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डोगरों की पुरानी संस्कृति, रीति-रिवाजों, भाषा की बात करने वालीं पद्मश्री पद्मा सचदेव का निधन हो गया है। ऐसे में उनके निधन से सिंगर लता मंगेशकर को बहुत दुःख हुआ है। जी हाँ और उन्होंने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
लता मंगेशकर ने ट्वीट कर लिखा है, "मेरी प्यारी सहेली और मशहूर लेखिका कवयित्री और संगीतकार पद्मा सचदेव के निधन की खबर सुनकर मैं निःशब्द हूं। क्या कहूं। हमारी बहुत पुरानी दोस्ती थी। पदमा और उसके पति हमारे परिवार के सदस्य जैसे ही थे। मेरे अमेरिका के शो का निवेदन उसने किया था। मैंने उसके डोगरी गाने गाए थे। जो बहुत लोक प्रिय हुए थे। पदम के पति सुरेंद्र सिंह जी अच्छे शास्त्रीय गायक हैं। जिन्होंने मेरा गुरुवाणी का रिकार्ड किया था। कई यादें हैं आज मैं बहुत दुखी हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। " आप सभी को बता दें कि पद्मा सचदेव एक भारतीय कवयित्री और उपन्यासकार थीं। उन्होंने डोगरी भाषा की पहली आधुनिक महिला कवि के रूप में अपनी छवि बनाई थी। पद्मा ने हिंदी में भी लेखनी की।
जी दरअसल उन्होंने 'मेरी कविता मेरे गीत' सहित कई कविता संग्रह प्रकाशित किए, जिसने 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता। इसी के साथ उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1970), सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (1987), हिंदी अकादमी पुरस्कार (1987-88), उत्तर प्रदेश हिंदी अकादमी के सौहार्द पुरस्कार (1989) से सम्मानित किया गया था। आप सभी को बता दें कि उनकी प्रकाशित कृतियों में 'अमराई', 'भटको नहीं धनंजय', 'नौशीन', अक्खरकुंड', 'बूंद बावड़ी' (आत्मकथा), 'तवी ते चन्हान', 'नेहरियां गलियां', 'पोता पोता निम्बल', 'उत्तरबैहनी', 'तैथियां', 'गोद भरी' तथा हिंदी में 'उपन्यास 'अब न बनेगी देहरी' प्रमुख रहीं हैं।
पति से तलाक लेगी नागिन की यह अदाकारा, कहा- 'मुझे थप्पड़ मारा, पेट पर लात मारी'
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डोगरों की पुरानी संस्कृति, रीति-रिवाजों, भाषा की बात करने वालीं पद्मश्री पद्मा सचदेव का निधन हो गया है। ऐसे में उनके निधन से सिंगर लता मंगेशकर को बहुत दुःख हुआ है। जी हाँ और उन्होंने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। लता मंगेशकर ने ट्वीट कर लिखा है, "मेरी प्यारी सहेली और मशहूर लेखिका कवयित्री और संगीतकार पद्मा सचदेव के निधन की खबर सुनकर मैं निःशब्द हूं। क्या कहूं। हमारी बहुत पुरानी दोस्ती थी। पदमा और उसके पति हमारे परिवार के सदस्य जैसे ही थे। मेरे अमेरिका के शो का निवेदन उसने किया था। मैंने उसके डोगरी गाने गाए थे। जो बहुत लोक प्रिय हुए थे। पदम के पति सुरेंद्र सिंह जी अच्छे शास्त्रीय गायक हैं। जिन्होंने मेरा गुरुवाणी का रिकार्ड किया था। कई यादें हैं आज मैं बहुत दुखी हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। " आप सभी को बता दें कि पद्मा सचदेव एक भारतीय कवयित्री और उपन्यासकार थीं। उन्होंने डोगरी भाषा की पहली आधुनिक महिला कवि के रूप में अपनी छवि बनाई थी। पद्मा ने हिंदी में भी लेखनी की। जी दरअसल उन्होंने 'मेरी कविता मेरे गीत' सहित कई कविता संग्रह प्रकाशित किए, जिसने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता। इसी के साथ उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार , सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार , हिंदी अकादमी पुरस्कार , उत्तर प्रदेश हिंदी अकादमी के सौहार्द पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आप सभी को बता दें कि उनकी प्रकाशित कृतियों में 'अमराई', 'भटको नहीं धनंजय', 'नौशीन', अक्खरकुंड', 'बूंद बावड़ी' , 'तवी ते चन्हान', 'नेहरियां गलियां', 'पोता पोता निम्बल', 'उत्तरबैहनी', 'तैथियां', 'गोद भरी' तथा हिंदी में 'उपन्यास 'अब न बनेगी देहरी' प्रमुख रहीं हैं। पति से तलाक लेगी नागिन की यह अदाकारा, कहा- 'मुझे थप्पड़ मारा, पेट पर लात मारी'
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- #West-bengalWest Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में चुनावों का अनिवार्य हिस्सा क्यों हो गयी है हिंसा?
Kolkata Airport: कोलकाता एयरपोर्ट पर बुधवार शाम बड़ा हादसा हो गया। कोलकाता एयरपोर्ट के 3सी डिपार्चर टर्मिनल बिल्डिंग में भीषण आग लग गई। आग लगते ही मौके पर हड़कंप मच गया।
एयरपोर्ट अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि आग 3सी डिपार्चर बिल्डिंग में लगी है। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। दमकल विभाग को सूचना दी गई है।
सीआईएसएफ ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आग लगते ही भगदड़ मच गई। डी पोर्टल चेक-इन काउंटर पर आग लग गई। धुएं के कारण यात्रियों और कर्मचारियों को टर्मिनल भवन से बाहर निकाला गया। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। आग बुझा दी गई है। सामान्य परिचालन बहाल किया जा रहा है।
सीआईएसएफ ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आग लगते ही भगदड़ मच गई थी। डी पोर्टल चेक-इन काउंटर पर आग लगी थी। धुएं के कारण यात्रियों और कर्मचारियों को टर्मिनल भवन से बाहर निकाला गया। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। आग बुझा दी गई है। सामान्य परिचालन बहाल किया जा रहा है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि चेक-इन एरिया पोर्टल डी पर रात 9:12 बजे आग लगी थी। इसका धुआं चारों ओर फैल गया। रात 9:40 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। चेक-इन क्षेत्र में धुएं के चलते चेक-इन प्रक्रिया को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ घंटों बाद चेक-इन और संचालन अब फिर से शुरू कर दिया गया है।
वहीं, इससे पहले महाराष्ट्र के मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को भीषण सड़क हादसा हो गया था। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी और तीन लोग घायल हो गए थे। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लोनावाला ओवरब्रिज पर दुर्घटना के बाद एक तेल टैंकर में आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी।
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बॉलीवुड इंडस्ट्री में बहुत से ऐसे सितारे हैं, जो इस इंडस्ट्री में सदाबहार रहते हैं या यूं कहें कि दर्शकों के जेहन में उनका चेहरा कभी फीका नहीं होता. लेकिन इस इंडस्ट्री के कई सितारे ऐसे भी हैं जिन्होनें पहली ही फिल्म से अपनी पहचान बनाई, लेकिन कुछ फिल्मों में काम करने के बाद वो गायब हो गए. ऐसी ही एक एक्ट्रेस हैं ऐश्वर्या की हमशक्ल कही जाने वाली स्नेहा उल्लाल, जो अपनी पहली फिल्म में सलमान के साथ नजर तो आईं लेकिन उसके बाद नहीं चलीं! आइए जानते हैं आजकल कहां है स्नेहा उल्लाल.
ऐश्वर्या की हमशक्ल कही जाने वाली एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल सलमान खान संग फिल्म 'लकी' में नजर आईं. इस फिल्म ने उन्हें इंडस्ट्री में एक पहचान तो दी, लेकिन स्नेहा कुछ एक फिल्मों के पिट जाने के बाद इंडस्ट्री से जैसे गायब हो गईं.
सलमान खान की फिल्म 'लकीः नो टाइम फॉर लव' में सलमान ने नई एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल को पर्दे पर उतारा था. लोगों को स्नेहा में ऐश की झलक दिखी, जिसके बाद रातों रात वो एक आम से खास चेहरा बन गईं और उन्हें ऐश की तरह ही बेहद खास मानने लगे.
स्नेहा साल 2005 में आई 'लकी...' के बाद कभी किसी फिल्म में सलमान के साथ नहीं दिखाई दीं. हालांकि स्नेहा ने 'आर्यन' (2006), 'जाने भी दो यारों' (2007), 'काश मेरे होते' (2009), और 'क्लिक' (2009) जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है.
स्नेहा ने 2005 में लकी रिलीज होने के बाद पढ़ाई पूरी करने की खातिर फिल्मों से दूरी बना ली थी. बाद में पढ़ाई पूरी कर स्नेहा ने दोबारा फिल्म इंडस्ट्री में लौटी लेकिन कुछ खास कमाल नहीं कर सकीं. उन्होंने कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया है.
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बॉलीवुड इंडस्ट्री में बहुत से ऐसे सितारे हैं, जो इस इंडस्ट्री में सदाबहार रहते हैं या यूं कहें कि दर्शकों के जेहन में उनका चेहरा कभी फीका नहीं होता. लेकिन इस इंडस्ट्री के कई सितारे ऐसे भी हैं जिन्होनें पहली ही फिल्म से अपनी पहचान बनाई, लेकिन कुछ फिल्मों में काम करने के बाद वो गायब हो गए. ऐसी ही एक एक्ट्रेस हैं ऐश्वर्या की हमशक्ल कही जाने वाली स्नेहा उल्लाल, जो अपनी पहली फिल्म में सलमान के साथ नजर तो आईं लेकिन उसके बाद नहीं चलीं! आइए जानते हैं आजकल कहां है स्नेहा उल्लाल. ऐश्वर्या की हमशक्ल कही जाने वाली एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल सलमान खान संग फिल्म 'लकी' में नजर आईं. इस फिल्म ने उन्हें इंडस्ट्री में एक पहचान तो दी, लेकिन स्नेहा कुछ एक फिल्मों के पिट जाने के बाद इंडस्ट्री से जैसे गायब हो गईं. सलमान खान की फिल्म 'लकीः नो टाइम फॉर लव' में सलमान ने नई एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल को पर्दे पर उतारा था. लोगों को स्नेहा में ऐश की झलक दिखी, जिसके बाद रातों रात वो एक आम से खास चेहरा बन गईं और उन्हें ऐश की तरह ही बेहद खास मानने लगे. स्नेहा साल दो हज़ार पाँच में आई 'लकी...' के बाद कभी किसी फिल्म में सलमान के साथ नहीं दिखाई दीं. हालांकि स्नेहा ने 'आर्यन' , 'जाने भी दो यारों' , 'काश मेरे होते' , और 'क्लिक' जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है. स्नेहा ने दो हज़ार पाँच में लकी रिलीज होने के बाद पढ़ाई पूरी करने की खातिर फिल्मों से दूरी बना ली थी. बाद में पढ़ाई पूरी कर स्नेहा ने दोबारा फिल्म इंडस्ट्री में लौटी लेकिन कुछ खास कमाल नहीं कर सकीं. उन्होंने कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया है. Read More:
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पं. राजेंद्र वर्मन ने सितार वादन की कला को घरानों की परम्परा से बाहर निकालकर नई पीढ़ी की पौध विकसित करने की दिशा में सार्थक प्रयत्न किया है। सवा पांच की ताल के उन्नायक राजेंद्र वर्मन वर्तमान समय के बेहतरीन, संवेदनशील और रचनात्मक कलाकार हैं, जो उनके रागों के गायन में प्रदर्शित होता है। आप अपनी शुद्धता एवं व्यवस्थित विकास और राग की शांति के लिए जाने जाते हैं। हिंदी विवेक को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने संगीत खासकर सितार की बारीकियों और संगीत के भविष्य को लेकर लम्बी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के सम्पादित अंशः
अपने बचपन और परिवार के विषय में कुछ बताएं?
मेरा जन्म राजस्थान के एक संगीत घराने में जोधपुर में हुआ था। मेरे पिताजी 'नाद रत्न' आचार्य देवेंद्र वर्मन संगीत के बड़े विद्वान और गायक थे। संगीत के दो तकनीकी भाग होते हैं, परफार्मेंस(प्रदर्शन) और शास्त्र। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे पिताजी के पास दोनों का विशद् ज्ञान था, जिसे मुझे सीखने का मौका मिला। गहन शिक्षा के लिए मुझे योग्य गुरु की तलाश थी। उसी समय इंदौर घराने के सितार वादक पद्मभूषण उस्ताद अब्दुल हलीम जाफर खान जी का जोधपुर में कार्यक्रम हुआ। उन्हें सुनते ही मुझे लगा कि इनसे बेहतर गुरु मुझे कोई और नहीं मिल सकता।
आप सितार वादन के क्षेत्र में ही क्यों आए, किसी और विधा में क्यों नहीं?
दरअसल, मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं गायन सीखूं। मैंने उसकी शिक्षा भी ली। साथ ही, तबला सीखा क्योंकि गायन के साथ ही साथ आपको किसी एक वाद्य का वादन आना आवश्यक है। इन सारी कवायदों के बावजूद सितार मुझे ज्यादा आकर्षित कर रहा था। उसे सुनते ही मन के तार झंकृत हो उठते थे। इसे आप दैवीय संयोग मानिए या कुछ और, हमेशा लगता था कि मुझे यही सीखना चाहिए। संयोग से मुझे बेहतरीन गुरु भी मिल गए। खां साहब ने मुझे मुंबई आने के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि घर की माली हलात ऐसी नहीं थी कि पिताजी मेरा मुंबई में रहने का खर्चा उठा सकते।
सितार वाद्य की क्या विशेषता होती है और यह सर्वश्रेष्ठ वाद्य क्यों माना जाता है?
सितार एक पूर्ण भारतीय वाद्य है क्योंकि इसमें भारतीय वाद्यों की तीनों विशेषताएं होती हैं। तंत्री या तारों के अलावा इसमें घुड़च, तरब के तार तथा सारिकाएं होती हैं। यह भारतीय तंत्री वाद्यों का सर्वाधिक विकसित रूप है। सामान्यतः सितार में 18, 19, 20 या 21 तार हो सकते हैं। इनमें से छह या सात बजने वाले तार हैं जो घुमावदार, उभरे हुए फ्रेट्स पर चलते हैं, और शेष सहानुभूति तार (तारब, जिसे तारिफ या तारफदार के रूप में भी जाना जाता है) हैं जो फ्रेट्स के नीचे चलते हैं और बजाए गए तारों के साथ सहानुभूति में गूंजते हैं। इन स्ट्रिंग्स का उपयोग आम तौर पर एक प्रस्तुति की शुरुआत में राग के मूड को सेट करने के लिए किया जाता है। फ्रेट्स, जिन्हें परदा या थाट के रूप में जाना जाता है, फाइन-ट्यूनिंग की अनुमति देते हैं। बजने वाले तार वाद्य यंत्र के सिर पर या उसके पास ट्यूनिंग खूंटे तक चलते हैं, जबकि सहानुभूति तार, जो कि विभिन्न लम्बाई के होते हैं, फ्रेटबोर्ड में छोटे छेद से गुजरते हैं ताकि छोटे ट्यूनिंग खूंटे से जुड़ सकें जो उपकरण की गर्दन के नीचे चलते हैं। सितार में दो पुल होते हैं। बड़ा पुल (बड़ा गोरा) बजाने के लिए और ड्रोन तार और छोटा पुल (छोटा गोरा) सहानुभूति तारों के लिए। यह खासियत इसे अन्य वाद्यों से अलग बनाती है।
आप स्वयं को किस घराने से सम्बद्ध मानते हैं और उस घराने की क्या खूबी है?
मेरा घराना वही है, जो मेरे उस्ताद का है। इंदौर घराना। अपने पिताजी के बाद मैंने अपने गुरु अब्दुल हलीम जाफर खां साहब से ही सीखा। उनके प्रशिक्षण के कारण ही बहुत ही कम समय में सितार के 'जफरखानी बाज' की पेचीदगियों को समझ पाया था। मेरा सौभाग्य है कि मेरे गुरु मुझे अपने सबसे बेहतर शिष्यों में स्थान देते थे।
इंदौर घराने की मूल विशेषता क्या है?
किसी भी घराने के बनने और प्रतिष्ठित होने के पीछे उसके मुखिया के काम और विशेष उपलब्धियां काम करती हैं। उस व्यक्ति ने किस-किस को सिखाया और उसके सिखाए शिष्यों ने आगे चलकर कितनी प्रगति की और नाम कमाया, इन सारी चीजों को मिलाने से घराना बनता है। मेरे गुरु का सितार वादन के क्षेत्र में पूरे विश्व में नाम था। अगर सितार की बात करें तो इसके लिए तीन घराने ज्यादा प्रसिद्ध रहे। पं. रविशंकर का मैहर घराना, उस्ताद विलायत अली खां साहब का इटावा घराना और हमारा इंदौर घराना। इन तीनों घरानों ने इस विधा में काफी काम किया। इसीलिए इन सब का सितार वादन के क्षेत्र में काफी नाम रहा।
अब तक आपने कितने शिष्यों को सितार वादन की शिक्षा दी हैं?
पूरी तरह से गिनती तो नहीं की परंतु तीन सौ से ऊपर ही संख्या बैठेगी। मैं लगभग 50 सालों से सितार बजाने के साथ ही साथ लोगों को सिखा भी रहा हूं क्योंकि मुंबई शहर में जीविकोपार्जन का अन्य कोई बेहतर विकल्प मेरे सामने न था। सिखाने का एक बड़ा कारण था कि मैं जोधपुर से ठीकठाक सितार वादन सीखकर आया था। मेरे पिताजी की इच्छा थी कि मैं लोगों को सितार की शिक्षा दूं। उनकी इस इच्छा का मान हो गया। परंतु मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं बिना फीस लिए सिखाऊं। वह मैंने नहीं किया। पहला प्रश्न आजीविका का था। दूसरी बात, मुफ्त में सीखने वाले लोग उस विद्या की कद्र नहीं करते। कोई बहुत ज्यादा गरीब है तो ठीक है पर जो दे सकता है उसे देना चाहिए।
मुंबई फिल्मों की नगरी है। क्या उस क्षेत्र में भी आपने हाथ आजमाया?
मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि शुरुआती दौर से ही मुझे फिल्मों में सितार वादन का कार्य मिलता रहा। मैंने सुर संगम, देस परदेस, अंगूर, दिल है कि मानता नहीं, रॉकी, हीरो समेत लगभग 250 से अधिक फिल्मों के लिए कार्य किया। 90 के दशक में कई सारे मित्रों ने जोर देना शुरू किया कि मुझे संगीत देना ही चाहिए क्योंकि मैं धुनें बना लेता था। उस दौर में दूरदर्शन पर 13-13 एपिसोड के धारावाहिक बनते थे। मैंने एक धारावाहिक 'रात की पुकार' में संगीत दिया। उसके बाद एक कारवां सा चल पड़ा। 'दिल से संगीत तक' कार्यक्रम किया और बहुत सारे जिंगल्स भी किए। पर मेरा मन हमेशा सितार में ज्यादा रमा।
भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार में संगीत का कितना योगदान रहा?
सर्वाधिक रहा। भारतीय संगीत आत्मिक संगीत होता है। इसका सम्बंध आत्मा के साथ होता है। जबकि पश्चिमी संगीत के साथ ऐसा नहीं है। वहां एक व्यक्ति धुन बनाता है और बाकी लोग उसे बजाते हैं। भारतीय संगीत के साथ ऐसा नहीं है। यहां पर पुरानी धुनों या ताल को विस्तार देने की भरपूर गुंजाइश होती है तथा समय के साथ उसे नवीन स्वरूप मिलता रहा है। वहां का संगीत बंधा हुआ है। मेरे गुरु कहा करते थे कि, मुझसे आप सीखते ही हैं। दूसरों को सुनते हैं। इन सब के अलावा अपना स्वयं का मस्तिष्क भी लगाइए। यहां के संगीत में पीढ़ी दर पीढ़ी काफी मेहनत की गई है, इसलिए भारतीय संगीत के प्रति पूरी दुनिया भागती है। आपको जानकर खुशी होगी कि सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक बजने और सुने जाने वाला भारतीय संगीत है। विश्व का शायद ही कोई बड़ा शहर हो जहां सितार सीखने वाले न हों। गायन हो, वादन हो या नृत्य। दुनियाभर से लोग सीखने के लिए आते हैं।
भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान किसका मानते हैं?
इस मामले में सबसे बड़ा योगदान पं. रविशंकर का रहा। शायद ईश्वर ने उन्हें इसी काम के लिए पृथ्वी पर भेजा था कि, तुम सम्पूर्ण विश्व में भारतीय संगीत का प्रचार-प्रसार करो। वे चाहते तो अकेले कार्यक्रम कर सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरों को खूब मौके दिए। बीटल्स ग्रुप के जॉन लेनन रविशंकर जी से सितार सीखने के लिए बनारस आए थे।
आप लोगों की पीढ़ी मेहनती थी। वर्तमान पीढ़ी फटाफट चीजें पाना चाहती है। उनके लिए क्या कहना चाहेंगे?
साधना समय मांगती है। आप उससे भाग नहीं सकते। यदि आपको बीए की पढ़ाई करनी है तो उतने साल परिश्रम करना ही पड़ेगा। यही नियम संगीत पर भी लागू होता है। यदि आप परिश्रम नहीं करते हैं तो आपको उस स्तर का ज्ञान प्राप्त नहीं होगा।
अर्थात् पहले की अपेक्षा शास्त्रीय संगीत का स्तर गिरा है?
मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं। पहले के लोग मेहनत करना चाहते थे। वर्तमान पीढ़ी उतनी मेहनती नहीं है। एक और कारण रहा। पहले संगीतज्ञ राजपरिवारों से संरक्षण पाते थे। उन्हें केवल रियाज करना रहता था। उनके जीवन यापन की जिम्मेदारी उस राजपरिवार के जिम्मे होती थी। जब आप कमाने लगते हैं तो रियाज पीछ छूटने लगता है। इसका असर फिल्मों पर भी पड़ा है। 40 से लेकर 70 के दशक तक का समय गोल्डेन पीरियड कहा जाता है। मैं उन सौभाग्यशाली लोगों में से हूं जिन्होंने उस दौर को देखा है। साथ ही, अपने समय के लगभग सभी बड़े और गुनी जनों के साथ संगत की। मुझे फिल्म संगीत के गोल्डेन पीरियड के संगीतकारों के साथ काम करने का भी सौभाग्य मिला।
कोई ऐसा संगीतकार जिसके साथ काम करने में सबसे ज्यादा आनंद आया हो?
हर संगीतकार का अलहदा अंदाज होता है। अगर शास्त्रीय संगीत की बात करें तो मदन मोहन लाजवाब थे। इसलिए उनका संगीत दिल के बहुत ज्यादा करीब रहा। परंतु उसी का और थोड़ा सुधरा रूप जयदेव जी का था। वे बहुत ही अच्छे इंसान थे, और उतना ही उम्दा उनका संगीत रहा। उसके बाद रवींद्र जैन और शंकर-जयकिशन आए। वह दौर ही बेहतरीन संगीत का था। गाने सुनकर पता चल जाता था कि इसमें संगीत ओ. पी. नैयर का है, या एस.डी. बर्मन का। आज वह मधुरता और विशिष्टता गायब हो गई है। सभी ए.आर. रहमान के चेले हो गए हैं। एक ही लय में गा रहे हैं। सुरों की ऊंचाई-गहराई, आलाप इत्यादि पर किसी का ध्यान ही नहीं है। सब ऊंचे सुर में चिल्ला रहे हैं।
भारतीय स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ पर आपने 50 घंटे का कार्यक्रम किया था। इतना वृहद कार्यक्रम किस प्रकार स्वरूप पा सका?
स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ पर जगह-जगह बड़े कलाकारों के कार्यक्रम हो रहे थे। मेरे मन में आया कि एक कार्यक्रम नवोदित और कम प्रसिद्ध कलाकारों का भी होना चाहिए। साथ ही, राष्ट्र को ट्रिब्यूट देने के तौर पर 50 घंटों का होना चाहिए। नए के नाम पर सुनने वाले नहीं आएंगे, इसलिए उनके साथ एक बड़ा आर्टिस्ट भी रखा। हॉल वाले तैयार नहीं हो रहे थे, उतनेे लम्बे कार्यक्रम के लिए। किसी तरह खार के शारदा विद्यामंदिर के संचालक तैयार हो गए। विद्यालय होने के कारण हमारे इतने सारे कलाकारों के लिए ग्रीन रूम की समस्या हल हो गई। मेरे एक आईपीएस मित्र ने पुलिस स्टेशन से परमीशन दिलवाने में मदद कर दी। हमारी मंशा थी कि देश के हर घराने और वाद्य के धुरंधर इसका हिस्सा बनें। कार्यक्रम के सफल आयोजन के पश्चात् महाराष्ट्र के तात्कालीन संस्कृति मंत्री ने हमारी पूरी टीम को मंत्रालय में बुलाकर सम्मानित किया था।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड से सम्पर्क साधने की कोशिश नहीं की?
किया था, लेकिन हमारी नियमावली उनसे मैच नहीं खा रही थी। वे चाहते थे कि प्रत्येक 8 घंटों के बाद पंद्रह मिनट का अंतराल हो। डॉक्टरों की टीम, एम्ब्युलेंस समेत बहुत सारी बाते थीं। जबकि हमें था कि एक बार जोत जल गई तो रुकनी नहीं चाहिए। फिर भी उनकी ओर से हमें प्रशस्ति पत्र मिला कि पूरी दुनिया में इस तरह का कोई कार्यक्रम पहले नहीं हुआ था। कोविड के दौरान भी हमने ऑनलाइन कार्यक्रम किए। हमें कार्यक्रम करते हुए 45 साल हो गए।
पिछले 8 सालों में मोदी जी ने भारतीय संस्कृति को विश्वव्यापी बनाने की दिशा में गम्भीर प्रयत्न किए हैं। संगीत के क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई?
यह सही है कि भारतीय संस्कृति के विस्तार के सार्थक प्रयत्न हो रहे हैं लेकिन अफसोस है कि संगीत के क्षेत्र में कोई व्यापक कार्य नहीं हुआ है। नेहरू पूरे विश्व में संगीतकारों को लेकर जाते थे। इंदिरा गांधी ने भी काफी प्रोत्साहन दिया। आखिरी बार राष्ट्रीय स्तर पर 'अपना उत्सव' का आयोजन 1986 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व में हुआ था। हमारी वर्तमान सरकार से अपेक्षा है कि संगीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम होने चाहिए ताकि भारतीय संस्कृति की इस शाखा के विस्तार को और बल मिले।
सितार बजाते समय सबसे ज्यादा आनंदित कब होते हैं?
साक्षात्कार के दौरान यह प्रश्न मुझे हमेशा पूछा जाता है कि, आपको पूरे विश्व में सितार बजाने में सबसे ज्यादा आनंद कहां आता है? मेरा जवाब होता है, जब मैं अपने घर पर बंद कमरे में रियाज कर रहा होता हूं। उस समय की एकाग्रता और अनुभूति ही किसी कलाकार की कला को सार्थक बनाने की दिशा में सार्थक कदमताल करती है। इसका व्यापक प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
संगीत के भविष्य को लेकर आप कितने आशान्वित हैं?
पिछले एक-डेढ़ दशकों में शास्त्रीय संगीत और फिल्मी संगीत, दोनों ने गति पकड़नी शुरू कर दी है। टीवी पर तमाम संगीत प्रतियोगिताएं आयोजित होने लगी हैं, जिनमें देश के कोने-कोने से प्रतिभाशाली प्रतियोगी सामने आ रहे हैं। पहले घराने होने की वजह से जो प्रतिभा सिमटी थी, उसका भी विस्तार हो रहा है। तमाम तालों और रागों को लेकर प्रयोग हो रहे हैं। डॉक्टरी, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध लोगों का झुकाव भी संगीत की ओर बढ़ रहा है। संगीत की खासियत है कि इसके स्वरों का आंदोलन हमारे दिल के आंदोलन से मिल जाता है। हमारी रीढ़ की में 22 लड़ियां होती हैं। सारे सुरों की संख्या भी 22 ही है।
दक्षिण के पांच राज्यों और बंगाल में संगीत की बड़ी समृद्ध परम्परा रही है, बाकी राज्यों में नहीं। ऐसा क्यों?
इसका सर्व प्रमुख कारण वहां की शासन परम्परा रही। उन राज्यों में राजघरानों ने संगीत के विकास को प्राथमिकता दी। जबकि बाकी जगहों पर उतने बढ़िया ढंग से नहीं हो पाया। उन राज्यों में आम लोगों के बीच संगीत को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जाता था। राज परिवार या बड़े उद्योगपति महफिलें आयोजित करवाते थे, जहां नए लोगों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता था। उत्तर भारत के ज्यादातर विद्यालयों में संगीत की शिक्षा ही नहीं मिलती।
6 दशकों के संगीत के प्रवास का सिंहावलोकन करने पर संगीत के क्षेत्र की कोई उपलब्धि जो बाकी रह गई हो, या कोई विशेष ताल जिसे आपने विकसित किया हो?
संगीत अथाह सागर है। एक व्यक्ति कुछ बूंदें ही पी सकता है। पिछले 60-65 सालों से यमन बजा रहा हूं लेकिन अभी भी स्वयं को पूर्ण पारंगत नहीं कह सकता। वैसे मैंने एक प्रयोग किया जो सफल रहा। राग के क्षेत्र में काफी प्रयोग हुए पर ताल के क्षेत्र में ऐसा नहीं हो पाया था। पहले माना जाता था कि तालों में घटाव-बढ़ाव की गुंजाइश नहीं। पं. रविशंकर ने आधा ताल जोड़ने का कार्य किया। जैसे, 10 की ताल से साढ़े 10 की ताल। मैंने उस कार्य को आगे बढ़ाया और सवा 5 की ताल विकसित की। काफी बड़े सितारवादक मुझसे यह नया अनुसंधान सीखने के लिए आते हैं और प्रशंसा करते हैं।
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पं. राजेंद्र वर्मन ने सितार वादन की कला को घरानों की परम्परा से बाहर निकालकर नई पीढ़ी की पौध विकसित करने की दिशा में सार्थक प्रयत्न किया है। सवा पांच की ताल के उन्नायक राजेंद्र वर्मन वर्तमान समय के बेहतरीन, संवेदनशील और रचनात्मक कलाकार हैं, जो उनके रागों के गायन में प्रदर्शित होता है। आप अपनी शुद्धता एवं व्यवस्थित विकास और राग की शांति के लिए जाने जाते हैं। हिंदी विवेक को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने संगीत खासकर सितार की बारीकियों और संगीत के भविष्य को लेकर लम्बी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के सम्पादित अंशः अपने बचपन और परिवार के विषय में कुछ बताएं? मेरा जन्म राजस्थान के एक संगीत घराने में जोधपुर में हुआ था। मेरे पिताजी 'नाद रत्न' आचार्य देवेंद्र वर्मन संगीत के बड़े विद्वान और गायक थे। संगीत के दो तकनीकी भाग होते हैं, परफार्मेंस और शास्त्र। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे पिताजी के पास दोनों का विशद् ज्ञान था, जिसे मुझे सीखने का मौका मिला। गहन शिक्षा के लिए मुझे योग्य गुरु की तलाश थी। उसी समय इंदौर घराने के सितार वादक पद्मभूषण उस्ताद अब्दुल हलीम जाफर खान जी का जोधपुर में कार्यक्रम हुआ। उन्हें सुनते ही मुझे लगा कि इनसे बेहतर गुरु मुझे कोई और नहीं मिल सकता। आप सितार वादन के क्षेत्र में ही क्यों आए, किसी और विधा में क्यों नहीं? दरअसल, मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं गायन सीखूं। मैंने उसकी शिक्षा भी ली। साथ ही, तबला सीखा क्योंकि गायन के साथ ही साथ आपको किसी एक वाद्य का वादन आना आवश्यक है। इन सारी कवायदों के बावजूद सितार मुझे ज्यादा आकर्षित कर रहा था। उसे सुनते ही मन के तार झंकृत हो उठते थे। इसे आप दैवीय संयोग मानिए या कुछ और, हमेशा लगता था कि मुझे यही सीखना चाहिए। संयोग से मुझे बेहतरीन गुरु भी मिल गए। खां साहब ने मुझे मुंबई आने के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि घर की माली हलात ऐसी नहीं थी कि पिताजी मेरा मुंबई में रहने का खर्चा उठा सकते। सितार वाद्य की क्या विशेषता होती है और यह सर्वश्रेष्ठ वाद्य क्यों माना जाता है? सितार एक पूर्ण भारतीय वाद्य है क्योंकि इसमें भारतीय वाद्यों की तीनों विशेषताएं होती हैं। तंत्री या तारों के अलावा इसमें घुड़च, तरब के तार तथा सारिकाएं होती हैं। यह भारतीय तंत्री वाद्यों का सर्वाधिक विकसित रूप है। सामान्यतः सितार में अट्ठारह, उन्नीस, बीस या इक्कीस तार हो सकते हैं। इनमें से छह या सात बजने वाले तार हैं जो घुमावदार, उभरे हुए फ्रेट्स पर चलते हैं, और शेष सहानुभूति तार हैं जो फ्रेट्स के नीचे चलते हैं और बजाए गए तारों के साथ सहानुभूति में गूंजते हैं। इन स्ट्रिंग्स का उपयोग आम तौर पर एक प्रस्तुति की शुरुआत में राग के मूड को सेट करने के लिए किया जाता है। फ्रेट्स, जिन्हें परदा या थाट के रूप में जाना जाता है, फाइन-ट्यूनिंग की अनुमति देते हैं। बजने वाले तार वाद्य यंत्र के सिर पर या उसके पास ट्यूनिंग खूंटे तक चलते हैं, जबकि सहानुभूति तार, जो कि विभिन्न लम्बाई के होते हैं, फ्रेटबोर्ड में छोटे छेद से गुजरते हैं ताकि छोटे ट्यूनिंग खूंटे से जुड़ सकें जो उपकरण की गर्दन के नीचे चलते हैं। सितार में दो पुल होते हैं। बड़ा पुल बजाने के लिए और ड्रोन तार और छोटा पुल सहानुभूति तारों के लिए। यह खासियत इसे अन्य वाद्यों से अलग बनाती है। आप स्वयं को किस घराने से सम्बद्ध मानते हैं और उस घराने की क्या खूबी है? मेरा घराना वही है, जो मेरे उस्ताद का है। इंदौर घराना। अपने पिताजी के बाद मैंने अपने गुरु अब्दुल हलीम जाफर खां साहब से ही सीखा। उनके प्रशिक्षण के कारण ही बहुत ही कम समय में सितार के 'जफरखानी बाज' की पेचीदगियों को समझ पाया था। मेरा सौभाग्य है कि मेरे गुरु मुझे अपने सबसे बेहतर शिष्यों में स्थान देते थे। इंदौर घराने की मूल विशेषता क्या है? किसी भी घराने के बनने और प्रतिष्ठित होने के पीछे उसके मुखिया के काम और विशेष उपलब्धियां काम करती हैं। उस व्यक्ति ने किस-किस को सिखाया और उसके सिखाए शिष्यों ने आगे चलकर कितनी प्रगति की और नाम कमाया, इन सारी चीजों को मिलाने से घराना बनता है। मेरे गुरु का सितार वादन के क्षेत्र में पूरे विश्व में नाम था। अगर सितार की बात करें तो इसके लिए तीन घराने ज्यादा प्रसिद्ध रहे। पं. रविशंकर का मैहर घराना, उस्ताद विलायत अली खां साहब का इटावा घराना और हमारा इंदौर घराना। इन तीनों घरानों ने इस विधा में काफी काम किया। इसीलिए इन सब का सितार वादन के क्षेत्र में काफी नाम रहा। अब तक आपने कितने शिष्यों को सितार वादन की शिक्षा दी हैं? पूरी तरह से गिनती तो नहीं की परंतु तीन सौ से ऊपर ही संख्या बैठेगी। मैं लगभग पचास सालों से सितार बजाने के साथ ही साथ लोगों को सिखा भी रहा हूं क्योंकि मुंबई शहर में जीविकोपार्जन का अन्य कोई बेहतर विकल्प मेरे सामने न था। सिखाने का एक बड़ा कारण था कि मैं जोधपुर से ठीकठाक सितार वादन सीखकर आया था। मेरे पिताजी की इच्छा थी कि मैं लोगों को सितार की शिक्षा दूं। उनकी इस इच्छा का मान हो गया। परंतु मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं बिना फीस लिए सिखाऊं। वह मैंने नहीं किया। पहला प्रश्न आजीविका का था। दूसरी बात, मुफ्त में सीखने वाले लोग उस विद्या की कद्र नहीं करते। कोई बहुत ज्यादा गरीब है तो ठीक है पर जो दे सकता है उसे देना चाहिए। मुंबई फिल्मों की नगरी है। क्या उस क्षेत्र में भी आपने हाथ आजमाया? मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि शुरुआती दौर से ही मुझे फिल्मों में सितार वादन का कार्य मिलता रहा। मैंने सुर संगम, देस परदेस, अंगूर, दिल है कि मानता नहीं, रॉकी, हीरो समेत लगभग दो सौ पचास से अधिक फिल्मों के लिए कार्य किया। नब्बे के दशक में कई सारे मित्रों ने जोर देना शुरू किया कि मुझे संगीत देना ही चाहिए क्योंकि मैं धुनें बना लेता था। उस दौर में दूरदर्शन पर तेरह-तेरह एपिसोड के धारावाहिक बनते थे। मैंने एक धारावाहिक 'रात की पुकार' में संगीत दिया। उसके बाद एक कारवां सा चल पड़ा। 'दिल से संगीत तक' कार्यक्रम किया और बहुत सारे जिंगल्स भी किए। पर मेरा मन हमेशा सितार में ज्यादा रमा। भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार में संगीत का कितना योगदान रहा? सर्वाधिक रहा। भारतीय संगीत आत्मिक संगीत होता है। इसका सम्बंध आत्मा के साथ होता है। जबकि पश्चिमी संगीत के साथ ऐसा नहीं है। वहां एक व्यक्ति धुन बनाता है और बाकी लोग उसे बजाते हैं। भारतीय संगीत के साथ ऐसा नहीं है। यहां पर पुरानी धुनों या ताल को विस्तार देने की भरपूर गुंजाइश होती है तथा समय के साथ उसे नवीन स्वरूप मिलता रहा है। वहां का संगीत बंधा हुआ है। मेरे गुरु कहा करते थे कि, मुझसे आप सीखते ही हैं। दूसरों को सुनते हैं। इन सब के अलावा अपना स्वयं का मस्तिष्क भी लगाइए। यहां के संगीत में पीढ़ी दर पीढ़ी काफी मेहनत की गई है, इसलिए भारतीय संगीत के प्रति पूरी दुनिया भागती है। आपको जानकर खुशी होगी कि सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक बजने और सुने जाने वाला भारतीय संगीत है। विश्व का शायद ही कोई बड़ा शहर हो जहां सितार सीखने वाले न हों। गायन हो, वादन हो या नृत्य। दुनियाभर से लोग सीखने के लिए आते हैं। भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान किसका मानते हैं? इस मामले में सबसे बड़ा योगदान पं. रविशंकर का रहा। शायद ईश्वर ने उन्हें इसी काम के लिए पृथ्वी पर भेजा था कि, तुम सम्पूर्ण विश्व में भारतीय संगीत का प्रचार-प्रसार करो। वे चाहते तो अकेले कार्यक्रम कर सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरों को खूब मौके दिए। बीटल्स ग्रुप के जॉन लेनन रविशंकर जी से सितार सीखने के लिए बनारस आए थे। आप लोगों की पीढ़ी मेहनती थी। वर्तमान पीढ़ी फटाफट चीजें पाना चाहती है। उनके लिए क्या कहना चाहेंगे? साधना समय मांगती है। आप उससे भाग नहीं सकते। यदि आपको बीए की पढ़ाई करनी है तो उतने साल परिश्रम करना ही पड़ेगा। यही नियम संगीत पर भी लागू होता है। यदि आप परिश्रम नहीं करते हैं तो आपको उस स्तर का ज्ञान प्राप्त नहीं होगा। अर्थात् पहले की अपेक्षा शास्त्रीय संगीत का स्तर गिरा है? मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं। पहले के लोग मेहनत करना चाहते थे। वर्तमान पीढ़ी उतनी मेहनती नहीं है। एक और कारण रहा। पहले संगीतज्ञ राजपरिवारों से संरक्षण पाते थे। उन्हें केवल रियाज करना रहता था। उनके जीवन यापन की जिम्मेदारी उस राजपरिवार के जिम्मे होती थी। जब आप कमाने लगते हैं तो रियाज पीछ छूटने लगता है। इसका असर फिल्मों पर भी पड़ा है। चालीस से लेकर सत्तर के दशक तक का समय गोल्डेन पीरियड कहा जाता है। मैं उन सौभाग्यशाली लोगों में से हूं जिन्होंने उस दौर को देखा है। साथ ही, अपने समय के लगभग सभी बड़े और गुनी जनों के साथ संगत की। मुझे फिल्म संगीत के गोल्डेन पीरियड के संगीतकारों के साथ काम करने का भी सौभाग्य मिला। कोई ऐसा संगीतकार जिसके साथ काम करने में सबसे ज्यादा आनंद आया हो? हर संगीतकार का अलहदा अंदाज होता है। अगर शास्त्रीय संगीत की बात करें तो मदन मोहन लाजवाब थे। इसलिए उनका संगीत दिल के बहुत ज्यादा करीब रहा। परंतु उसी का और थोड़ा सुधरा रूप जयदेव जी का था। वे बहुत ही अच्छे इंसान थे, और उतना ही उम्दा उनका संगीत रहा। उसके बाद रवींद्र जैन और शंकर-जयकिशन आए। वह दौर ही बेहतरीन संगीत का था। गाने सुनकर पता चल जाता था कि इसमें संगीत ओ. पी. नैयर का है, या एस.डी. बर्मन का। आज वह मधुरता और विशिष्टता गायब हो गई है। सभी ए.आर. रहमान के चेले हो गए हैं। एक ही लय में गा रहे हैं। सुरों की ऊंचाई-गहराई, आलाप इत्यादि पर किसी का ध्यान ही नहीं है। सब ऊंचे सुर में चिल्ला रहे हैं। भारतीय स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ पर आपने पचास घंटाटे का कार्यक्रम किया था। इतना वृहद कार्यक्रम किस प्रकार स्वरूप पा सका? स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ पर जगह-जगह बड़े कलाकारों के कार्यक्रम हो रहे थे। मेरे मन में आया कि एक कार्यक्रम नवोदित और कम प्रसिद्ध कलाकारों का भी होना चाहिए। साथ ही, राष्ट्र को ट्रिब्यूट देने के तौर पर पचास घंटाटों का होना चाहिए। नए के नाम पर सुनने वाले नहीं आएंगे, इसलिए उनके साथ एक बड़ा आर्टिस्ट भी रखा। हॉल वाले तैयार नहीं हो रहे थे, उतनेे लम्बे कार्यक्रम के लिए। किसी तरह खार के शारदा विद्यामंदिर के संचालक तैयार हो गए। विद्यालय होने के कारण हमारे इतने सारे कलाकारों के लिए ग्रीन रूम की समस्या हल हो गई। मेरे एक आईपीएस मित्र ने पुलिस स्टेशन से परमीशन दिलवाने में मदद कर दी। हमारी मंशा थी कि देश के हर घराने और वाद्य के धुरंधर इसका हिस्सा बनें। कार्यक्रम के सफल आयोजन के पश्चात् महाराष्ट्र के तात्कालीन संस्कृति मंत्री ने हमारी पूरी टीम को मंत्रालय में बुलाकर सम्मानित किया था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड से सम्पर्क साधने की कोशिश नहीं की? किया था, लेकिन हमारी नियमावली उनसे मैच नहीं खा रही थी। वे चाहते थे कि प्रत्येक आठ घंटाटों के बाद पंद्रह मिनट का अंतराल हो। डॉक्टरों की टीम, एम्ब्युलेंस समेत बहुत सारी बाते थीं। जबकि हमें था कि एक बार जोत जल गई तो रुकनी नहीं चाहिए। फिर भी उनकी ओर से हमें प्रशस्ति पत्र मिला कि पूरी दुनिया में इस तरह का कोई कार्यक्रम पहले नहीं हुआ था। कोविड के दौरान भी हमने ऑनलाइन कार्यक्रम किए। हमें कार्यक्रम करते हुए पैंतालीस साल हो गए। पिछले आठ सालों में मोदी जी ने भारतीय संस्कृति को विश्वव्यापी बनाने की दिशा में गम्भीर प्रयत्न किए हैं। संगीत के क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई? यह सही है कि भारतीय संस्कृति के विस्तार के सार्थक प्रयत्न हो रहे हैं लेकिन अफसोस है कि संगीत के क्षेत्र में कोई व्यापक कार्य नहीं हुआ है। नेहरू पूरे विश्व में संगीतकारों को लेकर जाते थे। इंदिरा गांधी ने भी काफी प्रोत्साहन दिया। आखिरी बार राष्ट्रीय स्तर पर 'अपना उत्सव' का आयोजन एक हज़ार नौ सौ छियासी में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व में हुआ था। हमारी वर्तमान सरकार से अपेक्षा है कि संगीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम होने चाहिए ताकि भारतीय संस्कृति की इस शाखा के विस्तार को और बल मिले। सितार बजाते समय सबसे ज्यादा आनंदित कब होते हैं? साक्षात्कार के दौरान यह प्रश्न मुझे हमेशा पूछा जाता है कि, आपको पूरे विश्व में सितार बजाने में सबसे ज्यादा आनंद कहां आता है? मेरा जवाब होता है, जब मैं अपने घर पर बंद कमरे में रियाज कर रहा होता हूं। उस समय की एकाग्रता और अनुभूति ही किसी कलाकार की कला को सार्थक बनाने की दिशा में सार्थक कदमताल करती है। इसका व्यापक प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। संगीत के भविष्य को लेकर आप कितने आशान्वित हैं? पिछले एक-डेढ़ दशकों में शास्त्रीय संगीत और फिल्मी संगीत, दोनों ने गति पकड़नी शुरू कर दी है। टीवी पर तमाम संगीत प्रतियोगिताएं आयोजित होने लगी हैं, जिनमें देश के कोने-कोने से प्रतिभाशाली प्रतियोगी सामने आ रहे हैं। पहले घराने होने की वजह से जो प्रतिभा सिमटी थी, उसका भी विस्तार हो रहा है। तमाम तालों और रागों को लेकर प्रयोग हो रहे हैं। डॉक्टरी, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध लोगों का झुकाव भी संगीत की ओर बढ़ रहा है। संगीत की खासियत है कि इसके स्वरों का आंदोलन हमारे दिल के आंदोलन से मिल जाता है। हमारी रीढ़ की में बाईस लड़ियां होती हैं। सारे सुरों की संख्या भी बाईस ही है। दक्षिण के पांच राज्यों और बंगाल में संगीत की बड़ी समृद्ध परम्परा रही है, बाकी राज्यों में नहीं। ऐसा क्यों? इसका सर्व प्रमुख कारण वहां की शासन परम्परा रही। उन राज्यों में राजघरानों ने संगीत के विकास को प्राथमिकता दी। जबकि बाकी जगहों पर उतने बढ़िया ढंग से नहीं हो पाया। उन राज्यों में आम लोगों के बीच संगीत को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जाता था। राज परिवार या बड़े उद्योगपति महफिलें आयोजित करवाते थे, जहां नए लोगों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता था। उत्तर भारत के ज्यादातर विद्यालयों में संगीत की शिक्षा ही नहीं मिलती। छः दशकों के संगीत के प्रवास का सिंहावलोकन करने पर संगीत के क्षेत्र की कोई उपलब्धि जो बाकी रह गई हो, या कोई विशेष ताल जिसे आपने विकसित किया हो? संगीत अथाह सागर है। एक व्यक्ति कुछ बूंदें ही पी सकता है। पिछले साठ-पैंसठ सालों से यमन बजा रहा हूं लेकिन अभी भी स्वयं को पूर्ण पारंगत नहीं कह सकता। वैसे मैंने एक प्रयोग किया जो सफल रहा। राग के क्षेत्र में काफी प्रयोग हुए पर ताल के क्षेत्र में ऐसा नहीं हो पाया था। पहले माना जाता था कि तालों में घटाव-बढ़ाव की गुंजाइश नहीं। पं. रविशंकर ने आधा ताल जोड़ने का कार्य किया। जैसे, दस की ताल से साढ़े दस की ताल। मैंने उस कार्य को आगे बढ़ाया और सवा पाँच की ताल विकसित की। काफी बड़े सितारवादक मुझसे यह नया अनुसंधान सीखने के लिए आते हैं और प्रशंसा करते हैं।
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[ कठिन समस्या
देखें और ऊँच-नीच के गलत खयाल को छोड़ दें और इस वहम को छोड़ दें जिससे कि उन्हें ब्राह्मण को देख कर पाप की गंध आती है और उनकी आवाज सुनकर उनका खाना पवित्र हो जाता है । ब्राह्मणों ने ही ब्रह्म को सर्वत्र देखने की शिक्षा संसार को दी है । बेशक, तब फिर पवित्रता कहीं बाहर से नहीं आ सकती । वह अन्दर ही होती है । आज ब्राह्मण यह संदेश फिर सुनावे कि अछूतपन का खयाल बुरा खयाल है । उसने संसार को यह शिक्षा दी है "आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः " मनुष्य स्वयं ही अपना उद्धारक है और अपना शत्रु और नाशक भी वही है ।
इस आंध्र - निवासी पत्र लेखक की बातों से अ-ब्राह्मणों को क्षुब्ध न होना चाहिए । इस पत्र - लेखक के जैसे कितने ही ब्राह्मण उनकी तरफ से अस्पृश्यता के खिलाफ़ उसी तरह लड़ेंगे जिस तरह कि वे खुद लड़ रहे हैं । कुछ थोड़े लोगों के पापों के कारण ब्राह्मणों की सारी जाति को ही धिक्कारना न चाहिए । मुझे डर है कि यह वृत्ति बढ़ रही है । वे इतने उदार बनें कि जो लोग उनके प्रति बुरा व्यवहार करते हैं उनसे अच्छे व्यवहार की आशा ही न करें ।
कोई राहगीर यदि मेरी तरफ दृष्टि न करे अथवा वह मेरे स्पर्श से, मेरी उपस्थिति से या मेरी आवाज से अपने को नापाक माने
तो उससे मैं अपना अपमान नहीं समभूंगा । इतना ही काफ़ी है कि उसके कहने से मैं अपने रास्ते से न हटूंगा या वह सुन लेगा इस डर से बोलना वन्द न करूँगा । जो अपने को उच्च मानता है उसके ज्ञान और वहम पर मुझे दया आ सकती है लेकिन मैं उस पर क्रोध और उसका तिरस्कार नहीं कर सकता । क्योंकि यदि मेरा तिरस्कार किया जायगा तो मुझे बुरा मालूम होगा । संयम खो देने से तो लोग अपना लक्ष्य ही खो बैठोंगे ।
सबसे महत्व की बात तो यह है कि सीमा से अधिक
बढ़वे अपने ब्राह्मण योद्धाओं को दिक्कत में न डाल दें । ब्राह्मण तो हिन्दू धर्म और मनुष्य समाज का उत्तम पुष्प है। ऐसा एक भी काम मैं न करूँगा जिससे उसे मुरझाना पड़े । मैं यह जानता हूँ कि वह अपनी रक्षा करने के लिए समर्थ है । उसक बहुत से तूफानों को देखा है । लेकिन अब्राह्मणों के बारे में यह न कहा जाना चाहिए कि उन्होंने इस पुष्प की सुगन्ध और कांति को लूट लेने का प्रयत्न किया । मैं नहीं चाहता कि ब्राह्मणों के सर्वनाश पर ब्राह्मण लोग उन्नति करें । मैं तो यह चाहता हूँ के वे उस उच्च स्थान को पहुँच जायँ जिसको अब तक ब्राह्मण नोग पहुँचे हुए थे । ब्राह्मण जन्म से होते हैं लेकिन ब्राह्मणत्व न्म से नहीं होता । यह तो वह गुरण है जिसको एक छोटे-सेटभी अपना विकास करके प्राप्त कर सकता है ।
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[ कठिन समस्या देखें और ऊँच-नीच के गलत खयाल को छोड़ दें और इस वहम को छोड़ दें जिससे कि उन्हें ब्राह्मण को देख कर पाप की गंध आती है और उनकी आवाज सुनकर उनका खाना पवित्र हो जाता है । ब्राह्मणों ने ही ब्रह्म को सर्वत्र देखने की शिक्षा संसार को दी है । बेशक, तब फिर पवित्रता कहीं बाहर से नहीं आ सकती । वह अन्दर ही होती है । आज ब्राह्मण यह संदेश फिर सुनावे कि अछूतपन का खयाल बुरा खयाल है । उसने संसार को यह शिक्षा दी है "आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः " मनुष्य स्वयं ही अपना उद्धारक है और अपना शत्रु और नाशक भी वही है । इस आंध्र - निवासी पत्र लेखक की बातों से अ-ब्राह्मणों को क्षुब्ध न होना चाहिए । इस पत्र - लेखक के जैसे कितने ही ब्राह्मण उनकी तरफ से अस्पृश्यता के खिलाफ़ उसी तरह लड़ेंगे जिस तरह कि वे खुद लड़ रहे हैं । कुछ थोड़े लोगों के पापों के कारण ब्राह्मणों की सारी जाति को ही धिक्कारना न चाहिए । मुझे डर है कि यह वृत्ति बढ़ रही है । वे इतने उदार बनें कि जो लोग उनके प्रति बुरा व्यवहार करते हैं उनसे अच्छे व्यवहार की आशा ही न करें । कोई राहगीर यदि मेरी तरफ दृष्टि न करे अथवा वह मेरे स्पर्श से, मेरी उपस्थिति से या मेरी आवाज से अपने को नापाक माने तो उससे मैं अपना अपमान नहीं समभूंगा । इतना ही काफ़ी है कि उसके कहने से मैं अपने रास्ते से न हटूंगा या वह सुन लेगा इस डर से बोलना वन्द न करूँगा । जो अपने को उच्च मानता है उसके ज्ञान और वहम पर मुझे दया आ सकती है लेकिन मैं उस पर क्रोध और उसका तिरस्कार नहीं कर सकता । क्योंकि यदि मेरा तिरस्कार किया जायगा तो मुझे बुरा मालूम होगा । संयम खो देने से तो लोग अपना लक्ष्य ही खो बैठोंगे । सबसे महत्व की बात तो यह है कि सीमा से अधिक बढ़वे अपने ब्राह्मण योद्धाओं को दिक्कत में न डाल दें । ब्राह्मण तो हिन्दू धर्म और मनुष्य समाज का उत्तम पुष्प है। ऐसा एक भी काम मैं न करूँगा जिससे उसे मुरझाना पड़े । मैं यह जानता हूँ कि वह अपनी रक्षा करने के लिए समर्थ है । उसक बहुत से तूफानों को देखा है । लेकिन अब्राह्मणों के बारे में यह न कहा जाना चाहिए कि उन्होंने इस पुष्प की सुगन्ध और कांति को लूट लेने का प्रयत्न किया । मैं नहीं चाहता कि ब्राह्मणों के सर्वनाश पर ब्राह्मण लोग उन्नति करें । मैं तो यह चाहता हूँ के वे उस उच्च स्थान को पहुँच जायँ जिसको अब तक ब्राह्मण नोग पहुँचे हुए थे । ब्राह्मण जन्म से होते हैं लेकिन ब्राह्मणत्व न्म से नहीं होता । यह तो वह गुरण है जिसको एक छोटे-सेटभी अपना विकास करके प्राप्त कर सकता है ।
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अफलातू ने 'गुण' को अपनी सूची मे नही रखा। जब हम किमी पदार्थ व देखने है, तो उसे बसे पहचानते है उसमें कुछ गुण पाये जाते हैं, जो अन्य किमी दस्त में भी पाये नहीं जाते। यह गुण उस पदार्थ को उसका स्वत्व देते है। किसी अन्य पदार्थ में, किसी भेद के बिना, इन सब गुणों का पाया जाना सम्भव ही नहीं। यह तं अन्य पदार्थों को अन्यता म ही निहित है। हमें दो ग्पयो मे कोई भेद दिखायी नही देता परन्तु एक मेरे हाथ में है, दूसरा मेरे माथी के हाथ में है, एक की सामग्री दूसरे की के सामग्री नही जब तुला एक को तालती है, तो दूसरे को नही तोलती। इस तरह गुण का प्रत्यय अपन साथ अनन्यत्व और विभिनता के प्रत्ययो को भी लाता हैं। दूसरी ओर भे देखें, तो इन दोनो प्रत्ययो का 'गुप' के बिना कुछ अर्थ ही नही ।
'वैशेषिक' ने 'वर्म' के पाच रूप कहे है, और वे सब गति के भिन्न रूप है। अफलातू ने 'गति' के 'साथ' अगति को भी जोड़ दिया है। प्राचीन यूनान में गति और अगति विवाद का विषय था। एक दल कहता था कि गति का कोई अस्तित्व नही । जब हम कहते हैं कि तीर व से ख तक जा पहुंचा है, ता हमारा अभिप्राय यह होता है कि कुछ समय पहले, यह क पर था, अब ग्व पर है। इस अन्तर में स्थिति क्या थी ? एक समय यह क और ख के बीच ग पर था, इससे पहले यह क और ग के बीच घ पर था। इस तरह, तीर अन्तर में वही न कही स्थित था । यह स्थिति स्थान असख्य हो सकते हैं, परन्तु है तो सभी ठिकाने, जहा तीर ठहरा हुआ था। इस दलील के आधार पर कहा जाता था कि गति केवल भास है, इसका वास्तविक अस्तित्व कुछ नहीं। दूसरा दल कहता था कि ससार म सारी वस्तुए गतिशील है । अफलातू ने गति और अगति दोनो को अपनी सूची में रखा है 'वैशेषिक' के रचयिता कणाद ने गति को ही लिया है ।
इस तरह अफलात के वर्ग और कणाद के दृष्ट 'पदार्थ', थोडे भेद के साथ एक
द्रव्य का प्रकटन कैसे होता है ? जैसा हम आग दखेंग, स्पीनोजा ने द्रव्य के साथ गुण का जोड़ा, लाइबनिज ने क्रिया को इसका अनिवार्य चिह्न बताया। कणाद के अनुमार, गुण और कर्म दोनो एक दूसरे से भिन्न है और टनम में किसी को भी छोड नही सक्त ।
अब हम प्रत्ययात्मक पदार्थों को लें। इन्ह प्रत्ययात्मक बहने का अर्थ क्या है ? गौ को देखते है, उसके रंग-रूप को देखते है । घास चरती वह इधर-उधर हम है उसकी गति को भी देखते है। ca गण और कर्म का ज्ञान इन्द्रिय जन्य ज्ञान है।
परतम जातियां
हम कहते हैं- 'गौ एक प्राणी है ।' हमारा अभिप्राय यह होता है कि गौओं का वर्ग प्राणी-वर्ग के अन्तर्गत, उसकी उप-जाति है। गौओं की जाति विशेष गौओं से बनती है । यह विशेष गौएं तो प्रत्यक्ष का विषय हैं, परन्तु यह धारणा कि 'गो', 'नील गौ' की जाति और 'प्राणी' की उप-जाति है, इन्द्रिय-जन्य ज्ञान नहीं । यह विभाग या वर्गीकरण हमारे मन की क्रिया है । जाति और उप-जाति, उप-जाति और उसे बनाने वाले व्यक्तियों का भेद 'सामान्य' और 'विशेष' का भेद है । 'वैशेषिक' में कहा है कि 'सामान्य और विशेष, ये दोनों, बुद्धि की अपेक्षा से है । (१ : २ : ३) । भारत एक विस्तार है । हम उसे प्रान्तों में वांटते हैं वांटते हैं। स्वयं भारत महाद्वीप का भाग है। महाद्वीप को देशों में मनुष्यों ने विभाजित किया है। इसी तरह विश्व में तो अनेक विशेष पदार्थ हैं; उन्हें जातियों और उप-जातियों में देखना मानसिक क्रिया है । समवाय के सम्बन्ध में 'वैशेषिक' ने बहुत कम कहा है ।
'इसमें यह है' ~~ जिस सम्बन्ध के कारण, इस प्रकार का ज्ञान कार्य-कारण में होता है, वह 'समवाय' है ।"
इतना ही निश्चित रूप में 'वैशेपिक' की शिक्षा है । इस सूत्र का अभिप्राय क्या है ? पहली बात तो यह है कि हम यहां एक सम्बन्ध की बावत वर्णन कर रहे हैं । दूसरी यह कि यह सम्बन्ध कार्य-कारण सम्बन्ध है ।
तीसरी यह कि इस सम्बन्ध का विवरण इन शब्दों में हुआ है ~~-'इसमें यह है ।'
अन्तिम वाक्य से प्रतीत होता है कि यहां संस्थान या स्थिति के ख्याल को प्रकट किया गया है। दो विशेष हालतों में यह सम्बन्ध हमारे सम्मुख आता है। हम कहते हैं -- घास हरी है ।' हरापन घास में पाया जाता है; यह घास का गुण है । 'इस (घास ) में यह ( हरापन ) है ।' द्रव्य और गुण का सम्बन्ध समवाय सम्वन्ध
। दूसरी हालत 'समस्त' और 'मांग' की या 'सामग्री' और 'निर्मित वस्तु' को है । 'समवाय' का अर्थ 'तन्तु चुनना' है । तन्तुओं को बुनने से वस्त्र बनता है । न्याय की परिभाषा में हम कहते हैं कि तन्तु वस्त्र का 'उपादान कारण' है। वस्त्र तन्तुओं से अतिरिक्त कुछ नहीं, और निरे तन्तु भी नहीं । तन्तु इसलिए नहीं कि तन्तुओं के मौजूद होने पर भी वस्त्र मौजूद न था; तन्तु ही है, क्योंकि इसमें तन्तुओं के अतिरिक्त कुछ दिखायी नहीं देता : हम फिर इसे तन्तुओं में बदल सकते हैं। हम कह सकते हैं कि 'इस ( वस्तु ) में यह ( तन्तु ) है ।' यह समस्त और उसके भागों का सम्बन्ध है । इन दो अर्थो में व्याख्याकार समचाय को लेते हैं; अधिक संख्या दूसरे अर्थ में होती है ।
परन्तु हम यह भी वह सकते है कि 'इस ( तन्तु ) में यह ( वस्तु ) है ।' तन्तुश्रो है म वस्तु छिपा है । तन्तु 'सभावना' या 'शक्यता' है, वस्तु उसको 'वस्तुता' है । साध्य दर्शन में, उपादान कारण वो ही नहीं, अपितु सारे कारण कार्य के सम्बन्ध को इस रूप में देखा है--- 'इम (कारण) में यह (कार्य) विद्यमान है ।'
समवाय को किसी रूप में ल, यह 'सम्बन्ध' है। यह एक बन्धन है, जो दा पृथक वस्तुओं का बन्धु बना देता है। ऐसे सम्बन्ध वे अभाव में स्थिति क्या होती है ? वस्तुए एक दूसरे के आगे-पीछे दायें वाय, उपर-नीचे, अवकाश में होती है, घटनाए एक दूसरे के साथ, या आगे-पीछे होती है । यह 'सयोग' है । इसका इतना हो अर्थ है कि अनेक वस्तुओं के लिए अवकाश में पर्याप्त स्थान है, और अनेक घटनाओ की काल में स्थिति हो सकती है। जब हम सम्बन्ध का जिन करते हैं, तो हम कहते है कि वस्तुए और घटनाए एक दूसरे के साथ बध है, गठित है। बहुत्व या अनेकता के साथ एक्ता भी मिल गयी है ।
तत्व ज्ञान के इतिहास में 'सयोग' और 'समवाय' का विवाद एक प्रमुख विवाद है । निरे सयोग का वडा समर्थक डेविड ह्यम हुआ है। वह कहता है कि सारी सत्ता प्रकटना की है, और प्रक्टनो में सयोग है, सम्बन्ध नही । विज्ञान कारण कार्य के सम्बन्ध को स्वीकार करता है, और इसका प्रमुख काम इस सम्बन्ध की खोज करना है । वैशेषिक ने 'समवाय' को पदार्थों में स्वीकार किया है, परन्तु यह भी कहा है कि यह सम्बन्ध इन्द्रियो से जाना नहीं जाता। जैसा हम आगे देखेंगे, ह्यूम और उसके साथियो ने इसे गलत स्थान में दूढा । इन्द्रिया सम्बन्ध को देख नही सक्ती, यह बुद्धि के मनन से जाना जाता है ।
महाद्वीप के तत्व- विवेचक
पिछले दो अध्यायों में हमने देखा है कि विचारकों ने सत् को किन मौलिक रूपों में देखा । परतम जातियों को सभी सूचियों में द्रव्य को प्रमुख स्थान दिया गया है। 'वैशेषिक' के अनुसार द्रव्य, गुण और कर्म ही तीन दृष्ट परतम जातियां है, और इन में गुण और कर्म दोनों द्रव्य पर आलम्बित हैं। वर्तमान अध्याय में द्रव्य की रूप-रेखा पर कुछ कहेंगे । पश्चिम में नवीन दार्शनिक विवेचन में द्रव्य-निरूपण एक प्रमुख विषय बना रहा है । इस सम्बन्ध में डेकार्ट, मेलनांश, स्पीनोजा और लाइवनिज के नाम विशेष रूप में प्रसिद्ध हैं। इन्हें इसी क्रम में लेगे ।
१. डेकार्ट का द्वैत
दार्शनिक विवेचन में नवीन युग का आरम्भ फ्रांस के प्रसिद्ध स्वतन्त्र विचारक रेन डेकार्ट (१५९६-१६५० ) से होता है । डेकार्ट की अपनी शिक्षा में गणित और ज्योतिप प्रधान विषय थे । जब दर्शन की ओर उसकी रुचि हुई, तो उसने गणित और दर्शन में एक आश्चर्यजनक असमानता को देखा। जहां गणित में निश्चित और असन्दिग्ध उत्तर मिलते हैं, वहां दर्शन में कोई ऐसे उत्तर नहीं मिलते; जिस चक्कर में दार्शनिक १,००० वर्ष पहले पड़े थे, उसी में अब पड़े हैं। दर्शन की इस त्रुटि को दूर करने के लिए डेकार्ट ने निश्चय किया कि गणित की विधि को दर्शन में प्रयुक्त करे, जिससे इसमें भी निश्चित और असन्दिग्ध परिणाम मिल सकें ।
डेकार्ट ने निश्चय किया कि किसी धारणा को स्वीकार करने से पहले, वह यह देखेगा कि धारणा युक्तियुक्त है या नहीं । प्रत्येक विश्वास को स्वीकृति के लिए इस कसोटी पर ठीक उतरना होगा। डेकार्ट ने व्यापक सन्देह से आरम्भ किया : वाह्य जगत, परमात्मा और स्वयं अपनी सत्ता में सन्देह किया । तुरन्त ही उसे सूझा कि इन तीनों की सत्ता में सन्देह हो सकता है, किन्तु 'सन्देह' के अस्तित्व में सन्देहु करना तो
सम्भव ही नही । मन्दह का अस्ति व उस मता का अचल चट्टान मा प्रतीत हुआ । सन्देह एक प्रकार की चतना अवस्था है इर्मा चेतना अवस्था का अस्तित्व भी असन्दिग्ध तथ्य है । चेतना चनन म ही होती है। इसलिए सन्देह करन वाले का अस्तित्व भी असन्दिग्ध है। डकार की पहली निश्चित धारणा यह थी मै चिन्तन करता हू इसलिए म हूँ। 1
अत्र डकाट न जपन विचारा पर दृष्टि डाली, और उनका परीक्षण आरम्भ किया। अपन प्रत्यया म उमन एक प्रत्यय सम्पूणता का देखा। उसन अपन आप पूछा- इस प्रत्यय की उत्पत्ति कैम हुई है। मैं ता अपूर्ण हु और काई अपूर्ण वस्तु पूणता के प्रत्यय का जन्म नही द सक्ती । पूर्णता के प्रत्यय न उसे पूर्ण सत्ता परमात्मा के अस्तित्व का मानन पर बाधित किया। पूर्ण परमात्मा विद्यमान है। यह डकाट की दूसरी निश्चित धारणा थी।
उस बाह्य जगत भी सत्य प्रतीत हाता था । यह प्रतीति आरम्भिक सन्देह के समय भा विद्यमान थो । अब उसन साचा कि क्या यह प्रतीति तथ्य की प्रतीक है, या केवल घाखा है ? यह प्रतीति धाखा हो हो ता मानना पडगा कि सत्य स्वरूप परमात्मा हम आयु भर इस धाख म रखता है। हम सम्पूर्ण परमात्मा की बाबत एसा ख्याल नही कर मकत । तीसरी धारणा जिसे डाट न स्वीकार किया, वाह्य जगत वा प्रकृति के अस्तित्व की बाबत थी। इस तरह डकाट अपनी तीन मौलिक धारणाओ पर निम्न त्रम में पहुचा
( १ ) म चिन्तन करता हूँ इसलिए म हू ।
( २ ) मेरे प्रत्ययो म पूणता का प्रत्यय विद्यमान है। इसका जन्मदाता पूर्ण परमात्मा भी विद्यमान है ।
(३) परमात्मा मत्य स्वरूप है । उसको व्यवस्था म वाह्य जगत की प्रतीति भ्रम नही हा सक्ती । प्रकृति का अस्तित्व असन्दिग्ध तथ्य है ।
परमात्मा और जीवात्मा दाना आत्मा है। इसलिए सत मदा परतम जातिया ह - आत्मा और प्रकृति। यह डकाट का द्वैत है ।
डकाट न इन दानो के स्वरूप की बाबत चिन्तन करना आरम्भ किया और इस परिणाम पर पहुचा वि
(१) आत्मा चेतन है और विस्तार रहित है।
(२) प्रकृति अचतन है और विस्तार इसका तत्व है। इस तरह, डकाट के दानो द्रव्य एक दूसर स इतन भिन्न हो गय कि इनम किसी प्रकार का सम्बन्ध अचिन्त नीय हो गया। परन्तु सम्बध तो हम दखत ही है डकार्ट भौदेखता था। हम बाह्य
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अफलातू ने 'गुण' को अपनी सूची मे नही रखा। जब हम किमी पदार्थ व देखने है, तो उसे बसे पहचानते है उसमें कुछ गुण पाये जाते हैं, जो अन्य किमी दस्त में भी पाये नहीं जाते। यह गुण उस पदार्थ को उसका स्वत्व देते है। किसी अन्य पदार्थ में, किसी भेद के बिना, इन सब गुणों का पाया जाना सम्भव ही नहीं। यह तं अन्य पदार्थों को अन्यता म ही निहित है। हमें दो ग्पयो मे कोई भेद दिखायी नही देता परन्तु एक मेरे हाथ में है, दूसरा मेरे माथी के हाथ में है, एक की सामग्री दूसरे की के सामग्री नही जब तुला एक को तालती है, तो दूसरे को नही तोलती। इस तरह गुण का प्रत्यय अपन साथ अनन्यत्व और विभिनता के प्रत्ययो को भी लाता हैं। दूसरी ओर भे देखें, तो इन दोनो प्रत्ययो का 'गुप' के बिना कुछ अर्थ ही नही । 'वैशेषिक' ने 'वर्म' के पाच रूप कहे है, और वे सब गति के भिन्न रूप है। अफलातू ने 'गति' के 'साथ' अगति को भी जोड़ दिया है। प्राचीन यूनान में गति और अगति विवाद का विषय था। एक दल कहता था कि गति का कोई अस्तित्व नही । जब हम कहते हैं कि तीर व से ख तक जा पहुंचा है, ता हमारा अभिप्राय यह होता है कि कुछ समय पहले, यह क पर था, अब ग्व पर है। इस अन्तर में स्थिति क्या थी ? एक समय यह क और ख के बीच ग पर था, इससे पहले यह क और ग के बीच घ पर था। इस तरह, तीर अन्तर में वही न कही स्थित था । यह स्थिति स्थान असख्य हो सकते हैं, परन्तु है तो सभी ठिकाने, जहा तीर ठहरा हुआ था। इस दलील के आधार पर कहा जाता था कि गति केवल भास है, इसका वास्तविक अस्तित्व कुछ नहीं। दूसरा दल कहता था कि ससार म सारी वस्तुए गतिशील है । अफलातू ने गति और अगति दोनो को अपनी सूची में रखा है 'वैशेषिक' के रचयिता कणाद ने गति को ही लिया है । इस तरह अफलात के वर्ग और कणाद के दृष्ट 'पदार्थ', थोडे भेद के साथ एक द्रव्य का प्रकटन कैसे होता है ? जैसा हम आग दखेंग, स्पीनोजा ने द्रव्य के साथ गुण का जोड़ा, लाइबनिज ने क्रिया को इसका अनिवार्य चिह्न बताया। कणाद के अनुमार, गुण और कर्म दोनो एक दूसरे से भिन्न है और टनम में किसी को भी छोड नही सक्त । अब हम प्रत्ययात्मक पदार्थों को लें। इन्ह प्रत्ययात्मक बहने का अर्थ क्या है ? गौ को देखते है, उसके रंग-रूप को देखते है । घास चरती वह इधर-उधर हम है उसकी गति को भी देखते है। ca गण और कर्म का ज्ञान इन्द्रिय जन्य ज्ञान है। परतम जातियां हम कहते हैं- 'गौ एक प्राणी है ।' हमारा अभिप्राय यह होता है कि गौओं का वर्ग प्राणी-वर्ग के अन्तर्गत, उसकी उप-जाति है। गौओं की जाति विशेष गौओं से बनती है । यह विशेष गौएं तो प्रत्यक्ष का विषय हैं, परन्तु यह धारणा कि 'गो', 'नील गौ' की जाति और 'प्राणी' की उप-जाति है, इन्द्रिय-जन्य ज्ञान नहीं । यह विभाग या वर्गीकरण हमारे मन की क्रिया है । जाति और उप-जाति, उप-जाति और उसे बनाने वाले व्यक्तियों का भेद 'सामान्य' और 'विशेष' का भेद है । 'वैशेषिक' में कहा है कि 'सामान्य और विशेष, ये दोनों, बुद्धि की अपेक्षा से है । । भारत एक विस्तार है । हम उसे प्रान्तों में वांटते हैं वांटते हैं। स्वयं भारत महाद्वीप का भाग है। महाद्वीप को देशों में मनुष्यों ने विभाजित किया है। इसी तरह विश्व में तो अनेक विशेष पदार्थ हैं; उन्हें जातियों और उप-जातियों में देखना मानसिक क्रिया है । समवाय के सम्बन्ध में 'वैशेषिक' ने बहुत कम कहा है । 'इसमें यह है' ~~ जिस सम्बन्ध के कारण, इस प्रकार का ज्ञान कार्य-कारण में होता है, वह 'समवाय' है ।" इतना ही निश्चित रूप में 'वैशेपिक' की शिक्षा है । इस सूत्र का अभिप्राय क्या है ? पहली बात तो यह है कि हम यहां एक सम्बन्ध की बावत वर्णन कर रहे हैं । दूसरी यह कि यह सम्बन्ध कार्य-कारण सम्बन्ध है । तीसरी यह कि इस सम्बन्ध का विवरण इन शब्दों में हुआ है ~~-'इसमें यह है ।' अन्तिम वाक्य से प्रतीत होता है कि यहां संस्थान या स्थिति के ख्याल को प्रकट किया गया है। दो विशेष हालतों में यह सम्बन्ध हमारे सम्मुख आता है। हम कहते हैं -- घास हरी है ।' हरापन घास में पाया जाता है; यह घास का गुण है । 'इस में यह है ।' द्रव्य और गुण का सम्बन्ध समवाय सम्वन्ध । दूसरी हालत 'समस्त' और 'मांग' की या 'सामग्री' और 'निर्मित वस्तु' को है । 'समवाय' का अर्थ 'तन्तु चुनना' है । तन्तुओं को बुनने से वस्त्र बनता है । न्याय की परिभाषा में हम कहते हैं कि तन्तु वस्त्र का 'उपादान कारण' है। वस्त्र तन्तुओं से अतिरिक्त कुछ नहीं, और निरे तन्तु भी नहीं । तन्तु इसलिए नहीं कि तन्तुओं के मौजूद होने पर भी वस्त्र मौजूद न था; तन्तु ही है, क्योंकि इसमें तन्तुओं के अतिरिक्त कुछ दिखायी नहीं देता : हम फिर इसे तन्तुओं में बदल सकते हैं। हम कह सकते हैं कि 'इस में यह है ।' यह समस्त और उसके भागों का सम्बन्ध है । इन दो अर्थो में व्याख्याकार समचाय को लेते हैं; अधिक संख्या दूसरे अर्थ में होती है । परन्तु हम यह भी वह सकते है कि 'इस में यह है ।' तन्तुश्रो है म वस्तु छिपा है । तन्तु 'सभावना' या 'शक्यता' है, वस्तु उसको 'वस्तुता' है । साध्य दर्शन में, उपादान कारण वो ही नहीं, अपितु सारे कारण कार्य के सम्बन्ध को इस रूप में देखा है--- 'इम में यह विद्यमान है ।' समवाय को किसी रूप में ल, यह 'सम्बन्ध' है। यह एक बन्धन है, जो दा पृथक वस्तुओं का बन्धु बना देता है। ऐसे सम्बन्ध वे अभाव में स्थिति क्या होती है ? वस्तुए एक दूसरे के आगे-पीछे दायें वाय, उपर-नीचे, अवकाश में होती है, घटनाए एक दूसरे के साथ, या आगे-पीछे होती है । यह 'सयोग' है । इसका इतना हो अर्थ है कि अनेक वस्तुओं के लिए अवकाश में पर्याप्त स्थान है, और अनेक घटनाओ की काल में स्थिति हो सकती है। जब हम सम्बन्ध का जिन करते हैं, तो हम कहते है कि वस्तुए और घटनाए एक दूसरे के साथ बध है, गठित है। बहुत्व या अनेकता के साथ एक्ता भी मिल गयी है । तत्व ज्ञान के इतिहास में 'सयोग' और 'समवाय' का विवाद एक प्रमुख विवाद है । निरे सयोग का वडा समर्थक डेविड ह्यम हुआ है। वह कहता है कि सारी सत्ता प्रकटना की है, और प्रक्टनो में सयोग है, सम्बन्ध नही । विज्ञान कारण कार्य के सम्बन्ध को स्वीकार करता है, और इसका प्रमुख काम इस सम्बन्ध की खोज करना है । वैशेषिक ने 'समवाय' को पदार्थों में स्वीकार किया है, परन्तु यह भी कहा है कि यह सम्बन्ध इन्द्रियो से जाना नहीं जाता। जैसा हम आगे देखेंगे, ह्यूम और उसके साथियो ने इसे गलत स्थान में दूढा । इन्द्रिया सम्बन्ध को देख नही सक्ती, यह बुद्धि के मनन से जाना जाता है । महाद्वीप के तत्व- विवेचक पिछले दो अध्यायों में हमने देखा है कि विचारकों ने सत् को किन मौलिक रूपों में देखा । परतम जातियों को सभी सूचियों में द्रव्य को प्रमुख स्थान दिया गया है। 'वैशेषिक' के अनुसार द्रव्य, गुण और कर्म ही तीन दृष्ट परतम जातियां है, और इन में गुण और कर्म दोनों द्रव्य पर आलम्बित हैं। वर्तमान अध्याय में द्रव्य की रूप-रेखा पर कुछ कहेंगे । पश्चिम में नवीन दार्शनिक विवेचन में द्रव्य-निरूपण एक प्रमुख विषय बना रहा है । इस सम्बन्ध में डेकार्ट, मेलनांश, स्पीनोजा और लाइवनिज के नाम विशेष रूप में प्रसिद्ध हैं। इन्हें इसी क्रम में लेगे । एक. डेकार्ट का द्वैत दार्शनिक विवेचन में नवीन युग का आरम्भ फ्रांस के प्रसिद्ध स्वतन्त्र विचारक रेन डेकार्ट से होता है । डेकार्ट की अपनी शिक्षा में गणित और ज्योतिप प्रधान विषय थे । जब दर्शन की ओर उसकी रुचि हुई, तो उसने गणित और दर्शन में एक आश्चर्यजनक असमानता को देखा। जहां गणित में निश्चित और असन्दिग्ध उत्तर मिलते हैं, वहां दर्शन में कोई ऐसे उत्तर नहीं मिलते; जिस चक्कर में दार्शनिक एक,शून्य वर्ष पहले पड़े थे, उसी में अब पड़े हैं। दर्शन की इस त्रुटि को दूर करने के लिए डेकार्ट ने निश्चय किया कि गणित की विधि को दर्शन में प्रयुक्त करे, जिससे इसमें भी निश्चित और असन्दिग्ध परिणाम मिल सकें । डेकार्ट ने निश्चय किया कि किसी धारणा को स्वीकार करने से पहले, वह यह देखेगा कि धारणा युक्तियुक्त है या नहीं । प्रत्येक विश्वास को स्वीकृति के लिए इस कसोटी पर ठीक उतरना होगा। डेकार्ट ने व्यापक सन्देह से आरम्भ किया : वाह्य जगत, परमात्मा और स्वयं अपनी सत्ता में सन्देह किया । तुरन्त ही उसे सूझा कि इन तीनों की सत्ता में सन्देह हो सकता है, किन्तु 'सन्देह' के अस्तित्व में सन्देहु करना तो सम्भव ही नही । मन्दह का अस्ति व उस मता का अचल चट्टान मा प्रतीत हुआ । सन्देह एक प्रकार की चतना अवस्था है इर्मा चेतना अवस्था का अस्तित्व भी असन्दिग्ध तथ्य है । चेतना चनन म ही होती है। इसलिए सन्देह करन वाले का अस्तित्व भी असन्दिग्ध है। डकार की पहली निश्चित धारणा यह थी मै चिन्तन करता हू इसलिए म हूँ। एक अत्र डकाट न जपन विचारा पर दृष्टि डाली, और उनका परीक्षण आरम्भ किया। अपन प्रत्यया म उमन एक प्रत्यय सम्पूणता का देखा। उसन अपन आप पूछा- इस प्रत्यय की उत्पत्ति कैम हुई है। मैं ता अपूर्ण हु और काई अपूर्ण वस्तु पूणता के प्रत्यय का जन्म नही द सक्ती । पूर्णता के प्रत्यय न उसे पूर्ण सत्ता परमात्मा के अस्तित्व का मानन पर बाधित किया। पूर्ण परमात्मा विद्यमान है। यह डकाट की दूसरी निश्चित धारणा थी। उस बाह्य जगत भी सत्य प्रतीत हाता था । यह प्रतीति आरम्भिक सन्देह के समय भा विद्यमान थो । अब उसन साचा कि क्या यह प्रतीति तथ्य की प्रतीक है, या केवल घाखा है ? यह प्रतीति धाखा हो हो ता मानना पडगा कि सत्य स्वरूप परमात्मा हम आयु भर इस धाख म रखता है। हम सम्पूर्ण परमात्मा की बाबत एसा ख्याल नही कर मकत । तीसरी धारणा जिसे डाट न स्वीकार किया, वाह्य जगत वा प्रकृति के अस्तित्व की बाबत थी। इस तरह डकाट अपनी तीन मौलिक धारणाओ पर निम्न त्रम में पहुचा म चिन्तन करता हूँ इसलिए म हू । मेरे प्रत्ययो म पूणता का प्रत्यय विद्यमान है। इसका जन्मदाता पूर्ण परमात्मा भी विद्यमान है । परमात्मा मत्य स्वरूप है । उसको व्यवस्था म वाह्य जगत की प्रतीति भ्रम नही हा सक्ती । प्रकृति का अस्तित्व असन्दिग्ध तथ्य है । परमात्मा और जीवात्मा दाना आत्मा है। इसलिए सत मदा परतम जातिया ह - आत्मा और प्रकृति। यह डकाट का द्वैत है । डकाट न इन दानो के स्वरूप की बाबत चिन्तन करना आरम्भ किया और इस परिणाम पर पहुचा वि आत्मा चेतन है और विस्तार रहित है। प्रकृति अचतन है और विस्तार इसका तत्व है। इस तरह, डकाट के दानो द्रव्य एक दूसर स इतन भिन्न हो गय कि इनम किसी प्रकार का सम्बन्ध अचिन्त नीय हो गया। परन्तु सम्बध तो हम दखत ही है डकार्ट भौदेखता था। हम बाह्य
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काशीपुर/नैनीताल(एजेंसी/वार्ता):उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को उधमसिंह नगर में समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अख्तियार किया और एक अधिकारी के वेतन रोकने और तीन से जवाब-तलब के निर्देश दिये हैं।
जनपद के प्रभारी मंत्री श्री जोशी आज उधमसिंह नगर के दौरे पर रहे। उन्होंने इस दौरान विकास योजनाओं की समीक्षा की। बैठक के दौरान कई अधिकारी अनुपस्थित रहे। उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और सख्त नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बैठक में अनुपस्थित जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, अधिशासी अभियंता विद्युत व नोडल अधिकारी वन विभाग का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिये जबकि वरिष्ठ परियोजना अधिकारी (उरेडा) का एक दिन का वेतन काटने को कहा है।
श्री जोशी ने आधी अधूरी जानकारी के साथ अधिकारियों के बैठक में प्रतिभाग करने को भी गंभीरता से लिया और आने वाले समय में पूर्ण तैयारी के साथ आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने विकास योजनाओं को समयबद्ध ढंग व पारदर्शिता एवं गुणवत्ता से पूर्ण करने को भी कहा।
उन्होंने साफ कहा कि गलत को छोड़ेंगे नहीं और सही को छेड़ेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के द्वार एवं जनहित में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार भर्ती घोटाले को उजागर करते हुए घोटाले बाजों को जेल भेजने का कार्य कर रही है।
उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित सामान को बाजार उपलब्ध कराने हेतु आउटलेट की व्यवस्था करने व रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।
मुख्य विकास अधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि जिला योजना के अंतर्गत शासन से अवमुक्त धनराशि 3629. 32 लाख रुपए के सापेक्ष 2827. 59 लाख की धनराशि विभिन्न योजनाओं में खर्च हो चुकी है जबकि राज्य योजना अंतर्गत शासन से अवमुक्त धनराशि 25976. 32 के सापेक्ष 20380. 74 लाख की धनराशि खर्च हो चुकी है। साथ ही केंद्रीय योजनांतर्गत 43247. 11 के सापेक्ष 42162. 30 लाख की धनराशि खर्च हो चुकी हैं।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ेंः- बेहद गुणकारी होती है तुलसी, कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर, जानिए इसके सेहत लाभ!
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काशीपुर/नैनीताल:उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को उधमसिंह नगर में समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अख्तियार किया और एक अधिकारी के वेतन रोकने और तीन से जवाब-तलब के निर्देश दिये हैं। जनपद के प्रभारी मंत्री श्री जोशी आज उधमसिंह नगर के दौरे पर रहे। उन्होंने इस दौरान विकास योजनाओं की समीक्षा की। बैठक के दौरान कई अधिकारी अनुपस्थित रहे। उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और सख्त नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बैठक में अनुपस्थित जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, अधिशासी अभियंता विद्युत व नोडल अधिकारी वन विभाग का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिये जबकि वरिष्ठ परियोजना अधिकारी का एक दिन का वेतन काटने को कहा है। श्री जोशी ने आधी अधूरी जानकारी के साथ अधिकारियों के बैठक में प्रतिभाग करने को भी गंभीरता से लिया और आने वाले समय में पूर्ण तैयारी के साथ आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने विकास योजनाओं को समयबद्ध ढंग व पारदर्शिता एवं गुणवत्ता से पूर्ण करने को भी कहा। उन्होंने साफ कहा कि गलत को छोड़ेंगे नहीं और सही को छेड़ेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के द्वार एवं जनहित में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार भर्ती घोटाले को उजागर करते हुए घोटाले बाजों को जेल भेजने का कार्य कर रही है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित सामान को बाजार उपलब्ध कराने हेतु आउटलेट की व्यवस्था करने व रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। मुख्य विकास अधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि जिला योजना के अंतर्गत शासन से अवमुक्त धनराशि तीन हज़ार छः सौ उनतीस. बत्तीस लाख रुपए के सापेक्ष दो हज़ार आठ सौ सत्ताईस. उनसठ लाख की धनराशि विभिन्न योजनाओं में खर्च हो चुकी है जबकि राज्य योजना अंतर्गत शासन से अवमुक्त धनराशि पच्चीस हज़ार नौ सौ छिहत्तर. बत्तीस के सापेक्ष बीस हज़ार तीन सौ अस्सी. चौहत्तर लाख की धनराशि खर्च हो चुकी है। साथ ही केंद्रीय योजनांतर्गत तैंतालीस हज़ार दो सौ सैंतालीस. ग्यारह के सापेक्ष बयालीस हज़ार एक सौ बासठ. तीस लाख की धनराशि खर्च हो चुकी हैं। - यह भी पढ़ेंः- बेहद गुणकारी होती है तुलसी, कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर, जानिए इसके सेहत लाभ!
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उज्जैन के कद्दावर रहे, कांग्रेस पार्टी के नेता प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी श्रीमती आशा बहू राशि के नाम भोपाल की स्पेशल कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। मामला इंदौर के व्यापारी की मानहानि का है।
इंदौर के व्यापारी रमन वीर सिंह अरोरा और उनकी मां रवींद्र कौर के खिलाफ इनाम घोषित होने की जानकारी फोटो समेत अखबारों में प्रकाशित हुई थी। इस मामले में श्री अरोरा की तरफ से भोपाल की स्पेशल कोर्ट में प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी के खिलाफ मानहानि का मामला प्रस्तुत किया गया था।
भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने इसी मामले में सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने इंदौर पुलिस कमिश्नर को निर्देशित किया है कि वह प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी को मामले की अगली सुनवाई की तारीख 28 अप्रैल 2023 को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।
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उज्जैन के कद्दावर रहे, कांग्रेस पार्टी के नेता प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी श्रीमती आशा बहू राशि के नाम भोपाल की स्पेशल कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। मामला इंदौर के व्यापारी की मानहानि का है। इंदौर के व्यापारी रमन वीर सिंह अरोरा और उनकी मां रवींद्र कौर के खिलाफ इनाम घोषित होने की जानकारी फोटो समेत अखबारों में प्रकाशित हुई थी। इस मामले में श्री अरोरा की तरफ से भोपाल की स्पेशल कोर्ट में प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी के खिलाफ मानहानि का मामला प्रस्तुत किया गया था। भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने इसी मामले में सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने इंदौर पुलिस कमिश्नर को निर्देशित किया है कि वह प्रेमचंद गुड्डू और उनकी पत्नी को मामले की अगली सुनवाई की तारीख अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार तेईस को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। ✔ इसी प्रकार की जानकारियों और समाचार के लिए कृपया यहां क्लिक करके हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें एवं यहां क्लिक करके हमारा टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें। क्योंकि भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल पर कुछ स्पेशल भी होता है।
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आईपीएल 2021 की शुरूआत के तीन दिन भारतीय युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदशर्न से जलवे बिखेरे और भारतीय चयनकर्ताओं की नजर में आने की कोशिश की। रॉयल चैलेंजर बेंगलोर की ओर से हर्षल पटेल ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ पांच विकेट लिए थे।
कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज नीतीश राणा ने रविवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 56 गेंदों पर 80 रन बनाए। इसके अलावा दिल्ली कैपिटल्स के तेज गेंदबाज आवेश खान ने दो विकेट लिए थे।
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आईपीएल दो हज़ार इक्कीस की शुरूआत के तीन दिन भारतीय युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदशर्न से जलवे बिखेरे और भारतीय चयनकर्ताओं की नजर में आने की कोशिश की। रॉयल चैलेंजर बेंगलोर की ओर से हर्षल पटेल ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ पांच विकेट लिए थे। कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज नीतीश राणा ने रविवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ छप्पन गेंदों पर अस्सी रन बनाए। इसके अलावा दिल्ली कैपिटल्स के तेज गेंदबाज आवेश खान ने दो विकेट लिए थे।
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नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवक्ता को छोड़कर अपने दूसरे अधिकारियों से पत्रकारों के मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब मीडिया तक सूचनाएं पहुंचाने के दिशानिर्देश तय किए गए हैं. पत्रकारों ने विरोध जताते हुए कहा है कि यह मीडिया का दमन करने की कोशिश है.
सूत्रों का कहना है कि इस आदेश के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों से उनके चैम्बर में पत्रकारों के मिलने का चलन खत्म हो जाएगा. इसमें कहा गया है कि संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एम ए गणपति मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता होने के साथ जरूरत के मुताबिक मीडिया के साथ सूचना साझा करेंगे.
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नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवक्ता को छोड़कर अपने दूसरे अधिकारियों से पत्रकारों के मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब मीडिया तक सूचनाएं पहुंचाने के दिशानिर्देश तय किए गए हैं. पत्रकारों ने विरोध जताते हुए कहा है कि यह मीडिया का दमन करने की कोशिश है. सूत्रों का कहना है कि इस आदेश के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों से उनके चैम्बर में पत्रकारों के मिलने का चलन खत्म हो जाएगा. इसमें कहा गया है कि संयुक्त सचिव एम ए गणपति मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता होने के साथ जरूरत के मुताबिक मीडिया के साथ सूचना साझा करेंगे.
