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फर्श में कपड़े के मॉडल रहस्य और रहस्य की एक छवि देते हैं, जो मनुष्य की जिज्ञासा हमेशा हल करना चाहता है। 2015 के आधे में कपड़े एक साधारण परिष्करण और सरल रंग समाधान में एक परिष्करण और अच्छा स्वाद है। इस मामले में, प्रत्येक मॉडल में एक हाइलाइट मौजूद है।
2015 में फर्श में कपड़े के सबसे फैशनेबल मॉडल में एक महिला को यादगार और अद्वितीय छवियां बनाने में मदद मिलती है। लंबे कपड़े की वास्तविक शैलियों में, फ़ैशनिस्ट खुद को ध्यान आकर्षित करेगा और उसकी तत्कालता और असामान्यता का प्रदर्शन करेगा।
फर्श 2015 में शाम के कपड़े । 2015 में लंबे कपड़े के शाम के मॉडल सादगी और minimalism द्वारा प्रतिष्ठित हैं। डिजाइनर बिना किसी सजावट और आकर्षक खत्म के फर्श में सुंदर शैलियों की पेशकश करते हैं। 2015 के बाहर निकलने पर लंबे कपड़े की एक विशेषता उज्ज्वल रंग समाधान के संयोजन में फर्श में एक सुरुचिपूर्ण सिल्हूट थी। इसके अलावा, गुणवत्ता के कपड़े का चयन लंबी पोशाक की प्रासंगिकता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
फर्श 2015 में आरामदायक कपड़े । फर्श में एक अनौपचारिक पोशाक चुनना, स्टाइलिस्ट 2015 में क्लासिक्स से अपील करने के लिए सुझाव देते हैं, जो इसकी प्रासंगिकता को कभी नहीं खोता है। फैशन में बुना हुआ तंग-फिटिंग शैलियों, ऊन और tweed का एक ढीला मॉडल बैग, साथ ही हल्के सूती और कैम्बिक कपड़े-शर्ट बुना हुआ। पेशेवरों के अनुसार, ये शैलियों सभी अवसरों के लिए महान हैं।
लंबे व्यापार कपड़े 2015 । 2015 में, स्टाइलिस्ट व्यापार और आत्मनिर्भर महिलाओं को सलाह देते हैं कि वे अपनी नारीत्व और सुंदरता को न भूलें, जो कि लंबे कपड़े के साथ सबसे अच्छा है। यह जानकर कि व्यापार शैली संयम मानती है, सबसे वास्तविक मॉडल फर्श में चिकनी सिल्हूट या ढीले कट के साथ कपड़े हैं, जो सुरुचिपूर्ण पट्टियों या कसने के साथ सुसज्जित हैं। रंग योजना एक व्यापार शैली में रखी जाती है। लेकिन एक छोटी कटआउट neckline या आस्तीन-लालटेन की उपस्थिति ऐसे मॉडल पतला और इतना सख्त नहीं बनाता है।
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फर्श में कपड़े के मॉडल रहस्य और रहस्य की एक छवि देते हैं, जो मनुष्य की जिज्ञासा हमेशा हल करना चाहता है। दो हज़ार पंद्रह के आधे में कपड़े एक साधारण परिष्करण और सरल रंग समाधान में एक परिष्करण और अच्छा स्वाद है। इस मामले में, प्रत्येक मॉडल में एक हाइलाइट मौजूद है। दो हज़ार पंद्रह में फर्श में कपड़े के सबसे फैशनेबल मॉडल में एक महिला को यादगार और अद्वितीय छवियां बनाने में मदद मिलती है। लंबे कपड़े की वास्तविक शैलियों में, फ़ैशनिस्ट खुद को ध्यान आकर्षित करेगा और उसकी तत्कालता और असामान्यता का प्रदर्शन करेगा। फर्श दो हज़ार पंद्रह में शाम के कपड़े । दो हज़ार पंद्रह में लंबे कपड़े के शाम के मॉडल सादगी और minimalism द्वारा प्रतिष्ठित हैं। डिजाइनर बिना किसी सजावट और आकर्षक खत्म के फर्श में सुंदर शैलियों की पेशकश करते हैं। दो हज़ार पंद्रह के बाहर निकलने पर लंबे कपड़े की एक विशेषता उज्ज्वल रंग समाधान के संयोजन में फर्श में एक सुरुचिपूर्ण सिल्हूट थी। इसके अलावा, गुणवत्ता के कपड़े का चयन लंबी पोशाक की प्रासंगिकता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फर्श दो हज़ार पंद्रह में आरामदायक कपड़े । फर्श में एक अनौपचारिक पोशाक चुनना, स्टाइलिस्ट दो हज़ार पंद्रह में क्लासिक्स से अपील करने के लिए सुझाव देते हैं, जो इसकी प्रासंगिकता को कभी नहीं खोता है। फैशन में बुना हुआ तंग-फिटिंग शैलियों, ऊन और tweed का एक ढीला मॉडल बैग, साथ ही हल्के सूती और कैम्बिक कपड़े-शर्ट बुना हुआ। पेशेवरों के अनुसार, ये शैलियों सभी अवसरों के लिए महान हैं। लंबे व्यापार कपड़े दो हज़ार पंद्रह । दो हज़ार पंद्रह में, स्टाइलिस्ट व्यापार और आत्मनिर्भर महिलाओं को सलाह देते हैं कि वे अपनी नारीत्व और सुंदरता को न भूलें, जो कि लंबे कपड़े के साथ सबसे अच्छा है। यह जानकर कि व्यापार शैली संयम मानती है, सबसे वास्तविक मॉडल फर्श में चिकनी सिल्हूट या ढीले कट के साथ कपड़े हैं, जो सुरुचिपूर्ण पट्टियों या कसने के साथ सुसज्जित हैं। रंग योजना एक व्यापार शैली में रखी जाती है। लेकिन एक छोटी कटआउट neckline या आस्तीन-लालटेन की उपस्थिति ऐसे मॉडल पतला और इतना सख्त नहीं बनाता है।
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I ase j
गुणी जन जिणको ऐसे ॥ ८ ॥ अणहिल्ल पाटक नामके नगरमें दुर्लभ संज्ञक राजाके समक्ष श्रीजिनेश्वरसूरिने शिथिलाचारी साधुओंसे वादप्रतिवाद किया और जैसे सिंह हाथिओंसे सामना कर उन्हें चीरकर फेक देता है वैसेही श्री जिनेश्वरसूरिने शास्त्रार्थ में उन शिथिला चारियोंको पराजित किया ॥ १० ॥ जैसे सूर्य रात्रिके अन्धकारको सत्वर नष्ट करता है वैसे ही रागादि दोष रहित सूरिजिनेश्वराचार्यने दशम असंयमीरूप पूजा लक्षण आश्चर्यरूप रात्रि में स्फुरायमाण स्वच्छन्द शिथिलाचारियोंके मतरूप अन्धकारको शीघ्र नष्ट किया ॥ १९ ॥
१९ और इन्हीं महाराजने भीगणधर सार्द्ध शतकमें ऊपर की बातको खुलासा पूर्वक कही है जिसका पाठ नीचे मुजब है अथ-वसति वासोद्धारकरा भारधारण धोरेयान् ॥ श्रीजिनेश्वरसूरि युगप्रवरान् शरणी कुर्वन् गाथा प्रयोदशकमाह ।।
तेसि पय पठम सिवा रसिठ भमरुत्व सव्व भमरहिऊ ॥ ससमय पर समय पयत्य सत्य वित्यारण समस्यो ।।६।।। अहिल्ल वाडयनाड इव्व दंसिय सुपत्तसंदोहे । पठरपए वहूक बिदूसगेय सन्नायगा जुगए ।।६५।। सठिय़ दुल्लहराए सरसइ अंको वसोहिय ।। सुहए. मज्जेरायसहं पविसिऊण लोयागमाणु मयं ॥ ६६ ॥ नामाय रएहिं समं करियं वियारं ॥ वियार रहिएहिं वसहि निवासी साहुण ठावित ठाविभो अप्पा ।।६७।। परिहरिय गुरुकमागय वरवत्ताएय गुजरत्ताए वसहि निवासो जेहिं फुडी कठ गुजरत्ताए ।।६८॥ इत्यादि ऊपरके पाठकी लघु कृतिका पाठ नीचे मुजब है
व्याख्या ॥ वक्षमाण त्रयोदश गाथांतं स्थितंतेसि जिणेसरसूरीणां चरणसरणं. पवजामीति संबंधः ॥ यः कीदृशः तेषां श्रीवर्द्धमानाचार्याणां पाद पद्म सेवा रसिक चरणारविन्दपर्युपासिगाढासक्त, किंवदिव्याह ।। भ्रमरवत् मधुकर सर्वेषु शास्त्रेषु भ्रमेण संशयेनरहितः
सर्व भ्रम रहितः ॥ अतएव स्वसमय परसमय पदार्थ सार्थः विस्तारण समर्थ स्वसिद्धांत पर सिद्धांतानां पदार्थ सार्थास्तत्र पदानि विभक्तितानि तेषां अर्था पदार्थास्तेषां सार्थासमूहास्तेषां विस्तारणे विस्तर प्रकाश नेपटुः ॥६४॥ यै श्रीजिनेश्चराचायँ नाममात्र धारकाचार्यैः समं सह विचारं धर्म्मवादं कृत्वा वसतौ निवासोऽवस्थानं साधूनां स्थापित प्रतिष्ठापितः, प्रतिष्ठितस्थापितः स्थिरी कृतः आत्मकीर्त्यालंकृतइत्यर्थः ॥ किंविशिष्टै विवादै वसत्ति व्यवस्थापनं, अणहिल्ल पाटके अणहिल्ल पाटकाख्य पत्तने कीदृशे पाटके नाटक इव, दशरूपाख्ये शास्त्र विशेषे इव कीदृशे ॥ अणहिल पाटके नाटके च, उभयोरपिश्लिष्टंविशेषण सप्तक माह ।। दंसिय सुपत्त संदोहे, दर्शितञ्चक्षुर्विषयतांनीतः सुपात्राणां संज्ञाजनानां स्थालक कञ्चो लादीनां हट्टेस्थापितानां संदोहः समूहो यत्र ॥ नाटक पक्षे, राम लक्ष्मण सीता लंकेश्वर विभीषणादीनि सुपात्राणि ज्ञेयानि, तस्मिन् दर्शित सुपात्र संदोह ॥ १ ॥ संदेहे इति पाठेतु, पत्तने पत्त मपक्षे समंजसचारित्र साधुवेषविष्टंधक कुपति दर्शनेन भव्यानां समस्य यं संशयः यदुत किमस्ति कापि सत्पात्र नवेति, अतउक्तं, दर्शित सुपात्र संदेहे ॥ नाटक पक्षे, दर्शितामि सुपात्राणां रामादीनां संसम्यकदेहा शरीराणि यत्र, तस्मिन् दर्शितसुपात्र संदेहे ॥ १ ॥ तथा ॥ पठरपए इति, प्रचुराणि प्रभूतानि प्रतिगृहद्वारकुपिका सहस्र लिंग महातहाग वाप्यादिसद्भावेन पयांसि जलानि यत्र, तस्मिम् प्रचुर पयसि ॥ नाटक पक्षे ॥ प्रचुराणि प्रलम्यानि दीर्घसनासानि पदानि यत्र तस्मिन् प्रचुर पदानि ॥ २ ॥ बहुकवि दूसगे इति, बहूनि अनेकामि कवयः काव्य कर्तारः दुष्यानिवस्त्राणि च यत्र तस्मिन् बहुक विदूषके ॥ नाटक पक्षेतु ॥ बहुका प्रभूता विदूषका क्रिडा पात्राणि यत्र तस्मिन् बहुक विदूषका ॥ ३ ॥ तथा ॥ संनायगायुगये इति, शोभननायके वशिष्ट मण्डल
गृह ग्रामादिस्वामिभिरनुगते ॥ नाटक पक्षेतु, ललित शांत उदानुउद्भुत संज्ञश्चतुर्विधैनायकैरनु गतो ॥ ४ ॥ तथा सद्दियदुल्लहराए इति, सहऋध्यावर्त्ततेतिसर्द्धिक ऋद्धमान् दुर्लभ राज्ञो महीपति यत्र तस्मिन् सार्द्धिक दुर्लभ राजा ॥ नाटक पक्षे ॥ सती शोभना वैराग्य युक्ता धीबुद्धिर्येषांते साका स्तेषां दुर्लभोदुःप्रापो राग श्रतशोऽनुबंधो यत्र तस्मिन सर्द्धिक दुर्लभ राग ॥ ५ ॥ तथा ॥ सर सइअंको वसोहिए इति, सरस्वती नाम नदी तस्या अंक उत्संग स्तेन उपशोभिते विराजिते ॥ नाटक पक्षे च ॥ सरस्वती भारतीलक्षणा वृत्तिः ॥ अंकाश्वर सांश्रया स्तैरुपशोभितेतेषां स्वरूपं नाटकाद्वगन्तव्यं ॥ ६ ॥ तथा ॥ सुहए इति, शोभना हया अश्वा यत्र तस्मिन् सुहये ॥ नाटकपक्षेतु ॥ सुखदे कौतकप्रियाणां शर्मंदे ॥ ७ ॥ इति पक्षविशेषण सप्तकार्थः ॥ किंकृत्वा विवादः कृतःमध्ये राजसभं राजसभामध्ये प्रविश्य उपविश्यकथं विवादक तःलोकञ्च आगमञ्च तयोरनुमतं सम्मतं यथा भवतीति गाथा ॥६५॥ ६६ ॥ ६७ ॥ त्रयार्थः ॥ अमुमेवार्थं पुनः सविशेषमाह॥ बसत्या चैत्यगृह निराकरणेन परगृहावस्थित्य सह विहारः ॥ समय भाष या ग्रामनगरादी विचरणं वसति विहारं सयैर्भगवद्भिः स्फुटीकृतः सिद्धान्तोक्कोपि पुनः प्रकटी कृतः कस्यां गूर्जरयात्रायां सप्ततिसहस्त्र प्रमाण मण्डलमध्ये किं विशिष्टायां प्रगटीकृत गुरुक्रमागतवरवा - तयामपि परिहता अवगणिता गुरुक्रमागता गुरुपारंपर्यसमायाता वरवार्त्ता विशिष्टधर्मवार्ता ययातत्स्यामपि अपिसंभावने नास्तिकिमप्यत्रासंभाव्यं घटतएवैतदित्यादि ।
देखिये ऊपरके पाठ में श्रीवर्द्धमान सूरिजीके चरण कमलकी सेवा भक्ति में भ्रमरकी तरह विशेषरक्त और सर्व प्रकारके संदेहरूप भ्रमसे रहित और श्रीजैन शास्त्रोंके तथा अन्य मतके शास्त्रों
के अर्थको विस्तार करने में समर्थ, ऐसे श्री जिनेश्वर सूरिजी महाराजने गुजरात देश में श्रीअणहिलपुर पहण में श्रीदुर्लभ राजाकी राज्य सभा चैत्यवासी आचार्य नामधारकोंके साथ साधुके क्रिया कर्त्तव्यका व्यवहार सम्बन्धी युक्ति और आगमानुसार धर्मवाद करके, वहां साधुका वसति मार्ग स्थापित किया उससे इन महाराजकी देश देशान्तरों में शोभा प्रसिद्धिको प्राप्त होती भई । यद्यपि शास्त्रों में तो वसतिमार्गको प्रकट ही कथन किया हुआ है परन्तु इस क्षेत्र में शिथिलाचारी द्रव्यलिंगियोंसे लुप्त प्रायः होगया था इसलिये इन महाराजने प्रगट किया और इन्हीं अणहिलपुर पट्टणको "दशरूप" नामा नाटक सदृश ओपमा देकर सात विशेषणोंकी समानता दिखाई है सो तो खुलासा ही लिखा है और ऊपरके पाठसे वसतिमार्ग प्रकाशक कहो या खरतर मार्ग प्रकाशक कहो अथवा वसतिवासी सुविहित मार्ग प्रकाशक कहो सबका भावार्थ एकही है सो तो ऊपरके लेखसे विवेकीतत्वज्ञ, पाठकगण स्वयं समझ सकते हैंःऔर इसी तरहसे उपरोक्त पाठकी वृहद्वृत्तिमें तथा श्रीसंघपहककी बृहद्वृत्ति और षट् स्थानक प्रकरण वृत्ति वगैरह अनेक शास्त्रों में दुर्लभराजाकी राज्य सभा में श्रीजिनेश्वर सूरिजी महाराज नेचैत्यवासियोंके साथ शास्त्रार्थ करके उन्होंको हटाये और संयसियोंका बिहार शुरू करानेका खुलासापूर्वक लिखा है उन सब पाठोंकों विस्तारके कारणसे यहां नहीं लिखता हूं, परन्तु जिसके देखने की इच्छा होवे सो उपरोक्त शास्त्र पाठ स्वयं देख लेवेंगे।
१२ बारहवां और भी श्रीखरतरगच्छकी गुर्वावली श्रीआ चार रत्नाकर के दूसरे प्रकाश में छप कर प्रसिद्ध हुई हैं उसके पृष्ठ १०४ । १०५ । १०६ में नीचे सजिब लिखा है।
पाट ऊपर श्रीजिनेश्वरसूरि हुए सो, सं० १०१९ में आचार्य पदको प्राप्त होके श्रीबुद्धिसागरसूरिके साथ संरुस्थल देश में विहार करके क्रमसे गुर्जर देशमें अणहिल्लपुर पट्टणमें गए, वहां दुर्लभ राजाका पुरोहित शिवशर्मा नामें ब्राह्मण जो अपना मामाथा तिसके घर में गए, वहां शिवशर्मा ब्राह्मण अपने लड़केको वेद पदोंका अर्थ बतला रहाथा, उसमें कितनेक वेद पदका उलटा अर्थ बताने लगा, तब गुरु बोले, इस मुजब नहीं है, हम कहें उस मुजब है, तब सच्चा अर्थ सुनके प्रोहित बोला कि आपको इस माफक वेदके अर्थका जाणपणा किसतरें हुआ, आप संसारी अवस्थामें कौन नगरके अरु किसके पुत्र थे, तब महाराजने कहा कि, हम वणारसी नगरीके, सोमं नामें ब्राह्मणके पुत्र हैं, तब शिवशर्मा पुरोहितने पिछानें कि ये तो मेराभाणेज है, ऐसा जाणके बहुत भक्ती मान हुआ, बहुमान पूर्वक अपने मकान में रक्खे, वहां रहते और भी कई पदार्थो में पुरोहितके दिलमें सन्देहथे सो सर्वदूर किये, तंब शिवशर्मा पुरोहित बहुत महाराजका रागी हुआ, तब वहाँके चैत्यवासियोंने विचारा कि श्रीजिनेश्वरसूरिके इहां रहनेसे अपना पडदा खुल जायगा, अपनेको कोई न मानेंगा, सर्व लोक इनोंके रागी हो जायेंगे, इसमें कोई उपाय करना चाहिये, ऐसा विचार के दुर्लभराजाके पास जायके चुगली किया कि दिल्ली से ग्रन्थ छोटक चोर आये हैं, सो आपके पुरोहितके इहां ठहरे हैं, तब राजा एसा बचन सुनके पुरोहितको बुलाकर पूछने लगा कि तेरे घर चौर आये सुना है, तब पुरोहित बोला कि, मेरे घर में चौरतो कोई नहीं आए है, परन्तु शुद्धक्रिया पात्र साधु आये हैं जो उनोंको चौर कहते होंगे सो आप चौर
होंगे, तब राजाने शुद्धाचार देखने के लिये श्रीजिनेश्वरसूरीको अपने पास बुलाये और चैत्यवाससियोंको भी बुलाये, जब श्रीजिनेश्वर सूरि राजाकी सभा में आए तब राजानें नमस्कार करा, तब गुरु महाराजने धर्मलाभ आशीर्वाद देके अपने बैठने योग्य स्थानमें, कंबली विछाके इरियावही पडिक मके जमीनकी पडिलेहणा करके बैठें। तब राजाने विचारा कि शुद्ध आचार ऐसा ही होता है और चैत्यवासी जो आये सो राजाको आशीर वाद देके, इसी तरह विस्तरोंके ऊपर बैठ गये तब राजाने चैत्यवासियोंका विरुद्ध आचार देखके श्री जिनेस्वरसूरि महराजको साधुका आधार पूछा तब महाराज बोले आपका देवाधिष्टित ज्ञानका भण्डार है जिसमें सर्व मत स्वरूप निवेदक पुस्तक है उसमें से आपके पण्डितोंके पास एक या दो पुस्तक मंगवाइये तब राजाने भण्डारमेंसे पुस्तक मंगवाया सो पण्डितों के दशवै कालिक पुस्तक हाथ लगी । सो जब राजसभामें लेके आये । तबगुरू महाराजनें कहा, इस पुस्तककों चैत्यवासियोंके हाथमें देके आप साधुका आचार सुनों, तब चैत्यवासी पुस्तक बाचने लगे, सो जहां बहुत साधुका आचार आने लगा वहांके पाठ वे छोड़नें लगे, तब गुरुमहाराज बोले, कि राजसभा में दिन को चौरी होती है, तब राजाने पूछा किस तरेसें, गुरूनें कहा, कि यहां इणोंनें साधुके आधार के कई पन्ने छोड़ दिये हैं, तब राजा बोला कि आप वांचो । तब गुरूमहाराजनें कहा हमारे बांधनेंसे ये लोग फिर कल्पित बात कहेंगे, इससे आपके बड़े पण्डितोंके पास ये पुस्तक वंचावो, तब राजाने अपने पण्डितोंके पास उस पुस्तक मेंसे साधुका आचार सुना, तब उसी आचारमुजिब श्रीजिनेश्वर
सूरिका सत्य आचार देखा, और चैत्यवासियोंका उस पुस्तकसे विरुद्ध आचार देखा, इससे सारी सभाके सामने राजाने कहा ॥ अतिशय पणें करके श्रीजिनेश्वरसूरि सच्चा हुवा, इससे ये खरतरा हे, और चैत्यवासी हारगया, इससेती ये कवला हे ॥ हारा सो कवला थया ॥ जीता खरतर जाणिया ।। तिणीकाल श्रीसंघ में । गच्छ दोघ वखाणिया ॥ १ ॥ इसी तरे सुविहित पक्षधारक श्री जिनेश्वर सूरि, वीर संवत् १५५० । विक्रम संवत् १०८० में खरतर विरुदकों प्राप्त भए । तबसें कोटिक गच्छ, चन्द्रकुल, वयरी शाखा, खरतर विरुद, जैसा भेद स्थिवर साधु, नवीन साधुओंसे कहने लगे, इहांसे सूल कोटिक गच्छका नाम खरतर गच्छ प्रसिद्ध हुआ, अतिशयेन खरा सत्य प्रतिज्ञा ये ते खरतराः इत्यादि खरतर विरुदकों प्राप्त होनेवाले श्री जिनेश्वर सूरि बड़े प्रभावीक भए ॥ ४० ॥"
१३ तेरहवां- और भी अन्यमतके न्यायवान् मध्यस्थ विद्वान्ने अङ्गरेजी भाषामें सभा में व्याख्यान (भाषण ) करते समय अनेक शास्त्रानुसार जैनधर्म के प्राचीन इतिहास संबंधी बहुत खुलासा किया था उसमें खरतरगच्छ तथा तपगच्छकी पहावलियोंका कथन करने में तपगच्छकी पहावलीको पहिले कथन न करके खरतरगच्छकी पहावलीको पहिले कथन करी थी और इसके बाद तपगच्छकी पहावलीको कथन करी थी उसी खरतरगच्छकी पट्टावली में भी श्रीजिनेश्वरसूरिजी महाराजते 'खरतर' विरुदलिखा है उसका गुजराती भाषायें अनुवाद सन् १९०८ जुलाई मासके "सनातन जैन " नामा मासिकपत्रके पृष्ट ३७४ से ३८९ तक में प्रसिद्धहुआ था जिसका उत्तरानीचेमुजब है
" डॉकूर जहाँन्नेस कलाह पी० एच० डी० ( बर्लिन ) ए लखेलो अंगरेजी निबन्ध-डाकूर भाउदाजी रॉयल ऐसीमाटीक
लोसाइटीनी मुंबई शाखा पासे (१२ मी डिसेंबर १८६७ ने दिने) निबंध वांच्यो हतो तेमां तेणे मेरुतुङ्गनी थेरावलि अने बीजां पुस्तकाने आधारे जैनोना प्राचीन इतिहास पर घणो प्रकाश पाडयों हतो । आ पृष्ठोमां जैनोना बे मुख्य गच्छ खरतर अने तप गच्छनी पहावलिओमांथी सौथी अगत्यनी तारीख - काल हुं आपीश, आ सर्व २२ लिखीत मतोमांथी लीधुं छे। तेनांथी २० प्रतो मुंबईथी, के. एम. चॅटफिल्ड संघईना केलवणी खाताना डायरेकटरनी सहायता थी मली छे तेथी तेनो उपकार मानु छु' अने बीजी बे प्रतो बर्लिनमांथी मेलवी छे
खरतर गच्छनी पहावलि ।
महावीर - कुल इक्ष्वाकु, गोत्र काश्यप, पिता क्षत्रियकुण्ड ग्रामना राजा सिद्धार्थ, माता त्रिशला, जन्म चैत्र शुद्धि त्रयोदशीमां, निर्वाण चतुर्थ आराना अंत पहेलां ३ वर्ष अने ८ ।। महिनें पापाशहेरमाँ ७२ वर्षनी उमरे कार्तिक अमावास्याने दिने तेमने १९ शिष्पो ( गणधरी ) हता ।
तेना प्रथम शिष्य गौतम उर्फे इन्द्रभूति हता, तेमना गोत्रनु नाम गौतम, पितानु नाम ब्राह्मण वसुभूति; मातानु नाम ब्राह्मणी पृथ्वी हतां, जन्म मगधदेशना गोबर ग्राममां थयो. मिर्वाण वीरना निर्वाण पछी १२ वर्षे ८२वर्षनी उमरे राजगृहीमां पाम्या, गौतमे दीक्षित करेला साधुओ पोतानी पहेलां गत थवाथी, अने बीजा नव गणधरो पोताना शिष्य साधुओ सुधर्माने सौंपी देवा थी, पांचमा गणधर सुधर्मानीपाट गणाई अने ते पाट पाँचमा आराना अंते थनार दुःप्रसहरि सुधी चालशे ।
वीर पछी १४ वर्ष गयां पछी जमालि नामनो पहेलो निन्हव जाग्यो, अने १६ वर्ष गयां पछी तिश्यगुप्त ( प्रादेशिक ) नामनो बीजो निन्हव थयो ।
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२ सुधर्मा - जन्म कोलक ग्राममा, गोत्र अनि वैश्यायन,
पिता घल्लि, माता सद्दिला; गृहस्थपणे ५० वर्ष, छद्मस्थ तरीके ४२ वर्ष अने केवली तरीके आठ वर्षे रह्या, निर्वाण वीर पछी २० वर्षे १०० वर्षनी वये पास्या ।
३ जम्बू - जन्म राजगृहीमां, गोत्र काश्यप, पिता श्रेष्ठी ऋषभदत्त, साता धारिणी ; गृहस्थ तरीके १६ वर्ष, छद्मस्थ तरीके २० अने कवली तरीके ४४ वर्ष रह्या, निर्वाण वीर पछी ६४ वर्षे ८० वर्षनी वये पास्या आ छेल्ला केवली हता ।
४ प्रभव - गोत्र कात्याघन, पिता जयपुरना राजा विद्य गृहस्थपणे ३० वर्ष, सामान्य व्रती तरीके ४४ वर्ष ( कोई ६४ कहे छे ) अने आचार्य तरीके १९ वर्ष रह्या सरण वीरना निर्वाण पछी ७५ वर्षे, ८५ ( अथवा १०५ ) वर्षनी वये थयुं ।
५ सय्यम्भव-जन्म राजगृही, गोत्र वात्स्य ; तेमणे शांतिजिननी प्रतिमानां दर्शन करवायी जैन दीक्षा लीधी, पोताना पुत्र मनक वास्ते दशवैकालक सूत्र रच्यु, २८ वर्ष गृहस्थाश्रममां, १९ व्रती तरीके, अने २३ वर्ष आचार्य तरीके गाल्या वीर पछी M५ वर्षे, ६२ वर्षनी वये पंचत्व पाम्या ।
६ यशोभद्र - गोत्र तुंगोयायन, गृहस्थ पणे २२ वर्ष, व्रती तरीके १४ वर्ष, अने आचार्य तरीके ५० वर्ष रह्या. वीर पछी १४८ वर्षे ८६ वर्षनी वये मृत्यु पाम्या ।
सम्भूति विजय अने तेना लघु गुरु भ्राता भद्रबाहु । ७ सम्भूति - विजय गोत्र - माढर, गृहस्थपणे ४२ वर्ष, व्रती तरीके ४०, युग प्रधान तरीके गाल्यां अने वीर पछी ९५६ वर्षे ९० वर्षनी उमरे गत थया ।
भद्रबाहु - गोत्र प्राचीन, तेमणे उपसर्गहरस्तोत्र, कल्पसूत्र, अने आवश्यक; दशवैकालिक वगैरे १० शास्त्रों पर निर्यक्तिओ
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I ase j गुणी जन जिणको ऐसे ॥ आठ ॥ अणहिल्ल पाटक नामके नगरमें दुर्लभ संज्ञक राजाके समक्ष श्रीजिनेश्वरसूरिने शिथिलाचारी साधुओंसे वादप्रतिवाद किया और जैसे सिंह हाथिओंसे सामना कर उन्हें चीरकर फेक देता है वैसेही श्री जिनेश्वरसूरिने शास्त्रार्थ में उन शिथिला चारियोंको पराजित किया ॥ दस ॥ जैसे सूर्य रात्रिके अन्धकारको सत्वर नष्ट करता है वैसे ही रागादि दोष रहित सूरिजिनेश्वराचार्यने दशम असंयमीरूप पूजा लक्षण आश्चर्यरूप रात्रि में स्फुरायमाण स्वच्छन्द शिथिलाचारियोंके मतरूप अन्धकारको शीघ्र नष्ट किया ॥ उन्नीस ॥ उन्नीस और इन्हीं महाराजने भीगणधर सार्द्ध शतकमें ऊपर की बातको खुलासा पूर्वक कही है जिसका पाठ नीचे मुजब है अथ-वसति वासोद्धारकरा भारधारण धोरेयान् ॥ श्रीजिनेश्वरसूरि युगप्रवरान् शरणी कुर्वन् गाथा प्रयोदशकमाह ।। तेसि पय पठम सिवा रसिठ भमरुत्व सव्व भमरहिऊ ॥ ससमय पर समय पयत्य सत्य वित्यारण समस्यो ।।छः।।। अहिल्ल वाडयनाड इव्व दंसिय सुपत्तसंदोहे । पठरपए वहूक बिदूसगेय सन्नायगा जुगए ।।पैंसठ।। सठिय़ दुल्लहराए सरसइ अंको वसोहिय ।। सुहए. मज्जेरायसहं पविसिऊण लोयागमाणु मयं ॥ छयासठ ॥ नामाय रएहिं समं करियं वियारं ॥ वियार रहिएहिं वसहि निवासी साहुण ठावित ठाविभो अप्पा ।।सरसठ।। परिहरिय गुरुकमागय वरवत्ताएय गुजरत्ताए वसहि निवासो जेहिं फुडी कठ गुजरत्ताए ।।अड़सठ॥ इत्यादि ऊपरके पाठकी लघु कृतिका पाठ नीचे मुजब है व्याख्या ॥ वक्षमाण त्रयोदश गाथांतं स्थितंतेसि जिणेसरसूरीणां चरणसरणं. पवजामीति संबंधः ॥ यः कीदृशः तेषां श्रीवर्द्धमानाचार्याणां पाद पद्म सेवा रसिक चरणारविन्दपर्युपासिगाढासक्त, किंवदिव्याह ।। भ्रमरवत् मधुकर सर्वेषु शास्त्रेषु भ्रमेण संशयेनरहितः सर्व भ्रम रहितः ॥ अतएव स्वसमय परसमय पदार्थ सार्थः विस्तारण समर्थ स्वसिद्धांत पर सिद्धांतानां पदार्थ सार्थास्तत्र पदानि विभक्तितानि तेषां अर्था पदार्थास्तेषां सार्थासमूहास्तेषां विस्तारणे विस्तर प्रकाश नेपटुः ॥चौंसठ॥ यै श्रीजिनेश्चराचायँ नाममात्र धारकाचार्यैः समं सह विचारं धर्म्मवादं कृत्वा वसतौ निवासोऽवस्थानं साधूनां स्थापित प्रतिष्ठापितः, प्रतिष्ठितस्थापितः स्थिरी कृतः आत्मकीर्त्यालंकृतइत्यर्थः ॥ किंविशिष्टै विवादै वसत्ति व्यवस्थापनं, अणहिल्ल पाटके अणहिल्ल पाटकाख्य पत्तने कीदृशे पाटके नाटक इव, दशरूपाख्ये शास्त्र विशेषे इव कीदृशे ॥ अणहिल पाटके नाटके च, उभयोरपिश्लिष्टंविशेषण सप्तक माह ।। दंसिय सुपत्त संदोहे, दर्शितञ्चक्षुर्विषयतांनीतः सुपात्राणां संज्ञाजनानां स्थालक कञ्चो लादीनां हट्टेस्थापितानां संदोहः समूहो यत्र ॥ नाटक पक्षे, राम लक्ष्मण सीता लंकेश्वर विभीषणादीनि सुपात्राणि ज्ञेयानि, तस्मिन् दर्शित सुपात्र संदोह ॥ एक ॥ संदेहे इति पाठेतु, पत्तने पत्त मपक्षे समंजसचारित्र साधुवेषविष्टंधक कुपति दर्शनेन भव्यानां समस्य यं संशयः यदुत किमस्ति कापि सत्पात्र नवेति, अतउक्तं, दर्शित सुपात्र संदेहे ॥ नाटक पक्षे, दर्शितामि सुपात्राणां रामादीनां संसम्यकदेहा शरीराणि यत्र, तस्मिन् दर्शितसुपात्र संदेहे ॥ एक ॥ तथा ॥ पठरपए इति, प्रचुराणि प्रभूतानि प्रतिगृहद्वारकुपिका सहस्र लिंग महातहाग वाप्यादिसद्भावेन पयांसि जलानि यत्र, तस्मिम् प्रचुर पयसि ॥ नाटक पक्षे ॥ प्रचुराणि प्रलम्यानि दीर्घसनासानि पदानि यत्र तस्मिन् प्रचुर पदानि ॥ दो ॥ बहुकवि दूसगे इति, बहूनि अनेकामि कवयः काव्य कर्तारः दुष्यानिवस्त्राणि च यत्र तस्मिन् बहुक विदूषके ॥ नाटक पक्षेतु ॥ बहुका प्रभूता विदूषका क्रिडा पात्राणि यत्र तस्मिन् बहुक विदूषका ॥ तीन ॥ तथा ॥ संनायगायुगये इति, शोभननायके वशिष्ट मण्डल गृह ग्रामादिस्वामिभिरनुगते ॥ नाटक पक्षेतु, ललित शांत उदानुउद्भुत संज्ञश्चतुर्विधैनायकैरनु गतो ॥ चार ॥ तथा सद्दियदुल्लहराए इति, सहऋध्यावर्त्ततेतिसर्द्धिक ऋद्धमान् दुर्लभ राज्ञो महीपति यत्र तस्मिन् सार्द्धिक दुर्लभ राजा ॥ नाटक पक्षे ॥ सती शोभना वैराग्य युक्ता धीबुद्धिर्येषांते साका स्तेषां दुर्लभोदुःप्रापो राग श्रतशोऽनुबंधो यत्र तस्मिन सर्द्धिक दुर्लभ राग ॥ पाँच ॥ तथा ॥ सर सइअंको वसोहिए इति, सरस्वती नाम नदी तस्या अंक उत्संग स्तेन उपशोभिते विराजिते ॥ नाटक पक्षे च ॥ सरस्वती भारतीलक्षणा वृत्तिः ॥ अंकाश्वर सांश्रया स्तैरुपशोभितेतेषां स्वरूपं नाटकाद्वगन्तव्यं ॥ छः ॥ तथा ॥ सुहए इति, शोभना हया अश्वा यत्र तस्मिन् सुहये ॥ नाटकपक्षेतु ॥ सुखदे कौतकप्रियाणां शर्मंदे ॥ सात ॥ इति पक्षविशेषण सप्तकार्थः ॥ किंकृत्वा विवादः कृतःमध्ये राजसभं राजसभामध्ये प्रविश्य उपविश्यकथं विवादक तःलोकञ्च आगमञ्च तयोरनुमतं सम्मतं यथा भवतीति गाथा ॥पैंसठ॥ छयासठ ॥ सरसठ ॥ त्रयार्थः ॥ अमुमेवार्थं पुनः सविशेषमाह॥ बसत्या चैत्यगृह निराकरणेन परगृहावस्थित्य सह विहारः ॥ समय भाष या ग्रामनगरादी विचरणं वसति विहारं सयैर्भगवद्भिः स्फुटीकृतः सिद्धान्तोक्कोपि पुनः प्रकटी कृतः कस्यां गूर्जरयात्रायां सप्ततिसहस्त्र प्रमाण मण्डलमध्ये किं विशिष्टायां प्रगटीकृत गुरुक्रमागतवरवा - तयामपि परिहता अवगणिता गुरुक्रमागता गुरुपारंपर्यसमायाता वरवार्त्ता विशिष्टधर्मवार्ता ययातत्स्यामपि अपिसंभावने नास्तिकिमप्यत्रासंभाव्यं घटतएवैतदित्यादि । देखिये ऊपरके पाठ में श्रीवर्द्धमान सूरिजीके चरण कमलकी सेवा भक्ति में भ्रमरकी तरह विशेषरक्त और सर्व प्रकारके संदेहरूप भ्रमसे रहित और श्रीजैन शास्त्रोंके तथा अन्य मतके शास्त्रों के अर्थको विस्तार करने में समर्थ, ऐसे श्री जिनेश्वर सूरिजी महाराजने गुजरात देश में श्रीअणहिलपुर पहण में श्रीदुर्लभ राजाकी राज्य सभा चैत्यवासी आचार्य नामधारकोंके साथ साधुके क्रिया कर्त्तव्यका व्यवहार सम्बन्धी युक्ति और आगमानुसार धर्मवाद करके, वहां साधुका वसति मार्ग स्थापित किया उससे इन महाराजकी देश देशान्तरों में शोभा प्रसिद्धिको प्राप्त होती भई । यद्यपि शास्त्रों में तो वसतिमार्गको प्रकट ही कथन किया हुआ है परन्तु इस क्षेत्र में शिथिलाचारी द्रव्यलिंगियोंसे लुप्त प्रायः होगया था इसलिये इन महाराजने प्रगट किया और इन्हीं अणहिलपुर पट्टणको "दशरूप" नामा नाटक सदृश ओपमा देकर सात विशेषणोंकी समानता दिखाई है सो तो खुलासा ही लिखा है और ऊपरके पाठसे वसतिमार्ग प्रकाशक कहो या खरतर मार्ग प्रकाशक कहो अथवा वसतिवासी सुविहित मार्ग प्रकाशक कहो सबका भावार्थ एकही है सो तो ऊपरके लेखसे विवेकीतत्वज्ञ, पाठकगण स्वयं समझ सकते हैंःऔर इसी तरहसे उपरोक्त पाठकी वृहद्वृत्तिमें तथा श्रीसंघपहककी बृहद्वृत्ति और षट् स्थानक प्रकरण वृत्ति वगैरह अनेक शास्त्रों में दुर्लभराजाकी राज्य सभा में श्रीजिनेश्वर सूरिजी महाराज नेचैत्यवासियोंके साथ शास्त्रार्थ करके उन्होंको हटाये और संयसियोंका बिहार शुरू करानेका खुलासापूर्वक लिखा है उन सब पाठोंकों विस्तारके कारणसे यहां नहीं लिखता हूं, परन्तु जिसके देखने की इच्छा होवे सो उपरोक्त शास्त्र पाठ स्वयं देख लेवेंगे। बारह बारहवां और भी श्रीखरतरगच्छकी गुर्वावली श्रीआ चार रत्नाकर के दूसरे प्रकाश में छप कर प्रसिद्ध हुई हैं उसके पृष्ठ एक सौ चार । एक सौ पाँच । एक सौ छः में नीचे सजिब लिखा है। पाट ऊपर श्रीजिनेश्वरसूरि हुए सो, संशून्य एक हज़ार उन्नीस में आचार्य पदको प्राप्त होके श्रीबुद्धिसागरसूरिके साथ संरुस्थल देश में विहार करके क्रमसे गुर्जर देशमें अणहिल्लपुर पट्टणमें गए, वहां दुर्लभ राजाका पुरोहित शिवशर्मा नामें ब्राह्मण जो अपना मामाथा तिसके घर में गए, वहां शिवशर्मा ब्राह्मण अपने लड़केको वेद पदोंका अर्थ बतला रहाथा, उसमें कितनेक वेद पदका उलटा अर्थ बताने लगा, तब गुरु बोले, इस मुजब नहीं है, हम कहें उस मुजब है, तब सच्चा अर्थ सुनके प्रोहित बोला कि आपको इस माफक वेदके अर्थका जाणपणा किसतरें हुआ, आप संसारी अवस्थामें कौन नगरके अरु किसके पुत्र थे, तब महाराजने कहा कि, हम वणारसी नगरीके, सोमं नामें ब्राह्मणके पुत्र हैं, तब शिवशर्मा पुरोहितने पिछानें कि ये तो मेराभाणेज है, ऐसा जाणके बहुत भक्ती मान हुआ, बहुमान पूर्वक अपने मकान में रक्खे, वहां रहते और भी कई पदार्थो में पुरोहितके दिलमें सन्देहथे सो सर्वदूर किये, तंब शिवशर्मा पुरोहित बहुत महाराजका रागी हुआ, तब वहाँके चैत्यवासियोंने विचारा कि श्रीजिनेश्वरसूरिके इहां रहनेसे अपना पडदा खुल जायगा, अपनेको कोई न मानेंगा, सर्व लोक इनोंके रागी हो जायेंगे, इसमें कोई उपाय करना चाहिये, ऐसा विचार के दुर्लभराजाके पास जायके चुगली किया कि दिल्ली से ग्रन्थ छोटक चोर आये हैं, सो आपके पुरोहितके इहां ठहरे हैं, तब राजा एसा बचन सुनके पुरोहितको बुलाकर पूछने लगा कि तेरे घर चौर आये सुना है, तब पुरोहित बोला कि, मेरे घर में चौरतो कोई नहीं आए है, परन्तु शुद्धक्रिया पात्र साधु आये हैं जो उनोंको चौर कहते होंगे सो आप चौर होंगे, तब राजाने शुद्धाचार देखने के लिये श्रीजिनेश्वरसूरीको अपने पास बुलाये और चैत्यवाससियोंको भी बुलाये, जब श्रीजिनेश्वर सूरि राजाकी सभा में आए तब राजानें नमस्कार करा, तब गुरु महाराजने धर्मलाभ आशीर्वाद देके अपने बैठने योग्य स्थानमें, कंबली विछाके इरियावही पडिक मके जमीनकी पडिलेहणा करके बैठें। तब राजाने विचारा कि शुद्ध आचार ऐसा ही होता है और चैत्यवासी जो आये सो राजाको आशीर वाद देके, इसी तरह विस्तरोंके ऊपर बैठ गये तब राजाने चैत्यवासियोंका विरुद्ध आचार देखके श्री जिनेस्वरसूरि महराजको साधुका आधार पूछा तब महाराज बोले आपका देवाधिष्टित ज्ञानका भण्डार है जिसमें सर्व मत स्वरूप निवेदक पुस्तक है उसमें से आपके पण्डितोंके पास एक या दो पुस्तक मंगवाइये तब राजाने भण्डारमेंसे पुस्तक मंगवाया सो पण्डितों के दशवै कालिक पुस्तक हाथ लगी । सो जब राजसभामें लेके आये । तबगुरू महाराजनें कहा, इस पुस्तककों चैत्यवासियोंके हाथमें देके आप साधुका आचार सुनों, तब चैत्यवासी पुस्तक बाचने लगे, सो जहां बहुत साधुका आचार आने लगा वहांके पाठ वे छोड़नें लगे, तब गुरुमहाराज बोले, कि राजसभा में दिन को चौरी होती है, तब राजाने पूछा किस तरेसें, गुरूनें कहा, कि यहां इणोंनें साधुके आधार के कई पन्ने छोड़ दिये हैं, तब राजा बोला कि आप वांचो । तब गुरूमहाराजनें कहा हमारे बांधनेंसे ये लोग फिर कल्पित बात कहेंगे, इससे आपके बड़े पण्डितोंके पास ये पुस्तक वंचावो, तब राजाने अपने पण्डितोंके पास उस पुस्तक मेंसे साधुका आचार सुना, तब उसी आचारमुजिब श्रीजिनेश्वर सूरिका सत्य आचार देखा, और चैत्यवासियोंका उस पुस्तकसे विरुद्ध आचार देखा, इससे सारी सभाके सामने राजाने कहा ॥ अतिशय पणें करके श्रीजिनेश्वरसूरि सच्चा हुवा, इससे ये खरतरा हे, और चैत्यवासी हारगया, इससेती ये कवला हे ॥ हारा सो कवला थया ॥ जीता खरतर जाणिया ।। तिणीकाल श्रीसंघ में । गच्छ दोघ वखाणिया ॥ एक ॥ इसी तरे सुविहित पक्षधारक श्री जिनेश्वर सूरि, वीर संवत् एक हज़ार पाँच सौ पचास । विक्रम संवत् एक हज़ार अस्सी में खरतर विरुदकों प्राप्त भए । तबसें कोटिक गच्छ, चन्द्रकुल, वयरी शाखा, खरतर विरुद, जैसा भेद स्थिवर साधु, नवीन साधुओंसे कहने लगे, इहांसे सूल कोटिक गच्छका नाम खरतर गच्छ प्रसिद्ध हुआ, अतिशयेन खरा सत्य प्रतिज्ञा ये ते खरतराः इत्यादि खरतर विरुदकों प्राप्त होनेवाले श्री जिनेश्वर सूरि बड़े प्रभावीक भए ॥ चालीस ॥" तेरह तेरहवां- और भी अन्यमतके न्यायवान् मध्यस्थ विद्वान्ने अङ्गरेजी भाषामें सभा में व्याख्यान करते समय अनेक शास्त्रानुसार जैनधर्म के प्राचीन इतिहास संबंधी बहुत खुलासा किया था उसमें खरतरगच्छ तथा तपगच्छकी पहावलियोंका कथन करने में तपगच्छकी पहावलीको पहिले कथन न करके खरतरगच्छकी पहावलीको पहिले कथन करी थी और इसके बाद तपगच्छकी पहावलीको कथन करी थी उसी खरतरगच्छकी पट्टावली में भी श्रीजिनेश्वरसूरिजी महाराजते 'खरतर' विरुदलिखा है उसका गुजराती भाषायें अनुवाद सन् एक हज़ार नौ सौ आठ जुलाई मासके "सनातन जैन " नामा मासिकपत्रके पृष्ट तीन सौ चौहत्तर से तीन सौ नवासी तक में प्रसिद्धहुआ था जिसका उत्तरानीचेमुजब है " डॉकूर जहाँन्नेस कलाह पीशून्य एचशून्य डीशून्य ए लखेलो अंगरेजी निबन्ध-डाकूर भाउदाजी रॉयल ऐसीमाटीक लोसाइटीनी मुंबई शाखा पासे निबंध वांच्यो हतो तेमां तेणे मेरुतुङ्गनी थेरावलि अने बीजां पुस्तकाने आधारे जैनोना प्राचीन इतिहास पर घणो प्रकाश पाडयों हतो । आ पृष्ठोमां जैनोना बे मुख्य गच्छ खरतर अने तप गच्छनी पहावलिओमांथी सौथी अगत्यनी तारीख - काल हुं आपीश, आ सर्व बाईस लिखीत मतोमांथी लीधुं छे। तेनांथी बीस प्रतो मुंबईथी, के. एम. चॅटफिल्ड संघईना केलवणी खाताना डायरेकटरनी सहायता थी मली छे तेथी तेनो उपकार मानु छु' अने बीजी बे प्रतो बर्लिनमांथी मेलवी छे खरतर गच्छनी पहावलि । महावीर - कुल इक्ष्वाकु, गोत्र काश्यप, पिता क्षत्रियकुण्ड ग्रामना राजा सिद्धार्थ, माता त्रिशला, जन्म चैत्र शुद्धि त्रयोदशीमां, निर्वाण चतुर्थ आराना अंत पहेलां तीन वर्ष अने आठ ।। महिनें पापाशहेरमाँ बहत्तर वर्षनी उमरे कार्तिक अमावास्याने दिने तेमने उन्नीस शिष्पो हता । तेना प्रथम शिष्य गौतम उर्फे इन्द्रभूति हता, तेमना गोत्रनु नाम गौतम, पितानु नाम ब्राह्मण वसुभूति; मातानु नाम ब्राह्मणी पृथ्वी हतां, जन्म मगधदेशना गोबर ग्राममां थयो. मिर्वाण वीरना निर्वाण पछी बारह वर्षे बयासीवर्षनी उमरे राजगृहीमां पाम्या, गौतमे दीक्षित करेला साधुओ पोतानी पहेलां गत थवाथी, अने बीजा नव गणधरो पोताना शिष्य साधुओ सुधर्माने सौंपी देवा थी, पांचमा गणधर सुधर्मानीपाट गणाई अने ते पाट पाँचमा आराना अंते थनार दुःप्रसहरि सुधी चालशे । वीर पछी चौदह वर्ष गयां पछी जमालि नामनो पहेलो निन्हव जाग्यो, अने सोलह वर्ष गयां पछी तिश्यगुप्त नामनो बीजो निन्हव थयो । fads एक दो सुधर्मा - जन्म कोलक ग्राममा, गोत्र अनि वैश्यायन, पिता घल्लि, माता सद्दिला; गृहस्थपणे पचास वर्ष, छद्मस्थ तरीके बयालीस वर्ष अने केवली तरीके आठ वर्षे रह्या, निर्वाण वीर पछी बीस वर्षे एक सौ वर्षनी वये पास्या । तीन जम्बू - जन्म राजगृहीमां, गोत्र काश्यप, पिता श्रेष्ठी ऋषभदत्त, साता धारिणी ; गृहस्थ तरीके सोलह वर्ष, छद्मस्थ तरीके बीस अने कवली तरीके चौंतालीस वर्ष रह्या, निर्वाण वीर पछी चौंसठ वर्षे अस्सी वर्षनी वये पास्या आ छेल्ला केवली हता । चार प्रभव - गोत्र कात्याघन, पिता जयपुरना राजा विद्य गृहस्थपणे तीस वर्ष, सामान्य व्रती तरीके चौंतालीस वर्ष अने आचार्य तरीके उन्नीस वर्ष रह्या सरण वीरना निर्वाण पछी पचहत्तर वर्षे, पचासी वर्षनी वये थयुं । पाँच सय्यम्भव-जन्म राजगृही, गोत्र वात्स्य ; तेमणे शांतिजिननी प्रतिमानां दर्शन करवायी जैन दीक्षा लीधी, पोताना पुत्र मनक वास्ते दशवैकालक सूत्र रच्यु, अट्ठाईस वर्ष गृहस्थाश्रममां, उन्नीस व्रती तरीके, अने तेईस वर्ष आचार्य तरीके गाल्या वीर पछी Mपाँच वर्षे, बासठ वर्षनी वये पंचत्व पाम्या । छः यशोभद्र - गोत्र तुंगोयायन, गृहस्थ पणे बाईस वर्ष, व्रती तरीके चौदह वर्ष, अने आचार्य तरीके पचास वर्ष रह्या. वीर पछी एक सौ अड़तालीस वर्षे छियासी वर्षनी वये मृत्यु पाम्या । सम्भूति विजय अने तेना लघु गुरु भ्राता भद्रबाहु । सात सम्भूति - विजय गोत्र - माढर, गृहस्थपणे बयालीस वर्ष, व्रती तरीके चालीस, युग प्रधान तरीके गाल्यां अने वीर पछी नौ सौ छप्पन वर्षे नब्बे वर्षनी उमरे गत थया । भद्रबाहु - गोत्र प्राचीन, तेमणे उपसर्गहरस्तोत्र, कल्पसूत्र, अने आवश्यक; दशवैकालिक वगैरे दस शास्त्रों पर निर्यक्तिओ
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दोहा -क्रिस्टीन कोलमैन ने दोहा में खेली जा रही वर्ल्ड चैंपियनशिप में 100 मीटर का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने ड्रग टेस्ट विवाद को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन करते हुए सोने का यह तमगा हासिल किया। इस विवाद के चलते उनका करियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था। 23 वर्षीय अमरीकी खिलाड़ी से इसी महीने तकनीकी आधार पर बैन हटाया गया था। उन्होंने फाइनल में 9. 76 सेकंड का समय निकाला। पिछली बार के विजेता जस्टिन गाल्टिन ने 9. 89 सेकंड का समय लिया और उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। कनाडा के आंद्रे डी ग्रीस 9. 90 सकंड का समय लिया और उन्हें ब्रांज मेडल मिला। कोलमैन का 100 मीटर की दौड़ में लिया गया समय इतिहास का छठा समय तेज समय है।
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दोहा -क्रिस्टीन कोलमैन ने दोहा में खेली जा रही वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक सौ मीटर का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने ड्रग टेस्ट विवाद को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन करते हुए सोने का यह तमगा हासिल किया। इस विवाद के चलते उनका करियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था। तेईस वर्षीय अमरीकी खिलाड़ी से इसी महीने तकनीकी आधार पर बैन हटाया गया था। उन्होंने फाइनल में नौ. छिहत्तर सेकंड का समय निकाला। पिछली बार के विजेता जस्टिन गाल्टिन ने नौ. नवासी सेकंड का समय लिया और उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। कनाडा के आंद्रे डी ग्रीस नौ. नब्बे सकंड का समय लिया और उन्हें ब्रांज मेडल मिला। कोलमैन का एक सौ मीटर की दौड़ में लिया गया समय इतिहास का छठा समय तेज समय है।
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OnePlus Nord की मार्केट में एंट्री हो चुकी है। लेकिन ग्राहकों को लुभाना वनप्लस नॉर्ड के लिए आसान नहीं होने वाला, क्योंकि Realme X3 SuperZoom से मजबूत चुनौती मिलने वाली है। फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, परफॉर्मेंस, गेमिंग और कैमरे के मामले में OnePlus Nord व Realme X3 SuperZoom के बीच कौन बेहतर है? सवाल का जवाब मिलेगा इस वीडियो में।
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OnePlus Nord की मार्केट में एंट्री हो चुकी है। लेकिन ग्राहकों को लुभाना वनप्लस नॉर्ड के लिए आसान नहीं होने वाला, क्योंकि Realme Xतीन SuperZoom से मजबूत चुनौती मिलने वाली है। फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, परफॉर्मेंस, गेमिंग और कैमरे के मामले में OnePlus Nord व Realme Xतीन SuperZoom के बीच कौन बेहतर है? सवाल का जवाब मिलेगा इस वीडियो में।
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प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान में रोजगार पाने वाले लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्य कोरोना वायरस से लड़ाई में जूझ रहे हैं, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने विकास राज्य के लिए इतनी बड़ी योजना शुरू कर दी है। मेरा तो मानना है कि एक प्रकार से आपदा से बने हर अवसर को उत्तर प्रदेश साकार कर रहा है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान ने आज आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार कार्यक्रम को प्रेरण दी है। यानी केंद्र सरकार की योजना को योगी की सरकार ने गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों ही तरीकों से विस्तार दे दिया है। उन्होंने रोजगार पाने वालों से कहा कि एक बार फिर आप सभी को, रोजगार के इन तमाम अवसरों के लिए बहुत-बहुत बधाई। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत पहुंची वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जो काम किया है।
वह बेहद प्रशंसनीय है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने यूरोप, फ्रांस, इटली व स्पेन जैसे विकसित देश को इस महामारी से अपने लोगों को बचाने के उपाय तथा निराकरण में काफी पीछे छोड़ दिया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने आपदा को अवसर में भी बदलने का मौका नहीं छोड़ा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने संकट के हर मोड़ पर दृढ़ता से मुकाबला किया।
मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयास और उपलब्धियां इस संकट में इसलिए विराट हैं, क्योंकि ये सिर्फ एक राज्य भर नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश दुनिया के कई देशों से बड़ा राज्य है। इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश के लोग खुद महसूस कर रहे हैं, लेकिन आप अगर आंकड़े जानेंगे तो और भी हैरान हो जायेंगे। चाहे यूपी के डॉक्टर हों, पैरामेडिकल स्टाफ हो, सफाई कर्मचारी हों, पुलिसकर्मी हों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हो, बैंक और पोस्टऑफिस के साथी हों, परिवहन विभाग के साथी हों, श्रमिक साथी हों, हर किसी ने पूरी निष्ठा के साथ अपना योगदान दिया है.
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प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान में रोजगार पाने वाले लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्य कोरोना वायरस से लड़ाई में जूझ रहे हैं, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने विकास राज्य के लिए इतनी बड़ी योजना शुरू कर दी है। मेरा तो मानना है कि एक प्रकार से आपदा से बने हर अवसर को उत्तर प्रदेश साकार कर रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान ने आज आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार कार्यक्रम को प्रेरण दी है। यानी केंद्र सरकार की योजना को योगी की सरकार ने गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों ही तरीकों से विस्तार दे दिया है। उन्होंने रोजगार पाने वालों से कहा कि एक बार फिर आप सभी को, रोजगार के इन तमाम अवसरों के लिए बहुत-बहुत बधाई। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत पहुंची वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जो काम किया है। वह बेहद प्रशंसनीय है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने यूरोप, फ्रांस, इटली व स्पेन जैसे विकसित देश को इस महामारी से अपने लोगों को बचाने के उपाय तथा निराकरण में काफी पीछे छोड़ दिया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने आपदा को अवसर में भी बदलने का मौका नहीं छोड़ा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने संकट के हर मोड़ पर दृढ़ता से मुकाबला किया। मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयास और उपलब्धियां इस संकट में इसलिए विराट हैं, क्योंकि ये सिर्फ एक राज्य भर नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश दुनिया के कई देशों से बड़ा राज्य है। इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश के लोग खुद महसूस कर रहे हैं, लेकिन आप अगर आंकड़े जानेंगे तो और भी हैरान हो जायेंगे। चाहे यूपी के डॉक्टर हों, पैरामेडिकल स्टाफ हो, सफाई कर्मचारी हों, पुलिसकर्मी हों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हो, बैंक और पोस्टऑफिस के साथी हों, परिवहन विभाग के साथी हों, श्रमिक साथी हों, हर किसी ने पूरी निष्ठा के साथ अपना योगदान दिया है.
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New Delhi : केंद्र सरकार ने बुधवार को डीजल के निर्यात पर शुल्क में कटौती का एलान किया जबकि घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा दिया. आज यानी 17 नवंबर से से नई दरें लागू होंगी. सरकारी स्वामित्व वाली तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसी फर्मों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर 17 नवंबर से 9,500 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 10,200 रुपये प्रति टन कर दिया गया है. एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है.
अप्रत्याशित लाभ कर की हर 15 दिन में की जाने वाली समीक्षा में सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10. 5 रुपये प्रति लीटर कर दिया. डीजल पर लगने वाले शुल्क में 1. 50 रुपये प्रति लीटर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है. जेट ईंधन या एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क, जो एक नवंबर को पिछली समीक्षा में पांच रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.
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New Delhi : केंद्र सरकार ने बुधवार को डीजल के निर्यात पर शुल्क में कटौती का एलान किया जबकि घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा दिया. आज यानी सत्रह नवंबर से से नई दरें लागू होंगी. सरकारी स्वामित्व वाली तेल और प्राकृतिक गैस निगम जैसी फर्मों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर सत्रह नवंबर से नौ,पाँच सौ रुपयापये प्रति टन से बढ़ाकर दस,दो सौ रुपयापये प्रति टन कर दिया गया है. एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है. अप्रत्याशित लाभ कर की हर पंद्रह दिन में की जाने वाली समीक्षा में सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क को तेरह रुपयापये प्रति लीटर से घटाकर दस. पाँच रुपयापये प्रति लीटर कर दिया. डीजल पर लगने वाले शुल्क में एक. पचास रुपयापये प्रति लीटर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है. जेट ईंधन या एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्यात शुल्क, जो एक नवंबर को पिछली समीक्षा में पांच रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.
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अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने ट्वीट कर कहा की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जयपुर यह पता लगाएगा कि क्या पतंजलि आयुर्वेद की बनाई गई CORONIL दवा का क्लीनिकल टेस्ट किया गया है या नहीं?
रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali) का कोरोनोवायरस (Coronavirus) संक्रमण के लिए इलाज शुरू करने पर चल रहे विवाद के बीच, महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार ने भी राज्य में उनकी दवा की बिक्री पर रोक लगा दी है.
इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने पतंजलि की दिव्य फार्मेसी को नोटिस जारी किया है. ऑनलाइन मीडिया के मुताबिक एक आधिकारी ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि पतंजलि ने केवल बुखार और खांसी के खिलाफ इम्यूनिटी बूस्टर बनाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था.
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अनिल देशमुख ने ट्वीट कर कहा की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जयपुर यह पता लगाएगा कि क्या पतंजलि आयुर्वेद की बनाई गई CORONIL दवा का क्लीनिकल टेस्ट किया गया है या नहीं? रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद का कोरोनोवायरस संक्रमण के लिए इलाज शुरू करने पर चल रहे विवाद के बीच, महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य में उनकी दवा की बिक्री पर रोक लगा दी है. इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने पतंजलि की दिव्य फार्मेसी को नोटिस जारी किया है. ऑनलाइन मीडिया के मुताबिक एक आधिकारी ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि पतंजलि ने केवल बुखार और खांसी के खिलाफ इम्यूनिटी बूस्टर बनाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था.
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कोलकाताः कोलकाता के भीड़भाड़ वाले बागड़ी मार्किट में रविवार को तड़के करीब 1000 दुकानों वाली एक बहुमंजिला इमारत में भयंकर आग गई। दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन नौ घंटे बाद भी आग बाजार में तेजी से फैल रही है। यह बाजार भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालय और राइटर्स बिल्डिंग से महज एक किलोमीटर दूर है। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 30 गाड़ियों को लगाया गया है। इमारत में मुख्यतः कॉस्मेटिक्स और खिलौने की दुकानें हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "भीड़भाड़ वाला इलाका होने के कारण हमें काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम इमारत में घुसने के लिए दरवाजों और छोटी खिड़कियों की ग्रिल काट रहे हैं और इसके लिए हाइड्रॉलिक सीढ़ी और गैस कटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। " उन्होंने बताया कि कैनिंग स्ट्रीट पर इमारत के भूतल में आग लगी और अन्य मंजिलों तक तेजी से फैल गई। उन्होंने कहा, "नौ घंटे बाद भी आग बुझाना मुश्किल हो रहा है। आग लगने के कारण का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक की एक टीम घटनास्थल का मुआयना करेगी। इमारत में भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तेजी से फैली। " (गठबंधन को लेकर मायावती का बड़ा बयान, बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन के पक्ष में हूं )
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कोलकाताः कोलकाता के भीड़भाड़ वाले बागड़ी मार्किट में रविवार को तड़के करीब एक हज़ार दुकानों वाली एक बहुमंजिला इमारत में भयंकर आग गई। दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन नौ घंटे बाद भी आग बाजार में तेजी से फैल रही है। यह बाजार भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालय और राइटर्स बिल्डिंग से महज एक किलोमीटर दूर है। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की तीस गाड़ियों को लगाया गया है। इमारत में मुख्यतः कॉस्मेटिक्स और खिलौने की दुकानें हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "भीड़भाड़ वाला इलाका होने के कारण हमें काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम इमारत में घुसने के लिए दरवाजों और छोटी खिड़कियों की ग्रिल काट रहे हैं और इसके लिए हाइड्रॉलिक सीढ़ी और गैस कटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। " उन्होंने बताया कि कैनिंग स्ट्रीट पर इमारत के भूतल में आग लगी और अन्य मंजिलों तक तेजी से फैल गई। उन्होंने कहा, "नौ घंटे बाद भी आग बुझाना मुश्किल हो रहा है। आग लगने के कारण का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक की एक टीम घटनास्थल का मुआयना करेगी। इमारत में भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तेजी से फैली। "
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गाजियाबाद. अगर आप पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अप्लाई करते समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है. कई बार अप्लाई के समय की गई गलती की वजह से आवेदन पेंडिंग में डाल दिया जाता है और आवेदक पासपोर्ट का इंतजार करता रहता है. बाद में उसे पासपोर्ट आफिस के चक्कर लगाने पड़ जाते हैं. पासपोर्ट अधिकारी बता रहे हैं कि अप्लाई करते समय किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए.
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी सुब्रतो हाजरा बताते हैं कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करे समय पते को लेकर दो विकल्प दिए होते हैं, पहला स्थाई और दूसरा वर्तमान. कई बार शहरों में नौकरी करने वाले लोग दोनों में स्थाई पता भर देते हैं. मसलन कोई वर्तमान में नोएडा में किराए में रहता है लेकिन वर्तमान पता अपने गांवों का देता है. पासपोर्ट वर्तमान पते पर ही बनता है.
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी बताते हैं कि कई लोग इस वजह से वर्तमान में स्थाई पता भरते हैं क्योंकि शहरों में किराए पर रहते हैं और उन्हें लगता है कि कहीं किराए के मकान में रहने की वजह से पासपोर्ट रिजेक्ट न हो जाए, इसलिए वर्तमान में स्थाई पता गांव का भर देते हैं. वो बताते हैं कि अगर आप किराए के मकान में भी रह रहे हैं तो भी पासपोर्ट बन सकता है. इसलिए वर्तमान पते पर ही पासपोर्ट के लिए आवेदन करना चाहिए.
वे बताते हैं कि स्थाई पता इसलिए लिया जाता है कि अगर कभी विदेश में कोई घटना हो जाए तो विदेश मंत्रालय स्थाई पते पर संपर्क कर सकता है. क्योंकि कई लोग वर्तमान पते पर अकेले ही रहते हैं. इसलिए स्थाई पता लिया जाता है. हालांकि कई लोगों के स्थाई और वर्तमान पता एक ही हो सकते हैं, उसमें कोई आपत्ति नहीं होती है.
पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद अप्वाइंटमेंट की डेट पर पासपोर्ट आफिस जाएं तो ओरिजनल पेपर साथ जरूर ले जाएं. कई बार आवेदक पेपर के नाम पर केवल आधार कार्ड लेकर आ जाते हैं. ऐसे आवेदकों को परेशान होना पड़ता है और दोबारा अप्वाइंटमेंट लेकर आना पड़ता है. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी लोगों से अपील करते हैं कि अप्वाइंटमेंट पर आने पर आवेदन में संलग्न पेपरों के अलावा अन्य ओरिजनल पेपर भी साथ लेकर आएं तो और बेहतर होगा. क्योंकि कई बार आवेदन में लगाए गए पेपरों का ओरिजनल से मिलान मुश्किल होता है, ऐसे में दूसरे ओरिजनल पेपर से मदद ली जा सकती है.
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गाजियाबाद. अगर आप पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अप्लाई करते समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है. कई बार अप्लाई के समय की गई गलती की वजह से आवेदन पेंडिंग में डाल दिया जाता है और आवेदक पासपोर्ट का इंतजार करता रहता है. बाद में उसे पासपोर्ट आफिस के चक्कर लगाने पड़ जाते हैं. पासपोर्ट अधिकारी बता रहे हैं कि अप्लाई करते समय किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी सुब्रतो हाजरा बताते हैं कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करे समय पते को लेकर दो विकल्प दिए होते हैं, पहला स्थाई और दूसरा वर्तमान. कई बार शहरों में नौकरी करने वाले लोग दोनों में स्थाई पता भर देते हैं. मसलन कोई वर्तमान में नोएडा में किराए में रहता है लेकिन वर्तमान पता अपने गांवों का देता है. पासपोर्ट वर्तमान पते पर ही बनता है. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी बताते हैं कि कई लोग इस वजह से वर्तमान में स्थाई पता भरते हैं क्योंकि शहरों में किराए पर रहते हैं और उन्हें लगता है कि कहीं किराए के मकान में रहने की वजह से पासपोर्ट रिजेक्ट न हो जाए, इसलिए वर्तमान में स्थाई पता गांव का भर देते हैं. वो बताते हैं कि अगर आप किराए के मकान में भी रह रहे हैं तो भी पासपोर्ट बन सकता है. इसलिए वर्तमान पते पर ही पासपोर्ट के लिए आवेदन करना चाहिए. वे बताते हैं कि स्थाई पता इसलिए लिया जाता है कि अगर कभी विदेश में कोई घटना हो जाए तो विदेश मंत्रालय स्थाई पते पर संपर्क कर सकता है. क्योंकि कई लोग वर्तमान पते पर अकेले ही रहते हैं. इसलिए स्थाई पता लिया जाता है. हालांकि कई लोगों के स्थाई और वर्तमान पता एक ही हो सकते हैं, उसमें कोई आपत्ति नहीं होती है. पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद अप्वाइंटमेंट की डेट पर पासपोर्ट आफिस जाएं तो ओरिजनल पेपर साथ जरूर ले जाएं. कई बार आवेदक पेपर के नाम पर केवल आधार कार्ड लेकर आ जाते हैं. ऐसे आवेदकों को परेशान होना पड़ता है और दोबारा अप्वाइंटमेंट लेकर आना पड़ता है. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी लोगों से अपील करते हैं कि अप्वाइंटमेंट पर आने पर आवेदन में संलग्न पेपरों के अलावा अन्य ओरिजनल पेपर भी साथ लेकर आएं तो और बेहतर होगा. क्योंकि कई बार आवेदन में लगाए गए पेपरों का ओरिजनल से मिलान मुश्किल होता है, ऐसे में दूसरे ओरिजनल पेपर से मदद ली जा सकती है. .
