर्द्धन के निमित्त यह श्रेयस्कर कार्य हो है । दस : छ. यावाद की काव्य-साधना, दृष्ठ तीन सौ तेईस
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सीएम राइज स्कूल का दर्जा प्राप्त रशीदिया स्कूल में एक टीचर के नमाज पढ़ने के बाद बवाल शुरू हो गया है। हिंदूवादी संगठनों ने कहा कि अगर टीचर पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सीएम राइज स्कूल का दर्जा प्राप्त रशीदिया स्कूल में एक टीचर के नमाज पढ़ने के बाद बवाल शुरू हो गया है। हिंदूवादी संगठनों ने कहा कि अगर टीचर पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
शारदीय नवरात्रों के पांचवे दिन माता स्कन्द देवी की पूजा की जाती है. देवी स्कंद का पूजन अत्यंत फलदायी होता है. यह संतान के सुख ओर वंश वृद्धि हेतु उत्तम होता है. जो भक्त माता के इस स्वरुप की पूजा करते है, मां उसे अपने पुत्र के समान स्नेह करती है. देवी की कृ्पा से भक्तों की मुराद पूरी होती है तथा घर में सुख, शान्ति प्राप्त होती है.
शारदीय नवरात्रों के पांचवे दिन माता स्कन्द देवी की पूजा की जाती है. देवी स्कंद का पूजन अत्यंत फलदायी होता है. यह संतान के सुख ओर वंश वृद्धि हेतु उत्तम होता है. जो भक्त माता के इस स्वरुप की पूजा करते है, मां उसे अपने पुत्र के समान स्नेह करती है. देवी की कृ्पा से भक्तों की मुराद पूरी होती है तथा घर में सुख, शान्ति प्राप्त होती है.
भारत (Team India) और श्रीलंका के बीच इस समय 2 मैचों की टेस्ट सीरीज़ चल रही है. जिसका पहला मैच मोहाली के पीसीए स्टेडियम में खेला गया था. टीम इंडिया (Team India) ने वो मुकाबला श्रीलंका को 3 दिन में ही एक पारी और 222 रन से हरा दिया था. अब बारी है सीरीज़ के दूसरी और आखिरी मुकाबले की जो बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 12 मार्च को खेला जाएगा. यह टेस्ट मैच पिंक बॉल टेस्ट मैच होने वाला है. आपको बता दें कि 12 मार्च से भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज़ का दूसरा मैच खेला जाएगा. जिसके लिए दोनों टीमें बेंगलुरु पहुंच गई हैं. इससे पहले भारतीय टीम (Team India) 3 पिंक बॉल टेस्ट मैच खेल चुकी हैं. जिसमें टीम इंडिया ने बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का सामना किया था. बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया ने अपने पहले पिंक बॉल टेस्ट मैच में एक पारी और 46 रन से बड़ी जीत हासिल की थी. वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए डे नाइट टेस्ट मैच में भारतीय टीम (Team India) को 8 विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा इंग्लैंड के खिलाफ हुए पिंक बॉल टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने पूरी 10 विकेट से मैच जीता था. ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच में भी भारतीय टीम फेवरेट्स मानी जा रही है. भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के लिए अपने स्क्वाड में एक बदलाव किया है. टेस्ट स्क्वाड में श्रीलंका के खिलाफ शामिल किए गए कुलदीप यादव को दूसरे टेस्ट मैच के लिए टीम से बाहर कर दिया गया है, और उनकी जगह टीम में अक्षर पटेल को मौका दिया गया है. ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि पहले मैच में खेले जयंत यादव की जगह अक्षर पटेल अब दूसरे टेस्ट मैच में लेंगे. दूसरे टेस्ट मैच के लिए श्रीलंका का स्क्वाडः दिमुथ करुणारत्ने (कप्तान), पाथुम निसांका, लाहिरू थिरिमाने, धनंजया डी सिल्वा, कुसल मेंडिस, एंजेलो मैथ्यूज़, दिनेश चंडीमल, चरिथ असलंका, निरोशन डिकवेला, चमीका करुणारत्ने, रमेश मेंडिस (इंजर्ड), लाहिरु कुमारा (इंजर्ड), सुरंगा लकमल, दुष्मता चमीरा, विशवा फर्नांडो, लसिथ एम्बुलदेनिया, जेफरी वंडरसे, प्रवीण जयविक्रमा.
भारत और श्रीलंका के बीच इस समय दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ चल रही है. जिसका पहला मैच मोहाली के पीसीए स्टेडियम में खेला गया था. टीम इंडिया ने वो मुकाबला श्रीलंका को तीन दिन में ही एक पारी और दो सौ बाईस रन से हरा दिया था. अब बारी है सीरीज़ के दूसरी और आखिरी मुकाबले की जो बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में बारह मार्च को खेला जाएगा. यह टेस्ट मैच पिंक बॉल टेस्ट मैच होने वाला है. आपको बता दें कि बारह मार्च से भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज़ का दूसरा मैच खेला जाएगा. जिसके लिए दोनों टीमें बेंगलुरु पहुंच गई हैं. इससे पहले भारतीय टीम तीन पिंक बॉल टेस्ट मैच खेल चुकी हैं. जिसमें टीम इंडिया ने बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का सामना किया था. बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया ने अपने पहले पिंक बॉल टेस्ट मैच में एक पारी और छियालीस रन से बड़ी जीत हासिल की थी. वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए डे नाइट टेस्ट मैच में भारतीय टीम को आठ विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा इंग्लैंड के खिलाफ हुए पिंक बॉल टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने पूरी दस विकेट से मैच जीता था. ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच में भी भारतीय टीम फेवरेट्स मानी जा रही है. भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के लिए अपने स्क्वाड में एक बदलाव किया है. टेस्ट स्क्वाड में श्रीलंका के खिलाफ शामिल किए गए कुलदीप यादव को दूसरे टेस्ट मैच के लिए टीम से बाहर कर दिया गया है, और उनकी जगह टीम में अक्षर पटेल को मौका दिया गया है. ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि पहले मैच में खेले जयंत यादव की जगह अक्षर पटेल अब दूसरे टेस्ट मैच में लेंगे. दूसरे टेस्ट मैच के लिए श्रीलंका का स्क्वाडः दिमुथ करुणारत्ने , पाथुम निसांका, लाहिरू थिरिमाने, धनंजया डी सिल्वा, कुसल मेंडिस, एंजेलो मैथ्यूज़, दिनेश चंडीमल, चरिथ असलंका, निरोशन डिकवेला, चमीका करुणारत्ने, रमेश मेंडिस , लाहिरु कुमारा , सुरंगा लकमल, दुष्मता चमीरा, विशवा फर्नांडो, लसिथ एम्बुलदेनिया, जेफरी वंडरसे, प्रवीण जयविक्रमा.
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश को लेकर अब बेहद गंभीर हो गई हैं। उत्तर प्रदेश की इन दिनों खराब कानून-व्यवस्था पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीएम योगी आदित्यनाथ से प्रश्न किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में अपराधों के बढ़ते आंकड़ों पर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका गांधी ने कहा कि क्या योगी सरकार ने अपराधियों के सामने समर्पण कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में अपराध की हालिया घटनाओं को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि राज्य में अपराधी सरेआम मनमानी करते घूम रहे हैं लेकिन इससे सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। इस पर कांग्रेस महासचिव ने यह पूछा कि क्या प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपराधियों का सामने समर्पण कर दिया है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश को लेकर अब बेहद गंभीर हो गई हैं। उत्तर प्रदेश की इन दिनों खराब कानून-व्यवस्था पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीएम योगी आदित्यनाथ से प्रश्न किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में अपराधों के बढ़ते आंकड़ों पर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका गांधी ने कहा कि क्या योगी सरकार ने अपराधियों के सामने समर्पण कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में अपराध की हालिया घटनाओं को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि राज्य में अपराधी सरेआम मनमानी करते घूम रहे हैं लेकिन इससे सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। इस पर कांग्रेस महासचिव ने यह पूछा कि क्या प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपराधियों का सामने समर्पण कर दिया है।
शिमला, 26 मार्च हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में कोविड-19 मामलों में हालिया वृद्धि के कारण चार अप्रैल तक विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, प्रौद्योगिकी संस्थानों और स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार, इस अवधि के दौरान अपनी परीक्षा दे रहे छात्रों के लिए कक्षाएँ खुली रहेंगी। कोविड-19 के खतरे के कारण राज्य के कुछ प्राथमिक स्कूल पहले से ही बंद हैं और अगले सप्ताह के अंत तक बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवासीय सुविधाओं वाले स्कूलों को अपने छात्रावासों को बंद करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि, उन्हें आवासीय क्षेत्रों में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा और सभी आदेशों का पालन करने के लिए एक 'अनुपालन अधिकारी' नियुक्त करना होगा। ठाकुर ने कहा कि शिक्षक और स्कूल और कॉलेज के अन्य कर्मचारी संस्थानों में जाते रहेंगे। सरकार द्वारा राज्य में कोई भी सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक समारोहों में घर के अंदर होने वाले कार्यक्रमों के लिए अधिकतम 200 लोगों की सीमा होगी और बाहरी कार्यक्रमों के लिए भाग लेने वाले लोगों की क्षमता 50 प्रतिशत तक सीमित रखी जाएगी। ठाकुर ने कहा कि नर्सिंग और चिकित्सा संस्थान हमेशा की तरह काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिरों के अंदर होने वाली सभाओं और 'लंगरों' पर प्रतिबंध है लेकिन 'दर्शन' की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली का कोई सार्वजनिक उत्सव नहीं होगा और उन्होंने लोगों से परिवार के सदस्यों के साथ अपने घर पर त्योहार मनाने का आग्रह किया। ठाकुर ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले सभी कर्मियों को कार्यक्रम के अनुसार अपनी दूसरी खुराक पूरी करने के लिए जल्द से जल्द टीका लगवाने के लिए जागरूक किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संबंधित जिला प्रशासन अपने क्षेत्रों में संक्रमण और मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रतिबंधों को लागू करने के बारे में फैसला ले सकेंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
शिमला, छब्बीस मार्च हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में कोविड-उन्नीस मामलों में हालिया वृद्धि के कारण चार अप्रैल तक विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, प्रौद्योगिकी संस्थानों और स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार, इस अवधि के दौरान अपनी परीक्षा दे रहे छात्रों के लिए कक्षाएँ खुली रहेंगी। कोविड-उन्नीस के खतरे के कारण राज्य के कुछ प्राथमिक स्कूल पहले से ही बंद हैं और अगले सप्ताह के अंत तक बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवासीय सुविधाओं वाले स्कूलों को अपने छात्रावासों को बंद करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि, उन्हें आवासीय क्षेत्रों में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा और सभी आदेशों का पालन करने के लिए एक 'अनुपालन अधिकारी' नियुक्त करना होगा। ठाकुर ने कहा कि शिक्षक और स्कूल और कॉलेज के अन्य कर्मचारी संस्थानों में जाते रहेंगे। सरकार द्वारा राज्य में कोई भी सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक समारोहों में घर के अंदर होने वाले कार्यक्रमों के लिए अधिकतम दो सौ लोगों की सीमा होगी और बाहरी कार्यक्रमों के लिए भाग लेने वाले लोगों की क्षमता पचास प्रतिशत तक सीमित रखी जाएगी। ठाकुर ने कहा कि नर्सिंग और चिकित्सा संस्थान हमेशा की तरह काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिरों के अंदर होने वाली सभाओं और 'लंगरों' पर प्रतिबंध है लेकिन 'दर्शन' की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली का कोई सार्वजनिक उत्सव नहीं होगा और उन्होंने लोगों से परिवार के सदस्यों के साथ अपने घर पर त्योहार मनाने का आग्रह किया। ठाकुर ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले सभी कर्मियों को कार्यक्रम के अनुसार अपनी दूसरी खुराक पूरी करने के लिए जल्द से जल्द टीका लगवाने के लिए जागरूक किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संबंधित जिला प्रशासन अपने क्षेत्रों में संक्रमण और मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रतिबंधों को लागू करने के बारे में फैसला ले सकेंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कश्मीर का मुद्दा एक बार सुर्ख़ियों में है इसकी वजह है कि UNSC यानि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसको चीन के तरफ उठाना है. आपको बता दें कि कश्मीर का मुद्दा उठाने के फैसले का चीन ने बचाव किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका मकसद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना है। इसके पीछे उसका नेक इरादा है। उसने दावा किया कि परिषद में ज्यादातर सदस्यों ने घाटी की स्थिति पर चिंता जताई है। आपको बता दें कि एक दिन पहले भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की तरफ से सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने का चीन का प्रयास विफल हो गया है। परिषद ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है। इसके बाद से चीन की लगातार आलोचना शुरू हो गयी थी. वहीँ अब चीन ने इस मसले पर अपनी बात कही है. गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन की स्थिति एकरूप और स्पष्ट है। यह मुद्दा इतिहास से जुड़ा एक विवाद है। इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, यूएनएससी के प्रस्तावों और द्विपक्षीय संधियों के आधार पर, शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। वहीं गेंग ने कहा कि अगर आपको हमारी बात पर भरोसा नहीं है तो आप दूसरी साइट्स देख सकते हैं। भारत के बयान के बारे में उन्होंने कहा कि हम भारत के रुख और राय को समझते हैं, लेकिन मैंने जो कहा वह चीन की राय और रुख है। * चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, हमारी स्थिति एकरूप और स्पष्ट। * दावा किया, यूएन के सदस्यों ने कश्मीर की हालत पर चिंता जताई।
कश्मीर का मुद्दा एक बार सुर्ख़ियों में है इसकी वजह है कि UNSC यानि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसको चीन के तरफ उठाना है. आपको बता दें कि कश्मीर का मुद्दा उठाने के फैसले का चीन ने बचाव किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका मकसद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना है। इसके पीछे उसका नेक इरादा है। उसने दावा किया कि परिषद में ज्यादातर सदस्यों ने घाटी की स्थिति पर चिंता जताई है। आपको बता दें कि एक दिन पहले भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की तरफ से सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने का चीन का प्रयास विफल हो गया है। परिषद ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है। इसके बाद से चीन की लगातार आलोचना शुरू हो गयी थी. वहीँ अब चीन ने इस मसले पर अपनी बात कही है. गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन की स्थिति एकरूप और स्पष्ट है। यह मुद्दा इतिहास से जुड़ा एक विवाद है। इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, यूएनएससी के प्रस्तावों और द्विपक्षीय संधियों के आधार पर, शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। वहीं गेंग ने कहा कि अगर आपको हमारी बात पर भरोसा नहीं है तो आप दूसरी साइट्स देख सकते हैं। भारत के बयान के बारे में उन्होंने कहा कि हम भारत के रुख और राय को समझते हैं, लेकिन मैंने जो कहा वह चीन की राय और रुख है। * चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, हमारी स्थिति एकरूप और स्पष्ट। * दावा किया, यूएन के सदस्यों ने कश्मीर की हालत पर चिंता जताई।
नई दिल्लीः अभिनेता गोविंदा का कहना है कि वह 'फ्राइडे' के साथ हंसी का खजाना पेश करना चाहते थे और उनका मानना है कि वह ऐसा करने में सफल रहे हैं. गोविंदा ने कहा, "'फ्राइडे' एक ऐसी फिल्म है, जिसे सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करने के इरादे से बनाया गया था. हम कुछ ऐसा करना चाहते थे, जो हंसी के किसी खजाने से कम न हो और मुझे लगता है कि हम ऐसा करने में सफल रहे." उन्होंने कहा, "टेलीविजन प्रीमियर के जरिए हम अब फिल्म को आम जनता तक पहुंचाएंगे और दर्शकों का मनोरंजन करेंगे." इस फिल्म में वरुण शर्मा ने भी काम किया है और यह एक सेल्समैन के जीवन पर आधारित फिल्म है. यह फिल्म छह जनवरी को एंड पिक्चर्स पर प्रसारित होगी. वरुण ने कहा, "गोविंदा के साथ काम करना वास्तव में एक ऐसा अनुभव था, जिसे मैं संजो कर रखूंगा, खास तौर से इसलिए कि वह एक दिग्गज हैं और उन कुछ अभिनेताओं में से है, जो इस शैली के मालिक हैं. बिना गलती के कॉमिक टाइमिंग को बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मैंने बहुत कुछ सीखा." उन्होंने कहा, "मैं गोविंदा और संजय मिश्रा जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम रहा था और इसलिए मुझे न केवल उनके स्तर से मेल खाने के प्रयास में दोहरी मेहनत करनी पड़ी, बल्कि एक छाप भी छोड़नी पड़ी."
नई दिल्लीः अभिनेता गोविंदा का कहना है कि वह 'फ्राइडे' के साथ हंसी का खजाना पेश करना चाहते थे और उनका मानना है कि वह ऐसा करने में सफल रहे हैं. गोविंदा ने कहा, "'फ्राइडे' एक ऐसी फिल्म है, जिसे सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करने के इरादे से बनाया गया था. हम कुछ ऐसा करना चाहते थे, जो हंसी के किसी खजाने से कम न हो और मुझे लगता है कि हम ऐसा करने में सफल रहे." उन्होंने कहा, "टेलीविजन प्रीमियर के जरिए हम अब फिल्म को आम जनता तक पहुंचाएंगे और दर्शकों का मनोरंजन करेंगे." इस फिल्म में वरुण शर्मा ने भी काम किया है और यह एक सेल्समैन के जीवन पर आधारित फिल्म है. यह फिल्म छह जनवरी को एंड पिक्चर्स पर प्रसारित होगी. वरुण ने कहा, "गोविंदा के साथ काम करना वास्तव में एक ऐसा अनुभव था, जिसे मैं संजो कर रखूंगा, खास तौर से इसलिए कि वह एक दिग्गज हैं और उन कुछ अभिनेताओं में से है, जो इस शैली के मालिक हैं. बिना गलती के कॉमिक टाइमिंग को बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मैंने बहुत कुछ सीखा." उन्होंने कहा, "मैं गोविंदा और संजय मिश्रा जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम रहा था और इसलिए मुझे न केवल उनके स्तर से मेल खाने के प्रयास में दोहरी मेहनत करनी पड़ी, बल्कि एक छाप भी छोड़नी पड़ी."
रायपुर. बिलासपुर लोकसभा सांसद को छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अरुण साव को भाजपा के नए अध्यक्ष बनने पर शुभकामनाएं. लेकिन जिस तरह से विश्व आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी समाज के नेता विष्णुदेव साय को उनके पद से हटाया गया, यह भाजपा के आदिवासी विरोधी रवैये को प्रदर्शित करता है. मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी समाज की है. राज्य के बड़े भू-भाग में आदिवासी संस्कृति पुष्पित पल्वित है. कम से कम आदिवासी दिवस के दिन ऐसा अप्रिय निर्णय नहीं लेना था. भाजपा के इस निर्णय से पूरे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई है. भाजपा का चरित्र मूलरूप से आदिवासी विरोधी है. 15 साल तक राज्य में जब भाजपा सत्ता में थी तब भी आदिवासियों की शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक उन्नति में बाधा उत्पन्न की जाती थी. विपक्ष में आने के बाद भी उनके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया. नंदकुमार साय के समय से अन्याय का जो दौर चला था वह विष्णुदेव तक पहुंच गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि चेहरा बदलने से हालात नहीं बदलने वाला है. छत्तीसगढ़ में भाजपा विश्वास के संकट के दौर से गुजर रही है. भाजपा 2018 के विधानसभा चुनाव की हार के बाद से लगातार जनता का भरोसा भाजपा चुनाव दर चुनाव खोते जा रही है. राज्य के भाजपा नेताओं ने जनता के साथ अपने कार्यकर्ताओं तथा केंद्रीय नेतृत्व का भी भरोसा खो दिया है. प्रदेश में भाजपा की बिगड़ती हालात से चिंतित भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश संगठन में भले ही बदलाव किया है लेकिन यह कवायद फिजूल साबित होने वाली है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व बदलने से उसकी जनविरोधी सोच नहीं बदलने वाली. छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 सालों के भाजपा के कुशासन को भोगा है. 15 साल बाद जनता को कांग्रेस की लोक कल्याणकारी सरकार मिली है जो किसान, मजदूर, युवा, आदिवासी, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, व्यापारी मजदूर सभी के हित के लिये योजना बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है. जनता भूपेश सरकार के काम से खुश है. जमीन वापसी, लघु वनोपज की खरीदी, तेंदूपत्ता का मानदेय बढ़ाने, बंद स्कूलों को खोलने, कनिष्ठ चयन बोर्ड के गठन और सरगुजा-बस्तर में आदिवासियों को केंद्रित कर बनाई योजनाओं से आदिवासी समाज की उन्नति हो रही है. गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, छत्तीसगढ़ की खुशहाली के साथ-साथ देश को भी नया रास्ता दिखा रही है. ऐसे में भाजपा कुछ भी कर ले कोई भी परिवर्तन कर ले जनता का खोया भरोसा अब वापस नहीं पा सकती.
रायपुर. बिलासपुर लोकसभा सांसद को छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अरुण साव को भाजपा के नए अध्यक्ष बनने पर शुभकामनाएं. लेकिन जिस तरह से विश्व आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी समाज के नेता विष्णुदेव साय को उनके पद से हटाया गया, यह भाजपा के आदिवासी विरोधी रवैये को प्रदर्शित करता है. मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बत्तीस प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी समाज की है. राज्य के बड़े भू-भाग में आदिवासी संस्कृति पुष्पित पल्वित है. कम से कम आदिवासी दिवस के दिन ऐसा अप्रिय निर्णय नहीं लेना था. भाजपा के इस निर्णय से पूरे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई है. भाजपा का चरित्र मूलरूप से आदिवासी विरोधी है. पंद्रह साल तक राज्य में जब भाजपा सत्ता में थी तब भी आदिवासियों की शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक उन्नति में बाधा उत्पन्न की जाती थी. विपक्ष में आने के बाद भी उनके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया. नंदकुमार साय के समय से अन्याय का जो दौर चला था वह विष्णुदेव तक पहुंच गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि चेहरा बदलने से हालात नहीं बदलने वाला है. छत्तीसगढ़ में भाजपा विश्वास के संकट के दौर से गुजर रही है. भाजपा दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव की हार के बाद से लगातार जनता का भरोसा भाजपा चुनाव दर चुनाव खोते जा रही है. राज्य के भाजपा नेताओं ने जनता के साथ अपने कार्यकर्ताओं तथा केंद्रीय नेतृत्व का भी भरोसा खो दिया है. प्रदेश में भाजपा की बिगड़ती हालात से चिंतित भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश संगठन में भले ही बदलाव किया है लेकिन यह कवायद फिजूल साबित होने वाली है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व बदलने से उसकी जनविरोधी सोच नहीं बदलने वाली. छत्तीसगढ़ की जनता ने पंद्रह सालों के भाजपा के कुशासन को भोगा है. पंद्रह साल बाद जनता को कांग्रेस की लोक कल्याणकारी सरकार मिली है जो किसान, मजदूर, युवा, आदिवासी, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, व्यापारी मजदूर सभी के हित के लिये योजना बनाकर उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है. जनता भूपेश सरकार के काम से खुश है. जमीन वापसी, लघु वनोपज की खरीदी, तेंदूपत्ता का मानदेय बढ़ाने, बंद स्कूलों को खोलने, कनिष्ठ चयन बोर्ड के गठन और सरगुजा-बस्तर में आदिवासियों को केंद्रित कर बनाई योजनाओं से आदिवासी समाज की उन्नति हो रही है. गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, छत्तीसगढ़ की खुशहाली के साथ-साथ देश को भी नया रास्ता दिखा रही है. ऐसे में भाजपा कुछ भी कर ले कोई भी परिवर्तन कर ले जनता का खोया भरोसा अब वापस नहीं पा सकती.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मॉनसून ने देश के कई राज्यों में ने दस्तक दे दी है और लोगों को गर्मी से राहत मिलना शुरू हो गई है. मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज (मंगलवार) को राष्ट्रीय राजधानी में 'येलो' अलर्ट और बुधवार के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है. वहीं आज मुंबई और आसपास के इलाको में बारिश लगातार जारी है. हाई टाइड दोपहर 4 बजकर 10 मिनट पर है. इसके साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल सहित कई राज्यों में बारिश होने की संभावना है. रिपोर्ट के अनुसार,अगले पांच दिन के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद महाराष्ट्र के कोंकण में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की दो टीमों को तैनात किया गया है. वहीं मुंबई में बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी जमा होना शुरू हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि एनडीआरएफ की एक टीम को रत्नागिरी जिले के चिपलून में जबकि दूसरी टीम को रायगढ़ जिले के महाड में तैनात किया गया है. मौसम विभाग ने चार जुलाई से आठ जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी करते हुए, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किये हैं. मुंबई और ठाणे जिलों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी करते हुए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. इसने अगले दो दिनों के लिए पालघर जिले के लिए येलो अलर्ट और उसके बाद तीन दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है. महाराष्ट्र में एनडीआरएफ की आठ टीमें तैनात की गयी है, इनमें से एक-एक टीम नागपुर, चिपलून और महाड में तैनात है, जबकि बाकी पांच टीमें मुंबई में हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
मॉनसून ने देश के कई राज्यों में ने दस्तक दे दी है और लोगों को गर्मी से राहत मिलना शुरू हो गई है. मौसम विज्ञान विभाग ने आज को राष्ट्रीय राजधानी में 'येलो' अलर्ट और बुधवार के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है. वहीं आज मुंबई और आसपास के इलाको में बारिश लगातार जारी है. हाई टाइड दोपहर चार बजकर दस मिनट पर है. इसके साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल सहित कई राज्यों में बारिश होने की संभावना है. रिपोर्ट के अनुसार,अगले पांच दिन के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद महाराष्ट्र के कोंकण में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की दो टीमों को तैनात किया गया है. वहीं मुंबई में बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी जमा होना शुरू हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि एनडीआरएफ की एक टीम को रत्नागिरी जिले के चिपलून में जबकि दूसरी टीम को रायगढ़ जिले के महाड में तैनात किया गया है. मौसम विभाग ने चार जुलाई से आठ जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी करते हुए, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किये हैं. मुंबई और ठाणे जिलों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी करते हुए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. इसने अगले दो दिनों के लिए पालघर जिले के लिए येलो अलर्ट और उसके बाद तीन दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है. महाराष्ट्र में एनडीआरएफ की आठ टीमें तैनात की गयी है, इनमें से एक-एक टीम नागपुर, चिपलून और महाड में तैनात है, जबकि बाकी पांच टीमें मुंबई में हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