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पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष नवाज शरीफ ने एक आभासी सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार के तहत, देश के नागरिकों के लिए अपने बच्चों की फीस का भुगतान करना, घर किराए पर देना और पेट्रोल और डीजल वाहनों को भरना मुश्किल होगा।
गई है। इसके बाद भी, इमरान सरकार झूठे प्रचार में लगी हुई है। नवाज ने इमरान के मुख्य सहयोगी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा पर पाकिस्तान के लोगों से धन उगाही और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने का आरोप लगाया।
जो लोग कह रहे हैं कि आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, उन्हें बाजार में आटे और दालों की कीमतों का पता लगाना चाहिए। किस्तान में, इमरान विपक्षी दलों और लोगों दोनों का एक लक्ष्य है।
विरोधियों को भारी जन समर्थन मिल रहा है। लंदन में इलाज करा रहे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि इमरान सरकार देश की समस्याओं से भाग रही है, बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के बजाय गलत प्रचार कर रही है। इस बीच, मरियम नवाज ने संकेत दिया कि सभी विपक्षी दलों के सांसद और विधायक आठ दिसम्बर को इस्तीफा दे सकते हैं।
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पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के अध्यक्ष नवाज शरीफ ने एक आभासी सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार के तहत, देश के नागरिकों के लिए अपने बच्चों की फीस का भुगतान करना, घर किराए पर देना और पेट्रोल और डीजल वाहनों को भरना मुश्किल होगा। गई है। इसके बाद भी, इमरान सरकार झूठे प्रचार में लगी हुई है। नवाज ने इमरान के मुख्य सहयोगी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा पर पाकिस्तान के लोगों से धन उगाही और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने का आरोप लगाया। जो लोग कह रहे हैं कि आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, उन्हें बाजार में आटे और दालों की कीमतों का पता लगाना चाहिए। किस्तान में, इमरान विपक्षी दलों और लोगों दोनों का एक लक्ष्य है। विरोधियों को भारी जन समर्थन मिल रहा है। लंदन में इलाज करा रहे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि इमरान सरकार देश की समस्याओं से भाग रही है, बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के बजाय गलत प्रचार कर रही है। इस बीच, मरियम नवाज ने संकेत दिया कि सभी विपक्षी दलों के सांसद और विधायक आठ दिसम्बर को इस्तीफा दे सकते हैं।
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नई दिल्ली, (भाषा)। दिल्ली समेत देश के अनेक हिस्सों में स्वाइन फ्लू के प्रकोप के मद्देनजर विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से ग्रस्त रोगियों को सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया का भी गंभीर खतरा हो सकता है और इसके लक्षण सामने आने पर तत्काल डॉक्टरों की राय ली जानी चाहिए। श्वांस संबंधी रोगों के विशेषज्ञ डॉ. आर के मणि के अनुसार स्वाइन फ्लू भी सामान्य फ्लू या इन्फ्लुएंजा ःबुखार जुखामः की तरह फैलता है। इसमें बुखार, शरीर में दर्द, खांसी और सर्दी जैसे लक्षण सामान्य होते हैं। स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों को निमोनिया का भी गंभीर खतरा हो सकता है। डॉ मणि के अनुसार इस तरह के रोगियों में कुछ दिन बुखार के बाद सांस लेने संबंधी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। इसके वायरस की पहचान लार का परीक्षण करके की जाती है। बुखार जैसी समस्या गंभीर होने पर जांच जरूर कराने की सलाह दी जाती हैताकि संक्रमण रोका जा सके। स्वाइन फ्लू के गंभीर रोगियों में निमोनिया का जोखिम होता है और इससे रोगी के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ सकता है हालांकि डॉक्टर यह सलाह भी देते हैं कि जांच के नतीजे के परिणाम `पॉजिटिव' आने पर दहशत और घबराहट से बचना चाहिए और विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए। जांच से शुरूआती स्तर पर ही निमोनिया का पता लगाया जा सकता है और समय रहते उपचार किया जा सकता है। मेदांता अस्पताल के डॉ हिमांशु गर्ग ने कहा कि स्वाइन फ्लू में शुरूआती लक्षणों में सामान्य सर्दी और खांसी होने से एच। एन। ःस्वाइन फ्लूः की पहचान करना मुश्किल होता है। संक्रमण बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और ऐसे में तत्काल डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉ गर्ग ने कहा, पहले से फेफड़े संबंधी समस्या वाले लोगों को इस तरह की समस्या होने का जोखिम अधिक होता है। स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए फिलहाल एंटी वायरल दवा `टैमीफ्लू' देने की सलाह दी जाती है लेकिन रोगी का सावधानी पूर्वक बचाव करना, देखभाल करना और संक्रमण से बचना ज्यादा जरूरी है। इस साल देश में एक जनवरी से अब तक स्वाइन फ्लू के 708 मामले सामने आये हैं जिनमें 132 रोगियों की मौत हो गयी।
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नई दिल्ली, । दिल्ली समेत देश के अनेक हिस्सों में स्वाइन फ्लू के प्रकोप के मद्देनजर विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से ग्रस्त रोगियों को सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया का भी गंभीर खतरा हो सकता है और इसके लक्षण सामने आने पर तत्काल डॉक्टरों की राय ली जानी चाहिए। श्वांस संबंधी रोगों के विशेषज्ञ डॉ. आर के मणि के अनुसार स्वाइन फ्लू भी सामान्य फ्लू या इन्फ्लुएंजा ःबुखार जुखामः की तरह फैलता है। इसमें बुखार, शरीर में दर्द, खांसी और सर्दी जैसे लक्षण सामान्य होते हैं। स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों को निमोनिया का भी गंभीर खतरा हो सकता है। डॉ मणि के अनुसार इस तरह के रोगियों में कुछ दिन बुखार के बाद सांस लेने संबंधी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। इसके वायरस की पहचान लार का परीक्षण करके की जाती है। बुखार जैसी समस्या गंभीर होने पर जांच जरूर कराने की सलाह दी जाती हैताकि संक्रमण रोका जा सके। स्वाइन फ्लू के गंभीर रोगियों में निमोनिया का जोखिम होता है और इससे रोगी के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ सकता है हालांकि डॉक्टर यह सलाह भी देते हैं कि जांच के नतीजे के परिणाम `पॉजिटिव' आने पर दहशत और घबराहट से बचना चाहिए और विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए। जांच से शुरूआती स्तर पर ही निमोनिया का पता लगाया जा सकता है और समय रहते उपचार किया जा सकता है। मेदांता अस्पताल के डॉ हिमांशु गर्ग ने कहा कि स्वाइन फ्लू में शुरूआती लक्षणों में सामान्य सर्दी और खांसी होने से एच। एन। ःस्वाइन फ्लूः की पहचान करना मुश्किल होता है। संक्रमण बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और ऐसे में तत्काल डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉ गर्ग ने कहा, पहले से फेफड़े संबंधी समस्या वाले लोगों को इस तरह की समस्या होने का जोखिम अधिक होता है। स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए फिलहाल एंटी वायरल दवा `टैमीफ्लू' देने की सलाह दी जाती है लेकिन रोगी का सावधानी पूर्वक बचाव करना, देखभाल करना और संक्रमण से बचना ज्यादा जरूरी है। इस साल देश में एक जनवरी से अब तक स्वाइन फ्लू के सात सौ आठ मामले सामने आये हैं जिनमें एक सौ बत्तीस रोगियों की मौत हो गयी।
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पोस्ट ऑफिस की स्कीमों में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है। यहां की छोटी बचत योजनाएं आपको अच्छा रिटर्न देने के साथ ही कई अन्य फायदे भी देते हैं। वहीं अगर आप भी निवेश के बारे में सोच रहे हैं और चाहते हैं कि आपको अच्छा रिटर्न मिले तो यहां पोस्ट ऑफिस की एक प्रभावशाली योजना है, जो कम निवेश पर भी अच्छा मुनाफा दे सकती है। यह योजना पोस्ट ऑफिस की पब्लिक प्राविडेड फंड स्कीम है। इस योजना के तहत लोगों को 7. 1 फीसद का रिटर्न दिया जाता है।
पोस्ट ऑफिस की पीपीएफ योजना में निवेशकों को प्रति वर्ष 7. 1% ब्याज दर दिया जाता है। इसके तहत 100 रुपये से खाता खोला जा सकता है। साथ ही आप एक साल में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1. 5 रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। यह एक टैक्स फ्री स्कीम है क्योंकि इसमें आपको आयकर की धारा 80सी के तहत 1. 5 लाख रुपये तक की छूट दी जाती है। इस योजना में कोई भी भारतीय निवेशकर जो योग्य हैं वे एकमुकश्त या एक-अवधि तक का निवेश कर सकते हैं।
इस योजना के तहत वयस्क भारतीय नागरिक सीधे अपने पीपीएफ खाते खोल सकते हैं। जबकि नाबालिग के लिए अभिभावक 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के लिए डाकघर पीपीएफ खाता खोल सकता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए आप किसी भी नजदीकी पोस्ट ऑफिस की शाखा से संपर्क कर सकते हैं।
इस स्कीम के तहत अगर कोई निवेशक खाता खोलता है तो वह पांच साल तक पैसा जमा करके अपने पैसे का भुगतान करा सकते हैं। साथ ही अगर वे पांच साल के बाद निवेश नहीं करना चाहते हैं तो इस योजना के तहत खुले खाते का पासबुक और अन्य दस्तावेज जमा कर लाभ ले सकते हैं। वहीं अगर अधिक समय तक निवेश करने का मन है तो आप इसे 25 सालों तक निवेश कर सकते हैं। निवेशक भारतीय डाक की आधिकारिक वेबसाइट indiapost. gov. in पर डाकघर पीपीएफ योजना के बारे में और जानकारी ले सकते हैं।
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पोस्ट ऑफिस की स्कीमों में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है। यहां की छोटी बचत योजनाएं आपको अच्छा रिटर्न देने के साथ ही कई अन्य फायदे भी देते हैं। वहीं अगर आप भी निवेश के बारे में सोच रहे हैं और चाहते हैं कि आपको अच्छा रिटर्न मिले तो यहां पोस्ट ऑफिस की एक प्रभावशाली योजना है, जो कम निवेश पर भी अच्छा मुनाफा दे सकती है। यह योजना पोस्ट ऑफिस की पब्लिक प्राविडेड फंड स्कीम है। इस योजना के तहत लोगों को सात. एक फीसद का रिटर्न दिया जाता है। पोस्ट ऑफिस की पीपीएफ योजना में निवेशकों को प्रति वर्ष सात. एक% ब्याज दर दिया जाता है। इसके तहत एक सौ रुपयापये से खाता खोला जा सकता है। साथ ही आप एक साल में कम से कम पाँच सौ रुपयापये और अधिकतम एक. पाँच रुपयापये तक का निवेश कर सकते हैं। यह एक टैक्स फ्री स्कीम है क्योंकि इसमें आपको आयकर की धारा अस्सीसी के तहत एक. पाँच लाख रुपये तक की छूट दी जाती है। इस योजना में कोई भी भारतीय निवेशकर जो योग्य हैं वे एकमुकश्त या एक-अवधि तक का निवेश कर सकते हैं। इस योजना के तहत वयस्क भारतीय नागरिक सीधे अपने पीपीएफ खाते खोल सकते हैं। जबकि नाबालिग के लिए अभिभावक अट्ठारह वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के लिए डाकघर पीपीएफ खाता खोल सकता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए आप किसी भी नजदीकी पोस्ट ऑफिस की शाखा से संपर्क कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत अगर कोई निवेशक खाता खोलता है तो वह पांच साल तक पैसा जमा करके अपने पैसे का भुगतान करा सकते हैं। साथ ही अगर वे पांच साल के बाद निवेश नहीं करना चाहते हैं तो इस योजना के तहत खुले खाते का पासबुक और अन्य दस्तावेज जमा कर लाभ ले सकते हैं। वहीं अगर अधिक समय तक निवेश करने का मन है तो आप इसे पच्चीस सालों तक निवेश कर सकते हैं। निवेशक भारतीय डाक की आधिकारिक वेबसाइट indiapost. gov. in पर डाकघर पीपीएफ योजना के बारे में और जानकारी ले सकते हैं।
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जैसा कि पहले उल्लेख किया गया था, 20 वीं शताब्दी की शुरुआत तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के सत्तारूढ़ कबीलों का सहजीवन, जिन ताकतों ने पूरी मानवता को गुलाम बनाने के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया था, उन्हें अंततः समेकित किया गया था। संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में बैंक और सूदखानों ने दुनिया के दो-तिहाई हिस्से को गुलाम बना लिया है। देशों और लोगों की वैश्विक लूट की एक प्रभावी परजीवी प्रणाली बनाई गई थी। एक मुट्ठी सूद कुलों का उत्पादन किए बिना, उन्होंने ग्रह को अपने अधीन कर लिया।
सभी आबाद महाद्वीपों, सभी देशों, लोगों और जनजातियों को गुलाम निर्भरता में गिर गया। उनमें से कुछ, गुलामों के मालिकों ने बस उखाड़ फेंका, क्योंकि उत्तरी अमेरिका के अधिकांश महान भारतीय कबीले भी गुलाम होने के लिए विद्रोही थे। केवल रूसी सभ्यता ने निरंकुशता को संरक्षित किया, हालांकि सांस्कृतिक सहयोग और सूचनात्मक प्रभाव की विधि के साथ-साथ वित्त और अर्थशास्त्र के माध्यम से, पश्चिम के स्वामी रूस में पश्चिमी देशों के कुलीन वर्ग में पैदा करने में सक्षम थे, जो यूरोपीय सभ्यता की ओर उन्मुख था। हालांकि, रूस खुद को पूरी तरह से अपने अधीन नहीं कर सका। रूसी सांस्कृतिक और सभ्यता संबंधी कोड "मैट्रिक्स", निरंकुशता और रूढ़िवादी (पुरानी विश्वासियों की दुनिया सहित) है, जो पूरी तरह से emasculated नहीं किया जा सकता है, खाली कर दिया।
20 वीं शताब्दी की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका का तेजी से विकास हुआ। उन्नीसवीं सदी के अंत से पश्चिमी यूरोप संकट में है। प्रणालीगत संकट का कारण, साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और अब, अनिवार्य रूप से विकास का पश्चिमी, पूंजीवादी मॉडल था। यह तभी बढ़ सकता है जब कोर (महानगर) नए क्षेत्रों, कॉलोनियों, आश्रित प्रदेशों की कीमत पर नए संसाधन प्राप्त कर सकते हैं। यह एक परजीवी मॉडल है। ग्रहों के दास-स्वामी, परजीवी "वित्तीय पिरामिड" का समर्थन करने के लिए, इसमें लगातार सभी नए "दाताओं", "ग्राहकों", नए देशों और लोगों को आकर्षित करना आवश्यक है। जबकि नई भूमि, बाजार, राष्ट्र हैं जिन्हें जब्त किया जा सकता है, लूट लिया जा सकता है, परजीवी योजना में शामिल किया जा सकता है, पश्चिम, विशेष रूप से इसका मूल फल-फूल रहा है। आप एक "पूंजीवाद का संकेत" बना सकते हैं, समृद्धि की उपस्थिति, एक उपभोक्ता समाज जिसमें उच्च वर्ग और तबका अच्छी तरह से सुसज्जित है। यह सच है कि इस संकेत के तहत, बहुसंख्यक आबादी की गुलामी और गरीबी निहित है, खासकर पश्चिमी (पूंजीवादी) दुनिया की परिधि पर। महानगर कई समस्याओं का समाधान करता है - गरीबी, भूख, युद्ध, परिधि।
लेकिन XIX के अंत तक - XX सदियों की शुरुआत। नए "दाताओं" छोड़ दिया। पश्चिम ने अपनी शिकारी, परजीवी प्रणाली को लगभग पूरी दुनिया में शामिल किया है। पूर्व की प्राचीन सभ्यताओं से - फारस, भारत, चीन, इंडोचाइना, जापान, अफ्रीका की आदिम जनजातियों और प्रशांत महासागर के द्वीपों तक। लगभग पूरे ग्रह को पश्चिमी माल के लिए कच्चे माल और बाजारों के स्रोतों में बदल दिया गया, उपनिवेश बनाया गया। पूरा ग्रह पश्चिमी "पिरामिड" के शीर्ष पर बसे हुए परजीवियों के एक छोटे से हाथ की समृद्धि के लिए काम कर रहा था। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि कोई हजारों डॉलर या पाउंड स्टर्लिंग, फ्रैंक, सोने के रूबल के लिए अपनी मालकिन को हीरे खरीद सकता है, और उस समय, अफ्रीका या दक्षिण एशिया में, हजारों भूख या दास श्रम से मर रहे थे। सामान्य तौर पर, वही चित्र जो हम अपने दिनों में देख सकते हैं। दक्षिण एशिया के देशों में हजारों गुलाम एक दिन में एक डॉलर के लिए काम करते हैं, सामान्य शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के बिना भुखमरी के कगार पर रहते हैं, और वसा के बारे में छोटे अभिजात वर्ग क्रोध करते हैं, यह जानने के लिए कि अन्य सुख क्या करने की कोशिश नहीं करते हैं। यह इन्फर्नो की भयानक दुनिया है, जहां सभ्यता की शानदार उन्नत उपलब्धियों को बेतहाशा पुरातन के साथ जोड़ा जाता है।
पश्चिमी तरीके से "नई विश्व व्यवस्था" एक गुलाम-मालिक सभ्यता, उपभोग और विनाश का समाज है। लेकिन इस प्रणाली को बनाए रखने के लिए, पश्चिमी क्षेत्रों के अस्तित्व को लम्बा खींचने के लिए नए क्षेत्रों का निरंतर विस्तार, जब्ती और लूटपाट, या पुराने लोगों के "सुधार", यानी उनका नया, बार-बार विनाश आवश्यक है। 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में, पश्चिमी स्वामी को तत्काल बलिदान की आवश्यकता थी। पश्चिम संकट में था। यह स्पष्ट है कि शिकारियों और परजीवियों के सत्तारूढ़ कुलों ने खुद को पीड़ित नहीं किया है, जिसमें सैकड़ों वर्षों तक विशाल खजाने जमा हुए हैं। लेकिन छोटे परजीवी, हजारों छोटे उद्योग और मालिक, जिनके कंधों पर वे संकट के परिणाम थे, गिर गए। बैंकिंग क्षेत्र, उद्योग और कृषि क्षेत्र में संकट शुरू हुआ। शहरों की सड़कों पर बर्बाद छोटे मालिकों, श्रमिकों और किसानों की भीड़ भरी हुई थी। गरीबी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। पश्चिमी प्रणाली sags।
वैश्विक परजीवी को तत्काल "रीसेट" और नए क्षेत्रों को लूटने की आवश्यकता थी। एकमात्र सभ्यता जिसका क्षेत्र अभी तक पूरी तरह से जलमग्न नहीं हुआ है और लूटा गया रूसी था। यह स्पष्ट है कि रूसी धन को पश्चिम में स्थानांतरित करने के लिए पहले से ही तंत्र थे। उदाहरण के लिए, रूसी उदारवादी "जीनियस" एस विटे को महिमा देना पसंद करते हैं, जिन्होंने वित्तीय सहित रूस में कई सुधार किए हैं। हालांकि, यह विट्टे का मौद्रिक सुधार था जिसने पश्चिमी देशों को रूस से सोने के भंडार को पंप करने की अनुमति दी। हालांकि, पश्चिम के वित्तीय और सूदखोरों के पास रूस के धन की पूरी पहुंच नहीं थी। उन्हें विश्व नेतृत्व के संघर्ष में मुख्य रणनीतिक प्रतियोगी को खत्म करने के लिए, रूस को युद्ध और अराजकता में डुबोने, इसे नष्ट करने की आवश्यकता थी। रूस के पास अपनी भूमंडलीकरण परियोजना को पेश करने का अवसर था - मानव जाति के उत्पादन बलों का एकीकरण, कुछ "चुने हुए" के परजीवीवाद के बिना और मानव जाति के मुख्य द्रव्यमान का जंगली शोषण। इसके अलावा, पश्चिम के आकाओं को अपने परजीवी, गुलाम-मालिक "नए आदेश" को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए रूस के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता थी।
उसी समय, अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को हल किया गया था। वैश्विक परजीवी अपेक्षाकृत युवा जर्मन साम्राज्य (दूसरा रीच) को कुचलने और लूटना चाहते थे। तेजी से विकासशील जर्मनी ने औद्योगिक और सैन्य शक्ति, नई प्रौद्योगिकियों पर भरोसा किया, जो राष्ट्रों के इंडो-यूरोपीय (आर्यन) परिवार की स्वस्थ परंपराओं को जारी रखते हैं। प्रोटेस्टेंट एंग्लो-सैक्सन के परजीवी सहानुभूति, सूदखोर-यहूदियों, ग्रहों के सूदखोरों के वित्तीय अंतरराष्ट्रीय को पश्चिमी दुनिया के भीतर एक प्रतियोगी, जो अपने तरीके से चला गया और यूरोपीय सभ्यता के नेता के स्थान का दावा करने वाले द्वितीय रेइच द्वारा कुचलने की आवश्यकता थी। इसी के साथ रूस और जर्मनी के रणनीतिक गठबंधन को रोकना आवश्यक था, जो फ्रांस, इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के आकाओं के लिए बेहद खतरनाक है। रूसी भावना, रूस के संसाधन, इसकी सैन्य शक्ति और उद्योग, प्रौद्योगिकी, अनुशासन और जर्मनी के आदेश संयुक्त राज्य और ब्रिटेन के नेतृत्व में "नई विश्व व्यवस्था" को नष्ट कर सकते हैं।
आश्चर्य नहीं कि रूस और जर्मनी के दुश्मनों ने इतना प्रयास किया हैरूसी सम्राट निकोलस द्वितीय और जर्मन कैसर विल्हेल्म II को एक आम भाषा नहीं मिली, रूस और जर्मनी के लिए। जब दोनों राजाओं ने एक गठबंधन को समाप्त करने का प्रयास किया, तो उन्होंने तुरंत उसे डूबो दिया। दुर्भाग्य से, न तो निकोलाई और न ही विल्हेम ने खुद को स्थिति की ऊंचाई पर पाया और जापान के संभावित प्रवेश के साथ एक रणनीतिक अक्ष बर्लिन - पीटर्सबर्ग नहीं बना सके। और ऐसा संघ लंदन और वाशिंगटन विश्व प्रभुत्व के दावों को नष्ट कर सकता है।
भी वेस्टर्न मास्टर्स ने पुरानी दुनिया की "रिफॉर्मैटिंग" की समस्या को हल किया। जर्मन साम्राज्य के अलावा, अपने पुराने राजसी-कुलीन घरों के साथ, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य, ओटोमन साम्राज्य और बाल्कन को विनाश और लूट के लिए सजा सुनाई गई थी। पुरानी निरपेक्ष और कुलीन राजशाही को अतीत की बात बन जाना था, साथ ही साथ "लोकतांत्रिक गणराज्यों" को लूटा और दिया गया, जहां सभी वास्तविक शक्ति वित्तीय कुलों से संबंधित थीं। और लोगों को "स्वतंत्रता", "लोगों की शक्ति", "समानता" के भ्रम और मृगतृष्णा दी गई। लोग "लोगों के लोकतंत्र" के भ्रम में रहते हुए, पैसे के स्वामी के गुलाम बन गए।
हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड के मालिकों को खुले तौर पर लड़ने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, और वे वास्तव में नहीं जानते कि कैसे। वे लंबे समय तक गुलाम मालिक, दास व्यापारी, सूदखोर, सट्टेबाज और समुद्री डाकू रहे हैं, लेकिन योद्धा नहीं। योद्धाओं की सभ्यताएँ जर्मनी, रूस और जापान हैं। इसलिए, पारंपरिक रूप से "विभाजित और जीत" या "विभाजित, हवादार और जीत" की रणनीति का उपयोग किया गया है। रूसी साम्राज्य अपने सभी दोषों और विरोधाभासों के बावजूद, प्रत्यक्ष युद्ध में अजेय था। रूसी सेना में और लोगों ने रूसी भावना रखी। इसलिए, पश्चिम के उस्तादों ने गुप्त, सूचना युद्ध, अपने प्रतिद्वंद्वियों और विरोधियों को आपस में लड़ाने के साथ-साथ बलिदान के देश के भीतर एक "पांचवें स्तंभ", क्रांतिकारी ताकतों का गठन करने के तरीकों का इस्तेमाल किया।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन, रूस पर खुले तौर पर हमला करने और इस तरह के युद्ध को जीतने में असमर्थ हैं, जल्दबाजी में रूस-विरोधी "राम" तैयार किया - जापान और विश्व युद्ध के लिए पूर्वाभ्यास किया। इसी समय, उन्होंने रूस में एक क्रांति (क्रांति 1905-1907) का आयोजन किया। 1904 में, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने जापानी साम्राज्य के सैन्यीकरण में भाग लेने वाली अन्य पश्चिमी शक्तियों की एक निश्चित भागीदारी के साथ, रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया। आक्रामकता के लिए अकेले जापान को दोष देना बेवकूफी है। पश्चिम के आकाओं ने रूसी और जापानी साम्राज्यों को कुशलतापूर्वक जहर दिया, उनके बीच के विरोधाभासों का उपयोग करते हुए, रूस में उनके एजेंट (विट्टे सहित) और मूर्खता, रूसी साम्राज्य के कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के राष्ट्रीय हितों की समझ की कमी थी।
जापान अग्रिम में एक घातक में बदल गया हथियार अमेरिका और इंग्लैंड के हाथों में। जापानी सशस्त्र, ने उन्हें एक प्रथम श्रेणी की सेना और नौसेना बनाया। उन्होंने सबसे पहले चीन को सेट किया, चीन की कमजोरी का इस्तेमाल करते हुए इसे और लूटा, और चीन को जापान से नफरत करने के लिए, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक दरार पैदा करना, जो उनके लाभ के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर जापान को रूस पर फेंक दिया गया। यह सच है कि साम्राज्य के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिभा की कमी के बावजूद, सशस्त्र बलों की उच्च कमान (कुछ अपवादों को छोड़कर, जैसे एडमिरल मकरोव), रूसी साम्राज्य यामाटो दौड़ के लिए बहुत मजबूत समर्थक साबित हुआ। यहां तक कि ग्रेट ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य-तकनीकी, भौतिक और वित्तीय समर्थन के साथ, जापान ने अपनी सेनाओं को जल्दी से समाप्त कर दिया और स्थिति को संतुलित किया गया, रूसी सेना के पास एक निर्णायक जवाबी कार्रवाई में जाने और जापानियों को महासागर में फेंकने का हर मौका था।
हालांकि, पश्चिम के स्वामी "पांचवें स्तंभ" पर खेती करने और एक क्रांति का आयोजन करने में सक्षम थे, रूस के भीतर एक राक्षसी आतंक। जब आतंकवादियों ने सबसे दृढ़, प्रमुख रूसी राजनेताओं, गणमान्य व्यक्तियों, राज्यपालों, जनरलों को मार डाला। वास्तव में, यह तब था जब पश्चिम के स्वामी ने तथाकथित जन्म दिया। "अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद" पश्चिमी "स्वर्ण अभिजात वर्ग" के हाथों में एक और उपकरण है। इस प्रकार, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का जन्मस्थान हैं। क्रांति और आतंक ने रूस को बहुत नुकसान पहुंचाया, हजारों लोगों के जीवन का दावा किया। जीत में त्सारिस्ट सरकार के विश्वास को कम करके अंदर से झटका और पीटर्सबर्ग ने रियायतें दीं, जापान के साथ शांति बनाई, हालांकि युद्ध को विजयी अंत तक लाने का हर अवसर था।
इस प्रकार, हमें यह जानना और याद रखना चाहिए कि यह रूसी-"जापानी" युद्ध नहीं था। यह पश्चिम के आकाओं द्वारा रूसी सभ्यता को कुचलने का एक प्रयास था। वास्तव में, यह था ग्रेट रूस को नष्ट करने और अपने प्राकृतिक और सांस्कृतिक को जब्त करने के उद्देश्य से विश्व युद्ध का पूर्वाभ्यासऐतिहासिक धन। रूस और जापान को पश्चिम के आकाओं के हित में खेला गया। पश्चिमी मास्टर्स के चंगुल में जापान ने एक हथियार और तोप चारे के रूप में काम किया। दसियों हज़ार रूसी और जापानी मारे गए, घायल हुए, एक मुट्ठी एंग्लो-अमेरिकन usurious राजधानी के इशारे पर अपंग हुए। लेकिन इस युद्ध में रूस को कुचलने, भ्रम पैदा करने और नष्ट करने के लिए संभव नहीं था। रूस में अभी भी रक्षात्मक सेना (सेना, नौसेना, ब्लैक हंड्रेड राइट्स, निर्णायक राजनेता, जैसे पी। स्टोलिपिन), विकास की बहुत संभावनाएं थीं। पांचवें स्तंभ, क्रांतिकारी सेनाओं को कुचल दिया गया, कुछ जेल और निर्वासन में चले गए, दूसरे विदेश भाग गए। युद्ध में पूरी तरह से थकावट के बावजूद, जापान ने एक न्यूनतम हासिल की है - कुरील, सखालिन का आधा हिस्सा, कोरिया और चीन में रूस के प्रभाव की सीमा।
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- इस श्रृंखला के लेखः
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जैसा कि पहले उल्लेख किया गया था, बीस वीं शताब्दी की शुरुआत तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के सत्तारूढ़ कबीलों का सहजीवन, जिन ताकतों ने पूरी मानवता को गुलाम बनाने के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया था, उन्हें अंततः समेकित किया गया था। संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में बैंक और सूदखानों ने दुनिया के दो-तिहाई हिस्से को गुलाम बना लिया है। देशों और लोगों की वैश्विक लूट की एक प्रभावी परजीवी प्रणाली बनाई गई थी। एक मुट्ठी सूद कुलों का उत्पादन किए बिना, उन्होंने ग्रह को अपने अधीन कर लिया। सभी आबाद महाद्वीपों, सभी देशों, लोगों और जनजातियों को गुलाम निर्भरता में गिर गया। उनमें से कुछ, गुलामों के मालिकों ने बस उखाड़ फेंका, क्योंकि उत्तरी अमेरिका के अधिकांश महान भारतीय कबीले भी गुलाम होने के लिए विद्रोही थे। केवल रूसी सभ्यता ने निरंकुशता को संरक्षित किया, हालांकि सांस्कृतिक सहयोग और सूचनात्मक प्रभाव की विधि के साथ-साथ वित्त और अर्थशास्त्र के माध्यम से, पश्चिम के स्वामी रूस में पश्चिमी देशों के कुलीन वर्ग में पैदा करने में सक्षम थे, जो यूरोपीय सभ्यता की ओर उन्मुख था। हालांकि, रूस खुद को पूरी तरह से अपने अधीन नहीं कर सका। रूसी सांस्कृतिक और सभ्यता संबंधी कोड "मैट्रिक्स", निरंकुशता और रूढ़िवादी है, जो पूरी तरह से emasculated नहीं किया जा सकता है, खाली कर दिया। बीस वीं शताब्दी की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका का तेजी से विकास हुआ। उन्नीसवीं सदी के अंत से पश्चिमी यूरोप संकट में है। प्रणालीगत संकट का कारण, साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और अब, अनिवार्य रूप से विकास का पश्चिमी, पूंजीवादी मॉडल था। यह तभी बढ़ सकता है जब कोर नए क्षेत्रों, कॉलोनियों, आश्रित प्रदेशों की कीमत पर नए संसाधन प्राप्त कर सकते हैं। यह एक परजीवी मॉडल है। ग्रहों के दास-स्वामी, परजीवी "वित्तीय पिरामिड" का समर्थन करने के लिए, इसमें लगातार सभी नए "दाताओं", "ग्राहकों", नए देशों और लोगों को आकर्षित करना आवश्यक है। जबकि नई भूमि, बाजार, राष्ट्र हैं जिन्हें जब्त किया जा सकता है, लूट लिया जा सकता है, परजीवी योजना में शामिल किया जा सकता है, पश्चिम, विशेष रूप से इसका मूल फल-फूल रहा है। आप एक "पूंजीवाद का संकेत" बना सकते हैं, समृद्धि की उपस्थिति, एक उपभोक्ता समाज जिसमें उच्च वर्ग और तबका अच्छी तरह से सुसज्जित है। यह सच है कि इस संकेत के तहत, बहुसंख्यक आबादी की गुलामी और गरीबी निहित है, खासकर पश्चिमी दुनिया की परिधि पर। महानगर कई समस्याओं का समाधान करता है - गरीबी, भूख, युद्ध, परिधि। लेकिन XIX के अंत तक - XX सदियों की शुरुआत। नए "दाताओं" छोड़ दिया। पश्चिम ने अपनी शिकारी, परजीवी प्रणाली को लगभग पूरी दुनिया में शामिल किया है। पूर्व की प्राचीन सभ्यताओं से - फारस, भारत, चीन, इंडोचाइना, जापान, अफ्रीका की आदिम जनजातियों और प्रशांत महासागर के द्वीपों तक। लगभग पूरे ग्रह को पश्चिमी माल के लिए कच्चे माल और बाजारों के स्रोतों में बदल दिया गया, उपनिवेश बनाया गया। पूरा ग्रह पश्चिमी "पिरामिड" के शीर्ष पर बसे हुए परजीवियों के एक छोटे से हाथ की समृद्धि के लिए काम कर रहा था। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि कोई हजारों डॉलर या पाउंड स्टर्लिंग, फ्रैंक, सोने के रूबल के लिए अपनी मालकिन को हीरे खरीद सकता है, और उस समय, अफ्रीका या दक्षिण एशिया में, हजारों भूख या दास श्रम से मर रहे थे। सामान्य तौर पर, वही चित्र जो हम अपने दिनों में देख सकते हैं। दक्षिण एशिया के देशों में हजारों गुलाम एक दिन में एक डॉलर के लिए काम करते हैं, सामान्य शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के बिना भुखमरी के कगार पर रहते हैं, और वसा के बारे में छोटे अभिजात वर्ग क्रोध करते हैं, यह जानने के लिए कि अन्य सुख क्या करने की कोशिश नहीं करते हैं। यह इन्फर्नो की भयानक दुनिया है, जहां सभ्यता की शानदार उन्नत उपलब्धियों को बेतहाशा पुरातन के साथ जोड़ा जाता है। पश्चिमी तरीके से "नई विश्व व्यवस्था" एक गुलाम-मालिक सभ्यता, उपभोग और विनाश का समाज है। लेकिन इस प्रणाली को बनाए रखने के लिए, पश्चिमी क्षेत्रों के अस्तित्व को लम्बा खींचने के लिए नए क्षेत्रों का निरंतर विस्तार, जब्ती और लूटपाट, या पुराने लोगों के "सुधार", यानी उनका नया, बार-बार विनाश आवश्यक है। बीस वीं शताब्दी की शुरुआत में, पश्चिमी स्वामी को तत्काल बलिदान की आवश्यकता थी। पश्चिम संकट में था। यह स्पष्ट है कि शिकारियों और परजीवियों के सत्तारूढ़ कुलों ने खुद को पीड़ित नहीं किया है, जिसमें सैकड़ों वर्षों तक विशाल खजाने जमा हुए हैं। लेकिन छोटे परजीवी, हजारों छोटे उद्योग और मालिक, जिनके कंधों पर वे संकट के परिणाम थे, गिर गए। बैंकिंग क्षेत्र, उद्योग और कृषि क्षेत्र में संकट शुरू हुआ। शहरों की सड़कों पर बर्बाद छोटे मालिकों, श्रमिकों और किसानों की भीड़ भरी हुई थी। गरीबी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। पश्चिमी प्रणाली sags। वैश्विक परजीवी को तत्काल "रीसेट" और नए क्षेत्रों को लूटने की आवश्यकता थी। एकमात्र सभ्यता जिसका क्षेत्र अभी तक पूरी तरह से जलमग्न नहीं हुआ है और लूटा गया रूसी था। यह स्पष्ट है कि रूसी धन को पश्चिम में स्थानांतरित करने के लिए पहले से ही तंत्र थे। उदाहरण के लिए, रूसी उदारवादी "जीनियस" एस विटे को महिमा देना पसंद करते हैं, जिन्होंने वित्तीय सहित रूस में कई सुधार किए हैं। हालांकि, यह विट्टे का मौद्रिक सुधार था जिसने पश्चिमी देशों को रूस से सोने के भंडार को पंप करने की अनुमति दी। हालांकि, पश्चिम के वित्तीय और सूदखोरों के पास रूस के धन की पूरी पहुंच नहीं थी। उन्हें विश्व नेतृत्व के संघर्ष में मुख्य रणनीतिक प्रतियोगी को खत्म करने के लिए, रूस को युद्ध और अराजकता में डुबोने, इसे नष्ट करने की आवश्यकता थी। रूस के पास अपनी भूमंडलीकरण परियोजना को पेश करने का अवसर था - मानव जाति के उत्पादन बलों का एकीकरण, कुछ "चुने हुए" के परजीवीवाद के बिना और मानव जाति के मुख्य द्रव्यमान का जंगली शोषण। इसके अलावा, पश्चिम के आकाओं को अपने परजीवी, गुलाम-मालिक "नए आदेश" को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए रूस के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता थी। उसी समय, अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को हल किया गया था। वैश्विक परजीवी अपेक्षाकृत युवा जर्मन साम्राज्य को कुचलने और लूटना चाहते थे। तेजी से विकासशील जर्मनी ने औद्योगिक और सैन्य शक्ति, नई प्रौद्योगिकियों पर भरोसा किया, जो राष्ट्रों के इंडो-यूरोपीय परिवार की स्वस्थ परंपराओं को जारी रखते हैं। प्रोटेस्टेंट एंग्लो-सैक्सन के परजीवी सहानुभूति, सूदखोर-यहूदियों, ग्रहों के सूदखोरों के वित्तीय अंतरराष्ट्रीय को पश्चिमी दुनिया के भीतर एक प्रतियोगी, जो अपने तरीके से चला गया और यूरोपीय सभ्यता के नेता के स्थान का दावा करने वाले द्वितीय रेइच द्वारा कुचलने की आवश्यकता थी। इसी के साथ रूस और जर्मनी के रणनीतिक गठबंधन को रोकना आवश्यक था, जो फ्रांस, इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के आकाओं के लिए बेहद खतरनाक है। रूसी भावना, रूस के संसाधन, इसकी सैन्य शक्ति और उद्योग, प्रौद्योगिकी, अनुशासन और जर्मनी के आदेश संयुक्त राज्य और ब्रिटेन के नेतृत्व में "नई विश्व व्यवस्था" को नष्ट कर सकते हैं। आश्चर्य नहीं कि रूस और जर्मनी के दुश्मनों ने इतना प्रयास किया हैरूसी सम्राट निकोलस द्वितीय और जर्मन कैसर विल्हेल्म II को एक आम भाषा नहीं मिली, रूस और जर्मनी के लिए। जब दोनों राजाओं ने एक गठबंधन को समाप्त करने का प्रयास किया, तो उन्होंने तुरंत उसे डूबो दिया। दुर्भाग्य से, न तो निकोलाई और न ही विल्हेम ने खुद को स्थिति की ऊंचाई पर पाया और जापान के संभावित प्रवेश के साथ एक रणनीतिक अक्ष बर्लिन - पीटर्सबर्ग नहीं बना सके। और ऐसा संघ लंदन और वाशिंगटन विश्व प्रभुत्व के दावों को नष्ट कर सकता है। भी वेस्टर्न मास्टर्स ने पुरानी दुनिया की "रिफॉर्मैटिंग" की समस्या को हल किया। जर्मन साम्राज्य के अलावा, अपने पुराने राजसी-कुलीन घरों के साथ, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य, ओटोमन साम्राज्य और बाल्कन को विनाश और लूट के लिए सजा सुनाई गई थी। पुरानी निरपेक्ष और कुलीन राजशाही को अतीत की बात बन जाना था, साथ ही साथ "लोकतांत्रिक गणराज्यों" को लूटा और दिया गया, जहां सभी वास्तविक शक्ति वित्तीय कुलों से संबंधित थीं। और लोगों को "स्वतंत्रता", "लोगों की शक्ति", "समानता" के भ्रम और मृगतृष्णा दी गई। लोग "लोगों के लोकतंत्र" के भ्रम में रहते हुए, पैसे के स्वामी के गुलाम बन गए। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड के मालिकों को खुले तौर पर लड़ने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, और वे वास्तव में नहीं जानते कि कैसे। वे लंबे समय तक गुलाम मालिक, दास व्यापारी, सूदखोर, सट्टेबाज और समुद्री डाकू रहे हैं, लेकिन योद्धा नहीं। योद्धाओं की सभ्यताएँ जर्मनी, रूस और जापान हैं। इसलिए, पारंपरिक रूप से "विभाजित और जीत" या "विभाजित, हवादार और जीत" की रणनीति का उपयोग किया गया है। रूसी साम्राज्य अपने सभी दोषों और विरोधाभासों के बावजूद, प्रत्यक्ष युद्ध में अजेय था। रूसी सेना में और लोगों ने रूसी भावना रखी। इसलिए, पश्चिम के उस्तादों ने गुप्त, सूचना युद्ध, अपने प्रतिद्वंद्वियों और विरोधियों को आपस में लड़ाने के साथ-साथ बलिदान के देश के भीतर एक "पांचवें स्तंभ", क्रांतिकारी ताकतों का गठन करने के तरीकों का इस्तेमाल किया। संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन, रूस पर खुले तौर पर हमला करने और इस तरह के युद्ध को जीतने में असमर्थ हैं, जल्दबाजी में रूस-विरोधी "राम" तैयार किया - जापान और विश्व युद्ध के लिए पूर्वाभ्यास किया। इसी समय, उन्होंने रूस में एक क्रांति का आयोजन किया। एक हज़ार नौ सौ चार में, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने जापानी साम्राज्य के सैन्यीकरण में भाग लेने वाली अन्य पश्चिमी शक्तियों की एक निश्चित भागीदारी के साथ, रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया। आक्रामकता के लिए अकेले जापान को दोष देना बेवकूफी है। पश्चिम के आकाओं ने रूसी और जापानी साम्राज्यों को कुशलतापूर्वक जहर दिया, उनके बीच के विरोधाभासों का उपयोग करते हुए, रूस में उनके एजेंट और मूर्खता, रूसी साम्राज्य के कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के राष्ट्रीय हितों की समझ की कमी थी। जापान अग्रिम में एक घातक में बदल गया हथियार अमेरिका और इंग्लैंड के हाथों में। जापानी सशस्त्र, ने उन्हें एक प्रथम श्रेणी की सेना और नौसेना बनाया। उन्होंने सबसे पहले चीन को सेट किया, चीन की कमजोरी का इस्तेमाल करते हुए इसे और लूटा, और चीन को जापान से नफरत करने के लिए, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक दरार पैदा करना, जो उनके लाभ के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर जापान को रूस पर फेंक दिया गया। यह सच है कि साम्राज्य के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिभा की कमी के बावजूद, सशस्त्र बलों की उच्च कमान , रूसी साम्राज्य यामाटो दौड़ के लिए बहुत मजबूत समर्थक साबित हुआ। यहां तक कि ग्रेट ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य-तकनीकी, भौतिक और वित्तीय समर्थन के साथ, जापान ने अपनी सेनाओं को जल्दी से समाप्त कर दिया और स्थिति को संतुलित किया गया, रूसी सेना के पास एक निर्णायक जवाबी कार्रवाई में जाने और जापानियों को महासागर में फेंकने का हर मौका था। हालांकि, पश्चिम के स्वामी "पांचवें स्तंभ" पर खेती करने और एक क्रांति का आयोजन करने में सक्षम थे, रूस के भीतर एक राक्षसी आतंक। जब आतंकवादियों ने सबसे दृढ़, प्रमुख रूसी राजनेताओं, गणमान्य व्यक्तियों, राज्यपालों, जनरलों को मार डाला। वास्तव में, यह तब था जब पश्चिम के स्वामी ने तथाकथित जन्म दिया। "अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद" पश्चिमी "स्वर्ण अभिजात वर्ग" के हाथों में एक और उपकरण है। इस प्रकार, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का जन्मस्थान हैं। क्रांति और आतंक ने रूस को बहुत नुकसान पहुंचाया, हजारों लोगों के जीवन का दावा किया। जीत में त्सारिस्ट सरकार के विश्वास को कम करके अंदर से झटका और पीटर्सबर्ग ने रियायतें दीं, जापान के साथ शांति बनाई, हालांकि युद्ध को विजयी अंत तक लाने का हर अवसर था। इस प्रकार, हमें यह जानना और याद रखना चाहिए कि यह रूसी-"जापानी" युद्ध नहीं था। यह पश्चिम के आकाओं द्वारा रूसी सभ्यता को कुचलने का एक प्रयास था। वास्तव में, यह था ग्रेट रूस को नष्ट करने और अपने प्राकृतिक और सांस्कृतिक को जब्त करने के उद्देश्य से विश्व युद्ध का पूर्वाभ्यासऐतिहासिक धन। रूस और जापान को पश्चिम के आकाओं के हित में खेला गया। पश्चिमी मास्टर्स के चंगुल में जापान ने एक हथियार और तोप चारे के रूप में काम किया। दसियों हज़ार रूसी और जापानी मारे गए, घायल हुए, एक मुट्ठी एंग्लो-अमेरिकन usurious राजधानी के इशारे पर अपंग हुए। लेकिन इस युद्ध में रूस को कुचलने, भ्रम पैदा करने और नष्ट करने के लिए संभव नहीं था। रूस में अभी भी रक्षात्मक सेना , विकास की बहुत संभावनाएं थीं। पांचवें स्तंभ, क्रांतिकारी सेनाओं को कुचल दिया गया, कुछ जेल और निर्वासन में चले गए, दूसरे विदेश भाग गए। युद्ध में पूरी तरह से थकावट के बावजूद, जापान ने एक न्यूनतम हासिल की है - कुरील, सखालिन का आधा हिस्सा, कोरिया और चीन में रूस के प्रभाव की सीमा। - लेखकः - इस श्रृंखला के लेखः
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इकाई - 1
शारीरिक शिक्षा की परिभाषा, महत्त्व एवं उद्देश्य
शारीरिक शिक्षा को परिभाषा
शारीरिक शिक्षा को कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नावित हैं
शमन ( Sharman) - "गत्यात्मक क्रियाओ (Motor Activity) और तत्सम्बधो अनुभवो के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा हो शारीरिक शिक्षा है । इसकी मुख्य विषय-वस्तु है मानवीय व्यवहार के तरीके । "1
एच सी बक (H C Buck ) - "शारीरिक शिक्षा सामा य शिक्षा से सम्बंधित वह वायत्रम है जिसके अनुसार वृहद् मासपेशी से सम्बचित किया के माध्यम से बालक को शिक्षित, विकसित और उन्नत किया जाता है। शारी रिक वियाग्रा से दी जाने वाली यह शिक्षा सम्पूर्ण वालव की शिक्षा है। शारीरिक कियाए साधन हैं। इन को इस तरह चुना व उनका गचालन चिया जाता है कि बालक के जीवन के शारीरिक, मानसिक, भावात्मक और नैतिक आदि प्रत्येक पहलू पर प्रभाव पडे ।"
जान एच जनी (John H Jenny ) -- 'शारीरिक शिक्षा सामान्य शिक्षा का वह क्षेत्र है जहा शारीरिक क्रियामा को विशेष महत्व दिया जाता है जिह यदि अच्छी तरह से मगठित व संचालित किया जाये तो इन्ह सामाय शिक्षा के अस्त्र व तकनीक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है ।"
प्रब्दुल जब्बार तँवर - "शारीरिक शियाओ के माध्यम से व्यक्तित्व के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास को सम्भव बनाने वाली तथा छात्रो निमित्त इन याया की शिक्षा की प्रक्रिया में सम्मिलित करने वाली तथा
Sharman, Jackson R Modern Principles of
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इकाई - एक शारीरिक शिक्षा की परिभाषा, महत्त्व एवं उद्देश्य शारीरिक शिक्षा को परिभाषा शारीरिक शिक्षा को कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नावित हैं शमन - "गत्यात्मक क्रियाओ और तत्सम्बधो अनुभवो के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा हो शारीरिक शिक्षा है । इसकी मुख्य विषय-वस्तु है मानवीय व्यवहार के तरीके । "एक एच सी बक - "शारीरिक शिक्षा सामा य शिक्षा से सम्बंधित वह वायत्रम है जिसके अनुसार वृहद् मासपेशी से सम्बचित किया के माध्यम से बालक को शिक्षित, विकसित और उन्नत किया जाता है। शारी रिक वियाग्रा से दी जाने वाली यह शिक्षा सम्पूर्ण वालव की शिक्षा है। शारीरिक कियाए साधन हैं। इन को इस तरह चुना व उनका गचालन चिया जाता है कि बालक के जीवन के शारीरिक, मानसिक, भावात्मक और नैतिक आदि प्रत्येक पहलू पर प्रभाव पडे ।" जान एच जनी -- 'शारीरिक शिक्षा सामान्य शिक्षा का वह क्षेत्र है जहा शारीरिक क्रियामा को विशेष महत्व दिया जाता है जिह यदि अच्छी तरह से मगठित व संचालित किया जाये तो इन्ह सामाय शिक्षा के अस्त्र व तकनीक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है ।" प्रब्दुल जब्बार तँवर - "शारीरिक शियाओ के माध्यम से व्यक्तित्व के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास को सम्भव बनाने वाली तथा छात्रो निमित्त इन याया की शिक्षा की प्रक्रिया में सम्मिलित करने वाली तथा Sharman, Jackson R Modern Principles of
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SS Rajamouli आज एक ऐसे डॉयरेक्टर है जिनकी फिल्मों का इंतजार हर किसी को रहता है। उनकी फिल्म 'बाहुबली' को तो कोई भुला ही नहीं सकता और अब शायद RRR भी एक ऐसी फिल्म बन गयी है जिसने इतने रिकार्ड्स तोड़े बॉक्स ऑफिस पर की आज वो फिल्ममेकर्स का बेंचमार्क बन गयी है. अब इससे पहले की हम इन दो फिल्म्स को भूलें एक और बड़ी फिल्म की तैयारी भी शुरू होगयी है. कौनसी है ये Grand फिल्म जिसे बनाने वाले हैं SS Rajamouli देखिए इस वीडियो में.
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SS Rajamouli आज एक ऐसे डॉयरेक्टर है जिनकी फिल्मों का इंतजार हर किसी को रहता है। उनकी फिल्म 'बाहुबली' को तो कोई भुला ही नहीं सकता और अब शायद RRR भी एक ऐसी फिल्म बन गयी है जिसने इतने रिकार्ड्स तोड़े बॉक्स ऑफिस पर की आज वो फिल्ममेकर्स का बेंचमार्क बन गयी है. अब इससे पहले की हम इन दो फिल्म्स को भूलें एक और बड़ी फिल्म की तैयारी भी शुरू होगयी है. कौनसी है ये Grand फिल्म जिसे बनाने वाले हैं SS Rajamouli देखिए इस वीडियो में.
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कांगड़ा - 'डांस हिमाचल डांस' के मंच पर इस मर्तबा जहां नृत्य के जलवे होंगे तो वहीं मेहमानों को कई सेलिब्रिटी से भी रू-ब-रू होने का मौका मिलेगा। प्रदेश के अग्रणी मीडिया गु्रन 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित डीएचडी का ऑडिशन दस सितंबर को कांगड़ा में होगा। बहुतकनीकी संस्थान के सभागार में आयोजित होने वाले इस आयोजन में मिसेज पंजाब प्राइड ऑफ नेशन फाइनलिस्ट और सब टाइटल विनर अदिति अग्रवाल बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट शिरकत करेंगी। इसके अलावा मिस हिमाचल की फाइनलिस्ट एवं मिस फेयर नेस क्वीन ईशा गुप्ता, मिस हिमाचल फाइनलिस्ट पलक शर्मा और मिस्टर हिमाचल फाइनलिस्ट मोहित शर्मा आकर्षण का केंद्र होंगे। सेलिब्रिटी गेस्ट के रूप में डीएचडी के मंच पर पहुंच रही अदिति अग्रवाल शिक्षाविद होने के नाते राष्ट्र को शिक्षित कर देश सेवा में योगदान दे रही हैं। इंग्लिश में एमए एंड एमफिल अदिति अग्रवाल अपने इन दायित्वों को पूरी शिद्दत और समर्पण की भावना से निभा रही है। फैशन डिजाइनिंग में भी श्रीमती अग्रवाल को महारत हासिल है। हर तरह के साहित्य को पढ़ना अदिति अग्रवाल के शौक में शुमार है। अलबत्ता कुकिंग, डांस व प्राकृतिक वातावरण में घूमना अदिति अग्रवाल को पसंद है। वह वीडियोकॉन सुपर कनेक्ट जोड़ी सीजन तीन में भी सेकेंड रनरअप का खिताब हासिल कर चुकी है। जाहिर तौर पर इन मेहमानों के आने से 'डीएचडी' मंच की शान बढ़ेगी। 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन को ले कर युवक युवतियों में भारी उत्साह है। दीगर है इस मंच के माध्यम से प्रतिभागियों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। मुंबई की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त टेरेंस लूईस अकादमी इस इवेंट के साथ जुड़ी हैं। इस वजह से विजेताओं को टीवी रियाल्टी शो में जाने का मौका मिलता है। 'दिव्य हिमाचल' मीडिया गु्रप के डिप्टी डायरेक्टर इवेंट पंकज सूद ने बताया कि प्रतिभागियो में गजब का उत्साह देखा गया है।
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कांगड़ा - 'डांस हिमाचल डांस' के मंच पर इस मर्तबा जहां नृत्य के जलवे होंगे तो वहीं मेहमानों को कई सेलिब्रिटी से भी रू-ब-रू होने का मौका मिलेगा। प्रदेश के अग्रणी मीडिया गु्रन 'दिव्य हिमाचल' द्वारा आयोजित डीएचडी का ऑडिशन दस सितंबर को कांगड़ा में होगा। बहुतकनीकी संस्थान के सभागार में आयोजित होने वाले इस आयोजन में मिसेज पंजाब प्राइड ऑफ नेशन फाइनलिस्ट और सब टाइटल विनर अदिति अग्रवाल बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट शिरकत करेंगी। इसके अलावा मिस हिमाचल की फाइनलिस्ट एवं मिस फेयर नेस क्वीन ईशा गुप्ता, मिस हिमाचल फाइनलिस्ट पलक शर्मा और मिस्टर हिमाचल फाइनलिस्ट मोहित शर्मा आकर्षण का केंद्र होंगे। सेलिब्रिटी गेस्ट के रूप में डीएचडी के मंच पर पहुंच रही अदिति अग्रवाल शिक्षाविद होने के नाते राष्ट्र को शिक्षित कर देश सेवा में योगदान दे रही हैं। इंग्लिश में एमए एंड एमफिल अदिति अग्रवाल अपने इन दायित्वों को पूरी शिद्दत और समर्पण की भावना से निभा रही है। फैशन डिजाइनिंग में भी श्रीमती अग्रवाल को महारत हासिल है। हर तरह के साहित्य को पढ़ना अदिति अग्रवाल के शौक में शुमार है। अलबत्ता कुकिंग, डांस व प्राकृतिक वातावरण में घूमना अदिति अग्रवाल को पसंद है। वह वीडियोकॉन सुपर कनेक्ट जोड़ी सीजन तीन में भी सेकेंड रनरअप का खिताब हासिल कर चुकी है। जाहिर तौर पर इन मेहमानों के आने से 'डीएचडी' मंच की शान बढ़ेगी। 'डांस हिमाचल डांस' के ऑडिशन को ले कर युवक युवतियों में भारी उत्साह है। दीगर है इस मंच के माध्यम से प्रतिभागियों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। मुंबई की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त टेरेंस लूईस अकादमी इस इवेंट के साथ जुड़ी हैं। इस वजह से विजेताओं को टीवी रियाल्टी शो में जाने का मौका मिलता है। 'दिव्य हिमाचल' मीडिया गु्रप के डिप्टी डायरेक्टर इवेंट पंकज सूद ने बताया कि प्रतिभागियो में गजब का उत्साह देखा गया है।
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2013 में त्यौहार "किनोटाव्र" के निर्देशकों मेंनतालिया मर्कुलोवा और एलेक्सी चूपोव ने अपनी पहली रचना - पेंटिंग "अंतरंग स्थानों" को प्रस्तुत किया। यूरोपीय आर्थहाउस की भावना से फिल्माई गई इस फिल्म ने उन समस्याओं को छुआ, जो किसी ने अभी तक रूस में अपने रचनाकारों से स्पष्ट रूप से नहीं कही थीं। निर्देशकों ने यौन कुंठा के सभी हाइपोस्टेस का प्रदर्शन किया, जो रातोंरात पवित्र नैतिकता और आत्म-संयम के पंथ द्वारा शासित दुनिया में एक व्यक्ति को मजबूर कर सकता है। फिल्म "अंतरंग स्थानों" की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पृष्ठभूमि, अभिनेताओं ने शानदार ढंग से अपने नायकों की छवियों का खुलासा किया, असाधारण साजिश ट्विस्ट ने इसे विजेता की पीठ पर खड़ा किया। फिल्म को 2014 की सबसे उज्ज्वल घटना के रूप में पहचाना गया था और इसने सभी उच्च गुणवत्ता वाली उत्तेजक परियोजनाओं के रूप में, जोशीले चर्चाओं, तूफानी तालियों और तीखी आलोचना की।
मर्कुलोव और चूपोव की तस्वीर कहानियों से बुनी गई हैमध्यम वर्ग के नागरिक - सफल, आर्थिक रूप से सुरक्षित, लेकिन गहरे दुखी। अपने जीवन के एक निश्चित चरण में, वे अपनी अंतरंग समस्याओं में फंस गए और अपने स्वयं के परिसरों के चक्कर में उलझ गए।
फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अभिनेताओं ने अवतार लियाहीरो खुद को वास्तव में भव्य आकार के सिर में "तिलचट्टे" के साथ। एक सफल प्राकृतिक आदमी, सर्गेई खुद में समलैंगिक शुरुआत पाकर आश्चर्यचकित था, अपनी पत्नी के प्रशंसक के लिए जुनून पैदा कर रहा था। उसे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि चौथा दर्जन में उसे आश्चर्यचकित करने वाले जीवन का क्या करना है, क्योंकि वह उसकी वासना की वस्तु को ट्रैक करता है।
और अनुकरणीय परिवार का आदमी अलेक्सी बदलने से डरता हैपत्नी। सुंदर महिलाओं के खतरनाक प्रभाव से बचने के लिए, वह केवल निम्न वर्ग के प्रभावशाली आयाम वाली महिलाओं को देखने का फैसला करती है और यह देखकर हैरान होती है कि वे उसे प्रसन्न करते हैं। एक नया शौक़ीन व्यक्ति अपने मनोविश्लेषक बोरिस का खुलकर स्तूप में परिचय कराता है। डॉक्टर, हालांकि, पाप के बिना भी नहीं है। उसके जुनून की वस्तु भ्रमित हो गई। और उन्हें अंतरंग करने के लिए बोरिस की आवश्यकता नहीं है।
इस मूक पागलपन के बीच, उठोबहुविवाहित फोटो कलाकार-डीवीकेमनेनेट्स इवान और ल्यूडमिला पेत्रोव्ना, जो कि अदम्य यौन भूख के साथ बाल्ज़कोवसोगो उम्र की महिला है और देश में इरोटिका पर प्रतिबंध लगाने की एक भावुक इच्छा है।
हंसना या रोना?
फिल्म "अंतरंग स्थानों" के अभिनेताओं को पहले नंगे रखा गया थादर्शक अपने नायकों के गुप्त रहस्य देख सकते हैं जो कि सहानुभूति पैदा कर सकते हैं, और घृणा, और घबराए हुए लोग। गति चित्रों की शैली निर्धारित करना मुश्किल है। इसमें सब कुछ हैः असली नाटक, और विनीत कॉमेडी, और इरोटिका, और बिल्कुल सफल नहीं, बल्कि अलैंगिक। आखिरकार, यह जुनून के बारे में नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के बारे में है जो व्यक्तित्व को नष्ट करते हैं।
इस कारण से, दर्शकों को मोशन पिक्चर माना जाता हैअस्पष्ट। नायकों के अंतरंग संघर्षों को देखते हुए, कुछ लोग हंसे बिना रुके, दूसरों ने ईमानदारी से नायकों के साथ सहानुभूति जताई और राहत की सांस लीः स्क्रीन पर, वास्तविकता वास्तविक जीवन की तुलना में अधिक भयानक और बदसूरत है। फिर भी अन्य लोगों ने भयावह अनैतिकता के लिए तस्वीर को दोषी ठहराया, अश्लील शब्दावली की एक बहुतायत और नग्नता की सबसे सौंदर्यवादी प्रस्तुति नहीं थी, जिसने तस्वीर को पारंपरिक इरोटिका से दूर बना दिया।
कास्टिंग कास्ट कैसी थी?
फिल्म की बाद की विशेषताओं को देखते हुएकास्टिंग अभिनेता के दौरान निर्देशकों को बहुत मुश्किलें होती हैं। भूमिकाओं के लिए कई आशाजनक आवेदकों ने परियोजना में भाग लेने से इनकार कर दिया, इसे "संदिग्ध नग्नता" माना। तब किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि निर्देशकों को कार्लोवी वैरी में "पूर्व के पश्चिम" कार्यक्रम के मुख्य पुरस्कार किन्नोत्र समारोह में "बेस्ट डेब्यू के लिए" पुरस्कार मिलेगा, और फिल्म को स्वयं फिल्म क्रिटिक्स और फिल्म क्रिटिक्स का डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा।
हालांकि, कुछ प्रसिद्ध अभिनेता तुरंतउत्तेजक परियोजना की शक्तिशाली क्षमता को महसूस किया। तो, प्रसिद्ध अभिनेत्री ओलेसा सुदिलोवस्काया, जिसने स्वेतलाना की भूमिका निभाई, फोटोग्राफर इवान की पत्नी को स्क्रिप्ट के साथ खुशी हुई। अपने एक साक्षात्कार में, अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से मुफ्त में चौंकाने वाली तस्वीर में दिखाई देंगी, क्योंकि वह मार्कुलोवा और चुप्पोवा के विचार से प्रभावित थीं। मुझे स्वेतलाना सुज़िलोव्सकाया की भूमिका के लिए लड़ना पड़ाः वह अंतहीन परीक्षणों में चली गई और निर्देशकों की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी।
फिल्म "अंतरंग" में भाग लेने के लिए कास्टिंग के दौरानउन जगहों पर जहां अभिनेताओं और भूमिकाओं को सावधानी से चुना गया था, और कुछ पात्रों के लिए शूटिंग की शुरुआत के लिए एक भी उपयुक्त उम्मीदवार नहीं था। तो, अव्यक्त समलैंगिक सर्गेई को खुद को चूपोव के परिणामस्वरूप खेलना पड़ा। वह एक पेशेवर अभिनेता नहीं थे, लेकिन एक जोखिम भरा प्रयोग करने का फैसला किया।
और नैतिकता के पर्यवेक्षक ल्यूडमिला पेत्रोव्ना की भूमिका परनिर्देशकों ने कास्टिंग शुरू होने के छह महीने बाद ही अभिनेत्री को ढूंढ लिया। जूलिया ऑग द्वारा उनकी शानदार प्रस्तुति, जिसे मर्कुलोवा और चुपोव ने शुरू में ऐसी सनकी छवि के बारे में सोचा भी नहीं था। निर्देशकों के दृष्टिकोण से, उसका सुखद रूसी चेहरा ग्राम जीवन के बारे में प्रस्तुतियों में बहुत अच्छा लगेगा, लेकिन प्रयोगात्मक परियोजनाओं में नहीं। जैसा कि यह निकला, वे गलत थे। जूलिया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया।
फिल्म का मुख्य किरदार अवतार लेता हैकरिश्माई अभिनेता यूरी कोलोकोलनिकोव। पंथ टीवी श्रृंखला "गेम ऑफ थ्रोन्स" से भविष्य के मैगनर टेनोव स्टीयर ने एक चौंकाने वाले फोटोग्राफर इवान की भूमिका निभाई, जिनकी रचनात्मक गतिविधि जननांगों को फिल्माने के लिए नीचे आती है, और उनकी जीवन स्थिति - पूर्ण यौन स्वतंत्रता के लिए।
खुशी के लिए बनाया गया आदमी, नायक को मानता हैKolokol'nikova। और यदि ऐसा है, तो जीवन से सब कुछ क्यों नहीं लिया जाता है? इवान के घर में दो पत्नियां हैं, जिसे फोटोग्राफर की बहुविवाह के साथ मजबूर किया जाता है, और वह एक से दूसरे तक भटकती है, और कई बार वह अपने मॉडलों के साथ सोती है। अपने आप को सीमित क्यों करें, नैतिकता के लिए एक सेनानी समझ में नहीं आता है, वह मनोविश्लेषक बोरिस (तैमूर बडलबेयली) द्वारा एक लंबी यात्रा पर एक अश्लील अभिशाप भेजता है, अपने रोगियों पर थोपने की मांग करता है, और एक ही समय में सामाजिक रूपरेखा पर।
फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अभिनेताओं ने शुद्ध रूप से दिखायालोगों के बीच वैचारिक संघर्ष, आधुनिक समाज में अत्यंत प्रासंगिक है। इवान की स्थिति प्यूरिटन नैतिकता के खिलाफ एक खुला विद्रोह है, लेकिन आसपास के लोग एक घोटालेबाज फोटोग्राफर के जीवन सिद्धांतों को स्वीकार करने में मुश्किल हैं। उनकी व्यक्तित्व और रचनात्मक खोज की आलोचना की जाती है। इवान की एक फोटो प्रदर्शनी, जो एक क्लोज-अप दिखाती हुई जगह है, नैतिक समिति पर प्रतिबंध लगाने के लिए उत्सुक है।
ल्यूडमिला पेत्रोव्ना समाज में पवित्रता और शुद्धता के लिए एक प्रबल सेनानी है। उसे रोटी मत खिलाओ - मुझे विश्व सिनेमा की मास्टरपीस से हल्की इरोटिका काट दो।
और इवान की प्रदर्शनी और पूरी तरह से आंशिक महिला को डुबोती हैसदमे में, क्योंकि इसकी सामग्री स्पष्ट रूप से "पोर्नोग्राफ़ी" की अवधारणा को ग्रहण करती है। और टीवी स्क्रीन पर टूटी हुई लाशों के खिलाफ ल्यूडमिला पेत्रोव्ना कोई आपत्ति नहीं करती है, और नग्न प्रकृति महिला के लिए एक असली ठोकर बन जाती है। आखिरकार, उनके चेहरे की शांत भावहीन अभिव्यक्ति के पीछे, जो पूरी फिल्म में अभिनेत्री जूलिया अगस्त द्वारा प्रतिभाशाली रूप से व्यक्त की गई थी, जुनूनी कामुक कल्पनाएं भटक रही हैं।
काम से घर आकर, वह पहली बातवाइब्रेटर पकड़ लेता है। ल्यूडमिला पेत्रोव्ना के लिए केवल मृत बैटरी एक वास्तविक त्रासदी बन जाती है। कष्टप्रद गलतफहमी से बचने के लिए, वह उन्हें इतनी मात्रा में खरीदती है जैसे कि निकट भविष्य में दुनिया को परमाणु युद्ध का सामना करना पड़ेगा, और दुकानें पृथ्वी के चेहरे से गायब हो जाएंगी।
फिल्म के प्रीमियर से पहले निर्देशक क्या नहीं सोच सकते थे?
इस एंटीपोड नायक कोलोकोलनिकोव शामिल थेफिल्म "अंतरंग स्थानों में मर्कुलोवा और चूपोव।" अभिनेताओं और भूमिकाओं ने एक ऐसी प्रतिक्रिया को उकसाया, जिसकी निर्देशक खुद कभी उम्मीद नहीं करते थे। ल्यूडमिला पेत्रोव्ना की रंगीन छवि, पाखंड, पाखंड और कुल अकेलेपन को उजागर करते हुए, रूसी राज्य ड्यूमा के कुछ सदस्यों के प्रयोगात्मक विचारों के खिलाफ एक वास्तविक विरोध बन गया।
उसका कुछ कैरिकेचर फिगर लग रहा थाशुरुआत में सोवियत संघ से "ग्रीटिंग्स" के साथ फिल्म प्रोजेक्ट बकरू बाकुरदेज़ और यूलिया मिशकिन के निर्माताओं ने इस तथ्य के बावजूद कि मर्कुलोव और चूपोव ने आधुनिक रूस में कई नैतिक समितियां पाईं। और खुद ऑग ने खुद एक साक्षात्कार में उल्लेख किया कि जब वह इस भूमिका के लिए तैयारी कर रही थी, तो उसने क्षेत्रीय कोम्सोमोल समिति की महिलाओं को याद किया, जो राजनीतिक जानकारी के क्षेत्र में युवा लोगों को शिक्षित करने के लिए सुदूर अतीत में उनके स्कूल में आई थीं। फिल्मांकन के दौरान, न तो निर्माता, न ही निर्देशक, और न ही अभिनेता सोच सकते थे कि ल्यूडमिला पेत्रोव्ना गर्म चर्चाओं का उद्देश्य बन जाएगी। आखिरकार, नैतिकता के लिए कट्टरपंथी लड़ाके अचानक देश में दिखाई दिए।
हालांकि, जब फिल्म "अंतरंग स्थानों" को देखते हुए, अभिनेता दर्शकों को न केवल नैतिकता और राजनीति के विषयों पर प्रतिबिंबित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि नाटकीय कथानक ट्विस्ट की भी उम्मीद करेंगे।
इलेसा स्वेतलोव्सकाया और दिनारा यनकोवस्की द्वारा निष्पादित इवान स्वेतलाना और सायन की पत्नियां, क्रमशः एक दूसरे के प्रति रक्तहीनता की शत्रुता को छोड़कर, कम से कम घबराहट पैदा कर सकती हैं।
फोटोग्राफर के घर में लगभग मध्ययुगीन स्थापित कियाआदेश। असंगत सायन एक कत्लेआम नौकरानी की भूमिका निभाता है, कुछ हद तक आधुनिक सिंड्रेला की याद दिलाता है, जो घर में धूल के प्रत्येक छींटे के लिए डिज्नी परी कथाओं से एक बुरी राजकुमारी की तरह एक लाल लाल बालों वाली स्वेतलाना है। नायिका सुदज़िलोव्सना के भी कर्तव्य हैं, निस्संदेह, अधिक महत्वपूर्ण हैं। स्वेतलाना इवान के निजी पीआर एजेंट हैं, लेकिन, अपनी स्थिति के बावजूद, वह अकेले रात बिताती है, अगले कमरे से बिस्तर की नीरसता को सुनकर। दोनों महिलाएं अपने-अपने तरीके से दुखी हैं। लेकिन उनके अपमान का चरम तब पहुंच जाता है जब इवान केवल अपने पति या पत्नी के शवों तक ही सीमित रहता है, और नायकों के लिए इस तरह के मोड़ के बाद भावनात्मक विस्फोट से बचा नहीं जा सकता है।
सुदज़िलोवस्काया और यांकोवस्काया तनाव और नाटक दोनों बनाने में कामयाब रहे। इस कहानी का अंत औसत उद्देश्यों से रहित है, जैसा कि रूसी निर्देशकों द्वारा फिल्म निर्माण की पूरी रचना है।
कोई कम अजीब प्रेम त्रिकोण प्रकट नहीं होता हैदर्शकों के सामने, जब अलेक्सी चुपोव, एकातेरिना शेगलोवा और पावेल आर्टेमयेव के नायक मंच पर आते हैं। फिल्म में उनकी एकमात्र कहानी दर्शक को हंसा नहीं पाती है। और नायिका ई। शेचग्लोवा ईवा विशेष रूप से संवेदनशील फिल्म प्रशंसकों को रोने में सक्षम बनाती है।
उसके पीछे, अनगिनत मजबूर गर्भपात। और घर के एकांत कोने में, एक युवती एक नोटबुक रखती है जिसमें वह अल्ट्रासाउंड से पृष्ठों पर चित्र चिपकाकर अपने अजन्मे बच्चों की स्मृति को संरक्षित करने की सख्त कोशिश करती है। उनके नीचे, ईव उन नामों पर हस्ताक्षर करता है, जो वह उन्हें देना चाहते थे।
जब घर के जीवनसाथी की दहलीज बदल जाएगी तो सबकुछ बदल जाएगायुवा सर्कस जादूगर, जिसकी भूमिका बैंड के पूर्व एकल कलाकार "कोर्नी" पावेल आर्टेमयेव द्वारा निभाई गई थी, वह आगे बढ़ेगा। आखिरकार, दोनों पति-पत्नी एक आकर्षक आदमी के साथ प्यार में पड़ जाते हैं। और फिर असली त्रासदी शुरू होती है।
और जब दर्शक खूब हँसेंगे?
लेकिन मोशन पिक्चर्स में केवल नाटक ही नहीं चलाया जाता है।अभिनेताओं। "अंतरंग स्थान" - एक फिल्म जो बहुत हँसी की अनुमति देती है। निकिता तरासोव और केसेनिया कटिमालोवा द्वारा निभाई गई अलेक्सेई और ओल्गा की कहानी शुरू से अंत तक कॉमिक के साथ परवान पर है।
एक फिल्म में सभी पात्रों की तरह, पति या पत्नी पीड़ित हैंउनकी विशेष समस्याओं में सेः एक पत्नी अपने पति पर ध्यान नहीं दे रही है, और बिस्तर में अपनी खुद की यौन असहायता से एक पति है। एलेक्सी, जिन्होंने जानबूझकर सुंदर लड़कियों से बड़े सेल्सवुमेन पर स्विच किया था, अब विशाल अल्बीना से दूर नहीं देख सकते हैं। चाहे वह व्यभिचार करने का फैसला करता है और उसकी पत्नी के साथ उसके संबंध कैसे विकसित होते हैं, दर्शक को पता चल जाएगा कि वह फिल्म को आखिर कब तक देखेगा।
निकिता तारासोव एक सनकी और बनाने में कामयाब रहीअपनी समस्याओं में उलझे परिवार के व्यक्ति की थोड़ी हास्यास्पद छवि। इस भूमिका ने अभिनेता को सच्ची सफलता दिलाई। फिल्म "अंतरंग स्थानों" के प्रीमियर के तुरंत बाद, उन्हें "द बैटल ऑफ सेवोपोपोल" के ऐतिहासिक उत्पादन के लिए आमंत्रित किया गया था।
मर्कुलोवा और चुपोवा को सम्मानित करने वाले अभिनेताआलोचकों और दर्शकों दोनों से सबसे अधिक प्रशंसा। बाद में, उनकी समीक्षाओं में, बार-बार इंगित किया गया कि कितनी अच्छी तरह, लगभग दोषरहित, अभिनेताओं ने फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अपनी भूमिका निभाई। और दर्शकों की राय का मतलब निर्देशकों से बहुत है। कई, निश्चित रूप से, असाधारण दृष्टि और सूक्ष्म हास्य पसंद करते हैं। हालांकि, फिल्म प्रशंसकों के एक महत्वपूर्ण हिस्से ने जानबूझकर अशिष्टता, असंगति और अवसाद के साथ फिल्म को दोहराया।
यूलिया अगस्त और यूरी को विशेष प्रशंसा मिलीकोलोकोलनिकोव, जिन्होंने उज्ज्वल, रंगीन छवियां बनाईं। एकाटेरिना शेच्ग्लोवा, जिनकी नायिका ईवा ने उनकी उदास आँखों और आकर्षक उपस्थिति के साथ उन पर जीत हासिल की, दर्शकों के दिलों में प्रवेश करने में कामयाब रही। सिनेमा-प्रेमियों ने अपनी समीक्षाओं में ओलेसा सुदिलोव्सकाया का भी उल्लेख किया, जो पूरी तरह से खुले रूप से कला-घर रिबन में फिट हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इसमें भाग लेने के लिए कलाकार को "दूसरी योजना की सर्वश्रेष्ठ महिला भूमिका" के लिए पुरस्कार मिला।
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दो हज़ार तेरह में त्यौहार "किनोटाव्र" के निर्देशकों मेंनतालिया मर्कुलोवा और एलेक्सी चूपोव ने अपनी पहली रचना - पेंटिंग "अंतरंग स्थानों" को प्रस्तुत किया। यूरोपीय आर्थहाउस की भावना से फिल्माई गई इस फिल्म ने उन समस्याओं को छुआ, जो किसी ने अभी तक रूस में अपने रचनाकारों से स्पष्ट रूप से नहीं कही थीं। निर्देशकों ने यौन कुंठा के सभी हाइपोस्टेस का प्रदर्शन किया, जो रातोंरात पवित्र नैतिकता और आत्म-संयम के पंथ द्वारा शासित दुनिया में एक व्यक्ति को मजबूर कर सकता है। फिल्म "अंतरंग स्थानों" की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पृष्ठभूमि, अभिनेताओं ने शानदार ढंग से अपने नायकों की छवियों का खुलासा किया, असाधारण साजिश ट्विस्ट ने इसे विजेता की पीठ पर खड़ा किया। फिल्म को दो हज़ार चौदह की सबसे उज्ज्वल घटना के रूप में पहचाना गया था और इसने सभी उच्च गुणवत्ता वाली उत्तेजक परियोजनाओं के रूप में, जोशीले चर्चाओं, तूफानी तालियों और तीखी आलोचना की। मर्कुलोव और चूपोव की तस्वीर कहानियों से बुनी गई हैमध्यम वर्ग के नागरिक - सफल, आर्थिक रूप से सुरक्षित, लेकिन गहरे दुखी। अपने जीवन के एक निश्चित चरण में, वे अपनी अंतरंग समस्याओं में फंस गए और अपने स्वयं के परिसरों के चक्कर में उलझ गए। फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अभिनेताओं ने अवतार लियाहीरो खुद को वास्तव में भव्य आकार के सिर में "तिलचट्टे" के साथ। एक सफल प्राकृतिक आदमी, सर्गेई खुद में समलैंगिक शुरुआत पाकर आश्चर्यचकित था, अपनी पत्नी के प्रशंसक के लिए जुनून पैदा कर रहा था। उसे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि चौथा दर्जन में उसे आश्चर्यचकित करने वाले जीवन का क्या करना है, क्योंकि वह उसकी वासना की वस्तु को ट्रैक करता है। और अनुकरणीय परिवार का आदमी अलेक्सी बदलने से डरता हैपत्नी। सुंदर महिलाओं के खतरनाक प्रभाव से बचने के लिए, वह केवल निम्न वर्ग के प्रभावशाली आयाम वाली महिलाओं को देखने का फैसला करती है और यह देखकर हैरान होती है कि वे उसे प्रसन्न करते हैं। एक नया शौक़ीन व्यक्ति अपने मनोविश्लेषक बोरिस का खुलकर स्तूप में परिचय कराता है। डॉक्टर, हालांकि, पाप के बिना भी नहीं है। उसके जुनून की वस्तु भ्रमित हो गई। और उन्हें अंतरंग करने के लिए बोरिस की आवश्यकता नहीं है। इस मूक पागलपन के बीच, उठोबहुविवाहित फोटो कलाकार-डीवीकेमनेनेट्स इवान और ल्यूडमिला पेत्रोव्ना, जो कि अदम्य यौन भूख के साथ बाल्ज़कोवसोगो उम्र की महिला है और देश में इरोटिका पर प्रतिबंध लगाने की एक भावुक इच्छा है। हंसना या रोना? फिल्म "अंतरंग स्थानों" के अभिनेताओं को पहले नंगे रखा गया थादर्शक अपने नायकों के गुप्त रहस्य देख सकते हैं जो कि सहानुभूति पैदा कर सकते हैं, और घृणा, और घबराए हुए लोग। गति चित्रों की शैली निर्धारित करना मुश्किल है। इसमें सब कुछ हैः असली नाटक, और विनीत कॉमेडी, और इरोटिका, और बिल्कुल सफल नहीं, बल्कि अलैंगिक। आखिरकार, यह जुनून के बारे में नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के बारे में है जो व्यक्तित्व को नष्ट करते हैं। इस कारण से, दर्शकों को मोशन पिक्चर माना जाता हैअस्पष्ट। नायकों के अंतरंग संघर्षों को देखते हुए, कुछ लोग हंसे बिना रुके, दूसरों ने ईमानदारी से नायकों के साथ सहानुभूति जताई और राहत की सांस लीः स्क्रीन पर, वास्तविकता वास्तविक जीवन की तुलना में अधिक भयानक और बदसूरत है। फिर भी अन्य लोगों ने भयावह अनैतिकता के लिए तस्वीर को दोषी ठहराया, अश्लील शब्दावली की एक बहुतायत और नग्नता की सबसे सौंदर्यवादी प्रस्तुति नहीं थी, जिसने तस्वीर को पारंपरिक इरोटिका से दूर बना दिया। कास्टिंग कास्ट कैसी थी? फिल्म की बाद की विशेषताओं को देखते हुएकास्टिंग अभिनेता के दौरान निर्देशकों को बहुत मुश्किलें होती हैं। भूमिकाओं के लिए कई आशाजनक आवेदकों ने परियोजना में भाग लेने से इनकार कर दिया, इसे "संदिग्ध नग्नता" माना। तब किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि निर्देशकों को कार्लोवी वैरी में "पूर्व के पश्चिम" कार्यक्रम के मुख्य पुरस्कार किन्नोत्र समारोह में "बेस्ट डेब्यू के लिए" पुरस्कार मिलेगा, और फिल्म को स्वयं फिल्म क्रिटिक्स और फिल्म क्रिटिक्स का डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा। हालांकि, कुछ प्रसिद्ध अभिनेता तुरंतउत्तेजक परियोजना की शक्तिशाली क्षमता को महसूस किया। तो, प्रसिद्ध अभिनेत्री ओलेसा सुदिलोवस्काया, जिसने स्वेतलाना की भूमिका निभाई, फोटोग्राफर इवान की पत्नी को स्क्रिप्ट के साथ खुशी हुई। अपने एक साक्षात्कार में, अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से मुफ्त में चौंकाने वाली तस्वीर में दिखाई देंगी, क्योंकि वह मार्कुलोवा और चुप्पोवा के विचार से प्रभावित थीं। मुझे स्वेतलाना सुज़िलोव्सकाया की भूमिका के लिए लड़ना पड़ाः वह अंतहीन परीक्षणों में चली गई और निर्देशकों की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी। फिल्म "अंतरंग" में भाग लेने के लिए कास्टिंग के दौरानउन जगहों पर जहां अभिनेताओं और भूमिकाओं को सावधानी से चुना गया था, और कुछ पात्रों के लिए शूटिंग की शुरुआत के लिए एक भी उपयुक्त उम्मीदवार नहीं था। तो, अव्यक्त समलैंगिक सर्गेई को खुद को चूपोव के परिणामस्वरूप खेलना पड़ा। वह एक पेशेवर अभिनेता नहीं थे, लेकिन एक जोखिम भरा प्रयोग करने का फैसला किया। और नैतिकता के पर्यवेक्षक ल्यूडमिला पेत्रोव्ना की भूमिका परनिर्देशकों ने कास्टिंग शुरू होने के छह महीने बाद ही अभिनेत्री को ढूंढ लिया। जूलिया ऑग द्वारा उनकी शानदार प्रस्तुति, जिसे मर्कुलोवा और चुपोव ने शुरू में ऐसी सनकी छवि के बारे में सोचा भी नहीं था। निर्देशकों के दृष्टिकोण से, उसका सुखद रूसी चेहरा ग्राम जीवन के बारे में प्रस्तुतियों में बहुत अच्छा लगेगा, लेकिन प्रयोगात्मक परियोजनाओं में नहीं। जैसा कि यह निकला, वे गलत थे। जूलिया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया। फिल्म का मुख्य किरदार अवतार लेता हैकरिश्माई अभिनेता यूरी कोलोकोलनिकोव। पंथ टीवी श्रृंखला "गेम ऑफ थ्रोन्स" से भविष्य के मैगनर टेनोव स्टीयर ने एक चौंकाने वाले फोटोग्राफर इवान की भूमिका निभाई, जिनकी रचनात्मक गतिविधि जननांगों को फिल्माने के लिए नीचे आती है, और उनकी जीवन स्थिति - पूर्ण यौन स्वतंत्रता के लिए। खुशी के लिए बनाया गया आदमी, नायक को मानता हैKolokol'nikova। और यदि ऐसा है, तो जीवन से सब कुछ क्यों नहीं लिया जाता है? इवान के घर में दो पत्नियां हैं, जिसे फोटोग्राफर की बहुविवाह के साथ मजबूर किया जाता है, और वह एक से दूसरे तक भटकती है, और कई बार वह अपने मॉडलों के साथ सोती है। अपने आप को सीमित क्यों करें, नैतिकता के लिए एक सेनानी समझ में नहीं आता है, वह मनोविश्लेषक बोरिस द्वारा एक लंबी यात्रा पर एक अश्लील अभिशाप भेजता है, अपने रोगियों पर थोपने की मांग करता है, और एक ही समय में सामाजिक रूपरेखा पर। फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अभिनेताओं ने शुद्ध रूप से दिखायालोगों के बीच वैचारिक संघर्ष, आधुनिक समाज में अत्यंत प्रासंगिक है। इवान की स्थिति प्यूरिटन नैतिकता के खिलाफ एक खुला विद्रोह है, लेकिन आसपास के लोग एक घोटालेबाज फोटोग्राफर के जीवन सिद्धांतों को स्वीकार करने में मुश्किल हैं। उनकी व्यक्तित्व और रचनात्मक खोज की आलोचना की जाती है। इवान की एक फोटो प्रदर्शनी, जो एक क्लोज-अप दिखाती हुई जगह है, नैतिक समिति पर प्रतिबंध लगाने के लिए उत्सुक है। ल्यूडमिला पेत्रोव्ना समाज में पवित्रता और शुद्धता के लिए एक प्रबल सेनानी है। उसे रोटी मत खिलाओ - मुझे विश्व सिनेमा की मास्टरपीस से हल्की इरोटिका काट दो। और इवान की प्रदर्शनी और पूरी तरह से आंशिक महिला को डुबोती हैसदमे में, क्योंकि इसकी सामग्री स्पष्ट रूप से "पोर्नोग्राफ़ी" की अवधारणा को ग्रहण करती है। और टीवी स्क्रीन पर टूटी हुई लाशों के खिलाफ ल्यूडमिला पेत्रोव्ना कोई आपत्ति नहीं करती है, और नग्न प्रकृति महिला के लिए एक असली ठोकर बन जाती है। आखिरकार, उनके चेहरे की शांत भावहीन अभिव्यक्ति के पीछे, जो पूरी फिल्म में अभिनेत्री जूलिया अगस्त द्वारा प्रतिभाशाली रूप से व्यक्त की गई थी, जुनूनी कामुक कल्पनाएं भटक रही हैं। काम से घर आकर, वह पहली बातवाइब्रेटर पकड़ लेता है। ल्यूडमिला पेत्रोव्ना के लिए केवल मृत बैटरी एक वास्तविक त्रासदी बन जाती है। कष्टप्रद गलतफहमी से बचने के लिए, वह उन्हें इतनी मात्रा में खरीदती है जैसे कि निकट भविष्य में दुनिया को परमाणु युद्ध का सामना करना पड़ेगा, और दुकानें पृथ्वी के चेहरे से गायब हो जाएंगी। फिल्म के प्रीमियर से पहले निर्देशक क्या नहीं सोच सकते थे? इस एंटीपोड नायक कोलोकोलनिकोव शामिल थेफिल्म "अंतरंग स्थानों में मर्कुलोवा और चूपोव।" अभिनेताओं और भूमिकाओं ने एक ऐसी प्रतिक्रिया को उकसाया, जिसकी निर्देशक खुद कभी उम्मीद नहीं करते थे। ल्यूडमिला पेत्रोव्ना की रंगीन छवि, पाखंड, पाखंड और कुल अकेलेपन को उजागर करते हुए, रूसी राज्य ड्यूमा के कुछ सदस्यों के प्रयोगात्मक विचारों के खिलाफ एक वास्तविक विरोध बन गया। उसका कुछ कैरिकेचर फिगर लग रहा थाशुरुआत में सोवियत संघ से "ग्रीटिंग्स" के साथ फिल्म प्रोजेक्ट बकरू बाकुरदेज़ और यूलिया मिशकिन के निर्माताओं ने इस तथ्य के बावजूद कि मर्कुलोव और चूपोव ने आधुनिक रूस में कई नैतिक समितियां पाईं। और खुद ऑग ने खुद एक साक्षात्कार में उल्लेख किया कि जब वह इस भूमिका के लिए तैयारी कर रही थी, तो उसने क्षेत्रीय कोम्सोमोल समिति की महिलाओं को याद किया, जो राजनीतिक जानकारी के क्षेत्र में युवा लोगों को शिक्षित करने के लिए सुदूर अतीत में उनके स्कूल में आई थीं। फिल्मांकन के दौरान, न तो निर्माता, न ही निर्देशक, और न ही अभिनेता सोच सकते थे कि ल्यूडमिला पेत्रोव्ना गर्म चर्चाओं का उद्देश्य बन जाएगी। आखिरकार, नैतिकता के लिए कट्टरपंथी लड़ाके अचानक देश में दिखाई दिए। हालांकि, जब फिल्म "अंतरंग स्थानों" को देखते हुए, अभिनेता दर्शकों को न केवल नैतिकता और राजनीति के विषयों पर प्रतिबिंबित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि नाटकीय कथानक ट्विस्ट की भी उम्मीद करेंगे। इलेसा स्वेतलोव्सकाया और दिनारा यनकोवस्की द्वारा निष्पादित इवान स्वेतलाना और सायन की पत्नियां, क्रमशः एक दूसरे के प्रति रक्तहीनता की शत्रुता को छोड़कर, कम से कम घबराहट पैदा कर सकती हैं। फोटोग्राफर के घर में लगभग मध्ययुगीन स्थापित कियाआदेश। असंगत सायन एक कत्लेआम नौकरानी की भूमिका निभाता है, कुछ हद तक आधुनिक सिंड्रेला की याद दिलाता है, जो घर में धूल के प्रत्येक छींटे के लिए डिज्नी परी कथाओं से एक बुरी राजकुमारी की तरह एक लाल लाल बालों वाली स्वेतलाना है। नायिका सुदज़िलोव्सना के भी कर्तव्य हैं, निस्संदेह, अधिक महत्वपूर्ण हैं। स्वेतलाना इवान के निजी पीआर एजेंट हैं, लेकिन, अपनी स्थिति के बावजूद, वह अकेले रात बिताती है, अगले कमरे से बिस्तर की नीरसता को सुनकर। दोनों महिलाएं अपने-अपने तरीके से दुखी हैं। लेकिन उनके अपमान का चरम तब पहुंच जाता है जब इवान केवल अपने पति या पत्नी के शवों तक ही सीमित रहता है, और नायकों के लिए इस तरह के मोड़ के बाद भावनात्मक विस्फोट से बचा नहीं जा सकता है। सुदज़िलोवस्काया और यांकोवस्काया तनाव और नाटक दोनों बनाने में कामयाब रहे। इस कहानी का अंत औसत उद्देश्यों से रहित है, जैसा कि रूसी निर्देशकों द्वारा फिल्म निर्माण की पूरी रचना है। कोई कम अजीब प्रेम त्रिकोण प्रकट नहीं होता हैदर्शकों के सामने, जब अलेक्सी चुपोव, एकातेरिना शेगलोवा और पावेल आर्टेमयेव के नायक मंच पर आते हैं। फिल्म में उनकी एकमात्र कहानी दर्शक को हंसा नहीं पाती है। और नायिका ई। शेचग्लोवा ईवा विशेष रूप से संवेदनशील फिल्म प्रशंसकों को रोने में सक्षम बनाती है। उसके पीछे, अनगिनत मजबूर गर्भपात। और घर के एकांत कोने में, एक युवती एक नोटबुक रखती है जिसमें वह अल्ट्रासाउंड से पृष्ठों पर चित्र चिपकाकर अपने अजन्मे बच्चों की स्मृति को संरक्षित करने की सख्त कोशिश करती है। उनके नीचे, ईव उन नामों पर हस्ताक्षर करता है, जो वह उन्हें देना चाहते थे। जब घर के जीवनसाथी की दहलीज बदल जाएगी तो सबकुछ बदल जाएगायुवा सर्कस जादूगर, जिसकी भूमिका बैंड के पूर्व एकल कलाकार "कोर्नी" पावेल आर्टेमयेव द्वारा निभाई गई थी, वह आगे बढ़ेगा। आखिरकार, दोनों पति-पत्नी एक आकर्षक आदमी के साथ प्यार में पड़ जाते हैं। और फिर असली त्रासदी शुरू होती है। और जब दर्शक खूब हँसेंगे? लेकिन मोशन पिक्चर्स में केवल नाटक ही नहीं चलाया जाता है।अभिनेताओं। "अंतरंग स्थान" - एक फिल्म जो बहुत हँसी की अनुमति देती है। निकिता तरासोव और केसेनिया कटिमालोवा द्वारा निभाई गई अलेक्सेई और ओल्गा की कहानी शुरू से अंत तक कॉमिक के साथ परवान पर है। एक फिल्म में सभी पात्रों की तरह, पति या पत्नी पीड़ित हैंउनकी विशेष समस्याओं में सेः एक पत्नी अपने पति पर ध्यान नहीं दे रही है, और बिस्तर में अपनी खुद की यौन असहायता से एक पति है। एलेक्सी, जिन्होंने जानबूझकर सुंदर लड़कियों से बड़े सेल्सवुमेन पर स्विच किया था, अब विशाल अल्बीना से दूर नहीं देख सकते हैं। चाहे वह व्यभिचार करने का फैसला करता है और उसकी पत्नी के साथ उसके संबंध कैसे विकसित होते हैं, दर्शक को पता चल जाएगा कि वह फिल्म को आखिर कब तक देखेगा। निकिता तारासोव एक सनकी और बनाने में कामयाब रहीअपनी समस्याओं में उलझे परिवार के व्यक्ति की थोड़ी हास्यास्पद छवि। इस भूमिका ने अभिनेता को सच्ची सफलता दिलाई। फिल्म "अंतरंग स्थानों" के प्रीमियर के तुरंत बाद, उन्हें "द बैटल ऑफ सेवोपोपोल" के ऐतिहासिक उत्पादन के लिए आमंत्रित किया गया था। मर्कुलोवा और चुपोवा को सम्मानित करने वाले अभिनेताआलोचकों और दर्शकों दोनों से सबसे अधिक प्रशंसा। बाद में, उनकी समीक्षाओं में, बार-बार इंगित किया गया कि कितनी अच्छी तरह, लगभग दोषरहित, अभिनेताओं ने फिल्म "अंतरंग स्थानों" में अपनी भूमिका निभाई। और दर्शकों की राय का मतलब निर्देशकों से बहुत है। कई, निश्चित रूप से, असाधारण दृष्टि और सूक्ष्म हास्य पसंद करते हैं। हालांकि, फिल्म प्रशंसकों के एक महत्वपूर्ण हिस्से ने जानबूझकर अशिष्टता, असंगति और अवसाद के साथ फिल्म को दोहराया। यूलिया अगस्त और यूरी को विशेष प्रशंसा मिलीकोलोकोलनिकोव, जिन्होंने उज्ज्वल, रंगीन छवियां बनाईं। एकाटेरिना शेच्ग्लोवा, जिनकी नायिका ईवा ने उनकी उदास आँखों और आकर्षक उपस्थिति के साथ उन पर जीत हासिल की, दर्शकों के दिलों में प्रवेश करने में कामयाब रही। सिनेमा-प्रेमियों ने अपनी समीक्षाओं में ओलेसा सुदिलोव्सकाया का भी उल्लेख किया, जो पूरी तरह से खुले रूप से कला-घर रिबन में फिट हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इसमें भाग लेने के लिए कलाकार को "दूसरी योजना की सर्वश्रेष्ठ महिला भूमिका" के लिए पुरस्कार मिला।
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कोयल साधे मौन जब, पावस का हो भान,
अवसर तो सबको मिले, समझे जो संकेत,
सजग सदा रखते रहे, सही समय का ज्ञान.
पो फटने के साथ ही,शुभ हो समय व्यतीत,
समय चक्र गतिशील है, पल पल का हो भान,
ताटंक छंद.
कभी दिखाता सत्य अहिंसा, कभी घाव भी देता है.
कभी बाँधता प्रेम पाश में, कभी प्राण हर लेता है,
रात दिवस जो चलती रहती, उन साँसों का माली है,
कभी बैर बन रहता दिल में, कभी मित्र सा होता है,
याद बने तो फिर आँखों में , सदा चित्र सा होता है,
यही रंक कर देता मन को , यही प्रीति भर देता है,
रहा सूखता .
रहा कूदता.
छिपता रहा.
लौटा ला.
भेद भरी .
को मापता .
रंगों भरा .
लौटा ला.
पूरा चमन .
रहता था तब तू,
उम्मीदों भरा .
लौटा ला.
क्यों है फंसा.
तकते रहे.
देता हुआ .
जीवन चला.
(संशोधित ग़ज़ल )
क्या लिखते रहते हो तुम,रेत पर,
उंगलियों से,समुद्र के किनारे !
कितनी देर टिकेगी, तुम्हारी यह लिखावट, कुछ पता है,
एक पल ,एक पहर या फ़िर एक दिन!
कल जब तुम आओगे, यहॉ दोबारा,
तो शायद इसे नहीं पाओगे!
फ़िर क्यूं लिखते हो, यह सब!
क्या मिलेगा, समय बरबाद करके!
लिखने का शौक है, लिखने का जज़्बा है,
लिखने की चाहत है,लिखने का ज़ुनून है,
लिखने की काबिलियत है ,
तो ज़रूर लिखो!
मगर रेत पर नहीं,
पहाडों पर लिखो ,पत्थरों पर लिखो,
जो अमिट रहे,सदियों तक चले,
जो कई पीढियां पढें, तुम्हारी आनेवाली नस्ल पढे और तुम्हें याद करे!
ऐसा कुछ लिखो!
निरंतर , अनवरत ,
अथाह है,
न उसका आदि है ,
न अंत है।
वह अनंत है।
ईश्वर भी अनादि ,
निरंतर है , अनंत है।
अन्तर्निहित है।
जीवन ,
समय फिक्सड है।
स्वयं एक गति है ,
समय ,
एक आदि है , अंत है।
समय , स्वयं स्थाई है ,
अशेष है ,
बाकी सब अस्थायी है ,
शून्य अवशेष है।
समय ,
गुजरता ,
अच्छा लगता है।
फिसलता है ,
पल पल फिसलता है ,
लगता भी फिसलता है ,
फिर भी अच्छा लगता है।
समय बदलता है ,
समय बदलता ,
अच्छा लगता है ,
प्रतीक्षा करता है ,
करना , अच्छा लगता है।
हम सब समयाधीन हैं ,
ईश्वर के आधीन हैं।
न समय।
दावा करते हैं ,
समय को बदलने का।
समय बदलने का दावा एक खेल है ,
एक लुभावना प्रलोभन है ,
कोई यंत्र है ,
तंत्र है ,
तंत्र का मंत्र है।
जीवन का मूलमंत्र है।
जो दुनिया से दूर जा चुके, लौट कभी ना आयेंगे।
सत्य यही है इस धरती का, आयें हैं सो जायेंगे।।
थमता नहीं समय का पहिया, हर पल को भरपूर जियें।
जिया नहीं हमने जिस पल को, फिर न दुबारा आयेंगे।।
धर्म विरुद्ध न अर्थ कमायें, संचय हम ज़्यादा न करें।
आयेगा जब वक्त बिदा का, हाथ पसारे जायेंगे।।
समय पूर्व, योग्यता से ज़्यादा, धन वैभव पद नाम मिले।
ऐसी गंदी राजनीति हम, और कहीं ना पायेंगे।।
बुरे समय में मित्र पड़ोसी, सगे सम्बंधी मुँह फेरें।
कृपा करें ना देव देवियाँ, नौ ग्रह आँख दिखायेंगे।।
समय अशुभ तो श्वान गली का, घर में घुसकर काटेगा।
भाग्य प्रबल तो लल्लू भोंदू , ऊँची कुर्सी पायेंगे।।
अंत समय जब आयेगा सब, यहीं धरा रह जायेगा।
तोड़ सभी रिश्ते नातों को, इक दिन हम भी जायेंगे।।
जन्म मरण आना जाना हम, युगों युगों से घूम रहे।
जब तक भगवत् प्राप्ति न होगी, भगवन हमें घुमायेंगे।।
यूँ हो उदास क्यूँ बैठे हो ?
मनुज उठो अब... ( एक गीत)
अनहोनी बीते साथी पर तो कर लें अतिशीघ्र किनारा"
वीरान हो गई ।
सबकुछ ख़त्म हो गया ।
और ऊपर से ये मुआ फून (फ़ोन)
अविचल अविरल है समय, प्रतिपल शाश्वत सत्य ।
दृष्टा प्रहरी वह सजग, हर सुख-दुख में रत्य ।।
पराभाव जाने नही, रचे साक्ष्य इतिहास ।
जीत हार के द्वंद में, रहे निर्लिप्त खास ।।
चाहे ठहरे सूर्य नभ, चाहे ठहरे श्वास ।
उथल-पुथल हो सृष्टि में, चाहे होय विनाश ।।
(अविवत्य- अपरिवर्तनीय)
शक्तिवान तो एक है, बाकी इनके दास ।
होकर उनके साथ तुम, चलो छोड़ अकरास ।।
(अकरास-आलस्य, औन्नत्य-उत्थान)
कदम-कदम साझा किये, जो जन इनके साथ ।
रहे अमर इतिहास में, उनके सारे गाथ ।।
गल चुका इतना शिखर अब भी समय है।
बल चुका इतना विहँस रवि भी समय है।
है थकी सरिता कभी अब भी समय है।
कब थकीं हैं ताकतीं अब भी समय है।
हो रहा अब मनन मन का भी समय है।
समय सम-कालीन करो ,समय जरा रूक कर चलो ।
नहीं कोई आशा चलो ,समय जरा रूक कर चलो ।
क्षण भंगुर प्रकाश चलो , समय जरा रूक कर चलो ।
पतझड़ में तुम ना मिलो , समय जरा रूक कर चलो ।
टाल टोल अब रहने दो,समय जरा रूक कर चलो ।
करम वीर पथ पर बढो ,समय जरा रूक कर चलो ।
प्राण प्रिय तुम गठ जोडों ,समय जरा रूक कर चलो ।
जोह -जतन सब रहने दो ,समय जरा रूक कर चलो ।
पलछिन प्राण अविराम चलो,समय जरा रूक कर चलो ।
वारि दुनिया को पिलाता है समय।
चक्र इसका घूमता रहता सदा।
ये नहीं रुकता किसी के वासते।
रेत की मानिंद कर से फिसलता।
भूत को रख याद, जी, बस आज में।
थाम कर मुठ्ठी में जिसने रख लिया।
कद्र जो इसकी नहीं करते कभी।
व्यक्ति जैसा आंक लेता है इसे।
सत युगी , त्रेता, कभी द्वापर यहां।
चुक रहा पल पल खज़ाना जान लो।
बीत जब जाता निकल कर हाथ से।
व्यस्त जीवन से शिकायत कुछ करें।
सृष्टि का आधार था।
तीव्र पारावार था ।
समय का श्रृंगार था ।
समय का संसार था ।
सत्य एकाकार था।
आदरणीया मंच संचालिका जी सादर, कृपया मेरी प्रस्तुति के दुसरे छंद में बोल्ड कर दर्शाए निम्न सुधार करने की कृपा करें. सादर आभार.
कभी बैर बन रहता दिल में, कभी मित्र सा होता है,
याद बने तो फिर आँखों में , सदा चित्र सा होता है,
यही रंक कर देता मन को , यही प्रीति भर देता है,
सादर आभार.
आ. डॉ.प्राची सिंह जी, संकलन पोस्ट करने पर हार्दिक बधाई आपको ! आयोजन मैं प्रस्तुत दोहावली को संशोधित करने की अनुकम्पा करें !
( संशोधित )
महोत्सव के सफल आयोजन एवं संकलन के लिए हृदय से आभार। संशोधित रचना संकलन में प्रतिस्थापित करने की कृपा करें।
जो दुनिया से दूर जा चुके, लौट कभी ना आयेंगे।
सत्य यही है इस धरती का, आयें हैं सो जायेंगे।।
थमता नहीं समय का पहिया, हर पल को भरपूर जियें।
जिया नहीं हमने जिस पल को, फिर न दुबारा आयेंगे।।
धर्म विरुद्ध न अर्थ कमायें, संचय हम ज़्यादा न करें।
आयेगा जब वक्त बिदा का, हाथ पसारे जायेंगे।।
समय पूर्व, योग्यता से ज़्यादा, धन वैभव पद नाम मिले।
ऐसी गंदी राजनीति हम, और कहीं ना पायेंगे।।
बुरे समय में मित्र पड़ोसी, सगे सम्बंधी मुँह फेरें।
कृपा करें ना देव देवियाँ, नौ ग्रह आँख दिखायेंगे।।
समय अशुभ तो श्वान गली का, घर में घुसकर काटेगा।
भाग्य प्रबल तो लल्लू भोंदू , ऊँची कुर्सी पायेंगे।।
अंत समय जब आयेगा सब, यहीं धरा रह जायेगा।
तोड़ सभी रिश्ते नातों को, इक दिन हम भी जायेंगे।।
जन्म मरण आना जाना हम, युगों युगों से घूम रहे।
जब तक भगवत् प्राप्ति न होगी, भगवन हमें घुमायेंगे।।
समय शीर्षक पर इकट्ठे विविध रचनाओं को देख कर मन हर्षित हो उठा. सर्वप्रथम आयोजन की संचालक आदरणीया प्राचीजी को एक सफल कार्यक्रम के लिए हार्दिक बधाई. सभी सहभागियों और पाठकों के प्रति मेरे मन में सादर भाव हैं.
इस बार के आयोजन में मैं उपस्थित नहीं रह पाया, इसका खेद तो है लेकिन नेपाल में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय ग़ज़ल कन्वेन्शन २०१५' में आमंत्रित होने के कारण दिनांक १० सितम्बर से १५ दिसम्बर तक काठमाण्डू, नेपाल के प्रवास पर था. आज ही पूर्वाह्न में वापसी हुई है.
यह कन्वेन्शन ग़ज़ल के बहुमुखी विकास के लिए अपनाये जारहे कदमों की समीक्षा हेतु आहूत था, जिसमें दक्षिण एशिया से चार देशों --नेपाल, भारत, बांग्ला देश, भूटान-- के प्रतिभागियों की उपस्थिति बननी थी. बाग्लादेश का प्रतिनिधि मण्डल कई कारणों से काठमाण्डू पहुँच ही नहीं सका.
बहरहाल, सफलतापूर्वक आयोजित काव्य महोत्सव के लिए पुनः हार्दिक बधाइयाँ.
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कोयल साधे मौन जब, पावस का हो भान, अवसर तो सबको मिले, समझे जो संकेत, सजग सदा रखते रहे, सही समय का ज्ञान. पो फटने के साथ ही,शुभ हो समय व्यतीत, समय चक्र गतिशील है, पल पल का हो भान, ताटंक छंद. कभी दिखाता सत्य अहिंसा, कभी घाव भी देता है. कभी बाँधता प्रेम पाश में, कभी प्राण हर लेता है, रात दिवस जो चलती रहती, उन साँसों का माली है, कभी बैर बन रहता दिल में, कभी मित्र सा होता है, याद बने तो फिर आँखों में , सदा चित्र सा होता है, यही रंक कर देता मन को , यही प्रीति भर देता है, रहा सूखता . रहा कूदता. छिपता रहा. लौटा ला. भेद भरी . को मापता . रंगों भरा . लौटा ला. पूरा चमन . रहता था तब तू, उम्मीदों भरा . लौटा ला. क्यों है फंसा. तकते रहे. देता हुआ . जीवन चला. क्या लिखते रहते हो तुम,रेत पर, उंगलियों से,समुद्र के किनारे ! कितनी देर टिकेगी, तुम्हारी यह लिखावट, कुछ पता है, एक पल ,एक पहर या फ़िर एक दिन! कल जब तुम आओगे, यहॉ दोबारा, तो शायद इसे नहीं पाओगे! फ़िर क्यूं लिखते हो, यह सब! क्या मिलेगा, समय बरबाद करके! लिखने का शौक है, लिखने का जज़्बा है, लिखने की चाहत है,लिखने का ज़ुनून है, लिखने की काबिलियत है , तो ज़रूर लिखो! मगर रेत पर नहीं, पहाडों पर लिखो ,पत्थरों पर लिखो, जो अमिट रहे,सदियों तक चले, जो कई पीढियां पढें, तुम्हारी आनेवाली नस्ल पढे और तुम्हें याद करे! ऐसा कुछ लिखो! निरंतर , अनवरत , अथाह है, न उसका आदि है , न अंत है। वह अनंत है। ईश्वर भी अनादि , निरंतर है , अनंत है। अन्तर्निहित है। जीवन , समय फिक्सड है। स्वयं एक गति है , समय , एक आदि है , अंत है। समय , स्वयं स्थाई है , अशेष है , बाकी सब अस्थायी है , शून्य अवशेष है। समय , गुजरता , अच्छा लगता है। फिसलता है , पल पल फिसलता है , लगता भी फिसलता है , फिर भी अच्छा लगता है। समय बदलता है , समय बदलता , अच्छा लगता है , प्रतीक्षा करता है , करना , अच्छा लगता है। हम सब समयाधीन हैं , ईश्वर के आधीन हैं। न समय। दावा करते हैं , समय को बदलने का। समय बदलने का दावा एक खेल है , एक लुभावना प्रलोभन है , कोई यंत्र है , तंत्र है , तंत्र का मंत्र है। जीवन का मूलमंत्र है। जो दुनिया से दूर जा चुके, लौट कभी ना आयेंगे। सत्य यही है इस धरती का, आयें हैं सो जायेंगे।। थमता नहीं समय का पहिया, हर पल को भरपूर जियें। जिया नहीं हमने जिस पल को, फिर न दुबारा आयेंगे।। धर्म विरुद्ध न अर्थ कमायें, संचय हम ज़्यादा न करें। आयेगा जब वक्त बिदा का, हाथ पसारे जायेंगे।। समय पूर्व, योग्यता से ज़्यादा, धन वैभव पद नाम मिले। ऐसी गंदी राजनीति हम, और कहीं ना पायेंगे।। बुरे समय में मित्र पड़ोसी, सगे सम्बंधी मुँह फेरें। कृपा करें ना देव देवियाँ, नौ ग्रह आँख दिखायेंगे।। समय अशुभ तो श्वान गली का, घर में घुसकर काटेगा। भाग्य प्रबल तो लल्लू भोंदू , ऊँची कुर्सी पायेंगे।। अंत समय जब आयेगा सब, यहीं धरा रह जायेगा। तोड़ सभी रिश्ते नातों को, इक दिन हम भी जायेंगे।। जन्म मरण आना जाना हम, युगों युगों से घूम रहे। जब तक भगवत् प्राप्ति न होगी, भगवन हमें घुमायेंगे।। यूँ हो उदास क्यूँ बैठे हो ? मनुज उठो अब... अनहोनी बीते साथी पर तो कर लें अतिशीघ्र किनारा" वीरान हो गई । सबकुछ ख़त्म हो गया । और ऊपर से ये मुआ फून अविचल अविरल है समय, प्रतिपल शाश्वत सत्य । दृष्टा प्रहरी वह सजग, हर सुख-दुख में रत्य ।। पराभाव जाने नही, रचे साक्ष्य इतिहास । जीत हार के द्वंद में, रहे निर्लिप्त खास ।। चाहे ठहरे सूर्य नभ, चाहे ठहरे श्वास । उथल-पुथल हो सृष्टि में, चाहे होय विनाश ।। शक्तिवान तो एक है, बाकी इनके दास । होकर उनके साथ तुम, चलो छोड़ अकरास ।। कदम-कदम साझा किये, जो जन इनके साथ । रहे अमर इतिहास में, उनके सारे गाथ ।। गल चुका इतना शिखर अब भी समय है। बल चुका इतना विहँस रवि भी समय है। है थकी सरिता कभी अब भी समय है। कब थकीं हैं ताकतीं अब भी समय है। हो रहा अब मनन मन का भी समय है। समय सम-कालीन करो ,समय जरा रूक कर चलो । नहीं कोई आशा चलो ,समय जरा रूक कर चलो । क्षण भंगुर प्रकाश चलो , समय जरा रूक कर चलो । पतझड़ में तुम ना मिलो , समय जरा रूक कर चलो । टाल टोल अब रहने दो,समय जरा रूक कर चलो । करम वीर पथ पर बढो ,समय जरा रूक कर चलो । प्राण प्रिय तुम गठ जोडों ,समय जरा रूक कर चलो । जोह -जतन सब रहने दो ,समय जरा रूक कर चलो । पलछिन प्राण अविराम चलो,समय जरा रूक कर चलो । वारि दुनिया को पिलाता है समय। चक्र इसका घूमता रहता सदा। ये नहीं रुकता किसी के वासते। रेत की मानिंद कर से फिसलता। भूत को रख याद, जी, बस आज में। थाम कर मुठ्ठी में जिसने रख लिया। कद्र जो इसकी नहीं करते कभी। व्यक्ति जैसा आंक लेता है इसे। सत युगी , त्रेता, कभी द्वापर यहां। चुक रहा पल पल खज़ाना जान लो। बीत जब जाता निकल कर हाथ से। व्यस्त जीवन से शिकायत कुछ करें। सृष्टि का आधार था। तीव्र पारावार था । समय का श्रृंगार था । समय का संसार था । सत्य एकाकार था। आदरणीया मंच संचालिका जी सादर, कृपया मेरी प्रस्तुति के दुसरे छंद में बोल्ड कर दर्शाए निम्न सुधार करने की कृपा करें. सादर आभार. कभी बैर बन रहता दिल में, कभी मित्र सा होता है, याद बने तो फिर आँखों में , सदा चित्र सा होता है, यही रंक कर देता मन को , यही प्रीति भर देता है, सादर आभार. आ. डॉ.प्राची सिंह जी, संकलन पोस्ट करने पर हार्दिक बधाई आपको ! आयोजन मैं प्रस्तुत दोहावली को संशोधित करने की अनुकम्पा करें ! महोत्सव के सफल आयोजन एवं संकलन के लिए हृदय से आभार। संशोधित रचना संकलन में प्रतिस्थापित करने की कृपा करें। जो दुनिया से दूर जा चुके, लौट कभी ना आयेंगे। सत्य यही है इस धरती का, आयें हैं सो जायेंगे।। थमता नहीं समय का पहिया, हर पल को भरपूर जियें। जिया नहीं हमने जिस पल को, फिर न दुबारा आयेंगे।। धर्म विरुद्ध न अर्थ कमायें, संचय हम ज़्यादा न करें। आयेगा जब वक्त बिदा का, हाथ पसारे जायेंगे।। समय पूर्व, योग्यता से ज़्यादा, धन वैभव पद नाम मिले। ऐसी गंदी राजनीति हम, और कहीं ना पायेंगे।। बुरे समय में मित्र पड़ोसी, सगे सम्बंधी मुँह फेरें। कृपा करें ना देव देवियाँ, नौ ग्रह आँख दिखायेंगे।। समय अशुभ तो श्वान गली का, घर में घुसकर काटेगा। भाग्य प्रबल तो लल्लू भोंदू , ऊँची कुर्सी पायेंगे।। अंत समय जब आयेगा सब, यहीं धरा रह जायेगा। तोड़ सभी रिश्ते नातों को, इक दिन हम भी जायेंगे।। जन्म मरण आना जाना हम, युगों युगों से घूम रहे। जब तक भगवत् प्राप्ति न होगी, भगवन हमें घुमायेंगे।। समय शीर्षक पर इकट्ठे विविध रचनाओं को देख कर मन हर्षित हो उठा. सर्वप्रथम आयोजन की संचालक आदरणीया प्राचीजी को एक सफल कार्यक्रम के लिए हार्दिक बधाई. सभी सहभागियों और पाठकों के प्रति मेरे मन में सादर भाव हैं. इस बार के आयोजन में मैं उपस्थित नहीं रह पाया, इसका खेद तो है लेकिन नेपाल में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय ग़ज़ल कन्वेन्शन दो हज़ार पंद्रह' में आमंत्रित होने के कारण दिनांक दस सितम्बर से पंद्रह दिसम्बर तक काठमाण्डू, नेपाल के प्रवास पर था. आज ही पूर्वाह्न में वापसी हुई है. यह कन्वेन्शन ग़ज़ल के बहुमुखी विकास के लिए अपनाये जारहे कदमों की समीक्षा हेतु आहूत था, जिसमें दक्षिण एशिया से चार देशों --नेपाल, भारत, बांग्ला देश, भूटान-- के प्रतिभागियों की उपस्थिति बननी थी. बाग्लादेश का प्रतिनिधि मण्डल कई कारणों से काठमाण्डू पहुँच ही नहीं सका. बहरहाल, सफलतापूर्वक आयोजित काव्य महोत्सव के लिए पुनः हार्दिक बधाइयाँ.
