raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
दरअसल, वॉल्वो बस नंबर यूपी 22 टी 7918 हरियाणा से बिहार जा रही थी। लेकिन रास्ते में खराब हो जान के कारण वह सड़क किनारे खड़ी थी। कई मजदूर सड़क पर ही लेटे हुए थे। इसी दौरान सामने तेज रफ्तार में आ रहे ट्रेलर ने बस को टक्कर मार दी और लोगों को रौंदते हुए चला गया। क्योंकि रात होने के चलते अधिकतर लोग तो गहरी नींद में थे। बताया जाता है कि कई के तो नींद में ही सांसे थम गईं। हादसे के चश्मदीद और बस यात्री फौनी साहनी ने बताया कि वह मूल रुप से बिहार के रहने वाले हैं और मजदूरी करने के लिए हरियाणा के अंबाला गए थे। मंगलवार को सभी लोग अपने घर लौट रहे थे। 40-50 यात्रियों की क्षमता वाली बस में कंडेक्टर और ड्राइवर ने ठूंस-ठूंसकर 130 से ज्यादा यात्री भर लिए। इस दौरान कुछ लोगों ने बैठने से मना किया तो उनपर बस मालिक ने दबाव बनाया। कुछ दूर चलते ही बस का बेलन टूट गया, जिसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। रात होने के की वजह कुछ लोग बस में तो कुछ सड़क पर सो गए। तभी ट्रक ने बस को पीछे से टक्कर मार दी। अगर ड्राइवर बस को सड़क से थोड़ा दूर लगाता तो शायद यह एक्सीडेंट नहीं होता। साथ ही इतनी सवारियां नहीं भरता तो भी उसका बेलन नहीं टूटता। हादसे के चश्मदीद ने बताया कि ट्रक ने जब टक्कर मारी तो बस कुछ दूर घिसटती चली गई। इसके बाद मैंने पीछे देखा तो सड़क पर खून ही खून बिखरा हुआ था। मांस के लोथड़े तास के पत्ते की तरह बिखरे हुए पड़े थे। वहीं कुछ लोग खून से लथपथ होकर बुरी तरह चीख रहे थे। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इतना खतरनाक एक्सीडेंट कभी नहीं देखा। युवक ने बताया कि इस हादसे ने मेरे अपने 6 साथी खो दिए। हम अक्सर समय साथ रहते थे, कहीं भी काम करने के लिए साथ जाते थे। लेकिन बस मालिक की गलती से वह मुझे छोड़कर चले गए। युवक ने बताया कि यह सब बस मालिक की गलती से हुआ। कहां हम रोजी रोटी के लिए दूसरे राज्य गए थे, लेकिन घर आते समय ही वह दुनिया छोड़ गए।
दरअसल, वॉल्वो बस नंबर यूपी बाईस टी सात हज़ार नौ सौ अट्ठारह हरियाणा से बिहार जा रही थी। लेकिन रास्ते में खराब हो जान के कारण वह सड़क किनारे खड़ी थी। कई मजदूर सड़क पर ही लेटे हुए थे। इसी दौरान सामने तेज रफ्तार में आ रहे ट्रेलर ने बस को टक्कर मार दी और लोगों को रौंदते हुए चला गया। क्योंकि रात होने के चलते अधिकतर लोग तो गहरी नींद में थे। बताया जाता है कि कई के तो नींद में ही सांसे थम गईं। हादसे के चश्मदीद और बस यात्री फौनी साहनी ने बताया कि वह मूल रुप से बिहार के रहने वाले हैं और मजदूरी करने के लिए हरियाणा के अंबाला गए थे। मंगलवार को सभी लोग अपने घर लौट रहे थे। चालीस-पचास यात्रियों की क्षमता वाली बस में कंडेक्टर और ड्राइवर ने ठूंस-ठूंसकर एक सौ तीस से ज्यादा यात्री भर लिए। इस दौरान कुछ लोगों ने बैठने से मना किया तो उनपर बस मालिक ने दबाव बनाया। कुछ दूर चलते ही बस का बेलन टूट गया, जिसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। रात होने के की वजह कुछ लोग बस में तो कुछ सड़क पर सो गए। तभी ट्रक ने बस को पीछे से टक्कर मार दी। अगर ड्राइवर बस को सड़क से थोड़ा दूर लगाता तो शायद यह एक्सीडेंट नहीं होता। साथ ही इतनी सवारियां नहीं भरता तो भी उसका बेलन नहीं टूटता। हादसे के चश्मदीद ने बताया कि ट्रक ने जब टक्कर मारी तो बस कुछ दूर घिसटती चली गई। इसके बाद मैंने पीछे देखा तो सड़क पर खून ही खून बिखरा हुआ था। मांस के लोथड़े तास के पत्ते की तरह बिखरे हुए पड़े थे। वहीं कुछ लोग खून से लथपथ होकर बुरी तरह चीख रहे थे। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इतना खतरनाक एक्सीडेंट कभी नहीं देखा। युवक ने बताया कि इस हादसे ने मेरे अपने छः साथी खो दिए। हम अक्सर समय साथ रहते थे, कहीं भी काम करने के लिए साथ जाते थे। लेकिन बस मालिक की गलती से वह मुझे छोड़कर चले गए। युवक ने बताया कि यह सब बस मालिक की गलती से हुआ। कहां हम रोजी रोटी के लिए दूसरे राज्य गए थे, लेकिन घर आते समय ही वह दुनिया छोड़ गए।
स्ट्रीट वेंडरों को रोजगार देने की तैयारी में योगी सरकार (फ़ाइल फोटो) लखनऊ. उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में प्रवासी मजदूरों से भरी डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी जिससे 24 मजदूरों की मौत (Death) हो गई. इस घटना में 20 से ज्यादा लोग घायल हैं. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. योगी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को हादसे में घायल हुए लोगों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को हर संभव राहत प्रदान करने तथा सभी घायलों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने मंडलायुक्त कानपुर तथा आईजी कानपुर को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य अपनी देख रेख में संपन्न कराने तथा दुर्घटना के कारणों की जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक, मजदूरों को लेकर आ रही डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से ज्यादा लोग लोग घायल हैं. सभी घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है. डीसीएम सड़क पर खड़ी थी तभी ट्रक ने उसमें टक्कर मार दी. औरेया की एसपी सुनीति सिंह और कई थानों की पुलिस मौके पर मौजूद है. जो लोग गंभीर रूप से घायल हैं उनको कानपुर के हैलट अस्पताल में रेफर किया गया है. घटना को देखते हुए मृतकों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है. घटना के वक्त अंधेरा था, प्रशासन के साथ आसपास के लोगों ने मदद की और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. गंभीर रूप से घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस और स्वास्थ्यकर्मी राहत और बचाव कार्य में जुटी है. फिलहाल पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुटी है. वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन अब खत्म हो चुका है. ये भी पढ़ेंः .
स्ट्रीट वेंडरों को रोजगार देने की तैयारी में योगी सरकार लखनऊ. उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में प्रवासी मजदूरों से भरी डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी जिससे चौबीस मजदूरों की मौत हो गई. इस घटना में बीस से ज्यादा लोग घायल हैं. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. योगी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को हादसे में घायल हुए लोगों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को हर संभव राहत प्रदान करने तथा सभी घायलों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने मंडलायुक्त कानपुर तथा आईजी कानपुर को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य अपनी देख रेख में संपन्न कराने तथा दुर्घटना के कारणों की जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक, मजदूरों को लेकर आ रही डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी जिसमें चौबीस लोगों की मौत हो गई जबकि बीस से ज्यादा लोग लोग घायल हैं. सभी घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है. डीसीएम सड़क पर खड़ी थी तभी ट्रक ने उसमें टक्कर मार दी. औरेया की एसपी सुनीति सिंह और कई थानों की पुलिस मौके पर मौजूद है. जो लोग गंभीर रूप से घायल हैं उनको कानपुर के हैलट अस्पताल में रेफर किया गया है. घटना को देखते हुए मृतकों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है. घटना के वक्त अंधेरा था, प्रशासन के साथ आसपास के लोगों ने मदद की और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. गंभीर रूप से घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस और स्वास्थ्यकर्मी राहत और बचाव कार्य में जुटी है. फिलहाल पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुटी है. वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन अब खत्म हो चुका है. ये भी पढ़ेंः .
सिद्धार्थनगर। 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य' योजना (आयुष्मान भारत योजना) में जिले के 48 हजार परिवार और शामिल होंगे। 25 सितंबर को योजना की शुरूआत होने के बाद इसमें सामाजिक आर्थिक जनगणना-2011 में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के एक लाख 17 हजार व शहरी क्षेत्र के 11 हजार लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड का वितरण किया जा रहा है। इस सूची से इतर भी पात्रों से छूटने की शिकायतों के बाद शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों के द्वारा दोबारा सर्वे कराया गया। इसमें 48 हजार परिवार ऐसे पाए गए जिन्हे योजना का लाभ दिया जा सकता है। इसकी सूची शासन को भेज दी गई है। शासन से निर्देश मिलने के बाद इन लोगाें भी योजना में शामिल किया जाएगा। कच्चा मकान, परिवार में किसी वयस्क (16-59) साल का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति/ जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति/ दिहाड़ी मजदूर, बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और कानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि। भिखारी, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामकाज करने वाले, रेहड़ी-पटरी दुकानदार, मोची, फेरी वाले, सड़क पर कामकाज करने वाले, कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, मजदूर, पेंटर, वेल्डर, सिक्योरिटी गार्ड, कुली और भार ढोने वाले अन्य कामकाजी व्यक्ति, स्वीपर, सफाई कर्मी, घरेलू काम करने वाले, हेंडीक्राफ्ट का काम करने वाले लोग, टेलर, चालक, रिक्शा चालक, दुकान पर काम करने वाले । इस योजना में अधिकांश बीमारियों के उपचार और अस्पताल में दाखिल होने का कवर शामिल है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना में 1354 पैकेज शामिल किए हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी सभी सरकारी अस्पतालों और योजना के पैनल में शामिल निजी चिकित्सालयों में उपचार करा सकते हैं। योजना में अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक सारा खर्च योजना में कवर है। पैनल में शामिल अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा, वह अस्पताल में सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा। अस्पताल में हेल्प डेस्क भी होगी। योजना के लाभार्थी देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में उपचार करा सकेंगे। आयुष्मान भारत योजना(एबीवाई) के तहत पूर्व में चिह्नित लाभार्थियों का विवरण विभाग के पोर्टल पर अपलोड है। शासन के निर्देश 25 सितंबर को योजना शुरू होने के बाद दोबारा सर्वे कराया गया है। इसमें 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना से छूटे और पात्र 48 हजार लोग पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
सिद्धार्थनगर। 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य' योजना में जिले के अड़तालीस हजार परिवार और शामिल होंगे। पच्चीस सितंबर को योजना की शुरूआत होने के बाद इसमें सामाजिक आर्थिक जनगणना-दो हज़ार ग्यारह में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के एक लाख सत्रह हजार व शहरी क्षेत्र के ग्यारह हजार लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड का वितरण किया जा रहा है। इस सूची से इतर भी पात्रों से छूटने की शिकायतों के बाद शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों के द्वारा दोबारा सर्वे कराया गया। इसमें अड़तालीस हजार परिवार ऐसे पाए गए जिन्हे योजना का लाभ दिया जा सकता है। इसकी सूची शासन को भेज दी गई है। शासन से निर्देश मिलने के बाद इन लोगाें भी योजना में शामिल किया जाएगा। कच्चा मकान, परिवार में किसी वयस्क साल का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति/ जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति/ दिहाड़ी मजदूर, बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और कानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि। भिखारी, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामकाज करने वाले, रेहड़ी-पटरी दुकानदार, मोची, फेरी वाले, सड़क पर कामकाज करने वाले, कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, मजदूर, पेंटर, वेल्डर, सिक्योरिटी गार्ड, कुली और भार ढोने वाले अन्य कामकाजी व्यक्ति, स्वीपर, सफाई कर्मी, घरेलू काम करने वाले, हेंडीक्राफ्ट का काम करने वाले लोग, टेलर, चालक, रिक्शा चालक, दुकान पर काम करने वाले । इस योजना में अधिकांश बीमारियों के उपचार और अस्पताल में दाखिल होने का कवर शामिल है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना में एक हज़ार तीन सौ चौवन पैकेज शामिल किए हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी सभी सरकारी अस्पतालों और योजना के पैनल में शामिल निजी चिकित्सालयों में उपचार करा सकते हैं। योजना में अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक सारा खर्च योजना में कवर है। पैनल में शामिल अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा, वह अस्पताल में सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा। अस्पताल में हेल्प डेस्क भी होगी। योजना के लाभार्थी देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में उपचार करा सकेंगे। आयुष्मान भारत योजना के तहत पूर्व में चिह्नित लाभार्थियों का विवरण विभाग के पोर्टल पर अपलोड है। शासन के निर्देश पच्चीस सितंबर को योजना शुरू होने के बाद दोबारा सर्वे कराया गया है। इसमें दो हज़ार ग्यारह की सामाजिक-आर्थिक जनगणना से छूटे और पात्र अड़तालीस हजार लोग पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
रांची । युवाओं को जॉब और झारखंड गवर्नमेंट की नियोजन नीति पर विधानसभा में तीसरे दिन भी जोरदार हंगामा हुआ. विपक्षी बीजेपी के विधायकों ने इसे लेकर जहां सदन के अंदर-बाहर प्रदर्शन किया, वहीं सत्ताधारी दलों के विधायकों ने बीजेपी को झारखंड विरोधी करार दिया. सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई. सदन की कार्यवाही प्रारम्भ होने से पहले विधानसभा के मुख्य द्वार पर विपक्ष के विधायकों ने तख्तियां लेकर धरना- प्रदर्शन किया और गवर्नमेंट के विरूद्ध नारेबाजी की. बीजेपी विधायकों ने गवर्नमेंट पर युवाओं को ठगने का आरोप लगाया. उन्होंने रोजगार छीनने वाली गवर्नमेंट होश में आओ, फर्जी नियोजन नीति बनाने वाली गवर्नमेंट लज्जा करो जैसे नारे लगाए. इसके बाद सदन की कार्यवाही प्रारम्भ होते ही बीजेपी के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. स्पीकर के बार-बार के आग्रह के बावजूद बीजेपी विधायक भानु प्रताप शाही, अमित मंडल, बिरंची नारायण, रणधीर सिंह एवं अन्य लगातार नारे लगाते रहे. हंगामे के बीच भानु प्रताप शाही ने बोला कि हमलोग सदन में सड़क-नाली पर चर्चा के लिए नहीं आए हैं. युवा सड़क पर हैं. गवर्नमेंट बताए कि राज्य में कौन सी नियोजन नीति लागू है? उन्होंने मांग किया कि सदन में नियोजन नीति पर चर्चा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि विधि विभाग की विरोध के बाद भी जानबूझकर ऐसी नीति बनाई जा रही है, जिससे नौकरियों की परीक्षाएं रद्द हो रही हैं.
रांची । युवाओं को जॉब और झारखंड गवर्नमेंट की नियोजन नीति पर विधानसभा में तीसरे दिन भी जोरदार हंगामा हुआ. विपक्षी बीजेपी के विधायकों ने इसे लेकर जहां सदन के अंदर-बाहर प्रदर्शन किया, वहीं सत्ताधारी दलों के विधायकों ने बीजेपी को झारखंड विरोधी करार दिया. सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई. सदन की कार्यवाही प्रारम्भ होने से पहले विधानसभा के मुख्य द्वार पर विपक्ष के विधायकों ने तख्तियां लेकर धरना- प्रदर्शन किया और गवर्नमेंट के विरूद्ध नारेबाजी की. बीजेपी विधायकों ने गवर्नमेंट पर युवाओं को ठगने का आरोप लगाया. उन्होंने रोजगार छीनने वाली गवर्नमेंट होश में आओ, फर्जी नियोजन नीति बनाने वाली गवर्नमेंट लज्जा करो जैसे नारे लगाए. इसके बाद सदन की कार्यवाही प्रारम्भ होते ही बीजेपी के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. स्पीकर के बार-बार के आग्रह के बावजूद बीजेपी विधायक भानु प्रताप शाही, अमित मंडल, बिरंची नारायण, रणधीर सिंह एवं अन्य लगातार नारे लगाते रहे. हंगामे के बीच भानु प्रताप शाही ने बोला कि हमलोग सदन में सड़क-नाली पर चर्चा के लिए नहीं आए हैं. युवा सड़क पर हैं. गवर्नमेंट बताए कि राज्य में कौन सी नियोजन नीति लागू है? उन्होंने मांग किया कि सदन में नियोजन नीति पर चर्चा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि विधि विभाग की विरोध के बाद भी जानबूझकर ऐसी नीति बनाई जा रही है, जिससे नौकरियों की परीक्षाएं रद्द हो रही हैं.
PATNA : मंडे को नियोजित शिक्षकों के विभिन्न संगठनों को एजुकेशन मिनिस्टर पीके शाही ने वार्ता के लिए बुलाया था। तय समय पर शिक्षक नेता विधान मंडल परिसर पहुंचे, लेकिन वहां जाने के बाद शिक्षकों को पता चला कि एजुकेशन मिनिस्टर हैं ही नहीं। वार्ता विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से होगी। वार्ता हुई भी पर शिक्षकों निराशा हाथ लगी। शिक्षक नेता बड़े ही उम्मीद के साथ वार्ता करने सभापति के कक्ष में गये। उन्हें यह लग रहा था कि अगर शिक्षा मंत्री नहीं हैं तो कोई और मंत्री उनकी जगह पर होंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षा विभाग के कुछ ऑफिसर जरूर थे। शिक्षकों को बताया गया कि शिक्षा मंत्री पटना से बाहर हैं इसलिए वर्ता में नहीं आ सके। सूत्रों की माने तो सभापति के कक्ष में होने वाले विधान परिषद के चुनाव के कुछ भावी उम्मीदवार मौजूद थे। सभापति ने सभी को इंट्रोड्यूश करवाया कि ये हैं भावी नेता और यही अब आपकी लड़ाई लड़ेंगे और अब भी नियोजित शिक्षकों की समस्या को लेकर गंभीर हैं। सभी नियोजित शिक्षक नेताओं को भावी उम्मीदवार के क्षेत्र का ब्योरा भी बताया गया। बहरहाल शिक्षक नेता वार्ता के बाद मायूस होकर लौट आये। मालूम हो कि फ्क् मार्च को नियोजित शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर राजधानी में प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद शिक्षक आर ब्लॉक पर आमरण अनशन पर बैठ गये थे। ठीक इसी दिन एजुकेशन मिनिस्टर ने सदन मे आश्वासन दिया था कि नियोजित शिक्षको से छह अप्रैल को बात होगी। साथ ही यह भी कहा था कि कुछ न कुछ पॉजिटिव रिजल्ट आयेगा। इसके बाद परिषद की ओर से एक अप्रैल को एक लेटर भी शिक्षकों को मिला कि जिसमें अनुरोध किया गया था कि अनशन समाप्त कर लिया जाय, आने वाली छह तारीख को वार्ता होगी। इसी आश्वासन के बाद संगठन ने अनशन को स्थगित किया था। लेकिन अब जब कुछ भी हाथ नहीं लगा है तो शिक्षक संगठन खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। वार्त की अगली तिथि आठ अप्रैल को दी गयी है। एजुकेशन मिनिस्टर ने सदन ही नहीं लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अवहेलना की है। अगर आठ अप्रैल को हम शिक्षकों के पक्ष में निर्णय नहीं लिया जाता है तो गंभीर आंदोलन किए जायेंगे। स्कूलों में तालाबंदी होगी, मैट्रिक की परीक्षा के मुल्यांकन का भी बहिष्कार होगा।
PATNA : मंडे को नियोजित शिक्षकों के विभिन्न संगठनों को एजुकेशन मिनिस्टर पीके शाही ने वार्ता के लिए बुलाया था। तय समय पर शिक्षक नेता विधान मंडल परिसर पहुंचे, लेकिन वहां जाने के बाद शिक्षकों को पता चला कि एजुकेशन मिनिस्टर हैं ही नहीं। वार्ता विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से होगी। वार्ता हुई भी पर शिक्षकों निराशा हाथ लगी। शिक्षक नेता बड़े ही उम्मीद के साथ वार्ता करने सभापति के कक्ष में गये। उन्हें यह लग रहा था कि अगर शिक्षा मंत्री नहीं हैं तो कोई और मंत्री उनकी जगह पर होंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षा विभाग के कुछ ऑफिसर जरूर थे। शिक्षकों को बताया गया कि शिक्षा मंत्री पटना से बाहर हैं इसलिए वर्ता में नहीं आ सके। सूत्रों की माने तो सभापति के कक्ष में होने वाले विधान परिषद के चुनाव के कुछ भावी उम्मीदवार मौजूद थे। सभापति ने सभी को इंट्रोड्यूश करवाया कि ये हैं भावी नेता और यही अब आपकी लड़ाई लड़ेंगे और अब भी नियोजित शिक्षकों की समस्या को लेकर गंभीर हैं। सभी नियोजित शिक्षक नेताओं को भावी उम्मीदवार के क्षेत्र का ब्योरा भी बताया गया। बहरहाल शिक्षक नेता वार्ता के बाद मायूस होकर लौट आये। मालूम हो कि फ्क् मार्च को नियोजित शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर राजधानी में प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद शिक्षक आर ब्लॉक पर आमरण अनशन पर बैठ गये थे। ठीक इसी दिन एजुकेशन मिनिस्टर ने सदन मे आश्वासन दिया था कि नियोजित शिक्षको से छह अप्रैल को बात होगी। साथ ही यह भी कहा था कि कुछ न कुछ पॉजिटिव रिजल्ट आयेगा। इसके बाद परिषद की ओर से एक अप्रैल को एक लेटर भी शिक्षकों को मिला कि जिसमें अनुरोध किया गया था कि अनशन समाप्त कर लिया जाय, आने वाली छह तारीख को वार्ता होगी। इसी आश्वासन के बाद संगठन ने अनशन को स्थगित किया था। लेकिन अब जब कुछ भी हाथ नहीं लगा है तो शिक्षक संगठन खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। वार्त की अगली तिथि आठ अप्रैल को दी गयी है। एजुकेशन मिनिस्टर ने सदन ही नहीं लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अवहेलना की है। अगर आठ अप्रैल को हम शिक्षकों के पक्ष में निर्णय नहीं लिया जाता है तो गंभीर आंदोलन किए जायेंगे। स्कूलों में तालाबंदी होगी, मैट्रिक की परीक्षा के मुल्यांकन का भी बहिष्कार होगा।
UP में होली पर गाने बजाने पर लगा बैन, गाइडलाइन जारी करते हुए सीएम योगी ने दी कड़ी चेतावनी : अभी अभी इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है बताया जाता है कि होली को ध्यान में रखकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है. ताजा अपडेट के अनुसार इस बार होली के दौरान सोहर गीत बजाने वालों पर जमकर कार्रवाई होगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी ने होली के मौके पर गाने बजाने पर बैन लगा दिया है। त्योहार के लिए गाइडलाइन जारी करते हुए सीएम योगी ने सख्त चेतावनी दी है।
UP में होली पर गाने बजाने पर लगा बैन, गाइडलाइन जारी करते हुए सीएम योगी ने दी कड़ी चेतावनी : अभी अभी इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है बताया जाता है कि होली को ध्यान में रखकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है. ताजा अपडेट के अनुसार इस बार होली के दौरान सोहर गीत बजाने वालों पर जमकर कार्रवाई होगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी ने होली के मौके पर गाने बजाने पर बैन लगा दिया है। त्योहार के लिए गाइडलाइन जारी करते हुए सीएम योगी ने सख्त चेतावनी दी है।
भगवान प्रजापत, उदयपुर : झीलों की नगरी उदयपुर में हनी ट्रैप के मामले में युवती ने युवक से शारीरिक संबंध बनाकर अपने तीन अन्य साथियों के माध्यम से ब्लैकमेल करते हुए 12 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित युवक पुलिस के पास पहुंचा, जहां प्रकरण दर्ज करते हुए युवती के तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला उदयपुर शहर के सवीना थाने का है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित युवक को बर्बाद होने से बचा लिया। थानाधिकारी रविन्द्र चारण ने बताया कि राजेश पुत्र मदनलाल औदिच्य ने नेहा शर्मा, विजय परिहार, रमेश मेघवाल और हेमंत सालवी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। राजेश ने बताया कि नेहा शर्मा से Whatsapp के माध्यम से सम्पर्क हुआ। इसके बाद दोनों के बीच बातें होने लगीं। इसी दौरान युवती ने फोन कर राजेश को कमरे पर बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद नेहा ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। नेहा ने राजेश से पैसे एंठने के लिए विजय परिहार और हेमंत सालवी को बुलाया। दोनों ने उसे धमकाया और 12 लाख रुपये मांगे। आरोपी उसके पास से 25 हजार रुपये लेकर चले गए। इसके बाद आरोपी उसे फोन पर लगातार पैसों की मांग करते रहे और 65 हजार रुपये झटक चुके थे। पैसे नहीं देने पर दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देते थे। पीड़ित के अनुसार आरोपियों के पास उसकी वीडियो रिकार्डिंग थी। इसके आधार पर उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। विजय परिहार, हेमन्त सालवी और अरविंद सिंह से पुलिस पूछताछ कर रही है।
भगवान प्रजापत, उदयपुर : झीलों की नगरी उदयपुर में हनी ट्रैप के मामले में युवती ने युवक से शारीरिक संबंध बनाकर अपने तीन अन्य साथियों के माध्यम से ब्लैकमेल करते हुए बारह लाख रुपये की मांग की। पीड़ित युवक पुलिस के पास पहुंचा, जहां प्रकरण दर्ज करते हुए युवती के तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला उदयपुर शहर के सवीना थाने का है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित युवक को बर्बाद होने से बचा लिया। थानाधिकारी रविन्द्र चारण ने बताया कि राजेश पुत्र मदनलाल औदिच्य ने नेहा शर्मा, विजय परिहार, रमेश मेघवाल और हेमंत सालवी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। राजेश ने बताया कि नेहा शर्मा से Whatsapp के माध्यम से सम्पर्क हुआ। इसके बाद दोनों के बीच बातें होने लगीं। इसी दौरान युवती ने फोन कर राजेश को कमरे पर बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद नेहा ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। नेहा ने राजेश से पैसे एंठने के लिए विजय परिहार और हेमंत सालवी को बुलाया। दोनों ने उसे धमकाया और बारह लाख रुपये मांगे। आरोपी उसके पास से पच्चीस हजार रुपये लेकर चले गए। इसके बाद आरोपी उसे फोन पर लगातार पैसों की मांग करते रहे और पैंसठ हजार रुपये झटक चुके थे। पैसे नहीं देने पर दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देते थे। पीड़ित के अनुसार आरोपियों के पास उसकी वीडियो रिकार्डिंग थी। इसके आधार पर उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। विजय परिहार, हेमन्त सालवी और अरविंद सिंह से पुलिस पूछताछ कर रही है।
जबलपुर-भोपाल फोरलेन पर शनिवार 4 सितंबर को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। बाइक से सुबह कैम्प के लिए निकले एनसीसी कैडेट्स की बाइक रोड पर खड़े हाईवा से टकरा गई। युवक के सिर में गंभीर चोट आई। जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया गया, उसकी मौत हो चुकी थी। शहपुरा पुलिस के मुताबिक ये हादसा खिरकाखेड़ा के पास शहपुरा रोड पर हुआ। बरेला निवासी आर्यन पाटकर (20) पिछले 15 दिनों से अपने मामा उत्तम पाटकर के घर शहपुरा में रह रहा था। वह शनिवार को एनसीसी की ड्रेस में बाइक से जबलपुर के लिए निकला था। खिरकाखेड़ा के पास उसकी बाइक खड़े हाईवा से टकरा गई। हादसे में आर्यन के सिर में गंभीर चोटें आई। उसे तत्काल स्थानीय लोगों ने शहपुरा अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शहपुरा पुलिस के मुताबिक हाइवा एमपी 20 एचबी 6048 पंक्चर हो गया था। इसके चलते ड्राइवर ने हाईवा को उसी हालत में सड़क पर छोड़ दिया था। उसने हाईवा की लाइट और कोई संकेतक नहीं लगाया था। इसकी वजह से हाईवा नहीं दिखा और ये आर्यन बाइक लेकर टकरा गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पीएम कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। वहीं शहपुरा रोड पर बाइक सवार श्रमिक सुरेंद्र सिंह (40) निवासी उमरिया को शनिवार को एक भारी वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में घायल सुरेंद्र को मेडिकल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। एक्सीडेंट के बाद वाहन लेकर फरार ड्राइवर की तलाश में पुलिस जुटी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जबलपुर-भोपाल फोरलेन पर शनिवार चार सितंबर को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। बाइक से सुबह कैम्प के लिए निकले एनसीसी कैडेट्स की बाइक रोड पर खड़े हाईवा से टकरा गई। युवक के सिर में गंभीर चोट आई। जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया गया, उसकी मौत हो चुकी थी। शहपुरा पुलिस के मुताबिक ये हादसा खिरकाखेड़ा के पास शहपुरा रोड पर हुआ। बरेला निवासी आर्यन पाटकर पिछले पंद्रह दिनों से अपने मामा उत्तम पाटकर के घर शहपुरा में रह रहा था। वह शनिवार को एनसीसी की ड्रेस में बाइक से जबलपुर के लिए निकला था। खिरकाखेड़ा के पास उसकी बाइक खड़े हाईवा से टकरा गई। हादसे में आर्यन के सिर में गंभीर चोटें आई। उसे तत्काल स्थानीय लोगों ने शहपुरा अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शहपुरा पुलिस के मुताबिक हाइवा एमपी बीस एचबी छः हज़ार अड़तालीस पंक्चर हो गया था। इसके चलते ड्राइवर ने हाईवा को उसी हालत में सड़क पर छोड़ दिया था। उसने हाईवा की लाइट और कोई संकेतक नहीं लगाया था। इसकी वजह से हाईवा नहीं दिखा और ये आर्यन बाइक लेकर टकरा गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पीएम कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। वहीं शहपुरा रोड पर बाइक सवार श्रमिक सुरेंद्र सिंह निवासी उमरिया को शनिवार को एक भारी वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में घायल सुरेंद्र को मेडिकल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। एक्सीडेंट के बाद वाहन लेकर फरार ड्राइवर की तलाश में पुलिस जुटी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शफीकुर्रहमान बर्क का ये बयान अखिलेश यादव के सारे उत्साह को दबा देने वाला है। बर्क का ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वो सभी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि यूपी में सभी बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों को एक होना पड़ेगा। ऐसा होना नामुमकिन ही दिख रहा है। UP Politics: उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश की बर्बादी के लिए जिम्मेदार मुख्यमंत्री हैं, पर्यटन मंत्री नहीं हैं। पर्यटन मंत्री कब दूसरे के साथ पर्यटन कर लेंगे। आपको पता ही नहीं हैं। पहले भी पर्यटन कर चुके है वो अगर आपको याद हो। इतना ही नहीं यह तक दावा कर दिया। कि मैनपुरी उपचुनाव में पर्यटन मंत्री ने ही समाजवादी पार्टी को जिताया है। इससे पहले अखिलेश यादव ने बीते दिनों यूपी विधानसभा में माफिया अतीक अहमद के मसले पर कहा था कि अतीक को बीएसपी ने भी पोषित किया, लेकिन बीजेपी कभी बीएसपी का नाम नहीं लेती, क्योंकि दोनों के बीच दोस्ती है। अब बीएसपी की तरफ से बीजेपी का बी टीम बताए जाने के बाद सपा के साथ सियासी जंग के आसार दिख रहे हैं। Uttar Pradesh: इससे पहले गठबंधन ना होते हुए भी कई मौकों पर समाजवादी पार्टी ने अमेठी से उम्मीदवार नहीं उतरा था। नेहरू-गांधी परिवार की ये पारंपरिक सीट रही है। लेकिन साल 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शिकस्त देकर उनके किला को ध्वस्त कर दिया था। सदाकत को उमेश पाल हत्याकांड के सिलसिले में सोमवार को प्रयागराज पुलिस ने गिरफ्तार किया था। प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के मुताबिक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मुस्लिम होस्टल में सदाकत का रूम है। उसी रूम में उमेश पाल की हत्या की साजिश रची गई। मायावती ने ये भी कहा है कि उमेश की हत्या में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन और बेटों का नाम आया है। अगर जांच में पता चला कि इनपर लगे आरोप सही हैं, तो बीएसपी से शाइस्ता परवीन को निकाल दिया जाएगा। मायावती ने सपा पर आरोप लगाया और कहा कि सबको पता है कि अतीक अहमद सपा का ही प्रोडक्ट है। UP: सीएम योगी ने अखिलेश पर चुटीले अंदाज में भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यहां पर नेता विरोधी दल के मुख से एक नई चर्चा भी सुनने को मिली खेल के बारे में। वो कह रहे थे कि आप अकेले मैच क्यों देख रहे हैं। CM Yogi: बीते दिनों लखनऊ में कुछ लोगों ने रामचरितमानस की प्रतियां जलाई थीं, जिसके बाद इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना का जिक्र आज सीएम योगी ने विधानसभा में किया है। उधर, मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह राम-कृष्ण की धरती है, जिस पर हम सभी को गौरव करना चाहिए, लेकिन अब लोग सियासी हित के लिए कुछ भी करने पर आमादा हो चुके हैं। योगी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि माफिया किसी भी पार्टी का हो, हमारी सरकार उसे पस्त करेगी और कमर तोड़ देगी। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हीं के शासनकाल में स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ था। लड़के हैं, गलती कर देते हैं वाली भाषा आपके ही कार्यकाल की है।
शफीकुर्रहमान बर्क का ये बयान अखिलेश यादव के सारे उत्साह को दबा देने वाला है। बर्क का ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वो सभी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि यूपी में सभी बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों को एक होना पड़ेगा। ऐसा होना नामुमकिन ही दिख रहा है। UP Politics: उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश की बर्बादी के लिए जिम्मेदार मुख्यमंत्री हैं, पर्यटन मंत्री नहीं हैं। पर्यटन मंत्री कब दूसरे के साथ पर्यटन कर लेंगे। आपको पता ही नहीं हैं। पहले भी पर्यटन कर चुके है वो अगर आपको याद हो। इतना ही नहीं यह तक दावा कर दिया। कि मैनपुरी उपचुनाव में पर्यटन मंत्री ने ही समाजवादी पार्टी को जिताया है। इससे पहले अखिलेश यादव ने बीते दिनों यूपी विधानसभा में माफिया अतीक अहमद के मसले पर कहा था कि अतीक को बीएसपी ने भी पोषित किया, लेकिन बीजेपी कभी बीएसपी का नाम नहीं लेती, क्योंकि दोनों के बीच दोस्ती है। अब बीएसपी की तरफ से बीजेपी का बी टीम बताए जाने के बाद सपा के साथ सियासी जंग के आसार दिख रहे हैं। Uttar Pradesh: इससे पहले गठबंधन ना होते हुए भी कई मौकों पर समाजवादी पार्टी ने अमेठी से उम्मीदवार नहीं उतरा था। नेहरू-गांधी परिवार की ये पारंपरिक सीट रही है। लेकिन साल दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शिकस्त देकर उनके किला को ध्वस्त कर दिया था। सदाकत को उमेश पाल हत्याकांड के सिलसिले में सोमवार को प्रयागराज पुलिस ने गिरफ्तार किया था। प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के मुताबिक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मुस्लिम होस्टल में सदाकत का रूम है। उसी रूम में उमेश पाल की हत्या की साजिश रची गई। मायावती ने ये भी कहा है कि उमेश की हत्या में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन और बेटों का नाम आया है। अगर जांच में पता चला कि इनपर लगे आरोप सही हैं, तो बीएसपी से शाइस्ता परवीन को निकाल दिया जाएगा। मायावती ने सपा पर आरोप लगाया और कहा कि सबको पता है कि अतीक अहमद सपा का ही प्रोडक्ट है। UP: सीएम योगी ने अखिलेश पर चुटीले अंदाज में भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यहां पर नेता विरोधी दल के मुख से एक नई चर्चा भी सुनने को मिली खेल के बारे में। वो कह रहे थे कि आप अकेले मैच क्यों देख रहे हैं। CM Yogi: बीते दिनों लखनऊ में कुछ लोगों ने रामचरितमानस की प्रतियां जलाई थीं, जिसके बाद इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना का जिक्र आज सीएम योगी ने विधानसभा में किया है। उधर, मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह राम-कृष्ण की धरती है, जिस पर हम सभी को गौरव करना चाहिए, लेकिन अब लोग सियासी हित के लिए कुछ भी करने पर आमादा हो चुके हैं। योगी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि माफिया किसी भी पार्टी का हो, हमारी सरकार उसे पस्त करेगी और कमर तोड़ देगी। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हीं के शासनकाल में स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ था। लड़के हैं, गलती कर देते हैं वाली भाषा आपके ही कार्यकाल की है।
रागोपक्लिष्ट चित्त अविमुक्त है तो यह चित्त अवश्य रागपर्यवस्थित ( राग-संप्रयुक्त ) नहीं है किन्तु यह रागोपहत है। [राग की समुदाचारता नहीं है, ( समुदाचरन् ) [ व्या ३०१.३१] किन्तु उसकी वासना के आधान से चित्त उपहत होता है। जब योगी राग से व्यावृत्त होता है [अर्थात् उस वासना का निरोध कर चित्त-दौष्ठुल्य का व्यावर्तन करता है ] तव चित्त विमुक्त होता है। इसी प्रकार अविद्या ( कुप्रज्ञा ) से क्लिष्ट प्रज्ञा शुद्ध नहीं होती : कुशल होने पर भी यह अविद्या से उपहत होती है। वादी को उसकी परिकल्पना से कोन निवारण कर सकता है ? " अविद्या प्रज्ञास्वभाव नहीं है। जिस वादी का मत है कि अविद्या सर्वक्लेशस्वभाव है उसका भी इसी से प्रतिषेध होता है । यदि अविद्या सर्ववलेशस्वभाव है तो संयोजनादि में इसका पृथक् [९२] वचन नहीं हो सकता। यह दृष्टि और अन्य क्लेशों से संप्रयुक्त नहीं है । आगम का यह् वचन न होना चाहिये था कि "रागोपक्लिप्ट चित्त विमुक्त नहीं होता " किन्तु उसे "अविद्या " से उपक्लिष्ट चित्त " कहना चाहिये था । क्या आप यह कहेंगे कि मत के विशेषणार्थ ऐसा कहा और सूत्र का कहने का यह आशय है कि "रागलक्षणा अविद्या से उपक्लिप्ट चित्त विमुक्त नहीं होता " ? इस विकल्प में आगम को इसका भी अवधारण करना चाहिये कि अविद्या का वह कौन सा प्रकार है जो प्रज्ञा की विशुद्धि में प्रतिवन्ध है। किन्तु आगम कहता है कि "अविद्या से उपक्लिष्ट प्रज्ञा शुद्ध नहीं होती।" को हि परिकल्पयन्तं निवर्तयति-- व्याख्या कल्पनामात्रमेतद् आगमनिरपेक्षमिति कथयति [व्या ३०१. ३४]- फा-पाओ और पू-कुआंग का इसमें एकमत्य नहीं है कि वसुबन्धु यहाँ सौत्रान्तिक के विरुद्ध वैभाषिक पक्ष लेते हैं अथवा नहीं । दूसरे शब्दों में जब आचार्य यह कहते हैं कि वादी को कौन उसकी कल्पनाओं से रोक सकता है तो या तो वह अपना मत देते हैं या वैभाषिक वचन का उल्लेख करते हैं । व्याख्या प्रथम विकल्प को स्वीकार करती है। संवभद्र कहते हैं कि "सौत्रान्तिक का कहना है कि कुशल प्रज्ञा व्यवकीर्ण हो सकती " । हम जानते हैं कि वह वसुबन्धु का उल्लेख सदा 'सौत्रान्तिक' करके करते हैं। चीनी टीकाकारों का विचार है कि वसुबन्धु इस वाद का प्रतिषेध करते है कि कुशल और क्लिष्ट प्रज्ञा का व्यतिषंग होता है किन्तु उनका यह मत नहीं है कि अविद्या एक पृथक् धर्म है । शुआन् चाड : "यथा राग चित्त से भिन्न है उसी प्रकार प्रज्ञा से भि अविद्या एक धर्मान्तर है । यह वाद सुष्टु ह भदन्त श्रीलाभ (व्या --श्रीलात ) कहते हैं कि "अविद्या सर्वक्लेश की सामान्य संज्ञा है; रागादि क्लेश से व्यतिरिक्त कोई अविद्या नहीं है ( अविद्येति सर्वक्लेशानामियं सामान्यसंज्ञा । न रागादिक्लेशव्यतिरिक्ताऽविद्या नामास्ति ) [ व्या ३०२.२] - - इस सूत्र के अनुसार "हे महाकौष्ठिल! यथाभूत नहीं जानते हैं (न प्रजानाति ) इससे अविद्या कहलाती है." [संयुत्त, ३. १७२ः महाकोट्ठितो (या महाकोट्ठिको) अवोच । अविज्जा अविज्जाति आवसो सारिपुत्त वुच्चति...] वास्तव में सब क्लेश अज्ञानस्वरूप हैं क्योंकि वह धर्मों का विपरीत ग्रहण करते हैं (विपरीतग्रहणतः ) नैज्जियों १२७४ में यह हरिवर्मा का वाद है। साएकी के अनुसार वमुबन्धु का यहाँ हरिवर्मा से अभिप्राय है।
रागोपक्लिष्ट चित्त अविमुक्त है तो यह चित्त अवश्य रागपर्यवस्थित नहीं है किन्तु यह रागोपहत है। [राग की समुदाचारता नहीं है, [ व्या तीन सौ एक.इकतीस] किन्तु उसकी वासना के आधान से चित्त उपहत होता है। जब योगी राग से व्यावृत्त होता है [अर्थात् उस वासना का निरोध कर चित्त-दौष्ठुल्य का व्यावर्तन करता है ] तव चित्त विमुक्त होता है। इसी प्रकार अविद्या से क्लिष्ट प्रज्ञा शुद्ध नहीं होती : कुशल होने पर भी यह अविद्या से उपहत होती है। वादी को उसकी परिकल्पना से कोन निवारण कर सकता है ? " अविद्या प्रज्ञास्वभाव नहीं है। जिस वादी का मत है कि अविद्या सर्वक्लेशस्वभाव है उसका भी इसी से प्रतिषेध होता है । यदि अविद्या सर्ववलेशस्वभाव है तो संयोजनादि में इसका पृथक् [बानवे] वचन नहीं हो सकता। यह दृष्टि और अन्य क्लेशों से संप्रयुक्त नहीं है । आगम का यह् वचन न होना चाहिये था कि "रागोपक्लिप्ट चित्त विमुक्त नहीं होता " किन्तु उसे "अविद्या " से उपक्लिष्ट चित्त " कहना चाहिये था । क्या आप यह कहेंगे कि मत के विशेषणार्थ ऐसा कहा और सूत्र का कहने का यह आशय है कि "रागलक्षणा अविद्या से उपक्लिप्ट चित्त विमुक्त नहीं होता " ? इस विकल्प में आगम को इसका भी अवधारण करना चाहिये कि अविद्या का वह कौन सा प्रकार है जो प्रज्ञा की विशुद्धि में प्रतिवन्ध है। किन्तु आगम कहता है कि "अविद्या से उपक्लिष्ट प्रज्ञा शुद्ध नहीं होती।" को हि परिकल्पयन्तं निवर्तयति-- व्याख्या कल्पनामात्रमेतद् आगमनिरपेक्षमिति कथयति [व्या तीन सौ एक. चौंतीस]- फा-पाओ और पू-कुआंग का इसमें एकमत्य नहीं है कि वसुबन्धु यहाँ सौत्रान्तिक के विरुद्ध वैभाषिक पक्ष लेते हैं अथवा नहीं । दूसरे शब्दों में जब आचार्य यह कहते हैं कि वादी को कौन उसकी कल्पनाओं से रोक सकता है तो या तो वह अपना मत देते हैं या वैभाषिक वचन का उल्लेख करते हैं । व्याख्या प्रथम विकल्प को स्वीकार करती है। संवभद्र कहते हैं कि "सौत्रान्तिक का कहना है कि कुशल प्रज्ञा व्यवकीर्ण हो सकती " । हम जानते हैं कि वह वसुबन्धु का उल्लेख सदा 'सौत्रान्तिक' करके करते हैं। चीनी टीकाकारों का विचार है कि वसुबन्धु इस वाद का प्रतिषेध करते है कि कुशल और क्लिष्ट प्रज्ञा का व्यतिषंग होता है किन्तु उनका यह मत नहीं है कि अविद्या एक पृथक् धर्म है । शुआन् चाड : "यथा राग चित्त से भिन्न है उसी प्रकार प्रज्ञा से भि अविद्या एक धर्मान्तर है । यह वाद सुष्टु ह भदन्त श्रीलाभ कहते हैं कि "अविद्या सर्वक्लेश की सामान्य संज्ञा है; रागादि क्लेश से व्यतिरिक्त कोई अविद्या नहीं है [ व्या तीन सौ दो.दो] - - इस सूत्र के अनुसार "हे महाकौष्ठिल! यथाभूत नहीं जानते हैं इससे अविद्या कहलाती है." [संयुत्त, तीन. एक सौ बहत्तरः महाकोट्ठितो अवोच । अविज्जा अविज्जाति आवसो सारिपुत्त वुच्चति...] वास्तव में सब क्लेश अज्ञानस्वरूप हैं क्योंकि वह धर्मों का विपरीत ग्रहण करते हैं नैज्जियों एक हज़ार दो सौ चौहत्तर में यह हरिवर्मा का वाद है। साएकी के अनुसार वमुबन्धु का यहाँ हरिवर्मा से अभिप्राय है।
ऋषिकेश, संवाददाता। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैठक कर नगर पंचायत कांग्रेस कमेटी तपोवन का गठन किया है। इसमें सर्वसम्मति से नवीन भंडारी को अध्यक्ष बनाया गया। वक्ताओं ने आगामी निकाय चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया। गुरुवार को तपोवन में जिलाध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल की उपस्थित में नगर पंचायत कांग्रेस कमेटी तपोवन का गठन किया गया। नवीन भंडारी को अध्यक्ष बनाया गया। जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के निर्देश पर कमेटी तपोवन का गठन किया गया है। नवनियुक्त अध्यक्ष नवीन भंडारी ने कहा कि हमारा लक्ष्य प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाना है। शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी गई इस जिम्मेदारी पर खरा उतरना होगा। इस दौरान कांग्रेसियों ने नवनियुक्त अध्यक्ष को बधाई दी। मौके पर जगमोहन भंडारी, राजेंद्र सिंह राणा, इंटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक भट्ट, अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष सुनील आर्य, प्रमिला बिजल्वाण, यशपाल भंडारी, पूर्व प्रधान चैन सिंह बिष्ट, दिनेश सकलानी, महावीर खरोला, पूरण भंडारी, एडवोकेट अनिल रावत, सचिन सेलवान, सभासद विनोद सकलानी, सुरेंद्र भंडारी, ध्रुव पवार, जतिन गुप्ता, अभिषेक नेगी, पीयूष रतूड़ी, सोनू भंडारी, रोहन, अमन सजवाण, शुभम, भूरी भंडारी, तपेस, विक्रम नेगी, मुकेश वर्मा, नरेंद्र कैंतूरा आदि रहे।
ऋषिकेश, संवाददाता। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैठक कर नगर पंचायत कांग्रेस कमेटी तपोवन का गठन किया है। इसमें सर्वसम्मति से नवीन भंडारी को अध्यक्ष बनाया गया। वक्ताओं ने आगामी निकाय चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया। गुरुवार को तपोवन में जिलाध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल की उपस्थित में नगर पंचायत कांग्रेस कमेटी तपोवन का गठन किया गया। नवीन भंडारी को अध्यक्ष बनाया गया। जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के निर्देश पर कमेटी तपोवन का गठन किया गया है। नवनियुक्त अध्यक्ष नवीन भंडारी ने कहा कि हमारा लक्ष्य प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाना है। शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी गई इस जिम्मेदारी पर खरा उतरना होगा। इस दौरान कांग्रेसियों ने नवनियुक्त अध्यक्ष को बधाई दी। मौके पर जगमोहन भंडारी, राजेंद्र सिंह राणा, इंटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक भट्ट, अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष सुनील आर्य, प्रमिला बिजल्वाण, यशपाल भंडारी, पूर्व प्रधान चैन सिंह बिष्ट, दिनेश सकलानी, महावीर खरोला, पूरण भंडारी, एडवोकेट अनिल रावत, सचिन सेलवान, सभासद विनोद सकलानी, सुरेंद्र भंडारी, ध्रुव पवार, जतिन गुप्ता, अभिषेक नेगी, पीयूष रतूड़ी, सोनू भंडारी, रोहन, अमन सजवाण, शुभम, भूरी भंडारी, तपेस, विक्रम नेगी, मुकेश वर्मा, नरेंद्र कैंतूरा आदि रहे।
किस भारतीय का मुरीद है पाकिस्तानी सिख क्रिकेटर? पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के लिए उभरते हुए क्रिकेटरों में से चुने गए देश के पहले सिख क्रिकेटर महिंदर पाल सिंह 'क्रिकेट के गॉड' सचिन तेंदुलकर के दीवाने हैं. बीबीसी से खास बातचीत में दाहिने हाथ से तेज गेंदबाज़ी करने वाले महिंदर पाल सिंह से ने बताया कि वो बचपन से ही क्रिकेट खेलते रहे हैं और इसमें उन्हें अपने माँ और पिता की तरफ़ से क़ाफ़ी प्रोत्साहन मिला. वो मेहनत करते रहे और आज इस मुक़ाम पर हैं. अब उनका एक ही सपना है कि वो पाकिस्तान की क्रिकेट टीम की तरफ़ से खेलें. 20 साल के महिंदर पाल सिंह ने कहा है कि उनके प्रशिक्षण में मुदस्सर नज़र, मुश्ताक अहमद ने उनके खेल की सराहना की है. महिंदर पाल पाकिस्तान के 'ननकाना साहब' गुरुद्वारा में सेवा करते हैं और क्रिकेट की मंज़िल तक पढ़ाई के साथ-साथ पहुँचना चाहते हैं. छह भाई बहनों में सबसे बड़े महिंदर कहते हैं कि ज़िंदगी गुज़ारने के लिए पढ़ाई ज़रूरी है. वक़ार यूनुस को पसंद करने वाले और उन्हें अपना आदर्श मानने वाले महिंदर ने गली मोहल्ले से क्रिकेट खेलते हुए पाकिस्तान में इतिहास बना लिया है और आगे पाकिस्तान का नाम रोशन करना चाहते हैं. उनकी तमन्ना है कि वो अपनी ज़िंदगी में एक बार सचिन से मिलें. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार ख़ान ने भी मुल्तान क्रिकेट अकेडमी में मुलाक़ात के दौरान उनकी सराहना की. राइट आर्म फ़ास्ट बॉलर महिंदर पाल सिंह का कहना है कि क्रिकेट टीमवर्क सिखाता है तो पढ़ाई तहज़ीब सिखाती है. सरदार हैं तो पंजाबी गाने सुनना पसंद है और जब भी टाइम मिलता है तो फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' और 'पीके' ज़रूर देखते हैं. क्रिकेट के अलावा इन्हें वॉलीबॉल खेलना अच्छा लगता है. उनका कहना है कि सही समय पर कोई गाइड नहीं मिलने की वजह से उनका बहुत वक़्त बर्बाद हो गया है. महिंदर पाल कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच में जब भी क्रिकेट हो उन्हें खेलने का मौका मिले. महिंदर कहते हैं, "मैं भारत के ख़िलाफ़ खेलना चाहता हूँ. वो दिन मेरे लिए सबसे अधिक खुशी का होगा. " (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
किस भारतीय का मुरीद है पाकिस्तानी सिख क्रिकेटर? पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के लिए उभरते हुए क्रिकेटरों में से चुने गए देश के पहले सिख क्रिकेटर महिंदर पाल सिंह 'क्रिकेट के गॉड' सचिन तेंदुलकर के दीवाने हैं. बीबीसी से खास बातचीत में दाहिने हाथ से तेज गेंदबाज़ी करने वाले महिंदर पाल सिंह से ने बताया कि वो बचपन से ही क्रिकेट खेलते रहे हैं और इसमें उन्हें अपने माँ और पिता की तरफ़ से क़ाफ़ी प्रोत्साहन मिला. वो मेहनत करते रहे और आज इस मुक़ाम पर हैं. अब उनका एक ही सपना है कि वो पाकिस्तान की क्रिकेट टीम की तरफ़ से खेलें. बीस साल के महिंदर पाल सिंह ने कहा है कि उनके प्रशिक्षण में मुदस्सर नज़र, मुश्ताक अहमद ने उनके खेल की सराहना की है. महिंदर पाल पाकिस्तान के 'ननकाना साहब' गुरुद्वारा में सेवा करते हैं और क्रिकेट की मंज़िल तक पढ़ाई के साथ-साथ पहुँचना चाहते हैं. छह भाई बहनों में सबसे बड़े महिंदर कहते हैं कि ज़िंदगी गुज़ारने के लिए पढ़ाई ज़रूरी है. वक़ार यूनुस को पसंद करने वाले और उन्हें अपना आदर्श मानने वाले महिंदर ने गली मोहल्ले से क्रिकेट खेलते हुए पाकिस्तान में इतिहास बना लिया है और आगे पाकिस्तान का नाम रोशन करना चाहते हैं. उनकी तमन्ना है कि वो अपनी ज़िंदगी में एक बार सचिन से मिलें. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार ख़ान ने भी मुल्तान क्रिकेट अकेडमी में मुलाक़ात के दौरान उनकी सराहना की. राइट आर्म फ़ास्ट बॉलर महिंदर पाल सिंह का कहना है कि क्रिकेट टीमवर्क सिखाता है तो पढ़ाई तहज़ीब सिखाती है. सरदार हैं तो पंजाबी गाने सुनना पसंद है और जब भी टाइम मिलता है तो फ़िल्म 'थ्री इडियट्स' और 'पीके' ज़रूर देखते हैं. क्रिकेट के अलावा इन्हें वॉलीबॉल खेलना अच्छा लगता है. उनका कहना है कि सही समय पर कोई गाइड नहीं मिलने की वजह से उनका बहुत वक़्त बर्बाद हो गया है. महिंदर पाल कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच में जब भी क्रिकेट हो उन्हें खेलने का मौका मिले. महिंदर कहते हैं, "मैं भारत के ख़िलाफ़ खेलना चाहता हूँ. वो दिन मेरे लिए सबसे अधिक खुशी का होगा. "
न्यूज डेस्कः चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से दुनिया भर में लाखों से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जिसमे सबसे ज्यादा नुकसान सुपरपावर अमेरिका को हुआ हैं। यहीं कारण है की अमेरिका चीन को कोरोना को लेकर जिम्मेदार मानता हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन चाहता तो संक्रमण को दुनिया में फैलने से रोक सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। चीन ने जानबूझकर दुनिया में कोरोना वायरस को फैलाया हैं। इसको लेकर चीन पर कारवाई होनी चाहिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि दुनियाभर में इस महामारी को छोड़ने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जाए। 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को खूब खरी-खरी सुनाई। उन्होंने साफ-साफ कहा की कोरोना महामारी की शुरुआत में चीन ने केवल घरेलू यात्रा पर रोक लगाई जबकि पूरे विश्व को संक्रमित करने के लिए अंतराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन जारी रखा। सयुक्त राष्ट्र को इस मामले में चीन को निश्चित तौर पर जवाबदेह ठहराना चाहिए। क्यों की इस महामारी से दुनिया में लाखों लोगों की मौत हुई हैं। इसपर सयुक्त राष्ट्र को सख्त फैसला लेनी चाहिए।
न्यूज डेस्कः चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से दुनिया भर में लाखों से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जिसमे सबसे ज्यादा नुकसान सुपरपावर अमेरिका को हुआ हैं। यहीं कारण है की अमेरिका चीन को कोरोना को लेकर जिम्मेदार मानता हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन चाहता तो संक्रमण को दुनिया में फैलने से रोक सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। चीन ने जानबूझकर दुनिया में कोरोना वायरस को फैलाया हैं। इसको लेकर चीन पर कारवाई होनी चाहिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि दुनियाभर में इस महामारी को छोड़ने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जाए। पचहत्तरवीं संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को खूब खरी-खरी सुनाई। उन्होंने साफ-साफ कहा की कोरोना महामारी की शुरुआत में चीन ने केवल घरेलू यात्रा पर रोक लगाई जबकि पूरे विश्व को संक्रमित करने के लिए अंतराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन जारी रखा। सयुक्त राष्ट्र को इस मामले में चीन को निश्चित तौर पर जवाबदेह ठहराना चाहिए। क्यों की इस महामारी से दुनिया में लाखों लोगों की मौत हुई हैं। इसपर सयुक्त राष्ट्र को सख्त फैसला लेनी चाहिए।
आरा/बीपी प्रतिनिधि। जेल के अंदर मादक पदार्थों की बिक्री करने, खूंखार अपराधियों के द्वारा जेल से मोबाइल अपना नेटवर्किंग चलाने जैसी सूचना के बाद आज सुबह एसडीपीओ हिमांशु कुमार एवं एसडीएम जोती लाल सहदेव के नेतृत्व में मंडल कारा में छापामारी अभियान चलाया गया। छापामारी अभियान के दौरान जिला प्रशासन की टीम ने हर बैरक समेत सेल की जांच-पड़ताल की। हालांकि मंडल कारा में बंदियों के पास से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई लेकिन शराब की एक भी बोतल नहीं मिली। इस छापामारी अभियान के दौरान बंदियों में काफी खौफ का माहौल था।
आरा/बीपी प्रतिनिधि। जेल के अंदर मादक पदार्थों की बिक्री करने, खूंखार अपराधियों के द्वारा जेल से मोबाइल अपना नेटवर्किंग चलाने जैसी सूचना के बाद आज सुबह एसडीपीओ हिमांशु कुमार एवं एसडीएम जोती लाल सहदेव के नेतृत्व में मंडल कारा में छापामारी अभियान चलाया गया। छापामारी अभियान के दौरान जिला प्रशासन की टीम ने हर बैरक समेत सेल की जांच-पड़ताल की। हालांकि मंडल कारा में बंदियों के पास से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई लेकिन शराब की एक भी बोतल नहीं मिली। इस छापामारी अभियान के दौरान बंदियों में काफी खौफ का माहौल था।
शालिभद्र की स्त्रिया ज्ञानशून्य नही थी। अगर अशिक्षित होती तो इतना अनुनय-विनय न करती । वे स्वय रूठकर वेठ जाती । पर उन्हे शिकायत यह है कि शालिभद्र ने उनका कोई अपराध नही बताया और उनकी ओर से अचानक ही मन खीच लिया है। उन्हे यही व्यथा है। इसी व्यथा के कारण वे व्याकुल हैं। वे कहती हैं - अगर हम सबका या हममे से किसी का अपराध है तो हमारा मस्तक चाहे काट ले हम यह सहन कर लेगी मगर अपराध बतलाये बिना रूठना हमे सह्य नही है। वास्तव मे भक्त और पतिव्रता की बात सरीखी होती है। ऐसे-ऐसे भक्त हुए हैं जिन्होने परमात्मा के लिए अपने प्राणो का भी उत्सर्ग कर दिया है। वे कहते थे - परमात्मा मिले अर्थात ध्यान मे आवे, यदि ऐसा नही होता- परमात्मा का ध्यान नही बनता तो इस जीवन की आवश्यकता ही नही हे। शालिभद्र की स्त्रिया भी ऐसा ही कह रही है। पति के असन्तुष्ट हो जाने पर पतिव्रता के लिए यही अन्तिम मार्ग रह जाता है। ये स्त्रिया अपनी चूक के लिए सिर काटने को तैयार हैं तो मैं अपने पति (परमात्मा) को प्रसन्न करने के लिये क्या करने को तैयार हू? मैंने परमात्मा का क्या अपराध किया है, जिससे श्रेणिक मेरा नाथ बना हुआ है ? मैं भी अपने मस्तक पर किसी को नाथ बनकर नही बैठने दूगा। मेरी पलिया मेरे जैसे झूठे अनाथ नाथ के लिए भी प्राण देने को तेयार है तो मे अपने सच्चे त्रिभुवननाथ के लिए जीवन देने मे क्यो सकोच करू । इस प्रकार शालिभद्र अपने विचार मे मग्न हे ओर उसकी पत्निया उससे प्रार्थना कर रही हे । शालिभद्र ओर उसकी स्त्रिया अपने-अपने लक्ष्य पर पूर्ण हे। बत्तीसो स्त्रिया तो अपने पतिप्रेम मे निमग्न हैं ओर शालिभद्र परमात्मप्रेम मे मग्न हे । शालिभद्र की स्त्रिया अपना अपराध जानने के लिए उत्सुक हे । वास्तव मे भक्ति वह नही है जो अपने गुण पूछती फिरे । सच्ची भक्ति वह हे जो अपने दोष देखती है। भक्ति सीखना हो तो शालिभद्र की स्त्रियो से सीखो। आज के लोग अपने दोष नही पूछते गुण पूछते हैं बल्कि अपने गुणा स्मरण करा कर दोषो को ढकने का प्रयत्न करते हैं। मगर भक्ति ऐसी नही हे वह तो सदा ही कोमल ओर नम्र हे । एक विद्वान ने भक्ति ओर ज्ञान की तुलना करक बतलाया है कि दोनो मे वडा कोन हे? उसका कथन हे कि ज्ञान बडा ह ओर कल्याणकारी हे, लेकिन पुरुष हे । भक्ति स्त्री हे। ज्ञान ओर भक्ति के बीच १६२ श्री जवाहर किरणावली मे माया नाम की एक स्त्री ओर है। पुरुष को तो स्त्री छल सकती है, लेकिन स्त्री को स्त्री नही छल सकती। अगर ज्ञान माया द्वारा न छला जाय तो ज्ञान भक्ति से ऊचा है। अगर छला गया तो वह गिर जाता है। मगर भक्ति तो पहले से ही नम्र है और स्त्री है। माया भक्ति को तो नही छल सकती। इसलिये ज्ञान और भक्ति मे भक्ति ही बड़ी है। भक्त अपने गुण नही देखता दुर्गुण देखता है। आप अगर ज्ञानी न बन सके और भक्त ही बन जाए- हृदय से भक्ति को अपना ले तो भी आपका कल्याण हो जायगा। तिलक- टीका लगाने से या मुहपत्ती बाधने से ही कोई भक्त नहीं हो जाता । भक्त बनने के लिए यह देखना पड़ता है कि मुझमे कौन-कौन से दुर्गुण भरे हुए है । मै कहा- कहा त्रुटि कर रहा हू? इस प्रकार अपने दुर्गुण और त्रुटि को दूर करने की चेष्टा करने वाला ही सच्चा भक्त कहलाता है। शालिभद्र और उसकी पत्नियो का अपने-अपने दोष देखने का प्रयत्न हो रहा है। उसकी पत्निया कहती है - आप हमारा अपराध हमे वतलाइए और उसके प्रतिकार के लिए उचित प्रायश्चित्त दीजिए । शालिभद्र सोचता है - इनका कथन भी मेरे लिए उपदेश बन रहा है। ये कहती हैं हमारा अपराध क्या है? और मै भी परमात्मा से पूछता हू-नाथ । मेरा क्या दोष है जिससे मुझे अनाथ बनना पड़ा और राजा श्रेणिक मेरा नाथ बनने आया ? इन रियो को मेरी उदासी का कारण मालूम ही नहीं है। मै इनके अवगुणो के कारण नहीं वरन अपने ही अवगुणों के कारण उदास हू। मै सोचता हू- प्रभु भरे प्रति उदास क्यो है? मेरी आत्मा परमात्मा के अनुकूल नहीं है यही मेरे दुख का कारण है। मगर अज्ञान के कारण ये स्त्रिया अपने को मेरे दुख कारण समझ रही है। निराशा के साथ उसकी सहेलिया चिन्ता और व्यग्रता भी आ धमकी। उन्हे किसी गम्भीर दुर्घटना की आशका होने लगी। अन्त मे उन्होने कहा- स्वामी, आज किसी कारण आपका फूल-सा कोमल हृदय वज्र के समान कठोर हो गया है। आपकी प्रसन्नता प्राप्त करने के हेतु हमने अपने पेट की सब बाते कह दी हैं, फिर भी आपके मुख से एक बोल तक नही निकलता । न तो आप हमारा दोष बतलाते है, न हमे निर्दोष ही कहते हैं। फिर भी यह दड क्यो दे रहे हैं? यह न्याय नहीं है, अन्याय है। अगर आपके न्यायालय मे न्याय-अन्याय का विचार नही है, आरोपित को अपराध बताये बिना ही दड दिया जाता है तो हमे अपील करनी होगी। अब सासजी के पास जाने के सिवाय कोई चारा नही रहा। आपका विचार न मालूम किन उलझनो मे उलझा है और नही कहा जा सकता कि इससे क्या अनर्थ हो सकता है । अगर आप अपने मन की बात कह दे तो अच्छा है अन्यथा हमे सासजी के पास जाना पडेगा।' शालिभद्र की स्त्रियो ने यह कह कर प्रकट कर दिया कि हम सासजी के पास जा रही है। फिर यह न कहियेगा कि माता से यह हाल कहने की क्या आवश्यकता थी? जब आप नही सुनते तो माताजी को पच बनाकर ही फैसला कराना होगा। यह नही हो सकता कि निर्दोष होने पर भी आप हमे त्याग दे। प्राचीन काल मे पति-पत्नी का प्रेम बहुत प्रगाढ होता था । कदाचित कभी कलह हो जाता तो सास तक को भी पता नही चल पाता था। स्त्रियो मे खूब गम्भीरता होती थी। लेकिन आजकल वह बात नही रही। आजकल दाम्पत्य प्रेम मे छिछलापन आ गया है। घर मे लडाई हुई तो बाहर नमक मिर्च मिलाकर उसका समाचार पहुचाये बिना औरतो को चैन नही पडता। इसी कारण कहावत प्रचलित हे कुत्ते के पेट मे खीर ठहरे तो स्त्रियो के पेट मे बात ठहरे । यद्यपि सभी स्त्रिया कभी समान नही होती फिर भी आज अधिकाश मे यह बात सुनी जाती है। एक पिता ने अपनी पुत्री को ससुराल जाते समय शिक्षा दी थी - वेटी घर की आग बाहर मत निकालना । यह सीख बडी सुन्दर है। इसका तात्पर्य यह नही कि कोई आग मॉगने आए तो देने से मना कर देना। अर्थ यह हे कि घर मे कभी कलह-क्लेश हो भी जाए तो उसे दूसरे के सामने प्रकट मत करना । जहा की बात तहा दबा देने से वह बढती नही है । प्रेममय जीवन और कलहमय जीवन में कितना अन्तर हे इस बात पर गहराई से विचार करो। वाल्मीकि रामायण मे लिखा है कि राम को सीता १६४ श्री जवाहर किरणावली ..
शालिभद्र की स्त्रिया ज्ञानशून्य नही थी। अगर अशिक्षित होती तो इतना अनुनय-विनय न करती । वे स्वय रूठकर वेठ जाती । पर उन्हे शिकायत यह है कि शालिभद्र ने उनका कोई अपराध नही बताया और उनकी ओर से अचानक ही मन खीच लिया है। उन्हे यही व्यथा है। इसी व्यथा के कारण वे व्याकुल हैं। वे कहती हैं - अगर हम सबका या हममे से किसी का अपराध है तो हमारा मस्तक चाहे काट ले हम यह सहन कर लेगी मगर अपराध बतलाये बिना रूठना हमे सह्य नही है। वास्तव मे भक्त और पतिव्रता की बात सरीखी होती है। ऐसे-ऐसे भक्त हुए हैं जिन्होने परमात्मा के लिए अपने प्राणो का भी उत्सर्ग कर दिया है। वे कहते थे - परमात्मा मिले अर्थात ध्यान मे आवे, यदि ऐसा नही होता- परमात्मा का ध्यान नही बनता तो इस जीवन की आवश्यकता ही नही हे। शालिभद्र की स्त्रिया भी ऐसा ही कह रही है। पति के असन्तुष्ट हो जाने पर पतिव्रता के लिए यही अन्तिम मार्ग रह जाता है। ये स्त्रिया अपनी चूक के लिए सिर काटने को तैयार हैं तो मैं अपने पति को प्रसन्न करने के लिये क्या करने को तैयार हू? मैंने परमात्मा का क्या अपराध किया है, जिससे श्रेणिक मेरा नाथ बना हुआ है ? मैं भी अपने मस्तक पर किसी को नाथ बनकर नही बैठने दूगा। मेरी पलिया मेरे जैसे झूठे अनाथ नाथ के लिए भी प्राण देने को तेयार है तो मे अपने सच्चे त्रिभुवननाथ के लिए जीवन देने मे क्यो सकोच करू । इस प्रकार शालिभद्र अपने विचार मे मग्न हे ओर उसकी पत्निया उससे प्रार्थना कर रही हे । शालिभद्र ओर उसकी स्त्रिया अपने-अपने लक्ष्य पर पूर्ण हे। बत्तीसो स्त्रिया तो अपने पतिप्रेम मे निमग्न हैं ओर शालिभद्र परमात्मप्रेम मे मग्न हे । शालिभद्र की स्त्रिया अपना अपराध जानने के लिए उत्सुक हे । वास्तव मे भक्ति वह नही है जो अपने गुण पूछती फिरे । सच्ची भक्ति वह हे जो अपने दोष देखती है। भक्ति सीखना हो तो शालिभद्र की स्त्रियो से सीखो। आज के लोग अपने दोष नही पूछते गुण पूछते हैं बल्कि अपने गुणा स्मरण करा कर दोषो को ढकने का प्रयत्न करते हैं। मगर भक्ति ऐसी नही हे वह तो सदा ही कोमल ओर नम्र हे । एक विद्वान ने भक्ति ओर ज्ञान की तुलना करक बतलाया है कि दोनो मे वडा कोन हे? उसका कथन हे कि ज्ञान बडा ह ओर कल्याणकारी हे, लेकिन पुरुष हे । भक्ति स्त्री हे। ज्ञान ओर भक्ति के बीच एक सौ बासठ श्री जवाहर किरणावली मे माया नाम की एक स्त्री ओर है। पुरुष को तो स्त्री छल सकती है, लेकिन स्त्री को स्त्री नही छल सकती। अगर ज्ञान माया द्वारा न छला जाय तो ज्ञान भक्ति से ऊचा है। अगर छला गया तो वह गिर जाता है। मगर भक्ति तो पहले से ही नम्र है और स्त्री है। माया भक्ति को तो नही छल सकती। इसलिये ज्ञान और भक्ति मे भक्ति ही बड़ी है। भक्त अपने गुण नही देखता दुर्गुण देखता है। आप अगर ज्ञानी न बन सके और भक्त ही बन जाए- हृदय से भक्ति को अपना ले तो भी आपका कल्याण हो जायगा। तिलक- टीका लगाने से या मुहपत्ती बाधने से ही कोई भक्त नहीं हो जाता । भक्त बनने के लिए यह देखना पड़ता है कि मुझमे कौन-कौन से दुर्गुण भरे हुए है । मै कहा- कहा त्रुटि कर रहा हू? इस प्रकार अपने दुर्गुण और त्रुटि को दूर करने की चेष्टा करने वाला ही सच्चा भक्त कहलाता है। शालिभद्र और उसकी पत्नियो का अपने-अपने दोष देखने का प्रयत्न हो रहा है। उसकी पत्निया कहती है - आप हमारा अपराध हमे वतलाइए और उसके प्रतिकार के लिए उचित प्रायश्चित्त दीजिए । शालिभद्र सोचता है - इनका कथन भी मेरे लिए उपदेश बन रहा है। ये कहती हैं हमारा अपराध क्या है? और मै भी परमात्मा से पूछता हू-नाथ । मेरा क्या दोष है जिससे मुझे अनाथ बनना पड़ा और राजा श्रेणिक मेरा नाथ बनने आया ? इन रियो को मेरी उदासी का कारण मालूम ही नहीं है। मै इनके अवगुणो के कारण नहीं वरन अपने ही अवगुणों के कारण उदास हू। मै सोचता हू- प्रभु भरे प्रति उदास क्यो है? मेरी आत्मा परमात्मा के अनुकूल नहीं है यही मेरे दुख का कारण है। मगर अज्ञान के कारण ये स्त्रिया अपने को मेरे दुख कारण समझ रही है। निराशा के साथ उसकी सहेलिया चिन्ता और व्यग्रता भी आ धमकी। उन्हे किसी गम्भीर दुर्घटना की आशका होने लगी। अन्त मे उन्होने कहा- स्वामी, आज किसी कारण आपका फूल-सा कोमल हृदय वज्र के समान कठोर हो गया है। आपकी प्रसन्नता प्राप्त करने के हेतु हमने अपने पेट की सब बाते कह दी हैं, फिर भी आपके मुख से एक बोल तक नही निकलता । न तो आप हमारा दोष बतलाते है, न हमे निर्दोष ही कहते हैं। फिर भी यह दड क्यो दे रहे हैं? यह न्याय नहीं है, अन्याय है। अगर आपके न्यायालय मे न्याय-अन्याय का विचार नही है, आरोपित को अपराध बताये बिना ही दड दिया जाता है तो हमे अपील करनी होगी। अब सासजी के पास जाने के सिवाय कोई चारा नही रहा। आपका विचार न मालूम किन उलझनो मे उलझा है और नही कहा जा सकता कि इससे क्या अनर्थ हो सकता है । अगर आप अपने मन की बात कह दे तो अच्छा है अन्यथा हमे सासजी के पास जाना पडेगा।' शालिभद्र की स्त्रियो ने यह कह कर प्रकट कर दिया कि हम सासजी के पास जा रही है। फिर यह न कहियेगा कि माता से यह हाल कहने की क्या आवश्यकता थी? जब आप नही सुनते तो माताजी को पच बनाकर ही फैसला कराना होगा। यह नही हो सकता कि निर्दोष होने पर भी आप हमे त्याग दे। प्राचीन काल मे पति-पत्नी का प्रेम बहुत प्रगाढ होता था । कदाचित कभी कलह हो जाता तो सास तक को भी पता नही चल पाता था। स्त्रियो मे खूब गम्भीरता होती थी। लेकिन आजकल वह बात नही रही। आजकल दाम्पत्य प्रेम मे छिछलापन आ गया है। घर मे लडाई हुई तो बाहर नमक मिर्च मिलाकर उसका समाचार पहुचाये बिना औरतो को चैन नही पडता। इसी कारण कहावत प्रचलित हे कुत्ते के पेट मे खीर ठहरे तो स्त्रियो के पेट मे बात ठहरे । यद्यपि सभी स्त्रिया कभी समान नही होती फिर भी आज अधिकाश मे यह बात सुनी जाती है। एक पिता ने अपनी पुत्री को ससुराल जाते समय शिक्षा दी थी - वेटी घर की आग बाहर मत निकालना । यह सीख बडी सुन्दर है। इसका तात्पर्य यह नही कि कोई आग मॉगने आए तो देने से मना कर देना। अर्थ यह हे कि घर मे कभी कलह-क्लेश हो भी जाए तो उसे दूसरे के सामने प्रकट मत करना । जहा की बात तहा दबा देने से वह बढती नही है । प्रेममय जीवन और कलहमय जीवन में कितना अन्तर हे इस बात पर गहराई से विचार करो। वाल्मीकि रामायण मे लिखा है कि राम को सीता एक सौ चौंसठ श्री जवाहर किरणावली ..