Samsung Galaxy Not 10 स्मार्टफोन को लेकर अब तक कई लीक और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है। स्मार्टफोन में आपको फ्रेस डिजाइन देखने को मिल सकता है। साउथ कोरियन कंपनी सैमसंग ने अपने आने वाले फ्लैगशिप स्मार्टफोन के लॉन्चिंग की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। Samsung ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इस बात की जानकारी दी है कि Samsung Galaxy Not 10 स्मार्टफोन 7 अगस्त को लॉन्च किया जाएगा। कंपनी का यह इवेंट 7 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। कंपनी ने इनवाइट में सिर्फ फोन का सिंगल कैमरा लेंस और S-Pen को दिखाया है। गौर करें तो कंपनी हर बार गैलेक्सी नोट सीरीज में एस-पेन स्टाइलस को टीजर के तौर पर प्रमुखता देती है और इस बार भी ऐसा देखने को मिला है। इस स्मार्टफोन को लेकर अब तक कई लीक और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है। स्मार्टफोन में आपको फ्रेस डिजाइन देखने को मिल सकता है। सैमसंग इस बार दो साइज में Galaxy Note 10 लॉन्च कर सकती है। जिसमें एक स्टैंडर्ड वेरिएंट होगा जबकि दूसरा प्रीमियम वाला वेरिएंट हो सकता है। गैलेक्सी नोट 10 सीरीज में कंपनी एक 5जी वेरिएंट भी उतार सकती है। गौर करें तो सैमसंग (Samsung) ने साउथ कोरिया, यूके और कुछ दूसरे देशों में अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन गैलक्सी एस10 (Samsung Galaxy S10) का 5 जी वेरिएंट लॉन्च किया है। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी इस फोन का भी 5G वेरिएंट पेश कर सकती है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इस स्मार्टफोन से जुड़े कई फीचर की रिपोर्ट्स सामने आई हैं। सैमसंग इस फोन में एक पंच होल डिजाइन वाला डिस्प्ले दे सकती है, जिसमें सेल्फी कैमरा लगा होगा। ये होल डिस्प्ले के सेंटर में हो सकता है, जो अभी तक सैमसंग के फोन में देखने को नहीं मिला है। Samsung Galaxy S10 में 6. 3 इंच का क्वॉड एचडी प्लस डायनैमिक एमोलेड डिस्प्ले मिल सकता है। इसके साथ ही कंपनी किसी एक वेरिएंट में 6. 7 इंच का भी डिस्प्ले दे सकती है। सैमसंग इस फोन के फ्रंट में सिंगल कैमरा देगी, जबकि रियर में कंपनी तीन कैमरे का सेटअप दे सकती है। इस फोन के साथ आपको एस पेन का सपोर्ट भी मिलेगा। ये स्मार्टफोन 12 जीबी तक की रैम और 1 टीबी तक की स्टोरेज के साथ कई वेरिएंट में लॉन्च हो सकता है। इसके साथ ही कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सैमसंग नोट 10 में आपको 3. 5 एमएम का जैक नहीं मिलेगा। सैमसंग ने एस10 सीरीज में ऑडियो जैक दिया था, लेकिन एप्पल, वनप्लस और गूगल पिक्सल की तरह सैमसंग गैलेक्सी नोट 10 में आपको 3. 5 एमएम का जैक नहीं मिलेगा।
Samsung Galaxy Not दस स्मार्टफोन को लेकर अब तक कई लीक और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है। स्मार्टफोन में आपको फ्रेस डिजाइन देखने को मिल सकता है। साउथ कोरियन कंपनी सैमसंग ने अपने आने वाले फ्लैगशिप स्मार्टफोन के लॉन्चिंग की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। Samsung ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इस बात की जानकारी दी है कि Samsung Galaxy Not दस स्मार्टफोन सात अगस्त को लॉन्च किया जाएगा। कंपनी का यह इवेंट सात अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। कंपनी ने इनवाइट में सिर्फ फोन का सिंगल कैमरा लेंस और S-Pen को दिखाया है। गौर करें तो कंपनी हर बार गैलेक्सी नोट सीरीज में एस-पेन स्टाइलस को टीजर के तौर पर प्रमुखता देती है और इस बार भी ऐसा देखने को मिला है। इस स्मार्टफोन को लेकर अब तक कई लीक और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है। स्मार्टफोन में आपको फ्रेस डिजाइन देखने को मिल सकता है। सैमसंग इस बार दो साइज में Galaxy Note दस लॉन्च कर सकती है। जिसमें एक स्टैंडर्ड वेरिएंट होगा जबकि दूसरा प्रीमियम वाला वेरिएंट हो सकता है। गैलेक्सी नोट दस सीरीज में कंपनी एक पाँचजी वेरिएंट भी उतार सकती है। गौर करें तो सैमसंग ने साउथ कोरिया, यूके और कुछ दूसरे देशों में अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन गैलक्सी एसदस का पाँच जी वेरिएंट लॉन्च किया है। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी इस फोन का भी पाँचG वेरिएंट पेश कर सकती है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इस स्मार्टफोन से जुड़े कई फीचर की रिपोर्ट्स सामने आई हैं। सैमसंग इस फोन में एक पंच होल डिजाइन वाला डिस्प्ले दे सकती है, जिसमें सेल्फी कैमरा लगा होगा। ये होल डिस्प्ले के सेंटर में हो सकता है, जो अभी तक सैमसंग के फोन में देखने को नहीं मिला है। Samsung Galaxy Sदस में छः. तीन इंच का क्वॉड एचडी प्लस डायनैमिक एमोलेड डिस्प्ले मिल सकता है। इसके साथ ही कंपनी किसी एक वेरिएंट में छः. सात इंच का भी डिस्प्ले दे सकती है। सैमसंग इस फोन के फ्रंट में सिंगल कैमरा देगी, जबकि रियर में कंपनी तीन कैमरे का सेटअप दे सकती है। इस फोन के साथ आपको एस पेन का सपोर्ट भी मिलेगा। ये स्मार्टफोन बारह जीबी तक की रैम और एक टीबी तक की स्टोरेज के साथ कई वेरिएंट में लॉन्च हो सकता है। इसके साथ ही कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सैमसंग नोट दस में आपको तीन. पाँच एमएम का जैक नहीं मिलेगा। सैमसंग ने एसदस सीरीज में ऑडियो जैक दिया था, लेकिन एप्पल, वनप्लस और गूगल पिक्सल की तरह सैमसंग गैलेक्सी नोट दस में आपको तीन. पाँच एमएम का जैक नहीं मिलेगा।
अंबाला - उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि सफाई व्यवस्था का कार्य धरातल पर नजर आना चाहिए तथा नगर परिषद के अंतर्गत सभी वार्डों में सफाई व्यवस्था दुरूस्त होनी चाहिए। लोग भी सफाई व्यवस्था के प्रति जागरूक हों, इसके लिए लोगों को प्रेरित भी करें। उपायुक्त आज लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह अम्बाला छावनी में स्वच्छता कमेटी की बैठक में सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे थे। इस मौके पर राजिंद्र विज भी उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बिन्दूवार नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किये जा रहे कार्यों बारे जानकारी हासिल की।
अंबाला - उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि सफाई व्यवस्था का कार्य धरातल पर नजर आना चाहिए तथा नगर परिषद के अंतर्गत सभी वार्डों में सफाई व्यवस्था दुरूस्त होनी चाहिए। लोग भी सफाई व्यवस्था के प्रति जागरूक हों, इसके लिए लोगों को प्रेरित भी करें। उपायुक्त आज लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह अम्बाला छावनी में स्वच्छता कमेटी की बैठक में सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे थे। इस मौके पर राजिंद्र विज भी उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बिन्दूवार नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर किये जा रहे कार्यों बारे जानकारी हासिल की।
बालना चाहिये उस से न्यून वा अधिक न बोले। बड़ों को मान्य दे उन के सामने उठ कर जाते उच्चासन पर बैठावे प्रथम नमस्ते" कर उनके सामने उस मासन पर न बैठे सभा में वैसे स्थान में बैठे जैसो अपनो योग्यता हो और दूसरा कोई न उठाने विरोध किसी मे न करे संपन्न होकर गुणों का ग्रहण और दाधी का लागर । सज्जनों का सङ्ग और दुष्टों का त्याग अपने माता पिता और आचार्थ को तन, मन और धनादि उत्तम २ पदार्थों से प्रौतिपूर्वक सेवा करे । यान्यम्माकथं सुरचितानि तानि त्वयोपास्यानि नो इतपरिण यह तेति इस का यह अभिप्राय है कि मातापिता आचार्य अपने सन्ताम और शिष्य को सदा सत्य उपदेश करें और यह भी कहें कि जो २ हमारे धर्मयुक्त कम हैं उनर का ग्रहण करा और जो २ दुष्टकर्म हो उनका त्याग करदिया करा जा २ सत्यजाने उमर का प्रकाश और प्रचार करे। किसी पाखंडी दुष्टाचारी मनुष्य पर विश्वास न करे और जिस २ उसम कर्म के लिये माता पिता और भाषाय्यं श्राज्ञा देवं उस २ का यथेष्ट पालन करो जैसे माता पिता में धर्म विद्या अच्छे प्राचारण के श्लोक "निघण्टु" "निकत" "अटाध्यायी' अथवा अन्य सत्र वा वेदमंत्र कण्ठस्थ कराये हो उन २ का पुनः अर्थ विद्यार्थियों को विदित करावे । जैसे प्रथम समुल्लास में परमेश्वर का व्याख्यान किया है उसी प्रकार मान के उस को उपासना करें जिस प्रकार आरोग्य विद्या और बल प्राप्त हो उसी प्रकार भोजन छाइन और व्यवहार करे करावे अर्थात् जितनो क्षुधः हो उस से कुछ न्यून भोजन करे मद्य मांसादि के सेवन से अलग रहें ज्ञात गमोर जल में प्रवेश न करें क्योंकि जस्ल अन्तु वा किमी पदार्थ मे दुःख और जो सग्नान आने तो ब आ सकता है "नाविज्ञा से जलागये" यह नमु का वचन अविज्ञात जनाभर में प्रविष्ट हो के स्नानादि न करें। # दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वम्वपूतं जलं पिबेत् । सत्यपूतां वदेह।चं मनःपूर्त समाचरेत् ॥ मनु० ॥ अर्थ-नोचे दृष्टिकर ऊंचे नोचे स्थान को देख के चले ससे छान के जस्त पिये सत्य से पवित्र करके वचन बोले मन से विचार के आचरण करें । माता शत्रुः पिता बैरी येन बालो न पाठितः । नशोभते सभामध्ये हंस मध्ये बको यथा ॥ ॥ तल्लामः ॥ यह किमो कवि का वचन है वे माता और पिता अपने सत्तानों के पण वैरो हैं जिन्होंने उन की विद्या की प्राप्ति न कराई वे विद्वानों की सभा में वैसे तिर स्कृत और कुशोभित होते हैं जैसे हंसे के बीच में बगुला । यही माता, पिता का कर्तव्य कर्म परम धर्म और कोति का काम है जो अपने सन्तानों को तन, मन, धन विद्या धर्म सभ्यता और उत्तमशिक्षायुक्त करना । यह बालशिक्षा में थोडासा लिखा इतने हो से बुद्धिमान् लॉग बहुत समझ लेंगे " इति श्रीमद्दयानन्द सरस्वतौ स्वामिलते सत्यार्थ प्रकाशे सुभाषाविभूषित बालशिक्षाविषये द्वितीयः समुल्लासः सम्पूर्णः ॥ २ ॥
बालना चाहिये उस से न्यून वा अधिक न बोले। बड़ों को मान्य दे उन के सामने उठ कर जाते उच्चासन पर बैठावे प्रथम नमस्ते" कर उनके सामने उस मासन पर न बैठे सभा में वैसे स्थान में बैठे जैसो अपनो योग्यता हो और दूसरा कोई न उठाने विरोध किसी मे न करे संपन्न होकर गुणों का ग्रहण और दाधी का लागर । सज्जनों का सङ्ग और दुष्टों का त्याग अपने माता पिता और आचार्थ को तन, मन और धनादि उत्तम दो पदार्थों से प्रौतिपूर्वक सेवा करे । यान्यम्माकथं सुरचितानि तानि त्वयोपास्यानि नो इतपरिण यह तेति इस का यह अभिप्राय है कि मातापिता आचार्य अपने सन्ताम और शिष्य को सदा सत्य उपदेश करें और यह भी कहें कि जो दो हमारे धर्मयुक्त कम हैं उनर का ग्रहण करा और जो दो दुष्टकर्म हो उनका त्याग करदिया करा जा दो सत्यजाने उमर का प्रकाश और प्रचार करे। किसी पाखंडी दुष्टाचारी मनुष्य पर विश्वास न करे और जिस दो उसम कर्म के लिये माता पिता और भाषाय्यं श्राज्ञा देवं उस दो का यथेष्ट पालन करो जैसे माता पिता में धर्म विद्या अच्छे प्राचारण के श्लोक "निघण्टु" "निकत" "अटाध्यायी' अथवा अन्य सत्र वा वेदमंत्र कण्ठस्थ कराये हो उन दो का पुनः अर्थ विद्यार्थियों को विदित करावे । जैसे प्रथम समुल्लास में परमेश्वर का व्याख्यान किया है उसी प्रकार मान के उस को उपासना करें जिस प्रकार आरोग्य विद्या और बल प्राप्त हो उसी प्रकार भोजन छाइन और व्यवहार करे करावे अर्थात् जितनो क्षुधः हो उस से कुछ न्यून भोजन करे मद्य मांसादि के सेवन से अलग रहें ज्ञात गमोर जल में प्रवेश न करें क्योंकि जस्ल अन्तु वा किमी पदार्थ मे दुःख और जो सग्नान आने तो ब आ सकता है "नाविज्ञा से जलागये" यह नमु का वचन अविज्ञात जनाभर में प्रविष्ट हो के स्नानादि न करें। # दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वम्वपूतं जलं पिबेत् । सत्यपूतां वदेह।चं मनःपूर्त समाचरेत् ॥ मनुशून्य ॥ अर्थ-नोचे दृष्टिकर ऊंचे नोचे स्थान को देख के चले ससे छान के जस्त पिये सत्य से पवित्र करके वचन बोले मन से विचार के आचरण करें । माता शत्रुः पिता बैरी येन बालो न पाठितः । नशोभते सभामध्ये हंस मध्ये बको यथा ॥ ॥ तल्लामः ॥ यह किमो कवि का वचन है वे माता और पिता अपने सत्तानों के पण वैरो हैं जिन्होंने उन की विद्या की प्राप्ति न कराई वे विद्वानों की सभा में वैसे तिर स्कृत और कुशोभित होते हैं जैसे हंसे के बीच में बगुला । यही माता, पिता का कर्तव्य कर्म परम धर्म और कोति का काम है जो अपने सन्तानों को तन, मन, धन विद्या धर्म सभ्यता और उत्तमशिक्षायुक्त करना । यह बालशिक्षा में थोडासा लिखा इतने हो से बुद्धिमान् लॉग बहुत समझ लेंगे " इति श्रीमद्दयानन्द सरस्वतौ स्वामिलते सत्यार्थ प्रकाशे सुभाषाविभूषित बालशिक्षाविषये द्वितीयः समुल्लासः सम्पूर्णः ॥ दो ॥
नई दिल्ली। भारत और अस्ट्रेलिया ने आपस में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए शनिवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। दोनों पक्षों ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी, एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए किए जा रहे प्रयासों को बल मिलेगा तथा भारत-आस्ट्रेलिया व्यापार पांच साल में करीब दो गुना हो सकता है। इस समझौते से कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, तिलहन, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, आईटी सेवा जैसे उद्योगों के लिए आस्ट्रेलिया को निर्यात बढ़ाना आसान होगा। क्षेत्र में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री डैन टेहान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की मौजूदगी में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (इंडऑस एकता) पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम वीडियो कांफ्रेंसिग सुविधा के तहत आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पूर्व ही श्री मोदी और श्री मॉरिसन भारत-आस्ट्रेलिया ऑनलाइन शिखर बैठक में मिले थे। उसके कुछ ही दिन बात इस अंतरिम करार पर हस्ताक्षरण किए गए हैं। इस समझौते में दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने और थोक वस्तुओं के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच सुनिश्चित करने के साथ साथ दोनों पक्षों ने एक दूसरे की अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया है। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार पांच वर्ष में बढ़कर 45 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर पहुंचने की उम्मीद है, जो इस समय 27 अरब डॉलर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों देश बहुत कम समय में इस समझौते पर पहुंचे हैं, जो दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास का सबूत है। उन्होंने कहा कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भरोसेमंद बनाने और भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में सहायक होगा। उन्होंने दोनों मंत्रियों और वार्ता में शामिल दोनों देशों के अधिकारियों की टीम को बधाई दी और कहा कि वह (श्री मोदी) इससे बहुत खुश हैं। श्री मोदी ने कहा कि एक महीने से भी कम समय में आज मैं अपने मित्र स्कॉट के साथ तीसरी बार रू-ब-रू हूं। पिछले हफ्ते हमारे बीच आभासी शिखर बैठक में बहुत लाभदायक चर्चा हुई थी। उस समय हमने अपनी टीमों को इस समझौते की बातचीत शीघ्र सम्पन्न करने का निर्देश दिया था। और मुझे बहुत ख़ुशी है कि आज इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। इस असाधारण उपलब्धि के लिए, मैं दोनों देशों के व्यापार मंत्रियों और उनके अधिकारियों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूं। श्री मोदी ने कहा कि इतने कम समय में ऐसे महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनना, यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच कितना आपसी विश्वास है। यह हमारे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक अवसर है। हमारी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा करने की बहुत संभावना है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस समझौते से हम इन अवसरों का पूरा लाभ उठा पाएंगे। इस समझौते के आधार पर हम साथ मिल कर आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाने, और एशिया प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में भी योगदान कर पाएंंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच विद्यार्थियों, पेशेवरों, और पर्यटकों का आदान-प्रदान आसान बनाएगा, जिससे संबंध और मजबूत होंगे। श्री मोदी ने इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम को कल खेले जाने वाले विश्व कप फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि यह समझौत (इंडऑस एकता) दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगाढ़ हो रहे संबंधों में एक और ऐतिहासिक आयाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कोयला, तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी), दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति के माध्यम से भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में सहयोग बढ़ा सकेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग में स्थिरता क्वाड समूह के नेताओं के बीच बातचीत का एक मुख्य विषय रहता है। श्री मॉरिसन ने कहा कि इस समझौते से शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विस्तार होगा और यह अवसरों का एक विशाल द्वारा खेलने वाला समझौता है।
नई दिल्ली। भारत और अस्ट्रेलिया ने आपस में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए शनिवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। दोनों पक्षों ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी, एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए किए जा रहे प्रयासों को बल मिलेगा तथा भारत-आस्ट्रेलिया व्यापार पांच साल में करीब दो गुना हो सकता है। इस समझौते से कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, तिलहन, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, आईटी सेवा जैसे उद्योगों के लिए आस्ट्रेलिया को निर्यात बढ़ाना आसान होगा। क्षेत्र में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री डैन टेहान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की मौजूदगी में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम वीडियो कांफ्रेंसिग सुविधा के तहत आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पूर्व ही श्री मोदी और श्री मॉरिसन भारत-आस्ट्रेलिया ऑनलाइन शिखर बैठक में मिले थे। उसके कुछ ही दिन बात इस अंतरिम करार पर हस्ताक्षरण किए गए हैं। इस समझौते में दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने और थोक वस्तुओं के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच सुनिश्चित करने के साथ साथ दोनों पक्षों ने एक दूसरे की अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया है। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार पांच वर्ष में बढ़कर पैंतालीस से पचास अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर पहुंचने की उम्मीद है, जो इस समय सत्ताईस अरब डॉलर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों देश बहुत कम समय में इस समझौते पर पहुंचे हैं, जो दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास का सबूत है। उन्होंने कहा कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भरोसेमंद बनाने और भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में सहायक होगा। उन्होंने दोनों मंत्रियों और वार्ता में शामिल दोनों देशों के अधिकारियों की टीम को बधाई दी और कहा कि वह इससे बहुत खुश हैं। श्री मोदी ने कहा कि एक महीने से भी कम समय में आज मैं अपने मित्र स्कॉट के साथ तीसरी बार रू-ब-रू हूं। पिछले हफ्ते हमारे बीच आभासी शिखर बैठक में बहुत लाभदायक चर्चा हुई थी। उस समय हमने अपनी टीमों को इस समझौते की बातचीत शीघ्र सम्पन्न करने का निर्देश दिया था। और मुझे बहुत ख़ुशी है कि आज इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। इस असाधारण उपलब्धि के लिए, मैं दोनों देशों के व्यापार मंत्रियों और उनके अधिकारियों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूं। श्री मोदी ने कहा कि इतने कम समय में ऐसे महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनना, यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच कितना आपसी विश्वास है। यह हमारे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक अवसर है। हमारी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा करने की बहुत संभावना है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस समझौते से हम इन अवसरों का पूरा लाभ उठा पाएंगे। इस समझौते के आधार पर हम साथ मिल कर आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाने, और एशिया प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में भी योगदान कर पाएंंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच विद्यार्थियों, पेशेवरों, और पर्यटकों का आदान-प्रदान आसान बनाएगा, जिससे संबंध और मजबूत होंगे। श्री मोदी ने इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम को कल खेले जाने वाले विश्व कप फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि यह समझौत दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगाढ़ हो रहे संबंधों में एक और ऐतिहासिक आयाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कोयला, तरल प्राकृतिक गैस , दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति के माध्यम से भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में सहयोग बढ़ा सकेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग में स्थिरता क्वाड समूह के नेताओं के बीच बातचीत का एक मुख्य विषय रहता है। श्री मॉरिसन ने कहा कि इस समझौते से शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विस्तार होगा और यह अवसरों का एक विशाल द्वारा खेलने वाला समझौता है।
दिवाली पर अगर आप एक नई कार खरीदना चाहते हैं, तो यहां हम आपके लिए पांच बेहतरीन कार लेकर आए हैं. ये पांचों कार ना केवल स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स में दमदार हैं, बल्कि कीमत के लिहाज से भी वाजिब हैं. आइए इन पांच कारों पर नजर डालते हैं. भारत में त्योहारी सीजन का खुमार चढ़ा हुआ है. बाजार में अलग ही रौनक है और लोग खरीदारी के लिए बेचैन हैं. दिवाली के मौके पर हर कोई अपने परिवार की खुशी के लिए कुछ ना कुछ नया खरीदने की सोचता है. अगर आप भी इस दिवाली नई कार लेने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपके लिए कुछ खास ऑप्शंस लाए हैं. बाजार में बेहतरीन स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स के साथ ऐसी कई SUV कार हैं, जिनकी कीमत बिल्कुल वाजिब है. अगर आपका बजट 10-12 लाख रुपये है, तो ये कार आपकी मेहनत की कमाई का एक-एक पैसा वसूलेंगी. - Maruti Suzuki Grand Vitara: भारतीय बाजार में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा ने ताजा एंट्री ली है. इसके Sigma वेरिएंट में आपको कई खास फीचर्स देखने को मिलेंगे. बाजार में इसकी एक्स-शोरूम कीमत 10.45 लाख रुपये से शुरू है. माइल्ड-हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ ये एसयूवी बढ़िया माइलेज भी देगी. इसमें LED DRLs के साथ हैलोजन प्रोजेक्टर हेडलाइट्स, सभी सीटों के लिए थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट, रियर स्पॉइलर, 17 इंच स्टील व्हील, 4.2-इंच TFT डिस्प्ले, कीलेस एंट्री एंड गो जैसे शानदार फीचर्स मिलते हैं. - Toyota Urban Cruiser Hyryder: टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर का माइल्ड-हाइब्रिड बेस वेरिएंट E की एक्स-शोरूम कीमत 10.48 लाख रुपये है. यह कार काफी हद तक मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा की तरह है. इसमें भी LED DRLs के साथ प्रोजेक्टर हेडलैंप, LED टेल लैंप, 17 इंच के स्टील व्हील, ब्लैक इंटीरियर थीम, 4.2 इंच का TFT MID, डुअल फ्रंट एयरबैग, EBD के साथ ABS, व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल (VSC), हिल-होल्ड कंट्रोल और रियर पार्किंग सेंसर जैसे धांसू फीचर्स दिए गए हैं. - Kia Carens: किआ केरेंस इस साल की शुरुआत में ही लॉन्च हुई है और काफी तेजी से भारतीय ग्राहकों के बीच पॉपुलर हो गई. यह भी एक एंट्री-लेवल पैसा वसूल कार है, जिसके प्रीमियम वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 9.59 लाख रुपये से शुरू होती है. इसमें छह एयरबैग, ESP, हिल-स्टार्ट असिस्ट, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और रियर पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके अलावा रूफ-माउंटेड रियर एसी वेंट्स, पावर विंडो, पांच यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट, लेदर सीट फीचर्स भी मौजदू हैं. - Mahindra Scorpio: बुकिंग के रिकॉर्ड तोड़ने वाली महिंद्रा स्कॉर्पियो N को 5 ट्रिम ऑप्शंस के साथ पेश किया गया है. इसके बेस वेरिएंट Z2 की एक्स-शोरूम कीमत 11.99 लाख रुपये से शुरू होती है. इसमें 2.2L mHawk इंजन की पावर के साथ स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल, दूसरी रो में एसी वेंट्स, इलेक्ट्रिक पावर स्टीयरिंग और हाइड्रॉलिक मैकेनिज्म के अलावा LED टेल लाइट जैसी बेहतरीन फीचर्स पेश किए गए हैं. - Hyundai Creta: मिड-साइज SUV सेगमेंट में हुंडई क्रेटा भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार में से एक है. अपने आकर्षक फीचर्स और वाजिब दाम के साथ यह कार बड़े पैमाने पर ग्राहकों को अपनी ओर खींचती है. इसके EX वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 11.38 लाख रुपये से शुरू है. इसमें 8 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 4 स्पीकर ऑडियो, वायरलेस एप्पल कारप्ले, एंड्रायड ऑटो कनेक्टिविटी, LED लैंप और डे/नाइट IRVM जैसे लेटेस्ट फीचर्स मिलते हैं.
दिवाली पर अगर आप एक नई कार खरीदना चाहते हैं, तो यहां हम आपके लिए पांच बेहतरीन कार लेकर आए हैं. ये पांचों कार ना केवल स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स में दमदार हैं, बल्कि कीमत के लिहाज से भी वाजिब हैं. आइए इन पांच कारों पर नजर डालते हैं. भारत में त्योहारी सीजन का खुमार चढ़ा हुआ है. बाजार में अलग ही रौनक है और लोग खरीदारी के लिए बेचैन हैं. दिवाली के मौके पर हर कोई अपने परिवार की खुशी के लिए कुछ ना कुछ नया खरीदने की सोचता है. अगर आप भी इस दिवाली नई कार लेने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपके लिए कुछ खास ऑप्शंस लाए हैं. बाजार में बेहतरीन स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स के साथ ऐसी कई SUV कार हैं, जिनकी कीमत बिल्कुल वाजिब है. अगर आपका बजट दस-बारह लाख रुपये है, तो ये कार आपकी मेहनत की कमाई का एक-एक पैसा वसूलेंगी. - Maruti Suzuki Grand Vitara: भारतीय बाजार में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा ने ताजा एंट्री ली है. इसके Sigma वेरिएंट में आपको कई खास फीचर्स देखने को मिलेंगे. बाजार में इसकी एक्स-शोरूम कीमत दस.पैंतालीस लाख रुपये से शुरू है. माइल्ड-हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ ये एसयूवी बढ़िया माइलेज भी देगी. इसमें LED DRLs के साथ हैलोजन प्रोजेक्टर हेडलाइट्स, सभी सीटों के लिए थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट, रियर स्पॉइलर, सत्रह इंच स्टील व्हील, चार.दो-इंच TFT डिस्प्ले, कीलेस एंट्री एंड गो जैसे शानदार फीचर्स मिलते हैं. - Toyota Urban Cruiser Hyryder: टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर का माइल्ड-हाइब्रिड बेस वेरिएंट E की एक्स-शोरूम कीमत दस.अड़तालीस लाख रुपये है. यह कार काफी हद तक मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा की तरह है. इसमें भी LED DRLs के साथ प्रोजेक्टर हेडलैंप, LED टेल लैंप, सत्रह इंच के स्टील व्हील, ब्लैक इंटीरियर थीम, चार.दो इंच का TFT MID, डुअल फ्रंट एयरबैग, EBD के साथ ABS, व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल , हिल-होल्ड कंट्रोल और रियर पार्किंग सेंसर जैसे धांसू फीचर्स दिए गए हैं. - Kia Carens: किआ केरेंस इस साल की शुरुआत में ही लॉन्च हुई है और काफी तेजी से भारतीय ग्राहकों के बीच पॉपुलर हो गई. यह भी एक एंट्री-लेवल पैसा वसूल कार है, जिसके प्रीमियम वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत नौ.उनसठ लाख रुपये से शुरू होती है. इसमें छह एयरबैग, ESP, हिल-स्टार्ट असिस्ट, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और रियर पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके अलावा रूफ-माउंटेड रियर एसी वेंट्स, पावर विंडो, पांच यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट, लेदर सीट फीचर्स भी मौजदू हैं. - Mahindra Scorpio: बुकिंग के रिकॉर्ड तोड़ने वाली महिंद्रा स्कॉर्पियो N को पाँच ट्रिम ऑप्शंस के साथ पेश किया गया है. इसके बेस वेरिएंट Zदो की एक्स-शोरूम कीमत ग्यारह.निन्यानवे लाख रुपये से शुरू होती है. इसमें दो.दोL mHawk इंजन की पावर के साथ स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल, दूसरी रो में एसी वेंट्स, इलेक्ट्रिक पावर स्टीयरिंग और हाइड्रॉलिक मैकेनिज्म के अलावा LED टेल लाइट जैसी बेहतरीन फीचर्स पेश किए गए हैं. - Hyundai Creta: मिड-साइज SUV सेगमेंट में हुंडई क्रेटा भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार में से एक है. अपने आकर्षक फीचर्स और वाजिब दाम के साथ यह कार बड़े पैमाने पर ग्राहकों को अपनी ओर खींचती है. इसके EX वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत ग्यारह.अड़तीस लाख रुपये से शुरू है. इसमें आठ इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, चार स्पीकर ऑडियो, वायरलेस एप्पल कारप्ले, एंड्रायड ऑटो कनेक्टिविटी, LED लैंप और डे/नाइट IRVM जैसे लेटेस्ट फीचर्स मिलते हैं.