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तेल का सेवन हम सभी की सेहत के लिए ज़रूरी होता है। आमतौर पर धारणा यह है कि तेल शरीर का दुश्मन होता है, जबकि सच यह है कि सही तेल का सेवन शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। सैचुरेटेड फैट्स और ट्रांस फैट्स युक्त तेल कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी का कारण बनते हैं। अगर आप वज़न कम करना चाह रहे हैं, तो आपको कुछ खास तरह का तेलों का उपयोग करना चाहिए।
ऑलिव ऑयल कोलेस्ट्रॉस के बढ़ने के जोखिम को कम करता है और साथ ही वज़न बढ़ने नहीं देता। इसका उपयोग सलाद की ड्रेसिंग के लिए किया जा सकता है और साथ खाना पकाने के लिए भी। इसके अलावा ज़ैतून के तेल में विटामिन-ई की भी अच्छी मात्रा होती है, जो एक ज़रूरी विटामिन है।
इस तेल का उपयोग खाने को पकाने में खूब किया जाता है, लेकिन फिर भी यह एक पॉपुलर पसंद नहीं है। नारियल का तेल मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस करता है। इसका सेवन वज़न को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
यह तेल सेसामोल और सेसामिनोल जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, तिल का तेल वज़न घटाने और सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह तेल डायबिटीज़ में भी लाभदायक साबित होता है। इसका सेवन डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्लड शुगर के स्तर को कम करता है।
कुसुम का तेल यानी Safflower oil, सैफ्लाउअर के फूलों से निकाला जाता है, जो हेल्दी होता है। इसका सेवन न सिर्फ वज़न को कंट्रोल करने में मदद करता है, बल्कि इससे शरीर में सूजन, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी सुधार होता है।
फिश ऑयल, फ्लेक्स ऑयल, पाम ऑयल और अखरोट का तेल खाने से बचना चाहिए अगर आप वज़न घटाना चाह रहे हैं। इन तेलों में कैलोरी की मात्रा काफी ज़्यादा होती है और स्मोकिंग पॉइंट भी कम होता है। जिन तेलों को उनके स्मोकिंग पॉइंट से ज़्यादा जला दिया जाता है, वे अस्वस्थ कम्पाउंड का उत्पादन करते हैं, जिससे शरीर को नुकसान पहुंचता है।
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तेल का सेवन हम सभी की सेहत के लिए ज़रूरी होता है। आमतौर पर धारणा यह है कि तेल शरीर का दुश्मन होता है, जबकि सच यह है कि सही तेल का सेवन शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। सैचुरेटेड फैट्स और ट्रांस फैट्स युक्त तेल कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी का कारण बनते हैं। अगर आप वज़न कम करना चाह रहे हैं, तो आपको कुछ खास तरह का तेलों का उपयोग करना चाहिए। ऑलिव ऑयल कोलेस्ट्रॉस के बढ़ने के जोखिम को कम करता है और साथ ही वज़न बढ़ने नहीं देता। इसका उपयोग सलाद की ड्रेसिंग के लिए किया जा सकता है और साथ खाना पकाने के लिए भी। इसके अलावा ज़ैतून के तेल में विटामिन-ई की भी अच्छी मात्रा होती है, जो एक ज़रूरी विटामिन है। इस तेल का उपयोग खाने को पकाने में खूब किया जाता है, लेकिन फिर भी यह एक पॉपुलर पसंद नहीं है। नारियल का तेल मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस करता है। इसका सेवन वज़न को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। यह तेल सेसामोल और सेसामिनोल जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, तिल का तेल वज़न घटाने और सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह तेल डायबिटीज़ में भी लाभदायक साबित होता है। इसका सेवन डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्लड शुगर के स्तर को कम करता है। कुसुम का तेल यानी Safflower oil, सैफ्लाउअर के फूलों से निकाला जाता है, जो हेल्दी होता है। इसका सेवन न सिर्फ वज़न को कंट्रोल करने में मदद करता है, बल्कि इससे शरीर में सूजन, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी सुधार होता है। फिश ऑयल, फ्लेक्स ऑयल, पाम ऑयल और अखरोट का तेल खाने से बचना चाहिए अगर आप वज़न घटाना चाह रहे हैं। इन तेलों में कैलोरी की मात्रा काफी ज़्यादा होती है और स्मोकिंग पॉइंट भी कम होता है। जिन तेलों को उनके स्मोकिंग पॉइंट से ज़्यादा जला दिया जाता है, वे अस्वस्थ कम्पाउंड का उत्पादन करते हैं, जिससे शरीर को नुकसान पहुंचता है।
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अनगारधर्मामृतवर्षिणीटीका सु. ६ धारिणीदेवीस्वप्नस्वरूपनिरूपणम् घुतिगुणैः- युतिभिः = स्वस्य सर्वेदिक मसरच्या कचिक्यप्रकाशपुखरूपाभिः कान्ता भिः, गुणैः- सौन्दर्यादिभिः 'सुरवरविमाणवेलंविए' सुरवरविमानविडम्ब के सुरवर विमानस्य = महर्द्धिकदेव विमानस्यापि विडम्बकं = विडम्बनाजनकं तिर'स्कारकर - मित्यर्थः, तस्मिन् स्वकीयपरमशोभया विमानतोऽप्युत्कर्पतया वर्च माने - इतिभावः, एतादृशे 'वरघरे' वरगृहे = रम्यमासादे । अथ शय्यावर्णनमाह'तंसि' इत्यादि, 'तंसि' तस्मिन् = वक्ष्यमाणगुणयुक्ते 'तारिसगंसि' तादृश के पूर्वोपार्जितपरमपुण्यमकर्षवताप्राणिनामुचिते 'सयणिज्जं सि' शयनीये- शय्यायाम् कीदृशे शयनीये ? इति विशेषणान्याह- 'सालिंगणवट्टिए' इत्यादि 'सालिगणवहिर' सालिङ्गनवर्त्तिके - आलिङ्गनवर्त्तिः=शरीरममाणोपधानं, तया सहवर्त्तते यत्तत्सालिङ्गनवर्त्तिकं, तस्मिन् शरीरममाणायतोषधानसहिते । 'उभओ विव्बोयणे' उभयतो बिब्बोयणे - उभयत = शिरश्चरणस्थापनस्थानद्वये 'बिच्चोयणे' इतिदेशीयशब्दः उपधानार्थकस्तेन विव्बोयणे = उपधाने यत्र तत्तस्मिन् उपर्यधउपधानमण्डिते, अत एत्र 'दुहश्र उन्नए' द्विधात उन्नते - द्विधात = मस्तकभागे चरणभागे च उन्नते= और क्या कहें (जुग्गुणेहिं सुरवरविमानवेलविए) यह शयनागार अपने सर्व दिशाओं में फैले हुए चाक चिक्यमसारीरूप पुंजद्वारा तथा सौन्दर्य आदि गुणों द्वारा महर्दिक देव विमान की भी तिरस्कार कर रहा था अर्थात् जो अपनी परम शोभा से देवों के विमान से भी अधिक शोभा बोला है (ऐसे शयनागार में ) ( तारिसगंसि) पुण्यवान के सोनेलायकशय्या में (तंसि) उस (सयणिज्जैसि ) शय्या पर ( शय्या का वर्णन इस प्रकार हैं) (सालिंगणवहिए) कि जो शरीरकी लंबाई के बराबर लंबे तकिया से युक्त है (उभओ विव्वोयणे) तथा जिसके दोनों तरफ - शिर और पौरों की तरफ - दो तकिये और छोटे २ रखे हुए हैं इस लिये जो ( ढुहओ उन्नए) भाटे पधारे शु उडीओ. (जुइगुणेहिं सुरवरं विमानवेलंबिए) या शयनागार मधी દિશાઓમાં ચામેર પ્રસરેલા ચમકતા પ્રકાશ પુંજથી તેમજ સૌદ વગેરે પાતાની વિશેષતાઓથી મહદ્ધિક [બહુજ કીંમતી] દેવવિમાનની પણ અવગણના કરતું હતુ અર્થાત્ તે પોતાની પરમ શાભાથી દેવાના વિમાના કરતાં પણ વધારે સુંદર શેલતું હતું. એવા शयनागारमां ( तारिसगंसि) युएयशासीमोने शयन योग्य शय्यामा (तंमि) ते ( सयणिज्जैसि ) शय्या ९५२ - सुध रही हती. ( शय्यानु' वार्जुन या प्रभाशे छे. ) (सालिंगणनधिए) ने शरीरनी संगाधना प्रभाणुना मोशीअवाजी है, ( उभओ विव्वोयणे) भने नेभनी गन्ने मालूखे-भाथा भने पानी तरहू-नानाणे शोशीक्ष सांछ, मेथी २ (दुहओ उन्नए) मन्ने मालूथ्री ४६४६ यी है भने (मज्झे
'मज्ज्ञे णयगंभी रे' मध्ये नतगम्भीरे - मध्ये मध्यभागे नतं= किञ्चिन्नप्रीभूतं गम्भीरं निम्नं च तस्मिन् । 'गंगापुलिणवालुयाउद्दालसालिसए' गङ्गापुलिनवालुकावदालसदृश के - गङ्गानदीतटस्य या वालुकास्तासाम् अवदालः=पादन्यासेऽघोगमनं, तत्सदृश के = तदुपमे, यथा वालुकायां तथा तूलगर्से शयनीयेऽपि पादन्या से निम्नोन्नतत्वं भवतीत्याशयः । 'उवचियखोमदुगुलपट्टपडिच्छण्णे' उपचितक्षोमदुकूलपट्ट प्रतिच्छन्ने- उपचितं नानारागरञ्जित विविध चित्रालङ्कृतं यत् क्षौसं = साम्मतिकजनस्यैक केशेन तन्तुशतं जायते तादृशमुक्ष्मकापसतन्तुविनिर्मितं वस्त्रम्, दुकूलम् = विशिष्टं वस्त्रे, ताभ्यां सञ्जातः पट्टः = शिल्पकलया सीवनेन युगलापेक्ष यैकीकृतं शय्यापरिमितं वस्त्रं 'खोल' इति भाषायां तेन प्रतिच्छन्ने- उपर्यंध आवृते । 'अत्थरय - मलय - नवतय - कुसत्त- लिम्वसीह के सरपच्चुत्थए' अस्तरजस्कदोनों ओर से कुछ २ ऊँची बनी हुई है । तथा (मज्झेयणगंभीरे) अध्य भाग में जो कुछ २ गहराई लिये हुए हैं (गगापुलिणबालुया उद्दालसालसए) गंगा नदी की वालुका की तरह पैर रखते ही जो नीचे की और कुछ थोडी २ घल जाती है (उबचियखोलहुगुल्लपट्टपडिच्छण्णे) अनेक रंगो से बनाये गये नाना प्रकार के चित्रों से अलंकृत क्षौम और दु कूल के पट्ट से ऊपर से लेकर नीचे तक जो ढकी हुई है। इस समय के मनुष्य के एक बाल से १०० तन्तु वनते है ऐसे सूक्ष्म कार्पासिक तन्तु से बने हुए वस्त्र का नाम-म है। अलसी आदि से बने हुए वस्त्र का नाम ढुकूल हैं। इन दोनों वस्त्रों को सीकर जो एक वस्त्र बना लिया जाता है उसका नाम पट्ट है । हिन्दी में उसे खोल कहते हैं । यह शय्या पर ऊपर से नीचे तक लटकती हुई पिछी रहती है । (अत्थ रय, मलघ, नव तय - कुसत्ति लिम्बसीह केसरपच्चुत्थए) धूली विहीन यण गंभीरे) पथलो लाग थोडओ एडओ है. (गंगापुलिणवालुया उद्दालसालसंघ) ગંગા નદીની રેતીની જેમ પગ મૂકતાંની સાથે જ તે થોડી નીચે ઢમાઈ જાય છે. આ प्रभाणे भेना उपर पग भूक्ष्वार्थी से भाशु हमाई नय छे. ( उवचिय खोम दुगुल्ल पट्टपडिच्छण्णे) उपरथी नीये सुधी ने न्नतन्नतना गोथी जनाववाभां आवेसां અનેક પ્રકારના ચિત્રોથી શણગારેલાં ક્ષૌમ અને ફૂલના પટ્ટ (કપડા)થી ઢાંકેલી છે અત્યારના માણસના એક વાળથી સેા (૧૦૦) તન્તુ બને છે, એવા ઝીણા ના તન્તુવડે મનાવવામાં આવેલા વસ્ત્રનું નામ શ્લોમ' છે. અળસી વગેરેથી બનાવવામાં આવેલા વસ્ત્રનું નામ દુકુલ છે, આ બન્ને વસ્ત્રાને સાથે સીવીને જે એક જાતનું વસ્ત્ર તૈયાર કર માં આવે છે, તેનું નામ 'પટ્ટ' છે. ગુજરાતી ભાષામાં એને पोणियु" हे छे. मा (अत्थरय, मलय, नवतय, कुसत्त, लिम्बसीह
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अनगारधर्मामृतवर्षिणीटीका सु. छः धारिणीदेवीस्वप्नस्वरूपनिरूपणम् घुतिगुणैः- युतिभिः = स्वस्य सर्वेदिक मसरच्या कचिक्यप्रकाशपुखरूपाभिः कान्ता भिः, गुणैः- सौन्दर्यादिभिः 'सुरवरविमाणवेलंविए' सुरवरविमानविडम्ब के सुरवर विमानस्य = महर्द्धिकदेव विमानस्यापि विडम्बकं = विडम्बनाजनकं तिर'स्कारकर - मित्यर्थः, तस्मिन् स्वकीयपरमशोभया विमानतोऽप्युत्कर्पतया वर्च माने - इतिभावः, एतादृशे 'वरघरे' वरगृहे = रम्यमासादे । अथ शय्यावर्णनमाह'तंसि' इत्यादि, 'तंसि' तस्मिन् = वक्ष्यमाणगुणयुक्ते 'तारिसगंसि' तादृश के पूर्वोपार्जितपरमपुण्यमकर्षवताप्राणिनामुचिते 'सयणिज्जं सि' शयनीये- शय्यायाम् कीदृशे शयनीये ? इति विशेषणान्याह- 'सालिंगणवट्टिए' इत्यादि 'सालिगणवहिर' सालिङ्गनवर्त्तिके - आलिङ्गनवर्त्तिः=शरीरममाणोपधानं, तया सहवर्त्तते यत्तत्सालिङ्गनवर्त्तिकं, तस्मिन् शरीरममाणायतोषधानसहिते । 'उभओ विव्बोयणे' उभयतो बिब्बोयणे - उभयत = शिरश्चरणस्थापनस्थानद्वये 'बिच्चोयणे' इतिदेशीयशब्दः उपधानार्थकस्तेन विव्बोयणे = उपधाने यत्र तत्तस्मिन् उपर्यधउपधानमण्डिते, अत एत्र 'दुहश्र उन्नए' द्विधात उन्नते - द्विधात = मस्तकभागे चरणभागे च उन्नते= और क्या कहें यह शयनागार अपने सर्व दिशाओं में फैले हुए चाक चिक्यमसारीरूप पुंजद्वारा तथा सौन्दर्य आदि गुणों द्वारा महर्दिक देव विमान की भी तिरस्कार कर रहा था अर्थात् जो अपनी परम शोभा से देवों के विमान से भी अधिक शोभा बोला है पुण्यवान के सोनेलायकशय्या में उस शय्या पर कि जो शरीरकी लंबाई के बराबर लंबे तकिया से युक्त है तथा जिसके दोनों तरफ - शिर और पौरों की तरफ - दो तकिये और छोटे दो रखे हुए हैं इस लिये जो भाटे पधारे शु उडीओ. या शयनागार मधी દિશાઓમાં ચામેર પ્રસરેલા ચમકતા પ્રકાશ પુંજથી તેમજ સૌદ વગેરે પાતાની વિશેષતાઓથી મહદ્ધિક [બહુજ કીંમતી] દેવવિમાનની પણ અવગણના કરતું હતુ અર્થાત્ તે પોતાની પરમ શાભાથી દેવાના વિમાના કરતાં પણ વધારે સુંદર શેલતું હતું. એવા शयनागारमां युएयशासीमोने शयन योग्य शय्यामा ते शय्या नौ सौ बावन - सुध रही हती. ने शरीरनी संगाधना प्रभाणुना मोशीअवाजी है, भने नेभनी गन्ने मालूखे-भाथा भने पानी तरहू-नानाणे शोशीक्ष सांछ, मेथी दो मन्ने मालूथ्री चार हज़ार छः सौ छियालीस यी है भने अध्य भाग में जो कुछ दो गहराई लिये हुए हैं गंगा नदी की वालुका की तरह पैर रखते ही जो नीचे की और कुछ थोडी दो घल जाती है अनेक रंगो से बनाये गये नाना प्रकार के चित्रों से अलंकृत क्षौम और दु कूल के पट्ट से ऊपर से लेकर नीचे तक जो ढकी हुई है। इस समय के मनुष्य के एक बाल से एक सौ तन्तु वनते है ऐसे सूक्ष्म कार्पासिक तन्तु से बने हुए वस्त्र का नाम-म है। अलसी आदि से बने हुए वस्त्र का नाम ढुकूल हैं। इन दोनों वस्त्रों को सीकर जो एक वस्त्र बना लिया जाता है उसका नाम पट्ट है । हिन्दी में उसे खोल कहते हैं । यह शय्या पर ऊपर से नीचे तक लटकती हुई पिछी रहती है । धूली विहीन यण गंभीरे) पथलो लाग थोडओ एडओ है. ગંગા નદીની રેતીની જેમ પગ મૂકતાંની સાથે જ તે થોડી નીચે ઢમાઈ જાય છે. આ प्रभाणे भेना उपर पग भूक्ष्वार्थी से भाशु हमाई नय छे. उपरथी नीये सुधी ने न्नतन्नतना गोथी जनाववाभां आवेसां અનેક પ્રકારના ચિત્રોથી શણગારેલાં ક્ષૌમ અને ફૂલના પટ્ટ થી ઢાંકેલી છે અત્યારના માણસના એક વાળથી સેા તન્તુ બને છે, એવા ઝીણા ના તન્તુવડે મનાવવામાં આવેલા વસ્ત્રનું નામ શ્લોમ' છે. અળસી વગેરેથી બનાવવામાં આવેલા વસ્ત્રનું નામ દુકુલ છે, આ બન્ને વસ્ત્રાને સાથે સીવીને જે એક જાતનું વસ્ત્ર તૈયાર કર માં આવે છે, તેનું નામ 'પટ્ટ' છે. ગુજરાતી ભાષામાં એને पोणियु" हे छे. मा (अत्थरय, मलय, नवतय, कुसत्त, लिम्बसीह
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क्योंकि पार्षद मुख्य रूप से नगरपालिका मामलों को संभालते थे, जैसे कि निर्माण परियोजनाओं का आयोजन करना और यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक सुविधाएं क्रम में हैं।
हांगकांग के सांसदों ने गुरुवार को स्थानीय जिला परिषदों में अधिकांश सीधे निर्वाचित सीटों को खत्म करने के लिए एक कानून में संशोधन पारित किया, जो जनता द्वारा चुने गए अंतिम प्रमुख राजनीतिक प्रतिनिधि निकाय हैं, जिससे शहर में आगे की लोकतांत्रिक चुनौतियां बंद हो गईं।
परिवर्तनों में नगरपालिका स्तर के संगठन में सीधे निर्वाचित सीटों के अनुपात को वर्तमान में 90% से घटाकर लगभग 20% करना शामिल है - उस स्तर से भी कम जब ये निकाय पहली बार 1980 के दशक में स्थापित किए गए थे, जब हांगकांग पर शासन किया गया था। ब्रिटेन.
शेष 470 सीटें मुख्य कार्यकारी द्वारा नियुक्त सदस्यों, ग्रामीण समिति अध्यक्षों और स्थानीय समितियों द्वारा चुने गए अन्य लोगों द्वारा भरी जाएंगी जो स्थापना समर्थक आंकड़ों से भरी हुई हैं।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि हांगकांग का प्रशासन "देशभक्त" कर रहे हैं, सभी आने वाले पार्षदों की एक समिति द्वारा जांच की जाएगी। पार्षदों के "अनुमोदन कदाचार" के लिए एक प्रदर्शन निगरानी तंत्र शुरू किया जाएगा।
चुनावी बदलाव 2019 में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के बाद हांगकांग पर बीजिंग के बढ़ते नियंत्रण को दर्शाता है। 2021 में, हांगकांग ने अपनी विधायिका के लिए अपने चुनावी कानूनों में संशोधन किया, जिससे जनता की वोट देने की क्षमता में भारी कमी आई और बीजिंग समर्थक सांसदों की संख्या में वृद्धि हुई। शहर के लिए निर्णय लेना।
विश्लेषकों ने कहा कि नवीनतम संशोधन शहर के मामलों में सार्वजनिक भागीदारी को हाशिये पर डाल देंगे, चेतावनी दी गई है कि सरकार आगे चलकर लोकप्रिय समर्थन खो सकती है।
अतीत में, शहर जिला परिषद सीटों के चुनावों ने आम तौर पर कम अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था क्योंकि पार्षद मुख्य रूप से नगरपालिका मामलों को संभालते थे, जैसे कि निर्माण परियोजनाओं का आयोजन करना और यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक सुविधाएं क्रम में हैं।
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क्योंकि पार्षद मुख्य रूप से नगरपालिका मामलों को संभालते थे, जैसे कि निर्माण परियोजनाओं का आयोजन करना और यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक सुविधाएं क्रम में हैं। हांगकांग के सांसदों ने गुरुवार को स्थानीय जिला परिषदों में अधिकांश सीधे निर्वाचित सीटों को खत्म करने के लिए एक कानून में संशोधन पारित किया, जो जनता द्वारा चुने गए अंतिम प्रमुख राजनीतिक प्रतिनिधि निकाय हैं, जिससे शहर में आगे की लोकतांत्रिक चुनौतियां बंद हो गईं। परिवर्तनों में नगरपालिका स्तर के संगठन में सीधे निर्वाचित सीटों के अनुपात को वर्तमान में नब्बे% से घटाकर लगभग बीस% करना शामिल है - उस स्तर से भी कम जब ये निकाय पहली बार एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक में स्थापित किए गए थे, जब हांगकांग पर शासन किया गया था। ब्रिटेन. शेष चार सौ सत्तर सीटें मुख्य कार्यकारी द्वारा नियुक्त सदस्यों, ग्रामीण समिति अध्यक्षों और स्थानीय समितियों द्वारा चुने गए अन्य लोगों द्वारा भरी जाएंगी जो स्थापना समर्थक आंकड़ों से भरी हुई हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हांगकांग का प्रशासन "देशभक्त" कर रहे हैं, सभी आने वाले पार्षदों की एक समिति द्वारा जांच की जाएगी। पार्षदों के "अनुमोदन कदाचार" के लिए एक प्रदर्शन निगरानी तंत्र शुरू किया जाएगा। चुनावी बदलाव दो हज़ार उन्नीस में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के बाद हांगकांग पर बीजिंग के बढ़ते नियंत्रण को दर्शाता है। दो हज़ार इक्कीस में, हांगकांग ने अपनी विधायिका के लिए अपने चुनावी कानूनों में संशोधन किया, जिससे जनता की वोट देने की क्षमता में भारी कमी आई और बीजिंग समर्थक सांसदों की संख्या में वृद्धि हुई। शहर के लिए निर्णय लेना। विश्लेषकों ने कहा कि नवीनतम संशोधन शहर के मामलों में सार्वजनिक भागीदारी को हाशिये पर डाल देंगे, चेतावनी दी गई है कि सरकार आगे चलकर लोकप्रिय समर्थन खो सकती है। अतीत में, शहर जिला परिषद सीटों के चुनावों ने आम तौर पर कम अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था क्योंकि पार्षद मुख्य रूप से नगरपालिका मामलों को संभालते थे, जैसे कि निर्माण परियोजनाओं का आयोजन करना और यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक सुविधाएं क्रम में हैं।
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सिर्फ नीला रंग । ठीक यही दशा टी. वी. की भी होगी ।
जब रंग मौजूद थे तब उन रंगों के महत्व को किसी ने नहीं समझा । किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इनके न रहने से मनुष्य का जीवन गतिहीन हो जायेगा । अब पृथ्वी पर रहने वाले हम सबके आने वाले दिन कैसे करेंगे- राकेश सोचने लगा ।
शाम को राकेश को पिता से पता चला कि कलकत्ता के सब रंग की कम्पनीवाले कोई दूसरा काम करने की सोच रहे हैं। दुकानों में जितने भी रंग थे सब उलट-पुलट कर नीले या काले हो गये थे ।
इधर, वृद्ध व्यक्तियों के बाल और दाढ़ी सब नीले रंग में बदल गये हैं और वे बहुत खूबसूरत लग रहे हैं । इसे देखकर उन लोगों के लिए बालों को तुरंत सफेद करने संबंधी कृत्रिम उपाय होने लगे थे । विभिन्न सैलूनों में काले बालों को सफेद करवाने की होड़ सी लग गयी है ।
राकेश आश्चर्यचकित हो अपने पिताजी की बातों को सुन रहा था । उससे भी ज्यादा चकित वह तब हुआ जब उसने रेडियो से यह समाचार सुना कि इस बीच दुनिया में कई लाख दुर्घटनाएं हो चुकी हैं । हिमालय की बर्फ का रंग आकाश के रंग के समान नीला हो गया है, इसलिए सत्ताईस हवाई जहाज हिमालय की चोटियों से टकरा चुके हैं। भारतवर्ष में अब तक तीन पुरुष, एक महिला इस रंग बदलने के घटनाचक्र से घबराकर पागल हो गये हैं ।
कई जगहों से इस तरह की घबरा देने वाली और भी अनेक दुर्घटनाओं का विवरण था ।
राकेश का मन दुखी हो गया । वह धीरे-धीरे चलता हुआ बरामदे में जा खड़ा हुआ । शाम हो चुकी थी और अंधेरा हो चला था । लेकिन आकाश से चांद-तारे कहां गये ? गाढ़े काले रंग के आकाश में गाढ़े नीले रंग का चांद था । वह ठीक दिखायी भी नहीं दे रहा था । और तारे ? वे तो दिखायी न देने के बराबर । क्या इसी तरह बीतेगा हर दिन, हर रात ?
राकेश वापस कमरे में लौट आया। कमरे में नीले रंग की बत्ती जल रही थी । टूयूब और बल्ब दोनों ही नीली रोशनी दे रहे थे । पिताजी और मां चुपचाप बैठे थे। मां का चेहरा मटमैला नजर आ रहा था । सुबह की चमक अब चेहरे पर मौजूद नहीं थी । पिताजी भी बड़े चिंतित जान पड़ रहे थे । रेडियो सामने रखा था । ऐसे में रेडियो के सिवा और चारा भी क्या था । किताब या अखबार पढ़ना कठिन था । टी. वी. देखना भी संभव न था । इस तरह घर में बैठे-बैठे सब अपने आप में ही खीज रहे थे ।
पिताजी रेडियो पर संगीत का कार्यक्रम सुन रहे थे । अचानक राकेश की तरफ मुड़कर उन्होंने कहा, "राका, तुमने ध्यान दिया, रेडियो पर समाचारों को समाचार -
वाचक ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं। नीले कागज पर काले अक्षर पढ़ना लोहे के चने चबाने जैसा होता होगा उनके लिए ।" राकेश धीरे से मुस्कराया ।
मां ने कहा, "फिर भी रेडियो के अलावा और चारा भी क्या है ?" राकेश ने पूछा, "पिताजी, ताजा समाचार में कुछ कहा है क्या ?" "हां, कहा है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने काफी छानबीन के बाद बताया है कि सूर्य में ही कुछ गड़बड़ है, जिसकी वजह से यह विचित्र घटना घटी है। अगले चौबीस घंटे के बाद ही वे निश्चित रूप से कुछ कह पायेंगे ।"
मीनू राकेश के इर्द-गिर्द घूम रही थी । राकेश उसे गोद में लेकर प्यार से सहलाने लगा । फिर काले रंग का गेंद लेकर खेलने लगा । ऐसा लग रहा था मानो समय ठहर गया है ।
इसी तरह रात के दस बज गये, किसी तरह खाना खाकर राकेश अपनी मां के पास जाकर लेट गया । मीनू भी उससे सटकर लेट गयी । पिताजी ने बगल के कमरे में जाते-जाते राकेश से कहा, "दिल छोटा मत करो राका । कल सवेरे उठकर देखांगे कि सब ठीक हो गया है ।
पिताजी की बात इतनी जल्दी सच हो जायेगी, राकेश ने यह कभी नहीं सोचा था ।
सुबह जब उसकी नींद टूटी तो वह हैरान रह गया । क्या उसकी आंखें गलत देख रही हैं । राकेश ने लेटे-लेटे ही कनखियों से चारों तरफ देखा । कमरे की दीवारों का रंग फिर से सफेद हो गया था । उसका अपना रंग भी फिर से गोरा हो गया ।
खिड़की से सूरज की सुनहरी किरणें कमरे की शोभा बढ़ा रही थीं। घूमकर उसने देखा कि मां नहीं है । वह तो बहुत पहले ही उठ चुकी उठ चुकी होगी ।
राकेश झट अपने बिस्तर से नीचे कूद पड़ा । वह बहुत खुश था । हे भगवान ! अच्छा हुआ जो सब कुछ पहले जैसा हो गया था। लेकिन यह सब हुआ कैसे ?
राकेश मां को खोजता हुआ रसोई की तरफ दौड़ पड़ा । वहां पहुंचकर देखा कि पिताजी हाथ-पांव हिलाते हुए मां को कुछ समझाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके एक हाथ में बाजार का सामान लाने वाले दो झोले थे । झोलों को ऊपर उठाते हुए पिताजी समझा रहे थे, "सोचो यह सूर्य है । इस सूर्य से ही हमारी पृथ्वी पर सफेद रोशनी आती है।"
मां ने बीच में ही 'टोका, "सफेद कहां, वह तो पीली रोशनी है ।" पिताजी उत्तेजित होकर कुछ बड़बड़ाये । फिर बोले, "तुम्हें यह सब बताने से कोई फायदा नहीं । बेहतर होगा कि यह बात मैं राका से ही जाकर कहूं ।"
राकेश को मजा आ गया, "सभी रंग फिर से बदल गये हैं पिताजी । लेकिन यह सारा बदलाव आया कैसे ? रेडियो में क्या इस बारे में कुछ आया है ?"
"अरे, वही तो मैं तुम्हारी मां को समझाने की कोशिश कर रहा था । रेडियो ने जो कुछ संक्षेप में बताया, वह इस प्रकार है : परसों रात यानी तीस घंटे पहले सूर्य में एक भयानक विस्फोट हुआ था । उस विस्फोट का कारण अभी तक वैज्ञानिकों को पता नहीं चला । लेकिन कहा है कि विस्फोट के कारण एक अजीब-से विकिरण ने सूर्य को चारों तरफ से घेर लिया था । विकिरण ने सूर्य के प्रकाश से छह रंगों को सोख लिया । उसने सिर्फ नीली आभा को ही निकलने दिया । फलस्वरूप पृथ्वी की हर चीज नीली दिखायी पड़ रही थी । इसके सिवा इस विकिरण का प्रभाव सूर्य के सबसे निकटवर्ती तीन ग्रहों यानी बुध, शुक्र और पृथ्वी पर भी पड़ा । इसलिए हमारे कृत्रिम रांशनी के स्रांत यानी ट्यूब और बल्ब भी नीले रंग की रोशनी दे रहे थे।"
"लेकिन काला रंग ?" चावल के बर्तन में कड़छी चलाते हुए राकेश की मां ने पूछा ।
जवाब दिया राकेश ने, "काला कोई रंग नहीं होता। अगर किसी चीज का कोई रंग न हो तो वह हमें काली दिखायी देती है।"
मां का चेहरा देखकर पता चलता था कि राकेश के जवाब से मां संतुष्ट नहीं हैं। इसे भांपकर पिताजी ने कहा, "भारतीय समय के अनुसार पिछली रात साढ़े तीन बजे के करीब सूर्य के चारों तरफ जो विकिरण फैला हुआ था, वह महाशून्य में समा गया । फलतः शेष छह रंग फिर से दिखायी देने लगे तथा पृथ्वी के ऊपर से उस विकिरण का प्रभाव छंट गया । इसलिए अब ट्यूव और बल्ब की रोशनी में कोई गड़बड़ी नहीं रहेगी । हम सिनेमा व टी. वी. भी पहले की तरह देख सकेंगे ।
पिताजी ने बाजार के झोलों को नीचे करते हुए राकेश को धीरे से कहा, "राका, अब रंगों के विषय में अपनी मां को संक्षेप में बता देना ।
राकेश को मजा आया और उसने सिर हिला दिया। हालांकि मां खाना बनाने में व्यस्त थी, फिर भी उसके कान उन दोनों की तरफ थे ।
गला खंखार पिताजी कहने लगे, "ध्यान से सुनों ! सूर्य की जो सफेद किरणें, तुम्हारे अनुसार पीली किरणें हैं, वैज्ञानिकों के अनुसार सफेद किरणें ही हैं। यदि सफेद रोशनी के अलग-अलग भाग होकर बिखर जायें तो तुम्हें सात-सात रंग दिखायी देंगे । आकाश में इंद्रधनुष निकलने पर हम वही सात रंग अलग-अलग देख पाते हैं। दिन में हर चीज के ऊपर यह सफेद रोशनी फैली रहती है, लेकिन फिर भी हम सभी चीजों को अलग-अलग रंगों में देख पाते हैं। ऐसा क्यों होता है ? तुमने जो यह लाल रंग की साड़ी पहन रखी है, इसके बारे में सोचो । इसके लाल दिखने
का कारण यह है कि इस लाल रंग ने अन्य छह रंगों को सोख लिया है। सिर्फ लाल आभा को आने दिया है जैसे उस विकिरण ने सिर्फ नीले रंग को आने दिया था । जां चीज सभी रंगों को सोख लेती है, वह हमें काले रंग की दिखायी देती है तथा जो चीज स्पेक्ट्रम के सभी रंगों को वापस भेज देती है, वह हमें सफेद दिखायी देती है। जैसे मेरा यह धोती-कुर्ता, बर्तन के चावल । अब समझी ना !"
मां ने कड़छी चलाते हुए कहा, "समझी, बहुत समझी ! अब जल्दी जाओ और बाजार कर लाओ । कल तो आप नीला भात नहीं खा पायें आज पेट भरकर सफेद भात खाकर आफिस जाना ।"
पिताजी चल दिये । जाते-जाते कह गये, "कल अखवार नहीं पढ़ पाया । देखूं तो, आज कोई विशेष समाचार छुपा है कि नहीं.
मां ने राकेश से कहा, "क्या बात है राका ! जाओ जाकर पढ़ो।" राकेश पढ़ने की मेज पर लौट आया । मीनू टेबल के नीचे चुपचाप लेटी हुई थी । खिड़की से आती धूप को देखकर राकेश बहुत खुश था । वह उठा और सीखचों से माथा सटाकर सूर्य की तरफ देखने लगा । आज सूर्य कितना खूबसूरत लग रहा है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं महसूस हुआ। सभी ने सूर्य को घर की मुर्गी
दाल बराबर समझ रखा था ।
लेकिन आज तो वह एक नया सूर्य लग रहा था - पीली आभा के साथ झिलमिलाता हुआ।
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सिर्फ नीला रंग । ठीक यही दशा टी. वी. की भी होगी । जब रंग मौजूद थे तब उन रंगों के महत्व को किसी ने नहीं समझा । किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इनके न रहने से मनुष्य का जीवन गतिहीन हो जायेगा । अब पृथ्वी पर रहने वाले हम सबके आने वाले दिन कैसे करेंगे- राकेश सोचने लगा । शाम को राकेश को पिता से पता चला कि कलकत्ता के सब रंग की कम्पनीवाले कोई दूसरा काम करने की सोच रहे हैं। दुकानों में जितने भी रंग थे सब उलट-पुलट कर नीले या काले हो गये थे । इधर, वृद्ध व्यक्तियों के बाल और दाढ़ी सब नीले रंग में बदल गये हैं और वे बहुत खूबसूरत लग रहे हैं । इसे देखकर उन लोगों के लिए बालों को तुरंत सफेद करने संबंधी कृत्रिम उपाय होने लगे थे । विभिन्न सैलूनों में काले बालों को सफेद करवाने की होड़ सी लग गयी है । राकेश आश्चर्यचकित हो अपने पिताजी की बातों को सुन रहा था । उससे भी ज्यादा चकित वह तब हुआ जब उसने रेडियो से यह समाचार सुना कि इस बीच दुनिया में कई लाख दुर्घटनाएं हो चुकी हैं । हिमालय की बर्फ का रंग आकाश के रंग के समान नीला हो गया है, इसलिए सत्ताईस हवाई जहाज हिमालय की चोटियों से टकरा चुके हैं। भारतवर्ष में अब तक तीन पुरुष, एक महिला इस रंग बदलने के घटनाचक्र से घबराकर पागल हो गये हैं । कई जगहों से इस तरह की घबरा देने वाली और भी अनेक दुर्घटनाओं का विवरण था । राकेश का मन दुखी हो गया । वह धीरे-धीरे चलता हुआ बरामदे में जा खड़ा हुआ । शाम हो चुकी थी और अंधेरा हो चला था । लेकिन आकाश से चांद-तारे कहां गये ? गाढ़े काले रंग के आकाश में गाढ़े नीले रंग का चांद था । वह ठीक दिखायी भी नहीं दे रहा था । और तारे ? वे तो दिखायी न देने के बराबर । क्या इसी तरह बीतेगा हर दिन, हर रात ? राकेश वापस कमरे में लौट आया। कमरे में नीले रंग की बत्ती जल रही थी । टूयूब और बल्ब दोनों ही नीली रोशनी दे रहे थे । पिताजी और मां चुपचाप बैठे थे। मां का चेहरा मटमैला नजर आ रहा था । सुबह की चमक अब चेहरे पर मौजूद नहीं थी । पिताजी भी बड़े चिंतित जान पड़ रहे थे । रेडियो सामने रखा था । ऐसे में रेडियो के सिवा और चारा भी क्या था । किताब या अखबार पढ़ना कठिन था । टी. वी. देखना भी संभव न था । इस तरह घर में बैठे-बैठे सब अपने आप में ही खीज रहे थे । पिताजी रेडियो पर संगीत का कार्यक्रम सुन रहे थे । अचानक राकेश की तरफ मुड़कर उन्होंने कहा, "राका, तुमने ध्यान दिया, रेडियो पर समाचारों को समाचार - वाचक ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं। नीले कागज पर काले अक्षर पढ़ना लोहे के चने चबाने जैसा होता होगा उनके लिए ।" राकेश धीरे से मुस्कराया । मां ने कहा, "फिर भी रेडियो के अलावा और चारा भी क्या है ?" राकेश ने पूछा, "पिताजी, ताजा समाचार में कुछ कहा है क्या ?" "हां, कहा है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने काफी छानबीन के बाद बताया है कि सूर्य में ही कुछ गड़बड़ है, जिसकी वजह से यह विचित्र घटना घटी है। अगले चौबीस घंटे के बाद ही वे निश्चित रूप से कुछ कह पायेंगे ।" मीनू राकेश के इर्द-गिर्द घूम रही थी । राकेश उसे गोद में लेकर प्यार से सहलाने लगा । फिर काले रंग का गेंद लेकर खेलने लगा । ऐसा लग रहा था मानो समय ठहर गया है । इसी तरह रात के दस बज गये, किसी तरह खाना खाकर राकेश अपनी मां के पास जाकर लेट गया । मीनू भी उससे सटकर लेट गयी । पिताजी ने बगल के कमरे में जाते-जाते राकेश से कहा, "दिल छोटा मत करो राका । कल सवेरे उठकर देखांगे कि सब ठीक हो गया है । पिताजी की बात इतनी जल्दी सच हो जायेगी, राकेश ने यह कभी नहीं सोचा था । सुबह जब उसकी नींद टूटी तो वह हैरान रह गया । क्या उसकी आंखें गलत देख रही हैं । राकेश ने लेटे-लेटे ही कनखियों से चारों तरफ देखा । कमरे की दीवारों का रंग फिर से सफेद हो गया था । उसका अपना रंग भी फिर से गोरा हो गया । खिड़की से सूरज की सुनहरी किरणें कमरे की शोभा बढ़ा रही थीं। घूमकर उसने देखा कि मां नहीं है । वह तो बहुत पहले ही उठ चुकी उठ चुकी होगी । राकेश झट अपने बिस्तर से नीचे कूद पड़ा । वह बहुत खुश था । हे भगवान ! अच्छा हुआ जो सब कुछ पहले जैसा हो गया था। लेकिन यह सब हुआ कैसे ? राकेश मां को खोजता हुआ रसोई की तरफ दौड़ पड़ा । वहां पहुंचकर देखा कि पिताजी हाथ-पांव हिलाते हुए मां को कुछ समझाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके एक हाथ में बाजार का सामान लाने वाले दो झोले थे । झोलों को ऊपर उठाते हुए पिताजी समझा रहे थे, "सोचो यह सूर्य है । इस सूर्य से ही हमारी पृथ्वी पर सफेद रोशनी आती है।" मां ने बीच में ही 'टोका, "सफेद कहां, वह तो पीली रोशनी है ।" पिताजी उत्तेजित होकर कुछ बड़बड़ाये । फिर बोले, "तुम्हें यह सब बताने से कोई फायदा नहीं । बेहतर होगा कि यह बात मैं राका से ही जाकर कहूं ।" राकेश को मजा आ गया, "सभी रंग फिर से बदल गये हैं पिताजी । लेकिन यह सारा बदलाव आया कैसे ? रेडियो में क्या इस बारे में कुछ आया है ?" "अरे, वही तो मैं तुम्हारी मां को समझाने की कोशिश कर रहा था । रेडियो ने जो कुछ संक्षेप में बताया, वह इस प्रकार है : परसों रात यानी तीस घंटे पहले सूर्य में एक भयानक विस्फोट हुआ था । उस विस्फोट का कारण अभी तक वैज्ञानिकों को पता नहीं चला । लेकिन कहा है कि विस्फोट के कारण एक अजीब-से विकिरण ने सूर्य को चारों तरफ से घेर लिया था । विकिरण ने सूर्य के प्रकाश से छह रंगों को सोख लिया । उसने सिर्फ नीली आभा को ही निकलने दिया । फलस्वरूप पृथ्वी की हर चीज नीली दिखायी पड़ रही थी । इसके सिवा इस विकिरण का प्रभाव सूर्य के सबसे निकटवर्ती तीन ग्रहों यानी बुध, शुक्र और पृथ्वी पर भी पड़ा । इसलिए हमारे कृत्रिम रांशनी के स्रांत यानी ट्यूब और बल्ब भी नीले रंग की रोशनी दे रहे थे।" "लेकिन काला रंग ?" चावल के बर्तन में कड़छी चलाते हुए राकेश की मां ने पूछा । जवाब दिया राकेश ने, "काला कोई रंग नहीं होता। अगर किसी चीज का कोई रंग न हो तो वह हमें काली दिखायी देती है।" मां का चेहरा देखकर पता चलता था कि राकेश के जवाब से मां संतुष्ट नहीं हैं। इसे भांपकर पिताजी ने कहा, "भारतीय समय के अनुसार पिछली रात साढ़े तीन बजे के करीब सूर्य के चारों तरफ जो विकिरण फैला हुआ था, वह महाशून्य में समा गया । फलतः शेष छह रंग फिर से दिखायी देने लगे तथा पृथ्वी के ऊपर से उस विकिरण का प्रभाव छंट गया । इसलिए अब ट्यूव और बल्ब की रोशनी में कोई गड़बड़ी नहीं रहेगी । हम सिनेमा व टी. वी. भी पहले की तरह देख सकेंगे । पिताजी ने बाजार के झोलों को नीचे करते हुए राकेश को धीरे से कहा, "राका, अब रंगों के विषय में अपनी मां को संक्षेप में बता देना । राकेश को मजा आया और उसने सिर हिला दिया। हालांकि मां खाना बनाने में व्यस्त थी, फिर भी उसके कान उन दोनों की तरफ थे । गला खंखार पिताजी कहने लगे, "ध्यान से सुनों ! सूर्य की जो सफेद किरणें, तुम्हारे अनुसार पीली किरणें हैं, वैज्ञानिकों के अनुसार सफेद किरणें ही हैं। यदि सफेद रोशनी के अलग-अलग भाग होकर बिखर जायें तो तुम्हें सात-सात रंग दिखायी देंगे । आकाश में इंद्रधनुष निकलने पर हम वही सात रंग अलग-अलग देख पाते हैं। दिन में हर चीज के ऊपर यह सफेद रोशनी फैली रहती है, लेकिन फिर भी हम सभी चीजों को अलग-अलग रंगों में देख पाते हैं। ऐसा क्यों होता है ? तुमने जो यह लाल रंग की साड़ी पहन रखी है, इसके बारे में सोचो । इसके लाल दिखने का कारण यह है कि इस लाल रंग ने अन्य छह रंगों को सोख लिया है। सिर्फ लाल आभा को आने दिया है जैसे उस विकिरण ने सिर्फ नीले रंग को आने दिया था । जां चीज सभी रंगों को सोख लेती है, वह हमें काले रंग की दिखायी देती है तथा जो चीज स्पेक्ट्रम के सभी रंगों को वापस भेज देती है, वह हमें सफेद दिखायी देती है। जैसे मेरा यह धोती-कुर्ता, बर्तन के चावल । अब समझी ना !" मां ने कड़छी चलाते हुए कहा, "समझी, बहुत समझी ! अब जल्दी जाओ और बाजार कर लाओ । कल तो आप नीला भात नहीं खा पायें आज पेट भरकर सफेद भात खाकर आफिस जाना ।" पिताजी चल दिये । जाते-जाते कह गये, "कल अखवार नहीं पढ़ पाया । देखूं तो, आज कोई विशेष समाचार छुपा है कि नहीं. मां ने राकेश से कहा, "क्या बात है राका ! जाओ जाकर पढ़ो।" राकेश पढ़ने की मेज पर लौट आया । मीनू टेबल के नीचे चुपचाप लेटी हुई थी । खिड़की से आती धूप को देखकर राकेश बहुत खुश था । वह उठा और सीखचों से माथा सटाकर सूर्य की तरफ देखने लगा । आज सूर्य कितना खूबसूरत लग रहा है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं महसूस हुआ। सभी ने सूर्य को घर की मुर्गी दाल बराबर समझ रखा था । लेकिन आज तो वह एक नया सूर्य लग रहा था - पीली आभा के साथ झिलमिलाता हुआ।
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शिक्षा का प्रयोग
[ २७ ] शिक्षा का प्रयोग
ध्रुव तक हम लोगों को रणवां आये कई महीने हो चुके थे । लोगों से काफ़ी पनिष्ठता हो गई थी । चखें का काम दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा था । हम लोगों के सम्पर्क से गांव के लोग अपने बहुत से पुराने संस्कारों और आचार-व्यवहार के सम्बन्ध में विचार से काम लेने लगे थे। इस तरह यद्यपि धीरे-धीरे लोगों का मानसिक विकास होता जा रहा था किन्तु अब तक शिक्षा का कोई विधिवत् कार्यक्रम निश्चित नहीं हो सका था। मैं स्वयं इसका निश्चय नहीं कर पाया था कि गांव वालों के लिए शिक्षा की किस प्रकार की योजना उपयुक्त होगी। गांव के किसान और मज़दूर दिन भर इस तरह काम में फँसे रहते हैं कि दिन के समय वे किसी स्कूल में अपना समय नहीं दे सकते, और यदि रात की व्यवस्था की जाय तो भी सदियों से पठन-पाठन की ओर दिलचस्पी न होने के कारण स्कूल में आने के लिए उन्हें कोई विशेष उत्सुकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त मुझे स्वयं भी इस बात का सन्देह था कि केवल अक्षर ज्ञान करा देने से इन्हें कोई लाभ हो सकेगा। स्कूलों में लगातार ६ वर्ष पढ़ कर लोग मिडिल पास होते हैं और तब कहीं उन्हें अन्य विविध पुस्तकों के पढ़ने की योग्यता होती है। ऐसी स्थिति में यदि हमने दिन या रात को उनका थोड़ा सा समय लेकर उन्हें अक्षर ज्ञान करा भी दिया तो इससे उनके मानसिक विकास में कहां तक सहायता मिल सकती है ? इसी प्रकार के विचारों की उधेड़बुन में पड़कर तथा अन्य कार्यों में अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण हम लोग ग्राम-शिक्षा की कोई स्पष्ट योजना नहीं बना सके। पर धीरे-धीरे हमें यह महसूस होने लगा कि इस दिशा में कुछ न कुछ करना अत्यावश्यक है। प्रारम्भ
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शिक्षा का प्रयोग [ सत्ताईस ] शिक्षा का प्रयोग ध्रुव तक हम लोगों को रणवां आये कई महीने हो चुके थे । लोगों से काफ़ी पनिष्ठता हो गई थी । चखें का काम दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा था । हम लोगों के सम्पर्क से गांव के लोग अपने बहुत से पुराने संस्कारों और आचार-व्यवहार के सम्बन्ध में विचार से काम लेने लगे थे। इस तरह यद्यपि धीरे-धीरे लोगों का मानसिक विकास होता जा रहा था किन्तु अब तक शिक्षा का कोई विधिवत् कार्यक्रम निश्चित नहीं हो सका था। मैं स्वयं इसका निश्चय नहीं कर पाया था कि गांव वालों के लिए शिक्षा की किस प्रकार की योजना उपयुक्त होगी। गांव के किसान और मज़दूर दिन भर इस तरह काम में फँसे रहते हैं कि दिन के समय वे किसी स्कूल में अपना समय नहीं दे सकते, और यदि रात की व्यवस्था की जाय तो भी सदियों से पठन-पाठन की ओर दिलचस्पी न होने के कारण स्कूल में आने के लिए उन्हें कोई विशेष उत्सुकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त मुझे स्वयं भी इस बात का सन्देह था कि केवल अक्षर ज्ञान करा देने से इन्हें कोई लाभ हो सकेगा। स्कूलों में लगातार छः वर्ष पढ़ कर लोग मिडिल पास होते हैं और तब कहीं उन्हें अन्य विविध पुस्तकों के पढ़ने की योग्यता होती है। ऐसी स्थिति में यदि हमने दिन या रात को उनका थोड़ा सा समय लेकर उन्हें अक्षर ज्ञान करा भी दिया तो इससे उनके मानसिक विकास में कहां तक सहायता मिल सकती है ? इसी प्रकार के विचारों की उधेड़बुन में पड़कर तथा अन्य कार्यों में अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण हम लोग ग्राम-शिक्षा की कोई स्पष्ट योजना नहीं बना सके। पर धीरे-धीरे हमें यह महसूस होने लगा कि इस दिशा में कुछ न कुछ करना अत्यावश्यक है। प्रारम्भ
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कोरोना के कारण पूरे देश में उथल-पुथल मचा हुआ है। हर दिन तीन लाख से ऊपर कोरोना संक्रमण के नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, हजारों लोग इसकी चपेट में आने के कारण जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं। इस खतरनाक संक्रमण से बचाव को लेकर हर राज्य की सरकार अपने स्तर पर नियम लागू कर रही है। कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू तो कहीं लॉकडाउन लगाया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है, लेकिन इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा अपने डॉग के साथ टहलती नजर आईं, जिसे देख यूजर्स भड़क गए और अभिनेत्री को ट्रोल करने लगे।
बता दें कि कोरोना के कारण महाराष्ट्र की स्थिति भयावह है। इस कारण सरकार से लेकर प्रशासन तक सख्ती अपनाई जा रही है। लोगों से लगातार कोविड गाइडलाइन का पालन करने की अपील की जा रही है। ऐसे में शुक्रवार को मलाइका अपने पेट डॉग कैस्पर के साथ वॉक पर नजर आईं। हालांकि उन्होंने चेहरे को मास्क से सुरक्षित कर रखा था।
योगेन शाह ने उनका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। मुंबई में कोरोना के इन हालातों के बीच अभिनेत्री का इस तरह वॉक पर निकलना लोगों को बड़ा नागवार गुजरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी जमकर क्लास लगा दी। एक यूजर ने लिखा कि 'कोरोना को रोकने को लेकर एक तरफ सरकार तरह-तरह के उपाय अपना रही है। दूसरी तरफ ये सेलेब्स. . . । '
वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि 'यहां इंसान घर पर जिंदगी मौत के बीच लड़ रहे हैं, लेकिन इन्हें अपने डॉगी को घुमाना है। ' ज्यादातर यूजर्स ने अभिनेत्री को जमकर ट्रोल किया और कमेंट में खरी-खोटी सुनाई। एक अन्य ने लिखा कि 'ब्रेक द चेन में क्या मॉर्निंग वॉक की इजाजत है? '
ये पहली बार नहीं है जब मलाइका अपने डॉग को लेकर ट्रोल हुई हैं। इससे पहले भी मलाइका का मजाक बन चुका है। वहीं, मलाइका के अलावा भी कई स्टार्स लॉकडाउन में निकलने को लेकर ट्रोल हो चुके हैं। इनमें आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, सारा अली खान, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, दिशा पाटनी, टाइगर श्रॉफ शामिल हैं। ये सभी कोरोना के बीच वैकेशन पर निकले थे।
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कोरोना के कारण पूरे देश में उथल-पुथल मचा हुआ है। हर दिन तीन लाख से ऊपर कोरोना संक्रमण के नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, हजारों लोग इसकी चपेट में आने के कारण जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं। इस खतरनाक संक्रमण से बचाव को लेकर हर राज्य की सरकार अपने स्तर पर नियम लागू कर रही है। कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू तो कहीं लॉकडाउन लगाया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है, लेकिन इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा अपने डॉग के साथ टहलती नजर आईं, जिसे देख यूजर्स भड़क गए और अभिनेत्री को ट्रोल करने लगे। बता दें कि कोरोना के कारण महाराष्ट्र की स्थिति भयावह है। इस कारण सरकार से लेकर प्रशासन तक सख्ती अपनाई जा रही है। लोगों से लगातार कोविड गाइडलाइन का पालन करने की अपील की जा रही है। ऐसे में शुक्रवार को मलाइका अपने पेट डॉग कैस्पर के साथ वॉक पर नजर आईं। हालांकि उन्होंने चेहरे को मास्क से सुरक्षित कर रखा था। योगेन शाह ने उनका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। मुंबई में कोरोना के इन हालातों के बीच अभिनेत्री का इस तरह वॉक पर निकलना लोगों को बड़ा नागवार गुजरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी जमकर क्लास लगा दी। एक यूजर ने लिखा कि 'कोरोना को रोकने को लेकर एक तरफ सरकार तरह-तरह के उपाय अपना रही है। दूसरी तरफ ये सेलेब्स. . . । ' वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि 'यहां इंसान घर पर जिंदगी मौत के बीच लड़ रहे हैं, लेकिन इन्हें अपने डॉगी को घुमाना है। ' ज्यादातर यूजर्स ने अभिनेत्री को जमकर ट्रोल किया और कमेंट में खरी-खोटी सुनाई। एक अन्य ने लिखा कि 'ब्रेक द चेन में क्या मॉर्निंग वॉक की इजाजत है? ' ये पहली बार नहीं है जब मलाइका अपने डॉग को लेकर ट्रोल हुई हैं। इससे पहले भी मलाइका का मजाक बन चुका है। वहीं, मलाइका के अलावा भी कई स्टार्स लॉकडाउन में निकलने को लेकर ट्रोल हो चुके हैं। इनमें आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, सारा अली खान, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, दिशा पाटनी, टाइगर श्रॉफ शामिल हैं। ये सभी कोरोना के बीच वैकेशन पर निकले थे।
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२. मानसिक स्वतंत्रता - मनुष्य को अपने स्वतंत्र विचार रखने, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने धर्म की रक्षा का पूरा हक हो । हर मनुष्य को अपने विचारों के लिए बोलने और लिखने की और उनका प्रचार करने की भी पूरी आजादी हो, जबतक कि उसमे किसी दूसरे का नुकसान न होता हो ( क्योंकि राज्य का यह भी तो कर्तव्य है कि वह एक के अन्याय से दूसरे को बचावे ) ।
३. राजनैतिक स्वतंत्रता- देश के शासन में भाग लेने का प्रत्येक मनुष्य को अधिकार होना चाहिए। राज्य सभी मनुष्यों के हित के लिए है, इसलिए उसमे सभी का हिस्सा होना चाहिए। हरेक नागरिक को वोट देने का अधिकार होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक की राज्य मे एक हैसियत होनी चाहिए। अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष, ब्राह्मणदलित सबको बिना धार्मिक भेदभाव के एक समान अधिकार प्राम होने चाहिएँ । राज्य से सब एक समान लाभ उठा सकें ।
४. राष्ट्रीय स्वतंत्रता - प्रत्येक देश आजाद हो । जहाँ सर- कार ही विदेशी हो, वहाँ रिआया को क्या अधिकार होंगे? और वह राज्य भी वहाँ की रिआया का कहाँतक फायदा कर सकता है ?
: ३ : प्राण-रक्षा का मेरा अधिकार
मैंने पिछले पत्र मे लिखा था कि मनुष्य ने अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने के लिए ही समाज या राज्य की कल्पना की थी। उसमे उसका उद्देश्य यही था कि मनुष्य के अधिकारों पर बलवान आक्रमणकारी कब्जा न कर सकें । समाज शब्द ही बहुत से आदमियों की केन्द्रीय शक्ति के भाव को जाहिर करता है। समाज मे रहनेवाले व्यक्ति - एक-दूसरे की स्त्रार्थ - प्रवृत्ति से मनुष्य की प्रकृति के अन्दर जो पशुत्व छिपा हुआ है, उससे अपनी रक्षा करने के लिए ही अपनी शक्ति के कुछ भाग को एक स्थान पर इकट्ठा कर देते है । यही शक्ति सत्ता कहलाती है। राज्य भी इसी सत्ता का जबरदस्त उदाहरण है। इसका मतलब यह है कि सरकार महज राज्य करने की खातिर राज्य नहीं करतो, लेकिन वह राज्य के अन्दर रहनेवालों की प्रसन्नता के लिए ही राज्य करती है। इसलिए अच्छे राज्य की कसौटी ही यह है कि जिस राज्य मे मनुष्य को ज्यादा-सेज्यादा स्वतन्त्रता मिली हो - मनुष्य ज्यादा से ज्यादा सुखी हो, वही उत्तम राज्य है । यहाँ यह बात याद रखनी चाहिए कि उच्छृंखलता और स्वतन्त्रता का अर्थ एक नहीं है, ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी शब्द है। उच्छृ खलना में एक अत्याचारी मनुष्य की आजादी भले ही कुछ समय के लिए कायम रह सकती है, लेकिन
आम लोगों के लिए तो वह भीषण वन्धन की ही हालत होगी, क्योंकि
ऐसे समय मे उसकी अपनी आजादी हमेशा खतरे में रहती है । मनुष्य अपनी जिन-जिन स्वतन्त्रताओं की इच्छा करता है, उनमे सबसे पहली अपने जीने का अधिकार है। उसे अपने जीवन के बारे मे पूरी बेफिक्री होनी चाहिए। मानवजीवन भगवान की अनुपम देन है । वह ऐसी चीज नहीं कि उसे कोई यों ही छीन ले । इसलिए यदि हरेक नागरिक सारे समाज या राष्ट्र से यह आशा करे कि वह उसके शरीर की पूरी तौर से रक्षा करेगा, तो यह न केवल उचित और स्वाभाविक ही है, बल्कि जरूरी भी है। जैसा कि मैं पीछे लिख आया हूँ, मनुष्य ने अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने और अत्याचारी मनुष्य या हिंसक पशु से अपनी रक्षा करने के लिए ही अपनी शक्ति का कुछ अंश समाज मे केन्द्रित किया है। समाज का सदस्य वनकर उसने अपने ऊपर जो एक वन्धन लगाया है या समाज की रक्षा के लिए जो त्याग वह करता है, उसका उसे इतना तो बदला मिलना ही चाहिए कि वह अपनी जान-माल की चिन्ता से मुक्त हो । राष्ट्र या समाज ने मनुष्य को अगर उसकी शरीर-रक्षा का भी आश्वासन न दिया, तो मनुष्य को उससे लाभ ही क्या ? वह फिर उसकी चिन्ता क्यों करेगा ?
इसीलिए प्रत्येक राष्ट्र का सबसे पहला कर्तव्य यह है कि वह अपने सदस्य की जान की हिफाजत के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे । पुलिस की भी इसीलिए आवश्यकता है कि वह अत्याचारी मनुष्य और हिंसक पशु से प्रजा की रक्षा करे । जिस राज्य मे पुलिस की व्यवस्था अच्छी होती है, उसमे प्रजा अपने जान-माल को सुरक्षित समझती है और निश्चिन्त होकर अपनी उन्नति करती रहती है । जहाँ मनुष्य को अपने जीवन का भरोसा ही न हो, वहाँ वह उन्नति
प्राण रक्षा का मेरा अधिकार
क्या करेगा ? इक्के-टुक्के आक्रमणकारियों के हाथों से रक्षा करने मे पुलिस समर्थ हो जाती है, लेकिन जब आक्रमणकारी भी कोई समूह या विदेशी देश हो, तो उससे रक्षा करने के लिए सेना की जरूरत होती है। परन्तु केवल पुलिस या सेना की व्यवस्था से ही शरीररक्षा की गारण्टी नहीं हो जाती । बहुत-सी जगहों और मौकों पर पुलिस की मदद लेना वडा कठिन होजाता है। कहीं अकेले-टुकेले जाते हुए या रात को घर मे चोर-डाकुओं से सामना हो जाने की हालत मे तुरत ही पुलिस को बुलाना सम्भव नहीं होता । इसलिए हरेक नागरिक को सभ्य राष्ट्रों मे यह अधिकार होता है कि जरूरत पडने पर वह खुद सामना करनेवाले पर वार करके अपनी आत्मरक्षा करे । केवल आत्मरक्षा ही नहीं, अपने सगे-सम्बन्धियों, लड़के, स्त्री, मा-बाप, भाई-बन्धु की रक्षा के लिए भी हथियार उठाने का अधिकार उसे होना चाहिए । यह कोई निश्चित नहीं होता कि फला वक्त ही कोई विपत्ति आवेगी । इसलिए नागरिकों को हमेशा हथियार रखने की इजाजत होनी चाहिए । कानून में भी ऐसी राजायश होनी चाहिए कि हमला करनेवाले पर अपनी हिफाजत के लिए हथियार उठाने का अधिकार हो । अक्सर सव देशों मे त्रियो को यह अधिकार होता है कि यदि कोई आक्रमणकारी उनके सतीत्व पर हमला करने लगे, तो वे अपने सतीत्व की रक्षा के लिए उसकी जान तक ले सकती है । लेकिन यह हमेशा याद रखना चाहिए कि आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने मे भी एक मर्यादा तो रखनी ही पड़ेगी। एक जरा-सी मारपीट होने पर भी लोग एकदूसरे की जान लेने लगें, तो इससे वडी अव्यवस्था फैल जायगी । आत्मरक्षा का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण
यह मर्यादा भी है। मनुष्य का जीवन बहुमूल्य है, इस सिद्धान्त को दोनों हालतों मे-अपने पर हमले के समय भी और दूसरे पर हमला करते समय भी - याद रखना चाहिए ।
सरकार का फर्ज सिर्फ अपने राज्य में ही प्रजा की शरीररक्षा की व्यवस्था कर देने भर से पूरा नहीं हो जाता। उसका तो यह कर्तव्य है कि वह हमेशा इस बात की चौकसी करती रहे कि किसी दूसरे देश में भी अपने नागरिकों पर कोई अनुचित दवाव न डाला जाय । सभ्य, उन्नत और जिम्मेदार सरकार इस बात का हमेशा खयाल रखती है कि विदेशों में भी उनकी प्रजा पर कोई बिना वजह के आक्रमण न करे । यदि अपने किसी नागरिक की हत्या दूसरे देश मे हो जाय, तो सरकार दूसरे देश की सरकार से इसका जवाव मांगती है और ठीक वजह न मिलने पर उसका मुआवजा मांगती है। लेकिन आजाद, ऊँचे उठे हुए और शक्तिशाली राष्ट्र ही ऐसा करते हैं। हिन्दुस्तान जैसे गुलाम देशों की सरकार मे न तो अपनी जिम्मेदारी समझने की इच्छा है और न शक्ति । हम हिन्दुस्तानियों का विदेशों में कितना अपमान होता है, यह तुमसे छिपा नहीं है। इसका कारण हमारे देश की गुलामी है न कि दूसरी सरकारों की उपेक्षा । वलवान का सभी आदर करते है । गुलाम कमजोर हिन्दुस्तानी की कौन चिन्ता करेगा ? जब खुद हिन्दुस्तान मे ही हमारे जान-माल की खैर नहीं है तो विदेशी सरकारें क्यों इस बात की फिक्र करने लगीं ? सीमाप्रान्त मे कितनी स्त्रियाँ चुराई जाती है और कितने हिन्दुओं की हत्या हो जाती है, लेकिन सरकार ने कभी इतना बड़ा कदम नहीं उठाया जितना एक अंग्रेज स्त्री मिस एलिस के चुराये जाने पर उठाया गया था । सिर्फ आक्रमणकारी
प्राण-रक्षा का मेरा अधिकार
मनुष्य से ही नहीं, बल्कि हिसक पशुओं और बीमारियों से भी प्रजा की रक्षा करना राज्य का खास कर्तव्य है । यहाँ तो इतनी बुरी हालत है कि किसान हिल पशुओं से अपनी और अपनी खेती की रक्षा तक नहीं कर सकते । सूअर और रीछ आते है तथा गाँववालों को नुक्सान पहुंचा जाते हैं। वे कुछ नहीं कर सकते। कई रियासतों मे तो यदि खेती को नुक्सान पहुॅचानेवाले पशुओं को कोई मार दे, तो उसे ही राज्य की ओर से सजा मिलती है। कितनी भयंकर दशा है । इसका कारण यह है कि रियासती प्रजा अपने नागरिक अधिकारों को नहीं समझती और देसी राजा भी अपने कर्तव्य को नहीं पहचानते । प्रजा जब राजा को कर देती है, उसके बन्धन और नियम मानती है, क्या उसकी यह आशा करना अनुचित होगा कि राज्य उसकी प्राण रक्षा करेगा ? बाकी फिर दूसरे पत्र मे 1
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दो. मानसिक स्वतंत्रता - मनुष्य को अपने स्वतंत्र विचार रखने, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने धर्म की रक्षा का पूरा हक हो । हर मनुष्य को अपने विचारों के लिए बोलने और लिखने की और उनका प्रचार करने की भी पूरी आजादी हो, जबतक कि उसमे किसी दूसरे का नुकसान न होता हो । तीन. राजनैतिक स्वतंत्रता- देश के शासन में भाग लेने का प्रत्येक मनुष्य को अधिकार होना चाहिए। राज्य सभी मनुष्यों के हित के लिए है, इसलिए उसमे सभी का हिस्सा होना चाहिए। हरेक नागरिक को वोट देने का अधिकार होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक की राज्य मे एक हैसियत होनी चाहिए। अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष, ब्राह्मणदलित सबको बिना धार्मिक भेदभाव के एक समान अधिकार प्राम होने चाहिएँ । राज्य से सब एक समान लाभ उठा सकें । चार. राष्ट्रीय स्वतंत्रता - प्रत्येक देश आजाद हो । जहाँ सर- कार ही विदेशी हो, वहाँ रिआया को क्या अधिकार होंगे? और वह राज्य भी वहाँ की रिआया का कहाँतक फायदा कर सकता है ? : तीन : प्राण-रक्षा का मेरा अधिकार मैंने पिछले पत्र मे लिखा था कि मनुष्य ने अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने के लिए ही समाज या राज्य की कल्पना की थी। उसमे उसका उद्देश्य यही था कि मनुष्य के अधिकारों पर बलवान आक्रमणकारी कब्जा न कर सकें । समाज शब्द ही बहुत से आदमियों की केन्द्रीय शक्ति के भाव को जाहिर करता है। समाज मे रहनेवाले व्यक्ति - एक-दूसरे की स्त्रार्थ - प्रवृत्ति से मनुष्य की प्रकृति के अन्दर जो पशुत्व छिपा हुआ है, उससे अपनी रक्षा करने के लिए ही अपनी शक्ति के कुछ भाग को एक स्थान पर इकट्ठा कर देते है । यही शक्ति सत्ता कहलाती है। राज्य भी इसी सत्ता का जबरदस्त उदाहरण है। इसका मतलब यह है कि सरकार महज राज्य करने की खातिर राज्य नहीं करतो, लेकिन वह राज्य के अन्दर रहनेवालों की प्रसन्नता के लिए ही राज्य करती है। इसलिए अच्छे राज्य की कसौटी ही यह है कि जिस राज्य मे मनुष्य को ज्यादा-सेज्यादा स्वतन्त्रता मिली हो - मनुष्य ज्यादा से ज्यादा सुखी हो, वही उत्तम राज्य है । यहाँ यह बात याद रखनी चाहिए कि उच्छृंखलता और स्वतन्त्रता का अर्थ एक नहीं है, ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी शब्द है। उच्छृ खलना में एक अत्याचारी मनुष्य की आजादी भले ही कुछ समय के लिए कायम रह सकती है, लेकिन आम लोगों के लिए तो वह भीषण वन्धन की ही हालत होगी, क्योंकि ऐसे समय मे उसकी अपनी आजादी हमेशा खतरे में रहती है । मनुष्य अपनी जिन-जिन स्वतन्त्रताओं की इच्छा करता है, उनमे सबसे पहली अपने जीने का अधिकार है। उसे अपने जीवन के बारे मे पूरी बेफिक्री होनी चाहिए। मानवजीवन भगवान की अनुपम देन है । वह ऐसी चीज नहीं कि उसे कोई यों ही छीन ले । इसलिए यदि हरेक नागरिक सारे समाज या राष्ट्र से यह आशा करे कि वह उसके शरीर की पूरी तौर से रक्षा करेगा, तो यह न केवल उचित और स्वाभाविक ही है, बल्कि जरूरी भी है। जैसा कि मैं पीछे लिख आया हूँ, मनुष्य ने अपनी स्वतन्त्रता कायम रखने और अत्याचारी मनुष्य या हिंसक पशु से अपनी रक्षा करने के लिए ही अपनी शक्ति का कुछ अंश समाज मे केन्द्रित किया है। समाज का सदस्य वनकर उसने अपने ऊपर जो एक वन्धन लगाया है या समाज की रक्षा के लिए जो त्याग वह करता है, उसका उसे इतना तो बदला मिलना ही चाहिए कि वह अपनी जान-माल की चिन्ता से मुक्त हो । राष्ट्र या समाज ने मनुष्य को अगर उसकी शरीर-रक्षा का भी आश्वासन न दिया, तो मनुष्य को उससे लाभ ही क्या ? वह फिर उसकी चिन्ता क्यों करेगा ? इसीलिए प्रत्येक राष्ट्र का सबसे पहला कर्तव्य यह है कि वह अपने सदस्य की जान की हिफाजत के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे । पुलिस की भी इसीलिए आवश्यकता है कि वह अत्याचारी मनुष्य और हिंसक पशु से प्रजा की रक्षा करे । जिस राज्य मे पुलिस की व्यवस्था अच्छी होती है, उसमे प्रजा अपने जान-माल को सुरक्षित समझती है और निश्चिन्त होकर अपनी उन्नति करती रहती है । जहाँ मनुष्य को अपने जीवन का भरोसा ही न हो, वहाँ वह उन्नति प्राण रक्षा का मेरा अधिकार क्या करेगा ? इक्के-टुक्के आक्रमणकारियों के हाथों से रक्षा करने मे पुलिस समर्थ हो जाती है, लेकिन जब आक्रमणकारी भी कोई समूह या विदेशी देश हो, तो उससे रक्षा करने के लिए सेना की जरूरत होती है। परन्तु केवल पुलिस या सेना की व्यवस्था से ही शरीररक्षा की गारण्टी नहीं हो जाती । बहुत-सी जगहों और मौकों पर पुलिस की मदद लेना वडा कठिन होजाता है। कहीं अकेले-टुकेले जाते हुए या रात को घर मे चोर-डाकुओं से सामना हो जाने की हालत मे तुरत ही पुलिस को बुलाना सम्भव नहीं होता । इसलिए हरेक नागरिक को सभ्य राष्ट्रों मे यह अधिकार होता है कि जरूरत पडने पर वह खुद सामना करनेवाले पर वार करके अपनी आत्मरक्षा करे । केवल आत्मरक्षा ही नहीं, अपने सगे-सम्बन्धियों, लड़के, स्त्री, मा-बाप, भाई-बन्धु की रक्षा के लिए भी हथियार उठाने का अधिकार उसे होना चाहिए । यह कोई निश्चित नहीं होता कि फला वक्त ही कोई विपत्ति आवेगी । इसलिए नागरिकों को हमेशा हथियार रखने की इजाजत होनी चाहिए । कानून में भी ऐसी राजायश होनी चाहिए कि हमला करनेवाले पर अपनी हिफाजत के लिए हथियार उठाने का अधिकार हो । अक्सर सव देशों मे त्रियो को यह अधिकार होता है कि यदि कोई आक्रमणकारी उनके सतीत्व पर हमला करने लगे, तो वे अपने सतीत्व की रक्षा के लिए उसकी जान तक ले सकती है । लेकिन यह हमेशा याद रखना चाहिए कि आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने मे भी एक मर्यादा तो रखनी ही पड़ेगी। एक जरा-सी मारपीट होने पर भी लोग एकदूसरे की जान लेने लगें, तो इससे वडी अव्यवस्था फैल जायगी । आत्मरक्षा का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण यह मर्यादा भी है। मनुष्य का जीवन बहुमूल्य है, इस सिद्धान्त को दोनों हालतों मे-अपने पर हमले के समय भी और दूसरे पर हमला करते समय भी - याद रखना चाहिए । सरकार का फर्ज सिर्फ अपने राज्य में ही प्रजा की शरीररक्षा की व्यवस्था कर देने भर से पूरा नहीं हो जाता। उसका तो यह कर्तव्य है कि वह हमेशा इस बात की चौकसी करती रहे कि किसी दूसरे देश में भी अपने नागरिकों पर कोई अनुचित दवाव न डाला जाय । सभ्य, उन्नत और जिम्मेदार सरकार इस बात का हमेशा खयाल रखती है कि विदेशों में भी उनकी प्रजा पर कोई बिना वजह के आक्रमण न करे । यदि अपने किसी नागरिक की हत्या दूसरे देश मे हो जाय, तो सरकार दूसरे देश की सरकार से इसका जवाव मांगती है और ठीक वजह न मिलने पर उसका मुआवजा मांगती है। लेकिन आजाद, ऊँचे उठे हुए और शक्तिशाली राष्ट्र ही ऐसा करते हैं। हिन्दुस्तान जैसे गुलाम देशों की सरकार मे न तो अपनी जिम्मेदारी समझने की इच्छा है और न शक्ति । हम हिन्दुस्तानियों का विदेशों में कितना अपमान होता है, यह तुमसे छिपा नहीं है। इसका कारण हमारे देश की गुलामी है न कि दूसरी सरकारों की उपेक्षा । वलवान का सभी आदर करते है । गुलाम कमजोर हिन्दुस्तानी की कौन चिन्ता करेगा ? जब खुद हिन्दुस्तान मे ही हमारे जान-माल की खैर नहीं है तो विदेशी सरकारें क्यों इस बात की फिक्र करने लगीं ? सीमाप्रान्त मे कितनी स्त्रियाँ चुराई जाती है और कितने हिन्दुओं की हत्या हो जाती है, लेकिन सरकार ने कभी इतना बड़ा कदम नहीं उठाया जितना एक अंग्रेज स्त्री मिस एलिस के चुराये जाने पर उठाया गया था । सिर्फ आक्रमणकारी प्राण-रक्षा का मेरा अधिकार मनुष्य से ही नहीं, बल्कि हिसक पशुओं और बीमारियों से भी प्रजा की रक्षा करना राज्य का खास कर्तव्य है । यहाँ तो इतनी बुरी हालत है कि किसान हिल पशुओं से अपनी और अपनी खेती की रक्षा तक नहीं कर सकते । सूअर और रीछ आते है तथा गाँववालों को नुक्सान पहुंचा जाते हैं। वे कुछ नहीं कर सकते। कई रियासतों मे तो यदि खेती को नुक्सान पहुॅचानेवाले पशुओं को कोई मार दे, तो उसे ही राज्य की ओर से सजा मिलती है। कितनी भयंकर दशा है । इसका कारण यह है कि रियासती प्रजा अपने नागरिक अधिकारों को नहीं समझती और देसी राजा भी अपने कर्तव्य को नहीं पहचानते । प्रजा जब राजा को कर देती है, उसके बन्धन और नियम मानती है, क्या उसकी यह आशा करना अनुचित होगा कि राज्य उसकी प्राण रक्षा करेगा ? बाकी फिर दूसरे पत्र मे एक
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Varanasi Gyanvapi Case वाराणसी के ज्ञानवापी शृंगार गौरी प्रकरण में एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र को अदालत ने कमीशन से हटा दिया गया है। अब विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेंगे।
वाराणसी, जागरण संवाददाता। ज्ञानवापी शृंगार गौरी प्रकरण में एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र को अदालत ने कमीशन से हटा दिया गया है। अब विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेंगे। उन्हें रिपोर्ट देने के लिए दो दिन का वक्त दिया गया है। इसके साथ ही वादी पक्ष की ओर से दाखिल एक प्रार्थना पत्र पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं करते हुए कल सुनवाई की बात कही है। इस प्रार्थना पत्र में वादी पक्ष ने तहखाने के एक कुछ हिस्सों में रखे मलबे को हटाने और एक बंद हिस्से की दीवार को तोड़कर फिर से सर्वे करने की मांग की थी।
16 मई को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियो और फोटोग्राफी पूरी होने के बाद एडवोकेट कमिश्नर को मंगलवार को रिपोर्ट अदालत मे में दाखिल करने का आदेश दिया था। इस पर विशेष एडवोकेट कमिश्रनर की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया अदालत में दिया गया था। इसमें यह कहा गया था कि यह स्पष्ट किया जाए कि सर्वे की रिपोर्ट कौन दाखिल करेगा। इस प्रार्थना पत्र पर बहस के दौरान मुस्लिम पक्ष ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाया था। उनका कहना है कि उन्होंने एक बाहरी व्यक्ति को कार्यवाही में शामिल किया था जिसने कार्यवाही की गोपनीयता को भंग किया है। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अजय मिश्र को हटा दिया। इसके बाद विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
अदालत ने अजय मिश्र को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। छह व सात मई को कार्यवाही के बाद अदालत ने 13 से 16 मई तक फिर से ज्ञानवापी परिसर में फोटो व वीडियोग्राफी करने 17 मई इसकी रिपोर्ट 17 देने को कहा था। इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्न के साथ विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल और सहायक एडवोकेट कमिश्नर अजय प्रताप सिहं को नियुक्त किया था।
ज्ञानवापी मामले में अजय कुमार मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के पद से से हटा दिया गया है। कमिशन के काम में रुचि नहीं लेने और मीडिया में सूचनाएं लीक करने के आरोप लगने के बाद उनपर यह कार्रवाई की गई है। अब विशाल सिंह और अजय प्रताप सिंह सर्वे रिपोर्ट दाखिल करेंगे। इसके लिए दो दिन का समय दिया गया है। तालाब से मछली हटाने और दीवार गिराने वाली अर्जी पर बुधवार को फैसला होगा। कोर्ट ने कहा कि अब विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह 12 मई के बाद की कमिशन की कार्यवाही की रिपोर्ट स्वंय दाखिल करेंगे। सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह विशेष अधिवक्ता विशाल सिंह के निर्देशन में काम करेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि विशाल सिंह ने कहा है कि कमिशन रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 2 दिन का समय लगेगा। इस प्रार्थनापत्र को स्वीकार किया जाता है और उन्हें 2 दिन का समय दिया जाता है।
वाराणसी की कोर्ट में ज्ञानवापी के सर्वे को लेकर हो रही सुनवाई पूरी हो गई है। ज्ञानवापी सर्वे के दौरान एक शख्स को रोक दिया गया था। उन पर मीडिया में खबरें लीक करने का आरोप लगा था। आज उन्हें कैमरामैन का सहयोगी बताया गया। तीखी बहस के बाद वाराणसी कोर्ट में इस पर सुनवाई पूरी हो गई है। ज्ञानवापी सर्वे के दौरान मीडिया में लीक हुई खबरों को लेकर भी वकीलों में तीखी बहस हुई। मीडिया में बयान देने को लेेकर प्रतिवादी के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। ज्ञानवापी मस्जिद के कोर्ट कमिश्नर के सर्वे की रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने को लेकर आज तीनों कोर्ट कमिश्नरों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में समय बढ़ाने की अर्जी लगाई। इस बीच वादी की ओर से एक अर्जी दी गई शृंगार गौरी की ओर बंद दीवार हटाई जाए और नंदी के सामने बंद तहखाने के सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया जाए।
दोनों पक्षों की ओर से काफी ऊंची आवाज में बहस हो रही है। प्रतिवादी अधिवक्ता ने आपत्ति जताईं कि बिना कोर्ट कमीशन की कार्यवाही पूरे हुए बगैर सील की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। विपक्षी अधिवक्ता ने मांग की है कि बिना कार्यवाही की रिपोर्ट देखे सील हटाने का आदेश दिया जाए,जबकि वादी अधिवक्ता ने कहा कि जिसे विपक्षी अधिवक्ता द्वारा फव्वारा कहा जा रहा है, उसके नीचे लगे दरवाजे को खोलकर कमीशन की कार्यवाही करने के लिए अदालत आदेशित करे।
मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि फव्वारे को शिवलिंग बताकर पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है। इस पर मंगलवार को हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि फव्वारे और शिवलिंग के बीच का अंतर हमें पता है। उन्होंने कहा कि फव्वारा यदि होगा तो नीचे पूरा सिस्टम होगा पानी के निकलने का, लेकिन जिस तरह से उसका शिवलिंग का आकार है। उसमें कुछ डंडियां डाली गई थीं पर वो ज्यादा अंदर तक गई नहीं, तो शिवलिंग खंडित हुआ या नहीं यह तो मैं अभी बहुत पुख्ता तौर पर नहीं बता सकता, लेकिन मेरी और हिंदू पक्ष की नजर में वो एक शिवलिंग है।
मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे कोर्ट की गोपनीयता भंग हो। मुझे विशाल जी के आरोप पर हटाया गया। कोर्ट के आदेश का मैं सम्मान करूंगा लेकिन इस बात का कष्ट हमेशा रहेगा कि विशाल जी ने अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ण करने के लिए मुझे नीचा दिखाया है।
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Varanasi Gyanvapi Case वाराणसी के ज्ञानवापी शृंगार गौरी प्रकरण में एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र को अदालत ने कमीशन से हटा दिया गया है। अब विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेंगे। वाराणसी, जागरण संवाददाता। ज्ञानवापी शृंगार गौरी प्रकरण में एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र को अदालत ने कमीशन से हटा दिया गया है। अब विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेंगे। उन्हें रिपोर्ट देने के लिए दो दिन का वक्त दिया गया है। इसके साथ ही वादी पक्ष की ओर से दाखिल एक प्रार्थना पत्र पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं करते हुए कल सुनवाई की बात कही है। इस प्रार्थना पत्र में वादी पक्ष ने तहखाने के एक कुछ हिस्सों में रखे मलबे को हटाने और एक बंद हिस्से की दीवार को तोड़कर फिर से सर्वे करने की मांग की थी। सोलह मई को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियो और फोटोग्राफी पूरी होने के बाद एडवोकेट कमिश्नर को मंगलवार को रिपोर्ट अदालत मे में दाखिल करने का आदेश दिया था। इस पर विशेष एडवोकेट कमिश्रनर की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया अदालत में दिया गया था। इसमें यह कहा गया था कि यह स्पष्ट किया जाए कि सर्वे की रिपोर्ट कौन दाखिल करेगा। इस प्रार्थना पत्र पर बहस के दौरान मुस्लिम पक्ष ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाया था। उनका कहना है कि उन्होंने एक बाहरी व्यक्ति को कार्यवाही में शामिल किया था जिसने कार्यवाही की गोपनीयता को भंग किया है। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अजय मिश्र को हटा दिया। इसके बाद विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह रिपोर्ट दाखिल करेंगे। अदालत ने अजय मिश्र को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। छह व सात मई को कार्यवाही के बाद अदालत ने तेरह से सोलह मई तक फिर से ज्ञानवापी परिसर में फोटो व वीडियोग्राफी करने सत्रह मई इसकी रिपोर्ट सत्रह देने को कहा था। इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्न के साथ विशेष एडवोकेट कमिश्नर विशाल और सहायक एडवोकेट कमिश्नर अजय प्रताप सिहं को नियुक्त किया था। ज्ञानवापी मामले में अजय कुमार मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के पद से से हटा दिया गया है। कमिशन के काम में रुचि नहीं लेने और मीडिया में सूचनाएं लीक करने के आरोप लगने के बाद उनपर यह कार्रवाई की गई है। अब विशाल सिंह और अजय प्रताप सिंह सर्वे रिपोर्ट दाखिल करेंगे। इसके लिए दो दिन का समय दिया गया है। तालाब से मछली हटाने और दीवार गिराने वाली अर्जी पर बुधवार को फैसला होगा। कोर्ट ने कहा कि अब विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह बारह मई के बाद की कमिशन की कार्यवाही की रिपोर्ट स्वंय दाखिल करेंगे। सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह विशेष अधिवक्ता विशाल सिंह के निर्देशन में काम करेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि विशाल सिंह ने कहा है कि कमिशन रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम दो दिन का समय लगेगा। इस प्रार्थनापत्र को स्वीकार किया जाता है और उन्हें दो दिन का समय दिया जाता है। वाराणसी की कोर्ट में ज्ञानवापी के सर्वे को लेकर हो रही सुनवाई पूरी हो गई है। ज्ञानवापी सर्वे के दौरान एक शख्स को रोक दिया गया था। उन पर मीडिया में खबरें लीक करने का आरोप लगा था। आज उन्हें कैमरामैन का सहयोगी बताया गया। तीखी बहस के बाद वाराणसी कोर्ट में इस पर सुनवाई पूरी हो गई है। ज्ञानवापी सर्वे के दौरान मीडिया में लीक हुई खबरों को लेकर भी वकीलों में तीखी बहस हुई। मीडिया में बयान देने को लेेकर प्रतिवादी के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। ज्ञानवापी मस्जिद के कोर्ट कमिश्नर के सर्वे की रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने को लेकर आज तीनों कोर्ट कमिश्नरों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में समय बढ़ाने की अर्जी लगाई। इस बीच वादी की ओर से एक अर्जी दी गई शृंगार गौरी की ओर बंद दीवार हटाई जाए और नंदी के सामने बंद तहखाने के सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया जाए। दोनों पक्षों की ओर से काफी ऊंची आवाज में बहस हो रही है। प्रतिवादी अधिवक्ता ने आपत्ति जताईं कि बिना कोर्ट कमीशन की कार्यवाही पूरे हुए बगैर सील की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। विपक्षी अधिवक्ता ने मांग की है कि बिना कार्यवाही की रिपोर्ट देखे सील हटाने का आदेश दिया जाए,जबकि वादी अधिवक्ता ने कहा कि जिसे विपक्षी अधिवक्ता द्वारा फव्वारा कहा जा रहा है, उसके नीचे लगे दरवाजे को खोलकर कमीशन की कार्यवाही करने के लिए अदालत आदेशित करे। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि फव्वारे को शिवलिंग बताकर पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है। इस पर मंगलवार को हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि फव्वारे और शिवलिंग के बीच का अंतर हमें पता है। उन्होंने कहा कि फव्वारा यदि होगा तो नीचे पूरा सिस्टम होगा पानी के निकलने का, लेकिन जिस तरह से उसका शिवलिंग का आकार है। उसमें कुछ डंडियां डाली गई थीं पर वो ज्यादा अंदर तक गई नहीं, तो शिवलिंग खंडित हुआ या नहीं यह तो मैं अभी बहुत पुख्ता तौर पर नहीं बता सकता, लेकिन मेरी और हिंदू पक्ष की नजर में वो एक शिवलिंग है। मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे कोर्ट की गोपनीयता भंग हो। मुझे विशाल जी के आरोप पर हटाया गया। कोर्ट के आदेश का मैं सम्मान करूंगा लेकिन इस बात का कष्ट हमेशा रहेगा कि विशाल जी ने अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ण करने के लिए मुझे नीचा दिखाया है।
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* भक्त चन्द्रहास *
शासक थे । उनके सुयोग्य पुत्र मदन तथा अमल उनकी राज्यकार्य में सहायता करते थे। उनके ' विषया' नामकी एक सुन्दरी कन्या थी । मन्त्रीकी रुचि केवल राजकार्य और धन एकत्र करनेमें ही थी; किंतु उनके पुत्र मदनमे भगवान्की भक्ति थी । वह साधु-संतोंका सेवक था । इसलिये मन्त्रीके महलमे जहाँ विलास तथा राग-रङ्ग चलता था, वहीं कभी-कभी संत भी एकत्र हो जाते थे । भगवान्की पावन कथा भी होती थी। अतिथि सत्कार तथा भगवन्नामकीर्तन भी होते थे । इन कार्योंमे रुचि न होनेपर भी मन्त्री अपने पुत्रको रोकते नहीं थे। एक दिन मन्त्रीके महलमे ऋषिगण बैठे थे । भगवान्की कथा हो रही थी। उसी समय सड़कपर भवनके सामनेसे भगवन्नाम- कीर्तन करते हुए चन्द्रहास बालकोकी मण्डलीके साथ निकले । बच्चोकी अत्यन्त मधुर कीर्तन- ध्वनि सुनकर ऋषियोके कहनेसे मदनने सबको वहीं बुला लिया । चन्द्रहासके साथ बालक नाचनेगाने लगे । भन्त्री धृष्टबुद्धि भी इसी समय वहाँ आ गये। मुनियोने तेजस्वी बालक चन्द्रहासको तन्मय होकर कीर्तन करते देखा। वे मुग्ध हो गये। कीर्तन समाप्त होनेपर स्नेहपूर्वक समीप बुलाकर ऋषियोंने उन्हें बैठा लिया और उनके शरीरके लक्षणोको देखने लगे। ऋषियोंने चन्द्रहासके शारीरिक लक्षण देखकर धृष्टबुद्धिसे कहा- 'मन्त्रिवर ! तुम इस बालकका प्रेमपूर्वक पालन करो । इसे अपने घर रक्खो । यही तुम्हारी सम्पूर्ण सम्पत्तिका स्वामी तथा इस देशका नरेश होगा ।"
'एक अज्ञात-कुल-शील, राहका भिखारी बालक मेरी सम्पत्तिका स्वामी होगा ।' यह बात धृष्टबुद्धिके हृदयमे तीरसी लगी । वे तो अपने लड़केको राजा बनानेका स्वप्न देख रहे थे । अब एक भिक्षुक-सा लड़का उनकी सारी इच्छाओको नष्ट कर दे, यह उन्हें सहन नहीं हो रहा था। उन्होने किसीसे कुछ कहा नहीं, पर सब लड़कोको मिठाई देनेके बहाने घरके भीतर ले गया । मिठाई देकर दूसरे लड़कों को तो उन्होंने विदा कर दिया, केवल चन्द्रहासको रोक लिया। एक विश्वासी वधिकको बुलाकर उसे चुपचाप समझाकर उसके साथ चन्द्रहासको भेज दिया।
वधिकको पुरस्कारका भारी लोभ मन्त्रीने दिया था। चन्द्रशसने जब देखा कि मुझे यह सुनसान जगलमें रातके समय लाया है, तब इसका उद्देश्य समझकर कहा - 'भाई । तुम मुझे भगवान् की पूजा कर लेने दो, तब मारमा ।" वविफने
अनुमति दे दी । चन्द्रहासने शालग्रामजीकी मूर्ति निकालकर उनकी पूजा की और उनके सम्मुख गद्गद कण्ठसे स्तुति करने लगा। भोले बालकका सुन्दर रूप, मधुर स्वर तथा भगवान्की भक्ति देखकर वधिककी आँखोंमे भी ऑसू आ गये । उसका हृदय एक निरपराध बालकको मारना स्वीकार नहीं करता था । परंतु उसे मन्त्रीका भय था । उसने देखा कि चन्द्रहासके एक पैरमे छः एगुलियाँ हैं। वधिकने तलवारसे जो एक अंगुली अधिक थी, उसे काट लिया और बालकको वहीं छोड़कर वह लौट गया । धृष्टबुद्धि वह अंगुली देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें लगा कि 'अपने बुद्धि-कौशलसे ऋषियोकी अमोघ वाणी मैंने झूठी कर दी।
कुन्तलपुर राज्यके अधीन एक छोटी रियासत थीचन्दनपुर । वहाँके नरेश कुलिन्दक किसी कार्य से बड़े सबेरे वनकी ओरसे घोड़ेपर चढ़े जा रहे थे। उनके कानोंमे बड़ी मधुर भगवन्नाम-कीर्तन-ध्वनि पड़ी । कटी अँगुलीकी पीड़ासे भूमिमे पड़े-पड़े चन्द्रहास करुण-कीर्तन कर रहे थे। राजाने कुछ दूरसे बड़े आश्चर्यसे देखा कि एक छोटा देवकुमार जैसा वालक भूमिपर पड़ा है। उसके चारो ओर अद्भुत प्रकाश फैला है। वनकी हरिणियाँ उसके पैर चाट रही हैं। पक्षी उसके ऊपर पंख फैलाकर छाया किये हुए हैं और उसके लिये वृक्षोंसे पके फल ला रहे हैं। राजाके और पास जानेपर पशु-पक्षी वनमें चले गये । राजाके कोई सन्तान नहीं थी। उन्होंने सोचा कि 'भगवान्ने मेरे लिये ही यह वैष्णव देवकुमार भेजा है।" घोड़ेसे उतरकर बड़े स्नेहसे चन्द्रहासको उन्होने गोदमें उठाया। उनके शरीरकी धूलि पोंछी और उन्हें अपने राजभवनमे ले आये ।
चन्द्रहास - अब चन्दनपुरके युवराज हो गये । यज्ञोपवीतसंस्कार होनेके पश्चात् गुरुके यहाँ रहकर उन्होंने वेद, वेदाङ्ग तथा शास्त्रों का अध्ययन किया। राजकुमारके योग्य अस्त्रशस्त्र चलाना तथा नीतिशास्त्रादि सीखा । अपने सद्गुणों से वे राजपरिवारके लिये प्राणके समान प्रिय हो गये। राजाने उन्हींपर राज्यका भार छोड़ दिया। राजकुमारके प्रबन्धसे छोटी-सी रियासत हरिगुणगानसे पूर्ण हो गयी। घर-घर हरिचर्चा होने लगी । सब लोग एकादशीव्रत करने लगे। पाठशालाओमें हरिगुणगान अनिवार्य हो गया ।
चन्दनपुर रियासतकी ओरसे कुन्तलपुरको दस हजार स्वर्णमुद्राएँ 'कर' के रूप में प्रतिवर्ष दी जाती थीं। चन्द्रहासने उन मुद्राओंके साथ और भी बहुत से घन-रखादि उपहार
* प्रभु-पद-रत भव-विरत मित बंदों भक्त उदार *
भेजे । धृष्टवुद्धिने जब चन्दनपुर राज्यके ऐश्वर्य एवं वहाँके युवराजके सुप्रबन्धकी बहुत प्रशसा सुनी, तब स्वयं वहाँकी व्यवस्था देखने वे चन्दनपुर आये । राजा तथा राजकुमारने उनका हृदयसे स्वागत किया। यहाॅ आकर जब धृष्टबुद्धिने चन्द्रहासको पहचाना, तब उनका हृदय व्याकुल हो गया । उन्होंने इस लड़केको मरवा डालनेका पूरा निश्चय कर लिया । स्नेह दिखाते हुए वे राजकुमारसे मिले। उन्होंने एक पत्र देकर कहा - 'युवराज ! बहुत ही आवश्यक काम है और दूसरे किसीपर मेरा विश्वास नहीं । तुम स्वयं यह पत्र लेकर कुन्तलपुर जाओ । मार्गमे पत्र खुलने न पाये । कोई इस बातको न जाने। इसे मदनको ही देना ।"
चन्द्रहास घोड़ेपर चढकर अकेले ही पत्र लेकर कुन्तलपुरको चल पड़े । दिनके तीसरे पहर वे कुन्तलपुरके पास वहाँके राजाके बगीचेमें पहुॅचे। बहुत प्यासे और थके थे, अतः घोड़ेको पानी पिलाकर एक ओर बॉध दिया और स्वयं सरोवरमें जल पीकर एक वृक्षकी शीतल छायामें लेट गये । लेटते ही उन्हें निद्रा आ गयी। उसी समय उस बगीचे में राजकुमारी चम्पकमालिनी अपनी सखियो तथा मन्त्रीकी कन्या 'विषया' के साथ घूमने आयी थी । संयोगवश अकेली विषया उधर चली आयी, जहाँ चन्द्रहास सोये थे। इस परम सुन्दर युवकको देखकर वह मुग्ध हो गयी और ध्यानसे उसे देखने लगी। उसे निद्रित कुमारके हाथ मे एक पत्र दीख पड़ा । कुतूहलवश उसने धीरेसे पत्र खींच लिया और पढ़ने लगी। पत्र उसके पिताका था । उसमें मन्त्रीने अपने पुत्रको लिखा 'इस राजकुमारको पहुँचते ही विष दे देना। इसके कुल, शूरता, विद्यां आदिका कुछ भी विचार न करके मेरे आदेशका तुरंत पालन करना ।" मन्त्रीकी कन्याको एक बार पत्र पढकर बड़ा दुःख हुआ । उसकी समझमे ही न आया कि पिताजी ऐसे सुन्दर देवकुमारको क्यों विष देना चाहते हैं । सहसा उसे लगा कि पिताजी इससे मेरा विवाह करना चाहते हैं । वे मेरा नाम लिखते समय भूलसे 'या' अक्षर छोड़ गये । उसने भगवान्के प्रति कृतज्ञता प्रकट की कि 'पत्र मेरे हाथ लगा; कहीं दूसरेको मिलता तो कितना अनर्थ होता ।' अपने नेत्रके काजलसे उसने पत्र में 'विष' के आगे उससे सटाकर 'या' लिख दिया, जिससे ' विषया दे देना' पढ़ा जाने लगा । पत्रको बंद करके निद्रित राजकुमारके हाथमें ज्यों-का-त्यों रखकर यह शीघ्रतासे चली गयी।
चन्द्रहासकी जब निद्रा खुली, सय वे शीघ्रतापूर्वक मन्त्रीके
घर गये । मन्त्रीके पुत्र मदनने पत्र देखा और ब्राह्मणको बुलाकर उसी दिन गोधूलि मुहूर्तमें चन्द्रहाससे उन्होंने अपनी बहिनका विवाह कर दिया। विवाह के समय कुन्तलपुरनरेश स्वयं भी पधारे । चन्द्रहासको देखकर उन्हें लगा कि 'मेरी कन्याके लिये भी यही योग्य वर है।' उन्होंने चन्दनपुरके इस युवराजकी विद्या, बुद्धि, शूरता आदिकी प्रशंसा बहुत सुन रक्खी थी। अब राजपुत्रीका विवाह भी चन्द्रहाससे करनेका उन्होंने निश्चय कर लिया ।
धृष्टबुद्धि तीन दिन बाद लौटे । यहाँकी स्थिति देखकर वे क्रोधके मारे पागल हो गये । उन्होने सोचा - भले मेरी कन्या विधवा हो जाय, पर इस शत्रुका वध में अवश्य कराके रहूँगा ।' द्वेपसे अंधे हुए हृदयकी यही स्थिति होती है। अपने हृदयकी बात मन्त्रीने किसीसे कही नहीं । नगरसे याहर पर्वतपर एक देवीका मन्दिर था । धृष्टत्रुद्धिने एक क्रूर वधिकको वहाँ यह समझाकर भेज दिया कि 'जो कोई देवीकी पूजा करने आये, उसे तुम मार डालना ।' चन्द्रहासको उसने यह बताकर कि 'भवानीकी पूजा उसकी कुलप्रथाके अनुसार होनी चाहिये सायंकाल देवीकी पूजा करनेका आदेश दिया।
इधर कुन्तलपुर-नरेशके मनमें वैराग्य हुआ। ऐसे उत्तम कार्यको करनेमें सत्पुरुष देर नहीं करते । राजाने मन्त्रीपुत्र मदनसे कहा - "बेटा ! तुम्हारे बहनोई चन्द्रहास बड़े सुयोग्य हैं। उन्हें भगवान्ने ही यहाँ भेजा है। मैं आज ही उनके साथ राजकुमारीका ब्याह कर देना चाहता हूँ । प्रातःकाल उन्हें सिंहासन पर बैठाकर मैं तपस्या करने वन चला जाऊँगा । तुम उन्हें तुरंत मेरे पास भेज दो ।'
मनुष्यकी कुटिलता, दुष्टता, प्रयत्न क्या अर्थ रखते हैं। वह दयामय गोपाल जो करना चाहे, उसे कौन टाल सकता है। चन्द्रहास पूजाकी सामग्री लिये मन्दिरकी ओर जा रहे थे । मन्त्रिपुत्र मदन राजाका सन्देश लिये बड़ी उमंगसे उन्हें मार्गमे मिला । मदनने पूजाका पात्र स्वयं ले लिया उसने राजभवन भेज दिया । जिस मुहूर्तमे धृष्टबुद्धिने यह कहकर कि - 'मैं देवीची पूजा कर आता हॅू' चन्द्रहासको चन्द्रहासके वधकी व्यवस्था की थी, उसी मुहूर्तमे राजभवनमें मन्दिरमें वधिकने उसी समय मन्त्रीके पुत्र मदनका सिर चन्द्रहास राजकुमारीका पाणिग्रहण कर रहे थे और देवीके
काट डाला !