- 10 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 10 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? फिल्मफेयर अवार्ड में अब कुछ दिन ही रह गए हैं और इसलिए कल फिल्मफेयर प्रीअवार्ड पार्टी रखी गई जिसमें बॉलीवुड स्टार्स शामिल हुए। शाहरुख खान से लेकर करण जौहर, सोनम कपूर, आलिया भट्ट तक इसमें शामिल हुए और दिखने में काफी स्मार्ट और स्टाइलिश लग रहे थे। फिल्मफेयर इसी सप्ताह होने वाला है और हर कोई यही इंतजार कर रहा है कि कौन इस साल बाजी मार ले जाएगा। बहरहाल वो भी इस सप्ताह पता चल जाएगा लेकिन फिलहाल आप देखिए प्रीअवार्ड पार्टी की तस्वीरें। See the pics of bollywood stars of filmfare pre award party. जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
- दस hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - दस hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? फिल्मफेयर अवार्ड में अब कुछ दिन ही रह गए हैं और इसलिए कल फिल्मफेयर प्रीअवार्ड पार्टी रखी गई जिसमें बॉलीवुड स्टार्स शामिल हुए। शाहरुख खान से लेकर करण जौहर, सोनम कपूर, आलिया भट्ट तक इसमें शामिल हुए और दिखने में काफी स्मार्ट और स्टाइलिश लग रहे थे। फिल्मफेयर इसी सप्ताह होने वाला है और हर कोई यही इंतजार कर रहा है कि कौन इस साल बाजी मार ले जाएगा। बहरहाल वो भी इस सप्ताह पता चल जाएगा लेकिन फिलहाल आप देखिए प्रीअवार्ड पार्टी की तस्वीरें। See the pics of bollywood stars of filmfare pre award party. जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
बचपन से लेकर जवानी तक इंसान के चेहरे में कई बदलाव आते है. आज चिल्ड्रेन्स डे के मौके पर हिंदी सिनेमा के कई सितारों ने बचपन की तस्वीर शेयर की है. यूं तो श्रद्धा कपूर के बचपन की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर अवेलेबल है लेकिन मम्मी शिवांगी कपूर के अभिनेत्री की ये तस्वीर बहुत क्यूट है. आलिया भट्ट भी बचपन में बहुत क्यूट थी. बहन पूजा के साथ आलिया की कई तस्वीरें इंटरनेट पर मौजूद है. रणबीर कपूर की बहन रिद्धिमा के साथ ये तस्वीरें क्यूटनेस के मामले में कम नहीं है. प्रियंका बचपन से अपने मम्मी बहुत करीब थी. अनुष्का शर्मा की यह तस्वीर रक्षाबंधन की है, जब वो अपने भाई को राखी बांध रही थी. सलमान की ये तस्वीर भाई अरबाज खान और सोहैल खान के साथ है. अदिति राव हैदरी ने भी बचपन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'Then and Now'.
बचपन से लेकर जवानी तक इंसान के चेहरे में कई बदलाव आते है. आज चिल्ड्रेन्स डे के मौके पर हिंदी सिनेमा के कई सितारों ने बचपन की तस्वीर शेयर की है. यूं तो श्रद्धा कपूर के बचपन की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर अवेलेबल है लेकिन मम्मी शिवांगी कपूर के अभिनेत्री की ये तस्वीर बहुत क्यूट है. आलिया भट्ट भी बचपन में बहुत क्यूट थी. बहन पूजा के साथ आलिया की कई तस्वीरें इंटरनेट पर मौजूद है. रणबीर कपूर की बहन रिद्धिमा के साथ ये तस्वीरें क्यूटनेस के मामले में कम नहीं है. प्रियंका बचपन से अपने मम्मी बहुत करीब थी. अनुष्का शर्मा की यह तस्वीर रक्षाबंधन की है, जब वो अपने भाई को राखी बांध रही थी. सलमान की ये तस्वीर भाई अरबाज खान और सोहैल खान के साथ है. अदिति राव हैदरी ने भी बचपन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'Then and Now'.
गोरखपुरः बीजेपी के फायरब्रांड सांसद योगी आदित्यनाथ ने अमर सिंह की सपा में वापसी पर मंगलवार को जमकर तंज कसा। उन्होंने अमर को राज्यसभा का टिकट देने के मामले में कहा कि सपा डूबता हुआ जहाज है, अच्छा है कि इसके साथ सभी डूब जाएं। -आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में हुई हिंसा को लेकर सपा पर निशाना साधा। -प्रशासन के संरक्षण में हिंदुओं के घर जलाने और लूटपाट का आरोप लगाया। -यूपी सरकार के समर्थन से अराजकता का माहौल बताया। -हिंदुओं का उत्पीड़न जारी रहने पर आजमगढ़ जाने का एलान किया। और क्या बोले आदित्यनाथ? -बीजेपी की सरकार में दंगे नहीं हुए, सपा सरकार के दौर में 400 से ज्यादा दंगे। -यूपी की सपा सरकार के मंत्री आपराधिक छवि के और माफिया हैं। -सपा की सरकार वर्ग संघर्ष को बढ़ावा दे रही है। -आतंकियों को सपा सरकार छोड़ रही थी, कोर्ट ने उस पर रोक लगाई। -बिहार में नीतीश को शराबबंदी की तरह अराजकता पर भी रोक लगानी चाहिए।
गोरखपुरः बीजेपी के फायरब्रांड सांसद योगी आदित्यनाथ ने अमर सिंह की सपा में वापसी पर मंगलवार को जमकर तंज कसा। उन्होंने अमर को राज्यसभा का टिकट देने के मामले में कहा कि सपा डूबता हुआ जहाज है, अच्छा है कि इसके साथ सभी डूब जाएं। -आदित्यनाथ ने आजमगढ़ में हुई हिंसा को लेकर सपा पर निशाना साधा। -प्रशासन के संरक्षण में हिंदुओं के घर जलाने और लूटपाट का आरोप लगाया। -यूपी सरकार के समर्थन से अराजकता का माहौल बताया। -हिंदुओं का उत्पीड़न जारी रहने पर आजमगढ़ जाने का एलान किया। और क्या बोले आदित्यनाथ? -बीजेपी की सरकार में दंगे नहीं हुए, सपा सरकार के दौर में चार सौ से ज्यादा दंगे। -यूपी की सपा सरकार के मंत्री आपराधिक छवि के और माफिया हैं। -सपा की सरकार वर्ग संघर्ष को बढ़ावा दे रही है। -आतंकियों को सपा सरकार छोड़ रही थी, कोर्ट ने उस पर रोक लगाई। -बिहार में नीतीश को शराबबंदी की तरह अराजकता पर भी रोक लगानी चाहिए।
मारुति सुजुकी अपनी पॉप्युलर हैचबैक कार स्विफ्ट (Swift) की नई जेनरेशन पर काम कर रही है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नई स्विफ्ट ग्लोबल मार्केट में जुलाई 2022 में आ सकती है। वहीं, भारतीय बाजार में इसे 2022 के आखिरी तक लॉन्च किया जाएगा। इस बारे में फिलहाल कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। बता दें कि वर्तमान जेनरेशन वाली स्विफ्ट को 2017 के शुरुआत में लॉन्च किया गया था। यानी यह करीब 4 साल पुरानी हो चुकी है। रिपोर्ट की मानें तो नई-जेनरेशन स्विफ्ट हैचबैक कंपनी के HEARTECT प्लेटफॉर्म के नए वर्जन पर आधारित होगी। इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए स्विफ्ट में ओवरऑल स्टेबिलिटी, सेफ्टी और हैंडलिंग बेहतर हो जाएगी। भारत में आने वाली स्विफ्ट को माइल्ड हाइब्रिड सिस्टम के साथ लाया जा सकता है। इसमें वर्तमान 12 वॉल्ट सेटअप की जगह 48-वॉल्ट का सेटअप लगाया जाएगा, जिससे कार का माइलेज और परफॉर्मेंस दोनों बेहतर हो जाएंगे। कार में पहले की ही तरह 1. 2 लीटर K12 डुअलजेट पेट्रोल इंजन मिलता रहेगा। कंपनी ने इसी साल स्विफ्ट में यह इंजन अपडेट किया है। इंजन 89bhp की पावर 113Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। कार के डायमेंशन में भी बहुत थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत में वर्तमान स्विफ्ट की कीमत 5. 73 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है।
मारुति सुजुकी अपनी पॉप्युलर हैचबैक कार स्विफ्ट की नई जेनरेशन पर काम कर रही है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नई स्विफ्ट ग्लोबल मार्केट में जुलाई दो हज़ार बाईस में आ सकती है। वहीं, भारतीय बाजार में इसे दो हज़ार बाईस के आखिरी तक लॉन्च किया जाएगा। इस बारे में फिलहाल कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। बता दें कि वर्तमान जेनरेशन वाली स्विफ्ट को दो हज़ार सत्रह के शुरुआत में लॉन्च किया गया था। यानी यह करीब चार साल पुरानी हो चुकी है। रिपोर्ट की मानें तो नई-जेनरेशन स्विफ्ट हैचबैक कंपनी के HEARTECT प्लेटफॉर्म के नए वर्जन पर आधारित होगी। इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए स्विफ्ट में ओवरऑल स्टेबिलिटी, सेफ्टी और हैंडलिंग बेहतर हो जाएगी। भारत में आने वाली स्विफ्ट को माइल्ड हाइब्रिड सिस्टम के साथ लाया जा सकता है। इसमें वर्तमान बारह वॉल्ट सेटअप की जगह अड़तालीस-वॉल्ट का सेटअप लगाया जाएगा, जिससे कार का माइलेज और परफॉर्मेंस दोनों बेहतर हो जाएंगे। कार में पहले की ही तरह एक. दो लीटरटर Kबारह डुअलजेट पेट्रोल इंजन मिलता रहेगा। कंपनी ने इसी साल स्विफ्ट में यह इंजन अपडेट किया है। इंजन नवासीbhp की पावर एक सौ तेरहNm का टॉर्क जेनरेट करता है। कार के डायमेंशन में भी बहुत थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत में वर्तमान स्विफ्ट की कीमत पाँच. तिहत्तर लाख रुपये से शुरू होती है।
यह है जीवन का सफर चल राही होकर बेफिक्र थम जाए यह कब बन निडर, क्यूँ मौत की यारी सबसे प्यारी, लगना है गले इसके कर रखी इसने सब तैयारी।। 🥰रा.जि.कुमार, सासाराम।
यह है जीवन का सफर चल राही होकर बेफिक्र थम जाए यह कब बन निडर, क्यूँ मौत की यारी सबसे प्यारी, लगना है गले इसके कर रखी इसने सब तैयारी।। 🥰रा.जि.कुमार, सासाराम।
इंदौर(Indore) : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे की उपस्थित में आयोजित पत्रकार-वार्ता में सम्मानीय पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा निगम परिषद में हमारे पूर्व के भाजपा महापौरों के द्वारा विकास के कई कार्य किये गये। मेरे कार्यकाल में उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए विकसित विकासशील इंदौर के विजन को लेकर अनेक कार्य हुए। कांग्रेस सरकार में इंदौर नगर निगम की क्या हालत थी वह आपसे हमसे छूपी हुई नहीं है। जब कांग्रेस की परिषद रही, अंधेर नगरीय चौपट राजा की परिभाषा चरितार्थ हुई। शहर में बिजली सहित सड़कों की हालत बद से बदत्तर थी। घरों मे पीने के पानी की जगह ड्रेनेज का पानी आता था, पीने के पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मचती थी, शहर की कालोनियों में पानी के लिए झगड़ों के समाचार आम बात थी। शहर मे पार्किंग, घरों के कचरे को लेकर कांग्रेस की नगर निगम मे कोई प्रबंधन नहीं था। बैक लाइनों,सड़क किनारे मे कचरे का ढेर लगा रहता था जिससे पूरे इंदौर में चारों और बदबू, मच्छरों का प्रकोप था। बारिश के दिनों में ड्रेनेज का पानी घरों के अंदर घुस जाता था। शहर की सड़को मे जगह-जगह गड्ढों से जनता बहुत परेशान थी। कांग्रेस के हाथ में वर्षों तक इंदौर नगर निगम रही परंतु उन्होंने कभी भी शहरवासियों की कोई चिंता नहीं की। जैसे ही जनता का जनादेश भाजपा को मिला और भाजपा सरकार बनी, तब से लेकर आपने देखा होगा, कि हमने एक विकसित और विकासशील स्मार्ट इंदौर बनाने की दिशा में कार्य किया है। शहर में टेम्पो से लेकर मेट्रो तक का सफर हम सभी ने देखा है। भाजपा की निगम परिषद कार्यकाल में सड़कें को जाल बिछाने का कार्य हो,पुल पुलियाओं का निर्माण, बायपास व रिंग रोड की योजना हो या हर घर नल हर घर जल देने की बात हो, चाहे चौराहे का सौंदर्यीकरण व बगीचों का रखरखाव, हमने सभी दिशाओ में बेहतर कार्य करके दिखाया है। ड्रेनेज की विकराल समस्यां से भी हमने जनता को निजात दिलायी है। मोघे ने कहा कि हमारे महापौर कार्यकाल में विशेष रूप से इंफ्रास्टक्चर को टारगेट करते हुए फिडर रोड, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण में सड़कों का निर्माण, एपरोच लिंक रोड़ के साथ शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण किया गयां,छोटी-छोटी बस्तीयों में सड़क निर्माण के साथ, शाला भवन का निर्माण व पुल पुलियों का निर्माण हमारे द्वारा प्राथमिक रूप से किया गया। पानी की निकासी हेतु स्टाम वाटर लाईन का निर्माण,जनसुविधा केन्द्र के साथ-साथ शहरी निम्नवर्गीय के लिये 5000 से अधिक आवासों का निर्माण किया गया। शहर के मुक्तिधामों का विकास किया गया, वहीं पार्किंग समस्यां से निजात दिलाने हेतु शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मल्टीलेवल बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कार्य हुआ। कांग्रेस की निगम परिषद के समय सिवरेज एक बड़ी समस्या थी, जिसे हमने लगभग 85 करोड की लागत से 25 कि. मी. लाईन डालकर ठीक करने का काम किया। वहीं कान्हा व सरस्वती नदी का जीर्णाद्धार हेतु 25 कि. मी. की लम्बी सीवरेज लाईन डाली गई। मोघे ने कहा कि सुचारू पेयजल व्यस्था हेतु तीसरे चरण में 900 एमएलडी क्षमता इंटेकलवेल का निर्माण, ग्राम भकलाय में 43 करोड का ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ, शहर भर में 21 पानी टंकियों का निर्माण और जल वितरण के लिए लगभग 750 कि. मी. पाईप लाईन डालने का कार्य किया गया। यशवंत सागर की क्षमता 18 एम. एल. डी से बड़ाकर 30 एम. एल. डी प्रतिदिन करने की दिशा में कार्य किया गया। नर्मदा के वैकल्पिक स्त्रोत के रूप में चोरल से इंदौर पानी लाने की योजना पर भी कार्य किया गया। मा. मुख्मयंत्री शिवराजसिंह चौहान की हर घर नल, हर घर जल योजना को साकार करने हेतु यह सब कार्य हुए। अपशिष्ट प्रबंधन के तहत देवगुराड़िया ट्रेचिंग ग्राउण्ड पर कचरा प्रोसिंग प्लांट स्थापित किया गया। इन्दौर को प्रकाशमय करने हेतु शहरभर में स्ट्रीट लाईट, एलएडी लाईट प्रमुख सड़कों पर सेन्ट्रल लाईटिंग, हाईमास्टक के साथ साथ उद्यानों में भी लाईट लगाने का कार्य भाजपा की निगम परिषद ने किया,बगीचों मनोरंजन स्थलों एवं पर्यटन स्थलो को सुव्यवस्थित करने की दिशा में शहर के मुख्य बगीचों का विकास, सिटी फारेस्ट की महत्वपूर्ण योजना दी गई। पर्यटन विकास के सहयोग से यशवंत सागर डेम, नेहरू पार्क, बिलावली, सिरपुर तालाब के साथ, पितृ पर्वत,लालबाग,राजबाड़ा पर अनेक विकास के कार्य किये गये। आओं बनाये अपना इंदौर के अंतर्गत जनसहयोग से कम्युनिटी हॉल का निर्माण,छात्रावास निर्माण,रोड़ों के सौंदर्यीकरण का निर्माण किया गया। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां निपटने हेतु क्लाईमेट चेंज सेल का गठन, प्राणी संग्रहालय में अपशिष्ट जल उपचार प्लांट की स्थापना, वर्षा जल निकासी हेतु नदी नालों की नियमित सफाई,जलपुर्नभरण का कार्य, लोक परिवहन के लिये नवीन बसों का क्रय सहित अनेकों कार्य भाजपा की परिषद ने स्मार्ट इंदौर बनाने के लिये किये है। पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से प्रदेश सह मीडिया प्रभारी दीपक जैन, टीनू, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दिव्या गुप्ता, चुनाव सह संचालक प्रमोद टण्डन, पूर्व प्रदेश पैनेलिस्ट जे. पी. मूलचंदानी, मीडिया प्रभारी रितेश तिवारी, सह मीडिया प्रभारी नितीन द्विवेदी उपस्थित थे।
इंदौर : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे की उपस्थित में आयोजित पत्रकार-वार्ता में सम्मानीय पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा निगम परिषद में हमारे पूर्व के भाजपा महापौरों के द्वारा विकास के कई कार्य किये गये। मेरे कार्यकाल में उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए विकसित विकासशील इंदौर के विजन को लेकर अनेक कार्य हुए। कांग्रेस सरकार में इंदौर नगर निगम की क्या हालत थी वह आपसे हमसे छूपी हुई नहीं है। जब कांग्रेस की परिषद रही, अंधेर नगरीय चौपट राजा की परिभाषा चरितार्थ हुई। शहर में बिजली सहित सड़कों की हालत बद से बदत्तर थी। घरों मे पीने के पानी की जगह ड्रेनेज का पानी आता था, पीने के पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मचती थी, शहर की कालोनियों में पानी के लिए झगड़ों के समाचार आम बात थी। शहर मे पार्किंग, घरों के कचरे को लेकर कांग्रेस की नगर निगम मे कोई प्रबंधन नहीं था। बैक लाइनों,सड़क किनारे मे कचरे का ढेर लगा रहता था जिससे पूरे इंदौर में चारों और बदबू, मच्छरों का प्रकोप था। बारिश के दिनों में ड्रेनेज का पानी घरों के अंदर घुस जाता था। शहर की सड़को मे जगह-जगह गड्ढों से जनता बहुत परेशान थी। कांग्रेस के हाथ में वर्षों तक इंदौर नगर निगम रही परंतु उन्होंने कभी भी शहरवासियों की कोई चिंता नहीं की। जैसे ही जनता का जनादेश भाजपा को मिला और भाजपा सरकार बनी, तब से लेकर आपने देखा होगा, कि हमने एक विकसित और विकासशील स्मार्ट इंदौर बनाने की दिशा में कार्य किया है। शहर में टेम्पो से लेकर मेट्रो तक का सफर हम सभी ने देखा है। भाजपा की निगम परिषद कार्यकाल में सड़कें को जाल बिछाने का कार्य हो,पुल पुलियाओं का निर्माण, बायपास व रिंग रोड की योजना हो या हर घर नल हर घर जल देने की बात हो, चाहे चौराहे का सौंदर्यीकरण व बगीचों का रखरखाव, हमने सभी दिशाओ में बेहतर कार्य करके दिखाया है। ड्रेनेज की विकराल समस्यां से भी हमने जनता को निजात दिलायी है। मोघे ने कहा कि हमारे महापौर कार्यकाल में विशेष रूप से इंफ्रास्टक्चर को टारगेट करते हुए फिडर रोड, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण में सड़कों का निर्माण, एपरोच लिंक रोड़ के साथ शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण किया गयां,छोटी-छोटी बस्तीयों में सड़क निर्माण के साथ, शाला भवन का निर्माण व पुल पुलियों का निर्माण हमारे द्वारा प्राथमिक रूप से किया गया। पानी की निकासी हेतु स्टाम वाटर लाईन का निर्माण,जनसुविधा केन्द्र के साथ-साथ शहरी निम्नवर्गीय के लिये पाँच हज़ार से अधिक आवासों का निर्माण किया गया। शहर के मुक्तिधामों का विकास किया गया, वहीं पार्किंग समस्यां से निजात दिलाने हेतु शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मल्टीलेवल बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कार्य हुआ। कांग्रेस की निगम परिषद के समय सिवरेज एक बड़ी समस्या थी, जिसे हमने लगभग पचासी करोड की लागत से पच्चीस कि. मी. लाईन डालकर ठीक करने का काम किया। वहीं कान्हा व सरस्वती नदी का जीर्णाद्धार हेतु पच्चीस कि. मी. की लम्बी सीवरेज लाईन डाली गई। मोघे ने कहा कि सुचारू पेयजल व्यस्था हेतु तीसरे चरण में नौ सौ एमएलडी क्षमता इंटेकलवेल का निर्माण, ग्राम भकलाय में तैंतालीस करोड का ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ, शहर भर में इक्कीस पानी टंकियों का निर्माण और जल वितरण के लिए लगभग सात सौ पचास कि. मी. पाईप लाईन डालने का कार्य किया गया। यशवंत सागर की क्षमता अट्ठारह एम. एल. डी से बड़ाकर तीस एम. एल. डी प्रतिदिन करने की दिशा में कार्य किया गया। नर्मदा के वैकल्पिक स्त्रोत के रूप में चोरल से इंदौर पानी लाने की योजना पर भी कार्य किया गया। मा. मुख्मयंत्री शिवराजसिंह चौहान की हर घर नल, हर घर जल योजना को साकार करने हेतु यह सब कार्य हुए। अपशिष्ट प्रबंधन के तहत देवगुराड़िया ट्रेचिंग ग्राउण्ड पर कचरा प्रोसिंग प्लांट स्थापित किया गया। इन्दौर को प्रकाशमय करने हेतु शहरभर में स्ट्रीट लाईट, एलएडी लाईट प्रमुख सड़कों पर सेन्ट्रल लाईटिंग, हाईमास्टक के साथ साथ उद्यानों में भी लाईट लगाने का कार्य भाजपा की निगम परिषद ने किया,बगीचों मनोरंजन स्थलों एवं पर्यटन स्थलो को सुव्यवस्थित करने की दिशा में शहर के मुख्य बगीचों का विकास, सिटी फारेस्ट की महत्वपूर्ण योजना दी गई। पर्यटन विकास के सहयोग से यशवंत सागर डेम, नेहरू पार्क, बिलावली, सिरपुर तालाब के साथ, पितृ पर्वत,लालबाग,राजबाड़ा पर अनेक विकास के कार्य किये गये। आओं बनाये अपना इंदौर के अंतर्गत जनसहयोग से कम्युनिटी हॉल का निर्माण,छात्रावास निर्माण,रोड़ों के सौंदर्यीकरण का निर्माण किया गया। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां निपटने हेतु क्लाईमेट चेंज सेल का गठन, प्राणी संग्रहालय में अपशिष्ट जल उपचार प्लांट की स्थापना, वर्षा जल निकासी हेतु नदी नालों की नियमित सफाई,जलपुर्नभरण का कार्य, लोक परिवहन के लिये नवीन बसों का क्रय सहित अनेकों कार्य भाजपा की परिषद ने स्मार्ट इंदौर बनाने के लिये किये है। पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से प्रदेश सह मीडिया प्रभारी दीपक जैन, टीनू, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दिव्या गुप्ता, चुनाव सह संचालक प्रमोद टण्डन, पूर्व प्रदेश पैनेलिस्ट जे. पी. मूलचंदानी, मीडिया प्रभारी रितेश तिवारी, सह मीडिया प्रभारी नितीन द्विवेदी उपस्थित थे।
टीवी अभिनेत्री तुनिशा शर्मा की मौत से हर कोई सदमे में है. 24 दिसंबर, 2022 को एक्ट्रेस ने अपने एक्स बॉयफ्रेंड शीजान मोहम्मद खान के मेकअप रूम में फांसी लगा ली. उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में शीजान खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. बीते दिनों एक्टर की फैमिली ने अपने बेटे को बेगुनाह बताया था. अब खबर है कि टीवी सीरियल अली बाबाः दास्तान-ए-काबुल की शूटिंग एक हफ्ते बाद आखिरकार शुरू हो गई है. अब तुनिशा की सह-कलाकार सपना ठाकुर ने कहा कि सेट पर वापस तो आ गए हैं, लेकिन अच्छा नहीं लग रहा है. सपना ठाकुर ने हिंदुस्तान टाइम्स कहा, "जिस क्षण मैं सेट पर पहुंचाी, मुझे अपने सीने में भारीपन महसूस हुआ. मुझे नहीं पता कि इसे क्या नाम दूं. सेट पर जो भावना थी, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है. ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी वजन हमारे ऊपर बंधा हुआ है और हम उसी वजन के साथ चल रहे हैं". बता दें कि सपना ठाकुर ने पिछले हफ्ते गुरुवार को कुछ सीन की शूटिंग की थी. तुनिशा की मौत के बाद शीजान खान आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस हिरासत में हैं. सेट पर माहौल के बारे में बताते हुए, सपना ठाकुर ने खुलासा किया कि लोग ज्यादा बात नहीं कर रहे थे और अजीब सा लग रहा था. उन्होंने कहा, 'पूरी टीम अभी सदमे से बाहर नहीं आई है. शूटिंग के लिए सेट पर वापस जाना भारी अहसास के साथ आया. भावना बहुत अच्छी नहीं थी. यह कहना बहुत आसान है कि शो को चलते रहना चाहिए, लेकिन जब आप इसका सामना करते हैं और इससे गुजरते हैं, तो आपको एहसास होता है कि यह कितना मुश्किल है. जब उन्हें सेट पर रिपोर्ट करने के लिए कॉल आया, तो सपना के दिमाग में पहला सवाल था, 'क्या हम उसी सेट पर शूटिंग कर रहे हैं? ' हालांकि बाद में पता चला कि लोकेशन बदला गया है, जिसके बाद राहत की सांस ली. उन्होंने कहा, "मैंने पूछा क्योंकि मैं उस सेट पर नहीं जाना चाहती. हमारी वहां बहुत सारी यादें हैं. तुनिशा के बारे में बात करते हुए सपना ने कहा, "वह हमेशा खुश रहती थी और सेट पर नाचती थी. हमने उन्हें सेट पर कभी उदास या शांत भी नहीं देखा था. वह हमेशा चहकती, गाती और नाचती रहती थी. वह चंडीगढ़ से थी और हम दोनों पंजाबी में बात किया करते थे. ये जानकर आज भी हैरानी होती है कि वो कैसे सुसाइड कर सकती हैं. शीजान संग तुनिशा के रिश्ते पर सपना ने बस यही कहा कि "अभी जो रिपोर्टें आ रही हैं, उनसे हमें उनके रिलेशन की गहराई का भी पता चल रहा है. "
टीवी अभिनेत्री तुनिशा शर्मा की मौत से हर कोई सदमे में है. चौबीस दिसंबर, दो हज़ार बाईस को एक्ट्रेस ने अपने एक्स बॉयफ्रेंड शीजान मोहम्मद खान के मेकअप रूम में फांसी लगा ली. उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में शीजान खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. बीते दिनों एक्टर की फैमिली ने अपने बेटे को बेगुनाह बताया था. अब खबर है कि टीवी सीरियल अली बाबाः दास्तान-ए-काबुल की शूटिंग एक हफ्ते बाद आखिरकार शुरू हो गई है. अब तुनिशा की सह-कलाकार सपना ठाकुर ने कहा कि सेट पर वापस तो आ गए हैं, लेकिन अच्छा नहीं लग रहा है. सपना ठाकुर ने हिंदुस्तान टाइम्स कहा, "जिस क्षण मैं सेट पर पहुंचाी, मुझे अपने सीने में भारीपन महसूस हुआ. मुझे नहीं पता कि इसे क्या नाम दूं. सेट पर जो भावना थी, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है. ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी वजन हमारे ऊपर बंधा हुआ है और हम उसी वजन के साथ चल रहे हैं". बता दें कि सपना ठाकुर ने पिछले हफ्ते गुरुवार को कुछ सीन की शूटिंग की थी. तुनिशा की मौत के बाद शीजान खान आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस हिरासत में हैं. सेट पर माहौल के बारे में बताते हुए, सपना ठाकुर ने खुलासा किया कि लोग ज्यादा बात नहीं कर रहे थे और अजीब सा लग रहा था. उन्होंने कहा, 'पूरी टीम अभी सदमे से बाहर नहीं आई है. शूटिंग के लिए सेट पर वापस जाना भारी अहसास के साथ आया. भावना बहुत अच्छी नहीं थी. यह कहना बहुत आसान है कि शो को चलते रहना चाहिए, लेकिन जब आप इसका सामना करते हैं और इससे गुजरते हैं, तो आपको एहसास होता है कि यह कितना मुश्किल है. जब उन्हें सेट पर रिपोर्ट करने के लिए कॉल आया, तो सपना के दिमाग में पहला सवाल था, 'क्या हम उसी सेट पर शूटिंग कर रहे हैं? ' हालांकि बाद में पता चला कि लोकेशन बदला गया है, जिसके बाद राहत की सांस ली. उन्होंने कहा, "मैंने पूछा क्योंकि मैं उस सेट पर नहीं जाना चाहती. हमारी वहां बहुत सारी यादें हैं. तुनिशा के बारे में बात करते हुए सपना ने कहा, "वह हमेशा खुश रहती थी और सेट पर नाचती थी. हमने उन्हें सेट पर कभी उदास या शांत भी नहीं देखा था. वह हमेशा चहकती, गाती और नाचती रहती थी. वह चंडीगढ़ से थी और हम दोनों पंजाबी में बात किया करते थे. ये जानकर आज भी हैरानी होती है कि वो कैसे सुसाइड कर सकती हैं. शीजान संग तुनिशा के रिश्ते पर सपना ने बस यही कहा कि "अभी जो रिपोर्टें आ रही हैं, उनसे हमें उनके रिलेशन की गहराई का भी पता चल रहा है. "
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। सर अलेक्जेंडर चेपमैन "एलेक्स" फर्ग्यूसन, KT, CBE, जो सर एलेक्स या फर्जी के नाम से विख्यात हैं (31 दिसम्बर 1941 को ग्लासगो के गोवन में जन्म), एक स्कॉटिश फुटबॉल प्रबंधक और पूर्व खिलाड़ी हैं जो संप्रति मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रबंधक हैं और 1986 से इसके प्रभारी हैं। एबर्डीन के प्रबंधक के रूप में अत्यधिक सफल अवधि से पहले फर्ग्यूसन इस्ट स्टर्लिंगशायर और सेंट मिरेन के प्रबंधक थे। जॉक स्टेन की मौत के कारण हासिल अस्थायी विस्तार के चलते - कुछ समय के लिए स्कॉटलैंड राष्ट्रीय टीम के प्रबंधक रहे - और उन्हें नवम्बर 1986 में मैनचेस्टर यूनाइटेड का प्रबंधक नियुक्त किया गया। मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रबंधकों के इतिहास में सर मैट बस्बी के बाद वे एक ऐसे दूसरे प्रबंधक हैं जिन्होंने 23 वर्षों तक टीम के प्रबंधक के रूप में सेवा की है, जबकि सारे वर्तमान लीग प्रबंधकों में उनका कार्यकाल सबसे लंबा है। अपने प्रबंधन के दौरान, फर्ग्यूसन ने कई पुरस्कार जीते हैं और कई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं जिसमें ब्रिटिश फुटबॉल इतिहास में सर्वाधिक वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रबंधक पुरस्कार भी शामिल है। 2008 में वे तीसरे ब्रिटिश प्रबंधक बने जिन्होंने एकाधिक अवसर पर यूरोपियन कप जीता. लेबर पार्टी ब्रिटेन की एक सेंटर - लेफ्ट यानि (उदार वामपंथी विचारधारा वाली) राजनीतिक पार्टी है। इसका जन्म उन्नीसवीं शताब्दी के मजदूर संगठनो के आंदोलन और समाजवादी राजनैतिक दलों के उदय के साथ हुआ जिसे उदार गिरिजाघर (ब्रॉड चर्च) कह के परिभाषित किया गया। इस दल की विचारधारा बहुत विस्तृत है जिसमें प्रखर समाजवाद से लेकर उदारवादी समाजवादी लोकतंत्र की विचारधारा शामिल हैं। १९०० में बनने के बाद लेबर पार्टी ने शुरुवाती १९२० के आम चुनावों में उस समय की लिब्रल पार्टी की जगह ले ली और रामसे मैक्डोनाल्ड के नेतृत्व में १९२४ और १९२९-३१ के दौरान अल्पमत की सरकारें बनाईं। १९४०-४५ के दौरान यह दल चर्चिल युद्ध मंत्रालय (Churchill war ministry) का हिस्सा रहा जिसके बाद इसने क्लीमेंट ऐट्टली के नेतृत्व में बहुमत की सरकार बनाई। लेबर दल १९६४-७० के दौरान हैरॉल्ड विल्सन के नेतृत्व वाले पहले विल्सन मंत्रीमंडल का भी हिस्सा रहा। इसके बाद 1974 से 1979, पहले विल्सन और फिर जेम्स कैलेघन के नेतृत्व में सरकार में रही। लेबर पार्टी 1997 और 2010 के दौरान टोनी ब्लेयर और गौर्डन ब्राउन के नेतृत्व में १७९ सीटों से घटकर २००१ के आम चुनावों में १६७ और फिर २००५ के चुनावों में ६६ सीटों के साथ अंतिम स्थान पर आती रही। २०१० के आम चुनावों में २५८ सीटें और २०१५ के आम चुनावों में २३२ सीटें जीतकर यह पार्टी अब ब्रिटेन की संसद में आधिकारिक विपक्ष की भूमिका निभा रही है। वेल्श के सदन में लेबर पार्टी की अल्पमत की सरकार है जबकि स्कॉटिश संसद में यह मुख्य विपक्ष की भूमिका में है और यूरोपीय संसद में इसके २० सांसद हैं जो प्रोग्रेसिव एलाएंस ऑफ सोसलिस्ट्स एंड डेमोक्रेट्स समूह के साथ बैठते हैं। लेबर दल यूरोपीय समाजवादी दल और प्रोग्रेसिव एलाएंस (अंतर्राष्ट्रीय) का एक पूर्णकालिक सदस्य है। और सोशलिस्ट इंटरनैशनल में पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहा है। दल के वर्तमान नेता हैरिएट हर्मन हैं जो ८ मई २०१५ को एड मिलिबैंड के त्यागपत्र देने के बाद चुने गए हैं। . एलेक्स फर्ग्यूसन और लेबर पार्टी आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): ग्लासगो, इंग्लैण्ड। स्काटलैंड का सब से बड़ा शहर ग्लासगो है। श्रेणीःस्कॉटलैण्ड के नगर. इंग्लैण्ड (अंग्रेज़ीः England), ग्रेट ब्रिटेन नामक टापू के दक्षिणी भाग में स्थित एक देश है। इसका क्षेत्रफल 50,331 वर्ग मील है। यह यूनाइटेड किंगडम का सबसे बड़ा निर्वाचक देश है। इंग्लैंड के अलावा स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तर आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम में शामिल हैं। यह यूरोप के उत्तर पश्चिम में अवस्थित है जो मुख्य भूमि से इंग्लिश चैनल द्वारा पृथकीकृत द्वीप का अंग है। इसकी राजभाषा अंग्रेज़ी है और यह विश्व के सबसे संपन्न तथा शक्तिशाली देशों में से एक है। इंग्लैंड के इतिहास में सबसे स्वर्णिम काल उसका औपनिवेशिक युग है। अठारहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी के मध्य तक ब्रिटिश साम्राज्य विश्व का सबसे बड़ा और शकितशाली साम्राज्य हुआ करता था जो कई महाद्वीपों में फैला हुआ था और कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। उसी समय पूरे विश्व में अंग्रेज़ी भाषा ने अपनी छाप छोड़ी जिसकी वज़ह से यह आज भी विश्व के सबसे अधिक लोगों द्वारा बोले व समझे जाने वाली भाषा है। . एलेक्स फर्ग्यूसन 41 संबंध है और लेबर पार्टी 45 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.33% है = 2 / (41 + 45)। यह लेख एलेक्स फर्ग्यूसन और लेबर पार्टी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। सर अलेक्जेंडर चेपमैन "एलेक्स" फर्ग्यूसन, KT, CBE, जो सर एलेक्स या फर्जी के नाम से विख्यात हैं , एक स्कॉटिश फुटबॉल प्रबंधक और पूर्व खिलाड़ी हैं जो संप्रति मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रबंधक हैं और एक हज़ार नौ सौ छियासी से इसके प्रभारी हैं। एबर्डीन के प्रबंधक के रूप में अत्यधिक सफल अवधि से पहले फर्ग्यूसन इस्ट स्टर्लिंगशायर और सेंट मिरेन के प्रबंधक थे। जॉक स्टेन की मौत के कारण हासिल अस्थायी विस्तार के चलते - कुछ समय के लिए स्कॉटलैंड राष्ट्रीय टीम के प्रबंधक रहे - और उन्हें नवम्बर एक हज़ार नौ सौ छियासी में मैनचेस्टर यूनाइटेड का प्रबंधक नियुक्त किया गया। मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रबंधकों के इतिहास में सर मैट बस्बी के बाद वे एक ऐसे दूसरे प्रबंधक हैं जिन्होंने तेईस वर्षों तक टीम के प्रबंधक के रूप में सेवा की है, जबकि सारे वर्तमान लीग प्रबंधकों में उनका कार्यकाल सबसे लंबा है। अपने प्रबंधन के दौरान, फर्ग्यूसन ने कई पुरस्कार जीते हैं और कई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं जिसमें ब्रिटिश फुटबॉल इतिहास में सर्वाधिक वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रबंधक पुरस्कार भी शामिल है। दो हज़ार आठ में वे तीसरे ब्रिटिश प्रबंधक बने जिन्होंने एकाधिक अवसर पर यूरोपियन कप जीता. लेबर पार्टी ब्रिटेन की एक सेंटर - लेफ्ट यानि राजनीतिक पार्टी है। इसका जन्म उन्नीसवीं शताब्दी के मजदूर संगठनो के आंदोलन और समाजवादी राजनैतिक दलों के उदय के साथ हुआ जिसे उदार गिरिजाघर कह के परिभाषित किया गया। इस दल की विचारधारा बहुत विस्तृत है जिसमें प्रखर समाजवाद से लेकर उदारवादी समाजवादी लोकतंत्र की विचारधारा शामिल हैं। एक हज़ार नौ सौ में बनने के बाद लेबर पार्टी ने शुरुवाती एक हज़ार नौ सौ बीस के आम चुनावों में उस समय की लिब्रल पार्टी की जगह ले ली और रामसे मैक्डोनाल्ड के नेतृत्व में एक हज़ार नौ सौ चौबीस और एक हज़ार नौ सौ उनतीस-इकतीस के दौरान अल्पमत की सरकारें बनाईं। एक हज़ार नौ सौ चालीस-पैंतालीस के दौरान यह दल चर्चिल युद्ध मंत्रालय का हिस्सा रहा जिसके बाद इसने क्लीमेंट ऐट्टली के नेतृत्व में बहुमत की सरकार बनाई। लेबर दल एक हज़ार नौ सौ चौंसठ-सत्तर के दौरान हैरॉल्ड विल्सन के नेतृत्व वाले पहले विल्सन मंत्रीमंडल का भी हिस्सा रहा। इसके बाद एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर से एक हज़ार नौ सौ उन्यासी, पहले विल्सन और फिर जेम्स कैलेघन के नेतृत्व में सरकार में रही। लेबर पार्टी एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे और दो हज़ार दस के दौरान टोनी ब्लेयर और गौर्डन ब्राउन के नेतृत्व में एक सौ उन्यासी सीटों से घटकर दो हज़ार एक के आम चुनावों में एक सौ सरसठ और फिर दो हज़ार पाँच के चुनावों में छयासठ सीटों के साथ अंतिम स्थान पर आती रही। दो हज़ार दस के आम चुनावों में दो सौ अट्ठावन सीटें और दो हज़ार पंद्रह के आम चुनावों में दो सौ बत्तीस सीटें जीतकर यह पार्टी अब ब्रिटेन की संसद में आधिकारिक विपक्ष की भूमिका निभा रही है। वेल्श के सदन में लेबर पार्टी की अल्पमत की सरकार है जबकि स्कॉटिश संसद में यह मुख्य विपक्ष की भूमिका में है और यूरोपीय संसद में इसके बीस सांसद हैं जो प्रोग्रेसिव एलाएंस ऑफ सोसलिस्ट्स एंड डेमोक्रेट्स समूह के साथ बैठते हैं। लेबर दल यूरोपीय समाजवादी दल और प्रोग्रेसिव एलाएंस का एक पूर्णकालिक सदस्य है। और सोशलिस्ट इंटरनैशनल में पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहा है। दल के वर्तमान नेता हैरिएट हर्मन हैं जो आठ मई दो हज़ार पंद्रह को एड मिलिबैंड के त्यागपत्र देने के बाद चुने गए हैं। . एलेक्स फर्ग्यूसन और लेबर पार्टी आम में दो बातें हैं : ग्लासगो, इंग्लैण्ड। स्काटलैंड का सब से बड़ा शहर ग्लासगो है। श्रेणीःस्कॉटलैण्ड के नगर. इंग्लैण्ड , ग्रेट ब्रिटेन नामक टापू के दक्षिणी भाग में स्थित एक देश है। इसका क्षेत्रफल पचास,तीन सौ इकतीस वर्ग मील है। यह यूनाइटेड किंगडम का सबसे बड़ा निर्वाचक देश है। इंग्लैंड के अलावा स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तर आयरलैंड भी यूनाइटेड किंगडम में शामिल हैं। यह यूरोप के उत्तर पश्चिम में अवस्थित है जो मुख्य भूमि से इंग्लिश चैनल द्वारा पृथकीकृत द्वीप का अंग है। इसकी राजभाषा अंग्रेज़ी है और यह विश्व के सबसे संपन्न तथा शक्तिशाली देशों में से एक है। इंग्लैंड के इतिहास में सबसे स्वर्णिम काल उसका औपनिवेशिक युग है। अठारहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी के मध्य तक ब्रिटिश साम्राज्य विश्व का सबसे बड़ा और शकितशाली साम्राज्य हुआ करता था जो कई महाद्वीपों में फैला हुआ था और कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। उसी समय पूरे विश्व में अंग्रेज़ी भाषा ने अपनी छाप छोड़ी जिसकी वज़ह से यह आज भी विश्व के सबसे अधिक लोगों द्वारा बोले व समझे जाने वाली भाषा है। . एलेक्स फर्ग्यूसन इकतालीस संबंध है और लेबर पार्टी पैंतालीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.तैंतीस% है = दो / । यह लेख एलेक्स फर्ग्यूसन और लेबर पार्टी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के 306 किलोमीटर लंबे रेवाड़ी-मदार खंड कोवीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इस मार्ग पर डबल स्टैक लॉन्ग हॉल कंटेनर ट्रेन को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर राजस्थान और हरियाणा के राज्यपाल, राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, श्री अर्जुन राम मेघवाल, श्री कैलाश चौधरी, श्री राव इंद्रजीत सिंह, श्री रतन लाल कटारिया और श्री कृष्णपाल गुर्जर भी उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के महायज्ञ ने आज एक नई गति प्राप्त की है। उन्होंने देश के आधुनिकीकरण के लिए सरकार द्वारा पिछले 12 दिनों में शुरू किए गए कार्यक्रमों का जिक्र किया, जैसे किसानों को डीबीटी, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में नेशनल मोबिलिटी कार्ड लॉन्च करना, एम्स राजकोट, आईआईएम संबलपुर का उद्घाटन, 6 शहरों में लाइट हाउस परियोजनाएं, राष्ट्रीय परमाणु समय पैमाना, भारतीय निर्देशक द्रव्य प्रणाली, राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला, कोच्चि-मंगलौर गैस पाइपलाइन, 100वीं किसान रेल, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक खंड आदि। उन्होंने कहा कि देश को आधुनिक बनाने के लिए कोरोना के इस दौर में भी कई लॉन्च किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिनों पहले कोरोना के लिए मेड इन इंडिया वैक्सीन को मंजूरी मिली है, जिससे लोगों में एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 21 वीं सदी में भारत के लिए गेम चेंजर परियोजना साबित होगी। उन्होंने कहा कि न्यू भाऊपुर-नई खुर्जा खंड के शुभारंभ के बाद से उस विशेष खंड में मालगाड़ी की औसत गति बढ़कर तीन गुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के न्यू अटेली से राजस्थान के न्यू किशनगंज तक पहली डबल स्टैक्ड कंटेनर मालगाड़ी के रवाना होने से भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए इंजीनियरों और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राजस्थान के सभी किसानों, उद्यमियों और व्यापारियों के लिए नए अवसर और नई उम्मीदें लाएगा। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, आधुनिक माल गाड़ियों के लिए न केवल एक मार्ग है, बल्कि देश के तेजी से विकास के लिए एक गलियारा भी है। उन्होंने कहा कि ये कॉरिडोर देश के विभिन्न शहरों में नए विकास केंद्रों और विकास बिंदुओं के उभरने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर ने यह भी दिखाना शुरू कर दिया है कि वे कैसे देश के विभिन्न हिस्सों की ताकत बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर हरियाणा और राजस्थान में खेती और संबद्ध व्यवसाय को आसान बनाएगा तथा महेंद्रगढ़, जयपुर, अजमेर और सीकर जैसे शहरों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। इन राज्यों की विनिर्माण इकाइयों और उद्यमियों को बहुत कम लागत पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेज पहुंच प्राप्त होगी। गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों के साथतेज और किफायती संपर्क, क्षेत्र में निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण जीवन और व्यापार में नई प्रणालियों को भी जन्म देता है और न केवल इससे जुड़े कार्यों को गति मिलती है बल्कि अर्थव्यवस्था के कई इंजनों को भी शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर न केवल निर्माण क्षेत्र में बल्कि सीमेंट, इस्पात और परिवहन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा करता है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लाभ के बारे मेंप्रधानमंत्री ने कहा, यह 9 राज्यों में 133 रेलवे स्टेशनों को कवर करेगा। इन स्टेशनों पर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, फ्रेट टर्मिनल, कंटेनर डिपो, कंटेनर टर्मिनल, पार्सल हब होंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी किसानों, लघु उद्योगों, कुटीर उद्योगों के साथ-साथ बड़े निर्माताओं को भी लाभान्वित करेंगे। प्रधानमंत्री ने रेल पटरियों का उद्धरण देते हुए कहा कि आज भारत मेंबुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए दो ट्रैक पर कार्य किये जा रहे हैं। क्षेत्र विशेष के स्तर पर और देश के विकास इंजन के स्तर पर। क्षेत्र विशेष के स्तर पर, प्रधानमंत्री ने आवास, स्वच्छता, बिजली, एलपीजी, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधारों का जिक्र किया। ऐसीयोजनाओं से करोड़ों भारतीय लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरे ट्रैक पर, राजमार्ग, रेलवे, वायुमार्ग, जलमार्ग और मल्टी-मोडल पोर्ट कनेक्टिविटी के तेज कार्यान्वयन से उद्योगऔर उद्यमियों जैसे विकास इंजनों को लाभ मिल रहा है। फ्रेट कॉरिडोर की तरह उद्योग को इकोनॉमिक कॉरिडोर, डिफेन्स कॉरिडोर,तकनीकी क्लस्टर प्रदान किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कियह क्षेत्र विशेष और उद्योग अवसंरचना भारत की छवि को सकारात्मक बना रही है, जो विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धिऔर भारत में विश्वास के बढ़ने से प्रतिबिंबित होती है। प्रधानमंत्री ने परियोजना में तकनीकी और वित्तीय सहायता के लिए जापान के लोगों को भी धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर, उद्योग के स्तर पर और निवेश के बीच समन्वय पर जोर दिया। पहले के समय में यात्रियों की परेशानी को याद करते हुएप्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, समयबद्धता, अच्छी सेवा, टिकट, सुविधाऔर सुरक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किये गए हैं। उन्होंने स्टेशनों और डिब्बों की साफ-सफाई, जैविक (बायोडिग्रेडेबल) शौचालय, खान-पान, आधुनिक टिकट प्रणाली और तेजस व वंदे भारत एक्सप्रेसजैसी मॉडल ट्रेनों, विस्टा-डोम कोच का उदाहरण दिया। उन्होंने रेल लाइनों को बड़ी लाइन में बदलने और विद्युतीकरण में अभूतपूर्व निवेश का भी जिक्र किया, जिससे रेलवे का दायरा बढ़ गया है और गति में वृद्धि हुई है। उन्होंने सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों, पटरियों को बिछाने के लिए आधुनिक तकनीक के बारे में बताया और इस बात की उम्मीद जताई कि पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य की राजधानी रेलवे से जुड़ जाएगी। प्रधानमंत्री ने कोरोना अवधि के दौरान रेलवे के उत्कृष्ट योगदान का उल्लेख किया और श्रमिकों को उनके घरों तक ले जाने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। Read this release in:
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन सौ छः किलोग्राममीटर लंबे रेवाड़ी-मदार खंड कोवीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इस मार्ग पर डबल स्टैक लॉन्ग हॉल कंटेनर ट्रेन को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर राजस्थान और हरियाणा के राज्यपाल, राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, श्री अर्जुन राम मेघवाल, श्री कैलाश चौधरी, श्री राव इंद्रजीत सिंह, श्री रतन लाल कटारिया और श्री कृष्णपाल गुर्जर भी उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के महायज्ञ ने आज एक नई गति प्राप्त की है। उन्होंने देश के आधुनिकीकरण के लिए सरकार द्वारा पिछले बारह दिनों में शुरू किए गए कार्यक्रमों का जिक्र किया, जैसे किसानों को डीबीटी, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में नेशनल मोबिलिटी कार्ड लॉन्च करना, एम्स राजकोट, आईआईएम संबलपुर का उद्घाटन, छः शहरों में लाइट हाउस परियोजनाएं, राष्ट्रीय परमाणु समय पैमाना, भारतीय निर्देशक द्रव्य प्रणाली, राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला, कोच्चि-मंगलौर गैस पाइपलाइन, एक सौवीं किसान रेल, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक खंड आदि। उन्होंने कहा कि देश को आधुनिक बनाने के लिए कोरोना के इस दौर में भी कई लॉन्च किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिनों पहले कोरोना के लिए मेड इन इंडिया वैक्सीन को मंजूरी मिली है, जिससे लोगों में एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इक्कीस वीं सदी में भारत के लिए गेम चेंजर परियोजना साबित होगी। उन्होंने कहा कि न्यू भाऊपुर-नई खुर्जा खंड के शुभारंभ के बाद से उस विशेष खंड में मालगाड़ी की औसत गति बढ़कर तीन गुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के न्यू अटेली से राजस्थान के न्यू किशनगंज तक पहली डबल स्टैक्ड कंटेनर मालगाड़ी के रवाना होने से भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए इंजीनियरों और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राजस्थान के सभी किसानों, उद्यमियों और व्यापारियों के लिए नए अवसर और नई उम्मीदें लाएगा। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, आधुनिक माल गाड़ियों के लिए न केवल एक मार्ग है, बल्कि देश के तेजी से विकास के लिए एक गलियारा भी है। उन्होंने कहा कि ये कॉरिडोर देश के विभिन्न शहरों में नए विकास केंद्रों और विकास बिंदुओं के उभरने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर ने यह भी दिखाना शुरू कर दिया है कि वे कैसे देश के विभिन्न हिस्सों की ताकत बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर हरियाणा और राजस्थान में खेती और संबद्ध व्यवसाय को आसान बनाएगा तथा महेंद्रगढ़, जयपुर, अजमेर और सीकर जैसे शहरों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। इन राज्यों की विनिर्माण इकाइयों और उद्यमियों को बहुत कम लागत पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेज पहुंच प्राप्त होगी। गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों के साथतेज और किफायती संपर्क, क्षेत्र में निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण जीवन और व्यापार में नई प्रणालियों को भी जन्म देता है और न केवल इससे जुड़े कार्यों को गति मिलती है बल्कि अर्थव्यवस्था के कई इंजनों को भी शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर न केवल निर्माण क्षेत्र में बल्कि सीमेंट, इस्पात और परिवहन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा करता है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लाभ के बारे मेंप्रधानमंत्री ने कहा, यह नौ राज्यों में एक सौ तैंतीस रेलवे स्टेशनों को कवर करेगा। इन स्टेशनों पर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, फ्रेट टर्मिनल, कंटेनर डिपो, कंटेनर टर्मिनल, पार्सल हब होंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी किसानों, लघु उद्योगों, कुटीर उद्योगों के साथ-साथ बड़े निर्माताओं को भी लाभान्वित करेंगे। प्रधानमंत्री ने रेल पटरियों का उद्धरण देते हुए कहा कि आज भारत मेंबुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए दो ट्रैक पर कार्य किये जा रहे हैं। क्षेत्र विशेष के स्तर पर और देश के विकास इंजन के स्तर पर। क्षेत्र विशेष के स्तर पर, प्रधानमंत्री ने आवास, स्वच्छता, बिजली, एलपीजी, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधारों का जिक्र किया। ऐसीयोजनाओं से करोड़ों भारतीय लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरे ट्रैक पर, राजमार्ग, रेलवे, वायुमार्ग, जलमार्ग और मल्टी-मोडल पोर्ट कनेक्टिविटी के तेज कार्यान्वयन से उद्योगऔर उद्यमियों जैसे विकास इंजनों को लाभ मिल रहा है। फ्रेट कॉरिडोर की तरह उद्योग को इकोनॉमिक कॉरिडोर, डिफेन्स कॉरिडोर,तकनीकी क्लस्टर प्रदान किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कियह क्षेत्र विशेष और उद्योग अवसंरचना भारत की छवि को सकारात्मक बना रही है, जो विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धिऔर भारत में विश्वास के बढ़ने से प्रतिबिंबित होती है। प्रधानमंत्री ने परियोजना में तकनीकी और वित्तीय सहायता के लिए जापान के लोगों को भी धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर, उद्योग के स्तर पर और निवेश के बीच समन्वय पर जोर दिया। पहले के समय में यात्रियों की परेशानी को याद करते हुएप्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, समयबद्धता, अच्छी सेवा, टिकट, सुविधाऔर सुरक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किये गए हैं। उन्होंने स्टेशनों और डिब्बों की साफ-सफाई, जैविक शौचालय, खान-पान, आधुनिक टिकट प्रणाली और तेजस व वंदे भारत एक्सप्रेसजैसी मॉडल ट्रेनों, विस्टा-डोम कोच का उदाहरण दिया। उन्होंने रेल लाइनों को बड़ी लाइन में बदलने और विद्युतीकरण में अभूतपूर्व निवेश का भी जिक्र किया, जिससे रेलवे का दायरा बढ़ गया है और गति में वृद्धि हुई है। उन्होंने सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों, पटरियों को बिछाने के लिए आधुनिक तकनीक के बारे में बताया और इस बात की उम्मीद जताई कि पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य की राजधानी रेलवे से जुड़ जाएगी। प्रधानमंत्री ने कोरोना अवधि के दौरान रेलवे के उत्कृष्ट योगदान का उल्लेख किया और श्रमिकों को उनके घरों तक ले जाने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। Read this release in:
Megadol Syrup डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से सिरप दवाओं के रूप में मिलती है। इस दवाई Megadol Syrup को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। आयु, लिंग और रोगी की पिछली स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार Megadol Syrup की खुराक दी जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। Megadol Syrup के सबसे सामान्य दुष्प्रभाव मतली या उलटी, दस्त, कब्ज हैं। Megadol Syrup के कुछ अन्य नुकसान भी हैं जो साइड इफेक्ट के खंड में लिखे गए हैं। Megadol Syrup के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Megadol Syrup का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए मध्यम है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव मध्यम है। Megadol Syrup से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से एलर्जी, जठरांत्र में रक्तस्राव, गुर्दे की बीमारी जैसी कोई समस्या है, तो Megadol Syrup देने की सलाह नहीं दी जाती क्योंकि इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Megadol Syrup लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। इन उपरोक्त परिस्थितियों के अलावा Megadol Syrup कुछ अन्य दवाओं के साथ लिए जाने पर गंभीर प्रतिक्रिया कर सकती है। इन प्रतिक्रियाओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। इन सभी सावधानियों के अलावा याद रखें कि वाहन चलाते समय Megadol Syrup को लेना सुरक्षित है, साथ ही इस की लत लगने की संभावना है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Megadol Syrup की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Megadol Syrup की खुराक अलग हो सकती है। ।बच्चे(2 से 12 वर्ष) क्या Megadol Syrup का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Megadol से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें। क्या Megadol Syrup का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के शरीर पर Megadol के विपरीत प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए ऐसा ही कोई संकेत आपके शरीर में भी देखने को मिले तो आप दवा लेना बंद कर दें। इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Megadol Syrup का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Megadol का इस्तेमाल हम कर सकते हैं, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव बहुत कम है। Megadol Syrup का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Megadol का दुष्प्रभाव आपके लीवर पर बेहद कम पड़ेगा। आप इसे डॉक्टर से बिना सलाह लिए भी ले सकते हैं। क्या ह्रदय पर Megadol Syrup का प्रभाव पड़ता है? हृदय के लिए Megadol के साइड इफेक्ट बहुत ही कम मिलते हैं। क्या Megadol Syrup आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Megadol Syrup को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Megadol Syrup को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? वाहन चलाने के अलावा मशीनों के बीच काम करने में सतर्कता की जरूरत होती है, ऐसे में आप Megadol Syrup का सेवन करके भी इन कामों को आसानी से कर सकते हैं। क्या Megadol Syrup को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Megadol Syrup का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Megadol Syrup इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Megadol Syrup किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Megadol Syrup को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कई दवाओं को खाने के साथ ही लिया जाता है। Megadol Syrup को भी आप भोजन के साथ ले सकते हैं। जब Megadol Syrup ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Megadol Syrup से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा। चोट की वजह से दर्द होने पर मस्तिष्क प्रोस्टाग्लैंडिंस नामक केमिकल रिलीज़ करता है। कई बार इस केमिकल के कारण बुखार, सूजन और जलन होती है। Megadol इस केमिकल के संश्लेषण को रोक देती है जिससे ये काम करना बंद कर देता है। डॉक्टर के प्रिस्क्राइब किए गए समय तक ही Megadol का इस्तेमाल करना चाहिए। लंबे समय तक Megadol खाने के कारण पेट खराब, किडनी को नुकसान और ह्रदय रोग जैसे हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। इनमें से कोई भी दुष्प्रभाव नज़र आने पर Megadol खानी बंद कर दें। डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की गई मात्रा में निर्धारित समय तक Megadol का इस्तेमाल सुरक्षित है। हालांकि, कुछ लोगों को Megadol के साइड इफेक्ट्स भी झेलने पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श करें। जी हांं, Megadol के ओवरडोज़ के कारण चक्कर आ सकते हैं। इसलिए अगर आपको Megadol लेने के बाद चक्कर महसूस हो रहे हैं तो कोई काम न करें। आराम करें और अगर आधे घंटे तक चक्कर बंद ना हों तो डॉक्टर से संपर्क करें। Megadol में सुल्फा नहीं होता है। Megadol एंटी-इनफ्लामेट्री दवा है। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Motrin® (Ibuprofen) US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Acetaminophen (acetaminophen) US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Ofirmev (acetaminophen)
Megadol Syrup डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से सिरप दवाओं के रूप में मिलती है। इस दवाई Megadol Syrup को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। आयु, लिंग और रोगी की पिछली स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार Megadol Syrup की खुराक दी जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। Megadol Syrup के सबसे सामान्य दुष्प्रभाव मतली या उलटी, दस्त, कब्ज हैं। Megadol Syrup के कुछ अन्य नुकसान भी हैं जो साइड इफेक्ट के खंड में लिखे गए हैं। Megadol Syrup के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Megadol Syrup का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए मध्यम है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव मध्यम है। Megadol Syrup से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से एलर्जी, जठरांत्र में रक्तस्राव, गुर्दे की बीमारी जैसी कोई समस्या है, तो Megadol Syrup देने की सलाह नहीं दी जाती क्योंकि इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Megadol Syrup लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। इन उपरोक्त परिस्थितियों के अलावा Megadol Syrup कुछ अन्य दवाओं के साथ लिए जाने पर गंभीर प्रतिक्रिया कर सकती है। इन प्रतिक्रियाओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। इन सभी सावधानियों के अलावा याद रखें कि वाहन चलाते समय Megadol Syrup को लेना सुरक्षित है, साथ ही इस की लत लगने की संभावना है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Megadol Syrup की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Megadol Syrup की खुराक अलग हो सकती है। ।बच्चे क्या Megadol Syrup का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Megadol से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें। क्या Megadol Syrup का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के शरीर पर Megadol के विपरीत प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए ऐसा ही कोई संकेत आपके शरीर में भी देखने को मिले तो आप दवा लेना बंद कर दें। इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Megadol Syrup का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Megadol का इस्तेमाल हम कर सकते हैं, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव बहुत कम है। Megadol Syrup का जिगर पर क्या असर होता है? Megadol का दुष्प्रभाव आपके लीवर पर बेहद कम पड़ेगा। आप इसे डॉक्टर से बिना सलाह लिए भी ले सकते हैं। क्या ह्रदय पर Megadol Syrup का प्रभाव पड़ता है? हृदय के लिए Megadol के साइड इफेक्ट बहुत ही कम मिलते हैं। क्या Megadol Syrup आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Megadol Syrup को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Megadol Syrup को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? वाहन चलाने के अलावा मशीनों के बीच काम करने में सतर्कता की जरूरत होती है, ऐसे में आप Megadol Syrup का सेवन करके भी इन कामों को आसानी से कर सकते हैं। क्या Megadol Syrup को लेना सुरखित है? डॉक्टर के कहने के बाद ही Megadol Syrup का सेवन करें। वैसे यह सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Megadol Syrup इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Megadol Syrup किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Megadol Syrup को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कई दवाओं को खाने के साथ ही लिया जाता है। Megadol Syrup को भी आप भोजन के साथ ले सकते हैं। जब Megadol Syrup ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Megadol Syrup से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा। चोट की वजह से दर्द होने पर मस्तिष्क प्रोस्टाग्लैंडिंस नामक केमिकल रिलीज़ करता है। कई बार इस केमिकल के कारण बुखार, सूजन और जलन होती है। Megadol इस केमिकल के संश्लेषण को रोक देती है जिससे ये काम करना बंद कर देता है। डॉक्टर के प्रिस्क्राइब किए गए समय तक ही Megadol का इस्तेमाल करना चाहिए। लंबे समय तक Megadol खाने के कारण पेट खराब, किडनी को नुकसान और ह्रदय रोग जैसे हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। इनमें से कोई भी दुष्प्रभाव नज़र आने पर Megadol खानी बंद कर दें। डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की गई मात्रा में निर्धारित समय तक Megadol का इस्तेमाल सुरक्षित है। हालांकि, कुछ लोगों को Megadol के साइड इफेक्ट्स भी झेलने पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श करें। जी हांं, Megadol के ओवरडोज़ के कारण चक्कर आ सकते हैं। इसलिए अगर आपको Megadol लेने के बाद चक्कर महसूस हो रहे हैं तो कोई काम न करें। आराम करें और अगर आधे घंटे तक चक्कर बंद ना हों तो डॉक्टर से संपर्क करें। Megadol में सुल्फा नहीं होता है। Megadol एंटी-इनफ्लामेट्री दवा है। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Motrin® US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Acetaminophen US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Ofirmev
Sankashti Chaturthi 2022 Vrat Date and Time: 'संकष्टी' शब्द का संस्कृत मूल है और इसका अर्थ है 'कठिन समय के दौरान उद्धार' जबकि 'चतुर्थी' का अर्थ है 'चौथा दिन या भगवान गणेश का दिन'। Sankashti Chaturthi 2022 Vrat Date and Time: संकष्टी चतुर्थी को दक्षिण भारतीय राज्यों में संकटहारा चतुर्थी भी कहा जाता है, यह हिंदुओं के लिए एक शुभ त्योहार है, जिसे भगवान गणेश के सम्मान में मनाया जाता है। यह प्रत्येक हिंदू कैलेंडर माह के दौरान कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के 'चतुर्थी' (चौथे दिन) पर मनाया जाता है। इसके अलावा जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो यह अंगारकी चतुर्थी के रूप में लोकप्रिय है और इसे सभी संकष्टी चतुर्थी के दिनों में सबसे शुभ माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी हर हिंदू कैलेंडर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि (चौथे दिन) को मनाई जाती है। संकष्टी चतुर्थी का उत्सव भारत के उत्तरी और दक्षिणी दोनों राज्यों में प्रचलित है। महाराष्ट्र राज्य में, उत्सव और भी विस्तृत और भव्य हैं। 'संकष्टी' शब्द का संस्कृत मूल है और इसका अर्थ है 'कठिन समय के दौरान उद्धार' जबकि 'चतुर्थी' का अर्थ है 'चौथा दिन या भगवान गणेश का दिन'। इसलिए इस शुभ दिन पर भक्त जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने और हर कठिन परिस्थिति में विजयी होने में मदद करने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं। संकष्टी चतुर्थी के अनुष्ठानः संकष्टी चतुर्थी के दिन, भक्त जल्दी उठते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। वे अपने देवता के सम्मान में एक सख्त उपवास रखते हैं। कुछ लोग आंशिक उपवास भी रख सकते हैं। इस व्रत का पालन करने वाला केवल फल, सब्जियां और पौधों की जड़ों को ही खा सकता है। इस दिन मुख्य भारतीय आहार में मूंगफली, आलू और साबूदाना खिचड़ी शामिल हैं। संकष्टी पूजा शाम को चंद्रमा को देखने के बाद की जाती है। भगवान गणेश की मूर्ति को दूर्वा घास और ताजे फूलों से सजाया गया है। इस दौरान दीपक भी जलाया जाता है। अन्य सामान्य पूजा अनुष्ठान जैसे धूप जलाना और वैदिक मंत्रों का पाठ भी किया जाता है। इसके बाद भक्तों ने महीने के लिए विशिष्ट 'व्रत कथा' का पाठ किया। शाम को भगवान गणेश की पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला जाता है। मोदक और भगवान गणेश के अन्य पसंदीदा खाने से युक्त विशेष 'नैवेद्य' प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है। इसके बाद एक 'आरती' होती है और बाद में सभी भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन, विशेष पूजा अनुष्ठान भी चंद्रमा या चंद्र भगवान को समर्पित होते हैं। इसमें चंद्रमा की दिशा में जल, चंदन का लेप, पवित्र चावल और फूल का छिड़काव करना शामिल है। इस दिन कुछ नाम रखने के लिए 'गणेश अष्टोत्र', 'संकष्टनाशन स्तोत्र' और 'वक्रथुंड महाकाया' का पाठ करना शुभ होता है। वास्तव में भगवान गणेश को समर्पित किसी भी अन्य वैदिक मंत्रों का जाप किया जा सकता है। संकष्टी चतुर्थी का महत्वः संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। भगवान गणेश के उत्साही भक्तों का मानना है कि विशेष रूप से अंगारकी चतुर्थी के दिन अपने देवता की भक्ति के साथ प्रार्थना करने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और वे एक समृद्ध जीवन व्यतीत करेंगे। निःसंतान दंपत्ति भी संतान की प्राप्ति के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत करते हैं। चूंकि संकष्टी चतुर्थी हर चंद्र महीने में मनाई जाती है, इसलिए प्रत्येक महीने में भगवान गणेश की पूजा अलग-अलग पीता (कमल की पंखुड़ी) और नाम से की जाती है। कुल 13 व्रत हैं, प्रत्येक व्रत का एक विशिष्ट उद्देश्य और कहानी है, जिसे 'व्रत कथा' के रूप में जाना जाता है। इसलिए कुल 13 'व्रत कथा' हैं, हर महीने के लिए एक और आखिरी कथा 'आदिका' के लिए है जो हिंदू कैलेंडर में हर चार साल में आने वाला एक अतिरिक्त महीना है। इस व्रत में से प्रत्येक की कहानी हर महीने के लिए अनूठी है और उस महीने में ही इसका पाठ किया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, इस पवित्र दिन पर भगवान शिव ने विष्णु, लक्ष्मी और पार्वती को छोड़कर अन्य देवताओं पर अपने पुत्र संकष्टी (भगवान गणेश का दूसरा नाम) की सर्वोच्चता की घोषणा की थी। तब से, भगवान संकष्टी को समृद्धि, सौभाग्य और स्वतंत्रता के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश अपने सभी भक्तों के लिए पृथ्वी की उपस्थिति प्रदान करते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व 'भविष्य पुराण' और 'नरसिंह पुराण' में वर्णित है और इसे स्वयं भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को भी समझाया था, जो सभी पांडवों में सबसे बड़े हैं।
Sankashti Chaturthi दो हज़ार बाईस Vrat Date and Time: 'संकष्टी' शब्द का संस्कृत मूल है और इसका अर्थ है 'कठिन समय के दौरान उद्धार' जबकि 'चतुर्थी' का अर्थ है 'चौथा दिन या भगवान गणेश का दिन'। Sankashti Chaturthi दो हज़ार बाईस Vrat Date and Time: संकष्टी चतुर्थी को दक्षिण भारतीय राज्यों में संकटहारा चतुर्थी भी कहा जाता है, यह हिंदुओं के लिए एक शुभ त्योहार है, जिसे भगवान गणेश के सम्मान में मनाया जाता है। यह प्रत्येक हिंदू कैलेंडर माह के दौरान कृष्ण पक्ष के 'चतुर्थी' पर मनाया जाता है। इसके अलावा जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो यह अंगारकी चतुर्थी के रूप में लोकप्रिय है और इसे सभी संकष्टी चतुर्थी के दिनों में सबसे शुभ माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी हर हिंदू कैलेंडर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। संकष्टी चतुर्थी का उत्सव भारत के उत्तरी और दक्षिणी दोनों राज्यों में प्रचलित है। महाराष्ट्र राज्य में, उत्सव और भी विस्तृत और भव्य हैं। 'संकष्टी' शब्द का संस्कृत मूल है और इसका अर्थ है 'कठिन समय के दौरान उद्धार' जबकि 'चतुर्थी' का अर्थ है 'चौथा दिन या भगवान गणेश का दिन'। इसलिए इस शुभ दिन पर भक्त जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने और हर कठिन परिस्थिति में विजयी होने में मदद करने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं। संकष्टी चतुर्थी के अनुष्ठानः संकष्टी चतुर्थी के दिन, भक्त जल्दी उठते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। वे अपने देवता के सम्मान में एक सख्त उपवास रखते हैं। कुछ लोग आंशिक उपवास भी रख सकते हैं। इस व्रत का पालन करने वाला केवल फल, सब्जियां और पौधों की जड़ों को ही खा सकता है। इस दिन मुख्य भारतीय आहार में मूंगफली, आलू और साबूदाना खिचड़ी शामिल हैं। संकष्टी पूजा शाम को चंद्रमा को देखने के बाद की जाती है। भगवान गणेश की मूर्ति को दूर्वा घास और ताजे फूलों से सजाया गया है। इस दौरान दीपक भी जलाया जाता है। अन्य सामान्य पूजा अनुष्ठान जैसे धूप जलाना और वैदिक मंत्रों का पाठ भी किया जाता है। इसके बाद भक्तों ने महीने के लिए विशिष्ट 'व्रत कथा' का पाठ किया। शाम को भगवान गणेश की पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला जाता है। मोदक और भगवान गणेश के अन्य पसंदीदा खाने से युक्त विशेष 'नैवेद्य' प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है। इसके बाद एक 'आरती' होती है और बाद में सभी भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन, विशेष पूजा अनुष्ठान भी चंद्रमा या चंद्र भगवान को समर्पित होते हैं। इसमें चंद्रमा की दिशा में जल, चंदन का लेप, पवित्र चावल और फूल का छिड़काव करना शामिल है। इस दिन कुछ नाम रखने के लिए 'गणेश अष्टोत्र', 'संकष्टनाशन स्तोत्र' और 'वक्रथुंड महाकाया' का पाठ करना शुभ होता है। वास्तव में भगवान गणेश को समर्पित किसी भी अन्य वैदिक मंत्रों का जाप किया जा सकता है। संकष्टी चतुर्थी का महत्वः संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। भगवान गणेश के उत्साही भक्तों का मानना है कि विशेष रूप से अंगारकी चतुर्थी के दिन अपने देवता की भक्ति के साथ प्रार्थना करने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और वे एक समृद्ध जीवन व्यतीत करेंगे। निःसंतान दंपत्ति भी संतान की प्राप्ति के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत करते हैं। चूंकि संकष्टी चतुर्थी हर चंद्र महीने में मनाई जाती है, इसलिए प्रत्येक महीने में भगवान गणेश की पूजा अलग-अलग पीता और नाम से की जाती है। कुल तेरह व्रत हैं, प्रत्येक व्रत का एक विशिष्ट उद्देश्य और कहानी है, जिसे 'व्रत कथा' के रूप में जाना जाता है। इसलिए कुल तेरह 'व्रत कथा' हैं, हर महीने के लिए एक और आखिरी कथा 'आदिका' के लिए है जो हिंदू कैलेंडर में हर चार साल में आने वाला एक अतिरिक्त महीना है। इस व्रत में से प्रत्येक की कहानी हर महीने के लिए अनूठी है और उस महीने में ही इसका पाठ किया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, इस पवित्र दिन पर भगवान शिव ने विष्णु, लक्ष्मी और पार्वती को छोड़कर अन्य देवताओं पर अपने पुत्र संकष्टी की सर्वोच्चता की घोषणा की थी। तब से, भगवान संकष्टी को समृद्धि, सौभाग्य और स्वतंत्रता के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश अपने सभी भक्तों के लिए पृथ्वी की उपस्थिति प्रदान करते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व 'भविष्य पुराण' और 'नरसिंह पुराण' में वर्णित है और इसे स्वयं भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को भी समझाया था, जो सभी पांडवों में सबसे बड़े हैं।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता : अब कोयला तस्करी मामले में कोलकाता का एक निजी अस्पताल सीबीआइ के स्कैनर पर है। दरअसल इस मामले में पिछले दिनों तृणमूल नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा को सीबीआइ ने अस्पताल से ही गिरफ्तार कर लिया था, जहां उसका इलाज चल रहा था। सीबीआइ का दावा है कि रिलीज से जुड़े तमाम दस्तावेज भी जारी कर दिए गए थे। अदालत के निर्देशानुसार विकास मिश्रा के गिरफ्तारी वारंट के अदालती आदेश के साथ अस्पताल पहुंचने से पहले उसे अस्पताल में फिर से भर्ती कर लिया गया था। सीबीआइ ने निजी अस्पताल के खिलाफ कोर्ट में शिकायत भी दर्ज कराई है। अब जब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं मिल जाती है, तब तक विकास मिश्रा वहीं रहेगा। अस्पताल में छुट्टी मिलने के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा। बता दें कि अदालत ने स्पष्ट कहा था कि विकास को अस्पताल से रिहा होने से पहले सीबीआइ को सूचित करना होगा। विकास के शरीर में क्या समस्या है, अद्यतन सूचित किया जाना चाहिए। आसनसोल कोर्ट में बुधवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई से पहले विकास को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीबीआइ को लगता है कि गिरफ्तारी के डर से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने कोयला तस्करी मामले में अनूप माजी उर्फ लाला, विनय मिश्रा और विकास मिश्रा की 9. 28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इनमें बैंक खाते, जमीन, कार, बेनामी संपत्ति और कारखाने शामिल हैं।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता : अब कोयला तस्करी मामले में कोलकाता का एक निजी अस्पताल सीबीआइ के स्कैनर पर है। दरअसल इस मामले में पिछले दिनों तृणमूल नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा को सीबीआइ ने अस्पताल से ही गिरफ्तार कर लिया था, जहां उसका इलाज चल रहा था। सीबीआइ का दावा है कि रिलीज से जुड़े तमाम दस्तावेज भी जारी कर दिए गए थे। अदालत के निर्देशानुसार विकास मिश्रा के गिरफ्तारी वारंट के अदालती आदेश के साथ अस्पताल पहुंचने से पहले उसे अस्पताल में फिर से भर्ती कर लिया गया था। सीबीआइ ने निजी अस्पताल के खिलाफ कोर्ट में शिकायत भी दर्ज कराई है। अब जब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं मिल जाती है, तब तक विकास मिश्रा वहीं रहेगा। अस्पताल में छुट्टी मिलने के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा। बता दें कि अदालत ने स्पष्ट कहा था कि विकास को अस्पताल से रिहा होने से पहले सीबीआइ को सूचित करना होगा। विकास के शरीर में क्या समस्या है, अद्यतन सूचित किया जाना चाहिए। आसनसोल कोर्ट में बुधवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई से पहले विकास को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीबीआइ को लगता है कि गिरफ्तारी के डर से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने कोयला तस्करी मामले में अनूप माजी उर्फ लाला, विनय मिश्रा और विकास मिश्रा की नौ. अट्ठाईस करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इनमें बैंक खाते, जमीन, कार, बेनामी संपत्ति और कारखाने शामिल हैं।
श्रीनगर, 29 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के शोपियां जिले के एक बगीचे से मंगलवार को दो शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों शवों की पहचान दरहल राजौरी के मोहम्मद अथर मिर्जा और मोहरा राजौरी के उमर सोहेल के रूप में हुई है। ये शव पापोरा गांव के पास बरामद हुए। उन्होंने कहा, शवों पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं है। इसके साथ ही सिरिंज, सिगरेट, एक चम्मच और थोड़ा सा पाउडर बरामद किया गया है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। नई दिल्ली। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की। बता दें कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा।
श्रीनगर, उनतीस अगस्त । जम्मू एवं कश्मीर के शोपियां जिले के एक बगीचे से मंगलवार को दो शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों शवों की पहचान दरहल राजौरी के मोहम्मद अथर मिर्जा और मोहरा राजौरी के उमर सोहेल के रूप में हुई है। ये शव पापोरा गांव के पास बरामद हुए। उन्होंने कहा, शवों पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं है। इसके साथ ही सिरिंज, सिगरेट, एक चम्मच और थोड़ा सा पाउडर बरामद किया गया है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। नई दिल्ली। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की। बता दें कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा।
Chandigarh Police: चंडीगढ़ के अंदर क्राइम ब्रांच का सब इंस्पेक्टर बनकर लोगों से ठगी व वसूली करने के मामले का पर्दाफाश हुआ है। हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहने वाला यह आरोपी पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर लोगों से ठगी कर रहा था। इसकी जानकारी चंडीगढ़ के असली पुलिस अधिकारियों को मिल गई और आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनोद कुमार के तौर पर हुई है। मलोया पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। मलोया थाना पुलिस ने बताया कि, क्राइम ब्रांच टीम को आरोपी के बारे में जानकारी मिली थी कि सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहने एक व्यक्ति सेक्टर-38 वेस्ट में लोगों को डरा धमका कर वसूली व ठगी करने की कोशिश कर रही है। जिसके बाद सिविल ड्रेस में वहां पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम ने जब आम नागरिक बनकर आरोपी से जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो वह खुद को क्राइम ब्रांच का सब इंस्पेक्टर बता कर असली क्राइम ब्रांच की टीम को ही धमकाने लगा। इसके बाद जब पुलिस टीम ने आरोपी से उसका पहचान पत्र मांगा तो वह हेकड़ी दिखाने लगा। जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, यह शातिर ठग लोगों के पैसे ठगने के बाद शाही जिंदगी जी रहा था। यह शहर के अच्छे होटलों में ही ठहरता था और वहां से वर्दी पहनकर निकलता था। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि, वह सभी से खुद को क्राइम ब्रांच में तैनात बता कर पैसे ऐंठता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को आज कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर हासिल किया जाएगा। जिससे पता चल सके की आरोपित कब से इस तरह की ठगी कर रहा है और अब तक इसने कितने लोगों के साथ ठगी की है। बता दें कि, चंडीगढ़ में इससे पहले भी नकली पुलिस अधिकारी पकड़े गए हैं। इसी साल अप्रैल माह में एक नकली सब इंस्पेक्टर और नकली महिला कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों आरोपित भी पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों के साथ ठगी करते थे। इनसे पुलिस ने फर्जी आई कार्ड बरामद किए थे।
Chandigarh Police: चंडीगढ़ के अंदर क्राइम ब्रांच का सब इंस्पेक्टर बनकर लोगों से ठगी व वसूली करने के मामले का पर्दाफाश हुआ है। हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहने वाला यह आरोपी पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर लोगों से ठगी कर रहा था। इसकी जानकारी चंडीगढ़ के असली पुलिस अधिकारियों को मिल गई और आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनोद कुमार के तौर पर हुई है। मलोया पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। मलोया थाना पुलिस ने बताया कि, क्राइम ब्रांच टीम को आरोपी के बारे में जानकारी मिली थी कि सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहने एक व्यक्ति सेक्टर-अड़तीस वेस्ट में लोगों को डरा धमका कर वसूली व ठगी करने की कोशिश कर रही है। जिसके बाद सिविल ड्रेस में वहां पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम ने जब आम नागरिक बनकर आरोपी से जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो वह खुद को क्राइम ब्रांच का सब इंस्पेक्टर बता कर असली क्राइम ब्रांच की टीम को ही धमकाने लगा। इसके बाद जब पुलिस टीम ने आरोपी से उसका पहचान पत्र मांगा तो वह हेकड़ी दिखाने लगा। जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, यह शातिर ठग लोगों के पैसे ठगने के बाद शाही जिंदगी जी रहा था। यह शहर के अच्छे होटलों में ही ठहरता था और वहां से वर्दी पहनकर निकलता था। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि, वह सभी से खुद को क्राइम ब्रांच में तैनात बता कर पैसे ऐंठता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को आज कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर हासिल किया जाएगा। जिससे पता चल सके की आरोपित कब से इस तरह की ठगी कर रहा है और अब तक इसने कितने लोगों के साथ ठगी की है। बता दें कि, चंडीगढ़ में इससे पहले भी नकली पुलिस अधिकारी पकड़े गए हैं। इसी साल अप्रैल माह में एक नकली सब इंस्पेक्टर और नकली महिला कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों आरोपित भी पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों के साथ ठगी करते थे। इनसे पुलिस ने फर्जी आई कार्ड बरामद किए थे।
बौलीवुड में अदिति राव हैदरी का करियर कुछ खास नही चल रहा है. उनकी पिछली दो फिल्में "वजीर" और "फितूर" ने बाक्स आफिस पर पानी तक नहीं मांगा था. जबकि इन दोनों फिल्मों में बौलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने उनके साथ अभिनय किया था. इसके बावजूद वह खुशनसीब हैं कि उन्हें मणि रत्नम की नई तमिल भाषा की रोमांटिक ड्रामा फिल्म "कत्रु वेलीईडी" में अभिनय करने का मौका मिल गया है. सूत्रों के अनुसार इससे अदिति राव हैदरी काफी उत्साहित हैं. क्योंकि बौलीवुड की हर अदाकारा का सपना होता है कि उन्हें एक बार मणि रत्नम के निर्देशन में अभिनय करने का मौका मिल जाए. पर अभी तक अदित राव हैदरी बौलीवुड की तीसरी अदाकारा हैं, जिन्हें यह अवसर मिला है. अदिति राव हैदरी से पहले 'दिल से' तथा 'बाम्बे' फिल्मों में मनीषा कोईराला और 'गुरू' व 'रावण' फिल्मों में ऐश्वर्या राय बच्चन को मणि रत्नम के निर्देशन में अभिनय करने का अवसर मिला था. सूत्रों के अनुसार अपनी इस तमिल फिल्म में मणि रत्नम ने अदिति राव हैदरी को इसलिए जोड़ा है, क्योंकि उन्हें अदिति राव हैदरी के लुक में मनीषा कोईराला की झलक नजर आयी. अदिति राव हैदरी आठ जुलाई से इस तमिल फिल्म की शूटिंग कर रही है. इस फिल्म के सेट से मिली जानकारी के अनुसार यूनिट के लोगो को लगता है कि फिल्म 'दिल से' की मनीषा कोईराला की वापसी हुई है. वैसे इस तमिल फिल्म में बंगलोर की खूबसूरत अदाकारा श्रृद्धा श्रीनाथ एक कैमियो करते हुए नजर आएंगी.
