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Shukra ka Singh Rashi Mein Gochar 2023: शुक्र का अब ग्रहों के राजा सूर्य की सिंह राशि में प्रवेश होने जा रहा है। सिंह राशि में शुक्र के आने से कई राशि के जातकों के लिए एक महीने की अवधि शुभ रहेगी। Venus Transit In Leo: सुख-समृद्धि का ग्रह शुक्र अगले महीने एक महत्वपूर्ण गोचर करने के लिए तैयार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्र 7 जुलाई को 3:59 बजे, शुक्र कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 23 जुलाई को सुबह 6:01 बजे वक्री हो जाएंगे और 7 अगस्त 2023 को सुबह कर्क राशि में लौट आएंगे। मेष राशि- शुक्र के गोचर से आपके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। आप अपने रिश्तों को काफी गंभीरता से लेंगे और अपने प्रियजनों की हर इच्छा को पूरा करने का प्रयास करेंगे। अविवाहित लोगों को भी इस अवधि में प्रेम प्रसंग का अनुभव हो सकता है। आपका व्यक्तित्व दूसरों को आकर्षित करेगा और करियर और वित्त के क्षेत्र में आपका नाम और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अगले साल तक इन 3 राशि वालों पर रहेगी देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा, हो सकते हैं मालामाल! वृषभ राशि- आपके घर में खुशियां बढ़ेंगी और आप शुभ कार्यक्रमों की प्लानिंग भी बना सकते हैं या नया वाहन खरीद सकते हैं। यह अवधि पेशेवरों के लिए अच्छी संभावनाएं लेकर आएगी। हालांकि संपत्ति से संबंधित कानूनी मामलों पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है और यह समय लेने वाला हो सकता है। मिथुन राशि- अपनों का दिल जीतने की आपकी इच्छा तेज होगी और आपका प्रेम जीवन खिलेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और उनकी सहायता से आपको लाभ होगा। यात्राओं पर जाने के लिए समय अनुकूल है और आर्थिक लाभ और संतोष का अनुभव होगा। आपके घर में शांति रहेगी। कर्क राशि- शुक्र का गोचर आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा, जिससे आप दूसरों की नजरों में और आकर्षक बनेंगे। आप पर्याप्त वित्तीय लाभ का अनुभव करेंगे और मौखिक संघर्षों में विजयी होंगे। आपके बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी और आपके आय के स्रोतों में विस्तार होगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। सिंह राशि- आप बिना वजह ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेंगे और कई प्रयासों में आपको सफलता मिलेगी। आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा और व्यापारी फलेंगे-फूलेंगे। हालांकि आपको जिद छोड़ने और परिवर्तनों के अनुकूल होने की आवश्यकता होगी। रोमांस आपके जीवन में प्रवेश करेगा, आनंद और उत्साह लाएगा। 20 साल बाद बना महा केदार योग, इन 3 राशि वालों के लिए लाया है अपार भाग्य व सफलता! कन्या राशि- विदेश के काम से जुड़े या विदेश जाने के इच्छुक लोगों को काफी फायदा होगा। अन्य क्षेत्रों में घूमने की आपकी इच्छा पूरी हो सकती है। अपने खर्चों काबू करें। आप संतोष का अनुभव करेंगे और आपका मन शांत रहेगा। तुला राशि- आपकी आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और लंबे समय से रुके हुए काम सफलतापूर्वक पूरे होंगे। आत्मविश्वास की वापसी होगी और प्रमोशन के योग बन सकते हैं। सामाजिक संपर्क आपके व्यवसाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और निवेश के अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
Shukra ka Singh Rashi Mein Gochar दो हज़ार तेईस: शुक्र का अब ग्रहों के राजा सूर्य की सिंह राशि में प्रवेश होने जा रहा है। सिंह राशि में शुक्र के आने से कई राशि के जातकों के लिए एक महीने की अवधि शुभ रहेगी। Venus Transit In Leo: सुख-समृद्धि का ग्रह शुक्र अगले महीने एक महत्वपूर्ण गोचर करने के लिए तैयार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्र सात जुलाई को तीन:उनसठ बजे, शुक्र कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद तेईस जुलाई को सुबह छः:एक बजे वक्री हो जाएंगे और सात अगस्त दो हज़ार तेईस को सुबह कर्क राशि में लौट आएंगे। मेष राशि- शुक्र के गोचर से आपके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। आप अपने रिश्तों को काफी गंभीरता से लेंगे और अपने प्रियजनों की हर इच्छा को पूरा करने का प्रयास करेंगे। अविवाहित लोगों को भी इस अवधि में प्रेम प्रसंग का अनुभव हो सकता है। आपका व्यक्तित्व दूसरों को आकर्षित करेगा और करियर और वित्त के क्षेत्र में आपका नाम और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अगले साल तक इन तीन राशि वालों पर रहेगी देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा, हो सकते हैं मालामाल! वृषभ राशि- आपके घर में खुशियां बढ़ेंगी और आप शुभ कार्यक्रमों की प्लानिंग भी बना सकते हैं या नया वाहन खरीद सकते हैं। यह अवधि पेशेवरों के लिए अच्छी संभावनाएं लेकर आएगी। हालांकि संपत्ति से संबंधित कानूनी मामलों पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है और यह समय लेने वाला हो सकता है। मिथुन राशि- अपनों का दिल जीतने की आपकी इच्छा तेज होगी और आपका प्रेम जीवन खिलेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और उनकी सहायता से आपको लाभ होगा। यात्राओं पर जाने के लिए समय अनुकूल है और आर्थिक लाभ और संतोष का अनुभव होगा। आपके घर में शांति रहेगी। कर्क राशि- शुक्र का गोचर आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा, जिससे आप दूसरों की नजरों में और आकर्षक बनेंगे। आप पर्याप्त वित्तीय लाभ का अनुभव करेंगे और मौखिक संघर्षों में विजयी होंगे। आपके बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी और आपके आय के स्रोतों में विस्तार होगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। सिंह राशि- आप बिना वजह ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेंगे और कई प्रयासों में आपको सफलता मिलेगी। आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा और व्यापारी फलेंगे-फूलेंगे। हालांकि आपको जिद छोड़ने और परिवर्तनों के अनुकूल होने की आवश्यकता होगी। रोमांस आपके जीवन में प्रवेश करेगा, आनंद और उत्साह लाएगा। बीस साल बाद बना महा केदार योग, इन तीन राशि वालों के लिए लाया है अपार भाग्य व सफलता! कन्या राशि- विदेश के काम से जुड़े या विदेश जाने के इच्छुक लोगों को काफी फायदा होगा। अन्य क्षेत्रों में घूमने की आपकी इच्छा पूरी हो सकती है। अपने खर्चों काबू करें। आप संतोष का अनुभव करेंगे और आपका मन शांत रहेगा। तुला राशि- आपकी आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और लंबे समय से रुके हुए काम सफलतापूर्वक पूरे होंगे। आत्मविश्वास की वापसी होगी और प्रमोशन के योग बन सकते हैं। सामाजिक संपर्क आपके व्यवसाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और निवेश के अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
राजे अपने अपने ठिकाने लग गए थे और बहुतों ने शाहजादे की सहायता करके अपने भाइयों की गुलामी की बेडी और भी दृढतर कर दी। उधर तो गुरु साहब और शाहजादे में शांति स्थापना और प्रेम का पत्रव्यवहार हो रहा था, इघर अन्य पहाडी राजाओं ने अवसर पर अपना पहला बैर साधने का सकल्प किया और गुर साहब से पहला भेजा कि "आप के सिक्ख लोग अकसर हमारे इलाकों में आ कर लूट पाट किया करते हैं, यह बहुत बुरा है। आपको इसका बहुत जल्द इतजाम करना चाहिए, क्योंकि आपके पैर दिन पर दिन अधिक फैलते जाते हैं। यदि याँही पैर फैलाना और लोगों पर अत्याचार करना अमीष्ट हो तो हम लोगों के इलाके से दूर और कहीं जा रहिए, नहीं तो हम लोगों को विवश हो आपसे विरोध करना पडेगा" । गुरु साइब इन पहाडी राजाओं का पत्र पा चकित और क्रोधित हुए। इनमें से अवसर पड़ने पर कइयों की उन्होंने सहायता की थी, अर यह वृनता देख कर उन्हें बडा बोध आया। एक और बादशाही सेना पड़ी हुई थी और इस मौके पर युद्धाग्नि सुलगा कर ये लोग गुर साहब को भस्म कर देना चाहते थे, क्योंकि बात यह थी कि गुरु साहन का प्रबल होना इन लोगो को बहुत सटकता था । यद्यपि इन्होने कई बार उनसे सहायता ली थी, पर इनके मन मे यही था कि जब अवसर होगा, इनको मटियामेट करके छोडेगे । एक साधारण 'गद्दी का गुरु' जो कि हम लोगों की भिक्षा मे पला, है, ऐसा, बलवान हो जाय. कि. हम तिलकधारी, सनी राजाओं को मौके पर हाथ जोड़ कर उससे सहायता मांगनी पड़े ! धिकार है हम लोगों पर ! कल कोई आश्चर्य नहीं कि वह हम सबों का राजेश्वर बन बैठे और धर्म और गालसा पंथ की आड़ में साम्राज्य स्थापन कर आप चैन करने लगे। शाहजादे से प्रेम का पत्र व्यवहार भी अच्छा नहीं" । यही सब सोच कर इन मिथ्याभिमानी राजाओं ने बड़ी बुरी सायत मे गुरु गोविंदसिंह को विरोध का संदेशा भेजा । गुरु साहब ने राजाओं को उत्तर लिख भेजा कि "भारतभूमि पर मेरा उतना ही हक़ है, जितना आप लोगो का। जिस भूमि पर मैं रहता हूँ वह मैंने द्रव्य देकर सरीदी है, कुछ आपसे भीख नहीं मांग ली है। सिक्खों से आप लोगों ने कुछ अनुचित व्यवहार किया होगा इसी कारण उन्होंने आपके इलाको मे लूट पाट मचाई होगी। अकारण इस प्रकार की कार्रवाई करने की मेरी सख्त भुमानियत है। उचित तो यही था कि आप लोग इस समय मेरी सहायता में तत्पर रहते सो उलटे विरोध पर उतारू हुए हैं, यह बड़ी लज्जा की यात है। खैर, इसका फल भी हाथों हाथ पाइएगा।" राजा लोगों के क्रोध में घी पड़ा। उत्तर में उन लोगों ने केवल लिख भेजा कि बहुत जल्द यह इलाका छोड़ कर चले जाओ नहीं तो वड़ी बेइज्जती के साथ निकाले जाओगे। गुरु साहब ने केवल इतना ही लिखा कि हम तय्यार हैं, जो अकाल पुरुष की मर्जी ! बादशाही युद्ध बंद रहने के कारण इस समय तक गुरु साहय के पास अच्छी सेना तय्यार हो गई थी और राजाओं को भी यह समाचार विदित था । इसलिये वे लोग बड़ी भारी तय्यारी करने लगे और थोड़े ही दिनों में करीब बीस हजार सेना इकट्ठी हो गई। इस बीच में एक दिन थोड़े से सिक्ख कुछ अन्न वस्त्र खरीदने के लिये पहाड़ी ग्रामों में गए थे। वहाँ राजा अजमेर चंद ने दो राजपूत जागीरदारों को उभाड़ कर उनको घेरवा दिया और दोनों तरफा तलवारें चलने लगीं। सिक्खो की बहादुरी के आगे उनमें से एक राजपूत मारा गया और कई घायल होकर भाग निकले। तात्पर्थ्य यह कि इस प्रकार की छेड़ छाड़ जारी रही। अब तक गुरु साहब के पास भी आठ हजार सेना तय्यार हो गई थी। उधर से राजाओं ने भी चढ़ाई कर दी, जिनमें अजमेर चंद बिलासपुरिया मुख्य था। इसने बड़ी धूम धाम से धावा करके गुरु साहब के निवासस्थान आनंदपुर का किला चारों ओर से घेर लिया। गुरु साहब किला बंद कर भीतर ही बैठे रहे और इस समय बाहर मैदान में लड़ कर सैन्य ध्वंस करना उन्होंने उचित न समझा । केवल किले की बुर्ज और दीवारों पर से तोप और बंदूकों की बाढ़ दागने लगे। इधर से भी तोपें अनि उगल रही थी और गोली तथा तीरों की वर्षा हो रही थी। दिन भर खूब आग्न की वर्षा हुई। सूर वीरों ने खूब अग्नि की पिचकारी से होली सेली और कायरों के जी दहल गए। दिन भर के युद्ध के बाद जब शत्रु थकित हो सो गए तो अँधेरी रात में गुरु साहब ने किले से बाहर निकल कर शत्रु पर एकाएक हमला कर दिया । बहुत से मारे गए और सहस्रों घायल हुए और जब तक वे सँभल कर सामना करने के लिये तय्यार हों, तब तक गुरु गोविंदसिंह फिर किले में जा घुसे। योंही दिन को किले के भीतर तोपों से लड़ते और रात्रि को एकाएक छापा मारते जिससे पहाड़ी राजाओं की बड़ी भारी हानि हुई और दिन पर दिन उन लोगों का वल घटने लगा। एक दिन राजाओं ने एक मतवाले हाथी को शराब पिला, सिर पर एक बड़ा भारी लोहे का तवा बाँध और सूंड़ मे तलवार पकड़वा किले का फाटक तोड़ने के लिये भेज दिया। गुरु साहब का एक शिष्य दुनीचंद नामी था । वह प्रायः अपनी बहादुरी की डींग मारा करता था। इस मौके पर गुरु साहब ने उसे बुलवा कर कहा कि ' जाओ हाथी मार भाओ ।" सुनते ही उसके होश हवा हो गए और हाथी मारने के बहाने से यह किले से कूद कर भाग गया। पीछे गुरु साहब ने दूसरे शिष्य विचित्रसिंह को हाथी से सामना करने की आज्ञा दी । पह हाथ में वर्धी ले भत्त वारण के सामने आया और ताक कर उसने एक बछ ऐसी मारी कि वह लोहे के तवे को भेद करती हुई हाथी के मस्तक में घुस गई। अब तो वह मत्त प्रवल इस्ती पीड़ा से चिंघारता हुआ पीछे की ओर लौट पड़ा और अपने राजाओं की सेना को रौंद रांद कर माटयामेट करने लगा । यह मौका गुरु साहब को अच्छा मिला। उन्होंने फौरन किले से बाहर निकल कर शत्रुओं पर आक्रमण कर दिया । इस दोहरी आपदा से सेना एक बार ही घयड़ा उठी और सामना करना छोड़ भाग निकली। कितने ही सिक्सरों की तेज तलवारों से मारे गए। कुछ दूर तक भाग कर जब सारी सेना बटुर कर ठीक व्यूहबद्ध होने लगी तो भाग कर सिक्ख लोग फिर किले के भीतर आ घुसे । अब की बार राजाओं ने एक अनोखी चाल चली । क्या किया कि एक आटे को गो चनवा उसके गले में एक पत्र बाँधा और उसमें यह लिखा कि आपको इसीकी कसम है यदि किला छोड़ कर मैदान में न आओ। गुरु साहब ने इसकी कुछ परवाह न की, पर उनकी माता जी ने बहुत जिद्द की और किला छोड़ने के लिये गुरु साहब को विवश किया। मातृभक्त गोविंदसिंहजी किला छोड़ कर्तारपुर की ओर रवाना हुए और उन्होंने मार्ग में एक टीले पर मोरचा जा लगाया। पहाड़ी राजाओं ने उन्हें यहाँ आ घेरा और दोनों तरफ से खूब घोर युद्ध हुआ। यद्यपि पहाड़ी राजाओं ने बहुतेरा जोर मारा पर हमारे सिक्ख जवानों की वीरता के आगे उन्हें पराजित होकर भागना ही पड़ा। अब तो ये लोग बढ़े परेशान हुए और बादशाही सूवा सरहिंद के नव्वाब के पास जा उन्होंने पुकार की कि हजूर ! देखिए गोविंदसिंह ने हमारी क्या दशा की है, अब आपकी सहायता बिना काम नहीं चलेगा। उसने कहा कि युद्ध का खर्च दो तो तुम्हें सहायता के लिये सेना मिल सकती है। बीस हजार रुपया देने पर दो तीन हजार अच्छी सुशिक्षित सेना दो अनुभवी भुगल सर्दारों के अधीन इन लोगों के साथ हुई । इन्होंने आते ही गुरु साहब पर धावा बोल दिया। गुरु साहब इस समय कर्तारपुर ही में थे, जहाँ मंवत् १७५८ के मार्गशीर्ष महीने में बड़ा घमासान युद्ध हुआ। गुरु साहब किले के भीतर से तोपों से लड़ रहे थे। इधर से भी तोपों की बाद दागी जा रही थी। दोनों ओर के सहस्रों वीर मरे और घायल हुए, पर पहाड़ी लोग गुरु साहब पर कुछ प्रभाव न डाल सके । एक समय एक बुर्ज पर बैठे हुए, गुरु साहब साफा बाँध रहे थे, पीछे सेवक खड़ा चंवर कर रहा था। राजा अजमेर चंद ने गोलंदाज को बुला गुरु साहब को गोले का निशाना बनाने की आज्ञा दी । एकाएक जहाँ गुरु साहब बैठे थे धुंधकार होगया और धुएँ और गधक बारूद की गंध के सिवाय कुछ भी न सुझाई देने लगा। जब धुँआ कुछ साफ हुआ तो गुरु साहब ने देखा कि चमरधारी का कहीं पता नहीं हैं और मांस के जलने की गंध आ रही है । बड़ी खेर हुई । गुरु साहब साफ बच गए, और वह चमरधारी उड़ गया। "जाको राखे साइयाँ, भार न सक्के कोय" । ऐसे ही ऐसे अवसर पर दैव बली कहा जाता है। गुरु साहब ने अपने गोलंदाज को बुला कर निशाना मारने को कहा, जिसमे शत्रुओं की ओर का गोलंढाज गिरा। राजा अजमेरचंद दूर हट गया था, नहीं तो वह भी न वच पाता । दिन भर की लड़ाई के बाद जब रात्रि हुई और दोनों ओर की सेना ने विश्राम किया तो गुरु साहब ने तोप की घटना याद कर कर्तारपुर के किले को सर्वथा सुरक्षित न समझा और वे एक गुप्त मार्ग से निकल कर रातोरात मार्ग सेना के साथ किले आनंदगढ मे आ गए। विदित होने पर शत्रु, ने, वहाँ ही आ किला घेरना आरंभ किया। अव की बाहर निकल सिक्स जवान खूप लड़े। उन्होंने सुबे सरहिंद की सेना को चार कोस तक पीछे हटा दिया, पर फिर उन्हें स्वयं पीछे लौटना पड़ा और सब लोग किले में आ प्रविष्ट हुए। अब की शत्रुओ ने किला अच्छी तरह से घेर लिया। आने जान के सारे मार्ग अवरुद्ध कर दिए । गुरु साहब किला बंद किए पूर्ववत् बड़ी वीरता से तोपो से लड़ते रहे। दो चार दस कर के पंद्रह दिवस यों ही व्यतीत हो गए, पर न तो किले का फाटक टूटा और न मुसलमानी सेना ही हटा । चडै संकट का मुकाम था । इधर किले के भीतर का रसद पानी चुकने लगा था । दाल रोटी की कौन कहे, सिक्स लोग एक एक मुट्ठी चने चबा चबा कर मोरचो पर डटे हुए थे, पर अब वह भी चुक गया और भूखों मरने के दिन आए। दो एक दिन केवल पानी पर गुजारा चला। जब कोई सहारा न रहा और बहुत से सिक्ख सिपाही मारे गए और घायल भी हुए तो गुरु साहब ने किले मे बंद रह कर यो सिपाही मरवाना अनुचित समझ, फाटक सोल दिया और व्यूहद्ध हो पृष्ठ और पार्श्व का पूरा बचाव करते हुए वे बाहर मैदान में निकल आए । यद्यपि शत्रुओं ने बहुतेरा चाहा और बहुत कुछ जोर भी मारा कि इस व्यूह को भेद कर गुरु गोविंदसिंह को पकड़ ले, पर गुरु साहब की व्यूह रचना की चतुराई और रणकौशल से उन लोगों की कुछ दाल न गली। जब व्यूह की लाइन का एक सिपाही गिरता दूसरा तत्क्षण वहाँ आ सड़ा होता था। यों ही लड़ते भिड़ते अपना बचाव करते हुए शत्रुओं को घुमाने फिराते गुरु साहब बची हुई सारी सिक्ख सेना के साथ सतलज पार हो गए और थकी हुई पहाड़ी और सरहिं सेना पीछे को वापस आई और उससे जहाँ तक बन पड़ा उसने आनंदपुर के किले को लूटपाट वीरान किया पर गोवंदसिंह का सटका इनके दिल से न मिटा । यद्यपि अब की लड़ाई में -गुरु साहब की हार हुई थी, पर तो भी इनकी वीरता और रणनिपुणता की धाक बैठ गई थी। गुरु साहब सतलज पार • वसुली नामक ग्राम में जाकर ठहरे और वहां थकी मांदी सेना के साथ कुछ दिनों तक उन्होंने विश्राम किया। वसुली का राजा गुरु साहब का परम मित्र था; उसने इस अवसर पर इनकी बड़ी खातिर की और सब तरह से इनकी थकावट मिटाने और आराम करने का इंतजाम कर दिया । कभी कभी दिल बहलाने के लिये वह गुरु साहब को शिकार इत्यादि के लिये बाहर भी ले जाया करता था। एक दिन आखेट करते हुए, चनों में इलाका जंबूर के राजा से भेंट हो गई । वह बड़ी प्रीति से गुरु साहब को अपने घर लिवा ले गया। कुछ दिन उसके घर रह कर, गुरु साइच ख्वालसर में आ गए और वहीं उन्होंने पुनः अपने शिष्य और अनुयायियों का एक बड़ा दरबार किया । समाचार पाकर दूर दूर से बहुत से शिष्य और नवयुवक सिक्ख योद्धा दरबार में हाजिर हुए। गुरु गोविंदसिंह जी ने सब का यथायोग्य सत्कार कर एक दो नली भरी बंदूक उठाई। यह बंदूक जंबूर के राजा ने उन्हें भेंट की थी। बंदूक उठाकर उन्होंने कहा कि क्या कोई ऐसा वीर है जो आप लक्ष्य बनकर इस यंदूक की शक्ति की • परीक्षा करे । गुरु साहब के इतना कहते ही जमात की जमात सिक्खों की उठ खड़ी हुई और सब ने लक्ष्य बनने की इच्छा प्रगट की। गुरु साहब इन लोगों की शक्ति और श्रद्धा देख परम संतुष्ट हुए और उपस्थित राजा और अन्य राजाओं के जो गुप्त चर जो वहाँ मौजूद थे। दाँतो उँगली जिसके, अमुगामी जरा से इशारे पर बेसटके प्राण देने को तैयार हैं, उसकी सर्वदा विजय क्यों न हो ? अस्तु, दरबार विसर्जन कर और शिष्यों को एक भावी बड़े युद्ध के लिये तैयार रहने की सूचना देकर गुरु साहब अपने घर आनंदपुर को वापस आए। ख्वालसर में जहा उन्होंने दरबार किया था, उसके स्मारक में एक मंदिर पना हुआ अब तक वर्तमान है। आनंदपुर आते हुए राह में एक लड़ाई और भी लड़नी पड़ी। बात यह थी कि रवालसर से रवाना होते हुए राह मे मंडी के राजा ने इनको निमंत्रण देकर चड़ी खातिर मै अपने यहाँ टिकाया। व्यास नदी के तीर एक सुंदर उपवन में इनका डेरा दिया गया, जहां स्मारक रूप एक मंदिर पीछे से बना । जो अब तक वर्तमान है। अभी गुरु माहब यही टिके हुए थे कि इन्हें सबर मिली कि बहुत से शिष्य तरह तरह की भेंट और तोहफे लेकर गुरुजी के दर्शनों को आते थे, जिनको मार्ग में कलमोठा के राजा ने लूट लिया। उक्त समचार के पाते ही गुरुजी ने अपने बड़े पुत्र अजीत सिंह को थोड़े से सिक्स जवानों के साथ कलमोठा विध्वस्त करने के लिये भेज दिया। उधर राजा फलमोठा का मित्र ज्वालामुखी का निवासी विजयभारती महंत, अपने पांच सौ नागा सवारों के साथ राजा की सहायता को आ पहुँचा । यह समाचार पा गुरु साहय स्वयं उधर को रवाना हुए और राजा कलमोठा को उन्होंने खूप मजा चखाया । नागा सवार सिक्खों के सामने तनिक मी ने ठहर सके। युद्ध में विजय पा सिक्ख सवारों ने राजा के इलाकों में खून लूट पाट की और विजय भारती के मठ को भी ध्वस्त विध्वस्त कर डाला । इन सब बखेड़ों से छुटी पा गुरु साहब आनंदपुर में बिराजने लगे। अब एक रोज किले में दर्बार कर आपने अपने पाँचों पुत्रों का "अमृत संस्कार" किया अर्थात् सव शिष्यों की तरह अमृत चखा उन्हें भी शिष्य और वीर कोटि में प्रविष्ट कराया और वैसे ही सारा प्रतिज्ञाएँ करवाई, अपने पुत्र और अन्य शिष्यों में कुछ भेद भाव न रक्खा । इस संस्कार के बाद गुरु साहब ने एक सर्वसाधारण वड़ा महात्सव किया और शिष्या तथा अभ्यागत ब्राह्मण साधुओं को सत्कारपूर्वक सूम भोजन कराया और दान दक्षिणा दी। थोड़े दिनों में सूर्य प्रहण का पर्व था और कुरुक्षेत्र में लक्षी जन समुदाय हिंदुओं का इकट्ठा होनेवाला था । ऐसे उत्तम अवसर को गुरु साहब ने हाथ से जाने देना उचित न समझा। मेले में जाकर भारत मात्र के हिंदुओं में सनातन धर्म की रक्षा और वीरव्रत का उपदेश करना ठान कर आषाढ़ मास संवत् १७५९ विक्रमी में वे कुरुक्षेत्र पहुँच गए और डेरा और तंबू इत्यादि खड़ा कर उन्होंने कार्य आरंभ कर दिया। नित्य सुबह शाम उपदेश हुआ करता था, जिसमें अपनी स्वाभाविक वाग्मिता के साथ सनातन धर्म की रक्षा और वीर धर्म ( सालसा पंथ ) का उपदेश होता था । लक्षों नर नारी इनके उपदेश से पावन होकर डेरे को जाते और कितनों ही ने खालसा धर्म अंगीकार कर गुरु के बल को बढ़ाया। धर्मोपदेश के साथ वीर धर्म की चर्चा भी अधिक रहा करती थी और अच्छे अच्छे उत्साही हिंदू शुर वीर युवक भी गुरु साहब के दर्शन को आते थे। गुरु साहब यथायोग्य सब का सत्कार करते और भारत माता की कथा सुनाते थे । इन वीरों मे से चंद्रनाथ नाम का एक राजपूत था। वह बड़ा बहादुर और तीरंदाज था। गुरु साहच उसकी बहुत खातिर किया करते थे। पर यह राजपूत वीरता के घमंड में इसकी कुछ परवाह न कर अपने मुँह आप अपनी तारीफ वधारा करता था। एक दिवस वह कहने लगा कि "मेरे ऐसा तीरंदाज संसार में है ही नहीं" । गुरु साहब उसकी डींग सुनकर मनोमन मुस्कराए और वाले "कृपापूर्वक जरा आपकी • इस अलौकिक रणनिपुणता का आभास मुझे भी करा दीजिए। इस पर बड़े घमंड से उसने धनुष पर वाण चढ़ा कर चलाया जो दो मील के लक्ष्य को वैध कर शांत हुआ । आस पास के लोग तारीफ करने लगे। अब की बार गुरु साहब ने शर संघाना और तीन मील के लक्ष्य को वैध दिया। यह देख कर उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा और वह गुरु साहब के सामने मत्था टेक कर बोला - क्षमा कीजिए महाराज ! मुझे आपके अलौकिक सामर्थ्य का ज्ञान न था । मिथ्या ही अपनी तारीफ के तार वाँधता था। गुरु साहब बोले, यह तो कोई बात नहीं है, करत सारे अभ्यास के खेल हैं। अहंकार अच्छी बात नहीं है। वह राजपूत बहुत लज्जित 'और नम्र हो गया। तदनंतर गुरु साइम ने ब्राह्मणों और अतिथि अभ्यागतों को ग्रहण के अवसर पर बहुत कुछ दान दक्षिणा दी, 'सब का यथोचित सत्कार किया और मणिराम 'नाम के एक विद्वान् ब्राह्मण को बहुत कुछ दान दक्षिणा के साथ अपना दससती एक पत्र भी दिया जो उसके वंशधरों के पास अब तक मौजूद है। सूर्यग्रहण का मेला समाप्त होने पर गुरु साहब चमकौर नामक प्राम मे आकर ठहरे। मैदान में डेरे पड़े हुए थे। दैवात उधर से दो सहस्र बादशाही सेना जा रही थी। गुरु माहब को मैदान में डेरा डाले हुए दंस कर उन लोगो ने इन पर हल्ला चोल दिया पर हमारे सिक्ख मवार वेसवर न थे। उन्होंने जम कर वह तलवार के जौहर दिखलाए कि मुगलों को मुहासरा छोड़ कर सीधे लाहोर का मार्ग लेना पड़ा। अब गुरु साहब मीधे आनंदपुर को चले आए। किला जिसे शत्रुओं ने तोड़ ताड़ दिया था सब मरम्मत करवा कर खूब सुदृढ़ बनवाया गया और जगह जगह सफीलों पर पहले की तरह तोपें चढ़वा दी गई तथा यथोपयुक्त स्थान स्थान पर और भी अस्त्र शस्त्रों का समावेश करवा दिया गया। इन्हीं दिनों काबुल का एक सन्त्री गुरु साहब के दर्शनों को आया और उसने बहुत कुछ धन रत्न के साथ, पचास अच्छे अच्छे शूर वीर पठान भी गुरु साहब को भेंट किए। गुरु साहब ने इन लोगों को यथायोग्य सैन्यिक पदों पर नियुक्त कर दिया और वे आनंदपूर्वक अपने किले आनंदपुर में निवास करने लगे । जब पहाड़ी राजा भीमचंद और अजमेरचंद ने जो इनके कट्टर शत्रु थे, यह समाचार सुना कि गुरु गोविंदसिंहजी फिर आनंदपुर में लौट आए है और बड़े ठाट बाद से युद्ध की तय्यारी कर रहे हैं तो उनका खून उबलने लगा"। अकेले लड़ कर जय पाना असंभव है, यह अनुभव उन्हें हो चुका था और गुरु गोविंद सिंहजी का दिन पर दिन जोर पकड़ते जाना भी उन्हें बड़ा अन्वरता था इसलिये उन्होंने शाहंशाह औरंगजेब को यह पत्र लिखा कि "हजूर, आपकी सलतनत में अब तक हम लोग अमन चैन से रहते थे, कोई भी उँगली दिखानेवाला न था, पर अब एक वला ऐसी आई है जिससे हम लोगों का जान माल हरदम सतरे में रहता है। तंगबहादुर नाम का एक फकीर संवत १७३२ में शादी हुक्म से बागी कहला कर मरवाया गया था; यह उसीका लड़का गोविंदसिंह है, जिसने यह आफत बरवा कर रक्खी है। इसने एक नया मजहब चलाया है । वह अपने चेलों को कवायद और लड़ाई के फन में होशियार करके अपनी फौज में भर्ती कर लेता है और नगदी रुपयों के साथ गोली चारूद वगैरः भी अपने बैलों से भेंट में लेता है, जिससे इसके पास बहुत सी फौज भी इकट्ठी हो गई है और हथियार तथा साज समान की भी कमी नहीं रही है । इसने कई मजबूत किले भी यनचा लिए हैं और अपने कट्टर सिपाहियों की बदौलत, जिनमें इसने एक नई रूह फूँक दी है, यह किसी को कुछ नहीं गिनता। बड़े बड़े लुटेरे, डाकू और बादशाही बागी इसके साथ हो गए हैं और ये रोक टोक लूट पाट कर लोगों का सर्वनाश कर रहे हैं। हम लोग इससे बहुत तंग आ गए हैं। कई बार हम लोगों ने मिल कर इस पर चढ़ाई भी की पर इसकी दिलेरी और चालाकी से हार कर इस लोगों को पीछे हट जाना पड़ा, यहाँ तक कि सूबा सरहिंद की मदद भी कुछ कारगर न हुई। इस शैतान की ताकत अगर एक दम जड़ से न उखाड़ दी जायगी तो जैसी कि इसकी मनशा है यह किसी रोज आपकी सलतनत मे भारी गदर मचाएगा। हिंदुओं को यह आपके खिलाफ उभाड़ता और उन्हें पट्टी पढ़ाया करता है और अभी से उसने अपने को सच्चा बादशाह मशहूर कर रक्खा है, इत्यादि इत्यादि । यह सब तो उन्होंने पत्र द्वारा लिखा फिर आप भी कई पहाड़ी राजाओं के साथ शाही दर्बार में जा पुकारा और ऊपर लिखा वृत्तांत मुँहजयानी शाहंशाह को सुनाया। बादशाह औरंगजेय जिसकी कूटनीति ने राजपूताने और दक्षिण दोनों प्रांतों मे अग्नि सुलगा रक्सी थी, पंजाब की इस नई आपदा का हाल सुन कर बहुत झल्लाया। तत्काल ही उसने सूवा सरहिंद के नाम शाही हुक्मनामा भेजा कि "चागी गोविंदसिंह को पकड़ कर फौरन दर्बार में हाजिर करो"। साथ ही इसके कुछ फौज भी सूवा सरहिंद के सहायता की लिये भेजी गई। भूधा भरहिंद पहाड़ी राजाओं के साथ शाही फौज लेकर संवत् १७५९ के फाल्गुण मास में बड़ी धूम धाम से आनंदपुर पर चढ़ आया। सिक्खों को खवर पहुँच चुकी थी कि "बादशाह ने गुरु साहब को पकड़ कर ले जाने की आशा दी है" इसलिये बहुत से योद्धा इस समय यहाँ इकट्टे हो गए थे और गुरु जी के लिये सब कुछ करने को तैय्यार थे । बादशाही सेता के आते ही गुरु साहब भी मैदान में निकले और तुरंत ही भयंकर युद्ध छिड़ गया। दोनों तरफा कड़ी मार होने लगी। बंदूक गोला गोली के शब्द और अग्नि की भयानक वर्षा के बीच वीर लोग हाथों में तलवार और बर्छा लिए आगे बढ़ते और कायर पीछे दबके जाते थे। रक्त की नदी बहने लगी और घायलों के हाय ! हाय ! तथा वीरो के मार मार शब्द से रणभूमि गूँज हो उठी तात्पर्य यह कि चार पांच रोज तक घड़ा भयंकर युद्ध हुआ। एक और बादशाही सुशिक्षित सेना और दूसरी ओर खालसा धम्मोन्मत चीरों की तलवारो ने कोहराम मचा दिया। मुगलो ने सिक्खो के व्यूरभेद की बहुत कुछ चेष्टा को पर वे सफलमनोरथ न हो सके। जब वे आग बढ़ते तलवार और वछ की दीवार सडी पाते । उनकी प्रबल तोपें भी इस दीवार को भग्न न कर सकी; क्योंकि पाइर्व भाग में गुरु साहब की तोपे भी आग उगल रही थी । वादशाही सेनापति 'साधारण बागी गोविंदसिंह का शौर्य और प्रताप देखकर चकित और भयभीत हुआ। गुरु साहब अब तक केवल वार बचाते थे। जब उन्होंने पाँचच दिन चादशाही सेना के कई एक भाग को कुछ निर्बल होते देखा तो तत्क्षण वे अपनी प्रधान सेना के साथ उसपर जा टूटे और इस चेग से उनका यह आक्रमण हुआ कि बादशाही सना को कई कोस पीछे हट जाना पड़ा । जब कुछ सँभल कर मुगल लोग फिर सम्मुखीन हुए तो बादशाही सेना का एक सवार अजीमखाँ गुरु साहब के सामने आ गया । उसने गुरु साहब पर तलवार चलाई। गुरु साहब ने उसके वार को ढाल पर लिया और जब तक वह सँभले सँभले तब तक उनकी दुर्गादत्त तलवार इस तेजी से उसकी खोपड़ी पर जा पड़ी कि वह दो टूक होकर घोडे के नीचे नजर आया। इतने ही में मुगल सर पैदांखाँ तलवार घुमाता हुआ सामने आ निकला और सामने आते हो लपक कर बड़े जोर से गुरुजी पर उसने वार किया । गुरु साइब उछल कर बगल में हो रहे और वगल हो से उन्होंने उसके पाइर्व भाग में खाँड़ा घुसेड़ दिया। एक आह और चीख के बाद यह भूमि पर लोटता नजर आया और दो एक बार पैर फटकार कर यमलोक को सिधारा। अब तो किसी की हिम्मत न हुई कि गुरुदेव पर वार करता या उनके सामने आता । सारे सरदार उनसे दूर ही दूर रह कर दबाव डालने की चेष्टा करने लगे। गुरु गोविंदसिंह की सेना में कई वीर पठान भी नौकर थे । इस अवसर पर सैयद वेग और मामूसां दो योद्धाओं ने अच्छे हाथ दिखलाए । तलवार सींच जिस समय ये देव ऐसी वीर शाही फौज पर टूटे तो बहुतों के छक्के छूट गए। मुगल सवार और पैदल इनकी चोटों के सामने भेंड़ बकरी ऐसे भागन लगे । जिधर इनका हाथ पड़ता, मैदान साफ नजर आता । अंत को ज्यों त्यों हरिचंद जारसुवालिया एक बहादुर सवार इनके सामने आया, पर मामूख ने एक तलवार ऐसी मारी कि उसकी खोपड़ी ककड़ी सी फट कर नीचे जा गिरो। यह दशा देख मुगलों के नामी नामी बहादुर लोग जुट कर इधर आ गए और इनमें से एक दोनवेग नाम के योद्धा ने मामूखां का काम तमाम कर दिया । अपने सायी मामूखां की यह दशा देख सैयद वेग को वड़ा लोध चढ़ आया और दो कदम पीछे हट कर उछल कर उसने ऐसी तलवार मारी कि गेंद ऐसा उछलता हुआ दीनवेग का सिर दूर जा पड़ा। अब तो गुरु साहब ने मुगलों की निर्बलता देख एक दम बड़े जोर से शत्रुओं पर हल्ला बोल दिया और 'वाइ गुरु की फते' के आकाशभेदी नाद से आकाश गुंजायमान हो उठा। मुगल सेना जो
राजे अपने अपने ठिकाने लग गए थे और बहुतों ने शाहजादे की सहायता करके अपने भाइयों की गुलामी की बेडी और भी दृढतर कर दी। उधर तो गुरु साहब और शाहजादे में शांति स्थापना और प्रेम का पत्रव्यवहार हो रहा था, इघर अन्य पहाडी राजाओं ने अवसर पर अपना पहला बैर साधने का सकल्प किया और गुर साहब से पहला भेजा कि "आप के सिक्ख लोग अकसर हमारे इलाकों में आ कर लूट पाट किया करते हैं, यह बहुत बुरा है। आपको इसका बहुत जल्द इतजाम करना चाहिए, क्योंकि आपके पैर दिन पर दिन अधिक फैलते जाते हैं। यदि याँही पैर फैलाना और लोगों पर अत्याचार करना अमीष्ट हो तो हम लोगों के इलाके से दूर और कहीं जा रहिए, नहीं तो हम लोगों को विवश हो आपसे विरोध करना पडेगा" । गुरु साइब इन पहाडी राजाओं का पत्र पा चकित और क्रोधित हुए। इनमें से अवसर पड़ने पर कइयों की उन्होंने सहायता की थी, अर यह वृनता देख कर उन्हें बडा बोध आया। एक और बादशाही सेना पड़ी हुई थी और इस मौके पर युद्धाग्नि सुलगा कर ये लोग गुर साहब को भस्म कर देना चाहते थे, क्योंकि बात यह थी कि गुरु साहन का प्रबल होना इन लोगो को बहुत सटकता था । यद्यपि इन्होने कई बार उनसे सहायता ली थी, पर इनके मन मे यही था कि जब अवसर होगा, इनको मटियामेट करके छोडेगे । एक साधारण 'गद्दी का गुरु' जो कि हम लोगों की भिक्षा मे पला, है, ऐसा, बलवान हो जाय. कि. हम तिलकधारी, सनी राजाओं को मौके पर हाथ जोड़ कर उससे सहायता मांगनी पड़े ! धिकार है हम लोगों पर ! कल कोई आश्चर्य नहीं कि वह हम सबों का राजेश्वर बन बैठे और धर्म और गालसा पंथ की आड़ में साम्राज्य स्थापन कर आप चैन करने लगे। शाहजादे से प्रेम का पत्र व्यवहार भी अच्छा नहीं" । यही सब सोच कर इन मिथ्याभिमानी राजाओं ने बड़ी बुरी सायत मे गुरु गोविंदसिंह को विरोध का संदेशा भेजा । गुरु साहब ने राजाओं को उत्तर लिख भेजा कि "भारतभूमि पर मेरा उतना ही हक़ है, जितना आप लोगो का। जिस भूमि पर मैं रहता हूँ वह मैंने द्रव्य देकर सरीदी है, कुछ आपसे भीख नहीं मांग ली है। सिक्खों से आप लोगों ने कुछ अनुचित व्यवहार किया होगा इसी कारण उन्होंने आपके इलाको मे लूट पाट मचाई होगी। अकारण इस प्रकार की कार्रवाई करने की मेरी सख्त भुमानियत है। उचित तो यही था कि आप लोग इस समय मेरी सहायता में तत्पर रहते सो उलटे विरोध पर उतारू हुए हैं, यह बड़ी लज्जा की यात है। खैर, इसका फल भी हाथों हाथ पाइएगा।" राजा लोगों के क्रोध में घी पड़ा। उत्तर में उन लोगों ने केवल लिख भेजा कि बहुत जल्द यह इलाका छोड़ कर चले जाओ नहीं तो वड़ी बेइज्जती के साथ निकाले जाओगे। गुरु साहब ने केवल इतना ही लिखा कि हम तय्यार हैं, जो अकाल पुरुष की मर्जी ! बादशाही युद्ध बंद रहने के कारण इस समय तक गुरु साहय के पास अच्छी सेना तय्यार हो गई थी और राजाओं को भी यह समाचार विदित था । इसलिये वे लोग बड़ी भारी तय्यारी करने लगे और थोड़े ही दिनों में करीब बीस हजार सेना इकट्ठी हो गई। इस बीच में एक दिन थोड़े से सिक्ख कुछ अन्न वस्त्र खरीदने के लिये पहाड़ी ग्रामों में गए थे। वहाँ राजा अजमेर चंद ने दो राजपूत जागीरदारों को उभाड़ कर उनको घेरवा दिया और दोनों तरफा तलवारें चलने लगीं। सिक्खो की बहादुरी के आगे उनमें से एक राजपूत मारा गया और कई घायल होकर भाग निकले। तात्पर्थ्य यह कि इस प्रकार की छेड़ छाड़ जारी रही। अब तक गुरु साहब के पास भी आठ हजार सेना तय्यार हो गई थी। उधर से राजाओं ने भी चढ़ाई कर दी, जिनमें अजमेर चंद बिलासपुरिया मुख्य था। इसने बड़ी धूम धाम से धावा करके गुरु साहब के निवासस्थान आनंदपुर का किला चारों ओर से घेर लिया। गुरु साहब किला बंद कर भीतर ही बैठे रहे और इस समय बाहर मैदान में लड़ कर सैन्य ध्वंस करना उन्होंने उचित न समझा । केवल किले की बुर्ज और दीवारों पर से तोप और बंदूकों की बाढ़ दागने लगे। इधर से भी तोपें अनि उगल रही थी और गोली तथा तीरों की वर्षा हो रही थी। दिन भर खूब आग्न की वर्षा हुई। सूर वीरों ने खूब अग्नि की पिचकारी से होली सेली और कायरों के जी दहल गए। दिन भर के युद्ध के बाद जब शत्रु थकित हो सो गए तो अँधेरी रात में गुरु साहब ने किले से बाहर निकल कर शत्रु पर एकाएक हमला कर दिया । बहुत से मारे गए और सहस्रों घायल हुए और जब तक वे सँभल कर सामना करने के लिये तय्यार हों, तब तक गुरु गोविंदसिंह फिर किले में जा घुसे। योंही दिन को किले के भीतर तोपों से लड़ते और रात्रि को एकाएक छापा मारते जिससे पहाड़ी राजाओं की बड़ी भारी हानि हुई और दिन पर दिन उन लोगों का वल घटने लगा। एक दिन राजाओं ने एक मतवाले हाथी को शराब पिला, सिर पर एक बड़ा भारी लोहे का तवा बाँध और सूंड़ मे तलवार पकड़वा किले का फाटक तोड़ने के लिये भेज दिया। गुरु साहब का एक शिष्य दुनीचंद नामी था । वह प्रायः अपनी बहादुरी की डींग मारा करता था। इस मौके पर गुरु साहब ने उसे बुलवा कर कहा कि ' जाओ हाथी मार भाओ ।" सुनते ही उसके होश हवा हो गए और हाथी मारने के बहाने से यह किले से कूद कर भाग गया। पीछे गुरु साहब ने दूसरे शिष्य विचित्रसिंह को हाथी से सामना करने की आज्ञा दी । पह हाथ में वर्धी ले भत्त वारण के सामने आया और ताक कर उसने एक बछ ऐसी मारी कि वह लोहे के तवे को भेद करती हुई हाथी के मस्तक में घुस गई। अब तो वह मत्त प्रवल इस्ती पीड़ा से चिंघारता हुआ पीछे की ओर लौट पड़ा और अपने राजाओं की सेना को रौंद रांद कर माटयामेट करने लगा । यह मौका गुरु साहब को अच्छा मिला। उन्होंने फौरन किले से बाहर निकल कर शत्रुओं पर आक्रमण कर दिया । इस दोहरी आपदा से सेना एक बार ही घयड़ा उठी और सामना करना छोड़ भाग निकली। कितने ही सिक्सरों की तेज तलवारों से मारे गए। कुछ दूर तक भाग कर जब सारी सेना बटुर कर ठीक व्यूहबद्ध होने लगी तो भाग कर सिक्ख लोग फिर किले के भीतर आ घुसे । अब की बार राजाओं ने एक अनोखी चाल चली । क्या किया कि एक आटे को गो चनवा उसके गले में एक पत्र बाँधा और उसमें यह लिखा कि आपको इसीकी कसम है यदि किला छोड़ कर मैदान में न आओ। गुरु साहब ने इसकी कुछ परवाह न की, पर उनकी माता जी ने बहुत जिद्द की और किला छोड़ने के लिये गुरु साहब को विवश किया। मातृभक्त गोविंदसिंहजी किला छोड़ कर्तारपुर की ओर रवाना हुए और उन्होंने मार्ग में एक टीले पर मोरचा जा लगाया। पहाड़ी राजाओं ने उन्हें यहाँ आ घेरा और दोनों तरफ से खूब घोर युद्ध हुआ। यद्यपि पहाड़ी राजाओं ने बहुतेरा जोर मारा पर हमारे सिक्ख जवानों की वीरता के आगे उन्हें पराजित होकर भागना ही पड़ा। अब तो ये लोग बढ़े परेशान हुए और बादशाही सूवा सरहिंद के नव्वाब के पास जा उन्होंने पुकार की कि हजूर ! देखिए गोविंदसिंह ने हमारी क्या दशा की है, अब आपकी सहायता बिना काम नहीं चलेगा। उसने कहा कि युद्ध का खर्च दो तो तुम्हें सहायता के लिये सेना मिल सकती है। बीस हजार रुपया देने पर दो तीन हजार अच्छी सुशिक्षित सेना दो अनुभवी भुगल सर्दारों के अधीन इन लोगों के साथ हुई । इन्होंने आते ही गुरु साहब पर धावा बोल दिया। गुरु साहब इस समय कर्तारपुर ही में थे, जहाँ मंवत् एक हज़ार सात सौ अट्ठावन के मार्गशीर्ष महीने में बड़ा घमासान युद्ध हुआ। गुरु साहब किले के भीतर से तोपों से लड़ रहे थे। इधर से भी तोपों की बाद दागी जा रही थी। दोनों ओर के सहस्रों वीर मरे और घायल हुए, पर पहाड़ी लोग गुरु साहब पर कुछ प्रभाव न डाल सके । एक समय एक बुर्ज पर बैठे हुए, गुरु साहब साफा बाँध रहे थे, पीछे सेवक खड़ा चंवर कर रहा था। राजा अजमेर चंद ने गोलंदाज को बुला गुरु साहब को गोले का निशाना बनाने की आज्ञा दी । एकाएक जहाँ गुरु साहब बैठे थे धुंधकार होगया और धुएँ और गधक बारूद की गंध के सिवाय कुछ भी न सुझाई देने लगा। जब धुँआ कुछ साफ हुआ तो गुरु साहब ने देखा कि चमरधारी का कहीं पता नहीं हैं और मांस के जलने की गंध आ रही है । बड़ी खेर हुई । गुरु साहब साफ बच गए, और वह चमरधारी उड़ गया। "जाको राखे साइयाँ, भार न सक्के कोय" । ऐसे ही ऐसे अवसर पर दैव बली कहा जाता है। गुरु साहब ने अपने गोलंदाज को बुला कर निशाना मारने को कहा, जिसमे शत्रुओं की ओर का गोलंढाज गिरा। राजा अजमेरचंद दूर हट गया था, नहीं तो वह भी न वच पाता । दिन भर की लड़ाई के बाद जब रात्रि हुई और दोनों ओर की सेना ने विश्राम किया तो गुरु साहब ने तोप की घटना याद कर कर्तारपुर के किले को सर्वथा सुरक्षित न समझा और वे एक गुप्त मार्ग से निकल कर रातोरात मार्ग सेना के साथ किले आनंदगढ मे आ गए। विदित होने पर शत्रु, ने, वहाँ ही आ किला घेरना आरंभ किया। अव की बाहर निकल सिक्स जवान खूप लड़े। उन्होंने सुबे सरहिंद की सेना को चार कोस तक पीछे हटा दिया, पर फिर उन्हें स्वयं पीछे लौटना पड़ा और सब लोग किले में आ प्रविष्ट हुए। अब की शत्रुओ ने किला अच्छी तरह से घेर लिया। आने जान के सारे मार्ग अवरुद्ध कर दिए । गुरु साहब किला बंद किए पूर्ववत् बड़ी वीरता से तोपो से लड़ते रहे। दो चार दस कर के पंद्रह दिवस यों ही व्यतीत हो गए, पर न तो किले का फाटक टूटा और न मुसलमानी सेना ही हटा । चडै संकट का मुकाम था । इधर किले के भीतर का रसद पानी चुकने लगा था । दाल रोटी की कौन कहे, सिक्स लोग एक एक मुट्ठी चने चबा चबा कर मोरचो पर डटे हुए थे, पर अब वह भी चुक गया और भूखों मरने के दिन आए। दो एक दिन केवल पानी पर गुजारा चला। जब कोई सहारा न रहा और बहुत से सिक्ख सिपाही मारे गए और घायल भी हुए तो गुरु साहब ने किले मे बंद रह कर यो सिपाही मरवाना अनुचित समझ, फाटक सोल दिया और व्यूहद्ध हो पृष्ठ और पार्श्व का पूरा बचाव करते हुए वे बाहर मैदान में निकल आए । यद्यपि शत्रुओं ने बहुतेरा चाहा और बहुत कुछ जोर भी मारा कि इस व्यूह को भेद कर गुरु गोविंदसिंह को पकड़ ले, पर गुरु साहब की व्यूह रचना की चतुराई और रणकौशल से उन लोगों की कुछ दाल न गली। जब व्यूह की लाइन का एक सिपाही गिरता दूसरा तत्क्षण वहाँ आ सड़ा होता था। यों ही लड़ते भिड़ते अपना बचाव करते हुए शत्रुओं को घुमाने फिराते गुरु साहब बची हुई सारी सिक्ख सेना के साथ सतलज पार हो गए और थकी हुई पहाड़ी और सरहिं सेना पीछे को वापस आई और उससे जहाँ तक बन पड़ा उसने आनंदपुर के किले को लूटपाट वीरान किया पर गोवंदसिंह का सटका इनके दिल से न मिटा । यद्यपि अब की लड़ाई में -गुरु साहब की हार हुई थी, पर तो भी इनकी वीरता और रणनिपुणता की धाक बैठ गई थी। गुरु साहब सतलज पार • वसुली नामक ग्राम में जाकर ठहरे और वहां थकी मांदी सेना के साथ कुछ दिनों तक उन्होंने विश्राम किया। वसुली का राजा गुरु साहब का परम मित्र था; उसने इस अवसर पर इनकी बड़ी खातिर की और सब तरह से इनकी थकावट मिटाने और आराम करने का इंतजाम कर दिया । कभी कभी दिल बहलाने के लिये वह गुरु साहब को शिकार इत्यादि के लिये बाहर भी ले जाया करता था। एक दिन आखेट करते हुए, चनों में इलाका जंबूर के राजा से भेंट हो गई । वह बड़ी प्रीति से गुरु साहब को अपने घर लिवा ले गया। कुछ दिन उसके घर रह कर, गुरु साइच ख्वालसर में आ गए और वहीं उन्होंने पुनः अपने शिष्य और अनुयायियों का एक बड़ा दरबार किया । समाचार पाकर दूर दूर से बहुत से शिष्य और नवयुवक सिक्ख योद्धा दरबार में हाजिर हुए। गुरु गोविंदसिंह जी ने सब का यथायोग्य सत्कार कर एक दो नली भरी बंदूक उठाई। यह बंदूक जंबूर के राजा ने उन्हें भेंट की थी। बंदूक उठाकर उन्होंने कहा कि क्या कोई ऐसा वीर है जो आप लक्ष्य बनकर इस यंदूक की शक्ति की • परीक्षा करे । गुरु साहब के इतना कहते ही जमात की जमात सिक्खों की उठ खड़ी हुई और सब ने लक्ष्य बनने की इच्छा प्रगट की। गुरु साहब इन लोगों की शक्ति और श्रद्धा देख परम संतुष्ट हुए और उपस्थित राजा और अन्य राजाओं के जो गुप्त चर जो वहाँ मौजूद थे। दाँतो उँगली जिसके, अमुगामी जरा से इशारे पर बेसटके प्राण देने को तैयार हैं, उसकी सर्वदा विजय क्यों न हो ? अस्तु, दरबार विसर्जन कर और शिष्यों को एक भावी बड़े युद्ध के लिये तैयार रहने की सूचना देकर गुरु साहब अपने घर आनंदपुर को वापस आए। ख्वालसर में जहा उन्होंने दरबार किया था, उसके स्मारक में एक मंदिर पना हुआ अब तक वर्तमान है। आनंदपुर आते हुए राह में एक लड़ाई और भी लड़नी पड़ी। बात यह थी कि रवालसर से रवाना होते हुए राह मे मंडी के राजा ने इनको निमंत्रण देकर चड़ी खातिर मै अपने यहाँ टिकाया। व्यास नदी के तीर एक सुंदर उपवन में इनका डेरा दिया गया, जहां स्मारक रूप एक मंदिर पीछे से बना । जो अब तक वर्तमान है। अभी गुरु माहब यही टिके हुए थे कि इन्हें सबर मिली कि बहुत से शिष्य तरह तरह की भेंट और तोहफे लेकर गुरुजी के दर्शनों को आते थे, जिनको मार्ग में कलमोठा के राजा ने लूट लिया। उक्त समचार के पाते ही गुरुजी ने अपने बड़े पुत्र अजीत सिंह को थोड़े से सिक्स जवानों के साथ कलमोठा विध्वस्त करने के लिये भेज दिया। उधर राजा फलमोठा का मित्र ज्वालामुखी का निवासी विजयभारती महंत, अपने पांच सौ नागा सवारों के साथ राजा की सहायता को आ पहुँचा । यह समाचार पा गुरु साहय स्वयं उधर को रवाना हुए और राजा कलमोठा को उन्होंने खूप मजा चखाया । नागा सवार सिक्खों के सामने तनिक मी ने ठहर सके। युद्ध में विजय पा सिक्ख सवारों ने राजा के इलाकों में खून लूट पाट की और विजय भारती के मठ को भी ध्वस्त विध्वस्त कर डाला । इन सब बखेड़ों से छुटी पा गुरु साहब आनंदपुर में बिराजने लगे। अब एक रोज किले में दर्बार कर आपने अपने पाँचों पुत्रों का "अमृत संस्कार" किया अर्थात् सव शिष्यों की तरह अमृत चखा उन्हें भी शिष्य और वीर कोटि में प्रविष्ट कराया और वैसे ही सारा प्रतिज्ञाएँ करवाई, अपने पुत्र और अन्य शिष्यों में कुछ भेद भाव न रक्खा । इस संस्कार के बाद गुरु साहब ने एक सर्वसाधारण वड़ा महात्सव किया और शिष्या तथा अभ्यागत ब्राह्मण साधुओं को सत्कारपूर्वक सूम भोजन कराया और दान दक्षिणा दी। थोड़े दिनों में सूर्य प्रहण का पर्व था और कुरुक्षेत्र में लक्षी जन समुदाय हिंदुओं का इकट्ठा होनेवाला था । ऐसे उत्तम अवसर को गुरु साहब ने हाथ से जाने देना उचित न समझा। मेले में जाकर भारत मात्र के हिंदुओं में सनातन धर्म की रक्षा और वीरव्रत का उपदेश करना ठान कर आषाढ़ मास संवत् एक हज़ार सात सौ उनसठ विक्रमी में वे कुरुक्षेत्र पहुँच गए और डेरा और तंबू इत्यादि खड़ा कर उन्होंने कार्य आरंभ कर दिया। नित्य सुबह शाम उपदेश हुआ करता था, जिसमें अपनी स्वाभाविक वाग्मिता के साथ सनातन धर्म की रक्षा और वीर धर्म का उपदेश होता था । लक्षों नर नारी इनके उपदेश से पावन होकर डेरे को जाते और कितनों ही ने खालसा धर्म अंगीकार कर गुरु के बल को बढ़ाया। धर्मोपदेश के साथ वीर धर्म की चर्चा भी अधिक रहा करती थी और अच्छे अच्छे उत्साही हिंदू शुर वीर युवक भी गुरु साहब के दर्शन को आते थे। गुरु साहब यथायोग्य सब का सत्कार करते और भारत माता की कथा सुनाते थे । इन वीरों मे से चंद्रनाथ नाम का एक राजपूत था। वह बड़ा बहादुर और तीरंदाज था। गुरु साहच उसकी बहुत खातिर किया करते थे। पर यह राजपूत वीरता के घमंड में इसकी कुछ परवाह न कर अपने मुँह आप अपनी तारीफ वधारा करता था। एक दिवस वह कहने लगा कि "मेरे ऐसा तीरंदाज संसार में है ही नहीं" । गुरु साहब उसकी डींग सुनकर मनोमन मुस्कराए और वाले "कृपापूर्वक जरा आपकी • इस अलौकिक रणनिपुणता का आभास मुझे भी करा दीजिए। इस पर बड़े घमंड से उसने धनुष पर वाण चढ़ा कर चलाया जो दो मील के लक्ष्य को वैध कर शांत हुआ । आस पास के लोग तारीफ करने लगे। अब की बार गुरु साहब ने शर संघाना और तीन मील के लक्ष्य को वैध दिया। यह देख कर उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा और वह गुरु साहब के सामने मत्था टेक कर बोला - क्षमा कीजिए महाराज ! मुझे आपके अलौकिक सामर्थ्य का ज्ञान न था । मिथ्या ही अपनी तारीफ के तार वाँधता था। गुरु साहब बोले, यह तो कोई बात नहीं है, करत सारे अभ्यास के खेल हैं। अहंकार अच्छी बात नहीं है। वह राजपूत बहुत लज्जित 'और नम्र हो गया। तदनंतर गुरु साइम ने ब्राह्मणों और अतिथि अभ्यागतों को ग्रहण के अवसर पर बहुत कुछ दान दक्षिणा दी, 'सब का यथोचित सत्कार किया और मणिराम 'नाम के एक विद्वान् ब्राह्मण को बहुत कुछ दान दक्षिणा के साथ अपना दससती एक पत्र भी दिया जो उसके वंशधरों के पास अब तक मौजूद है। सूर्यग्रहण का मेला समाप्त होने पर गुरु साहब चमकौर नामक प्राम मे आकर ठहरे। मैदान में डेरे पड़े हुए थे। दैवात उधर से दो सहस्र बादशाही सेना जा रही थी। गुरु माहब को मैदान में डेरा डाले हुए दंस कर उन लोगो ने इन पर हल्ला चोल दिया पर हमारे सिक्ख मवार वेसवर न थे। उन्होंने जम कर वह तलवार के जौहर दिखलाए कि मुगलों को मुहासरा छोड़ कर सीधे लाहोर का मार्ग लेना पड़ा। अब गुरु साहब मीधे आनंदपुर को चले आए। किला जिसे शत्रुओं ने तोड़ ताड़ दिया था सब मरम्मत करवा कर खूब सुदृढ़ बनवाया गया और जगह जगह सफीलों पर पहले की तरह तोपें चढ़वा दी गई तथा यथोपयुक्त स्थान स्थान पर और भी अस्त्र शस्त्रों का समावेश करवा दिया गया। इन्हीं दिनों काबुल का एक सन्त्री गुरु साहब के दर्शनों को आया और उसने बहुत कुछ धन रत्न के साथ, पचास अच्छे अच्छे शूर वीर पठान भी गुरु साहब को भेंट किए। गुरु साहब ने इन लोगों को यथायोग्य सैन्यिक पदों पर नियुक्त कर दिया और वे आनंदपूर्वक अपने किले आनंदपुर में निवास करने लगे । जब पहाड़ी राजा भीमचंद और अजमेरचंद ने जो इनके कट्टर शत्रु थे, यह समाचार सुना कि गुरु गोविंदसिंहजी फिर आनंदपुर में लौट आए है और बड़े ठाट बाद से युद्ध की तय्यारी कर रहे हैं तो उनका खून उबलने लगा"। अकेले लड़ कर जय पाना असंभव है, यह अनुभव उन्हें हो चुका था और गुरु गोविंद सिंहजी का दिन पर दिन जोर पकड़ते जाना भी उन्हें बड़ा अन्वरता था इसलिये उन्होंने शाहंशाह औरंगजेब को यह पत्र लिखा कि "हजूर, आपकी सलतनत में अब तक हम लोग अमन चैन से रहते थे, कोई भी उँगली दिखानेवाला न था, पर अब एक वला ऐसी आई है जिससे हम लोगों का जान माल हरदम सतरे में रहता है। तंगबहादुर नाम का एक फकीर संवत एक हज़ार सात सौ बत्तीस में शादी हुक्म से बागी कहला कर मरवाया गया था; यह उसीका लड़का गोविंदसिंह है, जिसने यह आफत बरवा कर रक्खी है। इसने एक नया मजहब चलाया है । वह अपने चेलों को कवायद और लड़ाई के फन में होशियार करके अपनी फौज में भर्ती कर लेता है और नगदी रुपयों के साथ गोली चारूद वगैरः भी अपने बैलों से भेंट में लेता है, जिससे इसके पास बहुत सी फौज भी इकट्ठी हो गई है और हथियार तथा साज समान की भी कमी नहीं रही है । इसने कई मजबूत किले भी यनचा लिए हैं और अपने कट्टर सिपाहियों की बदौलत, जिनमें इसने एक नई रूह फूँक दी है, यह किसी को कुछ नहीं गिनता। बड़े बड़े लुटेरे, डाकू और बादशाही बागी इसके साथ हो गए हैं और ये रोक टोक लूट पाट कर लोगों का सर्वनाश कर रहे हैं। हम लोग इससे बहुत तंग आ गए हैं। कई बार हम लोगों ने मिल कर इस पर चढ़ाई भी की पर इसकी दिलेरी और चालाकी से हार कर इस लोगों को पीछे हट जाना पड़ा, यहाँ तक कि सूबा सरहिंद की मदद भी कुछ कारगर न हुई। इस शैतान की ताकत अगर एक दम जड़ से न उखाड़ दी जायगी तो जैसी कि इसकी मनशा है यह किसी रोज आपकी सलतनत मे भारी गदर मचाएगा। हिंदुओं को यह आपके खिलाफ उभाड़ता और उन्हें पट्टी पढ़ाया करता है और अभी से उसने अपने को सच्चा बादशाह मशहूर कर रक्खा है, इत्यादि इत्यादि । यह सब तो उन्होंने पत्र द्वारा लिखा फिर आप भी कई पहाड़ी राजाओं के साथ शाही दर्बार में जा पुकारा और ऊपर लिखा वृत्तांत मुँहजयानी शाहंशाह को सुनाया। बादशाह औरंगजेय जिसकी कूटनीति ने राजपूताने और दक्षिण दोनों प्रांतों मे अग्नि सुलगा रक्सी थी, पंजाब की इस नई आपदा का हाल सुन कर बहुत झल्लाया। तत्काल ही उसने सूवा सरहिंद के नाम शाही हुक्मनामा भेजा कि "चागी गोविंदसिंह को पकड़ कर फौरन दर्बार में हाजिर करो"। साथ ही इसके कुछ फौज भी सूवा सरहिंद के सहायता की लिये भेजी गई। भूधा भरहिंद पहाड़ी राजाओं के साथ शाही फौज लेकर संवत् एक हज़ार सात सौ उनसठ के फाल्गुण मास में बड़ी धूम धाम से आनंदपुर पर चढ़ आया। सिक्खों को खवर पहुँच चुकी थी कि "बादशाह ने गुरु साहब को पकड़ कर ले जाने की आशा दी है" इसलिये बहुत से योद्धा इस समय यहाँ इकट्टे हो गए थे और गुरु जी के लिये सब कुछ करने को तैय्यार थे । बादशाही सेता के आते ही गुरु साहब भी मैदान में निकले और तुरंत ही भयंकर युद्ध छिड़ गया। दोनों तरफा कड़ी मार होने लगी। बंदूक गोला गोली के शब्द और अग्नि की भयानक वर्षा के बीच वीर लोग हाथों में तलवार और बर्छा लिए आगे बढ़ते और कायर पीछे दबके जाते थे। रक्त की नदी बहने लगी और घायलों के हाय ! हाय ! तथा वीरो के मार मार शब्द से रणभूमि गूँज हो उठी तात्पर्य यह कि चार पांच रोज तक घड़ा भयंकर युद्ध हुआ। एक और बादशाही सुशिक्षित सेना और दूसरी ओर खालसा धम्मोन्मत चीरों की तलवारो ने कोहराम मचा दिया। मुगलो ने सिक्खो के व्यूरभेद की बहुत कुछ चेष्टा को पर वे सफलमनोरथ न हो सके। जब वे आग बढ़ते तलवार और वछ की दीवार सडी पाते । उनकी प्रबल तोपें भी इस दीवार को भग्न न कर सकी; क्योंकि पाइर्व भाग में गुरु साहब की तोपे भी आग उगल रही थी । वादशाही सेनापति 'साधारण बागी गोविंदसिंह का शौर्य और प्रताप देखकर चकित और भयभीत हुआ। गुरु साहब अब तक केवल वार बचाते थे। जब उन्होंने पाँचच दिन चादशाही सेना के कई एक भाग को कुछ निर्बल होते देखा तो तत्क्षण वे अपनी प्रधान सेना के साथ उसपर जा टूटे और इस चेग से उनका यह आक्रमण हुआ कि बादशाही सना को कई कोस पीछे हट जाना पड़ा । जब कुछ सँभल कर मुगल लोग फिर सम्मुखीन हुए तो बादशाही सेना का एक सवार अजीमखाँ गुरु साहब के सामने आ गया । उसने गुरु साहब पर तलवार चलाई। गुरु साहब ने उसके वार को ढाल पर लिया और जब तक वह सँभले सँभले तब तक उनकी दुर्गादत्त तलवार इस तेजी से उसकी खोपड़ी पर जा पड़ी कि वह दो टूक होकर घोडे के नीचे नजर आया। इतने ही में मुगल सर पैदांखाँ तलवार घुमाता हुआ सामने आ निकला और सामने आते हो लपक कर बड़े जोर से गुरुजी पर उसने वार किया । गुरु साइब उछल कर बगल में हो रहे और वगल हो से उन्होंने उसके पाइर्व भाग में खाँड़ा घुसेड़ दिया। एक आह और चीख के बाद यह भूमि पर लोटता नजर आया और दो एक बार पैर फटकार कर यमलोक को सिधारा। अब तो किसी की हिम्मत न हुई कि गुरुदेव पर वार करता या उनके सामने आता । सारे सरदार उनसे दूर ही दूर रह कर दबाव डालने की चेष्टा करने लगे। गुरु गोविंदसिंह की सेना में कई वीर पठान भी नौकर थे । इस अवसर पर सैयद वेग और मामूसां दो योद्धाओं ने अच्छे हाथ दिखलाए । तलवार सींच जिस समय ये देव ऐसी वीर शाही फौज पर टूटे तो बहुतों के छक्के छूट गए। मुगल सवार और पैदल इनकी चोटों के सामने भेंड़ बकरी ऐसे भागन लगे । जिधर इनका हाथ पड़ता, मैदान साफ नजर आता । अंत को ज्यों त्यों हरिचंद जारसुवालिया एक बहादुर सवार इनके सामने आया, पर मामूख ने एक तलवार ऐसी मारी कि उसकी खोपड़ी ककड़ी सी फट कर नीचे जा गिरो। यह दशा देख मुगलों के नामी नामी बहादुर लोग जुट कर इधर आ गए और इनमें से एक दोनवेग नाम के योद्धा ने मामूखां का काम तमाम कर दिया । अपने सायी मामूखां की यह दशा देख सैयद वेग को वड़ा लोध चढ़ आया और दो कदम पीछे हट कर उछल कर उसने ऐसी तलवार मारी कि गेंद ऐसा उछलता हुआ दीनवेग का सिर दूर जा पड़ा। अब तो गुरु साहब ने मुगलों की निर्बलता देख एक दम बड़े जोर से शत्रुओं पर हल्ला बोल दिया और 'वाइ गुरु की फते' के आकाशभेदी नाद से आकाश गुंजायमान हो उठा। मुगल सेना जो
चंबा - स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच दवाओं व हैंड सेनेटाइजर की गुणवत्ता परखने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इसके तहत शनिवार को दवा निरीक्षक की अगवाई में टीम ने मेडिकल कालेज के दवाओं के सिविल व जिला स्टोर से छह दवाओं और दो हैंड सेनेटाइजर के सैंपल एकत्रित किए है। इन सैंपलों को जांच के लिए चंडीगढ व कंडाघाट स्थिता विभागीय प्रयोगशाला में भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही इन दवाओं व हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता की सही जानकारी मिल पाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल फेल होते हैं तो विभाग की ओर नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवा निरीक्षक राकेश की अगुवाई में टीम ने मेडिकल कालेज के सिविल स्टोर एवं जिला स्टोर में दबिश दी। इस दौरान दो हैंड सेनेटाइजर, एक पैरासिटामोल, एक एलर्जी, एक एंटी एमेटिक, एक एंटी बायोटिक, एक खांसी की दवा और एक रक्तचाप की दवा के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को बाकायदा सील करके जांच हेतु प्रयोगशाला भी भेज दिया गया है। बतातें चलें कि स्वास्थ्य विभाग पिछले काफी समय से दवाओं व हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल एकत्रित कर जांच हेतु भेज रहा है। इसी कडी में मेडिकल कालेज के सिविल व जिला स्टोर से सैंपल एकत्रित किए गए हैं। उधर, दवा निरीक्षक राकेश ने बताया कि गुणवा की जांच के लिए छह दवाओं व दो हैंड सेनेटाजर सहित कुल आठ सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की रिपोर्ट आने पर ही उनकी गुणवा की सही जानकारी मिल पाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील है कि वे दवाओं की गुणवा पर संदेह होने पर विभाग को अवश्य सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
चंबा - स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच दवाओं व हैंड सेनेटाइजर की गुणवत्ता परखने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इसके तहत शनिवार को दवा निरीक्षक की अगवाई में टीम ने मेडिकल कालेज के दवाओं के सिविल व जिला स्टोर से छह दवाओं और दो हैंड सेनेटाइजर के सैंपल एकत्रित किए है। इन सैंपलों को जांच के लिए चंडीगढ व कंडाघाट स्थिता विभागीय प्रयोगशाला में भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही इन दवाओं व हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता की सही जानकारी मिल पाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल फेल होते हैं तो विभाग की ओर नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवा निरीक्षक राकेश की अगुवाई में टीम ने मेडिकल कालेज के सिविल स्टोर एवं जिला स्टोर में दबिश दी। इस दौरान दो हैंड सेनेटाइजर, एक पैरासिटामोल, एक एलर्जी, एक एंटी एमेटिक, एक एंटी बायोटिक, एक खांसी की दवा और एक रक्तचाप की दवा के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को बाकायदा सील करके जांच हेतु प्रयोगशाला भी भेज दिया गया है। बतातें चलें कि स्वास्थ्य विभाग पिछले काफी समय से दवाओं व हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल एकत्रित कर जांच हेतु भेज रहा है। इसी कडी में मेडिकल कालेज के सिविल व जिला स्टोर से सैंपल एकत्रित किए गए हैं। उधर, दवा निरीक्षक राकेश ने बताया कि गुणवा की जांच के लिए छह दवाओं व दो हैंड सेनेटाजर सहित कुल आठ सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की रिपोर्ट आने पर ही उनकी गुणवा की सही जानकारी मिल पाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील है कि वे दवाओं की गुणवा पर संदेह होने पर विभाग को अवश्य सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
श्रीलंका में आर्थिक संकट को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स में राजपक्षे के देश छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ लंबे वक्त से 'Gota Go Gama' और 'Gota Go Home' आंदोलन जारी है। सिंहली भाषा में गामा का मतलब गांव होता है। प्रदर्शनकारी एक जगह जमा होकर तंबू लगाते हैं और गाड़ियों के हार्न बजाते हुए राष्ट्रपति और सरकार के खिलाफ गोटा-गो-गामा का नारा बुलंद करते हैं। इनका मकसद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर करना था। श्रीलंका में हालात खराब हैं। आज तो वहां के राष्ट्रपति के आवास तक प्रदर्शनकारियों की भीड़ पहुंच गई। हालात देख श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे वहां से फरार हो गए। बता दें कि देश की राजधानी कोलंबो में शनिवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़े। श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स को तोड़ राष्ट्रपति आवास के परिसर में घुस आए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल की शुरुआत से ही राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। तब से गोटाबाया राष्ट्रपति भवन का इस्तेमाल अपने घर और आफिस के तौर पर कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के दो जवान समेत 30 लोग प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गए और इन्हें कोलंबो के अस्पताल ले जाया गया।
श्रीलंका में आर्थिक संकट को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स में राजपक्षे के देश छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ लंबे वक्त से 'Gota Go Gama' और 'Gota Go Home' आंदोलन जारी है। सिंहली भाषा में गामा का मतलब गांव होता है। प्रदर्शनकारी एक जगह जमा होकर तंबू लगाते हैं और गाड़ियों के हार्न बजाते हुए राष्ट्रपति और सरकार के खिलाफ गोटा-गो-गामा का नारा बुलंद करते हैं। इनका मकसद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर करना था। श्रीलंका में हालात खराब हैं। आज तो वहां के राष्ट्रपति के आवास तक प्रदर्शनकारियों की भीड़ पहुंच गई। हालात देख श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे वहां से फरार हो गए। बता दें कि देश की राजधानी कोलंबो में शनिवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़े। श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स को तोड़ राष्ट्रपति आवास के परिसर में घुस आए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल की शुरुआत से ही राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। तब से गोटाबाया राष्ट्रपति भवन का इस्तेमाल अपने घर और आफिस के तौर पर कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के दो जवान समेत तीस लोग प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गए और इन्हें कोलंबो के अस्पताल ले जाया गया।
होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक (Holashtak) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत होली के आठ दिन पहले हो जाती है। हिंदू धर्म में इस अवधि का विशेष महत्व है। होलाष्टक के विषय में कई धार्मिक मान्यताएं है। कहते हैं कि होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही शिवजी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस काल में हर दिन अलग अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं, इसलिए इसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस साल होलाष्टक (Holashtak) 27 फरवरी से लेकर 07 मार्च तक रहने वाले हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि होलाष्टक की इस अवधि में पांच राशि के जातकों को बहुत संभलकर रहना होगा। मिथुन- होलाष्टक (Holashtak) की अवधि में मिथुन राशि के जातकों को बहुत सावधान रहना होगा। आपको बेवजह का तनाव घेर सकता है। लोगों के साथ वाद-विवाद या अनबन हो सकती है। कार्य-व्यापार में विशेष रूप से सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में समस्याएं आ सकती हैं। खर्चों में वृद्धि हो सकती है। आय के साधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान किसी के साथ रुपयों का लेन-देन न करें। कर्क- कर्क राशि वालों को घरेलू समस्याओं से बचकर रहना होगा। भूमि-भवन से जुड़े विवाद आपकी परेशानी का बड़ा कारण बन सकते हैं। पैतृक संपत्ति को लेकर दिक्कतें हो सकती हैं। बने-बनाए काम बिगड़ने का खतरा रहेगा। कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले शुभचिंतकों की राय अवश्य लें। रोजी-रोजगार के लिए भटक रहे लोगों का इंतजार थोड़ा और बढ़ सकता है। वृश्चिक- खर्चों पर अकुंश न बढ़ाने से आपकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। बेवजह की चीजों पर धन बिल्कुल खर्च न करें। जरूरी कार्यों में जल्दबाजी से बचना होगा। बहस या विवाद में पड़ने से बचें। इस अवधि में किसी भी बड़े निवेश से पहले शुभचिंतिकों की सलाह अवश्य लें। नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। गृह प्रवेश, भवन निर्माण की शुरुआत, मुंडन, हवन या महंगी वस्तुओं की खरीदारी बिल्कुल न करें। मकर- होलाष्टक की अवधि में मकर राशि के जातकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। रिश्तों में तनाव आने की संभावना है। जरूरी कार्यों में अड़चन अनुभव कर सकते हैं। सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी। स्वास्थ्य सलाहों की अनदेखी से बचें। इस अवधि में अपने सीक्रेट किसी से शेयर न करें। रुपये-पैसे के मामले में सावधानी बरतें। इस अवधि में न तो किसी से पैसा उधार लें और न ही पैसा उधार दें। कुंभ- होलाष्टक के दौरान कुंभ राशि के जातकों को आलस्य और अभिमान से बचना होगा। किसी भी काम को कल पर टालने की आदत आपके लिए बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। अपने सभी कार्य समय पर पूरा करने का प्रयास करें। अन्यथा आपके हाथ से अच्छा अवसर निकल सकते हैं। पार्टनरशिप का बिजनेस कर रहे लोगों को अपना कारोबार दूसरे के भरोसे छोड़ने से बचना होगा। इस तरह की गलतियां आपको कंगाल कर सकती हैं।
होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत होली के आठ दिन पहले हो जाती है। हिंदू धर्म में इस अवधि का विशेष महत्व है। होलाष्टक के विषय में कई धार्मिक मान्यताएं है। कहते हैं कि होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही शिवजी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस काल में हर दिन अलग अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं, इसलिए इसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस साल होलाष्टक सत्ताईस फरवरी से लेकर सात मार्च तक रहने वाले हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि होलाष्टक की इस अवधि में पांच राशि के जातकों को बहुत संभलकर रहना होगा। मिथुन- होलाष्टक की अवधि में मिथुन राशि के जातकों को बहुत सावधान रहना होगा। आपको बेवजह का तनाव घेर सकता है। लोगों के साथ वाद-विवाद या अनबन हो सकती है। कार्य-व्यापार में विशेष रूप से सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में समस्याएं आ सकती हैं। खर्चों में वृद्धि हो सकती है। आय के साधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। इस दौरान किसी के साथ रुपयों का लेन-देन न करें। कर्क- कर्क राशि वालों को घरेलू समस्याओं से बचकर रहना होगा। भूमि-भवन से जुड़े विवाद आपकी परेशानी का बड़ा कारण बन सकते हैं। पैतृक संपत्ति को लेकर दिक्कतें हो सकती हैं। बने-बनाए काम बिगड़ने का खतरा रहेगा। कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले शुभचिंतकों की राय अवश्य लें। रोजी-रोजगार के लिए भटक रहे लोगों का इंतजार थोड़ा और बढ़ सकता है। वृश्चिक- खर्चों पर अकुंश न बढ़ाने से आपकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। बेवजह की चीजों पर धन बिल्कुल खर्च न करें। जरूरी कार्यों में जल्दबाजी से बचना होगा। बहस या विवाद में पड़ने से बचें। इस अवधि में किसी भी बड़े निवेश से पहले शुभचिंतिकों की सलाह अवश्य लें। नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। गृह प्रवेश, भवन निर्माण की शुरुआत, मुंडन, हवन या महंगी वस्तुओं की खरीदारी बिल्कुल न करें। मकर- होलाष्टक की अवधि में मकर राशि के जातकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। रिश्तों में तनाव आने की संभावना है। जरूरी कार्यों में अड़चन अनुभव कर सकते हैं। सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी। स्वास्थ्य सलाहों की अनदेखी से बचें। इस अवधि में अपने सीक्रेट किसी से शेयर न करें। रुपये-पैसे के मामले में सावधानी बरतें। इस अवधि में न तो किसी से पैसा उधार लें और न ही पैसा उधार दें। कुंभ- होलाष्टक के दौरान कुंभ राशि के जातकों को आलस्य और अभिमान से बचना होगा। किसी भी काम को कल पर टालने की आदत आपके लिए बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। अपने सभी कार्य समय पर पूरा करने का प्रयास करें। अन्यथा आपके हाथ से अच्छा अवसर निकल सकते हैं। पार्टनरशिप का बिजनेस कर रहे लोगों को अपना कारोबार दूसरे के भरोसे छोड़ने से बचना होगा। इस तरह की गलतियां आपको कंगाल कर सकती हैं।
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से पहले कई विशेषज्ञों ने विराट कोहली की प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव करने की राय दी है। मेन इन ब्लू रविवार, 31 अक्टूबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में ब्लैक कैप्स से भिड़ेंगे। केन विलियमसन एंड कंपनी के खिलाफ मैच से पहले भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने सुझाव दिया है कि टीम इंडिया को अपनी प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव करने चाहिए। गावस्कर का मानना है कि स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और सीनियर तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को न्यूजीलैंड के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले से बाहर कर देना चाहिए। वहीं पूर्व टेस्ट ओपनर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा की दलील है कि हार्दिक पंड्या को बाहर करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा कर आप अपनी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाएंगे। क्रिकेटर से कमेंटेटर बने सुनील गावस्कर ने कहा कि अगर हार्दिक गेंदबाजी करने में असमर्थ हैं तो उनकी जगह युवा बल्लेबाजी सनसनी इशान किशन को लेना चाहिए। गावस्कर ने यह भी सुझाव दिया कि भुवनेश्वर के स्थान पर शार्दुल ठाकुर को अंतिम एकादश में शामिल किया जाना चाहिए, जो वर्तमान में अपनी फॉर्म से जूझ रहे हैं। गावस्कर ने आगे कहा, 'टीम इंडिया को बहुत अधिक बदलाव नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि प्रतियोगिता में एक हार के बाद ही टीम घबरा गई है। ' 72 वर्षीय गावस्कर को लगता है कि अगर भारत अपने शेष चार मुकाबलों को जीत लेता है, तो वे आसानी से नॉकआउट में जगह बना सकते हैं और फाइनल में भी पहुंच सकते हैं। हार्दिक ने इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद से कोई अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच नहीं खेला है। न तो उन्होंने आईपीएल 2021 में मुंबई इंडियंस के लिए गेंदबाजी की। टी20 विश्व कप में उन्होंने दोनों अभ्यास मैच और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में गेंदबाजी नहीं की। इससे उनकी फिटनेस और बाद में विश्व कप टीम में उनके चयन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आईसीसी टीबीस वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से पहले कई विशेषज्ञों ने विराट कोहली की प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव करने की राय दी है। मेन इन ब्लू रविवार, इकतीस अक्टूबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में ब्लैक कैप्स से भिड़ेंगे। केन विलियमसन एंड कंपनी के खिलाफ मैच से पहले भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने सुझाव दिया है कि टीम इंडिया को अपनी प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव करने चाहिए। गावस्कर का मानना है कि स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और सीनियर तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को न्यूजीलैंड के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले से बाहर कर देना चाहिए। वहीं पूर्व टेस्ट ओपनर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा की दलील है कि हार्दिक पंड्या को बाहर करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा कर आप अपनी चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाएंगे। क्रिकेटर से कमेंटेटर बने सुनील गावस्कर ने कहा कि अगर हार्दिक गेंदबाजी करने में असमर्थ हैं तो उनकी जगह युवा बल्लेबाजी सनसनी इशान किशन को लेना चाहिए। गावस्कर ने यह भी सुझाव दिया कि भुवनेश्वर के स्थान पर शार्दुल ठाकुर को अंतिम एकादश में शामिल किया जाना चाहिए, जो वर्तमान में अपनी फॉर्म से जूझ रहे हैं। गावस्कर ने आगे कहा, 'टीम इंडिया को बहुत अधिक बदलाव नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि प्रतियोगिता में एक हार के बाद ही टीम घबरा गई है। ' बहत्तर वर्षीय गावस्कर को लगता है कि अगर भारत अपने शेष चार मुकाबलों को जीत लेता है, तो वे आसानी से नॉकआउट में जगह बना सकते हैं और फाइनल में भी पहुंच सकते हैं। हार्दिक ने इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद से कोई अंतरराष्ट्रीय टीबीस मैच नहीं खेला है। न तो उन्होंने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में मुंबई इंडियंस के लिए गेंदबाजी की। टीबीस विश्व कप में उन्होंने दोनों अभ्यास मैच और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में गेंदबाजी नहीं की। इससे उनकी फिटनेस और बाद में विश्व कप टीम में उनके चयन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बुधवार को कैनबरा में खेला जाएगा। मनुका ओवल मैदान पर जब भारत मैदान पर उतरेगा, तब उसके सामने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपनी पहली जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। इसके साथ ही टीम विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचना चाहेगी। इससे पहले जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर भारत को कीवी टीम ने 3-0 से हराया था। कैनबरा के मैदान की बात करें, तो ऑस्ट्रेलिया ने यहां खेले अपने चारों मुकाबले जीते हैं। वहीं, भारत ने इस मैदान पर अब तक कुल 2 मुकाबले खेले हैं और दोनों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस सीरीज में भारतीय बॉलर्स स्ट्रगल करते नजर आए हैं। ऐसे में अगर भारत को जीत दर्ज करनी है, तो बॉलर्स को लय में आना होगा। सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह से भारतीय बॉलर्स पर हावी रहे हैं। स्टीव स्मिथ ने पिछले दोनों वनडे में शतक जड़ा। वहीं, कप्तान एरॉन फिंच ने पहले वनडे में शतक और दूसरे मुकाबले में फिफ्टी लगाई। चोट की वजह से सीरीज से बाहर होने वाले डेविड वॉर्नर ने भी दोनों मुकाबलों में फिफ्टी लगाई। स्मिथ-फिंच के अलावा मार्नस लाबुशाने और ग्लेन मैक्सवेल भी अच्छी फॉर्म में हैं। भारतीय बल्लेबाजों की बात करें, तो उन्हें शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके। शिखर धवन और हार्दिक पंड्या ने पहले वनडे में फिफ्टी लगाई, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। इसके बाद दूसरे वनडे में कप्तान विराट कोहली और उप-कप्तान लोकेश राहुल ने फिफ्टी लगाई, लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके। ऐसे में तीसरे वनडे में भारतीय बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाकर टीम को जीत दिलानी होगी। टीम की गेंदबाजी भारत की हार का सबसे बड़ी वजह रही है। भारतीय बॉलर्स शुरुआती ओवर में विकेट नहीं ले पा रहे हैं। यही नहीं, भारतीय बॉलर्स को जमकर रन पड़ रहे हैं। मोहम्मद शमी-जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज भी रन रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे में अगर टीम को जीतना है, तो बॉलर्स को जिम्मेदारी लेनी होगी और कंगारू टीम के विकेट निकालने होंगे। चोट की वजह से वॉर्नर टीम का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, पैट कमिंस को टेस्ट सीरीज की तैयारी के मद्देनजर आराम दिया गया है। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों के न होने से भारत के पास अच्छा मौका होगा। भारतीय बॉलर्स पिछले 5 मुकाबले से पावर-प्ले के दौरान चले आ रहे विकेटों के सूखे को दूर कर सकते हैं और भारतीय बल्लेबाज कमिंस की गैर-मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया पर अटैक कर सकते हैं। भले ही भारत यह सीरीज हार चुका है, लेकिन तीसरे वनडे में कोहली के पास एक और रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा। कोहली अगर इस मैच शतक जड़ने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे बतौर कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। अभी कोहली और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम 41-41 शतक दर्ज हैं। शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर ऑस्ट्रेलिया पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस सीरीज को मिलाकर कुल 13 वनडे सीरीज खेली गईं हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया ने 7 और भारत ने 6 सीरीज अपने नाम कीं हैं। ऑस्ट्रेलिया ने घर में भारत के खिलाफ 3 द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेलीं, जिसमें दो जीती और एक हारी है। कैनबरा में सामान्य रूप से आसमान साफ रहेगा। बीच-बीच में बादल छा सकते हैं। अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। पिच से बल्लेबाजों को मदद मिल सकती है। यहां खेले गए पिछले 9 वनडे मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का सक्सेस रेट 77. 77% है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक 142 वनडे खेले गए। इसमें टीम इंडिया ने 52 मैच जीते और 80 हारे हैं, जबकि 10 मुकाबले बेनतीजा रहे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी के घर में भारतीय टीम ने 53 वनडे खेले, जिसमें से 13 जीते और 38 मैच हारे हैं। 2 वनडे बेनतीजा रहे। पिछली बार भारतीय टीम ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 3 वनडे की सीरीज खेली थी। पहला वनडे हारने के बाद टीम इंडिया ने यह सीरीज 2-1 से जीती थी। तब भी भारतीय टीम की कमान विराट कोहली के हाथ में ही थी। ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी एरॉन फिंच के ही पास थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बुधवार को कैनबरा में खेला जाएगा। मनुका ओवल मैदान पर जब भारत मैदान पर उतरेगा, तब उसके सामने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपनी पहली जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। इसके साथ ही टीम विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचना चाहेगी। इससे पहले जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर भारत को कीवी टीम ने तीन-शून्य से हराया था। कैनबरा के मैदान की बात करें, तो ऑस्ट्रेलिया ने यहां खेले अपने चारों मुकाबले जीते हैं। वहीं, भारत ने इस मैदान पर अब तक कुल दो मुकाबले खेले हैं और दोनों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस सीरीज में भारतीय बॉलर्स स्ट्रगल करते नजर आए हैं। ऐसे में अगर भारत को जीत दर्ज करनी है, तो बॉलर्स को लय में आना होगा। सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह से भारतीय बॉलर्स पर हावी रहे हैं। स्टीव स्मिथ ने पिछले दोनों वनडे में शतक जड़ा। वहीं, कप्तान एरॉन फिंच ने पहले वनडे में शतक और दूसरे मुकाबले में फिफ्टी लगाई। चोट की वजह से सीरीज से बाहर होने वाले डेविड वॉर्नर ने भी दोनों मुकाबलों में फिफ्टी लगाई। स्मिथ-फिंच के अलावा मार्नस लाबुशाने और ग्लेन मैक्सवेल भी अच्छी फॉर्म में हैं। भारतीय बल्लेबाजों की बात करें, तो उन्हें शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके। शिखर धवन और हार्दिक पंड्या ने पहले वनडे में फिफ्टी लगाई, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। इसके बाद दूसरे वनडे में कप्तान विराट कोहली और उप-कप्तान लोकेश राहुल ने फिफ्टी लगाई, लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके। ऐसे में तीसरे वनडे में भारतीय बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाकर टीम को जीत दिलानी होगी। टीम की गेंदबाजी भारत की हार का सबसे बड़ी वजह रही है। भारतीय बॉलर्स शुरुआती ओवर में विकेट नहीं ले पा रहे हैं। यही नहीं, भारतीय बॉलर्स को जमकर रन पड़ रहे हैं। मोहम्मद शमी-जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज भी रन रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे में अगर टीम को जीतना है, तो बॉलर्स को जिम्मेदारी लेनी होगी और कंगारू टीम के विकेट निकालने होंगे। चोट की वजह से वॉर्नर टीम का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, पैट कमिंस को टेस्ट सीरीज की तैयारी के मद्देनजर आराम दिया गया है। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों के न होने से भारत के पास अच्छा मौका होगा। भारतीय बॉलर्स पिछले पाँच मुकाबले से पावर-प्ले के दौरान चले आ रहे विकेटों के सूखे को दूर कर सकते हैं और भारतीय बल्लेबाज कमिंस की गैर-मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया पर अटैक कर सकते हैं। भले ही भारत यह सीरीज हार चुका है, लेकिन तीसरे वनडे में कोहली के पास एक और रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा। कोहली अगर इस मैच शतक जड़ने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे बतौर कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। अभी कोहली और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम इकतालीस-इकतालीस शतक दर्ज हैं। शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर ऑस्ट्रेलिया पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस सीरीज को मिलाकर कुल तेरह वनडे सीरीज खेली गईं हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया ने सात और भारत ने छः सीरीज अपने नाम कीं हैं। ऑस्ट्रेलिया ने घर में भारत के खिलाफ तीन द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेलीं, जिसमें दो जीती और एक हारी है। कैनबरा में सामान्य रूप से आसमान साफ रहेगा। बीच-बीच में बादल छा सकते हैं। अधिकतम तापमान छब्बीस डिग्री और न्यूनतम तापमान बारह डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। पिच से बल्लेबाजों को मदद मिल सकती है। यहां खेले गए पिछले नौ वनडे मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का सक्सेस रेट सतहत्तर. सतहत्तर% है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक एक सौ बयालीस वनडे खेले गए। इसमें टीम इंडिया ने बावन मैच जीते और अस्सी हारे हैं, जबकि दस मुकाबले बेनतीजा रहे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी के घर में भारतीय टीम ने तिरेपन वनडे खेले, जिसमें से तेरह जीते और अड़तीस मैच हारे हैं। दो वनडे बेनतीजा रहे। पिछली बार भारतीय टीम ने जनवरी दो हज़ार उन्नीस में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तीन वनडे की सीरीज खेली थी। पहला वनडे हारने के बाद टीम इंडिया ने यह सीरीज दो-एक से जीती थी। तब भी भारतीय टीम की कमान विराट कोहली के हाथ में ही थी। ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी एरॉन फिंच के ही पास थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रमुख स्थान देते है; हम नईदुनिया प्रिन्टरी के संचालक मण्डल को जितना धन्यवाद देवे उतना कम है उन्होंने अपना अन्य कार्य को बीच में ही रुकवा कर इस कार्य को सर्वप्रथम प्रमुखता प्रदान की और इतने वर्षो का जो प्रेम व्यवहार बना हुआ है उसे ध्यान में रखते हुए इस कार्य को समय पर पूर्ण करने की पूरी कोशिश की। अतः क्रियेटिव पेज मेकर, वम्बई, श्री टोनिक टाइप सेटर, वम्बई, जयन्त प्रिन्टरी बम्बई एवं नईदुनिया प्रिन्टरी, इन्दौर के संचालक मण्डल एवं कर्मचारियों मण्डल के हम बहुत-बहुत आभारी है, सभी को हम बहुत-बहुत धन्यवाद प्रदान करते है । दोपचंद भाई गार्डी हार्दिक आभारः -- प्रतः हम सभी पूज्य आचार्यों, मुनिराजों, साध्वियोंजी म. सा., जैन श्री संघों, हितेषी महानुभावों, विज्ञापनदाताओं, भेटकर्ताओं नये सदस्यों, चतुर्विध संघों, नईदुनिया प्रिन्टरी मण्डल एवं जयन्त प्रिन्टर्स, क्रियेटिव पेज मेकर एवं श्री टोनिक टाइप सेटिंग वम्वई आदि का हम बहुत-बहुत आभार प्रकट करते हुए सभी से यही आशाएँ करते हैं कि भविष्य में भी इसी तरह का पूर्ण सहयोग प्रदान करते रहेगे, इसी आशाओं के साथ ! बम्बई : 25-8-1993 - हम है आपकेशांतीलाल छाजेड़ (जैन) महामंत्री रमेश चन्द जैन नेमनाथ जैन डी. टी. नोसर मंत्री हार्दिक आभार अ. भा. समग्र जैन चातुर्मास सूची प्रकाशन परिषद् बम्बई द्वारा प्रकाशित "समग्र जैन चातुर्मास सूची" के प्रचार-प्रसार के कार्य हेतु इस वर्ष मैंने देश के अनेक भागो का दौरा किया। छत्तीसगढ़ क्षेत्र के दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव आदि, नागपुर, जलगाँव, नासिक, अहमदनगर, शिर्डी, पूना, जयपुर, दिल्ली, गाजियाबाद, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, उदयपुर आदि, जिन-जिन क्षेत्रों में मैं गया वहाँ के श्री संघों, महानुभावो ने मुझे जो आदर, सत्कार प्रदान किया, उसे मै जीवन में कभी भी नहीं भूला सकता । कई क्षेत्रो में तो में प्रथम बार गया था । वहां चाहे मुझे कोई शक्ल से नही पहचानते हो, परन्तु मेरे नाम से सभी परिचित हैं। मुझे यह आभास प्रथम बार हुआ एव प्रथम देखा कि मेरे कार्यो, सेवाओं का प्रभाव देश-विदेश तक फैल चुका है। इस सूची पुस्तक से सम्पूर्ण जैन समाज के चतुर्विध संघ में मेरा नाम भी सव जानने लग गये हैं। मैं जहाँ भी गया जिनसे भी सम्पर्क किया सभी ने मेरे कार्य की भूरी-भूरी प्रशसा की, सुझाव भी प्रदान किये सभी ने एक स्वर से सराहना भी की। मैं तो समाज का एक छोटा-सा निर्धन अल्प वृद्धि का सेवक हूँ, मैं मेरा फर्ज अदा कर रहा हूँ। मुझे किसी तरह का कोई लोभ-लालच या आजीविका का साधन बनाकर समाज को धोखा देकर लूटना जैसा घिनौना कार्य करना नही है। मैने न तो ऐसा घिनौना कार्य पूर्व में कभी किया है, न भविष्य में करने का कोई इरादा है। मैंने तो मेरा फर्ज अदा करके सम्पूर्ण जैन समाज को दिखा दिया है कि अगर सच्ची सेवा करनी है तो वह करके दिखावे, जो कार्य बड़ी-बडी संस्थाएँ नही कर सकी, वह मैंने कई मुसीवतो का सामना करके दिखा दिया है और उसे समग्र जैन समाज ने एक स्वर से स्वीकारा भी है। अतः सभी का बहुत-बहुत आभार प्रगट करता हुआ, आप सभी को अनेकानेक धन्यवाद अर्पित कर रहा हूँ । समयाभाव के कारण सभी के नाम प्रकाशित नहीं कर पा रहा हूँ, आगामी अंक में पूर्ण विवरण के साथ प्रकाशित करूंगा। आशा करता हूँ कि आप भविष्य में भी इसी प्रकार का सहयोग प्रदान करते रहेंगे, ऐसी आशा करता हुआ । बाबूलाल जैन 'उज्जवल' संपादक