पृष्ठबुद्धिको जब पता लगा कि चन्द्रहास तो राजकुमारीसे
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* भक्त चन्द्रहास * शासक थे । उनके सुयोग्य पुत्र मदन तथा अमल उनकी राज्यकार्य में सहायता करते थे। उनके ' विषया' नामकी एक सुन्दरी कन्या थी । मन्त्रीकी रुचि केवल राजकार्य और धन एकत्र करनेमें ही थी; किंतु उनके पुत्र मदनमे भगवान्की भक्ति थी । वह साधु-संतोंका सेवक था । इसलिये मन्त्रीके महलमे जहाँ विलास तथा राग-रङ्ग चलता था, वहीं कभी-कभी संत भी एकत्र हो जाते थे । भगवान्की पावन कथा भी होती थी। अतिथि सत्कार तथा भगवन्नामकीर्तन भी होते थे । इन कार्योंमे रुचि न होनेपर भी मन्त्री अपने पुत्रको रोकते नहीं थे। एक दिन मन्त्रीके महलमे ऋषिगण बैठे थे । भगवान्की कथा हो रही थी। उसी समय सड़कपर भवनके सामनेसे भगवन्नाम- कीर्तन करते हुए चन्द्रहास बालकोकी मण्डलीके साथ निकले । बच्चोकी अत्यन्त मधुर कीर्तन- ध्वनि सुनकर ऋषियोके कहनेसे मदनने सबको वहीं बुला लिया । चन्द्रहासके साथ बालक नाचनेगाने लगे । भन्त्री धृष्टबुद्धि भी इसी समय वहाँ आ गये। मुनियोने तेजस्वी बालक चन्द्रहासको तन्मय होकर कीर्तन करते देखा। वे मुग्ध हो गये। कीर्तन समाप्त होनेपर स्नेहपूर्वक समीप बुलाकर ऋषियोंने उन्हें बैठा लिया और उनके शरीरके लक्षणोको देखने लगे। ऋषियोंने चन्द्रहासके शारीरिक लक्षण देखकर धृष्टबुद्धिसे कहा- 'मन्त्रिवर ! तुम इस बालकका प्रेमपूर्वक पालन करो । इसे अपने घर रक्खो । यही तुम्हारी सम्पूर्ण सम्पत्तिका स्वामी तथा इस देशका नरेश होगा ।" 'एक अज्ञात-कुल-शील, राहका भिखारी बालक मेरी सम्पत्तिका स्वामी होगा ।' यह बात धृष्टबुद्धिके हृदयमे तीरसी लगी । वे तो अपने लड़केको राजा बनानेका स्वप्न देख रहे थे । अब एक भिक्षुक-सा लड़का उनकी सारी इच्छाओको नष्ट कर दे, यह उन्हें सहन नहीं हो रहा था। उन्होने किसीसे कुछ कहा नहीं, पर सब लड़कोको मिठाई देनेके बहाने घरके भीतर ले गया । मिठाई देकर दूसरे लड़कों को तो उन्होंने विदा कर दिया, केवल चन्द्रहासको रोक लिया। एक विश्वासी वधिकको बुलाकर उसे चुपचाप समझाकर उसके साथ चन्द्रहासको भेज दिया। वधिकको पुरस्कारका भारी लोभ मन्त्रीने दिया था। चन्द्रशसने जब देखा कि मुझे यह सुनसान जगलमें रातके समय लाया है, तब इसका उद्देश्य समझकर कहा - 'भाई । तुम मुझे भगवान् की पूजा कर लेने दो, तब मारमा ।" वविफने अनुमति दे दी । चन्द्रहासने शालग्रामजीकी मूर्ति निकालकर उनकी पूजा की और उनके सम्मुख गद्गद कण्ठसे स्तुति करने लगा। भोले बालकका सुन्दर रूप, मधुर स्वर तथा भगवान्की भक्ति देखकर वधिककी आँखोंमे भी ऑसू आ गये । उसका हृदय एक निरपराध बालकको मारना स्वीकार नहीं करता था । परंतु उसे मन्त्रीका भय था । उसने देखा कि चन्द्रहासके एक पैरमे छः एगुलियाँ हैं। वधिकने तलवारसे जो एक अंगुली अधिक थी, उसे काट लिया और बालकको वहीं छोड़कर वह लौट गया । धृष्टबुद्धि वह अंगुली देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें लगा कि 'अपने बुद्धि-कौशलसे ऋषियोकी अमोघ वाणी मैंने झूठी कर दी। कुन्तलपुर राज्यके अधीन एक छोटी रियासत थीचन्दनपुर । वहाँके नरेश कुलिन्दक किसी कार्य से बड़े सबेरे वनकी ओरसे घोड़ेपर चढ़े जा रहे थे। उनके कानोंमे बड़ी मधुर भगवन्नाम-कीर्तन-ध्वनि पड़ी । कटी अँगुलीकी पीड़ासे भूमिमे पड़े-पड़े चन्द्रहास करुण-कीर्तन कर रहे थे। राजाने कुछ दूरसे बड़े आश्चर्यसे देखा कि एक छोटा देवकुमार जैसा वालक भूमिपर पड़ा है। उसके चारो ओर अद्भुत प्रकाश फैला है। वनकी हरिणियाँ उसके पैर चाट रही हैं। पक्षी उसके ऊपर पंख फैलाकर छाया किये हुए हैं और उसके लिये वृक्षोंसे पके फल ला रहे हैं। राजाके और पास जानेपर पशु-पक्षी वनमें चले गये । राजाके कोई सन्तान नहीं थी। उन्होंने सोचा कि 'भगवान्ने मेरे लिये ही यह वैष्णव देवकुमार भेजा है।" घोड़ेसे उतरकर बड़े स्नेहसे चन्द्रहासको उन्होने गोदमें उठाया। उनके शरीरकी धूलि पोंछी और उन्हें अपने राजभवनमे ले आये । चन्द्रहास - अब चन्दनपुरके युवराज हो गये । यज्ञोपवीतसंस्कार होनेके पश्चात् गुरुके यहाँ रहकर उन्होंने वेद, वेदाङ्ग तथा शास्त्रों का अध्ययन किया। राजकुमारके योग्य अस्त्रशस्त्र चलाना तथा नीतिशास्त्रादि सीखा । अपने सद्गुणों से वे राजपरिवारके लिये प्राणके समान प्रिय हो गये। राजाने उन्हींपर राज्यका भार छोड़ दिया। राजकुमारके प्रबन्धसे छोटी-सी रियासत हरिगुणगानसे पूर्ण हो गयी। घर-घर हरिचर्चा होने लगी । सब लोग एकादशीव्रत करने लगे। पाठशालाओमें हरिगुणगान अनिवार्य हो गया । चन्दनपुर रियासतकी ओरसे कुन्तलपुरको दस हजार स्वर्णमुद्राएँ 'कर' के रूप में प्रतिवर्ष दी जाती थीं। चन्द्रहासने उन मुद्राओंके साथ और भी बहुत से घन-रखादि उपहार * प्रभु-पद-रत भव-विरत मित बंदों भक्त उदार * भेजे । धृष्टवुद्धिने जब चन्दनपुर राज्यके ऐश्वर्य एवं वहाँके युवराजके सुप्रबन्धकी बहुत प्रशसा सुनी, तब स्वयं वहाँकी व्यवस्था देखने वे चन्दनपुर आये । राजा तथा राजकुमारने उनका हृदयसे स्वागत किया। यहाॅ आकर जब धृष्टबुद्धिने चन्द्रहासको पहचाना, तब उनका हृदय व्याकुल हो गया । उन्होंने इस लड़केको मरवा डालनेका पूरा निश्चय कर लिया । स्नेह दिखाते हुए वे राजकुमारसे मिले। उन्होंने एक पत्र देकर कहा - 'युवराज ! बहुत ही आवश्यक काम है और दूसरे किसीपर मेरा विश्वास नहीं । तुम स्वयं यह पत्र लेकर कुन्तलपुर जाओ । मार्गमे पत्र खुलने न पाये । कोई इस बातको न जाने। इसे मदनको ही देना ।" चन्द्रहास घोड़ेपर चढकर अकेले ही पत्र लेकर कुन्तलपुरको चल पड़े । दिनके तीसरे पहर वे कुन्तलपुरके पास वहाँके राजाके बगीचेमें पहुॅचे। बहुत प्यासे और थके थे, अतः घोड़ेको पानी पिलाकर एक ओर बॉध दिया और स्वयं सरोवरमें जल पीकर एक वृक्षकी शीतल छायामें लेट गये । लेटते ही उन्हें निद्रा आ गयी। उसी समय उस बगीचे में राजकुमारी चम्पकमालिनी अपनी सखियो तथा मन्त्रीकी कन्या 'विषया' के साथ घूमने आयी थी । संयोगवश अकेली विषया उधर चली आयी, जहाँ चन्द्रहास सोये थे। इस परम सुन्दर युवकको देखकर वह मुग्ध हो गयी और ध्यानसे उसे देखने लगी। उसे निद्रित कुमारके हाथ मे एक पत्र दीख पड़ा । कुतूहलवश उसने धीरेसे पत्र खींच लिया और पढ़ने लगी। पत्र उसके पिताका था । उसमें मन्त्रीने अपने पुत्रको लिखा 'इस राजकुमारको पहुँचते ही विष दे देना। इसके कुल, शूरता, विद्यां आदिका कुछ भी विचार न करके मेरे आदेशका तुरंत पालन करना ।" मन्त्रीकी कन्याको एक बार पत्र पढकर बड़ा दुःख हुआ । उसकी समझमे ही न आया कि पिताजी ऐसे सुन्दर देवकुमारको क्यों विष देना चाहते हैं । सहसा उसे लगा कि पिताजी इससे मेरा विवाह करना चाहते हैं । वे मेरा नाम लिखते समय भूलसे 'या' अक्षर छोड़ गये । उसने भगवान्के प्रति कृतज्ञता प्रकट की कि 'पत्र मेरे हाथ लगा; कहीं दूसरेको मिलता तो कितना अनर्थ होता ।' अपने नेत्रके काजलसे उसने पत्र में 'विष' के आगे उससे सटाकर 'या' लिख दिया, जिससे ' विषया दे देना' पढ़ा जाने लगा । पत्रको बंद करके निद्रित राजकुमारके हाथमें ज्यों-का-त्यों रखकर यह शीघ्रतासे चली गयी। चन्द्रहासकी जब निद्रा खुली, सय वे शीघ्रतापूर्वक मन्त्रीके घर गये । मन्त्रीके पुत्र मदनने पत्र देखा और ब्राह्मणको बुलाकर उसी दिन गोधूलि मुहूर्तमें चन्द्रहाससे उन्होंने अपनी बहिनका विवाह कर दिया। विवाह के समय कुन्तलपुरनरेश स्वयं भी पधारे । चन्द्रहासको देखकर उन्हें लगा कि 'मेरी कन्याके लिये भी यही योग्य वर है।' उन्होंने चन्दनपुरके इस युवराजकी विद्या, बुद्धि, शूरता आदिकी प्रशंसा बहुत सुन रक्खी थी। अब राजपुत्रीका विवाह भी चन्द्रहाससे करनेका उन्होंने निश्चय कर लिया । धृष्टबुद्धि तीन दिन बाद लौटे । यहाँकी स्थिति देखकर वे क्रोधके मारे पागल हो गये । उन्होने सोचा - भले मेरी कन्या विधवा हो जाय, पर इस शत्रुका वध में अवश्य कराके रहूँगा ।' द्वेपसे अंधे हुए हृदयकी यही स्थिति होती है। अपने हृदयकी बात मन्त्रीने किसीसे कही नहीं । नगरसे याहर पर्वतपर एक देवीका मन्दिर था । धृष्टत्रुद्धिने एक क्रूर वधिकको वहाँ यह समझाकर भेज दिया कि 'जो कोई देवीकी पूजा करने आये, उसे तुम मार डालना ।' चन्द्रहासको उसने यह बताकर कि 'भवानीकी पूजा उसकी कुलप्रथाके अनुसार होनी चाहिये सायंकाल देवीकी पूजा करनेका आदेश दिया। इधर कुन्तलपुर-नरेशके मनमें वैराग्य हुआ। ऐसे उत्तम कार्यको करनेमें सत्पुरुष देर नहीं करते । राजाने मन्त्रीपुत्र मदनसे कहा - "बेटा ! तुम्हारे बहनोई चन्द्रहास बड़े सुयोग्य हैं। उन्हें भगवान्ने ही यहाँ भेजा है। मैं आज ही उनके साथ राजकुमारीका ब्याह कर देना चाहता हूँ । प्रातःकाल उन्हें सिंहासन पर बैठाकर मैं तपस्या करने वन चला जाऊँगा । तुम उन्हें तुरंत मेरे पास भेज दो ।' मनुष्यकी कुटिलता, दुष्टता, प्रयत्न क्या अर्थ रखते हैं। वह दयामय गोपाल जो करना चाहे, उसे कौन टाल सकता है। चन्द्रहास पूजाकी सामग्री लिये मन्दिरकी ओर जा रहे थे । मन्त्रिपुत्र मदन राजाका सन्देश लिये बड़ी उमंगसे उन्हें मार्गमे मिला । मदनने पूजाका पात्र स्वयं ले लिया उसने राजभवन भेज दिया । जिस मुहूर्तमे धृष्टबुद्धिने यह कहकर कि - 'मैं देवीची पूजा कर आता हॅू' चन्द्रहासको चन्द्रहासके वधकी व्यवस्था की थी, उसी मुहूर्तमे राजभवनमें मन्दिरमें वधिकने उसी समय मन्त्रीके पुत्र मदनका सिर चन्द्रहास राजकुमारीका पाणिग्रहण कर रहे थे और देवीके काट डाला ! पृष्ठबुद्धिको जब पता लगा कि चन्द्रहास तो राजकुमारीसे
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने आज गुरूद्वारा बंगला साहिब में नतमस्तक होकर गुरू चरणो में अपना आकिदा भेंट किया। अपनी धर्मपत्नी के साथ गुरूद्वारा साहिब आए जंग को दिल्ली सिख गुरूद्वारा फ्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी. के. तथा महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा द्वारा सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। बाबा बघेल सिंह मल्टीमीडिया संग्रहालय में सिख इतिहास की जानकारी लेने के बाद जंग ने अपनी पत्नी के साथ जोड़ाघर में जूतो को साफ तथा पॉलिश करने की सेवा भी निभाई। गुरूद्वारा साहिब में आकर मन को सूकून मिलने का दावा करते हुए जंग ने कमेटी फ्रबंधको द्वारा गुरूनानक साहिब के फ्रकाश पर्व के अवसर पर होने वाले समागमो के दौरान हाजरी भरने की की गई पेशकश को कबूलने के साथ ही गुरूघरो के साथ सबंधित सभी मसलो को पहल के आधार पर हल करने का भी भरोसा दिया। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के वरिष्" उपाध्यक्ष रविन्दर सिंह खुराना, उपाध्यक्ष तनवंत सिंह, संयुक्त सचिव हरमीत सिंह कालका, वरिष्" अकाली नेता अवतार सिंह हित, ओंकार सिंह थापर, कुलदीप सिंह भोगल, कुलमोहन सिंह, दिल्ली कमेटी सदस्य परमजीत सिंह राणा, दर्शन सिंह, रवैल सिंह, अमरजीत सिंह पप्पू, चमन सिंह, हरविन्दर सिंह के. पी. , परमजीत सिंह चंढोक, कुलदीप सिंह साहनी, इन्द्रजीत सिंह मौंटी, कैप्टन इन्द्रफ्रीत सिंह, जसबीर सिंह जस्सी, कुलवंत सिंह बा" विधायक जतिन्दर सिंह शन्टी तथा विकम सिंह मौजूद थे।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने आज गुरूद्वारा बंगला साहिब में नतमस्तक होकर गुरू चरणो में अपना आकिदा भेंट किया। अपनी धर्मपत्नी के साथ गुरूद्वारा साहिब आए जंग को दिल्ली सिख गुरूद्वारा फ्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी. के. तथा महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा द्वारा सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। बाबा बघेल सिंह मल्टीमीडिया संग्रहालय में सिख इतिहास की जानकारी लेने के बाद जंग ने अपनी पत्नी के साथ जोड़ाघर में जूतो को साफ तथा पॉलिश करने की सेवा भी निभाई। गुरूद्वारा साहिब में आकर मन को सूकून मिलने का दावा करते हुए जंग ने कमेटी फ्रबंधको द्वारा गुरूनानक साहिब के फ्रकाश पर्व के अवसर पर होने वाले समागमो के दौरान हाजरी भरने की की गई पेशकश को कबूलने के साथ ही गुरूघरो के साथ सबंधित सभी मसलो को पहल के आधार पर हल करने का भी भरोसा दिया। इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के वरिष्" उपाध्यक्ष रविन्दर सिंह खुराना, उपाध्यक्ष तनवंत सिंह, संयुक्त सचिव हरमीत सिंह कालका, वरिष्" अकाली नेता अवतार सिंह हित, ओंकार सिंह थापर, कुलदीप सिंह भोगल, कुलमोहन सिंह, दिल्ली कमेटी सदस्य परमजीत सिंह राणा, दर्शन सिंह, रवैल सिंह, अमरजीत सिंह पप्पू, चमन सिंह, हरविन्दर सिंह के. पी. , परमजीत सिंह चंढोक, कुलदीप सिंह साहनी, इन्द्रजीत सिंह मौंटी, कैप्टन इन्द्रफ्रीत सिंह, जसबीर सिंह जस्सी, कुलवंत सिंह बा" विधायक जतिन्दर सिंह शन्टी तथा विकम सिंह मौजूद थे।
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देश भर में आज रोजे के बाद ईद उल फितर का त्योहार मुस्लिम भाईयो के द्वारा बड़े ही प्रेम और भाईचारे के साथ मनाया गया। वहीं भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में भी बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ ईद उल फितर की नमाज अदा की गई।
जयपुर से लूट की बड़ी बारदात हुई, जहां नौकर ने मालिक के परिवार को बंधक बनाने के बाद डकैती की। लाखों रुपए कैश और गहने लेकर फरार हो गया। लूट से पहले परिवार को बुरी तरह लाठी-हथौड़ी से पीटा गया।
शिवपाल यादव ने ईद के मौके पर सभी को मुबारकबाद दी। इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिखे कुछ लाइने भी लिखा। उन्होंने लिखा कि हमने उसे चलना सिखाया और वो हमें रौंदते चला गया।
यूपी के प्रयागराज में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। हत्या की यह वारदात मृतक के भाई के सामने अंजाम दी गई। आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी हुई है।
राजस्थान की सीकर पुलिस ने एक शातिर शख्स को गिरफ्तार किया है। जिसने पिछले दिनों शहर की एक सराफा की दुकान से एक करोड़ का सोना चुराया था। आरोपी मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है और चोरी राजस्थान में की, इसके बाद छिपने के लिए अपना ठिकाना दिल्ली बना लिया।
जयपुर : राजस्थान (Rajasthan) की सियासत का एक सितारा जो चार दशक बाद भी चमक रहा है। सूबे की राजनीति का जब भी जिक्र होगा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के नाम सबसे पहले आएगा। जादूगर से सियासत में जादूगरी तक का सफर तय करने वाले गहलोत आज 71 साल के हो गए हैं। जनता के बीच अपनापन लेकर जाने वाले अशोक असल जिंदगी में बेहद ही सरल स्वभाव के माने जाते हैं लेकिन राजनीति में उनका कोई सानी नहीं है। उन्हें गांधीवादी विचारधारा का नेता माना जाता है। बड़े-बड़े धुरंधरों को अपनी चाल से पस्त करने वाले अशोक गहलोत का यहां तक का सफर इतना भी आसान नहीं। जन्मदिन पर जानिए उस नेता के बारें में जो कभी एक जादूगर हुआ करता था और आज सियासत का बाजीगर. .
आगरा पहुंचे अयोध्या के परमहंस दास को दोबारा भी ताजमहल में प्रवेश नहीं मिला। वह जब मंगलवार को आगरा पहुंचे तो पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पैर फूल गए। महंत का कहना है कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है। वह वहां पूजा करना चाहते हैं। इसी के चलते मंगलवार को वहां पहुंचे थे।
'शौक बड़ी चीज है! ' चाहे वो चाय की हो या दारू की। बिहार से गुजरने वाली ट्रेनों के ड्राइवर को शायद अधिक तलब लगती है। पिछले दिनों चाय पीने के लिए बीच में ट्रेन रोकने का मामला सामने आया था, अब एक ड्राइवर ने शराब की तलब लगने पर ट्रेन को ब्रेक लगा दिए।
उन्नाव में ईद पर्व पर अराजक तत्व किसी भी तरीके की गड़बड़ी न कर सके इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। डीएम व एसपी पुलिस बल के साथ सड़क पर उतर कर सुरक्षा का जायजा लेते रहे। इसके अलावा खुफिया एजेंसी भी अलर्ट पर रखी गई हैं । शहर की ईदगाह मस्जिद में शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने नमाज अदा कराकर , तकरीर पढ़कर देश की अमन-चैन की दुआ मांगी ।
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देश भर में आज रोजे के बाद ईद उल फितर का त्योहार मुस्लिम भाईयो के द्वारा बड़े ही प्रेम और भाईचारे के साथ मनाया गया। वहीं भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में भी बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ ईद उल फितर की नमाज अदा की गई। जयपुर से लूट की बड़ी बारदात हुई, जहां नौकर ने मालिक के परिवार को बंधक बनाने के बाद डकैती की। लाखों रुपए कैश और गहने लेकर फरार हो गया। लूट से पहले परिवार को बुरी तरह लाठी-हथौड़ी से पीटा गया। शिवपाल यादव ने ईद के मौके पर सभी को मुबारकबाद दी। इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिखे कुछ लाइने भी लिखा। उन्होंने लिखा कि हमने उसे चलना सिखाया और वो हमें रौंदते चला गया। यूपी के प्रयागराज में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। हत्या की यह वारदात मृतक के भाई के सामने अंजाम दी गई। आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी हुई है। राजस्थान की सीकर पुलिस ने एक शातिर शख्स को गिरफ्तार किया है। जिसने पिछले दिनों शहर की एक सराफा की दुकान से एक करोड़ का सोना चुराया था। आरोपी मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है और चोरी राजस्थान में की, इसके बाद छिपने के लिए अपना ठिकाना दिल्ली बना लिया। जयपुर : राजस्थान की सियासत का एक सितारा जो चार दशक बाद भी चमक रहा है। सूबे की राजनीति का जब भी जिक्र होगा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम सबसे पहले आएगा। जादूगर से सियासत में जादूगरी तक का सफर तय करने वाले गहलोत आज इकहत्तर साल के हो गए हैं। जनता के बीच अपनापन लेकर जाने वाले अशोक असल जिंदगी में बेहद ही सरल स्वभाव के माने जाते हैं लेकिन राजनीति में उनका कोई सानी नहीं है। उन्हें गांधीवादी विचारधारा का नेता माना जाता है। बड़े-बड़े धुरंधरों को अपनी चाल से पस्त करने वाले अशोक गहलोत का यहां तक का सफर इतना भी आसान नहीं। जन्मदिन पर जानिए उस नेता के बारें में जो कभी एक जादूगर हुआ करता था और आज सियासत का बाजीगर. . आगरा पहुंचे अयोध्या के परमहंस दास को दोबारा भी ताजमहल में प्रवेश नहीं मिला। वह जब मंगलवार को आगरा पहुंचे तो पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पैर फूल गए। महंत का कहना है कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है। वह वहां पूजा करना चाहते हैं। इसी के चलते मंगलवार को वहां पहुंचे थे। 'शौक बड़ी चीज है! ' चाहे वो चाय की हो या दारू की। बिहार से गुजरने वाली ट्रेनों के ड्राइवर को शायद अधिक तलब लगती है। पिछले दिनों चाय पीने के लिए बीच में ट्रेन रोकने का मामला सामने आया था, अब एक ड्राइवर ने शराब की तलब लगने पर ट्रेन को ब्रेक लगा दिए। उन्नाव में ईद पर्व पर अराजक तत्व किसी भी तरीके की गड़बड़ी न कर सके इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। डीएम व एसपी पुलिस बल के साथ सड़क पर उतर कर सुरक्षा का जायजा लेते रहे। इसके अलावा खुफिया एजेंसी भी अलर्ट पर रखी गई हैं । शहर की ईदगाह मस्जिद में शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने नमाज अदा कराकर , तकरीर पढ़कर देश की अमन-चैन की दुआ मांगी ।
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सिक्किम सरकार काम न करने वाले सरकारी कर्मचारियों (Non-Performing Employees) के लिए नया विभाग बनाने जा रही है।
राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राहुल गाँधी ने कहा कि पार्टी की लड़ाई हिंदू और हिंदुत्व से है।
यामी गौतम ने ट्वीट कर बेहद कमजोर और घिसी पिटी समीक्षा करने के लिए फिल्म कंपेनियन की अनुपमा चोपड़ा को लताड़ लगाई है।
एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि करौली में हिंसा करने वाली भीड़ में कॉन्ग्रेस पार्षद मतलबू अहमद के कुछ रिश्तेदार भी शामिल थे।
2020 हुए दिल्ली के दंगों मेंं जाफराबाद में शाहरुख खान ने पुलिस के जवान पर पिस्टल तान दी थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी।
कर्नाटक के बेंगलुरु के कई स्कूलों को ईमेल भेजकर बम लगाने की सूचना दी गई है। बम निरोधक दस्ता तैनात कर तलाशी अभियान जारी है।
बाबुल सुप्रियो बालीगंज सीट से टीएमसी के उम्मीदवार हैं। उनका मानना है कि पहले उनकी पहुँच 70% लोगों तक थी, लेकिन अब वो 100% हो गई है।
कानपुर ACP ने युवती से छेड़छाड़ करने वाले युवक को घटनास्थल पर ही बाल खींच कर पाँच सेकेंड में ताबड़तोड़ 5 थप्पड़ जड़ दिए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने अपने जमीन की मालिकाना हक का इंतजार कर रहे कश्मीरी पंडितों के परिवारों को कागजात सौंपे।
गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में सहारनपुर के अब्दुल रहमान का नाम सामने आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार हमला करने से पहले मुर्तजा अब्बास ने उससे फोन पर बात की थी।
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सिक्किम सरकार काम न करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए नया विभाग बनाने जा रही है। राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राहुल गाँधी ने कहा कि पार्टी की लड़ाई हिंदू और हिंदुत्व से है। यामी गौतम ने ट्वीट कर बेहद कमजोर और घिसी पिटी समीक्षा करने के लिए फिल्म कंपेनियन की अनुपमा चोपड़ा को लताड़ लगाई है। एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि करौली में हिंसा करने वाली भीड़ में कॉन्ग्रेस पार्षद मतलबू अहमद के कुछ रिश्तेदार भी शामिल थे। दो हज़ार बीस हुए दिल्ली के दंगों मेंं जाफराबाद में शाहरुख खान ने पुलिस के जवान पर पिस्टल तान दी थी। इसमें तिरेपन लोगों की मौत हुई थी। कर्नाटक के बेंगलुरु के कई स्कूलों को ईमेल भेजकर बम लगाने की सूचना दी गई है। बम निरोधक दस्ता तैनात कर तलाशी अभियान जारी है। बाबुल सुप्रियो बालीगंज सीट से टीएमसी के उम्मीदवार हैं। उनका मानना है कि पहले उनकी पहुँच सत्तर% लोगों तक थी, लेकिन अब वो एक सौ% हो गई है। कानपुर ACP ने युवती से छेड़छाड़ करने वाले युवक को घटनास्थल पर ही बाल खींच कर पाँच सेकेंड में ताबड़तोड़ पाँच थप्पड़ जड़ दिए। हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने अपने जमीन की मालिकाना हक का इंतजार कर रहे कश्मीरी पंडितों के परिवारों को कागजात सौंपे। गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में सहारनपुर के अब्दुल रहमान का नाम सामने आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार हमला करने से पहले मुर्तजा अब्बास ने उससे फोन पर बात की थी।
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सेहतमंद रहने के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है। योग के माध्यम से मन- मस्तिष्क को शांत रखा जा सकता है वहीं शरीर को फिट रखने के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। वहीं प्राणायाम में कपालभाती का बहुत महत्व होता है। इसका नियमित अभ्यास आपको बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है।
हमने बात की योग प्रशिक्षक संगीता दुबे से और जाना कपालभाती के लाभ के बारे में। और इसे घर पर कैसे किया जा सकता है? आइए जानते हैं।
योग प्रशिक्षक संगीता दुबे बताती हैं कि कपालभाती को प्राणायाम का एक हिस्सा माना गया है। इसमें तेजी से सांस छोड़ने की क्रिया की जाती है जिससे विभिन्न बीमारियों का इलाज हो सकता है। कपालभाती 2 शब्दों से मिलकर बना है कपाल यानी माथा और भाती का अर्थ है तेज। कपालभाती प्राणायाम करने से शरीर के सभी अंग अच्छी तरह से कार्य करने में सक्षम होते हैं और खून को शुद्ध करने में मदद मिलती है।
कपालभाती को घर पर कैसे करें?
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अपने हाथों को घुटनों पर रखें और एक लंबी गहरी सांस अंदर लें।
सांस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचें। पेट की मांसपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचें।
जैसे ही आप पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है।
कपालभाती 5 मिनट से शुरू करके 10 और 30 मिनट तक किया जा सकता है।
कपालभाती प्राणायाम करते समय जोर से सांस को बाहर छोड़ें।
सांस लेने के लिए अधिक चिंता न करें।
आप जैसे ही अपने पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, आप अपने आप ही श्वास लेने लगते हैं।
यह पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है।
यह वजन कम करने में मदद करता है।
नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है।
रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को ऊर्जावान करता है।
मन को शांत करता है।
कपालभाती से एसिडिटी व गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
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सेहतमंद रहने के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है। योग के माध्यम से मन- मस्तिष्क को शांत रखा जा सकता है वहीं शरीर को फिट रखने के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। वहीं प्राणायाम में कपालभाती का बहुत महत्व होता है। इसका नियमित अभ्यास आपको बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है। हमने बात की योग प्रशिक्षक संगीता दुबे से और जाना कपालभाती के लाभ के बारे में। और इसे घर पर कैसे किया जा सकता है? आइए जानते हैं। योग प्रशिक्षक संगीता दुबे बताती हैं कि कपालभाती को प्राणायाम का एक हिस्सा माना गया है। इसमें तेजी से सांस छोड़ने की क्रिया की जाती है जिससे विभिन्न बीमारियों का इलाज हो सकता है। कपालभाती दो शब्दों से मिलकर बना है कपाल यानी माथा और भाती का अर्थ है तेज। कपालभाती प्राणायाम करने से शरीर के सभी अंग अच्छी तरह से कार्य करने में सक्षम होते हैं और खून को शुद्ध करने में मदद मिलती है। कपालभाती को घर पर कैसे करें? अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अपने हाथों को घुटनों पर रखें और एक लंबी गहरी सांस अंदर लें। सांस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचें। पेट की मांसपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचें। जैसे ही आप पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है। कपालभाती पाँच मिनट से शुरू करके दस और तीस मिनट तक किया जा सकता है। कपालभाती प्राणायाम करते समय जोर से सांस को बाहर छोड़ें। सांस लेने के लिए अधिक चिंता न करें। आप जैसे ही अपने पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, आप अपने आप ही श्वास लेने लगते हैं। यह पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है। रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर चमक बढ़ाता है। मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को ऊर्जावान करता है। मन को शांत करता है। कपालभाती से एसिडिटी व गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
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महिलाओं ने पुलिस पर डायरेक्टर से मिलीभगत का आरोप लगाया, जिसके बाद पुलिस ने डायरेक्टर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। उधर, गिरफ्तारी न होने से गुस्साईं फैकल्टी फिर शाम को थाने पहुंची तो पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गौरतलब है की बृहस्पतिवार को इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कालेज की महिला फैकल्टी ने डायरेक्टर पर मीटिंग के बहाने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। पुलिस ने डायरेक्टर पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
शुक्रवार को आरोपी की गिरफ्तारी न होने से गुस्साईं महिला फैकल्टी सुबह थाने पहुंचीं और नारेबाजी की। उनका कहना था कि डायरेक्टर से महिला टीचर्स ही नहीं, बल्कि पूरा कालेज परेशान है।
वह आए दिन स्टाफ को परेशान करते हैं। शाम को फिर थाने पहुंची महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी को सोफे पर बैठाकर उसकी सेवा कर रही है। महिला फैकल्टी का आरोप है कि पुलिस ने उनसे मेडिकल कराने को कहा।
महिला ने बताया की डायरेक्टर ने हाथ पकड़ा था। ऐसे में मेडिकल में क्या सामने आएगा। पुलिस डायरेक्टर से मिली हुई है, उधर, आरोपी ने आरोप निराधार बताए हैं।
एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जांच में आरोप सही मिलने पर डायरेक्टर प्रबल चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया गया।
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महिलाओं ने पुलिस पर डायरेक्टर से मिलीभगत का आरोप लगाया, जिसके बाद पुलिस ने डायरेक्टर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। उधर, गिरफ्तारी न होने से गुस्साईं फैकल्टी फिर शाम को थाने पहुंची तो पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है की बृहस्पतिवार को इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कालेज की महिला फैकल्टी ने डायरेक्टर पर मीटिंग के बहाने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। पुलिस ने डायरेक्टर पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। शुक्रवार को आरोपी की गिरफ्तारी न होने से गुस्साईं महिला फैकल्टी सुबह थाने पहुंचीं और नारेबाजी की। उनका कहना था कि डायरेक्टर से महिला टीचर्स ही नहीं, बल्कि पूरा कालेज परेशान है। वह आए दिन स्टाफ को परेशान करते हैं। शाम को फिर थाने पहुंची महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी को सोफे पर बैठाकर उसकी सेवा कर रही है। महिला फैकल्टी का आरोप है कि पुलिस ने उनसे मेडिकल कराने को कहा। महिला ने बताया की डायरेक्टर ने हाथ पकड़ा था। ऐसे में मेडिकल में क्या सामने आएगा। पुलिस डायरेक्टर से मिली हुई है, उधर, आरोपी ने आरोप निराधार बताए हैं। एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जांच में आरोप सही मिलने पर डायरेक्टर प्रबल चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया गया।
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सैन फ्रांस्सिको। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने 31 जनवरी, 2020 के बाद स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए अपने मोबाइल में एंड्रॉएड-10 वर्जन अपडेट करना अनिवार्य कर दिया है। इस निर्धारित तिथि के बाद गूगल केवल लेटेस्ट वर्जन एंड्रॉएड-10 चलाने वाले नए उपकरणों को ही मंजूरी देगा। इसके बाद कंपनी पुराने एंड्रॉएड वर्जन-9 पाई के साथ आने वाले उपकरणों को मंजूरी देना बंद कर देगी।
कंपनी के इस कदम की जानकारी गूगल के लेटेस्ट जीएमएस गाइडलाइन से मिली है।
एक्सडीए डेवलपर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जीएमएस का अर्थ है गूगल मोबाइल सेवा। यह ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) के भागीदारों द्वारा गूगल एप और इसकी सेवाओं को लाइसेंस प्रदान कराती है।
रिपोर्ट के अनुसार, जीएमएस को प्रीलोड करने के लिए ओईएम को प्रत्येक डिवाइस के लिए सॉफ्टवेयर का निर्माण करना होगा।
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सैन फ्रांस्सिको। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने इकतीस जनवरी, दो हज़ार बीस के बाद स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए अपने मोबाइल में एंड्रॉएड-दस वर्जन अपडेट करना अनिवार्य कर दिया है। इस निर्धारित तिथि के बाद गूगल केवल लेटेस्ट वर्जन एंड्रॉएड-दस चलाने वाले नए उपकरणों को ही मंजूरी देगा। इसके बाद कंपनी पुराने एंड्रॉएड वर्जन-नौ पाई के साथ आने वाले उपकरणों को मंजूरी देना बंद कर देगी। कंपनी के इस कदम की जानकारी गूगल के लेटेस्ट जीएमएस गाइडलाइन से मिली है। एक्सडीए डेवलपर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जीएमएस का अर्थ है गूगल मोबाइल सेवा। यह ओईएम के भागीदारों द्वारा गूगल एप और इसकी सेवाओं को लाइसेंस प्रदान कराती है। रिपोर्ट के अनुसार, जीएमएस को प्रीलोड करने के लिए ओईएम को प्रत्येक डिवाइस के लिए सॉफ्टवेयर का निर्माण करना होगा।
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यह असद या सीरिया के बारे में नहीं है।
सीरिया में मास्क फट गए हैं।
रूसी एयरोस्पेस बलों द्वारा कार्रवाई के एक साल बाद, एक भ्रामक रूप से भ्रमित करने वाली तस्वीर निर्दिष्ट की गई थी - संयुक्त राज्य अमेरिका और आतंकवादी रूस और वैध सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।
सूत्र अत्यंत स्पष्ट हैं, सच्चे लक्ष्यों की खोज की जाती है, अति सुंदर संस्थाएं, यदि काट नहीं की जाती हैं, तो पृष्ठभूमि में फीका पड़ जाता है।
विश्व मीडिया ने अमेरिकियों और रूसियों और आधिकारिक विशेषज्ञों के बीच टकराव के उच्च खतरे के बारे में खुले तौर पर लिखा है, जिन्होंने हाल ही में वाशिंगटन से आतंकवादियों की स्वायत्तता पर गंभीर चर्चा की थी, अब बताते हैं कि कैसे अमेरिकी आतंकवादियों की आपूर्ति करते हैं हथियार असद के खिलाफ और रूसी शहरों के खिलाफ स्थापित करने की धमकी।
यह स्पष्ट हो गया कि आईएसआईएस * के खिलाफ कोई गठबंधन नहीं हैं, लेकिन सहयोगी दलों के साथ एक रूसी सेना है जो अमेरिका और नाटो के एक साधन के रूप में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का विरोध करती है।
अक्टूबर 2016 तक, सीरिया में अगले विश्व संघर्ष की संरचना क्रिस्टलीकृत हो गई थी। हालांकि, इसके सार और कारणों को अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है।
आम तौर पर स्वीकृत मैक्सिम - डिक्रिपिट दुनिया हेग्मन ओम्प्थेन्थ समय के लिए "लोकतंत्र" का निर्यात नहीं कर सकता था और अब खुद को और सभी को मृत अंत में चला रहा है - थोड़ा समझाता है।
सीरिया एक ठोकर क्यों बन गया - अभी तक दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण देश नहीं है?
क्यों, उदाहरण के लिए, यह मिस्र नहीं था, जहां दाढ़ी वाले "लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले" अपनी सफलता को मजबूत करने में विफल रहे, और यहां तक कि एक मजबूत गैर-समर्थक अमेरिकी सरकार को सत्ता सौंपना पड़ा - लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं निगल लिया।
रूस आक्रामक का ठीक-ठीक विरोध क्यों कर रहा है - एक ऐसा देश जो कुछ साल पहले पतन से विदा हो चुका है और पश्चिमी अर्थव्यवस्था के सभी मुख्य प्रतिस्पर्धी नहीं है? और संयुक्त राज्य अमेरिका इतनी हिंसक रूप से चरम सीमा पर क्यों जा रहा है, जिससे दुनिया तीसरी दुनिया के कगार पर आ गई है?
हां, निश्चित रूप से, मध्य पूर्व के कई विशेषज्ञ कारणों की एक पूरी श्रृंखला का नाम देंगे जो इन सभी "क्यों? " का जवाब देते हैं। लेकिन सावधान विश्लेषण के साथ, यह स्पष्ट हो जाता है कि वे केवल कुछ महत्वपूर्ण के लिए एक आवेदन हैं।
पहला और सबसे लगातार तर्क तेल और गैस कारक है। कथित तौर पर, सीरिया में प्रचुर मात्रा में भंडार ने इसे पश्चिम के लिए एक वांछनीय लक्ष्य बना दिया, जो इराक और लीबिया के बाद, सीरिया के हाइड्रोकार्बन से लाभ कमा सकता है, स्थानीय राज्य को नष्ट कर सकता है।
वास्तव में, सीरिया में केवल एक ही तेल के साबित भंडार के 2,5 अरब बैरल हैं, जो कि उनके वैश्विक कुल का 0,1% है।
हां, युद्ध से कुछ साल पहले, नार्वे को लगता है कि सीरिया में बनियास शहर के चार सबसे बड़े जमा भंडार हैं, जो उत्पादन कुवैत के स्तर तक ला सकते हैं, लेकिन वास्तविक उत्पादन बिल्कुल नहीं बदला है।
और यह स्पष्ट रूप से सीरिया में आतंकवादी हस्तक्षेप की शुरुआत की व्याख्या करने के लिए पर्याप्त नहीं हैः यदि पश्चिम का लक्ष्य विशेष रूप से तेल था, तो दुनिया के भंडार के 17,5% के साथ वेनेजुएला में लोकतंत्र के निर्यात की व्यवस्था करना अधिक तर्कसंगत होगा।
और मध्य पूर्व में वहाँ से लाभ के लिए कोई है - एक ही कतर, कुवैत और अन्य समुद्री डाकू तेल में बहुत अधिक प्रचुर मात्रा में हैं और कम स्थिर हैंः शेखों को छोड़ दें और काले सोने को डाउनलोड करें।
यह भी माना जाता है कि आक्रामकता का कारण 2009 में दमिश्क की विफलता हो सकती है जो अपने क्षेत्र में कतर से यूरोप तक गैस पाइपलाइन से गुजरती है। हालाँकि, यह भी एक अतिशयोक्ति है। इस तरह की असहमति कतरी के लिए प्रेरणा बन सकती है, लेकिन पश्चिम के लिए नहीं।
गैस पाइपलाइन परियोजना अपने आप में इतनी जोखिम भरी और अस्पष्ट है कि यह केवल एक झांसा देने या बहाने के रूप में काम कर सकती है, लेकिन असद के खिलाफ एक बहु-वर्षीय आतंकवादी अभियान शुरू करने का वास्तविक कारण नहीं है।
सामान्य तौर पर, हाल के वर्षों में सभी संघर्षों में तेल के निशान को देखने के लिए और अपनी जमा राशि के लिए अपनी परेशानियों को दोष देने के लिए जो फैशन सामने आया है, वह एक ओवरसाइम्प्लिफिकेशन है और अर्थव्यवस्था में मौद्रिक दृष्टिकोण के समान है, जब आर्थिक संबंधों की सभी जटिलताओं का मूल्यांकन विशेष रूप से डेबिट / क्रेडिट के माध्यम से किया जाता है।
इस बीच, विश्व राजनीति में, तेल केवल हितों की रक्षा करने और भू राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में मायने रखता हैः हिटलर खुद के खातिर बाकू तेल नहीं चाहता था, लेकिन मास्को को इससे दूर करने और यूएसएसआर को खत्म करने के लिए।
टूल गोल को कॉल करना एक अभेद्य प्रतिस्थापन है, जो सार से दूर होता है।
सीरिया और क्षेत्र के भीतर कथित रूप से वास्तविक आंतरिक विरोधाभासों, इस्लामवाद के प्रसार और इराक के राज्यवाद के पतन के बारे में तर्क, जो चरमपंथ के विकास का आधार बने, सुन्नियों और शियाओं, सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव, सीरिया को युद्ध की व्याख्या के लिए बहुत कम महत्वपूर्ण हैं, जो विश्व युद्ध में विकसित होने के लिए तैयार हैं। क्षेत्र में अतिवृष्टि, पानी की कमी आदि।
यह सब, एक डिग्री या दूसरे के लिए, निश्चित रूप से, संघर्ष में मसाला जोड़ता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता है कि दुनिया के दर्जनों देशों की सेनाएं सीरिया में क्यों चल रही हैं, जिनमें से दो सबसे शक्तिशाली हैं - रूसी संघ और यूएसए।
सीरिया में मौजूदा संघर्ष के लिए बहुत अधिक ठोस, अपर्याप्त वैज्ञानिक माना जाता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मध्य पूर्व में अराजकता को बढ़ावा देने के लिए इस देश का पतन आवश्यक है, जो पूरे यूरेशिया में फैलने को अस्थिर कर देगा और सत्ता के वैकल्पिक आर्थिक केंद्रों - मुख्य रूप से चीन और रूस को नीचे लाने में मदद करेगा।
जैसे, डॉलर प्रणाली ऋण अधिभार का सामना नहीं करती है, और सीरिया में युद्ध आर्थिक टकराव में प्रतियोगियों को अस्थिर करने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है।
वास्तव में, यह पहली बार 2014 में चीनी अर्थव्यवस्था थी जिसने अमेरिकी को जीडीपी में पीछे छोड़ दिया, और, यह प्रतीत होता है कि दो आर्थिक दिग्गजों के बीच - निवर्तमान और ऊपर की तरफ - एक सैन्य-राजनीतिक लड़ाई को बढ़ावा देना चाहिए था।
अमेरिकी और चीनी दोनों राजनीतिक वैज्ञानिकों ने हाल के वर्षों में इस बारे में बहुत बात की है।
हालाँकि, सीरियाई संघर्ष में - और यह एक पूर्ण तथ्य है - चीन भी सीमा पर नहीं बैठता है। सभी पांच साल - और यहां तक कि मौजूदा बढ़ोत्तरी के साथ - वह अपनी सामान्य तटस्थता बनाए रखता है, केवल सीरियाई लोगों की पीड़ा और आतंकवाद की निंदा करने के बारे में शिकायत करता है।
अर्थशास्त्र के संदर्भ में, रूस संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा नहीं करता है, जबकि सीरिया में अमेरिकियों का मुख्य दुश्मन रूसी सेना है, चीनी भी वहां करीब नहीं हैं।
भौगोलिक रूप से भी, सीरिया में संघर्ष रूसी काकेशस के करीब है, जहां तुर्की के माध्यम से इगिलोव संक्रमण के हस्तांतरण के लिए एक सीधा गलियारा है, कहते हैं, चीन के उइगर क्षेत्र के लिए।
इस तर्क के अनुसार, अफगानिस्तान या पाकिस्तान में ISIS को बढ़ाना अधिक सही होगा, जहां से चीन में आतंकवादी अराजकता को फेंकना आसान है।
समुद्र और जमीन पर अंतरिक्ष, साथ ही मास्को और बीजिंग के बीच विशेष संबंधों में रूसी-चीनी अभ्यास नई अंतर्राष्ट्रीय नीति का एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन फिर भी यह सीरिया में संघर्ष को सीधे प्रभावित नहीं करता है।
इसके अलावा, हम विश्वास कर सकते हैं कि यदि रूस अब तक एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक खिलाड़ी नहीं था, तो बीजिंग ने सीरिया पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संघर्ष में प्रवेश नहीं किया होगा, लेकिन एक समझौते के आधार पर पश्चिम के साथ सहमति व्यक्त की होगी, भले ही वह इसके लिए बहुत लाभदायक न हो, शर्त लगाकर। पश्चिमी सभ्यता के अपरिहार्य कमजोर पड़ने में ऐतिहासिक Daud।
मैं अपने चीनी सहयोगियों को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे यह समझना चाहिए कि मास्को के साथ मौजूदा उत्कृष्ट संबंधों के बावजूद, बीजिंग किसी भी समय पश्चिम के साथ आम सहमति तक पहुंच सकता है और पुराने और नए नए संरचनाओं के उभरते संघर्ष में अपनी तरफ से "दोस्ताना तटस्थता" ले सकता है।
चीन के लिए सरल कारण के लिए, दो विशाल व्यावसायिक संरचनाओं के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ टकराव एक विशुद्ध रूप से आर्थिक विवाद है, और नहीं।
रूस में, पश्चिम के साथ संघर्ष पूरी तरह से अलग है, आर्थिक नहीं।
यह मानना टेढ़ी खीर है कि रूसी अर्थव्यवस्था, पिछले 15 वर्षों में अपनी सभी वास्तविक सफलताओं के साथ, अमेरिकी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, जो वास्तव में, अभी भी चीन में निर्मित है।
हां, ब्रिक्स जैसे भू-राजनीतिक संगठन संभावित रूप से जमैका प्रणाली और वाशिंगटन सहमति को नीचे ला सकते हैं, लेकिन फिर से यह शुद्ध अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि सैन्य-राजनीतिक टकराव का वित्तीय प्रक्षेपण है।
हालाँकि, इसका सार क्या है? रूस एक बार फिर एक वैश्विक संघर्ष के उपरिकेंद्र पर गर्म में बढ़ने की धमकी क्यों दे रहा है?
रूसी राज्य क्यों है जो अभी तक एक और दर्दनाक परिवर्तन से बच गया है और इससे पूरी तरह से उबर नहीं पाया है, हेग्मोन का झटका लेने के लिए मजबूर है, जो अंतर्राष्ट्रीय जीवन को नियंत्रित करता है और संघर्ष के अधिक विकसित उपकरण हैं?
महान और लंबे समय तक पीड़ित रूसी लोग, केवल विलुप्त होने से उबरने और विकास के मार्ग पर चल पड़े हैं, फिर से, जैसे 70, 100 और 200 साल पहले, दुनिया के आक्रामक के रास्ते पर है - वर्तमान मामले में, संयुक्त राज्य अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद ने उन्हें बढ़ावा दिया?
यह समझने के लिए, जैसा कि हमने देखा है, यह आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों का नाम देने के लिए पर्याप्त नहीं हैः न तो रूस के विशाल प्राकृतिक संसाधन, न ही हमारी बढ़ी हुई क्षमताएं, और न ही पुनर्जीवित सैन्य शक्ति पश्चिम के लिए संभावित खतरे के रूप में - कोई तथाकथित व्यावहारिक तर्क संयुक्त राज्य अमेरिका के सवाल का पूरा जवाब नहीं देते हैं सीरिया रूस के लिए लक्ष्य बना रहा है।
बेशक, वे पश्चिमी देशों के उच्च कार्यालयों में रूसी खतरे और परमाणु हमले में गंभीरता से विश्वास नहीं करते हैं, लेकिन वे इसे अपने स्वयं के आक्रामक के लिए डरावनी कहानियों, ब्लफ्स और प्रीटेक्स के रूप में उपयोग करते हैं।
जो कुछ हो रहा है, उसके सार को समझने के लिए, हमें अंततः यह स्वीकार करना होगा कि पश्चिमी सभ्यता के शीर्ष के कार्य राज्य विभाग और पेंटागन के क्लर्क नहीं हैं, लेकिन वैश्विक पैक्स अमेरीका परियोजना के वास्तविक प्रबंधक, जिन्हें हम बेहद व्यावहारिक मानते थे, वास्तव में कुछ आदर्शों और उच्च लक्ष्यों द्वारा निर्धारित होते हैं।
अमेरिकी विदेश नीति की गड़बड़ को गैर-सार्वजनिक आंकड़ों का उल्लेख नहीं करने के लिए सार्वजनिक आंकड़ों द्वारा प्रलेखित और नियमित रूप से आवाज उठाई जाती है।
एक आदर्श मुक्त समाज के रूप में अमेरिका की असाधारणता के बारे में शब्द, लोकतंत्र का एक प्रतीक और पृथ्वी की आखिरी उम्मीद सिर्फ सुंदर नारे, विज्ञापन नारे नहीं हैं, बल्कि ग्रह पर एक विशेष बल के रूप में खुद की भावना है।
अठारहवीं शताब्दी में वापस, प्रोटेस्टेंट उपदेशक जोनाथन एडवर्ड्स ने कहा कि ईश्वर के चुने हुए लोगों की स्थिति यहूदियों से अमेरिकियों तक चली गई। और संयुक्त राज्य के संस्थापक पिताओं ने अपनी गतिविधियों को सभी विश्व इतिहास के मुकुट के रूप में माना।
पहले से ही 20 वीं शताब्दी में, रोनाल्ड रीगन, जिन्होंने यूएसएसआर को "बुराई के साम्राज्य" के रूप में परिभाषित किया, ने स्पष्ट रूप से संयुक्त राज्य को "अच्छे के साम्राज्य" की भूमिका सौंपी। इस अर्थ में बुश, क्लिंटन और ओबामा कुछ भी नया आविष्कार नहीं करते हैं, लेकिन केवल अलग-अलग शब्दों में बहुत अमेरिकी दूतवाद को व्यक्त करते हैं।
आधुनिक अमेरिका की पूरी विदेश नीति एक "लोकतंत्र के निर्यातक" और शांति के न्याय के रूप में, जेंडर एक ऐसी विचारधारा की एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
संसाधनों पर कब्जा, तेल और गैस, साथ ही वित्तीय लाभ यह केवल बोनस हैं और आवाज वाले आदर्शों की प्राप्ति के लिए एक उपकरण है।
वास्तव में अमेरिकी दूतवाद क्या है - दर्शन, धर्मशास्त्र और भू-राजनीति के प्रतिच्छेदन पर एक अलग वार्तालाप।
हम केवल यह ध्यान रखते हैं कि इसकी मुख्य अवधारणा जिसके चारों ओर शेष संरचना निर्मित है, वह है "स्वतंत्रता"। दुनिया को मानव स्वतंत्रता के रूप में प्रस्तुत किया गया (जो एक आशीर्वाद के रूप में है), वास्तव में, संयुक्त राज्य अमेरिका इसे पूंजी की स्वतंत्रता के रूप में समझता है, अर्थात, एक आर्थिक व्यक्ति की अनुमति।
पूरी दुनिया को आदर्श रूप से वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक बाजार बनना चाहिए, जहां व्यक्ति स्वयं दोनों है। ब्रह्मांड की सभी अभिव्यक्तियों और इसके मुख्य सार के बराबर धन।
दरअसल, जीवन की ऐसी "मौद्रिक" समझ के आधार पर सभी तथाकथित व्यावहारिकता प्राप्त की जाती है।
हालांकि, पैसे का विस्तार - स्थानिक और आध्यात्मिक आयामों में - आज के लाभ तक सीमित नहीं है और मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी कीमत पर नहीं रुकता है - दुनिया के सार्वभौमिक अवशोषण और एक व्यक्ति को वित्तीय तंत्र में सुधार करना (यह प्रक्रिया खुद को प्रगति कहा जाता है, प्रौद्योगिकी के विकास के साथ सादृश्य द्वारा)।
क्या यह समझाने लायक है कि इस तरह से समझा गया "स्वतंत्रता" और ऐसी "प्रगति" पूरी तरह से पूरे 2000-year ईसाई तरीके के विपरीत हैं और मानवता के लिए घातक हैं?
क्या यह संयोग है कि हाल के दशकों में, पश्चिमी सभ्यता सहिष्णुता की आड़ में ईसाई धर्म की कुल अस्वीकृति और समलैंगिकों के अधिकारों की आड़ में धर्म-प्रचार को आगे बढ़ा चुकी है, जबकि रूस पारंपरिक मूल्यों और धर्मों का मुख्य दावेदार बन गया है?
क्या यह केवल एक संयोग है कि "पूंजी की स्वतंत्रता" और "आत्मा की स्वतंत्रता" के बीच लड़ाई की शुरुआत सीरिया की धरती पर चल रही है, जहां ईसाई दुनिया ने अपने पहले कदम उठाए थे?
मध्य पूर्व के भूमध्य सागर के उन पत्थरों पर ईसाई धर्म की कल्पना की गई थी, और सैकड़ों साल बाद वे इसे दफनाना चाहते हैं।
वैसे, अमेरिकी जेलों में प्रशिक्षित आईएसआईएस के विचारक आतंकवादियों के बीच सीरियाई शहर डाबिक में अच्छे और बुरे के बीच अंतिम लड़ाई के विचार के बीच खेती करते हैंः वे जजमेंट डे को करीब लाते हुए मसीह के वंशजों के साथ लड़ाई जीतेंगे।
किसी को चुराया नहीं जा सकता है, लेकिन सहस्त्राब्दी अर्थ और धार्मिक रहस्योद्घाटन से इनकार करते हैं, जिसके बिना कोई यह नहीं समझ सकता है कि इतिहास तेल और अल्पकालिक हितों से प्रेरित नहीं है, बल्कि विपरीत सिद्धांतों के संघर्ष से, दो ताकतें जो अलग-अलग दिशाओं में - नीचे और पर्वत ऊंचाइयों तक खींचती हैं।
और पूरी तरह से हमारी मूल भूमि के लिए कॉल करने के लिए आवश्यक है कि कैसे, बार-बार यह देखने के लिए नहीं मिलता है कि यह उन लोगों के रास्ते में है, जो खुद को एक महान, शुद्ध जाति या स्वतंत्रता का दीपक घोषित करते हैं, मानवता को अधीन करने का प्रयास करते हैं, रूस को "मुक्ति" के रूप में पूरा करने के लिए एक बाधा के रूप में नष्ट करते हैं। ।
"बुराई के कुल प्रसार से दुनिया को रोकना" - जैसे रूसी लोगों का क्रॉस, भाग्य और चट्टान, रूसी राज्य एक ऐतिहासिक विषय के रूप में।
इसका मतलब रूसियों की अयोग्यता और विशिष्टता नहीं है, क्योंकि संघर्ष भी हमारे भीतर हो रहा है, लेकिन इसकी एक विशेष जिम्मेदारी है और, सबसे महत्वपूर्ण बात, रूसी इतिहास में बहुत कुछ समझाता है, जो राष्ट्रीय हितों के एक साधारण संघर्ष के दृष्टिकोण से समझाना मुश्किल है।
क्रांति, गृहयुद्ध और हस्तक्षेप के बाद विनाशकारी और रक्तहीन क्यों है, यह समझाने का कोई और तरीका नहीं है, सोवियत रूस को अत्यधिक परिस्थितियों में और जल्द से जल्द पश्चिम के अगले आक्रमण की तैयारी के लिए मजबूर किया गया था, जो कि 30 की शुरुआत में नेतृत्व के लिए स्पष्ट था।
इतिहासकार मनमाने ढंग से हमें हिटलर की उपस्थिति और पूर्व में उसके मार्च की निष्पक्षता के लिए मना सकते हैं, कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन ने अपने नाजी शिष्टाचार पर ध्यान नहीं दिया, और फिर मूर्खता से जर्मन अर्थव्यवस्था के साथ मदद की, लेकिन यह स्पष्ट है कि हिटलर, आईएसआईएस की तरह, अब ध्यान से रूस में हड़ताल करने के लिए पोषित।
और जब सोवियत सेना ने बर्लिन पर कब्जा करने के तुरंत बाद नाजी सेना को नष्ट कर दिया, तो वे यूएसएसआर पर हमला करने के लिए "अकल्पनीय" प्रतिबद्ध करने के लिए तैयार थे। हिम्मत मत करना। लेकिन युद्ध के बाद के वर्षों में, उन्होंने परमाणु बम का उपयोग करने की संभावना के साथ मास्को को ब्लैकमेल किया।
केवल कम्युनिस्ट और पूंजीवादी व्यवस्थाओं का सामना करने से इस तरह की अर्थहीनता स्पष्ट है, जैसा कि हमने यूएसएसआर के पतन के बाद देखा - कोई साम्यवाद नहीं था, और रूस एक दुश्मन बना रहा।
उन्होंने हमें केवल इसलिए समाप्त नहीं किया क्योंकि वे "निरोधक बल" की मृत्यु को कई वर्षों का मामला मानते थे, और आज वे सीरिया में रूसी सेना को देखकर, अपनी कुंठा को कुंठा में काटते हैं।
भाग्य को नहीं चुना जाता है, और रूस को मृत्यु से दुनिया की एक नई भागीदारी के लिए बर्बाद किया जाता है - अन्यथा यह रूस होना बंद हो जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद मानवता के सभी के खिलाफ बनाया गया है, लेकिन विशेष रूप से उन लोगों के खिलाफ है जो इस मानवता की रक्षा करने की कोशिश करते हैं। रूसी विभाग ने रूसी शहरों में हड़ताल की धमकी देते हुए सीधे तौर पर हमें बताया। जल्द या बाद में, मास्को को सीधे घोषणा करनी होगी कि संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवादियों का मुख्य साथी है।
और इसका मतलब केवल एक ही होगा - "पूंजी की स्वतंत्रता का साम्राज्य" के साथ कुल और वैश्विक टकराव।
क्या यह खतरनाक है? हाँ, अत्यंत।
क्या इससे परमाणु युद्ध का खतरा है? यह संभावना नहीं है, क्योंकि यह अधिक संभावना (एंटी) आतंकवादी युद्ध और मूल्य की लड़ाई होगी।
केवल यह समझना महत्वपूर्ण है कि मामला असद में नहीं है और सीरिया में भी नहीं है, न कि संकीर्ण रूप से समझे जाने वाले रूसी हितों में भी। यह एक आध्यात्मिक टकराव है।
और इसमें निराशावाद और अत्यधिक अतिशयता समान रूप से हानिकारक हैं। 28 पैनफिलोव के बारे में नई राष्ट्रीय फिल्म के नायकों के रूप में, "हम शांति से जलते हैं। " टैंक'.
* एक संगठन जिसके संबंध में अदालत ने संघीय कानून "काउंटरिंग एक्सट्रीमिस्ट एक्टिविटीज़" के लिए प्रदान किए गए आधार पर परिसमापन या गतिविधियों पर रोक लगाने पर अंतिम निर्णय लिया।
- लेखकः
- मूल स्रोतः
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यह असद या सीरिया के बारे में नहीं है। सीरिया में मास्क फट गए हैं। रूसी एयरोस्पेस बलों द्वारा कार्रवाई के एक साल बाद, एक भ्रामक रूप से भ्रमित करने वाली तस्वीर निर्दिष्ट की गई थी - संयुक्त राज्य अमेरिका और आतंकवादी रूस और वैध सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं। सूत्र अत्यंत स्पष्ट हैं, सच्चे लक्ष्यों की खोज की जाती है, अति सुंदर संस्थाएं, यदि काट नहीं की जाती हैं, तो पृष्ठभूमि में फीका पड़ जाता है। विश्व मीडिया ने अमेरिकियों और रूसियों और आधिकारिक विशेषज्ञों के बीच टकराव के उच्च खतरे के बारे में खुले तौर पर लिखा है, जिन्होंने हाल ही में वाशिंगटन से आतंकवादियों की स्वायत्तता पर गंभीर चर्चा की थी, अब बताते हैं कि कैसे अमेरिकी आतंकवादियों की आपूर्ति करते हैं हथियार असद के खिलाफ और रूसी शहरों के खिलाफ स्थापित करने की धमकी। यह स्पष्ट हो गया कि आईएसआईएस * के खिलाफ कोई गठबंधन नहीं हैं, लेकिन सहयोगी दलों के साथ एक रूसी सेना है जो अमेरिका और नाटो के एक साधन के रूप में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का विरोध करती है। अक्टूबर दो हज़ार सोलह तक, सीरिया में अगले विश्व संघर्ष की संरचना क्रिस्टलीकृत हो गई थी। हालांकि, इसके सार और कारणों को अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है। आम तौर पर स्वीकृत मैक्सिम - डिक्रिपिट दुनिया हेग्मन ओम्प्थेन्थ समय के लिए "लोकतंत्र" का निर्यात नहीं कर सकता था और अब खुद को और सभी को मृत अंत में चला रहा है - थोड़ा समझाता है। सीरिया एक ठोकर क्यों बन गया - अभी तक दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण देश नहीं है? क्यों, उदाहरण के लिए, यह मिस्र नहीं था, जहां दाढ़ी वाले "लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले" अपनी सफलता को मजबूत करने में विफल रहे, और यहां तक कि एक मजबूत गैर-समर्थक अमेरिकी सरकार को सत्ता सौंपना पड़ा - लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं निगल लिया। रूस आक्रामक का ठीक-ठीक विरोध क्यों कर रहा है - एक ऐसा देश जो कुछ साल पहले पतन से विदा हो चुका है और पश्चिमी अर्थव्यवस्था के सभी मुख्य प्रतिस्पर्धी नहीं है? और संयुक्त राज्य अमेरिका इतनी हिंसक रूप से चरम सीमा पर क्यों जा रहा है, जिससे दुनिया तीसरी दुनिया के कगार पर आ गई है? हां, निश्चित रूप से, मध्य पूर्व के कई विशेषज्ञ कारणों की एक पूरी श्रृंखला का नाम देंगे जो इन सभी "क्यों? " का जवाब देते हैं। लेकिन सावधान विश्लेषण के साथ, यह स्पष्ट हो जाता है कि वे केवल कुछ महत्वपूर्ण के लिए एक आवेदन हैं। पहला और सबसे लगातार तर्क तेल और गैस कारक है। कथित तौर पर, सीरिया में प्रचुर मात्रा में भंडार ने इसे पश्चिम के लिए एक वांछनीय लक्ष्य बना दिया, जो इराक और लीबिया के बाद, सीरिया के हाइड्रोकार्बन से लाभ कमा सकता है, स्थानीय राज्य को नष्ट कर सकता है। वास्तव में, सीरिया में केवल एक ही तेल के साबित भंडार के दो,पाँच अरब बैरल हैं, जो कि उनके वैश्विक कुल का शून्य,एक% है। हां, युद्ध से कुछ साल पहले, नार्वे को लगता है कि सीरिया में बनियास शहर के चार सबसे बड़े जमा भंडार हैं, जो उत्पादन कुवैत के स्तर तक ला सकते हैं, लेकिन वास्तविक उत्पादन बिल्कुल नहीं बदला है। और यह स्पष्ट रूप से सीरिया में आतंकवादी हस्तक्षेप की शुरुआत की व्याख्या करने के लिए पर्याप्त नहीं हैः यदि पश्चिम का लक्ष्य विशेष रूप से तेल था, तो दुनिया के भंडार के सत्रह,पाँच% के साथ वेनेजुएला में लोकतंत्र के निर्यात की व्यवस्था करना अधिक तर्कसंगत होगा। और मध्य पूर्व में वहाँ से लाभ के लिए कोई है - एक ही कतर, कुवैत और अन्य समुद्री डाकू तेल में बहुत अधिक प्रचुर मात्रा में हैं और कम स्थिर हैंः शेखों को छोड़ दें और काले सोने को डाउनलोड करें। यह भी माना जाता है कि आक्रामकता का कारण दो हज़ार नौ में दमिश्क की विफलता हो सकती है जो अपने क्षेत्र में कतर से यूरोप तक गैस पाइपलाइन से गुजरती है। हालाँकि, यह भी एक अतिशयोक्ति है। इस तरह की असहमति कतरी के लिए प्रेरणा बन सकती है, लेकिन पश्चिम के लिए नहीं। गैस पाइपलाइन परियोजना अपने आप में इतनी जोखिम भरी और अस्पष्ट है कि यह केवल एक झांसा देने या बहाने के रूप में काम कर सकती है, लेकिन असद के खिलाफ एक बहु-वर्षीय आतंकवादी अभियान शुरू करने का वास्तविक कारण नहीं है। सामान्य तौर पर, हाल के वर्षों में सभी संघर्षों में तेल के निशान को देखने के लिए और अपनी जमा राशि के लिए अपनी परेशानियों को दोष देने के लिए जो फैशन सामने आया है, वह एक ओवरसाइम्प्लिफिकेशन है और अर्थव्यवस्था में मौद्रिक दृष्टिकोण के समान है, जब आर्थिक संबंधों की सभी जटिलताओं का मूल्यांकन विशेष रूप से डेबिट / क्रेडिट के माध्यम से किया जाता है। इस बीच, विश्व राजनीति में, तेल केवल हितों की रक्षा करने और भू राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में मायने रखता हैः हिटलर खुद के खातिर बाकू तेल नहीं चाहता था, लेकिन मास्को को इससे दूर करने और यूएसएसआर को खत्म करने के लिए। टूल गोल को कॉल करना एक अभेद्य प्रतिस्थापन है, जो सार से दूर होता है। सीरिया और क्षेत्र के भीतर कथित रूप से वास्तविक आंतरिक विरोधाभासों, इस्लामवाद के प्रसार और इराक के राज्यवाद के पतन के बारे में तर्क, जो चरमपंथ के विकास का आधार बने, सुन्नियों और शियाओं, सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव, सीरिया को युद्ध की व्याख्या के लिए बहुत कम महत्वपूर्ण हैं, जो विश्व युद्ध में विकसित होने के लिए तैयार हैं। क्षेत्र में अतिवृष्टि, पानी की कमी आदि। यह सब, एक डिग्री या दूसरे के लिए, निश्चित रूप से, संघर्ष में मसाला जोड़ता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता है कि दुनिया के दर्जनों देशों की सेनाएं सीरिया में क्यों चल रही हैं, जिनमें से दो सबसे शक्तिशाली हैं - रूसी संघ और यूएसए। सीरिया में मौजूदा संघर्ष के लिए बहुत अधिक ठोस, अपर्याप्त वैज्ञानिक माना जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मध्य पूर्व में अराजकता को बढ़ावा देने के लिए इस देश का पतन आवश्यक है, जो पूरे यूरेशिया में फैलने को अस्थिर कर देगा और सत्ता के वैकल्पिक आर्थिक केंद्रों - मुख्य रूप से चीन और रूस को नीचे लाने में मदद करेगा। जैसे, डॉलर प्रणाली ऋण अधिभार का सामना नहीं करती है, और सीरिया में युद्ध आर्थिक टकराव में प्रतियोगियों को अस्थिर करने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है। वास्तव में, यह पहली बार दो हज़ार चौदह में चीनी अर्थव्यवस्था थी जिसने अमेरिकी को जीडीपी में पीछे छोड़ दिया, और, यह प्रतीत होता है कि दो आर्थिक दिग्गजों के बीच - निवर्तमान और ऊपर की तरफ - एक सैन्य-राजनीतिक लड़ाई को बढ़ावा देना चाहिए था। अमेरिकी और चीनी दोनों राजनीतिक वैज्ञानिकों ने हाल के वर्षों में इस बारे में बहुत बात की है। हालाँकि, सीरियाई संघर्ष में - और यह एक पूर्ण तथ्य है - चीन भी सीमा पर नहीं बैठता है। सभी पांच साल - और यहां तक कि मौजूदा बढ़ोत्तरी के साथ - वह अपनी सामान्य तटस्थता बनाए रखता है, केवल सीरियाई लोगों की पीड़ा और आतंकवाद की निंदा करने के बारे में शिकायत करता है। अर्थशास्त्र के संदर्भ में, रूस संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा नहीं करता है, जबकि सीरिया में अमेरिकियों का मुख्य दुश्मन रूसी सेना है, चीनी भी वहां करीब नहीं हैं। भौगोलिक रूप से भी, सीरिया में संघर्ष रूसी काकेशस के करीब है, जहां तुर्की के माध्यम से इगिलोव संक्रमण के हस्तांतरण के लिए एक सीधा गलियारा है, कहते हैं, चीन के उइगर क्षेत्र के लिए। इस तर्क के अनुसार, अफगानिस्तान या पाकिस्तान में ISIS को बढ़ाना अधिक सही होगा, जहां से चीन में आतंकवादी अराजकता को फेंकना आसान है। समुद्र और जमीन पर अंतरिक्ष, साथ ही मास्को और बीजिंग के बीच विशेष संबंधों में रूसी-चीनी अभ्यास नई अंतर्राष्ट्रीय नीति का एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन फिर भी यह सीरिया में संघर्ष को सीधे प्रभावित नहीं करता है। इसके अलावा, हम विश्वास कर सकते हैं कि यदि रूस अब तक एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक खिलाड़ी नहीं था, तो बीजिंग ने सीरिया पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संघर्ष में प्रवेश नहीं किया होगा, लेकिन एक समझौते के आधार पर पश्चिम के साथ सहमति व्यक्त की होगी, भले ही वह इसके लिए बहुत लाभदायक न हो, शर्त लगाकर। पश्चिमी सभ्यता के अपरिहार्य कमजोर पड़ने में ऐतिहासिक Daud। मैं अपने चीनी सहयोगियों को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे यह समझना चाहिए कि मास्को के साथ मौजूदा उत्कृष्ट संबंधों के बावजूद, बीजिंग किसी भी समय पश्चिम के साथ आम सहमति तक पहुंच सकता है और पुराने और नए नए संरचनाओं के उभरते संघर्ष में अपनी तरफ से "दोस्ताना तटस्थता" ले सकता है। चीन के लिए सरल कारण के लिए, दो विशाल व्यावसायिक संरचनाओं के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ टकराव एक विशुद्ध रूप से आर्थिक विवाद है, और नहीं। रूस में, पश्चिम के साथ संघर्ष पूरी तरह से अलग है, आर्थिक नहीं। यह मानना टेढ़ी खीर है कि रूसी अर्थव्यवस्था, पिछले पंद्रह वर्षों में अपनी सभी वास्तविक सफलताओं के साथ, अमेरिकी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, जो वास्तव में, अभी भी चीन में निर्मित है। हां, ब्रिक्स जैसे भू-राजनीतिक संगठन संभावित रूप से जमैका प्रणाली और वाशिंगटन सहमति को नीचे ला सकते हैं, लेकिन फिर से यह शुद्ध अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि सैन्य-राजनीतिक टकराव का वित्तीय प्रक्षेपण है। हालाँकि, इसका सार क्या है? रूस एक बार फिर एक वैश्विक संघर्ष के उपरिकेंद्र पर गर्म में बढ़ने की धमकी क्यों दे रहा है? रूसी राज्य क्यों है जो अभी तक एक और दर्दनाक परिवर्तन से बच गया है और इससे पूरी तरह से उबर नहीं पाया है, हेग्मोन का झटका लेने के लिए मजबूर है, जो अंतर्राष्ट्रीय जीवन को नियंत्रित करता है और संघर्ष के अधिक विकसित उपकरण हैं? महान और लंबे समय तक पीड़ित रूसी लोग, केवल विलुप्त होने से उबरने और विकास के मार्ग पर चल पड़े हैं, फिर से, जैसे सत्तर, एक सौ और दो सौ साल पहले, दुनिया के आक्रामक के रास्ते पर है - वर्तमान मामले में, संयुक्त राज्य अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद ने उन्हें बढ़ावा दिया? यह समझने के लिए, जैसा कि हमने देखा है, यह आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों का नाम देने के लिए पर्याप्त नहीं हैः न तो रूस के विशाल प्राकृतिक संसाधन, न ही हमारी बढ़ी हुई क्षमताएं, और न ही पुनर्जीवित सैन्य शक्ति पश्चिम के लिए संभावित खतरे के रूप में - कोई तथाकथित व्यावहारिक तर्क संयुक्त राज्य अमेरिका के सवाल का पूरा जवाब नहीं देते हैं सीरिया रूस के लिए लक्ष्य बना रहा है। बेशक, वे पश्चिमी देशों के उच्च कार्यालयों में रूसी खतरे और परमाणु हमले में गंभीरता से विश्वास नहीं करते हैं, लेकिन वे इसे अपने स्वयं के आक्रामक के लिए डरावनी कहानियों, ब्लफ्स और प्रीटेक्स के रूप में उपयोग करते हैं। जो कुछ हो रहा है, उसके सार को समझने के लिए, हमें अंततः यह स्वीकार करना होगा कि पश्चिमी सभ्यता के शीर्ष के कार्य राज्य विभाग और पेंटागन के क्लर्क नहीं हैं, लेकिन वैश्विक पैक्स अमेरीका परियोजना के वास्तविक प्रबंधक, जिन्हें हम बेहद व्यावहारिक मानते थे, वास्तव में कुछ आदर्शों और उच्च लक्ष्यों द्वारा निर्धारित होते हैं। अमेरिकी विदेश नीति की गड़बड़ को गैर-सार्वजनिक आंकड़ों का उल्लेख नहीं करने के लिए सार्वजनिक आंकड़ों द्वारा प्रलेखित और नियमित रूप से आवाज उठाई जाती है। एक आदर्श मुक्त समाज के रूप में अमेरिका की असाधारणता के बारे में शब्द, लोकतंत्र का एक प्रतीक और पृथ्वी की आखिरी उम्मीद सिर्फ सुंदर नारे, विज्ञापन नारे नहीं हैं, बल्कि ग्रह पर एक विशेष बल के रूप में खुद की भावना है। अठारहवीं शताब्दी में वापस, प्रोटेस्टेंट उपदेशक जोनाथन एडवर्ड्स ने कहा कि ईश्वर के चुने हुए लोगों की स्थिति यहूदियों से अमेरिकियों तक चली गई। और संयुक्त राज्य के संस्थापक पिताओं ने अपनी गतिविधियों को सभी विश्व इतिहास के मुकुट के रूप में माना। पहले से ही बीस वीं शताब्दी में, रोनाल्ड रीगन, जिन्होंने यूएसएसआर को "बुराई के साम्राज्य" के रूप में परिभाषित किया, ने स्पष्ट रूप से संयुक्त राज्य को "अच्छे के साम्राज्य" की भूमिका सौंपी। इस अर्थ में बुश, क्लिंटन और ओबामा कुछ भी नया आविष्कार नहीं करते हैं, लेकिन केवल अलग-अलग शब्दों में बहुत अमेरिकी दूतवाद को व्यक्त करते हैं। आधुनिक अमेरिका की पूरी विदेश नीति एक "लोकतंत्र के निर्यातक" और शांति के न्याय के रूप में, जेंडर एक ऐसी विचारधारा की एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। संसाधनों पर कब्जा, तेल और गैस, साथ ही वित्तीय लाभ यह केवल बोनस हैं और आवाज वाले आदर्शों की प्राप्ति के लिए एक उपकरण है। वास्तव में अमेरिकी दूतवाद क्या है - दर्शन, धर्मशास्त्र और भू-राजनीति के प्रतिच्छेदन पर एक अलग वार्तालाप। हम केवल यह ध्यान रखते हैं कि इसकी मुख्य अवधारणा जिसके चारों ओर शेष संरचना निर्मित है, वह है "स्वतंत्रता"। दुनिया को मानव स्वतंत्रता के रूप में प्रस्तुत किया गया , वास्तव में, संयुक्त राज्य अमेरिका इसे पूंजी की स्वतंत्रता के रूप में समझता है, अर्थात, एक आर्थिक व्यक्ति की अनुमति। पूरी दुनिया को आदर्श रूप से वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक बाजार बनना चाहिए, जहां व्यक्ति स्वयं दोनों है। ब्रह्मांड की सभी अभिव्यक्तियों और इसके मुख्य सार के बराबर धन। दरअसल, जीवन की ऐसी "मौद्रिक" समझ के आधार पर सभी तथाकथित व्यावहारिकता प्राप्त की जाती है। हालांकि, पैसे का विस्तार - स्थानिक और आध्यात्मिक आयामों में - आज के लाभ तक सीमित नहीं है और मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी कीमत पर नहीं रुकता है - दुनिया के सार्वभौमिक अवशोषण और एक व्यक्ति को वित्तीय तंत्र में सुधार करना । क्या यह समझाने लायक है कि इस तरह से समझा गया "स्वतंत्रता" और ऐसी "प्रगति" पूरी तरह से पूरे दो हज़ार-year ईसाई तरीके के विपरीत हैं और मानवता के लिए घातक हैं? क्या यह संयोग है कि हाल के दशकों में, पश्चिमी सभ्यता सहिष्णुता की आड़ में ईसाई धर्म की कुल अस्वीकृति और समलैंगिकों के अधिकारों की आड़ में धर्म-प्रचार को आगे बढ़ा चुकी है, जबकि रूस पारंपरिक मूल्यों और धर्मों का मुख्य दावेदार बन गया है? क्या यह केवल एक संयोग है कि "पूंजी की स्वतंत्रता" और "आत्मा की स्वतंत्रता" के बीच लड़ाई की शुरुआत सीरिया की धरती पर चल रही है, जहां ईसाई दुनिया ने अपने पहले कदम उठाए थे? मध्य पूर्व के भूमध्य सागर के उन पत्थरों पर ईसाई धर्म की कल्पना की गई थी, और सैकड़ों साल बाद वे इसे दफनाना चाहते हैं। वैसे, अमेरिकी जेलों में प्रशिक्षित आईएसआईएस के विचारक आतंकवादियों के बीच सीरियाई शहर डाबिक में अच्छे और बुरे के बीच अंतिम लड़ाई के विचार के बीच खेती करते हैंः वे जजमेंट डे को करीब लाते हुए मसीह के वंशजों के साथ लड़ाई जीतेंगे। किसी को चुराया नहीं जा सकता है, लेकिन सहस्त्राब्दी अर्थ और धार्मिक रहस्योद्घाटन से इनकार करते हैं, जिसके बिना कोई यह नहीं समझ सकता है कि इतिहास तेल और अल्पकालिक हितों से प्रेरित नहीं है, बल्कि विपरीत सिद्धांतों के संघर्ष से, दो ताकतें जो अलग-अलग दिशाओं में - नीचे और पर्वत ऊंचाइयों तक खींचती हैं। और पूरी तरह से हमारी मूल भूमि के लिए कॉल करने के लिए आवश्यक है कि कैसे, बार-बार यह देखने के लिए नहीं मिलता है कि यह उन लोगों के रास्ते में है, जो खुद को एक महान, शुद्ध जाति या स्वतंत्रता का दीपक घोषित करते हैं, मानवता को अधीन करने का प्रयास करते हैं, रूस को "मुक्ति" के रूप में पूरा करने के लिए एक बाधा के रूप में नष्ट करते हैं। । "बुराई के कुल प्रसार से दुनिया को रोकना" - जैसे रूसी लोगों का क्रॉस, भाग्य और चट्टान, रूसी राज्य एक ऐतिहासिक विषय के रूप में। इसका मतलब रूसियों की अयोग्यता और विशिष्टता नहीं है, क्योंकि संघर्ष भी हमारे भीतर हो रहा है, लेकिन इसकी एक विशेष जिम्मेदारी है और, सबसे महत्वपूर्ण बात, रूसी इतिहास में बहुत कुछ समझाता है, जो राष्ट्रीय हितों के एक साधारण संघर्ष के दृष्टिकोण से समझाना मुश्किल है। क्रांति, गृहयुद्ध और हस्तक्षेप के बाद विनाशकारी और रक्तहीन क्यों है, यह समझाने का कोई और तरीका नहीं है, सोवियत रूस को अत्यधिक परिस्थितियों में और जल्द से जल्द पश्चिम के अगले आक्रमण की तैयारी के लिए मजबूर किया गया था, जो कि तीस की शुरुआत में नेतृत्व के लिए स्पष्ट था। इतिहासकार मनमाने ढंग से हमें हिटलर की उपस्थिति और पूर्व में उसके मार्च की निष्पक्षता के लिए मना सकते हैं, कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन ने अपने नाजी शिष्टाचार पर ध्यान नहीं दिया, और फिर मूर्खता से जर्मन अर्थव्यवस्था के साथ मदद की, लेकिन यह स्पष्ट है कि हिटलर, आईएसआईएस की तरह, अब ध्यान से रूस में हड़ताल करने के लिए पोषित। और जब सोवियत सेना ने बर्लिन पर कब्जा करने के तुरंत बाद नाजी सेना को नष्ट कर दिया, तो वे यूएसएसआर पर हमला करने के लिए "अकल्पनीय" प्रतिबद्ध करने के लिए तैयार थे। हिम्मत मत करना। लेकिन युद्ध के बाद के वर्षों में, उन्होंने परमाणु बम का उपयोग करने की संभावना के साथ मास्को को ब्लैकमेल किया। केवल कम्युनिस्ट और पूंजीवादी व्यवस्थाओं का सामना करने से इस तरह की अर्थहीनता स्पष्ट है, जैसा कि हमने यूएसएसआर के पतन के बाद देखा - कोई साम्यवाद नहीं था, और रूस एक दुश्मन बना रहा। उन्होंने हमें केवल इसलिए समाप्त नहीं किया क्योंकि वे "निरोधक बल" की मृत्यु को कई वर्षों का मामला मानते थे, और आज वे सीरिया में रूसी सेना को देखकर, अपनी कुंठा को कुंठा में काटते हैं। भाग्य को नहीं चुना जाता है, और रूस को मृत्यु से दुनिया की एक नई भागीदारी के लिए बर्बाद किया जाता है - अन्यथा यह रूस होना बंद हो जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद मानवता के सभी के खिलाफ बनाया गया है, लेकिन विशेष रूप से उन लोगों के खिलाफ है जो इस मानवता की रक्षा करने की कोशिश करते हैं। रूसी विभाग ने रूसी शहरों में हड़ताल की धमकी देते हुए सीधे तौर पर हमें बताया। जल्द या बाद में, मास्को को सीधे घोषणा करनी होगी कि संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवादियों का मुख्य साथी है। और इसका मतलब केवल एक ही होगा - "पूंजी की स्वतंत्रता का साम्राज्य" के साथ कुल और वैश्विक टकराव। क्या यह खतरनाक है? हाँ, अत्यंत। क्या इससे परमाणु युद्ध का खतरा है? यह संभावना नहीं है, क्योंकि यह अधिक संभावना आतंकवादी युद्ध और मूल्य की लड़ाई होगी। केवल यह समझना महत्वपूर्ण है कि मामला असद में नहीं है और सीरिया में भी नहीं है, न कि संकीर्ण रूप से समझे जाने वाले रूसी हितों में भी। यह एक आध्यात्मिक टकराव है। और इसमें निराशावाद और अत्यधिक अतिशयता समान रूप से हानिकारक हैं। अट्ठाईस पैनफिलोव के बारे में नई राष्ट्रीय फिल्म के नायकों के रूप में, "हम शांति से जलते हैं। " टैंक'. * एक संगठन जिसके संबंध में अदालत ने संघीय कानून "काउंटरिंग एक्सट्रीमिस्ट एक्टिविटीज़" के लिए प्रदान किए गए आधार पर परिसमापन या गतिविधियों पर रोक लगाने पर अंतिम निर्णय लिया। - लेखकः - मूल स्रोतः
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनियाभर में लगातार लोगों की जान ले रहा है। ऐसे में भारत की स्थिति भी गंभीर है और गुरुवार तक यहां संक्रमण के 166 मामले सामने आए हैं। इधर महाराष्ट्र के मुंबई के दफ्तरों को खाना पहुंचाने वाली डब्बावाला चेन ने भी अपनी सेवाएं 31 मार्च तक के लिए बंद कर दी हैं। कोरोना वायरस दुनियाभर में लगातार लोगों की जान ले रहा है। ऐसे में भारत की स्थिति भी गंभीर है और गुरुवार तक यहां संक्रमण के 166 मामले सामने आए हैं। इधर महाराष्ट्र के मुंबई के दफ्तरों को खाना पहुंचाने वाली डब्बावाला चेन ने भी अपनी सेवाएं 31 मार्च तक के लिए बंद कर दी हैं।
भारत में कोरोना वायरस के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। देश में हर रोज इससे संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है और यह आंकड़ा 166 हो गया है। वहीं, दुनियाभर में यह आंकड़ा दो लाख पार कर गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने से एक तरह से देश की रफ्तार पर ब्रेक सी लग गई है। दिल्ली, पटना, मुंबई, गुरुग्राम समेत कई अन्य शहरों में सार्वजनिक स्थलों, मॉल-मल्टिप्लेक्स, सिनेमाघर, बाजार और मंदिर बंद कर दिए गए हैं। इस महामारी का असर शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। भारत में अभी तक तीन मौतें हुई हैं। कोरोना के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं।
भारत ने कोरोना वायरस प्रकोप के मद्देनजर 36 देशों से आने वाले यात्रियों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। वहीं 11 देशों के यात्रियों को अनिवार्य रूप से अलग रखा जाएगा। गृह मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित देशों को छोड़कर 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया'(ओसीआई) कार्डधारकों को भारत में प्रवेश के लिये भारतीय मिशनों से ताजा वीजा लेना होगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 'कोई भी एयरलाइन ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आइसलैंड, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन से किसी भी यात्री को भारत नहीं लाएगी। यह आदेश 12 मार्च से प्रभावी हो चुका है। ' इसके अलावा 17 मार्च से एयरलाइनों द्वारा फिलिपीन, मलेशिया और अफगानिस्तान से यात्रियों के लाने पर भी रोक लगा दी गई है।
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनियाभर में लगातार लोगों की जान ले रहा है। ऐसे में भारत की स्थिति भी गंभीर है और गुरुवार तक यहां संक्रमण के एक सौ छयासठ मामले सामने आए हैं। इधर महाराष्ट्र के मुंबई के दफ्तरों को खाना पहुंचाने वाली डब्बावाला चेन ने भी अपनी सेवाएं इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दी हैं। कोरोना वायरस दुनियाभर में लगातार लोगों की जान ले रहा है। ऐसे में भारत की स्थिति भी गंभीर है और गुरुवार तक यहां संक्रमण के एक सौ छयासठ मामले सामने आए हैं। इधर महाराष्ट्र के मुंबई के दफ्तरों को खाना पहुंचाने वाली डब्बावाला चेन ने भी अपनी सेवाएं इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दी हैं। भारत में कोरोना वायरस के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। देश में हर रोज इससे संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है और यह आंकड़ा एक सौ छयासठ हो गया है। वहीं, दुनियाभर में यह आंकड़ा दो लाख पार कर गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने से एक तरह से देश की रफ्तार पर ब्रेक सी लग गई है। दिल्ली, पटना, मुंबई, गुरुग्राम समेत कई अन्य शहरों में सार्वजनिक स्थलों, मॉल-मल्टिप्लेक्स, सिनेमाघर, बाजार और मंदिर बंद कर दिए गए हैं। इस महामारी का असर शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। भारत में अभी तक तीन मौतें हुई हैं। कोरोना के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं। भारत ने कोरोना वायरस प्रकोप के मद्देनजर छत्तीस देशों से आने वाले यात्रियों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। वहीं ग्यारह देशों के यात्रियों को अनिवार्य रूप से अलग रखा जाएगा। गृह मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित देशों को छोड़कर 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' कार्डधारकों को भारत में प्रवेश के लिये भारतीय मिशनों से ताजा वीजा लेना होगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 'कोई भी एयरलाइन ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आइसलैंड, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन से किसी भी यात्री को भारत नहीं लाएगी। यह आदेश बारह मार्च से प्रभावी हो चुका है। ' इसके अलावा सत्रह मार्च से एयरलाइनों द्वारा फिलिपीन, मलेशिया और अफगानिस्तान से यात्रियों के लाने पर भी रोक लगा दी गई है।
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पदों का विवरण : मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (MPPEB) ने 3435 ग्रुप 3 पदों पर भर्ती को लेकर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं।
योग्यता : आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से Diploma, Engineering की डिग्री आदि होनी चाहिए।
आयु सीमा : आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष, जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित किया गया हैं। आयु में छूट की जानकारी नोटिश से प्राप्त करें।
आवेदन की तिथि : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 9 अप्रैल 2022 से लेकर 23 अप्रैल 2022 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा।
आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक उम्मीदवार मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (MPPEB) की वेबसाइट पर जा कर आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
आवेदन शुल्क : GEN के लिए आवेदन शुल्क 560/- रुपया, जबकि SC/ ST/ OBC के लिए आवेदन शुल्क 310/- रुपया निर्धारित किया गया हैं।
नौकरी करने का स्थान : मध्य प्रदेश।
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पदों का विवरण : मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने तीन हज़ार चार सौ पैंतीस ग्रुप तीन पदों पर भर्ती को लेकर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। योग्यता : आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से Diploma, Engineering की डिग्री आदि होनी चाहिए। आयु सीमा : आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष, जबकि अधिकतम आयु सीमा चालीस वर्ष निर्धारित किया गया हैं। आयु में छूट की जानकारी नोटिश से प्राप्त करें। आवेदन की तिथि : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार नौ अप्रैल दो हज़ार बाईस से लेकर तेईस अप्रैल दो हज़ार बाईस तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक उम्मीदवार मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल की वेबसाइट पर जा कर आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें। आवेदन शुल्क : GEN के लिए आवेदन शुल्क पाँच सौ साठ/- रुपया, जबकि SC/ ST/ OBC के लिए आवेदन शुल्क तीन सौ दस/- रुपया निर्धारित किया गया हैं। नौकरी करने का स्थान : मध्य प्रदेश।
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श्री पञ्चमेरु पूजा बेसरी छन्द
प्रथम सुदर्शन मेरु विराजे भद्रशाल वन भूपर छाजे । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ॥ ऊपर पांच शतक पर सोहे, नन्दनवन देखत मन मोहे । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। साढ़े वासठ महस ऊँचाई, वन सुमनस शोभै अधिकाई । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी । ऊँचो जोजन सहज छतीसं, पांडुकवन सोहे गिरिसीसं । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। चारों मेरु समान बखानों भूपर भद्रसाल चहुँ जानो । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। ऊँचे पांच शतक पर भाखे, चारों नन्दनवन अभिलाखे चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। साढ़े पचपन सहस उतडा, वन सौमनस चार बहु रङ्गा । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। उच्च अठाइस सहस वताये, पांडुक चारों वन शुभ गाये । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी । सुर नर चारण वन्दन आवें सो शोभा हम किहि मुख गावें । चैत्यालय सी सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। दोहा - पञ्चमेरु की आरती, पड़े सुने जो कोय । 'द्यानत' फल जानें प्रभू, तुरत महासुख होय ।। ओं ह्रीं पञ्चमेरुसम्वन्धिजिन चैत्यालयस्थजिनविम्वेभ्यः अर्ध्वम् ।
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श्री पञ्चमेरु पूजा बेसरी छन्द प्रथम सुदर्शन मेरु विराजे भद्रशाल वन भूपर छाजे । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ॥ ऊपर पांच शतक पर सोहे, नन्दनवन देखत मन मोहे । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। साढ़े वासठ महस ऊँचाई, वन सुमनस शोभै अधिकाई । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी । ऊँचो जोजन सहज छतीसं, पांडुकवन सोहे गिरिसीसं । चैत्यालय चारों सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। चारों मेरु समान बखानों भूपर भद्रसाल चहुँ जानो । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। ऊँचे पांच शतक पर भाखे, चारों नन्दनवन अभिलाखे चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। साढ़े पचपन सहस उतडा, वन सौमनस चार बहु रङ्गा । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। उच्च अठाइस सहस वताये, पांडुक चारों वन शुभ गाये । चैत्यालय सोलह सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी । सुर नर चारण वन्दन आवें सो शोभा हम किहि मुख गावें । चैत्यालय सी सुखकारी, मनवचतन कर वन्दना हमारी ।। दोहा - पञ्चमेरु की आरती, पड़े सुने जो कोय । 'द्यानत' फल जानें प्रभू, तुरत महासुख होय ।। ओं ह्रीं पञ्चमेरुसम्वन्धिजिन चैत्यालयस्थजिनविम्वेभ्यः अर्ध्वम् ।
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जल्द ही रूसी संघ के वायु सेना को नवीनतम प्राप्त होगाटी 50 के 5 वीं पीढ़ी के लड़ाकू। विमान महंगा है, के बारे में $ एक सौ मिलियन आज की विनिमय दर, और औसत करदाता के आधार पर बहुत अच्छी तरह से पैसे की इतनी बड़ी राशि खर्च करने के औचित्य के बारे में कहा जा सकता है।
इतिहास में हथियारों की दौड़ हुईमानवता हमेशा सेना का लाभ, जो प्रौद्योगिकी के सबसे उन्नत मॉडल का मालिक है, अगर 100% नहीं, कम से कम, युद्धों के नतीजे पर काफी प्रभाव डाले। मध्य फॉलीज से, जेट विमानों का तेजी से विकास शुरू हुआ। एक और बारी-बारी से पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बाद एक, जिनमें से प्रत्येक सभी पिछले सर्वश्रेष्ठ तकनीकी विशेषताओं से मतभेदः चढ़ाई, छत, गतिशीलता, क्षमता और छोटे हथियारों, उपस्थिति और मिसाइलों के विभिन्न प्रकारों की संख्या, पता लगाने और नेविगेशन के माध्यम से पर बोर्ड चड्डी की राशि की दर। सभी में पांच पीढ़ियां हैं। बाद वाले के लिए अमेरिका एफ -22 और एफ -35, जे-20 चीनी और रूसी टी 50 में शामिल हैं। जब तक काफी हाल ही में विमानन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतिम शब्द पर विचार किया गया उपस्थिति से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से प्रतिष्ठित हो सकता है।
तो, नवीनतम के बाहरी लक्षण क्या हैंइंटरसेप्टर विमान? पहली और उन दोनों के बीच मुख्य अंतर यह अधिक कोणीय आकार, सुंदर चिकनी सिल्हूट MiGs के बाद असामान्य है, "साब्रेस", "फैंटम" और "सूखी", सभी पिछले एक दशक के लिए उपयोग किया जाता है जो। बेशक, सौंदर्यशास्त्र का इसके साथ कुछ नहीं करना है बाहरी ताकि एक बड़ी हद तक जितना संभव हो उतना, वे वापस प्राप्त एंटीना रडार पर नहीं आया, और बगल में कहीं चला गया रडार विकिरण सतहों को प्रतिबिंबित करने की क्षमता के कारण, एक खास कोण विमानों पर अन्तर्विभाजक से मिलकर आकृति। एक ही आवश्यकताओं के रूप में अभाव या, बाहरी लोड पर हथियारों के न्यूनीकरण से तय है जो, क्योंकि जटिल ज्यामितीय आकार का "प्रकाश" विशेष रूप से उज्ज्वल। लोग हवा में एक छोटे से समझते हैं, और तीसरे जमीन है जिस पर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रतिष्ठित किया जा सकता का प्रतीक होगा। पाक एफए टी 50 अपने विदेशी समकक्षों के रूप में, समकालीन रोटरी जोर वेक्टर है। तो एक आम भाषा के लिए तकनीकी शब्द का अनुवाद, इसका मतलब है कि नलिका दो या तीन विमानों में अनुदैर्ध्य मध्य रेखा के बारे में घूर्णन योग्य हैं। अन्य सभी मामलों में, पांचवीं पीढ़ी के विमान में पिछले मॉडल के रूप में लगभग समान डिजाइन थे।
प्रौद्योगिकी की उपस्थिति ने कई लोगों को न्याय करने की अनुमति नहीं दी हैअन्य मापदंड जो आंखों तक पहुंच योग्य नहीं हैं I पांचवीं पीढ़ी टी -50 की नई लड़ाकू न केवल टाइटेनियम और एल्यूमीनियम मिश्र धातुओं की एक बड़ी हद तक (लगभग आधा) बनाई जाती है, इसके डिजाइन को समग्र प्लास्टिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। रासायनिक उत्पादों की तकनीकी उपलब्धियों ने उन हिस्सों के निर्माण के लिए पॉलिमर के इस्तेमाल के लिए रास्ता खोला जो पहले ही धातु के बने थे। यह तुरंत कई समस्याओं का हलः कम वजन बन गया, परिचालन जंग का खतरा भी कम हो गया, लेकिन मुख्य प्रभाव वायु रक्षा के लिए एक छोटी सी दृश्यता थी पॉलिमर जंजीरों एक तरह के डंपनर के रूप में काम करती हैं, उच्च आवृत्ति विकिरण को दबाने। इस क्षेत्र में हालिया प्रगति में टी -50 के निर्माण के लिए सामग्रियों में आवेदन मिला है पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू सुपर गतिशील, कम-ध्यान देने योग्य और सुपरसोनिक हाई स्पीड विशेषताओं होना चाहिए। नतीजतन, यह हल्के, टिकाऊ और यथासंभव उच्च आवृत्ति विकिरण के रूप में प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है।
पांचवीं पीढ़ी लड़ाकू विमान के सिद्धांतों के कार्यान्वयन में अमेरिकी अग्रणी थे उन्होंने अनुभव का पहला कड़वा फल भी चख लिया।
कम रडार दृश्यता, जो बन गई हैआधुनिक युद्ध की स्थिति में एक तत्काल आवश्यकता, विमान डिजाइनरों की एक बड़ी संख्या में बहुत सारी समस्याओं का निर्माण किया। वायुगतिकी के बारे में प्रतिनिधित्वों पर पुनर्विचार किया जाना था, जो उड़ान के गुणों को स्पष्ट रूप से बिगड़ता था। शक्ति का भी सामना करना पड़ा। "रैप्टर" "प्रेत" की तुलना में कम दबाव का सामना कर सकता है, अमेरिकी वायु सेना के पूर्व "वर्कहोर" अभी भी वियतनाम युद्ध के दौरान (4.95 ग्राम / 0.8 अधिकतम एफ -22 पर 5.50 ग्राम / 0.8 अधिकतम एफ -4 ई )। इसकी गति 50 के दशक के अंत में विकसित विमान की तुलना में भी कम है, और 60 के दशक में लड़ाकू अनुभव प्राप्त किया।
और के कारण मामूली उड़ान प्रदर्शनहथियारों के इन-फ़्यूज़ल तैनाती की आवश्यकता मिग, "फांटोम्स" और "टॉमकैट्स" ने मिसाइलों को अपने पंखों के नीचे ले लिया और लगभग सभी आंतरिक जगहों पर बिजली संयंत्र, ईंधन टैंक, चालक दल के केबिन, विमानन और अन्य महत्वपूर्ण जंक्शनों द्वारा कब्जा किया गया। जाहिर है, अतिरिक्त मात्रा वायुगतिकी को बिगड़ती है। और यह बहुत गंभीर नतीजे पर जोर देता है। अगर "रैप्टर" अभी भी पाया जाता है, और उस पर दुश्मन एक रॉकेट जारी करेंगे, तो पायलट के लिए जो कुछ भी रहता है, वह पहले से निकालना है थोड़ा मौका के प्रभाव से दूर हो जाओ।
लगभग 350 मिलियन अमेरिकी विमान हैं पायलट की संचालन की लागत और श्रम लागतों की कीमत 44,000 डॉलर में खींचती है, उसकी उड़ान का एक घंटे यह महंगा है रैप्टर एफ -22 पहले ही बंद कर दिया गया है।
चीन में, जेट सेनानियों के साथ निर्माण शुरू हुआएक पीढ़ी से देरी राष्ट्रीय विमानन उद्योग की शुरुआत में, कोई भी डिजाइन नहीं थे, सोवियत विमान की प्रतिलिपि बनाई गई थी। इसलिए, उनकी "स्टाल्स" जे -20 चीनी विनम्रता चौथी पीढ़ी के लिए जिम्मेदार है, हालांकि विश्व मानकों के मुताबिक, यह पांचवीं के अनुरूप है चेंग के बारे में बहुत कुछ जाना जाता है, लेकिन इसकी उपस्थिति को देखते हुए, यह सोवियत डिजाइनरों के विचारों का वाहक बनी हुई है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के देर से अस्सी के दशक में एक महत्वाकांक्षी शुरुआत हुईमरीन कोर के पुनर्निर्माण के लिए कार्यक्रम हॉरनेट एफ -18 को बदलने के लिए, विमान के अगली पीढ़ी के कुछ संकेतों को रखने वाले एक नए विमान की आवश्यकता थी। यह काम पेंटागन द्वारा निर्धारित दो आवश्यकताओं से जटिल थाः नौसेना जहाज-आधारित तैनाती की संभावना और यथासंभव कम। लॉकहीड-मार्टिन एफ -35 लाइटनिंग (मोलियानिया) द्वारा विकसित विमान, प्रतियोगिता जीता इसकी उड़ान और परिचालन विशेषताओं के साथ-साथ इसके लड़ने के गुणों के अनुसार, यह सु -35 वर्ग के रूसी इंटरसेप्टर के लिए भी नीच है। पांचवां पीढ़ी के लड़ाकू टी -50, अब तक लगभग सभी मापदंडों से अधिक है।
विस्तृत तकनीकी की कमी के कारणयह आकलन की सरल पद्धति का उपयोग करने के लिए समझ में आता है, ज्यामितीय पाक-एफए रैप्टर से बड़ा है, इसलिए अधिक रॉकेट या निर्देशित बम अपने हथियार डिब्बों में फिट हो सकते हैं। तो प्रकाशित डेटा के अनुसार, वह धड़ में 10 एसडी और पंखों के नीचे 6 अतिरिक्त (एफ -22, क्रमशः, 12 और 4) में है। साथ ही, पश्चिमी विशेषज्ञ बाहरी निलंबन प्रणालियों के उपयोग में गोपनीयता की गिरावट को इंगित करते हैं, लेकिन रूसी इंजीनियरों ने संकेत दिया है कि वे इस तकनीक के "प्लाज्मा-चुपके" के मालिक हैं जो इस दोष का स्तर है। 5 वीं पीढ़ी के सेनानी के बारे में फैसला करना बेहतर है, यह संभव है और मुकाबला उपयोग के दायरे पर है। टी -50 5,5 हजार किलोमीटर को पार कर सकता है, जबकि एफ -22 केवल 3,2 हजार किमी है। "रैप्टर" के फायदे थर्मल ट्रेस को नष्ट करने के लिए और इष्टतम विकिरण शक्ति के साथ-साथ रडार के संचालन के लिए विशेष प्रणाली में प्रकट होते हैं। इन दोनों विशेषताएं अवरक्त पहचान के लिए मुश्किल बनाते हैं। इसमें एक उच्च सुपरसोनिक क्रूज़िंग स्पीड (1.8 मेगा, टी -50 की तरह) है, जिससे उसे हवाई वायुसेना के स्थान पर जल्दी पहुंचने की अनुमति मिलती है। और आगे क्या है?