बौलीवुड में अदिति राव हैदरी का करियर कुछ खास नही चल रहा है. उनकी पिछली दो फिल्में "वजीर" और "फितूर" ने बाक्स आफिस पर पानी तक नहीं मांगा था. जबकि इन दोनों फिल्मों में बौलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने उनके साथ अभिनय किया था. इसके बावजूद वह खुशनसीब हैं कि उन्हें मणि रत्नम की नई तमिल भाषा की रोमांटिक ड्रामा फिल्म "कत्रु वेलीईडी" में अभिनय करने का मौका मिल गया है. सूत्रों के अनुसार इससे अदिति राव हैदरी काफी उत्साहित हैं. क्योंकि बौलीवुड की हर अदाकारा का सपना होता है कि उन्हें एक बार मणि रत्नम के निर्देशन में अभिनय करने का मौका मिल जाए. पर अभी तक अदित राव हैदरी बौलीवुड की तीसरी अदाकारा हैं, जिन्हें यह अवसर मिला है. अदिति राव हैदरी से पहले 'दिल से' तथा 'बाम्बे' फिल्मों में मनीषा कोईराला और 'गुरू' व 'रावण' फिल्मों में ऐश्वर्या राय बच्चन को मणि रत्नम के निर्देशन में अभिनय करने का अवसर मिला था. सूत्रों के अनुसार अपनी इस तमिल फिल्म में मणि रत्नम ने अदिति राव हैदरी को इसलिए जोड़ा है, क्योंकि उन्हें अदिति राव हैदरी के लुक में मनीषा कोईराला की झलक नजर आयी. अदिति राव हैदरी आठ जुलाई से इस तमिल फिल्म की शूटिंग कर रही है. इस फिल्म के सेट से मिली जानकारी के अनुसार यूनिट के लोगो को लगता है कि फिल्म 'दिल से' की मनीषा कोईराला की वापसी हुई है. वैसे इस तमिल फिल्म में बंगलोर की खूबसूरत अदाकारा श्रृद्धा श्रीनाथ एक कैमियो करते हुए नजर आएंगी.
दवा "एम्ला", जिसमें पर विचार किया जाएगायह लेख, एक लोकप्रिय स्थानीय एनेस्थेटिक है। इसका उपयोग कॉस्मेटिक इंजेक्शन की शुरूआत में किया जाता है, टैटू लगाने के साथ-साथ त्वचा पर सतही संचालन वाले अस्पतालों में, उदाहरण के लिए जब मौसा और मोल हटाते हैं। एम्ला के मलम के बारे में विवरण (समीक्षा, उपयोग के लिए निर्देश, संकेत और contraindications, और कीमत के बारे में जानकारी) नीचे वर्णित है। 5 जी के ट्यूबों में। निर्माता एम्ला क्रीम पैदा करता है। उपयोग के लिए निर्देश प्रत्येक पैकेज में संलग्न हैं। दवा को 30 डिग्री से अधिक के तापमान पर अधिकतम 3 वर्षों तक संग्रहित किया जाना चाहिए। यह उल्लेखनीय है कि निर्देश कहता है कि ट्यूब खोलने के बाद, क्रीम के अवशेषों का उपयोग नहीं किया जा सकता है, उन्हें निपटान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दवा "एम्ला" स्थानीय के रूप में प्रयोग की जाती हैट्रॉफिक अल्सर की यांत्रिक सफाई के दौरान एनेस्थेटिक। स्त्री रोग में - दर्दनाक जोड़ों की तैयारी के रूप में जननांग अंगों के श्लेष्म झिल्ली को एनेस्थेटिज़ करना। लेकिन सबसे लोकप्रिय मलम कॉस्मेटोलॉजिस्ट में है, क्योंकि इस उपकरण के उपयोग के साथ दवाओं, दर्दनाक बालों को हटाने और अन्य प्रक्रियाओं के लगभग सभी इंजेक्शन किए जाते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उत्पाद कितना सामान्य है,"एम्ला", उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि इस दवा का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के मंडल को संकुचित किया गया है, या यह संभव है, लेकिन बहुत अच्छी देखभाल के साथ। इसलिए, दवा लागू करने के लिए निषिद्ध हैः - लिडोकेन और प्रिलोकेन के अतिसंवेदनशीलता वाले रोगी; - 1 साल से कम उम्र के बच्चे; - एटॉलिक डार्माटाइटिस से पीड़ित लोग; - गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं। इसके लिए दवा के उपयोग को भी रोकेंसमय से पहले नवजात शिशुओं के साथ-साथ दिल लय में परेशानी वाले रोगियों के लिए भी। इसके अलावा एम्ला क्रीम एनाफिलेक्टिक सदमे तक एलर्जी प्रतिक्रियाओं जैसे अवांछित साइड इफेक्ट्स का कारण बन सकती है। बहुत ही कम, दवा का उपयोग त्वचा की सूजन और सूजन की उपस्थिति को उत्तेजित करता है। किसी भी घटना में क्रीम "एम्ला" आंखों के श्लेष्म झिल्ली पर गिरना चाहिए, इस मामले में कॉर्निया को सबसे मजबूत नुकसान संभव है। आम तौर पर, एजेंट को त्वचा पर दर पर लागू किया जाता हैअभिन्न अंग के प्रति 10 वर्ग सेंटीमीटर 1-2 ग्राम। क्रीम के जननांग अंगों के श्लेष्म झिल्ली को एनेस्थेट करते समय, आपको 5-10 ग्राम की आवश्यकता होती है। इस मामले में, आवेदन की अनुशंसित समय 5-10 मिनट है, जिसके बाद उपचार कार्य शुरू होता है। बच्चों में त्वचा संज्ञाहरण के साथ, अधिकतमउपयोग की जाने वाली क्रीम की मात्रा प्रति ग्राम के 10 वर्ग सेंटीमीटर प्रति ग्राम 1 ग्राम हो सकती है, और आवेदन की अवधि केवल 1 घंटे तक हो सकती है। आंख क्षेत्र में उत्पाद का उपयोग करने के लिए यह सख्ती से प्रतिबंधित है - यह एम्ला क्रीम के लिए मुख्य contraindications में से एक है। निर्देश यह भी चेतावनी देता है कि दवा क्षतिग्रस्त त्वचा पर लागू नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा, इसका उपयोग otolaryngological अभ्यास में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि मध्य कान में मलहम होने का खतरा होता है। सैलून और क्लीनिक में निम्नलिखित मामलों में क्रीम "एम्ला" का उपयोग किया जाता हैः - त्वचा को पॉलिश करते समय, निशान को सही करने और टैटू हटाने; - मेसोथेरेपी से पहले संज्ञाहरण के लिए (त्वचा की ऊपरी परतों में विटामिन की तैयारी का परिचय); - नासोलाबियल फोल्ड, गर्दन में झुर्री और इतने पर सुधार के साथ; - "बोटॉक्स", "रेस्टाइलन" जैसी दवाओं के परिचय के साथ; - एपिलेशन के दौरान - लेजर, इलेक्ट्रो-या फोटोपीलेशन; - संवहनी तारांकन को हटाते समय। कॉस्मेटोलॉजी में क्रीम लगाने पर, 91%रोगियों को लगभग पूर्ण एनाल्जेसिक प्रभाव देखा जाता है, शेष 9% अभी भी हल्के दर्द की शिकायत करते हैं। लागू दवा की मात्रा पर कितना प्रभावी संज्ञाहरण निर्भर करेगा - इसे मोटी परत के साथ फैलाना अभी भी आवश्यक है, और कम से कम आधा घंटे इंतजार करने के बाद, और अधिमानतः एक घंटा। इसलिए, यदि आप उपर्युक्त प्रक्रियाओं में से कोई भी करने जा रहे हैं, तो एनेस्थेसिया के लिए प्रयुक्त चिकित्सक के कितने मलम का ट्रैक रखें। इसके अलावा, contraindications की अनुपस्थिति में, दवा का उपयोग स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता है। एपिलेशन से पहले निर्देश सरल है - एक उपायविशेष रूप से निर्दिष्ट संवेदनशील क्षेत्रों में त्वचा पर एक मोटी परत लागू करें, 30 मिनट से एक घंटे तक प्रतीक्षा करें और प्रक्रिया शुरू करें। इस मामले में कवर का क्षेत्र काफी बड़ा है, इसलिए आपको क्रीम के कई ट्यूबों की आवश्यकता हो सकती है। महिलाएं इस उपाय की बहुत प्रशंसा करती हैं, इसके साथ ही एपिलेशन वास्तव में दर्द रहित हो गया है। मलहम "एम्ला", जिसकी कीमत 300 से है5 ग्राम के लिए रूबल, काफी महंगा उत्पाद है। लेकिन इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि हजारों मरीजों और सौंदर्य सैलून के ग्राहकों द्वारा की जाती है, जो अब सुरक्षित रूप से इंजेक्शन और अन्य प्रक्रियाओं को पूरी तरह से दर्द रहित तरीके से कर सकते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रूस में, दवा को अक्सर 5% की एकाग्रता पर बेचा जाता है, जब पश्चिम में ऐसे धन होते हैं जिनमें सक्रिय पदार्थ लगभग दोगुनी होते हैं - 9%। इसके अलावा, निर्माता, स्वीडिश कंपनी "प्राप्तकर्ता कार्लस्कोग एबी", 30 ग्राम के ट्यूबों के साथ-साथ पैच के रूप में उत्पाद बनाती है। वैसे, "एम्ला" मलम, जिसकी कीमत रूस में हैयह ऊपर बताया गया है, विदेशों में यह लगभग 2 गुना सस्ता है - लगभग 5 ग्राम पैकेज के लिए 170 रूबल। इसलिए, यदि आप अक्सर इस उत्पाद का उपयोग करते हैं, तो इसे विदेश यात्रा या व्यापार यात्रा के दौरान या इंटरनेट पर अंग्रेजी-भाषा साइटों पर बुक करने के दौरान इसे खरीदने का अर्थ होता है। - लगभग सभी महिलाएं जो बहुत ही दर्दनाक मोम समेत डिप्लेरी क्रीम का इस्तेमाल करती थीं, एक ठोस "पांच" डालती थीं; - मलम की प्रशंसा भी करें और जो लोग घर पर भी मेसोथेरेपी करते हैं - चेहरे पर त्वचा क्रीम बहुत जल्दी काम करता है और सब कुछ दर्द के बिना भी जाता है; - अधिक जटिल कॉस्मेटिक मैनिप्लेशंस के साथ,उदाहरण के लिए, होंठ को बढ़ाने के लिए एक विशेष जेल की शुरूआत के साथ, "एम्ला" दवा भी खुद को अच्छी तरफ दिखाती है - हालांकि प्रक्रिया में कुछ दर्द मौजूद है, लेकिन इसकी तुलना किसी भी उपाय के बिना की जा सकती है। एक तरफ या दूसरा, एम्ला पर रखे गए औसत स्कोर 4 है। और इसका मतलब यह है कि दवाओं का उपयोग करने वाले लोग बहुत खुश नहीं हैं। क्रीम "Emla": उन लोगों की समीक्षा जो उत्पाद पसंद नहीं करते थे या फिट नहीं थे (ऋणात्मक) तो, यहां नकारात्मक क्षण हैं जो ग्राहक देते हैं, "Emla" दवा का विवरण देते हैंः - सबसे पहले, लगभग हर किसी ने इसका उल्लेख कियामतलब बहुत महंगा है। और एपिलेशन, मेसोथेरेपी या शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ संज्ञाहरण के लिए प्रक्रियाओं के लिए इसे बहुत से ट्यूबों की आवश्यकता होती है। - कुछ पायस पर "एम्ला" बिल्कुल काम नहीं करता है,या उसके कार्यों को पूर्ण संज्ञाहरण के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शायद, यह प्रभाव उन लोगों द्वारा प्राप्त किया जाता है जो क्रीम को गलत तरीके से लागू करते हैं। या, यह देखते हुए कि दवा बहुत लोकप्रिय है, तथ्य यह नहीं है कि खरीदार ने नकली शेल्फ जीवन के साथ नकली या ट्यूब खरीदी है। - बहुत से लोग उस क्षण के लिए इंतजार कर रहे हैं जब क्रीम काम करेगा - आखिरकार, आवेदन के बाद कभी-कभी पूरी तरह से त्वचा को एनेस्थेटेड त्वचा के लिए एक घंटे लगाना चाहिए। - यह भी ध्यान दें कि 20-30 मिनट बाद मेंएनाल्जेसिया की चोटी, क्रीम का प्रभाव "नहीं" आता है - असुविधा फिर से दिखाई देती है। शायद यह शरीर की व्यक्तिगत विशेषताओं के कारण है। वैसे भी, केवल एक बहुत छोटा हैउन लोगों का प्रतिशत जो वास्तव में उपकरण से नाखुश हैं, और यह कौन काम नहीं करता है बाकी (इसकी उच्च कीमत को शाप देना) अभी भी उपयोग के लिए दवा "एम्ला" की सिफारिश करते हैं। से बड़ी संख्या में समीक्षा माना जाता हैविशेषज्ञों, यह ध्यान दिया जा सकता है कि उनमें से कोई भी नहीं कहा कि रोगी एलर्जी या edema जैसे दवा के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया थी। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि शरीर के हिस्से पर ऐसे अभिव्यक्ति अभी भी संभव हैं। इसलिए, यदि आप जानते हैं कि आपके पास अतिसंवेदनशील त्वचा है, या पहले लिडोकेन के लिए अवांछित प्रतिक्रियाएं थीं, तो अपने डॉक्टर को सूचित करें। हमने विस्तार से सभी विवरणों की जांच कीत्वचा "एलाला" के स्थानीय संज्ञाहरण के लिए दवा का उपयोगः इसके बारे में समीक्षा - सकारात्मक और नकारात्मक, विस्तृत निर्देश, साथ ही रचना और अन्य जानकारी। हमें आशा है कि यह कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं के लिए एनेस्थेटिक चुनने में आपकी मदद करेगा और मलम का उपयोग करने के बारे में सभी संदेहों को दूर करेगा।
दवा "एम्ला", जिसमें पर विचार किया जाएगायह लेख, एक लोकप्रिय स्थानीय एनेस्थेटिक है। इसका उपयोग कॉस्मेटिक इंजेक्शन की शुरूआत में किया जाता है, टैटू लगाने के साथ-साथ त्वचा पर सतही संचालन वाले अस्पतालों में, उदाहरण के लिए जब मौसा और मोल हटाते हैं। एम्ला के मलम के बारे में विवरण नीचे वर्णित है। पाँच जी के ट्यूबों में। निर्माता एम्ला क्रीम पैदा करता है। उपयोग के लिए निर्देश प्रत्येक पैकेज में संलग्न हैं। दवा को तीस डिग्री से अधिक के तापमान पर अधिकतम तीन वर्षों तक संग्रहित किया जाना चाहिए। यह उल्लेखनीय है कि निर्देश कहता है कि ट्यूब खोलने के बाद, क्रीम के अवशेषों का उपयोग नहीं किया जा सकता है, उन्हें निपटान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दवा "एम्ला" स्थानीय के रूप में प्रयोग की जाती हैट्रॉफिक अल्सर की यांत्रिक सफाई के दौरान एनेस्थेटिक। स्त्री रोग में - दर्दनाक जोड़ों की तैयारी के रूप में जननांग अंगों के श्लेष्म झिल्ली को एनेस्थेटिज़ करना। लेकिन सबसे लोकप्रिय मलम कॉस्मेटोलॉजिस्ट में है, क्योंकि इस उपकरण के उपयोग के साथ दवाओं, दर्दनाक बालों को हटाने और अन्य प्रक्रियाओं के लगभग सभी इंजेक्शन किए जाते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उत्पाद कितना सामान्य है,"एम्ला", उपयोग के लिए निर्देश इंगित करता है कि इस दवा का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के मंडल को संकुचित किया गया है, या यह संभव है, लेकिन बहुत अच्छी देखभाल के साथ। इसलिए, दवा लागू करने के लिए निषिद्ध हैः - लिडोकेन और प्रिलोकेन के अतिसंवेदनशीलता वाले रोगी; - एक साल से कम उम्र के बच्चे; - एटॉलिक डार्माटाइटिस से पीड़ित लोग; - गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं। इसके लिए दवा के उपयोग को भी रोकेंसमय से पहले नवजात शिशुओं के साथ-साथ दिल लय में परेशानी वाले रोगियों के लिए भी। इसके अलावा एम्ला क्रीम एनाफिलेक्टिक सदमे तक एलर्जी प्रतिक्रियाओं जैसे अवांछित साइड इफेक्ट्स का कारण बन सकती है। बहुत ही कम, दवा का उपयोग त्वचा की सूजन और सूजन की उपस्थिति को उत्तेजित करता है। किसी भी घटना में क्रीम "एम्ला" आंखों के श्लेष्म झिल्ली पर गिरना चाहिए, इस मामले में कॉर्निया को सबसे मजबूत नुकसान संभव है। आम तौर पर, एजेंट को त्वचा पर दर पर लागू किया जाता हैअभिन्न अंग के प्रति दस वर्ग सेंटीमीटर एक-दो ग्राम। क्रीम के जननांग अंगों के श्लेष्म झिल्ली को एनेस्थेट करते समय, आपको पाँच-दस ग्राम की आवश्यकता होती है। इस मामले में, आवेदन की अनुशंसित समय पाँच-दस मिनट है, जिसके बाद उपचार कार्य शुरू होता है। बच्चों में त्वचा संज्ञाहरण के साथ, अधिकतमउपयोग की जाने वाली क्रीम की मात्रा प्रति ग्राम के दस वर्ग सेंटीमीटर प्रति ग्राम एक ग्राम हो सकती है, और आवेदन की अवधि केवल एक घंटाटे तक हो सकती है। आंख क्षेत्र में उत्पाद का उपयोग करने के लिए यह सख्ती से प्रतिबंधित है - यह एम्ला क्रीम के लिए मुख्य contraindications में से एक है। निर्देश यह भी चेतावनी देता है कि दवा क्षतिग्रस्त त्वचा पर लागू नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा, इसका उपयोग otolaryngological अभ्यास में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि मध्य कान में मलहम होने का खतरा होता है। सैलून और क्लीनिक में निम्नलिखित मामलों में क्रीम "एम्ला" का उपयोग किया जाता हैः - त्वचा को पॉलिश करते समय, निशान को सही करने और टैटू हटाने; - मेसोथेरेपी से पहले संज्ञाहरण के लिए ; - नासोलाबियल फोल्ड, गर्दन में झुर्री और इतने पर सुधार के साथ; - "बोटॉक्स", "रेस्टाइलन" जैसी दवाओं के परिचय के साथ; - एपिलेशन के दौरान - लेजर, इलेक्ट्रो-या फोटोपीलेशन; - संवहनी तारांकन को हटाते समय। कॉस्मेटोलॉजी में क्रीम लगाने पर, इक्यानवे%रोगियों को लगभग पूर्ण एनाल्जेसिक प्रभाव देखा जाता है, शेष नौ% अभी भी हल्के दर्द की शिकायत करते हैं। लागू दवा की मात्रा पर कितना प्रभावी संज्ञाहरण निर्भर करेगा - इसे मोटी परत के साथ फैलाना अभी भी आवश्यक है, और कम से कम आधा घंटे इंतजार करने के बाद, और अधिमानतः एक घंटा। इसलिए, यदि आप उपर्युक्त प्रक्रियाओं में से कोई भी करने जा रहे हैं, तो एनेस्थेसिया के लिए प्रयुक्त चिकित्सक के कितने मलम का ट्रैक रखें। इसके अलावा, contraindications की अनुपस्थिति में, दवा का उपयोग स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता है। एपिलेशन से पहले निर्देश सरल है - एक उपायविशेष रूप से निर्दिष्ट संवेदनशील क्षेत्रों में त्वचा पर एक मोटी परत लागू करें, तीस मिनट से एक घंटे तक प्रतीक्षा करें और प्रक्रिया शुरू करें। इस मामले में कवर का क्षेत्र काफी बड़ा है, इसलिए आपको क्रीम के कई ट्यूबों की आवश्यकता हो सकती है। महिलाएं इस उपाय की बहुत प्रशंसा करती हैं, इसके साथ ही एपिलेशन वास्तव में दर्द रहित हो गया है। मलहम "एम्ला", जिसकी कीमत तीन सौ से हैपाँच ग्राम के लिए रूबल, काफी महंगा उत्पाद है। लेकिन इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि हजारों मरीजों और सौंदर्य सैलून के ग्राहकों द्वारा की जाती है, जो अब सुरक्षित रूप से इंजेक्शन और अन्य प्रक्रियाओं को पूरी तरह से दर्द रहित तरीके से कर सकते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रूस में, दवा को अक्सर पाँच% की एकाग्रता पर बेचा जाता है, जब पश्चिम में ऐसे धन होते हैं जिनमें सक्रिय पदार्थ लगभग दोगुनी होते हैं - नौ%। इसके अलावा, निर्माता, स्वीडिश कंपनी "प्राप्तकर्ता कार्लस्कोग एबी", तीस ग्राम के ट्यूबों के साथ-साथ पैच के रूप में उत्पाद बनाती है। वैसे, "एम्ला" मलम, जिसकी कीमत रूस में हैयह ऊपर बताया गया है, विदेशों में यह लगभग दो गुना सस्ता है - लगभग पाँच ग्राम पैकेज के लिए एक सौ सत्तर रूबल। इसलिए, यदि आप अक्सर इस उत्पाद का उपयोग करते हैं, तो इसे विदेश यात्रा या व्यापार यात्रा के दौरान या इंटरनेट पर अंग्रेजी-भाषा साइटों पर बुक करने के दौरान इसे खरीदने का अर्थ होता है। - लगभग सभी महिलाएं जो बहुत ही दर्दनाक मोम समेत डिप्लेरी क्रीम का इस्तेमाल करती थीं, एक ठोस "पांच" डालती थीं; - मलम की प्रशंसा भी करें और जो लोग घर पर भी मेसोथेरेपी करते हैं - चेहरे पर त्वचा क्रीम बहुत जल्दी काम करता है और सब कुछ दर्द के बिना भी जाता है; - अधिक जटिल कॉस्मेटिक मैनिप्लेशंस के साथ,उदाहरण के लिए, होंठ को बढ़ाने के लिए एक विशेष जेल की शुरूआत के साथ, "एम्ला" दवा भी खुद को अच्छी तरफ दिखाती है - हालांकि प्रक्रिया में कुछ दर्द मौजूद है, लेकिन इसकी तुलना किसी भी उपाय के बिना की जा सकती है। एक तरफ या दूसरा, एम्ला पर रखे गए औसत स्कोर चार है। और इसका मतलब यह है कि दवाओं का उपयोग करने वाले लोग बहुत खुश नहीं हैं। क्रीम "Emla": उन लोगों की समीक्षा जो उत्पाद पसंद नहीं करते थे या फिट नहीं थे तो, यहां नकारात्मक क्षण हैं जो ग्राहक देते हैं, "Emla" दवा का विवरण देते हैंः - सबसे पहले, लगभग हर किसी ने इसका उल्लेख कियामतलब बहुत महंगा है। और एपिलेशन, मेसोथेरेपी या शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ संज्ञाहरण के लिए प्रक्रियाओं के लिए इसे बहुत से ट्यूबों की आवश्यकता होती है। - कुछ पायस पर "एम्ला" बिल्कुल काम नहीं करता है,या उसके कार्यों को पूर्ण संज्ञाहरण के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शायद, यह प्रभाव उन लोगों द्वारा प्राप्त किया जाता है जो क्रीम को गलत तरीके से लागू करते हैं। या, यह देखते हुए कि दवा बहुत लोकप्रिय है, तथ्य यह नहीं है कि खरीदार ने नकली शेल्फ जीवन के साथ नकली या ट्यूब खरीदी है। - बहुत से लोग उस क्षण के लिए इंतजार कर रहे हैं जब क्रीम काम करेगा - आखिरकार, आवेदन के बाद कभी-कभी पूरी तरह से त्वचा को एनेस्थेटेड त्वचा के लिए एक घंटे लगाना चाहिए। - यह भी ध्यान दें कि बीस-तीस मिनट बाद मेंएनाल्जेसिया की चोटी, क्रीम का प्रभाव "नहीं" आता है - असुविधा फिर से दिखाई देती है। शायद यह शरीर की व्यक्तिगत विशेषताओं के कारण है। वैसे भी, केवल एक बहुत छोटा हैउन लोगों का प्रतिशत जो वास्तव में उपकरण से नाखुश हैं, और यह कौन काम नहीं करता है बाकी अभी भी उपयोग के लिए दवा "एम्ला" की सिफारिश करते हैं। से बड़ी संख्या में समीक्षा माना जाता हैविशेषज्ञों, यह ध्यान दिया जा सकता है कि उनमें से कोई भी नहीं कहा कि रोगी एलर्जी या edema जैसे दवा के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया थी। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि शरीर के हिस्से पर ऐसे अभिव्यक्ति अभी भी संभव हैं। इसलिए, यदि आप जानते हैं कि आपके पास अतिसंवेदनशील त्वचा है, या पहले लिडोकेन के लिए अवांछित प्रतिक्रियाएं थीं, तो अपने डॉक्टर को सूचित करें। हमने विस्तार से सभी विवरणों की जांच कीत्वचा "एलाला" के स्थानीय संज्ञाहरण के लिए दवा का उपयोगः इसके बारे में समीक्षा - सकारात्मक और नकारात्मक, विस्तृत निर्देश, साथ ही रचना और अन्य जानकारी। हमें आशा है कि यह कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं के लिए एनेस्थेटिक चुनने में आपकी मदद करेगा और मलम का उपयोग करने के बारे में सभी संदेहों को दूर करेगा।
आज शुरुआती कारोबार में ही रुपया करीब 43 पैसे टूट गया. नई दिल्ली. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने यह कहकर दुनियाभर के बाजारों में तहलका मचा दिया कि महंगाई के काबू में आने तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. इसके बाद शेयर बाजार में गिरावट के साथ आज मुद्रा विनिमय बाजार में भी रुपये पर खास दबाव दिख रहा है. फॉरेक्स बाजार में सोमवार सुबह डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 24 पैसे गिरकर रिकॉर्ड 80. 11 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गई. रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 79. 87 के स्तर पर बंद हुआ था. इससे पहले रुपये का सबसे निचला स्तर 80. 06 प्रति डॉलर था, जो पिछले महीने यानी जुलाई में पहुंचा था. अगर साल 2022 की बात की जाए तो अभी तक डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में 7 फीसदी की बड़ी गिरावट आ चुकी है. ये भी पढ़ें - आईटी सेक्टर की इस कंपनी ने 1 लाख को बना दिया 9. 58 करोड़, समझिए कैसे बोनस शेयर से निवेश हजारों गुना बढ़ा? फॉरेक्स (Forex) बाजार के जानकारों का कहना है कि फेड रिजर्व के मुखिया ने इस बार लगता है कि जल्दबाजी में फैसला किया है. उन्होंने महज 8 मिनट के भाषण में सिर्फ एक बात पर जोर दिया कि महंगाई दर 2 फीसदी तक आने तक ब्याज दरें बढ़ती रहेंगी. यह कारोबार और मकान खरीदारों के लिए बुरी खबर है और इसका असर सभी सेक्टर पर दिखेगा. यही कारण है कि आज अमेरिका, यूरोप और एशिया के ज्यादातर शेयर बाजारों में गिरावट का माहौल है. ग्लोबल मार्केट में भारतीय मुद्रा ही नहीं यूरो, पाउंड जैसी मुद्राओं पर भी भारी दबाव है और इनका रेट रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया है. अमेरिकी डॉलर अभी 20 साल के हाई लेवल पर है, जबकि एशियाई मुद्राएं आज 0. 50 फीसदी तक गिरावट के साथ ट्रेडिंग कर रही हैं. चीन की मुद्रा यूआन 2 साल के निचले स्तर पर चली गई है, जबकि भारतीय रुपया 79. 70 से 80. 30 रुपये के बीच ट्रेडिंग कर रहा है. बाजार एक्सपर्ट का कहना है कि डॉलर इंडेक्स आने वाले कुछ दिनों में 109 के स्तर तक जा सकता है. हालांकि, भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहेगी और आने वाले महीनों में भी एफपीआई का निवेश जारी रहेगा. इससे निर्यातकों को भी फायदा मिलेगा, लेकिन आयात और महंगा हो सकता है. जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. एक तरफ तो ओपेक ने अपने उत्पादन में कटौती की बात कही है तो दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आ रही, जिससे क्रूड आयात करना महंगा हो जाएगा. इसका असर सीधे आयात बिल पर दिखेगा और पेट्रोल-डीजल कीमतों पर भी दबाव बढ़ जाएगा. .
आज शुरुआती कारोबार में ही रुपया करीब तैंतालीस पैसे टूट गया. नई दिल्ली. अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने यह कहकर दुनियाभर के बाजारों में तहलका मचा दिया कि महंगाई के काबू में आने तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. इसके बाद शेयर बाजार में गिरावट के साथ आज मुद्रा विनिमय बाजार में भी रुपये पर खास दबाव दिख रहा है. फॉरेक्स बाजार में सोमवार सुबह डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा चौबीस पैसे गिरकर रिकॉर्ड अस्सी. ग्यारह रुपयापये के निचले स्तर पर पहुंच गई. रुपया पिछले कारोबारी सत्र में उन्यासी. सत्तासी के स्तर पर बंद हुआ था. इससे पहले रुपये का सबसे निचला स्तर अस्सी. छः प्रति डॉलर था, जो पिछले महीने यानी जुलाई में पहुंचा था. अगर साल दो हज़ार बाईस की बात की जाए तो अभी तक डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में सात फीसदी की बड़ी गिरावट आ चुकी है. ये भी पढ़ें - आईटी सेक्टर की इस कंपनी ने एक लाख को बना दिया नौ. अट्ठावन करोड़, समझिए कैसे बोनस शेयर से निवेश हजारों गुना बढ़ा? फॉरेक्स बाजार के जानकारों का कहना है कि फेड रिजर्व के मुखिया ने इस बार लगता है कि जल्दबाजी में फैसला किया है. उन्होंने महज आठ मिनट के भाषण में सिर्फ एक बात पर जोर दिया कि महंगाई दर दो फीसदी तक आने तक ब्याज दरें बढ़ती रहेंगी. यह कारोबार और मकान खरीदारों के लिए बुरी खबर है और इसका असर सभी सेक्टर पर दिखेगा. यही कारण है कि आज अमेरिका, यूरोप और एशिया के ज्यादातर शेयर बाजारों में गिरावट का माहौल है. ग्लोबल मार्केट में भारतीय मुद्रा ही नहीं यूरो, पाउंड जैसी मुद्राओं पर भी भारी दबाव है और इनका रेट रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया है. अमेरिकी डॉलर अभी बीस साल के हाई लेवल पर है, जबकि एशियाई मुद्राएं आज शून्य. पचास फीसदी तक गिरावट के साथ ट्रेडिंग कर रही हैं. चीन की मुद्रा यूआन दो साल के निचले स्तर पर चली गई है, जबकि भारतीय रुपया उन्यासी. सत्तर से अस्सी. तीस रुपयापये के बीच ट्रेडिंग कर रहा है. बाजार एक्सपर्ट का कहना है कि डॉलर इंडेक्स आने वाले कुछ दिनों में एक सौ नौ के स्तर तक जा सकता है. हालांकि, भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहेगी और आने वाले महीनों में भी एफपीआई का निवेश जारी रहेगा. इससे निर्यातकों को भी फायदा मिलेगा, लेकिन आयात और महंगा हो सकता है. जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. एक तरफ तो ओपेक ने अपने उत्पादन में कटौती की बात कही है तो दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आ रही, जिससे क्रूड आयात करना महंगा हो जाएगा. इसका असर सीधे आयात बिल पर दिखेगा और पेट्रोल-डीजल कीमतों पर भी दबाव बढ़ जाएगा. .
कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में बेंगलुरू एफसी ने मुंबई सिटी एफसी को 2- 1 से 18 सितंबर को डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट में हराया। इस समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ला गणेशन फोटो खिंचवाने के लिए प्रतिष्ठित ट्रॉफी प्राप्त करते सुनील छेत्री को धक्का देते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। डूरंड कप में विजयी होने के बाद सुनील छेत्री ट्रॉफी लेने के लिए स्टेज पर पहुंचे थे, इस दौरान बंगाल के राज्यपाल ने ट्रॉफी पकड़ते सुनील छेत्री को फोटो खिंचवाने के लिए धक्का दे दिया। सुनील छेत्री के अपमान का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आम यूजर्स के साथ पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान में कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने भी इसे शर्मनाक बताया है। भारत के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने ट्विटर पर लिखा कि यह हर तरह से गलत है। माफ़ करिए सुनील छेत्री, आप इससे बहुत बेहतर के हकदार हैं। राजेश प्रियदर्शी नाम के एक यूजर ने इस वीडियो पर कमेंट किया, 'गरिमामयी उपस्थिति। ' भानु प्रताप नाम के ट्विटर यूजर लिखते हैं कि देश में फोटो खिंचवाने वाली राजनीति चल पड़ी है, सबको छपास की बीमारी लग गई है। पूजा त्रिपाठी नाम की एक यूजर ने लिखा - बेहूदगी की हद तक ये फ़ोटोजीवी हैं। सब अपने सुप्रीम लीडर से सीख रहे। पवन नाम के एक यूजर कमेंट करते हैं - अगर ऐसा किसी क्रिकेट कप्तान के साथ हुआ होता तो? राज्यपाल जी ने यह कप नहीं जीता, यह कप टीम और उनके कप्तान ने जीता है। शर्मनाक घटना। शैलेंद्र तिवारी नाम के ट्विटर यूजर द्वारा लिखा गया कि ऐसे माननीय को ग्राउंड के चक्कर तो जरूर लगवाने चाहिए, इनकी सेहत और मानसिक स्तर दोनों दुरुस्त रहेगी।
कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में बेंगलुरू एफसी ने मुंबई सिटी एफसी को दो- एक से अट्ठारह सितंबर को डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट में हराया। इस समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ला गणेशन फोटो खिंचवाने के लिए प्रतिष्ठित ट्रॉफी प्राप्त करते सुनील छेत्री को धक्का देते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। डूरंड कप में विजयी होने के बाद सुनील छेत्री ट्रॉफी लेने के लिए स्टेज पर पहुंचे थे, इस दौरान बंगाल के राज्यपाल ने ट्रॉफी पकड़ते सुनील छेत्री को फोटो खिंचवाने के लिए धक्का दे दिया। सुनील छेत्री के अपमान का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आम यूजर्स के साथ पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान में कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने भी इसे शर्मनाक बताया है। भारत के पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने ट्विटर पर लिखा कि यह हर तरह से गलत है। माफ़ करिए सुनील छेत्री, आप इससे बहुत बेहतर के हकदार हैं। राजेश प्रियदर्शी नाम के एक यूजर ने इस वीडियो पर कमेंट किया, 'गरिमामयी उपस्थिति। ' भानु प्रताप नाम के ट्विटर यूजर लिखते हैं कि देश में फोटो खिंचवाने वाली राजनीति चल पड़ी है, सबको छपास की बीमारी लग गई है। पूजा त्रिपाठी नाम की एक यूजर ने लिखा - बेहूदगी की हद तक ये फ़ोटोजीवी हैं। सब अपने सुप्रीम लीडर से सीख रहे। पवन नाम के एक यूजर कमेंट करते हैं - अगर ऐसा किसी क्रिकेट कप्तान के साथ हुआ होता तो? राज्यपाल जी ने यह कप नहीं जीता, यह कप टीम और उनके कप्तान ने जीता है। शर्मनाक घटना। शैलेंद्र तिवारी नाम के ट्विटर यूजर द्वारा लिखा गया कि ऐसे माननीय को ग्राउंड के चक्कर तो जरूर लगवाने चाहिए, इनकी सेहत और मानसिक स्तर दोनों दुरुस्त रहेगी।
भरमौर -उपमंडल की ग्राम पंचायत होली के मझारण गांव में बुधवार को रीछ ने हमला कर ग्रामीण को बुरी तरह से लहूलुहान कर दिया। रीछ के हमले में घायल ग्रामीण का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली में उपचार चल रहा है। जहां घायल की हालत में सुधार बताया जा रहा है। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गई है। फिलहाल वन विभाग की ओर से रीछ के हमले में ग्रामीण को कोई फौरी राहत प्रदान नहीं की गई है। होली पंचायत के मझारण गांव का पंजाबा राम बुधवार सवेरे घर से महज पांच सौ मीटर दूर खेतों में पशुओं को चरा रहा था। इस दौरान घात लगाकर बैठे रीछ ने अचानक पंजाबा राम पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि पंजाबा राम ने रीछ का डटकर मुकाबला किया और मदद के लिए आवाजें भी लगाइर्ं। पंजाबा राम के चिल्लाने की आवाज सुनकर मौके पर पहंुचे ग्रामीणों को देखकर रीछ मौके से भाग गया। ग्रामीणों ने तुरंत रीछ के हमले में घायल पंजाबा राम को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली पहंुचाया। रीछ के हमले से पंजाबा राम के सिर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में चोंटे आई हैं। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्ग होली के मेडिकल आफिसर डा. विवेक शर्मा ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घायल की हालत खतरे से बाहर है। इस बावत वन विभाग को भी सूचित कर दिया गया है। नतीजतन नियमों के तहत विभाग घायल को राहत प्रदान करेगा।
भरमौर -उपमंडल की ग्राम पंचायत होली के मझारण गांव में बुधवार को रीछ ने हमला कर ग्रामीण को बुरी तरह से लहूलुहान कर दिया। रीछ के हमले में घायल ग्रामीण का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली में उपचार चल रहा है। जहां घायल की हालत में सुधार बताया जा रहा है। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गई है। फिलहाल वन विभाग की ओर से रीछ के हमले में ग्रामीण को कोई फौरी राहत प्रदान नहीं की गई है। होली पंचायत के मझारण गांव का पंजाबा राम बुधवार सवेरे घर से महज पांच सौ मीटर दूर खेतों में पशुओं को चरा रहा था। इस दौरान घात लगाकर बैठे रीछ ने अचानक पंजाबा राम पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि पंजाबा राम ने रीछ का डटकर मुकाबला किया और मदद के लिए आवाजें भी लगाइर्ं। पंजाबा राम के चिल्लाने की आवाज सुनकर मौके पर पहंुचे ग्रामीणों को देखकर रीछ मौके से भाग गया। ग्रामीणों ने तुरंत रीछ के हमले में घायल पंजाबा राम को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली पहंुचाया। रीछ के हमले से पंजाबा राम के सिर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में चोंटे आई हैं। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्ग होली के मेडिकल आफिसर डा. विवेक शर्मा ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घायल की हालत खतरे से बाहर है। इस बावत वन विभाग को भी सूचित कर दिया गया है। नतीजतन नियमों के तहत विभाग घायल को राहत प्रदान करेगा।
गढ़वा : खबर है गढ़वा की जहां बढ़गढ़ के बुढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा जवानों ने सड़क बना कर एक नया अध्याय जोड़ा है. सीआरपीएफ ने ग्रामीणों के सहयोग से पहली बार बुढ़ा पहाड़ पर 24 घंटे में मिट्टी मोरम का सड़क बनाया है. अब बुढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों का पहुंचना आसान हो गया. बुढ़ा पहाड़ पर सड़क बनने से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने में अब आसानी होगी. पहले इसी बुढ़ा पहाड़ का नक्सलियों का राज हुआ करता था. लेकिन जब से बुढ़ा पहाड़ के एक पॉइंट को खाली कराया गया है. तब से लगातर क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं. इस बुढ़ा पहाड़ के इर्द गिर्द नक्सलियों ने लैंड माइंस बिछा रखा था जिस वजह से सुरक्षा बलों को काफ़ी परेशानी होती थी. लेकिन अब सड़क बन जाने से विकास के साथ नक्सलियों के खिलाफ अभियान भी तेज होगा. सीआरपीएफ172बटालियन के कमांडेन्ट नृपेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से बुढ़ा पहाड़ पर सड़क बनाया गया है. इससे पहले ग्रामीण पहाड़ पर चढ़ने के लिए सड़क का निर्माण कर रहे थे. हमारी नजर पड़ी तो उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हमलोगों ने भी सहयोग करते हुए चौड़ी सड़क बना दिया. अभी बुढ़ा पहाड़ पर जेसीबी और ट्रैक्टर चढ़ा है. आगे आने वाले दिनों में अन्य गाड़ियां भी चढ़ जाएगी. ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि विकास निरंतर जारी रहे.
गढ़वा : खबर है गढ़वा की जहां बढ़गढ़ के बुढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा जवानों ने सड़क बना कर एक नया अध्याय जोड़ा है. सीआरपीएफ ने ग्रामीणों के सहयोग से पहली बार बुढ़ा पहाड़ पर चौबीस घंटाटे में मिट्टी मोरम का सड़क बनाया है. अब बुढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों का पहुंचना आसान हो गया. बुढ़ा पहाड़ पर सड़क बनने से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने में अब आसानी होगी. पहले इसी बुढ़ा पहाड़ का नक्सलियों का राज हुआ करता था. लेकिन जब से बुढ़ा पहाड़ के एक पॉइंट को खाली कराया गया है. तब से लगातर क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं. इस बुढ़ा पहाड़ के इर्द गिर्द नक्सलियों ने लैंड माइंस बिछा रखा था जिस वजह से सुरक्षा बलों को काफ़ी परेशानी होती थी. लेकिन अब सड़क बन जाने से विकास के साथ नक्सलियों के खिलाफ अभियान भी तेज होगा. सीआरपीएफएक सौ बहत्तरबटालियन के कमांडेन्ट नृपेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से बुढ़ा पहाड़ पर सड़क बनाया गया है. इससे पहले ग्रामीण पहाड़ पर चढ़ने के लिए सड़क का निर्माण कर रहे थे. हमारी नजर पड़ी तो उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हमलोगों ने भी सहयोग करते हुए चौड़ी सड़क बना दिया. अभी बुढ़ा पहाड़ पर जेसीबी और ट्रैक्टर चढ़ा है. आगे आने वाले दिनों में अन्य गाड़ियां भी चढ़ जाएगी. ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि विकास निरंतर जारी रहे.