जब आप इंटीमेट एरिया को साफ और मुलायम रखना चाहती हैं तो बिकिनी वैक्सिंग सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें गर्म या ठंडे वैक्स का इस्तेमाल कर प्यूबिक हेयर को हटाया जाता है। प्यूबिक हेयर को रेजर से हटाया जाता है। लेकिन बिकनी वैक्स से वहां लंबे समय बाद बाल उग आते हैं। इसी तरह अगर आप भी बिकिनी वैक्सिंग के बाद ये गलतियां कर रही हैं तो पहले इसे पढ़ लें। (बिकिनी वैक्सिंग की गलतियाँ) वैक्सिंग से 48 घंटे पहले अपनी त्वचा को धूप में न रखें। वैक्सिंग के बाद त्वचा कमजोर हो जाती है। इस वजह से बिकिनी वैक्सिंग के तुरंत बाद बिकिनी पहनने से बचें। अगर यूवी किरणें त्वचा पर पड़ती हैं तो इससे नुकसान हो सकता है। इससे हाइपरपिग्मेंटेशन हो सकता है। बिकनी वैक्सिंग के बाद स्विमिंग से दूर रहना ही बेहतर है। स्विमिंग पूल में बैक्टीरिया हो सकते हैं। इससे स्किन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। कम से कम 4-5 दिनों तक स्विमिंग पूल में न जाएं। वैक्सिंग के बाद खजूर की त्वचा भी गायब हो जाती है। इस वजह से किसी भी तरह का अतिरिक्त स्क्रबिंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। आप इसे कुछ दिनों के बाद एक सौम्य स्क्रब या एक्सफ़ोलीएटिंग सीरम से हटा सकते हैं। लेकिन वैक्सिंग के ठीक बाद इसे करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। सौना बाथ एक आरामदायक तरीका है और भाप त्वचा के रोमछिद्रों को खोलती है। इससे बाल झड़ने में मदद मिलती है। लेकिन बैक्टीरिया गर्म, नम जगहों पर पनपते हैं। इसलिए बिकिनी वैक्स के बाद गर्म पानी या हॉट योगा से दूर रहें। वैक्सिंग के बाद कुछ दिनों तक सुगंधित या रंगीन लोशन, साबुन या अन्य सौंदर्य उत्पादों का उपयोग न करें। ऐसे में साधारण बॉडी वॉश या क्रीम का इस्तेमाल करें।
जब आप इंटीमेट एरिया को साफ और मुलायम रखना चाहती हैं तो बिकिनी वैक्सिंग सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें गर्म या ठंडे वैक्स का इस्तेमाल कर प्यूबिक हेयर को हटाया जाता है। प्यूबिक हेयर को रेजर से हटाया जाता है। लेकिन बिकनी वैक्स से वहां लंबे समय बाद बाल उग आते हैं। इसी तरह अगर आप भी बिकिनी वैक्सिंग के बाद ये गलतियां कर रही हैं तो पहले इसे पढ़ लें। वैक्सिंग से अड़तालीस घंटाटे पहले अपनी त्वचा को धूप में न रखें। वैक्सिंग के बाद त्वचा कमजोर हो जाती है। इस वजह से बिकिनी वैक्सिंग के तुरंत बाद बिकिनी पहनने से बचें। अगर यूवी किरणें त्वचा पर पड़ती हैं तो इससे नुकसान हो सकता है। इससे हाइपरपिग्मेंटेशन हो सकता है। बिकनी वैक्सिंग के बाद स्विमिंग से दूर रहना ही बेहतर है। स्विमिंग पूल में बैक्टीरिया हो सकते हैं। इससे स्किन इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। कम से कम चार-पाँच दिनों तक स्विमिंग पूल में न जाएं। वैक्सिंग के बाद खजूर की त्वचा भी गायब हो जाती है। इस वजह से किसी भी तरह का अतिरिक्त स्क्रबिंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। आप इसे कुछ दिनों के बाद एक सौम्य स्क्रब या एक्सफ़ोलीएटिंग सीरम से हटा सकते हैं। लेकिन वैक्सिंग के ठीक बाद इसे करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। सौना बाथ एक आरामदायक तरीका है और भाप त्वचा के रोमछिद्रों को खोलती है। इससे बाल झड़ने में मदद मिलती है। लेकिन बैक्टीरिया गर्म, नम जगहों पर पनपते हैं। इसलिए बिकिनी वैक्स के बाद गर्म पानी या हॉट योगा से दूर रहें। वैक्सिंग के बाद कुछ दिनों तक सुगंधित या रंगीन लोशन, साबुन या अन्य सौंदर्य उत्पादों का उपयोग न करें। ऐसे में साधारण बॉडी वॉश या क्रीम का इस्तेमाल करें।
देश में पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 47,704 कोरोना संक्रमित मिले हैं और इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या 14,83,157 हो गई। इसमें 4,96,988 मामले सक्रिय हैं। इस दौरान 654 लोगों की मौत हो गई और मृतकों की संख्या बढ़कर 33,425 हो गई है। अब तक 9,52,744 मरीज कोरोना को हरा चुके हैं। अगर टेस्टिंग की बात करें तो 26 जुलाई को कुल 5,15,000 सैंपक की टेस्टिंग गई और 27 जुलाई को 5,28,000 की टेस्टिंग की गई। इधर, खाड़ी देशों से वंदे भारत मिशन के तहत लाए जा रहे लोगों में से कुछ लोग देश मे आते ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे यात्रा के दौरान सावधानी व जांच के इंतजाम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, सह यात्रियों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। रियाद से 14 तारीख को देश आए एक व्यक्ति ने यहां आते ही खुद टेस्ट कराया तो वह कोरोना पॉजिटिव निकला। संबंधित व्यक्ति मोनू कुमार सऊदी अरब के अल कासिम प्रांत में रह रहा था। वह 14 तारीख को रियाद की फ्लाइट से वाया दिल्ली लखनऊ पहुंचा था। वहां से वह अपने घर संत कबीर नगर चला गया। गौरतलब है कि आने वाले दिनों में बेंगलुरु और पुणे समेत कई शहरों के अधिकारी अलग-अलग अवधियों के लिए लॉकडाउन पुनः लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। उधर राजधानी दिल्ली में स्थिति में कुछ सुधार दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सप्ताहांतों में शनिवार, रविवार को पूरे राज्य में कड़ी पाबंदियां लागू करने का फैसला किया है। इससे पहले कर्नाटक और तमिलनाडु ने रविवार का लॉकडाउन लगा रखा है।
देश में पिछले चौबीस घंटाटे में रिकॉर्ड सैंतालीस,सात सौ चार कोरोना संक्रमित मिले हैं और इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या चौदह,तिरासी,एक सौ सत्तावन हो गई। इसमें चार,छियानवे,नौ सौ अठासी मामले सक्रिय हैं। इस दौरान छः सौ चौवन लोगों की मौत हो गई और मृतकों की संख्या बढ़कर तैंतीस,चार सौ पच्चीस हो गई है। अब तक नौ,बावन,सात सौ चौंतालीस मरीज कोरोना को हरा चुके हैं। अगर टेस्टिंग की बात करें तो छब्बीस जुलाई को कुल पाँच,पंद्रह,शून्य सैंपक की टेस्टिंग गई और सत्ताईस जुलाई को पाँच,अट्ठाईस,शून्य की टेस्टिंग की गई। इधर, खाड़ी देशों से वंदे भारत मिशन के तहत लाए जा रहे लोगों में से कुछ लोग देश मे आते ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे यात्रा के दौरान सावधानी व जांच के इंतजाम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, सह यात्रियों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। रियाद से चौदह तारीख को देश आए एक व्यक्ति ने यहां आते ही खुद टेस्ट कराया तो वह कोरोना पॉजिटिव निकला। संबंधित व्यक्ति मोनू कुमार सऊदी अरब के अल कासिम प्रांत में रह रहा था। वह चौदह तारीख को रियाद की फ्लाइट से वाया दिल्ली लखनऊ पहुंचा था। वहां से वह अपने घर संत कबीर नगर चला गया। गौरतलब है कि आने वाले दिनों में बेंगलुरु और पुणे समेत कई शहरों के अधिकारी अलग-अलग अवधियों के लिए लॉकडाउन पुनः लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। उधर राजधानी दिल्ली में स्थिति में कुछ सुधार दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सप्ताहांतों में शनिवार, रविवार को पूरे राज्य में कड़ी पाबंदियां लागू करने का फैसला किया है। इससे पहले कर्नाटक और तमिलनाडु ने रविवार का लॉकडाउन लगा रखा है।
पूरा बॉलीवुड इन दिनों सिर्फ और सिर्फ शादी के जश्न में डूबा है। प्रियंका सोनम, दीपिका के बाद 12 दिसंबर को अब ईशा अंबानी और आनंद पीरामल ने भी शादी कर ली। शादी का माहौल कुछ ऐसा था जैसे लग रहा था कि कई अवॉर्ड फंक्शन हैं और पूरा बॉलीवुड उमड़ा पड़ा है। सभी एक से बढ़कर लग रहे थे। हालांकि इससे पहले असल धमाल तो ईशा अंबानी की प्री वेडिंग सेरेमनी में हुआ था। इस सेरेमनी में कुछ ऐसे सितारे भी एक दूसरे के साथ नाचते नजर आए जो जल्दी एक दूसरे से नजरे भी नहीं मिलाते थे। इन फंक्शन ने कई लोगों के बीच दुरियां खत्म कर दी। यहां बात कर रहे हैं पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय बच्चन की जो अपने पति के साथ डांस फ्लोर पर जमकर थिरक रही थीं। वहीं दूसरी तरफ करिश्मा कपूर भी डांस फ्लोर पर जमकर अपने हुस्न का जलवा बिखेर रहीं थीं। मस्ती मस्ती में ऐश ने करिश्मा का हाथ पकड़ा औऱ उन्हें फ्लोर पर नचा दिया। तीनों फिर सोनू के टीटू की स्वीटी के गाने दिल चोरी साडा पर एक साथ थिरकते नजर आए। वहीं अभिषेक भी कंफर्टेबल होकर करिश्मा के साथ डांस करते नजर आए। गौरतलब है कि एक वक्त पर करिश्मा और अभिषेक बच्चन के अफेयर की खबरें टॉक ऑफ द टाउन हुआं करती थी। इतना ही नहीं करिश्मा और अभिषेक बच्चन की सगाई तक तय हो गई थी। हालांकि कुछ बात बिगड़ने के चलते यह रिश्ता टूट गया। इसके बाद से ही यह दोनों परिवार एक दूसरे से कटा कटा नजर आता था। अभिषेक भी करिश्मा से थोड़े दूर दूर ही नजर आते थे। बाद में यह खबरें भी आईं कि ऐश करिश्मा को खास पसंद नहीं करती हैं और दोनों एक दूसरे को इग्नोर ही करती रहती हैं। हालांकि ईशा अंबानी के फंक्शन में तीनों नें एक साथ ठूमके लगाकर लोगों की यह गलतफहमी भी दूर कर दीं। इससे पहले कृष्णा राज के निधन कार्यक्रम में भी ऐश ने रानी को गले लगा लिया था। बता दें कि अभिषेक का नाम रानी मुखर्जी से भी जुड़ा था और इनकी शादी की खबरें भी उड़ रहीं थीं। वहीं ऐश ने दोनों स्टार के साथ अच्छा व्यवहार दिखाकर जता दिया कि उनके मन में किसी के लिए कोई बैर भाव नही है। बता दे कि ईशा अंबानी की शादी में बच्चन परिवार से ऐश और अभिषेक बेटी आराध्या के साथ नजर आए। यहां ऐश्वर्या ने लाल रंग की साड़ी पहनी थी और जूड़ा बनाया हुआ था। इस साड़ी में वह बेहद ही खूबसूरत भारतीय नारी लग रही थीं। वहीं करिश्मा, करीना और सैफ अली खान सफेद लंग के कपड़ों में बेहद ही रॉयल लग रहे थे। इन सितारों को देखकर एक के बाद एक लोगों के होश उड़ रहे थे। वहीं आलिया भट्ट ने भी लंहगा पहना हुआ था और यहां वह अकेली पहुंची थी। आलिया का साथ देने के लिए रनबीर भी नहीं आए। वहीं सोनम कपूर भी अपने अलग अंदाज के साथ ईशा अंबानी की शादी में पहुंची। उन्होंने गुलाबी रंग की ड्रेस पहनी थी जिसमे दूपट्टे के पीछे इज एके ओके लिखा हुआ था। उनके जलवों ने भी सबका कैमरा अपनी ओर खींच लिया। शादी में प्रणब मुखर्जी और कई बड़े दिग्गज लोग पहुंच थे।
पूरा बॉलीवुड इन दिनों सिर्फ और सिर्फ शादी के जश्न में डूबा है। प्रियंका सोनम, दीपिका के बाद बारह दिसंबर को अब ईशा अंबानी और आनंद पीरामल ने भी शादी कर ली। शादी का माहौल कुछ ऐसा था जैसे लग रहा था कि कई अवॉर्ड फंक्शन हैं और पूरा बॉलीवुड उमड़ा पड़ा है। सभी एक से बढ़कर लग रहे थे। हालांकि इससे पहले असल धमाल तो ईशा अंबानी की प्री वेडिंग सेरेमनी में हुआ था। इस सेरेमनी में कुछ ऐसे सितारे भी एक दूसरे के साथ नाचते नजर आए जो जल्दी एक दूसरे से नजरे भी नहीं मिलाते थे। इन फंक्शन ने कई लोगों के बीच दुरियां खत्म कर दी। यहां बात कर रहे हैं पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय बच्चन की जो अपने पति के साथ डांस फ्लोर पर जमकर थिरक रही थीं। वहीं दूसरी तरफ करिश्मा कपूर भी डांस फ्लोर पर जमकर अपने हुस्न का जलवा बिखेर रहीं थीं। मस्ती मस्ती में ऐश ने करिश्मा का हाथ पकड़ा औऱ उन्हें फ्लोर पर नचा दिया। तीनों फिर सोनू के टीटू की स्वीटी के गाने दिल चोरी साडा पर एक साथ थिरकते नजर आए। वहीं अभिषेक भी कंफर्टेबल होकर करिश्मा के साथ डांस करते नजर आए। गौरतलब है कि एक वक्त पर करिश्मा और अभिषेक बच्चन के अफेयर की खबरें टॉक ऑफ द टाउन हुआं करती थी। इतना ही नहीं करिश्मा और अभिषेक बच्चन की सगाई तक तय हो गई थी। हालांकि कुछ बात बिगड़ने के चलते यह रिश्ता टूट गया। इसके बाद से ही यह दोनों परिवार एक दूसरे से कटा कटा नजर आता था। अभिषेक भी करिश्मा से थोड़े दूर दूर ही नजर आते थे। बाद में यह खबरें भी आईं कि ऐश करिश्मा को खास पसंद नहीं करती हैं और दोनों एक दूसरे को इग्नोर ही करती रहती हैं। हालांकि ईशा अंबानी के फंक्शन में तीनों नें एक साथ ठूमके लगाकर लोगों की यह गलतफहमी भी दूर कर दीं। इससे पहले कृष्णा राज के निधन कार्यक्रम में भी ऐश ने रानी को गले लगा लिया था। बता दें कि अभिषेक का नाम रानी मुखर्जी से भी जुड़ा था और इनकी शादी की खबरें भी उड़ रहीं थीं। वहीं ऐश ने दोनों स्टार के साथ अच्छा व्यवहार दिखाकर जता दिया कि उनके मन में किसी के लिए कोई बैर भाव नही है। बता दे कि ईशा अंबानी की शादी में बच्चन परिवार से ऐश और अभिषेक बेटी आराध्या के साथ नजर आए। यहां ऐश्वर्या ने लाल रंग की साड़ी पहनी थी और जूड़ा बनाया हुआ था। इस साड़ी में वह बेहद ही खूबसूरत भारतीय नारी लग रही थीं। वहीं करिश्मा, करीना और सैफ अली खान सफेद लंग के कपड़ों में बेहद ही रॉयल लग रहे थे। इन सितारों को देखकर एक के बाद एक लोगों के होश उड़ रहे थे। वहीं आलिया भट्ट ने भी लंहगा पहना हुआ था और यहां वह अकेली पहुंची थी। आलिया का साथ देने के लिए रनबीर भी नहीं आए। वहीं सोनम कपूर भी अपने अलग अंदाज के साथ ईशा अंबानी की शादी में पहुंची। उन्होंने गुलाबी रंग की ड्रेस पहनी थी जिसमे दूपट्टे के पीछे इज एके ओके लिखा हुआ था। उनके जलवों ने भी सबका कैमरा अपनी ओर खींच लिया। शादी में प्रणब मुखर्जी और कई बड़े दिग्गज लोग पहुंच थे।
जबलपुर आईं अपने जमाने की मशहूर फिल्म एक्ट्रेस जयाप्रदा ने मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर पहुंची और मत्था टेका। मां के दरबार में मन्नत वाले नारियल बांधे और हिंदू नववर्ष की जबलपुर सहित देशवासियों को बधाई दी। जयाप्रदा ने भेड़ाघाट पहुंच कर नौकायन किया और संगमरमर की मूर्तियां भी खरीदी। भेड़ाघाट में फिल्मों की शूटिंग के लिए सुविधाएं बढ़ाने की वकालत की। बोली कि इससे यहां की सुंदरता को पूरे विश्व में दिखा सकेंगे। फिल्म एक्ट्रेस जया प्रदा जबलपुर में एक होटल के उद्धाटन के सिलसिले में आई हैं। नवरात्र के पहले दिन अचानक अपने बीच जया प्रदा को देख मां त्रिपुर सुंदरी पहुंचे भक्तों को भी विश्वास नहीं हुआ। जया प्रदा ने सबसे पहले मां का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ सेल्फी लेने वालों की होड़ दिखी। जया प्रदा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि "सालों से इस धरती काे नमन करने की सोच रही थी। आज वो अवसर मिला। मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर में एक असीम ऊर्जा का अनुभव हुआ। जयप्रदा यहां से विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट पहुंची। यहां भेड़ाघाट फाल देखा और फिर पंचवटी घाट पहुंच कर मार्बल रॉक के बीच से निकली मां नर्मदा की अथाह जलराशि पर नौकायन का आनंद लिया। मां नर्मदा को नमन करते हुए जया प्रदा ने कहा कि भेड़ाघाट के मार्बल बहुत सुंदर हैं। यहां की हवा, पर्यावरण, मार्बल रॉक की सुंदरता और जबलपुर के लोगों का प्यार देखकर अभिभूत हूं। जबलपुर पहली बार आई हूं, लेकिन लोगों से मिलकर लगा ही नहीं कि यहां के लोगों के लिए मैं अनजान हूं। भेड़ाघाट सहित आसपास काफी नेचर वाले प्वाइंट हैं। यहां पयर्टन के साथ सरकार सुविधाएं बढ़ाएं ताे कई फिल्मों की शूटिंग होगी। भेड़ाघाट को मुख्य केंद्र बनाकर इसका विकास करना चाहिए। यहां की प्राकृतिक सुंदरता का मुकाबला नहीं। फिल्मों के माध्यम से हम पूरे विश्व को जबलपुर के बारे में बता सकते हैं। जया प्रदा राजनीतिक पृष्ठिभूमि से भी जुड़ी रही हैं। वे रामपुर से सपा की सांसद रह चुकी हैं। बाद में बीजेपी के नजदीक आ गईं। मोदी की वो कायल हैं। बोलीं- पीएम नरेंद्र मोदी का सबका साथ सबका विकास जमीन पर भी दिखता है। यही कारण है कि यूपी में मोदी व योगी को जनता ने फिर से मौका दिया। कोई भी नेता हो, यदि वह लोगों के बीच और लोगों के लिए काम करता है, तो वह बार-बार चुनकर आएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जबलपुर आईं अपने जमाने की मशहूर फिल्म एक्ट्रेस जयाप्रदा ने मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर पहुंची और मत्था टेका। मां के दरबार में मन्नत वाले नारियल बांधे और हिंदू नववर्ष की जबलपुर सहित देशवासियों को बधाई दी। जयाप्रदा ने भेड़ाघाट पहुंच कर नौकायन किया और संगमरमर की मूर्तियां भी खरीदी। भेड़ाघाट में फिल्मों की शूटिंग के लिए सुविधाएं बढ़ाने की वकालत की। बोली कि इससे यहां की सुंदरता को पूरे विश्व में दिखा सकेंगे। फिल्म एक्ट्रेस जया प्रदा जबलपुर में एक होटल के उद्धाटन के सिलसिले में आई हैं। नवरात्र के पहले दिन अचानक अपने बीच जया प्रदा को देख मां त्रिपुर सुंदरी पहुंचे भक्तों को भी विश्वास नहीं हुआ। जया प्रदा ने सबसे पहले मां का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ सेल्फी लेने वालों की होड़ दिखी। जया प्रदा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि "सालों से इस धरती काे नमन करने की सोच रही थी। आज वो अवसर मिला। मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर में एक असीम ऊर्जा का अनुभव हुआ। जयप्रदा यहां से विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट पहुंची। यहां भेड़ाघाट फाल देखा और फिर पंचवटी घाट पहुंच कर मार्बल रॉक के बीच से निकली मां नर्मदा की अथाह जलराशि पर नौकायन का आनंद लिया। मां नर्मदा को नमन करते हुए जया प्रदा ने कहा कि भेड़ाघाट के मार्बल बहुत सुंदर हैं। यहां की हवा, पर्यावरण, मार्बल रॉक की सुंदरता और जबलपुर के लोगों का प्यार देखकर अभिभूत हूं। जबलपुर पहली बार आई हूं, लेकिन लोगों से मिलकर लगा ही नहीं कि यहां के लोगों के लिए मैं अनजान हूं। भेड़ाघाट सहित आसपास काफी नेचर वाले प्वाइंट हैं। यहां पयर्टन के साथ सरकार सुविधाएं बढ़ाएं ताे कई फिल्मों की शूटिंग होगी। भेड़ाघाट को मुख्य केंद्र बनाकर इसका विकास करना चाहिए। यहां की प्राकृतिक सुंदरता का मुकाबला नहीं। फिल्मों के माध्यम से हम पूरे विश्व को जबलपुर के बारे में बता सकते हैं। जया प्रदा राजनीतिक पृष्ठिभूमि से भी जुड़ी रही हैं। वे रामपुर से सपा की सांसद रह चुकी हैं। बाद में बीजेपी के नजदीक आ गईं। मोदी की वो कायल हैं। बोलीं- पीएम नरेंद्र मोदी का सबका साथ सबका विकास जमीन पर भी दिखता है। यही कारण है कि यूपी में मोदी व योगी को जनता ने फिर से मौका दिया। कोई भी नेता हो, यदि वह लोगों के बीच और लोगों के लिए काम करता है, तो वह बार-बार चुनकर आएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उसका बहुत अच्छा दोस्त भी हो, लेकिन वास्तव में ऐसा रिश्ता सभी पति-पत्नी के बीच नहीं बन पाता क्योंकि इसके लिए उनके सितारे भी जिम्मेदार होते हैं. यहां जानिए उन राशियों के बारे में जिनमें आपस में बहुत पटती है. हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उसे बहुत अच्छे से समझे और सपोर्ट करे. लेकिन सभी कपल्स के बीच ऐसा रिश्ता बन नहीं पाता, क्योंकि पति-पत्नी के बीच बेहतर बॉन्डिंग भी उनके ग्रह नक्षत्रों की स्थिति का परिणाम होती है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो कुछ राशियों के बीच काफी अच्छी केमिस्ट्री होती है और अगर वे एक दूसरे की जीवनसाथी बन जाएं तो वे कपल कम और दोस्त ज्यादा होते हैं. वहीं कुछ राशियों के बीच आपस में बिल्कुल नहीं पटती, ऐसी राशियों के लोग अगर विवाह के बंधन में बंध जाएं तो आए दिन उनके बीच कुछ न कुछ समस्या चलती ही रहती है. यहां जानिए उन राशियों के बारे में जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझती हैं और बेस्ट कपल का उदाहरण बनती हैं. सिंह और वृषभ : सिंह और वृषभ वैसे तो स्वभाव में एक दूसरे से बहुत अलग होती हैं, लेकिन जब ये लोग कपल बनते हैं तो एक दूसरे को बहुत समझते हैं. इनका अलग होना ही इनकी ताकत बन जाता है. दोनों एक दूसरे के लिए बहुत लॉयल होते हैं. इन्हें अपने पार्टनर का साथ बहुत पसंद होता है और एक दूसरे की मन की बात ये बहुत आसानी से समझ लेते हैं. धनु और कर्क : धनु और कर्क राशि वाले बहुत भावुक होते हैं और दोनों एक दूसरे की हर इमोशन का खयाल रखते हैं. एक दूसरे को मान सम्मान देते हैं. इन दोनों के साथ में एक बेहद साहसी और रोमांचक होता है, तो दूसरा हर एक चीज में शांत और कैलकुलेटिव होता है. धनु राशि वाले लोग कर्क राशि वाले पार्टनर की भावनाओं को खोलने में मदद करते हैं, तो कर्क राशि वाले लोग धनु राशि वाले लोगों में दार्शनिक भाव पैदा करने में मदद करते हैं. रिश्ते में व्यक्तिगत स्पेस होने की अहमियत को भी ये बहुत अच्छे से समझते हैं, इसलिए एक दूसरे को स्पेस भी देते हैं जिससे इनके बीच का दोस्ती वाला रिश्ता और बढ़ता है. कुंभ और मिथुन : कुंभ और मिथुन राशि के लोग बेहतर कपल बनकर लोगों को प्रेरणा देते हैं. ये दोनों वास्तव में एक दूसरे की कंपनी को खूब एंजॉय करते हैं. साथ में रहना, घूमना और खाना पीना इन्हें बहुत पसंद होता है. इन दोनों को उनकी सोचने की अलग क्षमता और मनचले व्यक्तित्व को लेकर जाना जाता है. ये लोग जीवन को लेकर वैसे काफी गंभीर होते हैं, लेकिन अपने रिश्ते में बेहतर बॉन्ड बनाने के लिए ये मजाकिया बातें भी खूब करते हैं और अपने साथ दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान लाते हैं. मकर और कन्या : इन राशियों के बीच आपस में काफी समानता होती है, लेकिन इसकी वजह से ये कभी ईगो को बीच में नहीं आने देते. ये दोनों राशियां एक दूसरे के प्रति पूरी तरह से समर्पित होती हैं. ये अपने रिश्ते में एक दूसरे के मान सम्मान का पूरा खयाल रखते हैं और एक दूसरे से हर अच्छी बुरी बात को शेयर करते हैं. (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उसका बहुत अच्छा दोस्त भी हो, लेकिन वास्तव में ऐसा रिश्ता सभी पति-पत्नी के बीच नहीं बन पाता क्योंकि इसके लिए उनके सितारे भी जिम्मेदार होते हैं. यहां जानिए उन राशियों के बारे में जिनमें आपस में बहुत पटती है. हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उसे बहुत अच्छे से समझे और सपोर्ट करे. लेकिन सभी कपल्स के बीच ऐसा रिश्ता बन नहीं पाता, क्योंकि पति-पत्नी के बीच बेहतर बॉन्डिंग भी उनके ग्रह नक्षत्रों की स्थिति का परिणाम होती है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो कुछ राशियों के बीच काफी अच्छी केमिस्ट्री होती है और अगर वे एक दूसरे की जीवनसाथी बन जाएं तो वे कपल कम और दोस्त ज्यादा होते हैं. वहीं कुछ राशियों के बीच आपस में बिल्कुल नहीं पटती, ऐसी राशियों के लोग अगर विवाह के बंधन में बंध जाएं तो आए दिन उनके बीच कुछ न कुछ समस्या चलती ही रहती है. यहां जानिए उन राशियों के बारे में जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझती हैं और बेस्ट कपल का उदाहरण बनती हैं. सिंह और वृषभ : सिंह और वृषभ वैसे तो स्वभाव में एक दूसरे से बहुत अलग होती हैं, लेकिन जब ये लोग कपल बनते हैं तो एक दूसरे को बहुत समझते हैं. इनका अलग होना ही इनकी ताकत बन जाता है. दोनों एक दूसरे के लिए बहुत लॉयल होते हैं. इन्हें अपने पार्टनर का साथ बहुत पसंद होता है और एक दूसरे की मन की बात ये बहुत आसानी से समझ लेते हैं. धनु और कर्क : धनु और कर्क राशि वाले बहुत भावुक होते हैं और दोनों एक दूसरे की हर इमोशन का खयाल रखते हैं. एक दूसरे को मान सम्मान देते हैं. इन दोनों के साथ में एक बेहद साहसी और रोमांचक होता है, तो दूसरा हर एक चीज में शांत और कैलकुलेटिव होता है. धनु राशि वाले लोग कर्क राशि वाले पार्टनर की भावनाओं को खोलने में मदद करते हैं, तो कर्क राशि वाले लोग धनु राशि वाले लोगों में दार्शनिक भाव पैदा करने में मदद करते हैं. रिश्ते में व्यक्तिगत स्पेस होने की अहमियत को भी ये बहुत अच्छे से समझते हैं, इसलिए एक दूसरे को स्पेस भी देते हैं जिससे इनके बीच का दोस्ती वाला रिश्ता और बढ़ता है. कुंभ और मिथुन : कुंभ और मिथुन राशि के लोग बेहतर कपल बनकर लोगों को प्रेरणा देते हैं. ये दोनों वास्तव में एक दूसरे की कंपनी को खूब एंजॉय करते हैं. साथ में रहना, घूमना और खाना पीना इन्हें बहुत पसंद होता है. इन दोनों को उनकी सोचने की अलग क्षमता और मनचले व्यक्तित्व को लेकर जाना जाता है. ये लोग जीवन को लेकर वैसे काफी गंभीर होते हैं, लेकिन अपने रिश्ते में बेहतर बॉन्ड बनाने के लिए ये मजाकिया बातें भी खूब करते हैं और अपने साथ दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान लाते हैं. मकर और कन्या : इन राशियों के बीच आपस में काफी समानता होती है, लेकिन इसकी वजह से ये कभी ईगो को बीच में नहीं आने देते. ये दोनों राशियां एक दूसरे के प्रति पूरी तरह से समर्पित होती हैं. ये अपने रिश्ते में एक दूसरे के मान सम्मान का पूरा खयाल रखते हैं और एक दूसरे से हर अच्छी बुरी बात को शेयर करते हैं.
जोहानिसबर्ग, एक दिसंबर दक्षिण अफ्रीका के सीमित ओवरों के कप्तान तेम्बा बावुमा और टेस्ट कप्तान डीन एल्गर ने इस महीने भारत के खिलाफ होने वाली श्रृंखला के लिए अपने क्रिकेट बोर्ड के जैविक रूप से सुरक्षित (बायो-बबल) इंतजामों पर बुधवार को भरोसा जताया। कोविड-19 के नए प्रारूप ओमीक्रोन के सामने के आने के बाद भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर संदेह पैदा हो गया है। यह प्रारूप पिछले महीने पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने हालांकि कहा है कि फिलहाल 17 दिसंबर से पहले टेस्ट के साथ शुरू होने वाला दौरा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा। दक्षिण अफ्रीकी टीम पिछले साल कोविड-19 के प्रकोप के बाद से आठ जैविक रूप से सुरक्षित माहौल का हिस्सा रही है जिसमें इंग्लैंड, श्रीलंका और पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखलाएं भी शामिल हैं। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी शुएब मांजरा के अनुसार बोर्ड सभी खिलाड़ियों, स्टाफ और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्व स्तरीय कदम उठा रहा है। बावुमा ने कहा कि जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में खेलना कड़ा है और सीएसए ने जो काम किया है उसके लिए उसकी सराहना करने की जरूरत है। बावुमा ने कहा कि जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में खेलना कड़ा है और सीएसए ने जो काम किया है उसके लिए उसकी सराहना करने की जरूरत है। टेस्ट कप्तान एल्गर ने भी बावुमा से सहमति जताई। उन्होंने कहा, "यह विश्वास करना मुश्किल है कि हम एक साल से बायो बबल में काम कर रहे हैं लेकिन कोविड-19 वायरस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति जानता है कि अगर हमें क्रिकेट खेलना जारी रखना है तो यह जरूरी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
जोहानिसबर्ग, एक दिसंबर दक्षिण अफ्रीका के सीमित ओवरों के कप्तान तेम्बा बावुमा और टेस्ट कप्तान डीन एल्गर ने इस महीने भारत के खिलाफ होने वाली श्रृंखला के लिए अपने क्रिकेट बोर्ड के जैविक रूप से सुरक्षित इंतजामों पर बुधवार को भरोसा जताया। कोविड-उन्नीस के नए प्रारूप ओमीक्रोन के सामने के आने के बाद भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर संदेह पैदा हो गया है। यह प्रारूप पिछले महीने पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने हालांकि कहा है कि फिलहाल सत्रह दिसंबर से पहले टेस्ट के साथ शुरू होने वाला दौरा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा। दक्षिण अफ्रीकी टीम पिछले साल कोविड-उन्नीस के प्रकोप के बाद से आठ जैविक रूप से सुरक्षित माहौल का हिस्सा रही है जिसमें इंग्लैंड, श्रीलंका और पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखलाएं भी शामिल हैं। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के मुख्य चिकित्सा अधिकारी शुएब मांजरा के अनुसार बोर्ड सभी खिलाड़ियों, स्टाफ और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्व स्तरीय कदम उठा रहा है। बावुमा ने कहा कि जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में खेलना कड़ा है और सीएसए ने जो काम किया है उसके लिए उसकी सराहना करने की जरूरत है। बावुमा ने कहा कि जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में खेलना कड़ा है और सीएसए ने जो काम किया है उसके लिए उसकी सराहना करने की जरूरत है। टेस्ट कप्तान एल्गर ने भी बावुमा से सहमति जताई। उन्होंने कहा, "यह विश्वास करना मुश्किल है कि हम एक साल से बायो बबल में काम कर रहे हैं लेकिन कोविड-उन्नीस वायरस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति जानता है कि अगर हमें क्रिकेट खेलना जारी रखना है तो यह जरूरी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