रूसी की गतिशीलतापांचवीं पीढ़ी के टी-50 सेनानी अमेरिकी इंटरसेप्टर एफ -22 की तुलना में काफी बेहतर है। यह, अन्य सभी तुलनीय मापदंडों के लिए, हाल के दशकों के सैन्य अनुभवों को देखते हुए एक आधुनिक वायु युद्ध में सफलता का निर्धारण करता है। इस मामले में, दोनों तरह के कार्यों को हल करने के लिए दोनों विमान तैयार किए गए थे, जिनमें जमीन के लक्ष्य के खिलाफ हमलों भी शामिल थे। अमेरिकन "सहकर्मी" के विपरीत, रूसी टी -50, पांचवीं पीढ़ी सेनानी, भी एक सुपरसोनिक तूफान वाला हो सकता है, जबकि शॉट से पहले "रैप्टर" धीमा होने की आवश्यकता होती है।
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जल्द ही रूसी संघ के वायु सेना को नवीनतम प्राप्त होगाटी पचास के पाँच वीं पीढ़ी के लड़ाकू। विमान महंगा है, के बारे में $ एक सौ मिलियन आज की विनिमय दर, और औसत करदाता के आधार पर बहुत अच्छी तरह से पैसे की इतनी बड़ी राशि खर्च करने के औचित्य के बारे में कहा जा सकता है। इतिहास में हथियारों की दौड़ हुईमानवता हमेशा सेना का लाभ, जो प्रौद्योगिकी के सबसे उन्नत मॉडल का मालिक है, अगर एक सौ% नहीं, कम से कम, युद्धों के नतीजे पर काफी प्रभाव डाले। मध्य फॉलीज से, जेट विमानों का तेजी से विकास शुरू हुआ। एक और बारी-बारी से पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बाद एक, जिनमें से प्रत्येक सभी पिछले सर्वश्रेष्ठ तकनीकी विशेषताओं से मतभेदः चढ़ाई, छत, गतिशीलता, क्षमता और छोटे हथियारों, उपस्थिति और मिसाइलों के विभिन्न प्रकारों की संख्या, पता लगाने और नेविगेशन के माध्यम से पर बोर्ड चड्डी की राशि की दर। सभी में पांच पीढ़ियां हैं। बाद वाले के लिए अमेरिका एफ -बाईस और एफ -पैंतीस, जे-बीस चीनी और रूसी टी पचास में शामिल हैं। जब तक काफी हाल ही में विमानन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतिम शब्द पर विचार किया गया उपस्थिति से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से प्रतिष्ठित हो सकता है। तो, नवीनतम के बाहरी लक्षण क्या हैंइंटरसेप्टर विमान? पहली और उन दोनों के बीच मुख्य अंतर यह अधिक कोणीय आकार, सुंदर चिकनी सिल्हूट MiGs के बाद असामान्य है, "साब्रेस", "फैंटम" और "सूखी", सभी पिछले एक दशक के लिए उपयोग किया जाता है जो। बेशक, सौंदर्यशास्त्र का इसके साथ कुछ नहीं करना है बाहरी ताकि एक बड़ी हद तक जितना संभव हो उतना, वे वापस प्राप्त एंटीना रडार पर नहीं आया, और बगल में कहीं चला गया रडार विकिरण सतहों को प्रतिबिंबित करने की क्षमता के कारण, एक खास कोण विमानों पर अन्तर्विभाजक से मिलकर आकृति। एक ही आवश्यकताओं के रूप में अभाव या, बाहरी लोड पर हथियारों के न्यूनीकरण से तय है जो, क्योंकि जटिल ज्यामितीय आकार का "प्रकाश" विशेष रूप से उज्ज्वल। लोग हवा में एक छोटे से समझते हैं, और तीसरे जमीन है जिस पर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रतिष्ठित किया जा सकता का प्रतीक होगा। पाक एफए टी पचास अपने विदेशी समकक्षों के रूप में, समकालीन रोटरी जोर वेक्टर है। तो एक आम भाषा के लिए तकनीकी शब्द का अनुवाद, इसका मतलब है कि नलिका दो या तीन विमानों में अनुदैर्ध्य मध्य रेखा के बारे में घूर्णन योग्य हैं। अन्य सभी मामलों में, पांचवीं पीढ़ी के विमान में पिछले मॉडल के रूप में लगभग समान डिजाइन थे। प्रौद्योगिकी की उपस्थिति ने कई लोगों को न्याय करने की अनुमति नहीं दी हैअन्य मापदंड जो आंखों तक पहुंच योग्य नहीं हैं I पांचवीं पीढ़ी टी -पचास की नई लड़ाकू न केवल टाइटेनियम और एल्यूमीनियम मिश्र धातुओं की एक बड़ी हद तक बनाई जाती है, इसके डिजाइन को समग्र प्लास्टिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। रासायनिक उत्पादों की तकनीकी उपलब्धियों ने उन हिस्सों के निर्माण के लिए पॉलिमर के इस्तेमाल के लिए रास्ता खोला जो पहले ही धातु के बने थे। यह तुरंत कई समस्याओं का हलः कम वजन बन गया, परिचालन जंग का खतरा भी कम हो गया, लेकिन मुख्य प्रभाव वायु रक्षा के लिए एक छोटी सी दृश्यता थी पॉलिमर जंजीरों एक तरह के डंपनर के रूप में काम करती हैं, उच्च आवृत्ति विकिरण को दबाने। इस क्षेत्र में हालिया प्रगति में टी -पचास के निर्माण के लिए सामग्रियों में आवेदन मिला है पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू सुपर गतिशील, कम-ध्यान देने योग्य और सुपरसोनिक हाई स्पीड विशेषताओं होना चाहिए। नतीजतन, यह हल्के, टिकाऊ और यथासंभव उच्च आवृत्ति विकिरण के रूप में प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है। पांचवीं पीढ़ी लड़ाकू विमान के सिद्धांतों के कार्यान्वयन में अमेरिकी अग्रणी थे उन्होंने अनुभव का पहला कड़वा फल भी चख लिया। कम रडार दृश्यता, जो बन गई हैआधुनिक युद्ध की स्थिति में एक तत्काल आवश्यकता, विमान डिजाइनरों की एक बड़ी संख्या में बहुत सारी समस्याओं का निर्माण किया। वायुगतिकी के बारे में प्रतिनिधित्वों पर पुनर्विचार किया जाना था, जो उड़ान के गुणों को स्पष्ट रूप से बिगड़ता था। शक्ति का भी सामना करना पड़ा। "रैप्टर" "प्रेत" की तुलना में कम दबाव का सामना कर सकता है, अमेरिकी वायु सेना के पूर्व "वर्कहोर" अभी भी वियतनाम युद्ध के दौरान । इसकी गति पचास के दशक के अंत में विकसित विमान की तुलना में भी कम है, और साठ के दशक में लड़ाकू अनुभव प्राप्त किया। और के कारण मामूली उड़ान प्रदर्शनहथियारों के इन-फ़्यूज़ल तैनाती की आवश्यकता मिग, "फांटोम्स" और "टॉमकैट्स" ने मिसाइलों को अपने पंखों के नीचे ले लिया और लगभग सभी आंतरिक जगहों पर बिजली संयंत्र, ईंधन टैंक, चालक दल के केबिन, विमानन और अन्य महत्वपूर्ण जंक्शनों द्वारा कब्जा किया गया। जाहिर है, अतिरिक्त मात्रा वायुगतिकी को बिगड़ती है। और यह बहुत गंभीर नतीजे पर जोर देता है। अगर "रैप्टर" अभी भी पाया जाता है, और उस पर दुश्मन एक रॉकेट जारी करेंगे, तो पायलट के लिए जो कुछ भी रहता है, वह पहले से निकालना है थोड़ा मौका के प्रभाव से दूर हो जाओ। लगभग तीन सौ पचास मिलियन अमेरिकी विमान हैं पायलट की संचालन की लागत और श्रम लागतों की कीमत चौंतालीस,शून्य डॉलर में खींचती है, उसकी उड़ान का एक घंटे यह महंगा है रैप्टर एफ -बाईस पहले ही बंद कर दिया गया है। चीन में, जेट सेनानियों के साथ निर्माण शुरू हुआएक पीढ़ी से देरी राष्ट्रीय विमानन उद्योग की शुरुआत में, कोई भी डिजाइन नहीं थे, सोवियत विमान की प्रतिलिपि बनाई गई थी। इसलिए, उनकी "स्टाल्स" जे -बीस चीनी विनम्रता चौथी पीढ़ी के लिए जिम्मेदार है, हालांकि विश्व मानकों के मुताबिक, यह पांचवीं के अनुरूप है चेंग के बारे में बहुत कुछ जाना जाता है, लेकिन इसकी उपस्थिति को देखते हुए, यह सोवियत डिजाइनरों के विचारों का वाहक बनी हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के देर से अस्सी के दशक में एक महत्वाकांक्षी शुरुआत हुईमरीन कोर के पुनर्निर्माण के लिए कार्यक्रम हॉरनेट एफ -अट्ठारह को बदलने के लिए, विमान के अगली पीढ़ी के कुछ संकेतों को रखने वाले एक नए विमान की आवश्यकता थी। यह काम पेंटागन द्वारा निर्धारित दो आवश्यकताओं से जटिल थाः नौसेना जहाज-आधारित तैनाती की संभावना और यथासंभव कम। लॉकहीड-मार्टिन एफ -पैंतीस लाइटनिंग द्वारा विकसित विमान, प्रतियोगिता जीता इसकी उड़ान और परिचालन विशेषताओं के साथ-साथ इसके लड़ने के गुणों के अनुसार, यह सु -पैंतीस वर्ग के रूसी इंटरसेप्टर के लिए भी नीच है। पांचवां पीढ़ी के लड़ाकू टी -पचास, अब तक लगभग सभी मापदंडों से अधिक है। विस्तृत तकनीकी की कमी के कारणयह आकलन की सरल पद्धति का उपयोग करने के लिए समझ में आता है, ज्यामितीय पाक-एफए रैप्टर से बड़ा है, इसलिए अधिक रॉकेट या निर्देशित बम अपने हथियार डिब्बों में फिट हो सकते हैं। तो प्रकाशित डेटा के अनुसार, वह धड़ में दस एसडी और पंखों के नीचे छः अतिरिक्त में है। साथ ही, पश्चिमी विशेषज्ञ बाहरी निलंबन प्रणालियों के उपयोग में गोपनीयता की गिरावट को इंगित करते हैं, लेकिन रूसी इंजीनियरों ने संकेत दिया है कि वे इस तकनीक के "प्लाज्मा-चुपके" के मालिक हैं जो इस दोष का स्तर है। पाँच वीं पीढ़ी के सेनानी के बारे में फैसला करना बेहतर है, यह संभव है और मुकाबला उपयोग के दायरे पर है। टी -पचास पाँच,पाँच हजार किलोमीटर को पार कर सकता है, जबकि एफ -बाईस केवल तीन,दो हजार किमी है। "रैप्टर" के फायदे थर्मल ट्रेस को नष्ट करने के लिए और इष्टतम विकिरण शक्ति के साथ-साथ रडार के संचालन के लिए विशेष प्रणाली में प्रकट होते हैं। इन दोनों विशेषताएं अवरक्त पहचान के लिए मुश्किल बनाते हैं। इसमें एक उच्च सुपरसोनिक क्रूज़िंग स्पीड है, जिससे उसे हवाई वायुसेना के स्थान पर जल्दी पहुंचने की अनुमति मिलती है। और आगे क्या है? रूसी की गतिशीलतापांचवीं पीढ़ी के टी-पचास सेनानी अमेरिकी इंटरसेप्टर एफ -बाईस की तुलना में काफी बेहतर है। यह, अन्य सभी तुलनीय मापदंडों के लिए, हाल के दशकों के सैन्य अनुभवों को देखते हुए एक आधुनिक वायु युद्ध में सफलता का निर्धारण करता है। इस मामले में, दोनों तरह के कार्यों को हल करने के लिए दोनों विमान तैयार किए गए थे, जिनमें जमीन के लक्ष्य के खिलाफ हमलों भी शामिल थे। अमेरिकन "सहकर्मी" के विपरीत, रूसी टी -पचास, पांचवीं पीढ़ी सेनानी, भी एक सुपरसोनिक तूफान वाला हो सकता है, जबकि शॉट से पहले "रैप्टर" धीमा होने की आवश्यकता होती है।
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उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। शासन द्वारा रविवार रात जारी नोटिस में राज्य के आठ आईएएस (IAS) अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। इस ताबदले के बाद प्रतिक्षारत यानी वेटिंग के तीन आईएएस अधिकारियों को भी नया पद दे दिया गया है, हालांकि बीते लंबे वक्त से राज्य में वेटिंग के अफसरों को नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा चल रही थी।
शासन द्वारा जारी नोटिस में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात आईएएस अफसर महेंद्र सिंह को अब गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया गया है। वहीं ग्राम्य विकास के मनरेगा में रेणु तिवारी को अपर आयुक्त बना दिया गया है, इससे पहले रेणु तिवारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
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उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। शासन द्वारा रविवार रात जारी नोटिस में राज्य के आठ आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। इस ताबदले के बाद प्रतिक्षारत यानी वेटिंग के तीन आईएएस अधिकारियों को भी नया पद दे दिया गया है, हालांकि बीते लंबे वक्त से राज्य में वेटिंग के अफसरों को नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा चल रही थी। शासन द्वारा जारी नोटिस में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात आईएएस अफसर महेंद्र सिंह को अब गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया गया है। वहीं ग्राम्य विकास के मनरेगा में रेणु तिवारी को अपर आयुक्त बना दिया गया है, इससे पहले रेणु तिवारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
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तजबीजें कर रहे थे और अगर मेरा हाफिजा गलती नहीं करता, तो भाप ही लोग उन मौकों पर पेश नजर भाते थे। मगर भाज एकाएक यह इनकलाब नजर आता है। और, भापका तलब्दुन भापको मुबारक रहे, बन्दा इतना सहलयकीन नहीं है। मैंने जिन्दगी का यह उसूल बना लिया है कि बिरादराने वतन की हरएक तजबीज की मुखालिफत करूंगा, क्योंकि मुझे उससे किसी बेहबूदी की तबक्को नहीं है ।
भबुलवफा ने कहा- मालिहाजा, मुझे रात को भाफताब का यकीन हो सकता है, पर हिन्दुओंों की नेकनीयत पर यकीन नहीं हो सकता ।
सैयद शफकत अली बोले-हाजी साहब, मापने हम लोगों को जमाना-साज भौर बेउसूल समझने में मतानत से काम नहीं लिया। हमारा उसूल जो तब था, वह अब भी है और वही हमेशा रहेगा और वह है इस्लामी बकार को कायम करना और हरएक जायज तरीके से बिरादराने मिल्लत की बेहबूदी की कोशिश करना । अगर हमारे फायदे में बिरादराने वतन का नुकसान हो, तो हमको इसकी परवाह नहीं। मगर जिस तजवीज से उनके साथ हमको भी फायदा पहुँचता है और उनसे किसी तरह कम नहीं, उसकी मुखालिफत करना हमारे इमकाम से बाहर है । हम मुखालिफत के लिए मुखालिफत नहीं कर सकते ।
रात अधिक जा चुकी थी। सभा समाप्त हो गई। इस वार्तालाप का कोई विशेष फल न निकला। लोग मन में जो पक्ष स्थिर करके घर से आये थे, उसी पक्ष पर डटे रहे । हाजी हाशिम को अपनी विजय का जो पूर्ण विश्वास था, उसमें सन्देह पड़ गया ।
इस प्रस्ताव के विरोध में हिन्दू मेम्बरों को जब मुसलमानों के जलसे का हाल मालूम हुआ, तो उनके कान खड़े हुए। उन्हें मुसलमानों से जो श्राशा थी, वह भंग हो गई। कुल दस हिन्दू थे। सेठ बलभद्रदास चेयरमैन थे । डाक्टर श्यामाचरण वाइसचेयरमैन । लाला चिम्मनलाल मौर दीनानाथ तिवारी व्यापारियों के नेता थे। पद्मसिंह मौर रुस्तमभाई वकील थे । रमेशदत्त कालेज के प्रध्यापक, लाला भगतराम ठेकेदार, प्रभाकरराव हिन्दी पत्र 'जगत' के संपादक और कुंवर अनिरुद्ध बहादुरसिंह जिले के सबसे बड़े जमींदार थे। चौक की दूकानों में अधिकांश बलभद्रदास और चिम्मनलाल की थीं। दालमण्डी में दीनानाथ के कितने ही मकान थे। ये तीनों महाशय इस प्रस्ताव के विपक्षी थे । लाला भगतराम का काम चिम्मनलाल की आर्थिक सहायता से चलता था। इसलिए उनकी सम्मति भी उन्हीं की भोर थी। प्रभाकरराव, रमेशदत्त, रुस्तमभाई और पद्मसिंह इस प्रस्ताव के पक्ष में थे। डाक्टर श्यामाचरण और कुंवर साहब
के विषय में अभी तक कुछ निश्चय नहीं हो सका था। दोनों पक्ष उनसे सहायता
की प्राशा रखते थे । उन्हीं पर दोनों पक्षों की हार-जीत निर्भर थी । पद्मसिंह मभी बारात से नहीं लौटे थे ।
बलभद्रदास ने इस अवसर को अपने पक्ष के समर्थन के लिए उपयुक्त समझा और सब हिन्दू मेम्बरों को अपनी सुसज्जित बारहदरी में निमन्त्रित किया। इसका य उद्देश्य यह था कि डाक्टर साहब और कुँवर महोदय की सहानुभूति अपने पक्ष में कर ले । प्रभाकरराव मुसलमानों के कट्टर विरोधी थे। वे लोग इस प्रस्ताव को हिन्दू-मुसलिम विवाद का रंग देकर प्रभाकरराव को भी अपनी ओर खींचना चाहते थे ।
दीनावाथ तिवारी बोले-हमारे मुसलमान भाइयों ने तो इस विषय में बड़ी उदारता दिखायी, पर इसमें एक गूढ़ रहस्य है । उन्होंने 'एक पंथ दो काज' वाली चाल चली है। एक ओर तो समाज सुधार की नेकनामी हाय माती है, दूसरी भोर हिन्दुभों को हानि पहुँचाने का एक बहाना मिलता है। ऐसे अवसर से वे कब चुकनेवाले थे ?
चिम्मनलाल मुझे पालिटिक्स से कोई वास्ता नहीं है और न मैं इसके निकट जाता । लेकिन मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि हमारे मुसलिम भाइयों ने हमारी गरदन बुरी तरह पकड़ी है। दालमण्डी औौर चौक के अधिकांश मकान हिन्दुओं के है। यदि बोर्ड ने यह स्वीकार कर लिया, तो हिन्दुओं का मटियामेट हो जाएगा ! छिपे-छिपे चोट करना कोई मुसलमानों से सीख ले । अभी बहुत दिन नहीं बीते कि सूद की आड़ में हिन्दुओं पर आक्रमण किया गया था। अब वह चाल पट पड़ गई, तो यह नया उपाय सोचा । खेद है कि हमारे कुछ हिन्दू भाई उनके हाथों की कठपुतली बते हुए है। वे नहीं जानते कि अपने दुरुत्साह से अपनी जाति को कितनी हानी पहुँचा रहे हैं ।
स्थानीय कौंसिल में जब मूद का प्रस्ताव उपस्थित था, तो प्रभाकरराव ने उसका घोर विरोध किया था। चिम्मनलाल ने उसका उल्लेख करके और वर्तमान विषय को आर्थिक दृष्टिकोण से दिखाकर प्रभाकरराव को नियमविरुद्ध करने की चेष्टा की । प्रभाकरराव ने विवश नेत्रों से रुस्तमभाई की ओर देखा, मानो उनसे कह रहे थे कि मुझे ये लोग ब्रह्मफॉन में डाल रहे है, श्राप किसी तरह मेरा उद्धार कीजिए ।
रुस्तमभाई बड़े निर्भीक, स्पष्टवादी पुरुष थे । वे चिम्मनलाल का उत्तर देने के लिए खड़े हो गए और बोले- मुझे यह देखकर शोक हो रहा है कि श्राप लोग एक सामाजिक प्रश्न को हिन्दू-मुसलमानों के विवाद का स्वरूप दे रहे है । सूद के प्रश्न को भी यही रंग देने की चेष्टा की गई थी। ऐसे राष्ट्रीय विषयों को विवादग्रस्त बनाने से कुछ हिन्दू साहुकारो का भला हो जाता है; किन्तु इसमें राष्ट्रीयता को जी चोट लगती है, उसका अनुमान करना कठिन है। इसमें सन्देह नहीं कि इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने से हिन्दू साहुकारों को अधिक हानि पहुँचेगी, लेकिन मुसलमानों पर भी इसका प्रभाव अवश्य पड़ेगा । चौक और दालमण्डी में मुसलमानों की दुकानें कम नहीं हैं। हमको प्रतिवाद या विरोध की धुन में अपने मुसलमान भाइयों की नीयत की सचाई पर सन्देह न करना चाहिए । उन्होंने इस विषय में जो कुछ निश्चय किया है, वह सार्वजनिक
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तजबीजें कर रहे थे और अगर मेरा हाफिजा गलती नहीं करता, तो भाप ही लोग उन मौकों पर पेश नजर भाते थे। मगर भाज एकाएक यह इनकलाब नजर आता है। और, भापका तलब्दुन भापको मुबारक रहे, बन्दा इतना सहलयकीन नहीं है। मैंने जिन्दगी का यह उसूल बना लिया है कि बिरादराने वतन की हरएक तजबीज की मुखालिफत करूंगा, क्योंकि मुझे उससे किसी बेहबूदी की तबक्को नहीं है । भबुलवफा ने कहा- मालिहाजा, मुझे रात को भाफताब का यकीन हो सकता है, पर हिन्दुओंों की नेकनीयत पर यकीन नहीं हो सकता । सैयद शफकत अली बोले-हाजी साहब, मापने हम लोगों को जमाना-साज भौर बेउसूल समझने में मतानत से काम नहीं लिया। हमारा उसूल जो तब था, वह अब भी है और वही हमेशा रहेगा और वह है इस्लामी बकार को कायम करना और हरएक जायज तरीके से बिरादराने मिल्लत की बेहबूदी की कोशिश करना । अगर हमारे फायदे में बिरादराने वतन का नुकसान हो, तो हमको इसकी परवाह नहीं। मगर जिस तजवीज से उनके साथ हमको भी फायदा पहुँचता है और उनसे किसी तरह कम नहीं, उसकी मुखालिफत करना हमारे इमकाम से बाहर है । हम मुखालिफत के लिए मुखालिफत नहीं कर सकते । रात अधिक जा चुकी थी। सभा समाप्त हो गई। इस वार्तालाप का कोई विशेष फल न निकला। लोग मन में जो पक्ष स्थिर करके घर से आये थे, उसी पक्ष पर डटे रहे । हाजी हाशिम को अपनी विजय का जो पूर्ण विश्वास था, उसमें सन्देह पड़ गया । इस प्रस्ताव के विरोध में हिन्दू मेम्बरों को जब मुसलमानों के जलसे का हाल मालूम हुआ, तो उनके कान खड़े हुए। उन्हें मुसलमानों से जो श्राशा थी, वह भंग हो गई। कुल दस हिन्दू थे। सेठ बलभद्रदास चेयरमैन थे । डाक्टर श्यामाचरण वाइसचेयरमैन । लाला चिम्मनलाल मौर दीनानाथ तिवारी व्यापारियों के नेता थे। पद्मसिंह मौर रुस्तमभाई वकील थे । रमेशदत्त कालेज के प्रध्यापक, लाला भगतराम ठेकेदार, प्रभाकरराव हिन्दी पत्र 'जगत' के संपादक और कुंवर अनिरुद्ध बहादुरसिंह जिले के सबसे बड़े जमींदार थे। चौक की दूकानों में अधिकांश बलभद्रदास और चिम्मनलाल की थीं। दालमण्डी में दीनानाथ के कितने ही मकान थे। ये तीनों महाशय इस प्रस्ताव के विपक्षी थे । लाला भगतराम का काम चिम्मनलाल की आर्थिक सहायता से चलता था। इसलिए उनकी सम्मति भी उन्हीं की भोर थी। प्रभाकरराव, रमेशदत्त, रुस्तमभाई और पद्मसिंह इस प्रस्ताव के पक्ष में थे। डाक्टर श्यामाचरण और कुंवर साहब के विषय में अभी तक कुछ निश्चय नहीं हो सका था। दोनों पक्ष उनसे सहायता की प्राशा रखते थे । उन्हीं पर दोनों पक्षों की हार-जीत निर्भर थी । पद्मसिंह मभी बारात से नहीं लौटे थे । बलभद्रदास ने इस अवसर को अपने पक्ष के समर्थन के लिए उपयुक्त समझा और सब हिन्दू मेम्बरों को अपनी सुसज्जित बारहदरी में निमन्त्रित किया। इसका य उद्देश्य यह था कि डाक्टर साहब और कुँवर महोदय की सहानुभूति अपने पक्ष में कर ले । प्रभाकरराव मुसलमानों के कट्टर विरोधी थे। वे लोग इस प्रस्ताव को हिन्दू-मुसलिम विवाद का रंग देकर प्रभाकरराव को भी अपनी ओर खींचना चाहते थे । दीनावाथ तिवारी बोले-हमारे मुसलमान भाइयों ने तो इस विषय में बड़ी उदारता दिखायी, पर इसमें एक गूढ़ रहस्य है । उन्होंने 'एक पंथ दो काज' वाली चाल चली है। एक ओर तो समाज सुधार की नेकनामी हाय माती है, दूसरी भोर हिन्दुभों को हानि पहुँचाने का एक बहाना मिलता है। ऐसे अवसर से वे कब चुकनेवाले थे ? चिम्मनलाल मुझे पालिटिक्स से कोई वास्ता नहीं है और न मैं इसके निकट जाता । लेकिन मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि हमारे मुसलिम भाइयों ने हमारी गरदन बुरी तरह पकड़ी है। दालमण्डी औौर चौक के अधिकांश मकान हिन्दुओं के है। यदि बोर्ड ने यह स्वीकार कर लिया, तो हिन्दुओं का मटियामेट हो जाएगा ! छिपे-छिपे चोट करना कोई मुसलमानों से सीख ले । अभी बहुत दिन नहीं बीते कि सूद की आड़ में हिन्दुओं पर आक्रमण किया गया था। अब वह चाल पट पड़ गई, तो यह नया उपाय सोचा । खेद है कि हमारे कुछ हिन्दू भाई उनके हाथों की कठपुतली बते हुए है। वे नहीं जानते कि अपने दुरुत्साह से अपनी जाति को कितनी हानी पहुँचा रहे हैं । स्थानीय कौंसिल में जब मूद का प्रस्ताव उपस्थित था, तो प्रभाकरराव ने उसका घोर विरोध किया था। चिम्मनलाल ने उसका उल्लेख करके और वर्तमान विषय को आर्थिक दृष्टिकोण से दिखाकर प्रभाकरराव को नियमविरुद्ध करने की चेष्टा की । प्रभाकरराव ने विवश नेत्रों से रुस्तमभाई की ओर देखा, मानो उनसे कह रहे थे कि मुझे ये लोग ब्रह्मफॉन में डाल रहे है, श्राप किसी तरह मेरा उद्धार कीजिए । रुस्तमभाई बड़े निर्भीक, स्पष्टवादी पुरुष थे । वे चिम्मनलाल का उत्तर देने के लिए खड़े हो गए और बोले- मुझे यह देखकर शोक हो रहा है कि श्राप लोग एक सामाजिक प्रश्न को हिन्दू-मुसलमानों के विवाद का स्वरूप दे रहे है । सूद के प्रश्न को भी यही रंग देने की चेष्टा की गई थी। ऐसे राष्ट्रीय विषयों को विवादग्रस्त बनाने से कुछ हिन्दू साहुकारो का भला हो जाता है; किन्तु इसमें राष्ट्रीयता को जी चोट लगती है, उसका अनुमान करना कठिन है। इसमें सन्देह नहीं कि इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने से हिन्दू साहुकारों को अधिक हानि पहुँचेगी, लेकिन मुसलमानों पर भी इसका प्रभाव अवश्य पड़ेगा । चौक और दालमण्डी में मुसलमानों की दुकानें कम नहीं हैं। हमको प्रतिवाद या विरोध की धुन में अपने मुसलमान भाइयों की नीयत की सचाई पर सन्देह न करना चाहिए । उन्होंने इस विषय में जो कुछ निश्चय किया है, वह सार्वजनिक
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वस्तुओं में प्रवेश करने के पश्चात् माता का गर्भ कैसा दुस्सह और दुखदाई है, जिसमें एक ओर तो जठराग्नि की ज्वाला तपा रही है औ दूसरी ओर से मल मूत्र का दुर्गन्ध व्याकुल कर रहा है, फिर कैसी अंधेरी कोठरी है जिसमें हाथ पांव बांधा हुआ उलटा लटका रहना पड़ता है, जहां दायें बायें हिलने का ठौर नहीं, ऐसे घोर नरक में रहना में पड़ता है, फिर जब अपानवायु की प्रेरणा से यह जीव गर्भ से बाहर निकलने लगता है तव जैसे लोहकार लोहे की यंत्री होकर लोहे के तार को खींचता है ऐसे यह जीव चारों ओर से चपकर खिंचजाता है, रस समय इसे एकबारगी मूर्च्छा आती है, जब मूर्च्छा छूटती है तब उस घोर दुःख का अनुभव कर रोने लगता है । इतने कष्ट से जब बाहर आता है तब अत्यन्त बचपन में अशक्य औ असमर्थ होकर जहां माता लेटादेती है लेटा रहता है, लेटे २ मल मूत्र करदेता है, जो कहीं माता किसी गृहकार्य में छोड़कर चलीगई है तो वे मल मूत्र इसके हाथ नें लगकर सर्वत्र शरीर में और मुंह नाक में लगजाते हैं, कैसा घोर नरक है ? किसी अंग में नाक, कान, वा आंख में व्यथा होजाती है तो वह बच्चा बोल तो सकता नहीं केवल चिल्लाता है औ रोता है, माता समीप रही भी तो क्या जाने कि, बच्चा क्यों रोता है ?. इसके कहीं व्यथा है अथवा भूख से रोता है, यद्यपि उसे स्तन में लगा दूध पिलाना चाहती है पर वह पीता नहीं, क्लेश के कारण रोताही चला जाता है, यह कैसा घोर दुःख है ? फिर जब कुछ बड़ा होते २ युवा होता है, तो यह अमंगल रूप शरीर जो महा विकारवान है और मांस, मज्जा, अस्थि, धेर, मूत्र और विष्ठा से पूर्ण है इसमें अहंकार रूप बिलाव म्याऊं २ मैं ही हूं कहकर शब्द करने लगजाता है, फिर यह शरीर रूप नौका भोग रूप रेत में पड़जाती है जहां से इसका पारहोना कठिन है, फिर तृष्णा रूप सापिन इसे बार २ डसती रहती है, जिससे नाना प्रकार
के क्लेश पाता रहता है, फिर धीरे १ युवा अवस्था में काम रूप
पिशाच आलगता है, यह अवस्था इस जीव का परम शत्रु है, ऊपर से तो यह अवस्था देखने में सुन्दर है पर भीतर नाना प्रकार के अवगुण रूप घुन इसमें लगे रहते हैं । इस अवस्था में निर्दोष रहना कठिन है। इस अवस्था में जो चलायमान न हो वह पुरुष धन्य है । इस अवस्था में स्त्री रूप नागिन उसकर मारडालती है। जैसे हाथी को लोहे की शृङ्खला में जकड़ कर बांध देते हैं तैसे युवा पुरुष को स्त्री बाध लेती है कहीं जाने नहीं देती, यह स्त्री विप की बली है, जिसमें लिपटी उसको नाश करडालती है ।
प्यारे सज्जनो । एवम् प्रकार युवा अवस्था स्त्री पुत्र इत्यादि के वश में पड़कर घीत जाने के पश्चात् वृद्धावस्था आती है । जब यह शरीर जरजरी भूत होजाता है, बुद्धि क्षीण होजाती है, और नाना प्रकार के रोग इस अवस्था में आकर प्राप्त होजाते हैं, सब कुटुम्बी इसको त्यागदेते हैं, एक कोने में पड़ा ढासत्ता, खांसता, लार, श्रौ फफ गिराता रहता है । कोई पूछता नहीं, जिन पुत्र पौत्र के लिये जन्म भर कमाता मरता है वेही अपनी स्त्रियों को लेकर आनन्द करते हैं श्री कहते हैं कि यह वूदा शीघ्र मरजावे तो जान का जंजाल मिटे, फिर कुबड़ा होजाता है, शरीर सर्व प्रकार की शक्तियों से हीन होजाता है, पर तृष्ण बद्दुजाती हैं औ क्रोध अधिक होजाता है, बालबच्चों की दृष्टि में ऊंट के समान भासता है । जिन्हों ने बड़े २ संग्राम जीते हैं उनको भी यह जरावस्था जीत लेती है, और चूर्ण कर डालती है, फिर जैसे बिल्ली चूहे को देख दौड़ती है तैसे मृत्यु इसको देख खाने दौड़ती है औ खाजाती
मिय श्रोतृवृन्द । एवम् प्रकार बार २ यह जीव इस संसार रूप गढ़ में आगिरता है । जो बुद्धिमान इस संसार के इतने प्रकार के दुखों को अनुभव करते हैं वे अवश्य विचारेंगे कि किसी प्रकार इस असार संसार से छुटकारा दो औ ऐसा यत्न करें जिससे फिर माता के गर्भ में न आना पड़े । सो वह कौनसा सुलभ यता है मैं आपको सुनाता
हूं सुनिये । मैं इसी पुनर्जन्मके व्याख्यान में वार २ युओं औ प्रमाणों से सिद्ध करआया हूं कि यह मनुष्य जीवन पर्यन्त जिस सङ्कल्प को जिस स्वरूप में दृढ़ रक्खेगा वैसी ही गति अन्तकाल में होगी । इस वार्ता को मै थोड़ी देर पहले कीटभृङ्गन्याय से उदाहरण देकर सिद्ध करचुका हूं ( देखो पृष्ठ १२१ ) तो क्या अच्छी बात है कि हमलोग अन्य प्रकार के सङ्कल्पों का परित्याग कर अपना मन आठों याम श्यामसुन्दर के स्वरूप में लगावें। उसी के मनोहर रूप में मग्न रहें, जिससे शरीर छोड़ने के समय हमलोगों को प्रथम सारूप्यमुक्ति की प्राप्ति हो, अर्थात् देह त्यागने के साथ हमलोग प्रथम तो श्यामसुन्दर का रूप बन जावें फिर उस गोलोक निवासी अपने प्रीतम ( ) के समीप प हुंच सालोक्य मुक्ति प्राप्त करते हुए सामीप्यमुक्ति प्राप्त करें अथवा उस के रूप में लय होजावें, अर्थात् सायुज्यमुक्ति प्राप्त करलें ॥
यदि कोई नवीन प्रकाश वाले ( Enightened ) सूखे हृदय, प्रपंच में रत, रात दिन अमेरिका और जापान की यात्रा में मग्न, होटलों की व्हिस्की के बोतल के बोतल शून्य करने वाले, अपने मनमाना धर्म को स्वीकार करने वाले, कभी दयानन्दी, कभी ईसाई, कभी बौद्ध, कभी चूडापन्थी, कभी सतनामी, कभी राधास्वामी बनने वाले, अपनी बुद्धि के बल से र्यो कहमोर कि ब्रह्म तो साकार नहीं वह निराकार हैं, तो उनको आप लोग य उत्तर देदेवें कि तुम स्वामी हंसस्वरूप के व्याख्यान जो साकार औ निराकार उपासना के भेद पर औ अवतारों पर है उनको पहले पढ़ो फिर समझोगे कि साकार निराकार में क्या भेद है ? गोलोक क्या है ? मनमोहन श्यामसुन्दर क्या है ?
दूसरी बात यह है कि जब इन नवीन हवावालों पर ईश्वरकी कृपादृष्टि होने से अथवा किसी सच्चे महात्मा के सत्सङ्ग से यह ज्ञात होजावे कि सम्पूर्ण सृष्टि का सार प्रेम है, परमात्मा केवल प्रेम से मिलता है । कर्म, योग, ज्ञान, सब साधनों का फल प्रेम ही है, सो प्रेम बिना प्रेमपान्न
इंसनार ।
(e) के नित लेना नही मिना प्रेमपान जगना नहीं, जैसे मानुष्ट पत्थर में आम है परमाद्वारा प्रगट होना नहीं, जैसे समालबु, स्त्री पुरुषों से प्रेम पनि है पर मिना मेमपात्र (2) से राये वह प्रेम जगता नहीं लिया समपति, जो सम्पूर्ण नेमार के प्रेमियों का एक ही प्रेमपात्र
() ६ हजागो के प्रेमके जमाने के लिये हमारा मेमशन बनकर पवनार र हम पर लोक में आकर हममा चना गया है और में विराजमान है । काटा कृपा करहै । जैसे होगी वो मनी ( Mater ) अपने मान वन ज्योनिवरण का जन सागर हुआ तो सूर्य बनकर आसानु मे पिरा है, सीमकार अपनी दुर्ग (
f Brents ) का नाहार सर मनमोहन श्यामसुन्दर कृष्ण वनपर गोलोक में सुशोभित है । यदि यह भी न मानो तो यो फलो कि हमलोग उससे प्रेम कर रिप में पायेंगे मगह फरलेवेगे श्री उसी रूप के साथ नित्य मानव करने के लिये हमारा गोलोक भी सबके गिगे जहां जानेगा, क्योंकि जिस जगन्कर्ता ने रो) अनगिनत लोक लोकान्तर गनाये है तो आकाश के नागमणु के रूप में यह क्या में से एक मुझे है हम २ के लिये २ लोक विलग २ घनालने को समर्थ नही है? अवश्य समर्थ है ! म चाहे तो एक नहीं अपने प्रेमियों के लिये क्षण मात्र में जाता है, फिर जो पेसी (ste) है वे किसी की निरर्थक सन मानने नाही ना कोई लास नको ये किसी की नहीं सुनते, ये तो आप अपने भीनम को ही जानते है ।
راملی اس ساموش رو خامشی می شد سلمی رانی
चातिक जम सामोश रहो जामीशी में है सभी बाते । उस विषय का वर्णन पूर्ण प्रकार प्रेमभक्ति के व्याख्यान में करूंगा
तव शंका करनेवालों की सब शंकायें मिटजावेंगी ।
प्यारे सुहृदो । मै वार २ यही कहूंगा कि अपनी मनोवृत्ति उसी मनमोहन की माधुरी मूर्ति में लगाइये कि अन्तकाल से और किसी वृत्ति में फँसकर फिर संसार में लौटना न पड़े ।
मनोवृत्ति को मनमोहन प्यारे की मूर्ति में लगा संसार के आवाग मन से छूट उसी प्राणप्रिय के रूप में लय होने के विषय मैं आपको एक भक्त की मनोहर कथा सुनाता हूं । एकाग्र चित्त हो श्रवण कीजिये औ एकबार सव मिल बोलियेहरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
कथा श्री जयदेवजीकी
ओड़िया देश में श्री जगन्नाथजी के प्रान्त में कहीं कुड़विल्व नामका एक ग्राम है, यहां श्रीजयदेव जी प्रसिद्ध हरिभक्त हुए है, यह काव्यकला में वड़े चतुर थे, श्यामसुन्दरकी छवि और शृङ्गार में अहर्निश मग्न रहा करते थे । इसी कारण आपने एक काव्य गीतगोविन्द की रचना की है जिसमें श्यामसुन्दर श्री कृष्णचन्द्र के शृङ्गार और माधुर्य को इसप्रकार भरदिया है कि श्यामसुन्दर के चरणों के रसिक और प्रेमी इसके पदों को गानकर परम प्रेम में मग्न हो जाते हैं । इस गीतगोविन्द के पदों में ऐसी शोभा भरी हुई है कि जिस ठौर में इसके पद गायेजाते हैं भगवत् वहां आप आनकर श्रवण करते है ( गानेवाला प्रेमी होना चाहिये ) एक मालिनकी लड़की एक दिन अपने खेत में बैगन तोड़ते समय गीतगोविन्द के पदो को बड़े प्रेम से गारही थी, श्यासुन्दर उसके पीछे २ डोलरहे थे, जब पुजारियों ने भगवत को शयन से जगाने के लिये मन्दिर खोला तो देखा कि भगवत्मूर्त्ति के शृङ्गार के सब कपड़े फट रहे हैं और उनमें कांटे फसरहे हैं । पुजारियों को भय हुआ कि इस मन्दिर का मालिक राजा दहंसनाद ।
शेन को आवेगा तो ये कपड़े, जो बडे मूल्य के नाना प्रकार के रत्न जड़े हुए हैं, इसप्रकार फटे देखकर हम लोगों का दण्ड करेगा । ऐसाही हुआ राजा जब दर्शन को आया तो कपड़ों को फटा देख पुजारियों पर क्रोध किया और कहा कि कपड़े फटने का ठीक २ कारण बतलाओ ! नहीं तो कल प्रातःकाल तुमलोगों का दण्ड किया जावेगा । पुजारियो ने अर्द्धरात्रि पर्यन्त ध्यानावस्थित हो श्यामसुन्दर से अपने निर्दोष होने श्री राजा के कोप से बचने की प्रार्थना की । फिर ऐसा हुआ कि श्यामसुन्दर ने रात्रि को राजा को स्वप्न मे यह उपदेश किया कि पुजारियों का कोई दोप नहीं है । मालिन की लड़की गीतगोविन्द गारहीथी उसके सुनने को मैं उसके पीछे २ बैगन के खेत में फिर रहाथा इसकारण ये कपड़े फटगये है। राजा ने शयन से उठतेही अपने राज्य में डौडी पिटवादी कि कोई प्राणी गीतगोविन्द को किसी अपवित्र स्थान में न गानकरे ॥
एक मोगल घोड़े पर सवार गीतगोविन्द गाता जारहा था लौटकर देखा तो श्यामसुन्दर एक दूसरे घोड़े पर सवार पीछे २ चले आरहे है । देखतेही मोगल श्यामसुन्दर की मधुर मूर्ति में ऐसा मग्न हुआ कि उस की आखे बन्द होगई । मुहूर्त्तमात्र तक ध्यान में मग्न रहा, फिर जब आखें खोली तो कुछ नही देखा, श्यामसुन्दर अन्तर्ध्यान होगये, फिर तो वह अत्यन्त व्याकुल हो घर गया और सब छोड़ छाड़ बन मे जा मनमोहन की उसी माधुरी मूर्ति में लय होगया ।।
उसी समय श्री जगन्नाथजी के राजा डालचन्द्र ने भी जयदेवजी के देखा देखी दूसरा गीतगोविन्द रचा, दोनों गीतगोविन्द जगन्नाथजी के मन्दिर में रखदिये गये और यह प्रतिज्ञा हुई कि जिस गीतगोविन्द को श्री जगन्नाथजी स्वीकार करलें वही उत्तम प्रौ श्रेष्ठ समझाजावेगा, फिर ऐसा हुआ कि जयदेवजी के गीतगोविन्द को श्री जगन्नाथजी ने स्वीकार कर लिया, ऐसा देख राजाडालचन्द समुद्र में डूबने चला तत्र श्री जगन्नाथ जी के मन्दिर से आकाशवाणी हुई कि हे राजन् ! तू डूबे मत ! तेरा भी
एक २ पद जयदेवजी के गीतगोविन्द के एक २ सर्ग के साथ लगा रहेगा, पर नाम जयदेव ही का होगा !
उस देश में एक ब्राह्मण रहता था जिसको सन्तान नहीं होता था, उसने श्री जगन्नाथ जी के सम्मुख जाकर यह प्रतिज्ञा की, कि यदि मुझे सन्तान होगा तो पहला सन्तान श्री जगन्नाथजी को चढ़ादूंगा। संयोगवशात् उसे कन्या उत्पन्न हुई, जब वह वड़ी हुई तब श्री जगन्नाथजी के मन्दिर में अर्पण करने केलिये लेगया ! श्रीजगन्नाथजी ने कहा कि जयदेव मेरा ही शरीर है उसको यह कन्या देदे ! जब वह ब्राह्मण अपनी कन्या जयदेव जी के पास लेगया तो जयदेवजी ने कहा कि ( उनको हजार सोहैं मो पहाड़ एक ) उनको तो हजारो स्त्रिया शोभती है मेरे लिये तो एक ही पर्वत के समान है सो तू अपनी कन्या लेजा ! उनही को दे ! फिर वह ब्राह्मण दो चार वार इहा उहा करने के पश्चात् उस कन्या को जयदेवजी के समीप छोड़कर चलागया और समझा गया कि बेटी तू ! इनकी सेवा अपना स्वामी जानकर करते रहना ! कन्या का नाम पद्मावती था, प द्मावती ने स्वामी जानकर जयदेवजी की सेवा बहुत दिनों तक की । 'पहले तो बहुत दिनों तक घृणा करते रहे, पीछे उसकी सेवा से प्रसन्न हो उसको स्वीकार करलिया, श्री एक झोंपड़ी बना ठाकुरजी को पधरा उनकी पूजा करने की आज्ञा देदी, औ आप गीतगोविन्द की रचना मे रहे । गीतगोविन्द के पदों को पद्मावतीजी को गानकरना सिखलादिया । एक वार पदकी रचना करते २ उनके चित्त में यह भाव उदय हो आया कि लाडली जी के मान करने पर श्यामसुन्दर उनके मनाने के लिये उनके चरणों को अपने मस्तक पर रखना चाहते हैं, पर इस बात को अनुचित समझ कर हाथ से लेखनी छोड़दी, और किसी दूसरे भाव की चिन्ता करते हुए स्नान को चलेगये । उनके पीछे श्यामसुन्दर उनका स्वरूप धारण कर पद्मावतीजी से गीतगोविन्द लेकर उनके मनके पहले भाव की पूर्ति करदी। जब जयदेवजी स्नान से लौटे और पदकी रचना करने के
हसना ।
लिये गीतगोविन्द हाथ में लिया तो देखा कि जो भाव उनके मन में पहले उठा उसकी पूर्ति की हुई है । पद्मावती से पूछा इसमें किसने लिखा पचायतीजी ने उत्तर दिया कि स्वामिन् । आपही तो आकर लिखगये है । जयदेवजी समझगये कि यह श्यामसुन्दर की असीम कृपा का फल है और कहा कि ऐ पद्मावती तू धन्य है ! जो तेरे को श्यामसुन्दरका दर्शन हुआ । पद्मावतीजी यह लीला देख परम आनन्द को प्राप्त हुई ।
एकवार जयदेवजी तीर्थयात्रा को चले, यद्यपि उनको किसी प्रकार की आवश्यकता नहीं थी तथापि पद्मावतीजी ने एक अशर्फी ( मोहर ) उनके गाठ में बाधदी जो मार्ग में किसी समय पर काम आवेगी । अक स्मात् मार्ग में डाकुओं ने जयदेवजी को घेर लिया, जयदेवजी ने अशर्फी और कपड़ों को उतारकर दंदिया, तथापि ठाकुओ ने यह विचारा कि यह कोई धूर्त जानपड़ता है, राजा से जाकर सब बातें कहनेगा, और हम लोगों का दण्ड करावेगा । ऐसा विचार उनके हाथ पांव काट उन्हें एक ग्रुप में डाल चलेगये । जयदेवजी कृप में भी श्यामसुन्दर का नाम जपते बैठरहे । अकस्मात् कोई एक राजा उस वन में शिकार खेलने आया, जैसे कूप के समीप पहुंचा उसके कानों में हरिनाम के मधुर शब्द आये, आगे बढ़कर देखा तो एक कोई मनुष्य बैठा हुआ है, उनको कूप से निकलवाया, उनके स्वरूप को देख श्री वचनों को सुन समझगया कि यह महात्मा हैं, अपने को बड़ा भाग्यवान समझ अपनी राजधानी में लेगया और उनकी सेवा करने लगा । जयदेवजी ने राजा को साधुसेवा करने का उपदेश दिया, सर्वत्र देश में राजा की साधुसेवा की चर्चा फै लगई, फिर वे डाकू जिनोंने जयदेवजी की बुरी दशा कीथी स्वच्छ साधु का स्वरूप बना राजा के पास पहुंचे। जयदेवजी ने उनको देखकर राजा से कहा कि ये लोग बड़े महात्मा है, इनकी सेवा होनी चाहिये । ऐसी आज्ञा पा राजा उनकी सेवा अच्छी रीति से करने लगा ।
जयदेवजी ने यही विचारा कि ये अपने नीच कर्म से नहीं चूके
तो मैं अपने साधुपना से क्यों चूकूं पर उन डाकुओं के चित्त में यह शंका बनी रही कि ऐसा न हो कि यह जयदेवजी किसी दिन हमलोगों का दण्ड करावे, इसलिये वे नित्य वहां से जाने की प्रार्थना करते रहे, पर जयदेव जी उनको नही जानेदेते और बड़े आदर के साथ रखते थे, अन्त में जब उनलोगों ने बहुत हठ किया तो राजा से कहकर एक २ हज़ार मुद्रा उनको दिलवाकर वहा से बिदा किया, राजा ने उनके पहुंचाने के लिये एक सिपाही साथ करदिया, मार्ग मे सिपाही ने उन साधुसे पूछा कि स्वामीजी ने आप लोगों का इतना आदर क्यों करवाया? वे कुविचारी बोले कि तुम्हारे स्वामीजी और हमलोग एक राजा के यहां चाकर थे, स्वामीजी ने राज्य में बहुत बड़ा अपराध कियाथा इसलिये राजा ने उनको बन में लेजाकर मारडालने की आज्ञा दीथी पर हमलोगों ने इनको बन में लेजाकर इनका हाथ पांव काट इनकी जान छोड़दी, इसी कारण हमलोगों का इतना आदर कराया है। इस वचन के सुनते ही पृथिवी फटी और चारों पृथिवी के भीतर जाते रहे । यह अद्भुत लीला देखकर सिपाही दौड़ा गया और जयदेवजी से सब बातें कहसुनाई, सुनते ही वहुत पश्चाताप कर हाथ मलने चाहा कि इतने में उनके हाथ पांव निकल आये। ये दोनों आश्चर्य की बातें देख सिपाही ने राजा से जासुनाई, राजा ने जयदेवजी के पास जाकर, इन आश्चर्य वार्ताओं का कारण पूछा, पर स्वामी जी चुप रहे, जब बहुत हठ किया तब सव बातें पूर्ण प्रकार कहसुनाई । तव से राजा को श्री जयदेवजी में बहुत अधिक विश्वास औ प्रेम होगया औ तन मन से जयदेवजी की सेवा करने लगा, एक दिन श्री जयदेवजी ने अपने निवासस्थान जाने की इच्छा की पर राजा ने नहीं जाने दिया, जब बहुत हठ किया तव पद्मावतीजी को राजा ने बुलवा लिया और अपनी रानी को पद्मावती जी की सेवा करने की आज्ञा दी । एक दिन रानी का भाई मरगया उसके साथ उस की स्त्री " रानी जी की भावज " सती होगई, यह वार्त्ता रानीजी ने
पद्मावतीजी से कही श्री अपनी भावज की बड़ी प्रशंसा की। पद्मावतीजी ने कही कि स्वामी के साथ जीते जलना उचित नहीं है, प्रेम की प्रशंसा तो तबही है कि पति की मृत्यु सुनते ही स्त्री अपना भी शरीर छोड़देवे । रानी बोली कि ऐसी पतिव्रता तो आप को छोड़ दूसरी कौन स्त्री होसकती है ? इतना कह पद्मावतीजी की परीक्षा का विचार किया । राजा से यो कहा कि आप जयदेवजी को किसी वाटिका में छिपादेवें औ राजधानी में यों प्रचार करदेवें कि श्री जयदेवजी का शरीर छूटगया । राजा ने बहुत समझाया कि महात्माओं से ऐसी मसखरी नहीं करनी चाहिये, पर रानी के हठ करने से ऐसा ही किया, जब रानी ने यह बात पद्मावतीजी से जाकही, तव पद्मावती जी हसपडी और बोलीं कि वे तो आनन्द पूर्वक वाटिका में विराज रहे है । रानीजी ने समझा कि दो ही चार दिन की बात है इसलिये यह समझगई है, ऐसा विचार एक साल बीतनेदिया, एक साल के पश्चात् फिर ऐसाही किया औ पद्मावतीजी से पूर्ववत सय बातें जासुनाई । पद्मावतीजी ने विचारा कि रानी मेरी परीक्षा करने चाहती है, ऐसा विचार अपना प्राण छोडदिया, यह देखकर राजा रानी दोनों घबराये, राजा के चित्त में बहुत ही चिन्ता व्यापी । उदासीन मुख से श्रीजयदेवजी के समीप जा सव वार्त्ता कहसुनाई, जयदेवजी ने कहा कि चिन्ता मत करो चलो मैं चलता हू । जव श्रीजयदेवजी ने पद्माव तीजी के कान मे वसी बजाकर गीतगोविन्द के पद सुनाये तब वह हरि नाम लेतीहुई उठवैठीं ।
ऐसे कई साल वीतजाने पर श्रीजयदेवजी पद्मावतीजी के साथ अपने निवासस्थान कुडविल्व ग्राम में लौटआये, आप नित्य गगास्नान को जाया करते थे, सो आप की बृद्धता देख श्री गंगाजी को दाई । इसलिये गङ्गाजी से एक धार फूटकर आप के ग्राम के समीप बह आई, जो आज तक चहरही है जिसे जयदेईगंगा के नाम से प्रसिद्ध करते है । फिर जयदेवजी श्री पद्मावतीजी दोनों निरन्तर श्यामसुन्दर के प्रेम में मग्न
उनकी माधुरी शोभा औौ शृङ्गार मे चित्त लगाये अन्त में शरीर परित्याग कर श्यामसुन्दर के स्वरूप में तदाकार हो गोलोक को सिधारगये ।
प्यारे श्रोतृगरण ! भगवत् में प्रेम होने के लिये यह शृङ्गाररस उत्तम श्री श्रेष्ठ है, इसलिये इसको रसराज कहते है, अतएव मै बार २ अपने श्रोताओ से यही कहूंगा कि यदि शीघ्र अपना उद्धार करना हो तो श्यामसुन्दर की मनोहर छबि और मे चित्त लगा निरन्तर उस रूप मे सन्न हो डूबजाइये कि अन्तकाल में तदाकार हो उस मनमोहनी मूर्ति में लय होजाना पड़े । इस घोर कलिकाल में भगवत्प्राप्ति का कोई यत्न इससे बढ़कर उत्तम नहीं है । इस रसराज शृङ्गाररस और प्रेमका वर्णन भक्ति के व्याख्यान में देखिये । अब आज मै अपना व्याख्यान समाप्त करता हूं और अन्त में एक कवित्त सुनाता हूं जिसे सुन इसके भाव को अपने मनमें लिये घरजाइये, और जीवन पर्यन्त प्रेमरस को छक २ कर पीते हुये आवागमन से छूट नित्यानन्द मे प्राप्त होजाइये ।
कवित्त ।
माथे पै मुकुट देखि चन्द्रिका चटक दोख छविकी लटक देखि रूपरस पीजिये। लोचन विशाल दोख गरे गुंजसाल दोखे अधर रसाल दोख चित्त चोप कीजिये । कुण्डल इलन दोखे चलन देखि पलके चलन देखि सर्वस दीजिये । पीताम्बर छोर दोखे मुरलीकी घोर देखि सांवरे की ओर दोख देखिनोई कीजिये। फिर कल सुनाऊंगा
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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वस्तुओं में प्रवेश करने के पश्चात् माता का गर्भ कैसा दुस्सह और दुखदाई है, जिसमें एक ओर तो जठराग्नि की ज्वाला तपा रही है औ दूसरी ओर से मल मूत्र का दुर्गन्ध व्याकुल कर रहा है, फिर कैसी अंधेरी कोठरी है जिसमें हाथ पांव बांधा हुआ उलटा लटका रहना पड़ता है, जहां दायें बायें हिलने का ठौर नहीं, ऐसे घोर नरक में रहना में पड़ता है, फिर जब अपानवायु की प्रेरणा से यह जीव गर्भ से बाहर निकलने लगता है तव जैसे लोहकार लोहे की यंत्री होकर लोहे के तार को खींचता है ऐसे यह जीव चारों ओर से चपकर खिंचजाता है, रस समय इसे एकबारगी मूर्च्छा आती है, जब मूर्च्छा छूटती है तब उस घोर दुःख का अनुभव कर रोने लगता है । इतने कष्ट से जब बाहर आता है तब अत्यन्त बचपन में अशक्य औ असमर्थ होकर जहां माता लेटादेती है लेटा रहता है, लेटे दो मल मूत्र करदेता है, जो कहीं माता किसी गृहकार्य में छोड़कर चलीगई है तो वे मल मूत्र इसके हाथ नें लगकर सर्वत्र शरीर में और मुंह नाक में लगजाते हैं, कैसा घोर नरक है ? किसी अंग में नाक, कान, वा आंख में व्यथा होजाती है तो वह बच्चा बोल तो सकता नहीं केवल चिल्लाता है औ रोता है, माता समीप रही भी तो क्या जाने कि, बच्चा क्यों रोता है ?. इसके कहीं व्यथा है अथवा भूख से रोता है, यद्यपि उसे स्तन में लगा दूध पिलाना चाहती है पर वह पीता नहीं, क्लेश के कारण रोताही चला जाता है, यह कैसा घोर दुःख है ? फिर जब कुछ बड़ा होते दो युवा होता है, तो यह अमंगल रूप शरीर जो महा विकारवान है और मांस, मज्जा, अस्थि, धेर, मूत्र और विष्ठा से पूर्ण है इसमें अहंकार रूप बिलाव म्याऊं दो मैं ही हूं कहकर शब्द करने लगजाता है, फिर यह शरीर रूप नौका भोग रूप रेत में पड़जाती है जहां से इसका पारहोना कठिन है, फिर तृष्णा रूप सापिन इसे बार दो डसती रहती है, जिससे नाना प्रकार के क्लेश पाता रहता है, फिर धीरे एक युवा अवस्था में काम रूप पिशाच आलगता है, यह अवस्था इस जीव का परम शत्रु है, ऊपर से तो यह अवस्था देखने में सुन्दर है पर भीतर नाना प्रकार के अवगुण रूप घुन इसमें लगे रहते हैं । इस अवस्था में निर्दोष रहना कठिन है। इस अवस्था में जो चलायमान न हो वह पुरुष धन्य है । इस अवस्था में स्त्री रूप नागिन उसकर मारडालती है। जैसे हाथी को लोहे की शृङ्खला में जकड़ कर बांध देते हैं तैसे युवा पुरुष को स्त्री बाध लेती है कहीं जाने नहीं देती, यह स्त्री विप की बली है, जिसमें लिपटी उसको नाश करडालती है । प्यारे सज्जनो । एवम् प्रकार युवा अवस्था स्त्री पुत्र इत्यादि के वश में पड़कर घीत जाने के पश्चात् वृद्धावस्था आती है । जब यह शरीर जरजरी भूत होजाता है, बुद्धि क्षीण होजाती है, और नाना प्रकार के रोग इस अवस्था में आकर प्राप्त होजाते हैं, सब कुटुम्बी इसको त्यागदेते हैं, एक कोने में पड़ा ढासत्ता, खांसता, लार, श्रौ फफ गिराता रहता है । कोई पूछता नहीं, जिन पुत्र पौत्र के लिये जन्म भर कमाता मरता है वेही अपनी स्त्रियों को लेकर आनन्द करते हैं श्री कहते हैं कि यह वूदा शीघ्र मरजावे तो जान का जंजाल मिटे, फिर कुबड़ा होजाता है, शरीर सर्व प्रकार की शक्तियों से हीन होजाता है, पर तृष्ण बद्दुजाती हैं औ क्रोध अधिक होजाता है, बालबच्चों की दृष्टि में ऊंट के समान भासता है । जिन्हों ने बड़े दो संग्राम जीते हैं उनको भी यह जरावस्था जीत लेती है, और चूर्ण कर डालती है, फिर जैसे बिल्ली चूहे को देख दौड़ती है तैसे मृत्यु इसको देख खाने दौड़ती है औ खाजाती मिय श्रोतृवृन्द । एवम् प्रकार बार दो यह जीव इस संसार रूप गढ़ में आगिरता है । जो बुद्धिमान इस संसार के इतने प्रकार के दुखों को अनुभव करते हैं वे अवश्य विचारेंगे कि किसी प्रकार इस असार संसार से छुटकारा दो औ ऐसा यत्न करें जिससे फिर माता के गर्भ में न आना पड़े । सो वह कौनसा सुलभ यता है मैं आपको सुनाता हूं सुनिये । मैं इसी पुनर्जन्मके व्याख्यान में वार दो युओं औ प्रमाणों से सिद्ध करआया हूं कि यह मनुष्य जीवन पर्यन्त जिस सङ्कल्प को जिस स्वरूप में दृढ़ रक्खेगा वैसी ही गति अन्तकाल में होगी । इस वार्ता को मै थोड़ी देर पहले कीटभृङ्गन्याय से उदाहरण देकर सिद्ध करचुका हूं तो क्या अच्छी बात है कि हमलोग अन्य प्रकार के सङ्कल्पों का परित्याग कर अपना मन आठों याम श्यामसुन्दर के स्वरूप में लगावें। उसी के मनोहर रूप में मग्न रहें, जिससे शरीर छोड़ने के समय हमलोगों को प्रथम सारूप्यमुक्ति की प्राप्ति हो, अर्थात् देह त्यागने के साथ हमलोग प्रथम तो श्यामसुन्दर का रूप बन जावें फिर उस गोलोक निवासी अपने प्रीतम के समीप प हुंच सालोक्य मुक्ति प्राप्त करते हुए सामीप्यमुक्ति प्राप्त करें अथवा उस के रूप में लय होजावें, अर्थात् सायुज्यमुक्ति प्राप्त करलें ॥ यदि कोई नवीन प्रकाश वाले सूखे हृदय, प्रपंच में रत, रात दिन अमेरिका और जापान की यात्रा में मग्न, होटलों की व्हिस्की के बोतल के बोतल शून्य करने वाले, अपने मनमाना धर्म को स्वीकार करने वाले, कभी दयानन्दी, कभी ईसाई, कभी बौद्ध, कभी चूडापन्थी, कभी सतनामी, कभी राधास्वामी बनने वाले, अपनी बुद्धि के बल से र्यो कहमोर कि ब्रह्म तो साकार नहीं वह निराकार हैं, तो उनको आप लोग य उत्तर देदेवें कि तुम स्वामी हंसस्वरूप के व्याख्यान जो साकार औ निराकार उपासना के भेद पर औ अवतारों पर है उनको पहले पढ़ो फिर समझोगे कि साकार निराकार में क्या भेद है ? गोलोक क्या है ? मनमोहन श्यामसुन्दर क्या है ? दूसरी बात यह है कि जब इन नवीन हवावालों पर ईश्वरकी कृपादृष्टि होने से अथवा किसी सच्चे महात्मा के सत्सङ्ग से यह ज्ञात होजावे कि सम्पूर्ण सृष्टि का सार प्रेम है, परमात्मा केवल प्रेम से मिलता है । कर्म, योग, ज्ञान, सब साधनों का फल प्रेम ही है, सो प्रेम बिना प्रेमपान्न इंसनार । के नित लेना नही मिना प्रेमपान जगना नहीं, जैसे मानुष्ट पत्थर में आम है परमाद्वारा प्रगट होना नहीं, जैसे समालबु, स्त्री पुरुषों से प्रेम पनि है पर मिना मेमपात्र से राये वह प्रेम जगता नहीं लिया समपति, जो सम्पूर्ण नेमार के प्रेमियों का एक ही प्रेमपात्र छः हजागो के प्रेमके जमाने के लिये हमारा मेमशन बनकर पवनार र हम पर लोक में आकर हममा चना गया है और में विराजमान है । काटा कृपा करहै । जैसे होगी वो मनी अपने मान वन ज्योनिवरण का जन सागर हुआ तो सूर्य बनकर आसानु मे पिरा है, सीमकार अपनी दुर्ग का नाहार सर मनमोहन श्यामसुन्दर कृष्ण वनपर गोलोक में सुशोभित है । यदि यह भी न मानो तो यो फलो कि हमलोग उससे प्रेम कर रिप में पायेंगे मगह फरलेवेगे श्री उसी रूप के साथ नित्य मानव करने के लिये हमारा गोलोक भी सबके गिगे जहां जानेगा, क्योंकि जिस जगन्कर्ता ने रो) अनगिनत लोक लोकान्तर गनाये है तो आकाश के नागमणु के रूप में यह क्या में से एक मुझे है हम दो के लिये दो लोक विलग दो घनालने को समर्थ नही है? अवश्य समर्थ है ! म चाहे तो एक नहीं अपने प्रेमियों के लिये क्षण मात्र में जाता है, फिर जो पेसी है वे किसी की निरर्थक सन मानने नाही ना कोई लास नको ये किसी की नहीं सुनते, ये तो आप अपने भीनम को ही जानते है । راملی اس ساموش رو خامشی می شد سلمی رانی चातिक जम सामोश रहो जामीशी में है सभी बाते । उस विषय का वर्णन पूर्ण प्रकार प्रेमभक्ति के व्याख्यान में करूंगा तव शंका करनेवालों की सब शंकायें मिटजावेंगी । प्यारे सुहृदो । मै वार दो यही कहूंगा कि अपनी मनोवृत्ति उसी मनमोहन की माधुरी मूर्ति में लगाइये कि अन्तकाल से और किसी वृत्ति में फँसकर फिर संसार में लौटना न पड़े । मनोवृत्ति को मनमोहन प्यारे की मूर्ति में लगा संसार के आवाग मन से छूट उसी प्राणप्रिय के रूप में लय होने के विषय मैं आपको एक भक्त की मनोहर कथा सुनाता हूं । एकाग्र चित्त हो श्रवण कीजिये औ एकबार सव मिल बोलियेहरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । कथा श्री जयदेवजीकी ओड़िया देश में श्री जगन्नाथजी के प्रान्त में कहीं कुड़विल्व नामका एक ग्राम है, यहां श्रीजयदेव जी प्रसिद्ध हरिभक्त हुए है, यह काव्यकला में वड़े चतुर थे, श्यामसुन्दरकी छवि और शृङ्गार में अहर्निश मग्न रहा करते थे । इसी कारण आपने एक काव्य गीतगोविन्द की रचना की है जिसमें श्यामसुन्दर श्री कृष्णचन्द्र के शृङ्गार और माधुर्य को इसप्रकार भरदिया है कि श्यामसुन्दर के चरणों के रसिक और प्रेमी इसके पदों को गानकर परम प्रेम में मग्न हो जाते हैं । इस गीतगोविन्द के पदों में ऐसी शोभा भरी हुई है कि जिस ठौर में इसके पद गायेजाते हैं भगवत् वहां आप आनकर श्रवण करते है एक मालिनकी लड़की एक दिन अपने खेत में बैगन तोड़ते समय गीतगोविन्द के पदो को बड़े प्रेम से गारही थी, श्यासुन्दर उसके पीछे दो डोलरहे थे, जब पुजारियों ने भगवत को शयन से जगाने के लिये मन्दिर खोला तो देखा कि भगवत्मूर्त्ति के शृङ्गार के सब कपड़े फट रहे हैं और उनमें कांटे फसरहे हैं । पुजारियों को भय हुआ कि इस मन्दिर का मालिक राजा दहंसनाद । शेन को आवेगा तो ये कपड़े, जो बडे मूल्य के नाना प्रकार के रत्न जड़े हुए हैं, इसप्रकार फटे देखकर हम लोगों का दण्ड करेगा । ऐसाही हुआ राजा जब दर्शन को आया तो कपड़ों को फटा देख पुजारियों पर क्रोध किया और कहा कि कपड़े फटने का ठीक दो कारण बतलाओ ! नहीं तो कल प्रातःकाल तुमलोगों का दण्ड किया जावेगा । पुजारियो ने अर्द्धरात्रि पर्यन्त ध्यानावस्थित हो श्यामसुन्दर से अपने निर्दोष होने श्री राजा के कोप से बचने की प्रार्थना की । फिर ऐसा हुआ कि श्यामसुन्दर ने रात्रि को राजा को स्वप्न मे यह उपदेश किया कि पुजारियों का कोई दोप नहीं है । मालिन की लड़की गीतगोविन्द गारहीथी उसके सुनने को मैं उसके पीछे दो बैगन के खेत में फिर रहाथा इसकारण ये कपड़े फटगये है। राजा ने शयन से उठतेही अपने राज्य में डौडी पिटवादी कि कोई प्राणी गीतगोविन्द को किसी अपवित्र स्थान में न गानकरे ॥ एक मोगल घोड़े पर सवार गीतगोविन्द गाता जारहा था लौटकर देखा तो श्यामसुन्दर एक दूसरे घोड़े पर सवार पीछे दो चले आरहे है । देखतेही मोगल श्यामसुन्दर की मधुर मूर्ति में ऐसा मग्न हुआ कि उस की आखे बन्द होगई । मुहूर्त्तमात्र तक ध्यान में मग्न रहा, फिर जब आखें खोली तो कुछ नही देखा, श्यामसुन्दर अन्तर्ध्यान होगये, फिर तो वह अत्यन्त व्याकुल हो घर गया और सब छोड़ छाड़ बन मे जा मनमोहन की उसी माधुरी मूर्ति में लय होगया ।। उसी समय श्री जगन्नाथजी के राजा डालचन्द्र ने भी जयदेवजी के देखा देखी दूसरा गीतगोविन्द रचा, दोनों गीतगोविन्द जगन्नाथजी के मन्दिर में रखदिये गये और यह प्रतिज्ञा हुई कि जिस गीतगोविन्द को श्री जगन्नाथजी स्वीकार करलें वही उत्तम प्रौ श्रेष्ठ समझाजावेगा, फिर ऐसा हुआ कि जयदेवजी के गीतगोविन्द को श्री जगन्नाथजी ने स्वीकार कर लिया, ऐसा देख राजाडालचन्द समुद्र में डूबने चला तत्र श्री जगन्नाथ जी के मन्दिर से आकाशवाणी हुई कि हे राजन् ! तू डूबे मत ! तेरा भी एक दो पद जयदेवजी के गीतगोविन्द के एक दो सर्ग के साथ लगा रहेगा, पर नाम जयदेव ही का होगा ! उस देश में एक ब्राह्मण रहता था जिसको सन्तान नहीं होता था, उसने श्री जगन्नाथ जी के सम्मुख जाकर यह प्रतिज्ञा की, कि यदि मुझे सन्तान होगा तो पहला सन्तान श्री जगन्नाथजी को चढ़ादूंगा। संयोगवशात् उसे कन्या उत्पन्न हुई, जब वह वड़ी हुई तब श्री जगन्नाथजी के मन्दिर में अर्पण करने केलिये लेगया ! श्रीजगन्नाथजी ने कहा कि जयदेव मेरा ही शरीर है उसको यह कन्या देदे ! जब वह ब्राह्मण अपनी कन्या जयदेव जी के पास लेगया तो जयदेवजी ने कहा कि उनको तो हजारो स्त्रिया शोभती है मेरे लिये तो एक ही पर्वत के समान है सो तू अपनी कन्या लेजा ! उनही को दे ! फिर वह ब्राह्मण दो चार वार इहा उहा करने के पश्चात् उस कन्या को जयदेवजी के समीप छोड़कर चलागया और समझा गया कि बेटी तू ! इनकी सेवा अपना स्वामी जानकर करते रहना ! कन्या का नाम पद्मावती था, प द्मावती ने स्वामी जानकर जयदेवजी की सेवा बहुत दिनों तक की । 'पहले तो बहुत दिनों तक घृणा करते रहे, पीछे उसकी सेवा से प्रसन्न हो उसको स्वीकार करलिया, श्री एक झोंपड़ी बना ठाकुरजी को पधरा उनकी पूजा करने की आज्ञा देदी, औ आप गीतगोविन्द की रचना मे रहे । गीतगोविन्द के पदों को पद्मावतीजी को गानकरना सिखलादिया । एक वार पदकी रचना करते दो उनके चित्त में यह भाव उदय हो आया कि लाडली जी के मान करने पर श्यामसुन्दर उनके मनाने के लिये उनके चरणों को अपने मस्तक पर रखना चाहते हैं, पर इस बात को अनुचित समझ कर हाथ से लेखनी छोड़दी, और किसी दूसरे भाव की चिन्ता करते हुए स्नान को चलेगये । उनके पीछे श्यामसुन्दर उनका स्वरूप धारण कर पद्मावतीजी से गीतगोविन्द लेकर उनके मनके पहले भाव की पूर्ति करदी। जब जयदेवजी स्नान से लौटे और पदकी रचना करने के हसना । लिये गीतगोविन्द हाथ में लिया तो देखा कि जो भाव उनके मन में पहले उठा उसकी पूर्ति की हुई है । पद्मावती से पूछा इसमें किसने लिखा पचायतीजी ने उत्तर दिया कि स्वामिन् । आपही तो आकर लिखगये है । जयदेवजी समझगये कि यह श्यामसुन्दर की असीम कृपा का फल है और कहा कि ऐ पद्मावती तू धन्य है ! जो तेरे को श्यामसुन्दरका दर्शन हुआ । पद्मावतीजी यह लीला देख परम आनन्द को प्राप्त हुई । एकवार जयदेवजी तीर्थयात्रा को चले, यद्यपि उनको किसी प्रकार की आवश्यकता नहीं थी तथापि पद्मावतीजी ने एक अशर्फी उनके गाठ में बाधदी जो मार्ग में किसी समय पर काम आवेगी । अक स्मात् मार्ग में डाकुओं ने जयदेवजी को घेर लिया, जयदेवजी ने अशर्फी और कपड़ों को उतारकर दंदिया, तथापि ठाकुओ ने यह विचारा कि यह कोई धूर्त जानपड़ता है, राजा से जाकर सब बातें कहनेगा, और हम लोगों का दण्ड करावेगा । ऐसा विचार उनके हाथ पांव काट उन्हें एक ग्रुप में डाल चलेगये । जयदेवजी कृप में भी श्यामसुन्दर का नाम जपते बैठरहे । अकस्मात् कोई एक राजा उस वन में शिकार खेलने आया, जैसे कूप के समीप पहुंचा उसके कानों में हरिनाम के मधुर शब्द आये, आगे बढ़कर देखा तो एक कोई मनुष्य बैठा हुआ है, उनको कूप से निकलवाया, उनके स्वरूप को देख श्री वचनों को सुन समझगया कि यह महात्मा हैं, अपने को बड़ा भाग्यवान समझ अपनी राजधानी में लेगया और उनकी सेवा करने लगा । जयदेवजी ने राजा को साधुसेवा करने का उपदेश दिया, सर्वत्र देश में राजा की साधुसेवा की चर्चा फै लगई, फिर वे डाकू जिनोंने जयदेवजी की बुरी दशा कीथी स्वच्छ साधु का स्वरूप बना राजा के पास पहुंचे। जयदेवजी ने उनको देखकर राजा से कहा कि ये लोग बड़े महात्मा है, इनकी सेवा होनी चाहिये । ऐसी आज्ञा पा राजा उनकी सेवा अच्छी रीति से करने लगा । जयदेवजी ने यही विचारा कि ये अपने नीच कर्म से नहीं चूके तो मैं अपने साधुपना से क्यों चूकूं पर उन डाकुओं के चित्त में यह शंका बनी रही कि ऐसा न हो कि यह जयदेवजी किसी दिन हमलोगों का दण्ड करावे, इसलिये वे नित्य वहां से जाने की प्रार्थना करते रहे, पर जयदेव जी उनको नही जानेदेते और बड़े आदर के साथ रखते थे, अन्त में जब उनलोगों ने बहुत हठ किया तो राजा से कहकर एक दो हज़ार मुद्रा उनको दिलवाकर वहा से बिदा किया, राजा ने उनके पहुंचाने के लिये एक सिपाही साथ करदिया, मार्ग मे सिपाही ने उन साधुसे पूछा कि स्वामीजी ने आप लोगों का इतना आदर क्यों करवाया? वे कुविचारी बोले कि तुम्हारे स्वामीजी और हमलोग एक राजा के यहां चाकर थे, स्वामीजी ने राज्य में बहुत बड़ा अपराध कियाथा इसलिये राजा ने उनको बन में लेजाकर मारडालने की आज्ञा दीथी पर हमलोगों ने इनको बन में लेजाकर इनका हाथ पांव काट इनकी जान छोड़दी, इसी कारण हमलोगों का इतना आदर कराया है। इस वचन के सुनते ही पृथिवी फटी और चारों पृथिवी के भीतर जाते रहे । यह अद्भुत लीला देखकर सिपाही दौड़ा गया और जयदेवजी से सब बातें कहसुनाई, सुनते ही वहुत पश्चाताप कर हाथ मलने चाहा कि इतने में उनके हाथ पांव निकल आये। ये दोनों आश्चर्य की बातें देख सिपाही ने राजा से जासुनाई, राजा ने जयदेवजी के पास जाकर, इन आश्चर्य वार्ताओं का कारण पूछा, पर स्वामी जी चुप रहे, जब बहुत हठ किया तब सव बातें पूर्ण प्रकार कहसुनाई । तव से राजा को श्री जयदेवजी में बहुत अधिक विश्वास औ प्रेम होगया औ तन मन से जयदेवजी की सेवा करने लगा, एक दिन श्री जयदेवजी ने अपने निवासस्थान जाने की इच्छा की पर राजा ने नहीं जाने दिया, जब बहुत हठ किया तव पद्मावतीजी को राजा ने बुलवा लिया और अपनी रानी को पद्मावती जी की सेवा करने की आज्ञा दी । एक दिन रानी का भाई मरगया उसके साथ उस की स्त्री " रानी जी की भावज " सती होगई, यह वार्त्ता रानीजी ने पद्मावतीजी से कही श्री अपनी भावज की बड़ी प्रशंसा की। पद्मावतीजी ने कही कि स्वामी के साथ जीते जलना उचित नहीं है, प्रेम की प्रशंसा तो तबही है कि पति की मृत्यु सुनते ही स्त्री अपना भी शरीर छोड़देवे । रानी बोली कि ऐसी पतिव्रता तो आप को छोड़ दूसरी कौन स्त्री होसकती है ? इतना कह पद्मावतीजी की परीक्षा का विचार किया । राजा से यो कहा कि आप जयदेवजी को किसी वाटिका में छिपादेवें औ राजधानी में यों प्रचार करदेवें कि श्री जयदेवजी का शरीर छूटगया । राजा ने बहुत समझाया कि महात्माओं से ऐसी मसखरी नहीं करनी चाहिये, पर रानी के हठ करने से ऐसा ही किया, जब रानी ने यह बात पद्मावतीजी से जाकही, तव पद्मावती जी हसपडी और बोलीं कि वे तो आनन्द पूर्वक वाटिका में विराज रहे है । रानीजी ने समझा कि दो ही चार दिन की बात है इसलिये यह समझगई है, ऐसा विचार एक साल बीतनेदिया, एक साल के पश्चात् फिर ऐसाही किया औ पद्मावतीजी से पूर्ववत सय बातें जासुनाई । पद्मावतीजी ने विचारा कि रानी मेरी परीक्षा करने चाहती है, ऐसा विचार अपना प्राण छोडदिया, यह देखकर राजा रानी दोनों घबराये, राजा के चित्त में बहुत ही चिन्ता व्यापी । उदासीन मुख से श्रीजयदेवजी के समीप जा सव वार्त्ता कहसुनाई, जयदेवजी ने कहा कि चिन्ता मत करो चलो मैं चलता हू । जव श्रीजयदेवजी ने पद्माव तीजी के कान मे वसी बजाकर गीतगोविन्द के पद सुनाये तब वह हरि नाम लेतीहुई उठवैठीं । ऐसे कई साल वीतजाने पर श्रीजयदेवजी पद्मावतीजी के साथ अपने निवासस्थान कुडविल्व ग्राम में लौटआये, आप नित्य गगास्नान को जाया करते थे, सो आप की बृद्धता देख श्री गंगाजी को दाई । इसलिये गङ्गाजी से एक धार फूटकर आप के ग्राम के समीप बह आई, जो आज तक चहरही है जिसे जयदेईगंगा के नाम से प्रसिद्ध करते है । फिर जयदेवजी श्री पद्मावतीजी दोनों निरन्तर श्यामसुन्दर के प्रेम में मग्न उनकी माधुरी शोभा औौ शृङ्गार मे चित्त लगाये अन्त में शरीर परित्याग कर श्यामसुन्दर के स्वरूप में तदाकार हो गोलोक को सिधारगये । प्यारे श्रोतृगरण ! भगवत् में प्रेम होने के लिये यह शृङ्गाररस उत्तम श्री श्रेष्ठ है, इसलिये इसको रसराज कहते है, अतएव मै बार दो अपने श्रोताओ से यही कहूंगा कि यदि शीघ्र अपना उद्धार करना हो तो श्यामसुन्दर की मनोहर छबि और मे चित्त लगा निरन्तर उस रूप मे सन्न हो डूबजाइये कि अन्तकाल में तदाकार हो उस मनमोहनी मूर्ति में लय होजाना पड़े । इस घोर कलिकाल में भगवत्प्राप्ति का कोई यत्न इससे बढ़कर उत्तम नहीं है । इस रसराज शृङ्गाररस और प्रेमका वर्णन भक्ति के व्याख्यान में देखिये । अब आज मै अपना व्याख्यान समाप्त करता हूं और अन्त में एक कवित्त सुनाता हूं जिसे सुन इसके भाव को अपने मनमें लिये घरजाइये, और जीवन पर्यन्त प्रेमरस को छक दो कर पीते हुये आवागमन से छूट नित्यानन्द मे प्राप्त होजाइये । कवित्त । माथे पै मुकुट देखि चन्द्रिका चटक दोख छविकी लटक देखि रूपरस पीजिये। लोचन विशाल दोख गरे गुंजसाल दोखे अधर रसाल दोख चित्त चोप कीजिये । कुण्डल इलन दोखे चलन देखि पलके चलन देखि सर्वस दीजिये । पीताम्बर छोर दोखे मुरलीकी घोर देखि सांवरे की ओर दोख देखिनोई कीजिये। फिर कल सुनाऊंगा ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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बहुत कुछ खोज करने पर भी जब कुछ पता नहीं चला तो मैं अचेत हो पृथ्वी पर गिर पड़ा। मोहवश मैं रोता और चिल्लाता रहा । तीन दिन तक भूख प्यास एवं निद्रा बिना मैं मात्र रानी को याद करता बैठा रहा। चौथे दिन एक तीव्र तप से परिक्षीण आकृति उत्पन्न हुई । जो अभूति एवं जटा से मंत्र सिद्ध ज्ञात होती थी । उसने कहा२०२
राजन् ! व्याकुल मत बनो । उत्तम लक्षणों वाली होने में मंत्र साधन हेतु तुम्हारी पत्नी को मैं ले गया हू । तीन दिन तक यह बात गुप्तं रखने का कल्प होने से मैंने पहले यह नहीं बताई थी । विश्वास रखना कि उसे कोई पीड़ा नहीं होगी तथा शील भेद भी नही होगा किन्तु तुझे छः मास तक धैर्य रखना होगा, इतना मात्र कह कर वह सिद्ध पुरुप अदृश्य हो गया ।
राजकार्य को छोड़ कर उन्मत्त मनुष्य की तरह मैं मंदा विलाप करता रहता । हंसमिथुन को देख मेरी अवस्था अनीव दयनीय हो जाती इस प्रकार घोर वियोग दुःख को संदन करते हुए किसी प्रकार मैंने पांच मास व्यतीय किए ।
एक बार अचानक ही मुझे आनन्द को अनुभव होने लगा । दुःख जैसे भूल गया । मै सोचने लगो, यह क्या हुआ ? इतने मे बधाई आई कि भगवान तीर्थंकर देव पधारे हैं ।
यह सुन हर्षवश में परिवार सहित समवसरण में गया। जहां
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बहुत कुछ खोज करने पर भी जब कुछ पता नहीं चला तो मैं अचेत हो पृथ्वी पर गिर पड़ा। मोहवश मैं रोता और चिल्लाता रहा । तीन दिन तक भूख प्यास एवं निद्रा बिना मैं मात्र रानी को याद करता बैठा रहा। चौथे दिन एक तीव्र तप से परिक्षीण आकृति उत्पन्न हुई । जो अभूति एवं जटा से मंत्र सिद्ध ज्ञात होती थी । उसने कहादो सौ दो राजन् ! व्याकुल मत बनो । उत्तम लक्षणों वाली होने में मंत्र साधन हेतु तुम्हारी पत्नी को मैं ले गया हू । तीन दिन तक यह बात गुप्तं रखने का कल्प होने से मैंने पहले यह नहीं बताई थी । विश्वास रखना कि उसे कोई पीड़ा नहीं होगी तथा शील भेद भी नही होगा किन्तु तुझे छः मास तक धैर्य रखना होगा, इतना मात्र कह कर वह सिद्ध पुरुप अदृश्य हो गया । राजकार्य को छोड़ कर उन्मत्त मनुष्य की तरह मैं मंदा विलाप करता रहता । हंसमिथुन को देख मेरी अवस्था अनीव दयनीय हो जाती इस प्रकार घोर वियोग दुःख को संदन करते हुए किसी प्रकार मैंने पांच मास व्यतीय किए । एक बार अचानक ही मुझे आनन्द को अनुभव होने लगा । दुःख जैसे भूल गया । मै सोचने लगो, यह क्या हुआ ? इतने मे बधाई आई कि भगवान तीर्थंकर देव पधारे हैं । यह सुन हर्षवश में परिवार सहित समवसरण में गया। जहां
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कांग्रेसी अब अमिताभ से गुहार लगा रहे हैं - 'आ अब लौट चले'
अमिताभ ने कांग्रेस के कुछ नेताओं को ट्विटर पर फॉलो कर लिया और उसे राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. अब खुद ही बताइए क्या ये सही है?
कुछ दिनों पहले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं को ट्विटर पर फॉलो किया था. तब से विश्लेषक इस घटना के राजनीतिक मायने समझने में लगे हैं. ऐसा नहीं है कि अमिताभ बच्चन पहली बार किसी राजनेता को ट्विटर पर फॉलो कर रहे हैं. भ्रष्टाचार के मामले में जेल में सज़ा काट रहे राजनेता लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अमिताभ पहले से फॉलो कर रहे हैं. तो अब ऐसा क्या विशेष है कि ट्विटर पर फॉलो करने के बाद, कांग्रेस पार्टी के छुटभैया नेता अमिताभ से 'आ अब लौट चलें' का आग्रह कर रहे हैं?
इस विषय में दो बातें महत्वपूर्ण है, जो इसे सामान्य घटना से थोड़ा अलग बनाती हैं. पहली, एक समय था जब अमिताभ बच्चन नेहरू-गाँधी परिवार के बहुत करीब थे. वह राजीव गाँधी के काफ़ी घनिष्ट मित्र थे. 1984 में फिल्म जगत से कुछ दिन की छुट्टी लेकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था. 8वीं लोक सभा के चुनावों में उन्होंने इलाहबाद से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. फिर समय ने ऐसी करवट ली कि उन्होंने 3 साल बाद अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया और कांग्रेस से भी दूर हो गए. इस इतिहास के कारण अमिताभ की कांग्रेस में रूचि, चर्चा का विषय है.
दूसरा, कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गाँधी ने पार्टी नेताओं को आदेश दिया है कि वह कांग्रेस छोड़कर, दूसरे राजनीतिक दलों में गए नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी का प्रयास करें. दिल्ली में अरविंदर सिंह लव्ली की कांग्रेस में वापसी और अजय मकान - शीला दीक्षित के बीच हुई सुलह इसी आदेश का परिणाम है.
वर्तमान काल खंड में, स्वयं अमिताभ बच्चन ने चाहे कोई राजनीतिक इच्छा या रूचि न दिखाई हो, परंतु कांग्रेस पार्टी इस घटना को मिर्च मसाला लगाकर प्रसारित करना चाहेगी. यह घटना, चाहे तर्क के लिए ही, कांग्रेस को कहने का मौका देती है कि वर्तमान में गुजरात सरकार के ब्रांड अम्बेसडर अब कांग्रेस में रूचि लेने लगे हैं. चाहें तर्क के लिए ही, 2019 की राहुल गाँधी बनाम नरेंद्र मोदी वाली लड़ाई में कांग्रेस इस घटना को भुनाना चाहेगी.
नसीमुद्दीन सिद्दीकी क्या राहुल गांधी को भी मायावती जैसा भरोसा दिला पाएंगे?
श्रीदेवी के निधन पर कांग्रेस पार्टी का राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण!
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कांग्रेसी अब अमिताभ से गुहार लगा रहे हैं - 'आ अब लौट चले' अमिताभ ने कांग्रेस के कुछ नेताओं को ट्विटर पर फॉलो कर लिया और उसे राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. अब खुद ही बताइए क्या ये सही है? कुछ दिनों पहले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं को ट्विटर पर फॉलो किया था. तब से विश्लेषक इस घटना के राजनीतिक मायने समझने में लगे हैं. ऐसा नहीं है कि अमिताभ बच्चन पहली बार किसी राजनेता को ट्विटर पर फॉलो कर रहे हैं. भ्रष्टाचार के मामले में जेल में सज़ा काट रहे राजनेता लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अमिताभ पहले से फॉलो कर रहे हैं. तो अब ऐसा क्या विशेष है कि ट्विटर पर फॉलो करने के बाद, कांग्रेस पार्टी के छुटभैया नेता अमिताभ से 'आ अब लौट चलें' का आग्रह कर रहे हैं? इस विषय में दो बातें महत्वपूर्ण है, जो इसे सामान्य घटना से थोड़ा अलग बनाती हैं. पहली, एक समय था जब अमिताभ बच्चन नेहरू-गाँधी परिवार के बहुत करीब थे. वह राजीव गाँधी के काफ़ी घनिष्ट मित्र थे. एक हज़ार नौ सौ चौरासी में फिल्म जगत से कुछ दिन की छुट्टी लेकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था. आठवीं लोक सभा के चुनावों में उन्होंने इलाहबाद से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. फिर समय ने ऐसी करवट ली कि उन्होंने तीन साल बाद अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया और कांग्रेस से भी दूर हो गए. इस इतिहास के कारण अमिताभ की कांग्रेस में रूचि, चर्चा का विषय है. दूसरा, कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गाँधी ने पार्टी नेताओं को आदेश दिया है कि वह कांग्रेस छोड़कर, दूसरे राजनीतिक दलों में गए नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी का प्रयास करें. दिल्ली में अरविंदर सिंह लव्ली की कांग्रेस में वापसी और अजय मकान - शीला दीक्षित के बीच हुई सुलह इसी आदेश का परिणाम है. वर्तमान काल खंड में, स्वयं अमिताभ बच्चन ने चाहे कोई राजनीतिक इच्छा या रूचि न दिखाई हो, परंतु कांग्रेस पार्टी इस घटना को मिर्च मसाला लगाकर प्रसारित करना चाहेगी. यह घटना, चाहे तर्क के लिए ही, कांग्रेस को कहने का मौका देती है कि वर्तमान में गुजरात सरकार के ब्रांड अम्बेसडर अब कांग्रेस में रूचि लेने लगे हैं. चाहें तर्क के लिए ही, दो हज़ार उन्नीस की राहुल गाँधी बनाम नरेंद्र मोदी वाली लड़ाई में कांग्रेस इस घटना को भुनाना चाहेगी. नसीमुद्दीन सिद्दीकी क्या राहुल गांधी को भी मायावती जैसा भरोसा दिला पाएंगे? श्रीदेवी के निधन पर कांग्रेस पार्टी का राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण!
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साउथ अफ्रीकी टीम को इसी हफ्ते से नेदरलैंड्स के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी है, लेकिन इस स्टार को उस सीरीज से बाहर बैठना पड़ेगा.
कोरोनावायरस महामारी के कारण खेल और खिलाड़ियों पर असर अभी भी हो रहा है. संक्रमण से बचने के लिए बायो-बबल में टूर्नामेंटों का आयोजन किया जा रहा है, जो आगे भी जारी रहने की संभावना है. इसके बावजूद खिलाड़ियों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला साउथ अफ्रीकी टीम (South Africa Cricket Team) से आया है, जहां तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी (Lungi Ngidi) कोरोनावायरस संक्रमण की चपेट में आ गए हैं. कोरोना संक्रमण के कारण एनगिडी को नेदरलैंड्स के खिलाफ होने वाली घरेलू वनडे सीरीज से बाहर बैठना पड़ेगा. एनगिडी ने पिछले 4 महीनों से साउथ अफ्रीका के लिए कोई क्रिकेट मैच नहीं खेला है. साउथ अफ्रीका और नेदरलैंड्स के बीच 3 मैचों की ये सीरीज शुक्रवार 26 नवंबर से शुरू हो रही है.
टी20 विश्व कप के बाद खेली जा रही इस सीरीज में साउथ अफ्रीका के कई नियमित खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहे हैं. टीम के कप्तान टेम्बा बावुमा, विकेटकीपर-बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक, बल्लेबाज एडन मार्करम, रासी वैन डर डुसैं, तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा और एनरिक नॉर्खिया को इस सीरीज के लिए आराम दिया गया है. ये सभी अगले महीने भारत के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज में वापसी करेंगे. बाएं हाथ के अनुभवी स्पिनर केशव महाराज को टीम की कमान सौंपी गई है.
क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने बुधवार 24 नवंबर को एक बयान जारी कर एनगिडी के संक्रमित होने की जानकारी दी. अफ्रीकी बोर्ड ने इसके साथ ही बताया कि तेज गेंदबाज लिजाड विलियम्स भी इस सीरीज से बाहर हो गए हैं, क्योंकि उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है. अफ्रीकी बोर्ड के बयान के मुताबिक, तेज गेंदबाज जूनियर डाला को एनगिडी की जगह टीम में शामिल किया गया है. क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन-क्रिकइंफो ने CSA के हवाले से बताया कि एनगिडी बेहतर स्थिति में हैं और बोर्ड की मेडिकल टीम उनके अलावा लिजाड विलियम्स की स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
#Proteas Squad Update ??
एनगिडी ने जुलाई 2021 के बाद से ही साउथ अफ्रीका के लिए कोई मैच नहीं खेला है. तब साउथ अफ्रीकी टीम आयरलैंड के दौरे पर गई थी. वह श्रीलंका दौरे पर भी नहीं गए थे, जबकि टी20 विश्व कप में उन्हें टीम के साथ होने के बावजूद एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था. अफ्रीकी टीम नेट रनरेट के आधार पर विश्व कप के सुपर-12 राउंड से ही बाहर हो गई थी. इससे पहले एनगिडी ने यूएई में एमएस धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स के साथ मिलकर IPL 2021 का खिताब जीता था.
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साउथ अफ्रीकी टीम को इसी हफ्ते से नेदरलैंड्स के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी है, लेकिन इस स्टार को उस सीरीज से बाहर बैठना पड़ेगा. कोरोनावायरस महामारी के कारण खेल और खिलाड़ियों पर असर अभी भी हो रहा है. संक्रमण से बचने के लिए बायो-बबल में टूर्नामेंटों का आयोजन किया जा रहा है, जो आगे भी जारी रहने की संभावना है. इसके बावजूद खिलाड़ियों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला साउथ अफ्रीकी टीम से आया है, जहां तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी कोरोनावायरस संक्रमण की चपेट में आ गए हैं. कोरोना संक्रमण के कारण एनगिडी को नेदरलैंड्स के खिलाफ होने वाली घरेलू वनडे सीरीज से बाहर बैठना पड़ेगा. एनगिडी ने पिछले चार महीनों से साउथ अफ्रीका के लिए कोई क्रिकेट मैच नहीं खेला है. साउथ अफ्रीका और नेदरलैंड्स के बीच तीन मैचों की ये सीरीज शुक्रवार छब्बीस नवंबर से शुरू हो रही है. टीबीस विश्व कप के बाद खेली जा रही इस सीरीज में साउथ अफ्रीका के कई नियमित खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहे हैं. टीम के कप्तान टेम्बा बावुमा, विकेटकीपर-बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक, बल्लेबाज एडन मार्करम, रासी वैन डर डुसैं, तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा और एनरिक नॉर्खिया को इस सीरीज के लिए आराम दिया गया है. ये सभी अगले महीने भारत के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज में वापसी करेंगे. बाएं हाथ के अनुभवी स्पिनर केशव महाराज को टीम की कमान सौंपी गई है. क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने बुधवार चौबीस नवंबर को एक बयान जारी कर एनगिडी के संक्रमित होने की जानकारी दी. अफ्रीकी बोर्ड ने इसके साथ ही बताया कि तेज गेंदबाज लिजाड विलियम्स भी इस सीरीज से बाहर हो गए हैं, क्योंकि उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है. अफ्रीकी बोर्ड के बयान के मुताबिक, तेज गेंदबाज जूनियर डाला को एनगिडी की जगह टीम में शामिल किया गया है. क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन-क्रिकइंफो ने CSA के हवाले से बताया कि एनगिडी बेहतर स्थिति में हैं और बोर्ड की मेडिकल टीम उनके अलावा लिजाड विलियम्स की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. #Proteas Squad Update ?? एनगिडी ने जुलाई दो हज़ार इक्कीस के बाद से ही साउथ अफ्रीका के लिए कोई मैच नहीं खेला है. तब साउथ अफ्रीकी टीम आयरलैंड के दौरे पर गई थी. वह श्रीलंका दौरे पर भी नहीं गए थे, जबकि टीबीस विश्व कप में उन्हें टीम के साथ होने के बावजूद एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था. अफ्रीकी टीम नेट रनरेट के आधार पर विश्व कप के सुपर-बारह राउंड से ही बाहर हो गई थी. इससे पहले एनगिडी ने यूएई में एमएस धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स के साथ मिलकर IPL दो हज़ार इक्कीस का खिताब जीता था.
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कुछ सुधार हुआ है । यह हम नहीं कहेंगे कि नहीं । लेकिन आज गांव की हालत क्या है, इसको आप चलकर देख लें । जो बिजली बोर्ड था, उसको समाप्त करके प्राइवेट आदमी के हाथ में दे दिये, कम्पनी के हाथ में, वह तो लूटेगा और आज भी ये किये हैं, अधिनियम में भी यही है कि प्राइवेट व्यक्ति जेनरेट करेगा वितरण करेगा, वसूल करेगा और क्या हालत है वसूली का ? बिजली की खपत है 1500 रूपये का और बिल आता है 2500 रूपये का, 3500 रूपये का और उसको ठीक कराने के लिए बिजली ऑफिस का चक्कर लगाते-लगाते महीनों बीत जाते हैं और तबतक उनपर थाना में एफ0आई0आर0 दर्ज हो जाता है । बिहार विद्युत शुल्क विधेयक, 2018 जो लाये हैं, उसका क्या प्रयोजन है, क्या लाभ होगा ? उसका लाभ तो आम जनता के लिए होना चाहिए । आप जो कर रहे हैं, आम जनता के लिए कर रहे हैं, सरकार थोप दे कानून इससे तो जनतंत्र चलने वाला नहीं है । आपको तो जनता की नियत को, जनता की राय को जाननी होगी कि वह क्या चाहता है ? इससे तो ज्यादा अच्छा होता कि आप जी०एस०टी० को डायरेक्ट लागू कर देते लेकिन आप जी०एस०टी० को लागू कर दिये लेकिन आप जी०एस०टी० भी छिपाकर यह करारोपण कर रहे हैं और आम लोगों पर टैक्सेसन का भार देकर वितरण की व्यवस्था और उत्पादन की व्यवस्था दूसरे पर, प्राइवेट आदमी को दे रहे हैं । बिजली का शुल्क नहीं देगा और बिजली का शुल्क नहीं देगा तो उसको माफ कैसे करेंगे तो वह भी आप क्लियर कर दिये हैं । सबसे बड़ा अन्याय तो यह किये हैं कि अगर कोई आदमी अपील करेगा न्यायाधिकरण के विरूद्ध में तो आप ऐसा डायरेक्शन दिये हैं कि मुझे हंसी आती है । आजतक मैंने सुना भी नहीं । आप कहते हैं कि दो जज मिलकर के इसकी सुनवायी करेगा तो सरकार को कोई ऐसा पावर है संविधान में आपको कि आप डायरेक्शन दीजियेगा कोर्ट को कि आप दो आदमी मिलकर सुन लीजिए या एक बेंच बनाकर सुन लीजिए । ऐसा पावर आपको नहीं है । यह तो हाई कोर्ट की चीज है, न्यायालय की चीज है कि वह किसके जरिए, कितने आदमी
श्री रामदेव राय : क्रमशः..... या एक बेंच बनाकर सुन लीजिए ऐसा पावर आपको नहीं है । यह तो हाईकोर्ट की चीज है, न्यायालय की चीज है कि वह कितने बेंच के जरिये सुनवाई करेगा । इसमें चक्कर में भी फंसा दिये हैं आप और सबसे चक्कर यह फंसाये हैं, आज चलिए हमारे मंत्री जी चलें - यह बात ठीक है कि इनका अफसर कुछ अच्छा काम किया है । यह हम मानेंगे, लेकिन सवाल उठता है कि अफसर तो पटना में बैठे रहते हैं और गांव में क्या हालत है ? आप जो पोल गाड़ते हैं उसके अंदर झामा मेटल देना चाहिए, लेकिन उसके अंदर मिट्टी देता है । शहर में तार आप लगाये हैं
वह रबड़ से कवर है और गांव में नन्दकिशोर बाबू चलियेगा तो बड़का मोटका तार है, अगर टूट गया तो गांव का गांव साफ हो जायेगा । आप एक नया कानून बनाये हैं, यह लूट रहा है जो कंपनी है, जो कंपनी का एजेंट है वह किसी गांव का ही आदमी होता है जिसका मन जितना बिल होता है बढ़ाकर दे देता है, लोग परेशान-परेशान हैं । इस परेशानी को दूर करने की जरूरत है । आप संवेदनशील सरकार हैं और महत्वाकांक्षी योजना है तो आपको निश्चित रूप से सरजमीन की बात लेकर के ऐसा एक्ट बनाना चाहिए चूंकि आप जी०एस०टी० प्रवेश करके एक्ट बना रहे हैं और एक्ट आप लागू कर देंगे तो क्या दिक्कत होगी इसको - और इतना ही नहीं हुजूर, आप तलाशी लेने का कितना बड़ा पावर दे दिये हैं । आप कहते हैं कि गरीब को बिजली देंगे, आदिवासी को देंगे, अनुसूचित जाति को देंगे, मुफ्त देंगे और उसको बकाया, अगर वह बिजली उत्पादन करता है प्राइवेट रूप से तो उसको तलाशी करने के लिए और तलाशी करने का पावर है आपको ? कैसे पावर है ? इसके नियम के मुताबिक आपको तलाशी करनी होगी । आप न कोई मजिस्ट्रेट नियुक्त किये हैं, न कोई सक्षम पदाधिकारी नियुक्त किये हैं । इसके अलावे वह हमारे घर में प्रवेश कर जायेगा । हम बिजली बनाते हैं और चोरी भी करवाते हैं और हमको शुल्क भी आप नहीं लेंगे । आप एक्ट बना दिये हैं कि हमपर शुल्क बढ़ा देंगे और शुल्क हम समय पर नहीं देंगे तो हमारे घर में प्रवेश करा दीजिएगा आप पुलिस को कि प्रवेश करके उसकी तलाशी लो । आपको तलाशी कराने का अधिकार नहीं है । गरीब के घर की तलाशी कीजिएगा जिस गरीब के लिए सात निश्चय बनाये हैं, इतना काम करना चाहते हैं उस गरीब के घर की तलाशी क्यों कराना चाहते हैं और तलाशी करने की जरूरत क्या है ? अगर आप बिजली समय पर सप्लाय करते हैं, आपूर्ति करते हैं- जनरेशन बढ़ा है निश्चित है, सप्लाय करते हैं तो सप्लाय का मीटर लगाये क्या ? गांव में भैलीड मीटर है किसी के पास ? नहीं है, आज भी नहीं है । 80 परसेंट लोगों के पास मीटर नहीं है गांव में और उसको शुल्क देना पड़ता है। आप कहे कि हम कैंप लगाकर उससे वसूल करेंगे, उसकी जो अतिरिक्त चार्ज आयेगा उसका कैंप लगाकर हम वसूली करेंगे । एनाउन्स हुआ कि प्रत्येक महीना के 15 तारीख को प्रखंड मुख्यालय में जाकर वसूल करेंगे, लेकिन आज हो रहा है ? नहीं हो रहा है । जब काम हो ही नहीं रहा है तो आप विधेयक लाये क्यों और इस विधेयक को लाने से आम लोगों को क्या लाभ होगा, मैं यह समझना चाहता हूँ ।
हो गया ?