प्रमुख स्थान देते है; हम नईदुनिया प्रिन्टरी के संचालक मण्डल को जितना धन्यवाद देवे उतना कम है उन्होंने अपना अन्य कार्य को बीच में ही रुकवा कर इस कार्य को सर्वप्रथम प्रमुखता प्रदान की और इतने वर्षो का जो प्रेम व्यवहार बना हुआ है उसे ध्यान में रखते हुए इस कार्य को समय पर पूर्ण करने की पूरी कोशिश की। अतः क्रियेटिव पेज मेकर, वम्बई, श्री टोनिक टाइप सेटर, वम्बई, जयन्त प्रिन्टरी बम्बई एवं नईदुनिया प्रिन्टरी, इन्दौर के संचालक मण्डल एवं कर्मचारियों मण्डल के हम बहुत-बहुत आभारी है, सभी को हम बहुत-बहुत धन्यवाद प्रदान करते है । दोपचंद भाई गार्डी हार्दिक आभारः -- प्रतः हम सभी पूज्य आचार्यों, मुनिराजों, साध्वियोंजी म. सा., जैन श्री संघों, हितेषी महानुभावों, विज्ञापनदाताओं, भेटकर्ताओं नये सदस्यों, चतुर्विध संघों, नईदुनिया प्रिन्टरी मण्डल एवं जयन्त प्रिन्टर्स, क्रियेटिव पेज मेकर एवं श्री टोनिक टाइप सेटिंग वम्वई आदि का हम बहुत-बहुत आभार प्रकट करते हुए सभी से यही आशाएँ करते हैं कि भविष्य में भी इसी तरह का पूर्ण सहयोग प्रदान करते रहेगे, इसी आशाओं के साथ ! बम्बई : पच्चीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ तिरानवे - हम है आपकेशांतीलाल छाजेड़ महामंत्री रमेश चन्द जैन नेमनाथ जैन डी. टी. नोसर मंत्री हार्दिक आभार अ. भा. समग्र जैन चातुर्मास सूची प्रकाशन परिषद् बम्बई द्वारा प्रकाशित "समग्र जैन चातुर्मास सूची" के प्रचार-प्रसार के कार्य हेतु इस वर्ष मैंने देश के अनेक भागो का दौरा किया। छत्तीसगढ़ क्षेत्र के दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव आदि, नागपुर, जलगाँव, नासिक, अहमदनगर, शिर्डी, पूना, जयपुर, दिल्ली, गाजियाबाद, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, उदयपुर आदि, जिन-जिन क्षेत्रों में मैं गया वहाँ के श्री संघों, महानुभावो ने मुझे जो आदर, सत्कार प्रदान किया, उसे मै जीवन में कभी भी नहीं भूला सकता । कई क्षेत्रो में तो में प्रथम बार गया था । वहां चाहे मुझे कोई शक्ल से नही पहचानते हो, परन्तु मेरे नाम से सभी परिचित हैं। मुझे यह आभास प्रथम बार हुआ एव प्रथम देखा कि मेरे कार्यो, सेवाओं का प्रभाव देश-विदेश तक फैल चुका है। इस सूची पुस्तक से सम्पूर्ण जैन समाज के चतुर्विध संघ में मेरा नाम भी सव जानने लग गये हैं। मैं जहाँ भी गया जिनसे भी सम्पर्क किया सभी ने मेरे कार्य की भूरी-भूरी प्रशसा की, सुझाव भी प्रदान किये सभी ने एक स्वर से सराहना भी की। मैं तो समाज का एक छोटा-सा निर्धन अल्प वृद्धि का सेवक हूँ, मैं मेरा फर्ज अदा कर रहा हूँ। मुझे किसी तरह का कोई लोभ-लालच या आजीविका का साधन बनाकर समाज को धोखा देकर लूटना जैसा घिनौना कार्य करना नही है। मैने न तो ऐसा घिनौना कार्य पूर्व में कभी किया है, न भविष्य में करने का कोई इरादा है। मैंने तो मेरा फर्ज अदा करके सम्पूर्ण जैन समाज को दिखा दिया है कि अगर सच्ची सेवा करनी है तो वह करके दिखावे, जो कार्य बड़ी-बडी संस्थाएँ नही कर सकी, वह मैंने कई मुसीवतो का सामना करके दिखा दिया है और उसे समग्र जैन समाज ने एक स्वर से स्वीकारा भी है। अतः सभी का बहुत-बहुत आभार प्रगट करता हुआ, आप सभी को अनेकानेक धन्यवाद अर्पित कर रहा हूँ । समयाभाव के कारण सभी के नाम प्रकाशित नहीं कर पा रहा हूँ, आगामी अंक में पूर्ण विवरण के साथ प्रकाशित करूंगा। आशा करता हूँ कि आप भविष्य में भी इसी प्रकार का सहयोग प्रदान करते रहेंगे, ऐसी आशा करता हुआ । बाबूलाल जैन 'उज्जवल' संपादक
नई दिल्ली, सैमसंग (Samsung) का सस्ता अपकमिंग स्मार्टफोन गैलेक्सी ए03 (Galaxy A03) भारत में लॉन्च को तैयार है। फोन को मार्च की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है। इससे पहले कंपनी भारत में Galaxy A03 Core स्मार्टफोन को लॉन्च कर चुकी है। लेकिन कंपनी Galaxy A03 भारत में लॉन्च करने जा रही है। लीक रिपोर्ट की मानें, तो Galaxy A03 स्मार्टफोन दो वेरिएंट में आएगा। इसका एक वेरिएंट 3GB रैम और 32GB स्टोरेज ऑप्शन में आएगा। जबकि दूसरा वेरिएंट 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज ऑप्शन में आएगा। फोन को भारत में ब्लैक, डॉर्क ग्रीन और रेड कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा। Samsung Galaxy A03 स्मार्टफोन के बेस वेरिएंट 3 जीबी रैम और 32 जीबी स्टोरेज की कीमत 10,499 रुपये होगी। जबकि फोन का 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट 11,999 रुपये में आएगा। सैमसंग के अपकमिंग स्मार्टफोन गैलेक्सी A03 स्मार्टफोन की सीधी टक्कर Realme और Xiaomi स्मार्टफोन से होगी। अगर Samsung Galaxy A03 के स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो Galaxy A03 स्मार्टफोन में 6. 5 इंच की HD+ Infinity-V डिस्प्ले दी जाएगी। वही फोटोग्रॉफी के लिए फोन में 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया जाएगा। इसके अलावा फोन के रियर पैनल पर ड्यूल कैमरा सेटअप मिलेगा। इसका मेन कैमरा 48 मेगापिक्सल लेंस सपोर्ट के साथ आएगा। साथ ही 2 मेगापिक्सल डेप्थ सेंसर मौजूद रहेगा। Galaxy A03 स्मार्टफोन UNISOC-ब्रांडेड SoC प्रोसेसर सपोर्ट दिया गया है। जो कि Tiger T6xx सीरीज से संबंध रखता है। फोन एंड्राइड 11 बेस्ड OneUI पर काम करेगा। इसमें PowerVR IMG8322 GPU सपोर्ट दिया जाएगा। पावर बैकअप के लिए फोन में 5000mAh की बड़ी बैटरी दी जाएगी।
नई दिल्ली, सैमसंग का सस्ता अपकमिंग स्मार्टफोन गैलेक्सी एतीन भारत में लॉन्च को तैयार है। फोन को मार्च की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है। इससे पहले कंपनी भारत में Galaxy Aतीन Core स्मार्टफोन को लॉन्च कर चुकी है। लेकिन कंपनी Galaxy Aतीन भारत में लॉन्च करने जा रही है। लीक रिपोर्ट की मानें, तो Galaxy Aतीन स्मार्टफोन दो वेरिएंट में आएगा। इसका एक वेरिएंट तीनGB रैम और बत्तीसGB स्टोरेज ऑप्शन में आएगा। जबकि दूसरा वेरिएंट चार जीबी रैम और चौंसठ जीबी स्टोरेज ऑप्शन में आएगा। फोन को भारत में ब्लैक, डॉर्क ग्रीन और रेड कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा। Samsung Galaxy Aतीन स्मार्टफोन के बेस वेरिएंट तीन जीबी रैम और बत्तीस जीबी स्टोरेज की कीमत दस,चार सौ निन्यानवे रुपयापये होगी। जबकि फोन का चार जीबी रैम और चौंसठ जीबी स्टोरेज वेरिएंट ग्यारह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में आएगा। सैमसंग के अपकमिंग स्मार्टफोन गैलेक्सी Aतीन स्मार्टफोन की सीधी टक्कर Realme और Xiaomi स्मार्टफोन से होगी। अगर Samsung Galaxy Aतीन के स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो Galaxy Aतीन स्मार्टफोन में छः. पाँच इंच की HD+ Infinity-V डिस्प्ले दी जाएगी। वही फोटोग्रॉफी के लिए फोन में पाँच मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया जाएगा। इसके अलावा फोन के रियर पैनल पर ड्यूल कैमरा सेटअप मिलेगा। इसका मेन कैमरा अड़तालीस मेगापिक्सल लेंस सपोर्ट के साथ आएगा। साथ ही दो मेगापिक्सल डेप्थ सेंसर मौजूद रहेगा। Galaxy Aतीन स्मार्टफोन UNISOC-ब्रांडेड SoC प्रोसेसर सपोर्ट दिया गया है। जो कि Tiger Tछःxx सीरीज से संबंध रखता है। फोन एंड्राइड ग्यारह बेस्ड OneUI पर काम करेगा। इसमें PowerVR IMGआठ हज़ार तीन सौ बाईस GPU सपोर्ट दिया जाएगा। पावर बैकअप के लिए फोन में पाँच हज़ारmAh की बड़ी बैटरी दी जाएगी।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी मां हीराबेन का निधन हो गया। 100 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने आज सुबह 3. 30 बजे आखिर सांस ली। बता दें कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह से बुधवार की सुबह हीराबेन को 'यू एन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। इस बात की जानकारी खुद पीएम मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम. . . मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। " Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी मां हीराबेन का निधन हो गया। एक सौ साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने आज सुबह तीन. तीस बजे आखिर सांस ली। बता दें कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह से बुधवार की सुबह हीराबेन को 'यू एन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। इस बात की जानकारी खुद पीएम मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम. . . मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। " Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
मेरे पिछले लेखों में, यह मुझे प्रतीत होता है कि मैंने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है कि वर्तमान सरकार, चाहे वह इससे संबंधित हो, रूसी मिट्टी पर बहुत विश्वसनीय है और इसे छोड़ने के लिए बिल्कुल भी नहीं है। साथ ही साथ यह सामाजिक-आर्थिक नीति में कुछ भी नहीं बदलने जा रहा है, कम से कम बेहतर के लिए, अर्थात, सरकार अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय टीएनसी संरचनाओं के विकल्प के रूप में संप्रभु कुलीनवाद पूंजीवाद के निर्मित मॉडल से विचलित करने का इरादा नहीं रखती है। लेकिन साथ ही, हमें यह समझना चाहिए कि अधिकारियों की नीति रूस को हराने के लिए प्रेरित करती है। "प्रतिद्वंद्वी के मैदान पर" खेलना मुश्किल है। लेकिन उसके नियमों के अनुसार खेलना पूरी तरह से निराशाजनक है। लेकिन यह इस स्थिति में ठीक है कि रूसी कुलीन वर्गों ने खुद को और हमें डाल दिया। वे विदेशी क्षेत्र में खेलकर पूंजीवाद का निर्माण करते हैं। लेकिन पश्चिम (या बल्कि, इसके लोकोमोटिव - एंग्लो-सैक्सन) ने कभी भी अर्थव्यवस्था के पूंजीवादी मॉडल के ढांचे में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं की। इस क्षेत्र में "ट्रेंडसेटर" होने के नाते, एंग्लो-सैक्सन प्रतियोगिता के लिए अपने स्वयं के नियम स्थापित करते हैं। यह साइप्रस के विस्तार को देखने के लिए पर्याप्त है, जो पूंजीवादी प्रणाली (स्वामित्व, बैंकिंग गोपनीयता) की मूलभूत नींव पर रौंद दिया। एक बार शक्तिशाली फ्रांस और जर्मनी ने पहले ही एंग्लो-सैक्सन शक्ति को चुनौती दी थी। लेकिन वे पूंजीवादी दौड़ में हार गए। पिछली शताब्दी में दो बार, रूस को हराया गया था। इसके अलावा, दोनों हार उन क्षणों में हुई जब रूस ने "प्रतिद्वंद्वी के मैदान पर खेल शुरू किया। " उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, रूसी साम्राज्य दृढ़ता से पूंजीवादी पटरियों पर शुरू हुआ और सुरक्षित रूप से बीसवीं शताब्दी की शुरुआत और 1917 वर्ष की आपदा में गिरावट आई। सोवियत सुपर साम्राज्य का पतन भी समाजवादी आर्थिक प्रणाली में मुक्त बाजार के तत्वों को पेश करने के बजाय एक अयोग्य प्रयास से पहले हुआ था। जबकि लेनिन-स्टालिन की समाजवादी परियोजना रूस के लिए बचत करने वाली निकली। क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि मौजूदा सरकार उस काम में सफल होगी जो पहले कोई सफल नहीं हुआ था? अधिकारी भी मदद नहीं कर सकते हैं लेकिन उस खतरे को देख सकते हैं, जो गंभीर संकट और भ्रष्ट नौकरशाही के कारण पैदा हुई आंतरिक अशांति, ऑपरेशन में हार का बदला लेने का सपना देखने वाले बाहरी दुश्मन के ढोंगी पर लगाया गया है। इस मामले में, प्रतिध्वनि हो सकती है और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। या, कम से कम, बाहरी और आंतरिक प्रभाव गंभीरता से सरकार समर्थक कुलीन संरचनाओं की स्थिति को कमजोर कर देंगे और उन्हें एक समझौते पर आने के लिए मजबूर करेंगे, जिससे उनके धन और संभावनाओं का एक बड़ा हिस्सा बलिदान हो जाएगा। कम से कम यह तथ्य कि अधिकारी, मुख्य रूप से पश्चिमी मॉडल की नकल करते हैं, फिर भी हमें उनकी गतिविधियों के आधार पर छोड़ देता है, पश्चिम के लिए ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं, लेकिन रूसी लोगों के लिए अस्वीकार्य हैं और एलजीबीटी लोगों के लिए किशोर न्याय या सहिष्णुता। यानी राज्य अधिकारियों, उच्च मूल्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यावसायीकरण के लिए असुरक्षा के साथ नाव को हिला रहा है। लेकिन एक ही समय में, वह यह सुनिश्चित करता है कि वह लोकप्रिय दिमाग में उन "लाल रेखाओं" को पार नहीं करता है जो लोकप्रिय आक्रोश का विस्फोट पैदा करेगा और "नाव" को ओवरकिल बना देगा। इस मामले में बहुत संकेत एक तरह की आवाज़ है, जो अधिकारियों द्वारा किशोर न्याय के संबंध में किया गया था। वास्तव में, मुझे आशा है कि कोई भी विश्वास नहीं करेगा कि वी। मतविनेको के रूप में इस तरह के एक उच्च पदस्थ अधिकारी अपनी पहल पर किशोरों के हितों की पैरवी करेंगे। और अधिकारियों और ओलिगार्सिक लॉबी की भागीदारी के बिना, किशोर कानूनों को संसद में पेश नहीं किया गया था। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इन कानूनों को उनकी सेनाओं द्वारा दफन किया गया था। लेकिन समाज ने इस जांच पर बहुत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। और फिर सरकार ने इस विरोध प्रदर्शन को अपने सिर पर रखकर एक पॉकेट के आकार का "देशभक्ति का विरोध" किया, जैसे "समय का सार"। इसी नस में, अस्ताखोव के "कानों के साथ फंट" पर भी विचार कर सकते हैं - लोकपाल ने अचानक परिवार की रक्षा की आवश्यकता के लिए बच्चों के अधिकारों की प्रबलता से अपने विचार बदल दिए। और एपोथिसिस वीवीपी का व्यक्तिगत आगमन था। "रूस की अभिभावक सभा" के सम्मेलन में, जहां उन्होंने आधिकारिक तौर पर "उदारवादियों" के किशोर ढोंगी को समाप्त कर दिया। फिर भी, पूंजीवाद वह "लाल रेखा" है, जिसके लिए आधुनिक कुलीन शक्ति कभी भी विदा नहीं होगी, चाहे इससे कोई खतरा क्यों न हो। हुक या बदमाश द्वारा, शक्ति और चालाक, वह उसे खिला कुंड रखेगा। मैं यह भी नोट करना चाहूंगा कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय आबादी का, तथाकथित "पेप्सी पीढ़ी", जो पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के ढांचे के भीतर काफी सामान्य महसूस करता है, छोटा नहीं है, क्योंकि यह बस समाजवाद के तहत जीवन के सकारात्मक पहलुओं को नहीं जानता था, जबकि उनके कान इसके बारे में चर्चा करते थे। "अच्छे उदारवादी" 90's। इसलिए, वे सत्ता में अपने रवैये की परवाह किए बिना, रूस में समाजवाद को बहाल करने के प्रयास से खुश नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में, समाजवाद के लिए रूस में वापसी का सपना हवा में महल बनाने के समान है। हमें इसे अच्छी तरह से समझना चाहिए, क्योंकि हमें इस तथ्य को समझना चाहिए कि सत्ता को ध्वस्त करने का प्रयास केवल बाहरी दुश्मनों के हाथों में होगा और उन्हें रूसी मुद्दे को एक बार और सभी के समाधान में मदद कर सकता है। यह एक दुष्चक्र है, जो ऐसा लगता है, रूस की हार और मृत्यु को अपरिहार्य बनाता है, क्योंकि यह मोक्ष के लिए एकमात्र परीक्षण एंटीडोट का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि, अन्य देशों के विपरीत जिन्होंने पहले एंग्लो-सैक्सन शक्ति को चुनौती दी थी, रूस में कई विशेषताएं हैं। जिनमें से एक हमें अपने देश को "सहिष्णु साम्राज्य" कहने की अनुमति देता है। मैं समझता हूं कि "सहनशील" शब्द विश्व नवउदारवाद द्वारा बहुत गंदा था। हालाँकि, सहिष्णुता सहिष्णुता है। और यह वास्तव में अपने बाहरी इलाकों के प्रति सहिष्णुता है, कभी-कभी उनके सामने अपमान की बात तक पहुंच जाता है, कि रूसी साम्राज्य प्रतिष्ठित है। इस संपत्ति ने पूरी तरह से अलग धर्म, मानसिकता और सामाजिक-आर्थिक विकास के स्तरों के साथ लोगों के लिए साम्राज्य में सह-अस्तित्व के लिए संभव बना दिया। रूस में, आदिम Chukchi, पूरी तरह से सभ्य रूसी लोगों, Finns अपनी राष्ट्रीयता, जंगली Ossetians या Chechens और यूरोपीयकृत बाल्टिक राज्यों के लिए बंद हो गए और डंडे काफी आराम से सहवास कर सकते थे। स्वाभाविक रूप से, अलग-अलग समय में यह ज्यादतियों के बिना नहीं था, लेकिन रूस को कभी भी उस प्रकार के नरसंहार में नहीं देखा गया था जो कि यूरोपीय अपने उपनिवेशों में आयोजित करते थे। हमारे पास यह भी असहिष्णुता नहीं थी कि एशियाइयों ने विजय प्राप्त लोगों की ओर मतभेद किया, अपने लिए आसपास की राष्ट्रीयताओं को सुधारने का प्रयास किया, उदाहरण के लिए, जापानियों द्वारा अपने द्वीपों पर कब्जा करने के बाद ऐनू के साथ हुआ। यह रूसी सभ्यता की सहिष्णुता है, यह मुझे लगता है, यह हमें दुष्चक्र से बाहर निकलने में मदद कर सकता है। मैं रूस में न केवल विभिन्न नृवंशविज्ञान प्रणाली, बल्कि विभिन्न आर्थिक संरचनाओं के सह-अस्तित्व का शासन स्थापित करने का प्रस्ताव करता हूं। यह अधिकारियों को कुलीन वर्गों की इच्छाओं और वर्तमान बाहरी और आंतरिक राजनीतिक स्थिति की मांगों के बीच समझौता करने में सक्षम करेगा। यह देखते हुए कि रूसी संघ आधिकारिक रूप से एक संघीय राज्य है, मॉस्को को क्षेत्रों को आर्थिक संरचना को बदलने का अवसर देना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक खराब विकसित और मर रही एफईएफडी को समाजवादी नियोजित अर्थव्यवस्था की मदद से उठाया जा सकता है। इससे सुदूर पूर्व के लिए समाजवाद के तहत रहने के इच्छुक लोगों को आकर्षित करके क्षेत्र की जनसांख्यिकीय समस्या को हल करना संभव हो जाएगा। आप इस क्षेत्र के विकास की गति को भी बढ़ा सकते हैं, जबकि वर्तमान में बेहद अक्षमता से खर्च किए जा रहे धन की बचत करते हैं। आइए समाजवादी अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांतों को देखें जिन्हें हमें अपने अलग क्षेत्र में लागू करने की आवश्यकता है, और उन्हें केंद्रीय पूंजीवादी कानून के साथ कैसे जोड़ा जाए। 1। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और समाजवादी के बीच बुनियादी अंतर पूंजीवाद के तहत निजी संपत्ति अधिकारों का अस्तित्व है, जो समाजवाद के तहत मौजूद नहीं है। स्वाभाविक रूप से, हम निजी संपत्ति से दूर नहीं हो पाएंगे, जो संविधान में निहित है और जो संभवतः कुलीन वर्ग के लिए एकमात्र लेख है। लेकिन क्या हमें इससे परेशान होना चाहिए? जैसे ही हम मानते हैं कि समाजवादी अर्थव्यवस्था पूंजीवादी एक से बेहतर है और हम इसे साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, तो प्रयोग की सबसे बड़ी शुद्धता के लिए, यह मौजूदा मालिकों, साथ ही भविष्य के समाजवादी उद्यमियों के लिए, अपने व्यवसाय को विकसित रखने के लिए सार्थक है। लेकिन साथ ही, राज्य संपत्ति के किसी भी हस्तांतरण पर स्थगन को समाजवादी क्षेत्र में निजी हाथों में सौंपना आवश्यक है। निजी संपत्ति सभी अधिक कठिन है क्योंकि एक संतुलित समाजवादी अर्थव्यवस्था के लिए निजी क्षेत्र की उपस्थिति एक पूर्वापेक्षा है। 2। इसी समय, एक समाजवादी अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत इसकी नियोजित प्रकृति है। इसलिए, क्षेत्रीय स्तर पर, गोस्पलान बनाना आवश्यक है। जिसके कार्यों में क्षेत्र में आर्थिक विनियमन और संघीय स्तर पर निजी व्यावसायिक और आर्थिक सरकारी एजेंसियों के साथ बातचीत शामिल होगी। 3। बड़े और छोटे निजी उद्यमों, संघीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ-साथ संघीय केंद्र के साथ आय वितरण के मुद्दों को हल करने की आवश्यकता को देखते हुए, समाजवादी प्रणाली को राजकोषीय सेवा से लैस करना आवश्यक है। जो फीस और उनके प्रशासन को केंद्रीय रूप से व्यवस्थित करेगा, और इसके द्वारा बनाए रखने वाले हिस्से में संघीय केंद्र का भुगतान करेगा। इसके अलावा, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए "सरलीकृत" सुधार करना आवश्यक है। जिसमें एकल कर में सभी कर, पेंशन, उत्पाद शुल्क और सामाजिक कर शामिल होंगे। उद्यमों में एकाउंटेंट के एक विशाल वर्ग से छुटकारा पाने के लिए और राज्य योजना आयोग के हाथों में वित्तीय प्रवाह की एकाग्रता को अधिकतम करने के लिए। वैकल्पिक रूप से, खनिज संसाधनों, भूमि, शराब बेचने के अधिकार आदि के उपयोग के लिए उद्यमों के उद्यमियों और उद्यमियों द्वारा खरीद से उत्पाद शुल्क को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। उसी समय, क्षेत्रीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का कर संबंध नहीं होगा, क्योंकि वे बजट वित्तपोषण पर होंगे। इसी समय, संघीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों, साथ ही संघीय निजी कंपनियों की इकाइयां, क्षेत्रीय बजट को भुगतान करेंगी जो उन्हें स्थानीय बजट और निधियों को भुगतान करने के लिए आवश्यक हैं। 4। गारंटीकृत रोजगार और आय के एक गारंटीकृत स्तर को सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरियां पैदा करके और निजी उद्यमों को एक औसत स्तर तक श्रमिकों का भुगतान करके उन उद्यमों और उद्यमियों के साथ काम करके सुनिश्चित किया जा सकता है, जिन्होंने अनुचित रूप से कम मजदूरी स्थापित की है। 5। एक केंद्रीकृत पेंशन प्रावधान के लिए, एक गैर-राज्य पेंशन फंड बनाया जा सकता है जो क्षेत्रीय बजट से स्थापित संघीय मानकों के अनुसार धन प्राप्त करता है। स्वाभाविक रूप से, उसके लिए संघीय उद्यमों और उन उद्यमों और उद्यमियों के साथ काम करने के लिए एफआईयू के कार्यों को सौंपने की सलाह दी जाती है जो मानक कर व्यवस्थाओं के तहत काम करते हैं। 6। एक गलियारे की स्थापना करके कीमतों का तंग नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकता है जिसमें कीमतों में उतार-चढ़ाव होगा। सबसे पहले, कीमतों को कम करने का विकल्प निर्माता को कर वरीयताओं और / या सब्सिडी प्रदान करके, और मूल्य निर्धारण के तंग नियंत्रण द्वारा पुनर्विक्रेताओं के लिए लागू किया जा सकता है। भविष्य में, स्थानापन्न उत्पादन और बजट ट्रेडिंग नेटवर्क के विकास के कारण। 7। योजना बनाते समय, गोस्प्लान बड़े निजी कंपनियों और संघीय राज्य उद्यमों के साथ बातचीत के मुद्दों को लागू करता है, जो कि आयातकों के साथ काम करने के लिए होता है, डिलीवरी की मात्रा और सेवाओं के प्रावधान पर दीर्घकालिक समझौतों के आधार पर। 8। उद्योग और स्थान द्वारा उद्यमियों और छोटे उद्यमों को एकजुट करने वाले स्व-नियामक संगठन राज्य योजना आयोग के कार्यों के लिए निजी क्षेत्र के काम को विनियमित करने में लगे हो सकते हैं। उनके माध्यम से, किसी व्यवसाय के विस्तार या संगठन के लिए ऋण वितरित किया जा सकता है, अगर ऐसी योजनाओं के लिए प्रदान किया जाता है। उन्हें नियोजित कार्य भी दिए जाते हैं। इस प्रकार, जैसा कि हम देखते हैं, ऐसे तंत्र हैं जो रूस के क्षेत्र पर समाजवाद के एक आयोजन के आयोजन की अनुमति दे सकते हैं, जो रूस को उस समय की चुनौतियों का जवाब देने का अवसर प्रदान करेगा। और उसी समय घरेलू नीति के कुछ दबाव वाले मुद्दों को हल करें। और एक ही समय में, कुलीन वर्गों के अधिकार और हित, जो इतने उत्साह से रूसी अधिकारियों द्वारा देखे जाते हैं, प्रभावित नहीं होंगे। एक क्षेत्रीय समाजवादी अर्थव्यवस्था के निर्माण के ठोस चरणों, साथ ही इन तंत्रों को लागू करने के तरीकों की चर्चा मेरे अगले लेख में की जाएगी। - लेखकः
मेरे पिछले लेखों में, यह मुझे प्रतीत होता है कि मैंने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है कि वर्तमान सरकार, चाहे वह इससे संबंधित हो, रूसी मिट्टी पर बहुत विश्वसनीय है और इसे छोड़ने के लिए बिल्कुल भी नहीं है। साथ ही साथ यह सामाजिक-आर्थिक नीति में कुछ भी नहीं बदलने जा रहा है, कम से कम बेहतर के लिए, अर्थात, सरकार अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय टीएनसी संरचनाओं के विकल्प के रूप में संप्रभु कुलीनवाद पूंजीवाद के निर्मित मॉडल से विचलित करने का इरादा नहीं रखती है। लेकिन साथ ही, हमें यह समझना चाहिए कि अधिकारियों की नीति रूस को हराने के लिए प्रेरित करती है। "प्रतिद्वंद्वी के मैदान पर" खेलना मुश्किल है। लेकिन उसके नियमों के अनुसार खेलना पूरी तरह से निराशाजनक है। लेकिन यह इस स्थिति में ठीक है कि रूसी कुलीन वर्गों ने खुद को और हमें डाल दिया। वे विदेशी क्षेत्र में खेलकर पूंजीवाद का निर्माण करते हैं। लेकिन पश्चिम ने कभी भी अर्थव्यवस्था के पूंजीवादी मॉडल के ढांचे में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं की। इस क्षेत्र में "ट्रेंडसेटर" होने के नाते, एंग्लो-सैक्सन प्रतियोगिता के लिए अपने स्वयं के नियम स्थापित करते हैं। यह साइप्रस के विस्तार को देखने के लिए पर्याप्त है, जो पूंजीवादी प्रणाली की मूलभूत नींव पर रौंद दिया। एक बार शक्तिशाली फ्रांस और जर्मनी ने पहले ही एंग्लो-सैक्सन शक्ति को चुनौती दी थी। लेकिन वे पूंजीवादी दौड़ में हार गए। पिछली शताब्दी में दो बार, रूस को हराया गया था। इसके अलावा, दोनों हार उन क्षणों में हुई जब रूस ने "प्रतिद्वंद्वी के मैदान पर खेल शुरू किया। " उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, रूसी साम्राज्य दृढ़ता से पूंजीवादी पटरियों पर शुरू हुआ और सुरक्षित रूप से बीसवीं शताब्दी की शुरुआत और एक हज़ार नौ सौ सत्रह वर्ष की आपदा में गिरावट आई। सोवियत सुपर साम्राज्य का पतन भी समाजवादी आर्थिक प्रणाली में मुक्त बाजार के तत्वों को पेश करने के बजाय एक अयोग्य प्रयास से पहले हुआ था। जबकि लेनिन-स्टालिन की समाजवादी परियोजना रूस के लिए बचत करने वाली निकली। क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि मौजूदा सरकार उस काम में सफल होगी जो पहले कोई सफल नहीं हुआ था? अधिकारी भी मदद नहीं कर सकते हैं लेकिन उस खतरे को देख सकते हैं, जो गंभीर संकट और भ्रष्ट नौकरशाही के कारण पैदा हुई आंतरिक अशांति, ऑपरेशन में हार का बदला लेने का सपना देखने वाले बाहरी दुश्मन के ढोंगी पर लगाया गया है। इस मामले में, प्रतिध्वनि हो सकती है और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। या, कम से कम, बाहरी और आंतरिक प्रभाव गंभीरता से सरकार समर्थक कुलीन संरचनाओं की स्थिति को कमजोर कर देंगे और उन्हें एक समझौते पर आने के लिए मजबूर करेंगे, जिससे उनके धन और संभावनाओं का एक बड़ा हिस्सा बलिदान हो जाएगा। कम से कम यह तथ्य कि अधिकारी, मुख्य रूप से पश्चिमी मॉडल की नकल करते हैं, फिर भी हमें उनकी गतिविधियों के आधार पर छोड़ देता है, पश्चिम के लिए ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं, लेकिन रूसी लोगों के लिए अस्वीकार्य हैं और एलजीबीटी लोगों के लिए किशोर न्याय या सहिष्णुता। यानी राज्य अधिकारियों, उच्च मूल्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यावसायीकरण के लिए असुरक्षा के साथ नाव को हिला रहा है। लेकिन एक ही समय में, वह यह सुनिश्चित करता है कि वह लोकप्रिय दिमाग में उन "लाल रेखाओं" को पार नहीं करता है जो लोकप्रिय आक्रोश का विस्फोट पैदा करेगा और "नाव" को ओवरकिल बना देगा। इस मामले में बहुत संकेत एक तरह की आवाज़ है, जो अधिकारियों द्वारा किशोर न्याय के संबंध में किया गया था। वास्तव में, मुझे आशा है कि कोई भी विश्वास नहीं करेगा कि वी। मतविनेको के रूप में इस तरह के एक उच्च पदस्थ अधिकारी अपनी पहल पर किशोरों के हितों की पैरवी करेंगे। और अधिकारियों और ओलिगार्सिक लॉबी की भागीदारी के बिना, किशोर कानूनों को संसद में पेश नहीं किया गया था। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इन कानूनों को उनकी सेनाओं द्वारा दफन किया गया था। लेकिन समाज ने इस जांच पर बहुत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। और फिर सरकार ने इस विरोध प्रदर्शन को अपने सिर पर रखकर एक पॉकेट के आकार का "देशभक्ति का विरोध" किया, जैसे "समय का सार"। इसी नस में, अस्ताखोव के "कानों के साथ फंट" पर भी विचार कर सकते हैं - लोकपाल ने अचानक परिवार की रक्षा की आवश्यकता के लिए बच्चों के अधिकारों की प्रबलता से अपने विचार बदल दिए। और एपोथिसिस वीवीपी का व्यक्तिगत आगमन था। "रूस की अभिभावक सभा" के सम्मेलन में, जहां उन्होंने आधिकारिक तौर पर "उदारवादियों" के किशोर ढोंगी को समाप्त कर दिया। फिर भी, पूंजीवाद वह "लाल रेखा" है, जिसके लिए आधुनिक कुलीन शक्ति कभी भी विदा नहीं होगी, चाहे इससे कोई खतरा क्यों न हो। हुक या बदमाश द्वारा, शक्ति और चालाक, वह उसे खिला कुंड रखेगा। मैं यह भी नोट करना चाहूंगा कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय आबादी का, तथाकथित "पेप्सी पीढ़ी", जो पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के ढांचे के भीतर काफी सामान्य महसूस करता है, छोटा नहीं है, क्योंकि यह बस समाजवाद के तहत जीवन के सकारात्मक पहलुओं को नहीं जानता था, जबकि उनके कान इसके बारे में चर्चा करते थे। "अच्छे उदारवादी" नब्बे's। इसलिए, वे सत्ता में अपने रवैये की परवाह किए बिना, रूस में समाजवाद को बहाल करने के प्रयास से खुश नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में, समाजवाद के लिए रूस में वापसी का सपना हवा में महल बनाने के समान है। हमें इसे अच्छी तरह से समझना चाहिए, क्योंकि हमें इस तथ्य को समझना चाहिए कि सत्ता को ध्वस्त करने का प्रयास केवल बाहरी दुश्मनों के हाथों में होगा और उन्हें रूसी मुद्दे को एक बार और सभी के समाधान में मदद कर सकता है। यह एक दुष्चक्र है, जो ऐसा लगता है, रूस की हार और मृत्यु को अपरिहार्य बनाता है, क्योंकि यह मोक्ष के लिए एकमात्र परीक्षण एंटीडोट का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि, अन्य देशों के विपरीत जिन्होंने पहले एंग्लो-सैक्सन शक्ति को चुनौती दी थी, रूस में कई विशेषताएं हैं। जिनमें से एक हमें अपने देश को "सहिष्णु साम्राज्य" कहने की अनुमति देता है। मैं समझता हूं कि "सहनशील" शब्द विश्व नवउदारवाद द्वारा बहुत गंदा था। हालाँकि, सहिष्णुता सहिष्णुता है। और यह वास्तव में अपने बाहरी इलाकों के प्रति सहिष्णुता है, कभी-कभी उनके सामने अपमान की बात तक पहुंच जाता है, कि रूसी साम्राज्य प्रतिष्ठित है। इस संपत्ति ने पूरी तरह से अलग धर्म, मानसिकता और सामाजिक-आर्थिक विकास के स्तरों के साथ लोगों के लिए साम्राज्य में सह-अस्तित्व के लिए संभव बना दिया। रूस में, आदिम Chukchi, पूरी तरह से सभ्य रूसी लोगों, Finns अपनी राष्ट्रीयता, जंगली Ossetians या Chechens और यूरोपीयकृत बाल्टिक राज्यों के लिए बंद हो गए और डंडे काफी आराम से सहवास कर सकते थे। स्वाभाविक रूप से, अलग-अलग समय में यह ज्यादतियों के बिना नहीं था, लेकिन रूस को कभी भी उस प्रकार के नरसंहार में नहीं देखा गया था जो कि यूरोपीय अपने उपनिवेशों में आयोजित करते थे। हमारे पास यह भी असहिष्णुता नहीं थी कि एशियाइयों ने विजय प्राप्त लोगों की ओर मतभेद किया, अपने लिए आसपास की राष्ट्रीयताओं को सुधारने का प्रयास किया, उदाहरण के लिए, जापानियों द्वारा अपने द्वीपों पर कब्जा करने के बाद ऐनू के साथ हुआ। यह रूसी सभ्यता की सहिष्णुता है, यह मुझे लगता है, यह हमें दुष्चक्र से बाहर निकलने में मदद कर सकता है। मैं रूस में न केवल विभिन्न नृवंशविज्ञान प्रणाली, बल्कि विभिन्न आर्थिक संरचनाओं के सह-अस्तित्व का शासन स्थापित करने का प्रस्ताव करता हूं। यह अधिकारियों को कुलीन वर्गों की इच्छाओं और वर्तमान बाहरी और आंतरिक राजनीतिक स्थिति की मांगों के बीच समझौता करने में सक्षम करेगा। यह देखते हुए कि रूसी संघ आधिकारिक रूप से एक संघीय राज्य है, मॉस्को को क्षेत्रों को आर्थिक संरचना को बदलने का अवसर देना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक खराब विकसित और मर रही एफईएफडी को समाजवादी नियोजित अर्थव्यवस्था की मदद से उठाया जा सकता है। इससे सुदूर पूर्व के लिए समाजवाद के तहत रहने के इच्छुक लोगों को आकर्षित करके क्षेत्र की जनसांख्यिकीय समस्या को हल करना संभव हो जाएगा। आप इस क्षेत्र के विकास की गति को भी बढ़ा सकते हैं, जबकि वर्तमान में बेहद अक्षमता से खर्च किए जा रहे धन की बचत करते हैं। आइए समाजवादी अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांतों को देखें जिन्हें हमें अपने अलग क्षेत्र में लागू करने की आवश्यकता है, और उन्हें केंद्रीय पूंजीवादी कानून के साथ कैसे जोड़ा जाए। एक। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और समाजवादी के बीच बुनियादी अंतर पूंजीवाद के तहत निजी संपत्ति अधिकारों का अस्तित्व है, जो समाजवाद के तहत मौजूद नहीं है। स्वाभाविक रूप से, हम निजी संपत्ति से दूर नहीं हो पाएंगे, जो संविधान में निहित है और जो संभवतः कुलीन वर्ग के लिए एकमात्र लेख है। लेकिन क्या हमें इससे परेशान होना चाहिए? जैसे ही हम मानते हैं कि समाजवादी अर्थव्यवस्था पूंजीवादी एक से बेहतर है और हम इसे साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, तो प्रयोग की सबसे बड़ी शुद्धता के लिए, यह मौजूदा मालिकों, साथ ही भविष्य के समाजवादी उद्यमियों के लिए, अपने व्यवसाय को विकसित रखने के लिए सार्थक है। लेकिन साथ ही, राज्य संपत्ति के किसी भी हस्तांतरण पर स्थगन को समाजवादी क्षेत्र में निजी हाथों में सौंपना आवश्यक है। निजी संपत्ति सभी अधिक कठिन है क्योंकि एक संतुलित समाजवादी अर्थव्यवस्था के लिए निजी क्षेत्र की उपस्थिति एक पूर्वापेक्षा है। दो। इसी समय, एक समाजवादी अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत इसकी नियोजित प्रकृति है। इसलिए, क्षेत्रीय स्तर पर, गोस्पलान बनाना आवश्यक है। जिसके कार्यों में क्षेत्र में आर्थिक विनियमन और संघीय स्तर पर निजी व्यावसायिक और आर्थिक सरकारी एजेंसियों के साथ बातचीत शामिल होगी। तीन। बड़े और छोटे निजी उद्यमों, संघीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ-साथ संघीय केंद्र के साथ आय वितरण के मुद्दों को हल करने की आवश्यकता को देखते हुए, समाजवादी प्रणाली को राजकोषीय सेवा से लैस करना आवश्यक है। जो फीस और उनके प्रशासन को केंद्रीय रूप से व्यवस्थित करेगा, और इसके द्वारा बनाए रखने वाले हिस्से में संघीय केंद्र का भुगतान करेगा। इसके अलावा, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए "सरलीकृत" सुधार करना आवश्यक है। जिसमें एकल कर में सभी कर, पेंशन, उत्पाद शुल्क और सामाजिक कर शामिल होंगे। उद्यमों में एकाउंटेंट के एक विशाल वर्ग से छुटकारा पाने के लिए और राज्य योजना आयोग के हाथों में वित्तीय प्रवाह की एकाग्रता को अधिकतम करने के लिए। वैकल्पिक रूप से, खनिज संसाधनों, भूमि, शराब बेचने के अधिकार आदि के उपयोग के लिए उद्यमों के उद्यमियों और उद्यमियों द्वारा खरीद से उत्पाद शुल्क को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। उसी समय, क्षेत्रीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का कर संबंध नहीं होगा, क्योंकि वे बजट वित्तपोषण पर होंगे। इसी समय, संघीय स्तर पर राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों, साथ ही संघीय निजी कंपनियों की इकाइयां, क्षेत्रीय बजट को भुगतान करेंगी जो उन्हें स्थानीय बजट और निधियों को भुगतान करने के लिए आवश्यक हैं। चार। गारंटीकृत रोजगार और आय के एक गारंटीकृत स्तर को सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरियां पैदा करके और निजी उद्यमों को एक औसत स्तर तक श्रमिकों का भुगतान करके उन उद्यमों और उद्यमियों के साथ काम करके सुनिश्चित किया जा सकता है, जिन्होंने अनुचित रूप से कम मजदूरी स्थापित की है। पाँच। एक केंद्रीकृत पेंशन प्रावधान के लिए, एक गैर-राज्य पेंशन फंड बनाया जा सकता है जो क्षेत्रीय बजट से स्थापित संघीय मानकों के अनुसार धन प्राप्त करता है। स्वाभाविक रूप से, उसके लिए संघीय उद्यमों और उन उद्यमों और उद्यमियों के साथ काम करने के लिए एफआईयू के कार्यों को सौंपने की सलाह दी जाती है जो मानक कर व्यवस्थाओं के तहत काम करते हैं। छः। एक गलियारे की स्थापना करके कीमतों का तंग नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकता है जिसमें कीमतों में उतार-चढ़ाव होगा। सबसे पहले, कीमतों को कम करने का विकल्प निर्माता को कर वरीयताओं और / या सब्सिडी प्रदान करके, और मूल्य निर्धारण के तंग नियंत्रण द्वारा पुनर्विक्रेताओं के लिए लागू किया जा सकता है। भविष्य में, स्थानापन्न उत्पादन और बजट ट्रेडिंग नेटवर्क के विकास के कारण। सात। योजना बनाते समय, गोस्प्लान बड़े निजी कंपनियों और संघीय राज्य उद्यमों के साथ बातचीत के मुद्दों को लागू करता है, जो कि आयातकों के साथ काम करने के लिए होता है, डिलीवरी की मात्रा और सेवाओं के प्रावधान पर दीर्घकालिक समझौतों के आधार पर। आठ। उद्योग और स्थान द्वारा उद्यमियों और छोटे उद्यमों को एकजुट करने वाले स्व-नियामक संगठन राज्य योजना आयोग के कार्यों के लिए निजी क्षेत्र के काम को विनियमित करने में लगे हो सकते हैं। उनके माध्यम से, किसी व्यवसाय के विस्तार या संगठन के लिए ऋण वितरित किया जा सकता है, अगर ऐसी योजनाओं के लिए प्रदान किया जाता है। उन्हें नियोजित कार्य भी दिए जाते हैं। इस प्रकार, जैसा कि हम देखते हैं, ऐसे तंत्र हैं जो रूस के क्षेत्र पर समाजवाद के एक आयोजन के आयोजन की अनुमति दे सकते हैं, जो रूस को उस समय की चुनौतियों का जवाब देने का अवसर प्रदान करेगा। और उसी समय घरेलू नीति के कुछ दबाव वाले मुद्दों को हल करें। और एक ही समय में, कुलीन वर्गों के अधिकार और हित, जो इतने उत्साह से रूसी अधिकारियों द्वारा देखे जाते हैं, प्रभावित नहीं होंगे। एक क्षेत्रीय समाजवादी अर्थव्यवस्था के निर्माण के ठोस चरणों, साथ ही इन तंत्रों को लागू करने के तरीकों की चर्चा मेरे अगले लेख में की जाएगी। - लेखकः
उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के मंगलवार से ऑपरेशन गंगा के तहत कई सी-17 विमान तैनात करने की संभावना है। लगभग 14,000 भारतीय नागरिक अभी भी युद्धग्रस्त देश में हैं, सरकारी अधिकारियों ने कहा कि आईएएफएक निकासी योजना के साथ तैयार है। निकासी के प्रयासों को अंजाम देने के लिए आईएएफ परिवहन विमानों को शामिल करना आवश्यक था, क्योंकि हजारों भारतीय कीव, खारकीव और ओडेसा में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन की राजधानी छोड़ने की सलाह दी, क्योंकि रूसी सेना के हमलों से कीव में स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे आईएएफ परिवहन विमान में बड़ी वहन क्षमता है और नागरिक एयरलाइंस की तुलना में यूक्रेन के पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में निकासी की जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से निकासी मिशन की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने सोमवार शाम तक तीन उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की है। अब तक, 1600 से अधिक भारतीय छात्रों को आज सुबह तक यूक्रेन से निकाला जा चुका है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के मंगलवार से ऑपरेशन गंगा के तहत कई सी-सत्रह विमान तैनात करने की संभावना है। लगभग चौदह,शून्य भारतीय नागरिक अभी भी युद्धग्रस्त देश में हैं, सरकारी अधिकारियों ने कहा कि आईएएफएक निकासी योजना के साथ तैयार है। निकासी के प्रयासों को अंजाम देने के लिए आईएएफ परिवहन विमानों को शामिल करना आवश्यक था, क्योंकि हजारों भारतीय कीव, खारकीव और ओडेसा में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन की राजधानी छोड़ने की सलाह दी, क्योंकि रूसी सेना के हमलों से कीव में स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि सी-सत्रह ग्लोबमास्टर जैसे आईएएफ परिवहन विमान में बड़ी वहन क्षमता है और नागरिक एयरलाइंस की तुलना में यूक्रेन के पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में निकासी की जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से निकासी मिशन की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने सोमवार शाम तक तीन उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की है। अब तक, एक हज़ार छः सौ से अधिक भारतीय छात्रों को आज सुबह तक यूक्रेन से निकाला जा चुका है।
असम एक संकट के कगार पर है जो भारत के इस संवेदनशील और रणनीतिक पूर्वोत्तर राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुक्सान पहुँचा रहा है। असुरक्षा, अनिश्चितता और आघात लोगों के विभिन्न वर्गों में बड़े पैमाने पर बढ़ रहा हैं, ज़्यादातर गरीब और वंचितों के बीच। संकट दो मुद्दों के आसपास केंद्रित हैः नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता (संशोधन) विधेयक, जिसे 15 जुलाई, 2016 को संसद में प्रस्तुत किया गया था। एनआरसी अद्यतन कार्य - जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यवेक्षित किया जा रहा है - 2015 में शुरू हुआ था। 24 अगस्त, 1971 के मध्यरात्रि - कट ऑफ तारीख से पहले भारत में पंजीकृत सभी नागरिक - वैध भारतीय नागरिक हैं। इस कट ऑफ तारीख के बाद असम में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों को कानूनी तौर पर 'विदेशी' घोषित किया जाएगा। 1985 में तत्कालीन राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार, राज्य सरकार और अखिल असम छात्र संघ (एएएसयू) के बीच त्रिपक्षीय असम समझौते के तहत कटऑफ तिथि तय की गई थी। हालांकि, नागरिक समाज के भीतर व्यापक धारणा के अनुसार रिकॉर्ड-सत्यापन की प्रक्रिया निष्पक्ष और उद्देश्य के रूप में देखी गई थी, बीजेपी ने अप्रैल 2016 में विधानसभा चुनाव जीते जाने के बाद से ये समस्याएं उत्पन्न हुईं। नई सरकार ने काम को तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन यह भी सही है कि - कथित रूप से - प्रक्रिया के साथ झुकाव खिलवाड़ शुरू कर दिया, यह एक अवांछित खिलवाड़ कई गरीब लोगों के लिए कठिनाइयों का निर्माण कर रहा है। पक्षपात और मध्यस्थता के आरोप ने असम को पीड़ित करना शुरू कर दिया। यह एक विशाल, जटिल और कठिन प्रक्रिया है। अनौपचारिक अनुमानों का दावा है कि 35 लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसमें शामिल हो सकते हैं। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, 1.25 लाख मतदाताओं को 'संदिग्ध मतदाता' माना गया है - जिसे 'डी-मतदाता' भी कहा जाता है। एनआरसी ने 31 दिसंबर, 2016 को अपनी पहली रिपोर्ट जारी की, जिसमें 1.9 करोड़ को 3.29 करोड़ आवेदकों में से 'भारतीय नागरिक' घोषित किया गया था। दूसरी और अंतिम रिपोर्ट (दावों और सत्यापन के बाद दिसंबर 2018 में संशोधित की जानी चाहिए थीं) को 30 जून को रिलीज किया जाना था, लेकिन अधिकारियों द्वारा बताए गए बाढ़ के कारण के लिये इसे 30 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, बीजेपी द्वारा समर्थित नागरिकता (संशोधन) विधेयक को कम करता है। यह बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, जो सिख, पारसी, बौद्ध, जैन, या ईसाई मूल के हैं, से अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना चाहता है। मुस्लिम, या इसके विभिन्न संप्रदायों और समुदायों को इस विधेयक में शामिल नहीं किया गया है, वैसे ही जैसे शिया और अखिमीया जैसे समुदाय पाकिस्तान में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी के सहयोगी, आल असम असम छात्र संघ (एएएसयू) और इसके राजनीतिक मोर्चा, असम गण परिषद (एजीपी) ने इसका जोरदार विरोध किया है। एनआरसी दोनों भाजपा और एजीपी द्वारा समर्थित है। आसु के संस्थापक अध्यक्ष प्रफुल्ल महंत, जो दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं, ने 29 जून को गुवाहाटी में एक साक्षात्कार में न्यूजक्लिकिन को बताया, "यदि भाजपा इस नागरिकता संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाएगी तो एजीपी बीजेपी के साथ गठबंधन को तोड़ देगा।" असम सीमा पुलिस और सौ विदेशियों के ट्रिब्यूनल (एफटी) के स्कैनर के तहत हजारों लोग आते हैं। उन्हें अपनी भारतीय पहचान साबित करने के लिए 16 वैध दस्तावेजों की आपूर्ति करनी है। अगर वे अपील करना चाहते हैं, तो उन्हें न्यायमूर्ति उज्जल भुया के नेतृत्व में गोहाटी उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीशीय विभागीय खंडपीठ से संपर्क करना होगा। अधिकांश, इससे खासकर गरीब गांवों और अंदरूनी इलाकों में गरीब और अशिक्षित का जीवन सीधे तौर पर प्रभावित हैं, वे इस पूरे अभ्यास को मुश्किल पाते हैं। यदि उच्च न्यायालय की बेंच उनकी अपील को खारिज कर देती है, तो उन्हें ट्रिब्यूनल में वापस जाना होगा। यदि अंतिम अपील में उनकी अपील को खारिज कर दिया जाता है, तो उन्हें 'विदेशी' घोषित किया जाता है और जेल में भेज दिया जाता है - जो हिरासत केंद्रों के रूप में कार्य करता है। असम के छः 'डिटेन्शन सेंटर' में, उनके पास कोई जेल अधिकार नहीं है, और उन्हें 'दोषी' के रूप में माना जाता है। उनकी 'विदेशियों' के रूप में निंदा की जाती है, भले ही संदिग्ध मतदाता अपने दस्तावेजों में तकनीकी या आधिकारिक विसंगतियों के कारण वैध रूप से जांच के अधीन हैं। स्थानीय वकील इन हिरासतों को "अवैध" कहते हैं। सबसे अधिक प्रभावित बंगाली भाषी हिंदु और मुस्लिम हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि एनआरसी प्रक्रिया सीधे धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रही है। भारत के बाकी हिस्सों में, कार्यकर्ताओं के अनुसार, एनआरसी नागरिकता नियम, 2003 के नियम 4 द्वारा शासित है। एनआरसी कर्मचारियों को नागरिकता दस्तावेजों और साक्ष्य को सत्यापित करने के लिए घर-घर जाना पड़ता है। नियम 4 ए के तहत, जो असम के लिए विशिष्ट है, प्रत्येक क्षेत्र (ग्राम पंचायत) में, एनआरसी सेवा केंद्र स्थापित किए जाते हैं जहां निवासियों को एक फॉर्म लेना होता है, इसे भरना और दस्तावेजों के साथ जमा करना होता है। इसकी जिम्मेदारी उन लोगों पर है जो अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 'संदिग्ध' आदि हैं। डी-मतदाता कौन हैं? सीमा पुलिस 1962 से काम कर रही है और एफटी 1964 में अस्तित्व में आई थी। निगरानी के दौरान, यदि सीमा पुलिस किसी की नागरिकता को संदिग्ध पाती है, तो वह व्यक्ति को आरोपपत्र भेजती है और मामले को एसपी (बी) से संबंधित करती है, जो इस मामले को संदर्भित करती है एफटी और ट्रिब्यूनल फिर व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बुलाता है। विदेश अधिनियम, 1946 के तहत, असम पुलिस और असम सीमा पुलिस के पास उनके पुलिस क्षेत्राधिकार के तहत जमीन रिपोर्ट को सत्यापित करने की ज़िम्मेदारी है। संदेह के आधार पर वे एक मामला दर्ज कर सकते हैं, फिर एफटी नोटिस भेजता है। ऐसे आरोप हैं कि अधिकारी बिना किसी जांच के लोगों को 'संदिग्ध' घोषित करने के लिए पुलिस स्टेशनों में बैठे चुनावी रोल से नाम चुनते हैं। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक - कथित स्थानीय स्तर पर - "दोष मढना" और उन्हे "लक्षित" करना शामिल हैं। ऐसे अन्य तरीके भी हैं जिनमें लोग एफटी के पास जाने से पहले ही निबटाये जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने 1 997 में 'डी-मतदाता' श्रेणी की शुरुआत की थीं। चुनावी रोल के संशोधन के दौरान, ईसी-नियुक्त एलवीओ (स्थानीय सत्यापन अधिकारी, जो आमतौर पर अनुबंध आधार पर काम करते हैं) एक व्यक्ति को संदिग्ध घोषित कर सकते हैं। उनकी रिपोर्ट ईआरओ (चुनावी पंजीकरण अधिकारी) को जाती है, जो इसे संबंधित एसपी (बी) को भेजती है, जो मामला एफटी को संदर्भित करता है और ट्रिब्यूनल 'संदिग्ध' नागरिक को नोटिस देता है। नागरिक समाज कार्यकर्ताओं के अनुसार, 'डी-मतदाता' की अवधारणा केवल असम में है। इससे पहले, यह शिकायतकर्ता थी जिसे खुद सबूत इकट्ठे करने होते थें, लेकिन अब सबूत का बोझ आरोपी पर स्थानांतरित हो गया है। गणक कथित रूप से गांव के प्रधान के घर जाते हैं और सभी नाम लेते हैं, इसलिए कुछ विसंगतियां होती हैं। इसके अलावा, वे खातून (जो अविवाहित हैं), बेगम (विवाहित) और बेवा (विधवा) जैसे उपनामों के बीच अंतर को नहीं समझते हैं। महिलाओं के उपनाम बदलते रहते हैं - सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में - उनकी वैवाहिक स्थिति के आधार पर। यह आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम विसंगतियों की ओर जाता है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की तैयारी के दौरान, व्यक्ति (ओं) कागजी कार्य प्रदान करने में सक्षम नहीं होने के बारे में एक रिपोर्ट बनाई जाती है। यह भी एसपी (बी) के माध्यम से होता है, और व्यक्ति एफटी से पहले समाप्त होता है, जो संबंधित व्यक्ति को नोटिस देता है। एफटी ने पारिवारिक वृक्ष इतिहास मैपिंग की आवश्यकता को जोड़ा है। पहले 16 दस्तावेजों को पहले स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन अब, कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पारिवारिक वृक्ष विरासत एक अतिरिक्त बोझ है। विदेशी अधिनियम 1946 के अनुसार 'विदेशियों' की रोकथाम एफटी द्वारा की जाती है (अधिनियम में इस बाबत कई संशोधन नहीं है)। कचर जिले के तारापुर गांव में एक रिपोर्ट किया गया मामला था, जिसमें एक विवाहित महिला की मृत्यु 19 82 में 32-33 साल की उम्र में हुई थी। सीमा पुलिस ने 1984 में जांच की और 1996 में कहा कि वह एक विदेशी है। जांच से दो साल पहले उनकी मृत्यु हो गई थी और उनकी मृत्यु के चार साल बाद उसे विदेशी घोषित किया गया था। दुखद बेतुकापन पर खड़े इसी तरह के मामले ग्रामीण परिदृश्य में अकसर मिलते हैं। गुवाहाटी में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक विदेशियों ट्रिब्यूनल न्यायाधीश केवल राय दे सकते हैं। वे एक निर्णय नहीं दे सकते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई मामलों में, इस सिद्धांत को उलटा जा रहा है। नलबारी जिले में, उच्च न्यायालय की विभागीय खंडपीठ ने 84 मामलों को ट्रिब्यूनल को समीक्षा के लिए भेजा, कार्यकर्ताओं के मुताबिक। चाय बागान मजदूरों, कुछ जनजातियों, या बंगाल / बिहार / झारखंड के लोग, असमिया मूल के अन्य लोगों को एनआरसी मसौदे में शामिल नहीं किया गया था। उनकी 'नागरिकता' बरकरार है। कई स्थानीय लोगों के पास विभिन्न कारणों से वैध दस्तावेज नहीं हैंः भौगोलिक स्थिति में बदलाव, गांवों का क्षरण, बाढ़, चोरी, समय के नुकसान आदि। कई महिलाओं के जन्म / विद्यालय / चुनावी प्रमाण / प्रमाण पत्र नहीं होते हैं, खासकर जब वे विवाह के बाद अन्य गांवों में चली जाती हैं। हालांकि, उनके परिवारों के पास प्रामाणिक दस्तावेज हो सकते हैं। इसलिए, वे पंचायत प्रमाणपत्रों पर भरोसा करते हैं, जिनमें मजिस्ट्रेट की शक्तियां होती हैं। यह परिवार के पेड़, बुजुर्गों, पड़ोसियों और पंचायत द्वारा स्थानीय साक्ष्य के साक्ष्य पर आधारित हो सकता है। मिसाल के तौर पर, एक पिता यह प्रमाणित कर सकता है कि एक विशेष महिला उसकी बेटी है, जिसे गांव, आधिकारिक गणक और पंचायत द्वारा अनुमोदित किया जाता है। ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय ने पंचायत प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया था। अपील पर, सुप्रीम कोर्ट ने सहमति व्यक्त की कि सत्यापन के साथ यह वैध दस्तावेज है। हालांकि, वर्तमान परिदृश्य में, कई मामले सामने आए हैं, जहां पंचायत प्रमाण पत्र अभी भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है। लोग मानते हैं कि यह न्याय का सकल गर्भपात है, जिससे एक निश्चित आधिकारिक पूर्वाग्रह और पक्षपात पूर्ण प्रदर्शन में है। एनआरसी सेवा केंद्र फिर से सत्यापन के लिए नोटिस भेज रहा है, लेकिन कई लोगों को नोटिस नहीं मिल रहे हैं। इसलिए सेवा केंद्र उन्हें अनुपस्थित कर रहे हैं, और मामले की स्थिति लंबित के रूप में उल्लेखनीय है। इस बात की आशंका है कि दूसरे एनआरसी मसौदे से लाखों लोगों को छोड़ दिया जा सकता है। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि जब उन्होंने कुछ लोगों की सहायता की और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की, तो कुछ मामलों को ठीक किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एनआरसी राज्य समन्वयक प्रतीक हाजेला, एक आईएएस अधिकारी है जो शीर्ष अदालत की देखरेख में काम कर रहा है। लोग मानते हैं कि उनका कार्य कठिन है, लेकिन वे तर्क देते हैं कि उन्हें निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए, और अधिकारियों और पुलिस द्वारा जमीन पर विसंगतियों और पूर्वाग्रह व्यवहार की जांच करना है, जो "पक्षपातपूर्ण एजेंडा" या "निहित हितों" द्वारा संचालित हैं, कथित रूप से सत्तारूढ़ शासन के साथ वफादारी के कारण । उन्होंने इशारा किया कि लोग अपील कर सकते हैं और प्रक्रिया निष्पक्ष होगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। झंडा मार्च और मोक अभ्यास किया गया है। कार्यकर्ता तर्क देते हैं कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है, तो सैन्य शक्ति का यह शो क्यों कर रही है? यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने न्यूज़क्लिक को बताया "यह लोकतांत्रिक असम के इतिहास में अभूतपूर्व है"। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनाव भाषणों में घोषित किया था कि सभी बांग्लादेशियों को निर्वासित किया जाना चाहिए। "तो वह ऐसा करने में क्यों विफल है?" उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारतीय नागरिक हैं - असम समझौते के अनुसार - उन्हें परेशान और उत्पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, एनआरसी, माइग्रेशन मुद्दे पर सबसे लोकतांत्रिक उत्पाद है और इस पर सभी समूहों मै सर्वसम्मति है। हर कोई इसमें विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि एनआरसी का स्वागत सभी समूहों और हितधारकों ने किया केवल अगर एनआरसी प्रक्रिया को काफी और सफलतापूर्वक किया जा सकता है, तो इससे बीजेपी / आरएसएस और मुस्लिम समूहों की पहचान की राजनीति का समाधान होगा। फिर विकास के मुद्दे फोकस में आ जाएगा। हालांकि, उत्पीड़न, भय और आघात के कई मामले सामने आए हैं। "अधिकारियों को पक्षपातपूर्ण और पूर्वाग्रहित पाया गया है। वे निर्दोष और सच्चे भारतीयों को परेशान कर रहे हैं। यदि इतने सारे लोग बांग्लादेश से आ रहे हैं, तो सीमा पुलिस क्या कर रही है? लोग इसे झूठ नहीं बोलेंगे। अगर उन्हें दीवार पर धक्का दिया जाता है, तो वे वापस लड़ेंगे, "उन्होंने कहा। एजीपी के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल महंता ने इस संवाददाता को यह भी बताया कि वह एनआरसी प्रक्रिया से सहमत हैं। "हालांकि, कुछ अधिकारियों ने गलतियां की हो सकती हैं," उन्होंने कहा। भूमि दस्तावेज (निपटान कार्यालय प्रमाण पत्र) अक्सर 100-150 साल पुराने होते हैं। राजस्व रिकॉर्ड स्थानांतरण / खोने आदि के साथ अक्सर उन्हें कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता है या साबित करना मुश्किल हो जाता है। मौसमी प्रवासियों को भी अपनी पहचान साबित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। बाढ़ से विस्थापित लोगों और अन्य प्रवासी श्रमिकों की इसी तरह की समस्याएं आ रही हैं। उनके अस्थायी पते का इस्तेमाल विदेशी घोषित करने के लिए किया जाता है। बारपेटा जिले के जयपुर गांव में, न्यूजक्लिक कम से कम तीन लोगों की पत्नियों से मिला जिन्हे 'डी-मतदाता' घोषित किया गया था। ये लोग बोंगाइगो में काम करते हैं, जिन पर 1990 के दशक में आतंकवादियों ने हमला किया था और वहां एक शरणार्थी कैंप में रहते थे। राजभाषा, मूल निवासियों और जनजातियों समेत बंगाली भाषी मुस्लिम और बंगाली हिंदुओं को कथित तौर पर 'डी-मतदाता' श्रेणी में कट ऑफ तारीख के रूप में 'डी-मतदाता' श्रेणी में लक्षित किया गया है। विदेशियों के रूप में 'डी-मतदाता' छह हिरासत शिविर हैं, जो अलग शिविर नहीं हैं, बल्कि जिला जेल का हिस्सा हैं। तेजपुर, सिलचर, जोरहाट, गोलपाड़ा, डिब्रूगढ़ और कोकराझार (केवल महिलाओं के लिए) में हिरासत शिविरों में लगभग 1,000 लोग हैं। कैदियों के पास कोई जेल अधिकार नहीं है; उन्हें विचाराधीन कैदियों के रूप में माना जाता है। गोलपाड़ा जिला जेल के सूत्रों के मुताबिक, हिरासत शिविर में 239 'विदेशी नागरिक' हैं - जिनमें से 195 'डी-वोटर' हैं। स्थानीय वकीलों का मानना है कि 'डी-मतदाता' को विदेशियों के रूप में घोषित करना, जिसका मामला अभी भी सत्यापित किया जा रहा है, "अवैध" है। इस प्रकार, यह हिरासत एक संवैधानिक उल्लंघन है। 60 वर्षीय हरि दास, जाति द्वारा राजबांशी, जो बारपेटा में बामनविता गांव से संबंधित था, का नाम मतदाताओं की सूची में था। उन्हें 1997 में 'डी-मतदाता' घोषित किया गया था। उन्हें इसके बारे में पता चलने के बाद उन्होंने अदालत से संपर्क किया, लेकिन अदालत ने उन्हें सूचित किया कि उन्हें नोटिस मिलने तक प्रतीक्षा करनी होगी। उनकी पत्नी को भी दो साल पहले विदेशी ट्रिब्यूनल से नोटिस मिला, मामले लड़े और अदालत के आदेश में उन्हें भारतीय के रूप में मान लिया। उनके तीसरे भाई रोशिक और बहन को भारतीय घोषित किया जाता है। दास की बेटी, 32 को भारतीय घोषित कर दिया गया है, लेकिन 18 साल की उम्र में उनके बेटे को नौ महीने पहले नोटिस मिला। मामला सुनवाई में है। विदेशियों का मुद्दा - चुनाव जीतने के एक राजनीतिक साधन? इस मुद्दे को बीजेपी के चुनाव घोषणापत्र और बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) में अब तक प्रमुखता मिली है। एआईयूडीएफ, मुसलमानों और बीजेपी हिंदुओं का समर्थन कर रही है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1983 में असम का दौरा किया, तो उन्होंने कहा था कि विदेश अधिनियम, 1946 अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर सकता है। इसलिए, 1983 में अवैध प्रवासियों (ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारण) (आईएमडीटी) अधिनियम, उसी वर्ष कांग्रेस सरकार द्वारा अधिनियमित, के तहत एफटी की स्थापना की गई थी। जब 1985-90 से एजीपी सत्ता में थीं, तो वे एक भी विदेशी का पता नहीं लगा सके। 1991 में यह फिर से सत्ता में आयी, यह आईएमडीटी अधिनियम, 1983 को निरस्त कर सकती थीं। बाद में 2005 में सरबानंद सोनोवाल बनाम संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे खत्म किया। इसके बाद, "अल्पसंख्यकों की रक्षा" करने के लिए कोई वैकल्पिक कार्य नहीं किया गया। राज्य में कार्यकर्ता और वकील मांग करते हैं कि असम के बाहर से उच्च न्यायालय के उन न्यायाधीशों को अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए एफटी सदस्योंके रुप मैं नियुक्त किया जाए। "कई मौजूदा नियुक्त पूर्व एएएसयू सदस्य हैं और पक्षपातपूर्ण हैं। मुख्य न्यायाधीश के बाद, उज्जल भुयान वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। रोस्टर घुमाया नहीं जाता है ताकि अन्य न्यायाधीशों को विदेशियों के मामले को सुनने का मौका मिले। वह शिविरों में सभी एसपी को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं और कहा है कि इन शिविरों में चर्चा किए गए मामलों का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान ये दिशानिर्देश दिए। यह न्यायाधीश के प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, "उन्होंने कहा। असम के एक प्रसिद्ध सामाजिक वैज्ञानिक प्रोफेसर हिरेन गोहेन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि एक विशेष दस्तावेज अवैध पाया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार उन्हें कथित विदेशी होने के नाम पर फेंक सकती है। "वे गरीब पुरुष और महिलाएं हैं, और भारत में, गरीब लोगों के पास आमतौर पर कोई दस्तावेज नहीं होता है। प्राकृतिक न्याय होना चाहिए और उन्हें अपने प्रमाण-पत्रों को साबित करने का मौका दिया जाना चाहिए, "उन्होंने कहा कि" गैर-नागरिकों को मवेशियों के समूह के रूप में पाया जाने वाले लोगों को अनजाने में अपमानजनक और असंभव है। तो, हम इसके लिए नहीं पूछ रहे हैं। नागरिकता उन लोगों तक सीमित होनी चाहिए जिनके पास वैध अधिकार है। गैर-नागरिक पाए गए लोग अभी भी राज्य के निवासी हो सकते हैं। यह दुनिया भर के कई समाजों में होता है; लोग रहते हैं और काम करने के लिए उन देशों में जाते हैं, कुछ अधिकार हैं। उन पर रूप से हमला नहीं किया जा सकता है, रोजगार मिल सकता है, आदि। यदि आवश्यक हो, तो उन पर वर्क परमिट जारी क्यों न करें? " स्थानीय चिंताओं से छुटकारा पाने के लिए, उन्होंने कहा कि असम समझौते के अनुसार 24 मार्च, 1971 तक नागरिकता सीमित होनी चाहिए। "मैं इसमें पूरी तरह से विश्वास करता हूं। इसके अलावा, एक बार हमारे पास एक अद्यतन एनआरसी है, मुझे उम्मीद और विश्वास है कि हमें राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले आप्रवासियों की सही संख्या मिल जाएगी। "कई हिंदू चतुरवादियों ने यह कहते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मुस्लिम राज्य में बहुमत में होंगे। यह सिद्धांत डर पर आधारित है। एक अद्यतन एनआरसी हमें सही संख्या बताएगा, और उस डर फैक्टर को संबोधित करेगा, "उन्होंने कहा। किसान नेता अखिल गोगोई ने बीजेपी और एआईयूडीएफ पर भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर नागरिकों के अद्यतन राष्ट्रीय रजिस्टर, 1951 में विदेशियों को शामिल करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया गया है। "जो लोग एनआरसी अपडेट को हटाना चाहते हैं, वे राज्य के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। अगर हमें विदेशियों के मुद्दे को हल करना है, तो एनआरसी अपडेट पूरा करना जरूरी है, जो असम की अधिकांश बीमारियों का स्रोत है। गुवाहाटी में एक साक्षात्कार में न्यूज़क्लिकिन को बताया, "न केवल एनआरसी अपडेट संवेदनशील विदेशियों के मुद्दे को हल करने में मदद करेगा, बल्कि राज्य में एक मजबूत हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।" "जो लोग इस प्रक्रिया का विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं वे किसी भी तरह से राज्य के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। हम ऐसी सेनाओं को चेतावनी देते हैं कि असम विरोधी गतिविधियों में शामिल न हों। भाजपा हिंदुओं का समर्थन कर रही है जबकि एआईयूडीएफ मुसलमानों का भले ही वे विदेशी हैं। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे, "गोगोई ने कहा। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
असम एक संकट के कगार पर है जो भारत के इस संवेदनशील और रणनीतिक पूर्वोत्तर राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुक्सान पहुँचा रहा है। असुरक्षा, अनिश्चितता और आघात लोगों के विभिन्न वर्गों में बड़े पैमाने पर बढ़ रहा हैं, ज़्यादातर गरीब और वंचितों के बीच। संकट दो मुद्दों के आसपास केंद्रित हैः नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर और नागरिकता विधेयक, जिसे पंद्रह जुलाई, दो हज़ार सोलह को संसद में प्रस्तुत किया गया था। एनआरसी अद्यतन कार्य - जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यवेक्षित किया जा रहा है - दो हज़ार पंद्रह में शुरू हुआ था। चौबीस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के मध्यरात्रि - कट ऑफ तारीख से पहले भारत में पंजीकृत सभी नागरिक - वैध भारतीय नागरिक हैं। इस कट ऑफ तारीख के बाद असम में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों को कानूनी तौर पर 'विदेशी' घोषित किया जाएगा। एक हज़ार नौ सौ पचासी में तत्कालीन राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार, राज्य सरकार और अखिल असम छात्र संघ के बीच त्रिपक्षीय असम समझौते के तहत कटऑफ तिथि तय की गई थी। हालांकि, नागरिक समाज के भीतर व्यापक धारणा के अनुसार रिकॉर्ड-सत्यापन की प्रक्रिया निष्पक्ष और उद्देश्य के रूप में देखी गई थी, बीजेपी ने अप्रैल दो हज़ार सोलह में विधानसभा चुनाव जीते जाने के बाद से ये समस्याएं उत्पन्न हुईं। नई सरकार ने काम को तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन यह भी सही है कि - कथित रूप से - प्रक्रिया के साथ झुकाव खिलवाड़ शुरू कर दिया, यह एक अवांछित खिलवाड़ कई गरीब लोगों के लिए कठिनाइयों का निर्माण कर रहा है। पक्षपात और मध्यस्थता के आरोप ने असम को पीड़ित करना शुरू कर दिया। यह एक विशाल, जटिल और कठिन प्रक्रिया है। अनौपचारिक अनुमानों का दावा है कि पैंतीस लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसमें शामिल हो सकते हैं। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, एक.पच्चीस लाख मतदाताओं को 'संदिग्ध मतदाता' माना गया है - जिसे 'डी-मतदाता' भी कहा जाता है। एनआरसी ने इकतीस दिसंबर, दो हज़ार सोलह को अपनी पहली रिपोर्ट जारी की, जिसमें एक.नौ करोड़ को तीन.उनतीस करोड़ आवेदकों में से 'भारतीय नागरिक' घोषित किया गया था। दूसरी और अंतिम रिपोर्ट को तीस जून को रिलीज किया जाना था, लेकिन अधिकारियों द्वारा बताए गए बाढ़ के कारण के लिये इसे तीस जुलाई तक स्थगित कर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, बीजेपी द्वारा समर्थित नागरिकता विधेयक को कम करता है। यह बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, जो सिख, पारसी, बौद्ध, जैन, या ईसाई मूल के हैं, से अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना चाहता है। मुस्लिम, या इसके विभिन्न संप्रदायों और समुदायों को इस विधेयक में शामिल नहीं किया गया है, वैसे ही जैसे शिया और अखिमीया जैसे समुदाय पाकिस्तान में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी के सहयोगी, आल असम असम छात्र संघ और इसके राजनीतिक मोर्चा, असम गण परिषद ने इसका जोरदार विरोध किया है। एनआरसी दोनों भाजपा और एजीपी द्वारा समर्थित है। आसु के संस्थापक अध्यक्ष प्रफुल्ल महंत, जो दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं, ने उनतीस जून को गुवाहाटी में एक साक्षात्कार में न्यूजक्लिकिन को बताया, "यदि भाजपा इस नागरिकता संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाएगी तो एजीपी बीजेपी के साथ गठबंधन को तोड़ देगा।" असम सीमा पुलिस और सौ विदेशियों के ट्रिब्यूनल के स्कैनर के तहत हजारों लोग आते हैं। उन्हें अपनी भारतीय पहचान साबित करने के लिए सोलह वैध दस्तावेजों की आपूर्ति करनी है। अगर वे अपील करना चाहते हैं, तो उन्हें न्यायमूर्ति उज्जल भुया के नेतृत्व में गोहाटी उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीशीय विभागीय खंडपीठ से संपर्क करना होगा। अधिकांश, इससे खासकर गरीब गांवों और अंदरूनी इलाकों में गरीब और अशिक्षित का जीवन सीधे तौर पर प्रभावित हैं, वे इस पूरे अभ्यास को मुश्किल पाते हैं। यदि उच्च न्यायालय की बेंच उनकी अपील को खारिज कर देती है, तो उन्हें ट्रिब्यूनल में वापस जाना होगा। यदि अंतिम अपील में उनकी अपील को खारिज कर दिया जाता है, तो उन्हें 'विदेशी' घोषित किया जाता है और जेल में भेज दिया जाता है - जो हिरासत केंद्रों के रूप में कार्य करता है। असम के छः 'डिटेन्शन सेंटर' में, उनके पास कोई जेल अधिकार नहीं है, और उन्हें 'दोषी' के रूप में माना जाता है। उनकी 'विदेशियों' के रूप में निंदा की जाती है, भले ही संदिग्ध मतदाता अपने दस्तावेजों में तकनीकी या आधिकारिक विसंगतियों के कारण वैध रूप से जांच के अधीन हैं। स्थानीय वकील इन हिरासतों को "अवैध" कहते हैं। सबसे अधिक प्रभावित बंगाली भाषी हिंदु और मुस्लिम हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि एनआरसी प्रक्रिया सीधे धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रही है। भारत के बाकी हिस्सों में, कार्यकर्ताओं के अनुसार, एनआरसी नागरिकता नियम, दो हज़ार तीन के नियम चार द्वारा शासित है। एनआरसी कर्मचारियों को नागरिकता दस्तावेजों और साक्ष्य को सत्यापित करने के लिए घर-घर जाना पड़ता है। नियम चार ए के तहत, जो असम के लिए विशिष्ट है, प्रत्येक क्षेत्र में, एनआरसी सेवा केंद्र स्थापित किए जाते हैं जहां निवासियों को एक फॉर्म लेना होता है, इसे भरना और दस्तावेजों के साथ जमा करना होता है। इसकी जिम्मेदारी उन लोगों पर है जो अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 'संदिग्ध' आदि हैं। डी-मतदाता कौन हैं? सीमा पुलिस एक हज़ार नौ सौ बासठ से काम कर रही है और एफटी एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में अस्तित्व में आई थी। निगरानी के दौरान, यदि सीमा पुलिस किसी की नागरिकता को संदिग्ध पाती है, तो वह व्यक्ति को आरोपपत्र भेजती है और मामले को एसपी से संबंधित करती है, जो इस मामले को संदर्भित करती है एफटी और ट्रिब्यूनल फिर व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बुलाता है। विदेश अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियालीस के तहत, असम पुलिस और असम सीमा पुलिस के पास उनके पुलिस क्षेत्राधिकार के तहत जमीन रिपोर्ट को सत्यापित करने की ज़िम्मेदारी है। संदेह के आधार पर वे एक मामला दर्ज कर सकते हैं, फिर एफटी नोटिस भेजता है। ऐसे आरोप हैं कि अधिकारी बिना किसी जांच के लोगों को 'संदिग्ध' घोषित करने के लिए पुलिस स्टेशनों में बैठे चुनावी रोल से नाम चुनते हैं। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक - कथित स्थानीय स्तर पर - "दोष मढना" और उन्हे "लक्षित" करना शामिल हैं। ऐसे अन्य तरीके भी हैं जिनमें लोग एफटी के पास जाने से पहले ही निबटाये जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने एक नौ सौ सत्तानवे में 'डी-मतदाता' श्रेणी की शुरुआत की थीं। चुनावी रोल के संशोधन के दौरान, ईसी-नियुक्त एलवीओ एक व्यक्ति को संदिग्ध घोषित कर सकते हैं। उनकी रिपोर्ट ईआरओ को जाती है, जो इसे संबंधित एसपी को भेजती है, जो मामला एफटी को संदर्भित करता है और ट्रिब्यूनल 'संदिग्ध' नागरिक को नोटिस देता है। नागरिक समाज कार्यकर्ताओं के अनुसार, 'डी-मतदाता' की अवधारणा केवल असम में है। इससे पहले, यह शिकायतकर्ता थी जिसे खुद सबूत इकट्ठे करने होते थें, लेकिन अब सबूत का बोझ आरोपी पर स्थानांतरित हो गया है। गणक कथित रूप से गांव के प्रधान के घर जाते हैं और सभी नाम लेते हैं, इसलिए कुछ विसंगतियां होती हैं। इसके अलावा, वे खातून , बेगम और बेवा जैसे उपनामों के बीच अंतर को नहीं समझते हैं। महिलाओं के उपनाम बदलते रहते हैं - सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में - उनकी वैवाहिक स्थिति के आधार पर। यह आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम विसंगतियों की ओर जाता है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की तैयारी के दौरान, व्यक्ति कागजी कार्य प्रदान करने में सक्षम नहीं होने के बारे में एक रिपोर्ट बनाई जाती है। यह भी एसपी के माध्यम से होता है, और व्यक्ति एफटी से पहले समाप्त होता है, जो संबंधित व्यक्ति को नोटिस देता है। एफटी ने पारिवारिक वृक्ष इतिहास मैपिंग की आवश्यकता को जोड़ा है। पहले सोलह दस्तावेजों को पहले स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन अब, कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पारिवारिक वृक्ष विरासत एक अतिरिक्त बोझ है। विदेशी अधिनियम एक हज़ार नौ सौ छियालीस के अनुसार 'विदेशियों' की रोकथाम एफटी द्वारा की जाती है । कचर जिले के तारापुर गांव में एक रिपोर्ट किया गया मामला था, जिसमें एक विवाहित महिला की मृत्यु उन्नीस बयासी में बत्तीस-तैंतीस साल की उम्र में हुई थी। सीमा पुलिस ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में जांच की और एक हज़ार नौ सौ छियानवे में कहा कि वह एक विदेशी है। जांच से दो साल पहले उनकी मृत्यु हो गई थी और उनकी मृत्यु के चार साल बाद उसे विदेशी घोषित किया गया था। दुखद बेतुकापन पर खड़े इसी तरह के मामले ग्रामीण परिदृश्य में अकसर मिलते हैं। गुवाहाटी में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक विदेशियों ट्रिब्यूनल न्यायाधीश केवल राय दे सकते हैं। वे एक निर्णय नहीं दे सकते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई मामलों में, इस सिद्धांत को उलटा जा रहा है। नलबारी जिले में, उच्च न्यायालय की विभागीय खंडपीठ ने चौरासी मामलों को ट्रिब्यूनल को समीक्षा के लिए भेजा, कार्यकर्ताओं के मुताबिक। चाय बागान मजदूरों, कुछ जनजातियों, या बंगाल / बिहार / झारखंड के लोग, असमिया मूल के अन्य लोगों को एनआरसी मसौदे में शामिल नहीं किया गया था। उनकी 'नागरिकता' बरकरार है। कई स्थानीय लोगों के पास विभिन्न कारणों से वैध दस्तावेज नहीं हैंः भौगोलिक स्थिति में बदलाव, गांवों का क्षरण, बाढ़, चोरी, समय के नुकसान आदि। कई महिलाओं के जन्म / विद्यालय / चुनावी प्रमाण / प्रमाण पत्र नहीं होते हैं, खासकर जब वे विवाह के बाद अन्य गांवों में चली जाती हैं। हालांकि, उनके परिवारों के पास प्रामाणिक दस्तावेज हो सकते हैं। इसलिए, वे पंचायत प्रमाणपत्रों पर भरोसा करते हैं, जिनमें मजिस्ट्रेट की शक्तियां होती हैं। यह परिवार के पेड़, बुजुर्गों, पड़ोसियों और पंचायत द्वारा स्थानीय साक्ष्य के साक्ष्य पर आधारित हो सकता है। मिसाल के तौर पर, एक पिता यह प्रमाणित कर सकता है कि एक विशेष महिला उसकी बेटी है, जिसे गांव, आधिकारिक गणक और पंचायत द्वारा अनुमोदित किया जाता है। ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय ने पंचायत प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया था। अपील पर, सुप्रीम कोर्ट ने सहमति व्यक्त की कि सत्यापन के साथ यह वैध दस्तावेज है। हालांकि, वर्तमान परिदृश्य में, कई मामले सामने आए हैं, जहां पंचायत प्रमाण पत्र अभी भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है। लोग मानते हैं कि यह न्याय का सकल गर्भपात है, जिससे एक निश्चित आधिकारिक पूर्वाग्रह और पक्षपात पूर्ण प्रदर्शन में है। एनआरसी सेवा केंद्र फिर से सत्यापन के लिए नोटिस भेज रहा है, लेकिन कई लोगों को नोटिस नहीं मिल रहे हैं। इसलिए सेवा केंद्र उन्हें अनुपस्थित कर रहे हैं, और मामले की स्थिति लंबित के रूप में उल्लेखनीय है। इस बात की आशंका है कि दूसरे एनआरसी मसौदे से लाखों लोगों को छोड़ दिया जा सकता है। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि जब उन्होंने कुछ लोगों की सहायता की और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की, तो कुछ मामलों को ठीक किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एनआरसी राज्य समन्वयक प्रतीक हाजेला, एक आईएएस अधिकारी है जो शीर्ष अदालत की देखरेख में काम कर रहा है। लोग मानते हैं कि उनका कार्य कठिन है, लेकिन वे तर्क देते हैं कि उन्हें निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए, और अधिकारियों और पुलिस द्वारा जमीन पर विसंगतियों और पूर्वाग्रह व्यवहार की जांच करना है, जो "पक्षपातपूर्ण एजेंडा" या "निहित हितों" द्वारा संचालित हैं, कथित रूप से सत्तारूढ़ शासन के साथ वफादारी के कारण । उन्होंने इशारा किया कि लोग अपील कर सकते हैं और प्रक्रिया निष्पक्ष होगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। झंडा मार्च और मोक अभ्यास किया गया है। कार्यकर्ता तर्क देते हैं कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है, तो सैन्य शक्ति का यह शो क्यों कर रही है? यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने न्यूज़क्लिक को बताया "यह लोकतांत्रिक असम के इतिहास में अभूतपूर्व है"। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनाव भाषणों में घोषित किया था कि सभी बांग्लादेशियों को निर्वासित किया जाना चाहिए। "तो वह ऐसा करने में क्यों विफल है?" उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारतीय नागरिक हैं - असम समझौते के अनुसार - उन्हें परेशान और उत्पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, एनआरसी, माइग्रेशन मुद्दे पर सबसे लोकतांत्रिक उत्पाद है और इस पर सभी समूहों मै सर्वसम्मति है। हर कोई इसमें विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि एनआरसी का स्वागत सभी समूहों और हितधारकों ने किया केवल अगर एनआरसी प्रक्रिया को काफी और सफलतापूर्वक किया जा सकता है, तो इससे बीजेपी / आरएसएस और मुस्लिम समूहों की पहचान की राजनीति का समाधान होगा। फिर विकास के मुद्दे फोकस में आ जाएगा। हालांकि, उत्पीड़न, भय और आघात के कई मामले सामने आए हैं। "अधिकारियों को पक्षपातपूर्ण और पूर्वाग्रहित पाया गया है। वे निर्दोष और सच्चे भारतीयों को परेशान कर रहे हैं। यदि इतने सारे लोग बांग्लादेश से आ रहे हैं, तो सीमा पुलिस क्या कर रही है? लोग इसे झूठ नहीं बोलेंगे। अगर उन्हें दीवार पर धक्का दिया जाता है, तो वे वापस लड़ेंगे, "उन्होंने कहा। एजीपी के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल महंता ने इस संवाददाता को यह भी बताया कि वह एनआरसी प्रक्रिया से सहमत हैं। "हालांकि, कुछ अधिकारियों ने गलतियां की हो सकती हैं," उन्होंने कहा। भूमि दस्तावेज अक्सर एक सौ-एक सौ पचास साल पुराने होते हैं। राजस्व रिकॉर्ड स्थानांतरण / खोने आदि के साथ अक्सर उन्हें कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता है या साबित करना मुश्किल हो जाता है। मौसमी प्रवासियों को भी अपनी पहचान साबित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। बाढ़ से विस्थापित लोगों और अन्य प्रवासी श्रमिकों की इसी तरह की समस्याएं आ रही हैं। उनके अस्थायी पते का इस्तेमाल विदेशी घोषित करने के लिए किया जाता है। बारपेटा जिले के जयपुर गांव में, न्यूजक्लिक कम से कम तीन लोगों की पत्नियों से मिला जिन्हे 'डी-मतदाता' घोषित किया गया था। ये लोग बोंगाइगो में काम करते हैं, जिन पर एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में आतंकवादियों ने हमला किया था और वहां एक शरणार्थी कैंप में रहते थे। राजभाषा, मूल निवासियों और जनजातियों समेत बंगाली भाषी मुस्लिम और बंगाली हिंदुओं को कथित तौर पर 'डी-मतदाता' श्रेणी में कट ऑफ तारीख के रूप में 'डी-मतदाता' श्रेणी में लक्षित किया गया है। विदेशियों के रूप में 'डी-मतदाता' छह हिरासत शिविर हैं, जो अलग शिविर नहीं हैं, बल्कि जिला जेल का हिस्सा हैं। तेजपुर, सिलचर, जोरहाट, गोलपाड़ा, डिब्रूगढ़ और कोकराझार में हिरासत शिविरों में लगभग एक,शून्य लोग हैं। कैदियों के पास कोई जेल अधिकार नहीं है; उन्हें विचाराधीन कैदियों के रूप में माना जाता है। गोलपाड़ा जिला जेल के सूत्रों के मुताबिक, हिरासत शिविर में दो सौ उनतालीस 'विदेशी नागरिक' हैं - जिनमें से एक सौ पचानवे 'डी-वोटर' हैं। स्थानीय वकीलों का मानना है कि 'डी-मतदाता' को विदेशियों के रूप में घोषित करना, जिसका मामला अभी भी सत्यापित किया जा रहा है, "अवैध" है। इस प्रकार, यह हिरासत एक संवैधानिक उल्लंघन है। साठ वर्षीय हरि दास, जाति द्वारा राजबांशी, जो बारपेटा में बामनविता गांव से संबंधित था, का नाम मतदाताओं की सूची में था। उन्हें एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में 'डी-मतदाता' घोषित किया गया था। उन्हें इसके बारे में पता चलने के बाद उन्होंने अदालत से संपर्क किया, लेकिन अदालत ने उन्हें सूचित किया कि उन्हें नोटिस मिलने तक प्रतीक्षा करनी होगी। उनकी पत्नी को भी दो साल पहले विदेशी ट्रिब्यूनल से नोटिस मिला, मामले लड़े और अदालत के आदेश में उन्हें भारतीय के रूप में मान लिया। उनके तीसरे भाई रोशिक और बहन को भारतीय घोषित किया जाता है। दास की बेटी, बत्तीस को भारतीय घोषित कर दिया गया है, लेकिन अट्ठारह साल की उम्र में उनके बेटे को नौ महीने पहले नोटिस मिला। मामला सुनवाई में है। विदेशियों का मुद्दा - चुनाव जीतने के एक राजनीतिक साधन? इस मुद्दे को बीजेपी के चुनाव घोषणापत्र और बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में अब तक प्रमुखता मिली है। एआईयूडीएफ, मुसलमानों और बीजेपी हिंदुओं का समर्थन कर रही है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक हज़ार नौ सौ तिरासी में असम का दौरा किया, तो उन्होंने कहा था कि विदेश अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छियालीस अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर सकता है। इसलिए, एक हज़ार नौ सौ तिरासी में अवैध प्रवासियों अधिनियम, उसी वर्ष कांग्रेस सरकार द्वारा अधिनियमित, के तहत एफटी की स्थापना की गई थी। जब एक हज़ार नौ सौ पचासी-नब्बे से एजीपी सत्ता में थीं, तो वे एक भी विदेशी का पता नहीं लगा सके। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में यह फिर से सत्ता में आयी, यह आईएमडीटी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ तिरासी को निरस्त कर सकती थीं। बाद में दो हज़ार पाँच में सरबानंद सोनोवाल बनाम संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे खत्म किया। इसके बाद, "अल्पसंख्यकों की रक्षा" करने के लिए कोई वैकल्पिक कार्य नहीं किया गया। राज्य में कार्यकर्ता और वकील मांग करते हैं कि असम के बाहर से उच्च न्यायालय के उन न्यायाधीशों को अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए एफटी सदस्योंके रुप मैं नियुक्त किया जाए। "कई मौजूदा नियुक्त पूर्व एएएसयू सदस्य हैं और पक्षपातपूर्ण हैं। मुख्य न्यायाधीश के बाद, उज्जल भुयान वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। रोस्टर घुमाया नहीं जाता है ताकि अन्य न्यायाधीशों को विदेशियों के मामले को सुनने का मौका मिले। वह शिविरों में सभी एसपी को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं और कहा है कि इन शिविरों में चर्चा किए गए मामलों का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान ये दिशानिर्देश दिए। यह न्यायाधीश के प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, "उन्होंने कहा। असम के एक प्रसिद्ध सामाजिक वैज्ञानिक प्रोफेसर हिरेन गोहेन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि एक विशेष दस्तावेज अवैध पाया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार उन्हें कथित विदेशी होने के नाम पर फेंक सकती है। "वे गरीब पुरुष और महिलाएं हैं, और भारत में, गरीब लोगों के पास आमतौर पर कोई दस्तावेज नहीं होता है। प्राकृतिक न्याय होना चाहिए और उन्हें अपने प्रमाण-पत्रों को साबित करने का मौका दिया जाना चाहिए, "उन्होंने कहा कि" गैर-नागरिकों को मवेशियों के समूह के रूप में पाया जाने वाले लोगों को अनजाने में अपमानजनक और असंभव है। तो, हम इसके लिए नहीं पूछ रहे हैं। नागरिकता उन लोगों तक सीमित होनी चाहिए जिनके पास वैध अधिकार है। गैर-नागरिक पाए गए लोग अभी भी राज्य के निवासी हो सकते हैं। यह दुनिया भर के कई समाजों में होता है; लोग रहते हैं और काम करने के लिए उन देशों में जाते हैं, कुछ अधिकार हैं। उन पर रूप से हमला नहीं किया जा सकता है, रोजगार मिल सकता है, आदि। यदि आवश्यक हो, तो उन पर वर्क परमिट जारी क्यों न करें? " स्थानीय चिंताओं से छुटकारा पाने के लिए, उन्होंने कहा कि असम समझौते के अनुसार चौबीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर तक नागरिकता सीमित होनी चाहिए। "मैं इसमें पूरी तरह से विश्वास करता हूं। इसके अलावा, एक बार हमारे पास एक अद्यतन एनआरसी है, मुझे उम्मीद और विश्वास है कि हमें राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले आप्रवासियों की सही संख्या मिल जाएगी। "कई हिंदू चतुरवादियों ने यह कहते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मुस्लिम राज्य में बहुमत में होंगे। यह सिद्धांत डर पर आधारित है। एक अद्यतन एनआरसी हमें सही संख्या बताएगा, और उस डर फैक्टर को संबोधित करेगा, "उन्होंने कहा। किसान नेता अखिल गोगोई ने बीजेपी और एआईयूडीएफ पर भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर नागरिकों के अद्यतन राष्ट्रीय रजिस्टर, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में विदेशियों को शामिल करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया गया है। "जो लोग एनआरसी अपडेट को हटाना चाहते हैं, वे राज्य के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। अगर हमें विदेशियों के मुद्दे को हल करना है, तो एनआरसी अपडेट पूरा करना जरूरी है, जो असम की अधिकांश बीमारियों का स्रोत है। गुवाहाटी में एक साक्षात्कार में न्यूज़क्लिकिन को बताया, "न केवल एनआरसी अपडेट संवेदनशील विदेशियों के मुद्दे को हल करने में मदद करेगा, बल्कि राज्य में एक मजबूत हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।" "जो लोग इस प्रक्रिया का विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं वे किसी भी तरह से राज्य के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। हम ऐसी सेनाओं को चेतावनी देते हैं कि असम विरोधी गतिविधियों में शामिल न हों। भाजपा हिंदुओं का समर्थन कर रही है जबकि एआईयूडीएफ मुसलमानों का भले ही वे विदेशी हैं। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे, "गोगोई ने कहा। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रानिक्स कंप्यूटर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। सरस्वती कुंज स्थित आवास में मंगलवार रात को उनका शव पड़ा मिला। उनके गले और हाथ की नस कटी हुई थी। प्रोफेसर की पुत्री की ओर से इस संबंध में हत्या की तहरीर दी गई है। आईआईटी के इलेक्ट्रानिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अरुण कुमार आईआईटी परिसर के सरस्वती कुंज स्थित आवास में अकेले रहते थे। मंगलवार की रात को करीब पौने आठ बजे उनके घर पहुंची नौकरानी घर ने के अंदर से धुआं निकलता देखा। अंदर जाने पर देखा तो प्रोफेसर के बिस्तर पर आग लगी थी। जिसके बाद उसने पानी डालकर आग बुझाई। इसी बीच उसकी नजर खून पर गई तो वह घबरा गई। प्रोफेसर को रक्त रंजित हालत में देख उसने शोर मचा दिया। जिसके बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए और पुलिस को भी सूचना दी। करीब साढ़े आठ बजे पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव का निरीक्षण किया तो प्रोफेसर के गले और दांये हाथ की नश सर्जिकल ब्लेड से कटी हुई मिली। जबकि उनकी पीठ का काफी हिस्सा जला हुआ मिला। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रोफेसर अपने आवास पर अकेले रहते थे। उनकी दो पत्नियों की पहले ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जसबीर पुंडीर ने बताया कि मृतक प्रोफेसर की पुत्री गीतिका की ओर से पिता की अज्ञात व्यक्ति द्वारा गला और नश काटकर हत्या करने की तहरीर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रानिक्स कंप्यूटर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। सरस्वती कुंज स्थित आवास में मंगलवार रात को उनका शव पड़ा मिला। उनके गले और हाथ की नस कटी हुई थी। प्रोफेसर की पुत्री की ओर से इस संबंध में हत्या की तहरीर दी गई है। आईआईटी के इलेक्ट्रानिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अरुण कुमार आईआईटी परिसर के सरस्वती कुंज स्थित आवास में अकेले रहते थे। मंगलवार की रात को करीब पौने आठ बजे उनके घर पहुंची नौकरानी घर ने के अंदर से धुआं निकलता देखा। अंदर जाने पर देखा तो प्रोफेसर के बिस्तर पर आग लगी थी। जिसके बाद उसने पानी डालकर आग बुझाई। इसी बीच उसकी नजर खून पर गई तो वह घबरा गई। प्रोफेसर को रक्त रंजित हालत में देख उसने शोर मचा दिया। जिसके बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए और पुलिस को भी सूचना दी। करीब साढ़े आठ बजे पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव का निरीक्षण किया तो प्रोफेसर के गले और दांये हाथ की नश सर्जिकल ब्लेड से कटी हुई मिली। जबकि उनकी पीठ का काफी हिस्सा जला हुआ मिला। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रोफेसर अपने आवास पर अकेले रहते थे। उनकी दो पत्नियों की पहले ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जसबीर पुंडीर ने बताया कि मृतक प्रोफेसर की पुत्री गीतिका की ओर से पिता की अज्ञात व्यक्ति द्वारा गला और नश काटकर हत्या करने की तहरीर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