पदों का विवरण : Neyveli Lignite Corporation (NLC) ने Graduate (Engg), Degree (Non Engg) & Technician (Diploma) Apprentice, ITI Apprentice आदि के 77 पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन आमंत्रित किये हैं। योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार बीई, बीटेक, डिप्लोमा, आईटीआई आदि होनी चाहिए। आवेदन की तिथि : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों पर 30 अप्रैल 2023 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा। चयन प्रक्रिया : Neyveli Lignite Corporation (NLC) के इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जायेगा। आवेदन प्रक्रिया : आप Neyveli Lignite Corporation (NLC) के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। नौकरी करने का स्थान : बीकानेर, राजस्थान।
पदों का विवरण : Neyveli Lignite Corporation ने Graduate , Degree & Technician Apprentice, ITI Apprentice आदि के सतहत्तर पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन आमंत्रित किये हैं। योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार बीई, बीटेक, डिप्लोमा, आईटीआई आदि होनी चाहिए। आवेदन की तिथि : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों पर तीस अप्रैल दो हज़ार तेईस तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा। चयन प्रक्रिया : Neyveli Lignite Corporation के इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जायेगा। आवेदन प्रक्रिया : आप Neyveli Lignite Corporation के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। नौकरी करने का स्थान : बीकानेर, राजस्थान।
मुंबईः पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Former Mumbai Police Commissioner Param Bir Singh) की मुश्किलें बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं। मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) ने परमबीर सिंह के खिलाफ गैर-ज़मानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी करने के लिए एस्प्लेनेड कोर्ट (Court) के समक्ष एक याचिका दायर की। बताया जा रहा है कि, परबीर सिंह के खिलाफ जारी रंगदारी केस में जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में परमबीर सिंह की तलाश की जा रही है। इस समय वह कहां हैं इसका अब तक पता नहीं चल पाया है। अपराध शाखा की अर्ज़ी पर अब 29 अक्टूबर को कोर्ट सुनवाई करेगा। इससे पहले परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज उगाही के एक मामले में गुजरात (Gujarat) के 42 वर्षीय 'हवाला' संचालक को गिरफ्तार (Arrest) किया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पेश पटेल नाम के शख्स को पुलिस ने अरेस्ट किया था। पटेल की भूमिका जबरन वसूली मामले की जांच के दौरान सामने आई, जिसे कुछ महीने पहले यहां गोरेगांव पुलिस थाने में कारोबारी बिमल अग्रवाल ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज कराया था। आगे की जांच पुलिस कर रही है। मुंबई पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने और मार्च में होमगार्ड्स में तबादला किए जाने के कुछ दिनों बाद सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में दावा किया था कि, अनिल देशमुख पुलिस अधिकारियों से मुंबई में रेस्त्रां और बार मालिकों से पैसा लेने के लिए कहते थे। एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने आरोपों से इनकार किया है। इस मामले में ईडी भी देशमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रहा है।
मुंबईः पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने परमबीर सिंह के खिलाफ गैर-ज़मानती वारंट जारी करने के लिए एस्प्लेनेड कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की। बताया जा रहा है कि, परबीर सिंह के खिलाफ जारी रंगदारी केस में जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में परमबीर सिंह की तलाश की जा रही है। इस समय वह कहां हैं इसका अब तक पता नहीं चल पाया है। अपराध शाखा की अर्ज़ी पर अब उनतीस अक्टूबर को कोर्ट सुनवाई करेगा। इससे पहले परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज उगाही के एक मामले में गुजरात के बयालीस वर्षीय 'हवाला' संचालक को गिरफ्तार किया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पेश पटेल नाम के शख्स को पुलिस ने अरेस्ट किया था। पटेल की भूमिका जबरन वसूली मामले की जांच के दौरान सामने आई, जिसे कुछ महीने पहले यहां गोरेगांव पुलिस थाने में कारोबारी बिमल अग्रवाल ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज कराया था। आगे की जांच पुलिस कर रही है। मुंबई पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने और मार्च में होमगार्ड्स में तबादला किए जाने के कुछ दिनों बाद सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में दावा किया था कि, अनिल देशमुख पुलिस अधिकारियों से मुंबई में रेस्त्रां और बार मालिकों से पैसा लेने के लिए कहते थे। एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने आरोपों से इनकार किया है। इस मामले में ईडी भी देशमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रहा है।
तो मानो कुछ बदल-सा गया, शांत-सा होने लगा। अब मुझे नहीं डरा रहे थे। समा रही थीं। कुछ खास था, जो मुझे खुद से मिलवा रहा था। मैं अकेली ही चल पड़ी थी, बस नयनसुख के लिए नहीं। प्रकृति की ममता की छांव के एहसास के लिए, और चंद पल खुद से प्यार जताने के लिए, मैं चल पड़ी, थोड़ा-सा प्रेमरस का पान करने के लिए। पहुँचकर नैनी झील, लौट आया हो, और नैनीताल से मेरा कोई पुराना रिश्ता हो। बस कुछ तस्वीरें धुँधली सी थीं, अब वो ख्वाब हकीकत में बदल गए। मैं जान चुकी थी, प्रकृति से मेरा मेल निराला है, इसके अलावा मेरे प्रेम का न कोई ठिकाना है, बस प्रकृति की गोद में अब जीवन बिताना है।
तो मानो कुछ बदल-सा गया, शांत-सा होने लगा। अब मुझे नहीं डरा रहे थे। समा रही थीं। कुछ खास था, जो मुझे खुद से मिलवा रहा था। मैं अकेली ही चल पड़ी थी, बस नयनसुख के लिए नहीं। प्रकृति की ममता की छांव के एहसास के लिए, और चंद पल खुद से प्यार जताने के लिए, मैं चल पड़ी, थोड़ा-सा प्रेमरस का पान करने के लिए। पहुँचकर नैनी झील, लौट आया हो, और नैनीताल से मेरा कोई पुराना रिश्ता हो। बस कुछ तस्वीरें धुँधली सी थीं, अब वो ख्वाब हकीकत में बदल गए। मैं जान चुकी थी, प्रकृति से मेरा मेल निराला है, इसके अलावा मेरे प्रेम का न कोई ठिकाना है, बस प्रकृति की गोद में अब जीवन बिताना है।
आमतौर पर पुरुष अपने घर की औरतों के लेकर काफी संवेदनशील होते हैं। उनके प्रति प्रोटेक्टिव होने के चक्कर में वे कब पजेसिव हो जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। ध्यान रहे, अपनी पत्नी या बहन को भी उतनी ही आजादी दें, जितनी आजादी की अपेक्षा आप अपने जीवन में करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी निभाने के चक्कर में उनकी इच्छाओं को मार देना या फिर उनके प्रति बहुत ज्यादा पजेसिव हो जाना कहीं से भी आपको श्रेष्ठ नहीं बनाता। कठोर, बहादुर, जिम्मेदार, यही कुछ शब्द हैं जो हमारे समाज में 'मर्द' होने की छवि बनाते हैं। आप मर्द हैं, तो आप कमजोर नहीं हो सकते हैं, आप मर्द हैं, तो आप झुक नहीं सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर आप मर्द हैं तो बॉडी लैंग्वेज के साथ-साथ आपके बर्ताव और आपकी भाषा भी कठोर होनी चाहिए। लेकिन यह सच नहीं है। मर्द होने का मतलब कठोर होना नहीं है। परफेक्ट मैन वही है जिसकी भाषा भी सॉफ्ट हो और बॉडी लैंग्वेज भी। महिलाओं को अक्सर परिवार की खुशियों के लिए अपनी इच्छाओं की कुर्बानी देते देखा जाता है लेकिन अगर पुरुष भी इस बात को सीख लें तो किसी को भी ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने ईगो को साइड करें और अपना दिल बड़ा रखें। अगर आपके परिवार को आपकी जरूरत है, तो अपने काम को कुछ देर के लिए टालने की कोशिश करें। मर्द होने के नाते आपका काम सिर्फ पैसे कमाना नहीं है। अपनी खुशियों और अपनी जिंदगी के लिए भी समय निकालें। माना जाता है कि घर संभालना, बच्चों को संभालना यह सब महिलाओं का काम है लेकिन जब घर दोनों का है, बच्चे दोनों के हैं तो जिम्मेदारी किसी एक की क्यों हो। अगर कभी कभार आप किचन में जाकर कुछ पका देंगे या फिर पार्टनर अगर घर के दूसरे कामों में व्यस्त है तो बच्चे की देखभाल कर देंगे तो उससे आपका पुरुषत्व कम नहीं हो जाएगा। परफेक्ट मैन वही है जो ऑफिस वर्क को नहीं बल्कि हर तरह के काम को पूरी जिम्मेदारी और दिल से निभाए।
आमतौर पर पुरुष अपने घर की औरतों के लेकर काफी संवेदनशील होते हैं। उनके प्रति प्रोटेक्टिव होने के चक्कर में वे कब पजेसिव हो जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। ध्यान रहे, अपनी पत्नी या बहन को भी उतनी ही आजादी दें, जितनी आजादी की अपेक्षा आप अपने जीवन में करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी निभाने के चक्कर में उनकी इच्छाओं को मार देना या फिर उनके प्रति बहुत ज्यादा पजेसिव हो जाना कहीं से भी आपको श्रेष्ठ नहीं बनाता। कठोर, बहादुर, जिम्मेदार, यही कुछ शब्द हैं जो हमारे समाज में 'मर्द' होने की छवि बनाते हैं। आप मर्द हैं, तो आप कमजोर नहीं हो सकते हैं, आप मर्द हैं, तो आप झुक नहीं सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर आप मर्द हैं तो बॉडी लैंग्वेज के साथ-साथ आपके बर्ताव और आपकी भाषा भी कठोर होनी चाहिए। लेकिन यह सच नहीं है। मर्द होने का मतलब कठोर होना नहीं है। परफेक्ट मैन वही है जिसकी भाषा भी सॉफ्ट हो और बॉडी लैंग्वेज भी। महिलाओं को अक्सर परिवार की खुशियों के लिए अपनी इच्छाओं की कुर्बानी देते देखा जाता है लेकिन अगर पुरुष भी इस बात को सीख लें तो किसी को भी ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने ईगो को साइड करें और अपना दिल बड़ा रखें। अगर आपके परिवार को आपकी जरूरत है, तो अपने काम को कुछ देर के लिए टालने की कोशिश करें। मर्द होने के नाते आपका काम सिर्फ पैसे कमाना नहीं है। अपनी खुशियों और अपनी जिंदगी के लिए भी समय निकालें। माना जाता है कि घर संभालना, बच्चों को संभालना यह सब महिलाओं का काम है लेकिन जब घर दोनों का है, बच्चे दोनों के हैं तो जिम्मेदारी किसी एक की क्यों हो। अगर कभी कभार आप किचन में जाकर कुछ पका देंगे या फिर पार्टनर अगर घर के दूसरे कामों में व्यस्त है तो बच्चे की देखभाल कर देंगे तो उससे आपका पुरुषत्व कम नहीं हो जाएगा। परफेक्ट मैन वही है जो ऑफिस वर्क को नहीं बल्कि हर तरह के काम को पूरी जिम्मेदारी और दिल से निभाए।
अमेरिका द्वारा जारी National Security Strategy 2022 में चीन को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया है। वहीं रूस इसमें दूसरे नंबर पर है। ये दस्तावेज अमेरिका के भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों का एक संकेत हो सकता है। अमेरिका के एक सरकारी दस्तावेज ने पाकिस्तान और चीन की धड़कनों को बढ़ाने का काम किया है। हालांकि, दोनों की वजह अलग है लेकिन परेशानी दोनों के लिए ही है। दरअसल, अमेरिका ने कुछ दिन पहले US National Security Strategy 2022 रिपोर्ट को जारी किया था। इस अहम दस्तावेज में चीन को अमेरिका और विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। इस दस्तावेज ने जहां अमेरिका-चीन के रिश्तों की खाई को बढ़ाने का काम किया है वहीं उसकी चिंता भी बढ़ा दी है। इसको देखते हुए भविष्य में अमेरिका चीन को अपने लिए बड़ा खतरा मानते हुए क्या कदम उठाएगा इसकी अटकलें फिलहाल लगाना मुश्किल है। पहले से दोनों के बीच कई मुद्दों पर जबरदस्त टकराव है जिसकी वजह से कई बार दोनों आमने-सामने आ चुके हैं। अमेरिका ने चीन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। मौजूदा दस्तावेज इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधरने की काफी कम है। ऐसे में ये निश्चित है कि तनाव बढ़ेगा। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से अधिक हुआ है। चीन की बड़ी समस्या ये है कि अमेरिका उसकी वन चाइना पालिसी को मानता है लेकिन, ताइवान पर वो इस नीति को सिरे से खारिज कर देता है। इस दस्तावेज में पाकिस्तान का कहीं कोई नाम नहीं है। उसकी सबसे बड़ी समस्या और चिंता यही है। दरअसल, पिछले कुछ माह में जिस तरह से दोनों के बीच संबंधों में गरमाहट आई थी, उसको देखते हुए कहा जा रहा था कि दोनों के बीच हालात फिर सामान्य होने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान ने भी इन पर काफी बढ़चढ़कर बयान दिए थे। पाकिस्तान ने यहां तक कहा था कि वो अमेरिका का करीबी और अहम सहयोगी है। लेकिन, ताजा दस्तावेज ने इसकी पोल खोल दी है। पाकिस्तान को इस दस्तावेज में कहीं कोई सहयोगी करार नहीं दिया गया है। पाकिस्तान के लिए ये उसकी उम्मीदों पर पानी फिरने जैसा ही है। इस दस्तावेज से पाकिस्तान को लेकर जो संकेत आ रहे हैं वो कुछ वैसे ही हैं जो इस वर्ष की शुरुआत में थे। इस दस्तावेज में रूस का भी जिक्र किया गया है। रूस को इस दस्तावेज में अमेरिका और विश्व के लिए चीन के बाद दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा खतरा माना गया है। हालांकि, इस दस्तावेज से रूस पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों के बीच अलगाव या दूरी का एक लंबा इतिहास रहा है। शीत युद्ध भले ही दशकों पहले खत्म हो गया हो लेकिन, हकीकत ये है कि ये अब भी जारी है। यूक्रेन पर हमले ने इसको और बढ़ाने का काम किया है। रूस को इस दस्तावेज में दूसरे नंबर पर रखना भी इस बात का सीधा संकेत है कि अमेरिका और रूस के रिश्ते पहले जैसे ही हैं। भारत की बात करें तो इस दस्तावेज में उसको रक्षा क्षेत्र का एक प्रमुख सहयोगी माना है। इसमें कहा गया है कि विश्व में खासतौर पर दक्षिण और मध्य एशिया में जो चुनौतियां और खतरे उत्पन्न हुए हैं उनमें भारत एक अहम सहयोगी है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय से भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को एक नया आयाम मिला है। बीते कुछ समय में इसमें और उछाल आया है। डोनाल्ड ट्रंप के बाद मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इसको आगे बढ़ाया है। भारत को इस तरह से इस दस्तावेज में अहम स्थान देना भी चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता की वजह बन गया है। गौरतलब है कि अमेरिका हर वर्ष इस दस्तावेज को जारी करता है। इस दस्तावेज में अमेरिका और विश्व के सामने बड़ी चुनौतियां, खतरों और इससे निपटने के लिए भावी रणनीति के अलावा इसके लिए उसके साझेदारों का भी विस्तार से जिक्र किया जाता है। इसमें विश्व में अमेरिका के साझेदारों की भूमिका भी स्पष्ट की जाती है। इस लिहाज से ये दस्तावेज काफी अहम माना जाता है।
अमेरिका द्वारा जारी National Security Strategy दो हज़ार बाईस में चीन को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया है। वहीं रूस इसमें दूसरे नंबर पर है। ये दस्तावेज अमेरिका के भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों का एक संकेत हो सकता है। अमेरिका के एक सरकारी दस्तावेज ने पाकिस्तान और चीन की धड़कनों को बढ़ाने का काम किया है। हालांकि, दोनों की वजह अलग है लेकिन परेशानी दोनों के लिए ही है। दरअसल, अमेरिका ने कुछ दिन पहले US National Security Strategy दो हज़ार बाईस रिपोर्ट को जारी किया था। इस अहम दस्तावेज में चीन को अमेरिका और विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। इस दस्तावेज ने जहां अमेरिका-चीन के रिश्तों की खाई को बढ़ाने का काम किया है वहीं उसकी चिंता भी बढ़ा दी है। इसको देखते हुए भविष्य में अमेरिका चीन को अपने लिए बड़ा खतरा मानते हुए क्या कदम उठाएगा इसकी अटकलें फिलहाल लगाना मुश्किल है। पहले से दोनों के बीच कई मुद्दों पर जबरदस्त टकराव है जिसकी वजह से कई बार दोनों आमने-सामने आ चुके हैं। अमेरिका ने चीन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। मौजूदा दस्तावेज इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधरने की काफी कम है। ऐसे में ये निश्चित है कि तनाव बढ़ेगा। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से अधिक हुआ है। चीन की बड़ी समस्या ये है कि अमेरिका उसकी वन चाइना पालिसी को मानता है लेकिन, ताइवान पर वो इस नीति को सिरे से खारिज कर देता है। इस दस्तावेज में पाकिस्तान का कहीं कोई नाम नहीं है। उसकी सबसे बड़ी समस्या और चिंता यही है। दरअसल, पिछले कुछ माह में जिस तरह से दोनों के बीच संबंधों में गरमाहट आई थी, उसको देखते हुए कहा जा रहा था कि दोनों के बीच हालात फिर सामान्य होने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान ने भी इन पर काफी बढ़चढ़कर बयान दिए थे। पाकिस्तान ने यहां तक कहा था कि वो अमेरिका का करीबी और अहम सहयोगी है। लेकिन, ताजा दस्तावेज ने इसकी पोल खोल दी है। पाकिस्तान को इस दस्तावेज में कहीं कोई सहयोगी करार नहीं दिया गया है। पाकिस्तान के लिए ये उसकी उम्मीदों पर पानी फिरने जैसा ही है। इस दस्तावेज से पाकिस्तान को लेकर जो संकेत आ रहे हैं वो कुछ वैसे ही हैं जो इस वर्ष की शुरुआत में थे। इस दस्तावेज में रूस का भी जिक्र किया गया है। रूस को इस दस्तावेज में अमेरिका और विश्व के लिए चीन के बाद दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा खतरा माना गया है। हालांकि, इस दस्तावेज से रूस पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों के बीच अलगाव या दूरी का एक लंबा इतिहास रहा है। शीत युद्ध भले ही दशकों पहले खत्म हो गया हो लेकिन, हकीकत ये है कि ये अब भी जारी है। यूक्रेन पर हमले ने इसको और बढ़ाने का काम किया है। रूस को इस दस्तावेज में दूसरे नंबर पर रखना भी इस बात का सीधा संकेत है कि अमेरिका और रूस के रिश्ते पहले जैसे ही हैं। भारत की बात करें तो इस दस्तावेज में उसको रक्षा क्षेत्र का एक प्रमुख सहयोगी माना है। इसमें कहा गया है कि विश्व में खासतौर पर दक्षिण और मध्य एशिया में जो चुनौतियां और खतरे उत्पन्न हुए हैं उनमें भारत एक अहम सहयोगी है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय से भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को एक नया आयाम मिला है। बीते कुछ समय में इसमें और उछाल आया है। डोनाल्ड ट्रंप के बाद मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इसको आगे बढ़ाया है। भारत को इस तरह से इस दस्तावेज में अहम स्थान देना भी चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता की वजह बन गया है। गौरतलब है कि अमेरिका हर वर्ष इस दस्तावेज को जारी करता है। इस दस्तावेज में अमेरिका और विश्व के सामने बड़ी चुनौतियां, खतरों और इससे निपटने के लिए भावी रणनीति के अलावा इसके लिए उसके साझेदारों का भी विस्तार से जिक्र किया जाता है। इसमें विश्व में अमेरिका के साझेदारों की भूमिका भी स्पष्ट की जाती है। इस लिहाज से ये दस्तावेज काफी अहम माना जाता है।
इराक़ के स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी के प्रवक्ता करीम नूरी ने 29 मई 2017 को एक बयान में बल दिया कि सीरिया की सरकार से समन्वय द्वारा सीरिया के भीतर आतंकवादी गुट दाइश से संघर्ष के लिए स्वयं सेवी बल के जवान तैयार हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान इराक़ की महत्वपूर्ण समस्या, आतंकवादी गुट दाइश था और दाइश जून 2014 में इस्लामी सरकार के गठन के दावे के साथ इराक़ में प्रविष्ट हुआ और उसने सुन्नी बाहुल्य क्षेत्रों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर दिया। यह घटना इराक़ की राष्ट्रीय संप्रभुता, इस देश के विभाजन और साथ ही सीरिया के कुछ क्षेत्रों के विभाजन के ख़तरे की घंटी सिद्ध हुई। इसी के साथ इराक़ के धर्मगुरुओं ने देश को भीषण ख़तरे में देखकर एक महत्वपूर्ण फ़त्वा जारी किया। इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह सीस्तानी ने इस बात पर ध्यान देने के बजाए कि दाइश ने सुन्नी बाहुल्य क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, एकल इराक़ को ध्यान में रखते हुए स्वयं सेवी बलों के गठन का फ़त्वा जारी किया। इस फ़त्वे के अनुसार स्वयं सेवी बल या हशदुश्शाबी का गठन हुआ जिसमें एक लाख से अधिक इराक़ी नागरिक शामिल हुए। इराक़ में आतंकवादी गुट दाइश से संघर्ष, स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी थी। इराक़ की सेना और पुलिस के साथ स्वयं सेवी बलों ने रणक्षेत्र में सफल कार्यवाहियां कीं और इस प्रकार देश में आतंकवाद से संघर्ष में स्वयं सेवी बलों ने अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया और स्वयं सेवी बल, देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्था के रूप में एक क़ानूनी सेना के रूप में बदल गये। अमरीका की एक शोध संस्था की सक्रिय सदस्य रंदा मंसूर ने मार्च 2016 में प्रकाशित होने वाले अपने एक लेख में लिखा कि वर्ष 2015 में केवल 13 प्रतिशत इराक़ी सुन्नी यह मानते थे कि केन्द्र सरकार ही देश से आतंकवादी गुट दाइश को खदेड़ सकती है और दाइश के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को पुनः अपने क़ब्ज़े में ले सकती है। (ak)
इराक़ के स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी के प्रवक्ता करीम नूरी ने उनतीस मई दो हज़ार सत्रह को एक बयान में बल दिया कि सीरिया की सरकार से समन्वय द्वारा सीरिया के भीतर आतंकवादी गुट दाइश से संघर्ष के लिए स्वयं सेवी बल के जवान तैयार हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान इराक़ की महत्वपूर्ण समस्या, आतंकवादी गुट दाइश था और दाइश जून दो हज़ार चौदह में इस्लामी सरकार के गठन के दावे के साथ इराक़ में प्रविष्ट हुआ और उसने सुन्नी बाहुल्य क्षेत्रों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर दिया। यह घटना इराक़ की राष्ट्रीय संप्रभुता, इस देश के विभाजन और साथ ही सीरिया के कुछ क्षेत्रों के विभाजन के ख़तरे की घंटी सिद्ध हुई। इसी के साथ इराक़ के धर्मगुरुओं ने देश को भीषण ख़तरे में देखकर एक महत्वपूर्ण फ़त्वा जारी किया। इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह सीस्तानी ने इस बात पर ध्यान देने के बजाए कि दाइश ने सुन्नी बाहुल्य क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, एकल इराक़ को ध्यान में रखते हुए स्वयं सेवी बलों के गठन का फ़त्वा जारी किया। इस फ़त्वे के अनुसार स्वयं सेवी बल या हशदुश्शाबी का गठन हुआ जिसमें एक लाख से अधिक इराक़ी नागरिक शामिल हुए। इराक़ में आतंकवादी गुट दाइश से संघर्ष, स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी थी। इराक़ की सेना और पुलिस के साथ स्वयं सेवी बलों ने रणक्षेत्र में सफल कार्यवाहियां कीं और इस प्रकार देश में आतंकवाद से संघर्ष में स्वयं सेवी बलों ने अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया और स्वयं सेवी बल, देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्था के रूप में एक क़ानूनी सेना के रूप में बदल गये। अमरीका की एक शोध संस्था की सक्रिय सदस्य रंदा मंसूर ने मार्च दो हज़ार सोलह में प्रकाशित होने वाले अपने एक लेख में लिखा कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में केवल तेरह प्रतिशत इराक़ी सुन्नी यह मानते थे कि केन्द्र सरकार ही देश से आतंकवादी गुट दाइश को खदेड़ सकती है और दाइश के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को पुनः अपने क़ब्ज़े में ले सकती है।
हिमाचल के जिला कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुंदर सिंह ठाकुर ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी कार्यालय लेकर SDM कार्यालय तक रैली के रूप में पहुंचकर अपना नामांकन पत्र भरा है। इस दौरान सुंदर सिंह ठाकुर के समर्थक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। जिन्होंने सुंदर सिंह ठाकुर आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ है जैसे नारे लगाए। उसके बाद सुंदर ठाकुर ने SDM कार्यालय में तमाम दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। नामांकन भरने के बाद उन्होंने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने देवी-देवताओं और अपने बजुर्गों के आशीर्वाद से समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। जिसके चलते अब पूरी तरह से चुनावी कार्यक्रम शुरू हो गए हैं और जनता के बीच जाकर अपने पिछले पांच सालों में किए गए विकास कार्यों के आधार पर मतदान करने की अपील की जाएगी। गौरतलब है कि सुंदर सिंह ठाकुर वर्ष 2017 में कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। जबकि इससे पहले 2012 में भी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उस दौरान उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। लिहाजा, 2017 की जीत के बाद इस बार फिर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल के जिला कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुंदर सिंह ठाकुर ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी कार्यालय लेकर SDM कार्यालय तक रैली के रूप में पहुंचकर अपना नामांकन पत्र भरा है। इस दौरान सुंदर सिंह ठाकुर के समर्थक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। जिन्होंने सुंदर सिंह ठाकुर आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ है जैसे नारे लगाए। उसके बाद सुंदर ठाकुर ने SDM कार्यालय में तमाम दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। नामांकन भरने के बाद उन्होंने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने देवी-देवताओं और अपने बजुर्गों के आशीर्वाद से समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। जिसके चलते अब पूरी तरह से चुनावी कार्यक्रम शुरू हो गए हैं और जनता के बीच जाकर अपने पिछले पांच सालों में किए गए विकास कार्यों के आधार पर मतदान करने की अपील की जाएगी। गौरतलब है कि सुंदर सिंह ठाकुर वर्ष दो हज़ार सत्रह में कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। जबकि इससे पहले दो हज़ार बारह में भी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उस दौरान उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। लिहाजा, दो हज़ार सत्रह की जीत के बाद इस बार फिर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अतः मानद केवल साधनागत नहीं है। इस दृष्टि से यह कह दिया जा सकता है कि 'कामायनी' में आनंद के जिस स्वरूप को उद्घाटित किया गया है वह नितात रूप में अंतर्मुखी नहीं है। अंतर्मुखी होने के साथ-साथ वह बहिर्मुखी भी है। इसी रूप मे यह अखड आनंद है। दो टुकड़ों में इसे विभाजित किया जा सकता है- ऐसी मान्यता वा अव खडन् होना चाहिए । इस ग्रानद के मूल मे एक सर्वांतर आत्मा की स्पष्ट अनुभूति है। यह अनुभूति क्या है ? इसके लिए कहना होगा कि विश्व भर को परम सत्ता का व्यक्ति रूप मानना ही यह अनुभूति है। आत्मवाद की भित्ति पर खड़ा 'कामायनी' का यह प्रानदवाद निपचय ही अभेददृष्टि लाता है। इस ग्रात्मवाद का एक प्रधान सिद्धात है 'सोऽहम्' - प्रर्थात् 'मैं वही हूँ । इस स्थिति मे उपासक-उपास्य मे भेद नहीं रह जाता। उपासक अपनी अनुमति द्वारा उस शिव तत्त्व का ही प्रत्यभिज्ञान करने लगता है। इस 'सोऽहम्' के पद को प्राप्त करते हो पूर्णानंद की उपलब्धि हो जाती है। यह अद्वैतजन्य आनंद शिव को, मोक्ष को और संसार को भी मानंदपूर्ण मानता है। निरानद कही भी दृष्टिगोचर नहीं होता। हाँ, जहाँ सामरस्य का अभाव है और विषमता की प्रेरणा है वहाँ अवश्य दुःख को स्थिति मानी जा सकती है। मनु का चिंतन, जो 'कामायनी' के पूर्वार्द्ध में अधिकतर व्यक्त हुआ है, इसका उदाहरण है। इसका कारण यही है कि वहाँ सामरस्य का अभाव है, विषमता की प्रेरणा है; किंतु ऐसे स्थलो पर सिद्धांतों का प्रवर्त्तन नहीं - हुआ है। कारण, ये स्थल मनु की शुद्धावस्था का द्योतन नहीं करते । इस प्रकार 'कामायनी' के इस पूर्वपक्ष को अन्वयव्यतिरेक पद्धति से आनदवाद की सिद्धि के लिए काम में लाया गया है। इस आनंदवाद में बुद्धिवाद का विरोध किया गया है। हाँ, मात्र बुद्धि के विरोध की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। इसका मूल उपादान है श्रद्धा । इस सूत्र को सुलझाने के लिए इच्छा, ज्ञान एवं क्रिया - इन विन्दुभी पर विचार करना होगा । इन शब्दों का प्रयोग प्रसादजी ने पारिभाषिक रूप में किया है और इनकी शास्त्र सम्मत व्याख्या के साथ-साथ अपनी मौलिकता का भी प्रतिपादन किया है। यही कारण है कि इन शब्दों की व्याख्या को लेकर अनेक लोगों में भ्रम पैदा हो गया है। जब कुछ मालोचक माधुनिक ग्रंथ में इनको व्याख्या को प्रतिपादित करते हैं तो वे प्रसादजी से कितने दूर अनजाने में ही चले जाते हैं, यह देखने-समझने की बात है। आधुनिक मर्यो में प्रसादजी का मत अधिक-से-अधिक यही है कि जीवन की नाना इच्छाएं रागप्रेरित कर्म एवं विरागमूलक ज्ञान से निरंतर सलग्न रहें । इस बात को और अधिक स्पष्ट रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है कि रागमूलक कर्म एवं विरागमूलक ज्ञान - इन दो तदों के बीच में से एक-दूसरे को
अतः मानद केवल साधनागत नहीं है। इस दृष्टि से यह कह दिया जा सकता है कि 'कामायनी' में आनंद के जिस स्वरूप को उद्घाटित किया गया है वह नितात रूप में अंतर्मुखी नहीं है। अंतर्मुखी होने के साथ-साथ वह बहिर्मुखी भी है। इसी रूप मे यह अखड आनंद है। दो टुकड़ों में इसे विभाजित किया जा सकता है- ऐसी मान्यता वा अव खडन् होना चाहिए । इस ग्रानद के मूल मे एक सर्वांतर आत्मा की स्पष्ट अनुभूति है। यह अनुभूति क्या है ? इसके लिए कहना होगा कि विश्व भर को परम सत्ता का व्यक्ति रूप मानना ही यह अनुभूति है। आत्मवाद की भित्ति पर खड़ा 'कामायनी' का यह प्रानदवाद निपचय ही अभेददृष्टि लाता है। इस ग्रात्मवाद का एक प्रधान सिद्धात है 'सोऽहम्' - प्रर्थात् 'मैं वही हूँ । इस स्थिति मे उपासक-उपास्य मे भेद नहीं रह जाता। उपासक अपनी अनुमति द्वारा उस शिव तत्त्व का ही प्रत्यभिज्ञान करने लगता है। इस 'सोऽहम्' के पद को प्राप्त करते हो पूर्णानंद की उपलब्धि हो जाती है। यह अद्वैतजन्य आनंद शिव को, मोक्ष को और संसार को भी मानंदपूर्ण मानता है। निरानद कही भी दृष्टिगोचर नहीं होता। हाँ, जहाँ सामरस्य का अभाव है और विषमता की प्रेरणा है वहाँ अवश्य दुःख को स्थिति मानी जा सकती है। मनु का चिंतन, जो 'कामायनी' के पूर्वार्द्ध में अधिकतर व्यक्त हुआ है, इसका उदाहरण है। इसका कारण यही है कि वहाँ सामरस्य का अभाव है, विषमता की प्रेरणा है; किंतु ऐसे स्थलो पर सिद्धांतों का प्रवर्त्तन नहीं - हुआ है। कारण, ये स्थल मनु की शुद्धावस्था का द्योतन नहीं करते । इस प्रकार 'कामायनी' के इस पूर्वपक्ष को अन्वयव्यतिरेक पद्धति से आनदवाद की सिद्धि के लिए काम में लाया गया है। इस आनंदवाद में बुद्धिवाद का विरोध किया गया है। हाँ, मात्र बुद्धि के विरोध की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। इसका मूल उपादान है श्रद्धा । इस सूत्र को सुलझाने के लिए इच्छा, ज्ञान एवं क्रिया - इन विन्दुभी पर विचार करना होगा । इन शब्दों का प्रयोग प्रसादजी ने पारिभाषिक रूप में किया है और इनकी शास्त्र सम्मत व्याख्या के साथ-साथ अपनी मौलिकता का भी प्रतिपादन किया है। यही कारण है कि इन शब्दों की व्याख्या को लेकर अनेक लोगों में भ्रम पैदा हो गया है। जब कुछ मालोचक माधुनिक ग्रंथ में इनको व्याख्या को प्रतिपादित करते हैं तो वे प्रसादजी से कितने दूर अनजाने में ही चले जाते हैं, यह देखने-समझने की बात है। आधुनिक मर्यो में प्रसादजी का मत अधिक-से-अधिक यही है कि जीवन की नाना इच्छाएं रागप्रेरित कर्म एवं विरागमूलक ज्ञान से निरंतर सलग्न रहें । इस बात को और अधिक स्पष्ट रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है कि रागमूलक कर्म एवं विरागमूलक ज्ञान - इन दो तदों के बीच में से एक-दूसरे को
शिमला - शिमला ग्रामीण के टपरोग गांव में मेगा मेडिकल कैंप 16 दिसंबर को होगा। श्री सत्य साई सेवा समिति की मेडिकल कैंप टीम ने टपरोग गांव का दौरा कर कैंप स्थल व शिविर की तिथि 16 दिसंबर निर्धारित कर दी है। समिति की ओर से डा. विकास गुप्ता ने आठ ओपीडी वाले इस मेगा कैंप के लिए टपरोग प्राथमिक पाठशाला व आंगनबाड़ी भवन को उपयुक्त पाया। टपरोग महिला मंडल की प्रधान तनु शर्मा व युवक मंडल टपरोग के प्रधान खेमराज शर्मा ने टीम को विद्यालय परिसर का निरीक्षण करवाया। उल्लेखनीय है कि पाहल व घैणी पंचायत में इस मेगा मेडिकल कैंप को लेकर खासा उत्साह है। महिला मंडल प्रधान तनु शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में यह इस प्रकार का पहला बडा मेडिकल कैंप है, जिसमें बच्चों, महिलाओं, बजुर्गों, हृदय रोगियों के साथ साथ दांत व आंख के मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाएगा और निःशुल्क दवाइयां भी बांटी जाएंगी। टपरोग युवक मंडल के प्रधान खेमराज ने बताया कि इस शिविर के बारे में अखवार व रेडियो के माध्यम से पहले लोगों को सूचना दी गई थी, लेकिन कैंप की तिथि नहीं बताई गई थी। अब तिथि की घोषणा के बाद लोगों को शिविर के लिए अपना समय निकालने में दिक्कत नहीं होगी। डा. विकास गुप्ता ने बताया कि पंचायत में इसे टपरोग गांच में रखने से घैणी पंचायत के लोग भी इसमें भाग ले सकते हैं। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
शिमला - शिमला ग्रामीण के टपरोग गांव में मेगा मेडिकल कैंप सोलह दिसंबर को होगा। श्री सत्य साई सेवा समिति की मेडिकल कैंप टीम ने टपरोग गांव का दौरा कर कैंप स्थल व शिविर की तिथि सोलह दिसंबर निर्धारित कर दी है। समिति की ओर से डा. विकास गुप्ता ने आठ ओपीडी वाले इस मेगा कैंप के लिए टपरोग प्राथमिक पाठशाला व आंगनबाड़ी भवन को उपयुक्त पाया। टपरोग महिला मंडल की प्रधान तनु शर्मा व युवक मंडल टपरोग के प्रधान खेमराज शर्मा ने टीम को विद्यालय परिसर का निरीक्षण करवाया। उल्लेखनीय है कि पाहल व घैणी पंचायत में इस मेगा मेडिकल कैंप को लेकर खासा उत्साह है। महिला मंडल प्रधान तनु शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में यह इस प्रकार का पहला बडा मेडिकल कैंप है, जिसमें बच्चों, महिलाओं, बजुर्गों, हृदय रोगियों के साथ साथ दांत व आंख के मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाएगा और निःशुल्क दवाइयां भी बांटी जाएंगी। टपरोग युवक मंडल के प्रधान खेमराज ने बताया कि इस शिविर के बारे में अखवार व रेडियो के माध्यम से पहले लोगों को सूचना दी गई थी, लेकिन कैंप की तिथि नहीं बताई गई थी। अब तिथि की घोषणा के बाद लोगों को शिविर के लिए अपना समय निकालने में दिक्कत नहीं होगी। डा. विकास गुप्ता ने बताया कि पंचायत में इसे टपरोग गांच में रखने से घैणी पंचायत के लोग भी इसमें भाग ले सकते हैं। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
Huawei Pocket S हैंडसेट चीन में लांच कर दिया गया है। यह हैंडसेट HarmonyOS 3 पर चलता है और इसमें 6. 9-इंच (2,790 x 1,188 पिक्सल) फोल्डेबल OLED पैनल 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ दिया गया है। Huawei Pocket S Price And Specifications: चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Huawei ने अपने फोल्डेबल स्मार्टफोन Huawei Pocket S का अनावरण बीते दिन चीन में कर दिया है। स्मार्टफोन में एक लचीला ग्रेफाइट हीट डिस्पेन्सन सिस्टम है और 40W फास्ट चार्जिंग के लिए समर्थन के साथ 4,000mAh की बैटरी पैक करता है। हैंडसेट 6. 9 इंच के फोल्डेबल OLED डिस्प्ले के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। स्मार्टफोन स्नैपड्रैगन 778G SoC द्वारा संचालित है और बॉक्स से बाहर Harmony OS 3 पर चलता है। चीनी कंपनी के पॉकेट एस में एक डुअल रियर कैमरा सेटअप भी है जो 40-मेगापिक्सल के मुख्य सेंसर द्वारा हेडलाइन किया गया है। बता दें हुवावे पॉकेट एस फ्रॉस्ट सिल्वर, आइस क्रिस्टल ब्लू, मिंट ग्रीन, ओब्सीडियन ब्लैक, प्रिमरोज़ गोल्ड और सकुरा पिंक कलर वेरिएंट में आता है। Huawei Pocket S हैंडसेट को कम्पनी ने आकर्षक डिज़ाइन और शानदार फीचर्स के साथ लांच किया है। स्मार्टफोन स्नैपड्रैगन 778G SoC द्वारा संचालित है और बॉक्स से बाहर Harmony OS 3 पर चलता है। इस प्रोसेसर के साथ आप हैंडसेट पर बड़े आराम से मल्टीटास्किंग कर सकते हैं। Huawei Pocket S में 6. 9 इंच का फोल्डेबल OLED डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 2,790 x 1,188 पिक्सल के रेजोल्यूशन के साथ है। यह डिस्प्ले फिल्म देखने तथा गेम खेलने के दौरान आपको एक बेहतर कलर कॉन्बिनेशन वाला स्मूद और इमर्सिव ग्राफिक एक्सपीरियंस प्रदान करता है। इसमें 340 x 340 पिक्सल रेजोल्यूशन वाला बाहरी 1. 04-इंच OLED पैनल भी है जो नोटिफिकेशन, समय और अन्य विवरण दिखाता है। हैंडसेट एक स्नैपड्रैगन 778G प्रोसेसर द्वारा संचालित है और बॉक्स के बाहर हार्मनी ओएस 3 पर चलता है। सेल्फी के लिए, स्मार्टफोन 10. 7-मेगापिक्सल के फ्रंट कैमरा सेंसर के साथ आता है। वहीं, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के लिए Huawei Pocket S में डुअल रियर कैमरा सेटअप है जिसमें 40-मेगापिक्सल का मुख्य सेंसर और 13-मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल लेंस है। स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी है जो 40W चार्जिंग को सपोर्ट करती है। Huawei Pocket S हैंडसेट की कीमत 8GB रैम + 128GB स्टोरेज वेरिएंट के लिए लगभग 67,900 रुपये रखी गई है, जबकि 8GB की कीमत RAM + 256GB स्टोरेज वैरिएंट लगभग 73,600 रुपये के प्राइस टैग के साथ आता है। पॉकेट एस का 8GB रैम + 512GB स्टोरेज वैरिएंट भी है, जिसकी कीमत लगभग 84,900 रुपये है। Huawei Pocket S के प्री-ऑर्डर पहले ही शुरू हो चुके हैं और फोन 10 नवंबर से बिक्री पर जाएगा। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है हैंडसेट फ्रॉस्ट सिल्वर, आइस क्रिस्टल ब्लू, मिंट ग्रीन, ओब्सीडियन ब्लैक, प्रिमरोज़ गोल्ड और सकुरा पिंक कलर वेरिएंट में आता है।
Huawei Pocket S हैंडसेट चीन में लांच कर दिया गया है। यह हैंडसेट HarmonyOS तीन पर चलता है और इसमें छः. नौ-इंच फोल्डेबल OLED पैनल एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ दिया गया है। Huawei Pocket S Price And Specifications: चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Huawei ने अपने फोल्डेबल स्मार्टफोन Huawei Pocket S का अनावरण बीते दिन चीन में कर दिया है। स्मार्टफोन में एक लचीला ग्रेफाइट हीट डिस्पेन्सन सिस्टम है और चालीस वाट फास्ट चार्जिंग के लिए समर्थन के साथ चार,शून्यmAh की बैटरी पैक करता है। हैंडसेट छः. नौ इंच के फोल्डेबल OLED डिस्प्ले के साथ एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ आता है। स्मार्टफोन स्नैपड्रैगन सात सौ अठहत्तरG SoC द्वारा संचालित है और बॉक्स से बाहर Harmony OS तीन पर चलता है। चीनी कंपनी के पॉकेट एस में एक डुअल रियर कैमरा सेटअप भी है जो चालीस-मेगापिक्सल के मुख्य सेंसर द्वारा हेडलाइन किया गया है। बता दें हुवावे पॉकेट एस फ्रॉस्ट सिल्वर, आइस क्रिस्टल ब्लू, मिंट ग्रीन, ओब्सीडियन ब्लैक, प्रिमरोज़ गोल्ड और सकुरा पिंक कलर वेरिएंट में आता है। Huawei Pocket S हैंडसेट को कम्पनी ने आकर्षक डिज़ाइन और शानदार फीचर्स के साथ लांच किया है। स्मार्टफोन स्नैपड्रैगन सात सौ अठहत्तरG SoC द्वारा संचालित है और बॉक्स से बाहर Harmony OS तीन पर चलता है। इस प्रोसेसर के साथ आप हैंडसेट पर बड़े आराम से मल्टीटास्किंग कर सकते हैं। Huawei Pocket S में छः. नौ इंच का फोल्डेबल OLED डिस्प्ले एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट और दो,सात सौ नब्बे x एक,एक सौ अठासी पिक्सल के रेजोल्यूशन के साथ है। यह डिस्प्ले फिल्म देखने तथा गेम खेलने के दौरान आपको एक बेहतर कलर कॉन्बिनेशन वाला स्मूद और इमर्सिव ग्राफिक एक्सपीरियंस प्रदान करता है। इसमें तीन सौ चालीस x तीन सौ चालीस पिक्सल रेजोल्यूशन वाला बाहरी एक. चार-इंच OLED पैनल भी है जो नोटिफिकेशन, समय और अन्य विवरण दिखाता है। हैंडसेट एक स्नैपड्रैगन सात सौ अठहत्तरG प्रोसेसर द्वारा संचालित है और बॉक्स के बाहर हार्मनी ओएस तीन पर चलता है। सेल्फी के लिए, स्मार्टफोन दस. सात-मेगापिक्सल के फ्रंट कैमरा सेंसर के साथ आता है। वहीं, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के लिए Huawei Pocket S में डुअल रियर कैमरा सेटअप है जिसमें चालीस-मेगापिक्सल का मुख्य सेंसर और तेरह-मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल लेंस है। स्मार्टफोन में चार,शून्यmAh की बैटरी है जो चालीस वाट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। Huawei Pocket S हैंडसेट की कीमत आठGB रैम + एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट के लिए लगभग सरसठ,नौ सौ रुपयापये रखी गई है, जबकि आठGB की कीमत RAM + दो सौ छप्पनGB स्टोरेज वैरिएंट लगभग तिहत्तर,छः सौ रुपयापये के प्राइस टैग के साथ आता है। पॉकेट एस का आठGB रैम + पाँच सौ बारहGB स्टोरेज वैरिएंट भी है, जिसकी कीमत लगभग चौरासी,नौ सौ रुपयापये है। Huawei Pocket S के प्री-ऑर्डर पहले ही शुरू हो चुके हैं और फोन दस नवंबर से बिक्री पर जाएगा। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है हैंडसेट फ्रॉस्ट सिल्वर, आइस क्रिस्टल ब्लू, मिंट ग्रीन, ओब्सीडियन ब्लैक, प्रिमरोज़ गोल्ड और सकुरा पिंक कलर वेरिएंट में आता है।
संबंधबोधक अव्यय, या संस्कृत के कर्मप्रवचनीय, अधच उपसर्गों या अन्य नामशब्दों का आधार लेकर आने लगे। परसर्गों के प्रयोग और शुद्ध प्रातिपदिक रूपों के प्रचलन के कारण नव्य भाषाओ की वाक्यरचना एक निश्चित पद्धति को अपनाने के लिये वाव्य की गई, उसमें संस्कृत की सी वाक्यरचनात्मक स्वतंत्रता नहीं रह सकी" । संक्षेप में, पुरानी हिंदी की गतिविधि की यही कहानी है। मध्यकालीन भारतीय चार्य भाषा ६२४. वैदिक संस्कृत या छान्दस् भाषा का जो रूप हमे ऋग्वेद संहिता तथा अथर्ववेद संहिता में और बाद के ब्राह्मग ग्रन्थों में मिलता है, उससे स्पष्ट है कि वैदिक भाषा स्वयं कतिपय विभाषाओं में विभक्त रही होगी। कुछ विद्वानों को मान्यता तो यहाँ तक है कि ऋऋग्वेद की भाषा में प्रचलित जन-भाषा का नैसर्गिक रूप न मिलकर पुरोहित वर्ग की साधु भाषा का रूप ही मिलता है । अथर्ववेद को भाषा पर अवश्य जन-भाषा की छाप मालूम पड़ती है। परवर्ती वैदिक चाल में ही जन भाषा अनार्य भाषाओं-मुण्डा तथा द्राविड भाषाओं-से प्रभावित हुई तथा प्राकृत भाषाओं को विशेषताएँ यास्क से कुछ पहले ही जन-भाषा में शुरू हो गई होंगी । प्राकृतों का स्पष्ट नामकरण यद्यपि वररुचि के 'प्राकृतप्रकाश' से पुराना नहीं है, किन्तु वररुचि के समय तक मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषायें पूर्णतः प्रौढ हो चुकी थीं, यहाँ तक कि उनमे से कुछ में साहित्यिक रचनायें भी होने लगी थीं। 'प्राकृतप्रकाश' मे शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी तथा पैशाची इन चार ही प्राकृतों का जिक्र मिलता है। बाद के वैयाकरणों ने पड़भाषा वर्ग में अर्धमागधी तथा अपभ्रंश को भी शामिल किया और शारी, आवन्ती, चाण्डाली, श्राभोरी जैसो विभाषाओं को भी तालिका दी, लेकिन उस समय की समस्त वैभाषिक प्रवृत्तियों का आलेमन हमे उपलब्ध नहीं । निःसंदेह वैयाकरणों के द्वारा परिगणित प्राकृतों के अतिरिक्त अनेक मध्यवर्ती प्राइवें भी रही होंगी, जो साहित्यिक स्तर तक न उठ पाई हो । कहना न होगा, जब अर्धमागधी १. डा० भोलार व्यास : दिदर्दी साहित्य का वृहत् इतिहास । (द्वितीय) - साहित्यिक आधार तथा परपण, पृ० ३६४६५ । २. डा० प्रबोध बेचरदास पंडितः प्राकृत भाषा पृ० १३ । तथा पालि क्रमश जैन एवं बौद्ध धर्म के द्वारा धार्मिक साहित्य की भाषा के रूप में अपनाई गई, तो वे किसी खास प्रदेश की जनभाषा अवश्य रही होंगी, किंतु धीरे धीरे उनमें परिनिष्ठितता बढ़ती गई। 'पालि' जो वस्तुत मध्यदेश की भाषा या पुरानो शौरसेनी को नींव पर बनी थी, अनेक वैभाषिक तत्त्वो की छौंक डाल कर 'खिचड़ी भाषा बन बैठी और आज भी कुछ लोग 'पालि' को मागची का हो विकास मानने को भ्रात धारणा से आकांत दिसाई पड़ते हैं। श्री नरूला ने ठोक हो कहा है : - "इस प्रकार प्राकृत भाषाएँ जो अपने आदिकाल में, जब वे बौद्ध और जैन धर्मों के साथ अस्तित्व में आई आम बोलचाल की भाषाएँ न होने पर भी उसके बहुत सन्निकट थी । किंतु नैक्ट्य क्रमश कम होता गया और वे जन-भाषाओं से दूर हटतछूटतीं धीरे धीरे प्रामाणिक संस्कृत सो कृत्रिम बन गई । "" वस्तुतः संस्कृत ने साहित्यिक मातों को भी परिनिष्ठिता के साँचे मे जकड दिया था, वे शिष्ट भाषाये बन गई थीं। जैसा कि डा० पंडित ने लिसा है :- "इससे अनुमान तो यही होता है कि भारत के साहित्यिक प्राकृत प्रधानतया रूढिचुस्त ( Conventional ) थे, वैयाकरणों के विधि विधान से हो लिसे जाते थे, और संस्कृत को आदर्श रसकर केवल शिष्टस्वरूप में लिखे जाते थे, किंतु संस्कृत के प्रभाव से दूर जो प्राकृत लिसे गये वे अधिक विकासशील थे । "" हाल की गाथाओं प्रवरसेन के सेतुबंध, वाक्पतिराज के गडउनहो, राजशेखर की कर्पूरमंजरी या अन्यान्य परवर्ती नाटकों की प्रातें बोलचाल को भाषा का संकेत नहीं करतीं, वे पहितों की शिष्ट प्राकृतें ही है, इसमें हर्गिज़ संदेह नहीं । २५. अपभ्रंश कीर-हुला प्रवृत्ति ही नहीं, उसकी साहित्यिक छन्दःपरम्परा का भी सर्वप्रथम दर्शन कालिदास के 'विक्रमोर्वशीय' के चतुर्थ अंक के कतिपय पद्यों में होता है। भाषाशास्त्रीय इतिहास मे उत्तर मध्यरालीन भारतीय आर्य भाषा ( Later Middlo IndcAryen ) की शुरूआत हमें कालिदाम से हो माननी होगी, वैसे मोटे तौर पर यह युग ईमाको छडी सदा से माना जाता है । कालिदास १. शमशेरविंद नन्नाः हिंदी और प्रादेशिक भाषा वैज्ञनिक इतिज्ञम भाषा पृ० २४.
संबंधबोधक अव्यय, या संस्कृत के कर्मप्रवचनीय, अधच उपसर्गों या अन्य नामशब्दों का आधार लेकर आने लगे। परसर्गों के प्रयोग और शुद्ध प्रातिपदिक रूपों के प्रचलन के कारण नव्य भाषाओ की वाक्यरचना एक निश्चित पद्धति को अपनाने के लिये वाव्य की गई, उसमें संस्कृत की सी वाक्यरचनात्मक स्वतंत्रता नहीं रह सकी" । संक्षेप में, पुरानी हिंदी की गतिविधि की यही कहानी है। मध्यकालीन भारतीय चार्य भाषा छः सौ चौबीस. वैदिक संस्कृत या छान्दस् भाषा का जो रूप हमे ऋग्वेद संहिता तथा अथर्ववेद संहिता में और बाद के ब्राह्मग ग्रन्थों में मिलता है, उससे स्पष्ट है कि वैदिक भाषा स्वयं कतिपय विभाषाओं में विभक्त रही होगी। कुछ विद्वानों को मान्यता तो यहाँ तक है कि ऋऋग्वेद की भाषा में प्रचलित जन-भाषा का नैसर्गिक रूप न मिलकर पुरोहित वर्ग की साधु भाषा का रूप ही मिलता है । अथर्ववेद को भाषा पर अवश्य जन-भाषा की छाप मालूम पड़ती है। परवर्ती वैदिक चाल में ही जन भाषा अनार्य भाषाओं-मुण्डा तथा द्राविड भाषाओं-से प्रभावित हुई तथा प्राकृत भाषाओं को विशेषताएँ यास्क से कुछ पहले ही जन-भाषा में शुरू हो गई होंगी । प्राकृतों का स्पष्ट नामकरण यद्यपि वररुचि के 'प्राकृतप्रकाश' से पुराना नहीं है, किन्तु वररुचि के समय तक मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषायें पूर्णतः प्रौढ हो चुकी थीं, यहाँ तक कि उनमे से कुछ में साहित्यिक रचनायें भी होने लगी थीं। 'प्राकृतप्रकाश' मे शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी तथा पैशाची इन चार ही प्राकृतों का जिक्र मिलता है। बाद के वैयाकरणों ने पड़भाषा वर्ग में अर्धमागधी तथा अपभ्रंश को भी शामिल किया और शारी, आवन्ती, चाण्डाली, श्राभोरी जैसो विभाषाओं को भी तालिका दी, लेकिन उस समय की समस्त वैभाषिक प्रवृत्तियों का आलेमन हमे उपलब्ध नहीं । निःसंदेह वैयाकरणों के द्वारा परिगणित प्राकृतों के अतिरिक्त अनेक मध्यवर्ती प्राइवें भी रही होंगी, जो साहित्यिक स्तर तक न उठ पाई हो । कहना न होगा, जब अर्धमागधी एक. डाशून्य भोलार व्यास : दिदर्दी साहित्य का वृहत् इतिहास । - साहित्यिक आधार तथा परपण, पृशून्य छत्तीस हज़ार चार सौ पैंसठ । दो. डाशून्य प्रबोध बेचरदास पंडितः प्राकृत भाषा पृशून्य तेरह । तथा पालि क्रमश जैन एवं बौद्ध धर्म के द्वारा धार्मिक साहित्य की भाषा के रूप में अपनाई गई, तो वे किसी खास प्रदेश की जनभाषा अवश्य रही होंगी, किंतु धीरे धीरे उनमें परिनिष्ठितता बढ़ती गई। 'पालि' जो वस्तुत मध्यदेश की भाषा या पुरानो शौरसेनी को नींव पर बनी थी, अनेक वैभाषिक तत्त्वो की छौंक डाल कर 'खिचड़ी भाषा बन बैठी और आज भी कुछ लोग 'पालि' को मागची का हो विकास मानने को भ्रात धारणा से आकांत दिसाई पड़ते हैं। श्री नरूला ने ठोक हो कहा है : - "इस प्रकार प्राकृत भाषाएँ जो अपने आदिकाल में, जब वे बौद्ध और जैन धर्मों के साथ अस्तित्व में आई आम बोलचाल की भाषाएँ न होने पर भी उसके बहुत सन्निकट थी । किंतु नैक्ट्य क्रमश कम होता गया और वे जन-भाषाओं से दूर हटतछूटतीं धीरे धीरे प्रामाणिक संस्कृत सो कृत्रिम बन गई । "" वस्तुतः संस्कृत ने साहित्यिक मातों को भी परिनिष्ठिता के साँचे मे जकड दिया था, वे शिष्ट भाषाये बन गई थीं। जैसा कि डाशून्य पंडित ने लिसा है :- "इससे अनुमान तो यही होता है कि भारत के साहित्यिक प्राकृत प्रधानतया रूढिचुस्त थे, वैयाकरणों के विधि विधान से हो लिसे जाते थे, और संस्कृत को आदर्श रसकर केवल शिष्टस्वरूप में लिखे जाते थे, किंतु संस्कृत के प्रभाव से दूर जो प्राकृत लिसे गये वे अधिक विकासशील थे । "" हाल की गाथाओं प्रवरसेन के सेतुबंध, वाक्पतिराज के गडउनहो, राजशेखर की कर्पूरमंजरी या अन्यान्य परवर्ती नाटकों की प्रातें बोलचाल को भाषा का संकेत नहीं करतीं, वे पहितों की शिष्ट प्राकृतें ही है, इसमें हर्गिज़ संदेह नहीं । पच्चीस. अपभ्रंश कीर-हुला प्रवृत्ति ही नहीं, उसकी साहित्यिक छन्दःपरम्परा का भी सर्वप्रथम दर्शन कालिदास के 'विक्रमोर्वशीय' के चतुर्थ अंक के कतिपय पद्यों में होता है। भाषाशास्त्रीय इतिहास मे उत्तर मध्यरालीन भारतीय आर्य भाषा की शुरूआत हमें कालिदाम से हो माननी होगी, वैसे मोटे तौर पर यह युग ईमाको छडी सदा से माना जाता है । कालिदास एक. शमशेरविंद नन्नाः हिंदी और प्रादेशिक भाषा वैज्ञनिक इतिज्ञम भाषा पृशून्य चौबीस.
भुवनेश्वर, आनलाइन डेस्क। 'हौसलो से मिलता है सफलता का मुकाम, आसान नहीं है इस दुनिया में नाम कमाना', यह लाइन ओडिशा (Odisha) के गंजम जिले (Ganjam District) के रहने वाले 31 वर्षीय सी एच नागेशु पात्रो (CH Nageshu Patro) पर सटीक बैठती है। पात्रो दिन में एक निजी कालेज में गेस्ट लेक्चरर का काम करते हैं, तो वहीं रात में रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए नजर आते हैं। इतना ही नहीं, पात्रो इन सबके बीच गरीब छात्रों को पढ़ाने के लिए समय भी निकालते हैं। उनका खुद का कोचिंग सेंटर है। पोस्टग्रेजुएट पत्रो 2011 से कुली के रूप में रजिस्टर्ड हैं। उनकी जिंदगी कोविड महामारी के बाद पूरी तरह से बदल गई। वे बताते हैं, 'अधिकतर ट्रेनें कोविड महामारी के दौरान चलनी बंद हो गई, जिससे मेरे सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया। इस दौरान खाली बैठने की अपेक्षा मैने दसवीं के छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया। पात्रो बाद में आठवीं से बारहवीं कक्षा के बच्चों के लिए एक कोचिंग सेंटर खोला, जहां ज्यादातर गरीब बच्चे आते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं एक कुली के रूप में जो भी कमाता हूं, वह ज्यादातर कोचिंग सेंटर में चार शिक्षकों भुगतान करने पर खर्च होता है। ' पात्रो कोचिंग सेंटर में हिंदी और उड़िया पढ़ाते हैं। अन्य विषय को पढ़ाने के लिए उन्होंने शिक्षकों को नियुक्त किया है। वह एक कुली के रूप में काम करके हर महीने 10 हजार रुपये से 12 हजार रुपये तक कमाते हैं। पात्रो अपने शिक्षकों को दो हजार हजार से तीन हजार रुपये के बीच भुगतान करते हैं। पात्रो कालेज से भी प्रति माह लगभग 8 हजार रुपये कमाते हैं। अतिथि व्याख्याता यानी गेस्ट लेक्चरर के रूप में प्रत्येक कक्षा के लिए उन्हें 200 रुपये मिलते हैं। एक सप्ताह में वह अधिकतम सात कक्षाएं ले सकते हैं। ये भी पढ़ेंः
भुवनेश्वर, आनलाइन डेस्क। 'हौसलो से मिलता है सफलता का मुकाम, आसान नहीं है इस दुनिया में नाम कमाना', यह लाइन ओडिशा के गंजम जिले के रहने वाले इकतीस वर्षीय सी एच नागेशु पात्रो पर सटीक बैठती है। पात्रो दिन में एक निजी कालेज में गेस्ट लेक्चरर का काम करते हैं, तो वहीं रात में रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए नजर आते हैं। इतना ही नहीं, पात्रो इन सबके बीच गरीब छात्रों को पढ़ाने के लिए समय भी निकालते हैं। उनका खुद का कोचिंग सेंटर है। पोस्टग्रेजुएट पत्रो दो हज़ार ग्यारह से कुली के रूप में रजिस्टर्ड हैं। उनकी जिंदगी कोविड महामारी के बाद पूरी तरह से बदल गई। वे बताते हैं, 'अधिकतर ट्रेनें कोविड महामारी के दौरान चलनी बंद हो गई, जिससे मेरे सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया। इस दौरान खाली बैठने की अपेक्षा मैने दसवीं के छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया। पात्रो बाद में आठवीं से बारहवीं कक्षा के बच्चों के लिए एक कोचिंग सेंटर खोला, जहां ज्यादातर गरीब बच्चे आते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं एक कुली के रूप में जो भी कमाता हूं, वह ज्यादातर कोचिंग सेंटर में चार शिक्षकों भुगतान करने पर खर्च होता है। ' पात्रो कोचिंग सेंटर में हिंदी और उड़िया पढ़ाते हैं। अन्य विषय को पढ़ाने के लिए उन्होंने शिक्षकों को नियुक्त किया है। वह एक कुली के रूप में काम करके हर महीने दस हजार रुपये से बारह हजार रुपये तक कमाते हैं। पात्रो अपने शिक्षकों को दो हजार हजार से तीन हजार रुपये के बीच भुगतान करते हैं। पात्रो कालेज से भी प्रति माह लगभग आठ हजार रुपये कमाते हैं। अतिथि व्याख्याता यानी गेस्ट लेक्चरर के रूप में प्रत्येक कक्षा के लिए उन्हें दो सौ रुपयापये मिलते हैं। एक सप्ताह में वह अधिकतम सात कक्षाएं ले सकते हैं। ये भी पढ़ेंः
वाराणसी। सोनभद्र जा रही बस में बैटरी हीटिंग और शार्ट सर्किट से आग लग गयी। फायर की दो गाडिय़ों ने एक घंटे में आग पर काबू पाया। किसी तरह यात्रियों ने अपनी जान बचाई। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जनरथ बस कैंट रोडवेज से सोनभद्र जा रही थी। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लग गयी। सूचना के बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बस और उसमें रखे यात्रियों के कई समान पूरी तरह से जल गए। यात्रियों का आरोप है कि आग लगने के बावजूद उनको सूचना नहीं दी गई जब आग तीव्र गति से लपट के साथ बस को चपेट में ले लिया। चालक व परिचालक ने यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए बस से उतर जाने को कहा। यात्री जान बचाकर सामानों को छोड़कर बस से नीचे उतर आए इतने में आग ने पूरे बस को चपेट में ले लिया और यात्रियों के लाखों का सामान जलकर राख हो गया। महिला यात्रियों ने कहा कि उनके गहने जल गए। कैंट से सोनभद्र जा रही बस में 40 यात्री सवार थे।
वाराणसी। सोनभद्र जा रही बस में बैटरी हीटिंग और शार्ट सर्किट से आग लग गयी। फायर की दो गाडिय़ों ने एक घंटे में आग पर काबू पाया। किसी तरह यात्रियों ने अपनी जान बचाई। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जनरथ बस कैंट रोडवेज से सोनभद्र जा रही थी। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लग गयी। सूचना के बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बस और उसमें रखे यात्रियों के कई समान पूरी तरह से जल गए। यात्रियों का आरोप है कि आग लगने के बावजूद उनको सूचना नहीं दी गई जब आग तीव्र गति से लपट के साथ बस को चपेट में ले लिया। चालक व परिचालक ने यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए बस से उतर जाने को कहा। यात्री जान बचाकर सामानों को छोड़कर बस से नीचे उतर आए इतने में आग ने पूरे बस को चपेट में ले लिया और यात्रियों के लाखों का सामान जलकर राख हो गया। महिला यात्रियों ने कहा कि उनके गहने जल गए। कैंट से सोनभद्र जा रही बस में चालीस यात्री सवार थे।
'अरे, यह तो मेरे बारे में ही बात कर रही है और वह भी तारीफ... क्या बात है.... तरु तुम तो छा गए,' बड़बड़ा कर वह सीधा हो कर पीछे हो लिया. 'खड़ूस माना नहीं... आलसी कहीं का... बेचारी रह गई मन मार कर... चल तरु तू भी चल जिम का टाइम हो गया है' सोच वह जौगिंग करते हुए ही जिम पहुंच गया. दूसरे दिन तरुण शालू को जबरदस्ती प्रिया जैसा ट्रैक सूट पहना कर पार्क में ले आया.1 राउंड भी शालू बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाई. थक कर वह साइड की डस्टबिन से टकरा कर गिर गई. "कहां हो शालू? कहां गई?" पुकार लोगों के हंसने की आवाजें सुन तरुण पलटा. शालू की ऐसी हालत देख उस की भी हंसी छूट गई पर प्रिया को उस ओर देखता देख खिसियाई सी हंसी हंसते हुए हाथ का सहारा दे उठा दिया.
'अरे, यह तो मेरे बारे में ही बात कर रही है और वह भी तारीफ... क्या बात है.... तरु तुम तो छा गए,' बड़बड़ा कर वह सीधा हो कर पीछे हो लिया. 'खड़ूस माना नहीं... आलसी कहीं का... बेचारी रह गई मन मार कर... चल तरु तू भी चल जिम का टाइम हो गया है' सोच वह जौगिंग करते हुए ही जिम पहुंच गया. दूसरे दिन तरुण शालू को जबरदस्ती प्रिया जैसा ट्रैक सूट पहना कर पार्क में ले आया.एक राउंड भी शालू बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाई. थक कर वह साइड की डस्टबिन से टकरा कर गिर गई. "कहां हो शालू? कहां गई?" पुकार लोगों के हंसने की आवाजें सुन तरुण पलटा. शालू की ऐसी हालत देख उस की भी हंसी छूट गई पर प्रिया को उस ओर देखता देख खिसियाई सी हंसी हंसते हुए हाथ का सहारा दे उठा दिया.
शिखर धवन ने पंजाब किंग्स के खिलाफ खेली गई अपनी पारी में 13 चौके, 2 छक्के लगाने का काम किया जिसके चलते दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने 196 रनों के विशाल स्कोर को आसानी से हासिल कर लिया। आईपीएल 2021 के पहले 3 मैचों में धवन का यह दूसरा अर्धशतक है। दिल्ली कपिटल्स के सहायक कोच मोहम्मद कैफ ने धवन की इस पारी की जमकर तारीफ की है और उन्हें आईपीएल का सबसे निडर बल्लेबाज बताया है। कैफ ने धवन की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए उन्हें आईपीएल का वो खास बल्लेबाज बताया है जो कि निडर होकर क्रिकेट खेलता है लेकिन उसके बावजूद क्रीज पर मजबूती से टिका रहता है। कैफ ने धवन को आईपीएल का सुपर स्टार कहकर भी संबोधित किया। अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से शिखर धवन की तारीफ करते हुए कैफ ने लिखा,'शिखर धवन वो खास बल्लेबाज हैं जो कि मैदान पर तब भी मजबूती से टिके होते हैं जब वो बेखौफ होकर बल्लेबाजी कर रहे होते हैं। वह बिना कोई समझौता किये खतरों को कम करने का काम करते हैं। उनका स्ट्राइक रेट बताता है कि वो टी20 क्रिकेट के कितने महान खिलाड़ी हैं। गब्बर एक आईपीएल सुपरस्टार हैं। ' गौरतलब है कि पंजाब किंग्स की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मयंक अग्रवाल (69) और केएल राहुल की आतिशी पारियों के दम पर महज 12 ओवर में ही 122 रन बना लिये थे, हालांकि दिल्ली के गेंदबाजों ने बीच के ओवर्स में वापसी की और पंजाब की टीम 195 रन ही बना सकी। जवाब में दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने शिखर धवन (92), पृथ्वी शॉ (35) और मार्कस स्टॉयनिस (27) की शानदार पारियों के दम पर 10 गेंद पहले ही मैच को 6 विकेट से जीत लिया। मैच के बाद शिखर धवन ने माना कि वानखेड़े के मैदान पर ओस के चलते पहली पारी की अपेक्षा दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना आसान हो जाता है। आपको बता दें कि दिल्ली कैपिटल्स को अपने अगले 2 मैच चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में खेलने होंगे। रविचंद्रन अश्विन से बात करते हुए शिखर धवन ने कहा,'वानखेड़े के मैदान पर उछाल मिलती है और गेंद आसानी से बल्ले पर आता है, खास तौर से दूसरी पारी में जब मैदान पर ओस आ जाती है। मेरी बल्लेबाजी की शैली जैसी है उससे मैं गेंदबाजों की गति का इस्तेमाल कर सकता हूं और स्पिनर्स के लिये ज्यादा मदद नहीं है तो मैं चाहे जैसे शॉट मार सकता हूं। '
शिखर धवन ने पंजाब किंग्स के खिलाफ खेली गई अपनी पारी में तेरह चौके, दो छक्के लगाने का काम किया जिसके चलते दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने एक सौ छियानवे रनों के विशाल स्कोर को आसानी से हासिल कर लिया। आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के पहले तीन मैचों में धवन का यह दूसरा अर्धशतक है। दिल्ली कपिटल्स के सहायक कोच मोहम्मद कैफ ने धवन की इस पारी की जमकर तारीफ की है और उन्हें आईपीएल का सबसे निडर बल्लेबाज बताया है। कैफ ने धवन की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए उन्हें आईपीएल का वो खास बल्लेबाज बताया है जो कि निडर होकर क्रिकेट खेलता है लेकिन उसके बावजूद क्रीज पर मजबूती से टिका रहता है। कैफ ने धवन को आईपीएल का सुपर स्टार कहकर भी संबोधित किया। अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से शिखर धवन की तारीफ करते हुए कैफ ने लिखा,'शिखर धवन वो खास बल्लेबाज हैं जो कि मैदान पर तब भी मजबूती से टिके होते हैं जब वो बेखौफ होकर बल्लेबाजी कर रहे होते हैं। वह बिना कोई समझौता किये खतरों को कम करने का काम करते हैं। उनका स्ट्राइक रेट बताता है कि वो टीबीस क्रिकेट के कितने महान खिलाड़ी हैं। गब्बर एक आईपीएल सुपरस्टार हैं। ' गौरतलब है कि पंजाब किंग्स की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मयंक अग्रवाल और केएल राहुल की आतिशी पारियों के दम पर महज बारह ओवर में ही एक सौ बाईस रन बना लिये थे, हालांकि दिल्ली के गेंदबाजों ने बीच के ओवर्स में वापसी की और पंजाब की टीम एक सौ पचानवे रन ही बना सकी। जवाब में दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने शिखर धवन , पृथ्वी शॉ और मार्कस स्टॉयनिस की शानदार पारियों के दम पर दस गेंद पहले ही मैच को छः विकेट से जीत लिया। मैच के बाद शिखर धवन ने माना कि वानखेड़े के मैदान पर ओस के चलते पहली पारी की अपेक्षा दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना आसान हो जाता है। आपको बता दें कि दिल्ली कैपिटल्स को अपने अगले दो मैच चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में खेलने होंगे। रविचंद्रन अश्विन से बात करते हुए शिखर धवन ने कहा,'वानखेड़े के मैदान पर उछाल मिलती है और गेंद आसानी से बल्ले पर आता है, खास तौर से दूसरी पारी में जब मैदान पर ओस आ जाती है। मेरी बल्लेबाजी की शैली जैसी है उससे मैं गेंदबाजों की गति का इस्तेमाल कर सकता हूं और स्पिनर्स के लिये ज्यादा मदद नहीं है तो मैं चाहे जैसे शॉट मार सकता हूं। '
काम उबाऊ है। इन हास्यास्पद कार्यालय प्रशंसकों के साथ मसाला चीजें। आइए इसका सामना करते हैं, कभी-कभी काम वास्तविक ड्रैग हो सकता है , लेकिन इसे हमेशा काम नहीं करना चाहिए और कोई खेल नहीं है। जबकि निम्नलिखित पंद्रह प्रशंसकों की तरह कुछ ऐसा लगता है जो जिम हेलपर कार्यालय पर ड्वाइट श्राउट के साथ करेंगे, ये बहुत अधिक मनोरंजक हैं क्योंकि वे असली हैं । यह तब होता है जब आप छुट्टी पर जाते हैं और बहुत मज़ेदार लोगों के साथ काम करते हैं। इन तरह के सहकर्मियों के साथ, जो परेशान ग्राहकों की जरूरत है? साथ ही साथ अपने पूरे कार्यालय को भी ले जा सकते हैं, है ना? या ठीक इसके विपरीत। उन्होंने Bieber में अपने क्यूबिकल को पछाड़ दिया। ऐसा लगता है कि किसी के पास Bieber बुखार का गंभीर मामला है , और उसका निदान महान नहीं है। बेकन-लपेटा हुआ माउस, कोई भी? रुको . . . मैं उलझन में हूँ। यह बेकन है, लेकिन मैं इसे नहीं खाना चाहता। क्या हो रहा है? ? ? ऑटोरेवो कॉरपोरेट यूट्यूब चैनल ने इस वीडियो को अपने कर्मचारियों को अपने राष्ट्रीय बिक्री निदेशक पर खींचने के लिए एक विस्तृत प्रचार के रूप में पोस्ट किया, जो दो सप्ताह तक छुट्टी पर थे। अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देखने के लिए वीडियो देखें। अधिक " सर्वश्रेष्ठ कार्यालय शरारत कभी? यह हर समय सबसे श्रम-केंद्रित कार्यालयों में से एक होना है, और यह सवाल पूछता है, "उनके कार्यालय को समझने के लिए कितने अधिकारी इसे लेते हैं? " कभी-कभी ऐसा लगता है कि काम आपको मारने जा रहा है। आरआईपी उत्पादकता! इतना आसान, लेकिन इतना परेशान! इस चाल के बारे में सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि यह धीमा जल रहा है। एक दिन आप अपने कीबोर्ड के माध्यम से एक छोटी हरी चीज अंकुरित करते हैं, तो अगले दिन, और भी . . . और अधिक . . . और अधिक होते हैं। आप इन सभी लोगों की तरह सोड के साथ अपने पूरे कार्यालय में भी जा सकते हैं और कवर कर सकते हैं। लोक सेवा घोषणाः यदि आपके सहकर्मियों को हृदय की स्थिति है, तो आज तक यह कोशिश न करें, जब तक कि आप आज एम्बुलेंस में सवारी करना पसंद न करें। वैकल्पिक रूप से, आप हवा की सींग को अपने कार्यालय की कुर्सी पर संलग्न कर सकते हैं, जैसे कि बहुत अधिक और अधिक तीव्र हूपी कुशन। "मेरे हाथ इतने फिसलन क्यों हैं ? ! " सबसे कलात्मक एंडी वॉरहोल मार्ग में संभव है, लेकिन फिर भी। यह कहीं 5 बजे है, और वह जगह ठीक है! जब उनके सहयोगी मेक्सिको के कैबो सैन लुकास की यात्रा से लौट आए, तो उनके सहकर्मियों ने इस उष्णकटिबंधीय स्वर्ग के साथ अपने संक्रमण को कम करने का फैसला किया। अगर मैं उसे था, तो मैं इसे कभी नहीं ले जाऊंगा। सैकड़ों और सैकड़ों गुब्बारे। यह भी देखेंः 20 बहुत मजेदार अप्रैल फूल दिवस दिन! उन्होंने अपने कॉल आयोजित किए। उन सभी को। यह क्लासिक "फोन / स्टेपलर को जेल-ओ मोल्ड" चाल में डालने का एक और बदलाव है, लेकिन कम उल्लसित (या कष्टप्रद) नहीं है। जब एक कर्मचारी को कार्यालय-व्यापी सम्मेलन यात्रा से बाहर रखा गया था, तो वह अपने सहकर्मियों के साथ पीले पोस्ट-नोट नोट्स के साथ हर उपलब्ध कार्य सतह को कवर करके भी मिला। 5,300 पोस्ट-इसके। हॉफ को परेशान मत करो! हमने Bieber के साथ सूची शुरू की, और हम इसे डेविड हैसलहॉफ़ के साथ समाप्त कर रहे हैं। मुझे यकीन नहीं है कि कौन सा बुरा है। क्या होता है जब आपके सहकर्मियों को आपकी 8 वीं कक्षा की सालाना तस्वीर की प्रतिलिपि पर हाथ मिलते हैं? इस। ऐसा ही होता है। साल की किताबों की तस्वीरों के बारे में बात करते हुए, यहां 15 हिंसक ईरानी उद्धरण हैं, हम चाहते हैं कि हम सोचें कि उनमें से 20 सबसे ज्यादा अजीब वरिष्ठ चित्र हैं । या इन तस्वीरों पर नज़र डालें जिन्होंने स्कूल चित्र दिवस पर गंभीर रूप से भयानक बाल कटवाने को रोका !
काम उबाऊ है। इन हास्यास्पद कार्यालय प्रशंसकों के साथ मसाला चीजें। आइए इसका सामना करते हैं, कभी-कभी काम वास्तविक ड्रैग हो सकता है , लेकिन इसे हमेशा काम नहीं करना चाहिए और कोई खेल नहीं है। जबकि निम्नलिखित पंद्रह प्रशंसकों की तरह कुछ ऐसा लगता है जो जिम हेलपर कार्यालय पर ड्वाइट श्राउट के साथ करेंगे, ये बहुत अधिक मनोरंजक हैं क्योंकि वे असली हैं । यह तब होता है जब आप छुट्टी पर जाते हैं और बहुत मज़ेदार लोगों के साथ काम करते हैं। इन तरह के सहकर्मियों के साथ, जो परेशान ग्राहकों की जरूरत है? साथ ही साथ अपने पूरे कार्यालय को भी ले जा सकते हैं, है ना? या ठीक इसके विपरीत। उन्होंने Bieber में अपने क्यूबिकल को पछाड़ दिया। ऐसा लगता है कि किसी के पास Bieber बुखार का गंभीर मामला है , और उसका निदान महान नहीं है। बेकन-लपेटा हुआ माउस, कोई भी? रुको . . . मैं उलझन में हूँ। यह बेकन है, लेकिन मैं इसे नहीं खाना चाहता। क्या हो रहा है? ? ? ऑटोरेवो कॉरपोरेट यूट्यूब चैनल ने इस वीडियो को अपने कर्मचारियों को अपने राष्ट्रीय बिक्री निदेशक पर खींचने के लिए एक विस्तृत प्रचार के रूप में पोस्ट किया, जो दो सप्ताह तक छुट्टी पर थे। अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देखने के लिए वीडियो देखें। अधिक " सर्वश्रेष्ठ कार्यालय शरारत कभी? यह हर समय सबसे श्रम-केंद्रित कार्यालयों में से एक होना है, और यह सवाल पूछता है, "उनके कार्यालय को समझने के लिए कितने अधिकारी इसे लेते हैं? " कभी-कभी ऐसा लगता है कि काम आपको मारने जा रहा है। आरआईपी उत्पादकता! इतना आसान, लेकिन इतना परेशान! इस चाल के बारे में सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि यह धीमा जल रहा है। एक दिन आप अपने कीबोर्ड के माध्यम से एक छोटी हरी चीज अंकुरित करते हैं, तो अगले दिन, और भी . . . और अधिक . . . और अधिक होते हैं। आप इन सभी लोगों की तरह सोड के साथ अपने पूरे कार्यालय में भी जा सकते हैं और कवर कर सकते हैं। लोक सेवा घोषणाः यदि आपके सहकर्मियों को हृदय की स्थिति है, तो आज तक यह कोशिश न करें, जब तक कि आप आज एम्बुलेंस में सवारी करना पसंद न करें। वैकल्पिक रूप से, आप हवा की सींग को अपने कार्यालय की कुर्सी पर संलग्न कर सकते हैं, जैसे कि बहुत अधिक और अधिक तीव्र हूपी कुशन। "मेरे हाथ इतने फिसलन क्यों हैं ? ! " सबसे कलात्मक एंडी वॉरहोल मार्ग में संभव है, लेकिन फिर भी। यह कहीं पाँच बजे है, और वह जगह ठीक है! जब उनके सहयोगी मेक्सिको के कैबो सैन लुकास की यात्रा से लौट आए, तो उनके सहकर्मियों ने इस उष्णकटिबंधीय स्वर्ग के साथ अपने संक्रमण को कम करने का फैसला किया। अगर मैं उसे था, तो मैं इसे कभी नहीं ले जाऊंगा। सैकड़ों और सैकड़ों गुब्बारे। यह भी देखेंः बीस बहुत मजेदार अप्रैल फूल दिवस दिन! उन्होंने अपने कॉल आयोजित किए। उन सभी को। यह क्लासिक "फोन / स्टेपलर को जेल-ओ मोल्ड" चाल में डालने का एक और बदलाव है, लेकिन कम उल्लसित नहीं है। जब एक कर्मचारी को कार्यालय-व्यापी सम्मेलन यात्रा से बाहर रखा गया था, तो वह अपने सहकर्मियों के साथ पीले पोस्ट-नोट नोट्स के साथ हर उपलब्ध कार्य सतह को कवर करके भी मिला। पाँच,तीन सौ पोस्ट-इसके। हॉफ को परेशान मत करो! हमने Bieber के साथ सूची शुरू की, और हम इसे डेविड हैसलहॉफ़ के साथ समाप्त कर रहे हैं। मुझे यकीन नहीं है कि कौन सा बुरा है। क्या होता है जब आपके सहकर्मियों को आपकी आठ वीं कक्षा की सालाना तस्वीर की प्रतिलिपि पर हाथ मिलते हैं? इस। ऐसा ही होता है। साल की किताबों की तस्वीरों के बारे में बात करते हुए, यहां पंद्रह हिंसक ईरानी उद्धरण हैं, हम चाहते हैं कि हम सोचें कि उनमें से बीस सबसे ज्यादा अजीब वरिष्ठ चित्र हैं । या इन तस्वीरों पर नज़र डालें जिन्होंने स्कूल चित्र दिवस पर गंभीर रूप से भयानक बाल कटवाने को रोका !
Kundali Bhagya: Mahesh and Rakhi shake their legs in Sonakshi's haldi ceremony: सीरियल 'कुंडली भाग्य' (Kundali Bhagya) के सेट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस वीडियो में सीरियल 'कुंडली भाग्य' की राखी और महेश साथ डांस करते नजर आ रहे हैं। Kundali Bhagya: Mahesh and Rakhi shake their legs in Sonakshi's haldi ceremony: सीरियल कुंडली भाग्य (Kundali Bhagya) में इस समय जश्न मनाया जा रहा है। पूरा लूथरा परिवार सोनाक्षी की शादी में हंगामा मचा रहा है। करण और प्रीता ही नहीं बल्कि उनके मम्मी पापा भी इस शादी से बहुत खुश हैं। तभी तो राखी और महेश, सोनाक्षी की हल्दी की रस्मों में जमकर डांस करते नजर आए। कुछ समय पहले ही महेश यानी नवीन सैनी (Naveen Saini) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में नवीन सैनी अपनी कोस्टार अनीशा हिंदूजा के साथ विद्या बालन की फिल्म डर्टी पिक्चर के गाने पर ठुमके लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Kundali Bhagya: Mahesh and Rakhi shake their legs in Sonakshi's haldi ceremony: सीरियल 'कुंडली भाग्य' के सेट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस वीडियो में सीरियल 'कुंडली भाग्य' की राखी और महेश साथ डांस करते नजर आ रहे हैं। Kundali Bhagya: Mahesh and Rakhi shake their legs in Sonakshi's haldi ceremony: सीरियल कुंडली भाग्य में इस समय जश्न मनाया जा रहा है। पूरा लूथरा परिवार सोनाक्षी की शादी में हंगामा मचा रहा है। करण और प्रीता ही नहीं बल्कि उनके मम्मी पापा भी इस शादी से बहुत खुश हैं। तभी तो राखी और महेश, सोनाक्षी की हल्दी की रस्मों में जमकर डांस करते नजर आए। कुछ समय पहले ही महेश यानी नवीन सैनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में नवीन सैनी अपनी कोस्टार अनीशा हिंदूजा के साथ विद्या बालन की फिल्म डर्टी पिक्चर के गाने पर ठुमके लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
प्रत्येक मानव व्यक्ति के आकार अलग-अलग है और उनके आनुवंशिकता पर निर्भर करता है, अनिवार्य रूप से केवल प्लास्टिक सर्जन कर सकते हैं कुछ ठीक। इसलिए, और अधिक आकर्षक लग रही करने के लिए, आप अपने निर्धारित करने के लिए की जरूरत है चेहरे के प्रकार और उसकी खूबियों पर जोर देना या बाल, मेकअप और विभिन्न सहायक उपकरण की मदद से खामियों को छिपाने। चेहरा आकार कई प्रकार से एक हो सकता है। हमें विस्तार से प्रत्येक प्रकार पर विचार करेंः 1. अंडाकार चेहरा आकार लगभग पूर्ण माना जाता है। उसके मालिक किसी भी बाल कटवाने और केश बाल लंबाई की परवाह दिखा सकते हैं। हाशिये के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। लंबे या छोटे, साथ ही प्रत्यक्ष या परोक्ष की अनुमति दी। बेशक, चुनाव को ध्यान में हालत और बाल प्रकार लेना चाहिए। भौंहों के आकार , किसी भी संभव। केवल बात यह है कि परहेज किया जाना चाहिए एक उच्च वृद्धि है, जो दे देंगे की एक अभिव्यक्ति स्थायी आश्चर्य। अंडाकार चेहरे के लिए मेकअप अलग किया जा सकता है, क्योंकि कुछ भी समायोजित करने के लिए कोई जरूरत नहीं है। सावधानी पाउडर और रूज, जो एक व्यक्ति एक बहुत ही अलग रूप दे सकते हैं आवेदन करना चाहिए। एक अच्छी तरह से चुना सामान मौजूदा गुण को रेखांकित करेगा। जब चश्मा चुनने, शायद, केवल अंडाकार फ्रेम से बचने के लिए, यह अनुपात के साथ यह अति नहीं महत्वपूर्ण है। झुमके, छोटे या बड़े, छोटी या लंबी हो सकता है मुख्य बात यह है कि वे कपड़े और एक पूरे के रूप आंकड़ा के साथ मिश्रण। चेहरे के गोल आकार 2. । इस प्रकार के साथ महिलाओं को हमेशा अच्छी लगती है, लेकिन अक्सर बदलने के लिए अपने आप में कुछ प्रयास करें। यह लंबे बाल है कि चेहरे की तरफ चिकनी हैं में कर सकते हैं। खैर मोटा केशविन्यास, साथ ही मध्यम आकार या बड़े कर्ल देखो। बैंग्स परोक्ष या प्रत्यक्ष हो सकता है, जिस स्थिति में यह लंबा होना चाहिए। दौर चेहरे के लिए आइब्रो सबसे अच्छा घुमावदार आकार उपयुक्त हैं। चेहरा प्रकार नेत्रहीन और श्रृंगार की मदद से निकाला जाता है। इस मामले में, यह ब्लशर लागू करने के लिए (लाइन मंदिरों से होठों के कोनों को आयोजित किया जाना चाहिए) महत्वपूर्ण है। जब सामान चुनने अंडाकार बालियां और अंक कि भौंहों के आकार गूंज पसंद करते हैं करने के लिए बेहतर है। 3. चेहरे के वर्ग आकार। तुम्हें पता है, एक बहुत ही कम बाल कटवाने के रूप में रह सकते हैं जो महिलाओं के व्यक्तित्व, और बैंग्स के साथ लंबे बाल, जो नेत्रहीन दौर चेहरे पर जोर देना होगा। आइब्रो का आकार कोई भी हो सकता है, लेकिन यह वृद्धि के साथ एक वक्र रेखा फिट करने के लिए सबसे अच्छा है। मदद करने के लिए एक लाल कि गाल की गोलाई लिए आवेदन किया है आकार सही व्यक्ति दो, अन्य क्षेत्रों, इसके विपरीत, यह हल्का करने के लिए सलाह दी जाती है। सभी सामान गोल या अंडाकार होना चाहिए। 4. Oblong (या आयताकार) चेहरे के आकार। अपने मालिकों यह तब होता है जब चुनने केशविन्यास एक है कि एक व्यक्ति नेत्रहीन व्यापक कर सकते हैं लेने चाहिए। लंबे से, सीधे बाल छोड़ दिया जाना चाहिए। इस चेहरे के आकार के साथ उपयुक्त मात्रा मध्यम लंबाई बाल कटाने बैंग्स के साथ। भौहें सीधे या थोड़ा गोल किया जाना चाहिए। अक्सर एक आयताकार चेहरा आकार आइब्रो के सिर्फ सही लाइन के साथ मोड़ प्रकृति से प्राप्त। सही मेकअप समय नहीं लगेगा, पाउडर cheekbones की लाइन को हल्का और लज्जित थोड़ा अस्थायी क्षेत्र काला कर देना चाहिए। व्यक्ति के इस प्रकार नेत्रहीन व्यापक संशोधित किया जाएगा -rimmed चश्मा और घुमावदार बालियां। चेहरे की त्रिकोणीय आकार 5. । यह सबसे अच्छा मध्यम लंबाई केशविन्यास के इस प्रकार के लिए अनुकूल है (ठोड़ी करने के लिए) एक किनारा, जो या तो सीधे या तिरछा हो सकता है के साथ। अच्छा लगेगा और लंबे बालों, लेकिन फिर तुम वापस में एक छोटे से ऊन बनाने की जरूरत है। भौंह औसत लंबाई से थोड़ा घुमावदार किया जाना चाहिए। प्रत्यक्ष भौंह आकार बचा जाना चाहिए। आवेदन करने वाले मेकअप जोर चेहरे के बीच में क्या करना चाहिए, यह पाउडर सभी आकृति चमकदार हो और एक हीरे में cheekbones पर लाल लागू होते हैं। सहायक उपकरण एक कम महत्वपूर्ण का चयन करना चाहिए, त्रिकोणीय आकार के चारों ओर से परहेज। इन युक्तियों का पालन कर, आप हमेशा भव्य और पुरुषों के बीच बहुत लोकप्रिय देख सकते हैं।
प्रत्येक मानव व्यक्ति के आकार अलग-अलग है और उनके आनुवंशिकता पर निर्भर करता है, अनिवार्य रूप से केवल प्लास्टिक सर्जन कर सकते हैं कुछ ठीक। इसलिए, और अधिक आकर्षक लग रही करने के लिए, आप अपने निर्धारित करने के लिए की जरूरत है चेहरे के प्रकार और उसकी खूबियों पर जोर देना या बाल, मेकअप और विभिन्न सहायक उपकरण की मदद से खामियों को छिपाने। चेहरा आकार कई प्रकार से एक हो सकता है। हमें विस्तार से प्रत्येक प्रकार पर विचार करेंः एक. अंडाकार चेहरा आकार लगभग पूर्ण माना जाता है। उसके मालिक किसी भी बाल कटवाने और केश बाल लंबाई की परवाह दिखा सकते हैं। हाशिये के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। लंबे या छोटे, साथ ही प्रत्यक्ष या परोक्ष की अनुमति दी। बेशक, चुनाव को ध्यान में हालत और बाल प्रकार लेना चाहिए। भौंहों के आकार , किसी भी संभव। केवल बात यह है कि परहेज किया जाना चाहिए एक उच्च वृद्धि है, जो दे देंगे की एक अभिव्यक्ति स्थायी आश्चर्य। अंडाकार चेहरे के लिए मेकअप अलग किया जा सकता है, क्योंकि कुछ भी समायोजित करने के लिए कोई जरूरत नहीं है। सावधानी पाउडर और रूज, जो एक व्यक्ति एक बहुत ही अलग रूप दे सकते हैं आवेदन करना चाहिए। एक अच्छी तरह से चुना सामान मौजूदा गुण को रेखांकित करेगा। जब चश्मा चुनने, शायद, केवल अंडाकार फ्रेम से बचने के लिए, यह अनुपात के साथ यह अति नहीं महत्वपूर्ण है। झुमके, छोटे या बड़े, छोटी या लंबी हो सकता है मुख्य बात यह है कि वे कपड़े और एक पूरे के रूप आंकड़ा के साथ मिश्रण। चेहरे के गोल आकार दो. । इस प्रकार के साथ महिलाओं को हमेशा अच्छी लगती है, लेकिन अक्सर बदलने के लिए अपने आप में कुछ प्रयास करें। यह लंबे बाल है कि चेहरे की तरफ चिकनी हैं में कर सकते हैं। खैर मोटा केशविन्यास, साथ ही मध्यम आकार या बड़े कर्ल देखो। बैंग्स परोक्ष या प्रत्यक्ष हो सकता है, जिस स्थिति में यह लंबा होना चाहिए। दौर चेहरे के लिए आइब्रो सबसे अच्छा घुमावदार आकार उपयुक्त हैं। चेहरा प्रकार नेत्रहीन और श्रृंगार की मदद से निकाला जाता है। इस मामले में, यह ब्लशर लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है। जब सामान चुनने अंडाकार बालियां और अंक कि भौंहों के आकार गूंज पसंद करते हैं करने के लिए बेहतर है। तीन. चेहरे के वर्ग आकार। तुम्हें पता है, एक बहुत ही कम बाल कटवाने के रूप में रह सकते हैं जो महिलाओं के व्यक्तित्व, और बैंग्स के साथ लंबे बाल, जो नेत्रहीन दौर चेहरे पर जोर देना होगा। आइब्रो का आकार कोई भी हो सकता है, लेकिन यह वृद्धि के साथ एक वक्र रेखा फिट करने के लिए सबसे अच्छा है। मदद करने के लिए एक लाल कि गाल की गोलाई लिए आवेदन किया है आकार सही व्यक्ति दो, अन्य क्षेत्रों, इसके विपरीत, यह हल्का करने के लिए सलाह दी जाती है। सभी सामान गोल या अंडाकार होना चाहिए। चार. Oblong चेहरे के आकार। अपने मालिकों यह तब होता है जब चुनने केशविन्यास एक है कि एक व्यक्ति नेत्रहीन व्यापक कर सकते हैं लेने चाहिए। लंबे से, सीधे बाल छोड़ दिया जाना चाहिए। इस चेहरे के आकार के साथ उपयुक्त मात्रा मध्यम लंबाई बाल कटाने बैंग्स के साथ। भौहें सीधे या थोड़ा गोल किया जाना चाहिए। अक्सर एक आयताकार चेहरा आकार आइब्रो के सिर्फ सही लाइन के साथ मोड़ प्रकृति से प्राप्त। सही मेकअप समय नहीं लगेगा, पाउडर cheekbones की लाइन को हल्का और लज्जित थोड़ा अस्थायी क्षेत्र काला कर देना चाहिए। व्यक्ति के इस प्रकार नेत्रहीन व्यापक संशोधित किया जाएगा -rimmed चश्मा और घुमावदार बालियां। चेहरे की त्रिकोणीय आकार पाँच. । यह सबसे अच्छा मध्यम लंबाई केशविन्यास के इस प्रकार के लिए अनुकूल है एक किनारा, जो या तो सीधे या तिरछा हो सकता है के साथ। अच्छा लगेगा और लंबे बालों, लेकिन फिर तुम वापस में एक छोटे से ऊन बनाने की जरूरत है। भौंह औसत लंबाई से थोड़ा घुमावदार किया जाना चाहिए। प्रत्यक्ष भौंह आकार बचा जाना चाहिए। आवेदन करने वाले मेकअप जोर चेहरे के बीच में क्या करना चाहिए, यह पाउडर सभी आकृति चमकदार हो और एक हीरे में cheekbones पर लाल लागू होते हैं। सहायक उपकरण एक कम महत्वपूर्ण का चयन करना चाहिए, त्रिकोणीय आकार के चारों ओर से परहेज। इन युक्तियों का पालन कर, आप हमेशा भव्य और पुरुषों के बीच बहुत लोकप्रिय देख सकते हैं।
शिमला. हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड (Himachal Electricity Board) हाईटेक बनने की दिशा में आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. बिजली बोर्ड प्रदेश के उपभोक्ताओं को जल्द ही बिजली के स्मार्ट मीटर की सौगात देगा. शिमला (Shimla) और धर्मशाला (Dharamshala) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. स्मार्ट मीटर की खासियत यह है कि बिजली बोर्ड के साथ-साथ उपभोक्ता भी बिजली खपत पर नजर रख पाएगा. ऑनलाइन ही बिल आएगा और ऑनलाइन ही बिल का भुगतान होगा. स्मार्ट मीटर (Smart Electricity Meter) की एक और खासियत यह है कि उपभोक्ता मोबाइल की तरह प्री-पेड कनेक्शन भी ले सकता है, यानी एक बार रिचार्ज करने से बार-बार बिजली का बिल (Electricity bills) जमा करने का झंझट खत्म हो जाएगा. फिलहाल दो शहरों में सुविधाः केंद्र की योजना के तहत दोनों शहरों में 1 लाख 35 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे और इस पर 27 करोड़ रुपये की लागत आएगी. राज्य बिजली बोर्ड के एमडी जेपी काल्टा ने बताया कि इन मीटरों को लगाने के लिए केंद्र की ओर से 23 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी. यह मीटर किस तरह से लगाए जाने हैं, इसका खाका बोर्ड की बैठक में तैयार कर लिया गया है. बोर्ड को मिलेगी राहतः जेपी काल्टा का कहना है कि इससे कर्मचारियों की कमी की समस्या भी कुछ हद तक दूर होगी. मीटर रीडिंग के लिए घरों में कर्मचारियों को भेजने की जरूरत नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि जल्द ही यह स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे. इन दोनों शहरों में सफलता मिलने के बाद अन्य स्थानों पर भी स्मार्ट मीटर लगाने पर विचार किया जाएगा. हिमाचल में लगेंगे स्मार्ट बिजली मीटर, प्री-पेड कनेक्शन की तरह होंगे रिजार्ज Reviewed by News Himachali on October 17, 2019 Rating:
शिमला. हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड हाईटेक बनने की दिशा में आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. बिजली बोर्ड प्रदेश के उपभोक्ताओं को जल्द ही बिजली के स्मार्ट मीटर की सौगात देगा. शिमला और धर्मशाला में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. स्मार्ट मीटर की खासियत यह है कि बिजली बोर्ड के साथ-साथ उपभोक्ता भी बिजली खपत पर नजर रख पाएगा. ऑनलाइन ही बिल आएगा और ऑनलाइन ही बिल का भुगतान होगा. स्मार्ट मीटर की एक और खासियत यह है कि उपभोक्ता मोबाइल की तरह प्री-पेड कनेक्शन भी ले सकता है, यानी एक बार रिचार्ज करने से बार-बार बिजली का बिल जमा करने का झंझट खत्म हो जाएगा. फिलहाल दो शहरों में सुविधाः केंद्र की योजना के तहत दोनों शहरों में एक लाख पैंतीस हजार स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे और इस पर सत्ताईस करोड़ रुपये की लागत आएगी. राज्य बिजली बोर्ड के एमडी जेपी काल्टा ने बताया कि इन मीटरों को लगाने के लिए केंद्र की ओर से तेईस करोड़ रुपये की मदद मिलेगी. यह मीटर किस तरह से लगाए जाने हैं, इसका खाका बोर्ड की बैठक में तैयार कर लिया गया है. बोर्ड को मिलेगी राहतः जेपी काल्टा का कहना है कि इससे कर्मचारियों की कमी की समस्या भी कुछ हद तक दूर होगी. मीटर रीडिंग के लिए घरों में कर्मचारियों को भेजने की जरूरत नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि जल्द ही यह स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे. इन दोनों शहरों में सफलता मिलने के बाद अन्य स्थानों पर भी स्मार्ट मीटर लगाने पर विचार किया जाएगा. हिमाचल में लगेंगे स्मार्ट बिजली मीटर, प्री-पेड कनेक्शन की तरह होंगे रिजार्ज Reviewed by News Himachali on October सत्रह, दो हज़ार उन्नीस Rating:
श्री रामचरितमानस श्री तुलसी कृत रामाय यह ग्रन्थ बड़े परिश्रम और यत्न से श्रीतुलसीदास जी की किम्बी हुई ख़ास प्रति से शोध कर ज्यौं की त्यौं छापा गया है। इस भय से कि कदाचित् कोई इसे असम्भव समझे, गोसाई जी के हाथ की लिखी हुई प्रति के १० पृष्ठ का फोटोग्राफ भी पुस्तक में लगा दिया है, और उस की दृढ़ पुष्टि के लिये गोसांई जी के हाथ के लिखे हुए पंचनामा का फोटोग्राफ भी उसी के संग है, जिस में लोगों को यह भी न कहना पड़े कि गोसांई जी के हाथ के लिखे हुए का प्रमाण ही क्या है ? और लोगों की भांति मैं नहीं चाहता कि इश्तिहार में ऊपर से नीचे तक प्रशंसा ही भरदूं, क्योंकि जो इस के गुणग्राहक हैं उन के लिये इतना ही बहुत है । इस ग्रन्थ में तुलसीदास जी का जीवनचरित भी दिया गया है और अक्षर बड़ा वो कागज़ अच्छा है। विद्यानुरागी परम गुणवान् श्रीमान् आनरेबुल राय दुर्गाप्रसाद साहिब वहादुर की गुणग्राहकता से यह ग्रन्थ १९ नवम्बर १८८९ को गोरखपुर की प्रदर्शिनी में भी रक्खा गया था और लोगों ने आश्चर्य्य दृष्टि से देखा । तीन सौ वर्ष पर यह अलभ्य पदार्थ हाथ लगा है, जिन को रामरस के अपूर्व स्वाद लेना हो वे न चूकै और नीचे लिखे हुए पते से मंगा लेवें । नहीं तो अवसर निकल जाने पर पछताना होगा । ६ रुपया ४ रुपया मूल्य फोटो सहित रामायण का मूल्य बिना फोटो की रामायण का डाकमहसूल १ ॥) "खगविलास " प्रेस } साहब प्रसाद सिंह ।
श्री रामचरितमानस श्री तुलसी कृत रामाय यह ग्रन्थ बड़े परिश्रम और यत्न से श्रीतुलसीदास जी की किम्बी हुई ख़ास प्रति से शोध कर ज्यौं की त्यौं छापा गया है। इस भय से कि कदाचित् कोई इसे असम्भव समझे, गोसाई जी के हाथ की लिखी हुई प्रति के दस पृष्ठ का फोटोग्राफ भी पुस्तक में लगा दिया है, और उस की दृढ़ पुष्टि के लिये गोसांई जी के हाथ के लिखे हुए पंचनामा का फोटोग्राफ भी उसी के संग है, जिस में लोगों को यह भी न कहना पड़े कि गोसांई जी के हाथ के लिखे हुए का प्रमाण ही क्या है ? और लोगों की भांति मैं नहीं चाहता कि इश्तिहार में ऊपर से नीचे तक प्रशंसा ही भरदूं, क्योंकि जो इस के गुणग्राहक हैं उन के लिये इतना ही बहुत है । इस ग्रन्थ में तुलसीदास जी का जीवनचरित भी दिया गया है और अक्षर बड़ा वो कागज़ अच्छा है। विद्यानुरागी परम गुणवान् श्रीमान् आनरेबुल राय दुर्गाप्रसाद साहिब वहादुर की गुणग्राहकता से यह ग्रन्थ उन्नीस नवम्बर एक हज़ार आठ सौ नवासी को गोरखपुर की प्रदर्शिनी में भी रक्खा गया था और लोगों ने आश्चर्य्य दृष्टि से देखा । तीन सौ वर्ष पर यह अलभ्य पदार्थ हाथ लगा है, जिन को रामरस के अपूर्व स्वाद लेना हो वे न चूकै और नीचे लिखे हुए पते से मंगा लेवें । नहीं तो अवसर निकल जाने पर पछताना होगा । छः रुपयापया चार रुपयापया मूल्य फोटो सहित रामायण का मूल्य बिना फोटो की रामायण का डाकमहसूल एक ॥) "खगविलास " प्रेस } साहब प्रसाद सिंह ।
रिकवच या रिकंवच. पूर्वांचल का ख़ास स्नैक्स. जिसे बिहार के भी कुछ हिस्सों में इसी नाम से जाना जाता है. गुजरात में पातरा तो पंजाबी में पतौड़े और महाराष्ट्र में अळूवडी कहा जाता है. यह अरबी के पत्तों, बेसन और कुछ मसालों के साथ मिलाकर बनता है. आज हम पूर्वी उत्तर प्रदेश के स्वाद को आपके किचन तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे. तो चलिए आपको रिकवंच की रेसिपी के बारे में बताते हैं. शैलो फ्राय करने के लिए तेल (वैकल्पिक) - अरबी के पत्तों को धोकर सुखा लें. - बेसन और चावल के आटा को छानकर एक बाउल में रखें. - बाक़ी सभी सामग्रियों को बेसन में डालें और अच्छी तरह से मिलाएं. - अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर उसे एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें. - एक बड़ी थाड़ी या फ़्लैट सरफेस को साफ़ करें. - अरबी की एक पत्ती को उल्टा रखें और उसपर मिश्रण लगाएं. उसके ऊपर एक-एक करके पत्तियां रखें और मिश्रण लगाएं. 6 से 7 पत्तियों का इस्तेमाल करें. तीन का सिरा एक तरफ़ और चार का सिरा एक तरफ़ रखें. - अब उसे रोल करें. रोल करते समय थोड़ा-थोड़ा मिश्रण लगाते जाएं, ताकि वह अच्छी तरह से चिपक जाए. - इसी तरह से बाक़ी बचे पत्तों से दो रोल और बना लें. - इसे 20 मिनट तक धीमी आंच पर स्टीम देकर अच्छी तरह से पकाएं. - स्टीम करते समय आप इमली की पत्तियों को पानी में डाल सकते हैं. - ठंडा होने के बाद काटें. हरी चटनी के साथ सर्व करें. - अगर आप चाहे तो इसे शैलो फ्राय करके या डीप फ्राय करके भी खा सकते हैं.