श्री रामदेव राय : और नहीं .........
आपकी मर्जी हम तो इसलिए कह रहे हैं कि आगे भी कई संशोधन आपके हैं और अभी सब बोल लीजिएगा तो आगे रेपीटीशन होगा, पुनरावृत्ति होगी जिसको हमको रोकना होगा ।
श्री नन्दकिशोर यादव, मंत्री : महोदय, चार-पांच बार बोलने का एग्रीमेन्ट हो गया है ।
श्री रामदेव राय : मैं यह कहना चाहता हूँ कि इसको जनमत संग्रह में भेज दीजिए । जनता की आवाज को समझ लीजिए, जनता आपसे क्या अपेक्षा करती है उसके अनुरूप यह एक्ट बनाइये । यह जनता विरोधी एक्ट है इसलिए आप इसको वापस कर लीजिए, नहीं तो जनमत संग्रह में भेज दीजिए । अगर वह भी नहीं कर सकते हैं तो प्रवर समिति में भेज दीजिए कि 30 दिन के अंदर वह अपना रिपोर्ट पेश कर दे । तरीका भी यही है, इसलिए मैं सिद्धांत पर चर्चा नहीं किया हूँ । यह सिद्धांत की चीज है ही नहीं, यह तो बिलकुल जनता से संबंधित चीज है । ऐसे अब आसन का अग्रह हो रहा है तो आगे तो है उसमें बहुत चीज हमलोग करेंगे ।
जनमत जानने हेतु परिचारित हो । "
"बिहार विद्युत् शुल्क विधेयक, 2018 दिनांक 30 जून, 2018 तक
यह प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ ।
अब संयुक्त प्रवर समिति का प्रस्ताव । इसमें माननीय सदस्य श्री भोला यादव द्वारा संयुक्त प्रवर समिति का प्रस्ताव आया है । क्या माननीय सदस्य श्री भोला यादव, अपना प्रस्ताव मूव करेंगे ?
(इस अवसर पर मा0स0 श्री भोला यादव अनुपस्थित)
"बिहार विद्युत् शुल्क विधेयक, 2018 पर विचार हो ।" प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
अब मैं खंडशः लेता हूं । खंड - 2 में 10 संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री रामदेव राय, अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री रामदेव राय : जी सर । मैं प्रस्ताव करता हूँ कि :
"विधेयक के खंड-2 के उपखंड (1) के मद (ख)
के दूसरी पंक्ति के शब्द "या अधिक" को विलोपित किया जाय ।" महोदय, आप देखेंगे कि यहां भी यही बात है। खंड-2 में ख पढ़ेंगे सह उत्पादनअब किसी से बाहर में पूछिए तो सह उत्पादन किसको कहते हैं । हम तो समझते हैं सह उत्पादन नहीं कहेगा और सह उत्पादन से अभिप्रेत है प्रक्रिया में उत्पादित ऊर्जा
जो लगातार विद्युत् सहित उपयोगी ऊर्जा का दो या अधिक रूप में- दो या इससे अधिक क्या होता है ? इसको क्लीयर नहीं किये हैं । इसलिए इसमें मैं यह संशोधन दिया हूँ कि दो से अधिक जो शब्द है इसको विलोपित कर दीजिए । ज्यादा से ज्यादा दो रहने दीजिए । वैकल्पिक व्यवस्था होगी उत्पादन की ।
"विधेयक के खंड-2 के उपखंड (1) के मद (ख) के दूसरी पंक्ति के शब्द "या अधिक" को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ ।
क्या माननीय सदस्य श्री रामदेव राय, अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री रामदेव राय : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि :
"विधेयक के खंड-2 उपखंड (1) के मद (घ) के छठी पंक्ति के शब्द "व्यक्ति" एवं शब्द "शामिल" के बीच शब्द "भी" अंतःस्थापित किया जाय तथा छठी पंक्ति के शब्द समूह " नहीं है" के स्थान पर शब्द 'रहेगा" प्रतिस्थापित किया जाय ।"
देखिए सर, क्लीयर है आप भी थोड़ा पढ़ते जाइये तो हमको सुविधा होगी, नहीं तो हम केवल बोलते रह जायेंगे उधर से ना होगा और बात खतम हो जायेगी । जब ना में ही खतम हो जायेगी तो जिंदगी भर ना ही रहने दीजिए । हमलोग को हां में रहने दीजिए हमेशा । कोई हो अनुज्ञप्तिधारी अथवा सरकार द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए अथवा आमजन को विद्युत् आपूर्ति करने के व्यवसाय में लगे अन्य व्यक्ति द्वारा, विद्युत् व्यवसाय में लगे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसमें नहीं है अनुज्ञप्तिधारीकोई व्यक्ति हो द्वारा विद्युत् की आपूर्ति की जाती हो और इसमें से कोई भी व्यक्ति शामिल है जिसके परिसर तत्संबंधी समय यथाशक्ति अनुज्ञप्तिधारी सरकार ऐसे अन्य व्यक्ति के कार्यों के विद्युत् प्राप्त करने के कार्यों के प्रयोजनार्थ जुड़े हों, किन्तु इसमें कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं रहेंगे जिसके उत्पादक कंपनी और किसी अनुज्ञप्तिधारी तथा अनुज्ञप्तिधारियों के बीच करार के अधीन - मैं इसमें इसलिए कहा कोई व्यक्ति शामिल रहेंगे यह दिया जाय । इसको अगर ठीक से मंत्री जी समझेंगे तो मैं उन्हीं लाभ के लिए दिया हूँ कि कोई व्यक्ति शामिल नहीं है इसको काटकर के कोई व्यक्ति शामिल रहेंगे यह कर दिया जाय और करार शब्द को हटा दें, करार शब्द का क्या प्रयोजन है ?
श्री रामदेव राय : क्रमशः और करार का क्या प्रयोजन है ? इस ऐक्ट में करार का क्या अर्थ होता है, किससे एकरारनाम आप किये हैं, किस से एकरारनामा किये नहीं, विद्युत की
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कुछ सुधार हुआ है । यह हम नहीं कहेंगे कि नहीं । लेकिन आज गांव की हालत क्या है, इसको आप चलकर देख लें । जो बिजली बोर्ड था, उसको समाप्त करके प्राइवेट आदमी के हाथ में दे दिये, कम्पनी के हाथ में, वह तो लूटेगा और आज भी ये किये हैं, अधिनियम में भी यही है कि प्राइवेट व्यक्ति जेनरेट करेगा वितरण करेगा, वसूल करेगा और क्या हालत है वसूली का ? बिजली की खपत है एक हज़ार पाँच सौ रूपये का और बिल आता है दो हज़ार पाँच सौ रूपये का, तीन हज़ार पाँच सौ रूपये का और उसको ठीक कराने के लिए बिजली ऑफिस का चक्कर लगाते-लगाते महीनों बीत जाते हैं और तबतक उनपर थाना में एफशून्यआईशून्यआरशून्य दर्ज हो जाता है । बिहार विद्युत शुल्क विधेयक, दो हज़ार अट्ठारह जो लाये हैं, उसका क्या प्रयोजन है, क्या लाभ होगा ? उसका लाभ तो आम जनता के लिए होना चाहिए । आप जो कर रहे हैं, आम जनता के लिए कर रहे हैं, सरकार थोप दे कानून इससे तो जनतंत्र चलने वाला नहीं है । आपको तो जनता की नियत को, जनता की राय को जाननी होगी कि वह क्या चाहता है ? इससे तो ज्यादा अच्छा होता कि आप जीशून्यएसशून्यटीशून्य को डायरेक्ट लागू कर देते लेकिन आप जीशून्यएसशून्यटीशून्य को लागू कर दिये लेकिन आप जीशून्यएसशून्यटीशून्य भी छिपाकर यह करारोपण कर रहे हैं और आम लोगों पर टैक्सेसन का भार देकर वितरण की व्यवस्था और उत्पादन की व्यवस्था दूसरे पर, प्राइवेट आदमी को दे रहे हैं । बिजली का शुल्क नहीं देगा और बिजली का शुल्क नहीं देगा तो उसको माफ कैसे करेंगे तो वह भी आप क्लियर कर दिये हैं । सबसे बड़ा अन्याय तो यह किये हैं कि अगर कोई आदमी अपील करेगा न्यायाधिकरण के विरूद्ध में तो आप ऐसा डायरेक्शन दिये हैं कि मुझे हंसी आती है । आजतक मैंने सुना भी नहीं । आप कहते हैं कि दो जज मिलकर के इसकी सुनवायी करेगा तो सरकार को कोई ऐसा पावर है संविधान में आपको कि आप डायरेक्शन दीजियेगा कोर्ट को कि आप दो आदमी मिलकर सुन लीजिए या एक बेंच बनाकर सुन लीजिए । ऐसा पावर आपको नहीं है । यह तो हाई कोर्ट की चीज है, न्यायालय की चीज है कि वह किसके जरिए, कितने आदमी श्री रामदेव राय : क्रमशः..... या एक बेंच बनाकर सुन लीजिए ऐसा पावर आपको नहीं है । यह तो हाईकोर्ट की चीज है, न्यायालय की चीज है कि वह कितने बेंच के जरिये सुनवाई करेगा । इसमें चक्कर में भी फंसा दिये हैं आप और सबसे चक्कर यह फंसाये हैं, आज चलिए हमारे मंत्री जी चलें - यह बात ठीक है कि इनका अफसर कुछ अच्छा काम किया है । यह हम मानेंगे, लेकिन सवाल उठता है कि अफसर तो पटना में बैठे रहते हैं और गांव में क्या हालत है ? आप जो पोल गाड़ते हैं उसके अंदर झामा मेटल देना चाहिए, लेकिन उसके अंदर मिट्टी देता है । शहर में तार आप लगाये हैं वह रबड़ से कवर है और गांव में नन्दकिशोर बाबू चलियेगा तो बड़का मोटका तार है, अगर टूट गया तो गांव का गांव साफ हो जायेगा । आप एक नया कानून बनाये हैं, यह लूट रहा है जो कंपनी है, जो कंपनी का एजेंट है वह किसी गांव का ही आदमी होता है जिसका मन जितना बिल होता है बढ़ाकर दे देता है, लोग परेशान-परेशान हैं । इस परेशानी को दूर करने की जरूरत है । आप संवेदनशील सरकार हैं और महत्वाकांक्षी योजना है तो आपको निश्चित रूप से सरजमीन की बात लेकर के ऐसा एक्ट बनाना चाहिए चूंकि आप जीशून्यएसशून्यटीशून्य प्रवेश करके एक्ट बना रहे हैं और एक्ट आप लागू कर देंगे तो क्या दिक्कत होगी इसको - और इतना ही नहीं हुजूर, आप तलाशी लेने का कितना बड़ा पावर दे दिये हैं । आप कहते हैं कि गरीब को बिजली देंगे, आदिवासी को देंगे, अनुसूचित जाति को देंगे, मुफ्त देंगे और उसको बकाया, अगर वह बिजली उत्पादन करता है प्राइवेट रूप से तो उसको तलाशी करने के लिए और तलाशी करने का पावर है आपको ? कैसे पावर है ? इसके नियम के मुताबिक आपको तलाशी करनी होगी । आप न कोई मजिस्ट्रेट नियुक्त किये हैं, न कोई सक्षम पदाधिकारी नियुक्त किये हैं । इसके अलावे वह हमारे घर में प्रवेश कर जायेगा । हम बिजली बनाते हैं और चोरी भी करवाते हैं और हमको शुल्क भी आप नहीं लेंगे । आप एक्ट बना दिये हैं कि हमपर शुल्क बढ़ा देंगे और शुल्क हम समय पर नहीं देंगे तो हमारे घर में प्रवेश करा दीजिएगा आप पुलिस को कि प्रवेश करके उसकी तलाशी लो । आपको तलाशी कराने का अधिकार नहीं है । गरीब के घर की तलाशी कीजिएगा जिस गरीब के लिए सात निश्चय बनाये हैं, इतना काम करना चाहते हैं उस गरीब के घर की तलाशी क्यों कराना चाहते हैं और तलाशी करने की जरूरत क्या है ? अगर आप बिजली समय पर सप्लाय करते हैं, आपूर्ति करते हैं- जनरेशन बढ़ा है निश्चित है, सप्लाय करते हैं तो सप्लाय का मीटर लगाये क्या ? गांव में भैलीड मीटर है किसी के पास ? नहीं है, आज भी नहीं है । अस्सी परसेंट लोगों के पास मीटर नहीं है गांव में और उसको शुल्क देना पड़ता है। आप कहे कि हम कैंप लगाकर उससे वसूल करेंगे, उसकी जो अतिरिक्त चार्ज आयेगा उसका कैंप लगाकर हम वसूली करेंगे । एनाउन्स हुआ कि प्रत्येक महीना के पंद्रह तारीख को प्रखंड मुख्यालय में जाकर वसूल करेंगे, लेकिन आज हो रहा है ? नहीं हो रहा है । जब काम हो ही नहीं रहा है तो आप विधेयक लाये क्यों और इस विधेयक को लाने से आम लोगों को क्या लाभ होगा, मैं यह समझना चाहता हूँ । हो गया ? श्री रामदेव राय : और नहीं ......... आपकी मर्जी हम तो इसलिए कह रहे हैं कि आगे भी कई संशोधन आपके हैं और अभी सब बोल लीजिएगा तो आगे रेपीटीशन होगा, पुनरावृत्ति होगी जिसको हमको रोकना होगा । श्री नन्दकिशोर यादव, मंत्री : महोदय, चार-पांच बार बोलने का एग्रीमेन्ट हो गया है । श्री रामदेव राय : मैं यह कहना चाहता हूँ कि इसको जनमत संग्रह में भेज दीजिए । जनता की आवाज को समझ लीजिए, जनता आपसे क्या अपेक्षा करती है उसके अनुरूप यह एक्ट बनाइये । यह जनता विरोधी एक्ट है इसलिए आप इसको वापस कर लीजिए, नहीं तो जनमत संग्रह में भेज दीजिए । अगर वह भी नहीं कर सकते हैं तो प्रवर समिति में भेज दीजिए कि तीस दिन के अंदर वह अपना रिपोर्ट पेश कर दे । तरीका भी यही है, इसलिए मैं सिद्धांत पर चर्चा नहीं किया हूँ । यह सिद्धांत की चीज है ही नहीं, यह तो बिलकुल जनता से संबंधित चीज है । ऐसे अब आसन का अग्रह हो रहा है तो आगे तो है उसमें बहुत चीज हमलोग करेंगे । जनमत जानने हेतु परिचारित हो । " "बिहार विद्युत् शुल्क विधेयक, दो हज़ार अट्ठारह दिनांक तीस जून, दो हज़ार अट्ठारह तक यह प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ । अब संयुक्त प्रवर समिति का प्रस्ताव । इसमें माननीय सदस्य श्री भोला यादव द्वारा संयुक्त प्रवर समिति का प्रस्ताव आया है । क्या माननीय सदस्य श्री भोला यादव, अपना प्रस्ताव मूव करेंगे ? "बिहार विद्युत् शुल्क विधेयक, दो हज़ार अट्ठारह पर विचार हो ।" प्रस्ताव स्वीकृत हुआ । अब मैं खंडशः लेता हूं । खंड - दो में दस संशोधन है । क्या माननीय सदस्य श्री रामदेव राय, अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री रामदेव राय : जी सर । मैं प्रस्ताव करता हूँ कि : "विधेयक के खंड-दो के उपखंड के मद के दूसरी पंक्ति के शब्द "या अधिक" को विलोपित किया जाय ।" महोदय, आप देखेंगे कि यहां भी यही बात है। खंड-दो में ख पढ़ेंगे सह उत्पादनअब किसी से बाहर में पूछिए तो सह उत्पादन किसको कहते हैं । हम तो समझते हैं सह उत्पादन नहीं कहेगा और सह उत्पादन से अभिप्रेत है प्रक्रिया में उत्पादित ऊर्जा जो लगातार विद्युत् सहित उपयोगी ऊर्जा का दो या अधिक रूप में- दो या इससे अधिक क्या होता है ? इसको क्लीयर नहीं किये हैं । इसलिए इसमें मैं यह संशोधन दिया हूँ कि दो से अधिक जो शब्द है इसको विलोपित कर दीजिए । ज्यादा से ज्यादा दो रहने दीजिए । वैकल्पिक व्यवस्था होगी उत्पादन की । "विधेयक के खंड-दो के उपखंड के मद के दूसरी पंक्ति के शब्द "या अधिक" को विलोपित किया जाय ।" यह संशोधन अस्वीकृत हुआ । क्या माननीय सदस्य श्री रामदेव राय, अपना संशोधन मूव करेंगे ? श्री रामदेव राय : मैं प्रस्ताव करता हूँ कि : "विधेयक के खंड-दो उपखंड के मद के छठी पंक्ति के शब्द "व्यक्ति" एवं शब्द "शामिल" के बीच शब्द "भी" अंतःस्थापित किया जाय तथा छठी पंक्ति के शब्द समूह " नहीं है" के स्थान पर शब्द 'रहेगा" प्रतिस्थापित किया जाय ।" देखिए सर, क्लीयर है आप भी थोड़ा पढ़ते जाइये तो हमको सुविधा होगी, नहीं तो हम केवल बोलते रह जायेंगे उधर से ना होगा और बात खतम हो जायेगी । जब ना में ही खतम हो जायेगी तो जिंदगी भर ना ही रहने दीजिए । हमलोग को हां में रहने दीजिए हमेशा । कोई हो अनुज्ञप्तिधारी अथवा सरकार द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए अथवा आमजन को विद्युत् आपूर्ति करने के व्यवसाय में लगे अन्य व्यक्ति द्वारा, विद्युत् व्यवसाय में लगे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इसमें नहीं है अनुज्ञप्तिधारीकोई व्यक्ति हो द्वारा विद्युत् की आपूर्ति की जाती हो और इसमें से कोई भी व्यक्ति शामिल है जिसके परिसर तत्संबंधी समय यथाशक्ति अनुज्ञप्तिधारी सरकार ऐसे अन्य व्यक्ति के कार्यों के विद्युत् प्राप्त करने के कार्यों के प्रयोजनार्थ जुड़े हों, किन्तु इसमें कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं रहेंगे जिसके उत्पादक कंपनी और किसी अनुज्ञप्तिधारी तथा अनुज्ञप्तिधारियों के बीच करार के अधीन - मैं इसमें इसलिए कहा कोई व्यक्ति शामिल रहेंगे यह दिया जाय । इसको अगर ठीक से मंत्री जी समझेंगे तो मैं उन्हीं लाभ के लिए दिया हूँ कि कोई व्यक्ति शामिल नहीं है इसको काटकर के कोई व्यक्ति शामिल रहेंगे यह कर दिया जाय और करार शब्द को हटा दें, करार शब्द का क्या प्रयोजन है ? श्री रामदेव राय : क्रमशः और करार का क्या प्रयोजन है ? इस ऐक्ट में करार का क्या अर्थ होता है, किससे एकरारनाम आप किये हैं, किस से एकरारनामा किये नहीं, विद्युत की
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गये पहले टी-20 मैच में ज्यादा रन नहीं बने। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 126 रन बनाये वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम अंतिम गेंद पर जीत हासिल नहीं कर पाई। विशाखापत्तनम की पिच बल्लेबाजों की मददगार होती है, लेकिन इस मैच में ऐसा कुछ नहीं हुआ। दोनों में से कोई भी टीम खुलकर बल्लेबाजी नहीं कर पाई।
विशाखापट्टनम की पिच स्पिन और तेज गेंदबाज दोनों के लिए मददगार थी। भारत के लिए जसप्रीत बुमराह समेत स्पिन गेंदबाजों ने भी शानदार गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से भी कुछ ऐसा ही रहा।
ऑस्ट्रेलिया के लिए नाथन कुल्टर नाइल, पैट कमिंस और डार्शी शॉर्ट ने अच्छी गेंदबाजी की। पिच पर गेंद रुककर आ रही थी और इसी वजह से बल्लेबाजों को रन बनाने में लगातार परेशानी हो रही थी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टी-20 मैच बैंगलोर को एम चिन्नास्वामी में स्टेडियम में खेला जायेगा। इसी पिच पर आईपीएल की टीम आरसीबी अपना घरेलू मैच भी खेलती है।
इसपर बल्लेबाजों के लिए काफी मदद होती है। इसके साथ ही कम गेंदबाजों के लिए भी कम मददगार नहीं है। युजवेंद्र चहल ने आरसीबी के लिए खेलते हुए इस पिच पर कई शानदार प्रदर्शन किये हैं।
कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन की टीम से दूसरे मैच की पिच को लेकर बयान आया है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी आर सुधाकर ने दावा किया है कि यह एक स्पोर्टिंग विकेट होगी और यहाँ सभी के लिए कुछ न कुछ होगा।
अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गये पहले टी-बीस मैच में ज्यादा रन नहीं बने। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने एक सौ छब्बीस रन बनाये वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम अंतिम गेंद पर जीत हासिल नहीं कर पाई। विशाखापत्तनम की पिच बल्लेबाजों की मददगार होती है, लेकिन इस मैच में ऐसा कुछ नहीं हुआ। दोनों में से कोई भी टीम खुलकर बल्लेबाजी नहीं कर पाई। विशाखापट्टनम की पिच स्पिन और तेज गेंदबाज दोनों के लिए मददगार थी। भारत के लिए जसप्रीत बुमराह समेत स्पिन गेंदबाजों ने भी शानदार गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से भी कुछ ऐसा ही रहा। ऑस्ट्रेलिया के लिए नाथन कुल्टर नाइल, पैट कमिंस और डार्शी शॉर्ट ने अच्छी गेंदबाजी की। पिच पर गेंद रुककर आ रही थी और इसी वजह से बल्लेबाजों को रन बनाने में लगातार परेशानी हो रही थी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टी-बीस मैच बैंगलोर को एम चिन्नास्वामी में स्टेडियम में खेला जायेगा। इसी पिच पर आईपीएल की टीम आरसीबी अपना घरेलू मैच भी खेलती है। इसपर बल्लेबाजों के लिए काफी मदद होती है। इसके साथ ही कम गेंदबाजों के लिए भी कम मददगार नहीं है। युजवेंद्र चहल ने आरसीबी के लिए खेलते हुए इस पिच पर कई शानदार प्रदर्शन किये हैं। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन की टीम से दूसरे मैच की पिच को लेकर बयान आया है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी आर सुधाकर ने दावा किया है कि यह एक स्पोर्टिंग विकेट होगी और यहाँ सभी के लिए कुछ न कुछ होगा। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
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कोलकाता, समाज्ञा : कोलकाता में क्रिसमस मतलब "पार्क स्ट्रीट"। क्रिसमस से एक सप्ताह पहले से पार्क स्ट्रीट को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाने लग जाता है। लोगों में पार्क स्ट्रीट आने का उत्साह भी बढ़ जाता है। बाजारों में क्रिसमस त्यौहार के लिए सांता वाली टोपियां, रंग-बिरेंगे गुब्बारे, खिलौने, चश्मे, लाइट, क्रिसमस ट्री, व अन्य सजावट की वस्तुएं मिलना शुरू हो चुके है। इस त्योहार को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा जाता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके लिए सांता क्लॉज ढेर सारे उपहार लेकर आएगा। वही कुछ बच्चों के लिए यह त्योहार आमदनी का जरिया लेकर आता है। इन दिनों आप पार्क स्ट्रीट में कई ऐसे बच्चों को देख सकते हैं जो क्रिसमस ट्री, सजावट की वस्तुएं, गुब्बारे, टोपियां और खिलौने बेच रहे हैं। ताकि उन्हें दो पैसे मिल सके और उन पैसों से घर में कुछ दिनों तक ही सही लेकिन दो वक्त की रोटी बन जाये। इनमें से कुछ बच्चे ऐसे भी है जिन्हें क्रिसमस का अर्थ भी नहीं पता है। कुछ बच्चे तो विशेषकर क्रिसमस का समान बेचने ही कोलकाता में आए हैं। समाज्ञा की संवाददाता ने उनमें से ही कुछ बच्चों से बात की।
मोहम्मद जमशेद नामक एक बच्चे ने बताया कि वह बिहार का रहने वाला है। वह कोलकाता सिर्फ क्रिसमस के समय आता है। क्योंकि क्रिसमस के समय कोलकाता में काफी रौनक रहती है और पार्क स्ट्रीट में घुमने आए लोग क्रिसमस के समानों को बड़े उत्साह के साथ खरीदते है। बच्चे ने बताया कि घर में उसके 3 और छोटे भाई बहन और माता-पिता है। उसेक पिता बिहार में ही राजमिस्त्री का काम करते है। घर की आर्थिक स्थिति दयनीय है जिसके कारण वह त्योहारों के समय इसी तरह सामान बेचकर पिता का हाथ बटाता है। बच्चे ने कहा कि क्रिसमस के बाद वह फिर बिहार चला जाएगा और जो कुछ भी यहां से कमाई हुई होगी वह घर जाकर फिर उससे पढ़ाई करेगा। इधर सुंदरबन से भी एक बच्ची पार्क स्ट्रीट में सामान बेचने आई हुई है। बच्ची ने अपना नाम नासिमुन मुल्ला बताया है, वह सुंदरवन की रहने वाली और वहीं वह कक्षा 6 में पड़ती है। उसकी मम्मी यहीं दूसरों के घर में झाड़ू-पोछे का काम करती है और उसके पापा कोई काम नहीं करते है। घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण वह कोलकता आकर त्यौहारों पर दुकान लगाती है। यह दुकान उसके भाई की है, भाई का हाथ बटाने के लिए वह प्रतिवर्ष यहां त्यौहारों पर आती है विशेषकर क्रिसमस पर क्योंकि क्रिसमस पर ज्यादा समानों की बिक्री हो जाती है। बच्ची ने बताया क्रिसमस के समय वह प्रतिदिन करीब 300 रूपये कमा लेती है।
पार्क स्ट्रीट में ही गुब्बारे बेच रही एक छोटी बच्ची जायरा खातून ने कहा कि पैसे नहीं होने के कारण मैं यहां गुब्बारे बेचती हूं, मेरे पापा भी गुब्बारे बेचते है और मम्मी दूसरों के घर में झाडूं-पोछा करती है और उसकी बड़ी बहन चिविंगम बेचती है। बच्ची ने बताया कि इन रूपयों से जो भी कमाई होती है, उससे घर में मम्मी-पापा की मदद हो जाती है। बच्ची कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में कक्षा यू. के. जी में पढ़ती है। सुबह वह स्कूल जाती है और स्कूल से लौटने बाद बाद वह गुब्बारे बेचती है। वहीं फुटपाथ पर ही क्रिसमस का समान बेच रही शाहीन ने बताया कि उसके पिता नहीं है और उसकी मां दूसरों के घर में साफ-सफाई का काम करती है। त्यौहारों पर अच्छी कमाई हो जाती है इसलिए वह दुकान लगाती है जिससे उसकी मां की मदद हो सके और घर में कुछ रूपये आ सके। शाहीन ने बताया कि उसकी मां ने उसे क्रिसमस की दुकान लगाने के लिए रूपये व सामान दिए है, दिन भर में वह करीब 200 रूपये कमा लेती है। वह कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ती है। वह सुबह 8 से 12 बजे तक स्कूल रहती है उसके बाद फिर 1 बजे रात 8 बजे तक दुकान लगाती है। वहीं फुटपाथ पर ही क्रिसमस ट्री, टोपियां, चश्में व अन्य सजावट की वस्तुएं बेच रहा एक अन्य बच्चा जिसका नाम रविकुल है उसने बताया कि उसके मम्मी-पापा दोनों ही टोपी बेचते है और वे क्रिसमस का समान बेच रहा ताकि ज्यादा आमदनी हो सके जिससे मरे मम्मी-पापा की आर्थिक मदद हो सके और कुछ रूपये घर में ज्यादा आ सके। उसने यह भी बताया कि वह पढ़ाई नहीं करता स्कूल जाने के पैसे नहीं है, जब क्रिसमस खत्म हो जाएगा तो उसके बाद गुलाब के फूल बेचता है। इन बच्चों के अलावा कई और भी बच्चे है जो त्यौहारों पर दुकान लागाकर अपने माता-पिता की आर्थिक सहायता करते हैं।
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कोलकाता, समाज्ञा : कोलकाता में क्रिसमस मतलब "पार्क स्ट्रीट"। क्रिसमस से एक सप्ताह पहले से पार्क स्ट्रीट को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाने लग जाता है। लोगों में पार्क स्ट्रीट आने का उत्साह भी बढ़ जाता है। बाजारों में क्रिसमस त्यौहार के लिए सांता वाली टोपियां, रंग-बिरेंगे गुब्बारे, खिलौने, चश्मे, लाइट, क्रिसमस ट्री, व अन्य सजावट की वस्तुएं मिलना शुरू हो चुके है। इस त्योहार को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा जाता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके लिए सांता क्लॉज ढेर सारे उपहार लेकर आएगा। वही कुछ बच्चों के लिए यह त्योहार आमदनी का जरिया लेकर आता है। इन दिनों आप पार्क स्ट्रीट में कई ऐसे बच्चों को देख सकते हैं जो क्रिसमस ट्री, सजावट की वस्तुएं, गुब्बारे, टोपियां और खिलौने बेच रहे हैं। ताकि उन्हें दो पैसे मिल सके और उन पैसों से घर में कुछ दिनों तक ही सही लेकिन दो वक्त की रोटी बन जाये। इनमें से कुछ बच्चे ऐसे भी है जिन्हें क्रिसमस का अर्थ भी नहीं पता है। कुछ बच्चे तो विशेषकर क्रिसमस का समान बेचने ही कोलकाता में आए हैं। समाज्ञा की संवाददाता ने उनमें से ही कुछ बच्चों से बात की। मोहम्मद जमशेद नामक एक बच्चे ने बताया कि वह बिहार का रहने वाला है। वह कोलकाता सिर्फ क्रिसमस के समय आता है। क्योंकि क्रिसमस के समय कोलकाता में काफी रौनक रहती है और पार्क स्ट्रीट में घुमने आए लोग क्रिसमस के समानों को बड़े उत्साह के साथ खरीदते है। बच्चे ने बताया कि घर में उसके तीन और छोटे भाई बहन और माता-पिता है। उसेक पिता बिहार में ही राजमिस्त्री का काम करते है। घर की आर्थिक स्थिति दयनीय है जिसके कारण वह त्योहारों के समय इसी तरह सामान बेचकर पिता का हाथ बटाता है। बच्चे ने कहा कि क्रिसमस के बाद वह फिर बिहार चला जाएगा और जो कुछ भी यहां से कमाई हुई होगी वह घर जाकर फिर उससे पढ़ाई करेगा। इधर सुंदरबन से भी एक बच्ची पार्क स्ट्रीट में सामान बेचने आई हुई है। बच्ची ने अपना नाम नासिमुन मुल्ला बताया है, वह सुंदरवन की रहने वाली और वहीं वह कक्षा छः में पड़ती है। उसकी मम्मी यहीं दूसरों के घर में झाड़ू-पोछे का काम करती है और उसके पापा कोई काम नहीं करते है। घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण वह कोलकता आकर त्यौहारों पर दुकान लगाती है। यह दुकान उसके भाई की है, भाई का हाथ बटाने के लिए वह प्रतिवर्ष यहां त्यौहारों पर आती है विशेषकर क्रिसमस पर क्योंकि क्रिसमस पर ज्यादा समानों की बिक्री हो जाती है। बच्ची ने बताया क्रिसमस के समय वह प्रतिदिन करीब तीन सौ रूपये कमा लेती है। पार्क स्ट्रीट में ही गुब्बारे बेच रही एक छोटी बच्ची जायरा खातून ने कहा कि पैसे नहीं होने के कारण मैं यहां गुब्बारे बेचती हूं, मेरे पापा भी गुब्बारे बेचते है और मम्मी दूसरों के घर में झाडूं-पोछा करती है और उसकी बड़ी बहन चिविंगम बेचती है। बच्ची ने बताया कि इन रूपयों से जो भी कमाई होती है, उससे घर में मम्मी-पापा की मदद हो जाती है। बच्ची कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में कक्षा यू. के. जी में पढ़ती है। सुबह वह स्कूल जाती है और स्कूल से लौटने बाद बाद वह गुब्बारे बेचती है। वहीं फुटपाथ पर ही क्रिसमस का समान बेच रही शाहीन ने बताया कि उसके पिता नहीं है और उसकी मां दूसरों के घर में साफ-सफाई का काम करती है। त्यौहारों पर अच्छी कमाई हो जाती है इसलिए वह दुकान लगाती है जिससे उसकी मां की मदद हो सके और घर में कुछ रूपये आ सके। शाहीन ने बताया कि उसकी मां ने उसे क्रिसमस की दुकान लगाने के लिए रूपये व सामान दिए है, दिन भर में वह करीब दो सौ रूपये कमा लेती है। वह कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में कक्षा चार में पढ़ती है। वह सुबह आठ से बारह बजे तक स्कूल रहती है उसके बाद फिर एक बजे रात आठ बजे तक दुकान लगाती है। वहीं फुटपाथ पर ही क्रिसमस ट्री, टोपियां, चश्में व अन्य सजावट की वस्तुएं बेच रहा एक अन्य बच्चा जिसका नाम रविकुल है उसने बताया कि उसके मम्मी-पापा दोनों ही टोपी बेचते है और वे क्रिसमस का समान बेच रहा ताकि ज्यादा आमदनी हो सके जिससे मरे मम्मी-पापा की आर्थिक मदद हो सके और कुछ रूपये घर में ज्यादा आ सके। उसने यह भी बताया कि वह पढ़ाई नहीं करता स्कूल जाने के पैसे नहीं है, जब क्रिसमस खत्म हो जाएगा तो उसके बाद गुलाब के फूल बेचता है। इन बच्चों के अलावा कई और भी बच्चे है जो त्यौहारों पर दुकान लागाकर अपने माता-पिता की आर्थिक सहायता करते हैं।
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किसान जो इन मुद्दों को जानता है और उनका अनुसरण करता है, वह सबसे अधिक संभावना कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचेंगे। इस पोस्ट को साझा करना सभी दोस्तों तक पहुंचने और खेती में सुधार लाने के लिए एक प्रेरणा होगी।
किसानों, आपने महाराष्ट्र में कीटनाशकों के विषाक्त प्रभाव के कारण महाराष्ट्र में कुछ किसानों की आकस्मिक मृत्यु की खबर सुनी होगी। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, उपयुक्त कीटनाशकों के उपयोग से बीमारी से बचाव और उत्पादन में काफी वृद्धि हो सकती है। विषाक्तता के कारण आकस्मिक मृत्यु के मामलों में जोखिम अधिक होते हैं और अक्सर होते हैं। इसलिए ऐसे कीटनाशकों से निपटने के दौरान आपको एहतियाती उपाय करने और देखभाल करने के बारे में विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है।
दवा की पैकेजिंग पर लिखे गए लेबल को सावधानीपूर्वक पढ़ें और उस पर कंपनी के निर्देशानुसार कार्य करें, जो यदि किसान अनपढ़ है, तो शिक्षक को निर्देश दिया जाता है और निर्देश को समझने के बाद ही दवा का उपयोग करें।
उस दवा को उसके मूल लेबल की पैकेजिंग में रखना। बाहर के लेबल को अलग तरीके से करने और अंदर एक और दवा लेने से बचें।
वातानुकूलित स्टोररूम में कीटनाशकों को स्टोर करना अनिवार्य है, बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के सदस्यों को ताला लगाना जो खेती में शामिल नहीं हैं और पालतू जानवरों के संपर्क में नहीं हैं।
कीटनाशकों को हमेशा भोजन और भोजन से अलग संग्रहीत किया जाना चाहिए।
एक्सपायरी डेट के साथ-साथ लीक हुई पैकिंग दवा के बिना जमीन में गंदगी का निपटान।
दवा जहरीली है और चिकित्सक या चिकित्सक के पास आती है। इससे पहले, रोगी को प्राथमिक चिकित्सा देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
किसी भी परिस्थिति में दवा या इसके खाली टिन का इस्तेमाल घर में इस्तेमाल के लिए नहीं किया जाना चाहिए या इसे नदी - पानी या अन्य स्थानों पर फेंकने के बिना जमीन में खोद देना चाहिए।
किसी भी परिस्थिति में दवा को नम या गर्म स्थान पर संग्रहीत नहीं किया जाना चाहिए।
ज्यादातर मामलों में, दवा का छिड़काव करते समय दुर्घटनाएं अधिक होती हैं और अगर दवा की सही तरीके से देखरेख न की जाए तो घातक परिणाम हो सकते हैं। इसलिए इस बारे में सावधान रहना जरूरी है।
छिड़काव स्थल पर साफ पानी, साबुन और तौलिये को बनाए रखें और उनका उपयोग करें।
निर्देश के अनुसार मानक बनाए रखना अत्यावश्यक है।
अपनी सांस में किसी भी दवा को नहीं लेने के लिए सावधान रहें।
दवा की पैकिंग को तोड़ते समय, पैकिंग को उचित उपकरण के साथ तोड़ा जाना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में मुंह का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
दवाई का छिड़काव करते समय, दवाई हाथ से कुछ भी न खाएं और न पिएं, बीज, तम्बाकू या मसाले न खाएं। अपने हाथों को साबुन से धोने के बाद ही इस वस्तु को लेना महत्वपूर्ण है।
दवा का उल्टी दिशा में छिड़काव न करें।
एक बीमार, कमजोर या एलर्जी वाली दवा का छिड़काव दवा के साथ नहीं किया जाना चाहिए।
हमेशा सुरक्षात्मक कपड़े पहनना, चमड़े पहनना, हाथ के दस्ताने, पैर के जूते, नाक की गैस बनाना, और दवाओं के छिड़काव के विषाक्त प्रभाव को रोकने के लिए समाप्त होने पर इन उपकरणों को भी धोना चाहिए।
किसी भी परिस्थिति में सिर के ऊपर कॉटन की टोपी नहीं पहननी चाहिए। क्योंकि सूती कपड़े दवा को अधिक लचीला बनाते हैं, यह समस्या पैदा कर सकता है।
दवा के रिसाव की जाँच करते रहें और रिसाव वाले पंप से दवा का छिड़काव करें। बिलकुल नहीं। विशेष पंप के ऊपरी ढक्कन को बिल्कुल बंद करना आवश्यक है।
दवा से भरे पंपों को स्टोर न करें। जब छिड़काव पूरा हो जाता है, तो बस पंप को साफ करें।
हमेशा सुबह या शाम को छिड़काव करने पर जोर दें।
गर्मी के दौरान फसल के पैन के ऊपर से गंधयुक्त दवाओं के छिड़काव से बचें।
दवा छिड़कते समय कुछ समय के लिए दवा छिड़कने के बाद, एक ब्रेक लें और इस तरह से करें जैसे कि स्वच्छ और खुली हवा प्राप्त करें।
जैसे किसी दवा का छिड़काव पानी में नहीं घुलता है।
खराब दवा जो फसल जलने या विरूपण का कारण बनती है, कहीं और छिड़काव किया जाता है। यदि छिड़काव डिटर्जेंट का पंप संभव है, तो इसे अलग रखें या पंप को अच्छी तरह से साफ करने के बाद इसका उपयोग करें।
दवा छिड़कने के बाद, साबुन से ठीक से स्नान करें और शरीर को साफ करें।
झीलों, नदियों या संग्रहीत पानी में स्नान न करें।
नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें।
दवा का छिड़काव करने के बाद, किसी भी इंसान या जानवर को तैयार होने तक खेत से जाने नहीं देना चाहिए।
फलों और फूलों और सब्जियों में दवा छिड़कने के बाद इसे हफ्तों तक न निकालें। दवा का छिड़काव करने के तुरंत बाद सब्जियों या फलों का उपयोग या बिक्री न करें।
हमेशा दवा का छिड़काव और आपके रक्त की जांच के साथ नियमित रूप से जांच करवाएं। अधिक दवा छिड़काव होने पर एक से अधिक बार चेकअप करें।
दवा की विषाक्तता को रोकने के लिए प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों की स्थापना और निगरानी रखना।
प्रतिकूल परिस्थितियां दवा की विषाक्तता को प्रभावित कर सकती हैं और डॉक्टर के अस्पताल पहुंचने या पहुंचने से पहले मरीज को प्राथमिक चिकित्सा प्राप्त करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ताकि हताहतों से बचा जा सके। यदि इस समय अधिक प्रभाव पड़ता है, तो नंबर 108 पर कॉल किया जा सकता है।
त्वचा पर विषाक्त प्रभाव होने पर रोगी के दवाई के कपड़े को तुरंत बदल दें या धो लें और फिर से धोएं।
अगर आंख में जहर का असर होता है, तो 10-15 मिनट के लिए पानी के छींटे मारकर आंखों को अच्छी तरह से साफ करें और इस मामले में बिना डॉक्टर की सलाह के आंखों में कोई भी रसायन या दवा न लगाएं।
सांस लेने की विषाक्तता महसूस होने पर ताजा और खुली हवा उपलब्ध होने वाली जगह पर सांस लेते रहें। रोगी को तुरंत सांस दें। जब तक संभव न हो चलाएं।
रोगी के कपड़ों को ढीला करने के लिए। यदि श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो कृत्रिम श्वसन न दें, रोगी को शांत रखें और मादक पेय प्रदान न करें।
तत्काल विषाक्तता अगर रोगी को तत्काल नमक गर्म पानी पाई उल्टी होती है। गर्म पानी की एक मग में एक चम्मच नमक घोलें। ऐसा तब तक करें जब तक कि भाप में पानी की निकासी न हो जाए।
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किसान जो इन मुद्दों को जानता है और उनका अनुसरण करता है, वह सबसे अधिक संभावना कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचेंगे। इस पोस्ट को साझा करना सभी दोस्तों तक पहुंचने और खेती में सुधार लाने के लिए एक प्रेरणा होगी। किसानों, आपने महाराष्ट्र में कीटनाशकों के विषाक्त प्रभाव के कारण महाराष्ट्र में कुछ किसानों की आकस्मिक मृत्यु की खबर सुनी होगी। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, उपयुक्त कीटनाशकों के उपयोग से बीमारी से बचाव और उत्पादन में काफी वृद्धि हो सकती है। विषाक्तता के कारण आकस्मिक मृत्यु के मामलों में जोखिम अधिक होते हैं और अक्सर होते हैं। इसलिए ऐसे कीटनाशकों से निपटने के दौरान आपको एहतियाती उपाय करने और देखभाल करने के बारे में विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है। दवा की पैकेजिंग पर लिखे गए लेबल को सावधानीपूर्वक पढ़ें और उस पर कंपनी के निर्देशानुसार कार्य करें, जो यदि किसान अनपढ़ है, तो शिक्षक को निर्देश दिया जाता है और निर्देश को समझने के बाद ही दवा का उपयोग करें। उस दवा को उसके मूल लेबल की पैकेजिंग में रखना। बाहर के लेबल को अलग तरीके से करने और अंदर एक और दवा लेने से बचें। वातानुकूलित स्टोररूम में कीटनाशकों को स्टोर करना अनिवार्य है, बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के सदस्यों को ताला लगाना जो खेती में शामिल नहीं हैं और पालतू जानवरों के संपर्क में नहीं हैं। कीटनाशकों को हमेशा भोजन और भोजन से अलग संग्रहीत किया जाना चाहिए। एक्सपायरी डेट के साथ-साथ लीक हुई पैकिंग दवा के बिना जमीन में गंदगी का निपटान। दवा जहरीली है और चिकित्सक या चिकित्सक के पास आती है। इससे पहले, रोगी को प्राथमिक चिकित्सा देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। किसी भी परिस्थिति में दवा या इसके खाली टिन का इस्तेमाल घर में इस्तेमाल के लिए नहीं किया जाना चाहिए या इसे नदी - पानी या अन्य स्थानों पर फेंकने के बिना जमीन में खोद देना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में दवा को नम या गर्म स्थान पर संग्रहीत नहीं किया जाना चाहिए। ज्यादातर मामलों में, दवा का छिड़काव करते समय दुर्घटनाएं अधिक होती हैं और अगर दवा की सही तरीके से देखरेख न की जाए तो घातक परिणाम हो सकते हैं। इसलिए इस बारे में सावधान रहना जरूरी है। छिड़काव स्थल पर साफ पानी, साबुन और तौलिये को बनाए रखें और उनका उपयोग करें। निर्देश के अनुसार मानक बनाए रखना अत्यावश्यक है। अपनी सांस में किसी भी दवा को नहीं लेने के लिए सावधान रहें। दवा की पैकिंग को तोड़ते समय, पैकिंग को उचित उपकरण के साथ तोड़ा जाना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में मुंह का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। दवाई का छिड़काव करते समय, दवाई हाथ से कुछ भी न खाएं और न पिएं, बीज, तम्बाकू या मसाले न खाएं। अपने हाथों को साबुन से धोने के बाद ही इस वस्तु को लेना महत्वपूर्ण है। दवा का उल्टी दिशा में छिड़काव न करें। एक बीमार, कमजोर या एलर्जी वाली दवा का छिड़काव दवा के साथ नहीं किया जाना चाहिए। हमेशा सुरक्षात्मक कपड़े पहनना, चमड़े पहनना, हाथ के दस्ताने, पैर के जूते, नाक की गैस बनाना, और दवाओं के छिड़काव के विषाक्त प्रभाव को रोकने के लिए समाप्त होने पर इन उपकरणों को भी धोना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में सिर के ऊपर कॉटन की टोपी नहीं पहननी चाहिए। क्योंकि सूती कपड़े दवा को अधिक लचीला बनाते हैं, यह समस्या पैदा कर सकता है। दवा के रिसाव की जाँच करते रहें और रिसाव वाले पंप से दवा का छिड़काव करें। बिलकुल नहीं। विशेष पंप के ऊपरी ढक्कन को बिल्कुल बंद करना आवश्यक है। दवा से भरे पंपों को स्टोर न करें। जब छिड़काव पूरा हो जाता है, तो बस पंप को साफ करें। हमेशा सुबह या शाम को छिड़काव करने पर जोर दें। गर्मी के दौरान फसल के पैन के ऊपर से गंधयुक्त दवाओं के छिड़काव से बचें। दवा छिड़कते समय कुछ समय के लिए दवा छिड़कने के बाद, एक ब्रेक लें और इस तरह से करें जैसे कि स्वच्छ और खुली हवा प्राप्त करें। जैसे किसी दवा का छिड़काव पानी में नहीं घुलता है। खराब दवा जो फसल जलने या विरूपण का कारण बनती है, कहीं और छिड़काव किया जाता है। यदि छिड़काव डिटर्जेंट का पंप संभव है, तो इसे अलग रखें या पंप को अच्छी तरह से साफ करने के बाद इसका उपयोग करें। दवा छिड़कने के बाद, साबुन से ठीक से स्नान करें और शरीर को साफ करें। झीलों, नदियों या संग्रहीत पानी में स्नान न करें। नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें। दवा का छिड़काव करने के बाद, किसी भी इंसान या जानवर को तैयार होने तक खेत से जाने नहीं देना चाहिए। फलों और फूलों और सब्जियों में दवा छिड़कने के बाद इसे हफ्तों तक न निकालें। दवा का छिड़काव करने के तुरंत बाद सब्जियों या फलों का उपयोग या बिक्री न करें। हमेशा दवा का छिड़काव और आपके रक्त की जांच के साथ नियमित रूप से जांच करवाएं। अधिक दवा छिड़काव होने पर एक से अधिक बार चेकअप करें। दवा की विषाक्तता को रोकने के लिए प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों की स्थापना और निगरानी रखना। प्रतिकूल परिस्थितियां दवा की विषाक्तता को प्रभावित कर सकती हैं और डॉक्टर के अस्पताल पहुंचने या पहुंचने से पहले मरीज को प्राथमिक चिकित्सा प्राप्त करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ताकि हताहतों से बचा जा सके। यदि इस समय अधिक प्रभाव पड़ता है, तो नंबर एक सौ आठ पर कॉल किया जा सकता है। त्वचा पर विषाक्त प्रभाव होने पर रोगी के दवाई के कपड़े को तुरंत बदल दें या धो लें और फिर से धोएं। अगर आंख में जहर का असर होता है, तो दस-पंद्रह मिनट के लिए पानी के छींटे मारकर आंखों को अच्छी तरह से साफ करें और इस मामले में बिना डॉक्टर की सलाह के आंखों में कोई भी रसायन या दवा न लगाएं। सांस लेने की विषाक्तता महसूस होने पर ताजा और खुली हवा उपलब्ध होने वाली जगह पर सांस लेते रहें। रोगी को तुरंत सांस दें। जब तक संभव न हो चलाएं। रोगी के कपड़ों को ढीला करने के लिए। यदि श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो कृत्रिम श्वसन न दें, रोगी को शांत रखें और मादक पेय प्रदान न करें। तत्काल विषाक्तता अगर रोगी को तत्काल नमक गर्म पानी पाई उल्टी होती है। गर्म पानी की एक मग में एक चम्मच नमक घोलें। ऐसा तब तक करें जब तक कि भाप में पानी की निकासी न हो जाए।
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टोरंटो (भाषा)। जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करते हुए एक नये अध्ययन में चेतावनी दी गयी है कि अगर समुद्र का तापमान बढ़ता रहा तो मछलियों का आकार 20 से 30 प्रतिशत तक घट सकता है।
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मछलियों का आकार घटने की आशंका की वजह के बारे में विस्तार से बताया है।
ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फोर दि ओशन एंड फिशरीज के एसोसिएट प्रोफेसर विलियम चेउंग ने कहा, ' 'ठंडे खून वाले प्राणी होने के कारण मछलियां अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित नहीं कर सकतीं। जब समुद्र का पानी गर्म हो जाता है तो उनका चयापचय तेज हो जाता है तथा उन्हें अपने शरीर की क्रियाएं बनाए रखने के लिए और ऑक्सीजन की जरुरत होती है। '
चेउंग ने कहा, ' 'एक समय आता है जब मछलियों के गलफडे़ एक बडे़ शरीर के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पाते। इसलिए मछलियों के शरीर का आकार बढ़ना रुक जाता है। ' ' इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डेनियल पाउली के अनुसार, जैसे ही मछली किशोरावस्था में पहुंचती है तो ऑक्सीजन के लिए उनकी मांग बढ़ जाती है क्योंकि उनके शरीर का वजन बढ़ जाता है। लेकिन गलफडे़ के पृष्ठ का क्षेत्रफल उतनी गति से नहीं बढ़ता जितना बाकी शरीर।
शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इस जैविक क्रिया के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मछलियों का आकार सिकुडे़गा और उसका आकार उन अनुमानों से भी छोटा हो जाएगा तो पिछले अध्ययनों में लगाए गए।
गर्म पानी में मछलियों को और अधिक ऑक्सीजन की जरुरत पडे़गी लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र में कम ऑक्सीजन पैदा होगी। इसका मतलब है कि गलफड़ा ऑक्सीजन की कम आपूर्ति कर पाएगा जो पहले ही धीमी गति से बढ़ता है।
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टोरंटो । जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करते हुए एक नये अध्ययन में चेतावनी दी गयी है कि अगर समुद्र का तापमान बढ़ता रहा तो मछलियों का आकार बीस से तीस प्रतिशत तक घट सकता है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मछलियों का आकार घटने की आशंका की वजह के बारे में विस्तार से बताया है। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फोर दि ओशन एंड फिशरीज के एसोसिएट प्रोफेसर विलियम चेउंग ने कहा, ' 'ठंडे खून वाले प्राणी होने के कारण मछलियां अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित नहीं कर सकतीं। जब समुद्र का पानी गर्म हो जाता है तो उनका चयापचय तेज हो जाता है तथा उन्हें अपने शरीर की क्रियाएं बनाए रखने के लिए और ऑक्सीजन की जरुरत होती है। ' चेउंग ने कहा, ' 'एक समय आता है जब मछलियों के गलफडे़ एक बडे़ शरीर के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पाते। इसलिए मछलियों के शरीर का आकार बढ़ना रुक जाता है। ' ' इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डेनियल पाउली के अनुसार, जैसे ही मछली किशोरावस्था में पहुंचती है तो ऑक्सीजन के लिए उनकी मांग बढ़ जाती है क्योंकि उनके शरीर का वजन बढ़ जाता है। लेकिन गलफडे़ के पृष्ठ का क्षेत्रफल उतनी गति से नहीं बढ़ता जितना बाकी शरीर। शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इस जैविक क्रिया के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मछलियों का आकार सिकुडे़गा और उसका आकार उन अनुमानों से भी छोटा हो जाएगा तो पिछले अध्ययनों में लगाए गए। गर्म पानी में मछलियों को और अधिक ऑक्सीजन की जरुरत पडे़गी लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र में कम ऑक्सीजन पैदा होगी। इसका मतलब है कि गलफड़ा ऑक्सीजन की कम आपूर्ति कर पाएगा जो पहले ही धीमी गति से बढ़ता है।
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इस प्रकार महादेवी जी के काव्य में छायावाद तथा रहस्यवाद का परिष्कृत स्वरूप मिलता है ।
महादेवी जी ने अभी तक गीतकाव्य ही है और बात भी पूर्णतः स्पष्ट है कि अन्तर्मुखी भावनाओं को व्यक्त करने के हेतु गीतिकाव्यं ही उपयुक्त रहता है।
महादेवी जी का कला पक्ष भी उतना ही श्रेष्ठ है जितना उनका भाव पक्ष । उनके काव्य की सम्पूर्ण सुन्दरता उसकी स्वाभाविकता में है; उसमें अकृत्रिमता ही सर्वत्र दिखाई देती है । इसी अकृत्रिमता के कारण ही उनकी भाषा अत्यन्त परिष्कृत अत्यन्त मधुर और कोमल है। स्वाभाविकता का आग्रह इतना अधिक है कि कहीं कहीं पर मात्राओं की पूर्ति और तुक के कारण कुछ शब्दों का अंगभंग तक हो गया है। 'बातास' का 'बतास'; 'आधार' का 'आधार', 'ज्योति' का 'ज्योती', इत्यादि लिखते समय उन्होंने तनिक भी संकोच नहीं किया है। उनकी कविता में कहींकहीं पर अत्यानुप्रास भी नहीं मिलते; परन्तु तुक और सुन्दर शब्दों के प्रयोग ने उनके काव्य की गति को मन्द नहीं होने दिया है ।
"महादेवी जी अभी तक साधना के मार्ग पर हैं । 'नीहार' के धुंधलेपन में 'रश्मि' के सुन्हले प्रकाश पर जो 'नीरजा' खिली थी यह 'सान्ध्य गीत' की ध्वनि से 'दीपशिखा' तक अपनी सरस अनुभूतियों और कल्पना की पंखड़ियों से सौन्दर्य विकीर्ण कर इस नारी की आत्मा की व्यथा को विश्व के करण-करण के माध्यम में से उस अनन्त, असीम के चरणों तक पहुँचाती रही।"
- डा० इन्द्रनाथ मदान । भविष्य में वे प्रभात के अनुकूल मिलन की भूमिका देकर हमें का भी संदेश देंगी । तब उन्हें न जलन रहेगी, न
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इस प्रकार महादेवी जी के काव्य में छायावाद तथा रहस्यवाद का परिष्कृत स्वरूप मिलता है । महादेवी जी ने अभी तक गीतकाव्य ही है और बात भी पूर्णतः स्पष्ट है कि अन्तर्मुखी भावनाओं को व्यक्त करने के हेतु गीतिकाव्यं ही उपयुक्त रहता है। महादेवी जी का कला पक्ष भी उतना ही श्रेष्ठ है जितना उनका भाव पक्ष । उनके काव्य की सम्पूर्ण सुन्दरता उसकी स्वाभाविकता में है; उसमें अकृत्रिमता ही सर्वत्र दिखाई देती है । इसी अकृत्रिमता के कारण ही उनकी भाषा अत्यन्त परिष्कृत अत्यन्त मधुर और कोमल है। स्वाभाविकता का आग्रह इतना अधिक है कि कहीं कहीं पर मात्राओं की पूर्ति और तुक के कारण कुछ शब्दों का अंगभंग तक हो गया है। 'बातास' का 'बतास'; 'आधार' का 'आधार', 'ज्योति' का 'ज्योती', इत्यादि लिखते समय उन्होंने तनिक भी संकोच नहीं किया है। उनकी कविता में कहींकहीं पर अत्यानुप्रास भी नहीं मिलते; परन्तु तुक और सुन्दर शब्दों के प्रयोग ने उनके काव्य की गति को मन्द नहीं होने दिया है । "महादेवी जी अभी तक साधना के मार्ग पर हैं । 'नीहार' के धुंधलेपन में 'रश्मि' के सुन्हले प्रकाश पर जो 'नीरजा' खिली थी यह 'सान्ध्य गीत' की ध्वनि से 'दीपशिखा' तक अपनी सरस अनुभूतियों और कल्पना की पंखड़ियों से सौन्दर्य विकीर्ण कर इस नारी की आत्मा की व्यथा को विश्व के करण-करण के माध्यम में से उस अनन्त, असीम के चरणों तक पहुँचाती रही।" - डाशून्य इन्द्रनाथ मदान । भविष्य में वे प्रभात के अनुकूल मिलन की भूमिका देकर हमें का भी संदेश देंगी । तब उन्हें न जलन रहेगी, न
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कुल 39 टी20 मैचों का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड (Ruturaj Gaikwad) ने 2020 में चेन्नई के लिए खेलकर अपने आईपीएल करियर का शुभारम्भ किया। उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में अपने उज्जवल भविष्य की झलक दे दी। आपको बता दें कि 6 मैचों में ही उनके नाम 3 अर्धशतक दर्ज हैं। जिसमें 72 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा। साथ ही अभी वो सिर्फ 24 साल के ही हैं।
आईपीएल के करियर की शुरुआत में ही 51 की औसत से 204 रन अपने नाम कर चुके ऋतुराज 2 बार नॉटआउट भी रहे हैं। यही नहीं वो टीम के लिए ओपन करने के बाद वो लम्बी पारी भी खेल सकते हैं और एक कप्तान के तौर पर वो टीम का नेतृत्व कर सकते हैं।
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कुल उनतालीस टीबीस मैचों का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड ने दो हज़ार बीस में चेन्नई के लिए खेलकर अपने आईपीएल करियर का शुभारम्भ किया। उन्होंने सिर्फ छः मैचों में अपने उज्जवल भविष्य की झलक दे दी। आपको बता दें कि छः मैचों में ही उनके नाम तीन अर्धशतक दर्ज हैं। जिसमें बहत्तर रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा। साथ ही अभी वो सिर्फ चौबीस साल के ही हैं। आईपीएल के करियर की शुरुआत में ही इक्यावन की औसत से दो सौ चार रन अपने नाम कर चुके ऋतुराज दो बार नॉटआउट भी रहे हैं। यही नहीं वो टीम के लिए ओपन करने के बाद वो लम्बी पारी भी खेल सकते हैं और एक कप्तान के तौर पर वो टीम का नेतृत्व कर सकते हैं।
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आवास ऋण देने वाली कंपनी एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने आज भरोसा जताया कि महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था जल्द उबर जाएगी। उन्होंने कहा कि 'भारत' यानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत उम्मीद से जल्दी सुधर जाएगी।
कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि जुलाई तक लॉकडाउन हट जाता है तथा सितंबर तक स्थिति सामान्य होने लगती है, तो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पांच प्रतिशत की गिरावट आएगी। यदि स्थिति इससे खराब रहती है, तो अर्थव्यवस्था में 7. 5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। प्रत्येक एक महीने के लॉकडाउन से जीडीपी में एक प्रतिशत की कमी आएगी।
उन्होंने लॉकडाउन की वजह से घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम संस्कृति के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र पर पड़े असर को नजरंदाज किया है।
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आवास ऋण देने वाली कंपनी एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने आज भरोसा जताया कि महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था जल्द उबर जाएगी। उन्होंने कहा कि 'भारत' यानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत उम्मीद से जल्दी सुधर जाएगी। कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि जुलाई तक लॉकडाउन हट जाता है तथा सितंबर तक स्थिति सामान्य होने लगती है, तो सकल घरेलू उत्पाद में पांच प्रतिशत की गिरावट आएगी। यदि स्थिति इससे खराब रहती है, तो अर्थव्यवस्था में सात. पाँच प्रतिशत की गिरावट आएगी। प्रत्येक एक महीने के लॉकडाउन से जीडीपी में एक प्रतिशत की कमी आएगी। उन्होंने लॉकडाउन की वजह से घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम संस्कृति के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र पर पड़े असर को नजरंदाज किया है।
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लंदन। गायिका-अभिनेत्री ला तोया जैक्सन अब लाइफ विद ला तोया' नामक नये रियेलिटी शो में दिखेंगी। कॉन्टैक्टम्यूजिक के अनुसार इस शो में 56 वर्षीय जैक्सन के जीवन के हर पहलू को कैमरे में कैद किया जायेगा। इस शो के फोर्मेट से उत्साहित जैक्सन ने कहा, " मैं ओपरा विनफे नेटवर्क के साथ काम कर बहुत खुश हूं। यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव रहेगा।
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लंदन। गायिका-अभिनेत्री ला तोया जैक्सन अब लाइफ विद ला तोया' नामक नये रियेलिटी शो में दिखेंगी। कॉन्टैक्टम्यूजिक के अनुसार इस शो में छप्पन वर्षीय जैक्सन के जीवन के हर पहलू को कैमरे में कैद किया जायेगा। इस शो के फोर्मेट से उत्साहित जैक्सन ने कहा, " मैं ओपरा विनफे नेटवर्क के साथ काम कर बहुत खुश हूं। यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव रहेगा।
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किया नायगा अथवा बोला जायगा वह किसी न किसी विशेषण का ही सूचक होगा, निर्विशेष पदमे मन-वाणोको गम है ही नहीं। वाणी प्रतियोगी व व्यवच्छेदककी ही वाचक है और जहाँ विशेषण- विशेष्यरूप गुण-गुणीभाव विद्यमान है वहाँ निर्गुणता से क्या सम्बन्ध ? फिर चाहे हम सगुण भक्तिसे विद्वेष करके निर्गुण-भक्तिका आग्रह भले ही करे, किसी आकारसे घृणा पड़े किया करे, परन्तु वास्तव में अपने आचरणसे तो हम सगुण व
1 परस्पर विरोधीका नाम प्रतियोगी है, जैसे घट अपने घटाभावका प्रतियोगी है।
२. व्यवच्छेदक उस विशेषणको कहते हैं जो अन्य वस्तुओंसे अपने विशेष्यको मिस्र करके वोधन करा दे जैसे 'कुण्डली पुरुष' । यहाँ कुण्ढलने अन्य पुरुषोंसे कुण्डलचालेको भिन्न करके जितला दिया। इस प्रकार शब्दका स्वभाव है कि वह किसी न किसी विशेषणको लेकर परिच्छिन. वस्तुको ही बोधन करेगा, अपरिष्ठित वस्तुके बोधन करानेमें शब्द किसी प्रकार समर्थ नहीं है। आशय यह है कि निर्गुण परमात्मा में मनवाणी की गम नहीं है । यदि निष्प, अज, अविनाशी शब्दोंसे उसका कथन- चिन्वन किया जायगा तो यह नित्य, अज आदि उसके विशेषण ही होंगे, ये उसका स्वरूप नहीं हो सकते, और जब यह विशेषण हुए सच अनित्य, जन्म व नाशसे मिल ही उस परमात्माका बोध होगा परन्तु वह परमात्मा अपनी व्यापकता करके किसी विशेषणका विशेषय नहीं हो सकता, यदि किसी विशेषणवाला माना जाय तो उसकी व्यापकता भग होती है और अनित्य, जन्म व नाशादि गुणक्रियाओंमें उसका अभाव सिद्ध होता है, परन्तु वस्तुतःकिसी स्थल में उसका अभाव नहीं है और मन-वाणी किसी न किसी विशेषण बिना कथन-चिन्तन में समर्थ हो नहीं सकते, क्योंकि वे स्वयं देश, काल व वस्तु परिच्छेद वाले हैं। इसलिये वाणी व मनद्वारा जो कुछ भी कथन-चिन्तन होगा षह सगुणताके अन्तर्गतही रहेगा ।
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किया नायगा अथवा बोला जायगा वह किसी न किसी विशेषण का ही सूचक होगा, निर्विशेष पदमे मन-वाणोको गम है ही नहीं। वाणी प्रतियोगी व व्यवच्छेदककी ही वाचक है और जहाँ विशेषण- विशेष्यरूप गुण-गुणीभाव विद्यमान है वहाँ निर्गुणता से क्या सम्बन्ध ? फिर चाहे हम सगुण भक्तिसे विद्वेष करके निर्गुण-भक्तिका आग्रह भले ही करे, किसी आकारसे घृणा पड़े किया करे, परन्तु वास्तव में अपने आचरणसे तो हम सगुण व एक परस्पर विरोधीका नाम प्रतियोगी है, जैसे घट अपने घटाभावका प्रतियोगी है। दो. व्यवच्छेदक उस विशेषणको कहते हैं जो अन्य वस्तुओंसे अपने विशेष्यको मिस्र करके वोधन करा दे जैसे 'कुण्डली पुरुष' । यहाँ कुण्ढलने अन्य पुरुषोंसे कुण्डलचालेको भिन्न करके जितला दिया। इस प्रकार शब्दका स्वभाव है कि वह किसी न किसी विशेषणको लेकर परिच्छिन. वस्तुको ही बोधन करेगा, अपरिष्ठित वस्तुके बोधन करानेमें शब्द किसी प्रकार समर्थ नहीं है। आशय यह है कि निर्गुण परमात्मा में मनवाणी की गम नहीं है । यदि निष्प, अज, अविनाशी शब्दोंसे उसका कथन- चिन्वन किया जायगा तो यह नित्य, अज आदि उसके विशेषण ही होंगे, ये उसका स्वरूप नहीं हो सकते, और जब यह विशेषण हुए सच अनित्य, जन्म व नाशसे मिल ही उस परमात्माका बोध होगा परन्तु वह परमात्मा अपनी व्यापकता करके किसी विशेषणका विशेषय नहीं हो सकता, यदि किसी विशेषणवाला माना जाय तो उसकी व्यापकता भग होती है और अनित्य, जन्म व नाशादि गुणक्रियाओंमें उसका अभाव सिद्ध होता है, परन्तु वस्तुतःकिसी स्थल में उसका अभाव नहीं है और मन-वाणी किसी न किसी विशेषण बिना कथन-चिन्तन में समर्थ हो नहीं सकते, क्योंकि वे स्वयं देश, काल व वस्तु परिच्छेद वाले हैं। इसलिये वाणी व मनद्वारा जो कुछ भी कथन-चिन्तन होगा षह सगुणताके अन्तर्गतही रहेगा ।
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- रेलवे स्टेशन पर यूं सादगी भरे अंदाज में बेंच पर बैठी नजर आई 'बालिका वधू' की आनंदी, फैन्स बोले- बेहद खूबसूरतBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।मंगलवार जनवरी 31, 2023 06:08 AM ISTटीवी सीरियल बालिका वधू में आनंदी के रोल से फैंस के दिलों में जगह बनाने वाली एक्ट्रेस अविका गोर ने फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया है. इसके चलते वह सुर्खियों में छाई हुई हैं.
- 'बालिका वधू' की नन्ही आनंदी बड़ी होकर दिखती है बेहद ग्लैमरस, अविका गौर बनी साउथ फिल्मों की हीरोइन. . . PHOTOSTelevision । Edited by: प्रियंका तिवारी ।सोमवार जनवरी 23, 2023 07:47 PM ISTइस सीरियल से स्टार बनी छोटी आनंदी यानी अविका गौर की मासूमियत और उनकी बातें करने के अंदाज ने दर्शकों के दिलों को जीत लिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटी आनंदी अब काफी बड़ी हो चुकी हैं और फिल्मों का रुख कर रही हैं.
- बालिका वधु फेम अविका गोर 'कहानी रबरबैंड की' से बॉलीवुड में कर रही हैं डेब्यू, जानें फिल्म से जुड़े डिटेल्सBollywood । Edited by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार सितम्बर 30, 2022 10:14 AM ISTकहानी रबरबैंड की" का निर्माण मून हाउस प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है. मीत ब्रदर्स ने फिल्म के लिए संगीत तैयार किया है, जबकि फारूख मिस्त्री सिनेमेटोग्राफर हैं. फिल्म के गाने में जाने-माने सिंगर्स कुणाल गांजावाला, हरगुन कौर और गीत सागर की खूबसूरत आवाजें सुनी जा सकती हैं.
- Bollywood । Written by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार जून 28, 2022 03:40 PM ISTटीवी सीरियल बालिका वधू से लोकप्रियता हासिल करने वाली एक्ट्रेस अब बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं. अब वह बॉलीवुड की एक हॉरर फिल्म में नजर आएंगी.
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- रेलवे स्टेशन पर यूं सादगी भरे अंदाज में बेंच पर बैठी नजर आई 'बालिका वधू' की आनंदी, फैन्स बोले- बेहद खूबसूरतBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।मंगलवार जनवरी इकतीस, दो हज़ार तेईस छः:आठ AM ISTटीवी सीरियल बालिका वधू में आनंदी के रोल से फैंस के दिलों में जगह बनाने वाली एक्ट्रेस अविका गोर ने फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया है. इसके चलते वह सुर्खियों में छाई हुई हैं. - 'बालिका वधू' की नन्ही आनंदी बड़ी होकर दिखती है बेहद ग्लैमरस, अविका गौर बनी साउथ फिल्मों की हीरोइन. . . PHOTOSTelevision । Edited by: प्रियंका तिवारी ।सोमवार जनवरी तेईस, दो हज़ार तेईस सात:सैंतालीस PM ISTइस सीरियल से स्टार बनी छोटी आनंदी यानी अविका गौर की मासूमियत और उनकी बातें करने के अंदाज ने दर्शकों के दिलों को जीत लिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटी आनंदी अब काफी बड़ी हो चुकी हैं और फिल्मों का रुख कर रही हैं. - बालिका वधु फेम अविका गोर 'कहानी रबरबैंड की' से बॉलीवुड में कर रही हैं डेब्यू, जानें फिल्म से जुड़े डिटेल्सBollywood । Edited by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार सितम्बर तीस, दो हज़ार बाईस दस:चौदह AM ISTकहानी रबरबैंड की" का निर्माण मून हाउस प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है. मीत ब्रदर्स ने फिल्म के लिए संगीत तैयार किया है, जबकि फारूख मिस्त्री सिनेमेटोग्राफर हैं. फिल्म के गाने में जाने-माने सिंगर्स कुणाल गांजावाला, हरगुन कौर और गीत सागर की खूबसूरत आवाजें सुनी जा सकती हैं. - Bollywood । Written by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार जून अट्ठाईस, दो हज़ार बाईस तीन:चालीस PM ISTटीवी सीरियल बालिका वधू से लोकप्रियता हासिल करने वाली एक्ट्रेस अब बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं. अब वह बॉलीवुड की एक हॉरर फिल्म में नजर आएंगी.
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84 वर्षीय कार्यकर्ता, स्टेन स्वामी की अस्पताल में मौत..
उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी"
(नई दिल्ली) एल्गर परिषद मामलाः स्टेन स्वामी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय को बताया था कि नवी मुंबई के तलोजा जेल में उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई थी और अगर उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी"।
पिछले साल एल्गार परिषद मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किए गए 84 वर्षीय पुजारी-कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का स्वास्थ्य आधार पर जमानत की लड़ाई के बीच आज निधन हो गया। जेसुइट पुजारी कल से वेंटिलेटर पर थे, तब उनकी तबीयत खराब हो गई।
28 मई को अदालत के आदेश के बाद स्टेन स्वामी का मुंबई के निजी होली फैमिली अस्पताल में इलाज चल रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक सरकारी अस्पताल का सुझाव दिया था, जिस पर उन्होंने कहा थाः "मैं यहां जेल में मरना पसंद करूंगा। ।"
अक्टूबर से मुंबई के पास जेल में बंद स्टेन स्वामी ने अपने जीवन के आखिरी कुछ महीने छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ने में बिताए। दिसंबर में, उन्हें जेल में एक पुआल और एक सिपर की अनुमति दी गई थी, जिसे उन्होंने पार्किंसंस रोग के कारण अदालत में अनुरोध किया था। उन्होंने कई बार चिकित्सा उपचार और अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था।
एनआईए, जिसने उसे अक्टूबर में उसके घर से गिरफ्तार किया था, ने देर रात व्यापक रूप से आलोचना की, अदालत में उसके जमानत रिक्वेस्ट का विरोध किया और कहा कि उसकी चिकित्सा बीमारियों का कोई "निर्णायक सबूत" नहीं था। एजेंसी अपने इस तर्क पर कायम रही कि स्टेन स्वामी एक माओवादी था जिसने देश में अशांति फैलाने की साजिश रची थी।
स्टेन स्वामी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय को बताया था कि नवी मुंबई के तलोजा जेल में उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई थी और अगर उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी"।
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चौरासी वर्षीय कार्यकर्ता, स्टेन स्वामी की अस्पताल में मौत.. उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी" एल्गर परिषद मामलाः स्टेन स्वामी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय को बताया था कि नवी मुंबई के तलोजा जेल में उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई थी और अगर उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी"। पिछले साल एल्गार परिषद मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किए गए चौरासी वर्षीय पुजारी-कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का स्वास्थ्य आधार पर जमानत की लड़ाई के बीच आज निधन हो गया। जेसुइट पुजारी कल से वेंटिलेटर पर थे, तब उनकी तबीयत खराब हो गई। अट्ठाईस मई को अदालत के आदेश के बाद स्टेन स्वामी का मुंबई के निजी होली फैमिली अस्पताल में इलाज चल रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक सरकारी अस्पताल का सुझाव दिया था, जिस पर उन्होंने कहा थाः "मैं यहां जेल में मरना पसंद करूंगा। ।" अक्टूबर से मुंबई के पास जेल में बंद स्टेन स्वामी ने अपने जीवन के आखिरी कुछ महीने छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ने में बिताए। दिसंबर में, उन्हें जेल में एक पुआल और एक सिपर की अनुमति दी गई थी, जिसे उन्होंने पार्किंसंस रोग के कारण अदालत में अनुरोध किया था। उन्होंने कई बार चिकित्सा उपचार और अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था। एनआईए, जिसने उसे अक्टूबर में उसके घर से गिरफ्तार किया था, ने देर रात व्यापक रूप से आलोचना की, अदालत में उसके जमानत रिक्वेस्ट का विरोध किया और कहा कि उसकी चिकित्सा बीमारियों का कोई "निर्णायक सबूत" नहीं था। एजेंसी अपने इस तर्क पर कायम रही कि स्टेन स्वामी एक माओवादी था जिसने देश में अशांति फैलाने की साजिश रची थी। स्टेन स्वामी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय को बताया था कि नवी मुंबई के तलोजा जेल में उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई थी और अगर उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई, तो उनकी "जल्द ही मृत्यु हो जाएगी"।
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दिल तेरा आशिक़ एक बॉलीवुड रोमांस ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन लॉरेंस डिसूज़ा ने किया है। इस फिल्म में सलमान खान, माधुरी दीक्षित और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में नज़र आये थे।
Ameesha Patel ने किया खुलासा, दूसरी एक्ट्रेसस ने नाक के नीचे से छीन लीं फिल्में, बोलीं- "मैं आउटसाइडर थी. . "
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दिल तेरा आशिक़ एक बॉलीवुड रोमांस ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन लॉरेंस डिसूज़ा ने किया है। इस फिल्म में सलमान खान, माधुरी दीक्षित और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में नज़र आये थे। Ameesha Patel ने किया खुलासा, दूसरी एक्ट्रेसस ने नाक के नीचे से छीन लीं फिल्में, बोलीं- "मैं आउटसाइडर थी. . "
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सुंदरता के लिए महिलाएं लंबी और कठिन संघर्ष औरअपने बालों का स्वास्थ्य प्रसिद्ध निर्माता बालों की देखभाल के लिए डिजाइन किए गए उत्पादों की एक पूरी श्रृंखला तैयार करते हैं, लेकिन वे कई पीढ़ियों द्वारा पहले से परीक्षण की जाने वाली लोकप्रिय व्यंजनों से प्रतिस्पर्धा के योग्य हैं। सबसे सरल और प्रभावी माध्यमों में से एक केफिर है। केफिर बालों का मुखौटा प्राचीन एशिया में महिलाओं द्वारा उपयोग किया जाता था, जिनके बाल मोटाई, ताकत और प्राकृतिक चमक से हमेशा प्रतिष्ठित थे।
इस किण्वित दूध उत्पाद के उपयोगी गुणन केवल अपने आंतरिक उपयोग के लिए जाना जाता है। केफिर का अपना माइक्रोफ्लोरा होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य का समर्थन करने वाले माइक्रोफ्लोरा के समान होता है। केफिर बालों के लिए मुखौटा उनकी प्राकृतिक सुंदरता और ऊर्जा को बहाल करेगा, उन्हें वसा, सुस्तता और नाजुकता से बचाएगा, और उन्हें स्वस्थ तरीके से ट्यून करने में मदद करेगा। यह चमत्कारी उत्पाद तेल और शुष्क दोनों बालों से निपटने में सक्षम है, खोपड़ी के स्वास्थ्य को बहाल करता है, जड़ें मजबूत करता है और नुकसान को रोकता है। यह बालों पर एक सुरक्षात्मक फिल्म बनाता है, जो बाहरी पर्यावरण के नकारात्मक प्रभावों से बचाता है और साथ ही साथ एक अदृश्य लोचदार फ्रेम बन जाता है जो उनकी मात्रा का समर्थन करता है और बढ़ाता है।
हालांकि, यह प्रभाव मोटे बालों के लिए एक मुखौटा हैकेफिर केवल इस शर्त के तहत देता है कि इसके बाद आप बालों पर किसी भी कॉस्मेटिक साधन को लागू नहीं करते हैं। लेकिन इन उपकरणों के उपयोग के बिना भी, चमत्कारी केफिर कई समस्याओं के साथ-साथ सामना कर सकता है। इससे मास्क बालों के रोम को मजबूत कर सकते हैं, डैंड्रफ से छुटकारा पा सकते हैं, शुष्क हो सकते हैं और बहुत चिकना बाल degrease।
सबसे आसान तेल के बालों के लिए एक मुखौटा है। इसे तैयार करने के लिए, नॉनफैट केफिर का गिलास लें, जिसे उपयोग से पहले गरम किया जाना चाहिए। एक गर्म मुखौटा न केवल खोपड़ी के लिए और अधिक सुखद है, बल्कि इसका एक और प्रभावशाली प्रभाव भी है। खोपड़ी के गीलेपन को भूलने के लिए, मात्रा में समान रूप से केफिर द्रव्यमान वितरित करें। आवेदन समाप्त हो जाने के बाद, आपको अपने सिर पर एक प्लास्टिक टोपी डालना होगा, इसे एक तौलिया से लपेटना होगा और लगभग आधे घंटे तक पकड़ना होगा।
शुष्क बालों का इलाज करने के लिए, एक बाल मुखौटाकेफिर काफी अलग तैयार है। ऐसा करने के लिए, केफिर के तीन चम्मच अंडे की जर्दी और एक चम्मच जैतून (कास्ट या बोझॉक) तेल डाल सकते हैं। सिर पर मिश्रण लागू करें, फिर एक प्लास्टिक की टोपी के साथ कवर करें और एक तौलिया के साथ लपेटें। इस मुखौटा को 60 मिनट की जरूरत है। तेल और केफिर से बाल मास्क कुल्ला शैम्पू चाहिए।
निर्जीव बालों और डैंड्रफ़ हटाने के लिएकेफिर और काली रोटी का मुखौटा। आपको बिना किसी क्रस्ट के 200 ग्राम काले रोटी लेने की जरूरत है, आधे कप केफिर में भिगो दें और एक बड़ा चमचा कास्ट तेल जोड़ें। तैयार द्रव्यमान को बालों को लागू करें, 25 मिनट तक रखें, फिर सामान्य रूप से कुल्लाएं।
केफिर मास्क का पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता हैबाल विकास को प्रोत्साहित करें, उन्हें मजबूत करें और बालों के झड़ने को कम करें। इसके लिए प्याज का रस भी बहुत अच्छा है, लेकिन अक्सर इसका उपयोग करने की इच्छा फैलाने वाली अप्रिय गंध को हतोत्साहित करती है। हालांकि, केफिर के साथ प्याज मिश्रण न केवल विशिष्ट स्वाद को निष्क्रिय करता है, बल्कि चिकित्सकीय प्रभाव को भी बढ़ाता है। एक चम्मच केफिर को प्याज के रस के एक चम्मच में जोड़ने के लिए पर्याप्त है, अच्छी तरह मिलाएं और खोपड़ी में रगड़ें। आधा घंटे पकड़ो और शैम्पू के साथ कुल्ला।
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सुंदरता के लिए महिलाएं लंबी और कठिन संघर्ष औरअपने बालों का स्वास्थ्य प्रसिद्ध निर्माता बालों की देखभाल के लिए डिजाइन किए गए उत्पादों की एक पूरी श्रृंखला तैयार करते हैं, लेकिन वे कई पीढ़ियों द्वारा पहले से परीक्षण की जाने वाली लोकप्रिय व्यंजनों से प्रतिस्पर्धा के योग्य हैं। सबसे सरल और प्रभावी माध्यमों में से एक केफिर है। केफिर बालों का मुखौटा प्राचीन एशिया में महिलाओं द्वारा उपयोग किया जाता था, जिनके बाल मोटाई, ताकत और प्राकृतिक चमक से हमेशा प्रतिष्ठित थे। इस किण्वित दूध उत्पाद के उपयोगी गुणन केवल अपने आंतरिक उपयोग के लिए जाना जाता है। केफिर का अपना माइक्रोफ्लोरा होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य का समर्थन करने वाले माइक्रोफ्लोरा के समान होता है। केफिर बालों के लिए मुखौटा उनकी प्राकृतिक सुंदरता और ऊर्जा को बहाल करेगा, उन्हें वसा, सुस्तता और नाजुकता से बचाएगा, और उन्हें स्वस्थ तरीके से ट्यून करने में मदद करेगा। यह चमत्कारी उत्पाद तेल और शुष्क दोनों बालों से निपटने में सक्षम है, खोपड़ी के स्वास्थ्य को बहाल करता है, जड़ें मजबूत करता है और नुकसान को रोकता है। यह बालों पर एक सुरक्षात्मक फिल्म बनाता है, जो बाहरी पर्यावरण के नकारात्मक प्रभावों से बचाता है और साथ ही साथ एक अदृश्य लोचदार फ्रेम बन जाता है जो उनकी मात्रा का समर्थन करता है और बढ़ाता है। हालांकि, यह प्रभाव मोटे बालों के लिए एक मुखौटा हैकेफिर केवल इस शर्त के तहत देता है कि इसके बाद आप बालों पर किसी भी कॉस्मेटिक साधन को लागू नहीं करते हैं। लेकिन इन उपकरणों के उपयोग के बिना भी, चमत्कारी केफिर कई समस्याओं के साथ-साथ सामना कर सकता है। इससे मास्क बालों के रोम को मजबूत कर सकते हैं, डैंड्रफ से छुटकारा पा सकते हैं, शुष्क हो सकते हैं और बहुत चिकना बाल degrease। सबसे आसान तेल के बालों के लिए एक मुखौटा है। इसे तैयार करने के लिए, नॉनफैट केफिर का गिलास लें, जिसे उपयोग से पहले गरम किया जाना चाहिए। एक गर्म मुखौटा न केवल खोपड़ी के लिए और अधिक सुखद है, बल्कि इसका एक और प्रभावशाली प्रभाव भी है। खोपड़ी के गीलेपन को भूलने के लिए, मात्रा में समान रूप से केफिर द्रव्यमान वितरित करें। आवेदन समाप्त हो जाने के बाद, आपको अपने सिर पर एक प्लास्टिक टोपी डालना होगा, इसे एक तौलिया से लपेटना होगा और लगभग आधे घंटे तक पकड़ना होगा। शुष्क बालों का इलाज करने के लिए, एक बाल मुखौटाकेफिर काफी अलग तैयार है। ऐसा करने के लिए, केफिर के तीन चम्मच अंडे की जर्दी और एक चम्मच जैतून तेल डाल सकते हैं। सिर पर मिश्रण लागू करें, फिर एक प्लास्टिक की टोपी के साथ कवर करें और एक तौलिया के साथ लपेटें। इस मुखौटा को साठ मिनट की जरूरत है। तेल और केफिर से बाल मास्क कुल्ला शैम्पू चाहिए। निर्जीव बालों और डैंड्रफ़ हटाने के लिएकेफिर और काली रोटी का मुखौटा। आपको बिना किसी क्रस्ट के दो सौ ग्राम काले रोटी लेने की जरूरत है, आधे कप केफिर में भिगो दें और एक बड़ा चमचा कास्ट तेल जोड़ें। तैयार द्रव्यमान को बालों को लागू करें, पच्चीस मिनट तक रखें, फिर सामान्य रूप से कुल्लाएं। केफिर मास्क का पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता हैबाल विकास को प्रोत्साहित करें, उन्हें मजबूत करें और बालों के झड़ने को कम करें। इसके लिए प्याज का रस भी बहुत अच्छा है, लेकिन अक्सर इसका उपयोग करने की इच्छा फैलाने वाली अप्रिय गंध को हतोत्साहित करती है। हालांकि, केफिर के साथ प्याज मिश्रण न केवल विशिष्ट स्वाद को निष्क्रिय करता है, बल्कि चिकित्सकीय प्रभाव को भी बढ़ाता है। एक चम्मच केफिर को प्याज के रस के एक चम्मच में जोड़ने के लिए पर्याप्त है, अच्छी तरह मिलाएं और खोपड़ी में रगड़ें। आधा घंटे पकड़ो और शैम्पू के साथ कुल्ला।
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रूसी में चीनी मिट्टी के बरतन की रोजमर्रा की जिंदगी अपने शासन के तहत पीटर प्रथम के शाही हाथ पेश किया गया था, बर्तन यूरोप से आयात किया गया, उपलब्ध ऐसी खुशी केवल अमीर लोग थे। एक छोटी सी बाद में, चीनी मिट्टी के बरतन सेट एक मूल्यवान उपहार के रूप में प्रस्तुत किए गए। बाद चीन, सबसे अधिक मूल्यवान थे यूरोपीय ब्रांडों (Sevres, Meysensy) अपनी खरीद के लिए धन की भारी मात्रा में खर्च किया गया, कि पूरी तरह से अनुचित था। 1744 में महारानी एलिजाबेथ, एक "मिट्टी के बरतन कारख़ाना" सेंट पीटर्सबर्ग के पास निर्माण करने के लिए रूसी चीनी मिट्टी के बरतन के युग के रूप का आदेश दिया। मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी पहली निजी कारखाने के रूप में इतिहास रच दिया।
एक लंबे समय के लिए चीनी मिट्टी के बरतन उत्पादन केवल राज्य के अधिकार क्षेत्र में था, लेकिन वहाँ हमेशा एक निजी मालिक जो प्रतिस्पर्धा करने के लिए यदि आप नहीं है, तो कंपनी संप्रभु उद्यमों कर सकता हूँ चाहता है। 1766 में अंग्रेज फ्रैंट्स याकोव्लेविच गार्डनर, मौजूदा Urusova कारखाने के आधार पर अपने स्वयं के संयंत्र खोला। एक उद्यमी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए उन्हें बाजार से ड्राइव, घरेलू गुणवत्ता वाले उत्पादों की जगह चीनी मिट्टी के बरतन के यूरोपीय नमूना के साथ प्रतिस्पर्धा करने, और इच्छा थी। आधुनिक बयानबाजी में बोलते हुए, उन्होंने करने के लिए "importozamestit" यूरोपीय माल का फैसला किया और प्रयास सफल रहा था।
पहले स्थान पर आवश्यक कच्चे माल में व्यापार के संगठन, और गार्डनर के लिए, वह लगभग पूरे देश का दौरा किया, चेर्निहाइव (लिटिल रूस) में एक मिट्टी जमा पाया। फ्रांज Gattenberga (जिनेवा प्रोफेसर विश्वविद्यालय) - promashek ऐसा करने के लिए और पहिया बदलने नहीं, वह बात विशेषज्ञ आकर्षित किया। और यह इतनी अच्छी तरह से चला गया है कि कारखाने में 1777 से 1783 को महारानी कैथरीन द्वितीय की सेवा के लिए चार पदक रिहा कर दिया गया है और उसे करने के लिए प्रस्तुत किए गए। अनुभव एक सफलता थी, कारखाने के मालिक शाही महल में सबसे ज्यादा दर्शकों, जिसके बाद उन्होंने मास्को के राज्य-चिह्न है, जो गुणवत्ता चिह्न के लिए समान था की छवि के साथ मुहर लगा करने के लिए हकदार था का दौरा किया।
फ्रांज गार्डनर, टुकड़ा माल के साथ साथ, चीनी मिट्टी के बरतन मेज के बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है। पहले कार्यकर्ताओं यूरोपीय विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी, संख्या प्रसिद्ध Meissen से तैयार हुए। रूसी चीनी मिट्टी के बरतन गुणवत्ता और कलात्मक प्रदर्शन में यूरोपीय से अलग नहीं है, लेकिन कीमत बहुत अधिक किफायती था।
रूस अत्यधिक उत्पादों कारखाने और उन सभी यूरोपीय निर्माताओं के लिए खर्च नहीं उठा सकते हैं, जो खरीदने के लिए खुश मूल्यवान। 1771 में, लगभग सत्तर कार्यकर्ताओं विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत थे, उनकी संख्या 10 वर्षों में दोगुनी हो गई है। सभी नौकरियों रूसी विशेषज्ञों का कब्जा था, केवल एक कलाकार के प्रबंधन और विदेशों से छुट्टी दे दी गई है।
फ्रांज गार्डनर चीनी मिट्टी के बरतन के उत्पादन में अपनी खुद की शैली, सैकड़ों में कास्टिंग के नमूनों की संख्या को खोजने के लिए सक्षम था। व्यंजन के अलावा डाला और पेंट चीनी मिट्टी के बरतन सैलून अद्वितीय मूर्तियां हैं, जिनमें से लेखकों प्रसिद्ध थे कलाकारों थे।
संस्थापक की मृत्यु के बाद, मास्को में चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने सभी निजी रूसी कारखानों का सबसे अच्छा माना जाता था। मामले उत्तराधिकारियों को लिया गया थाः अपनी मृत्यु से पहले थोड़े समय, कंपनी के संस्थापक के ज्येष्ठ पुत्र में अपनी पत्नी लगी हुई थी, और उसके बाद। उसके हाथ में कारखाना अपने पदों में से लगभग सभी को खो दिया है, लेकिन उसके बाद मामला उसके बच्चों को ले लिया, उत्पादन पुनर्जीवित किया गया था। यह विनिर्माण प्रौद्योगिकी मिट्टी के बरतन में महारत हासिल किया गया था। सन 1829 में, सोने उत्पादन प्रथम औद्योगिक प्रदर्शनी प्राप्त हुआ है। 1855 में वह करने के लिए दो सिरों ईगल के सार्वजनिक कलंक पर डाल उत्पादों का निर्माण सही प्राप्त किया।
पूरे के दौरान 19 वीं सदी मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी के शाही अदालत के आपूर्तिकर्ताओं में से एक व्यापार शो में उत्पादों की गुणवत्ता की पुष्टि करता है, 1856 के बाद से हो जाता है। सदी के अंत में वारिस कंपनी मात्वे कुज़्नेत्सोव बेच दिया। उन्होंने न केवल उत्पादन सुविधाओं, लेकिन यह भी सभी आकृति, पैटर्न और क्लासिक garderovskih चित्र का एक विशाल संग्रह हासिल कर ली।
मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी (Verbilki) में कुछ के साथ कुजनेत्सोवा थैलीशाह मिला महिमा फीका है, लेकिन एक ठोस कारोबार के साथ। कारखाने उत्पादित माल 208 हजार रूबल एक साल, और 700 आत्माओं की तुलना में अधिक कर्मचारियों की संख्या के अधिग्रहण के समय तक। कुज़्नेत्सोव इसकी महिमा का पूरा पुनरुद्धार के लिए, अपनी सारी विरासत में मिला धन और एक शतक और इतिहास का एक आधा इस्तेमाल किया।
बात सभी उत्पादों पर मास्को में संयंत्र के एक ब्रांड का उपयोग करने के बुद्धिमान निर्णय करने के लिए ग्राहक आधार पूरी तरह से संरक्षित किया गया है धन्यवाद विस्तार किया गया है,। नए मालिक उत्पादों है कि सच नहीं थे की सीमा को नवीनीकृत नहीं करना चाहता था। माल की मदों की संख्या लोकप्रिय व्यंजन और मूर्तियों के 4 से अधिक लाख यूनिट थी। संयंत्र में वर्षगांठ विशेष संग्रह की रिहाई के निशान। तो यह Borodino, रोमानोव के शासनकाल की 300 वीं वर्षगांठ की लड़ाई की 100 वीं वर्षगांठ सील किया गया था।
राष्ट्रीयकरण के बाद, निर्माण आधिकारिक तौर पर मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी के रूप में जाना जाने लगा। बाद क्रांतिकारी अवधि में उत्पादन में काफी गिरावट आई, और जो उत्पादन किया जाता है, विनय decals (डीकल) या प्रतिनिधित्व किया प्रचार लेख के साथ सजाया गया था।
सबसे प्रसिद्ध, 1930 में, मैं एक सेवा मास्को में चीनी मिट्टी "कुबड़ा हार्स" संयंत्र के, और साथ ही अन्य कार्यों के प्रतिभावान मूर्तिकार एसएम ओर्लोव ब्रश से प्राप्त हुआ है महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के चीनी मिट्टी के बरतन रिलीज होने के दौरान काफी कमी आई है, लेकिन अवधि उज्ज्वल काम करता है द्वारा चिह्नित किया गया। सेवा "मातृभूमि के लिए लड़ाई" (ए Chechulina द्वारा) महान जनरलों "Suvorov" के साथ छवियों का एक सेट जारी किया है, "अलेक्जेंडर नेव्स्की", "Kutuzov", सोवियत सैन्य नेतृत्व पुरस्कार की छवि (प्रमाणन। Demorrey टी) बनाया गया था के साथ सेट।
CJSC "चीनी मिट्टी Verbilok": 1991 में दिमित्रोव चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने एक संयुक्त स्टॉक कंपनी, आधिकारिक नाम बन गया। 1995 के बाद से, ऑपरेटिंग सहायक 'Verbilok कटाई करने के लिए "। नई सुविधा प्रशासन और कर्मचारियों के संयंत्र के संस्थापकों द्वारा निर्धारित परंपराओं के व्यस्त पुनरुद्धार कर रहे हैं।
1996 में, कंपनी के रूप में अच्छी तरह से मेक्सिको में के रूप में बर्मिंघम में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में पुरस्कार प्राप्त,। 2007 के बाद से, संयंत्र पैरोकार के गिल्ड में सदस्यता के हिस्से के रूप क्रेमलिन के लिए अपने उत्पादों की आपूर्ति। कंपनी अब "गार्डनर कारख़ाना" कहा जाता है, लेकिन मास्को में चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने के पुराने नाम के साथ कई के लिए अधिक परिचित। उत्पाद कई संग्रहणीय लाइन का उत्पादन किया।
संग्रह "फ्रैंट्स गार्डनर" परंपरागत रूपों उम्र 19-20 चीनी मिट्टी के बरतन जान। कंपनी जादूगर उपहार वस्तुओं पर वास्तव में शिलालेख करता है (चाय जोड़े, सेट, मूर्तियों)। इसके अलावा परिवार व्यंजन जिस पर कलाकारों परिवार चढाई की, मोनोग्राम या चयनित पैटर्न बारे में उपलब्ध है। कंपनी विभिन्न प्रयोजनों, चाय और कॉफी जोड़े, फल, फूलदान, बच्चों के सेट के लिए के लिए सेट पैदा करता है।
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रूसी में चीनी मिट्टी के बरतन की रोजमर्रा की जिंदगी अपने शासन के तहत पीटर प्रथम के शाही हाथ पेश किया गया था, बर्तन यूरोप से आयात किया गया, उपलब्ध ऐसी खुशी केवल अमीर लोग थे। एक छोटी सी बाद में, चीनी मिट्टी के बरतन सेट एक मूल्यवान उपहार के रूप में प्रस्तुत किए गए। बाद चीन, सबसे अधिक मूल्यवान थे यूरोपीय ब्रांडों अपनी खरीद के लिए धन की भारी मात्रा में खर्च किया गया, कि पूरी तरह से अनुचित था। एक हज़ार सात सौ चौंतालीस में महारानी एलिजाबेथ, एक "मिट्टी के बरतन कारख़ाना" सेंट पीटर्सबर्ग के पास निर्माण करने के लिए रूसी चीनी मिट्टी के बरतन के युग के रूप का आदेश दिया। मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी पहली निजी कारखाने के रूप में इतिहास रच दिया। एक लंबे समय के लिए चीनी मिट्टी के बरतन उत्पादन केवल राज्य के अधिकार क्षेत्र में था, लेकिन वहाँ हमेशा एक निजी मालिक जो प्रतिस्पर्धा करने के लिए यदि आप नहीं है, तो कंपनी संप्रभु उद्यमों कर सकता हूँ चाहता है। एक हज़ार सात सौ छयासठ में अंग्रेज फ्रैंट्स याकोव्लेविच गार्डनर, मौजूदा Urusova कारखाने के आधार पर अपने स्वयं के संयंत्र खोला। एक उद्यमी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए उन्हें बाजार से ड्राइव, घरेलू गुणवत्ता वाले उत्पादों की जगह चीनी मिट्टी के बरतन के यूरोपीय नमूना के साथ प्रतिस्पर्धा करने, और इच्छा थी। आधुनिक बयानबाजी में बोलते हुए, उन्होंने करने के लिए "importozamestit" यूरोपीय माल का फैसला किया और प्रयास सफल रहा था। पहले स्थान पर आवश्यक कच्चे माल में व्यापार के संगठन, और गार्डनर के लिए, वह लगभग पूरे देश का दौरा किया, चेर्निहाइव में एक मिट्टी जमा पाया। फ्रांज Gattenberga - promashek ऐसा करने के लिए और पहिया बदलने नहीं, वह बात विशेषज्ञ आकर्षित किया। और यह इतनी अच्छी तरह से चला गया है कि कारखाने में एक हज़ार सात सौ सतहत्तर से एक हज़ार सात सौ तिरासी को महारानी कैथरीन द्वितीय की सेवा के लिए चार पदक रिहा कर दिया गया है और उसे करने के लिए प्रस्तुत किए गए। अनुभव एक सफलता थी, कारखाने के मालिक शाही महल में सबसे ज्यादा दर्शकों, जिसके बाद उन्होंने मास्को के राज्य-चिह्न है, जो गुणवत्ता चिह्न के लिए समान था की छवि के साथ मुहर लगा करने के लिए हकदार था का दौरा किया। फ्रांज गार्डनर, टुकड़ा माल के साथ साथ, चीनी मिट्टी के बरतन मेज के बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है। पहले कार्यकर्ताओं यूरोपीय विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी, संख्या प्रसिद्ध Meissen से तैयार हुए। रूसी चीनी मिट्टी के बरतन गुणवत्ता और कलात्मक प्रदर्शन में यूरोपीय से अलग नहीं है, लेकिन कीमत बहुत अधिक किफायती था। रूस अत्यधिक उत्पादों कारखाने और उन सभी यूरोपीय निर्माताओं के लिए खर्च नहीं उठा सकते हैं, जो खरीदने के लिए खुश मूल्यवान। एक हज़ार सात सौ इकहत्तर में, लगभग सत्तर कार्यकर्ताओं विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत थे, उनकी संख्या दस वर्षों में दोगुनी हो गई है। सभी नौकरियों रूसी विशेषज्ञों का कब्जा था, केवल एक कलाकार के प्रबंधन और विदेशों से छुट्टी दे दी गई है। फ्रांज गार्डनर चीनी मिट्टी के बरतन के उत्पादन में अपनी खुद की शैली, सैकड़ों में कास्टिंग के नमूनों की संख्या को खोजने के लिए सक्षम था। व्यंजन के अलावा डाला और पेंट चीनी मिट्टी के बरतन सैलून अद्वितीय मूर्तियां हैं, जिनमें से लेखकों प्रसिद्ध थे कलाकारों थे। संस्थापक की मृत्यु के बाद, मास्को में चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने सभी निजी रूसी कारखानों का सबसे अच्छा माना जाता था। मामले उत्तराधिकारियों को लिया गया थाः अपनी मृत्यु से पहले थोड़े समय, कंपनी के संस्थापक के ज्येष्ठ पुत्र में अपनी पत्नी लगी हुई थी, और उसके बाद। उसके हाथ में कारखाना अपने पदों में से लगभग सभी को खो दिया है, लेकिन उसके बाद मामला उसके बच्चों को ले लिया, उत्पादन पुनर्जीवित किया गया था। यह विनिर्माण प्रौद्योगिकी मिट्टी के बरतन में महारत हासिल किया गया था। सन एक हज़ार आठ सौ उनतीस में, सोने उत्पादन प्रथम औद्योगिक प्रदर्शनी प्राप्त हुआ है। एक हज़ार आठ सौ पचपन में वह करने के लिए दो सिरों ईगल के सार्वजनिक कलंक पर डाल उत्पादों का निर्माण सही प्राप्त किया। पूरे के दौरान उन्नीस वीं सदी मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी के शाही अदालत के आपूर्तिकर्ताओं में से एक व्यापार शो में उत्पादों की गुणवत्ता की पुष्टि करता है, एक हज़ार आठ सौ छप्पन के बाद से हो जाता है। सदी के अंत में वारिस कंपनी मात्वे कुज़्नेत्सोव बेच दिया। उन्होंने न केवल उत्पादन सुविधाओं, लेकिन यह भी सभी आकृति, पैटर्न और क्लासिक garderovskih चित्र का एक विशाल संग्रह हासिल कर ली। मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी में कुछ के साथ कुजनेत्सोवा थैलीशाह मिला महिमा फीका है, लेकिन एक ठोस कारोबार के साथ। कारखाने उत्पादित माल दो सौ आठ हजार रूबल एक साल, और सात सौ आत्माओं की तुलना में अधिक कर्मचारियों की संख्या के अधिग्रहण के समय तक। कुज़्नेत्सोव इसकी महिमा का पूरा पुनरुद्धार के लिए, अपनी सारी विरासत में मिला धन और एक शतक और इतिहास का एक आधा इस्तेमाल किया। बात सभी उत्पादों पर मास्को में संयंत्र के एक ब्रांड का उपयोग करने के बुद्धिमान निर्णय करने के लिए ग्राहक आधार पूरी तरह से संरक्षित किया गया है धन्यवाद विस्तार किया गया है,। नए मालिक उत्पादों है कि सच नहीं थे की सीमा को नवीनीकृत नहीं करना चाहता था। माल की मदों की संख्या लोकप्रिय व्यंजन और मूर्तियों के चार से अधिक लाख यूनिट थी। संयंत्र में वर्षगांठ विशेष संग्रह की रिहाई के निशान। तो यह Borodino, रोमानोव के शासनकाल की तीन सौ वीं वर्षगांठ की लड़ाई की एक सौ वीं वर्षगांठ सील किया गया था। राष्ट्रीयकरण के बाद, निर्माण आधिकारिक तौर पर मास्को में चीनी मिट्टी फैक्टरी के रूप में जाना जाने लगा। बाद क्रांतिकारी अवधि में उत्पादन में काफी गिरावट आई, और जो उत्पादन किया जाता है, विनय decals या प्रतिनिधित्व किया प्रचार लेख के साथ सजाया गया था। सबसे प्रसिद्ध, एक हज़ार नौ सौ तीस में, मैं एक सेवा मास्को में चीनी मिट्टी "कुबड़ा हार्स" संयंत्र के, और साथ ही अन्य कार्यों के प्रतिभावान मूर्तिकार एसएम ओर्लोव ब्रश से प्राप्त हुआ है महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के चीनी मिट्टी के बरतन रिलीज होने के दौरान काफी कमी आई है, लेकिन अवधि उज्ज्वल काम करता है द्वारा चिह्नित किया गया। सेवा "मातृभूमि के लिए लड़ाई" महान जनरलों "Suvorov" के साथ छवियों का एक सेट जारी किया है, "अलेक्जेंडर नेव्स्की", "Kutuzov", सोवियत सैन्य नेतृत्व पुरस्कार की छवि बनाया गया था के साथ सेट। CJSC "चीनी मिट्टी Verbilok": एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में दिमित्रोव चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने एक संयुक्त स्टॉक कंपनी, आधिकारिक नाम बन गया। एक हज़ार नौ सौ पचानवे के बाद से, ऑपरेटिंग सहायक 'Verbilok कटाई करने के लिए "। नई सुविधा प्रशासन और कर्मचारियों के संयंत्र के संस्थापकों द्वारा निर्धारित परंपराओं के व्यस्त पुनरुद्धार कर रहे हैं। एक हज़ार नौ सौ छियानवे में, कंपनी के रूप में अच्छी तरह से मेक्सिको में के रूप में बर्मिंघम में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में पुरस्कार प्राप्त,। दो हज़ार सात के बाद से, संयंत्र पैरोकार के गिल्ड में सदस्यता के हिस्से के रूप क्रेमलिन के लिए अपने उत्पादों की आपूर्ति। कंपनी अब "गार्डनर कारख़ाना" कहा जाता है, लेकिन मास्को में चीनी मिट्टी के बरतन कारखाने के पुराने नाम के साथ कई के लिए अधिक परिचित। उत्पाद कई संग्रहणीय लाइन का उत्पादन किया। संग्रह "फ्रैंट्स गार्डनर" परंपरागत रूपों उम्र उन्नीस-बीस चीनी मिट्टी के बरतन जान। कंपनी जादूगर उपहार वस्तुओं पर वास्तव में शिलालेख करता है । इसके अलावा परिवार व्यंजन जिस पर कलाकारों परिवार चढाई की, मोनोग्राम या चयनित पैटर्न बारे में उपलब्ध है। कंपनी विभिन्न प्रयोजनों, चाय और कॉफी जोड़े, फल, फूलदान, बच्चों के सेट के लिए के लिए सेट पैदा करता है।
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टेस्ला इंक और SpaceX के फाउंडर एवं सीईओ एलन मस्क को एक बड़ा झटका लगा है. एलन मस्क अब वैश्विक धनकुबेरों के ब्लूमबर्ग की लिस्ट में दूसरे नंबर से फिसलकर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. ताजा सूची में एलन मस्क को पछाड़कर LVMH के चेयरमैन Bernard Arnault दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. (Photo: File)
ब्लूमबर्ग की मंगलवार तक की लिस्ट के मुताबिक एलन मस्क की संपत्ति 3. 16 बिलियन डॉलर की कमी के साथ 161 बिलियन डॉलर पर थी. पिछले दिनों एलन मस्क के एक ट्वीट से टेस्ला के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली थी. एलन मस्क ने ट्वीट में लिखा था कि उनकी कंपनी टेस्ला वाहन खरीदारों से अब बिटक्वाइन नहीं लेगी. (Photo: File)
एलन मस्क के इस ट्वीट से Bitcoin की कीमतों में भारी गिरावट आई थी. एलन मस्क के ट्वीट के दो घंटे के अंदर Bitcoin की कीमत 17 फीसदी तक गिर गई थी. हालांकि, बाद में एलन मस्क ने स्पष्ट किया था कि उनकी कंपनी ने एक भी बिटक्वाइन नहीं बेचा है. लेकिन तब तक उनकी संपत्ति काफी घट चुकी थी. (Photo: File)
दुनिया के अमीरों की लिस्ट में Amazon के जेफ बेजोस टॉप पर बरकरार हैं. उनकी कुल संपत्ति 190 बिलियन डॉलर आंकी गई है. वहीं, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स इस लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं, जिनकी कुल संपत्ति 144 बिलियन डॉलर आंकी गई है. फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग 118 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ 5वें स्थान पर हैं. (Photo: File)
अगर भारतीयों की बात करें तो उद्योगपति मुकेश अंबानी Bloomberg Billionaires Index की लिस्ट में 13वें स्थान पर हैं. मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 75. 2 बिलियन डॉलर आंकी गई है. वहीं अडाणी ग्रुप के गौतम अडाणी 63. 1 बिलियन डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ 17वें पायदान पर पहुंचे हैं. (Photo: File)
गौरतलब है कि पिछले साल एलन मस्क की संपत्ति में जोरदार उछाल आया था. ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक जनवरी- 2020 में एलन मस्क अमीरों की रैंकिंग में 35वें स्थान पर थे, जो साल के अंत तक दूसरे नंबर पर पहुंच गए थे. एलन मस्क के लिए साल 2020 बेहद शानदार रहा था. (Photo: File)
संपत्ति में जोरदार उछाल के बाद जनवरी-2021 में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर शख्स बन गए, उन्होंने अमेजन के जेफ बेजॉस को पीछे छोड़ दिया था. लगभग 27 बिलियन यूएस डॉलर मूल्य के साथ 2020 की शुरुआत करने वाले मस्क ने अपनी संपत्ति में 150 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखी थी. (Photo: File)
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टेस्ला इंक और SpaceX के फाउंडर एवं सीईओ एलन मस्क को एक बड़ा झटका लगा है. एलन मस्क अब वैश्विक धनकुबेरों के ब्लूमबर्ग की लिस्ट में दूसरे नंबर से फिसलकर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. ताजा सूची में एलन मस्क को पछाड़कर LVMH के चेयरमैन Bernard Arnault दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. ब्लूमबर्ग की मंगलवार तक की लिस्ट के मुताबिक एलन मस्क की संपत्ति तीन. सोलह बिलियन डॉलर की कमी के साथ एक सौ इकसठ बिलियन डॉलर पर थी. पिछले दिनों एलन मस्क के एक ट्वीट से टेस्ला के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली थी. एलन मस्क ने ट्वीट में लिखा था कि उनकी कंपनी टेस्ला वाहन खरीदारों से अब बिटक्वाइन नहीं लेगी. एलन मस्क के इस ट्वीट से Bitcoin की कीमतों में भारी गिरावट आई थी. एलन मस्क के ट्वीट के दो घंटे के अंदर Bitcoin की कीमत सत्रह फीसदी तक गिर गई थी. हालांकि, बाद में एलन मस्क ने स्पष्ट किया था कि उनकी कंपनी ने एक भी बिटक्वाइन नहीं बेचा है. लेकिन तब तक उनकी संपत्ति काफी घट चुकी थी. दुनिया के अमीरों की लिस्ट में Amazon के जेफ बेजोस टॉप पर बरकरार हैं. उनकी कुल संपत्ति एक सौ नब्बे बिलियन डॉलर आंकी गई है. वहीं, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स इस लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं, जिनकी कुल संपत्ति एक सौ चौंतालीस बिलियन डॉलर आंकी गई है. फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग एक सौ अट्ठारह बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ पाँचवें स्थान पर हैं. अगर भारतीयों की बात करें तो उद्योगपति मुकेश अंबानी Bloomberg Billionaires Index की लिस्ट में तेरहवें स्थान पर हैं. मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति पचहत्तर. दो बिलियन डॉलर आंकी गई है. वहीं अडाणी ग्रुप के गौतम अडाणी तिरेसठ. एक बिलियन डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ सत्रहवें पायदान पर पहुंचे हैं. गौरतलब है कि पिछले साल एलन मस्क की संपत्ति में जोरदार उछाल आया था. ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक जनवरी- दो हज़ार बीस में एलन मस्क अमीरों की रैंकिंग में पैंतीसवें स्थान पर थे, जो साल के अंत तक दूसरे नंबर पर पहुंच गए थे. एलन मस्क के लिए साल दो हज़ार बीस बेहद शानदार रहा था. संपत्ति में जोरदार उछाल के बाद जनवरी-दो हज़ार इक्कीस में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर शख्स बन गए, उन्होंने अमेजन के जेफ बेजॉस को पीछे छोड़ दिया था. लगभग सत्ताईस बिलियन यूएस डॉलर मूल्य के साथ दो हज़ार बीस की शुरुआत करने वाले मस्क ने अपनी संपत्ति में एक सौ पचास बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखी थी.