लॉन्च से पहले ही हाल ही में Honor 9X का रीटेल बॉक्स का खुलासा हो चुका है। आधिकारिक लॉन्च से पहले ही Honor 9X रिटेल बॉक्स की तस्वीरें आधिकारिक तौर पर शेयर की गयीं हैं। Honor 9X के रीटेल बॉक्स की इन तस्वीरों की बात करें तो रिटेल बॉक्स "मल्टी-कलर डिज़ाइन" और "व्हाइट टॉप पैनल" के साथ देखा जा सकता है। बॉक्स पर आपको ब्लू और पर्पल कलर के मिक्स शेड दिखेंगे। साथ ही Honor की ब्रांडिंग भी दी गयी है। इससे उम्मीद यह लगाई जा रही है कि Honor 9X स्मार्टफोन ग्रेडिएंट फिनिश के साथ आ सकता है। आपको बता दें कि हाल ही में इससे पहले हॉनर ने इस बात की पुष्टि की थी कि कंपनी 23 जुलाई को अपने नए Honor 9X स्मार्टफोन को लॉन्च करेगी। अब अगर स्पेक्स की बात करें तो Honor 9X ऑक्टा-कोर हाईसिलिकॉन किरिन 810 प्रोसेसर के साथ आ सकता है। Honor ब्रांड के इस फोन में पॉप-अप सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है। Honor 9X में 3,750 एमएएच की बैटरी भी हो सकती है जो 10 वॉट के चार्जर के साथ यूज़र्स को उपलब्ध कराई जा सकती है। ये रीटेल बॉक्स को Weibo पर Honor के वाइस प्रेसिडेंट ने शेयर किया है। ऐसे ही 2018 में भी Honor 8X को ड्यूल-टोन डिज़ाइन के साथ कंपनी ने पेश किया था, जिसके बैक पैनल पर visual gradient effect थी। हॉनर ने इस हफ्ते के शुरुआत में पुष्टि की थी कि कंपनी चीन में हॉनर 9X को 23 जुलाई को लॉन्च करेगी। हाल ही में वीबो पोस्ट से पता चला था कि Honor 9X हाईसिलिकॉन किरिन 810 प्रोसेसर से लैस होगा जो 7nm प्रोसेसर पर बेस्ड है। गौर करने वाली बात यह है कि हुवावे ने पिछले महीने Nova 5 स्मार्टफोन को लॉन्च किया था। हुवावे नोवा 5 पहला ऐसा स्मार्टफोन था जिसे हाईसिलिकॉन किरिन 810 प्रोसेसर के साथ उतारा गया था। ऐसे ही लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक Honor 9X में पॉप-अप सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है। साथ ही फोन के पिछले हिस्से पर ड्यूल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है। डिवाइस में 6.5 या 6.7 इंच का LCD पैनल भी होने की उम्मीद की जा रही है। नोटः डिजिट हिंदी को अब Instagram और Tiktok पर फॉलो करें।
लॉन्च से पहले ही हाल ही में Honor नौX का रीटेल बॉक्स का खुलासा हो चुका है। आधिकारिक लॉन्च से पहले ही Honor नौX रिटेल बॉक्स की तस्वीरें आधिकारिक तौर पर शेयर की गयीं हैं। Honor नौX के रीटेल बॉक्स की इन तस्वीरों की बात करें तो रिटेल बॉक्स "मल्टी-कलर डिज़ाइन" और "व्हाइट टॉप पैनल" के साथ देखा जा सकता है। बॉक्स पर आपको ब्लू और पर्पल कलर के मिक्स शेड दिखेंगे। साथ ही Honor की ब्रांडिंग भी दी गयी है। इससे उम्मीद यह लगाई जा रही है कि Honor नौX स्मार्टफोन ग्रेडिएंट फिनिश के साथ आ सकता है। आपको बता दें कि हाल ही में इससे पहले हॉनर ने इस बात की पुष्टि की थी कि कंपनी तेईस जुलाई को अपने नए Honor नौX स्मार्टफोन को लॉन्च करेगी। अब अगर स्पेक्स की बात करें तो Honor नौX ऑक्टा-कोर हाईसिलिकॉन किरिन आठ सौ दस प्रोसेसर के साथ आ सकता है। Honor ब्रांड के इस फोन में पॉप-अप सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है। Honor नौX में तीन,सात सौ पचास एमएएच की बैटरी भी हो सकती है जो दस वॉट के चार्जर के साथ यूज़र्स को उपलब्ध कराई जा सकती है। ये रीटेल बॉक्स को Weibo पर Honor के वाइस प्रेसिडेंट ने शेयर किया है। ऐसे ही दो हज़ार अट्ठारह में भी Honor आठX को ड्यूल-टोन डिज़ाइन के साथ कंपनी ने पेश किया था, जिसके बैक पैनल पर visual gradient effect थी। हॉनर ने इस हफ्ते के शुरुआत में पुष्टि की थी कि कंपनी चीन में हॉनर नौX को तेईस जुलाई को लॉन्च करेगी। हाल ही में वीबो पोस्ट से पता चला था कि Honor नौX हाईसिलिकॉन किरिन आठ सौ दस प्रोसेसर से लैस होगा जो सातnm प्रोसेसर पर बेस्ड है। गौर करने वाली बात यह है कि हुवावे ने पिछले महीने Nova पाँच स्मार्टफोन को लॉन्च किया था। हुवावे नोवा पाँच पहला ऐसा स्मार्टफोन था जिसे हाईसिलिकॉन किरिन आठ सौ दस प्रोसेसर के साथ उतारा गया था। ऐसे ही लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक Honor नौX में पॉप-अप सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है। साथ ही फोन के पिछले हिस्से पर ड्यूल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है। डिवाइस में छः.पाँच या छः.सात इंच का LCD पैनल भी होने की उम्मीद की जा रही है। नोटः डिजिट हिंदी को अब Instagram और Tiktok पर फॉलो करें।
इरोड वेंकट नायकर रामासामी जिन्हे पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता था, बीसवीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता थे। इन्होंने जस्टिस पार्टी का गठन किया जिसका सिद्धान्त रुढ़िवादी हिन्दुत्व का विरोध था। भारतीय तथा विशेषकर दक्षिण भारतीय समाज के शोषित वर्ग के लोगों की स्थिति सुधारने में इनका नाम शीर्षस्थ है। ई. वी. रामासामी तमिल राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। द्रविड़ आन्दोलन को शुरू करने का श्रेय इन्हीं को जाता है। इनके समर्थक इन्हें पेरियार संबोधन से संबोधित करते थे। इन्होंने सामाजिक समानता पर बल दिया, मनुस्मृति को जलाया तथा ब्राह्मणों के बिना विवाह करवाए। इन्होंने 'कुदी अरासु' नामक ग्रंथ लिखा। 1930 ई. में ईश्वर विरोधी समिति के निमंत्रण पर वे रूस गए तथा लौटने के बाद वे काँग्रेस से अलग हो गए एवं द्रविड़ मुनेत्र कडगम की स्थापना की। ई. वी. रामासामी का मत था कि "ईश्वर को धूर्तों ने बनाया, गुंडों ने चलाया और मूर्ख उसे पूजते हैं" पेरियार की मात्रभाषा कन्नड़ थी, लेकिन तमिल और तेलुगु पर भी उन्हें खासा अधिकार था। बचपन से ही वे अपने परिवार में वैष्णव संतों के उपदेश और प्रवचन सुनते आये थे, और धर्म के आधार पर होने वाले शोषण और भेदभाव के मूल कारणों को उन धार्मिक सिद्धांतों में उन्होंने बहुत पहले ही ढूंढ निकाला था। पेरियार बहुत ही तार्किक थे वे हर धार्मिक उपदेश पर तर्क के द्वारा प्रहार कर उसे खंडित करते। पेरियार जीवन भर सामाजिक और धार्मिक बुराइयों के खिलाफ लड़ते रहे।
इरोड वेंकट नायकर रामासामी जिन्हे पेरियार नाम से भी जाना जाता था, बीसवीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता थे। इन्होंने जस्टिस पार्टी का गठन किया जिसका सिद्धान्त रुढ़िवादी हिन्दुत्व का विरोध था। भारतीय तथा विशेषकर दक्षिण भारतीय समाज के शोषित वर्ग के लोगों की स्थिति सुधारने में इनका नाम शीर्षस्थ है। ई. वी. रामासामी तमिल राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। द्रविड़ आन्दोलन को शुरू करने का श्रेय इन्हीं को जाता है। इनके समर्थक इन्हें पेरियार संबोधन से संबोधित करते थे। इन्होंने सामाजिक समानता पर बल दिया, मनुस्मृति को जलाया तथा ब्राह्मणों के बिना विवाह करवाए। इन्होंने 'कुदी अरासु' नामक ग्रंथ लिखा। एक हज़ार नौ सौ तीस ई. में ईश्वर विरोधी समिति के निमंत्रण पर वे रूस गए तथा लौटने के बाद वे काँग्रेस से अलग हो गए एवं द्रविड़ मुनेत्र कडगम की स्थापना की। ई. वी. रामासामी का मत था कि "ईश्वर को धूर्तों ने बनाया, गुंडों ने चलाया और मूर्ख उसे पूजते हैं" पेरियार की मात्रभाषा कन्नड़ थी, लेकिन तमिल और तेलुगु पर भी उन्हें खासा अधिकार था। बचपन से ही वे अपने परिवार में वैष्णव संतों के उपदेश और प्रवचन सुनते आये थे, और धर्म के आधार पर होने वाले शोषण और भेदभाव के मूल कारणों को उन धार्मिक सिद्धांतों में उन्होंने बहुत पहले ही ढूंढ निकाला था। पेरियार बहुत ही तार्किक थे वे हर धार्मिक उपदेश पर तर्क के द्वारा प्रहार कर उसे खंडित करते। पेरियार जीवन भर सामाजिक और धार्मिक बुराइयों के खिलाफ लड़ते रहे।
नई दिल्लीः कुछ वक्त पहले हुए उड़ी हमले पर सिनेमाजगत की कई हस्तियों ने प्रतिक्रिया जाहिर की। बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे हैं जो किसी भी मामले में अपनी राय देने से कतराते नहीं है। ऐसे में फिल्मकार विकास बहल का कहना है कि बॉलीवुड कलाकार अगर चुप हैं तो भी उनकी आलोचना की जाती है और अगर कुछ बोले तो विवाद खड़ा हो जाता है, इसलिए हर मुद्दे पर आखिर वे क्यों बोलें। जहां एक ओर पाकिस्तान और भारत के बीच सीमा पर तनाव चल रहा है, वहीं मनोरंजन की दुनिया में बवाल मचा हुआ है। यहां कुछ भारतीय संगठनों ने मनोरंजन जगत में पाकिस्तानियों पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं पाकिस्तानियों ने सिनेमाघरों में भारत की फिल्में दिखाने से मना कर दिया है। 'क्वीन' के निर्देशक का मानना है कि बॉलीवुड के लोग जो बोलते हैं, उन पर अधिक होहल्ला मचाया जाता है। बहल ने कहा, "ईमानदारी से कहूं, तो मुझे नहीं पता कि बॉलीवुड सभी चीजों पर टिप्पणी क्यों करता है। चूंकि, यहां बहुत-से मुद्दे हैं और देश में सभी लोग इस तरह के मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ हैं। वे इतने लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। " उन्होंने कहा, "बॉलीवुड को सभी चीजों पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। हां, यदि हम उस विषय के बारे में अच्छी तरह वाकिफ हैं तो अलग बात है। जैसे कि मुझे भारत में महिलाओं के मुद्दे पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है। ईमानदारी के साथ कहूं तो इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि इस मुद्दे पर मैंने कोई काम नहीं किया है। " महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसो) ने उड़ी में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़कर वापस जाने का अल्टीमेटम दिया। मनसे ने पाकिस्तानी सिनेमा और टेलीविजन कलाकारों के लिए 23 सितंबर को भारत छोड़ने के लिए तथाकथित अल्टीमेटम जारी किया है। जम्मू और कश्मीर के उड़ी में 18 सितंबर को हुए आतंकी हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हुए थे। वहीं सलमान खान, कंगना रनौत और अदनान सामी ने अपने विचार व्यक्त किए। फवाद खान और आतिफ असलम ने बॉलीवुड फिल्मों में काम किया। वहीं उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। 'शानदार' निर्देशक ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि लोगों ने इस पर विचार साझा करने के लिए उन्हें फोन किया। मनोरंजन की दुनिया में प्रौद्योगिकी में आए बदलाव के बारे में बहल ने कहा, "इसका अच्छा और बुरा दोनों पक्ष है। अच्छा पहलू यह है कि जब भी लोग इसे देखेंगे तो काफी लंबे समय तक देख सकते हैं। " उन्होंने कहा, "दुख की बात यह है कि हम ऐसी फिल्म बनाते हैं कि लोग चल कर सिनेमाघरों तक आएं और हम बड़े पर्दे के लिए फिल्म बना रहे हैं। " बहल वर्तमान में बिहार के शैक्षिक कोचिंग संस्थान सुपर 30 पर बायोपिक बना रहे हैं।
नई दिल्लीः कुछ वक्त पहले हुए उड़ी हमले पर सिनेमाजगत की कई हस्तियों ने प्रतिक्रिया जाहिर की। बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे हैं जो किसी भी मामले में अपनी राय देने से कतराते नहीं है। ऐसे में फिल्मकार विकास बहल का कहना है कि बॉलीवुड कलाकार अगर चुप हैं तो भी उनकी आलोचना की जाती है और अगर कुछ बोले तो विवाद खड़ा हो जाता है, इसलिए हर मुद्दे पर आखिर वे क्यों बोलें। जहां एक ओर पाकिस्तान और भारत के बीच सीमा पर तनाव चल रहा है, वहीं मनोरंजन की दुनिया में बवाल मचा हुआ है। यहां कुछ भारतीय संगठनों ने मनोरंजन जगत में पाकिस्तानियों पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं पाकिस्तानियों ने सिनेमाघरों में भारत की फिल्में दिखाने से मना कर दिया है। 'क्वीन' के निर्देशक का मानना है कि बॉलीवुड के लोग जो बोलते हैं, उन पर अधिक होहल्ला मचाया जाता है। बहल ने कहा, "ईमानदारी से कहूं, तो मुझे नहीं पता कि बॉलीवुड सभी चीजों पर टिप्पणी क्यों करता है। चूंकि, यहां बहुत-से मुद्दे हैं और देश में सभी लोग इस तरह के मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ हैं। वे इतने लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। " उन्होंने कहा, "बॉलीवुड को सभी चीजों पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। हां, यदि हम उस विषय के बारे में अच्छी तरह वाकिफ हैं तो अलग बात है। जैसे कि मुझे भारत में महिलाओं के मुद्दे पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है। ईमानदारी के साथ कहूं तो इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि इस मुद्दे पर मैंने कोई काम नहीं किया है। " महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने उड़ी में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को अड़तालीस घंटाटे के भीतर भारत छोड़कर वापस जाने का अल्टीमेटम दिया। मनसे ने पाकिस्तानी सिनेमा और टेलीविजन कलाकारों के लिए तेईस सितंबर को भारत छोड़ने के लिए तथाकथित अल्टीमेटम जारी किया है। जम्मू और कश्मीर के उड़ी में अट्ठारह सितंबर को हुए आतंकी हमले में उन्नीस भारतीय जवान शहीद हुए थे। वहीं सलमान खान, कंगना रनौत और अदनान सामी ने अपने विचार व्यक्त किए। फवाद खान और आतिफ असलम ने बॉलीवुड फिल्मों में काम किया। वहीं उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। 'शानदार' निर्देशक ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि लोगों ने इस पर विचार साझा करने के लिए उन्हें फोन किया। मनोरंजन की दुनिया में प्रौद्योगिकी में आए बदलाव के बारे में बहल ने कहा, "इसका अच्छा और बुरा दोनों पक्ष है। अच्छा पहलू यह है कि जब भी लोग इसे देखेंगे तो काफी लंबे समय तक देख सकते हैं। " उन्होंने कहा, "दुख की बात यह है कि हम ऐसी फिल्म बनाते हैं कि लोग चल कर सिनेमाघरों तक आएं और हम बड़े पर्दे के लिए फिल्म बना रहे हैं। " बहल वर्तमान में बिहार के शैक्षिक कोचिंग संस्थान सुपर तीस पर बायोपिक बना रहे हैं।
अलोंग अरुणाचल प्रदेश राज्य के पूर्वी सियांग ज़िले में समुद्री स्तर से 300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक नगर है। - अलोंग सुंदर गाँवों वाला प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित अरुणाचल प्रदेश का एक छोटा नगर है। - गर्मी के मौसम के लिए अलोंग अरुणाचल प्रदेश का सबसे अधिक पर्यटकों वाला स्थान है। - सुंदर पेड़-पौधों से भरा यह स्थान अरुणाचल प्रदेश के सर्वाधिक उपयुक्त स्वास्थ्य वर्धक स्थानों में से एक है। - अलोंग जाने के लिए मीठुन और जर्सी क्रॉस ब्रीडिंग फार्म से गुजरना होता है जो अलोंग से 25 किमी की दूरी पर कामाकी में स्थित है।
अलोंग अरुणाचल प्रदेश राज्य के पूर्वी सियांग ज़िले में समुद्री स्तर से तीन सौ मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक नगर है। - अलोंग सुंदर गाँवों वाला प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित अरुणाचल प्रदेश का एक छोटा नगर है। - गर्मी के मौसम के लिए अलोंग अरुणाचल प्रदेश का सबसे अधिक पर्यटकों वाला स्थान है। - सुंदर पेड़-पौधों से भरा यह स्थान अरुणाचल प्रदेश के सर्वाधिक उपयुक्त स्वास्थ्य वर्धक स्थानों में से एक है। - अलोंग जाने के लिए मीठुन और जर्सी क्रॉस ब्रीडिंग फार्म से गुजरना होता है जो अलोंग से पच्चीस किमी की दूरी पर कामाकी में स्थित है।
रायपुर. विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने एक बार फिर तबादले किए हैं. इसी के तहत राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक आदेश जारी कर एक साथ तीन तहसीलदारों के तबादले का आदेश जारी कर दिया है गया है. जिसके अनुसार हेमंत डहरिया को दुर्ग भेजा गया है. इसके पहले हेमंत जिले के कोटा में पदस्थ थे. इसी प्रकार अमित कुमार सिन्हा बिलासपुर तहसीलदार को भी दुर्ग भेजा गया है.
रायपुर. विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने एक बार फिर तबादले किए हैं. इसी के तहत राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक आदेश जारी कर एक साथ तीन तहसीलदारों के तबादले का आदेश जारी कर दिया है गया है. जिसके अनुसार हेमंत डहरिया को दुर्ग भेजा गया है. इसके पहले हेमंत जिले के कोटा में पदस्थ थे. इसी प्रकार अमित कुमार सिन्हा बिलासपुर तहसीलदार को भी दुर्ग भेजा गया है.
Kubbra Sait के डेब्यू के बाद से कुब्रा सैत और लिसा एडेलस्टीन को जुड़वाँ के नाम से पहचाना जाने लगा है। अब जब कुब्रा ने अपने बड़े बॉलीवुड डेब्यू, फाउंडेशन ऑन एप्पल टीवी के साथ इंटरनेशनल मीडिया में धूम मचा दी है, तो व्यापक दर्शकों द्वारा इसे पहली पसंद के साथ देखा जा रहा है। लिसा ने अपने सोशल मीडिया पर कुब्रा को शो से उनके लुक की तारीफ करते हुए एक संदेश भेजा और कहा 'प्यारी बहन, आप काल्पनिक रूप से क्रूर और खूबसूरती के परिदृश्य से बेहद मजबूत थीं! बधाई हो!'दोनों ही अभिनेत्रियाँ समानता साझा करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप दर्शकों ने दोनों की पिक्चर्स के साथ ढेरों मीम्स बनाए हैं। उनकी गहन निगाहों से लेकर अभूतपूर्व प्रदर्शन की धनी दोनों अभिनेत्रियाँ भले ही अलग-अलग देशों से हैं, लेकिन सिनेमा के लिए एक संयुक्त जुनून साझा करती हैं और एक-दूसरे के काम की सराहना भी करती हैं। यह वास्तव में बहुत खास बात है कि हॉलीवुड में कुब्रा के प्रवेश के चलते उनका सभी द्वारा ज़ोरो शोरो से स्वागत किया गया है।
Kubbra Sait के डेब्यू के बाद से कुब्रा सैत और लिसा एडेलस्टीन को जुड़वाँ के नाम से पहचाना जाने लगा है। अब जब कुब्रा ने अपने बड़े बॉलीवुड डेब्यू, फाउंडेशन ऑन एप्पल टीवी के साथ इंटरनेशनल मीडिया में धूम मचा दी है, तो व्यापक दर्शकों द्वारा इसे पहली पसंद के साथ देखा जा रहा है। लिसा ने अपने सोशल मीडिया पर कुब्रा को शो से उनके लुक की तारीफ करते हुए एक संदेश भेजा और कहा 'प्यारी बहन, आप काल्पनिक रूप से क्रूर और खूबसूरती के परिदृश्य से बेहद मजबूत थीं! बधाई हो!'दोनों ही अभिनेत्रियाँ समानता साझा करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप दर्शकों ने दोनों की पिक्चर्स के साथ ढेरों मीम्स बनाए हैं। उनकी गहन निगाहों से लेकर अभूतपूर्व प्रदर्शन की धनी दोनों अभिनेत्रियाँ भले ही अलग-अलग देशों से हैं, लेकिन सिनेमा के लिए एक संयुक्त जुनून साझा करती हैं और एक-दूसरे के काम की सराहना भी करती हैं। यह वास्तव में बहुत खास बात है कि हॉलीवुड में कुब्रा के प्रवेश के चलते उनका सभी द्वारा ज़ोरो शोरो से स्वागत किया गया है।
12 राशियों में से हर व्यक्ति की अलग राशि होती है, जिसकी मदद से व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका आज का दिन कैसा होगा? ज्योतिष में ग्रहों की चाल से शुभ और अशुभ घड़ियां बनती हैं, जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी राशि के बारे में आज का दिन अच्छा है, तो आप उसे सेलिब्रेट कर सकते हैं, वहीं अगर आज का दिन आपके लिए खराब है तो आप पंडित जी के दिए गए सुझावों को अपनाकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। आज का दिशाशूलः पश्चिम। आज का राहुकालः सांय 04:30 बजे से सांय 06:00 बजे तक। आज की भद्राः अपराह्न 03: 50 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक। मेषः पारिवारिकत दायित्व की पूर्ती होगी। मांगलिक या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी। यात्रा देशाटन की स्थिची बन रही है। वृषः गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। यश, कीर्ति, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मिथुनः सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रिश्तों में मधुरता आएगी। व्यावसायिक कार्य में व्यस्त हो सकते हैं। कर्कः संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सिंहः गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। संबंधों में मधुरता आएगी। कन्याः रिश्तों में निकटता आएगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगी। शिक्षा प्रकियोगिता के क्षेत्र में प्रगति होगी। तुलाः जीवनसाथी का सहयोग और सानिध्य मिलेगा। आर्थिक मामलों में प्रगति होगी। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। वृश्चिकः वाहन चलाते समय सावधानी रखें। किसी मूल्यवान वस्तु के चोरी या खोने की आशंका है। सचेत रहने की जरूरत है। धनुः उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। व्यावसायिक योजन फलीभूत होगा। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। मकरः शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में चल रहा श्रम सार्थक होगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कुंभः शासनसत्ता का सहयोग रहेगा। जीवनसाथी का सानिध्य मिलेगा। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। मीनः भाग्यवश सुखद समाचार मिलेगा। पारिवारिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।
बारह राशियों में से हर व्यक्ति की अलग राशि होती है, जिसकी मदद से व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका आज का दिन कैसा होगा? ज्योतिष में ग्रहों की चाल से शुभ और अशुभ घड़ियां बनती हैं, जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी राशि के बारे में आज का दिन अच्छा है, तो आप उसे सेलिब्रेट कर सकते हैं, वहीं अगर आज का दिन आपके लिए खराब है तो आप पंडित जी के दिए गए सुझावों को अपनाकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। आज का दिशाशूलः पश्चिम। आज का राहुकालः सांय चार:तीस बजे से सांय छः:शून्य बजे तक। आज की भद्राः अपराह्न तीन: पचास बजे से रात्रि ग्यारह:तीस बजे तक। मेषः पारिवारिकत दायित्व की पूर्ती होगी। मांगलिक या सांस्कृतिक उत्सव में हिस्सेदारी रहेगी। यात्रा देशाटन की स्थिची बन रही है। वृषः गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। यश, कीर्ति, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मिथुनः सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रिश्तों में मधुरता आएगी। व्यावसायिक कार्य में व्यस्त हो सकते हैं। कर्कः संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सिंहः गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। संबंधों में मधुरता आएगी। कन्याः रिश्तों में निकटता आएगी। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगी। शिक्षा प्रकियोगिता के क्षेत्र में प्रगति होगी। तुलाः जीवनसाथी का सहयोग और सानिध्य मिलेगा। आर्थिक मामलों में प्रगति होगी। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। वृश्चिकः वाहन चलाते समय सावधानी रखें। किसी मूल्यवान वस्तु के चोरी या खोने की आशंका है। सचेत रहने की जरूरत है। धनुः उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। व्यावसायिक योजन फलीभूत होगा। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। मकरः शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में चल रहा श्रम सार्थक होगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कुंभः शासनसत्ता का सहयोग रहेगा। जीवनसाथी का सानिध्य मिलेगा। व्यावसायिक प्रयास फलीभूत होगा। मीनः भाग्यवश सुखद समाचार मिलेगा। पारिवारिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।
एक समय में, मोमबत्तियां प्रकाश का एक महत्वपूर्ण स्रोत थे,और वे परिसर को कवर किया। आज वे मुख्य रूप से कमरे की सजावट के लिए उपयोग किए जाते हैं, सुखद सुगंध को उजागर करते हैं और वातावरण में आराम और संयम लाते हैं। एक आभूषण के रूप में, कारीगर विभिन्न आकारों और रंगों के उत्पाद बनाते हैं, जबकि कृत्रिम और प्राकृतिक दोनों, विभिन्न अतिरिक्त सामग्रियों के साथ सजाते हैं। घर पर मोमबत्तियां बनाना कई लोगों के लिए एक आकर्षक शौक बन गया है। इस लेख की सलाह के बाद, यह प्रक्रिया भी शुरुआती हो सकती है। मोमबत्ती बनाने के लिए आपको क्या चाहिए? क्रम में विशेष सामग्री खरीदेंघर पर एक मोमबत्ती बनाओ, जरूरी नहीं। आपको जो कुछ भी चाहिए वह रसोईघर या बच्चों के अलमारियों में पाया जा सकता है। सबसे पहले, पहले इस्तेमाल की गई मोमबत्तियों से सिंडर इकट्ठा करें या हार्डवेयर स्टोर में सबसे सरल पैराफिन खरीदें। रंग के लिए छोटे मोल्ड और मल्टीकोरर मोम क्रेयॉन तैयार करें। फॉर्म दही से कप, बेकिंग के लिए सिलिकॉन कप, रेत के साथ खेलने के लिए बच्चों के सेट और विभिन्न चित्रित कंटेनर के रूप में काम कर सकते हैं। आप कांच से बने पारदर्शी चश्मा में संरचना डालना कर सकते हैं। लेकिन ध्यान दें कि आप समाप्त मोमबत्ती को हटा नहीं सकते हैं। ग्लास को मुक्त करने के लिए इसे पूरी तरह से उपयोग करने की आवश्यकता होगी। रंग न केवल छोटे होते हैं, बल्कि ऐक्रेलिक या तेल पेंट, और यहां तक कि सजावटी सौंदर्य प्रसाधन भी हो सकते हैं। आपको कपास के धागे, विकर को हल करने और फिक्स करने के लिए चिपकने की भी आवश्यकता होती है, जिसमें मोम पिघलने की क्षमता होती है। एक बर्तन जो एक भाप स्नान का काम करता है। वैकल्पिक रूप से, आप मोमबत्ती में आवश्यक तेल जोड़ सकते हैं, इसे स्वाद बनाते हैं। सजावटी ट्रिविया उत्पाद मौलिकता और अपील देगी। जब सभी सामग्रियों को एकत्र किया जाता है, तो घर पर मोमबत्तियां बनाना सरल और मनोरंजक होगा। एक विक बनाने के लिए कैसे? विक को उच्च गुणवत्ता वाले जलने चाहिए। अपने हाथों से सजावटी मोमबत्तियां बनाने के लिए जो धूम्रपान नहीं करेंगे, सही धागे का चयन करना महत्वपूर्ण है। यह प्राकृतिक फाइबर से बना होना चाहिए, जो जल रहा है, राख में crumbles। अगर, इग्निशन पर, धागा एक ठोस गेंद छोड़कर लुढ़का जाता है, तो यह सिंथेटिक सामग्री है। विक की पसंद भविष्य के आकार और आकार से प्रभावित होती हैमोमबत्तियाँ, मोम प्रकार और रंग। यदि आप एक गिलास बीकर का उपयोग करते हैं, तो धातु के स्टैंड पर विकल नीचे से नीचे तक पहुंचने की इजाजत नहीं देता है, जिससे नीचे की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती है। मोमबत्ती का व्यास इसकी मोटाई निर्धारित करता है, जो लौ के आकार को निर्धारित करता है। अपने आप को विकृत करने के लिए, आपको धागे से लेने की जरूरत हैप्राकृतिक धागा या फूल और नमक के 1 चम्मच, बोरीक एसिड के 2 चम्मच, एक गिलास पानी के साथ मिश्रित के समाधान में भिगो दें। धागे को तरल में कम से कम 12 घंटे तक भिगो दें। कॉर्ड को सुखाने के बाद, आप एक साथ धागे को क्रोकेट या बुनाई कर सकते हैं। मोमबत्तियां बनाने के तरीके और विकल्पहाथ, सेट। वे न केवल रंग और आंतरिक सामग्री में भिन्न होते हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के रूपों में भी भिन्न होते हैं जिनका उपयोग उनके निर्माण में किया जाता है। शिल्पकार अपने स्वयं के हस्तनिर्मित कार्डबोर्ड संरचनाओं में बड़े गोले में नारंगी खाल में उत्पाद बनाते हैं। मोमबत्तियां एक बहुत ही रोचक समाधान हैं।रेत का रूप रेत के लिए धन्यवाद, आप उत्पाद के किसी भी आकार को प्राप्त कर सकते हैं। मोमबत्तियां, जिसकी तस्वीर नीचे दी गई है, लड़की समुद्र तट पर बना है। बेशक, आप इस प्रक्रिया को घर पर दोहरा सकते हैं। इसके लिए, गीली रेत ली जाती है और एक विस्तृत कंटेनर में रखा जाता है। इसके बाद, सैंडबॉक्स में बचपन और कुलिकोव के मॉडलिंग को याद रखें। हम रेत के साथ व्यस्त हैं, इसमें विभिन्न आकार निचोड़ते हैं। फिर आपको तरल मोम के साथ अंक भरने की जरूरत है, जिसे एक चम्मच का उपयोग करके डाला जाता है। मोम धीरे-धीरे धातु को बहता है, जो रेत में रूप के विनाश को रोकता है। हम सामग्री को ठंडा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, फिर समाप्त मोमबत्ती खींचें। पारदर्शी उत्पाद बहुत प्रभावशाली लगते हैं। एक जेल का उपयोग कर घर पर मोमबत्तियाँ बनाने पर विचार करें। उन्हें बनाने के लिए आपको टैनिन, ग्लिसरीन और जिलेटिन की आवश्यकता होती है। मिश्रण तैयार करने के लिए, पानी में जिलेटिन को पतला करना और ग्लिसरीन को 20: 5: 25 के अनुपात में जोड़ना आवश्यक है। फिर द्रव्यमान को पारदर्शीता के लिए पानी के स्नान में गरम किया जाता है। इस समय, टैनिन ग्लिसरीन 2:10 के साथ मिश्रित किया जाना चाहिए और गर्म भी किया जाना चाहिए और पहली संरचना में जोड़ा जाना चाहिए। मिश्रण स्पष्ट होने तक हीटिंग जारी रखें। द्रव्यमान के लिए मोल्ड तैयार करें। वे उच्च तापमान के लिए पारदर्शी और प्रतिरोधी होना चाहिए। ये चश्मा, चश्मा, वाइन चश्मा या चश्मे हो सकते हैं। फॉर्म को नीचे रखे गोले या ग्लास मोती से सजाया जा सकता है। विकेट लें और ग्लास के छेद पर स्थित एक पेंसिल पर इसे ठीक करें। आपको मोमबत्ती की सजावट के करीब विक को कम नहीं करना चाहिए, इसे 1 सेमी उठाएं। फिर धीरे-धीरे मोल्डों में समाधान पेश करें और इसे सख्त करने के लिए प्रतीक्षा करें। नतीजतन, हम मूल पारदर्शी मोमबत्तियां प्राप्त करते हैं। तस्वीरें (उदाहरण के लिए) नीचे प्रस्तुत की गई हैं। घर पर मोमबत्तियाँ बनानाएक जेल का उपयोग अवांछित हवा बुलबुले के गठन से ढका हुआ है। यदि हवा की उपस्थिति विशेष रूप से यथार्थवादी कार्बोनेटेड पेय बनाने के लिए डिज़ाइन नहीं की गई है, तो बुलबुले से छुटकारा पाने के कई तरीकों पर विचार करें। जेल से हवा तेजी से बाहर आती है जब यह नहीं हैजम गया और गर्म है। इसलिए, भाप स्नान से जेल को तब तक न हटाएं जब तक कि सभी बुलबुले बाहर न आएं। संरचना जितनी गर्म होगी, तेज़ी से यह हवा से मुक्त होगी। अगर मोमबत्ती पहले से ही डूब गई है, तो उसे गर्म ओवन के पास, सूरज में या गर्म स्कार्फ में लपेटें। धीरे-धीरे कप खुद को गर्म करें, जिसमें उत्पाद रखा जाता है। यदि, अपने हाथों से सजावटी मोमबत्तियां बनाते हैं, तो आप छोटे चीजों का उपयोग करते हैं, जैसे गोले, उन्हें शुरुआत में जेल से भरें और उन्हें सख्त बनाएं। फिर सजावट के लिए उनका उपयोग करें, जेल मिश्रण से मुक्त नहीं। ऊपर, हमने देखा कि कैसे एक मोमबत्ती बनाने के लिएजेल का उपयोग कर। इसके बाद, हम प्राकृतिक पदार्थों से सजावट के अतिरिक्त मोम से मोमबत्तियां बनाने के उदाहरण का वर्णन करते हैं। कॉफी बीन्स का एक खोल बनाने के लिए, आपको विभिन्न आकारों के दो रूप तैयार करने की आवश्यकता है। मुख्य बात यह है कि छोटे रूप को बड़े रूप में फिट होना चाहिए और साथ ही उनके बीच एक विस्तृत जगह प्रदान करना चाहिए। ज्यामितीय रूप से आंकड़े कोई भी हो सकते हैं। हम एक फॉर्म को दूसरे और अंतराल में डालते हैंकॉफी बीन्स के साथ हमारे मामले भरें। अगर वांछित है, तो आप किसी भी सजावट, मोती, गोले, सूखे फूल डाल सकते हैं। फिर सामग्री के साथ जगह मोम के साथ डाला जाता है और सूखे तक अलग सेट। कुछ समय बाद, अंदर के रूप को हटा दिया जाना चाहिए और विक को खाली क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। इसके बाद, candlestick द्रव्यमान की आंतरिक जगह डालना। एक मोम मोमबत्ती तैयार है! कुछ मामलों में, रोमांटिक मूड बनाने के लिए, आप सुगंध को दूर करने वाले प्राकृतिक अवयवों का उपयोग कर सकते हैं। ऐसे उत्पाद अल्पकालिक हैं और एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है। सुगंधित मोमबत्ती बनाने के लिएनारंगी और इसे आधे में काट लें। त्वचा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहे एक चम्मच के साथ लुगदी निकालें, जो भविष्य की मोमबत्ती के लिए एक आकार के रूप में काम करेगा। दांत छोड़ने, छील सजावटी कट के किनारों। विक को सेट करें और मोम-पेंट वाले अंदर दोनों हिस्सों के अंदर भरें। हम मोम को सख्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मोमबत्ती का उपयोग किया जा सकता है। जब एक लौ से गरम किया जाता है, तो छील सुगंधित पदार्थों को छोड़ देगी और वातावरण को गर्मी और रोमांटिकवाद का विशेष आराम प्रदान करेगी। मोमबत्तियां सुंदर और मूल दिखती हैं।कोन। एक क्रिसमस के पेड़ की उपस्थिति देते हुए मोम को हरा रंग दिया जा सकता है। और घर शंकु पर एक मोमबत्ती बनाने के लिए कैसे? हाँ, बहुत आसान! बनाने के लिए आपको सफेद पैराफिन मोमबत्तियां और सिंडर, मोम, कांच के कंटेनर से रंगीन चाक, एक पत्रिका, मोती या मोती, टूथपिक्स से चादरों की आवश्यकता होती है। मोमबत्तियों को तोड़कर शुरू करें, विक निकालें औरटुकड़ों को एक गिलास कंटेनर में रखो। कसा हुआ क्रेयॉन जोड़ें और मोम पिघलने के लिए गर्म पानी के साथ एक सॉस पैन में कंटेनर रखें। उसी समय, कागज़ के टुकड़े के साथ पत्रिका पत्रक मोड़ें और टेप के साथ किनारों को सुरक्षित करें। बैग के आधार पर मिट्टी के साथ टूथपिक को ठीक करें और उस पर विक को सुरक्षित करें। इसे एक बैग में डुबो दें और शंकु के शीर्ष पर बने छेद से हटा दें। इसके बाद, बैग को एक कंटेनर में फोल्ड शीट पर घंटी की तुलना में एक गर्दन की चौड़ाई के साथ रखा जाना चाहिए। फिर पिघला हुआ और रंगीन मोम एक उल्टा बैग में डाल दिया जाता है। सख्त होने के बाद, आधार पर विक को काटा जाना चाहिए, कागज हटा दिया गया है। मोमबत्ती को सजाने के लिए, मोतियों को गर्म पानी में गर्म करने की आवश्यकता होती है और धीरे-धीरे चिमटी का उपयोग करके मोम में दबाया जाता है (आप मनमाने ढंग से कर सकते हैं, या आप एक सुंदर पैटर्न और शिलालेख डाल सकते हैं)। संगमरमर की मोमबत्तियां बनाने के लिए टुकड़ों की आवश्यकता होगीमोम। आप उन्हें स्वयं बना सकते हैं। आवश्यक रंग के मोम पिघलने के बाद, इसे एक विस्तृत कंटेनर में डालें और इसे पूर्ण ठोसकरण की प्रतीक्षा किए बिना टुकड़ों में काट लें। अपनी कल्पना के आधार पर कठोर टुकड़ों को आकार में रखें। दीवारों पर मोज़ेक बनाकर, या कई रंगों की परतों में टुकड़े लगाए जा सकते हैं। इसके बाद, हम विक को ठीक करते हैं और मोल्ड में एक अलग रंग के पिघला हुआ मोम डालते हैं। बहुत गर्म मिश्रण टुकड़ों को थोड़ा पिघल सकता है, लेकिन यदि आप थोड़ा सा ठंडा द्रव्यमान डालते हैं, तो टुकड़े उज्ज्वल दिखेंगे। डालने के बाद, कंटेनर की सतह पर टैप करें, जिससे मोम सभी आवाजों में प्रवेश कर सके। पूर्ण शीतलन के बाद, मोल्ड से मोमबत्ती हटा दें।
एक समय में, मोमबत्तियां प्रकाश का एक महत्वपूर्ण स्रोत थे,और वे परिसर को कवर किया। आज वे मुख्य रूप से कमरे की सजावट के लिए उपयोग किए जाते हैं, सुखद सुगंध को उजागर करते हैं और वातावरण में आराम और संयम लाते हैं। एक आभूषण के रूप में, कारीगर विभिन्न आकारों और रंगों के उत्पाद बनाते हैं, जबकि कृत्रिम और प्राकृतिक दोनों, विभिन्न अतिरिक्त सामग्रियों के साथ सजाते हैं। घर पर मोमबत्तियां बनाना कई लोगों के लिए एक आकर्षक शौक बन गया है। इस लेख की सलाह के बाद, यह प्रक्रिया भी शुरुआती हो सकती है। मोमबत्ती बनाने के लिए आपको क्या चाहिए? क्रम में विशेष सामग्री खरीदेंघर पर एक मोमबत्ती बनाओ, जरूरी नहीं। आपको जो कुछ भी चाहिए वह रसोईघर या बच्चों के अलमारियों में पाया जा सकता है। सबसे पहले, पहले इस्तेमाल की गई मोमबत्तियों से सिंडर इकट्ठा करें या हार्डवेयर स्टोर में सबसे सरल पैराफिन खरीदें। रंग के लिए छोटे मोल्ड और मल्टीकोरर मोम क्रेयॉन तैयार करें। फॉर्म दही से कप, बेकिंग के लिए सिलिकॉन कप, रेत के साथ खेलने के लिए बच्चों के सेट और विभिन्न चित्रित कंटेनर के रूप में काम कर सकते हैं। आप कांच से बने पारदर्शी चश्मा में संरचना डालना कर सकते हैं। लेकिन ध्यान दें कि आप समाप्त मोमबत्ती को हटा नहीं सकते हैं। ग्लास को मुक्त करने के लिए इसे पूरी तरह से उपयोग करने की आवश्यकता होगी। रंग न केवल छोटे होते हैं, बल्कि ऐक्रेलिक या तेल पेंट, और यहां तक कि सजावटी सौंदर्य प्रसाधन भी हो सकते हैं। आपको कपास के धागे, विकर को हल करने और फिक्स करने के लिए चिपकने की भी आवश्यकता होती है, जिसमें मोम पिघलने की क्षमता होती है। एक बर्तन जो एक भाप स्नान का काम करता है। वैकल्पिक रूप से, आप मोमबत्ती में आवश्यक तेल जोड़ सकते हैं, इसे स्वाद बनाते हैं। सजावटी ट्रिविया उत्पाद मौलिकता और अपील देगी। जब सभी सामग्रियों को एकत्र किया जाता है, तो घर पर मोमबत्तियां बनाना सरल और मनोरंजक होगा। एक विक बनाने के लिए कैसे? विक को उच्च गुणवत्ता वाले जलने चाहिए। अपने हाथों से सजावटी मोमबत्तियां बनाने के लिए जो धूम्रपान नहीं करेंगे, सही धागे का चयन करना महत्वपूर्ण है। यह प्राकृतिक फाइबर से बना होना चाहिए, जो जल रहा है, राख में crumbles। अगर, इग्निशन पर, धागा एक ठोस गेंद छोड़कर लुढ़का जाता है, तो यह सिंथेटिक सामग्री है। विक की पसंद भविष्य के आकार और आकार से प्रभावित होती हैमोमबत्तियाँ, मोम प्रकार और रंग। यदि आप एक गिलास बीकर का उपयोग करते हैं, तो धातु के स्टैंड पर विकल नीचे से नीचे तक पहुंचने की इजाजत नहीं देता है, जिससे नीचे की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती है। मोमबत्ती का व्यास इसकी मोटाई निर्धारित करता है, जो लौ के आकार को निर्धारित करता है। अपने आप को विकृत करने के लिए, आपको धागे से लेने की जरूरत हैप्राकृतिक धागा या फूल और नमक के एक चम्मच, बोरीक एसिड के दो चम्मच, एक गिलास पानी के साथ मिश्रित के समाधान में भिगो दें। धागे को तरल में कम से कम बारह घंटाटे तक भिगो दें। कॉर्ड को सुखाने के बाद, आप एक साथ धागे को क्रोकेट या बुनाई कर सकते हैं। मोमबत्तियां बनाने के तरीके और विकल्पहाथ, सेट। वे न केवल रंग और आंतरिक सामग्री में भिन्न होते हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के रूपों में भी भिन्न होते हैं जिनका उपयोग उनके निर्माण में किया जाता है। शिल्पकार अपने स्वयं के हस्तनिर्मित कार्डबोर्ड संरचनाओं में बड़े गोले में नारंगी खाल में उत्पाद बनाते हैं। मोमबत्तियां एक बहुत ही रोचक समाधान हैं।रेत का रूप रेत के लिए धन्यवाद, आप उत्पाद के किसी भी आकार को प्राप्त कर सकते हैं। मोमबत्तियां, जिसकी तस्वीर नीचे दी गई है, लड़की समुद्र तट पर बना है। बेशक, आप इस प्रक्रिया को घर पर दोहरा सकते हैं। इसके लिए, गीली रेत ली जाती है और एक विस्तृत कंटेनर में रखा जाता है। इसके बाद, सैंडबॉक्स में बचपन और कुलिकोव के मॉडलिंग को याद रखें। हम रेत के साथ व्यस्त हैं, इसमें विभिन्न आकार निचोड़ते हैं। फिर आपको तरल मोम के साथ अंक भरने की जरूरत है, जिसे एक चम्मच का उपयोग करके डाला जाता है। मोम धीरे-धीरे धातु को बहता है, जो रेत में रूप के विनाश को रोकता है। हम सामग्री को ठंडा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, फिर समाप्त मोमबत्ती खींचें। पारदर्शी उत्पाद बहुत प्रभावशाली लगते हैं। एक जेल का उपयोग कर घर पर मोमबत्तियाँ बनाने पर विचार करें। उन्हें बनाने के लिए आपको टैनिन, ग्लिसरीन और जिलेटिन की आवश्यकता होती है। मिश्रण तैयार करने के लिए, पानी में जिलेटिन को पतला करना और ग्लिसरीन को बीस: पाँच: पच्चीस के अनुपात में जोड़ना आवश्यक है। फिर द्रव्यमान को पारदर्शीता के लिए पानी के स्नान में गरम किया जाता है। इस समय, टैनिन ग्लिसरीन दो:दस के साथ मिश्रित किया जाना चाहिए और गर्म भी किया जाना चाहिए और पहली संरचना में जोड़ा जाना चाहिए। मिश्रण स्पष्ट होने तक हीटिंग जारी रखें। द्रव्यमान के लिए मोल्ड तैयार करें। वे उच्च तापमान के लिए पारदर्शी और प्रतिरोधी होना चाहिए। ये चश्मा, चश्मा, वाइन चश्मा या चश्मे हो सकते हैं। फॉर्म को नीचे रखे गोले या ग्लास मोती से सजाया जा सकता है। विकेट लें और ग्लास के छेद पर स्थित एक पेंसिल पर इसे ठीक करें। आपको मोमबत्ती की सजावट के करीब विक को कम नहीं करना चाहिए, इसे एक सेमी उठाएं। फिर धीरे-धीरे मोल्डों में समाधान पेश करें और इसे सख्त करने के लिए प्रतीक्षा करें। नतीजतन, हम मूल पारदर्शी मोमबत्तियां प्राप्त करते हैं। तस्वीरें नीचे प्रस्तुत की गई हैं। घर पर मोमबत्तियाँ बनानाएक जेल का उपयोग अवांछित हवा बुलबुले के गठन से ढका हुआ है। यदि हवा की उपस्थिति विशेष रूप से यथार्थवादी कार्बोनेटेड पेय बनाने के लिए डिज़ाइन नहीं की गई है, तो बुलबुले से छुटकारा पाने के कई तरीकों पर विचार करें। जेल से हवा तेजी से बाहर आती है जब यह नहीं हैजम गया और गर्म है। इसलिए, भाप स्नान से जेल को तब तक न हटाएं जब तक कि सभी बुलबुले बाहर न आएं। संरचना जितनी गर्म होगी, तेज़ी से यह हवा से मुक्त होगी। अगर मोमबत्ती पहले से ही डूब गई है, तो उसे गर्म ओवन के पास, सूरज में या गर्म स्कार्फ में लपेटें। धीरे-धीरे कप खुद को गर्म करें, जिसमें उत्पाद रखा जाता है। यदि, अपने हाथों से सजावटी मोमबत्तियां बनाते हैं, तो आप छोटे चीजों का उपयोग करते हैं, जैसे गोले, उन्हें शुरुआत में जेल से भरें और उन्हें सख्त बनाएं। फिर सजावट के लिए उनका उपयोग करें, जेल मिश्रण से मुक्त नहीं। ऊपर, हमने देखा कि कैसे एक मोमबत्ती बनाने के लिएजेल का उपयोग कर। इसके बाद, हम प्राकृतिक पदार्थों से सजावट के अतिरिक्त मोम से मोमबत्तियां बनाने के उदाहरण का वर्णन करते हैं। कॉफी बीन्स का एक खोल बनाने के लिए, आपको विभिन्न आकारों के दो रूप तैयार करने की आवश्यकता है। मुख्य बात यह है कि छोटे रूप को बड़े रूप में फिट होना चाहिए और साथ ही उनके बीच एक विस्तृत जगह प्रदान करना चाहिए। ज्यामितीय रूप से आंकड़े कोई भी हो सकते हैं। हम एक फॉर्म को दूसरे और अंतराल में डालते हैंकॉफी बीन्स के साथ हमारे मामले भरें। अगर वांछित है, तो आप किसी भी सजावट, मोती, गोले, सूखे फूल डाल सकते हैं। फिर सामग्री के साथ जगह मोम के साथ डाला जाता है और सूखे तक अलग सेट। कुछ समय बाद, अंदर के रूप को हटा दिया जाना चाहिए और विक को खाली क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। इसके बाद, candlestick द्रव्यमान की आंतरिक जगह डालना। एक मोम मोमबत्ती तैयार है! कुछ मामलों में, रोमांटिक मूड बनाने के लिए, आप सुगंध को दूर करने वाले प्राकृतिक अवयवों का उपयोग कर सकते हैं। ऐसे उत्पाद अल्पकालिक हैं और एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है। सुगंधित मोमबत्ती बनाने के लिएनारंगी और इसे आधे में काट लें। त्वचा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहे एक चम्मच के साथ लुगदी निकालें, जो भविष्य की मोमबत्ती के लिए एक आकार के रूप में काम करेगा। दांत छोड़ने, छील सजावटी कट के किनारों। विक को सेट करें और मोम-पेंट वाले अंदर दोनों हिस्सों के अंदर भरें। हम मोम को सख्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मोमबत्ती का उपयोग किया जा सकता है। जब एक लौ से गरम किया जाता है, तो छील सुगंधित पदार्थों को छोड़ देगी और वातावरण को गर्मी और रोमांटिकवाद का विशेष आराम प्रदान करेगी। मोमबत्तियां सुंदर और मूल दिखती हैं।कोन। एक क्रिसमस के पेड़ की उपस्थिति देते हुए मोम को हरा रंग दिया जा सकता है। और घर शंकु पर एक मोमबत्ती बनाने के लिए कैसे? हाँ, बहुत आसान! बनाने के लिए आपको सफेद पैराफिन मोमबत्तियां और सिंडर, मोम, कांच के कंटेनर से रंगीन चाक, एक पत्रिका, मोती या मोती, टूथपिक्स से चादरों की आवश्यकता होती है। मोमबत्तियों को तोड़कर शुरू करें, विक निकालें औरटुकड़ों को एक गिलास कंटेनर में रखो। कसा हुआ क्रेयॉन जोड़ें और मोम पिघलने के लिए गर्म पानी के साथ एक सॉस पैन में कंटेनर रखें। उसी समय, कागज़ के टुकड़े के साथ पत्रिका पत्रक मोड़ें और टेप के साथ किनारों को सुरक्षित करें। बैग के आधार पर मिट्टी के साथ टूथपिक को ठीक करें और उस पर विक को सुरक्षित करें। इसे एक बैग में डुबो दें और शंकु के शीर्ष पर बने छेद से हटा दें। इसके बाद, बैग को एक कंटेनर में फोल्ड शीट पर घंटी की तुलना में एक गर्दन की चौड़ाई के साथ रखा जाना चाहिए। फिर पिघला हुआ और रंगीन मोम एक उल्टा बैग में डाल दिया जाता है। सख्त होने के बाद, आधार पर विक को काटा जाना चाहिए, कागज हटा दिया गया है। मोमबत्ती को सजाने के लिए, मोतियों को गर्म पानी में गर्म करने की आवश्यकता होती है और धीरे-धीरे चिमटी का उपयोग करके मोम में दबाया जाता है । संगमरमर की मोमबत्तियां बनाने के लिए टुकड़ों की आवश्यकता होगीमोम। आप उन्हें स्वयं बना सकते हैं। आवश्यक रंग के मोम पिघलने के बाद, इसे एक विस्तृत कंटेनर में डालें और इसे पूर्ण ठोसकरण की प्रतीक्षा किए बिना टुकड़ों में काट लें। अपनी कल्पना के आधार पर कठोर टुकड़ों को आकार में रखें। दीवारों पर मोज़ेक बनाकर, या कई रंगों की परतों में टुकड़े लगाए जा सकते हैं। इसके बाद, हम विक को ठीक करते हैं और मोल्ड में एक अलग रंग के पिघला हुआ मोम डालते हैं। बहुत गर्म मिश्रण टुकड़ों को थोड़ा पिघल सकता है, लेकिन यदि आप थोड़ा सा ठंडा द्रव्यमान डालते हैं, तो टुकड़े उज्ज्वल दिखेंगे। डालने के बाद, कंटेनर की सतह पर टैप करें, जिससे मोम सभी आवाजों में प्रवेश कर सके। पूर्ण शीतलन के बाद, मोल्ड से मोमबत्ती हटा दें।
Mens Health: शादी के बाद अगर किसी पुरुष को शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़े तो उसे ऐसी चीजें खानी चाहिए जिससे मेल फर्टिलिटी में इजाफा हो जाए और पिता बनने में परेशानी न आए. Clove For Male Fertility: आजकल शादीशुदा पुरुषों के कंधों पर परिवार की इतनी ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं जिसकी वजह से वो अपनी सेहत का खास ख्याल नहीं रख पाते, ऐसे में उन्हें मर्दाना कमजोरी का सामना करना पड़ता है. इसके लिए जरूरी है कि हम वो चीज खाएं जिससे मेल फर्टिलिटी और स्पर्म काउंट बेहतर हो साथ ही पिता बनने में परेशानियां न आएं. शादीशुदा मर्दों के लिए क्यों फायदेमंद है लौंग? कई हेल्थ एक्सपर्ट इनफर्टिलिटी की परेशानियों में लौंग खाने की सलाह देते हैं. इस गरम मसाले को चबाने के वैसे तो कई फायदे हैं, लेकिन शादीशुदा पुरुषों के लिए ये किसी औषधि से कम नहीं है. लौंग में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेट्री, एंटीकार्सिनोजेलिक और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज पाई जाती है जो सेहत के लिए लाभकारी है. लौंग खाने से शादीशुदा मर्दों की सेहत बेहतर रहती है. इससे उनकी फर्टिलिटी (Male Fertility) में भी सुधार होता है. इस मसाले को रोजाना चबाने से टेस्टोस्टेरॉन का लेवल (Testosterone Level) भी काफी हद तक बढ़ जाता है. आजकल कई युवा सिगरेट और शराब की बुरी लत की शिकार होते हैं जिसकी वजह से शुक्राणुओं की संख्या कम होने लगती है. इससे भविष्य में पिता बनने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप लौंग का सेवन करेंगे तो स्पर्म काउंट धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा. लौंग में सैपोनिन्स, एल्कलाइड्स और फ्लेवेनॉइड्स जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं जो यौन इच्छा (Libido) को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा कुछ पुरुषों को प्रीमैच्योर इजेक्युलेशन (Premature Ejaculation) की समस्या होती है उनके लिए भी लौंग फायदेमंद साबित हो सकता है. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
Mens Health: शादी के बाद अगर किसी पुरुष को शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़े तो उसे ऐसी चीजें खानी चाहिए जिससे मेल फर्टिलिटी में इजाफा हो जाए और पिता बनने में परेशानी न आए. Clove For Male Fertility: आजकल शादीशुदा पुरुषों के कंधों पर परिवार की इतनी ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं जिसकी वजह से वो अपनी सेहत का खास ख्याल नहीं रख पाते, ऐसे में उन्हें मर्दाना कमजोरी का सामना करना पड़ता है. इसके लिए जरूरी है कि हम वो चीज खाएं जिससे मेल फर्टिलिटी और स्पर्म काउंट बेहतर हो साथ ही पिता बनने में परेशानियां न आएं. शादीशुदा मर्दों के लिए क्यों फायदेमंद है लौंग? कई हेल्थ एक्सपर्ट इनफर्टिलिटी की परेशानियों में लौंग खाने की सलाह देते हैं. इस गरम मसाले को चबाने के वैसे तो कई फायदे हैं, लेकिन शादीशुदा पुरुषों के लिए ये किसी औषधि से कम नहीं है. लौंग में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेट्री, एंटीकार्सिनोजेलिक और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज पाई जाती है जो सेहत के लिए लाभकारी है. लौंग खाने से शादीशुदा मर्दों की सेहत बेहतर रहती है. इससे उनकी फर्टिलिटी में भी सुधार होता है. इस मसाले को रोजाना चबाने से टेस्टोस्टेरॉन का लेवल भी काफी हद तक बढ़ जाता है. आजकल कई युवा सिगरेट और शराब की बुरी लत की शिकार होते हैं जिसकी वजह से शुक्राणुओं की संख्या कम होने लगती है. इससे भविष्य में पिता बनने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप लौंग का सेवन करेंगे तो स्पर्म काउंट धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा. लौंग में सैपोनिन्स, एल्कलाइड्स और फ्लेवेनॉइड्स जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं जो यौन इच्छा को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा कुछ पुरुषों को प्रीमैच्योर इजेक्युलेशन की समस्या होती है उनके लिए भी लौंग फायदेमंद साबित हो सकता है.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा हो गया है। बता दें स्टेशन परिसर में करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई है। महिला की मौत से हड़कंप रेलवे स्टेशन मच गया। दिल्ली पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई है कि फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची है और जांच-पड़ताल की गई है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा हो गया है। बता दें स्टेशन परिसर में करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई है। महिला की मौत से हड़कंप रेलवे स्टेशन मच गया। दिल्ली पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई है कि फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची है और जांच-पड़ताल की गई है।
नीमराना थाना पुलिस ने जानलेवा हमला करने के मामले में मंगलवार देर शाम को कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में शामिल एक स्कूटी व पिकअप गाड़ी को बरामद किया है। डीएसपी महावीर सिंह शेखावत ने बताया कि थाना क्षेत्र कायसा गांव के सरजीत सिंह पुत्र रोहिताश यादव ने 18 नवम्बर 2021 में मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया कि चाचा ने फोन कर बताया था कि बड़े भाई के लड़के मारपीट और झगड़ा कर रहे है। मौके पर पहुंचा तो चाचा के दोनों लड़के दिनेश, प्रदीप और चाची सावित्री देवी पत्नी स्व. रूपचंद तथा दूसरा चाचा कृष्ण कुमार और उसके बेटे कर्मवीर व सोनू और निहाल सिंह पुत्र प्रभाती लाल ये सभी मौजूद थे। सरजीत सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों ने मिलकर पीछे से पिकअप चढ़ाकर मेरे बेटे का पैर तोड़ दिया। बीच-बचाव करने आया राकेश पुत्र रणजीत सिंह पर फरसी से सिर में वार कर दिया, जिसके सिर में 10 टांके आए है। जिस पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कायसा निवासी प्रदीप कुमार(29) पुत्र रूपंचद व कर्मवीर (27) पुत्र कृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में शामिल एक स्कूटी व पिकअप गाड़ी को जब्त किया है। वहीं, मामले में पुलिस द्वारा तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नीमराना थाना पुलिस ने जानलेवा हमला करने के मामले में मंगलवार देर शाम को कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में शामिल एक स्कूटी व पिकअप गाड़ी को बरामद किया है। डीएसपी महावीर सिंह शेखावत ने बताया कि थाना क्षेत्र कायसा गांव के सरजीत सिंह पुत्र रोहिताश यादव ने अट्ठारह नवम्बर दो हज़ार इक्कीस में मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया कि चाचा ने फोन कर बताया था कि बड़े भाई के लड़के मारपीट और झगड़ा कर रहे है। मौके पर पहुंचा तो चाचा के दोनों लड़के दिनेश, प्रदीप और चाची सावित्री देवी पत्नी स्व. रूपचंद तथा दूसरा चाचा कृष्ण कुमार और उसके बेटे कर्मवीर व सोनू और निहाल सिंह पुत्र प्रभाती लाल ये सभी मौजूद थे। सरजीत सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों ने मिलकर पीछे से पिकअप चढ़ाकर मेरे बेटे का पैर तोड़ दिया। बीच-बचाव करने आया राकेश पुत्र रणजीत सिंह पर फरसी से सिर में वार कर दिया, जिसके सिर में दस टांके आए है। जिस पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कायसा निवासी प्रदीप कुमार पुत्र रूपंचद व कर्मवीर पुत्र कृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में शामिल एक स्कूटी व पिकअप गाड़ी को जब्त किया है। वहीं, मामले में पुलिस द्वारा तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अब उस विद्याके चमत्कारको देखकर एक सज्जन उसके पीछे पड़ गये कि 'मेरेको भी यह विद्या सिखाओ, मैं भी इसको सीखना चाहता है' । तो उसने सरबतासे कहा कि 'यह विद्या चमत्कारी तो बहुत है, पर वास्तविक हित, कल्याण करनेवाली नहीं है' । उससे यह पूछा गया कि 'आप दूसरेके बिना कहे ही उसके प्रश्नको और उत्तरको कैसे जान जाते हो ?" तो उसने कहा कि मैं अपने कानमें विष्ठा ळगाये रखता हूँ । जब कोई पूछने आता है, तो उस समय कर्णपिशाचिनी आकर मेरे कान में उसका प्रश्न और प्रश्न- का उत्तर सुना देती है, और मैं वैसा ही कह देता हूँ' । फिर उससे पूछा गया कि 'आपका मरना कैसे होगा - इस विषय में आपने कुछ पूछा है कि नहीं इसपर उसने कहा कि 'मेरा मरना तो नर्मदाके किनारे होगा' । उसका शरीर शान्त होने के बाद पता लगा कि जब वह ( अपना अन्त-समय जानकर ) नर्मदामें जाने लगा, तो कर्ण पिशाचिनी सकरी बनकर उसके सामने आ गयी । उसको देखकर वह नर्मदाको तरफ भागा, तो वर्णपिशाचिनीने उसको नर्मदा में जाने से पहले ही किनारेपर मार दिया। कारण यह था कि अगर वह नर्मदामें भरता तो उसकी सद्गति हो जाती। परन्तु कर्णपिशाचिनीने उसकी सद्गति नहीं होने दी और उसको नर्मदाके किनारे पर ही मारकर अपने लोकमें ले गयी । इसका तात्पर्य यह हुआ कि देवता, पितर आदिकी उपासना स्वरूपसे त्याज्य नहीं है; परन्तु भूत, प्रेत, पिशाच आदिकी उपासना फ्नरूपसे ही त्याज्य है । कारण कि देवताओंमें भगवद्भाव और निष्काम-
अब उस विद्याके चमत्कारको देखकर एक सज्जन उसके पीछे पड़ गये कि 'मेरेको भी यह विद्या सिखाओ, मैं भी इसको सीखना चाहता है' । तो उसने सरबतासे कहा कि 'यह विद्या चमत्कारी तो बहुत है, पर वास्तविक हित, कल्याण करनेवाली नहीं है' । उससे यह पूछा गया कि 'आप दूसरेके बिना कहे ही उसके प्रश्नको और उत्तरको कैसे जान जाते हो ?" तो उसने कहा कि मैं अपने कानमें विष्ठा ळगाये रखता हूँ । जब कोई पूछने आता है, तो उस समय कर्णपिशाचिनी आकर मेरे कान में उसका प्रश्न और प्रश्न- का उत्तर सुना देती है, और मैं वैसा ही कह देता हूँ' । फिर उससे पूछा गया कि 'आपका मरना कैसे होगा - इस विषय में आपने कुछ पूछा है कि नहीं इसपर उसने कहा कि 'मेरा मरना तो नर्मदाके किनारे होगा' । उसका शरीर शान्त होने के बाद पता लगा कि जब वह नर्मदामें जाने लगा, तो कर्ण पिशाचिनी सकरी बनकर उसके सामने आ गयी । उसको देखकर वह नर्मदाको तरफ भागा, तो वर्णपिशाचिनीने उसको नर्मदा में जाने से पहले ही किनारेपर मार दिया। कारण यह था कि अगर वह नर्मदामें भरता तो उसकी सद्गति हो जाती। परन्तु कर्णपिशाचिनीने उसकी सद्गति नहीं होने दी और उसको नर्मदाके किनारे पर ही मारकर अपने लोकमें ले गयी । इसका तात्पर्य यह हुआ कि देवता, पितर आदिकी उपासना स्वरूपसे त्याज्य नहीं है; परन्तु भूत, प्रेत, पिशाच आदिकी उपासना फ्नरूपसे ही त्याज्य है । कारण कि देवताओंमें भगवद्भाव और निष्काम-
बेगूसरायः बिहार के बेगूसराय में सरकारी उदासीनता की वजह से करीब 30 सालों से डोभा बने पोखर को स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर ना सिर्फ जीर्णोद्धार कर लिया है, बल्कि छठ महापर्व करने लायक पोखर बना दिया है। लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व को लेकर पोखरों की साफ सफाई की जाती है। नगर निगम के वार्ड 41 स्थित बड़ी एघु पंडित टोला पोखर वर्षों से सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा था। इस बार स्थानीय लोगों ने छठ व्रत यहां पर करने का निर्णय लिया और ग्रामीणों से चंदा कर पोखर का जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया। करीब 68 साल पहले बने इस पोखर में 20 वर्षों तक छठ महापर्व होता रहा लेकिन बीच के कालखंड में पोखर धीरे-धीरे जीर्ण शीर्ण अवस्था में हो गया और डोभा का रूप ले लिया। लोग छठ करना छोड़ दिए। इस बीच कई बार जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन से लोगों ने पोखर का जीर्णोद्धार करने की मांग की, लेकिन इस पोखर का कायाकल्प नहीं हो पाया। इस बार पंडित टोला के लोगों ने इस पोखर का जीर्णोद्धार करने का मन बनाया और 15 दिनों से कार्य शुरू कर दिया। आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि पोखर में सीढ़ी का निर्माण वर्षों पहले किया गया था, जो अब भी सही हालत में हैं। पोखर में गंदगी का अंबार था। लोग नाला का पानी और कचरा फेंकने लगे थे। जिसे अब सफाई की गई और बालू भरकर पोखर का समतलीकरण किया जा रहा है। इस कार्य को स्थानीय लोग जन सहयोग और श्रमदान से कर रहे हैं। स्थानीय निवासी रिपूसूदन पंडित ने कहा कि नगर निगम से बहुत आशा थी लेकिन वह नहीं हुआ इस बार जन सहयोग से चंदा कर और श्रमदान कर इस पोखर का कायाकल्प कर लिया गया है। इस बार पंडित टोला के लोग इसी पोखर में छठ व्रत करेंगे। स्थानीय निवासी प्रफुल्ल मिश्रा ने कहा कि स्थानीय लोगों की पहल पर डोभा बन गए इस पोखर का कायाकल्प हो गया है। इस बार छठ महापर्व इस पोखर में किया जाएगा।
बेगूसरायः बिहार के बेगूसराय में सरकारी उदासीनता की वजह से करीब तीस सालों से डोभा बने पोखर को स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर ना सिर्फ जीर्णोद्धार कर लिया है, बल्कि छठ महापर्व करने लायक पोखर बना दिया है। लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व को लेकर पोखरों की साफ सफाई की जाती है। नगर निगम के वार्ड इकतालीस स्थित बड़ी एघु पंडित टोला पोखर वर्षों से सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा था। इस बार स्थानीय लोगों ने छठ व्रत यहां पर करने का निर्णय लिया और ग्रामीणों से चंदा कर पोखर का जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया। करीब अड़सठ साल पहले बने इस पोखर में बीस वर्षों तक छठ महापर्व होता रहा लेकिन बीच के कालखंड में पोखर धीरे-धीरे जीर्ण शीर्ण अवस्था में हो गया और डोभा का रूप ले लिया। लोग छठ करना छोड़ दिए। इस बीच कई बार जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन से लोगों ने पोखर का जीर्णोद्धार करने की मांग की, लेकिन इस पोखर का कायाकल्प नहीं हो पाया। इस बार पंडित टोला के लोगों ने इस पोखर का जीर्णोद्धार करने का मन बनाया और पंद्रह दिनों से कार्य शुरू कर दिया। आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि पोखर में सीढ़ी का निर्माण वर्षों पहले किया गया था, जो अब भी सही हालत में हैं। पोखर में गंदगी का अंबार था। लोग नाला का पानी और कचरा फेंकने लगे थे। जिसे अब सफाई की गई और बालू भरकर पोखर का समतलीकरण किया जा रहा है। इस कार्य को स्थानीय लोग जन सहयोग और श्रमदान से कर रहे हैं। स्थानीय निवासी रिपूसूदन पंडित ने कहा कि नगर निगम से बहुत आशा थी लेकिन वह नहीं हुआ इस बार जन सहयोग से चंदा कर और श्रमदान कर इस पोखर का कायाकल्प कर लिया गया है। इस बार पंडित टोला के लोग इसी पोखर में छठ व्रत करेंगे। स्थानीय निवासी प्रफुल्ल मिश्रा ने कहा कि स्थानीय लोगों की पहल पर डोभा बन गए इस पोखर का कायाकल्प हो गया है। इस बार छठ महापर्व इस पोखर में किया जाएगा।
Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: देश में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर उर्फ मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पूरा होने का इंतजार सभी को बेसब्री से है. क्योंकि यह देश की पहली बुलेट ट्रेन होगी. इस प्रोजेक्ट पर काम तेजी से जारी है. इसी कड़ी में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चार बुलेट ट्रेन स्टेशनों ठाणे, विरार, बोइसर और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के प्रस्तावित स्वरूप की तस्वीरें जारी की गई. मुंबई में गुरुवार को एक कार्यक्रम में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत आने वाले बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन के डिजाइन सार्वजनिक किए गए. (Image- Twitter @TheMahaIndex) हालांकि, इससे पहले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन के डिजाइन की कुछ स्लाइड्स पहले जारी की गई थीं, लेकिन यह पहली बार है जब तस्वीरों का पूरा सेट सामने आया है. कहा जाता है कि स्टेशन का डिजाइन बादलों और अरब सागर की ऊंची उठती लहरों से प्रेरित है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स भारत का पहला अंडरसी स्टेशन यानी समंदर के अंदर होगा और एचएसआर स्टेशन एकमात्र भूमिगत स्टेशन होगा जिस पर गुरुवार को काम शुरू किया गया. स्टेशन को जमीनी स्तर से लगभग 24 मीटर की गहराई पर बनाने की योजना है. इसके तीन स्तर होंगे- एक प्लेटफॉर्म, कॉन्कोर्स और सर्विस फ्लोर, विक्रोली में निर्माण कार्य चल रहा है. परियोजना प्रबंधक यूपी सिंह ने कहा, "हम जमीनी स्तर से लगभग 24 मीटर नीचे 6 प्लेटफॉर्म बनाने जा रहे हैं. स्टेशनों के तीन स्तर हैं जिनमें स्टेशन सुविधाएं, यात्री सुविधाएं और प्रत्येक स्तर पर प्लेटफॉर्म शामिल हैं. " इसमें दो एंट्री और एग्जिट प्वाइंट होंगे, इनमें प्वाइंट 2बी पर पास के मेट्रो स्टेशन और दूसरा एमटीएनएल भवन की ओर होगा. कॉन्कोर्स और प्लेटफॉर्म स्तरों पर यात्रियों की आवाजाही और सुविधाओं के लिए पर्याप्त जगह को एडजस्ट करने के लिए स्टेशन का डिजाइन तैयार किया गया है. मुंबई में गुरुवार को एक कार्यक्रम में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत आने वाले बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन के डिजाइन सार्वजनिक किए गए. (Image- Twitter @TheMahaIndex)
Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project: देश में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर उर्फ मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पूरा होने का इंतजार सभी को बेसब्री से है. क्योंकि यह देश की पहली बुलेट ट्रेन होगी. इस प्रोजेक्ट पर काम तेजी से जारी है. इसी कड़ी में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चार बुलेट ट्रेन स्टेशनों ठाणे, विरार, बोइसर और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के प्रस्तावित स्वरूप की तस्वीरें जारी की गई. मुंबई में गुरुवार को एक कार्यक्रम में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत आने वाले बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन के डिजाइन सार्वजनिक किए गए. हालांकि, इससे पहले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन के डिजाइन की कुछ स्लाइड्स पहले जारी की गई थीं, लेकिन यह पहली बार है जब तस्वीरों का पूरा सेट सामने आया है. कहा जाता है कि स्टेशन का डिजाइन बादलों और अरब सागर की ऊंची उठती लहरों से प्रेरित है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स भारत का पहला अंडरसी स्टेशन यानी समंदर के अंदर होगा और एचएसआर स्टेशन एकमात्र भूमिगत स्टेशन होगा जिस पर गुरुवार को काम शुरू किया गया. स्टेशन को जमीनी स्तर से लगभग चौबीस मीटर की गहराई पर बनाने की योजना है. इसके तीन स्तर होंगे- एक प्लेटफॉर्म, कॉन्कोर्स और सर्विस फ्लोर, विक्रोली में निर्माण कार्य चल रहा है. परियोजना प्रबंधक यूपी सिंह ने कहा, "हम जमीनी स्तर से लगभग चौबीस मीटर नीचे छः प्लेटफॉर्म बनाने जा रहे हैं. स्टेशनों के तीन स्तर हैं जिनमें स्टेशन सुविधाएं, यात्री सुविधाएं और प्रत्येक स्तर पर प्लेटफॉर्म शामिल हैं. " इसमें दो एंट्री और एग्जिट प्वाइंट होंगे, इनमें प्वाइंट दोबी पर पास के मेट्रो स्टेशन और दूसरा एमटीएनएल भवन की ओर होगा. कॉन्कोर्स और प्लेटफॉर्म स्तरों पर यात्रियों की आवाजाही और सुविधाओं के लिए पर्याप्त जगह को एडजस्ट करने के लिए स्टेशन का डिजाइन तैयार किया गया है. मुंबई में गुरुवार को एक कार्यक्रम में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत आने वाले बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन के डिजाइन सार्वजनिक किए गए.
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की सिफारिश के मद्देनजर राजीव गांधी हत्याकांड के सभी छह दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया। मई में, शीर्ष अदालत ने एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था, जिन्हें 1991 में पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने दोषियों को रिहा करने का आदेश पारित किया। इसमें कहा गया है कि पेरारीवलन से संबंधित अदालत का आदेश मामले के अन्य सभी दोषियों पर लागू होता है और यह भी कहा गया है कि तमिलनाडु ने मामले के सभी दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की है। दोषियों एस नलिनी और आरपी रविचंद्रन ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने जेल से रिहाई की मांग करने वाली उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। याचिकाओं के जवाब में, तमिलनाडु सरकार ने कहा कि दोनों ने 30 साल से अधिक जेल की सजा काट ली है और उसने चार साल पहले सभी सात दोषियों की सजा को मंजूरी दे दी थी। 18 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय करने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया, क्योंकि उसने पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया था। (आईएएनएस)
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की सिफारिश के मद्देनजर राजीव गांधी हत्याकांड के सभी छह दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया। मई में, शीर्ष अदालत ने एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था, जिन्हें एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने दोषियों को रिहा करने का आदेश पारित किया। इसमें कहा गया है कि पेरारीवलन से संबंधित अदालत का आदेश मामले के अन्य सभी दोषियों पर लागू होता है और यह भी कहा गया है कि तमिलनाडु ने मामले के सभी दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की है। दोषियों एस नलिनी और आरपी रविचंद्रन ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने जेल से रिहाई की मांग करने वाली उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। याचिकाओं के जवाब में, तमिलनाडु सरकार ने कहा कि दोनों ने तीस साल से अधिक जेल की सजा काट ली है और उसने चार साल पहले सभी सात दोषियों की सजा को मंजूरी दे दी थी। अट्ठारह मई को, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद एक सौ बयालीस के तहत पूर्ण न्याय करने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया, क्योंकि उसने पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया था।
उत्तर प्रदेश के एंटी-रोमियो स्क्वॉड की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने ऑपरेशन दुर्गा लांच किया गया है। एंटी-रोमियो को मिलती कामयाबी के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए हरियाणा सरकार ने इसका गठन किया है। बुधवार को गठित हुए ऑपरेशन दुर्गा की टीम ने पहले ही दिन करीब 72 मनचलों को पकड़ा। ऑपरेशन दुर्गा के लिए 24 टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों में ज्यादातर महिला अधिकारी और महिला सिपाही शामिल हैं। ऑपरेशन दुर्गा का गठन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के फ्लाईंग स्क्वॉड द्वारा किया गया है। ऑपरेशन दुर्गा की टीम के लिए हर सार्वजनिक स्थल पर अन्य पुलिसवालों को भी तैनात किया गया है। ऑपरेशन दुर्गा की टीमों ने राज्य के सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, कॉलेज, बस स्टेंड और रेलवे स्टेशन से महिलाओं के साथ छेड़खानी और उनपर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में कई मनचलों को गिरफ्तार किया।
उत्तर प्रदेश के एंटी-रोमियो स्क्वॉड की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने ऑपरेशन दुर्गा लांच किया गया है। एंटी-रोमियो को मिलती कामयाबी के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए हरियाणा सरकार ने इसका गठन किया है। बुधवार को गठित हुए ऑपरेशन दुर्गा की टीम ने पहले ही दिन करीब बहत्तर मनचलों को पकड़ा। ऑपरेशन दुर्गा के लिए चौबीस टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों में ज्यादातर महिला अधिकारी और महिला सिपाही शामिल हैं। ऑपरेशन दुर्गा का गठन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के फ्लाईंग स्क्वॉड द्वारा किया गया है। ऑपरेशन दुर्गा की टीम के लिए हर सार्वजनिक स्थल पर अन्य पुलिसवालों को भी तैनात किया गया है। ऑपरेशन दुर्गा की टीमों ने राज्य के सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, कॉलेज, बस स्टेंड और रेलवे स्टेशन से महिलाओं के साथ छेड़खानी और उनपर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में कई मनचलों को गिरफ्तार किया।
नई दिल्ली। । बांग्लादेश के बाएं हाथ के स्पिनर अब्दुर रज्जाक अब बांग्लादेश क्रिकेट टीम के चयनकर्ता बना सकते हैं। अपनी क्रिकेट टीम को अगले स्तर पर पहुंचाने के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) निरंतर प्रयासों में लगा है। इसी के तहत ही BCB ने रज्जाक को खेल को अलविदा कहने को कहा है जिससे उसे टीम का चयनकर्ता बनाया जा सके। रज्जाक अभी भी घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं और BCB चाहती है कि चयन समिति में खाली हुआ एक पद रज्जाक को दिया जाना चाहिये। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर रज्जाक के लंबे अनुभव को देखते हुए ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड उन्हें चयनकर्ता की भूमिका में देखना चाहता है। बांग्लादेश क्रिकेट के अध्यक्ष अकरम खान ने कहा कि उन्होंने रज्जाक को बंगबंधु ढाका प्रीमियर डिविजन क्रिकेट लीग के दौरान ही चयनकर्ता बनने के लिए प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अबतक स्वीकार नहीं किया है। अब कोरोना वायरस की वजह से लीग स्थगित हो गई है तो संभव है कि रज्जाक संन्यास लेकर बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के चयनकर्ता बन जाएं। रज्जाक का ये भी कहना है कि मुझे चयनकर्ता बनने के लिए क्रिकेट छोड़ना पड़ेगा जो आसान नहीं होगा। रज्जाक ने बांग्लादेश की ओर से 13 टेस्ट, 153 एकदिवसीय और 34 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। रज्जाक अब भी बांग्लादेश की लोकल लीग खेल रहे हैं।
नई दिल्ली। । बांग्लादेश के बाएं हाथ के स्पिनर अब्दुर रज्जाक अब बांग्लादेश क्रिकेट टीम के चयनकर्ता बना सकते हैं। अपनी क्रिकेट टीम को अगले स्तर पर पहुंचाने के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड निरंतर प्रयासों में लगा है। इसी के तहत ही BCB ने रज्जाक को खेल को अलविदा कहने को कहा है जिससे उसे टीम का चयनकर्ता बनाया जा सके। रज्जाक अभी भी घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं और BCB चाहती है कि चयन समिति में खाली हुआ एक पद रज्जाक को दिया जाना चाहिये। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर रज्जाक के लंबे अनुभव को देखते हुए ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड उन्हें चयनकर्ता की भूमिका में देखना चाहता है। बांग्लादेश क्रिकेट के अध्यक्ष अकरम खान ने कहा कि उन्होंने रज्जाक को बंगबंधु ढाका प्रीमियर डिविजन क्रिकेट लीग के दौरान ही चयनकर्ता बनने के लिए प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अबतक स्वीकार नहीं किया है। अब कोरोना वायरस की वजह से लीग स्थगित हो गई है तो संभव है कि रज्जाक संन्यास लेकर बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के चयनकर्ता बन जाएं। रज्जाक का ये भी कहना है कि मुझे चयनकर्ता बनने के लिए क्रिकेट छोड़ना पड़ेगा जो आसान नहीं होगा। रज्जाक ने बांग्लादेश की ओर से तेरह टेस्ट, एक सौ तिरेपन एकदिवसीय और चौंतीस टीबीस अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। रज्जाक अब भी बांग्लादेश की लोकल लीग खेल रहे हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई, एसीबी पर उन्हें फंसाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. केजरीवाल ने कहा सीबीआई और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की किसी भी फाइल को जांच करने के लिए मांग ले रहे हैं, ताकि किसी भी तरह से किसी भी मामले में उन्हें फंसा सकें. डीजेबी का प्रभार केजरीवाल के पास है. केजरीवाल ने कई ट्वीट करते हुए घोषणा की कि वह सीबीआई और एसीबी ने जो फाइले मांगी हैं, उसकी लिस्ट सबके सामने रखेंगे और उनसे कहा कि या तो वे कारण बताएं या राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दिल्लीवालों से माफी मांगें. केजरीवाल ने पिछले साल सितम्बर में जल विभाग का प्रभार संभाला था. साल 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उन्होंने किसी विभाग का प्रभार लिया था. राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड के प्रमुख केजरीवाल हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ' प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल और भाजपा अगर आपके पास कोई विशिष्ट जानकारी है तो कृपया जांच कीजिए. लेकिन दिल्ली सरकार के सभी विभागों का कामकाज बंद कर दिल्ली के लोगों को कष्ट मत दीजिए. ' एक अन्य ट्वीट में मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करने के लिए उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल से सोमवार को मुलाकात करने का समय मांगा है. पिछले कुछ दिनों में केजरीवाल ने कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. साल 2017 में पंजाब में आप के खराब प्रदर्शन और उत्तर प्रदेश में भाजपा की शानदार जीत के बाद केजरीवाल ने मोदी पर निशाना साधना कम कर दिया था. (इनपुट भाषा से) .