रिकवच या रिकंवच. पूर्वांचल का ख़ास स्नैक्स. जिसे बिहार के भी कुछ हिस्सों में इसी नाम से जाना जाता है. गुजरात में पातरा तो पंजाबी में पतौड़े और महाराष्ट्र में अळूवडी कहा जाता है. यह अरबी के पत्तों, बेसन और कुछ मसालों के साथ मिलाकर बनता है. आज हम पूर्वी उत्तर प्रदेश के स्वाद को आपके किचन तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे. तो चलिए आपको रिकवंच की रेसिपी के बारे में बताते हैं. शैलो फ्राय करने के लिए तेल - अरबी के पत्तों को धोकर सुखा लें. - बेसन और चावल के आटा को छानकर एक बाउल में रखें. - बाक़ी सभी सामग्रियों को बेसन में डालें और अच्छी तरह से मिलाएं. - अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर उसे एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें. - एक बड़ी थाड़ी या फ़्लैट सरफेस को साफ़ करें. - अरबी की एक पत्ती को उल्टा रखें और उसपर मिश्रण लगाएं. उसके ऊपर एक-एक करके पत्तियां रखें और मिश्रण लगाएं. छः से सात पत्तियों का इस्तेमाल करें. तीन का सिरा एक तरफ़ और चार का सिरा एक तरफ़ रखें. - अब उसे रोल करें. रोल करते समय थोड़ा-थोड़ा मिश्रण लगाते जाएं, ताकि वह अच्छी तरह से चिपक जाए. - इसी तरह से बाक़ी बचे पत्तों से दो रोल और बना लें. - इसे बीस मिनट तक धीमी आंच पर स्टीम देकर अच्छी तरह से पकाएं. - स्टीम करते समय आप इमली की पत्तियों को पानी में डाल सकते हैं. - ठंडा होने के बाद काटें. हरी चटनी के साथ सर्व करें. - अगर आप चाहे तो इसे शैलो फ्राय करके या डीप फ्राय करके भी खा सकते हैं.
देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम की वार्षिक तीर्थयात्रा सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी बाधित रही। भूस्खलन की वजह से तीर्थस्थल जाने वाले कई मुख्य मार्ग अवरुद्ध रहे। क्षेत्र में बारिश घटी है। सडक़ों से मलबे हटाने का काम जारी है। कई स्थानों पर वाहनों की सामान्य आवाजाही बहाल किया जाना अभी बाकी है। बद्रीनाथ राजमार्ग पर नंदप्रयाग-चमोली सडक़ को साफ करना बाकी है। बद्रीनाथ और रुद्रप्रयाग के बीच रविवार शाम को कई वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ले जाया गया। इस स्थान पर पिछले सप्ताह भारी बारिश के बाद बड़ी संख्या में चट्टानें गिरी थीं।
देहरादून। उत्तराखंड में चार धाम की वार्षिक तीर्थयात्रा सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी बाधित रही। भूस्खलन की वजह से तीर्थस्थल जाने वाले कई मुख्य मार्ग अवरुद्ध रहे। क्षेत्र में बारिश घटी है। सडक़ों से मलबे हटाने का काम जारी है। कई स्थानों पर वाहनों की सामान्य आवाजाही बहाल किया जाना अभी बाकी है। बद्रीनाथ राजमार्ग पर नंदप्रयाग-चमोली सडक़ को साफ करना बाकी है। बद्रीनाथ और रुद्रप्रयाग के बीच रविवार शाम को कई वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ले जाया गया। इस स्थान पर पिछले सप्ताह भारी बारिश के बाद बड़ी संख्या में चट्टानें गिरी थीं।
वस्तुतः उनके प्रति प्रेम से यो करता है? पत्नी का पति के प्रति प्यार क्या वास्तविक प्रेम है? वह अपने बच्चों को क्यों प्यार करती है? वे अपने खून और बीज से पैदा हुए, सिर्फ इसलिए। वरना क्या हम सब बच्चों को एक ही तरह प्यार न करते?" 'बच्चों, पत्नी या पति के लिए मरने तैयार लोग आज कितने मिलेंगे? वह बेटा अपनी पत्नी के उसे त्यागने पर मरने तैयार होता है तो वह पत्नी के प्रति प्रेम के कारण नहीं, अपने प्रति प्रेम के कारण है। अपना सुख नष्ट हो जाने की निराशा ही कारण है। यदि उसे अपनी पत्नी से हार्दिक प्रेम हो और वह स्त्री और एक पुरुष को प्यार करने में अधिक खुशी पावे तो उसे स्वीकार करना चाहिए था। पत्नी के आनंद को अपने लिए स्वागत योग्य मानना चाहिए था। वही निःस्वार्थ प्रेम है। यदि पत्नी के मन में हार्दिक प्रेम होता तो अन्य पुरुष की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखती। कहते है कि बच्चों के प्रति प्रेम है। अपने बच्चे को पानी में डूबते देखकर कितने लोग अपनी जान की बाजी लगाकर उसे बचाने तैयार होंगे? एक बेटी ने अम्मा से कहा- उसकी बच्ची सत्रह सीढ़ीयोंवाले कुएँ में गिरी। माँ ने बच्ची को गिरते देखा। वह कुछ नहीं कर सकी। पास खड़े कोई गोताखोर को ले आये। मगर तब तक बच्ची मर गई थी। उस माँ को कुएँ में उतरकर बच्ची को निकालने की बात क्यों नहीं सूझी? निन्यानवे प्रतिशत लोग ऐसे हैं। अधिकांश लोग अपनी जान देकर दूसरे के प्राण बचाने तैयार नही हैं। इसीलिए अम्मा कहती है कि ईश्वर ही हार्दिक प्रेम करते हैं।' 'उस ईश्वर का सहारा दृढ़ता से लेना। इसका मतलब यह नही कि दूसरों को प्यार नही करना चाहिए। उनमें ईश्वर को देख उस ईश्वर को प्यार करें। तब व्यक्ति के नाराज़ होने पर भी हमें व्यथित होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।' एक युवक अम्मा की बातें ध्यान से सुनते हुए सब के पीछे बैठा है। वह पहली बार आया है। उसके चेहरे पर जरा भी सम्मान नहीं है। अम्मा के बात खतम करते ही युवक ने कलरिमंडप पर रखे अम्मा के कृष्णभाव के चित्र को लक्ष्य करके किसी भूमिका के बिना पूछा- 'वह मोरपंख और मुकुट अम्मा ने पहने हैं न? इस वेष के
वस्तुतः उनके प्रति प्रेम से यो करता है? पत्नी का पति के प्रति प्यार क्या वास्तविक प्रेम है? वह अपने बच्चों को क्यों प्यार करती है? वे अपने खून और बीज से पैदा हुए, सिर्फ इसलिए। वरना क्या हम सब बच्चों को एक ही तरह प्यार न करते?" 'बच्चों, पत्नी या पति के लिए मरने तैयार लोग आज कितने मिलेंगे? वह बेटा अपनी पत्नी के उसे त्यागने पर मरने तैयार होता है तो वह पत्नी के प्रति प्रेम के कारण नहीं, अपने प्रति प्रेम के कारण है। अपना सुख नष्ट हो जाने की निराशा ही कारण है। यदि उसे अपनी पत्नी से हार्दिक प्रेम हो और वह स्त्री और एक पुरुष को प्यार करने में अधिक खुशी पावे तो उसे स्वीकार करना चाहिए था। पत्नी के आनंद को अपने लिए स्वागत योग्य मानना चाहिए था। वही निःस्वार्थ प्रेम है। यदि पत्नी के मन में हार्दिक प्रेम होता तो अन्य पुरुष की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखती। कहते है कि बच्चों के प्रति प्रेम है। अपने बच्चे को पानी में डूबते देखकर कितने लोग अपनी जान की बाजी लगाकर उसे बचाने तैयार होंगे? एक बेटी ने अम्मा से कहा- उसकी बच्ची सत्रह सीढ़ीयोंवाले कुएँ में गिरी। माँ ने बच्ची को गिरते देखा। वह कुछ नहीं कर सकी। पास खड़े कोई गोताखोर को ले आये। मगर तब तक बच्ची मर गई थी। उस माँ को कुएँ में उतरकर बच्ची को निकालने की बात क्यों नहीं सूझी? निन्यानवे प्रतिशत लोग ऐसे हैं। अधिकांश लोग अपनी जान देकर दूसरे के प्राण बचाने तैयार नही हैं। इसीलिए अम्मा कहती है कि ईश्वर ही हार्दिक प्रेम करते हैं।' 'उस ईश्वर का सहारा दृढ़ता से लेना। इसका मतलब यह नही कि दूसरों को प्यार नही करना चाहिए। उनमें ईश्वर को देख उस ईश्वर को प्यार करें। तब व्यक्ति के नाराज़ होने पर भी हमें व्यथित होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।' एक युवक अम्मा की बातें ध्यान से सुनते हुए सब के पीछे बैठा है। वह पहली बार आया है। उसके चेहरे पर जरा भी सम्मान नहीं है। अम्मा के बात खतम करते ही युवक ने कलरिमंडप पर रखे अम्मा के कृष्णभाव के चित्र को लक्ष्य करके किसी भूमिका के बिना पूछा- 'वह मोरपंख और मुकुट अम्मा ने पहने हैं न? इस वेष के
राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के विधायक ने सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सीएम गहलोत को सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए। युवाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे तो प्रदेश का सियासी नक्शा बदल जाएगा। दरअसल, राजस्थान की सियासत में बुधवार को भीषण गर्मी के बीच सियासी पारा बढ़ता नजर आया। अपने बयानों से अपनी ही पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले पूर्व मंत्री सांगोद से कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने सीए को ही नसीहत दे डाली। आपको बता दें कि कांग्रेस के विधायक ने सीएम अशोक गहलोत को कहा कि सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए। युवाओं को आगे बढ़ाने की घोषणा करें प्रदेश का सियासी नक्शा बदल जाएगा। साथ ही उन्होंने सत्ता को शराब के नशे से भी ज्यादा खतरनाक बताया और कहा कि माया का मोह कहां आसानी से छूटने वाला है। विधायक भरत सिंह ने इशारों ही इशारों में मंत्री प्रमोद जैन भाया को मुख्यमंत्री के सपोर्ट होने का दावा करते हुए कहा कि गलत आदमी को राजी रखने के लिए जहर पीना पड़ता है। इस मामले में तो मुख्यमंत्री नीलकंठ बने हुए हैं। भरत सिंह ने ऐलान किया कि 20 अगस्त को सांगोद में एक बड़ी रैली करेंगे जिसमें सचिन पायलट को भी बुलाया है। उन्होंने प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा और अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी बुलाया है। मुख्यमंत्री को भी निमंत्रण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर इनमें से कोई भी नहीं आएगा तो वह अकेले ही जनता के साथ मिलकर यह रैली निकालेंगे। भरत सिंह के बयान पर प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने कहा कि बड़ों को खुद सत्ता का मोह छोड़ने की पहल करनी चाहिए। उन्हें उदाहरण पेश करने चाहिए। This website uses cookies.
राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के विधायक ने सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सीएम गहलोत को सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए। युवाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे तो प्रदेश का सियासी नक्शा बदल जाएगा। दरअसल, राजस्थान की सियासत में बुधवार को भीषण गर्मी के बीच सियासी पारा बढ़ता नजर आया। अपने बयानों से अपनी ही पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले पूर्व मंत्री सांगोद से कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने सीए को ही नसीहत दे डाली। आपको बता दें कि कांग्रेस के विधायक ने सीएम अशोक गहलोत को कहा कि सत्ता का मोह छोड़ देना चाहिए। युवाओं को आगे बढ़ाने की घोषणा करें प्रदेश का सियासी नक्शा बदल जाएगा। साथ ही उन्होंने सत्ता को शराब के नशे से भी ज्यादा खतरनाक बताया और कहा कि माया का मोह कहां आसानी से छूटने वाला है। विधायक भरत सिंह ने इशारों ही इशारों में मंत्री प्रमोद जैन भाया को मुख्यमंत्री के सपोर्ट होने का दावा करते हुए कहा कि गलत आदमी को राजी रखने के लिए जहर पीना पड़ता है। इस मामले में तो मुख्यमंत्री नीलकंठ बने हुए हैं। भरत सिंह ने ऐलान किया कि बीस अगस्त को सांगोद में एक बड़ी रैली करेंगे जिसमें सचिन पायलट को भी बुलाया है। उन्होंने प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा और अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी बुलाया है। मुख्यमंत्री को भी निमंत्रण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर इनमें से कोई भी नहीं आएगा तो वह अकेले ही जनता के साथ मिलकर यह रैली निकालेंगे। भरत सिंह के बयान पर प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने कहा कि बड़ों को खुद सत्ता का मोह छोड़ने की पहल करनी चाहिए। उन्हें उदाहरण पेश करने चाहिए। This website uses cookies.
अरविंद वैष्णव नारायणपुर - माओवादियों के भारत बंद के दिन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने 5 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार पांच नक्सली आईडी ब्लास्ट, आगजनी समेत कई घटनाओं में शामिल थे. दावा किया गया कि इन नक्सलियों द्वारा किए आईडी ब्लास्ट में दो जवान शहीद हुए थे. ये पूरा मामला कोहकामेटा थाना व कुरुशनार थाना का है. एएसपी नीरज चन्द्राकर ने इसकी पुष्टि की है. इधर दंतेवाड़ा के बोदली-मंगनार मार्ग में माओवादियों ने उत्पात मचा दिया. जगह-जगह सड़क काट दी गई. पेड़ की टहनियों व पत्थरों को सड़क पर इस घटना को मओवादियों की पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी ने अंजाम दिया है. बता दे की मओवादियों ने भारत बंद कर आव्हान कर इलाके में दर्जनों बैनर पोस्टर लगाए. माओवादियों ने पोस्टर में ऑपरेशन प्रहार का विरोध किया है. सातधार पुल के पास सीआरपीएफ कैम्प है, इसके कुछ दूरी पर मलेवाही व पुष्पाल और बादली कैम्प है. 10 से 12 किमी के दायरे में 3-4 सुरक्षाबलों का कैम्प है. उसके बावजूद दिनदहाड़े माओवादियों ने यहां पर भारी संख्या में बैनर पोस्टर लगा दिए. सीआरपीएफ चेकपोस्ट से करीब 200 मीटर की दूरी पर ही पोस्टर लगाए है. जगह-जगह पत्थर रख मार्ग अवरूद्ध कर दिया गया. पुलिया भी खोद दिया गया. यह सड़क मओवादियों के निशाने पर है. आज से ठीक 4 दिन पहले भी इसी जगह पर भारी संख्या में बैनर-पोस्टर लगाए थे, जिसमें व्यापारियों को इस सड़क में आने जाने से मना किया था. व्यापारियों को सीधी चेतावनी दी थी. इससे पुलिस अलर्ट हो गई थी. बताया जा रहा है कि यह घटना माओवादियों के पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी ने अंजाम दिया है. केशकाल के ग्राम मातेंगा में टीकाकरण करने जा रही टीम वापस लौट गई. नक्सलियों ने 26 अप्रैल भारत बंद के पोस्टर टांग रखे थे. एसपी सिद्दार्थ तिवारी ने बताया कि जानकारी मिली के नक्सलियों ने पोस्टर लगाए है. ग्रामीणों ने निकल लिया है. पुलिस मौके के रवाना हुई है. कांकेर बड़गांव थाना क्षेत्र के चिखली गांव के पास नक्सलियों ने बैनर पोस्टर टांग दिया. पखांजूर-भानुप्रतापपुर मार्ग पर भारी मात्रा में पर्चे फेंक फरार हो गया. वहीं जिला मुख्यालाय से महज 15 किलोमीटर दूर मलांजकुडुम घाट पर नक्सलियों ने पेड़ काटकर गिरा दिया. पीढापाल में टॉवर गिराकर आगजनी की. ग्रामीणों ने फोन के माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना दी. छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र सीमा पर भी नक्सलियों का उत्पात मचाय. गढ़चिरौली जिले के पर्मिली-मेदपल्ली इलाके में वाहनों में आगजनी कर दी. नक्सलियों ने आज सुबह छह ट्रैक्टरों और एक टैंकर में आग लगा दी. बता दें कि ऑपरेशन प्रहार के विरोध में नक्सलियों ने भारत बंद बलाया था.
अरविंद वैष्णव नारायणपुर - माओवादियों के भारत बंद के दिन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने पाँच नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार पांच नक्सली आईडी ब्लास्ट, आगजनी समेत कई घटनाओं में शामिल थे. दावा किया गया कि इन नक्सलियों द्वारा किए आईडी ब्लास्ट में दो जवान शहीद हुए थे. ये पूरा मामला कोहकामेटा थाना व कुरुशनार थाना का है. एएसपी नीरज चन्द्राकर ने इसकी पुष्टि की है. इधर दंतेवाड़ा के बोदली-मंगनार मार्ग में माओवादियों ने उत्पात मचा दिया. जगह-जगह सड़क काट दी गई. पेड़ की टहनियों व पत्थरों को सड़क पर इस घटना को मओवादियों की पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी ने अंजाम दिया है. बता दे की मओवादियों ने भारत बंद कर आव्हान कर इलाके में दर्जनों बैनर पोस्टर लगाए. माओवादियों ने पोस्टर में ऑपरेशन प्रहार का विरोध किया है. सातधार पुल के पास सीआरपीएफ कैम्प है, इसके कुछ दूरी पर मलेवाही व पुष्पाल और बादली कैम्प है. दस से बारह किमी के दायरे में तीन-चार सुरक्षाबलों का कैम्प है. उसके बावजूद दिनदहाड़े माओवादियों ने यहां पर भारी संख्या में बैनर पोस्टर लगा दिए. सीआरपीएफ चेकपोस्ट से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर ही पोस्टर लगाए है. जगह-जगह पत्थर रख मार्ग अवरूद्ध कर दिया गया. पुलिया भी खोद दिया गया. यह सड़क मओवादियों के निशाने पर है. आज से ठीक चार दिन पहले भी इसी जगह पर भारी संख्या में बैनर-पोस्टर लगाए थे, जिसमें व्यापारियों को इस सड़क में आने जाने से मना किया था. व्यापारियों को सीधी चेतावनी दी थी. इससे पुलिस अलर्ट हो गई थी. बताया जा रहा है कि यह घटना माओवादियों के पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी ने अंजाम दिया है. केशकाल के ग्राम मातेंगा में टीकाकरण करने जा रही टीम वापस लौट गई. नक्सलियों ने छब्बीस अप्रैल भारत बंद के पोस्टर टांग रखे थे. एसपी सिद्दार्थ तिवारी ने बताया कि जानकारी मिली के नक्सलियों ने पोस्टर लगाए है. ग्रामीणों ने निकल लिया है. पुलिस मौके के रवाना हुई है. कांकेर बड़गांव थाना क्षेत्र के चिखली गांव के पास नक्सलियों ने बैनर पोस्टर टांग दिया. पखांजूर-भानुप्रतापपुर मार्ग पर भारी मात्रा में पर्चे फेंक फरार हो गया. वहीं जिला मुख्यालाय से महज पंद्रह किलोग्राममीटर दूर मलांजकुडुम घाट पर नक्सलियों ने पेड़ काटकर गिरा दिया. पीढापाल में टॉवर गिराकर आगजनी की. ग्रामीणों ने फोन के माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना दी. छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र सीमा पर भी नक्सलियों का उत्पात मचाय. गढ़चिरौली जिले के पर्मिली-मेदपल्ली इलाके में वाहनों में आगजनी कर दी. नक्सलियों ने आज सुबह छह ट्रैक्टरों और एक टैंकर में आग लगा दी. बता दें कि ऑपरेशन प्रहार के विरोध में नक्सलियों ने भारत बंद बलाया था.
व्यवस्थापन (चर्चा । योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:29, 25 अक्टूबर 2017 का अवतरण (Text replacement - "khoj.bharatdiscovery.org" to "bharatkhoj.org") कदपानत्लूरुह तमिलनाडु राज्य में तिनेवेली ज़िले के तेनकासी ताल्लुके का एक प्रमुख क़स्बा है। यह क़स्बा 9° 4' उत्तरी अक्षांश तथा 17° 20' पूर्वी देशांतर पर स्थित है। - तमिलनाडु का यह क़स्बा प्रारंभ से ही अपने हथकरघा उद्योग के लिए जनपद में प्रसिद्ध रहा है। यहाँ कपड़ा बुनने का काम जुलाहों द्वारा होता है। - ↑ कदपानत्लूरुह (हिन्दी)। । अभिगमन तिथिः 01 मार्च, 2014।
व्यवस्थापन द्वारा परिवर्तित बारह:उनतीस, पच्चीस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह का अवतरण कदपानत्लूरुह तमिलनाडु राज्य में तिनेवेली ज़िले के तेनकासी ताल्लुके का एक प्रमुख क़स्बा है। यह क़स्बा नौ° चार' उत्तरी अक्षांश तथा सत्रह° बीस' पूर्वी देशांतर पर स्थित है। - तमिलनाडु का यह क़स्बा प्रारंभ से ही अपने हथकरघा उद्योग के लिए जनपद में प्रसिद्ध रहा है। यहाँ कपड़ा बुनने का काम जुलाहों द्वारा होता है। - ↑ कदपानत्लूरुह । । अभिगमन तिथिः एक मार्च, दो हज़ार चौदह।
इजराइल ने सफलतापूर्वक नए जासूसी उपग्रह के प्रक्षेपण करने की घोषणा की है। करीब दो दशक से इस तरह के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं और ओफेक-16 इसी जासूसी बेड़े में शामिल हो गया है। यरूशलमः इजराइल ने सोमवार को एक नए जासूसी उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किए जाने की घोषणा की जिससे उसे ईरानी परमाणु गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इस बीच इजराइली विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि पिछले सप्ताह एक ईरानी परमाणु संयंत्र में लगी आग के पीछे उनका देश हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि ओफेक-16 उपग्रह से क्षेत्र में खतरों की निगरानी में मदद मिलेगी। इजराइल में करीब दो दशक से इस तरह के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं और ओफेक-16 ऐसे जासूसी उपग्रहों के बेड़े में शामिल हो गया है। अधिकारियों ने खास तौर पर किसी खतरे का नाम नहीं लिया लेकिन ईरान संभवतः उनमें से एक है। ईरान और इजराइल में पुरानी शत्रुता है। इजराइल, ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रक्षेपण के बाद कहा कि उपग्रह की सफलता से इजराइल के दुश्मनों के खिलाफ पास में या दूर तक कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे जमीन पर, समुद्र में, हवा में और यहां तक की अंतरिक्ष में भी कार्रवाई करने की हमारी क्षमता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, " आप अनुमान लगा सकते हैं कि जब आपके पास आकाश में समानांतर रूप से एक से ज्यादा उपग्रह होते हैं तो आप अपने हितों पर ज्यादा बेहतर तरीके से नजर रख सकते हैं। " इजराइल ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के इसके निर्माण, पड़ोसी देश सीरिया में सैन्य मौजूदगी और संदिग्ध परमाणु कार्यकर्म को देखते हुए इजराइल ईरान पर करीबी नजर रखता है। इजराइल की सेना ने कहा कि गाजा पट्टी से फलस्तीनी उग्रवादियों ने दक्षिण इजराइल में दो रॉकेट दागे। इस हमले ने बीते कुछ महीनों से चल रही शांति को भंग कर दिया है। इस हमले के जवाब में इजराइल के विमानों ने गाजा में काबिज इस्लामिक समूह हमास के दो सैन्य ठिकानों पर हमला किया। दोनों ओर से किए गए हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। रॉकेट हमले की जिम्मेदारी अभी किसी फलस्तीनी उग्रवादी समूह ने नहीं ली है। इस साल गाजा-इजराइल के बीच आमतौर पर शांति रही। कोरोना वायरस का खतरा भी इसकी एक वजह है।
इजराइल ने सफलतापूर्वक नए जासूसी उपग्रह के प्रक्षेपण करने की घोषणा की है। करीब दो दशक से इस तरह के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं और ओफेक-सोलह इसी जासूसी बेड़े में शामिल हो गया है। यरूशलमः इजराइल ने सोमवार को एक नए जासूसी उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किए जाने की घोषणा की जिससे उसे ईरानी परमाणु गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इस बीच इजराइली विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि पिछले सप्ताह एक ईरानी परमाणु संयंत्र में लगी आग के पीछे उनका देश हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि ओफेक-सोलह उपग्रह से क्षेत्र में खतरों की निगरानी में मदद मिलेगी। इजराइल में करीब दो दशक से इस तरह के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं और ओफेक-सोलह ऐसे जासूसी उपग्रहों के बेड़े में शामिल हो गया है। अधिकारियों ने खास तौर पर किसी खतरे का नाम नहीं लिया लेकिन ईरान संभवतः उनमें से एक है। ईरान और इजराइल में पुरानी शत्रुता है। इजराइल, ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रक्षेपण के बाद कहा कि उपग्रह की सफलता से इजराइल के दुश्मनों के खिलाफ पास में या दूर तक कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे जमीन पर, समुद्र में, हवा में और यहां तक की अंतरिक्ष में भी कार्रवाई करने की हमारी क्षमता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, " आप अनुमान लगा सकते हैं कि जब आपके पास आकाश में समानांतर रूप से एक से ज्यादा उपग्रह होते हैं तो आप अपने हितों पर ज्यादा बेहतर तरीके से नजर रख सकते हैं। " इजराइल ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के इसके निर्माण, पड़ोसी देश सीरिया में सैन्य मौजूदगी और संदिग्ध परमाणु कार्यकर्म को देखते हुए इजराइल ईरान पर करीबी नजर रखता है। इजराइल की सेना ने कहा कि गाजा पट्टी से फलस्तीनी उग्रवादियों ने दक्षिण इजराइल में दो रॉकेट दागे। इस हमले ने बीते कुछ महीनों से चल रही शांति को भंग कर दिया है। इस हमले के जवाब में इजराइल के विमानों ने गाजा में काबिज इस्लामिक समूह हमास के दो सैन्य ठिकानों पर हमला किया। दोनों ओर से किए गए हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। रॉकेट हमले की जिम्मेदारी अभी किसी फलस्तीनी उग्रवादी समूह ने नहीं ली है। इस साल गाजा-इजराइल के बीच आमतौर पर शांति रही। कोरोना वायरस का खतरा भी इसकी एक वजह है।
यह स्मारक राष्ट्रीय ध्वज खादी के कपड़े से बनाया गया दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज है। इसको शनिवार को "सेना दिवस" का उत्सव मनाने के लिए जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक भव्य सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान लहराया जाएगा। राष्ट्रीय ध्वज लोंगेवाला में प्रदर्शित किया जाएगा, जो वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक युद्ध का मुख्य केंद्र था। 2 अक्टूबर 2021 को लेह में राष्ट्रीय ध्वज के अनावरण के बाद से यह खादी के द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए बनाया गया 5वां ध्वज होगा। दूसरा तिरंगा झंडा 8 अक्टूबर 2021 को वायु सेना दिवस के अवसर पर हिंडन एयरबेस पर और फिर 21 अक्टूबर 2021 को लाल किले पर प्रदर्शित किया गया था, उस दिन भारत ने 100 करोड़ कोविड टीकाकरण का आंकड़ा पूरा किया था। 4 दिसंबर 2021 को नौसेना दिवस मनाने के लिए मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास नौसेना डॉकयार्ड में स्मारक राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भारतीयता की सामूहिक भावना और खादी की विरासत शिल्पकला का प्रतीक है। इस ध्वज को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा स्वतंत्रता के 75 साल के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाने के लिए तैयार किया गया है। ऐतिहासिक अवसरों पर प्रमुख स्थानों पर ध्वज को प्रदर्शित करने के लिए केवीआईसी ने इसे रक्षा बलों को सौंप दिया है। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है तथा इसका वजन (लगभग) 1400 किलोग्राम है। इस झंडे को तैयार करने में खादी के 70 कारीगरों को 49 दिन लगे थे। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण से खादी कारीगरों और संबद्ध श्रमिकों के लिए करीब 3500 घंटे का अतिरिक्त कार्य उपलब्ध हुआ है। झंडे को बनाने में 4500 मीटर हाथ से काते और हाथ से बुने हुए खादी के सूती ध्वजपट का इस्तेमाल किया गया है, जो 33, 750 वर्ग फुट के कुल क्षेत्रफल को कवर करता है। ध्वज में अशोक चक्र का व्यास 30 फीट है।
यह स्मारक राष्ट्रीय ध्वज खादी के कपड़े से बनाया गया दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज है। इसको शनिवार को "सेना दिवस" का उत्सव मनाने के लिए जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक भव्य सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान लहराया जाएगा। राष्ट्रीय ध्वज लोंगेवाला में प्रदर्शित किया जाएगा, जो वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक युद्ध का मुख्य केंद्र था। दो अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को लेह में राष्ट्रीय ध्वज के अनावरण के बाद से यह खादी के द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए बनाया गया पाँचवां ध्वज होगा। दूसरा तिरंगा झंडा आठ अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को वायु सेना दिवस के अवसर पर हिंडन एयरबेस पर और फिर इक्कीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को लाल किले पर प्रदर्शित किया गया था, उस दिन भारत ने एक सौ करोड़ कोविड टीकाकरण का आंकड़ा पूरा किया था। चार दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को नौसेना दिवस मनाने के लिए मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास नौसेना डॉकयार्ड में स्मारक राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भारतीयता की सामूहिक भावना और खादी की विरासत शिल्पकला का प्रतीक है। इस ध्वज को खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा स्वतंत्रता के पचहत्तर साल के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाने के लिए तैयार किया गया है। ऐतिहासिक अवसरों पर प्रमुख स्थानों पर ध्वज को प्रदर्शित करने के लिए केवीआईसी ने इसे रक्षा बलों को सौंप दिया है। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज दो सौ पच्चीस फीट लंबा और एक सौ पचास फीट चौड़ा है तथा इसका वजन एक हज़ार चार सौ किलोग्रामग्राम है। इस झंडे को तैयार करने में खादी के सत्तर कारीगरों को उनचास दिन लगे थे। स्मारक राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण से खादी कारीगरों और संबद्ध श्रमिकों के लिए करीब तीन हज़ार पाँच सौ घंटाटे का अतिरिक्त कार्य उपलब्ध हुआ है। झंडे को बनाने में चार हज़ार पाँच सौ मीटर हाथ से काते और हाथ से बुने हुए खादी के सूती ध्वजपट का इस्तेमाल किया गया है, जो तैंतीस, सात सौ पचास वर्ग फुट के कुल क्षेत्रफल को कवर करता है। ध्वज में अशोक चक्र का व्यास तीस फीट है।
Horoscope Today, 02 April 2019: मेष राशिफलः मेष राशि वालों पर मां लक्ष्मी की कृपा रहेगी। धन लाभ का योग बन रहा है। करियर में जबरदस्त उन्नति देखने को मिल सकती है। लेकिन सेहत का थोड़ा ध्यान रखें। बाहर का खाना खाने से आपको बचना होगा। वृषभ राशिफलः आर्थिक स्थिति में सुधार आने वाला है। जिससे धन से संबंधी कष्ट दूर हो पाएंगे। घर का माहौल काफी अच्छा रहने वाला है। कोई शुभ कार्य हो सकता है। सेहत के लिए भी दिन शुभ है। मिथुन राशिफलः आज आपको अपने किसी तनाव से मुक्ति मिल सकती है। हमसफर का भरपूर साथ मिलने वाला है। नौकरी बदलने से आपको फायदा मिलेगा। इनकम में बढ़ोतरी हो सकती है। बच्चों का स्वास्थ्य थोड़ा परेशान करने वाला है। कर्क राशिफलः घर में किसी बुजुर्ग की तबीयत खराब हो सकती है। निवेश करने के लिए दिन अच्छा नहीं है। इंटरव्यू पर जाने से पहले मां सरस्वती की पूजा कर लें। घर में कोई नया मेहमान आने वाला है। सिंह राशिफलः खर्च बढ़ने की संभावना है। स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर धन ज्यादा खर्च हो सकता है। इसलिए सेहत का विशेष ध्यान रखें। कार्यस्थल पर आपके साथी काम बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। जिससे आपका दिन तनाव भरा रह सकता है। पीले रंग के कपड़े पहनना आपके लिए लाभकारी रहेगा। कन्या राशिफलः आज आपका मन काफी अशांत रहने वाला है। किसी ना किसी बात पर झगड़े होने की संभावना है। इसलिए सुबह कोई भी काम शुरू करने से पहले गायत्री मंत्र का जाप कर लें। इससे मन शांत होगा। तुला राशिफलः अगर आप नौकरी की तलाश में लगे हुए हैं। तो आज का दिन आपके लिए काफी शुभ रहने वाला है। पति पत्नी के संबंध काफी मधुर रहेंगे। वाहन खरीदने का योग बन रहा है। बच्चों का मन पढ़ाई में ज्यादा लगेगा। वृश्चिक राशिफलः आय में बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर बिजनेस वालों के लिए दिन बेहद शुभ रहने वाला है। किसी खास व्यक्ति की सेहत में सुधार आ सकता है। जिससे आपका मन प्रसन्न रहने की उम्मीद है। प्रेम संबंधों के लिए दिन थोड़ा सा मुश्किल रह सकता है। धनु राशिफलः आपको किसी पुराने निवेश से धन हानि हो सकती है। जिसकी वजह से आज आपका मन उदास रहने वाला है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने शुभ समय और दिन के बारे में जान लें। इससे आपका नुकसान होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। दांपत्य जीवन के लिए दिन शुभ रहने वाला है। मकर राशिफलः आज आप अपने पुराने रूके हुए कामों को पूरा करने की कोशिश करेंगे। प्यार का इजहार करने के लिए दिन उत्तम है। अचानक से धन लाभ होता दिखाई दे रहा है। सफेद रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ रहेगा। कुंभ राशिफलः दिन काफी खुशनुमा रहने वाला है। हमसफर से कोई खास गिफ्ट मिल सकता है। किसी जरूरी काम में हमसफर का साथ मिल सकता है। यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। सेहत के लिए दिन सामान्य रहने वाला है। मीन राशिफलः किसी खास से आपको धोखा मिलता दिखाई दे रहा है। जिसकी वजह से आप काफी परेशान रहने वाले हैं। व्यापार में आपको धन हानि हो सकती है। किसी भी काम को करने में सावधानी बरतनी होगी। प्रेम संबंधों के लिए दिन सामान्य रहेगा।
Horoscope Today, दो अप्रैलil दो हज़ार उन्नीस: मेष राशिफलः मेष राशि वालों पर मां लक्ष्मी की कृपा रहेगी। धन लाभ का योग बन रहा है। करियर में जबरदस्त उन्नति देखने को मिल सकती है। लेकिन सेहत का थोड़ा ध्यान रखें। बाहर का खाना खाने से आपको बचना होगा। वृषभ राशिफलः आर्थिक स्थिति में सुधार आने वाला है। जिससे धन से संबंधी कष्ट दूर हो पाएंगे। घर का माहौल काफी अच्छा रहने वाला है। कोई शुभ कार्य हो सकता है। सेहत के लिए भी दिन शुभ है। मिथुन राशिफलः आज आपको अपने किसी तनाव से मुक्ति मिल सकती है। हमसफर का भरपूर साथ मिलने वाला है। नौकरी बदलने से आपको फायदा मिलेगा। इनकम में बढ़ोतरी हो सकती है। बच्चों का स्वास्थ्य थोड़ा परेशान करने वाला है। कर्क राशिफलः घर में किसी बुजुर्ग की तबीयत खराब हो सकती है। निवेश करने के लिए दिन अच्छा नहीं है। इंटरव्यू पर जाने से पहले मां सरस्वती की पूजा कर लें। घर में कोई नया मेहमान आने वाला है। सिंह राशिफलः खर्च बढ़ने की संभावना है। स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर धन ज्यादा खर्च हो सकता है। इसलिए सेहत का विशेष ध्यान रखें। कार्यस्थल पर आपके साथी काम बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। जिससे आपका दिन तनाव भरा रह सकता है। पीले रंग के कपड़े पहनना आपके लिए लाभकारी रहेगा। कन्या राशिफलः आज आपका मन काफी अशांत रहने वाला है। किसी ना किसी बात पर झगड़े होने की संभावना है। इसलिए सुबह कोई भी काम शुरू करने से पहले गायत्री मंत्र का जाप कर लें। इससे मन शांत होगा। तुला राशिफलः अगर आप नौकरी की तलाश में लगे हुए हैं। तो आज का दिन आपके लिए काफी शुभ रहने वाला है। पति पत्नी के संबंध काफी मधुर रहेंगे। वाहन खरीदने का योग बन रहा है। बच्चों का मन पढ़ाई में ज्यादा लगेगा। वृश्चिक राशिफलः आय में बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर बिजनेस वालों के लिए दिन बेहद शुभ रहने वाला है। किसी खास व्यक्ति की सेहत में सुधार आ सकता है। जिससे आपका मन प्रसन्न रहने की उम्मीद है। प्रेम संबंधों के लिए दिन थोड़ा सा मुश्किल रह सकता है। धनु राशिफलः आपको किसी पुराने निवेश से धन हानि हो सकती है। जिसकी वजह से आज आपका मन उदास रहने वाला है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने शुभ समय और दिन के बारे में जान लें। इससे आपका नुकसान होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। दांपत्य जीवन के लिए दिन शुभ रहने वाला है। मकर राशिफलः आज आप अपने पुराने रूके हुए कामों को पूरा करने की कोशिश करेंगे। प्यार का इजहार करने के लिए दिन उत्तम है। अचानक से धन लाभ होता दिखाई दे रहा है। सफेद रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ रहेगा। कुंभ राशिफलः दिन काफी खुशनुमा रहने वाला है। हमसफर से कोई खास गिफ्ट मिल सकता है। किसी जरूरी काम में हमसफर का साथ मिल सकता है। यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। सेहत के लिए दिन सामान्य रहने वाला है। मीन राशिफलः किसी खास से आपको धोखा मिलता दिखाई दे रहा है। जिसकी वजह से आप काफी परेशान रहने वाले हैं। व्यापार में आपको धन हानि हो सकती है। किसी भी काम को करने में सावधानी बरतनी होगी। प्रेम संबंधों के लिए दिन सामान्य रहेगा।
बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा 13 मई को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा से सगाई करने जा रही हैं। उनकी सेरेमनी नई दिल्ली में होगी। राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सांसद हैं। 2022 में वे महज 33 साल की उम्र में राज्यसभा के सांसद चुने गए। राघव चड्ढा ने 2019 में अपना पहला आम चुनाव लड़ा। साउथ दिल्ली से उन्हें भारतीय जनता पार्टी के रमेश विधूड़ी ने हराया था। हालांकि, वे दूसरे स्थान पर रहे थे। 2020 में राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और बीजेपी कैंडिडेट आरपी सिंह को 20 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। राघव चड्ढा राज्य सभा सांसद तो हैं ही, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो वे चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA की प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। राघव चड्ढा का जन्म 11 नवम्बर 1988 को दिल्ल्ली में हुआ और यहीं के मॉडर्न स्कूल से उनकी स्कूलिंग और दिल्ली विश्वविद्यालय से उनकी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई। फिर उन्होंने CA की पढ़ाई की। राघव चड्ढा एग्जीक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम में सर्टिफिकेट लेने लंदन गए थे। उन्होंने वहां से पढ़ाई की और फिर डेलोइट, श्याम मालपानी और ग्रांट थोर्नटन जैसी फर्म्स में भी काम भी किया। 2011 में राघव चड्ढा अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट से जुड़े थे। यहीं उनकी मुलाक़ात अरविंद केजरीवाल से हुई। वे आम आदमी पार्टी में इसकी स्थापना के समय से ही हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो राघव चड्ढा परिणीति चोपड़ा से करीब 6 महीने पहले उस वक्त पहली बार मिले थे, जब एक्ट्रेस पंजाब में अपनी फिल्म 'कोडनेम तिरंगा' की शूटिंग कर रही थीं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा तेरह मई को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा से सगाई करने जा रही हैं। उनकी सेरेमनी नई दिल्ली में होगी। राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सांसद हैं। दो हज़ार बाईस में वे महज तैंतीस साल की उम्र में राज्यसभा के सांसद चुने गए। राघव चड्ढा ने दो हज़ार उन्नीस में अपना पहला आम चुनाव लड़ा। साउथ दिल्ली से उन्हें भारतीय जनता पार्टी के रमेश विधूड़ी ने हराया था। हालांकि, वे दूसरे स्थान पर रहे थे। दो हज़ार बीस में राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और बीजेपी कैंडिडेट आरपी सिंह को बीस हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। राघव चड्ढा राज्य सभा सांसद तो हैं ही, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो वे चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA की प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। राघव चड्ढा का जन्म ग्यारह नवम्बर एक हज़ार नौ सौ अठासी को दिल्ल्ली में हुआ और यहीं के मॉडर्न स्कूल से उनकी स्कूलिंग और दिल्ली विश्वविद्यालय से उनकी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई। फिर उन्होंने CA की पढ़ाई की। राघव चड्ढा एग्जीक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम में सर्टिफिकेट लेने लंदन गए थे। उन्होंने वहां से पढ़ाई की और फिर डेलोइट, श्याम मालपानी और ग्रांट थोर्नटन जैसी फर्म्स में भी काम भी किया। दो हज़ार ग्यारह में राघव चड्ढा अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट से जुड़े थे। यहीं उनकी मुलाक़ात अरविंद केजरीवाल से हुई। वे आम आदमी पार्टी में इसकी स्थापना के समय से ही हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो राघव चड्ढा परिणीति चोपड़ा से करीब छः महीने पहले उस वक्त पहली बार मिले थे, जब एक्ट्रेस पंजाब में अपनी फिल्म 'कोडनेम तिरंगा' की शूटिंग कर रही थीं।
शरद ऋतु में, टमाटर की मुख्य फसल कटाई के बाद,कई गार्डनर्स सोच रहे हैं कि हरी फलों के साथ क्या करना है। रिपेन में मौसम की स्थिति के कारण समय नहीं होगा, और दयालुता फेंक दी जाएगी। हरे टमाटर से आप बहुत सारे स्वादिष्ट स्नैक्स पका सकते हैं। फिकलिंग और फिकलिंग फलों के लिए कई पारंपरिक व्यंजन हैं, जो पकाए जाने वाले और मसालों के साथ अलग-अलग होते हैं। लेकिन हम तले हुए हरे टमाटर को पकाते हुए कैसे रहेंगे। इस पकवान के लिए व्यंजन असामान्य हैं, लेकिन परिणाम प्रभावशाली हैं। यह पकवान दक्षिणी देशों से हमारे पास आया था। यह अमेरिका है, जहां तली हुई हरी टमाटर, इस लेख में है कि एक तस्वीर के साथ नुस्खा, बहुत लोकप्रिय हैं और सब्जियों, पकाया या विभिन्न व्याख्याओं में शतावरी ग्रील्ड की प्रधानता को स्वीकार नहीं करते हैं में भी लोकप्रिय है। तैयार यह कई वेरिएंट हो सकता है। यह एक अलग पकवान या नाश्ते हो सकता है। तली हुई हरी टमाटर नाश्ते के लिए खिलाया जा सकता है। बहुत अच्छा वे मसालेदार सॉस के साथ संयुक्त कर रहे हैं। इस पकवान को तैयार करने के लिए आपको बहुत कम आवश्यकता हैअवयव, इसके अलावा, वे सभी रसोई में हैं। तो, अगर आपके पास कुछ पके हुए टमाटर नहीं हैं, तो निम्न नुस्खा का उपयोग करें। तला हुआ हरा टमाटर बनाने के लिए, जिसकी नुस्खा बहुत सरल है, आपको 5-6 बड़े फल, एक गिलास आटा, दो चिकन अंडे और वनस्पति तेल लेने की जरूरत है। टमाटर लगभग 0.5 सेंटीमीटर मोटी सर्कल में कटौती। एक अलग कटोरे में अंडे whisk। हम फ्राइंग पैन को आग पर डालते हैं और वनस्पति तेल डालते हैं। यह पकवान संयुक्त राज्य अमेरिका में विशेष रूप से लोकप्रिय है। खाना पकाने के लिए, 400 ग्राम बेकन, आधे गिलास दूध, दो बड़े हरे टमाटर, आधा गिलास मक्का स्टार्च, स्वाद के लिए नमक और काली मिर्च का एक छोटा चम्मच लें। हम आग पर फ्राइंग पैन डालते हैं और बेकन के स्लाइस फ्राइज़ करते हैं। आग छोटी होनी चाहिए। प्रक्रिया में, बेकन अपनी सभी वसा देगा, जिस पर हम टमाटर फ्राइज़ करेंगे। इस बीच, हर टमाटर बहुत पतली हलकों में कटौती नहीं होती है। इस नुस्खा में क्लैरेट के साथ तैयार किया गया हैएक तीव्र सॉस जो पकवान को असामान्य स्वाद देता है। 4 बड़े टमाटर, दूध के 100 मिलीलीटर, एक अंडे, मक्खन के 100 ग्राम, ब्रेडक्रंब या कॉर्नमील के तीन बड़े चम्मच, एक गर्म मिर्च सॉस या ताबास्को और नमक लें। टमाटर धोया और 10 मिलीमीटर से अधिक सर्कल में कटौती। अलग-अलग, अंडे को दूध से हराएं और इस मिश्रण में थोड़ा मसालेदार सॉस (स्वाद के लिए) जोड़ें। नमक और काली मिर्च के साथ आटा या बिस्कुट मिलाएं। एक फ्राइंग पैन में, मक्खन पिघलाएं, जिसे वनस्पति तेल के साथ मिश्रित किया जा सकता है। अपने क्लासिक संस्करण में टमाटर तैयार करेंलंबे भंडारण के लिए यह असंभव है। लेकिन एक नुस्खा है जो पारंपरिक के करीब है। फ्राइड हरे टमाटर (सर्दी के लिए एक नुस्खा!) इस प्रकार तैयार है। हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे। टमाटर को धोया जाता है और सर्कल में काटा जाता है। फिर उन्हें वनस्पति तेल में प्रत्येक तरफ फ्राइये। हमने पूर्व तैयार डिब्बे में तैयार टमाटर लगाए। हर कुछ परतों के बाद मसालों (काली मिर्च और नमक) डाल दिया। इस पकवान में असामान्य स्वाद है। कुरकुरा, प्रकाश अम्लता के अंदर और लहसुन की नाजुक सुगंध भी लोग हैं, जो खाने के बारे में एक बहुत कुछ पता है प्रभावित करेगा। लहसुन नुस्खा के साथ तले हुए हरे टमाटर जो हम प्रदान करते हैं तैयार करने के लिए, आप तीन हरे टमाटर बड़े आकार, मकई का आटा आधा कप, छाछ की 100 मिलीलीटर की जरूरत, रोटी के टुकड़ों, नमक, काली मिर्च, वनस्पति तेल, मलाई और मेयोनेज़ के 100 मिलीलीटर की एक चौथाई कप, 1-2 लहसुन लौंग शुद्ध।
शरद ऋतु में, टमाटर की मुख्य फसल कटाई के बाद,कई गार्डनर्स सोच रहे हैं कि हरी फलों के साथ क्या करना है। रिपेन में मौसम की स्थिति के कारण समय नहीं होगा, और दयालुता फेंक दी जाएगी। हरे टमाटर से आप बहुत सारे स्वादिष्ट स्नैक्स पका सकते हैं। फिकलिंग और फिकलिंग फलों के लिए कई पारंपरिक व्यंजन हैं, जो पकाए जाने वाले और मसालों के साथ अलग-अलग होते हैं। लेकिन हम तले हुए हरे टमाटर को पकाते हुए कैसे रहेंगे। इस पकवान के लिए व्यंजन असामान्य हैं, लेकिन परिणाम प्रभावशाली हैं। यह पकवान दक्षिणी देशों से हमारे पास आया था। यह अमेरिका है, जहां तली हुई हरी टमाटर, इस लेख में है कि एक तस्वीर के साथ नुस्खा, बहुत लोकप्रिय हैं और सब्जियों, पकाया या विभिन्न व्याख्याओं में शतावरी ग्रील्ड की प्रधानता को स्वीकार नहीं करते हैं में भी लोकप्रिय है। तैयार यह कई वेरिएंट हो सकता है। यह एक अलग पकवान या नाश्ते हो सकता है। तली हुई हरी टमाटर नाश्ते के लिए खिलाया जा सकता है। बहुत अच्छा वे मसालेदार सॉस के साथ संयुक्त कर रहे हैं। इस पकवान को तैयार करने के लिए आपको बहुत कम आवश्यकता हैअवयव, इसके अलावा, वे सभी रसोई में हैं। तो, अगर आपके पास कुछ पके हुए टमाटर नहीं हैं, तो निम्न नुस्खा का उपयोग करें। तला हुआ हरा टमाटर बनाने के लिए, जिसकी नुस्खा बहुत सरल है, आपको पाँच-छः बड़े फल, एक गिलास आटा, दो चिकन अंडे और वनस्पति तेल लेने की जरूरत है। टमाटर लगभग शून्य दशमलव पाँच सेंटीमीटर मोटी सर्कल में कटौती। एक अलग कटोरे में अंडे whisk। हम फ्राइंग पैन को आग पर डालते हैं और वनस्पति तेल डालते हैं। यह पकवान संयुक्त राज्य अमेरिका में विशेष रूप से लोकप्रिय है। खाना पकाने के लिए, चार सौ ग्राम बेकन, आधे गिलास दूध, दो बड़े हरे टमाटर, आधा गिलास मक्का स्टार्च, स्वाद के लिए नमक और काली मिर्च का एक छोटा चम्मच लें। हम आग पर फ्राइंग पैन डालते हैं और बेकन के स्लाइस फ्राइज़ करते हैं। आग छोटी होनी चाहिए। प्रक्रिया में, बेकन अपनी सभी वसा देगा, जिस पर हम टमाटर फ्राइज़ करेंगे। इस बीच, हर टमाटर बहुत पतली हलकों में कटौती नहीं होती है। इस नुस्खा में क्लैरेट के साथ तैयार किया गया हैएक तीव्र सॉस जो पकवान को असामान्य स्वाद देता है। चार बड़े टमाटर, दूध के एक सौ मिलीलीटर, एक अंडे, मक्खन के एक सौ ग्राम, ब्रेडक्रंब या कॉर्नमील के तीन बड़े चम्मच, एक गर्म मिर्च सॉस या ताबास्को और नमक लें। टमाटर धोया और दस मिलीमीटर से अधिक सर्कल में कटौती। अलग-अलग, अंडे को दूध से हराएं और इस मिश्रण में थोड़ा मसालेदार सॉस जोड़ें। नमक और काली मिर्च के साथ आटा या बिस्कुट मिलाएं। एक फ्राइंग पैन में, मक्खन पिघलाएं, जिसे वनस्पति तेल के साथ मिश्रित किया जा सकता है। अपने क्लासिक संस्करण में टमाटर तैयार करेंलंबे भंडारण के लिए यह असंभव है। लेकिन एक नुस्खा है जो पारंपरिक के करीब है। फ्राइड हरे टमाटर इस प्रकार तैयार है। हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे। टमाटर को धोया जाता है और सर्कल में काटा जाता है। फिर उन्हें वनस्पति तेल में प्रत्येक तरफ फ्राइये। हमने पूर्व तैयार डिब्बे में तैयार टमाटर लगाए। हर कुछ परतों के बाद मसालों डाल दिया। इस पकवान में असामान्य स्वाद है। कुरकुरा, प्रकाश अम्लता के अंदर और लहसुन की नाजुक सुगंध भी लोग हैं, जो खाने के बारे में एक बहुत कुछ पता है प्रभावित करेगा। लहसुन नुस्खा के साथ तले हुए हरे टमाटर जो हम प्रदान करते हैं तैयार करने के लिए, आप तीन हरे टमाटर बड़े आकार, मकई का आटा आधा कप, छाछ की एक सौ मिलीलीटर की जरूरत, रोटी के टुकड़ों, नमक, काली मिर्च, वनस्पति तेल, मलाई और मेयोनेज़ के एक सौ मिलीलीटर की एक चौथाई कप, एक-दो लहसुन लौंग शुद्ध।
Maharashtra देवेंद्र फड़णवीस ने महाराष्ट्र सरकार ने 14-15 दिसंबर को केवल दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया है। हमने मांग की थी कि इसे दो सप्ताह के लिए चला जाना चाहिए। महाराष्ट्र में किसानों के लिए समस्या है और उनकी मदद नहीं की जा रही है। मुंबई, एएनआइ। Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़णवीस ने वीरवार को कहा कि राज्य सरकार ने 14-15 दिसंबर को केवल दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया है। हमने मांग की थी कि इसे दो सप्ताह के लिए चला जाना चाहिए। महाराष्ट्र में किसानों के लिए समस्या है और उनकी मदद नहीं की जा रही है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। इस मौके पर देवेंद्र फड़णवीस के मुताबिक, हम मांग करते हैं कि इस तरह के मुद्दों को चर्चा के लिए उठाया जाए और समाधान की मांग की जाए, लेकिन राज्य सरकार कुछ भी चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। एक तरह से राज्य सरकार विधानसभा सत्र का सामना नहीं करना चाहती है। इससे पहले महाराष्ट्र में उद्धव सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था कि सरकार के एक वर्ष पूरे होने के पहले आए सुप्रीम कोर्ट एवं बांबे हाई कोर्ट के फैसलों से यह सिद्ध हो गया है कि राज्य में संविधान ध्वस्त होने जैसी स्थिति पैदा गई है। सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। इस स्थिति में हम राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष की भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उद्धव सरकार किसानों के हितों की उपेक्षा कर रही है और मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह विफल है। फड़णवीस ने कोर्ट के जिन दो फैसलों का जिक्र किया, उनमें से एक अभिनेत्री कंगना रनोट का बंगला तोड़े जाने पर हाई कोर्ट का निर्णय और दूसरा, पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर शीर्ष कोर्ट का फैसला है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दो प्रकरणों से ही राज्य में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का पता चलता है। सरकार के विरुद्ध बोलने वालों को जेल में डालने का रवैया अपनाया जा रहा है। फड़नवीस ने यह सवाल भी उठाया कि कोर्ट द्वारा की गई इन टिप्पणियों के लिए किसको जिम्मेदार ठहराया जाएगा? गृह मंत्री, मुख्यमंत्री या फिर उनके आदेशों का पालन करने वाले अधिकारियों को? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का एक वर्ष पूरा हुआ, लेकिन उपलब्धि कुछ भी नहीं है।
Maharashtra देवेंद्र फड़णवीस ने महाराष्ट्र सरकार ने चौदह-पंद्रह दिसंबर को केवल दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया है। हमने मांग की थी कि इसे दो सप्ताह के लिए चला जाना चाहिए। महाराष्ट्र में किसानों के लिए समस्या है और उनकी मदद नहीं की जा रही है। मुंबई, एएनआइ। Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़णवीस ने वीरवार को कहा कि राज्य सरकार ने चौदह-पंद्रह दिसंबर को केवल दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया है। हमने मांग की थी कि इसे दो सप्ताह के लिए चला जाना चाहिए। महाराष्ट्र में किसानों के लिए समस्या है और उनकी मदद नहीं की जा रही है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। इस मौके पर देवेंद्र फड़णवीस के मुताबिक, हम मांग करते हैं कि इस तरह के मुद्दों को चर्चा के लिए उठाया जाए और समाधान की मांग की जाए, लेकिन राज्य सरकार कुछ भी चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। एक तरह से राज्य सरकार विधानसभा सत्र का सामना नहीं करना चाहती है। इससे पहले महाराष्ट्र में उद्धव सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था कि सरकार के एक वर्ष पूरे होने के पहले आए सुप्रीम कोर्ट एवं बांबे हाई कोर्ट के फैसलों से यह सिद्ध हो गया है कि राज्य में संविधान ध्वस्त होने जैसी स्थिति पैदा गई है। सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। इस स्थिति में हम राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष की भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उद्धव सरकार किसानों के हितों की उपेक्षा कर रही है और मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह विफल है। फड़णवीस ने कोर्ट के जिन दो फैसलों का जिक्र किया, उनमें से एक अभिनेत्री कंगना रनोट का बंगला तोड़े जाने पर हाई कोर्ट का निर्णय और दूसरा, पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर शीर्ष कोर्ट का फैसला है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दो प्रकरणों से ही राज्य में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का पता चलता है। सरकार के विरुद्ध बोलने वालों को जेल में डालने का रवैया अपनाया जा रहा है। फड़नवीस ने यह सवाल भी उठाया कि कोर्ट द्वारा की गई इन टिप्पणियों के लिए किसको जिम्मेदार ठहराया जाएगा? गृह मंत्री, मुख्यमंत्री या फिर उनके आदेशों का पालन करने वाले अधिकारियों को? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का एक वर्ष पूरा हुआ, लेकिन उपलब्धि कुछ भी नहीं है।
एकरूप, परमपरिणामिकभावरूप, ज्ञायकरूप है, शुद्ध है, पवित्र है, प्रगट है । किन्तु किसको ? कि जिसने पर का लक्ष्य छोड़कर अन्तर्मुख होकर एक इस ज्ञायकभाव की सेवां- उपासना की, उसकी पर्याय में सम्यग्दर्शन-ज्ञान तथा चारित्र का अंश प्रगट हुआ तब उसने 'ज्ञायकभाव परम शुद्ध है' - ऐसा जाना । उसकी अपेक्षा ही यह कहा जा सकता है कि ज्ञायकभाव परम शुद्ध है । ज्ञायकभाव की दृष्टि होने पर जो शुद्धता प्रगट हुई, उसे इस शुद्धता में स्व का औौर पर का ज्ञान परिणमनरूप हुआ । यह ज्ञान पर का, निमित्त का या ज्ञेय का कार्य नहीं है, अपनी ज्ञान की पर्याय जो परिणमित हुई उसका कर्त्ता वह स्वयं ही है और जो पर्याय परिणामी, वह उसका स्वयं का कार्य है । अहो ! यह छठी गाथा अलौकिक है । यह तो छठी का अफर लेख । लौकिक में 'छट्टी का लेख' कहावत प्रसिद्ध है । कहते हैं - वालक के जन्म के छह दिन बाद विधाता भाग्य लेख लिखने आता है, वहाँ कागज वगैरह रखते हैं; परन्तु वहाँ तो कागज ऐसा का ऐसा कोरा ही रहता है, क्योंकि वहाँ कोई विधाता नहीं है । परन्तु जो भगवान चिदानन्द का नाथ स्वयं पर्याय में ज्ञात हुआ- वही निश्चय विधाता है। उसने यह लेख लिखा कि इस आत्मा को अल्पकाल में मुक्ति है । ज्ञायक के सन्मुख होने पर, जब ज्ञायक शुद्ध जानने में आया, तब मुक्ति - लेख निश्चित लिखा जाता है, ऐसी अलौकिक बात इस गाथा में है । गाथा ६ की टीका पर प्रवचन वस्तु स्वयं स्वयं से ही सिद्ध होने से अनादि सत्तास्वरूप है । ध्रुवज्ञायकभाव का अस्तित्व स्वयं से ही है, किसी ईश्वर ने इसे बनाया नहीं है । स्वरूप दिसत्तावाला है अर्थात् इसका अनादि से ही अस्तित्व है। इसकी सत्ता कोई नई नहीं है । तथा कभी विनाश नहीं होगा, अतः अनंत है । भविष्य में भी निरन्तर ध्रुवस्वरूप रहेगा । इसप्रकार आदि अंतरहित ध्रुवज्ञायकभाव दिसत्तारूप है । यह पर्यायरहित ध्रुव की बात है । पर्याय तो नाशवान है। केवलज्ञान की क्षायिक पर्याय हो तो भी वह एकसमय की पर्याय है, इससे नाशवान है । यह तो त्रिकाली ज्ञायकस्वभाव चैतन्यप्रकाश के नूर के पूर से भरा हुआ भगवान आत्मा है, वह अविनाशी वस्तु है । अनादि अनंत अब वर्तमान की बात करते हैं कि नित्य उद्योतरूप होने से क्षरिएक नहीं है अर्थात् जैसा वर्त्तमान है वैसा का वैसा ही त्रिकाल है, वर्त्तमानपने स्वयं स्थित रहनेवाला है और स्पष्ट प्रकाशमान ज्योति है । ग्रहाहा....! पर की अपेक्षा रखे बिना स्वयं, स्वयं के ज्ञान में स्पष्ट ज्ञात होता है। ऐसी चैतन्यज्योति स्वयं है । प्रवचनसार गाथा १७२ की टीका में अलिंगग्रहरण के छठे बोल में आता है कि अपने स्वभाव से जाना जा सके, ऐसा प्रत्यक्ष ज्ञाता है । सर्वत्र इस शैली से ही बात की है । भगवान आत्मा मतिश्रुतज्ञान में स्वयं से प्रत्यक्ष जाना जा सके, ऐसी चैतन्यज्योति है । आत्मा परोक्ष या ढका हुआ नहीं रहता । अहा ! ज्ञायकदेव जिनके ज्ञान में समाया है, उनकी यह बात है । ऐसा ज्ञायक एकभाव है । भाषा तो देखो ! ज्ञायक एकभाव है अर्थात् एकस्वरूप है । उपशमभाव, क्षायिकभाव आदि पर्यायभाव तो अनेक हैं; यह तो त्रिकाल एकरूप, सदृश-सदृश, सामान्य ज्ञायक, स्वयं एकभाव है । ताश के खेल में जैसा हुकम का इक्का होता है; उसीप्रकार यह ज्ञायक हुकम के इक्का जैसा सर्वोपरि है, सदा ही इसकी जीत है अहा ! आचार्यदेव की कथनी कैसी है ? इसका वाक्य भी कैसा ग्रहा है ? भगवान आत्मा ज्ञायक एकभाव है । वह संसार अवस्था में अनादिबन्ध पर्याय की निरूपणा से दूध-पानी की तरह कर्मपुद्गलों के साथ एकरूप है । यह पर्याय की बात है । संसारी अवस्था में नादिबंध पर्याय की अपेक्षा से कर्मपुद्गलों के साथ दूध और पानी की तरह एकक्षेत्रावगाह सम्बन्ध है । वस्तुतः तो दूध दूधपने, पानी पानीपने है । उसी प्रकार ज्ञायक ज्ञायकपने तथा कर्मपुद्गल पुद्गलपने हैं । किन्तु दोनों के बीच मात्र एकसमय की पर्याय में निमित्त नैमित्तिक सम्बन्ध है । यह श्रात्मा कर्मपुद्गलों के साथ एकरूप होने पर भी द्रव्यस्वभाव की अपेक्षा से देखें तो दुरंतकषायचक्र के उदय की विचित्रता के वश से प्रवर्तमान, पुण्य - पाप को उत्पन्न करने वाले अनेकरूप शुभ-अशुभभावरूप से परिणमित नहीं होते । कषायचक्र का मिटना बड़ा कठिन है । यह जीव उस कषायचक्र के उदय की विचित्रता के वश हो जाता है । कर्म का उदय इस जीव को वश में नहीं करता, वल्कि यह जीव स्वयं कर्म के वश में हो जाता है । द्रव्य के स्वभाव की अपेक्षा से देखें तो ज्ञायक एकभाव पुण्य-पाप के कारणरूप अनेक शुभाशुभभावात्मा (ज्ञायक) के स्वभावरूप से परिणमन नहीं करते, क्योंकि शुभाशुभभावों में ज्ञायकपना नहीं है । शुभाशुभभाव रागादिरूप अचेतन हैं, उनमें ज्ञान का अंश नहीं है । रागादि स्वयं को नहीं जानते और पर को भी नहीं जानते । देखो ! कितना खुलासा किया है । शुभ-अशुभ भाव तो एकेन्द्रिय जीव में - निगोद में भी होता है। किन्तु चेतनस्वरूपी ज्ञायकमूर्ति चैतन्य के नूर का पूर भगवान आत्मा अचेतन शुभाशुभभावरूप कैसे हो ? भाई ! तेरी ध्रुववस्तु अनादि अनंत ऐसी की ऐसी पड़ी है, एकरूप है; शुभाशुभभाव तो रूप हैं । पंचमहाव्रत के परिणाम, दया-दान के परिणाम, विषय-कषाय के परिणाम इत्यादि अनेक शुभ-अशुभभावोंरूप ज्ञायक शुद्धद्रव्य कभी नहीं हुआ । अरे ! यह तो अन्तर की निज घर की बात है । लोगों ने इसे सुनने की दरकार नहीं की। कहते हैं कि - आत्मा प्रमत्त भी नहीं है और भी नहीं है । वह तो ज्ञायक एकभावरूप सम्यग्दर्शन का ध्येय और विषय है । आत्मा शरीर, मन, वाणी और जड़कर्मरूप से तो होता ही नहीं है, किन्तु पुण्य और पाप को उत्पन्न करने वाले शुभाशुभभावपने भी नहीं होता । ऐसी शुद्धसत्ता का अन्तर में स्वीकार हुआ, यह अलौकिक बात है । 'मैं' एक ज्ञायक शुद्ध हूँ' - ऐसा अन्तर सन्मुख होकर जिसने ज्ञायक को जाना, अनुभव किया, उसे मुक्ति का केन मिल गया अर्थात् उसकी मुक्ति - कन्या से सगाई हो गई, ऐसा यह छठी का लेख है । नियमसार (शुद्धभाव अधिकार ) में ऐसा कहा है कि - प्रौदयिक आदरभाव त्रिकालीस्वरूप में नहीं हैं । शुभ-अशुभभाव जो प्रौदयिकभाव हैं, उसरूप ज्ञायक परिणमता नहीं है, क्योंकि वे प्रौदयिकभाव अचेतन हैं, यह बात तो ठीक; परन्तु क्षयोपशमभाव, क्षायिकभाव तो ज्ञायक को प्रसिद्ध करने वाली ज्ञान की पर्याय है, वह भी वस्तु में नहीं हैं; त्रिकालीद्रव्य को जानने वाली ज्ञान की पर्याय भी ज्ञायक में नहीं है । गजब बात है न ? अहा ! इन्द्रों व गरगधरों की उपस्थिति में देवाधिदेव त्रिलोकीनाथ जिनेन्द्रदेवकी दिव्यध्वनि में यह अलौकिक बात आती होगी, तब सुनने वाला कैसा नाच उठता होगा ? कि आदि भावों को गोचर आत्मा कहा, वे चारों ही भाव पर्यायस्वरूप हैं । उनसे या उनके आश्रय से आत्मा जाना जाय, ऐसा नहीं है । ध्रुवनित्यानन्दस्वरूपश्रय से ही जाना जाता है । यह त्रिकालशुद्ध आत्मा ही दृष्टि का विषय है । वह सम्यग्दृष्टि को ही दृष्टिगोचर होता है, जानने में आता है । एकतरफ गोचर कहें; और दूसरी ओर अगोचर भी कहते हैं, दोनों ही बातें ठीक हैं, यथार्थ हैं । जहाँ जो अपेक्षा हो, वहाँ वैसा समझना चाहिए । अहाहा ! द्रव्यस्वभाव, पदार्थस्वभाव, तत्त्वस्वभाव या वस्तुस्वभाव जो चैतन्यभाव है उसको उसके निजस्वरूप से देखें तो पुण्य-पाप को उत्पन्न करने वाले जो समस्त शुभ-अशुभभाव है उन रूप में वह चैतन्य - स्वभाव कभी भी नहीं परिणमता । अहिंसा, सत्य, दया, दान, व्रत, पूजा, भक्ति इत्यादि शुभराग ही शुभभाव हैं । हिंसा, झूठ, चोरी, विषय-वासना इत्यादि अशुभराग अशुभभाव हैं । ये दोनों भाव जड़ हैं और मलिन हैं । यहाँ कहते हैं कि निर्मलानंद चैतन्यप्रभुत्मा कभी भी शुभ-अशुभभावपने जड़रूप या मलिनरूप नहीं हुआ । इससे वह प्रमत्त भी नहीं है और प्रमत्त भी नहीं है । टीका में 'प्रमत्त' शब्द पहले लिया है, गाथा में 'अप्रमत्त प्रमत्त ' इस क्रम में पहले 'अप्रमत्त' लिया है । यह तो शब्दों की योजना है, क्योंकि गाथा तो पद्यरूप है न ? इसलिए छन्दानुरोध से अप्रमत्त प्रमत्त लिया है, इसका कोई विशिष्ट अभिप्राय नहीं है । यह तो वस्तु के स्वरूप की बात है । जैनशासन तो वस्तु का स्वरूप है । जैन अर्थात् अन्दर जो ध्रुवज्ञायकभाव विराजता है, जो कभी रागरूप, जड़रूप या मलिनतारूप नहीं होता, ऐसे ज्ञायक के सन्मुख होकर जो उसे दृष्टि में ले, उसे जैन कहते हैं । जैन कोई बाड़ा या वेष नहीं है, यह तो वस्तुस्वरूप है । धर्म के बहाने बाहर में हो-हल्ला करे, पुण्य की क्रियायें करे, रथयात्रा - जुलूस निकाले, किन्तु यह सव तो राग है । और जो राग है वह आत्मा नहीं है । तथा आत्मा कभी भी रागरूप नहीं हुआ है। ज्ञायक में राग का अभाव है, राग में ज्ञायक का अभाव है । ऐसा होते हुए अज्ञानी कहते हैं कि शुभभाव करते-करते धर्म होता है, यह अचरज की बात है । अचेतनभाव करते-करते चेतन कैसे प्रगट होगा ? राग करते-करते वीतरागता कैसे हो ? ऐसा कभी वनता नहीं है। इससे आत्मा जो एक ज्ञायकभावरूप है वह प्रमत्त-अप्रमत्त के भेदरूप नहीं है, ऐसा न्याय कहा । व इसे शुद्ध कैसे कहना ? यह बात करते हैं । वहीमा समस्त ग्रन्य द्रव्यों के भावों से भिन्नपने उपासित होता हुआ 'शुद्ध' कहलाता है । यहाँ 'न्यद्रव्य' का अर्थ कर्म का उदय और उसका भाव ग्रहरण किया है, यहाँ राग की बात नहीं है । जीव का कर्म के उदय और उनके भावों पर अनादि से लक्ष्य है, कर्म के उदय के वश होकर स्वयं अटकता है, इसलिए पुद्गलकर्म और उनके भावों का लक्ष्य छोड़कर एक नायकभाव का लक्ष्य करने की बात है । परभावों के तीन प्रकार हैं :(१) कर्म का भाव वह परभाव है । (२) रागादि विकार को भी परभाव कहते हैं । (३) निर्मलपर्याय को भी स्वभाव की अपेक्षा से परभाव कहा जाता है । यहाँ तो जड़द्रव्य और इसके भाव को परद्रव्य कहा है । चैतन्यदेवज्ञायक को परभाव से भिन्नपने सेवन करते हुए शुद्ध कहा जाता है । अर्थात् निमित्त का लक्ष्य छोड़कर ज्ञायक के ऊपर लक्ष्य किया तब उसने जायक की उपासना की, ज्ञान की पर्याय में ज्ञायक को जाना । इसप्रकार 'वह शुद्ध है' - ऐसा कहने में आता है । जिसने जाना नहीं, उसको शुद्ध है ऐसा कैसे कहें अर्थात् उसको शुद्ध कैसे कहा जा सकता है ? अहा ! नित्य ध्रुवस्वभाव पर लक्ष्य जाते ही शुद्धता उत्पन्न होती है, तब यह कहा जाता है कि इसने ध्रु वद्रव्य की सेवा की और शुद्धज्ञायक को जाना । अन्दर लक्ष्य गये विना 'शुद्ध है' - ऐसा भी कहे तो उसका कोई अर्थ नहीं है । ! भगवान आत्मा चैतन्यरस - कंद है । ऐसा आत्मा कभी देखाअहा जाना नहीं और इसकी बात भी सुनने की परवाह नहीं की। दुनियाँ की चतुराई में लगा रहा, वाहर में कारखाना, धंधा - व्यापार आदि के धमाल में अटक गया । परन्तु भाई ! यह तो पागलपना है । यह तो देवाधिदेव तीर्थंकरदेव का है कि जाननस्वभाववाला ज्ञायक है तथा अजान (जड़) स्वभाववाले कर्मपुद्गल हैं, यह आत्मा में इनके भावरूप कैसे हों ? ग्रहो ! श्रात्मा ऐसा का ऐसा चैतन्यरस के तत्त्व से भरा हुआ है । वह पर से, कर्म से, निमित्त से भिन्न करके उपासना करने में आता है अर्थात् ज्ञायक को पर्याय में स्वीकार करने पर वह 'शुद्ध है' - ऐसा जानने में आता है । वह सम्यग्दर्शन अर्थात् धर्म की प्रथम सीढ़ी कही जाती है । तथा शुद्धनय का विषयभूत उस एक ही का उग्र प्राश्रय - सेवन करने पर विशेष - विशेष शुद्धतारूप रत्नत्रय धर्म प्रगट होता है । आगे ११वीं गाथा में तो ज्ञायक को 'शुद्धनय' कहा है। और इस एक के प्रश्रय से ही सम्यग्दर्शन होता है, इससे 'शुद्धनय' ही एक आदरणीय है। आत्मा के आश्रय से जो शुद्धपरिरगमन हुआ, उसे ही शुद्धनय हुआ ऐसा कहा जाता है । अर्थात् शुद्धनय के प्राश्रय से जो पर्याय हुई, उस पर्याय में शुद्ध का भान हुआ, इसलिए उसे शुद्धनय कहा है । समयसार स्रव अधिकार कलश १२० में आया है कि शुद्धनय का आश्रय करके जो निरन्तर