के तहत फिनलैंड की यह कंपनी 31 दिसंबर 2015 तक नोकिया ब्रांड के तहत फोन नहीं बेच सकती थी। यह समयसीमा खत्म हो चुकी है। हालांकि, नोकिया के अधिकारियों ने बताया था कि नोकिया ब्रांड के स्मार्टफोन 2016 की चौथी तिमाही से पहले नहीं लॉन्च किए जा सकते। संभव है कि दोनों कंपनियों के बीच ब्रांड के इस्तेमाल को लेकर समय सीमा को बढ़ाने पर समझौता हुआ था जिसकी घोषणा सार्वजनिक तौर पर नहीं की गई। नोकिया के सीईओ राजीव सुरी ने पिछले साल जुलाई में पुष्टि की थी कि कंपनी की योजना मोबाइल मार्केट में वापसी करने की है। नोकिया किसी ऐसी कंपनी के साथ समझौता करेगी जो प्रोडक्ट की मैन्यूफैक्चरिंग, सेल्स, मार्केटिंग और कस्टमर सपोर्ट की जिम्मेदारी उठाएगी। इसी रणनीति के तहत एन1 टैबलेट को लॉन्च किया जा चुकका है। इसके लिए कंपनी ने फॉक्सकॉन के साथ ब्रांड-लाइसेंसिंग का समझौता किया था। में बॉक्स जैसे आकार का काले रंग का नोकिया स्मार्टफोन नज़र आ रहा है। इसमें हैंडसेट का बैक, फ्रंट और किनारे वाला हिस्सा दिख रहा है। हैंडसेट में दो एंटिना लाइन नज़र आ रहे हैं जो बैकपैनल पर टॉप और निचले हिस्से में हैं। कंपनी का लोगो बैकपैनल के केंद्र मे हैं। वॉल्यूम और पावर बटन दायीं तरफ हैं। सिम कार्ड स्लॉट और माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट बायीं तरफ। फ्रंट पैनल में स्पीकर ग्रिल टॉप पर है और नोकिया का लोगो इसके नीचे। संभव है कि फोन को आईपी रेटिंग्स मिले। अफसोस की बात है कि इसके अलावा हैंडसेट के स्पेसिफेकशन और लॉन्च की तारीख के बारे में कुछ और नहीं पता है। एक और रोचक बात यह है कि नोकिया के हैंडसेट का डिजाइन पिछले साल लीक हुई तस्वीरों में नज़र आ रहे नोकिया सी1 के डिजाइन से मेल नहीं खाता। हालांकि, वे रेंडर इमेज थे। संभव है कि यही असली नोकिया सी1 हो। फिलहाल, किसी भी दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती। 5 इंच के फुल-एचडी डिस्प्ले, 8 मेगापिक्सल का रियर और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा के साथ आएगा। कहा जा रहा है कि यह डिवाइस एंड्रॉयड 6. 0 मार्शमैलो पर चलेगा। एक और रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नोकिया सी1 हैंडसेट में इंटेल चिपसेट के साथ 2जीबी का रैम होगा। मज़ेदार बात यह है कि नोकिया ने इस हफ्ते एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें कंपनी के विज़न के बारे में बताया गया है। इस वीडियो में हमें नोकिया के तीन फोन की झलक देखने को मिली थी। संभावना प्रबल है कि इनमें से एक नोकिया सी1 रहा हो।
के तहत फिनलैंड की यह कंपनी इकतीस दिसंबर दो हज़ार पंद्रह तक नोकिया ब्रांड के तहत फोन नहीं बेच सकती थी। यह समयसीमा खत्म हो चुकी है। हालांकि, नोकिया के अधिकारियों ने बताया था कि नोकिया ब्रांड के स्मार्टफोन दो हज़ार सोलह की चौथी तिमाही से पहले नहीं लॉन्च किए जा सकते। संभव है कि दोनों कंपनियों के बीच ब्रांड के इस्तेमाल को लेकर समय सीमा को बढ़ाने पर समझौता हुआ था जिसकी घोषणा सार्वजनिक तौर पर नहीं की गई। नोकिया के सीईओ राजीव सुरी ने पिछले साल जुलाई में पुष्टि की थी कि कंपनी की योजना मोबाइल मार्केट में वापसी करने की है। नोकिया किसी ऐसी कंपनी के साथ समझौता करेगी जो प्रोडक्ट की मैन्यूफैक्चरिंग, सेल्स, मार्केटिंग और कस्टमर सपोर्ट की जिम्मेदारी उठाएगी। इसी रणनीति के तहत एनएक टैबलेट को लॉन्च किया जा चुकका है। इसके लिए कंपनी ने फॉक्सकॉन के साथ ब्रांड-लाइसेंसिंग का समझौता किया था। में बॉक्स जैसे आकार का काले रंग का नोकिया स्मार्टफोन नज़र आ रहा है। इसमें हैंडसेट का बैक, फ्रंट और किनारे वाला हिस्सा दिख रहा है। हैंडसेट में दो एंटिना लाइन नज़र आ रहे हैं जो बैकपैनल पर टॉप और निचले हिस्से में हैं। कंपनी का लोगो बैकपैनल के केंद्र मे हैं। वॉल्यूम और पावर बटन दायीं तरफ हैं। सिम कार्ड स्लॉट और माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट बायीं तरफ। फ्रंट पैनल में स्पीकर ग्रिल टॉप पर है और नोकिया का लोगो इसके नीचे। संभव है कि फोन को आईपी रेटिंग्स मिले। अफसोस की बात है कि इसके अलावा हैंडसेट के स्पेसिफेकशन और लॉन्च की तारीख के बारे में कुछ और नहीं पता है। एक और रोचक बात यह है कि नोकिया के हैंडसेट का डिजाइन पिछले साल लीक हुई तस्वीरों में नज़र आ रहे नोकिया सीएक के डिजाइन से मेल नहीं खाता। हालांकि, वे रेंडर इमेज थे। संभव है कि यही असली नोकिया सीएक हो। फिलहाल, किसी भी दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती। पाँच इंच के फुल-एचडी डिस्प्ले, आठ मेगापिक्सल का रियर और पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा के साथ आएगा। कहा जा रहा है कि यह डिवाइस एंड्रॉयड छः. शून्य मार्शमैलो पर चलेगा। एक और रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नोकिया सीएक हैंडसेट में इंटेल चिपसेट के साथ दोजीबी का रैम होगा। मज़ेदार बात यह है कि नोकिया ने इस हफ्ते एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें कंपनी के विज़न के बारे में बताया गया है। इस वीडियो में हमें नोकिया के तीन फोन की झलक देखने को मिली थी। संभावना प्रबल है कि इनमें से एक नोकिया सीएक रहा हो।
पीड़िता का फ्रेंड दहशत में चिल्लाता हुआ भागा। इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता, अपराधी मौके से फरार हो गए। इस घटना से वारदात को देखने वाले लोगों में दहशत फैल गई। धार जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह अन्य वरिष्ठ पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाया गया। पीड़िता के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने बताया कि दोनों अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, अभी तक चीजें स्पष्ट नहीं हैं। घटना को बहुत करीब से देखने वाले लोगों के बयानों के आधार पर अपराधियों की तलाश शुरू की गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को धार में एक महिला ने अपनी तीन नाबालिग बेटियों की कथित तौर पर हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, दो लड़कियों के शव एक कुएं से बरामद किए गए, जबकि एक लड़की कुएं के बाहर मृत पाई गई। पुलिस ने पीड़ितों की मां को बुधवार सुबह गिरफ्तार करने का दावा किया है(आईएएनएस)
पीड़िता का फ्रेंड दहशत में चिल्लाता हुआ भागा। इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता, अपराधी मौके से फरार हो गए। इस घटना से वारदात को देखने वाले लोगों में दहशत फैल गई। धार जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह अन्य वरिष्ठ पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाया गया। पीड़िता के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने बताया कि दोनों अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, अभी तक चीजें स्पष्ट नहीं हैं। घटना को बहुत करीब से देखने वाले लोगों के बयानों के आधार पर अपराधियों की तलाश शुरू की गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को धार में एक महिला ने अपनी तीन नाबालिग बेटियों की कथित तौर पर हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, दो लड़कियों के शव एक कुएं से बरामद किए गए, जबकि एक लड़की कुएं के बाहर मृत पाई गई। पुलिस ने पीड़ितों की मां को बुधवार सुबह गिरफ्तार करने का दावा किया है
बेथलहम इतना प्राचीन है कि यह हैइसकी नींव इतिहासकारों की सटीक तिथि नहीं हो सकती। वे लगभग 17-16 सदियों ईसा पूर्व दिनांकित करते हैं। वह भूमि जहां बेथलेहेम स्थित है, वह फिलीस्तीनी स्वायत्त क्षेत्र (यरूशलेम के दक्षिण) से संबंधित है। यह शहर, जॉर्डन नदी के तट पर स्थित है। बाइबिल में उन्हें ईफ्रेट, बेथ-लेहेम येहुदा के नाम से जाना जाता है लेकिन इस नाम के बजाय, पूरे क्षेत्र को संदर्भित करता है, जो अब एक आधुनिक बेथलेहम है। बेतलेहेम कहाँ है, यह पता लगाने में, किस देश में,हम विश्वास से कह सकते हैं कि विवादास्पद क्षेत्र में दुनिया का यह हिस्सा इजरायल और फिलिस्तीन द्वारा दावा किया जाता है उस पावती के लिए समय-समय पर संघर्ष हो रहा है जबकि शांति समझौता फिलिस्तीनी कब्जे में शहर बना रहता है। शहर का क्षेत्र 5.4 वर्ग किलोमीटर में रहता है। सदियों से इस छोटे से क्षेत्र को कई बार जीत लिया गया है। पहले उल्लेख 17 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में राजा दाऊद के जन्म के संबंध में और भविष्यवक्ता शमूएल के द्वारा राज्य पर अभिषेक के लिए किया गया था। 16 वीं शताब्दी की शुरुआत से 20 वीं सदी के बेथलहम, पवित्र भूमि,यरूशलेम तुर्क साम्राज्य का हिस्सा थे। मुस्लिम कब्जे के बावजूद, तीर्थयात्रियों को स्वतंत्र रूप से पवित्र स्थानों में गिर गई। लेकिन 1831-1841 के वर्षों में, बेतलेहेम के लिए उपयोग मुहम्मद अली (मिस्र के Khedive) है, जो दस साल के लिए शहर के नियंत्रण में था बंद हो गया। 1853-1856 में रूस ने तुर्क साम्राज्य के साथ क्रीमियन युद्ध में प्रवेश किया, इसका कारण रूसी भूमि को पवित्र भूमि में ईसाई चर्चों के नेतृत्व के साथ प्रदान करने का नकार था। 1 9 22 में, ओट्टोमन की कमजोर पड़ने के बाद बेथलहमसाम्राज्य ब्रिटेन के संरक्षक के तहत पारित कर दिया संयुक्त राष्ट्र के न्यायक्षेत्र के अंतर्गत, शहर 1 9 47 में गिर गया, और 1 9 48 में यरूशलेम और बेतलेहेम को जॉर्डनियों ने कब्जा कर लिया। 1 9 67 से 1 99 5 तक शहर इसराइल के नियंत्रण में था 1 99 5 में वार्ता के परिणामस्वरूप, यह फिलिस्तीनी प्राधिकरण को दिया गया था, जहां आज भी ऐसा है। इस भाग में फिलिस्तीनी स्वायत्तताबेथलहम दुनिया में सबसे अधिक देखी जाने वाली स्थानों में से एक है। इस क्षेत्र के जीवन में शहर ने कभी भी एक प्रमुख भूमिका निभाई है। इसका मूल्य एक अलग विमान में हैः इस क्षेत्र में महान लोगों का जन्म, शताब्दी की गहराई में हुई घटना श्रृंखला और समकालीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन को निर्धारित किया। प्राचीन दिनांक निर्धारित करना मुश्किल है, लेकिन सबसे पहलेश्रद्धेय स्थानों का मील का पत्थर यरूशलेम से बेतलेहेम की सड़क पर है - यह राहेल की कब्र है इस महिला का नाम ओल्ड टैस्टमैंट में वर्णित है, क्योंकि पिताजी इसाक की प्यारी पत्नी है। कब्र यहूदीों की तीर्थयात्रा का उद्देश्य है इस क्षेत्र में सब कुछ छितरा होता हैः बाकी जगह राहेल, बेडौइन कब्रिस्तान के मध्य में स्थित है, जहां मुसलमान अपने पूर्वजों की यादों का सम्मान करते हैं। उस जगह में जहां बेतलेहेम है, उनमें से एकसबसे प्रसिद्ध राजा हैं डेविड वहाँ वह राज्य के लिए अभिषेक किया गया था दाऊद ने इजरायल की भूमि को एकजुट किया, जीत लिया और यरूशलेम को कब्जा कर लिया, इसे अपने राज्य की राजधानी बना दिया। यरूशलेम में, दाऊद सुलैमान के पुत्र ने सभी यहूदियों द्वारा एक मंदिर का सम्मान किया। दाऊद के नाम के संबंध में, इसका अक्सर उल्लेख किया जाता हैमहान दादा रूथ वह अपनी पवित्रता और उसकी सास के लिए प्रेम की वजह से बाइबल के इतिहास में प्रवेश करती थी। बूढ़ी औरत को खिलाने के लिए, रूत ने बेतलेहेम के आसपास के खेतों में मकई को इकट्ठा किया, जो अपने भविष्य के पति के लिए काम करने वाले पुनर्मूठे के पीछे छोड़ दिया। कुछ शताब्दियां पारित हो जाएंगी, और इन क्षेत्रों पर एन्जिल्स के शब्दों को उजागर किया जाएगा, जिन्होंने मसीह के जन्म को उड़ा दिया था। इस जगह को अब "फील्ड ऑफ शेफर्ड्स" कहा जाता है और यह छोटे से शहर बेत साहूर को दर्शाता है। बहुत जगह जहां बेथलहम शहर स्थित है, इसकीइतिहास रहस्यों में डूबा हुआ है ऐतिहासिक घटनाओं के सबसे प्राचीन भाग का पता लगाने के लिए संभव है, विवादास्पद स्रोतों और पुरातत्व पर निर्भर। बेतलेहेम में, यीशु मसीह का जन्म हुआ, जिसने विश्वासियों और इतिहासकारों की आंखों में इस शहर के मुख्य मूल्य को निर्धारित किया। बेथलहम में क्रिसमस की गुफा के स्थान के संबंध में, शहर ने विश्व महत्व हासिल किया मुस्लिम ईसाई कई शताब्दियों के लिए मुसलमानों के साथ लड़े थे। क्रॉस विजय ने पूर्वी राजाओं को रास्ता दिया श्राइन के चारों ओर का इतिहास बहुत खूनी लड़ाई जानता है। 326 में, बिज़ेनटियम की महारानी के इशारे परक्रिसमस गुफा के ऊपर ऐलेना को मसीह के जन्म के आधार पर बनाया गया था। 52 9 में, सामरियों द्वारा मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया गया, जिन्होंने बीजान्टिन शासन के खिलाफ विद्रोह किया था। विद्रोह को दबाने के बाद, सम्राट जस्टीनियन ने बासीलीक को बहाल किया, मंदिर के कमरे का विस्तार किया। 1517 से पहले विश्व युद्ध के अंत तकबेथलहम समेत सभी पवित्र भूमि, तुर्क साम्राज्य के थे। हालांकि, तीर्थयात्रियों को तीर्थयात्रा के प्रवेश द्वार बंद नहीं किया गया था, हर आस्तिक बाधाओं के बिना पूजा करने के लिए आ सकता है हालांकि, पथ असुरक्षित था। 1 99 5 में, वार्ता के लिए धन्यवाद, जिस स्थान पर बेथलेहेम स्थित है वह स्थान फिलिस्तीनी प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दिया गया था। इसलिए एक छोटा सा ऐतिहासिक शहर छोटा प्रांत का केंद्र बन गया। बेथलहम शहर जहां शांति से एक साथ रहती हैमुसलमान और ईसाई अभी हाल तक (50 साल पहले) शहर लगभग पूरी तरह से रूढ़िवादी था, लेकिन अब ईसाई मूल्यवर्ग में विश्वासियों की संख्या में कमी आई है। रूढ़िवादी दुनिया का मुख्य स्थान क्रिसमस चर्च हैमसीह का एक विशाल क्षेत्र है। सीधे तीर्थस्थल के लिए तीन मठों के आस-पासः रूढ़िवादी, अर्मेनियाई और फ़्रांसिस्कैन मंदिर तीन संप्रदायों के स्वामित्व में है, केवल रूढ़िवादी याजकों को मुख्य वेदी पर सेवाएं रखने का अधिकार है। मंदिर का दिल वेदी के नीचे है इसे उतरने के लिए यह एक प्राचीन सीढ़ी पर आवश्यक है, एक गलती पर पहुंच कर, एक मंजिल में, चांदी के तारे को देखने संभव है, जिसका अर्थ है कि मसीह का जन्म हुआ था। यह दुनिया भर के ईसाइयों की तीर्थयात्रा का मुख्य लक्ष्य है। मंदिर को छूने का अवसर के लिए, विश्वासियों ने लंबी यात्राएं की हैं। उल्लेखनीय और खुद मंदिर कई सदियों पहले एक मोटे पत्थर से निर्मित, यह प्राचीन वास्तुकला को संग्रहीत करता है और एक किले की तरह दिखता है, हमेशा अपने तीर्थयात्रियों और मंत्रियों की रक्षा और संरक्षण के लिए तैयार होता है। हाल के बहाली का काम आप कुछ स्थानों में मोज़ेक मंजिल देखने की अनुमति देता है, यहां तक कि सम्राट जस्टिनियन के तहत भी बनाया गया है। दीवारों पर मोज़ेक सजावट के अवशेष दिखाई देते हैं, वहां एक पेंटिंग भी है। संतों की लिखित छवियों ने कल्पना को प्रभावित किया और मंदिर में भाग लेने वाले विश्वासियों की भावनाओं को मजबूत किया। कट्टर का समर्थन करने वाले सोलह स्तंभ पंद्रहवीं शताब्दी तक हैं और क्रुसेडर्स की अवधि का उल्लेख करते हैं। वे चित्रों से सजाए गए हैं, लेकिन यह पहले से ही विचार करना मुश्किल है। मसीह के जन्म के चर्च से कहीं दूर नहीं हैएक और यादगार बाइबिल जगह - बेथलेहेम शिशुओं की गुफा परंपरा के अनुसार, उनके में, महिलाओं ने अपने बेटे को छुपा दिया, लेकिन उन्हें बचा नहीं सका। राजा हेरोदेस के आदेश के अनुसार, नर शिशुओं के लगभग 14 हजार (विभिन्न स्रोतों के अनुसार) मारे गए थे। हेरोदेस बच्चों को नष्ट करने का आदेश भविष्यवाणी के कारण दिया कि ये लड़का, यहूदियों के भविष्य के राजा का जन्म होगा और उसे नाश कर देगा। गुफा की गहराई में कटेकॉम की व्यवस्था में बनाया गया एक छोटा चर्च है। यह छठी शताब्दी में रहने वाले जीवित धार्मिक स्थलों का सबसे प्राचीन ईसाई भवन है। इसके अलावा एक जिज्ञासु यात्री यात्रा कर सकते हैंहेराडियम एक मानव निर्मित पहाड़ पर राजा हेरोदेस द्वारा बनाया गया शहर है। महान सभ्यताओं की खराबता को याद करते हुए शहर के ऊपर पहाड़ी बढ़ जाता है। यह माना जाता था कि पहाड़ राजा की कब्र है, लेकिन 2005 में किए गए खुदाई ने इस सिद्धांत के अनुयायियों को निराश किया। ताबूत का पता चला था, लेकिन इसमें कोई अवशेष नहीं पाया गया था। आधुनिकता शहर के जीवन के पाठ्यक्रम को प्रभावित करती है, लेकिनमूल रूप से सभी घटनाओं यहाँ हुई घटनाओं के आध्यात्मिक मूल्य से संबंधित हैं। आज बेथलहम, जहां लगभग 25 000 हज़ार निवासियां हैं, सभी मेहमानों के लिए खुली हैं लोग उसे जिज्ञासा के लिए, और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए यात्रा करते हैं इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष, धीरे-धीरे इस क्षेत्र में सुगंध, उन स्थानों पर जाकर हस्तक्षेप नहीं करता है जहां बेथलेहेम स्थित है। वह जगह जहां बेथलेहेम स्थित है (फिलिस्तीन का देश),सेना के संघर्ष से खुद को बचाने की कोशिश करें, क्योंकि पर्यटकों द्वारा मुख्य लाभ लाया जाता है। पर्यटकों के प्रवाह पर निर्भरता से फ़िलिस्तीन उद्यमी, शिल्प, कामयाब, व्यापार और अन्य प्रकार की उद्यमशीलता बनायी जाती है। कई लोगों का तर्क है कि इसराइल में बेतलेहेम शहर -यीशु मसीह का जन्मस्थान यह बेथलेहम में उद्धारकर्ता के जन्म के हिस्से में और शहर से संबंधित इजरायल के लिए दुष्टता के मामले में सच है बेतलेहेम फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को संदर्भित करता है और यरूशलेम से दो घंटे दूर है। आप एक चेकपॉइंट के जरिए शहर में जा सकते हैं। अक्सर आपको लाइन में खड़ा होना पड़ता है, यह तीर्थयात्रियों के प्रवाह में और दस्तावेजों के सत्यापन के कारण है।
बेथलहम इतना प्राचीन है कि यह हैइसकी नींव इतिहासकारों की सटीक तिथि नहीं हो सकती। वे लगभग सत्रह-सोलह सदियों ईसा पूर्व दिनांकित करते हैं। वह भूमि जहां बेथलेहेम स्थित है, वह फिलीस्तीनी स्वायत्त क्षेत्र से संबंधित है। यह शहर, जॉर्डन नदी के तट पर स्थित है। बाइबिल में उन्हें ईफ्रेट, बेथ-लेहेम येहुदा के नाम से जाना जाता है लेकिन इस नाम के बजाय, पूरे क्षेत्र को संदर्भित करता है, जो अब एक आधुनिक बेथलेहम है। बेतलेहेम कहाँ है, यह पता लगाने में, किस देश में,हम विश्वास से कह सकते हैं कि विवादास्पद क्षेत्र में दुनिया का यह हिस्सा इजरायल और फिलिस्तीन द्वारा दावा किया जाता है उस पावती के लिए समय-समय पर संघर्ष हो रहा है जबकि शांति समझौता फिलिस्तीनी कब्जे में शहर बना रहता है। शहर का क्षेत्र पाँच.चार वर्ग किलोमीटर में रहता है। सदियों से इस छोटे से क्षेत्र को कई बार जीत लिया गया है। पहले उल्लेख सत्रह वीं शताब्दी ईसा पूर्व में राजा दाऊद के जन्म के संबंध में और भविष्यवक्ता शमूएल के द्वारा राज्य पर अभिषेक के लिए किया गया था। सोलह वीं शताब्दी की शुरुआत से बीस वीं सदी के बेथलहम, पवित्र भूमि,यरूशलेम तुर्क साम्राज्य का हिस्सा थे। मुस्लिम कब्जे के बावजूद, तीर्थयात्रियों को स्वतंत्र रूप से पवित्र स्थानों में गिर गई। लेकिन एक हज़ार आठ सौ इकतीस-एक हज़ार आठ सौ इकतालीस के वर्षों में, बेतलेहेम के लिए उपयोग मुहम्मद अली है, जो दस साल के लिए शहर के नियंत्रण में था बंद हो गया। एक हज़ार आठ सौ तिरेपन-एक हज़ार आठ सौ छप्पन में रूस ने तुर्क साम्राज्य के साथ क्रीमियन युद्ध में प्रवेश किया, इसका कारण रूसी भूमि को पवित्र भूमि में ईसाई चर्चों के नेतृत्व के साथ प्रदान करने का नकार था। एक नौ बाईस में, ओट्टोमन की कमजोर पड़ने के बाद बेथलहमसाम्राज्य ब्रिटेन के संरक्षक के तहत पारित कर दिया संयुक्त राष्ट्र के न्यायक्षेत्र के अंतर्गत, शहर एक नौ सैंतालीस में गिर गया, और एक नौ अड़तालीस में यरूशलेम और बेतलेहेम को जॉर्डनियों ने कब्जा कर लिया। एक नौ सरसठ से एक निन्यानवे पाँच तक शहर इसराइल के नियंत्रण में था एक निन्यानवे पाँच में वार्ता के परिणामस्वरूप, यह फिलिस्तीनी प्राधिकरण को दिया गया था, जहां आज भी ऐसा है। इस भाग में फिलिस्तीनी स्वायत्तताबेथलहम दुनिया में सबसे अधिक देखी जाने वाली स्थानों में से एक है। इस क्षेत्र के जीवन में शहर ने कभी भी एक प्रमुख भूमिका निभाई है। इसका मूल्य एक अलग विमान में हैः इस क्षेत्र में महान लोगों का जन्म, शताब्दी की गहराई में हुई घटना श्रृंखला और समकालीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन को निर्धारित किया। प्राचीन दिनांक निर्धारित करना मुश्किल है, लेकिन सबसे पहलेश्रद्धेय स्थानों का मील का पत्थर यरूशलेम से बेतलेहेम की सड़क पर है - यह राहेल की कब्र है इस महिला का नाम ओल्ड टैस्टमैंट में वर्णित है, क्योंकि पिताजी इसाक की प्यारी पत्नी है। कब्र यहूदीों की तीर्थयात्रा का उद्देश्य है इस क्षेत्र में सब कुछ छितरा होता हैः बाकी जगह राहेल, बेडौइन कब्रिस्तान के मध्य में स्थित है, जहां मुसलमान अपने पूर्वजों की यादों का सम्मान करते हैं। उस जगह में जहां बेतलेहेम है, उनमें से एकसबसे प्रसिद्ध राजा हैं डेविड वहाँ वह राज्य के लिए अभिषेक किया गया था दाऊद ने इजरायल की भूमि को एकजुट किया, जीत लिया और यरूशलेम को कब्जा कर लिया, इसे अपने राज्य की राजधानी बना दिया। यरूशलेम में, दाऊद सुलैमान के पुत्र ने सभी यहूदियों द्वारा एक मंदिर का सम्मान किया। दाऊद के नाम के संबंध में, इसका अक्सर उल्लेख किया जाता हैमहान दादा रूथ वह अपनी पवित्रता और उसकी सास के लिए प्रेम की वजह से बाइबल के इतिहास में प्रवेश करती थी। बूढ़ी औरत को खिलाने के लिए, रूत ने बेतलेहेम के आसपास के खेतों में मकई को इकट्ठा किया, जो अपने भविष्य के पति के लिए काम करने वाले पुनर्मूठे के पीछे छोड़ दिया। कुछ शताब्दियां पारित हो जाएंगी, और इन क्षेत्रों पर एन्जिल्स के शब्दों को उजागर किया जाएगा, जिन्होंने मसीह के जन्म को उड़ा दिया था। इस जगह को अब "फील्ड ऑफ शेफर्ड्स" कहा जाता है और यह छोटे से शहर बेत साहूर को दर्शाता है। बहुत जगह जहां बेथलहम शहर स्थित है, इसकीइतिहास रहस्यों में डूबा हुआ है ऐतिहासिक घटनाओं के सबसे प्राचीन भाग का पता लगाने के लिए संभव है, विवादास्पद स्रोतों और पुरातत्व पर निर्भर। बेतलेहेम में, यीशु मसीह का जन्म हुआ, जिसने विश्वासियों और इतिहासकारों की आंखों में इस शहर के मुख्य मूल्य को निर्धारित किया। बेथलहम में क्रिसमस की गुफा के स्थान के संबंध में, शहर ने विश्व महत्व हासिल किया मुस्लिम ईसाई कई शताब्दियों के लिए मुसलमानों के साथ लड़े थे। क्रॉस विजय ने पूर्वी राजाओं को रास्ता दिया श्राइन के चारों ओर का इतिहास बहुत खूनी लड़ाई जानता है। तीन सौ छब्बीस में, बिज़ेनटियम की महारानी के इशारे परक्रिसमस गुफा के ऊपर ऐलेना को मसीह के जन्म के आधार पर बनाया गया था। बावन नौ में, सामरियों द्वारा मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया गया, जिन्होंने बीजान्टिन शासन के खिलाफ विद्रोह किया था। विद्रोह को दबाने के बाद, सम्राट जस्टीनियन ने बासीलीक को बहाल किया, मंदिर के कमरे का विस्तार किया। एक हज़ार पाँच सौ सत्रह से पहले विश्व युद्ध के अंत तकबेथलहम समेत सभी पवित्र भूमि, तुर्क साम्राज्य के थे। हालांकि, तीर्थयात्रियों को तीर्थयात्रा के प्रवेश द्वार बंद नहीं किया गया था, हर आस्तिक बाधाओं के बिना पूजा करने के लिए आ सकता है हालांकि, पथ असुरक्षित था। एक निन्यानवे पाँच में, वार्ता के लिए धन्यवाद, जिस स्थान पर बेथलेहेम स्थित है वह स्थान फिलिस्तीनी प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दिया गया था। इसलिए एक छोटा सा ऐतिहासिक शहर छोटा प्रांत का केंद्र बन गया। बेथलहम शहर जहां शांति से एक साथ रहती हैमुसलमान और ईसाई अभी हाल तक शहर लगभग पूरी तरह से रूढ़िवादी था, लेकिन अब ईसाई मूल्यवर्ग में विश्वासियों की संख्या में कमी आई है। रूढ़िवादी दुनिया का मुख्य स्थान क्रिसमस चर्च हैमसीह का एक विशाल क्षेत्र है। सीधे तीर्थस्थल के लिए तीन मठों के आस-पासः रूढ़िवादी, अर्मेनियाई और फ़्रांसिस्कैन मंदिर तीन संप्रदायों के स्वामित्व में है, केवल रूढ़िवादी याजकों को मुख्य वेदी पर सेवाएं रखने का अधिकार है। मंदिर का दिल वेदी के नीचे है इसे उतरने के लिए यह एक प्राचीन सीढ़ी पर आवश्यक है, एक गलती पर पहुंच कर, एक मंजिल में, चांदी के तारे को देखने संभव है, जिसका अर्थ है कि मसीह का जन्म हुआ था। यह दुनिया भर के ईसाइयों की तीर्थयात्रा का मुख्य लक्ष्य है। मंदिर को छूने का अवसर के लिए, विश्वासियों ने लंबी यात्राएं की हैं। उल्लेखनीय और खुद मंदिर कई सदियों पहले एक मोटे पत्थर से निर्मित, यह प्राचीन वास्तुकला को संग्रहीत करता है और एक किले की तरह दिखता है, हमेशा अपने तीर्थयात्रियों और मंत्रियों की रक्षा और संरक्षण के लिए तैयार होता है। हाल के बहाली का काम आप कुछ स्थानों में मोज़ेक मंजिल देखने की अनुमति देता है, यहां तक कि सम्राट जस्टिनियन के तहत भी बनाया गया है। दीवारों पर मोज़ेक सजावट के अवशेष दिखाई देते हैं, वहां एक पेंटिंग भी है। संतों की लिखित छवियों ने कल्पना को प्रभावित किया और मंदिर में भाग लेने वाले विश्वासियों की भावनाओं को मजबूत किया। कट्टर का समर्थन करने वाले सोलह स्तंभ पंद्रहवीं शताब्दी तक हैं और क्रुसेडर्स की अवधि का उल्लेख करते हैं। वे चित्रों से सजाए गए हैं, लेकिन यह पहले से ही विचार करना मुश्किल है। मसीह के जन्म के चर्च से कहीं दूर नहीं हैएक और यादगार बाइबिल जगह - बेथलेहेम शिशुओं की गुफा परंपरा के अनुसार, उनके में, महिलाओं ने अपने बेटे को छुपा दिया, लेकिन उन्हें बचा नहीं सका। राजा हेरोदेस के आदेश के अनुसार, नर शिशुओं के लगभग चौदह हजार मारे गए थे। हेरोदेस बच्चों को नष्ट करने का आदेश भविष्यवाणी के कारण दिया कि ये लड़का, यहूदियों के भविष्य के राजा का जन्म होगा और उसे नाश कर देगा। गुफा की गहराई में कटेकॉम की व्यवस्था में बनाया गया एक छोटा चर्च है। यह छठी शताब्दी में रहने वाले जीवित धार्मिक स्थलों का सबसे प्राचीन ईसाई भवन है। इसके अलावा एक जिज्ञासु यात्री यात्रा कर सकते हैंहेराडियम एक मानव निर्मित पहाड़ पर राजा हेरोदेस द्वारा बनाया गया शहर है। महान सभ्यताओं की खराबता को याद करते हुए शहर के ऊपर पहाड़ी बढ़ जाता है। यह माना जाता था कि पहाड़ राजा की कब्र है, लेकिन दो हज़ार पाँच में किए गए खुदाई ने इस सिद्धांत के अनुयायियों को निराश किया। ताबूत का पता चला था, लेकिन इसमें कोई अवशेष नहीं पाया गया था। आधुनिकता शहर के जीवन के पाठ्यक्रम को प्रभावित करती है, लेकिनमूल रूप से सभी घटनाओं यहाँ हुई घटनाओं के आध्यात्मिक मूल्य से संबंधित हैं। आज बेथलहम, जहां लगभग पच्चीस शून्य हज़ार निवासियां हैं, सभी मेहमानों के लिए खुली हैं लोग उसे जिज्ञासा के लिए, और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए यात्रा करते हैं इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष, धीरे-धीरे इस क्षेत्र में सुगंध, उन स्थानों पर जाकर हस्तक्षेप नहीं करता है जहां बेथलेहेम स्थित है। वह जगह जहां बेथलेहेम स्थित है ,सेना के संघर्ष से खुद को बचाने की कोशिश करें, क्योंकि पर्यटकों द्वारा मुख्य लाभ लाया जाता है। पर्यटकों के प्रवाह पर निर्भरता से फ़िलिस्तीन उद्यमी, शिल्प, कामयाब, व्यापार और अन्य प्रकार की उद्यमशीलता बनायी जाती है। कई लोगों का तर्क है कि इसराइल में बेतलेहेम शहर -यीशु मसीह का जन्मस्थान यह बेथलेहम में उद्धारकर्ता के जन्म के हिस्से में और शहर से संबंधित इजरायल के लिए दुष्टता के मामले में सच है बेतलेहेम फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को संदर्भित करता है और यरूशलेम से दो घंटे दूर है। आप एक चेकपॉइंट के जरिए शहर में जा सकते हैं। अक्सर आपको लाइन में खड़ा होना पड़ता है, यह तीर्थयात्रियों के प्रवाह में और दस्तावेजों के सत्यापन के कारण है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