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जमियत उलमा ए हिन्द हर जिले में आयोजित करेगा सद्भावना संसद, 13 नवम्बर को दिल्ली में देशव्यापी जलसा। जमियत के पदाधिकारियों ने देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर जताई नाराजगी, कहा-काननू नाम की कोई चीज नजर नहीं आती।
मुजफ्फरनगर। जमियत उलमा ए हिन्द की मीटिंग में कौमी यकजहती (सामाजिक एकता) पर जोर देते हुए उलेमाओं ने कहा कि देश के साथ ही उत्तर प्रदेश और दूसरे प्रदेशों में जो भी सरकार चुनी गयी हैं, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता ने वोट देकर चुनी हैं। मुसलमान भी इस देश के नागरिक हैं तो ऐसे में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनी गयी सरकारों से डरने की जरूरत नहीं है। यूपी में मदरसों का सर्वे पूरा हो चुका है, कहीं कोई बड़ी चीज सामने नहीं आई है। मदरसों की जांच, नमाज पर पाबंदी, लाउड स्पीकर पर पाबंदी के इस दौर से निकलकर मुस्लिमों को तालीम की राह पकड़ने के बारे में सोचना होगा। मीटिंग में जमियत के द्वारा सामाजिक एकता के लिए चलाये जा रहे सद्भावना संसद कार्यक्रम को सफल बनाने और 13 नवम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान पर प्रस्तावित जलसे की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हुई।
जमियत उलमा ए हिन्द के द्वारा शनिवार को सवेरे शहर के मौहल्ला खालापार में स्थित मस्जिद उमर खां में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मीटिंग में मुख्य अतिथि जमियत उलमा ए हिन्द के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की तरक्की केवल तालीम के रास्ते पर चलने से ही है। आज देश में जो हालात बने हैं, हमें सभी को मिलकर समाज को तालीम के बारे में सोचना होगा। इसके लिए उलेमाओं, बु(िजीवियों और साधन सम्पन्न लोगों को मिलकर कदम बढ़ाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वे सभी अपने अपने स्तर से समाज को तालीम की राह पर लाने के लिए सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रचार प्रसार करें। उनको जागरुक करते हुए काबिल युवाओं को तकनीकी और उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करें। मौलाना हकीमुद्दीन ने कहा कि जब तक मुसलमान अपना शैक्षिक स्तर ऊंचा उठाने के बारे में नहीं सोचेगा, तब तक शिक्षा के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी मुस्लिमों को विकास के लिए तसरना होगा। उन्होंने बताया कि सामाजिक एकता के लिए जमियत सद्भावना संसद कार्यक्रम कर रही है। यह प्रतिमाह हो रहे हैं और प्रत्येक जनपद को इससे जोड़ना है। मुजफ्फरनगर में भी सद्भावना संसद के लिए कार्यक्रम की रूपरेखा आज बनाई गयी है। इसके साथ ही 13 नवम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित इजलास को सफल बनाने के लिए भी दौरा किया जा रहा है। आज की मीटिंग में इस एजेंडे पर भी चर्चा की गयी है।
मौलाना हकीमुद्दीन ने कहा कि केन्द्र और राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकारें तो ऐसे में मुस्लिमों को सरकार से डरने की कोई भी जरूरत वह नहीं समझते हैं। यूपी में मदरसों का सर्वे पूरा हो चुका है। मुस्लिम सरकार का हर आदेश पालन कर रहा है। वह देश के नागरिक हैं। अपनी सरकारों से डरकर काम नहीं चलेगा। आपसी मोहब्बत और प्यार से ही देश आगे बढ़ेगा। जमियत का इतिहास रहा है कि उसने हमेशा देश के हित में काम किया। आजादी की जंग में उलेमाओं ने अपनी जान की कुर्बानियां पेश की। उन्होंने कहा कि आज देश में मॉब लिंचिंग बड़ी समस्या बनी हुई है। गुजरात के खेडा का प्रकरण उठाते हुए उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए कोई कानूनी मदद, मानवाधिकार जैसी संस्था नहीं आई। देश में अपराधी के भी अधिकार हैं, लेकिन आज ऐसा लगता है कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ कोई कानून नहीं है और न ही कोई सजा है। कानून अपना काम करे, तो विश्वास कायम हो। मीटिंग में मुख्य रूप से जमियत के प्रदेश महासचिव मौलाना जाकिर कासमी, जिलाध्यक्ष मुफ्ति बिन यामीन सहित अन्य उलेमाओं ने भी अपने विचार पेश किये।
मीटिंग में मुख्य रूप से इस अवसर पर मुख्य रूप से मौलाना माज हसन, मौलाना आकिल, मौलाना इक़बाल, पूर्व विधायक मौलाना जमील अहमद सेक्रेटरी जमीअत उलमा पश्चिम उत्तर प्रदेश, मौलाना अरशद, मौलाना हामिद बागोंवाली, हाफिज गुलशेर, मुफ्ती इकबाल, डाक्टर जमालुद्दीन, हाफिज फुरकान असदी, कारी सादिक, कारी अब्दुल माजिद, हाफिज इकराम कारी आदिल, हाजी वसीम आलम, मौलाना गुलजार, मौलाना असजद, मुफ्ती अब्दुल समद, कारी नौशाद, मौलाना इसरार, मुफ्ती फाजिल, मौलाना कलीम, मौलाना हुसैन, कारी जाफर, मौलाना मूसा, मौलाना, मेहताब, मौलाना मुबश्शीर, हाजी शादाब, माशाल्ला एडवोकेट, हाजी गुलजार, मौलाना जाहिद आदि शामिल रहे।
जमीयत उल्मा ए हिन्द ज़िला मुजफ्फर नगर की एक अहम बैठक में जमीयत उल्मा ए हिन्द के द्वारा चलाए जा रहे सद्भावना संसद पर चर्चा हुई । मुख्य अतिथि ने कहा कि पूरे देश में जमीयत ने 1000 सद्भावना संसद करने का जो निश्चय किया है उसके तहत पूरे देश में सद्भावना के प्रोग्राम्स का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में 29 अक्टूबर को दिल्ली में सद्भावना सम्मेलन प्रस्तावित है जो देश की एकता और अखंडता को बाकी रखने के में अहम रोल अदा करेगा। देशवासियों में प्रेम और आपसी भाईचारा बनाए रखना ही हमारा संकल्प है।
जमीयत उल्मा उत्तर प्रदेश के सेक्रेट्री कारी ज़ाकिर हुसैन क़ासमी ने कहा कि नवंबर माह में जमीअत उलमा ए हिन्द का राष्ट्रीय महाअधिवेशन प्रस्तावित है जो दिल्ली में होगा। आज की मीटिंग में उसकी तैयारियों पर चर्चा करना भी अहम मुद्दा था। उन्होंने बताया कि जनपद मुजफ्फर नगर से राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए 200 बसे जाएंगी आज उसकी रूपरेखा बनाई गई है। कारी ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि नौजवानों को शिक्षा के स्तर को बढ़ाना होगा। दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम जरूरी है, साथ ही नौजवानो को नशे की लत से बचाना और समाज में मेहनत कर नशा मुक्त समाज बनाना, नौजवानो को रोजगार से जोड़ना वक्त की जरूरत है। जमीयत इस पर निरंतर कार्य कर रही है और उल्माओ को इस ओर ज़्यादा ध्यान देकर इस पर काम करने की जरूरत है।
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जमियत उलमा ए हिन्द हर जिले में आयोजित करेगा सद्भावना संसद, तेरह नवम्बर को दिल्ली में देशव्यापी जलसा। जमियत के पदाधिकारियों ने देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर जताई नाराजगी, कहा-काननू नाम की कोई चीज नजर नहीं आती। मुजफ्फरनगर। जमियत उलमा ए हिन्द की मीटिंग में कौमी यकजहती पर जोर देते हुए उलेमाओं ने कहा कि देश के साथ ही उत्तर प्रदेश और दूसरे प्रदेशों में जो भी सरकार चुनी गयी हैं, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता ने वोट देकर चुनी हैं। मुसलमान भी इस देश के नागरिक हैं तो ऐसे में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनी गयी सरकारों से डरने की जरूरत नहीं है। यूपी में मदरसों का सर्वे पूरा हो चुका है, कहीं कोई बड़ी चीज सामने नहीं आई है। मदरसों की जांच, नमाज पर पाबंदी, लाउड स्पीकर पर पाबंदी के इस दौर से निकलकर मुस्लिमों को तालीम की राह पकड़ने के बारे में सोचना होगा। मीटिंग में जमियत के द्वारा सामाजिक एकता के लिए चलाये जा रहे सद्भावना संसद कार्यक्रम को सफल बनाने और तेरह नवम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान पर प्रस्तावित जलसे की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हुई। जमियत उलमा ए हिन्द के द्वारा शनिवार को सवेरे शहर के मौहल्ला खालापार में स्थित मस्जिद उमर खां में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मीटिंग में मुख्य अतिथि जमियत उलमा ए हिन्द के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की तरक्की केवल तालीम के रास्ते पर चलने से ही है। आज देश में जो हालात बने हैं, हमें सभी को मिलकर समाज को तालीम के बारे में सोचना होगा। इसके लिए उलेमाओं, बु(िजीवियों और साधन सम्पन्न लोगों को मिलकर कदम बढ़ाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वे सभी अपने अपने स्तर से समाज को तालीम की राह पर लाने के लिए सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रचार प्रसार करें। उनको जागरुक करते हुए काबिल युवाओं को तकनीकी और उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करें। मौलाना हकीमुद्दीन ने कहा कि जब तक मुसलमान अपना शैक्षिक स्तर ऊंचा उठाने के बारे में नहीं सोचेगा, तब तक शिक्षा के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी मुस्लिमों को विकास के लिए तसरना होगा। उन्होंने बताया कि सामाजिक एकता के लिए जमियत सद्भावना संसद कार्यक्रम कर रही है। यह प्रतिमाह हो रहे हैं और प्रत्येक जनपद को इससे जोड़ना है। मुजफ्फरनगर में भी सद्भावना संसद के लिए कार्यक्रम की रूपरेखा आज बनाई गयी है। इसके साथ ही तेरह नवम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित इजलास को सफल बनाने के लिए भी दौरा किया जा रहा है। आज की मीटिंग में इस एजेंडे पर भी चर्चा की गयी है। मौलाना हकीमुद्दीन ने कहा कि केन्द्र और राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकारें तो ऐसे में मुस्लिमों को सरकार से डरने की कोई भी जरूरत वह नहीं समझते हैं। यूपी में मदरसों का सर्वे पूरा हो चुका है। मुस्लिम सरकार का हर आदेश पालन कर रहा है। वह देश के नागरिक हैं। अपनी सरकारों से डरकर काम नहीं चलेगा। आपसी मोहब्बत और प्यार से ही देश आगे बढ़ेगा। जमियत का इतिहास रहा है कि उसने हमेशा देश के हित में काम किया। आजादी की जंग में उलेमाओं ने अपनी जान की कुर्बानियां पेश की। उन्होंने कहा कि आज देश में मॉब लिंचिंग बड़ी समस्या बनी हुई है। गुजरात के खेडा का प्रकरण उठाते हुए उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए कोई कानूनी मदद, मानवाधिकार जैसी संस्था नहीं आई। देश में अपराधी के भी अधिकार हैं, लेकिन आज ऐसा लगता है कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ कोई कानून नहीं है और न ही कोई सजा है। कानून अपना काम करे, तो विश्वास कायम हो। मीटिंग में मुख्य रूप से जमियत के प्रदेश महासचिव मौलाना जाकिर कासमी, जिलाध्यक्ष मुफ्ति बिन यामीन सहित अन्य उलेमाओं ने भी अपने विचार पेश किये। मीटिंग में मुख्य रूप से इस अवसर पर मुख्य रूप से मौलाना माज हसन, मौलाना आकिल, मौलाना इक़बाल, पूर्व विधायक मौलाना जमील अहमद सेक्रेटरी जमीअत उलमा पश्चिम उत्तर प्रदेश, मौलाना अरशद, मौलाना हामिद बागोंवाली, हाफिज गुलशेर, मुफ्ती इकबाल, डाक्टर जमालुद्दीन, हाफिज फुरकान असदी, कारी सादिक, कारी अब्दुल माजिद, हाफिज इकराम कारी आदिल, हाजी वसीम आलम, मौलाना गुलजार, मौलाना असजद, मुफ्ती अब्दुल समद, कारी नौशाद, मौलाना इसरार, मुफ्ती फाजिल, मौलाना कलीम, मौलाना हुसैन, कारी जाफर, मौलाना मूसा, मौलाना, मेहताब, मौलाना मुबश्शीर, हाजी शादाब, माशाल्ला एडवोकेट, हाजी गुलजार, मौलाना जाहिद आदि शामिल रहे। जमीयत उल्मा ए हिन्द ज़िला मुजफ्फर नगर की एक अहम बैठक में जमीयत उल्मा ए हिन्द के द्वारा चलाए जा रहे सद्भावना संसद पर चर्चा हुई । मुख्य अतिथि ने कहा कि पूरे देश में जमीयत ने एक हज़ार सद्भावना संसद करने का जो निश्चय किया है उसके तहत पूरे देश में सद्भावना के प्रोग्राम्स का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में उनतीस अक्टूबर को दिल्ली में सद्भावना सम्मेलन प्रस्तावित है जो देश की एकता और अखंडता को बाकी रखने के में अहम रोल अदा करेगा। देशवासियों में प्रेम और आपसी भाईचारा बनाए रखना ही हमारा संकल्प है। जमीयत उल्मा उत्तर प्रदेश के सेक्रेट्री कारी ज़ाकिर हुसैन क़ासमी ने कहा कि नवंबर माह में जमीअत उलमा ए हिन्द का राष्ट्रीय महाअधिवेशन प्रस्तावित है जो दिल्ली में होगा। आज की मीटिंग में उसकी तैयारियों पर चर्चा करना भी अहम मुद्दा था। उन्होंने बताया कि जनपद मुजफ्फर नगर से राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए दो सौ बसे जाएंगी आज उसकी रूपरेखा बनाई गई है। कारी ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि नौजवानों को शिक्षा के स्तर को बढ़ाना होगा। दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम जरूरी है, साथ ही नौजवानो को नशे की लत से बचाना और समाज में मेहनत कर नशा मुक्त समाज बनाना, नौजवानो को रोजगार से जोड़ना वक्त की जरूरत है। जमीयत इस पर निरंतर कार्य कर रही है और उल्माओ को इस ओर ज़्यादा ध्यान देकर इस पर काम करने की जरूरत है।
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दिवाली पूजा के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाते हैं।
दिवाली पूजा के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाते हैं। दिवाली फेस्टिवल का जश्न छोटी दिवाली से शुरू होकर भैया दूज पर खत्म होता है। हालांकि, दिवाली दो ही दिन की होती है लेकिन दिवाली के बाद भी भैया दूज तक जश्न का माहौल बना रहता है। दिवाली पूजन के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानें क्या हैं वो बातें।
मान्यता है कि भगवान गणेश को भोजन अति प्रिय है और ख़ास तौर पर मीठी चीज़ें ,इसलिए दिवाली वाले दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए। साथ ही गणेश जी को पीले वस्त्र चढ़ाने चाहिए।
अगर आप इस दिवाली मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहती हैं तो आपको उन्हें लाल वस्त्र चढ़ाने चाहिए। अमित पंडित का कहना है कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें कमल के गट्टे की माला और कमल का फूल जरूर चढ़ाना चाहिए। मां लक्ष्मी को दिवाली वाले दिन खीर का भोग लगाना चाहिए।
दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूब, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का और सबसे महत्त्वपूर्ण होता है कमल का फूल ।
अमित पंडित ने बताया कि दिवाली वाले दिन घरों में देसी घी के दिये जलाने चाहिए। अगर देसी घी नहीं है तो आप सरसो के तेल के दीये भी जला सकती हैं। सबसे शुभ दीये जलाना देसी घी और तिल के तेल में उपयोगी माना जाता है। दिवाली वाले दिन घर के हर हिस्से में दीये जलाने चाहिए। जैसे एक दीया मंदिर में, एक तुलसी के पौधे के पास, घर के सभी कमरों में देसी घी या तिल के तेल के दीये जलाने चाहिए। घर के वॉशरूम और घर में कहीं पर भी बनी नाली के पास सरसो के तेल का दीया जलाना चाहिए।
दिवाली वाले दिन शादीशुदा एक महिला को अपने पति के दाहिनी ओर बैठकरभगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
घर की महिला को दिवाली पूजा करने से पहले 16 श्रृंगार करने चाहिए। इस बारे में अमित पंडित का कहना है कि दिवाली वाले दिन हम मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं इसलिए बहुत जरूरी है कि घर की महिलाएं भी अच्छे से तैयार होकर अपने पति के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करें।
दिवाली वाले दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए उन्हें 21 हरि घास (दुर्वा घास) जरूर चढ़ानी चाहिए। साथ ही धनिया और गुड़ भी चढ़ाना चाहिए।
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दिवाली पूजा के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाते हैं। दिवाली पूजा के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाते हैं। दिवाली फेस्टिवल का जश्न छोटी दिवाली से शुरू होकर भैया दूज पर खत्म होता है। हालांकि, दिवाली दो ही दिन की होती है लेकिन दिवाली के बाद भी भैया दूज तक जश्न का माहौल बना रहता है। दिवाली पूजन के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानें क्या हैं वो बातें। मान्यता है कि भगवान गणेश को भोजन अति प्रिय है और ख़ास तौर पर मीठी चीज़ें ,इसलिए दिवाली वाले दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए। साथ ही गणेश जी को पीले वस्त्र चढ़ाने चाहिए। अगर आप इस दिवाली मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहती हैं तो आपको उन्हें लाल वस्त्र चढ़ाने चाहिए। अमित पंडित का कहना है कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें कमल के गट्टे की माला और कमल का फूल जरूर चढ़ाना चाहिए। मां लक्ष्मी को दिवाली वाले दिन खीर का भोग लगाना चाहिए। दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूब, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का और सबसे महत्त्वपूर्ण होता है कमल का फूल । अमित पंडित ने बताया कि दिवाली वाले दिन घरों में देसी घी के दिये जलाने चाहिए। अगर देसी घी नहीं है तो आप सरसो के तेल के दीये भी जला सकती हैं। सबसे शुभ दीये जलाना देसी घी और तिल के तेल में उपयोगी माना जाता है। दिवाली वाले दिन घर के हर हिस्से में दीये जलाने चाहिए। जैसे एक दीया मंदिर में, एक तुलसी के पौधे के पास, घर के सभी कमरों में देसी घी या तिल के तेल के दीये जलाने चाहिए। घर के वॉशरूम और घर में कहीं पर भी बनी नाली के पास सरसो के तेल का दीया जलाना चाहिए। दिवाली वाले दिन शादीशुदा एक महिला को अपने पति के दाहिनी ओर बैठकरभगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। घर की महिला को दिवाली पूजा करने से पहले सोलह श्रृंगार करने चाहिए। इस बारे में अमित पंडित का कहना है कि दिवाली वाले दिन हम मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं इसलिए बहुत जरूरी है कि घर की महिलाएं भी अच्छे से तैयार होकर अपने पति के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करें। दिवाली वाले दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए उन्हें इक्कीस हरि घास जरूर चढ़ानी चाहिए। साथ ही धनिया और गुड़ भी चढ़ाना चाहिए। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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MNNIT Recruitment 2022: मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT), इलाहाबाद ने असिस्टेंट प्रोफेसर (ग्रेड- II) के पदों (MNNIT Recruitment 2022) को भरने के लिए आवेदन मांगे हैं. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार जो इन पदों (MNNIT Recruitment 2022) के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे MNNIT की आधिकारिक वेबसाइट mnnit. ac. in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं. इन पदों (MNNIT Recruitment 2022) के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है.
इसके अलावा उम्मीदवार सीधे इस लिंक http://www. mnnit. ac. in/index. php/jobs पर क्लिक करके भी इन पदों (MNNIT Recruitment 2022) के लिए आवेदन कर सकते हैं. साथ ही इस लिंक http://www. mnnit. ac. in/images/newstories/2022/jobs/nt/02-_Advertisement के जरिए भी आधिकारिक नोटिफिकेशन (MNNIT Recruitment 2022) को भी देख सकते हैं. इस भर्ती (MNNIT Recruitment 2022) प्रक्रिया के तहत कुल 145 पदों को भरा जाएगा.
उम्मीदवारों के पास आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए संबंधित योग्यता होनी चाहिए.
उम्मीदवारों की आयुसीमा 60 वर्ष होनी चाहिए.
उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के तौर पर 1000 रुपये का भुगतान करना होगा.
उम्मीदवारों को विधिवत स्व-सत्यापित सहायक दस्तावेजों के साथ विधिवत रूप से भरे हुए आवेदन फॉर्म को 07 जुलाई पर या उससे पहले दिए गए पते पर भेजना होगा.
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MNNIT Recruitment दो हज़ार बाईस: मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान , इलाहाबाद ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे हैं. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार जो इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे MNNIT की आधिकारिक वेबसाइट mnnit. ac. in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं. इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके अलावा उम्मीदवार सीधे इस लिंक http://www. mnnit. ac. in/index. php/jobs पर क्लिक करके भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. साथ ही इस लिंक http://www. mnnit. ac. in/images/newstories/दो हज़ार बाईस/jobs/nt/दो-_Advertisement के जरिए भी आधिकारिक नोटिफिकेशन को भी देख सकते हैं. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल एक सौ पैंतालीस पदों को भरा जाएगा. उम्मीदवारों के पास आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए संबंधित योग्यता होनी चाहिए. उम्मीदवारों की आयुसीमा साठ वर्ष होनी चाहिए. उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के तौर पर एक हज़ार रुपयापये का भुगतान करना होगा. उम्मीदवारों को विधिवत स्व-सत्यापित सहायक दस्तावेजों के साथ विधिवत रूप से भरे हुए आवेदन फॉर्म को सात जुलाई पर या उससे पहले दिए गए पते पर भेजना होगा. .
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क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल (सीएएन) की पुरुष व महिला टीमों के बीच जल्द ही एक क्रिकेट श्रृंखला खेली जाएगी। इस श्रृंखला से भारत-नेपाल व दोनों क्रिकेट संघों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे।
जागरण संवाददाता, देहरादून। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल (सीएएन) की पुरुष व महिला टीमों के बीच जल्द ही क्रिकेट श्रृंखला खेली जाएगी। इस श्रृंखला से भारत-नेपाल व दोनों क्रिकेट संघों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष चतुर बहादुर चंद ने सोमवार को देहरादून स्थित एक होटल में सीएयू के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव व पूर्व बीसीसीआइ उपाध्यक्ष महिम वर्मा से मुलाकात की। जिसमें उन्होंने नेपाल में क्रिकेट को बढ़ावा देने व भारत की तरह नेपाल में भी क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने को लेकर चर्चा की। साथ ही नेपाल में क्रिकेटरों की पौध तैयार करने को लेकर सुझाव लिए।
इसके अलावा सीएएन के अध्यक्ष चतुर बहादुर चंद ने सीएयू की पुरुष व महिला टीम के साथ क्रिकेट श्रृंखला खेलने के लिए प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही क्रिकेट श्रृंखला का प्लान तैयार कर सीएयू को भेजेंगे। सीएयू से स्वीकृति मिलने के बाद क्रिकेट श्रृंखला आयोजित की जाएगी। सीएएन की ओर से क्रिकेट श्रृंखला के प्रस्ताव पर सीएयू अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला ने खुशी जाहिर करते हुए सीएएन की हर संभव मदद करने का भरोसा दिया।
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क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल की पुरुष व महिला टीमों के बीच जल्द ही एक क्रिकेट श्रृंखला खेली जाएगी। इस श्रृंखला से भारत-नेपाल व दोनों क्रिकेट संघों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे। जागरण संवाददाता, देहरादून। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल की पुरुष व महिला टीमों के बीच जल्द ही क्रिकेट श्रृंखला खेली जाएगी। इस श्रृंखला से भारत-नेपाल व दोनों क्रिकेट संघों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष चतुर बहादुर चंद ने सोमवार को देहरादून स्थित एक होटल में सीएयू के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव व पूर्व बीसीसीआइ उपाध्यक्ष महिम वर्मा से मुलाकात की। जिसमें उन्होंने नेपाल में क्रिकेट को बढ़ावा देने व भारत की तरह नेपाल में भी क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने को लेकर चर्चा की। साथ ही नेपाल में क्रिकेटरों की पौध तैयार करने को लेकर सुझाव लिए। इसके अलावा सीएएन के अध्यक्ष चतुर बहादुर चंद ने सीएयू की पुरुष व महिला टीम के साथ क्रिकेट श्रृंखला खेलने के लिए प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही क्रिकेट श्रृंखला का प्लान तैयार कर सीएयू को भेजेंगे। सीएयू से स्वीकृति मिलने के बाद क्रिकेट श्रृंखला आयोजित की जाएगी। सीएएन की ओर से क्रिकेट श्रृंखला के प्रस्ताव पर सीएयू अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला ने खुशी जाहिर करते हुए सीएएन की हर संभव मदद करने का भरोसा दिया।
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खुद से खुदी तक और खुदी से खुदा तक. . . । मौसिकी की रंग-ओ-खुशबूओं में भीगा यह पैगाम जब झील किनारे, खुले आसमान तक लहराया तो अमन-चैन की बयार बही। वासंती महक और सुरों की चहक भरा यह सुहाना मंजर रचने हंसराज हंस भारत भवन के मुक्ताकाश मंच पर आए। पुरकशिश आवाज और संगीत का लय-ताल भरा यह ताना-बाना सूफियाना धुनों के पंख लगाकर जैसे अनंत सैर की सैर करता रहा।
राखो मोरी लाज हरी. . . . जैसे आमफहम नगमे से शुरू हुआ सिलसिला खुसरो के छाप तिलक सब छीनी. . . तक परवान चढ़ा। यूं करीब एक बरस बाद सात सुरों ने मिलकर भारत भवन का सांस्कृतिक सन्नाटा तोड़ा। कला प्रेमियों की उमड़ती भीड़ इस बात का गवाह बनी कि भोपाल यकीनन कला के कद्रदानों का शहर है।
शनिवार रात 9 बजे हंसराज हंस ने भारत भवन के बहिरंग पर आमद दी। उन्होंने मंच थामते ही श्रोताओं से कहा कि हाजिरे महफिल आप सबको नमस्कार, आदाब सतश्रीअकाल। हैप्पी बर्थडे, हैप्पी वैलेंटाइन डे. . . । उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, कोरोना के दौरान जब भी गाने की कोशिश करता, तो सिर्फ क-रोना साहब याद आता है। कहता था करोना। अब डेढ़ साल बाद भोपाल ने कहा कि करोना। भगवान की मर्जी है कि दोबारा बहाल हुई है जिंदगी। मैं यही दुआ करता हूं, खुदा से कि खुशनुमा जिंदगी बिताकर इस जहाने फानी से कूच करें।
उन्होंने कहा कि कोई नहीं जानता कि मेरे लंबे बाल इयरफोन छिपाते हैं, यहां तक कि राजनीतिक सभाओं के दौरान भी मैं राग दरबारी सुन रहा होता हूं।
हंसराज ने जैसे ही 'राखो मौरी लाज गरीब नवाज" पेश किया तो सभागार गुलजार हो उठा। उसके बाद एक के बाद एक सूफी गीतों की प्रस्तुति के साथ ही भोपाल पर जबरदस्त सूफियाना रंगत चढ़ने लगी। हंसराज के सुरों का जादू ऐसा चला कि श्रोता खुद को रोक नहीं पाए और उनके सुरों के साथ गुनगुनाने लगे। उर्दू अदब के साथ पंजाबी तड़के की संगत आई, तो सुनने वालों का दिल मस्त कलंदर हो गया। हंसराज हंस के गानों की प्रस्तुतियों ने इस शाम को यादगार बना दिया। श्रोता लगाकर डांस भी करते रहे। यह सिलसिला देर रात 11:30 तक चला। दमा दम मस्त कलंदर से हंसराज हंस ने अपनी गायिकी को परवान तक पहुंचाया। कार्यक्रम का संचालन कला समीक्षक और सुप्रसिद्ध उद्घोषक विनय उपाध्याय ने अपने खास अंदाज में किया। भारत भवन की कला यात्रा का भी परिचय दिया।
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खुद से खुदी तक और खुदी से खुदा तक. . . । मौसिकी की रंग-ओ-खुशबूओं में भीगा यह पैगाम जब झील किनारे, खुले आसमान तक लहराया तो अमन-चैन की बयार बही। वासंती महक और सुरों की चहक भरा यह सुहाना मंजर रचने हंसराज हंस भारत भवन के मुक्ताकाश मंच पर आए। पुरकशिश आवाज और संगीत का लय-ताल भरा यह ताना-बाना सूफियाना धुनों के पंख लगाकर जैसे अनंत सैर की सैर करता रहा। राखो मोरी लाज हरी. . . . जैसे आमफहम नगमे से शुरू हुआ सिलसिला खुसरो के छाप तिलक सब छीनी. . . तक परवान चढ़ा। यूं करीब एक बरस बाद सात सुरों ने मिलकर भारत भवन का सांस्कृतिक सन्नाटा तोड़ा। कला प्रेमियों की उमड़ती भीड़ इस बात का गवाह बनी कि भोपाल यकीनन कला के कद्रदानों का शहर है। शनिवार रात नौ बजे हंसराज हंस ने भारत भवन के बहिरंग पर आमद दी। उन्होंने मंच थामते ही श्रोताओं से कहा कि हाजिरे महफिल आप सबको नमस्कार, आदाब सतश्रीअकाल। हैप्पी बर्थडे, हैप्पी वैलेंटाइन डे. . . । उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, कोरोना के दौरान जब भी गाने की कोशिश करता, तो सिर्फ क-रोना साहब याद आता है। कहता था करोना। अब डेढ़ साल बाद भोपाल ने कहा कि करोना। भगवान की मर्जी है कि दोबारा बहाल हुई है जिंदगी। मैं यही दुआ करता हूं, खुदा से कि खुशनुमा जिंदगी बिताकर इस जहाने फानी से कूच करें। उन्होंने कहा कि कोई नहीं जानता कि मेरे लंबे बाल इयरफोन छिपाते हैं, यहां तक कि राजनीतिक सभाओं के दौरान भी मैं राग दरबारी सुन रहा होता हूं। हंसराज ने जैसे ही 'राखो मौरी लाज गरीब नवाज" पेश किया तो सभागार गुलजार हो उठा। उसके बाद एक के बाद एक सूफी गीतों की प्रस्तुति के साथ ही भोपाल पर जबरदस्त सूफियाना रंगत चढ़ने लगी। हंसराज के सुरों का जादू ऐसा चला कि श्रोता खुद को रोक नहीं पाए और उनके सुरों के साथ गुनगुनाने लगे। उर्दू अदब के साथ पंजाबी तड़के की संगत आई, तो सुनने वालों का दिल मस्त कलंदर हो गया। हंसराज हंस के गानों की प्रस्तुतियों ने इस शाम को यादगार बना दिया। श्रोता लगाकर डांस भी करते रहे। यह सिलसिला देर रात ग्यारह:तीस तक चला। दमा दम मस्त कलंदर से हंसराज हंस ने अपनी गायिकी को परवान तक पहुंचाया। कार्यक्रम का संचालन कला समीक्षक और सुप्रसिद्ध उद्घोषक विनय उपाध्याय ने अपने खास अंदाज में किया। भारत भवन की कला यात्रा का भी परिचय दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दुमका : उपराजधानी दुमका में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा निर्देश पर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अग्निवीर सेना भर्ती योजना एवं सामान्य जरूरत की चीजों पर लगाए गए जीएसटी के विरुद्ध जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा 5 अगस्त 22 को जोरदार प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा ।
दुमका जिला कांग्रेस कमेटी की बेठक बुधवार को संपन्न बैठक में प्रदर्शन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने एवं गिरफ्तारी देने हेतु आवश्यक विचार विमर्श किया गया । इस कार्यक्रम के तहत दुमका जिले के हंसडीहा चौक एवं दुमका जिले के विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे एवं कांग्रेसियों द्वारा गिरफ्तारी दी जाएगी ।
जिलाध्यक्ष श्यामल किशोर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा चलाये जा रहे अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा 135 किलोमीटर की पदयात्रा का कार्यक्रम निर्धारित किया गया ।
यह पदयात्रा दिनांक 09. 08. 2022 को कांग्रेश भवन से प्रारंभ होगी जो जिले के विभिन्न प्रखंडों से गुजरते हुए दिनांक 14. 08. 2022 को ऐतिहासिक सिद्धू कान्हू चौक प्रतिमा स्थल दुमका मैं आकर समाप्त होगी । समापन कार्यक्रम समारोह पूर्वक आयोजित किया जाएगा । पदयात्रा कार्यक्रम की सफलता के लिये जिला कांग्रेस के महासचिव महेश राम चंद्रवंशी के नेतृत्व में 11 सदस्य कमेटी का गठन किया गया है ।
जिसमें वरिष्ठ नेता प्रोफेसर मनोज अंबष्ट, अरबी खातुन,संजीत सिंह,अरविंद कुमार, शाहरुख शेख,महबूब आलम,स्टीफन मरांडी,युगल किशोर सिंह गणेश,रोमी इमाम,अलीमाम टिंकु को शामिल किया गया है । पदयात्रा कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी के द्वारा एक रथ भी निकाला जायेगा । रथ द्वारा वर्तमान केंद्र सरकार की नाकामियों एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों के बारे में जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जानकारी दी जाएगी ।
आज की बैठक में झारखंड प्रदेश कांग्रेश आदिवासी कांग्रेस के संयोजक डॉo सुशील मरांडी,महेश राम चंद्रवंशी,प्रोफेसर मनोज अम्बष्ट,अरबी खातुन,राजा मरांडी,स्टीफन मरांडी,अरबिन्द कुमार,ममता देवी,अलीमाम टिंकू,प्रेम शाह,शाहरुख शेख मौसम,श्याम सुंदर भगत,सुनील किसको,श्याम सुंदर मोदी,मोजीब अंसारी,सुबोध मंडल,महबूब आलम , मो खुर्शीद,अशोक यादव, ममता देवी,रोहित रंजन सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हुए ।
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दुमका : उपराजधानी दुमका में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा निर्देश पर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अग्निवीर सेना भर्ती योजना एवं सामान्य जरूरत की चीजों पर लगाए गए जीएसटी के विरुद्ध जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा पाँच अगस्त बाईस को जोरदार प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा । दुमका जिला कांग्रेस कमेटी की बेठक बुधवार को संपन्न बैठक में प्रदर्शन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने एवं गिरफ्तारी देने हेतु आवश्यक विचार विमर्श किया गया । इस कार्यक्रम के तहत दुमका जिले के हंसडीहा चौक एवं दुमका जिले के विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे एवं कांग्रेसियों द्वारा गिरफ्तारी दी जाएगी । जिलाध्यक्ष श्यामल किशोर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा चलाये जा रहे अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा एक सौ पैंतीस किलोग्राममीटर की पदयात्रा का कार्यक्रम निर्धारित किया गया । यह पदयात्रा दिनांक नौ. आठ. दो हज़ार बाईस को कांग्रेश भवन से प्रारंभ होगी जो जिले के विभिन्न प्रखंडों से गुजरते हुए दिनांक चौदह. आठ. दो हज़ार बाईस को ऐतिहासिक सिद्धू कान्हू चौक प्रतिमा स्थल दुमका मैं आकर समाप्त होगी । समापन कार्यक्रम समारोह पूर्वक आयोजित किया जाएगा । पदयात्रा कार्यक्रम की सफलता के लिये जिला कांग्रेस के महासचिव महेश राम चंद्रवंशी के नेतृत्व में ग्यारह सदस्य कमेटी का गठन किया गया है । जिसमें वरिष्ठ नेता प्रोफेसर मनोज अंबष्ट, अरबी खातुन,संजीत सिंह,अरविंद कुमार, शाहरुख शेख,महबूब आलम,स्टीफन मरांडी,युगल किशोर सिंह गणेश,रोमी इमाम,अलीमाम टिंकु को शामिल किया गया है । पदयात्रा कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी के द्वारा एक रथ भी निकाला जायेगा । रथ द्वारा वर्तमान केंद्र सरकार की नाकामियों एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों के बारे में जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जानकारी दी जाएगी । आज की बैठक में झारखंड प्रदेश कांग्रेश आदिवासी कांग्रेस के संयोजक डॉo सुशील मरांडी,महेश राम चंद्रवंशी,प्रोफेसर मनोज अम्बष्ट,अरबी खातुन,राजा मरांडी,स्टीफन मरांडी,अरबिन्द कुमार,ममता देवी,अलीमाम टिंकू,प्रेम शाह,शाहरुख शेख मौसम,श्याम सुंदर भगत,सुनील किसको,श्याम सुंदर मोदी,मोजीब अंसारी,सुबोध मंडल,महबूब आलम , मो खुर्शीद,अशोक यादव, ममता देवी,रोहित रंजन सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हुए ।
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अगर आप अपने लिए एक ऐसा साथी चाहती हैं, जिसके साथ आप जीवनभर खुश रहें तो अपने होने वाले पार्टनर में आपके होने वाले पार्टनर में ये खूबियां जरूर होनी चाहिए।
ऐसे पुरुष आपको अपनी पसंद के हिसाब से चलने के लिए दबाव नहीं डालते, बल्कि वे आपको आपके मूल व्यक्तित्व के साथ स्वीकार करते हैं। यानी आप जैसी हैं, वैसी ही उन्हें पसंद होती हैं। ऐसे पुरुष दूसरे व्यक्ति की कमिया गिनाने या उसे छोटा दिखाने में यकीन नहीं रखते। मुमकिन है कि वे ऐसी बातें कह दें, जो आपकी सोच से अलग हों, लेकिन वे कभी भी सीधे तौर पर किसी की आलोचना करके उनका अपमान नहीं करते। ऐसे पुरुषों के साथ महिलाएं सहज रहती हैं और उन पर खास तरह से पेश आने या व्यवहार करने का दबाव नहीं होता। यह चीज महिलाओं को खुशी देती है।
हर इंसान में अच्छी-बुरी कई तरह की क्वालिटी होती हैं और इन्हीं के आधार पर अकसर उन्हें कैरेक्टर सर्टिफिकेट दे दिया जाता है। अगर कोई लड़की बहुत पार्टी करती है, अकेले घूमने निकल जाती है, लड़कों के साथ सोशलाइज करती है, जो अक्सर लोग उसके बारे में एक खास किस्म की राय बना लेते हैं और यह राय आमतौर पर नेगेटिव होती है। संभ्रांत पुरुष ऐसा नहीं करते, वे कुछेक एक्टिविटी के आधार पर आपके बारे में राय नहीं बनाते, बल्कि वे लंबे दौर में आपके साथ वक्त गुजारते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि आप किन पक्षों में मजबूत हैं और किनमें आप सुधार कर सकती हैं। ऐसे पुरुषों को दूसरे लोगों की तरफ से लगाए गए लेबल्स से भी कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वे अपनी राय सतही चीजों को देखकर नहीं बनाते और वे अपने पार्टनर को जज करने में यकीन नहीं रखते। आप जैसी हैं, आपको उसी स्वरूप में वे चाहते हैं और आपके लिए कमिटमेंट फील करते हैं।
ऐसा इंसान जो आपके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहता है, वह आपके लिए काफी डेडिकेटेड होता है। वह अपना खयाल भी रखता है, लेकिन उसका पूरा फोकस आप पर होता है। आपकी छोटी से छोटी परेशानी को दूर करने के लिए वह प्रयास करता है। ऐसा इंसान ऐसा व्यवहार करने से भी बचता है, जिससे आपको किसी तरह की ठेस पहुंचे या दुख हो। ऐसे व्यक्ति के साथ रहने पर महिलाएं इस बात को लेकर परेशान नहीं होतीं कि उसे कोई बात बुरी ना लग जाए या फिर उसे खुश रखने के लिए उन्हें कौन सी विशेष चीजें करने की जरूरत है।
हर इंसान में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो दूसरे को बुरी लग सकती हैं। लेकिन हर किसी को पसंद आने वाले पुरुष अपनी खामियों को लेकर अत्यधिक सतर्क होते हैं। अगर आप उनकी कमियों की तरफ संकेत करती हैं या फिर उनकी कुछ आदतों से असहज महसूस करती हैं तो वे पूरी ईमानदारी के साथ अपने व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। वे सोचते हैं कि उनके व्यवहार से आपको किसी भी तरह की तकलीफ ना महसूस हो।
जब तनाव का माहौल हो या किसी तरह का मतभेद हो तो उस दौरान शांत रह जाने से बहुत सी परेशानियां खुद-ब-खुद हल हो जाती हैं। इसीलिए वे कई बार दूसरों के कड़वे बोल भी शांति से सुन लेते हैं और संजीदा तरीके से किसी भी बात पर रिएक्ट करते हैं। ऐसे पुरुष किसी के उकसावे में नहीं आते हैं, बल्कि वे हर पहलू के बारे में सोचने और समझने के बाद ही कुछ बोलते हैं।
अगर आप भी अपने लिए एक सुयोग्य जीवनसाथी की तलाश कर रही हैं तो इन खूबियों वाले पुरुष के साथ आप अपने भावी जीवन के बारे में सोच सकती हैं क्योंकि इनके साथ आपका तालमेल निश्चित रूप से अच्छा रहेगा।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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अगर आप अपने लिए एक ऐसा साथी चाहती हैं, जिसके साथ आप जीवनभर खुश रहें तो अपने होने वाले पार्टनर में आपके होने वाले पार्टनर में ये खूबियां जरूर होनी चाहिए। ऐसे पुरुष आपको अपनी पसंद के हिसाब से चलने के लिए दबाव नहीं डालते, बल्कि वे आपको आपके मूल व्यक्तित्व के साथ स्वीकार करते हैं। यानी आप जैसी हैं, वैसी ही उन्हें पसंद होती हैं। ऐसे पुरुष दूसरे व्यक्ति की कमिया गिनाने या उसे छोटा दिखाने में यकीन नहीं रखते। मुमकिन है कि वे ऐसी बातें कह दें, जो आपकी सोच से अलग हों, लेकिन वे कभी भी सीधे तौर पर किसी की आलोचना करके उनका अपमान नहीं करते। ऐसे पुरुषों के साथ महिलाएं सहज रहती हैं और उन पर खास तरह से पेश आने या व्यवहार करने का दबाव नहीं होता। यह चीज महिलाओं को खुशी देती है। हर इंसान में अच्छी-बुरी कई तरह की क्वालिटी होती हैं और इन्हीं के आधार पर अकसर उन्हें कैरेक्टर सर्टिफिकेट दे दिया जाता है। अगर कोई लड़की बहुत पार्टी करती है, अकेले घूमने निकल जाती है, लड़कों के साथ सोशलाइज करती है, जो अक्सर लोग उसके बारे में एक खास किस्म की राय बना लेते हैं और यह राय आमतौर पर नेगेटिव होती है। संभ्रांत पुरुष ऐसा नहीं करते, वे कुछेक एक्टिविटी के आधार पर आपके बारे में राय नहीं बनाते, बल्कि वे लंबे दौर में आपके साथ वक्त गुजारते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि आप किन पक्षों में मजबूत हैं और किनमें आप सुधार कर सकती हैं। ऐसे पुरुषों को दूसरे लोगों की तरफ से लगाए गए लेबल्स से भी कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वे अपनी राय सतही चीजों को देखकर नहीं बनाते और वे अपने पार्टनर को जज करने में यकीन नहीं रखते। आप जैसी हैं, आपको उसी स्वरूप में वे चाहते हैं और आपके लिए कमिटमेंट फील करते हैं। ऐसा इंसान जो आपके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहता है, वह आपके लिए काफी डेडिकेटेड होता है। वह अपना खयाल भी रखता है, लेकिन उसका पूरा फोकस आप पर होता है। आपकी छोटी से छोटी परेशानी को दूर करने के लिए वह प्रयास करता है। ऐसा इंसान ऐसा व्यवहार करने से भी बचता है, जिससे आपको किसी तरह की ठेस पहुंचे या दुख हो। ऐसे व्यक्ति के साथ रहने पर महिलाएं इस बात को लेकर परेशान नहीं होतीं कि उसे कोई बात बुरी ना लग जाए या फिर उसे खुश रखने के लिए उन्हें कौन सी विशेष चीजें करने की जरूरत है। हर इंसान में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो दूसरे को बुरी लग सकती हैं। लेकिन हर किसी को पसंद आने वाले पुरुष अपनी खामियों को लेकर अत्यधिक सतर्क होते हैं। अगर आप उनकी कमियों की तरफ संकेत करती हैं या फिर उनकी कुछ आदतों से असहज महसूस करती हैं तो वे पूरी ईमानदारी के साथ अपने व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। वे सोचते हैं कि उनके व्यवहार से आपको किसी भी तरह की तकलीफ ना महसूस हो। जब तनाव का माहौल हो या किसी तरह का मतभेद हो तो उस दौरान शांत रह जाने से बहुत सी परेशानियां खुद-ब-खुद हल हो जाती हैं। इसीलिए वे कई बार दूसरों के कड़वे बोल भी शांति से सुन लेते हैं और संजीदा तरीके से किसी भी बात पर रिएक्ट करते हैं। ऐसे पुरुष किसी के उकसावे में नहीं आते हैं, बल्कि वे हर पहलू के बारे में सोचने और समझने के बाद ही कुछ बोलते हैं। अगर आप भी अपने लिए एक सुयोग्य जीवनसाथी की तलाश कर रही हैं तो इन खूबियों वाले पुरुष के साथ आप अपने भावी जीवन के बारे में सोच सकती हैं क्योंकि इनके साथ आपका तालमेल निश्चित रूप से अच्छा रहेगा। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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कबीरदास के अनेक शिष्यों ने भी कविता की जैसे भगोदास, श्रुतिगोपाल और धरमदास । धरमदास जी लिखते हैं : " गहरी नदिया अगम बहै धरवा, खेय के पार लगा दीजो रे । धरमदास की अरज गुसाई, अब के खेप निभा दोजेो रे । "
उस समय के भक्त कवियों में नाम देव का नाम स्मरणीय है । ये महाराष्ट्र देश के रहने वाले जाति के दर्ज़ी थे। इन्होंने व्रजभाषा में कविता की है :अंकाला रहै बाहर करै उजास ।" " नाम कहै हरि भगति बिनु निहचै नरक निवास । जैन कवियों में जयसागर और ज्ञानसागर के नाम प्रसिद्ध हैं । कुछ समय बाद कुतुबन शेख नामी एक मुसलमान कवि ने मृगावती नामक ग्रंथ लिखा जिसमें दोहे और चौपाई छंदों में एक प्रेम कहानी कही गई है । यह शेरशाह के पिता हुसैन के यहाँ रहता था और इसने उसकी प्रशंसा में कविता भी की है । एक और प्रेम कहानी जिसका नाम लक्ष्मण सेन- पद्मावती है दामा कषि ने लिखा था। इस समय के कवियों में सेन की भी गणना है । सेन ने कृष्ण संबंधी अच्छी कविता लिखी है और इसकी भाषा भी अच्छी है।
उसी समय में एक महात्मा चरणदास जी हो गए हैं जिन्होंने ज्ञानस्वरोदय नामक ग्रंथ लिखा है। यह एक प्रसिद्ध योगी थे । उनके बाद गुरु नानक पंजाब में हुए जिन्होंने सिक्ख मत चलाया । यह सं० १५२६ से १५९६ वि० तक जीवित रहे । यह जाति के खत्री थे किंतु जाति भेद को व्यर्थ समझते थे और हिन्दू मुसलमानों में कोई अंतर न रखते थे । नानक जी ने देश विदेश में बहुत यात्रा की थी। ये बड़े बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति थे । इनकी रचनाएं
और पंजाबी और हिन्दी मिली भाषा में लिखी गई हैं। इनकी कविताएं सिक्खों के ग्रंथसाहेब, नानक जी की साखी और भ्रष्टांगयोग इत्यादि ग्रंथों में मिलती हैं ।
पुष्प मध्य ज्यों बास बसत है मुकट माँहि जस छाई । तैसे ही हरि बसै निरंतर घर ही खोजो भाई । ' " मित्र दोस्त माल धन, छोड़ि चले प्रति भाई । संगि न कोई नानका, उह हंस अकेला जाई । कहु नानक भज राम नाम नित जातें हो उद्धार 3₂ गुरु नानक जी के जन्म के थोड़े ही दिन बाद स्वामी वल्लभाचार्य का जन्म हुआ । यह तैलंग ब्राह्मण थे जिनका जन्म १४७६ ई० में हुआ था । अंत में यह लगे। कदाचित इनका जन्म भी काशी में हुआ था। इनकी अब तक पूजा होती है। ज्ञात होता है कि संस्कृत के अतिरिक्त ब्रजभाषा में भी इन्होंने कुछ पद लिखे । पद इन्होंने लिखे हों अथवा न लिखे हों किंतु हिन्दी विशेषतः ब्रजभाषा सदा इनकी कृतज्ञ रहेगी, क्योंकि इन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और इनके शिष्यों ने उसे गौरव के शिखर पर पहुँचा दिया।
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कबीरदास के अनेक शिष्यों ने भी कविता की जैसे भगोदास, श्रुतिगोपाल और धरमदास । धरमदास जी लिखते हैं : " गहरी नदिया अगम बहै धरवा, खेय के पार लगा दीजो रे । धरमदास की अरज गुसाई, अब के खेप निभा दोजेो रे । " उस समय के भक्त कवियों में नाम देव का नाम स्मरणीय है । ये महाराष्ट्र देश के रहने वाले जाति के दर्ज़ी थे। इन्होंने व्रजभाषा में कविता की है :अंकाला रहै बाहर करै उजास ।" " नाम कहै हरि भगति बिनु निहचै नरक निवास । जैन कवियों में जयसागर और ज्ञानसागर के नाम प्रसिद्ध हैं । कुछ समय बाद कुतुबन शेख नामी एक मुसलमान कवि ने मृगावती नामक ग्रंथ लिखा जिसमें दोहे और चौपाई छंदों में एक प्रेम कहानी कही गई है । यह शेरशाह के पिता हुसैन के यहाँ रहता था और इसने उसकी प्रशंसा में कविता भी की है । एक और प्रेम कहानी जिसका नाम लक्ष्मण सेन- पद्मावती है दामा कषि ने लिखा था। इस समय के कवियों में सेन की भी गणना है । सेन ने कृष्ण संबंधी अच्छी कविता लिखी है और इसकी भाषा भी अच्छी है। उसी समय में एक महात्मा चरणदास जी हो गए हैं जिन्होंने ज्ञानस्वरोदय नामक ग्रंथ लिखा है। यह एक प्रसिद्ध योगी थे । उनके बाद गुरु नानक पंजाब में हुए जिन्होंने सिक्ख मत चलाया । यह संशून्य एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस से एक हज़ार पाँच सौ छियानवे विशून्य तक जीवित रहे । यह जाति के खत्री थे किंतु जाति भेद को व्यर्थ समझते थे और हिन्दू मुसलमानों में कोई अंतर न रखते थे । नानक जी ने देश विदेश में बहुत यात्रा की थी। ये बड़े बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति थे । इनकी रचनाएं और पंजाबी और हिन्दी मिली भाषा में लिखी गई हैं। इनकी कविताएं सिक्खों के ग्रंथसाहेब, नानक जी की साखी और भ्रष्टांगयोग इत्यादि ग्रंथों में मिलती हैं । पुष्प मध्य ज्यों बास बसत है मुकट माँहि जस छाई । तैसे ही हरि बसै निरंतर घर ही खोजो भाई । ' " मित्र दोस्त माल धन, छोड़ि चले प्रति भाई । संगि न कोई नानका, उह हंस अकेला जाई । कहु नानक भज राम नाम नित जातें हो उद्धार तीन₂ गुरु नानक जी के जन्म के थोड़े ही दिन बाद स्वामी वल्लभाचार्य का जन्म हुआ । यह तैलंग ब्राह्मण थे जिनका जन्म एक हज़ार चार सौ छिहत्तर ईशून्य में हुआ था । अंत में यह लगे। कदाचित इनका जन्म भी काशी में हुआ था। इनकी अब तक पूजा होती है। ज्ञात होता है कि संस्कृत के अतिरिक्त ब्रजभाषा में भी इन्होंने कुछ पद लिखे । पद इन्होंने लिखे हों अथवा न लिखे हों किंतु हिन्दी विशेषतः ब्रजभाषा सदा इनकी कृतज्ञ रहेगी, क्योंकि इन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और इनके शिष्यों ने उसे गौरव के शिखर पर पहुँचा दिया।
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सिंह, कन्या - शारीरिक बीमारी की बहुत संभावनाएं हैं, बैंक से जुड़े लेनदेन के बारे में सावधान रहने की आवश्यकता है। दीर्घकालिक निवेश से बचें और अपने दोस्तों के साथ बाहर जाकर कुछ खुश क्षण बिताएं, जब आप अपने प्यारे के साथ बाहर जाते हैं।
तो ड्रेसिंग में अपने कपड़े और नईता रखें, नव विकसित व्यावसायिक संबंध भविष्य में बहुत लाभ प्रदान करेंगे, आप अपने लोगों के साथ बहुत सक्रिय होंगे, लोग आपको आपकी राय के लिए पूछेंगे और जो कुछ भी आप कहेंगे बिना सोच के इसे स्वीकार करेंगे।
वृश्चिक, मीन - काम पर चीज़ें थोड़ी अजीब हो सकती हैं; आपको महसूस होगा, कि सब कुछ आपके ख़िलाफ़ जा रहा है। अपने व्यक्तित्व और रंग-रूप को बेहतर बनाने का कोशिश संतोषजनक साबित होगी। आपको महसूस हो सकता है कि आपके जीवनसाथी ने आपको चोट पहुँचाई है। आपका संचार और काम करने की क्षमता प्रभावी साबित होगी और आप अपने साथी के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हो सकते हैं।
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सिंह, कन्या - शारीरिक बीमारी की बहुत संभावनाएं हैं, बैंक से जुड़े लेनदेन के बारे में सावधान रहने की आवश्यकता है। दीर्घकालिक निवेश से बचें और अपने दोस्तों के साथ बाहर जाकर कुछ खुश क्षण बिताएं, जब आप अपने प्यारे के साथ बाहर जाते हैं। तो ड्रेसिंग में अपने कपड़े और नईता रखें, नव विकसित व्यावसायिक संबंध भविष्य में बहुत लाभ प्रदान करेंगे, आप अपने लोगों के साथ बहुत सक्रिय होंगे, लोग आपको आपकी राय के लिए पूछेंगे और जो कुछ भी आप कहेंगे बिना सोच के इसे स्वीकार करेंगे। वृश्चिक, मीन - काम पर चीज़ें थोड़ी अजीब हो सकती हैं; आपको महसूस होगा, कि सब कुछ आपके ख़िलाफ़ जा रहा है। अपने व्यक्तित्व और रंग-रूप को बेहतर बनाने का कोशिश संतोषजनक साबित होगी। आपको महसूस हो सकता है कि आपके जीवनसाथी ने आपको चोट पहुँचाई है। आपका संचार और काम करने की क्षमता प्रभावी साबित होगी और आप अपने साथी के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हो सकते हैं।
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कोरोना महामारी के पश्चात् अब अक्षय कुमार की 5 मूवीज थिएटर में रिलीज होने के लिए तैयार हैं। अब अक्षय ने दर्शक तथा प्रशंसकों से अपील की है कि थिएटर्स में आकर मूवीज देखें। अक्षय का कहना है कि अब चीजें नॉर्मल हो रही हैं तथा उम्मीद है कि सब ऐसा ही रहे इसलिए थिएटर्स में मूवीज देखकर आप मनोरंजन जगत की सहायता कर सकते हैं।
दरअसल, एक न्यूज पोर्टल से चर्चा करते हुए अक्षय ने बताया, ये बहुत अच्छा अहसास है कि एक बार फिर वर्ष में 4-5 फिल्में रिलीज हो रही हैं। चीजें अब सामान्य हो रही हैं तथा उम्मीद है कि सब ऐसा ही रहे। अक्षय के अनुसार, वह और फिल्म की टीम दर्शकों को थिएटर्स में मनोरंजन करने की बहुत वक़्त से प्रतीक्षा कर रहे हैं। इंडस्ट्री आशा कर रही है कि सब वैसा हो जाए जैसा कोरोना से पहले था। इसके साथ ही सभी फिंग्स क्रॉस करके बैठे हैं कि अब और बुरा ना हो।
साथ ही अक्षय ने बताया कि डेढ़ वर्ष इंडस्ट्री के लिए बहुत मुश्किल भरे रहे तथा रुपयों की भी बहुत समस्या हुईं। अब क्योंकि थिएटर्स वापस महाराष्ट्र में खुल रहे हैं तो आशा है कि दर्शक थिएटर्स में आएं क्योंकि वे भी थिएटर्स को मिस कर रहे होंगे। बता दें कि आने वाले कुछ माहों में अक्षय की मूवी सूर्यवंशी, पृथ्वीराज, बच्चन पांडे, रक्षाबंधन तथा राम सेतू रिलीज होने वाली हैं। इनके अतिरिक्त अक्षय, ओह माई गॉड, अतरंगी रे भी दिखाई देंगे। हालांकि ये मूवीज अगले वर्ष रिलीज हो सकती हैं। अक्षय अंतिम बार मूवी बेल बॉटम में दिखाई दिए थे तो थिएटर्स में ही रिलीज हुई थी। हालांकि उस समय महाराष्ट्र में सभी सिनेमा हॉल्स बंद थे।
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कोरोना महामारी के पश्चात् अब अक्षय कुमार की पाँच मूवीज थिएटर में रिलीज होने के लिए तैयार हैं। अब अक्षय ने दर्शक तथा प्रशंसकों से अपील की है कि थिएटर्स में आकर मूवीज देखें। अक्षय का कहना है कि अब चीजें नॉर्मल हो रही हैं तथा उम्मीद है कि सब ऐसा ही रहे इसलिए थिएटर्स में मूवीज देखकर आप मनोरंजन जगत की सहायता कर सकते हैं। दरअसल, एक न्यूज पोर्टल से चर्चा करते हुए अक्षय ने बताया, ये बहुत अच्छा अहसास है कि एक बार फिर वर्ष में चार-पाँच फिल्में रिलीज हो रही हैं। चीजें अब सामान्य हो रही हैं तथा उम्मीद है कि सब ऐसा ही रहे। अक्षय के अनुसार, वह और फिल्म की टीम दर्शकों को थिएटर्स में मनोरंजन करने की बहुत वक़्त से प्रतीक्षा कर रहे हैं। इंडस्ट्री आशा कर रही है कि सब वैसा हो जाए जैसा कोरोना से पहले था। इसके साथ ही सभी फिंग्स क्रॉस करके बैठे हैं कि अब और बुरा ना हो। साथ ही अक्षय ने बताया कि डेढ़ वर्ष इंडस्ट्री के लिए बहुत मुश्किल भरे रहे तथा रुपयों की भी बहुत समस्या हुईं। अब क्योंकि थिएटर्स वापस महाराष्ट्र में खुल रहे हैं तो आशा है कि दर्शक थिएटर्स में आएं क्योंकि वे भी थिएटर्स को मिस कर रहे होंगे। बता दें कि आने वाले कुछ माहों में अक्षय की मूवी सूर्यवंशी, पृथ्वीराज, बच्चन पांडे, रक्षाबंधन तथा राम सेतू रिलीज होने वाली हैं। इनके अतिरिक्त अक्षय, ओह माई गॉड, अतरंगी रे भी दिखाई देंगे। हालांकि ये मूवीज अगले वर्ष रिलीज हो सकती हैं। अक्षय अंतिम बार मूवी बेल बॉटम में दिखाई दिए थे तो थिएटर्स में ही रिलीज हुई थी। हालांकि उस समय महाराष्ट्र में सभी सिनेमा हॉल्स बंद थे।
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सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को जिले में मेघगर्जन के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग जयपुर ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले अजमेर तथा बीकानेर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ बारिश हो सकती है।
मौसम केंद्र जयपुर के वैज्ञानिक आर एस शर्मा ने बताया कि साथ ही बिजली चमकने, अचानक तेज हवाओं का झोंका (30-40 केएमपीएच) आने सहित ओलावृष्टि होने की भी संभावना है। विभाग ने बताया कि इस सिस्टम का असर 12 मार्च को सर्वाधिक देखने को मिलेगा। इधर, खेतों में रबी की फसल लगभग पककर तैयार है, ऐसे में किसानों के सामने यह बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि अगर बेमौसम बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है तो फसलों में भारी नुकसान होगा और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। वर्तमान के मौसम को लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। जिले में गुरुवार को दिन भर गर्मी पड़ने के साथ हवाएं भी चली। गत 3 से 4 दिनों में मौसम में आए बदलाव के चलते अस्पताल में सर्दी जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
मौसम विभाग जयपुर के अनुसार 13 मार्च से एक बार पुनः मौसम शुष्क रहेगा। जिसके बाद गर्मी का असर फिर तेज होगा। साथी आने वाले दिनों में तेज लू चलने का असर भी देखने को मिल सकता है।
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सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को जिले में मेघगर्जन के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग जयपुर ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले अजमेर तथा बीकानेर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के वैज्ञानिक आर एस शर्मा ने बताया कि साथ ही बिजली चमकने, अचानक तेज हवाओं का झोंका आने सहित ओलावृष्टि होने की भी संभावना है। विभाग ने बताया कि इस सिस्टम का असर बारह मार्च को सर्वाधिक देखने को मिलेगा। इधर, खेतों में रबी की फसल लगभग पककर तैयार है, ऐसे में किसानों के सामने यह बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि अगर बेमौसम बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है तो फसलों में भारी नुकसान होगा और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। वर्तमान के मौसम को लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। जिले में गुरुवार को दिन भर गर्मी पड़ने के साथ हवाएं भी चली। गत तीन से चार दिनों में मौसम में आए बदलाव के चलते अस्पताल में सर्दी जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मौसम विभाग जयपुर के अनुसार तेरह मार्च से एक बार पुनः मौसम शुष्क रहेगा। जिसके बाद गर्मी का असर फिर तेज होगा। साथी आने वाले दिनों में तेज लू चलने का असर भी देखने को मिल सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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- #MathuraMathura: पाकिस्तानी हिन्दुओं की दुर्दशा पर बोले संतः '100 में से केवल 1 करोड़ सनातनियों को जागना होगा'
- #Mathuraभगवान बांके बिहारी को चढ़ाया 85 लाख का सोने का हार? , आखिर क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई?
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की एक स्थानीय अदालत ने शाही ईदगाह का अमीन सर्वेक्षण करने का आदेश दे दिया है। बता दें कि हिंदू सेना के दावे के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर यहां भी वाराणसी के ज्ञानवापी मामले की तरह ही सर्वेक्षण करने का आदेश दिया गया है। वहीं कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की ताऱीख तय की है। साथ ही अमीन को इससे पहले संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है। वादी ने 8 दिसंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन (तृतीय) की न्यायाधीश सोनिका वर्मा की अदालत में दावा किया था।
इस दावे में कहा गया था कि औरंगजेब द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13. 37 एकड़ जमीन पर मंदिर तोड़कर ईदगाह बना कर तैयार कराई गई थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट के सामने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर मंदिर बनने तक का पूरा इतिहास पेश किया था। साथ ही उन्होंने साल 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ बनाम शाही ईदगाह के बीच हुए समझौते को भी रद्द किए जाने की मांग की है। अधिवक्ता शैलेश दुबे ने बताया कि कोर्ट ने वादी की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकृत कर ली। जिसके बाद अमीन द्वारा सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। पहले 22 दिसंबर को इस मामले की कोर्ट में सुनवाई होनी थी। लेकिन कुछ कारणों के चलते ऐसा नहीं हो पायाथा। वहीं अब 20 जनवरी तक अमीन को ईदगाह की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
बता दें कि इससे पहले भी करीब आधा दर्जन से अधिक वादी सिविल जज सीनियर डिवीजन (प्रथम) ज्योति सिंह के कोर्ट में इसी मांग को सामने रख चुके हैं। लेकिन अभी तक उन याचिकाओं पर किसी भी प्रकार का कोई फैसला नहीं हो सका है। वहीं 17 अगस्त 2021 को पांच महिलाओं ने वाराणसी के श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में श्रृंगार गौरी में पूजन और विग्रहों की सुरक्षा को लेकर याचिका दाखिल की थी। जिसके बाद वहां पर तैनात सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त कर ज्ञानवापी का सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। जिसके बाद यह मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा था।
कितना पुराना विवाद?
है।
किया।
है।
पूरा विवाद इसी 13. 37 एकड़ जमीन को लेकर है। इस जमीन में से 10. 9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2. 5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। इस समझौते में मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के लिए अपने कब्जे की कुछ जगह छोड़ी और मुस्लिम पक्ष को बदले में पास में ही कुछ जगह दी गई थी। अब हिन्दू पक्ष पूरी 13. 37 एकड़ जमीन पर कब्जे की मांग कर रहा है।
इतिहास क्या कहता है?
ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठा जीते। जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया। 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13. 37 एकड़ की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी। 1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ये भूमि अधिग्रहीत कर ली।
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- #MathuraMathura: पाकिस्तानी हिन्दुओं की दुर्दशा पर बोले संतः 'एक सौ में से केवल एक करोड़ सनातनियों को जागना होगा' - #Mathuraभगवान बांके बिहारी को चढ़ाया पचासी लाख का सोने का हार? , आखिर क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई? उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की एक स्थानीय अदालत ने शाही ईदगाह का अमीन सर्वेक्षण करने का आदेश दे दिया है। बता दें कि हिंदू सेना के दावे के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर यहां भी वाराणसी के ज्ञानवापी मामले की तरह ही सर्वेक्षण करने का आदेश दिया गया है। वहीं कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बीस जनवरी की ताऱीख तय की है। साथ ही अमीन को इससे पहले संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है। वादी ने आठ दिसंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन की न्यायाधीश सोनिका वर्मा की अदालत में दावा किया था। इस दावे में कहा गया था कि औरंगजेब द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान की तेरह. सैंतीस एकड़ जमीन पर मंदिर तोड़कर ईदगाह बना कर तैयार कराई गई थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट के सामने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर मंदिर बनने तक का पूरा इतिहास पेश किया था। साथ ही उन्होंने साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ बनाम शाही ईदगाह के बीच हुए समझौते को भी रद्द किए जाने की मांग की है। अधिवक्ता शैलेश दुबे ने बताया कि कोर्ट ने वादी की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकृत कर ली। जिसके बाद अमीन द्वारा सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। पहले बाईस दिसंबर को इस मामले की कोर्ट में सुनवाई होनी थी। लेकिन कुछ कारणों के चलते ऐसा नहीं हो पायाथा। वहीं अब बीस जनवरी तक अमीन को ईदगाह की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। बता दें कि इससे पहले भी करीब आधा दर्जन से अधिक वादी सिविल जज सीनियर डिवीजन ज्योति सिंह के कोर्ट में इसी मांग को सामने रख चुके हैं। लेकिन अभी तक उन याचिकाओं पर किसी भी प्रकार का कोई फैसला नहीं हो सका है। वहीं सत्रह अगस्त दो हज़ार इक्कीस को पांच महिलाओं ने वाराणसी के श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में श्रृंगार गौरी में पूजन और विग्रहों की सुरक्षा को लेकर याचिका दाखिल की थी। जिसके बाद वहां पर तैनात सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त कर ज्ञानवापी का सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। जिसके बाद यह मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा था। कितना पुराना विवाद? है। किया। है। पूरा विवाद इसी तेरह. सैंतीस एकड़ जमीन को लेकर है। इस जमीन में से दस. नौ एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और दो. पाँच एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। इस समझौते में मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के लिए अपने कब्जे की कुछ जगह छोड़ी और मुस्लिम पक्ष को बदले में पास में ही कुछ जगह दी गई थी। अब हिन्दू पक्ष पूरी तेरह. सैंतीस एकड़ जमीन पर कब्जे की मांग कर रहा है। इतिहास क्या कहता है? ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह एक हज़ार छः सौ उनहत्तर-सत्तर में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। एक हज़ार सात सौ सत्तर में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठा जीते। जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया। एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तेरह. सैंतीस एकड़ की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ये भूमि अधिग्रहीत कर ली।
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स्कूल में घुसे 'किताब प्रेमी चोर'विद्यालय में चोरी की जानकारी प्राधानाध्यापक को तब लगी जब वे सुबह स्कूल खोलने पहुंचे। प्रधानाध्यापक शाहजहां ने बताया कि जब वे विद्यालय पहुंचे तो देखा कि ऑफिस का गेट का ताला कटा हुआ है और विद्यालय के अंदर के बक्से की कुंडी उखड़ी हुई है। इसके बाद जब वे अंदर पहुंचे तो पाया कि बक्से के अंदर पुस्तकालय की रखी गई लगभग 600 किताबें, विद्यालय की पेंसिल और चॉक के साथ साथ कुछ सामग्रियां गायब थीं। बाहर आने पर देखा कि चोर ने उनमें से कुछ किताबें और अन्य कई सामग्रियां पास के खेतों में इधर उधर फेंक दी हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इसके अलावा चोरों ने साइंस किट के भी बहुत सारे सामान चोरी कर ली। उन्होंने कहा कि चोरी से संबंधित मामले की एक प्राथमिकी अज्ञात चोरों के खिलाफ मुफस्सिल थाने में दर्ज की जा रही है और कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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स्कूल में घुसे 'किताब प्रेमी चोर'विद्यालय में चोरी की जानकारी प्राधानाध्यापक को तब लगी जब वे सुबह स्कूल खोलने पहुंचे। प्रधानाध्यापक शाहजहां ने बताया कि जब वे विद्यालय पहुंचे तो देखा कि ऑफिस का गेट का ताला कटा हुआ है और विद्यालय के अंदर के बक्से की कुंडी उखड़ी हुई है। इसके बाद जब वे अंदर पहुंचे तो पाया कि बक्से के अंदर पुस्तकालय की रखी गई लगभग छः सौ किताबें, विद्यालय की पेंसिल और चॉक के साथ साथ कुछ सामग्रियां गायब थीं। बाहर आने पर देखा कि चोर ने उनमें से कुछ किताबें और अन्य कई सामग्रियां पास के खेतों में इधर उधर फेंक दी हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इसके अलावा चोरों ने साइंस किट के भी बहुत सारे सामान चोरी कर ली। उन्होंने कहा कि चोरी से संबंधित मामले की एक प्राथमिकी अज्ञात चोरों के खिलाफ मुफस्सिल थाने में दर्ज की जा रही है और कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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मशहूर कॉमेडी शो 'द कपिल शर्मा शो' इस साल का अंत धमाकेदार तरीके से करने जा रहा है। दरअसल, 2022 के आखिरी दिन इस शो में कॉमेडी के कई दिग्गज नजर आने वाले हैं, जिन्होंने लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले इस शो के ताजा एपिसोड में कपिल के साथ जाकिर खान, अनुभव बस्सी, कुशा कपिला और अभिषेक उपमन्यु बतौर गेस्ट दिखेंगे। इस दौरान वह अपने करियर पर भी बात करते नजर आएंगे। शो में जाकिर ने अपने करियर से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं जो बहुत कम लोगों को ही पता होंगी।
शो में जाकिर खान ने अपने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार स्टेज पर परफॉर्म कर रहे थे तो उन्हें दो मिनट में ही स्टेज से उतार दिया गया था। जाकिर ने हैरान कर देने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परिवार या दोस्तों के बीच और स्टेज पर परफॉर्म करने में बहुत फर्क होता है। घरवालों और दोस्तों के बीच आप मजाकिया हो सकते हैं लेकिन अनजान जनता को कहानी सुनाना और हंसाना बहुत बड़ा टास्क होता है। जाकिर के मुताबिक एक सच्चा कॉमेडियन ही ऐसा कर सकता है।
इस शो में जाकिर अपने बचपन की यादें भी साझा करते नजर आए। उन्होंने बताया कि कॉमेडी करने की प्रेरणा उन्हें राजू श्रीवास्तव से मिली। उन्होंने बताया कि वह बचपन में राजू श्रीवास्तव और जॉनी लीवर की कॉमेडी की सीडी खरीदकर उन्हें देखा करते थे। जाकिर आगे बताते हैं कि स्कूल के दिनों में लाफ्टर चैलेंज शुरू हुआ था, तब उनके दोस्त उनकी टांग खींचते थे कि तुम भी शो में हिस्सा लेने जाओ। जाकिर ने आगे बताया कि टीवी पर परफॉर्मेंस देखने के बाद उन्हें लगता था कि यह बहुत आसान है, लेकिन असल जिंदगी में जब मैं यह शुरू किया तब पता चला कि यह काम कितना मुश्किल है।
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मशहूर कॉमेडी शो 'द कपिल शर्मा शो' इस साल का अंत धमाकेदार तरीके से करने जा रहा है। दरअसल, दो हज़ार बाईस के आखिरी दिन इस शो में कॉमेडी के कई दिग्गज नजर आने वाले हैं, जिन्होंने लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले इस शो के ताजा एपिसोड में कपिल के साथ जाकिर खान, अनुभव बस्सी, कुशा कपिला और अभिषेक उपमन्यु बतौर गेस्ट दिखेंगे। इस दौरान वह अपने करियर पर भी बात करते नजर आएंगे। शो में जाकिर ने अपने करियर से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं जो बहुत कम लोगों को ही पता होंगी। शो में जाकिर खान ने अपने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार स्टेज पर परफॉर्म कर रहे थे तो उन्हें दो मिनट में ही स्टेज से उतार दिया गया था। जाकिर ने हैरान कर देने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परिवार या दोस्तों के बीच और स्टेज पर परफॉर्म करने में बहुत फर्क होता है। घरवालों और दोस्तों के बीच आप मजाकिया हो सकते हैं लेकिन अनजान जनता को कहानी सुनाना और हंसाना बहुत बड़ा टास्क होता है। जाकिर के मुताबिक एक सच्चा कॉमेडियन ही ऐसा कर सकता है। इस शो में जाकिर अपने बचपन की यादें भी साझा करते नजर आए। उन्होंने बताया कि कॉमेडी करने की प्रेरणा उन्हें राजू श्रीवास्तव से मिली। उन्होंने बताया कि वह बचपन में राजू श्रीवास्तव और जॉनी लीवर की कॉमेडी की सीडी खरीदकर उन्हें देखा करते थे। जाकिर आगे बताते हैं कि स्कूल के दिनों में लाफ्टर चैलेंज शुरू हुआ था, तब उनके दोस्त उनकी टांग खींचते थे कि तुम भी शो में हिस्सा लेने जाओ। जाकिर ने आगे बताया कि टीवी पर परफॉर्मेंस देखने के बाद उन्हें लगता था कि यह बहुत आसान है, लेकिन असल जिंदगी में जब मैं यह शुरू किया तब पता चला कि यह काम कितना मुश्किल है।
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PAK vs NZ: पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार से दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी हैं। पाकिस्तान दौरे पर गई न्यूजीलैंड की टीम दो टेस्ट के अलावा तीन वनडे मैच भी खेलेगी। इस सीरीज के शुरू होने से पहले पीसीबी की ओर से वेन्यू को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच मुल्तान की चगह कराची में खेला जाएगा। इस फैसले के बाद दौरे पर होने वाले सभी मुकाबले एक ही शहर में होंगे। पीसीबी ने यह फैसला न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड से बात करने के बाद लिया।
पाकिस्तान दौरे पर आई न्यूजीलैंड की टीम को पहले दो टेस्ट मैच खेलना है। अमूमन टेस्ट मैच सुबह से ही शुरू हो जाते हैं। मैच में पर्याप्त ओवर फेके जा सके इस वजह से मैच सही समय पर शुरू होना लाजमी हो जाता है। लेकिन कड़ाके की ठंड की वजह से इस वक्त पाकिस्तान के कुछ इलाकों में कोहरे के मौसम की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि मैच मुल्तान से कराजी शिफ्ट कर दिया गया। इस मुद्दे को लेकर पीसीबी ने कहा कि घने कोहरे की वजह से मुल्तान से उड़ानों के समय में बदलाव किया गया है। इसके कारण खेल का समय भी बाधित हो सकता है। अब टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच कराची में खेला जाएगा। मैचों के वेन्यू के अलावा दिनों में भी बदलाव किए गए हैं। दूसरा टेस्ट मैच और वनडे सीरीज के तीनों मैच अपने निर्धारित समय से एक दिन पहले खेले जाएंगे।
आपको बता दें की पाकिस्तान की टीम ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट सीरीज को 3-0 से गंवाया था। इस सीरीज में मिली हार के कारण पाकिस्तान की टीम WTC फाइनल की रेस से बाहर हो गई थी। टेस्ट क्रिकेट अपने घर पर पाकिस्तान की स्थिति चिंताजनक है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले जाने वाले टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान की टीम वापसी की तलाश में है। पहला टेस्ट मैच 26 से 30 दिसंबर और दूसरा मैच 02 से 06 जनवरी तक खेले जाएंगे। वही वनडे सीरीज से मैच 09, 11 और 13 जनवरी को कराची में ही खेले जाएंगे।
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PAK vs NZ: पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार से दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी हैं। पाकिस्तान दौरे पर गई न्यूजीलैंड की टीम दो टेस्ट के अलावा तीन वनडे मैच भी खेलेगी। इस सीरीज के शुरू होने से पहले पीसीबी की ओर से वेन्यू को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच मुल्तान की चगह कराची में खेला जाएगा। इस फैसले के बाद दौरे पर होने वाले सभी मुकाबले एक ही शहर में होंगे। पीसीबी ने यह फैसला न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड से बात करने के बाद लिया। पाकिस्तान दौरे पर आई न्यूजीलैंड की टीम को पहले दो टेस्ट मैच खेलना है। अमूमन टेस्ट मैच सुबह से ही शुरू हो जाते हैं। मैच में पर्याप्त ओवर फेके जा सके इस वजह से मैच सही समय पर शुरू होना लाजमी हो जाता है। लेकिन कड़ाके की ठंड की वजह से इस वक्त पाकिस्तान के कुछ इलाकों में कोहरे के मौसम की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि मैच मुल्तान से कराजी शिफ्ट कर दिया गया। इस मुद्दे को लेकर पीसीबी ने कहा कि घने कोहरे की वजह से मुल्तान से उड़ानों के समय में बदलाव किया गया है। इसके कारण खेल का समय भी बाधित हो सकता है। अब टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच कराची में खेला जाएगा। मैचों के वेन्यू के अलावा दिनों में भी बदलाव किए गए हैं। दूसरा टेस्ट मैच और वनडे सीरीज के तीनों मैच अपने निर्धारित समय से एक दिन पहले खेले जाएंगे। आपको बता दें की पाकिस्तान की टीम ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट सीरीज को तीन-शून्य से गंवाया था। इस सीरीज में मिली हार के कारण पाकिस्तान की टीम WTC फाइनल की रेस से बाहर हो गई थी। टेस्ट क्रिकेट अपने घर पर पाकिस्तान की स्थिति चिंताजनक है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले जाने वाले टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान की टीम वापसी की तलाश में है। पहला टेस्ट मैच छब्बीस से तीस दिसंबर और दूसरा मैच दो से छः जनवरी तक खेले जाएंगे। वही वनडे सीरीज से मैच नौ, ग्यारह और तेरह जनवरी को कराची में ही खेले जाएंगे।
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तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन (BIE) ने 11वीं की छात्रा अरुतला अनामिका को पास घोषित करने के कुछ देर बाद फेल करार दिया है. अप्रैल में आयोजित 11वीं की परीक्षा में फेल होने के कारण अनामिका ने सुसाइड कर लिया था.
शनिवार को जब अनामिका की बहन उदया बोर्ड की वेबसाइट पर बहन के रि-वेरिफाइड मार्क्स चेक कर रही थी तो पहले उसे अनामिका का रिजल्ट पास मिला, जिसे कुछ ही देर में 'फेल' में बदल दिया गया था. बोर्ड के इस कारनामे का पता चलने पर अनामिका के घरवाले बोर्ड के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं. हालांकि, बोर्ड का कहना है कि यह क्लरिकल मिस्टेक थी जिसे तुरंत ठीक कर लिया गया.
बोर्ड द्वारा बार-बार मार्क्स बदलने वाले इस रवैये से नाराज अनामिका के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बोर्ड अपनी ड्यूटी निभाने में फेल हो गया है. बता दें कि अनामिका को इंग्लिश में 64, इकोनॉमिक्स में 55, सिविक्स में 67, कॉमर्स में 75 और तेलुगू-1 में पहले 48 और बाद में 20 मार्क्स दिए गए थे.
अनामिका की बहन उदया ने शनिवार को जब बोर्ड की वेबसाइट चेक की तो उसकी बहन के मार्क्स कुछ ही देर के फासले में बदले हुए मिले. एक घंटे पहले जिस जगह 48 मार्क्स दिया गया था उसमें अब 21 मार्क्स दिए गए थे. बोर्ड के रि-वेरिफिकेशन वाले रिजल्ट देखने के बाद अनामिका के परिवार वालों ने बोर्ड के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
18 अप्रैल को तेलंगाना बोर्ड के 11वीं परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे. इसमें तेलंगाना के कई छात्र-छात्राएं फेल हुए थे. फेल होने के कारण लगभग 23 छात्र-छात्राओं ने सुसाइड कर लिया. इन्हीं में से एक छात्रा अरुतला अनामिका भी थी. बता दें कि तेलंगाना में 11वीं की परीक्षा में लगभग 9. 43 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे. इनमें 3. 38 लाख स्टूडेंट्स फेल घोषित किए गए थे. यह मुद्दा काफी चर्चा में रही जिसे बाद में हाई कोर्ट तक ले जाया गया. यहां रि-इवेलुएशन का आदेश दिया गया था.
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तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन ने ग्यारहवीं की छात्रा अरुतला अनामिका को पास घोषित करने के कुछ देर बाद फेल करार दिया है. अप्रैल में आयोजित ग्यारहवीं की परीक्षा में फेल होने के कारण अनामिका ने सुसाइड कर लिया था. शनिवार को जब अनामिका की बहन उदया बोर्ड की वेबसाइट पर बहन के रि-वेरिफाइड मार्क्स चेक कर रही थी तो पहले उसे अनामिका का रिजल्ट पास मिला, जिसे कुछ ही देर में 'फेल' में बदल दिया गया था. बोर्ड के इस कारनामे का पता चलने पर अनामिका के घरवाले बोर्ड के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं. हालांकि, बोर्ड का कहना है कि यह क्लरिकल मिस्टेक थी जिसे तुरंत ठीक कर लिया गया. बोर्ड द्वारा बार-बार मार्क्स बदलने वाले इस रवैये से नाराज अनामिका के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बोर्ड अपनी ड्यूटी निभाने में फेल हो गया है. बता दें कि अनामिका को इंग्लिश में चौंसठ, इकोनॉमिक्स में पचपन, सिविक्स में सरसठ, कॉमर्स में पचहत्तर और तेलुगू-एक में पहले अड़तालीस और बाद में बीस मार्क्स दिए गए थे. अनामिका की बहन उदया ने शनिवार को जब बोर्ड की वेबसाइट चेक की तो उसकी बहन के मार्क्स कुछ ही देर के फासले में बदले हुए मिले. एक घंटे पहले जिस जगह अड़तालीस मार्क्स दिया गया था उसमें अब इक्कीस मार्क्स दिए गए थे. बोर्ड के रि-वेरिफिकेशन वाले रिजल्ट देखने के बाद अनामिका के परिवार वालों ने बोर्ड के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. अट्ठारह अप्रैल को तेलंगाना बोर्ड के ग्यारहवीं परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे. इसमें तेलंगाना के कई छात्र-छात्राएं फेल हुए थे. फेल होने के कारण लगभग तेईस छात्र-छात्राओं ने सुसाइड कर लिया. इन्हीं में से एक छात्रा अरुतला अनामिका भी थी. बता दें कि तेलंगाना में ग्यारहवीं की परीक्षा में लगभग नौ. तैंतालीस लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे. इनमें तीन. अड़तीस लाख स्टूडेंट्स फेल घोषित किए गए थे. यह मुद्दा काफी चर्चा में रही जिसे बाद में हाई कोर्ट तक ले जाया गया. यहां रि-इवेलुएशन का आदेश दिया गया था.