एकरूप, परमपरिणामिकभावरूप, ज्ञायकरूप है, शुद्ध है, पवित्र है, प्रगट है । किन्तु किसको ? कि जिसने पर का लक्ष्य छोड़कर अन्तर्मुख होकर एक इस ज्ञायकभाव की सेवां- उपासना की, उसकी पर्याय में सम्यग्दर्शन-ज्ञान तथा चारित्र का अंश प्रगट हुआ तब उसने 'ज्ञायकभाव परम शुद्ध है' - ऐसा जाना । उसकी अपेक्षा ही यह कहा जा सकता है कि ज्ञायकभाव परम शुद्ध है । ज्ञायकभाव की दृष्टि होने पर जो शुद्धता प्रगट हुई, उसे इस शुद्धता में स्व का औौर पर का ज्ञान परिणमनरूप हुआ । यह ज्ञान पर का, निमित्त का या ज्ञेय का कार्य नहीं है, अपनी ज्ञान की पर्याय जो परिणमित हुई उसका कर्त्ता वह स्वयं ही है और जो पर्याय परिणामी, वह उसका स्वयं का कार्य है । अहो ! यह छठी गाथा अलौकिक है । यह तो छठी का अफर लेख । लौकिक में 'छट्टी का लेख' कहावत प्रसिद्ध है । कहते हैं - वालक के जन्म के छह दिन बाद विधाता भाग्य लेख लिखने आता है, वहाँ कागज वगैरह रखते हैं; परन्तु वहाँ तो कागज ऐसा का ऐसा कोरा ही रहता है, क्योंकि वहाँ कोई विधाता नहीं है । परन्तु जो भगवान चिदानन्द का नाथ स्वयं पर्याय में ज्ञात हुआ- वही निश्चय विधाता है। उसने यह लेख लिखा कि इस आत्मा को अल्पकाल में मुक्ति है । ज्ञायक के सन्मुख होने पर, जब ज्ञायक शुद्ध जानने में आया, तब मुक्ति - लेख निश्चित लिखा जाता है, ऐसी अलौकिक बात इस गाथा में है । गाथा छः की टीका पर प्रवचन वस्तु स्वयं स्वयं से ही सिद्ध होने से अनादि सत्तास्वरूप है । ध्रुवज्ञायकभाव का अस्तित्व स्वयं से ही है, किसी ईश्वर ने इसे बनाया नहीं है । स्वरूप दिसत्तावाला है अर्थात् इसका अनादि से ही अस्तित्व है। इसकी सत्ता कोई नई नहीं है । तथा कभी विनाश नहीं होगा, अतः अनंत है । भविष्य में भी निरन्तर ध्रुवस्वरूप रहेगा । इसप्रकार आदि अंतरहित ध्रुवज्ञायकभाव दिसत्तारूप है । यह पर्यायरहित ध्रुव की बात है । पर्याय तो नाशवान है। केवलज्ञान की क्षायिक पर्याय हो तो भी वह एकसमय की पर्याय है, इससे नाशवान है । यह तो त्रिकाली ज्ञायकस्वभाव चैतन्यप्रकाश के नूर के पूर से भरा हुआ भगवान आत्मा है, वह अविनाशी वस्तु है । अनादि अनंत अब वर्तमान की बात करते हैं कि नित्य उद्योतरूप होने से क्षरिएक नहीं है अर्थात् जैसा वर्त्तमान है वैसा का वैसा ही त्रिकाल है, वर्त्तमानपने स्वयं स्थित रहनेवाला है और स्पष्ट प्रकाशमान ज्योति है । ग्रहाहा....! पर की अपेक्षा रखे बिना स्वयं, स्वयं के ज्ञान में स्पष्ट ज्ञात होता है। ऐसी चैतन्यज्योति स्वयं है । प्रवचनसार गाथा एक सौ बहत्तर की टीका में अलिंगग्रहरण के छठे बोल में आता है कि अपने स्वभाव से जाना जा सके, ऐसा प्रत्यक्ष ज्ञाता है । सर्वत्र इस शैली से ही बात की है । भगवान आत्मा मतिश्रुतज्ञान में स्वयं से प्रत्यक्ष जाना जा सके, ऐसी चैतन्यज्योति है । आत्मा परोक्ष या ढका हुआ नहीं रहता । अहा ! ज्ञायकदेव जिनके ज्ञान में समाया है, उनकी यह बात है । ऐसा ज्ञायक एकभाव है । भाषा तो देखो ! ज्ञायक एकभाव है अर्थात् एकस्वरूप है । उपशमभाव, क्षायिकभाव आदि पर्यायभाव तो अनेक हैं; यह तो त्रिकाल एकरूप, सदृश-सदृश, सामान्य ज्ञायक, स्वयं एकभाव है । ताश के खेल में जैसा हुकम का इक्का होता है; उसीप्रकार यह ज्ञायक हुकम के इक्का जैसा सर्वोपरि है, सदा ही इसकी जीत है अहा ! आचार्यदेव की कथनी कैसी है ? इसका वाक्य भी कैसा ग्रहा है ? भगवान आत्मा ज्ञायक एकभाव है । वह संसार अवस्था में अनादिबन्ध पर्याय की निरूपणा से दूध-पानी की तरह कर्मपुद्गलों के साथ एकरूप है । यह पर्याय की बात है । संसारी अवस्था में नादिबंध पर्याय की अपेक्षा से कर्मपुद्गलों के साथ दूध और पानी की तरह एकक्षेत्रावगाह सम्बन्ध है । वस्तुतः तो दूध दूधपने, पानी पानीपने है । उसी प्रकार ज्ञायक ज्ञायकपने तथा कर्मपुद्गल पुद्गलपने हैं । किन्तु दोनों के बीच मात्र एकसमय की पर्याय में निमित्त नैमित्तिक सम्बन्ध है । यह श्रात्मा कर्मपुद्गलों के साथ एकरूप होने पर भी द्रव्यस्वभाव की अपेक्षा से देखें तो दुरंतकषायचक्र के उदय की विचित्रता के वश से प्रवर्तमान, पुण्य - पाप को उत्पन्न करने वाले अनेकरूप शुभ-अशुभभावरूप से परिणमित नहीं होते । कषायचक्र का मिटना बड़ा कठिन है । यह जीव उस कषायचक्र के उदय की विचित्रता के वश हो जाता है । कर्म का उदय इस जीव को वश में नहीं करता, वल्कि यह जीव स्वयं कर्म के वश में हो जाता है । द्रव्य के स्वभाव की अपेक्षा से देखें तो ज्ञायक एकभाव पुण्य-पाप के कारणरूप अनेक शुभाशुभभावात्मा के स्वभावरूप से परिणमन नहीं करते, क्योंकि शुभाशुभभावों में ज्ञायकपना नहीं है । शुभाशुभभाव रागादिरूप अचेतन हैं, उनमें ज्ञान का अंश नहीं है । रागादि स्वयं को नहीं जानते और पर को भी नहीं जानते । देखो ! कितना खुलासा किया है । शुभ-अशुभ भाव तो एकेन्द्रिय जीव में - निगोद में भी होता है। किन्तु चेतनस्वरूपी ज्ञायकमूर्ति चैतन्य के नूर का पूर भगवान आत्मा अचेतन शुभाशुभभावरूप कैसे हो ? भाई ! तेरी ध्रुववस्तु अनादि अनंत ऐसी की ऐसी पड़ी है, एकरूप है; शुभाशुभभाव तो रूप हैं । पंचमहाव्रत के परिणाम, दया-दान के परिणाम, विषय-कषाय के परिणाम इत्यादि अनेक शुभ-अशुभभावोंरूप ज्ञायक शुद्धद्रव्य कभी नहीं हुआ । अरे ! यह तो अन्तर की निज घर की बात है । लोगों ने इसे सुनने की दरकार नहीं की। कहते हैं कि - आत्मा प्रमत्त भी नहीं है और भी नहीं है । वह तो ज्ञायक एकभावरूप सम्यग्दर्शन का ध्येय और विषय है । आत्मा शरीर, मन, वाणी और जड़कर्मरूप से तो होता ही नहीं है, किन्तु पुण्य और पाप को उत्पन्न करने वाले शुभाशुभभावपने भी नहीं होता । ऐसी शुद्धसत्ता का अन्तर में स्वीकार हुआ, यह अलौकिक बात है । 'मैं' एक ज्ञायक शुद्ध हूँ' - ऐसा अन्तर सन्मुख होकर जिसने ज्ञायक को जाना, अनुभव किया, उसे मुक्ति का केन मिल गया अर्थात् उसकी मुक्ति - कन्या से सगाई हो गई, ऐसा यह छठी का लेख है । नियमसार में ऐसा कहा है कि - प्रौदयिक आदरभाव त्रिकालीस्वरूप में नहीं हैं । शुभ-अशुभभाव जो प्रौदयिकभाव हैं, उसरूप ज्ञायक परिणमता नहीं है, क्योंकि वे प्रौदयिकभाव अचेतन हैं, यह बात तो ठीक; परन्तु क्षयोपशमभाव, क्षायिकभाव तो ज्ञायक को प्रसिद्ध करने वाली ज्ञान की पर्याय है, वह भी वस्तु में नहीं हैं; त्रिकालीद्रव्य को जानने वाली ज्ञान की पर्याय भी ज्ञायक में नहीं है । गजब बात है न ? अहा ! इन्द्रों व गरगधरों की उपस्थिति में देवाधिदेव त्रिलोकीनाथ जिनेन्द्रदेवकी दिव्यध्वनि में यह अलौकिक बात आती होगी, तब सुनने वाला कैसा नाच उठता होगा ? कि आदि भावों को गोचर आत्मा कहा, वे चारों ही भाव पर्यायस्वरूप हैं । उनसे या उनके आश्रय से आत्मा जाना जाय, ऐसा नहीं है । ध्रुवनित्यानन्दस्वरूपश्रय से ही जाना जाता है । यह त्रिकालशुद्ध आत्मा ही दृष्टि का विषय है । वह सम्यग्दृष्टि को ही दृष्टिगोचर होता है, जानने में आता है । एकतरफ गोचर कहें; और दूसरी ओर अगोचर भी कहते हैं, दोनों ही बातें ठीक हैं, यथार्थ हैं । जहाँ जो अपेक्षा हो, वहाँ वैसा समझना चाहिए । अहाहा ! द्रव्यस्वभाव, पदार्थस्वभाव, तत्त्वस्वभाव या वस्तुस्वभाव जो चैतन्यभाव है उसको उसके निजस्वरूप से देखें तो पुण्य-पाप को उत्पन्न करने वाले जो समस्त शुभ-अशुभभाव है उन रूप में वह चैतन्य - स्वभाव कभी भी नहीं परिणमता । अहिंसा, सत्य, दया, दान, व्रत, पूजा, भक्ति इत्यादि शुभराग ही शुभभाव हैं । हिंसा, झूठ, चोरी, विषय-वासना इत्यादि अशुभराग अशुभभाव हैं । ये दोनों भाव जड़ हैं और मलिन हैं । यहाँ कहते हैं कि निर्मलानंद चैतन्यप्रभुत्मा कभी भी शुभ-अशुभभावपने जड़रूप या मलिनरूप नहीं हुआ । इससे वह प्रमत्त भी नहीं है और प्रमत्त भी नहीं है । टीका में 'प्रमत्त' शब्द पहले लिया है, गाथा में 'अप्रमत्त प्रमत्त ' इस क्रम में पहले 'अप्रमत्त' लिया है । यह तो शब्दों की योजना है, क्योंकि गाथा तो पद्यरूप है न ? इसलिए छन्दानुरोध से अप्रमत्त प्रमत्त लिया है, इसका कोई विशिष्ट अभिप्राय नहीं है । यह तो वस्तु के स्वरूप की बात है । जैनशासन तो वस्तु का स्वरूप है । जैन अर्थात् अन्दर जो ध्रुवज्ञायकभाव विराजता है, जो कभी रागरूप, जड़रूप या मलिनतारूप नहीं होता, ऐसे ज्ञायक के सन्मुख होकर जो उसे दृष्टि में ले, उसे जैन कहते हैं । जैन कोई बाड़ा या वेष नहीं है, यह तो वस्तुस्वरूप है । धर्म के बहाने बाहर में हो-हल्ला करे, पुण्य की क्रियायें करे, रथयात्रा - जुलूस निकाले, किन्तु यह सव तो राग है । और जो राग है वह आत्मा नहीं है । तथा आत्मा कभी भी रागरूप नहीं हुआ है। ज्ञायक में राग का अभाव है, राग में ज्ञायक का अभाव है । ऐसा होते हुए अज्ञानी कहते हैं कि शुभभाव करते-करते धर्म होता है, यह अचरज की बात है । अचेतनभाव करते-करते चेतन कैसे प्रगट होगा ? राग करते-करते वीतरागता कैसे हो ? ऐसा कभी वनता नहीं है। इससे आत्मा जो एक ज्ञायकभावरूप है वह प्रमत्त-अप्रमत्त के भेदरूप नहीं है, ऐसा न्याय कहा । व इसे शुद्ध कैसे कहना ? यह बात करते हैं । वहीमा समस्त ग्रन्य द्रव्यों के भावों से भिन्नपने उपासित होता हुआ 'शुद्ध' कहलाता है । यहाँ 'न्यद्रव्य' का अर्थ कर्म का उदय और उसका भाव ग्रहरण किया है, यहाँ राग की बात नहीं है । जीव का कर्म के उदय और उनके भावों पर अनादि से लक्ष्य है, कर्म के उदय के वश होकर स्वयं अटकता है, इसलिए पुद्गलकर्म और उनके भावों का लक्ष्य छोड़कर एक नायकभाव का लक्ष्य करने की बात है । परभावों के तीन प्रकार हैं : कर्म का भाव वह परभाव है । रागादि विकार को भी परभाव कहते हैं । निर्मलपर्याय को भी स्वभाव की अपेक्षा से परभाव कहा जाता है । यहाँ तो जड़द्रव्य और इसके भाव को परद्रव्य कहा है । चैतन्यदेवज्ञायक को परभाव से भिन्नपने सेवन करते हुए शुद्ध कहा जाता है । अर्थात् निमित्त का लक्ष्य छोड़कर ज्ञायक के ऊपर लक्ष्य किया तब उसने जायक की उपासना की, ज्ञान की पर्याय में ज्ञायक को जाना । इसप्रकार 'वह शुद्ध है' - ऐसा कहने में आता है । जिसने जाना नहीं, उसको शुद्ध है ऐसा कैसे कहें अर्थात् उसको शुद्ध कैसे कहा जा सकता है ? अहा ! नित्य ध्रुवस्वभाव पर लक्ष्य जाते ही शुद्धता उत्पन्न होती है, तब यह कहा जाता है कि इसने ध्रु वद्रव्य की सेवा की और शुद्धज्ञायक को जाना । अन्दर लक्ष्य गये विना 'शुद्ध है' - ऐसा भी कहे तो उसका कोई अर्थ नहीं है । ! भगवान आत्मा चैतन्यरस - कंद है । ऐसा आत्मा कभी देखाअहा जाना नहीं और इसकी बात भी सुनने की परवाह नहीं की। दुनियाँ की चतुराई में लगा रहा, वाहर में कारखाना, धंधा - व्यापार आदि के धमाल में अटक गया । परन्तु भाई ! यह तो पागलपना है । यह तो देवाधिदेव तीर्थंकरदेव का है कि जाननस्वभाववाला ज्ञायक है तथा अजान स्वभाववाले कर्मपुद्गल हैं, यह आत्मा में इनके भावरूप कैसे हों ? ग्रहो ! श्रात्मा ऐसा का ऐसा चैतन्यरस के तत्त्व से भरा हुआ है । वह पर से, कर्म से, निमित्त से भिन्न करके उपासना करने में आता है अर्थात् ज्ञायक को पर्याय में स्वीकार करने पर वह 'शुद्ध है' - ऐसा जानने में आता है । वह सम्यग्दर्शन अर्थात् धर्म की प्रथम सीढ़ी कही जाती है । तथा शुद्धनय का विषयभूत उस एक ही का उग्र प्राश्रय - सेवन करने पर विशेष - विशेष शुद्धतारूप रत्नत्रय धर्म प्रगट होता है । आगे ग्यारहवीं गाथा में तो ज्ञायक को 'शुद्धनय' कहा है। और इस एक के प्रश्रय से ही सम्यग्दर्शन होता है, इससे 'शुद्धनय' ही एक आदरणीय है। आत्मा के आश्रय से जो शुद्धपरिरगमन हुआ, उसे ही शुद्धनय हुआ ऐसा कहा जाता है । अर्थात् शुद्धनय के प्राश्रय से जो पर्याय हुई, उस पर्याय में शुद्ध का भान हुआ, इसलिए उसे शुद्धनय कहा है । समयसार स्रव अधिकार कलश एक सौ बीस में आया है कि शुद्धनय का आश्रय करके जो निरन्तर
cheapest home loan: अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन यह कोई आम खरीददारी नहीं होती. इसके लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. घर खरीदने के लिए लोगों को लोन लेना पड़ता है. कोरोना महामारी के चलते घर खरीदने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह से होम लोन पर ब्याज की दर ऐतिहासिक रूप से कम हुईं हैं. ब्याज दर में गिरावट के चलते लोग घर खरीदने पर विचार कर रहे हैं. होम लोन की अवधि 25 साल होती है. होम लोन में मामूली आधा प्रतिशत का अंतर भी चुकाई गई धनराशि में भारी अंतर ला सकता है. इसलिए किसी भी बैंक का चुनाव करने से पहले सभी में तुलना कर लेनी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. अब आप सिर्फ 6. 50% ब्याज दर पर बड़े बैंकों से लोन ले सकते हैं. अगर घर लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो बेहद सस्ती दरों पर बड़े बैंकों से होम लोन हासिल कर सकते हैं. कोटक महिंद्रा ने हाल में होम लोन की ब्याज दर में 15 बेसिस प्वाइंट्स कम किए हैं. अब महज 6. 50% पर ग्राहकों को होम लोन का ऑफर दिया जा रहा है, जो अभी तक की सबसे कम ब्याज दर है. बैंक ने कहा है कि यह सीमित फेस्टिव सीजन ऑफर है और 8 नवंबर 2021 तक जारी रहेगा. देश का सबसे बड़ा कर्जदाता स्टेट बैंक (SBI) न्यूनतम 6. 75% ब्याज दर पर होम लोन का ऑफर दे रहा है. एक और सरकारी बैंक BOI (बैंक ऑफ बड़ौदा) भी इसी ब्याज दर पर होम लोन मुहैया करा रहा है. दूसरी तरफ, सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक HDFC 6. 75% की ब्याज दर पर होम लोन ग्राहकों को ऑफर कर रहा है. ICICI की बात करें तो ये बड़ा प्राइवेट बैंक भी 6. 75% दर पर होम लोन का ऑफर दे रहा है. भले ही बैंकों में होम लोन की ब्याज दरें सस्ती हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हो सकते हैं जो कम क्रेडिट स्कोर या दूसरे कारणों से बैंकों से लोन लेने के योग्य नहीं हैं. अगर बैंक कम क्रेडिट स्कोर के चलते आपको होम लोन देने से मना कर देता है, तो आप इसके लिए नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) का रुख कर सकते हैं. नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां क्रेडिट मूल्यांकन मानदंडों में अपेक्षाकृत ढील देती हैं. इनकी प्रक्रिया भी तेज होती है. NBFC में LIC हाउसिंग फाइनेंस आती है, जो 6. 66% सालाना की कम ब्याज दर के साथ सबसे सस्ता होम लोन ऑफर कर रही है. जबकि HDFC लिमिटेड और बजाज फाइनेंस होम लोन पर 6. 75% ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं. टाटा कैपिटल की बात करें तो यहां होम लोन रेट 6. 90% है.
cheapest home loan: अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन यह कोई आम खरीददारी नहीं होती. इसके लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. घर खरीदने के लिए लोगों को लोन लेना पड़ता है. कोरोना महामारी के चलते घर खरीदने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह से होम लोन पर ब्याज की दर ऐतिहासिक रूप से कम हुईं हैं. ब्याज दर में गिरावट के चलते लोग घर खरीदने पर विचार कर रहे हैं. होम लोन की अवधि पच्चीस साल होती है. होम लोन में मामूली आधा प्रतिशत का अंतर भी चुकाई गई धनराशि में भारी अंतर ला सकता है. इसलिए किसी भी बैंक का चुनाव करने से पहले सभी में तुलना कर लेनी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. अब आप सिर्फ छः. पचास% ब्याज दर पर बड़े बैंकों से लोन ले सकते हैं. अगर घर लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो बेहद सस्ती दरों पर बड़े बैंकों से होम लोन हासिल कर सकते हैं. कोटक महिंद्रा ने हाल में होम लोन की ब्याज दर में पंद्रह बेसिस प्वाइंट्स कम किए हैं. अब महज छः. पचास% पर ग्राहकों को होम लोन का ऑफर दिया जा रहा है, जो अभी तक की सबसे कम ब्याज दर है. बैंक ने कहा है कि यह सीमित फेस्टिव सीजन ऑफर है और आठ नवंबर दो हज़ार इक्कीस तक जारी रहेगा. देश का सबसे बड़ा कर्जदाता स्टेट बैंक न्यूनतम छः. पचहत्तर% ब्याज दर पर होम लोन का ऑफर दे रहा है. एक और सरकारी बैंक BOI भी इसी ब्याज दर पर होम लोन मुहैया करा रहा है. दूसरी तरफ, सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक HDFC छः. पचहत्तर% की ब्याज दर पर होम लोन ग्राहकों को ऑफर कर रहा है. ICICI की बात करें तो ये बड़ा प्राइवेट बैंक भी छः. पचहत्तर% दर पर होम लोन का ऑफर दे रहा है. भले ही बैंकों में होम लोन की ब्याज दरें सस्ती हों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हो सकते हैं जो कम क्रेडिट स्कोर या दूसरे कारणों से बैंकों से लोन लेने के योग्य नहीं हैं. अगर बैंक कम क्रेडिट स्कोर के चलते आपको होम लोन देने से मना कर देता है, तो आप इसके लिए नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों का रुख कर सकते हैं. नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां क्रेडिट मूल्यांकन मानदंडों में अपेक्षाकृत ढील देती हैं. इनकी प्रक्रिया भी तेज होती है. NBFC में LIC हाउसिंग फाइनेंस आती है, जो छः. छयासठ% सालाना की कम ब्याज दर के साथ सबसे सस्ता होम लोन ऑफर कर रही है. जबकि HDFC लिमिटेड और बजाज फाइनेंस होम लोन पर छः. पचहत्तर% ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं. टाटा कैपिटल की बात करें तो यहां होम लोन रेट छः. नब्बे% है.
चीनी इंजीनियरों द्वारा विकसित C919 बड़े यात्री विमान ने देश के उत्तर में भीतरी मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के हुलुनुबीर क्षेत्र में ठंड के मौसम में परीक्षण उड़ानें शुरू कीं। बेहद ठंडे मौसम में अपने सिस्टम और उपकरणों के प्रदर्शन का परीक्षण करने के लिए शुक्रवार, 25 दिसंबर को विमान हुलुबनबीर के अंतरराष्ट्रीय Dongshan हवाई अड्डे पर उतरा। चीन के वाणिज्यिक विमान निगम के निर्माता के उड़ान दल ने घोषणा की कि विमान ने विभिन्न क्षेत्रों में कई हवाई अड्डों से समन्वित परीक्षण उड़ानों का उपयोग किया है। इस संदर्भ में, हुलुनुबीर परीक्षण उड़ानों के लिए चुना गया स्थान बन गया। क्योंकि यह शहर अपनी ठंडी जलवायु के लिए जाना जाता है जो सर्दियों में शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। सवाल में शहर में कई अन्य उपकरण निर्माताओं की मेजबानी करने का अवसर है, जो इसकी जलवायु के लिए बहुत ठंडे मौसम में परीक्षण करना चाहते हैं।
चीनी इंजीनियरों द्वारा विकसित Cनौ सौ उन्नीस बड़े यात्री विमान ने देश के उत्तर में भीतरी मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के हुलुनुबीर क्षेत्र में ठंड के मौसम में परीक्षण उड़ानें शुरू कीं। बेहद ठंडे मौसम में अपने सिस्टम और उपकरणों के प्रदर्शन का परीक्षण करने के लिए शुक्रवार, पच्चीस दिसंबर को विमान हुलुबनबीर के अंतरराष्ट्रीय Dongshan हवाई अड्डे पर उतरा। चीन के वाणिज्यिक विमान निगम के निर्माता के उड़ान दल ने घोषणा की कि विमान ने विभिन्न क्षेत्रों में कई हवाई अड्डों से समन्वित परीक्षण उड़ानों का उपयोग किया है। इस संदर्भ में, हुलुनुबीर परीक्षण उड़ानों के लिए चुना गया स्थान बन गया। क्योंकि यह शहर अपनी ठंडी जलवायु के लिए जाना जाता है जो सर्दियों में शून्य से पच्चीस डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। सवाल में शहर में कई अन्य उपकरण निर्माताओं की मेजबानी करने का अवसर है, जो इसकी जलवायु के लिए बहुत ठंडे मौसम में परीक्षण करना चाहते हैं।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विश्वनाथन विचारों की निरंतरता और ताजगी की परंपरा को एक साथ लाते हैं. नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय में दो नए जजों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए)) की तरफ से मंगलवार को आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के अंदाज कुछ बदले-बदले नजर आए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सिफारिश के 72 घंटे के भीतर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और वरिष्ठ अधिवक्ता कलपति वेंकटरमण विश्वनाथन की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति दर्शाती है कि कॉलेजियम जीवंत, सक्रिय और अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध है. कॉलेजियम सिस्टम की सिफारिश के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और सीनियर एडवोकेट कलपति वेंकटरमन विश्वनाथन को सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज प्रमोट किया गया है. एससीबीए द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति मिश्रा और विश्वनाथन विचारों की निरंतरता और ताजगी की परंपरा को एक साथ लाते हैं. न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की 11 अगस्त, 2030 को सेवानिवृत्ति पर न्यायमूर्ति विश्वनाथन भारत के प्रधान न्यायाधीश बनेंगे और 25 मई, 2031 तक इस पद पर बने रहेंगे. न्यायमूर्ति मिश्रा को 10 दिसंबर, 2009 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. उन्हें 13 अक्टूबर, 2021 को आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. .
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विश्वनाथन विचारों की निरंतरता और ताजगी की परंपरा को एक साथ लाते हैं. नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय में दो नए जजों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ) की तरफ से मंगलवार को आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के अंदाज कुछ बदले-बदले नजर आए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सिफारिश के बहत्तर घंटाटे के भीतर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और वरिष्ठ अधिवक्ता कलपति वेंकटरमण विश्वनाथन की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति दर्शाती है कि कॉलेजियम जीवंत, सक्रिय और अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध है. कॉलेजियम सिस्टम की सिफारिश के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और सीनियर एडवोकेट कलपति वेंकटरमन विश्वनाथन को सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज प्रमोट किया गया है. एससीबीए द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति मिश्रा और विश्वनाथन विचारों की निरंतरता और ताजगी की परंपरा को एक साथ लाते हैं. न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की ग्यारह अगस्त, दो हज़ार तीस को सेवानिवृत्ति पर न्यायमूर्ति विश्वनाथन भारत के प्रधान न्यायाधीश बनेंगे और पच्चीस मई, दो हज़ार इकतीस तक इस पद पर बने रहेंगे. न्यायमूर्ति मिश्रा को दस दिसंबर, दो हज़ार नौ को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. उन्हें तेरह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. .
सूचना पर साहरघाट थाना के एसआई अभिषेक आनंद एवं एएसआई अनिल सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की तहकीकात के बाद शव को उतारकर कब्जे में ले लिया। मृतका के पिता मनोज झा के आने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल मधुबनी भेज दिया। मधवापुर, संस। साहरघाट थाना क्षेत्र स्थित महुआ गांव में शुक्रवार को पुलिस ने एक घर से फंदे से झूलता हुआ महिला का शव बरामद किया है। इस घटना से गांव में सनसनी फैल गई। मृत महिला की पहचान महुआ गांव के ही राधा मोहन ठाकुर की 19 वर्षीया पत्नी रागनी कुमारी के रूप में हुई है। इस घटना की सूचना पर साहरघाट थाना के एसआई अभिषेक आनंद एवं एएसआई अनिल सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। जहां मामले की पूरी तहकीकात के बाद शव को फंदे से उतारकर कब्जे में ले लिया। मृतका के पिता मनोज झा के आने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, मधुबनी भेज दिया। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की सुबह महिला को घर में फंदे से झूलता देखा गया। इसके बाद साहरघाट थाना पुलिस को सूचना दी गई। मृतका का पति करीब छह माह से बाहर है। घर में मृतका के पति के 70 वर्षीय दादा और दादी थी। घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आत्महत्या या हत्या की घटना है, यह जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी मौत की कारण का पता चल सकता है। पुलिस को इस घटना को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। मृतका के पिता मनोज झा ने बताया कि कानून पर पूरा भरोसा है। कानून हमारे साथ न्याय जरूर करेगा। बताते चलें कि एक साल पहले ही मृतका की शादी हुई थी। मृतका का मायका बासोपट्टी थाना क्षेत्र के गौसनगर गांव में है। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और स्वजन द्वारा लिखित आवेदन देने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सूचना पर साहरघाट थाना के एसआई अभिषेक आनंद एवं एएसआई अनिल सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की तहकीकात के बाद शव को उतारकर कब्जे में ले लिया। मृतका के पिता मनोज झा के आने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल मधुबनी भेज दिया। मधवापुर, संस। साहरघाट थाना क्षेत्र स्थित महुआ गांव में शुक्रवार को पुलिस ने एक घर से फंदे से झूलता हुआ महिला का शव बरामद किया है। इस घटना से गांव में सनसनी फैल गई। मृत महिला की पहचान महुआ गांव के ही राधा मोहन ठाकुर की उन्नीस वर्षीया पत्नी रागनी कुमारी के रूप में हुई है। इस घटना की सूचना पर साहरघाट थाना के एसआई अभिषेक आनंद एवं एएसआई अनिल सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। जहां मामले की पूरी तहकीकात के बाद शव को फंदे से उतारकर कब्जे में ले लिया। मृतका के पिता मनोज झा के आने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, मधुबनी भेज दिया। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की सुबह महिला को घर में फंदे से झूलता देखा गया। इसके बाद साहरघाट थाना पुलिस को सूचना दी गई। मृतका का पति करीब छह माह से बाहर है। घर में मृतका के पति के सत्तर वर्षीय दादा और दादी थी। घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आत्महत्या या हत्या की घटना है, यह जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी मौत की कारण का पता चल सकता है। पुलिस को इस घटना को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। मृतका के पिता मनोज झा ने बताया कि कानून पर पूरा भरोसा है। कानून हमारे साथ न्याय जरूर करेगा। बताते चलें कि एक साल पहले ही मृतका की शादी हुई थी। मृतका का मायका बासोपट्टी थाना क्षेत्र के गौसनगर गांव में है। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और स्वजन द्वारा लिखित आवेदन देने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चर्चा में क्यों? 4 अक्तूबर, 2023 को राजस्थान के राजस्व मंडल अध्यक्ष राजेश्वर सिंह ने राविरा पत्रिका के 127वें संस्करण का विमोचन किया। - राजस्व मंडल की ओर से प्रकाशित इस महत्त्वपूर्ण अंक में राजस्व न्यायालयों की बेहतरी को लेकर विशेष लेख, राज्य में नवगठित संभाग, ज़िले, उपखंड व तहसीलों से संबंधित अधिसूचनाओं, राजस्व मंडल न्यायालय के स्तर से पारित श्रेष्ठ निर्णयों को विषय-वस्तु के रूप में समाहित किया गया है। - इसके साथ ही राजस्व प्रशासन व राजस्व विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण विषयों पर लिखे गए आलेख, सरकार द्वारा जारी महत्त्वपूर्ण परिपत्र व अधिसूचनाओं व राजस्व समाचारों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
चर्चा में क्यों? चार अक्तूबर, दो हज़ार तेईस को राजस्थान के राजस्व मंडल अध्यक्ष राजेश्वर सिंह ने राविरा पत्रिका के एक सौ सत्ताईसवें संस्करण का विमोचन किया। - राजस्व मंडल की ओर से प्रकाशित इस महत्त्वपूर्ण अंक में राजस्व न्यायालयों की बेहतरी को लेकर विशेष लेख, राज्य में नवगठित संभाग, ज़िले, उपखंड व तहसीलों से संबंधित अधिसूचनाओं, राजस्व मंडल न्यायालय के स्तर से पारित श्रेष्ठ निर्णयों को विषय-वस्तु के रूप में समाहित किया गया है। - इसके साथ ही राजस्व प्रशासन व राजस्व विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण विषयों पर लिखे गए आलेख, सरकार द्वारा जारी महत्त्वपूर्ण परिपत्र व अधिसूचनाओं व राजस्व समाचारों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
LIC ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया हुआ है. कंपनियों के मौजूदा वैल्युएशन पर भी LIC का निवेश फायदेमंद है. जीवन बीमा कंपनी LIC की तरफ से कहा गया है कि उनकी तरफ से अदानी ग्रुप की कंपनियों में निवेश बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. LIC के चेयरमैन ने पिछले हफ्ते इसको लेकर बयान दिया है, और साथ में यह भी साफ किया है कि ग्रुप की कंपनियों में पहले से किए निवेश को निकालने को लेकर भी फिलहाल कोई योजना नहीं है. LIC ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया हुआ है. कंपनियों के मौजूदा वैल्युएशन पर भी LIC का निवेश फायदेमंद है.
LIC ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में तीस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया हुआ है. कंपनियों के मौजूदा वैल्युएशन पर भी LIC का निवेश फायदेमंद है. जीवन बीमा कंपनी LIC की तरफ से कहा गया है कि उनकी तरफ से अदानी ग्रुप की कंपनियों में निवेश बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. LIC के चेयरमैन ने पिछले हफ्ते इसको लेकर बयान दिया है, और साथ में यह भी साफ किया है कि ग्रुप की कंपनियों में पहले से किए निवेश को निकालने को लेकर भी फिलहाल कोई योजना नहीं है. LIC ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में तीस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया हुआ है. कंपनियों के मौजूदा वैल्युएशन पर भी LIC का निवेश फायदेमंद है.
नई दिल्ली। पटना के गांधी मैदान में आज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की 'देश बचाओ-भाजपा भगाओ रैली' हो रही है। इस रैली में बड़ी संख्या में आरजेडी के समर्थक पहुंच रहे हैं। समर्थकों ने अपने आप को पूरी तरह से पार्टी के रंग में रंग लिया है और लोगों की भीड़ में अलग ही नज़र आ रहें हैं। जहां किसी ने अपने हाथ में आरजेडी का झंडा भी पकड़ रखा था वहीं, किसी ने पेट पर लालटेन और सीने पर लालू-राबड़ी जिंदाबाद पेंट करावा रखा है। कई लोग जेसीबी पर सवार होकर रैली स्थल पर पहुंच रहा है। रैली में पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी ताकत दिखाएंगे। सुबह से ही पटना के गांधी मैदान में समर्थकों का हुजूम उमड़ रहा है। इस रैली में जेडीयू के बागी नेता और राज्यसभा सांसद शरद यादव भी मंच पर मौजूद रहे। वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद रहेंगे। आपको बता दें कि इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का रिकॉर्डेड भाषण चलाया जाएगा।
नई दिल्ली। पटना के गांधी मैदान में आज राष्ट्रीय जनता दल की 'देश बचाओ-भाजपा भगाओ रैली' हो रही है। इस रैली में बड़ी संख्या में आरजेडी के समर्थक पहुंच रहे हैं। समर्थकों ने अपने आप को पूरी तरह से पार्टी के रंग में रंग लिया है और लोगों की भीड़ में अलग ही नज़र आ रहें हैं। जहां किसी ने अपने हाथ में आरजेडी का झंडा भी पकड़ रखा था वहीं, किसी ने पेट पर लालटेन और सीने पर लालू-राबड़ी जिंदाबाद पेंट करावा रखा है। कई लोग जेसीबी पर सवार होकर रैली स्थल पर पहुंच रहा है। रैली में पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी ताकत दिखाएंगे। सुबह से ही पटना के गांधी मैदान में समर्थकों का हुजूम उमड़ रहा है। इस रैली में जेडीयू के बागी नेता और राज्यसभा सांसद शरद यादव भी मंच पर मौजूद रहे। वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद रहेंगे। आपको बता दें कि इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का रिकॉर्डेड भाषण चलाया जाएगा।
तथैव स्वात्मसद्भावानुभूतो सर्ववस्तुनः । प्रतिक्षणं वहिर्हेतुः साधारण इति धुवम् ॥ ६ ॥ प्रसिद्धद्रव्यपर्यायवृत्तौ वाह्यस्य दर्शनात् । निमित्तस्या न्यथाभावाभावान्निश्चीयते बुधैः ॥ १० ॥ हम सारिखे अल्पज्ञ जीवो के यहा प्रत्यक्ष प्रमाणसे प्रसिद्ध नही भी होरही वर्तना तिस प्रकार व्ययहारोपयोगी कार्य के देखने से अनुमित होजाती है। जिस प्रकार कि चावलो का अग्निसयोग अनुसार खदर, वदर, होकर पकना स्वरूप पाक की प्रसिद्धि होजाने से यह अनुमान प्रवतं जाता है कि भात इस नाम को धारने वाली पर्याय का पूर्व मे प्रत्येक क्षरण मे सूक्ष्म रूप से चात्रलो का पाक हुआ है । अन्यथा यानी प्रतिक्षरण सूक्ष्मरूप से पाक होना यदि नही माना जायगा तो इष्ट होरहे पाक को सभी प्रकारो से सिद्धि नही होसकती है । भावार्थ - प्रत्येक क्षरण मे सूक्ष्म परिणाम करता हुआ बालक जिसप्रकार युवा होजाता है । उसी प्रकार अग्नि द्वारा चावलो को पकाने पर भी क्रम क्रम से सूक्ष्म पाक होते होते भात वन सका है, अन्यथा नही । अत उन अतीन्द्रिय सूक्ष्म पाको का जैसे अनुमान कर लिया जाता है। उसी प्रकार वर्तना का अनुमान कर लिया जाता है । सम्पूर्ण वस्तुओं के प्रत्येक क्षण मे होने वाले अपने निज सद्भाव के अनुभव करने मे कोई साधारण वहिरग हेतु है । यह निश्चित मार्ग है, द्रव्यो की प्रसिद्ध होरही पर्यायो के वर्तने मे भी वहिरग निमित्त कारण देखा जाता है । भन्यथा उन पर्यायो के भाव का अभाव है, मत. अन्यथानुपपत्ति द्वारा विद्वानो करके उस प्रतीन्द्रिय भी वर्तना का निश्चय कर लिया जाता है, वह वर्तना काल द्रव्य करके किया गया उपकार है । आदित्यादिगतिस्ताव तद्धेतुर्विभाव्यते । तस्यापि स्वात्मसतानुभूतौ हेतुव्यपेक्षणात् ॥ ११ ॥ मुख्य काल को नही मानने वाले श्वेताम्बर कहते हैं कि सूर्य चन्द्रमा आदि की गति या ऋतु अवस्था, प्रादि उस वर्तना की प्रयोजक हेतु होजायगी। इस पर ग्रन्थकार कहते हैं, कि सूर्य आदि की गति तो उस वर्तना का हेतु नही है। यह बात यो विचार ली जाती है कि उन सूर्य मादि के गमन या ऋतु की भी स्वकीय निज सत्ता के अनुभव करने में किसी अन्य हेतु की विशेषतया प्रपेक्षा होजाती है । अत. अन्य हेतु काल द्रव्य का मानना श्वेताम्बरो को भी आवश्यक पड़ेगा । न चैवमनवस्थां स्यात्कालस्यान्याव्यपेक्षणात् । स्ववृत्तौ तत्स्वभावत्वात्स्वयं वृत्तेः प्रसिद्धितः ॥ १२ ॥ यदि कोई यो कहे कि धर्मादिक की वर्तना कराने मे काल द्रव्य साधारण हेतु है और काल द्रव्य की वर्त्तना मे भी वर्त्तयिता किसी अन्य द्रव्य की आवश्यकता पडेगी और उस अन्य द्रव्य की वर्तना करानेमे भी द्रव्यान्तरो की भाकाक्षा बढ़ जानेसे अनवस्था दोष होगा। ग्रन्थकार कहते हैं कि हमारे यहा इस प्रकार मनवस्था दोष नही आता है क्योकि काल को मन्य द्रव्य की व्यपेक्षा नहीं है अपनी वर्तना करने मे उस काल का वही स्वभाव है क्योकि दूसरो के वसना कराने के समान काल द्वय की स्वय निज में वर्तना करने की प्रसिद्धि होरही है जैसे कि प्रकाश दूसरो को अवगाह देता हुआ स्वय को भी भवगाह दे देता है, ज्ञान अन्य पदार्थों को जानता हुआ भी जान लेता है । तथैव सवभावानां स्वयं वृत्तिर्न युज्यते । दृष्टेष्टवाधनात्सर्वादीनामिति विचिंतितम् ॥१३॥ यहा किसी का यह कटाक्ष करना युक्त नहीं है कि जिस प्रकार काल स्वयं अपनी वर्त्तना का प्रयोजक हेतु है उस ही प्रकार सम्पूर्ण पदार्थों की स्वमेव वर्तना होजायगी कारण कि घट, पट आदि सम्पूर्ण पदार्थों को स्वय वतना का प्रयोजक हेतुपना मानने पर प्रत्यक्ष अनुमान, आदि प्रमारणो करके वाधा आती है, इस बात का हम पूर्व प्रकरण में विशेष रूप से विचार कर चुके है, प्रदीपका स्वपरोद्योतन स्वभाव है, घट का नहीं । कतक फल या फिटकिरी स्वय को और कीच को भी पानी मे नीचे बैठा देते है, वायु या फेन नही । न दृश्यमानतैवात्र युज्यते वर्तमानता वर्तमानस्य कालस्याभावे तस्याः स्वतो स्थितेः ॥ १४ ॥ प्रत्यक्षासंभवासक्त रनुमानाद्ययोगतः । सर्वप्रमाणनिन्हुत्त्या सर्वशून्यत्वशक्तितः ॥१५॥ मुख्य काल और व्यवहारकाल को नही मानने वाले बौद्ध यहा कटाक्ष करते हैं कि वर्तमान काल कोई पदार्थ नही है, निर्विकल्पक दर्शन द्वारा जो पदार्थों की दृश्यमानता है वही वर्तमानता है अत एव इस अन्यापोह रूप धर्म को ही वर्तना कहा जा सकता है, इसके लिये इतने लम्बे चौडे कार्य कारण भाव के मानने की आवश्यकता नही । आचाय कहते है कि यह बौद्धो का कहना युक्तिपूर्ण नही है क्योकि वर्तमानकाल का प्रभाव मानने पर उस दृश्यमानता की स्वयं अपने आप से व्यवस्था नही होसकती है क्योकि "दृशि प्रक्षरणे" धातु से कर्म मे यक् करते हुये पुन. वर्तमानकाल की विवक्षा होने पर "शानच' प्रत्यय करने पर दृश्यमान बनता है, दूसरी वातयह है कि वर्तमान कालके नही मानने पर प्रत्यक्ष प्रमा रण के असम्भव होजानेका प्रसग होगा क्योकि वर्तमान कालीन पदार्थो को इन्द्रिय, अनिन्द्रिय-जन्य प्रत्यक्ष जानते है, प्रत्यक्ष को मूल मान कर अनुमान आदि प्रमाण प्रवर्तते है अतः प्रत्यक्ष प्रमाण का असम्भव होजानेसे अनुमान आदि प्रमाणोकी योजना नही हासकती है, ऐसी दशामे सम्पूर्ण प्रमारगोका अपलाप हो जानेसे सर्व पदार्थोके शून्यपनका प्रसंग श्रावेगा जो कि किसीको भी इष्ट नहीं है, ऋत. वर्तमान कालका मानना अत्यावश्यक है । जो पण्डित यो कह देते है कि 'वर्तमानाभावः पतत. पतित पतितव्य कालोपपत्तेः' अर्थात् - वर्तमानकाल कोई नही हैं क्योकि वृक्ष से पतन कर रहे फल का कुछ देश तो पतित होकर भूतकाल के गर्भ में चला गया है और कुछ नीचे पडने योग्य देश भविष्य काल मे ग्राने वाला है अनः भूत पतित और भविष्य पतिनव्य काल ही है । उन पण्डितो की यह तक निस्सार है जब कि फल का वर्तमान काल मे पतनहोरहा प्रत्यक्ष सिद्ध है, वतमान को मध्यवर्ती मान कर ही भूत, भविष्य काल माने जा सकते है, अन्यथा नही । स्वसंविदद्वयं तत्वमिच्छतः सांप्रतं कथम् सिद्धयन्न वर्तमानोस्य कालः सूक्ष्मः स्वयंप्रभुः ॥१६॥ जो बौद्ध बहिरग सम्पूर्ण पदार्थों को नहीं मान कर स्वसम्वेदनाद्वत को ही तत्व इच्छते हैं उनके यहा वर्तमान काल मे वर्त रहा सम्वेदनाद्व त भला किस प्रकार सिद्ध नही होगा ? और ऐसा मानने पर इस सम्बेदनाद्व तका स्वयं प्रभु होरहा और परम सूक्ष्म वर्तमान काल सिद्ध नही होवे ? यानी वर्तमानकाल प्रवश्य सिद्धहोजावेगा । क्षणिक-वादी बौद्धो को बडी सुलभता से वर्तमान क्षरण इष्ट करना पड़ेगा कारणकि वर्तमान क्षणमे पदार्थकी सत्ता मा ते हुये उन्होने दूसरे क्षरणमे पदार्थों का स्वभाव से होरहा विनाश इष्ट किया है "द्वितीयक्ष रणवृत्तिध्वंस प्रतियोगित्व क्षणिकत्वं । ततो न भाविता द्रक्ष्यमाणता नाप्यतोतता । दृष्टता भाव्यतीतस्य कालस्यान्यप्रसिद्धितः ॥ १७॥ तिसही कारण भविष्यमे दर्शनका विषय होजाना यह दृक्ष्यमाणता ही भविष्यता नही है भोर तिस ही कारण दृष्टता ही अतीतपना भी नही है क्योकि अन्य भी भविष्य में होने वाला भावी काल औौर होचुके अतीत काल के प्रोत प्रोत चले भा रहे अन्वय की प्रसिद्धि होरही है । ज्ञान करके देखा जा चुकापन या देखाजायगापन केवल इतना स्वभाव ही भूतकाल या भविष्यकाल नहीं है किन्तु यथार्थ मे पदार्थों के परिणमयिता भूत, वतमान, भविष्य, काल हैं । गतं न गम्यते तावदागतं नैव गम्यते । गतागतविनिमुक्तं गम्यमानं न गम्यते ॥१८॥ इत्येवं वर्तमानस्य कालस्याभावभाषणं । स्ववाग्विरुद्धमाभाति तन्निषेधे समत्वतः ॥१६॥ निषिद्धमनिषिद्धं वा तद्वयोन्मुक्तमेव वा । निषिध्यते नहिं कैवं निषेधो / व धेरेव वा ।।२०।। कोई पण्डित कहते हैं कि कोई पथिक मार्ग मे गमन कर रहा है जितना मार्ग वह गमन कर चुका है वह फिर गमन नही किया जाता है क्योकि वह गत होचुका भौर जो भविष्य मे माने योग्य मार्ग है वह भी गमन नही किया जा सकता है कारण कि वह तो भविष्य काल मे गमन किया जावेगा अवं गत और मागत मार्गसे रहित कोई गम्यमान स्थल शेष नही रहा तो वह नही गमन किया जायगा ऐसो दशा मे गत और गमिष्यमारण से प्रात्तरिक्त वर्तमानका कोई गम्यमान शेष नही रहता है । प्राचार्य कहते हैं कि इस प्रकार जो पण्डित वर्तमान काल के प्रभाव को वखानते हैं उनका भाषण स्ववचन विरुद्ध प्रतीत हो रहा है क्योकि उस वर्तमानके निषेधमे मा समान रूपसे वैसे ही भाक्षेप प्रवर्त जाता है हम जैन उन वतमान काल का निषेध करने वाले पण्डिता से पूछते है कि भाप निषिद्ध
तथैव स्वात्मसद्भावानुभूतो सर्ववस्तुनः । प्रतिक्षणं वहिर्हेतुः साधारण इति धुवम् ॥ छः ॥ प्रसिद्धद्रव्यपर्यायवृत्तौ वाह्यस्य दर्शनात् । निमित्तस्या न्यथाभावाभावान्निश्चीयते बुधैः ॥ दस ॥ हम सारिखे अल्पज्ञ जीवो के यहा प्रत्यक्ष प्रमाणसे प्रसिद्ध नही भी होरही वर्तना तिस प्रकार व्ययहारोपयोगी कार्य के देखने से अनुमित होजाती है। जिस प्रकार कि चावलो का अग्निसयोग अनुसार खदर, वदर, होकर पकना स्वरूप पाक की प्रसिद्धि होजाने से यह अनुमान प्रवतं जाता है कि भात इस नाम को धारने वाली पर्याय का पूर्व मे प्रत्येक क्षरण मे सूक्ष्म रूप से चात्रलो का पाक हुआ है । अन्यथा यानी प्रतिक्षरण सूक्ष्मरूप से पाक होना यदि नही माना जायगा तो इष्ट होरहे पाक को सभी प्रकारो से सिद्धि नही होसकती है । भावार्थ - प्रत्येक क्षरण मे सूक्ष्म परिणाम करता हुआ बालक जिसप्रकार युवा होजाता है । उसी प्रकार अग्नि द्वारा चावलो को पकाने पर भी क्रम क्रम से सूक्ष्म पाक होते होते भात वन सका है, अन्यथा नही । अत उन अतीन्द्रिय सूक्ष्म पाको का जैसे अनुमान कर लिया जाता है। उसी प्रकार वर्तना का अनुमान कर लिया जाता है । सम्पूर्ण वस्तुओं के प्रत्येक क्षण मे होने वाले अपने निज सद्भाव के अनुभव करने मे कोई साधारण वहिरग हेतु है । यह निश्चित मार्ग है, द्रव्यो की प्रसिद्ध होरही पर्यायो के वर्तने मे भी वहिरग निमित्त कारण देखा जाता है । भन्यथा उन पर्यायो के भाव का अभाव है, मत. अन्यथानुपपत्ति द्वारा विद्वानो करके उस प्रतीन्द्रिय भी वर्तना का निश्चय कर लिया जाता है, वह वर्तना काल द्रव्य करके किया गया उपकार है । आदित्यादिगतिस्ताव तद्धेतुर्विभाव्यते । तस्यापि स्वात्मसतानुभूतौ हेतुव्यपेक्षणात् ॥ ग्यारह ॥ मुख्य काल को नही मानने वाले श्वेताम्बर कहते हैं कि सूर्य चन्द्रमा आदि की गति या ऋतु अवस्था, प्रादि उस वर्तना की प्रयोजक हेतु होजायगी। इस पर ग्रन्थकार कहते हैं, कि सूर्य आदि की गति तो उस वर्तना का हेतु नही है। यह बात यो विचार ली जाती है कि उन सूर्य मादि के गमन या ऋतु की भी स्वकीय निज सत्ता के अनुभव करने में किसी अन्य हेतु की विशेषतया प्रपेक्षा होजाती है । अत. अन्य हेतु काल द्रव्य का मानना श्वेताम्बरो को भी आवश्यक पड़ेगा । न चैवमनवस्थां स्यात्कालस्यान्याव्यपेक्षणात् । स्ववृत्तौ तत्स्वभावत्वात्स्वयं वृत्तेः प्रसिद्धितः ॥ बारह ॥ यदि कोई यो कहे कि धर्मादिक की वर्तना कराने मे काल द्रव्य साधारण हेतु है और काल द्रव्य की वर्त्तना मे भी वर्त्तयिता किसी अन्य द्रव्य की आवश्यकता पडेगी और उस अन्य द्रव्य की वर्तना करानेमे भी द्रव्यान्तरो की भाकाक्षा बढ़ जानेसे अनवस्था दोष होगा। ग्रन्थकार कहते हैं कि हमारे यहा इस प्रकार मनवस्था दोष नही आता है क्योकि काल को मन्य द्रव्य की व्यपेक्षा नहीं है अपनी वर्तना करने मे उस काल का वही स्वभाव है क्योकि दूसरो के वसना कराने के समान काल द्वय की स्वय निज में वर्तना करने की प्रसिद्धि होरही है जैसे कि प्रकाश दूसरो को अवगाह देता हुआ स्वय को भी भवगाह दे देता है, ज्ञान अन्य पदार्थों को जानता हुआ भी जान लेता है । तथैव सवभावानां स्वयं वृत्तिर्न युज्यते । दृष्टेष्टवाधनात्सर्वादीनामिति विचिंतितम् ॥तेरह॥ यहा किसी का यह कटाक्ष करना युक्त नहीं है कि जिस प्रकार काल स्वयं अपनी वर्त्तना का प्रयोजक हेतु है उस ही प्रकार सम्पूर्ण पदार्थों की स्वमेव वर्तना होजायगी कारण कि घट, पट आदि सम्पूर्ण पदार्थों को स्वय वतना का प्रयोजक हेतुपना मानने पर प्रत्यक्ष अनुमान, आदि प्रमारणो करके वाधा आती है, इस बात का हम पूर्व प्रकरण में विशेष रूप से विचार कर चुके है, प्रदीपका स्वपरोद्योतन स्वभाव है, घट का नहीं । कतक फल या फिटकिरी स्वय को और कीच को भी पानी मे नीचे बैठा देते है, वायु या फेन नही । न दृश्यमानतैवात्र युज्यते वर्तमानता वर्तमानस्य कालस्याभावे तस्याः स्वतो स्थितेः ॥ चौदह ॥ प्रत्यक्षासंभवासक्त रनुमानाद्ययोगतः । सर्वप्रमाणनिन्हुत्त्या सर्वशून्यत्वशक्तितः ॥पंद्रह॥ मुख्य काल और व्यवहारकाल को नही मानने वाले बौद्ध यहा कटाक्ष करते हैं कि वर्तमान काल कोई पदार्थ नही है, निर्विकल्पक दर्शन द्वारा जो पदार्थों की दृश्यमानता है वही वर्तमानता है अत एव इस अन्यापोह रूप धर्म को ही वर्तना कहा जा सकता है, इसके लिये इतने लम्बे चौडे कार्य कारण भाव के मानने की आवश्यकता नही । आचाय कहते है कि यह बौद्धो का कहना युक्तिपूर्ण नही है क्योकि वर्तमानकाल का प्रभाव मानने पर उस दृश्यमानता की स्वयं अपने आप से व्यवस्था नही होसकती है क्योकि "दृशि प्रक्षरणे" धातु से कर्म मे यक् करते हुये पुन. वर्तमानकाल की विवक्षा होने पर "शानच' प्रत्यय करने पर दृश्यमान बनता है, दूसरी वातयह है कि वर्तमान कालके नही मानने पर प्रत्यक्ष प्रमा रण के असम्भव होजानेका प्रसग होगा क्योकि वर्तमान कालीन पदार्थो को इन्द्रिय, अनिन्द्रिय-जन्य प्रत्यक्ष जानते है, प्रत्यक्ष को मूल मान कर अनुमान आदि प्रमाण प्रवर्तते है अतः प्रत्यक्ष प्रमाण का असम्भव होजानेसे अनुमान आदि प्रमाणोकी योजना नही हासकती है, ऐसी दशामे सम्पूर्ण प्रमारगोका अपलाप हो जानेसे सर्व पदार्थोके शून्यपनका प्रसंग श्रावेगा जो कि किसीको भी इष्ट नहीं है, ऋत. वर्तमान कालका मानना अत्यावश्यक है । जो पण्डित यो कह देते है कि 'वर्तमानाभावः पतत. पतित पतितव्य कालोपपत्तेः' अर्थात् - वर्तमानकाल कोई नही हैं क्योकि वृक्ष से पतन कर रहे फल का कुछ देश तो पतित होकर भूतकाल के गर्भ में चला गया है और कुछ नीचे पडने योग्य देश भविष्य काल मे ग्राने वाला है अनः भूत पतित और भविष्य पतिनव्य काल ही है । उन पण्डितो की यह तक निस्सार है जब कि फल का वर्तमान काल मे पतनहोरहा प्रत्यक्ष सिद्ध है, वतमान को मध्यवर्ती मान कर ही भूत, भविष्य काल माने जा सकते है, अन्यथा नही । स्वसंविदद्वयं तत्वमिच्छतः सांप्रतं कथम् सिद्धयन्न वर्तमानोस्य कालः सूक्ष्मः स्वयंप्रभुः ॥सोलह॥ जो बौद्ध बहिरग सम्पूर्ण पदार्थों को नहीं मान कर स्वसम्वेदनाद्वत को ही तत्व इच्छते हैं उनके यहा वर्तमान काल मे वर्त रहा सम्वेदनाद्व त भला किस प्रकार सिद्ध नही होगा ? और ऐसा मानने पर इस सम्बेदनाद्व तका स्वयं प्रभु होरहा और परम सूक्ष्म वर्तमान काल सिद्ध नही होवे ? यानी वर्तमानकाल प्रवश्य सिद्धहोजावेगा । क्षणिक-वादी बौद्धो को बडी सुलभता से वर्तमान क्षरण इष्ट करना पड़ेगा कारणकि वर्तमान क्षणमे पदार्थकी सत्ता मा ते हुये उन्होने दूसरे क्षरणमे पदार्थों का स्वभाव से होरहा विनाश इष्ट किया है "द्वितीयक्ष रणवृत्तिध्वंस प्रतियोगित्व क्षणिकत्वं । ततो न भाविता द्रक्ष्यमाणता नाप्यतोतता । दृष्टता भाव्यतीतस्य कालस्यान्यप्रसिद्धितः ॥ सत्रह॥ तिसही कारण भविष्यमे दर्शनका विषय होजाना यह दृक्ष्यमाणता ही भविष्यता नही है भोर तिस ही कारण दृष्टता ही अतीतपना भी नही है क्योकि अन्य भी भविष्य में होने वाला भावी काल औौर होचुके अतीत काल के प्रोत प्रोत चले भा रहे अन्वय की प्रसिद्धि होरही है । ज्ञान करके देखा जा चुकापन या देखाजायगापन केवल इतना स्वभाव ही भूतकाल या भविष्यकाल नहीं है किन्तु यथार्थ मे पदार्थों के परिणमयिता भूत, वतमान, भविष्य, काल हैं । गतं न गम्यते तावदागतं नैव गम्यते । गतागतविनिमुक्तं गम्यमानं न गम्यते ॥अट्ठारह॥ इत्येवं वर्तमानस्य कालस्याभावभाषणं । स्ववाग्विरुद्धमाभाति तन्निषेधे समत्वतः ॥सोलह॥ निषिद्धमनिषिद्धं वा तद्वयोन्मुक्तमेव वा । निषिध्यते नहिं कैवं निषेधो / व धेरेव वा ।।बीस।। कोई पण्डित कहते हैं कि कोई पथिक मार्ग मे गमन कर रहा है जितना मार्ग वह गमन कर चुका है वह फिर गमन नही किया जाता है क्योकि वह गत होचुका भौर जो भविष्य मे माने योग्य मार्ग है वह भी गमन नही किया जा सकता है कारण कि वह तो भविष्य काल मे गमन किया जावेगा अवं गत और मागत मार्गसे रहित कोई गम्यमान स्थल शेष नही रहा तो वह नही गमन किया जायगा ऐसो दशा मे गत और गमिष्यमारण से प्रात्तरिक्त वर्तमानका कोई गम्यमान शेष नही रहता है । प्राचार्य कहते हैं कि इस प्रकार जो पण्डित वर्तमान काल के प्रभाव को वखानते हैं उनका भाषण स्ववचन विरुद्ध प्रतीत हो रहा है क्योकि उस वर्तमानके निषेधमे मा समान रूपसे वैसे ही भाक्षेप प्रवर्त जाता है हम जैन उन वतमान काल का निषेध करने वाले पण्डिता से पूछते है कि भाप निषिद्ध
वह कौन है - एक गुरु तस्वीरें Maykl Friman, जो उत्कृष्ट पुस्तकों की एक बड़ी संख्या में लिखा है? क्या अन्य लेखकों के बीच में आकर्षित करता है? उसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं। उन्होंने कहा कि 1945 में ब्रिटेन में पैदा हुआ था। मैं (100 से अधिक) पुस्तकों का एक बहुत कुछ अपने व्यावसायिक विकास में युवा फोटोग्राफर मदद करने के लिए लिखा था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी पुस्तकें - इन रचनाओं, वे सरल पाठ्यपुस्तकों या मैनुअल नहीं कहा जा सकता। यात्रा और निरंतर आत्म विकास माइकल फ्रीमैन उसकी अद्भुत किताबें लिखने के लिए मदद की। उनकी अनूठी तस्वीरें प्रकाशित सबसे प्रसिद्ध प्रकाशन। अपनी पुस्तकों में, वह अपने स्वयं के चित्रों का उपयोग, यह क्या उसे अन्य लेखकों से अलग करता है। दो दिशाओं संरेखित, वह अन्य शौकीनों और पेशेवरों की मदद की अपने सभी बारीकियों को खोजने के लिए डिजिटल फोटोग्राफी की पेचीदगियों में महारत हासिल करने,। माइकल कला और स्थापत्य कला का काम करता है के चित्र लेने के प्यार करता है। अपनी पुस्तकों में से कई एशिया, सूडान और जापान के बारे में कहते हैं। कौशल आश्चर्यजनक विशेष प्रभाव पैदा करने के लिए तस्वीर यह और भी अधिक मशहूर बना देता है। उनकी पुस्तक - एक बेस्टसेलर। वे 20 भाषाओं में अनुवाद किया गया। वे पढ़ रहे हैं, फिर से पढ़ें। वे कई फोटोग्राफरों के लिए संदर्भ पुस्तकें हैं। किसी को भी जो अपनी पुस्तकों में पढ़ा है, एक व्यक्ति जो प्रशिक्षण समाप्त हो गया है के रूप में खुद के बारे में बात करेंगे। वे प्रेरित करते हैं, सिखाना, अपने काम और लेखन पर नए सिरे से देखने के लिए मदद करते हैं। पुस्तक "फोटोग्राफर की दृष्टि" इस प्रकाशन - फोटोग्राफी के प्रेमियों के लिए एक वास्तविक खोज। यह अपनी तरह का सबसे अच्छा माना जाता है। उन्होंने कहा कि आसान और समझने योग्य भाषा इतिहास और फोटोग्राफी विकास की कला के बारे में बताता है। यह रहस्य और सफलता के रहस्यों का पता चलता है। यह फोटोग्राफर, उनकी रचनात्मक तरीकों की आत्मा समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह लेखक का फोटोग्राफ पर कीमतों के गठन में कहा, और क्यों कुछ लागत महंगे। सभी कवर फोटोग्राफी की शैलियों। रचनात्मक रहस्य, शैली और कलात्मक कौशल की शैलियों में से सबसे अच्छा संग्रह इकट्ठे हुए। इस किताब को नया अविश्वसनीय छवियों और विचारों के लिए प्रेरित करेंगी। "फोटोग्राफी के स्कूल" Maykl Friman कई किताबें लिखी हैं। "फोटोग्राफी के स्कूल" - सबसे लोकप्रिय में से एक। पुस्तक सड़क शैली का सार पता चलता है। स्ट्रीट फोटोग्राफी पत्रकारिता की तरह एक सा है। किताब कैसे हर रोज से परे जाने की, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सिखाता है। Maykl Friman अपना सर्वश्रेष्ठ छात्रों के साथ यह परिचय है, और अपने काम को दर्शाता है। उनकी पुस्तकें समर्थन करते हैं और प्रेरित युवा फोटोग्राफर। पुस्तक सरल भाषा और आसान में लिखा है। पाठक समझ जाएगा एक सरल आदर्श कैमरा शॉट्स बनाने के लिए कैसे रोशनी में समझ जाएगा, यौगिक रचनाओं सीखता है। वास्तव में, इस पुस्तक - अनुभवी फोटोग्राफरों और शुरुआती के लिए कार्रवाई के लिए एक गाइड। स्नैपशॉट - एक सच्चे रचनात्मक प्रक्रिया है कि कुछ कौशल और ज्ञान की आवश्यकता है। Maykl Friman फ़ोटो के क्षेत्र में एक विशेषज्ञ उपयोगी टिप्स का एक बहुत दे दी है। यहाँ उनमें से सबसे प्रसिद्ध है। - अच्छा शॉट आंख प्रसन्न। लेखक भले ही कोई स्पष्ट नियमों और रचना कर रहे हैं ध्यान में रखने के लिए बाध्य है,। - यदि छवि भावनाओं का विस्फोट का कारण नहीं है, यह बहुत आसान है। - तस्वीर हर बार सभी नए आइटम को खोजने के लिए सक्षम होने के लिए multilayered है किया जाना चाहिए। - विचार जरूरी उपस्थित होना है। लेखक के विचारों कह की गहराई। छवियाँ आकर्षित ध्यान,, मन्त्रमुग्ध अपनी कल्पना जंगली चलाने दे। - शासन से प्रस्थान, चित्र की अंदरूनी समझ से आगे बढ़ें। आत्मा प्रत्येक तस्वीर में शामिल हो जाए। Maykl Friman - एक आदमी है जो फोटोग्राफी की कला लिए अपना जीवन समर्पित, अपने काम और पुस्तकों उसकी आत्मा का एक टुकड़ा में निवेश किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया वास्तव में एक उपयोगी उत्पाद दे दी है। उन्होंने लिखा है और अब मास्टर वर्ग आयोजित करता है। उनकी मदद के युवा फोटोग्राफरों के लिए अमूल्य है।
वह कौन है - एक गुरु तस्वीरें Maykl Friman, जो उत्कृष्ट पुस्तकों की एक बड़ी संख्या में लिखा है? क्या अन्य लेखकों के बीच में आकर्षित करता है? उसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं। उन्होंने कहा कि एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में ब्रिटेन में पैदा हुआ था। मैं पुस्तकों का एक बहुत कुछ अपने व्यावसायिक विकास में युवा फोटोग्राफर मदद करने के लिए लिखा था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी पुस्तकें - इन रचनाओं, वे सरल पाठ्यपुस्तकों या मैनुअल नहीं कहा जा सकता। यात्रा और निरंतर आत्म विकास माइकल फ्रीमैन उसकी अद्भुत किताबें लिखने के लिए मदद की। उनकी अनूठी तस्वीरें प्रकाशित सबसे प्रसिद्ध प्रकाशन। अपनी पुस्तकों में, वह अपने स्वयं के चित्रों का उपयोग, यह क्या उसे अन्य लेखकों से अलग करता है। दो दिशाओं संरेखित, वह अन्य शौकीनों और पेशेवरों की मदद की अपने सभी बारीकियों को खोजने के लिए डिजिटल फोटोग्राफी की पेचीदगियों में महारत हासिल करने,। माइकल कला और स्थापत्य कला का काम करता है के चित्र लेने के प्यार करता है। अपनी पुस्तकों में से कई एशिया, सूडान और जापान के बारे में कहते हैं। कौशल आश्चर्यजनक विशेष प्रभाव पैदा करने के लिए तस्वीर यह और भी अधिक मशहूर बना देता है। उनकी पुस्तक - एक बेस्टसेलर। वे बीस भाषाओं में अनुवाद किया गया। वे पढ़ रहे हैं, फिर से पढ़ें। वे कई फोटोग्राफरों के लिए संदर्भ पुस्तकें हैं। किसी को भी जो अपनी पुस्तकों में पढ़ा है, एक व्यक्ति जो प्रशिक्षण समाप्त हो गया है के रूप में खुद के बारे में बात करेंगे। वे प्रेरित करते हैं, सिखाना, अपने काम और लेखन पर नए सिरे से देखने के लिए मदद करते हैं। पुस्तक "फोटोग्राफर की दृष्टि" इस प्रकाशन - फोटोग्राफी के प्रेमियों के लिए एक वास्तविक खोज। यह अपनी तरह का सबसे अच्छा माना जाता है। उन्होंने कहा कि आसान और समझने योग्य भाषा इतिहास और फोटोग्राफी विकास की कला के बारे में बताता है। यह रहस्य और सफलता के रहस्यों का पता चलता है। यह फोटोग्राफर, उनकी रचनात्मक तरीकों की आत्मा समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह लेखक का फोटोग्राफ पर कीमतों के गठन में कहा, और क्यों कुछ लागत महंगे। सभी कवर फोटोग्राफी की शैलियों। रचनात्मक रहस्य, शैली और कलात्मक कौशल की शैलियों में से सबसे अच्छा संग्रह इकट्ठे हुए। इस किताब को नया अविश्वसनीय छवियों और विचारों के लिए प्रेरित करेंगी। "फोटोग्राफी के स्कूल" Maykl Friman कई किताबें लिखी हैं। "फोटोग्राफी के स्कूल" - सबसे लोकप्रिय में से एक। पुस्तक सड़क शैली का सार पता चलता है। स्ट्रीट फोटोग्राफी पत्रकारिता की तरह एक सा है। किताब कैसे हर रोज से परे जाने की, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सिखाता है। Maykl Friman अपना सर्वश्रेष्ठ छात्रों के साथ यह परिचय है, और अपने काम को दर्शाता है। उनकी पुस्तकें समर्थन करते हैं और प्रेरित युवा फोटोग्राफर। पुस्तक सरल भाषा और आसान में लिखा है। पाठक समझ जाएगा एक सरल आदर्श कैमरा शॉट्स बनाने के लिए कैसे रोशनी में समझ जाएगा, यौगिक रचनाओं सीखता है। वास्तव में, इस पुस्तक - अनुभवी फोटोग्राफरों और शुरुआती के लिए कार्रवाई के लिए एक गाइड। स्नैपशॉट - एक सच्चे रचनात्मक प्रक्रिया है कि कुछ कौशल और ज्ञान की आवश्यकता है। Maykl Friman फ़ोटो के क्षेत्र में एक विशेषज्ञ उपयोगी टिप्स का एक बहुत दे दी है। यहाँ उनमें से सबसे प्रसिद्ध है। - अच्छा शॉट आंख प्रसन्न। लेखक भले ही कोई स्पष्ट नियमों और रचना कर रहे हैं ध्यान में रखने के लिए बाध्य है,। - यदि छवि भावनाओं का विस्फोट का कारण नहीं है, यह बहुत आसान है। - तस्वीर हर बार सभी नए आइटम को खोजने के लिए सक्षम होने के लिए multilayered है किया जाना चाहिए। - विचार जरूरी उपस्थित होना है। लेखक के विचारों कह की गहराई। छवियाँ आकर्षित ध्यान,, मन्त्रमुग्ध अपनी कल्पना जंगली चलाने दे। - शासन से प्रस्थान, चित्र की अंदरूनी समझ से आगे बढ़ें। आत्मा प्रत्येक तस्वीर में शामिल हो जाए। Maykl Friman - एक आदमी है जो फोटोग्राफी की कला लिए अपना जीवन समर्पित, अपने काम और पुस्तकों उसकी आत्मा का एक टुकड़ा में निवेश किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया वास्तव में एक उपयोगी उत्पाद दे दी है। उन्होंने लिखा है और अब मास्टर वर्ग आयोजित करता है। उनकी मदद के युवा फोटोग्राफरों के लिए अमूल्य है।