रिलायंस जियो को लॉन्च किए जाने के बाद से इस टेलीकॉम कंपनी को लेकर ग्राहकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। जियो को इस महीने की शुरुआत में लॉन्च किया गया था। यह लाइफ टाइम मुफ्त कॉलिंग के साथ आता है। और वेलकम ऑफर के तहत ग्राहकों को 31 दिसंबर 2016 तक अनिलिमिटेड 4जी डेटा मिलेगा। ऑफर से साफ है कि आपके लिए रिलायंस जियो सिम खरीद पाना आसान नहीं होगा। एक्टिवेट कराना तो और भी मुश्किल है। अन्य नेटवर्क से उलट जियो सिर्फ 4जी पर चलता है और यह वॉयस कॉल पर भी लागू है। इसका मतलब है कि इस नेटवर्क की सुविधा लेने के लिए आपके पास 4जी फोन होना ही चाहिए जो वॉयस ओवर एलटीई फ़ीचर को भी सपोर्ट करता है। अगर आपके फोन में 4जी कनेक्टिविटी है, लेकिन वीओएलटीई सपोर्ट नहीं करता है तो आपको फोन कॉल के लिए जियो4जीवॉयस ऐप इस्तेमाल करना होगा। अगर आप नए फोन की तलाश में हैं और यह सोच रहे हैं कि यह रिलायंस 4जी नेटवर्क के साथ काम करेगा या नहीं, तो हमने आपका यह काम आसान कर दिया है। हमने वीओएलटीई सपोर्ट के साथ आने वाले उन बेहतरीन फोन की सूची तैयार की है। ध्यान रहे कि हम इस सूची में गैजेट्स 360 द्वारा रिव्यू किए गए फोन को ही शामिल किया है। अच्छी बात यह है कि रिव्यू के दौरान हमने इन फोन में वीओएलटीई कॉल की भी टेस्टिंग की है। और ये फोन अक्टूबर 2015 के बाद ही लॉन्च किए गए हैं। आइए आपको इस सूची से रूबरू कराएं। ऐप्पल ने हाल ही में पिछले साल लॉन्च किए गए आईफोन 6एस और आईफोन 6एस प्लस की कीमत में कटौती की थी। यह इन्हें खरीदने का बेहतरीन वक्त है। रिव्यू में हमने पाया था कि इनके डिजाइन बेहतरीन हैं और कैमरा परफॉर्मेंस में भी सुधार की गई है। अगर आपको ऐप्पल ईको सिस्टम पसंद है तो आपको इन फोन को खरीदने पर नुकसान नहीं होगा। सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइस सही मामले में आईफोन को चुनौती देते हैं। गैलेक्सी एस7 और गैलेक्सी एस7 एज आपके लिए अच्छे विकल्प हैं। दोनों ही फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ ने हमें लुभाया। हालांकि, सैमसंग के सॉफ्टवेयर में और सुधार की गुंजाइश है। एचटीसी 10 फ्लैगशिप स्मार्टफोन का डिजाइन मन मोहने वाला है। और इसकी परफॉर्मेंस भी आपको लुभाएगी। हैंडसेट का डिस्प्ले अच्छा है। दोनों ही कैमरे से आप अच्छी तस्वीरें ले पाएंगे। इस फोन की सिर्फ एक खामी इसकी बैटरी लाइफ है। इस सूची में ब्लैकबेरी प्रिव एक मात्र फोन है जो फिज़िकल कीबोर्ड के साथ आता है। कुछ लोग सिर्फ इस वजह से ही फोन खरीदना चाहेंगे। इसकी बिल्ड क्वालिटी भी अच्छी है। हालांकि, इसकी कीमत आपको चुभेगी। यह थोड़ा पुराना भी है और फ्रंट कैमरा निराश करता है। पिछले साल सितंबर महीने में लॉन्च किया गया सैमसंग का आखिरी नोट सीरीज फैबलेट आज की तारीख में आपको 39,900 रुपये में भी मिल जाएगा। सैमसंग गैलेक्सी नोट 5 की परफॉर्मेंस सॉलिड है और बैटरी लाइफ भी बेहतरीन है। हालांकि, एस पेन के बार-बार खराब होने का डर है। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
रिलायंस जियो को लॉन्च किए जाने के बाद से इस टेलीकॉम कंपनी को लेकर ग्राहकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। जियो को इस महीने की शुरुआत में लॉन्च किया गया था। यह लाइफ टाइम मुफ्त कॉलिंग के साथ आता है। और वेलकम ऑफर के तहत ग्राहकों को इकतीस दिसंबर दो हज़ार सोलह तक अनिलिमिटेड चारजी डेटा मिलेगा। ऑफर से साफ है कि आपके लिए रिलायंस जियो सिम खरीद पाना आसान नहीं होगा। एक्टिवेट कराना तो और भी मुश्किल है। अन्य नेटवर्क से उलट जियो सिर्फ चारजी पर चलता है और यह वॉयस कॉल पर भी लागू है। इसका मतलब है कि इस नेटवर्क की सुविधा लेने के लिए आपके पास चारजी फोन होना ही चाहिए जो वॉयस ओवर एलटीई फ़ीचर को भी सपोर्ट करता है। अगर आपके फोन में चारजी कनेक्टिविटी है, लेकिन वीओएलटीई सपोर्ट नहीं करता है तो आपको फोन कॉल के लिए जियोचारजीवॉयस ऐप इस्तेमाल करना होगा। अगर आप नए फोन की तलाश में हैं और यह सोच रहे हैं कि यह रिलायंस चारजी नेटवर्क के साथ काम करेगा या नहीं, तो हमने आपका यह काम आसान कर दिया है। हमने वीओएलटीई सपोर्ट के साथ आने वाले उन बेहतरीन फोन की सूची तैयार की है। ध्यान रहे कि हम इस सूची में गैजेट्स तीन सौ साठ द्वारा रिव्यू किए गए फोन को ही शामिल किया है। अच्छी बात यह है कि रिव्यू के दौरान हमने इन फोन में वीओएलटीई कॉल की भी टेस्टिंग की है। और ये फोन अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह के बाद ही लॉन्च किए गए हैं। आइए आपको इस सूची से रूबरू कराएं। ऐप्पल ने हाल ही में पिछले साल लॉन्च किए गए आईफोन छःएस और आईफोन छःएस प्लस की कीमत में कटौती की थी। यह इन्हें खरीदने का बेहतरीन वक्त है। रिव्यू में हमने पाया था कि इनके डिजाइन बेहतरीन हैं और कैमरा परफॉर्मेंस में भी सुधार की गई है। अगर आपको ऐप्पल ईको सिस्टम पसंद है तो आपको इन फोन को खरीदने पर नुकसान नहीं होगा। सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइस सही मामले में आईफोन को चुनौती देते हैं। गैलेक्सी एससात और गैलेक्सी एससात एज आपके लिए अच्छे विकल्प हैं। दोनों ही फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ ने हमें लुभाया। हालांकि, सैमसंग के सॉफ्टवेयर में और सुधार की गुंजाइश है। एचटीसी दस फ्लैगशिप स्मार्टफोन का डिजाइन मन मोहने वाला है। और इसकी परफॉर्मेंस भी आपको लुभाएगी। हैंडसेट का डिस्प्ले अच्छा है। दोनों ही कैमरे से आप अच्छी तस्वीरें ले पाएंगे। इस फोन की सिर्फ एक खामी इसकी बैटरी लाइफ है। इस सूची में ब्लैकबेरी प्रिव एक मात्र फोन है जो फिज़िकल कीबोर्ड के साथ आता है। कुछ लोग सिर्फ इस वजह से ही फोन खरीदना चाहेंगे। इसकी बिल्ड क्वालिटी भी अच्छी है। हालांकि, इसकी कीमत आपको चुभेगी। यह थोड़ा पुराना भी है और फ्रंट कैमरा निराश करता है। पिछले साल सितंबर महीने में लॉन्च किया गया सैमसंग का आखिरी नोट सीरीज फैबलेट आज की तारीख में आपको उनतालीस,नौ सौ रुपयापये में भी मिल जाएगा। सैमसंग गैलेक्सी नोट पाँच की परफॉर्मेंस सॉलिड है और बैटरी लाइफ भी बेहतरीन है। हालांकि, एस पेन के बार-बार खराब होने का डर है। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स तीन सौ साठ एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
श्रर्थ- समस्त लोक में फैले हुए तथा भ्रमर के समान काले रंग वाले सम्पूर्ण अन्धकार को शीघ्रता से जैसे सूर्य की किरणों नष्ट कर देती हैं। उसी प्रकार हे भगवन् ! आपके स्तवन से देह् धारियों का ( जन्म, जरा, मरण रूप ) संसार परम्परा से बंधा पाप क्षण भर में नाश हो जाता है । भावार्य - जैसे ग्रन्थकार को सूर्य नष्ट कर देता है उसी प्रकार आपके स्तोत्र से जीवों के पाप क्षय हो जाते हैं ।
श्रर्थ- समस्त लोक में फैले हुए तथा भ्रमर के समान काले रंग वाले सम्पूर्ण अन्धकार को शीघ्रता से जैसे सूर्य की किरणों नष्ट कर देती हैं। उसी प्रकार हे भगवन् ! आपके स्तवन से देह् धारियों का संसार परम्परा से बंधा पाप क्षण भर में नाश हो जाता है । भावार्य - जैसे ग्रन्थकार को सूर्य नष्ट कर देता है उसी प्रकार आपके स्तोत्र से जीवों के पाप क्षय हो जाते हैं ।
नई दिल्ली : मणिपुर की एक लड़की के साथ एयरपोर्ट पर नस्लभेदी टिप्पणी का मामला सामने आया है। मोनिका नाम की इस लड़की ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इस बाबत लिखा था, जो कि वायरल हो गया। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने शनिवार को मोनिका से पूछा कि पक्का इंडियन हो न? इसके बाद से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि मोनिका मैं इसके लिए माफी चाहती हूं, मेरे पास इमिग्रेशन नहीं है। मैं गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात करुंगी, जिनके पास इमिग्रेशन विभाग है। मोनिका नेअपने फेसबुक पोस्ट में बताया था कि शनिवार को जब आईजीआई के टर्मिनल-3 पर पहुंची तो अभिकारी ने उससे पूछा कि वो पक्का इंडियन है न? इस पर मोनिका ने कहा कि वो लेट हो रही है, उसे जाने दिया जाए, तो इस पर अधिकारी ने कहा कि एयरक्राफ्ट आपको छोड़कर नहीं जा रहा, आराम से जवाब दीजिए। जब मोनिका ने अधिकारी के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वो मणिपुर से है, तो उसने उनसे पूछा कि अच्छा ये बताओ कि मणिपुर के बॉर्डर से कितने राज्य सटे हैं, इन राज्यों के नाम बताओ? मोनिका के इस पोस्ट को खूब शेयर किया जा रहा है। कई लोगों ने इस पर अपना गुस्सा भी जाहिर किया है। मोनिका को कई लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। जिसके लिए उन्होने सभी का धन्यवाद किया है।
नई दिल्ली : मणिपुर की एक लड़की के साथ एयरपोर्ट पर नस्लभेदी टिप्पणी का मामला सामने आया है। मोनिका नाम की इस लड़की ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इस बाबत लिखा था, जो कि वायरल हो गया। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने शनिवार को मोनिका से पूछा कि पक्का इंडियन हो न? इसके बाद से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि मोनिका मैं इसके लिए माफी चाहती हूं, मेरे पास इमिग्रेशन नहीं है। मैं गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात करुंगी, जिनके पास इमिग्रेशन विभाग है। मोनिका नेअपने फेसबुक पोस्ट में बताया था कि शनिवार को जब आईजीआई के टर्मिनल-तीन पर पहुंची तो अभिकारी ने उससे पूछा कि वो पक्का इंडियन है न? इस पर मोनिका ने कहा कि वो लेट हो रही है, उसे जाने दिया जाए, तो इस पर अधिकारी ने कहा कि एयरक्राफ्ट आपको छोड़कर नहीं जा रहा, आराम से जवाब दीजिए। जब मोनिका ने अधिकारी के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वो मणिपुर से है, तो उसने उनसे पूछा कि अच्छा ये बताओ कि मणिपुर के बॉर्डर से कितने राज्य सटे हैं, इन राज्यों के नाम बताओ? मोनिका के इस पोस्ट को खूब शेयर किया जा रहा है। कई लोगों ने इस पर अपना गुस्सा भी जाहिर किया है। मोनिका को कई लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। जिसके लिए उन्होने सभी का धन्यवाद किया है।
Posted On: श्रीमती हरसिमरत बादल ने आज सभी खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों से अपील की कि वे केरल में बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए राहत प्रयासों में योगदान करें। उन्होंने कंपनियों से कहा कि इस नेक कार्य के लिए संसाधित खाद्य उत्पाद उदारतापूर्वक दान दें। - उप सचिव श्री अत्यानंद (9891614895) श्रीमती बादल ने कहा कि उनके अनुरोध पर आईटीसी और ब्रिटेनिया द्वारा बिस्केट के तीन लाख पैकेट पहले ही केरल सरकार को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये बिस्केट त्रिवेन्द्रम, कोच्चि और मालापुरम में अधिकारियों को सौंपे गए ताकि उन्हें आगे पीडि़त लोगों को वितरित किया जा सके।
Posted On: श्रीमती हरसिमरत बादल ने आज सभी खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों से अपील की कि वे केरल में बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए राहत प्रयासों में योगदान करें। उन्होंने कंपनियों से कहा कि इस नेक कार्य के लिए संसाधित खाद्य उत्पाद उदारतापूर्वक दान दें। - उप सचिव श्री अत्यानंद श्रीमती बादल ने कहा कि उनके अनुरोध पर आईटीसी और ब्रिटेनिया द्वारा बिस्केट के तीन लाख पैकेट पहले ही केरल सरकार को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये बिस्केट त्रिवेन्द्रम, कोच्चि और मालापुरम में अधिकारियों को सौंपे गए ताकि उन्हें आगे पीडि़त लोगों को वितरित किया जा सके।
Bigg Boss 13: Devoleena पर बुरी तरह से भड़के एक्स कंटेस्टेंट Arhaan Khan, बोले- 'मेरे और रश्मि का रिश्ता गहरा...' रश्मि देसाई (Rashmi Desai) और एक्स कंटेस्टेंट अरहान खान (Arhaan Khan) अपने रिलेशनशिप को लेकर हमेशा चर्चा में बने हुए रहते हैं। टीवी रियलिटी शो 'बिग बॉस' के सीजन 13 (Bigg Boss 13) में रश्मि देसाई (Rashmi Desai) और एक्स कंटेस्टेंट अरहान खान (Arhaan Khan) को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, रश्मि देसाई और अरहान खान एक दूसरे को पसंद करते है और एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में हैं। हाल ही में रश्मि की बेस्ट फ्रेंड देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) ने बिग बॉस के घर में उनको सपोर्ट करने के लिए एंट्री की है। हाल ही में देवोलीना भट्टाचार्जी और रश्मि देसाई बिग बॉस के घर में अरहान खान के बारे में बात करते दिखाई दिए थे। इस दौरान देवोलीना ने रश्मि देसाई को सलाह देते हुए कहा था कि वो अरहान खान से दूर रहे। देवोलीना के इन बातों पर पूर्व सदस्य अरहान खान (Arhaan Khan) ने जवाब दिया है। (इसे भी पढ़े- Bigg Boss 13: Himanshi Khurana का टूटा भरोसा, रश्मि के सामने Asim Riaz के प्यार को बताया 'फिल्मी') एक्स बिग बॉस कंटेस्टेंट अरहान खान (Arhaan Khan) ने स्पॉटबॉय से बातचीत में कहा है, 'देवोलीना कुछ भी कर ले रश्मि को वो मुझसे अलग नहीं कर सकती।' इस पर बात करते हुए अरहान खान ने आगे कहा- 'मुझे देवोलीना पर हैरानी होती है कि वो ऐसी सलाह रश्मि को कैसे दे सकती है। वो रश्मि की पर्सनल लाइफ में जबरदस्ती घुसती नजर आ रही हैं। वो हम दोनों के बीच में बोलकर अच्छा नहीं कर रही हैं।' अरहान खान (Arhaan Khan) ने आगे कहा- 'देवोलीना जिस तरह से बर्ताव कर रही हैं उससे ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं हैं। अगर सलमान खान ने मेरे बारे में ये बाते कहीं होती तो मुझे इससे फर्क पड़ता लेकिन देवोलीना के बोलने से मुझे फर्क नही पड़ता।' (इसे भी पढ़े- Devoleena से पहले Rashami के राखी भाई Mrunal Jain को शो मेकर्स ने किया था अप्रोच, इस वजह से नहीं बन पाए Bigg Boss 13 का हिस्सा) अरहान खान ने कहा- 'आपने देखा होगा देवोलीना भट्टाचार्जी जान बूजकर मेरे बारे में बात करती दिखाई देती है। इस पर रश्मि कुछ भी कहने से बचती नजर आती है। मेरे और रश्मि का रिश्ता बहुत गहरा है और सच्चा भी। मैं अपने रिश्ते को लेकर काफी कोन्फिडेंट हूं। हम दोनों एक साथ है।' बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Bigg Boss तेरह: Devoleena पर बुरी तरह से भड़के एक्स कंटेस्टेंट Arhaan Khan, बोले- 'मेरे और रश्मि का रिश्ता गहरा...' रश्मि देसाई और एक्स कंटेस्टेंट अरहान खान अपने रिलेशनशिप को लेकर हमेशा चर्चा में बने हुए रहते हैं। टीवी रियलिटी शो 'बिग बॉस' के सीजन तेरह में रश्मि देसाई और एक्स कंटेस्टेंट अरहान खान को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, रश्मि देसाई और अरहान खान एक दूसरे को पसंद करते है और एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में हैं। हाल ही में रश्मि की बेस्ट फ्रेंड देवोलीना भट्टाचार्जी ने बिग बॉस के घर में उनको सपोर्ट करने के लिए एंट्री की है। हाल ही में देवोलीना भट्टाचार्जी और रश्मि देसाई बिग बॉस के घर में अरहान खान के बारे में बात करते दिखाई दिए थे। इस दौरान देवोलीना ने रश्मि देसाई को सलाह देते हुए कहा था कि वो अरहान खान से दूर रहे। देवोलीना के इन बातों पर पूर्व सदस्य अरहान खान ने जवाब दिया है। एक्स बिग बॉस कंटेस्टेंट अरहान खान ने स्पॉटबॉय से बातचीत में कहा है, 'देवोलीना कुछ भी कर ले रश्मि को वो मुझसे अलग नहीं कर सकती।' इस पर बात करते हुए अरहान खान ने आगे कहा- 'मुझे देवोलीना पर हैरानी होती है कि वो ऐसी सलाह रश्मि को कैसे दे सकती है। वो रश्मि की पर्सनल लाइफ में जबरदस्ती घुसती नजर आ रही हैं। वो हम दोनों के बीच में बोलकर अच्छा नहीं कर रही हैं।' अरहान खान ने आगे कहा- 'देवोलीना जिस तरह से बर्ताव कर रही हैं उससे ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं हैं। अगर सलमान खान ने मेरे बारे में ये बाते कहीं होती तो मुझे इससे फर्क पड़ता लेकिन देवोलीना के बोलने से मुझे फर्क नही पड़ता।' अरहान खान ने कहा- 'आपने देखा होगा देवोलीना भट्टाचार्जी जान बूजकर मेरे बारे में बात करती दिखाई देती है। इस पर रश्मि कुछ भी कहने से बचती नजर आती है। मेरे और रश्मि का रिश्ता बहुत गहरा है और सच्चा भी। मैं अपने रिश्ते को लेकर काफी कोन्फिडेंट हूं। हम दोनों एक साथ है।' बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
गत 30 मई को संस्कार भारती, दिल्ली प्रांत द्वारा विभिन्न कला विधाओं के अग्रणी कलाकारों द्वारा कला क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों एवं कलाकारों के संघर्ष पर चर्चा हेतु ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय था - 'दर्द न जाने कोय। ' इसमें कोरोना महामारी द्वारा प्रभावित हुए कलाकारों की आर्थिक सहायता हेतु धनराशि एकत्रित करने पर गंभीरता से विचार किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कलाकारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए कॉर्पोरेट घरानों से सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत सहायता प्राप्त की जानी चाहिए। समाज द्वारा प्राप्त होने वाली सहायता राशि से अभावग्रस्त कलाकारों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रयास संस्कार भारती द्वारा किये जायेंगे। साथ ही महामारी के इस कठिन समय में केंद्र सरकार एवं विभिन राज्य सरकारों को भी संस्कृतिकर्मियों की समस्याओं से अगवत करवाने हेतु ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे। कार्यक्रम में राजेन्द्र पुंडीर, संदीप दत्ता, नीरज गुप्ता द्वारा अभावग्रस्त कलाकारों की सहायता के लिए समर्पण राशि प्रदान करने की घोषणा की गई।
गत तीस मई को संस्कार भारती, दिल्ली प्रांत द्वारा विभिन्न कला विधाओं के अग्रणी कलाकारों द्वारा कला क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों एवं कलाकारों के संघर्ष पर चर्चा हेतु ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय था - 'दर्द न जाने कोय। ' इसमें कोरोना महामारी द्वारा प्रभावित हुए कलाकारों की आर्थिक सहायता हेतु धनराशि एकत्रित करने पर गंभीरता से विचार किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कलाकारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए कॉर्पोरेट घरानों से सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत सहायता प्राप्त की जानी चाहिए। समाज द्वारा प्राप्त होने वाली सहायता राशि से अभावग्रस्त कलाकारों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रयास संस्कार भारती द्वारा किये जायेंगे। साथ ही महामारी के इस कठिन समय में केंद्र सरकार एवं विभिन राज्य सरकारों को भी संस्कृतिकर्मियों की समस्याओं से अगवत करवाने हेतु ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे। कार्यक्रम में राजेन्द्र पुंडीर, संदीप दत्ता, नीरज गुप्ता द्वारा अभावग्रस्त कलाकारों की सहायता के लिए समर्पण राशि प्रदान करने की घोषणा की गई।
टनकपुर में पिथौरागढ़ चुंगी के समीप सरस्वती शिशु मंदिर में शनिवार को शिक्षक-अभिभावक गोष्ठी का आयोजन किया। विद्यालय समिति के अध्यक्ष कांति बल्लभ जोशी की अध्यक्षता और प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ जोशी के संचालन में अभिभावकों ने अपने विचार साझा किए। कोरोना के दौर में फीस जमा न होने के बावजूद शिक्षकों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद विद्यालय का परिणाम शत प्रतिशत रहा।
टनकपुर में पिथौरागढ़ चुंगी के समीप सरस्वती शिशु मंदिर में शनिवार को शिक्षक-अभिभावक गोष्ठी का आयोजन किया। विद्यालय समिति के अध्यक्ष कांति बल्लभ जोशी की अध्यक्षता और प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ जोशी के संचालन में अभिभावकों ने अपने विचार साझा किए। कोरोना के दौर में फीस जमा न होने के बावजूद शिक्षकों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद विद्यालय का परिणाम शत प्रतिशत रहा।
चेन्नई, (एजेंसी/वार्ता): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अवैध मादक पदार्थों और हथियारों के व्यापार के मामले में त्रिची विशेष शिविर के नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। एनआईए ने मंगलवार को ट्वीट करके यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक धर्मराजन के नेतृत्व में केरल की 10 सदस्यीय एनआईए टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस विशेष शिविर में विदेशी नागरिक रहते हैं जिनमें से अधिकांश श्रीलंकाई तमिल हैं और उनपर विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से पांच श्रीलंकाई तमिल हैं जबकि चार सिंहली हैं। उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच चेन्नई की विशेष अदालत, पूनमल्ली लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सी. गुणशेखरन उर्फ गुना, पुष्पराजा, मोहम्मद अस्मिन, अलाहप्पेरुमोगा सुनील गामिनी फांसिया उर्फ सुनील गामिनी, स्टेनली केनेडी फर्नांडा उर्फ किसान, लादिया चंद्रसेना, धानुका रोशन, वेल्ला सुरंका उर्फ गमगे सुरंका प्रदीप और थिलिपन उर्फ दिलीपन गिरफ्तारों में शामिल हैं। एनआईए ने ट्वीट किया," कल नौ लोगों की गिरफ्तारी इस वर्ष जुलाई में हुई छापेमारी का फॉलो अप हैं, जिसमें कई मोबाइल फोन और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ गिरोह से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई थी। "यह मामला सी. गुणशेखरन उर्फ गुना और पुष्पराजा उर्फ पुकुट्टी कन्ना द्वारा नियंत्रित एक श्रीलंकाई ड्रग माफिया से संबंधित है, जिसका सहयोगी पाकिस्तान स्थित मादक पदार्थों और हथियारों का आपूर्तिकर्ता हाजी सलीम है, जो भारत और श्रीलंका में प्रतिबंधित लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) का पुनरुत्थान करने के लिए अवैध मादक पदार्थों और हथियारों का काम कर रहा है। एनआईए ने 08 जुलाई 2022 को इस मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। एनआईए ने कहा कि मामले में आगे की जांच चल रही है। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ेंः-ऐसे करें ग्लैमरस लुक पाने के लिए मेकअप, सब देखते रहे जाएंगे!
चेन्नई, : राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अवैध मादक पदार्थों और हथियारों के व्यापार के मामले में त्रिची विशेष शिविर के नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। एनआईए ने मंगलवार को ट्वीट करके यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक धर्मराजन के नेतृत्व में केरल की दस सदस्यीय एनआईए टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस विशेष शिविर में विदेशी नागरिक रहते हैं जिनमें से अधिकांश श्रीलंकाई तमिल हैं और उनपर विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से पांच श्रीलंकाई तमिल हैं जबकि चार सिंहली हैं। उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच चेन्नई की विशेष अदालत, पूनमल्ली लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सी. गुणशेखरन उर्फ गुना, पुष्पराजा, मोहम्मद अस्मिन, अलाहप्पेरुमोगा सुनील गामिनी फांसिया उर्फ सुनील गामिनी, स्टेनली केनेडी फर्नांडा उर्फ किसान, लादिया चंद्रसेना, धानुका रोशन, वेल्ला सुरंका उर्फ गमगे सुरंका प्रदीप और थिलिपन उर्फ दिलीपन गिरफ्तारों में शामिल हैं। एनआईए ने ट्वीट किया," कल नौ लोगों की गिरफ्तारी इस वर्ष जुलाई में हुई छापेमारी का फॉलो अप हैं, जिसमें कई मोबाइल फोन और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ गिरोह से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई थी। "यह मामला सी. गुणशेखरन उर्फ गुना और पुष्पराजा उर्फ पुकुट्टी कन्ना द्वारा नियंत्रित एक श्रीलंकाई ड्रग माफिया से संबंधित है, जिसका सहयोगी पाकिस्तान स्थित मादक पदार्थों और हथियारों का आपूर्तिकर्ता हाजी सलीम है, जो भारत और श्रीलंका में प्रतिबंधित लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम का पुनरुत्थान करने के लिए अवैध मादक पदार्थों और हथियारों का काम कर रहा है। एनआईए ने आठ जुलाई दो हज़ार बाईस को इस मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। एनआईए ने कहा कि मामले में आगे की जांच चल रही है। - यह भी पढ़ेंः-ऐसे करें ग्लैमरस लुक पाने के लिए मेकअप, सब देखते रहे जाएंगे!
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. रोहित शेट्टी की फिल्म सिंबा हाल ही में रिलीज हुई और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया. रणवीर सिंह और सारा अली खान की इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया. आमतौर पर रोहित शेट्टी की फिल्म के दर्शक लबड़े फैन है. वो चाहे उनकी कोई कॉमेडी फिल्म हो या फिर एक्शन से भरपूर. रोहित शेट्टी ने अपनी अगली फिल्म का भी ऐलान कर दिया है. उनकी अगली फिल्म सूर्यवंशी होगी जिसमें अक्षय कुमार लीड रोल प्ले करते नजर आएंगे इस बात की आपको जानकारी पहले मिल चुकी है लेकिन जो लोग ये समझ रहे हैं कि सूर्यवंशी तमील फिल्म का रीमेल होगी उनके लिए रोहित शेट्टी ने अपना एक बयान जारी किया है जिसमें ये साफ हो गया है कि सूर्यवंशी अपनी एक अलग कहानी के साथ रिलीज होगी ना ही किसी फिल्म का रीमेक होगी. रोहित शेट्टी ने अपने बयान में कहा है, 'मैंने किसी तमिल फिल्म का राईट फिल्म सूर्यवंशी के लिए खरीदा है ये बिल्कुक गलत खबर है. ' अक्षय कुमार की सूर्यवंशी को प्रोड्यूस करने के साथ साथ निर्देशन का काम भी रोहित शेट्टी ही संभालेंगे. इस फिल्म की कहानी किसी फिल्म से मेल खाती नहीं होगी. आपको बता दें रोहित शेट्टी पहली बार अक्षय कुमार के साथ काम करने जा रहे है. इतना ही नहीं सुनने में तो ये भी आ रहा है कि सिंबा स्टार रणवीर सिंह और अजय देवगन का भी केमियो रोल फिल्म में देखने को मिलेगा. सूर्यवंशी में अक्षय कुमार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड जैसा की खबरें आ रही हैं. अक्षय कुमार की कई फिल्मे रिलीज होने जा रही है. सूर्यवंशी के अलावा अक्षय कुमार हाउसफुल 4 और मिशन मंगल में भी नजर आएंगे. इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ नित्या मेनन, शर्मन जोशी, तापसी पन्नू, विद्या बालन जैसे कलाकार अहम रोल निभाते नजर आएंगे. अक्षय कुमार की फिल्मों को लेकर उनके फैंस में काफी उत्साह रहता है तो ऐसे में सूर्यवंशी में उनके अलग किरदार में नजर आना उनके फैंस को उत्साह को और बढ़ा दिया है. Rohit Shetty clarifies: News that Rohit Shetty has bought rights of a #Tamil film for #Sooryavanshi is untrue and baseless... Akshay Kumar starrer #Sooryavanshi, produced and directed by Rohit Shetty, is an original story and not inspired from any film, the statement reads.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. रोहित शेट्टी की फिल्म सिंबा हाल ही में रिलीज हुई और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया. रणवीर सिंह और सारा अली खान की इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया. आमतौर पर रोहित शेट्टी की फिल्म के दर्शक लबड़े फैन है. वो चाहे उनकी कोई कॉमेडी फिल्म हो या फिर एक्शन से भरपूर. रोहित शेट्टी ने अपनी अगली फिल्म का भी ऐलान कर दिया है. उनकी अगली फिल्म सूर्यवंशी होगी जिसमें अक्षय कुमार लीड रोल प्ले करते नजर आएंगे इस बात की आपको जानकारी पहले मिल चुकी है लेकिन जो लोग ये समझ रहे हैं कि सूर्यवंशी तमील फिल्म का रीमेल होगी उनके लिए रोहित शेट्टी ने अपना एक बयान जारी किया है जिसमें ये साफ हो गया है कि सूर्यवंशी अपनी एक अलग कहानी के साथ रिलीज होगी ना ही किसी फिल्म का रीमेक होगी. रोहित शेट्टी ने अपने बयान में कहा है, 'मैंने किसी तमिल फिल्म का राईट फिल्म सूर्यवंशी के लिए खरीदा है ये बिल्कुक गलत खबर है. ' अक्षय कुमार की सूर्यवंशी को प्रोड्यूस करने के साथ साथ निर्देशन का काम भी रोहित शेट्टी ही संभालेंगे. इस फिल्म की कहानी किसी फिल्म से मेल खाती नहीं होगी. आपको बता दें रोहित शेट्टी पहली बार अक्षय कुमार के साथ काम करने जा रहे है. इतना ही नहीं सुनने में तो ये भी आ रहा है कि सिंबा स्टार रणवीर सिंह और अजय देवगन का भी केमियो रोल फिल्म में देखने को मिलेगा. सूर्यवंशी में अक्षय कुमार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड जैसा की खबरें आ रही हैं. अक्षय कुमार की कई फिल्मे रिलीज होने जा रही है. सूर्यवंशी के अलावा अक्षय कुमार हाउसफुल चार और मिशन मंगल में भी नजर आएंगे. इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ नित्या मेनन, शर्मन जोशी, तापसी पन्नू, विद्या बालन जैसे कलाकार अहम रोल निभाते नजर आएंगे. अक्षय कुमार की फिल्मों को लेकर उनके फैंस में काफी उत्साह रहता है तो ऐसे में सूर्यवंशी में उनके अलग किरदार में नजर आना उनके फैंस को उत्साह को और बढ़ा दिया है. Rohit Shetty clarifies: News that Rohit Shetty has bought rights of a #Tamil film for #Sooryavanshi is untrue and baseless... Akshay Kumar starrer #Sooryavanshi, produced and directed by Rohit Shetty, is an original story and not inspired from any film, the statement reads.