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जब आप किसी को बताते हैं कि आप ट्रायथलॉन कर रहे हैं, तो आप शायद सुनेंगे, "हे दोस्त, एक आयरनमैन? तीव्र!" लेकिन एक आयरनमैन वास्तव में दौड़ की एक विशिष्ट दूरी है और सबसे लंबा है।
वास्तव में चार आम ट्रायथलॉन दूरी हैं। इससे पहले कि आप पहले प्रशिक्षण में सिर कूद सकें, आपको वह चुनना होगा जिसे आप ढूंढना चाहते हैं।
यही कारण है कि हम शिकागो क्षेत्र से जेनिफर हैरिसन-पेशेवर यूएसएटी लेवल II प्रमाणित ट्रायथलॉन कोच के संपर्क में आ गए- मूलभूत बातों को तोड़ने के लिए कि प्रत्येक व्यक्ति को दौड़ के लिए साइन अप करने से पहले पता होना चाहिए।
हैरिसन कहते हैं, "ट्रायथलॉन के कई अलग-अलग बदलाव हैं, लेकिन आपके क्लासिक चार स्प्रिंट दूर हैं, ओलंपिक दूरी, आधा आयरनमैन (जिसे अब 70.3 कहा जाता है), और पूर्ण आयरनमैन (140.6 के रूप में भी जाना जाता है)" हैरिसन कहते हैं।
प्रत्येक की सामान्य दूरी यहां दी गई हैः
जो आपके लिए सही है? निर्णय लेने का तरीका यहां दिया गया है।
यदि आप एक स्प्रिंट ट्रायथलॉन के लिए साइन अप करने जा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि प्रशिक्षण के लिए आपको हर सप्ताह कम से कम 5 से 6 घंटे शेष रहें, हैरिसन कहते हैं। और वास्तविक कसरत के लिए, हैरिसन का कहना है कि आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप एक या दो सत्र-प्रति खेल-साप्ताहिक कर रहे हैं। तो इसका मतलब है कि कम से कम 2 बाइक वर्कआउट्स, 2 स्विम, और प्रति सप्ताह 2 रन।
जैसे-जैसे दौड़ प्रति दौड़ बढ़ती है, "प्रति सप्ताह अनुमानित घंटे" को बॉलपार्क करना उतना आसान नहीं है जितना आपको इसमें रखना होगा क्योंकि हर किसी के कार्यसूची अलग-अलग होते हैं। लेकिन आत्मविश्वास से दौड़ में जाने के लिए, आपको कम से कम 1 मील तैरने में सक्षम होना चाहिए, बाइक पर कम से कम 40 से 50 मील बाइक, और 12 मील की दौड़ पूरी करें, हैरिसन कहते हैं। (बैक-टू-बैक नहीं।) और आपको यह पता करने के लिए कि आपका सबसे लंबा कसरत कैसा दिखता है, हैरिसन का कहना है कि यह आमतौर पर ऐसा कुछ दिखता हैः बैक-टू-बैक कसरत (जिसे अक्सर 'डबल' या ' ईंट '), जिसमें 40 से 50 मील की बाइक की सवारी होती है, उसके बाद 10 से 12 मील की दौड़ होती है।
लंबी दौड़ के साथ, हैरिसन कहते हैं, जब वास्तविक प्रशिक्षण होता है तो ओलंपिक दूरी योजना से आपको एकमात्र बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा। सोमवार से शुक्रवार तक आपका शेड्यूल काफी समान रहता है, लेकिन सप्ताहांत में आपके पास बहुत अधिक भारी प्रशिक्षण भार होगा। हैरिसन का कहना है कि आपका ठेठ सप्ताहांत इस तरह दिखेगाः शनिवार -50 से 60 मील की दूरी पर एक लंबी बाइक की सवारी - इसके बाद एक संक्रमण चलाना-आपकी सवारी के बाद सीधे 20 मिनट का रन आसान हो गया। (कुल समयः लगभग 4 घंटे, इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी तेजी से बाइक लगाते हैं।) फिर आप रविवार को अपना लंबा रन हिट करेंगे, जो आम तौर पर लगभग 15 से 16 मील लंबा होता है। (यह 10-मिनट-प्रति-मील की गति पर लगभग 2.5 घंटे है।)
आयरनमैन दिनचर्या आधे आयरनमैन प्रशिक्षण के समान काम करती है, सिवाय इसके कि आपकी दूरी लंबी है। यदि यह आपका पहला आयरनमैन है, तो हैरिसन कहते हैं, "जब आप अपने प्रशिक्षण की चोटी पर हों तो सिमुलेशन कसरत में निचोड़ना हमेशा अच्छा विचार है। इसका मतलब है कि आप एक घंटे लंबी तैरना पूरा करेंगे, इसके बाद 100 मील की सवारी के बाद, और 8 से 9 मील की दौड़ के साथ शीर्ष पर बंद हो जाएगा। और यह आपके सबसे लंबे समय तक कसरत के रूप में गिना जाता है क्योंकि आप एक दिन में सभी तीन घटकों को मार रहे हैं।
तो आप कब जानते हैं कि आप अगले स्तर तक जाने के लिए तैयार हैं? हैरिसन की सलाह सरल हैः नीचे शुरू करें और अपना रास्ता तैयार करें। हैरिसन कहते हैं, एक बार जब आप अपने बेल्ट के नीचे कम से कम एक स्प्रिंट प्राप्त कर लेंगे, तो आपको यह जानने का अनुभव होगा कि आप अगली दूरी तक चढ़ाई का आनंद लेंगे या नहीं। फिर ओलंपिक, आधे आयरनमैन पर जाएं, और जब तक आपके पास पर्याप्त समय न हो और कोई नाराज चोट न हो - आयरनमैन।
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जब आप किसी को बताते हैं कि आप ट्रायथलॉन कर रहे हैं, तो आप शायद सुनेंगे, "हे दोस्त, एक आयरनमैन? तीव्र!" लेकिन एक आयरनमैन वास्तव में दौड़ की एक विशिष्ट दूरी है और सबसे लंबा है। वास्तव में चार आम ट्रायथलॉन दूरी हैं। इससे पहले कि आप पहले प्रशिक्षण में सिर कूद सकें, आपको वह चुनना होगा जिसे आप ढूंढना चाहते हैं। यही कारण है कि हम शिकागो क्षेत्र से जेनिफर हैरिसन-पेशेवर यूएसएटी लेवल II प्रमाणित ट्रायथलॉन कोच के संपर्क में आ गए- मूलभूत बातों को तोड़ने के लिए कि प्रत्येक व्यक्ति को दौड़ के लिए साइन अप करने से पहले पता होना चाहिए। हैरिसन कहते हैं, "ट्रायथलॉन के कई अलग-अलग बदलाव हैं, लेकिन आपके क्लासिक चार स्प्रिंट दूर हैं, ओलंपिक दूरी, आधा आयरनमैन , और पूर्ण आयरनमैन " हैरिसन कहते हैं। प्रत्येक की सामान्य दूरी यहां दी गई हैः जो आपके लिए सही है? निर्णय लेने का तरीका यहां दिया गया है। यदि आप एक स्प्रिंट ट्रायथलॉन के लिए साइन अप करने जा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि प्रशिक्षण के लिए आपको हर सप्ताह कम से कम पाँच से छः घंटाटे शेष रहें, हैरिसन कहते हैं। और वास्तविक कसरत के लिए, हैरिसन का कहना है कि आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप एक या दो सत्र-प्रति खेल-साप्ताहिक कर रहे हैं। तो इसका मतलब है कि कम से कम दो बाइक वर्कआउट्स, दो स्विम, और प्रति सप्ताह दो रन। जैसे-जैसे दौड़ प्रति दौड़ बढ़ती है, "प्रति सप्ताह अनुमानित घंटे" को बॉलपार्क करना उतना आसान नहीं है जितना आपको इसमें रखना होगा क्योंकि हर किसी के कार्यसूची अलग-अलग होते हैं। लेकिन आत्मविश्वास से दौड़ में जाने के लिए, आपको कम से कम एक मील तैरने में सक्षम होना चाहिए, बाइक पर कम से कम चालीस से पचास मील बाइक, और बारह मील की दौड़ पूरी करें, हैरिसन कहते हैं। और आपको यह पता करने के लिए कि आपका सबसे लंबा कसरत कैसा दिखता है, हैरिसन का कहना है कि यह आमतौर पर ऐसा कुछ दिखता हैः बैक-टू-बैक कसरत , जिसमें चालीस से पचास मील की बाइक की सवारी होती है, उसके बाद दस से बारह मील की दौड़ होती है। लंबी दौड़ के साथ, हैरिसन कहते हैं, जब वास्तविक प्रशिक्षण होता है तो ओलंपिक दूरी योजना से आपको एकमात्र बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा। सोमवार से शुक्रवार तक आपका शेड्यूल काफी समान रहता है, लेकिन सप्ताहांत में आपके पास बहुत अधिक भारी प्रशिक्षण भार होगा। हैरिसन का कहना है कि आपका ठेठ सप्ताहांत इस तरह दिखेगाः शनिवार -पचास से साठ मील की दूरी पर एक लंबी बाइक की सवारी - इसके बाद एक संक्रमण चलाना-आपकी सवारी के बाद सीधे बीस मिनट का रन आसान हो गया। फिर आप रविवार को अपना लंबा रन हिट करेंगे, जो आम तौर पर लगभग पंद्रह से सोलह मील लंबा होता है। आयरनमैन दिनचर्या आधे आयरनमैन प्रशिक्षण के समान काम करती है, सिवाय इसके कि आपकी दूरी लंबी है। यदि यह आपका पहला आयरनमैन है, तो हैरिसन कहते हैं, "जब आप अपने प्रशिक्षण की चोटी पर हों तो सिमुलेशन कसरत में निचोड़ना हमेशा अच्छा विचार है। इसका मतलब है कि आप एक घंटे लंबी तैरना पूरा करेंगे, इसके बाद एक सौ मील की सवारी के बाद, और आठ से नौ मील की दौड़ के साथ शीर्ष पर बंद हो जाएगा। और यह आपके सबसे लंबे समय तक कसरत के रूप में गिना जाता है क्योंकि आप एक दिन में सभी तीन घटकों को मार रहे हैं। तो आप कब जानते हैं कि आप अगले स्तर तक जाने के लिए तैयार हैं? हैरिसन की सलाह सरल हैः नीचे शुरू करें और अपना रास्ता तैयार करें। हैरिसन कहते हैं, एक बार जब आप अपने बेल्ट के नीचे कम से कम एक स्प्रिंट प्राप्त कर लेंगे, तो आपको यह जानने का अनुभव होगा कि आप अगली दूरी तक चढ़ाई का आनंद लेंगे या नहीं। फिर ओलंपिक, आधे आयरनमैन पर जाएं, और जब तक आपके पास पर्याप्त समय न हो और कोई नाराज चोट न हो - आयरनमैन।
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मनोरंजन डेस्क. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता John abraham की हिट फिल्म 'सत्यमेव जयते (satyameva jayate)' का सीक्वेल अगले साल गांधी जयंती यानि कि 2 अक्टूबर को रिलीज होगी। हाल ही में जॉन ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी।
अब इस इस फिल्म का पहला पोस्टर भी सामने आ चुका है। इस पोस्टर को फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें जॉन का लुक बहुत जबरदस्त लग रहा है। फिल्म में दिव्या खोसला कुमार भी हैं, जो निर्माता भूषण कुमार की पत्नी हैं।
इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में जॉन के साथ काम करने के बारे में दिव्या ने हाल ही में न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा था, "मैं जॉन और (निर्देशक) मिलाप जवेरी के प्रति वाकई शुक्रगुजार हूं, उन्होंने अपनी फिल्म में फीमेल लीड के तौर पर मुझे कास्ट करने का निश्चय किया।
मुझे लगता है कि यह मेरे लिए एक काफी बड़ा मौका है। पहले मैंने निर्देशन किया है, लेकिन अभी पिछले कुछ समय से मैं एक्टिंग में वापस आने का सोच रही थी।
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मनोरंजन डेस्क. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता John abraham की हिट फिल्म 'सत्यमेव जयते ' का सीक्वेल अगले साल गांधी जयंती यानि कि दो अक्टूबर को रिलीज होगी। हाल ही में जॉन ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी। अब इस इस फिल्म का पहला पोस्टर भी सामने आ चुका है। इस पोस्टर को फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें जॉन का लुक बहुत जबरदस्त लग रहा है। फिल्म में दिव्या खोसला कुमार भी हैं, जो निर्माता भूषण कुमार की पत्नी हैं। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में जॉन के साथ काम करने के बारे में दिव्या ने हाल ही में न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा था, "मैं जॉन और मिलाप जवेरी के प्रति वाकई शुक्रगुजार हूं, उन्होंने अपनी फिल्म में फीमेल लीड के तौर पर मुझे कास्ट करने का निश्चय किया। मुझे लगता है कि यह मेरे लिए एक काफी बड़ा मौका है। पहले मैंने निर्देशन किया है, लेकिन अभी पिछले कुछ समय से मैं एक्टिंग में वापस आने का सोच रही थी।
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वॉट्सऐप कॉल का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। कई यूजर्स इस पर की गई कॉल्स को रिकॉर्ड भी करना चाहते है। वैसे तो वॉट्सऐप ऐसा कोई फीचर नहीं देता है। वॉट्सऐप पर आपको वीडियो और ऑडियो कॉलिंग दोनों का मौका मिलता है। लेकिन आप दूसरे तरीकों से कॉल को रिकॉर्ड कर सकते हैं। बात रिकॉर्डिंग की करें तो आपको डिफॉल्ट रूप से कोई सुविधा नहीं मिलती है। एंड्रॉयड पर वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्ड करना आसान है। इसके लिए आपको Call Recorder: Cube ACR ऐप डाउनलोड करना होगा।
हालांकि, यह ऐप सभी फोन्स पर काम नहीं करता है। इसके लिए आपको ऐप के सपोर्ट पेज पर जाना चाहिए, जिससे पता चल सके कि आपका फोन इस ऐप को सपोर्ट करेगा या नहीं। अगर आपका फोन इस ऐप को सपोर्ट करता है, तो आप वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्ड कर सकते हैं।
पहले गूगल प्ले स्टोर पर Cube Call ऐप्लिकेशन सर्च करना होगा। ऐप के मिलते ही आपको इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा।
ऐप इंस्टॉल होने के बाद यूजर्स को इसे ओपन करना होगा और इसे वॉट्सऐप पर स्विच करना होगा।
अब आपको वॉट्सऐप कॉल करते हुए Cube Call विजिट नजर आएगा ।
अगर विजिट नहीं दिख रहा है, तो आपको Cube Call की सेटिंग में वापस जाना होगा और यहां Force वॉइप call को चुनना होगा।
इसके बाद आपको दोबारा कॉल करनी होगी और आपको विजिट नजर आने लगेगा।
अगर इसके बाद भी आपको एरर नजर आता है, तो इसका मतलब है कि ये ऐप आप आप केफोने को सपोर्ट नहीं कर रहा।
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वॉट्सऐप कॉल का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। कई यूजर्स इस पर की गई कॉल्स को रिकॉर्ड भी करना चाहते है। वैसे तो वॉट्सऐप ऐसा कोई फीचर नहीं देता है। वॉट्सऐप पर आपको वीडियो और ऑडियो कॉलिंग दोनों का मौका मिलता है। लेकिन आप दूसरे तरीकों से कॉल को रिकॉर्ड कर सकते हैं। बात रिकॉर्डिंग की करें तो आपको डिफॉल्ट रूप से कोई सुविधा नहीं मिलती है। एंड्रॉयड पर वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्ड करना आसान है। इसके लिए आपको Call Recorder: Cube ACR ऐप डाउनलोड करना होगा। हालांकि, यह ऐप सभी फोन्स पर काम नहीं करता है। इसके लिए आपको ऐप के सपोर्ट पेज पर जाना चाहिए, जिससे पता चल सके कि आपका फोन इस ऐप को सपोर्ट करेगा या नहीं। अगर आपका फोन इस ऐप को सपोर्ट करता है, तो आप वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्ड कर सकते हैं। पहले गूगल प्ले स्टोर पर Cube Call ऐप्लिकेशन सर्च करना होगा। ऐप के मिलते ही आपको इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा। ऐप इंस्टॉल होने के बाद यूजर्स को इसे ओपन करना होगा और इसे वॉट्सऐप पर स्विच करना होगा। अब आपको वॉट्सऐप कॉल करते हुए Cube Call विजिट नजर आएगा । अगर विजिट नहीं दिख रहा है, तो आपको Cube Call की सेटिंग में वापस जाना होगा और यहां Force वॉइप call को चुनना होगा। इसके बाद आपको दोबारा कॉल करनी होगी और आपको विजिट नजर आने लगेगा। अगर इसके बाद भी आपको एरर नजर आता है, तो इसका मतलब है कि ये ऐप आप आप केफोने को सपोर्ट नहीं कर रहा।
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Gangster Lawrence Bishnoi: बठिंडा जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) की तबीयत खराब हो गई है. सोमवार रात बिश्नोई को फरीदकोट मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया. वकीलों के मुताबिक बिश्नोई के पेट में इन्फेक्शन है और उसे बुखार आ रहा है. बुखार ना उतरने के कारण उसे फरीदकोट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
विपक्षी एकताः 2019 में एक दूसरे के खिलाफ लड़े, अब कैसे करेंगे सीटों पर समझौता?
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Gangster Lawrence Bishnoi: बठिंडा जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई की तबीयत खराब हो गई है. सोमवार रात बिश्नोई को फरीदकोट मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया. वकीलों के मुताबिक बिश्नोई के पेट में इन्फेक्शन है और उसे बुखार आ रहा है. बुखार ना उतरने के कारण उसे फरीदकोट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. विपक्षी एकताः दो हज़ार उन्नीस में एक दूसरे के खिलाफ लड़े, अब कैसे करेंगे सीटों पर समझौता?
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नई दिल्लीः देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है. बीते 24 घंटे में 14516 नए मामले दर्ज किए गए हैं. एक दिन में ये कोविड-19 के सबसे अधिक मामले हैं. इसी के साथ संक्रमितों की तादाद चार लाख के करीब हो गई है. देश में संक्रमितों की कुल तादाद 3,95,048 हो गई है, वहीं मौत के 375 नए मामलों के साथ अब तक 12,948 लोग इस संक्रमण के कारण जान गंवा चुके हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आज सुबह आठ बजे जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्वस्थ हो रहे रोगियों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है और अब तक 2,13,830 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, वहीं 1,68,269 मरीजों का अब भी उपचार चल रहा है. एक रोगी देश छोड़कर जा चुका है. एक अधिकारी ने कहा, "इस तरह अब तक लगभग 54. 12 संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं. "
संक्रमण के कुल मामलों में विदेशी भी शामिल हैं. देश में लगातार नौवें दिन संक्रमण के 10 हजार से अधिक केस रिपोर्ट किए गए हैं. एक जून से 20 जून के बीच देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण के दो लाख से अधिक केस सामने आए हैं. महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में सबसे अधिक इजाफा देखा गया है.
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नई दिल्लीः देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है. बीते चौबीस घंटाटे में चौदह हज़ार पाँच सौ सोलह नए मामले दर्ज किए गए हैं. एक दिन में ये कोविड-उन्नीस के सबसे अधिक मामले हैं. इसी के साथ संक्रमितों की तादाद चार लाख के करीब हो गई है. देश में संक्रमितों की कुल तादाद तीन,पचानवे,अड़तालीस हो गई है, वहीं मौत के तीन सौ पचहत्तर नए मामलों के साथ अब तक बारह,नौ सौ अड़तालीस लोग इस संक्रमण के कारण जान गंवा चुके हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आज सुबह आठ बजे जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्वस्थ हो रहे रोगियों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है और अब तक दो,तेरह,आठ सौ तीस लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, वहीं एक,अड़सठ,दो सौ उनहत्तर मरीजों का अब भी उपचार चल रहा है. एक रोगी देश छोड़कर जा चुका है. एक अधिकारी ने कहा, "इस तरह अब तक लगभग चौवन. बारह संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं. " संक्रमण के कुल मामलों में विदेशी भी शामिल हैं. देश में लगातार नौवें दिन संक्रमण के दस हजार से अधिक केस रिपोर्ट किए गए हैं. एक जून से बीस जून के बीच देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण के दो लाख से अधिक केस सामने आए हैं. महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में सबसे अधिक इजाफा देखा गया है.
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रायपुर। Raipur Local Editorial Rice Scam राज्य में गरीबों के चावल पर राजनीति आरंभ हो गई है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत राज्य को केंद्र से मिले चावल को गरीबों को न बांटकर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला करने का आरोप लगाया है। हालांकि मंत्री अमरजीत भगत ने यह कहकर आरोपों को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार से जितना चावल आया है, उसे बांटा गया है। जाहिर है उनके इस उत्तर से तो विपक्ष को संतुष्ट होना ही नहीं था। कौशिक ने कहा कि केंद्र से भेजे गए एक करोड़ 50 लाख 63 हजार टन चावल का यहां सही ढंग से वितरण नहीं हुआ। विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सरकार गरीबोें का चावल खा गई। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने सदन की कमेटी से इसकी जांच कराने की मांग की।
इतना तो तय है कि गरीबों के चावल के मामले में दिए जा रहे तर्कों में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों में से कोई एक ही सही है। अगर यह सब सिर्फ राजनीति के लिए किया जा रहा है, तो कहीं से भी उचित नहीं है। स्वार्थ सिद्धि के लिए जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना राजनीति के स्तर को गिराता है। दरअसल, किसी भी योजना को बनाने का उद्देश्य बहुत पवित्र होता है, लेकिन जब इसमें राजनीति प्रदेश करने लगती है तो इसकी पवित्रता भंग होने लगती है। कोरोना महामारी के दौरान देश के किसी भी नागरिक को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी। इसमें गरीबों या जरूरतमंदों को पांच किलो अतिरिक्त मुफ्त अनाज दिया जाता है। सरकार की इस योजना के तहत देश के लगभग 80 करोड़ गरीब लोगों को निश्शुल्क राशन दिया जाना है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसमें घोटाले के आरोप लग रहे हैं।
देश में ऐसी बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके क्रियान्वयन को लेकर लगातार उंगलियां उठती रहती हैं। हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगते रहते हैं। जब देश की एक बड़ी आबादी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो तो उनके हक पर सेंध लगाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। देश की जनता को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राजनीति में ऐसे उदाहरण कम नहीं हैं, जब जनता का हक मारने वालों को अंततः सलाखों के पीछे जाना पड़ा हो। धुआं उठा है तो निश्चित रूप से चिंगारी भी कहीं न कहीं लगी ही होगी। और यदि ऐसा नहीं है तो अपने ऊपर लगे दाग को साफ करने की जिम्मेदारी भी सत्तापक्ष की ही है। आशा की जानी चाहिए कि सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने से पीछे नहीं हटेगी, ताकि दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।
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रायपुर। Raipur Local Editorial Rice Scam राज्य में गरीबों के चावल पर राजनीति आरंभ हो गई है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत राज्य को केंद्र से मिले चावल को गरीबों को न बांटकर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला करने का आरोप लगाया है। हालांकि मंत्री अमरजीत भगत ने यह कहकर आरोपों को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार से जितना चावल आया है, उसे बांटा गया है। जाहिर है उनके इस उत्तर से तो विपक्ष को संतुष्ट होना ही नहीं था। कौशिक ने कहा कि केंद्र से भेजे गए एक करोड़ पचास लाख तिरेसठ हजार टन चावल का यहां सही ढंग से वितरण नहीं हुआ। विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सरकार गरीबोें का चावल खा गई। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने सदन की कमेटी से इसकी जांच कराने की मांग की। इतना तो तय है कि गरीबों के चावल के मामले में दिए जा रहे तर्कों में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों में से कोई एक ही सही है। अगर यह सब सिर्फ राजनीति के लिए किया जा रहा है, तो कहीं से भी उचित नहीं है। स्वार्थ सिद्धि के लिए जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना राजनीति के स्तर को गिराता है। दरअसल, किसी भी योजना को बनाने का उद्देश्य बहुत पवित्र होता है, लेकिन जब इसमें राजनीति प्रदेश करने लगती है तो इसकी पवित्रता भंग होने लगती है। कोरोना महामारी के दौरान देश के किसी भी नागरिक को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी। इसमें गरीबों या जरूरतमंदों को पांच किलो अतिरिक्त मुफ्त अनाज दिया जाता है। सरकार की इस योजना के तहत देश के लगभग अस्सी करोड़ गरीब लोगों को निश्शुल्क राशन दिया जाना है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसमें घोटाले के आरोप लग रहे हैं। देश में ऐसी बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके क्रियान्वयन को लेकर लगातार उंगलियां उठती रहती हैं। हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगते रहते हैं। जब देश की एक बड़ी आबादी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो तो उनके हक पर सेंध लगाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। देश की जनता को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राजनीति में ऐसे उदाहरण कम नहीं हैं, जब जनता का हक मारने वालों को अंततः सलाखों के पीछे जाना पड़ा हो। धुआं उठा है तो निश्चित रूप से चिंगारी भी कहीं न कहीं लगी ही होगी। और यदि ऐसा नहीं है तो अपने ऊपर लगे दाग को साफ करने की जिम्मेदारी भी सत्तापक्ष की ही है। आशा की जानी चाहिए कि सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने से पीछे नहीं हटेगी, ताकि दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।
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आगरा(ब्यूरो)। चातुर्मास कहां किया जाए, यह गुरु की आज्ञा पर निर्भर करता है। गुरु आचार्य विद्या सागर महाराज का आदेश आगरा में चातुर्मास करने का था। गुरुदेव का आशीर्वाद और आगरावासियों का पुण्य है जो आज चातुर्मास की स्थापना का स्वर्णिम अवसर आया है।
शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, हरीपर्वत में सोमवार को आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि सुधा सागर महाराज ने धर्मसभा में यह प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि जहां चातुर्मास होता है, वहां एक दिन की मुनिश्री की अगवानी होती है। आगरा वालों ने दो दिन की अगवानी करके सभी को पीछे छोड़ दिया है। साधु के साथ-साथ श्रावक का भी चातुर्मास हो तो चातुर्मास सफल हो जाता है। साधु का प्रवचन स्वयं के लाभ के लिए नहीं, बल्कि श्रावक के लाभ के लिए होता है। आप लोग प्रवचन को उपयोग में लाएं तो मेरा प्रवचन देना सार्थक होगा। धर्मसभा से पूर्व मुनिश्री सुधा सागर महाराज के वर्षायोग को कलश स्थापना की गई।
मुख्य कलश व रजत ध्वज स्थापित करने का सौभाग्य प्रदीप जैन पीएनसी, नवीन जैन, चक्रेश जैन, योगेश जैन परिवार को मिला। दूसरा कलश पन्नालाल बैनाड़ा, तीसरा हीरालाल बैनाड़ा, चौथा नीरज जैन, पांचवां निर्मल जैन मोट््या के परिवार ने स्थापित किया। चातुर्मास की अखंड ज्योति प्राप्त करने का सौभाग्य सुखपाल परिवार को मिला। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य योगेंद्र विनोद छाबड़ा, हस्तिनापुर खेकड़ा व पहाडिय़ा परिवार, जयपुर वालों को मिला। जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य अलवर के जयंती परिवार को मिला।
सोमवार दोपहर दो बजे से शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। भक्तों ने संगीत पर नृत्य करते हुए गुरु की पूजा की। मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा, जयपुर, कोटा, ललितपुर, उदयपुर, झांसी, दिल्ली, अलवर, अजमेर, नासिक, गाजियाबाद अलीगढ़, फिरोजाबाद, टूंडला, इटावा, कानपुर, प्रयागराज, सोनीपत, रोहतक, पानीपत आदि शहरों से आए पांच हजार भक्तों ने गुरु भक्ति कर पुण्य अर्जित किया। दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति, आगरा दिगंबर जैन परिषद, दिगंबर जैन शिक्षा समिति ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, प्रदीप जैन पीएनसी, जितेंद्र जैन, अखिल बरौलिया, मनोज जैन बाकलीवाल, जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन ठेकेदार, राकेश जैन पर्दे वाले, पार्षद राकेश जैन, पुष्पेंद्र जैन, दिलीप जैन, आशीष जैन मोनू समेत अन्य मौजूद रहे।
आगरा. गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ के वर्षायोग को मंगल कलश स्थापना सोमवार को प्रतापपुरा चौराहा स्थित दि रमाना ग्रांड में भक्तिभाव से की गई। आर्यिका आर्षमति माताजी ने श्रद्धालुओं से कहा कि चातुर्मास का मंगल कलश तो स्थापित कर दिया, अब आपको तप और संयम की ओर बढऩा चाहिए। तभी यह चातुर्मास सफल और ऐतिहासिक होगा।
ज्ञानार्ष वर्षायोग समिति ओल्ड ईदगाह कालोनी द्वारा आयोजित वर्षा योग मंगल कलश स्थापना समारोह व गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। नैंसी जैन व प्रियांशी जैन ने नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। भक्तों ने समाधिस्थ आचार्य ज्ञान सागर महाराज के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन किया। गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी को भक्तों ने शास्त्र, वस्त्र भेंट किए और पाद प्रक्षालन किया। आगरा के साथ ही ग्वालियर, मनिया, मुरार, मुरैना, हाथरस, धौलपुर से आए भक्तों ने गुरु मां के चरणों में श्रीफल भेंट किए। मंगल चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में पहला कलश लेने का सौभाग्य केदारनाथ, विनय कुमार जैन, दूसरा कलश नायक परिवार, तीसरा कलश रङ्क्षवद्र कुमार जैन, चौथा कलश रिखबचंद्र अमित कुमार जैन, पांचवां कलश संजय कुमार, अजय कुमार जैन को मिला। ध्वजारोहण राजेश जैन सेठी के परिवार को मिला। विधानाचार्य नितिन भैया के निर्देशन में कलश स्थापित किए गए। भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालुओं ने नृत्यमय भक्ति की। संचालन पुनीत जैन व सोनू जैन ने किया। मंदिर अध्यक्ष रिखबंचद जैन, मंत्री अतुल जैन, अजय जैन, विकास जैन, अमित कुमार, बॉबी जैन, राजकुमार जैन, राहुल जैन, शुभम जैन आदि मौजूद रहे।
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आगरा। चातुर्मास कहां किया जाए, यह गुरु की आज्ञा पर निर्भर करता है। गुरु आचार्य विद्या सागर महाराज का आदेश आगरा में चातुर्मास करने का था। गुरुदेव का आशीर्वाद और आगरावासियों का पुण्य है जो आज चातुर्मास की स्थापना का स्वर्णिम अवसर आया है। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, हरीपर्वत में सोमवार को आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि सुधा सागर महाराज ने धर्मसभा में यह प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि जहां चातुर्मास होता है, वहां एक दिन की मुनिश्री की अगवानी होती है। आगरा वालों ने दो दिन की अगवानी करके सभी को पीछे छोड़ दिया है। साधु के साथ-साथ श्रावक का भी चातुर्मास हो तो चातुर्मास सफल हो जाता है। साधु का प्रवचन स्वयं के लाभ के लिए नहीं, बल्कि श्रावक के लाभ के लिए होता है। आप लोग प्रवचन को उपयोग में लाएं तो मेरा प्रवचन देना सार्थक होगा। धर्मसभा से पूर्व मुनिश्री सुधा सागर महाराज के वर्षायोग को कलश स्थापना की गई। मुख्य कलश व रजत ध्वज स्थापित करने का सौभाग्य प्रदीप जैन पीएनसी, नवीन जैन, चक्रेश जैन, योगेश जैन परिवार को मिला। दूसरा कलश पन्नालाल बैनाड़ा, तीसरा हीरालाल बैनाड़ा, चौथा नीरज जैन, पांचवां निर्मल जैन मोट््या के परिवार ने स्थापित किया। चातुर्मास की अखंड ज्योति प्राप्त करने का सौभाग्य सुखपाल परिवार को मिला। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य योगेंद्र विनोद छाबड़ा, हस्तिनापुर खेकड़ा व पहाडिय़ा परिवार, जयपुर वालों को मिला। जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य अलवर के जयंती परिवार को मिला। सोमवार दोपहर दो बजे से शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। भक्तों ने संगीत पर नृत्य करते हुए गुरु की पूजा की। मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा, जयपुर, कोटा, ललितपुर, उदयपुर, झांसी, दिल्ली, अलवर, अजमेर, नासिक, गाजियाबाद अलीगढ़, फिरोजाबाद, टूंडला, इटावा, कानपुर, प्रयागराज, सोनीपत, रोहतक, पानीपत आदि शहरों से आए पांच हजार भक्तों ने गुरु भक्ति कर पुण्य अर्जित किया। दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति, आगरा दिगंबर जैन परिषद, दिगंबर जैन शिक्षा समिति ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, प्रदीप जैन पीएनसी, जितेंद्र जैन, अखिल बरौलिया, मनोज जैन बाकलीवाल, जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन ठेकेदार, राकेश जैन पर्दे वाले, पार्षद राकेश जैन, पुष्पेंद्र जैन, दिलीप जैन, आशीष जैन मोनू समेत अन्य मौजूद रहे। आगरा. गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ के वर्षायोग को मंगल कलश स्थापना सोमवार को प्रतापपुरा चौराहा स्थित दि रमाना ग्रांड में भक्तिभाव से की गई। आर्यिका आर्षमति माताजी ने श्रद्धालुओं से कहा कि चातुर्मास का मंगल कलश तो स्थापित कर दिया, अब आपको तप और संयम की ओर बढऩा चाहिए। तभी यह चातुर्मास सफल और ऐतिहासिक होगा। ज्ञानार्ष वर्षायोग समिति ओल्ड ईदगाह कालोनी द्वारा आयोजित वर्षा योग मंगल कलश स्थापना समारोह व गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। नैंसी जैन व प्रियांशी जैन ने नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। भक्तों ने समाधिस्थ आचार्य ज्ञान सागर महाराज के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन किया। गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी को भक्तों ने शास्त्र, वस्त्र भेंट किए और पाद प्रक्षालन किया। आगरा के साथ ही ग्वालियर, मनिया, मुरार, मुरैना, हाथरस, धौलपुर से आए भक्तों ने गुरु मां के चरणों में श्रीफल भेंट किए। मंगल चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में पहला कलश लेने का सौभाग्य केदारनाथ, विनय कुमार जैन, दूसरा कलश नायक परिवार, तीसरा कलश रङ्क्षवद्र कुमार जैन, चौथा कलश रिखबचंद्र अमित कुमार जैन, पांचवां कलश संजय कुमार, अजय कुमार जैन को मिला। ध्वजारोहण राजेश जैन सेठी के परिवार को मिला। विधानाचार्य नितिन भैया के निर्देशन में कलश स्थापित किए गए। भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालुओं ने नृत्यमय भक्ति की। संचालन पुनीत जैन व सोनू जैन ने किया। मंदिर अध्यक्ष रिखबंचद जैन, मंत्री अतुल जैन, अजय जैन, विकास जैन, अमित कुमार, बॉबी जैन, राजकुमार जैन, राहुल जैन, शुभम जैन आदि मौजूद रहे।
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आंगनबाडी यूनियन ने सोमवार को विभिन्न सवालों को लेकर काला दिवस मनाया। साथ ही सेविका और सहायिकाओं ने काली पोशाक पहनकर रैली निकाली और समाहारणालय के सामने प्रदर्शन किया। जबकि 745 आंगनबाड़ी केन्द्रों में तालाबंदी कर एक दिनी हड़ताल पर रही। इन सभी की मुख्य मांगे 45 वें और 46 वें भारतीय श्रम सम्मेलनों की सिफारिशों को लागू कर सेविका ,सहायिका को 26 हजार वेतन, ग्रेच्युटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने, न्यूनतम मजदूरी का भुगतान, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने, ईएसआई, पीएफ और ग्रेच्युटी सहित पेंशन, सामाजिक सुरक्षा देने आदि शामिल हैं। इसके पूर्व झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन के बैनर तले जिलेभर की सैकड़ों सेविका, सहायिकाओं ने सब्जी मंडी कोडरमा बाजार से जुलूस निकाली, जो रांची- पटना रोड हुए समाहरणालय पहुंचकर प्रदर्शन और सभा में तब्दील हो गयी। जुलूस में आईसीडीएस का निजीकरण पर रोक लगाओ, नौ हजार में दम नहीं- 26 हजार से कम नहीं, बकाया पोषाहार मानदेय का भुगतान करो आदि नारे लगाए। सभा की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शोभा प्रसाद और संचालन जिला सचिव वर्षा रानी ने किया। सभा को सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान, जिला संयोजक रमेश प्रजापति, आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी, सुरेंद्र पाण्डेय ने संबोधित किया। मुख्य वक्ता सह सीटू नेता संजय पासवान ने कहा कि 27 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,सहायिकाएं, जो छह साल से कम आयु के लगभग आठ करोड़ बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और ईसीसीई की बुनियादी सेवाएं देती हैं। लेकिन न्यूनतम मजदूरी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ यहां तक कि श्रमिक का दर्जा तक नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी नेत्री मीरा देवी ने कहा कि छह माह से पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र चलाने में समस्या आ रही है। यदि 15 दिनों के अंदर बकाया पोषाहार राशि, मानदेय का भुगतान नहीं किया, तो बेमियादी हड़ताल के लिए बाध्य होगें।
प्रदर्शन के बाद केन्द्रीय मांगों से संबंधित मांग पत्र प्रधानमंत्री के नाम डीसी को सौंपा गया। साथ ही नवम्बर 2022 से बकाया मानदेय, एसीएसटी केंद्र में जनवरी समेत अन्य केन्द्रों में मार्च महीने से बकाया पोषाहार राशि का भुगतान करने, बिना मोबाइल और डेटा रिचार्ज के पोषण ट्रैकर ऐप पर काम के लिए मजबूर न करने, आंगनबाड़ी केंद्र में प्रति माह गैस सिलेंडर रिफिलिंग करने, प्रथम तिमाही का चावल देने, लाभुकों का आधार सिडिंग न होने पर पोषाहार, मानदेय की कटौती पर रोक लगाने आदि मांगों को लेकर डीसी से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिलकर वार्ता किया।
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आंगनबाडी यूनियन ने सोमवार को विभिन्न सवालों को लेकर काला दिवस मनाया। साथ ही सेविका और सहायिकाओं ने काली पोशाक पहनकर रैली निकाली और समाहारणालय के सामने प्रदर्शन किया। जबकि सात सौ पैंतालीस आंगनबाड़ी केन्द्रों में तालाबंदी कर एक दिनी हड़ताल पर रही। इन सभी की मुख्य मांगे पैंतालीस वें और छियालीस वें भारतीय श्रम सम्मेलनों की सिफारिशों को लागू कर सेविका ,सहायिका को छब्बीस हजार वेतन, ग्रेच्युटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने, न्यूनतम मजदूरी का भुगतान, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने, ईएसआई, पीएफ और ग्रेच्युटी सहित पेंशन, सामाजिक सुरक्षा देने आदि शामिल हैं। इसके पूर्व झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका यूनियन के बैनर तले जिलेभर की सैकड़ों सेविका, सहायिकाओं ने सब्जी मंडी कोडरमा बाजार से जुलूस निकाली, जो रांची- पटना रोड हुए समाहरणालय पहुंचकर प्रदर्शन और सभा में तब्दील हो गयी। जुलूस में आईसीडीएस का निजीकरण पर रोक लगाओ, नौ हजार में दम नहीं- छब्बीस हजार से कम नहीं, बकाया पोषाहार मानदेय का भुगतान करो आदि नारे लगाए। सभा की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शोभा प्रसाद और संचालन जिला सचिव वर्षा रानी ने किया। सभा को सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान, जिला संयोजक रमेश प्रजापति, आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी, सुरेंद्र पाण्डेय ने संबोधित किया। मुख्य वक्ता सह सीटू नेता संजय पासवान ने कहा कि सत्ताईस लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,सहायिकाएं, जो छह साल से कम आयु के लगभग आठ करोड़ बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और ईसीसीई की बुनियादी सेवाएं देती हैं। लेकिन न्यूनतम मजदूरी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ यहां तक कि श्रमिक का दर्जा तक नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी नेत्री मीरा देवी ने कहा कि छह माह से पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र चलाने में समस्या आ रही है। यदि पंद्रह दिनों के अंदर बकाया पोषाहार राशि, मानदेय का भुगतान नहीं किया, तो बेमियादी हड़ताल के लिए बाध्य होगें। प्रदर्शन के बाद केन्द्रीय मांगों से संबंधित मांग पत्र प्रधानमंत्री के नाम डीसी को सौंपा गया। साथ ही नवम्बर दो हज़ार बाईस से बकाया मानदेय, एसीएसटी केंद्र में जनवरी समेत अन्य केन्द्रों में मार्च महीने से बकाया पोषाहार राशि का भुगतान करने, बिना मोबाइल और डेटा रिचार्ज के पोषण ट्रैकर ऐप पर काम के लिए मजबूर न करने, आंगनबाड़ी केंद्र में प्रति माह गैस सिलेंडर रिफिलिंग करने, प्रथम तिमाही का चावल देने, लाभुकों का आधार सिडिंग न होने पर पोषाहार, मानदेय की कटौती पर रोक लगाने आदि मांगों को लेकर डीसी से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिलकर वार्ता किया।
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under water museam (फाइल फोटो)
जॉर्डन के अकाबा में दुनिया का पहला अंडरवाटर मिलिट्री म्यूजियम बनाया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार 19 सैन्य अवशेषों वाले एक अंडरवाटर म्यूजियम को आधिकारिक तौर पर अकाबा में लॉन्च किया गया है। यह लाल सागर में आठ फीट की गहराई में बना है।
सेना ने यहां युद्धक टैंक, सैन्य एंबुलेंस, हेलिकॉप्टर, युद्धक विमान, क्रेन और एंटी एयरक्राफ्ट समेत 19 तरह के सैन्य उपकरण रखे हैं। खास बात यह है कि इसे सिर्फ सात दिन में बनाकर तैयार किया गया है।
अकाबा स्पेशल इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (एएसईजेडए) ने बताया कि समय-समय पर यहां खास प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसका मकसद है कि लोग म्यूजियम आकर अलग महसूस करें। साथ ही लोग समुद्री जीवों के साथ सैन्य धरोहर को अलग अंदाज में देख सकें।
बताया गया है कि स्कैनिंग, फोटो खींचने और योजना बनाने के 30 दिन बाद, यह सुनिश्चित किया गया कि इस प्रक्रिया में समुद्री जीवन प्रभावित न हो। सतह से नीचे 15 से 20 मीटर दूरी पर आठ सैन्य अवशेषों को लगाया गया जबकि अन्य 11 को 20 से 28 मीटर की दूरी पर लगाया गया।
एएसईजेडए ने अपने बयान में कहा कि संबंधित अधिकारियों और संघों के सहयोग से समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव उपाय किए गए है।
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under water museam जॉर्डन के अकाबा में दुनिया का पहला अंडरवाटर मिलिट्री म्यूजियम बनाया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार उन्नीस सैन्य अवशेषों वाले एक अंडरवाटर म्यूजियम को आधिकारिक तौर पर अकाबा में लॉन्च किया गया है। यह लाल सागर में आठ फीट की गहराई में बना है। सेना ने यहां युद्धक टैंक, सैन्य एंबुलेंस, हेलिकॉप्टर, युद्धक विमान, क्रेन और एंटी एयरक्राफ्ट समेत उन्नीस तरह के सैन्य उपकरण रखे हैं। खास बात यह है कि इसे सिर्फ सात दिन में बनाकर तैयार किया गया है। अकाबा स्पेशल इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी ने बताया कि समय-समय पर यहां खास प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसका मकसद है कि लोग म्यूजियम आकर अलग महसूस करें। साथ ही लोग समुद्री जीवों के साथ सैन्य धरोहर को अलग अंदाज में देख सकें। बताया गया है कि स्कैनिंग, फोटो खींचने और योजना बनाने के तीस दिन बाद, यह सुनिश्चित किया गया कि इस प्रक्रिया में समुद्री जीवन प्रभावित न हो। सतह से नीचे पंद्रह से बीस मीटर दूरी पर आठ सैन्य अवशेषों को लगाया गया जबकि अन्य ग्यारह को बीस से अट्ठाईस मीटर की दूरी पर लगाया गया। एएसईजेडए ने अपने बयान में कहा कि संबंधित अधिकारियों और संघों के सहयोग से समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव उपाय किए गए है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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भोजपुरी सिनेमा के पॉवर स्टार पवन सिंह और सुपरस्टार रितेश पांडे का कोई भी गाना हो वह चाहे सुपर रोमांटिक हो या दर्द भरा उसके वीडियो को दर्शकों के द्वारा खूब पसंद किया जाता है. यूट्यूब पर तो इन दोनों ही सितारों के गाने हमेशा ट्रेंडिंग में होते हैं. यही हाल इन दोनों के हाल ही में रिलीज हुए गानों का भी है. कौन से है पवन सिंह और रितेश के वो लेटेस्ट गाने जो इस हफ्ते कर रहे हैं जबरदस्त ट्रेंड जानिए इस वीडियो में.
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भोजपुरी सिनेमा के पॉवर स्टार पवन सिंह और सुपरस्टार रितेश पांडे का कोई भी गाना हो वह चाहे सुपर रोमांटिक हो या दर्द भरा उसके वीडियो को दर्शकों के द्वारा खूब पसंद किया जाता है. यूट्यूब पर तो इन दोनों ही सितारों के गाने हमेशा ट्रेंडिंग में होते हैं. यही हाल इन दोनों के हाल ही में रिलीज हुए गानों का भी है. कौन से है पवन सिंह और रितेश के वो लेटेस्ट गाने जो इस हफ्ते कर रहे हैं जबरदस्त ट्रेंड जानिए इस वीडियो में.
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GORAKHPUR: त्योहार के सीजन में शहर में लोगों की भीड़ बढ़ेगी तो इसके साथ ही जाम की समस्या भी बढ़ती जाएगी। प्रशासन की तरफ से भी कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं होने के कारण त्योहार तक जाम झेलना मजबूरी है। सड़क किनारे दुर्गा पंडाल के सजने और बाजारों में भीड़ बढ़ने की वजह से ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है। मंगलवार को शहर के कई चौराहों पर लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। शहर की सड़कों पर दिनभर वाहन रेंगते रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि त्योहार में भीड़ को देखते हुए रुट डायवर्जन का इंतजाम किया जा रहा है।
दशहरा और दीपावली करीब होने से मार्केट में रौनक बढ़ने लगी है। नवरात्रि के शुभ मौके पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है। धीरे-धीरे बाजार में लोगों की आवक बढ़ती जाएगी। मेला के लिए मार्केट में फुटपाथ पर अतिरिक्त दुकानें लगने से ट्रैफिक सिकुड़ने लगा है। उधर कई जगहों पर सड़क किनारे दुर्गा पंडाल बनाए जाने से आधी सड़क पर आवागमन बंद हो गया है। चौराहों पर पंडाल होने से ट्रैफिक का प्रेशर बढ़ गया है। जिससे जाम से निजात के आसार नहीं दिख रहे।
स्टेशन रोड, मोहद्दीपुर, असुरन, बेतियाहाता, आजाद चौक, गोरखनाथ सहित कई जगहों पर पंडाल बनाए गए हैं। इस वजह से सड़क पर एक ओर की लेन भी बंद हो जा रही है। जिससे वन वे रोड पर ट्रैफिक का लोड बढ़ जा रहा है।
- भीड़ वाली जगहों पर फोर व्हीलर लेकर न जाएं।
- पार्किग के लिए निर्धारित जगह पर अपने वाहन खड़े करें।
- शहर में वन वे ट्रैफिक वाले रास्तों पर उसी हिसाब से चलें।
- चौराहों पर ट्रैफिक थमने पर धैर्य पूर्वक इंतजार करें।
- किसी भी जगह पर रांग साइड से निकलने की कोशिश न करें।
- घंटाघर, अलीनगर, बक्शीपुर जैसे जगहों पर पैदल ही मार्केट करने निकलें।
- रुट डायवर्जन पर अमल करें। बदले हुए रास्ते से ही चलें।
त्योहारी सीजन को देखते हुए पूरी तैयारी की गई है। सप्तमी से रात के समय शहर में बड़े वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक रहेगी। भीड़ वाले इलाकों में रूट डायवर्ट किया जाएगा।
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GORAKHPUR: त्योहार के सीजन में शहर में लोगों की भीड़ बढ़ेगी तो इसके साथ ही जाम की समस्या भी बढ़ती जाएगी। प्रशासन की तरफ से भी कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं होने के कारण त्योहार तक जाम झेलना मजबूरी है। सड़क किनारे दुर्गा पंडाल के सजने और बाजारों में भीड़ बढ़ने की वजह से ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है। मंगलवार को शहर के कई चौराहों पर लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। शहर की सड़कों पर दिनभर वाहन रेंगते रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि त्योहार में भीड़ को देखते हुए रुट डायवर्जन का इंतजाम किया जा रहा है। दशहरा और दीपावली करीब होने से मार्केट में रौनक बढ़ने लगी है। नवरात्रि के शुभ मौके पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है। धीरे-धीरे बाजार में लोगों की आवक बढ़ती जाएगी। मेला के लिए मार्केट में फुटपाथ पर अतिरिक्त दुकानें लगने से ट्रैफिक सिकुड़ने लगा है। उधर कई जगहों पर सड़क किनारे दुर्गा पंडाल बनाए जाने से आधी सड़क पर आवागमन बंद हो गया है। चौराहों पर पंडाल होने से ट्रैफिक का प्रेशर बढ़ गया है। जिससे जाम से निजात के आसार नहीं दिख रहे। स्टेशन रोड, मोहद्दीपुर, असुरन, बेतियाहाता, आजाद चौक, गोरखनाथ सहित कई जगहों पर पंडाल बनाए गए हैं। इस वजह से सड़क पर एक ओर की लेन भी बंद हो जा रही है। जिससे वन वे रोड पर ट्रैफिक का लोड बढ़ जा रहा है। - भीड़ वाली जगहों पर फोर व्हीलर लेकर न जाएं। - पार्किग के लिए निर्धारित जगह पर अपने वाहन खड़े करें। - शहर में वन वे ट्रैफिक वाले रास्तों पर उसी हिसाब से चलें। - चौराहों पर ट्रैफिक थमने पर धैर्य पूर्वक इंतजार करें। - किसी भी जगह पर रांग साइड से निकलने की कोशिश न करें। - घंटाघर, अलीनगर, बक्शीपुर जैसे जगहों पर पैदल ही मार्केट करने निकलें। - रुट डायवर्जन पर अमल करें। बदले हुए रास्ते से ही चलें। त्योहारी सीजन को देखते हुए पूरी तैयारी की गई है। सप्तमी से रात के समय शहर में बड़े वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक रहेगी। भीड़ वाले इलाकों में रूट डायवर्ट किया जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की आज पहली बरसी है। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस अवसर पर शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।
इमरान खान बुरी तरह डरे हुए हैं। उनको डर है कि भारत-पाकिस्तान पर कभी भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा है कि भारत के अंदर जो हालात है, जिस तरह प्रोटेस्ट हो रहें हैं, साथ ही अर्थव्यवस्था भी नीचे जा रही है, इसके बाद भारत हमारे लिए खतरनाक हो गया। इन लोगों ने पुलवामा के बाद हम पर जो हमला किया था, वो फिर से कर सकतें हैं, इन सबसे ध्यान भटकाने के लिए।
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की आज पहली बरसी है। इस हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हो गए थे। इस अवसर पर शुक्रवार को गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। इमरान खान बुरी तरह डरे हुए हैं। उनको डर है कि भारत-पाकिस्तान पर कभी भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा है कि भारत के अंदर जो हालात है, जिस तरह प्रोटेस्ट हो रहें हैं, साथ ही अर्थव्यवस्था भी नीचे जा रही है, इसके बाद भारत हमारे लिए खतरनाक हो गया। इन लोगों ने पुलवामा के बाद हम पर जो हमला किया था, वो फिर से कर सकतें हैं, इन सबसे ध्यान भटकाने के लिए।
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बालोद। जिले की एक अदालत ने 2012 के एक मामले में शनिवार को फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक, अदालत ने नाबालिग का अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने और शारीरिक शोषण करने के आरोप में आरोपी को सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले के संबंध में न्यायालयीन सूत्रों ने जानकारी दी है कि यह वारदात 2012 की है। 30 वर्षीय आरोपी कुंदन सिन्हा ने 14 वर्षीया पीड़िता के सामने पहले तो प्रेम का प्रस्ताव दिया। फिर उसने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। प्रेम और विवाह का झांसा देकर जब उसने संबंध बनाए, तब चोरी छिपे वीडियो भी बना लिया। बाद में आरोपी उसी वीडियो को बार बार दिखाकर आरोपी पीड़िता को न केवल ब्लैकमेल करता रहा, बल्कि लगातार शारीरिक शोषण करता रहा।
काफी दिनों तक सहने के बाद आखिरकार पीड़िता ने थाने में इसकी शिकायत की। बालोद जिले के डौंडी थाने की पुलिस ने मामले को जांच में लिया और आरोपी कुंदन को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया। इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष एवं पॉक्सो) मुकेश कुमार पात्रे ने शनिवार को निर्णय दिया है। न्यायालय ने आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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बालोद। जिले की एक अदालत ने दो हज़ार बारह के एक मामले में शनिवार को फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक, अदालत ने नाबालिग का अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने और शारीरिक शोषण करने के आरोप में आरोपी को सश्रम कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले के संबंध में न्यायालयीन सूत्रों ने जानकारी दी है कि यह वारदात दो हज़ार बारह की है। तीस वर्षीय आरोपी कुंदन सिन्हा ने चौदह वर्षीया पीड़िता के सामने पहले तो प्रेम का प्रस्ताव दिया। फिर उसने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। प्रेम और विवाह का झांसा देकर जब उसने संबंध बनाए, तब चोरी छिपे वीडियो भी बना लिया। बाद में आरोपी उसी वीडियो को बार बार दिखाकर आरोपी पीड़िता को न केवल ब्लैकमेल करता रहा, बल्कि लगातार शारीरिक शोषण करता रहा। काफी दिनों तक सहने के बाद आखिरकार पीड़िता ने थाने में इसकी शिकायत की। बालोद जिले के डौंडी थाने की पुलिस ने मामले को जांच में लिया और आरोपी कुंदन को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया। इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार पात्रे ने शनिवार को निर्णय दिया है। न्यायालय ने आरोपी को बीस साल सश्रम कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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हिमाचल के हमीरपुर स्थित धनेड़ में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार में महंगाई आसमान पर पहुंच चुकी है। आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। हर घर का बजट बिगड़ चुका है। कांग्रेस के समय घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 450 रुपए थी जो अब बढ़कर 1100 रुपए हो गई है।
सुखविंदर सिंह ने धनेड़ में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार को महंगाई पर आड़े हाथों लिया। सुक्खू ने जनता से बदलाव के लिए वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाने की हर चीज महंगी हुई है। सरसों के तेल से लेकर हर दाल और सब्जी के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। महंगाई को रोकने के लिए डबल इंजन सरकार कोई कदम नहीं उठा रही।
पेट्रोलियम पदार्थों के दाम अनियंत्रित हो चुके हैं। कांग्रेस के समय भाजपाई जरा सी महंगाई होने पर देश में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करते थे। प्रधानमंत्री कहते थे कि बहुत हुई महंगाई की मार, बदलो कांग्रेस सरकार। यही जुमला अब भाजपा पर फिट बैठता है। लोग हिमाचल की नाकाम सरकार को बदलने के लिए तैयार बैठे हैं।
सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर बेरोजगारों को रोजगार देगी। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रहेगी। स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर मुहैया कराए जाएंगे। उद्योगों व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लाएंगे। किसान-बागवानों के लिए फसलों का उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाएगा। ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देंगे।
हमीरपुर हर क्षेत्र में प्रदेश का सिरमौर बनेगा और उसे अपना वर्षों पुराना गौरव प्राप्त होगा। भाजपा सरकार में हमीरपुर को विकास के मामले में अनदेखा किया गया। यहां से बड़े दफ्तर बदलकर मंडी ले जाए गए। सुक्खू ने कहा कि जनता सोच समझकर वोट करे। एक-एक वोट महत्वपूर्ण है, उससे हमीरपुर जिले का भविष्य तय होगा। इस मौके पर पूर्व विधायक कुलदीप पठानिया, कांग्रेस महासचिव सुनील शर्मा भी मौजूद रहे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हिमाचल के हमीरपुर स्थित धनेड़ में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार में महंगाई आसमान पर पहुंच चुकी है। आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। हर घर का बजट बिगड़ चुका है। कांग्रेस के समय घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत चार सौ पचास रुपयापए थी जो अब बढ़कर एक हज़ार एक सौ रुपयापए हो गई है। सुखविंदर सिंह ने धनेड़ में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार को महंगाई पर आड़े हाथों लिया। सुक्खू ने जनता से बदलाव के लिए वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाने की हर चीज महंगी हुई है। सरसों के तेल से लेकर हर दाल और सब्जी के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। महंगाई को रोकने के लिए डबल इंजन सरकार कोई कदम नहीं उठा रही। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम अनियंत्रित हो चुके हैं। कांग्रेस के समय भाजपाई जरा सी महंगाई होने पर देश में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करते थे। प्रधानमंत्री कहते थे कि बहुत हुई महंगाई की मार, बदलो कांग्रेस सरकार। यही जुमला अब भाजपा पर फिट बैठता है। लोग हिमाचल की नाकाम सरकार को बदलने के लिए तैयार बैठे हैं। सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर बेरोजगारों को रोजगार देगी। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रहेगी। स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर मुहैया कराए जाएंगे। उद्योगों व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लाएंगे। किसान-बागवानों के लिए फसलों का उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाएगा। ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देंगे। हमीरपुर हर क्षेत्र में प्रदेश का सिरमौर बनेगा और उसे अपना वर्षों पुराना गौरव प्राप्त होगा। भाजपा सरकार में हमीरपुर को विकास के मामले में अनदेखा किया गया। यहां से बड़े दफ्तर बदलकर मंडी ले जाए गए। सुक्खू ने कहा कि जनता सोच समझकर वोट करे। एक-एक वोट महत्वपूर्ण है, उससे हमीरपुर जिले का भविष्य तय होगा। इस मौके पर पूर्व विधायक कुलदीप पठानिया, कांग्रेस महासचिव सुनील शर्मा भी मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान अकसर अपनी हॉट फोटोज को लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं। सुहाना के हॉट लुक को लोग बेहद पसंद करते है। उनकी फोटोज अकसर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है।हाल ही में फिर एक बार सुहाना की कुछ तस्वीरें सामने आई है। अपनी इन लेटेस्ट तस्वीरों में सुहाना बिना मेकअप के नजर आ रही हैं। तस्वीर में सुहाना के साथ उनकी एक फ्रेंड भी नजर आ रही हैं। इस तस्वीर में सुहाना ने व्हाइट कलर के टॉप के साथ ब्लैक शॉर्टस पहने हुए है। जिसमें वह काफी बोल्ड और स्टाईलिश लुक में दिख रही है। सुहाना अपनी दोस्त के साथ बिंदास अंदाज में स्माइल भी दे रही हैं। लोगों को सुहाना की यह तस्वीरें बेहद पसंद आ रही है।बता दें कि सुहाना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है। उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो जाती है। सुहाना मशहूर स्टारकिड में से एक है। फिलहाल वह लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है।
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बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान अकसर अपनी हॉट फोटोज को लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं। सुहाना के हॉट लुक को लोग बेहद पसंद करते है। उनकी फोटोज अकसर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है।हाल ही में फिर एक बार सुहाना की कुछ तस्वीरें सामने आई है। अपनी इन लेटेस्ट तस्वीरों में सुहाना बिना मेकअप के नजर आ रही हैं। तस्वीर में सुहाना के साथ उनकी एक फ्रेंड भी नजर आ रही हैं। इस तस्वीर में सुहाना ने व्हाइट कलर के टॉप के साथ ब्लैक शॉर्टस पहने हुए है। जिसमें वह काफी बोल्ड और स्टाईलिश लुक में दिख रही है। सुहाना अपनी दोस्त के साथ बिंदास अंदाज में स्माइल भी दे रही हैं। लोगों को सुहाना की यह तस्वीरें बेहद पसंद आ रही है।बता दें कि सुहाना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है। उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो जाती है। सुहाना मशहूर स्टारकिड में से एक है। फिलहाल वह लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है।
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सिहुंता - ग्राम पंचायत गरनोटा में रविवार को हल्के के विधायक विक्रम जरयाल के सम्मान में नागरिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पधारने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधायक का फूलमालाओं से लादकर जोरदार वेलकम किया। उन्होंने विधायक को शाल व टोपी पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया। इस दौरान इलाकावासियों ने विधायक के समक्ष जनहित से जुड़ी समस्याओं को पेश कर जल्द हल भी मांगा। समारोह में मौजूद पूर्व भाजपा मंडलाध्यक्ष नानक चंद वर्मा ने विधायक से आईटीआई गरनोटा के मैदान को पंचायत के सुपुर्द करने और गरनोटा आईटीआई के चंबा में चल रहे सात ट्रेडों को स्थानांतरित करने के अलावा रेन शेल्टर के निर्माण की मांग उठाई। उन्होंने गरनोटा में बैंक शाखा खोलने के अलावा गरनोटा स्कूल व आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में स्टाफ की कमी को पूरा कर राहत प्रदान करने को भी कहा। उन्होंने खगल कूहल का मरम्मत कार्य करवाने की मांग भी विधायक के समक्ष प्रमुखता से उठाई। विधायक विक्रम जरयाल ने अपने संबोधन में उपस्थित जनसमूह का चुनावों में सहयोग कर दोबारा से हलके की कमान सौंपने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी इन मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करवाया जाएगा। समारोह में उपमंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा भाजपा एससी मोर्चा के अध्यक्ष प्यारेलाल डोगरा, बृजलाल शर्मा, महामंत्री बलदेव सिंह, थुलेल पंचायत के प्रधान कांशी राम, नायब तहसीलदार सिहुंता देवेंद्र कुमार, दिव्य चक्षु, वीरभान, आईटीआई प्रिंसीपल राजेश पुरी, रेंज आफिसर मनोज कुमार शर्मा, वरयाम सिंह व लक्ष्मण कौशल समेत करीब एक हजार लोग मौजूद रहे।
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सिहुंता - ग्राम पंचायत गरनोटा में रविवार को हल्के के विधायक विक्रम जरयाल के सम्मान में नागरिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पधारने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधायक का फूलमालाओं से लादकर जोरदार वेलकम किया। उन्होंने विधायक को शाल व टोपी पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया। इस दौरान इलाकावासियों ने विधायक के समक्ष जनहित से जुड़ी समस्याओं को पेश कर जल्द हल भी मांगा। समारोह में मौजूद पूर्व भाजपा मंडलाध्यक्ष नानक चंद वर्मा ने विधायक से आईटीआई गरनोटा के मैदान को पंचायत के सुपुर्द करने और गरनोटा आईटीआई के चंबा में चल रहे सात ट्रेडों को स्थानांतरित करने के अलावा रेन शेल्टर के निर्माण की मांग उठाई। उन्होंने गरनोटा में बैंक शाखा खोलने के अलावा गरनोटा स्कूल व आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में स्टाफ की कमी को पूरा कर राहत प्रदान करने को भी कहा। उन्होंने खगल कूहल का मरम्मत कार्य करवाने की मांग भी विधायक के समक्ष प्रमुखता से उठाई। विधायक विक्रम जरयाल ने अपने संबोधन में उपस्थित जनसमूह का चुनावों में सहयोग कर दोबारा से हलके की कमान सौंपने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी इन मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करवाया जाएगा। समारोह में उपमंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा भाजपा एससी मोर्चा के अध्यक्ष प्यारेलाल डोगरा, बृजलाल शर्मा, महामंत्री बलदेव सिंह, थुलेल पंचायत के प्रधान कांशी राम, नायब तहसीलदार सिहुंता देवेंद्र कुमार, दिव्य चक्षु, वीरभान, आईटीआई प्रिंसीपल राजेश पुरी, रेंज आफिसर मनोज कुमार शर्मा, वरयाम सिंह व लक्ष्मण कौशल समेत करीब एक हजार लोग मौजूद रहे।
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निघासन। शनिवार को इलाके के एक गांव की विवाहिता युवती की जहरीला पदार्थ पी लेने से मौत हो गई। विवाहिता के घरवालों ने गांव के ही एक युवक पर उसको जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। तीन दिन पहले युवक ने विवाहिता को पीटा था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कोतवाली क्षेत्र के शिवलालपुरवा गांव का रंजीत बाहर मजदूरी करता है। होली के बाद वह मजदूरी करने चला गया था। घर पर उसकी पत्नी मीरा और परिवार के अन्य सदस्य थे। बताया जाता है कि गुरुवार को किसी बात पर गांव के ही युवक अर्जुन और मीरा के बीच किसी बात पर कहासुनी हुई और अर्जुन ने मीरा को पीट दिया था। ससुर की शिकायत पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने अर्जुन और मीरा के घरवालों के बीच दवा कराने की बात पर समझौता करवा दिया। बताया जाता है कि शनिवार सुबह मीरा ने घर में रखा कीटनाशक पी लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर घरवाले उसे निघासन सीएचसी लाए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मीरा के ससुर ने अर्जुन पर जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। शनिवार से रविवार तक तमाम लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास करते रहे लेकिन मीरा के ससुर ने समझौता मानने से इंकार कर दिया। कोतवाल प्रभातेश कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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निघासन। शनिवार को इलाके के एक गांव की विवाहिता युवती की जहरीला पदार्थ पी लेने से मौत हो गई। विवाहिता के घरवालों ने गांव के ही एक युवक पर उसको जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। तीन दिन पहले युवक ने विवाहिता को पीटा था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कोतवाली क्षेत्र के शिवलालपुरवा गांव का रंजीत बाहर मजदूरी करता है। होली के बाद वह मजदूरी करने चला गया था। घर पर उसकी पत्नी मीरा और परिवार के अन्य सदस्य थे। बताया जाता है कि गुरुवार को किसी बात पर गांव के ही युवक अर्जुन और मीरा के बीच किसी बात पर कहासुनी हुई और अर्जुन ने मीरा को पीट दिया था। ससुर की शिकायत पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने अर्जुन और मीरा के घरवालों के बीच दवा कराने की बात पर समझौता करवा दिया। बताया जाता है कि शनिवार सुबह मीरा ने घर में रखा कीटनाशक पी लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर घरवाले उसे निघासन सीएचसी लाए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मीरा के ससुर ने अर्जुन पर जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। शनिवार से रविवार तक तमाम लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास करते रहे लेकिन मीरा के ससुर ने समझौता मानने से इंकार कर दिया। कोतवाल प्रभातेश कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्लीः रविवार को मुज़फ़्फ़रनगर में हुई किसान महापंचायत ने, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना संकट को सामने लाकर खड़ा कर दिया है. बहुत स्पष्ट था कि एक ऐसे सूबे में, जो देश में सबसे ज़्यादा गन्ना पैदा करता है, गन्ना किसानों की परेशानी आगामी विधान सभा चुनावों में एक अहम भूमिका निभाएगी.
यूपी की गन्ना पट्टी में कृषि संकट की स्थिति पिछले कुछ सालों में बिगड़ गई है, चूंकि किसानों की आय में कमी आई है, जबकि इनपुट लागत बढ़ गई है. ये संकट मुख्य रूप से तीन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता है- वहीं पुरानी क़ीमतें, देरी से या टुकड़ों में भुगतान, और इनपुट लागत में तेज़ी के साथ वृद्धि.
इन कारकों ने यूपी में गहरी अशांति पैदा कर दी है, जहां 35 लाख से अधिक परिवार आजीविका के लिए गन्ने की खेती पर निर्भर करते हैं, जबकि देशभर में ये संख्या 60 लाख है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय रही है, जहां राज्य सरकारें हर वर्ष स्टेट एडवाइज़री प्राइस (एसएपी) बढ़ाती रहती थीं, ताकि सुनिश्चित रहे कि बढ़ती महंगाई और इनपुट लागत के मद्देनज़र, ये किसानों के लिए लाभदायक बनी रहे. लेकिन, 2017-18 के बाद लगभग तीन साल से, गन्ने के इन एसएपी दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
गन्ने की आम क़िस्म के लिए 315 रुपए प्रति क्विंटल एसएपी मिलती है, जबकि शुरू की क़िस्मों को 325 रुपए प्रति क्विंटल, और ख़ारिज की गई किस्मों को 310 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है. इसकी तुलना पंजाब से कीजिए, जहां यूपी के साथ अगले साल शुरू में चुनाव होने हैं- उसने इस साल शुरूआती क़िस्म की एसएपी बढ़ाकर 360 रुपए प्रति क्विंटल कर दी, जो 2017-18 से 310 रुपए चली आ रही थी.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
इसके ऊपर, भुगतान में होने वाली देरी ने किसानों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है. गन्ना (नियंत्रण) आदेश,1966, के अंतर्गत गन्ने की सप्लाई की तिथि से 14 दिन के अंदर, किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, और ऐसा न करने की स्थिति में बक़ाया राशि पर, 15 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करना होता है.
लेकिन, गन्ना मिलों का आरोप है कि स्टॉक की बिक्री पूरे साल चलती है, और 14 दिन की समय सीमा से अकसर आगे निकल जाती है, जिससे उनपर भारी बक़ाया जमा हो जाता है, जिसपर भारी ब्याज लगता है. गन्ना मिलें अकसर भुगतान में देरी करती हैं, तथा बैंकों से ऋण लेती हैं और इस सारी प्रक्रिया में उनपर ब्याज का भारी बोझ आ जाता है.
इसके नतीजे में, किसानों के भुगतान में या तो काफी देरी होती है, या फिर वो टुकड़ों में मिलता है जिससे उन्हें अपनी जीविका चलाना, और बिना क़र्ज़ लिए गन्ने की खेती जारी रखना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, गन्ने की फसल लंबी अवधि की होती है, और फसल का चक्र कम से कम एक साल तक चलता है, जिससे समय पर भुगतान किसानों के लिए बहुत अहम हो जाता है.
भुगतान में देरी का मसला इतना गंभीर है, कि इस साल सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देकर राज्यों से पूछना पड़ा, कि वो बक़ाया का भुगतान किस तरह करेंगे.
गन्ने की खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की समस्या को और बढ़ा दिया है. गन्ना एक ऐसी फसल है जिसमें सबसे ज़्यादा पानी, रसायन, और श्रम लगता है. ऊंची पैदावार लेने के लिए फसल के विकास के सभी चरणों में, मिट्टी के अंदर अनुकूलतम नमी बनाए रखनी आवश्यक होती है. एक टन गन्ने के उत्पादन के लिए क़रीब 250 टन पानी की ज़रूरत होती है, और 80 प्रतिशत फसल की सिंचाई, गहरे पानी की पम्पिंग द्वारा भूमिगत जल से होती है.
भूजल के गिरते स्तर की वजह से पंपिंग की अवधि और गहराई पहले से बढ़ गई है, जिसके कारण बिजली या डीज़ल का उपभोग तेज़ी से बढ़ा है. इसके साथ ही डीज़ल के दाम क़रीब 100 रुपए प्रति लीटर छूने, और बिजली दरों में इज़ाफे के परिणामस्वरूप, इनपुट लागत बहुत अधिक बढ़ गई है.
भारत के सबसे अधिक आबादी वाले सूबे उत्तरप्रदेश में, एक चीज़ जिसकी कमी नहीं है वो है सस्ता श्रम. गन्ने की खेती का ज़्यादातर काम हाथ से होता है, और मशीनरी का इस्तेमाल खेतों की तैयारी जैसे कामों तक सीमित है. एक अनुमान के अनुसार, गन्ने की खेती की कुल लागत में श्रम की हिस्सेदारी 32. 3 प्रतिशत होती है. कुल मिलाकर यूपी में एक हेक्टेयर फसल में, 1,191. 4 घंटे का श्रम लगता है जबकि महाराष्ट्र में प्रति हेक्टेयर 1,728. 8 घंटे लगते हैं.
लेकिन, कोविड महामारी और खाद्य पदार्थों तथा ईंधन के दाम बढ़ने से, श्रम की लागत भी बहुत बढ़ गई है - किसानों का कहना है कि पिछले तीन सालों में ये लागत, 7,500 प्रति बीघा (0. 6 एकड़) से बढ़कर 9,750 रुपए प्रति बीघा पहुंच गई है. और किसानों के लिए सबसे ख़राब ये है, कि फसल की उत्पादन लागत, उसकी लदाई, और ढुलाई का बढ़ा हुआ ख़र्च, उन्हें ख़ुद ही वहन करना पड़ता है.
ऊर्वरकों तथा फसल सुरक्षा के अन्य रसायनों के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे ये समस्याएं और बढ़ गई हैं. और गन्ने का एसएपी 2017-18 के स्तरों पर अटके रहने से, किसान ख़ुद को घाटे की स्थिति में पाते हैं.
पश्चिमी यूपी के किसानों का कहना है, कि पिछले तीन वर्षों में गन्ने की खेती की कुल लागत, 12,000 रुपए प्रति बीघा से बढ़कर 16,000 प्रति बीघा पर पहुंच गई है, जिससे 60 क्विंटल की उपज होती है. चूंकि यूपी में गन्ने के दाम 325 रुपए प्रति क्विंटल पर अटके हुए हैं, इसलिए पिछले तीन वर्षों में इससे होने वाली आय, 7,500 रुपए प्रति बीघा से घटकर, 3,500 प्रति बीघा पर आ गई है.
दिप्रिंट ने पहले ख़बर दी थी, कि यूपी की गन्ना पट्टी के किसानों ने उन्हीं प्रोत्साहनों की मांग की है, जो उनके समकक्षों को हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों में मिलते हैं, जैसे मुफ्त बिजली और गन्ने की बढ़ी हुई क़ीमतें.