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई, एसीबी पर उन्हें फंसाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. केजरीवाल ने कहा सीबीआई और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा दिल्ली जल बोर्ड की किसी भी फाइल को जांच करने के लिए मांग ले रहे हैं, ताकि किसी भी तरह से किसी भी मामले में उन्हें फंसा सकें. डीजेबी का प्रभार केजरीवाल के पास है. केजरीवाल ने कई ट्वीट करते हुए घोषणा की कि वह सीबीआई और एसीबी ने जो फाइले मांगी हैं, उसकी लिस्ट सबके सामने रखेंगे और उनसे कहा कि या तो वे कारण बताएं या राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दिल्लीवालों से माफी मांगें. केजरीवाल ने पिछले साल सितम्बर में जल विभाग का प्रभार संभाला था. साल दो हज़ार पंद्रह में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उन्होंने किसी विभाग का प्रभार लिया था. राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड के प्रमुख केजरीवाल हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ' प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल और भाजपा अगर आपके पास कोई विशिष्ट जानकारी है तो कृपया जांच कीजिए. लेकिन दिल्ली सरकार के सभी विभागों का कामकाज बंद कर दिल्ली के लोगों को कष्ट मत दीजिए. ' एक अन्य ट्वीट में मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करने के लिए उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल से सोमवार को मुलाकात करने का समय मांगा है. पिछले कुछ दिनों में केजरीवाल ने कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. साल दो हज़ार सत्रह में पंजाब में आप के खराब प्रदर्शन और उत्तर प्रदेश में भाजपा की शानदार जीत के बाद केजरीवाल ने मोदी पर निशाना साधना कम कर दिया था. .
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः झारखंड के लोहरदगा जिले के हिरही भोक्ता बगीचा इलाके के पास रामनवमी की शोभायात्रा पर पथराव और जुलूस में शामिल लोगों पर धारदार हथियारों से किये गए हमले में दर्जनों लोग घायल हो गये, जिससे पूरे जिले में तनाव फैल गया. हालात को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोहरदगा में कुजरा की ओर से रामनवमी की शोभायात्रा आ रही थी तभी कब्रिस्तान के पास दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने नारेबाजी नहीं करने के लिये कहा. लेकिन जब तक कोई कुछ समझ पाता कुछ शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पथराव शुरू हो गया, जिसमें अनेक लोग घायल हो गए।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः झारखंड के लोहरदगा जिले के हिरही भोक्ता बगीचा इलाके के पास रामनवमी की शोभायात्रा पर पथराव और जुलूस में शामिल लोगों पर धारदार हथियारों से किये गए हमले में दर्जनों लोग घायल हो गये, जिससे पूरे जिले में तनाव फैल गया. हालात को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोहरदगा में कुजरा की ओर से रामनवमी की शोभायात्रा आ रही थी तभी कब्रिस्तान के पास दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने नारेबाजी नहीं करने के लिये कहा. लेकिन जब तक कोई कुछ समझ पाता कुछ शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पथराव शुरू हो गया, जिसमें अनेक लोग घायल हो गए।
लखनऊ। गोमती नगर जन कल्याण महासमिति की प्रबंध समिति की बैठक हुई। जिसमें प्रबंध समिति के सदस्य एवं वार्ड प्रभारी उपस्थित रहे। महासमिति के महासचिव डॉ राघवेंद्र शुक्ल ने महासमिति के द्वारा किए गए सेवा विकास कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की जिसमें पन्द्रह दिन चले अभियान में जरूरतमंदों एवं गरीबों को वस्त्र वितरण कंबल वितरण भोजन वितरण एवं मकर संक्रांति के उत्सव पर खत्री भवन में तहरी भोज का आयोजन किया गया। महासमिति के प्रयास से गोमती नगर क्षेत्र में एलडीए पीडब्ल्यूडी नगर निगम द्वारा सोलह सड़कों का निर्माण कराया गया गोमती नगर में लगभग सभी पार्कों का सुंदरीकरण एवं विकासकार्य एवम बिजली की व्यवस्था पीएनजी गैस लगवाने पेड़ कटवाने शुद्ध पेयजल जल नालियों के सफाई हेतु नगर निगम नगर विकास मंत्री की सराहना की गई। महासमिति ने लखनऊ को राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) बनाने हेतु एवं जुगौली क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर एवं अंडरपास बनाने हेतु रक्षा मंत्री को निवेदन किया है समता मूलक चौराहा स्वीकृत फ्लाईओवर के लिए भी धन्यवाद किया। मिठाई वाले चौराहे से हनीमैन चौराहा एवं डॉ राम मनोहर लोहिया से शहीद पथ तक जाम से निजात हेतु एलिमेटेड रोड बनवाने हेतु आग्रह किया महासमिति का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तथा कार्यपालिका की सूची व भावी प्रबंध कार्यकारिणी सदस्यों की स्वीकृत भी सभा में की गई महासमिति के कोषाध्यक्ष श्री पी आर पांडे जी ने आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया एवं सभा में सर्व सहमति से उपयुक्त प्रस्ताव की चर्चा में पारित किए। अंत में महासमिति के अध्यक्ष डॉक्टर बी एन सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। यह जानकारी सचिव डॉक्टर पशुपति नाथ पांडे ने दी।
लखनऊ। गोमती नगर जन कल्याण महासमिति की प्रबंध समिति की बैठक हुई। जिसमें प्रबंध समिति के सदस्य एवं वार्ड प्रभारी उपस्थित रहे। महासमिति के महासचिव डॉ राघवेंद्र शुक्ल ने महासमिति के द्वारा किए गए सेवा विकास कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की जिसमें पन्द्रह दिन चले अभियान में जरूरतमंदों एवं गरीबों को वस्त्र वितरण कंबल वितरण भोजन वितरण एवं मकर संक्रांति के उत्सव पर खत्री भवन में तहरी भोज का आयोजन किया गया। महासमिति के प्रयास से गोमती नगर क्षेत्र में एलडीए पीडब्ल्यूडी नगर निगम द्वारा सोलह सड़कों का निर्माण कराया गया गोमती नगर में लगभग सभी पार्कों का सुंदरीकरण एवं विकासकार्य एवम बिजली की व्यवस्था पीएनजी गैस लगवाने पेड़ कटवाने शुद्ध पेयजल जल नालियों के सफाई हेतु नगर निगम नगर विकास मंत्री की सराहना की गई। महासमिति ने लखनऊ को राज्य राजधानी क्षेत्र बनाने हेतु एवं जुगौली क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर एवं अंडरपास बनाने हेतु रक्षा मंत्री को निवेदन किया है समता मूलक चौराहा स्वीकृत फ्लाईओवर के लिए भी धन्यवाद किया। मिठाई वाले चौराहे से हनीमैन चौराहा एवं डॉ राम मनोहर लोहिया से शहीद पथ तक जाम से निजात हेतु एलिमेटेड रोड बनवाने हेतु आग्रह किया महासमिति का वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से इकतीस मार्च तथा कार्यपालिका की सूची व भावी प्रबंध कार्यकारिणी सदस्यों की स्वीकृत भी सभा में की गई महासमिति के कोषाध्यक्ष श्री पी आर पांडे जी ने आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया एवं सभा में सर्व सहमति से उपयुक्त प्रस्ताव की चर्चा में पारित किए। अंत में महासमिति के अध्यक्ष डॉक्टर बी एन सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। यह जानकारी सचिव डॉक्टर पशुपति नाथ पांडे ने दी।
पूर्व के भाग में आपने पढ़ा, नियति और मयंक दोनो ही गंभीर रूप से घायल होते है। नियति की चोट बाहरी थी, वहीं मयंक की चोट अंदरूनी थी। ऊपर से देखने पर मयंक बिलकुल ठीक लग रहा था, पर इन चोटें ने उसे अंदर से बहुत ज्यादा घायल कर दिया था। फल स्वरूप दूसरे दिन मयंक इस दुनिया से .....सदा... सदा......के लिए चला गया। नियति की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उसकी मां उसे लेकर उसके ससुराल पहुंचती है। नियति को अंदर से किसी अनहोनी की आशंका हो रही थी। पढ़े आगे क्या हुआ जब नियति अपने घर पहुंची? मां की बातों से नियति को यकीन होने लगा की कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। ऑटो रुकते ही उसके बीमार, घायल शरीर में पता नही कहां से इतनी ताकत आ गई। घर के साथ वाली सड़क पर घुसते ही वहां के वातावरण में एक अजीब सी मंहुसियत उसे महसूस होने लगी। जैसे हर पेड़, उसका हर पत्ता पत्ता उसे बताना चाह रहा हो की, "नियति तुम्हारी जिंदगी में एक बहुत बड़ा तूफान आ चुका है। तुम अभी जिसके साथ चंद घंटे पहले हसती खिलखिलाती बेटी का बर्थ डे मना रही थी। जो हर पल तुमपे कुर्बान हुआ जाता था। वही अब तुम्हे अकेला छोड़ गया है।" नियति पल भर के लिए भूल गई की मां भी साथ में है। उन्हे वहीं छोड़ वो लगभग दौड़ती हुई सी घर का मेन गेट खोल अंदर दाखिल हो गई। जैसे ही वो अंदर गई। नीता मौसी दिखीं । वो उनकी ओर बढ़ी। उसे देख नीता का सब्र टूट गया । नीना देवी ने ही सिर्फ अपना बेटा नहीं खोया था। नीता की भी गोद सूनी हुई थी। मयंक उसका बेटा, भांजा सब कुछ ही तो था। ये बात अलग थी की वो खुद पर नियंत्रण नहीं को रही थी। अभी तक नीता ने भी अपने आंसू जज्ब कर रक्खे थे। नियति को देखते ही बड़ी कोशिश से रोका गया सब्र खत्म हो गया। अब वो पूरी वेग से बह जाने को आतुर था। नियति के पास आते हीं वो उसे गले लगा कर फूट फूट कर रोने लगीं। नियति का दिल बैठा जा रहा था। नीता मौसी को यूं रोते देख उन्हे खुद से अलग किया और तेज आवाज में चीख उठी, "मौसी क्या हुआ मयंक को? आप ऐसे रो क्यों रही है?"कह कर वो अंदर अपने कमरे की ओर देखने जाने लगी। नीता ने उसे अंदर जाने से रोक लिया और उसे गले लगाते हुए रो कर बोली, "नियति बेटा हमारा मयंक अब हमारे साथ नहीं है। वो हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चला गया।" ये शब्द नियति के कानो में ऐसे उतरे जैसे किसी ने गर्म शीशा उड़ेल दिया हो। वो तड़प गई। "मौसी ये आप क्या कह रही है? ऐसा नही हो सकता! मेरा मयंक अपनी नियति को यूं अकेले छोड़ कर नही जा सकता।" नीता उसे समझती हुई बोली, पर बेटा ऐसा अनर्थ भगवान कर चुके हैं। तुम संभालो खुद को।" नियति के कदम लड़खड़ा गए। वो खुद पर नियंत्रण नही रख सकी। नीता उसे सहारा देकर उसके कमरे तक ले गई, और बेड पर लिटा दिया। नियति कुछ देर बाद संयत हुई तो देखा मां भी उसके पास ही बैठी है। नीता मौसी और मां को देख कर नियति के अंदर का तूफान फट पड़ा। वो बर्दाश्त नही कर पा रही थी कि उसको किसी ने मयंक के आखिरी दर्शन कराना भी जरूरी नही समझा। वो नीता से पूछने लगी, "मौसी क्या ये भी भगवान की ही इच्छा थी कि मैं उसे आखिरी बार भी ना देखूं! ऐसा क्यों हुआ मौसी आपने मुझे मयंक के आखिरी दर्शन से क्यों वंचित रक्खा?" नीता के पास उसके इन सारे प्रश्नों ना कोई उत्तर नही था। वो क्या कहती नियति से की मैने कोशिश की थी लेकिन जीजी ने तुम्हे नही बुलाने दिया।नीता भले ही खुद बुरी बन रही थी पर सास बहू के बीच दूरियां पैदा नही करना चाह रही थी। इस कारण बोली, "नही बेटा तेरी तबीयत नही ठीक थी, इसी वजह से तुझे हम नही लाए। डॉक्टर से तुझे स्ट्रेस लेने से मना किया था। अभी भी तेरी तबीयत ठीक नहीं है बेटा तू आराम कर।" कह कर नीता ने उसे लिटा दिया। नीता शुक्र मना रही थी कि बाहर ही जीजी नही मिल गई वरना वो शायद ही नियति को घर में घुसने देती। थोड़ा काम तो हो गया था, अब बड़ी बहन को शांत कर नियति को रहने देने की बारी थी। नीना का सर दर्द हो रहा था। वो ऊपर के कमरे में दवा खा कर सो रही थी। शांता को नियति का ध्यान रखने को बोल कर वो दबे कदमों से बहन के पास ऊपर गई। घर में जो रिश्तेदार थे उनकी निगाह इसी बात पर लगी थी की अब देखे नीना देवी क्या करती है? बहू को रखती है या घर से निकल देती है। रहने देगी इसकी आशा तो न के बराबर थी। जिस तरह वो नियति से खफा थीं। ये जानने पर की नियति आ गई है, एक तूफान आना तय था। कमरे से कोई आहट ना पाकर नीता वहीं इंतजार करने लगी बहन के जागने का। जितनी देर तूफान टला रहे उतना ही अच्छा हो। जब से नियति की मां घर के अंदर आई थीं उनकी निगाहें मिनी को ही ढूंढ रही थी, पर वो कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। शांता से पूछा तो वो बोली, "अभी ले आती हूं।" इसके थोड़ी देर बाद मिनी को नहला धुला कर शांता ले आई। उसे नानी के पास दे दिया। पर नानी को इतने दिन बाद देखने के कारण मिनी उनके पास रोने लगी, तो नियति की मां ने उसे नियति के पास लिटा दिया। मिनी का स्पर्श पाते ही नियति ने उसे सीने से चिपका लिया। जिस मिनी को एक पल के लिए भी अपनी आंखो से ओझल नहीं करती थी, आज पांचवा दिन था उससे दूर हुए। अब वही मेरे जीने का सहारा है। ऐसा ख्याल मन में आते हीं मिनी को सीने से भींचे नियति की आंखे नम होने लगी। करीब दो घंटे बाद नीना जागी। बाहर बैठी नीता को जब आभास हुआ की जीजी जग गई है तो वो अंदर चली गई और बोली, "अब सर दर्द कैसा है जीजी?" नीना बोली, "आराम है अब तो। पहले बड़ा ही भयंकर दर्द उठा था। दवा खा कर नींद आ गई। तब जाकर दर्द से राहत मिली। मिनी कहां है? इस दर्द की वजह से मै अपनी बच्ची का भी ध्यान नहीं दे पाई।" नीता बोली, "मिनी नहा कर सो रही है दीदी आप उसकी चिंता मत करो। आप अपनी तबीयत पर ध्यान दो। जीजी चाय बनी है आप बैठो मैं तुरंत ले कर आती हूं।" इतना कह नीता नीना को कमरे में बिठा कर चली गई। नियति के बारे में बात करने को नीता को कुछ वक्त चाहिए था, जब वह बिना किसी बाधा के आराम से बहन को समझा सके। चाय पीने में कुछ वक्त तो लगेगा ही इस समय में वो दीदी को समझाने का प्रयास करेगी कि वो नियति को यहीं रहने दे। वैसे ही वो इतनी दुखी है। इस समय नही रहने दिया घर में तो वो बिचारी कैसे जिएगी? जल्दी से एक कप चाय लेकर नीता बहन के पास गई। नीना को सच में चाय की जरूरत थी। अपनी बहन को अपनी इच्छा समझते देख नीना का दिल छू गया। बात तो बहुत छोटी सी थी पर अपना इतना ध्यान रखना उसके मन को छू गया। नीता के हाथ से कप लेते हुए नीना बोली, "नीता तू कैसे जान गई की मुझे चाय की इच्छा हो रही है!" चाय पीते हुए नीना ने नीता के सर पे हाथ फेर कर बोली, "सदा खुश रह मेरी बहन, तू मेरा कितना ध्यान रखती है! इस दुख की घड़ी में तू मेरे साथ न होती तो मैं क्या करती? तूने और चंचल ने मिल कर सब संभाल लिया। वरना पता नहीं क्या होता?" दीदी का मूड ठीक देख नीता को बल मिला। अब वो अंदर से मजबूत पा रही थी खुद को। नियति आई है और उसने बिना उन्हें बताए उसे घर में रोक लिया है। जो अब तक बताने में डर रही थी। जीजी की बातों से साहस आ गया था। नीता बहन के और पास खिसक आई और उनका हाथ अपने हाथ में ले सहलाते हुए बोली, "जीजी भगवान ने पता नहीं क्यों इतना बड़ा अनर्थ कर दिया कुछ समझ नहीं आता। मैने आपका ध्यान रख कर कोई एहसान नही किया। आप मेरी बड़ी बहन हो और मयंक मेरे लिए बेटे से जरा भी कमतर नहीं था।" जरा सा रुक कर फिर कहना शुरू किया, "दीदी हम सब लोग तो फिर भी सब्र कर लें, पर जरा नियति का तो सोचो!... उस बिचारी ने अभी अपनी जिंदगी में देखा ही क्या था? अभी अभी तो उसने अपने जीवन की शुरुआत की थी। वो इस सदमे को कैसे सहेगी! बिचारी ने मायके में भी जीवन सिर्फ काटा ही था। जीना तो उसने मयंक से शादी के बाद शुरू किया था। वो कैसे मयंक के बिना जिएगी? फिर हमने उसे मयंक के आखिरी दर्शन भी नहीं करने दिया। दीदी..!, आपसे एक बात कहनी है, जो हुआ सो हुआ पर अब हमें नियति का साथ देना चाहिए।" मनुहार करते हुए स्वर को अत्यधिक कोमल बनाते हुए नीता बोली, "दीदी नियति अभी कुछ देर पहले अपनी मां के साथ आई है। प्लीज उसे कुछ मत कहना। उसे रहने दो।" नीना के चेहरे का भाव बहन की बातें सुन कर बदल गया। अपना हाथ छुड़ा कर उठ खड़ी हुई और बोली, " तू भूल सकती है मैं नहीं। उसकी वजह से ही आज मैं अपने इकलौते बेटे को खो चुकी हूं। वो यहां नही रह सकती। मुझे और कुछ नहीं सुनना।" नीता बोली, "दीदी जरा तो सोचो रिश्तेदार, मित्र, समाज में सारे लोग क्या कहेंगे ! बेटे के जाते ही बहू को घर से निकाल दिया।" नीता भी उठ कर बहन के पास गई और उसके कंधे पर अपने हाथ रख कर बोली, "ठीक है दीदी... तुम्हे नियति को नही रहने देना है तो मत रहने दो.. पर उसे अभी ना जाने की कहो। काम से कम मयंक की तेरहवीं तक उसे रहने दो। फिर जो तुम्हारे जी में आए करना मैं नहीं रोकूंगी। बस दीदी मेरी इतनी बात मन लो... इज्जत रह जायेगी तुम्हारे घर की, और नियति को भी थोड़ा सा चैन मिलेगा इस कठिन वक्त में।" इतना कह कर नीता ने नीना के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए। नीता की बातों ने नीना के मन पर असर किया। वो सच कह रही थी। अभी तक जो भी परिचित, रिश्तेदार आते सबसे पहले नियति के बारे में ही पूछते। सभी की संवेदना नियति के साथ थी। उनके पूछने पर की नियति कहां है ? जवाब देना मुश्किल होता..। शक भरी नजरों से सब उन्हें देखते। उनको लगता की वो अन्याय कर रहीं हैं नियति के साथ। नीना ने कुछ देर सोचा फिर फैसला ले लिया। नियति को अभी रहने देते है। सारे कर्म काण्ड निपटने के बाद इस बारे में वो कोई कदम उठाएगी। नीना ने नीता की ओर देखा और बोली, " ठीक है नीता तू कहती है इस लिए उसे रहने दे रही हूं पर सिर्फ सारे क्रिया कर्म निपटने तक। पर उसके बाद मुझसे कोई उम्मीद मत रखना मैं उसकी शक्ल बर्दाश्त नहीं कर सकती! और हां ध्यान रखना वो मेरी नजरों से दूर ही रहे।" इतना कह कर वो बाहर जाने लगीं। नीता ने आभारपूर्ण नजरों से नीना को देखा और बोली, "हां दीदी जैसा आप चाहेंगी वैसा ही होगा। वो आपके सामने न आए इसकी पूरी कोशिश करूंगी।" दोनों बहने बाहर आ गई। ऐसा क्यों होता है ? एक सास अपनी बहू को अपना क्यों नहीं समझती? क्या सिर्फ इस लिए की उसे उनके बेटे ने खुद पसंद किया था....? क्या जिस घर में नियति ब्याह कर आई उस पर उसका सारा अधिकार पति के जाते ही खत्म हो गया...? नीना देवी ने तो अपना बेटा खोया था, पर नियति का तो वो पूरा जीवन आधार ही था। आगे पढ़े नियति ने आगे आने वाली मुश्किलों का सामना कैसे किया? क्या वाकई नीना देवी इतनी निष्ठुर हो गांव की नियति को घर से निकल दिया...! पढ़े अगले भाग में।
पूर्व के भाग में आपने पढ़ा, नियति और मयंक दोनो ही गंभीर रूप से घायल होते है। नियति की चोट बाहरी थी, वहीं मयंक की चोट अंदरूनी थी। ऊपर से देखने पर मयंक बिलकुल ठीक लग रहा था, पर इन चोटें ने उसे अंदर से बहुत ज्यादा घायल कर दिया था। फल स्वरूप दूसरे दिन मयंक इस दुनिया से .....सदा... सदा......के लिए चला गया। नियति की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उसकी मां उसे लेकर उसके ससुराल पहुंचती है। नियति को अंदर से किसी अनहोनी की आशंका हो रही थी। पढ़े आगे क्या हुआ जब नियति अपने घर पहुंची? मां की बातों से नियति को यकीन होने लगा की कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। ऑटो रुकते ही उसके बीमार, घायल शरीर में पता नही कहां से इतनी ताकत आ गई। घर के साथ वाली सड़क पर घुसते ही वहां के वातावरण में एक अजीब सी मंहुसियत उसे महसूस होने लगी। जैसे हर पेड़, उसका हर पत्ता पत्ता उसे बताना चाह रहा हो की, "नियति तुम्हारी जिंदगी में एक बहुत बड़ा तूफान आ चुका है। तुम अभी जिसके साथ चंद घंटे पहले हसती खिलखिलाती बेटी का बर्थ डे मना रही थी। जो हर पल तुमपे कुर्बान हुआ जाता था। वही अब तुम्हे अकेला छोड़ गया है।" नियति पल भर के लिए भूल गई की मां भी साथ में है। उन्हे वहीं छोड़ वो लगभग दौड़ती हुई सी घर का मेन गेट खोल अंदर दाखिल हो गई। जैसे ही वो अंदर गई। नीता मौसी दिखीं । वो उनकी ओर बढ़ी। उसे देख नीता का सब्र टूट गया । नीना देवी ने ही सिर्फ अपना बेटा नहीं खोया था। नीता की भी गोद सूनी हुई थी। मयंक उसका बेटा, भांजा सब कुछ ही तो था। ये बात अलग थी की वो खुद पर नियंत्रण नहीं को रही थी। अभी तक नीता ने भी अपने आंसू जज्ब कर रक्खे थे। नियति को देखते ही बड़ी कोशिश से रोका गया सब्र खत्म हो गया। अब वो पूरी वेग से बह जाने को आतुर था। नियति के पास आते हीं वो उसे गले लगा कर फूट फूट कर रोने लगीं। नियति का दिल बैठा जा रहा था। नीता मौसी को यूं रोते देख उन्हे खुद से अलग किया और तेज आवाज में चीख उठी, "मौसी क्या हुआ मयंक को? आप ऐसे रो क्यों रही है?"कह कर वो अंदर अपने कमरे की ओर देखने जाने लगी। नीता ने उसे अंदर जाने से रोक लिया और उसे गले लगाते हुए रो कर बोली, "नियति बेटा हमारा मयंक अब हमारे साथ नहीं है। वो हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चला गया।" ये शब्द नियति के कानो में ऐसे उतरे जैसे किसी ने गर्म शीशा उड़ेल दिया हो। वो तड़प गई। "मौसी ये आप क्या कह रही है? ऐसा नही हो सकता! मेरा मयंक अपनी नियति को यूं अकेले छोड़ कर नही जा सकता।" नीता उसे समझती हुई बोली, पर बेटा ऐसा अनर्थ भगवान कर चुके हैं। तुम संभालो खुद को।" नियति के कदम लड़खड़ा गए। वो खुद पर नियंत्रण नही रख सकी। नीता उसे सहारा देकर उसके कमरे तक ले गई, और बेड पर लिटा दिया। नियति कुछ देर बाद संयत हुई तो देखा मां भी उसके पास ही बैठी है। नीता मौसी और मां को देख कर नियति के अंदर का तूफान फट पड़ा। वो बर्दाश्त नही कर पा रही थी कि उसको किसी ने मयंक के आखिरी दर्शन कराना भी जरूरी नही समझा। वो नीता से पूछने लगी, "मौसी क्या ये भी भगवान की ही इच्छा थी कि मैं उसे आखिरी बार भी ना देखूं! ऐसा क्यों हुआ मौसी आपने मुझे मयंक के आखिरी दर्शन से क्यों वंचित रक्खा?" नीता के पास उसके इन सारे प्रश्नों ना कोई उत्तर नही था। वो क्या कहती नियति से की मैने कोशिश की थी लेकिन जीजी ने तुम्हे नही बुलाने दिया।नीता भले ही खुद बुरी बन रही थी पर सास बहू के बीच दूरियां पैदा नही करना चाह रही थी। इस कारण बोली, "नही बेटा तेरी तबीयत नही ठीक थी, इसी वजह से तुझे हम नही लाए। डॉक्टर से तुझे स्ट्रेस लेने से मना किया था। अभी भी तेरी तबीयत ठीक नहीं है बेटा तू आराम कर।" कह कर नीता ने उसे लिटा दिया। नीता शुक्र मना रही थी कि बाहर ही जीजी नही मिल गई वरना वो शायद ही नियति को घर में घुसने देती। थोड़ा काम तो हो गया था, अब बड़ी बहन को शांत कर नियति को रहने देने की बारी थी। नीना का सर दर्द हो रहा था। वो ऊपर के कमरे में दवा खा कर सो रही थी। शांता को नियति का ध्यान रखने को बोल कर वो दबे कदमों से बहन के पास ऊपर गई। घर में जो रिश्तेदार थे उनकी निगाह इसी बात पर लगी थी की अब देखे नीना देवी क्या करती है? बहू को रखती है या घर से निकल देती है। रहने देगी इसकी आशा तो न के बराबर थी। जिस तरह वो नियति से खफा थीं। ये जानने पर की नियति आ गई है, एक तूफान आना तय था। कमरे से कोई आहट ना पाकर नीता वहीं इंतजार करने लगी बहन के जागने का। जितनी देर तूफान टला रहे उतना ही अच्छा हो। जब से नियति की मां घर के अंदर आई थीं उनकी निगाहें मिनी को ही ढूंढ रही थी, पर वो कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। शांता से पूछा तो वो बोली, "अभी ले आती हूं।" इसके थोड़ी देर बाद मिनी को नहला धुला कर शांता ले आई। उसे नानी के पास दे दिया। पर नानी को इतने दिन बाद देखने के कारण मिनी उनके पास रोने लगी, तो नियति की मां ने उसे नियति के पास लिटा दिया। मिनी का स्पर्श पाते ही नियति ने उसे सीने से चिपका लिया। जिस मिनी को एक पल के लिए भी अपनी आंखो से ओझल नहीं करती थी, आज पांचवा दिन था उससे दूर हुए। अब वही मेरे जीने का सहारा है। ऐसा ख्याल मन में आते हीं मिनी को सीने से भींचे नियति की आंखे नम होने लगी। करीब दो घंटे बाद नीना जागी। बाहर बैठी नीता को जब आभास हुआ की जीजी जग गई है तो वो अंदर चली गई और बोली, "अब सर दर्द कैसा है जीजी?" नीना बोली, "आराम है अब तो। पहले बड़ा ही भयंकर दर्द उठा था। दवा खा कर नींद आ गई। तब जाकर दर्द से राहत मिली। मिनी कहां है? इस दर्द की वजह से मै अपनी बच्ची का भी ध्यान नहीं दे पाई।" नीता बोली, "मिनी नहा कर सो रही है दीदी आप उसकी चिंता मत करो। आप अपनी तबीयत पर ध्यान दो। जीजी चाय बनी है आप बैठो मैं तुरंत ले कर आती हूं।" इतना कह नीता नीना को कमरे में बिठा कर चली गई। नियति के बारे में बात करने को नीता को कुछ वक्त चाहिए था, जब वह बिना किसी बाधा के आराम से बहन को समझा सके। चाय पीने में कुछ वक्त तो लगेगा ही इस समय में वो दीदी को समझाने का प्रयास करेगी कि वो नियति को यहीं रहने दे। वैसे ही वो इतनी दुखी है। इस समय नही रहने दिया घर में तो वो बिचारी कैसे जिएगी? जल्दी से एक कप चाय लेकर नीता बहन के पास गई। नीना को सच में चाय की जरूरत थी। अपनी बहन को अपनी इच्छा समझते देख नीना का दिल छू गया। बात तो बहुत छोटी सी थी पर अपना इतना ध्यान रखना उसके मन को छू गया। नीता के हाथ से कप लेते हुए नीना बोली, "नीता तू कैसे जान गई की मुझे चाय की इच्छा हो रही है!" चाय पीते हुए नीना ने नीता के सर पे हाथ फेर कर बोली, "सदा खुश रह मेरी बहन, तू मेरा कितना ध्यान रखती है! इस दुख की घड़ी में तू मेरे साथ न होती तो मैं क्या करती? तूने और चंचल ने मिल कर सब संभाल लिया। वरना पता नहीं क्या होता?" दीदी का मूड ठीक देख नीता को बल मिला। अब वो अंदर से मजबूत पा रही थी खुद को। नियति आई है और उसने बिना उन्हें बताए उसे घर में रोक लिया है। जो अब तक बताने में डर रही थी। जीजी की बातों से साहस आ गया था। नीता बहन के और पास खिसक आई और उनका हाथ अपने हाथ में ले सहलाते हुए बोली, "जीजी भगवान ने पता नहीं क्यों इतना बड़ा अनर्थ कर दिया कुछ समझ नहीं आता। मैने आपका ध्यान रख कर कोई एहसान नही किया। आप मेरी बड़ी बहन हो और मयंक मेरे लिए बेटे से जरा भी कमतर नहीं था।" जरा सा रुक कर फिर कहना शुरू किया, "दीदी हम सब लोग तो फिर भी सब्र कर लें, पर जरा नियति का तो सोचो!... उस बिचारी ने अभी अपनी जिंदगी में देखा ही क्या था? अभी अभी तो उसने अपने जीवन की शुरुआत की थी। वो इस सदमे को कैसे सहेगी! बिचारी ने मायके में भी जीवन सिर्फ काटा ही था। जीना तो उसने मयंक से शादी के बाद शुरू किया था। वो कैसे मयंक के बिना जिएगी? फिर हमने उसे मयंक के आखिरी दर्शन भी नहीं करने दिया। दीदी..!, आपसे एक बात कहनी है, जो हुआ सो हुआ पर अब हमें नियति का साथ देना चाहिए।" मनुहार करते हुए स्वर को अत्यधिक कोमल बनाते हुए नीता बोली, "दीदी नियति अभी कुछ देर पहले अपनी मां के साथ आई है। प्लीज उसे कुछ मत कहना। उसे रहने दो।" नीना के चेहरे का भाव बहन की बातें सुन कर बदल गया। अपना हाथ छुड़ा कर उठ खड़ी हुई और बोली, " तू भूल सकती है मैं नहीं। उसकी वजह से ही आज मैं अपने इकलौते बेटे को खो चुकी हूं। वो यहां नही रह सकती। मुझे और कुछ नहीं सुनना।" नीता बोली, "दीदी जरा तो सोचो रिश्तेदार, मित्र, समाज में सारे लोग क्या कहेंगे ! बेटे के जाते ही बहू को घर से निकाल दिया।" नीता भी उठ कर बहन के पास गई और उसके कंधे पर अपने हाथ रख कर बोली, "ठीक है दीदी... तुम्हे नियति को नही रहने देना है तो मत रहने दो.. पर उसे अभी ना जाने की कहो। काम से कम मयंक की तेरहवीं तक उसे रहने दो। फिर जो तुम्हारे जी में आए करना मैं नहीं रोकूंगी। बस दीदी मेरी इतनी बात मन लो... इज्जत रह जायेगी तुम्हारे घर की, और नियति को भी थोड़ा सा चैन मिलेगा इस कठिन वक्त में।" इतना कह कर नीता ने नीना के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए। नीता की बातों ने नीना के मन पर असर किया। वो सच कह रही थी। अभी तक जो भी परिचित, रिश्तेदार आते सबसे पहले नियति के बारे में ही पूछते। सभी की संवेदना नियति के साथ थी। उनके पूछने पर की नियति कहां है ? जवाब देना मुश्किल होता..। शक भरी नजरों से सब उन्हें देखते। उनको लगता की वो अन्याय कर रहीं हैं नियति के साथ। नीना ने कुछ देर सोचा फिर फैसला ले लिया। नियति को अभी रहने देते है। सारे कर्म काण्ड निपटने के बाद इस बारे में वो कोई कदम उठाएगी। नीना ने नीता की ओर देखा और बोली, " ठीक है नीता तू कहती है इस लिए उसे रहने दे रही हूं पर सिर्फ सारे क्रिया कर्म निपटने तक। पर उसके बाद मुझसे कोई उम्मीद मत रखना मैं उसकी शक्ल बर्दाश्त नहीं कर सकती! और हां ध्यान रखना वो मेरी नजरों से दूर ही रहे।" इतना कह कर वो बाहर जाने लगीं। नीता ने आभारपूर्ण नजरों से नीना को देखा और बोली, "हां दीदी जैसा आप चाहेंगी वैसा ही होगा। वो आपके सामने न आए इसकी पूरी कोशिश करूंगी।" दोनों बहने बाहर आ गई। ऐसा क्यों होता है ? एक सास अपनी बहू को अपना क्यों नहीं समझती? क्या सिर्फ इस लिए की उसे उनके बेटे ने खुद पसंद किया था....? क्या जिस घर में नियति ब्याह कर आई उस पर उसका सारा अधिकार पति के जाते ही खत्म हो गया...? नीना देवी ने तो अपना बेटा खोया था, पर नियति का तो वो पूरा जीवन आधार ही था। आगे पढ़े नियति ने आगे आने वाली मुश्किलों का सामना कैसे किया? क्या वाकई नीना देवी इतनी निष्ठुर हो गांव की नियति को घर से निकल दिया...! पढ़े अगले भाग में।
"हो जाने दो ! अधिक से अधिक क्या होगा ? हमें घर बैठने की मिल जायेगो - यही न ? बँट जायेंगे हम । माधव यदि समर्थ बनता है प्रसन्नता होगो !" "मुनो ! तात्या मुनो ! और आप कहते हैं, मैं दादा साहब से बापू बोले । आज्ञा तो हमें पहूँ !" गंगोवा जंघा पर थाप मारते हुए बोले, "दादा साहब ! याप-जैसे उदारमन के बहुत पोड़े लोग होते है ! इतना सोधापन राजनीति में नहीं चलता है। यदि यह केवल घर का मामला होता, तो हमने कुछ न वहा होता । परन्तु रावसाहव ने मातारकरजी की किले से नीचे उतारकर मुखत्यारी दे दी है। धाराबाई के बाद जिजाबाई के साथ सहयोग की बातें शुरू हो रही है । इसके परिणाम सारे राज्य को एक दिन भोगने पड़ेंगे । उनका तरुण रक्त है। गोपालराव की ओर उनको छेड़छाड़ लड़करन में गिन ली जायेगो, विन्तु उसका अस्थत आपके मध्ये मह दिया जायेगा। उसके उत्तरदायो आप रहेंगे, इस बात को दाश साहब ध्यान में रखें !" "तात्या ! इस ओर मेरा ध्यान नहीं है, यह समझते हैं क्या आप ? मैं क्या चुप बैठा हुआ हूँ ? मैंने भाभी सादिया को वचन दिया है। मायके आने को राह देख रहा हूँ।" "अनुमान है कि रावसाहब सम्भवतः मृगनक्षत्र के प्रारम्भ में आ पहुँचेंगे !" बापू थाले । "ठीक हूँ। जब आयेंगे सभी सब बातों का निपटारा कर लेंगे। गंगोवा, हम भी जितने अकेले समझे जाते हैं, उतने अलग थलग अभी नहीं है।" "धि-छि ! यह कौन कहता है ! आप बाहर निकलेंगे तो सारी मराठेशाही व्यापकी सहायता के लिए बड़ी हो जायेगी। आपके पराक्रम से कौन परिचित नहीं है ? माना ग्राहव मापसे कभी कुछ न कह सके । आपका वह दवदवा गया हम जानते नहीं है ? राघोबा एकदम प्रसन्न हो गये। वे दिल खोलकर हँस पड़े । उम्र हंसो में बापू तात्मा शामिल हो गये और उसी समय सेवक गरवत का थाल लेकर अन्दर आया । बापू और गंगोदा को उठते देशकर दाश चोले, "रुको तारया दारबत पोकर जाना ।" शरबत पोते-पोते दादा बोले, "तात्या, आज सायंकाल हम पर्वतो पर जायेंगे । आपको भी चलना चाहिए ।" दारयत का चपक थाल में रखकर अंगोछे से मुंह पोंछते हुए गंगोवा बोले, "श्रोमन्त, बहुत दिनों बाद ऐमा लगा कि पेशवाओं के महल में
"हो जाने दो ! अधिक से अधिक क्या होगा ? हमें घर बैठने की मिल जायेगो - यही न ? बँट जायेंगे हम । माधव यदि समर्थ बनता है प्रसन्नता होगो !" "मुनो ! तात्या मुनो ! और आप कहते हैं, मैं दादा साहब से बापू बोले । आज्ञा तो हमें पहूँ !" गंगोवा जंघा पर थाप मारते हुए बोले, "दादा साहब ! याप-जैसे उदारमन के बहुत पोड़े लोग होते है ! इतना सोधापन राजनीति में नहीं चलता है। यदि यह केवल घर का मामला होता, तो हमने कुछ न वहा होता । परन्तु रावसाहव ने मातारकरजी की किले से नीचे उतारकर मुखत्यारी दे दी है। धाराबाई के बाद जिजाबाई के साथ सहयोग की बातें शुरू हो रही है । इसके परिणाम सारे राज्य को एक दिन भोगने पड़ेंगे । उनका तरुण रक्त है। गोपालराव की ओर उनको छेड़छाड़ लड़करन में गिन ली जायेगो, विन्तु उसका अस्थत आपके मध्ये मह दिया जायेगा। उसके उत्तरदायो आप रहेंगे, इस बात को दाश साहब ध्यान में रखें !" "तात्या ! इस ओर मेरा ध्यान नहीं है, यह समझते हैं क्या आप ? मैं क्या चुप बैठा हुआ हूँ ? मैंने भाभी सादिया को वचन दिया है। मायके आने को राह देख रहा हूँ।" "अनुमान है कि रावसाहब सम्भवतः मृगनक्षत्र के प्रारम्भ में आ पहुँचेंगे !" बापू थाले । "ठीक हूँ। जब आयेंगे सभी सब बातों का निपटारा कर लेंगे। गंगोवा, हम भी जितने अकेले समझे जाते हैं, उतने अलग थलग अभी नहीं है।" "धि-छि ! यह कौन कहता है ! आप बाहर निकलेंगे तो सारी मराठेशाही व्यापकी सहायता के लिए बड़ी हो जायेगी। आपके पराक्रम से कौन परिचित नहीं है ? माना ग्राहव मापसे कभी कुछ न कह सके । आपका वह दवदवा गया हम जानते नहीं है ? राघोबा एकदम प्रसन्न हो गये। वे दिल खोलकर हँस पड़े । उम्र हंसो में बापू तात्मा शामिल हो गये और उसी समय सेवक गरवत का थाल लेकर अन्दर आया । बापू और गंगोदा को उठते देशकर दाश चोले, "रुको तारया दारबत पोकर जाना ।" शरबत पोते-पोते दादा बोले, "तात्या, आज सायंकाल हम पर्वतो पर जायेंगे । आपको भी चलना चाहिए ।" दारयत का चपक थाल में रखकर अंगोछे से मुंह पोंछते हुए गंगोवा बोले, "श्रोमन्त, बहुत दिनों बाद ऐमा लगा कि पेशवाओं के महल में
Riots in Ecuador Jail: इक्वाडोर की जेल में एक बार फिर दंगे हुए हैं. जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई है और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं. यहां कैदियों ने एक दूसरे पर बंदूकों और चाकुओं से हमला कर दिया था. दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर (Riots in Ecuador Jail) के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि जेल में बंदूकों और चाकुओं से लैस गिरोहों के बीच संघर्ष में 20 लोगों की मौत हो गई. उन्होंने घोषणा की कि अधिकारियों ने जेल (Jail) पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है. देश के गृह मंत्री पेट्रीसियो कैरिलो ने बताया कि राजधानी से करीब 310 किलोमीटर दक्षिण में स्थित तुरी में रविवार को हुई झड़प के दौरान पांच लोगों की हत्या (Murder in Ecuador) कर दी गई, छह को फंदे से लटका दिया गया और एक को जहर दे दिया गया. कम से कम पांच लोगों को गंभीर चोटें आई हैं. 'रेडियो डेमोक्रेसी' से बात करते हुए कैरिलो ने दंगे को राजनीति से जुड़ी 'आपराधिक अर्थव्यवस्था' संबंधित बताया. पुलिस कमांडर जनरल कार्लोस कैबरेरा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अधिकारी जेल के हर ब्लॉक की तलाशी कर रहे हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले महीने कहा था कि 2020 में इक्वाडोर की जेलों में टकराव में कम से कम 316 कैदी मारे गए, जिनमें से 119 सितंबर के दंगों में मारे गए. इससे पहले इक्वाडोर की सबसे बड़ी जेल लिटोरल पेनीटेंटियरी (Litoral Penitentiary) में झड़प हुई थी, जिसमें पांच कैदियों की मौत हो गई. जबकि 25 कैदी घायल हुए थे. इस घटना से कुछ समय पहले भी यहां ऐसी ही हिंसा हुई थी. जिसे अधिकारियों ने किसी जेल में हुआ सबसे भयानक रक्तपात बताया था. पुलिस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि तटीय शहर गुआयाक्विल की जेल में अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल से जुड़े जेल गैंग्स आपस में भिड़ गए थे. यहां कैदियों के पास से बंदूकें जब्त की गई थीं. घटना के वीडियो सामने आए थे, जिनमें अधजली लाश दिख रही थीं. केवल इतना ही नहीं बल्कि कैदियों ने प्रतिद्वंद्वी कैदियों की हत्या करने के लिए जेल के दूसरे हिस्से की तरफ जाने के लिए एक दीवार को डायनामाइट से उड़ाने की कोशिश की थी. इस देश की बात करें, तो यहां ड्रग्स की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है. जिसके कारण हिंसा लगातार बढ़ रही है. सरकार तक के लिए इन सबसे निपटना मुश्किल है.
Riots in Ecuador Jail: इक्वाडोर की जेल में एक बार फिर दंगे हुए हैं. जिसमें बीस लोगों की मौत हो गई है और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं. यहां कैदियों ने एक दूसरे पर बंदूकों और चाकुओं से हमला कर दिया था. दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि जेल में बंदूकों और चाकुओं से लैस गिरोहों के बीच संघर्ष में बीस लोगों की मौत हो गई. उन्होंने घोषणा की कि अधिकारियों ने जेल पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है. देश के गृह मंत्री पेट्रीसियो कैरिलो ने बताया कि राजधानी से करीब तीन सौ दस किलोग्राममीटर दक्षिण में स्थित तुरी में रविवार को हुई झड़प के दौरान पांच लोगों की हत्या कर दी गई, छह को फंदे से लटका दिया गया और एक को जहर दे दिया गया. कम से कम पांच लोगों को गंभीर चोटें आई हैं. 'रेडियो डेमोक्रेसी' से बात करते हुए कैरिलो ने दंगे को राजनीति से जुड़ी 'आपराधिक अर्थव्यवस्था' संबंधित बताया. पुलिस कमांडर जनरल कार्लोस कैबरेरा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अधिकारी जेल के हर ब्लॉक की तलाशी कर रहे हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले महीने कहा था कि दो हज़ार बीस में इक्वाडोर की जेलों में टकराव में कम से कम तीन सौ सोलह कैदी मारे गए, जिनमें से एक सौ उन्नीस सितंबर के दंगों में मारे गए. इससे पहले इक्वाडोर की सबसे बड़ी जेल लिटोरल पेनीटेंटियरी में झड़प हुई थी, जिसमें पांच कैदियों की मौत हो गई. जबकि पच्चीस कैदी घायल हुए थे. इस घटना से कुछ समय पहले भी यहां ऐसी ही हिंसा हुई थी. जिसे अधिकारियों ने किसी जेल में हुआ सबसे भयानक रक्तपात बताया था. पुलिस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि तटीय शहर गुआयाक्विल की जेल में अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल से जुड़े जेल गैंग्स आपस में भिड़ गए थे. यहां कैदियों के पास से बंदूकें जब्त की गई थीं. घटना के वीडियो सामने आए थे, जिनमें अधजली लाश दिख रही थीं. केवल इतना ही नहीं बल्कि कैदियों ने प्रतिद्वंद्वी कैदियों की हत्या करने के लिए जेल के दूसरे हिस्से की तरफ जाने के लिए एक दीवार को डायनामाइट से उड़ाने की कोशिश की थी. इस देश की बात करें, तो यहां ड्रग्स की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है. जिसके कारण हिंसा लगातार बढ़ रही है. सरकार तक के लिए इन सबसे निपटना मुश्किल है.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सियासी भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अमरिंदर ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। इसके बाद अमरिंदर के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे, लेकिन अब अमरिंदर ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे। अब एक न्यूज चैनल से बातचीत में अमरिंदर ने खुद ये स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा, 'अब तक मैं कांग्रेस में हूं, पर आगे नहीं रहूंगा। मेरे साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होगा। ' भास्कर ने पहले ही ये खबर ब्रेक कर दी थी कि कैप्टन भाजपा में शामिल नहीं होंगे। भास्कर ने कहा था कि अमरिंदर एक नॉन-पॉलिटिकल संगठन बनाकर पंजाब की सियासत में नया दांव चलेंगे। कैप्टन के करीबी सूत्रों की मानें तो यह संगठन दिल्ली बॉर्डर पर एक साल से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म करवा देगा। उसके बाद पंजाब में नए सियासी दल का आगाज होगा, जो पार्टियों की पहचान से ऊपर कैप्टन अमरिंदर सिंह के इर्द-गिर्द घूमेगा। इस तरह अमरिंदर किसानों के साथ-साथ केंद्र को भी साधकर डबल माइलेज लेंगे। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें. . . ) सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी और कमलनाथ ने कोशिश की कि सोनिया गांधी और अमरिंदर की मुलाकात हो जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अमरिंदर 2 दिन से दिल्ली में ही हैं, लेकिन उन्होंने इस दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया से कोई भी मुलाकात नहीं की। इसके उलट उन्होंने अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल के साथ अमरिंदर की मुलाकात के दौरान पंजाब से सटे पाकिस्तान बॉर्डर पर सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें. . . ) This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सियासी भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अमरिंदर ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। इसके बाद अमरिंदर के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे, लेकिन अब अमरिंदर ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे। अब एक न्यूज चैनल से बातचीत में अमरिंदर ने खुद ये स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा, 'अब तक मैं कांग्रेस में हूं, पर आगे नहीं रहूंगा। मेरे साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होगा। ' भास्कर ने पहले ही ये खबर ब्रेक कर दी थी कि कैप्टन भाजपा में शामिल नहीं होंगे। भास्कर ने कहा था कि अमरिंदर एक नॉन-पॉलिटिकल संगठन बनाकर पंजाब की सियासत में नया दांव चलेंगे। कैप्टन के करीबी सूत्रों की मानें तो यह संगठन दिल्ली बॉर्डर पर एक साल से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म करवा देगा। उसके बाद पंजाब में नए सियासी दल का आगाज होगा, जो पार्टियों की पहचान से ऊपर कैप्टन अमरिंदर सिंह के इर्द-गिर्द घूमेगा। इस तरह अमरिंदर किसानों के साथ-साथ केंद्र को भी साधकर डबल माइलेज लेंगे। सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी और कमलनाथ ने कोशिश की कि सोनिया गांधी और अमरिंदर की मुलाकात हो जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अमरिंदर दो दिन से दिल्ली में ही हैं, लेकिन उन्होंने इस दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया से कोई भी मुलाकात नहीं की। इसके उलट उन्होंने अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल के साथ अमरिंदर की मुलाकात के दौरान पंजाब से सटे पाकिस्तान बॉर्डर पर सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
'आतंकवादी हैं प्रशांत भूषण'पुलवामा हमले के मुद्दे पर साइबर आर्मी का शिकार मशहूर वकील प्रशांत भूषण को भी होना पड़ा। भूषण का 'गुनाह' सिर्फ़ इतना था कि उन्होंने ट्वीट कर सवाल उठाया था कि जम्मू-कश्मीर के युवा आख़िर क्यों हिंसा का रास्ता अख़्तियार कर रहे हैं। बस, फिर क्या था? हज़ार लोगों ने उनके ट्विटर अकाउंट पर जा कर उन्हें जवाब दिया और तमाम मर्यादाओं को धता बताते हुए उनकी जम कर मजम्मत की, यहाँ तक कि उन्हें आतंकवादी क़रार दिया गया। सोची समझी रणनीति के तहत राष्ट्रवाद का एक ऐसा 'नैरेटिव' तैयार कर लिया गया है, जिसमें सरकार के किसी भी फ़ैसले का विरोध करने वाले को देशद्रोही क़रार दिया जाता है। 'केंद्र सरकार की कमज़ोरी से हमला'जब बीजेपी विपक्ष में थी तो वह कश्मीर और सेना के मुद्दे पर बहुत ही मुखर थी। हर बार आतंकवादी हमला या सीमा पर झड़प होने पर वह तत्कालीन सरकार पर बुरी तरह टूट पड़ती थी। इस अभियान में सबसे आगे नरेंद्र मोदी ही रहते थे। फ़ेसबुक पर 'ड्रंक जर्नलिस्ट' के पेज़ पर मोदी का वह वीडियो देखा जा सकता है, उसके साथ ही पुलवामा हमले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की प्रतिक्रिया भी देखी जा सकती है। '10 पाक सैनिकों के सिर लाओ'साल 2013 में पाकिस्तान की बोर्डर एक्शन टीम के लोग सीमा पार कर भारत में घुस आए और लांस नायक हेमराज सिंह की हत्या कर, उनका सिर काट ले गए। इस पर खूब बावेला मचा था245। बीजेपी नेता सुषमा स्वराज का वह बयान आज भी लोगों को याद है कि एक हेमराज के बदले 10 पाकिस्तानी सैनिकों के सिर लाए जाने चाहिए। 'भारतीय सेना अभी लाहौर में होती'साल 2013 में हुए आतंकवादी हमले पर मनमोहन सिंह सरकार की तीखी आलोचना करते हुए बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने कहा था कि यदि आज नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री होते तो अब तक भारतीय सेना लाहौर पहुँच चुकी होती। इस समय नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और गिरिराज सिंह उन्हीं की सरकार में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। उनसे यह सवाल पूछा जाना चाहिए है कि उनकी सरकार ने भारतीय सेना को कहाँ तक पहुँचाया है। निशाने पर राहुल गाँधीसाइबर आर्मी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को निशाने पर लिया। उसने फ़ोटोशॉप कर राहुल गाँधी को पुलवामा के हमलावर के साथ दिखाया और कहा वह कांग्रेस अध्यक्ष के नज़दीक है। लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल कर यह साबित कर दिया कि यह फ़ेक न्यूज़ का मामला था। जिस फ़ेसबुक पेज़ पर राहुल की यह फ़ेक न्यूज़ चला, उसने 'वन्स अगेन मोदी राज' का नारा लिख रखा है और वहाँ भगवा झंडा भी लगा रखा है। निशाने पर प्रियंकासाइबर आर्मी के निशाने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी भी हैं। फ़ेसबुक पर नरेंद्र दामोदर मोदी नाम के पेज़ पर यह कहा गया है कि प्रियंका गाँधी ने पुलवामा हमले से पहले 7 फ़रवरी को दुबई में पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से मुलाक़ात की थी। यह साफ़ है कि जानबूझ कर देश में युद्धोन्माद फैलाया जा रहा है। चुनाव के ठीक पहले इसके राजनीतिक निहितार्थ हैं। सवाल यह उठता है कि क्या एक ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जिसमें कश्मीर या आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर सरकार से कोई सवाल न पूछा जाए?
'आतंकवादी हैं प्रशांत भूषण'पुलवामा हमले के मुद्दे पर साइबर आर्मी का शिकार मशहूर वकील प्रशांत भूषण को भी होना पड़ा। भूषण का 'गुनाह' सिर्फ़ इतना था कि उन्होंने ट्वीट कर सवाल उठाया था कि जम्मू-कश्मीर के युवा आख़िर क्यों हिंसा का रास्ता अख़्तियार कर रहे हैं। बस, फिर क्या था? हज़ार लोगों ने उनके ट्विटर अकाउंट पर जा कर उन्हें जवाब दिया और तमाम मर्यादाओं को धता बताते हुए उनकी जम कर मजम्मत की, यहाँ तक कि उन्हें आतंकवादी क़रार दिया गया। सोची समझी रणनीति के तहत राष्ट्रवाद का एक ऐसा 'नैरेटिव' तैयार कर लिया गया है, जिसमें सरकार के किसी भी फ़ैसले का विरोध करने वाले को देशद्रोही क़रार दिया जाता है। 'केंद्र सरकार की कमज़ोरी से हमला'जब बीजेपी विपक्ष में थी तो वह कश्मीर और सेना के मुद्दे पर बहुत ही मुखर थी। हर बार आतंकवादी हमला या सीमा पर झड़प होने पर वह तत्कालीन सरकार पर बुरी तरह टूट पड़ती थी। इस अभियान में सबसे आगे नरेंद्र मोदी ही रहते थे। फ़ेसबुक पर 'ड्रंक जर्नलिस्ट' के पेज़ पर मोदी का वह वीडियो देखा जा सकता है, उसके साथ ही पुलवामा हमले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की प्रतिक्रिया भी देखी जा सकती है। 'दस पाक सैनिकों के सिर लाओ'साल दो हज़ार तेरह में पाकिस्तान की बोर्डर एक्शन टीम के लोग सीमा पार कर भारत में घुस आए और लांस नायक हेमराज सिंह की हत्या कर, उनका सिर काट ले गए। इस पर खूब बावेला मचा थादो सौ पैंतालीस। बीजेपी नेता सुषमा स्वराज का वह बयान आज भी लोगों को याद है कि एक हेमराज के बदले दस पाकिस्तानी सैनिकों के सिर लाए जाने चाहिए। 'भारतीय सेना अभी लाहौर में होती'साल दो हज़ार तेरह में हुए आतंकवादी हमले पर मनमोहन सिंह सरकार की तीखी आलोचना करते हुए बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने कहा था कि यदि आज नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री होते तो अब तक भारतीय सेना लाहौर पहुँच चुकी होती। इस समय नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और गिरिराज सिंह उन्हीं की सरकार में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। उनसे यह सवाल पूछा जाना चाहिए है कि उनकी सरकार ने भारतीय सेना को कहाँ तक पहुँचाया है। निशाने पर राहुल गाँधीसाइबर आर्मी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को निशाने पर लिया। उसने फ़ोटोशॉप कर राहुल गाँधी को पुलवामा के हमलावर के साथ दिखाया और कहा वह कांग्रेस अध्यक्ष के नज़दीक है। लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल कर यह साबित कर दिया कि यह फ़ेक न्यूज़ का मामला था। जिस फ़ेसबुक पेज़ पर राहुल की यह फ़ेक न्यूज़ चला, उसने 'वन्स अगेन मोदी राज' का नारा लिख रखा है और वहाँ भगवा झंडा भी लगा रखा है। निशाने पर प्रियंकासाइबर आर्मी के निशाने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी भी हैं। फ़ेसबुक पर नरेंद्र दामोदर मोदी नाम के पेज़ पर यह कहा गया है कि प्रियंका गाँधी ने पुलवामा हमले से पहले सात फ़रवरी को दुबई में पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से मुलाक़ात की थी। यह साफ़ है कि जानबूझ कर देश में युद्धोन्माद फैलाया जा रहा है। चुनाव के ठीक पहले इसके राजनीतिक निहितार्थ हैं। सवाल यह उठता है कि क्या एक ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जिसमें कश्मीर या आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर सरकार से कोई सवाल न पूछा जाए?
कोई भी इवेंट कई सारे लोगों के समर्थन के बिना सफलता से पूर्ण नहीं हो पाता है। अगर आपसे किसी सेमिनार, कॉउन्सिल, कल्चरल समिट या ऐसे किसी मौके पर वोट ऑफ़ थैंक्स देने के लिए कहा गया है, तो आपको अपनी ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि होने के तौर पर उन लोगों को शुक्रिया कहना चाहिए जिनकी वजह से ये इवेंट सफल हो पाया है। एक प्रभावी वाक्य से शुरुआत करें, फिर अपने ऑडियंस को जल्दी और रोचक तरीके से शुक्रिया कहें, और उसके बाद अपनी स्पीच को खत्म करें। 1. उन लोगों को संबोधित करें जिन्हें आप शुक्रिया कहना चाहते हैंः बहुत लोग अपना वोट ऑफ़ थैंक्स ऑडियंस के उन सदस्यों की बात करके करते हैं जिनको वो शुक्रिया कहना चाहते हैं। आपके पहले ही वाक्य से ऑडियंस को लगना चाहिए की आप उनसे बात कर रहे हैं और उन्हें अपनी शुक्रिया में शामिल कर रहे हैं। ऐसी ओपनिंग लाइन्स सुनने में जानी पहचानी लगती हैं "फ्रेंड्स, रोमन्स, कंट्रीमेन..." उसको थोड़ा बदल लें ताकि वो आपकी परिस्थिति से मेल खाये, कुछ ऐसे, "मिस्टर प्रिंसिपल, मिस्टर वाइस प्रिंसिपल, टीचर्स, स्टूडेंट्स..."। 2. खुद को और अपने रोल की पहचान कराएंः अगर आपने अभी तक अपना नाम नहीं बताया, तो ये ऐसा करने का सही समय है! अपने ऑडियंस से कहें की आपको वोट ऑफ़ थैंक्स देने को कहा गया है, और फिर 1 या 2 वाक्यों में अपना उस ऑर्गेनाइजेशन से सम्बन्ध बताएं। आप इस इवेंट में अपना रोल भी शामिल कर सकते हैं। 3. उस ऑर्गेनाइजेशन को महत्व दें जिसने सब को एकत्रित किया हैः कमरे में मौजूद हर व्यक्ति किसी न किसी रूप से उस संपूर्ण ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ा हुआ होगा, इसलिए स्पीच की बॉडी पर पहुँचने से पहले होस्ट के लिए आभार प्रकट करना अच्छा विचार रहता है। 4. उन लोगों की पहचान करें जिन्हें आप शुक्रिया कहना चाहते हैंः इस लिस्ट में अक्सर गेस्ट्स, पार्टिसिपेंट्स, ऑर्गनाइज़र्स, वॉलंटियर्स, और स्पोंसर्स शामिल होंगे। अपनी स्पीच डिलीवर करने से पहले, ये फैसला करें की आप किन लोगों या समूहों को शुक्रिया करना चाहते हैं ताकि मौका आने पर, आप किसी को भूल नहीं जाएँ। सभी लोग, फिर उनका इवेंट में कितना भी सहयोग हो, ये महसूस करना चाहते हैं की उन्होनें बहुत अहम भाग निभाया। चाहे आप किसी को उनके समय के लिए शुक्रिया कह रहे हैं या किसी और सहयोग के लिए, पूर्णतः उनके द्वारा दिए गए सहयोग की अहमियत ज़रूर जतायें। 5. ज़्यादा उत्साहित नहीं होंः आभार प्रकट करना तब अच्छा लगता है जब सच्चे मन से किया जाए। अपनी शुक्रिया को ज़्यादा खींचने से बचें, और अपने आभार को ज़रुरत से ज़्यादा नहीं प्रकट करेंः इससे आपकी ऑडियंस बोर हो जाएगी और जिसे आप शुक्रिया कह रहे हैं वह भी बुरा महसूस कर सकता है। हर शुक्रिया को संक्षिप्त, सच्चा और स्नेहपूर्ण रखें। 6. इवेंट के दौरान गुज़रे किसी ख़ास पल की याद करें और उसका जवाब देंः परफ़ॉर्मर/स्पीकर्स को दिखाएं की आप ध्यान से सुन रहे थे और ऐसे कोई बात बोलें जो आपके ज़हन में रह गयी थी। कुछ वाक्यों में, किसी पार्टिसिपेंट द्वारा दिया गया आइडिया दोहराएं और बताएं की वह इस इवेंट के पूरे थीम से कैसे मेल खाता है। कुछ ऐसा उठाएं जो आपको अच्छा लगा था और जिससे आप सहमत हुए थे। ऐसी कोई बात नहीं दोहराएं जिनसे आप विपरीत विचार रखते हैंः आप पूरी तरह से पॉजिटिव बात करना चाहेंगे। 7. अपनी ऑर्गेनाइजेशन की अहमियत को ज़ाहिर करेंः स्पीच के अंत में, ये बताएं की आपकी ऑर्गेनाइजेशन क्यों ख़ास है। आप इस बात पर ज़ोर दे सकते हैं की वह कैसे समाज की छोटे या बड़े तरीकों से मदद करती है। आप चाहेंगे की लोग जब इवेंट से निकले तो उनके दिमाग में आपके ग्रुप के लिए पॉजिटिव धारणा हो। 8. अपनी स्पीच के अंत में कुछ ख़ास लोगों का नाम से शुक्रिया करने से बचेंः सामान्य तौर पर, कोई ख़ास लोग जिनका नाम आना चाहिए उन्हें आप स्पीच के दौरान शुक्रिया कह चुके होंगे। जब आप ख़तम करने लगें, सामान्य तरीके से बात करें और पूरी ऑडियंस से बात करने की कोशिश करें- नाम लेकर किसी को अलग करने की गलती नहीं करें। 9. अपना वोट ऑफ़ थैंक्स संक्षिप्त रखेंः अपने वोट ऑफ़ थैंक्स को संक्षिप्त और आसान रखना एक अच्छा विचार है, पर कन्क्लूड करते समय इस बात को ख़ास तौर से ध्यान रखें। ये इवेंट ख़त्म करने का समय है और आपकी ऑडियंस इंतज़ार नहीं करना चाहती है। उनके समय की कीमत समझें और वही कहें जो कहना ज़रूरी है ।
कोई भी इवेंट कई सारे लोगों के समर्थन के बिना सफलता से पूर्ण नहीं हो पाता है। अगर आपसे किसी सेमिनार, कॉउन्सिल, कल्चरल समिट या ऐसे किसी मौके पर वोट ऑफ़ थैंक्स देने के लिए कहा गया है, तो आपको अपनी ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि होने के तौर पर उन लोगों को शुक्रिया कहना चाहिए जिनकी वजह से ये इवेंट सफल हो पाया है। एक प्रभावी वाक्य से शुरुआत करें, फिर अपने ऑडियंस को जल्दी और रोचक तरीके से शुक्रिया कहें, और उसके बाद अपनी स्पीच को खत्म करें। एक. उन लोगों को संबोधित करें जिन्हें आप शुक्रिया कहना चाहते हैंः बहुत लोग अपना वोट ऑफ़ थैंक्स ऑडियंस के उन सदस्यों की बात करके करते हैं जिनको वो शुक्रिया कहना चाहते हैं। आपके पहले ही वाक्य से ऑडियंस को लगना चाहिए की आप उनसे बात कर रहे हैं और उन्हें अपनी शुक्रिया में शामिल कर रहे हैं। ऐसी ओपनिंग लाइन्स सुनने में जानी पहचानी लगती हैं "फ्रेंड्स, रोमन्स, कंट्रीमेन..." उसको थोड़ा बदल लें ताकि वो आपकी परिस्थिति से मेल खाये, कुछ ऐसे, "मिस्टर प्रिंसिपल, मिस्टर वाइस प्रिंसिपल, टीचर्स, स्टूडेंट्स..."। दो. खुद को और अपने रोल की पहचान कराएंः अगर आपने अभी तक अपना नाम नहीं बताया, तो ये ऐसा करने का सही समय है! अपने ऑडियंस से कहें की आपको वोट ऑफ़ थैंक्स देने को कहा गया है, और फिर एक या दो वाक्यों में अपना उस ऑर्गेनाइजेशन से सम्बन्ध बताएं। आप इस इवेंट में अपना रोल भी शामिल कर सकते हैं। तीन. उस ऑर्गेनाइजेशन को महत्व दें जिसने सब को एकत्रित किया हैः कमरे में मौजूद हर व्यक्ति किसी न किसी रूप से उस संपूर्ण ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ा हुआ होगा, इसलिए स्पीच की बॉडी पर पहुँचने से पहले होस्ट के लिए आभार प्रकट करना अच्छा विचार रहता है। चार. उन लोगों की पहचान करें जिन्हें आप शुक्रिया कहना चाहते हैंः इस लिस्ट में अक्सर गेस्ट्स, पार्टिसिपेंट्स, ऑर्गनाइज़र्स, वॉलंटियर्स, और स्पोंसर्स शामिल होंगे। अपनी स्पीच डिलीवर करने से पहले, ये फैसला करें की आप किन लोगों या समूहों को शुक्रिया करना चाहते हैं ताकि मौका आने पर, आप किसी को भूल नहीं जाएँ। सभी लोग, फिर उनका इवेंट में कितना भी सहयोग हो, ये महसूस करना चाहते हैं की उन्होनें बहुत अहम भाग निभाया। चाहे आप किसी को उनके समय के लिए शुक्रिया कह रहे हैं या किसी और सहयोग के लिए, पूर्णतः उनके द्वारा दिए गए सहयोग की अहमियत ज़रूर जतायें। पाँच. ज़्यादा उत्साहित नहीं होंः आभार प्रकट करना तब अच्छा लगता है जब सच्चे मन से किया जाए। अपनी शुक्रिया को ज़्यादा खींचने से बचें, और अपने आभार को ज़रुरत से ज़्यादा नहीं प्रकट करेंः इससे आपकी ऑडियंस बोर हो जाएगी और जिसे आप शुक्रिया कह रहे हैं वह भी बुरा महसूस कर सकता है। हर शुक्रिया को संक्षिप्त, सच्चा और स्नेहपूर्ण रखें। छः. इवेंट के दौरान गुज़रे किसी ख़ास पल की याद करें और उसका जवाब देंः परफ़ॉर्मर/स्पीकर्स को दिखाएं की आप ध्यान से सुन रहे थे और ऐसे कोई बात बोलें जो आपके ज़हन में रह गयी थी। कुछ वाक्यों में, किसी पार्टिसिपेंट द्वारा दिया गया आइडिया दोहराएं और बताएं की वह इस इवेंट के पूरे थीम से कैसे मेल खाता है। कुछ ऐसा उठाएं जो आपको अच्छा लगा था और जिससे आप सहमत हुए थे। ऐसी कोई बात नहीं दोहराएं जिनसे आप विपरीत विचार रखते हैंः आप पूरी तरह से पॉजिटिव बात करना चाहेंगे। सात. अपनी ऑर्गेनाइजेशन की अहमियत को ज़ाहिर करेंः स्पीच के अंत में, ये बताएं की आपकी ऑर्गेनाइजेशन क्यों ख़ास है। आप इस बात पर ज़ोर दे सकते हैं की वह कैसे समाज की छोटे या बड़े तरीकों से मदद करती है। आप चाहेंगे की लोग जब इवेंट से निकले तो उनके दिमाग में आपके ग्रुप के लिए पॉजिटिव धारणा हो। आठ. अपनी स्पीच के अंत में कुछ ख़ास लोगों का नाम से शुक्रिया करने से बचेंः सामान्य तौर पर, कोई ख़ास लोग जिनका नाम आना चाहिए उन्हें आप स्पीच के दौरान शुक्रिया कह चुके होंगे। जब आप ख़तम करने लगें, सामान्य तरीके से बात करें और पूरी ऑडियंस से बात करने की कोशिश करें- नाम लेकर किसी को अलग करने की गलती नहीं करें। नौ. अपना वोट ऑफ़ थैंक्स संक्षिप्त रखेंः अपने वोट ऑफ़ थैंक्स को संक्षिप्त और आसान रखना एक अच्छा विचार है, पर कन्क्लूड करते समय इस बात को ख़ास तौर से ध्यान रखें। ये इवेंट ख़त्म करने का समय है और आपकी ऑडियंस इंतज़ार नहीं करना चाहती है। उनके समय की कीमत समझें और वही कहें जो कहना ज़रूरी है ।
रणवीर सिंह (Ranveer Singh) के पास इस समय रोहित शेट्टी की फिल्म 'सर्कस' भी पाइपलाइन में है. इस फिल्म में पूजा हेगड़े, जैकलीन फर्नांडीज और वरुण शर्मा नजर आएंगे. रणवीर सिंह इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' (Jayeshbhai Jordaar) का जमकर प्रमोशन कर रहे हैं. हालांकि, इस फिल्म को लेकर एक विवाद भी खड़ा हो गया है लेकिन जल्द ही रियलिटी शो 'डांस दीवाने जूनियर्स' (Dance Deewane Junior) के अपकमिंग एपिसोड में एक्टर रणवीर सिंह (Ranveer Singh) बतौर गेस्ट जज नजर आएंगे. एपिसोड से शेयर किए गए एक प्रोमो में, रणवीर और शो की जज नोरा फतेही को 'गर्मी' गाने पर थिरकते हुए देखा गया. वो हू-ब-हू नोरा फतेही की तरह डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. दोनों के इस डांस को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. रणवीर सिंह ने नीतू कपूर और नोरा फतेही के साथ अपनी फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' के गाने 'फायरक्रैकर' पर भी डांस किया. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शो के वीडियो क्लिप भी शेयर किए. नोरा फतेही को आखिरी बार पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के साथ 'डांस मेरी रानी' नाम के म्यूजिक वीडियो में देखा गया था. वो अगली बार पवन कल्याण की 'हरि हर वीरा मल्लू' में दिखाई देंगी. रणवीर सिंह इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' का जोरदार तरीके से प्रमोशन कर रहे हैं. रणवीर सिंह के साथ फिल्म में बोमन ईरानी और रत्ना पाठक शाह उनके माता-पिता और शालिनी पांडे उनकी गर्भवती पत्नी के रूप में नजर आने वाली हैं. इसका निर्देशन दिव्यांग ठक्कर ने किया है. फिल्म में रणवीर को एक पारंपरिक गुजराती सरपंच के बेटे के रूप में दिखाया गया है, जो समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच समान अधिकारों में विश्वास करता है. उनकी ये फिल्म 13 मई को रिलीज होने वाली है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, हाल ही में फिल्म को लेकर एक विवाद भी खड़ा हो गया है. दरअसल, फिल्म के एक सीन में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भ का पता लगाया गया है कि कोख में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की. इसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है और इस सीन को फिल्म से हटाने की मांग की गई है. रणवीर सिंह के पास इस समय रोहित शेट्टी की फिल्म 'सर्कस' भी पाइपलाइन में है. इस फिल्म में पूजा हेगड़े, जैकलीन फर्नांडीज और वरुण शर्मा नजर आएंगे.
रणवीर सिंह के पास इस समय रोहित शेट्टी की फिल्म 'सर्कस' भी पाइपलाइन में है. इस फिल्म में पूजा हेगड़े, जैकलीन फर्नांडीज और वरुण शर्मा नजर आएंगे. रणवीर सिंह इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' का जमकर प्रमोशन कर रहे हैं. हालांकि, इस फिल्म को लेकर एक विवाद भी खड़ा हो गया है लेकिन जल्द ही रियलिटी शो 'डांस दीवाने जूनियर्स' के अपकमिंग एपिसोड में एक्टर रणवीर सिंह बतौर गेस्ट जज नजर आएंगे. एपिसोड से शेयर किए गए एक प्रोमो में, रणवीर और शो की जज नोरा फतेही को 'गर्मी' गाने पर थिरकते हुए देखा गया. वो हू-ब-हू नोरा फतेही की तरह डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. दोनों के इस डांस को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. रणवीर सिंह ने नीतू कपूर और नोरा फतेही के साथ अपनी फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' के गाने 'फायरक्रैकर' पर भी डांस किया. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शो के वीडियो क्लिप भी शेयर किए. नोरा फतेही को आखिरी बार पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के साथ 'डांस मेरी रानी' नाम के म्यूजिक वीडियो में देखा गया था. वो अगली बार पवन कल्याण की 'हरि हर वीरा मल्लू' में दिखाई देंगी. रणवीर सिंह इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' का जोरदार तरीके से प्रमोशन कर रहे हैं. रणवीर सिंह के साथ फिल्म में बोमन ईरानी और रत्ना पाठक शाह उनके माता-पिता और शालिनी पांडे उनकी गर्भवती पत्नी के रूप में नजर आने वाली हैं. इसका निर्देशन दिव्यांग ठक्कर ने किया है. फिल्म में रणवीर को एक पारंपरिक गुजराती सरपंच के बेटे के रूप में दिखाया गया है, जो समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच समान अधिकारों में विश्वास करता है. उनकी ये फिल्म तेरह मई को रिलीज होने वाली है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, हाल ही में फिल्म को लेकर एक विवाद भी खड़ा हो गया है. दरअसल, फिल्म के एक सीन में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भ का पता लगाया गया है कि कोख में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की. इसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है और इस सीन को फिल्म से हटाने की मांग की गई है. रणवीर सिंह के पास इस समय रोहित शेट्टी की फिल्म 'सर्कस' भी पाइपलाइन में है. इस फिल्म में पूजा हेगड़े, जैकलीन फर्नांडीज और वरुण शर्मा नजर आएंगे.
पहली बारिश में ही पटना में हुआ जलजमाव (फाइल फोटो) ( Image Source : PTI ) पटनाः बिहार में पिछले चार-पांच दिनों से मॉनसून पूरी तरह सक्रिय है. राज्य के सभी जिलों में लगातार मध्यम से लेकर भारी स्तर की वर्षा हो रही है. कई जिलों में बहुत भारी वर्षा हुई है. मौसम विभाग के अनुसार आज सोमवार (3 जुलाई) को राज्य के सभी जिलों में मध्यम से लेकर भारी वर्षा तो कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी वर्षा का पूर्वानुमान है. आज करीब 12 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. मौसम विभाग की ओर से इन 12 में से छह जिलों में बहुत ज्यादा भारी वर्षा के साथ मेघ गर्जन की चेतावनी दी गई है. इनमें उत्तर-पूर्व भाग का पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, अररिया, किशनगंज और मधेपुरा जिला शामिल है. इसके अलावा वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, भागलपुर, बांका और सहरसा में भी भारी वर्षा के साथ वज्रपात की चेतावनी दी गई है. प्रदेश में मॉनसून सक्रिय होने के साथ-साथ उत्तर बिहार में बहुत ज्यादा भारी बारिश देखी जा रही है. मौसम विभाग की ओर से बीते रविवार की शाम जारी रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटे में राज्य के सभी जिलों में मध्यम से लेकर भारी स्तर तक की वर्षा हुई है. कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी वर्षा भी दर्ज की गई है. मधुबनी के झंझारपुर में 183 मिलीमीटर बारिश हुई है. सीवान के दरौली में 167 मिलीमीटर और कटिहार में 114. 2 मिलीमीटर बारिश हुई है. दरभंगा के कमतौल में 105. 2 मिलीमीटर, सीवान शहरी क्षेत्र में 100. 2, पचरुखी में 100. 2, सुपौल में 89. 4, मधुबनी के मधेपुर में 85. 6, सुपौल के निर्मली में 82. 4, सीवान के महाराजगंज में 80. 2, भोजपुर में 79. 4, बक्सर में 74, जहानाबाद के काको में 64. 8 और दरभंगा के घनश्यामपुर में 64. 4 मिलीमीटर वर्षा हुई है. इसके अलावा भी कई जिलों में बारिश हुई है. प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के तापमान में भी काफी गिरावट आई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक तापमान में कोई परिवर्तन होने का खास पूर्वानुमान नहीं है. बीते रविवार को सबसे अधिक तापमान नालंदा में 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सबसे कम तापमान सीतामढ़ी में 28. 4 डिग्री सेल्सियस रहा. रविवार को बिहार में औसत तापमान 32 डिग्री से 34 डिग्री के बीच रहा. पटना में भी तापमान 32. 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार एक चक्रवातीय परिसंचरण मध्य उत्तर प्रदेश के पास समुद्र तल से औसत 5. 8 किलोमीटर ऊपर अवस्थित है. साथ ही एक अन्य चक्रवातीय परिसंचरण उप हिमालय पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम के आसपास समुद्र तल से 3. 1 किलोमीटर ऊपर अवस्थित है. इसके प्रभाव से आज पूरे राज्य में वर्षा और अधिसंख्य जिलों में भारी वर्षा के साथ मेघ गर्जन की संभावना है.
पहली बारिश में ही पटना में हुआ जलजमाव पटनाः बिहार में पिछले चार-पांच दिनों से मॉनसून पूरी तरह सक्रिय है. राज्य के सभी जिलों में लगातार मध्यम से लेकर भारी स्तर की वर्षा हो रही है. कई जिलों में बहुत भारी वर्षा हुई है. मौसम विभाग के अनुसार आज सोमवार को राज्य के सभी जिलों में मध्यम से लेकर भारी वर्षा तो कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी वर्षा का पूर्वानुमान है. आज करीब बारह जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. मौसम विभाग की ओर से इन बारह में से छह जिलों में बहुत ज्यादा भारी वर्षा के साथ मेघ गर्जन की चेतावनी दी गई है. इनमें उत्तर-पूर्व भाग का पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, अररिया, किशनगंज और मधेपुरा जिला शामिल है. इसके अलावा वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, भागलपुर, बांका और सहरसा में भी भारी वर्षा के साथ वज्रपात की चेतावनी दी गई है. प्रदेश में मॉनसून सक्रिय होने के साथ-साथ उत्तर बिहार में बहुत ज्यादा भारी बारिश देखी जा रही है. मौसम विभाग की ओर से बीते रविवार की शाम जारी रिपोर्ट के अनुसार चौबीस घंटाटे में राज्य के सभी जिलों में मध्यम से लेकर भारी स्तर तक की वर्षा हुई है. कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी वर्षा भी दर्ज की गई है. मधुबनी के झंझारपुर में एक सौ तिरासी मिलीमीटर बारिश हुई है. सीवान के दरौली में एक सौ सरसठ मिलीमीटर और कटिहार में एक सौ चौदह. दो मिलीमीटर बारिश हुई है. दरभंगा के कमतौल में एक सौ पाँच. दो मिलीमीटर, सीवान शहरी क्षेत्र में एक सौ. दो, पचरुखी में एक सौ. दो, सुपौल में नवासी. चार, मधुबनी के मधेपुर में पचासी. छः, सुपौल के निर्मली में बयासी. चार, सीवान के महाराजगंज में अस्सी. दो, भोजपुर में उन्यासी. चार, बक्सर में चौहत्तर, जहानाबाद के काको में चौंसठ. आठ और दरभंगा के घनश्यामपुर में चौंसठ. चार मिलीमीटर वर्षा हुई है. इसके अलावा भी कई जिलों में बारिश हुई है. प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के तापमान में भी काफी गिरावट आई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक तापमान में कोई परिवर्तन होने का खास पूर्वानुमान नहीं है. बीते रविवार को सबसे अधिक तापमान नालंदा में सैंतीस डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सबसे कम तापमान सीतामढ़ी में अट्ठाईस. चार डिग्री सेल्सियस रहा. रविवार को बिहार में औसत तापमान बत्तीस डिग्री से चौंतीस डिग्री के बीच रहा. पटना में भी तापमान बत्तीस. चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार एक चक्रवातीय परिसंचरण मध्य उत्तर प्रदेश के पास समुद्र तल से औसत पाँच. आठ किलोग्राममीटर ऊपर अवस्थित है. साथ ही एक अन्य चक्रवातीय परिसंचरण उप हिमालय पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम के आसपास समुद्र तल से तीन. एक किलोग्राममीटर ऊपर अवस्थित है. इसके प्रभाव से आज पूरे राज्य में वर्षा और अधिसंख्य जिलों में भारी वर्षा के साथ मेघ गर्जन की संभावना है.
मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल ने जिला अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए उच्च न्यायालय के प्रशासन द्वारा परिकल्पित एक योजना के विरोध में सोमवार को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का संकल्प लिया। 27 मार्च को आयोजित आम सभा की बैठक में अन्य सदस्यों की सहायता और सलाह पर राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष आरके सिंह सैनी द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था। परिषद ने दावा किया कि 25 ऋण योजना को रद्द करने की अधिवक्ताओं की मांगों को पूरा करने के लिए उच्च न्यायालय ने कोई पहल नहीं की है, जिसके अनुसार जिला अदालतों को 3 महीने के भीतर 25 सबसे पुराने मामलों का निपटान करना आवश्यक है। जिला अदालतों में अधिवक्ताओं के बीच असंतोष को ध्यान में रखते हुए, परिषद ने राज्य के सभी वकीलों को 28 और 29 मार्च को अदालती कामकाज से दूर रहने का आह्वान किया। अधिवक्ता न्यायिक रिमांड और जमानत याचिका के मामले भी नहीं करेंगे। योजना के खिलाफ विरोध पिछले महीने शुरू हुआ, जिसमें वकीलों ने 23 मार्च से 25 मार्च तक हड़ताल पर जाने का फैसला किया। उच्च न्यायालय ने बाद में हड़ताल का स्वतः संज्ञान लिया, इसे "मध्य प्रदेश राज्य के लिए दुखद दिन" कहा। मुख्य न्यायाधीश रवि मालिमथ ने हड़ताली अधिवक्ताओं को चेतावनी दी थी कि अगर बहिष्कार बंद नहीं किया गया तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सोमवार को राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और प्रत्येक निर्वाचित सदस्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा कि वकीलों को न्यायिक कार्य से दूर रहने के लिए मजबूर करने के लिए उनके खिलाफ अदालती अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि सभापति द्वारा बुलाई गई हड़ताल 24 मार्च को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की खुली अवहेलना थी।
मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल ने जिला अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए उच्च न्यायालय के प्रशासन द्वारा परिकल्पित एक योजना के विरोध में सोमवार को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का संकल्प लिया। सत्ताईस मार्च को आयोजित आम सभा की बैठक में अन्य सदस्यों की सहायता और सलाह पर राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष आरके सिंह सैनी द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था। परिषद ने दावा किया कि पच्चीस ऋण योजना को रद्द करने की अधिवक्ताओं की मांगों को पूरा करने के लिए उच्च न्यायालय ने कोई पहल नहीं की है, जिसके अनुसार जिला अदालतों को तीन महीने के भीतर पच्चीस सबसे पुराने मामलों का निपटान करना आवश्यक है। जिला अदालतों में अधिवक्ताओं के बीच असंतोष को ध्यान में रखते हुए, परिषद ने राज्य के सभी वकीलों को अट्ठाईस और उनतीस मार्च को अदालती कामकाज से दूर रहने का आह्वान किया। अधिवक्ता न्यायिक रिमांड और जमानत याचिका के मामले भी नहीं करेंगे। योजना के खिलाफ विरोध पिछले महीने शुरू हुआ, जिसमें वकीलों ने तेईस मार्च से पच्चीस मार्च तक हड़ताल पर जाने का फैसला किया। उच्च न्यायालय ने बाद में हड़ताल का स्वतः संज्ञान लिया, इसे "मध्य प्रदेश राज्य के लिए दुखद दिन" कहा। मुख्य न्यायाधीश रवि मालिमथ ने हड़ताली अधिवक्ताओं को चेतावनी दी थी कि अगर बहिष्कार बंद नहीं किया गया तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सोमवार को राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और प्रत्येक निर्वाचित सदस्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा कि वकीलों को न्यायिक कार्य से दूर रहने के लिए मजबूर करने के लिए उनके खिलाफ अदालती अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि सभापति द्वारा बुलाई गई हड़ताल चौबीस मार्च को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की खुली अवहेलना थी।
कांग्रेस के विकास की प्रारम्भिक भूमिका. पुराने कांग्रेसियों का दृष्टिकोण व नीति कांग्रेस को स्थापित हुए अवतक ५० वर्प हो गये । इस लम्बे अरसे में भारत के राष्ट्रीय विकास की कई भूमिकाओं से वह गुजर चुकी है। हां, आगे जाकर उसके अन्दर कुछ मतभेद जरूर पैदा हो गये थे । परन्तु पिछला जमाना तो १८८५ से १९१५ वल्कि १९२१ तक ऐसा रहा, जिसमें भिन्न-भिन्न रायों और विचारों के लोगों ने मिलकर अपने लिए प्रायः एक ही कार्यक्रम तजवीजं किया था। इसका यह अर्थ नहीं कि उन दिनों भारतीय राजनीति में मत-भेद और विचार-भेद पैदा ही नहीं हुए थे, वल्कि यह कि वे गिनती में आने लायक न थे । युद्ध का निर्णय करने में या लड़ाई की रचना में सबसे बड़ी कठिनाई है युद्धक्षेत्र का चुनाव और व्यूह-रचना । दोनों तरफ के लोग हमला करें या वचाव, प्रार्थना करें या विरोध, युद्ध रोककर शत्रु को सन्धि- चर्चा के लिए निमन्त्रण दें या एकदम छापा मारकर उसे घेर लें, इन्हींकी उधेड़-चुन में लगे रहते हैं । युद्ध-क्षेत्र में इन्हीं प्रश्नों पर सेनापतियों के दिमाग परेशान रहते हैं। इसी तरह राजनैतिक क्षेत्र में भी ऐसे प्रश्न आते हैं, जहां नेताओं को यह तय करना पड़ता है कि आन्दोलन महज लफ्जी और कागजी हो या कुछ करके बताया जाय । यदि कुछ कर दिखाना हो तव उन्हें यह निश्चय करना पड़ता है कि लड़ाई प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष । यों तो ये प्रश्न वड़ी तेजी से हमारी आंखों के सामने दौड़ जाते हैं और उससे भी ज्यादा तेजी के साथ हमारे दिमाग में चक्कर काटते हैं, परन्तु राजनैतिक लड़ाइयों में वीसों वर्षों में जाकर कहीं एक के बाद दूसरी स्थिति का विकास होता है और जो काम पचास वर्गों की जबर्दस्त लड़ाई के बाद आज वड़ा आसान और मामूली दिखाई देता है वह हमारे पूर्वजों को, जिन्होंने कि कांग्रेस की शुरुआत की, अपनी कल्पना के बाहर मालूम हुआ होता । जरा खयाल कीजिए कि विदेशी माल के या कौंसिलों के, अदालतों या कालेजों के वहिष्कार या कुछ कानूनों के सविनय भंग का कोई प्रस्ताव उमेशचन्द्र बनर्जी या सुरेन्द्रनाथ वनर्जी, सर फीरोजअव्याय ३ : कांग्रेस के विकास की प्रारम्भिक भूमिका शाह मेहता या पं० अयोव्यानाथ, लालमोहन घोप या मनमोहन घोष, सुब्रह्मण्य ऐयर या आनन्दा चालू, ह्यूम साहब और वेडरवर्न साहब के सामने रक्खा गया है। अब यह सोचने में जरा भी देर नहीं लग सकती कि इन विचारों के कारण वे कितने भड़क उठे होते और न ऐसे उग्र कार्यक्रम, वंग-भंग के, कर्जन और मिण्टो की प्रतिगामी नीतियों के, या गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका सम्बन्धी अनुभवों के या जालियांवाला बाग के हत्याकाण्ड के पहले बन हो सकते थे । बात यह कि पिछली सदी के अन्त के प्रारम्भिक पन्द्रह सालों के लड़ाई-झगड़ों में जो कांग्रेस नेता रहे वे ज्यादातर वकील-चैरिस्टर और कुछ व्यापारी एवं डॉक्टर थे, जिनका सच्चे दिल से यह विश्वास था कि हिन्दुस्तान सिर्फ इतना ही चाहता है कि अंग्रेजों और पार्लमेण्ट के सामने उसका पक्ष बहुत सुन्दर और नपी-तुली भाषा में रख दिया जाय । इस प्रयोजन के लिए उन्हें एक राजनैतिक संगठन की जरूरत थी और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। उसके द्वारा वे राष्ट्र के दुःखों और उच्च आकांक्षाओं को प्रदर्शित करते रहे। जब इस बात की याद करते हैं कि किन-किन व्यक्तियों ने भारत की राजनीति को बनाया और उसे प्रभावित किया, इनके विश्वास क्या थे, तब वे सव भिन्न-भिन्न युग हमारे सामने आ जाते हैं जिनमें कि भारतीय राजनैतिक आन्दोलन इन पचास वर्षों में बँट गया है। वह जमाना और हालतें ही ऐसी थीं कि अपने दुःख-दर्द दूर करने के लिए हाकिमों के सामने सिया दलील और प्रार्थना करने के और नई रिआयतों और विशेषाधिकारों के लिए मामूली मांग करने के और कुछ नहीं हो सकता था। फिर यह मनोदशा आगे जाकर शीघ्र ही एक कला के रूप में परिणत हो गई। एक ओर कानून प्रवीण बुद्धि और दूसरी ओर खूब कल्पनाशील और भावना प्रधान वक्तृत्व-कला, दोनों ने उस काम को अपने ऊपर ले लिया जो भारतीय राजनीतिज्ञों के सामने था । कांग्रेस के प्रस्तावों के समर्थन में जो व्याख्यान होते थे और कांग्रेस के अध्यक्ष जो भाषण दिया करते थे उनमें दो बातें हुआ करती थीं - एक तो प्रभावकारी तथ्य और आंकड़े, दूसरे अकाट्य दलीलें। उनके उद्गारों में जिन बातों पर अक्सर जोर दिया जाता था वे ये हैं - अंग्रेज़ लोग बड़े न्यायो हैं और अगर उन्हें ठीक तौर पर वाकिफ रक्खा जाय तो वे सत्य और हक के पथ से जुदा न होंगे; हमारे सामने असली मसला अंग्रेजों का नहीं बल्कि अवगोरों का है; बराई पद्धति में है, न कि व्यक्ति में, कांग्रेस बड़ी राजभक्त है, ब्रिटिश-ताज से नहीं बल्कि हिन्दुस्तानी नौकरशाही से उसका झगड़ा है; ब्रिटिश-विधान ऐसा है जो लोगों की स्वाधीनता का सब जगह रक्षण करता है और ब्रिटिश पार्लमेण्ट प्रजातन्त्र पद्धति की माता है; ब्रिटिग-विधान संसार के सब विधानों से अच्छा है। कांग्रेस राजद्रोह करनेवाली संस्था नहीं है; भारतीय राजनीतिज्ञ सरकार का भाव लोगों तक और लोगों का सरकार तक पहुँचाने के स्वाभाविक साधन हैं; हिन्दुस्तानियों को सरकारी नौकरियां अधिकाधिक दी जानी चाहिएँ, ऊँचे पदों के योग्य बनाने के लिए उन्हें शिक्षा दी जानी चाहिए; विश्वविद्यालय, स्थानिक संस्थायें और सरकारी नौकरियां ये हिन्दुस्तान के लिए तालीमगाह होनी चाहिएँ; धारा-सभाओं में चुने हुए प्रतिनिधि होने चाहिएँ और उन्हें प्रश्न पूछने तथा वजट पर चर्चा करने का अधिकार भी देना चाहिए; प्रेस और जंगल-कानून की कड़ाई कम होनी चाहिए; पुलिस लोगों की मित्र बनके रहे; कर कम होने चाहिएँ; फौजी खर्च घटाया जाय, कम-से-कम इंग्लैण्ड उसमें कुछ हिस्सा ले; न्याय और शासनविभाग अलहदा - अलहदा हों; प्रान्त और केन्द्र की कार्यकारिणियों और भारत-मंत्री की कौंसिल में हिन्दुस्तानियों को जगह दी जाय; भारतवर्ष को ब्रिटिश पार्लमेण्ट में प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व मिले और प्रत्येक प्रान्त से दो प्रतिनिधि लिये जायँ; नॉन- रेग्यु- - लेटेड प्रान्त रेग्युलेटेड प्रान्तों की पंक्ति में लाये जायँ; सिविल सर्विसवालों के बजाय इंग्लैण्ड के सार्वजनिक जीवन के नामी-नामी अंग्रेज गवर्नर वनाकर भेजे जायँ; नौकरियों के लिए भारत और इंग्लैण्ड में एक साथ परीक्षायें ली जायँ; इंग्लैण्ड को प्रति वर्ष जो रुपया भारत से जाता है वह रोका जाय और देशी उद्योग-धंधों को तरक्की दी जाय; लगान कम किया जाय और वन्दोवस्त दायमी कर दिया जाय । कांग्रेस यहां तक आगे बढ़ी कि उसने नमक-कर को अन्यायपूर्ण वतलाया, सूती माल पर लगे उत्पत्तिकर को अनुचित बतलाया और सिविलियन लोगों को दिये जानेवाले विनिमय दर - मुआवजे को गैर कानूनी बतलाया तथा ठेठ १८६३ में मालवीयजी महाराज की दृष्टि यहां तक पहुँच गई थी कि उन्होंने ग्राम-उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए भी एक प्रस्ताव उपस्थित किया था । भारतीय राजनीतिज्ञों का ध्यान जिन-जिन विषयों की ओर गया था उनका एक- निगाह में सिंहावलोकन करने से यह आसानी से मालूम हो जाता है कि उनकी से मनोरचना किस प्रकार हुई थी । उस समय जब कि भारतीय राजनैतिक क्षेत्र में कोई पथ-दर्शक नहीं था, उन लोगों ने जो रुख अख्त्यार किया था उसके लिए हम उन्हें बुरा नहीं कह सकते । किसी भी आधुनिक इमारत की नींव में छः फीट नीचे जो ईंट, चना और पत्थर गड़े हुए हैं क्या उनपर कोई दोप लगाया जा सकता है ? क्योंकि वही तो हैं जिनके ऊपर सारी इमारत खड़ी हो सकी है। पहले उपनिवेशों के ढंग का स्व-शासन, फिर साम्राज्य के अर्न्तगत होमरुल, उसके वाद स्वराज्य और सबके ऊपर जाकर पूर्ण स्वाधीनता की मंजिलें एक के बाद एक वन सकी हैं। उन्हें अपनी स्पष्ट वात के भी समर्थन में अंग्रेजों के प्रमाण देने पड़ते थे। अपनी समझ और अपनी क्षमता के अनुसार, उन्होंने बहुत परिश्रम और भारी कुर्बानियां की थीं। आज अगर हमारा रास्ता साफ है और हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, तो यह सव हमारे उन्हीं पुरखाओं की बदौलत है कि जिन्होंने जंगल-झाड़ियों को साफ करने का कठिन काम किया है। अतएव इस अवसर पर हम उन तमाम महापुरुषों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता प्रदर्शित करें जिन्होंने कि हमारे सार्वजनिक जीवन की आरम्भिक मंजिलों में प्रगति की गाड़ी को आगे बढ़ाया था । ब्रिटिश राज्य में युद्ध कांग्रेसियों के दिलों में कभी-कभी कुछ उत्तेजना और रोप के भाव आ गये हों, पर इसमें कोई शक नहीं कि ठेठ १८८५ से १६०५ तक कांग्रेस की जो प्रगति हुई उसकी बुनियाद थी वैध आन्दोलन के प्रति उनका दृढ़ और अंग्रेजों की न्याय-प्रियता पर अटल विश्वास ही । इसी भाव को लेकर १८६३ में स्वागताध्यक्ष सरदार दयालसिंह मजीठिया ने कांग्रेस के विषय में कहा था कि "भारत में ब्रिटिश शासन की कीर्ति का यह कलश है।" आगे चलकर उन्होंने यह भी कहा कि "हम उस विधान के मातहत सुख से रह रहे हैं जिसका विरुद है आजादी, और जिसका दावा है सहिष्णुता ।" कांग्रेस के चौथे अधिवेशन ( इलाहावाद, १८८८) के प्रतिनिधि ने लॉर्ड रिपन का यह विचार उद्धृत किया था - "महारानी का घोषणा पत्र कोई सुलहनामा नहीं है, न वह कोई राजनैतिक लेख ही है; बल्कि वह तो सरकार के सिद्धान्तों का घोषणा-पत्र है।" लॉर्ड सेल्सवरी के इस वचन पर कि "प्रतिनिधियों के द्वारा शासन की प्रथा पूर्वी लोगों की परम्परा के मुआफिक नहीं है", जोर के साथ नाराजगी प्रकट की गई थी और १८९० में सर फिरोजशाह मेहता ने तो यहां तक कह दिया था कि "मुझे इस बात का कोई अन्देशा नहीं है कि ब्रिटिश राजनीतिज्ञ अंत में जाकर हमारी पुकार पर अवश्य ध्यान देंगे।" बारहवें अधिवेशन (१८९६) के अध्यक्ष पद से मुहम्मद रहीमतुल्ला सवानी ने तो और भी असंदिग्धरूप में कहा कि "अंग्रेजों से बढ़कर ज्यादा ईमानदार और मजबूत कौम इस सूरज के तले कहीं नहीं है।" और जब कि उस कौम ने हिन्दुस्तानियों के अनुनय-विनय और विरोध का जवाब उलटा दमन से दिया, तब भी मदरास-कांग्रेस (१८९८) के अध्यक्ष आनंदमोहन वसु ने जोर देकर कहा था कि "शिक्षित वर्ग इंग्लैण्ड दोस्त हैं, दुश्मन नहीं । इंग्लैण्ड के सामने जो महान् कार्य है उसमें वे उनके स्वाभाविक तथा आवश्यक मित्र और सहायक हैं।" हमारे इन पूर्व-पुरुषों ने अंग्रेजों और इंग्लैण्ड के प्रति जो विश्वास रक्खा वह कभी-कभी दयाजनक और हेय मालूम होता है; परन्तु हमारा कर्तव्य तो यही है कि हम उनकी मर्यादाओं को समझें। डॉ० सर रासविहारी घोष के शब्दों में ( २३ वीं कांग्रेस, मदरास, १९०८) "अपने कोमल विचार उन तक भेजें जिन्होंने अपने समय में अपने कर्तव्य का भरसक पालन किया है, फिर चाहे वह कितना ही अपूर्ण और त्रुटि युक्त क्यों न हों, उनके बारे में अच्छी-बुरी रायें भी क्यों न हों। हो सकता है कि उनका उत्साह कुछ दवा हुआ हो, परन्तु मैं विना शेखी के कहूंगा कि वह उत्साह सच्चा और शुद्ध भाव से परिपूर्ण था । वह वैसा ही था जिसे देखकर नौजवानों के दिल हिल उठते हैं और अनुप्राणित होते रहते हैं । " कांग्रेस के इतिहास में जो पहला जवरदस्त आन्दोलन हुआ वह पांच वर्षों ( १९०६ से १९९१ ) तक रहा । उसे उस समय ऐसे दमनकारी उपायों का सामना करना पड़ा जो उस समय जंगली समझे गये । हालांकि उसमें इधर-उधर मार-काट भी हो गई, मगर अंत में उसमें पूरी सफलता मिली । आखिर १६११ में शाही घोषणा कर दी गई कि वंगभंग रद कर दिया गया। किन्तु यह ब्रिटिश सरकार की भारी प्रशंसा का विषय बन गया । इससे ब्रिटिश-याय के प्रति लोगों के मन में नया विश्वास पैदा हो गया और धुंआधार वक्तृताओं द्वारा कृतज्ञता - प्रकाश होने लगा । श्री अम्विकाचरण मुजुमदार ने कहा - "ब्रिटिश ताज के प्रति श्रद्धा-भक्ति के भावों से भरा प्रत्येक हृदय आज एक तान से घड़क रहा है; वह ब्रिटिश राजनीतिज्ञता के प्रति कृतज्ञता और नवीन विश्वास से परिपूर्ण हो रहा है । हममें से कुछ लोगों ने तो कभी - अपनी मुसीवतों के अन्धकारमय दिनों में भी - ब्रिटिश न्याय के अन्तिम विजय की आशा नहीं छोड़ी थी, उसपर से. अपना विश्वास नहीं उठने दिया था ।"* परन्तु इसी के साथ कांग्रेसियों ने उन दुःखदायी * पुराने जमाने में कांग्रेसी लोगों को अपनी राजभक्ति की परेड दिखाने का शौक था। १९१४ में जब लॉर्ड पेण्टलैंड (गवर्नर) मदरास में कांग्रेस के पण्डाल में आये तो सब लोग उठ खड़े हुए और तालियों द्वारा उनका स्वागत किया। यहां तक कि श्री० ए० पी० पेट्रो, जो कि उस समय पर एक प्रस्ताव पर बोल रहे थे, एकाएक रोक दिये गये और उनकी जगह सुरेन्द्रनाथ वनर्जी को राजभक्ति का प्रस्ताव उपस्थित करने के लिये कहा गया जिसे कि उन्होंने अपनी समृद्ध भाषा में पेश किया । ऐसी ही घटना लखनऊ-कांग्रेस (१९१६) के समय भी हुई थी, जब कि सर जैम्स मेस्टन कांग्रेस में आये थे और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया था । अपना ध्यान नहीं हटाया था, जो कि १९११ और उससे कांग्रेस के बड़े-बूढ़ों ने, इसमें कोई सन्देह नहीं कि, अपनी सुधारों में और दमनकारी कानूनों को हटवाने में लगाई थी; परन्तु इससे यह अन्दाज करना गलत होगा कि वे सिर्फ भारतीय प्रश्न के अंशों का ही खयाल करते थे, पूरे प्रश्न का नहीं । १८८६ के कलकत्ता अधिवेशन में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था- "स्व-शासन प्रकृति की व्यवस्था है, विधि का विधान है, प्रकृति ने अपनी पुस्तक में स्वयं अपने हाथों से यह सर्वोपरि व्यवस्था लिख रक्खी है - प्रत्येक राष्ट्र अपने भाग्य का आप ही निर्माता होना चाहिए।" २० वें अधिवेशन के सभापतिपद से सर हेनरी कॉटन ने 'भारत के संयुक्त राज्य' अथवा 'भारत के स्वतंत्र और पृथक् राज्यों के संघ' की कल्पना की थी । दादाभाई ने यूनाइटेड किंगडम या उपनिवेशो के जैसे स्व-शासन या स्वराज्य का जिक्र किया था । सरकार द्वारा कांग्रेसियों का सम्मान कांग्रेस के पहले पच्चीस सालों में जिनके ऊपर कांग्रेस की राजनीति का दारोमदार रहा, वे सरकार के दुश्मन नहीं थे। यह बात न केवल उन घोषणाओं से ही सिद्ध होती है जो कि समय-समय पर उनके द्वारा की जाती रही हैं, बल्कि स्वयं सरकार भी उनके साथ रिआयतें करके और जब-जब हिन्दुस्तानियों को ऊँचे पद व स्थान देने का मोका आया तव तव उन्हींको उसके लिए चुनकर यही सिद्ध करती रही है। ऐसे उच्च पदों के लिए न्याय विभाग का क्षेत्र ही स्वभावतः सबसे उपयुक्त था। मदरास के सर एस० सुब्रह्मण्य ऐयर तो कांग्रेस के पहले ही अधिवेशन में सामने आये और श्री वी० कृष्णस्वामी ऐयर २६०८ में हुई मदरास की पहली कन्वेन्शन कांग्रेस के एकमात्र कर्ता-धर्ता थे, जो बहुत कड़े विधान के मातहत हुई थी और जिसके लिए तत्कालीन मदरास गवर्नर ने अपना तम्बू देने की कृपा की थी। राष्ट्रवादियों और कांग्रेस का उल्लेख करते हुए यह कहनेवाले श्री कृष्णस्वामी ऐयर ही थे कि जो अंग सड़-गल कर वेकाम हो गये हैं उन्हें काट डालना चाहिए । सर शंकरन् नायर अमरावती में हुए अधिवेशन (१८९७) के सभापति हुए थे। और तो और पर श्री रमेशन् ( सर वेपा सिनो) १८६८ से कांग्रेसवादी ही थे, जिस साल कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीकाप्रवासी भारतीयों की कठिनाइयों के सम्बन्ध में पेश किये गये प्रस्ताव का अनुमोदन किया था। इसके बाद जिनका नम्बर आता है वे हैं ( १ ) श्री टी० बी० शेषगिरि ऐर, जो १६१० की कांग्रेस में सामने आये, और (२) श्री पी० आर० सुन्दरम् ऐयर, जो १३०८ में श्री कृष्णस्वामी ऐयर के एक उत्साही सहकारी थे। ये छहों मदरास हाईकोर्ट के जज बनाये गये और इनमें से दो कार्यकारिणी कौंसिल के सदस्य भी हो गये - एक मदरास में और दूसरा दिल्ली में । इनमें से पहले (सर सुब्रह्मण्य ) १८९६ में कांग्रेस के सभापति होनेवाले थे परन्तु हाईकोर्ट के जज बना दिये जाने के कारण रह गये थे। श्रीमती बेसेण्ट द्वारा चलाये गये होमरूल आन्दोलन के समय, १९९४ में, यह फिर कांग्रेस के क्षेत्र में आ गये । यही नहीं, वल्कि अपनी नाइटहुड (सर की उपाधि ) का भी परित्याग कर दिया, जिससे मि० माण्टेगु और लॉर्ड चेम्सफोर्ड दोनों ही इनपर नाराज हो गये। कहते हैं कि भूतपूर्व जज की हैसियत से जो पेन्शन इन्हें मिलती थी उसे वन्द कर देने की भी बात उस समय उठी थी, परन्तु बाद में कुछ सोचकर फिर ऐसा किया नहीं गया । और आगे चलें तो, सर पी० एस० शिवस्वामी ऐयर और सर सी० पी० रामस्वामी ऐयर भी कांग्रेसी थे। इनमें से पहले तो १८६५ की कांग्रेस में सामने आये थे और दूसरे थे तो वाद के नये रंगरूट लेकिन रहे सदा पहलों से भी ज्यादा उत्साही, क्योंकि डा० बेसेण्ट और उनके साथियों की नजरवन्दी के समय उन्होंने तो सत्याग्रह (निष्क्रिय प्रतिरोध) के प्रतिज्ञापत्र पर भी हस्ताक्षर कर दिये थे । सच तो यह है कि १९१७ और १६१६ के बीच कांग्रेसी क्षेत्र में सर सी० पी० रामस्वामी एक ऐसे चमकते हुए सितारे थे जिन्होंने अपने प्रकाश से भारत के राजनैतिक क्षितिज में चकाचौंध कर रक्खी थी। ये दोनों ही बाद में कार्यकारिणी के सदस्य बना दिये गये । यही हाल सर मुहम्मद हवीवुल्ला का हुआ, जिन्होंने पहले-पहल १८९८ में कांग्रेस के मंच पर प्रकट होकर अपने बुद्धि कौशल एवं वक्तृत्व-शक्ति का परिचय दिया था। यह पहले मदरास और फिर भारत सरकार की कार्यकारिणी के सदस्य बनाये गये । मदराससरकार के लॉ-मेम्बर होनेवाले सर एन० कृष्ण नैयर १९०४ की कांग्रेस में बोले थे, और उनके उत्तराधिकारी सर के० वी० रेड्डी तो १६१७ में जस्टिस पार्टी का जन्म होने तक भी एक उत्साही एवं सुप्रसिद्ध कांग्रेसी थे । सर एम० रामचन्द्रराव बहुत समय तक कांग्रेस में रह चुके हैं। और असलियत यह है कि १९२१ में मदरास की कार्यकारिणी में उनकी नियुक्ति भी हो चुकी थी, परन्तु फिर ऐन वक्त पर विचार बदल दिया गया । इस प्रकार ६ हाईकोर्ट के जज और ६ कार्यकारिणी के सदस्य तो अकेले मदरास के कांग्रेसमैन ही हो चुके थे । और हाल में टैरिफ बोर्ड में श्री नटेसन की जो नियुक्ति हुई है उससे तो गैरमामूली क्षेत्रों में भी कांग्रेसियों के पसन्द किये जाने के उदाहरण की वृद्धि हुई है, यही नहीं वल्कि सर षण्मुखम् चेट्टी को भी न्याय या शासन के विभागों में ही कोई पद देने के बजाय कोचीन का दीवान वनाना भी इसी बात का पोपक है। जो कांग्रेसमैन इस तरह पुरस्कृत हुए उनमें सबसे पहले सम्भवतः श्री सी० जम्बुलिंगम् मुदालियर थे जो मदरास कौंसिल के एक चुने हुए सदस्य थे और १८९३ में वहां के सिटी सिविल कोर्ट के जज बनाये गये थे। वम्बई में श्री वदरुद्दीन तैयवजी और नारायण चन्द्रावरकर दोनों, जो क्रमशः १८८७ की मदरासकांग्रेस और १६०० की लाहोर कांग्रेस के सभापति हुए थे, तथा श्री काशीनाथ त्र्यम्बक तैलंग बम्बई-हाईकोर्ट के जज बनाये गये । श्री समर्थ और भूपेन्द्रनाथ वसु भारत - मंत्री की (इंण्डिया) कौंसिल के सदस्य बनाये गये और सर चिमनलाल शीतलवाड़ को बाद में बम्बई की कार्यकारिणी कौंसिल का एक सदस्य बना दिया गया । कलकत्ता में श्री ए० चौधरी, जिन्होंने वंग-भंग के विरुद्ध होनेवाले आन्दोलन में प्रमुख भाग लिया था, लगभग उसी समय वहां की हाईकोर्ट के जज बना दिये गये । १९०८ में जब लॉर्ड मिण्टो ने भारत सरकार की लॉ-मेम्वरी के लिए व्यक्तियों का किया तो, लेडी मिण्टो ने अपने पति लॉर्ड मिण्टो का जो जीवन चरित्र लिखा है चुनाव उससे मालूम पड़ता है कि, दो नाम उनके सामने थे -- एक तो श्री आशुतोप मुकर्जी का, "जो भारत के एक प्रमुख कानूनदां थे, पर थे सच्चे दिल से पुराणपन्थी, और सावधानी के साथ उनका पक्ष उपस्थित किया गया था," और दूसरा श्री सत्येन्द्रप्रसन्न सिंह का, जिनके बारे में लॉर्ड मिण्टो ने कहा बताते हैं कि "उनके विचार तो सौम्य हैं परन्तु हैं वह कांग्रेसी ।" सत्येन्द्रप्रसन्न सिंह १८६६ की कलकत्ता-कांग्रेस में, देशी नरेश को बिना मुकदमा चलाये निर्वासित कर देने के प्रश्न पर बोले थे। और, यह हम सब जानते हैं कि, अन्त में (लॉ-मेम्बरी के लिए) तरजीह कांग्रसमैन को ही दी गई। इसी प्रकार १६२० में गवर्नर-जनरल की कार्यकारिणी में जब जगह हुई तब भी लॉर्ड चेम्सफोर्ड ( १९२०) ने तो महाराजा बर्दवान को रखना चाहा पर मि० माण्टेगु ने बड़ी कौंसिल के किसी चुने हुए सदस्य को ही रखना ज्यादा पसन्द किया । मि० माण्टेगु ने श्री श्रीनिवास शास्त्री का नाम इसके लिए सुझाया, लेकिन चूंकि ऐन मौके पर उन्होंने साथ नहीं दिया था इसलिए चेम्सफोर्ड ने उन्हें रखना पसन्द नहीं किया और श्री वी० एन० शर्मा को रक्खा - जो कि, जैसा हम आगे देखेंगे, अमृतसर-काण्ड के वक्त भी सरकार के पृष्ठ- पोपक बने रहे। बंगाल में कांग्रेस से सम्बन्ध रखनेवाले अन्य जिन व्यक्तियों को ऊंचे सरकारी ओहदे मिले उनमें श्री एस० के० दास और सर प्रभासचन्द्र मित्र मुख्य हैं। इनमें श्री दास, जो १६०५ की कांग्रेस में, कार्यकारिणी में हिन्दुस्तानियों की नियुक्ति के प्रश्न पर
कांग्रेस के विकास की प्रारम्भिक भूमिका. पुराने कांग्रेसियों का दृष्टिकोण व नीति कांग्रेस को स्थापित हुए अवतक पचास वर्प हो गये । इस लम्बे अरसे में भारत के राष्ट्रीय विकास की कई भूमिकाओं से वह गुजर चुकी है। हां, आगे जाकर उसके अन्दर कुछ मतभेद जरूर पैदा हो गये थे । परन्तु पिछला जमाना तो एक हज़ार आठ सौ पचासी से एक हज़ार नौ सौ पंद्रह वल्कि एक हज़ार नौ सौ इक्कीस तक ऐसा रहा, जिसमें भिन्न-भिन्न रायों और विचारों के लोगों ने मिलकर अपने लिए प्रायः एक ही कार्यक्रम तजवीजं किया था। इसका यह अर्थ नहीं कि उन दिनों भारतीय राजनीति में मत-भेद और विचार-भेद पैदा ही नहीं हुए थे, वल्कि यह कि वे गिनती में आने लायक न थे । युद्ध का निर्णय करने में या लड़ाई की रचना में सबसे बड़ी कठिनाई है युद्धक्षेत्र का चुनाव और व्यूह-रचना । दोनों तरफ के लोग हमला करें या वचाव, प्रार्थना करें या विरोध, युद्ध रोककर शत्रु को सन्धि- चर्चा के लिए निमन्त्रण दें या एकदम छापा मारकर उसे घेर लें, इन्हींकी उधेड़-चुन में लगे रहते हैं । युद्ध-क्षेत्र में इन्हीं प्रश्नों पर सेनापतियों के दिमाग परेशान रहते हैं। इसी तरह राजनैतिक क्षेत्र में भी ऐसे प्रश्न आते हैं, जहां नेताओं को यह तय करना पड़ता है कि आन्दोलन महज लफ्जी और कागजी हो या कुछ करके बताया जाय । यदि कुछ कर दिखाना हो तव उन्हें यह निश्चय करना पड़ता है कि लड़ाई प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष । यों तो ये प्रश्न वड़ी तेजी से हमारी आंखों के सामने दौड़ जाते हैं और उससे भी ज्यादा तेजी के साथ हमारे दिमाग में चक्कर काटते हैं, परन्तु राजनैतिक लड़ाइयों में वीसों वर्षों में जाकर कहीं एक के बाद दूसरी स्थिति का विकास होता है और जो काम पचास वर्गों की जबर्दस्त लड़ाई के बाद आज वड़ा आसान और मामूली दिखाई देता है वह हमारे पूर्वजों को, जिन्होंने कि कांग्रेस की शुरुआत की, अपनी कल्पना के बाहर मालूम हुआ होता । जरा खयाल कीजिए कि विदेशी माल के या कौंसिलों के, अदालतों या कालेजों के वहिष्कार या कुछ कानूनों के सविनय भंग का कोई प्रस्ताव उमेशचन्द्र बनर्जी या सुरेन्द्रनाथ वनर्जी, सर फीरोजअव्याय तीन : कांग्रेस के विकास की प्रारम्भिक भूमिका शाह मेहता या पंशून्य अयोव्यानाथ, लालमोहन घोप या मनमोहन घोष, सुब्रह्मण्य ऐयर या आनन्दा चालू, ह्यूम साहब और वेडरवर्न साहब के सामने रक्खा गया है। अब यह सोचने में जरा भी देर नहीं लग सकती कि इन विचारों के कारण वे कितने भड़क उठे होते और न ऐसे उग्र कार्यक्रम, वंग-भंग के, कर्जन और मिण्टो की प्रतिगामी नीतियों के, या गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका सम्बन्धी अनुभवों के या जालियांवाला बाग के हत्याकाण्ड के पहले बन हो सकते थे । बात यह कि पिछली सदी के अन्त के प्रारम्भिक पन्द्रह सालों के लड़ाई-झगड़ों में जो कांग्रेस नेता रहे वे ज्यादातर वकील-चैरिस्टर और कुछ व्यापारी एवं डॉक्टर थे, जिनका सच्चे दिल से यह विश्वास था कि हिन्दुस्तान सिर्फ इतना ही चाहता है कि अंग्रेजों और पार्लमेण्ट के सामने उसका पक्ष बहुत सुन्दर और नपी-तुली भाषा में रख दिया जाय । इस प्रयोजन के लिए उन्हें एक राजनैतिक संगठन की जरूरत थी और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। उसके द्वारा वे राष्ट्र के दुःखों और उच्च आकांक्षाओं को प्रदर्शित करते रहे। जब इस बात की याद करते हैं कि किन-किन व्यक्तियों ने भारत की राजनीति को बनाया और उसे प्रभावित किया, इनके विश्वास क्या थे, तब वे सव भिन्न-भिन्न युग हमारे सामने आ जाते हैं जिनमें कि भारतीय राजनैतिक आन्दोलन इन पचास वर्षों में बँट गया है। वह जमाना और हालतें ही ऐसी थीं कि अपने दुःख-दर्द दूर करने के लिए हाकिमों के सामने सिया दलील और प्रार्थना करने के और नई रिआयतों और विशेषाधिकारों के लिए मामूली मांग करने के और कुछ नहीं हो सकता था। फिर यह मनोदशा आगे जाकर शीघ्र ही एक कला के रूप में परिणत हो गई। एक ओर कानून प्रवीण बुद्धि और दूसरी ओर खूब कल्पनाशील और भावना प्रधान वक्तृत्व-कला, दोनों ने उस काम को अपने ऊपर ले लिया जो भारतीय राजनीतिज्ञों के सामने था । कांग्रेस के प्रस्तावों के समर्थन में जो व्याख्यान होते थे और कांग्रेस के अध्यक्ष जो भाषण दिया करते थे उनमें दो बातें हुआ करती थीं - एक तो प्रभावकारी तथ्य और आंकड़े, दूसरे अकाट्य दलीलें। उनके उद्गारों में जिन बातों पर अक्सर जोर दिया जाता था वे ये हैं - अंग्रेज़ लोग बड़े न्यायो हैं और अगर उन्हें ठीक तौर पर वाकिफ रक्खा जाय तो वे सत्य और हक के पथ से जुदा न होंगे; हमारे सामने असली मसला अंग्रेजों का नहीं बल्कि अवगोरों का है; बराई पद्धति में है, न कि व्यक्ति में, कांग्रेस बड़ी राजभक्त है, ब्रिटिश-ताज से नहीं बल्कि हिन्दुस्तानी नौकरशाही से उसका झगड़ा है; ब्रिटिश-विधान ऐसा है जो लोगों की स्वाधीनता का सब जगह रक्षण करता है और ब्रिटिश पार्लमेण्ट प्रजातन्त्र पद्धति की माता है; ब्रिटिग-विधान संसार के सब विधानों से अच्छा है। कांग्रेस राजद्रोह करनेवाली संस्था नहीं है; भारतीय राजनीतिज्ञ सरकार का भाव लोगों तक और लोगों का सरकार तक पहुँचाने के स्वाभाविक साधन हैं; हिन्दुस्तानियों को सरकारी नौकरियां अधिकाधिक दी जानी चाहिएँ, ऊँचे पदों के योग्य बनाने के लिए उन्हें शिक्षा दी जानी चाहिए; विश्वविद्यालय, स्थानिक संस्थायें और सरकारी नौकरियां ये हिन्दुस्तान के लिए तालीमगाह होनी चाहिएँ; धारा-सभाओं में चुने हुए प्रतिनिधि होने चाहिएँ और उन्हें प्रश्न पूछने तथा वजट पर चर्चा करने का अधिकार भी देना चाहिए; प्रेस और जंगल-कानून की कड़ाई कम होनी चाहिए; पुलिस लोगों की मित्र बनके रहे; कर कम होने चाहिएँ; फौजी खर्च घटाया जाय, कम-से-कम इंग्लैण्ड उसमें कुछ हिस्सा ले; न्याय और शासनविभाग अलहदा - अलहदा हों; प्रान्त और केन्द्र की कार्यकारिणियों और भारत-मंत्री की कौंसिल में हिन्दुस्तानियों को जगह दी जाय; भारतवर्ष को ब्रिटिश पार्लमेण्ट में प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व मिले और प्रत्येक प्रान्त से दो प्रतिनिधि लिये जायँ; नॉन- रेग्यु- - लेटेड प्रान्त रेग्युलेटेड प्रान्तों की पंक्ति में लाये जायँ; सिविल सर्विसवालों के बजाय इंग्लैण्ड के सार्वजनिक जीवन के नामी-नामी अंग्रेज गवर्नर वनाकर भेजे जायँ; नौकरियों के लिए भारत और इंग्लैण्ड में एक साथ परीक्षायें ली जायँ; इंग्लैण्ड को प्रति वर्ष जो रुपया भारत से जाता है वह रोका जाय और देशी उद्योग-धंधों को तरक्की दी जाय; लगान कम किया जाय और वन्दोवस्त दायमी कर दिया जाय । कांग्रेस यहां तक आगे बढ़ी कि उसने नमक-कर को अन्यायपूर्ण वतलाया, सूती माल पर लगे उत्पत्तिकर को अनुचित बतलाया और सिविलियन लोगों को दिये जानेवाले विनिमय दर - मुआवजे को गैर कानूनी बतलाया तथा ठेठ एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ में मालवीयजी महाराज की दृष्टि यहां तक पहुँच गई थी कि उन्होंने ग्राम-उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए भी एक प्रस्ताव उपस्थित किया था । भारतीय राजनीतिज्ञों का ध्यान जिन-जिन विषयों की ओर गया था उनका एक- निगाह में सिंहावलोकन करने से यह आसानी से मालूम हो जाता है कि उनकी से मनोरचना किस प्रकार हुई थी । उस समय जब कि भारतीय राजनैतिक क्षेत्र में कोई पथ-दर्शक नहीं था, उन लोगों ने जो रुख अख्त्यार किया था उसके लिए हम उन्हें बुरा नहीं कह सकते । किसी भी आधुनिक इमारत की नींव में छः फीट नीचे जो ईंट, चना और पत्थर गड़े हुए हैं क्या उनपर कोई दोप लगाया जा सकता है ? क्योंकि वही तो हैं जिनके ऊपर सारी इमारत खड़ी हो सकी है। पहले उपनिवेशों के ढंग का स्व-शासन, फिर साम्राज्य के अर्न्तगत होमरुल, उसके वाद स्वराज्य और सबके ऊपर जाकर पूर्ण स्वाधीनता की मंजिलें एक के बाद एक वन सकी हैं। उन्हें अपनी स्पष्ट वात के भी समर्थन में अंग्रेजों के प्रमाण देने पड़ते थे। अपनी समझ और अपनी क्षमता के अनुसार, उन्होंने बहुत परिश्रम और भारी कुर्बानियां की थीं। आज अगर हमारा रास्ता साफ है और हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, तो यह सव हमारे उन्हीं पुरखाओं की बदौलत है कि जिन्होंने जंगल-झाड़ियों को साफ करने का कठिन काम किया है। अतएव इस अवसर पर हम उन तमाम महापुरुषों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता प्रदर्शित करें जिन्होंने कि हमारे सार्वजनिक जीवन की आरम्भिक मंजिलों में प्रगति की गाड़ी को आगे बढ़ाया था । ब्रिटिश राज्य में युद्ध कांग्रेसियों के दिलों में कभी-कभी कुछ उत्तेजना और रोप के भाव आ गये हों, पर इसमें कोई शक नहीं कि ठेठ एक हज़ार आठ सौ पचासी से एक हज़ार छः सौ पाँच तक कांग्रेस की जो प्रगति हुई उसकी बुनियाद थी वैध आन्दोलन के प्रति उनका दृढ़ और अंग्रेजों की न्याय-प्रियता पर अटल विश्वास ही । इसी भाव को लेकर एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ में स्वागताध्यक्ष सरदार दयालसिंह मजीठिया ने कांग्रेस के विषय में कहा था कि "भारत में ब्रिटिश शासन की कीर्ति का यह कलश है।" आगे चलकर उन्होंने यह भी कहा कि "हम उस विधान के मातहत सुख से रह रहे हैं जिसका विरुद है आजादी, और जिसका दावा है सहिष्णुता ।" कांग्रेस के चौथे अधिवेशन के प्रतिनिधि ने लॉर्ड रिपन का यह विचार उद्धृत किया था - "महारानी का घोषणा पत्र कोई सुलहनामा नहीं है, न वह कोई राजनैतिक लेख ही है; बल्कि वह तो सरकार के सिद्धान्तों का घोषणा-पत्र है।" लॉर्ड सेल्सवरी के इस वचन पर कि "प्रतिनिधियों के द्वारा शासन की प्रथा पूर्वी लोगों की परम्परा के मुआफिक नहीं है", जोर के साथ नाराजगी प्रकट की गई थी और एक हज़ार आठ सौ नब्बे में सर फिरोजशाह मेहता ने तो यहां तक कह दिया था कि "मुझे इस बात का कोई अन्देशा नहीं है कि ब्रिटिश राजनीतिज्ञ अंत में जाकर हमारी पुकार पर अवश्य ध्यान देंगे।" बारहवें अधिवेशन के अध्यक्ष पद से मुहम्मद रहीमतुल्ला सवानी ने तो और भी असंदिग्धरूप में कहा कि "अंग्रेजों से बढ़कर ज्यादा ईमानदार और मजबूत कौम इस सूरज के तले कहीं नहीं है।" और जब कि उस कौम ने हिन्दुस्तानियों के अनुनय-विनय और विरोध का जवाब उलटा दमन से दिया, तब भी मदरास-कांग्रेस के अध्यक्ष आनंदमोहन वसु ने जोर देकर कहा था कि "शिक्षित वर्ग इंग्लैण्ड दोस्त हैं, दुश्मन नहीं । इंग्लैण्ड के सामने जो महान् कार्य है उसमें वे उनके स्वाभाविक तथा आवश्यक मित्र और सहायक हैं।" हमारे इन पूर्व-पुरुषों ने अंग्रेजों और इंग्लैण्ड के प्रति जो विश्वास रक्खा वह कभी-कभी दयाजनक और हेय मालूम होता है; परन्तु हमारा कर्तव्य तो यही है कि हम उनकी मर्यादाओं को समझें। डॉशून्य सर रासविहारी घोष के शब्दों में "अपने कोमल विचार उन तक भेजें जिन्होंने अपने समय में अपने कर्तव्य का भरसक पालन किया है, फिर चाहे वह कितना ही अपूर्ण और त्रुटि युक्त क्यों न हों, उनके बारे में अच्छी-बुरी रायें भी क्यों न हों। हो सकता है कि उनका उत्साह कुछ दवा हुआ हो, परन्तु मैं विना शेखी के कहूंगा कि वह उत्साह सच्चा और शुद्ध भाव से परिपूर्ण था । वह वैसा ही था जिसे देखकर नौजवानों के दिल हिल उठते हैं और अनुप्राणित होते रहते हैं । " कांग्रेस के इतिहास में जो पहला जवरदस्त आन्दोलन हुआ वह पांच वर्षों तक रहा । उसे उस समय ऐसे दमनकारी उपायों का सामना करना पड़ा जो उस समय जंगली समझे गये । हालांकि उसमें इधर-उधर मार-काट भी हो गई, मगर अंत में उसमें पूरी सफलता मिली । आखिर एक हज़ार छः सौ ग्यारह में शाही घोषणा कर दी गई कि वंगभंग रद कर दिया गया। किन्तु यह ब्रिटिश सरकार की भारी प्रशंसा का विषय बन गया । इससे ब्रिटिश-याय के प्रति लोगों के मन में नया विश्वास पैदा हो गया और धुंआधार वक्तृताओं द्वारा कृतज्ञता - प्रकाश होने लगा । श्री अम्विकाचरण मुजुमदार ने कहा - "ब्रिटिश ताज के प्रति श्रद्धा-भक्ति के भावों से भरा प्रत्येक हृदय आज एक तान से घड़क रहा है; वह ब्रिटिश राजनीतिज्ञता के प्रति कृतज्ञता और नवीन विश्वास से परिपूर्ण हो रहा है । हममें से कुछ लोगों ने तो कभी - अपनी मुसीवतों के अन्धकारमय दिनों में भी - ब्रिटिश न्याय के अन्तिम विजय की आशा नहीं छोड़ी थी, उसपर से. अपना विश्वास नहीं उठने दिया था ।"* परन्तु इसी के साथ कांग्रेसियों ने उन दुःखदायी * पुराने जमाने में कांग्रेसी लोगों को अपनी राजभक्ति की परेड दिखाने का शौक था। एक हज़ार नौ सौ चौदह में जब लॉर्ड पेण्टलैंड मदरास में कांग्रेस के पण्डाल में आये तो सब लोग उठ खड़े हुए और तालियों द्वारा उनका स्वागत किया। यहां तक कि श्रीशून्य एशून्य पीशून्य पेट्रो, जो कि उस समय पर एक प्रस्ताव पर बोल रहे थे, एकाएक रोक दिये गये और उनकी जगह सुरेन्द्रनाथ वनर्जी को राजभक्ति का प्रस्ताव उपस्थित करने के लिये कहा गया जिसे कि उन्होंने अपनी समृद्ध भाषा में पेश किया । ऐसी ही घटना लखनऊ-कांग्रेस के समय भी हुई थी, जब कि सर जैम्स मेस्टन कांग्रेस में आये थे और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया था । अपना ध्यान नहीं हटाया था, जो कि एक हज़ार नौ सौ ग्यारह और उससे कांग्रेस के बड़े-बूढ़ों ने, इसमें कोई सन्देह नहीं कि, अपनी सुधारों में और दमनकारी कानूनों को हटवाने में लगाई थी; परन्तु इससे यह अन्दाज करना गलत होगा कि वे सिर्फ भारतीय प्रश्न के अंशों का ही खयाल करते थे, पूरे प्रश्न का नहीं । एक हज़ार आठ सौ छियासी के कलकत्ता अधिवेशन में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था- "स्व-शासन प्रकृति की व्यवस्था है, विधि का विधान है, प्रकृति ने अपनी पुस्तक में स्वयं अपने हाथों से यह सर्वोपरि व्यवस्था लिख रक्खी है - प्रत्येक राष्ट्र अपने भाग्य का आप ही निर्माता होना चाहिए।" बीस वें अधिवेशन के सभापतिपद से सर हेनरी कॉटन ने 'भारत के संयुक्त राज्य' अथवा 'भारत के स्वतंत्र और पृथक् राज्यों के संघ' की कल्पना की थी । दादाभाई ने यूनाइटेड किंगडम या उपनिवेशो के जैसे स्व-शासन या स्वराज्य का जिक्र किया था । सरकार द्वारा कांग्रेसियों का सम्मान कांग्रेस के पहले पच्चीस सालों में जिनके ऊपर कांग्रेस की राजनीति का दारोमदार रहा, वे सरकार के दुश्मन नहीं थे। यह बात न केवल उन घोषणाओं से ही सिद्ध होती है जो कि समय-समय पर उनके द्वारा की जाती रही हैं, बल्कि स्वयं सरकार भी उनके साथ रिआयतें करके और जब-जब हिन्दुस्तानियों को ऊँचे पद व स्थान देने का मोका आया तव तव उन्हींको उसके लिए चुनकर यही सिद्ध करती रही है। ऐसे उच्च पदों के लिए न्याय विभाग का क्षेत्र ही स्वभावतः सबसे उपयुक्त था। मदरास के सर एसशून्य सुब्रह्मण्य ऐयर तो कांग्रेस के पहले ही अधिवेशन में सामने आये और श्री वीशून्य कृष्णस्वामी ऐयर दो हज़ार छः सौ आठ में हुई मदरास की पहली कन्वेन्शन कांग्रेस के एकमात्र कर्ता-धर्ता थे, जो बहुत कड़े विधान के मातहत हुई थी और जिसके लिए तत्कालीन मदरास गवर्नर ने अपना तम्बू देने की कृपा की थी। राष्ट्रवादियों और कांग्रेस का उल्लेख करते हुए यह कहनेवाले श्री कृष्णस्वामी ऐयर ही थे कि जो अंग सड़-गल कर वेकाम हो गये हैं उन्हें काट डालना चाहिए । सर शंकरन् नायर अमरावती में हुए अधिवेशन के सभापति हुए थे। और तो और पर श्री रमेशन् एक हज़ार आठ सौ अड़सठ से कांग्रेसवादी ही थे, जिस साल कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीकाप्रवासी भारतीयों की कठिनाइयों के सम्बन्ध में पेश किये गये प्रस्ताव का अनुमोदन किया था। इसके बाद जिनका नम्बर आता है वे हैं श्री टीशून्य बीशून्य शेषगिरि ऐर, जो एक हज़ार छः सौ दस की कांग्रेस में सामने आये, और श्री पीशून्य आरशून्य सुन्दरम् ऐयर, जो एक हज़ार तीन सौ आठ में श्री कृष्णस्वामी ऐयर के एक उत्साही सहकारी थे। ये छहों मदरास हाईकोर्ट के जज बनाये गये और इनमें से दो कार्यकारिणी कौंसिल के सदस्य भी हो गये - एक मदरास में और दूसरा दिल्ली में । इनमें से पहले एक हज़ार आठ सौ छियानवे में कांग्रेस के सभापति होनेवाले थे परन्तु हाईकोर्ट के जज बना दिये जाने के कारण रह गये थे। श्रीमती बेसेण्ट द्वारा चलाये गये होमरूल आन्दोलन के समय, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में, यह फिर कांग्रेस के क्षेत्र में आ गये । यही नहीं, वल्कि अपनी नाइटहुड का भी परित्याग कर दिया, जिससे मिशून्य माण्टेगु और लॉर्ड चेम्सफोर्ड दोनों ही इनपर नाराज हो गये। कहते हैं कि भूतपूर्व जज की हैसियत से जो पेन्शन इन्हें मिलती थी उसे वन्द कर देने की भी बात उस समय उठी थी, परन्तु बाद में कुछ सोचकर फिर ऐसा किया नहीं गया । और आगे चलें तो, सर पीशून्य एसशून्य शिवस्वामी ऐयर और सर सीशून्य पीशून्य रामस्वामी ऐयर भी कांग्रेसी थे। इनमें से पहले तो एक हज़ार आठ सौ पैंसठ की कांग्रेस में सामने आये थे और दूसरे थे तो वाद के नये रंगरूट लेकिन रहे सदा पहलों से भी ज्यादा उत्साही, क्योंकि डाशून्य बेसेण्ट और उनके साथियों की नजरवन्दी के समय उन्होंने तो सत्याग्रह के प्रतिज्ञापत्र पर भी हस्ताक्षर कर दिये थे । सच तो यह है कि एक हज़ार नौ सौ सत्रह और एक हज़ार छः सौ सोलह के बीच कांग्रेसी क्षेत्र में सर सीशून्य पीशून्य रामस्वामी एक ऐसे चमकते हुए सितारे थे जिन्होंने अपने प्रकाश से भारत के राजनैतिक क्षितिज में चकाचौंध कर रक्खी थी। ये दोनों ही बाद में कार्यकारिणी के सदस्य बना दिये गये । यही हाल सर मुहम्मद हवीवुल्ला का हुआ, जिन्होंने पहले-पहल एक हज़ार आठ सौ अट्ठानवे में कांग्रेस के मंच पर प्रकट होकर अपने बुद्धि कौशल एवं वक्तृत्व-शक्ति का परिचय दिया था। यह पहले मदरास और फिर भारत सरकार की कार्यकारिणी के सदस्य बनाये गये । मदराससरकार के लॉ-मेम्बर होनेवाले सर एनशून्य कृष्ण नैयर एक हज़ार नौ सौ चार की कांग्रेस में बोले थे, और उनके उत्तराधिकारी सर केशून्य वीशून्य रेड्डी तो एक हज़ार छः सौ सत्रह में जस्टिस पार्टी का जन्म होने तक भी एक उत्साही एवं सुप्रसिद्ध कांग्रेसी थे । सर एमशून्य रामचन्द्रराव बहुत समय तक कांग्रेस में रह चुके हैं। और असलियत यह है कि एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में मदरास की कार्यकारिणी में उनकी नियुक्ति भी हो चुकी थी, परन्तु फिर ऐन वक्त पर विचार बदल दिया गया । इस प्रकार छः हाईकोर्ट के जज और छः कार्यकारिणी के सदस्य तो अकेले मदरास के कांग्रेसमैन ही हो चुके थे । और हाल में टैरिफ बोर्ड में श्री नटेसन की जो नियुक्ति हुई है उससे तो गैरमामूली क्षेत्रों में भी कांग्रेसियों के पसन्द किये जाने के उदाहरण की वृद्धि हुई है, यही नहीं वल्कि सर षण्मुखम् चेट्टी को भी न्याय या शासन के विभागों में ही कोई पद देने के बजाय कोचीन का दीवान वनाना भी इसी बात का पोपक है। जो कांग्रेसमैन इस तरह पुरस्कृत हुए उनमें सबसे पहले सम्भवतः श्री सीशून्य जम्बुलिंगम् मुदालियर थे जो मदरास कौंसिल के एक चुने हुए सदस्य थे और एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में वहां के सिटी सिविल कोर्ट के जज बनाये गये थे। वम्बई में श्री वदरुद्दीन तैयवजी और नारायण चन्द्रावरकर दोनों, जो क्रमशः एक हज़ार आठ सौ सत्तासी की मदरासकांग्रेस और एक हज़ार छः सौ की लाहोर कांग्रेस के सभापति हुए थे, तथा श्री काशीनाथ त्र्यम्बक तैलंग बम्बई-हाईकोर्ट के जज बनाये गये । श्री समर्थ और भूपेन्द्रनाथ वसु भारत - मंत्री की कौंसिल के सदस्य बनाये गये और सर चिमनलाल शीतलवाड़ को बाद में बम्बई की कार्यकारिणी कौंसिल का एक सदस्य बना दिया गया । कलकत्ता में श्री एशून्य चौधरी, जिन्होंने वंग-भंग के विरुद्ध होनेवाले आन्दोलन में प्रमुख भाग लिया था, लगभग उसी समय वहां की हाईकोर्ट के जज बना दिये गये । एक हज़ार नौ सौ आठ में जब लॉर्ड मिण्टो ने भारत सरकार की लॉ-मेम्वरी के लिए व्यक्तियों का किया तो, लेडी मिण्टो ने अपने पति लॉर्ड मिण्टो का जो जीवन चरित्र लिखा है चुनाव उससे मालूम पड़ता है कि, दो नाम उनके सामने थे -- एक तो श्री आशुतोप मुकर्जी का, "जो भारत के एक प्रमुख कानूनदां थे, पर थे सच्चे दिल से पुराणपन्थी, और सावधानी के साथ उनका पक्ष उपस्थित किया गया था," और दूसरा श्री सत्येन्द्रप्रसन्न सिंह का, जिनके बारे में लॉर्ड मिण्टो ने कहा बताते हैं कि "उनके विचार तो सौम्य हैं परन्तु हैं वह कांग्रेसी ।" सत्येन्द्रप्रसन्न सिंह एक हज़ार आठ सौ छयासठ की कलकत्ता-कांग्रेस में, देशी नरेश को बिना मुकदमा चलाये निर्वासित कर देने के प्रश्न पर बोले थे। और, यह हम सब जानते हैं कि, अन्त में तरजीह कांग्रसमैन को ही दी गई। इसी प्रकार एक हज़ार छः सौ बीस में गवर्नर-जनरल की कार्यकारिणी में जब जगह हुई तब भी लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने तो महाराजा बर्दवान को रखना चाहा पर मिशून्य माण्टेगु ने बड़ी कौंसिल के किसी चुने हुए सदस्य को ही रखना ज्यादा पसन्द किया । मिशून्य माण्टेगु ने श्री श्रीनिवास शास्त्री का नाम इसके लिए सुझाया, लेकिन चूंकि ऐन मौके पर उन्होंने साथ नहीं दिया था इसलिए चेम्सफोर्ड ने उन्हें रखना पसन्द नहीं किया और श्री वीशून्य एनशून्य शर्मा को रक्खा - जो कि, जैसा हम आगे देखेंगे, अमृतसर-काण्ड के वक्त भी सरकार के पृष्ठ- पोपक बने रहे। बंगाल में कांग्रेस से सम्बन्ध रखनेवाले अन्य जिन व्यक्तियों को ऊंचे सरकारी ओहदे मिले उनमें श्री एसशून्य केशून्य दास और सर प्रभासचन्द्र मित्र मुख्य हैं। इनमें श्री दास, जो एक हज़ार छः सौ पाँच की कांग्रेस में, कार्यकारिणी में हिन्दुस्तानियों की नियुक्ति के प्रश्न पर
Meerut। गंगानगर पुलिस नकली करेंसी छापने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मां-बेटी समेत चार आरोपियों को बक्सर चौराहे से गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने पांच लाख 42 हजार रूपये की नकली करेंसी समेत 97 हजार अर्धनिíमत नकली नोट व प्रिंटर व अन्य सामग्री बरामद की है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गाजियाबाद जेल में बंद मुख्य आरोपी ही के इशारे पर नकली करेंसी का पूरा नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। अब तक कहां-कहां कितनी नकली करेंसी खपाई गई है, पुलिस इस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है। पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि सोमवार को बक्सर चौराहे पर पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान नकली नोटो के साथ सुमन पत्नी सुभाष और उसकी बेटी माही निवासी ग्राम सिखैड़ा इंचौली को गिरफ्तार किया। जिनके कब्जे से नकली करेंसी बरामद की गई। इनकी निशानदेही पर सुभाषनगर में किराए के मकान से रोबिन पुत्र जयपाल निवासी सिवाया दौराला, सिकंदर पुत्र राजपाल निवासी पिलखुवा हापुड़ को गिरफ्तार किया। पुलिस ने सुमन, माही, रोबिन और सिकंदर को हिरासत में लेकर पूछताछ करनी शुरू कर दी। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि सरगना प्रशांत उर्फ विराट पुत्र पदम सिंह मूल रुप से पुदिया गांव थाना मदिलकम जनपद त्रिशूर राज्य केरल का मूल निवासी है। वह करीब चार वर्ष पूर्व केरल से भागकर गाजियाबाद आ गया था। गाजियाबाद मे भी किराए का मकान लेकर नकली नोटों का कार्य उसने शुरू किया था। प्रशांत नकली नोटो के मामले में खरखौदा, सिंभावली, कवि नगर गाजियाबाद से पहले जेल जा चुका है। वर्तमान में भी वह गाजियाबाद जेल में बंद है। करीब ढाई वर्ष पहले सिहानी गेट गाजियाबाद से नकली नोट प्रकरण में ही वह जेल गया था। जेल मे ही उसकी मुलाकात विनोद व सिकंदर से हुई थी। आरोपी सिकंदर थाना पिलखुवा हापुड़ का हिस्ट्रीशीटर है। इतना ही नहीं यहीं तीनों ने नकली नोट छापने का प्लान भी बनाया था। जेल से बाहर आने के बाद प्रशांत ने विनोद और सिकंदर से संपर्क साधा। नकली नोट छापने के प्लान में विनोद ने अपने रिश्तेदार रॉबिन को भी शामिल कर लिया। इसके बाद सबने मिलकर कलर प्रिंटर पर अलग-अलग असली नोटों को स्कैन कर डाई बनाई। डमी फाइनल होने के बाद आरोपियों ने 2000, 500, 200 और 100 रुपये के नकली नोट तैयार कर खपाने शुरू कर दिए। नोटों को जिले के बाजार और दिल्ली-एनसीआर में खपाने के लिए सुमन और उसकी बेटी माही को गैंग में शामिल किया गया था। 1. रोबिन उर्फ मुकेश पुत्र जयपाल निवासी ग्राम सिवाया दौराला। 2. सिकंदर उर्फ सतेंद्र पुत्र राजपाल निवासी आर्यनगर पिलखुवा थाना पिलखुवा हापुड़। 3. सुमन पत्नी सुभाष निवासी ग्राम सिखैडा इंचौली। 4. माही पुत्री सुभाष निवासी ग्राम सिखैडा इंचौली। 2. प्रशांत उर्फ विराट पुत्र पदम सिह निवासी पुदिया गांव थाना मदिलकम जनपद त्रिशूर केरल, वर्तमान पता 954 गंगाटावर कवि नगर जनपद गाजियाबाद।
Meerut। गंगानगर पुलिस नकली करेंसी छापने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मां-बेटी समेत चार आरोपियों को बक्सर चौराहे से गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने पांच लाख बयालीस हजार रूपये की नकली करेंसी समेत सत्तानवे हजार अर्धनिíमत नकली नोट व प्रिंटर व अन्य सामग्री बरामद की है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गाजियाबाद जेल में बंद मुख्य आरोपी ही के इशारे पर नकली करेंसी का पूरा नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। अब तक कहां-कहां कितनी नकली करेंसी खपाई गई है, पुलिस इस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है। पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि सोमवार को बक्सर चौराहे पर पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान नकली नोटो के साथ सुमन पत्नी सुभाष और उसकी बेटी माही निवासी ग्राम सिखैड़ा इंचौली को गिरफ्तार किया। जिनके कब्जे से नकली करेंसी बरामद की गई। इनकी निशानदेही पर सुभाषनगर में किराए के मकान से रोबिन पुत्र जयपाल निवासी सिवाया दौराला, सिकंदर पुत्र राजपाल निवासी पिलखुवा हापुड़ को गिरफ्तार किया। पुलिस ने सुमन, माही, रोबिन और सिकंदर को हिरासत में लेकर पूछताछ करनी शुरू कर दी। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि सरगना प्रशांत उर्फ विराट पुत्र पदम सिंह मूल रुप से पुदिया गांव थाना मदिलकम जनपद त्रिशूर राज्य केरल का मूल निवासी है। वह करीब चार वर्ष पूर्व केरल से भागकर गाजियाबाद आ गया था। गाजियाबाद मे भी किराए का मकान लेकर नकली नोटों का कार्य उसने शुरू किया था। प्रशांत नकली नोटो के मामले में खरखौदा, सिंभावली, कवि नगर गाजियाबाद से पहले जेल जा चुका है। वर्तमान में भी वह गाजियाबाद जेल में बंद है। करीब ढाई वर्ष पहले सिहानी गेट गाजियाबाद से नकली नोट प्रकरण में ही वह जेल गया था। जेल मे ही उसकी मुलाकात विनोद व सिकंदर से हुई थी। आरोपी सिकंदर थाना पिलखुवा हापुड़ का हिस्ट्रीशीटर है। इतना ही नहीं यहीं तीनों ने नकली नोट छापने का प्लान भी बनाया था। जेल से बाहर आने के बाद प्रशांत ने विनोद और सिकंदर से संपर्क साधा। नकली नोट छापने के प्लान में विनोद ने अपने रिश्तेदार रॉबिन को भी शामिल कर लिया। इसके बाद सबने मिलकर कलर प्रिंटर पर अलग-अलग असली नोटों को स्कैन कर डाई बनाई। डमी फाइनल होने के बाद आरोपियों ने दो हज़ार, पाँच सौ, दो सौ और एक सौ रुपयापये के नकली नोट तैयार कर खपाने शुरू कर दिए। नोटों को जिले के बाजार और दिल्ली-एनसीआर में खपाने के लिए सुमन और उसकी बेटी माही को गैंग में शामिल किया गया था। एक. रोबिन उर्फ मुकेश पुत्र जयपाल निवासी ग्राम सिवाया दौराला। दो. सिकंदर उर्फ सतेंद्र पुत्र राजपाल निवासी आर्यनगर पिलखुवा थाना पिलखुवा हापुड़। तीन. सुमन पत्नी सुभाष निवासी ग्राम सिखैडा इंचौली। चार. माही पुत्री सुभाष निवासी ग्राम सिखैडा इंचौली। दो. प्रशांत उर्फ विराट पुत्र पदम सिह निवासी पुदिया गांव थाना मदिलकम जनपद त्रिशूर केरल, वर्तमान पता नौ सौ चौवन गंगाटावर कवि नगर जनपद गाजियाबाद।
तालिका संख्या 7.5 प्रदर्शित करती है कि जिन 344 लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण किया है उनके द्वारा पर्याप्त रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया है। संस्थागत वित्त के माध्यम से लाभार्थी द्वारा स्वयं व उसके परिवार के अन्य सदस्यों के स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और इस प्रकार कुल 927 व्यक्तियों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुये हैं और इनकी अल्प बेरोजगारी की स्थिति में कमी आई है। उपरोक्त लाभार्थियों द्वारा आय सृजक परिसम्पत्तियों के निर्माण के फलस्वरूप प्राथमिकता क्षेत्र के अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किये गये हैं। और कुल 566 अन्य व्यक्तियों को रोजगार पर लगाया गया है। इस प्रकार संस्थागत वित्त के माध्यम से कुल 1493 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुये हैं। अतः हम कह सकते हैं कि संस्थागत वित्त का रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 7.6.4. रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव संस्थागत वित्त का लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। संस्थागत वित्त के माध्यम से अधिकांश लाभार्थियों ने आय सृजक परिसम्पत्तियों का निर्माण किया है जिससे उनको पर्याप्त आय सृजित हो रही है और उपभोग व्यय भी पर्याप्त मात्रा में कर रहे हैं। इस प्रकार उनके रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त के प्रभाव का मूल्यांकन निम्न आधार पर किया जा सकता है(a) उच्च वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव जैसा कि हम पूर्व में स्पष्ट कर चुके हैं कि अध्ययन क्षेत्र के उच्च वर्ग के लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति अच्छी है। उनके पास पर्याप्त कृषि योग्य भूमि है और उससे उनको पर्याप्त कृषि आय हो रही है। संस्थागत वित्त के परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव इसी वर्ग पर पड़ा है क्योंकि संस्थागत वित्त के माध्यम से इन लाभार्थियों ने अपनी कृषि योग्य भूमि पर सिंचाई की सुविधाओं का विकास कर लिया है तथा आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग करते हुये उन्नतशील बीज व खाद का भी प्रयोग कर रहे हैं। इस प्रकार से ये मिश्रित फसल चक्र को अपनाते हुये पर्याप्त उत्पादन कर रहे हैं और पर्याप्त आय उत्पन्न कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप इनका उपभोग व्यय सर्वाधिक है और आवश्यक आवश्यकताओं के अतिरिक्त आरामदायक व विलासिता पूर्ण वस्तुओं का पर्याप्त उपभोग कर रहे हैं। इस प्रकार इनके रहन-सहन का स्तर उच्च है और इस पर संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। (b) मध्यम वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव जैसा कि हम पूर्व में स्पष्ट कर चुके हैं कि अध्ययन क्षेत्र के मध्यम वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन का स्तर मिश्रित है। अर्थात् यह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं और आरामदायक वस्तुओं का भी उपभोग कर लेते हैं परन्तु विलासिता पूर्ण वस्तुओं का उपभोग नहीं कर पाते। इनकी आय संरचना भी उच्च वर्ग के लाभार्थियों से कम है। इन लाभार्थियों पर भी संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। संस्थागत वित्त के माध्यम से इन लाभार्थियों ने आय सृजक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जैसे मुर्गीपालन व मत्स्य पालन, पशु सम्पत्ति का सृजन व कृषि में उन्नतशील बीज, खाद का प्रयोग आदि के माध्यम से ये पर्याप्त उत्पादन कर लेते हैं और उसके परिणामस्वरूप ये आय उत्पन्न कर रहे हैं और आरामदायक व आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं तथा अपने रहन-सहन के स्तर का मिश्रित बनाये हुये हैं। इस प्रकार संस्थागत वित्त का प्रभाव मध्यम वर्ग के लाभार्थियों पर सकारात्मक पड़ा है। (c) निम्न वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव अध्ययन क्षेत्र विकास खण्ड कमासिन के निम्न वर्ग के लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति अत्यन्त चिन्तनीय है। इनकी आय संरचना अत्यन्त निम्न है और वार्षिक रूप से 0 - 40,000 रू० तक ही आय अर्जित कर पाते हैं। जिस कारण ये अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की ही पूर्ति बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं। इस प्रकार इनका रहन-सहन का स्तर अत्यन्त निम्न है। तथा इनके रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त का प्रभाव भी आंशिक पड़ा है। क्योंकि इन्हें जो वित्त प्राप्त हुआ है, उसे कुछ लाभार्थियों ने उपभोग कार्यों पर व्यय कर दिया है। निम्न वर्ग के कुल 392 लाभार्थियों में 156 लाभार्थियों ने प्राप्त ऋण राशि को उपभोग कार्यों पर व्यय कर दिया है और शेष 236 लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे इनको 0-20,000 रूपये तक वार्षिक आय उत्पन्न हो रही है और परिणाम स्वरूप अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की ही सन्तुष्टि कर पा रहे हैं। इस प्रकार निम्न वर्ग ( कमजोर वर्ग) के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त का प्रभाव आंशिक रूप से पड़ा है। 76.5 उपभोग स्तर पर प्रभाव संस्थागत वित्त का लाभार्थियों के उपभोग स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। क्योंकि संस्थागत वित्त के माध्यम से अधिकांश लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे उनको प्रतिफल आय उत्पन्न हो रही है और उस आय से वो उपभोग व्यय कर रहे हैं। तालिका संख्या 6.5 प्रदर्शित करती है कि उच्च वर्ग के 23 लाभार्थी 40,000 - 60,000 रूपये वार्षिक प्रतिफल आय के रूप में अर्जित कर रहे हैं और इस आय से वह पर्याप्त उपभोग व्यय कर रहे हैं। पर्याप्त प्रतिफल आय के कारण उच्च वर्ग के लाभार्थी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ आरामदायक व बिलासिता सम्बन्धी वस्तुओं का भी पर्याप्त उपभोग करते हैं। इस प्रकार उच्च वर्ग के उपभोग स्तर पर संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मध्यम वर्ग के भी सभी लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे उनको
तालिका संख्या सात.पाँच प्रदर्शित करती है कि जिन तीन सौ चौंतालीस लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण किया है उनके द्वारा पर्याप्त रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया है। संस्थागत वित्त के माध्यम से लाभार्थी द्वारा स्वयं व उसके परिवार के अन्य सदस्यों के स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और इस प्रकार कुल नौ सौ सत्ताईस व्यक्तियों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुये हैं और इनकी अल्प बेरोजगारी की स्थिति में कमी आई है। उपरोक्त लाभार्थियों द्वारा आय सृजक परिसम्पत्तियों के निर्माण के फलस्वरूप प्राथमिकता क्षेत्र के अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किये गये हैं। और कुल पाँच सौ छयासठ अन्य व्यक्तियों को रोजगार पर लगाया गया है। इस प्रकार संस्थागत वित्त के माध्यम से कुल एक हज़ार चार सौ तिरानवे व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुये हैं। अतः हम कह सकते हैं कि संस्थागत वित्त का रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सात.छः.चार. रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव संस्थागत वित्त का लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। संस्थागत वित्त के माध्यम से अधिकांश लाभार्थियों ने आय सृजक परिसम्पत्तियों का निर्माण किया है जिससे उनको पर्याप्त आय सृजित हो रही है और उपभोग व्यय भी पर्याप्त मात्रा में कर रहे हैं। इस प्रकार उनके रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त के प्रभाव का मूल्यांकन निम्न आधार पर किया जा सकता है उच्च वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव जैसा कि हम पूर्व में स्पष्ट कर चुके हैं कि अध्ययन क्षेत्र के उच्च वर्ग के लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति अच्छी है। उनके पास पर्याप्त कृषि योग्य भूमि है और उससे उनको पर्याप्त कृषि आय हो रही है। संस्थागत वित्त के परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव इसी वर्ग पर पड़ा है क्योंकि संस्थागत वित्त के माध्यम से इन लाभार्थियों ने अपनी कृषि योग्य भूमि पर सिंचाई की सुविधाओं का विकास कर लिया है तथा आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग करते हुये उन्नतशील बीज व खाद का भी प्रयोग कर रहे हैं। इस प्रकार से ये मिश्रित फसल चक्र को अपनाते हुये पर्याप्त उत्पादन कर रहे हैं और पर्याप्त आय उत्पन्न कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप इनका उपभोग व्यय सर्वाधिक है और आवश्यक आवश्यकताओं के अतिरिक्त आरामदायक व विलासिता पूर्ण वस्तुओं का पर्याप्त उपभोग कर रहे हैं। इस प्रकार इनके रहन-सहन का स्तर उच्च है और इस पर संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मध्यम वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव जैसा कि हम पूर्व में स्पष्ट कर चुके हैं कि अध्ययन क्षेत्र के मध्यम वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन का स्तर मिश्रित है। अर्थात् यह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं और आरामदायक वस्तुओं का भी उपभोग कर लेते हैं परन्तु विलासिता पूर्ण वस्तुओं का उपभोग नहीं कर पाते। इनकी आय संरचना भी उच्च वर्ग के लाभार्थियों से कम है। इन लाभार्थियों पर भी संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। संस्थागत वित्त के माध्यम से इन लाभार्थियों ने आय सृजक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जैसे मुर्गीपालन व मत्स्य पालन, पशु सम्पत्ति का सृजन व कृषि में उन्नतशील बीज, खाद का प्रयोग आदि के माध्यम से ये पर्याप्त उत्पादन कर लेते हैं और उसके परिणामस्वरूप ये आय उत्पन्न कर रहे हैं और आरामदायक व आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं तथा अपने रहन-सहन के स्तर का मिश्रित बनाये हुये हैं। इस प्रकार संस्थागत वित्त का प्रभाव मध्यम वर्ग के लाभार्थियों पर सकारात्मक पड़ा है। निम्न वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव अध्ययन क्षेत्र विकास खण्ड कमासिन के निम्न वर्ग के लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति अत्यन्त चिन्तनीय है। इनकी आय संरचना अत्यन्त निम्न है और वार्षिक रूप से शून्य - चालीस,शून्य रूशून्य तक ही आय अर्जित कर पाते हैं। जिस कारण ये अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की ही पूर्ति बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं। इस प्रकार इनका रहन-सहन का स्तर अत्यन्त निम्न है। तथा इनके रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त का प्रभाव भी आंशिक पड़ा है। क्योंकि इन्हें जो वित्त प्राप्त हुआ है, उसे कुछ लाभार्थियों ने उपभोग कार्यों पर व्यय कर दिया है। निम्न वर्ग के कुल तीन सौ बानवे लाभार्थियों में एक सौ छप्पन लाभार्थियों ने प्राप्त ऋण राशि को उपभोग कार्यों पर व्यय कर दिया है और शेष दो सौ छत्तीस लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे इनको शून्य-बीस,शून्य रूपये तक वार्षिक आय उत्पन्न हो रही है और परिणाम स्वरूप अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की ही सन्तुष्टि कर पा रहे हैं। इस प्रकार निम्न वर्ग के लाभार्थियों के रहन-सहन के स्तर पर संस्थागत वित्त का प्रभाव आंशिक रूप से पड़ा है। छिहत्तर.पाँच उपभोग स्तर पर प्रभाव संस्थागत वित्त का लाभार्थियों के उपभोग स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। क्योंकि संस्थागत वित्त के माध्यम से अधिकांश लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे उनको प्रतिफल आय उत्पन्न हो रही है और उस आय से वो उपभोग व्यय कर रहे हैं। तालिका संख्या छः.पाँच प्रदर्शित करती है कि उच्च वर्ग के तेईस लाभार्थी चालीस,शून्य - साठ,शून्य रूपये वार्षिक प्रतिफल आय के रूप में अर्जित कर रहे हैं और इस आय से वह पर्याप्त उपभोग व्यय कर रहे हैं। पर्याप्त प्रतिफल आय के कारण उच्च वर्ग के लाभार्थी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ आरामदायक व बिलासिता सम्बन्धी वस्तुओं का भी पर्याप्त उपभोग करते हैं। इस प्रकार उच्च वर्ग के उपभोग स्तर पर संस्थागत वित्त का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मध्यम वर्ग के भी सभी लाभार्थियों ने उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण कर लिया है जिससे उनको
हम सब के फ्रैंड सर्कल में ऐसे फ्रैंड जरूर होते हैं जो हमेशा अपनी तारीफ करते रहते हैं जैसे 'मेरा फोन सब से अच्छा है, इस में सैल्फी तुम सब के फोन से ज्यादा अच्छी आती है. मेरे पास भी एकदम ऐसी ही ड्रैस है, तुहारी थोड़ी सस्ती क्वालिटी की है लेकिन मैं ने तो काफी मंहगी खरीदी थी, ये तो कुछ भी नहीं है मैं बनाऊंगी तो उंगलियां चाटते रह जाओगे, तुम कह रहे हो इसलिए मैं कर रही हूं वरना तो मैं कभी नहीं करती.' कोई उन की बात सुने चाहे न सुने लेकिन वे अपनी बात जरूर कहते हैं. अवसर कोई सा भी हो, पर वे अपने किस्से सुनाना बंद नहीं करते. कई बार तो ऐसा भी होता है कि उन्हें आते देख सब इधरउधर चले जाते हैं कि कौन इस की बात सुन कर बोर हो. दरअसल हम ऐसे फ्रैंड को 'मैं' फ्रैंड कह सकते हैं. सामने वाले की चीज कितनी भी अच्छी क्यों न हो ये उस की तारीफ करने के बजाय अपनी ही तारीफ करते हैं. इन्हें लगता है कि इन के पास जो है वही अच्छा है, वे जो करते हैं, जो सोचते हैं वही सही है. उन का जो करने का मन करता है बाकि लोग भी वही करें. अगर उन के अनुसार नहीं किया जाता तो उस में अपना 100 प्रतिशत नहीं देते, बस कमी निकालते रहते हें. जब उन्हें कोई जरूरी बात बता भी रहा होता है तो सुनते नहीं हैं बीच में ही टोकते रहते हैं.
हम सब के फ्रैंड सर्कल में ऐसे फ्रैंड जरूर होते हैं जो हमेशा अपनी तारीफ करते रहते हैं जैसे 'मेरा फोन सब से अच्छा है, इस में सैल्फी तुम सब के फोन से ज्यादा अच्छी आती है. मेरे पास भी एकदम ऐसी ही ड्रैस है, तुहारी थोड़ी सस्ती क्वालिटी की है लेकिन मैं ने तो काफी मंहगी खरीदी थी, ये तो कुछ भी नहीं है मैं बनाऊंगी तो उंगलियां चाटते रह जाओगे, तुम कह रहे हो इसलिए मैं कर रही हूं वरना तो मैं कभी नहीं करती.' कोई उन की बात सुने चाहे न सुने लेकिन वे अपनी बात जरूर कहते हैं. अवसर कोई सा भी हो, पर वे अपने किस्से सुनाना बंद नहीं करते. कई बार तो ऐसा भी होता है कि उन्हें आते देख सब इधरउधर चले जाते हैं कि कौन इस की बात सुन कर बोर हो. दरअसल हम ऐसे फ्रैंड को 'मैं' फ्रैंड कह सकते हैं. सामने वाले की चीज कितनी भी अच्छी क्यों न हो ये उस की तारीफ करने के बजाय अपनी ही तारीफ करते हैं. इन्हें लगता है कि इन के पास जो है वही अच्छा है, वे जो करते हैं, जो सोचते हैं वही सही है. उन का जो करने का मन करता है बाकि लोग भी वही करें. अगर उन के अनुसार नहीं किया जाता तो उस में अपना एक सौ प्रतिशत नहीं देते, बस कमी निकालते रहते हें. जब उन्हें कोई जरूरी बात बता भी रहा होता है तो सुनते नहीं हैं बीच में ही टोकते रहते हैं.
नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर मामले में इतालवी अदालत के फैसले में कथित रूप से नामित कुछ नेताओं एवं अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र और सीबीआई से आज जवाब मांगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने वकील एम एल शर्मा द्वारा दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किए। याचिका में मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई है। यह जनहित याचिका पिछले सप्ताह दायर की गई थी और इसमें संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत उन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है जिनके नामों का जिक्र इतालवी अदालत के फैसले में कथित रूप से किया गया था। सीबीआई ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री समेत वीवीआईपी लोगों को लाने ले जाने वाले 12 हेलीकॉप्टरों के सौदे के लिए फर्म द्वारा भारतीयों को दी गई कथित रिश्वत के मामले में 2013 में मामला दर्ज किया था। याचिका में रक्षा मंत्रालय एवं सीबीआई को पक्ष बनाया गया है। इसमें उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की मांग की गई है जिनका नाम मिलान में इतालवी अदालत द्वारा सात अप्रैल 2016 को सुनाए गए फैसले में कथित रूप से लिया गया है। इस याचिका में मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीवीसी से कराने की मांग की गई है और इसमें कई कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। याचिका में प्रश्न किया गया है कि क्या इतालवी अदालत का फैसला अभियोग चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। याचिका में कहा गया है कि यह जांच वर्ष 2011 में इस आरोप के तहत इटली में शुरू की गई थी कि अगस्तावेस्टलैंड ने सौदा करने के लिए स्विट्जरलैंड के सलाहकार गुइडो राल्फ हैश्के को 350 करोड़ से अधिक रपए का कमीशन दिया। इसमें कहा गया है कि इटली की जांच का दायरा कथित कमीशन के धन के भारत पहुंचने पर खत्म होगा। जांच इस बारे में नहीं की जाएगी कि भारतीय प्रतिष्ठान में किसे धन दिया गया। याचिका में कहा गया, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में इटली में कार्रवाई की गई है। कंपनी के सीईओ को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन यहां कोई कदम नहीं उठाया गया। जिस देश को सौदे से लाभ होता, उसने कार्रवाई कर ली है लेकिन जिस देश के धन का नुकसान हुआ है, उसने कोई कदम नहीं उठाया।
नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर मामले में इतालवी अदालत के फैसले में कथित रूप से नामित कुछ नेताओं एवं अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र और सीबीआई से आज जवाब मांगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने वकील एम एल शर्मा द्वारा दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किए। याचिका में मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई है। यह जनहित याचिका पिछले सप्ताह दायर की गई थी और इसमें संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत उन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है जिनके नामों का जिक्र इतालवी अदालत के फैसले में कथित रूप से किया गया था। सीबीआई ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री समेत वीवीआईपी लोगों को लाने ले जाने वाले बारह हेलीकॉप्टरों के सौदे के लिए फर्म द्वारा भारतीयों को दी गई कथित रिश्वत के मामले में दो हज़ार तेरह में मामला दर्ज किया था। याचिका में रक्षा मंत्रालय एवं सीबीआई को पक्ष बनाया गया है। इसमें उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की मांग की गई है जिनका नाम मिलान में इतालवी अदालत द्वारा सात अप्रैल दो हज़ार सोलह को सुनाए गए फैसले में कथित रूप से लिया गया है। इस याचिका में मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीवीसी से कराने की मांग की गई है और इसमें कई कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। याचिका में प्रश्न किया गया है कि क्या इतालवी अदालत का फैसला अभियोग चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। याचिका में कहा गया है कि यह जांच वर्ष दो हज़ार ग्यारह में इस आरोप के तहत इटली में शुरू की गई थी कि अगस्तावेस्टलैंड ने सौदा करने के लिए स्विट्जरलैंड के सलाहकार गुइडो राल्फ हैश्के को तीन सौ पचास करोड़ से अधिक रपए का कमीशन दिया। इसमें कहा गया है कि इटली की जांच का दायरा कथित कमीशन के धन के भारत पहुंचने पर खत्म होगा। जांच इस बारे में नहीं की जाएगी कि भारतीय प्रतिष्ठान में किसे धन दिया गया। याचिका में कहा गया, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में इटली में कार्रवाई की गई है। कंपनी के सीईओ को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन यहां कोई कदम नहीं उठाया गया। जिस देश को सौदे से लाभ होता, उसने कार्रवाई कर ली है लेकिन जिस देश के धन का नुकसान हुआ है, उसने कोई कदम नहीं उठाया।
नोएडा में सड़क हादसे दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। बीती रात भी नोएडा के सेक्टर-85 में एक ऐसा ही दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें रेडियो मिर्ची की ग्रुप मैनेजर की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा देर रात 1. 30 बजे हुआ। जानकारी के अनुसार मृतका 26 वर्षीय तान्या खन्ना रेडियो मिर्ची की ग्रुप मैनेजर(सेल्स) थी। वह मंगलवार देर रात दिल्ली स्थित अपने ऑफिस से ग्रेटर नोएडा की ओर जा रही थी। हादसे के वक्त कार की रफ्तार बहुत तेज थी। नोएडा सेक्टर-85 के एक नाले के पास पहुंचकर कार ने नियंत्रण खो दिया और तान्या खन्ना कार समेत नाले में जा गिरी। कार के नाले में गिरते ही मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस को इस घटना की सूचना देर रात करीब 2:30 बजे मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में कार और तान्या के शव को नाले से निकाला। बता दें कि तान्या खन्ना गाजियाबाद में अपने परिवार के साथ रहती थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। आशंका जताई जा रही है उनकी मौत नाले में भरे 4 फीट पानी में डूबने से हुई है, लेकिन पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर रही है।
नोएडा में सड़क हादसे दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। बीती रात भी नोएडा के सेक्टर-पचासी में एक ऐसा ही दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें रेडियो मिर्ची की ग्रुप मैनेजर की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा देर रात एक. तीस बजे हुआ। जानकारी के अनुसार मृतका छब्बीस वर्षीय तान्या खन्ना रेडियो मिर्ची की ग्रुप मैनेजर थी। वह मंगलवार देर रात दिल्ली स्थित अपने ऑफिस से ग्रेटर नोएडा की ओर जा रही थी। हादसे के वक्त कार की रफ्तार बहुत तेज थी। नोएडा सेक्टर-पचासी के एक नाले के पास पहुंचकर कार ने नियंत्रण खो दिया और तान्या खन्ना कार समेत नाले में जा गिरी। कार के नाले में गिरते ही मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस को इस घटना की सूचना देर रात करीब दो:तीस बजे मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में कार और तान्या के शव को नाले से निकाला। बता दें कि तान्या खन्ना गाजियाबाद में अपने परिवार के साथ रहती थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। आशंका जताई जा रही है उनकी मौत नाले में भरे चार फीट पानी में डूबने से हुई है, लेकिन पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर रही है।
Quick links: Kapil Dev On Rishabh Pant Car Accident: टीम इंडिया (Team India) के उभरते हुए सितारे ऋषभ पंत (Rishabh Pant) के भयानक एक्सीडेंट के बाद पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) ने बड़ा बयान दिया है। 30 अक्टूबर को सुबह-सुबह दिल्ली से अपने घर उत्तराखंड जा रहे पंत एक भयानक हादसे का शिकार हुए। एक्सीडेंट के बाद उनकी कार जल गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। क्रिकेटर ने वाहन से बाहर निकलने के लिए कार की खिड़की तोड़ दी, जिसके बाद दुर्घटनास्थल पर तुरंत पहुंचे हरियाणा रोडवेज के बस चालक और कंडक्टर ने उनकी मदद की। ऋषभ पंत के दुर्घटना की खबर के बाद पूरी क्रिकेट जगत से उनके लिए संवेदनशील मैसेज आ रहे हैं। सब उनके जल्दी ठीक होकर मैदान पर वापसी करने की कामना कर रहे हैं। इस बीच भारत को पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कप्तान कपिल देव ने इस मामले पर भावुक होकर बड़ा बयान दिया है। कपिल देव ने एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान कहा, "यह एक सीख है। जब मैं एक उभरता हुआ क्रिकेटर था, तो मुझे एक मोटरसाइकिल दुर्घटना का सामना करना पड़ा। उस दिन के बाद से मेरे भाई ने मुझे मोटरसाइकिल छूने तक नहीं दी। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि ऋषभ पंत सुरक्षित हैं। पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी कहा कि क्रिकेटरों को अपना ख्याल रखने की जरूरत है और पंत खुद कार चलाने के बजाय आसानी से ड्राइवर रख सकते हैं। हरिद्वार (ग्रामीण) के एसपी एसके सिंह द्वारा दिए गए एक बयान के अनुसार, पंत रविवार अकेले कार चला रहे थे, वहीं रविवार को, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुलासा किया कि टक्कर होने से पहले पंत "गड्ढे या किसी काली चीज से बचने की कोशिश कर रहे थे।" कपिल देव ने आगे कहा कि "हां, आपके पास शानदार गति वाली एक अच्छी दिखने वाली कार है लेकिन आपको सावधान रहना होगा। आप आसानी से एक ड्राइवर का खर्च उठा सकते हैं, आपको इसे अकेले चलाने की ज़रूरत नहीं है। मैं समझता हूं कि किसी को ऐसी चीजों के लिए शौक या जुनून भी होता है, यह उसकी उम्र में होना स्वाभाविक है, लेकिन आपकी जिम्मेदारियां भी होती हैं। केवल आप ही अपना ख्याल रख सकते हैं। आपको अपने लिए चीजें तय करनी होंगी।"
Quick links: Kapil Dev On Rishabh Pant Car Accident: टीम इंडिया के उभरते हुए सितारे ऋषभ पंत के भयानक एक्सीडेंट के बाद पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने बड़ा बयान दिया है। तीस अक्टूबर को सुबह-सुबह दिल्ली से अपने घर उत्तराखंड जा रहे पंत एक भयानक हादसे का शिकार हुए। एक्सीडेंट के बाद उनकी कार जल गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। क्रिकेटर ने वाहन से बाहर निकलने के लिए कार की खिड़की तोड़ दी, जिसके बाद दुर्घटनास्थल पर तुरंत पहुंचे हरियाणा रोडवेज के बस चालक और कंडक्टर ने उनकी मदद की। ऋषभ पंत के दुर्घटना की खबर के बाद पूरी क्रिकेट जगत से उनके लिए संवेदनशील मैसेज आ रहे हैं। सब उनके जल्दी ठीक होकर मैदान पर वापसी करने की कामना कर रहे हैं। इस बीच भारत को पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कप्तान कपिल देव ने इस मामले पर भावुक होकर बड़ा बयान दिया है। कपिल देव ने एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान कहा, "यह एक सीख है। जब मैं एक उभरता हुआ क्रिकेटर था, तो मुझे एक मोटरसाइकिल दुर्घटना का सामना करना पड़ा। उस दिन के बाद से मेरे भाई ने मुझे मोटरसाइकिल छूने तक नहीं दी। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि ऋषभ पंत सुरक्षित हैं। पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी कहा कि क्रिकेटरों को अपना ख्याल रखने की जरूरत है और पंत खुद कार चलाने के बजाय आसानी से ड्राइवर रख सकते हैं। हरिद्वार के एसपी एसके सिंह द्वारा दिए गए एक बयान के अनुसार, पंत रविवार अकेले कार चला रहे थे, वहीं रविवार को, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुलासा किया कि टक्कर होने से पहले पंत "गड्ढे या किसी काली चीज से बचने की कोशिश कर रहे थे।" कपिल देव ने आगे कहा कि "हां, आपके पास शानदार गति वाली एक अच्छी दिखने वाली कार है लेकिन आपको सावधान रहना होगा। आप आसानी से एक ड्राइवर का खर्च उठा सकते हैं, आपको इसे अकेले चलाने की ज़रूरत नहीं है। मैं समझता हूं कि किसी को ऐसी चीजों के लिए शौक या जुनून भी होता है, यह उसकी उम्र में होना स्वाभाविक है, लेकिन आपकी जिम्मेदारियां भी होती हैं। केवल आप ही अपना ख्याल रख सकते हैं। आपको अपने लिए चीजें तय करनी होंगी।"
SBI Recruitment 2023: बैंक में नौकरी करने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में आर्मोरर्स और कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स पद के लिए बंपर भर्ती निकाली है। कुछ समय पहले इन भर्ती का एक विज्ञापन जारी किया गया था। ये भर्तियां क्लर्क कैडर की हैं। खबरों की मानें तो इन वैकेंसी के लिए आवेदन आप आज यानी 6 सितंबर 2023 से कर सकते हैं। आवेदन करने क लिए लिंक आज यानी बुधवार से खोल दिया गया है। जो भी अभ्यर्थी इन पद के लिए फॉर्म भरना चाहते हैं, वो बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आपको sbi.co.in पर. जाकर आवेदन करना होगा। इच्छुक उम्मीदवार जल्दी से जल्दी आधिकारिक वेबसाइट, sbi.co.in पर विजिट कर सकते हैं। इस रिक्रूटमेंट के जरिये टोटल 107 पद भरे जाएंगे। ये पद आर्मोरर्स और कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स के लिए निकाला गया है। इन 107 वैकेंसी में से 89 वैकेंसी कंट्रोल रूम ऑपरेटर के लिए होगी जबकि बाकि बचे हुए 18 वैकेंसी आर्मोरर्स की होगी। एसबीआइ में भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से होगा। परीक्षा ऑनलाइन ही आयोजित किया जायेगा, जो 100 मार्क्स का होगा। इसके बाद यदि आप लिखित परीक्षा में सफल हो जाते हैं, तो आपको इंटरव्यू से गुजरना होगा, जो 25 मार्क्स का होगा। रिटेन एग्जाम कब तक लिया जायेगा इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। अधिक जानकारी के लिए आपको समय-समय पर वेबसाइट देखते रहना होगा। आर्मोरर्स पद के लिए उम्मीदवारों की ऐज लिमिट 20 से 45 साल के बीच तय की गई है। जबकि, कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स पद के लिए 20 से 48 साल तय की गई है। खबरों की मानें तो अप्लाई करने के लिए आपको एक रुपये भी देने नहीं पड़ेंगे। - बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
SBI Recruitment दो हज़ार तेईस: बैंक में नौकरी करने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में आर्मोरर्स और कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स पद के लिए बंपर भर्ती निकाली है। कुछ समय पहले इन भर्ती का एक विज्ञापन जारी किया गया था। ये भर्तियां क्लर्क कैडर की हैं। खबरों की मानें तो इन वैकेंसी के लिए आवेदन आप आज यानी छः सितंबर दो हज़ार तेईस से कर सकते हैं। आवेदन करने क लिए लिंक आज यानी बुधवार से खोल दिया गया है। जो भी अभ्यर्थी इन पद के लिए फॉर्म भरना चाहते हैं, वो बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आपको sbi.co.in पर. जाकर आवेदन करना होगा। इच्छुक उम्मीदवार जल्दी से जल्दी आधिकारिक वेबसाइट, sbi.co.in पर विजिट कर सकते हैं। इस रिक्रूटमेंट के जरिये टोटल एक सौ सात पद भरे जाएंगे। ये पद आर्मोरर्स और कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स के लिए निकाला गया है। इन एक सौ सात वैकेंसी में से नवासी वैकेंसी कंट्रोल रूम ऑपरेटर के लिए होगी जबकि बाकि बचे हुए अट्ठारह वैकेंसी आर्मोरर्स की होगी। एसबीआइ में भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से होगा। परीक्षा ऑनलाइन ही आयोजित किया जायेगा, जो एक सौ मार्क्स का होगा। इसके बाद यदि आप लिखित परीक्षा में सफल हो जाते हैं, तो आपको इंटरव्यू से गुजरना होगा, जो पच्चीस मार्क्स का होगा। रिटेन एग्जाम कब तक लिया जायेगा इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। अधिक जानकारी के लिए आपको समय-समय पर वेबसाइट देखते रहना होगा। आर्मोरर्स पद के लिए उम्मीदवारों की ऐज लिमिट बीस से पैंतालीस साल के बीच तय की गई है। जबकि, कंट्रोल रूम ऑपरेटर्स पद के लिए बीस से अड़तालीस साल तय की गई है। खबरों की मानें तो अप्लाई करने के लिए आपको एक रुपये भी देने नहीं पड़ेंगे। - बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
अजमेर। राजस्थान में अजमेर जिले को एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का जिला प्रमुख मिलेगा। पंचायती राज चुनाव के आज संपनन परिणामों की तस्वीर में अजमेर जिला परिषद के लिए 32 वार्डो मे बहुमत भाजपा ने हासिल किया है। इसमें भाजपा के कई दिग्गज चुनाव जीते हैं और वे जिला प्रमुख के दावेदार भी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिले के जिला परिषद के 32 वार्डों में से 21 पर भाजपा का कब्जा तथा 11 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। इनमें मसूदा से पूर्व विधायक एवं पूर्व जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा के साथ साथ पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाड़िया ने भी जीत दर्ज कराई है और दोनों ही जिला प्रमुख के चुनाव के प्रारंभ से प्रबल दावेदार है। कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ ने पंचायत समिति सदस्य के तौर पर चुनाव जीता है। जहां तक प्रधानों का सवाल है जिले की ग्यारह पंचायत समितियों में से नौ में भाजपा के प्रधान बनने का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में एकबार फिर पूरे जिले के पंचायत चुनाव में मोटी तस्वीर भाजपा के पक्ष में नजर आई है। उल्लेखनीय है कि जिले में जिला प्रमुख एक बार फिर भाजपा का बनेगा और कांग्रेस सत्तारूढ़ दल होने के बावजूद इसमें पिछड़ती दिखाई देगी। यह कोई नया मौका नहीं होगा भाजपा ने इस कुर्सी पर पिछले पच्चीस सालों से कब्जा बरकरार रखा है। वर्ष 1988 में कांग्रेस का जिला प्रमुख था और उसके बाद से भाजपा का रहा और अब आज के चुनाव परिणाम के बाद भी भाजपा के पक्ष में तस्वीर साफ हो गई है।
अजमेर। राजस्थान में अजमेर जिले को एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का जिला प्रमुख मिलेगा। पंचायती राज चुनाव के आज संपनन परिणामों की तस्वीर में अजमेर जिला परिषद के लिए बत्तीस वार्डो मे बहुमत भाजपा ने हासिल किया है। इसमें भाजपा के कई दिग्गज चुनाव जीते हैं और वे जिला प्रमुख के दावेदार भी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिले के जिला परिषद के बत्तीस वार्डों में से इक्कीस पर भाजपा का कब्जा तथा ग्यारह पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। इनमें मसूदा से पूर्व विधायक एवं पूर्व जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा के साथ साथ पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाड़िया ने भी जीत दर्ज कराई है और दोनों ही जिला प्रमुख के चुनाव के प्रारंभ से प्रबल दावेदार है। कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ ने पंचायत समिति सदस्य के तौर पर चुनाव जीता है। जहां तक प्रधानों का सवाल है जिले की ग्यारह पंचायत समितियों में से नौ में भाजपा के प्रधान बनने का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में एकबार फिर पूरे जिले के पंचायत चुनाव में मोटी तस्वीर भाजपा के पक्ष में नजर आई है। उल्लेखनीय है कि जिले में जिला प्रमुख एक बार फिर भाजपा का बनेगा और कांग्रेस सत्तारूढ़ दल होने के बावजूद इसमें पिछड़ती दिखाई देगी। यह कोई नया मौका नहीं होगा भाजपा ने इस कुर्सी पर पिछले पच्चीस सालों से कब्जा बरकरार रखा है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठासी में कांग्रेस का जिला प्रमुख था और उसके बाद से भाजपा का रहा और अब आज के चुनाव परिणाम के बाद भी भाजपा के पक्ष में तस्वीर साफ हो गई है।
ऐसा बहुत ही कम होता है कि कोई खिलाड़ी अपने कपड़े उतार दे, लेकिन टेनिस खिलाड़ी सेरेना ने ऐसा ही किया। उन्होंने प्रचार के लिए अपने ऊपर के सभी कपड़े उतार दिए। सेरेना उस समय टॉपलेस हो गईं जब वह स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता का प्रचार कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने आई टच माई सेल्फ का गाना भी गाया। The post टॉपलेस हो गई ये महिला खिलाड़ी appeared first on GyanHiGyan.
ऐसा बहुत ही कम होता है कि कोई खिलाड़ी अपने कपड़े उतार दे, लेकिन टेनिस खिलाड़ी सेरेना ने ऐसा ही किया। उन्होंने प्रचार के लिए अपने ऊपर के सभी कपड़े उतार दिए। सेरेना उस समय टॉपलेस हो गईं जब वह स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता का प्रचार कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने आई टच माई सेल्फ का गाना भी गाया। The post टॉपलेस हो गई ये महिला खिलाड़ी appeared first on GyanHiGyan.