करना एक समस्या है। मूल शब्दावली का अनुवाद 'उत्तर-पूर्व और दक्षिण पूर्व भी किया जा सकता है ( देखिए पाद-टिप्पणी हि. सं. अनुवाद) । आज तो उस स्थान पर एक अंतरीप है जिसके दोनों ओर एक एक बंदरस्थान है। पूर्व में 'लुतो' बंदरस्थान है ओ अधिक सुरक्षित है। पश्चिम में 'फिनेका' है जो वही पुराना नाम है। जो वर्णन इस पद में दिया गया है वह लुनो बंदरगाह के लिये ठीक जान पड़ता है। ध्यान रहे कि जहाज वहां नहीं पहुँचा । २७ः१४ "युरकुलीन" --यह यूनानी और लातीनी का मिश्रित शब्द है । 'यूर' शब्द यूनानी है और 'कुलीन' शब्द लातीनी भाषा का है। इस शब्द का अर्थ है 'पूर्वोत्तर' । यह भयंकर आंधी होती है। आज भी आइडा नामक ७६०० फुट ऊंचे पहाड़ से बहती है । २७ : १६ "कौदा"-- कुछ प्राचीन प्रतियों में "क्लौदा" नाम है । २७ : १६ "जहाज की नीचे से बांधा"--यह जानकारी नहीं है कि यह कार्य कैसे किया गया। विद्वान लोग प्राचीन जलयात्रा और जलयानों के आधार पर इस कार्य की पद्धति के संबंध में विभिन्न अनुमान प्रस्तुत करते हैं (दे. इन्टरप्रीटर बाइबल, ग्रंथ ६, पृष्ठ ३३६) । "सुरतिस" - यह एक उथली खाड़ी का नाम' है । (दे. हि. सं. अनुवाद) । इस शब्द का अर्थ है 'चोर बालू' । 'आफ्रिका के उत्तरी किनारे पर ट्यूनिस और बार्से के अंतरीपों के बीच में खतरनाक रेतीले किनारे हैं। इन्हें चोरबालू कहा गया है । २७ : २१ "बहुत उपवास कर चुके" (हि. सं. 'कई दिनों से निराहार थे' ) - इनका उपवास धर्मकृत्य नहीं था, वरन संभाव्यतः जलयात्रा की बीमारी के कारण था । २७ः२२-२४ में पौलुस की साक्षी है। उसका अटूट विश्वास भी दर्शनीय है । "स्वर्गदूत ने...कहा" --जीवन के प्रत्येक मोड़ पर पौलुस को दर्शन दिया गया है । २७ : २७ "अद्रिया समुद्र" -यह वर्तमान आद्रियातिक समुद्र नहीं है जो इटली और दलमतिया के बीच में है। उस युग में यह नाम सामान्यतः समस्त पूर्वी भूमध्यसागर के लिये प्रयुक्त होता था। एक विद्वान का कहना है कि यह क्रेते और सिसिली टापूओं के बीच भूमध्यसागर भाग के लिये प्रयुक्त होता था । २७ २८ "पुरसा" सं. 'व्याम' अर्थात हाथों को अगल बगल पूरा फैलाने पर उंगलियों के सिरे तक की लंबाई)। यह लंबाई छः फुट होती है। २७ : ३५-तुलना कीजिए मर ८ : ६; १४ : २२, २३। यह रोटी तोड़ना साधारण भोजन के लिये था, प्रभु भोज के लिये नहीं । दैनिक भोजन के समय भी परमेश्वर को धन्यवाद दिया जाता था । २७ : ३७ "दो सौ छिहत्तर जन" -कुछ मूलप्रतियों में है 'लगभग छिहत्तर २७ : ४१ "दो समुद्र के संगम की जगह" -संभाव्यतः वह स्थान जो दो धाराओं के मिलने के कारण उथला हो । यह स्थान कौनसा था आज निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता । २७ : ४४ "सब कोई. . .बच निकले" - - २७ : २४ में पौलुस का कहा हुआ भविष्यकथन पूरा होता है। (२) मिलिते (माल्टा) टापू में ( २८ : १-१० ) २८ : १ "मिलिते"-वर्तमान माल्टा द्वीप है। कुछ मूल प्रतियों में 'मिलितेने' है। यह टापू रोमी प्रांत सिसिली का भाग था। सिसिली द्वीप से यह लगभग १६ किलोमीटर दक्षिण में है। २८ः२ "जंगली"-- मूल यूनानी शब्द है 'बर्बर' ( Bar
करना एक समस्या है। मूल शब्दावली का अनुवाद 'उत्तर-पूर्व और दक्षिण पूर्व भी किया जा सकता है । आज तो उस स्थान पर एक अंतरीप है जिसके दोनों ओर एक एक बंदरस्थान है। पूर्व में 'लुतो' बंदरस्थान है ओ अधिक सुरक्षित है। पश्चिम में 'फिनेका' है जो वही पुराना नाम है। जो वर्णन इस पद में दिया गया है वह लुनो बंदरगाह के लिये ठीक जान पड़ता है। ध्यान रहे कि जहाज वहां नहीं पहुँचा । सत्ताईसःचौदह "युरकुलीन" --यह यूनानी और लातीनी का मिश्रित शब्द है । 'यूर' शब्द यूनानी है और 'कुलीन' शब्द लातीनी भाषा का है। इस शब्द का अर्थ है 'पूर्वोत्तर' । यह भयंकर आंधी होती है। आज भी आइडा नामक सात हज़ार छः सौ फुट ऊंचे पहाड़ से बहती है । सत्ताईस : सोलह "कौदा"-- कुछ प्राचीन प्रतियों में "क्लौदा" नाम है । सत्ताईस : सोलह "जहाज की नीचे से बांधा"--यह जानकारी नहीं है कि यह कार्य कैसे किया गया। विद्वान लोग प्राचीन जलयात्रा और जलयानों के आधार पर इस कार्य की पद्धति के संबंध में विभिन्न अनुमान प्रस्तुत करते हैं । "सुरतिस" - यह एक उथली खाड़ी का नाम' है । । इस शब्द का अर्थ है 'चोर बालू' । 'आफ्रिका के उत्तरी किनारे पर ट्यूनिस और बार्से के अंतरीपों के बीच में खतरनाक रेतीले किनारे हैं। इन्हें चोरबालू कहा गया है । सत्ताईस : इक्कीस "बहुत उपवास कर चुके" - इनका उपवास धर्मकृत्य नहीं था, वरन संभाव्यतः जलयात्रा की बीमारी के कारण था । सत्ताईसःबाईस-चौबीस में पौलुस की साक्षी है। उसका अटूट विश्वास भी दर्शनीय है । "स्वर्गदूत ने...कहा" --जीवन के प्रत्येक मोड़ पर पौलुस को दर्शन दिया गया है । सत्ताईस : सत्ताईस "अद्रिया समुद्र" -यह वर्तमान आद्रियातिक समुद्र नहीं है जो इटली और दलमतिया के बीच में है। उस युग में यह नाम सामान्यतः समस्त पूर्वी भूमध्यसागर के लिये प्रयुक्त होता था। एक विद्वान का कहना है कि यह क्रेते और सिसिली टापूओं के बीच भूमध्यसागर भाग के लिये प्रयुक्त होता था । सत्ताईस अट्ठाईस "पुरसा" सं. 'व्याम' अर्थात हाथों को अगल बगल पूरा फैलाने पर उंगलियों के सिरे तक की लंबाई)। यह लंबाई छः फुट होती है। सत्ताईस : पैंतीस-तुलना कीजिए मर आठ : छः; चौदह : बाईस, तेईस। यह रोटी तोड़ना साधारण भोजन के लिये था, प्रभु भोज के लिये नहीं । दैनिक भोजन के समय भी परमेश्वर को धन्यवाद दिया जाता था । सत्ताईस : सैंतीस "दो सौ छिहत्तर जन" -कुछ मूलप्रतियों में है 'लगभग छिहत्तर सत्ताईस : इकतालीस "दो समुद्र के संगम की जगह" -संभाव्यतः वह स्थान जो दो धाराओं के मिलने के कारण उथला हो । यह स्थान कौनसा था आज निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता । सत्ताईस : चौंतालीस "सब कोई. . .बच निकले" - - सत्ताईस : चौबीस में पौलुस का कहा हुआ भविष्यकथन पूरा होता है। मिलिते टापू में अट्ठाईस : एक "मिलिते"-वर्तमान माल्टा द्वीप है। कुछ मूल प्रतियों में 'मिलितेने' है। यह टापू रोमी प्रांत सिसिली का भाग था। सिसिली द्वीप से यह लगभग सोलह किलोग्राममीटर दक्षिण में है। अट्ठाईसःदो "जंगली"-- मूल यूनानी शब्द है 'बर्बर' ( Bar
कार्यक्रम में प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण केंद्र डरोह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। रेनबो वल्र्ड स्कूल के अध्यक्ष डाक्टर छवि कश्यप, स्कूल की प्रधानाचार्या सुजैन डेविड व स्कूल प्रबंधक रवि जम्वाल ने मुख्यातिथि को पुष्पवृंद भेंट कर स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यातिथि द्वारा दीप प्रज्वलित करके की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमका आगाज करते हुए बच्चों ने शास्त्रीय नृत्य शिव स्तुति पेश किया। नर्सरी रोज के नौनिहालों ने भी दादा-दादी के स्वागत के लिए स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच में ही रेनबो वल्र्ड स्कूल के अध्यक्ष डाक्टर छवि कश्यप, स्कूल प्रधानाचार्या सुजैन डेविड व स्कूल प्रबंधक रवि जम्बाल ने मुख्य अतिथि को हिमाचली टोपी एशॉल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया । समारोह के मुख्य अतिथि ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों द्वारा जो प्रस्तुतियां दी गई हैं। कार्यक्रम के अंत में रेनबो वल्र्ड स्कूल के प्रबंधक रवि जम्वाल ने मुख्य अतिथि व अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपने अपना बहुमूल्य समय निकालकर अपने नौनिहालों के सांस्कृतिक कार्यक्रम को चार चांद लगाकर सफल बनाया है।
कार्यक्रम में प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण केंद्र डरोह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। रेनबो वल्र्ड स्कूल के अध्यक्ष डाक्टर छवि कश्यप, स्कूल की प्रधानाचार्या सुजैन डेविड व स्कूल प्रबंधक रवि जम्वाल ने मुख्यातिथि को पुष्पवृंद भेंट कर स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यातिथि द्वारा दीप प्रज्वलित करके की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमका आगाज करते हुए बच्चों ने शास्त्रीय नृत्य शिव स्तुति पेश किया। नर्सरी रोज के नौनिहालों ने भी दादा-दादी के स्वागत के लिए स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच में ही रेनबो वल्र्ड स्कूल के अध्यक्ष डाक्टर छवि कश्यप, स्कूल प्रधानाचार्या सुजैन डेविड व स्कूल प्रबंधक रवि जम्बाल ने मुख्य अतिथि को हिमाचली टोपी एशॉल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया । समारोह के मुख्य अतिथि ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों द्वारा जो प्रस्तुतियां दी गई हैं। कार्यक्रम के अंत में रेनबो वल्र्ड स्कूल के प्रबंधक रवि जम्वाल ने मुख्य अतिथि व अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपने अपना बहुमूल्य समय निकालकर अपने नौनिहालों के सांस्कृतिक कार्यक्रम को चार चांद लगाकर सफल बनाया है।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अमेरिकी शोधार्थी के बलात्कार मामले में अदालत की ओर से दोषी ठहराए गए हिंदी फिल्म 'पीपली लाइव' के सह निर्देशक महमूद फारूकी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग करते हुए कहा कि विदेशी के साथ हुए अपराध से भारत की बदनामी हुई। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत अपराध के लिए अधिकतम सजा की मांग करते हुए शिकायतकर्ता के वकील ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन से कहा कि पीड़िता का एक ऐसे दोस्त ने बलात्कार किया जिस पर उसने भरोसा किया। हालांकि फारूकी की वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा कि उसने मामले में पूरा सहयोग किया। इसलिए उसे सुधार का मौका मिलना चाहिए। सजा पर दलीलों के दौरान शिकायतकर्ता के वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि विदेशी (पीड़िता) यहां शोध कार्य के लिए आई थी। लेकिन उसके जानने वाले व्यक्ति ने उसका बलात्कार किया जो उसका दोस्त था। जिस पर उसने भरोसा किया। दोषी के प्रति नरमी का अनुरोध करते हुए फारूकी की वकील ने कहा कि वह आदतन अपराधी नहीं है। उसने कभी भी महिला को धमकी नहीं दी और न ही उसके साथ हिंसक या बर्बर हुआ। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसले को चार अगस्त के लिए सुरक्षित रखा।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अमेरिकी शोधार्थी के बलात्कार मामले में अदालत की ओर से दोषी ठहराए गए हिंदी फिल्म 'पीपली लाइव' के सह निर्देशक महमूद फारूकी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग करते हुए कहा कि विदेशी के साथ हुए अपराध से भारत की बदनामी हुई। भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर के तहत अपराध के लिए अधिकतम सजा की मांग करते हुए शिकायतकर्ता के वकील ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन से कहा कि पीड़िता का एक ऐसे दोस्त ने बलात्कार किया जिस पर उसने भरोसा किया। हालांकि फारूकी की वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा कि उसने मामले में पूरा सहयोग किया। इसलिए उसे सुधार का मौका मिलना चाहिए। सजा पर दलीलों के दौरान शिकायतकर्ता के वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि विदेशी यहां शोध कार्य के लिए आई थी। लेकिन उसके जानने वाले व्यक्ति ने उसका बलात्कार किया जो उसका दोस्त था। जिस पर उसने भरोसा किया। दोषी के प्रति नरमी का अनुरोध करते हुए फारूकी की वकील ने कहा कि वह आदतन अपराधी नहीं है। उसने कभी भी महिला को धमकी नहीं दी और न ही उसके साथ हिंसक या बर्बर हुआ। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसले को चार अगस्त के लिए सुरक्षित रखा।
खेल। टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय महिला हॉकी टीम (India Women's Hockey team) ने शानदार प्रदर्शन किया, जिस कारण उन्हें चैंपियन कहना गलत नहीं होगा। सेमीफाइनल तक पहुंचना और इतिहास रचना दोनों ही काम भारतीय महिला हॉकी टीम ने कर दिखाया। जीत या हार जिंदगी का हिस्सा है, इस बार हारीं हैं तो अगले बारी जीत की राह चुनेंगे। बेहद मजबूत मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम (Australia) को हराकर सेमीफाइनल (Semifinal) में पहुंचना भारत की बेटियों ने ये दिखा दिया की वो किसी से कम नहीं है। भले ही वह ब्रॉन्ज के लिए लड़ते लड़ते ग्रेट ब्रिटेन (Great Britain) से हार गईं, लेकिन देश के लोगों का दिल जीत ले गईं। दरअसल शुक्रवार को खेले गए ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में भारत को ग्रेट ब्रिटेन ने 4-3 से मात दे दी। भारत की तरफ से 2 गोल गुरजीत ने किए जबकि 1 गोल वंदना कटारिया ने किए। पहले क्वार्टर तक तो दोनों टीमों ने गजब का खेल दिखाया, लेकिन कोई भी गोल दागने में सफल नहीं हो पाया। वहीं दूसरे क्वार्टर में ग्रेट ब्रिटेन की टीम अलग रणनीती से मैदान में उतरी और आक्रामकता से खेल की शुरुआत करते हुए 5 मिनट में ही पहला गोल कर दिया। अब भारत पर दबाव बन गया क्योंकि स्कोर 1-0 हो गया था, जवाबी हमले में भारत ने दूसरे क्वार्टर के खत्म होने से पहले 10 मिनट में पहले पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन गोल करने से चूक गईं। दूसरे क्वार्टर के खत्म होते होते ग्रेट ब्रिटेन ने एक और गोल दागकर भारतीय टीम पर ज्यादा दबाव बना दिया। इसके बाद भारत की तरफ से गुरजीत ने पेनल्टी कॉर्नर का शानदार तरीके से फायदा उठाते हुए टीम के लिए पहला गोल दाग दिया। जिससे स्कोर 2-1 हो गया। एक बार फिर दूसरे क्वार्टर के खत्म होने से कुछ देर पहले ही भारतीय टीम ने पूरी ताकत लगाते हुए पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया और गुरजीत ने फिर एक गोल दाग दिया। वहीं हाफ टाइम से ठीक पहले वंदना कटारिया ने गोल दागकर भारत की बढ़त को 3-2 कर दिया। दूसरे क्वार्टर में 15 मिनट में 5 गोल दागे गए। इनमें 3 ग्रेट ब्रिटेन और 2 भारत की तरफ से हुए। तीसरे क्वार्टर खत्म होने से पहले ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने जवाबी गोल दागकर स्कोर बराबर कर दिया फिर तीसरा क्वार्टर खत्म होने से 10 मिनट पहले भारतीय टीम ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन बढ़त नहीं बना पाई। और गेम भारत के हाथ से निकल गया। जिस कारण उसे ग्रेट ब्रेिटेन से हार का सामना करना पड़ा।
खेल। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया, जिस कारण उन्हें चैंपियन कहना गलत नहीं होगा। सेमीफाइनल तक पहुंचना और इतिहास रचना दोनों ही काम भारतीय महिला हॉकी टीम ने कर दिखाया। जीत या हार जिंदगी का हिस्सा है, इस बार हारीं हैं तो अगले बारी जीत की राह चुनेंगे। बेहद मजबूत मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचना भारत की बेटियों ने ये दिखा दिया की वो किसी से कम नहीं है। भले ही वह ब्रॉन्ज के लिए लड़ते लड़ते ग्रेट ब्रिटेन से हार गईं, लेकिन देश के लोगों का दिल जीत ले गईं। दरअसल शुक्रवार को खेले गए ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में भारत को ग्रेट ब्रिटेन ने चार-तीन से मात दे दी। भारत की तरफ से दो गोल गुरजीत ने किए जबकि एक गोल वंदना कटारिया ने किए। पहले क्वार्टर तक तो दोनों टीमों ने गजब का खेल दिखाया, लेकिन कोई भी गोल दागने में सफल नहीं हो पाया। वहीं दूसरे क्वार्टर में ग्रेट ब्रिटेन की टीम अलग रणनीती से मैदान में उतरी और आक्रामकता से खेल की शुरुआत करते हुए पाँच मिनट में ही पहला गोल कर दिया। अब भारत पर दबाव बन गया क्योंकि स्कोर एक-शून्य हो गया था, जवाबी हमले में भारत ने दूसरे क्वार्टर के खत्म होने से पहले दस मिनट में पहले पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन गोल करने से चूक गईं। दूसरे क्वार्टर के खत्म होते होते ग्रेट ब्रिटेन ने एक और गोल दागकर भारतीय टीम पर ज्यादा दबाव बना दिया। इसके बाद भारत की तरफ से गुरजीत ने पेनल्टी कॉर्नर का शानदार तरीके से फायदा उठाते हुए टीम के लिए पहला गोल दाग दिया। जिससे स्कोर दो-एक हो गया। एक बार फिर दूसरे क्वार्टर के खत्म होने से कुछ देर पहले ही भारतीय टीम ने पूरी ताकत लगाते हुए पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया और गुरजीत ने फिर एक गोल दाग दिया। वहीं हाफ टाइम से ठीक पहले वंदना कटारिया ने गोल दागकर भारत की बढ़त को तीन-दो कर दिया। दूसरे क्वार्टर में पंद्रह मिनट में पाँच गोल दागे गए। इनमें तीन ग्रेट ब्रिटेन और दो भारत की तरफ से हुए। तीसरे क्वार्टर खत्म होने से पहले ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने जवाबी गोल दागकर स्कोर बराबर कर दिया फिर तीसरा क्वार्टर खत्म होने से दस मिनट पहले भारतीय टीम ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन बढ़त नहीं बना पाई। और गेम भारत के हाथ से निकल गया। जिस कारण उसे ग्रेट ब्रेिटेन से हार का सामना करना पड़ा।
सबरीमाला मंदिर में 2 महिलाओं के प्रवेश के बाद भड़की हिंसात्मक प्रदर्शन के 4 दिनों बाद केरल में रविवार का दिन शांतिपूर्ण तरीके से गुजरा। अब तक इन प्रदर्शनों में करीब 5,769 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 1,869 केस दर्ज किये गए हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो उसके आदेश को लागू करे। उन्होंने ये भी कहा कि वो किसी भी विरोध प्रदर्शन के आगे झुकेंगे नहीं क्योंकि देश के सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबसे ऊपर है। मुख्यमंत्री ने भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से अपील की है कि वो अपने केरल इकाई को राज्य में हिंसा फैलाने से रोके। मुख्यमंत्री का पोस्ट तब आया जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि माकपा नीत एलडीएफ सरकार भाजपा कार्यकर्ताओं को राज्य के खिलाफ आवाज उठाने के लिए गिरफ्तार कर रही थी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे संवैधानिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि संघ परिवार केरल में भी उन्हीं तरीकों को लागू करने की कोशिश कर रहा है जो उन्होंने उत्तर भारत में किए थे। लेकिन ये केरल में सफल नहीं होगा। राज्य हर तरह के साजिशों का मजबूती से सामना करेगा। राज्य पुलिस अधीक्षक ने कहा कि करीब 5,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिसमे से 4,980 लोगों को जमानत दे दी गई। कन्नूर जिले में अब तक 283 मामले दर्ज किए गए हैं और 764 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कन्नूर में ही स्थित एक RSS के दफ्तर को आग भी लगा दी गयी थी और भाजपा सांसद वी मुरलीधरन के घर पर एक देसी बम फेंका गया था।
सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद भड़की हिंसात्मक प्रदर्शन के चार दिनों बाद केरल में रविवार का दिन शांतिपूर्ण तरीके से गुजरा। अब तक इन प्रदर्शनों में करीब पाँच,सात सौ उनहत्तर लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक,आठ सौ उनहत्तर केस दर्ज किये गए हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो उसके आदेश को लागू करे। उन्होंने ये भी कहा कि वो किसी भी विरोध प्रदर्शन के आगे झुकेंगे नहीं क्योंकि देश के सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबसे ऊपर है। मुख्यमंत्री ने भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से अपील की है कि वो अपने केरल इकाई को राज्य में हिंसा फैलाने से रोके। मुख्यमंत्री का पोस्ट तब आया जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि माकपा नीत एलडीएफ सरकार भाजपा कार्यकर्ताओं को राज्य के खिलाफ आवाज उठाने के लिए गिरफ्तार कर रही थी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे संवैधानिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि संघ परिवार केरल में भी उन्हीं तरीकों को लागू करने की कोशिश कर रहा है जो उन्होंने उत्तर भारत में किए थे। लेकिन ये केरल में सफल नहीं होगा। राज्य हर तरह के साजिशों का मजबूती से सामना करेगा। राज्य पुलिस अधीक्षक ने कहा कि करीब पाँच,आठ सौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिसमे से चार,नौ सौ अस्सी लोगों को जमानत दे दी गई। कन्नूर जिले में अब तक दो सौ तिरासी मामले दर्ज किए गए हैं और सात सौ चौंसठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कन्नूर में ही स्थित एक RSS के दफ्तर को आग भी लगा दी गयी थी और भाजपा सांसद वी मुरलीधरन के घर पर एक देसी बम फेंका गया था।
मुंबईः राज्य में गैर शिक्षक कर्मचारियों (Non-Teaching Staff ) के आंदोलन का असर 12वीं के छात्रों पर पड़ा है। कई छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा (Practical Examination) रोक दी गई है। 12वीं बोर्ड की लिखित परीक्षा (12th Board Written Exams) सिर्फ 7 दिन दूर है। छात्र चिंतित हैं, क्योंकि कई छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा अभी तक पूरी नहीं हुई है। शिक्षकों का कहना है कि 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाएं 1 फरवरी से शुरू हुई हैं, लेकिन लैब असिस्टेंट नहीं हैं, ऐसे में प्रैक्टिकल परीक्षा कैसे ली जाए। इस आंदोलन से शिक्षा विभाग और बोर्ड को बड़ा झटका लगा है। इससे 12वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्रों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कक्षाओं के शिक्षक भी परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर बिना लैब असिस्टेंट के कैसे प्रायोगिक परीक्षा ली जाए। 12वीं बोर्ड की लिखित परीक्षा 21 फरवरी से शुरू होने वाली है। प्रैक्टिकल परीक्षा 16 फरवरी तक पूरी होने की उम्मीद थी। गैर शिक्षक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण कई कॉलेजों में इन प्रायोगिक परीक्षाओं को कराने में मुश्किलें आ रही हैं। बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स जैसे विषयों की प्रैक्टिकल परीक्षा कराने की जिम्मेदारी लैब असिस्टेंट की होती है। इस आंदोलन के कारण लैब सहायक उपलब्ध नहीं होने से परेशानी हो रही है। कई छात्रों की तीन से चार विषयों की प्रायोगिक परीक्षा बाकी है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों का हो रहा है। हड़ताल के कारण छात्र असमंजस में फंसे हुए हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि प्रायोगिक परीक्षा की तैयारियां करें या 21 फरवरी से होने वाली लिखित परीक्षा की। कई छात्रों का कहना है कि वे वेहद तनाव में हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर परेशान हैं। वे बच्चों को तरह-तरह के ढाढस दे रहे हैं। वे अपने बच्चों को कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है। सब समस्याएं ठीक हो जाएंगी, लेकिन प्रायोगिक परीक्षा अधर में लटकने से छात्र चिंतित हैं। मुंबई बोर्ड ने सफाई दी है कि 12वीं बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कई कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षाएं समय पर संपन्न हो चुकी हैं और कुछ कॉलेजों में परीक्षाएं 20 फरवरी तक संपन्न हो जाएंगी। इसके अलावा मुंबई बोर्ड ने कहा है कि कॉलेजों को पूरी मदद की जाएगी। हालांकि बोर्ड से किसी तरह का सहयोग नहीं मिलने से प्राचार्य और शिक्षक मायूस हो रहे हैं। कई शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि राज्य सरकार को इस संबंध में तत्काल कोई हल निकालना चाहिए और उपयुक्त समाधान खोजने की आवश्यकता है, जिससे छात्रों को किसी भी प्रकार की शैक्षिक हानि न हो। यदि गैर शिक्षक कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहा तो 12वीं बोर्ड की लिखित परीक्षाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
मुंबईः राज्य में गैर शिक्षक कर्मचारियों के आंदोलन का असर बारहवीं के छात्रों पर पड़ा है। कई छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा रोक दी गई है। बारहवीं बोर्ड की लिखित परीक्षा सिर्फ सात दिन दूर है। छात्र चिंतित हैं, क्योंकि कई छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा अभी तक पूरी नहीं हुई है। शिक्षकों का कहना है कि बारहवीं की प्रायोगिक परीक्षाएं एक फरवरी से शुरू हुई हैं, लेकिन लैब असिस्टेंट नहीं हैं, ऐसे में प्रैक्टिकल परीक्षा कैसे ली जाए। इस आंदोलन से शिक्षा विभाग और बोर्ड को बड़ा झटका लगा है। इससे बारहवीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्रों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कक्षाओं के शिक्षक भी परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर बिना लैब असिस्टेंट के कैसे प्रायोगिक परीक्षा ली जाए। बारहवीं बोर्ड की लिखित परीक्षा इक्कीस फरवरी से शुरू होने वाली है। प्रैक्टिकल परीक्षा सोलह फरवरी तक पूरी होने की उम्मीद थी। गैर शिक्षक कर्मचारियों के आंदोलन के कारण कई कॉलेजों में इन प्रायोगिक परीक्षाओं को कराने में मुश्किलें आ रही हैं। बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स जैसे विषयों की प्रैक्टिकल परीक्षा कराने की जिम्मेदारी लैब असिस्टेंट की होती है। इस आंदोलन के कारण लैब सहायक उपलब्ध नहीं होने से परेशानी हो रही है। कई छात्रों की तीन से चार विषयों की प्रायोगिक परीक्षा बाकी है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों का हो रहा है। हड़ताल के कारण छात्र असमंजस में फंसे हुए हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि प्रायोगिक परीक्षा की तैयारियां करें या इक्कीस फरवरी से होने वाली लिखित परीक्षा की। कई छात्रों का कहना है कि वे वेहद तनाव में हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर परेशान हैं। वे बच्चों को तरह-तरह के ढाढस दे रहे हैं। वे अपने बच्चों को कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है। सब समस्याएं ठीक हो जाएंगी, लेकिन प्रायोगिक परीक्षा अधर में लटकने से छात्र चिंतित हैं। मुंबई बोर्ड ने सफाई दी है कि बारहवीं बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कई कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षाएं समय पर संपन्न हो चुकी हैं और कुछ कॉलेजों में परीक्षाएं बीस फरवरी तक संपन्न हो जाएंगी। इसके अलावा मुंबई बोर्ड ने कहा है कि कॉलेजों को पूरी मदद की जाएगी। हालांकि बोर्ड से किसी तरह का सहयोग नहीं मिलने से प्राचार्य और शिक्षक मायूस हो रहे हैं। कई शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि राज्य सरकार को इस संबंध में तत्काल कोई हल निकालना चाहिए और उपयुक्त समाधान खोजने की आवश्यकता है, जिससे छात्रों को किसी भी प्रकार की शैक्षिक हानि न हो। यदि गैर शिक्षक कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहा तो बारहवीं बोर्ड की लिखित परीक्षाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
एमएसपी के मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार मांगेगी और समय। समिति बनाने के प्रस्ताव पर किसान संगठनों को राजी करने की होगी कोशिश। प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो) किसान आंदोलन के संदर्भ में सरकार ने आधा विवाद सुलझाने का दावा किया है। हालांकि हकीकत यह है कि इस विवाद के मामले में अभी हाथी की पूंछ ही निकली है। जिन दो प्रमुख मुद्दों तीनों कृषि कानून की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी पर पेच फंसा है, उन मामलों में बीच का रास्ता निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। बीच का रास्ता निकालने के लिए सरकार में शुक्रवार से माथापच्ची का दौर शुरू होगा। चार जनवरी को किसान संगठनों से होने वाली सातवें दौर की बातचीत के कुछ मामले में सरकार का रुख अभी से स्पष्ट है। सरकार कानून वापसी की मांग स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा एमएसपी पर खरीद व्यवस्था को जारी रखने संबंधी कानूनी गारंटी देने के लिए समय दिए जाने की मांग करेगी। इससे पहले सरकार किसान संगठनों को इस विवाद के निपटारे के लिए समिति का गठन संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए राजी करेगी। सरकार के सूत्र के मुताबिक बुधवार की बैठक में ही कृषि मंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार कानूनों की वापसी की मांग नहीं मानेगी। कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से तीनों कानूनों को रद्द करने के अलावा दूसरे विकल्प मांगे हैं। सरकार चाहती है कि किसान संगठन कानून रद्द करने के बदले कानून के उन प्रावधानों पर चर्चा करे, जिससे उसे समस्या है। सातवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने इसी रुख पर कायम रहेगी। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर एमएसपी पर कोई ठोस पहल की जाए तो किसान संगठनों को तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग के प्रति रुख नरम करने के लिए राजी किया जा सकता है। सरकार के स्तर पर इस बात पर मंथन हो रहा है कि ऐसा कौन सा नया भरोसा दिया जाए, जिससे एमएसपी व्यवस्था जारी रहने का ठोस संदेश जाए। सरकार इस आशय का लिखित आश्वासन पहले ही दे चुकी है, जिसे किसान संगठनों ने ठुकरा दिया है। सरकार इस बैठक में किसानों की मांग पर विचार के लिए और समय मांगेगी। एमएसपी संबंधी मांग पर क्या है उलझन? दरअसल, एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की राह में कई उलझने हैं। सबसे पहले इसके वित्तीय प्रभाव पड़ेंगे। सरकार को इससे जुड़े सभी पक्षों से बात करनी होगी। सवाल यह भी है कि सरकार दूसरे पक्ष को एक निश्चित कीमत से कम पर खरीद नहीं करने के लिए कैसे बाध्य कर सकती है। वह भी तब जब कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए निजी क्षेत्र लालायित नहीं हैं। इसके अलावा एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने के बाद सरप्लस अनाज का क्या होगा। यह सवाल इसलिए कि सरकार भंडारण सहित अन्य कारणों से निश्चित मात्रा में ही अनाज खरीद सकेगी। फिर सरप्लस अनाज का क्या होगा? कृषि मंत्रालय में एमएसपी पर नया प्रस्ताव देने पर माथापच्ची का दौर बृहस्पतिवार से शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार या शनिवार को सातवें दौर की वार्ता की रणनीति बनाने के लिए सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू होगा। इन्हीं बैठकों में किसानों के सामने वार्ता के दौरान दिए जाने वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
एमएसपी के मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार मांगेगी और समय। समिति बनाने के प्रस्ताव पर किसान संगठनों को राजी करने की होगी कोशिश। प्रदर्शन करते किसान किसान आंदोलन के संदर्भ में सरकार ने आधा विवाद सुलझाने का दावा किया है। हालांकि हकीकत यह है कि इस विवाद के मामले में अभी हाथी की पूंछ ही निकली है। जिन दो प्रमुख मुद्दों तीनों कृषि कानून की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी पर पेच फंसा है, उन मामलों में बीच का रास्ता निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। बीच का रास्ता निकालने के लिए सरकार में शुक्रवार से माथापच्ची का दौर शुरू होगा। चार जनवरी को किसान संगठनों से होने वाली सातवें दौर की बातचीत के कुछ मामले में सरकार का रुख अभी से स्पष्ट है। सरकार कानून वापसी की मांग स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा एमएसपी पर खरीद व्यवस्था को जारी रखने संबंधी कानूनी गारंटी देने के लिए समय दिए जाने की मांग करेगी। इससे पहले सरकार किसान संगठनों को इस विवाद के निपटारे के लिए समिति का गठन संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए राजी करेगी। सरकार के सूत्र के मुताबिक बुधवार की बैठक में ही कृषि मंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार कानूनों की वापसी की मांग नहीं मानेगी। कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से तीनों कानूनों को रद्द करने के अलावा दूसरे विकल्प मांगे हैं। सरकार चाहती है कि किसान संगठन कानून रद्द करने के बदले कानून के उन प्रावधानों पर चर्चा करे, जिससे उसे समस्या है। सातवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने इसी रुख पर कायम रहेगी। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर एमएसपी पर कोई ठोस पहल की जाए तो किसान संगठनों को तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग के प्रति रुख नरम करने के लिए राजी किया जा सकता है। सरकार के स्तर पर इस बात पर मंथन हो रहा है कि ऐसा कौन सा नया भरोसा दिया जाए, जिससे एमएसपी व्यवस्था जारी रहने का ठोस संदेश जाए। सरकार इस आशय का लिखित आश्वासन पहले ही दे चुकी है, जिसे किसान संगठनों ने ठुकरा दिया है। सरकार इस बैठक में किसानों की मांग पर विचार के लिए और समय मांगेगी। एमएसपी संबंधी मांग पर क्या है उलझन? दरअसल, एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की राह में कई उलझने हैं। सबसे पहले इसके वित्तीय प्रभाव पड़ेंगे। सरकार को इससे जुड़े सभी पक्षों से बात करनी होगी। सवाल यह भी है कि सरकार दूसरे पक्ष को एक निश्चित कीमत से कम पर खरीद नहीं करने के लिए कैसे बाध्य कर सकती है। वह भी तब जब कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए निजी क्षेत्र लालायित नहीं हैं। इसके अलावा एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने के बाद सरप्लस अनाज का क्या होगा। यह सवाल इसलिए कि सरकार भंडारण सहित अन्य कारणों से निश्चित मात्रा में ही अनाज खरीद सकेगी। फिर सरप्लस अनाज का क्या होगा? कृषि मंत्रालय में एमएसपी पर नया प्रस्ताव देने पर माथापच्ची का दौर बृहस्पतिवार से शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार या शनिवार को सातवें दौर की वार्ता की रणनीति बनाने के लिए सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू होगा। इन्हीं बैठकों में किसानों के सामने वार्ता के दौरान दिए जाने वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Ranchi/Garhwa : गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल मुख्यालय में हेमंत सरकार जल्द ही डिग्री कॉलेज बनवाएगी. साथ ही मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत राज्य सरकार इलाज के लिए 5 की जगह 10 अब लाख रुपये की सहायता देगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को दोनों प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है. बता दें कि 2008 से पहले रंका, गढ़वा सदर अनुमंडल अंतर्गत आता था. अनुमंडल बनने के बाद से रंकावासियों की डिग्री कॉलेज को लेकर मांग की जा रही थी. गढ़वा विधायक और जिलावासियों की मांग को देखते हुए सरकार ने डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि रंका में डिग्री कॉलेज शुरू होने से युवाओं को उच्च शिक्षा के कई अवसर प्राप्त होंगे और भविष्य में उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. झारखंड में अब मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत असाध्य रोगों के इलाज में मरीजों को हेमंत सरकार मदद के तौर पर 10 लाख की सहायता देगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभागीय स्तर से चिकित्सा सहायता अनुदान की राशि 5 लाख रुपये को बढ़ाकर 10 लाख करने का फैसला किया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पूर्व से स्वीकृत गंभीर रोगों की सूची में अन्य गंभीर बीमारियों को सूचीबद्ध करने से संबंधित प्रस्ताव पर भी स्वीकृति दी है. इसे भी पढ़ें- शाम की न्यूज डायरी। । 31 अगस्त। । CA सुमन को नहीं मिली बेल। । फिर ED के रिमांड पर प्रेम प्रकाश। । प्रताड़ना के आरोप में सीमा पात्रा अरेस्ट। । अब सत्यानंद भोक्ता-प्रदीप यादव गये रायपुर। । 'लोकतंत्र का सीरियल किलर BJP'। । समेत कई खबरें और वीडियो। ।
Ranchi/Garhwa : गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल मुख्यालय में हेमंत सरकार जल्द ही डिग्री कॉलेज बनवाएगी. साथ ही मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत राज्य सरकार इलाज के लिए पाँच की जगह दस अब लाख रुपये की सहायता देगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को दोनों प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है. बता दें कि दो हज़ार आठ से पहले रंका, गढ़वा सदर अनुमंडल अंतर्गत आता था. अनुमंडल बनने के बाद से रंकावासियों की डिग्री कॉलेज को लेकर मांग की जा रही थी. गढ़वा विधायक और जिलावासियों की मांग को देखते हुए सरकार ने डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि रंका में डिग्री कॉलेज शुरू होने से युवाओं को उच्च शिक्षा के कई अवसर प्राप्त होंगे और भविष्य में उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. झारखंड में अब मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत असाध्य रोगों के इलाज में मरीजों को हेमंत सरकार मदद के तौर पर दस लाख की सहायता देगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभागीय स्तर से चिकित्सा सहायता अनुदान की राशि पाँच लाख रुपये को बढ़ाकर दस लाख करने का फैसला किया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पूर्व से स्वीकृत गंभीर रोगों की सूची में अन्य गंभीर बीमारियों को सूचीबद्ध करने से संबंधित प्रस्ताव पर भी स्वीकृति दी है. इसे भी पढ़ें- शाम की न्यूज डायरी। । इकतीस अगस्त। । CA सुमन को नहीं मिली बेल। । फिर ED के रिमांड पर प्रेम प्रकाश। । प्रताड़ना के आरोप में सीमा पात्रा अरेस्ट। । अब सत्यानंद भोक्ता-प्रदीप यादव गये रायपुर। । 'लोकतंत्र का सीरियल किलर BJP'। । समेत कई खबरें और वीडियो। ।
लखनऊ/कोलकाता/तिरुवनंतपुरम । यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा के प्रावधान वाले प्रस्तावित 'सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक-2014' के विरोध में गुरुवार को परिवहन संचालकों के देशव्यापी हड़ताल से देश भर में लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों पर यात्री फंसे रहे तथा लोगों को कार्यालय जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देश भर के मजदूर संघ भाजपा पर कामगार विरोधी नीति बनाने का आरोप लगाते हुए इस प्रस्तावित विधेयक को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। नए विधेयक में लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाने पर 50 हजार रुपये, शराब पीकर वाहन चलाने पर 10 हजार रुपये और अत्यधिक तेज परिचालन पर 6,000 रुपये के चालान का प्रावधान है। इसे मंत्रिमंडल के पास मंजूरी के लिए रखा जाना है। विधेयक में एक नियामक प्राधिकरण गठित किए जाने का भी प्रावधान है। परिवहन संचालकों का कहना है कि विधेयक में विभिन्न उल्लंघनों के लिए निर्धारित किया गया जुर्माना काफी अधिक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हालांकि इसे वाजिब बताते हुए कहा है कि अगले पांच साल में सालाना दुर्घटनाओं की संख्या घटाकर दो लाख तक लाने के लिए यह जरूरी है। सालाना दुर्घटनाओं की संख्या अभी 4.90 लाख है और इसमें से 25 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं गंभीर प्रकृति की होती हैं। सार्वजनिक परिवहन, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी संचालकों द्वारा बुलाई गई 24 घंटे की हड़ताल के कारण केरल में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे पर हजारों लोग फंसे हुए हैं। राज्य में छह श्रमिक संघों ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। त्रिपुरा में भी बंद के कारण सार्वजनिक परिवहन बुरी तरह प्रभावित रहा। परिवहन कार्यकर्ताओं ने पूरे त्रिपुरा में रैलियां निकालीं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की कार्य समिति के सदस्य तापस दत्ता ने आईएएनएस को बताया, "हड़ताल का व्यापक असर हुआ है। राज्य में कहीं भी अप्रिय घटना घटित नहीं हुई है।" देशभर में सीटू, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस और भारतीय मजदूर संघ ने विधेयक के खिलाफ 24 घंटे के हड़ताल का आह्वान किया है। कुछ राज्यों को यह संदेह है कि प्रस्तावित विधेयक उनकी वित्तीय, विधायी और प्रशासनिक शक्तियों का अतिक्रमण कर लेगा। हरियाणा में सरकारी बस सेवा पूरी तरह चरमरा गई है। निजी बस चालक भी अपनी बसों को संचालित नहीं कर रहे हैं। इससे यात्री असहाय से हो गए हैं। ऑटो-रिक्शा और रिक्शा चालक यात्रियों की मुश्किलों का फायदा उठा कर ज्यादा किराया वसूल कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और बसों के न चलने के कारण कोलकाता सहित पूरे राज्य में अधिकांश सड़कें लगभग सूनी पड़ी रहीं। हावड़ा एवं सियालदह रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को तथा कार्यालय जाने वाले लोगों को टैक्सी या बस के अभाव में भारी मुसीबत झेलनी पड़ी। कोलकाता और हावड़ा के कई हिस्सों से बसों में तोड़-फोड़ की खबरें भी मिली हैं। गुरुवार को सभी निजी स्कूल बंद रहे, जबकि सरकारी स्कूलों में मामूली उपस्थिति दर्ज की गई, क्योंकि अधिकांश परिजनों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। प्रमुख विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में कोलकाता और राज्य में कई जगहों पर रैलियां निकालीं। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेशवासियों से बंद को निष्क्रिय करने का अह्वान किया। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर अनिवार्य रूप से पहुंचने के लिए एक परिपत्र जारी किया था। उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में हड़ताल का असर दिखायी दे रहा है। अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रोडवेज से अनुबंधित बसों के चालक भी इस हड़ताल में शामिल हैं। दूसरी तरफ हड़ताल का विरोध कर रहे संगठनों ने परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का दावा किया है। रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रवक्ता आर. पी. वर्मा ने कहा इस विधेयक के खिलाफ बुधवार मध्यरात्रि से ही बसों का संचालन बंद करा दिया गया है। इस हड़ताल का टेम्पो-टैक्सी महासंघ सहित कई अन्य संगठन समर्थन कर रहे हैं। वहीं लखनऊ ऑटो रिक्शा थ्री व्हीलर संघ ने हड़ताल का पुरजोर विरोध किया है। परिवहन संगठनों की बुधवार को हुई बैठक के बाद हड़ताल में शामिल न होने का फैसला लिया गया। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक ए. के. सिंह ने बताया कि हड़ताल का आह्वान केवल एक संगठन ने किया है, जबकि शेष संगठन इसमें शामिल नहीं है। इस कारण हड़ताल का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। एहतियात के तौर पर प्रशासन व पुलिस को इसकी जानकारी दे दी गई है। बंद का तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में आंशिक असर देखा गया। हैदराबाद में परिवहन सेवाएं आंशिक तौर पर प्रभावित रहीं, क्योंकि ऑटो-रिक्शॉ, कैब और ट्रक पूर्ववत चलते रहे। राज्य सरकार के सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) के मुख्य कर्मचारी संघ ने इस बंद में हिस्सा नहीं लिया, जिससे दोनों ही राज्यों में सार्वजनिक परिवहन प्रभावित नहीं हुआ। आरटीसी के अधिकारियों ने बताया कि सभी शहरों एवं कस्बों में बस सेवाएं पहले की भांति ही जारी रही। दोनों राज्यों में आरटीसी के कई बस डिपो पर कुछ कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। काली पट्टी लगाए प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने नए विधेयक के खिलाफ नारेबाजी की। ऑटो चालकों के कुछ संघों ने विधेयक में श्रमिक विरोधी प्रावधानों का आरोप लगाते हुए एक रैली का आयोजन किया। बंद का करीमनगर, निजामाबाद और तेलंगाना के अन्य शहरों में खास असर नहीं रहा। विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, तिरुपति और आंध्र प्रदेश के कुछ अन्य शहरों में बंद का मामूली असर रहा। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में (25-30 वर्षों में) पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
लखनऊ/कोलकाता/तिरुवनंतपुरम । यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा के प्रावधान वाले प्रस्तावित 'सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक-दो हज़ार चौदह' के विरोध में गुरुवार को परिवहन संचालकों के देशव्यापी हड़ताल से देश भर में लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में रेलवे स्टेशनों पर यात्री फंसे रहे तथा लोगों को कार्यालय जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देश भर के मजदूर संघ भाजपा पर कामगार विरोधी नीति बनाने का आरोप लगाते हुए इस प्रस्तावित विधेयक को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। नए विधेयक में लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाने पर पचास हजार रुपये, शराब पीकर वाहन चलाने पर दस हजार रुपये और अत्यधिक तेज परिचालन पर छः,शून्य रुपयापये के चालान का प्रावधान है। इसे मंत्रिमंडल के पास मंजूरी के लिए रखा जाना है। विधेयक में एक नियामक प्राधिकरण गठित किए जाने का भी प्रावधान है। परिवहन संचालकों का कहना है कि विधेयक में विभिन्न उल्लंघनों के लिए निर्धारित किया गया जुर्माना काफी अधिक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हालांकि इसे वाजिब बताते हुए कहा है कि अगले पांच साल में सालाना दुर्घटनाओं की संख्या घटाकर दो लाख तक लाने के लिए यह जरूरी है। सालाना दुर्घटनाओं की संख्या अभी चार.नब्बे लाख है और इसमें से पच्चीस फीसदी सड़क दुर्घटनाएं गंभीर प्रकृति की होती हैं। सार्वजनिक परिवहन, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी संचालकों द्वारा बुलाई गई चौबीस घंटाटे की हड़ताल के कारण केरल में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे पर हजारों लोग फंसे हुए हैं। राज्य में छह श्रमिक संघों ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। त्रिपुरा में भी बंद के कारण सार्वजनिक परिवहन बुरी तरह प्रभावित रहा। परिवहन कार्यकर्ताओं ने पूरे त्रिपुरा में रैलियां निकालीं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस की कार्य समिति के सदस्य तापस दत्ता ने आईएएनएस को बताया, "हड़ताल का व्यापक असर हुआ है। राज्य में कहीं भी अप्रिय घटना घटित नहीं हुई है।" देशभर में सीटू, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस और भारतीय मजदूर संघ ने विधेयक के खिलाफ चौबीस घंटाटे के हड़ताल का आह्वान किया है। कुछ राज्यों को यह संदेह है कि प्रस्तावित विधेयक उनकी वित्तीय, विधायी और प्रशासनिक शक्तियों का अतिक्रमण कर लेगा। हरियाणा में सरकारी बस सेवा पूरी तरह चरमरा गई है। निजी बस चालक भी अपनी बसों को संचालित नहीं कर रहे हैं। इससे यात्री असहाय से हो गए हैं। ऑटो-रिक्शा और रिक्शा चालक यात्रियों की मुश्किलों का फायदा उठा कर ज्यादा किराया वसूल कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और बसों के न चलने के कारण कोलकाता सहित पूरे राज्य में अधिकांश सड़कें लगभग सूनी पड़ी रहीं। हावड़ा एवं सियालदह रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को तथा कार्यालय जाने वाले लोगों को टैक्सी या बस के अभाव में भारी मुसीबत झेलनी पड़ी। कोलकाता और हावड़ा के कई हिस्सों से बसों में तोड़-फोड़ की खबरें भी मिली हैं। गुरुवार को सभी निजी स्कूल बंद रहे, जबकि सरकारी स्कूलों में मामूली उपस्थिति दर्ज की गई, क्योंकि अधिकांश परिजनों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। प्रमुख विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में कोलकाता और राज्य में कई जगहों पर रैलियां निकालीं। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेशवासियों से बंद को निष्क्रिय करने का अह्वान किया। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर अनिवार्य रूप से पहुंचने के लिए एक परिपत्र जारी किया था। उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में हड़ताल का असर दिखायी दे रहा है। अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रोडवेज से अनुबंधित बसों के चालक भी इस हड़ताल में शामिल हैं। दूसरी तरफ हड़ताल का विरोध कर रहे संगठनों ने परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का दावा किया है। रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रवक्ता आर. पी. वर्मा ने कहा इस विधेयक के खिलाफ बुधवार मध्यरात्रि से ही बसों का संचालन बंद करा दिया गया है। इस हड़ताल का टेम्पो-टैक्सी महासंघ सहित कई अन्य संगठन समर्थन कर रहे हैं। वहीं लखनऊ ऑटो रिक्शा थ्री व्हीलर संघ ने हड़ताल का पुरजोर विरोध किया है। परिवहन संगठनों की बुधवार को हुई बैठक के बाद हड़ताल में शामिल न होने का फैसला लिया गया। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक ए. के. सिंह ने बताया कि हड़ताल का आह्वान केवल एक संगठन ने किया है, जबकि शेष संगठन इसमें शामिल नहीं है। इस कारण हड़ताल का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। एहतियात के तौर पर प्रशासन व पुलिस को इसकी जानकारी दे दी गई है। बंद का तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में आंशिक असर देखा गया। हैदराबाद में परिवहन सेवाएं आंशिक तौर पर प्रभावित रहीं, क्योंकि ऑटो-रिक्शॉ, कैब और ट्रक पूर्ववत चलते रहे। राज्य सरकार के सड़क परिवहन निगम के मुख्य कर्मचारी संघ ने इस बंद में हिस्सा नहीं लिया, जिससे दोनों ही राज्यों में सार्वजनिक परिवहन प्रभावित नहीं हुआ। आरटीसी के अधिकारियों ने बताया कि सभी शहरों एवं कस्बों में बस सेवाएं पहले की भांति ही जारी रही। दोनों राज्यों में आरटीसी के कई बस डिपो पर कुछ कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। काली पट्टी लगाए प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने नए विधेयक के खिलाफ नारेबाजी की। ऑटो चालकों के कुछ संघों ने विधेयक में श्रमिक विरोधी प्रावधानों का आरोप लगाते हुए एक रैली का आयोजन किया। बंद का करीमनगर, निजामाबाद और तेलंगाना के अन्य शहरों में खास असर नहीं रहा। विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, तिरुपति और आंध्र प्रदेश के कुछ अन्य शहरों में बंद का मामूली असर रहा। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
ICMAI Dec Exam Result: इंस्टीट्यूट हर साल दो बार इस परीक्षा का आयोजन करता है। यह परीक्षा जून और दिसंबर में करवाई जाती है और अभी यह नतीजे दिसंबर परीक्षा के जारी किए गए हैं। इंस्टीट्यूट ने वेबसाइट पर नतीजे जारी करने के साथ प्रेस रिलीज भी जारी की है, जिसमें नतीजे घोषित होने के बारे में बताया गया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: द इंस्टीट्यूट ऑफ कोस्ट अकाउंट्स ऑफ इंडिया ने आईसीएमएआई दिसंबर 2016 परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं। इंस्टीट्यूट ने इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षा के नतीजे जारी किए हैं। इस परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इंस्टीट्यूट हर साल दो बार इस परीक्षा का आयोजन करता है। यह परीक्षा जून और दिसंबर में करवाई जाती है और अभी यह नतीजे दिसंबर परीक्षा के जारी किए गए हैं। इंस्टीट्यूट ने वेबसाइट पर नतीजे जारी करने के साथ प्रेस रिलीज भी जारी की है, जिसमें नतीजे घोषित होने के बारे में बताया गया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इस परीक्षा के नतीजे दो वेबसाइट http://www. examicai. in और http://www. examicmai. org. पर जाकर देखे जा सकते हैं। इस परीक्षा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था और परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार आगे की प्रक्रिया में भाग लेंगे। ICMAI ICAI Dec Exam Result: वहीं परीक्षा में परीक्षार्थियों के पास करने का प्रतिशत भी कम रहा है। इस बार इंटरमीडिएट में 9. 09 फीसदी और फाइनल में 12. 71 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इससे पहले इंस्टीट्यूट ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि जल्द ही इस परीक्षा के नतीजे जारी किए जाएंगे और परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार जल्द ही रिजल्ट देख सकेंगे। अब इंस्टीट्यूट ने 21 फरवरी को नतीजे जारी कर इंतजार खत्म कर दिया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: कैसे देखें रिजल्ट- अपना रिजल्ट देखने के लिए वेबसाइट http://www. examicai. in और http://www. examicmai. org पर जाएं और तय प्रक्रिया को फॉलो करते हुए परीक्षा से जुड़े लिंक पर क्लिक करें और मांगी गई सूचना भरकर अपना रिजल्ट देख लें।
ICMAI Dec Exam Result: इंस्टीट्यूट हर साल दो बार इस परीक्षा का आयोजन करता है। यह परीक्षा जून और दिसंबर में करवाई जाती है और अभी यह नतीजे दिसंबर परीक्षा के जारी किए गए हैं। इंस्टीट्यूट ने वेबसाइट पर नतीजे जारी करने के साथ प्रेस रिलीज भी जारी की है, जिसमें नतीजे घोषित होने के बारे में बताया गया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: द इंस्टीट्यूट ऑफ कोस्ट अकाउंट्स ऑफ इंडिया ने आईसीएमएआई दिसंबर दो हज़ार सोलह परीक्षा के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं। इंस्टीट्यूट ने इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षा के नतीजे जारी किए हैं। इस परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इंस्टीट्यूट हर साल दो बार इस परीक्षा का आयोजन करता है। यह परीक्षा जून और दिसंबर में करवाई जाती है और अभी यह नतीजे दिसंबर परीक्षा के जारी किए गए हैं। इंस्टीट्यूट ने वेबसाइट पर नतीजे जारी करने के साथ प्रेस रिलीज भी जारी की है, जिसमें नतीजे घोषित होने के बारे में बताया गया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इस परीक्षा के नतीजे दो वेबसाइट http://www. examicai. in और http://www. examicmai. org. पर जाकर देखे जा सकते हैं। इस परीक्षा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था और परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार आगे की प्रक्रिया में भाग लेंगे। ICMAI ICAI Dec Exam Result: वहीं परीक्षा में परीक्षार्थियों के पास करने का प्रतिशत भी कम रहा है। इस बार इंटरमीडिएट में नौ. नौ फीसदी और फाइनल में बारह. इकहत्तर फीसदी बच्चे पास हुए हैं। ICMAI ICAI Dec Exam Result: इससे पहले इंस्टीट्यूट ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि जल्द ही इस परीक्षा के नतीजे जारी किए जाएंगे और परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवार जल्द ही रिजल्ट देख सकेंगे। अब इंस्टीट्यूट ने इक्कीस फरवरी को नतीजे जारी कर इंतजार खत्म कर दिया है। ICMAI ICAI Dec Exam Result: कैसे देखें रिजल्ट- अपना रिजल्ट देखने के लिए वेबसाइट http://www. examicai. in और http://www. examicmai. org पर जाएं और तय प्रक्रिया को फॉलो करते हुए परीक्षा से जुड़े लिंक पर क्लिक करें और मांगी गई सूचना भरकर अपना रिजल्ट देख लें।
बाल किसी भी लड़की की खूबसूरती का बहुत अहम् हिस्सा होते है, घने काले और लहराते बाल किसी भी लड़की की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते है. बहुत सी लड़कियां अपने बालों को खूबसूरत सिल्की और शाइनी बनाने के लिए बहुत सारे महंगे-मंहगे हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है. पर इनके इस्तेमाल से बालों को बहुत साइड इफ़ेक्ट हो सकते है, और आपके बहुत सारे पैसे भी खर्च हो जाते है. पर आज हम आपको कुछ ऐसी नेचुरल चीजों के बारे में बताने जा रहे है जिनसे बाल धोने से आपके बाल लम्बे घने और खूबसूरत हो जायेगे और इनमे कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा. शहद - अगर आपके बालों में डैंड्रफ की समस्या है तो अपने बालों को धोने के लिए शहद का इस्तेमाल करे, इसे इस्तेमाल करने में लिए एक मग पानी में आधा कप शहद डालकर अच्छे से मिलाये. अब इससे अपने बालों की मसाज करे और 10 मिनट बाद धोलें. ऐसा करने से आपके बालो से डैंड्रफ की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और आपके बालो में चमक भी आ जाएगी. मेथी के बीज- मेथी के बीज भी बालों के लिए बहुत फायदेमंद होते है, इसके इस्तेमाल से भी बालों से डैंड्रफ की समस्या दूर हो जाती है, इसके इस्तेमाल से बालों की ग्रोथ भी तेज होती है, और बाल सफ़ेद भी नहीं होते है. इसे इस्तेमाल करने के लिए चार कप मेथी के बीज को एक मग पानी में डाकर रातभर के लिए छोड़ दे, सुबह उठने पर इस पानी को छान ले और इस पानी से अपने बाल धोएं. नारियल पानी - नारियल पानी में भरपूर मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स मौजूद होते है, बालों के इसका इस्तेमाल करने से बाल मॉइश्चराइज होते है और साथ ही मजबूत और चमकदार भी बनते है, इसके लिए फ्रेश नारियल पानी से अपने पूरे बालों को अपने पुरे बालों में अच्छे से लगाए, अब 15 मिनट के बाद सादे पानी से अपने बालों को धो ले.
बाल किसी भी लड़की की खूबसूरती का बहुत अहम् हिस्सा होते है, घने काले और लहराते बाल किसी भी लड़की की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते है. बहुत सी लड़कियां अपने बालों को खूबसूरत सिल्की और शाइनी बनाने के लिए बहुत सारे महंगे-मंहगे हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है. पर इनके इस्तेमाल से बालों को बहुत साइड इफ़ेक्ट हो सकते है, और आपके बहुत सारे पैसे भी खर्च हो जाते है. पर आज हम आपको कुछ ऐसी नेचुरल चीजों के बारे में बताने जा रहे है जिनसे बाल धोने से आपके बाल लम्बे घने और खूबसूरत हो जायेगे और इनमे कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा. शहद - अगर आपके बालों में डैंड्रफ की समस्या है तो अपने बालों को धोने के लिए शहद का इस्तेमाल करे, इसे इस्तेमाल करने में लिए एक मग पानी में आधा कप शहद डालकर अच्छे से मिलाये. अब इससे अपने बालों की मसाज करे और दस मिनट बाद धोलें. ऐसा करने से आपके बालो से डैंड्रफ की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और आपके बालो में चमक भी आ जाएगी. मेथी के बीज- मेथी के बीज भी बालों के लिए बहुत फायदेमंद होते है, इसके इस्तेमाल से भी बालों से डैंड्रफ की समस्या दूर हो जाती है, इसके इस्तेमाल से बालों की ग्रोथ भी तेज होती है, और बाल सफ़ेद भी नहीं होते है. इसे इस्तेमाल करने के लिए चार कप मेथी के बीज को एक मग पानी में डाकर रातभर के लिए छोड़ दे, सुबह उठने पर इस पानी को छान ले और इस पानी से अपने बाल धोएं. नारियल पानी - नारियल पानी में भरपूर मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स मौजूद होते है, बालों के इसका इस्तेमाल करने से बाल मॉइश्चराइज होते है और साथ ही मजबूत और चमकदार भी बनते है, इसके लिए फ्रेश नारियल पानी से अपने पूरे बालों को अपने पुरे बालों में अच्छे से लगाए, अब पंद्रह मिनट के बाद सादे पानी से अपने बालों को धो ले.