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कोरोना वायरस के चलते बीसीसीआई आईपीएल 2020 को यूएई में आयोजित करवा रही है। ताकि लीग सुरक्षित तरीके से खेली जा सके। लेकिन ऐसे में फ्रेंचाइजी लगभग 50 दिन चलने वाली इस लीग में नेट बॉलर्स के तौर पर लोकल बॉलर्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी। अब वह अपने साथ नेट बॉलर्स के तौर पर युवाओं को लेकर जाना चाहते हैं। सामने आई खबर के मुताबिक बंगाल के आकाशदीप व सयान घोष की पेस जोड़ी यूएई जाएगी।
लगभग 50 दिनों तक चलने वाली लीग में नेट बॉलर बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं। आकाश दीप और सयान घोष की बंगाल पेस जोड़ी आईपीएल 2020 के लिए नेट गेंदबाजों के रूप में क्रमशः राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब टीम का हिस्सा होगी। सीएबी प्रेसिडेंट अविषेक डालमिया ने इस बात पर खुशी जताते हुए कहा,
"हम खुश हैं कि फ्रेंचाइजी ने दो युवा खिलाड़ियों में रुचि दिखाई है। पिछले कुछ दिनों के दौरान चर्चा चल रही थी और उन्होंने आज इसकी पुष्टि की है। वे स्क्वाड गेंदबाजों के रूप में शामिल होंगे, दोनों को उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं।
सीएबी के सचिव स्नेहाशीष गांगुली ने कहा,
बंगाल के युवा गेंदबाज आकाश दीप अब यूएई के लिए उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दोनों खिलाड़ी इस अवसर को लेकर काफी उत्साहित हैं। आकाश दीप ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा,
सयान घोष ने कहा,
"यह मेरे लिए एक महान अवसर है और मैं जो अनुभव हासिल करूंगा वह भविष्य में बंगाल की मदद करेगा। यह हमारे घरों में तालाबंदी होने से एक वेलकमिंग ब्रेक है। मैं क्रिकेट खेल सकता हूं और जो एक बड़ी प्रेरणा है।
कोरोना वायरस के चलते लंबे वक्त से स्थगित चल रहे आईपीएल 2020 का आयोजन अब 19 सितंबर से यूएई में कराया जाएगा। बोर्ड ने खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम तैयार किए हैं, जिसका सभी को सख्ती से पालन भी करना होगा। लीग के आयोजन की खबर ने फैंस व क्रिकेटर्स सभी को खुश कर दिया है। अब 20 अगस्त के बाद सभी टीमें यूएई के लिए रवाना होंगी।
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कोरोना वायरस के चलते बीसीसीआई आईपीएल दो हज़ार बीस को यूएई में आयोजित करवा रही है। ताकि लीग सुरक्षित तरीके से खेली जा सके। लेकिन ऐसे में फ्रेंचाइजी लगभग पचास दिन चलने वाली इस लीग में नेट बॉलर्स के तौर पर लोकल बॉलर्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी। अब वह अपने साथ नेट बॉलर्स के तौर पर युवाओं को लेकर जाना चाहते हैं। सामने आई खबर के मुताबिक बंगाल के आकाशदीप व सयान घोष की पेस जोड़ी यूएई जाएगी। लगभग पचास दिनों तक चलने वाली लीग में नेट बॉलर बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं। आकाश दीप और सयान घोष की बंगाल पेस जोड़ी आईपीएल दो हज़ार बीस के लिए नेट गेंदबाजों के रूप में क्रमशः राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब टीम का हिस्सा होगी। सीएबी प्रेसिडेंट अविषेक डालमिया ने इस बात पर खुशी जताते हुए कहा, "हम खुश हैं कि फ्रेंचाइजी ने दो युवा खिलाड़ियों में रुचि दिखाई है। पिछले कुछ दिनों के दौरान चर्चा चल रही थी और उन्होंने आज इसकी पुष्टि की है। वे स्क्वाड गेंदबाजों के रूप में शामिल होंगे, दोनों को उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं। सीएबी के सचिव स्नेहाशीष गांगुली ने कहा, बंगाल के युवा गेंदबाज आकाश दीप अब यूएई के लिए उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दोनों खिलाड़ी इस अवसर को लेकर काफी उत्साहित हैं। आकाश दीप ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, सयान घोष ने कहा, "यह मेरे लिए एक महान अवसर है और मैं जो अनुभव हासिल करूंगा वह भविष्य में बंगाल की मदद करेगा। यह हमारे घरों में तालाबंदी होने से एक वेलकमिंग ब्रेक है। मैं क्रिकेट खेल सकता हूं और जो एक बड़ी प्रेरणा है। कोरोना वायरस के चलते लंबे वक्त से स्थगित चल रहे आईपीएल दो हज़ार बीस का आयोजन अब उन्नीस सितंबर से यूएई में कराया जाएगा। बोर्ड ने खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम तैयार किए हैं, जिसका सभी को सख्ती से पालन भी करना होगा। लीग के आयोजन की खबर ने फैंस व क्रिकेटर्स सभी को खुश कर दिया है। अब बीस अगस्त के बाद सभी टीमें यूएई के लिए रवाना होंगी।
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Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : टाटा वर्कर्स यूनियन की कमिटी मेंबरों की बैठक बुधवार को माइकल जॉन सभागार में हुई. इसमें कर्मचारियों के ग्रेड और प्रमोशन का मुद्दा उठा. बैठक में सबसे पहले पिछले दिनो दिवंगत हुए कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद अप्रैल में सेवानिवृत हुए तीन कर्मचारियों को सम्मानित किया गया. उसके बाद महामंत्री सतीश सिंह ने पूर्व की बैठक के निर्णयों को कमिटी मेंबरों के समक्ष रखा. कोषाध्यक्ष ने आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया. सबसे पहले अरविंद पांडे ने अपनी बातें रखी. इसके बाद एचआरएम के उदय कुमार ने कहा कि कांट्रेक्टर सेल में 15 साल से ज्यादा समय से लोग काम कर रहे हैं, पर ईएसएफ में हैं, जो उचित नहीं है. ऑफिस में काम करने वाले ऑफिस एसोसिएट का प्रमोशन एनएस 6 के बाद हमेशा के लिए बंद हो जाता है. इस मुद्दे पर प्रबंधन से बात करने की जरूरत है. कोक प्लांट के कमिटी मेंबर आरसी झा ने कहा कि फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर बहाली के विषय में सितम्बर में हुई पिछली बैठक में भी उठाया था, लेकिन कोई स्पष्ट जबाब नहीं मिला. इसके साथ नई बनी कंपनियों में बहाली के संबंध में भी कोई जानकारी यूनियन के पदाधिकारियों ने नहीं दी.
आरसी झा ने अधिकारियों की तरह कर्मचारियों के लिए भी फ्लेक्सी पंचिंग लागू किए जाने की मांग उठाई. वेज स्ट्रक्चर एक ऐसी चीज है जो हर कर्मचारी और हर कमिटी मेम्बरों को प्रभावित करता है. इस मुद्दे पर यूनियन को गंभीरता दिखानी होगी. बैठक में लगभग 60 कमिटी मेंबरों ने अपने विचार रखे. यूनियन के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों की सराहना करते हुए आगे और बेहतर करने की बात कही. अध्यक्ष संजीव चौधरी ने कहा कि कमिटी मेंबरों द्वारा एनएस ग्रेड और प्रमोशन सहित फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट जैसे उठाए गए मुद्दे पर प्रबंधन से वार्ता कर हल निकाला जाएगा, ताकि मजदूरों के हितों की रक्षा हो. कई मुद्दों पर प्रबंधन से एक दौर की चर्चा भी हुई है. इसलिए आप भरोसा रखें परिणाम अच्छा ही होगा.
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Jamshedpur : टाटा वर्कर्स यूनियन की कमिटी मेंबरों की बैठक बुधवार को माइकल जॉन सभागार में हुई. इसमें कर्मचारियों के ग्रेड और प्रमोशन का मुद्दा उठा. बैठक में सबसे पहले पिछले दिनो दिवंगत हुए कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद अप्रैल में सेवानिवृत हुए तीन कर्मचारियों को सम्मानित किया गया. उसके बाद महामंत्री सतीश सिंह ने पूर्व की बैठक के निर्णयों को कमिटी मेंबरों के समक्ष रखा. कोषाध्यक्ष ने आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया. सबसे पहले अरविंद पांडे ने अपनी बातें रखी. इसके बाद एचआरएम के उदय कुमार ने कहा कि कांट्रेक्टर सेल में पंद्रह साल से ज्यादा समय से लोग काम कर रहे हैं, पर ईएसएफ में हैं, जो उचित नहीं है. ऑफिस में काम करने वाले ऑफिस एसोसिएट का प्रमोशन एनएस छः के बाद हमेशा के लिए बंद हो जाता है. इस मुद्दे पर प्रबंधन से बात करने की जरूरत है. कोक प्लांट के कमिटी मेंबर आरसी झा ने कहा कि फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर बहाली के विषय में सितम्बर में हुई पिछली बैठक में भी उठाया था, लेकिन कोई स्पष्ट जबाब नहीं मिला. इसके साथ नई बनी कंपनियों में बहाली के संबंध में भी कोई जानकारी यूनियन के पदाधिकारियों ने नहीं दी. आरसी झा ने अधिकारियों की तरह कर्मचारियों के लिए भी फ्लेक्सी पंचिंग लागू किए जाने की मांग उठाई. वेज स्ट्रक्चर एक ऐसी चीज है जो हर कर्मचारी और हर कमिटी मेम्बरों को प्रभावित करता है. इस मुद्दे पर यूनियन को गंभीरता दिखानी होगी. बैठक में लगभग साठ कमिटी मेंबरों ने अपने विचार रखे. यूनियन के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों की सराहना करते हुए आगे और बेहतर करने की बात कही. अध्यक्ष संजीव चौधरी ने कहा कि कमिटी मेंबरों द्वारा एनएस ग्रेड और प्रमोशन सहित फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट जैसे उठाए गए मुद्दे पर प्रबंधन से वार्ता कर हल निकाला जाएगा, ताकि मजदूरों के हितों की रक्षा हो. कई मुद्दों पर प्रबंधन से एक दौर की चर्चा भी हुई है. इसलिए आप भरोसा रखें परिणाम अच्छा ही होगा.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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नई दिल्लीः
बॉलीवुड अभिनेत्री कल्कि कोचलिन (Kalki Koechlin) बिना शादी के जल्द ही मां बनने वाली हैं. कल्कि कोचलिन (Kalki Koechlin) ने ये खुशखबरी सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए दी. तस्वीर में कल्कि (Kalki Koechlin) अपने बेबी बंप को दिखाती नजर आ रही हैं. कल्कि कोचलिन (Kalki Koechlin) ने सितंबर में अपने इजरायली ब्वॉयफ्रेंड गाय हेर्शबर्ग संग अपने रिश्ते का खुलासा सोशल मीडिया पर किया था.
इससे पहले साल 2011 में कल्कि की शादी फिल्मकार अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) के साथ हुई थी, लेकिन इसके दो साल बाद ये दोनों अलग हो गए. ऐसी ही कई एक्ट्रेसेस हैं जो शादी से पहले ही अपने मां बनने की खबरों से सुर्खियों में आ चुकी हैं. आइए जानते हैं कि कौन सी ऐसी सेलिब्रिटी हैं, जो शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हुईं.
एमी जैक्सन (Amy Jackson)
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ फिल्म में काम कर चुकी एक्ट्रेस एमी जैक्सन (Amy Jackson) ने हाल ही में बेटे को जन्म दिया है. इस बात की जानकारी एमी जैक्सन (Amy Jackson) ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए दी है. एमी (Amy Jackson) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. एमी जैक्सन (Amy Jackson) के मंगेतर का नाम George Panayiotou है.
नेहा धूपिया (Neha Dhupia)
अभिनेता अंगद बेदी से शादी करने के महज तीन महीने बाद ही नेहा धूपिया (Neha Dhupia) ने प्रेग्नेंसी की खबर का खुलासा कर दिया था. ये खुशखबरी नेहा धूपिया (Neha Dhupia) ने खुद अपने सोशल मीडिया पर तस्वीरों को शेयर करते हुए दी थी. बता दें कि नेहा धूपिया (Neha Dhupia) ने 10 मई 2018 को अचानक गुपचुप तरीके से अंगद बेदी के साथ शादी कर ली थी.
सेलिना जेटली (Celina Jaitly)
बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली (Celina Jaitly) भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने वाली सेलिब्रिटी में शुमार हैं. सेलिना जेटली (Celina Jaitly) ने बॉयफैंड पीटर हॉग से जुलाई 2011 में चुपके से शादी की और मार्च 2012 में जुड़वा बच्चे को जन्म दिया था. सेलिना (Celina Jaitly) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बिकिनी में बेबी बंप की तस्वीरें शेयर करके अपने प्रेग्नेंट होने की खबर दी थी.
कोंकणा सेन शर्मा (Konkona Sen Sharma)
बॉलीवुड में अपने अभिनय से लोहा मनवाने वाली एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा (Konkona Sen Sharma) ने लंबे वक्त तक एक्टर रणवीर शौरी (Ranvir Shorey) को डेट करने के बाद सितंबर 2010 में गुपचुप तरीके से शादी कर ली. ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि जब कोंकणा ने शादी की तो वो प्रेग्नेंट थी. कोंकणा सेन शर्मा (Konkona Sen Sharma) ने मार्च 2011 में बेटे को जन्म दिया.
अमृता अरोड़ा (Amrita Arora)
बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता अरोड़ा (Amrita Arora) की भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने की खबर मीडिया खूब छाई थीं. अमृता अरोड़ा (Amrita Arora) का बिजनेसमैन शकील लदाक के साथ अफेयर था और खबर थी कि प्रेग्नेंट होने की वजह से उन्होंने अचानक शादी कर ली.
लंबे समय से फिल्मों से गायब रहने वाली अमृता (Amrita Arora) का फिल्मी करियर तो कुछ खास नहीं रहा लेकिन साल 2004 में आई फिल्म 'गर्लफ्रेंड' ने अमृता (Amrita Arora) को एक अलग ही पहचान दी थी.
महिमा चौधरी (Mahima Chaudhry)
परदेस' (1997) फिल्म की गंगा यानि महिमा चौधरी (Mahima Chaudhry) किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. अपनी पहली फिल्म के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीतने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhry) ने अचानक शादी की खबर देखकर सबको चौंका दिया था. खबरों की मानें तो महिमा चौधरी (Mahima Chaudhry) पहले से प्रेग्नेंट थीं. साल 2006 में उन्होंने बॉबी चौधरी से शादी कर ली और कुछ ही महीनों बाद बेटी को जन्म दिया. साल 2013 में महिमा और बॉबी ने अलग होने का फैसला ले लिया. महिमा इस वक्त आर्यना नाम की बेटी की सिंगल पेरेंट हैं.
नीना गुप्ता (Neena Gupta)
बॉलीवुड अभिनेत्री नीना गुप्ता (Neena Gupta) एक ऐसा नाम जिन्होंने शादी के बिना एक बच्ची को जन्म दिया. नीना गुप्ता का अफेयर वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स (Viv Richards) के साथ था. दोनों ने कभी शादी नहीं की. बिना शादी किए बेटी मसाबा (Masaba Gupta) को जन्म देकर उन्होंने अपनी मॉर्डन सोच का परिचय भी दिया. साल 1990 में फिल्म 'वो छोकरी' के लिए नीना को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है. फिल्मों की बात करें तो नीना ने 'खलनायक', 'बाजार सीताराम' जैसी बेहतरीन हिंदी फिल्मों में काम किया. वहीं, 'गांधी' और 'इन कस्टडी' और 'कॉटन मेरी' जैसी इंटरनेशनल मूवीज में भी उन्होंने काम किया.
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नई दिल्लीः बॉलीवुड अभिनेत्री कल्कि कोचलिन बिना शादी के जल्द ही मां बनने वाली हैं. कल्कि कोचलिन ने ये खुशखबरी सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए दी. तस्वीर में कल्कि अपने बेबी बंप को दिखाती नजर आ रही हैं. कल्कि कोचलिन ने सितंबर में अपने इजरायली ब्वॉयफ्रेंड गाय हेर्शबर्ग संग अपने रिश्ते का खुलासा सोशल मीडिया पर किया था. इससे पहले साल दो हज़ार ग्यारह में कल्कि की शादी फिल्मकार अनुराग कश्यप के साथ हुई थी, लेकिन इसके दो साल बाद ये दोनों अलग हो गए. ऐसी ही कई एक्ट्रेसेस हैं जो शादी से पहले ही अपने मां बनने की खबरों से सुर्खियों में आ चुकी हैं. आइए जानते हैं कि कौन सी ऐसी सेलिब्रिटी हैं, जो शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हुईं. एमी जैक्सन बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार के साथ फिल्म में काम कर चुकी एक्ट्रेस एमी जैक्सन ने हाल ही में बेटे को जन्म दिया है. इस बात की जानकारी एमी जैक्सन ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए दी है. एमी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. एमी जैक्सन के मंगेतर का नाम George Panayiotou है. नेहा धूपिया अभिनेता अंगद बेदी से शादी करने के महज तीन महीने बाद ही नेहा धूपिया ने प्रेग्नेंसी की खबर का खुलासा कर दिया था. ये खुशखबरी नेहा धूपिया ने खुद अपने सोशल मीडिया पर तस्वीरों को शेयर करते हुए दी थी. बता दें कि नेहा धूपिया ने दस मई दो हज़ार अट्ठारह को अचानक गुपचुप तरीके से अंगद बेदी के साथ शादी कर ली थी. सेलिना जेटली बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने वाली सेलिब्रिटी में शुमार हैं. सेलिना जेटली ने बॉयफैंड पीटर हॉग से जुलाई दो हज़ार ग्यारह में चुपके से शादी की और मार्च दो हज़ार बारह में जुड़वा बच्चे को जन्म दिया था. सेलिना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बिकिनी में बेबी बंप की तस्वीरें शेयर करके अपने प्रेग्नेंट होने की खबर दी थी. कोंकणा सेन शर्मा बॉलीवुड में अपने अभिनय से लोहा मनवाने वाली एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा ने लंबे वक्त तक एक्टर रणवीर शौरी को डेट करने के बाद सितंबर दो हज़ार दस में गुपचुप तरीके से शादी कर ली. ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि जब कोंकणा ने शादी की तो वो प्रेग्नेंट थी. कोंकणा सेन शर्मा ने मार्च दो हज़ार ग्यारह में बेटे को जन्म दिया. अमृता अरोड़ा बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता अरोड़ा की भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने की खबर मीडिया खूब छाई थीं. अमृता अरोड़ा का बिजनेसमैन शकील लदाक के साथ अफेयर था और खबर थी कि प्रेग्नेंट होने की वजह से उन्होंने अचानक शादी कर ली. लंबे समय से फिल्मों से गायब रहने वाली अमृता का फिल्मी करियर तो कुछ खास नहीं रहा लेकिन साल दो हज़ार चार में आई फिल्म 'गर्लफ्रेंड' ने अमृता को एक अलग ही पहचान दी थी. महिमा चौधरी परदेस' फिल्म की गंगा यानि महिमा चौधरी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. अपनी पहली फिल्म के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीतने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी ने अचानक शादी की खबर देखकर सबको चौंका दिया था. खबरों की मानें तो महिमा चौधरी पहले से प्रेग्नेंट थीं. साल दो हज़ार छः में उन्होंने बॉबी चौधरी से शादी कर ली और कुछ ही महीनों बाद बेटी को जन्म दिया. साल दो हज़ार तेरह में महिमा और बॉबी ने अलग होने का फैसला ले लिया. महिमा इस वक्त आर्यना नाम की बेटी की सिंगल पेरेंट हैं. नीना गुप्ता बॉलीवुड अभिनेत्री नीना गुप्ता एक ऐसा नाम जिन्होंने शादी के बिना एक बच्ची को जन्म दिया. नीना गुप्ता का अफेयर वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ था. दोनों ने कभी शादी नहीं की. बिना शादी किए बेटी मसाबा को जन्म देकर उन्होंने अपनी मॉर्डन सोच का परिचय भी दिया. साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में फिल्म 'वो छोकरी' के लिए नीना को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है. फिल्मों की बात करें तो नीना ने 'खलनायक', 'बाजार सीताराम' जैसी बेहतरीन हिंदी फिल्मों में काम किया. वहीं, 'गांधी' और 'इन कस्टडी' और 'कॉटन मेरी' जैसी इंटरनेशनल मूवीज में भी उन्होंने काम किया.
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ जो अपमानजनक बातें कही हैं, उन्हें वह भले ही दोहराते रह सकते हैं, लेकिन अडानी महाघोटाले में अपनी भूमिका पर हमारे सवालों से वह बच नहीं सकते हैं.
नई दिल्लीः कांग्रेस ने मंगलवार को 'हम अडानी के हैं कौन' शृंखला के हिस्से के रूप में अडानी समूह पर अपना हमला जारी रखते हुए पूछा कि क्या 'सर्व-शक्तिशाली' एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग के उन आरोपों की जांच करेंगी, जो ऑफशोर शेल कंपनियों द्वारा कथित तौर पर गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी से जुड़े हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवालों के एक नए सेट में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 29 जनवरी को विनोद अडानी के खिलाफ गंभीर आरोपों के जवाब में अडानी समूह ने यह कहते हुए खुद को अलग रखने की कोशिश की थी कि विनोद अडानी के पास अडानी समूह की किसी भी सूचीबद्ध संस्था या सहायक कंपनी में कोई प्रबंधकीय पद नहीं है और उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
कांग्रेस महासचिव ने बयान में कहा है कि जैसा कि हमने 19 फरवरी को 'हम अडानी के हैं कौन' प्रश्न शृंखला में उल्लेख किया था कि अडानी समूह द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों में दायर किए गए विभिन्न ज्ञापनों में कहा गया था कि 'समूह का मतलब एसबी अडानी फैमिली ट्रस्ट, अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, अडानी ट्रेडलाइन एलएलपी, गौतम अडानी, राजेश अडानी, विनोद एस. अडानी है.
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, लेकिन अब हमें पता चला है कि 18 मार्च, 2020 को अडानी समूह की ओर से अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में कहा गया है कि, 'कंपनी के प्रवर्तक विनोद एस. अडानी ने महत्वपूर्ण लाभकारी हित में परिवर्तन इस प्रकार से की सूचना दी है'.
जयराम रमेश ने कहा कि इस पत्र पर अडानी एंटरप्राइजेज के कंपनी सचिव और संयुक्त अध्यक्ष (विधि) जतिन जालूंधवाला ने हस्ताक्षर किए थे और इससे स्पष्ट होता है कि अडानी समूह के मामलों में विनोद अडानी की एक केंद्रीय भूमिका में हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये अकाट्य सबूत अंततः भारत की सर्वशक्तिशाली एजेंसियों द्वारा विनोद अडानी की विदेशी शेल कंपनियों द्वारा समक्रमिक व्यापार (राउंड ट्रिपिंग) और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच का मार्ग प्रशस्त करेंगे? अथवा आप अपने करीबी दोस्त को संरक्षण देना जारी रखेंगे और अपने बचाव में उसके द्वारा प्रस्तुत हास्यास्पद थोथी दलील को स्वीकार कर लेंगे.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि विनोद अडानी के करीबी सहयोगी जयचंद जिंगरी से जुड़े पांच निवेश फंडों ने 20,000 करोड़ रुपये के अडानी फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) में एंकर इन्वेस्टर के रूप में सब्सक्रिप्शन का 11. 3 प्रतिशत हिस्सा लिया था, जो अंततः विफल रहा.
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि सेबी इन फंडों में से कुछ की जांच कर रहा है, लेकिन हमें इस बात की चिंता है कि इन मामलों में भी जांच क्या उसी दिशा में आगे बढ़ेगी जैसे अडानी समूह की अन्य गतिविधियों की जांच आज तक कहीं पहुंच नहीं पाई है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या आप भारतीय निवेशकों और नागरिकों को आश्वस्त कर सकते हैं कि सेबी आपके दोस्तों को बचाने के लिए सांकेतिक जांच करने की बजाय ठोस कदम उठाएगा?
बता दें कि बीते फरवरी महीने में एक रिपोर्ट में गया था कि भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के सुर्खियों से दूर रहने वाले बड़े भाई विनोद अडानी की अडानी समूह की कंपनियों के विस्तार में केंद्रीय भूमिका रही है. फोर्ब्स पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उन्होंने विभिन्न ऑफशोर कंपनियों का एक कथित जाल खड़ा किया, जिनका खुलासा नियामक अधिकरणों के सामने नहीं किया.
मालूम हो कि बीते जनवरी महीने में अमेरिकी निवेश अनुसंधान फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो साल की जांच में पता चला है कि अडानी समूह दशकों से 'स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी' में शामिल रहा है.
हिंडनबर्ग को दिए विस्तृत जवाब में अडानी समूह ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह सभी कानूनों और सूचना सार्वजनिक करने संबंधी नीतियों का पालन करता है.
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ जो अपमानजनक बातें कही हैं, उन्हें वह भले ही दोहराते रह सकते हैं, लेकिन अडानी महाघोटाले में अपनी भूमिका पर हमारे सवालों से वह बच नहीं सकते हैं. नई दिल्लीः कांग्रेस ने मंगलवार को 'हम अडानी के हैं कौन' शृंखला के हिस्से के रूप में अडानी समूह पर अपना हमला जारी रखते हुए पूछा कि क्या 'सर्व-शक्तिशाली' एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग के उन आरोपों की जांच करेंगी, जो ऑफशोर शेल कंपनियों द्वारा कथित तौर पर गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी से जुड़े हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवालों के एक नए सेट में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि उनतीस जनवरी को विनोद अडानी के खिलाफ गंभीर आरोपों के जवाब में अडानी समूह ने यह कहते हुए खुद को अलग रखने की कोशिश की थी कि विनोद अडानी के पास अडानी समूह की किसी भी सूचीबद्ध संस्था या सहायक कंपनी में कोई प्रबंधकीय पद नहीं है और उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में उनकी कोई भूमिका नहीं है. कांग्रेस महासचिव ने बयान में कहा है कि जैसा कि हमने उन्नीस फरवरी को 'हम अडानी के हैं कौन' प्रश्न शृंखला में उल्लेख किया था कि अडानी समूह द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों में दायर किए गए विभिन्न ज्ञापनों में कहा गया था कि 'समूह का मतलब एसबी अडानी फैमिली ट्रस्ट, अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, अडानी ट्रेडलाइन एलएलपी, गौतम अडानी, राजेश अडानी, विनोद एस. अडानी है. कांग्रेस नेता ने आगे कहा, लेकिन अब हमें पता चला है कि अट्ठारह मार्च, दो हज़ार बीस को अडानी समूह की ओर से अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में कहा गया है कि, 'कंपनी के प्रवर्तक विनोद एस. अडानी ने महत्वपूर्ण लाभकारी हित में परिवर्तन इस प्रकार से की सूचना दी है'. जयराम रमेश ने कहा कि इस पत्र पर अडानी एंटरप्राइजेज के कंपनी सचिव और संयुक्त अध्यक्ष जतिन जालूंधवाला ने हस्ताक्षर किए थे और इससे स्पष्ट होता है कि अडानी समूह के मामलों में विनोद अडानी की एक केंद्रीय भूमिका में हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये अकाट्य सबूत अंततः भारत की सर्वशक्तिशाली एजेंसियों द्वारा विनोद अडानी की विदेशी शेल कंपनियों द्वारा समक्रमिक व्यापार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच का मार्ग प्रशस्त करेंगे? अथवा आप अपने करीबी दोस्त को संरक्षण देना जारी रखेंगे और अपने बचाव में उसके द्वारा प्रस्तुत हास्यास्पद थोथी दलील को स्वीकार कर लेंगे. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि विनोद अडानी के करीबी सहयोगी जयचंद जिंगरी से जुड़े पांच निवेश फंडों ने बीस,शून्य करोड़ रुपये के अडानी फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर में एंकर इन्वेस्टर के रूप में सब्सक्रिप्शन का ग्यारह. तीन प्रतिशत हिस्सा लिया था, जो अंततः विफल रहा. उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि सेबी इन फंडों में से कुछ की जांच कर रहा है, लेकिन हमें इस बात की चिंता है कि इन मामलों में भी जांच क्या उसी दिशा में आगे बढ़ेगी जैसे अडानी समूह की अन्य गतिविधियों की जांच आज तक कहीं पहुंच नहीं पाई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या आप भारतीय निवेशकों और नागरिकों को आश्वस्त कर सकते हैं कि सेबी आपके दोस्तों को बचाने के लिए सांकेतिक जांच करने की बजाय ठोस कदम उठाएगा? बता दें कि बीते फरवरी महीने में एक रिपोर्ट में गया था कि भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के सुर्खियों से दूर रहने वाले बड़े भाई विनोद अडानी की अडानी समूह की कंपनियों के विस्तार में केंद्रीय भूमिका रही है. फोर्ब्स पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उन्होंने विभिन्न ऑफशोर कंपनियों का एक कथित जाल खड़ा किया, जिनका खुलासा नियामक अधिकरणों के सामने नहीं किया. मालूम हो कि बीते जनवरी महीने में अमेरिकी निवेश अनुसंधान फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो साल की जांच में पता चला है कि अडानी समूह दशकों से 'स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी' में शामिल रहा है. हिंडनबर्ग को दिए विस्तृत जवाब में अडानी समूह ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह सभी कानूनों और सूचना सार्वजनिक करने संबंधी नीतियों का पालन करता है.
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भारतीय टीम (Indian Team) के हेड कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) लीसेस्टरशायर में टीम इंडिया के साथ जुड़ गए। भारतीय टीम वहां वॉर्म अप मैच खेलने के लिए गई हुई है। द्रविड़ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ थे और वे देरी से इंग्लैंड गए हैं।
लीसेस्टरशायर में दूसरे अभ्यास सेशन में द्रविड़ खिलाड़ियों के साथ दिखे। उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत भी की। वह मैदान पर दिखे। द्रविड़ की कोचिंग में यह टीम इंडिया का दूसरा विदेशी दौरा होगा। पहली बार भारतीय टीम उनकी कोचिंग में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई थी।
राहुल द्रविड़ के आने से पहले भारतीय टीम की कोचिंग पारस महाम्ब्रे और विक्रम राठौर देख रहे थे। पहले सेशन के लिए इन दोनों ने टीम के साथ मिलकर काम किया। टीम इंडिया को लीसेस्टरशायर के खिलाफ एक अभ्यास मैच भी खेलना है। टेस्ट मैच से पहले टीम की तैयारी के लिए यह आवश्यक है।
भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी सोमवार को ही इंग्लैंड पहुंचे हैं। उनमें श्रेयस अय्यर और ऋषभ पन्त का नाम है। उनके साथ राहुल द्रविड़ भी टीम के साथ गए हैं। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा भी भारतीय टीम में शामिल हो गए हैं। टीम इंडिया के लिए वह पहली बार विदेशी धरती पर कप्तानी करेंगे।
भारतीय टीम ने पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में धाकड़ प्रदर्शन किया था। टीम इंडिया ने चार में से 2 टेस्ट जीते थे और एक में पराजय का सामना किया था। एक मैच उस सीरीज से बचा हुआ है जो अब खेला जाना है। दोनों टीमों के कप्तान इस दौरान बदल गए हैं। पिछले साल इंग्लैंड के लिए कप्तानी करने वाले जो रूट का स्थान अब बेन स्टोक्स ने ले लिया है। वहीँ भारतीय टीम में विराट कोहली की जगह नए कप्तान रोहित शर्मा हैं।
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भारतीय टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ लीसेस्टरशायर में टीम इंडिया के साथ जुड़ गए। भारतीय टीम वहां वॉर्म अप मैच खेलने के लिए गई हुई है। द्रविड़ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीबीस सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ थे और वे देरी से इंग्लैंड गए हैं। लीसेस्टरशायर में दूसरे अभ्यास सेशन में द्रविड़ खिलाड़ियों के साथ दिखे। उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत भी की। वह मैदान पर दिखे। द्रविड़ की कोचिंग में यह टीम इंडिया का दूसरा विदेशी दौरा होगा। पहली बार भारतीय टीम उनकी कोचिंग में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई थी। राहुल द्रविड़ के आने से पहले भारतीय टीम की कोचिंग पारस महाम्ब्रे और विक्रम राठौर देख रहे थे। पहले सेशन के लिए इन दोनों ने टीम के साथ मिलकर काम किया। टीम इंडिया को लीसेस्टरशायर के खिलाफ एक अभ्यास मैच भी खेलना है। टेस्ट मैच से पहले टीम की तैयारी के लिए यह आवश्यक है। भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी सोमवार को ही इंग्लैंड पहुंचे हैं। उनमें श्रेयस अय्यर और ऋषभ पन्त का नाम है। उनके साथ राहुल द्रविड़ भी टीम के साथ गए हैं। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा भी भारतीय टीम में शामिल हो गए हैं। टीम इंडिया के लिए वह पहली बार विदेशी धरती पर कप्तानी करेंगे। भारतीय टीम ने पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में धाकड़ प्रदर्शन किया था। टीम इंडिया ने चार में से दो टेस्ट जीते थे और एक में पराजय का सामना किया था। एक मैच उस सीरीज से बचा हुआ है जो अब खेला जाना है। दोनों टीमों के कप्तान इस दौरान बदल गए हैं। पिछले साल इंग्लैंड के लिए कप्तानी करने वाले जो रूट का स्थान अब बेन स्टोक्स ने ले लिया है। वहीँ भारतीय टीम में विराट कोहली की जगह नए कप्तान रोहित शर्मा हैं।
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Don't Miss!
इन दिनों ऐश्वर्या राय की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। फैंस उनकी तस्वीरें देखना पसंद करते हैं। लिहाजा, आज हम ऐश की एक ऐसी फिल्म की तस्वीरें लेकर आए हैं, जो रिलीज ही नहीं हुई है। सनी देओल- ऐश्वर्या की बात करें तो आज तक ये सितारे कभी एक फिल्म में नहीं दिखे हैं। लेकिन बता दें, एक फिल्म ऐसी थी, जहां फैंस इन्हें साथ देख सकते थे।
साल 1997 में एक फिल्म बन रही 'इंडियन', जिसमें ऐश और सनी देओल थे। लेकिन फिल्म कभी रिलीज नहीं हो पाई। रिपोर्ट्स की मानें तो यह फिल्म उस वक्त की सबसे मंहगी फिल्मों में शामिल थी। फिल्म की शूटिंग भी शुरु हो चुकी थी। लेकिन एक साल की शूटिंग के बाद फिल्म बंद कर दी गई। इसके पीछे की वजह सामने नहीं आई है।
बॉलीवुड में कई बार बिग बजट की फिल्में डिब्बाबंद पड़ चुकी हैं। कोई शक नहीं कि यदि यह फिल्म रिलीज होती तो काफी चर्चा में रहती.. क्योंकि ये जोड़ी फैंस ने कभी देखी नहीं है। बहरहाल, फिल्म के सेट से ये तस्वीरें फैन ग्रूप पर वायरल रहती हैं।
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Don't Miss! इन दिनों ऐश्वर्या राय की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। फैंस उनकी तस्वीरें देखना पसंद करते हैं। लिहाजा, आज हम ऐश की एक ऐसी फिल्म की तस्वीरें लेकर आए हैं, जो रिलीज ही नहीं हुई है। सनी देओल- ऐश्वर्या की बात करें तो आज तक ये सितारे कभी एक फिल्म में नहीं दिखे हैं। लेकिन बता दें, एक फिल्म ऐसी थी, जहां फैंस इन्हें साथ देख सकते थे। साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में एक फिल्म बन रही 'इंडियन', जिसमें ऐश और सनी देओल थे। लेकिन फिल्म कभी रिलीज नहीं हो पाई। रिपोर्ट्स की मानें तो यह फिल्म उस वक्त की सबसे मंहगी फिल्मों में शामिल थी। फिल्म की शूटिंग भी शुरु हो चुकी थी। लेकिन एक साल की शूटिंग के बाद फिल्म बंद कर दी गई। इसके पीछे की वजह सामने नहीं आई है। बॉलीवुड में कई बार बिग बजट की फिल्में डिब्बाबंद पड़ चुकी हैं। कोई शक नहीं कि यदि यह फिल्म रिलीज होती तो काफी चर्चा में रहती.. क्योंकि ये जोड़ी फैंस ने कभी देखी नहीं है। बहरहाल, फिल्म के सेट से ये तस्वीरें फैन ग्रूप पर वायरल रहती हैं।
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परिवर्तन को स्वीकार कर सहसा सहस्र हिन्दुओ का परित्याग कर दिया जाय ?' इस पर मालवीयजी महाराज का गन्तहृदय उद्वेलित हो उठा और उन्होने अपने बंगले पर काशी के मूर्धन्य पण्डितों को एक सभा बुलायी और सवने एक स्वर से स्वीकार किया और व्यवस्था दी कि बलात् मुसलमान बनाये गये हिन्दुओ को वापस लेने के लिए किसी प्रकार की शुद्धि प्रक्रिया को आवश्यकता नही है - एक मात्र गगाजल और राम नाम पर्याप्त है। मालवीयजी महाराज बहुत थक गये थे, उनके मुंह के पास मैंने कान लगाया तो सुन सका- राम नाम, गंगा जल-चस" "
चार-पाच दिन मेहनत करके मालवीयजी ने एक वक्तव्य तैयार कराया । इस वक्तव्य में उन्होंने लिखा कि "धर्म परिवर्तन वन्द होना चाहिए।" "जो जबरदस्ती मुसलमान बनाये गये है और फिर हिन्दू बनना चाहते है, उन्हें फिर हिन्दू समाज में प्रवेश करने की सुविधा मिलनी चाहिए । हिन्दुओ की आत्मरक्षा का प्रवन्ध करना चाहिए।" "स्त्रयं जीवित रहना और दूसरो को जीवित रखना उसका उद्देश्य हो ।" " में अपने हिन्दू माइयो से यह नहीं कहता कि जहा मुसलमान कमजोर या कम हो, वहा वे उन पर आक्रमण करें, पर मै हिन्दुओ को यह अवश्य कह रहा हू कि जहा वे दुर्बल है वहा सवल बनें, जहा उनकी संख्या कम है, वहा वे सफलतापूर्वक अपनी रक्षा करें।" उन्होंने लिखा कि "यदि मुसलमान तथा अन्य जाति या धर्म के माननेवाले लोग हिन्दुओ के साथ शान्ति से रहना चाहते है, तो उन्हें हिन्दुओ के धर्म का आदर करना पडेगा । वे हिन्दुओ के पूजागृहो, मन्दिरो को भ्रष्ट नही कर सकेंगे, और धार्मिक स्वतन्त्रता, जीवन की पवित्रता एवं स्त्रियो के सतीत्व का उन्हें अवश्य सम्मान करना होगा ।" उनका यह भी कहना था कि "हिन्दुओ की तथा अन्य जातियो की राजनीतिक उन्नति कांग्रेस के हाथो में सुरक्षित हो सकती है । पर हिन्दुभो के विरुद्ध साम्प्रदायिक प्रश्नो पर, तथा धार्मिक, सामाजिक और सास्कृतिक उन्नति के प्रश्नो पर अन्तिम निर्णय देने का अधिकार निश्चय ही किसी हिन्दू सस्था को ही है, जो इसकी ओर से बोलने तथा कार्य के लिए प्रतिनिधित्व करती हो ।" उनकी धारणा थी कि "सामाजिक सगठन के आधार पर निर्मित अराजनीतिक संस्थाओं के अभाव ने राष्ट्रीयता के मोर्चे को दुर्बल बना दिया है"
१. महामना मालवीयजी वर्थ सैनटिनरी कोमिमोरेशन वाल्युम, पृ० २३२ ।
५७२ महामना मदन मोहन मालवीय जीवन और नेतृत्व
तथा "खुश करने की राजनीतिक नीति तथा मुस्लिम लीग की असम्भव मागो को जन्म दिया है। " वे चाहते थे कि "अत्मसम्मान और आत्मरक्षा के लिए हिन्दू स्वयंसेवको की संस्थाएं कायम की जायें । हिन्दू हिन्दुओ की रक्षा करें, और मुसलमानो के अत्याचारो का दृढता से मुकाबला करें।"
इस वक्तव्य की भाषा बहुत कडी और कडवी थी । इसमें मालवीयजी के अपने सन्तुलन और धैर्य की कमी थी । पर यह वक्तव्य मुस्लिम नेताओं की नीतिरीति तथा कलकत्ता और नोआखाली में किये गये अत्याचारों की प्रतिक्रिया थी । वक्तव्य मूलरूप से रक्षात्मक था, उसका उद्देश्य न तो हिन्दू साम्प्रदायिकता के आधार पर मुस्लिम लीग की तरह को किसी राजनीतिक संस्था को कायम करना था, और न आक्रमणशील हिन्दुत्व को प्रोत्साहित करना था। नोआखाली की प्रतिक्रिया में बिहार में उपद्रव हुए, जिनमे मुसलमानो के जान-माल की बहुत क्षति हुई। उन्हें कष्टो का सामना करना पड़ा । इन उपद्रवो के सम्बन्ध में मालवीयजी का वक्तव्य अवश्य ही महत्त्वपूर्ण होता । पर वे तो नोभाखाली से सम्बन्धित वक्तव्य देने के दो-चार दिन बाद ही इतने बीमार हो गये कि स्वस्थ चित्त से कोई काम करना उनके लिए सम्भव ही नही था । पर सन् १९२३ और सन् १९३१ में इस प्रकार के उपद्रवो के सम्बन्ध में मालवीयजी ने जो कहा था उससे यह स्पष्ट है कि बिहार की घटनाओ ने उन्हें बहुत दुखी किया होगा। अप्रैल सन् १९२३ में उन्होने कहा था - " हिन्दू बलवान् होकर मुसलमानो को तकलीफ दें, ऐसी मेरी स्वप्न में कल्पना नही है ।" उन्होने यह भी कहा था कि " अगर कोई हिन्दू किसी मुसलमान को मुसलमान होने के कारण हानि पहुँचावे, और कोई मुसलमान किसी हिन्दू को हिन्दू होने के कारण दु ख दे, तो हमारी गणना संसार की सम्य जातियों में कभी नही हो सकती ।" अगस्त सन् १९२३ में उन्होने हिन्दू महासभा के अधिवेशन में कहा था - "अपना आचरण ऐसा बना लो कि किसी मुसलमान या किसी ईसाई को बेजा शिकायत न हो।" सन् १९३१ में उन्होने कहा थाः "मैं मनुष्यत्व के सामने जांत पाँत नही मानता । हिन्दू और मुसलमान, इन दोनो में जब तक प्रेम-भाव उत्पन्न नही होगा, तब तक किसी का कल्याण नहीं होगा।
वक्तव्य के तीन चार दिन बाद गोपाष्टमी को संध्या समय वे ७-८ मील दूर शिवपुर गोशाला के उत्सव में गये । यह गोशाला उनके प्रयत्न और प्रेरणा
से तैयार हुई थी। उत्सव में उन्होने गोरक्षा पर छोटा-सा भाषण किया ।
विश्वविद्यालय को लौटते-लौटते काफी रात हो गयी। रास्ते में ठण्ड लग जाने से शरीर में पीड़ा हो गयी। एक दो दिन कुछ ख्याल नहीं किया। जब ज्वर का प्रकोप बहुत बढने लगा, तब आयुर्वेदिक औपधियो का प्रयोग शुरू किया। पर दशा विगडती हो गयो । देश की कारुणिक दशा की चिन्ता करते हुए वे बेहोश से हो गये और इस दशा में वे महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेते रहे । इस समय भी उनमें इतनी चेतना थी कि जब उनके दौहित्र शिवकुमार ने उन्हें पुरुषसूक्त सुनाते हुए कुछ गलती की, तब उन्होने शिवकुमार जी को रोक कर शुद्ध उच्चारण बताया। इसी तरह जव डाक्टर घाण्डेकर ने रक्त की परीक्षा के लिए रक्त लेने का प्रयत्न किया, तब यह समझ कर कि उन्हें इंजेक्शन दिया जा रहा है, सूई चुभोने से रोक दिया । जव गोविन्दजी ने बताया कि इजेक्शन नही दिया जा रहा है, रक्त निकाला जायगा, तब वे चुप हो गये । इसी तरह जब दशा इतनी बिगडी की ऊर्ध्व-श्वास चलने लगा, तब चिकित्सको ने आक्सीजन देने का निश्चय किया । मालवीयजी को यह बुरा लगा । इस पर उनकी पुत्री मालतीजी ने कहा कि आक्सीजन कोई ऐलोपैथिक दवा नही है, और यदि आप इसका प्रयोग स्वीकार करेंगे तो हम सब को सुख मिलेगा, तो वे राजी हो गये । उर्ध्व - श्वास का प्रकोप बढता गया । ज्वर भी १०५६ डिग्री हो गया । उर्ध्व-श्वास तीन दिन तक चलता रहा । सहसा तापमान १०५६ पर से घट कर १०५ पर आ गया, और उनकी शान्ति गम्भीर होने लगी- श्वास की गति मन्द हो चली । वाबू पुरुषोत्तमदास टण्डन ने, जो वहाँ उस समय उपस्थित थे, कहा - "अब वे जा रहे है ।" 'हरे राम हरे राम' 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' को ध्वनि सब ने ऊँची कर दो। उन्हें शय्या पर से उठा लिया गया, भीतर चौकी पर ले जा कर रक्खा गया। उनके मुख में तुलसीदल और गंगाजल छोडा गया । वहाँ पर गोबर से लिपी भूमि पर अपनी स्वाभाविक शान्तमुद्रा में उन्होने १२ नवम्बर सन् १९४६ को प्राण छोड दिये ।
शोक और श्रद्धांजलि
मालवीयजी के निधन से हिन्दू विश्वविद्यालय के साथ-साथ सारी वाराणसी में शोक छा गया । विश्वविद्यालय दस दिन के लिए बन्द कर दिया गया। नगर को अन्य शैक्षिक संस्थाएं भी एक दिन के लिए बन्द कर दी गयी । व्यापारियो ने भी उस दिन अपना कारोवार वन्द कर दिया। शवयात्रा में विश्वविद्यालय के अध्यापको, विद्यार्थियों और कर्मचारियो के अतिरिक्त सब जाति और सम्प्रदाय के नागरिको की अपार भीड थी । कांग्रेस और हिन्दू सभा के अतिरिक्त बहुत
सम्प्रदायों के प्रतिनिधि भी उसमें शामिल थे । सड़क के दोनो ओर बहुत से नागरिक दर्शनार्थं खडे थे । जब मर्थी गुरुद्वारे के पास पहुँची, तब सिक्खों ने अपने जातीय झंडे से शव का सम्मान किया, रेशमी वस्त्र अर्पण किये और फूलो की वर्षा की । कई घटो के बाद मणिकर्णिका घाट पर विल्व- चन्दन की चिता पर उनका विधिवत् दाहसंस्कार हुआ ।
काशी में कई दिन तक जनता तथा विभिन्न संस्थाओं की ओर से शोक सभागो मे मालवीयजी को श्रद्धाञ्जलिया अर्पित की गयी। प्रयाग, लखनऊ, कानपुर तथा सुल्तानपुर, बलिया आदि युक्त प्रान्त के नगरो के अतिरिक्त बगलोर, मद्रास, पटना, मुजफ्फरपुर, लाहौर, अमृतसर, नागपुर, आदि नगरो मे भी एक दिन के लिए बाजार बन्द करके शोक सभाए की गयी । देश वे बहुत से प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मालवीयजी के निधन पर अपनी सम्वेदना के साथ उनके व्यक्तित्व और उनकी सेवाओं के सम्बन्ध में वक्तव्य प्रकाशित किये ।
उनके निधन पर गाधीजी ने जो उस समय नोआखाली के गाँवो में भ्रमण
कर रहे थे, लिखा : मालवीयजी अमर है " प्रारम्भिक योवन से लेकर परिपक्व बुढापे तक परिश्रम ने उन्हें अमर बना दिया है । वे अपने अनुयायियो के सेवक थे समझौते की भावना उनके स्वभाव का अंग था ।" उनका आन्तरिक जीवन पवित्रता का मूर्तिमान था । वे करुणा और कोमलता के निधान थे । धार्मिक ग्रन्थो का उनका ज्ञान वृहद् था । " महात्माजी ने तो सन् १९३१ में एक सदेश में लिखा थाः "आज मालवीयजी के साथ देशभक्ति में कौन मुकाबला कर सकता है । यौवन काल से प्रारम्भ करके आज तक उनकी देशभक्ति का प्रवाह अविच्छिन्न चलता आया है।"
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा "हमें अत्यन्त शोक है कि अब हम उस उज्ज्वल नक्षत्र का दर्शन नहीं कर सकेंगे जिसने हमारे जीवन में प्रकाश दिया, बालकाल से ही प्रेरणा दी तथा भारत से प्रेम करना सिखाया" "
डाक्टर राजेन्द्रप्रसाद ने लिखा "एक महान् व्यक्तित्व आज संसार से उठ गया। पंडित, मालवीयजी के काम और उनके नाम से भावी पीढी को यह प्रेरणा मिलेगी कि दृढ भक्ति से मनुष्य के लिए सव कुछ सम्भव है। मालवीयजी
१. आज १५ नवम्बर सन् १९४६ ।
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परिवर्तन को स्वीकार कर सहसा सहस्र हिन्दुओ का परित्याग कर दिया जाय ?' इस पर मालवीयजी महाराज का गन्तहृदय उद्वेलित हो उठा और उन्होने अपने बंगले पर काशी के मूर्धन्य पण्डितों को एक सभा बुलायी और सवने एक स्वर से स्वीकार किया और व्यवस्था दी कि बलात् मुसलमान बनाये गये हिन्दुओ को वापस लेने के लिए किसी प्रकार की शुद्धि प्रक्रिया को आवश्यकता नही है - एक मात्र गगाजल और राम नाम पर्याप्त है। मालवीयजी महाराज बहुत थक गये थे, उनके मुंह के पास मैंने कान लगाया तो सुन सका- राम नाम, गंगा जल-चस" " चार-पाच दिन मेहनत करके मालवीयजी ने एक वक्तव्य तैयार कराया । इस वक्तव्य में उन्होंने लिखा कि "धर्म परिवर्तन वन्द होना चाहिए।" "जो जबरदस्ती मुसलमान बनाये गये है और फिर हिन्दू बनना चाहते है, उन्हें फिर हिन्दू समाज में प्रवेश करने की सुविधा मिलनी चाहिए । हिन्दुओ की आत्मरक्षा का प्रवन्ध करना चाहिए।" "स्त्रयं जीवित रहना और दूसरो को जीवित रखना उसका उद्देश्य हो ।" " में अपने हिन्दू माइयो से यह नहीं कहता कि जहा मुसलमान कमजोर या कम हो, वहा वे उन पर आक्रमण करें, पर मै हिन्दुओ को यह अवश्य कह रहा हू कि जहा वे दुर्बल है वहा सवल बनें, जहा उनकी संख्या कम है, वहा वे सफलतापूर्वक अपनी रक्षा करें।" उन्होंने लिखा कि "यदि मुसलमान तथा अन्य जाति या धर्म के माननेवाले लोग हिन्दुओ के साथ शान्ति से रहना चाहते है, तो उन्हें हिन्दुओ के धर्म का आदर करना पडेगा । वे हिन्दुओ के पूजागृहो, मन्दिरो को भ्रष्ट नही कर सकेंगे, और धार्मिक स्वतन्त्रता, जीवन की पवित्रता एवं स्त्रियो के सतीत्व का उन्हें अवश्य सम्मान करना होगा ।" उनका यह भी कहना था कि "हिन्दुओ की तथा अन्य जातियो की राजनीतिक उन्नति कांग्रेस के हाथो में सुरक्षित हो सकती है । पर हिन्दुभो के विरुद्ध साम्प्रदायिक प्रश्नो पर, तथा धार्मिक, सामाजिक और सास्कृतिक उन्नति के प्रश्नो पर अन्तिम निर्णय देने का अधिकार निश्चय ही किसी हिन्दू सस्था को ही है, जो इसकी ओर से बोलने तथा कार्य के लिए प्रतिनिधित्व करती हो ।" उनकी धारणा थी कि "सामाजिक सगठन के आधार पर निर्मित अराजनीतिक संस्थाओं के अभाव ने राष्ट्रीयता के मोर्चे को दुर्बल बना दिया है" एक. महामना मालवीयजी वर्थ सैनटिनरी कोमिमोरेशन वाल्युम, पृशून्य दो सौ बत्तीस । पाँच सौ बहत्तर महामना मदन मोहन मालवीय जीवन और नेतृत्व तथा "खुश करने की राजनीतिक नीति तथा मुस्लिम लीग की असम्भव मागो को जन्म दिया है। " वे चाहते थे कि "अत्मसम्मान और आत्मरक्षा के लिए हिन्दू स्वयंसेवको की संस्थाएं कायम की जायें । हिन्दू हिन्दुओ की रक्षा करें, और मुसलमानो के अत्याचारो का दृढता से मुकाबला करें।" इस वक्तव्य की भाषा बहुत कडी और कडवी थी । इसमें मालवीयजी के अपने सन्तुलन और धैर्य की कमी थी । पर यह वक्तव्य मुस्लिम नेताओं की नीतिरीति तथा कलकत्ता और नोआखाली में किये गये अत्याचारों की प्रतिक्रिया थी । वक्तव्य मूलरूप से रक्षात्मक था, उसका उद्देश्य न तो हिन्दू साम्प्रदायिकता के आधार पर मुस्लिम लीग की तरह को किसी राजनीतिक संस्था को कायम करना था, और न आक्रमणशील हिन्दुत्व को प्रोत्साहित करना था। नोआखाली की प्रतिक्रिया में बिहार में उपद्रव हुए, जिनमे मुसलमानो के जान-माल की बहुत क्षति हुई। उन्हें कष्टो का सामना करना पड़ा । इन उपद्रवो के सम्बन्ध में मालवीयजी का वक्तव्य अवश्य ही महत्त्वपूर्ण होता । पर वे तो नोभाखाली से सम्बन्धित वक्तव्य देने के दो-चार दिन बाद ही इतने बीमार हो गये कि स्वस्थ चित्त से कोई काम करना उनके लिए सम्भव ही नही था । पर सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस और सन् एक हज़ार नौ सौ इकतीस में इस प्रकार के उपद्रवो के सम्बन्ध में मालवीयजी ने जो कहा था उससे यह स्पष्ट है कि बिहार की घटनाओ ने उन्हें बहुत दुखी किया होगा। अप्रैल सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस में उन्होने कहा था - " हिन्दू बलवान् होकर मुसलमानो को तकलीफ दें, ऐसी मेरी स्वप्न में कल्पना नही है ।" उन्होने यह भी कहा था कि " अगर कोई हिन्दू किसी मुसलमान को मुसलमान होने के कारण हानि पहुँचावे, और कोई मुसलमान किसी हिन्दू को हिन्दू होने के कारण दु ख दे, तो हमारी गणना संसार की सम्य जातियों में कभी नही हो सकती ।" अगस्त सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस में उन्होने हिन्दू महासभा के अधिवेशन में कहा था - "अपना आचरण ऐसा बना लो कि किसी मुसलमान या किसी ईसाई को बेजा शिकायत न हो।" सन् एक हज़ार नौ सौ इकतीस में उन्होने कहा थाः "मैं मनुष्यत्व के सामने जांत पाँत नही मानता । हिन्दू और मुसलमान, इन दोनो में जब तक प्रेम-भाव उत्पन्न नही होगा, तब तक किसी का कल्याण नहीं होगा। वक्तव्य के तीन चार दिन बाद गोपाष्टमी को संध्या समय वे सात-आठ मील दूर शिवपुर गोशाला के उत्सव में गये । यह गोशाला उनके प्रयत्न और प्रेरणा से तैयार हुई थी। उत्सव में उन्होने गोरक्षा पर छोटा-सा भाषण किया । विश्वविद्यालय को लौटते-लौटते काफी रात हो गयी। रास्ते में ठण्ड लग जाने से शरीर में पीड़ा हो गयी। एक दो दिन कुछ ख्याल नहीं किया। जब ज्वर का प्रकोप बहुत बढने लगा, तब आयुर्वेदिक औपधियो का प्रयोग शुरू किया। पर दशा विगडती हो गयो । देश की कारुणिक दशा की चिन्ता करते हुए वे बेहोश से हो गये और इस दशा में वे महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेते रहे । इस समय भी उनमें इतनी चेतना थी कि जब उनके दौहित्र शिवकुमार ने उन्हें पुरुषसूक्त सुनाते हुए कुछ गलती की, तब उन्होने शिवकुमार जी को रोक कर शुद्ध उच्चारण बताया। इसी तरह जव डाक्टर घाण्डेकर ने रक्त की परीक्षा के लिए रक्त लेने का प्रयत्न किया, तब यह समझ कर कि उन्हें इंजेक्शन दिया जा रहा है, सूई चुभोने से रोक दिया । जव गोविन्दजी ने बताया कि इजेक्शन नही दिया जा रहा है, रक्त निकाला जायगा, तब वे चुप हो गये । इसी तरह जब दशा इतनी बिगडी की ऊर्ध्व-श्वास चलने लगा, तब चिकित्सको ने आक्सीजन देने का निश्चय किया । मालवीयजी को यह बुरा लगा । इस पर उनकी पुत्री मालतीजी ने कहा कि आक्सीजन कोई ऐलोपैथिक दवा नही है, और यदि आप इसका प्रयोग स्वीकार करेंगे तो हम सब को सुख मिलेगा, तो वे राजी हो गये । उर्ध्व - श्वास का प्रकोप बढता गया । ज्वर भी एक हज़ार छप्पन डिग्री हो गया । उर्ध्व-श्वास तीन दिन तक चलता रहा । सहसा तापमान एक हज़ार छप्पन पर से घट कर एक सौ पाँच पर आ गया, और उनकी शान्ति गम्भीर होने लगी- श्वास की गति मन्द हो चली । वाबू पुरुषोत्तमदास टण्डन ने, जो वहाँ उस समय उपस्थित थे, कहा - "अब वे जा रहे है ।" 'हरे राम हरे राम' 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' को ध्वनि सब ने ऊँची कर दो। उन्हें शय्या पर से उठा लिया गया, भीतर चौकी पर ले जा कर रक्खा गया। उनके मुख में तुलसीदल और गंगाजल छोडा गया । वहाँ पर गोबर से लिपी भूमि पर अपनी स्वाभाविक शान्तमुद्रा में उन्होने बारह नवम्बर सन् एक हज़ार नौ सौ छियालीस को प्राण छोड दिये । शोक और श्रद्धांजलि मालवीयजी के निधन से हिन्दू विश्वविद्यालय के साथ-साथ सारी वाराणसी में शोक छा गया । विश्वविद्यालय दस दिन के लिए बन्द कर दिया गया। नगर को अन्य शैक्षिक संस्थाएं भी एक दिन के लिए बन्द कर दी गयी । व्यापारियो ने भी उस दिन अपना कारोवार वन्द कर दिया। शवयात्रा में विश्वविद्यालय के अध्यापको, विद्यार्थियों और कर्मचारियो के अतिरिक्त सब जाति और सम्प्रदाय के नागरिको की अपार भीड थी । कांग्रेस और हिन्दू सभा के अतिरिक्त बहुत सम्प्रदायों के प्रतिनिधि भी उसमें शामिल थे । सड़क के दोनो ओर बहुत से नागरिक दर्शनार्थं खडे थे । जब मर्थी गुरुद्वारे के पास पहुँची, तब सिक्खों ने अपने जातीय झंडे से शव का सम्मान किया, रेशमी वस्त्र अर्पण किये और फूलो की वर्षा की । कई घटो के बाद मणिकर्णिका घाट पर विल्व- चन्दन की चिता पर उनका विधिवत् दाहसंस्कार हुआ । काशी में कई दिन तक जनता तथा विभिन्न संस्थाओं की ओर से शोक सभागो मे मालवीयजी को श्रद्धाञ्जलिया अर्पित की गयी। प्रयाग, लखनऊ, कानपुर तथा सुल्तानपुर, बलिया आदि युक्त प्रान्त के नगरो के अतिरिक्त बगलोर, मद्रास, पटना, मुजफ्फरपुर, लाहौर, अमृतसर, नागपुर, आदि नगरो मे भी एक दिन के लिए बाजार बन्द करके शोक सभाए की गयी । देश वे बहुत से प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मालवीयजी के निधन पर अपनी सम्वेदना के साथ उनके व्यक्तित्व और उनकी सेवाओं के सम्बन्ध में वक्तव्य प्रकाशित किये । उनके निधन पर गाधीजी ने जो उस समय नोआखाली के गाँवो में भ्रमण कर रहे थे, लिखा : मालवीयजी अमर है " प्रारम्भिक योवन से लेकर परिपक्व बुढापे तक परिश्रम ने उन्हें अमर बना दिया है । वे अपने अनुयायियो के सेवक थे समझौते की भावना उनके स्वभाव का अंग था ।" उनका आन्तरिक जीवन पवित्रता का मूर्तिमान था । वे करुणा और कोमलता के निधान थे । धार्मिक ग्रन्थो का उनका ज्ञान वृहद् था । " महात्माजी ने तो सन् एक हज़ार नौ सौ इकतीस में एक सदेश में लिखा थाः "आज मालवीयजी के साथ देशभक्ति में कौन मुकाबला कर सकता है । यौवन काल से प्रारम्भ करके आज तक उनकी देशभक्ति का प्रवाह अविच्छिन्न चलता आया है।" पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा "हमें अत्यन्त शोक है कि अब हम उस उज्ज्वल नक्षत्र का दर्शन नहीं कर सकेंगे जिसने हमारे जीवन में प्रकाश दिया, बालकाल से ही प्रेरणा दी तथा भारत से प्रेम करना सिखाया" " डाक्टर राजेन्द्रप्रसाद ने लिखा "एक महान् व्यक्तित्व आज संसार से उठ गया। पंडित, मालवीयजी के काम और उनके नाम से भावी पीढी को यह प्रेरणा मिलेगी कि दृढ भक्ति से मनुष्य के लिए सव कुछ सम्भव है। मालवीयजी एक. आज पंद्रह नवम्बर सन् एक हज़ार नौ सौ छियालीस ।
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Dhanbad: कोल कर्मियों की समस्याओं के तत्काल निवारण के लिए सोमवार 5 दिसंबर को कोयला भवन में तीन दिवसीय कैंप का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन बीसीसी एल के सीएमडी समीरन दत्ता ने किया. पहले दिन 38 कर्मियों की समस्याएं सुनी गई, जिसमें 33 का तत्काल समाधान किया गया.
चीफ जेनरल मैनेजर ( पर्सनल) विद्युत शाह ने बताया कि पूरे कोल इंडिया में इस तरह का यह पहला आयोजना है, जिसकी शुरुआत बीसीसीएल में आज हुई है. पहले दिन चार अलग अलग एरिया के कर्मियों की समस्या सुनी गई है, शेष दो दिन में बचे एरिया को भी शामिल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य 0 विध्वंस है. साथ ही प्रबंधन और कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी जरूरी है. कार्यक्रम में सीनियर एजीएम एसएन मिश्रा, सीनियर एडवाइजर मौजूद थे.
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Dhanbad: कोल कर्मियों की समस्याओं के तत्काल निवारण के लिए सोमवार पाँच दिसंबर को कोयला भवन में तीन दिवसीय कैंप का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन बीसीसी एल के सीएमडी समीरन दत्ता ने किया. पहले दिन अड़तीस कर्मियों की समस्याएं सुनी गई, जिसमें तैंतीस का तत्काल समाधान किया गया. चीफ जेनरल मैनेजर विद्युत शाह ने बताया कि पूरे कोल इंडिया में इस तरह का यह पहला आयोजना है, जिसकी शुरुआत बीसीसीएल में आज हुई है. पहले दिन चार अलग अलग एरिया के कर्मियों की समस्या सुनी गई है, शेष दो दिन में बचे एरिया को भी शामिल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शून्य विध्वंस है. साथ ही प्रबंधन और कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी जरूरी है. कार्यक्रम में सीनियर एजीएम एसएन मिश्रा, सीनियर एडवाइजर मौजूद थे.
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भारतीय वायुसेना को आज तीन और Rafale लड़ाकू विमान मिल जाएंगे। तीनों राफेल विमान आज यानि बुधवार को फ्रांस से उड़ान भरने के बाद शाम तक अंबाला एयरबेस पर पहुंच जाएगें। इससे पहले पांच राफेल विमान 28 जुलाई को भारत पहुंचा था। इन्हें 10 सितंबर को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान ख़रीदे है।
फिलहाल, तीन नए लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के साथ ही भारत में राफेल विमानों की संख्या अब 5 से आठ हो जाएगी। राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती पहले ही की जा चुकी है। लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअव कंट्रोल ((LAC) पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच उन्हें लद्दाख में तैनात किया गया है। राफेल चलाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलटों को फ्रांस में ट्रेनिंग दी जा रही है।
बता दें कि फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation से पांच राफेल विमानों का पहला बेड़ा 28 जुलाई को भारत में पहुंचा था। जहां राफेल ने फ्रांस से उड़ान भरने के बाद संयुक्त अरब अमीरात में हाल्ट किया था, जहां उसने ईंधन भरा था। राफेल के पहले बेड़े को जब वायुसेना में शामिल किया गया था तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे गेम चेंजर करार दिया था। उनका दावा था कि राफेल के साथ वायुसेना ने टेक्नोलॉजी के स्तर पर भी अपनी बढ़त हासिल कर ली है। यह नवीनतम हथियारों और सुपीरियर सेंसर से लैस लड़ाकू विमान है।
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भारतीय वायुसेना को आज तीन और Rafale लड़ाकू विमान मिल जाएंगे। तीनों राफेल विमान आज यानि बुधवार को फ्रांस से उड़ान भरने के बाद शाम तक अंबाला एयरबेस पर पहुंच जाएगें। इससे पहले पांच राफेल विमान अट्ठाईस जुलाई को भारत पहुंचा था। इन्हें दस सितंबर को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। भारत ने फ्रांस से छत्तीस राफेल विमान ख़रीदे है। फिलहाल, तीन नए लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के साथ ही भारत में राफेल विमानों की संख्या अब पाँच से आठ हो जाएगी। राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती पहले ही की जा चुकी है। लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअव कंट्रोल पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच उन्हें लद्दाख में तैनात किया गया है। राफेल चलाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलटों को फ्रांस में ट्रेनिंग दी जा रही है। बता दें कि फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation से पांच राफेल विमानों का पहला बेड़ा अट्ठाईस जुलाई को भारत में पहुंचा था। जहां राफेल ने फ्रांस से उड़ान भरने के बाद संयुक्त अरब अमीरात में हाल्ट किया था, जहां उसने ईंधन भरा था। राफेल के पहले बेड़े को जब वायुसेना में शामिल किया गया था तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे गेम चेंजर करार दिया था। उनका दावा था कि राफेल के साथ वायुसेना ने टेक्नोलॉजी के स्तर पर भी अपनी बढ़त हासिल कर ली है। यह नवीनतम हथियारों और सुपीरियर सेंसर से लैस लड़ाकू विमान है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने एक ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि जिहाद की अवधारणा केवल इस्लाम में नहीं है, बल्कि भगवत गीता और ईसाई धर्म में भी है। उन्होंने कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन से जिहाद करने को कहा था। भाजपा ने उनके इस बयान पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पर हमला बोला है।
गुरूवार को दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई की आत्मकथा के लॉन्च के मौके पर बोलते हुए शिवराज पाटिल ने कहा, "ऐसा कहा जाता है कि इस्लाम धर्म में जिहाद की बहुत चर्चा है। इस अवधारणा का मतलब है कि अगर सही इरादे होने और सही चीजें करने के बावजूद कोई भी आपको नहीं समझ रहा तो आप बल का प्रयोग कर सकते हैं। "
पाटिल ने आगे कहा, "जिहाद केवल कुरान में नहीं है। महाभारत में गीता के एक हिस्से में श्रीकृष्ण भी अर्जुन से जिहाद की बात करते हैं। जिहाद ईसाई धर्म में भी है। ईसाइयों ने भी लिखा है कि वे सिर्फ शांति स्थापित करने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि साथ में तलवारें भी लाए हैं। यानि कि अगर सब कुछ समझाने के बाद कोई हथियार लेकर आ रहा है तो आप भाग नहीं सकते हैं। "
"हाथ में हथियार लेकर लोगों को समझाने की अवधारणा नहीं होनी चाहिए"
जिहाद की अवधारणा की आलोचना करते हुए 87 वर्षीय पाटिल ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि हाथ में हथियार लेकर लोगों को समझाने की यह अवधारणा होनी ही नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में शांति की जरूरत है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पाटिल के बयान की निंदा करते हुए कहा कि हिंदुओं के प्रति कांग्रेस की ये नफरत संयोग नहीं बल्कि वोट बैंक का प्रयोग है और गुजरात चुनाव में एक वोट बैंक का ध्रुवीकरण करने के लिए जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही हिंदू और भगवा आतंक नामक शब्द गढ़ा, राम मंदिर का विरोध किया, राम जी के अस्तित्व पर सवाल उठाए और कहा कि हिंदुस्तान ISIS के बराबर है।
कौन हैं शिवराज पाटिल?
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने एक ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि जिहाद की अवधारणा केवल इस्लाम में नहीं है, बल्कि भगवत गीता और ईसाई धर्म में भी है। उन्होंने कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन से जिहाद करने को कहा था। भाजपा ने उनके इस बयान पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पर हमला बोला है। गुरूवार को दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई की आत्मकथा के लॉन्च के मौके पर बोलते हुए शिवराज पाटिल ने कहा, "ऐसा कहा जाता है कि इस्लाम धर्म में जिहाद की बहुत चर्चा है। इस अवधारणा का मतलब है कि अगर सही इरादे होने और सही चीजें करने के बावजूद कोई भी आपको नहीं समझ रहा तो आप बल का प्रयोग कर सकते हैं। " पाटिल ने आगे कहा, "जिहाद केवल कुरान में नहीं है। महाभारत में गीता के एक हिस्से में श्रीकृष्ण भी अर्जुन से जिहाद की बात करते हैं। जिहाद ईसाई धर्म में भी है। ईसाइयों ने भी लिखा है कि वे सिर्फ शांति स्थापित करने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि साथ में तलवारें भी लाए हैं। यानि कि अगर सब कुछ समझाने के बाद कोई हथियार लेकर आ रहा है तो आप भाग नहीं सकते हैं। " "हाथ में हथियार लेकर लोगों को समझाने की अवधारणा नहीं होनी चाहिए" जिहाद की अवधारणा की आलोचना करते हुए सत्तासी वर्षीय पाटिल ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि हाथ में हथियार लेकर लोगों को समझाने की यह अवधारणा होनी ही नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में शांति की जरूरत है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पाटिल के बयान की निंदा करते हुए कहा कि हिंदुओं के प्रति कांग्रेस की ये नफरत संयोग नहीं बल्कि वोट बैंक का प्रयोग है और गुजरात चुनाव में एक वोट बैंक का ध्रुवीकरण करने के लिए जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही हिंदू और भगवा आतंक नामक शब्द गढ़ा, राम मंदिर का विरोध किया, राम जी के अस्तित्व पर सवाल उठाए और कहा कि हिंदुस्तान ISIS के बराबर है। कौन हैं शिवराज पाटिल?
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पलंग पर दो कुन्दे पड़े हैं। राजा बड़ी रानी के प्रपक्ष में पड़ गया। उसे विधास हो गया कि सचमुच ही कुदा हुए हैं। कुछ दिन तक तो उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसकी सारी आशा मिट्टी में मिल गई। धीरे-धीरे उसने मन को सहाय
बगीने में फेंके हुए उन सुन्दर बच्चों को राजमहल की एक नेक दासी ने देखा। वह उन पर्थों को अपने पर ले जाकर बड़े जतन से पालने लगी। दोनों राजकुमार उस दासी के घर में सुख से पढ़ने लगे। दासी अपनी जान लगा कर उनकी देख-माल करती थी। वे बड़े हुए। उनके रूप, गुण और शील को देखकर सब लोग अचरज में पड़ जाते थे ।
इसी तरह कुछ और चरस बीत गए। एक दिन उन राजकुमारों ने दासी से पूछा"माँ! हमारे पिताजी कहाँ हैं। सभी बच्चों के बाप पर आते हैं। अपने बच्चों के लिए बहुत-सी चीजें लाते हैं। बच्चे अपने पाप की गोद में बढ़ कर घूमते-फिरते हैं। हमारे पिताजी कहाँ गए पर क्यों नहीं आते हम उनको कप देखेंगे, माँ" दासी ने कहा- "तुम दोनों यहाँ के राजा के पुत्र
हो। तुम्हारे पिता के दो रानियाँ हैं। छोटी रानी तुम्हारी माँ है। तुम्हारी सीतली मी ने तुम दोनों के पैदा होते ही डाढ़ के कारण एक बगीने में किया दिया और राजा से कह दिया कि तुम्हारी माँ ने कड़ी के दो कुन्दे पैदा किए हैं। राजा ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया। संयोग से उस दिन में बगीने में गई और तुम लोगों को पड़े देख कर घर उठा लाई और छिपा कर पाने-पोसने लगी।" उसने सारा किस्सा उन दोनों भाइयों को कह सुनाया। सुन कर राजकुमारों ने कहा ने कहा- "बच्छा, ऐसी बात है फिर वे खेलने चले गए।
वे राजमहल के उसी बगीचे में एक जगह खेला करते थे। राजनहल की खिड़कियों से वह जगह अच्छी तरह दिखाई देती भी राजा रोज महल पर से उन्हें खेलते हुए देखता था। उनके सुन्दर प्यारे-प्यारे मुखड़े देख कर राजा के हृदय में एक हुक सी उठ जाती थी। वह सोचने लगता- ये प्यारे बच्चे न जाने किसकी आँखों के तारे हैं। जाने, उसने कौन-से पुण्य किए थे कि ऐसे पुत्र पाए मेरा तो भाग्यफूट गया। बड़ी आस लगा कर दूसरा ब्याह किया लेकिन दुर्भाग्य, उसने पैदा किए लकड़ी के कुन्दे ! जाने, लोग अपने मन में क्या सोचते होंगे।"
एक दिन राजा सबेरे-सवेरे बगीचे में टहलने गया। उस समय वे दोनों राजकुमार भी वहाँ खेल रहे थे। एक के हाथ में एक काट का हाथी था और दूसरे के हाथ में मिट्टी का एक हाथी मिट्टी के हाथी कला राजकुमार अपने हाथी को तालाब के किनारे ले गया और बोला 'हाथी मेरे पानी पी. सूड उठा कर पानी पी! दूसरे ने भी अपने हाथी से कहा- हाथी मेरे! पानी पी. डउठा कर पानी पी! राजा वहीं खड़ा खड़ा यह सप देख सुन रहा था। बच्चों के पास आकर उसने कहा- "बच्चो! कहीं मट्टी और काठ के हाथी भी पानी पीते हैं!" बचो ! जानते हो, उन दोनों लड़कों ने क्या दिया। दोनों ने एक स्पर में कहा क्यों नहीं जब यहां के राजा के घर में रानी के गर्भ से उन्हें पैदा होते हैं तो हमारे ये हाथी पानी क्यों न पिएंगे !
बच्चों के मुँह से यह बात सुन कर राजा सन्नाटे में आ गया। उनकी बातें उसके हृदय में चुम सी गई। उसने सोचादुधमुहे बच्चों को राजमहल का रहस्य कैसे मालम हुआ यह तो पाँच साल पहले की चात है। इन्हें कैसे साइम हो सकी जरूर
इसमें कोई न कोई भेद भरा है। "यह सोचकर उसने उन लड़कों से पूछा- बच्चो तुम्हारी से बड़ा अन्नरज हो रहा है। बताओ तो तुम किसके बेटे हो !" लड़कों ने कहा - इन इस देश के राजा के लड़के है। बुढ़िया ने पाल-पोस कर हमको बड़ा किया है। यह कहकर उन्होंने राजाको आमा घर भी दिखा दिया। राजा तुरन्त बुढ़िया के पास गया और सारा किस्सा मन कर अचरख में आ गया। उसने बुढ़िया को बहुत धन्यवाद दिया और बड़ी ख़ुशी से दोनों लड़कों को अपने साथ महल में ले गया।
महल में जाकर उसने तुरन्त बड़ी रानी को बुलाया और पट पर पूछा- "सन सच बोलो क्या छोटी रानी के कुन्दे ही पैदा हुए थे।" बड़ी रानी को को तो खून नहीं। उसने घर-घर काँपते अपनी कनकी और रोते हुए राजा के पैरों पर गिर पड़ी। छोटी रानी घर से निकली और सब हाल जान कर अनुरोध करने लगी कि घड़ी रानी को गाऊ कर दिया जाए। राजा ने छोटी रानी की बात मानकर बड़ी रानी को माफ कर दिया।
शुभ घड़ी देख कर राजा ने बुढ़िया और राजकुमारों को अपने महल में बुलवा लिया। दोनों बच्चों को देख कर छोटी गनी पागल हो उठी। ऑसू बहाते हुए पुलकित होकर उसने दोनों को छाती से लगा लिया। बड़ी रनी भी बदल गई और उन बच्चों को अपनी गोद में लेकर असू बहाने लगीं। सब के मन का मैल धुल गया। बच्चों को देख कर सबका दिल उमड़ पड़ा। सबों ने उस दासी को दिल से धन्यवाद दिया। राजा ने बुढ़िया को बड़े आदर के साथ राजमहल में रखा। राज भर में घर घर में दिवाली मनाई गई।
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पलंग पर दो कुन्दे पड़े हैं। राजा बड़ी रानी के प्रपक्ष में पड़ गया। उसे विधास हो गया कि सचमुच ही कुदा हुए हैं। कुछ दिन तक तो उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसकी सारी आशा मिट्टी में मिल गई। धीरे-धीरे उसने मन को सहाय बगीने में फेंके हुए उन सुन्दर बच्चों को राजमहल की एक नेक दासी ने देखा। वह उन पर्थों को अपने पर ले जाकर बड़े जतन से पालने लगी। दोनों राजकुमार उस दासी के घर में सुख से पढ़ने लगे। दासी अपनी जान लगा कर उनकी देख-माल करती थी। वे बड़े हुए। उनके रूप, गुण और शील को देखकर सब लोग अचरज में पड़ जाते थे । इसी तरह कुछ और चरस बीत गए। एक दिन उन राजकुमारों ने दासी से पूछा"माँ! हमारे पिताजी कहाँ हैं। सभी बच्चों के बाप पर आते हैं। अपने बच्चों के लिए बहुत-सी चीजें लाते हैं। बच्चे अपने पाप की गोद में बढ़ कर घूमते-फिरते हैं। हमारे पिताजी कहाँ गए पर क्यों नहीं आते हम उनको कप देखेंगे, माँ" दासी ने कहा- "तुम दोनों यहाँ के राजा के पुत्र हो। तुम्हारे पिता के दो रानियाँ हैं। छोटी रानी तुम्हारी माँ है। तुम्हारी सीतली मी ने तुम दोनों के पैदा होते ही डाढ़ के कारण एक बगीने में किया दिया और राजा से कह दिया कि तुम्हारी माँ ने कड़ी के दो कुन्दे पैदा किए हैं। राजा ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया। संयोग से उस दिन में बगीने में गई और तुम लोगों को पड़े देख कर घर उठा लाई और छिपा कर पाने-पोसने लगी।" उसने सारा किस्सा उन दोनों भाइयों को कह सुनाया। सुन कर राजकुमारों ने कहा ने कहा- "बच्छा, ऐसी बात है फिर वे खेलने चले गए। वे राजमहल के उसी बगीचे में एक जगह खेला करते थे। राजनहल की खिड़कियों से वह जगह अच्छी तरह दिखाई देती भी राजा रोज महल पर से उन्हें खेलते हुए देखता था। उनके सुन्दर प्यारे-प्यारे मुखड़े देख कर राजा के हृदय में एक हुक सी उठ जाती थी। वह सोचने लगता- ये प्यारे बच्चे न जाने किसकी आँखों के तारे हैं। जाने, उसने कौन-से पुण्य किए थे कि ऐसे पुत्र पाए मेरा तो भाग्यफूट गया। बड़ी आस लगा कर दूसरा ब्याह किया लेकिन दुर्भाग्य, उसने पैदा किए लकड़ी के कुन्दे ! जाने, लोग अपने मन में क्या सोचते होंगे।" एक दिन राजा सबेरे-सवेरे बगीचे में टहलने गया। उस समय वे दोनों राजकुमार भी वहाँ खेल रहे थे। एक के हाथ में एक काट का हाथी था और दूसरे के हाथ में मिट्टी का एक हाथी मिट्टी के हाथी कला राजकुमार अपने हाथी को तालाब के किनारे ले गया और बोला 'हाथी मेरे पानी पी. सूड उठा कर पानी पी! दूसरे ने भी अपने हाथी से कहा- हाथी मेरे! पानी पी. डउठा कर पानी पी! राजा वहीं खड़ा खड़ा यह सप देख सुन रहा था। बच्चों के पास आकर उसने कहा- "बच्चो! कहीं मट्टी और काठ के हाथी भी पानी पीते हैं!" बचो ! जानते हो, उन दोनों लड़कों ने क्या दिया। दोनों ने एक स्पर में कहा क्यों नहीं जब यहां के राजा के घर में रानी के गर्भ से उन्हें पैदा होते हैं तो हमारे ये हाथी पानी क्यों न पिएंगे ! बच्चों के मुँह से यह बात सुन कर राजा सन्नाटे में आ गया। उनकी बातें उसके हृदय में चुम सी गई। उसने सोचादुधमुहे बच्चों को राजमहल का रहस्य कैसे मालम हुआ यह तो पाँच साल पहले की चात है। इन्हें कैसे साइम हो सकी जरूर इसमें कोई न कोई भेद भरा है। "यह सोचकर उसने उन लड़कों से पूछा- बच्चो तुम्हारी से बड़ा अन्नरज हो रहा है। बताओ तो तुम किसके बेटे हो !" लड़कों ने कहा - इन इस देश के राजा के लड़के है। बुढ़िया ने पाल-पोस कर हमको बड़ा किया है। यह कहकर उन्होंने राजाको आमा घर भी दिखा दिया। राजा तुरन्त बुढ़िया के पास गया और सारा किस्सा मन कर अचरख में आ गया। उसने बुढ़िया को बहुत धन्यवाद दिया और बड़ी ख़ुशी से दोनों लड़कों को अपने साथ महल में ले गया। महल में जाकर उसने तुरन्त बड़ी रानी को बुलाया और पट पर पूछा- "सन सच बोलो क्या छोटी रानी के कुन्दे ही पैदा हुए थे।" बड़ी रानी को को तो खून नहीं। उसने घर-घर काँपते अपनी कनकी और रोते हुए राजा के पैरों पर गिर पड़ी। छोटी रानी घर से निकली और सब हाल जान कर अनुरोध करने लगी कि घड़ी रानी को गाऊ कर दिया जाए। राजा ने छोटी रानी की बात मानकर बड़ी रानी को माफ कर दिया। शुभ घड़ी देख कर राजा ने बुढ़िया और राजकुमारों को अपने महल में बुलवा लिया। दोनों बच्चों को देख कर छोटी गनी पागल हो उठी। ऑसू बहाते हुए पुलकित होकर उसने दोनों को छाती से लगा लिया। बड़ी रनी भी बदल गई और उन बच्चों को अपनी गोद में लेकर असू बहाने लगीं। सब के मन का मैल धुल गया। बच्चों को देख कर सबका दिल उमड़ पड़ा। सबों ने उस दासी को दिल से धन्यवाद दिया। राजा ने बुढ़िया को बड़े आदर के साथ राजमहल में रखा। राज भर में घर घर में दिवाली मनाई गई।
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मुनव्वर राणा ने कहा थाकि तबरेज (Tabrej Rana) ने गोली चलवाई या नहीं इस बारे में पुलिस जांच करे लेकिन आधी रात को उनके घर बिना सर्च वारंट के गुंडों जैसा व्यवहार करना एकदम गलत है.
मशहूर शायर मुनव्वर राणा के बेटे तबरेज राणा ने सरेंडर के लिए कोर्ट में अर्जी (Tabrez Rana Surrender Plea) दायर की है. तबरेज पर खुद के ऊपर फायरिंग करवाने (Firing Case) का आरोप है. मंगलवार को पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उनका गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए अर्जी दायक की थी. अब तबरेज कोर्ट में सरेंडर करना चाहते हैं.
हालांकि तबरेज के खुद पर फायरिंग मामले में अब तक रायबरेली पुलिस (UP Police) कोई सुराग नहीं जुटा सकी है. खुद पर हमला करवाने के आरोपों के बाद तबरेज राणा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. इस बीच उनके वकील ने कोर्ट में सरेंडर के लिए अर्जी दायर की है.
तबरेज पर फायरिंग के मामले में रायबरेली पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि जांच के बाद सामने आया है कि मुनव्वर राना के बेटे ने अपने चाचा और चचेरे भाइयों को फंसाने के लिए खुद पर गोली चलवाई थी. पुलिस इसे संपत्ति विवाद का मामला बता रही है. वहीं TV9 से बातचीत में मुनव्वर राना ने कहा था कि उन्हें पुलिस की जांच से आपत्ति नहीं है, वे आएं और जांच करें. लेकिन उनके साथ आतंकवादी या उग्रवादी जैसा सलूक न किया जाए.
मुनव्वर राणा ने कहा कि तबरेज ने गोली चलवाई या नहीं इस बारे में पुलिस जांच करे लेकिन आधी रात को उनके घर बिना सर्च वारंट के गुंडों जैसा व्यवहार करना, महिलाओं-बच्चों से फोन छीन कर अभद्रता करना एकदम गलत है. रायबरेली के जो लोग उन पर आरोप लगा रहे हैं वे उनके ही टुकड़ों पर पलते थे.
बतादें कि 29 जून को रायबरेली जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के त्रिपुला चौराहे के पास दिन दहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने मशहूर शायर मुन्नवर राणा के बेटे तबरेज राणा की गाड़ी पर गोली चला दी थी. दरअसल बाइक सवार लोगों ने त्रिपुला के पेट्रोल पम्प पर दो राउं फायर की थी. दोनों गोली तबरेज राणा की गाड़ी में जाकर लगी थीं. हालांकि गोली लगने के बाद दोनों ही आरोपी फरार हो गए थे.
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मुनव्वर राणा ने कहा थाकि तबरेज ने गोली चलवाई या नहीं इस बारे में पुलिस जांच करे लेकिन आधी रात को उनके घर बिना सर्च वारंट के गुंडों जैसा व्यवहार करना एकदम गलत है. मशहूर शायर मुनव्वर राणा के बेटे तबरेज राणा ने सरेंडर के लिए कोर्ट में अर्जी दायर की है. तबरेज पर खुद के ऊपर फायरिंग करवाने का आरोप है. मंगलवार को पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उनका गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए अर्जी दायक की थी. अब तबरेज कोर्ट में सरेंडर करना चाहते हैं. हालांकि तबरेज के खुद पर फायरिंग मामले में अब तक रायबरेली पुलिस कोई सुराग नहीं जुटा सकी है. खुद पर हमला करवाने के आरोपों के बाद तबरेज राणा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. इस बीच उनके वकील ने कोर्ट में सरेंडर के लिए अर्जी दायर की है. तबरेज पर फायरिंग के मामले में रायबरेली पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि जांच के बाद सामने आया है कि मुनव्वर राना के बेटे ने अपने चाचा और चचेरे भाइयों को फंसाने के लिए खुद पर गोली चलवाई थी. पुलिस इसे संपत्ति विवाद का मामला बता रही है. वहीं TVनौ से बातचीत में मुनव्वर राना ने कहा था कि उन्हें पुलिस की जांच से आपत्ति नहीं है, वे आएं और जांच करें. लेकिन उनके साथ आतंकवादी या उग्रवादी जैसा सलूक न किया जाए. मुनव्वर राणा ने कहा कि तबरेज ने गोली चलवाई या नहीं इस बारे में पुलिस जांच करे लेकिन आधी रात को उनके घर बिना सर्च वारंट के गुंडों जैसा व्यवहार करना, महिलाओं-बच्चों से फोन छीन कर अभद्रता करना एकदम गलत है. रायबरेली के जो लोग उन पर आरोप लगा रहे हैं वे उनके ही टुकड़ों पर पलते थे. बतादें कि उनतीस जून को रायबरेली जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के त्रिपुला चौराहे के पास दिन दहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने मशहूर शायर मुन्नवर राणा के बेटे तबरेज राणा की गाड़ी पर गोली चला दी थी. दरअसल बाइक सवार लोगों ने त्रिपुला के पेट्रोल पम्प पर दो राउं फायर की थी. दोनों गोली तबरेज राणा की गाड़ी में जाकर लगी थीं. हालांकि गोली लगने के बाद दोनों ही आरोपी फरार हो गए थे.
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कारण कोई कानून या सुधार चल पायेगा, इसी में लोगों को संदेह लगता है । एक सुझाव यह भी थाया कि चुनाव में मोटरों व जीवों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया जाय। यह भी कहा गया कि मतदान से पन्द्रह दिन पहिले प्रचार वंद कर दिया जाय ।
यह विचार मी व्यक्त किया गया कि खर्च की सीमा के लिये नियम बहुत कड़े हों। इस सम्बन्ध में एक जांच कमीशन की नियुक्ति का मुकाव दिया गया जो स्वयं उम्मीदवारों के क्षेत्रों पर जाकर उम्मीदवारों के साधनों तथा खर्च के बारे में जांच करे और जहां अवहेलना पाई जाय वहां उम्मीदवार को तुरन्त चुनाव के अयोग्य घोषित किया जाय तथा कठोर दंड की व्यवस्था रहे । इस सम्बन्ध में सपरिश्रम कारावास का सुझाव भी दिया गया है। यह भी कहा गया है कि चुनाव व्यय में सब प्रकार का व्यय-उम्मीदवार का व्यक्तिगत खर्च, पार्टी को सहायता और समर्थकों की मदद, सब शामिल होना चाहिये । यह सुझाव भी दिया गया कि लोकसभा में व्यय की अधिकतम मर्यादा पांच हजार और विधान सभा में दो हजार रहे और चुनाव कानून में भी इसी श्राशय के परिवर्तन किये जांय । इस पर भी जोर दिया गया कि चुनाव सम्बन्धी सरकारी नियम लचीले, अस्पष्ट या वच निकलने जैसे नहीं होने चाहियें ।
चुनाव में निष्पक्षता - चुनाव में निप्पक्षता लाने के सम्बन्ध में कहा गया कि सरकारी कर्मचारियों को चुनाव में पूर्णतया निष्पक्ष रहने की हिदायत रहे । किसी भी प्रकार के सरकारी या सार्वजनिक पद पर स्थित व्यक्ति को चुनाव में खड़े होने की इजाजत न दी जाय । इसी सम्बन्ध में यह सुझाव भी रखा गया कि ग्राम चुनाव के दो महीने पूर्व मंत्री मंडल को त्याग-पत्र देना चाहिये और नये मंत्री मण्डल की नियुक्ति चुनाव के तुरन्त बाद हो जानी चाहिए । इस अवधि में राज्यपाल शासन चलाये । यह भी सुझाया गया कि राज्यपाल राजनैतिक व्यक्ति न होकर प्रशासनिक अनुभव का व्यक्ति हो तो अधिक अच्छा रहेगा ।
वर्तमान संविधान में तथा पंचायती राज्य को संस्थाओं में तनो जगह सामान्य बहुमत ही मान्य है । सर्वसम्मति तथा सर्वानुमति की बात लोगों को भाकर्षक तथा उचित तो लगती है, पर आाज की अनेक प्रकार की व्यापक विभिन्नताओं और रस्साकशी के बीच उसकी व्यवहारिकता में मानतौर पर संदेह प्रकट किया जाता है और जब सर्वसम्मति से उतर कर लगभग सर्वानुमति की बात कही जाती है तो ७५ मा ८० प्रतिशत से फिर बहुमत में मा जाने में
अधिक कठिनाई नहीं होती और उसमें अन्तर आमतौर पर लोगों को नहीं लगता । इसमें तो सर्वानुमति या कन्सन्सस की वात लोगों को अधिक समझ में आती है। लेकिन विभिन्न स्वार्थों के टकराव जब प्रवल हों तथा सत्ता का केन्द्रीयकरण जहां जवरदस्त हो, वहां तब तक एक मत होना और भी कठिन लगता है, जब तक प्रवल नैतिकता का दबाव या महान संकट की घड़ी देश या समाज के सामने नहीं हो ।
वर्तमान प्राम- चुनाव के परिणाम स्वरूप राजस्थान में स्पष्ट बहुमत के प्रभाव में या उसकी स्पष्ट जांच किए बिना ही, अल्प मत को सरकार बनाने का मौका देना बहुत से लोगों की राय में बहुमत के निर्णय का अपमान माना गया । राजस्थान में निर्दलीय लोगों की निरर्णायक स्थिति के कारण बहुमत की स्पष्टता नहीं आ सकी, नकी, इसलिए बहुत से लोगों की यह राय भी बनी कि निर्दलीय लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देनी चाहिये और कुछ लोग इस राय के भी हुए कि इस परिस्थिति में सर्वदलीय सरकार ही राजस्थान में में उचित होगी जिसमें सभी विजयी दलों के नेता शामिल हों ।
उम्मीदवारों की योग्यता संबंधी कानून में भी परिवर्तन की मांग की गई । उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता ऊंची रखी जाय, क्षेत्र में निवास और सेवा संबंधी भी कोई योग्यता रखी जाय । यह भी कहा गया कि ७५ प्रतिशत मत प्राप्त करने वाला ही सफल माना जाय, यद्यपि इसके न प्राप्त होने पर जो संभावित परिणाम होंगे उनका निवारण किस प्रकार से हो इस पर विचार करने की तैयारी नहीं पाई गई ।
प्रत्यक्ष श्रथवा परोक्ष चुनाव- चुनाव प्रत्यक्ष हों या परोक्षइसके संबंध में दोनों प्रकार की राय प्रकट की गई । एक ओर व्यक्त किया गया कि प्रादेशिक और केन्द्रीय स्तर पर चुनाव प्रत्यक्ष होना ही उचित होगा । यदि ऐसा नहीं हो तो उम्मीदवार मतदाता मंडलों द्वारा तय किये जांय, दलों द्वारा नहीं । दल अपने उद्देश्य तथा कार्यक्रमों से जनता को शिक्षित करें । लेकिन यह प्रश्न व की ही रह गया कि दल अपने उम्मीदवार खड़े न करे तो दल के कार्यक्रम की पूर्ति की जिम्मेदारी कौन और कैसे लेगा ?