प्रश्न पर 5 मिनट लगाएं अब आप लेन्ज़ नियम को कुछ साधारण स्थितियों पर लागू करना चाहेंगे और प्रेरित धारा की दिशा मालूम करना चाहेंगे । बोध प्रश्न 3 क) चित्र 13.5 क में, लूप में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि बल F से लूप को खींचकर इसके क्षेत्रफल को कम किया गया हो । B की दिशा पृष्ठ में अंदर की ओर और इसके लंबवत् है। ख) चित्र 15.5 ख के छोटे लूप में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि एक बैटरी द्वारा, जिसे चित्र में नहीं दिखाया गया है, बड़े लूप में बायीं ओर से देखने पर दक्षिणार्वत धारा अचानक स्थापित की जाती है ? आइए अब हम इन नियमों के एक अनुप्रयोग पर विचार करें जो कि संभवतः आज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग है । उदाहरण 1: ए सी जेनरेटर क्या आप जानते हैं कि आज पूरी दुनिया में प्रतिदिन लगभग 1013 वाट की दर से विद्युत ऊर्जा की खपत होती है और तकरीबन समस्त विद्युत ऊर्जा वैद्युत जेनरेटरों से प्राप्त होती है ? जेनरेटर एक चुंबकीय क्षेत्र में चालकों का निकाय होता है । चित्र 13.6 में एक सरल जेनरेटर दिखाया गया है । Rotating contacts Stationary brushes To load चित्र 13.6: एक ए सी वैद्युत जेनरेटर का सरलं आरेब । जब चुंबकीय क्षेत्र में लूप घूर्णन करता है, तब परिवर्ती चुंबकीय अभिवाह से इसमें एक प्रेरित विद्युत बाहक बल उत्पन्न होता है। घारा घूर्णनी संपर्कों और स्थिर बुर्गों से होती हुई एक वैद्युत भार (load) की ओर प्रवाहित होती है। चुंबक के ध्रुवों के बीच रखी गई कुंडली का घूर्णन कराने के लिए यांत्रिक ऊर्जा प्रयुक्त होती है । बिजली घरों में यांत्रिक ऊर्जा का स्रोत या तो गिरता हुआ पानी ( पन बिजली घरों में ) होता है या भाप होती है जिसे ईधन जलाकर ( तापीय बिजलीघर में ) या नाभिकीय विखंडन द्वारा ( नाभिकीय शक्ति संयत्र में ) बनाया जाता है । घूर्णन के कारण कुंडली से गुज़रने वाले चुंबकीय अभिवाह में परिवर्तन आ जाता है जिससे विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है । तब कुंडली में प्रेरित धारा प्रवाहित होती है । आइए हम प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा के परिमाणं ज्ञात करें ।. मान लीजिए S कुंडली का क्षेत्रफल है और 8 चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली समतल पर अभिलंब के बीच का कोण है । कुंडली में अभिवाह होता है BS cos 0 यदि कुंडली एकसमान कोणीय चाल से घूर्णन कर रही हो, तो समय के साथ 9 में परिवर्तन होता रहता है क्योंकि w t । तब कुंडली में विद्युत वाहक बल होगा ( BS cos wt ) BS w sin wt यदि हम कुंडली के तार को बिंदु P की ओर लायें जो कि घूर्णन कर रही कुंडली से काफ़ी दूरी पर हो और जहां ( चुंबक के ६. ण ) चुंबकीय क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन नहीं होता हो, तब समीकरण 13.2 ( ख) के अनुसार इस प्रदेश में Vx E शून्य होगा अर्थात् E संरक्षी होगा । और तब हम इस क्षेत्र से संबंधित एक वैद्युत विभव को परिभाषित कर सकते हैं । मान लीजिए कुंडली के दोनों सिरों का विभवांतर V है । यदि जेनरेटर से कोई धारा नहीं ली जा रही हो, तो दो तारों के । बीच का विभवांतर घूर्णनी कुंडली के विद्युत वाहक बल के बराबर होगा, अर्थात् BS w sin wot = V₂ sin wt जहां Vo BS w जेनरेटर की शिखर निर्गम वोल्टता (peak output voltage) है । जैसा कि समीकरण 13.4 क में दिया गया है, V एक प्रत्यावर्ती वोल्टता (alternating voltage) है । यदि हम इन तारों में एक भार R लगा दें, तो हम एक प्रत्यावर्ती धारा ( alternating current) ज़नित कर सकते हैं जिसका परिमाण है I = sin wr क्या अब आप एक ए सी जेनरेटर की डिज़ाइन से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न करना चाहेंगे ? बोध प्रश्न 4 एक वैद्युत जेनरेटर में, जैसा कि चित्र 13.6 में दिखाया गया है, 50cm की भुजा वाला तार का एक वर्गाकार लूप है जिसमें 10 घुमाव हैं । हमारे देश में प्रयुक्त मानक 50Hz ए सी का उत्पादन करने के लिए लूप को 50 परिक्रमण प्रति सैकंड की दर से घुमाया जाता है । जेनरेटर का शिखर निर्गम वोल्टता 300 V हो, इसके लिए चुंबकीय क्षेत्र का क्या परिमाण होना चाहिए ? आपको याद होगा कि चित्र 13.2 क में दिखाए गए पहले प्रयोग में आपने गुणात्मक रूप से यह "दिखाने के लिए बोध प्रश्न 1 हल किया था कि गतिमान तार पर लग रहे लारेन्ज़ बल के कारण अचर चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। बाद में फ़ैराडे नियम प्रस्तुत करते समय हमने यह बताया था कि इस स्थिति पर भी समीकरण (13.2) लागू होता है । इस तरह से जनित वाहक बल को गतिक बिद्युत बाहक बल (motional electromotive force) कहा जाता है । आइए हम परिमाणात्मक रूप से गतिक विद्युत वाहक बल ज्ञात करें । 13.2.3 गतिक विद्युत वाहक बल आइए हम एक सरल स्थिति लें, जैसा कि चित्र 13.7 में दिखाया गया है। लंबाई L वाले तार CD को अचर वेग v से दायीं ओर खींचा जाता है । यह तार GABH के बिंदुओं C और D के संपर्क में है जिससे कि एक तार लूप ABCD बन जाता है। हम तार CD की स्थिति को दूरी x से मापते हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस लूप को एक अचर चुंबकीय क्षेत्र B में रखा जाता है जिसकी दिशा पृष्ठ के अंदर की ओरं उसके लंबवत् है । जैसा कि आप जानते हैं तार में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेग काफ़ी अधिक होते हैं । परन्तु यहां हम इनकी उपेक्षा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि ये यादृच्छिकतः अभिविन्यस्त (randomly oriented) होते हैं और यदि हम तार CD के सभी इलेक्ट्रॉनों पर लगे बलों को जोड़ दें, तो लॉरेन्ज़ बल में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेगों का नेट योगदान शून्य होता है। इस तरह, तार के प्रत्येक आवेश पर निम्नलिखित बल लगता है qv x B जहां हमने तार में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेगों की उपेक्षा कर दी है। इसकी उपेक्षा करने का कारण ऊपर बताया जा चुका है। अब, क्योंकि VI B, इसलिए F है qvB और F की दिशा चित्र 13.7 में दिखाई गई है । लूप के चारों ओर प्रभावी विद्युत वाहक बल का परिकलन करने के लिए हमें प्रति एकक आवेश नेट कार्य ज्ञात करना होगा, जो कि निम्नलिखित है : •विद्युतचुंबकीय प्रेरण प्रश्न पर 10 मिनट लगाएं • L चित्र 13.7: खूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल की व्याख्या गतिमान तार के आदेशों पर लगे बलों के आधार पर की जाती है।
प्रश्न पर पाँच मिनट लगाएं अब आप लेन्ज़ नियम को कुछ साधारण स्थितियों पर लागू करना चाहेंगे और प्रेरित धारा की दिशा मालूम करना चाहेंगे । बोध प्रश्न तीन क) चित्र तेरह.पाँच क में, लूप में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि बल F से लूप को खींचकर इसके क्षेत्रफल को कम किया गया हो । B की दिशा पृष्ठ में अंदर की ओर और इसके लंबवत् है। ख) चित्र पंद्रह.पाँच ख के छोटे लूप में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि एक बैटरी द्वारा, जिसे चित्र में नहीं दिखाया गया है, बड़े लूप में बायीं ओर से देखने पर दक्षिणार्वत धारा अचानक स्थापित की जाती है ? आइए अब हम इन नियमों के एक अनुप्रयोग पर विचार करें जो कि संभवतः आज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग है । उदाहरण एक: ए सी जेनरेटर क्या आप जानते हैं कि आज पूरी दुनिया में प्रतिदिन लगभग एक हज़ार तेरह वाट की दर से विद्युत ऊर्जा की खपत होती है और तकरीबन समस्त विद्युत ऊर्जा वैद्युत जेनरेटरों से प्राप्त होती है ? जेनरेटर एक चुंबकीय क्षेत्र में चालकों का निकाय होता है । चित्र तेरह.छः में एक सरल जेनरेटर दिखाया गया है । Rotating contacts Stationary brushes To load चित्र तेरह.छः: एक ए सी वैद्युत जेनरेटर का सरलं आरेब । जब चुंबकीय क्षेत्र में लूप घूर्णन करता है, तब परिवर्ती चुंबकीय अभिवाह से इसमें एक प्रेरित विद्युत बाहक बल उत्पन्न होता है। घारा घूर्णनी संपर्कों और स्थिर बुर्गों से होती हुई एक वैद्युत भार की ओर प्रवाहित होती है। चुंबक के ध्रुवों के बीच रखी गई कुंडली का घूर्णन कराने के लिए यांत्रिक ऊर्जा प्रयुक्त होती है । बिजली घरों में यांत्रिक ऊर्जा का स्रोत या तो गिरता हुआ पानी होता है या भाप होती है जिसे ईधन जलाकर या नाभिकीय विखंडन द्वारा बनाया जाता है । घूर्णन के कारण कुंडली से गुज़रने वाले चुंबकीय अभिवाह में परिवर्तन आ जाता है जिससे विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है । तब कुंडली में प्रेरित धारा प्रवाहित होती है । आइए हम प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा के परिमाणं ज्ञात करें ।. मान लीजिए S कुंडली का क्षेत्रफल है और आठ चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली समतल पर अभिलंब के बीच का कोण है । कुंडली में अभिवाह होता है BS cos शून्य यदि कुंडली एकसमान कोणीय चाल से घूर्णन कर रही हो, तो समय के साथ नौ में परिवर्तन होता रहता है क्योंकि w t । तब कुंडली में विद्युत वाहक बल होगा BS w sin wt यदि हम कुंडली के तार को बिंदु P की ओर लायें जो कि घूर्णन कर रही कुंडली से काफ़ी दूरी पर हो और जहां चुंबकीय क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन नहीं होता हो, तब समीकरण तेरह.दो के अनुसार इस प्रदेश में Vx E शून्य होगा अर्थात् E संरक्षी होगा । और तब हम इस क्षेत्र से संबंधित एक वैद्युत विभव को परिभाषित कर सकते हैं । मान लीजिए कुंडली के दोनों सिरों का विभवांतर V है । यदि जेनरेटर से कोई धारा नहीं ली जा रही हो, तो दो तारों के । बीच का विभवांतर घूर्णनी कुंडली के विद्युत वाहक बल के बराबर होगा, अर्थात् BS w sin wot = V₂ sin wt जहां Vo BS w जेनरेटर की शिखर निर्गम वोल्टता है । जैसा कि समीकरण तेरह.चार क में दिया गया है, V एक प्रत्यावर्ती वोल्टता है । यदि हम इन तारों में एक भार R लगा दें, तो हम एक प्रत्यावर्ती धारा ज़नित कर सकते हैं जिसका परिमाण है I = sin wr क्या अब आप एक ए सी जेनरेटर की डिज़ाइन से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न करना चाहेंगे ? बोध प्रश्न चार एक वैद्युत जेनरेटर में, जैसा कि चित्र तेरह.छः में दिखाया गया है, पचास सेंटीमीटर की भुजा वाला तार का एक वर्गाकार लूप है जिसमें दस घुमाव हैं । हमारे देश में प्रयुक्त मानक पचास हर्ट्ज़ ए सी का उत्पादन करने के लिए लूप को पचास परिक्रमण प्रति सैकंड की दर से घुमाया जाता है । जेनरेटर का शिखर निर्गम वोल्टता तीन सौ वोल्ट हो, इसके लिए चुंबकीय क्षेत्र का क्या परिमाण होना चाहिए ? आपको याद होगा कि चित्र तेरह.दो क में दिखाए गए पहले प्रयोग में आपने गुणात्मक रूप से यह "दिखाने के लिए बोध प्रश्न एक हल किया था कि गतिमान तार पर लग रहे लारेन्ज़ बल के कारण अचर चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। बाद में फ़ैराडे नियम प्रस्तुत करते समय हमने यह बताया था कि इस स्थिति पर भी समीकरण लागू होता है । इस तरह से जनित वाहक बल को गतिक बिद्युत बाहक बल कहा जाता है । आइए हम परिमाणात्मक रूप से गतिक विद्युत वाहक बल ज्ञात करें । तेरह.दो.तीन गतिक विद्युत वाहक बल आइए हम एक सरल स्थिति लें, जैसा कि चित्र तेरह.सात में दिखाया गया है। लंबाई L वाले तार CD को अचर वेग v से दायीं ओर खींचा जाता है । यह तार GABH के बिंदुओं C और D के संपर्क में है जिससे कि एक तार लूप ABCD बन जाता है। हम तार CD की स्थिति को दूरी x से मापते हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस लूप को एक अचर चुंबकीय क्षेत्र B में रखा जाता है जिसकी दिशा पृष्ठ के अंदर की ओरं उसके लंबवत् है । जैसा कि आप जानते हैं तार में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेग काफ़ी अधिक होते हैं । परन्तु यहां हम इनकी उपेक्षा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि ये यादृच्छिकतः अभिविन्यस्त होते हैं और यदि हम तार CD के सभी इलेक्ट्रॉनों पर लगे बलों को जोड़ दें, तो लॉरेन्ज़ बल में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेगों का नेट योगदान शून्य होता है। इस तरह, तार के प्रत्येक आवेश पर निम्नलिखित बल लगता है qv x B जहां हमने तार में इलेक्ट्रॉनों के तापीय वेगों की उपेक्षा कर दी है। इसकी उपेक्षा करने का कारण ऊपर बताया जा चुका है। अब, क्योंकि VI B, इसलिए F है qvB और F की दिशा चित्र तेरह.सात में दिखाई गई है । लूप के चारों ओर प्रभावी विद्युत वाहक बल का परिकलन करने के लिए हमें प्रति एकक आवेश नेट कार्य ज्ञात करना होगा, जो कि निम्नलिखित है : •विद्युतचुंबकीय प्रेरण प्रश्न पर दस मिनट लगाएं • L चित्र तेरह.सात: खूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल की व्याख्या गतिमान तार के आदेशों पर लगे बलों के आधार पर की जाती है।
४३२ / सोनामाटो दो महीने की बच्ची को लिये गठिया से घर आयो । सावन बीत गया तथा आधा भादों भी निकल गया और रामकली नही आयी थी तो मां बहुत घबरा रही थी । अब क्या कुसाइति में आयेगी ? भादों में भला लड़की आती-जाती है रामरूप मां को समझाता, 'वह महाशक्तिशाली बाबू हनुमानप्रसाद की बेटी है, उसे भादो नही लगेगा।' फिर व्यंग्य करता, 'देखना कितना कितना लेकर आती है।' किन्तु सचमुच ही अकल्पित सम्पदा के रूप में गाय आ गयी तो सबका मुंह बन्द हो गया। भूल गया भादो । गाय को बतीसा पहुंचा गया। पहुचा क्या गया, वह आगे-आगे बछड़े को लिये चलता आया और पीछे-पीछे चलबल-थलबल थन वाली छुट्टा गाय खुद बां-वां करती दौड़ती चली आयो । द्वार पर खड़ो हुई तो माजी ने अनाज भोइंछ कर उस लक्ष्मी की पूजा को खूंटे पर बांधी गयी तो चारों ओर अजोर हो गया। देखने वाले जुटे । दाम का अनुमान शुरू हुआ। कोई ढाई हज़ार कहता तो कोई तीन हज़ार 1 गांव में ऐसी गाय किसी के पास नही । रामरूप के भीतर गर्व की एक हलकी सिहरन उठी किन्तु वह तत्क्षण दब गयी । साले के विवाह के इस कीमती दहेज में प्रेम है या कृपा ? या कूटनीतिक चोट ? अगम है, अबूझ है ससुरजी का चरित्र । उनका न तो प्रेम समझ में आता है और न हो उनकी घृणा । रामरूप सास रोककर प्रतीक्षा कर रहा था कि अब कोई आफत आयो, अब मानसिक यन्त्रणा का कोई नया गुल खिला और अब कोई ब्लाक पर घटी घटना को प्रतिक्रिया में कडवाहट की लहर फैलो । किन्तु ऐसा कुछ न होकर सद्भाव के चमचमाते सर्टिफिकेट की भाति गाय द्वार पर खड़ी हो गयी तो वह चकित हो गया । कही ऐसा तो नही कि इस दहेज के मूल मे उसकी सास मलिकाइन दुलहिनजी है। सम्भव है खेत की रजिस्ट्री की भांति अड़ गयी हों, गाय जायेंगी ही। तब क्या चारा था ? रजिस्ट्री तो दूर कचहरी मे होनी है, उसके लाखों बहाने व्यवधान है, यहां द्वार पर की गाय तो कितनी आसान है, ले जा रे बतिसवा खोलकर पहुंचा आ । ओह, काश कि कुछ ऐसा ही आदेश रजिस्ट्री पर घट जाता । मगर, अब क्या घटेगा ? रामरूप के अन्तर्मन से भी उसकी चाह निकल गयी है। दो बार निर्धारित तिथियों पर जाने और भिन्न-भिन्न बहानों से टकराकर फिंक आने के बाद अब तीसरी-चौथी बार रामरूप नही जायेगा। कहां गया पिछली बार ? कभी भेंट होने पर पूछेंगे ससुरजी तो कह देगा, आपका और हमारा क्या बटा हुआ है ? जब आपका है तो उसे मैं अपना ही समझ रहा हूं। क्या होगा रजिस्ट्री होकर ? और कभी सासजो ने पूछा तो कह देगा, हा रजिस्ट्री हो गयी। खेत मिल गया । बहुत नेह-छोह है बाबूजी का । मामला खतम । और खतम नही तो फिर क्या होनेजाने का है ? करइल ससुर की जाति का ज़मीन-जिन्न जैसा आदमी भला जान रहते जमीन देगा? तिस पर भी इस नयी कलंक-कथा की कड़ी जुड़ने के बाद ?
चार सौ बत्तीस / सोनामाटो दो महीने की बच्ची को लिये गठिया से घर आयो । सावन बीत गया तथा आधा भादों भी निकल गया और रामकली नही आयी थी तो मां बहुत घबरा रही थी । अब क्या कुसाइति में आयेगी ? भादों में भला लड़की आती-जाती है रामरूप मां को समझाता, 'वह महाशक्तिशाली बाबू हनुमानप्रसाद की बेटी है, उसे भादो नही लगेगा।' फिर व्यंग्य करता, 'देखना कितना कितना लेकर आती है।' किन्तु सचमुच ही अकल्पित सम्पदा के रूप में गाय आ गयी तो सबका मुंह बन्द हो गया। भूल गया भादो । गाय को बतीसा पहुंचा गया। पहुचा क्या गया, वह आगे-आगे बछड़े को लिये चलता आया और पीछे-पीछे चलबल-थलबल थन वाली छुट्टा गाय खुद बां-वां करती दौड़ती चली आयो । द्वार पर खड़ो हुई तो माजी ने अनाज भोइंछ कर उस लक्ष्मी की पूजा को खूंटे पर बांधी गयी तो चारों ओर अजोर हो गया। देखने वाले जुटे । दाम का अनुमान शुरू हुआ। कोई ढाई हज़ार कहता तो कोई तीन हज़ार एक गांव में ऐसी गाय किसी के पास नही । रामरूप के भीतर गर्व की एक हलकी सिहरन उठी किन्तु वह तत्क्षण दब गयी । साले के विवाह के इस कीमती दहेज में प्रेम है या कृपा ? या कूटनीतिक चोट ? अगम है, अबूझ है ससुरजी का चरित्र । उनका न तो प्रेम समझ में आता है और न हो उनकी घृणा । रामरूप सास रोककर प्रतीक्षा कर रहा था कि अब कोई आफत आयो, अब मानसिक यन्त्रणा का कोई नया गुल खिला और अब कोई ब्लाक पर घटी घटना को प्रतिक्रिया में कडवाहट की लहर फैलो । किन्तु ऐसा कुछ न होकर सद्भाव के चमचमाते सर्टिफिकेट की भाति गाय द्वार पर खड़ी हो गयी तो वह चकित हो गया । कही ऐसा तो नही कि इस दहेज के मूल मे उसकी सास मलिकाइन दुलहिनजी है। सम्भव है खेत की रजिस्ट्री की भांति अड़ गयी हों, गाय जायेंगी ही। तब क्या चारा था ? रजिस्ट्री तो दूर कचहरी मे होनी है, उसके लाखों बहाने व्यवधान है, यहां द्वार पर की गाय तो कितनी आसान है, ले जा रे बतिसवा खोलकर पहुंचा आ । ओह, काश कि कुछ ऐसा ही आदेश रजिस्ट्री पर घट जाता । मगर, अब क्या घटेगा ? रामरूप के अन्तर्मन से भी उसकी चाह निकल गयी है। दो बार निर्धारित तिथियों पर जाने और भिन्न-भिन्न बहानों से टकराकर फिंक आने के बाद अब तीसरी-चौथी बार रामरूप नही जायेगा। कहां गया पिछली बार ? कभी भेंट होने पर पूछेंगे ससुरजी तो कह देगा, आपका और हमारा क्या बटा हुआ है ? जब आपका है तो उसे मैं अपना ही समझ रहा हूं। क्या होगा रजिस्ट्री होकर ? और कभी सासजो ने पूछा तो कह देगा, हा रजिस्ट्री हो गयी। खेत मिल गया । बहुत नेह-छोह है बाबूजी का । मामला खतम । और खतम नही तो फिर क्या होनेजाने का है ? करइल ससुर की जाति का ज़मीन-जिन्न जैसा आदमी भला जान रहते जमीन देगा? तिस पर भी इस नयी कलंक-कथा की कड़ी जुड़ने के बाद ?
जबलपुर, यशभारत। नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान प्रोत्साहन राशि वितरण में गड़बड़ी सामने आई है। चहेते डॉक्टरों को इस योजना के तहत पूरी राशि बांट दी गई जबकि लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ से कह दिया गया कि राशि बाद में मिलेगी। मेडिकल में गड़बड़ी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मालूम हो कि आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने आदेश जारी करते हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ को वितरित होने वाली राशि का सर्कुलर जारी किया था। आयुक्त के आदेश मुताबिक डॉक्टरों को 15 प्रतिशत राशि वितरित की जानी है वहीं लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ को 5 प्रतिशत दिए जाने का प्रावधान रखा गया। हैरत की बात तो यह है कि मेडिकल प्रबंधन ने डॉक्टरों को तो 15 प्रतिशत राशि बांट दी लेकिन लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ को राशि बांटने की बारी आई तो कह दिया गया बाद में दी जाएगी। मप्र चिकित्सा शिक्षा कर्मचारी संघ के संयोजक वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ के मेडिकल प्रबंधन भेदभाव कर रहा है। आयुष्मान योजना के तहत 5 प्रतिशत राशि दिए जाने का प्रावधान है परंतु मेडिकल प्रबंधन का कहना है कि यह राशि अपने हिसाब से देंगे। जबकि यही राशि डॉक्टरों को बहुत पहले ही वितरित कर दी गई। कर्मचारियों को नियमों का पेंच बताकर डॉक्टरों को उपकृत किया जा रहा है। चिकित्सा कर्मचारी संघ के अजय दुबे, राजू मस्के, अमित विश्वकर्मा, घनश्याम पटेल ने बताया कि आयुष्मान योजना प्रोत्साहन राशि में किस तरह से बंदरबांट किया जा रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीबी एंड चेस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट स्टाफ को योजना के तहत पूरी राशि बांट दी गई जबकि अन्य कर्मचारियों को राशि देने में नियमों का फेर बताया जा रहा है। - चिकित्सा आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखते हुए किस कर्मचारी को कितनी राशि मिलना है इसका उल्लेख किया। - आयुष्मकान पैकेज की 15 प्रतिशत राशि डॉक्टरों को दी गई। - लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ की 5 प्रतिशत राशि को बांटा नहीं गया उसका ब्याज अधिकारी ले रहे हैं। - नर्सिंग स्टाफ 3. 5 प्रतिशत और नोडल अधिकारी आयुष्मान को 2 प्रतिशत राशि बांटी जानी थी।
जबलपुर, यशभारत। नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान प्रोत्साहन राशि वितरण में गड़बड़ी सामने आई है। चहेते डॉक्टरों को इस योजना के तहत पूरी राशि बांट दी गई जबकि लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ से कह दिया गया कि राशि बाद में मिलेगी। मेडिकल में गड़बड़ी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मालूम हो कि आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने आदेश जारी करते हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत डॉक्टर और चिकित्सा स्टाफ को वितरित होने वाली राशि का सर्कुलर जारी किया था। आयुक्त के आदेश मुताबिक डॉक्टरों को पंद्रह प्रतिशत राशि वितरित की जानी है वहीं लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ को पाँच प्रतिशत दिए जाने का प्रावधान रखा गया। हैरत की बात तो यह है कि मेडिकल प्रबंधन ने डॉक्टरों को तो पंद्रह प्रतिशत राशि बांट दी लेकिन लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ को राशि बांटने की बारी आई तो कह दिया गया बाद में दी जाएगी। मप्र चिकित्सा शिक्षा कर्मचारी संघ के संयोजक वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ के मेडिकल प्रबंधन भेदभाव कर रहा है। आयुष्मान योजना के तहत पाँच प्रतिशत राशि दिए जाने का प्रावधान है परंतु मेडिकल प्रबंधन का कहना है कि यह राशि अपने हिसाब से देंगे। जबकि यही राशि डॉक्टरों को बहुत पहले ही वितरित कर दी गई। कर्मचारियों को नियमों का पेंच बताकर डॉक्टरों को उपकृत किया जा रहा है। चिकित्सा कर्मचारी संघ के अजय दुबे, राजू मस्के, अमित विश्वकर्मा, घनश्याम पटेल ने बताया कि आयुष्मान योजना प्रोत्साहन राशि में किस तरह से बंदरबांट किया जा रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीबी एंड चेस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट स्टाफ को योजना के तहत पूरी राशि बांट दी गई जबकि अन्य कर्मचारियों को राशि देने में नियमों का फेर बताया जा रहा है। - चिकित्सा आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखते हुए किस कर्मचारी को कितनी राशि मिलना है इसका उल्लेख किया। - आयुष्मकान पैकेज की पंद्रह प्रतिशत राशि डॉक्टरों को दी गई। - लेबटेक्नीशियन-पैरामेडिकल स्टाफ की पाँच प्रतिशत राशि को बांटा नहीं गया उसका ब्याज अधिकारी ले रहे हैं। - नर्सिंग स्टाफ तीन. पाँच प्रतिशत और नोडल अधिकारी आयुष्मान को दो प्रतिशत राशि बांटी जानी थी।
21. 'चिकित्साशास्त्र का जनक' किसे कहा जाता है? 22. गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादक कौन था? 23. संपूर्ण पृथ्वी की गोलाकार समुद्री यात्रा करने वाला विश्व का पहला नाविका कौन था? 24. 'लायड जॉर्ज अपने को नेपोलियन मानता है परन्तु विल्सन स्वयं को ईसा मसीह'। यह कथन किसका है? 25. "कैम्प डेविड समझौता" संबंधित है? 26. यह किस प्राचीन दार्शनिक का कथन है कि "मै औरों से इसलिए अधिक बुद्धिमान हूँ कि मैं यह जानता हूँ कि मैं कुछ नहीं जानता? 27. 'इन द प्रेज ऑफ़ फॉली' पुस्तक के लेखक कौन है? 28. पोप और चर्च की आलोचना करने के कारण किन दो धर्म सुधारकों को जिंदा जला दिया गया था? 29. किस आधुनिक गणराज्य में सर्वप्रथम 1848 में ही सबको मताधिकार दे दिया गया था? 30. 'मीठा बोलो किन्तु हाथ में डंडा रखो' यह किस अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति का मूल आधार था?
इक्कीस. 'चिकित्साशास्त्र का जनक' किसे कहा जाता है? बाईस. गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादक कौन था? तेईस. संपूर्ण पृथ्वी की गोलाकार समुद्री यात्रा करने वाला विश्व का पहला नाविका कौन था? चौबीस. 'लायड जॉर्ज अपने को नेपोलियन मानता है परन्तु विल्सन स्वयं को ईसा मसीह'। यह कथन किसका है? पच्चीस. "कैम्प डेविड समझौता" संबंधित है? छब्बीस. यह किस प्राचीन दार्शनिक का कथन है कि "मै औरों से इसलिए अधिक बुद्धिमान हूँ कि मैं यह जानता हूँ कि मैं कुछ नहीं जानता? सत्ताईस. 'इन द प्रेज ऑफ़ फॉली' पुस्तक के लेखक कौन है? अट्ठाईस. पोप और चर्च की आलोचना करने के कारण किन दो धर्म सुधारकों को जिंदा जला दिया गया था? उनतीस. किस आधुनिक गणराज्य में सर्वप्रथम एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में ही सबको मताधिकार दे दिया गया था? तीस. 'मीठा बोलो किन्तु हाथ में डंडा रखो' यह किस अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति का मूल आधार था?
राखीगाढ़ी को राखी शाहपुर के नाम से जाना जाता है और राखी खास, हिसार जिले का एक गांव है। इसका ऐतिहासिक महत्व, 1963 में पलही खुदाई और 1997 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से की खुदाई दौरान खोज की गयी थी। माना जाता है की वर्तमान में गांव उस जगह पे है जहाँ 2,000 ईसा पूर्व के आसपास सरस्वती नदी सूख गयी थी। यह गाँव 2. 2 किमी वर्ग में फैला हुआ है और हड़प्पा और सिंधु घाटी सभ्यता का एक हिस्सा भी है। ऐतिहासिक राखीगाढ़ी २२४ हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और देश में सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है और सबसे बड़ी साइट मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है। खुदाई में सिंधु घाटी सभ्यता की उन दिनों में उन्नति का खुलासा हुआ। उत्खनन में ईंट से बनी सीवेज लाइन, मिट्टी की मूर्तियां, पीतल की कलाकृतियां, वजन, पीतल और सुइयों से बने मछली हुक और नालियों पाया गया। अन्य महत्वपूर्ण खोजों थी, पीतल के बर्तन पर सोने और चांदी का काम, लगभग 3,000 अर्द्ध कीमती पत्थरों से युक्त एक सोने की ढलाई,कब्रिस्तान में 11 कंकाल, टेराकोटा चूड़ियाँ, शंख, सोने के आभूषण और कई और अधिक चीज़ें, उनमें से कुछ 5000 साल से अधिक पुराने थे।
राखीगाढ़ी को राखी शाहपुर के नाम से जाना जाता है और राखी खास, हिसार जिले का एक गांव है। इसका ऐतिहासिक महत्व, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में पलही खुदाई और एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से की खुदाई दौरान खोज की गयी थी। माना जाता है की वर्तमान में गांव उस जगह पे है जहाँ दो,शून्य ईसा पूर्व के आसपास सरस्वती नदी सूख गयी थी। यह गाँव दो. दो किमी वर्ग में फैला हुआ है और हड़प्पा और सिंधु घाटी सभ्यता का एक हिस्सा भी है। ऐतिहासिक राखीगाढ़ी दो सौ चौबीस हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और देश में सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है और सबसे बड़ी साइट मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है। खुदाई में सिंधु घाटी सभ्यता की उन दिनों में उन्नति का खुलासा हुआ। उत्खनन में ईंट से बनी सीवेज लाइन, मिट्टी की मूर्तियां, पीतल की कलाकृतियां, वजन, पीतल और सुइयों से बने मछली हुक और नालियों पाया गया। अन्य महत्वपूर्ण खोजों थी, पीतल के बर्तन पर सोने और चांदी का काम, लगभग तीन,शून्य अर्द्ध कीमती पत्थरों से युक्त एक सोने की ढलाई,कब्रिस्तान में ग्यारह कंकाल, टेराकोटा चूड़ियाँ, शंख, सोने के आभूषण और कई और अधिक चीज़ें, उनमें से कुछ पाँच हज़ार साल से अधिक पुराने थे।
IPL 2023, MI vs KKR: दरअसल, मुंबई के वानखेडे मैदान में हुए टूर्नामेंट के इस 22वें मुकाबले (70 में से) में किशन (25 गेंदों पर 58 रनः पांच चौके और पांच छक्के) के तूफानी अर्धशतक से मिली शानदार शुरुआत के दम पर मुंबई ने वेंकटेश अय्यर के रिकॉर्ड शतक पर पानी फेरते हुए कोलकाता के खिलाफ 14 गेंद बाकी रहते हुए पांच विकेट से आसान जीत हासिल की थी। IPL 2023, MI vs KKR: मैच के बाद प्रेजेंटेशन के दौरान अपनी बात रखते हुए 16 अप्रैल, 2023 को मुंबई इंडियंस के कप्तान सूर्य कुमार यादव। (फोटोः www. iplt20. com) IPL 2023 , MI vs KKR: कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ अपने होम ग्राउंड में जीत के बाद मुंबई इंडियंस ( Mumbai Indians ) के रविवार (16 अप्रैल, 2023) को कप्तान रहे सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav : SKY) ने कहा कि टीम के खिलाड़ियों ने वही लय बरकरार रखी, जिस पर वह पिछले मैच में थे। उन्होंने इस दौरान ओपनर ईशान किशन और प्लेयर पीयूष चावला की भी तारीफ की। मैच प्रेजेंटेशन के दौरान वह बोले, "डग-आउट में हमारी बात हुई थी कि हमें पिछले मैच वाला मुमेंटम (लय) बनाए रखना है और लड़कों ने वही कर के दिखाया। मुझे खेल खत्म करना अच्छा लगता पर फिर भी जिस तरह से टीम खेली उससे मैं बहुत खुश था। दोपहर में हमें लगा था कि पिच थोड़ी सूखी है, मगर जिस तरह से लोगों ने बल्लेबाजी की वह शाम को सेट हो गई। " बकौल स्काई, "दिन के खेल में वानखेडे (Wankhede Stadium) में 160-170 एक अच्छा स्कोर है, पर ईशान किशन (Ishan Kishan) ने हमें अच्छी शुरुआत दिलाई। मैंने पहली पांच-सात गेंदों में अपना समय लिया और सोचा कि अगर मैं अपना ध्यान केंद्रित कर सकता हूं तो मुझे स्कोर मिल सकता है। " उन्होंने आगे बताया- हम जानते हैं कि अगर टॉप ऑर्डर (बैटिंग) अच्छी शुरुआत देता है तो निचले क्रम में हमारे पास कितनी मारक क्षमता है। यह एक 'लीजेंड्री स्पेल' (पौराणिक जादू - पीयूष चावला) था। उन्होंने दबाव में अपना हाथ ऊपर किया। ट्रेंडिंगः
IPL दो हज़ार तेईस, MI vs KKR: दरअसल, मुंबई के वानखेडे मैदान में हुए टूर्नामेंट के इस बाईसवें मुकाबले में किशन के तूफानी अर्धशतक से मिली शानदार शुरुआत के दम पर मुंबई ने वेंकटेश अय्यर के रिकॉर्ड शतक पर पानी फेरते हुए कोलकाता के खिलाफ चौदह गेंद बाकी रहते हुए पांच विकेट से आसान जीत हासिल की थी। IPL दो हज़ार तेईस, MI vs KKR: मैच के बाद प्रेजेंटेशन के दौरान अपनी बात रखते हुए सोलह अप्रैल, दो हज़ार तेईस को मुंबई इंडियंस के कप्तान सूर्य कुमार यादव। IPL दो हज़ार तेईस , MI vs KKR: कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ अपने होम ग्राउंड में जीत के बाद मुंबई इंडियंस के रविवार को कप्तान रहे सूर्यकुमार यादव ने कहा कि टीम के खिलाड़ियों ने वही लय बरकरार रखी, जिस पर वह पिछले मैच में थे। उन्होंने इस दौरान ओपनर ईशान किशन और प्लेयर पीयूष चावला की भी तारीफ की। मैच प्रेजेंटेशन के दौरान वह बोले, "डग-आउट में हमारी बात हुई थी कि हमें पिछले मैच वाला मुमेंटम बनाए रखना है और लड़कों ने वही कर के दिखाया। मुझे खेल खत्म करना अच्छा लगता पर फिर भी जिस तरह से टीम खेली उससे मैं बहुत खुश था। दोपहर में हमें लगा था कि पिच थोड़ी सूखी है, मगर जिस तरह से लोगों ने बल्लेबाजी की वह शाम को सेट हो गई। " बकौल स्काई, "दिन के खेल में वानखेडे में एक सौ साठ-एक सौ सत्तर एक अच्छा स्कोर है, पर ईशान किशन ने हमें अच्छी शुरुआत दिलाई। मैंने पहली पांच-सात गेंदों में अपना समय लिया और सोचा कि अगर मैं अपना ध्यान केंद्रित कर सकता हूं तो मुझे स्कोर मिल सकता है। " उन्होंने आगे बताया- हम जानते हैं कि अगर टॉप ऑर्डर अच्छी शुरुआत देता है तो निचले क्रम में हमारे पास कितनी मारक क्षमता है। यह एक 'लीजेंड्री स्पेल' था। उन्होंने दबाव में अपना हाथ ऊपर किया। ट्रेंडिंगः
शहद के कई लाभ सुने होंगे आपने. ये हमारे शरीर में काफी फायदा पहुंचता है. यह औषधीय गुणों से भरपूर होता हैं और स्वाद में भी मीठा होने की वजह से बहुत पसंद किया जाता हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेहत बनाने वाला यही शहद, जहर का काम भी करता हैं. शहद कैसे जहर बन सकता हैए आज इसी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. हम आपके लिए उन चीजों की जानकारी लेकर आए हैं, जिनको शहद के साथ सेवन करने से बचना चाहिए. भूलकर भी मूली के साथ शहद का सेवन न करें. दरअसल, इससे बॉडी में टॉक्सिन्स बनने लगते है. इससे कई हैल्थ प्रॉब्लम हो सकती है. मूली खाने के कम से कम एक घंटे बाद शहद का सेवन करें. अक्सर लोग वजन कम करने के लिए गर्म पानी में शहद डालकर पीते हैं जोकि गलत है. ज्यादा गर्म पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर में गर्मी पैदा होने लगती है, जिससे पेट संबंधित समस्याएं होने लगती है. ऐसे में गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीएं. चाय या कॉफी के साथ शहद का सेवन न करें. इससे शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे घबराहट और स्ट्रेस बढ़ता है. शहद का सेवन गर्म चीजों के साथ न करें. शहद के साथ इसका सेवन जहर के समान होता है. दरअसल, शहद की तासीर गर्म होती है जिससे पेट खराब हो सकता है.
शहद के कई लाभ सुने होंगे आपने. ये हमारे शरीर में काफी फायदा पहुंचता है. यह औषधीय गुणों से भरपूर होता हैं और स्वाद में भी मीठा होने की वजह से बहुत पसंद किया जाता हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेहत बनाने वाला यही शहद, जहर का काम भी करता हैं. शहद कैसे जहर बन सकता हैए आज इसी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. हम आपके लिए उन चीजों की जानकारी लेकर आए हैं, जिनको शहद के साथ सेवन करने से बचना चाहिए. भूलकर भी मूली के साथ शहद का सेवन न करें. दरअसल, इससे बॉडी में टॉक्सिन्स बनने लगते है. इससे कई हैल्थ प्रॉब्लम हो सकती है. मूली खाने के कम से कम एक घंटे बाद शहद का सेवन करें. अक्सर लोग वजन कम करने के लिए गर्म पानी में शहद डालकर पीते हैं जोकि गलत है. ज्यादा गर्म पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर में गर्मी पैदा होने लगती है, जिससे पेट संबंधित समस्याएं होने लगती है. ऐसे में गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीएं. चाय या कॉफी के साथ शहद का सेवन न करें. इससे शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे घबराहट और स्ट्रेस बढ़ता है. शहद का सेवन गर्म चीजों के साथ न करें. शहद के साथ इसका सेवन जहर के समान होता है. दरअसल, शहद की तासीर गर्म होती है जिससे पेट खराब हो सकता है.
पिछले कुछ दिनों से कोरोना पॉजिटिव मरीजों के स्वस्थ होने की रफ्तार में व्यापक स्तर पर सुधार आया है। यानि सैम्पलिंग में पॉजिटिव मिले व्यक्ति अपने घरों में रहकर व स्वास्थ्य विभाग के नियमित मॉनीटरिंग के बाद लगातार स्वस्थ हो रहे हैं। हालांकि अभी भी प्रतिदिन जांच में पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं लेकिन अब पॉजिटिव मरीजों के मिलने की रफ्तार में पूर्वकी तरह कमी आईहै। क्योंकि सैम्पलिंग की संख्या में भी इजाफा हुआ है। जानकारी के अनुसार बीते 48 घंटे में जिले में 568 कोरोना पॉजिटिव मरीज स्वस्थ हुए हैं। अब जिले में मात्र 1770 कोरोना के एक्टिव मामले हैं। इनलोगों का इलाज होम आइसोलेशन में हो रहा है। इसके साथ ही अब तक पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 8472 पहुंच गईहै। इसमें से 1770 पॉजिटिव मरीजों को छोड़कर शेष व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हैं। अब तक प्रशासनिक स्तर पर 27 लोगों के मौत की पुष्टि की जा रही है।
पिछले कुछ दिनों से कोरोना पॉजिटिव मरीजों के स्वस्थ होने की रफ्तार में व्यापक स्तर पर सुधार आया है। यानि सैम्पलिंग में पॉजिटिव मिले व्यक्ति अपने घरों में रहकर व स्वास्थ्य विभाग के नियमित मॉनीटरिंग के बाद लगातार स्वस्थ हो रहे हैं। हालांकि अभी भी प्रतिदिन जांच में पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं लेकिन अब पॉजिटिव मरीजों के मिलने की रफ्तार में पूर्वकी तरह कमी आईहै। क्योंकि सैम्पलिंग की संख्या में भी इजाफा हुआ है। जानकारी के अनुसार बीते अड़तालीस घंटाटे में जिले में पाँच सौ अड़सठ कोरोना पॉजिटिव मरीज स्वस्थ हुए हैं। अब जिले में मात्र एक हज़ार सात सौ सत्तर कोरोना के एक्टिव मामले हैं। इनलोगों का इलाज होम आइसोलेशन में हो रहा है। इसके साथ ही अब तक पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर आठ हज़ार चार सौ बहत्तर पहुंच गईहै। इसमें से एक हज़ार सात सौ सत्तर पॉजिटिव मरीजों को छोड़कर शेष व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हैं। अब तक प्रशासनिक स्तर पर सत्ताईस लोगों के मौत की पुष्टि की जा रही है।
रायपुर। CG News पर्यावरण की सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शी सोच से शुरु हुई गोधन न्याय योजना का पूरा देश मुरीद हो चुका है। मुख्यमंत्री बघेल ने इस योजना की शुरूआत की थी जो आज पूरी तरह से सफल होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शासकीय विभागो के लिए निर्देश जारी किया है कि अब शासकीय कार्यालयों, निगम मंडल और अन्य जितने भी सरकारी दफ्तर हैं, उनमें रंग रोगन में गोबर से बने प्राकृतिक पेंट का इस्तेमाल होगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले का केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने स्वागत किया है। गडकरी ने ट्वीट कर लिखा है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागीय निर्माण में गोबर से बने प्राकृतिक पेंट के इस्तेमाल का निर्देश छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिया है, उनके इस फैसले का अभिनंदन करता हूं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ये फैसला सराहनीय और स्वागत योग्य है। मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट करते हुए केंद्रीय मंत्री गड़करी को धन्यवाद देते हुए कहा है कि नेक इरादों से ही देश और प्रदेश दूसरों के लिए प्रेरणा बनते है। CM ने कहा है कि गोधन और श्रम का सम्मान कर छत्तीसगढ़ गांधी जी के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। कई मंचों पर छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना की तारीफ खुद प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री कर चुके हैं। इसके अलावा इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। यहां तक की इस योजना के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए कई राज्य अपने यहां के अधिकारियों को भी छत्तीसगढ़ के दौरे पर भेज चुके हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी शासकीय विभागों, निगम-मंडलों एवं स्थानीय निकायों में भवनों के रंग-रोगन के लिए गोबर पेंट का अनिवार्यतः उपयोग करने के निर्देश दिये हैं। पूर्व में जारी किए गए निर्देशों के बावजूद अभी भी निर्माण विभागों द्वारा केमिकल पेंट का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सभी विभागों, निगम-मंडलों और स्थानीय निकायों को भवनों के रंगरोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग अनिवार्यतः करने के निर्देश जारी करने को कहा है। CM ने कहा है कि गोबर पेंट का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा।
रायपुर। CG News पर्यावरण की सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शी सोच से शुरु हुई गोधन न्याय योजना का पूरा देश मुरीद हो चुका है। मुख्यमंत्री बघेल ने इस योजना की शुरूआत की थी जो आज पूरी तरह से सफल होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शासकीय विभागो के लिए निर्देश जारी किया है कि अब शासकीय कार्यालयों, निगम मंडल और अन्य जितने भी सरकारी दफ्तर हैं, उनमें रंग रोगन में गोबर से बने प्राकृतिक पेंट का इस्तेमाल होगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले का केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने स्वागत किया है। गडकरी ने ट्वीट कर लिखा है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागीय निर्माण में गोबर से बने प्राकृतिक पेंट के इस्तेमाल का निर्देश छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिया है, उनके इस फैसले का अभिनंदन करता हूं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ये फैसला सराहनीय और स्वागत योग्य है। मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट करते हुए केंद्रीय मंत्री गड़करी को धन्यवाद देते हुए कहा है कि नेक इरादों से ही देश और प्रदेश दूसरों के लिए प्रेरणा बनते है। CM ने कहा है कि गोधन और श्रम का सम्मान कर छत्तीसगढ़ गांधी जी के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। कई मंचों पर छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना की तारीफ खुद प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री कर चुके हैं। इसके अलावा इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। यहां तक की इस योजना के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए कई राज्य अपने यहां के अधिकारियों को भी छत्तीसगढ़ के दौरे पर भेज चुके हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी शासकीय विभागों, निगम-मंडलों एवं स्थानीय निकायों में भवनों के रंग-रोगन के लिए गोबर पेंट का अनिवार्यतः उपयोग करने के निर्देश दिये हैं। पूर्व में जारी किए गए निर्देशों के बावजूद अभी भी निर्माण विभागों द्वारा केमिकल पेंट का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सभी विभागों, निगम-मंडलों और स्थानीय निकायों को भवनों के रंगरोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग अनिवार्यतः करने के निर्देश जारी करने को कहा है। CM ने कहा है कि गोबर पेंट का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा।
Aries (मेष): आज आपकों व्यवसाय में लाभ होंने के संयोग हैं। अगर आप अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को अनदेखा करेंगे, तो कुछ ऐसे लोग नाराज हो सकते हैं जो आपके साथ रहते हैं। आप पर उच्च अधिकारीगण की कृपादृष्टि होगी और आपके वर्चस्व में वृद्धि होगी। काम पर जाने से पहले मन पक्का कर लें। शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। पारिवारिक वातावरण आनंदप्रद रहेगा। मित्रों, स्नेहीजनों के साथ मेल-मिलाप होगा। Taurus (वृष): आर्थिक तौर पर सुधार के चलते आप आसानी से काफी वक़्त से लंबित बिल और उधार चुका सकेंगे। जरूरत से ज्यादा वक़्त व पैसा मनोरंजन पर खर्च न करें। परिवार एवं स्नेहियों के साथ उग्र विवाद के कारण दुख हो सकता है। आपका प्रबल आत्मविश्वास और आज के दिन का आसान कामकाज मिलकर आपको आराम के लिए काफी वक़्त देंगे। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आज लोग आपकी वह प्रशंसा करेंगे, जिसे आप हमेशा से सुनना चाहते थे। Gemini (मिथुन): आज आपको मित्रों से लाभ होगा। नए मित्र बन सकते हैं, जो कि भविष्य में आपके लिए लाभदायी सिद्ध हो सकते हैं। अपेक्षा से अधिक धनलाभ होगा। प्रवास या पर्यटन का आयोजन हो सकता है। सरकारी कार्यों में लाभ होगा। आज के दिन आप कार्यक्षेत्र में कुछ बढ़िया कर सकते हैं। अगर आप यात्रा कर रहें है तो सभी ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखना न भूलें। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आप और आपका हमदम एक-दूसरे से आज एक-दूसरे की खूबसूरत भावनाओं का इजहार कर सकेंगे। काम में धीमी प्रगति हल्का-सा मानसिक तनाव दे सकती है। Cancer (कर्क): आप आज दिन के प्रारंभ में शारीरिक तथा मानसिकरुप से व्याकुलता और अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। आज भाग्य आपका साथ ज़रूर देगा, क्योंकि यह आपका दिन है। संभव हैं कि आज आपके बॉस का मिज़ाज काफ़ी ख़राब हो, जिसके चलते आपको काम करने में काफ़ी तकलीफ़ हो सकती है। किसी पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार की वजह से वैवाहिक जीवन में अनबन मुमकिन है। अपने जज़्बात पर काबू रखें और ऐसा कोई गैरजिम्मेदाराना काम न करें जिसके लिए बाद में आपको पछताना पड़े। साझीदारी के लिए अच्छे मौके हैं, लेकिन भली-भांति सोचकर ही कदम बढ़ाएँ। Leo (सिंह): मन में उत्साह का संचार होगा, जिस वजह से दिनभर का समय आनंदपूर्वक बीतेगा। भाई-बंधुओं एवं स्नेहीजनों से मेलजोल बढ़ेगा। दिन अनुकूल है। काम सरलता से होंगे। उच्च पदाधिकारी खुश होंगे। बाहर जाना हो सकता है। ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा सकते हैं। माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। सरकारी लाभ होगा। आज कोई महत्त्वपूर्ण योजना भी बना सकते हैं। अपने काम के लिए दूसरों पर दबाव न डालें। दूसरे लोगों की इच्छाओं और दिलचस्पियों पर भी गौर करें, इससे आपको दिली खुशी हासिल होगी। आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। आज अनेक रूप से लाभ होने के कारण आपके हर्षोल्लास में दुगुनी वृद्धि होगी। लेन-देन में सावधानी बरतें। कानूनी मसले हल होंगे। किसी चिंता से मुक्ति मिलेगी। पत्नी एवं पुत्र की तरफ से लाभदायी समाचार मिलेंगे। मित्रों से हुई मुलाकात से आनंद मिलेगा। व्यापार में नए प्रस्ताव समृद्धि के संकेत देंगे। अपने काम से काम रखें। यात्रा प्रवास से बचें। जिससे किसीके साथ विवाद या मनदुःख न हो। स्वास्थ्य में कुछ अस्वस्थता बनी रहेगी। Libra (तुला): आज प्रातःकाल में आप शारीरिक तथा मानसिकरुप से शिथिलता का अनुभव करेंगे। कार्य के लिए कुछ अधिक ही भागदौड़ मची रहेगी तथा परिश्रम की तुलना में प्राप्ति अल्प होगी। आज के किए गए परिश्रम के असंतोषकारक परिणाम होंगे, जिनसे मन में ग्लानि होगी। अविचारी निर्णय से गलतफहमियां खड़ी न हों, इसका ध्यान रखिएगा। नए कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में वृद्धि होकर आर्थिक क्षेत्र में सुधार की संभावना है। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। वाद-विवाद से बचकर रहें। Scorpio (वृश्चिक): आज व्यापार अच्छा चलेगा। विवाद समाप्त होने से शांति एवं सुख बढ़ेगा। परोपकारी स्वभाव होने से दूसरों की मदद कर पाएंगे। कामकाज की जिज्ञासा बढ़ेगी। सुखवृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति होगी। परिवार में क्लेश, मनमुटाव हो सकता है। निद्रा का अभाव रहेगा। मानहानि होने की आशंका है। आर्थिक योजनाओं में धन का निवेश हो सकता है। आप व्यवसाय या व्यापार के कार्य में व्यस्त रहेंगे। तथा उससे लाभ भी होगा। अधिक लोगों के साथ आज मिलने के कारण विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। Sagittarius (धनु) आज आपको अच्छे समाचार मिल सकते हैं। आर्थिक लाभ की संभावनाएं हैं। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ आनंददायी प्रवास का योग है। आपका पारिवारिक वातावरण आनंद व उल्लास से लबालब भरा रहेगा। तन में चेतना एवं स्फूर्ति का संचार होगा। उनसे मिली भेट व सौगात पाकर आप आनंदित होंगे। क्रोध पर संयम रखिएगा। व्यवसाय में बाधा उपस्थित होने की संभावना है व उच्चपदाधिकारियों की अप्रसन्नता के कारण दुखी होने की संभावना भी है। आपके लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। Capricorn (मकर): सबसे अच्छा रिश्ता बनाए रखने की कोशिश करें। ज़ाहिर तौर पर रोमांस के लिए पर्याप्त मौक़े हैं। लेकिन ऐसा बहुत कम समय के लिए है। आज आलस्य को त्यागकर कार्यों को समय पर करने से सफलता प्राप्त हो सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सोच-समझकर व्यय करें। कार्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में बाधाओं से मन अशांत रहेगा। आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। (कुंभ): लेखनकार्य के लिए दिन अच्छा है। परंतु मध्याह्न के बाद या संध्याकाल में परिस्थितियों में बदलाव आएगा। दुविधापूर्ण परिस्थिति का अनुभव होगा। आज के किए गए परिश्रम के असंतोषकारक परिणाम होंगे, जिनसे मन में ग्लानि होगी। अविचारी निर्णय से गलतफहमियां खड़ी न हों, इसका ध्यान रखिएगा। प्रयत्न एवं दूरदर्शिता से सहयोग व समर्थन मिलेगा। अहंकार के भाव मन में न आने दें। काम में लापरवाही न करें। आज किए गए हर कार्य में सफलता मिलेगी। घर का वातावरण प्रफुल्लित रहेगा। Pisces (मीन):
Aries : आज आपकों व्यवसाय में लाभ होंने के संयोग हैं। अगर आप अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को अनदेखा करेंगे, तो कुछ ऐसे लोग नाराज हो सकते हैं जो आपके साथ रहते हैं। आप पर उच्च अधिकारीगण की कृपादृष्टि होगी और आपके वर्चस्व में वृद्धि होगी। काम पर जाने से पहले मन पक्का कर लें। शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। पारिवारिक वातावरण आनंदप्रद रहेगा। मित्रों, स्नेहीजनों के साथ मेल-मिलाप होगा। Taurus : आर्थिक तौर पर सुधार के चलते आप आसानी से काफी वक़्त से लंबित बिल और उधार चुका सकेंगे। जरूरत से ज्यादा वक़्त व पैसा मनोरंजन पर खर्च न करें। परिवार एवं स्नेहियों के साथ उग्र विवाद के कारण दुख हो सकता है। आपका प्रबल आत्मविश्वास और आज के दिन का आसान कामकाज मिलकर आपको आराम के लिए काफी वक़्त देंगे। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आज लोग आपकी वह प्रशंसा करेंगे, जिसे आप हमेशा से सुनना चाहते थे। Gemini : आज आपको मित्रों से लाभ होगा। नए मित्र बन सकते हैं, जो कि भविष्य में आपके लिए लाभदायी सिद्ध हो सकते हैं। अपेक्षा से अधिक धनलाभ होगा। प्रवास या पर्यटन का आयोजन हो सकता है। सरकारी कार्यों में लाभ होगा। आज के दिन आप कार्यक्षेत्र में कुछ बढ़िया कर सकते हैं। अगर आप यात्रा कर रहें है तो सभी ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखना न भूलें। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आप और आपका हमदम एक-दूसरे से आज एक-दूसरे की खूबसूरत भावनाओं का इजहार कर सकेंगे। काम में धीमी प्रगति हल्का-सा मानसिक तनाव दे सकती है। Cancer : आप आज दिन के प्रारंभ में शारीरिक तथा मानसिकरुप से व्याकुलता और अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। आज भाग्य आपका साथ ज़रूर देगा, क्योंकि यह आपका दिन है। संभव हैं कि आज आपके बॉस का मिज़ाज काफ़ी ख़राब हो, जिसके चलते आपको काम करने में काफ़ी तकलीफ़ हो सकती है। किसी पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार की वजह से वैवाहिक जीवन में अनबन मुमकिन है। अपने जज़्बात पर काबू रखें और ऐसा कोई गैरजिम्मेदाराना काम न करें जिसके लिए बाद में आपको पछताना पड़े। साझीदारी के लिए अच्छे मौके हैं, लेकिन भली-भांति सोचकर ही कदम बढ़ाएँ। Leo : मन में उत्साह का संचार होगा, जिस वजह से दिनभर का समय आनंदपूर्वक बीतेगा। भाई-बंधुओं एवं स्नेहीजनों से मेलजोल बढ़ेगा। दिन अनुकूल है। काम सरलता से होंगे। उच्च पदाधिकारी खुश होंगे। बाहर जाना हो सकता है। ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा सकते हैं। माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। सरकारी लाभ होगा। आज कोई महत्त्वपूर्ण योजना भी बना सकते हैं। अपने काम के लिए दूसरों पर दबाव न डालें। दूसरे लोगों की इच्छाओं और दिलचस्पियों पर भी गौर करें, इससे आपको दिली खुशी हासिल होगी। आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। आज अनेक रूप से लाभ होने के कारण आपके हर्षोल्लास में दुगुनी वृद्धि होगी। लेन-देन में सावधानी बरतें। कानूनी मसले हल होंगे। किसी चिंता से मुक्ति मिलेगी। पत्नी एवं पुत्र की तरफ से लाभदायी समाचार मिलेंगे। मित्रों से हुई मुलाकात से आनंद मिलेगा। व्यापार में नए प्रस्ताव समृद्धि के संकेत देंगे। अपने काम से काम रखें। यात्रा प्रवास से बचें। जिससे किसीके साथ विवाद या मनदुःख न हो। स्वास्थ्य में कुछ अस्वस्थता बनी रहेगी। Libra : आज प्रातःकाल में आप शारीरिक तथा मानसिकरुप से शिथिलता का अनुभव करेंगे। कार्य के लिए कुछ अधिक ही भागदौड़ मची रहेगी तथा परिश्रम की तुलना में प्राप्ति अल्प होगी। आज के किए गए परिश्रम के असंतोषकारक परिणाम होंगे, जिनसे मन में ग्लानि होगी। अविचारी निर्णय से गलतफहमियां खड़ी न हों, इसका ध्यान रखिएगा। नए कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में वृद्धि होकर आर्थिक क्षेत्र में सुधार की संभावना है। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। वाद-विवाद से बचकर रहें। Scorpio : आज व्यापार अच्छा चलेगा। विवाद समाप्त होने से शांति एवं सुख बढ़ेगा। परोपकारी स्वभाव होने से दूसरों की मदद कर पाएंगे। कामकाज की जिज्ञासा बढ़ेगी। सुखवृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति होगी। परिवार में क्लेश, मनमुटाव हो सकता है। निद्रा का अभाव रहेगा। मानहानि होने की आशंका है। आर्थिक योजनाओं में धन का निवेश हो सकता है। आप व्यवसाय या व्यापार के कार्य में व्यस्त रहेंगे। तथा उससे लाभ भी होगा। अधिक लोगों के साथ आज मिलने के कारण विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। Sagittarius आज आपको अच्छे समाचार मिल सकते हैं। आर्थिक लाभ की संभावनाएं हैं। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ आनंददायी प्रवास का योग है। आपका पारिवारिक वातावरण आनंद व उल्लास से लबालब भरा रहेगा। तन में चेतना एवं स्फूर्ति का संचार होगा। उनसे मिली भेट व सौगात पाकर आप आनंदित होंगे। क्रोध पर संयम रखिएगा। व्यवसाय में बाधा उपस्थित होने की संभावना है व उच्चपदाधिकारियों की अप्रसन्नता के कारण दुखी होने की संभावना भी है। आपके लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। Capricorn : सबसे अच्छा रिश्ता बनाए रखने की कोशिश करें। ज़ाहिर तौर पर रोमांस के लिए पर्याप्त मौक़े हैं। लेकिन ऐसा बहुत कम समय के लिए है। आज आलस्य को त्यागकर कार्यों को समय पर करने से सफलता प्राप्त हो सकती है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। सोच-समझकर व्यय करें। कार्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में बाधाओं से मन अशांत रहेगा। आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। : लेखनकार्य के लिए दिन अच्छा है। परंतु मध्याह्न के बाद या संध्याकाल में परिस्थितियों में बदलाव आएगा। दुविधापूर्ण परिस्थिति का अनुभव होगा। आज के किए गए परिश्रम के असंतोषकारक परिणाम होंगे, जिनसे मन में ग्लानि होगी। अविचारी निर्णय से गलतफहमियां खड़ी न हों, इसका ध्यान रखिएगा। प्रयत्न एवं दूरदर्शिता से सहयोग व समर्थन मिलेगा। अहंकार के भाव मन में न आने दें। काम में लापरवाही न करें। आज किए गए हर कार्य में सफलता मिलेगी। घर का वातावरण प्रफुल्लित रहेगा। Pisces :
भजहब क्या है ? उनके कहने से तो ऐसा मालूम पडता था कि शायद ईश्वर ने उन्हें अनशन की तारीख तक सुझा दी थी । ऐसी मिसाल पेश करना कितना खतरनाक होगा और अगर वापू मर गये । तो, हिन्दुस्तान की क्या हालत हो जायगी ? मुझे भविष्य सूना और उदास दीखने लगा, और जब मै उसपर विचार करता था तो मेरे दिल में एक निराशा छा जाती थी । इस तरह में लगातार विचारों ही विचारो मे डूवता रहा । मेरे दिमाग में गडबडी मच गई, और गुस्सा, निराशा और जिस व्यक्ति ने इतनी बडी उथल-पुथल पैदा कर दी उसके प्रति प्रेम से वह सराबोर हो गया। मुझे नहीं सूझता था कि मैं क्या कहूँ, और सबसे ज्यादा अपने-आपके प्रति मं चिडचिडा और बद-मिजाज हो गया । और फिर मुझमें एक अजीब बात हुई। मुझपर भावनाओं का ऐसा दौर शुरू हुआ कि एक मकट-काल ही आ उपस्थित हुआ, पर अन्त में जाकर मुझे कुछ शान्ति मालूम हुई, और भविष्य भी इतना अन्धकार पूर्ण दिखाई नही दिया । बापू मे ऐन मौके पर ठीक काम कर डालने की अजीव मूझ थी, और मुमकिन है कि उनके इस काम के भी - जो मेरे दृष्टि विन्दु में बिलकुल असमर्थनीय था- कोई बडे - नतीजे हो, और वह केवल उमी काम के छोटे से सीमित क्षेत्र में नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीय लडाई के व्यापक स्वरूपो में भी । और अगर वापू मर भी गये, तो भी हमारी स्वतंत्रता की लडाई चलती रहेगी। इसलिए कुछ भी नतीजा हो, इन्सान को हर हालत के लिए तैयार और मुस्तैद रहना चाहिए । अपने दिमाग को गांधीजी की मृत्यु तक वरदात करने के लिए विना हिचकिचाहट के तैयार करके मेने शान्ति और धैर्य धारण किया, और दुनिया और दुनिया की हर घटना का सामना करने को तैयार हो गया । इसके बाद सारे देश में एक भयकर उथल-पुथल मचने, हिन्दू समाज में उत्साह की एक जादूभरी लहर आ जाने की खबरे आईं, और मालूम होने लगा कि अस्पृश्यता का अब खात्मा ही होनेवाला है। मैं सोचने लगा कि यरवडा जेल में बैठा हुआ यह छोटा-सा आदमी कितना वडा जादूगर है, और लोगों के दिलों में खलबली मचा देनेवाली डोर हिलाना वह कितनी अच्छी तरह जानता है ! उनका एक तार मुझे मिला। मेरे जेल आने के बाद यह उनका पहला ही मदेश था, और इतने लम्बे अर्से के बाद उनका यह तार मिलने से मुझे लाभ ही हुआ । इस तार में उन्होंने लिखा "इन वेदना के दिनों में मुझे हमेशा तुम्हारा ध्यान रहा है। तुम्हारी राय जानने को मैं बहुत ज्यादा उत्सुक हूँ। तुम्हें मालूम है, मैं तुम्हारी राय की कितनी क़दर करता हूँ। मैंने इन्दु ( और ) सरूप के बच्चों को देखा । इन्दु खुश और कुछ तगड़ी दीखती थी। तबीयत बहुत ठीक है । तार से जवाब दो । स्नेह । " यह एक असाधारण बात थी, लेकिन उनके स्वभाव के अनुसार ही थी, कि उन्होने अपने अनशन की पीड़ा और अपने काम-काज के बीच भी मेरी लड़की और मेरी बहन के बच्चो के आने का जिक्र किया, और यह भी लिखा कि इन्दिरा तगडी हो गई है । उस वक्त मेरी बहन भी पूना की जेल म थी, और ये सब बच्चे पूना के स्कूल में पढ़ते थे । वह जीवन मे छोटी दीखनेवाली बातो को कभी नही भूलते, जिनका वास्तव में बड़ा महत्व भी होता है । ठीक उसी वक्त मुझे यह खबर भी मिली कि चुनाव के सवाल पर कोई समझौता भी हो गया है । जेल के सुपरिन्टेण्डेण्ट ने महरबानी करके मुझे गाधीजी को जवाब भेजने की इजाजत दे दी, और मैंने उन्हे यह तार भेजा " आपके तार और यह संक्षिप्त समाचार मिलने से कि कोई समझौता हो गया है, मुझे बड़ी राहत और खुशी हासिल हुई। पहले तो आपके अनशन के निश्चय से मानसिक क्लेश और बड़ी दुविधा पैदा हुई, पर आखिरमे आशावाद की विजय हुई और मुझे मानसिक शान्ति मिली । पद- दलित वर्गों के लिए बड़े से बड़ा बलिदान भी कम ही है । स्वतन्त्रता की कसौटी सबसे छोटे की स्वतन्त्रता से करनी चाहिए, मगर मुझे यह ख़तरा मालूम होता है कि कहीं हमारे एक मात्र लक्ष्य को दूसरे सवालात ढक न ले। मैं धार्मिक दृष्टिकोण से निर्णय करने में असमर्थ हूँ । यह भी ख़तरा है कि दूसरे लोग आपके तरीकों का दुरुपयोग करेंगे। लेकिन एक जादूगर को मैं कैसे सलाह दे सकता हूँ ? स्नेह ।" पूना मे जमा हुए भिन्न-भिन्न लोगो ने एक समझौते पर दस्तखत किये, और ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने उसे चटपट मंजूर कर लिया और उसके मुताबिक अपना पिछला 'निर्णय' बदल दिया, और अनशन तोड दिया गया । मै ऐसे समझौतो और इकरारनामो को बहुत नापसन्द करता हूँ, लेकिन पूना के समझौते मे क्या-क्या तय हुआ इसका खयाल न करते हुए भी मैने उसका स्वागत किया । उत्तेजना खत्म हो चुकी थी, और हम जेल के अपने मामूली कार्यक्रम मे लग गये । हरिजन आन्दोलन और जेल मे से गाधीजी की प्रवृत्तियों की खबरे हमे मिलती रहती थी । लेकिन उनसे मुझे खुशी नही होती थी । इसमे शक नहीं कि अछूतपन को मिटाने और दुखी दलित जातियों को उठाने के आन्दोलन को उससे बडे गजब का बढावा मिला, लेकिन वह समझौते के कारण नहीं, बल्कि देशभर में जो एक जेहादी जोश फैल गया था उसके कारण। यह तो अच्छी वात थी । लेकिन इसीके साथ-साथ यह भी साफ जाहिर था कि इससे सविनय भग को नुकसान पहुँचा । देश का ध्यान दूसरे सवालो पर चला गया, और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता हरिजन कार्य मे लग गये । शायद उनमें से ज्यादातर लोग कम खतरे के कामो मे लगने का बहाना चाहते ही थे, जिनमे जेल जाने, या इससे भी ज्यादा, लाठी खाने और सम्पत्ति जब्त कराने का डर न हो । यह कुदरती हो था, और हमारे हजारो कार्यकर्ताओ मे से हरेक से यह उम्मीद करना ठीक भी न था कि वह गहरे कष्ट-सहन और अपने परिवार के भग और नाश के लिए हमेशा तैयार रहे । लेकिन हमारे बडे आन्दोलन का इस तरह धीरेधीरे हास होना देखकर दिल में दर्द होता था। फिर भी, सविनय भग तो चलता ही रहा, और मौके मौके पर मार्च-अप्रैल १९३३ को कलकत्ता-काग्रेस जैसे बडे-वडे प्रदर्शन हो हो जाते थे । गाधीजी यरवडा जेल मे थे, मगर उन्हें लोगो से मिलने और हरिजन-आन्दोलन के मुताबिक हिदायते भेजने को कुछ सुविधाये मिल गई थी। कुछ भी हो, इससे उनके जेल में रहने की तीक्ष्णता कम हो गई थी । इन सब बातो से मुझे बडी उदामी हुई । कई महीने बाद, मई १९३३ मे, गाधीजी ने अपना इक्कीस दिन का उपवास गुरु किया। इसकी खबर से भी पहले तो मुझे वडा धक्का लगा, लेकिन होनहार ऐसा ही था, यह समझकर मैंने उसे मजूर कर लिया और अपने दिल को समझा लिया । वास्तव में मुझे उन लोगो पर ही झूझल आई जो उनपर उपवास का निश्चय कर लेने और घोपित कर देने के बाद उसे छोड देने का जोर डाल रहे थे । उपवास मेरी तो समझ के बाहर था और निश्चय कर लेने के पहले अगर मुझसे पूछा जाता तो मैं जोर से उसके खिलाफ राय देता, लेकिन में गाधीजी की प्रतिज्ञा का बड़ा महत्व समझता था, और किसी भी व्यक्ति के लिए मुझे यह गलत मालूम होता था कि वह किसी भी व्यक्तिगत मामले में, जिसे वह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण समझते थे, उनकी प्रतिज्ञा को तुड़वाने की कोशिश करे। इस तरह हालाकि मै खिन्न था, फिर भी उसको गवारा करता रहा । अपना उपवास शुरू करने से कुछ दिन पहले उन्होंने मुझे अपने खास ढंग का एक पत्र भेजा, जिससे मेरा दिल बहुत हिल गया । चूकि उन्होने जवाब मांगा था, इसलिए मैने निम्नलिखित तार भेजा "आपका खत मिला । जिन मामलों को मैं नहीं समझता उनके बारे में मैं क्या कह सकता हूँ ? मैं तो एक वेगाने देश में, जहाँ आप एक"मेरो कहानौ मात्र परिचित मीनार की तरह हैं, अपना कहीं पता ही नहीं पाता हूँ; अँधेरे में अपना रास्ता टटोलता हूँ, लेकिन ठोकर खाकर गिर जाता हूँ । नतीजा जो कुछ हो, मेरा स्नेह और मेरे विचार हमेशा आपके साथ होंगे।" एक ओर उनके कार्य को मैं बिलकुल नापसन्द करता था, और दूसरी ओर उन्हे आघात न पहुँचाने की भी मेरी इच्छा थी। इस द्वन्द्व का मुझे सामना करना पडा था । मगर फिर भी मैंने महसूस किया कि मैने उन्हे प्रसन्नता का संदेश नही भेजा, और अब जब कि वह अपनी भयकर अग्नि-परीक्षा मे से, जिसमे उनकी मृत्यु भी हो सकती थी, गुजरने का निश्चय कर ही चुके है, तो मुझे चाहिए कि मुझसे जितना बन सके उतना में उन्हें प्रसन्न बनाऊँ । छोटी-छोटी बातो का भी मन पर बडा असर होता है, और उन्हें जीवन बनाये रखने के लिए अपना सारा मनोबल लगा देना पडेगा । मुझे ऐसा भी लगा कि अब जो कुछ भी होकर रहे, चाहे दुर्भाग्य से उनकी मृत्यु भी हो जाय तो उसे भी कडे दिल से बरदाश्त कर लेना चाहिए । इसलिए मने उन्हें दूसरा तार भेजा "अब तो जब आपने अपना जोखों का काम शुरू कर ही दिया है, तो मैं फिर अपना स्नेह और अभिनन्दन आपको भेजता है, और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि अब मुझे यह ज्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देता है कि जो कुछ होता है वह अच्छा ही होता है, और कुछ भी नतीजा हो, आपकी विजय ही है । " उनका उपवास पूरा हो गया और वह जीवित रहे । उपवास के पहले ही दिन वह जेल से रिहा कर दिये गये, और उनके कहने से छ हफ्तो के लिए सविनय भग स्थगित कर दिया गया । बीच मे देश में भावना का फिर एक उभाड़ आया । कि क्या राजनीति में यह सही तरीका है ? मुझे तो लगने लगा, कि यह केवल पुनरुद्धार - वाद है और इसके सामने स्पष्ट विचार करने का तरीका बिलकुल नहीं ठहर सकता । सारा हिन्दुस्तान, या उसका ज्यादातर हिस्सा, सम्मान से महात्माजी की तरफ निगाह गडाये हुए था, और उनसे उम्मीद करता था कि वह चमत्कार पर चमत्कार करते चले जायँ, अस्पृश्यता का नाश कर दे, और स्वराज्य हासिल करले, इत्यादि, और खुद कुछ भी न करे । गाधीजी भी दूसरो को विचार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते थे, उनका जोर पवित्रता और बलिदान पर था। मुझे लगा कि हालाकि मै गाधीजी पर बडी भावुकतापूर्ण आसक्ति रखता हूँ फिर भी मानसिक दृष्टि से मै उनसे दूर होता चला जा रहा हूँ । अक्सर वह अपनी राजनैतिक हलचलो में अपनी सहज वृत्ति से, जो गलती नही करती थी, काम लेते थे । अच्छा और फायदेमन्द काम करने का उनमे स्वभावसिद्ध गुण है, लेकिन क्या राष्ट्र को तैयार करने का रास्ता श्रद्धा का ही है ? कुछ वक्त के लिए तो यह फायदेमन्द हो सकता है, मगर अन्त मे क्या होगा ? और मैं यह नहीं समझ सका कि वह वर्तमान सामाजिक व्यवस्था को, जिसकी बुनियाद हिंसा और सघर्ष पर है, कैसे मजूर कर लेते है, जैसाकि वह मजूर करते हुए दीखते है ? मेरे अन्दर जोर से सघर्प चलने लगा, और में दो प्रतिस्पर्धी निष्ठाओ की चक्की मे पिसने लगा। मैने जान लिया कि जब मैं जेल की चहारदीवारी से बाहर निकलूंगा, तव भविष्य में मेरे सामने मुसीवत ही खडी मिलेगी। मुझे प्रतीत होने लगा कि मै अकेला और निराश्रय हूँ, और हिन्दुस्तान, जिसे मैने प्यार किया और जिसके लिए मैंने इतना परिश्रम किया, मुझे एक पराया और हड़वडाहट में डालनेवाला देश मालूम होने लगा । क्या यह मेरा कुसूर था कि मैं अपने मुल्कवालो की स्पिरिट और विचार प्रणाली से अपना मेल न बैठा सका ? मुझे मालूम हुआ कि अपने गहरे-सेगहरे साथियो के और मेरे बीच में एक अप्रत्यक्ष दीवार खटी हो गई है, और उसको पार करने में अपने आपको असमर्थ पाकर मै दुखी हो गया और मन मसोस कर बैठ गया । उन सब पर मानो पुरानी दुनिया ने, पुरानी विचारधाराओ, पुरानी आशाओ और पुरानी इच्छाओ की दुनिया ने अपना आवरण डाल रक्खा था। नई दुनिया का निर्माण होना तो अभी बहुत दूर था । दो लोको के बीच भटकता, आश्रय की कुछ आश नही, पडी है एक दूसरे मे उठने की शक्ति नही । हिन्दुस्तान, सब बातो से ज्यादा, धार्मिक देश समझा जाता है, और हिन्दू और मुसलमान और सिख और दूसरे लोग अपने-अपने मतो का अभिमान रखते हैं, और एक-दूसरे के सिर फोडकर उनकी सचाई का सुबूत देते है । हिन्दुस्तान में और दूसरे मुल्को मे मजहब के, और कम-से-कम मौजूदा रूप में संगठित मजहब के, दृश्य ने मुझे भयभीत कर दिया है, मैंने उसकी कई वार निन्दा की है, और उसको जड मूल से १ सूल अग्रेजी पद्य निम्नप्रकार है "Wandering between two worlds, one dead, The other powerless to be born With nowhere yet to rest his head मिटा देने तक की ख्वाहिश की है । मुझे तो प्राय हमेशा यही मालूम हुआ कि अन्धविश्वास और प्रतिगामिता, जड सिद्धान्त और कट्टरपन, मिथ्या- विचार और शोषण और स्थापित स्वार्थों के सरक्षण का ही नाम मजहब है । मगर यह भी मुझे अच्छी तरह मालूम है कि उसमे और भी कुछ है, उसमे कुछ ऐसी चीज भी है जो इन्सानो की गहरी आन्तरिक आकाक्षा को भी पूरा करती है। वरना उसका इतनी जबरदस्त ताकत बनना जैसाकि वह वना हुआ है कैसे मुमकिन था, और उससे वेशुमार पीडित आत्माओ को शान्ति और विश्राम कैसे मिल सकते थे ? क्या वह शान्ति सिर्फ अन्धविश्वास की छाया या शका के अभाव का बहाना ही था ? क्या वह वैसी ही गान्ति थी जेसी खुले समुद्र के तूफानो से बचकर किसी बन्दरगाह में मिलती है, या उससे कुछ ज्यादा थी ? कुछ बातो मे तो सचमुच वह इससे कुछ ज्यादा ही थी । लेकिन इसका भूतकाल कैसा भी रहा हो, आजकल का संगठित मजहब तो ज्यादातर एक खाली ढोल ही रह गया है, जिसके अन्दर कोई तत्त्व नही है । श्री जी० के० चेस्टरटन ने इसके लिए ( अपने खास तरह के मजहब के लिए नही, मगर दूसरो के लिए 1 ) भूगर्भ में पाये जानेवाले ऐसे 'फॉसिल' की उपमा दी है, जो किसी ऐसे जानवर या सजीव वस्तु का सिर्फ ढाचामात्र है कि जिसके अन्दर से उसका अपना जीवित तत्त्व तो पूरी तरह से निकल चुका है, लेकिन जिसका ऊपरी पञ्जर रह और जिसके अन्दर कोई बिलकुल दूसरी ही चीज भर दी गई है । और, अगर किसी मजहब मे कोई महत्वपूर्ण चीज रह भी गई है तो, उसपर और दूसरी हानिकर चीजो का आवरण चढ गया है । मालूम होता है कि यही बात हमारे पूर्वी मजहबो मे, और पश्चिमी मजहबो मे भी, हुई हे । चर्च आफ इग्लैण्ड एक ऐसे मजहब की मिसाल है, जो किसी भी मानी मे मजहब नहीं है । किसी हद तक, यही बात सारे सगठित प्रोटेस्टेण्ट मजहबो के बारे मे सही है, लेकिन इसमें सबसे आगे बढा हुआ चर्च आफ इग्लैण्ड ही है, क्योकि वह अर्से से एक सरकारी राजनैतिक महकमा बन चुका है । १ १. हिन्दुस्तान में चर्च आफ इंग्लैण्ड तो प्रायः सरकार से अलग मालूम ही नहीं होता है । जिस तरह ऊंचे सरकारी मुलाजिम साम्राज्यवादी सत्ता के प्रतीक है उसी तरह ( हिन्दुस्तान के ख़जाने से ) सरकार की तरफ़ से तनख्वाह पानेवाले पादरी और चेपलेन भी हैं । हिन्दुस्तान की राजनीति में चर्च कुल मिलाकर एक रूढ़िवादी और प्रतिगामी शक्ति रही है और आम तौर पर सुधार या प्रगति के विरुद्ध रही है। सामान्य ईसाई मिशनरी हिन्दुस्तान के पुराने इतिहास और संस्कृति से आम तौर पर बिलकुल मजहव क्या है ? उसके बहुत से अनुयाथियो का चारित्र्य वेगक ऊँचे-से-ऊँचा है मगर यह मार्के की बात है कि किस तरह इस चर्च ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की गरज को पूरा किया है, और पूंजीवाद और साम्राज्यवाद दोनो को किस तरह नैतिक और ईसाई जामा पहना दिया है। इस मजहब ने एशिया और अफ्रीका में अग्रेजो की लुटेरी नीति का समर्थन करने की कोशिश की है, और अंग्रेजो मे एक गैरमामूली और रश्क करने योग्य भावना भरदी है कि हम हमेशा ठीक ही और सही काम करते हैं । इस वडप्पन भरी सत्कार्य - भावना को इस चर्च ने पैदा किया है या वह खुद उससे पैदा हुई है, यह मे नही जानता । यूरोपियन महाद्वीप के और अमेरिका के दूसरे देश, जो इग्लैण्ड के बरावर खुश नसीव नहीं हुए है, अक्सर कहते है कि अग्रेज मक्कार है- 'परफाइड एलबियन' ना चाकिफ होते हैं और वे यह जानने की जरा भी तकलीफ नहीं उठात कि वह कैसी थी या कैसी है। ये गैरईसाइयों के पापों और कमजोरियों को दिखाते रहने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। बेशक, कई लोग इनमें बहुत ऊचे अपवाद-रूप हुए हैं। चार्ली एण्डरूज़ से बढ़कर हिन्दुस्तान का दूसरा सच्चा दोस्त नही हुआ, जिनमें प्रेम और सेवा की भावना और उमढती हुई मैत्री खूब लबालब भरी हुई है। पूना के क्राइस्ट सेवा सध में भी कुछ अच्छे अग्रेज़ हैं जिनके मज़हब ने उन्हें दूसरों को समझना और उनकी सेवा करना, न कि अपना वडप्पन दिखाना, सिखलाया है और जो अपनी सारी बडी-वडी योग्यताओं के साथ हिन्दुस्तान को जनता की सेवा में लग गये हैं। दूसरे भी कई अग्रेज पाढरी हुए हैं, जिनको हिन्दुस्तान याद करता है। १२ दिसंबर १९३४ को लाई-सभा में बोलते हुए केण्टरबरी के धर्माध्यक्ष ने १६१६ के मागटेगु चम्सफोर्ड-सुधारों की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए कहा था कि "कभी-कभी मुझे ख़याल आता है कि यह बड़ी घोषणा कुछ जल्दबाजी से कर दी गई है, और मेरा अनुमान है कि महायुद्ध के बाद एक उतावलेपन का और उदारता पूर्ण प्रदर्शन कर दिया गया है, लेकिन जो ध्येय निश्चित कर दिया गया है उसे वापस नहीं लिया जा सकता ।" यह गौर करने लायक़ बात है कि इग्लिश चर्च का धर्माध्यक्ष हिन्दुस्तान की राजनीति के बारे में ऐसा अनुदार दृष्टिकोण रखता है। जो चीज भारतीय लोकमत के अनुसार बिलकुल ही नाकाफी समझी गई, और इसी कारण जिसके लिए असहयोग और वाद की तमाम घटनाये हुई, उसको धर्माध्यक्ष साहब 'उतावलेपन का और उदारतापूर्ण' प्रदर्शन कहते हैं । इग्लैण्ड के शासकवर्ग के दृष्टिकोण से यह एक सन्तोष-प्रद सिद्धान्त है, और इसमें शक नहीं कि अपनी उदारता के सम्बन्ध में उनका यह विश्वास, जो कि अविवेक की हद तक पहुँच जाता है, उनके अन्दर सन्तोष की एक सात्विक ज्योति पैदा किये बिना न रहता होगा । यह एक पुराना ताना है । लेकिन शायद यह इलजाम तो अग्रेजो की कामयाबी पर हसद के सबब से लगाया जाता है, और निश्चय ही कोई दूसरे मुल्क भी इग्लैण्ड के दोष नही निकाल सकते, क्योंकि उनके भी कारनामे इतने ही खराब है। जो राष्ट्र जानता हुआ भी मक्कारी करता है, उसके पास हमेशा इतना शक्ति - सग्रह नही रह सकता, जैसा कि अंग्रेजों ने बार-बार दिखलाया है; और इसमे उसके खास तरह के 'मजहब' ने जहाँ अपना स्वार्थ सधता हो वहाँ नीति-अनीति की चिन्ता करने की भावना को भोथरा करके उसे मदद दी है । दूसरी जातियो और राष्ट्रो ने अक्सर अग्रेजो से भी बहुत खराव काम किये है, लेकिन अंग्रेजो की बराबर वे अपनी स्वार्थसाधना को गुण बनाने में कामयाब नहीं हुए है । हम सभीके लिए यह बहुत आसान है कि हम दूसरो के तिल के बराबर दोष को ताड के बराबर बता दे, लेकिन शायद इस करतब मे भी अंग्रेज ही सबसे ज्यादा बढकर है । प्रोटेस्टेण्ट - मत ने नई परिस्थिति के मुताबिक बन जाने की कोशिश की, और दोनो दुनिया का ही ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहा । जहाँतक इस दुनिया का ताल्लुक था वहाँतक तो वह खूब ही कामयाब हुआ, लेकिन मजहब की दृष्टि से वह सगठित मजहब के रूप मे न घर का रहा न घाट का । और धीरे-धीरे मज़हब की जगह भावुकता और व्यवसाय आ गया । रोमन केथोलिक मत इस नतीजे से बच गया। क्योकि वह पुरानी जड को ही पकडे रहा, और जबतक वह जड़ कायम रहेगी तबतक वह भी फलता-फूलता रहेगा । पश्चिम में आज वही एक अपने सीमित अर्थ मे जिन्दा मजहब है । एक रोमन कैथोलिक दोस्त ने जेल मे मेरे पास केथोलिक-मत पर कई पुस्तके और धार्मिक पत्र भेज दिये थे, और मैने उन्हें बडी दिलचस्पी से पढ़ा था । उन्हे पढने पर मुझे लगा कि अब भी बहुत लोगो पर उसका बडा प्रभाव है । इस्लाम और प्रचलित हिन्दू धर्म की तरह ही उससे भी सन्देह और मानसिक द्वन्द्व से राहत १. चर्च आफ इंग्लैण्ड हिन्दुस्तान की राजनीति पर किस तरह अपना अप्रत्यक्ष असर डालता है, इसकी हाल ही में एक मिसाल मेरे देखने में आई है । ७ नवम्बर १९३४ को कानपुर में युक्तप्रान्तीय हिन्दुस्तानी ईसाई कान्फ्रेन्स में स्वागताध्यक्ष श्री ई० डी० डेविड ने कहा था कि "ईसाई की हैसियत से, हमारा यह धार्मिक कर्तव्य है कि हम सम्राट् के राजभक्त रहे, जो कि हमारे 'धर्म के संरक्षक' हैं।" लाज़िमी तौर पर इसका मतलब है हिन्दुस्तान में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का समर्थन । श्री डेविड ने आई० सी० एस०, पुलिस और सारे प्रस्तावित विधान के बारे में, जिससे उनके विचारानुसार हिन्दुस्तान के ईसाई मिशन ख़तरे में पड़ सकते हैं, इंग्लैण्ड के 'कहर' अनुदार लोगों की राय के साथ भी अपनी सहानुभूति जाहिर की थी । मिल जाती है और भविष्य के जीवन के बारे मे एक आश्वासन मिल जाता है, जिससे इस जीवन की कसर पूरी हो जाती है । मगर, मेरा खयाल है कि इस तरह की सुरक्षितता चाहना मेरे लिए तो नामुमकिन है । मै तो खुले समुद्र को ही ज्यादा चाहता हूँ, जिसमे चाहे जितनी आँधियाँ और तूफान हो, न मुझे पर लोक की या मौत के बाद क्या होता है इसके बारे में मुझे कोई दिलचस्पी नही है । इस जीवन की समस्याये ही मेरे दिमाग को भर देने के लिए काफी मालूम होती है । चीनियो की परम्परागत जीवन-दृष्टि, जो कि मूलत नैतिक है लेकिन फिर भी गैर-मजहवी या नास्तिकता का रग लिये हुए है, मुझे पसन्द आती है, हालाँकि जिस तरह वह अमल में लाई जा रही है वह मुझे पसन्द नही है । मुझे तो 'ताओ' यानी मार्ग या जीवन के पथ मे दिलचरपी है, मै चाहता हूँ कि जीवन को समझा जाय, उसका त्याग नही बल्कि उसको अगीकार किया जाय, उसके अनुसार चला जाय, और उसको उन्नत बनाया जाय । मगर आम मजहवी दृष्टिकोण इस दुनिया से ताल्लुक नहीं रखता । मुझे वह स्पष्ट विचार का दुश्मन मालूम होता है, क्योंकि उसकी बुनियाद सिर्फ कुछ स्थिर और अपरिवर्तनीय मतो और सिद्धान्तो को बिना चूँ-चपड किये स्वीकार कर लेने पर ही नहीं है, बल्कि वह मानसिक प्रवृत्ति, भावना और भावुकता पर भी आधारित है । वह, मै जिन्हे आध्यात्मिकता और आत्मासम्बन्धी वाते समझता हूँ, उनसे बहुत दूर है, और वह, जान-बूझकर या अनजान मे इस डर से कि शायद असलियत पूर्व निर्धारित विचारो से मेल न खाय, असलियत से भी आँखे बन्द कर लेता है । वह् सकुचित है, और दूसरी तरह की रायो या खयालात को वरदाश्त नहीं करता । वह आत्म-मर्यादित और अहंकारपूर्ण है, और अक्सर खुदगर्जा और मौका - परम्तो को अपनेसे बेजा फायदा उठाने देता है । इसके मानी यह नहीं है कि मजहब को माननेवाले अक्सर ऊँचे-से-ऊँचे नैतिक और रूहानी ढग के लोग नही हुए है, या अभी भी नहीं है । लेकिन इसके यह मानी जरूर है कि अगर नैतिकता और आध्यात्मिकता को दूसरी दुनिया के पैमाने से न नापकर इसी दुनिया के पैमाने से नापना हो तो मज़हत्री दृष्टिकोण अवश्य ही राष्ट्रो की नैतिक और आध्यात्मिक प्रगति में सहायता नही देता वल्कि बाधा तक डालता हं । आम तौर पर, मजहव ईश्वर या परमतत्त्व की अ-सामाजिक या व्यक्तिगत खोज का विषय बन जाता है, और मजहबी आदमी समाज की भलाई की बनिस्बत अपनेआपकी मुक्ति की ज्यादा फिक्र करने लगता है। रहस्यवादी अपने अहकार से छुटकारा पाने की कोशिश करता है, और इस कोशिश में अक्सर अहकार को ही बीमारी उसके पीछे लग जाती है । नैतिक पैमानो का ताल्लुक समाज की ज़रूरतो से नही रहता,