(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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नई दिल्लीः रविवार को मुज़फ़्फ़रनगर में हुई किसान महापंचायत ने, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना संकट को सामने लाकर खड़ा कर दिया है. बहुत स्पष्ट था कि एक ऐसे सूबे में, जो देश में सबसे ज़्यादा गन्ना पैदा करता है, गन्ना किसानों की परेशानी आगामी विधान सभा चुनावों में एक अहम भूमिका निभाएगी. यूपी की गन्ना पट्टी में कृषि संकट की स्थिति पिछले कुछ सालों में बिगड़ गई है, चूंकि किसानों की आय में कमी आई है, जबकि इनपुट लागत बढ़ गई है. ये संकट मुख्य रूप से तीन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता है- वहीं पुरानी क़ीमतें, देरी से या टुकड़ों में भुगतान, और इनपुट लागत में तेज़ी के साथ वृद्धि. इन कारकों ने यूपी में गहरी अशांति पैदा कर दी है, जहां पैंतीस लाख से अधिक परिवार आजीविका के लिए गन्ने की खेती पर निर्भर करते हैं, जबकि देशभर में ये संख्या साठ लाख है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय रही है, जहां राज्य सरकारें हर वर्ष स्टेट एडवाइज़री प्राइस बढ़ाती रहती थीं, ताकि सुनिश्चित रहे कि बढ़ती महंगाई और इनपुट लागत के मद्देनज़र, ये किसानों के लिए लाभदायक बनी रहे. लेकिन, दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के बाद लगभग तीन साल से, गन्ने के इन एसएपी दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. गन्ने की आम क़िस्म के लिए तीन सौ पंद्रह रुपयापए प्रति क्विंटल एसएपी मिलती है, जबकि शुरू की क़िस्मों को तीन सौ पच्चीस रुपयापए प्रति क्विंटल, और ख़ारिज की गई किस्मों को तीन सौ दस रुपयापए प्रति क्विंटल मिलता है. इसकी तुलना पंजाब से कीजिए, जहां यूपी के साथ अगले साल शुरू में चुनाव होने हैं- उसने इस साल शुरूआती क़िस्म की एसएपी बढ़ाकर तीन सौ साठ रुपयापए प्रति क्विंटल कर दी, जो दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से तीन सौ दस रुपयापए चली आ रही थी. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इसके ऊपर, भुगतान में होने वाली देरी ने किसानों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है. गन्ना आदेश,एक हज़ार नौ सौ छयासठ, के अंतर्गत गन्ने की सप्लाई की तिथि से चौदह दिन के अंदर, किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, और ऐसा न करने की स्थिति में बक़ाया राशि पर, पंद्रह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करना होता है. लेकिन, गन्ना मिलों का आरोप है कि स्टॉक की बिक्री पूरे साल चलती है, और चौदह दिन की समय सीमा से अकसर आगे निकल जाती है, जिससे उनपर भारी बक़ाया जमा हो जाता है, जिसपर भारी ब्याज लगता है. गन्ना मिलें अकसर भुगतान में देरी करती हैं, तथा बैंकों से ऋण लेती हैं और इस सारी प्रक्रिया में उनपर ब्याज का भारी बोझ आ जाता है. इसके नतीजे में, किसानों के भुगतान में या तो काफी देरी होती है, या फिर वो टुकड़ों में मिलता है जिससे उन्हें अपनी जीविका चलाना, और बिना क़र्ज़ लिए गन्ने की खेती जारी रखना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, गन्ने की फसल लंबी अवधि की होती है, और फसल का चक्र कम से कम एक साल तक चलता है, जिससे समय पर भुगतान किसानों के लिए बहुत अहम हो जाता है. भुगतान में देरी का मसला इतना गंभीर है, कि इस साल सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देकर राज्यों से पूछना पड़ा, कि वो बक़ाया का भुगतान किस तरह करेंगे. गन्ने की खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की समस्या को और बढ़ा दिया है. गन्ना एक ऐसी फसल है जिसमें सबसे ज़्यादा पानी, रसायन, और श्रम लगता है. ऊंची पैदावार लेने के लिए फसल के विकास के सभी चरणों में, मिट्टी के अंदर अनुकूलतम नमी बनाए रखनी आवश्यक होती है. एक टन गन्ने के उत्पादन के लिए क़रीब दो सौ पचास टन पानी की ज़रूरत होती है, और अस्सी प्रतिशत फसल की सिंचाई, गहरे पानी की पम्पिंग द्वारा भूमिगत जल से होती है. भूजल के गिरते स्तर की वजह से पंपिंग की अवधि और गहराई पहले से बढ़ गई है, जिसके कारण बिजली या डीज़ल का उपभोग तेज़ी से बढ़ा है. इसके साथ ही डीज़ल के दाम क़रीब एक सौ रुपयापए प्रति लीटर छूने, और बिजली दरों में इज़ाफे के परिणामस्वरूप, इनपुट लागत बहुत अधिक बढ़ गई है. भारत के सबसे अधिक आबादी वाले सूबे उत्तरप्रदेश में, एक चीज़ जिसकी कमी नहीं है वो है सस्ता श्रम. गन्ने की खेती का ज़्यादातर काम हाथ से होता है, और मशीनरी का इस्तेमाल खेतों की तैयारी जैसे कामों तक सीमित है. एक अनुमान के अनुसार, गन्ने की खेती की कुल लागत में श्रम की हिस्सेदारी बत्तीस. तीन प्रतिशत होती है. कुल मिलाकर यूपी में एक हेक्टेयर फसल में, एक,एक सौ इक्यानवे. चार घंटाटे का श्रम लगता है जबकि महाराष्ट्र में प्रति हेक्टेयर एक,सात सौ अट्ठाईस. आठ घंटाटे लगते हैं. लेकिन, कोविड महामारी और खाद्य पदार्थों तथा ईंधन के दाम बढ़ने से, श्रम की लागत भी बहुत बढ़ गई है - किसानों का कहना है कि पिछले तीन सालों में ये लागत, सात,पाँच सौ प्रति बीघा से बढ़कर नौ,सात सौ पचास रुपयापए प्रति बीघा पहुंच गई है. और किसानों के लिए सबसे ख़राब ये है, कि फसल की उत्पादन लागत, उसकी लदाई, और ढुलाई का बढ़ा हुआ ख़र्च, उन्हें ख़ुद ही वहन करना पड़ता है. ऊर्वरकों तथा फसल सुरक्षा के अन्य रसायनों के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे ये समस्याएं और बढ़ गई हैं. और गन्ने का एसएपी दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के स्तरों पर अटके रहने से, किसान ख़ुद को घाटे की स्थिति में पाते हैं. पश्चिमी यूपी के किसानों का कहना है, कि पिछले तीन वर्षों में गन्ने की खेती की कुल लागत, बारह,शून्य रुपयापए प्रति बीघा से बढ़कर सोलह,शून्य प्रति बीघा पर पहुंच गई है, जिससे साठ क्विंटल की उपज होती है. चूंकि यूपी में गन्ने के दाम तीन सौ पच्चीस रुपयापए प्रति क्विंटल पर अटके हुए हैं, इसलिए पिछले तीन वर्षों में इससे होने वाली आय, सात,पाँच सौ रुपयापए प्रति बीघा से घटकर, तीन,पाँच सौ प्रति बीघा पर आ गई है. दिप्रिंट ने पहले ख़बर दी थी, कि यूपी की गन्ना पट्टी के किसानों ने उन्हीं प्रोत्साहनों की मांग की है, जो उनके समकक्षों को हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों में मिलते हैं, जैसे मुफ्त बिजली और गन्ने की बढ़ी हुई क़ीमतें.
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शेयर बाजार में जारी गिरावट का सिलसिला आज सातवें सत्र में आखिरकर टूटा और सेंसेक्स और निफ्टी ने आज शुरुआत में बढ़त बना ली. दोपहर लगभग 1. 30 बजे के बाद फिर से गिरावट शुरू हुई.
नई दिल्ली. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के भाव में नरमी के बीच सोमवार सुबह सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के नए रेट भी जारी कर दिए हैं. आज ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 114 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि, कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आज भी स्थिर बनाए रखा है. . आगे पढ़ें. .
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शेयर बाजार में जारी गिरावट का सिलसिला आज सातवें सत्र में आखिरकर टूटा और सेंसेक्स और निफ्टी ने आज शुरुआत में बढ़त बना ली. दोपहर लगभग एक. तीस बजे के बाद फिर से गिरावट शुरू हुई. नई दिल्ली. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के भाव में नरमी के बीच सोमवार सुबह सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के नए रेट भी जारी कर दिए हैं. आज ब्रेंट क्रूड का भाव करीब एक सौ चौदह डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि, कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आज भी स्थिर बनाए रखा है. . आगे पढ़ें. .
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DIWANGANJ:
कंधई थाना क्षेत्र के पयागपुर औरिस्ता गांव में शनिवार को चाय की दुकान पर मारी गई गोली से घायल अधेड़ की इलाज के दौरान गुरुवार को इलाहाबाद में सांसे थम गई। मौत की सूचना जब घर पर पहुंची तो यहां कोहराम मच गया।
गौरतलब हो कि पयागपुर औरिस्ता गांव निवासी राजेश्वर सिंह (48) शनिवार की शाम लगभग 6 बजे गांव के ही एक दुकान पर बैठ कर चाय पी रहे थे। वहां पर पहले से ही हिस्ट्रीशीटर मोनू बजरंगी बैठा हुआ था। चाय पीने के दौरान दोनों में कहासुनी हुई और विवाद हो गया। इसी बीच हिस्ट्रीशीटर ने तमंचा निकल लिया और गोली चला दी। गोली राजेश्वर के सिर में जा धंसी और वे गिर पड़े। इससे दुकान पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई।
सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें लेकर इलाहाबाद गए थे। जहां रविवार को उनके सिर का आपरेशन कर गोली निकाली गई थी, लेकिन उनकी हालत ठीक नहीं थी। इधर राजेश्वर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 307 सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज कर मोनू बजरंगी को सोमवार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
इस बीच गुरुवार की सुबह अचानक राजेश्वर की तबियत ज्यादा खराब हो गई । डाक्टर उन्हें लेकर आईसीयू वार्ड में गए। वहां इलाज के दौरान अचानक उनकी सांसे थम गई। राजेश्वर की मौत की सूचना जब घर पहुंची तो यहां कोहराम मच गया। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है।
गोली से घायल राजेश्वर सिंह की मौत के बाद दर्ज मुकदमे को धारा 302 में तरमीम कर दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। शांति व्यवस्था के लिहाज से गांव पर नजर रखी गई है।
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DIWANGANJ: कंधई थाना क्षेत्र के पयागपुर औरिस्ता गांव में शनिवार को चाय की दुकान पर मारी गई गोली से घायल अधेड़ की इलाज के दौरान गुरुवार को इलाहाबाद में सांसे थम गई। मौत की सूचना जब घर पर पहुंची तो यहां कोहराम मच गया। गौरतलब हो कि पयागपुर औरिस्ता गांव निवासी राजेश्वर सिंह शनिवार की शाम लगभग छः बजे गांव के ही एक दुकान पर बैठ कर चाय पी रहे थे। वहां पर पहले से ही हिस्ट्रीशीटर मोनू बजरंगी बैठा हुआ था। चाय पीने के दौरान दोनों में कहासुनी हुई और विवाद हो गया। इसी बीच हिस्ट्रीशीटर ने तमंचा निकल लिया और गोली चला दी। गोली राजेश्वर के सिर में जा धंसी और वे गिर पड़े। इससे दुकान पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें लेकर इलाहाबाद गए थे। जहां रविवार को उनके सिर का आपरेशन कर गोली निकाली गई थी, लेकिन उनकी हालत ठीक नहीं थी। इधर राजेश्वर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तीन सौ सात सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज कर मोनू बजरंगी को सोमवार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इस बीच गुरुवार की सुबह अचानक राजेश्वर की तबियत ज्यादा खराब हो गई । डाक्टर उन्हें लेकर आईसीयू वार्ड में गए। वहां इलाज के दौरान अचानक उनकी सांसे थम गई। राजेश्वर की मौत की सूचना जब घर पहुंची तो यहां कोहराम मच गया। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। गोली से घायल राजेश्वर सिंह की मौत के बाद दर्ज मुकदमे को धारा तीन सौ दो में तरमीम कर दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। शांति व्यवस्था के लिहाज से गांव पर नजर रखी गई है।
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कई दिनों से मशहूर टीवी शो 'संजीवनी' के सीजन 2 की खबरें मीडिया में छा रही हैं। इन खबरों ने जोर तब पकड़ा जब इश्कबाज़ कपल नकुल मेहता और सुरभि चंदना के इस शो को करने की सुर्खियां बनने लगी। हालांकि, दोनों में से कभी किसी ने इस खबर की पुष्टि नहीं की और नवीनतम खबरों के अनुसार, सुरभि की जगह सीजन 2 में, कोई और अभिनेता नज़र आने वाला है।
पिंकविला की खबर के अनुसार, नमित खन्ना को इस शो के लिए चुना गया है। सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों के किरदारों की डिटेल्स भी सामने आ गयी है। खबरों के अनुसार, सुरभि इस शो में एक मासूम और शर्मीली पंजाबी लड़की का किरदार निभाएंगी जो संजीवनी में अपने माता-पिता को बेगुनाह साबित करने आती हैं।
वही दूसरी तरफ, नमित एक सर्जन का किरदार निभा रहे हैं जिनका चार्म हर किसी को दीवाना बना देता है। दोनों की प्रेम-कहानी नफरत से शुरू होगी जो बाद में जाकर प्यार में तब्दील हो जाएगी। शो में दोनों की नोकझोक देखना बहुत दिलचस्प होगा। दोनों ने अपने अभिनय के हुनर को साबित किया है और ये जोड़ी छोटे परदे पर क्या धमाल मचाएगी, ये तो शो शुरू होने के बाद ही पता चलेगा।
इस दौरान, सीजन 2 में पहले सीजन के मशहूर किरदार भी लौट कर आयेंगे। इसका मतलब है कि शो में मोहनीश बहल, गुरदीप कोहली समेत बाकि कलाकार भी वापसी कर रहे हैं। 'संजीवनी' उन दिनों का बेहद लोकप्रिय शो हुआ करता था और फिर उसके बाद आया शो 'दिल मिल गए' जो युवाओं के बीच बहुत मशहूर हुआ और इंडस्ट्री को कई स्टार्स मिले। अब फिर से उसी हॉस्पिटल में एक नयी कहानी लेकर आ रहे हैं दो नए लोग जो दर्शको का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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कई दिनों से मशहूर टीवी शो 'संजीवनी' के सीजन दो की खबरें मीडिया में छा रही हैं। इन खबरों ने जोर तब पकड़ा जब इश्कबाज़ कपल नकुल मेहता और सुरभि चंदना के इस शो को करने की सुर्खियां बनने लगी। हालांकि, दोनों में से कभी किसी ने इस खबर की पुष्टि नहीं की और नवीनतम खबरों के अनुसार, सुरभि की जगह सीजन दो में, कोई और अभिनेता नज़र आने वाला है। पिंकविला की खबर के अनुसार, नमित खन्ना को इस शो के लिए चुना गया है। सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों के किरदारों की डिटेल्स भी सामने आ गयी है। खबरों के अनुसार, सुरभि इस शो में एक मासूम और शर्मीली पंजाबी लड़की का किरदार निभाएंगी जो संजीवनी में अपने माता-पिता को बेगुनाह साबित करने आती हैं। वही दूसरी तरफ, नमित एक सर्जन का किरदार निभा रहे हैं जिनका चार्म हर किसी को दीवाना बना देता है। दोनों की प्रेम-कहानी नफरत से शुरू होगी जो बाद में जाकर प्यार में तब्दील हो जाएगी। शो में दोनों की नोकझोक देखना बहुत दिलचस्प होगा। दोनों ने अपने अभिनय के हुनर को साबित किया है और ये जोड़ी छोटे परदे पर क्या धमाल मचाएगी, ये तो शो शुरू होने के बाद ही पता चलेगा। इस दौरान, सीजन दो में पहले सीजन के मशहूर किरदार भी लौट कर आयेंगे। इसका मतलब है कि शो में मोहनीश बहल, गुरदीप कोहली समेत बाकि कलाकार भी वापसी कर रहे हैं। 'संजीवनी' उन दिनों का बेहद लोकप्रिय शो हुआ करता था और फिर उसके बाद आया शो 'दिल मिल गए' जो युवाओं के बीच बहुत मशहूर हुआ और इंडस्ट्री को कई स्टार्स मिले। अब फिर से उसी हॉस्पिटल में एक नयी कहानी लेकर आ रहे हैं दो नए लोग जो दर्शको का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक (co-author) हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स (researchers) टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं।
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यह आर्टिकल १,२९,१३७ बार देखा गया है।
जब भी आप किसी सार्वजनिक सभा या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो आपसे उम्मीद की जाती है की आप बोले, और ऐसे मौकों पर आपको भाषण देने के लिए काफी तैयारी करनी पड़ती है। इस लेख में आपको अच्छे भाषण लिखने की टिप्पणियां दी गयी हैं।
विधि 1 का 4:
{"smallUrl":"https:\/\/www2अपने उद्देश्य या थीसिस को चुनेंः आपके चुने गये विषय के बारे में भाषण क्यों दे रहे है? ("ऐसे मेरे अध्यापक ने मुझे सलाह दिया!" या "मुझे करना होगा" वैध कारण नहीं है।)
- थीसिस वह मुद्दा है जिस पर आप जोर देना चाहेंगे। यदि अपने जीवन में हुए घटनाओं के बारे में भाषण लिख रहे हैं तो, आपका क्या संदेश होगा? आपका विषय अपने मौत से संघर्ष के बारे में हो सकता है, पर आपका थीसिस या उद्देश्य साट बेल्ट लगाने का समर्थन दर्शाना चाहिए। आपको प्रमाण के साथ इस विषय को व्यतीत करना चाहिए, "इससे मेरी जान बची" से बहस करने से आप कुछ हासिल नहीं कर सकेंगे!
- एक अच्छा भाषण एक अच्छे कारण के लिए ही लिखा जाता हैः प्रेरित करने, निर्देश देने, समर्थन इकट्ठे करने, एवं कार्रवाई के नेतृत्व करने के लिए I यह सब नेक उद्देश्य हैं - सिर्फ सुनाने, या स्पीकर के अहंकार को बढ़ावा देने, या चापलूसी करने, डराने, या किसी की बेइज्जती करने के लिए नहीं है।
- थीसिस वह मुद्दा है जिस पर आप जोर देना चाहेंगे। यदि अपने जीवन में हुए घटनाओं के बारे में भाषण लिख रहे हैं तो, आपका क्या संदेश होगा? आपका विषय अपने मौत से संघर्ष के बारे में हो सकता है, पर आपका थीसिस या उद्देश्य साट बेल्ट लगाने का समर्थन दर्शाना चाहिए। आपको प्रमाण के साथ इस विषय को व्यतीत करना चाहिए, "इससे मेरी जान बची" से बहस करने से आप कुछ हासिल नहीं कर सकेंगे!
{"smallUrl":"https:\/\/www4विश्वास दिलाने योग्य बनेंः अपने दर्शकों को राज़ी करने आपको जो ठीक लगे, उसे करें। अगर आपके उल्लेख तार्किक नहीं है तो, अन्य सोच-विचारों को दृष्टि में लाएं। अगर दर्शक आपके विचारों से सहमत नहीं है, तो उन्हें अपने हर शब्दों से पकड़े रहें।
- प्लेटो की अपील कि भाषण में लोकाचार, करुणा और लोगो का उपयोग लाभ दायक होगा। अपने दर्शकों को राज़ी करें ताकि आप उनका विश्वास जीत सकें (लोकाचार) या दूसरे विचारों का उपयोग करके (जब आप हेन्स के बारे में सोचते हैं, तो क्या आप गुणवत्ता जाँघियों के बारे में सोचते या फिर माईकिल जॉर्डन के बारे में?) राज़ी करने उनकी भावनाओं को समझें (करुणा), या फिर सीधे शब्दों का उपयोग करना (शब्द)। दूसरों की तुलना में कुछ भी मजबूत या अधिक प्रभावशाली नहीं होता; यह सब स्थिति पर निर्भर करता है।
विधि 2 का 4:
{"smallUrl":"https:\/\/www2उनकी ध्यान को आकर्षित करेंः उनके साथ "हाथ मिलाए", औपचारिक ही सही। अपने भाषण को व्यक्तिगत करें ताकी आपके दर्शक आपके साथ बाँधे रहें। अपने विषय पर दर्शकों की सहमती और आपके साथ घनिष्ठ संबंध बनाएं।
- लिखते वक़्त भी, अपनी वास्तविक मुस्कुराहट बनाएं रखें। यह बात दर्शक भी बता सकेंगे। आप शुरुआत, एक मनोरंजक चुटकुले के साथ करना चाहेंगे या विचारात्मक किस्से से, जो एक स्थिति से जुड़ सके।
- जैसे ही आप लिखते है, यह सोचें की आप अपने मित्र से क्या कहेंगे। आप जितने आरामदायक और खुले होंगे, दर्शक उतने ही आसानी से आपकी और खींचे रहेंगे। आपको चुनना है कि आप अपने विचारें को कैसे व्यक्त करेंगे जैसे आप किसी व्यक्ति के साथ आसानी से अपने विचार व्यतीत कर रहें हो, किसी से अपनी भावनाएं सहजता से प्रकट कर सकें। दिल से दिया गया भाषण सबसे प्रभावशाली होते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www4उदाहरण से समझाएंः अपने लिखित को चित्रात्मक बनायें। आपका लक्ष्य अपने भाषण के मुख्य विषयों को दर्शकों के मन में छा जाए। अगर कोई पूछे या बाद में भाषण की तारीफ़ करें, तो इस तरह सुनाई देगा, "मुझे वह कहानी पसंद आयी जो टॉम ने अपनी बहन को सुनाया" या "इस साल की कमाई का पाई चार्ट मददगार था"। वह शायद ऐसा नहीं कहेंगे, "आपके भाषण के मुख्य भाग का दूसरा विषय सोचा समझा और तार्किक था"। तो स्पष्टता से सोचें।
- यह स्पष्टता कई तरीके से किया जा सकता है। अगर आप अपने कंपनी के सहकर्मियों के साथ साल के बुरे प्रदर्शन कर रहे हों तो, भूख से मर रहे परिवारों के चित्र से सहकर्मियों को प्रेरित करना उचित बात नहीं है। छवियों का इस्तेमाल उचित रूप से करें। अगर आप अंको की बात कर रहे हैं तो, ग्राफ़ का उपयोग करें। अगर आप भावनाओं की बात कर रहे हैं, तो तस्वीर दर्शाएं। अपने संदर्भ को जाने।
{"smallUrl":"https:\/\/www1विषय का परिचय मज़बूती से करेंः दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हमेशा बड़े तथ्यों से शुरु करें। याद है वह बात, दर्शकों को क्या बाँधे रखता है? अब इन बातों का समय आ गया है। अपने भाषण में घुस जाएं, व्यक्तिगत बनें और अपने मानवीय पक्ष दिखाएं।
- महत्वपूर्ण कथन या दूसरों के शब्दों के साथ शुरुआत करने से आपकी विश्वसनीयता को स्थापित कर देता है। मेर्रियम वेबस्टर का उपयोग विशेषज्ञ बनने के लिए न करें; हर कीमत पर घिसी-पिटी पदों का प्रयोग न करें।
{"smallUrl":"https:\/\/www3भाषण के मुख्य भाग का निर्माण करेंः इस भाग में मुख्य विषयों और उनके समर्थन में जानकारी होनी चाहिए। जो सूची आपने पहले बनाई थी? उन्हें अब तीन विषयों तक सीमित रखें। इनमें से कौन से विषय पक्के तौर पर विश्वसनीय है?
- सबसे प्रबल विषयों से शुरु करें। आप चाहेंगे की आपके विवादों में कोई भी दोष न हो। आप उन्हें अपने पक्ष में करें, इससे पहले की उन्हें आपकी आलोचना करने का मौका मिल जाये।
- सबसे कमजोर विषय को बीच में रखें। आप इसको सैंडविच कर रहे हैं क्योंकि आप चाहते है कि दर्शक इसे भूल जाएं।
- अपने दूसरे प्रबल विषय के साथ समाप्ति करें। आप इसे संतोषजनक रूप से समाप्त करें I एक बार फिर से पूरे मुद्दे को दोहराएं, आखिरी सबूत के साथ विवाद समाप्त करें।
{"smallUrl":"https:\/\/www5दृढ़ निष्कर्ष के साथ समाप्त करेंः एक शक्तिशाली दृढ़ निष्कर्ष और सारांश के साथ समाप्त करें। उन्हें आप एक प्रश्न या तात्पर्य के साथ छोड़ दे; कुछ अस्पष्ट वस्तु के साथ छोड़ दे - आपके विचार में वह कुछ क्या होना चाहिए?
- आपसे लिखी भाषण से दर्शकों को पूरा होने का एहसास दें। उन्हें शुरुआत से फिर से ज़ोर से परिचित करवाएं - आखिरकार, अब उनके पास जोश से भरपूर आवश्यक ज्ञान है। आप इसे अंतिम अनुच्छेद के शुरुआत में एक प्रबल और, ज्ञापक वाक्य के साथ कर सकते हैं।
विधि 4 का 4:
{"smallUrl":"https:\/\/www2स्पष्टता का निरीक्षण करेंः अकसर जब हम कुछ लिखते हैं, उसे कहने का एक आसान तरीका भी है। अपने लेख पर फिर से नज़र डालें I हर एक वाक्य का लिहाज़ करें -- क्या आप इसे और साफ़ कर सकते हैं?
{"smallUrl":"https:\/\/www4अपने भाषण को आखिरी रूप देः एक बार अपने विषय तैयार कर लिए, उसका अंतिम रूप बनाएं। इसी स्थान में आप भाषण देने के तरीक़े अपनाएंगे।
- शरीर के इशारों को लिखें। आपका भाषण वास्तविक लगना चाहिए न की बनावटी, एक छोटे पत्र में अपने शरीर के अंग (जैसे चेहरा, हाथ, आदि) का प्रयोग लिखने से पूर्वाभ्यास करते वक़्त इसकी मदद ले सकते हैं।
- भाषण के सारांश को एक अनौपचारिक पर्ची में लिखिए। यों कि आप भाषण को नहीं पढ़ते, एक अनौपचारिक पर्ची में सारांश लिखना अच्छी बात है ताकि आपसे कुछ छूट न जाएं... जैसे दर्शकों को ध्यान से सुनने और कमेटी को आमंत्रित करने का धन्यवाद करें।
- समाप्त करेंः भाषण का आखिरी वाक्य सशक्त हो ताकि समाप्ति प्राकृतिक लगे I लोग हमेशा आखिर के अंक याद रखते हैं; तो, इसे ज़ोर से बोलें!
- निराशाजनक तरीके से धन्यवाद न कहे, जिससे पता चले कि भाषण ख़त्म हो गया है। यह अनावश्यक है।
- अपने महत्वपूर्ण विषयों पर ज़ोर दें! अपने भाषण में परिवर्तन न करें की लोग आपको परखेंगे (दबाव में खरा उतरें) I परिवर्तन तब करें जब आप ऐसा चाहते हो, और संपादन से कोई आपत्ति न हो।
- फ्लिप चार्ट या ड्राई इरेज़ बोर्ड को अपने व्याख्यान में शामिल करने से पहले सोचे लें। अंत में आपको लगेगा की आपने दर्शकों के बजाए फ्लिप चार्ट से ही बात कर रहे हैं। दर्शक आपके अस्पष्ट लेख से विचलित हो सकते हैं -- या आपके भाषण में हो रहे गड़बड़ को देख रहे हैं। असुरक्षित या शर्मीले स्पीकर को मंच का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि इससे उनका ध्यान भाषण से हट जाता है। आपकी स्थिति में जो अनुकूल है, वही सही।
- हर कोई अपनी पुरानी यादों को ताज़ा कर लेते हैं जब वह अपनी भाषण को भली-भाँति याद रखना, दोहराना और रिक्त होना। इससे भाषण पटरी से उतर सकता है। अपने विषय के साथ सहज रहे और कुछ प्रमुख अंकों को 3x5 कार्ड पर अंकित कर लें, उसे एक विशेष धागे या छल्ले से बाँध लें। शांत रहे और भाषण में हुई गलतियों से न डरें; लोग आपके खिलाफ कुछ नहीं कह सकेंगे।
- आपके भाषण की लंबाई कार्यक्रम से निर्धारित है। याद रखें कि हर मिनट में स्पीकर करीब 100-135 शब्दों का प्रयोग करता है I नीचे भाषण की लंबाई के नमूने दिए गए हैः
- विशेषज्ञ का भाषणः 18-22 मिनट (1800 से 2970 शब्द)
- औपचारिक स्पीकरः- 5-7 मिनट (500 से 945 शब्द)
- समाचार कॉन्फरन्सः 2-3 मिनट (200 से 405 शब्द)
- शादी की शुभकामनाएंः 2-3 मिनट (200 से 405 शब्द)
- दर्शकों के संदर्भ का विचार करें। इसे सरलता से करने का तरीके है इसके बारे में सोचनाः दर्शक कौन है? वह यहां क्यों है? और आपके भाषण को सुनने के बाद, आप वह पहली बात क्या है जो उनसे या किसी और से कहलवाना चाहते हों?
- आपके अलावा कौन है जो दर्शकों को अपना परिचय ठीक से लिख पाएंगे? ( यह भाषण नहीं ,आपका परिचय है जिसे आप अपने शब्दों में लिखना चाहेंगे)। अपने भाषण से पहले, उस व्यक्ति से मिले जो आपका परिचय दे रहा हो और उससे अपना परिचय पढ़ें या लिख के दें। जब तक की वह व्यक्ति नौसिखिया है, वह आभार व्यक्त करेगा की उन्हें आपके परिचय लिखने से बचा लिया।
- अगर आपके पास भाषण की पर्चियां है (कागज़ के टुकड़े/ या प्रमुख विषयों के कार्ड) तो आप सारा समय उसी को देखने में व्यर्थ करेंगे। ज्यादा बुलेट विषय या कार्ड न बनाएं।
- लंबे शब्दों का प्रयोग न करें। अभ्यास के दौरान भाषण को समय बंध करें। अगर पाँच मिनट से अधिक हो जाये तो बेहतर होगा की आप एक मंत्रमुग्ध स्पीकर बन जाएं। अगर एक अनाड़ी भाषण देता है, तो दर्शक 3 के बाद अपनी घड़ी को शुरू कर देते हैं। याद रहें अब्राहम लिंकल्न को सिर्फ एक या दो मिनट ही गेट्टीसबर्ग भाषण में लगा।
सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो १,२९,१३७ बार पढ़ा गया है।
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यह आर्टिकल एक,उनतीस,एक सौ सैंतीस बार देखा गया है। जब भी आप किसी सार्वजनिक सभा या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो आपसे उम्मीद की जाती है की आप बोले, और ऐसे मौकों पर आपको भाषण देने के लिए काफी तैयारी करनी पड़ती है। इस लेख में आपको अच्छे भाषण लिखने की टिप्पणियां दी गयी हैं। विधि एक का चार: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोअपने उद्देश्य या थीसिस को चुनेंः आपके चुने गये विषय के बारे में भाषण क्यों दे रहे है? - थीसिस वह मुद्दा है जिस पर आप जोर देना चाहेंगे। यदि अपने जीवन में हुए घटनाओं के बारे में भाषण लिख रहे हैं तो, आपका क्या संदेश होगा? आपका विषय अपने मौत से संघर्ष के बारे में हो सकता है, पर आपका थीसिस या उद्देश्य साट बेल्ट लगाने का समर्थन दर्शाना चाहिए। आपको प्रमाण के साथ इस विषय को व्यतीत करना चाहिए, "इससे मेरी जान बची" से बहस करने से आप कुछ हासिल नहीं कर सकेंगे! - एक अच्छा भाषण एक अच्छे कारण के लिए ही लिखा जाता हैः प्रेरित करने, निर्देश देने, समर्थन इकट्ठे करने, एवं कार्रवाई के नेतृत्व करने के लिए I यह सब नेक उद्देश्य हैं - सिर्फ सुनाने, या स्पीकर के अहंकार को बढ़ावा देने, या चापलूसी करने, डराने, या किसी की बेइज्जती करने के लिए नहीं है। - थीसिस वह मुद्दा है जिस पर आप जोर देना चाहेंगे। यदि अपने जीवन में हुए घटनाओं के बारे में भाषण लिख रहे हैं तो, आपका क्या संदेश होगा? आपका विषय अपने मौत से संघर्ष के बारे में हो सकता है, पर आपका थीसिस या उद्देश्य साट बेल्ट लगाने का समर्थन दर्शाना चाहिए। आपको प्रमाण के साथ इस विषय को व्यतीत करना चाहिए, "इससे मेरी जान बची" से बहस करने से आप कुछ हासिल नहीं कर सकेंगे! {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारविश्वास दिलाने योग्य बनेंः अपने दर्शकों को राज़ी करने आपको जो ठीक लगे, उसे करें। अगर आपके उल्लेख तार्किक नहीं है तो, अन्य सोच-विचारों को दृष्टि में लाएं। अगर दर्शक आपके विचारों से सहमत नहीं है, तो उन्हें अपने हर शब्दों से पकड़े रहें। - प्लेटो की अपील कि भाषण में लोकाचार, करुणा और लोगो का उपयोग लाभ दायक होगा। अपने दर्शकों को राज़ी करें ताकि आप उनका विश्वास जीत सकें या दूसरे विचारों का उपयोग करके राज़ी करने उनकी भावनाओं को समझें , या फिर सीधे शब्दों का उपयोग करना । दूसरों की तुलना में कुछ भी मजबूत या अधिक प्रभावशाली नहीं होता; यह सब स्थिति पर निर्भर करता है। विधि दो का चार: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोउनकी ध्यान को आकर्षित करेंः उनके साथ "हाथ मिलाए", औपचारिक ही सही। अपने भाषण को व्यक्तिगत करें ताकी आपके दर्शक आपके साथ बाँधे रहें। अपने विषय पर दर्शकों की सहमती और आपके साथ घनिष्ठ संबंध बनाएं। - लिखते वक़्त भी, अपनी वास्तविक मुस्कुराहट बनाएं रखें। यह बात दर्शक भी बता सकेंगे। आप शुरुआत, एक मनोरंजक चुटकुले के साथ करना चाहेंगे या विचारात्मक किस्से से, जो एक स्थिति से जुड़ सके। - जैसे ही आप लिखते है, यह सोचें की आप अपने मित्र से क्या कहेंगे। आप जितने आरामदायक और खुले होंगे, दर्शक उतने ही आसानी से आपकी और खींचे रहेंगे। आपको चुनना है कि आप अपने विचारें को कैसे व्यक्त करेंगे जैसे आप किसी व्यक्ति के साथ आसानी से अपने विचार व्यतीत कर रहें हो, किसी से अपनी भावनाएं सहजता से प्रकट कर सकें। दिल से दिया गया भाषण सबसे प्रभावशाली होते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारउदाहरण से समझाएंः अपने लिखित को चित्रात्मक बनायें। आपका लक्ष्य अपने भाषण के मुख्य विषयों को दर्शकों के मन में छा जाए। अगर कोई पूछे या बाद में भाषण की तारीफ़ करें, तो इस तरह सुनाई देगा, "मुझे वह कहानी पसंद आयी जो टॉम ने अपनी बहन को सुनाया" या "इस साल की कमाई का पाई चार्ट मददगार था"। वह शायद ऐसा नहीं कहेंगे, "आपके भाषण के मुख्य भाग का दूसरा विषय सोचा समझा और तार्किक था"। तो स्पष्टता से सोचें। - यह स्पष्टता कई तरीके से किया जा सकता है। अगर आप अपने कंपनी के सहकर्मियों के साथ साल के बुरे प्रदर्शन कर रहे हों तो, भूख से मर रहे परिवारों के चित्र से सहकर्मियों को प्रेरित करना उचित बात नहीं है। छवियों का इस्तेमाल उचित रूप से करें। अगर आप अंको की बात कर रहे हैं तो, ग्राफ़ का उपयोग करें। अगर आप भावनाओं की बात कर रहे हैं, तो तस्वीर दर्शाएं। अपने संदर्भ को जाने। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकविषय का परिचय मज़बूती से करेंः दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हमेशा बड़े तथ्यों से शुरु करें। याद है वह बात, दर्शकों को क्या बाँधे रखता है? अब इन बातों का समय आ गया है। अपने भाषण में घुस जाएं, व्यक्तिगत बनें और अपने मानवीय पक्ष दिखाएं। - महत्वपूर्ण कथन या दूसरों के शब्दों के साथ शुरुआत करने से आपकी विश्वसनीयता को स्थापित कर देता है। मेर्रियम वेबस्टर का उपयोग विशेषज्ञ बनने के लिए न करें; हर कीमत पर घिसी-पिटी पदों का प्रयोग न करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनभाषण के मुख्य भाग का निर्माण करेंः इस भाग में मुख्य विषयों और उनके समर्थन में जानकारी होनी चाहिए। जो सूची आपने पहले बनाई थी? उन्हें अब तीन विषयों तक सीमित रखें। इनमें से कौन से विषय पक्के तौर पर विश्वसनीय है? - सबसे प्रबल विषयों से शुरु करें। आप चाहेंगे की आपके विवादों में कोई भी दोष न हो। आप उन्हें अपने पक्ष में करें, इससे पहले की उन्हें आपकी आलोचना करने का मौका मिल जाये। - सबसे कमजोर विषय को बीच में रखें। आप इसको सैंडविच कर रहे हैं क्योंकि आप चाहते है कि दर्शक इसे भूल जाएं। - अपने दूसरे प्रबल विषय के साथ समाप्ति करें। आप इसे संतोषजनक रूप से समाप्त करें I एक बार फिर से पूरे मुद्दे को दोहराएं, आखिरी सबूत के साथ विवाद समाप्त करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwपाँचदृढ़ निष्कर्ष के साथ समाप्त करेंः एक शक्तिशाली दृढ़ निष्कर्ष और सारांश के साथ समाप्त करें। उन्हें आप एक प्रश्न या तात्पर्य के साथ छोड़ दे; कुछ अस्पष्ट वस्तु के साथ छोड़ दे - आपके विचार में वह कुछ क्या होना चाहिए? - आपसे लिखी भाषण से दर्शकों को पूरा होने का एहसास दें। उन्हें शुरुआत से फिर से ज़ोर से परिचित करवाएं - आखिरकार, अब उनके पास जोश से भरपूर आवश्यक ज्ञान है। आप इसे अंतिम अनुच्छेद के शुरुआत में एक प्रबल और, ज्ञापक वाक्य के साथ कर सकते हैं। विधि चार का चार: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोस्पष्टता का निरीक्षण करेंः अकसर जब हम कुछ लिखते हैं, उसे कहने का एक आसान तरीका भी है। अपने लेख पर फिर से नज़र डालें I हर एक वाक्य का लिहाज़ करें -- क्या आप इसे और साफ़ कर सकते हैं? {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारअपने भाषण को आखिरी रूप देः एक बार अपने विषय तैयार कर लिए, उसका अंतिम रूप बनाएं। इसी स्थान में आप भाषण देने के तरीक़े अपनाएंगे। - शरीर के इशारों को लिखें। आपका भाषण वास्तविक लगना चाहिए न की बनावटी, एक छोटे पत्र में अपने शरीर के अंग का प्रयोग लिखने से पूर्वाभ्यास करते वक़्त इसकी मदद ले सकते हैं। - भाषण के सारांश को एक अनौपचारिक पर्ची में लिखिए। यों कि आप भाषण को नहीं पढ़ते, एक अनौपचारिक पर्ची में सारांश लिखना अच्छी बात है ताकि आपसे कुछ छूट न जाएं... जैसे दर्शकों को ध्यान से सुनने और कमेटी को आमंत्रित करने का धन्यवाद करें। - समाप्त करेंः भाषण का आखिरी वाक्य सशक्त हो ताकि समाप्ति प्राकृतिक लगे I लोग हमेशा आखिर के अंक याद रखते हैं; तो, इसे ज़ोर से बोलें! - निराशाजनक तरीके से धन्यवाद न कहे, जिससे पता चले कि भाषण ख़त्म हो गया है। यह अनावश्यक है। - अपने महत्वपूर्ण विषयों पर ज़ोर दें! अपने भाषण में परिवर्तन न करें की लोग आपको परखेंगे I परिवर्तन तब करें जब आप ऐसा चाहते हो, और संपादन से कोई आपत्ति न हो। - फ्लिप चार्ट या ड्राई इरेज़ बोर्ड को अपने व्याख्यान में शामिल करने से पहले सोचे लें। अंत में आपको लगेगा की आपने दर्शकों के बजाए फ्लिप चार्ट से ही बात कर रहे हैं। दर्शक आपके अस्पष्ट लेख से विचलित हो सकते हैं -- या आपके भाषण में हो रहे गड़बड़ को देख रहे हैं। असुरक्षित या शर्मीले स्पीकर को मंच का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि इससे उनका ध्यान भाषण से हट जाता है। आपकी स्थिति में जो अनुकूल है, वही सही। - हर कोई अपनी पुरानी यादों को ताज़ा कर लेते हैं जब वह अपनी भाषण को भली-भाँति याद रखना, दोहराना और रिक्त होना। इससे भाषण पटरी से उतर सकता है। अपने विषय के साथ सहज रहे और कुछ प्रमुख अंकों को तीनxपाँच कार्ड पर अंकित कर लें, उसे एक विशेष धागे या छल्ले से बाँध लें। शांत रहे और भाषण में हुई गलतियों से न डरें; लोग आपके खिलाफ कुछ नहीं कह सकेंगे। - आपके भाषण की लंबाई कार्यक्रम से निर्धारित है। याद रखें कि हर मिनट में स्पीकर करीब एक सौ-एक सौ पैंतीस शब्दों का प्रयोग करता है I नीचे भाषण की लंबाई के नमूने दिए गए हैः - विशेषज्ञ का भाषणः अट्ठारह-बाईस मिनट - औपचारिक स्पीकरः- पाँच-सात मिनट - समाचार कॉन्फरन्सः दो-तीन मिनट - शादी की शुभकामनाएंः दो-तीन मिनट - दर्शकों के संदर्भ का विचार करें। इसे सरलता से करने का तरीके है इसके बारे में सोचनाः दर्शक कौन है? वह यहां क्यों है? और आपके भाषण को सुनने के बाद, आप वह पहली बात क्या है जो उनसे या किसी और से कहलवाना चाहते हों? - आपके अलावा कौन है जो दर्शकों को अपना परिचय ठीक से लिख पाएंगे? । अपने भाषण से पहले, उस व्यक्ति से मिले जो आपका परिचय दे रहा हो और उससे अपना परिचय पढ़ें या लिख के दें। जब तक की वह व्यक्ति नौसिखिया है, वह आभार व्यक्त करेगा की उन्हें आपके परिचय लिखने से बचा लिया। - अगर आपके पास भाषण की पर्चियां है तो आप सारा समय उसी को देखने में व्यर्थ करेंगे। ज्यादा बुलेट विषय या कार्ड न बनाएं। - लंबे शब्दों का प्रयोग न करें। अभ्यास के दौरान भाषण को समय बंध करें। अगर पाँच मिनट से अधिक हो जाये तो बेहतर होगा की आप एक मंत्रमुग्ध स्पीकर बन जाएं। अगर एक अनाड़ी भाषण देता है, तो दर्शक तीन के बाद अपनी घड़ी को शुरू कर देते हैं। याद रहें अब्राहम लिंकल्न को सिर्फ एक या दो मिनट ही गेट्टीसबर्ग भाषण में लगा। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो एक,उनतीस,एक सौ सैंतीस बार पढ़ा गया है।
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नौतनवा (महराजगंज): जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम नौतनवा प्रमोद कुमार ने गेहूं क्रय केंद्रों समेत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का औचक निरीक्षण किया है। इस दौरान कुछ केंद्रों को चेतावनी भी दी गई। एसडीएम ने सभी केंद्रों को जरूरी निर्देश भी दिये।
जानकारी के अनुसार निरकीक्षण के दौरान बैकुंठपुर सोसाइटी पर कोई खरीदारी होती नहीं पायी गई। एसडीएम ने बैकुंठपुर क्रय केंद्र को चेतावनी दी है कि तत्काल खरीद सुनिश्चित करें अन्यथा की स्थिति में एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
शेखुवानी क्रय केंद्र पर जब एसडीएम पहुंचे तो वहां केंद्र संचालन करते हुए पाया गया। कोटेदारों को गोदाम से कम मात्रा में दिया जा रहा था। खाद्यान्न मार्केटिंग इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया गया।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का औचक जांच किया गया है। सभी को जरूरी दिशा-निर्दंश दिये गये हैं।
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नौतनवा : जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम नौतनवा प्रमोद कुमार ने गेहूं क्रय केंद्रों समेत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का औचक निरीक्षण किया है। इस दौरान कुछ केंद्रों को चेतावनी भी दी गई। एसडीएम ने सभी केंद्रों को जरूरी निर्देश भी दिये। जानकारी के अनुसार निरकीक्षण के दौरान बैकुंठपुर सोसाइटी पर कोई खरीदारी होती नहीं पायी गई। एसडीएम ने बैकुंठपुर क्रय केंद्र को चेतावनी दी है कि तत्काल खरीद सुनिश्चित करें अन्यथा की स्थिति में एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। शेखुवानी क्रय केंद्र पर जब एसडीएम पहुंचे तो वहां केंद्र संचालन करते हुए पाया गया। कोटेदारों को गोदाम से कम मात्रा में दिया जा रहा था। खाद्यान्न मार्केटिंग इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कोटेदारों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का औचक जांच किया गया है। सभी को जरूरी दिशा-निर्दंश दिये गये हैं।
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मुंबई। धारावाहिक 'मेरी आवाज ही पहचान है' से छोटे पर्दे पर कदम रख रहीं अभिनेत्री अमृता राव का कहना है कि उन्हें खुशी है कि छोटा पर्दा संस्कृति से जुड़े परिधान के उपयोग को बढ़ावा देता है। अमृता धारावाहिक में पारंपरिक भारतीय लुक में नजर आएंगी। उनके परिधान से लेकर जेवर आदि सभी कुछ एकदम 'देसी' होगा।
उन्होंने कहा कि किरदारों को अति फैशनेबल नहीं दिखाया जाएगा।
बॉलीवुड में अमृता को 'विवाह', 'इश्क विश्क', 'मैं हूं ना' और 'जॉली एलएलबी' सरीखी फिल्मों में उनकी भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है। उनका कहना है कि कई धारावाहिक निर्माताओं ने उन्हें अपने धारावाहिक में लेने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वह छोटे पर्दे पर एक 'धमाकेदार धारावाहिक' से कदम रखना चाहती थीं।
'मेरी आवाज ही पहचान है' में अमृता कल्याणी नामक गायिका की भूमिका निभा रही हैं।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुंबई। धारावाहिक 'मेरी आवाज ही पहचान है' से छोटे पर्दे पर कदम रख रहीं अभिनेत्री अमृता राव का कहना है कि उन्हें खुशी है कि छोटा पर्दा संस्कृति से जुड़े परिधान के उपयोग को बढ़ावा देता है। अमृता धारावाहिक में पारंपरिक भारतीय लुक में नजर आएंगी। उनके परिधान से लेकर जेवर आदि सभी कुछ एकदम 'देसी' होगा। उन्होंने कहा कि किरदारों को अति फैशनेबल नहीं दिखाया जाएगा। बॉलीवुड में अमृता को 'विवाह', 'इश्क विश्क', 'मैं हूं ना' और 'जॉली एलएलबी' सरीखी फिल्मों में उनकी भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है। उनका कहना है कि कई धारावाहिक निर्माताओं ने उन्हें अपने धारावाहिक में लेने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वह छोटे पर्दे पर एक 'धमाकेदार धारावाहिक' से कदम रखना चाहती थीं। 'मेरी आवाज ही पहचान है' में अमृता कल्याणी नामक गायिका की भूमिका निभा रही हैं। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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RRR के फैंस ने विजयवाड़ा के थियेटर में कांच तोड़े-सीटें फाड़ी, लगाए Jr NTR और Ram Charan के नारे; जानिए क्यों?
RRR fans vandilised theater: जूनियर एनटीआर और रामचरण की फिल्म आरआरआर के लिए शुक्रवार का दिन तो वैसे अच्छा रहा लेकिन आंध्र प्रदेश में फिल्म की स्क्रिनिंग पर तोड़फोड़ देखने को मिली क्योंकि टेक्नीकल इशू के कारण फिल्म रोक दी गई थी।
RRR fans vandilised theater: जूनियर एनटीआर और रामचरण की फिल्म आरआरआर शुक्रवार को देशभर में रिलीज कर दी गई है। एसएस राजामौली की इस फिल्म को देशभर से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। लेकिन आंध्र प्रदेश के विजय से एक अप्रिय घटना सामने आई है। दरअसल आरआरआर के फैंस ने विजयवाड़ा के एक थियेटर में जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने अन्नपूर्णा नाम के एक थियेटर में स्क्रीन खराब करने की कोशिश की, सीटें फाड़ीं और यहां तक कि थियेटर परिसर के कांच भी तोड़े। ये सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि थियेटर में स्क्रिनिंग रुक गई थी और लोग फिल्म देखने के लिए परेशान हो गए थे। लोगों ने जूनिएयर एनटीआर और राम चरण के नारे लगाने भी शुरू कर दिए थे।
फिल्म की स्क्रिनिंग में एक टेक्नीकल इशू की वजह से खराबी आ गई थी। जिसकी वजह से आधे घंटें से ज्यादा स्क्रीनिंग रुक गई थी। कुछ लोग तो थियेटर से गुस्सा होकर बाहर निकल गए लेकिन कुछ ने तोड़फोड़ मचा दी। इसके बाद पुलिस को बीच में आना पड़ा और ये उठापठक रुकवाई गई। थियेटर मैनेजमेंट ने उत्पात मचाने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फूटेज खंगालते हुए कार्रवाई कर रही है। आखिरकार करीब 2 घंटे की देरी के बाद फिर से फिल्म की स्क्रिनिंग शुरू हो पाई।
आरआरआर काफी समय बाद थियेटर पर रिलीज हुई है। महामारी की वजह से फिल्म को मेकर्स रिलीज ही नहीं कर रहे थे। बार बार फिल्म को आगे टाला जा रहा था क्योंकि थियेटर्स या तो आधी क्षमता से खुल रह थे या कई राज्यों में खुल ही नहीं रहे थे। फिल्म का बजट करीब 600 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ये फिल्म पैन इंडिया फिल्म है और कई भाषाओं में रिलीज हुई है। आप इसे इंडिया के अलग अलग राज्यों में तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी में देख सकते हैं। ओरमैक्स मीडिया की मानें तो फिल्म पहले ही दिन पूरे इंडिया से अलग अलग भाषाओं में कुल मिलाकर 130 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर सकती है।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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RRR के फैंस ने विजयवाड़ा के थियेटर में कांच तोड़े-सीटें फाड़ी, लगाए Jr NTR और Ram Charan के नारे; जानिए क्यों? RRR fans vandilised theater: जूनियर एनटीआर और रामचरण की फिल्म आरआरआर के लिए शुक्रवार का दिन तो वैसे अच्छा रहा लेकिन आंध्र प्रदेश में फिल्म की स्क्रिनिंग पर तोड़फोड़ देखने को मिली क्योंकि टेक्नीकल इशू के कारण फिल्म रोक दी गई थी। RRR fans vandilised theater: जूनियर एनटीआर और रामचरण की फिल्म आरआरआर शुक्रवार को देशभर में रिलीज कर दी गई है। एसएस राजामौली की इस फिल्म को देशभर से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। लेकिन आंध्र प्रदेश के विजय से एक अप्रिय घटना सामने आई है। दरअसल आरआरआर के फैंस ने विजयवाड़ा के एक थियेटर में जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने अन्नपूर्णा नाम के एक थियेटर में स्क्रीन खराब करने की कोशिश की, सीटें फाड़ीं और यहां तक कि थियेटर परिसर के कांच भी तोड़े। ये सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि थियेटर में स्क्रिनिंग रुक गई थी और लोग फिल्म देखने के लिए परेशान हो गए थे। लोगों ने जूनिएयर एनटीआर और राम चरण के नारे लगाने भी शुरू कर दिए थे। फिल्म की स्क्रिनिंग में एक टेक्नीकल इशू की वजह से खराबी आ गई थी। जिसकी वजह से आधे घंटें से ज्यादा स्क्रीनिंग रुक गई थी। कुछ लोग तो थियेटर से गुस्सा होकर बाहर निकल गए लेकिन कुछ ने तोड़फोड़ मचा दी। इसके बाद पुलिस को बीच में आना पड़ा और ये उठापठक रुकवाई गई। थियेटर मैनेजमेंट ने उत्पात मचाने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फूटेज खंगालते हुए कार्रवाई कर रही है। आखिरकार करीब दो घंटाटे की देरी के बाद फिर से फिल्म की स्क्रिनिंग शुरू हो पाई। आरआरआर काफी समय बाद थियेटर पर रिलीज हुई है। महामारी की वजह से फिल्म को मेकर्स रिलीज ही नहीं कर रहे थे। बार बार फिल्म को आगे टाला जा रहा था क्योंकि थियेटर्स या तो आधी क्षमता से खुल रह थे या कई राज्यों में खुल ही नहीं रहे थे। फिल्म का बजट करीब छः सौ करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ये फिल्म पैन इंडिया फिल्म है और कई भाषाओं में रिलीज हुई है। आप इसे इंडिया के अलग अलग राज्यों में तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी में देख सकते हैं। ओरमैक्स मीडिया की मानें तो फिल्म पहले ही दिन पूरे इंडिया से अलग अलग भाषाओं में कुल मिलाकर एक सौ तीस करोड़ रुपये का कलेक्शन कर सकती है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बिहार में मध्यावधि चुनाव वाले बयान को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि भविष्यवाणी से पूरी तरह सहमत हूं. पर वह चुनाव नहीं उप-चुनाव होगा.
पटनाः बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बिहार में मध्यावधि चुनाव वाले बयान को लेकर अब सूबे की सियासत गर्माने लगी है.
दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई राजद की बैठक में तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि बिहार में अगले साल यानी 2021 में मध्यावधि चुनाव होंगे. तेजस्वी यादव के इस बयान पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि मैं भी 2021 में चुनाव होने की भविष्यवाणी से पूरी तरह सहमत हूं. पर वह चुनाव नहीं उप-चुनाव होगा.
जीतन राम मांझी ने कहा कि 14 जनवरी तक का इंतजार कीजिए और देखिए कि किन-किन सीटों पर उपचुनाव होंगे. उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस के कई विधायक हमारे साथ हैं. इन सभी के हमारे साथ आने पर तो उप चुनाव होंगे ही. यहां बता दें कि सोमवार को राजद की समीक्षा बैठक में तेजस्वी यादव ने आह्वान किया था कि तैयार रहें, वर्ष 2021 में मध्यावधि चुनाव कभी भी हो सकता है.
उन्होंने कहा कि जनता ने महागठबंधन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन एनडीए ने जोड़तोड़ से सरकार बना ली. उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के बाद वे राज्यभर में धन्यवाद यात्रा पर निकलेंगे. तेजस्वी ने कहा विपरीत परिस्थितियों के बाद भी राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. सभी वर्गों का वोट पार्टी को मिला.
चुनाव परिणाम और बेहतर होता अगर कुछ लोग भितरघात नहीं करते. पार्टी में रहते हुए महागठबंधन उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया गया. राजद के हिस्से 144 सीटें आई थीं तो हम इतने पर ही प्रत्याशी उतार सकते थे. सभी को टिकट देना संभव नहीं था. उन्होंने कहा जिन लोगों ने गड़बड़ी की है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.
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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बिहार में मध्यावधि चुनाव वाले बयान को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि भविष्यवाणी से पूरी तरह सहमत हूं. पर वह चुनाव नहीं उप-चुनाव होगा. पटनाः बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बिहार में मध्यावधि चुनाव वाले बयान को लेकर अब सूबे की सियासत गर्माने लगी है. दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई राजद की बैठक में तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि बिहार में अगले साल यानी दो हज़ार इक्कीस में मध्यावधि चुनाव होंगे. तेजस्वी यादव के इस बयान पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि मैं भी दो हज़ार इक्कीस में चुनाव होने की भविष्यवाणी से पूरी तरह सहमत हूं. पर वह चुनाव नहीं उप-चुनाव होगा. जीतन राम मांझी ने कहा कि चौदह जनवरी तक का इंतजार कीजिए और देखिए कि किन-किन सीटों पर उपचुनाव होंगे. उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस के कई विधायक हमारे साथ हैं. इन सभी के हमारे साथ आने पर तो उप चुनाव होंगे ही. यहां बता दें कि सोमवार को राजद की समीक्षा बैठक में तेजस्वी यादव ने आह्वान किया था कि तैयार रहें, वर्ष दो हज़ार इक्कीस में मध्यावधि चुनाव कभी भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि जनता ने महागठबंधन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन एनडीए ने जोड़तोड़ से सरकार बना ली. उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के बाद वे राज्यभर में धन्यवाद यात्रा पर निकलेंगे. तेजस्वी ने कहा विपरीत परिस्थितियों के बाद भी राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. सभी वर्गों का वोट पार्टी को मिला. चुनाव परिणाम और बेहतर होता अगर कुछ लोग भितरघात नहीं करते. पार्टी में रहते हुए महागठबंधन उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया गया. राजद के हिस्से एक सौ चौंतालीस सीटें आई थीं तो हम इतने पर ही प्रत्याशी उतार सकते थे. सभी को टिकट देना संभव नहीं था. उन्होंने कहा जिन लोगों ने गड़बड़ी की है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.
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OnePlus की ओर से बहुचर्चित OnePlus Nord 3, और Nord 3 CE 5G टेलीफोन 5 जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है. अभी तक Nord 3 टेलीफोन के बारे में कंपनी 6. 74 इंच AMOLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, कलर वेरिएंट्स, अलर्ट स्लाइडर फीचर जैसे स्पेक्स कंफर्म कर चुकी है. OnePlus Nord 3 के कैमरा की बात करें तो इसमें कंपनी Sony का IMX890 सेंसर उपयोग करने जा रही है. सेल्फी के लिए टेलीफोन 16 मेगापिक्सल लेंस कैरी कर सकता है. बैटरी कैपिसिटी 5000mAh की हो सकती है. टेलीफोन में 80W SuperVOOC चार्जिंग भी मिलेगी, ऐसा बोला गया है.
के स्पेसिफिकेशन देखें तो टेलीफोन में 6. 7 इंच का सुपर एमोलेड डिस्प्ले देखने को मिलेगा जिसमें 120Hz का रिफ्रेश दर और 950 निट्स की पीक ब्राइटनेस देखने को मिल सकती है. इसमें Snapdragon 782G चिपसेट दिया जाएगा जिसके साथ में 12GB तक LPDDR4X फिजिकल रैम, और 16GB तक वर्चुअल रैम का सपोर्ट होगा.
हिंदुस्तान में 4 जुलाई को लॉन्च होने वाला है. अभी तक इस टेलीफोन के बारे में जो लीक्स सामने आए हैं, उनके अनुसार यह Snapdragon 8 Plus Gen 1 चिपसेट के साथ आने वाला है. टेलीफोन में 5000एमएएच बैटरी देखने को मिल सकती है. इसका प्राइमरी कैमरा 50 मेगापिक्सल का OIS सपोर्टेड लेंस बताया गया है. साथ ही यह 120W फास्ट चार्जिंग फीचर के साथ भी आ सकता है. टेलीफोन में 12 जीबी तक रैम देखने को मिल सकती है. इसकी मूल्य 33999 रुपये तक हो सकती है.
IQOO की ओर से ही 11S भी 4 जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है लेकिन ये चीन में लॉन्च होगा. टेलीफोन में Qualcomm Snapdragon 8 Gen 2 लगा है जिसके साथ में LPDDR5x RAM और UFS 4. 0 स्टोरेज देखने को मिल सकती है. यह टेलीफोन 2K रिजॉल्यूशन वाले डिस्प्ले के साथ बताया गया है. जिसमें 144Hz तक रिफ्रेश दर देखने को मिल सकता है. इसमें रियर में 50 मेगापिक्सल का Sony IMX866 सेंसर देखने को मिल सकता है. टेलीफोन में 4700 एमएएच बैटरी 200W फास्ट चार्जिंग के साथ आ सकती है.
भी इसी सप्ताह लॉन्च होने जा रहा है. यह टेलीफोन जुलाई की 5 तारीख को चीन में दस्तक देने जा रहा है. इसके बारे में बोला गया है कि यह 24GB रैम के साथ आने वाला है जो कि होगा. टेलीफोन में Qualcomm Snapdragon 8 Plus Gen 2 चिप देखने को मिल सकती है. इसमें बैटरी भी बड़ी बताई गई है जो कि 6000mAh की है. टेलीफोन में 165W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिल सकता है.
Honor X50 चीन में 5 जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है. टेलीफोन Qualcomm Snapdragon 6 Gen 1 SoC के साथ बताया गया है. इसमें 5800mAh बैटरी देखने को मिल सकती है. टेलीफोन में 1. 5K कर्व्ड डिस्प्ले होगा और 100MP का प्राइमरी कैमरा देखने को मिल सकता है. यह 35W फास्ट चार्जिंग के साथ आने वाला है.
Realme Narzo 60 सीरीज 6 जुलाई को लॉन्च होने के लिए तैयार है. इसमें Realme Narzo 60 और Realme Narzo 60 Pro को लॉन्च किया जाएगा, ऐसा बोला गया है. इन्हें Realme 11 Pro सीरीज का ही रीब्रांडेड वर्जन बताया जा रहा है. Realme Narzo 60 सीरीज की मूल्य 17,999 रुपये से प्रारम्भ हो सकती है.
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OnePlus की ओर से बहुचर्चित OnePlus Nord तीन, और Nord तीन CE पाँचG टेलीफोन पाँच जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है. अभी तक Nord तीन टेलीफोन के बारे में कंपनी छः. चौहत्तर इंच AMOLED डिस्प्ले, एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट, कलर वेरिएंट्स, अलर्ट स्लाइडर फीचर जैसे स्पेक्स कंफर्म कर चुकी है. OnePlus Nord तीन के कैमरा की बात करें तो इसमें कंपनी Sony का IMXआठ सौ नब्बे सेंसर उपयोग करने जा रही है. सेल्फी के लिए टेलीफोन सोलह मेगापिक्सल लेंस कैरी कर सकता है. बैटरी कैपिसिटी पाँच हज़ारmAh की हो सकती है. टेलीफोन में अस्सी वाट SuperVOOC चार्जिंग भी मिलेगी, ऐसा बोला गया है. के स्पेसिफिकेशन देखें तो टेलीफोन में छः. सात इंच का सुपर एमोलेड डिस्प्ले देखने को मिलेगा जिसमें एक सौ बीस हर्ट्ज़ का रिफ्रेश दर और नौ सौ पचास निट्स की पीक ब्राइटनेस देखने को मिल सकती है. इसमें Snapdragon सात सौ बयासीG चिपसेट दिया जाएगा जिसके साथ में बारहGB तक LPDDRचारX फिजिकल रैम, और सोलहGB तक वर्चुअल रैम का सपोर्ट होगा. हिंदुस्तान में चार जुलाई को लॉन्च होने वाला है. अभी तक इस टेलीफोन के बारे में जो लीक्स सामने आए हैं, उनके अनुसार यह Snapdragon आठ Plus Gen एक चिपसेट के साथ आने वाला है. टेलीफोन में पाँच हज़ारएमएएच बैटरी देखने को मिल सकती है. इसका प्राइमरी कैमरा पचास मेगापिक्सल का OIS सपोर्टेड लेंस बताया गया है. साथ ही यह एक सौ बीस वाट फास्ट चार्जिंग फीचर के साथ भी आ सकता है. टेलीफोन में बारह जीबी तक रैम देखने को मिल सकती है. इसकी मूल्य तैंतीस हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपयापये तक हो सकती है. IQOO की ओर से ही ग्यारहS भी चार जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है लेकिन ये चीन में लॉन्च होगा. टेलीफोन में Qualcomm Snapdragon आठ Gen दो लगा है जिसके साथ में LPDDRपाँचx RAM और UFS चार. शून्य स्टोरेज देखने को मिल सकती है. यह टेलीफोन दो केल्विन रिजॉल्यूशन वाले डिस्प्ले के साथ बताया गया है. जिसमें एक सौ चौंतालीस हर्ट्ज़ तक रिफ्रेश दर देखने को मिल सकता है. इसमें रियर में पचास मेगापिक्सल का Sony IMXआठ सौ छयासठ सेंसर देखने को मिल सकता है. टेलीफोन में चार हज़ार सात सौ एमएएच बैटरी दो सौ वाट फास्ट चार्जिंग के साथ आ सकती है. भी इसी सप्ताह लॉन्च होने जा रहा है. यह टेलीफोन जुलाई की पाँच तारीख को चीन में दस्तक देने जा रहा है. इसके बारे में बोला गया है कि यह चौबीसGB रैम के साथ आने वाला है जो कि होगा. टेलीफोन में Qualcomm Snapdragon आठ Plus Gen दो चिप देखने को मिल सकती है. इसमें बैटरी भी बड़ी बताई गई है जो कि छः हज़ारmAh की है. टेलीफोन में एक सौ पैंसठ वाट फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिल सकता है. Honor Xपचास चीन में पाँच जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है. टेलीफोन Qualcomm Snapdragon छः Gen एक SoC के साथ बताया गया है. इसमें पाँच हज़ार आठ सौmAh बैटरी देखने को मिल सकती है. टेलीफोन में एक. पाँच केल्विन कर्व्ड डिस्प्ले होगा और एक सौMP का प्राइमरी कैमरा देखने को मिल सकता है. यह पैंतीस वाट फास्ट चार्जिंग के साथ आने वाला है. Realme Narzo साठ सीरीज छः जुलाई को लॉन्च होने के लिए तैयार है. इसमें Realme Narzo साठ और Realme Narzo साठ Pro को लॉन्च किया जाएगा, ऐसा बोला गया है. इन्हें Realme ग्यारह Pro सीरीज का ही रीब्रांडेड वर्जन बताया जा रहा है. Realme Narzo साठ सीरीज की मूल्य सत्रह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से प्रारम्भ हो सकती है.
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दुबईः अभिनेत्री शमा सिकंदर ने फिट रहने के लिए एक मजेदार तरीका चुना है।
वह दुबई में अपनी छुट्टी के दौरान पोल डांसिंग सीख रही हैं।
अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर पोल डांस करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया।
वीडियो को देखते ही उनके कई प्रसंशक हॉट और अवसम कर रहे हैं।
अभिनेत्री ने कहा, मैं फिटनेस और डासिंग की काफी शौकिन हूं।
इन दोनों चीजों को जो भी मिलाता है, वो मेरी लीस्ट में आ जाता है। कुछ समय के लिए मेरे दिमाग में पोल डांसिंग थी और मुझे इसे सीखने के लिए एक अच्छे कोच और टीम की जरूरत थी।
उन्होंने कहा, दुबई में काफी अच्छे कोच हैं और मैं इस मौके को जाने नहीं दे सकती।
मैंने अभी ही शुरुआत की है, लेकिन मैं इसे बेहतरीन तरीके से करने को तैयार हूं। यह खूबसूरत है।
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दुबईः अभिनेत्री शमा सिकंदर ने फिट रहने के लिए एक मजेदार तरीका चुना है। वह दुबई में अपनी छुट्टी के दौरान पोल डांसिंग सीख रही हैं। अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर पोल डांस करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो को देखते ही उनके कई प्रसंशक हॉट और अवसम कर रहे हैं। अभिनेत्री ने कहा, मैं फिटनेस और डासिंग की काफी शौकिन हूं। इन दोनों चीजों को जो भी मिलाता है, वो मेरी लीस्ट में आ जाता है। कुछ समय के लिए मेरे दिमाग में पोल डांसिंग थी और मुझे इसे सीखने के लिए एक अच्छे कोच और टीम की जरूरत थी। उन्होंने कहा, दुबई में काफी अच्छे कोच हैं और मैं इस मौके को जाने नहीं दे सकती। मैंने अभी ही शुरुआत की है, लेकिन मैं इसे बेहतरीन तरीके से करने को तैयार हूं। यह खूबसूरत है।
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केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसान दिल्ली तक आ पहुंचे हैं. किसानों की लड़ाई दिल्ली तक आ पहुंची है. हरियाणा ने किसानों को रोकने के लिए रास्ते बंद कर दिए हैं तो दिल्ली पुलिस भी मोर्चे पर तैनात है. किसानों को प्रदर्शन से रोके जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति दर्ज कराई है.
सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार के तीनों खेती बिल किसान विरोधी हैं. ये बिल वापिस लेने की बजाय किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, उन पर वॉटर कैनन चलाई जा रही हैं. किसानों पर ये जुर्म बिल्कुल गलत है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है.
हरियाणा सरकार ने बृहस्पतिवार को पंजाब से लगती अपनी सीमा को पूरी तरह सील कर दिया. राज्य की दिल्ली से लगती सीमा पर भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. हरियाणा की भाजपा सरकार ने पंजाब जाने वाली बस सेवा निलंबित कर दी है.
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केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसान दिल्ली तक आ पहुंचे हैं. किसानों की लड़ाई दिल्ली तक आ पहुंची है. हरियाणा ने किसानों को रोकने के लिए रास्ते बंद कर दिए हैं तो दिल्ली पुलिस भी मोर्चे पर तैनात है. किसानों को प्रदर्शन से रोके जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति दर्ज कराई है. सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार के तीनों खेती बिल किसान विरोधी हैं. ये बिल वापिस लेने की बजाय किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है, उन पर वॉटर कैनन चलाई जा रही हैं. किसानों पर ये जुर्म बिल्कुल गलत है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है. हरियाणा सरकार ने बृहस्पतिवार को पंजाब से लगती अपनी सीमा को पूरी तरह सील कर दिया. राज्य की दिल्ली से लगती सीमा पर भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. हरियाणा की भाजपा सरकार ने पंजाब जाने वाली बस सेवा निलंबित कर दी है.
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अभिनेत्री देवोलीना को प्रज्ञा की भूमिका की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने इसे करने के लिए किन्हीं कारणों से साफ मना कर दिया। हालांकि वास्तविक वजह क्या थी ये तो सिर्फ देवो ही जानती हैं।
सनाया ने भी प्रज्ञा की भूमिका निभाने से इनकार कर दिया था। कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन इस दौर की खबरों की मानें तो सनाया ने तब टेलीविजन जगत से ब्रेक लिया था।
टीवी स्टार जेनिफर को भी कुमकुम भाग्य की प्रज्ञा वाली भूमिका की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया था क्योंकि वो सास-बहू टाइप के धारावाहिकों में भूमिका नहीं करना चाहती थीं।
आमना का नाम भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा है। उन्हें भी कुमकुम भाग्य धारावाहिक का ऑफर दिया गया लेकिन आमना ने इसे अस्वीकार कर दिया था। क्योंकि वो तब टेलीविजन पर वापस आने के लिए तैयार नहीं थीं।
अंत में प्रज्ञा की ये भूमिका श्रीति झा को ही मिली। फैन्स को लगता है कि वह इस भूमिका के लिए सही विकल्प हैं और कोई भी प्रज्ञा के रोल के साथ इस तरह का न्याय नहीं कर सकता। फैन्स का यह भी मानना है कि प्रज्ञा और अभी की केमिस्ट्री नॉन रिप्लेसेबल है।
Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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अभिनेत्री देवोलीना को प्रज्ञा की भूमिका की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने इसे करने के लिए किन्हीं कारणों से साफ मना कर दिया। हालांकि वास्तविक वजह क्या थी ये तो सिर्फ देवो ही जानती हैं। सनाया ने भी प्रज्ञा की भूमिका निभाने से इनकार कर दिया था। कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन इस दौर की खबरों की मानें तो सनाया ने तब टेलीविजन जगत से ब्रेक लिया था। टीवी स्टार जेनिफर को भी कुमकुम भाग्य की प्रज्ञा वाली भूमिका की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया था क्योंकि वो सास-बहू टाइप के धारावाहिकों में भूमिका नहीं करना चाहती थीं। आमना का नाम भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा है। उन्हें भी कुमकुम भाग्य धारावाहिक का ऑफर दिया गया लेकिन आमना ने इसे अस्वीकार कर दिया था। क्योंकि वो तब टेलीविजन पर वापस आने के लिए तैयार नहीं थीं। अंत में प्रज्ञा की ये भूमिका श्रीति झा को ही मिली। फैन्स को लगता है कि वह इस भूमिका के लिए सही विकल्प हैं और कोई भी प्रज्ञा के रोल के साथ इस तरह का न्याय नहीं कर सकता। फैन्स का यह भी मानना है कि प्रज्ञा और अभी की केमिस्ट्री नॉन रिप्लेसेबल है। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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नयी दिल्लीः बैंगलोर में आज IPL-2018 के लिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या पंजाब ने स्पेशलिस्ट विकेटकीपर न लेकर भारी भूल की है? टीम की सह-मालिक प्रीति ज़िंटा ने नीलामी के कल पहले दिन ताबड़तोड़ ख़रीदारी की थी. आज उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के 16 साल के स्पिनर मुजीब ज़दरान को चार करोड़ में क़रीदकर हलचल मचा दी थी.
पंजाब स्टार स्पिनर आर. अश्विन को कल ख़रीदने में कामयाब रही थी. अश्विन के अलावा उसने के. एल. राहुल, एरॉन फ़िंच, मयंक अग्रवाल, युवराज सिंह और क्रिस गेल को भी ख़रीदा है. पंजाब की टीम में 21 खिलाड़ी हैं.
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नयी दिल्लीः बैंगलोर में आज IPL-दो हज़ार अट्ठारह के लिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या पंजाब ने स्पेशलिस्ट विकेटकीपर न लेकर भारी भूल की है? टीम की सह-मालिक प्रीति ज़िंटा ने नीलामी के कल पहले दिन ताबड़तोड़ ख़रीदारी की थी. आज उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के सोलह साल के स्पिनर मुजीब ज़दरान को चार करोड़ में क़रीदकर हलचल मचा दी थी. पंजाब स्टार स्पिनर आर. अश्विन को कल ख़रीदने में कामयाब रही थी. अश्विन के अलावा उसने के. एल. राहुल, एरॉन फ़िंच, मयंक अग्रवाल, युवराज सिंह और क्रिस गेल को भी ख़रीदा है. पंजाब की टीम में इक्कीस खिलाड़ी हैं.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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रूस में लेन-देन सुविधाओं की एक बड़ी राशि है। कुछ कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यों के बाहर ले जाने के लिए। उदाहरण के लिए, एक पहचान पत्र। इसके बिना, यह एक खरीद और बिक्री लेनदेन की कल्पना करना मुश्किल है। लेकिन वहाँ अपवाद हैं। जब खरीदने के लिए एक फोन के एक विशेष मामले में की जरूरत है यह लेख एक पासपोर्ट है कि क्या व्याख्या करेगा। किन दस्तावेजों उपयोगी हो सकते हैं? लेन-देन का क्या सुविधाओं पर ध्यान देने की सिफारिश की है? यह समझने के लिए सवाल डाल करने के लिए इतना मुश्किल नहीं है। विशेष रूप से आप ध्यान से रूसी संघ के विधान की जांच करता है, तो।
पहला सवाल को ध्यान में रखना होगा कि - यह खरीदार की उम्र है। बात यह है कि आम तौर पर खरीद से संबंधित लेन-देन की आबादी का उपलब्ध नहीं हैं। हम बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं।
रूसी कानून के अनुसार, किशोर नागरिकों 6 साल के बाद एक माता पिता के साथ एक निश्चित चरित्र के लेन-देन का अधिकार है। सी 14 (या एक पासपोर्ट की प्राप्ति के बाद) एक सूची बढ़ जाती जोड़ने की। बहुमत की उम्र तक किसी भी लेनदेन करने की अनुमति है।
कैसे एक सेल फोन खरीदने के लिए? किस उम्र में इस तरह के एक समझौते में प्रवेश कर सकते हैं? अभ्यास में, यहां तक कि एक किशोरी एक मोबाइल डिवाइस खरीद सकते हैं। 14 साल के बिल्कुल साथ। लेकिन कुछ दुकानों लेन-देन से मना करने का अधिकार है। ऐसा लगता है कि 100% मोबाइल फोन खरीदने के लिए या रूस में किसी अन्य गैजेट बहुमत की उम्र के बाद करने के लिए सक्षम हो जाएगा।
अक्सर अध्ययन समस्या पैदा होती है जब आप एक फोन कर सकते हैं। पहले से ही कहा गया है, जब गैजेट खरीदने खरीदने और बेचने आता है। आमतौर पर चेकआउट नागरिक के बाद एक चेक जारी करने के लिए। और कुछ नहीं। यह एक उत्कृष्ट साधारण दुकान उपकरण है।
अभ्यास में, ऐसे स्थानों में एक मोबाइल डिवाइस की खरीद के साथ कोई समस्या नहीं मौजूद नहीं हैं। के बारे में एक पासपोर्ट की जरूरत है कि क्या होता है जब फ़ोन खरीदने लगता है के लिए, आप, आप बी / उपकरण खरीदने की योजना है चाहिए। आमतौर पर, इस तरह के लेन-देन दोनों खरीददार से और विक्रेता के विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
वास्तव में, एक व्यक्ति द्वारा व्यवहार में कोई दस्तावेज नहीं कहा जा रहा है। सीधे शब्दों में विक्रेता, फोन के मॉडल किस तरह का मैं खरीदना चाहता हूँ बताओ। तब सब कुछ लेन-देन का विशिष्ट स्थान पर निर्भर करेगा।
कैसे नए फोन बेचने के लिए? जनसंख्या अक्सर क्या आप के साथ लेने के लिए दुकान के साथ एक सौदा करने के बारे में सोचा। क्या कागजात वे आवश्यक हो सकता है?
यह कहा गया है कि बहुत विशिष्ट आउटलेट पर निर्भर करता है है। अक्सर, पंजीकरण के लिए नागरिक केवल एक मोबाइल फोन के पैसे की आवश्यकता है। यह पर्याप्त होगा।
बेशक, कोई भी फोन काफी एक छोटा सा बच्चा बेच देंगे। लेकिन किशोरी कार्रवाई में विचारों का अनुवाद करने में काफी सक्षम है। हेजिंग के लिए एक छोटी सी माता पिता के लिए एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अनुमति के लिए जारी किया जा सकता है। इस विधि विफलताओं के खिलाफ की रक्षा करेगा।
तदनुसार, पहचान पत्र - यह नहीं खरीद और फोन की बिक्री के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह हमेशा जरूरी नहीं है। खास तौर पर अगर हम नए गैजेट के बारे में बात कर रहे हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि प्रस्तावित योजना केवल जो तुरंत दुकान में एक फोन खरीदने के लिए चयन करने के लिए प्रासंगिक है लायक है। ऋण और किस्त - एक अलग लेन-देन। यह इस प्रकार है कि एक मोबाइल फोन की खरीद थोड़ा भिन्न होगा। वास्तव में क्या?
सबसे पहले, ऋण और किस्त नागरिकों द्वारा विशेष रूप से की पेशकश की। दूसरे, आप अपनी आय दस्तावेजों को सत्यापित करने की जरूरत है। और यह केवल शुरुआत है।
जब दुकान पर किस्तों में या क्रेडिट पर एक फोन खरीदने मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है? हाँ, बिना असफल हो। इसके बिना, एक नागरिक खरीदारी पूरी नहीं कर सकते। पहले से ही उल्लेख किया है, इसके साथ ही हम एक आय विवरण (फॉर्म 2-गड्ढे) लाने के लिए किया है।
आज के बाजार में, कुछ उत्पादों महंगा स्मार्टफोन है। और वे "हाथों से" खरीदना पसंद करते हैं। उदाहरण के लिए, बी / y के लिए। यह स्थिति बहुत ही दुर्लभ नहीं है। रूस में, यह आम बात है - आप गैजेट ही नहीं, मोबाइल फोन की बिक्री के लिए विज्ञापन का एक बहुत देख सकते हैं। क्या भविष्य खरीदार पकड़ है?
मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब आप फोन "इसके साथ" खरीदते हैं? यह सब क्या विक्रेता मिल गया पर निर्भर करता है। अक्सर खरीदार पहचान का सबूत की आवश्यकता होती है। बच्चों बी / यू फोन बेचने की कोशिश कर नहीं।
इसके अलावा, यह विक्रेता से पहचान के लिए पूछने के लिए सिफारिश की है। यह मूल की एक प्रति का अनुरोध या पासपोर्ट तस्वीरें करने के लिए सलाह दी जाती है। इस तकनीक को धोखाधड़ी के खिलाफ खरीदार की रक्षा में मदद मिलेगी।
तदनुसार, एक पासपोर्ट निश्चित संचालनों के लिए आवश्यक है। यह उपेक्षित किया जा सकता है अगर एक बस की दुकान में खरीदारी हेतु भुगतान करता है। अन्य मामलों में, पहचान - लेन-देन में प्रदर्शित होने के प्रमुख कागजात से एक है।
मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब एक फोन खरीदने करते हैं? पहले से ही उल्लेख किया है, कुछ लेन-देन के लिए अनिवार्य कागज है। और कभी कभी यह आवश्यक नहीं है। उदाहरण के लिए, जब दुकान पहचान करने के लिए पूरे खरीद (नया) का भुगतान नहीं पूछा।
वहाँ हर जगह केवल अपवाद हैं। इसलिए, आप क्या दुकान में है ग्राहक के साथ अपने पासपोर्ट को नहीं कहा जाएगा के बारे में सोच नहीं करना चाहिए। हम यक़ीन के साथ कह सकते हैं - पहचान पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब साथ की योजना बनाई अधिग्रहण डिवाइस में निर्मित सिम कार्ड।
बात यह है कि फोन नंबर के लिए एक अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता है। विफल, एक पासपोर्ट के बिना ऐसा करने के लिए। इसका मतलब है कि सभी व्यक्तियों को जो इस दस्तावेज़ है, जब तक अन्यथा व्यापार नेटवर्क के चार्टर में कहा गया है, सौदे में प्रवेश करने का अधिकार होगा।
जब भुगतान कार्ड, बैंक हस्तांतरण द्वारा किया जाता है कुछ समस्याओं उत्पन्न हो सकती है। नकदी में भुगतान, पहचान दस्तावेजों के प्रावधान की आवश्यकता नहीं है अगर यह एक ऋण या किस्त नहीं है।
विक्रेता नए फोन नगदी रहित भुगतान के माध्यम से चार्ज किया जाता है, तो, पासपोर्ट के लिए अनुरोध करने का अधिकार है। उदाहरण के लिए, एक बैंक कार्ड के साथ। अभ्यास में, इस घटना दुर्लभ है।
हालांकि, खाते में अभी भी इस तथ्य लेना है। खासकर जो लोग संपर्क रहित भुगतान का उपयोग करना पसंद के लिए। आपरेशन पुष्टि करने के लिए कार्ड पर पिन कोड नहीं पूछता है। इसलिए, विक्रेता लेनदेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक पासपोर्ट की आवश्यकता का अधिकार है। आश्चर्य यह आवश्यक नहीं है।
मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब एक फोन खरीदने करते हैं? यह कहा गया है इस दस्तावेज़ में केवल कुछ निश्चित परिस्थितियों में एक की जरूरत नहीं है। और यह विचार करने के लिए महत्वपूर्ण है।
एक जोखिम भरा कारोबार - हम विश्वास है कि खरीद पहचान पत्र के बिना टेलीफोन का / u ख के साथ कह सकते हैं। विक्रेता से एक पासपोर्ट की आवश्यकता (और खरीदार, भी) महत्वपूर्ण है।
जब एक ऋण या किश्तों के लिए आवेदन करने की दुकान न केवल पासपोर्ट की आवश्यकता है। यह ध्यान दिया जाता है कि एक पहचान पत्र के लिए उपकरण के लिए एक अतिरिक्त गारंटी के अधिग्रहण के लिए यह महत्वपूर्ण है। इसके बिना, लेन-देन मना कर दिया जाएगा। दरअसल, सिम कार्ड बाहर के बिना एक फोन खरीदने के लिए, और कहा कि एक अतिरिक्त गारंटी या एक कमरा खरीदने के लिए है - नहीं।
अब तुम क्या जब एक फोन खरीदने के लिए देखने के लिए के बारे में सोच सकते हैं। यह लेन-देन उपभोक्ता के लिए सावधान ध्यान देने की आवश्यकता। अन्यथा, जोखिम के या एक नागरिक एक बुरा मशीन खरीदने, या मुठभेड़ धोखाधड़ी करने के लिए।
एक मोबाइल फोन के निम्नलिखित मदों देखते हैं खरीदने के लिए मुख्य सुझावों मेंः
- निष्पादित सौदा सरकारी खुदरा श्रृंखलाओं में सबसे अच्छा है। बी / y गैजेट खरीद नहीं करना चाहिए।
- आप "पुराना" फोन खरीदना चाहते हैं, तो आप भुगतान करने से पहले यह जांच सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह पतवार की शर्त है, साथ ही संरचनात्मक अखंडता पर ध्यान देने की सिफारिश की है। यह विक्रेता से एक मोबाइल डिवाइस पर दस्तावेज़ों के लिए पूछने के लिए सबसे अच्छा है। यह डिवाइस पर और दस्तावेज में सीरियल नंबर की जांच करने के लिए आवश्यक है।
- जब आप "हाथों से" खरीद आप पहचान का सबूत लेनी होगी। यह बेहतर है कि यह एक नागरिक पासपोर्ट था।
- डिवाइस की कम लागत की उलझन। मोबाइल फोन आज एक अलग मूल्य वर्ग की है। वहाँ और अधिक महंगी मॉडल हैं, और बहुत ज्यादा नहीं। यदि स्वयं गैजेट महंगा है, को कम करके आंका लागत - एक विशेष उपकरण की कमियों का एक स्पष्ट संकेत है।
- जब दुकान मॉडल चुनने डिवाइस की गुणवत्ता का प्रदर्शन करने के लिए कहा जा सकता। कुछ मामलों में यह एक फोन से कॉल करने के लिए प्रयास करने के लिए सलाह दी जाती है।
शायद यह सभी सिफारिशों पूरा किया जा सकता। अब से, यह स्पष्ट है कि क्या दस्तावेजों फोन खरीदने के लिए की जरूरत है। वास्तव में, आप केवल धन का प्रबंधन कर सकते हैं। सौदा ही जटिल नहीं है का अध्ययन किया। इसलिए ज्यादा दस्तावेजों इसके प्रदर्शन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए केवल जब यह बी / u डिवाइसों के अधिग्रहण के लिए आता है के बारे में चिंता। नए फोन खरीदने के लिए आसान होता है।
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रूस में लेन-देन सुविधाओं की एक बड़ी राशि है। कुछ कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यों के बाहर ले जाने के लिए। उदाहरण के लिए, एक पहचान पत्र। इसके बिना, यह एक खरीद और बिक्री लेनदेन की कल्पना करना मुश्किल है। लेकिन वहाँ अपवाद हैं। जब खरीदने के लिए एक फोन के एक विशेष मामले में की जरूरत है यह लेख एक पासपोर्ट है कि क्या व्याख्या करेगा। किन दस्तावेजों उपयोगी हो सकते हैं? लेन-देन का क्या सुविधाओं पर ध्यान देने की सिफारिश की है? यह समझने के लिए सवाल डाल करने के लिए इतना मुश्किल नहीं है। विशेष रूप से आप ध्यान से रूसी संघ के विधान की जांच करता है, तो। पहला सवाल को ध्यान में रखना होगा कि - यह खरीदार की उम्र है। बात यह है कि आम तौर पर खरीद से संबंधित लेन-देन की आबादी का उपलब्ध नहीं हैं। हम बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं। रूसी कानून के अनुसार, किशोर नागरिकों छः साल के बाद एक माता पिता के साथ एक निश्चित चरित्र के लेन-देन का अधिकार है। सी चौदह एक सूची बढ़ जाती जोड़ने की। बहुमत की उम्र तक किसी भी लेनदेन करने की अनुमति है। कैसे एक सेल फोन खरीदने के लिए? किस उम्र में इस तरह के एक समझौते में प्रवेश कर सकते हैं? अभ्यास में, यहां तक कि एक किशोरी एक मोबाइल डिवाइस खरीद सकते हैं। चौदह साल के बिल्कुल साथ। लेकिन कुछ दुकानों लेन-देन से मना करने का अधिकार है। ऐसा लगता है कि एक सौ% मोबाइल फोन खरीदने के लिए या रूस में किसी अन्य गैजेट बहुमत की उम्र के बाद करने के लिए सक्षम हो जाएगा। अक्सर अध्ययन समस्या पैदा होती है जब आप एक फोन कर सकते हैं। पहले से ही कहा गया है, जब गैजेट खरीदने खरीदने और बेचने आता है। आमतौर पर चेकआउट नागरिक के बाद एक चेक जारी करने के लिए। और कुछ नहीं। यह एक उत्कृष्ट साधारण दुकान उपकरण है। अभ्यास में, ऐसे स्थानों में एक मोबाइल डिवाइस की खरीद के साथ कोई समस्या नहीं मौजूद नहीं हैं। के बारे में एक पासपोर्ट की जरूरत है कि क्या होता है जब फ़ोन खरीदने लगता है के लिए, आप, आप बी / उपकरण खरीदने की योजना है चाहिए। आमतौर पर, इस तरह के लेन-देन दोनों खरीददार से और विक्रेता के विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। वास्तव में, एक व्यक्ति द्वारा व्यवहार में कोई दस्तावेज नहीं कहा जा रहा है। सीधे शब्दों में विक्रेता, फोन के मॉडल किस तरह का मैं खरीदना चाहता हूँ बताओ। तब सब कुछ लेन-देन का विशिष्ट स्थान पर निर्भर करेगा। कैसे नए फोन बेचने के लिए? जनसंख्या अक्सर क्या आप के साथ लेने के लिए दुकान के साथ एक सौदा करने के बारे में सोचा। क्या कागजात वे आवश्यक हो सकता है? यह कहा गया है कि बहुत विशिष्ट आउटलेट पर निर्भर करता है है। अक्सर, पंजीकरण के लिए नागरिक केवल एक मोबाइल फोन के पैसे की आवश्यकता है। यह पर्याप्त होगा। बेशक, कोई भी फोन काफी एक छोटा सा बच्चा बेच देंगे। लेकिन किशोरी कार्रवाई में विचारों का अनुवाद करने में काफी सक्षम है। हेजिंग के लिए एक छोटी सी माता पिता के लिए एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अनुमति के लिए जारी किया जा सकता है। इस विधि विफलताओं के खिलाफ की रक्षा करेगा। तदनुसार, पहचान पत्र - यह नहीं खरीद और फोन की बिक्री के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह हमेशा जरूरी नहीं है। खास तौर पर अगर हम नए गैजेट के बारे में बात कर रहे हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि प्रस्तावित योजना केवल जो तुरंत दुकान में एक फोन खरीदने के लिए चयन करने के लिए प्रासंगिक है लायक है। ऋण और किस्त - एक अलग लेन-देन। यह इस प्रकार है कि एक मोबाइल फोन की खरीद थोड़ा भिन्न होगा। वास्तव में क्या? सबसे पहले, ऋण और किस्त नागरिकों द्वारा विशेष रूप से की पेशकश की। दूसरे, आप अपनी आय दस्तावेजों को सत्यापित करने की जरूरत है। और यह केवल शुरुआत है। जब दुकान पर किस्तों में या क्रेडिट पर एक फोन खरीदने मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है? हाँ, बिना असफल हो। इसके बिना, एक नागरिक खरीदारी पूरी नहीं कर सकते। पहले से ही उल्लेख किया है, इसके साथ ही हम एक आय विवरण लाने के लिए किया है। आज के बाजार में, कुछ उत्पादों महंगा स्मार्टफोन है। और वे "हाथों से" खरीदना पसंद करते हैं। उदाहरण के लिए, बी / y के लिए। यह स्थिति बहुत ही दुर्लभ नहीं है। रूस में, यह आम बात है - आप गैजेट ही नहीं, मोबाइल फोन की बिक्री के लिए विज्ञापन का एक बहुत देख सकते हैं। क्या भविष्य खरीदार पकड़ है? मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब आप फोन "इसके साथ" खरीदते हैं? यह सब क्या विक्रेता मिल गया पर निर्भर करता है। अक्सर खरीदार पहचान का सबूत की आवश्यकता होती है। बच्चों बी / यू फोन बेचने की कोशिश कर नहीं। इसके अलावा, यह विक्रेता से पहचान के लिए पूछने के लिए सिफारिश की है। यह मूल की एक प्रति का अनुरोध या पासपोर्ट तस्वीरें करने के लिए सलाह दी जाती है। इस तकनीक को धोखाधड़ी के खिलाफ खरीदार की रक्षा में मदद मिलेगी। तदनुसार, एक पासपोर्ट निश्चित संचालनों के लिए आवश्यक है। यह उपेक्षित किया जा सकता है अगर एक बस की दुकान में खरीदारी हेतु भुगतान करता है। अन्य मामलों में, पहचान - लेन-देन में प्रदर्शित होने के प्रमुख कागजात से एक है। मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब एक फोन खरीदने करते हैं? पहले से ही उल्लेख किया है, कुछ लेन-देन के लिए अनिवार्य कागज है। और कभी कभी यह आवश्यक नहीं है। उदाहरण के लिए, जब दुकान पहचान करने के लिए पूरे खरीद का भुगतान नहीं पूछा। वहाँ हर जगह केवल अपवाद हैं। इसलिए, आप क्या दुकान में है ग्राहक के साथ अपने पासपोर्ट को नहीं कहा जाएगा के बारे में सोच नहीं करना चाहिए। हम यक़ीन के साथ कह सकते हैं - पहचान पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब साथ की योजना बनाई अधिग्रहण डिवाइस में निर्मित सिम कार्ड। बात यह है कि फोन नंबर के लिए एक अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता है। विफल, एक पासपोर्ट के बिना ऐसा करने के लिए। इसका मतलब है कि सभी व्यक्तियों को जो इस दस्तावेज़ है, जब तक अन्यथा व्यापार नेटवर्क के चार्टर में कहा गया है, सौदे में प्रवेश करने का अधिकार होगा। जब भुगतान कार्ड, बैंक हस्तांतरण द्वारा किया जाता है कुछ समस्याओं उत्पन्न हो सकती है। नकदी में भुगतान, पहचान दस्तावेजों के प्रावधान की आवश्यकता नहीं है अगर यह एक ऋण या किस्त नहीं है। विक्रेता नए फोन नगदी रहित भुगतान के माध्यम से चार्ज किया जाता है, तो, पासपोर्ट के लिए अनुरोध करने का अधिकार है। उदाहरण के लिए, एक बैंक कार्ड के साथ। अभ्यास में, इस घटना दुर्लभ है। हालांकि, खाते में अभी भी इस तथ्य लेना है। खासकर जो लोग संपर्क रहित भुगतान का उपयोग करना पसंद के लिए। आपरेशन पुष्टि करने के लिए कार्ड पर पिन कोड नहीं पूछता है। इसलिए, विक्रेता लेनदेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक पासपोर्ट की आवश्यकता का अधिकार है। आश्चर्य यह आवश्यक नहीं है। मैं एक पासपोर्ट की जरूरत है जब एक फोन खरीदने करते हैं? यह कहा गया है इस दस्तावेज़ में केवल कुछ निश्चित परिस्थितियों में एक की जरूरत नहीं है। और यह विचार करने के लिए महत्वपूर्ण है। एक जोखिम भरा कारोबार - हम विश्वास है कि खरीद पहचान पत्र के बिना टेलीफोन का / u ख के साथ कह सकते हैं। विक्रेता से एक पासपोर्ट की आवश्यकता महत्वपूर्ण है। जब एक ऋण या किश्तों के लिए आवेदन करने की दुकान न केवल पासपोर्ट की आवश्यकता है। यह ध्यान दिया जाता है कि एक पहचान पत्र के लिए उपकरण के लिए एक अतिरिक्त गारंटी के अधिग्रहण के लिए यह महत्वपूर्ण है। इसके बिना, लेन-देन मना कर दिया जाएगा। दरअसल, सिम कार्ड बाहर के बिना एक फोन खरीदने के लिए, और कहा कि एक अतिरिक्त गारंटी या एक कमरा खरीदने के लिए है - नहीं। अब तुम क्या जब एक फोन खरीदने के लिए देखने के लिए के बारे में सोच सकते हैं। यह लेन-देन उपभोक्ता के लिए सावधान ध्यान देने की आवश्यकता। अन्यथा, जोखिम के या एक नागरिक एक बुरा मशीन खरीदने, या मुठभेड़ धोखाधड़ी करने के लिए। एक मोबाइल फोन के निम्नलिखित मदों देखते हैं खरीदने के लिए मुख्य सुझावों मेंः - निष्पादित सौदा सरकारी खुदरा श्रृंखलाओं में सबसे अच्छा है। बी / y गैजेट खरीद नहीं करना चाहिए। - आप "पुराना" फोन खरीदना चाहते हैं, तो आप भुगतान करने से पहले यह जांच सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह पतवार की शर्त है, साथ ही संरचनात्मक अखंडता पर ध्यान देने की सिफारिश की है। यह विक्रेता से एक मोबाइल डिवाइस पर दस्तावेज़ों के लिए पूछने के लिए सबसे अच्छा है। यह डिवाइस पर और दस्तावेज में सीरियल नंबर की जांच करने के लिए आवश्यक है। - जब आप "हाथों से" खरीद आप पहचान का सबूत लेनी होगी। यह बेहतर है कि यह एक नागरिक पासपोर्ट था। - डिवाइस की कम लागत की उलझन। मोबाइल फोन आज एक अलग मूल्य वर्ग की है। वहाँ और अधिक महंगी मॉडल हैं, और बहुत ज्यादा नहीं। यदि स्वयं गैजेट महंगा है, को कम करके आंका लागत - एक विशेष उपकरण की कमियों का एक स्पष्ट संकेत है। - जब दुकान मॉडल चुनने डिवाइस की गुणवत्ता का प्रदर्शन करने के लिए कहा जा सकता। कुछ मामलों में यह एक फोन से कॉल करने के लिए प्रयास करने के लिए सलाह दी जाती है। शायद यह सभी सिफारिशों पूरा किया जा सकता। अब से, यह स्पष्ट है कि क्या दस्तावेजों फोन खरीदने के लिए की जरूरत है। वास्तव में, आप केवल धन का प्रबंधन कर सकते हैं। सौदा ही जटिल नहीं है का अध्ययन किया। इसलिए ज्यादा दस्तावेजों इसके प्रदर्शन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए केवल जब यह बी / u डिवाइसों के अधिग्रहण के लिए आता है के बारे में चिंता। नए फोन खरीदने के लिए आसान होता है।
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चंडीगढ़ - पंजाब राज्य सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई दौरान पंजाब पुलिस को निर्देश देते कहा कि कांस्टेबल एसपीयू की भर्ती संबंधी आरटीआई एक्ट 2005 के तहत मांगा गया रिकार्ड मुहैया करवाया जाए। राज्य सूचना आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि मलकीत सिंह पुत्र जसबीर सिंह निवासी वार्ड नंबर- चार के नजदीक पूरन शाह देहवली जिला गुरदासपुर द्वारा दायर केस नंबर 1212 ऑफ 2017 द्वारा आयोग से मांग की गई थी कि उसे सूचना अधिकार 2005 के अधीन कांस्टेबल एसपीयू की भर्ती संबंधी सीरियल नंबर एक से 230 तक समूह श्रेणियों के चयनित उम्मीदवारों के रिकार्ड की कापियां मुहैया करवाई जाएं तथा कद का ब्यौरा, छाती का माप, हाई जंप संबंधी विवरण भी दिए जाएं, परंतु अपीलकर्त्ता द्वारा मांगी गई जानकारी संबंधित विभाग द्वारा नहीं दी गई। केस की सुनवाई के दौरान अपीलकर्त्ता ने आरोप लगाया कि भर्ती के दौरान उसकी ऊंचाई, छाती का माप और अन्य रिकार्ड मंदभावना के तहत सहन नहीं दर्ज किया गया। अपीलकर्त्ता ने अपने इन दोषों के पक्ष में सबूत के रूप में चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा की गई भर्ती संबंधी अपने चुने जाने संबंधी दस्तावेज की कापी पेश की।
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चंडीगढ़ - पंजाब राज्य सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई दौरान पंजाब पुलिस को निर्देश देते कहा कि कांस्टेबल एसपीयू की भर्ती संबंधी आरटीआई एक्ट दो हज़ार पाँच के तहत मांगा गया रिकार्ड मुहैया करवाया जाए। राज्य सूचना आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि मलकीत सिंह पुत्र जसबीर सिंह निवासी वार्ड नंबर- चार के नजदीक पूरन शाह देहवली जिला गुरदासपुर द्वारा दायर केस नंबर एक हज़ार दो सौ बारह ऑफ दो हज़ार सत्रह द्वारा आयोग से मांग की गई थी कि उसे सूचना अधिकार दो हज़ार पाँच के अधीन कांस्टेबल एसपीयू की भर्ती संबंधी सीरियल नंबर एक से दो सौ तीस तक समूह श्रेणियों के चयनित उम्मीदवारों के रिकार्ड की कापियां मुहैया करवाई जाएं तथा कद का ब्यौरा, छाती का माप, हाई जंप संबंधी विवरण भी दिए जाएं, परंतु अपीलकर्त्ता द्वारा मांगी गई जानकारी संबंधित विभाग द्वारा नहीं दी गई। केस की सुनवाई के दौरान अपीलकर्त्ता ने आरोप लगाया कि भर्ती के दौरान उसकी ऊंचाई, छाती का माप और अन्य रिकार्ड मंदभावना के तहत सहन नहीं दर्ज किया गया। अपीलकर्त्ता ने अपने इन दोषों के पक्ष में सबूत के रूप में चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा की गई भर्ती संबंधी अपने चुने जाने संबंधी दस्तावेज की कापी पेश की।
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दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी एपल को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा यदि कंपनी मैक प्रो के प्रोडक्ट्स पर छूट चाहती है तो उसे चीन की बजाय अमेरिका में ही पार्ट बनाने होंगे।
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
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दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी एपल को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा यदि कंपनी मैक प्रो के प्रोडक्ट्स पर छूट चाहती है तो उसे चीन की बजाय अमेरिका में ही पार्ट बनाने होंगे। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
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चेन्नई/नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने बुधवार आधी रात को AIADMK नेता टीटीवी दिनाकरन को उनके चेन्नई स्थित आवास पर पहुंचकर समन दिया. बता दें कि दिनाकरन पर अपने गुट के लिए चुनाव चिह्न 'दो पत्तियां' हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के कर्मचारी को घूस की पेशकश करने का आरोप है. पुलिस इस मामले में उनसे पूछताछ भी करेगी. इस दौरान दिनाकरन के घर के सामने उनके एक समर्थक ने आत्मदाह करने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया.
मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली पुलिस की एक टीम सहायक आयुक्त के नेतृत्व में चेन्नई पहुंची. पुलिस ने बताया कि दिनाकरन के खिलाफ बहुत सबूत हैं. बिचौलिए सुकेश चंद्रशेखर से उनकी टेलीफोन पर बातचीत का रिकॉर्ड भी है. सुकेश को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. दिल्ली पुलिस ने दिनाकरन के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया है. पुलिस को आशंका है कि वे देश छोड़कर भाग सकते हैं. देश के सभी एयरपोर्ट्स को इस बारे में जानकारी दे दी गई है.
गौरतलब है कि शशिकला गुट ने आरके नगर विधान सभा सीट पर उप चुनाव के लिए 2 पत्तियां चुनाव चिह्न मांगा था. पन्नीरसेल्वम गुट ने भी इसके लिए दावा किया था. इसलिए आयोग ने इसे जब्त कर लिया था. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह पता चला है कि बिचौलिए सुकेश ने 50 करोड़ रुपए की डील की थी. उसके पास से 1. 30 करोड़ रुपए बरामद हुए हैं, उसके पास से मिली दो कारों को भी जब्त कर लिया गया है. उसके बाद ही दिनाकरन के खिलाफ 17 अप्रैल को केस दर्ज किया गया था.
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चेन्नई/नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने बुधवार आधी रात को AIADMK नेता टीटीवी दिनाकरन को उनके चेन्नई स्थित आवास पर पहुंचकर समन दिया. बता दें कि दिनाकरन पर अपने गुट के लिए चुनाव चिह्न 'दो पत्तियां' हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के कर्मचारी को घूस की पेशकश करने का आरोप है. पुलिस इस मामले में उनसे पूछताछ भी करेगी. इस दौरान दिनाकरन के घर के सामने उनके एक समर्थक ने आत्मदाह करने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया. मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली पुलिस की एक टीम सहायक आयुक्त के नेतृत्व में चेन्नई पहुंची. पुलिस ने बताया कि दिनाकरन के खिलाफ बहुत सबूत हैं. बिचौलिए सुकेश चंद्रशेखर से उनकी टेलीफोन पर बातचीत का रिकॉर्ड भी है. सुकेश को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. दिल्ली पुलिस ने दिनाकरन के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया है. पुलिस को आशंका है कि वे देश छोड़कर भाग सकते हैं. देश के सभी एयरपोर्ट्स को इस बारे में जानकारी दे दी गई है. गौरतलब है कि शशिकला गुट ने आरके नगर विधान सभा सीट पर उप चुनाव के लिए दो पत्तियां चुनाव चिह्न मांगा था. पन्नीरसेल्वम गुट ने भी इसके लिए दावा किया था. इसलिए आयोग ने इसे जब्त कर लिया था. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह पता चला है कि बिचौलिए सुकेश ने पचास करोड़ रुपए की डील की थी. उसके पास से एक. तीस करोड़ रुपए बरामद हुए हैं, उसके पास से मिली दो कारों को भी जब्त कर लिया गया है. उसके बाद ही दिनाकरन के खिलाफ सत्रह अप्रैल को केस दर्ज किया गया था.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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ठीक ही समझा कि अनेक भ्रम-वीथियों में भटकने वाले लोगों को पथान्वेषक नहीं कहा जा सकता । वे ज्ञान में लिपटे हुए है इसलिए उन्हें सत्पथ दिखाई नहीं पड़ता । जो वेश-भूषा अथवा रहन-सहन की रीति को प्रधानता देकर उन्हीं के पीछे पड़े हुए हैं उनको कोई तात्त्विक लाभ नहीं हो सकता । पंडित को यह विश्वास है कि छूत उसकी सृष्टि नहीं है, बल्कि एक अनादि कर्म- प्रवाह का फल है । उसका भ्रम भंजन करते हुए कबीर कहते हैं कि छूत मायाजन्य है उसी के विध्वंस से छूत का विध्वंस हो जायेगा"पंडित देखहु मनमहं जानी।
कहु धौं छूति कहां ते उपजी तर्बाह छूति तुम मानी ।
एकै पाट सकल बैठाये छूति लेत धौं काकी ।
छूतिहि जेवन छूतिहि अँचवन छूतिहि जगत उपाया ॥ कहहि कबीर ते छूति बिबरजित जाके संग न माया' ॥"
कबीर ने ब्राह्मरण क्षत्रिय आदि के आचरण में मन की शुद्धि के स्थान पर बाह्याचार का प्राधान्य ही देखा । उन्होंने देखा कि ब्राह्मण अपने नित्यनैमित्तिक प्रचार को ही सब कुछ समझे बैठा है और कुलीनता के गर्व से विचूर्ण है और क्षत्रिय को अपने जुझारू होने का अभिमान है । कबीर ने दोनों के चित्र प्रस्तुत करते हुए चेतावनी दी है । वे ब्राह्मरण का चित्र प्रस्तुत करते हुए कहते हैं"पंडित भूले पढ़ि गुन्य बेदा, प्राप न पांव नांनां भेदा । संझ्या तरपन अरु षट करमां, लागि रहे इनकै आशरमां ॥ गायत्री जुग चारि पढ़ाई, पूछौ जाइ मुकति किनि पाई । सब में राम रहे ल्यौ सींचा, इन थे और कहो को नींचा ॥ प्रति गुन गरब क अधिकाई, अधिकै गरबि न होइ भलाई ॥" और क्षत्रिय को वे कहते हैं१. कबीर-बीजक, शब्द ४१
"खत्री करें खत्रिया धरमो, तिनकू होय सवाया करमो । जीवहि मारि जीव प्रतिपारें, देखत जनम आपनों हारें ।
खत्री सो जु कुटंब सं जूझं, पंचूं मेटि एक कूं बुझं । जो श्रावध गुर ग्यांन लखावा, गहि करवाल धूप धरि भावा । हेला करें निसांने घाऊ, भूझ परं तहां मनमथराऊ ॥"
दुनिया के दीवानापन पर कबीर खीजते है और पूजा के आडम्बर पर अपनी विकलता व्यक्त करते है । इसी का एक लघु चित्र इस प्रकार दीख पड़ता है -
"रांम राइ भई विकल मति मेरी, कै यहु दुनीं दिवांनी तेरी ॥ जे पूजा हरि नाहीं भावं, सो पूजनहार चढ़ावै । जिहि पूजा हरि भल मांनें, सो पूजनहार न जाने ॥"
जिस प्रकार कवीर ने पंडितों के 'आचार' की पोल खोली है उसी प्रकार योगियों के प्रचार की भी । कहने की आवश्यकता नहीं कि जनता में सर्वाधिक प्रभाव हिन्दू मत या पौराणिक धर्म का था। इसके बाद ही योगियों की प्रबलता थी । उस समय के योगी अपनी योग की करामातें दिखाने में जितने कुशल होते थे उतने ही 'मैदान' में श्रा कूदने में भी। कबीर हैरान थे और लोगों से कहा करते थे - "भई यह भी अजब योग है कि महादेव के नाम पर पंथ चलाया जाता है। लोग बड़े बड़े महन्त हो जाते हैं, हाट-बाट में समाधि लगाते फिरते हैं और मौका पाते ही रण-क्षेत्र में भी कूद पड़ते है । भला दत्तात्रेय ने भी कभी मवासियों द्वारा शत्रुओंों पर चढ़ाई की थी, शुकदेव ने भी कभी तोप-संग्रह किये थे, नारद ने भी कभी बन्दूक दागी थी ? विचित्र है ये विरक्त
१. कबीर ग्रन्थावली, पद २७५
जिनकी सोने की गद्दियाँ जगमगा रही हैं, हाथी घोड़ों के ठाठ लगे हैं, करोड़पतियों की-सी शान है' ।
कबीर के समय में योगी लोग बटुवा, मेखला, मुद्रा, कंथा, कंबल, सिंगी आदि धारण करते थे । वे एक प्रकार के मंत्र का प्रयोग करते थे जिसमें 'तांति' प्रौर 'सारि' का उपयोग किया जाता था। कबीर ने योग की श्रादर्श साधना का एक चित्र प्रस्तुत करते हुए अपने युग के योगी के वेश को इस प्रकार प्रकट किया है"जोगिया तन को जंत्र बजाइ,
ज्यूं तेरा श्रावागमन मिटाइ । तन करि तांति धर्म करि डांडि, सत की सारि लगाइ । मन कर निहचल प्रासंण निहचल, रसना रस उपजाइ । चित करि बटवा तुचा मेषली, भसमै भसम चढ़ाई । तजि पाषंड पांच करि निग्रह, खोजि परम पद राइ । हिर सींगी ग्यांन गुंणि बांधौ, खोजि निरंजन साचा । कहै कबीर निरंजन की गति, जुगति बिनां प्यंड काचा ॥"
दिखावटी योगियों के आडंबर से कबीर को अत्यन्त क्षोभ होता है । सत्य निष्ठा की प्रतिष्ठा चाहते हैं । वेश से तत्त्व सिद्धि नहीं हो सकती । यदि
१. देखिये, डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी - कबीर, पृष्ठ १२८-१२६ तथा बीजक, रमैनी ६९ वीं"ऐसा जोग न देखा भाई । भूला फिरै लिये गफिलाई ।। महादेव को पंथ चलावें । ऐसो बड़ो महंत कहावै ॥ हाट-बजारे लावें तारी। कच्चे सिद्धन माया प्यारी । कब दत्ते मावासी तोरी । कब सुखदेव तोपची जोरी ॥ नारद कब बन्दूक चलाया । व्यासदेव कब बंब बजाया ।। करहि लराई मति के मन्दा । ई अतीत की तरकस बन्दा ।। भये विरक्त लोभ मन ठाना। सोना पहिरि लजायँ बाना ॥ थोरा थोरी कीन्ह बटोरा। गांव पाय जस चलै करोरा ॥ "
कबीर-वारणी में समाज-चित्रण
परमात्मा फकीरों में मिलता है तो उसी में खोजना चाहिये । वे ऐसे वेश को सहर्ष स्वीकार करते है -
"फाड़ि पुटौला धजि करौं, कामलड़ी पहराऊं । जेहि जेहि भेषां हरि मिलें, सोइ सोइ भेष धराऊं ॥"
जो मुद्रा लगाकर लोगों को दिखाते हैं वे अवधूत नहीं है, केवल प्राडंबर भक्त है । योगी तो जगत् से भिन्न होता है -
"प्रवधू जोगी जग थें न्यारा ।
मुद्रा निरति सुरति करि सींगी, नादन षंड धारा ।"
"ब्रह्म प्रगनि में काया जारै, त्रिकुटि संगम जागे । कहै कबीर सोई जोगेश्वर, सहज सुंनि ल्यौ लागे ॥"
ये योगी शरीर में विभूति लगाते, जटा धारण करते, पंचाग्नि में तपते और चमत्कारों के बल पर जनता को आतंकित रखते थे । ज्ञान और अहंकार के इन पुतलों पर कबीर को क्षोभ होता और उन्हें कोरी- कोरी सुनाने लगते । साधना के अनेक रहस्यों को अधिगत कर लेने के कारण कबीर अपने पूर्ण आत्मविश्वास के साथ उन पर व्यंग्य प्रहार करते थे। उनकी मान्यताओं का कृतियों से कोई सामंजस्य नही था । वे कुछ मान कर करते कुछ और ही थे और उसका परिणाम भी कुछ और ही होता था। अतएव कबीर ने अपने मत के सार को इस प्रकार प्रस्तुत किया -
"ब्रह्म'डे सो प्यंडे जानि, मानसरोवर करि प्रसनांन ।
सोहं हंसा ताकौ जाप, ताहि न लिपे पुन्य न पाप ॥"
सिहल को सिद्ध पीठ मान कर वहां जाकर सिद्धि प्राप्त करने वालों से कबीर और तो क्या कहते, केवल थोड़े से शब्दों में एक तीव्र व्यंग्य कसकर योगियों पर ऐसा मारा कि जिससे उन्हें जो याद आना था वह तो याद श्रा ही गया, साथ ही समय की एक हल्की सी झांकी भी देदी"कबीर खोजी रांम का, गया जु सिंहल दीप। राम तो घटि भीतरि रहया, जु भावं परतीत ॥"
कबीर ने जैसे चित्र योगियों की दशा के प्रस्तुत किये है उनसे कहीं अधिक रंगीन पंडे-पुजारियों के आडंबरों के किये हैं। उनकी साढ़े तीन हाथ की धोती, जनेऊ, लम्बा तिलक और छुआ-छूत की बीमारी - इतनी भयंकर कि लकड़ी भी धोकर जलायी जाती । यह सब कुछ था, किन्तु पेड़े कभी नहीं धोये जाते थे ।
चन्द्रग्रहण के समय पानी का घड़ा खराब हो सकता था, बनी हुई रोटियां दूषित हो सकती थी किन्तु धन-धान्य, वस्त्रादि ? ये सब कुछ कैसे खराब हो जाते ? इनके विसर्जन करते समय छटी की याद आ जाती । पंडितों की अपनी मान्यताएं थीं, शुद्धता का उनका अपना आदर्श था। ब्रह्मणों के संबंध में आठ कनौजिया नौ चूल्हे' की कहावत चरितार्थ तो तब भी होती होगी अन्यथा कबीर को यह न कहना पड़ता
" कहू पांडे सुचि कवन ठांव, जिहि घरि भोजन बैठि खांऊ ।
माता जूठी पिता पुनि जूठा, जूठे फल चित लागे । जूठा श्रांवन जूठा जांनां, चेतहु क्यूं न प्रभागे । ज जूठा पांनी पुनि जूठा, जूठा बैठि पकाया । जूठी कड़छी श्रन परोस्या, जूठे जूठा खाया । चौका जूठा गोबर जूठा, जूठी का ढोकारा । कहै कबीर तेई जन सूचे, जे हरि भजि तर्जाह बिकारा ।"
इस प्रकार कबीर ने समाज के आचरण के विषय में बड़े सजीव एंव मार्मिक चित्र चित्रित किये हैं। एक और उद्धरण देखिये जिसमें माता-पिता के प्रति पुत्र के व्यवहार का खाका खींचा गया है6
"जारि बारि करि आवे वेहा, मूंबां पीछे प्रीति सनेहा । जीवत पित्रहि मारहि डंगा, मूंवां पित्र ले घालें गंगा ॥ जीवत पित्र कू अंत न स्वावें, मूंवां पाछै प्यंड भरावें । जीवत पित्र कू बोलें अपराध, मूं वां पीछें देहि सराध ॥ कहि कबीर मोहि प्रचिरज श्रावं, कउवा खाइ पित्र क्यू पावें ॥"
१. कबीर ग्रन्थावली, पद ३५६ र
कबीर वाणी में समाज-चित्ररण
इस पद में कबीर ने न केवल समाज की वस्तु स्थिति की ही एक झांकी दी है वरन् ज्ञान और मूर्खता पर कर्कश प्रहार भी किया है ।
लोग माला फेरते है और सोचते हैं और करते हैं। ऐसी माला किस काम की ? जिनका मन वासनाओं से फिर गया है उनको माला फेरने की आवश्यकता नहीं है । कबीर माला जपने वालों के इस रूप को प्रस्तुत करते हुए कहते हैं"माला पहरं मनमुखी, ताथै कछू न होइ । मन माला कौं फेरतां, जुग उजियारा सोइ' ॥ "
की भावना और चरण में संगति न देख कर कबीर को उन्होंने इस असामंजस्य को देख कर कहाक्षोभ होता था।
" सेवै सालिगरांम कूं, माया सेती हेत । वोढे काला कापड़ा, नाँव धरावै सेत' ॥'
मूर्ति पूजा और तीर्थ-व्रत आदि का कबीर के समय में दौर - दौरा था । इनमें एक ओर भ्रम का आधार था तो दूसरी ओर भेद-भाव का प्रचार । कबीर के व्यंग्य से तराशी हुई प्रस्तर-पूजकों के भ्रम की एक मूर्ति और उसका परिणाम देखियेपड़ा -
"पांहण केरा पूतला, करि पूजे करतार । इही भरोस जे रुहे, ते बूडे काली धार ॥ "
और जप, तप, तीर्थ एवं व्रत में केवल प्रध-विश्वास देखकर उन्हें कहना
"जप तप दोसें थोथरा, तीरथ व्रत बेसास । सूर्व सेंबल सेविया, यौं जग चल्या निराश ॥"
१. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ४५ २. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ४४ ३. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ४३ ४. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ४४
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ठीक ही समझा कि अनेक भ्रम-वीथियों में भटकने वाले लोगों को पथान्वेषक नहीं कहा जा सकता । वे ज्ञान में लिपटे हुए है इसलिए उन्हें सत्पथ दिखाई नहीं पड़ता । जो वेश-भूषा अथवा रहन-सहन की रीति को प्रधानता देकर उन्हीं के पीछे पड़े हुए हैं उनको कोई तात्त्विक लाभ नहीं हो सकता । पंडित को यह विश्वास है कि छूत उसकी सृष्टि नहीं है, बल्कि एक अनादि कर्म- प्रवाह का फल है । उसका भ्रम भंजन करते हुए कबीर कहते हैं कि छूत मायाजन्य है उसी के विध्वंस से छूत का विध्वंस हो जायेगा"पंडित देखहु मनमहं जानी। कहु धौं छूति कहां ते उपजी तर्बाह छूति तुम मानी । एकै पाट सकल बैठाये छूति लेत धौं काकी । छूतिहि जेवन छूतिहि अँचवन छूतिहि जगत उपाया ॥ कहहि कबीर ते छूति बिबरजित जाके संग न माया' ॥" कबीर ने ब्राह्मरण क्षत्रिय आदि के आचरण में मन की शुद्धि के स्थान पर बाह्याचार का प्राधान्य ही देखा । उन्होंने देखा कि ब्राह्मण अपने नित्यनैमित्तिक प्रचार को ही सब कुछ समझे बैठा है और कुलीनता के गर्व से विचूर्ण है और क्षत्रिय को अपने जुझारू होने का अभिमान है । कबीर ने दोनों के चित्र प्रस्तुत करते हुए चेतावनी दी है । वे ब्राह्मरण का चित्र प्रस्तुत करते हुए कहते हैं"पंडित भूले पढ़ि गुन्य बेदा, प्राप न पांव नांनां भेदा । संझ्या तरपन अरु षट करमां, लागि रहे इनकै आशरमां ॥ गायत्री जुग चारि पढ़ाई, पूछौ जाइ मुकति किनि पाई । सब में राम रहे ल्यौ सींचा, इन थे और कहो को नींचा ॥ प्रति गुन गरब क अधिकाई, अधिकै गरबि न होइ भलाई ॥" और क्षत्रिय को वे कहते हैंएक. कबीर-बीजक, शब्द इकतालीस "खत्री करें खत्रिया धरमो, तिनकू होय सवाया करमो । जीवहि मारि जीव प्रतिपारें, देखत जनम आपनों हारें । खत्री सो जु कुटंब सं जूझं, पंचूं मेटि एक कूं बुझं । जो श्रावध गुर ग्यांन लखावा, गहि करवाल धूप धरि भावा । हेला करें निसांने घाऊ, भूझ परं तहां मनमथराऊ ॥" दुनिया के दीवानापन पर कबीर खीजते है और पूजा के आडम्बर पर अपनी विकलता व्यक्त करते है । इसी का एक लघु चित्र इस प्रकार दीख पड़ता है - "रांम राइ भई विकल मति मेरी, कै यहु दुनीं दिवांनी तेरी ॥ जे पूजा हरि नाहीं भावं, सो पूजनहार चढ़ावै । जिहि पूजा हरि भल मांनें, सो पूजनहार न जाने ॥" जिस प्रकार कवीर ने पंडितों के 'आचार' की पोल खोली है उसी प्रकार योगियों के प्रचार की भी । कहने की आवश्यकता नहीं कि जनता में सर्वाधिक प्रभाव हिन्दू मत या पौराणिक धर्म का था। इसके बाद ही योगियों की प्रबलता थी । उस समय के योगी अपनी योग की करामातें दिखाने में जितने कुशल होते थे उतने ही 'मैदान' में श्रा कूदने में भी। कबीर हैरान थे और लोगों से कहा करते थे - "भई यह भी अजब योग है कि महादेव के नाम पर पंथ चलाया जाता है। लोग बड़े बड़े महन्त हो जाते हैं, हाट-बाट में समाधि लगाते फिरते हैं और मौका पाते ही रण-क्षेत्र में भी कूद पड़ते है । भला दत्तात्रेय ने भी कभी मवासियों द्वारा शत्रुओंों पर चढ़ाई की थी, शुकदेव ने भी कभी तोप-संग्रह किये थे, नारद ने भी कभी बन्दूक दागी थी ? विचित्र है ये विरक्त एक. कबीर ग्रन्थावली, पद दो सौ पचहत्तर जिनकी सोने की गद्दियाँ जगमगा रही हैं, हाथी घोड़ों के ठाठ लगे हैं, करोड़पतियों की-सी शान है' । कबीर के समय में योगी लोग बटुवा, मेखला, मुद्रा, कंथा, कंबल, सिंगी आदि धारण करते थे । वे एक प्रकार के मंत्र का प्रयोग करते थे जिसमें 'तांति' प्रौर 'सारि' का उपयोग किया जाता था। कबीर ने योग की श्रादर्श साधना का एक चित्र प्रस्तुत करते हुए अपने युग के योगी के वेश को इस प्रकार प्रकट किया है"जोगिया तन को जंत्र बजाइ, ज्यूं तेरा श्रावागमन मिटाइ । तन करि तांति धर्म करि डांडि, सत की सारि लगाइ । मन कर निहचल प्रासंण निहचल, रसना रस उपजाइ । चित करि बटवा तुचा मेषली, भसमै भसम चढ़ाई । तजि पाषंड पांच करि निग्रह, खोजि परम पद राइ । हिर सींगी ग्यांन गुंणि बांधौ, खोजि निरंजन साचा । कहै कबीर निरंजन की गति, जुगति बिनां प्यंड काचा ॥" दिखावटी योगियों के आडंबर से कबीर को अत्यन्त क्षोभ होता है । सत्य निष्ठा की प्रतिष्ठा चाहते हैं । वेश से तत्त्व सिद्धि नहीं हो सकती । यदि एक. देखिये, डाशून्य हजारीप्रसाद द्विवेदी - कबीर, पृष्ठ एक सौ अट्ठाईस-एक सौ छब्बीस तथा बीजक, रमैनी उनहत्तर वीं"ऐसा जोग न देखा भाई । भूला फिरै लिये गफिलाई ।। महादेव को पंथ चलावें । ऐसो बड़ो महंत कहावै ॥ हाट-बजारे लावें तारी। कच्चे सिद्धन माया प्यारी । कब दत्ते मावासी तोरी । कब सुखदेव तोपची जोरी ॥ नारद कब बन्दूक चलाया । व्यासदेव कब बंब बजाया ।। करहि लराई मति के मन्दा । ई अतीत की तरकस बन्दा ।। भये विरक्त लोभ मन ठाना। सोना पहिरि लजायँ बाना ॥ थोरा थोरी कीन्ह बटोरा। गांव पाय जस चलै करोरा ॥ " कबीर-वारणी में समाज-चित्रण परमात्मा फकीरों में मिलता है तो उसी में खोजना चाहिये । वे ऐसे वेश को सहर्ष स्वीकार करते है - "फाड़ि पुटौला धजि करौं, कामलड़ी पहराऊं । जेहि जेहि भेषां हरि मिलें, सोइ सोइ भेष धराऊं ॥" जो मुद्रा लगाकर लोगों को दिखाते हैं वे अवधूत नहीं है, केवल प्राडंबर भक्त है । योगी तो जगत् से भिन्न होता है - "प्रवधू जोगी जग थें न्यारा । मुद्रा निरति सुरति करि सींगी, नादन षंड धारा ।" "ब्रह्म प्रगनि में काया जारै, त्रिकुटि संगम जागे । कहै कबीर सोई जोगेश्वर, सहज सुंनि ल्यौ लागे ॥" ये योगी शरीर में विभूति लगाते, जटा धारण करते, पंचाग्नि में तपते और चमत्कारों के बल पर जनता को आतंकित रखते थे । ज्ञान और अहंकार के इन पुतलों पर कबीर को क्षोभ होता और उन्हें कोरी- कोरी सुनाने लगते । साधना के अनेक रहस्यों को अधिगत कर लेने के कारण कबीर अपने पूर्ण आत्मविश्वास के साथ उन पर व्यंग्य प्रहार करते थे। उनकी मान्यताओं का कृतियों से कोई सामंजस्य नही था । वे कुछ मान कर करते कुछ और ही थे और उसका परिणाम भी कुछ और ही होता था। अतएव कबीर ने अपने मत के सार को इस प्रकार प्रस्तुत किया - "ब्रह्म'डे सो प्यंडे जानि, मानसरोवर करि प्रसनांन । सोहं हंसा ताकौ जाप, ताहि न लिपे पुन्य न पाप ॥" सिहल को सिद्ध पीठ मान कर वहां जाकर सिद्धि प्राप्त करने वालों से कबीर और तो क्या कहते, केवल थोड़े से शब्दों में एक तीव्र व्यंग्य कसकर योगियों पर ऐसा मारा कि जिससे उन्हें जो याद आना था वह तो याद श्रा ही गया, साथ ही समय की एक हल्की सी झांकी भी देदी"कबीर खोजी रांम का, गया जु सिंहल दीप। राम तो घटि भीतरि रहया, जु भावं परतीत ॥" कबीर ने जैसे चित्र योगियों की दशा के प्रस्तुत किये है उनसे कहीं अधिक रंगीन पंडे-पुजारियों के आडंबरों के किये हैं। उनकी साढ़े तीन हाथ की धोती, जनेऊ, लम्बा तिलक और छुआ-छूत की बीमारी - इतनी भयंकर कि लकड़ी भी धोकर जलायी जाती । यह सब कुछ था, किन्तु पेड़े कभी नहीं धोये जाते थे । चन्द्रग्रहण के समय पानी का घड़ा खराब हो सकता था, बनी हुई रोटियां दूषित हो सकती थी किन्तु धन-धान्य, वस्त्रादि ? ये सब कुछ कैसे खराब हो जाते ? इनके विसर्जन करते समय छटी की याद आ जाती । पंडितों की अपनी मान्यताएं थीं, शुद्धता का उनका अपना आदर्श था। ब्रह्मणों के संबंध में आठ कनौजिया नौ चूल्हे' की कहावत चरितार्थ तो तब भी होती होगी अन्यथा कबीर को यह न कहना पड़ता " कहू पांडे सुचि कवन ठांव, जिहि घरि भोजन बैठि खांऊ । माता जूठी पिता पुनि जूठा, जूठे फल चित लागे । जूठा श्रांवन जूठा जांनां, चेतहु क्यूं न प्रभागे । ज जूठा पांनी पुनि जूठा, जूठा बैठि पकाया । जूठी कड़छी श्रन परोस्या, जूठे जूठा खाया । चौका जूठा गोबर जूठा, जूठी का ढोकारा । कहै कबीर तेई जन सूचे, जे हरि भजि तर्जाह बिकारा ।" इस प्रकार कबीर ने समाज के आचरण के विषय में बड़े सजीव एंव मार्मिक चित्र चित्रित किये हैं। एक और उद्धरण देखिये जिसमें माता-पिता के प्रति पुत्र के व्यवहार का खाका खींचा गया हैछः "जारि बारि करि आवे वेहा, मूंबां पीछे प्रीति सनेहा । जीवत पित्रहि मारहि डंगा, मूंवां पित्र ले घालें गंगा ॥ जीवत पित्र कू अंत न स्वावें, मूंवां पाछै प्यंड भरावें । जीवत पित्र कू बोलें अपराध, मूं वां पीछें देहि सराध ॥ कहि कबीर मोहि प्रचिरज श्रावं, कउवा खाइ पित्र क्यू पावें ॥" एक. कबीर ग्रन्थावली, पद तीन सौ छप्पन र कबीर वाणी में समाज-चित्ररण इस पद में कबीर ने न केवल समाज की वस्तु स्थिति की ही एक झांकी दी है वरन् ज्ञान और मूर्खता पर कर्कश प्रहार भी किया है । लोग माला फेरते है और सोचते हैं और करते हैं। ऐसी माला किस काम की ? जिनका मन वासनाओं से फिर गया है उनको माला फेरने की आवश्यकता नहीं है । कबीर माला जपने वालों के इस रूप को प्रस्तुत करते हुए कहते हैं"माला पहरं मनमुखी, ताथै कछू न होइ । मन माला कौं फेरतां, जुग उजियारा सोइ' ॥ " की भावना और चरण में संगति न देख कर कबीर को उन्होंने इस असामंजस्य को देख कर कहाक्षोभ होता था। " सेवै सालिगरांम कूं, माया सेती हेत । वोढे काला कापड़ा, नाँव धरावै सेत' ॥' मूर्ति पूजा और तीर्थ-व्रत आदि का कबीर के समय में दौर - दौरा था । इनमें एक ओर भ्रम का आधार था तो दूसरी ओर भेद-भाव का प्रचार । कबीर के व्यंग्य से तराशी हुई प्रस्तर-पूजकों के भ्रम की एक मूर्ति और उसका परिणाम देखियेपड़ा - "पांहण केरा पूतला, करि पूजे करतार । इही भरोस जे रुहे, ते बूडे काली धार ॥ " और जप, तप, तीर्थ एवं व्रत में केवल प्रध-विश्वास देखकर उन्हें कहना "जप तप दोसें थोथरा, तीरथ व्रत बेसास । सूर्व सेंबल सेविया, यौं जग चल्या निराश ॥" एक. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ पैंतालीस दो. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ चौंतालीस तीन. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ तैंतालीस चार. कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ चौंतालीस
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देश के कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने के बावजूद कोविड संक्रमण के मामलों की संख्या में हाल में आयी तेजी चिंता का विषय है। इस संदर्भ में, आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन योग प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देते और बेचैनी से मुक्त करते हैं, बदले हुए परिदृश्य में आम लोगों को उनके दैनिक जीवन को संतुलित करने के लिए उपयोगी सहायता प्रदान करते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के अलावा, योग कई लोगों के सामने आने वाले गतिविधि संबंधी संकट को दूर करने के लिए एक सकारात्मक मार्ग भी प्रदान करता है जो महामारी के कारण घर पर रहने के लिए मजबूर हैं।
चूंकि कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) शुरुआती लोगों के लिए सबसे अच्छा योग पाठ्यक्रम माना जाता है, संस्थान के वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से ज्यादातर सीवाईपी से जुड़े हैं। संस्थान वर्तमान में दैनिक आधार पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉमन योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्ट्रीम करता है। ये सीवाईपी के उच्च-गुणवत्ता वाले ऑनलाइन शिक्षाप्रद वीडियो हैं, जिन्हें आम लोगों को घर पर योग का अभ्यास करने में सक्षम बनाने के लिए बनाया गया है।
प्रारंभिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को "योगा स्वयंसेवक प्रशिक्षण (वाईवीटी) पाठ्यक्रम" कहा जाता है, क्योंकि यह पाठ्यक्रम, योग की शिक्षा प्रदान करने के अलावा, छात्रों को "योग स्वयंसेवक" के रूप में आगे बढ़ने का अवसर भी देता है। वाईवीटी पाठ्यक्रम में चार स्तर होंगे, जिनकी कुल अवधि 36 घंटे होगी। पाठ्यक्रम की शुरुआत योगा एप्रीशिएशन प्रोग्राम नामक मॉड्यूल से होगी जो 45 मिनट के दैनिक अभ्यास के साथ चार दिन का होता है और फिर दूसरा मॉड्यूल शुरू होता है, सीवाईपी- परिचय कार्यक्रम 1.5 घंटे के दैनिक अभ्यास के साथ 12 दिनों के लिए होगा। तीसरे मॉड्यूल पर पहुंचने के साथ सीवाईपी- योग साधना 1.5 घंटे के दैनिक अभ्यास के साथ छह दिनों के लिए होगी।अंतिम मॉड्यूल में दो-दिन (हर रोज छह घंटे) सीवाईपी- स्व अभ्यास, मूल्यांकन और प्रमाणन शामिल हैं। मूल्यवर्धन के रूप में, संस्थान तात्कालिक पाठ्यक्रम के छात्रों को एक "स्वयंसेवक प्रमाणपत्र" प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है, जो योग प्रमाणन बोर्ड (वाईसीबी) से योग के क्षेत्र में प्रमाणन की देश की सर्वोच्च संस्था है। जहां यह पाठ्यक्रम निः शुल्क प्रदान किया जाता है, वाईसीबी से प्रमाणपत्र के लिए 250/- रुपये का मामूली शुल्क देना होगा। एमडीएनआईवाई लोगों के लिए पर्याप्त शिक्षण सामग्री और प्रचार सामग्री उपलब्ध करा रहा है, ताकि लोगों और संस्थानों कोयोग सीखने की गतिविधियों के लिए तैयार और हिस्सेदारी में सक्षम किया जा सके।
महामारी को देखते हुए लोगों की मण्डली से बचना जरूरी है, और इसलिए संस्थानने योग प्रशिक्षण के लिए वर्चुअल या डिजिटल मोड को अपनाया है। इसने संस्थान को पिछले दो महीनों में हजारों लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाया है। संस्थान ने यह भी माना है कि आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस2021, योग सीखने के मामले में लक्ष्य निर्धारण का एक अवसर है, क्योंकि यहभागीदारी की जबरदस्त भावना को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, आम लोगों ने भी समझबूझ के साथ कोरोनोवायरस से लड़ने की इच्छाशक्ति दिखाई है, और उनमें से कई योग को इस लड़ाई में एक मूल्यवान सहायता के रूप में देखते हैं। एमडीएनआईवाई ने सभी को योग प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए महामारी के बीच "योग के साथ रहो, घर पर रहो" संदेश को बढ़ावा दिया है। संस्थान इस वर्ष वर्चुअल या डिजिटल मोड में अतंरराष्ट्रीय योग दिवस 2021 की तैयारी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन करेगा।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस2021 के आयोजन में अब से सिर्फ दो महीने बचे हैं, ऐसे में यह योग के संदेश को दुनिया भर में फैलाने का एक उपयुक्त समय है। 2021 में योग दिवसके लिए दृष्टिकोण, देखभाल और सावधानी के साथ संयोजन से जुड़ा होगा। विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से योग और स्वास्थ्य के लिए योग के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा। अगर जून, 2021 में स्थिति ठीक हो तो सीमित जन मंडली पर विचार किया जा सकता है। इसलिए, आयुष मंत्रालय और एमडीएनआईवाई महामारी के कारण पैदा हुई चुनौतियों के बीच अपने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल/वर्चुअल गतिविधियों के दायरे का विस्तार करने के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों के साथ साझेदारी का निर्माण कर योग को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए काम कर रहा है।
"योग स्वयंसेवक प्रशिक्षण (वाईवीटी) पाठ्यक्रम" का वर्तमान बैच आयुष मंत्रालय और युवा मामले और खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) द्वारा की गई एक संयुक्त पहल का एक हिस्सा है। यह एक जन-केंद्रित ऑनलाइन योग प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो 21 अप्रैल, 2021 को शुरू हुआ था। इसके बाद एक मई 2021, 21 मई 2021 और एक जून 2021 को रिपीट बैच शुरू किए जाएंगे। योग पोर्टल (https://yoga.ayush.gov.in) और लोकप्रिय सोशल मीडिया पर आयुष मंत्रालय के हैंडर पर इस तरह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध है। जैसे - फेसबुक (https://www.facebook.com/moayush/), यूट्यूब (https://www.youtube.com/channel/UCqRR2gs-I3zrNcE4so4TpgQ), इंस्टाग्राम (https://www.instagram.com/ministryofayush/?hl=en) और ट्विटर (https://twitter.com/moayush?ref_src=twsrc%5Egoogle%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor)। इनके अलावा एमडीएनआईवाई के सोशल मीडिया हैंडल पर भी यह जानकारी उपलब्ध है। जैसे - फेसबुक (https://www.facebook.com/mdniyayush/), यूट्यूब (https://www.youtube.com/channel/UCDv8TtM0JGZrD0H7wEdUl7w) और इंस्टाग्राम (https://www.instagram.com/mdniyyoga/?utm_source=ig_embed&hl=en)
योग अपने स्वास्थ्य और कल्याण के पहलुओं के माध्यम से महामारी के बीच भी सकारात्मकता की शुरूआत करने की क्षमता रखता है। आयुष मंत्रालय इस कठिन दौर में सभी हितधारकों से योग के राजदूतों की भूमिका निभाने और महामारी के बीच ज्यादा से ज्यादा लोगों को शारीरिक और भावनात्मक बाधाओं से निपटने के लिए अपने प्रयासों में योग का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील करता है।
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Posted On: देश के कोविड-उन्नीस के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने के बावजूद कोविड संक्रमण के मामलों की संख्या में हाल में आयी तेजी चिंता का विषय है। इस संदर्भ में, आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन योग प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देते और बेचैनी से मुक्त करते हैं, बदले हुए परिदृश्य में आम लोगों को उनके दैनिक जीवन को संतुलित करने के लिए उपयोगी सहायता प्रदान करते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के अलावा, योग कई लोगों के सामने आने वाले गतिविधि संबंधी संकट को दूर करने के लिए एक सकारात्मक मार्ग भी प्रदान करता है जो महामारी के कारण घर पर रहने के लिए मजबूर हैं। चूंकि कॉमन योग प्रोटोकॉल शुरुआती लोगों के लिए सबसे अच्छा योग पाठ्यक्रम माना जाता है, संस्थान के वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से ज्यादातर सीवाईपी से जुड़े हैं। संस्थान वर्तमान में दैनिक आधार पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉमन योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्ट्रीम करता है। ये सीवाईपी के उच्च-गुणवत्ता वाले ऑनलाइन शिक्षाप्रद वीडियो हैं, जिन्हें आम लोगों को घर पर योग का अभ्यास करने में सक्षम बनाने के लिए बनाया गया है। प्रारंभिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को "योगा स्वयंसेवक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम" कहा जाता है, क्योंकि यह पाठ्यक्रम, योग की शिक्षा प्रदान करने के अलावा, छात्रों को "योग स्वयंसेवक" के रूप में आगे बढ़ने का अवसर भी देता है। वाईवीटी पाठ्यक्रम में चार स्तर होंगे, जिनकी कुल अवधि छत्तीस घंटाटे होगी। पाठ्यक्रम की शुरुआत योगा एप्रीशिएशन प्रोग्राम नामक मॉड्यूल से होगी जो पैंतालीस मिनट के दैनिक अभ्यास के साथ चार दिन का होता है और फिर दूसरा मॉड्यूल शुरू होता है, सीवाईपी- परिचय कार्यक्रम एक दशमलव पाँच घंटाटे के दैनिक अभ्यास के साथ बारह दिनों के लिए होगा। तीसरे मॉड्यूल पर पहुंचने के साथ सीवाईपी- योग साधना एक दशमलव पाँच घंटाटे के दैनिक अभ्यास के साथ छह दिनों के लिए होगी।अंतिम मॉड्यूल में दो-दिन सीवाईपी- स्व अभ्यास, मूल्यांकन और प्रमाणन शामिल हैं। मूल्यवर्धन के रूप में, संस्थान तात्कालिक पाठ्यक्रम के छात्रों को एक "स्वयंसेवक प्रमाणपत्र" प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है, जो योग प्रमाणन बोर्ड से योग के क्षेत्र में प्रमाणन की देश की सर्वोच्च संस्था है। जहां यह पाठ्यक्रम निः शुल्क प्रदान किया जाता है, वाईसीबी से प्रमाणपत्र के लिए दो सौ पचास/- रुपये का मामूली शुल्क देना होगा। एमडीएनआईवाई लोगों के लिए पर्याप्त शिक्षण सामग्री और प्रचार सामग्री उपलब्ध करा रहा है, ताकि लोगों और संस्थानों कोयोग सीखने की गतिविधियों के लिए तैयार और हिस्सेदारी में सक्षम किया जा सके। महामारी को देखते हुए लोगों की मण्डली से बचना जरूरी है, और इसलिए संस्थानने योग प्रशिक्षण के लिए वर्चुअल या डिजिटल मोड को अपनाया है। इसने संस्थान को पिछले दो महीनों में हजारों लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाया है। संस्थान ने यह भी माना है कि आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसदो हज़ार इक्कीस, योग सीखने के मामले में लक्ष्य निर्धारण का एक अवसर है, क्योंकि यहभागीदारी की जबरदस्त भावना को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, आम लोगों ने भी समझबूझ के साथ कोरोनोवायरस से लड़ने की इच्छाशक्ति दिखाई है, और उनमें से कई योग को इस लड़ाई में एक मूल्यवान सहायता के रूप में देखते हैं। एमडीएनआईवाई ने सभी को योग प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए महामारी के बीच "योग के साथ रहो, घर पर रहो" संदेश को बढ़ावा दिया है। संस्थान इस वर्ष वर्चुअल या डिजिटल मोड में अतंरराष्ट्रीय योग दिवस दो हज़ार इक्कीस की तैयारी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन करेगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवसदो हज़ार इक्कीस के आयोजन में अब से सिर्फ दो महीने बचे हैं, ऐसे में यह योग के संदेश को दुनिया भर में फैलाने का एक उपयुक्त समय है। दो हज़ार इक्कीस में योग दिवसके लिए दृष्टिकोण, देखभाल और सावधानी के साथ संयोजन से जुड़ा होगा। विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से योग और स्वास्थ्य के लिए योग के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा। अगर जून, दो हज़ार इक्कीस में स्थिति ठीक हो तो सीमित जन मंडली पर विचार किया जा सकता है। इसलिए, आयुष मंत्रालय और एमडीएनआईवाई महामारी के कारण पैदा हुई चुनौतियों के बीच अपने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल/वर्चुअल गतिविधियों के दायरे का विस्तार करने के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों के साथ साझेदारी का निर्माण कर योग को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए काम कर रहा है। "योग स्वयंसेवक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम" का वर्तमान बैच आयुष मंत्रालय और युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा की गई एक संयुक्त पहल का एक हिस्सा है। यह एक जन-केंद्रित ऑनलाइन योग प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो इक्कीस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को शुरू हुआ था। इसके बाद एक मई दो हज़ार इक्कीस, इक्कीस मई दो हज़ार इक्कीस और एक जून दो हज़ार इक्कीस को रिपीट बैच शुरू किए जाएंगे। योग पोर्टल और लोकप्रिय सोशल मीडिया पर आयुष मंत्रालय के हैंडर पर इस तरह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध है। जैसे - फेसबुक , यूट्यूब , इंस्टाग्राम और ट्विटर । इनके अलावा एमडीएनआईवाई के सोशल मीडिया हैंडल पर भी यह जानकारी उपलब्ध है। जैसे - फेसबुक , यूट्यूब और इंस्टाग्राम योग अपने स्वास्थ्य और कल्याण के पहलुओं के माध्यम से महामारी के बीच भी सकारात्मकता की शुरूआत करने की क्षमता रखता है। आयुष मंत्रालय इस कठिन दौर में सभी हितधारकों से योग के राजदूतों की भूमिका निभाने और महामारी के बीच ज्यादा से ज्यादा लोगों को शारीरिक और भावनात्मक बाधाओं से निपटने के लिए अपने प्रयासों में योग का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील करता है।
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वीरविनोद. [ माधवराव सेंधियाले लड़ाई - १५६२
बरसोड़ाका चावड़ा नाथसिंह, थांवलाका चहुवान नाथसिंह, बनेड्याका चहुवान चत्रसिंह, कांसेड़ीका पुंवार सर्दारसिंह, महाराणाका मामा भ्रांगधराका झाला साहिबसिंह व उनका पुत्र सामन्तसिंह, पुरोहित नन्दराम, महता अगरचन्द, जनानी ड्योढ़ीका दारोगह महता लक्ष्मीचन्द, साह मोतीराम बौल्या अपने पुत्र एकलिंगदास समेत, भट्ट देवेश्वर, धवा दूसरा नगराज, धायभाई रूपा, धायभाई कीका, धायभाई हट्टू, धायभाई उदयराम, धायभाई रत्ना, धवा चतुर्भुज, धवा कुशला ( ये दोनों शख्स कुंवर हमीरसिंह और भीमसिंहके धवा थे. ) और कायस्थ प्रताप इनके सिवा सिंधी और अरब सिपाहियोंके, जो अफ्सर जमादार महाराणाके पास रहे उनके नाम नीचे दर्ज किये जाते हैंःजमादार फ़ीरोज़, जमादार लड़ाऊ, जमादार खगोट, जमादार मलंग, जमादार गुल हाला, जमादार चन्दर, जमादार जादू, जमादार बढ्यो, जमादार शेरबेग, जमादार खगोट दूसरा, जमादार अमद, जमादार मुराद वगैरह.
अगर्चि अमरचन्द प्रधान ने बहुतसा गल्ला एकट्ठा किया था, लेकिन हज़ारहा आदमी लड़नेवाले राजपूत सिपाहियों, व शहरकी रिया वगैरहके लिये वह काफ़ी न होसका. रसदकी यहांतक कमी हुई, कि कभी कभी फ़ाक़ह कशीकी नौबत पहुंचती थी, परन्तु बाघसिंहसे इस मौकेपर लोगों को बड़ी मदद मिली. वह दिन में एक ही वक्त खाना खाते थे, और उस वक़ नक्कारह बजाया जाता था, जिसकी आवाज़ सुनकर जो लोग आते, उन्हें खाना खिला देते. इस बात से बाघसिंह की बड़ी नामवरी हुई; और दुश्मन भंजन तोप, जो उसके क़ब्ज़हमें थी, उसके सबब शहर पनाहके दक्षिण तरफ गनीम लोग करीब नहीं आते थे. मरहटोंने पचास ५०००० हज़ार रुपया भेजकर बाघसिंहको कहलाया कि अपनी तोपको बन्द करें, हमारी फ़ौज कृष्ण पौलसे हमलह करेगी. बाघसिंहने धोखा देकर रुपया ले लिया, और पश्चिमी पहाड़ोंकी तरफ से गल्ला मंगाकर अपना काम चलाया. मगर जब शर्तके मुवाफिक माधवरावकी फ़ौज कृष्णपोलकी तरफ़ बढ़ी, तो पहाड़के निकट आनेपर उसने उनपर अपनी तोपका ऐसा वार किया; कि जिससे गुनीमको बहुतसा नुक्सान उठानेके बाद महाराज बाघसिंहकी दगाबाजी समझकर पीछा हटना पड़ा.
छः महीने तक आपसमें लड़ाई होतीरही; आखिरकार रावत् भीम सिंह व अर्जुनसिंहने माधवरावको कहलाया, कि आप फायदह लड़ते हैं, अगर रत्नसिंहको राणा बनाकर मलब निकालना हो, तो उनसे रुपया तलब कीजिये, वर्नह हम देनेको तय्यार हैं. माधवरावने देवगढ़के रावत् जशवन्तसिंह के पुत्र राघवदेवसे रुपया तलब किया, तो उसने कहा, कि अभी तो हमारे पास नहीं है, उदयपुरमें क़ब्ज़ह होने बाद बन्दोबस्त करेंगे.
इसपर सेंधियाने गुस्से हो कर कहा, कि हमारी फ़ौजको तन्स्वाह कहांसे दीजाये? यह सुनकर राघवदेव डरा, कि कहीं यह मुझे गिरिफ्तार करके महाराणा अरिसिंहके सुपुर्द न करदे, और भागकर देवगढ़ चलागया. उस वक्त महाराणाकी तरफसे रावत् अर्जुनसिंह सुलहका पैग़ाम लेकर माधवरावके पास भेजा गया, और सत्तर ७०००००० लाख रुपया देनेपर उसे राजी किया. लेकिन माधवरावने शहरमें गल्लेकी कमी होनेके सबब भीतरकी फ़ौजको घबराई हुई सुनकर सोचा, कि अगर इस हालतमें शहरकी लूट की जायेगी, तो ज़ियादह फायदह होगा. उसने अमरचन्द प्रधानको कहलाया, कि बीस लाख रुपया जियादह देनेपर सुलह काइम रह सक्ती है. अमरचन्दने गुस्से में आकर अदनामह फाड़ डाला, और सर्कारी कोठार व अहल्कारों के घरोंमेंसे, जो नाज था, निकलवाकर बाजार में और सिपाहियोंके पास भिजवा दिया; और कुल राजपूत व सिपाहियोंको बुलाकर उनकी तसल्ली की. मिर्ज़ा आदिलबेग वगैरह सिंधी सिपाहियोंने महाराणाके पास जाकर कसम खाई, और अर्ज की, कि अब हम लोग आपसे तनख्वाह न लेंगे; उदयपुर हमारा वतन है, जब तक गल्ला मिलेगा, उसे खाकर लड़ेंगे, बाद उसके चौपायोंपर गुज़र करके दुश्मनको अपने हाथ दिखलावेंगे, और अखर में दुश्मनकी फ़ौजपर बहादुरीसे हमलह करके मरेंगे. इसी तरह राजपूत भी जवांमदर्दी दिखलाकर महाराणाको तसल्ली देते थे. उन लोगोंके मुहब्बत आमेज कलाम सुनकर महाराणाकी आंखोंसे आंसू टपकने लगे; और राजपूत व सिपाहियोंने एक मत होकर मरहटी फ़ौजपर फिर गोलन्दाज़ी शुरू की.
[ माधवरावसे सुलह- १५६३
इन बातों की ख़बर माधवरावको मिली, उसने कुछ अरसे बाद अपनी तरफ से सुलहका पैगाम भेजा. जिसपर अमरचन्दने कहलाया, कि हमको गल्ला व मेगज़िन (गोला बारूद ) में, जो ज़ियादह खर्च हुआ, वह कम करनेपर सुलह होसकी है. लाचार सेंधियाको साठ लाख रुपया लेकर सुलह करनी पड़ी. और साढ़े तीन लाख रुपया दफ्तर खर्च यानी अहल्कारोंकी रिश्वत के ठहरे, तब रुपया देने की शर्तें पूरी करनेका विचार हुआ. पच्चीस लाख रुपयेमें सोना, चांदी, जवाहिरात व नक्द, और आठ लाख जागीरदारों से वसूल करके दिया गया. बाक़ी रुपयोंके एवज़में जावद, नीमच, जीरण और मोरवण वगैरह पर्गने गिर्वी रक्खे गये, और यह शर्त की गई, कि महाराणाके अहल्कारोंकी शामिलातसे उक्त पर्गनोंकी आमदनी साल दर साल जमा होती रहेगी; और रुपया अदा होजाने के बाद उनकी आमदनी राज्य मेवाड़के शामिल कीजावेगी. कर्नेल टॉड लिखते हैं, कि "इस तरह विक्रमी १८२६ [ हि० ११८३ १७६९ ] में उदयपुरका मुहासरह खत्म हुआ, और ये उम्दह जिले मेवाड़ की रियासतसे निकल गये; लेकिन तुमको यह याद होगा, कि ये ज़िले सिर्फ गिर्वी
[ अवनामहकी नकल- १५६४
रक्खे गये थे. अगर्चि मुल्क की तबाही और सल्तनतकी तनज़ुलीके सबब गिर्वीसे छूटना मुमकिन न हुआ, लेकिन ताहम दावा उनपर बना रहा. अहूदनामह ईसवी १८१७ [ हि० १२३२ = वि० १८७४ ] में राणाके एल्चियोंने उन जिलोंकी बहाली भी शर्तोमें दाखिल करानी चाही, क्योंकि सर्कार इंग्लिशियह उस वक्त उस मुल्कके गुजरतह हालात से बिल्कुल वाकिफ़ न थी, और सेंधियासे अंग्रेज़ी सर्कारको मुहब्बत थी; इसलिये सर्कार इंग्लिशियहने उस शर्तको मंजूर न किया, लेकिन जबकि सर्कार इंग्लिशियह व सेंधियामें दुश्मनी होगई, और उन जिलोंके बचानेका मौका हासिल हुआ, उस वक्त ब सबब मस्लिहत, जिसका समझना मुश्किल है, वह हाथसे जाता रहा. उस मस्लिहतके बाबमें, जो उन जिलोंके लिये नुक्सानका बाइस हुई, तवारीख हिन्दके मुवर्रिखोंने नुक्तह चीनी की है. सर्कार इंग्लिशियह खुद इस बातको सोचे, कि उनको पचास साल तक रिहनसे न छुड़ाना, व शम्शेरके ज़ोरसे हासिल न करना, क्या उनके दावेको झूठा करता है ? गरज कि इस बात के सुबूतमें बहुतसी सनदें मौजूद हैं, और कोटा वाले ज़ालिमसिंह व लालाजी बलाल ( पंडित ) जो अब मरे हैं, दोनों की जुबानी यह तस्दीक के दरजेको पहुंची है. किसी न किसी दिन जब सर्कार इंग्लिशियह उन जिलोंको मेवाड़में दोबारह शामिल करना मुनासिब समझेगी, वह शहादतें काम आवेंगी. "
इन पर्गनोंके गिर्वी रखने के बाद एक अदनामह माधवराव सेंधिया और महाराणाके दर्मियान हुआ, जिसकी नक्क नीचे लिखी जाती है
अदनामहकी नकल.
सिंधिं श्री महाराणां श्री अरिसिघजी सूश्वस्थांन उदैपुकी मामलत ठाहरी, सरकार सुबैदार श्री माघजी सीधें तीन सरदाराकी मांमलतको करार तीकी कलम. रतनसिंघजी मंदसौर रहे, त्यांने जागीर रु ७५००० पीचत्र हजारकी देणी, राज पाछे राजको वारस कदाच मंदसौ न रहे नीकलजाय, तौ उणीको पष्य न होसी पटो न पावसी राजको वारस नही, मंदसौर रहे, तो रावत भीमसीघजीको भाइी बेटो उणां तीरे रेहे, मोर सरदार न रहे.
१मेवाड मांह्रै जवतीका थांसां होय. जांकी उठत्री सरकार सूं देणी
बाबल्या तथा वाबल्याकी फोज मेवाङमै रहसी नही.