के अर्द्धभाग को मगध भाषा और संस्कृत भाषा (2) मे प्रवर्ता देते हैं। न केवल भाषा ही वल्कि प्रीति भी वे सर्वजन समूह मे पैदा कर देते है। अर्थात सब जनता मागध देव के प्रताप से मागध भाषा मे बोलते है और प्रीतिकर देव के प्रताप से आपस मे मित्रता से रहते है । ये तो देव कृत अतिशय हुये । इन उद्धरणो से यह प्रक्ट है कि भगवान की ध्वनि का सर्व भाषा रूप होना देवकृत नहीं है किन्तु दिव्यध्वनिका वह खास स्वभाव है। जिसे समतभद्र जैसे प्रभावशाली आचार्य भी स्वीकार करते है । जिसका उल्लेख इस लेख मे ऊपर किया जा चुका है । जैसे हम लोगो की अपेक्षा अहंत की ज्ञान आदि आतरिक शक्तिया अलौकिक होती हैं । तैसे ही उनकी वाह्य अवस्था मे भी हम से विशेषता होजाती है । भीतरी शक्तिया परिपूर्ण प्रकट होजाने के कारण अहंत का प्रभाव इतना लोकोत्तर बन जाता है कि उसे देखकर साधारण लोग आश्चर्य करने लग जाते हैं । गहन बात को समझने के लिये बुद्धि भी गहन चाहिये । यही कारण है जो समतभद्रादि जैसे विशाल प्रतिमाधारी आचार्य अतिशयो को अक्षरश मानते हैं किन्तु आज कल के ज्ञान लवदुविदग्ध पुरुष उनके मानने में हिचकिचाहट करते हैं। उन्हे समझना चाहिये कि योग की अचित्य महिमा है । फिर अर्हत तो प्रम योगी हैं उनकी लोकोत्तर विभूति मे तो सदेह को कोई स्थान ही नहीं रहता। आदि पुराण मे भी कहा है किमहीयसामचित्या हि योगजाः शक्ति संपद. ॥४॥ अर्थ - महा पुरुषो की योग से उत्पन्न शक्ति सपदाये अचित्य होती है 1 स० नोट- कटारियाजी के लेख विद्वत्ता पूर्ण एव नई खोज को लिए हुये होते हैं । यह लेख भी बहुत ही परिश्रम के साथ लिखा गया है । पाठको को इसमे कुछ नवीनता मालूम होगी । फिर भी अभी यह विषय विशेष स्पष्ट होना चाहिये, जिससे श्रद्धा के सिवाय सर्व साधारण विद्वानो की बुद्धि मे भी यह बात आसके । विद्वान लेखक ने आदि पुराण पर्व २३ का ७३ वां श्लोक देकर जो शका समाधान किया है वह बहुत अस्पष्ट प्रतीत होता है । आशा है कि कटारियाजी इस विषय को और भी अधिक विस्तार से लिखकर स्पष्ट करेंगे । जैन कर्म सिद्धांत एक मुमुझु प्राणी के सामने ४ प्रश्न उपस्थित होते हैं१ ससार क्या है ? २. ससारके कारण क्या हैं? ३. मोक्ष क्या है ? ४. मोक्ष के क्या कारण है ? इन्ही चारो प्रश्नों के समाधान में ७ तत्व छिपे हुए हैं और उन्ही के साथ कर्म सिद्धति भी । चेतन अचेतन पदार्थों से भरा हुआ जो स्थान है वह ससार है। इस प्रथम प्रश्न के उत्तर मे २ तत्व आते हैं - जीव और अजीव । चतुर्गतिरूप दुखमय ससार मे यह जीव कर्मों के फल से परिभ्रमण किया करता है और जब तक कर्म आ-आकार जीव के बधते रहते हैं तब तक जीवका ससारसे छूटना नही हो सकता है । इस दूसरे प्रश्न के उत्तर मे आस्रव और बध ये दो तत्व आ जाते है । सव कर्मों के बन्धन से छूट जाना इसका नाम मोक्ष है । इस तीसरे प्रश्न के उत्तर मे मोक्षतत्व आ जाता है। नवीन कर्मों का वन्ध नही होने देना और पुराने बधे कर्मों को खिपा देना ये दो बाते मोक्ष की कारण है, इस चौथे प्रश्न के उत्तर में सवर और निर्जरा ये दो तत्व आ जाते हैं । इस प्रकार चारों प्रश्नों के समाधान मे जीव, अजीव, आस्रव, वध, सवर, निर्जरा और मोक्ष इन ७ तत्वों की उपलब्धि होती है। इन्ही सत्यार्थ ७ तत्वो के श्रद्धान करने को जैनधर्म मे सम्यग्दर्शन ( यथार्थ दृष्टि ) कहा है । यही मोक्ष महल की प्रथम सीढ़ी है। अनन्त जीवो से व्याप्त यह संसार अनादि काल से चला आ रहा है और आगे अनन्तकाल तक चलता रहेगा। इस ससार मे रहने वाले जीवो मे कोई सुखी है, कोई दुखी है, कोई नर है, कोई मादा है, कोई सवल है, कोई निर्बल है, कोई बुद्धिमान है, कोई मूर्ख है, कोई कुरूप है, कोई सुरूप है इत्यादि जीवो की नाना प्रकार की अवस्थाये जो देखी जाती हैं उनका कारण जीव के किए हुए शुभाशुभ कर्मोंके सिवाय और कुछ नहीं है । जब यहप्राणी अपने मन वचन काय से अच्छे-बुरे काम करता है तव आत्मा मे कुछ हरकत पैदा होती है उस हरकत से सूक्ष्म पुद्गल के अश आत्मा से सम्बन्ध कर लेते हैं इनको ही जैनधर्म में कर्म बताया है । इन्ही शुभाशुभ कर्मों के फल से जीव की अच्छी-बुरी अनेक दशायें होती हैं । कुछ लोग इनका कारण ईश्वर को ठहराते हैं । पर यह ठीक नहीं है । अव्वल तो ईश्वर को सृष्टि रचने की जरूरत ही क्यो हुई ? न रचने पर उसकी कौन सी हानि हुई थी ? और रची भी तो किसी को सुखी, किसी को दुखी आदि क्यो बनाया ? यदि कहो कि जीव जो अच्छे बुरे काम करता है उनका वैमा ही अच्छा-बुरा फल ईश्वर देता है। उसी से जीवो को ये विविध प्रकार की अवस्थाये देखने में आती हैं - तो ऐसा कहना भी ठीक नहीं है। क्योंकि जब ईश्वर स्वय बुद्ध, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान है तो जीवो को पहिले पापकर्म करने ही क्यो देता है। जिससे आगे चलकर उसे उन पापियो को फल देने की नौबत आवे । हाकिम के सामने अपराध करे तब तो उमे हाकिम मना करे नही और अपराध हो चुकने के बाद उसे दण्ड देवे, हाकिम का ऐपा करना योग्य नही है । इसके अलावा हम पूछते हैं कि - ईश्वर समस्त सृष्टि मे व्यापक है तो व्यापक मे क्रिया नही हो सकती है । देश से देशान्तर होने को क्रिया कहते [ ★ ★ जैन निबन्ध रत्नावली भाग २ है । व्यापक मे यह क्रिया असम्भव है । क्योकि व्यापक सर्वक्षेत्र मे व्याप्त है इसमे कोई भी क्षेत्र अवशेष नही रहता है जिसमे क्रिया हो सके । क्रिया के बिना सृष्टि की रचना नहीं हो सकती है । अव्यापक माने तो सर्वक्षेत्र की क्रियायें नहीं हो सकेगी । जो ईश्वर को अशरीरी माने तो अमूर्तिक से मूर्तिमान कार्य नही हो सकते हैं वर्ना अमूर्त आकाश से मतं पदार्थ उत्पन्न होने लगेंगे । तब असत् से सत् पदार्थ की उत्पत्ति हो जायेगी । जो ईश्वर को शरीर सहित मान लिया जाये तो ईश्वर सब को दिखना चाहिए और उसे निरन्जन नही कहना चाहिए । जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान माने तो सबको सुखी व सुन्दर बनाना चाहिए । यदि कहोकि बुरे काम करने वालोको बुरा बनाये तो कर्म बलवान हुए, ईश्वर को सर्व शक्तिमान मानना नहीं हो सकेगा । सर्व शक्तिमान नही मानने से समस्त सृष्टि की रचना उससे नही हो सकती है और सब काम उसी के लिये होते है तो वेश्या चोर उसने क्यों बनाये जिससे पापाचरण करना पडे ? सृष्टि बनाने के प्रथम समार में कुछ पदार्थ थे या नहीं ? जो पदार्थ थे तो ईश्वर ने क्या बनाया ? जो पदार्थ नहीं थे तो बिना पदार्थों के सृष्टि कैसे बनाई ? बिना बनाये कुछ नहीं होता तो ईश्वर को स्वय बना हुआ मानें तो सृष्टि को भी स्वयं बनी हुई क्यों न मानें ? सभी काम ईश्वरकृत माने तो प्रत्यक्ष का लोप होगा क्योकि प्रत्यक्ष मे घटपट गृहादिक मनुष्यकृत देखे जाते हैं। सभी काम ईश्वरकृत मानने से जीवो के पुण्यपाप सब निरर्थक हो जायेंगे । न तो किसी को हिंसा आदि पाप कार्यों का फल मिलेगा और न किसी को जप, तप, दया आदि पुण्य कार्यो का फल मिलेगा। क्योंकि ये तो जीवों ने किये ही नहीं, यदि ईश्वर ने किये हैं तो इनका फल जीवो को मिलना क्यो चाहिए ? तक निशक हो प्राणी पाप करेंगे और पुण्य कार्यों से विमुख रहेंगे । इस प्रकार ईश्वर को कर्ता मानने में इस तरह के अन्य भी अनेक विवाद खडे होते है । किसी कर्म का फल हमे तुरन्त मिल जाता है किसी का कुछ माह वाद मिलता है किसी का कुछ वर्ष बाद मिलता है और किसी का जन्मातर मे मिलता है । इसका क्या कारण है ? कर्मों के फल के भोगने मे समय की यह विषमता क्यो देखी जाती है ? ईश्वरवादियों की ओर से इसका ईश्वरेच्छा के सिवाय कोई सन्तोषकारक समाधान नही मिलता । किन्तु कर्मों में ही फलदान की शक्ति मानने वाला कर्मवादी जैनसिद्धात उक्त प्रश्नो का बुद्धिगम्य समाधान करता है । जैन शास्त्री का कहना है कि बाईस भेद स्कन्ध के और एक भेद अणु का इस प्रकार पुद्गल के कुल २३ भेद होते है । इन्ही को २३ वर्गणाये कहते हैं । इनमे से १८ वर्गणाओ का जीव से कुछ सम्बन्ध नहीं है और ५ वर्गणाओ को जीव ग्रहण करता है। उनके नामआहार वर्गणा, तैजस वर्गणा, भाषा मनोवर्गणा और कार्मणवर्गणा है । आहारवर्गणा से औदारिक, वॅक्रियिक और आहारक यतीन शरीर और श्वासोच्छ्वास बनते है । तैजस वर्गणा से तैजस शरीर बनता है। भाषावर्गणा से शब्द वनते है मनोवर्गणा से द्रव्य मन बनता है जिसके द्वारा यह जीव हित-अहित का विचार करता है और कार्मणवर्गणा से ज्ञानावरणादिक अप्ट कर्म बनते हैं। जिन वर्मो के निमित्त से यह जीव चतुर्गतिरूप समार मे भ्रमण करता हुआ नाना प्रकार के दुख उठाता है और जिनके क्षय होने से यह जीव ससार से छूटकर मोक्षपद को पाता है । इन ज्ञानावरणादि अष्टकर्मों के पिंड को ही कार्मण शरीर कहते है । इस प्रकार
के अर्द्धभाग को मगध भाषा और संस्कृत भाषा मे प्रवर्ता देते हैं। न केवल भाषा ही वल्कि प्रीति भी वे सर्वजन समूह मे पैदा कर देते है। अर्थात सब जनता मागध देव के प्रताप से मागध भाषा मे बोलते है और प्रीतिकर देव के प्रताप से आपस मे मित्रता से रहते है । ये तो देव कृत अतिशय हुये । इन उद्धरणो से यह प्रक्ट है कि भगवान की ध्वनि का सर्व भाषा रूप होना देवकृत नहीं है किन्तु दिव्यध्वनिका वह खास स्वभाव है। जिसे समतभद्र जैसे प्रभावशाली आचार्य भी स्वीकार करते है । जिसका उल्लेख इस लेख मे ऊपर किया जा चुका है । जैसे हम लोगो की अपेक्षा अहंत की ज्ञान आदि आतरिक शक्तिया अलौकिक होती हैं । तैसे ही उनकी वाह्य अवस्था मे भी हम से विशेषता होजाती है । भीतरी शक्तिया परिपूर्ण प्रकट होजाने के कारण अहंत का प्रभाव इतना लोकोत्तर बन जाता है कि उसे देखकर साधारण लोग आश्चर्य करने लग जाते हैं । गहन बात को समझने के लिये बुद्धि भी गहन चाहिये । यही कारण है जो समतभद्रादि जैसे विशाल प्रतिमाधारी आचार्य अतिशयो को अक्षरश मानते हैं किन्तु आज कल के ज्ञान लवदुविदग्ध पुरुष उनके मानने में हिचकिचाहट करते हैं। उन्हे समझना चाहिये कि योग की अचित्य महिमा है । फिर अर्हत तो प्रम योगी हैं उनकी लोकोत्तर विभूति मे तो सदेह को कोई स्थान ही नहीं रहता। आदि पुराण मे भी कहा है किमहीयसामचित्या हि योगजाः शक्ति संपद. ॥चार॥ अर्थ - महा पुरुषो की योग से उत्पन्न शक्ति सपदाये अचित्य होती है एक सशून्य नोट- कटारियाजी के लेख विद्वत्ता पूर्ण एव नई खोज को लिए हुये होते हैं । यह लेख भी बहुत ही परिश्रम के साथ लिखा गया है । पाठको को इसमे कुछ नवीनता मालूम होगी । फिर भी अभी यह विषय विशेष स्पष्ट होना चाहिये, जिससे श्रद्धा के सिवाय सर्व साधारण विद्वानो की बुद्धि मे भी यह बात आसके । विद्वान लेखक ने आदि पुराण पर्व तेईस का तिहत्तर वां श्लोक देकर जो शका समाधान किया है वह बहुत अस्पष्ट प्रतीत होता है । आशा है कि कटारियाजी इस विषय को और भी अधिक विस्तार से लिखकर स्पष्ट करेंगे । जैन कर्म सिद्धांत एक मुमुझु प्राणी के सामने चार प्रश्न उपस्थित होते हैंएक ससार क्या है ? दो. ससारके कारण क्या हैं? तीन. मोक्ष क्या है ? चार. मोक्ष के क्या कारण है ? इन्ही चारो प्रश्नों के समाधान में सात तत्व छिपे हुए हैं और उन्ही के साथ कर्म सिद्धति भी । चेतन अचेतन पदार्थों से भरा हुआ जो स्थान है वह ससार है। इस प्रथम प्रश्न के उत्तर मे दो तत्व आते हैं - जीव और अजीव । चतुर्गतिरूप दुखमय ससार मे यह जीव कर्मों के फल से परिभ्रमण किया करता है और जब तक कर्म आ-आकार जीव के बधते रहते हैं तब तक जीवका ससारसे छूटना नही हो सकता है । इस दूसरे प्रश्न के उत्तर मे आस्रव और बध ये दो तत्व आ जाते है । सव कर्मों के बन्धन से छूट जाना इसका नाम मोक्ष है । इस तीसरे प्रश्न के उत्तर मे मोक्षतत्व आ जाता है। नवीन कर्मों का वन्ध नही होने देना और पुराने बधे कर्मों को खिपा देना ये दो बाते मोक्ष की कारण है, इस चौथे प्रश्न के उत्तर में सवर और निर्जरा ये दो तत्व आ जाते हैं । इस प्रकार चारों प्रश्नों के समाधान मे जीव, अजीव, आस्रव, वध, सवर, निर्जरा और मोक्ष इन सात तत्वों की उपलब्धि होती है। इन्ही सत्यार्थ सात तत्वो के श्रद्धान करने को जैनधर्म मे सम्यग्दर्शन कहा है । यही मोक्ष महल की प्रथम सीढ़ी है। अनन्त जीवो से व्याप्त यह संसार अनादि काल से चला आ रहा है और आगे अनन्तकाल तक चलता रहेगा। इस ससार मे रहने वाले जीवो मे कोई सुखी है, कोई दुखी है, कोई नर है, कोई मादा है, कोई सवल है, कोई निर्बल है, कोई बुद्धिमान है, कोई मूर्ख है, कोई कुरूप है, कोई सुरूप है इत्यादि जीवो की नाना प्रकार की अवस्थाये जो देखी जाती हैं उनका कारण जीव के किए हुए शुभाशुभ कर्मोंके सिवाय और कुछ नहीं है । जब यहप्राणी अपने मन वचन काय से अच्छे-बुरे काम करता है तव आत्मा मे कुछ हरकत पैदा होती है उस हरकत से सूक्ष्म पुद्गल के अश आत्मा से सम्बन्ध कर लेते हैं इनको ही जैनधर्म में कर्म बताया है । इन्ही शुभाशुभ कर्मों के फल से जीव की अच्छी-बुरी अनेक दशायें होती हैं । कुछ लोग इनका कारण ईश्वर को ठहराते हैं । पर यह ठीक नहीं है । अव्वल तो ईश्वर को सृष्टि रचने की जरूरत ही क्यो हुई ? न रचने पर उसकी कौन सी हानि हुई थी ? और रची भी तो किसी को सुखी, किसी को दुखी आदि क्यो बनाया ? यदि कहो कि जीव जो अच्छे बुरे काम करता है उनका वैमा ही अच्छा-बुरा फल ईश्वर देता है। उसी से जीवो को ये विविध प्रकार की अवस्थाये देखने में आती हैं - तो ऐसा कहना भी ठीक नहीं है। क्योंकि जब ईश्वर स्वय बुद्ध, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान है तो जीवो को पहिले पापकर्म करने ही क्यो देता है। जिससे आगे चलकर उसे उन पापियो को फल देने की नौबत आवे । हाकिम के सामने अपराध करे तब तो उमे हाकिम मना करे नही और अपराध हो चुकने के बाद उसे दण्ड देवे, हाकिम का ऐपा करना योग्य नही है । इसके अलावा हम पूछते हैं कि - ईश्वर समस्त सृष्टि मे व्यापक है तो व्यापक मे क्रिया नही हो सकती है । देश से देशान्तर होने को क्रिया कहते [ ★ ★ जैन निबन्ध रत्नावली भाग दो है । व्यापक मे यह क्रिया असम्भव है । क्योकि व्यापक सर्वक्षेत्र मे व्याप्त है इसमे कोई भी क्षेत्र अवशेष नही रहता है जिसमे क्रिया हो सके । क्रिया के बिना सृष्टि की रचना नहीं हो सकती है । अव्यापक माने तो सर्वक्षेत्र की क्रियायें नहीं हो सकेगी । जो ईश्वर को अशरीरी माने तो अमूर्तिक से मूर्तिमान कार्य नही हो सकते हैं वर्ना अमूर्त आकाश से मतं पदार्थ उत्पन्न होने लगेंगे । तब असत् से सत् पदार्थ की उत्पत्ति हो जायेगी । जो ईश्वर को शरीर सहित मान लिया जाये तो ईश्वर सब को दिखना चाहिए और उसे निरन्जन नही कहना चाहिए । जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान माने तो सबको सुखी व सुन्दर बनाना चाहिए । यदि कहोकि बुरे काम करने वालोको बुरा बनाये तो कर्म बलवान हुए, ईश्वर को सर्व शक्तिमान मानना नहीं हो सकेगा । सर्व शक्तिमान नही मानने से समस्त सृष्टि की रचना उससे नही हो सकती है और सब काम उसी के लिये होते है तो वेश्या चोर उसने क्यों बनाये जिससे पापाचरण करना पडे ? सृष्टि बनाने के प्रथम समार में कुछ पदार्थ थे या नहीं ? जो पदार्थ थे तो ईश्वर ने क्या बनाया ? जो पदार्थ नहीं थे तो बिना पदार्थों के सृष्टि कैसे बनाई ? बिना बनाये कुछ नहीं होता तो ईश्वर को स्वय बना हुआ मानें तो सृष्टि को भी स्वयं बनी हुई क्यों न मानें ? सभी काम ईश्वरकृत माने तो प्रत्यक्ष का लोप होगा क्योकि प्रत्यक्ष मे घटपट गृहादिक मनुष्यकृत देखे जाते हैं। सभी काम ईश्वरकृत मानने से जीवो के पुण्यपाप सब निरर्थक हो जायेंगे । न तो किसी को हिंसा आदि पाप कार्यों का फल मिलेगा और न किसी को जप, तप, दया आदि पुण्य कार्यो का फल मिलेगा। क्योंकि ये तो जीवों ने किये ही नहीं, यदि ईश्वर ने किये हैं तो इनका फल जीवो को मिलना क्यो चाहिए ? तक निशक हो प्राणी पाप करेंगे और पुण्य कार्यों से विमुख रहेंगे । इस प्रकार ईश्वर को कर्ता मानने में इस तरह के अन्य भी अनेक विवाद खडे होते है । किसी कर्म का फल हमे तुरन्त मिल जाता है किसी का कुछ माह वाद मिलता है किसी का कुछ वर्ष बाद मिलता है और किसी का जन्मातर मे मिलता है । इसका क्या कारण है ? कर्मों के फल के भोगने मे समय की यह विषमता क्यो देखी जाती है ? ईश्वरवादियों की ओर से इसका ईश्वरेच्छा के सिवाय कोई सन्तोषकारक समाधान नही मिलता । किन्तु कर्मों में ही फलदान की शक्ति मानने वाला कर्मवादी जैनसिद्धात उक्त प्रश्नो का बुद्धिगम्य समाधान करता है । जैन शास्त्री का कहना है कि बाईस भेद स्कन्ध के और एक भेद अणु का इस प्रकार पुद्गल के कुल तेईस भेद होते है । इन्ही को तेईस वर्गणाये कहते हैं । इनमे से अट्ठारह वर्गणाओ का जीव से कुछ सम्बन्ध नहीं है और पाँच वर्गणाओ को जीव ग्रहण करता है। उनके नामआहार वर्गणा, तैजस वर्गणा, भाषा मनोवर्गणा और कार्मणवर्गणा है । आहारवर्गणा से औदारिक, वॅक्रियिक और आहारक यतीन शरीर और श्वासोच्छ्वास बनते है । तैजस वर्गणा से तैजस शरीर बनता है। भाषावर्गणा से शब्द वनते है मनोवर्गणा से द्रव्य मन बनता है जिसके द्वारा यह जीव हित-अहित का विचार करता है और कार्मणवर्गणा से ज्ञानावरणादिक अप्ट कर्म बनते हैं। जिन वर्मो के निमित्त से यह जीव चतुर्गतिरूप समार मे भ्रमण करता हुआ नाना प्रकार के दुख उठाता है और जिनके क्षय होने से यह जीव ससार से छूटकर मोक्षपद को पाता है । इन ज्ञानावरणादि अष्टकर्मों के पिंड को ही कार्मण शरीर कहते है । इस प्रकार
यूपी के शाहजहांपुर ज़िले की रहने वाली प्रीति सक्सेना (बदला हुआ नाम) का रंग सांवला है। उनके मम्मी - पापा उनके लिए रिश्ता देख रहे थे लेकिन दो बार उनका रिश्ता सिर्फ इस बात पर टूट गया क्योंकि लड़के को गोरी लड़की चाहिए थी। हमारे समाज में गोरेपन को सुंदरता का पैमाना माना जाता है। हैरानी की बात है कि जिस देश की आधे से ज़्यादा आबादी का रंग गहरा है, उस देश में गोरेपन को पाने के लिए लड़कियां न जाने कितने जतन करती हैं। यहां शादी करने के लिए जितना ज़रूरी लड़की का पढ़ा लिखा होना होता है, कई बार उससे ज़्यादा ज़रूरी उसका गोरा होना हो जाता है। आपने भी किसी न किसी को कहते सुना होगा - लड़की गोरी है, इसे तो अच्छा लड़का मिल जाएगा। लोगों की इसी नब्ज़ को पकड़कर गोरा बनाने वाले उत्पादों का बाज़ार पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। फेयरनेस क्रीम, पाउडर, फेस पैक, फाउंडेशन जैसे न जाने कितने उत्पाद बाज़ार में अपनी पैठ जमाए हैं लेकिन पिछले कुछ समय में इस बाज़ार का हाल कई लोगों ने समझने की कोशिश की है। इसे स्त्रीवाद के बढ़ते कदम कहिए, खुद से प्यार करने की कोशिश या जागरूकता का बढ़ना, कई लड़कियां इस बात को मानने लगी हैं कि उनकी असली रंगत में ही उनकी ख़ूबसूरती है और इसे कोई भी क्रीम बदल नहीं सकती। इस सबके बीच हाल ही में आया एक विज्ञापन लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ये विज्ञापन प्रिटी 24 नाम की क्रीम का है। कहने को तो ये भी एक क्रीम का विज्ञापन ही है ये लेकिन इसमें कहीं भी गोरा बनाने का वादा या दावा नहीं किया गया है। विज्ञापन में लड़कियां कहती हैं - "पहले सिखाया गोरापन ही सुंदरता है, फिर उम्मीद जगाई फेयरनेस पॉसिबल है, पल - पल महसूस करवाया फेयर चेहरा ही सक्सेस है लेकिन एक सच कभी नहीं बताया कि चेहरे का रंग कभी नहीं बदल सकता, बहुत हुआ फेयरनेस - फेयरनेस।" ऐसे समय में जब गोरेपन को ही लड़कियों की सफलता की चाबी माना जाता हो और इसके बाज़ार का कारोबार अरबों रुपयों का हो इस तरह के विज्ञापन एक नई उम्मीद जगाते हैं। कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चली थी, 'डार्क इज़ ब्यूटीफुल'। इस कैंपेन को 'वुमेन ऑफ वर्थ' नाम के ऑर्गेनाइजेशन ने शुरू किया था। इसके विज्ञापन में अभिनेत्री नंदिता दास को लिया गया था जो महिलाओं से ये अपील कर रही थीं कि अपनी फेयरनेस क्रीम के साथ इस ख्याल को भी दिमाग से निकालकर फेंक दो कि सांवला रंग बुरा होता है। भारत में अपनी रंगत को गोरा करना हमेशा से ही चलन में रहा है लेकिन जैसे - जैसे समाज पर बाज़ारवाद हावी होता गया गोरा बनाने की क्रीम ने भी यहां अपना बर्चस्व बना लिया। पुराने ज़माने में लोग हल्दी, नींबू, चंदन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल गोरा होने के लिए करते थे, बाद में इनकी जगह क्रीम ने ले ली। 1975 में हिंदुस्तान यूनीलिवर ने 'फेयर एंड लवली' नाम से एक क्रीम निकाली जो त्वचा की रंगत को हल्का करने का दावा कर रही थी। इसके बाद कई और कंपनियां भी इसी ढर्रे पर चल पड़ीं। शुरुआत में तो ये सिर्फ लड़कियों के लिए ही था लेकिन 2005 में जब इमामी ने 'फेयर एंड हैंडसम' क्रीम लॉन्च की तो गोरे होने के लिए पुरुषों की बेताबी भी बढ़ने लगी। ड्रमडॉटकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ फेयर एंड लवली का भारतीय बाज़ार सालाना 2000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का हो गया है। फ्यूचर मार्केट इनसाइट की रिसर्च के मुताबिक, त्वचा के रंग को हल्का बनाने वाले उत्पादों का वैश्विक बाज़ार 2027 तक 890 करोड़ डॉलर का हो जाएगा। 2017 में ये बाज़ार 480 करोड़ डॉलर का था। जहां गोरा बनाने का दावा करने वाले उत्पादों का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है वहीं ये भी सच है कि ये उत्पाद त्वचा के लिए बेहद ख़तरनाक होते हैं। सीएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत सारी बड़ी कंपनियों के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में हैवी मेटल जैसे अर्सेनिक, कैडमियम, लेड, मरकरी, निकेल आदि पाए गए हैं। ये वो मेटल हैं, जो शरीर से लंबे समय तक टच में रहें, तो कैंसर और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लखनऊ के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अबीर सारस्वत बताते हैं, "ऐसी कोई क्रीम नहीं है जो किसी को गोरा बना दे। फेयरनेस क्रीम के कई नुकसान भी होते हैं।" वह बताते हैं कि अलग अलग क्रीमों का त्वचा पर अलग - अलग प्रभाव होता है। कई बड़े ब्रांड जो क्रीम बनाते हैं उनमें हानिकारक तत्व इतने ज़्यादा नहीं होते लेकिन ये भी सच है कि ये कोई भी प्रोडक्ट रंग गोरा नहीं कर सकते, चाहे इनकी कीमत कितनी भी ज़्यादा हो। डॉ. सारस्वत कहते हैं कि गोरेपन का दावा करने वाले ज़्यादातर भ्रामक प्रचार ही करते हैं ऐसे में अगर केाई कंपनी अपने विज्ञापन में नए तरीके का प्रयोग करती है और इस तरह की सामाजिक बुराई को दूर करने की पहल करती है तो ये वाकई तारीफ की बात है लेकिन ये बात भी सच है कि हर कॉस्मेटिक क्रीम का कहीं न कहीं कुछ नुकसान तो त्वचा पर होता है इसलिए इनका इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है। इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए 25 जुलाई 2016 को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर ने संसद में आवाज़ उठाई थी कि सौंदर्य प्रसाधनों का प्रचार करने वाली कुछ विज्ञापन कंपनियां दावा करती हैं कि इन क्रीमों के इस्तेमाल से रंग गोरा हो जाएगा। यह दावा वास्तव में न केवल रंगभेद को बढ़ावा देता है बल्कि इससे औरतों में हीन भावना भी पैदा होती है। उन्होंने ये भी कहा कि क्या गोरेपन का दावा करने वाली एजेंसियां या इनमें काम करने वाले मॉडल इन क्रीमों का प्रयोग करती हैं। फिर ये एजेंसियां किस आधार पर यह दावा करती हैं कि क्रीम से रंग गोरा हो जाएगा? इसके बाद इस बात की चर्चा हुई थी कि शायद अब गोरापन बढ़ाने का दावा करने वाली क्रीमों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी। इसके बाद अगस्त में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी स्टेरॉयड-लेस फेयरनेस क्रीम की अनियमित बिक्री को रोकने संबंधी नियम बनाने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसमें कुछ त्वचा रोग विशेषज्ञ फेयरनेस क्रीम की काउंटर द सेल जांच करेंगे कि कहीं उसमें स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले स्टेरॉइड हॉर्मोन कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है। हालांकि इस बात का अभी तक कोई परिणाम समाने नहीं आया है। हालांकि अगर आने वाले समय में ये बातें लागू हो जाती हैं तो गोरेपन का दावा करने वाले उत्पादों पर नकारात्मक असर ज़रूर पड़ेगा।
यूपी के शाहजहांपुर ज़िले की रहने वाली प्रीति सक्सेना का रंग सांवला है। उनके मम्मी - पापा उनके लिए रिश्ता देख रहे थे लेकिन दो बार उनका रिश्ता सिर्फ इस बात पर टूट गया क्योंकि लड़के को गोरी लड़की चाहिए थी। हमारे समाज में गोरेपन को सुंदरता का पैमाना माना जाता है। हैरानी की बात है कि जिस देश की आधे से ज़्यादा आबादी का रंग गहरा है, उस देश में गोरेपन को पाने के लिए लड़कियां न जाने कितने जतन करती हैं। यहां शादी करने के लिए जितना ज़रूरी लड़की का पढ़ा लिखा होना होता है, कई बार उससे ज़्यादा ज़रूरी उसका गोरा होना हो जाता है। आपने भी किसी न किसी को कहते सुना होगा - लड़की गोरी है, इसे तो अच्छा लड़का मिल जाएगा। लोगों की इसी नब्ज़ को पकड़कर गोरा बनाने वाले उत्पादों का बाज़ार पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। फेयरनेस क्रीम, पाउडर, फेस पैक, फाउंडेशन जैसे न जाने कितने उत्पाद बाज़ार में अपनी पैठ जमाए हैं लेकिन पिछले कुछ समय में इस बाज़ार का हाल कई लोगों ने समझने की कोशिश की है। इसे स्त्रीवाद के बढ़ते कदम कहिए, खुद से प्यार करने की कोशिश या जागरूकता का बढ़ना, कई लड़कियां इस बात को मानने लगी हैं कि उनकी असली रंगत में ही उनकी ख़ूबसूरती है और इसे कोई भी क्रीम बदल नहीं सकती। इस सबके बीच हाल ही में आया एक विज्ञापन लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ये विज्ञापन प्रिटी चौबीस नाम की क्रीम का है। कहने को तो ये भी एक क्रीम का विज्ञापन ही है ये लेकिन इसमें कहीं भी गोरा बनाने का वादा या दावा नहीं किया गया है। विज्ञापन में लड़कियां कहती हैं - "पहले सिखाया गोरापन ही सुंदरता है, फिर उम्मीद जगाई फेयरनेस पॉसिबल है, पल - पल महसूस करवाया फेयर चेहरा ही सक्सेस है लेकिन एक सच कभी नहीं बताया कि चेहरे का रंग कभी नहीं बदल सकता, बहुत हुआ फेयरनेस - फेयरनेस।" ऐसे समय में जब गोरेपन को ही लड़कियों की सफलता की चाबी माना जाता हो और इसके बाज़ार का कारोबार अरबों रुपयों का हो इस तरह के विज्ञापन एक नई उम्मीद जगाते हैं। कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चली थी, 'डार्क इज़ ब्यूटीफुल'। इस कैंपेन को 'वुमेन ऑफ वर्थ' नाम के ऑर्गेनाइजेशन ने शुरू किया था। इसके विज्ञापन में अभिनेत्री नंदिता दास को लिया गया था जो महिलाओं से ये अपील कर रही थीं कि अपनी फेयरनेस क्रीम के साथ इस ख्याल को भी दिमाग से निकालकर फेंक दो कि सांवला रंग बुरा होता है। भारत में अपनी रंगत को गोरा करना हमेशा से ही चलन में रहा है लेकिन जैसे - जैसे समाज पर बाज़ारवाद हावी होता गया गोरा बनाने की क्रीम ने भी यहां अपना बर्चस्व बना लिया। पुराने ज़माने में लोग हल्दी, नींबू, चंदन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल गोरा होने के लिए करते थे, बाद में इनकी जगह क्रीम ने ले ली। एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में हिंदुस्तान यूनीलिवर ने 'फेयर एंड लवली' नाम से एक क्रीम निकाली जो त्वचा की रंगत को हल्का करने का दावा कर रही थी। इसके बाद कई और कंपनियां भी इसी ढर्रे पर चल पड़ीं। शुरुआत में तो ये सिर्फ लड़कियों के लिए ही था लेकिन दो हज़ार पाँच में जब इमामी ने 'फेयर एंड हैंडसम' क्रीम लॉन्च की तो गोरे होने के लिए पुरुषों की बेताबी भी बढ़ने लगी। ड्रमडॉटकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ फेयर एंड लवली का भारतीय बाज़ार सालाना दो हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा का हो गया है। फ्यूचर मार्केट इनसाइट की रिसर्च के मुताबिक, त्वचा के रंग को हल्का बनाने वाले उत्पादों का वैश्विक बाज़ार दो हज़ार सत्ताईस तक आठ सौ नब्बे करोड़ डॉलर का हो जाएगा। दो हज़ार सत्रह में ये बाज़ार चार सौ अस्सी करोड़ डॉलर का था। जहां गोरा बनाने का दावा करने वाले उत्पादों का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है वहीं ये भी सच है कि ये उत्पाद त्वचा के लिए बेहद ख़तरनाक होते हैं। सीएसई की एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत सारी बड़ी कंपनियों के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में हैवी मेटल जैसे अर्सेनिक, कैडमियम, लेड, मरकरी, निकेल आदि पाए गए हैं। ये वो मेटल हैं, जो शरीर से लंबे समय तक टच में रहें, तो कैंसर और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लखनऊ के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अबीर सारस्वत बताते हैं, "ऐसी कोई क्रीम नहीं है जो किसी को गोरा बना दे। फेयरनेस क्रीम के कई नुकसान भी होते हैं।" वह बताते हैं कि अलग अलग क्रीमों का त्वचा पर अलग - अलग प्रभाव होता है। कई बड़े ब्रांड जो क्रीम बनाते हैं उनमें हानिकारक तत्व इतने ज़्यादा नहीं होते लेकिन ये भी सच है कि ये कोई भी प्रोडक्ट रंग गोरा नहीं कर सकते, चाहे इनकी कीमत कितनी भी ज़्यादा हो। डॉ. सारस्वत कहते हैं कि गोरेपन का दावा करने वाले ज़्यादातर भ्रामक प्रचार ही करते हैं ऐसे में अगर केाई कंपनी अपने विज्ञापन में नए तरीके का प्रयोग करती है और इस तरह की सामाजिक बुराई को दूर करने की पहल करती है तो ये वाकई तारीफ की बात है लेकिन ये बात भी सच है कि हर कॉस्मेटिक क्रीम का कहीं न कहीं कुछ नुकसान तो त्वचा पर होता है इसलिए इनका इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है। इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए पच्चीस जुलाई दो हज़ार सोलह को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर ने संसद में आवाज़ उठाई थी कि सौंदर्य प्रसाधनों का प्रचार करने वाली कुछ विज्ञापन कंपनियां दावा करती हैं कि इन क्रीमों के इस्तेमाल से रंग गोरा हो जाएगा। यह दावा वास्तव में न केवल रंगभेद को बढ़ावा देता है बल्कि इससे औरतों में हीन भावना भी पैदा होती है। उन्होंने ये भी कहा कि क्या गोरेपन का दावा करने वाली एजेंसियां या इनमें काम करने वाले मॉडल इन क्रीमों का प्रयोग करती हैं। फिर ये एजेंसियां किस आधार पर यह दावा करती हैं कि क्रीम से रंग गोरा हो जाएगा? इसके बाद इस बात की चर्चा हुई थी कि शायद अब गोरापन बढ़ाने का दावा करने वाली क्रीमों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी। इसके बाद अगस्त में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी स्टेरॉयड-लेस फेयरनेस क्रीम की अनियमित बिक्री को रोकने संबंधी नियम बनाने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसमें कुछ त्वचा रोग विशेषज्ञ फेयरनेस क्रीम की काउंटर द सेल जांच करेंगे कि कहीं उसमें स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले स्टेरॉइड हॉर्मोन कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है। हालांकि इस बात का अभी तक कोई परिणाम समाने नहीं आया है। हालांकि अगर आने वाले समय में ये बातें लागू हो जाती हैं तो गोरेपन का दावा करने वाले उत्पादों पर नकारात्मक असर ज़रूर पड़ेगा।
प्रज्ञान ओझा को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए चुके ओझा की गेंदबाजी एक्शन पर 2014 में शिकायत भी हुई थी। नई दिल्ली। भारत के एक और शानदार गेंदबाज का करियर समाप्त हो गया। ये गेंदबाज कोई और नहीं बाएं हाथ के अनुभवी स्पिनर प्रज्ञान ओझा हैं। छह साल पहले खेला गया टेस्ट मैच प्रज्ञान के करियर का आखिरी टेस्ट मैच साबित हुआ। आखिरी बार 2013 प्रज्ञान, सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में भारत की ओर से मैदान पर उतरे थे। प्रज्ञान बेहतरीन स्पिनर थे। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले क्रिकेटर ने अपने छोटे टेस्ट करियर में महज 24 टेस्ट मैच खेलकर 113 विकेट हासिल किए। टीम इंडिया में वापसी के जब सारे रास्ते बंद हो गए तो प्रज्ञान ने अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से तत्काल प्रभाव से संन्यास लेने की अनाउंसमेंत कर दी। प्रज्ञान ओझा ने एक ट्वीट में अपने संन्यास की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "मैं अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से तुरंत प्रभाव से संन्यास ले रहा हूं। " स्पिनर ने ट्वीट में यह भी कहा, "भारत के लिए इस लेवल पर खेलना मेरा हमेशा से सपना था। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि कितना खुशकिस्मत हूं कि मेरा सपना पूरा हुआ और मुझे देशवासियों का इतना प्यार और सम्मान मिला। " प्रज्ञान ओझा ने 23 टेस्ट मैच 2009 से 2013 के दौरान खेले। उन्हें एकदिवसीय मैचों में भी मौका मिला, लेकिन ये बेहद कम था। प्रज्ञा ने कुल 18 एक दिवसीय मैच खेले जिसमें 21 विकेट हासिल किए। प्रज्ञान ओझा को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए चुके ओझा की गेंदबाजी एक्शन पर 2014 में शिकायत भी हुई थी। जिसके बाद जांच हुई और 2015 में उनके गेंदबाजी एक्शन को फिर वैध ठहरा दिया।
प्रज्ञान ओझा को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए चुके ओझा की गेंदबाजी एक्शन पर दो हज़ार चौदह में शिकायत भी हुई थी। नई दिल्ली। भारत के एक और शानदार गेंदबाज का करियर समाप्त हो गया। ये गेंदबाज कोई और नहीं बाएं हाथ के अनुभवी स्पिनर प्रज्ञान ओझा हैं। छह साल पहले खेला गया टेस्ट मैच प्रज्ञान के करियर का आखिरी टेस्ट मैच साबित हुआ। आखिरी बार दो हज़ार तेरह प्रज्ञान, सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में भारत की ओर से मैदान पर उतरे थे। प्रज्ञान बेहतरीन स्पिनर थे। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले क्रिकेटर ने अपने छोटे टेस्ट करियर में महज चौबीस टेस्ट मैच खेलकर एक सौ तेरह विकेट हासिल किए। टीम इंडिया में वापसी के जब सारे रास्ते बंद हो गए तो प्रज्ञान ने अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से तत्काल प्रभाव से संन्यास लेने की अनाउंसमेंत कर दी। प्रज्ञान ओझा ने एक ट्वीट में अपने संन्यास की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "मैं अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से तुरंत प्रभाव से संन्यास ले रहा हूं। " स्पिनर ने ट्वीट में यह भी कहा, "भारत के लिए इस लेवल पर खेलना मेरा हमेशा से सपना था। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि कितना खुशकिस्मत हूं कि मेरा सपना पूरा हुआ और मुझे देशवासियों का इतना प्यार और सम्मान मिला। " प्रज्ञान ओझा ने तेईस टेस्ट मैच दो हज़ार नौ से दो हज़ार तेरह के दौरान खेले। उन्हें एकदिवसीय मैचों में भी मौका मिला, लेकिन ये बेहद कम था। प्रज्ञा ने कुल अट्ठारह एक दिवसीय मैच खेले जिसमें इक्कीस विकेट हासिल किए। प्रज्ञान ओझा को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए चुके ओझा की गेंदबाजी एक्शन पर दो हज़ार चौदह में शिकायत भी हुई थी। जिसके बाद जांच हुई और दो हज़ार पंद्रह में उनके गेंदबाजी एक्शन को फिर वैध ठहरा दिया।
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अतीक अहमद की मौत के बाद अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया, उत्तरप्रदेशः उत्तरप्रदेश के माफिया अतीक अहमद का खेल तमाम, कम से कम 100 आपराधिक मामलों का सामना करने वाले उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को आज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चिकित्सा जांच के लिए ले जाते समय गोली से मार दिया गया। जिसके बाद उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्य्मंत्री अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा की इस घटना के बाद उत्तरप्रदेश में भय का वातावरण बन जायेगा, यह लोग जान कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा की उत्तरप्रदेश में अपराध की पराकाष्ठा हो गई है, और अपराधियों के हौसले बुलंद है। जब पुलिस के बीच किसी की हत्या की जा सकती है तो आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेता है? अतीक अहमद को गोली मारने वाले तीन युवाओं का नाम लोकेश तिवारी, सुन्नी और अरुण मौर्य के रूप में सामने आया है।
अतीक अहमद की मौत के बाद अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया, उत्तरप्रदेशः उत्तरप्रदेश के माफिया अतीक अहमद का खेल तमाम, कम से कम एक सौ आपराधिक मामलों का सामना करने वाले उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को आज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चिकित्सा जांच के लिए ले जाते समय गोली से मार दिया गया। जिसके बाद उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्य्मंत्री अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा की इस घटना के बाद उत्तरप्रदेश में भय का वातावरण बन जायेगा, यह लोग जान कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट में कहा की उत्तरप्रदेश में अपराध की पराकाष्ठा हो गई है, और अपराधियों के हौसले बुलंद है। जब पुलिस के बीच किसी की हत्या की जा सकती है तो आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेता है? अतीक अहमद को गोली मारने वाले तीन युवाओं का नाम लोकेश तिवारी, सुन्नी और अरुण मौर्य के रूप में सामने आया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांधी जयंती के मौके पर कारागार प्रशिक्षण मुख्यालय परिसर में बने कारागार के नवनिर्मित मुख्यालय का मंगलवार शाम को लोकार्पण करेंगे। इस मुख्यालय को डॉ. संपूर्णानंद कारागार प्रशिक्षण संस्थान परिसर में बनाया गया है। यह कार्यक्रम शाम 4:00 बजे आयोजित किया जायेगा। करीब 10000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पूरी तरह से वातानुकूलित 6 मंजिला इस भवन का निर्माण राजकीय निर्माण निगम ने 47. 61 करोड रुपए से कराया है। इसमें अतिथि ग्रह, संग्रहालय, पुस्तकालय, अभिलेखागार, सभाकक्ष, नियंत्रण कक्ष, बहुउद्देशीय हाल, कैंटीन एवं कार्यालय कक्ष निर्मित किए गए हैं। The post सीएम योगी कारागार के नवनिर्मित मुख्यालय का लोकार्पण करेंगे appeared first on Uttar Pradesh News, UP News ,Hindi News Portal ,यूपी की ताजा खबरें.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांधी जयंती के मौके पर कारागार प्रशिक्षण मुख्यालय परिसर में बने कारागार के नवनिर्मित मुख्यालय का मंगलवार शाम को लोकार्पण करेंगे। इस मुख्यालय को डॉ. संपूर्णानंद कारागार प्रशिक्षण संस्थान परिसर में बनाया गया है। यह कार्यक्रम शाम चार:शून्य बजे आयोजित किया जायेगा। करीब दस हज़ार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पूरी तरह से वातानुकूलित छः मंजिला इस भवन का निर्माण राजकीय निर्माण निगम ने सैंतालीस. इकसठ करोड रुपए से कराया है। इसमें अतिथि ग्रह, संग्रहालय, पुस्तकालय, अभिलेखागार, सभाकक्ष, नियंत्रण कक्ष, बहुउद्देशीय हाल, कैंटीन एवं कार्यालय कक्ष निर्मित किए गए हैं। The post सीएम योगी कारागार के नवनिर्मित मुख्यालय का लोकार्पण करेंगे appeared first on Uttar Pradesh News, UP News ,Hindi News Portal ,यूपी की ताजा खबरें.