गोरखपुर (ब्यूरो). डीएफओ विकास यादव ने बताया कि फॉरेस्ट सिटी के निर्माण कार्य के लिए बजट मिलने वाला है। फारेस्ट सिटी बनाए जाने के लिए दो करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया है। पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपए मिलने की उम्मीद है। उसके बाद ही काम शुरु हो जाएगा। तीन फेज में बजट आएगा। भारत सरकार की तरफ से बजट एप्रूव्ड हो गया है। स्टेट गवर्नमेंट के पास आ चुका है, बजट रिलीज होते ही निर्माण कार्य शुरु करा दिया जाएगा। इस बजट से एडवेंचर स्पोट्र्स, साइकिल ट्रेक, पाथवेज, ओपन जिम, जॉगर्स पार्क और बेंच बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि टूरिस्ट स्पॉट के रुप में गोरखपुराइट्स सिटी फॉरेस्ट में एडवेंचर चीजें देखने को मिलेंगी। जहां पर बच्चे, बुजुर्ग और युवाओं के लिए बेहद आकर्षित करने वाला होगा। यह सबकुछ आपको सिटी के नजदीक (एयरफोर्स के पास) जंगल तिनकोनिया रेंज यानी रजही के जंगल में बनाया जाएगा। दूसरा सूबा बाजार पुलिस चौकी के पीछे 50 हेक्टेयर में बनाया जाएगा। तीसरा चिडिय़ाघर के बगल में बनाए जाने की बात चल रही है। यूपी गवर्नमेंट की तरफ से शासन आदेश था कि प्रदेश के वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर सहित 13 शहरों में 26 सिटी फॅरेस्ट डेवलप किए जाने की प्लानिंग की गई थी। इस आदेश के आने के बाद से गोरखपुर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ से कवायद शुरु कर दी गई थी। गोरखपुर में पहले से जंगल है। ऐसे में सिटी फारेस्ट नेचुरल जंगल में ही बनाए जाने के लिए तीन जंगलों को चुन लिया गया है। इसके लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने 50 हेक्टेयर में तीन जगह को चुना है। जिसमें एयरपोर्ट के नजदीक जंगल तिनकोनिया, सूबा बाजार पुलिस चौकी के पीछे स्थित जंगल, चिडिय़ाघर के बगल में सिटी फारेस्ट बनाए जाएंगे। - यह फॉरेस्ट एरिया के बाउंड्री या बाड़ से घिरे होंगे, इनमें स्मृति वन, आरोग्य वाटिका, नक्षत्र वाटिका और हरिशंकरी वाटिका बनाई जाएगी। - जैव-विविधता के लिए इसमें सभी प्रकार की सजावटी, झाडिय़ां, बेलदार, औषधीय पौधे, फूल और फलों के पौधे लगाए जाएंगे। - यहां एडवेंचर स्पोट्र्स, साइकिल ट्रेक, पाथवेज, ओपन जिम, जागर्स पार्क और बेंच बनेंगे। - एडवेंचर तालाब होगा। जहां पर सेफ्टी के सारे इक्विपमेंट्स शामिल होंगे।
गोरखपुर . डीएफओ विकास यादव ने बताया कि फॉरेस्ट सिटी के निर्माण कार्य के लिए बजट मिलने वाला है। फारेस्ट सिटी बनाए जाने के लिए दो करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया है। पहली किस्त के रूप में सत्तर लाख रुपए मिलने की उम्मीद है। उसके बाद ही काम शुरु हो जाएगा। तीन फेज में बजट आएगा। भारत सरकार की तरफ से बजट एप्रूव्ड हो गया है। स्टेट गवर्नमेंट के पास आ चुका है, बजट रिलीज होते ही निर्माण कार्य शुरु करा दिया जाएगा। इस बजट से एडवेंचर स्पोट्र्स, साइकिल ट्रेक, पाथवेज, ओपन जिम, जॉगर्स पार्क और बेंच बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि टूरिस्ट स्पॉट के रुप में गोरखपुराइट्स सिटी फॉरेस्ट में एडवेंचर चीजें देखने को मिलेंगी। जहां पर बच्चे, बुजुर्ग और युवाओं के लिए बेहद आकर्षित करने वाला होगा। यह सबकुछ आपको सिटी के नजदीक जंगल तिनकोनिया रेंज यानी रजही के जंगल में बनाया जाएगा। दूसरा सूबा बाजार पुलिस चौकी के पीछे पचास हेक्टेयर में बनाया जाएगा। तीसरा चिडिय़ाघर के बगल में बनाए जाने की बात चल रही है। यूपी गवर्नमेंट की तरफ से शासन आदेश था कि प्रदेश के वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर सहित तेरह शहरों में छब्बीस सिटी फॅरेस्ट डेवलप किए जाने की प्लानिंग की गई थी। इस आदेश के आने के बाद से गोरखपुर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ से कवायद शुरु कर दी गई थी। गोरखपुर में पहले से जंगल है। ऐसे में सिटी फारेस्ट नेचुरल जंगल में ही बनाए जाने के लिए तीन जंगलों को चुन लिया गया है। इसके लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने पचास हेक्टेयर में तीन जगह को चुना है। जिसमें एयरपोर्ट के नजदीक जंगल तिनकोनिया, सूबा बाजार पुलिस चौकी के पीछे स्थित जंगल, चिडिय़ाघर के बगल में सिटी फारेस्ट बनाए जाएंगे। - यह फॉरेस्ट एरिया के बाउंड्री या बाड़ से घिरे होंगे, इनमें स्मृति वन, आरोग्य वाटिका, नक्षत्र वाटिका और हरिशंकरी वाटिका बनाई जाएगी। - जैव-विविधता के लिए इसमें सभी प्रकार की सजावटी, झाडिय़ां, बेलदार, औषधीय पौधे, फूल और फलों के पौधे लगाए जाएंगे। - यहां एडवेंचर स्पोट्र्स, साइकिल ट्रेक, पाथवेज, ओपन जिम, जागर्स पार्क और बेंच बनेंगे। - एडवेंचर तालाब होगा। जहां पर सेफ्टी के सारे इक्विपमेंट्स शामिल होंगे।
अध्याय : 11 एक सतही पर्यवेक्षक भी यह समझने में चूक नहीं करेगा कि मुसलमानों के प्रति हिन्दुओं और हिन्दुओं के प्रति मुसलमानों का आक्रामक रवैया ही उनके दृष्टिकोण को दर्शा देता है। हिन्दुओं का आक्रामक रवैया एक नया चरण है, जिसका विकास हाल ही में होना शुरू हुआ है । मुसलमानों का आक्रामक रवैया उनका जातीय चरित्र है और हिन्दुओं की तुलना में प्राचीन भी है। ऐसा नहीं है कि यदि अवसर दिया जाए तो हिन्दू गति नहीं पकड़ लेंगे और मुसलमानों को पीछे नहीं छोड़ देंगे। परन्तु वर्तमान में तो इस आक्रामक मनोभाव के प्रदर्शन से मुसलमान ही हिन्दुओं को बहुत से पीछे छोड़ चुके हैं। साम्प्रदायिक दंगों से सम्बन्धित खण्ड में मुसलमानों के सामाजिक आक्रमण के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है। मुसलमानों की राजनीतिक आक्रामकता के बारे में संक्षेप में कुछ चर्चा करना आवश्यक है। क्योंकि उनके राजनीतिक अतिक्रमणों ने जो विकार उत्पन्न कर दिए है, उन्हें नज़रअन्दाज नहीं किया जा सकता। मुसलमानों की इस राजनीतिक आक्रामकता की तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली बात यह है कि मुसलमानों की राजनीतिक मांगें हनुमानजी की पूंछ की तरह बढ़ती जा रही हैं। उनकी मांगों का समारम्भ 1892 से होता है। 1885 में "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" की स्थापना की गयी थी । स्वराज्य के बजाए एक अच्छे प्रशासन की मांग को लेकर इसे शुरू गया था। ब्रिटिश सरकार ने इस मांग की प्रतिक्रियास्वरूप 1861 के विधान के तहत केन्द्रीय और प्रान्तीय विधायिकाओं के स्वरूप में बदलाव लाने की आवश्यकता महसूस की। कांग्रेसी आंदोलन के अभी शैशवावस्था में रहने के कारण, ब्रिटिश सरकार ने विधायिका सभाओं को जन-प्रातिनिधिक बनाने की आवश्यकता नहीं समझी। उसने उन्हें केवल प्रातिनिधिक होने की आभा से मण्डित करने का ही विचार किया। तदनुसार, 1892 ई. में ब्रिटिश संसद ने भारत परिषद् अधिनियम "(इण्डियन काउन्सिल्स एक्ट) " पारित किया। यह अधिनियम दो बातों के लिए याद किया जाएगा। 1892 ई. के अधिनियम में, पहली बार, जन प्रतिनिधित्व के आधार पर विधायिकाओं के गठन करने के सिद्धांत से सादृश्य सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया। यह निर्वाचन का सिद्धांत नहीं था। यह मनोनयन का सिद्धांत था, परन्तु इसमें व्यवस्था यह की गयी कि मनोनयन से पूर्व उस मनोनीत होने वाले प्रतिनिधि का महत्वपूर्ण जन संस्थाओं, व्यवसायी संघों आदि जैसे नगरपालिकों, जिला बोर्डों, विश्वविद्यालयों के द्वारा चयन होना चाहिए। दूसरी बात, भारत के राजनीतिक विधान में मुसलमानों के लिए अलग प्रतिनिधित्व का सिद्धांत सर्वप्रथम इसी अधिनियम के अंतर्गत स्थापित विधायिकाओं के गठन में प्रयुक्त किया गया। इस सिद्धांत के प्रतिपादन पर रहस्यों का आवरण पड़ा हुआ है। यह इसलिए रहस्यमय है कि इसका समावेश बहुत चुपचाप किया गया। इस अधिनियम में अलग प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, इस सम्बन्ध में अधिनियम चुप है। यह तो उन दिशानिर्देशों में, न कि अधिनियम में शामिल किया गया था जो उन व्यक्तियों को दिए गये थे जिनके द्वारा विधायिकाओं में विभिन्न वर्गों और हितों का प्रतिनिधित्व निश्चित किया जाना था तथा उक्त निर्देशों में, प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए मुसलमानों को एक वर्ग मानने के लिए कहा गया था। दिशानिर्देशन में इसके समावेश के लिए कौन उत्तरदायी था, यह रहस्य है। अलग प्रतिनिधित्व की यह योजना किसी मांग का परिणाम नहीं थी। ऐसी मांगों को मुसलमानों के किसी संगठन ने पेश भी नहीं किया था। तब उसकी शुरुआत किससे हुई? ऐसा संकेत मिलता है कि वायसराय लार्ड डफरिन इसका प्रणेता था जिसने 1888 में ही, जब वह विधायिकाओं में प्रतिनिधित्व के प्रश्न को देख रहा था, इस बात पर बल दिया था कि भारत में हितों के आधार पर प्रतिनिधित्व दिए जाने की आवश्यकता होगी, तथा जिस प्रकार इंग्लैण्ड में प्रतिनिधित्व प्राप्त किया जाता है उसे यहाँ प्रचलित नहीं किया जा सकता। कुतूहल इससे आगे इस प्रश्न को उठाने के लिए बाध्य करता है कि आखिर लार्ड डफरिन द्वारा हित आधारित प्रतिनिधित्व की योजना प्रस्तुत करने के पीछे कौन से कारण रहे होंगे। ऐसा बताया जाता है कि 'कांग्रेस से, जिसकी तीन वर्ष पूर्व स्थापना हो चुकी थी, मुसलमानों को विमुख करने के लिए यह किया गया था। अब सत्य जो भी रहा हो, किन्तु इतना सुनिश्चित है कि सर्वप्रथम इसी अधिनियम के द्वारा मुसलमानों का अलग प्रतिनिधित्व भारतीय संविधान की एक विशेषता बन गया। फिर भी यह ध्यान में रखना चाहिए कि इस अधिनियम ने या इसके नियामकों
अध्याय : ग्यारह एक सतही पर्यवेक्षक भी यह समझने में चूक नहीं करेगा कि मुसलमानों के प्रति हिन्दुओं और हिन्दुओं के प्रति मुसलमानों का आक्रामक रवैया ही उनके दृष्टिकोण को दर्शा देता है। हिन्दुओं का आक्रामक रवैया एक नया चरण है, जिसका विकास हाल ही में होना शुरू हुआ है । मुसलमानों का आक्रामक रवैया उनका जातीय चरित्र है और हिन्दुओं की तुलना में प्राचीन भी है। ऐसा नहीं है कि यदि अवसर दिया जाए तो हिन्दू गति नहीं पकड़ लेंगे और मुसलमानों को पीछे नहीं छोड़ देंगे। परन्तु वर्तमान में तो इस आक्रामक मनोभाव के प्रदर्शन से मुसलमान ही हिन्दुओं को बहुत से पीछे छोड़ चुके हैं। साम्प्रदायिक दंगों से सम्बन्धित खण्ड में मुसलमानों के सामाजिक आक्रमण के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है। मुसलमानों की राजनीतिक आक्रामकता के बारे में संक्षेप में कुछ चर्चा करना आवश्यक है। क्योंकि उनके राजनीतिक अतिक्रमणों ने जो विकार उत्पन्न कर दिए है, उन्हें नज़रअन्दाज नहीं किया जा सकता। मुसलमानों की इस राजनीतिक आक्रामकता की तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली बात यह है कि मुसलमानों की राजनीतिक मांगें हनुमानजी की पूंछ की तरह बढ़ती जा रही हैं। उनकी मांगों का समारम्भ एक हज़ार आठ सौ बानवे से होता है। एक हज़ार आठ सौ पचासी में "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" की स्थापना की गयी थी । स्वराज्य के बजाए एक अच्छे प्रशासन की मांग को लेकर इसे शुरू गया था। ब्रिटिश सरकार ने इस मांग की प्रतिक्रियास्वरूप एक हज़ार आठ सौ इकसठ के विधान के तहत केन्द्रीय और प्रान्तीय विधायिकाओं के स्वरूप में बदलाव लाने की आवश्यकता महसूस की। कांग्रेसी आंदोलन के अभी शैशवावस्था में रहने के कारण, ब्रिटिश सरकार ने विधायिका सभाओं को जन-प्रातिनिधिक बनाने की आवश्यकता नहीं समझी। उसने उन्हें केवल प्रातिनिधिक होने की आभा से मण्डित करने का ही विचार किया। तदनुसार, एक हज़ार आठ सौ बानवे ई. में ब्रिटिश संसद ने भारत परिषद् अधिनियम " " पारित किया। यह अधिनियम दो बातों के लिए याद किया जाएगा। एक हज़ार आठ सौ बानवे ई. के अधिनियम में, पहली बार, जन प्रतिनिधित्व के आधार पर विधायिकाओं के गठन करने के सिद्धांत से सादृश्य सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया। यह निर्वाचन का सिद्धांत नहीं था। यह मनोनयन का सिद्धांत था, परन्तु इसमें व्यवस्था यह की गयी कि मनोनयन से पूर्व उस मनोनीत होने वाले प्रतिनिधि का महत्वपूर्ण जन संस्थाओं, व्यवसायी संघों आदि जैसे नगरपालिकों, जिला बोर्डों, विश्वविद्यालयों के द्वारा चयन होना चाहिए। दूसरी बात, भारत के राजनीतिक विधान में मुसलमानों के लिए अलग प्रतिनिधित्व का सिद्धांत सर्वप्रथम इसी अधिनियम के अंतर्गत स्थापित विधायिकाओं के गठन में प्रयुक्त किया गया। इस सिद्धांत के प्रतिपादन पर रहस्यों का आवरण पड़ा हुआ है। यह इसलिए रहस्यमय है कि इसका समावेश बहुत चुपचाप किया गया। इस अधिनियम में अलग प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, इस सम्बन्ध में अधिनियम चुप है। यह तो उन दिशानिर्देशों में, न कि अधिनियम में शामिल किया गया था जो उन व्यक्तियों को दिए गये थे जिनके द्वारा विधायिकाओं में विभिन्न वर्गों और हितों का प्रतिनिधित्व निश्चित किया जाना था तथा उक्त निर्देशों में, प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए मुसलमानों को एक वर्ग मानने के लिए कहा गया था। दिशानिर्देशन में इसके समावेश के लिए कौन उत्तरदायी था, यह रहस्य है। अलग प्रतिनिधित्व की यह योजना किसी मांग का परिणाम नहीं थी। ऐसी मांगों को मुसलमानों के किसी संगठन ने पेश भी नहीं किया था। तब उसकी शुरुआत किससे हुई? ऐसा संकेत मिलता है कि वायसराय लार्ड डफरिन इसका प्रणेता था जिसने एक हज़ार आठ सौ अठासी में ही, जब वह विधायिकाओं में प्रतिनिधित्व के प्रश्न को देख रहा था, इस बात पर बल दिया था कि भारत में हितों के आधार पर प्रतिनिधित्व दिए जाने की आवश्यकता होगी, तथा जिस प्रकार इंग्लैण्ड में प्रतिनिधित्व प्राप्त किया जाता है उसे यहाँ प्रचलित नहीं किया जा सकता। कुतूहल इससे आगे इस प्रश्न को उठाने के लिए बाध्य करता है कि आखिर लार्ड डफरिन द्वारा हित आधारित प्रतिनिधित्व की योजना प्रस्तुत करने के पीछे कौन से कारण रहे होंगे। ऐसा बताया जाता है कि 'कांग्रेस से, जिसकी तीन वर्ष पूर्व स्थापना हो चुकी थी, मुसलमानों को विमुख करने के लिए यह किया गया था। अब सत्य जो भी रहा हो, किन्तु इतना सुनिश्चित है कि सर्वप्रथम इसी अधिनियम के द्वारा मुसलमानों का अलग प्रतिनिधित्व भारतीय संविधान की एक विशेषता बन गया। फिर भी यह ध्यान में रखना चाहिए कि इस अधिनियम ने या इसके नियामकों
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे दिन कोरोना वायरस के 500 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. दिल्ली में गुरुवार को कोविड-19 के 571 नए मामले सामने आए जिसके बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 11,500 से अधिक हो गई है। इसके साथ ही महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 176 हो गई है। वहीं दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में इलाकों का रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में वर्गीकरण करने के लिए एक नई प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले 20 मई को संक्रमण के 534 मामले सामने आए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की संख्या 176 हो गई है और संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 11,659 हो गई है। बीते 24 घंटे में दिल्ली में 375 कोरोना वायरस पीड़ित ठीक भी हुए हैं। मृत्यु जांच समिति (डेथ ऑडिट कमेटी) को विभिन्न अस्पतालों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मौत की कुल संख्या का तात्पर्य उन मामलों से है जहां मौत का प्राथमिक कारण कोविड-19 बताया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामले और निषिद्ध क्षेत्र की संख्या में कमी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों से कहा है कि वह मौजूदा दिशा-निर्देश के अनुसार अपने क्षेत्रों में निषिद्ध क्षेत्र की पहचान करें। देश में कोविड-19 के मामले गुरुवार को बढ़कर 1,12,359 तक पहुंच गए, जबकि संक्रमण के कारण मरने वाले लोगों की संख्या 3,435 हो गई। पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के संक्रमण से 132 लोगों की मौत हुई है और 5,609 नए मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में अभी 63,624 लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि 45,299 लोग ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इस प्रकार, अब तक लगभग 40. 32 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं। " कुल पुष्टि किए गए मामलों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे दिन कोरोना वायरस के पाँच सौ से ज्यादा मामले सामने आए हैं. दिल्ली में गुरुवार को कोविड-उन्नीस के पाँच सौ इकहत्तर नए मामले सामने आए जिसके बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या ग्यारह,पाँच सौ से अधिक हो गई है। इसके साथ ही महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर एक सौ छिहत्तर हो गई है। वहीं दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में इलाकों का रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में वर्गीकरण करने के लिए एक नई प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले बीस मई को संक्रमण के पाँच सौ चौंतीस मामले सामने आए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की संख्या एक सौ छिहत्तर हो गई है और संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर ग्यारह,छः सौ उनसठ हो गई है। बीते चौबीस घंटाटे में दिल्ली में तीन सौ पचहत्तर कोरोना वायरस पीड़ित ठीक भी हुए हैं। मृत्यु जांच समिति को विभिन्न अस्पतालों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मौत की कुल संख्या का तात्पर्य उन मामलों से है जहां मौत का प्राथमिक कारण कोविड-उन्नीस बताया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामले और निषिद्ध क्षेत्र की संख्या में कमी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों से कहा है कि वह मौजूदा दिशा-निर्देश के अनुसार अपने क्षेत्रों में निषिद्ध क्षेत्र की पहचान करें। देश में कोविड-उन्नीस के मामले गुरुवार को बढ़कर एक,बारह,तीन सौ उनसठ तक पहुंच गए, जबकि संक्रमण के कारण मरने वाले लोगों की संख्या तीन,चार सौ पैंतीस हो गई। पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोना वायरस के संक्रमण से एक सौ बत्तीस लोगों की मौत हुई है और पाँच,छः सौ नौ नए मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में अभी तिरेसठ,छः सौ चौबीस लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि पैंतालीस,दो सौ निन्यानवे लोग ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इस प्रकार, अब तक लगभग चालीस. बत्तीस प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं। " कुल पुष्टि किए गए मामलों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
आज हम बात कर रहे हैं राजस्थान के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटक स्थानों में से एक जोधपुर की। जोधपुर ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां आपको ज्यादातर घर ब्लू रंग में रंगे दिखेंगे। बता दें मुख्य रूप से यहां आकर्षण का केंद्र मंदिर, किले, महल, उद्यान, बाजार हैं। जोधपुर राजस्थान के प्रमुख शहरों में से एक है। राजस्थान घूमने का सबसे अच्छा समय हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। आज हम आपको बाताएंगे जोधपुर के कुछ प्रसिद्ध और लोकप्रिय जगहों के बारे में। जोधपुर शहर से 410 फीट की ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह किला भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। वहीं राजस्थान में यह दूसरा सबसे बड़ा किला है। मेहरानगढ़ किला 5 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। आप इस किले के शाही दरबारों, महलों और मंदिरों में जा सकते हैं। यहां राठौर कबीले के हथियारों, कलाकृतियों, कपड़े, पेंटिंग, पालकी और ऐसी बहुत चीजों को देखने के लिए संग्रहालय जरूर जाए। यूनाइटेड किंगडम में बकिंघम पैलेस के बाद, उम्मेद भवन पैलेस दुनिया का सबसे बड़ा निजी निवास है। इसमें जोधपुर का शाही परिवार अभी भी रहता है। बता दें यह भारत में सबसे खूबसूरत महल है। आपको बता दें इमारत का एक हिस्सा ताज होटल द्वारा एक लक्जरी होटल में बदल दिया गया है। इस महल में कुल 350 कमरे हैं। इसके अलावा हाल ही में इसे ट्रिपएडवाइजर ट्रैवल एजेंसी से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लक्जरी होटल का पुरस्कार मिला है। मंडोर गार्डन जोधपुर के सबसे पुराने उद्यानों में से एक है। कहा जाता है की इसे लगभग एक हजार साल पहले बनाया गया था। मंडोर में प्राचीन साम्राज्य, बगीचे में कई शाही संरचनाएं और बीच में एक झील है। यहां आपको सिर्फ खूबसूरत बगीचे ही नहीं बल्कि आश्चर्यजनक वास्तुकला भी देखने को मिलती है। साथ ही आप यहां कई प्राचीन मंदिर भी देख सकते हैं। महाराजा सरदार सिंह ने अपने शासनकाल में सरदार बाजार और घंटाघर का निर्माण करवाया था। यह सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों और स्थानों में से एक है। इसके आसपास एक बड़ा बाजार है, जहां आप कपड़े, गहने, संगमरमर के इनले, शिल्प और बहुत कुछ खरीद सकते हैं। आप यहां से मजेदार राजस्थानी संस्कृति की याद ले जा सकते हैं। कायलाना झील 1872 में प्रताप सिंह द्वारा निर्माण किया गया था। प्राचीन काल के समय इस क्षेत्र में जोधपुर के दो नेताओं द्वारा निर्मित महल और उद्यान थे, लेकिन बाद में प्रताप सिंह और उनके लोगों द्वारा इसे नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद रेगिस्तानी शहर जोधपुर में हमेशा पानी की कमी रहने के कारण यहां कायलाना झील का निर्माण किया गया था।
आज हम बात कर रहे हैं राजस्थान के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटक स्थानों में से एक जोधपुर की। जोधपुर ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां आपको ज्यादातर घर ब्लू रंग में रंगे दिखेंगे। बता दें मुख्य रूप से यहां आकर्षण का केंद्र मंदिर, किले, महल, उद्यान, बाजार हैं। जोधपुर राजस्थान के प्रमुख शहरों में से एक है। राजस्थान घूमने का सबसे अच्छा समय हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। आज हम आपको बाताएंगे जोधपुर के कुछ प्रसिद्ध और लोकप्रिय जगहों के बारे में। जोधपुर शहर से चार सौ दस फीट की ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह किला भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। वहीं राजस्थान में यह दूसरा सबसे बड़ा किला है। मेहरानगढ़ किला पाँच किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। आप इस किले के शाही दरबारों, महलों और मंदिरों में जा सकते हैं। यहां राठौर कबीले के हथियारों, कलाकृतियों, कपड़े, पेंटिंग, पालकी और ऐसी बहुत चीजों को देखने के लिए संग्रहालय जरूर जाए। यूनाइटेड किंगडम में बकिंघम पैलेस के बाद, उम्मेद भवन पैलेस दुनिया का सबसे बड़ा निजी निवास है। इसमें जोधपुर का शाही परिवार अभी भी रहता है। बता दें यह भारत में सबसे खूबसूरत महल है। आपको बता दें इमारत का एक हिस्सा ताज होटल द्वारा एक लक्जरी होटल में बदल दिया गया है। इस महल में कुल तीन सौ पचास कमरे हैं। इसके अलावा हाल ही में इसे ट्रिपएडवाइजर ट्रैवल एजेंसी से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लक्जरी होटल का पुरस्कार मिला है। मंडोर गार्डन जोधपुर के सबसे पुराने उद्यानों में से एक है। कहा जाता है की इसे लगभग एक हजार साल पहले बनाया गया था। मंडोर में प्राचीन साम्राज्य, बगीचे में कई शाही संरचनाएं और बीच में एक झील है। यहां आपको सिर्फ खूबसूरत बगीचे ही नहीं बल्कि आश्चर्यजनक वास्तुकला भी देखने को मिलती है। साथ ही आप यहां कई प्राचीन मंदिर भी देख सकते हैं। महाराजा सरदार सिंह ने अपने शासनकाल में सरदार बाजार और घंटाघर का निर्माण करवाया था। यह सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों और स्थानों में से एक है। इसके आसपास एक बड़ा बाजार है, जहां आप कपड़े, गहने, संगमरमर के इनले, शिल्प और बहुत कुछ खरीद सकते हैं। आप यहां से मजेदार राजस्थानी संस्कृति की याद ले जा सकते हैं। कायलाना झील एक हज़ार आठ सौ बहत्तर में प्रताप सिंह द्वारा निर्माण किया गया था। प्राचीन काल के समय इस क्षेत्र में जोधपुर के दो नेताओं द्वारा निर्मित महल और उद्यान थे, लेकिन बाद में प्रताप सिंह और उनके लोगों द्वारा इसे नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद रेगिस्तानी शहर जोधपुर में हमेशा पानी की कमी रहने के कारण यहां कायलाना झील का निर्माण किया गया था।
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य आर. पी. सिंह ने बयान जारी करके डॉ. रमन सिंह से यह आग्रह किया है कि अगर वे छत्तीसगढ़ के सच्चे हित चिंतक हैं और कोरोना वायरस के चलते पूरे देश एवं अन्य राज्यों की तरह ही छत्तीसगढ़ भी प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था से व्यथित हैं तो एक सच्चे राजनेता की तरह व्यवहार करें। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने राज्य की प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था को देखकर ही केंद्र सरकार से 30 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज की मांग की थी। बार-बार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस आग्रह को दोहराया भी था। लेकिन दुखद पहलू यह है कि आज तक केंद्र सरकार ने आर्थिक मदद तो दूर उस पत्र का जवाब देना भी उचित नहीं समझा है। 20 लाख करोड़ रुपए के मोदी लाली पॉप जिसमे की तेरह शून्य होते हैं। यही शून्य छत्तीसगढ़ राज्य को मोदी जी से हासिल हुआ है। आर. पी. सिंह ने कहा है डॉ. रमन सिंह जी को जनता ने तीन बार प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना था इसलिए यह उनकी भी नैतिक जिम्मेदारी है कि छत्तीसगढ़ राज्य को केंद्र से आर्थिक पैकेज आवश्यक रूप से मिले। डॉ. रमन सिंह को मोदी सरकार के ऊपर दबाव बनाना चाहिए की प्रदेश के व्यापक जनहित में उक्त 30 हजार करोड़ की राशि शीघ्र ही जारी हो। ताकि जनहित के कार्य तेजी से संपन्न किए जा सकें। इतना ही नहीं उन्हें अपने सभी विधायकों को भी आदेशित करना चाहिए कि वह अनिवार्य रूप से अपनी विधायक निधि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कर दें। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों से भी उन्हें आग्रह करना चाहिए कि वे पीएम केयर फंड के बजाए सीएम रिलीफ फंड में अपना योगदान दें। कोरोना संक्रमण के चलते पूरे देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। कई आर्थिक एजेंसियों ने यह आशंका भी जताई है कि इस वर्ष देश का जीडीपी 0% तक हो सकता है। ऐसी विकट परिस्थिति में देश की चिंता ना करते हुए डॉ. रमन सिंह की चिंता सिर्फ छत्तीसगढ़ को लेकर है। उनका यह बयान प्रदेश की जनता को बताने के लिए पर्याप्त है कि ऐसे समय में जब छत्तीसगढ़ की सरकार और प्रदेश की जनता कोरोना संक्रमण से जूझ रही है तब रमन सिंह जी कोरी बयानबाजी करके ओछी राजनीति कर रहे हैं। रमन सिंह जी से पुनः आग्रह है या तो 30 हजार करोड रुपए का आर्थिक पैकेज राज्य सरकार को तुरंत दिलवाने में मदद करें अन्यथा ऐसी छोटी राजनीति से दूर रहें।
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य आर. पी. सिंह ने बयान जारी करके डॉ. रमन सिंह से यह आग्रह किया है कि अगर वे छत्तीसगढ़ के सच्चे हित चिंतक हैं और कोरोना वायरस के चलते पूरे देश एवं अन्य राज्यों की तरह ही छत्तीसगढ़ भी प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था से व्यथित हैं तो एक सच्चे राजनेता की तरह व्यवहार करें। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने राज्य की प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था को देखकर ही केंद्र सरकार से तीस हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज की मांग की थी। बार-बार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस आग्रह को दोहराया भी था। लेकिन दुखद पहलू यह है कि आज तक केंद्र सरकार ने आर्थिक मदद तो दूर उस पत्र का जवाब देना भी उचित नहीं समझा है। बीस लाख करोड़ रुपए के मोदी लाली पॉप जिसमे की तेरह शून्य होते हैं। यही शून्य छत्तीसगढ़ राज्य को मोदी जी से हासिल हुआ है। आर. पी. सिंह ने कहा है डॉ. रमन सिंह जी को जनता ने तीन बार प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना था इसलिए यह उनकी भी नैतिक जिम्मेदारी है कि छत्तीसगढ़ राज्य को केंद्र से आर्थिक पैकेज आवश्यक रूप से मिले। डॉ. रमन सिंह को मोदी सरकार के ऊपर दबाव बनाना चाहिए की प्रदेश के व्यापक जनहित में उक्त तीस हजार करोड़ की राशि शीघ्र ही जारी हो। ताकि जनहित के कार्य तेजी से संपन्न किए जा सकें। इतना ही नहीं उन्हें अपने सभी विधायकों को भी आदेशित करना चाहिए कि वह अनिवार्य रूप से अपनी विधायक निधि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कर दें। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों से भी उन्हें आग्रह करना चाहिए कि वे पीएम केयर फंड के बजाए सीएम रिलीफ फंड में अपना योगदान दें। कोरोना संक्रमण के चलते पूरे देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। कई आर्थिक एजेंसियों ने यह आशंका भी जताई है कि इस वर्ष देश का जीडीपी शून्य% तक हो सकता है। ऐसी विकट परिस्थिति में देश की चिंता ना करते हुए डॉ. रमन सिंह की चिंता सिर्फ छत्तीसगढ़ को लेकर है। उनका यह बयान प्रदेश की जनता को बताने के लिए पर्याप्त है कि ऐसे समय में जब छत्तीसगढ़ की सरकार और प्रदेश की जनता कोरोना संक्रमण से जूझ रही है तब रमन सिंह जी कोरी बयानबाजी करके ओछी राजनीति कर रहे हैं। रमन सिंह जी से पुनः आग्रह है या तो तीस हजार करोड रुपए का आर्थिक पैकेज राज्य सरकार को तुरंत दिलवाने में मदद करें अन्यथा ऐसी छोटी राजनीति से दूर रहें।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बीजेपी (BJP) पर एक बार फिर निशाना साधा हैं. इस बार अखिलेश यादव ने शाहजहांपुर में चिन्मयानंद ब्लैकमेलिंग केस (Chinmayanand Blackmailing case) में गिरफ्तार लॉ छात्रा (Law Student) मामले पर ट्वीट किया है. अखिलेश यादव ने लिखा है, "भाजपा नेता के ख़िलाफ़ साहस दिखाते हुए आवाज़ उठाने वाली बेटी को ही जेल भेजकर भाजपा ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है. आज देश की हर बेटी, बहन और मां भाजपा के इस शर्मनाक कृत्य से दुखी हैं और लोग कह रहे हैं "देश में सब अच्छा है" - निंदनीय! 'बेटी बचाओ' भी आख़िरकार एक जुमला ही साबित हुआ. " उधर स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayananda) से रंगदारी (Extortion) मांगने के आरोप में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी के मामले में शाहजहांपुर (Shahjahanpur) एडीजे फर्स्ट कोर्ट ने बुधवार को पीड़िता की जमानत अर्जी खारिज कर दी. पीड़िता की गिरफ्तारी के बाद उसके वकील ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी. गुरुवार को फिर से कोर्ट में छात्रा की जमानत के लिए आवेदन किया जाएगा. 26 सितंबर को कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के लिए तारीख दे रखी है. सहायक अभियोजन अधिकारी लाल साहब ने फोन पर बताया कि चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने वाली रेप पीड़िता छात्रा की जमानत अर्जी उनके अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने एसीजीएम की अदालत में लगाई थी. जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. उधर चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने बताया कि बुधवार को उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री की जमानत की अर्जी जिला जज की अदालत में दी है, जिस पर सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय हुई है. पीड़िता की गिरफ्तारी के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) ने प्रेस वार्ता की, जिसमें आईपीएस भारती सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद को मोबाइल पर धमकी भरा मैसेज भेजा गया था. जिसमें उनसे पांच करोड़ रुपए की मांग की गई थी. रंगदारी नहीं देने पर उनका अश्लील वीडियो टीवी चैनल पर चलवा कर उनकी इज्जत मिट्टी में मिलाने की धमकी दी गई थी. ये भी पढ़ेंः .
लखनऊ. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी पर एक बार फिर निशाना साधा हैं. इस बार अखिलेश यादव ने शाहजहांपुर में चिन्मयानंद ब्लैकमेलिंग केस में गिरफ्तार लॉ छात्रा मामले पर ट्वीट किया है. अखिलेश यादव ने लिखा है, "भाजपा नेता के ख़िलाफ़ साहस दिखाते हुए आवाज़ उठाने वाली बेटी को ही जेल भेजकर भाजपा ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है. आज देश की हर बेटी, बहन और मां भाजपा के इस शर्मनाक कृत्य से दुखी हैं और लोग कह रहे हैं "देश में सब अच्छा है" - निंदनीय! 'बेटी बचाओ' भी आख़िरकार एक जुमला ही साबित हुआ. " उधर स्वामी चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी के मामले में शाहजहांपुर एडीजे फर्स्ट कोर्ट ने बुधवार को पीड़िता की जमानत अर्जी खारिज कर दी. पीड़िता की गिरफ्तारी के बाद उसके वकील ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी. गुरुवार को फिर से कोर्ट में छात्रा की जमानत के लिए आवेदन किया जाएगा. छब्बीस सितंबर को कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के लिए तारीख दे रखी है. सहायक अभियोजन अधिकारी लाल साहब ने फोन पर बताया कि चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने वाली रेप पीड़िता छात्रा की जमानत अर्जी उनके अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने एसीजीएम की अदालत में लगाई थी. जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. उधर चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने बताया कि बुधवार को उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री की जमानत की अर्जी जिला जज की अदालत में दी है, जिस पर सुनवाई के लिए तीस सितंबर की तारीख तय हुई है. पीड़िता की गिरफ्तारी के बाद विशेष जांच दल ने प्रेस वार्ता की, जिसमें आईपीएस भारती सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद को मोबाइल पर धमकी भरा मैसेज भेजा गया था. जिसमें उनसे पांच करोड़ रुपए की मांग की गई थी. रंगदारी नहीं देने पर उनका अश्लील वीडियो टीवी चैनल पर चलवा कर उनकी इज्जत मिट्टी में मिलाने की धमकी दी गई थी. ये भी पढ़ेंः .
tra a je हृदय में वेदना की भाग दबाये, पलकों में आँसुओं का समुद्र छिपाये दीपक नीरजा के विवाह में संलग्न थे। नीरजा प्रसन्न होगी, वह दुलहन वनेगी । देवकी देवी की आत्मा संतोष मानेगी । वे नहीं हैं तो उनके पीछे विवाह में कोई कमी न रहे । इसलिये हर तैयारी पूरी ज्ञान से की गई थी । नीरजा के साथ दीपक प्रदीप को अपना हृदय सर्वस्व समर्पण करने के लिये अभी यहाँ तो अभी वहाँ दौड़ते थे। विवाह भी समाज का कैसा विचित्र खेल है ! अलग अलग डाल के दो फूल नुकीली सुई से धागे में जुड़ जाते हैं। बाजे बजे, बारात आई । दीपक ने तन मन धन से सब का स्वागत किया । और फिर फेरे भी फिर गये । दीपक के हृदय में संतोष भी था और द्वंद्व भी । उनको ऐसा लग रहा था जैसे उनका वर्षों से सींचा हुआ गुलाब का पौदा तूफान के खेलों के में डोल रहा है। मानो तेज़ पवन बेले की कली का घूंघट उठाने को आकुल है, अथवा कोई फूल अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ देवता के चरणों में चढ़ा दिया गया है । विदा से पहले नीरजा ने दीपक को देखा । बहुत रोकने पर भी दीपक की आँखों के अविरल आँसून थमे । नीरजा ने कहा- "मेरे पीछे रोना मत ।" साथ ही अपनी एक प्रिय सहेली सुखवर्पा से बोली"तुम इनका ध्यान रखना । मेरे जाने के बाद इनको खिलाने पिलाने की जिम्मेवारी मैं तुम पर छोड़ती हूँ । कल कल की बात है, परसों मैं आ ही जाऊँगी ।" दीपक ने पोंछते हुए कहा - "परेशानी की कोई बात नहीं है । तुम जानो, सुख से रहो, मुझे कोई तकलीफ़ कैसे होगी । मन तो वैसे ही उमड़ उमड़ कर रहा है । तुम जा रही हो, देवकी देवी की याद आ रही है । यह घर तो उजड़ सा ही गया ।' नीरजा - "नहीं, उजड़ कैसे गया ! मैं इसी घर में रहूँगी ।" मन के गुबार अभी उमड़ ही रहे थे कि मर्द औरतों ने शोर मचाया। "जल्दी भेजो नीरजा को, ये लोग नाराज़ हो रहे हैं ।" दीपक और नीरजा चिपट कर रोते हुए अलग हुए । मन के सारे उद्वेग पर पाषाण रख धीरज समेट दीपक ने नीरजा का हाथ प्रदीप को पकड़ा दिया। कहा - "इसे कोई दुःख न हो । मैं तुम्हारी हर सेवा के लिये प्रस्तुत हूँ । " फिर नीरजा को गाड़ी में बैठा दिया। नीरजा के हृदय की दशा इस समय ज्वारभाटे जैसी थी । सचमुच विदा का समय भी कैसा कठोर होता है। अपने आँगन की खेलती हुई ज्योत्स्ना मानो भोर को सौंप दी जाती है। दीपक और बेटी वाले खड़े देखते रहे । विदा हो गई । वह घर आँखें भर लाया जो देवकी देवी के मरने पर भी जड़ पड़ा रहा था । वे कबूतर जो पल भर भी शान्ति से नहीं बैठते थे, पर फड़फड़ाते हुए कमरे में उड़ते रहते थे, झरोखों में से नीरजा की विदा देखते रहे । वे निनिमेष थे । नीरजा को विदा कर जब दीपक उस कमरे में दीवारों से बातें करने लगे तो वे बिचारे उसी तरफ़ देखते रहे । उस दिन रात भर कमरा बन्द कर दीपकों से मन समझाते रहे । न वे सोये, न कबूतरों ने उनका ध्यान छोड़ा। रात बीती, दिन बीता, न दीपक उठे, न कबूतर उड़े । न जाने उनकी चपलता, उनकी भूख, उनकी प्यास कहाँ चली गई थी ! संसार के भी कैसे कैसे विचित्र स्वर होते हैं। कभी उसमें किसी के हँसने की गूंज होती है। कभी किसी के आनन्द का नाद होता है । पर इन सब से ऊपर सुना जाता है कोई अनहद नाद, कोई आनन्द की धुन
tra a je हृदय में वेदना की भाग दबाये, पलकों में आँसुओं का समुद्र छिपाये दीपक नीरजा के विवाह में संलग्न थे। नीरजा प्रसन्न होगी, वह दुलहन वनेगी । देवकी देवी की आत्मा संतोष मानेगी । वे नहीं हैं तो उनके पीछे विवाह में कोई कमी न रहे । इसलिये हर तैयारी पूरी ज्ञान से की गई थी । नीरजा के साथ दीपक प्रदीप को अपना हृदय सर्वस्व समर्पण करने के लिये अभी यहाँ तो अभी वहाँ दौड़ते थे। विवाह भी समाज का कैसा विचित्र खेल है ! अलग अलग डाल के दो फूल नुकीली सुई से धागे में जुड़ जाते हैं। बाजे बजे, बारात आई । दीपक ने तन मन धन से सब का स्वागत किया । और फिर फेरे भी फिर गये । दीपक के हृदय में संतोष भी था और द्वंद्व भी । उनको ऐसा लग रहा था जैसे उनका वर्षों से सींचा हुआ गुलाब का पौदा तूफान के खेलों के में डोल रहा है। मानो तेज़ पवन बेले की कली का घूंघट उठाने को आकुल है, अथवा कोई फूल अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ देवता के चरणों में चढ़ा दिया गया है । विदा से पहले नीरजा ने दीपक को देखा । बहुत रोकने पर भी दीपक की आँखों के अविरल आँसून थमे । नीरजा ने कहा- "मेरे पीछे रोना मत ।" साथ ही अपनी एक प्रिय सहेली सुखवर्पा से बोली"तुम इनका ध्यान रखना । मेरे जाने के बाद इनको खिलाने पिलाने की जिम्मेवारी मैं तुम पर छोड़ती हूँ । कल कल की बात है, परसों मैं आ ही जाऊँगी ।" दीपक ने पोंछते हुए कहा - "परेशानी की कोई बात नहीं है । तुम जानो, सुख से रहो, मुझे कोई तकलीफ़ कैसे होगी । मन तो वैसे ही उमड़ उमड़ कर रहा है । तुम जा रही हो, देवकी देवी की याद आ रही है । यह घर तो उजड़ सा ही गया ।' नीरजा - "नहीं, उजड़ कैसे गया ! मैं इसी घर में रहूँगी ।" मन के गुबार अभी उमड़ ही रहे थे कि मर्द औरतों ने शोर मचाया। "जल्दी भेजो नीरजा को, ये लोग नाराज़ हो रहे हैं ।" दीपक और नीरजा चिपट कर रोते हुए अलग हुए । मन के सारे उद्वेग पर पाषाण रख धीरज समेट दीपक ने नीरजा का हाथ प्रदीप को पकड़ा दिया। कहा - "इसे कोई दुःख न हो । मैं तुम्हारी हर सेवा के लिये प्रस्तुत हूँ । " फिर नीरजा को गाड़ी में बैठा दिया। नीरजा के हृदय की दशा इस समय ज्वारभाटे जैसी थी । सचमुच विदा का समय भी कैसा कठोर होता है। अपने आँगन की खेलती हुई ज्योत्स्ना मानो भोर को सौंप दी जाती है। दीपक और बेटी वाले खड़े देखते रहे । विदा हो गई । वह घर आँखें भर लाया जो देवकी देवी के मरने पर भी जड़ पड़ा रहा था । वे कबूतर जो पल भर भी शान्ति से नहीं बैठते थे, पर फड़फड़ाते हुए कमरे में उड़ते रहते थे, झरोखों में से नीरजा की विदा देखते रहे । वे निनिमेष थे । नीरजा को विदा कर जब दीपक उस कमरे में दीवारों से बातें करने लगे तो वे बिचारे उसी तरफ़ देखते रहे । उस दिन रात भर कमरा बन्द कर दीपकों से मन समझाते रहे । न वे सोये, न कबूतरों ने उनका ध्यान छोड़ा। रात बीती, दिन बीता, न दीपक उठे, न कबूतर उड़े । न जाने उनकी चपलता, उनकी भूख, उनकी प्यास कहाँ चली गई थी ! संसार के भी कैसे कैसे विचित्र स्वर होते हैं। कभी उसमें किसी के हँसने की गूंज होती है। कभी किसी के आनन्द का नाद होता है । पर इन सब से ऊपर सुना जाता है कोई अनहद नाद, कोई आनन्द की धुन
महराजगंज में मंगलवार देर रात किसी से मिलने गई मां-बेटी पर अज्ञात युवकों ने हमला कर दिया। इस दौरान लड़की की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई है। पुलिस अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। महराजगंजः उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में मंगलवार की रात मां-बेटी पर धारदार हथियार से हमला कर आरोपी मौके से फरार हो गए। हमले के दौरान लड़की की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई है। पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। चीखपुकार सुन आसपास के लोगों ने घायल महिला को इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कालेज में भर्ती करावाया है। जहां पर उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह घटना महराजगंज के रुदलापुर गांव की है। पनियरा क्षेत्र के रुदलापुर गांव निवासी काजल मद्धेशिया को किसी ने देर रात फोनकर गांव के बाहर नहर के पास मिलने के लिए बुलाया था। काजल अपनी मां पिंकी के साथ उससे मिलने गई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर आरोपितों ने काजल पर जानलेवा हमला कर दिया। बेटी पर हमला होता देख काजल की मां बीच-बचाव करने लगी तो आरोपित ने उसकी मां पर भी हमलाकर दिया। इसी दौरान किसी तरह से वहां से बचकर महिला ने गांव आकर लोगों से मदद की गुहार लगाई। घटना की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर चल दिए। ग्रामीणों को मौके पर आता देख आरोपी घटनास्थल से फरार हो गया। इसी दौरान महिला की बेटी काजल की मौत हो गई। पनियारा पुलिस ने दो अज्ञात आरोपितों के खिलाफ हत्या करने और हत्या का प्रयास करने के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधीक्षक डाक्टर कौस्तुभ के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगा दी गई है। जल्द ही आरोपित पुलिस की गिरफ्त में होंगे। वहीं काजल के भाई-बहनों ने पुलिस को बताया कि उन्हें मामले कि कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि आरोपितों से मिलने वह दोनों मुख्य गेट से न जाकर छत के रास्ते उतर कर आरोपियों से मिलने गई थी। जिस कारण उन्हें मामले की जानकारी नहीं हो पाई।
महराजगंज में मंगलवार देर रात किसी से मिलने गई मां-बेटी पर अज्ञात युवकों ने हमला कर दिया। इस दौरान लड़की की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई है। पुलिस अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। महराजगंजः उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में मंगलवार की रात मां-बेटी पर धारदार हथियार से हमला कर आरोपी मौके से फरार हो गए। हमले के दौरान लड़की की मौके पर मौत हो गई। जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई है। पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। चीखपुकार सुन आसपास के लोगों ने घायल महिला को इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कालेज में भर्ती करावाया है। जहां पर उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह घटना महराजगंज के रुदलापुर गांव की है। पनियरा क्षेत्र के रुदलापुर गांव निवासी काजल मद्धेशिया को किसी ने देर रात फोनकर गांव के बाहर नहर के पास मिलने के लिए बुलाया था। काजल अपनी मां पिंकी के साथ उससे मिलने गई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर आरोपितों ने काजल पर जानलेवा हमला कर दिया। बेटी पर हमला होता देख काजल की मां बीच-बचाव करने लगी तो आरोपित ने उसकी मां पर भी हमलाकर दिया। इसी दौरान किसी तरह से वहां से बचकर महिला ने गांव आकर लोगों से मदद की गुहार लगाई। घटना की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर चल दिए। ग्रामीणों को मौके पर आता देख आरोपी घटनास्थल से फरार हो गया। इसी दौरान महिला की बेटी काजल की मौत हो गई। पनियारा पुलिस ने दो अज्ञात आरोपितों के खिलाफ हत्या करने और हत्या का प्रयास करने के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधीक्षक डाक्टर कौस्तुभ के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगा दी गई है। जल्द ही आरोपित पुलिस की गिरफ्त में होंगे। वहीं काजल के भाई-बहनों ने पुलिस को बताया कि उन्हें मामले कि कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि आरोपितों से मिलने वह दोनों मुख्य गेट से न जाकर छत के रास्ते उतर कर आरोपियों से मिलने गई थी। जिस कारण उन्हें मामले की जानकारी नहीं हो पाई।
आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस शानदार वीडियो को शेयर किया है और कैप्शन में दिल छू लेने वाली बात लिखी है. कहते हैं कि अगर मन में विश्वास और हौसला हो तो इंसान जीवन के हर मुसीबत को पार कर जाता है यानी जीवन में सफलता पाने के लिए हौसले का होना जरूरी होता है. असल में हौसला हमारे अंदर की शक्ति को बढ़ाता है और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है. आपने कई ऐसे लोगों के बारे में सुना होगा, जो नेत्रहीन होते हैं, यानी देख नहीं सकते, लेकिन अपने हौसले से वो जिंदगी का हर मुकाम को आखिरकार पा ही लेते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे ही एक शख्स का वीडियो आजकल खूब वायरल (Viral Videos) हो रहा है, जो है तो नेत्रहीन, लेकिन अपनी नेत्रहीनता को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और वो करके दिखाया, जो आंख वाले भी करने से पहले 10 बार सोचें. आपने स्केटिंग करते लोगों को तो देखा ही होगा. इसे सीखना इतना आसान नहीं होता. इसमें काफी मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन शायद ही आपने कभी किसी नेत्रहीन व्यक्ति को स्केटिंग करते देखा होगा. वायरल हो रहे वीडियो में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक नेत्रहीन शख्स स्केटिंग करते हुए गजब के स्टंट करता नजर आ रहा है. इस दौरान वह अपने हाथ में स्टिक भी लिए हुए है, जिसकी मदद से वह आगे की राह को पहचान रहा है और स्केटिंग कर रहा है. आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस शानदार वीडियो को शेयर किया है और कैप्शन में दिल छू लेने वाली बात लिखी है. उन्होंने लिखा है, 'आंखों में रोशनी नहीं थी. पर किस्मत इसे स्केटबोर्डिंग करने से नहीं रोक सकी. आपको जिन्दगी से जो चाहिए, उसके लिए इतना संघर्ष करें कि किस्मत भी घुटने टेक दे'. देखें वीडियोः 1 मिनट 20 सेकेंड के इस वीडियो को अब तक 11 हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. वहीं, लोगों ने वीडियो देख कर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने लिखा है, 'अद्भुत कला का प्रदर्शन', जबकि और भी कई यूजर्स ने वीडियो को बेहद ही शानदार और अद्भुत बताया है और साथ ही उस नेत्रहीन शख्स के हौसले को सलाम भी किया है.
आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस शानदार वीडियो को शेयर किया है और कैप्शन में दिल छू लेने वाली बात लिखी है. कहते हैं कि अगर मन में विश्वास और हौसला हो तो इंसान जीवन के हर मुसीबत को पार कर जाता है यानी जीवन में सफलता पाने के लिए हौसले का होना जरूरी होता है. असल में हौसला हमारे अंदर की शक्ति को बढ़ाता है और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है. आपने कई ऐसे लोगों के बारे में सुना होगा, जो नेत्रहीन होते हैं, यानी देख नहीं सकते, लेकिन अपने हौसले से वो जिंदगी का हर मुकाम को आखिरकार पा ही लेते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे ही एक शख्स का वीडियो आजकल खूब वायरल हो रहा है, जो है तो नेत्रहीन, लेकिन अपनी नेत्रहीनता को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और वो करके दिखाया, जो आंख वाले भी करने से पहले दस बार सोचें. आपने स्केटिंग करते लोगों को तो देखा ही होगा. इसे सीखना इतना आसान नहीं होता. इसमें काफी मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन शायद ही आपने कभी किसी नेत्रहीन व्यक्ति को स्केटिंग करते देखा होगा. वायरल हो रहे वीडियो में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक नेत्रहीन शख्स स्केटिंग करते हुए गजब के स्टंट करता नजर आ रहा है. इस दौरान वह अपने हाथ में स्टिक भी लिए हुए है, जिसकी मदद से वह आगे की राह को पहचान रहा है और स्केटिंग कर रहा है. आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस शानदार वीडियो को शेयर किया है और कैप्शन में दिल छू लेने वाली बात लिखी है. उन्होंने लिखा है, 'आंखों में रोशनी नहीं थी. पर किस्मत इसे स्केटबोर्डिंग करने से नहीं रोक सकी. आपको जिन्दगी से जो चाहिए, उसके लिए इतना संघर्ष करें कि किस्मत भी घुटने टेक दे'. देखें वीडियोः एक मिनट बीस सेकेंड के इस वीडियो को अब तक ग्यारह हजार से भी अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. वहीं, लोगों ने वीडियो देख कर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. एक यूजर ने लिखा है, 'अद्भुत कला का प्रदर्शन', जबकि और भी कई यूजर्स ने वीडियो को बेहद ही शानदार और अद्भुत बताया है और साथ ही उस नेत्रहीन शख्स के हौसले को सलाम भी किया है.
और ऐसा कुछ आज हो सकता है? क्या एक महिला पहले ही संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सेवा कर चुकी है? क्या पहली महिला एडिथ विल्सन वास्तव में अपने पति के बाद राष्ट्रपति के रूप में काम करती थीं, राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को एक कमजोर स्ट्रोक का सामना करना पड़ा? एडिथ बोलिंग गल्ट विल्सन निश्चित रूप से राष्ट्रपति होने के लिए सही पूर्वज थे। 1872 में औपनिवेशिक वर्जीनिया के अमेरिकी सर्किट न्यायाधीश विलियम होलकोम्बे बोलिंग और सैली व्हाइट के लिए पैदा हुए, एडिथ बोलिंग वास्तव में पोकाहोंटस के प्रत्यक्ष वंशज थे और रक्त से राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन से संबंधित थे और पहली महिला मार्था वाशिंगटन और लेटिटिया टायलर से शादी कर चुके थे। साथ ही, उसके पालन-पोषण ने उसे "आम लोक" से सम्बंधित कर दिया। गृह युद्ध में उसके दादा के वृक्षारोपण के बाद, एडिथ, बाकी बड़े बोलिंग परिवार के साथ, एक वाईथविले पर एक छोटे से बोर्डिंग हाउस में रहते थे, वर्जीनिया स्टोर। मार्था वाशिंगटन कॉलेज में संक्षेप में भाग लेने के अलावा, उन्हें थोड़ी औपचारिक शिक्षा मिली। राष्ट्रपति वुडरो विल्सन की दूसरी पत्नी के रूप में, एडिथ विल्सन ने उन्हें उच्च शिक्षा की कमी नहीं दी, जिससे उन्हें राष्ट्रपति पद के मामलों और संघीय सरकार के कार्यकलापों को बनाए रखने से रोक दिया गया, जबकि उन्होंने अपने सचिव को पहली महिला के बड़े पैमाने पर औपचारिक कर्तव्यों को सौंप दिया। अप्रैल 1 9 17 में, अपने दूसरे कार्यकाल के शुरू होने के चार महीने बाद, राष्ट्रपति विल्सन ने अमेरिका को प्रथम विश्व युद्ध में ले जाया। युद्ध के दौरान, एडिथ ने अपने पति के साथ मिलकर काम किया, अपनी बैठक में भाग लिया, और अपनी बैठकों में भाग लिया और उन्हें राजनेताओं और विदेशी प्रतिनिधियों की राय दे दी। यहां तक कि विल्सन के सबसे करीबी सलाहकारों को अक्सर उनके साथ मिलने के लिए एडिथ की मंजूरी की आवश्यकता थी। जैसे-जैसे युद्ध 1 9 1 9 में खत्म हो गया, एडिथ राष्ट्रपति के साथ पेरिस गए जहां उन्होंने वर्सेल्स पीस संधि पर बातचीत के दौरान उन्हें सम्मानित किया। वाशिंगटन लौटने के बाद, एडिथ ने राष्ट्रपति का समर्थन किया और सहायता की क्योंकि वह लीग ऑफ नेशंस के प्रस्ताव के लिए रिपब्लिकन विपक्ष को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पहले से ही खराब स्वास्थ्य में होने के बावजूद, और अपने डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ, राष्ट्रपति विल्सन ने अपने लीग ऑफ़ नेशंस प्लान के लिए सार्वजनिक समर्थन जीतने के लिए "सीटी स्टॉप" अभियान में 1 9 1 9 के पतन में ट्रेन से देश को पार किया। अंतरराष्ट्रीय अलगाववाद के लिए एक अनुमानित युद्ध-युद्ध की इच्छा में देश के साथ, उन्हें थोड़ी सी सफलता मिली और शारीरिक थकावट से गिरने के बाद वाशिंगटन लौट आया। विल्सन कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ और आखिरकार 2 अक्टूबर, 1 9 1 9 को भारी स्ट्रोक का सामना करना पड़ा। एडिथ ने तुरंत निर्णय लेने लगे। राष्ट्रपति के डॉक्टरों से परामर्श करने के बाद, उन्होंने अपने पति को इस्तीफा दे दिया और उपाध्यक्ष को लेने की इजाजत दे दी। इसके बजाय, एडिथ ने शुरू किया कि वह बाद में राष्ट्रपति के एक साल और पांच महीने लंबी "कार्यवाहक" कहेंगी। 1 9 3 9 की आत्मकथा "माई मेमोयर" में, श्रीमती विल्सन ने लिखा, "तो मेरी कार्यवाहक शुरू हुई। मैंने अलग-अलग सचिवों या सीनेटरों से भेजे गए प्रत्येक पेपर का अध्ययन किया, और मेरी सतर्कता के बावजूद, मेरे पास सतर्कता के बावजूद, टेबलाइड रूप में पचाने और पेश करने की कोशिश की, उन्हें राष्ट्रपति के पास जाना पड़ा। मैंने स्वयं सार्वजनिक मामलों के स्वभाव के संबंध में कभी भी एक निर्णय नहीं लिया। मेरा एकमात्र निर्णय था जो महत्वपूर्ण था और क्या नहीं था, और मेरे पति के लिए मामलों को पेश करने का बहुत महत्वपूर्ण निर्णय था। " एडिथ ने कैबिनेट , कांग्रेस, प्रेस और लोगों से आंशिक रूप से लकवाग्रस्त पति की हालत की गंभीरता को छिपाने की कोशिश करके अपने राष्ट्रपति "कार्यवाहक" की शुरुआत की। सार्वजनिक बुलेटिन में, या तो उनके द्वारा लिखित या अनुमोदित, एडिथ ने कहा कि राष्ट्रपति विल्सन को केवल आराम की जरूरत है और वह अपने शयनकक्ष से व्यवसाय कर रहे हैं। कैबिनेट सदस्यों को एडिथ की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति से बात करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने वुडरो की समीक्षा या अनुमोदन के लिए लक्षित सभी सामग्री को अवरुद्ध और स्क्रीन किया। अगर उन्हें पर्याप्त महत्वपूर्ण समझा जाता है, तो एडिथ उन्हें अपने पति के बेडरूम में ले जाएगा। क्या बेडरूम से आने वाले फैसले राष्ट्रपति द्वारा किए गए थे या उस समय एडिथ ज्ञात नहीं थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कई दिन राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों को स्वीकार किया गया है, एडिथ ने तर्क दिया कि उन्होंने कभी भी किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत नहीं की, प्रमुख निर्णय, साइन या वीटो कानून नहीं बनाया, या अन्यथा कार्यकारी आदेश जारी करने के माध्यम से कार्यकारी शाखा को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सभी महिलाएं पहली बार "प्रशासन" से खुश नहीं थीं। एक रिपब्लिकन सीनेटर ने उसे "राष्ट्रपति" कहा था, जिसने फर्स्ट लेडी से एक्टिंग फर्स्ट मैन से अपना खिताब बदलकर प्रत्यर्पण के सपने को पूरा किया था। " "माई मेमोयर" में, श्रीमती विल्सन ने दृढ़ता से तर्क दिया कि उन्होंने राष्ट्रपति के डॉक्टरों की सिफारिशों पर अपनी छद्म-राष्ट्रपति भूमिका निभाई थी। वर्षों से विल्सन प्रशासन की कार्यवाही का अध्ययन करने के बाद, इतिहासकारों ने निष्कर्ष निकाला है कि उनके पति की बीमारी के दौरान ईडिथ विल्सन की भूमिका केवल "कार्यवाहक" से परे थी। इसके बजाय, उन्होंने अनिवार्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया जब तक कि वुडरो विल्सन का दूसरा कार्यकाल मार्च में समाप्त नहीं हुआ 1921। तीन साल बाद, वुडरो विल्सन रविवार को 3:15 बजे रविवार को 3 फरवरी, 1 9 24 को अपने वाशिंगटन, डीसी, घर में निधन हो गया। अगले दिन, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ने शुक्रवार, 1 फरवरी को अपनी आखिरी पूर्ण सजा सुनाई थी। "मैं मशीनरी का टूटा हुआ टुकड़ा हूं। जब मशीनरी टूट जाती है- मैं तैयार हूं। "और शनिवार, 2 फरवरी को, उन्होंने अपना अंतिम शब्दः" एडिथ "कहा। क्या एडिथ विल्सन ने संविधान का उल्लंघन किया? 1 9 1 9 में, अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद II, धारा 1, धारा 6 ने राष्ट्रपति उत्तराधिकार को निम्नानुसार परिभाषित कियाः "कार्यालय से राष्ट्रपति के निष्कासन के मामले में, या उसकी मृत्यु, इस्तीफा, या कहा गया कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थता, वही राष्ट्रपति उपाध्यक्ष पर भरोसा करेगी, और कांग्रेस कानून द्वारा दे सकती है राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों को हटाने, मृत्यु, इस्तीफा या अक्षमता का मामला, यह घोषणा करते हुए कि अधिकारी कौन सा राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा, और ऐसे अधिकारी तदनुसार कार्य करेंगे, जब तक विकलांगता को हटाया न जाए, या राष्ट्रपति चुने जाएंगे। " हालांकि, राष्ट्रपति विल्सन न तो अपमानित , मृत, या इस्तीफा देने को तैयार थे, इसलिए उपराष्ट्रपति थॉमस मार्शल ने राष्ट्रपति पद संभालने से इनकार कर दिया जब तक कि राष्ट्रपति के डॉक्टर ने बीमार राष्ट्रपति की "उस पद के अधिकारों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थता" प्रमाणित नहीं किया और कांग्रेस पास एक प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति रिक्त पद के कार्यालय की घोषणा। न तो कभी हुआ। हालांकि, 1 9 1 9 में एडिथ विल्सन ने जो किया वह करने वाली पहली महिला संविधान में 25 वें संशोधन से जूझ सकती है, जिसे 1 9 67 में अनुमोदित किया गया था। 25 वें संशोधन में बिजली और शर्तों के हस्तांतरण की एक और अधिक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसे राष्ट्रपति को राष्ट्रपति पद की शक्तियों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थ घोषित किया जा सकता है। > संदर्भः विल्सन, एडिथ बोलिंग गल्ट। मेरा संस्मरण न्यूयॉर्कः द बॉब्स-मेरिल कंपनी, 1 9 3 9। मिलर, क्रिस्टी। एलेन और एडिथः वुडरो विल्सन की पहली देवियों । लॉरेंस, कान 2010।
और ऐसा कुछ आज हो सकता है? क्या एक महिला पहले ही संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सेवा कर चुकी है? क्या पहली महिला एडिथ विल्सन वास्तव में अपने पति के बाद राष्ट्रपति के रूप में काम करती थीं, राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को एक कमजोर स्ट्रोक का सामना करना पड़ा? एडिथ बोलिंग गल्ट विल्सन निश्चित रूप से राष्ट्रपति होने के लिए सही पूर्वज थे। एक हज़ार आठ सौ बहत्तर में औपनिवेशिक वर्जीनिया के अमेरिकी सर्किट न्यायाधीश विलियम होलकोम्बे बोलिंग और सैली व्हाइट के लिए पैदा हुए, एडिथ बोलिंग वास्तव में पोकाहोंटस के प्रत्यक्ष वंशज थे और रक्त से राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन से संबंधित थे और पहली महिला मार्था वाशिंगटन और लेटिटिया टायलर से शादी कर चुके थे। साथ ही, उसके पालन-पोषण ने उसे "आम लोक" से सम्बंधित कर दिया। गृह युद्ध में उसके दादा के वृक्षारोपण के बाद, एडिथ, बाकी बड़े बोलिंग परिवार के साथ, एक वाईथविले पर एक छोटे से बोर्डिंग हाउस में रहते थे, वर्जीनिया स्टोर। मार्था वाशिंगटन कॉलेज में संक्षेप में भाग लेने के अलावा, उन्हें थोड़ी औपचारिक शिक्षा मिली। राष्ट्रपति वुडरो विल्सन की दूसरी पत्नी के रूप में, एडिथ विल्सन ने उन्हें उच्च शिक्षा की कमी नहीं दी, जिससे उन्हें राष्ट्रपति पद के मामलों और संघीय सरकार के कार्यकलापों को बनाए रखने से रोक दिया गया, जबकि उन्होंने अपने सचिव को पहली महिला के बड़े पैमाने पर औपचारिक कर्तव्यों को सौंप दिया। अप्रैल एक नौ सत्रह में, अपने दूसरे कार्यकाल के शुरू होने के चार महीने बाद, राष्ट्रपति विल्सन ने अमेरिका को प्रथम विश्व युद्ध में ले जाया। युद्ध के दौरान, एडिथ ने अपने पति के साथ मिलकर काम किया, अपनी बैठक में भाग लिया, और अपनी बैठकों में भाग लिया और उन्हें राजनेताओं और विदेशी प्रतिनिधियों की राय दे दी। यहां तक कि विल्सन के सबसे करीबी सलाहकारों को अक्सर उनके साथ मिलने के लिए एडिथ की मंजूरी की आवश्यकता थी। जैसे-जैसे युद्ध एक नौ एक नौ में खत्म हो गया, एडिथ राष्ट्रपति के साथ पेरिस गए जहां उन्होंने वर्सेल्स पीस संधि पर बातचीत के दौरान उन्हें सम्मानित किया। वाशिंगटन लौटने के बाद, एडिथ ने राष्ट्रपति का समर्थन किया और सहायता की क्योंकि वह लीग ऑफ नेशंस के प्रस्ताव के लिए रिपब्लिकन विपक्ष को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पहले से ही खराब स्वास्थ्य में होने के बावजूद, और अपने डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ, राष्ट्रपति विल्सन ने अपने लीग ऑफ़ नेशंस प्लान के लिए सार्वजनिक समर्थन जीतने के लिए "सीटी स्टॉप" अभियान में एक नौ एक नौ के पतन में ट्रेन से देश को पार किया। अंतरराष्ट्रीय अलगाववाद के लिए एक अनुमानित युद्ध-युद्ध की इच्छा में देश के साथ, उन्हें थोड़ी सी सफलता मिली और शारीरिक थकावट से गिरने के बाद वाशिंगटन लौट आया। विल्सन कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ और आखिरकार दो अक्टूबर, एक नौ एक नौ को भारी स्ट्रोक का सामना करना पड़ा। एडिथ ने तुरंत निर्णय लेने लगे। राष्ट्रपति के डॉक्टरों से परामर्श करने के बाद, उन्होंने अपने पति को इस्तीफा दे दिया और उपाध्यक्ष को लेने की इजाजत दे दी। इसके बजाय, एडिथ ने शुरू किया कि वह बाद में राष्ट्रपति के एक साल और पांच महीने लंबी "कार्यवाहक" कहेंगी। एक नौ तीन नौ की आत्मकथा "माई मेमोयर" में, श्रीमती विल्सन ने लिखा, "तो मेरी कार्यवाहक शुरू हुई। मैंने अलग-अलग सचिवों या सीनेटरों से भेजे गए प्रत्येक पेपर का अध्ययन किया, और मेरी सतर्कता के बावजूद, मेरे पास सतर्कता के बावजूद, टेबलाइड रूप में पचाने और पेश करने की कोशिश की, उन्हें राष्ट्रपति के पास जाना पड़ा। मैंने स्वयं सार्वजनिक मामलों के स्वभाव के संबंध में कभी भी एक निर्णय नहीं लिया। मेरा एकमात्र निर्णय था जो महत्वपूर्ण था और क्या नहीं था, और मेरे पति के लिए मामलों को पेश करने का बहुत महत्वपूर्ण निर्णय था। " एडिथ ने कैबिनेट , कांग्रेस, प्रेस और लोगों से आंशिक रूप से लकवाग्रस्त पति की हालत की गंभीरता को छिपाने की कोशिश करके अपने राष्ट्रपति "कार्यवाहक" की शुरुआत की। सार्वजनिक बुलेटिन में, या तो उनके द्वारा लिखित या अनुमोदित, एडिथ ने कहा कि राष्ट्रपति विल्सन को केवल आराम की जरूरत है और वह अपने शयनकक्ष से व्यवसाय कर रहे हैं। कैबिनेट सदस्यों को एडिथ की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति से बात करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने वुडरो की समीक्षा या अनुमोदन के लिए लक्षित सभी सामग्री को अवरुद्ध और स्क्रीन किया। अगर उन्हें पर्याप्त महत्वपूर्ण समझा जाता है, तो एडिथ उन्हें अपने पति के बेडरूम में ले जाएगा। क्या बेडरूम से आने वाले फैसले राष्ट्रपति द्वारा किए गए थे या उस समय एडिथ ज्ञात नहीं थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कई दिन राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों को स्वीकार किया गया है, एडिथ ने तर्क दिया कि उन्होंने कभी भी किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत नहीं की, प्रमुख निर्णय, साइन या वीटो कानून नहीं बनाया, या अन्यथा कार्यकारी आदेश जारी करने के माध्यम से कार्यकारी शाखा को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सभी महिलाएं पहली बार "प्रशासन" से खुश नहीं थीं। एक रिपब्लिकन सीनेटर ने उसे "राष्ट्रपति" कहा था, जिसने फर्स्ट लेडी से एक्टिंग फर्स्ट मैन से अपना खिताब बदलकर प्रत्यर्पण के सपने को पूरा किया था। " "माई मेमोयर" में, श्रीमती विल्सन ने दृढ़ता से तर्क दिया कि उन्होंने राष्ट्रपति के डॉक्टरों की सिफारिशों पर अपनी छद्म-राष्ट्रपति भूमिका निभाई थी। वर्षों से विल्सन प्रशासन की कार्यवाही का अध्ययन करने के बाद, इतिहासकारों ने निष्कर्ष निकाला है कि उनके पति की बीमारी के दौरान ईडिथ विल्सन की भूमिका केवल "कार्यवाहक" से परे थी। इसके बजाय, उन्होंने अनिवार्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया जब तक कि वुडरो विल्सन का दूसरा कार्यकाल मार्च में समाप्त नहीं हुआ एक हज़ार नौ सौ इक्कीस। तीन साल बाद, वुडरो विल्सन रविवार को तीन:पंद्रह बजे रविवार को तीन फरवरी, एक नौ चौबीस को अपने वाशिंगटन, डीसी, घर में निधन हो गया। अगले दिन, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ने शुक्रवार, एक फरवरी को अपनी आखिरी पूर्ण सजा सुनाई थी। "मैं मशीनरी का टूटा हुआ टुकड़ा हूं। जब मशीनरी टूट जाती है- मैं तैयार हूं। "और शनिवार, दो फरवरी को, उन्होंने अपना अंतिम शब्दः" एडिथ "कहा। क्या एडिथ विल्सन ने संविधान का उल्लंघन किया? एक नौ एक नौ में, अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद II, धारा एक, धारा छः ने राष्ट्रपति उत्तराधिकार को निम्नानुसार परिभाषित कियाः "कार्यालय से राष्ट्रपति के निष्कासन के मामले में, या उसकी मृत्यु, इस्तीफा, या कहा गया कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थता, वही राष्ट्रपति उपाध्यक्ष पर भरोसा करेगी, और कांग्रेस कानून द्वारा दे सकती है राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों को हटाने, मृत्यु, इस्तीफा या अक्षमता का मामला, यह घोषणा करते हुए कि अधिकारी कौन सा राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा, और ऐसे अधिकारी तदनुसार कार्य करेंगे, जब तक विकलांगता को हटाया न जाए, या राष्ट्रपति चुने जाएंगे। " हालांकि, राष्ट्रपति विल्सन न तो अपमानित , मृत, या इस्तीफा देने को तैयार थे, इसलिए उपराष्ट्रपति थॉमस मार्शल ने राष्ट्रपति पद संभालने से इनकार कर दिया जब तक कि राष्ट्रपति के डॉक्टर ने बीमार राष्ट्रपति की "उस पद के अधिकारों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थता" प्रमाणित नहीं किया और कांग्रेस पास एक प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति रिक्त पद के कार्यालय की घोषणा। न तो कभी हुआ। हालांकि, एक नौ एक नौ में एडिथ विल्सन ने जो किया वह करने वाली पहली महिला संविधान में पच्चीस वें संशोधन से जूझ सकती है, जिसे एक नौ सरसठ में अनुमोदित किया गया था। पच्चीस वें संशोधन में बिजली और शर्तों के हस्तांतरण की एक और अधिक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसे राष्ट्रपति को राष्ट्रपति पद की शक्तियों और कर्तव्यों को निर्वहन करने में असमर्थ घोषित किया जा सकता है। > संदर्भः विल्सन, एडिथ बोलिंग गल्ट। मेरा संस्मरण न्यूयॉर्कः द बॉब्स-मेरिल कंपनी, एक नौ तीन नौ। मिलर, क्रिस्टी। एलेन और एडिथः वुडरो विल्सन की पहली देवियों । लॉरेंस, कान दो हज़ार दस।
(विधायक की फोटो वाली टी-शर्ट का दुरुपयोग) ( Image Source : P Amitesh ) Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur News: नेताओं की तस्वीर छपे अख़बार में समोसा जलेबी खाकर फेंकने का मामला आम है. अब विधायक की तस्वीर वाले टी-शर्ट में 52 परी पर जुआरियों का दांव लगाना चर्चा का विषय बन गया है. मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर ज़िले के विधायक डॉ विनय जायसवाल सुर्ख़ियों में रहने के आदी हो चुके हैं. इस बार बांटी गई टी-शर्ट ने विधायक विनय जायसवाल को चर्चा में ला दिया है. विधायक की तस्वीर लगी टी-शर्ट को बिछाकर जुआ खेलने की फोटो जमकर वायरल हो रही है. जानकारी के मुताबिक़ विधायक डॉ विनय जायसवाल ने पिछले साल निर्वाचन क्षेत्र में एमएलए कप क्रिकेट टूर्नामेंट करवाया था. टूर्नामेंड में कई वार्ड की टीमों ने हिस्सा लिया. विधायक ने सभी खिलाड़ियों को अपनी फोटो लगी टी-शर्ट का वितरण किया. टी-शर्ट पहनकर खिलाड़ियों को टूर्नामेंट खेलना था. टूर्नामेंट के बाद टी-शर्ट का दुरूपयोग विधायक महोदय ने भी नहीं सोचा होगा. सोशल मीडिया पर दो तीन फोटो वायरल हो रही हैं. फोटो में जुआरी विधायक की तस्वीर वाली टी-शर्ट को ज़मीन पर बिछाकर बक़ायदा 52 पत्तियों पर दांव लगाते दिख रहे है. जुआरियों का चेहरा वायरल फ़ोटो में नहीं दिख रहा है और ना ही स्थान का पता चल रहा है. लेकिन तस्वीर से साफ़ है कि जुआरियों के हाथों में ताश की पत्ती और रुपए हैं और विधायक की तस्वीर वाले टी-शर्ट पर सजाकर दांव लगाया जा रहा है. बता दें कि मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ विनय जायसवाल अपने अंदाज और बयानों की वजह से हमेशा चर्चा में रहते हैं. कुछ महीनों पहले उन्होंने एसईसीएल के कर्मचारी और ठेकेदार पर नाली की सफाई को लेकर नाराजगी जताई थी. विधायक सफाई व्यवस्था को लेकर एसईसीएल के सफाई कर्मचारी पर गुस्सा निकाल रहे थे. नाराजगी जाहिर करने के तरीके में एक पढ़े लिखे डॉक्टर विधायक का व्यवहार नजर नहीं आया. विधायक विनय जायसवाल ने सफाई विभाग के कर्मचारी को फोन पर कहा कि "नाली भरी पड़ी है. शाम तक अगर सफाई नहीं हुई तो तेरे को और तेरे ठेकेदार को उल्टा टांग दूंगा. तेरे को भी तेरे ठेकेदार को भी. " टी-शर्ट लगी फोटो बिछाकर जुआ खेलने के संबंध में विधायक डॉ विनय जायसवाल का पक्ष जानने के लिए संपर्क नहीं हो सका. Chhattisgarh: लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश! छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज पर क्या हैं संयुक्त राष्ट्र के विचार?
Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur News: नेताओं की तस्वीर छपे अख़बार में समोसा जलेबी खाकर फेंकने का मामला आम है. अब विधायक की तस्वीर वाले टी-शर्ट में बावन परी पर जुआरियों का दांव लगाना चर्चा का विषय बन गया है. मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर ज़िले के विधायक डॉ विनय जायसवाल सुर्ख़ियों में रहने के आदी हो चुके हैं. इस बार बांटी गई टी-शर्ट ने विधायक विनय जायसवाल को चर्चा में ला दिया है. विधायक की तस्वीर लगी टी-शर्ट को बिछाकर जुआ खेलने की फोटो जमकर वायरल हो रही है. जानकारी के मुताबिक़ विधायक डॉ विनय जायसवाल ने पिछले साल निर्वाचन क्षेत्र में एमएलए कप क्रिकेट टूर्नामेंट करवाया था. टूर्नामेंड में कई वार्ड की टीमों ने हिस्सा लिया. विधायक ने सभी खिलाड़ियों को अपनी फोटो लगी टी-शर्ट का वितरण किया. टी-शर्ट पहनकर खिलाड़ियों को टूर्नामेंट खेलना था. टूर्नामेंट के बाद टी-शर्ट का दुरूपयोग विधायक महोदय ने भी नहीं सोचा होगा. सोशल मीडिया पर दो तीन फोटो वायरल हो रही हैं. फोटो में जुआरी विधायक की तस्वीर वाली टी-शर्ट को ज़मीन पर बिछाकर बक़ायदा बावन पत्तियों पर दांव लगाते दिख रहे है. जुआरियों का चेहरा वायरल फ़ोटो में नहीं दिख रहा है और ना ही स्थान का पता चल रहा है. लेकिन तस्वीर से साफ़ है कि जुआरियों के हाथों में ताश की पत्ती और रुपए हैं और विधायक की तस्वीर वाले टी-शर्ट पर सजाकर दांव लगाया जा रहा है. बता दें कि मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ विनय जायसवाल अपने अंदाज और बयानों की वजह से हमेशा चर्चा में रहते हैं. कुछ महीनों पहले उन्होंने एसईसीएल के कर्मचारी और ठेकेदार पर नाली की सफाई को लेकर नाराजगी जताई थी. विधायक सफाई व्यवस्था को लेकर एसईसीएल के सफाई कर्मचारी पर गुस्सा निकाल रहे थे. नाराजगी जाहिर करने के तरीके में एक पढ़े लिखे डॉक्टर विधायक का व्यवहार नजर नहीं आया. विधायक विनय जायसवाल ने सफाई विभाग के कर्मचारी को फोन पर कहा कि "नाली भरी पड़ी है. शाम तक अगर सफाई नहीं हुई तो तेरे को और तेरे ठेकेदार को उल्टा टांग दूंगा. तेरे को भी तेरे ठेकेदार को भी. " टी-शर्ट लगी फोटो बिछाकर जुआ खेलने के संबंध में विधायक डॉ विनय जायसवाल का पक्ष जानने के लिए संपर्क नहीं हो सका. Chhattisgarh: लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश! छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज पर क्या हैं संयुक्त राष्ट्र के विचार?