पटायत सलूक सु रहेसी, ज्यांकी मेर मरजाद भागां सु चाली माही ती
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वीरविनोद. [ माधवराव सेंधियाले लड़ाई - एक हज़ार पाँच सौ बासठ बरसोड़ाका चावड़ा नाथसिंह, थांवलाका चहुवान नाथसिंह, बनेड्याका चहुवान चत्रसिंह, कांसेड़ीका पुंवार सर्दारसिंह, महाराणाका मामा भ्रांगधराका झाला साहिबसिंह व उनका पुत्र सामन्तसिंह, पुरोहित नन्दराम, महता अगरचन्द, जनानी ड्योढ़ीका दारोगह महता लक्ष्मीचन्द, साह मोतीराम बौल्या अपने पुत्र एकलिंगदास समेत, भट्ट देवेश्वर, धवा दूसरा नगराज, धायभाई रूपा, धायभाई कीका, धायभाई हट्टू, धायभाई उदयराम, धायभाई रत्ना, धवा चतुर्भुज, धवा कुशला और कायस्थ प्रताप इनके सिवा सिंधी और अरब सिपाहियोंके, जो अफ्सर जमादार महाराणाके पास रहे उनके नाम नीचे दर्ज किये जाते हैंःजमादार फ़ीरोज़, जमादार लड़ाऊ, जमादार खगोट, जमादार मलंग, जमादार गुल हाला, जमादार चन्दर, जमादार जादू, जमादार बढ्यो, जमादार शेरबेग, जमादार खगोट दूसरा, जमादार अमद, जमादार मुराद वगैरह. अगर्चि अमरचन्द प्रधान ने बहुतसा गल्ला एकट्ठा किया था, लेकिन हज़ारहा आदमी लड़नेवाले राजपूत सिपाहियों, व शहरकी रिया वगैरहके लिये वह काफ़ी न होसका. रसदकी यहांतक कमी हुई, कि कभी कभी फ़ाक़ह कशीकी नौबत पहुंचती थी, परन्तु बाघसिंहसे इस मौकेपर लोगों को बड़ी मदद मिली. वह दिन में एक ही वक्त खाना खाते थे, और उस वक़ नक्कारह बजाया जाता था, जिसकी आवाज़ सुनकर जो लोग आते, उन्हें खाना खिला देते. इस बात से बाघसिंह की बड़ी नामवरी हुई; और दुश्मन भंजन तोप, जो उसके क़ब्ज़हमें थी, उसके सबब शहर पनाहके दक्षिण तरफ गनीम लोग करीब नहीं आते थे. मरहटोंने पचास पचास हज़ार हज़ार रुपया भेजकर बाघसिंहको कहलाया कि अपनी तोपको बन्द करें, हमारी फ़ौज कृष्ण पौलसे हमलह करेगी. बाघसिंहने धोखा देकर रुपया ले लिया, और पश्चिमी पहाड़ोंकी तरफ से गल्ला मंगाकर अपना काम चलाया. मगर जब शर्तके मुवाफिक माधवरावकी फ़ौज कृष्णपोलकी तरफ़ बढ़ी, तो पहाड़के निकट आनेपर उसने उनपर अपनी तोपका ऐसा वार किया; कि जिससे गुनीमको बहुतसा नुक्सान उठानेके बाद महाराज बाघसिंहकी दगाबाजी समझकर पीछा हटना पड़ा. छः महीने तक आपसमें लड़ाई होतीरही; आखिरकार रावत् भीम सिंह व अर्जुनसिंहने माधवरावको कहलाया, कि आप फायदह लड़ते हैं, अगर रत्नसिंहको राणा बनाकर मलब निकालना हो, तो उनसे रुपया तलब कीजिये, वर्नह हम देनेको तय्यार हैं. माधवरावने देवगढ़के रावत् जशवन्तसिंह के पुत्र राघवदेवसे रुपया तलब किया, तो उसने कहा, कि अभी तो हमारे पास नहीं है, उदयपुरमें क़ब्ज़ह होने बाद बन्दोबस्त करेंगे. इसपर सेंधियाने गुस्से हो कर कहा, कि हमारी फ़ौजको तन्स्वाह कहांसे दीजाये? यह सुनकर राघवदेव डरा, कि कहीं यह मुझे गिरिफ्तार करके महाराणा अरिसिंहके सुपुर्द न करदे, और भागकर देवगढ़ चलागया. उस वक्त महाराणाकी तरफसे रावत् अर्जुनसिंह सुलहका पैग़ाम लेकर माधवरावके पास भेजा गया, और सत्तर सत्तर लाख लाख रुपया देनेपर उसे राजी किया. लेकिन माधवरावने शहरमें गल्लेकी कमी होनेके सबब भीतरकी फ़ौजको घबराई हुई सुनकर सोचा, कि अगर इस हालतमें शहरकी लूट की जायेगी, तो ज़ियादह फायदह होगा. उसने अमरचन्द प्रधानको कहलाया, कि बीस लाख रुपया जियादह देनेपर सुलह काइम रह सक्ती है. अमरचन्दने गुस्से में आकर अदनामह फाड़ डाला, और सर्कारी कोठार व अहल्कारों के घरोंमेंसे, जो नाज था, निकलवाकर बाजार में और सिपाहियोंके पास भिजवा दिया; और कुल राजपूत व सिपाहियोंको बुलाकर उनकी तसल्ली की. मिर्ज़ा आदिलबेग वगैरह सिंधी सिपाहियोंने महाराणाके पास जाकर कसम खाई, और अर्ज की, कि अब हम लोग आपसे तनख्वाह न लेंगे; उदयपुर हमारा वतन है, जब तक गल्ला मिलेगा, उसे खाकर लड़ेंगे, बाद उसके चौपायोंपर गुज़र करके दुश्मनको अपने हाथ दिखलावेंगे, और अखर में दुश्मनकी फ़ौजपर बहादुरीसे हमलह करके मरेंगे. इसी तरह राजपूत भी जवांमदर्दी दिखलाकर महाराणाको तसल्ली देते थे. उन लोगोंके मुहब्बत आमेज कलाम सुनकर महाराणाकी आंखोंसे आंसू टपकने लगे; और राजपूत व सिपाहियोंने एक मत होकर मरहटी फ़ौजपर फिर गोलन्दाज़ी शुरू की. [ माधवरावसे सुलह- एक हज़ार पाँच सौ तिरेसठ इन बातों की ख़बर माधवरावको मिली, उसने कुछ अरसे बाद अपनी तरफ से सुलहका पैगाम भेजा. जिसपर अमरचन्दने कहलाया, कि हमको गल्ला व मेगज़िन में, जो ज़ियादह खर्च हुआ, वह कम करनेपर सुलह होसकी है. लाचार सेंधियाको साठ लाख रुपया लेकर सुलह करनी पड़ी. और साढ़े तीन लाख रुपया दफ्तर खर्च यानी अहल्कारोंकी रिश्वत के ठहरे, तब रुपया देने की शर्तें पूरी करनेका विचार हुआ. पच्चीस लाख रुपयेमें सोना, चांदी, जवाहिरात व नक्द, और आठ लाख जागीरदारों से वसूल करके दिया गया. बाक़ी रुपयोंके एवज़में जावद, नीमच, जीरण और मोरवण वगैरह पर्गने गिर्वी रक्खे गये, और यह शर्त की गई, कि महाराणाके अहल्कारोंकी शामिलातसे उक्त पर्गनोंकी आमदनी साल दर साल जमा होती रहेगी; और रुपया अदा होजाने के बाद उनकी आमदनी राज्य मेवाड़के शामिल कीजावेगी. कर्नेल टॉड लिखते हैं, कि "इस तरह विक्रमी एक हज़ार आठ सौ छब्बीस [ हिशून्य एक हज़ार एक सौ तिरासी एक हज़ार सात सौ उनहत्तर ] में उदयपुरका मुहासरह खत्म हुआ, और ये उम्दह जिले मेवाड़ की रियासतसे निकल गये; लेकिन तुमको यह याद होगा, कि ये ज़िले सिर्फ गिर्वी [ अवनामहकी नकल- एक हज़ार पाँच सौ चौंसठ रक्खे गये थे. अगर्चि मुल्क की तबाही और सल्तनतकी तनज़ुलीके सबब गिर्वीसे छूटना मुमकिन न हुआ, लेकिन ताहम दावा उनपर बना रहा. अहूदनामह ईसवी एक हज़ार आठ सौ सत्रह [ हिशून्य एक हज़ार दो सौ बत्तीस = विशून्य एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर ] में राणाके एल्चियोंने उन जिलोंकी बहाली भी शर्तोमें दाखिल करानी चाही, क्योंकि सर्कार इंग्लिशियह उस वक्त उस मुल्कके गुजरतह हालात से बिल्कुल वाकिफ़ न थी, और सेंधियासे अंग्रेज़ी सर्कारको मुहब्बत थी; इसलिये सर्कार इंग्लिशियहने उस शर्तको मंजूर न किया, लेकिन जबकि सर्कार इंग्लिशियह व सेंधियामें दुश्मनी होगई, और उन जिलोंके बचानेका मौका हासिल हुआ, उस वक्त ब सबब मस्लिहत, जिसका समझना मुश्किल है, वह हाथसे जाता रहा. उस मस्लिहतके बाबमें, जो उन जिलोंके लिये नुक्सानका बाइस हुई, तवारीख हिन्दके मुवर्रिखोंने नुक्तह चीनी की है. सर्कार इंग्लिशियह खुद इस बातको सोचे, कि उनको पचास साल तक रिहनसे न छुड़ाना, व शम्शेरके ज़ोरसे हासिल न करना, क्या उनके दावेको झूठा करता है ? गरज कि इस बात के सुबूतमें बहुतसी सनदें मौजूद हैं, और कोटा वाले ज़ालिमसिंह व लालाजी बलाल जो अब मरे हैं, दोनों की जुबानी यह तस्दीक के दरजेको पहुंची है. किसी न किसी दिन जब सर्कार इंग्लिशियह उन जिलोंको मेवाड़में दोबारह शामिल करना मुनासिब समझेगी, वह शहादतें काम आवेंगी. " इन पर्गनोंके गिर्वी रखने के बाद एक अदनामह माधवराव सेंधिया और महाराणाके दर्मियान हुआ, जिसकी नक्क नीचे लिखी जाती है अदनामहकी नकल. सिंधिं श्री महाराणां श्री अरिसिघजी सूश्वस्थांन उदैपुकी मामलत ठाहरी, सरकार सुबैदार श्री माघजी सीधें तीन सरदाराकी मांमलतको करार तीकी कलम. रतनसिंघजी मंदसौर रहे, त्यांने जागीर पचहत्तर हज़ार रुपया पीचत्र हजारकी देणी, राज पाछे राजको वारस कदाच मंदसौ न रहे नीकलजाय, तौ उणीको पष्य न होसी पटो न पावसी राजको वारस नही, मंदसौर रहे, तो रावत भीमसीघजीको भाइी बेटो उणां तीरे रेहे, मोर सरदार न रहे. एकमेवाड मांह्रै जवतीका थांसां होय. जांकी उठत्री सरकार सूं देणी बाबल्या तथा वाबल्याकी फोज मेवाङमै रहसी नही. पटायत सलूक सु रहेसी, ज्यांकी मेर मरजाद भागां सु चाली माही ती
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Adityapur : सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर शहरी क्षेत्र में अपराध को नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने अपनी कमर कस ली है. इसके तहत क्षेत्र में पुलिस की टीम द्वारा अगल-अलग जगहों पर 'एंटी क्राइम चेकिंग अभियान' चलाया गया. अभियान में दर्जनों वाहनों में लगे काले शीशों को हटवाया गया. साथ ही वाहन चालकों को दोबारा काला शीशा नहीं लगाने की नसीहत दी गई. कुछ चालकों को पुलिस ने फटकार लगाई और दोबारा पकड़े जाने पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। मौके पर मौजूद आदित्यपुर थाना के सब इंस्पेक्टर आलोक रंजन चौधरी ने बताया कि अपराधियों और अपराध पर नकेल कसने के लिए आदित्यपुर थाना प्रभारी आलोक कुमार दुबे के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है.
उन्होंने वाहन मालिकों से पुलिस को सहयोग करने की अपील भी की. वाहन मालिकों को ट्रैफिक नियमों का कड़ई से पालन करने का आदेश दिया गया अन्यथा कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। दरअसल विभिन्न आपराधिक मामलों की जांच में पुलिस को पता चला है कि अपराधी वाहनों में काले शीशे लगाकर सड़क पर घूम रहे हैं. इसी को लेकर आदित्यपुर पुलिस द्वारा इस अभियान की शुरुआत की गई है ताकि क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाया जा सके. आदित्यपुर पुलिस का यह अभियान क्षेत्र में आगे भी जारी रहेगा.
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Adityapur : सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर शहरी क्षेत्र में अपराध को नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने अपनी कमर कस ली है. इसके तहत क्षेत्र में पुलिस की टीम द्वारा अगल-अलग जगहों पर 'एंटी क्राइम चेकिंग अभियान' चलाया गया. अभियान में दर्जनों वाहनों में लगे काले शीशों को हटवाया गया. साथ ही वाहन चालकों को दोबारा काला शीशा नहीं लगाने की नसीहत दी गई. कुछ चालकों को पुलिस ने फटकार लगाई और दोबारा पकड़े जाने पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। मौके पर मौजूद आदित्यपुर थाना के सब इंस्पेक्टर आलोक रंजन चौधरी ने बताया कि अपराधियों और अपराध पर नकेल कसने के लिए आदित्यपुर थाना प्रभारी आलोक कुमार दुबे के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने वाहन मालिकों से पुलिस को सहयोग करने की अपील भी की. वाहन मालिकों को ट्रैफिक नियमों का कड़ई से पालन करने का आदेश दिया गया अन्यथा कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। दरअसल विभिन्न आपराधिक मामलों की जांच में पुलिस को पता चला है कि अपराधी वाहनों में काले शीशे लगाकर सड़क पर घूम रहे हैं. इसी को लेकर आदित्यपुर पुलिस द्वारा इस अभियान की शुरुआत की गई है ताकि क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाया जा सके. आदित्यपुर पुलिस का यह अभियान क्षेत्र में आगे भी जारी रहेगा.
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अध्याय १५ : मुक़दमा वापस
') आया हूँ । यहाँ आकर उन रैयतो की सहायता करने के लिए मुझसे बहुत आग्रह किया गया था, जिनके साथ कहा जाता है कि निलहे साहब अच्छा व्यवहार नहीं करते, पर जबतक मै सब बातें अच्छी तरह जान न लेता, तबतक उन लोगो की कोई सहायता नहीं कर सकता था। इसलिए यदि हो सके तो अधिकारियो और निलहे साहबो की सहायता से में सब बाते जानने के लिए भाया हूँ । मैं किसी दूसरे उद्देश्य से यहाँ नहीं आया हूँ। मुझे यह विश्वास नहीं होता कि मेरे यहाँ आने से किसी प्रकार शाति-भग या प्राण-हानि हो सकती है। मै कह सकता हूँ कि मुझे ऐसी बातों का बहुत अनुभव है। अधिकारियो को जो कठिनाइयाँ होती है, उनको मै समझता हूँ, और मै यह भी मानता हूँ कि उन्हें जो सूचना मिलती है, वे केवल उसी के अनुसार काम कर सकते हैं । कानून माननेवाले व्यक्ति की तरह मेरी प्रवृत्ति यही होनी चाहिए थी, और ऐसी प्रवृत्ति हुई भी कि से इस आजा का पालन करूं, पर मैं उन लोगो के प्रति, जिनके कारण मे यहाँ आया हूँ, अपने कर्तव्य का उल्लघन नहीं कर सकता था । मे समझता हूँ कि मैं उन लोगो के बीच रहकर ही उनकी भलाई कर सकता हूँ। इस कारण मै स्वेच्छा से इस स्थान से नहीं जासकता था। दो कर्तव्यो के परस्पर विरोध की दशा में में केवल यही कर सकता था कि अपने को हटाने की सारी जिम्मेदारी शासको पर छोड़ दूं । मै भलीभाति जानता हूँ कि भारत के सार्वजनिक जीवन में मेरी - जैसी स्थितिवाले लोगो को आदर्श उपस्थित करने में बहुत ही सचेत रहना पड़ता है। मेरा दृढ विश्वास है कि जिस स्थिति में मैं हूँ उस स्थिति में प्रत्येक प्रतिष्ठित व्यक्ति को वही काम करना सबसे अच्छा है, जो इस समय मैंने करना निश्चय किया है; और वह यह है कि बिना किसी प्रकार का विरोध किये आज्ञा न मानने का दण्ड सहने के लिए तैयार हो जाऊं। मैंने जो वयान दिया है, वह इसलिए नहीं है कि जो इण्ड मुझे मिलनेवाला है, वह कम किया जाय; बल्कि इस बात को दिसलाने के लिए कि मैने सरकारी आज्ञा की अवज्ञा इस कारण से नही की है कि मुझे सरकार के प्रति विश्वास नहीं है, बल्कि इस कारण मे
कि मैंने उससे भी उच्चतर आज्ञा - अपनी विवेकवृद्धि की आज्ञाकार पालन करना उचित समझा है।"
अब मुकदमे की सुनवाई मुल्तवी रखने का तो कुछ कारण ही नही रह गया था; परन्तु मजिस्ट्रेट या सरकारी वकील इस परिणाम की आशा नही रखते थे । अतएव सज्रा के लिए अदालत ने फैनला मुल्तवी रक्ता। मैने वाइसराय को तार द्वारा सव हालात की सूचना दे दी थी, पटना भी तार दे दिया था। भारत भूषण पडित मालवीयजी वगैरा को भी तार द्वारा समाचार भेज दिया था । अव तजा सुनने के लिए बदालत का समय आने के पहले ही मुझे मजिस्ट्रेट का हम मिला कि हृषम लाट साहब के हुक्म से मुक़दमा उठा लिया गया है और कलेक्टर को चिट्ठी मिली कि आप जो कुछ जाँच करना चाहे, शौक़ ने करें और उसमें जो कुछ मदद सरकारी कर्मचारियों को ओर से लेना चाहे, ले । ऐसे तत्काल और शुभ परिणाम को आशा हममें से किसी ने नही को थी। मैं कलेक्टर मि० हैकाक से मिला । वह भला आदमी मालून और इन्साफ करने के लिए तत्पर नजर आया। उन्होंने कहा कि आप जो कुछ काग्रज-पत्र या और कुछ देखना चाहे, देख सकते हैं। जब कभी मिलना चाहें, जरूर मिल सकते है ।
दूसरी तरफ तारे भारतवर्ष को सत्याग्रह का अथवा कानून के सविनयभग का पहला स्थानिक पदार्थ-पाठ मिला । अनुवारों में इन प्रकरण की खूब चर्चा चली और चम्पारन को तया मेरी जाँच को कति विज्ञापन मिल गया ।
मुझे अपनी जाँच के लिए जहाँ एक ओर सरकार के निष्पक्ष रहने की जरूरत थी, वहीं दूसरी ओर अखबारों में चर्चा होने की और उनके सम्वाददातालों की जरूरत नहीं थी। यही नहीं, बल्कि उनकी कडी टोका और जांच को बड़ी-बड़ी रिपोटों से हानि होने का भी भय था । इसदिए मैन मूल्य-मूल्य अजवारों के सम्पादकों से अनुरोध किया कि "आप अपने नम्बाद दाताओ को भेजने का खर्च न उठावे । जितनी चा प्रकाशित करने योग् होंगी, वह मैं आपको खुद ही भेजता रहूँगा और खबर नी देता रहेगा।"
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अध्याय पंद्रह : मुक़दमा वापस ') आया हूँ । यहाँ आकर उन रैयतो की सहायता करने के लिए मुझसे बहुत आग्रह किया गया था, जिनके साथ कहा जाता है कि निलहे साहब अच्छा व्यवहार नहीं करते, पर जबतक मै सब बातें अच्छी तरह जान न लेता, तबतक उन लोगो की कोई सहायता नहीं कर सकता था। इसलिए यदि हो सके तो अधिकारियो और निलहे साहबो की सहायता से में सब बाते जानने के लिए भाया हूँ । मैं किसी दूसरे उद्देश्य से यहाँ नहीं आया हूँ। मुझे यह विश्वास नहीं होता कि मेरे यहाँ आने से किसी प्रकार शाति-भग या प्राण-हानि हो सकती है। मै कह सकता हूँ कि मुझे ऐसी बातों का बहुत अनुभव है। अधिकारियो को जो कठिनाइयाँ होती है, उनको मै समझता हूँ, और मै यह भी मानता हूँ कि उन्हें जो सूचना मिलती है, वे केवल उसी के अनुसार काम कर सकते हैं । कानून माननेवाले व्यक्ति की तरह मेरी प्रवृत्ति यही होनी चाहिए थी, और ऐसी प्रवृत्ति हुई भी कि से इस आजा का पालन करूं, पर मैं उन लोगो के प्रति, जिनके कारण मे यहाँ आया हूँ, अपने कर्तव्य का उल्लघन नहीं कर सकता था । मे समझता हूँ कि मैं उन लोगो के बीच रहकर ही उनकी भलाई कर सकता हूँ। इस कारण मै स्वेच्छा से इस स्थान से नहीं जासकता था। दो कर्तव्यो के परस्पर विरोध की दशा में में केवल यही कर सकता था कि अपने को हटाने की सारी जिम्मेदारी शासको पर छोड़ दूं । मै भलीभाति जानता हूँ कि भारत के सार्वजनिक जीवन में मेरी - जैसी स्थितिवाले लोगो को आदर्श उपस्थित करने में बहुत ही सचेत रहना पड़ता है। मेरा दृढ विश्वास है कि जिस स्थिति में मैं हूँ उस स्थिति में प्रत्येक प्रतिष्ठित व्यक्ति को वही काम करना सबसे अच्छा है, जो इस समय मैंने करना निश्चय किया है; और वह यह है कि बिना किसी प्रकार का विरोध किये आज्ञा न मानने का दण्ड सहने के लिए तैयार हो जाऊं। मैंने जो वयान दिया है, वह इसलिए नहीं है कि जो इण्ड मुझे मिलनेवाला है, वह कम किया जाय; बल्कि इस बात को दिसलाने के लिए कि मैने सरकारी आज्ञा की अवज्ञा इस कारण से नही की है कि मुझे सरकार के प्रति विश्वास नहीं है, बल्कि इस कारण मे कि मैंने उससे भी उच्चतर आज्ञा - अपनी विवेकवृद्धि की आज्ञाकार पालन करना उचित समझा है।" अब मुकदमे की सुनवाई मुल्तवी रखने का तो कुछ कारण ही नही रह गया था; परन्तु मजिस्ट्रेट या सरकारी वकील इस परिणाम की आशा नही रखते थे । अतएव सज्रा के लिए अदालत ने फैनला मुल्तवी रक्ता। मैने वाइसराय को तार द्वारा सव हालात की सूचना दे दी थी, पटना भी तार दे दिया था। भारत भूषण पडित मालवीयजी वगैरा को भी तार द्वारा समाचार भेज दिया था । अव तजा सुनने के लिए बदालत का समय आने के पहले ही मुझे मजिस्ट्रेट का हम मिला कि हृषम लाट साहब के हुक्म से मुक़दमा उठा लिया गया है और कलेक्टर को चिट्ठी मिली कि आप जो कुछ जाँच करना चाहे, शौक़ ने करें और उसमें जो कुछ मदद सरकारी कर्मचारियों को ओर से लेना चाहे, ले । ऐसे तत्काल और शुभ परिणाम को आशा हममें से किसी ने नही को थी। मैं कलेक्टर मिशून्य हैकाक से मिला । वह भला आदमी मालून और इन्साफ करने के लिए तत्पर नजर आया। उन्होंने कहा कि आप जो कुछ काग्रज-पत्र या और कुछ देखना चाहे, देख सकते हैं। जब कभी मिलना चाहें, जरूर मिल सकते है । दूसरी तरफ तारे भारतवर्ष को सत्याग्रह का अथवा कानून के सविनयभग का पहला स्थानिक पदार्थ-पाठ मिला । अनुवारों में इन प्रकरण की खूब चर्चा चली और चम्पारन को तया मेरी जाँच को कति विज्ञापन मिल गया । मुझे अपनी जाँच के लिए जहाँ एक ओर सरकार के निष्पक्ष रहने की जरूरत थी, वहीं दूसरी ओर अखबारों में चर्चा होने की और उनके सम्वाददातालों की जरूरत नहीं थी। यही नहीं, बल्कि उनकी कडी टोका और जांच को बड़ी-बड़ी रिपोटों से हानि होने का भी भय था । इसदिए मैन मूल्य-मूल्य अजवारों के सम्पादकों से अनुरोध किया कि "आप अपने नम्बाद दाताओ को भेजने का खर्च न उठावे । जितनी चा प्रकाशित करने योग् होंगी, वह मैं आपको खुद ही भेजता रहूँगा और खबर नी देता रहेगा।"
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बिहार कांग्रेस के कई नेताओं ने आज पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। प्रदेश कांग्रेस समिति में संभावित बदलावों को लेकर अपनी राय दी। बिहार में कांग्रेस विधायकों की टूट को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं ने यह मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के आवास 12 तुगलक लेन पर पहुंचकर उनसे मुलाकात करने वाले नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद, वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, निखिल कुमार, अवधेश सिंह, अशोक राम, अनिल शर्मा और अजीत शर्मा शामिल थे।
पार्टी के एक नेता ने बताया, "इन नेताओं ने बिहार कांग्रेस में संभावित बदलावों को लेकर राहुल गांधी के समक्ष अपनी राय रखी है। " सूत्रों ने बताया कि बुधवार शाम बिहार प्रदेश कांग्रेस के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य भी राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे।
पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजद और वाम दलों के साथ गठबंधन में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस सिर्फ 19 सीटें ही जीत पाई थी। राजद और वाम दलों के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। इसके बाद से ही बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव को लेकर चर्चा है।
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बिहार कांग्रेस के कई नेताओं ने आज पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। प्रदेश कांग्रेस समिति में संभावित बदलावों को लेकर अपनी राय दी। बिहार में कांग्रेस विधायकों की टूट को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं ने यह मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के आवास बारह तुगलक लेन पर पहुंचकर उनसे मुलाकात करने वाले नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद, वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, निखिल कुमार, अवधेश सिंह, अशोक राम, अनिल शर्मा और अजीत शर्मा शामिल थे। पार्टी के एक नेता ने बताया, "इन नेताओं ने बिहार कांग्रेस में संभावित बदलावों को लेकर राहुल गांधी के समक्ष अपनी राय रखी है। " सूत्रों ने बताया कि बुधवार शाम बिहार प्रदेश कांग्रेस के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य भी राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजद और वाम दलों के साथ गठबंधन में सत्तर सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस सिर्फ उन्नीस सीटें ही जीत पाई थी। राजद और वाम दलों के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। इसके बाद से ही बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव को लेकर चर्चा है।
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यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने लखनऊ के पांच थानेदारों को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया है। सभी पर फरियादियों से कमीशन लेने का आरोप है।
कुछ लोगों ने ये आरोप लगाया था कि फरियादियों की शिकायत सुनने और केस दर्ज करने के लिए पुलिस रिश्वत ले रही है। इस शिकायत पर डीजीपी ने गोमतीनगर, पीजीआई, हसनगंज, आशियाना और आलमबाग के कोतवाल को लाइन हाजिर कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों ने कमीशन लेते हुए पुलिसकर्मियों का वीडियो भी बनाया है। इसी के बाद डीजीपी ने ये एक्शन लिया है। हालांकि, मामले की सच्चाई जांच के बात ही उजागर होगी।
पुलिस लाइन के अफसरों का कहना है कि इस मामले में अब जांच की जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने लखनऊ के पांच थानेदारों को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया है। सभी पर फरियादियों से कमीशन लेने का आरोप है। कुछ लोगों ने ये आरोप लगाया था कि फरियादियों की शिकायत सुनने और केस दर्ज करने के लिए पुलिस रिश्वत ले रही है। इस शिकायत पर डीजीपी ने गोमतीनगर, पीजीआई, हसनगंज, आशियाना और आलमबाग के कोतवाल को लाइन हाजिर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों ने कमीशन लेते हुए पुलिसकर्मियों का वीडियो भी बनाया है। इसी के बाद डीजीपी ने ये एक्शन लिया है। हालांकि, मामले की सच्चाई जांच के बात ही उजागर होगी। पुलिस लाइन के अफसरों का कहना है कि इस मामले में अब जांच की जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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न्यूज डेस्कः राजस्थान में नौकरी की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग बड़े पैमाने पर भर्ती करने जा रही हैं। जो लोग सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं वो आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाये रखें। क्यों की इस वेबसाइट पर बहुत जल्द विज्ञापन जारी किया जायेगा।
खबर के अनुसार राजस्थान सरकार ने आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग में 450 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों सहित कुल 1 हजार से अधिक पदों पर भर्ती के लिए भर्ती मंजूरी दी है। इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।
इन पदों पर भर्ती को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग को सूचना भेजी जा चुकी है। आपको बता दें की विभाग ने आयुर्वेद चिकित्साधिकारी के 450 एवं आयुर्वेद नर्स व कंपाउण्डर के 550 पदों की भर्ती की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक इन पदों पर उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार हीं होगी। इसको लेकर सुचना जारी किया जायेगा। आप अपनी योग्यता के मुताबिक आवेदन कर सकेंगे।
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न्यूज डेस्कः राजस्थान में नौकरी की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग बड़े पैमाने पर भर्ती करने जा रही हैं। जो लोग सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं वो आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाये रखें। क्यों की इस वेबसाइट पर बहुत जल्द विज्ञापन जारी किया जायेगा। खबर के अनुसार राजस्थान सरकार ने आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग में चार सौ पचास आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों सहित कुल एक हजार से अधिक पदों पर भर्ती के लिए भर्ती मंजूरी दी है। इच्छुक उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं। इन पदों पर भर्ती को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग को सूचना भेजी जा चुकी है। आपको बता दें की विभाग ने आयुर्वेद चिकित्साधिकारी के चार सौ पचास एवं आयुर्वेद नर्स व कंपाउण्डर के पाँच सौ पचास पदों की भर्ती की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक इन पदों पर उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार हीं होगी। इसको लेकर सुचना जारी किया जायेगा। आप अपनी योग्यता के मुताबिक आवेदन कर सकेंगे।
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- वहीं, अगर बात पहली किस्त के पैसों की करें, तो सरकार द्वारा ई-श्रम कार्डधारकों के बैंक खाते में एक-एक हजार रुपये की पहली किस्त भेजी गई थी। इस किस्त का लाभ उन्हीं कार्डधारकों को मिला है, जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर 31 दिसंबर से पहले अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था।
किन लोगों को मिलेंगे अगली किस्त के पैसे?
- उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही एलान कर चुकी है कि ई-श्रम कार्ड योजना के अंगर्गत वो श्रमिकों के बैंक खाते में हर महीने 500 रुपये भेजेगी। लेकिन योजना के मुताबिक, इसका लाभ उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा, जिन्होंने अब तक श्रम विभाग की किसी भी योजना का लाभ नहीं लिया होगा।
- अगर आपने अब तक अपना ई-श्रम कार्ड नहीं बनवाया है, तो आप अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सीएससी या डाकघर में जाकर इस कार्ड के लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके अलावा आप खुद ई-श्रम विभाग के आधिकारिक पोर्टल eshram. gov. in पर जाकर भी खुद का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
- अगर आपको अब तक ये नहीं पता कि आपके बैंक खाते में ई-श्रम कार्ड योजना के अंतर्गत मिली पहली किस्त पहुंची है या नहीं। तो आप अपने नजदीकी एटीएम जाकर इसे जान सकते हैं। आपको एटीएम मशीन से मिनी बैंक स्टेटमेंट निकालनी है, जिसमें आपको पता लग जाएगा कि खाते में पैसे आए हैं या नहीं।
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- वहीं, अगर बात पहली किस्त के पैसों की करें, तो सरकार द्वारा ई-श्रम कार्डधारकों के बैंक खाते में एक-एक हजार रुपये की पहली किस्त भेजी गई थी। इस किस्त का लाभ उन्हीं कार्डधारकों को मिला है, जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर इकतीस दिसंबर से पहले अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था। किन लोगों को मिलेंगे अगली किस्त के पैसे? - उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही एलान कर चुकी है कि ई-श्रम कार्ड योजना के अंगर्गत वो श्रमिकों के बैंक खाते में हर महीने पाँच सौ रुपयापये भेजेगी। लेकिन योजना के मुताबिक, इसका लाभ उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा, जिन्होंने अब तक श्रम विभाग की किसी भी योजना का लाभ नहीं लिया होगा। - अगर आपने अब तक अपना ई-श्रम कार्ड नहीं बनवाया है, तो आप अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सीएससी या डाकघर में जाकर इस कार्ड के लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके अलावा आप खुद ई-श्रम विभाग के आधिकारिक पोर्टल eshram. gov. in पर जाकर भी खुद का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। - अगर आपको अब तक ये नहीं पता कि आपके बैंक खाते में ई-श्रम कार्ड योजना के अंतर्गत मिली पहली किस्त पहुंची है या नहीं। तो आप अपने नजदीकी एटीएम जाकर इसे जान सकते हैं। आपको एटीएम मशीन से मिनी बैंक स्टेटमेंट निकालनी है, जिसमें आपको पता लग जाएगा कि खाते में पैसे आए हैं या नहीं।
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-आम जनता की प्रवृत्ति भेड़ों के समान होती है।
- एक दूसरे की देखा-देख काम करना, मनुष्य का स्वभाव है।
गड़ फूटौ अर वेदन मिटी ।
गड़ फूटा और वेदना मिटी ।
गड़ = नितंबों पर पका फोड़ा।
- कलह व झगड़े का मूल कारण मिटा और झंझट खत्म हुआ। - दुख देने वाली बुनियाद दूर हुई और जी को शांति मिली।
गडूरड़ा तौ मैलौ इज खासी । ग्राम- शूकर तो मैला ही खाते हैं ।
गडूरड़ौ = सूअर से मिलता-जुलता एक जानवर जो बस्ती में गंदे स्थानों पर रहता है और मनुष्य के मल का भक्षण करता है। सूअर की भाँति इसके मुँह से बाहर निकले हुए दाँत नहीं होते । हरिजन इसे पालते हैं और इसका माँस भी खाते हैं ।
- हीन स्वभाव वाला व्यक्ति किसी भी सूरत में अपनी हीनता नहीं छोड़ पाता । - गंदे आदमी के आचरण से गंदगी कभी नहीं मिटती ।
पाठा : गडूरड़ा तौ मैलौ इज फिरोळै। ग्राम-शूकर तो मैला ही छितराते हैं।
गडू जोई ने गुणते घाल्यू तो काम आघूं । - भी. १८३ बुड्ढा देखकर बोरे में डाला तो काम आ गया ।
संदर्भ-कथाः एक राजा बड़ा सनकी था। उसकी हर सनक से राज्य के खजाने की काफी क्षति होती थी । एक बार उसने राज के पंडितों से सूर्य ग्रहण के बारे में सुना तो पूछा कि सूर्य ग्रहण क्यों होता है ? पंडितों ने कहा - राहु नामक ग्रह सूरज को ग्रस लेता है, तब सूर्य ग्रहण होता है ? क्यों ग्रस लेता है, कैसे ग्रस लेता है ? ग्रसने के बाद छूटता कैसे है ? राजा के सवालों का माकूल जवाब नहीं मिला तो राजा की सनक दिमाग में खदबदाने लगी। आदेश दिया कि इसी सूर्य ग्रहण से एक महीने पूर्व सूरज तक पहुँचकर ग्रहण का सही पता करना है। सो हृष्ट-पुष्ट हजार घोड़े और हजार ही हृष्ट-पुष्ट नौजवान सूर्य की खोज में निकलेंगे। एक भी घोड़ा न पाँच बरस से कम हो न बड़ा । और न एक भी सवार पच्चीस बरस से छोटा हो न बड़ा । यदि किसी ने भूल-चूक से भी किसी बूढ़े व्यक्ति को साथ ले लिया तो उसकी खैर नहीं है। पर एक
राजस्थानी हिंदी कहावत-कोश ८०९
सिपाही के घर में बूढ़े बाप के अलावा दूसरा कोई व्यक्ति नहीं था । बाप भी मरियल और बुद्धिमान ! उसने तो किसी से भी सलाह नहीं ली। और भातड़े में डालकर पीठ पर बाँध लिया। भातड़े में दस-बीस छेद कर दिये ताकि पिता सांस ले सके। बस, राजा की सनक के आगे, किसका विवेक काम देता। सो पंद्रह दिन पहले वह हजार सिपाही लेकर सूर्य ग्रहण का पता करने गाजे-बाजों के साथ रवाना हो गया।
संयोग की लीला ऐसी हुई एक भीषण अँधेरे जंगल के बीच वे बुरी तरह फँस गए। तीन दिन चक्कर मारते रहे पर बाहर निकलने की बजाय उलटे अँधेरे में धँसते गए। न पानी न खाना। मौत अँधेरे का रूप धरकर आई, इस में कोई संदेह नहीं। किसी भी सिपाही का दिमाग काम नहीं दिया। राजा भी पूर्णतया हताश हो गया। ऐसी मौत मरेगा, इसकी कल्पना तक नहीं थी । साँस उखड़ने लगी । तब उसने झीने स्वर में कहा - सौ ही गुनाह माफ है। यदि कोई मेरी आज्ञा के खिलाफ किसी बूढ़े व्यक्ति को साथ लाया हो तो उस से पूछो - वरना सभी बेमौत मरेंगे। तब एक सिपाही ने भातड़े से पिता को बाहर निकाला। उसने समाधान भातड़े से बाहर निकलने के पहिले सोच लिया था। उसके कहते ही एक ताजी ब्याई घोड़ी लगाम से मुक्त होते ही बछेरे से मिलने की खातिर राज दरबार की दिशा में तेजी से दौड़ी। तब उसके पीछे-पीछे हजार सवार भी दौड़ पड़े। राजा का घोड़ा सबसे आगे था । घोड़ी का पीछा करते-करते सभी सवार राजा के साथ राज दरबार में पहुँचे। आराम से पानी पिया । सबकी जान बची। पिता की उम्र सौ वर्ष की थी, सो उसे सौ मोहरें पुरस्कार में मिलीं । तब से उस राजा ने पुख्ता तय कर लिया कि राज्य के खास दीवान की उम्र सौ वर्ष से कम नहीं होगी । वृद्ध दीवान को हरदम साथ रखता और उसका पूरा आदर करता। दुबारा प्राण तो उसी ने बख्शे हैं। हजार सिपाही तो और रख लिए जाते, पर इतना अनुभव और ऐसी सूझ-बूझ कहाँ से आती !
- वृद्धावस्था के अनुभव की पूँजी किसी राज्य के खजाने व राजा से बड़ी है ।
गड्ड ते मरे खोजे, मोट क्यार मरे लाजे । - भी. १८१ बुड्ढे अपनी आदत से मरते हैं लेकिन बड़े अपनी लाज के मारे । -आदत के वशीभूत ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिस से किसी को दुख हो । - वृद्ध लोग परंपरागत रीति की राह चलते हैं और बड़े लोग अपनी प्रतिष्ठा बनाये रखने की हर चंद चेष्टा करते हैं।
राजस्थानी हिंदी कहावत कोश ८१०
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-आम जनता की प्रवृत्ति भेड़ों के समान होती है। - एक दूसरे की देखा-देख काम करना, मनुष्य का स्वभाव है। गड़ फूटौ अर वेदन मिटी । गड़ फूटा और वेदना मिटी । गड़ = नितंबों पर पका फोड़ा। - कलह व झगड़े का मूल कारण मिटा और झंझट खत्म हुआ। - दुख देने वाली बुनियाद दूर हुई और जी को शांति मिली। गडूरड़ा तौ मैलौ इज खासी । ग्राम- शूकर तो मैला ही खाते हैं । गडूरड़ौ = सूअर से मिलता-जुलता एक जानवर जो बस्ती में गंदे स्थानों पर रहता है और मनुष्य के मल का भक्षण करता है। सूअर की भाँति इसके मुँह से बाहर निकले हुए दाँत नहीं होते । हरिजन इसे पालते हैं और इसका माँस भी खाते हैं । - हीन स्वभाव वाला व्यक्ति किसी भी सूरत में अपनी हीनता नहीं छोड़ पाता । - गंदे आदमी के आचरण से गंदगी कभी नहीं मिटती । पाठा : गडूरड़ा तौ मैलौ इज फिरोळै। ग्राम-शूकर तो मैला ही छितराते हैं। गडू जोई ने गुणते घाल्यू तो काम आघूं । - भी. एक सौ तिरासी बुड्ढा देखकर बोरे में डाला तो काम आ गया । संदर्भ-कथाः एक राजा बड़ा सनकी था। उसकी हर सनक से राज्य के खजाने की काफी क्षति होती थी । एक बार उसने राज के पंडितों से सूर्य ग्रहण के बारे में सुना तो पूछा कि सूर्य ग्रहण क्यों होता है ? पंडितों ने कहा - राहु नामक ग्रह सूरज को ग्रस लेता है, तब सूर्य ग्रहण होता है ? क्यों ग्रस लेता है, कैसे ग्रस लेता है ? ग्रसने के बाद छूटता कैसे है ? राजा के सवालों का माकूल जवाब नहीं मिला तो राजा की सनक दिमाग में खदबदाने लगी। आदेश दिया कि इसी सूर्य ग्रहण से एक महीने पूर्व सूरज तक पहुँचकर ग्रहण का सही पता करना है। सो हृष्ट-पुष्ट हजार घोड़े और हजार ही हृष्ट-पुष्ट नौजवान सूर्य की खोज में निकलेंगे। एक भी घोड़ा न पाँच बरस से कम हो न बड़ा । और न एक भी सवार पच्चीस बरस से छोटा हो न बड़ा । यदि किसी ने भूल-चूक से भी किसी बूढ़े व्यक्ति को साथ ले लिया तो उसकी खैर नहीं है। पर एक राजस्थानी हिंदी कहावत-कोश आठ सौ नौ सिपाही के घर में बूढ़े बाप के अलावा दूसरा कोई व्यक्ति नहीं था । बाप भी मरियल और बुद्धिमान ! उसने तो किसी से भी सलाह नहीं ली। और भातड़े में डालकर पीठ पर बाँध लिया। भातड़े में दस-बीस छेद कर दिये ताकि पिता सांस ले सके। बस, राजा की सनक के आगे, किसका विवेक काम देता। सो पंद्रह दिन पहले वह हजार सिपाही लेकर सूर्य ग्रहण का पता करने गाजे-बाजों के साथ रवाना हो गया। संयोग की लीला ऐसी हुई एक भीषण अँधेरे जंगल के बीच वे बुरी तरह फँस गए। तीन दिन चक्कर मारते रहे पर बाहर निकलने की बजाय उलटे अँधेरे में धँसते गए। न पानी न खाना। मौत अँधेरे का रूप धरकर आई, इस में कोई संदेह नहीं। किसी भी सिपाही का दिमाग काम नहीं दिया। राजा भी पूर्णतया हताश हो गया। ऐसी मौत मरेगा, इसकी कल्पना तक नहीं थी । साँस उखड़ने लगी । तब उसने झीने स्वर में कहा - सौ ही गुनाह माफ है। यदि कोई मेरी आज्ञा के खिलाफ किसी बूढ़े व्यक्ति को साथ लाया हो तो उस से पूछो - वरना सभी बेमौत मरेंगे। तब एक सिपाही ने भातड़े से पिता को बाहर निकाला। उसने समाधान भातड़े से बाहर निकलने के पहिले सोच लिया था। उसके कहते ही एक ताजी ब्याई घोड़ी लगाम से मुक्त होते ही बछेरे से मिलने की खातिर राज दरबार की दिशा में तेजी से दौड़ी। तब उसके पीछे-पीछे हजार सवार भी दौड़ पड़े। राजा का घोड़ा सबसे आगे था । घोड़ी का पीछा करते-करते सभी सवार राजा के साथ राज दरबार में पहुँचे। आराम से पानी पिया । सबकी जान बची। पिता की उम्र सौ वर्ष की थी, सो उसे सौ मोहरें पुरस्कार में मिलीं । तब से उस राजा ने पुख्ता तय कर लिया कि राज्य के खास दीवान की उम्र सौ वर्ष से कम नहीं होगी । वृद्ध दीवान को हरदम साथ रखता और उसका पूरा आदर करता। दुबारा प्राण तो उसी ने बख्शे हैं। हजार सिपाही तो और रख लिए जाते, पर इतना अनुभव और ऐसी सूझ-बूझ कहाँ से आती ! - वृद्धावस्था के अनुभव की पूँजी किसी राज्य के खजाने व राजा से बड़ी है । गड्ड ते मरे खोजे, मोट क्यार मरे लाजे । - भी. एक सौ इक्यासी बुड्ढे अपनी आदत से मरते हैं लेकिन बड़े अपनी लाज के मारे । -आदत के वशीभूत ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिस से किसी को दुख हो । - वृद्ध लोग परंपरागत रीति की राह चलते हैं और बड़े लोग अपनी प्रतिष्ठा बनाये रखने की हर चंद चेष्टा करते हैं। राजस्थानी हिंदी कहावत कोश आठ सौ दस
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अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन व शिलान्यास कर दिया है। यह ऐतिहासिक पल हैं। जिनका सदियों से इंतजार किया जा रहा था। आयोजन को लेकर पूरा देश राममय है। (पूजन में मध्य में रखी कूर्म शिला में विराजमान होंगे रामलला। )
भूमिपूजन व शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे।
ब्राह्मणों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी ने विधि-विधान से पूजन किया और मंदिर की नींव के लिए चांदी की नौ ईंटें रखकर शिलान्यास किया। इस मौके पर देश भर से साधु-संत आए हुए हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए मेहमानों की संख्या सीमित रखी गई है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत आयोजन में शामिल होने के लिए मंगलवार को ही पहुंच गए थे। उनके साथ साधु-संत भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
भाजपा नेता उमा भारती भी आयोजन में शामिल हुईं। पहले कहा जा रहा था कि वह शायद कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगी क्योंकि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है लेकिन वह भी पूजन कार्यक्रम में शामिल हुईं।
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अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन व शिलान्यास कर दिया है। यह ऐतिहासिक पल हैं। जिनका सदियों से इंतजार किया जा रहा था। आयोजन को लेकर पूरा देश राममय है। भूमिपूजन व शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। ब्राह्मणों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी ने विधि-विधान से पूजन किया और मंदिर की नींव के लिए चांदी की नौ ईंटें रखकर शिलान्यास किया। इस मौके पर देश भर से साधु-संत आए हुए हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए मेहमानों की संख्या सीमित रखी गई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत आयोजन में शामिल होने के लिए मंगलवार को ही पहुंच गए थे। उनके साथ साधु-संत भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। भाजपा नेता उमा भारती भी आयोजन में शामिल हुईं। पहले कहा जा रहा था कि वह शायद कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगी क्योंकि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है लेकिन वह भी पूजन कार्यक्रम में शामिल हुईं।
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Haridwar Uttarakhand Chunav Result 2022 News in Hindi बड़ा नेता बनने की कोशिश स्वामी यतिश्वरानंद को ले डूबी। स्वामी यतिश्वरानंद को वर्ष 2017 में 44 हजार 319 मत मिले थे जबकि 2022 में वह 40 हजार पर ही सिमट कर रह गए।
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Uttarakhand Election Results 2022: बड़ा नेता बनने की कोशिश स्वामी यतिश्वरानंद को ले डूबी, वर्ष 2017 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता हरीश रावत को 12 हजार से अधिक मतों से हराकर जो साख बनायी थी। वह उन्होंने वर्ष 2022 में हरीश रावत की बेटी कांग्रेस नेत्री अनुपमा रावत से साढ़े छह हजार से अधिक मतों से हार के साथ गंवा दी।
स्वामी यतिश्वरानंद को वर्ष 2017 में 44 हजार 319 मत मिले थे, जबकि 2022 में वह 40 हजार पर ही सिमट कर रह गए। हालांकि स्वामी यतिश्वरानंद ने 2017 में विधायक बनने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए काफी कुछ किया था। पर, जबसे वह भाजपा सरकार में मंत्री बनें, पहले तीरथ सिंह रावत की सरकार में राज्यमंत्री और बाद में पुष्कर सिंह धामी सरकार में कबीना मंत्री, उनके आचार, विचार और व्यवहार में परिर्वतन आने का आरोप लगना शुरू हो गया।
क्षेत्रीय जनता के साथ उनकी दूरी बनने लगी थी और वह और उनके लोग आम जनता के साथ बड़े नेताओं सा व्यवहार करने लगे थे। उनसे मिलने आने वालों को उनसे मिलने में दिक्कत होने लगी और उनका क्षेत्र में रहना कम हो गया था। यहीं से उनके खिलाफ माहौल बनने लगा था, हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपनी नजदीकी दिखा उन्होंने इसकी भरपाई करने की कोशिश की पर, इसमें वह कामयाब नहीं हो सके।
2017 में कांग्रेस उम्मीदवार हरीश रावत हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक का खेल रचा चुनावी गणित को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर जो गलती की थी। उसी गलती को स्वामी यतिश्वरानंद ने इस बार दोहरायी। उन्होंने बहुसंख्यक हिंदू वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश की पर, कामयाब नहीं हो सके। इसके विपरीत कांग्रेस ने अपनी गलती में सुधार करते हुए मतदाताओं को हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक बदलने की अपनी गलती को दोहराया नहीं। बल्कि कांग्रेस और पार्टी उम्मीदवार अनुपमा रावत ने पहले ही दिन से सबको साथ लेकर चलने की नीति अपनायी और अंत तक उसे कायम रखा। स्वामी यतिश्वरानंद कांग्रेस के इस चक्रव्यूह में उलझ कर रह गए और जीत उनके हाथ से फिसल गयी।
जिले में हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर, ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरानकलियर, रुड़की, खानपुर, मंगलौर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण सीट शामिल हैं।
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Haridwar Uttarakhand Chunav Result दो हज़ार बाईस News in Hindi बड़ा नेता बनने की कोशिश स्वामी यतिश्वरानंद को ले डूबी। स्वामी यतिश्वरानंद को वर्ष दो हज़ार सत्रह में चौंतालीस हजार तीन सौ उन्नीस मत मिले थे जबकि दो हज़ार बाईस में वह चालीस हजार पर ही सिमट कर रह गए। जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Uttarakhand Election Results दो हज़ार बाईस: बड़ा नेता बनने की कोशिश स्वामी यतिश्वरानंद को ले डूबी, वर्ष दो हज़ार सत्रह में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता हरीश रावत को बारह हजार से अधिक मतों से हराकर जो साख बनायी थी। वह उन्होंने वर्ष दो हज़ार बाईस में हरीश रावत की बेटी कांग्रेस नेत्री अनुपमा रावत से साढ़े छह हजार से अधिक मतों से हार के साथ गंवा दी। स्वामी यतिश्वरानंद को वर्ष दो हज़ार सत्रह में चौंतालीस हजार तीन सौ उन्नीस मत मिले थे, जबकि दो हज़ार बाईस में वह चालीस हजार पर ही सिमट कर रह गए। हालांकि स्वामी यतिश्वरानंद ने दो हज़ार सत्रह में विधायक बनने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए काफी कुछ किया था। पर, जबसे वह भाजपा सरकार में मंत्री बनें, पहले तीरथ सिंह रावत की सरकार में राज्यमंत्री और बाद में पुष्कर सिंह धामी सरकार में कबीना मंत्री, उनके आचार, विचार और व्यवहार में परिर्वतन आने का आरोप लगना शुरू हो गया। क्षेत्रीय जनता के साथ उनकी दूरी बनने लगी थी और वह और उनके लोग आम जनता के साथ बड़े नेताओं सा व्यवहार करने लगे थे। उनसे मिलने आने वालों को उनसे मिलने में दिक्कत होने लगी और उनका क्षेत्र में रहना कम हो गया था। यहीं से उनके खिलाफ माहौल बनने लगा था, हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपनी नजदीकी दिखा उन्होंने इसकी भरपाई करने की कोशिश की पर, इसमें वह कामयाब नहीं हो सके। दो हज़ार सत्रह में कांग्रेस उम्मीदवार हरीश रावत हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक का खेल रचा चुनावी गणित को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर जो गलती की थी। उसी गलती को स्वामी यतिश्वरानंद ने इस बार दोहरायी। उन्होंने बहुसंख्यक हिंदू वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश की पर, कामयाब नहीं हो सके। इसके विपरीत कांग्रेस ने अपनी गलती में सुधार करते हुए मतदाताओं को हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक बदलने की अपनी गलती को दोहराया नहीं। बल्कि कांग्रेस और पार्टी उम्मीदवार अनुपमा रावत ने पहले ही दिन से सबको साथ लेकर चलने की नीति अपनायी और अंत तक उसे कायम रखा। स्वामी यतिश्वरानंद कांग्रेस के इस चक्रव्यूह में उलझ कर रह गए और जीत उनके हाथ से फिसल गयी। जिले में हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर, ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरानकलियर, रुड़की, खानपुर, मंगलौर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण सीट शामिल हैं।
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India vs Pakistan: भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) का मानना है कि एशिया कप के लिए प्लेइंग इलेवन में ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक दोनों को साथ रखना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि टीम प्रबंधन टॉप आर्डर में बदलाव करना नहीं चाहेगा। भारत के टॉप आर्डर में केएल राहुल, रोहित शर्मा, विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव शामिल हैं। पंत और कार्तिक टीम में विशेषज्ञ भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं।
भारत का रविवार को एशिया कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से मुकाबला होगा। भारत की नजरें पाकिस्तान से पिछले वर्ष इसी स्थल पर टी 20 विश्व कप के दौरान मिली 10 विकेट की हार का बदला चुकाने पर टिकी होंगी।
पंत बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और उनका इस्तेमाल आक्रामक भूमिका निभाने के लिए किया जाता है जबकि कार्तिक ज्यादातर फिनिशर के तौर पर जाने जाते हैं।
राहुल, रोहित, विराट, सूर्यकुमार, हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा का स्थान स्वतः सुरक्षित है। पुजारा का मानना है कि पंत और कार्तिक में से एक के लिए एशिया कप टीम में जगह है और वह टीम में पंत के साथ जाना चाहेंगे क्योंकि वह बल्ले से लेफ्ट-राइट संयोजन का विकल्प देते हैं।
पुजारा ने 'क्रिकइंफो टी 20: टाइम आउट' में कहा, "टीम प्रबंधन के लिए पंत और कार्तिक में से एक को चुनना एक बड़ा सिरदर्द होगा क्योंकि दोनों इस फॉर्मेट में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अब समस्या यह है कि आप किसे चाहते हैं। वह बल्लेबाज जो नंबर पांच पर बल्लेबाजी कर सके या फिर फिनिशर जो छह या सात नंबर पर खेल सके। यदि आप पांच नंबर पर किसी को चाहते हैं तो पंत बेहतर विकल्प होंगे। यदि आप बल्लेबाजी लाइन अप के साथ ऐसा फिनिशर चाहते हैं जो 10 या 20 गेंद खेले और आपको 40-50 रन दे सके तो मुझे लगता है कि दिनेश कार्तिक बेहतर विकल्प होंगे।"
पुजारा ने कहा, "जहां तक मैं टीम प्रबंधन और टीम के आसपास की चीजों को जानता हूं मुझे लगता है कि वे पंत के साथ जाना चाहेंगे क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और टीम को लेफ्ट-राइट के रूप में संतुलन देते हैं।"
कुछ क्रिकेट पंडित टॉप आर्डर में बदलाव का संकेत देते हैं जहां सूर्यकुमार को हटाकर पंत और कार्तिक दोनों को समायोजित किया जाए, पुजारा का महसूस करना है कि सूर्य को ड्राप करना बहुत नुश्किल है क्योंकि वह टी 20 में बेहद शानदार फॉर्म में हैं।
पुजारा ने साथ ही कहा, "सूर्य हमारे टॉप टी 20 खिलाड़ियों में से एक हैं। यदि आपको दोनों को खेलाना है तो टॉप आर्डर के बल्लेबाजों में से एक को हटाना होगा जो असंभव है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि दोनों प्लेइंग इलेवन में जगह बना सकते हैं।"
यदि कार्तिक टीम में नहीं खेलते हैं तो फिनिशर की भूमिका कौन निभाएगा, पुजारा ने कहा कि हार्दिक पांड्या इस काम को भली भांति निभा सकते हैं जैसा उन्होंने आईपीएल के समय गुजरात टाइटंस के लिए किया था।
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India vs Pakistan: भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि एशिया कप के लिए प्लेइंग इलेवन में ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक दोनों को साथ रखना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि टीम प्रबंधन टॉप आर्डर में बदलाव करना नहीं चाहेगा। भारत के टॉप आर्डर में केएल राहुल, रोहित शर्मा, विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव शामिल हैं। पंत और कार्तिक टीम में विशेषज्ञ भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। भारत का रविवार को एशिया कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से मुकाबला होगा। भारत की नजरें पाकिस्तान से पिछले वर्ष इसी स्थल पर टी बीस विश्व कप के दौरान मिली दस विकेट की हार का बदला चुकाने पर टिकी होंगी। पंत बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और उनका इस्तेमाल आक्रामक भूमिका निभाने के लिए किया जाता है जबकि कार्तिक ज्यादातर फिनिशर के तौर पर जाने जाते हैं। राहुल, रोहित, विराट, सूर्यकुमार, हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा का स्थान स्वतः सुरक्षित है। पुजारा का मानना है कि पंत और कार्तिक में से एक के लिए एशिया कप टीम में जगह है और वह टीम में पंत के साथ जाना चाहेंगे क्योंकि वह बल्ले से लेफ्ट-राइट संयोजन का विकल्प देते हैं। पुजारा ने 'क्रिकइंफो टी बीस: टाइम आउट' में कहा, "टीम प्रबंधन के लिए पंत और कार्तिक में से एक को चुनना एक बड़ा सिरदर्द होगा क्योंकि दोनों इस फॉर्मेट में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अब समस्या यह है कि आप किसे चाहते हैं। वह बल्लेबाज जो नंबर पांच पर बल्लेबाजी कर सके या फिर फिनिशर जो छह या सात नंबर पर खेल सके। यदि आप पांच नंबर पर किसी को चाहते हैं तो पंत बेहतर विकल्प होंगे। यदि आप बल्लेबाजी लाइन अप के साथ ऐसा फिनिशर चाहते हैं जो दस या बीस गेंद खेले और आपको चालीस-पचास रन दे सके तो मुझे लगता है कि दिनेश कार्तिक बेहतर विकल्प होंगे।" पुजारा ने कहा, "जहां तक मैं टीम प्रबंधन और टीम के आसपास की चीजों को जानता हूं मुझे लगता है कि वे पंत के साथ जाना चाहेंगे क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और टीम को लेफ्ट-राइट के रूप में संतुलन देते हैं।" कुछ क्रिकेट पंडित टॉप आर्डर में बदलाव का संकेत देते हैं जहां सूर्यकुमार को हटाकर पंत और कार्तिक दोनों को समायोजित किया जाए, पुजारा का महसूस करना है कि सूर्य को ड्राप करना बहुत नुश्किल है क्योंकि वह टी बीस में बेहद शानदार फॉर्म में हैं। पुजारा ने साथ ही कहा, "सूर्य हमारे टॉप टी बीस खिलाड़ियों में से एक हैं। यदि आपको दोनों को खेलाना है तो टॉप आर्डर के बल्लेबाजों में से एक को हटाना होगा जो असंभव है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि दोनों प्लेइंग इलेवन में जगह बना सकते हैं।" यदि कार्तिक टीम में नहीं खेलते हैं तो फिनिशर की भूमिका कौन निभाएगा, पुजारा ने कहा कि हार्दिक पांड्या इस काम को भली भांति निभा सकते हैं जैसा उन्होंने आईपीएल के समय गुजरात टाइटंस के लिए किया था।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में अबतक भारतीय पूंजी बाजारों में 7,245 करोड़ रुपये डाले हैं। वृहद आर्थिक माहौल बेहतर होने की वजह से धारणा सकारात्मक हुई है जिसकी वजह से एफपीआई भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि एफपीआई के शुद्ध प्रवाह के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशक धीरे-धीरे अपने सतर्क रुख को छोड़ रहे हैं और भारतीय बाजारों के प्रति उनका भरोसा बढ़ रहा है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने दो से 20 अगस्त के दौरान शेयरों में 5,001 करोड़ रुपये डाले। इस दौरान ऋण या बांड बाजार में उनका निवेश 2,244 करोड़ रुपये रहा। इस तरह उनका शुद्ध निवेश 7,245 करोड़ रुपये रहा। कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष, इक्विटी तकनीकी शोध श्रीकान्त चौहान ने अन्य उभरते बाजारों के बारे में कहा कि दक्षिण कोरिया, ताइवान और थाइलैंड में एफपीआई का प्रवाह नकारात्मक रहा है। उन्होंने इन बाजारों से क्रमशः 526. 9 करोड़ डॉलर, 85. 5 करोड़ डॉलर और 34. 1 करोड़ डॉलर की निकासी की है। वहीं इंडोनेशिया में एफपीआई ने 15. 6 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अगस्त में अबतक भारतीय पूंजी बाजारों में सात,दो सौ पैंतालीस करोड़ रुपये डाले हैं। वृहद आर्थिक माहौल बेहतर होने की वजह से धारणा सकारात्मक हुई है जिसकी वजह से एफपीआई भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि एफपीआई के शुद्ध प्रवाह के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशक धीरे-धीरे अपने सतर्क रुख को छोड़ रहे हैं और भारतीय बाजारों के प्रति उनका भरोसा बढ़ रहा है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने दो से बीस अगस्त के दौरान शेयरों में पाँच,एक करोड़ रुपये डाले। इस दौरान ऋण या बांड बाजार में उनका निवेश दो,दो सौ चौंतालीस करोड़ रुपये रहा। इस तरह उनका शुद्ध निवेश सात,दो सौ पैंतालीस करोड़ रुपये रहा। कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष, इक्विटी तकनीकी शोध श्रीकान्त चौहान ने अन्य उभरते बाजारों के बारे में कहा कि दक्षिण कोरिया, ताइवान और थाइलैंड में एफपीआई का प्रवाह नकारात्मक रहा है। उन्होंने इन बाजारों से क्रमशः पाँच सौ छब्बीस. नौ करोड़ डॉलर, पचासी. पाँच करोड़ डॉलर और चौंतीस. एक करोड़ डॉलर की निकासी की है। वहीं इंडोनेशिया में एफपीआई ने पंद्रह. छः करोड़ डॉलर का निवेश किया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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बॉलीवुड की दबंग एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा एक बार फिर अपने स्टाइल स्टेटमेंट को लेकर लाइमलाइट में हैं।
उन्होंने हाल ही में अपने ग्लैमरस फोटोशूट की दिलकश तस्वीरें इंस्टा पर पोस्ट की है।
हालिया पोस्ट में सोनाक्षी ग्रीन फ्लोरल प्रिंटेड ड्रेस में सिजलिंग लग रही हैं।
कर्ली हेयर उनके इस लुक में चार चांद लगा रहा है।
ब्लू हाई हील्स के साथ उन्होंने इस लुक को स्टाइलअप किया है।
सोनाक्षी ने फिल्म दबंग से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। यहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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बॉलीवुड की दबंग एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा एक बार फिर अपने स्टाइल स्टेटमेंट को लेकर लाइमलाइट में हैं। उन्होंने हाल ही में अपने ग्लैमरस फोटोशूट की दिलकश तस्वीरें इंस्टा पर पोस्ट की है। हालिया पोस्ट में सोनाक्षी ग्रीन फ्लोरल प्रिंटेड ड्रेस में सिजलिंग लग रही हैं। कर्ली हेयर उनके इस लुक में चार चांद लगा रहा है। ब्लू हाई हील्स के साथ उन्होंने इस लुक को स्टाइलअप किया है। सोनाक्षी ने फिल्म दबंग से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। यहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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रूखे और बेजान बालों के लिए परफेक्ट है मेयो स्पा। लेकिन अगर आपक स्किन ऑयली है तो इस बात पर दें विशेष ध्यान।
बदलते मौसम का सेहत के साथ-साथ त्वचा और बालों दोनों पर प्रभाव देखा जा सकता है। मौसम बदलते ही हमारी स्किन पर एलर्जी या रूखेपन जैसी परेशानियां दिखने लगती हैं। स्किन के अलावा बाल भी कमजोर पड़ने लगते हैं। मौसम में परिवर्तन के साथ बाल टूटने, झड़ने तो लगते ही हैं लेकिन सबसे अधिक दिक्कत जो देखी गई है वह है बालों के रूखेपन की। बालों से शाइन खत्म होने लगती है और वे बेजान लगने लगते हैं। ऐसा इस बदलते मौसम में अगर आपके साथ हो रहा है तो हम आपको तीन घरेलू उपचारों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें से एक का भी उपयोग आपको सॉफ्ट, घने और चमकदार बाल दिला सकता है। इन घरेलू उपायों को आप होममेड हेयर-स्पा भी कह सकते हैं जो आपको पार्लर में कराये जाने वाले हेयर-स्पा से काफी सस्ते लेकिन रिजल्ट में उससे भी अधिक और अच्छे परिणाम दे सकते है।
लगाने की विधिः कोकोनट यानी नारियल के तेल को गर्म करें। केवल उतना ही गर्म करने जितना आपको लगे कि आप बालों में लगा सकेंगे। इस तेल को बालों की जड़ों में, पूरे बालों में और बालों के अंत में अच्छे-से लगा लें। तेल लगाने के बाद कम से कम 10 मिनट तक मालिश करें। इसके बाद सिर पर प्लास्टिक कैप (जिसे नहाते समय लोग पहनते हैं) या फिर प्लास्टिक की थैली से बाल अच्छे-से कवर कर लें। इसके बाद गर्म पानी में तौलिया भिगोकर, उसे निचोड़कर सिर पर कम से कम 10 सद 15 मिनट रख लें। अंत में शैम्पू से बाल धो लें।
ऑयल स्पा के लाभः इस स्पा को करने से बालों का और स्कैल्प का भी रूख्पान खत्म होगा। बालों में तेल लगाने के बाद उसे गर्म तौलिये से गर्माहट देने से यह तेल बालों की जड़ों में जायेगा और उन्हें मजबूती देगा। इस स्पा से बाल सॉफ्ट होंगे, उन्हें नमी और मजबूती मिलेगी।
लगाने की विधिः एक बाउल में दोनों अंडों का पीला भाग, ऑलिव ऑयल और आवश्यक्ता अनुसार पानी डालकर मिला लें। इस मिश्रण को बालों में लगा लें और 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में शैम्पू से बाल धो लें।
एग स्पा के लाभः बालों को सॉफ्ट बनाने और उन्हें शाइन प्रदान करने के लिए यह स्पा फायदेमंद है।
लगाने की विधिः मेयोनेज़ को अपने बालों पर अच्छे-से लगाएं। इसके बाद सिर पर प्लास्टिक कैप (जिसे नहाते समय लोग पहनते हैं) या फिर प्लास्टिक की थैली से बाल अच्छे-से कवर कर लें। अब अंत में गर्म पानी में भीगे हुए तौलिये को निचोड़कर सिर पर रख लें। 10 से 15 मिनट बाद शैम्पू के प्रयोग से बाल अच्छे-से धो लें।
मेयो स्पा के लाभः रूखे और बेजान बालों के लिए परफेक्ट है मेयो स्पा। बस इतना ध्यान रहे कि अगर आपने स्कैल्प की स्किन ऑयली है तो बालों की जड़ों में मेयोनेज़ ना लगाएं। केवल बालों में ही लगाएं।
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रूखे और बेजान बालों के लिए परफेक्ट है मेयो स्पा। लेकिन अगर आपक स्किन ऑयली है तो इस बात पर दें विशेष ध्यान। बदलते मौसम का सेहत के साथ-साथ त्वचा और बालों दोनों पर प्रभाव देखा जा सकता है। मौसम बदलते ही हमारी स्किन पर एलर्जी या रूखेपन जैसी परेशानियां दिखने लगती हैं। स्किन के अलावा बाल भी कमजोर पड़ने लगते हैं। मौसम में परिवर्तन के साथ बाल टूटने, झड़ने तो लगते ही हैं लेकिन सबसे अधिक दिक्कत जो देखी गई है वह है बालों के रूखेपन की। बालों से शाइन खत्म होने लगती है और वे बेजान लगने लगते हैं। ऐसा इस बदलते मौसम में अगर आपके साथ हो रहा है तो हम आपको तीन घरेलू उपचारों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें से एक का भी उपयोग आपको सॉफ्ट, घने और चमकदार बाल दिला सकता है। इन घरेलू उपायों को आप होममेड हेयर-स्पा भी कह सकते हैं जो आपको पार्लर में कराये जाने वाले हेयर-स्पा से काफी सस्ते लेकिन रिजल्ट में उससे भी अधिक और अच्छे परिणाम दे सकते है। लगाने की विधिः कोकोनट यानी नारियल के तेल को गर्म करें। केवल उतना ही गर्म करने जितना आपको लगे कि आप बालों में लगा सकेंगे। इस तेल को बालों की जड़ों में, पूरे बालों में और बालों के अंत में अच्छे-से लगा लें। तेल लगाने के बाद कम से कम दस मिनट तक मालिश करें। इसके बाद सिर पर प्लास्टिक कैप या फिर प्लास्टिक की थैली से बाल अच्छे-से कवर कर लें। इसके बाद गर्म पानी में तौलिया भिगोकर, उसे निचोड़कर सिर पर कम से कम दस सद पंद्रह मिनट रख लें। अंत में शैम्पू से बाल धो लें। ऑयल स्पा के लाभः इस स्पा को करने से बालों का और स्कैल्प का भी रूख्पान खत्म होगा। बालों में तेल लगाने के बाद उसे गर्म तौलिये से गर्माहट देने से यह तेल बालों की जड़ों में जायेगा और उन्हें मजबूती देगा। इस स्पा से बाल सॉफ्ट होंगे, उन्हें नमी और मजबूती मिलेगी। लगाने की विधिः एक बाउल में दोनों अंडों का पीला भाग, ऑलिव ऑयल और आवश्यक्ता अनुसार पानी डालकर मिला लें। इस मिश्रण को बालों में लगा लें और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में शैम्पू से बाल धो लें। एग स्पा के लाभः बालों को सॉफ्ट बनाने और उन्हें शाइन प्रदान करने के लिए यह स्पा फायदेमंद है। लगाने की विधिः मेयोनेज़ को अपने बालों पर अच्छे-से लगाएं। इसके बाद सिर पर प्लास्टिक कैप या फिर प्लास्टिक की थैली से बाल अच्छे-से कवर कर लें। अब अंत में गर्म पानी में भीगे हुए तौलिये को निचोड़कर सिर पर रख लें। दस से पंद्रह मिनट बाद शैम्पू के प्रयोग से बाल अच्छे-से धो लें। मेयो स्पा के लाभः रूखे और बेजान बालों के लिए परफेक्ट है मेयो स्पा। बस इतना ध्यान रहे कि अगर आपने स्कैल्प की स्किन ऑयली है तो बालों की जड़ों में मेयोनेज़ ना लगाएं। केवल बालों में ही लगाएं।
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Bokaro : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोमवार को यहां नया मोड़ स्थित बिरसा चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका. इस दौरान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गैर भाजपा शासित राज्य में ईडी और सीबीआई का भय दिखाकर विकास कार्य को अवरुद्ध करने का प्रयास कर रही है. इस दौरान जेएमएम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मोदी और केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी की. नेताओं ने कहा कि बहुमत से जो गैर भाजपा शासित राज्य में सरकार बनी हुई है, वहां ईडी और सीबीआई का भय दिखाया जा रहा है.
केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है. साथ ही प्रदेशों में विकास को अवरुद्ध करने का भी काम कर रही है. नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार के 7 साल के शासन में विकास दिख नहीं रहा है. महंगाई चरम पर है, ऐसे में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए गैर भाजपा शासित राज्यों में इस तरह का काम कर स्थिर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है. जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा.
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Bokaro : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोमवार को यहां नया मोड़ स्थित बिरसा चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका. इस दौरान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गैर भाजपा शासित राज्य में ईडी और सीबीआई का भय दिखाकर विकास कार्य को अवरुद्ध करने का प्रयास कर रही है. इस दौरान जेएमएम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मोदी और केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी की. नेताओं ने कहा कि बहुमत से जो गैर भाजपा शासित राज्य में सरकार बनी हुई है, वहां ईडी और सीबीआई का भय दिखाया जा रहा है. केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है. साथ ही प्रदेशों में विकास को अवरुद्ध करने का भी काम कर रही है. नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार के सात साल के शासन में विकास दिख नहीं रहा है. महंगाई चरम पर है, ऐसे में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए गैर भाजपा शासित राज्यों में इस तरह का काम कर स्थिर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है. जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा.
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बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा के बाद रकुल प्रीत सिंह भी अलग अंदाज में टी-शर्ट पहनने को लेकर चर्चा में हैं। रकुल प्रीत सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर फैंस को इस ट्रिक के बारे में बताया।
बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh) भी इन दिनों लॉकडाउन के कारण घर पर ही अधिक से अधिक समय बिता रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए वह अक्सर अपने फैंस को कोरोना वायरस से बचने की टिप्स शेयर करती रहती हैं। इन दिनों उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह दीवार पर उल्टा लटककर टी-शर्ट पहन रही हैं।
रकुल प्रीत सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वह दीवार पर उल्टा लटककर यानी 'फॉरवर्ड फोल्ड अगेंस्ट अ वॉल' होकर कपड़े पहन रही हैं। वीडियो को शेयर कर रकुल ने कैप्शन में लिखाः "सामान्य स्टाइल में कपड़े पहन कर बोर रही थी। तो आपके लिए भी यह टास्क है इसे करें। " रकुल का यह अंदाज देखकर फैंस भी हैरान हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
रकुल प्रीत सिंह ने फैंस से इसे करने का चैलेंज दिया। इससे पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा ने अपनी बहन के चैलेंज को अपनाते हुए उल्टा खड़ा होकर टी-शर्ट पहना था। नेहा ने इसका वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया। वीडियो में नेहा दोनों हाथों के बल खड़े होकर दीवार का सहारा लेकर टी-शर्ट पहनती दिखाई पड़ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, 'टी शर्ट चैलेंज। ये आयशा शर्मा के लिए है। मैं बहुत बोर हो रही थी तो सोचा इसे ट्राई कर लूं। सेफ रहो। घर पर रहो'।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा के बाद रकुल प्रीत सिंह भी अलग अंदाज में टी-शर्ट पहनने को लेकर चर्चा में हैं। रकुल प्रीत सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर फैंस को इस ट्रिक के बारे में बताया। बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह भी इन दिनों लॉकडाउन के कारण घर पर ही अधिक से अधिक समय बिता रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए वह अक्सर अपने फैंस को कोरोना वायरस से बचने की टिप्स शेयर करती रहती हैं। इन दिनों उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह दीवार पर उल्टा लटककर टी-शर्ट पहन रही हैं। रकुल प्रीत सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वह दीवार पर उल्टा लटककर यानी 'फॉरवर्ड फोल्ड अगेंस्ट अ वॉल' होकर कपड़े पहन रही हैं। वीडियो को शेयर कर रकुल ने कैप्शन में लिखाः "सामान्य स्टाइल में कपड़े पहन कर बोर रही थी। तो आपके लिए भी यह टास्क है इसे करें। " रकुल का यह अंदाज देखकर फैंस भी हैरान हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रकुल प्रीत सिंह ने फैंस से इसे करने का चैलेंज दिया। इससे पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा ने अपनी बहन के चैलेंज को अपनाते हुए उल्टा खड़ा होकर टी-शर्ट पहना था। नेहा ने इसका वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया। वीडियो में नेहा दोनों हाथों के बल खड़े होकर दीवार का सहारा लेकर टी-शर्ट पहनती दिखाई पड़ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, 'टी शर्ट चैलेंज। ये आयशा शर्मा के लिए है। मैं बहुत बोर हो रही थी तो सोचा इसे ट्राई कर लूं। सेफ रहो। घर पर रहो'।
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Kailash Vijayvargiya: बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय 25 दिनों बाद अमेरिका से इंदौर लौटे। भारत आते ही वो विवादों में घिर गए। मीडिया से बात करते हुए, उन्होंने ऐसा बयान दे डाला, जिसके बाद हंगामा मच गया। उन्होंने बिहार की राजनीति में आए बदलाव पर तंज कसते हुए कहा कि मेरे एक अमेरिका में जानने वाले ने कहा कि नीतीश कुमार ऐसे पाला बदलते हैं जैसे विदेशी लड़कियां बॉयफ्रेंड बदलती हैं। उनके इस बयान के सामने आने के बाद हंगामा मच गया।
बिहार राजनीति पर कटाक्ष करते हुए लड़कियों के बॉयफ्रेंड बदलने वाले बयान से जब विजयवर्गीय घिरते हुए नजर आए तो उन्होंने इस पर अपनी सफाई पेश की। इंदौर में उन्होंने कहा कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ के देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरा बयान बहुत साफ है।
अमेरिका में मेरे एक मित्र ने ये बात कही थी कि जैसे अमेरिका में लड़कियां कभी भी अपना बॉयफ्रेंड बदल लेती है। उसी तरह बिहार राजनीति में कब क्या हो जाए नहीं पता। मैंने इस बात को सिर्फ कोट किया है। वहीं, कांग्रेस के लगाए आरोप पर उन्होंने कहा कि नारी हमारे लिए पूजनीय हैं। हम भारतीय नारी का बहुत सम्मान करते हैं।
एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान के बीजेपी संसदीय बोर्ड से निवृत्त होने के बाद मध्य प्रदेश में उनकी आगामी भूमिका के सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह पार्टी की सतत प्रक्रिया है। पार्टी अपने मुताबिक पदाधिकारियों का चयन करती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया को मौका मिला है वह अच्छे कर्मठ और जमीन से जुड़े हुए कार्यकर्ता है।
वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर किए गए सवाल पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि बीजेपी में शीर्ष नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं तो वही मध्य प्रदेश में बीजेपी का नेतृत्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 2023 का मध्य प्रदेश चुनाव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कांग्रेस के वापस सत्ता में आने के दावे को लेकर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कमलनाथ जी की उम्र 75 से ऊपर हो गई है उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव को लेकर विदेशों में भी धूम रही, वहां भारतीयों में काफी उत्साह था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को सभी स्वीकारते हैं। बीजेपी को उनकी बातों से इसलिए फर्क नहीं पड़ता।
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Kailash Vijayvargiya: बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पच्चीस दिनों बाद अमेरिका से इंदौर लौटे। भारत आते ही वो विवादों में घिर गए। मीडिया से बात करते हुए, उन्होंने ऐसा बयान दे डाला, जिसके बाद हंगामा मच गया। उन्होंने बिहार की राजनीति में आए बदलाव पर तंज कसते हुए कहा कि मेरे एक अमेरिका में जानने वाले ने कहा कि नीतीश कुमार ऐसे पाला बदलते हैं जैसे विदेशी लड़कियां बॉयफ्रेंड बदलती हैं। उनके इस बयान के सामने आने के बाद हंगामा मच गया। बिहार राजनीति पर कटाक्ष करते हुए लड़कियों के बॉयफ्रेंड बदलने वाले बयान से जब विजयवर्गीय घिरते हुए नजर आए तो उन्होंने इस पर अपनी सफाई पेश की। इंदौर में उन्होंने कहा कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ के देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरा बयान बहुत साफ है। अमेरिका में मेरे एक मित्र ने ये बात कही थी कि जैसे अमेरिका में लड़कियां कभी भी अपना बॉयफ्रेंड बदल लेती है। उसी तरह बिहार राजनीति में कब क्या हो जाए नहीं पता। मैंने इस बात को सिर्फ कोट किया है। वहीं, कांग्रेस के लगाए आरोप पर उन्होंने कहा कि नारी हमारे लिए पूजनीय हैं। हम भारतीय नारी का बहुत सम्मान करते हैं। एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान के बीजेपी संसदीय बोर्ड से निवृत्त होने के बाद मध्य प्रदेश में उनकी आगामी भूमिका के सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह पार्टी की सतत प्रक्रिया है। पार्टी अपने मुताबिक पदाधिकारियों का चयन करती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया को मौका मिला है वह अच्छे कर्मठ और जमीन से जुड़े हुए कार्यकर्ता है। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर किए गए सवाल पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि बीजेपी में शीर्ष नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं तो वही मध्य प्रदेश में बीजेपी का नेतृत्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दो हज़ार तेईस का मध्य प्रदेश चुनाव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कांग्रेस के वापस सत्ता में आने के दावे को लेकर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कमलनाथ जी की उम्र पचहत्तर से ऊपर हो गई है उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव को लेकर विदेशों में भी धूम रही, वहां भारतीयों में काफी उत्साह था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को सभी स्वीकारते हैं। बीजेपी को उनकी बातों से इसलिए फर्क नहीं पड़ता। यह भी पढ़ेंः
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राजस्थान में विधानसभा सत्र को लेकर राजभवन व सरकार के बीच जारी गतिरोध बुधवार रात समाप्त हो गया। सरकार के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र 14 अगस्त से बुलाने को मंजूरी दे दी।
राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार, राज्यपाल मिश्र ने राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने के निर्देश मौखिक रूप से दिए हैं।
इस बीच राजस्थान के बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के मामले में यथास्थिति बनाये रखने के उच्च न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बुधवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दी। अध्यक्ष सीपी जोशी ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय का आदेश 'जाहिर तौर पर असंवैधानिक' है और यह संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में 'सीधा अतिक्रमण' है।
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राजस्थान में विधानसभा सत्र को लेकर राजभवन व सरकार के बीच जारी गतिरोध बुधवार रात समाप्त हो गया। सरकार के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र चौदह अगस्त से बुलाने को मंजूरी दे दी। राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार, राज्यपाल मिश्र ने राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाने के निर्देश मौखिक रूप से दिए हैं। इस बीच राजस्थान के बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के उन्नीस बागी विधायकों के मामले में यथास्थिति बनाये रखने के उच्च न्यायालय के चौबीस जुलाई के आदेश के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बुधवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दी। अध्यक्ष सीपी जोशी ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय का आदेश 'जाहिर तौर पर असंवैधानिक' है और यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में 'सीधा अतिक्रमण' है।
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टोक्यो में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड सम्मेलन में शामिल हुए. वहां कई मुद्दों पर बात हुई. प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति बाइडने और अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने सामयिक हालात को लेकर कई अहम बातें कही हैं. क्वाड मीटिंग में इंडो पैसिफिक रीजन का जिक्र भी हुआ तो अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी बयान दिए. क्वाड की मीटिंग के बाद पीएम मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात हुई. इस मुलाकात को भारत- अमेरिकी संबंधों के लिए बेहद खास माना जा रहा है. इस मुलाकात में मोदी ने कहा कि दुनिया में क्वाड की स्थिति सुदृढ़ होती जा रही है. देखें ये वीडियो.