भजहब क्या है ? उनके कहने से तो ऐसा मालूम पडता था कि शायद ईश्वर ने उन्हें अनशन की तारीख तक सुझा दी थी । ऐसी मिसाल पेश करना कितना खतरनाक होगा और अगर वापू मर गये । तो, हिन्दुस्तान की क्या हालत हो जायगी ? मुझे भविष्य सूना और उदास दीखने लगा, और जब मै उसपर विचार करता था तो मेरे दिल में एक निराशा छा जाती थी । इस तरह में लगातार विचारों ही विचारो मे डूवता रहा । मेरे दिमाग में गडबडी मच गई, और गुस्सा, निराशा और जिस व्यक्ति ने इतनी बडी उथल-पुथल पैदा कर दी उसके प्रति प्रेम से वह सराबोर हो गया। मुझे नहीं सूझता था कि मैं क्या कहूँ, और सबसे ज्यादा अपने-आपके प्रति मं चिडचिडा और बद-मिजाज हो गया । और फिर मुझमें एक अजीब बात हुई। मुझपर भावनाओं का ऐसा दौर शुरू हुआ कि एक मकट-काल ही आ उपस्थित हुआ, पर अन्त में जाकर मुझे कुछ शान्ति मालूम हुई, और भविष्य भी इतना अन्धकार पूर्ण दिखाई नही दिया । बापू मे ऐन मौके पर ठीक काम कर डालने की अजीव मूझ थी, और मुमकिन है कि उनके इस काम के भी - जो मेरे दृष्टि विन्दु में बिलकुल असमर्थनीय था- कोई बडे - नतीजे हो, और वह केवल उमी काम के छोटे से सीमित क्षेत्र में नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीय लडाई के व्यापक स्वरूपो में भी । और अगर वापू मर भी गये, तो भी हमारी स्वतंत्रता की लडाई चलती रहेगी। इसलिए कुछ भी नतीजा हो, इन्सान को हर हालत के लिए तैयार और मुस्तैद रहना चाहिए । अपने दिमाग को गांधीजी की मृत्यु तक वरदात करने के लिए विना हिचकिचाहट के तैयार करके मेने शान्ति और धैर्य धारण किया, और दुनिया और दुनिया की हर घटना का सामना करने को तैयार हो गया । इसके बाद सारे देश में एक भयकर उथल-पुथल मचने, हिन्दू समाज में उत्साह की एक जादूभरी लहर आ जाने की खबरे आईं, और मालूम होने लगा कि अस्पृश्यता का अब खात्मा ही होनेवाला है। मैं सोचने लगा कि यरवडा जेल में बैठा हुआ यह छोटा-सा आदमी कितना वडा जादूगर है, और लोगों के दिलों में खलबली मचा देनेवाली डोर हिलाना वह कितनी अच्छी तरह जानता है ! उनका एक तार मुझे मिला। मेरे जेल आने के बाद यह उनका पहला ही मदेश था, और इतने लम्बे अर्से के बाद उनका यह तार मिलने से मुझे लाभ ही हुआ । इस तार में उन्होंने लिखा "इन वेदना के दिनों में मुझे हमेशा तुम्हारा ध्यान रहा है। तुम्हारी राय जानने को मैं बहुत ज्यादा उत्सुक हूँ। तुम्हें मालूम है, मैं तुम्हारी राय की कितनी क़दर करता हूँ। मैंने इन्दु सरूप के बच्चों को देखा । इन्दु खुश और कुछ तगड़ी दीखती थी। तबीयत बहुत ठीक है । तार से जवाब दो । स्नेह । " यह एक असाधारण बात थी, लेकिन उनके स्वभाव के अनुसार ही थी, कि उन्होने अपने अनशन की पीड़ा और अपने काम-काज के बीच भी मेरी लड़की और मेरी बहन के बच्चो के आने का जिक्र किया, और यह भी लिखा कि इन्दिरा तगडी हो गई है । उस वक्त मेरी बहन भी पूना की जेल म थी, और ये सब बच्चे पूना के स्कूल में पढ़ते थे । वह जीवन मे छोटी दीखनेवाली बातो को कभी नही भूलते, जिनका वास्तव में बड़ा महत्व भी होता है । ठीक उसी वक्त मुझे यह खबर भी मिली कि चुनाव के सवाल पर कोई समझौता भी हो गया है । जेल के सुपरिन्टेण्डेण्ट ने महरबानी करके मुझे गाधीजी को जवाब भेजने की इजाजत दे दी, और मैंने उन्हे यह तार भेजा " आपके तार और यह संक्षिप्त समाचार मिलने से कि कोई समझौता हो गया है, मुझे बड़ी राहत और खुशी हासिल हुई। पहले तो आपके अनशन के निश्चय से मानसिक क्लेश और बड़ी दुविधा पैदा हुई, पर आखिरमे आशावाद की विजय हुई और मुझे मानसिक शान्ति मिली । पद- दलित वर्गों के लिए बड़े से बड़ा बलिदान भी कम ही है । स्वतन्त्रता की कसौटी सबसे छोटे की स्वतन्त्रता से करनी चाहिए, मगर मुझे यह ख़तरा मालूम होता है कि कहीं हमारे एक मात्र लक्ष्य को दूसरे सवालात ढक न ले। मैं धार्मिक दृष्टिकोण से निर्णय करने में असमर्थ हूँ । यह भी ख़तरा है कि दूसरे लोग आपके तरीकों का दुरुपयोग करेंगे। लेकिन एक जादूगर को मैं कैसे सलाह दे सकता हूँ ? स्नेह ।" पूना मे जमा हुए भिन्न-भिन्न लोगो ने एक समझौते पर दस्तखत किये, और ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने उसे चटपट मंजूर कर लिया और उसके मुताबिक अपना पिछला 'निर्णय' बदल दिया, और अनशन तोड दिया गया । मै ऐसे समझौतो और इकरारनामो को बहुत नापसन्द करता हूँ, लेकिन पूना के समझौते मे क्या-क्या तय हुआ इसका खयाल न करते हुए भी मैने उसका स्वागत किया । उत्तेजना खत्म हो चुकी थी, और हम जेल के अपने मामूली कार्यक्रम मे लग गये । हरिजन आन्दोलन और जेल मे से गाधीजी की प्रवृत्तियों की खबरे हमे मिलती रहती थी । लेकिन उनसे मुझे खुशी नही होती थी । इसमे शक नहीं कि अछूतपन को मिटाने और दुखी दलित जातियों को उठाने के आन्दोलन को उससे बडे गजब का बढावा मिला, लेकिन वह समझौते के कारण नहीं, बल्कि देशभर में जो एक जेहादी जोश फैल गया था उसके कारण। यह तो अच्छी वात थी । लेकिन इसीके साथ-साथ यह भी साफ जाहिर था कि इससे सविनय भग को नुकसान पहुँचा । देश का ध्यान दूसरे सवालो पर चला गया, और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता हरिजन कार्य मे लग गये । शायद उनमें से ज्यादातर लोग कम खतरे के कामो मे लगने का बहाना चाहते ही थे, जिनमे जेल जाने, या इससे भी ज्यादा, लाठी खाने और सम्पत्ति जब्त कराने का डर न हो । यह कुदरती हो था, और हमारे हजारो कार्यकर्ताओ मे से हरेक से यह उम्मीद करना ठीक भी न था कि वह गहरे कष्ट-सहन और अपने परिवार के भग और नाश के लिए हमेशा तैयार रहे । लेकिन हमारे बडे आन्दोलन का इस तरह धीरेधीरे हास होना देखकर दिल में दर्द होता था। फिर भी, सविनय भग तो चलता ही रहा, और मौके मौके पर मार्च-अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तैंतीस को कलकत्ता-काग्रेस जैसे बडे-वडे प्रदर्शन हो हो जाते थे । गाधीजी यरवडा जेल मे थे, मगर उन्हें लोगो से मिलने और हरिजन-आन्दोलन के मुताबिक हिदायते भेजने को कुछ सुविधाये मिल गई थी। कुछ भी हो, इससे उनके जेल में रहने की तीक्ष्णता कम हो गई थी । इन सब बातो से मुझे बडी उदामी हुई । कई महीने बाद, मई एक हज़ार नौ सौ तैंतीस मे, गाधीजी ने अपना इक्कीस दिन का उपवास गुरु किया। इसकी खबर से भी पहले तो मुझे वडा धक्का लगा, लेकिन होनहार ऐसा ही था, यह समझकर मैंने उसे मजूर कर लिया और अपने दिल को समझा लिया । वास्तव में मुझे उन लोगो पर ही झूझल आई जो उनपर उपवास का निश्चय कर लेने और घोपित कर देने के बाद उसे छोड देने का जोर डाल रहे थे । उपवास मेरी तो समझ के बाहर था और निश्चय कर लेने के पहले अगर मुझसे पूछा जाता तो मैं जोर से उसके खिलाफ राय देता, लेकिन में गाधीजी की प्रतिज्ञा का बड़ा महत्व समझता था, और किसी भी व्यक्ति के लिए मुझे यह गलत मालूम होता था कि वह किसी भी व्यक्तिगत मामले में, जिसे वह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण समझते थे, उनकी प्रतिज्ञा को तुड़वाने की कोशिश करे। इस तरह हालाकि मै खिन्न था, फिर भी उसको गवारा करता रहा । अपना उपवास शुरू करने से कुछ दिन पहले उन्होंने मुझे अपने खास ढंग का एक पत्र भेजा, जिससे मेरा दिल बहुत हिल गया । चूकि उन्होने जवाब मांगा था, इसलिए मैने निम्नलिखित तार भेजा "आपका खत मिला । जिन मामलों को मैं नहीं समझता उनके बारे में मैं क्या कह सकता हूँ ? मैं तो एक वेगाने देश में, जहाँ आप एक"मेरो कहानौ मात्र परिचित मीनार की तरह हैं, अपना कहीं पता ही नहीं पाता हूँ; अँधेरे में अपना रास्ता टटोलता हूँ, लेकिन ठोकर खाकर गिर जाता हूँ । नतीजा जो कुछ हो, मेरा स्नेह और मेरे विचार हमेशा आपके साथ होंगे।" एक ओर उनके कार्य को मैं बिलकुल नापसन्द करता था, और दूसरी ओर उन्हे आघात न पहुँचाने की भी मेरी इच्छा थी। इस द्वन्द्व का मुझे सामना करना पडा था । मगर फिर भी मैंने महसूस किया कि मैने उन्हे प्रसन्नता का संदेश नही भेजा, और अब जब कि वह अपनी भयकर अग्नि-परीक्षा मे से, जिसमे उनकी मृत्यु भी हो सकती थी, गुजरने का निश्चय कर ही चुके है, तो मुझे चाहिए कि मुझसे जितना बन सके उतना में उन्हें प्रसन्न बनाऊँ । छोटी-छोटी बातो का भी मन पर बडा असर होता है, और उन्हें जीवन बनाये रखने के लिए अपना सारा मनोबल लगा देना पडेगा । मुझे ऐसा भी लगा कि अब जो कुछ भी होकर रहे, चाहे दुर्भाग्य से उनकी मृत्यु भी हो जाय तो उसे भी कडे दिल से बरदाश्त कर लेना चाहिए । इसलिए मने उन्हें दूसरा तार भेजा "अब तो जब आपने अपना जोखों का काम शुरू कर ही दिया है, तो मैं फिर अपना स्नेह और अभिनन्दन आपको भेजता है, और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि अब मुझे यह ज्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देता है कि जो कुछ होता है वह अच्छा ही होता है, और कुछ भी नतीजा हो, आपकी विजय ही है । " उनका उपवास पूरा हो गया और वह जीवित रहे । उपवास के पहले ही दिन वह जेल से रिहा कर दिये गये, और उनके कहने से छ हफ्तो के लिए सविनय भग स्थगित कर दिया गया । बीच मे देश में भावना का फिर एक उभाड़ आया । कि क्या राजनीति में यह सही तरीका है ? मुझे तो लगने लगा, कि यह केवल पुनरुद्धार - वाद है और इसके सामने स्पष्ट विचार करने का तरीका बिलकुल नहीं ठहर सकता । सारा हिन्दुस्तान, या उसका ज्यादातर हिस्सा, सम्मान से महात्माजी की तरफ निगाह गडाये हुए था, और उनसे उम्मीद करता था कि वह चमत्कार पर चमत्कार करते चले जायँ, अस्पृश्यता का नाश कर दे, और स्वराज्य हासिल करले, इत्यादि, और खुद कुछ भी न करे । गाधीजी भी दूसरो को विचार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते थे, उनका जोर पवित्रता और बलिदान पर था। मुझे लगा कि हालाकि मै गाधीजी पर बडी भावुकतापूर्ण आसक्ति रखता हूँ फिर भी मानसिक दृष्टि से मै उनसे दूर होता चला जा रहा हूँ । अक्सर वह अपनी राजनैतिक हलचलो में अपनी सहज वृत्ति से, जो गलती नही करती थी, काम लेते थे । अच्छा और फायदेमन्द काम करने का उनमे स्वभावसिद्ध गुण है, लेकिन क्या राष्ट्र को तैयार करने का रास्ता श्रद्धा का ही है ? कुछ वक्त के लिए तो यह फायदेमन्द हो सकता है, मगर अन्त मे क्या होगा ? और मैं यह नहीं समझ सका कि वह वर्तमान सामाजिक व्यवस्था को, जिसकी बुनियाद हिंसा और सघर्ष पर है, कैसे मजूर कर लेते है, जैसाकि वह मजूर करते हुए दीखते है ? मेरे अन्दर जोर से सघर्प चलने लगा, और में दो प्रतिस्पर्धी निष्ठाओ की चक्की मे पिसने लगा। मैने जान लिया कि जब मैं जेल की चहारदीवारी से बाहर निकलूंगा, तव भविष्य में मेरे सामने मुसीवत ही खडी मिलेगी। मुझे प्रतीत होने लगा कि मै अकेला और निराश्रय हूँ, और हिन्दुस्तान, जिसे मैने प्यार किया और जिसके लिए मैंने इतना परिश्रम किया, मुझे एक पराया और हड़वडाहट में डालनेवाला देश मालूम होने लगा । क्या यह मेरा कुसूर था कि मैं अपने मुल्कवालो की स्पिरिट और विचार प्रणाली से अपना मेल न बैठा सका ? मुझे मालूम हुआ कि अपने गहरे-सेगहरे साथियो के और मेरे बीच में एक अप्रत्यक्ष दीवार खटी हो गई है, और उसको पार करने में अपने आपको असमर्थ पाकर मै दुखी हो गया और मन मसोस कर बैठ गया । उन सब पर मानो पुरानी दुनिया ने, पुरानी विचारधाराओ, पुरानी आशाओ और पुरानी इच्छाओ की दुनिया ने अपना आवरण डाल रक्खा था। नई दुनिया का निर्माण होना तो अभी बहुत दूर था । दो लोको के बीच भटकता, आश्रय की कुछ आश नही, पडी है एक दूसरे मे उठने की शक्ति नही । हिन्दुस्तान, सब बातो से ज्यादा, धार्मिक देश समझा जाता है, और हिन्दू और मुसलमान और सिख और दूसरे लोग अपने-अपने मतो का अभिमान रखते हैं, और एक-दूसरे के सिर फोडकर उनकी सचाई का सुबूत देते है । हिन्दुस्तान में और दूसरे मुल्को मे मजहब के, और कम-से-कम मौजूदा रूप में संगठित मजहब के, दृश्य ने मुझे भयभीत कर दिया है, मैंने उसकी कई वार निन्दा की है, और उसको जड मूल से एक सूल अग्रेजी पद्य निम्नप्रकार है "Wandering between two worlds, one dead, The other powerless to be born With nowhere yet to rest his head मिटा देने तक की ख्वाहिश की है । मुझे तो प्राय हमेशा यही मालूम हुआ कि अन्धविश्वास और प्रतिगामिता, जड सिद्धान्त और कट्टरपन, मिथ्या- विचार और शोषण और स्थापित स्वार्थों के सरक्षण का ही नाम मजहब है । मगर यह भी मुझे अच्छी तरह मालूम है कि उसमे और भी कुछ है, उसमे कुछ ऐसी चीज भी है जो इन्सानो की गहरी आन्तरिक आकाक्षा को भी पूरा करती है। वरना उसका इतनी जबरदस्त ताकत बनना जैसाकि वह वना हुआ है कैसे मुमकिन था, और उससे वेशुमार पीडित आत्माओ को शान्ति और विश्राम कैसे मिल सकते थे ? क्या वह शान्ति सिर्फ अन्धविश्वास की छाया या शका के अभाव का बहाना ही था ? क्या वह वैसी ही गान्ति थी जेसी खुले समुद्र के तूफानो से बचकर किसी बन्दरगाह में मिलती है, या उससे कुछ ज्यादा थी ? कुछ बातो मे तो सचमुच वह इससे कुछ ज्यादा ही थी । लेकिन इसका भूतकाल कैसा भी रहा हो, आजकल का संगठित मजहब तो ज्यादातर एक खाली ढोल ही रह गया है, जिसके अन्दर कोई तत्त्व नही है । श्री जीशून्य केशून्य चेस्टरटन ने इसके लिए भूगर्भ में पाये जानेवाले ऐसे 'फॉसिल' की उपमा दी है, जो किसी ऐसे जानवर या सजीव वस्तु का सिर्फ ढाचामात्र है कि जिसके अन्दर से उसका अपना जीवित तत्त्व तो पूरी तरह से निकल चुका है, लेकिन जिसका ऊपरी पञ्जर रह और जिसके अन्दर कोई बिलकुल दूसरी ही चीज भर दी गई है । और, अगर किसी मजहब मे कोई महत्वपूर्ण चीज रह भी गई है तो, उसपर और दूसरी हानिकर चीजो का आवरण चढ गया है । मालूम होता है कि यही बात हमारे पूर्वी मजहबो मे, और पश्चिमी मजहबो मे भी, हुई हे । चर्च आफ इग्लैण्ड एक ऐसे मजहब की मिसाल है, जो किसी भी मानी मे मजहब नहीं है । किसी हद तक, यही बात सारे सगठित प्रोटेस्टेण्ट मजहबो के बारे मे सही है, लेकिन इसमें सबसे आगे बढा हुआ चर्च आफ इग्लैण्ड ही है, क्योकि वह अर्से से एक सरकारी राजनैतिक महकमा बन चुका है । एक एक. हिन्दुस्तान में चर्च आफ इंग्लैण्ड तो प्रायः सरकार से अलग मालूम ही नहीं होता है । जिस तरह ऊंचे सरकारी मुलाजिम साम्राज्यवादी सत्ता के प्रतीक है उसी तरह सरकार की तरफ़ से तनख्वाह पानेवाले पादरी और चेपलेन भी हैं । हिन्दुस्तान की राजनीति में चर्च कुल मिलाकर एक रूढ़िवादी और प्रतिगामी शक्ति रही है और आम तौर पर सुधार या प्रगति के विरुद्ध रही है। सामान्य ईसाई मिशनरी हिन्दुस्तान के पुराने इतिहास और संस्कृति से आम तौर पर बिलकुल मजहव क्या है ? उसके बहुत से अनुयाथियो का चारित्र्य वेगक ऊँचे-से-ऊँचा है मगर यह मार्के की बात है कि किस तरह इस चर्च ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की गरज को पूरा किया है, और पूंजीवाद और साम्राज्यवाद दोनो को किस तरह नैतिक और ईसाई जामा पहना दिया है। इस मजहब ने एशिया और अफ्रीका में अग्रेजो की लुटेरी नीति का समर्थन करने की कोशिश की है, और अंग्रेजो मे एक गैरमामूली और रश्क करने योग्य भावना भरदी है कि हम हमेशा ठीक ही और सही काम करते हैं । इस वडप्पन भरी सत्कार्य - भावना को इस चर्च ने पैदा किया है या वह खुद उससे पैदा हुई है, यह मे नही जानता । यूरोपियन महाद्वीप के और अमेरिका के दूसरे देश, जो इग्लैण्ड के बरावर खुश नसीव नहीं हुए है, अक्सर कहते है कि अग्रेज मक्कार है- 'परफाइड एलबियन' ना चाकिफ होते हैं और वे यह जानने की जरा भी तकलीफ नहीं उठात कि वह कैसी थी या कैसी है। ये गैरईसाइयों के पापों और कमजोरियों को दिखाते रहने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। बेशक, कई लोग इनमें बहुत ऊचे अपवाद-रूप हुए हैं। चार्ली एण्डरूज़ से बढ़कर हिन्दुस्तान का दूसरा सच्चा दोस्त नही हुआ, जिनमें प्रेम और सेवा की भावना और उमढती हुई मैत्री खूब लबालब भरी हुई है। पूना के क्राइस्ट सेवा सध में भी कुछ अच्छे अग्रेज़ हैं जिनके मज़हब ने उन्हें दूसरों को समझना और उनकी सेवा करना, न कि अपना वडप्पन दिखाना, सिखलाया है और जो अपनी सारी बडी-वडी योग्यताओं के साथ हिन्दुस्तान को जनता की सेवा में लग गये हैं। दूसरे भी कई अग्रेज पाढरी हुए हैं, जिनको हिन्दुस्तान याद करता है। बारह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को लाई-सभा में बोलते हुए केण्टरबरी के धर्माध्यक्ष ने एक हज़ार छः सौ सोलह के मागटेगु चम्सफोर्ड-सुधारों की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए कहा था कि "कभी-कभी मुझे ख़याल आता है कि यह बड़ी घोषणा कुछ जल्दबाजी से कर दी गई है, और मेरा अनुमान है कि महायुद्ध के बाद एक उतावलेपन का और उदारता पूर्ण प्रदर्शन कर दिया गया है, लेकिन जो ध्येय निश्चित कर दिया गया है उसे वापस नहीं लिया जा सकता ।" यह गौर करने लायक़ बात है कि इग्लिश चर्च का धर्माध्यक्ष हिन्दुस्तान की राजनीति के बारे में ऐसा अनुदार दृष्टिकोण रखता है। जो चीज भारतीय लोकमत के अनुसार बिलकुल ही नाकाफी समझी गई, और इसी कारण जिसके लिए असहयोग और वाद की तमाम घटनाये हुई, उसको धर्माध्यक्ष साहब 'उतावलेपन का और उदारतापूर्ण' प्रदर्शन कहते हैं । इग्लैण्ड के शासकवर्ग के दृष्टिकोण से यह एक सन्तोष-प्रद सिद्धान्त है, और इसमें शक नहीं कि अपनी उदारता के सम्बन्ध में उनका यह विश्वास, जो कि अविवेक की हद तक पहुँच जाता है, उनके अन्दर सन्तोष की एक सात्विक ज्योति पैदा किये बिना न रहता होगा । यह एक पुराना ताना है । लेकिन शायद यह इलजाम तो अग्रेजो की कामयाबी पर हसद के सबब से लगाया जाता है, और निश्चय ही कोई दूसरे मुल्क भी इग्लैण्ड के दोष नही निकाल सकते, क्योंकि उनके भी कारनामे इतने ही खराब है। जो राष्ट्र जानता हुआ भी मक्कारी करता है, उसके पास हमेशा इतना शक्ति - सग्रह नही रह सकता, जैसा कि अंग्रेजों ने बार-बार दिखलाया है; और इसमे उसके खास तरह के 'मजहब' ने जहाँ अपना स्वार्थ सधता हो वहाँ नीति-अनीति की चिन्ता करने की भावना को भोथरा करके उसे मदद दी है । दूसरी जातियो और राष्ट्रो ने अक्सर अग्रेजो से भी बहुत खराव काम किये है, लेकिन अंग्रेजो की बराबर वे अपनी स्वार्थसाधना को गुण बनाने में कामयाब नहीं हुए है । हम सभीके लिए यह बहुत आसान है कि हम दूसरो के तिल के बराबर दोष को ताड के बराबर बता दे, लेकिन शायद इस करतब मे भी अंग्रेज ही सबसे ज्यादा बढकर है । प्रोटेस्टेण्ट - मत ने नई परिस्थिति के मुताबिक बन जाने की कोशिश की, और दोनो दुनिया का ही ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहा । जहाँतक इस दुनिया का ताल्लुक था वहाँतक तो वह खूब ही कामयाब हुआ, लेकिन मजहब की दृष्टि से वह सगठित मजहब के रूप मे न घर का रहा न घाट का । और धीरे-धीरे मज़हब की जगह भावुकता और व्यवसाय आ गया । रोमन केथोलिक मत इस नतीजे से बच गया। क्योकि वह पुरानी जड को ही पकडे रहा, और जबतक वह जड़ कायम रहेगी तबतक वह भी फलता-फूलता रहेगा । पश्चिम में आज वही एक अपने सीमित अर्थ मे जिन्दा मजहब है । एक रोमन कैथोलिक दोस्त ने जेल मे मेरे पास केथोलिक-मत पर कई पुस्तके और धार्मिक पत्र भेज दिये थे, और मैने उन्हें बडी दिलचस्पी से पढ़ा था । उन्हे पढने पर मुझे लगा कि अब भी बहुत लोगो पर उसका बडा प्रभाव है । इस्लाम और प्रचलित हिन्दू धर्म की तरह ही उससे भी सन्देह और मानसिक द्वन्द्व से राहत एक. चर्च आफ इंग्लैण्ड हिन्दुस्तान की राजनीति पर किस तरह अपना अप्रत्यक्ष असर डालता है, इसकी हाल ही में एक मिसाल मेरे देखने में आई है । सात नवम्बर एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को कानपुर में युक्तप्रान्तीय हिन्दुस्तानी ईसाई कान्फ्रेन्स में स्वागताध्यक्ष श्री ईशून्य डीशून्य डेविड ने कहा था कि "ईसाई की हैसियत से, हमारा यह धार्मिक कर्तव्य है कि हम सम्राट् के राजभक्त रहे, जो कि हमारे 'धर्म के संरक्षक' हैं।" लाज़िमी तौर पर इसका मतलब है हिन्दुस्तान में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का समर्थन । श्री डेविड ने आईशून्य सीशून्य एसशून्य, पुलिस और सारे प्रस्तावित विधान के बारे में, जिससे उनके विचारानुसार हिन्दुस्तान के ईसाई मिशन ख़तरे में पड़ सकते हैं, इंग्लैण्ड के 'कहर' अनुदार लोगों की राय के साथ भी अपनी सहानुभूति जाहिर की थी । मिल जाती है और भविष्य के जीवन के बारे मे एक आश्वासन मिल जाता है, जिससे इस जीवन की कसर पूरी हो जाती है । मगर, मेरा खयाल है कि इस तरह की सुरक्षितता चाहना मेरे लिए तो नामुमकिन है । मै तो खुले समुद्र को ही ज्यादा चाहता हूँ, जिसमे चाहे जितनी आँधियाँ और तूफान हो, न मुझे पर लोक की या मौत के बाद क्या होता है इसके बारे में मुझे कोई दिलचस्पी नही है । इस जीवन की समस्याये ही मेरे दिमाग को भर देने के लिए काफी मालूम होती है । चीनियो की परम्परागत जीवन-दृष्टि, जो कि मूलत नैतिक है लेकिन फिर भी गैर-मजहवी या नास्तिकता का रग लिये हुए है, मुझे पसन्द आती है, हालाँकि जिस तरह वह अमल में लाई जा रही है वह मुझे पसन्द नही है । मुझे तो 'ताओ' यानी मार्ग या जीवन के पथ मे दिलचरपी है, मै चाहता हूँ कि जीवन को समझा जाय, उसका त्याग नही बल्कि उसको अगीकार किया जाय, उसके अनुसार चला जाय, और उसको उन्नत बनाया जाय । मगर आम मजहवी दृष्टिकोण इस दुनिया से ताल्लुक नहीं रखता । मुझे वह स्पष्ट विचार का दुश्मन मालूम होता है, क्योंकि उसकी बुनियाद सिर्फ कुछ स्थिर और अपरिवर्तनीय मतो और सिद्धान्तो को बिना चूँ-चपड किये स्वीकार कर लेने पर ही नहीं है, बल्कि वह मानसिक प्रवृत्ति, भावना और भावुकता पर भी आधारित है । वह, मै जिन्हे आध्यात्मिकता और आत्मासम्बन्धी वाते समझता हूँ, उनसे बहुत दूर है, और वह, जान-बूझकर या अनजान मे इस डर से कि शायद असलियत पूर्व निर्धारित विचारो से मेल न खाय, असलियत से भी आँखे बन्द कर लेता है । वह् सकुचित है, और दूसरी तरह की रायो या खयालात को वरदाश्त नहीं करता । वह आत्म-मर्यादित और अहंकारपूर्ण है, और अक्सर खुदगर्जा और मौका - परम्तो को अपनेसे बेजा फायदा उठाने देता है । इसके मानी यह नहीं है कि मजहब को माननेवाले अक्सर ऊँचे-से-ऊँचे नैतिक और रूहानी ढग के लोग नही हुए है, या अभी भी नहीं है । लेकिन इसके यह मानी जरूर है कि अगर नैतिकता और आध्यात्मिकता को दूसरी दुनिया के पैमाने से न नापकर इसी दुनिया के पैमाने से नापना हो तो मज़हत्री दृष्टिकोण अवश्य ही राष्ट्रो की नैतिक और आध्यात्मिक प्रगति में सहायता नही देता वल्कि बाधा तक डालता हं । आम तौर पर, मजहव ईश्वर या परमतत्त्व की अ-सामाजिक या व्यक्तिगत खोज का विषय बन जाता है, और मजहबी आदमी समाज की भलाई की बनिस्बत अपनेआपकी मुक्ति की ज्यादा फिक्र करने लगता है। रहस्यवादी अपने अहकार से छुटकारा पाने की कोशिश करता है, और इस कोशिश में अक्सर अहकार को ही बीमारी उसके पीछे लग जाती है । नैतिक पैमानो का ताल्लुक समाज की ज़रूरतो से नही रहता,
उसने ख्वाजा खावन्द सईद के मजार का तवाफ किया।' इवराहीम लोदी पर विजय के उपरात २४ अप्रैल, १५२६ ई० को उसने दोख निजामुद्दीन औलिया के मजार की परिक्रमा की । २५ अप्रैल, १५२६ ई० को वह ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार वाकी के रौजे पर पहुँचा ।। अप्रैल १५२८ ई० को उसने शेख शरफुद्दीन यह्या मुनेरी के मजार का तवाफ किया । ग्वालियर के प्रसिद्ध सूफी शेस गौस से भी उसके बड़े अच्छे सम्बन्ध थे ।' एक अन्य आलिम मीर रफीउद्दीन सफत्री से भी वह बड़ा प्रभावित था और उनकी समस्त सिफारिशों को स्वीकार कर लेता था। उसे योगियों के विषय में भी जानकारी प्राप्त करने से रुचि थी। जनवरी १५०५ ई० मे वह बीगराम पहुँचवर गूर खत्तरी के योगियों के तीर्थस्थान के दर्शनार्थ जाना चाहता था विन्तु इसमे वह सफल न हो सया। १६ मार्च १५१९ ई० को जब वह फिर वहा पहुँचा तो उसने प्रयत्न करके गूर खत्तरी के दर्शन किये । बाबर का चरित्र बाबरनामा के अध्ययन से बाबर वे चरित्र पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। उसने अपनी भूलो तथा अपने दोषो को बडे मार्मिक शब्दो मे स्वीकार किया है। उसे अपनी अज्ञानता स्वीकार करने में कोई सोच न होता था । हिरात मे वदी उज्जमान मीर्जा की दावत म पका हुआ वाज लाया गया किन्तु उसे वाज को काटना एव टुकडे टुकडे करना न आता था अत उसने उसे उसी प्रकार छोड़ दिया किन्तु मीर्जा के पूछने पर कि, 'क्या उसे बाज़ पसन्द नही ?" उसने नि सकोच उत्तर दे दिया कि, "मैं उसे काटना नही जानता ।' ' उसने अपने प्रथम विवाह के सम्बंध में अपनी झेंप एव सुशीलता का जो वर्णन दिया है वह अत्यधिक रोचक है किन्तु उससे भी अधिव दिलचस्प बाबुरी नामक तरुण से उसकी प्रम- क्या है । इस समय उसको अवस्था १६-१७ वर्ष की थी। वह लिखता है कि, "मैं उन्माद एव शेप मे उसके आने पर उसे धन्यवाद भी न दे पाता था, तो उसके चले जाने की शिकायत ही किस प्रकार कर सकता था ? मुझ में इतनी शक्ति भी तो न थी कि उसका उचित रूप से स्वागत हो कर लेता । एक दिन प्रम के उन्माद म मैं अपन मित्रों के साथ एक गली में जा रहा था । अचानक मेरा और उसका सामना हो गया । झेंप एव घबराहट मे मेरी यह दशा हो गई कि मैं उससे आख भी न मिला सका और न एक शब्द कह सवा । झेंप तथा घवराहट में मुहम्मद सालेह के इस शेर वा स्मरण करता हुआ उसे छोड़ कर चल दिया १ बाबर नामा १० ११६ । २ चाबर नामा १० १५८ । ३ बाबर नामा पृ० १५६ । ४ बाबर नामा पृ० ३२१ । ५ बाबर नामा पृ० २२० । ६ बाबर नामा पृ० ११६ । १० बाबर नामा पू० ५२८ । "जब मैं अपने माशूक को देखता हूँ तो झेंप जाता हूँ, मेरे मित्र मेरी ओर देखते है और में दूसरो की ओर ।" सिंहासनारूढ होने के बाद ही उसे घोर क्प्टो एवं विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उसने हर आफत और मुसीबत का बडे धैर्य से मुकाबला किया। जितने वर्षों तक वह फरगाना के राज्य वे लिये सघर्प करता रहा उसे असाधारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पितु उसने कभी हिम्मत न हारी । १४९७-९८ ई० के वृत्तान में अपनी असफलताओं को जो समीक्षा उमने की है उससे उसके मक्ल्प का पूर्ण परिचय मिल जाता है। वह लिखता है, "क्योकि मुझे राज्य पर अधिकार करने तथा बादशाह बनने की आवाक्षा थी अत में एक या दो बार की असफलता से निराश होकर बैठा न रह सकता था। २ हिरात से काबुल लौटते समय पर्वतीय याना के समय उसे जितने कष्ट भोगने पडे उतने कष्ट सम्भवत उसने अपने जीवन-वाल मे कभी न भोगे थे । उसने इन कष्टो के विषय में स्वय एक शेर की रचना भी की है "भाग्य का कोई ऐसा कष्ट अथवा हानि नही है जिसे मैंने न भोगा हो, इस टूटे हुए हृदय ने सभी को सहन किया है। हाय । कोई ऐसा कष्ट भी है, जिसे मैंने न भोगा हो । "" किन्तु वह किसी भी कठिनाई के समय हताश न हुआ। इसके साथ साथ उसे अपने मित्रो का इतना अधिक ध्यान था कि उसने उनसे पृथक् होकर अपने लिये किसी सुरक्षित स्थान पर पहुँचना स्वीकार न किया। इसी यात्रा में जब उससे आग्रह किया गया कि वह वरफ से बचने के लिये गुफा में प्रविष्ट हो जाय तो उसने सोचा कि जब उसके कुछ आदमी बरफ तथा तूफान मे फँसे हुए है तो यह कैसे हो सकता है कि वह उस गरम स्थान मे शरण ले। जो कुछ वष्ट अथवा वठिनाई होगी उसका वह मुकाबला करेगा। इस अवसर पर फारसी की एक लोकोक्ति ने कि "मिनो के साथ मरना ईद के समान होना है' उसके साहस को और भी बढ़ा दिया। आराम के समय वह अपने पिछले क्प्ट कभी न भूलता था । १५०१ - २ ई० मे शैवानी को समरवन्द समर्पित करके जब वह अपनी माता को लेकर वहा से चल खडा हुआ तो रात्रि में यात्रा करता हुआ घोड़े से गिर पडा किन्तु तत्काल उठ कर सवार हो गया। यह दशा तथा पिछली घटनायें उसकी आखो के सामने स्वप्न के समान घूमती रही। इतने कष्ट भोगने के उपरान्त जब वह दोज़क् नामक छोटे से स्थान पर पहुँचा तो उसे जो सतोष प्राप्त हुआ उसकी चर्चा वह इस प्रकार करता है -"हमे अपने जीवन१ बाबर नामा १० ५२६ । २ बाबर नामा पृ० ५१८ । ३ बाबर नामा ५० ६६ । ४ बाबर नामा पृ०६७ ।
उसने ख्वाजा खावन्द सईद के मजार का तवाफ किया।' इवराहीम लोदी पर विजय के उपरात चौबीस अप्रैल, एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस ईशून्य को उसने दोख निजामुद्दीन औलिया के मजार की परिक्रमा की । पच्चीस अप्रैल, एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस ईशून्य को वह ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार वाकी के रौजे पर पहुँचा ।। अप्रैल एक हज़ार पाँच सौ अट्ठाईस ईशून्य को उसने शेख शरफुद्दीन यह्या मुनेरी के मजार का तवाफ किया । ग्वालियर के प्रसिद्ध सूफी शेस गौस से भी उसके बड़े अच्छे सम्बन्ध थे ।' एक अन्य आलिम मीर रफीउद्दीन सफत्री से भी वह बड़ा प्रभावित था और उनकी समस्त सिफारिशों को स्वीकार कर लेता था। उसे योगियों के विषय में भी जानकारी प्राप्त करने से रुचि थी। जनवरी एक हज़ार पाँच सौ पाँच ईशून्य मे वह बीगराम पहुँचवर गूर खत्तरी के योगियों के तीर्थस्थान के दर्शनार्थ जाना चाहता था विन्तु इसमे वह सफल न हो सया। सोलह मार्च एक हज़ार पाँच सौ उन्नीस ईशून्य को जब वह फिर वहा पहुँचा तो उसने प्रयत्न करके गूर खत्तरी के दर्शन किये । बाबर का चरित्र बाबरनामा के अध्ययन से बाबर वे चरित्र पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। उसने अपनी भूलो तथा अपने दोषो को बडे मार्मिक शब्दो मे स्वीकार किया है। उसे अपनी अज्ञानता स्वीकार करने में कोई सोच न होता था । हिरात मे वदी उज्जमान मीर्जा की दावत म पका हुआ वाज लाया गया किन्तु उसे वाज को काटना एव टुकडे टुकडे करना न आता था अत उसने उसे उसी प्रकार छोड़ दिया किन्तु मीर्जा के पूछने पर कि, 'क्या उसे बाज़ पसन्द नही ?" उसने नि सकोच उत्तर दे दिया कि, "मैं उसे काटना नही जानता ।' ' उसने अपने प्रथम विवाह के सम्बंध में अपनी झेंप एव सुशीलता का जो वर्णन दिया है वह अत्यधिक रोचक है किन्तु उससे भी अधिव दिलचस्प बाबुरी नामक तरुण से उसकी प्रम- क्या है । इस समय उसको अवस्था सोलह-सत्रह वर्ष की थी। वह लिखता है कि, "मैं उन्माद एव शेप मे उसके आने पर उसे धन्यवाद भी न दे पाता था, तो उसके चले जाने की शिकायत ही किस प्रकार कर सकता था ? मुझ में इतनी शक्ति भी तो न थी कि उसका उचित रूप से स्वागत हो कर लेता । एक दिन प्रम के उन्माद म मैं अपन मित्रों के साथ एक गली में जा रहा था । अचानक मेरा और उसका सामना हो गया । झेंप एव घबराहट मे मेरी यह दशा हो गई कि मैं उससे आख भी न मिला सका और न एक शब्द कह सवा । झेंप तथा घवराहट में मुहम्मद सालेह के इस शेर वा स्मरण करता हुआ उसे छोड़ कर चल दिया एक बाबर नामा दस एक सौ सोलह । दो चाबर नामा दस एक सौ अट्ठावन । तीन बाबर नामा पृशून्य एक सौ छप्पन । चार बाबर नामा पृशून्य तीन सौ इक्कीस । पाँच बाबर नामा पृशून्य दो सौ बीस । छः बाबर नामा पृशून्य एक सौ सोलह । दस बाबर नामा पूशून्य पाँच सौ अट्ठाईस । "जब मैं अपने माशूक को देखता हूँ तो झेंप जाता हूँ, मेरे मित्र मेरी ओर देखते है और में दूसरो की ओर ।" सिंहासनारूढ होने के बाद ही उसे घोर क्प्टो एवं विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उसने हर आफत और मुसीबत का बडे धैर्य से मुकाबला किया। जितने वर्षों तक वह फरगाना के राज्य वे लिये सघर्प करता रहा उसे असाधारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पितु उसने कभी हिम्मत न हारी । एक हज़ार चार सौ सत्तानवे-अट्ठानवे ईशून्य के वृत्तान में अपनी असफलताओं को जो समीक्षा उमने की है उससे उसके मक्ल्प का पूर्ण परिचय मिल जाता है। वह लिखता है, "क्योकि मुझे राज्य पर अधिकार करने तथा बादशाह बनने की आवाक्षा थी अत में एक या दो बार की असफलता से निराश होकर बैठा न रह सकता था। दो हिरात से काबुल लौटते समय पर्वतीय याना के समय उसे जितने कष्ट भोगने पडे उतने कष्ट सम्भवत उसने अपने जीवन-वाल मे कभी न भोगे थे । उसने इन कष्टो के विषय में स्वय एक शेर की रचना भी की है "भाग्य का कोई ऐसा कष्ट अथवा हानि नही है जिसे मैंने न भोगा हो, इस टूटे हुए हृदय ने सभी को सहन किया है। हाय । कोई ऐसा कष्ट भी है, जिसे मैंने न भोगा हो । "" किन्तु वह किसी भी कठिनाई के समय हताश न हुआ। इसके साथ साथ उसे अपने मित्रो का इतना अधिक ध्यान था कि उसने उनसे पृथक् होकर अपने लिये किसी सुरक्षित स्थान पर पहुँचना स्वीकार न किया। इसी यात्रा में जब उससे आग्रह किया गया कि वह वरफ से बचने के लिये गुफा में प्रविष्ट हो जाय तो उसने सोचा कि जब उसके कुछ आदमी बरफ तथा तूफान मे फँसे हुए है तो यह कैसे हो सकता है कि वह उस गरम स्थान मे शरण ले। जो कुछ वष्ट अथवा वठिनाई होगी उसका वह मुकाबला करेगा। इस अवसर पर फारसी की एक लोकोक्ति ने कि "मिनो के साथ मरना ईद के समान होना है' उसके साहस को और भी बढ़ा दिया। आराम के समय वह अपने पिछले क्प्ट कभी न भूलता था । एक हज़ार पाँच सौ एक - दो ईशून्य मे शैवानी को समरवन्द समर्पित करके जब वह अपनी माता को लेकर वहा से चल खडा हुआ तो रात्रि में यात्रा करता हुआ घोड़े से गिर पडा किन्तु तत्काल उठ कर सवार हो गया। यह दशा तथा पिछली घटनायें उसकी आखो के सामने स्वप्न के समान घूमती रही। इतने कष्ट भोगने के उपरान्त जब वह दोज़क् नामक छोटे से स्थान पर पहुँचा तो उसे जो सतोष प्राप्त हुआ उसकी चर्चा वह इस प्रकार करता है -"हमे अपने जीवनएक बाबर नामा दस पाँच सौ छब्बीस । दो बाबर नामा पृशून्य पाँच सौ अट्ठारह । तीन बाबर नामा पचास छयासठ । चार बाबर नामा पृसरसठ ।
( अशस्तिम् ) निन्दाजनक अपकीर्ति या अप्रशंसनीय निन्दनीय गति को ( भव-मुञ्चन् ) दूर करता हुआ (ते) तुझे (प्र-तरम् ) उत्कृष्ट (द्रीय ) दीर्घ (यु) आयु ( दधामि ) प्रदान करता हूँ । चाता॑त् ते प्रा॒णम॑चद॒ सूर्याचक्षु॑र॒द्दं तव॑ । यत् ते॒ मन॒स्त्वयि॒ तद् धार॑यामि॒ सं वि॒त्स्वाहा॑ ज॒ह्वयालंपन् ।।३ भा० - (ते ) तेरे लिये ( प्राणम् ) प्राण को हे पुरुष में ( वातात् ) इस वायु से ( अविदम् ) उत्पन्न करता हूँ। और ( अहम् ) मै प्रजापति ( तब ) तेरी (चक्षुः ) दर्शन शक्ति को ( सूर्यात् ) सूर्य से उत्पन्न करता हूँ । और ( यत् ) जो ( ते ) तेरे ( मनः ) सकप कारी अन्त. करण है उसको ( त्वयि ) तेरे भीतर ( धारयामि) स्थापित करता हूँ । ( अगे. ) अपने सब अगों, इन्द्रियो या जानेद्रियों मे ( सवि ) भली प्रकार ज्ञान कर और ( जिया ) जीभ या वाणी से ( आलपन ) स्पष्ट पाणी का उच्चारण करता हुआ ( वद ) बोल । प्र॒ागन॑ त्वा द्वि॒पा चतु॑ष्पदाम॒ग्निमि॑व जातम॒भि स ध॑मामि । नम॑स्त मृ॒त्यो चक्षु॑षु॒ नमः॑ प्र॒णाय॑ ते॒ऽक॑रम् ॥ ४ ॥ भा० - पुरुष । जीवात्मन् । ( अग्निम् इव ) जिस प्रकार जाग को फ्रक लगा कर या वायु द्वारा पसे से जिया लिया जाता है, उमी प्रकार (द्विपदाम् ) दोपाये मनुष्य-शरीर और पक्षिनरीस मे और ( चतुष्पदाम् ) चौपार्यो में ( जातम् ) उत्पन्न होकर शरीर धारण किये हुए तुनको में उकार ( प्राणेन ) प्राण द्वारा ( अभिम धमामि ) मगं प्रत्यक्षरूप में चैतन्य किये रहता है। उत्तर में जीव कहता है । ह भगान 1 ( कृपा ) सत्र प्राणियों को दें; से करने वाले सुगा (त चषे ) तर प्रदान कियादि इन्जिन माता के लिये ( नम ) टनका नोग्य विषय और ( न प्राणाय ) तर दिव प्राण लिया
निन्दाजनक अपकीर्ति या अप्रशंसनीय निन्दनीय गति को दूर करता हुआ तुझे उत्कृष्ट दीर्घ आयु प्रदान करता हूँ । चाता॑त् ते प्रा॒णम॑चद॒ सूर्याचक्षु॑र॒द्दं तव॑ । यत् ते॒ मन॒स्त्वयि॒ तद् धार॑यामि॒ सं वि॒त्स्वाहा॑ ज॒ह्वयालंपन् ।।तीन भाशून्य - तेरे लिये प्राण को हे पुरुष में इस वायु से उत्पन्न करता हूँ। और मै प्रजापति तेरी दर्शन शक्ति को सूर्य से उत्पन्न करता हूँ । और जो तेरे सकप कारी अन्त. करण है उसको तेरे भीतर स्थापित करता हूँ । अपने सब अगों, इन्द्रियो या जानेद्रियों मे भली प्रकार ज्ञान कर और जीभ या वाणी से स्पष्ट पाणी का उच्चारण करता हुआ बोल । प्र॒ागन॑ त्वा द्वि॒पा चतु॑ष्पदाम॒ग्निमि॑व जातम॒भि स ध॑मामि । नम॑स्त मृ॒त्यो चक्षु॑षु॒ नमः॑ प्र॒णाय॑ ते॒ऽक॑रम् ॥ चार ॥ भाशून्य - पुरुष । जीवात्मन् । जिस प्रकार जाग को फ्रक लगा कर या वायु द्वारा पसे से जिया लिया जाता है, उमी प्रकार दोपाये मनुष्य-शरीर और पक्षिनरीस मे और चौपार्यो में उत्पन्न होकर शरीर धारण किये हुए तुनको में उकार प्राण द्वारा मगं प्रत्यक्षरूप में चैतन्य किये रहता है। उत्तर में जीव कहता है । ह भगान एक सत्र प्राणियों को दें; से करने वाले सुगा तर प्रदान कियादि इन्जिन माता के लिये टनका नोग्य विषय और तर दिव प्राण लिया
नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी' (Bigg Boss OTT) पर इन दिनों नेहा भसीन (Neha Bhasin) खूब धूम मचा रही हैं. घर में उनकी और प्रतीक सहजपाल के कनेक्शन को खूब पसंद किया जा रहा है. दोनों को कई मौकों पर एक-दूसरे के करीब आते हुए भी देखा गया है. जिसके बाद नेहा को शादी टूटने का डर सताने लगा. अब इस मामले में सिंगर के पति समीरुद्दीन का खुद जवाब आया है. स्पॉटबॉय से बात करते हुए, उन्होंने कहाः 'हाहा! हां, मैं भी ऐसा करता हूं! लगातार तकरार, इस बात पर कॉम्पटीशन करना कि कौन ज्यादा कूल है, बेहतर है, होशियार है, गले लगना, झगड़े, छेड़खानी और स्कूली बच्चों की तरह एक-दूसरे का मजाक उड़ाना, वास्तव में आज भी जब वह अपने स्कूल के दोस्तों से मिलती है, तो वह बिल्कुल ऐसी ही होती है! दूसरी ओर, वे दोनों एक-दूसरे को स्पष्ट नजरिया दे सकते हैं, एक-दूसरे को शांत कर सकते हैं. ऐसा लगता है जैसे वे एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं. नेहा और प्रतीक (Neha And Partik Connection) का रिश्ता झगड़े और दिलचस्प नजदीकी पलों से भरा रहा है. कुछ दिनों पहले, नेहा ने उस पर (प्रतीक) पर एक जूता फेंका था, जब उसे पता चला कि वह उसे छोड़कर दिव्या अग्रवाल के साथ एक नया कनेक्शन शुरू करने की योजना बना रहा है. बाद में जब नेहा को पता चला कि प्रतीक उसके साथ मजाक कर रहा है तो उसने मजाक में उसके साथ मारपीट की. बिग बॉस ओटीटी को करण जौहर होस्ट कर रहे हैं. इस सीजन की रियलिटी शो प्रतियोगियों में शमिता शेट्टी, राकेश बापट, मिलिंद गाबा, नेहा भसीन, दिव्या अग्रवाल भी शामिल हैं. बिग बॉस ओटीटी मुख्य शो का छह सप्ताह का डिजिटल स्पिन-ऑफ है और वूट पर टेलीकास्ट होता है.
नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी' पर इन दिनों नेहा भसीन खूब धूम मचा रही हैं. घर में उनकी और प्रतीक सहजपाल के कनेक्शन को खूब पसंद किया जा रहा है. दोनों को कई मौकों पर एक-दूसरे के करीब आते हुए भी देखा गया है. जिसके बाद नेहा को शादी टूटने का डर सताने लगा. अब इस मामले में सिंगर के पति समीरुद्दीन का खुद जवाब आया है. स्पॉटबॉय से बात करते हुए, उन्होंने कहाः 'हाहा! हां, मैं भी ऐसा करता हूं! लगातार तकरार, इस बात पर कॉम्पटीशन करना कि कौन ज्यादा कूल है, बेहतर है, होशियार है, गले लगना, झगड़े, छेड़खानी और स्कूली बच्चों की तरह एक-दूसरे का मजाक उड़ाना, वास्तव में आज भी जब वह अपने स्कूल के दोस्तों से मिलती है, तो वह बिल्कुल ऐसी ही होती है! दूसरी ओर, वे दोनों एक-दूसरे को स्पष्ट नजरिया दे सकते हैं, एक-दूसरे को शांत कर सकते हैं. ऐसा लगता है जैसे वे एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं. नेहा और प्रतीक का रिश्ता झगड़े और दिलचस्प नजदीकी पलों से भरा रहा है. कुछ दिनों पहले, नेहा ने उस पर पर एक जूता फेंका था, जब उसे पता चला कि वह उसे छोड़कर दिव्या अग्रवाल के साथ एक नया कनेक्शन शुरू करने की योजना बना रहा है. बाद में जब नेहा को पता चला कि प्रतीक उसके साथ मजाक कर रहा है तो उसने मजाक में उसके साथ मारपीट की. बिग बॉस ओटीटी को करण जौहर होस्ट कर रहे हैं. इस सीजन की रियलिटी शो प्रतियोगियों में शमिता शेट्टी, राकेश बापट, मिलिंद गाबा, नेहा भसीन, दिव्या अग्रवाल भी शामिल हैं. बिग बॉस ओटीटी मुख्य शो का छह सप्ताह का डिजिटल स्पिन-ऑफ है और वूट पर टेलीकास्ट होता है.
नयी दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के सभी पदाधिकारियों एवं सांसदों को क्रिसमस की पूर्व संध्या पर व नव वर्ष से पहले ग्रीटिग कार्ड भेजे हैं। नव वर्ष से पहले ग्रीटिग कार्ड पर ड्रीम कैचर की तस्वीर बनी हुई है, जो समुद्र के किनारे एक डंडे से चिपका हुआ है। वहीं कार्ड पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर भी हैं। कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस 28 दिसंबर से पहले इस कार्ड को एक व्यक्तिगत संपर्क के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रीटिग कार्ड पा चुके एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूर्व अध्यक्ष की अच्छी पहल है, जो व्यक्तिगत भी है।
नयी दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के सभी पदाधिकारियों एवं सांसदों को क्रिसमस की पूर्व संध्या पर व नव वर्ष से पहले ग्रीटिग कार्ड भेजे हैं। नव वर्ष से पहले ग्रीटिग कार्ड पर ड्रीम कैचर की तस्वीर बनी हुई है, जो समुद्र के किनारे एक डंडे से चिपका हुआ है। वहीं कार्ड पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर भी हैं। कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस अट्ठाईस दिसंबर से पहले इस कार्ड को एक व्यक्तिगत संपर्क के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रीटिग कार्ड पा चुके एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूर्व अध्यक्ष की अच्छी पहल है, जो व्यक्तिगत भी है।
यद्यपि यह सच है कि हम सुधारक नही, वल्कि सिर्फ प्रेक्षक है, पर तो भी हम आलोचक की दृष्टि से प्रेक्षण किए बिना नहीं रह सकते, और परम्परागत योन नैतिकता का समर्थन करना या उन उपायो को श्रेष्ठ कहना, जिनके द्वारा समाज ने जीवन में यौन-प्रवृत्ति की व्यावहारिक समस्या को व्यवस्थित करने का यत्न किया है, हमें असम्भव मालूम हुआ है। हम आसानी से यह दिखला सकते हैं कि दुनिया जिसे अपनी नैतिक नियमावली कहती है, उसके लिए जितनी कुर्वानी करनी पडती है, उतनी की पात्र वह नहीं है, और इसका व्यवहार न तो ईमानदारी से निर्धारित हुआ है, और न समझदारी से । हम अपने रोगियों को ये आलोचनाए सुनने से नहीं रोकते । हम उन्हे यह आदत डालते है कि वे और सव मामलो को तरह यौन मामलो पर भी दिना किसी पूर्वग्रह के विचार कर सकें, और यदि इलाज के प्रभाव से स्वतन्त्र होने के वाद, वे असयत योन स्वच्छन्दता और पूर्ण निवृत्ति के बीच का कोई रास्ता चुन लेते है, तो हमें कोई परेशानी नही होती, चाहे फिर उसका कुछ भी परिणाम हो । हम यह कहते हैं कि जिस आदमी ने अपने बारे में सच्ची बात समझना और पहचानना सीख लिया है, उसे अव अनैतिकता के खतरो से लड़ने का बल प्राप्त हो गया है, चाहे उसका नैतिकता का मानदण्ड कुछ दृष्टियो से प्रचलित मानदण्ड से भिन्न हो क्यो न हो । प्रसगत, हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हम स्नायु रोग पैदा करने में इन्द्रिय संयम को बहुत अधिक महत्व न दे बैठे । उस तरह के सम्भोग से, जो बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो सकता है, कुठा से और तत्पश्चात् कुठा द्वारा प्रेरित राग-मचय से उत्पन्न रोगजनक स्थितियो में से बहुत थोड़ी-सी स्थितियों में ही, नाराम मिल सकता है । इस प्रकार, मनोविश्लेषण के चिकित्सा सम्बन्धी प्रभाव की व्यास्या हम यह मानकर नही कर सकते कि यह रोगियों को यौन सम्भोग करने की खुली छूट देता है । आपको कोई और चीज भी देखनी होगी । मै समझता हूं कि आपके इस अनुमान पर विचार करते हुए मैंने जो बातें कही थी, उनमें से एक बात ने प्राप नहीं रास्ते पर आ गए होने । सम्भवत किमी अचेतन चोज के स्थान पर किमी चेतन चीज के श्रा जाने, अचेतन विचारों के चेतन विचारों में रूपान्तरित हो जाने से ही हमाग कार्य सफल होता है। आपका खयाल सही है । बिलकुल यही स्थिति है। अचेतन का चेतन में विस्तार करके दमन दूर किए जाते हैं लक्षण निर्माण यो अव स्वाए दूर की जाती है, और रोगजनक द्वन्द्व वे स्थान पर प्रकृति संघर्ष लाया जाता है, जिसमें रघर या उधर फैनला अवश्य होना है। हम अपने रोगियों के लिए कुछ नहीं करते। उन्हें ऐसा करते हैं कि उनमें एक यह माननिक परिवर्तन होने लगे । यह परिवर्तन उनमें जितनी अधिक मात्रा में कर दिया जाता है, उतना ही धर लाभ हम उन्हें पहुंचा देते हैं। जहा कोई दमन, या इसमाको मानसिक कम नहीं होना, जिने दूर करना हो यहां हमारी चिकित्सा के करने योग्य कोई
यद्यपि यह सच है कि हम सुधारक नही, वल्कि सिर्फ प्रेक्षक है, पर तो भी हम आलोचक की दृष्टि से प्रेक्षण किए बिना नहीं रह सकते, और परम्परागत योन नैतिकता का समर्थन करना या उन उपायो को श्रेष्ठ कहना, जिनके द्वारा समाज ने जीवन में यौन-प्रवृत्ति की व्यावहारिक समस्या को व्यवस्थित करने का यत्न किया है, हमें असम्भव मालूम हुआ है। हम आसानी से यह दिखला सकते हैं कि दुनिया जिसे अपनी नैतिक नियमावली कहती है, उसके लिए जितनी कुर्वानी करनी पडती है, उतनी की पात्र वह नहीं है, और इसका व्यवहार न तो ईमानदारी से निर्धारित हुआ है, और न समझदारी से । हम अपने रोगियों को ये आलोचनाए सुनने से नहीं रोकते । हम उन्हे यह आदत डालते है कि वे और सव मामलो को तरह यौन मामलो पर भी दिना किसी पूर्वग्रह के विचार कर सकें, और यदि इलाज के प्रभाव से स्वतन्त्र होने के वाद, वे असयत योन स्वच्छन्दता और पूर्ण निवृत्ति के बीच का कोई रास्ता चुन लेते है, तो हमें कोई परेशानी नही होती, चाहे फिर उसका कुछ भी परिणाम हो । हम यह कहते हैं कि जिस आदमी ने अपने बारे में सच्ची बात समझना और पहचानना सीख लिया है, उसे अव अनैतिकता के खतरो से लड़ने का बल प्राप्त हो गया है, चाहे उसका नैतिकता का मानदण्ड कुछ दृष्टियो से प्रचलित मानदण्ड से भिन्न हो क्यो न हो । प्रसगत, हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हम स्नायु रोग पैदा करने में इन्द्रिय संयम को बहुत अधिक महत्व न दे बैठे । उस तरह के सम्भोग से, जो बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो सकता है, कुठा से और तत्पश्चात् कुठा द्वारा प्रेरित राग-मचय से उत्पन्न रोगजनक स्थितियो में से बहुत थोड़ी-सी स्थितियों में ही, नाराम मिल सकता है । इस प्रकार, मनोविश्लेषण के चिकित्सा सम्बन्धी प्रभाव की व्यास्या हम यह मानकर नही कर सकते कि यह रोगियों को यौन सम्भोग करने की खुली छूट देता है । आपको कोई और चीज भी देखनी होगी । मै समझता हूं कि आपके इस अनुमान पर विचार करते हुए मैंने जो बातें कही थी, उनमें से एक बात ने प्राप नहीं रास्ते पर आ गए होने । सम्भवत किमी अचेतन चोज के स्थान पर किमी चेतन चीज के श्रा जाने, अचेतन विचारों के चेतन विचारों में रूपान्तरित हो जाने से ही हमाग कार्य सफल होता है। आपका खयाल सही है । बिलकुल यही स्थिति है। अचेतन का चेतन में विस्तार करके दमन दूर किए जाते हैं लक्षण निर्माण यो अव स्वाए दूर की जाती है, और रोगजनक द्वन्द्व वे स्थान पर प्रकृति संघर्ष लाया जाता है, जिसमें रघर या उधर फैनला अवश्य होना है। हम अपने रोगियों के लिए कुछ नहीं करते। उन्हें ऐसा करते हैं कि उनमें एक यह माननिक परिवर्तन होने लगे । यह परिवर्तन उनमें जितनी अधिक मात्रा में कर दिया जाता है, उतना ही धर लाभ हम उन्हें पहुंचा देते हैं। जहा कोई दमन, या इसमाको मानसिक कम नहीं होना, जिने दूर करना हो यहां हमारी चिकित्सा के करने योग्य कोई
LUCKNOW: कॉमेडी रोल चैलेंजिंग होता है, मैं इस चैलेंज को बहुत इंज्वॉय करती हूं। यह कहना है टीवी एक्टर भावना बलसावर का। सिटी में एक टीवी शो के प्रमोशन के लिए आई भावना कहती हैं कि कॉमेडी और एक्टिंग उनकी जीन में है। एक्टिंग उन्हें गॉड गिफ्ट है। मां शोभा खोटे और मामा बीजू खोटे उनके आइडियल है। 'देख भाई देख' टीवी सीरियल से अपनी एक्टिंग का सफर शुरू करने वाली भावना टीवी इंडस्ट्री में दो दशक का समय बीता चुकी है। भावना का कहना है कि तब के समय और आज के समय में बहुत परिवर्तन आ चुका है। बीस साल पहले की और आज टीवी इंडस्ट्री में बहुत अंतर है। तब एक वीक में एक सीरियल बनते थे, जबकि आज एक दिन में एक या एक से अधिक सीरियल तैयार होते हैं। तब ऐपीसोड वीकली होते थे, जबकि आज डेली हैं। उसके पीछे कारण है कि इंडस्ट्री तरक्की कर रहा है। लोग भागमभाग जिंदगी जी रहे हैं। पहले लोग पूरे सात दिन अपने मनपंसद करेक्टर को देखने के लिए इंतजार करते थे, जबकि आज वीकली करेक्टर को याद तक नहीं रखते। पहले सीरियल की क्वालिटी पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन आज बहुत काम करना पड़ता है। अब डेली शो बनते है। भावना का कहना है कि यूं तो वह टीवी इंडस्ट्री में बहुत बिजी हैं। फिल्मों में अच्छे रोल का ऑफर आने पर वह काम करेंगी। रोल भले ही छोटा हो, लेकिन दमदार होना चाहिए। करियर के शुरुआती दिनों में रोल ऑफर आए थे, लेकिन बहुत दमदार न होने पर फिल्मों की तरफ रुख नहीं किया। स्क्रीन पर काम करने से मुझे खुशी मिलती है। इस खुशी के लिए मैं हर रोज मुंबई की ट्रैफिक से जद्दोजहद करती हूं। रोज तीन घंटे स्टूडियो आने-जाने में मेरे कार में ही गुजर जाते हैं। भावना बताती हैं कि लखनऊ से उनका पुराना रिश्ता है। इससे पहले वह कई बार थियेटर करने लखनऊ आ चुकी हैं। वह मुस्कुराती हुई बड़ी अदा से कहती हैं, आई लव लखनऊ। यहां के फूड और तहजीब का कोई जवाब नहीं। प्रोग्राम में आने के साथ ही भावना ने लखनऊ के स्पेशल डिश के मैन्यू की डिटेल मांगी।
LUCKNOW: कॉमेडी रोल चैलेंजिंग होता है, मैं इस चैलेंज को बहुत इंज्वॉय करती हूं। यह कहना है टीवी एक्टर भावना बलसावर का। सिटी में एक टीवी शो के प्रमोशन के लिए आई भावना कहती हैं कि कॉमेडी और एक्टिंग उनकी जीन में है। एक्टिंग उन्हें गॉड गिफ्ट है। मां शोभा खोटे और मामा बीजू खोटे उनके आइडियल है। 'देख भाई देख' टीवी सीरियल से अपनी एक्टिंग का सफर शुरू करने वाली भावना टीवी इंडस्ट्री में दो दशक का समय बीता चुकी है। भावना का कहना है कि तब के समय और आज के समय में बहुत परिवर्तन आ चुका है। बीस साल पहले की और आज टीवी इंडस्ट्री में बहुत अंतर है। तब एक वीक में एक सीरियल बनते थे, जबकि आज एक दिन में एक या एक से अधिक सीरियल तैयार होते हैं। तब ऐपीसोड वीकली होते थे, जबकि आज डेली हैं। उसके पीछे कारण है कि इंडस्ट्री तरक्की कर रहा है। लोग भागमभाग जिंदगी जी रहे हैं। पहले लोग पूरे सात दिन अपने मनपंसद करेक्टर को देखने के लिए इंतजार करते थे, जबकि आज वीकली करेक्टर को याद तक नहीं रखते। पहले सीरियल की क्वालिटी पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन आज बहुत काम करना पड़ता है। अब डेली शो बनते है। भावना का कहना है कि यूं तो वह टीवी इंडस्ट्री में बहुत बिजी हैं। फिल्मों में अच्छे रोल का ऑफर आने पर वह काम करेंगी। रोल भले ही छोटा हो, लेकिन दमदार होना चाहिए। करियर के शुरुआती दिनों में रोल ऑफर आए थे, लेकिन बहुत दमदार न होने पर फिल्मों की तरफ रुख नहीं किया। स्क्रीन पर काम करने से मुझे खुशी मिलती है। इस खुशी के लिए मैं हर रोज मुंबई की ट्रैफिक से जद्दोजहद करती हूं। रोज तीन घंटे स्टूडियो आने-जाने में मेरे कार में ही गुजर जाते हैं। भावना बताती हैं कि लखनऊ से उनका पुराना रिश्ता है। इससे पहले वह कई बार थियेटर करने लखनऊ आ चुकी हैं। वह मुस्कुराती हुई बड़ी अदा से कहती हैं, आई लव लखनऊ। यहां के फूड और तहजीब का कोई जवाब नहीं। प्रोग्राम में आने के साथ ही भावना ने लखनऊ के स्पेशल डिश के मैन्यू की डिटेल मांगी।
शुक्रवार को प्रसारित होने वाले बिग बॉस के वीकएंड एपिसोड में दर्शकों को हर बार कुछ ना कुछ मसालेदार और मजेदार देखने को मिलता है। पूरे हफ्ते घर में हुए विवादों का हिसाब-किताब लेकर शो के होस्ट सलमान खान घरवालों से रूबरू होते हैं। हालांकि शो के इस सीजन से घरवालों से सलमान के रूबरू होने के तरीके में काफी बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अभिनेता टीवी के जरिए घरवालों से बातचीत करते थे, तो वहीं अब सलमान खुद घर के अंदर जाकर सभी सदस्यों से मुखातिब होते हैं। इसी क्रम में बीते एपिसोड में सलमान एक बार फिर घर के अंदर सभी सदस्यों से मिलने पहुंचे। घर के अंदर पहुंचे सलमान खान ने इस दौरान ना सिर्फ घरवालों के बीच कुछ टास्क कराए, बल्कि सबके सामने एक-दूसरे की असलियत भी लाई। दरअसल, अभिनेता ने एक सेग्मेंट के दौरान घरवालों को टास्क दिया कि वह उनके लिए कही गई बातों से यह अंदाजा लगाएं कि घर के किस सदस्य ने उन पर यह कमेंट किया है। इस दौरान सलमान ने प्रियंका को लेकर सौंदर्या के कहे एक कमेंट को दोहराया, जिसके बाद दोनों अभिनेत्रियों के बीच जमकर कैटफाइट देखने को मिली। प्रियंका से सलमान खान ने कहा कि घर के किसी सदस्य ने उनके लिए यह बात कही है कि अंकित की मां अपना गला दबा लेंगी अगर प्रियंका उनके घर की बहू बनती है। अपने लिए कहे गए इन शब्दों को सुन प्रियंका जहां हैरान रह गईं तो वहीं अंकित भी इसे सुन काफी नाराज हुए। बाद में जब इस बात का खुलासा हुआ कि प्रियंका के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल सौंदर्या ने किया है तो अंकित उन पर काफी नाराज हुए। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने सौंदर्या के संस्कारों पर भी सवाल उठा दिया। वहीं, दूसरी तरफ अपने लिए ऐसी बातें सुन प्रियंका भी आग बबूला हो गईं, जिसके बाद दोनों अभिनेत्रियां सलमान खान के सामने ही एक-दूसरे से बहस करने लगीं। अंत में इस बात से आहत प्रियंका फूट-फूट कर रोने लगीं, जिसके बाद उनके दोस्त अंकित उन्हें शांत कराते नजर आए। इस दौरान प्रियंका की हालत इतनी खराब हो गई कि वह रोते-रोते यह भी कहती दिखीं कि वह सांस नहीं ले पा रही हैं। इसके बाद अंकित उन्हें समझाते हुए कहते हैं कि उन्हें ऐसे लोगों के लिए बिल्कुल भी रोना नहीं चाहिए।
शुक्रवार को प्रसारित होने वाले बिग बॉस के वीकएंड एपिसोड में दर्शकों को हर बार कुछ ना कुछ मसालेदार और मजेदार देखने को मिलता है। पूरे हफ्ते घर में हुए विवादों का हिसाब-किताब लेकर शो के होस्ट सलमान खान घरवालों से रूबरू होते हैं। हालांकि शो के इस सीजन से घरवालों से सलमान के रूबरू होने के तरीके में काफी बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अभिनेता टीवी के जरिए घरवालों से बातचीत करते थे, तो वहीं अब सलमान खुद घर के अंदर जाकर सभी सदस्यों से मुखातिब होते हैं। इसी क्रम में बीते एपिसोड में सलमान एक बार फिर घर के अंदर सभी सदस्यों से मिलने पहुंचे। घर के अंदर पहुंचे सलमान खान ने इस दौरान ना सिर्फ घरवालों के बीच कुछ टास्क कराए, बल्कि सबके सामने एक-दूसरे की असलियत भी लाई। दरअसल, अभिनेता ने एक सेग्मेंट के दौरान घरवालों को टास्क दिया कि वह उनके लिए कही गई बातों से यह अंदाजा लगाएं कि घर के किस सदस्य ने उन पर यह कमेंट किया है। इस दौरान सलमान ने प्रियंका को लेकर सौंदर्या के कहे एक कमेंट को दोहराया, जिसके बाद दोनों अभिनेत्रियों के बीच जमकर कैटफाइट देखने को मिली। प्रियंका से सलमान खान ने कहा कि घर के किसी सदस्य ने उनके लिए यह बात कही है कि अंकित की मां अपना गला दबा लेंगी अगर प्रियंका उनके घर की बहू बनती है। अपने लिए कहे गए इन शब्दों को सुन प्रियंका जहां हैरान रह गईं तो वहीं अंकित भी इसे सुन काफी नाराज हुए। बाद में जब इस बात का खुलासा हुआ कि प्रियंका के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल सौंदर्या ने किया है तो अंकित उन पर काफी नाराज हुए। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने सौंदर्या के संस्कारों पर भी सवाल उठा दिया। वहीं, दूसरी तरफ अपने लिए ऐसी बातें सुन प्रियंका भी आग बबूला हो गईं, जिसके बाद दोनों अभिनेत्रियां सलमान खान के सामने ही एक-दूसरे से बहस करने लगीं। अंत में इस बात से आहत प्रियंका फूट-फूट कर रोने लगीं, जिसके बाद उनके दोस्त अंकित उन्हें शांत कराते नजर आए। इस दौरान प्रियंका की हालत इतनी खराब हो गई कि वह रोते-रोते यह भी कहती दिखीं कि वह सांस नहीं ले पा रही हैं। इसके बाद अंकित उन्हें समझाते हुए कहते हैं कि उन्हें ऐसे लोगों के लिए बिल्कुल भी रोना नहीं चाहिए।
मुंबई। लम्बे समय से चर्चा में बनी हुई ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की फिल्म विक्रम वेधा का ट्रेलर मेकर्स ने गुरुवार को जारी कर दिया। ट्रेलर को ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ साझा किया है। ट्रेलर की शुरुआत एक धमाकेदार डायलॉग से होती है, 'हम अक्सर सोचते हैं कि कहानी के सिर्फ दो ही सिरे होते हैं, अच्छाई या बुराई। लेकिन हमारी ये सोच गलत है शायद। क्या हर बुराई वाकई बुरी होती है? क्या हर अच्छाई वाकई अच्छी होती है? अक्सर सच सही और झूठ गलत होता है, पर इस कहानी में सच और झूठ दोनों ही गलत हैं। ' इसी के साथ दिखाई देता है रितिक रोशन का हवा से बातें करते हुए लोगों के साथ मारकाट कर रहे हैंऔर उनके पीछे पुलिस ऑफिसर बने सैफ अली खान पड़े हुए हैं। वहीं ट्रेलर में सैफ अली खान कहते हैं, 'तुम्हें पता है कि हर एन्काउंटर के बाद भी मैं चैन की नींद क्यों सो पाता हूं? क्योंकि हम जानते हैं कि हमने किसी बेगुनाह को नहीं मारा। ' कुल मिलाकर फिल्म का ट्रेलर एक्शन से भरपूर है। फैंस इसे काफी पसंद कर रहे हैं । ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की फिल्म 'विक्रम वेधा' 2017 में आई तमिल फिल्म का हिंदी रीमेक है। फिल्म का डायरेक्शन ऑरिजनल फिल्म बनाने वाले पुष्कर-गायत्री ने किया है। विक्रम वेधा को नीरज पांडे द्वारा रिलायंस एंटरटेनमेंट और वाई नॉट स्टूडियोज के सहयोग से उनकी कंपनी फ्राइडे फिल्मवर्क्स के तहत बनाया जा रहा है. यह फिल्म इसी महीने 30 सितंबर को रिलीज होगी। ऑरिजनल तमिल फिल्म में आर माधवन और विजय सेतुपति ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म विक्रम-बेताल की ऐतिहासिक कहानी पर आधारित है, जिसमें एक चालाक गैंगस्टर हर बार एक पुलिसवाले से बचकर भाग निकलता है। इस तरह इस फिल्म में सैफ और ऋतिक को एकसाथ देखना दिलचस्प होगा। विक्रम वेधा को नीरज पांडे द्वारा रिलायंस एंटरटेनमेंट और वाई नॉट स्टूडियोज के सहयोग से उनकी कंपनी फ्राइडे फिल्मवर्क्स के तहत बनाया जा रहा है। यह फिल्म इसी महीने 30 सितंबर को रिलीज होगी।
मुंबई। लम्बे समय से चर्चा में बनी हुई ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की फिल्म विक्रम वेधा का ट्रेलर मेकर्स ने गुरुवार को जारी कर दिया। ट्रेलर को ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ साझा किया है। ट्रेलर की शुरुआत एक धमाकेदार डायलॉग से होती है, 'हम अक्सर सोचते हैं कि कहानी के सिर्फ दो ही सिरे होते हैं, अच्छाई या बुराई। लेकिन हमारी ये सोच गलत है शायद। क्या हर बुराई वाकई बुरी होती है? क्या हर अच्छाई वाकई अच्छी होती है? अक्सर सच सही और झूठ गलत होता है, पर इस कहानी में सच और झूठ दोनों ही गलत हैं। ' इसी के साथ दिखाई देता है रितिक रोशन का हवा से बातें करते हुए लोगों के साथ मारकाट कर रहे हैंऔर उनके पीछे पुलिस ऑफिसर बने सैफ अली खान पड़े हुए हैं। वहीं ट्रेलर में सैफ अली खान कहते हैं, 'तुम्हें पता है कि हर एन्काउंटर के बाद भी मैं चैन की नींद क्यों सो पाता हूं? क्योंकि हम जानते हैं कि हमने किसी बेगुनाह को नहीं मारा। ' कुल मिलाकर फिल्म का ट्रेलर एक्शन से भरपूर है। फैंस इसे काफी पसंद कर रहे हैं । ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की फिल्म 'विक्रम वेधा' दो हज़ार सत्रह में आई तमिल फिल्म का हिंदी रीमेक है। फिल्म का डायरेक्शन ऑरिजनल फिल्म बनाने वाले पुष्कर-गायत्री ने किया है। विक्रम वेधा को नीरज पांडे द्वारा रिलायंस एंटरटेनमेंट और वाई नॉट स्टूडियोज के सहयोग से उनकी कंपनी फ्राइडे फिल्मवर्क्स के तहत बनाया जा रहा है. यह फिल्म इसी महीने तीस सितंबर को रिलीज होगी। ऑरिजनल तमिल फिल्म में आर माधवन और विजय सेतुपति ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म विक्रम-बेताल की ऐतिहासिक कहानी पर आधारित है, जिसमें एक चालाक गैंगस्टर हर बार एक पुलिसवाले से बचकर भाग निकलता है। इस तरह इस फिल्म में सैफ और ऋतिक को एकसाथ देखना दिलचस्प होगा। विक्रम वेधा को नीरज पांडे द्वारा रिलायंस एंटरटेनमेंट और वाई नॉट स्टूडियोज के सहयोग से उनकी कंपनी फ्राइडे फिल्मवर्क्स के तहत बनाया जा रहा है। यह फिल्म इसी महीने तीस सितंबर को रिलीज होगी।
चाहिए । स्त्री और पुरुष के सम्बन्ध भक्षक-भक्ष्य, भोगी-भोग्य के न होकर', ' स्वस्थ सहयोग के हैं, किंतु आधुनिक साहित्य में नारी-विषयक विकृतियों का विष इस प्रकार बढता चला जाता है कि सभ्य मानवीय व्यवहारों की अपेक्षा उसकी कुचेष्टाओं को ही अधिक प्रश्रय मिल रहा है । अस्तु, भारतीय साहित्य को फासिस्टों की तरह स्त्रियों को गुलाम बनाने की प्रवृत्ति एक ऐसे गहरे गर्त मे पछाड़ देगी, जहाँ से देश की गुलामी की द्रौपदी के चीर की भाँति बढती चली जावेगी, यह निश्चय है । मानवीय न्याय तथा अधिकारों के साथ सामूहिक कल्याण की भावना को प्रगति देनेवाला साहित्य कभी स्त्रियों का अपमान नहीं कर सकता । उसका यथार्थ वर्तमान वस्तुस्थिति का चित्रण मात्र न होकर वस्तुस्थिति की भावी रूपरेखा का सुझाव होता है । वह किसी प्राचीन संस्कृति के विनाश का उतना आग्रह नहीं करता, जितना उसके नव निर्माण का । नवीनता का सम्पन्न कोष विद्वेष तथा दुर्भावना की धरोहर से पूर्ण नहीं हो सकेगा । साहित्य के सारे ज्ञान और सारी शिक्षा की परिपूर्ण प्रेरणा मानव को जीवन की इस विषम अनेक रूपता मे व्याकुल ऐक्य खोज लेने की क्षमता देती है, दूसगे के प्रति सहानुभूतिमय रहने और अपने सकीर्ण व्यक्तित्व के प्रसार करने की सर्वमय भावना उत्पन्न करती है । तभी साहित्य के कार्य, चिंतन और भाव उसके अपने होते हुए भी सब के हो जाते हैं । साहित्य सृजन का यही सबसे सुन्दर पुरस्कार है । और साहित्य की सबसे बड़ी सार्थकता भी यही है ।
चाहिए । स्त्री और पुरुष के सम्बन्ध भक्षक-भक्ष्य, भोगी-भोग्य के न होकर', ' स्वस्थ सहयोग के हैं, किंतु आधुनिक साहित्य में नारी-विषयक विकृतियों का विष इस प्रकार बढता चला जाता है कि सभ्य मानवीय व्यवहारों की अपेक्षा उसकी कुचेष्टाओं को ही अधिक प्रश्रय मिल रहा है । अस्तु, भारतीय साहित्य को फासिस्टों की तरह स्त्रियों को गुलाम बनाने की प्रवृत्ति एक ऐसे गहरे गर्त मे पछाड़ देगी, जहाँ से देश की गुलामी की द्रौपदी के चीर की भाँति बढती चली जावेगी, यह निश्चय है । मानवीय न्याय तथा अधिकारों के साथ सामूहिक कल्याण की भावना को प्रगति देनेवाला साहित्य कभी स्त्रियों का अपमान नहीं कर सकता । उसका यथार्थ वर्तमान वस्तुस्थिति का चित्रण मात्र न होकर वस्तुस्थिति की भावी रूपरेखा का सुझाव होता है । वह किसी प्राचीन संस्कृति के विनाश का उतना आग्रह नहीं करता, जितना उसके नव निर्माण का । नवीनता का सम्पन्न कोष विद्वेष तथा दुर्भावना की धरोहर से पूर्ण नहीं हो सकेगा । साहित्य के सारे ज्ञान और सारी शिक्षा की परिपूर्ण प्रेरणा मानव को जीवन की इस विषम अनेक रूपता मे व्याकुल ऐक्य खोज लेने की क्षमता देती है, दूसगे के प्रति सहानुभूतिमय रहने और अपने सकीर्ण व्यक्तित्व के प्रसार करने की सर्वमय भावना उत्पन्न करती है । तभी साहित्य के कार्य, चिंतन और भाव उसके अपने होते हुए भी सब के हो जाते हैं । साहित्य सृजन का यही सबसे सुन्दर पुरस्कार है । और साहित्य की सबसे बड़ी सार्थकता भी यही है ।
नई दिल्ली, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया ने शनिवार को कहा कि वह दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली नगर निगम के दैनिक वेतनभोगी स्वच्छता कर्मचारियों के वेतन को 13,820 से घटाकर 9,724 किए जाने का कड़ा विरोध करती है। पार्टी ने कहा कि वह मानती है कि दिल्ली की साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मचारियों को उचित वेतन दिया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा भाजपा शासित दिल्ली नगर निगमों के साथ मिलकर सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी कर उनके वेतन को घटाना दिल्ली की स्वच्छता के सवाल के प्रति दोनों दलों की गंभीरता के अभाव का परिचायक है। एक ओर दिल्ली के विधायकों की वेतन में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है तो वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों के वेतन को घटाकर सरकार द्वारा ही निर्धारित मिनिमम वेज से भी कम कर दिया गया है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा, स्वराज इंडिया मांग करती है कि दिल्ली सरकार अपने इस फैसले को तुरंत वापस ले और सफाई कर्मचारियों के पुराने वेतन को पुनः बहाल करे। साथ ही सफाई कर्मचारियों द्वारा उनके कर्तव्य निर्वहन में आ रही बाधाओं पर भी ध्यान देकर उन्हें दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। स्वराज इंडिया दिल्ली की स्वच्छता के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मचारियों के हितों व अधिकारों की रक्षा करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली, एक सितम्बर । राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया ने शनिवार को कहा कि वह दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली नगर निगम के दैनिक वेतनभोगी स्वच्छता कर्मचारियों के वेतन को तेरह,आठ सौ बीस से घटाकर नौ,सात सौ चौबीस किए जाने का कड़ा विरोध करती है। पार्टी ने कहा कि वह मानती है कि दिल्ली की साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मचारियों को उचित वेतन दिया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा भाजपा शासित दिल्ली नगर निगमों के साथ मिलकर सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी कर उनके वेतन को घटाना दिल्ली की स्वच्छता के सवाल के प्रति दोनों दलों की गंभीरता के अभाव का परिचायक है। एक ओर दिल्ली के विधायकों की वेतन में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है तो वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों के वेतन को घटाकर सरकार द्वारा ही निर्धारित मिनिमम वेज से भी कम कर दिया गया है। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा, स्वराज इंडिया मांग करती है कि दिल्ली सरकार अपने इस फैसले को तुरंत वापस ले और सफाई कर्मचारियों के पुराने वेतन को पुनः बहाल करे। साथ ही सफाई कर्मचारियों द्वारा उनके कर्तव्य निर्वहन में आ रही बाधाओं पर भी ध्यान देकर उन्हें दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। स्वराज इंडिया दिल्ली की स्वच्छता के लिए जिम्मेदार सफाई कर्मचारियों के हितों व अधिकारों की रक्षा करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (National Monetization Pipeline) स्कीम पर पुनर्विचार करने की अपील की है। इसके साथ ही स्टालिन ने पीएम मोदी से इस स्कीम को लागू करने से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings) और राज्य सरकारों की राय लेने का भी आग्रह किया है। स्टालिन ने कहा है कि ये उपक्रम देश के औद्योगीकरण एवं आत्मनिर्भरता लक्ष्यों में अहम भूमिका निभाते हैं। आपको बता दें कि दो दिन पहले स्टालिन ने विधानसभा में तर्क दिया था कि लोगों के कल्याण के लिए काम करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचना या पट्टे पर देना देश के लिए अच्छा नहीं है, और वह इस संबंध में पीएम मोदी को पत्र लिखेंगे। स्टालिन ने पत्र में कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संपत्ति सार्वजनिक संपत्ति है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन की घोषणा की, जिसमें पिछले महीने अपनी ब्राउनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों का मुद्रीकरण करने के लिए केंद्र की चार साल की योजना शामिल है। वित्त मंत्री ने पिछले साल के बजट में एनएमपी योजना को लागू करने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा बजट COVID-19 महामारी के अनुरूप है और अर्थव्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती को आर्थिक पुनरुद्धार के अवसर के रूप में लिया गया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन स्कीम पर पुनर्विचार करने की अपील की है। इसके साथ ही स्टालिन ने पीएम मोदी से इस स्कीम को लागू करने से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य सरकारों की राय लेने का भी आग्रह किया है। स्टालिन ने कहा है कि ये उपक्रम देश के औद्योगीकरण एवं आत्मनिर्भरता लक्ष्यों में अहम भूमिका निभाते हैं। आपको बता दें कि दो दिन पहले स्टालिन ने विधानसभा में तर्क दिया था कि लोगों के कल्याण के लिए काम करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचना या पट्टे पर देना देश के लिए अच्छा नहीं है, और वह इस संबंध में पीएम मोदी को पत्र लिखेंगे। स्टालिन ने पत्र में कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संपत्ति सार्वजनिक संपत्ति है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन की घोषणा की, जिसमें पिछले महीने अपनी ब्राउनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों का मुद्रीकरण करने के लिए केंद्र की चार साल की योजना शामिल है। वित्त मंत्री ने पिछले साल के बजट में एनएमपी योजना को लागू करने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा बजट COVID-उन्नीस महामारी के अनुरूप है और अर्थव्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती को आर्थिक पुनरुद्धार के अवसर के रूप में लिया गया।
रांचीः झारखंड में कोरोना के (Covid-19 Jharkhand) सबसे अधिक रांची और पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में हैं। रांची में 16 और जमशेदपुर में 16 मरीज हैं। राज्य में कुल 68 मरीज एक्टिव (Active Patient ) हैं। गुरुवार सुबह बताया गया कि इन 24 घंटों में कोरोना से पांच मरीज स्वस्थ हुए हैं। इसके विपरीत राज्य में कोरोना के सात नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के (Health Sector) अनुसार धनबाद से एक और पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) से छह मरीज मिले हैं। राज्य में कुल कोरोना मरीजों की (Corona Patients) संख्या अब चार लाख, 42 हजार,446 हो चुकी है। इस बीच कोरोना का पता लगाने के लिए जांच जारी है। राज्य में कुल दो करोड़, 27 लाख, 97 हजार, 287 सैंपल की जांच की गयी है। इनमें से 68 सक्रिय केस (Active Case) है। कोरोना से चार लाख, 37 हजार, 48 मरीज ठीक हुए हैं। हालांकि, राज्य में पांच हजार, 330 मरीजों की मौत कोरोना से हुई है। झारखंड में कोरोना (Corona in Jharkhand) का रिकवरी रेट 98. 78 प्रतिशत और मृत्यु दर 1. 20 प्रतिशत है।
रांचीः झारखंड में कोरोना के सबसे अधिक रांची और पूर्वी सिंहभूम में हैं। रांची में सोलह और जमशेदपुर में सोलह मरीज हैं। राज्य में कुल अड़सठ मरीज एक्टिव हैं। गुरुवार सुबह बताया गया कि इन चौबीस घंटाटों में कोरोना से पांच मरीज स्वस्थ हुए हैं। इसके विपरीत राज्य में कोरोना के सात नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार धनबाद से एक और पूर्वी सिंहभूम से छह मरीज मिले हैं। राज्य में कुल कोरोना मरीजों की संख्या अब चार लाख, बयालीस हजार,चार सौ छियालीस हो चुकी है। इस बीच कोरोना का पता लगाने के लिए जांच जारी है। राज्य में कुल दो करोड़, सत्ताईस लाख, सत्तानवे हजार, दो सौ सत्तासी सैंपल की जांच की गयी है। इनमें से अड़सठ सक्रिय केस है। कोरोना से चार लाख, सैंतीस हजार, अड़तालीस मरीज ठीक हुए हैं। हालांकि, राज्य में पांच हजार, तीन सौ तीस मरीजों की मौत कोरोना से हुई है। झारखंड में कोरोना का रिकवरी रेट अट्ठानवे. अठहत्तर प्रतिशत और मृत्यु दर एक. बीस प्रतिशत है।
नई दिल्ली। वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) स्टार द ग्रेट खली का कहना है कि योगा करने से खिलाडि़यों को ओलंपिक में पदक हासिल नहीं हो सकता है और इससे अच्छा पहलवान बनने में भी सहायता नहीं होती। सात फुट एक इंच लंबे भारतीय पहलवान खली ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि योग खिलाडि़यों को ओलंपिक पदक नहीं दिला सकता यदि वह लगातार अपने खेल का अभ्यास करेंगे तो वह पदक जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि योगा सिर्फ बुजुर्ग लोगों के लिए है। हर कोई एक बिस्तर पर बैठकर यह करने लग जाता है। योग को बेकार कहने वाले वाले खली ने स्पष्ट किया कि वह बेकार योग पर विचार नहीं करते। इससे पहले, योगा की आलोचना करने वाले खली ने एक चैनल पर प्रसारित होने वाले बिग बॉस के घर में प्राणायाम किया था और इससे होने वाले फायद के बारे में अपने दोस्तों को जानकारी दी थी ।
नई दिल्ली। वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट स्टार द ग्रेट खली का कहना है कि योगा करने से खिलाडि़यों को ओलंपिक में पदक हासिल नहीं हो सकता है और इससे अच्छा पहलवान बनने में भी सहायता नहीं होती। सात फुट एक इंच लंबे भारतीय पहलवान खली ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि योग खिलाडि़यों को ओलंपिक पदक नहीं दिला सकता यदि वह लगातार अपने खेल का अभ्यास करेंगे तो वह पदक जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि योगा सिर्फ बुजुर्ग लोगों के लिए है। हर कोई एक बिस्तर पर बैठकर यह करने लग जाता है। योग को बेकार कहने वाले वाले खली ने स्पष्ट किया कि वह बेकार योग पर विचार नहीं करते। इससे पहले, योगा की आलोचना करने वाले खली ने एक चैनल पर प्रसारित होने वाले बिग बॉस के घर में प्राणायाम किया था और इससे होने वाले फायद के बारे में अपने दोस्तों को जानकारी दी थी ।
(www. arya-tv. com) दिवालिया हो रहे पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देने से बाज नहीं आ रहा है। अमेरिका के ब्यूरो ऑफ काउंटरटेरिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का आतंकवाद के खिलाफ रवैया सख्त होने के बजाय ढुलमुल ही रहा। उसने दिखावे के नाम पर मंद गति से कार्रवाई की है। इसी का नतीजा है कि साल 2020 की तुलना में 2021 में सामूहिक हत्याओं और आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ। अमेरिकी की कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म- 2021 के मुताबिक, पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और ISI-जैसे आतंकी संगठन पल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आतंकी संगठन लगातार पाकिस्तान के ही लोगों को निशाना बनाकर उनकी सामूहिक हत्याएं कर रहे हैं। पाकिस्तान के बाहर भारत और अन्य देशों में आतंकी साजिश को अंजाम दे रहे और UN-अमेरिकी की आतंकी सूची में शामिल हक्कानी नेटवर्क, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को भी पाकिस्तान में ही पनाह मिली हुई है। पाक ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर पर केस चलाया, लेकिन आतंकी साजिश में कोई कमी नहीं आई। पाकिस्तान में आम चुनाव अक्टूबर में होने की संभावना है। देश में जिस तरह की राजनीतिक अनिश्चतता का माहौल है, ऐसे में आर्थिक संकट और गहरा सकता है। यह आशंका एशिया इलेक्शन आउटलुक 2023 में जताई गई है। वैसे भी पाक कर्ज की किस्त चुकाने में नाकामी की कगार पर है। बिगड़ते आर्थिक हालात में पहले भी हो सकते हैं। गंभीर आर्थिक स्थिति और जल्द चुनाव होने की स्थिति में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के लिए सत्ता की राह खुल सकती है। वह पहले भी लोकलुभावन वादों के साथ सत्ता में आई थी। अगर ऐसा हुआ तो खान और सेना के बीच मुखर विरोध शुरू हो सकता है। इससे संघर्ष और हिंसा बढ़ेगी और पाकिस्तान का आर्थिक संकट गहरा जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया जिसमें भारत के अधिकांश पड़ोसी देश आते हैं, उनमें आतंकवाद को पालने वालों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही हैं। दुनिया में आतंकियों के पनाहगार देशों में काेलंबिया, यमन, लेबनान, लीबिया, इराक, फिलीपींस, सूडान, क्यूबा आदि हैं। पाक को 2018 में, 1998 के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत विशेष चिंता का देश (सीपीसी) नामित किया गया था। 2019, 2020 व 2021 में सीपीसी के रूप में नया स्वरूप दिया गया था। इसके अलावा आतंकी फंडिंग पर नजर रखने और कार्रवाई करने वाले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाक को 2018 में रखा गया था, लेकिन उसने तय बिंदुओं के अनुसार कार्रवाई नहीं की। अमेरिका की कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म में कहा गया है कि भारत ने आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए सख्ती के साथ कार्रवाई की। 2021 में आतंकवाद ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाए। ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ दूसरे क्वाड काउंटर टेररिज्म टेबलटॉप अभ्यास की मेजबानी की। आतंकवाद की जांच से संबंधित अमेरिका के अनुरोध का भारत तुरंत जवाब देता है। इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 को 2019 में संशोधित किया था। कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि भी की है, ताकि आतंकी दबोचे जा सकें।
दिवालिया हो रहे पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देने से बाज नहीं आ रहा है। अमेरिका के ब्यूरो ऑफ काउंटरटेरिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का आतंकवाद के खिलाफ रवैया सख्त होने के बजाय ढुलमुल ही रहा। उसने दिखावे के नाम पर मंद गति से कार्रवाई की है। इसी का नतीजा है कि साल दो हज़ार बीस की तुलना में दो हज़ार इक्कीस में सामूहिक हत्याओं और आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ। अमेरिकी की कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म- दो हज़ार इक्कीस के मुताबिक, पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान , बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और ISI-जैसे आतंकी संगठन पल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आतंकी संगठन लगातार पाकिस्तान के ही लोगों को निशाना बनाकर उनकी सामूहिक हत्याएं कर रहे हैं। पाकिस्तान के बाहर भारत और अन्य देशों में आतंकी साजिश को अंजाम दे रहे और UN-अमेरिकी की आतंकी सूची में शामिल हक्कानी नेटवर्क, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को भी पाकिस्तान में ही पनाह मिली हुई है। पाक ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर पर केस चलाया, लेकिन आतंकी साजिश में कोई कमी नहीं आई। पाकिस्तान में आम चुनाव अक्टूबर में होने की संभावना है। देश में जिस तरह की राजनीतिक अनिश्चतता का माहौल है, ऐसे में आर्थिक संकट और गहरा सकता है। यह आशंका एशिया इलेक्शन आउटलुक दो हज़ार तेईस में जताई गई है। वैसे भी पाक कर्ज की किस्त चुकाने में नाकामी की कगार पर है। बिगड़ते आर्थिक हालात में पहले भी हो सकते हैं। गंभीर आर्थिक स्थिति और जल्द चुनाव होने की स्थिति में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के लिए सत्ता की राह खुल सकती है। वह पहले भी लोकलुभावन वादों के साथ सत्ता में आई थी। अगर ऐसा हुआ तो खान और सेना के बीच मुखर विरोध शुरू हो सकता है। इससे संघर्ष और हिंसा बढ़ेगी और पाकिस्तान का आर्थिक संकट गहरा जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया जिसमें भारत के अधिकांश पड़ोसी देश आते हैं, उनमें आतंकवाद को पालने वालों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही हैं। दुनिया में आतंकियों के पनाहगार देशों में काेलंबिया, यमन, लेबनान, लीबिया, इराक, फिलीपींस, सूडान, क्यूबा आदि हैं। पाक को दो हज़ार अट्ठारह में, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत विशेष चिंता का देश नामित किया गया था। दो हज़ार उन्नीस, दो हज़ार बीस व दो हज़ार इक्कीस में सीपीसी के रूप में नया स्वरूप दिया गया था। इसके अलावा आतंकी फंडिंग पर नजर रखने और कार्रवाई करने वाले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाक को दो हज़ार अट्ठारह में रखा गया था, लेकिन उसने तय बिंदुओं के अनुसार कार्रवाई नहीं की। अमेरिका की कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म में कहा गया है कि भारत ने आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए सख्ती के साथ कार्रवाई की। दो हज़ार इक्कीस में आतंकवाद ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाए। ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ दूसरे क्वाड काउंटर टेररिज्म टेबलटॉप अभ्यास की मेजबानी की। आतंकवाद की जांच से संबंधित अमेरिका के अनुरोध का भारत तुरंत जवाब देता है। इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम , एक हज़ार नौ सौ सरसठ को दो हज़ार उन्नीस में संशोधित किया था। कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि भी की है, ताकि आतंकी दबोचे जा सकें।
गरियाबंद. स्वास्थ्य विभाग में एएनएम की फर्जी भर्ती पर कार्रवाई न होने से नाराज युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कल जल सत्याग्रह करेंगे. कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इसकी जानकारी दी. उन्होंने 24 घंटे में मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कारर्वाई की मांग की. युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीएचएमओ को बर्खास्त करने की मांग की है, मांग पूरी न होने पर कल दोपहर गरियाबंद के छिंद तालाब में सत्याग्रह करने की चेतावनी दी है. बिन्द्रावनगढ़ विधानसभा अध्यक्ष अमित गिरि ने इस आशय का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा. कार्यकर्ता इसके पहले भी अर्धनग्न प्रदर्शन करने के साथ साथ ज्ञापन भी दे चुके हैं. फिर भी जिला प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया. युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 14 एएनएम के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था जिसकी परीक्षा व्यापंम द्वारा ली गई थी. व्यापंम ने 41 लोगों की मेरिट लिस्ट सौंपी थी. सीएचएमओ अरुण रात्रे ने पहले तो 14 लोगों की भर्ती कर ली मगर बाद में शेष बचे 27 लोगों को भी नियमविरुद्ध भर्ती कर लिया. इसी अनियमितता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लंबे अरसे से युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कर रहे हैं. गरियाबंद. स्वास्थ्य विभाग में एएनएम की फर्जी भर्ती पर कार्रवाई न होने से नाराज युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कल जल सत्याग्रह करेंगे. कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इसकी जानकारी दी.