यदि आप इस सुंदर जानवर से मोहित हो गए थे औरइसे घर पर लेने का फैसला किया, तो पहले आपको ध्यान देना चाहिए कि आप इसे क्या खिलाऊंगे। हम इस बारे में हमारे लेख में चर्चा करेंगे। गिनी पिग एक शाकाहारी कृंतक है हर कोई जानता है कि सब्जी खाना मोटे और खराब है। इस कारण से, आवश्यक पदार्थों से खुद को सुनिश्चित करने के लिए, जानवरों को बहुत खा जाना चाहिए। यदि ऐसा कृन्तकों प्रकृति में रहते हैं, तो वे बड़ी मात्रा में वनस्पति (ताजा) खाते हैं। ये जानवर लगभग हमेशा खाते हैं, ये नहीं जानते कि रात्रिभोज, नाश्ते और दोपहर के भोजन के रूप में ऐसी चीजें हैं। छोटे भागों में जानवरों की आंत में भोजन लगभग लगातार पहुंचने चाहिए। यह आपके पालतू जानवर के शरीर द्वारा किसी न किसी प्रकार के भोजन के सर्वोत्तम प्रसंस्करण को सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है। एस्कॉर्बिक एसिड का एक अच्छा स्रोत हैफूला हुआ जई और हरी घास जिस दिन कृंतक को विटामिन सी के बीस मिलीग्राम की आवश्यकता होती है, गर्दन की अवधि के दौरान, कण्ठ के लिए थोड़ा अधिक एस्कॉर्बिक एसिड की आवश्यकता होती है - प्रति दिन लगभग 30 मिलीग्राम। यह माइक्रोलेमेंट भी एक सलाद में निहित है,डॉगरोस की जामुन, मीठे काली मिर्च और, ज़ाहिर है, ताजा साग में। कृन्तकों के पीने के कटोरे में, आप 5 मिलीग्राम में विटामिन सी जोड़ सकते हैं (आप इसे पालतू जानवरों की दुकान या पशु चिकित्सा फार्मेसी में खरीद सकते हैं) इसके अलावा, ampoules बेचा और एस्कॉर्बिक एसिड (आप एक नियमित फार्मेसी में भी खरीद सकते हैं)। आप विशेष विटामिनयुक्त भोजन और कृन्तकों के लिए भोजन का उपयोग भी कर सकते हैं। लेकिन हमारे मुख्य विषय पर वापस। गिनी सूअर क्या खाती है? उसका आहार काफी अलग है। सभी फ़ीड को कई उप-प्रजातियों में विभाजित किया जा सकता हैः मोटे, ध्यान केंद्रित और रसदार। इस शब्द का मतलब घास और टहनी है। उनमें बहुत कम नमी होती है, लेकिन बहुत सारे फाइबर होते हैं। इस प्रकार का भोजन अपरिवर्तनीय है। कृंतक के लिए दांत पीसने के लिए जरूरी है, और पेस्टिस्टल्सिस में सुधार करने और आंत में सेलूलोज़ प्रसंस्करण माइक्रोफ्लोरा की व्यवहार्य स्थिति बनाए रखना आवश्यक है। जैसा कि आप जानते हैं, सेलूलोज़ में अवशोषण क्रिया है। यह एक चुंबक की तरह, अपने आप को जहरीले पदार्थों के लिए "आकर्षित करता है" और उन्हें दूर ले जाता है, इस प्रकार आंतों को साफ करता है। इस संबंध में, अपने पालतू जानवर के पिंजरे में हमेशा घास होना चाहिए। इस उत्पाद का एक अन्य लाभ यह है कि यह बहुत धीरे-धीरे खराब हो जाता है। गिनी सूअरों को खिलाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? रसदार फोरेज, यानी, हिरण और सब्जियां। आहार में इस प्रकार का भोजन बहुत सारे पालतू जानवर होना चाहिए। चलो इसके बारे में अधिक जानकारी में बात करते हैं। तो, यह खाना खपत किया जाना चाहिएगिनी सुअर जितना संभव हो उतना भोजन विविधतापूर्ण होना चाहिए। इसलिए, गिनी पिग लाल क्लॉवर, घास का मैदान घास, पौधे, यारो दिया जा सकता है। ध्यान दें कि हरे रंग का सावधानीपूर्वक चयन किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ पौधे कृंतक के लिए हानिकारक हो सकते हैं। मोटाई के अलावा गिनी पिग पर क्या फ़ीड करता हैऔर ताजा हिरण? बेशक, सब्जियां (अजमोद, ब्रोकोली, चीनी गोभी, आदि)। आइए इस विषय के बारे में और बात करें। जैसा कि हम पहले से ही पता चला है, गिनी सूअर सलाद, और इसकी सभी किस्में खाते हैं। यह फ़ीड ताजा होना चाहिए, क्योंकि पत्तियां घंटों के मामले में खराब हो जाती हैं। आनंद के साथ अभी भी गिनी पिग का उपयोग करता हैअजमोद के लिए खाना इसमें बहुत सारे मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस और विटामिन शामिल हैं। एंटीसेप्टिक गुणों के लिए इसकी सराहना की जाती है। अपने पालतू और डिल की पेशकश करें। इसमें लौह, पोटेशियम और कैरोटीन होता है। डिल आंत में गैसों के गठन को कम कर देता है। सच है, इस हिरन को बड़ी मात्रा में नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें कई आवश्यक तेल होते हैं। खीरे गिनी सूअर का पालन करने का विषय हैं। खीरे के रस में कमजोर विरोधी भड़काऊ प्रभाव होता है। इस सब्जी का एक अन्य लाभ इसकी कम कैलोरी सामग्री है। यह उन कृन्तकों को देना उपयोगी है जिन्हें वजन कम करने की आवश्यकता है। लेकिन युवा गिनी सूअर केवल खीरे खिलाओ, भले ही वे उनमें से बहुत शौकीन हों। आखिरकार, एक बढ़ते शरीर को पर्याप्त पोषण प्राप्त करना चाहिए। एस्कॉर्बिक एसिड के लिए रिकॉर्ड धारक मिठाई काली मिर्च है। इसके अलावा, इसमें कैरोटीन की एक बड़ी मात्रा होती है। मिर्च स्लाइस के साथ खिलाया जाना चाहिए, लेकिन, ज़ाहिर है, बिना बीज के। गिनी सुअर के लिए एक और उपयोगी उत्पाद गाजर है। इसमें कई विटामिन, कैरोटीन, ग्लूकोज और ट्रेस तत्व शामिल हैं। टमाटर भी कृंतक मेनू में प्रवेश करना चाहिए। उनमें कैरोटीन और विटामिन सी होता है। पालतू जानवर को केवल परिपक्व फल देना आवश्यक है। ग्रीन टमाटर कृंतकों को नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि उनमें सोलानाइन (एक जहरीला पदार्थ) होता है। जब यह पकाता है, तो यह गिर जाता है। गोभी एक स्वस्थ सब्जी है, लेकिन यह इसके लायक हैसावधानी के साथ। इसमें बहुत सारी चीनी, प्रोटीन और विटामिन, साथ ही जैविक सल्फर भी शामिल है। सच है, गोभी मजबूत गैस गठन का कारण बन सकता है। कृंतक को केवल गोभी की शीर्ष पत्तियां दी जानी चाहिए (अधिमानतः सफेद सिर वाली)। यद्यपि यदि आप ऐसे जानवरों की सामग्री के लिए नए हैं, तो बेहतर है कि अपने पालतू जानवर को ऐसे उत्पाद से खराब न करें। उसे थोड़ा ब्रोकोली देना सबसे अच्छा है, यह इतना खतरनाक नहीं है। सब कुछ के अलावा, गिनी सुअर क्या फ़ीड करता हैउपर्युक्त के? खरबूजे (कद्दू, खरबूजे, तरबूज, आदि), जिनमें बहुत सारे विटामिन, कैरोटीन होते हैं। उन्हें त्वचा के साथ कृंतक स्लाइस को दिया जाना चाहिए। इन जानवरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी zucchini और कद्दू। वे आहार भोजन के रूप में काम करते हैं। कद्दू के बीज कीड़े के खिलाफ एक निवारक हैं। इसके अलावा, उनमें कई विटामिन होते हैं, तत्वों का पता लगाते हैं। इसके अलावा, वे जस्ता का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं। त्वचा की बीमारियों की रोकथाम के लिए यह तत्व आवश्यक है, अच्छी स्थिति में त्वचा को बनाए रखना। कृन्तकों का पोषण संतुलित होना चाहिए। इसलिए, उनके आहार में फल और जामुन शामिल होना चाहिए। उदाहरण के लिए, रोमन उपयोगी है। इसमें बहुत से एस्कॉर्बिक एसिड, कैरोटीन और विटामिन पी शामिल हैं। अंतिम तत्व जहाजों की ताकत बढ़ाता है। नाशपाती और सेब में पेक्टिन, कैरोटीन और बहुत सारी चीनी होती है। इसके अलावा, गिनी सूअर विभिन्न जामुन, संतरे और केले खाने से खुश हैं। यह एक उच्च कैलोरी फ़ीड है। उनमें बहुत सारे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। फ़ीड के इस समूह में अनाज, सेम और बीज शामिल हैं। इसके अलावा इस श्रेणी में तैयार फीड हैं। विशेष रूप से अच्छे उत्पाद हर्बल आटे पर आधारित होते हैं। वयस्क जानवरों को प्रतिदिन बीस ग्राम दिया जाना चाहिए। नर्सिंग और गर्भवती महिलाओं, साथ ही युवा व्यक्तियों को अधिक (लगभग चालीस ग्राम) की आवश्यकता होती है। गिनी सूअरों को खिलाने के लिए कितना सही है? सुबह और रात में ध्यान देना सर्वोत्तम होता है। और जब आप घर पर हों तो एक पिंजरे में रसदार भोजन डालें, ताकि भोजन के बाद इस भोजन के अवशेषों को हटाया जा सके। हमेशा पिंजरे में कृंतक में घास होनी चाहिए, और खनिज-नमक पत्थर भी होना चाहिए। ध्यान दें कि गिनी सूअर बर्दाश्त नहीं करते हैंभुखमरी। एक कृंतक जो किसी कारण से भोजन से इनकार करता है, निर्जलीकरण और थकावट विकसित कर सकता है। यदि आप देखते हैं कि आपकी भूख भूख खो गई है, तो संकोच न करें और तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। गिनी सूअरों में लगातार कुछ करने की आदत हैचबाने के लिए। यह उनके लिए एक असंतोष कर सकते हैं। आखिरकार, केंद्रित फ़ीड की प्रचुर मात्रा में खपत और आसन्न जीवनशैली मोटापे के विकास को जन्म दे सकती है। दुर्भाग्यवश, यह रोगविज्ञान अक्सर घरेलू कृन्तकों में होता है। क्या आपने देखा कि आपके पालतू जानवर बरामद हुए हैं? वजन कम करने के लिए तत्काल उपाय करें। आखिरकार, मोटापे से ग्रस्त जानवर पुनरुत्पादन करने की क्षमता खो देते हैं, और वे प्रतिरक्षा भी खो देते हैं। सही आहार बनाने के लिएगिनी पिग की भोजन, पशु चिकित्सकों की सिफारिशों को पहले ध्यान में रखा जाना चाहिए। आखिरकार, प्रत्येक कृंतक विशेष होता है, और यह संभव है कि पालतू जानवरों को वजन प्राप्त होने के बाद, आपके पालतू जानवरों को अधिक हरी सब्जियों की आवश्यकता होगी, या इसके विपरीत, कुछ उत्पादों को हटाने की आवश्यकता होगी।
यदि आप इस सुंदर जानवर से मोहित हो गए थे औरइसे घर पर लेने का फैसला किया, तो पहले आपको ध्यान देना चाहिए कि आप इसे क्या खिलाऊंगे। हम इस बारे में हमारे लेख में चर्चा करेंगे। गिनी पिग एक शाकाहारी कृंतक है हर कोई जानता है कि सब्जी खाना मोटे और खराब है। इस कारण से, आवश्यक पदार्थों से खुद को सुनिश्चित करने के लिए, जानवरों को बहुत खा जाना चाहिए। यदि ऐसा कृन्तकों प्रकृति में रहते हैं, तो वे बड़ी मात्रा में वनस्पति खाते हैं। ये जानवर लगभग हमेशा खाते हैं, ये नहीं जानते कि रात्रिभोज, नाश्ते और दोपहर के भोजन के रूप में ऐसी चीजें हैं। छोटे भागों में जानवरों की आंत में भोजन लगभग लगातार पहुंचने चाहिए। यह आपके पालतू जानवर के शरीर द्वारा किसी न किसी प्रकार के भोजन के सर्वोत्तम प्रसंस्करण को सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है। एस्कॉर्बिक एसिड का एक अच्छा स्रोत हैफूला हुआ जई और हरी घास जिस दिन कृंतक को विटामिन सी के बीस मिलीग्राम की आवश्यकता होती है, गर्दन की अवधि के दौरान, कण्ठ के लिए थोड़ा अधिक एस्कॉर्बिक एसिड की आवश्यकता होती है - प्रति दिन लगभग तीस मिलीग्राम। यह माइक्रोलेमेंट भी एक सलाद में निहित है,डॉगरोस की जामुन, मीठे काली मिर्च और, ज़ाहिर है, ताजा साग में। कृन्तकों के पीने के कटोरे में, आप पाँच मिलीग्राम में विटामिन सी जोड़ सकते हैं इसके अलावा, ampoules बेचा और एस्कॉर्बिक एसिड । आप विशेष विटामिनयुक्त भोजन और कृन्तकों के लिए भोजन का उपयोग भी कर सकते हैं। लेकिन हमारे मुख्य विषय पर वापस। गिनी सूअर क्या खाती है? उसका आहार काफी अलग है। सभी फ़ीड को कई उप-प्रजातियों में विभाजित किया जा सकता हैः मोटे, ध्यान केंद्रित और रसदार। इस शब्द का मतलब घास और टहनी है। उनमें बहुत कम नमी होती है, लेकिन बहुत सारे फाइबर होते हैं। इस प्रकार का भोजन अपरिवर्तनीय है। कृंतक के लिए दांत पीसने के लिए जरूरी है, और पेस्टिस्टल्सिस में सुधार करने और आंत में सेलूलोज़ प्रसंस्करण माइक्रोफ्लोरा की व्यवहार्य स्थिति बनाए रखना आवश्यक है। जैसा कि आप जानते हैं, सेलूलोज़ में अवशोषण क्रिया है। यह एक चुंबक की तरह, अपने आप को जहरीले पदार्थों के लिए "आकर्षित करता है" और उन्हें दूर ले जाता है, इस प्रकार आंतों को साफ करता है। इस संबंध में, अपने पालतू जानवर के पिंजरे में हमेशा घास होना चाहिए। इस उत्पाद का एक अन्य लाभ यह है कि यह बहुत धीरे-धीरे खराब हो जाता है। गिनी सूअरों को खिलाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? रसदार फोरेज, यानी, हिरण और सब्जियां। आहार में इस प्रकार का भोजन बहुत सारे पालतू जानवर होना चाहिए। चलो इसके बारे में अधिक जानकारी में बात करते हैं। तो, यह खाना खपत किया जाना चाहिएगिनी सुअर जितना संभव हो उतना भोजन विविधतापूर्ण होना चाहिए। इसलिए, गिनी पिग लाल क्लॉवर, घास का मैदान घास, पौधे, यारो दिया जा सकता है। ध्यान दें कि हरे रंग का सावधानीपूर्वक चयन किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ पौधे कृंतक के लिए हानिकारक हो सकते हैं। मोटाई के अलावा गिनी पिग पर क्या फ़ीड करता हैऔर ताजा हिरण? बेशक, सब्जियां । आइए इस विषय के बारे में और बात करें। जैसा कि हम पहले से ही पता चला है, गिनी सूअर सलाद, और इसकी सभी किस्में खाते हैं। यह फ़ीड ताजा होना चाहिए, क्योंकि पत्तियां घंटों के मामले में खराब हो जाती हैं। आनंद के साथ अभी भी गिनी पिग का उपयोग करता हैअजमोद के लिए खाना इसमें बहुत सारे मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस और विटामिन शामिल हैं। एंटीसेप्टिक गुणों के लिए इसकी सराहना की जाती है। अपने पालतू और डिल की पेशकश करें। इसमें लौह, पोटेशियम और कैरोटीन होता है। डिल आंत में गैसों के गठन को कम कर देता है। सच है, इस हिरन को बड़ी मात्रा में नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें कई आवश्यक तेल होते हैं। खीरे गिनी सूअर का पालन करने का विषय हैं। खीरे के रस में कमजोर विरोधी भड़काऊ प्रभाव होता है। इस सब्जी का एक अन्य लाभ इसकी कम कैलोरी सामग्री है। यह उन कृन्तकों को देना उपयोगी है जिन्हें वजन कम करने की आवश्यकता है। लेकिन युवा गिनी सूअर केवल खीरे खिलाओ, भले ही वे उनमें से बहुत शौकीन हों। आखिरकार, एक बढ़ते शरीर को पर्याप्त पोषण प्राप्त करना चाहिए। एस्कॉर्बिक एसिड के लिए रिकॉर्ड धारक मिठाई काली मिर्च है। इसके अलावा, इसमें कैरोटीन की एक बड़ी मात्रा होती है। मिर्च स्लाइस के साथ खिलाया जाना चाहिए, लेकिन, ज़ाहिर है, बिना बीज के। गिनी सुअर के लिए एक और उपयोगी उत्पाद गाजर है। इसमें कई विटामिन, कैरोटीन, ग्लूकोज और ट्रेस तत्व शामिल हैं। टमाटर भी कृंतक मेनू में प्रवेश करना चाहिए। उनमें कैरोटीन और विटामिन सी होता है। पालतू जानवर को केवल परिपक्व फल देना आवश्यक है। ग्रीन टमाटर कृंतकों को नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि उनमें सोलानाइन होता है। जब यह पकाता है, तो यह गिर जाता है। गोभी एक स्वस्थ सब्जी है, लेकिन यह इसके लायक हैसावधानी के साथ। इसमें बहुत सारी चीनी, प्रोटीन और विटामिन, साथ ही जैविक सल्फर भी शामिल है। सच है, गोभी मजबूत गैस गठन का कारण बन सकता है। कृंतक को केवल गोभी की शीर्ष पत्तियां दी जानी चाहिए । यद्यपि यदि आप ऐसे जानवरों की सामग्री के लिए नए हैं, तो बेहतर है कि अपने पालतू जानवर को ऐसे उत्पाद से खराब न करें। उसे थोड़ा ब्रोकोली देना सबसे अच्छा है, यह इतना खतरनाक नहीं है। सब कुछ के अलावा, गिनी सुअर क्या फ़ीड करता हैउपर्युक्त के? खरबूजे , जिनमें बहुत सारे विटामिन, कैरोटीन होते हैं। उन्हें त्वचा के साथ कृंतक स्लाइस को दिया जाना चाहिए। इन जानवरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी zucchini और कद्दू। वे आहार भोजन के रूप में काम करते हैं। कद्दू के बीज कीड़े के खिलाफ एक निवारक हैं। इसके अलावा, उनमें कई विटामिन होते हैं, तत्वों का पता लगाते हैं। इसके अलावा, वे जस्ता का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं। त्वचा की बीमारियों की रोकथाम के लिए यह तत्व आवश्यक है, अच्छी स्थिति में त्वचा को बनाए रखना। कृन्तकों का पोषण संतुलित होना चाहिए। इसलिए, उनके आहार में फल और जामुन शामिल होना चाहिए। उदाहरण के लिए, रोमन उपयोगी है। इसमें बहुत से एस्कॉर्बिक एसिड, कैरोटीन और विटामिन पी शामिल हैं। अंतिम तत्व जहाजों की ताकत बढ़ाता है। नाशपाती और सेब में पेक्टिन, कैरोटीन और बहुत सारी चीनी होती है। इसके अलावा, गिनी सूअर विभिन्न जामुन, संतरे और केले खाने से खुश हैं। यह एक उच्च कैलोरी फ़ीड है। उनमें बहुत सारे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। फ़ीड के इस समूह में अनाज, सेम और बीज शामिल हैं। इसके अलावा इस श्रेणी में तैयार फीड हैं। विशेष रूप से अच्छे उत्पाद हर्बल आटे पर आधारित होते हैं। वयस्क जानवरों को प्रतिदिन बीस ग्राम दिया जाना चाहिए। नर्सिंग और गर्भवती महिलाओं, साथ ही युवा व्यक्तियों को अधिक की आवश्यकता होती है। गिनी सूअरों को खिलाने के लिए कितना सही है? सुबह और रात में ध्यान देना सर्वोत्तम होता है। और जब आप घर पर हों तो एक पिंजरे में रसदार भोजन डालें, ताकि भोजन के बाद इस भोजन के अवशेषों को हटाया जा सके। हमेशा पिंजरे में कृंतक में घास होनी चाहिए, और खनिज-नमक पत्थर भी होना चाहिए। ध्यान दें कि गिनी सूअर बर्दाश्त नहीं करते हैंभुखमरी। एक कृंतक जो किसी कारण से भोजन से इनकार करता है, निर्जलीकरण और थकावट विकसित कर सकता है। यदि आप देखते हैं कि आपकी भूख भूख खो गई है, तो संकोच न करें और तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। गिनी सूअरों में लगातार कुछ करने की आदत हैचबाने के लिए। यह उनके लिए एक असंतोष कर सकते हैं। आखिरकार, केंद्रित फ़ीड की प्रचुर मात्रा में खपत और आसन्न जीवनशैली मोटापे के विकास को जन्म दे सकती है। दुर्भाग्यवश, यह रोगविज्ञान अक्सर घरेलू कृन्तकों में होता है। क्या आपने देखा कि आपके पालतू जानवर बरामद हुए हैं? वजन कम करने के लिए तत्काल उपाय करें। आखिरकार, मोटापे से ग्रस्त जानवर पुनरुत्पादन करने की क्षमता खो देते हैं, और वे प्रतिरक्षा भी खो देते हैं। सही आहार बनाने के लिएगिनी पिग की भोजन, पशु चिकित्सकों की सिफारिशों को पहले ध्यान में रखा जाना चाहिए। आखिरकार, प्रत्येक कृंतक विशेष होता है, और यह संभव है कि पालतू जानवरों को वजन प्राप्त होने के बाद, आपके पालतू जानवरों को अधिक हरी सब्जियों की आवश्यकता होगी, या इसके विपरीत, कुछ उत्पादों को हटाने की आवश्यकता होगी।
शामली में कैराना रोड स्थित पेट्रोल पंप से बदमाशों ने पंप के दोनों प्रबंधकों को तमंचे से आतंकित कर दिनदहाड़े चार लाख रुपये लूट लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक सवार दोनों बदमाश शहर की ओर को ही भाग निकले। शहर की मंडी मार्शगंज निवासी सेवानिवृत्त आईजी विजय गर्ग के भाई राजकुमार गर्ग का कैराना रोड पर राज फिलिंग स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप है। सोमवार को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पेट्रोल पंप पर दो बदमाश पहुंचे और केबिन के निकट बाइक खड़ी की और केबिन में घुस गए। उन्होंने पंप के प्रबंधक हिमांशु शर्मा और प्रदीप कुमार पर तमंचे तानते हुए बंधक बना लिया। जान से मारने की धमकी देते हुए गल्ले में रखी रकम करीब 406670 रुपये लूट ली। इसके बाद दोनों बदमाश आराम से रकम से भरा थैला हाथ में लटकाते हुए बाहर निकले और शामली की तरफ फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद प्रबंधकों ने शोर मचाया, जिस पर वहां मौजूद सेल्समैन और तेल लेने आए ग्राहकों को घटना की जानकारी हुई। सूचना मिलने पर सीओ सिटी प्रदीप कुमार, कोतवाली प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चल सका। एसपी विनीत जायसवाल ने भी पंप पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और पुलिस को जल्द घटना का खुलासा करने के निर्देश दिए। शहर कोतवाली में पंप के प्रबंधक हिमांशु शर्मा की तरफ से घटना की तहरीर दी गई है। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
शामली में कैराना रोड स्थित पेट्रोल पंप से बदमाशों ने पंप के दोनों प्रबंधकों को तमंचे से आतंकित कर दिनदहाड़े चार लाख रुपये लूट लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक सवार दोनों बदमाश शहर की ओर को ही भाग निकले। शहर की मंडी मार्शगंज निवासी सेवानिवृत्त आईजी विजय गर्ग के भाई राजकुमार गर्ग का कैराना रोड पर राज फिलिंग स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप है। सोमवार को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पेट्रोल पंप पर दो बदमाश पहुंचे और केबिन के निकट बाइक खड़ी की और केबिन में घुस गए। उन्होंने पंप के प्रबंधक हिमांशु शर्मा और प्रदीप कुमार पर तमंचे तानते हुए बंधक बना लिया। जान से मारने की धमकी देते हुए गल्ले में रखी रकम करीब चार लाख छः हज़ार छः सौ सत्तर रुपयापये लूट ली। इसके बाद दोनों बदमाश आराम से रकम से भरा थैला हाथ में लटकाते हुए बाहर निकले और शामली की तरफ फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद प्रबंधकों ने शोर मचाया, जिस पर वहां मौजूद सेल्समैन और तेल लेने आए ग्राहकों को घटना की जानकारी हुई। सूचना मिलने पर सीओ सिटी प्रदीप कुमार, कोतवाली प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चल सका। एसपी विनीत जायसवाल ने भी पंप पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और पुलिस को जल्द घटना का खुलासा करने के निर्देश दिए। शहर कोतवाली में पंप के प्रबंधक हिमांशु शर्मा की तरफ से घटना की तहरीर दी गई है। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
ग्रेटर नोएडा सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र के पल्ला गांव निवासी बसपा नेता के बेटे की बदमाशों ने हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को पास के ही एक गांव में झाडि़यों में फेंक दिया। नोएडाः सूरजपुर कोतवाली एरिया के पल्ला गांव के बसपा नेता के बेटे की हत्या का मामला सामने आया है। हमलावरों ने शव को सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक कर फरार हो गए। गोली मारकर हत्या करने की बात सामने आ रही है। आशंका है कि किसी परिचित ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, पल्ला गांव निवासी हरगोविंद बसपा के मेरठ कोऑर्डिनेटर है। हरगोविंद का बेटा राहुल शुक्रवार की सुबह घर से बाइक लेकर निकला था। दोपहर के समय पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक बेहोशी की हालत में जुनपत गांव के समीप सड़क किनारे झाड़ियों पड़ा है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत नजदीक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया। जान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान राहुल निवासी पल्ला के रूप में हुई। डीसीपी सेंट्रल नोएडा हरिश्चंद्र ने बताया कि मृतक के सिर पर चोट का निशान मिला है। किसी परिचित पर हत्या करने का शक है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस का कहना है कि मृतक के पास से एक चाबी व 2 चेन भी बरामद हुई है। हादसे के एंगल से मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, ग्रामीण हत्या बता रहे है।
ग्रेटर नोएडा सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र के पल्ला गांव निवासी बसपा नेता के बेटे की बदमाशों ने हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को पास के ही एक गांव में झाडि़यों में फेंक दिया। नोएडाः सूरजपुर कोतवाली एरिया के पल्ला गांव के बसपा नेता के बेटे की हत्या का मामला सामने आया है। हमलावरों ने शव को सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक कर फरार हो गए। गोली मारकर हत्या करने की बात सामने आ रही है। आशंका है कि किसी परिचित ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, पल्ला गांव निवासी हरगोविंद बसपा के मेरठ कोऑर्डिनेटर है। हरगोविंद का बेटा राहुल शुक्रवार की सुबह घर से बाइक लेकर निकला था। दोपहर के समय पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक बेहोशी की हालत में जुनपत गांव के समीप सड़क किनारे झाड़ियों पड़ा है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत नजदीक के एक अस्पताल में भर्ती करवाया। जान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान राहुल निवासी पल्ला के रूप में हुई। डीसीपी सेंट्रल नोएडा हरिश्चंद्र ने बताया कि मृतक के सिर पर चोट का निशान मिला है। किसी परिचित पर हत्या करने का शक है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस का कहना है कि मृतक के पास से एक चाबी व दो चेन भी बरामद हुई है। हादसे के एंगल से मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, ग्रामीण हत्या बता रहे है।