PM Narendra Modi attended the Quad Summit in Tokyo today. After the Quad meeting, he had a bilateral meeting with US President Joe Biden. This meeting was important for Indo-US relations. Modi said that the position of Quad is getting stronger. Watch this video.
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टोक्यो में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड सम्मेलन में शामिल हुए. वहां कई मुद्दों पर बात हुई. प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति बाइडने और अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने सामयिक हालात को लेकर कई अहम बातें कही हैं. क्वाड मीटिंग में इंडो पैसिफिक रीजन का जिक्र भी हुआ तो अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी बयान दिए. क्वाड की मीटिंग के बाद पीएम मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात हुई. इस मुलाकात को भारत- अमेरिकी संबंधों के लिए बेहद खास माना जा रहा है. इस मुलाकात में मोदी ने कहा कि दुनिया में क्वाड की स्थिति सुदृढ़ होती जा रही है. देखें ये वीडियो. PM Narendra Modi attended the Quad Summit in Tokyo today. After the Quad meeting, he had a bilateral meeting with US President Joe Biden. This meeting was important for Indo-US relations. Modi said that the position of Quad is getting stronger. Watch this video.
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एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं.
एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं.
एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं.
रश्मिका ने अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों से की थी.
तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री साल 2018 में फिल्म 'चालो' से हुई थी.
अभिनेत्री की एक्टिंग फैंस को काफी ज्यादा पंसद आती है.
इतना ही नहीं साल 2020 में रश्मिका को नेशनल क्रश तक का खिताब दिया गया है.
रश्मिका की क्यूटनेस और खूबसूरती के लोग दीवाने हैं.
कर्नाटक में तो रश्मिका का निक नेम ही नेशनल क्रश है.
वहीं एक्सप्रेशन क्वीन के खिताब पर भी उनका ही कब्जा है.
फिल्म पुष्पा पार्ट 1 ने रश्मिका के करियर को पंख दिए और वह एक बार फिर देशभर में छा गईं.
अब उन्हें श्रीवल्ली के नाम से जाना जाने लगा है.
2016 में अपना करियर शुरू करने वाली रश्मिका ने अब तक महज 13 फिल्मों में ही काम किया है.
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एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं. एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं. एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना किसी पहचान की मोहताज नही हैं. रश्मिका ने अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों से की थी. तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री साल दो हज़ार अट्ठारह में फिल्म 'चालो' से हुई थी. अभिनेत्री की एक्टिंग फैंस को काफी ज्यादा पंसद आती है. इतना ही नहीं साल दो हज़ार बीस में रश्मिका को नेशनल क्रश तक का खिताब दिया गया है. रश्मिका की क्यूटनेस और खूबसूरती के लोग दीवाने हैं. कर्नाटक में तो रश्मिका का निक नेम ही नेशनल क्रश है. वहीं एक्सप्रेशन क्वीन के खिताब पर भी उनका ही कब्जा है. फिल्म पुष्पा पार्ट एक ने रश्मिका के करियर को पंख दिए और वह एक बार फिर देशभर में छा गईं. अब उन्हें श्रीवल्ली के नाम से जाना जाने लगा है. दो हज़ार सोलह में अपना करियर शुरू करने वाली रश्मिका ने अब तक महज तेरह फिल्मों में ही काम किया है.
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लंदनः पीढ़ी-दर-पीढ़ी अगर एक ही परिवार या खानदार के लोग हाई केलोस्ट्रॉल से पीड़ित हों, तो इसे आनुवांशिक हाई कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। ऐसे लोगों के लिए खुशी की बात है कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन की पहचान की है, जिसकी वजह से एक ही परिवार की आने वाली पीढ़ियों में उच्च कोलेस्ट्रॉल का प्रसार होता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को हार्ट-अटैक, स्ट्रोक, हृदय वाल्व संकुचन सहित दिल की कई बीमारियों की वजह माना जाता है। दरअसल फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया एक आनुवांशिक स्थिति है, जो कम घनत्व वाले लीपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल-सी) या बैड कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी होती है।
निष्कर्षो से पता चला है कि कोलेस्ट्रॉल में मौजूद लीपोप्रोटीन फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया के एक-चौथाई मामलों का कारण होता है। डेनमार्क स्थित युनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के अंतर्गत हेरलेव हॉस्पिटल की चिकित्सक और इस अध्ययन की मुख्य शोधार्थी ऐनी लैंग्स्टेड ने बताया, "इस शोध में अन्य व्यक्तियों की तुलना में फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया से ग्रसित व्यक्यिों के रक्त में लीपोप्रोटीन (ए) की उच्च मात्रा पाई गई। "
इसके साथ ही फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया और लीपोप्रोटीन की उच्च मात्रा से ग्रसित व्यक्तियों को हृदयघात होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है। यह शोध 'द लैंसेट डाइबिटीज एंड इंडोक्राइनोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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लंदनः पीढ़ी-दर-पीढ़ी अगर एक ही परिवार या खानदार के लोग हाई केलोस्ट्रॉल से पीड़ित हों, तो इसे आनुवांशिक हाई कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। ऐसे लोगों के लिए खुशी की बात है कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन की पहचान की है, जिसकी वजह से एक ही परिवार की आने वाली पीढ़ियों में उच्च कोलेस्ट्रॉल का प्रसार होता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को हार्ट-अटैक, स्ट्रोक, हृदय वाल्व संकुचन सहित दिल की कई बीमारियों की वजह माना जाता है। दरअसल फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया एक आनुवांशिक स्थिति है, जो कम घनत्व वाले लीपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल या बैड कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी होती है। निष्कर्षो से पता चला है कि कोलेस्ट्रॉल में मौजूद लीपोप्रोटीन फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया के एक-चौथाई मामलों का कारण होता है। डेनमार्क स्थित युनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के अंतर्गत हेरलेव हॉस्पिटल की चिकित्सक और इस अध्ययन की मुख्य शोधार्थी ऐनी लैंग्स्टेड ने बताया, "इस शोध में अन्य व्यक्तियों की तुलना में फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया से ग्रसित व्यक्यिों के रक्त में लीपोप्रोटीन की उच्च मात्रा पाई गई। " इसके साथ ही फैमिलियल हाइपरकॉलेस्ट्रॉलस्टीरोलेमिया और लीपोप्रोटीन की उच्च मात्रा से ग्रसित व्यक्तियों को हृदयघात होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है। यह शोध 'द लैंसेट डाइबिटीज एंड इंडोक्राइनोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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एस .पी. के सामने डी. एस. पी. खड़े होकर सेल्यूट किया।
"सर... उस ट्रक को ट्रेस कर लिया...."
एस .पी. खुश हुए।
"धर्मानी उराची की जगह जितने लोग ट्रक लेकर आते हैं वे ड्राइवर -- खाना खाने के लिए कल्याणी सिंघम सरदार जी के पंजाबी मेस का एक होटल है साहब.... 24 घंटे खुला रहने वाला मेस है वह। सड़क के किनारे मूंझ की चारपायां पड़ी रहती हैं उस पर बैठकर ड्राइवरों को खाना खाने की आदत है। उस तरफ से आने वाला कोई भी ट्रक यहां खड़े हुए बिना नहीं जाता। खासतौर पर रात के 11:00 बजे कहां-कहां हॉल्ट हुआ वे सब मिलकर बातें करते हैं । अतः मैं वहां जाकर किस-किस का वहां हाल्ट हुआ मैंने मालूम किया। कल रात 10:30 बजे से 12:00 बजे तक यहां आने वाले तीन ट्रक थे। उसमें भी दो पंजाबी ट्रक थे.... एक लोकल। वह लोकल ट्रक मेस पर खड़े हुए बिना ही गया। कल्याण सिंघम को उस लारी ड्राइवर को अच्छी तरह जानता था।
"यस.... उस ड्राइवर का नाम धनराज हैं उसी ने अपना स्वयं का एक पुराना ट्रक खरीद कर स्वयं ही ओनर बन गया । वहां एक सुनसान जगह पर पुरानी इमारत को गोडाउन बना रखा है और लोकल ट्रांसपोर्ट करता है.... उस आदमी का चाल चलन ठीक नहीं है सरदार जी ने कहा..."
"गोडाउन कहां है पूछा ?"
"पूछ लिया सर... मैं सब तैयारी के साथ रवाना हो रहा हूं...."
"जाकर पहले उस आदमी को दबोचो।"
डी. एस. पी. दोबारा सेल्यूट करके जल्दी से कमरे से बाहर आए।
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एस .पी. के सामने डी. एस. पी. खड़े होकर सेल्यूट किया। "सर... उस ट्रक को ट्रेस कर लिया...." एस .पी. खुश हुए। "धर्मानी उराची की जगह जितने लोग ट्रक लेकर आते हैं वे ड्राइवर -- खाना खाने के लिए कल्याणी सिंघम सरदार जी के पंजाबी मेस का एक होटल है साहब.... चौबीस घंटाटे खुला रहने वाला मेस है वह। सड़क के किनारे मूंझ की चारपायां पड़ी रहती हैं उस पर बैठकर ड्राइवरों को खाना खाने की आदत है। उस तरफ से आने वाला कोई भी ट्रक यहां खड़े हुए बिना नहीं जाता। खासतौर पर रात के ग्यारह:शून्य बजे कहां-कहां हॉल्ट हुआ वे सब मिलकर बातें करते हैं । अतः मैं वहां जाकर किस-किस का वहां हाल्ट हुआ मैंने मालूम किया। कल रात दस:तीस बजे से बारह:शून्य बजे तक यहां आने वाले तीन ट्रक थे। उसमें भी दो पंजाबी ट्रक थे.... एक लोकल। वह लोकल ट्रक मेस पर खड़े हुए बिना ही गया। कल्याण सिंघम को उस लारी ड्राइवर को अच्छी तरह जानता था। "यस.... उस ड्राइवर का नाम धनराज हैं उसी ने अपना स्वयं का एक पुराना ट्रक खरीद कर स्वयं ही ओनर बन गया । वहां एक सुनसान जगह पर पुरानी इमारत को गोडाउन बना रखा है और लोकल ट्रांसपोर्ट करता है.... उस आदमी का चाल चलन ठीक नहीं है सरदार जी ने कहा..." "गोडाउन कहां है पूछा ?" "पूछ लिया सर... मैं सब तैयारी के साथ रवाना हो रहा हूं...." "जाकर पहले उस आदमी को दबोचो।" डी. एस. पी. दोबारा सेल्यूट करके जल्दी से कमरे से बाहर आए।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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जाह्नवी कपूर का यह रेड साड़ी लुक खूब वायरल हुआ था, जिसमें एक्ट्रेस ने डीप नेक स्लीवलैस ब्लाउज के साथ खूबसूरत से बॉर्डर वाली लाल रंग की साड़ी पहनी थी. साथ ही नो मेकअप लुक के करके उन्होंने बालों को सॉफ्ट कर्ल्स करके खुला रखा था.
आजकल टिशू की साड़ी का ट्रेंड बहुत ज्यादा है. ऐसे में आप जेनेलिया देशमुख से इंस्पिरेशन लेकर इस तरह की लाल रंग की ट्रांसपेरेंट टिशू की साड़ी कैरी कर सकते हैं और इसके साथ आप बड़े-बड़े झुमके बालों में गजरा लगाकर अपने लुक को पूरा कर सकती हैं.
कैटरीना कैफ का ये रेड साड़ी लुक आप किसी भी पार्टी या फिर फंक्शन में ट्राई कर सकते हैं. जिसमें उन्होंने छोटे-छोटे प्रिंट्स वाली रेड कलर की साड़ी पहनी है और उसके साथ सेम फैब्रिक का ब्लाउज और कानों में बड़े-बड़े ग्रीन कलर के इयररिंग्स कैरी किए हैं.
काजोल का यह रेड साड़ी लुक भी आप किसी भी शादी या रिसेप्शन में ट्राई कर सकते हैं. जिसमें उन्होंने स्टोन वर्क वाली खूबसूरत सी रेड कलर की साड़ी स्लीवलैस ब्लाउज के साथ कैरी की है और उसके साथ मोतियों वाला चोकर सेट पहना है.
अगर आप किसी कॉकटेल पार्टी में ग्लैमरस रेड कलर की साड़ी पहनना चाहते हैं, तो अनन्या पांडे के इस लुक से इंस्पिरेशन लेकर आप फ्रिल वाली रेड कलर की साड़ी हॉल्टर नेक ब्लाउज के साथ कैरी कर सकती हैं.
अगर आपकी अभी-अभी शादी हुई है और आप किसी फंक्शन में जा रहे हैं, तो आप इस तरह की लाल रंग की बनारसी साड़ी कैरी कर सकते हैं, इसके साथ हैवी ज्वेलरी बालों में जुड़ा और भरी हुई मांग बेहद ही खूबसूरत लगेगी.
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जाह्नवी कपूर का यह रेड साड़ी लुक खूब वायरल हुआ था, जिसमें एक्ट्रेस ने डीप नेक स्लीवलैस ब्लाउज के साथ खूबसूरत से बॉर्डर वाली लाल रंग की साड़ी पहनी थी. साथ ही नो मेकअप लुक के करके उन्होंने बालों को सॉफ्ट कर्ल्स करके खुला रखा था. आजकल टिशू की साड़ी का ट्रेंड बहुत ज्यादा है. ऐसे में आप जेनेलिया देशमुख से इंस्पिरेशन लेकर इस तरह की लाल रंग की ट्रांसपेरेंट टिशू की साड़ी कैरी कर सकते हैं और इसके साथ आप बड़े-बड़े झुमके बालों में गजरा लगाकर अपने लुक को पूरा कर सकती हैं. कैटरीना कैफ का ये रेड साड़ी लुक आप किसी भी पार्टी या फिर फंक्शन में ट्राई कर सकते हैं. जिसमें उन्होंने छोटे-छोटे प्रिंट्स वाली रेड कलर की साड़ी पहनी है और उसके साथ सेम फैब्रिक का ब्लाउज और कानों में बड़े-बड़े ग्रीन कलर के इयररिंग्स कैरी किए हैं. काजोल का यह रेड साड़ी लुक भी आप किसी भी शादी या रिसेप्शन में ट्राई कर सकते हैं. जिसमें उन्होंने स्टोन वर्क वाली खूबसूरत सी रेड कलर की साड़ी स्लीवलैस ब्लाउज के साथ कैरी की है और उसके साथ मोतियों वाला चोकर सेट पहना है. अगर आप किसी कॉकटेल पार्टी में ग्लैमरस रेड कलर की साड़ी पहनना चाहते हैं, तो अनन्या पांडे के इस लुक से इंस्पिरेशन लेकर आप फ्रिल वाली रेड कलर की साड़ी हॉल्टर नेक ब्लाउज के साथ कैरी कर सकती हैं. अगर आपकी अभी-अभी शादी हुई है और आप किसी फंक्शन में जा रहे हैं, तो आप इस तरह की लाल रंग की बनारसी साड़ी कैरी कर सकते हैं, इसके साथ हैवी ज्वेलरी बालों में जुड़ा और भरी हुई मांग बेहद ही खूबसूरत लगेगी.
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पटना के विभिन्न इलाकों में गुरुवार को कोरोना के 1407 नए मरीज मिले। एम्स में कोरोना संक्रमित दो महिलाओं की मौत हो गई। पटना एम्स के 14, आईजीआईएमएस के 10, पीएमसीएच के 12, एनएमसीएच के 3, आईजीआईसी के एक डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। आईजीआईसी में एंटीजन टेस्ट में 20 मरीजों के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। एनएमसीएच में दो नए मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें एक साढ़े 3 महीने का बच्चा भी है।
हर दिन मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है....
बिहार में पिछले 24 घंटे में एक बार फिर 2379 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है. सबसे खराब स्थिति पटना जिले की है, जहां 2 दर्जन से ज्यादा इलाकों में संक्रमण फैल चुका है और फिर से पटना में 1407 संक्रमित मरीज (Corona Cases In Patna) मिले हैं. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार गया और मुजफ्फरपुर में भी मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. गया में 177 मरीज मिले हैं तो मुजफ्फरपुर में 137 मरीज मिले हैं. वहीं सारण में 52, वैशाली में 35, बेगूसराय में 71, मधुबनी में 36, मुंगेर में 20, दरभंगा में 24, भागलपुर में 27, पश्चिमी चंपारण में 18, समस्तीपुर में 31, रोहतास में 15, सहरसा में भी 15 मरीज मिले हैं.
Shimla, Mandi, Kangra, Chamba, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, #बिहार, #मुजफ्फरपुर, #पूर्वी चंपारण, #कानपुर, #दरभंगा, #समस्तीपुर, #नालंदा, #पटना, #मुजफ्फरपुर, #जहानाबाद, #पटना, #नालंदा, #अररिया, #अरवल, #औरंगाबाद, #कटिहार, #किशनगंज, #कैमूर, #खगड़िया, #गया, #गोपालगंज, #जमुई, #जहानाबाद, #नवादा, #पश्चिम चंपारण, #पूर्णिया, #पूर्वी चंपारण, #बक्सर, #बांका, #बेगूसराय, #भागलपुर, #भोजपुर, #मधुबनी, #मधेपुरा, #मुंगेर, #रोहतास, #लखीसराय, #वैशाली, #शिवहर, #शेखपुरा, #समस्तीपुर, #सहरसा, #सारण #सीतामढ़ी, #सीवान, #सुपौल,
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पटना के विभिन्न इलाकों में गुरुवार को कोरोना के एक हज़ार चार सौ सात नए मरीज मिले। एम्स में कोरोना संक्रमित दो महिलाओं की मौत हो गई। पटना एम्स के चौदह, आईजीआईएमएस के दस, पीएमसीएच के बारह, एनएमसीएच के तीन, आईजीआईसी के एक डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। आईजीआईसी में एंटीजन टेस्ट में बीस मरीजों के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। एनएमसीएच में दो नए मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें एक साढ़े तीन महीने का बच्चा भी है। हर दिन मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है.... बिहार में पिछले चौबीस घंटाटे में एक बार फिर दो हज़ार तीन सौ उन्यासी मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है. सबसे खराब स्थिति पटना जिले की है, जहां दो दर्जन से ज्यादा इलाकों में संक्रमण फैल चुका है और फिर से पटना में एक हज़ार चार सौ सात संक्रमित मरीज मिले हैं. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार गया और मुजफ्फरपुर में भी मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. गया में एक सौ सतहत्तर मरीज मिले हैं तो मुजफ्फरपुर में एक सौ सैंतीस मरीज मिले हैं. वहीं सारण में बावन, वैशाली में पैंतीस, बेगूसराय में इकहत्तर, मधुबनी में छत्तीस, मुंगेर में बीस, दरभंगा में चौबीस, भागलपुर में सत्ताईस, पश्चिमी चंपारण में अट्ठारह, समस्तीपुर में इकतीस, रोहतास में पंद्रह, सहरसा में भी पंद्रह मरीज मिले हैं. Shimla, Mandi, Kangra, Chamba, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, #बिहार, #मुजफ्फरपुर, #पूर्वी चंपारण, #कानपुर, #दरभंगा, #समस्तीपुर, #नालंदा, #पटना, #मुजफ्फरपुर, #जहानाबाद, #पटना, #नालंदा, #अररिया, #अरवल, #औरंगाबाद, #कटिहार, #किशनगंज, #कैमूर, #खगड़िया, #गया, #गोपालगंज, #जमुई, #जहानाबाद, #नवादा, #पश्चिम चंपारण, #पूर्णिया, #पूर्वी चंपारण, #बक्सर, #बांका, #बेगूसराय, #भागलपुर, #भोजपुर, #मधुबनी, #मधेपुरा, #मुंगेर, #रोहतास, #लखीसराय, #वैशाली, #शिवहर, #शेखपुरा, #समस्तीपुर, #सहरसा, #सारण #सीतामढ़ी, #सीवान, #सुपौल,
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वाशिंगटनः एक स्थायी संघर्ष विराम की दलाली के कई असफल प्रयासों के बाद, सूडान में युद्धरत गुट एक नए अल्पकालिक संघर्ष विराम के लिए सहमत हो गए हैं, अमेरिका और सऊदी मध्यस्थों ने शनिवार को घोषणा की।
अमेरिका और सऊदी अरब के एक संयुक्त बयान के अनुसार, सऊदी बंदरगाह शहर जेद्दा में अपनी बैठक के दौरान सूडानी सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स सात दिनों के संघर्ष विराम पर सहमत हुए। संघर्ष विराम सोमवार को रात 9:45 बजे शुरू होने वाला है। सूडान में स्थानीय समय। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो संघर्ष विराम को बढ़ाया जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद और संघर्ष विराम की शुरुआत से पहले 48 घंटे की अधिसूचना अवधि के दौरान, "दोनों पक्षों ने सऊदी और अमेरिकी मददगारों को सैन्य लाभ नहीं लेने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में सूचित किया है। "
नागरिकों की सुरक्षा और संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए सहायता के प्रवाह को आसान बनाने पर जेद्दा वार्ता के दौरान दोनों पक्ष पहले एक आम सहमति पर पहुँचे। हालाँकि, दोनों पक्षों के उल्लंघन के आरोपों के कारण पहले के संघर्ष विराम समझौते ध्वस्त हो गए हैं।
यूएस-सऊदी के बयान में कहा गया है कि "यह सर्वविदित था कि पार्टियों ने पहले संघर्ष विराम की घोषणा की थी जिसे नहीं देखा गया था। "
जेद्दाह समझौते पर सभी पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे और पहले के संघर्ष विराम के विपरीत, इसे यूएस-सऊदी और अंतर्राष्ट्रीय युद्धविराम निगरानी तंत्र द्वारा समर्थित किया जाएगा।
निगरानी और समन्वय समिति के लिए अमेरिका और सऊदी अरब प्रत्येक पार्टी के तीन प्रतिनिधियों के साथ तीन प्रतिनिधि भेजेंगे।
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वाशिंगटनः एक स्थायी संघर्ष विराम की दलाली के कई असफल प्रयासों के बाद, सूडान में युद्धरत गुट एक नए अल्पकालिक संघर्ष विराम के लिए सहमत हो गए हैं, अमेरिका और सऊदी मध्यस्थों ने शनिवार को घोषणा की। अमेरिका और सऊदी अरब के एक संयुक्त बयान के अनुसार, सऊदी बंदरगाह शहर जेद्दा में अपनी बैठक के दौरान सूडानी सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स सात दिनों के संघर्ष विराम पर सहमत हुए। संघर्ष विराम सोमवार को रात नौ:पैंतालीस बजे शुरू होने वाला है। सूडान में स्थानीय समय। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो संघर्ष विराम को बढ़ाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद और संघर्ष विराम की शुरुआत से पहले अड़तालीस घंटाटे की अधिसूचना अवधि के दौरान, "दोनों पक्षों ने सऊदी और अमेरिकी मददगारों को सैन्य लाभ नहीं लेने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में सूचित किया है। " नागरिकों की सुरक्षा और संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए सहायता के प्रवाह को आसान बनाने पर जेद्दा वार्ता के दौरान दोनों पक्ष पहले एक आम सहमति पर पहुँचे। हालाँकि, दोनों पक्षों के उल्लंघन के आरोपों के कारण पहले के संघर्ष विराम समझौते ध्वस्त हो गए हैं। यूएस-सऊदी के बयान में कहा गया है कि "यह सर्वविदित था कि पार्टियों ने पहले संघर्ष विराम की घोषणा की थी जिसे नहीं देखा गया था। " जेद्दाह समझौते पर सभी पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे और पहले के संघर्ष विराम के विपरीत, इसे यूएस-सऊदी और अंतर्राष्ट्रीय युद्धविराम निगरानी तंत्र द्वारा समर्थित किया जाएगा। निगरानी और समन्वय समिति के लिए अमेरिका और सऊदी अरब प्रत्येक पार्टी के तीन प्रतिनिधियों के साथ तीन प्रतिनिधि भेजेंगे।
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डेस्क. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अंजिक्य रहाणे और ईशांत शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को एक और बड़ा झटका देने का फैसला कर लिया है। टीम से बाहर होने के बाद अब इन दोनों खिलाड़ियों की संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट से छुट्टी होनी भी तय है। वहीं लिमिटिड ओवर्स में शानदार प्रदर्शन कर रहे सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल को बोर्ड की ओर से इनाम दिया जाएगा। इन दोनों खिलाड़ियों को बीसीसीआई के संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट में जगह मिलेगी।
21 दिसंबर को होने वाले एपेक्स काउंसिल की मीटिंग में बीसीसीआई संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट वाले खिलाड़ियों की नई लिस्ट जारी करेगा। जल्द ही टी20 फॉर्मेट में टीम की कमान संभालने जा रहे हार्दिक पांड्या को भी प्रमोशन देने की तैयारी हो रही है। हार्दिक पांड्या को सी कैटेगरी से बी कैटेगरी में प्रमोट किया जाएगा।
रहाणे और ईशांत शर्मा के अलावा ऋद्धिमान साहा को सेंट्रेल कॉन्ट्रेक्ट से बाहर किया जाएगा। इस साल की शुरुआत में साहा को यह कह दिया गया था कि उन्हें अब दोबारा टीम इंडिया में शामिल होने का मौका नहीं दिया जाएगा। ईशांत शर्मा और रहाणे की भी टीम इंडिया में वापसी बेहद मुश्किल नज़र आ रही है।
बीसीसीआई ने संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट को चार कैटेगरी में बांट रखा है। ए प्लस कैटेगरी के खिलाड़ियों को 7 करोड़ रुपये सलाना दिए जाते हैं। ए कैटेगरी के प्लेयर्स को 5 करोड़ जबकि बी कैटेगरी के प्लेयर्स को 3 करोड़ रुपये सलाना मिलते हैं। सी कैटेगरी के खिलाड़ियों को बीसीसआई की ओर से 1 करोड़ रुपये सलाना फीस दी जाती है।
चूंकि सूर्यकुमार यादव अब टी20 और वनडे में टीम का अहम हिस्सा बन चुके हैं इसलिए उन्हें सी कैटेगरी से बी में प्रमोशन मिलना तय है। वहीं शुभमन गिल वनडे और टेस्ट में टीम इंडिया का अहम हिस्सा हैं। शुभमन गिल को भी सी कैटेगरी से बी में प्रमोट किया जाएगा। ईशान किशन को बीसीसीआई सी कैटेगरी में जगह दे सकती है।
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डेस्क. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अंजिक्य रहाणे और ईशांत शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को एक और बड़ा झटका देने का फैसला कर लिया है। टीम से बाहर होने के बाद अब इन दोनों खिलाड़ियों की संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट से छुट्टी होनी भी तय है। वहीं लिमिटिड ओवर्स में शानदार प्रदर्शन कर रहे सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल को बोर्ड की ओर से इनाम दिया जाएगा। इन दोनों खिलाड़ियों को बीसीसीआई के संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट में जगह मिलेगी। इक्कीस दिसंबर को होने वाले एपेक्स काउंसिल की मीटिंग में बीसीसीआई संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट वाले खिलाड़ियों की नई लिस्ट जारी करेगा। जल्द ही टीबीस फॉर्मेट में टीम की कमान संभालने जा रहे हार्दिक पांड्या को भी प्रमोशन देने की तैयारी हो रही है। हार्दिक पांड्या को सी कैटेगरी से बी कैटेगरी में प्रमोट किया जाएगा। रहाणे और ईशांत शर्मा के अलावा ऋद्धिमान साहा को सेंट्रेल कॉन्ट्रेक्ट से बाहर किया जाएगा। इस साल की शुरुआत में साहा को यह कह दिया गया था कि उन्हें अब दोबारा टीम इंडिया में शामिल होने का मौका नहीं दिया जाएगा। ईशांत शर्मा और रहाणे की भी टीम इंडिया में वापसी बेहद मुश्किल नज़र आ रही है। बीसीसीआई ने संट्रेल कॉन्ट्रेक्ट को चार कैटेगरी में बांट रखा है। ए प्लस कैटेगरी के खिलाड़ियों को सात करोड़ रुपये सलाना दिए जाते हैं। ए कैटेगरी के प्लेयर्स को पाँच करोड़ जबकि बी कैटेगरी के प्लेयर्स को तीन करोड़ रुपये सलाना मिलते हैं। सी कैटेगरी के खिलाड़ियों को बीसीसआई की ओर से एक करोड़ रुपये सलाना फीस दी जाती है। चूंकि सूर्यकुमार यादव अब टीबीस और वनडे में टीम का अहम हिस्सा बन चुके हैं इसलिए उन्हें सी कैटेगरी से बी में प्रमोशन मिलना तय है। वहीं शुभमन गिल वनडे और टेस्ट में टीम इंडिया का अहम हिस्सा हैं। शुभमन गिल को भी सी कैटेगरी से बी में प्रमोट किया जाएगा। ईशान किशन को बीसीसीआई सी कैटेगरी में जगह दे सकती है।
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की तराई का यह पहाडी दृश्य, चित्रपटरों की तरह क्षण-क्षण पर बडल रहा था। उधर ब्रजदाज को लॉ कुछ दूसरा ही दृश्य देख रही थीं । गाँव का वह ताल जिसमें कमल मिल रहे थे, मिना के निर्मल प्यार की तरह तरंगायित हो रहा था और उस प्यार में विश्राम की लालमा, बीच-बीच में उसे देखते ही, मालती का पैर के अँगूटों के चाँही के मोटे छल्लों का सदमठाना, महसा उसी स्त्री का सन्दिग्ध मान से उसको बाहर भेजने की प्रेरणा, साधारण जीवन में बालक के प्यार से जो र सन्तोष उसे मिल रहा था, वह भी छिन गया; क्यों सन्देह होन। इन्दी को विश्वास हो चला था, कि ब्रजराज मालो को प्यार करता है। और गाँव में एक ही सुन्दरी, चचल, हँसमुप और मनचली मी थी, उसका ब्याह नहीं हुआ था । हाँ, वही तो माली ? और यह श्रोनाली ऍपन मे मम्भ नहीं तो वही है। ? टोक-टीक बढ़ी है। यह चक्का पकड़े हुए पीछे घूम कर अपनी स्मृतिधारा पर विश्वास कर लेना चाहता था। ग्रहस्तिनी भूली हुई बातें इस मुग ने स्मरण दिला हो । यद्दी तो वह अपने को न रोक समा पीछे घूम ही पड़ा और देखने लगा ।
लारी इक्रा गरी एक वृद्ध से कुछ अधिक हानि न होने पर भी किसी को कहीं चोट न लगने पर मी मिग भल्ला उठा । ब्रजराज भी फिर लारी पर न चढा। किसी को किनी से महानुभूति नहीं । तनिकसी भूल भी कोई मह नहीं सस्ता, यही न ! ब्रजराज ने सोचा कि मैं दी क्यों न रूठ जाऊँ ? उसने नौकरी को नमस्कार किया
ब्रजराज को वैराग्य हो गया हो, सो तो बात नहीं । हाँ, उसे गार्हस्थ्यजीवन के सुख के प्रारम में ही टोकर लगी। उसकी सीधी-सादी गृहस्थी में कोई विशेष नन्दन था। केवल मना कर राह चलते चलने कमी-कमो मालती की चुदल से, दलके शरक्त में, दो बूँद हरे नीबू के रस को-सी मुगन्ध तराचर में मिल जाती थी ।
भोष में
वह सन गया, इधर कलकत्ता के कोलाहल में रहक्र उसने ड्राइवरी सीपी । पहाडियों की गोद में उसे एक प्रकार की शांति मिली । दो-चार घरों के छोटे-छोटे से गांवों को देखकर उसके मन में विगगपूर्ण दुलार होता था। वह थाना लारी पर बैठा हुआ उपेक्षा से एक दृष्टि डालता हुआ निकल जाता । तब वह अपने गाँव पर मानो प्रत्यक्ष रूप से प्रतिशोध ले लेता; किन्तु नौकरी छोड़कर यह क्या जाने कैसा हो गया । ज्वालामुखी के समीप ही पड़ी को बस्ती में जाकर रहने लगा ।
पास में कुछ नये बचे थे। उन्हें वह धीरे-धीरे सच करने लगा । उधर उसके मन का निश्चिन्त भाव और शरीर का बल धीरे-धीरे क्षीण होने लगा। कोई कहता तो उसरा काम कर देता; पर उसके बदले में पैसा न लेता । लोग कहते-पडा भलामानुम है। उससे बहुत से लोगों कीमत हो गयी। उसका दिन दलने लगा। वह घर की क्भो चिन्ता न करता । हाँ, भूलने का प्रयत्न करता, किन्तु मिन्ना फिर सोचता 'टा हो गया होगा। उसको माँ होगी हो, जिसने मुझे काम करने के लिए परदेश भेज दिया। वह भिन्ना को ठीक कर लेगी। सेती-नारी से काम चल ही जायगा । मे हो गृहस्थो में अतिरिक्त व्यक्ति था । थोर मालती ! न, न ! पहले उसके कारण सदिग्ध बनकर मुझे घर छोड़ना वडा । उसी का फिर से स्मरण करते ही मैं नौकरी से छुड़ाया गया । यहाँ से उस दिन मुझे फिर उसका सन्देह हुआ । वद पंजाब में कहाँ नाती ! उसका नाम भी न लूँ ।"
"इन्दो तो मुझे परदेश भेजकर मुझ से नीद लेगी ही।"
पर यह नशा दो-ही- तीन वरसों में उसट गया। इस अर्थयुग में सर संवन जिसका है वही उट्टी बोल गया। ग्राज ब्रजराज ग्रकिचन क्गाल था । श्राज हो से उसे भीस माँगना चाहिए। नौकरी न करेगा, हाँ मीप माँग लेगा। किमी का काम कर देगा, तो यह देगा वह अपनी भौख । उसकी मानमिक धारा इसी तरह चल रही थी।
यद सबेरे दी श्राज मन्दिर के समीप ही जा बैठा। श्राज उसके हृदय
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की तराई का यह पहाडी दृश्य, चित्रपटरों की तरह क्षण-क्षण पर बडल रहा था। उधर ब्रजदाज को लॉ कुछ दूसरा ही दृश्य देख रही थीं । गाँव का वह ताल जिसमें कमल मिल रहे थे, मिना के निर्मल प्यार की तरह तरंगायित हो रहा था और उस प्यार में विश्राम की लालमा, बीच-बीच में उसे देखते ही, मालती का पैर के अँगूटों के चाँही के मोटे छल्लों का सदमठाना, महसा उसी स्त्री का सन्दिग्ध मान से उसको बाहर भेजने की प्रेरणा, साधारण जीवन में बालक के प्यार से जो र सन्तोष उसे मिल रहा था, वह भी छिन गया; क्यों सन्देह होन। इन्दी को विश्वास हो चला था, कि ब्रजराज मालो को प्यार करता है। और गाँव में एक ही सुन्दरी, चचल, हँसमुप और मनचली मी थी, उसका ब्याह नहीं हुआ था । हाँ, वही तो माली ? और यह श्रोनाली ऍपन मे मम्भ नहीं तो वही है। ? टोक-टीक बढ़ी है। यह चक्का पकड़े हुए पीछे घूम कर अपनी स्मृतिधारा पर विश्वास कर लेना चाहता था। ग्रहस्तिनी भूली हुई बातें इस मुग ने स्मरण दिला हो । यद्दी तो वह अपने को न रोक समा पीछे घूम ही पड़ा और देखने लगा । लारी इक्रा गरी एक वृद्ध से कुछ अधिक हानि न होने पर भी किसी को कहीं चोट न लगने पर मी मिग भल्ला उठा । ब्रजराज भी फिर लारी पर न चढा। किसी को किनी से महानुभूति नहीं । तनिकसी भूल भी कोई मह नहीं सस्ता, यही न ! ब्रजराज ने सोचा कि मैं दी क्यों न रूठ जाऊँ ? उसने नौकरी को नमस्कार किया ब्रजराज को वैराग्य हो गया हो, सो तो बात नहीं । हाँ, उसे गार्हस्थ्यजीवन के सुख के प्रारम में ही टोकर लगी। उसकी सीधी-सादी गृहस्थी में कोई विशेष नन्दन था। केवल मना कर राह चलते चलने कमी-कमो मालती की चुदल से, दलके शरक्त में, दो बूँद हरे नीबू के रस को-सी मुगन्ध तराचर में मिल जाती थी । भोष में वह सन गया, इधर कलकत्ता के कोलाहल में रहक्र उसने ड्राइवरी सीपी । पहाडियों की गोद में उसे एक प्रकार की शांति मिली । दो-चार घरों के छोटे-छोटे से गांवों को देखकर उसके मन में विगगपूर्ण दुलार होता था। वह थाना लारी पर बैठा हुआ उपेक्षा से एक दृष्टि डालता हुआ निकल जाता । तब वह अपने गाँव पर मानो प्रत्यक्ष रूप से प्रतिशोध ले लेता; किन्तु नौकरी छोड़कर यह क्या जाने कैसा हो गया । ज्वालामुखी के समीप ही पड़ी को बस्ती में जाकर रहने लगा । पास में कुछ नये बचे थे। उन्हें वह धीरे-धीरे सच करने लगा । उधर उसके मन का निश्चिन्त भाव और शरीर का बल धीरे-धीरे क्षीण होने लगा। कोई कहता तो उसरा काम कर देता; पर उसके बदले में पैसा न लेता । लोग कहते-पडा भलामानुम है। उससे बहुत से लोगों कीमत हो गयी। उसका दिन दलने लगा। वह घर की क्भो चिन्ता न करता । हाँ, भूलने का प्रयत्न करता, किन्तु मिन्ना फिर सोचता 'टा हो गया होगा। उसको माँ होगी हो, जिसने मुझे काम करने के लिए परदेश भेज दिया। वह भिन्ना को ठीक कर लेगी। सेती-नारी से काम चल ही जायगा । मे हो गृहस्थो में अतिरिक्त व्यक्ति था । थोर मालती ! न, न ! पहले उसके कारण सदिग्ध बनकर मुझे घर छोड़ना वडा । उसी का फिर से स्मरण करते ही मैं नौकरी से छुड़ाया गया । यहाँ से उस दिन मुझे फिर उसका सन्देह हुआ । वद पंजाब में कहाँ नाती ! उसका नाम भी न लूँ ।" "इन्दो तो मुझे परदेश भेजकर मुझ से नीद लेगी ही।" पर यह नशा दो-ही- तीन वरसों में उसट गया। इस अर्थयुग में सर संवन जिसका है वही उट्टी बोल गया। ग्राज ब्रजराज ग्रकिचन क्गाल था । श्राज हो से उसे भीस माँगना चाहिए। नौकरी न करेगा, हाँ मीप माँग लेगा। किमी का काम कर देगा, तो यह देगा वह अपनी भौख । उसकी मानमिक धारा इसी तरह चल रही थी। यद सबेरे दी श्राज मन्दिर के समीप ही जा बैठा। श्राज उसके हृदय
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Entertainment Live Updates: अप्रैल का आखिरी वीकेंड आ चुका है और मनोरंजन जगत की कई बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। एक ओर जहां शुक्रवार को रिलीज हुई नई फिल्मों और शोज की हलचल नजर आ रही है, वहीं आदिपुरुष के नए पोस्टर को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरु हो चुकी है।
मां सीता नवमी के शुभ अवसर पर, टीम आदिपुरुष ने बहादुरी और पवित्रता का प्रतीक जानकी का एक आकर्षक मोशन पोस्टर रिलीज किया है। जो किरदार कृति सैनन निभा रही हैं। टीम ने पोस्टर के साथ-साथ मधुर 'राम सिया राम' के ऑडियो टीज़र का अनावरण कर विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहीं, नई रिलीज की बात करें तो मणिरत्नम की पोन्नियिन सेलवन 2 सिनेमाघरों में आ चुकी है और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत ली है।
शोबिज की दुनिया के सभी अपडेट के लिए स्पेस चेक करते रहें।
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कपिल शर्मा शो में ना आ पाने Krushna Abhishek ने बताई वजह, कहा- ' उसने मेरा ब्रेनवॉश किया था'
Krushna Abhishek On The Kapil Sharma Show Comeback: कॉमेडियन कपिल शर्मा का द कपिल शर्मा शो दर्शकों के बीच बहुत हिट है और सबसे पसंदीदा शो में से एक है। इस शो के दीवाने सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी हैं। मशहूर कॉमेडी शो में कपिल शर्मा शो में कृष्णा अभिषेक की एंट्री हो चुकी है और इस शो का वो प्रोमों भी आ गया है कृष्णा सपना बनकर नजर आ रहे हैं।
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Tridha Choudhury Bold Video: 'आश्रम' जैसी वेब सीरीज में बोल्ड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस त्रिधा चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और लोगों को अपनी निजी जिंदगी से रूबरू करवाती ही रहती हैं। त्रिधा के हाल के वीडियो ने फैंस के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है।
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Arjun Rampal- Gabriella Demetriades: अभिनेता अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रैंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने शनिवार को फैंस के साथ खुशखबरी शेयर की है। गैब्रिएला ने अपने मैटरनिटी फोटोशूट से तस्वीरें शेयर करते हुए अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की। तस्वीरों में गैब्रिएला को ब्रांड Deme के आउटफिट में देखा जा सकता है, जिसमें वो अपने बेबी बंप को फ्लॉन्ट कर रही हैं। उसने पोस्ट को कैप्शन दिया, 'रियलिटी या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस? ' उनके पोस्ट के कमेंट्स सेक्शन में अन्य सेलेब्स की ओर से बधाई और शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई है।
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विक्रम, ऐश्वर्या राय, कार्थी, जयम रवि और त्रिशा की मुख्य भूमिकाओं वाली ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'पोन्नियिन सेलवन 2' कल सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म के सीक्वल को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है और फिल्म को फैंस और क्रिटिक्स से कई प्रशंसा मिल रही है। कथित तौर पर, फिल्म को रिलीज के पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 30 करोड़ रुपये की कमाई का अंदाजा लगाया गया था, लेकिन उम्मीद को तोड़ते हुए, मणिरत्नम निर्देशित इस फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर दुनिया भर में 38 करोड़ रुपये की कमाई की है।
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'किसी का भाई किसी की जान' के साथ सुर्खियां बटोर रहे सलमान खान जल्द ही एक शो में नजर आने वाले हैं, जहां वो कहते नजर आ रहे हैं कि वो प्यार में अनलकी हैं। चैनल द्वारा जारी किए गए प्रोमो में, पत्रकार को अभिनेता से रिश्तों के प्रति उनके रवैये के बारे में सवाल करते हुए देखा जा सकता है। जिस पर सलमान ने हंसते हुए जवाब दिया, "मैं प्यार में अनलकी हूं सर। सब अच्छी थी, दोष मुझ में ही लगता है। जिन्हें मैं चाहता था कि वह मुझे जान कहें, वह भी मुझे भाई कह रही हैं। तो अब मैं क्या करूं? "
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7 मई को, किंग चार्ल्स III के कोरोनेशन कॉन्सर्ट में फिल्म और म्यूजिक से जुड़े सितारों का जमावड़ा होगा। इस कार्यक्रम में हॉलीवुड के टॉम क्रूज, म्यूजिकल ग्रूप द पुसीकैट डॉल्स और बॉलीवुड की सोनम कपूर की उपस्थिति और प्रदर्शन होंगे। वैराइटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोनम कपूर Commonwealth virtual choir को पेश करते हुए स्टेज पर स्पोकन वर्ड पीस देंगी।
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हाल ही में फिल्मफेयर रेड कार्पेट पर जाह्नवी कपूर ने कदम रखा तो हर किसी की निगाहें उन पर ही थम गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी शेयर की हैं। साथ ही उन्होंने खुलासा किया है कि रेड कार्पेट और स्टेज परफॉर्मेंस के ठीक पहले उन्होंने ऊप्स मोमेंट जैसी स्थिति को कैसे संभाला। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी कई तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए जाह्नवी कपूर ने लिखा है- 'रेड कारपेट से 5 मिनट पहले और स्टेज पर परफॉर्म करने से 12 मिनट पहले जब आपकी जिप खराब हो जाए। '
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बीते दिन रणबीर कपूर अपनी मां नीतू कपूर के साथ एक स्किन केयर बुक लॉन्च इवेंट में पहुंचे थे। इवेंट के दौरान रणबीर और नीतू दोनों ही अपनी स्किन प्रॉब्लमस को लेकर दिल की बातें कर रहे थे। बातों का सिलसिला चल ही रहा था कि रणबीर भूल गए कि उन्होने अपने हाथ में कॉफी का कप पकड़ा हुआ है। गलती से उनके कप से पूरी कॉफी उनकी पैंट पर गिर गई। लेकिन रणबीर ने काफी सहजता से पूरी सिचुएशन को संभाला।
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आलिया भट्ट "फैशन की सबसे बड़ी नाइट आउट" मेट गाला में अपनी शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह प्रबल गुरुंग की आउटफिट में रेड कार्पेट की शोभा बढ़ाएंगी, और हर कोई इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए आलिया का लुक क्या है। आलिया को पैपराजी ने शनिवार तड़के एयरपोर्ट पर स्पॉट किया, जब वह गाला के लिए न्यूयॉर्क जा रही थीं। मुंबई एयरपोर्ट में एंट्री करते ही आलिया ने पैपराजी को मुस्कुराते हुए हेलो किया।
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- छियालीस मिनट ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, Entertainment Live Updates: अप्रैल का आखिरी वीकेंड आ चुका है और मनोरंजन जगत की कई बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। एक ओर जहां शुक्रवार को रिलीज हुई नई फिल्मों और शोज की हलचल नजर आ रही है, वहीं आदिपुरुष के नए पोस्टर को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरु हो चुकी है। मां सीता नवमी के शुभ अवसर पर, टीम आदिपुरुष ने बहादुरी और पवित्रता का प्रतीक जानकी का एक आकर्षक मोशन पोस्टर रिलीज किया है। जो किरदार कृति सैनन निभा रही हैं। टीम ने पोस्टर के साथ-साथ मधुर 'राम सिया राम' के ऑडियो टीज़र का अनावरण कर विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, नई रिलीज की बात करें तो मणिरत्नम की पोन्नियिन सेलवन दो सिनेमाघरों में आ चुकी है और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत ली है। शोबिज की दुनिया के सभी अपडेट के लिए स्पेस चेक करते रहें। उनतीस, कपिल शर्मा शो में ना आ पाने Krushna Abhishek ने बताई वजह, कहा- ' उसने मेरा ब्रेनवॉश किया था' Krushna Abhishek On The Kapil Sharma Show Comeback: कॉमेडियन कपिल शर्मा का द कपिल शर्मा शो दर्शकों के बीच बहुत हिट है और सबसे पसंदीदा शो में से एक है। इस शो के दीवाने सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी हैं। मशहूर कॉमेडी शो में कपिल शर्मा शो में कृष्णा अभिषेक की एंट्री हो चुकी है और इस शो का वो प्रोमों भी आ गया है कृष्णा सपना बनकर नजर आ रहे हैं। उनतीस, Tridha Choudhury Bold Video: 'आश्रम' जैसी वेब सीरीज में बोल्ड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस त्रिधा चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और लोगों को अपनी निजी जिंदगी से रूबरू करवाती ही रहती हैं। त्रिधा के हाल के वीडियो ने फैंस के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है। उनतीस, Shefali Jariwala New Video: मशहूर एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन किसी ना किसी वजह से खबरों में आ जाती हैं। एक बार फिर उन्होंने कुछ ऐसा किया है कि वो चर्चा का विषय बन गई हैं। उनतीस, 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में आलिया भट्ट और संजय लीला भंसाली की जोड़ी ने जादू कर दिया क्योंकि फिल्म को अब भी सेलिब्रेट किया जा रहा है। हाल ही में हुए हुंडई फिल्मफेयर अवार्ड्स दो हज़ार तेईस में इस फिल्म ने कई पुरस्कार जीते। जहां आलिया ने 'बेस्ट एक्ट्रेस इन ए लीडिंग रोल' जीता, वहीं संजय लीला भंसाली ने 'बेस्ट डायरेक्टर' की ट्रॉफी जीती। शो को सलमान खान ने होस्ट किया था और उन्होंने इसे जितना संभव हो सके उतना मनोरंजक बनाया। जब 'गंगूबाई काठियावाड़ी' की राइटर उत्कर्षिनी वशिष्ठ 'बेस्ट डायलॉग्स' की ट्रॉफी लेने स्टेज पर गईं तो उन्होंने आलिया का शुक्रिया भी अदा किया। उत्कर्षिनी वशिष्ठ ने कहा, "मुझे आलिया के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करना है' और सलमान ने अपने मजाकिया अंदाज में 'इंशाअल्लाह' कहा, जो भंसाली के साथ उनकी ठप पड़ी फिल्म की ओर इशारा करता है। उनतीस, Arjun Rampal- Gabriella Demetriades: अभिनेता अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रैंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने शनिवार को फैंस के साथ खुशखबरी शेयर की है। गैब्रिएला ने अपने मैटरनिटी फोटोशूट से तस्वीरें शेयर करते हुए अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की। तस्वीरों में गैब्रिएला को ब्रांड Deme के आउटफिट में देखा जा सकता है, जिसमें वो अपने बेबी बंप को फ्लॉन्ट कर रही हैं। उसने पोस्ट को कैप्शन दिया, 'रियलिटी या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस? ' उनके पोस्ट के कमेंट्स सेक्शन में अन्य सेलेब्स की ओर से बधाई और शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई है। उनतीस, विक्रम, ऐश्वर्या राय, कार्थी, जयम रवि और त्रिशा की मुख्य भूमिकाओं वाली ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'पोन्नियिन सेलवन दो' कल सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म के सीक्वल को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है और फिल्म को फैंस और क्रिटिक्स से कई प्रशंसा मिल रही है। कथित तौर पर, फिल्म को रिलीज के पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर तीस करोड़ रुपये की कमाई का अंदाजा लगाया गया था, लेकिन उम्मीद को तोड़ते हुए, मणिरत्नम निर्देशित इस फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर दुनिया भर में अड़तीस करोड़ रुपये की कमाई की है। उनतीस, सलमान खान ने अपने लव लाइफ को लेकर दिया जवाब, कहा, 'मैं प्यार में बदकिस्मत हूं' 'किसी का भाई किसी की जान' के साथ सुर्खियां बटोर रहे सलमान खान जल्द ही एक शो में नजर आने वाले हैं, जहां वो कहते नजर आ रहे हैं कि वो प्यार में अनलकी हैं। चैनल द्वारा जारी किए गए प्रोमो में, पत्रकार को अभिनेता से रिश्तों के प्रति उनके रवैये के बारे में सवाल करते हुए देखा जा सकता है। जिस पर सलमान ने हंसते हुए जवाब दिया, "मैं प्यार में अनलकी हूं सर। सब अच्छी थी, दोष मुझ में ही लगता है। जिन्हें मैं चाहता था कि वह मुझे जान कहें, वह भी मुझे भाई कह रही हैं। तो अब मैं क्या करूं? " उनतीस, सात मई को, किंग चार्ल्स III के कोरोनेशन कॉन्सर्ट में फिल्म और म्यूजिक से जुड़े सितारों का जमावड़ा होगा। इस कार्यक्रम में हॉलीवुड के टॉम क्रूज, म्यूजिकल ग्रूप द पुसीकैट डॉल्स और बॉलीवुड की सोनम कपूर की उपस्थिति और प्रदर्शन होंगे। वैराइटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोनम कपूर Commonwealth virtual choir को पेश करते हुए स्टेज पर स्पोकन वर्ड पीस देंगी। उनतीस, हाल ही में फिल्मफेयर रेड कार्पेट पर जाह्नवी कपूर ने कदम रखा तो हर किसी की निगाहें उन पर ही थम गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी शेयर की हैं। साथ ही उन्होंने खुलासा किया है कि रेड कार्पेट और स्टेज परफॉर्मेंस के ठीक पहले उन्होंने ऊप्स मोमेंट जैसी स्थिति को कैसे संभाला। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी कई तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए जाह्नवी कपूर ने लिखा है- 'रेड कारपेट से पाँच मिनट पहले और स्टेज पर परफॉर्म करने से बारह मिनट पहले जब आपकी जिप खराब हो जाए। ' उनतीस, बीते दिन रणबीर कपूर अपनी मां नीतू कपूर के साथ एक स्किन केयर बुक लॉन्च इवेंट में पहुंचे थे। इवेंट के दौरान रणबीर और नीतू दोनों ही अपनी स्किन प्रॉब्लमस को लेकर दिल की बातें कर रहे थे। बातों का सिलसिला चल ही रहा था कि रणबीर भूल गए कि उन्होने अपने हाथ में कॉफी का कप पकड़ा हुआ है। गलती से उनके कप से पूरी कॉफी उनकी पैंट पर गिर गई। लेकिन रणबीर ने काफी सहजता से पूरी सिचुएशन को संभाला। उनतीस, बीते दिन यानि की शुक्रवार को शाहरुख खान को श्रीनगर एयरपोर्ट पर देखा गया, जब बॉलीवुड सुपरस्टार को साथी यात्रियों ने घेर लिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, जहां शाहरुख खान भीड़ से घिरे नजर आ रहे हैं। जबकि फैंस उनके साथ सेल्फी लेने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। भीड़ से रास्ता बनाते हुए अभिनेता आगे बढ़ रहे हैं। शाहरुख यहां ऑल ब्लैक आउटफिट में नजर आ रहे हैं। उनतीस, आलिया भट्ट "फैशन की सबसे बड़ी नाइट आउट" मेट गाला में अपनी शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह प्रबल गुरुंग की आउटफिट में रेड कार्पेट की शोभा बढ़ाएंगी, और हर कोई इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए आलिया का लुक क्या है। आलिया को पैपराजी ने शनिवार तड़के एयरपोर्ट पर स्पॉट किया, जब वह गाला के लिए न्यूयॉर्क जा रही थीं। मुंबई एयरपोर्ट में एंट्री करते ही आलिया ने पैपराजी को मुस्कुराते हुए हेलो किया। उनतीस, टेलीविजन एक्ट्रेस आरती सिंह को पिछले हफ्ते मुंबई के एक रेस्तरां में हाथ में चोट लग गई है, जिसके बाद उन्हें लगभग छह टांके लगे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, तेईस अप्रैल को एक रेस्तरां में अपने दोस्तों के साथ डिनर करते समय आरती के हाथ में चोट लग गई थी। सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस ने अपना वीडियो शेयर किया है। जिसे देखकर एक्ट्रेस के फैंस काफी परेशान हो रहे हैं। उनतीस, मां सीता नवमी के अवसर पर टीम आदिपुरुष ने "राम सिया राम" के ऑडियो टीज़र के साथ कृति सैनन अभिनीत जानकी के आकर्षक मोशन पोस्टर को रिलीज किया। आदिपुरूष का निर्देशन ओम राउत ने किया हैं और टी-सीरीज़ के भूषण कुमार और कृष्ण कुमार, ओम राउत, प्रसाद सुतार और रेट्रोफाइल्स के राजेश नायर द्वारा निर्मित है। यह फिल्म सोलह जून दो हज़ार तेईस को विश्व स्तर पर रिलीज़ होने के लिए तैयार है।
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( शगुन हंस, योल )
गोपालपुर के चिडि़याघर से तीन तेंदुए फरार हो गए। अब तक तो हिमाचल से कैदियों के भागने के समाचार आते थे, अब तो जानवर भी भागने लगे हैं। व्यवस्थाएं ऐसी ही हैं प्रदेश में, पहले शेरों को खराब चिकन खिलाकर मार दिया गया। कुछ दिन पहले ही समाचार यह भी पढ़ने को मिला कि मांस खाने वाले जानवर घास खाकर गुजारा कर रहे हैं। यानी यह समझें कि हम किसी काबिल नहीं हैं।
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गोपालपुर के चिडि़याघर से तीन तेंदुए फरार हो गए। अब तक तो हिमाचल से कैदियों के भागने के समाचार आते थे, अब तो जानवर भी भागने लगे हैं। व्यवस्थाएं ऐसी ही हैं प्रदेश में, पहले शेरों को खराब चिकन खिलाकर मार दिया गया। कुछ दिन पहले ही समाचार यह भी पढ़ने को मिला कि मांस खाने वाले जानवर घास खाकर गुजारा कर रहे हैं। यानी यह समझें कि हम किसी काबिल नहीं हैं।
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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सूक्खू ने सरकार से मांग की है। सुक्खू ने कहा कि अनेक फल पक कर तैयार हैं और उन्हें पैक करने के लिए बॉक्स नहीं मिल रहे हैं। सरकार बागवानों के लिए बॉक्स का प्रबंध कराए। कोरोना महामारी के चलते बॉक्स की मार्केट में भारी किल्लत हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि बागवानों को बॉक्स उपलब्ध हो सकें।
सूक्खू ने कहा कि सीएम बद्दी, परमाणु में स्थित गत्ता फैक्टरियों को उत्पादन शुरू करने की मंजूरी दें। महामारी के मद्देनजर जरूरी हिदायतों के साथ उत्पादन शुरू कराया जाए। इससे बागवानों को बॉक्स उपलब्ध हो सकेंगे। इससे वे अपने फलों को पैक कर मार्केट में ला पाएंगे। इस समय चेरी, आरु ,पल्म समेत कई फल बागानों में पक चुके हैं, लेकिन बागवान उन्हें तोड़ नहीं पा रहा। चूंकि, तोड़ने के बाद उन्हें पैक करना जरूरी है। इसलिए उन्हें समय सबसे अधिक जरूरत बॉक्स की है। एक-महीने में सेब सीजन भी शुरू हो जाएगा। उसके लिए भी बॉक्स की जरूरत पड़ेगी।
अगर समय रहते गत्ता फैक्टरियों में उत्पादन शुरू न हुआ तो बागवानों की मांग पूरी करना मुश्किल होगा। जिससे सेब की फसल बिना पैकिंग खराब हो सकती है। सूक्खू ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण समय पर पॉलिनेशन के लिए मधुमक्खियां, सेब की पैकेजिंग के लिए सामान और लेबर न मिलने की वजह से इस बार 4,500 करोड़ रुपए की सेब बागवानी पर खतरे के बादल गहरा गए हैं।
हिमाचल के लाखों लोग केवल सेब बागवानी के चलते रोजी रोटी पा रहे हैं। ऐसे में सेब बागवानी के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाली मधुमक्खियों की उपलब्धता न होने के चलते नुकसान के आसार हैं। सेब बागवानी 95 फीसदी मधुमक्खियों की वजह से होने वाली पॉलिनेशन के सहारे टिकी हुई है। हिमाचल की 80 फीसदी बागवानी के लिए मधुमक्खियां बाहरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार से लाई जाती हैं। लॉकडाउन की स्थिति में अभी तक बाहरी राज्यों से मधुमक्खियों के बॉक्स बागवानों तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने सीएम जयराम ठाकुर से मधुमक्खी पालकों की आमद हिमाचल में सुनिश्चित करने को कहा है। इन्हें पूरी जांच पड़ताल के बाद लाएं ताकि पॉलीनेशन हो सके।
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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सूक्खू ने सरकार से मांग की है। सुक्खू ने कहा कि अनेक फल पक कर तैयार हैं और उन्हें पैक करने के लिए बॉक्स नहीं मिल रहे हैं। सरकार बागवानों के लिए बॉक्स का प्रबंध कराए। कोरोना महामारी के चलते बॉक्स की मार्केट में भारी किल्लत हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि बागवानों को बॉक्स उपलब्ध हो सकें। सूक्खू ने कहा कि सीएम बद्दी, परमाणु में स्थित गत्ता फैक्टरियों को उत्पादन शुरू करने की मंजूरी दें। महामारी के मद्देनजर जरूरी हिदायतों के साथ उत्पादन शुरू कराया जाए। इससे बागवानों को बॉक्स उपलब्ध हो सकेंगे। इससे वे अपने फलों को पैक कर मार्केट में ला पाएंगे। इस समय चेरी, आरु ,पल्म समेत कई फल बागानों में पक चुके हैं, लेकिन बागवान उन्हें तोड़ नहीं पा रहा। चूंकि, तोड़ने के बाद उन्हें पैक करना जरूरी है। इसलिए उन्हें समय सबसे अधिक जरूरत बॉक्स की है। एक-महीने में सेब सीजन भी शुरू हो जाएगा। उसके लिए भी बॉक्स की जरूरत पड़ेगी। अगर समय रहते गत्ता फैक्टरियों में उत्पादन शुरू न हुआ तो बागवानों की मांग पूरी करना मुश्किल होगा। जिससे सेब की फसल बिना पैकिंग खराब हो सकती है। सूक्खू ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण समय पर पॉलिनेशन के लिए मधुमक्खियां, सेब की पैकेजिंग के लिए सामान और लेबर न मिलने की वजह से इस बार चार,पाँच सौ करोड़ रुपए की सेब बागवानी पर खतरे के बादल गहरा गए हैं। हिमाचल के लाखों लोग केवल सेब बागवानी के चलते रोजी रोटी पा रहे हैं। ऐसे में सेब बागवानी के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाली मधुमक्खियों की उपलब्धता न होने के चलते नुकसान के आसार हैं। सेब बागवानी पचानवे फीसदी मधुमक्खियों की वजह से होने वाली पॉलिनेशन के सहारे टिकी हुई है। हिमाचल की अस्सी फीसदी बागवानी के लिए मधुमक्खियां बाहरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार से लाई जाती हैं। लॉकडाउन की स्थिति में अभी तक बाहरी राज्यों से मधुमक्खियों के बॉक्स बागवानों तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने सीएम जयराम ठाकुर से मधुमक्खी पालकों की आमद हिमाचल में सुनिश्चित करने को कहा है। इन्हें पूरी जांच पड़ताल के बाद लाएं ताकि पॉलीनेशन हो सके।
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चित्तसंबोधने-उपभोगेन कामस्तव वर्धिष्यते । विवेक सामर्थ्यादेव त्वमैहिकमामुष्मिकञ्च विषयजातं हिरण्यगर्भपदपर्यन्तं सर्व काकविष्ठावन्मनसा सन्त्यज्य निर्वृत्तो भव ।
ननु मनुजशरीरं तत्सम्बन्धि स्वीसुतादि च दुःखहेतुत्वेन त्याज्यमपि, देवादिशरीरमतिपुण्यकर्मफलभूतं कथं दुःखहेतुः
करो । उपभोग करने से अभिलाषाएं और बढ़ेगी। विवेक के प्रायल्य से ही इस लोक और परलोक के जो ब्रह्मलोक तक विषय- पुञ्ज हैं उन सय को काक-विष्ठा की तरह छोड़ कर निवृत्त हो जाओ।
मनुष्य-शरीर और उनके सम्बन्धी जो स्त्री, पुत्र आदि हैं वे सब दुःख के हेतु हैं अतः वे परित्याज्य हैं किन्तु देवता आदिके शरीर जो अत्यन्त पुण्य कर्म के फल रूप हैं वे कैसे दुःख के हेतु कहे
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चित्तसंबोधने-उपभोगेन कामस्तव वर्धिष्यते । विवेक सामर्थ्यादेव त्वमैहिकमामुष्मिकञ्च विषयजातं हिरण्यगर्भपदपर्यन्तं सर्व काकविष्ठावन्मनसा सन्त्यज्य निर्वृत्तो भव । ननु मनुजशरीरं तत्सम्बन्धि स्वीसुतादि च दुःखहेतुत्वेन त्याज्यमपि, देवादिशरीरमतिपुण्यकर्मफलभूतं कथं दुःखहेतुः करो । उपभोग करने से अभिलाषाएं और बढ़ेगी। विवेक के प्रायल्य से ही इस लोक और परलोक के जो ब्रह्मलोक तक विषय- पुञ्ज हैं उन सय को काक-विष्ठा की तरह छोड़ कर निवृत्त हो जाओ। मनुष्य-शरीर और उनके सम्बन्धी जो स्त्री, पुत्र आदि हैं वे सब दुःख के हेतु हैं अतः वे परित्याज्य हैं किन्तु देवता आदिके शरीर जो अत्यन्त पुण्य कर्म के फल रूप हैं वे कैसे दुःख के हेतु कहे
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अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर वार्ड में सफाई से जुड़े संसाधनों का बंटवारा किया जाए। जब हर वार्ड के पास अपने संसाधन होंगे, तो सफाई व्यवस्था में अपने आप सुधार नजर आएगा। उन्होंने जोन उपायुक्त और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों को प्रतिदिन कैरिंग चार्ज और स्वच्छता एप की शिकायतों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों और स्वास्थ्य निरीक्षकों से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्र के दुकानदारों को दुकान पर कचरा पात्र रखने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास समितियों और पार्षदों के साथ मिलकर कचरा डिपो के लिए प्वॉइंट चिह्नित किए जाएं। उन्होंने कहा कि लोगों को कचरा निर्धारित समय और निर्धारित स्थल पर डालने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने उपायुक्त (कार्मिक) को निर्देश दिए टैक्स कलेक्शन और रेवन्यू बढ़ाने के लिए हर जोन में दो अतिरिक्त कर्मचारी लगाएं। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी अच्छा काम करेगा, उसे नगर निगम जयपुर पुरस्कृत करेगा।
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अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर वार्ड में सफाई से जुड़े संसाधनों का बंटवारा किया जाए। जब हर वार्ड के पास अपने संसाधन होंगे, तो सफाई व्यवस्था में अपने आप सुधार नजर आएगा। उन्होंने जोन उपायुक्त और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों को प्रतिदिन कैरिंग चार्ज और स्वच्छता एप की शिकायतों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों और स्वास्थ्य निरीक्षकों से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्र के दुकानदारों को दुकान पर कचरा पात्र रखने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास समितियों और पार्षदों के साथ मिलकर कचरा डिपो के लिए प्वॉइंट चिह्नित किए जाएं। उन्होंने कहा कि लोगों को कचरा निर्धारित समय और निर्धारित स्थल पर डालने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने उपायुक्त को निर्देश दिए टैक्स कलेक्शन और रेवन्यू बढ़ाने के लिए हर जोन में दो अतिरिक्त कर्मचारी लगाएं। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी अच्छा काम करेगा, उसे नगर निगम जयपुर पुरस्कृत करेगा।
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इंडिया न्यूज़,दिल्ली (ChatGPT): पिछले साल नवंबर में लॉन्च नया टेक स्टार्टअप Artificial Intelligence ने अपने AI चैटबॉट ChatGPT के लिए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान की घोषणा कर दी है। इस पेड सब्सक्रिप्शन के बाद यूजर्स को पहले से बेहतर और फास्ट सर्विस मिलेगी। पेड सब्सक्रिप्शन का खुलासा ChatGPT ने LinkedIn पर पोस्ट कर के किया है।
क्या है AI चैटबॉट ChatGPT ?
AI चैटबोट Artificial Intelligence का प्रयोग कर के आपके किसी भी टॉपिक को कम्पलीट टेक्स्ट और आइडिया मे लिख देता है। इसमे बिल्कुल इंसानो जैसा ही काम करने की क्षमता है, आप इसका इस्तेमाल कविता, कहानी, फ्रीलांसिंग काम या होम र्वक करने में कर सकते है।
कितने में ले सकते ChatGPT प्लान?
ChatGPT ने अपने नए ChatGPT Plus प्लान लॉन्च कर दिया है, इस नए ChatGPT Plus में ChatGPT के मुकाबले यूजर्स को ज्यादा फीचर्स मिलेंगे, जो फ्री यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। पेड सब्सक्रिप्शन के बाद यूजर्स को प्रीमियम के साथ नए फीचर्स का प्रॉयोरिटी एक्सेस और ज्यादा API रिक्वेस्ट लिमिट मिलेगी। इस नए पेड प्लान के लिए विदेशी यूजर्स को हर महीने 20 डॉलर रुपए खर्च करने होंगे। वहीं भारतीय यूजर्स को करीब 1600 रुपये ChatGPT Plus प्लान के लिए चुकाने होंगे।
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इंडिया न्यूज़,दिल्ली : पिछले साल नवंबर में लॉन्च नया टेक स्टार्टअप Artificial Intelligence ने अपने AI चैटबॉट ChatGPT के लिए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान की घोषणा कर दी है। इस पेड सब्सक्रिप्शन के बाद यूजर्स को पहले से बेहतर और फास्ट सर्विस मिलेगी। पेड सब्सक्रिप्शन का खुलासा ChatGPT ने LinkedIn पर पोस्ट कर के किया है। क्या है AI चैटबॉट ChatGPT ? AI चैटबोट Artificial Intelligence का प्रयोग कर के आपके किसी भी टॉपिक को कम्पलीट टेक्स्ट और आइडिया मे लिख देता है। इसमे बिल्कुल इंसानो जैसा ही काम करने की क्षमता है, आप इसका इस्तेमाल कविता, कहानी, फ्रीलांसिंग काम या होम र्वक करने में कर सकते है। कितने में ले सकते ChatGPT प्लान? ChatGPT ने अपने नए ChatGPT Plus प्लान लॉन्च कर दिया है, इस नए ChatGPT Plus में ChatGPT के मुकाबले यूजर्स को ज्यादा फीचर्स मिलेंगे, जो फ्री यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। पेड सब्सक्रिप्शन के बाद यूजर्स को प्रीमियम के साथ नए फीचर्स का प्रॉयोरिटी एक्सेस और ज्यादा API रिक्वेस्ट लिमिट मिलेगी। इस नए पेड प्लान के लिए विदेशी यूजर्स को हर महीने बीस डॉलर रुपए खर्च करने होंगे। वहीं भारतीय यूजर्स को करीब एक हज़ार छः सौ रुपयापये ChatGPT Plus प्लान के लिए चुकाने होंगे।
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राव ने कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुये शिखर बैठक में समूह के नेता आगे की रणनीति पर विचार विमर्श करेंगे और दिशा तय करेंगे. शिखर बैठक में होने वाले बातचीत और फैसले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहते हुये निरूपमा राव ने कहा कि समूह के नेता अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, वित्तीय नियामक सुधार, व्यापार और संरक्षणवाद, पर्यावरण बदलाव तथा विकास जैसे मुद्दों पर गौर कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ब्रिटेन और कनाडा के प्रधानमंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं. इसके साथ ही ब्राजील प्रतिनिधमंडल के प्रमुख के साथ भी बैठक कर सकते हैं.
राव ने कहा कि प्रधानमंत्री शिखर बैठक में पहुंचने वाले विश्व नेताओं के साथ आपसी हित के विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार विमर्श करेंगे. यह पूछे जाने पर कि वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार के लिये प्रधानमंत्री क्या समूह-20 को ढांचागत निर्माण को अपने एजेंडा में रखने का सुझाव देंगे, इस पर राव ने कहा समूह. 20 का एजेंडा मजबूत, सतत और संतुलित आर्थिक वृद्धि है इसमें इस मुद्दे का भी समाधान होगा.
चीन की अपनी मुद्रा को नीचा रखने के बारे में पूछे जाने पर राव ने कहा कि हाल में समूह 20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में इस बारे में व्यापक सहमति बनी है कि समूह के देशों को अपनी मुद्रा को बाजार शाक्तियों पर छोड देना चाहिये.
मेजबान के रूप में दक्षिण कोरिया स्पेन, मालावी (अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष), इथोपिया (नईपीएडी के अध्यक्ष), वियतनाम (आसियान के अध्यक्ष) और सिंगापुर के नेताओं को भी आमंत्रित किया है.
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राव ने कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुये शिखर बैठक में समूह के नेता आगे की रणनीति पर विचार विमर्श करेंगे और दिशा तय करेंगे. शिखर बैठक में होने वाले बातचीत और फैसले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहते हुये निरूपमा राव ने कहा कि समूह के नेता अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, वित्तीय नियामक सुधार, व्यापार और संरक्षणवाद, पर्यावरण बदलाव तथा विकास जैसे मुद्दों पर गौर कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ब्रिटेन और कनाडा के प्रधानमंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं. इसके साथ ही ब्राजील प्रतिनिधमंडल के प्रमुख के साथ भी बैठक कर सकते हैं. राव ने कहा कि प्रधानमंत्री शिखर बैठक में पहुंचने वाले विश्व नेताओं के साथ आपसी हित के विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार विमर्श करेंगे. यह पूछे जाने पर कि वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार के लिये प्रधानमंत्री क्या समूह-बीस को ढांचागत निर्माण को अपने एजेंडा में रखने का सुझाव देंगे, इस पर राव ने कहा समूह. बीस का एजेंडा मजबूत, सतत और संतुलित आर्थिक वृद्धि है इसमें इस मुद्दे का भी समाधान होगा. चीन की अपनी मुद्रा को नीचा रखने के बारे में पूछे जाने पर राव ने कहा कि हाल में समूह बीस के वित्त मंत्रियों की बैठक में इस बारे में व्यापक सहमति बनी है कि समूह के देशों को अपनी मुद्रा को बाजार शाक्तियों पर छोड देना चाहिये. मेजबान के रूप में दक्षिण कोरिया स्पेन, मालावी , इथोपिया , वियतनाम और सिंगापुर के नेताओं को भी आमंत्रित किया है.