गरियाबंद. स्वास्थ्य विभाग में एएनएम की फर्जी भर्ती पर कार्रवाई न होने से नाराज युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कल जल सत्याग्रह करेंगे. कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इसकी जानकारी दी. उन्होंने चौबीस घंटाटे में मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कारर्वाई की मांग की. युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीएचएमओ को बर्खास्त करने की मांग की है, मांग पूरी न होने पर कल दोपहर गरियाबंद के छिंद तालाब में सत्याग्रह करने की चेतावनी दी है. बिन्द्रावनगढ़ विधानसभा अध्यक्ष अमित गिरि ने इस आशय का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा. कार्यकर्ता इसके पहले भी अर्धनग्न प्रदर्शन करने के साथ साथ ज्ञापन भी दे चुके हैं. फिर भी जिला प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया. युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित चौदह एएनएम के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था जिसकी परीक्षा व्यापंम द्वारा ली गई थी. व्यापंम ने इकतालीस लोगों की मेरिट लिस्ट सौंपी थी. सीएचएमओ अरुण रात्रे ने पहले तो चौदह लोगों की भर्ती कर ली मगर बाद में शेष बचे सत्ताईस लोगों को भी नियमविरुद्ध भर्ती कर लिया. इसी अनियमितता की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लंबे अरसे से युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कर रहे हैं. गरियाबंद. स्वास्थ्य विभाग में एएनएम की फर्जी भर्ती पर कार्रवाई न होने से नाराज युवक कांग्रेस कार्यकर्ता कल जल सत्याग्रह करेंगे. कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इसकी जानकारी दी.
जिले के हलधरपुर थाना क्षेत्र के गहना ग्राम पंचायत अंतर्गत अवरनापुर गांव में हाई वोल्टेज विद्युत की चपेट में आने से एक किशोर की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं उसके मां-बाप गंभीर रूप से झुलस गए। जिनका उपचार मुख्यालय स्थित एक निजी चिकित्सालय में चल रहा है। शनिवार की रात्रि 1. 30 बजे के लगभग गांव में जब आंधी और बूंदाबांदी शुरू हुई तो उसी दौरान गांव के ट्रांसफार्मर में तेज धमाका हुआ। उसी दौरान विद्युत तार में हाई वोल्टेज विद्युत प्रवाहित होने लगा। जिसकी चपेट में आकर 13 वर्षीय हर्षित यादव पुत्र राजेश यादव आ गया। हर्षित यादव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वह सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। वही मृतक हर्षित को चारपाई से नीचे गिरा पड़ा देख कर उसके पिता राजेश यादव और उसकी मां सुनीता यादव जब उसे उठाने का प्रयास किए तो वह भी हाई वोल्टेज विद्युत की चपेट में आकर के गंभीर रूप से झुलस गए। परिजनों ने सभी को तत्काल फातिमा चिकित्सालय ले गए ,जहां पर हर्षित को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि उसके पिता राजेश यादव और उसकी मां सुनीता यादव को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। परंतु उनका उपचार मुख्यालय स्थित एक निजी चिकित्सालय में चल रहा है। इस घटना से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।
जिले के हलधरपुर थाना क्षेत्र के गहना ग्राम पंचायत अंतर्गत अवरनापुर गांव में हाई वोल्टेज विद्युत की चपेट में आने से एक किशोर की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं उसके मां-बाप गंभीर रूप से झुलस गए। जिनका उपचार मुख्यालय स्थित एक निजी चिकित्सालय में चल रहा है। शनिवार की रात्रि एक. तीस बजे के लगभग गांव में जब आंधी और बूंदाबांदी शुरू हुई तो उसी दौरान गांव के ट्रांसफार्मर में तेज धमाका हुआ। उसी दौरान विद्युत तार में हाई वोल्टेज विद्युत प्रवाहित होने लगा। जिसकी चपेट में आकर तेरह वर्षीय हर्षित यादव पुत्र राजेश यादव आ गया। हर्षित यादव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वह सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था। वही मृतक हर्षित को चारपाई से नीचे गिरा पड़ा देख कर उसके पिता राजेश यादव और उसकी मां सुनीता यादव जब उसे उठाने का प्रयास किए तो वह भी हाई वोल्टेज विद्युत की चपेट में आकर के गंभीर रूप से झुलस गए। परिजनों ने सभी को तत्काल फातिमा चिकित्सालय ले गए ,जहां पर हर्षित को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि उसके पिता राजेश यादव और उसकी मां सुनीता यादव को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। परंतु उनका उपचार मुख्यालय स्थित एक निजी चिकित्सालय में चल रहा है। इस घटना से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।
Cyclonic Storm Biparjoy Updates: चक्रवात बिपरजॉय और तेज हो गया है. अब यह गुजरात के सौराष्ट्र तट की ओर बढ़ रहा है. आईएमडी ने गुजरात के कच्छ, द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, राजकोट, जूनागढ़ और मोरबी जिलों में 14 और 15 जून को भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है. साइक्लोन बिपरजॉय के 15 जून को कच्छ के मांडवी और पाकिस्तान के कराची के बीच तट से टकराने की संभावना है. अंजू ने नसरुल्लाह से शादी की या नहीं? शख्स ने बताई 'प्री वेडिंग शूट की सच्चाई' Anju Nasrullah Love Story : News18 India पर Anju के पति अरविंद ने कर दिया चौंकाने वाला ख़ुलासा?
Cyclonic Storm Biparjoy Updates: चक्रवात बिपरजॉय और तेज हो गया है. अब यह गुजरात के सौराष्ट्र तट की ओर बढ़ रहा है. आईएमडी ने गुजरात के कच्छ, द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, राजकोट, जूनागढ़ और मोरबी जिलों में चौदह और पंद्रह जून को भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है. साइक्लोन बिपरजॉय के पंद्रह जून को कच्छ के मांडवी और पाकिस्तान के कराची के बीच तट से टकराने की संभावना है. अंजू ने नसरुल्लाह से शादी की या नहीं? शख्स ने बताई 'प्री वेडिंग शूट की सच्चाई' Anju Nasrullah Love Story : Newsअट्ठारह India पर Anju के पति अरविंद ने कर दिया चौंकाने वाला ख़ुलासा?
भोर हूँ, विभोर हूँ, शान्ति का शोर हूँ, पास हूँ, एहसास हूँ, रात का निकास हूँ। गीत हूँ, संगीत हूँ, शब्द का मनमीत हूँ, भय से, अचेत हूँ, पर वक़्त से भयभीत हूँ। वाद हूँ, संवाद हूँ, बिन बात का विवाद हूँ, न जाति से, न धर्म से, हर कौम से आबाद हूँ। रंग हूँ, बेढंग हूँ, परछाइयों के संग हूँ, बिखरे हुए सुराख में, घुल जाऊँ, तो प्रसंग हूँ। रक्त की फुहार हूँ, रूह की पुकार हूँ, आफत की मझधार में, ठहरा हुआ विचार हूँ। ज्ञान हूँ, वरदान हूँ, अपमान से अंजान हूँ, रूप से, प्रारूप तक, सम्मान का मेहमान हूँ। सम्पूर्ण हूँ, सर्वत्र हूँ, आकांक्षाओं का अस्त्र हूँ, अर्थ से, अनर्थ तक, आशाओं से सशस्त्र हूँ। न साधू हूँ, न संत हूँ, न इतिहास का कोई ग्रन्थ हूँ, मैं अल्प हूँ, अत्यंत हूँ, मैं अंत हूँ, अनंत हूँ। मैं अंत हूँ, अनंत हूँ, मैं अंत हूँ, अनंत हूँ।
भोर हूँ, विभोर हूँ, शान्ति का शोर हूँ, पास हूँ, एहसास हूँ, रात का निकास हूँ। गीत हूँ, संगीत हूँ, शब्द का मनमीत हूँ, भय से, अचेत हूँ, पर वक़्त से भयभीत हूँ। वाद हूँ, संवाद हूँ, बिन बात का विवाद हूँ, न जाति से, न धर्म से, हर कौम से आबाद हूँ। रंग हूँ, बेढंग हूँ, परछाइयों के संग हूँ, बिखरे हुए सुराख में, घुल जाऊँ, तो प्रसंग हूँ। रक्त की फुहार हूँ, रूह की पुकार हूँ, आफत की मझधार में, ठहरा हुआ विचार हूँ। ज्ञान हूँ, वरदान हूँ, अपमान से अंजान हूँ, रूप से, प्रारूप तक, सम्मान का मेहमान हूँ। सम्पूर्ण हूँ, सर्वत्र हूँ, आकांक्षाओं का अस्त्र हूँ, अर्थ से, अनर्थ तक, आशाओं से सशस्त्र हूँ। न साधू हूँ, न संत हूँ, न इतिहास का कोई ग्रन्थ हूँ, मैं अल्प हूँ, अत्यंत हूँ, मैं अंत हूँ, अनंत हूँ। मैं अंत हूँ, अनंत हूँ, मैं अंत हूँ, अनंत हूँ।
नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने शुRवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के उस फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें सत्याग्रह के दौरान बिजली बिल न भरने वालों के बिल 50 फीसदी माफ कर दिए थे। इस तरह के 24,036 बिजली उपभोक्ता थे, जिन्हें यह छूट दी गई थी। इन उपभोक्ताओं ने आम आदमी पार्टी के बिजली सत्याग्रह के दौरान अपने बिजली बिल के भुगतान करने बंद कर दिए थे। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही इस मसले पर दस दिन के भीतर दिल्ली सरकार से जवाब भी मांगा है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सरकार को एक नोटिस जारी किया और 18 मार्च तक जवाब देने के लिए कहा। गौरतलब है कि दिल्ली कैबिनेट ने 12 फरवरी को बिजली सत्याग्रह (अक्टूबर 2012 से मई 2013 तक) के दौरान बिजली बिल न भरने वाले 24 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के आधे बिल के साथ जुर्माना भी माफ करने की घोषणा की थी। यह घोषणा करते समय यह कहा गया था कि इस माफी से सरकारी खजाने पर करीब 6 हजार करोड रूपये का बोझ पडेगा। 12 फरवरी को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली बिल पर 13 करोड का डिफाल्ट माफ करने का फैसला किया था। अरविंद केजरीवाल ने उन लोगों का बिल माफ करने का फैसला किया था जो उनके धरने के दौरान बिजली का बिल नहीं भर पाए थे।
नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने शुRवार को आम आदमी पार्टी सरकार के उस फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिसमें सत्याग्रह के दौरान बिजली बिल न भरने वालों के बिल पचास फीसदी माफ कर दिए थे। इस तरह के चौबीस,छत्तीस बिजली उपभोक्ता थे, जिन्हें यह छूट दी गई थी। इन उपभोक्ताओं ने आम आदमी पार्टी के बिजली सत्याग्रह के दौरान अपने बिजली बिल के भुगतान करने बंद कर दिए थे। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही इस मसले पर दस दिन के भीतर दिल्ली सरकार से जवाब भी मांगा है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सरकार को एक नोटिस जारी किया और अट्ठारह मार्च तक जवाब देने के लिए कहा। गौरतलब है कि दिल्ली कैबिनेट ने बारह फरवरी को बिजली सत्याग्रह के दौरान बिजली बिल न भरने वाले चौबीस हजार से अधिक उपभोक्ताओं के आधे बिल के साथ जुर्माना भी माफ करने की घोषणा की थी। यह घोषणा करते समय यह कहा गया था कि इस माफी से सरकारी खजाने पर करीब छः हजार करोड रूपये का बोझ पडेगा। बारह फरवरी को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली बिल पर तेरह करोड का डिफाल्ट माफ करने का फैसला किया था। अरविंद केजरीवाल ने उन लोगों का बिल माफ करने का फैसला किया था जो उनके धरने के दौरान बिजली का बिल नहीं भर पाए थे।
चस्का चोरी का : १३६ बेबस : मैं बहुत ईमानदार आदमी हूं डॉक्टर साहब ! और मेरे बाबा की ईमानदारी तो दूर-दूर तक मशहूर थी । उस जमाने के तहसीलदार आप जानो वादशाह होते थे। फिर भी दौरे पर जाते तो मजाल कि किसी के यहाँ पानी भी पोते । घोडी को भी घर आकर दाना-पानी नसीव होता । डॉक्टर : ओह आई सी । तनख्वाह मे पूरा पड़ जाता था । वेबसः नही भी पडता था, तो मन मार लेते। कई एक चीजो को तरसने भी रहते। पर कभी किसी के आगे किसी चीज़ के लिए हाथ नहीं फैलाए । डॉक्टर : तो अब क्या हो गया ? वेबसः कह नहीं सकता। अब आप में क्या छिपाता । शर्म भी आती है। नदामत भी होती है, फिर भी जाने क्यों बेबस होकर यही कोई छोटी-मोटी चीज चुराने से पीछे नही हटता, चाहे वह मेरे किसी काम को न हो। इसका इलाज कर देंगी आप ? डॉक्टर : क्यो नही (खट खट ) आइए । ( कुछ लोग अन्दर आते है) इनसे मिल चुके हैं आप ? बेबस : अरे अरे आप मैनेजर साहब... मैनेजर : चमचा चुराते हुए तकलीफ नही हुई आपको । शर्म आनी चाहिए । लाइए, चुकाइए अपना बिल और जाइए और फिर कभी यहाँ क़दम रखा तो हमसे बुरा कोई न होगा । वेबसः नहीं नहीं नहीं मिलना मुझे इनमे तुम तुम कप्तान ! यह चार पैसे को माचिस चुराई है मैंने ! यह टके टके के बल्ब ! यह सड़ा-मा साबुन ! कप्तानः आप ऐने नहीं मानेंगे। मैं अभी सिपाही बुलवाता हूँ। (सीटी) यह थैला हिरामत में ले ली । वेबसः खुदा के लिए मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ! आआप' बाबा बॉस ! बॉस : शर्म आनी चाहिए तुम्हें । तुम्हारे अच्छे रिकॉर्ड को देखकर आज यही रफा-दफा करता हूँ ।
चस्का चोरी का : एक सौ छत्तीस बेबस : मैं बहुत ईमानदार आदमी हूं डॉक्टर साहब ! और मेरे बाबा की ईमानदारी तो दूर-दूर तक मशहूर थी । उस जमाने के तहसीलदार आप जानो वादशाह होते थे। फिर भी दौरे पर जाते तो मजाल कि किसी के यहाँ पानी भी पोते । घोडी को भी घर आकर दाना-पानी नसीव होता । डॉक्टर : ओह आई सी । तनख्वाह मे पूरा पड़ जाता था । वेबसः नही भी पडता था, तो मन मार लेते। कई एक चीजो को तरसने भी रहते। पर कभी किसी के आगे किसी चीज़ के लिए हाथ नहीं फैलाए । डॉक्टर : तो अब क्या हो गया ? वेबसः कह नहीं सकता। अब आप में क्या छिपाता । शर्म भी आती है। नदामत भी होती है, फिर भी जाने क्यों बेबस होकर यही कोई छोटी-मोटी चीज चुराने से पीछे नही हटता, चाहे वह मेरे किसी काम को न हो। इसका इलाज कर देंगी आप ? डॉक्टर : क्यो नही आइए । इनसे मिल चुके हैं आप ? बेबस : अरे अरे आप मैनेजर साहब... मैनेजर : चमचा चुराते हुए तकलीफ नही हुई आपको । शर्म आनी चाहिए । लाइए, चुकाइए अपना बिल और जाइए और फिर कभी यहाँ क़दम रखा तो हमसे बुरा कोई न होगा । वेबसः नहीं नहीं नहीं मिलना मुझे इनमे तुम तुम कप्तान ! यह चार पैसे को माचिस चुराई है मैंने ! यह टके टके के बल्ब ! यह सड़ा-मा साबुन ! कप्तानः आप ऐने नहीं मानेंगे। मैं अभी सिपाही बुलवाता हूँ। यह थैला हिरामत में ले ली । वेबसः खुदा के लिए मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ! आआप' बाबा बॉस ! बॉस : शर्म आनी चाहिए तुम्हें । तुम्हारे अच्छे रिकॉर्ड को देखकर आज यही रफा-दफा करता हूँ ।
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में किन देशों को मलेरिया मुक्त प्रमाणित किया है? हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अज़रबैजान और ताजिकिस्तान को मलेरिया मुक्त देशों के रूप में प्रमाणित किया। वे अपने क्षेत्रों में एनोफिलीज मच्छर जनित बीमारी को खत्म करने में सफल रहे। 2. कौन सा देश 'मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' (International Conference on Human-Wildlife Conflict and Coexistence) का मेजबान है? मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इस वर्ष ऑक्सफोर्ड, यूनाइटेड किंगडम में आयोजित किया जा रहा है। यह प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN), संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और अन्य द्वारा आयोजित किया जा रहा है। 3. IMF की Extended Fund Facility को हाल ही में किस देश के लिए मंज़ूरी दी गई है? अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की विस्तारित निधि सुविधा उन देशों के लिए अभिप्रेत है जो संरचनात्मक कमजोरी के कारण गंभीर मध्यम अवधि के BoP मुद्दों का सामना कर रहे हैं जिन्हें संबोधित करने के लिए समय की आवश्यकता होती है। रूस के साथ युद्ध के बीच यूक्रेन को तत्काल धन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हाल ही में इसे मंजूरी दी गई थी। 4. 'शेंगेन क्षेत्र' (Schengen area) किस संघ से जुड़ा है? यूरोपीय संघ के सदस्यों ने हाल ही में शेंगेन क्षेत्र (Schengen area) में वीज़ा आवेदन प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने के लिए शेंगेन वीज़ा को डिजिटाइज़ करने का निर्णय लिया है। शेंगेन क्षेत्र 27 यूरोपीय संघ के देशों का एक क्षेत्र है जिसने आधिकारिक तौर पर सभी पासपोर्ट और अन्य प्रकार के सीमा नियंत्रण को अपनी पारस्परिक सीमाओं पर समाप्त कर दिया है। 5. किस देश ने हाल ही में एक नए संविधान (अप्रैल 2023) पर जनमत संग्रह कराया? उज़्बेकिस्तान ने 30 अप्रैल को एक नए संविधान पर जनमत संग्रह कराया। यह संविधान उज़्बेकिस्तान को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक, कानूनी और सामाजिक राज्य घोषित करने का प्रयास करता है। संविधान व्यक्तिगत अधिकारों से लेकर संसद की शक्तियों के विस्तार तक के नए नियमों को भी स्थापित करता है।
एक. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में किन देशों को मलेरिया मुक्त प्रमाणित किया है? हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अज़रबैजान और ताजिकिस्तान को मलेरिया मुक्त देशों के रूप में प्रमाणित किया। वे अपने क्षेत्रों में एनोफिलीज मच्छर जनित बीमारी को खत्म करने में सफल रहे। दो. कौन सा देश 'मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' का मेजबान है? मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इस वर्ष ऑक्सफोर्ड, यूनाइटेड किंगडम में आयोजित किया जा रहा है। यह प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ , संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और अन्य द्वारा आयोजित किया जा रहा है। तीन. IMF की Extended Fund Facility को हाल ही में किस देश के लिए मंज़ूरी दी गई है? अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की विस्तारित निधि सुविधा उन देशों के लिए अभिप्रेत है जो संरचनात्मक कमजोरी के कारण गंभीर मध्यम अवधि के BoP मुद्दों का सामना कर रहे हैं जिन्हें संबोधित करने के लिए समय की आवश्यकता होती है। रूस के साथ युद्ध के बीच यूक्रेन को तत्काल धन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हाल ही में इसे मंजूरी दी गई थी। चार. 'शेंगेन क्षेत्र' किस संघ से जुड़ा है? यूरोपीय संघ के सदस्यों ने हाल ही में शेंगेन क्षेत्र में वीज़ा आवेदन प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने के लिए शेंगेन वीज़ा को डिजिटाइज़ करने का निर्णय लिया है। शेंगेन क्षेत्र सत्ताईस यूरोपीय संघ के देशों का एक क्षेत्र है जिसने आधिकारिक तौर पर सभी पासपोर्ट और अन्य प्रकार के सीमा नियंत्रण को अपनी पारस्परिक सीमाओं पर समाप्त कर दिया है। पाँच. किस देश ने हाल ही में एक नए संविधान पर जनमत संग्रह कराया? उज़्बेकिस्तान ने तीस अप्रैल को एक नए संविधान पर जनमत संग्रह कराया। यह संविधान उज़्बेकिस्तान को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक, कानूनी और सामाजिक राज्य घोषित करने का प्रयास करता है। संविधान व्यक्तिगत अधिकारों से लेकर संसद की शक्तियों के विस्तार तक के नए नियमों को भी स्थापित करता है।
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS)) सेट पीटर्सबर्गः सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के हिस्से के रूप में एक ऊर्जा पैनल आयोजित किया गया। रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी निदेशक इगोर सेचिन ने इस कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसका नाम था : एनर्जी मार्केट में सदोम और अमोरा : भगवान का क्रोध या संगठित अराजकता? यदि आप कर सकते हैं तो स्वयं को बचाएं। उन्होंने इस रिपोर्ट में एनर्जी ट्रांजिशन और जलवायु परिवर्तन का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक वित्तीय और आर्थिक प्रणालियों की अस्थिरता, अमेरिकी बैंकिंग संकट और आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर की घटती भूमिका पर विशेष बात की। सेचिन ने अभूतपूर्व बाहरी चुनौतियों के समय रूसी ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता में सुधार के लिए एक रोडमैप भी प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में सीएनपीसी के अध्यक्ष दाई हौलियांग; वालप्रो इंडिया के प्रबंध निदेशक गोविंदा कोटिस सतीश; आईसीईएफ (कूल अर्थ फोरम के लिए नवाचार), जापानी सरकार की एक गैर-लाभकारी कम कार्बन प्रौद्योगिकी पहल के बोर्ड के अध्यक्ष; 2007 से 2011 तक अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक नोबुओ तनाका; अजरबैजान गणराज्य की स्टेट ऑयल कंपनी के अध्यक्ष रोवशन नजफ; चीन के उपाध्यक्ष और एशिया प्रशांत के प्रमुख विश्वविद्यालय, सिंघुआ विश्वविद्यालय, चीनी विज्ञान अकादमी के सदस्य जियांग पिक्स्यू; ऑयल एंड पेट्रोलियम होल्डिंग इंटरनेशनल रिसोर्सेज (ओपीएचआईआर) के अध्यक्ष और सीईओ प्रेडो ए. एक्विनो जूनियर; मार्टिन वीवोरोव्स्की और केन्या नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ और प्रबंध निदेशक लेपरान गिदोन ओले मोरिंथैट ने हिस्सा लिया। एनर्जी पैनल में वेनेजुएला के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी हिस्सा लिया जिसका नेतृत्व सेंट्रल बैंक के प्रमुख ने किया। साथ ही चीन, अजरबैजान, मंगोलिया, इंडोनेशिया, निकारागुआ और ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल ने भी इसमें हिस्सा लिया। निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओटेर्गा के पुत्र लॉरेनियानो और डेनियल भी मौजूद थे। एनर्जी पैनल का संचालन रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के शिक्षाविद और रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के विश्व अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संस्थान के अध्यक्ष अलेक्जेंडर डायनकिन ने किया। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
) सेट पीटर्सबर्गः सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के हिस्से के रूप में एक ऊर्जा पैनल आयोजित किया गया। रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी निदेशक इगोर सेचिन ने इस कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसका नाम था : एनर्जी मार्केट में सदोम और अमोरा : भगवान का क्रोध या संगठित अराजकता? यदि आप कर सकते हैं तो स्वयं को बचाएं। उन्होंने इस रिपोर्ट में एनर्जी ट्रांजिशन और जलवायु परिवर्तन का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक वित्तीय और आर्थिक प्रणालियों की अस्थिरता, अमेरिकी बैंकिंग संकट और आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर की घटती भूमिका पर विशेष बात की। सेचिन ने अभूतपूर्व बाहरी चुनौतियों के समय रूसी ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता में सुधार के लिए एक रोडमैप भी प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में सीएनपीसी के अध्यक्ष दाई हौलियांग; वालप्रो इंडिया के प्रबंध निदेशक गोविंदा कोटिस सतीश; आईसीईएफ , जापानी सरकार की एक गैर-लाभकारी कम कार्बन प्रौद्योगिकी पहल के बोर्ड के अध्यक्ष; दो हज़ार सात से दो हज़ार ग्यारह तक अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक नोबुओ तनाका; अजरबैजान गणराज्य की स्टेट ऑयल कंपनी के अध्यक्ष रोवशन नजफ; चीन के उपाध्यक्ष और एशिया प्रशांत के प्रमुख विश्वविद्यालय, सिंघुआ विश्वविद्यालय, चीनी विज्ञान अकादमी के सदस्य जियांग पिक्स्यू; ऑयल एंड पेट्रोलियम होल्डिंग इंटरनेशनल रिसोर्सेज के अध्यक्ष और सीईओ प्रेडो ए. एक्विनो जूनियर; मार्टिन वीवोरोव्स्की और केन्या नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ और प्रबंध निदेशक लेपरान गिदोन ओले मोरिंथैट ने हिस्सा लिया। एनर्जी पैनल में वेनेजुएला के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी हिस्सा लिया जिसका नेतृत्व सेंट्रल बैंक के प्रमुख ने किया। साथ ही चीन, अजरबैजान, मंगोलिया, इंडोनेशिया, निकारागुआ और ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल ने भी इसमें हिस्सा लिया। निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओटेर्गा के पुत्र लॉरेनियानो और डेनियल भी मौजूद थे। एनर्जी पैनल का संचालन रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के शिक्षाविद और रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के विश्व अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संस्थान के अध्यक्ष अलेक्जेंडर डायनकिन ने किया। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
यूं तो सिल्वर स्क्रीन पर हम कई ऐसे कैरेक्टर्स देखते है जो कि काल्पनिक होते है. लेकिन कहीं ना कहीं हम उनसे जुड़ाव महसूस करते है. जब हम काल्पनिक पात्रों में ही वास्तविकता ढूंढने लगते है तो बात अगर रीयल कैरेक्टर की हो तो बात अलग ही होगी. अब देखिए बॉलीवुड में तो रियल लाईफ़ कैरेक्टर से प्रेरित होकर कई किरदार गढ़े जा रहे है जिन्हें पसंद भी खूब किया जा रहा है. भारतीय सिनेमा की शुरुवात में ही मशहूर ऐतिहासिक पात्रों को लेकर कई फ़िल्में बनीं जो कि सफल भी रही. आज भी कई फ़िल्मकार को प्रेरित करने में रियल लाईफ किरदार सफल रहे है, चाहे वो सोशल एक्टिविस्ट हो या फिर खेल या फ़िल्म से जुड़ी मशहूर हस्ती या फिर एक आम आदमी. हाल ही में सक्सेस के कई रिकार्ड तोड़ रही फ़िल्म बजरंगी भाईजान में भी नवाफजुद्दीन सिद्दकी ने रियल लाईफ से इंस्पायर कैरेक्टर निभाया है. लिस्ट लंबी है कई रियल लाईफ किरदार बॉलीवुड फ़िल्मों की प्रेरणा बनीं है. आईए देखते है असली पात्रों पर गढ़ी गई फ़िल्मों के बारे में. बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकार्ड तोड़ रही है फिल्म बजरंगी भाईजान में पाकिस्तानी पत्रकार चांद नवाब को इन्सपिरेशन बनाया गया है जिन्होंने कभी एक ही बात को 20 बार दोहराया था. इनका वीडियो युट्युब पर वायरल हो गया था. इस कॉमिक सिचुएशन को बड़े एक बार फिर दोहराया है नवाजुद्दिन सिद्दकी ने जिन्होंने इस फ़िल्म में एक पत्रकार का रोल किया है जो कि चांद नवाब से प्रेरित बताया जा रहा है. हाल में रीलिज़ हुई फ़िल्म हवाईजादा में आयुषमान खुराना ने शिवकर बापूजी तलपड़े का किरदार निभाया था. वैसे तो हवाई जहाज के इनोवेशन का क्रेडिट राइट ब्रदर्स को दिया जाता है जिन्होंने 1903 में ये एरोप्लेन का अविष्कार किया था. फ़िल्म 'हवाईजादा' में बताया गया है कि शिवकर बापूजी तलपदे ने राइट ब्रदर्स से आठ वर्ष पहले 1895 में पहला प्लेन बना दिया था. इस विमान का नाम मारुतसखा था. ये फ़िल्म बेस्ड थी शाहिद आजमी की लाईफ पर जो कि ह्युमन राईट एक्टिविस्ट और एक वकिल थे जिनकी साल 2010 में हत्या कर दी गई थी. इस फ़िल्म को टोरंटो फ़िल्म फेस्टीवल में भी प्रदर्शित किया गया था. रियल लाईफ से इंस्पायर इस फ़िल्म में राजकुमार राव ने शाहिद का रोल किया था. प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम ने एक महिला बॉक्सर का रोल प्ले किया था. जो कि विश्व चैम्पीयन रह चुकी है इस फिल्म में मैरी कॉम के एक बॉक्सर के तौर पर संघर्ष को दिखाया गया है और साथ ही ये दिखाया गया है कि शादी के बाद भी कोई महिला कैसे सक्सेस पा सकती है. इस फ़िल्म में फरहान अख्तर ने एथलिट का रोल प्ले किया था जो कि एथलिट मिल्खा सिंह के किरदार से इन्सपायर था. जो कि एक नेशनल चैम्पियन रनर और ओलम्पियन थे. रियल लाईफ से इन्सपायर इस फि़ल्म ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की जिसकी वजह से और भी फ़िल्ममेकर्स को रियल लाईफ से इन्सपायर फ़िल्म बनाने की प्रेरणा मिली. फ्लाईंग सिख के किरदार के लिए फरहान अख्तर को काफी तारीफे मिली. ये फ़िल्म पान सिंह नाम के एक डाकू के जीवन पर बनीं थी. पान सिंह तोमर इंडियन आर्मी में काम कर चुके थे और साथ ही नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल विनर भी थे इसके बावजूद भी इसे हालात की मार ही कहेंगे कि उन्हें अपनी जमीन ही जमीन को पाने के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली और आखिरकार उन्हें अपना अधिकार पाने के लिए डाकू बनना पड़ा. पान सिंह का रोल इरफान खान ने निभाया था. इस फ़िल्म को शुरुआत कुछ खास नहीं मिली थी लेकिन क्रिटीकली एप्रिशिएट किए जाने के बाद इस फ़िल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ने रफ्तार पकड़ी. चंबल के बागी डाकू के रोल के इरफान खान को कई अवार्ड्स भी मिले थे. इस फ़िल्म में रणदीप हुड़ा ने फ़ेमस पेंटर राजा रवि वर्मा का रोल किया था. राजा रवि वर्मा 19 वीं सदी के एक ऐसे पेंटर थे जिन्होनें अपने ब्रश और रंगो के सहारे एक स्त्री के विविध रुपों को केनवस पर उतारा था. राजा रवी वर्मा दुनिया के मशहूर पेंटर्स में से एक है. इस फ़िल्म के लिए विद्या बालन ने पहली बार सिल्वर स्क्रिन पर जमकर एक्सपोज किया था. वजह थी रोल की डिमांड इस फ़िल्म में उन्होने साउथ की एक्ट्रेस सिल्क स्मिता का रोल किया था जो कि अपनी बोल्ड मूवीज की बदौलत काफी मशहूर बन गई थी लेकिन अपनी जिंदगी अच्छी तरह से जीने से पहले ही वो दुनिया से कूच कर गई माना जाता है कि उन्होने आत्महत्या की थी.इस फ़िल्म के लिए विद्या को नेशनल अवार्ड भी मिला था. कहा जाता है कि ये फ़िल्म महेश भट्ट और परवीन बॉबी की रियल लव स्टोरी पर बेस्ड थी. इस फ़िल्म में परवीन बॉबी ने एक सिज़नोफ्रेनिक पेंशेट का रोल किया था. कहा जाता है कि ये फ़िल्म धीरुभाई अंबानी की लाईफ से इन्सपायर थी जिन्होंने एक आम आदमी से भारत के सबसे मशहूर और अमिर बिजनेसमेन बनने का सफर तय किया था. अभिषेक और ऐश की जोड़ी से सजी इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा परफार्म किया था. ये दोनों ही फ़िल्में क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित थी साथ ही राजगुरु और सुखदेव जो कि आजादी की लड़ाई में उनके प्रमुख सहयोगी थे इनके योगदान को भी इस फि़ल्म में दिखाया गया था. शहीद में मनोज कुमार ने तो वहीं लिजेंड ऑफ भगत सिंह में अजय देवगन ने भगत सिंह का रोल प्ले किया था. इस फ़िल्म के लिए अजय देवगन को जख्म के बाद दूसरा नेशनल अवार्ड मिला था. जाती हैं. इस फिल्म में सीमा बिस्वास ने फूलन देवी का रोल प्ले किया था. जो अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेने के लिए डकैत बन जाती हैं बाद में सरेंडर करके पॉलिटिक्स में आती है. यानि इस फ़िल्म में एक बागी से राजनैतिक बनने के सफर को दिखाया गया है. फ़िल्म जन्नत में एक बुकी का किरदार निभाने के बाद इमरान हाशमी एक क्रिकेटर का रोल प्ले करने जा रहे है. अजहर नाम की फ़िल्म में वो क्रिकेटर अजहरउद्दीन का रोल प्ले करने वाले है जिनका करियर मैच फ़िक्सिंग के आरोप लगने के बाद एकदम से ढलान पर आ गया था. कहीं कोई रियल किरदार पूरी फ़िल्म का हिस्सा बनकर उसे बॉयोपिक का नाम दे देता है, तो कहीं एक छोटे से किरदार के लिए इन्सपिरेशन बन जाता है.कुल मिलाकर इस रियल लाईफ किरदार को जब रील पर उतारा जाता है तो फ़िल्म को ना सिर्फ कमर्शियल सक्सेस मिलने की गुजाईंश बढ़ जाती है बल्की क्रिटिकल एप्रिसिएशन भी मिलता है. इसके साथ ही घिसी पिटी कहानी के बजाए आडियंस भी रियल स्टोरी को रुपहले परदे पर देखना पसंद करती हैं.
यूं तो सिल्वर स्क्रीन पर हम कई ऐसे कैरेक्टर्स देखते है जो कि काल्पनिक होते है. लेकिन कहीं ना कहीं हम उनसे जुड़ाव महसूस करते है. जब हम काल्पनिक पात्रों में ही वास्तविकता ढूंढने लगते है तो बात अगर रीयल कैरेक्टर की हो तो बात अलग ही होगी. अब देखिए बॉलीवुड में तो रियल लाईफ़ कैरेक्टर से प्रेरित होकर कई किरदार गढ़े जा रहे है जिन्हें पसंद भी खूब किया जा रहा है. भारतीय सिनेमा की शुरुवात में ही मशहूर ऐतिहासिक पात्रों को लेकर कई फ़िल्में बनीं जो कि सफल भी रही. आज भी कई फ़िल्मकार को प्रेरित करने में रियल लाईफ किरदार सफल रहे है, चाहे वो सोशल एक्टिविस्ट हो या फिर खेल या फ़िल्म से जुड़ी मशहूर हस्ती या फिर एक आम आदमी. हाल ही में सक्सेस के कई रिकार्ड तोड़ रही फ़िल्म बजरंगी भाईजान में भी नवाफजुद्दीन सिद्दकी ने रियल लाईफ से इंस्पायर कैरेक्टर निभाया है. लिस्ट लंबी है कई रियल लाईफ किरदार बॉलीवुड फ़िल्मों की प्रेरणा बनीं है. आईए देखते है असली पात्रों पर गढ़ी गई फ़िल्मों के बारे में. बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकार्ड तोड़ रही है फिल्म बजरंगी भाईजान में पाकिस्तानी पत्रकार चांद नवाब को इन्सपिरेशन बनाया गया है जिन्होंने कभी एक ही बात को बीस बार दोहराया था. इनका वीडियो युट्युब पर वायरल हो गया था. इस कॉमिक सिचुएशन को बड़े एक बार फिर दोहराया है नवाजुद्दिन सिद्दकी ने जिन्होंने इस फ़िल्म में एक पत्रकार का रोल किया है जो कि चांद नवाब से प्रेरित बताया जा रहा है. हाल में रीलिज़ हुई फ़िल्म हवाईजादा में आयुषमान खुराना ने शिवकर बापूजी तलपड़े का किरदार निभाया था. वैसे तो हवाई जहाज के इनोवेशन का क्रेडिट राइट ब्रदर्स को दिया जाता है जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ तीन में ये एरोप्लेन का अविष्कार किया था. फ़िल्म 'हवाईजादा' में बताया गया है कि शिवकर बापूजी तलपदे ने राइट ब्रदर्स से आठ वर्ष पहले एक हज़ार आठ सौ पचानवे में पहला प्लेन बना दिया था. इस विमान का नाम मारुतसखा था. ये फ़िल्म बेस्ड थी शाहिद आजमी की लाईफ पर जो कि ह्युमन राईट एक्टिविस्ट और एक वकिल थे जिनकी साल दो हज़ार दस में हत्या कर दी गई थी. इस फ़िल्म को टोरंटो फ़िल्म फेस्टीवल में भी प्रदर्शित किया गया था. रियल लाईफ से इंस्पायर इस फ़िल्म में राजकुमार राव ने शाहिद का रोल किया था. प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम ने एक महिला बॉक्सर का रोल प्ले किया था. जो कि विश्व चैम्पीयन रह चुकी है इस फिल्म में मैरी कॉम के एक बॉक्सर के तौर पर संघर्ष को दिखाया गया है और साथ ही ये दिखाया गया है कि शादी के बाद भी कोई महिला कैसे सक्सेस पा सकती है. इस फ़िल्म में फरहान अख्तर ने एथलिट का रोल प्ले किया था जो कि एथलिट मिल्खा सिंह के किरदार से इन्सपायर था. जो कि एक नेशनल चैम्पियन रनर और ओलम्पियन थे. रियल लाईफ से इन्सपायर इस फि़ल्म ने एक सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की जिसकी वजह से और भी फ़िल्ममेकर्स को रियल लाईफ से इन्सपायर फ़िल्म बनाने की प्रेरणा मिली. फ्लाईंग सिख के किरदार के लिए फरहान अख्तर को काफी तारीफे मिली. ये फ़िल्म पान सिंह नाम के एक डाकू के जीवन पर बनीं थी. पान सिंह तोमर इंडियन आर्मी में काम कर चुके थे और साथ ही नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल विनर भी थे इसके बावजूद भी इसे हालात की मार ही कहेंगे कि उन्हें अपनी जमीन ही जमीन को पाने के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली और आखिरकार उन्हें अपना अधिकार पाने के लिए डाकू बनना पड़ा. पान सिंह का रोल इरफान खान ने निभाया था. इस फ़िल्म को शुरुआत कुछ खास नहीं मिली थी लेकिन क्रिटीकली एप्रिशिएट किए जाने के बाद इस फ़िल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ने रफ्तार पकड़ी. चंबल के बागी डाकू के रोल के इरफान खान को कई अवार्ड्स भी मिले थे. इस फ़िल्म में रणदीप हुड़ा ने फ़ेमस पेंटर राजा रवि वर्मा का रोल किया था. राजा रवि वर्मा उन्नीस वीं सदी के एक ऐसे पेंटर थे जिन्होनें अपने ब्रश और रंगो के सहारे एक स्त्री के विविध रुपों को केनवस पर उतारा था. राजा रवी वर्मा दुनिया के मशहूर पेंटर्स में से एक है. इस फ़िल्म के लिए विद्या बालन ने पहली बार सिल्वर स्क्रिन पर जमकर एक्सपोज किया था. वजह थी रोल की डिमांड इस फ़िल्म में उन्होने साउथ की एक्ट्रेस सिल्क स्मिता का रोल किया था जो कि अपनी बोल्ड मूवीज की बदौलत काफी मशहूर बन गई थी लेकिन अपनी जिंदगी अच्छी तरह से जीने से पहले ही वो दुनिया से कूच कर गई माना जाता है कि उन्होने आत्महत्या की थी.इस फ़िल्म के लिए विद्या को नेशनल अवार्ड भी मिला था. कहा जाता है कि ये फ़िल्म महेश भट्ट और परवीन बॉबी की रियल लव स्टोरी पर बेस्ड थी. इस फ़िल्म में परवीन बॉबी ने एक सिज़नोफ्रेनिक पेंशेट का रोल किया था. कहा जाता है कि ये फ़िल्म धीरुभाई अंबानी की लाईफ से इन्सपायर थी जिन्होंने एक आम आदमी से भारत के सबसे मशहूर और अमिर बिजनेसमेन बनने का सफर तय किया था. अभिषेक और ऐश की जोड़ी से सजी इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा परफार्म किया था. ये दोनों ही फ़िल्में क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित थी साथ ही राजगुरु और सुखदेव जो कि आजादी की लड़ाई में उनके प्रमुख सहयोगी थे इनके योगदान को भी इस फि़ल्म में दिखाया गया था. शहीद में मनोज कुमार ने तो वहीं लिजेंड ऑफ भगत सिंह में अजय देवगन ने भगत सिंह का रोल प्ले किया था. इस फ़िल्म के लिए अजय देवगन को जख्म के बाद दूसरा नेशनल अवार्ड मिला था. जाती हैं. इस फिल्म में सीमा बिस्वास ने फूलन देवी का रोल प्ले किया था. जो अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेने के लिए डकैत बन जाती हैं बाद में सरेंडर करके पॉलिटिक्स में आती है. यानि इस फ़िल्म में एक बागी से राजनैतिक बनने के सफर को दिखाया गया है. फ़िल्म जन्नत में एक बुकी का किरदार निभाने के बाद इमरान हाशमी एक क्रिकेटर का रोल प्ले करने जा रहे है. अजहर नाम की फ़िल्म में वो क्रिकेटर अजहरउद्दीन का रोल प्ले करने वाले है जिनका करियर मैच फ़िक्सिंग के आरोप लगने के बाद एकदम से ढलान पर आ गया था. कहीं कोई रियल किरदार पूरी फ़िल्म का हिस्सा बनकर उसे बॉयोपिक का नाम दे देता है, तो कहीं एक छोटे से किरदार के लिए इन्सपिरेशन बन जाता है.कुल मिलाकर इस रियल लाईफ किरदार को जब रील पर उतारा जाता है तो फ़िल्म को ना सिर्फ कमर्शियल सक्सेस मिलने की गुजाईंश बढ़ जाती है बल्की क्रिटिकल एप्रिसिएशन भी मिलता है. इसके साथ ही घिसी पिटी कहानी के बजाए आडियंस भी रियल स्टोरी को रुपहले परदे पर देखना पसंद करती हैं.
राजधानी एक बार फिर गोलियों की आवाज से थराई है संतोषी नगर इलाके के मठपुरैना के पास गोली चली है। जानकारी के मुताबिक आलम नाम के व्यक्ति ने जावेद खान पर गोली चला दी है। जावेद को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जावेद के पीठ में गोली लगी है मठपुरैना जाने के रास्ते पर रिंग रोड पर ये घटना हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक पीछे से आकर आलम ने जावेद पर गोली मारी है. गोली चलाने के बाद मौके से आलम फरार हो गया. घटनास्थल पर पुरानी बस्ती सीएसपी कृष्ण कुमार पटेल, टिकरापारा टीआई मौजूद हैं. , आरोपी की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
राजधानी एक बार फिर गोलियों की आवाज से थराई है संतोषी नगर इलाके के मठपुरैना के पास गोली चली है। जानकारी के मुताबिक आलम नाम के व्यक्ति ने जावेद खान पर गोली चला दी है। जावेद को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जावेद के पीठ में गोली लगी है मठपुरैना जाने के रास्ते पर रिंग रोड पर ये घटना हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक पीछे से आकर आलम ने जावेद पर गोली मारी है. गोली चलाने के बाद मौके से आलम फरार हो गया. घटनास्थल पर पुरानी बस्ती सीएसपी कृष्ण कुमार पटेल, टिकरापारा टीआई मौजूद हैं. , आरोपी की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्ली, 03जून (हि.स.) । खराब प्रदर्शन के चलते लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे भज्जी ने लय में लौट आने के बाद भी राष्ट्रीय टीम में वापस न लिए जाने पर दुख प्रकट किया है। निराश भारतीय दिग्गज स्पिनर ने ऐसा कर भारतीय क्रिकेट की सेलेक्शन प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। लेकिन भज्जी ने कहा है कि लगातार उन्हें नजरअंदाज करने से उनके हौसले डगमगाने वाले नहीं हैं और वह राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। आइपीए-7 में भज्जी ने 14 मैचों में 6.47 के तीसरे सर्वश्रेष्ठ इकॉनमी रेट के साथ गेंदबाजी की और 14 विकेट चटकाए। वहीं, जहां आइपीएल-7 के स्टार स्पिनर पंजाब के अक्षर पटेल और केकेआर के सुनील नरेन को टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों से लोहा लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा वहीं भज्जी ने ज्यादातर विकेट टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के ही लिए जिसमें ग्लेन मैक्सवेल और क्रिस गेल जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के विकेट शामिल रहे। हालांकि इसके बाद भी राष्ट्रीय टीम के आगामी विदेशी दौरों के लिए घोषित टीम में भज्जी का नाम नदारद रहा। निराश भज्जी ने आखिरकार चयन प्रक्रिया पर अपनी भड़ास निकाल ही दी, उन्होंने कहा, 'मुझे नजरअंदाज किए जाने से निराशा है और ये जाहिर तौर पर अच्छा अहसास नहीं है। हां, राष्ट्रीय टीम में चयन ना होना आपको दुख देता ही है। इस बार के आइपीएल में मेरा प्रदर्शन सबने देखा है। मैं वो ही कर सकता हूं जो मेरे हाथ में है। मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि इस चयन प्रक्रिया ने बेशक मुझे दुख पहुंचाया है लेकिन मैं हार नहीं मानने वाला। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट में सभी भारतीय स्पिनरों में मेरा प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है।' तकरीबन 700 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले इस 33 वर्षीय अनुभवी स्पिनर को आइपीएल और चैंपियंस लीग जैसे बड़े टूर्नामेंटों में सफलता के बावजूद लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मामले में चयनकर्चाओं से बात करने और आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर भज्जी ने कहा, 'मेरे लिए खास रणनीति से क्या मतलब है? मेरा काम है गेंदबाजी करना और अपनी टीम को मैच जिताना और मैं ये अपनी काबिलियत के हिसाब से पूरी तरह सही कर रहा हूं। इससे आगे मुझे सोचने की जरूरत नहीं है। उम्र अब भी मेरे पक्ष में है और मुझे भरोसा है कि मैं भारत के लिए फिर खेलूंगा।'
नई दिल्ली, तीनजून । खराब प्रदर्शन के चलते लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे भज्जी ने लय में लौट आने के बाद भी राष्ट्रीय टीम में वापस न लिए जाने पर दुख प्रकट किया है। निराश भारतीय दिग्गज स्पिनर ने ऐसा कर भारतीय क्रिकेट की सेलेक्शन प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। लेकिन भज्जी ने कहा है कि लगातार उन्हें नजरअंदाज करने से उनके हौसले डगमगाने वाले नहीं हैं और वह राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। आइपीए-सात में भज्जी ने चौदह मैचों में छः.सैंतालीस के तीसरे सर्वश्रेष्ठ इकॉनमी रेट के साथ गेंदबाजी की और चौदह विकेट चटकाए। वहीं, जहां आइपीएल-सात के स्टार स्पिनर पंजाब के अक्षर पटेल और केकेआर के सुनील नरेन को टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों से लोहा लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा वहीं भज्जी ने ज्यादातर विकेट टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के ही लिए जिसमें ग्लेन मैक्सवेल और क्रिस गेल जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के विकेट शामिल रहे। हालांकि इसके बाद भी राष्ट्रीय टीम के आगामी विदेशी दौरों के लिए घोषित टीम में भज्जी का नाम नदारद रहा। निराश भज्जी ने आखिरकार चयन प्रक्रिया पर अपनी भड़ास निकाल ही दी, उन्होंने कहा, 'मुझे नजरअंदाज किए जाने से निराशा है और ये जाहिर तौर पर अच्छा अहसास नहीं है। हां, राष्ट्रीय टीम में चयन ना होना आपको दुख देता ही है। इस बार के आइपीएल में मेरा प्रदर्शन सबने देखा है। मैं वो ही कर सकता हूं जो मेरे हाथ में है। मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि इस चयन प्रक्रिया ने बेशक मुझे दुख पहुंचाया है लेकिन मैं हार नहीं मानने वाला। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट में सभी भारतीय स्पिनरों में मेरा प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है।' तकरीबन सात सौ अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले इस तैंतीस वर्षीय अनुभवी स्पिनर को आइपीएल और चैंपियंस लीग जैसे बड़े टूर्नामेंटों में सफलता के बावजूद लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मामले में चयनकर्चाओं से बात करने और आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर भज्जी ने कहा, 'मेरे लिए खास रणनीति से क्या मतलब है? मेरा काम है गेंदबाजी करना और अपनी टीम को मैच जिताना और मैं ये अपनी काबिलियत के हिसाब से पूरी तरह सही कर रहा हूं। इससे आगे मुझे सोचने की जरूरत नहीं है। उम्र अब भी मेरे पक्ष में है और मुझे भरोसा है कि मैं भारत के लिए फिर खेलूंगा।'
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
यूक्रेन से वापस भारत आने पर MBBS के एक छात्र ने बताया कि यूक्रेन में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यूक्रेन के बॉर्डर इलाकों में हालात ज़्यादा ख़राब है। भारतीय छात्र अब ज़्यादा संख्या में आ रहे हैं, रेस्क्यू फ्लाइटों की संख्या भी बढ़ रही है। राजधानी कीव समेत अन्य हिस्सों से लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। UN में अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा है कि हम रूस की कार्रवाई का एकता के साथ जवाब देना जारी रखेंगे। हम यहां रूस को रुकने अपनी सीमा पर लौटने सैनिकों को वापस बैरक में भेजने के लिए कहने आए हैं। अपने राजनयिकों को वार्ता की मेज पर लाएं। रूस ने सचमुच यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आखिरकार गुरुवार को यूक्रेन के खिलाफ जंग कर ही दिया है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई का एलान करते हुए यूक्रेन की सेनार को हथियार डालने और घर लौटने के लिए कहा है। उधर राजधानी कीव समेत यूक्रेन के कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। कीव एयरपोर्ट पर कब्जे के प्रयास की भी खबर है। रूस के एलान पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि जंग के लिए य जिम्मेदार होगा। .
यूक्रेन से वापस भारत आने पर MBBS के एक छात्र ने बताया कि यूक्रेन में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यूक्रेन के बॉर्डर इलाकों में हालात ज़्यादा ख़राब है। भारतीय छात्र अब ज़्यादा संख्या में आ रहे हैं, रेस्क्यू फ्लाइटों की संख्या भी बढ़ रही है। राजधानी कीव समेत अन्य हिस्सों से लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। UN में अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा है कि हम रूस की कार्रवाई का एकता के साथ जवाब देना जारी रखेंगे। हम यहां रूस को रुकने अपनी सीमा पर लौटने सैनिकों को वापस बैरक में भेजने के लिए कहने आए हैं। अपने राजनयिकों को वार्ता की मेज पर लाएं। रूस ने सचमुच यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आखिरकार गुरुवार को यूक्रेन के खिलाफ जंग कर ही दिया है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई का एलान करते हुए यूक्रेन की सेनार को हथियार डालने और घर लौटने के लिए कहा है। उधर राजधानी कीव समेत यूक्रेन के कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। कीव एयरपोर्ट पर कब्जे के प्रयास की भी खबर है। रूस के एलान पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि जंग के लिए य जिम्मेदार होगा। .
बिहार, भारत। बिहार राज्य से बड़ी खबर सामने आ रही है कि, बिहार सरकार द्वारा जातिय कोड में बड़ा बदलाव कर इन जातियों को जाति की सूची से बाहर कर इसकी एक नई लिस्ट जारी की है। 15 अप्रैल से जाति आधारित गणना का दूसरा दौर : दरअसल, बिहार में आगामी 15 अप्रैल से जाति आधारित गणना का दूसरा दौर शुरू होने जा रहा है और इस गणना के दौरान लोगों से जाति पूछने के साथ-साथ कई सवाल पूछे जाएंगे। इस बारे में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जाति को लेकर जारी की गई अपनी इस लिस्ट में इन जातियों को बाहर किया, जबकि इन्हें जातियों को जोड़ा गया है। इस बारे में प्रशिक्षण कार्य में शामिल जिला प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। दर्जी के उपनाम भी हटाएं : इसके अलावा इस नई लिस्ट में दर्जी (हिंदू) का उपनाम जो श्रीवास्तव/ लाला/ लाल / दर्जी दर्ज थे, इन सभी को भी हटाकर एक नाम सिर्फ दर्जी कर दिया गया है। बता दें कि, सामान्य प्रशासन विभाग ने इस लिस्ट में शामिल न होने वाली जाति का अन्य कोड 215 कर दिया, जबकि 206 कोड में भी सुधार किया गया है। हालांकि, इस कोड के प्रयोग से पहले अंचल अधिकारी से लिखित में पूर्वानुमति लेनी होगी, लिखित पूर्वानुमति की प्रति संलग्न कर प्रपत्र समर्पित करना होगा। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
बिहार, भारत। बिहार राज्य से बड़ी खबर सामने आ रही है कि, बिहार सरकार द्वारा जातिय कोड में बड़ा बदलाव कर इन जातियों को जाति की सूची से बाहर कर इसकी एक नई लिस्ट जारी की है। पंद्रह अप्रैल से जाति आधारित गणना का दूसरा दौर : दरअसल, बिहार में आगामी पंद्रह अप्रैल से जाति आधारित गणना का दूसरा दौर शुरू होने जा रहा है और इस गणना के दौरान लोगों से जाति पूछने के साथ-साथ कई सवाल पूछे जाएंगे। इस बारे में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जाति को लेकर जारी की गई अपनी इस लिस्ट में इन जातियों को बाहर किया, जबकि इन्हें जातियों को जोड़ा गया है। इस बारे में प्रशिक्षण कार्य में शामिल जिला प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। दर्जी के उपनाम भी हटाएं : इसके अलावा इस नई लिस्ट में दर्जी का उपनाम जो श्रीवास्तव/ लाला/ लाल / दर्जी दर्ज थे, इन सभी को भी हटाकर एक नाम सिर्फ दर्जी कर दिया गया है। बता दें कि, सामान्य प्रशासन विभाग ने इस लिस्ट में शामिल न होने वाली जाति का अन्य कोड दो सौ पंद्रह कर दिया, जबकि दो सौ छः कोड में भी सुधार किया गया है। हालांकि, इस कोड के प्रयोग से पहले अंचल अधिकारी से लिखित में पूर्वानुमति लेनी होगी, लिखित पूर्वानुमति की प्रति संलग्न कर प्रपत्र समर्पित करना होगा। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
तुर्की के नागरिकों के अधिकांश मुसलमान हैं, लेकिन तुर्की समाज, सिद्धांत रूप में, इसलिए प्रचलित एक आधुनिक, यूरोपीय शैली के कपड़े है। आप तुर्की से छुट्टी पर जाना है, तो आप देखेंगे कि वहाँ फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में के रूप में एक ही तरह से तैयार है। आप बुर्का में कुछ महिलाओं को देख सकते हैं (काला उसके सिर पर एक काला घूंघट के साथ पूरे शरीर को कवर)। वास्तव में, इस संगठन तुर्की (कानून लेकिन कुछ लोगों को रुचि रखते हैं) में गैरकानूनी घोषित, और यहां तक कि एक धर्मनिरपेक्ष संदर्भ में हिजाब पहनने (विश्वविद्यालयों, सरकारी एजेंसियों, और इतने पर। डी) विवादास्पद है। एक नियम के रूप में, लोग हैं, जो तुर्की से छुट्टी पर जाना है, का मानना है कि वहाँ वे स्थानीय लोगों के चिथड़े में ड्रेसिंग देखेंगे। इसके अलावा, कई लोगों का मानना है कि सभी तुर्की महिलाओं घूंघट पहनते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। तुर्की पोशाक भी स्टाइलिश हो सकता है। हालांकि गर्मियों में और तुर्की के निवासियों में एक विशेषता है महिलाओं और पुरुषों लगभग हूबहू पोशाक। यह एक टी शर्ट के साथ प्रकाश शॉर्ट्स हो सकता है। हालांकि अगर महिला के कपड़े वह काम नहीं चलेगा बिना, किसी घटना का दौरा करने जा रहा है। साथ ही सिडनी, न्यूयॉर्क या लंदन में के रूप में तुर्की के शहरों में, आप के आसपास स्थानीय लोगों के बहुमत सुरुचिपूर्ण ढंग से कपड़े पहने हो जाएगा। बेशक, तुर्की कपड़े मामूली हो सकता है। नेट मामूली कपड़े की सराहना की है और अक्सर आवश्यक है। संक्षेप में, यह मदद कर सकते हैं महिलाओं कमर, कंधे या ऊपरी बाहों नहीं दिखाते। यह विस्तृत पैंट या पोशाक / घुटने लंबाई स्कर्ट, ब्लाउज या कोहनी के बीच में आस्तीन के साथ शीर्ष। महिलाओं को अपने बालों को कवर करने के लिए वहाँ दुपट्टा। कूलर महीनों के दौरान, वे हल्के हूडी हैं। यह एक बहुत अच्छा विचार है - बस मस्जिद के द्वार पर सिर पर यह लेने, तो तुर्की में रहने वाली महिलाओं जब यह बाहर ठंड है एक दुपट्टा के साथ चारों ओर गंदगी की जरूरत नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप तुर्की में नियमित रूप से कपड़े पहनते हैं नहीं कर सकते। दुकानों और शॉर्ट्स और टैंक टॉप, और महिलाओं और पुरुषों के लिए भी एकमुश्त कपड़े बेच रहे हैं। जूते फर्क नहीं पड़ता। लेकिन तुर्की में, यह है कि यह आसानी से मस्जिद के द्वार पर हटाया जा सकता है, आसान जूता कुछ हुआ करता था। इसलिए, लगभग सभी देश के निवासियों मोकासिन पर जाएं। सबसे का दौरा किया मस्जिदों कर्मचारियों के सारे कपड़े (निः शुल्क) के लिए कवर प्रदान कर सकते हैं, अगर पोशाक की एक व्यक्ति की शैली इस संस्था के लिए उपयुक्त नहीं है। समुद्र तटीय सैरगाह में के रूप में आप की तरह पोशाक के लिए हो सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि नग्नता अवैध है, लेकिन कुछ पर्यटकों को तुर्की के समुद्र तटों पर धूप सेंकने टॉपलेस कर रहे हैं। हालांकि अगर आप इसके बारे में पुलिस पता है, तुम एक ठीक भुगतान करना होगा। यह दिलचस्प है कि मुस्लिम महिलाओं के लिए एक विशेष समुद्र तट संगठन है। उन्होंने कहा कि एक डाइविंग सूट की तरह एक सा है। एक औरत रेस्तरां में जाने का फैसला किया है, तो वह विचारशील तुर्की कपड़े, एक छोटे से कम देखा जा सकता है जो की तस्वीरें खरीदने की जरूरत है। यह संगठन अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में की तुलना में अधिक औपचारिक लग रहा है। किसी भी मामले में रेस्तरां शॉर्ट्स और टी शर्ट में यात्रा करने के लिए अनुमति नहीं है। एक ही डाइनिंग रूम के लिए लागू होता है। जो है, आप एक सुंदर पोशाक में खाने के लिए की जरूरत है। शाम में, अधिमानतः एक तुर्की पहनने फैशनेबल पोशाक, स्कर्ट या शीर्ष। पुरुषों वैकल्पिक रूप से टाई बांधने (लेकिन यह संभव बनाने के लिए, आवश्यक होने पर)। जैकेट भी वैकल्पिक है। एक आदमी रेस्तरां में एक जैकेट पहने हुए में आता है, तो यह किसी भी समय हटाया जा सकता है और उन्हें हॉल में लाने के लिए वेटर पूछना। ग्रामीण पर्यटन स्थलों से दूर स्थित क्षेत्रों में, तुर्क सामान्य कपड़ों में ले जाएगा। लेकिन महिलाओं पर यहाँ देख पोशाक के स्टाइलिश तुर्की शैली आप सफल होने के लिए संभावना नहीं है। सबसे अधिक संभावना है, यह पूरी तरह से बंद संगठन हो जाएगा। एक विदेशी महिला के पारंपरिक तुर्की की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहती है, तो वह पैंट पहने हो जाएगा। तुम भी पारंपरिक तुर्की पतलून, आस्तीन के साथ शीर्ष (कम से कम कोहनी के लिए) खरीद सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों में आप एक टोपी के बिना बाहर नहीं जाना चाहिए। हालांकि आगंतुकों आमतौर पर पर्यटन केंद्रों और ग्रामीण इलाकों के लिए तुरंत जाना वे विशेष रूप से दिलचस्पी नहीं है। dzhalabiya, abaya और हिजाबः तुर्की राष्ट्रीय कपड़े कई रूप है। अब वे बिल्कुल नहीं हैं। असल में, इस पोशाक दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक आवश्यक गुण है। Dzhalabiya - एक पोशाक या ऊँची एड़ी के जूते के लिए नीचे एक शर्ट। इस तरह तुर्की पोशाक, एक तस्वीर जिसमें से नीचे दिया गया है के रूप में, लंबी आस्तीन है क्योंकि महिलाओं भी अपने हाथों को दिखाने के लिए मना कर रहे हैं। सरल (घर) dzhalabii और छुट्टियों, सतह जिनमें से कढ़ाई के साथ सजाया गया है रहे हैं। ऍबया मुख्य रूप से काला है। जैसा कि अरब देशों में हमेशा की तरह लड़ाई रात में जगह ले ली, महिलाओं, जो काले कपड़े तुर्की पहने थे, किसी का ध्यान नहीं बच सकता है। ऍबया, सार्वजनिक स्थानों में पहना जा करने के लिए बनाया है, जबकि dzhalabiya है - घर संगठन है। यह आमतौर पर एक रूमाल के साथ पहना जाता है। हिजाब - एक सूट है कि एक औरत के चेहरे का पता चलता है। यह लंबे समय मुक्त पोशाक है कि आकार को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। यह, स्तनपान कराने के लिए इस तरह के एक पोशाक में बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि यह व्यावहारिक रूप से अदृश्य है। यह भी एक गर्भवती महिला को बीच अंतर करना मुश्किल है, लेकिन इस स्थिति में यह शायद ही कभी घर की दीवारों को छोड़ने के लिए अनुमति दी है। इससे पहले, महिलाओं घूंघट संरक्षित महसूस पहनी थी। अब यह असामान्य है। इस प्रकार, तुर्की में, विभिन्न स्थानों में लोगों को अलग ढंग से पोशाक। लेकिन विश्वास नहीं है कोई स्टाइलिश कपड़े नहीं है। इसके विपरीत, यहाँ आने से अक्सर कहते हैं कि तुर्क पर्यटकों से अलग नहीं है।
तुर्की के नागरिकों के अधिकांश मुसलमान हैं, लेकिन तुर्की समाज, सिद्धांत रूप में, इसलिए प्रचलित एक आधुनिक, यूरोपीय शैली के कपड़े है। आप तुर्की से छुट्टी पर जाना है, तो आप देखेंगे कि वहाँ फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में के रूप में एक ही तरह से तैयार है। आप बुर्का में कुछ महिलाओं को देख सकते हैं । वास्तव में, इस संगठन तुर्की में गैरकानूनी घोषित, और यहां तक कि एक धर्मनिरपेक्ष संदर्भ में हिजाब पहनने विवादास्पद है। एक नियम के रूप में, लोग हैं, जो तुर्की से छुट्टी पर जाना है, का मानना है कि वहाँ वे स्थानीय लोगों के चिथड़े में ड्रेसिंग देखेंगे। इसके अलावा, कई लोगों का मानना है कि सभी तुर्की महिलाओं घूंघट पहनते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। तुर्की पोशाक भी स्टाइलिश हो सकता है। हालांकि गर्मियों में और तुर्की के निवासियों में एक विशेषता है महिलाओं और पुरुषों लगभग हूबहू पोशाक। यह एक टी शर्ट के साथ प्रकाश शॉर्ट्स हो सकता है। हालांकि अगर महिला के कपड़े वह काम नहीं चलेगा बिना, किसी घटना का दौरा करने जा रहा है। साथ ही सिडनी, न्यूयॉर्क या लंदन में के रूप में तुर्की के शहरों में, आप के आसपास स्थानीय लोगों के बहुमत सुरुचिपूर्ण ढंग से कपड़े पहने हो जाएगा। बेशक, तुर्की कपड़े मामूली हो सकता है। नेट मामूली कपड़े की सराहना की है और अक्सर आवश्यक है। संक्षेप में, यह मदद कर सकते हैं महिलाओं कमर, कंधे या ऊपरी बाहों नहीं दिखाते। यह विस्तृत पैंट या पोशाक / घुटने लंबाई स्कर्ट, ब्लाउज या कोहनी के बीच में आस्तीन के साथ शीर्ष। महिलाओं को अपने बालों को कवर करने के लिए वहाँ दुपट्टा। कूलर महीनों के दौरान, वे हल्के हूडी हैं। यह एक बहुत अच्छा विचार है - बस मस्जिद के द्वार पर सिर पर यह लेने, तो तुर्की में रहने वाली महिलाओं जब यह बाहर ठंड है एक दुपट्टा के साथ चारों ओर गंदगी की जरूरत नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप तुर्की में नियमित रूप से कपड़े पहनते हैं नहीं कर सकते। दुकानों और शॉर्ट्स और टैंक टॉप, और महिलाओं और पुरुषों के लिए भी एकमुश्त कपड़े बेच रहे हैं। जूते फर्क नहीं पड़ता। लेकिन तुर्की में, यह है कि यह आसानी से मस्जिद के द्वार पर हटाया जा सकता है, आसान जूता कुछ हुआ करता था। इसलिए, लगभग सभी देश के निवासियों मोकासिन पर जाएं। सबसे का दौरा किया मस्जिदों कर्मचारियों के सारे कपड़े के लिए कवर प्रदान कर सकते हैं, अगर पोशाक की एक व्यक्ति की शैली इस संस्था के लिए उपयुक्त नहीं है। समुद्र तटीय सैरगाह में के रूप में आप की तरह पोशाक के लिए हो सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि नग्नता अवैध है, लेकिन कुछ पर्यटकों को तुर्की के समुद्र तटों पर धूप सेंकने टॉपलेस कर रहे हैं। हालांकि अगर आप इसके बारे में पुलिस पता है, तुम एक ठीक भुगतान करना होगा। यह दिलचस्प है कि मुस्लिम महिलाओं के लिए एक विशेष समुद्र तट संगठन है। उन्होंने कहा कि एक डाइविंग सूट की तरह एक सा है। एक औरत रेस्तरां में जाने का फैसला किया है, तो वह विचारशील तुर्की कपड़े, एक छोटे से कम देखा जा सकता है जो की तस्वीरें खरीदने की जरूरत है। यह संगठन अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में की तुलना में अधिक औपचारिक लग रहा है। किसी भी मामले में रेस्तरां शॉर्ट्स और टी शर्ट में यात्रा करने के लिए अनुमति नहीं है। एक ही डाइनिंग रूम के लिए लागू होता है। जो है, आप एक सुंदर पोशाक में खाने के लिए की जरूरत है। शाम में, अधिमानतः एक तुर्की पहनने फैशनेबल पोशाक, स्कर्ट या शीर्ष। पुरुषों वैकल्पिक रूप से टाई बांधने । जैकेट भी वैकल्पिक है। एक आदमी रेस्तरां में एक जैकेट पहने हुए में आता है, तो यह किसी भी समय हटाया जा सकता है और उन्हें हॉल में लाने के लिए वेटर पूछना। ग्रामीण पर्यटन स्थलों से दूर स्थित क्षेत्रों में, तुर्क सामान्य कपड़ों में ले जाएगा। लेकिन महिलाओं पर यहाँ देख पोशाक के स्टाइलिश तुर्की शैली आप सफल होने के लिए संभावना नहीं है। सबसे अधिक संभावना है, यह पूरी तरह से बंद संगठन हो जाएगा। एक विदेशी महिला के पारंपरिक तुर्की की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहती है, तो वह पैंट पहने हो जाएगा। तुम भी पारंपरिक तुर्की पतलून, आस्तीन के साथ शीर्ष खरीद सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों में आप एक टोपी के बिना बाहर नहीं जाना चाहिए। हालांकि आगंतुकों आमतौर पर पर्यटन केंद्रों और ग्रामीण इलाकों के लिए तुरंत जाना वे विशेष रूप से दिलचस्पी नहीं है। dzhalabiya, abaya और हिजाबः तुर्की राष्ट्रीय कपड़े कई रूप है। अब वे बिल्कुल नहीं हैं। असल में, इस पोशाक दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम महिलाओं के लिए एक आवश्यक गुण है। Dzhalabiya - एक पोशाक या ऊँची एड़ी के जूते के लिए नीचे एक शर्ट। इस तरह तुर्की पोशाक, एक तस्वीर जिसमें से नीचे दिया गया है के रूप में, लंबी आस्तीन है क्योंकि महिलाओं भी अपने हाथों को दिखाने के लिए मना कर रहे हैं। सरल dzhalabii और छुट्टियों, सतह जिनमें से कढ़ाई के साथ सजाया गया है रहे हैं। ऍबया मुख्य रूप से काला है। जैसा कि अरब देशों में हमेशा की तरह लड़ाई रात में जगह ले ली, महिलाओं, जो काले कपड़े तुर्की पहने थे, किसी का ध्यान नहीं बच सकता है। ऍबया, सार्वजनिक स्थानों में पहना जा करने के लिए बनाया है, जबकि dzhalabiya है - घर संगठन है। यह आमतौर पर एक रूमाल के साथ पहना जाता है। हिजाब - एक सूट है कि एक औरत के चेहरे का पता चलता है। यह लंबे समय मुक्त पोशाक है कि आकार को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। यह, स्तनपान कराने के लिए इस तरह के एक पोशाक में बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि यह व्यावहारिक रूप से अदृश्य है। यह भी एक गर्भवती महिला को बीच अंतर करना मुश्किल है, लेकिन इस स्थिति में यह शायद ही कभी घर की दीवारों को छोड़ने के लिए अनुमति दी है। इससे पहले, महिलाओं घूंघट संरक्षित महसूस पहनी थी। अब यह असामान्य है। इस प्रकार, तुर्की में, विभिन्न स्थानों में लोगों को अलग ढंग से पोशाक। लेकिन विश्वास नहीं है कोई स्टाइलिश कपड़े नहीं है। इसके विपरीत, यहाँ आने से अक्सर कहते हैं कि तुर्क पर्यटकों से अलग नहीं है।
मुझे लगा आप प्रोफेशनल होंगे! रेडिट यूजर (ScooterBobb) ने अपने बॉस के साथ हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने लिखा, मैं अभी भी सदमे में हूं। स्नैपशॉट में आप देख सकते हैं कि जिस शख्स को नौकरी से निकाल दिया गया है, उसका बॉस उससे काम को लेकर अपडेट मांग रहा है। मैसेज पढ़कर समझ आता है कि बॉस किसी इन्वेंट्री के अपडेट की बात कर रहा है। जवाब में वर्क पूछता है- मैं जानना चाहता हूं कि मुझे निकाल दिया गया है या नहीं? जिस पर बॉस कहता है- हां, आप अब कंपनी के कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन इन्वेंट्री उस समय की है जब आप कार्यरत थे। इसलिए सोचा कि आपसे अपडेट ले लूं। आगे बॉस ने लिखा- 25 साल आपने संस्थान में काम किया, मुझे लगा कि आप प्रोफेशनल होंगे। इस पर शख्स ने जवाब दिया- लेकिन 25 साल में मैंने किसी को नौकरी से निकालते हुए नहीं देखा। कुछ दिनों पहले शेयर किए गए इस पोस्ट को खबर लिखा जाने तक 1 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही लोग इस पर कमेंट के जरिए अपने रिएक्शन भी दे रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में कहा- तुम्हें नौकरी से निकाल दिया गया है, अब काम पर वापस जाओ। दूसरे ने कमेंट किया- आपकी प्रतिक्रियाएं बिल्कुल सही हैं। सही मुद्दे पर, नो-नॉनसेंस।
मुझे लगा आप प्रोफेशनल होंगे! रेडिट यूजर ने अपने बॉस के साथ हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने लिखा, मैं अभी भी सदमे में हूं। स्नैपशॉट में आप देख सकते हैं कि जिस शख्स को नौकरी से निकाल दिया गया है, उसका बॉस उससे काम को लेकर अपडेट मांग रहा है। मैसेज पढ़कर समझ आता है कि बॉस किसी इन्वेंट्री के अपडेट की बात कर रहा है। जवाब में वर्क पूछता है- मैं जानना चाहता हूं कि मुझे निकाल दिया गया है या नहीं? जिस पर बॉस कहता है- हां, आप अब कंपनी के कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन इन्वेंट्री उस समय की है जब आप कार्यरत थे। इसलिए सोचा कि आपसे अपडेट ले लूं। आगे बॉस ने लिखा- पच्चीस साल आपने संस्थान में काम किया, मुझे लगा कि आप प्रोफेशनल होंगे। इस पर शख्स ने जवाब दिया- लेकिन पच्चीस साल में मैंने किसी को नौकरी से निकालते हुए नहीं देखा। कुछ दिनों पहले शेयर किए गए इस पोस्ट को खबर लिखा जाने तक एक लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही लोग इस पर कमेंट के जरिए अपने रिएक्शन भी दे रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में कहा- तुम्हें नौकरी से निकाल दिया गया है, अब काम पर वापस जाओ। दूसरे ने कमेंट किया- आपकी प्रतिक्रियाएं बिल्कुल सही हैं। सही मुद्दे पर, नो-नॉनसेंस।
भोजपुरी अदाकारा नम्रता मल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को देखकर फैंस की रातों की नींद उड़ गई है। नम्रता मल्ला भोजपुरी की उन अदाकाराओं में से एक हैं जो कि लाइमलाइट बटोरने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देती हैं। नम्रता मल्ला अपनी बोल्डनेस की वजह से खूब सुर्खियां बटोरती हैं। समय समय पर नम्रता मल्ला अपनी हॉट तस्वीरें और तस्वीरें फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं। हाल ही में नम्रता मल्ला ने अपनी कुछ शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में नम्रता मल्ला गोल्डन कलर का खूबसूरत आउटफिट पहने नजर आ रही हैं। तस्वीरों में नम्रता मल्ला स्माइल कर रही हैं। नम्रता मल्ला की इन कातिल अदाओं ने लोगों का दिल जीत लिया है। कुछ समय में ही नम्रता मल्ला की इन तस्वीरों ने हंगामा मचा दिया है। लोग नम्रता मल्ला के इस बोल्ड लुक से नजर नहीं हटा पा रहे हैं। नम्रता मल्ला ने इस तस्वीरों को शेयर करते हुए खुलासा किया है कि वो किसी लाइव इवेंट का हिस्सा बनने पहुंची हैं। गौरतलब है कि हाल ही में नम्रता मल्ला ने भगवा रंग की बिकिनी पहनकर हंगामा खड़ा कर दिया था। नम्रता मल्ला ने भगवा रंग की बिकिनी पहनकर दीपिका पादुकोण के पठान लुक को कॉपी करने की कोशिश की थी। ऑरेंज कलर की बिकिनी पहनते ही लोगों ने नम्रता मल्ला को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया था। अब भी लोग नम्रता मल्ला के कपड़ों पर निशाना साध रहे हैं। हालांकि नम्रता मल्ला को ट्रोलिंग से जरा भी फर्क नहीं पड़ता। तभी तो नम्रता मल्ला ने ट्रोलिंग के बीच के बीच एक वीडियो शेयर की थी। इस वीडियो में नम्रता मल्ला खेसारी लाल यादव के साथ मस्ती करती नजर आई थीं। इस दौरान नम्रता मल्ला ने खेसारी लाल यादव को बताया कि वो उनका 3 घंटों से इंतजार कर रही थीं। ये बात सुनकर खेसारी लाल यादव ने नम्रता मल्ला के कपड़ों पर कमेंट कर दिया। खेसारी लाल यादव ने नम्रता मल्ला का बोल्ड लुक देखकर कहा कि उनके बाकी कपड़े कहां हैं।
भोजपुरी अदाकारा नम्रता मल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को देखकर फैंस की रातों की नींद उड़ गई है। नम्रता मल्ला भोजपुरी की उन अदाकाराओं में से एक हैं जो कि लाइमलाइट बटोरने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देती हैं। नम्रता मल्ला अपनी बोल्डनेस की वजह से खूब सुर्खियां बटोरती हैं। समय समय पर नम्रता मल्ला अपनी हॉट तस्वीरें और तस्वीरें फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं। हाल ही में नम्रता मल्ला ने अपनी कुछ शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में नम्रता मल्ला गोल्डन कलर का खूबसूरत आउटफिट पहने नजर आ रही हैं। तस्वीरों में नम्रता मल्ला स्माइल कर रही हैं। नम्रता मल्ला की इन कातिल अदाओं ने लोगों का दिल जीत लिया है। कुछ समय में ही नम्रता मल्ला की इन तस्वीरों ने हंगामा मचा दिया है। लोग नम्रता मल्ला के इस बोल्ड लुक से नजर नहीं हटा पा रहे हैं। नम्रता मल्ला ने इस तस्वीरों को शेयर करते हुए खुलासा किया है कि वो किसी लाइव इवेंट का हिस्सा बनने पहुंची हैं। गौरतलब है कि हाल ही में नम्रता मल्ला ने भगवा रंग की बिकिनी पहनकर हंगामा खड़ा कर दिया था। नम्रता मल्ला ने भगवा रंग की बिकिनी पहनकर दीपिका पादुकोण के पठान लुक को कॉपी करने की कोशिश की थी। ऑरेंज कलर की बिकिनी पहनते ही लोगों ने नम्रता मल्ला को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया था। अब भी लोग नम्रता मल्ला के कपड़ों पर निशाना साध रहे हैं। हालांकि नम्रता मल्ला को ट्रोलिंग से जरा भी फर्क नहीं पड़ता। तभी तो नम्रता मल्ला ने ट्रोलिंग के बीच के बीच एक वीडियो शेयर की थी। इस वीडियो में नम्रता मल्ला खेसारी लाल यादव के साथ मस्ती करती नजर आई थीं। इस दौरान नम्रता मल्ला ने खेसारी लाल यादव को बताया कि वो उनका तीन घंटाटों से इंतजार कर रही थीं। ये बात सुनकर खेसारी लाल यादव ने नम्रता मल्ला के कपड़ों पर कमेंट कर दिया। खेसारी लाल यादव ने नम्रता मल्ला का बोल्ड लुक देखकर कहा कि उनके बाकी कपड़े कहां हैं।
Dharmendra Pradhan बोले- "2014 में भारत में एक नया दौर शुरू हुआ और अब. . . " । Hindi Newsकेंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan बोले- "2014 में भारत में एक नया दौर शुरू हुआ, भारत के लोगों का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बढ़ रहा है' चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
Dharmendra Pradhan बोले- "दो हज़ार चौदह में भारत में एक नया दौर शुरू हुआ और अब. . . " । Hindi Newsकेंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan बोले- "दो हज़ार चौदह में भारत में एक नया दौर शुरू हुआ, भारत के लोगों का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बढ़ रहा है' चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
रैनसमवेयर हमले के बाद दुनियाभर में कंप्यूटर ख़तरे में हैं और सरकारें चिंतित हैं. सोमवार को जब लोग दफ्तरों में अपने काम पर लौटेंगे तो उनके कंप्यूटर्स पर भी रैनसमवेयर के हमले का ख़तरा है. यूरोपोल के प्रमुख रॉब वेनलाइट ने शुक्रवार को हुए हमले के दायरे को अभूतपूर्व बताया. ब्रिटेन, अमरीका, चीन, रूस, स्पेन, इटली, वियतनाम और कई अन्य देशों में 'रैनसमवेयर' साइबर हमलों की खबर है. इस साइबर हमले में कंप्यूटर स्क्रीन पर नज़र आता है 'फ़िरौती दो या अपनी फाइलें भूल जाओ. '
रैनसमवेयर हमले के बाद दुनियाभर में कंप्यूटर ख़तरे में हैं और सरकारें चिंतित हैं. सोमवार को जब लोग दफ्तरों में अपने काम पर लौटेंगे तो उनके कंप्यूटर्स पर भी रैनसमवेयर के हमले का ख़तरा है. यूरोपोल के प्रमुख रॉब वेनलाइट ने शुक्रवार को हुए हमले के दायरे को अभूतपूर्व बताया. ब्रिटेन, अमरीका, चीन, रूस, स्पेन, इटली, वियतनाम और कई अन्य देशों में 'रैनसमवेयर' साइबर हमलों की खबर है. इस साइबर हमले में कंप्यूटर स्क्रीन पर नज़र आता है 'फ़िरौती दो या अपनी फाइलें भूल जाओ. '
इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वितरण कंपनी की मनमानी के कारण क्षेत्र के ग्रामीण परेशान है। इसे लेकर जनहित मोर्चा के दोराहा ब्लाक के उपाध्यक्ष खुमान सिंह के नेतृत्व में एक ज्ञापन एसडीएम को भेजा गया है। जिसमें शिकायत की गई है कि आगामी दिनों में विद्युत कंपनी की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो जनआंदोलन किया जाएगा। दोराहा ब्लाक के उपाध्यक्ष खुमान सिंह ने बताया कि क्षेत्र के बाजार बरखेड़ा में घनश्याम धौलपुरे के घर पर विद्युत कंपनी के ठेकेदार ने डीपी लगवा दी है। जिस कारण करंट की चपेट में आने से भैंस मर गई। चार साल पहले डीपी लगाए जाने का विरोध भी किया गया था। मनमानी पूर्ण तरीके से डीपी लगा दी गई। धौलपुरे परिवार दहशत में रहता है। डीपी हमेशा आवासीय क्षेत्र से दूर लगाई जाती है, लेकिन कंपनी के ठेकेदार ने तानाशाही तरीके से उनके घर के पास डीपी लगवा दी है। इसके अलावा दोराहा, अहमदपुर, श्यामपुर सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के ऊपर से गुजर रही उच्च क्षमता की बिजली लाइन से खतरा है। बिजली कंपनी की लापरवाही से आक्रोशित लोगों ने घटनास्थल को घेर लिया था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वितरण कंपनी की मनमानी के कारण क्षेत्र के ग्रामीण परेशान है। इसे लेकर जनहित मोर्चा के दोराहा ब्लाक के उपाध्यक्ष खुमान सिंह के नेतृत्व में एक ज्ञापन एसडीएम को भेजा गया है। जिसमें शिकायत की गई है कि आगामी दिनों में विद्युत कंपनी की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो जनआंदोलन किया जाएगा। दोराहा ब्लाक के उपाध्यक्ष खुमान सिंह ने बताया कि क्षेत्र के बाजार बरखेड़ा में घनश्याम धौलपुरे के घर पर विद्युत कंपनी के ठेकेदार ने डीपी लगवा दी है। जिस कारण करंट की चपेट में आने से भैंस मर गई। चार साल पहले डीपी लगाए जाने का विरोध भी किया गया था। मनमानी पूर्ण तरीके से डीपी लगा दी गई। धौलपुरे परिवार दहशत में रहता है। डीपी हमेशा आवासीय क्षेत्र से दूर लगाई जाती है, लेकिन कंपनी के ठेकेदार ने तानाशाही तरीके से उनके घर के पास डीपी लगवा दी है। इसके अलावा दोराहा, अहमदपुर, श्यामपुर सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के ऊपर से गुजर रही उच्च क्षमता की बिजली लाइन से खतरा है। बिजली कंपनी की लापरवाही से आक्रोशित लोगों ने घटनास्थल को घेर लिया था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Jamshedpur : दो साल के बाद टाटा स्टील का फिजिकल ट्राइबल कॉन्क्लेव संवाद-2022 का शुभारंभ मंगलवार 15 नवंबर को गोपाल मैदान बिष्टुपुर में होने जा रहा है. 15 से 19 नवंबर के बीच चलनेवाले इस जनजातीय सम्मेलन में इस देश भर की 186 जनजातियों के 2500 से अधिक प्रतिनिधि शिरकत करेंगे. सोमवार को ट्राइबल कल्चरल सेंटर सोनारी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में टाटा स्टील फाउंडेशन सीइओ सौरव राय और टाटा स्टील ट्राइबल सर्विसेस के प्रमुख जिरेन जेवियर टोपनो ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद संवाद का आयोजन पूरी तरह से ऑफलाइन होने जा रहा है. इसमें 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के 27 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) सहित 200 जनजातियों के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे. 15 नवंबर को संवाद का आगाज झारखंड की 31 जनजातियों के 501 नगाड़ों की धुन से होगा. संवादा का आकर्षण डॉ सोनम वांगचुक होंगे, जिन्हें राजकुमार हीरानी की फिल्म थ्री इडियट्स के फुंसुक वांगड़ू कैरेक्टर की प्रेरणा माना जाता है. इस कैरेक्चर को फिल्म अभिनेता आमिर खान ने निभाया था. सौरव राय ने बताया कि हर साल संवाद का एक विशिष्ट विषय होता है, जो आदिवासी पहचान को लिए होता है. इस वर्ष की थीम "रीइमेजिन" है, जिसका उद्देश्य इस गतिशील समाज में सामाजिक परिवर्तन को सक्षम करने में स्वदेशी लोगों की भूमिका के बारे में बातचीत को बढ़ावा देना है. यही नहीं, इन जनजातीय समूहों के रहन सहन और जीवन शैली से भी प्रेरणा लेनी है ताकि आज की समस्याओं को दूर किया जा सके. आज हम यह महसूस कर रहे हैं कि वर्तमान में हम जिन सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनका उत्तर हमारे देश और दुनिया के स्वदेशी समुदायों के पास है. कॉन्क्लेव में देश भर से आए प्रतनिधि अपने जनजातीय समूह की कहानियां कहेंगे. इसे लेकर विभिन्न सत्र होंगे. इस बार का संवाद आदिवासी जीवन शैली और देश के आदिवासी विकास विमर्श में हमारी अपनी सोच को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भारत में जनजातीयता के इस सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक संवाद में आदिवासी कलाकारों, बुनकरों और कारीगरों, संगीतकारों, हीलरों, घरेलू रसोइयों, विद्वानों, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों का समूह एक मंच पर आकर आदिवासी संस्कृति का जश्न मनाएगा. पद्म श्री दुर्गाबाई व्याम और सुभाष व्याम, जापानी श्याम, डॉ सोनम वांगचुक और कई अन्य जनजातीय लीडर इस साल संवाद के गवाह बनेंगे. ये अपने अनुभव संवाद में शेयर करेंगे. साथ ही संवाद मंच पर अपने अनुभवों और कहानियों को साझा करके जनजातीयता पर चर्चा को और आगे ले जायेंगे. इस वर्ष 175 से अधिक आदिवासी हीलर जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को बताएंगे. साथ ही संथाल कठपुतली, वारली कला, और बोडो बुनाई जैसे कला रूपों के लाइव प्रदर्शनों के साथ-साथ प्रदर्शनी-सह-बिक्री स्टालों के माध्यम से जनजातीय कला और हस्तशिल्प में 41 से अधिक कला रूपों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा, जहां आगंतुक कलाकारों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों में शामिल हो सकते हैं. इन समुदायों के स्वादिष्ट जायके को बढ़ावा देने के लिए 112 घरेलू रसोइयों द्वारा तैयार 101 से अधिक आदिवासी व्यंजनों को क्यूरेटेड लंच के रूप में परोसा जाएगा. जमशेदपुर के लोग जनजातीय भोजन के हिस्से के रूप में जोमैटो पर "आतिथि @ संवाद" पर ऑनलाइन ऑर्डर देकर अपने घरों में आराम से इन व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं. जनजातीय संगीत रिदम्स ऑफ द अर्थ को बढ़ावा देने के लिए एक स्वरथमा के सहयोग से निर्मित 12 मूल ट्रैक के साथ अपना पहला पूर्ण एलबम इस साल रिलीज होगा. इन इंटरैक्टिव सत्रों और लाइव प्रदर्शनों के अलावा संवाद पूरे देश में जनजातियों के सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से समृद्ध आदिवासी विरासत, प्रथाओं और संस्कृति को धरातल पर उतारेगा.
Jamshedpur : दो साल के बाद टाटा स्टील का फिजिकल ट्राइबल कॉन्क्लेव संवाद-दो हज़ार बाईस का शुभारंभ मंगलवार पंद्रह नवंबर को गोपाल मैदान बिष्टुपुर में होने जा रहा है. पंद्रह से उन्नीस नवंबर के बीच चलनेवाले इस जनजातीय सम्मेलन में इस देश भर की एक सौ छियासी जनजातियों के दो हज़ार पाँच सौ से अधिक प्रतिनिधि शिरकत करेंगे. सोमवार को ट्राइबल कल्चरल सेंटर सोनारी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में टाटा स्टील फाउंडेशन सीइओ सौरव राय और टाटा स्टील ट्राइबल सर्विसेस के प्रमुख जिरेन जेवियर टोपनो ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद संवाद का आयोजन पूरी तरह से ऑफलाइन होने जा रहा है. इसमें तेईस राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के सत्ताईस विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों सहित दो सौ जनजातियों के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे. पंद्रह नवंबर को संवाद का आगाज झारखंड की इकतीस जनजातियों के पाँच सौ एक नगाड़ों की धुन से होगा. संवादा का आकर्षण डॉ सोनम वांगचुक होंगे, जिन्हें राजकुमार हीरानी की फिल्म थ्री इडियट्स के फुंसुक वांगड़ू कैरेक्टर की प्रेरणा माना जाता है. इस कैरेक्चर को फिल्म अभिनेता आमिर खान ने निभाया था. सौरव राय ने बताया कि हर साल संवाद का एक विशिष्ट विषय होता है, जो आदिवासी पहचान को लिए होता है. इस वर्ष की थीम "रीइमेजिन" है, जिसका उद्देश्य इस गतिशील समाज में सामाजिक परिवर्तन को सक्षम करने में स्वदेशी लोगों की भूमिका के बारे में बातचीत को बढ़ावा देना है. यही नहीं, इन जनजातीय समूहों के रहन सहन और जीवन शैली से भी प्रेरणा लेनी है ताकि आज की समस्याओं को दूर किया जा सके. आज हम यह महसूस कर रहे हैं कि वर्तमान में हम जिन सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनका उत्तर हमारे देश और दुनिया के स्वदेशी समुदायों के पास है. कॉन्क्लेव में देश भर से आए प्रतनिधि अपने जनजातीय समूह की कहानियां कहेंगे. इसे लेकर विभिन्न सत्र होंगे. इस बार का संवाद आदिवासी जीवन शैली और देश के आदिवासी विकास विमर्श में हमारी अपनी सोच को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भारत में जनजातीयता के इस सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक संवाद में आदिवासी कलाकारों, बुनकरों और कारीगरों, संगीतकारों, हीलरों, घरेलू रसोइयों, विद्वानों, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों का समूह एक मंच पर आकर आदिवासी संस्कृति का जश्न मनाएगा. पद्म श्री दुर्गाबाई व्याम और सुभाष व्याम, जापानी श्याम, डॉ सोनम वांगचुक और कई अन्य जनजातीय लीडर इस साल संवाद के गवाह बनेंगे. ये अपने अनुभव संवाद में शेयर करेंगे. साथ ही संवाद मंच पर अपने अनुभवों और कहानियों को साझा करके जनजातीयता पर चर्चा को और आगे ले जायेंगे. इस वर्ष एक सौ पचहत्तर से अधिक आदिवासी हीलर जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को बताएंगे. साथ ही संथाल कठपुतली, वारली कला, और बोडो बुनाई जैसे कला रूपों के लाइव प्रदर्शनों के साथ-साथ प्रदर्शनी-सह-बिक्री स्टालों के माध्यम से जनजातीय कला और हस्तशिल्प में इकतालीस से अधिक कला रूपों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा, जहां आगंतुक कलाकारों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों में शामिल हो सकते हैं. इन समुदायों के स्वादिष्ट जायके को बढ़ावा देने के लिए एक सौ बारह घरेलू रसोइयों द्वारा तैयार एक सौ एक से अधिक आदिवासी व्यंजनों को क्यूरेटेड लंच के रूप में परोसा जाएगा. जमशेदपुर के लोग जनजातीय भोजन के हिस्से के रूप में जोमैटो पर "आतिथि @ संवाद" पर ऑनलाइन ऑर्डर देकर अपने घरों में आराम से इन व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं. जनजातीय संगीत रिदम्स ऑफ द अर्थ को बढ़ावा देने के लिए एक स्वरथमा के सहयोग से निर्मित बारह मूल ट्रैक के साथ अपना पहला पूर्ण एलबम इस साल रिलीज होगा. इन इंटरैक्टिव सत्रों और लाइव प्रदर्शनों के अलावा संवाद पूरे देश में जनजातियों के सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से समृद्ध आदिवासी विरासत, प्रथाओं और संस्कृति को धरातल पर उतारेगा.