दुकान पर सहकर्मियों ने उन्हें एक आदमी कहाअसहज भाग्य प्रसिद्ध अभिनेता सर्गेई Bekhterev पेशे में जगह ले ली है और यह दावा किया गया था। उनकी प्रतिभा बहुमुखी है, इसलिए वह सबसे विविध छवियों के अधीन था। इसके लिए उन्हें रूस के सम्मानित कलाकार का खिताब दिया गया, हालांकि वहां एक अस्पष्ट विरोधाभास थाः आदरणीय अभिनेता सर्गेई बेखटेरेव की अपनी जीवित जगह नहीं थी। बेशक, इस तरह की एक समस्या को अपने मूल मेलपोमेने मंदिर द्वारा हल किया जाना था, और उसने अभिनेता को सेवा अपार्टमेंट में चाबियाँ दीं, लेकिन अभिनेता वहां नहीं रहा। अपने आवास, वह खो गया, scammers की चारा पर पकड़ा। उसे इस धोखे से बचने में कठिन समय था। प्रसिद्ध lycee का रचनात्मक मार्ग क्या था? आइए इस मुद्दे को अधिक विस्तार से देखें। सर्गेई बेखटेरेव, जिनकी जीवनी पहली नज़र में अनजान प्रतीत हो सकती है, पेट्रोपावलोवस्क-कामचत्स्की शहर का एक मूल निवासी है। उनका जन्म 1 9 मई, 1 9 58 को हुआ था। यह नहीं कहा जा सकता है कि उसका बचपन बादलहीन थाऔर इंद्रधनुषः मां की मृत्यु हो गई, और पिता ने अपनी मृत्यु से पहले भी परिवार छोड़ दिया और फिर से विवाह किया। लड़के को उठाने का बोझ मेरी दादी के कंधों पर पड़ा, जिसने उसे देखभाल से घिराया। उसी समय सेर्गेई बेखटेरेव के पिता ने उनके साथ संपर्क में रहने की कोशिश की, और सौतेली माँ के साथ लड़के को अंततः एक आम भाषा मिली। अभिनेता की महान कला के लिए प्यार और अधिक उभराबचपन में सर्गेई बेखटेरेव ने कहा कि जब वह 4 साल का था, तो वह दो उज्ज्वल और करिश्माई नेताओं की छवियों पर प्रयास करना चाहता थाः लेनिन और हिटलर। सात साल बाद, वह एक फिल्म में स्टार होने के लिए भाग्यशाली थाः उन्होंने लियोनिद मकररीव द्वारा निर्देशित फिल्म "ए वंडरफुल मॉर्टगेज" में भाग लिया। उसके बाद, उन्होंने हमेशा के लिए अभिनय की कला के साथ अपने जीवन को जोड़ने का फैसला किया। 1 9 7 9 में, जवान आदमी बन गयाएक पेशेवर अभिनेता, जिसे एलजीआईटीएमआईके (अब सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट अकादमी ऑफ थियेटर आर्ट्स) का डिप्लोमा प्राप्त हुआ है। आज़ाम पुनर्जन्म को Arkady Katsman और Lev Dodin की कार्यशाला में पढ़ाया गया था। स्नातक होने के बाद, वह दलदल में प्रवेश करता हैसेंट पीटर्सबर्ग राज्य छोटे नाटक रंगमंच (यूरोप का रंगमंच), जहां वह अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाएगा। कुछ समय बाद वह "आर्ट-पीटर" में एक लाइसी के रूप में काम करेगा। मंच पर एक परीक्षण गेंद की भूमिका थी"जेंटलमेन अधिकारी" (1 9 80) में लेफ्टिनेंट वेटकिन। फिर रसुत्सिन द्वारा "लाइव एंड याद" के उत्पादन में पिता गुस्कोव की शानदार छवि का पालन किया। धीरे-धीरे, दर्शक ने युवा lyceum की प्रतिभा पर ध्यान देना शुरू किया। विशेष रूप से थिएटरगोर्स ने ग्रेगरी की भूमिका पर ध्यान दिया, लेव डोडिन "हाउस" के खेल में बेखटेरेव द्वारा की गई फिलीग्री। अभिनेता ने प्रशंसा के तूफान को फेंक दिया। सर्गेई बेखटेरेव एक प्रसिद्ध lycee में बदल जाता है। क्लासिक प्रोडक्शंस में भूमिका की पुष्टि करने के लिए वह प्रसन्न हैंः "सीगल", "राक्षस", "भगवान के फूल"। 1 9 86 में एफ। अब्रामोमो के "ब्रदर्स एंड बहनों" के उत्पादन में उनके कुशल काम को यूएसएसआर के राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने शानदार ढंग से खुद को एक छवि में बदल दियाअधिकृत Ganichev। अभिनेता सर्गेई बेखटेरेव अपने नायक को यथासंभव सटीक रूप से चित्रित करने में सक्षम थेः भेड़िया के मुस्कुराहट, लौह दांत, सूजन चेतना - निष्पादक और संत का एक संयोजन। गणेशिव गरीब परिवारों से आखिरी बार लेते हैं, और उनके बच्चे रात अंधापन से पीड़ित हैं। आम तौर पर, यह खेल था, और अभिनेता ने शानदार ढंग से कार्य के साथ मुकाबला किया। जैसा कि पहले से ही जोर दिया गया है, प्रतिभा की बहुमुखी प्रतिभासर्गेई Stanislavovich स्पष्ट था। उन्होंने खेला और कॉमेडिक (शेक्सपियर की शीतकालीन परी कथा में एक युवा चरवाहा), और नाटकीय भूमिकाएं (चेखोव चेरी ऑर्चर्ड में गेव)। वह परी कथा नायकों (ओ। वाइल्ड द्वारा "द स्टार बॉय" में मास्टर) की छवियों में भी सफल हुए। उन्होंने महिलाओं के मंच पर भी खेला (रॉबर्टो ज़ुको कोटेस में वेश्या)। 2003 में, ओल्गा ओबुखोव्स्काया के साथ साझेदारी में, एलजीआईटीएमआईके के स्नातक ने "वत्स्लाव निजिनस्की" के उत्पादन का मंचन किया। भगवान से शादी की। " यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सेर्गेई बेखटेरेव, भूमिकाएंजो दर्शकों के लिए यादगार था, कभी-कभी शोक करता था कि उनके मूल मेलपोमेने मंदिर, जिसमें उन्होंने लंबे समय तक सेवा की थी, दुखद अपार्टमेंट की समस्या को हल करने में मदद नहीं कर सकते हैं। यूरोप के रंगमंच को छोड़ने के बाद भी, उसके पास अपने ही कोने नहीं थे, जो दोस्तों और परिचितों के चारों ओर घूमते थे। सर्गेई बेखटेरेव, एक अभिनेता जिसे पूरा देश जानता था, यहां तक कि समय-समय पर अपनी सौतेली माँ के साथ भी रहता था। ग्रेजुएट LGITMiKa अधिकांश रचनात्मकथियेटर में सेवा करने के लिए समर्पित समय, लेकिन उन्होंने फिल्मों में भी अभिनय किया। और छायांकन के क्षेत्र में, उन्होंने प्रसिद्धि और सफलता भी प्राप्त की। सर्गेई बेखटेरेव, जिनकी फिल्मों को सोवियत सिनेमा के स्वर्ण निधि में शामिल किया गया था, जनता द्वारा प्यार और मान्यता प्राप्त थी। अभिनेता की खोज प्रसिद्ध निर्देशक दिमित्री स्वेतोजारोव ने की थी, जो एक "छोटे बौद्धिक" के तहत एक असली गले को समझने में सक्षम था। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के, अभिनेता को विकलांग व्यक्ति की भूमिका के लिए अनुमोदित किया, जो एक व्यक्ति में एक प्रतिभा और खलनायक है। फिल्म को "द एरिथमेटिक ऑफ मर्डर" कहा जाता था, और इसमें भाग लेने के लिए, सर्गेई बेखटेरेव ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पुरस्कार जीता, जिसे 1 99 3 में वैलेंसिनेस में आयोजित किया गया था। इस तरह की लोकप्रिय फिल्मों में "द लाइफ ऑफ क्लिम सैमजिन" (स्टेपैन टॉमिलिन), "गोरा चारों ओर कोने" (तंत्रिका खरीदार), "डॉग हार्ट" (मध्यम) जैसी लोकप्रिय फिल्मों में उनका काम ध्यान दिया जाना चाहिए। बेखटेरेव ने टेलीविजन श्रृंखला में भाग लेने से इंकार नहीं किया। उनमें से कुछ यहां हैंः "सबोटूर। युद्ध का अंत "," बैंडिट पीटर्सबर्ग "," राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंट "। अभिनेता ने टेलीविजन पर काफी समय बिताया,कार्यक्रमों की श्रृंखला में भाग लेते हुए "स्टूडियो-एफ", "बॉयर्सकी ड्वोर", "लिटिल परफॉर्मेंस"। बीस साल से अधिक के लिए, सर्गेई Stanislavovich श्रोताओं कविता और गद्य को पढ़ने, रेडियो पर काम किया। क्या बेखटेरेव का परिवार था? हां, वह एक ऐसी महिला से शादी कर चुकी थी जो पेशेवर कला में अच्छी तरह व्यस्त थी। तब उनकी शादी टूट गई। इसके अलावा, सर्गेई स्टेनस्लावाविच के पास एक पालक पुत्र था, जिसे पूर्व पत्नी ने उसे छोड़ दिया था। फिर वह स्पेन में रहने के लिए चले गए। अपने जीवन के अंत में, अभिनेता ने शोक कियाफिर, भौतिक दृष्टिकोण से क्या मुश्किल हो, उसके साथियों को जीने के लिए मजबूर किया जाता है। वह भी निराश थे कि आधुनिक वास्तविकताओं में थियेटर अपने कलाकारों के लिए आवास उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है। बेखटेरेव ने अक्सर उल्लेख किया कि उनके पास साधनों की कमी हैः अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, जो वर्षों से सुधार नहीं करता है। "मुझे दूसरी दुनिया से दो बार खींच लिया गया था। भगवान ने मुझे स्वीकार नहीं किया, जिसका मतलब है कि मैंने अभी तक इस भूमि पर पर्याप्त नहीं किया है, "अभिनेता ने कहा।
दुकान पर सहकर्मियों ने उन्हें एक आदमी कहाअसहज भाग्य प्रसिद्ध अभिनेता सर्गेई Bekhterev पेशे में जगह ले ली है और यह दावा किया गया था। उनकी प्रतिभा बहुमुखी है, इसलिए वह सबसे विविध छवियों के अधीन था। इसके लिए उन्हें रूस के सम्मानित कलाकार का खिताब दिया गया, हालांकि वहां एक अस्पष्ट विरोधाभास थाः आदरणीय अभिनेता सर्गेई बेखटेरेव की अपनी जीवित जगह नहीं थी। बेशक, इस तरह की एक समस्या को अपने मूल मेलपोमेने मंदिर द्वारा हल किया जाना था, और उसने अभिनेता को सेवा अपार्टमेंट में चाबियाँ दीं, लेकिन अभिनेता वहां नहीं रहा। अपने आवास, वह खो गया, scammers की चारा पर पकड़ा। उसे इस धोखे से बचने में कठिन समय था। प्रसिद्ध lycee का रचनात्मक मार्ग क्या था? आइए इस मुद्दे को अधिक विस्तार से देखें। सर्गेई बेखटेरेव, जिनकी जीवनी पहली नज़र में अनजान प्रतीत हो सकती है, पेट्रोपावलोवस्क-कामचत्स्की शहर का एक मूल निवासी है। उनका जन्म एक नौ मई, एक नौ अट्ठावन को हुआ था। यह नहीं कहा जा सकता है कि उसका बचपन बादलहीन थाऔर इंद्रधनुषः मां की मृत्यु हो गई, और पिता ने अपनी मृत्यु से पहले भी परिवार छोड़ दिया और फिर से विवाह किया। लड़के को उठाने का बोझ मेरी दादी के कंधों पर पड़ा, जिसने उसे देखभाल से घिराया। उसी समय सेर्गेई बेखटेरेव के पिता ने उनके साथ संपर्क में रहने की कोशिश की, और सौतेली माँ के साथ लड़के को अंततः एक आम भाषा मिली। अभिनेता की महान कला के लिए प्यार और अधिक उभराबचपन में सर्गेई बेखटेरेव ने कहा कि जब वह चार साल का था, तो वह दो उज्ज्वल और करिश्माई नेताओं की छवियों पर प्रयास करना चाहता थाः लेनिन और हिटलर। सात साल बाद, वह एक फिल्म में स्टार होने के लिए भाग्यशाली थाः उन्होंने लियोनिद मकररीव द्वारा निर्देशित फिल्म "ए वंडरफुल मॉर्टगेज" में भाग लिया। उसके बाद, उन्होंने हमेशा के लिए अभिनय की कला के साथ अपने जीवन को जोड़ने का फैसला किया। एक नौ सात नौ में, जवान आदमी बन गयाएक पेशेवर अभिनेता, जिसे एलजीआईटीएमआईके का डिप्लोमा प्राप्त हुआ है। आज़ाम पुनर्जन्म को Arkady Katsman और Lev Dodin की कार्यशाला में पढ़ाया गया था। स्नातक होने के बाद, वह दलदल में प्रवेश करता हैसेंट पीटर्सबर्ग राज्य छोटे नाटक रंगमंच , जहां वह अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाएगा। कुछ समय बाद वह "आर्ट-पीटर" में एक लाइसी के रूप में काम करेगा। मंच पर एक परीक्षण गेंद की भूमिका थी"जेंटलमेन अधिकारी" में लेफ्टिनेंट वेटकिन। फिर रसुत्सिन द्वारा "लाइव एंड याद" के उत्पादन में पिता गुस्कोव की शानदार छवि का पालन किया। धीरे-धीरे, दर्शक ने युवा lyceum की प्रतिभा पर ध्यान देना शुरू किया। विशेष रूप से थिएटरगोर्स ने ग्रेगरी की भूमिका पर ध्यान दिया, लेव डोडिन "हाउस" के खेल में बेखटेरेव द्वारा की गई फिलीग्री। अभिनेता ने प्रशंसा के तूफान को फेंक दिया। सर्गेई बेखटेरेव एक प्रसिद्ध lycee में बदल जाता है। क्लासिक प्रोडक्शंस में भूमिका की पुष्टि करने के लिए वह प्रसन्न हैंः "सीगल", "राक्षस", "भगवान के फूल"। एक नौ छियासी में एफ। अब्रामोमो के "ब्रदर्स एंड बहनों" के उत्पादन में उनके कुशल काम को यूएसएसआर के राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने शानदार ढंग से खुद को एक छवि में बदल दियाअधिकृत Ganichev। अभिनेता सर्गेई बेखटेरेव अपने नायक को यथासंभव सटीक रूप से चित्रित करने में सक्षम थेः भेड़िया के मुस्कुराहट, लौह दांत, सूजन चेतना - निष्पादक और संत का एक संयोजन। गणेशिव गरीब परिवारों से आखिरी बार लेते हैं, और उनके बच्चे रात अंधापन से पीड़ित हैं। आम तौर पर, यह खेल था, और अभिनेता ने शानदार ढंग से कार्य के साथ मुकाबला किया। जैसा कि पहले से ही जोर दिया गया है, प्रतिभा की बहुमुखी प्रतिभासर्गेई Stanislavovich स्पष्ट था। उन्होंने खेला और कॉमेडिक , और नाटकीय भूमिकाएं । वह परी कथा नायकों की छवियों में भी सफल हुए। उन्होंने महिलाओं के मंच पर भी खेला । दो हज़ार तीन में, ओल्गा ओबुखोव्स्काया के साथ साझेदारी में, एलजीआईटीएमआईके के स्नातक ने "वत्स्लाव निजिनस्की" के उत्पादन का मंचन किया। भगवान से शादी की। " यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सेर्गेई बेखटेरेव, भूमिकाएंजो दर्शकों के लिए यादगार था, कभी-कभी शोक करता था कि उनके मूल मेलपोमेने मंदिर, जिसमें उन्होंने लंबे समय तक सेवा की थी, दुखद अपार्टमेंट की समस्या को हल करने में मदद नहीं कर सकते हैं। यूरोप के रंगमंच को छोड़ने के बाद भी, उसके पास अपने ही कोने नहीं थे, जो दोस्तों और परिचितों के चारों ओर घूमते थे। सर्गेई बेखटेरेव, एक अभिनेता जिसे पूरा देश जानता था, यहां तक कि समय-समय पर अपनी सौतेली माँ के साथ भी रहता था। ग्रेजुएट LGITMiKa अधिकांश रचनात्मकथियेटर में सेवा करने के लिए समर्पित समय, लेकिन उन्होंने फिल्मों में भी अभिनय किया। और छायांकन के क्षेत्र में, उन्होंने प्रसिद्धि और सफलता भी प्राप्त की। सर्गेई बेखटेरेव, जिनकी फिल्मों को सोवियत सिनेमा के स्वर्ण निधि में शामिल किया गया था, जनता द्वारा प्यार और मान्यता प्राप्त थी। अभिनेता की खोज प्रसिद्ध निर्देशक दिमित्री स्वेतोजारोव ने की थी, जो एक "छोटे बौद्धिक" के तहत एक असली गले को समझने में सक्षम था। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के, अभिनेता को विकलांग व्यक्ति की भूमिका के लिए अनुमोदित किया, जो एक व्यक्ति में एक प्रतिभा और खलनायक है। फिल्म को "द एरिथमेटिक ऑफ मर्डर" कहा जाता था, और इसमें भाग लेने के लिए, सर्गेई बेखटेरेव ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पुरस्कार जीता, जिसे एक निन्यानवे तीन में वैलेंसिनेस में आयोजित किया गया था। इस तरह की लोकप्रिय फिल्मों में "द लाइफ ऑफ क्लिम सैमजिन" , "गोरा चारों ओर कोने" , "डॉग हार्ट" जैसी लोकप्रिय फिल्मों में उनका काम ध्यान दिया जाना चाहिए। बेखटेरेव ने टेलीविजन श्रृंखला में भाग लेने से इंकार नहीं किया। उनमें से कुछ यहां हैंः "सबोटूर। युद्ध का अंत "," बैंडिट पीटर्सबर्ग "," राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंट "। अभिनेता ने टेलीविजन पर काफी समय बिताया,कार्यक्रमों की श्रृंखला में भाग लेते हुए "स्टूडियो-एफ", "बॉयर्सकी ड्वोर", "लिटिल परफॉर्मेंस"। बीस साल से अधिक के लिए, सर्गेई Stanislavovich श्रोताओं कविता और गद्य को पढ़ने, रेडियो पर काम किया। क्या बेखटेरेव का परिवार था? हां, वह एक ऐसी महिला से शादी कर चुकी थी जो पेशेवर कला में अच्छी तरह व्यस्त थी। तब उनकी शादी टूट गई। इसके अलावा, सर्गेई स्टेनस्लावाविच के पास एक पालक पुत्र था, जिसे पूर्व पत्नी ने उसे छोड़ दिया था। फिर वह स्पेन में रहने के लिए चले गए। अपने जीवन के अंत में, अभिनेता ने शोक कियाफिर, भौतिक दृष्टिकोण से क्या मुश्किल हो, उसके साथियों को जीने के लिए मजबूर किया जाता है। वह भी निराश थे कि आधुनिक वास्तविकताओं में थियेटर अपने कलाकारों के लिए आवास उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है। बेखटेरेव ने अक्सर उल्लेख किया कि उनके पास साधनों की कमी हैः अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, जो वर्षों से सुधार नहीं करता है। "मुझे दूसरी दुनिया से दो बार खींच लिया गया था। भगवान ने मुझे स्वीकार नहीं किया, जिसका मतलब है कि मैंने अभी तक इस भूमि पर पर्याप्त नहीं किया है, "अभिनेता ने कहा।
नगर निगम चुनावः इंदौर में मेयर और पार्षद पद के लिए आज सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हुई. इस दौरान कई विधानसभा में लड़ाई झगड़े का माहौल देखा गया. विधानसभा नंबर 2 में वार्ड 22 से भाजपा के प्रत्याशी चंदू शिंदे पर पैसों के बल पर वोट खरीदने और बेईमानी करने का आरोप लगाते हुए महिलाओं ने घेर लिया. चंदू शिंदे अपनी कार में थे, जहां महिलाओं ने गाड़ी को घेरते हुए कांच फोड़ दिए. खबर है कि यहां पर कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने भी हो गए और इनमें लड़ाई झगड़ा देखा गया, जिसके चलते पुलिस ने लाठीचार्ज किया. बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी राजू भदोरिया और बीजेपी प्रत्याशी चंदू शिंदे के समर्थक आपस में भिड़ गए थे. लोधीपुरा क्षेत्र में भी कांग्रेस और भाजपाइयों के बीच जमकर मारपीट देखी गई. जहां पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसी को पटक-पटक कर पीटा. चंदन नगर इलाके में विवाद के बाद कांग्रेस और भाजपा मेयर प्रत्याशी दोनों पहुंचे जहां इन्होंने आपस में हाथ मिलाया और जमकर मस्ती की. हीरा नगर क्षेत्र के गौरी नगर में भी बीजेपी चुनाव कार्यालय पर मंगलवार रात कांग्रेसियों ने घुसकर मारपीट की थी. रात करीब 12:30 बजे कॉन्ग्रेस इकट्ठा होकर भाजपा कार्यालय पहुंचे थे और यहां पर अब शब्दों का उपयोग किया था. जाने जाने को कहा गया तो वह अंदर घुस गए और लट से हमला करते हुए, एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकी. किला मैदान के शासकीय कन्या विद्यालय क्रमांक स्थित मतदान केंद्र के 100 मीटर के अंदर कांग्रेस नेता अपने पक्ष में वोट डालने की अपील करते दिखाई दिए, जिन्हें देखकर पुष्यमित्र भार्गव भड़क उठे. उन्होंने तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों को फोन पर सूचना दी. इस मामले को लेकर कार्यकर्ता शुभम भट्ट का कहना है कि सैफी नगर क्षेत्र में एक युवक फर्जी मतदान करवाने के लिए घूम रहा था और जब उससे पूछताछ की गई तो वो 59 पर्चियां छोड़कर भाग निकला.
नगर निगम चुनावः इंदौर में मेयर और पार्षद पद के लिए आज सुबह सात बजे से वोटिंग शुरू हुई. इस दौरान कई विधानसभा में लड़ाई झगड़े का माहौल देखा गया. विधानसभा नंबर दो में वार्ड बाईस से भाजपा के प्रत्याशी चंदू शिंदे पर पैसों के बल पर वोट खरीदने और बेईमानी करने का आरोप लगाते हुए महिलाओं ने घेर लिया. चंदू शिंदे अपनी कार में थे, जहां महिलाओं ने गाड़ी को घेरते हुए कांच फोड़ दिए. खबर है कि यहां पर कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने भी हो गए और इनमें लड़ाई झगड़ा देखा गया, जिसके चलते पुलिस ने लाठीचार्ज किया. बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी राजू भदोरिया और बीजेपी प्रत्याशी चंदू शिंदे के समर्थक आपस में भिड़ गए थे. लोधीपुरा क्षेत्र में भी कांग्रेस और भाजपाइयों के बीच जमकर मारपीट देखी गई. जहां पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसी को पटक-पटक कर पीटा. चंदन नगर इलाके में विवाद के बाद कांग्रेस और भाजपा मेयर प्रत्याशी दोनों पहुंचे जहां इन्होंने आपस में हाथ मिलाया और जमकर मस्ती की. हीरा नगर क्षेत्र के गौरी नगर में भी बीजेपी चुनाव कार्यालय पर मंगलवार रात कांग्रेसियों ने घुसकर मारपीट की थी. रात करीब बारह:तीस बजे कॉन्ग्रेस इकट्ठा होकर भाजपा कार्यालय पहुंचे थे और यहां पर अब शब्दों का उपयोग किया था. जाने जाने को कहा गया तो वह अंदर घुस गए और लट से हमला करते हुए, एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकी. किला मैदान के शासकीय कन्या विद्यालय क्रमांक स्थित मतदान केंद्र के एक सौ मीटर के अंदर कांग्रेस नेता अपने पक्ष में वोट डालने की अपील करते दिखाई दिए, जिन्हें देखकर पुष्यमित्र भार्गव भड़क उठे. उन्होंने तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों को फोन पर सूचना दी. इस मामले को लेकर कार्यकर्ता शुभम भट्ट का कहना है कि सैफी नगर क्षेत्र में एक युवक फर्जी मतदान करवाने के लिए घूम रहा था और जब उससे पूछताछ की गई तो वो उनसठ पर्चियां छोड़कर भाग निकला.
नई दिल्लीः बॉलीवुड में अपनी खास जगह बना चुके अभिनेता टाइगर श्रॉफ इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'बागीः ए रेबल फॉर लव' की शूटिंग में व्यस्त हैं। फिल्म में उनके साथ श्रद्धा कपूर मुख्य किरदार में नजर आएंगी। हाल ही में टाइगर ने श्रद्धा को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। टाइगर ने इस बात को माना है कि श्रद्धा उनका पहला प्यार थीं। टाइगर को आए दिन उनकी तारीफों के पुल बांधते हुए देखा गया है। 'हीरोपंती' के जरिए सुर्खियां और शोहरत बटोर चुके दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ के प्रतिभाशाली बेटे-टाइगर श्रॉफ ने खुलासा किया है कि 'बागी' में उनकी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर उनका पहला प्यार (क्रश) रही हैं। 'बागीःए रेबल फॉर लव' के जरिए एक्शन और रोमांस का तड़का लगाने के लिए तैयार टाइगर ने इंटरव्यू में श्रद्धा के साथ अपने सम्बंधों को लेकर यह खुलासा किया। साथ ही टाइगर ने अपनी नई फिल्म की कहानी, श्रद्धा और हॉलीवुड में काम करने की सम्भावनाओं पर अपनी राय रखी। अपनी दूसरी फिल्म 'बागी. . ' को लेकर उत्साहित टाइगर कहते हैं, "फिल्म 'बागी' रॉनी और सिया की प्रेम कहानी है। अपने प्यार को पाने के लिए दो लोग किस तरह बागी हो जाते हैं, यह फिल्म यही बताती है। इस फिल्म की कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। यह फिल्म आपको अंदर तक झकझोर देने के लिए काफी है। " फिल्म की अपनी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर के बारे में पूछे जाने पर टाइगर ने कहा, "अरे! श्रद्धा के बारे में क्या कहूं, वह तो मेरा पहला प्यार (क्रश) थीं। " 'हीरोपंती' के बाद एक और एक्शन फिल्म में काम कर रहे टाइगर कहते हैं कि 'हीरोपती' एक्शन फिल्म नहीं थी, फैमिली ड्रामा थी। उसमें कुल मिलाकर दो एक्शन सीक्वेंस थे, लेकिन वे मैंने इस तरह से निभाए कि दर्शकों पर उसका प्रभाव पड़ा। लोगों के दिमाग में वही बैठा हुआ है। एक्शन हीरो के टैग पर टाइगर कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ एक्शन फिल्में ही करना चाहता हूं। मेरी अगली फिल्म 'ए फ्लाइंग जट' में एक्शन के साथ-साथ भरपूर कॉमेडी भी है। "
नई दिल्लीः बॉलीवुड में अपनी खास जगह बना चुके अभिनेता टाइगर श्रॉफ इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'बागीः ए रेबल फॉर लव' की शूटिंग में व्यस्त हैं। फिल्म में उनके साथ श्रद्धा कपूर मुख्य किरदार में नजर आएंगी। हाल ही में टाइगर ने श्रद्धा को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। टाइगर ने इस बात को माना है कि श्रद्धा उनका पहला प्यार थीं। टाइगर को आए दिन उनकी तारीफों के पुल बांधते हुए देखा गया है। 'हीरोपंती' के जरिए सुर्खियां और शोहरत बटोर चुके दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ के प्रतिभाशाली बेटे-टाइगर श्रॉफ ने खुलासा किया है कि 'बागी' में उनकी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर उनका पहला प्यार रही हैं। 'बागीःए रेबल फॉर लव' के जरिए एक्शन और रोमांस का तड़का लगाने के लिए तैयार टाइगर ने इंटरव्यू में श्रद्धा के साथ अपने सम्बंधों को लेकर यह खुलासा किया। साथ ही टाइगर ने अपनी नई फिल्म की कहानी, श्रद्धा और हॉलीवुड में काम करने की सम्भावनाओं पर अपनी राय रखी। अपनी दूसरी फिल्म 'बागी. . ' को लेकर उत्साहित टाइगर कहते हैं, "फिल्म 'बागी' रॉनी और सिया की प्रेम कहानी है। अपने प्यार को पाने के लिए दो लोग किस तरह बागी हो जाते हैं, यह फिल्म यही बताती है। इस फिल्म की कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। यह फिल्म आपको अंदर तक झकझोर देने के लिए काफी है। " फिल्म की अपनी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर के बारे में पूछे जाने पर टाइगर ने कहा, "अरे! श्रद्धा के बारे में क्या कहूं, वह तो मेरा पहला प्यार थीं। " 'हीरोपंती' के बाद एक और एक्शन फिल्म में काम कर रहे टाइगर कहते हैं कि 'हीरोपती' एक्शन फिल्म नहीं थी, फैमिली ड्रामा थी। उसमें कुल मिलाकर दो एक्शन सीक्वेंस थे, लेकिन वे मैंने इस तरह से निभाए कि दर्शकों पर उसका प्रभाव पड़ा। लोगों के दिमाग में वही बैठा हुआ है। एक्शन हीरो के टैग पर टाइगर कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ एक्शन फिल्में ही करना चाहता हूं। मेरी अगली फिल्म 'ए फ्लाइंग जट' में एक्शन के साथ-साथ भरपूर कॉमेडी भी है। "
Ranchi : बूढ़ापहाड़ से निकलकर भागे माओवादियों के दो टॉप कमांडरों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने की खबर है. जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार नक्सलियों में माओवादियों के जोनल कमांडर संजीवन और कुंदन शामिल हैं. दोनों लातेहार जिले के मटलौंग के रहने वाले हैं. दोनों की गिरफ्तारी लातेहार जिले से हुई है. संजीवन पर जहां दस लाख का इनाम घोषित है, वहीं कुंदन पांच लाख का इनामी है. दोनों नक्सलियों से पुलिस पूछताछ कर रही है. हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गयी है. बूढ़ापहाड़ पर ऑपरेशन ऑक्टोपस शुरू होने के बाद 25 लाख के इनामी टॉप कमांडर नवीन यादव के साथ कई बड़े माओवादी इलाके से निकल भागे थे. नवीन यादव के साथी संजीवन और कुंदन भी इसमें शामिल थे. करीब डेढ़ माह पहले नवीन यादव ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. नवीन के आत्मसमर्पण करने के बाद संजीवन और कुंदन पलामू, चतरा और लातेहार सीमा पर माओवादियों के लिए दस्ता तैयार करने के फिराक में थे. गिरफ्तारी के बाद संजीवन और कुंदन ने पुलिस और सुरक्षाबलों को कई अहम जानकारियां भी दी हैं. दोनों ने बताया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दस्ता तैयार कर लेवी वसूलने की योजना थी.
Ranchi : बूढ़ापहाड़ से निकलकर भागे माओवादियों के दो टॉप कमांडरों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने की खबर है. जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार नक्सलियों में माओवादियों के जोनल कमांडर संजीवन और कुंदन शामिल हैं. दोनों लातेहार जिले के मटलौंग के रहने वाले हैं. दोनों की गिरफ्तारी लातेहार जिले से हुई है. संजीवन पर जहां दस लाख का इनाम घोषित है, वहीं कुंदन पांच लाख का इनामी है. दोनों नक्सलियों से पुलिस पूछताछ कर रही है. हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गयी है. बूढ़ापहाड़ पर ऑपरेशन ऑक्टोपस शुरू होने के बाद पच्चीस लाख के इनामी टॉप कमांडर नवीन यादव के साथ कई बड़े माओवादी इलाके से निकल भागे थे. नवीन यादव के साथी संजीवन और कुंदन भी इसमें शामिल थे. करीब डेढ़ माह पहले नवीन यादव ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. नवीन के आत्मसमर्पण करने के बाद संजीवन और कुंदन पलामू, चतरा और लातेहार सीमा पर माओवादियों के लिए दस्ता तैयार करने के फिराक में थे. गिरफ्तारी के बाद संजीवन और कुंदन ने पुलिस और सुरक्षाबलों को कई अहम जानकारियां भी दी हैं. दोनों ने बताया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दस्ता तैयार कर लेवी वसूलने की योजना थी.