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नीति के उपदेश यही सिखाते हैं कि त्रिवर्ग की उन्नति करनी चाहिए, जिससे मोक्ष की प्राति सुकर हो जाय । त्रिवर्ग से तात्पर्य धर्म, अर्थ और काम तीनों से है। प्राचीन समय में भारत की सम्पत्ति सभी देशों के लिए स्पृहणीय थी । काम, अर्थात् व्यवहार तो भारत से ही और देशों ने सीखा है। सुखोपभोग की सामग्री भारत में कितनी विपुल थी, इसका पता प्राचीन काव्यों को पढ़ने से बड़ी आसानी से लग जाता है ।
यह सच होते हुए भी भारतीय सभ्यता में इतनी विशेषता अवश्य है कि यहाँ धर्म को सभी पुरुषार्थों में प्रधान स्थान दिया गया है । धर्म का आत्मा से सीधा सम्बन्ध है । उससे आत्मा वलवान् होता है। जब कभी व्यवहार में धर्म के साथ अर्थ-काम का संघर्ष उपस्थित होता है, जब कभी प्रश्न खड़ा होता है कि या तो धर्म को अपना लो या अर्थ को । ऐसे समय में हम सदा धर्म को ही अपनाते हैं, यही हमारे शास्त्रकारों का उपदेश है कि -
परित्यजेदर्थ कामौ च स्यातां धर्मवर्जितो ।
अर्थात्, धर्म से विरुद्ध अर्थ और काम को छोड़ देना चाहिए । इस विषय का सूक्ष्म से सूक्ष्म विवेचन धर्मशास्त्रकारों ने किया है । भगवान् मनु कहते हैं कि - अद्रोहेणैव भूतानामल्पद्रोहेण वा पुनः ।
द्रव्योपार्जन और अपनी उन्नति का सम्पादन अवश्य ही मानव-मात्र का कर्त्तव्य है, परन्तु वह द्रव्योपार्जन या आत्मोन्नति ऐसी हो, जिससे किसी से द्रोह न हो । दूसरों को धक्का मारकर उपार्जन करना ठीक नहीं । प्रश्न होता है कि किसी भी अर्थोपार्जन या उन्नति में परद्रोह तो अवश्य होगा । मान लिया जाय कि किसी मनुष्य को कोई अच्छा पद मिला, तो क्या उसका यह उपार्जन विना द्रोह किये हो गया ? नहीं । उसी के साथ जो दूसरे लोग उस पद के इच्छुक थे, उनको हटाने के कारण द्रोह तो हो ही गया । तब अद्रोह से उपार्जन कैसे सम्भव है । इसी सूक्ष्म बात को ध्यान में रखकर मनु भगवान् ने साथ ही कह दिया था कि 'अल्पद्रोहेण वा पुनः', अर्थात् यदि द्रोह अपरिहार्य हो, तो वह बहुत कम रूप में लिया जाय । जैसे पद प्राप्त होने पर जो द्रोह औरों से होता है, वह साक्षात् अपकार करने से नहीं, अपि तु दूसरों के द्वारा हुआ है । इसलिए यह अल्पद्रोह है । कारण वहाँ द्रोह लक्ष्य नहीं था, अपनी उन्नति ही लक्ष्य था । इस प्रकार का द्रोह उपार्जन में लक्ष्य है। परन्तु साक्षात् द्रोह नहीं करना चाहिए । जैसे, शिकायतों और आरोपो के द्वारा दूसरे को पदच्युत करवाकर फिर स्वयं उस स्थान को लेना । इस प्रकार का उपार्जन धर्म-विरुद्ध है । यह नहीं होना चाहिए। इस प्रकार, धार्मिक नेताओं ने सर्वदा हमें सचेत किया है कि हम कभी प्रधान को, अर्थात् धर्म को न भूलें । धर्म का ही दूसरा नाम है कर्त्तव्य । कर्त्तव्य और धर्म में भेद नहीं । कर्तव्य निष्ठा ही भारतीय संस्कृति की प्रधान वस्तु है । कर्त्तव्य में आलस्य, प्रमादादि को स्थान नहीं । इस प्रकार, धर्म और उससे अविरुद्ध अर्थ और काम का आचरण करने से मोक्ष नाम का परम पुरुपार्थ अपने आप सिद्ध हो जाता है ।
शरीर ग्रहण करता है । यदि भारतीय संस्कृति का वैशिष्ट्य पुनर्जन्मवाद है, तो भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत आनेवाले बौद्ध, जैन, सिक्ख, आर्यसमाज, ब्राह्मसमाज आदि जितने सम्प्रदाय हैं, वे सभी इस पुनर्जन्मवाद को अवश्य स्वीकार करते हैं। इस प्रकार, आचार और विचार ये, दो जो संस्कृति के पहलू हैं, उनमें विचारांश में भारतीयों का ऐक्य स्थापित हैं। शरीर के अतिरिक्त आत्मा है। जिस प्रकार शरीर के प्रति भोजनाच्छादनादि हमारे अनेक कर्त्तव्य हैं, उसी प्रकार आत्मा के प्रति भी हमारे कुछ कर्त्तव्य हैं । इस प्रकार के अध्यात्म पर अवलम्बित व्यवहार ही आचारांश में भारतीयों की एकता को प्रतिष्ठित करते हैं। प्राचीन समय में भी भारत । प्राचीन समय में भी भारत में अध्यात्म-दृष्टि प्रधान रही है । आत्मा को उन्नत वनानेवाले आचरणों को ही धर्म कहा जाता है। आजकल शिक्षित लोग धर्म से चौंकते हैं। बहुत से लोग धर्म को एक हौवा समझते हैं । परन्तु खेद है कि ये धर्म के स्वरूप पर ध्यान नहीं देते। धर्म न तो कोई हौवा है और न कोई चौंकानेवाली चीज है, न वह अवनति के मार्ग में ढकेलनेवाली कोई वस्तु है। धर्म उसी का नाम है, जो उन्नति की ओर ले जाय । धर्म का लक्षण करते हुए कणाद ने स्पष्ट कर दिया है कि - -'यतोऽभ्युदयनिःश्रेयसः सिद्धिः स धर्मः', अर्थात् जो क्रमशः उन्नत करता हुआ चरम उन्नति तक ले जाय, वही धर्म है । वह उन्नति न केवल संसार की ही है, परन्तु उसके साथ-साथ आत्मा की चरम उन्नति है, अर्थात् मोक्ष भी धर्म के द्वारा ही होता है। आजकल यन्त्र-युग में नये-नये यन्त्रों का आविष्कार ही उन्नति की ओर अग्रसर होना है। किन्तु विचार कीजिए कि ये सव यन्त्रों को कौन बनाता है। मनुष्य की कल्पना शक्ति ही इन यन्त्रों को जन्म देनेवाली है। यह कल्पना-शक्ति किस यन्त्र से प्रादुर्भूत होती है, इसका ज्ञान भारतीय संस्कृति में मुख्य माना गया था । यन्त्रों को जन्म देनेवाली कल्पना शक्ति के उद्भावक मन, बुद्धि और सब-के-सव चैतन्यप्रद आत्मा का विचार आध्यात्मिकवाद है । भारतीय संस्कृति के नेता यही कहते हैं कि जो अपने-आपका परिष्कार वा सुधार न कर सका, वह अन्य वस्तुओं का निर्माता होने पर महत्त्वशाली नहीं कहा जा सकता। इसलिए, आध्यात्मिकवाद की यहाँ की संस्कृति में प्रधानता हो गई है ।
कुछ लोग आक्षेप करते हैं कि अध्यात्मवाद के अनुयायियों ने धर्म के आगे अर्थ और काम को गिरा दिया। वे केवल धर्म-ही-धर्म को पकड़े रहे, और देश की अनेक प्रकार की उन्नति में बाधक सिद्ध हुए। परन्तु भारतीय संस्कृति के विचारकों को यह अच्छी तरह मालूम है कि हमारे यहाँ अर्थ और काम से विमुख होने का कहीं विधान नहीं । धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों हमारे यहाँ पुरुपार्थ माने गये हैं । पुरुषार्थ का मतलब है, जो पुरुषों के द्वारा चाहने योग्य हों, अथवा मनुष्य के चार लक्ष्य हैं । 'पुरुपैरर्थ्यते', यह व्युत्पत्ति उपर्युक्त अर्थ को सिद्ध करती है। उनमें अर्थ और काम का ही सामान रूप से समावेश है, तब अर्थ और काम की उपेक्षा का आरोप कैसे माननीय हो सकता है । यह बात भी नहीं है कि भारत में कभी अर्थ, काम की उन्नति हुई ही नही । धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र, अर्थात् व्यवहार शास्त्र और । - कलाशास्त्र तीनों भारत में पूर्णतया उन्नत थे । प्राचीन इतिहास इसका साक्षी है । सभी
होता है, जो पानी के साथ चने भी खिलाता है; क्योंकि वह अधिक लोगों का अधिक हित सम्पादन करता है । परन्तु, विवेक-दृष्टि कभी उसे धर्मात्मा नहीं कहेगी; क्योंकि उसका उद्देश्य लोगों को लाभ पहुॅचाने का नहीं । भारतीय दृष्टि में वही धर्मात्मा है, जिसने पहले प्याऊ खोला; क्योंकि वह निःस्वार्थ भावना से पिपासा- निवृत्ति के लिए जल पिलाता है। उसके कार्य में किसी प्रकार की दुरभिसन्धि नहीं ।
दूसरा उदाहरण लीजिए । अमेरिका में जब सर्वप्रथम ट्रामगाड़ी चलने को थी, तब लोग बड़े उत्सुक थे । कम्पनी ने भी पूरी तैयारी कर ली थी । परन्तु फिर भी महीनों बीत गये । सरकारी आज्ञा मिलने में देर हो रही थी । ज्यादा देर होती देख कम्पनी के डाइरेक्टर ने सरकारी ऑफिसर को तगड़ी-सी रिश्वत दे दी । फलतः, ट्राम चालू करने का आर्डर शीघ्र प्राप्त हो गया और शीघ्र ट्रामगाड़ी के चलने से जनता को आराम हो गया । पाश्चात्य परिभाषा के अनुसार उस प्रकार रिश्वत देना धर्म होना चाहिए; क्योंकि वह अधिकांश मनुष्यों के लाभ के लिए कार्य था । परन्तु, परिणाम उसका उल्टा हुआ । वहाँ के हाईकोर्ट में उस रिश्वत लेने पर केस चला और अभियोग प्रमाणित होने पर देने और लेनेवालों को दण्ड भोगना पड़ा । इसलिए, हमारी संस्कृति के अनुसार धर्म के सम्बन्ध में ऐसी बातें नहीं चल सकतीं । आध्यात्मिक दृष्टि से ही विचार होगा। अमुक कार्य के करने में अमुक मनुष्य का उद्देश्य क्या है, और उस कार्य का परिणाम क्या है । यदि उद्देश्य और परिणाम बुरा है, तो अच्छा काम भी अधर्म ही ठहरेगा और उद्देश्य एवं परिणाम अनुचित न रहने से बुरे काम भी अच्छे हो जायेंगे । किसी भी कार्य में कर्त्ता की नीयत जाने विना धर्म का निर्णय नहीं हो सकता । इसके लिए भी आध्यात्मिकता की ओर आना होगा । यों धर्म और कर्त्तव्य के निर्णय में आध्यात्मिकता की ही कमी हुई, तब भारत की ओर ही सबकी दृष्टि केन्द्रित होती है। भारत सर्वदा से आध्यात्मिक दृष्टि को सर्वोपरि मानता आया है। उपनिषद् की एक आख्यायिका है, याज्ञवल्क्य जब वृद्ध हुए, तब घर छोड़ वन में एकान्तवास करते हुए ब्रह्म-चिन्तन की इच्छा हुई । उनकी दो पत्नियाँ थी - मैत्रेयी और कात्यायनी । उन्होंने वन में जाने के पहले अपनी कुछ सम्पत्ति थी, उसको दोनों पलियों में विभक्त कर देना चाहा। उन्होंने मैत्रेयी को बुलाया और उसे समझाया कि मै अपनी जो कुछ सम्पत्ति है, उसको तुम दोनों में बाँट देना चाहता हूँ । मैत्रेयी तो आर्य ललना थी । ऋषि की सम्पत्ति क्या हो सकती है। कमण्डलु, मृगचर्म, कौपीन, कुटिया, यही तो ऋषियों के आश्रम में होता था । परन्तु मैत्रेयी ने कहा भगवन् ! यदि आप मुझे वह सारी पृथ्वी दे दें, जो रत्नों, सुवणों और समस्त धन-धान्यादि से लदी हुई हो, उसको प्राप्त करके तो मैं अमर हो जाऊँगी न ? याज्ञवल्क्य ने कहा - सम्पत्ति से कोई मनुष्य अमर तो नहीं हो सकता । हॉ, जिस प्रकार धनवानों का जीवन बीतता है, सैकड़ों नौकर रखते हैं, तरह-तरह के वस्त्र पहन सकते हैं, सब प्रकार के स्वादिष्ठ भोजन प्राप्त हो सकते हैं, उस प्रकार सुख से जीवन व्यतीत हो सकता है। परन्तु सम्पत्ति से अमरता तो नहीं मिल सकती । इस पर मैत्रेयी ने कहा - जिसको लेकर अमर नहीं हो सकती, उसे लेकर क्या करूँगी । जिसकी खोज में आप घर को छोड़कर वन में जा रहे हैं, अपने उस लाभ में आप हमें भी
मोक्ष को ही यह संस्कृति परम पुरुषार्थ कहती है। वह मोक्ष क्या है ? आत्मा को स्वतंत्र बना देना ही मोक्ष है । कर्त्तव्य का आचरण करते-करते मन, बुद्धि और शरीर पवित्र हो जाते हैं। इस प्रकार के पवित्र मन और बुद्धि में आत्मा की स्वतंत्र सत्ता प्रतीत होने लगती है। वह आत्मा हमें कहीं बाहर से लेने नहीं जाना पड़ेगा, वह तो सबके पास है। परन्तु मन और बुद्धि अपवित्र होने से उसे ग्रहण नहीं कर पाती । जब कर्त्तव्याचरण द्वारा मन, बुद्धि पवित्र हो जाती है, तब आत्मा का दर्शन होना सुगम हो जाता है । इसीको मोक्ष कहते हैं ।
अव प्रश्न यह उठता है कि यह संसार तो प्रश्नों और समस्याओं का जंगल है। यह कैसे पहचाना जाय कि अमुक कर्त्तव्य है, और अमुक धर्म है, जहाँ कार्यों की शृङ्खला सामने खड़ी है। बहुत से कार्य कर्त्तव्य-कोटि में आते हैं, बहुत-से त्याज्य हैं । सामान्य मानव बुद्धि यह कैसे समझे कि यह करना चाहिए, और यह छोड़ना चाहिए ? इस प्रश्न के अनेक समाधान भारतीय ग्रन्थों में मिलते हैं। अनेक ऐसी पहचान निश्चित की गई है । कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य का विचार करनेवाले पाश्चात्य आधिभौतिकवादी पहले उन कार्यों को कर्त्तव्य-कोटि में रखते थे, जो सत्र मनुष्यों को लाभ पहुँचानेवाले हों । ऐसी परिभाषा बना लेने पर उनके सामने जब यह प्रश्न आया कि कोई कार्य ऐसा नहीं, जो सभी मनुष्यों को लाभ ही लाभ पहुँचाता है। किसी-न-किसी को किसी कार्य में हानि भी अवश्य होगी। चोरी को अपराध घोषित करना शायद चोरों को नागवार गुजरेगा । रोगियों की संख्या में कमी होना डॉक्टरों की रोजी छीनना होगा । भ्रातृ-भाव और वन्धुत्व की वृद्धि और द्वेष का अभाव होने से वकीलों की जीविका का प्रश्न आ जायगा । शायद कोई वकील यह नहीं चाहता होगा कि मेरे मुवकिल आपस का झगड़ा भूल जायँ । ऐसी ही स्थिति में अच्छा-से-अच्छा माना जानेवाला कार्य भी कर्त्तव्य और धर्म न हो सकेगा; क्योंकि पाश्चात्य विद्वानों की पूर्व परिभाषा के अनुसार वह सब लोगों का हित सम्पादन नहीं करता। इस प्रश्न के सामने आने पर पश्चिमी विद्वानों ने अपनी परिभाषा बदल दी । उन्होंने कहा कि धर्म वह है, जो अधिकांश मनुष्यों को अधिक लाभ पहुँचानेवाला हो । लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने गीतारहस्य ग्रन्थ में इस प्रकार के समस्त पाश्चात्य मतों को सामने रखकर उनकी आलोचना प्रस्तुत करके यह सिद्ध कर दिया है कि धर्म-अधर्म या कर्त्तव्य-अकर्त्तव्य का निर्णय भौतिक दृष्टि से कथमपि सम्भव नहीं । उसके निर्णय के लिए तो आध्यात्मिक दृष्टि को ही अपनाना होगा । भौतिक परिभाषा में उन्होंने अनेक दृष्टान्तों से दोष दिखाये हैं । मान लीजिए कि गर्मी में तृपार्त्त जनों की प्यास बुझाने के लिए किसी ने प्याऊ लगाया। लोग उसके प्याऊ पर आते हैं और सुखादु शीतल जल पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं । उसके प्याऊ पर जल पीनेवालों की भीड़ देखकर सामनेवाले दूकानदार वनिये ने भी एक प्याऊ खोल दिया, जो पानी के साथ चने भी खिलाता है। वनिये का उद्देश्य लोगों को जल से तृप्त करना नहीं है, अपि तु अपना व्यापार चमकाना है। ज्यादा भीड़ बढ़ने पर लोग उसकी दूकान पर बैठकर खरीददारी भी करते हैं। अब यदि पाश्चात्य दृष्टि से कर्त्तव्याकर्त्तव्य का या धर्माधर्म का विचार करें, तो बनिया ही धर्मात्मा सिद्ध
भारतीय संस्कृति चच सकेगी। और, यह भी स्मरण रखना चाहिए कि कर्त्तव्य-निष्ठा वर्णाश्रम व्यवस्था के आधार पर ही स्थित हो सकती है, अन्यथा कर्त्तव्य का ज्ञान ही किस आधार पर हो सकेगा ? वर्ण व्यवस्था ही अपने-अपने वर्ण के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य निश्चित करती है । जिस वर्ण का जो धर्म है, उसमें फल का कुछ भी विचार न करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को प्रवृत्त होना चाहिए । यही कर्त्तव्य-निष्ठा है।
भारतीय संस्कृति के मुख्य ग्रन्थ भगवद्गीता में भी कर्त्तव्य बुद्धि को ही मुख्य माना गया है, और फल की अपेक्षा न कर कर्त्तव्य-पालन का नाम ही कर्मयोग रखा है। कर्मयोग एक बहुत उच्चकोटि की वस्तु है, जो क्या सामाजिक, क्या राजनीतिक, क्या धार्मिक सभी विषयों में अत्यन्त उपादेय सिद्ध होती है, किन्तु जब यह प्रश्न उठाया जाय कि फल की इच्छा न करें, तो किस कार्य में प्रवृत्ति करें ? क्योंकि, प्रवृत्ति का क्रम तो शास्त्रों में यही निर्धारित किया गया है कि पहले फल की इच्छा होती है, तब उसके साधन रूप से उपाय की इच्छा और उपाय की इच्छा से आत्मा में प्रयत्न होता है । प्रयत्न नाम की एक प्रेरणा उठती है और उस प्रेरणा से हाथ-पैर आदि इन्द्रियाँ प्रवृत्त होती हैं। यदि फलेच्छा ही न होगी, तो आगे का क्रम चलेगा ही कैसे ? और, प्रवृत्ति ही क्यों होगी ? तब इसका उत्तर यही हो सकता है कि जिसके लिए जो कर्म नियत है, उसमें उसे प्रवृत्त रहना चाहिए । 'नियतं कुरु कर्मलम्', यही भगवद्गीता का आदेश है । परन्तु किसके लिए कौन सा कर्म नियत है - इसका उत्तर तो वर्ण-व्यवस्था ही दे सकती है। उसमें ही भिन्न-भिन्न वर्णों के अपने-अपने कर्म नियत हैं, उनका अनुष्ठान विना फल की इच्छा के ही करते रहना चाहिए । यदि विना वर्ण व्यवस्था माने भी कर्त्तव्य-निष्ठा का कोई यह समाधान करे कि जगत् के लाभदायक कर्म फल की इच्छा विना ही करते रहना चाहिए अथवा आत्मा की आज्ञा जिन कर्मों के लिए मिले, वे कर्म करते रहना चाहिए, तो इन पक्षों में जो दोप आते हैं, उनका विवरण आरम्भ में ही दे दिया गया है कि सबका लाभदायक कोई भी कर्म हो नहीं सकता और किनको लाभ पहुँचाने का यत्न करें और किनकी हानि की उपेक्षा करें - इसका भी नियामक कुछ नहीं मिल सकता । आत्मा की आज्ञा भी भिन्न-भिन्न परिस्थिति में भिन्नभिन्न प्रकार की मिलती है। एक बार अनुचित कार्य करके जब आत्मा मलिन हो जाता है, तब वहाँ से अनुचित कार्यों की ही अनुमति मिलने लगती है। इससे आत्मा की आज्ञा पर भी निर्भर रहना बन नहीं सकता । सारांश यह है कि कर्मयोग-सिद्धान्त वर्णव्यवस्था के आधार पर ही बन सकता है और वह कर्मयोग - सिद्धान्त व्यवहार क्षेत्र से पार पाने का सबसे उत्तम साधन है । इसलिए, कर्त्तव्य निष्ठा वा कर्मयोग की सिद्धि के लिए वर्णाश्रम व्यवस्था को भारतीय संस्कृति में प्रधान स्थान दिया गया है ।
वर्त्तमान में वर्ण-व्यवस्था पर बहुत आक्षेप होते हैं और इसी पर भारत की अवनति का बहुत-कुछ दायित्व रखा जाता है। इसे दूषित करनेवाले विद्वानों का कथन है कि वर्ण-व्यवस्था ने ही समाज मे आपस में फूट डाल दी । परस्पर ऊँच-नीच
हिस्टेदार बनाइए । तब याज्ञवल्क्य ने उसको ज्ञानोपदेश देना प्रारम्भ किया। तालर्य यह कि प्राचीन काल में भारत की त्रियों में भी आत्मतत्व के सामने समस्त संसार की सम्पत्ति को भी तुच्छ समझने की भावना थी ।
आध्यात्मिकता का एक खरूप कर्त्तव्य-निष्ठा भी है। वह कर्तव्य-निष्ठा ही भारत की देन है। कर्त्तव्य-निष्ठा की शिक्षा गुरुओं द्वारा आश्रमों में दी जाती थी । वचनों में शक्ति भी इसी निठा से उत्पन्न होती है । कौन-सी वह शक्ति है, पुत्र से पिता की, शिष्य से गुरु की आज्ञा का पालन करा देती है। यह शक्ति कर्त्तव्य-निठा ही है। कर्तव्य-निष्ठा का तालये यह है कि किसी भी कार्य को इसलिए करना कि वह कर्त्तव्य है। इसलिए नहीं कि उसके करने से अच्छा फल मिलेगा । चाहे फल हो या नहीं, पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करना ही होगा । आजकल अँगरेजी में इसे 'ड्यूटी' चन्द से कहा जाने लगा है। भारतीय चरित्रों में आप इस कर्त्तव्य-निठा के जगह-जगह दर्शन करेंगे। भारत का एक सुन्दर सन्दर्भ है। वन में क्षत्राणी द्रौपदी ने महाराज युधिष्ठिर को छेड़ दिया कि आप जो धर्म को इतना श्रेष्ठ कहा करते हैं, वह बात तो व्यवहार में ठीक नहीं जँचती । आप स्वयं इतने धर्मात्मा, यज्ञ, दान, व्रत पालन करनेवाले वा नियमों से रहनेवाले वन में भटकते हैं, और दम्न की प्रतिमृत्ति, निरन्तर पाप-कमों में लीन रहनेवाला दुर्योधन संसार-भर का ऐश्वर्य भोग रहा है । तत्र क्या यह समझा जाय कि यदि वनों में भटकना हो, तो धर्म से ताल्लुक रखो और यदि उन्नति करना हो, तो छल-कपट, दम्म को अपनाओ । इसका बड़ा अच्छा उत्तर युधिष्ठिर ने दिया कि द्रौपदी ! तुमको यह किसने बहका दिया कि मैं फल की इच्छा से कर्म करता हूँ । यह सष्ट समझो कि मैं दान, यज्ञादि कर्म-फल की आकांक्षा से कभी नहीं करता । दान करना चाहिए, इसलिए दान करता हूँ-नाहं धर्मफलाकांक्षी राजपुत्रि चरामि भो । ददामि देयमित्येव यजे यष्टव्यमित्युत ।।
यज्ञ करना चाहिए, इसलिए यज्ञ करता हूँ । इस उत्तर से स्पष्ट सिद्ध होता है कि भारत के महापुरुष कर्त्तव्य-निष्ठा से प्रेरित होकर ही कर्म किया करते थे । भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण ने भी कर्म करने की यही युक्ति अर्जुन को बताई है और इस प्रकार किया हुआ कर्म आत्मा को आवद्ध करनेवाला नहीं होता~यह लष्ट उपदेश किया है ।
सारांश यह है कि भारतीय संस्कृति आध्यात्मिकता पर अवलम्वित है और कर्म करने में कर्तव्य निष्ठा को इसमें मुख्य स्थान दिया गया है। यदि आध्यात्मिकता न रहे, तो समझ लेना होगा कि भारतीय संस्कृति का लोप हो चुका । अतः, भारतीय संस्कृति के रक्षकों को आध्यात्मिकता की ओर अवस्य ध्यान देना चाहिए। वर्त्तमान युग में जो एकमात्र पेट की चिन्ता ही संसार में सब कुछ बन गई है, वह भारतीय संस्कृति की सर्वथा विघातिनी है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल पेट भर लेना नहीं है । आत्मिक उन्नति ही मनुष्य-जीवन का मुख्य फल है । यही प्रवृत्ति जनता में फैलाने से
संग्रह - शक्ति वाले ऊरु वा उदरस्थानीय वैश्य हैं और सेवा-शक्तिवाले पादस्थानीय शूद्र हैं। अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार ही शरीर में प्रकृति ने ऊच्चावच भाव से रखा है। प्रकृति का किसी के साथ पक्षपात नहीं । ज्ञान-शक्ति का ही यह प्रभाव है कि वह सबसे ऊँचे स्थान में बैठती है। इसीलिए, प्रकृति ने शिर को सव अवयवों में ऊँचा स्थान दिया है । शिर सब अवयवों से सदा ऊँचा ही रहना चाहता है। यदि आप सब अंगों को एक सीध में लिटाना चाहें, तब भी एक तकिया लगाकर शिर को कुछ ऊँचा कर ही देना पड़ेगा । नहीं तो शरीर को चैन ही नहीं मिलेगा । यह ज्ञान शक्ति की ही महिमा है। इसी प्रकार प्रपंच में भी ज्ञान-शक्ति के कारण ब्राह्मण वर्ण व्यवस्था द्वारा उच्च स्थान पाते हैं । अन्यान्य शक्तियाँ भी अपने-अपने प्रभावानुसार क्रम से सन्निविष्ट होती हैं। उसी के अनुसार तत्तत् शक्तिः प्रधान वर्णों का भी स्थान नियत किया गया है। इसमें राग-द्वेप की कोई भी बात नहीं है। शरीर के अवयवों में उच्च-नीच भाव का कभी झगड़ा नहीं होता, सदा सबका सहयोग रहता है। पैर यदि मार्ग में चलते हैं, तो उन्हें मार्ग बताने को आँख प्रस्तुत रहती है । यदि पैर ठोकर खाय, तो दोप आँख पर ही दिया जाता है। इसी प्रकार उदर में क्षुधा लगे, तो भोजन का सामान जुटाने को हाथ सदा प्रस्तुत रहते हैं और उदर मे भी कभी ऐसी प्रवृत्ति नहीं होती कि जो अन्न-पान मुझे मिल गया, वह मैं ही रखूँ और अवयवों के पालन में इसे क्यों लगाऊँ ? यदि कदाचिद् ऐसी प्रवृत्ति हो जाय, तो उदर भी रोगाक्रान्त होकर दुःखी होगा और अन्य अंग भी दुर्बल हो जायेंगे । आत्मा भी विकल हो जायगा । अतः, इससे सव अवयवों के परस्पर सहयोग से ही शरीर का और शरीर के अधिष्ठाता आत्मा का निर्वाह होता है। शरीर के अवयवों के अनुसार वर्ण व्यवस्था बतानेवाले शास्त्रों ने समाज को इसी प्रकार के सहयोग की आज्ञा दी है। अपनी-अपनी शक्ति लगाकर अपने अपने कार्यों द्वारा सत्र वर्ण समाज का हित करते रहें - इसीसे प्रपंच का अधिष्ठाता परमात्मा प्रसन्न रहता है । परस्पर राग-द्वेष का यहाँ कोई भी स्थान नहीं । कदाचित् यह प्रश्न हो कि जिन-जिन में उक्त प्रकार की शक्तियाँ देखी जायँ, उन्हें उन कार्यों में लगाया जाय, यह तो ठीक है, किन्तु केवल जन्मानुसार वर्ण व्यवस्था स्थिर रखना तो उचित नहीं हो सकता । ब्राह्मण वा क्षत्रिय के घर जन्म लेने मात्र से ही कोई ब्राह्मण वा क्षत्रिय क्यों हो जाय ? और अन्य वर्णों की अपेक्षा अपने को क्यों मानने लगे। इसका उत्तर है कि कारण के गुणों के अनुसार ही कार्य में गुण होते हैं यह भी विज्ञान-सिद्ध नियम है । काली मिट्टी से घड़ा बनाया जायगा, तो वह काला ही होगा । लाल धागों से कपड़ा बनाया जायगा, से तो लाल ही होगा। मीठे आम के बीज से जो वृक्ष बना है, उसके फल मीठे ही होंगे । इत्यादि प्रकृति-सिद्ध नियम सर्वत्र ही देखा जाता है । तब माता-पिता के रज-वीर्य में जैसी शक्तियाँ हैं, वे ही सन्तान में विकास पायेंगी । यदि कहीं इससे उल्टा देखा जाय, •तो समझना चाहिए कि आहार-विहार, रहन-सहन' आदि में कुछ व्यतिक्रम वा दोष हुआ है। उसका प्रतिकार करना चाहिए । विज्ञान- सिद्ध वर्ण व्यवस्था पर क्यों दोष दिया जाय । शिल्पियों में आज भी परीक्षा करके देखा जा सकता है कि एक बढ़ई का
भाव पैदा कर दिया, और यही सब अवनति की जड़ हुई। किन्तु, विचार करने पर यह आक्षेप निर्मूल ही सिद्ध होता है। वर्ण व्यवस्था कभी परस्पर विरोध वा आपस की फूट नहीं सिखाती । वेद-मन्त्रों से स्मृति पुराणादि तक जहाँ कहीं वर्ण-व्यवस्था का वर्णन है, वहाँ सर्वत्र सब वर्णों को एक शरीर का अंग माना गया है ।
ब्राह्मणोऽस्यमुखमासीद् वाहू राजन्यः कृतः । ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रोऽजायत । ।। ( पुरुपसूक्त )
अर्थात्, विराट् पुरुष का ब्राह्मण मुख था, अर्थात् विराट् पुरुष के मुख से ब्राह्मण उत्पन्न हुआ था। क्षत्रिय उसके बाहु थे, वैश्य कटि वा उदर थे और विराट पुरुष के पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए थे। इसी वेद-मन्त्र का अनुवाद सव स्मृति पुराणों में है। इसका तात्पर्य यही है कि प्रत्येक वंश के शरीर में जैसे प्रकृति के द्वारा चार भाग बनाये गये हैं शिर, वक्षःस्थल, उदर और पाद, वैसे ही परमात्मा का जो ब्रह्माण्ड रूप विराट शरीर है, उसमें भी चार भाग हैं। हमारे शरीर के प्रथम भाग शिर में ज्ञानशक्ति है । ज्ञान की इन्द्रियाँ आँख, कान, नाक आदि शिर में ही हैं, और वर्त्तमान विज्ञान भी यही कहता है कि शिर में ही ज्ञान-तन्तु रहते हैं, उनके अभिज्वलन से ही ज्ञान पैदा हुआ करता है। विचार का कार्य अधिक करनेवालों को शिर में ही पीड़ा होती है । द्वितीय भाग वक्षःस्थल में बल की शक्ति है । बल की इन्द्रियाँ, जिनसे बल का काम होता है, हाथ इसी अंग में आते हैं। और बल का कार्य अधिक करनेवाले को छाती में ही पीड़ा होती है। शरीर के तीसरे उदर-भाग में संग्रह और पालन की शक्ति है । बाहर से सब वस्तुओं को उदर ही लेता है और उनका विभाग करके आवश्यकतानुसार सत्र अंगों में भेज देता है। उनके ही द्वारा सब अंगों का पालन होता है । अन्न-पानादि बाहर से पहले उदर में भी पहुँचाये जाते हैं और वहीं से विभक्त होकर सच अंगों का पोषण करते हैं । यहाँ तक कि मस्तक में वा पैर में भी पीड़ा हो, तो औषधि उदर में ही डाली जाती है। वही से वह शिर आदि में पहुँचकर पीड़ा शान्त करती है। चौथे भाग पाद में सेवा-शक्ति है । यह उक्त तीनों अंगों को अपने-अपने कार्य में सहायता देता है। देखने की इच्छा आँख को होती है। उसी को उत्तम दृश्य देखने से सुख मिलता है। मधुर गान सुनने की इच्छा कान को होती है, किन्तु दृश्य देखने वा गान सुनने के स्थानों में आँख वा कान को पैर ही पहुँचाते हैं। बल का कार्य करने के लिए और उदर-पोषण की सामग्री के लिए भी नियत स्थानों पैर ही ले जायेंगे । इन्हीं चारों शक्तियों के परस्पर सहयोग से सव काम चलता है, और सव अंगों के अपने-अपने कार्य में व्याप्त रहने पर आत्मा प्रसन्न रहता है। जैसे, हमारा यह व्यष्टि शरीर है, उसी प्रकार परमात्मा का शरीर यह सम्पूर्ण प्रपंच है। इसमें भी समष्टि रूप से चारों शक्तियाँ भिन्न-भिन्न अवयवों में वर्त्तमान हैं, और परस्पर सहयोग से कार्य करती हैं। जहाँ प्रधान रूप से ज्ञान-शक्ति है, वे प्रपंच-रूप परमात्मा के शिरःस्थानीय ब्राह्मण हैं। जहाँ चल-शक्ति है, वे वक्षःस्थल-रूप क्षत्रिय हैं।
जैसा कि भारत के ग्रामों में जाट, गूजर, मीना, अहीर आदि बहुत-सी जातियाँ मिलती हैं । वे उन आगत जातियों के रूपान्तर हैं -- यह सम्भव है, किन्तु यहाँ के वर्णों में वे आगत जातियाँ सम्मिलित हो गई हों, यह सम्भव नहीं । भारत को सदा से वर्णव्यवस्था का पूर्ण आग्रह रहा है और वह व्यवस्था प्राकृतिक वा विज्ञानानुमोदित है ।
शरीर संगठन की दृष्टि से वर्ण-व्यवस्था का महत्त्व दिखाया गया। अब समाज-संगठन की दृष्टि से विचार किया जायगा ।
विद्या, बल, द्रव्य आदि सत्र शक्तियों में दुर्बल किसी समाज की संगठन द्वारा उन्नति करने को उसके नेता प्रस्तुत हों, तो सबसे पहले उनका ध्यान शिल्प की उन्नति की ओर जायगा । सब प्रकार के शिल्पों की उन्नति के विना देश या समाज उन्नत हो ही नहीं सकता । प्रथम महायुद्ध के अवसर पर देखा गया कि भारत में वस्त्रों की कमी जो हुई, सो तो हुई, किन्तु वस्त्रों को सीने के लिए सूई की भी कमी हो गई । सूई भी हमें दूसरे देशों से लेनी पड़ती थी । भला, ऐसा समाज सभ्यता की श्रेणी में आकर उन्नति की ओर कैसे पैर बढ़ा सकता है। अतएव, उसके अनन्तर हमारे नेताओं की दृष्टि शिल्प की उन्नति की ओर गई और उनके उद्योग और ईश्वर कृपा से आज भारत शिल्प में बहुत कुछ उन्नत हो गया है । अस्तु; प्राचीन भारत में भी इस बात पर पूरा ध्यान दिया गया था, और वर्ण व्यवस्था में प्रचुर संख्या में रहनेवाली शूद्र जाति के हाथ में शिल्प-चल दिया गया था ।
शिल्पैर्वा विविधैर्जीवेत् द्विजातिहितमाचरन् ।
( याज्ञवल्क्य स्मृति)
शूद्रों में भी भिन्न-भिन्न शिल्पों के लिए भिन्न जातियों का विभाग कर दिया गया था । किसी जाति को वस्त्र बनाने का व्यवसाय, किसी को सीने का, किसी को लकड़ी का, किसी को लोहे का, किसी जाति को सोने का, इस प्रकार से भिन्न-भिन्न जातियों में भिन्न-भिन्न शिल्प बाँट दिये गये थे, जो आज भी चले आ रहे हैं। यह शिल्पबल शूद्र-बल है । शूद्रों के बुद्धि विकास से शिल्पों की उन्नति यहाँ पूर्ण मात्रा में हुई । ढाके की मलमल की बरावरी आज तक भी पाश्चात्य जगत् न कर सका । प्राचीन भारत के नेता ऋषि-महपियों का यह भी ध्यान था कि सब प्रकार के बलों की उन्नति समाज में की जाय, किन्तु उन बलों के दुरुपयोग से समाज को क्लेश न हो, इसका भी ध्यान रखा जाय । इसलिए, उन्होंने अपनी व्यवस्था में एक वल का नियन्त्रण दूसरे बल के द्वारा किया । नियन्त्रण निग्रह और अनुग्रह दोनों से होता है । हितैषिता भी हो और साथ ही दुरुपयोग से बचाया जाय, तभी ठीक नियंत्रण हो सकता है। इस दृष्टि से शूद्र बल का नियन्त्रण व्यापार-बल के द्वारा किया गया । वह व्यापार-वल वैश्य-वल है । और वर्ण-व्यवस्था में शूद्रों से ऊपर वैश्यों का स्थान है । शिल्पी को अपने शिल्प के अधिकाधिक प्रसार की इच्छा रहती है और वह प्रसार व्यापार-बल के द्वारा ही हो सकता है । एक ग्राम, नगर और देश के शिल्प को सैकड़ों-हजारों कोसों तक प्रचारित कर देना व्यापार-वल का ही काम है। इसलिए व्यापार-वल शिल्प-चल की सहायता भी करता है और आलस्यादि दुरुपयोग से उसे बचाता भी है । प्रसार की लालसा से शिल्पियों को
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नीति के उपदेश यही सिखाते हैं कि त्रिवर्ग की उन्नति करनी चाहिए, जिससे मोक्ष की प्राति सुकर हो जाय । त्रिवर्ग से तात्पर्य धर्म, अर्थ और काम तीनों से है। प्राचीन समय में भारत की सम्पत्ति सभी देशों के लिए स्पृहणीय थी । काम, अर्थात् व्यवहार तो भारत से ही और देशों ने सीखा है। सुखोपभोग की सामग्री भारत में कितनी विपुल थी, इसका पता प्राचीन काव्यों को पढ़ने से बड़ी आसानी से लग जाता है । यह सच होते हुए भी भारतीय सभ्यता में इतनी विशेषता अवश्य है कि यहाँ धर्म को सभी पुरुषार्थों में प्रधान स्थान दिया गया है । धर्म का आत्मा से सीधा सम्बन्ध है । उससे आत्मा वलवान् होता है। जब कभी व्यवहार में धर्म के साथ अर्थ-काम का संघर्ष उपस्थित होता है, जब कभी प्रश्न खड़ा होता है कि या तो धर्म को अपना लो या अर्थ को । ऐसे समय में हम सदा धर्म को ही अपनाते हैं, यही हमारे शास्त्रकारों का उपदेश है कि - परित्यजेदर्थ कामौ च स्यातां धर्मवर्जितो । अर्थात्, धर्म से विरुद्ध अर्थ और काम को छोड़ देना चाहिए । इस विषय का सूक्ष्म से सूक्ष्म विवेचन धर्मशास्त्रकारों ने किया है । भगवान् मनु कहते हैं कि - अद्रोहेणैव भूतानामल्पद्रोहेण वा पुनः । द्रव्योपार्जन और अपनी उन्नति का सम्पादन अवश्य ही मानव-मात्र का कर्त्तव्य है, परन्तु वह द्रव्योपार्जन या आत्मोन्नति ऐसी हो, जिससे किसी से द्रोह न हो । दूसरों को धक्का मारकर उपार्जन करना ठीक नहीं । प्रश्न होता है कि किसी भी अर्थोपार्जन या उन्नति में परद्रोह तो अवश्य होगा । मान लिया जाय कि किसी मनुष्य को कोई अच्छा पद मिला, तो क्या उसका यह उपार्जन विना द्रोह किये हो गया ? नहीं । उसी के साथ जो दूसरे लोग उस पद के इच्छुक थे, उनको हटाने के कारण द्रोह तो हो ही गया । तब अद्रोह से उपार्जन कैसे सम्भव है । इसी सूक्ष्म बात को ध्यान में रखकर मनु भगवान् ने साथ ही कह दिया था कि 'अल्पद्रोहेण वा पुनः', अर्थात् यदि द्रोह अपरिहार्य हो, तो वह बहुत कम रूप में लिया जाय । जैसे पद प्राप्त होने पर जो द्रोह औरों से होता है, वह साक्षात् अपकार करने से नहीं, अपि तु दूसरों के द्वारा हुआ है । इसलिए यह अल्पद्रोह है । कारण वहाँ द्रोह लक्ष्य नहीं था, अपनी उन्नति ही लक्ष्य था । इस प्रकार का द्रोह उपार्जन में लक्ष्य है। परन्तु साक्षात् द्रोह नहीं करना चाहिए । जैसे, शिकायतों और आरोपो के द्वारा दूसरे को पदच्युत करवाकर फिर स्वयं उस स्थान को लेना । इस प्रकार का उपार्जन धर्म-विरुद्ध है । यह नहीं होना चाहिए। इस प्रकार, धार्मिक नेताओं ने सर्वदा हमें सचेत किया है कि हम कभी प्रधान को, अर्थात् धर्म को न भूलें । धर्म का ही दूसरा नाम है कर्त्तव्य । कर्त्तव्य और धर्म में भेद नहीं । कर्तव्य निष्ठा ही भारतीय संस्कृति की प्रधान वस्तु है । कर्त्तव्य में आलस्य, प्रमादादि को स्थान नहीं । इस प्रकार, धर्म और उससे अविरुद्ध अर्थ और काम का आचरण करने से मोक्ष नाम का परम पुरुपार्थ अपने आप सिद्ध हो जाता है । शरीर ग्रहण करता है । यदि भारतीय संस्कृति का वैशिष्ट्य पुनर्जन्मवाद है, तो भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत आनेवाले बौद्ध, जैन, सिक्ख, आर्यसमाज, ब्राह्मसमाज आदि जितने सम्प्रदाय हैं, वे सभी इस पुनर्जन्मवाद को अवश्य स्वीकार करते हैं। इस प्रकार, आचार और विचार ये, दो जो संस्कृति के पहलू हैं, उनमें विचारांश में भारतीयों का ऐक्य स्थापित हैं। शरीर के अतिरिक्त आत्मा है। जिस प्रकार शरीर के प्रति भोजनाच्छादनादि हमारे अनेक कर्त्तव्य हैं, उसी प्रकार आत्मा के प्रति भी हमारे कुछ कर्त्तव्य हैं । इस प्रकार के अध्यात्म पर अवलम्बित व्यवहार ही आचारांश में भारतीयों की एकता को प्रतिष्ठित करते हैं। प्राचीन समय में भी भारत । प्राचीन समय में भी भारत में अध्यात्म-दृष्टि प्रधान रही है । आत्मा को उन्नत वनानेवाले आचरणों को ही धर्म कहा जाता है। आजकल शिक्षित लोग धर्म से चौंकते हैं। बहुत से लोग धर्म को एक हौवा समझते हैं । परन्तु खेद है कि ये धर्म के स्वरूप पर ध्यान नहीं देते। धर्म न तो कोई हौवा है और न कोई चौंकानेवाली चीज है, न वह अवनति के मार्ग में ढकेलनेवाली कोई वस्तु है। धर्म उसी का नाम है, जो उन्नति की ओर ले जाय । धर्म का लक्षण करते हुए कणाद ने स्पष्ट कर दिया है कि - -'यतोऽभ्युदयनिःश्रेयसः सिद्धिः स धर्मः', अर्थात् जो क्रमशः उन्नत करता हुआ चरम उन्नति तक ले जाय, वही धर्म है । वह उन्नति न केवल संसार की ही है, परन्तु उसके साथ-साथ आत्मा की चरम उन्नति है, अर्थात् मोक्ष भी धर्म के द्वारा ही होता है। आजकल यन्त्र-युग में नये-नये यन्त्रों का आविष्कार ही उन्नति की ओर अग्रसर होना है। किन्तु विचार कीजिए कि ये सव यन्त्रों को कौन बनाता है। मनुष्य की कल्पना शक्ति ही इन यन्त्रों को जन्म देनेवाली है। यह कल्पना-शक्ति किस यन्त्र से प्रादुर्भूत होती है, इसका ज्ञान भारतीय संस्कृति में मुख्य माना गया था । यन्त्रों को जन्म देनेवाली कल्पना शक्ति के उद्भावक मन, बुद्धि और सब-के-सव चैतन्यप्रद आत्मा का विचार आध्यात्मिकवाद है । भारतीय संस्कृति के नेता यही कहते हैं कि जो अपने-आपका परिष्कार वा सुधार न कर सका, वह अन्य वस्तुओं का निर्माता होने पर महत्त्वशाली नहीं कहा जा सकता। इसलिए, आध्यात्मिकवाद की यहाँ की संस्कृति में प्रधानता हो गई है । कुछ लोग आक्षेप करते हैं कि अध्यात्मवाद के अनुयायियों ने धर्म के आगे अर्थ और काम को गिरा दिया। वे केवल धर्म-ही-धर्म को पकड़े रहे, और देश की अनेक प्रकार की उन्नति में बाधक सिद्ध हुए। परन्तु भारतीय संस्कृति के विचारकों को यह अच्छी तरह मालूम है कि हमारे यहाँ अर्थ और काम से विमुख होने का कहीं विधान नहीं । धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों हमारे यहाँ पुरुपार्थ माने गये हैं । पुरुषार्थ का मतलब है, जो पुरुषों के द्वारा चाहने योग्य हों, अथवा मनुष्य के चार लक्ष्य हैं । 'पुरुपैरर्थ्यते', यह व्युत्पत्ति उपर्युक्त अर्थ को सिद्ध करती है। उनमें अर्थ और काम का ही सामान रूप से समावेश है, तब अर्थ और काम की उपेक्षा का आरोप कैसे माननीय हो सकता है । यह बात भी नहीं है कि भारत में कभी अर्थ, काम की उन्नति हुई ही नही । धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र, अर्थात् व्यवहार शास्त्र और । - कलाशास्त्र तीनों भारत में पूर्णतया उन्नत थे । प्राचीन इतिहास इसका साक्षी है । सभी होता है, जो पानी के साथ चने भी खिलाता है; क्योंकि वह अधिक लोगों का अधिक हित सम्पादन करता है । परन्तु, विवेक-दृष्टि कभी उसे धर्मात्मा नहीं कहेगी; क्योंकि उसका उद्देश्य लोगों को लाभ पहुॅचाने का नहीं । भारतीय दृष्टि में वही धर्मात्मा है, जिसने पहले प्याऊ खोला; क्योंकि वह निःस्वार्थ भावना से पिपासा- निवृत्ति के लिए जल पिलाता है। उसके कार्य में किसी प्रकार की दुरभिसन्धि नहीं । दूसरा उदाहरण लीजिए । अमेरिका में जब सर्वप्रथम ट्रामगाड़ी चलने को थी, तब लोग बड़े उत्सुक थे । कम्पनी ने भी पूरी तैयारी कर ली थी । परन्तु फिर भी महीनों बीत गये । सरकारी आज्ञा मिलने में देर हो रही थी । ज्यादा देर होती देख कम्पनी के डाइरेक्टर ने सरकारी ऑफिसर को तगड़ी-सी रिश्वत दे दी । फलतः, ट्राम चालू करने का आर्डर शीघ्र प्राप्त हो गया और शीघ्र ट्रामगाड़ी के चलने से जनता को आराम हो गया । पाश्चात्य परिभाषा के अनुसार उस प्रकार रिश्वत देना धर्म होना चाहिए; क्योंकि वह अधिकांश मनुष्यों के लाभ के लिए कार्य था । परन्तु, परिणाम उसका उल्टा हुआ । वहाँ के हाईकोर्ट में उस रिश्वत लेने पर केस चला और अभियोग प्रमाणित होने पर देने और लेनेवालों को दण्ड भोगना पड़ा । इसलिए, हमारी संस्कृति के अनुसार धर्म के सम्बन्ध में ऐसी बातें नहीं चल सकतीं । आध्यात्मिक दृष्टि से ही विचार होगा। अमुक कार्य के करने में अमुक मनुष्य का उद्देश्य क्या है, और उस कार्य का परिणाम क्या है । यदि उद्देश्य और परिणाम बुरा है, तो अच्छा काम भी अधर्म ही ठहरेगा और उद्देश्य एवं परिणाम अनुचित न रहने से बुरे काम भी अच्छे हो जायेंगे । किसी भी कार्य में कर्त्ता की नीयत जाने विना धर्म का निर्णय नहीं हो सकता । इसके लिए भी आध्यात्मिकता की ओर आना होगा । यों धर्म और कर्त्तव्य के निर्णय में आध्यात्मिकता की ही कमी हुई, तब भारत की ओर ही सबकी दृष्टि केन्द्रित होती है। भारत सर्वदा से आध्यात्मिक दृष्टि को सर्वोपरि मानता आया है। उपनिषद् की एक आख्यायिका है, याज्ञवल्क्य जब वृद्ध हुए, तब घर छोड़ वन में एकान्तवास करते हुए ब्रह्म-चिन्तन की इच्छा हुई । उनकी दो पत्नियाँ थी - मैत्रेयी और कात्यायनी । उन्होंने वन में जाने के पहले अपनी कुछ सम्पत्ति थी, उसको दोनों पलियों में विभक्त कर देना चाहा। उन्होंने मैत्रेयी को बुलाया और उसे समझाया कि मै अपनी जो कुछ सम्पत्ति है, उसको तुम दोनों में बाँट देना चाहता हूँ । मैत्रेयी तो आर्य ललना थी । ऋषि की सम्पत्ति क्या हो सकती है। कमण्डलु, मृगचर्म, कौपीन, कुटिया, यही तो ऋषियों के आश्रम में होता था । परन्तु मैत्रेयी ने कहा भगवन् ! यदि आप मुझे वह सारी पृथ्वी दे दें, जो रत्नों, सुवणों और समस्त धन-धान्यादि से लदी हुई हो, उसको प्राप्त करके तो मैं अमर हो जाऊँगी न ? याज्ञवल्क्य ने कहा - सम्पत्ति से कोई मनुष्य अमर तो नहीं हो सकता । हॉ, जिस प्रकार धनवानों का जीवन बीतता है, सैकड़ों नौकर रखते हैं, तरह-तरह के वस्त्र पहन सकते हैं, सब प्रकार के स्वादिष्ठ भोजन प्राप्त हो सकते हैं, उस प्रकार सुख से जीवन व्यतीत हो सकता है। परन्तु सम्पत्ति से अमरता तो नहीं मिल सकती । इस पर मैत्रेयी ने कहा - जिसको लेकर अमर नहीं हो सकती, उसे लेकर क्या करूँगी । जिसकी खोज में आप घर को छोड़कर वन में जा रहे हैं, अपने उस लाभ में आप हमें भी मोक्ष को ही यह संस्कृति परम पुरुषार्थ कहती है। वह मोक्ष क्या है ? आत्मा को स्वतंत्र बना देना ही मोक्ष है । कर्त्तव्य का आचरण करते-करते मन, बुद्धि और शरीर पवित्र हो जाते हैं। इस प्रकार के पवित्र मन और बुद्धि में आत्मा की स्वतंत्र सत्ता प्रतीत होने लगती है। वह आत्मा हमें कहीं बाहर से लेने नहीं जाना पड़ेगा, वह तो सबके पास है। परन्तु मन और बुद्धि अपवित्र होने से उसे ग्रहण नहीं कर पाती । जब कर्त्तव्याचरण द्वारा मन, बुद्धि पवित्र हो जाती है, तब आत्मा का दर्शन होना सुगम हो जाता है । इसीको मोक्ष कहते हैं । अव प्रश्न यह उठता है कि यह संसार तो प्रश्नों और समस्याओं का जंगल है। यह कैसे पहचाना जाय कि अमुक कर्त्तव्य है, और अमुक धर्म है, जहाँ कार्यों की शृङ्खला सामने खड़ी है। बहुत से कार्य कर्त्तव्य-कोटि में आते हैं, बहुत-से त्याज्य हैं । सामान्य मानव बुद्धि यह कैसे समझे कि यह करना चाहिए, और यह छोड़ना चाहिए ? इस प्रश्न के अनेक समाधान भारतीय ग्रन्थों में मिलते हैं। अनेक ऐसी पहचान निश्चित की गई है । कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य का विचार करनेवाले पाश्चात्य आधिभौतिकवादी पहले उन कार्यों को कर्त्तव्य-कोटि में रखते थे, जो सत्र मनुष्यों को लाभ पहुँचानेवाले हों । ऐसी परिभाषा बना लेने पर उनके सामने जब यह प्रश्न आया कि कोई कार्य ऐसा नहीं, जो सभी मनुष्यों को लाभ ही लाभ पहुँचाता है। किसी-न-किसी को किसी कार्य में हानि भी अवश्य होगी। चोरी को अपराध घोषित करना शायद चोरों को नागवार गुजरेगा । रोगियों की संख्या में कमी होना डॉक्टरों की रोजी छीनना होगा । भ्रातृ-भाव और वन्धुत्व की वृद्धि और द्वेष का अभाव होने से वकीलों की जीविका का प्रश्न आ जायगा । शायद कोई वकील यह नहीं चाहता होगा कि मेरे मुवकिल आपस का झगड़ा भूल जायँ । ऐसी ही स्थिति में अच्छा-से-अच्छा माना जानेवाला कार्य भी कर्त्तव्य और धर्म न हो सकेगा; क्योंकि पाश्चात्य विद्वानों की पूर्व परिभाषा के अनुसार वह सब लोगों का हित सम्पादन नहीं करता। इस प्रश्न के सामने आने पर पश्चिमी विद्वानों ने अपनी परिभाषा बदल दी । उन्होंने कहा कि धर्म वह है, जो अधिकांश मनुष्यों को अधिक लाभ पहुँचानेवाला हो । लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने गीतारहस्य ग्रन्थ में इस प्रकार के समस्त पाश्चात्य मतों को सामने रखकर उनकी आलोचना प्रस्तुत करके यह सिद्ध कर दिया है कि धर्म-अधर्म या कर्त्तव्य-अकर्त्तव्य का निर्णय भौतिक दृष्टि से कथमपि सम्भव नहीं । उसके निर्णय के लिए तो आध्यात्मिक दृष्टि को ही अपनाना होगा । भौतिक परिभाषा में उन्होंने अनेक दृष्टान्तों से दोष दिखाये हैं । मान लीजिए कि गर्मी में तृपार्त्त जनों की प्यास बुझाने के लिए किसी ने प्याऊ लगाया। लोग उसके प्याऊ पर आते हैं और सुखादु शीतल जल पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं । उसके प्याऊ पर जल पीनेवालों की भीड़ देखकर सामनेवाले दूकानदार वनिये ने भी एक प्याऊ खोल दिया, जो पानी के साथ चने भी खिलाता है। वनिये का उद्देश्य लोगों को जल से तृप्त करना नहीं है, अपि तु अपना व्यापार चमकाना है। ज्यादा भीड़ बढ़ने पर लोग उसकी दूकान पर बैठकर खरीददारी भी करते हैं। अब यदि पाश्चात्य दृष्टि से कर्त्तव्याकर्त्तव्य का या धर्माधर्म का विचार करें, तो बनिया ही धर्मात्मा सिद्ध भारतीय संस्कृति चच सकेगी। और, यह भी स्मरण रखना चाहिए कि कर्त्तव्य-निष्ठा वर्णाश्रम व्यवस्था के आधार पर ही स्थित हो सकती है, अन्यथा कर्त्तव्य का ज्ञान ही किस आधार पर हो सकेगा ? वर्ण व्यवस्था ही अपने-अपने वर्ण के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य निश्चित करती है । जिस वर्ण का जो धर्म है, उसमें फल का कुछ भी विचार न करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को प्रवृत्त होना चाहिए । यही कर्त्तव्य-निष्ठा है। भारतीय संस्कृति के मुख्य ग्रन्थ भगवद्गीता में भी कर्त्तव्य बुद्धि को ही मुख्य माना गया है, और फल की अपेक्षा न कर कर्त्तव्य-पालन का नाम ही कर्मयोग रखा है। कर्मयोग एक बहुत उच्चकोटि की वस्तु है, जो क्या सामाजिक, क्या राजनीतिक, क्या धार्मिक सभी विषयों में अत्यन्त उपादेय सिद्ध होती है, किन्तु जब यह प्रश्न उठाया जाय कि फल की इच्छा न करें, तो किस कार्य में प्रवृत्ति करें ? क्योंकि, प्रवृत्ति का क्रम तो शास्त्रों में यही निर्धारित किया गया है कि पहले फल की इच्छा होती है, तब उसके साधन रूप से उपाय की इच्छा और उपाय की इच्छा से आत्मा में प्रयत्न होता है । प्रयत्न नाम की एक प्रेरणा उठती है और उस प्रेरणा से हाथ-पैर आदि इन्द्रियाँ प्रवृत्त होती हैं। यदि फलेच्छा ही न होगी, तो आगे का क्रम चलेगा ही कैसे ? और, प्रवृत्ति ही क्यों होगी ? तब इसका उत्तर यही हो सकता है कि जिसके लिए जो कर्म नियत है, उसमें उसे प्रवृत्त रहना चाहिए । 'नियतं कुरु कर्मलम्', यही भगवद्गीता का आदेश है । परन्तु किसके लिए कौन सा कर्म नियत है - इसका उत्तर तो वर्ण-व्यवस्था ही दे सकती है। उसमें ही भिन्न-भिन्न वर्णों के अपने-अपने कर्म नियत हैं, उनका अनुष्ठान विना फल की इच्छा के ही करते रहना चाहिए । यदि विना वर्ण व्यवस्था माने भी कर्त्तव्य-निष्ठा का कोई यह समाधान करे कि जगत् के लाभदायक कर्म फल की इच्छा विना ही करते रहना चाहिए अथवा आत्मा की आज्ञा जिन कर्मों के लिए मिले, वे कर्म करते रहना चाहिए, तो इन पक्षों में जो दोप आते हैं, उनका विवरण आरम्भ में ही दे दिया गया है कि सबका लाभदायक कोई भी कर्म हो नहीं सकता और किनको लाभ पहुँचाने का यत्न करें और किनकी हानि की उपेक्षा करें - इसका भी नियामक कुछ नहीं मिल सकता । आत्मा की आज्ञा भी भिन्न-भिन्न परिस्थिति में भिन्नभिन्न प्रकार की मिलती है। एक बार अनुचित कार्य करके जब आत्मा मलिन हो जाता है, तब वहाँ से अनुचित कार्यों की ही अनुमति मिलने लगती है। इससे आत्मा की आज्ञा पर भी निर्भर रहना बन नहीं सकता । सारांश यह है कि कर्मयोग-सिद्धान्त वर्णव्यवस्था के आधार पर ही बन सकता है और वह कर्मयोग - सिद्धान्त व्यवहार क्षेत्र से पार पाने का सबसे उत्तम साधन है । इसलिए, कर्त्तव्य निष्ठा वा कर्मयोग की सिद्धि के लिए वर्णाश्रम व्यवस्था को भारतीय संस्कृति में प्रधान स्थान दिया गया है । वर्त्तमान में वर्ण-व्यवस्था पर बहुत आक्षेप होते हैं और इसी पर भारत की अवनति का बहुत-कुछ दायित्व रखा जाता है। इसे दूषित करनेवाले विद्वानों का कथन है कि वर्ण-व्यवस्था ने ही समाज मे आपस में फूट डाल दी । परस्पर ऊँच-नीच हिस्टेदार बनाइए । तब याज्ञवल्क्य ने उसको ज्ञानोपदेश देना प्रारम्भ किया। तालर्य यह कि प्राचीन काल में भारत की त्रियों में भी आत्मतत्व के सामने समस्त संसार की सम्पत्ति को भी तुच्छ समझने की भावना थी । आध्यात्मिकता का एक खरूप कर्त्तव्य-निष्ठा भी है। वह कर्तव्य-निष्ठा ही भारत की देन है। कर्त्तव्य-निष्ठा की शिक्षा गुरुओं द्वारा आश्रमों में दी जाती थी । वचनों में शक्ति भी इसी निठा से उत्पन्न होती है । कौन-सी वह शक्ति है, पुत्र से पिता की, शिष्य से गुरु की आज्ञा का पालन करा देती है। यह शक्ति कर्त्तव्य-निठा ही है। कर्तव्य-निष्ठा का तालये यह है कि किसी भी कार्य को इसलिए करना कि वह कर्त्तव्य है। इसलिए नहीं कि उसके करने से अच्छा फल मिलेगा । चाहे फल हो या नहीं, पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करना ही होगा । आजकल अँगरेजी में इसे 'ड्यूटी' चन्द से कहा जाने लगा है। भारतीय चरित्रों में आप इस कर्त्तव्य-निठा के जगह-जगह दर्शन करेंगे। भारत का एक सुन्दर सन्दर्भ है। वन में क्षत्राणी द्रौपदी ने महाराज युधिष्ठिर को छेड़ दिया कि आप जो धर्म को इतना श्रेष्ठ कहा करते हैं, वह बात तो व्यवहार में ठीक नहीं जँचती । आप स्वयं इतने धर्मात्मा, यज्ञ, दान, व्रत पालन करनेवाले वा नियमों से रहनेवाले वन में भटकते हैं, और दम्न की प्रतिमृत्ति, निरन्तर पाप-कमों में लीन रहनेवाला दुर्योधन संसार-भर का ऐश्वर्य भोग रहा है । तत्र क्या यह समझा जाय कि यदि वनों में भटकना हो, तो धर्म से ताल्लुक रखो और यदि उन्नति करना हो, तो छल-कपट, दम्म को अपनाओ । इसका बड़ा अच्छा उत्तर युधिष्ठिर ने दिया कि द्रौपदी ! तुमको यह किसने बहका दिया कि मैं फल की इच्छा से कर्म करता हूँ । यह सष्ट समझो कि मैं दान, यज्ञादि कर्म-फल की आकांक्षा से कभी नहीं करता । दान करना चाहिए, इसलिए दान करता हूँ-नाहं धर्मफलाकांक्षी राजपुत्रि चरामि भो । ददामि देयमित्येव यजे यष्टव्यमित्युत ।। यज्ञ करना चाहिए, इसलिए यज्ञ करता हूँ । इस उत्तर से स्पष्ट सिद्ध होता है कि भारत के महापुरुष कर्त्तव्य-निष्ठा से प्रेरित होकर ही कर्म किया करते थे । भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण ने भी कर्म करने की यही युक्ति अर्जुन को बताई है और इस प्रकार किया हुआ कर्म आत्मा को आवद्ध करनेवाला नहीं होता~यह लष्ट उपदेश किया है । सारांश यह है कि भारतीय संस्कृति आध्यात्मिकता पर अवलम्वित है और कर्म करने में कर्तव्य निष्ठा को इसमें मुख्य स्थान दिया गया है। यदि आध्यात्मिकता न रहे, तो समझ लेना होगा कि भारतीय संस्कृति का लोप हो चुका । अतः, भारतीय संस्कृति के रक्षकों को आध्यात्मिकता की ओर अवस्य ध्यान देना चाहिए। वर्त्तमान युग में जो एकमात्र पेट की चिन्ता ही संसार में सब कुछ बन गई है, वह भारतीय संस्कृति की सर्वथा विघातिनी है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल पेट भर लेना नहीं है । आत्मिक उन्नति ही मनुष्य-जीवन का मुख्य फल है । यही प्रवृत्ति जनता में फैलाने से संग्रह - शक्ति वाले ऊरु वा उदरस्थानीय वैश्य हैं और सेवा-शक्तिवाले पादस्थानीय शूद्र हैं। अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार ही शरीर में प्रकृति ने ऊच्चावच भाव से रखा है। प्रकृति का किसी के साथ पक्षपात नहीं । ज्ञान-शक्ति का ही यह प्रभाव है कि वह सबसे ऊँचे स्थान में बैठती है। इसीलिए, प्रकृति ने शिर को सव अवयवों में ऊँचा स्थान दिया है । शिर सब अवयवों से सदा ऊँचा ही रहना चाहता है। यदि आप सब अंगों को एक सीध में लिटाना चाहें, तब भी एक तकिया लगाकर शिर को कुछ ऊँचा कर ही देना पड़ेगा । नहीं तो शरीर को चैन ही नहीं मिलेगा । यह ज्ञान शक्ति की ही महिमा है। इसी प्रकार प्रपंच में भी ज्ञान-शक्ति के कारण ब्राह्मण वर्ण व्यवस्था द्वारा उच्च स्थान पाते हैं । अन्यान्य शक्तियाँ भी अपने-अपने प्रभावानुसार क्रम से सन्निविष्ट होती हैं। उसी के अनुसार तत्तत् शक्तिः प्रधान वर्णों का भी स्थान नियत किया गया है। इसमें राग-द्वेप की कोई भी बात नहीं है। शरीर के अवयवों में उच्च-नीच भाव का कभी झगड़ा नहीं होता, सदा सबका सहयोग रहता है। पैर यदि मार्ग में चलते हैं, तो उन्हें मार्ग बताने को आँख प्रस्तुत रहती है । यदि पैर ठोकर खाय, तो दोप आँख पर ही दिया जाता है। इसी प्रकार उदर में क्षुधा लगे, तो भोजन का सामान जुटाने को हाथ सदा प्रस्तुत रहते हैं और उदर मे भी कभी ऐसी प्रवृत्ति नहीं होती कि जो अन्न-पान मुझे मिल गया, वह मैं ही रखूँ और अवयवों के पालन में इसे क्यों लगाऊँ ? यदि कदाचिद् ऐसी प्रवृत्ति हो जाय, तो उदर भी रोगाक्रान्त होकर दुःखी होगा और अन्य अंग भी दुर्बल हो जायेंगे । आत्मा भी विकल हो जायगा । अतः, इससे सव अवयवों के परस्पर सहयोग से ही शरीर का और शरीर के अधिष्ठाता आत्मा का निर्वाह होता है। शरीर के अवयवों के अनुसार वर्ण व्यवस्था बतानेवाले शास्त्रों ने समाज को इसी प्रकार के सहयोग की आज्ञा दी है। अपनी-अपनी शक्ति लगाकर अपने अपने कार्यों द्वारा सत्र वर्ण समाज का हित करते रहें - इसीसे प्रपंच का अधिष्ठाता परमात्मा प्रसन्न रहता है । परस्पर राग-द्वेष का यहाँ कोई भी स्थान नहीं । कदाचित् यह प्रश्न हो कि जिन-जिन में उक्त प्रकार की शक्तियाँ देखी जायँ, उन्हें उन कार्यों में लगाया जाय, यह तो ठीक है, किन्तु केवल जन्मानुसार वर्ण व्यवस्था स्थिर रखना तो उचित नहीं हो सकता । ब्राह्मण वा क्षत्रिय के घर जन्म लेने मात्र से ही कोई ब्राह्मण वा क्षत्रिय क्यों हो जाय ? और अन्य वर्णों की अपेक्षा अपने को क्यों मानने लगे। इसका उत्तर है कि कारण के गुणों के अनुसार ही कार्य में गुण होते हैं यह भी विज्ञान-सिद्ध नियम है । काली मिट्टी से घड़ा बनाया जायगा, तो वह काला ही होगा । लाल धागों से कपड़ा बनाया जायगा, से तो लाल ही होगा। मीठे आम के बीज से जो वृक्ष बना है, उसके फल मीठे ही होंगे । इत्यादि प्रकृति-सिद्ध नियम सर्वत्र ही देखा जाता है । तब माता-पिता के रज-वीर्य में जैसी शक्तियाँ हैं, वे ही सन्तान में विकास पायेंगी । यदि कहीं इससे उल्टा देखा जाय, •तो समझना चाहिए कि आहार-विहार, रहन-सहन' आदि में कुछ व्यतिक्रम वा दोष हुआ है। उसका प्रतिकार करना चाहिए । विज्ञान- सिद्ध वर्ण व्यवस्था पर क्यों दोष दिया जाय । शिल्पियों में आज भी परीक्षा करके देखा जा सकता है कि एक बढ़ई का भाव पैदा कर दिया, और यही सब अवनति की जड़ हुई। किन्तु, विचार करने पर यह आक्षेप निर्मूल ही सिद्ध होता है। वर्ण व्यवस्था कभी परस्पर विरोध वा आपस की फूट नहीं सिखाती । वेद-मन्त्रों से स्मृति पुराणादि तक जहाँ कहीं वर्ण-व्यवस्था का वर्णन है, वहाँ सर्वत्र सब वर्णों को एक शरीर का अंग माना गया है । ब्राह्मणोऽस्यमुखमासीद् वाहू राजन्यः कृतः । ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रोऽजायत । ।। अर्थात्, विराट् पुरुष का ब्राह्मण मुख था, अर्थात् विराट् पुरुष के मुख से ब्राह्मण उत्पन्न हुआ था। क्षत्रिय उसके बाहु थे, वैश्य कटि वा उदर थे और विराट पुरुष के पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए थे। इसी वेद-मन्त्र का अनुवाद सव स्मृति पुराणों में है। इसका तात्पर्य यही है कि प्रत्येक वंश के शरीर में जैसे प्रकृति के द्वारा चार भाग बनाये गये हैं शिर, वक्षःस्थल, उदर और पाद, वैसे ही परमात्मा का जो ब्रह्माण्ड रूप विराट शरीर है, उसमें भी चार भाग हैं। हमारे शरीर के प्रथम भाग शिर में ज्ञानशक्ति है । ज्ञान की इन्द्रियाँ आँख, कान, नाक आदि शिर में ही हैं, और वर्त्तमान विज्ञान भी यही कहता है कि शिर में ही ज्ञान-तन्तु रहते हैं, उनके अभिज्वलन से ही ज्ञान पैदा हुआ करता है। विचार का कार्य अधिक करनेवालों को शिर में ही पीड़ा होती है । द्वितीय भाग वक्षःस्थल में बल की शक्ति है । बल की इन्द्रियाँ, जिनसे बल का काम होता है, हाथ इसी अंग में आते हैं। और बल का कार्य अधिक करनेवाले को छाती में ही पीड़ा होती है। शरीर के तीसरे उदर-भाग में संग्रह और पालन की शक्ति है । बाहर से सब वस्तुओं को उदर ही लेता है और उनका विभाग करके आवश्यकतानुसार सत्र अंगों में भेज देता है। उनके ही द्वारा सब अंगों का पालन होता है । अन्न-पानादि बाहर से पहले उदर में भी पहुँचाये जाते हैं और वहीं से विभक्त होकर सच अंगों का पोषण करते हैं । यहाँ तक कि मस्तक में वा पैर में भी पीड़ा हो, तो औषधि उदर में ही डाली जाती है। वही से वह शिर आदि में पहुँचकर पीड़ा शान्त करती है। चौथे भाग पाद में सेवा-शक्ति है । यह उक्त तीनों अंगों को अपने-अपने कार्य में सहायता देता है। देखने की इच्छा आँख को होती है। उसी को उत्तम दृश्य देखने से सुख मिलता है। मधुर गान सुनने की इच्छा कान को होती है, किन्तु दृश्य देखने वा गान सुनने के स्थानों में आँख वा कान को पैर ही पहुँचाते हैं। बल का कार्य करने के लिए और उदर-पोषण की सामग्री के लिए भी नियत स्थानों पैर ही ले जायेंगे । इन्हीं चारों शक्तियों के परस्पर सहयोग से सव काम चलता है, और सव अंगों के अपने-अपने कार्य में व्याप्त रहने पर आत्मा प्रसन्न रहता है। जैसे, हमारा यह व्यष्टि शरीर है, उसी प्रकार परमात्मा का शरीर यह सम्पूर्ण प्रपंच है। इसमें भी समष्टि रूप से चारों शक्तियाँ भिन्न-भिन्न अवयवों में वर्त्तमान हैं, और परस्पर सहयोग से कार्य करती हैं। जहाँ प्रधान रूप से ज्ञान-शक्ति है, वे प्रपंच-रूप परमात्मा के शिरःस्थानीय ब्राह्मण हैं। जहाँ चल-शक्ति है, वे वक्षःस्थल-रूप क्षत्रिय हैं। जैसा कि भारत के ग्रामों में जाट, गूजर, मीना, अहीर आदि बहुत-सी जातियाँ मिलती हैं । वे उन आगत जातियों के रूपान्तर हैं -- यह सम्भव है, किन्तु यहाँ के वर्णों में वे आगत जातियाँ सम्मिलित हो गई हों, यह सम्भव नहीं । भारत को सदा से वर्णव्यवस्था का पूर्ण आग्रह रहा है और वह व्यवस्था प्राकृतिक वा विज्ञानानुमोदित है । शरीर संगठन की दृष्टि से वर्ण-व्यवस्था का महत्त्व दिखाया गया। अब समाज-संगठन की दृष्टि से विचार किया जायगा । विद्या, बल, द्रव्य आदि सत्र शक्तियों में दुर्बल किसी समाज की संगठन द्वारा उन्नति करने को उसके नेता प्रस्तुत हों, तो सबसे पहले उनका ध्यान शिल्प की उन्नति की ओर जायगा । सब प्रकार के शिल्पों की उन्नति के विना देश या समाज उन्नत हो ही नहीं सकता । प्रथम महायुद्ध के अवसर पर देखा गया कि भारत में वस्त्रों की कमी जो हुई, सो तो हुई, किन्तु वस्त्रों को सीने के लिए सूई की भी कमी हो गई । सूई भी हमें दूसरे देशों से लेनी पड़ती थी । भला, ऐसा समाज सभ्यता की श्रेणी में आकर उन्नति की ओर कैसे पैर बढ़ा सकता है। अतएव, उसके अनन्तर हमारे नेताओं की दृष्टि शिल्प की उन्नति की ओर गई और उनके उद्योग और ईश्वर कृपा से आज भारत शिल्प में बहुत कुछ उन्नत हो गया है । अस्तु; प्राचीन भारत में भी इस बात पर पूरा ध्यान दिया गया था, और वर्ण व्यवस्था में प्रचुर संख्या में रहनेवाली शूद्र जाति के हाथ में शिल्प-चल दिया गया था । शिल्पैर्वा विविधैर्जीवेत् द्विजातिहितमाचरन् । शूद्रों में भी भिन्न-भिन्न शिल्पों के लिए भिन्न जातियों का विभाग कर दिया गया था । किसी जाति को वस्त्र बनाने का व्यवसाय, किसी को सीने का, किसी को लकड़ी का, किसी को लोहे का, किसी जाति को सोने का, इस प्रकार से भिन्न-भिन्न जातियों में भिन्न-भिन्न शिल्प बाँट दिये गये थे, जो आज भी चले आ रहे हैं। यह शिल्पबल शूद्र-बल है । शूद्रों के बुद्धि विकास से शिल्पों की उन्नति यहाँ पूर्ण मात्रा में हुई । ढाके की मलमल की बरावरी आज तक भी पाश्चात्य जगत् न कर सका । प्राचीन भारत के नेता ऋषि-महपियों का यह भी ध्यान था कि सब प्रकार के बलों की उन्नति समाज में की जाय, किन्तु उन बलों के दुरुपयोग से समाज को क्लेश न हो, इसका भी ध्यान रखा जाय । इसलिए, उन्होंने अपनी व्यवस्था में एक वल का नियन्त्रण दूसरे बल के द्वारा किया । नियन्त्रण निग्रह और अनुग्रह दोनों से होता है । हितैषिता भी हो और साथ ही दुरुपयोग से बचाया जाय, तभी ठीक नियंत्रण हो सकता है। इस दृष्टि से शूद्र बल का नियन्त्रण व्यापार-बल के द्वारा किया गया । वह व्यापार-वल वैश्य-वल है । और वर्ण-व्यवस्था में शूद्रों से ऊपर वैश्यों का स्थान है । शिल्पी को अपने शिल्प के अधिकाधिक प्रसार की इच्छा रहती है और वह प्रसार व्यापार-बल के द्वारा ही हो सकता है । एक ग्राम, नगर और देश के शिल्प को सैकड़ों-हजारों कोसों तक प्रचारित कर देना व्यापार-वल का ही काम है। इसलिए व्यापार-वल शिल्प-चल की सहायता भी करता है और आलस्यादि दुरुपयोग से उसे बचाता भी है । प्रसार की लालसा से शिल्पियों को
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