इस पर यह विचार भी व्यक्त किया गया कि चुनाव के लिये प्रत्यक्ष प्रणाली हो उचित है । व्यय चाहे कुछ अधिक हो, पर शासन चलाने वाला व्यक्ति सीघा जनता के द्वारा ही चुना जाना चाहिये । परोक्ष चुनाव में जनता की सीधी राय नहीं रहती प्रतः चुना हुआ व्यक्ति आम जनता के प्रति अपनी
सीधी जिम्मेदारी महसूस नहीं करता। यह विचार भी प्रकट किया गया कि परोक्ष चुनाव में थोड़े लोगों को भ्रष्ट करना अधिक सरल होगा, प्रतः व्यापक और प्रत्यक्ष मतदान से जनमत अधिक सही रूप से प्रकट हो सकता है।
चुनाव क्षेत्रों की मर्यादा- यह विचार भी सभी प्रोर से व्यक्त हुआ कि चुनाव क्षेत्रों को और सीमित किया जाय, क्योंकि छोटे क्षेत्रों में प्रचार भी अधिक और संपर्क भी अधिक सीघा और गहरा हो सकता है। पर विधान समाओं या लोकसभा में अधिक सदस्य जाने पर वहां के काम काज में कठिनाई आयेगी, उसका विचार इसमें संभवतः नहीं किया गया ।
तीसरे तथा चौथे ग्राम चुनावों का तुलनात्मक सर्वेक्षरण - तीसरे तथा चौथे ग्राम चुनाव के तुलनात्मक सर्वेक्षरण के प्रसंग में हमें सबसे पहिले घटनामों पर विचार करना होगा जो गत पांच वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर हुई है, क्योंकि उन्होंने ही जन मानस को इतना अधिक क्षुब्ध कर दिया जिसके कारण देश नर में कांग्रेस विरोधी हवा तेजी के साथ चल पड़ी। योजनामों को कार्यान्वित करने के लिए वित्तीय साधनों की उपलब्धि के लिये जहां कर दाता की पीठ पर करों का बोझा वढ़ता चला गया वहां दूसरी ओर अनिवार्य वस्तुओं के भाव भी निरंतर बढ़ते चले गये । इघर सेतों तथा कारखानों में उत्पादन की कमी के कारण भी चीजों के भाव वढ़े ही, साथ ही उनको सुलमता की स्थिति भी समाप्त होती चली गई । ऊंचे भावों पर भी चीजों का मिलना कठिन होता चला गया । यद्यपि इन सभी वातों के लिये प्राकृतिक परिस्थितियां भी एक हृद तक जिम्मेदार रहीं, परन्तु इन सभी वातों के लिये जनता ने सरकार तथा सत्तारूढ दल कांग्रेस को हो जिम्मेदार मानना शुरू किया और इस सब का परिणाम यह रहा कि चौथे ग्राम चुनाव में कांग्रेस विरोध तीसरे प्राम-चुनाव की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ा रहा ।
सत्तारूढ दल के प्रति विरोध - भावना -यद्यपि चौये ग्राम चुनावों के दौरान मतदाता संबंधी प्रांकड़ों का पूरा व्यौरा तो हमारे सामने नहीं है पर सत्तारूढ दल के प्रति विरोध भावना के कारण भी सभी जगह मतदाता भपेक्षाकृत अधिक संख्या में मत डालने को प्रेरित हुये । नमी क्षेत्रों में मतदान के प्रति श्रामतौर पर अच्छा उत्साह दिखाई दिया है। उम्मीदवारों तमा भ्राम जनता के बीच की दूरी भी अपेक्षाकृत कम हुई है। जहां सरकारी अधिकारियों के रवैये तथा कार्यकुशलता का प्रश्न है, यह कहना कठिन है कि पांच वर्ष के
वाद भी उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन हुआ है अथवा नहीं । इसका एक कारण यह भी है कि चाहे किसी भी पक्ष की सरकार बने, उनकी स्थिति में किसी भी प्रकार का अंतर आने वाला नहीं है। ऐसा मानकर चलने के कारण चुनावों के प्रति सरकारी कर्मचारियों के रुख में आमतौर पर कोई विशेष परि- वर्तन दिखाई नहीं दिया है । पर फिर भी ऐसे उदाहरण सुनने में आये जिनमें कुछ अधिकारियों ने एक राजनैतिक दल-खासकर सत्तारूढ दल की ओर अपना सम्मान प्रकट किया तो कुछ ने स्वतंत्र दल व जनसंघ के प्रति अपना झुकाव दिखाया ।
चुनाव के खर्चे में कमी अथवा वृद्धि का जहां तक ताल्लुक है इसमें कमी का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि सभी चीजों के भावों को गत पांच वर्षों में वृद्धि हुई है, यहां तक कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की दरें भी वढ़ी हुई सुनने में आई हैं । परन्तु इस बार विपक्षी दलों के गठबंधन के कारण चुनाव दंगल में भाग लेने वाले विरोधी दलों के उम्मीदवार अपनी जीत के बारे में विस्त नजर आते थे । वैसे कहने को तो ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार भी जिनकी जमानत जब्त होने तक में उनके सिवाय शायद ही किसी को शक हो, अपनी जीत को डींग हाकने से वाज़ नहीं आते थे । आम चुनाव में सत्य का जैसा व्यापक, व्यवस्थित और जाना वझा व्यवहार होता है, उसका दूसरा उदाहरण शायद ही मिल सके। पर जिन क्षेत्रों में कुछ जाने-माने असाधारण उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे उनमें किए जाने वाले चुनाव के खर्चे के कड़े इस जमाने में भी चौंका देने वाले माने जायेगे । यद्यपि उनके खर्चे का सही अनुमान लगाना तो आसान नहीं है पर इतना अवश्य है कि उनके खर्चे की सीमा हजारों तक ही सीमित न रहकर लाखों तक पहुँच गई है - यह बात सभी मंजूर करेंगे । चौथे ग्राम चुनाव की यह अपनी विशेषता ही मानी जायेगी ।
चुनाव प्रचार के दौरान वोलने तथा प्रकाशन के मामलों में स्तर संबंधी मर्यादाओं का पालन किस सीमा तक किया गया इसका विस्तृत उल्लेख तो चुनाव सम्बन्धी प्रकरण में किया जा चुका है, पर इस दृष्टि से पांच वर्षों में किसी प्रकार का परिवर्तन आया हो ऐसा नहीं लगता । आम लोगों में चुनाव के प्रचार के तौर-तरीके तथा वृत्तियां जैसी की तैसी रही हैं उनमें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं आया है। इतना अवश्य है कि कुछ दल पहिले से संगठित अधिक क्षमतावान वन गए हैं तो कुछ दल कमजोर भी
हुए हैं ।
समाचार पत्रों का रस - राज्य के दैनिक समाचार पत्रों में प्रयको बार कांग्रेस विरोधी रुख साफ दिखाई देता था, इसके कारण चाहे जो भी रहे हो । कांग्रेस को इस बार श्रपदस्थ करने का वातावरण बनाने में नाका मी बहुत बड़ा हाथ रहा है । बड़े से बड़े समाचार पत्रों में नो एक या दूसरे दल का तथा कुछ विशेष चुनाव क्षेत्रों में इस या उस विशिष्ट उम्मीदवार का समर्थन या विरोध करने में जैसा सातत्य और कौशल प्रकट किया गया, वह शीत युद्ध और पक्षपात का बहुत स्पष्ट और अध्ययन करने योग्य विषय है ।
मतदान के लिए निर्णय का प्राधार सामान्य मतदाता अपना मत देने से पूर्व तत्सम्बन्धी निर्णय लेते समय किन किन बातों से प्रभावित होता है यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है इसे कोई भी इन्कार नहीं कर सकता। यह कहना हो होगा कि हमारे देश के करोड़ों मतशताओं का काफी बड़ा हिस्सा प्रशिक्षित है। इस कारण इस वर्ग से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह विभिन्न दनों के आदर्शी, राजनीति तथा सिद्धान्तों का विवेचनात्मक विश्लेषण करने की स्थिति में हो । जब तक उसमें इसके लिए योग्यता और क्षमता पैदा न हो सके तव तक सामान्य भारतीय मतदाता से यह उम्मीद करना कि वह दल के प्रादर्शों के आधार पर उम्मीदवारों के सम्बन्ध में निर्णय कर सकेगा, उचित नहीं माना जा सकता । इस स्तर की योग्यता के लिए मतदाताओं का साक्षर हो जाना ही ( यद्यपि अभी तो करोड़ों मतदाता साक्षर भी नहीं है) नहीं है । आवश्यकता इस बात की है कि उनका सामान्य ज्ञान परिपक्व हो कि वे विभिन्न राजनैतिक दलों की विचारधाराश्रों के अन्तर घोर महत्व को समझ सकें और उनके कार्य से विचारों की व्यवहारिता को नाप सकें ।
इसी पृष्ठभूमि में तभी यह प्रश्न उठता है कि धाज जबकि देश में लगभग ६०-७० प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते है, सामान्य मतदाता सोच-समझ कर मत देता है प्रयवा केवल बोभा उतारने की दृष्टि से हो अपनी जिम्मेदारी पूरी करता है ? चुनाव औौर मतदान के दौरान जनमानत के इस दृष्टि से किए गए अध्ययन से सहज हो इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि मतदान के सम्बन्ध में मतदाता ने सामान्यतः उन्हीं बातों से प्रभावित होकर अपना फैसला किया है जो उम्मीदवार की योग्यता भौर क्षमता के सम्बन्ध में सही निर्णय लेने में सहायक नहीं मानी जा सकती है। उन सभी तथ्यों पर हम मागे एक एक कर विचार करें तो अधिक सही होगा ।
स्थानीय प्रमुख लोगों का प्रभाव हमारे देश में केवल कुछ अपवादों को छोड़कर सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के बारे में यह धारणा बनी हुई है
और जिसे निराधार भी नहीं माना जा सकता, कि सभी निर्वाचित होने वाले लोग पांच वर्ष में एक बार तो अपने क्षेत्र के गांव गांव में चक्कर लगाते हैं, गांव वालों के हमदर्द होने का ढिढोरा पीटते हैं, उनके दुख दर्द दूर करने के लम्बे चौड़े वादे करते हैं, उनकी शिकवा - शिकायतों को ध्यान पूर्वक सुनते हैं, पर चुने जाने के बाद गांव और मतदाताओं के पास जाना तो दूर रहा, मौके वे मौके जब कोई मतदाता इन निर्वाचित प्रतिनिधियों तक स्वयं पहुंचते हैं तब भी उनकी बात नहीं सुनते । जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा मतदाताओं के पारस्परिक सम्बन्धों और पसी विश्वास की यह स्थिति हो, वहां यह सोचना कि मतदाता अपने उम्मीदवार के सम्बन्ध में गुरगावगुरण की दृष्टि से निर्णय करता होगा, उचित नहीं माना जा सकता। असल में सामान्य मतदाता उन व्यक्तियों से प्रभावित होकर ही इस सम्बन्ध में अपना निर्णय करता है जो चुनाव प्रचार के सिलसिले में प्रमुक उम्मीदवार का पक्ष लेकर उस तक पहुंचते हैं । सामान्यतः उम्मीदवार ग्राम मतदाता तक पहुंचने के लिए उन लोगों को अपना माध्यम बनाते हैं जिनका सम्बन्धित क्षेत्र में स्थानीयता के कारण अपना प्रभाव होता है । यह लोग मतदाताओं को जिस हद तक प्रभावित कर पाते हैं, उतनी सीमा तक अमुक उम्मीदवार की जीत की संभावनायें उस क्षेत्र में वनती जाती हैं ।
दलीय प्रदर्श-जहां तक दल विशेष की प्रतिष्ठा और राजनीति सम्वन्धी तथ्यों द्वारा इस क्षेत्र में प्रभाव डालने का ताल्लुक है, यह कहना अनुपयुक्त नहीं होगा कि देश की वर्तमान समाज व्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन होने, मतदाताओं में व्यापक राजनैतिक चेतना पनपने तथा गुरगावगुण की दृष्टि से निर्णय लेने लायक वौद्धिक परिपक्वता होने तक हमें इसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी । दलीय आदर्शों तथा सिद्धान्तों के आधार पर मतदाताओं द्वारा उम्मीदवारों के सम्बन्ध में निर्णय लेने का प्रतिशत इतना कम है कि उसे नगण्य की ही संज्ञा दी जाय तो अनुचित नहीं होगा ।
उम्मीदवार से लाभ की प्राशा - यह कहना अनुचित नहीं होगा कि सामान्य मतदाता मत देने से पूर्व यह भी सोचता है कि कौनसा उम्मीदवार उसे किस हद तक लाभ पहुॅचा सकता है और इस आधार पर भी वह अपना मत देता है । इस लाभ की परिभाषा अत्यधिक व्यापक है। इसमें एक ओर जहां उम्मीदवार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता शामिल है वहां दूसरी
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कारण कोई कानून या सुधार चल पायेगा, इसी में लोगों को संदेह लगता है । एक सुझाव यह भी थाया कि चुनाव में मोटरों व जीवों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया जाय। यह भी कहा गया कि मतदान से पन्द्रह दिन पहिले प्रचार वंद कर दिया जाय । यह विचार मी व्यक्त किया गया कि खर्च की सीमा के लिये नियम बहुत कड़े हों। इस सम्बन्ध में एक जांच कमीशन की नियुक्ति का मुकाव दिया गया जो स्वयं उम्मीदवारों के क्षेत्रों पर जाकर उम्मीदवारों के साधनों तथा खर्च के बारे में जांच करे और जहां अवहेलना पाई जाय वहां उम्मीदवार को तुरन्त चुनाव के अयोग्य घोषित किया जाय तथा कठोर दंड की व्यवस्था रहे । इस सम्बन्ध में सपरिश्रम कारावास का सुझाव भी दिया गया है। यह भी कहा गया है कि चुनाव व्यय में सब प्रकार का व्यय-उम्मीदवार का व्यक्तिगत खर्च, पार्टी को सहायता और समर्थकों की मदद, सब शामिल होना चाहिये । यह सुझाव भी दिया गया कि लोकसभा में व्यय की अधिकतम मर्यादा पांच हजार और विधान सभा में दो हजार रहे और चुनाव कानून में भी इसी श्राशय के परिवर्तन किये जांय । इस पर भी जोर दिया गया कि चुनाव सम्बन्धी सरकारी नियम लचीले, अस्पष्ट या वच निकलने जैसे नहीं होने चाहियें । चुनाव में निष्पक्षता - चुनाव में निप्पक्षता लाने के सम्बन्ध में कहा गया कि सरकारी कर्मचारियों को चुनाव में पूर्णतया निष्पक्ष रहने की हिदायत रहे । किसी भी प्रकार के सरकारी या सार्वजनिक पद पर स्थित व्यक्ति को चुनाव में खड़े होने की इजाजत न दी जाय । इसी सम्बन्ध में यह सुझाव भी रखा गया कि ग्राम चुनाव के दो महीने पूर्व मंत्री मंडल को त्याग-पत्र देना चाहिये और नये मंत्री मण्डल की नियुक्ति चुनाव के तुरन्त बाद हो जानी चाहिए । इस अवधि में राज्यपाल शासन चलाये । यह भी सुझाया गया कि राज्यपाल राजनैतिक व्यक्ति न होकर प्रशासनिक अनुभव का व्यक्ति हो तो अधिक अच्छा रहेगा । वर्तमान संविधान में तथा पंचायती राज्य को संस्थाओं में तनो जगह सामान्य बहुमत ही मान्य है । सर्वसम्मति तथा सर्वानुमति की बात लोगों को भाकर्षक तथा उचित तो लगती है, पर आाज की अनेक प्रकार की व्यापक विभिन्नताओं और रस्साकशी के बीच उसकी व्यवहारिकता में मानतौर पर संदेह प्रकट किया जाता है और जब सर्वसम्मति से उतर कर लगभग सर्वानुमति की बात कही जाती है तो पचहत्तर मा अस्सी प्रतिशत से फिर बहुमत में मा जाने में अधिक कठिनाई नहीं होती और उसमें अन्तर आमतौर पर लोगों को नहीं लगता । इसमें तो सर्वानुमति या कन्सन्सस की वात लोगों को अधिक समझ में आती है। लेकिन विभिन्न स्वार्थों के टकराव जब प्रवल हों तथा सत्ता का केन्द्रीयकरण जहां जवरदस्त हो, वहां तब तक एक मत होना और भी कठिन लगता है, जब तक प्रवल नैतिकता का दबाव या महान संकट की घड़ी देश या समाज के सामने नहीं हो । वर्तमान प्राम- चुनाव के परिणाम स्वरूप राजस्थान में स्पष्ट बहुमत के प्रभाव में या उसकी स्पष्ट जांच किए बिना ही, अल्प मत को सरकार बनाने का मौका देना बहुत से लोगों की राय में बहुमत के निर्णय का अपमान माना गया । राजस्थान में निर्दलीय लोगों की निरर्णायक स्थिति के कारण बहुमत की स्पष्टता नहीं आ सकी, नकी, इसलिए बहुत से लोगों की यह राय भी बनी कि निर्दलीय लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देनी चाहिये और कुछ लोग इस राय के भी हुए कि इस परिस्थिति में सर्वदलीय सरकार ही राजस्थान में में उचित होगी जिसमें सभी विजयी दलों के नेता शामिल हों । उम्मीदवारों की योग्यता संबंधी कानून में भी परिवर्तन की मांग की गई । उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता ऊंची रखी जाय, क्षेत्र में निवास और सेवा संबंधी भी कोई योग्यता रखी जाय । यह भी कहा गया कि पचहत्तर प्रतिशत मत प्राप्त करने वाला ही सफल माना जाय, यद्यपि इसके न प्राप्त होने पर जो संभावित परिणाम होंगे उनका निवारण किस प्रकार से हो इस पर विचार करने की तैयारी नहीं पाई गई । प्रत्यक्ष श्रथवा परोक्ष चुनाव- चुनाव प्रत्यक्ष हों या परोक्षइसके संबंध में दोनों प्रकार की राय प्रकट की गई । एक ओर व्यक्त किया गया कि प्रादेशिक और केन्द्रीय स्तर पर चुनाव प्रत्यक्ष होना ही उचित होगा । यदि ऐसा नहीं हो तो उम्मीदवार मतदाता मंडलों द्वारा तय किये जांय, दलों द्वारा नहीं । दल अपने उद्देश्य तथा कार्यक्रमों से जनता को शिक्षित करें । लेकिन यह प्रश्न व की ही रह गया कि दल अपने उम्मीदवार खड़े न करे तो दल के कार्यक्रम की पूर्ति की जिम्मेदारी कौन और कैसे लेगा ? इस पर यह विचार भी व्यक्त किया गया कि चुनाव के लिये प्रत्यक्ष प्रणाली हो उचित है । व्यय चाहे कुछ अधिक हो, पर शासन चलाने वाला व्यक्ति सीघा जनता के द्वारा ही चुना जाना चाहिये । परोक्ष चुनाव में जनता की सीधी राय नहीं रहती प्रतः चुना हुआ व्यक्ति आम जनता के प्रति अपनी सीधी जिम्मेदारी महसूस नहीं करता। यह विचार भी प्रकट किया गया कि परोक्ष चुनाव में थोड़े लोगों को भ्रष्ट करना अधिक सरल होगा, प्रतः व्यापक और प्रत्यक्ष मतदान से जनमत अधिक सही रूप से प्रकट हो सकता है। चुनाव क्षेत्रों की मर्यादा- यह विचार भी सभी प्रोर से व्यक्त हुआ कि चुनाव क्षेत्रों को और सीमित किया जाय, क्योंकि छोटे क्षेत्रों में प्रचार भी अधिक और संपर्क भी अधिक सीघा और गहरा हो सकता है। पर विधान समाओं या लोकसभा में अधिक सदस्य जाने पर वहां के काम काज में कठिनाई आयेगी, उसका विचार इसमें संभवतः नहीं किया गया । तीसरे तथा चौथे ग्राम चुनावों का तुलनात्मक सर्वेक्षरण - तीसरे तथा चौथे ग्राम चुनाव के तुलनात्मक सर्वेक्षरण के प्रसंग में हमें सबसे पहिले घटनामों पर विचार करना होगा जो गत पांच वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर हुई है, क्योंकि उन्होंने ही जन मानस को इतना अधिक क्षुब्ध कर दिया जिसके कारण देश नर में कांग्रेस विरोधी हवा तेजी के साथ चल पड़ी। योजनामों को कार्यान्वित करने के लिए वित्तीय साधनों की उपलब्धि के लिये जहां कर दाता की पीठ पर करों का बोझा वढ़ता चला गया वहां दूसरी ओर अनिवार्य वस्तुओं के भाव भी निरंतर बढ़ते चले गये । इघर सेतों तथा कारखानों में उत्पादन की कमी के कारण भी चीजों के भाव वढ़े ही, साथ ही उनको सुलमता की स्थिति भी समाप्त होती चली गई । ऊंचे भावों पर भी चीजों का मिलना कठिन होता चला गया । यद्यपि इन सभी वातों के लिये प्राकृतिक परिस्थितियां भी एक हृद तक जिम्मेदार रहीं, परन्तु इन सभी वातों के लिये जनता ने सरकार तथा सत्तारूढ दल कांग्रेस को हो जिम्मेदार मानना शुरू किया और इस सब का परिणाम यह रहा कि चौथे ग्राम चुनाव में कांग्रेस विरोध तीसरे प्राम-चुनाव की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ा रहा । सत्तारूढ दल के प्रति विरोध - भावना -यद्यपि चौये ग्राम चुनावों के दौरान मतदाता संबंधी प्रांकड़ों का पूरा व्यौरा तो हमारे सामने नहीं है पर सत्तारूढ दल के प्रति विरोध भावना के कारण भी सभी जगह मतदाता भपेक्षाकृत अधिक संख्या में मत डालने को प्रेरित हुये । नमी क्षेत्रों में मतदान के प्रति श्रामतौर पर अच्छा उत्साह दिखाई दिया है। उम्मीदवारों तमा भ्राम जनता के बीच की दूरी भी अपेक्षाकृत कम हुई है। जहां सरकारी अधिकारियों के रवैये तथा कार्यकुशलता का प्रश्न है, यह कहना कठिन है कि पांच वर्ष के वाद भी उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन हुआ है अथवा नहीं । इसका एक कारण यह भी है कि चाहे किसी भी पक्ष की सरकार बने, उनकी स्थिति में किसी भी प्रकार का अंतर आने वाला नहीं है। ऐसा मानकर चलने के कारण चुनावों के प्रति सरकारी कर्मचारियों के रुख में आमतौर पर कोई विशेष परि- वर्तन दिखाई नहीं दिया है । पर फिर भी ऐसे उदाहरण सुनने में आये जिनमें कुछ अधिकारियों ने एक राजनैतिक दल-खासकर सत्तारूढ दल की ओर अपना सम्मान प्रकट किया तो कुछ ने स्वतंत्र दल व जनसंघ के प्रति अपना झुकाव दिखाया । चुनाव के खर्चे में कमी अथवा वृद्धि का जहां तक ताल्लुक है इसमें कमी का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि सभी चीजों के भावों को गत पांच वर्षों में वृद्धि हुई है, यहां तक कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की दरें भी वढ़ी हुई सुनने में आई हैं । परन्तु इस बार विपक्षी दलों के गठबंधन के कारण चुनाव दंगल में भाग लेने वाले विरोधी दलों के उम्मीदवार अपनी जीत के बारे में विस्त नजर आते थे । वैसे कहने को तो ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार भी जिनकी जमानत जब्त होने तक में उनके सिवाय शायद ही किसी को शक हो, अपनी जीत को डींग हाकने से वाज़ नहीं आते थे । आम चुनाव में सत्य का जैसा व्यापक, व्यवस्थित और जाना वझा व्यवहार होता है, उसका दूसरा उदाहरण शायद ही मिल सके। पर जिन क्षेत्रों में कुछ जाने-माने असाधारण उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे उनमें किए जाने वाले चुनाव के खर्चे के कड़े इस जमाने में भी चौंका देने वाले माने जायेगे । यद्यपि उनके खर्चे का सही अनुमान लगाना तो आसान नहीं है पर इतना अवश्य है कि उनके खर्चे की सीमा हजारों तक ही सीमित न रहकर लाखों तक पहुँच गई है - यह बात सभी मंजूर करेंगे । चौथे ग्राम चुनाव की यह अपनी विशेषता ही मानी जायेगी । चुनाव प्रचार के दौरान वोलने तथा प्रकाशन के मामलों में स्तर संबंधी मर्यादाओं का पालन किस सीमा तक किया गया इसका विस्तृत उल्लेख तो चुनाव सम्बन्धी प्रकरण में किया जा चुका है, पर इस दृष्टि से पांच वर्षों में किसी प्रकार का परिवर्तन आया हो ऐसा नहीं लगता । आम लोगों में चुनाव के प्रचार के तौर-तरीके तथा वृत्तियां जैसी की तैसी रही हैं उनमें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं आया है। इतना अवश्य है कि कुछ दल पहिले से संगठित अधिक क्षमतावान वन गए हैं तो कुछ दल कमजोर भी हुए हैं । समाचार पत्रों का रस - राज्य के दैनिक समाचार पत्रों में प्रयको बार कांग्रेस विरोधी रुख साफ दिखाई देता था, इसके कारण चाहे जो भी रहे हो । कांग्रेस को इस बार श्रपदस्थ करने का वातावरण बनाने में नाका मी बहुत बड़ा हाथ रहा है । बड़े से बड़े समाचार पत्रों में नो एक या दूसरे दल का तथा कुछ विशेष चुनाव क्षेत्रों में इस या उस विशिष्ट उम्मीदवार का समर्थन या विरोध करने में जैसा सातत्य और कौशल प्रकट किया गया, वह शीत युद्ध और पक्षपात का बहुत स्पष्ट और अध्ययन करने योग्य विषय है । मतदान के लिए निर्णय का प्राधार सामान्य मतदाता अपना मत देने से पूर्व तत्सम्बन्धी निर्णय लेते समय किन किन बातों से प्रभावित होता है यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है इसे कोई भी इन्कार नहीं कर सकता। यह कहना हो होगा कि हमारे देश के करोड़ों मतशताओं का काफी बड़ा हिस्सा प्रशिक्षित है। इस कारण इस वर्ग से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह विभिन्न दनों के आदर्शी, राजनीति तथा सिद्धान्तों का विवेचनात्मक विश्लेषण करने की स्थिति में हो । जब तक उसमें इसके लिए योग्यता और क्षमता पैदा न हो सके तव तक सामान्य भारतीय मतदाता से यह उम्मीद करना कि वह दल के प्रादर्शों के आधार पर उम्मीदवारों के सम्बन्ध में निर्णय कर सकेगा, उचित नहीं माना जा सकता । इस स्तर की योग्यता के लिए मतदाताओं का साक्षर हो जाना ही नहीं है । आवश्यकता इस बात की है कि उनका सामान्य ज्ञान परिपक्व हो कि वे विभिन्न राजनैतिक दलों की विचारधाराश्रों के अन्तर घोर महत्व को समझ सकें और उनके कार्य से विचारों की व्यवहारिता को नाप सकें । इसी पृष्ठभूमि में तभी यह प्रश्न उठता है कि धाज जबकि देश में लगभग साठ-सत्तर प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते है, सामान्य मतदाता सोच-समझ कर मत देता है प्रयवा केवल बोभा उतारने की दृष्टि से हो अपनी जिम्मेदारी पूरी करता है ? चुनाव औौर मतदान के दौरान जनमानत के इस दृष्टि से किए गए अध्ययन से सहज हो इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि मतदान के सम्बन्ध में मतदाता ने सामान्यतः उन्हीं बातों से प्रभावित होकर अपना फैसला किया है जो उम्मीदवार की योग्यता भौर क्षमता के सम्बन्ध में सही निर्णय लेने में सहायक नहीं मानी जा सकती है। उन सभी तथ्यों पर हम मागे एक एक कर विचार करें तो अधिक सही होगा । स्थानीय प्रमुख लोगों का प्रभाव हमारे देश में केवल कुछ अपवादों को छोड़कर सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के बारे में यह धारणा बनी हुई है और जिसे निराधार भी नहीं माना जा सकता, कि सभी निर्वाचित होने वाले लोग पांच वर्ष में एक बार तो अपने क्षेत्र के गांव गांव में चक्कर लगाते हैं, गांव वालों के हमदर्द होने का ढिढोरा पीटते हैं, उनके दुख दर्द दूर करने के लम्बे चौड़े वादे करते हैं, उनकी शिकवा - शिकायतों को ध्यान पूर्वक सुनते हैं, पर चुने जाने के बाद गांव और मतदाताओं के पास जाना तो दूर रहा, मौके वे मौके जब कोई मतदाता इन निर्वाचित प्रतिनिधियों तक स्वयं पहुंचते हैं तब भी उनकी बात नहीं सुनते । जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा मतदाताओं के पारस्परिक सम्बन्धों और पसी विश्वास की यह स्थिति हो, वहां यह सोचना कि मतदाता अपने उम्मीदवार के सम्बन्ध में गुरगावगुरण की दृष्टि से निर्णय करता होगा, उचित नहीं माना जा सकता। असल में सामान्य मतदाता उन व्यक्तियों से प्रभावित होकर ही इस सम्बन्ध में अपना निर्णय करता है जो चुनाव प्रचार के सिलसिले में प्रमुक उम्मीदवार का पक्ष लेकर उस तक पहुंचते हैं । सामान्यतः उम्मीदवार ग्राम मतदाता तक पहुंचने के लिए उन लोगों को अपना माध्यम बनाते हैं जिनका सम्बन्धित क्षेत्र में स्थानीयता के कारण अपना प्रभाव होता है । यह लोग मतदाताओं को जिस हद तक प्रभावित कर पाते हैं, उतनी सीमा तक अमुक उम्मीदवार की जीत की संभावनायें उस क्षेत्र में वनती जाती हैं । दलीय प्रदर्श-जहां तक दल विशेष की प्रतिष्ठा और राजनीति सम्वन्धी तथ्यों द्वारा इस क्षेत्र में प्रभाव डालने का ताल्लुक है, यह कहना अनुपयुक्त नहीं होगा कि देश की वर्तमान समाज व्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन होने, मतदाताओं में व्यापक राजनैतिक चेतना पनपने तथा गुरगावगुण की दृष्टि से निर्णय लेने लायक वौद्धिक परिपक्वता होने तक हमें इसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी । दलीय आदर्शों तथा सिद्धान्तों के आधार पर मतदाताओं द्वारा उम्मीदवारों के सम्बन्ध में निर्णय लेने का प्रतिशत इतना कम है कि उसे नगण्य की ही संज्ञा दी जाय तो अनुचित नहीं होगा । उम्मीदवार से लाभ की प्राशा - यह कहना अनुचित नहीं होगा कि सामान्य मतदाता मत देने से पूर्व यह भी सोचता है कि कौनसा उम्मीदवार उसे किस हद तक लाभ पहुॅचा सकता है और इस आधार पर भी वह अपना मत देता है । इस लाभ की परिभाषा अत्यधिक व्यापक है। इसमें एक ओर जहां उम्मीदवार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता शामिल है वहां दूसरी
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मुंबईः महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर घमासान जारी है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) चीफ राज ठाकरे के अल्टीमेटम के बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने लाउडस्पीकर पर अजान के विरोध में कुछ मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा भी चलाई है. वहीं, पुलिस ने हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले या पाठ करने का प्रयास करने वाले 250 मनसे कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया है. इन सबके बीच NCP चीफ शरद पवार ने महाविकास अघाड़ी सरकार की मीटिंग बुलाई.
शरद पवार ने यह बैठक लाउडस्पीकर विवाद को लेकर ही बुलाई है. इस मीटिंग में राज्य की कानून और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन हुआ. बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, बाला साहेब थोराट सहित कई बड़े नेता शामिल हुए. गौरतलब है कि राज ठाकरे ने उद्धव सरकार को 4 मई तक सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने कहा था कि MNS के कार्यकर्ता उन सभी स्थानों पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, जहां लाउडस्पीकर से अजान होगी.
राज ठाकरे द्वारा किए गए इस ऐलान के बाद से महाराष्ट्र पुलिस अलर्ट हो गई. पुलिस ने मस्जिदों में जाकर लाउडस्पीकरों की आवाज चेक की. कई मस्जिदों पर लाउडस्पीकर नहीं चलाया गया. वहीं, MNS कार्यकर्ताओं ने भी उस जगहों पर लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया, जहां मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान दी गई. पुलिस ने अब तक मनसे के 250 कार्यकर्ताओं को अरेस्ट भी किया है.
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मुंबईः महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर घमासान जारी है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना चीफ राज ठाकरे के अल्टीमेटम के बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने लाउडस्पीकर पर अजान के विरोध में कुछ मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा भी चलाई है. वहीं, पुलिस ने हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले या पाठ करने का प्रयास करने वाले दो सौ पचास मनसे कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया है. इन सबके बीच NCP चीफ शरद पवार ने महाविकास अघाड़ी सरकार की मीटिंग बुलाई. शरद पवार ने यह बैठक लाउडस्पीकर विवाद को लेकर ही बुलाई है. इस मीटिंग में राज्य की कानून और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन हुआ. बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, बाला साहेब थोराट सहित कई बड़े नेता शामिल हुए. गौरतलब है कि राज ठाकरे ने उद्धव सरकार को चार मई तक सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने कहा था कि MNS के कार्यकर्ता उन सभी स्थानों पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, जहां लाउडस्पीकर से अजान होगी. राज ठाकरे द्वारा किए गए इस ऐलान के बाद से महाराष्ट्र पुलिस अलर्ट हो गई. पुलिस ने मस्जिदों में जाकर लाउडस्पीकरों की आवाज चेक की. कई मस्जिदों पर लाउडस्पीकर नहीं चलाया गया. वहीं, MNS कार्यकर्ताओं ने भी उस जगहों पर लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया, जहां मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान दी गई. पुलिस ने अब तक मनसे के दो सौ पचास कार्यकर्ताओं को अरेस्ट भी किया है.
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नॉर्वे सरकार श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच शान्तिवार्ता पुनः शुरू कराने के प्रयास में लगी है.
इसी सिलसिले में नॉर्वे के विशेष दूत एरिक सोल्हेम आजकल श्रीलंका की यात्रा पर हैं.
उन्होंने बुधवार को उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप में विद्रोहियों के मुख्यालय किल्लिनोचि मे विद्रोहियों के नेता तमिलचेल्वम से मुलाक़ात की.
वे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा से भी मिलेंगे और उन्हें तमिल विद्रोहियों के साथ हुई अपनी बातचीत से अवगत कराएँगे.
सोल्हेम ने पिछ्ले दो दिनो में सरकार के शांति सचिवालय के महासचिव जयंत धनपाल से मुलाक़ात की.
उन्होंने तमिल पार्टी ईलम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ड्ग्लस देवानन्दा और श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के नेता रऊफ़ ह्कीम से भेंट की.
श्लीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच पिछले दो सालों से बातचीत बंद है.
तमिल विद्रोही ये माँग कर रहे हैं कि पूर्व और उत्तर में उनके अधीन क्षेत्र के लिये सरकार एक अंतरिम प्रशसन की स्थापना करे.
सरकार को यह माँग स्वीकार तो है पर उसका कहना है कि जब वो इस अन्तरिम प्रशासन की स्थापना करेगी उस समय विद्रोहियों को अलगाववाद की समस्या का राजनैतिक हल भी ढूँढना होगा.
मगर विद्रोहियों को ये स्वीकार नही है और वे बार-बार यही कह रहे हैं कि जब तक सरकार अंतरिम प्रशासन की स्थापना नही करती तब तक वो राजनैतिक समाधान के बारे में बात नही करेंगे.
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नॉर्वे सरकार श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच शान्तिवार्ता पुनः शुरू कराने के प्रयास में लगी है. इसी सिलसिले में नॉर्वे के विशेष दूत एरिक सोल्हेम आजकल श्रीलंका की यात्रा पर हैं. उन्होंने बुधवार को उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप में विद्रोहियों के मुख्यालय किल्लिनोचि मे विद्रोहियों के नेता तमिलचेल्वम से मुलाक़ात की. वे राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा से भी मिलेंगे और उन्हें तमिल विद्रोहियों के साथ हुई अपनी बातचीत से अवगत कराएँगे. सोल्हेम ने पिछ्ले दो दिनो में सरकार के शांति सचिवालय के महासचिव जयंत धनपाल से मुलाक़ात की. उन्होंने तमिल पार्टी ईलम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ड्ग्लस देवानन्दा और श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के नेता रऊफ़ ह्कीम से भेंट की. श्लीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच पिछले दो सालों से बातचीत बंद है. तमिल विद्रोही ये माँग कर रहे हैं कि पूर्व और उत्तर में उनके अधीन क्षेत्र के लिये सरकार एक अंतरिम प्रशसन की स्थापना करे. सरकार को यह माँग स्वीकार तो है पर उसका कहना है कि जब वो इस अन्तरिम प्रशासन की स्थापना करेगी उस समय विद्रोहियों को अलगाववाद की समस्या का राजनैतिक हल भी ढूँढना होगा. मगर विद्रोहियों को ये स्वीकार नही है और वे बार-बार यही कह रहे हैं कि जब तक सरकार अंतरिम प्रशासन की स्थापना नही करती तब तक वो राजनैतिक समाधान के बारे में बात नही करेंगे.
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Ranchi: रांची के पंडरा ओपी क्षेत्र के बजरा के रहने वाले ओम प्रकाश सिंह उर्फ विजय सिंह ने पत्नी से झगड़ा के बाद मायके जाने की वजह से फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली. उनका शव सोमवार बजरा स्थित घर से बरामद किया गया. मृतक ओम प्रकाश एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में चालक था. वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला था. बताया जा रहा है कि विजय सिंह अत्याधिक शराब का सेवन करता था. शराब पीने के बाद प्रतिदिन पत्नी से झगड़ा कर मारपीट किया करता था.
जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्ट का माल लेकर ओम प्रकाश को कहीं जाना था, लेकिन वह कंपनी पहुंचा नहीं. मालिक व अन्य कर्मी उसे लगातार फोन कर रहे थे. जवाब नहीं मिलने पर उन्हें संदेह हुआ. इसके बाद कंपनी के लोगों ने उसके भाई ललन सिंह से बात की. वह विजय के घर गया. दरवाजा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला. इसके बाद ललन ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि विजय फंदे से झूल रहा था. सूचना मिलने के बाद पंडरा ओपी की पुलिस मौके पर पहुंची. शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया. मामले में ललन के बयान पर यूडी केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
पुलिस के अनुसार विजय सिंह शराब के नशे में अक्सर पत्नी के साथ झगड़ा किया करता था. बीते शनिवार की रात भी उसने पत्नी के साथ झगड़ा किया. इस दौरान उसने पत्नी की पिटाई भी कर दी. इसके बाद रविवार को पत्नी अपने बच्चों के साथ बेड़ो स्थित मायके चली गई. इसकी जानकारी विजय को भी दी थी. मायके जाने की वजह से फोन पर विजय ने पत्नी को गाली-गलौज भी किया. शाम में वह घर पहुंचा. फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली.
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Ranchi: रांची के पंडरा ओपी क्षेत्र के बजरा के रहने वाले ओम प्रकाश सिंह उर्फ विजय सिंह ने पत्नी से झगड़ा के बाद मायके जाने की वजह से फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली. उनका शव सोमवार बजरा स्थित घर से बरामद किया गया. मृतक ओम प्रकाश एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में चालक था. वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला था. बताया जा रहा है कि विजय सिंह अत्याधिक शराब का सेवन करता था. शराब पीने के बाद प्रतिदिन पत्नी से झगड़ा कर मारपीट किया करता था. जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्ट का माल लेकर ओम प्रकाश को कहीं जाना था, लेकिन वह कंपनी पहुंचा नहीं. मालिक व अन्य कर्मी उसे लगातार फोन कर रहे थे. जवाब नहीं मिलने पर उन्हें संदेह हुआ. इसके बाद कंपनी के लोगों ने उसके भाई ललन सिंह से बात की. वह विजय के घर गया. दरवाजा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला. इसके बाद ललन ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि विजय फंदे से झूल रहा था. सूचना मिलने के बाद पंडरा ओपी की पुलिस मौके पर पहुंची. शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया. मामले में ललन के बयान पर यूडी केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. पुलिस के अनुसार विजय सिंह शराब के नशे में अक्सर पत्नी के साथ झगड़ा किया करता था. बीते शनिवार की रात भी उसने पत्नी के साथ झगड़ा किया. इस दौरान उसने पत्नी की पिटाई भी कर दी. इसके बाद रविवार को पत्नी अपने बच्चों के साथ बेड़ो स्थित मायके चली गई. इसकी जानकारी विजय को भी दी थी. मायके जाने की वजह से फोन पर विजय ने पत्नी को गाली-गलौज भी किया. शाम में वह घर पहुंचा. फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली.
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जिनमें रक्तमांस ऋषि अथवा द्रष्टा (seer ) ने अपने दर्शन से चढाया होगा । यह दर्शन भी वह होगा जो आदिम मानव को भावना के गर्भ में से श्रद्धं स्फुट होता विदित होगा, जिसके चारों ओर एक विवेक-पूर्वीय और रहस्यशील श्रावरण श्रावृत्त होगा। इन अनुष्ठानों में एक उल्लास और उमग का समावेश रहता है, एक मंगत और समृद्धि की भावना विद्यमान रहती है । इन उत्सवो मे विविध दृष्टिकोणों और साम्प्रदायिक भावनाओं का अद्भुत सम्मिश्रण मिलेगा । इनमें एक और शकटचीथ ( संकटचौथ ) गणेशपूजा से सम्बन्ध रखनेवाली होगी, तो दूसरी ओर नागपूजा होगी, श्ननन्तपूजा होगी, कही व्रत और उपवास होगे, कहीं रात्रि जागरण, कही जुआखेलना, और मदिरा सेवन तक । यही जीवन-शोधन को नयी प्रणालियां भी साथ-साथ मिलेंगी और पदार्थवादी दर्शन औौर बौद्धिकता में विश्वास, नये से नये विचारक के साथ चाय पार्टियाँ और सिनेमा-दर्शन, टेविल कुर्सी सब कुछ । अतः अहंचैतन्य के विविध स्तरों का एक ही केन्द्र पर अद्भुत समीकरण यहाँ दिखायी पड़ता है ।
लोक-साहित्य का कोटिक्रम
इस दृष्टि से लोक-जीवन की अभिव्यक्तियों का अध्ययन क्षितिजीय (horizontal ) ही नही होना चाहिए, तलगामी ( perpenticular ) भी होना चाहिये । यो जब हम देखेंगे तो लोकाभिव्यक्ति के वाणी-रूप साहित्य को क्रमशः कुछ इस कोटि-क्रम में पायेंगे । ( देखिये पृष्ठ १२ का चित्र )
१- दिवाली पर लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश यादि की पूजा को स्थान देना
तथा मंजम्पज्ञ से उनकी पूजा इसके उपलक्षण हैं ।
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जिनमें रक्तमांस ऋषि अथवा द्रष्टा ने अपने दर्शन से चढाया होगा । यह दर्शन भी वह होगा जो आदिम मानव को भावना के गर्भ में से श्रद्धं स्फुट होता विदित होगा, जिसके चारों ओर एक विवेक-पूर्वीय और रहस्यशील श्रावरण श्रावृत्त होगा। इन अनुष्ठानों में एक उल्लास और उमग का समावेश रहता है, एक मंगत और समृद्धि की भावना विद्यमान रहती है । इन उत्सवो मे विविध दृष्टिकोणों और साम्प्रदायिक भावनाओं का अद्भुत सम्मिश्रण मिलेगा । इनमें एक और शकटचीथ गणेशपूजा से सम्बन्ध रखनेवाली होगी, तो दूसरी ओर नागपूजा होगी, श्ननन्तपूजा होगी, कही व्रत और उपवास होगे, कहीं रात्रि जागरण, कही जुआखेलना, और मदिरा सेवन तक । यही जीवन-शोधन को नयी प्रणालियां भी साथ-साथ मिलेंगी और पदार्थवादी दर्शन औौर बौद्धिकता में विश्वास, नये से नये विचारक के साथ चाय पार्टियाँ और सिनेमा-दर्शन, टेविल कुर्सी सब कुछ । अतः अहंचैतन्य के विविध स्तरों का एक ही केन्द्र पर अद्भुत समीकरण यहाँ दिखायी पड़ता है । लोक-साहित्य का कोटिक्रम इस दृष्टि से लोक-जीवन की अभिव्यक्तियों का अध्ययन क्षितिजीय ही नही होना चाहिए, तलगामी भी होना चाहिये । यो जब हम देखेंगे तो लोकाभिव्यक्ति के वाणी-रूप साहित्य को क्रमशः कुछ इस कोटि-क्रम में पायेंगे । एक- दिवाली पर लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश यादि की पूजा को स्थान देना तथा मंजम्पज्ञ से उनकी पूजा इसके उपलक्षण हैं ।
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गुरू सम्मानः
सचिन आज भले ही आज इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने नाम पर 100 सेंचुरी दर्ज करा चुके हों. जिससे उनके इस प्रदर्शन को एक रिकार्ड के लिए आंका जाता हो, लेकिन क्रिकेट के मैदान से बाहर सचिन एक आम आदमी की तरह ही सोचते हैं. इतने बड़े पायदान पर पहुंचने के बाद भी वह अपने गुरूओं का सम्मान नहीं भूलें. उनके रिश्ते और उनके दिखाए रास्ते को सचिन आज भी विश्ोष मौकों पर याद करने से नहीं चूकते हैं. सचिन ने बीते साल 5 सितंबर पर शिक्षक दिवस पर अपनी व अपने गुरू की यह तस्वीर ट्वीटर पर शेयर की. जिससे साफ है कि सचिन आज भी अपने शिक्षकों से गहरा आत्िमक लगाव रखते हैं.
पर्यावरण सुरक्षाः
सचिन जितना अपनी जिंदगी में क्रिकेट के बारे में सोचते हैं उतना ही दूसरी चीजों को महत्व देते हैं. जी हां वह देश और समाज हित के लिए काम करने से भी नहीं चूकते हैं. पर्यावरण को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी मानते हैं. शायद इसीलिए वह पेड़ पौधो को भी लगाने से नहीं कतराते हैं. उनका मानना है कि पेड़ पौधों की वजह से ही हम एक स्वस्थ्य समाज में रहकर स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं और वह उनकी झुककर सेवा भी करते हैं.
धर्म कर्मः
सचिन जीवन में भगवान और आस्था को भी विशेष दर्जा देते हैं. उनका ईश्वर से गहरा लगाव है. वह खुद को धार्मिक कामों से भी जोड़े रखते हैं. सचिन के ट्वीटर एकांउट पर शेयर यह तस्वरी कुछ यही प्रमाणित करती है, जिसमें सचिन झुककर भगवान गण्ापति की पूजा कर रहे हैं. जीं हां क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन गणपतिबप्पा के आगमन पर उनका स्वागत कर रहे हैं. शायद क्रिकेट के अलावा भी सचिन की ऐसी ही कुछ बाते हैं जो उन्हें लाखों की भीड़ से अलग बनाती है.
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गुरू सम्मानः सचिन आज भले ही आज इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने नाम पर एक सौ सेंचुरी दर्ज करा चुके हों. जिससे उनके इस प्रदर्शन को एक रिकार्ड के लिए आंका जाता हो, लेकिन क्रिकेट के मैदान से बाहर सचिन एक आम आदमी की तरह ही सोचते हैं. इतने बड़े पायदान पर पहुंचने के बाद भी वह अपने गुरूओं का सम्मान नहीं भूलें. उनके रिश्ते और उनके दिखाए रास्ते को सचिन आज भी विश्ोष मौकों पर याद करने से नहीं चूकते हैं. सचिन ने बीते साल पाँच सितंबर पर शिक्षक दिवस पर अपनी व अपने गुरू की यह तस्वीर ट्वीटर पर शेयर की. जिससे साफ है कि सचिन आज भी अपने शिक्षकों से गहरा आत्िमक लगाव रखते हैं. पर्यावरण सुरक्षाः सचिन जितना अपनी जिंदगी में क्रिकेट के बारे में सोचते हैं उतना ही दूसरी चीजों को महत्व देते हैं. जी हां वह देश और समाज हित के लिए काम करने से भी नहीं चूकते हैं. पर्यावरण को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी मानते हैं. शायद इसीलिए वह पेड़ पौधो को भी लगाने से नहीं कतराते हैं. उनका मानना है कि पेड़ पौधों की वजह से ही हम एक स्वस्थ्य समाज में रहकर स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं और वह उनकी झुककर सेवा भी करते हैं. धर्म कर्मः सचिन जीवन में भगवान और आस्था को भी विशेष दर्जा देते हैं. उनका ईश्वर से गहरा लगाव है. वह खुद को धार्मिक कामों से भी जोड़े रखते हैं. सचिन के ट्वीटर एकांउट पर शेयर यह तस्वरी कुछ यही प्रमाणित करती है, जिसमें सचिन झुककर भगवान गण्ापति की पूजा कर रहे हैं. जीं हां क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन गणपतिबप्पा के आगमन पर उनका स्वागत कर रहे हैं. शायद क्रिकेट के अलावा भी सचिन की ऐसी ही कुछ बाते हैं जो उन्हें लाखों की भीड़ से अलग बनाती है.
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Don't Miss!
- Movies एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है'
महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के चीफ एक्जीक्यूटीव (टैक्टर एंड फार्म मकैनिज्म) ने बताया कि हम इस वित्तीय वर्ष के दौरान ही 6 नये ट्रैक्टर मॉडलों को पेश करेंगे। आपको बता दें कि भारतीय बाजार में टैक्टरों की मांग में भी लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। देश के किसान पौराणीक तरीके से खेती करने के बजाय आधुनिक तकनीकियों से खेती करना ज्यादा पसंद कर रहें हैं।
इस क्रम में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा किसानों को बेहतरीन टैक्टर चुनने का एक आकर्षक मौका पेश करेगा। हालांकि कंपनी ने इस बारें में कोई जानकारी साझा नहीं की है कि इस नये प्लेटफार्म पर कंपनी कितना निवेश करेगी, लेकिन एक बात कंपनी ने बताया कि कंपनी लगभग 350 करोड़ रुपये तक का निवेश करने को तैयार है। आपको बता दें कि कंपनी इस समय भारतीय बाजार में अपने उत्पादन क्षमता के साथ ही नये उत्पादों को उतारने की योजना पर ज्यादा बल दे रही है।
बीते सप्ताह ऑटोमोटिव एंड फार्म डिवीजन के हेड पवन गोयनका ने बताया कि, कंपनी आने वाले समय 2013-2015 के बीच लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। जिसमें से लगभग 7,500 करोड़ रुपये कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में और लगभग 2,500 करोड़ रुपये नये उतपादो को बाजार में पेश करने में खर्च करेगी।
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Don't Miss! - Movies एयरपोर्ट पर जाकर हसीना ने कैमरे के सामने उतारे कपड़े, फिर पैंट भी नीचे करके बोलीं- 'अब अच्छा लग रहा है' महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के चीफ एक्जीक्यूटीव ने बताया कि हम इस वित्तीय वर्ष के दौरान ही छः नये ट्रैक्टर मॉडलों को पेश करेंगे। आपको बता दें कि भारतीय बाजार में टैक्टरों की मांग में भी लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। देश के किसान पौराणीक तरीके से खेती करने के बजाय आधुनिक तकनीकियों से खेती करना ज्यादा पसंद कर रहें हैं। इस क्रम में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा किसानों को बेहतरीन टैक्टर चुनने का एक आकर्षक मौका पेश करेगा। हालांकि कंपनी ने इस बारें में कोई जानकारी साझा नहीं की है कि इस नये प्लेटफार्म पर कंपनी कितना निवेश करेगी, लेकिन एक बात कंपनी ने बताया कि कंपनी लगभग तीन सौ पचास करोड़ रुपये तक का निवेश करने को तैयार है। आपको बता दें कि कंपनी इस समय भारतीय बाजार में अपने उत्पादन क्षमता के साथ ही नये उत्पादों को उतारने की योजना पर ज्यादा बल दे रही है। बीते सप्ताह ऑटोमोटिव एंड फार्म डिवीजन के हेड पवन गोयनका ने बताया कि, कंपनी आने वाले समय दो हज़ार तेरह-दो हज़ार पंद्रह के बीच लगभग दस,शून्य करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। जिसमें से लगभग सात,पाँच सौ करोड़ रुपये कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में और लगभग दो,पाँच सौ करोड़ रुपये नये उतपादो को बाजार में पेश करने में खर्च करेगी।
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नई दिल्लीः ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल-ए-उलेमा चीफ ने एक कैंप के दौरान विवादित और रूढ़िवादी बयान दिया है. सुन्नी धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुस्लीयर ने मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन में अपने व्यक्तव्य में कहा की महिलाए सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए होती है.
यहाँ बयान देने के बाद वो यहाँ ही नहीं रुके. उनका मानना है की महिलाओ की बौद्धिक शक्ति भी पुरुषो से कम होती है. यहाँ तक की महिलाए पुरुषो की बराबरी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा की जेंडर इक्वलिटी जैसे चीज़ होती ही नहीं है और हासिल भी नहीं की जा सकती है.
उन्होंने सवाल भी पूछा की क्या दुनियाभर के हार्ट सर्जन में कोई महिला भी है. यहाँ पहली बार नहीं है की सुन्नी धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुस्लीयर ने यहाँ विवादित बयान दिया है. इसके पहले महिला को रिजर्वेशन देने की मांग पर विवाद हो चूका है.
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नई दिल्लीः ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल-ए-उलेमा चीफ ने एक कैंप के दौरान विवादित और रूढ़िवादी बयान दिया है. सुन्नी धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुस्लीयर ने मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन में अपने व्यक्तव्य में कहा की महिलाए सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए होती है. यहाँ बयान देने के बाद वो यहाँ ही नहीं रुके. उनका मानना है की महिलाओ की बौद्धिक शक्ति भी पुरुषो से कम होती है. यहाँ तक की महिलाए पुरुषो की बराबरी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा की जेंडर इक्वलिटी जैसे चीज़ होती ही नहीं है और हासिल भी नहीं की जा सकती है. उन्होंने सवाल भी पूछा की क्या दुनियाभर के हार्ट सर्जन में कोई महिला भी है. यहाँ पहली बार नहीं है की सुन्नी धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुस्लीयर ने यहाँ विवादित बयान दिया है. इसके पहले महिला को रिजर्वेशन देने की मांग पर विवाद हो चूका है.
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नई दिल्ली। कार निर्माता कंपनी BMW ने नई MINI Clubman इंडियन समर रेड एडिशन को भारत में लॉन्च किया है। इसे खरीदने के लिए आप Amazon पर जाकर इसकी बुकिंग कर सकते हैं। इसका डिजाइन और डाइमेशन इसे एक गो-कार्ट भावना के साथ इसे ढालता है। कंपनी ने इसकी कीमत 44. 90 लाख रुपये (एक्स शोरूम) रखी है।
नई MINI Clubman समर रेड एडिशन में एक मॉडर्न और प्रैक्टिकल फंक्शन दिए गए हैं। ये यूनीक 6 डोर मिनी 5 सीटों के साथ आती है और इसमें 360 लीटर का बूट स्पेस दिया है, जिसे 1250 लीटर तक बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही इसमें इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल स्पोर्ट्स सीटें दी गई है और साथ ही पैसेंजर्स के लिए मेमोरी फंक्शन भी दिया गया है।
नई Mini में कंपनी ने 2-लीटर का 4 सिलेंडर इंजन के साथ ट्विन पावर टर्बो टेक्नोलॉजी दी है, जो कि 192 hp की पावर और 280 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ने में इसे 7. 2 सेकंड का वक्त लगता है और इसकी टॉप स्पीड 228 kmph है। इसका इंजन 7-स्पीड स्टेप्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के साथ डबल क्लच के साथ आता है। कंपनी ने इसमें स्टैंडर्ड MID मोड - स्पोर्ट और ग्रीन दिए हैं।
नई MINI Clubman इंडियन समर रेड एडिशन में स्टैंडर्ड फ्रंट और पैसेंजर्स के लिए एयरबैग्स, ब्रेक असिस्ट, 3-प्वाइंट सीट बेल्ट्स, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, क्रैश सेंसर, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम, कॉर्नरिंग ब्रेक कंट्रोल और रन-फ्लैट इंडीकेटर दिया है। इसके साथ ही इसमें ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम के साथ ब्रेकिंग फ्रंक्शन और रियर व्यू कैमरा भी दिया है।
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नई दिल्ली। कार निर्माता कंपनी BMW ने नई MINI Clubman इंडियन समर रेड एडिशन को भारत में लॉन्च किया है। इसे खरीदने के लिए आप Amazon पर जाकर इसकी बुकिंग कर सकते हैं। इसका डिजाइन और डाइमेशन इसे एक गो-कार्ट भावना के साथ इसे ढालता है। कंपनी ने इसकी कीमत चौंतालीस. नब्बे लाख रुपये रखी है। नई MINI Clubman समर रेड एडिशन में एक मॉडर्न और प्रैक्टिकल फंक्शन दिए गए हैं। ये यूनीक छः डोर मिनी पाँच सीटों के साथ आती है और इसमें तीन सौ साठ लीटरटर का बूट स्पेस दिया है, जिसे एक हज़ार दो सौ पचास लीटरटर तक बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही इसमें इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल स्पोर्ट्स सीटें दी गई है और साथ ही पैसेंजर्स के लिए मेमोरी फंक्शन भी दिया गया है। नई Mini में कंपनी ने दो-लीटर का चार सिलेंडर इंजन के साथ ट्विन पावर टर्बो टेक्नोलॉजी दी है, जो कि एक सौ बानवे hp की पावर और दो सौ अस्सी Nm का टॉर्क जनरेट करता है। शून्य से एक सौ kmph की रफ्तार पकड़ने में इसे सात. दो सेकंड का वक्त लगता है और इसकी टॉप स्पीड दो सौ अट्ठाईस kmph है। इसका इंजन सात-स्पीड स्टेप्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के साथ डबल क्लच के साथ आता है। कंपनी ने इसमें स्टैंडर्ड MID मोड - स्पोर्ट और ग्रीन दिए हैं। नई MINI Clubman इंडियन समर रेड एडिशन में स्टैंडर्ड फ्रंट और पैसेंजर्स के लिए एयरबैग्स, ब्रेक असिस्ट, तीन-प्वाइंट सीट बेल्ट्स, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, क्रैश सेंसर, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम, कॉर्नरिंग ब्रेक कंट्रोल और रन-फ्लैट इंडीकेटर दिया है। इसके साथ ही इसमें ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम के साथ ब्रेकिंग फ्रंक्शन और रियर व्यू कैमरा भी दिया है।
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अमरजीत कुमार सिन्हा समाज के लिए उदाहरण बन गए हैं। इफ्तार के वक्त जब वो रोजा तोड़ते हैं तो पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये अमरजीत हैं या अहमद। हिन्दुस्तान की यही तो खूबसूरती है। रमजान के मौके पर विधि-विधान के साथ अमरजीत सिन्हा रोजा रखते हैं। रमजान के नियम के साथ इफ्तार और सेहरी करते है। बंगला स्थान के रहने वाले अमरजीत सिर्फ रोजा ही नहीं रखते बल्कि हिन्दू त्योहार भी उतने ही जतन से मनाते हैं।
दरअसल, अमरजीत किसी मुसीबत में थे तो इनके कुछ मुस्लिम दोस्तों ने सलाह दी कि रमजान का महीना चल रहा है, रोजा रखकर दुआ करो, सब ठीक हो जाए। संयोग की बात रही कि अमरजीत के साथ अच्छ हुआ। तब से रोजा लेकर उनमें आस्था की सैलाब उमड़ पड़ी। अमरजीत के मुताबिक मुस्लिम लोग छठ पर्व कर सकते हैं तो हिंदू समाज के लोग रमजान में रोजा क्यों नहीं रख सकते? सभी धर्म एक है। अल्लाह, ईश्वर, गॉड सब एक हैं। सभी धर्मों को लेकर सम्मान का भाव रखनी चाहिए।
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अमरजीत कुमार सिन्हा समाज के लिए उदाहरण बन गए हैं। इफ्तार के वक्त जब वो रोजा तोड़ते हैं तो पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये अमरजीत हैं या अहमद। हिन्दुस्तान की यही तो खूबसूरती है। रमजान के मौके पर विधि-विधान के साथ अमरजीत सिन्हा रोजा रखते हैं। रमजान के नियम के साथ इफ्तार और सेहरी करते है। बंगला स्थान के रहने वाले अमरजीत सिर्फ रोजा ही नहीं रखते बल्कि हिन्दू त्योहार भी उतने ही जतन से मनाते हैं। दरअसल, अमरजीत किसी मुसीबत में थे तो इनके कुछ मुस्लिम दोस्तों ने सलाह दी कि रमजान का महीना चल रहा है, रोजा रखकर दुआ करो, सब ठीक हो जाए। संयोग की बात रही कि अमरजीत के साथ अच्छ हुआ। तब से रोजा लेकर उनमें आस्था की सैलाब उमड़ पड़ी। अमरजीत के मुताबिक मुस्लिम लोग छठ पर्व कर सकते हैं तो हिंदू समाज के लोग रमजान में रोजा क्यों नहीं रख सकते? सभी धर्म एक है। अल्लाह, ईश्वर, गॉड सब एक हैं। सभी धर्मों को लेकर सम्मान का भाव रखनी चाहिए।
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भारत के विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि पाकिस्तान से अपनी गतिविधियाँ चलाने वाले चरमपंथी संगठन जमात-उल-दावा पर प्रतिबंध लगाया जाए.
भारत का कहना है कि जमात-उल-दावा कोई अलग संगठन नहीं है बल्कि लश्कर-ए-तैबा का ही छद्म रूप है.
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के विशेष दूत हुसैन हारुन ने बीबीसी उर्दू सेवा के उमर आफ़रीदी से बातचीत की है.
क्या भारत की माँग को मानते हुए पाकिस्तान की सरकार जमात-उल-दावा या दूसरे किसी चरमपंथी संगठन पर पाबंदी लगाएगी?
पाकिस्तान कहता रहा है कि हमें सबूत दीजिए, हम जाँच करेंगे, हम मिल-जुलकर काम करेंगे, ख़ुफ़िया जानकारियाँ शेयर करेंगे. इसके बाद जाँच में अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ पाकिस्तान के क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी साहब ने भी यही कहा है कि अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ वही सुलूक होगा जो कि एक हत्यारे के ख़िलाफ़ होता है. जमात-उल-दावा हो या लश्कर हो, नाम से कुछ नहीं होता, जो भी दोषी पाया गया उस पर कार्रवाई होगी.
आप जो कह रहे हैं वह तो पाकिस्तान का अब तक का रुख़ रहा है, लेकिन भारत लगातार माँग कर रहा है कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए. भारत में मोहम्मद अजमल अमीर कसाब नाम का जो व्यक्ति गिरफ़्तार किया गया है उसने बहुत सारी बातें स्वीकार की हैं. भारत ने अब संयुक्त राष्ट्र में मामले को उठा दिया है तो पाकिस्तान इस पर क्या करने वाला है?
आप बातें स्वीकार करने की बात कह रहे हैं, हम तो ये कह रहे हैं कि उस व्यक्ति को पाकिस्तानी कूटनयिकों से मिलने की अनुमति दी जाए (कौंसुलर एक्सेस) ताकि हम तस्दीक कर सकें कि वह पाकिस्तानी है भी या नहीं.
हमने पहले भी कहा है कि जो एंटी टेरर मैकेनिज़्म भारत और पाकिस्तान के बीच लागू है. भारत के कहने से कोई बात तब्दील नहीं हुई है, हम पहले भी इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं, आगे भी करेंगे.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो मामला आया है उसके बारे में आप क्या कहेंगे?
ये जो दो नाम हैं इनकी जाँच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहले ही कर रहा है. ये कोई भारत के कहने पर कल से शुरू नहीं हुआ है, यह जाँच कोई छह-आठ महीने से चल रही है, इस जाँच में अगर पाया गया कि ये संगठन ग़लत गतिविधियों में शामिल हैं तो संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुरूप कार्रवाई होगी.
यानी आप ये कह रहे हैं कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आपसे कहे कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लागू किया जाए तो आप प्रतिबंध लागू करेंगे?
हमने यही कहा है कि ऐसी कोई भी गुज़ारिश आएगी तो हम उस पर ग़ौर करेंगे और उसके मेरिट के हिसाब से फ़ैसला करेंगे.
लोगों को ये पता है कि ये संगठन पाकिस्तान में सक्रिय हैं, अलग-अलग मौक़े पर मीडिया में इनके नाम आते रहे हैं, इनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं. पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र का इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है, वह अपने स्तर पर जाँच करके कार्रवाई क्यों नहीं करता?
बिल्कुल जाँच हो रही है, कार्रवाई हो रही है. एंटी टेरर मैकेनिज्म के तहत हो रही है, ये काम तो इस्लाबाद के हैं लेकिन मुझे पता है कि का हो रहा है.
पाकिस्तान में अक्सर ऐसा देखा गया है कि चरमपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है लेकिन वे नाम बदलकर काम करते रहते हैं, क्या ऐसे किसी क़दम से फ़ायदा होगा?
आपका कहना सही है लेकिन पाकिस्तान के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और पाकिस्तान ख़ुद ही दहशतगर्दी का शिकार है. पाकिस्तान के ऊपर दबाव है कि वह ठोस कार्रवाई करे जो हम कर भी रहे हैं.
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भारत के विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि पाकिस्तान से अपनी गतिविधियाँ चलाने वाले चरमपंथी संगठन जमात-उल-दावा पर प्रतिबंध लगाया जाए. भारत का कहना है कि जमात-उल-दावा कोई अलग संगठन नहीं है बल्कि लश्कर-ए-तैबा का ही छद्म रूप है. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के विशेष दूत हुसैन हारुन ने बीबीसी उर्दू सेवा के उमर आफ़रीदी से बातचीत की है. क्या भारत की माँग को मानते हुए पाकिस्तान की सरकार जमात-उल-दावा या दूसरे किसी चरमपंथी संगठन पर पाबंदी लगाएगी? पाकिस्तान कहता रहा है कि हमें सबूत दीजिए, हम जाँच करेंगे, हम मिल-जुलकर काम करेंगे, ख़ुफ़िया जानकारियाँ शेयर करेंगे. इसके बाद जाँच में अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ पाकिस्तान के क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी साहब ने भी यही कहा है कि अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ वही सुलूक होगा जो कि एक हत्यारे के ख़िलाफ़ होता है. जमात-उल-दावा हो या लश्कर हो, नाम से कुछ नहीं होता, जो भी दोषी पाया गया उस पर कार्रवाई होगी. आप जो कह रहे हैं वह तो पाकिस्तान का अब तक का रुख़ रहा है, लेकिन भारत लगातार माँग कर रहा है कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए. भारत में मोहम्मद अजमल अमीर कसाब नाम का जो व्यक्ति गिरफ़्तार किया गया है उसने बहुत सारी बातें स्वीकार की हैं. भारत ने अब संयुक्त राष्ट्र में मामले को उठा दिया है तो पाकिस्तान इस पर क्या करने वाला है? आप बातें स्वीकार करने की बात कह रहे हैं, हम तो ये कह रहे हैं कि उस व्यक्ति को पाकिस्तानी कूटनयिकों से मिलने की अनुमति दी जाए ताकि हम तस्दीक कर सकें कि वह पाकिस्तानी है भी या नहीं. हमने पहले भी कहा है कि जो एंटी टेरर मैकेनिज़्म भारत और पाकिस्तान के बीच लागू है. भारत के कहने से कोई बात तब्दील नहीं हुई है, हम पहले भी इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं, आगे भी करेंगे. लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो मामला आया है उसके बारे में आप क्या कहेंगे? ये जो दो नाम हैं इनकी जाँच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहले ही कर रहा है. ये कोई भारत के कहने पर कल से शुरू नहीं हुआ है, यह जाँच कोई छह-आठ महीने से चल रही है, इस जाँच में अगर पाया गया कि ये संगठन ग़लत गतिविधियों में शामिल हैं तो संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुरूप कार्रवाई होगी. यानी आप ये कह रहे हैं कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आपसे कहे कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लागू किया जाए तो आप प्रतिबंध लागू करेंगे? हमने यही कहा है कि ऐसी कोई भी गुज़ारिश आएगी तो हम उस पर ग़ौर करेंगे और उसके मेरिट के हिसाब से फ़ैसला करेंगे. लोगों को ये पता है कि ये संगठन पाकिस्तान में सक्रिय हैं, अलग-अलग मौक़े पर मीडिया में इनके नाम आते रहे हैं, इनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं. पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र का इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है, वह अपने स्तर पर जाँच करके कार्रवाई क्यों नहीं करता? बिल्कुल जाँच हो रही है, कार्रवाई हो रही है. एंटी टेरर मैकेनिज्म के तहत हो रही है, ये काम तो इस्लाबाद के हैं लेकिन मुझे पता है कि का हो रहा है. पाकिस्तान में अक्सर ऐसा देखा गया है कि चरमपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है लेकिन वे नाम बदलकर काम करते रहते हैं, क्या ऐसे किसी क़दम से फ़ायदा होगा? आपका कहना सही है लेकिन पाकिस्तान के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और पाकिस्तान ख़ुद ही दहशतगर्दी का शिकार है. पाकिस्तान के ऊपर दबाव है कि वह ठोस कार्रवाई करे जो हम कर भी रहे हैं.
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कर ज्ञान विशेषकों पृथक् पदार्थ मानीयें, तव तो पदार्थ बहुत हो जायेंगे, क्योंकि ज्ञान विशेष अनेक प्रकारकें हैं.
संशय से उपरि नवितव्यता प्रत्ययरूप सदर्थपर्यालोचनात्मक तिसकों तर्क कहते हैं, जैसे कि यह स्याणु अथवा पुरुष जरुर होवेगा, यहनी ज्ञान विशेषही है, ज्ञानविशेष जो है, सो ज्ञातासें अनिन्न है, इस वास्ते पृथक् पदार्थ कल्पना ठीक नहीं.
ए संशय अरु तर्कसेंती उत्तर काल नावी नियात्मक पैसा जो ज्ञान, तिसका नाम निर्णय है, यहनी ज्ञान विशेष है, यरु निश्चयरूप हो ऐसें प्रत्यक्षादि प्रमाणोंके अंतर्भाव होनेंसें पृथक् पदार्थ कल्पना ठीक नहीं.
१०-११-१२ तथा वाद, जल्प, वितंभा, तहां प्रमाण तर्क साधन उपालंन सिद्धांत अविरुद्ध पंचावयव करके संयुक्त पत्र प्रतिपक्षका जो ग्रहण करण, तिसका नाम वाद है. सो वादतत्त्व ज्ञानके वास्ते शिष्य अरु आचार्यका होता है, यरु सोइ वाद जिसकों जीतना होवे, तिसके साथ ढल, जाति, निग्रह स्थान करके साधनोपलंन, सो जल्प है, तथा सो वादही प्रतिष स्थापना करकेंदी वितंमा है, यह वाद, जल्प, विर्तमा, इन तीनोका नेद ही नहीं हो सक्ता है, क्योंकि तत्त्वचिंताविषे तत्त्वके निर्णयार्थ वाद क रनां चाहियें, परंतु बल जाति आदिक करके तत्त्वका निश्चय नहीं होता है, क्योंकि बलादिक जो हैं, सो परके वंचने वास्ते करियें हैं, तिनसें त त्व निर्णयकी प्राप्ति नहीं होती है, जे कर इनका जेदजी मानोगे, तोन! ये पदार्थ नहीं हो सक्के हैं, क्योंकि जो परमार्थसें वस्तु है, सोइ पदार्थ है. घरु वाद जो है, सो पुरुषकी इबाके अधीन है, नियतरूप नहीं है. इस वास्ते पदार्थ नहीं, तथा एक औौरनी बात है, कि कुक्कड, लाल, मोंढे, ३ नके वादी पक्ष प्रतिपक ग्रहण करते हैं, तिनोंकोंजी तत्त्वज्ञान की प्राप्ति होनी चाहियें, परंतु यह तुम नहीं मानते हो, इस वास्ते वाद पदार्थ नहीं है.
१३ तथा १ असिद्ध, २ अनेकांतिक, ३ विरुद्ध, यह तीनो हेत्वानास हैं. हेतु तो नहीं, परंतु हेतुकी तरें नासन होते हैं, इस वास्ते हेत्वानास कहते हैं. जब सम्यक् हेतुवोंकी ही तत्त्वव्यवस्थिति नहीं, तो हेत्वानासों का तो क्याही कहना है ? क्योंकि जो नियत स्वरूप करकें रहे, सो वस्तु
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कर ज्ञान विशेषकों पृथक् पदार्थ मानीयें, तव तो पदार्थ बहुत हो जायेंगे, क्योंकि ज्ञान विशेष अनेक प्रकारकें हैं. संशय से उपरि नवितव्यता प्रत्ययरूप सदर्थपर्यालोचनात्मक तिसकों तर्क कहते हैं, जैसे कि यह स्याणु अथवा पुरुष जरुर होवेगा, यहनी ज्ञान विशेषही है, ज्ञानविशेष जो है, सो ज्ञातासें अनिन्न है, इस वास्ते पृथक् पदार्थ कल्पना ठीक नहीं. ए संशय अरु तर्कसेंती उत्तर काल नावी नियात्मक पैसा जो ज्ञान, तिसका नाम निर्णय है, यहनी ज्ञान विशेष है, यरु निश्चयरूप हो ऐसें प्रत्यक्षादि प्रमाणोंके अंतर्भाव होनेंसें पृथक् पदार्थ कल्पना ठीक नहीं. दस नवंबर बारह तथा वाद, जल्प, वितंभा, तहां प्रमाण तर्क साधन उपालंन सिद्धांत अविरुद्ध पंचावयव करके संयुक्त पत्र प्रतिपक्षका जो ग्रहण करण, तिसका नाम वाद है. सो वादतत्त्व ज्ञानके वास्ते शिष्य अरु आचार्यका होता है, यरु सोइ वाद जिसकों जीतना होवे, तिसके साथ ढल, जाति, निग्रह स्थान करके साधनोपलंन, सो जल्प है, तथा सो वादही प्रतिष स्थापना करकेंदी वितंमा है, यह वाद, जल्प, विर्तमा, इन तीनोका नेद ही नहीं हो सक्ता है, क्योंकि तत्त्वचिंताविषे तत्त्वके निर्णयार्थ वाद क रनां चाहियें, परंतु बल जाति आदिक करके तत्त्वका निश्चय नहीं होता है, क्योंकि बलादिक जो हैं, सो परके वंचने वास्ते करियें हैं, तिनसें त त्व निर्णयकी प्राप्ति नहीं होती है, जे कर इनका जेदजी मानोगे, तोन! ये पदार्थ नहीं हो सक्के हैं, क्योंकि जो परमार्थसें वस्तु है, सोइ पदार्थ है. घरु वाद जो है, सो पुरुषकी इबाके अधीन है, नियतरूप नहीं है. इस वास्ते पदार्थ नहीं, तथा एक औौरनी बात है, कि कुक्कड, लाल, मोंढे, तीन नके वादी पक्ष प्रतिपक ग्रहण करते हैं, तिनोंकोंजी तत्त्वज्ञान की प्राप्ति होनी चाहियें, परंतु यह तुम नहीं मानते हो, इस वास्ते वाद पदार्थ नहीं है. तेरह तथा एक असिद्ध, दो अनेकांतिक, तीन विरुद्ध, यह तीनो हेत्वानास हैं. हेतु तो नहीं, परंतु हेतुकी तरें नासन होते हैं, इस वास्ते हेत्वानास कहते हैं. जब सम्यक् हेतुवोंकी ही तत्त्वव्यवस्थिति नहीं, तो हेत्वानासों का तो क्याही कहना है ? क्योंकि जो नियत स्वरूप करकें रहे, सो वस्तु
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लंदन, (भाषा)। ब्रिटेन में अंगदान की सूची से ब्रिटिश सिखों को जोड़ने के लिए एक नया अभियान शुरू किया गया है। एशियाई समुदाय के लोगों को शारीरिक समस्याओं की स्थिति में अंग प्रतिरोपण की काफी जरूरत होती है, लेकिन उन्हें ब्रिटेन में आम आबादी के मुकाबले इसके लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अंगदान करने वालों में एशिया से हर साल केवल दो प्रतिशत लोग ही होते हैं, लेकिन समुदाय की भागीदारी अंग प्रतिरोपण की आवश्यकता वाले लोगों में पांच गुना होती है। नेशनल हेल्थ सर्विस ःएनएचएसः ने देशभर में एक लक्षित अभियान आरंभ किया है, जो सिख समुदाय के लोगों से अंगदान रजिस्टर से जुड़ने के आग्रह से शुरू हो रहा है। अगले हफ्ते से ``ऑर्गन डोनेशन. . . लेट्स मेक ए डिफरेंस" शीर्षक से टेलीविजन कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रसारित होने जा रही है। यह अभियान सिख समुदाय के चैनल संगत टीवी और सैंडवेल तथा वेस्ट बर्मिंघम अस्पतालों. . . एनएचएस ट्रस्ट की अंगदान समिति के सहयोग से शुरू हो रहा है। एनएचएस ट्रस्ट में अंगदान अभियान से जुड़े जॉन ब्लीसडेल ने कहा, ``हमारा मानना है कि अंगदान सिख धर्म के अनुरूप है और इस समुदाय में अधिक दानदाताओं की असल में आवश्यकता है। यदि अधिक लोग पंजीकृत होंगे तो अधिक जानें बचाई जा सकती हैं तथा अंग प्रतिरोपण आवश्यक होने की स्थिति में उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। " पंजाबी और अंग्रेजी भाषा के मिश्रण वाले टीवी कार्यक्रमों में सतनाम कांग नाम के एक व्यक्ति को दिखाया जाता है जो किडनी प्रतिरोपण का इंतजार कर रहा है। वह बर्मिंघम के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में डायलिसिस पर रहने के दौरान की क"िनाइयों के बारे में बताता है। यह अस्पताल हाल में तब चर्चा में आया था जब पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उ"ाने वाली मलाला यूसुफजई की जिन्दगी बचाने के लिए कई ऑपरेशन किए गए थे। तालिबान के एक आतंकी ने मलाला के सिर में गोली मार दी थी। कांग ः53ः बर्मिंघम के निवासी हैं। उन्हें 2006 से किडनी की जरूरत है। उन्होंने अपने डायलिसिस से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर कहा कि इससे सिर्फ वह ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, ``मैं लोगों से अंगदान रजिस्टर से जुड़ने का आग्रह करता हूं, आप किसी को उसका जीवन लौटा सकते हैं। इससे आप सिर्फ उस व्यक्ति की नहीं, बल्कि उसके परिवार और मित्रों की भी मदद करेंगे। " अंजू कौर, प्रीतपाल सिंह संघेरा और जसविंदर धालीवाल ऐसे स्थानीय लोग हैं जिन्हें किडनी दान में मिली है। वे प्रतिरोपण से पहले के अपने जीवन के बारे में बात करते हैं और बयां करते हैं कि किडनी मिलने के बाद उनकी जिन्दगी किस तरह बदल गई।
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लंदन, । ब्रिटेन में अंगदान की सूची से ब्रिटिश सिखों को जोड़ने के लिए एक नया अभियान शुरू किया गया है। एशियाई समुदाय के लोगों को शारीरिक समस्याओं की स्थिति में अंग प्रतिरोपण की काफी जरूरत होती है, लेकिन उन्हें ब्रिटेन में आम आबादी के मुकाबले इसके लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अंगदान करने वालों में एशिया से हर साल केवल दो प्रतिशत लोग ही होते हैं, लेकिन समुदाय की भागीदारी अंग प्रतिरोपण की आवश्यकता वाले लोगों में पांच गुना होती है। नेशनल हेल्थ सर्विस ःएनएचएसः ने देशभर में एक लक्षित अभियान आरंभ किया है, जो सिख समुदाय के लोगों से अंगदान रजिस्टर से जुड़ने के आग्रह से शुरू हो रहा है। अगले हफ्ते से ``ऑर्गन डोनेशन. . . लेट्स मेक ए डिफरेंस" शीर्षक से टेलीविजन कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रसारित होने जा रही है। यह अभियान सिख समुदाय के चैनल संगत टीवी और सैंडवेल तथा वेस्ट बर्मिंघम अस्पतालों. . . एनएचएस ट्रस्ट की अंगदान समिति के सहयोग से शुरू हो रहा है। एनएचएस ट्रस्ट में अंगदान अभियान से जुड़े जॉन ब्लीसडेल ने कहा, ``हमारा मानना है कि अंगदान सिख धर्म के अनुरूप है और इस समुदाय में अधिक दानदाताओं की असल में आवश्यकता है। यदि अधिक लोग पंजीकृत होंगे तो अधिक जानें बचाई जा सकती हैं तथा अंग प्रतिरोपण आवश्यक होने की स्थिति में उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। " पंजाबी और अंग्रेजी भाषा के मिश्रण वाले टीवी कार्यक्रमों में सतनाम कांग नाम के एक व्यक्ति को दिखाया जाता है जो किडनी प्रतिरोपण का इंतजार कर रहा है। वह बर्मिंघम के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में डायलिसिस पर रहने के दौरान की क"िनाइयों के बारे में बताता है। यह अस्पताल हाल में तब चर्चा में आया था जब पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उ"ाने वाली मलाला यूसुफजई की जिन्दगी बचाने के लिए कई ऑपरेशन किए गए थे। तालिबान के एक आतंकी ने मलाला के सिर में गोली मार दी थी। कांग ःतिरेपनः बर्मिंघम के निवासी हैं। उन्हें दो हज़ार छः से किडनी की जरूरत है। उन्होंने अपने डायलिसिस से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर कहा कि इससे सिर्फ वह ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, ``मैं लोगों से अंगदान रजिस्टर से जुड़ने का आग्रह करता हूं, आप किसी को उसका जीवन लौटा सकते हैं। इससे आप सिर्फ उस व्यक्ति की नहीं, बल्कि उसके परिवार और मित्रों की भी मदद करेंगे। " अंजू कौर, प्रीतपाल सिंह संघेरा और जसविंदर धालीवाल ऐसे स्थानीय लोग हैं जिन्हें किडनी दान में मिली है। वे प्रतिरोपण से पहले के अपने जीवन के बारे में बात करते हैं और बयां करते हैं कि किडनी मिलने के बाद उनकी जिन्दगी किस तरह बदल गई।
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गाजियाबाद। विधानसभा चुनाव से पहले उनके घर पर आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने उनकी पार्टी को प्रदेशभर में सीटें देने और सम्मान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन सम्मान और जिम्मेदारी नहीं दी। अगर दी होती तो समाजवादी पार्टी आज यूपी की सत्ता में होती। बता दें कि शिवपाल यादव ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू का समर्थन करके फिर संकेत दे दिए हैं कि चाचा-भतीजे यानी अखिलेश और शिवपाल के रिश्तों में फिर से खटास बढ़ गई है।
शिवपाल यादव बुधवार को गाजियाबाद के शास्त्री नगर में पूर्व आईएएस अधिकारी व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नेता चक्रपाणि यादव के घर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव में अभी परिपक्वता की कमी है। परिपक्वता की कमी ना होती तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का नतीजा यह ना होता।
उन्होंने रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली करारी हार पर कहा कि अखिलेश यादव ने उन्हें चुनाव में ना तो कोई जिम्मेदारी दी और ना ही स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल किया। अगर उन्हें जिम्मेदारी दी गई होती तो कम से कम आजमगढ़ की सीट जीत कर उन्हें दे देता।
समाजवादी पार्टी के विधायक होने के बावजूद पार्टी से अलग जाकर एनडीए कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने पर उन्होंने कहा कि विपक्ष और उनकी पार्टी ने उनसे कभी राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए वोट नहीं मांगा ना ही उन्हें मीटिंग में बुलाया गया। एनडीए ने उन्हें भोज पर बुलाया और वोट मांगा तो उन्होंने समर्थन देने की हामी भर दी।
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गाजियाबाद। विधानसभा चुनाव से पहले उनके घर पर आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने उनकी पार्टी को प्रदेशभर में सीटें देने और सम्मान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन सम्मान और जिम्मेदारी नहीं दी। अगर दी होती तो समाजवादी पार्टी आज यूपी की सत्ता में होती। बता दें कि शिवपाल यादव ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू का समर्थन करके फिर संकेत दे दिए हैं कि चाचा-भतीजे यानी अखिलेश और शिवपाल के रिश्तों में फिर से खटास बढ़ गई है। शिवपाल यादव बुधवार को गाजियाबाद के शास्त्री नगर में पूर्व आईएएस अधिकारी व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नेता चक्रपाणि यादव के घर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव में अभी परिपक्वता की कमी है। परिपक्वता की कमी ना होती तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का नतीजा यह ना होता। उन्होंने रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली करारी हार पर कहा कि अखिलेश यादव ने उन्हें चुनाव में ना तो कोई जिम्मेदारी दी और ना ही स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल किया। अगर उन्हें जिम्मेदारी दी गई होती तो कम से कम आजमगढ़ की सीट जीत कर उन्हें दे देता। समाजवादी पार्टी के विधायक होने के बावजूद पार्टी से अलग जाकर एनडीए कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने पर उन्होंने कहा कि विपक्ष और उनकी पार्टी ने उनसे कभी राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए वोट नहीं मांगा ना ही उन्हें मीटिंग में बुलाया गया। एनडीए ने उन्हें भोज पर बुलाया और वोट मांगा तो उन्होंने समर्थन देने की हामी भर दी।
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चिंतलनार थाना क्षेत्र के मुकरम के जंगल से सुरक्षाबल के जवानों ने विस्फोटकों के साथ घूम रहे 4 नक्सलियों (Naxalite Arrested) को हिरासत में लिया है।
सांकेतिक तस्वीर।
छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को सर्चिंग के दौरान बड़ी कामयाबी मिली है। चिंतलनार थाना क्षेत्र के मुकरम के जंगल से सुरक्षाबल ने विस्फोटकों के साथ घूम रहे 4 नक्सलियों (Naxalite Arrested) को हिरासत में लिया है। इन चारों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद किया गया है।
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चिंतलनार थाना क्षेत्र के मुकरम के जंगल से सुरक्षाबल के जवानों ने विस्फोटकों के साथ घूम रहे चार नक्सलियों को हिरासत में लिया है। सांकेतिक तस्वीर। छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को सर्चिंग के दौरान बड़ी कामयाबी मिली है। चिंतलनार थाना क्षेत्र के मुकरम के जंगल से सुरक्षाबल ने विस्फोटकों के साथ घूम रहे चार नक्सलियों को हिरासत में लिया है। इन चारों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद किया गया है।
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नयी दिल्ली। फेस्टिव सीजन शुरू हो रहा है और सभी कंपनियां अपने नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी में हैं। कोरोना संकट के बीच इंडस्ट्रीज के लिए त्योहारी सीजन किसी वरदान से कम नहीं है। स्मार्टफोन कंपनियां भी धमाल मचाने वाली हैं। अक्टूबर में एक से एक शानदार स्मार्टफोन आने वाले हैं। सैमसंग, वीवो, ऐप्पल और वनप्लानस जैसी कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करेंगी। अक्टूबर में भारत और वैश्विक स्तर पर लॉन्च होने वाले कुछ दमदार स्मार्टफोन्स पर एक नज़र डालते हैं।
सैमसंग भारत में 8 अक्टूबर को गैलेक्सी एफ 41 नाम से अपना पहला एफ-सीरीज का फोन पेश करेगी। ये हैंडसेट कैमरा सेंट्रिक होने की उम्मीद है और इसमें गैलेक्सी एम 31 वाले ही बहुत सारे फीचर्स होंगे, जिसमें वॉटरड्रॉप एमोलेड डिस्प्ले और 6,000 एमएएच की बैटरी शामिल है। फोन में 64 मेगापिक्सेल प्राइमरी सेंसर के साथ ट्रिपल रियर कैमरा होने की भी पुष्टि हो गई है। कीमत की बात करें तो सैमसंग गैलेक्सी एफ41 की कीमत लगभग 15,000 रुपये हो सकती है।
वनप्लस 8 टी भारत में 14 अक्टूबर को लॉन्च होगा। इसमें स्नैपड्रैगन 865 एसओसी, 120 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट स्क्रीन, 4,500 एमएएच की बैटरी और नए 65 वाट वार्प चार्जिंग सॉल्यूशन जैसे दमदार फीचर्स होंगे। केवल 39 मिनट में इस डिवाइस को 100 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा वनप्लस 8 टी में 48 मेगापिक्सेल क्वाड रियर कैमरा, पंच-होल डिस्प्ले और 12 जीबी रैम + 256 जीबी स्टोरेज हो सकती है। अमेज़न लिस्टिंग के अनुसार, हैंडसेट की कीमत 51,700 रुपये से शुरू हो सकती है।
गूगल का मिड-रेंज पिक्सेल 4ए स्मार्टफोन 17 अक्टूबर को भारत में लॉन्च होगा। फोन में एक 60 हर्ट्ज 5. 8 इंच एफएचडी + ओलेड डिस्प्ले, स्नैपड्रैगन 730 जी चिपसेट, 12 मेगापिक्सेल कैमरा, 3,140 एमएएच की बैटरी और 18 वाट फास्ट चार्जिंग सॉल्यूशन होगा। अन्य फीचर्स में स्टीरियो स्पीकर, 3. 5 मिमी हेडफोन जैक और एक पॉली कार्बोनेट यूनीबॉडी शामिल है जिसमें एक रियर-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर शामिल होगा। हैंडसेट लगभग 26,000 रुपये के मूल्य पर आने की संभावना है।
वीवो वी20 सीरीज भारत में 12 अक्टूबर को आ सकता है। ये हैंडसेट बेज़ल-लेस डिस्प्ले, स्नैपड्रैगन 600/700 एसओसी, ट्रिपल कैमरा सेटअप, 4,000 एमएएच की बैटरी और 33 वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा। वीवो वी20 की कीमत 20,000 रु से 30,000 रु के बीच हो सकती है। अगर भारत में इस फोन को लॉन्च किया गया तो इसमें 5जी कनेक्टिविटी, 44 मेगापिक्सेल प्राइमरी सेंसर के साथ डुअल सेल्फी कैमरा और 64 मेगापिक्सेल प्राइमरी कैमरा होगा।
संभावना है कि आईफोन 12 सीरीज 13 अक्टूबर को आ सकता है। ऐप्पल अलग-अलग स्क्रीन साइज़ में चार स्मार्टफ़ोन पेश कर सकती है, जिसमें ओलेड पैनल, हाई रिफ्रेश रेट, ए14 बायोनिक चिपसेट और 5जी कनेक्टिविटी हो सकती है। डिजाइन की बात करें तो आईफोन 12 सीरीज आईफोन 4 की तरह क्वाड डिजाइन के साथ आ सकता है जिसमें पीछे की तरफ एक स्क्विर कैमरा मॉड्यूल है। इस बात की संभावना है कि इस फोन के साथ ईयरफ़ोन और चार्जर नहीं आएगा।
मोटोरोला रेजर 5जी, जिसे पिछले महीने वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया गया था, को अक्टूबर में भारत में लॉन्च किया जा सकता है। इसके लिए अभी कोई फिक्स तारीख नहीं है। मोटोरोला का नया फोल्डेबल फोन 5जी कनेक्टिविटी, स्नैपड्रैगन 765जी एसओसी, 6. 2-इंच फोल्डेबल प्लास्टिक ओलेड स्क्रीन और 2. 7-इंच ओलेड कवर डिस्प्ले के साथ आएगा। मोटोरोला रेजर 5जी में दो कैमरे होंगे। इस फोन में 2,800 एमएएच की बैटरी होगी। ये फोन फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है।
सैमसंग गैलेक्सी एस20 एफई भी अक्टूबर में आ सकता है। फोन में स्नैपड्रैगन 865 / एक्सिनॉस 990 एसओसी, 120 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट स्क्रीन, 12 मेगापिक्सेल ट्रिपल रियर कैमरा, 15 वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट और 4,500 एमएएच की बैटरी और 32 मेगापिक्सेल सेल्फी कैमरा होगा। वैश्विक स्तर पर यह फोन लगभग 51,000 रुपये में बिक रहा है।
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नयी दिल्ली। फेस्टिव सीजन शुरू हो रहा है और सभी कंपनियां अपने नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी में हैं। कोरोना संकट के बीच इंडस्ट्रीज के लिए त्योहारी सीजन किसी वरदान से कम नहीं है। स्मार्टफोन कंपनियां भी धमाल मचाने वाली हैं। अक्टूबर में एक से एक शानदार स्मार्टफोन आने वाले हैं। सैमसंग, वीवो, ऐप्पल और वनप्लानस जैसी कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करेंगी। अक्टूबर में भारत और वैश्विक स्तर पर लॉन्च होने वाले कुछ दमदार स्मार्टफोन्स पर एक नज़र डालते हैं। सैमसंग भारत में आठ अक्टूबर को गैलेक्सी एफ इकतालीस नाम से अपना पहला एफ-सीरीज का फोन पेश करेगी। ये हैंडसेट कैमरा सेंट्रिक होने की उम्मीद है और इसमें गैलेक्सी एम इकतीस वाले ही बहुत सारे फीचर्स होंगे, जिसमें वॉटरड्रॉप एमोलेड डिस्प्ले और छः,शून्य एमएएच की बैटरी शामिल है। फोन में चौंसठ मेगापिक्सेल प्राइमरी सेंसर के साथ ट्रिपल रियर कैमरा होने की भी पुष्टि हो गई है। कीमत की बात करें तो सैमसंग गैलेक्सी एफइकतालीस की कीमत लगभग पंद्रह,शून्य रुपयापये हो सकती है। वनप्लस आठ टी भारत में चौदह अक्टूबर को लॉन्च होगा। इसमें स्नैपड्रैगन आठ सौ पैंसठ एसओसी, एक सौ बीस हर्ट्ज रिफ्रेश रेट स्क्रीन, चार,पाँच सौ एमएएच की बैटरी और नए पैंसठ वाट वार्प चार्जिंग सॉल्यूशन जैसे दमदार फीचर्स होंगे। केवल उनतालीस मिनट में इस डिवाइस को एक सौ प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा वनप्लस आठ टी में अड़तालीस मेगापिक्सेल क्वाड रियर कैमरा, पंच-होल डिस्प्ले और बारह जीबी रैम + दो सौ छप्पन जीबी स्टोरेज हो सकती है। अमेज़न लिस्टिंग के अनुसार, हैंडसेट की कीमत इक्यावन,सात सौ रुपयापये से शुरू हो सकती है। गूगल का मिड-रेंज पिक्सेल चारए स्मार्टफोन सत्रह अक्टूबर को भारत में लॉन्च होगा। फोन में एक साठ हर्ट्ज पाँच. आठ इंच एफएचडी + ओलेड डिस्प्ले, स्नैपड्रैगन सात सौ तीस जी चिपसेट, बारह मेगापिक्सेल कैमरा, तीन,एक सौ चालीस एमएएच की बैटरी और अट्ठारह वाट फास्ट चार्जिंग सॉल्यूशन होगा। अन्य फीचर्स में स्टीरियो स्पीकर, तीन. पाँच मिमी हेडफोन जैक और एक पॉली कार्बोनेट यूनीबॉडी शामिल है जिसमें एक रियर-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर शामिल होगा। हैंडसेट लगभग छब्बीस,शून्य रुपयापये के मूल्य पर आने की संभावना है। वीवो वीबीस सीरीज भारत में बारह अक्टूबर को आ सकता है। ये हैंडसेट बेज़ल-लेस डिस्प्ले, स्नैपड्रैगन छः सौ/सात सौ एसओसी, ट्रिपल कैमरा सेटअप, चार,शून्य एमएएच की बैटरी और तैंतीस वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा। वीवो वीबीस की कीमत बीस,शून्य रुपया से तीस,शून्य रुपया के बीच हो सकती है। अगर भारत में इस फोन को लॉन्च किया गया तो इसमें पाँचजी कनेक्टिविटी, चौंतालीस मेगापिक्सेल प्राइमरी सेंसर के साथ डुअल सेल्फी कैमरा और चौंसठ मेगापिक्सेल प्राइमरी कैमरा होगा। संभावना है कि आईफोन बारह सीरीज तेरह अक्टूबर को आ सकता है। ऐप्पल अलग-अलग स्क्रीन साइज़ में चार स्मार्टफ़ोन पेश कर सकती है, जिसमें ओलेड पैनल, हाई रिफ्रेश रेट, एचौदह बायोनिक चिपसेट और पाँचजी कनेक्टिविटी हो सकती है। डिजाइन की बात करें तो आईफोन बारह सीरीज आईफोन चार की तरह क्वाड डिजाइन के साथ आ सकता है जिसमें पीछे की तरफ एक स्क्विर कैमरा मॉड्यूल है। इस बात की संभावना है कि इस फोन के साथ ईयरफ़ोन और चार्जर नहीं आएगा। मोटोरोला रेजर पाँचजी, जिसे पिछले महीने वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया गया था, को अक्टूबर में भारत में लॉन्च किया जा सकता है। इसके लिए अभी कोई फिक्स तारीख नहीं है। मोटोरोला का नया फोल्डेबल फोन पाँचजी कनेक्टिविटी, स्नैपड्रैगन सात सौ पैंसठजी एसओसी, छः. दो-इंच फोल्डेबल प्लास्टिक ओलेड स्क्रीन और दो. सात-इंच ओलेड कवर डिस्प्ले के साथ आएगा। मोटोरोला रेजर पाँचजी में दो कैमरे होंगे। इस फोन में दो,आठ सौ एमएएच की बैटरी होगी। ये फोन फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है। सैमसंग गैलेक्सी एसबीस एफई भी अक्टूबर में आ सकता है। फोन में स्नैपड्रैगन आठ सौ पैंसठ / एक्सिनॉस नौ सौ नब्बे एसओसी, एक सौ बीस हर्ट्ज रिफ्रेश रेट स्क्रीन, बारह मेगापिक्सेल ट्रिपल रियर कैमरा, पंद्रह वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट और चार,पाँच सौ एमएएच की बैटरी और बत्तीस मेगापिक्सेल सेल्फी कैमरा होगा। वैश्विक स्तर पर यह फोन लगभग इक्यावन,शून्य रुपयापये में बिक रहा है।
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Gwalior Crime Newsग्वालियर(नप्र)। ग्वालियर के थाटीपुर थाने के अंदर से एक सेनेटरी कारोबारी की पिस्टल ही गायब हो गई। कारोबारी ने पिस्टल नगर निगम चुनाव से पहले आचार संहिता लगने पर जमा करवाई थी। जब वह सोमवार को पिस्टल लेने थाने पहुंचा तो वह गायब मिली। थाने के अंदर से पिस्टल गायब होने से हड़कंप मच गया है। देर रात तक स्टाफ पिस्टल ढूंढने में लगा हुआ था, यह जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित सांघी तक भी पहुंच गई है।
थाटीपुर स्थित जोशी नगर में रहने वाले सेनेटरी कारोबारी नीलेश शर्मा के पास लाइसेंसी पिस्टल है। नगर निगम चुनाव से पहले आचार संहिता लगी थी। आचार संहिता लगते ही हथियार जमा होना शुरू हो जाते हैं। इसके चलते ही नीलेश शर्मा ने अपनी पिस्टल भी थाटीपुर थाने में जमा करवाई थी। सोमवार को वह थाटीपुर थाने में अपनी लाइसेंसी पिस्टल वापस लेने के लिए पहुंचे। इसी दौरान ़जब शस्त्रागार से पिस्टल निकालने के लिए ढूंढी गई तो वह गायब मिली। थाना प्रभारी कुलदीप सिंह राजपूत सहित अन्य स्टाफ भी आ गया। देर रात तक पिस्टल ढूंढी गई। थाना प्रभारी का कहना है कि अभी कई हथियार थाने में जमा है, हो सकता है इन्हीं के बीच कहीं पिस्टल दब गई हो उसे ढूंढने के प्रयास जारी हैं।
माधौगंज इलाके में एक युवती से युवक ने शादी का वादा किया। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहने लगे। युवक करीब दो साल तक शादी की बात कहकर युवती के साथ दुष्कर्म करता रहा। इसी बीच वह अलग हो गया और उसने दूसरी युवती से रिश्ता जोड़ लिया। दोनों शादी करने वाले हैं। जब यह जानकारी युवती को लगी तब वह माधौगंज थाने पहुंची और उसने दुष्कर्म व धमकाने की धाराओं में एफआइआर दर्ज कराई। पुलिस रात को आरोपित के घर पहुंची, वह नहीं मिला। आरोपित का नाम रहीश खान है।
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Gwalior Crime Newsग्वालियर। ग्वालियर के थाटीपुर थाने के अंदर से एक सेनेटरी कारोबारी की पिस्टल ही गायब हो गई। कारोबारी ने पिस्टल नगर निगम चुनाव से पहले आचार संहिता लगने पर जमा करवाई थी। जब वह सोमवार को पिस्टल लेने थाने पहुंचा तो वह गायब मिली। थाने के अंदर से पिस्टल गायब होने से हड़कंप मच गया है। देर रात तक स्टाफ पिस्टल ढूंढने में लगा हुआ था, यह जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित सांघी तक भी पहुंच गई है। थाटीपुर स्थित जोशी नगर में रहने वाले सेनेटरी कारोबारी नीलेश शर्मा के पास लाइसेंसी पिस्टल है। नगर निगम चुनाव से पहले आचार संहिता लगी थी। आचार संहिता लगते ही हथियार जमा होना शुरू हो जाते हैं। इसके चलते ही नीलेश शर्मा ने अपनी पिस्टल भी थाटीपुर थाने में जमा करवाई थी। सोमवार को वह थाटीपुर थाने में अपनी लाइसेंसी पिस्टल वापस लेने के लिए पहुंचे। इसी दौरान ़जब शस्त्रागार से पिस्टल निकालने के लिए ढूंढी गई तो वह गायब मिली। थाना प्रभारी कुलदीप सिंह राजपूत सहित अन्य स्टाफ भी आ गया। देर रात तक पिस्टल ढूंढी गई। थाना प्रभारी का कहना है कि अभी कई हथियार थाने में जमा है, हो सकता है इन्हीं के बीच कहीं पिस्टल दब गई हो उसे ढूंढने के प्रयास जारी हैं। माधौगंज इलाके में एक युवती से युवक ने शादी का वादा किया। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहने लगे। युवक करीब दो साल तक शादी की बात कहकर युवती के साथ दुष्कर्म करता रहा। इसी बीच वह अलग हो गया और उसने दूसरी युवती से रिश्ता जोड़ लिया। दोनों शादी करने वाले हैं। जब यह जानकारी युवती को लगी तब वह माधौगंज थाने पहुंची और उसने दुष्कर्म व धमकाने की धाराओं में एफआइआर दर्ज कराई। पुलिस रात को आरोपित के घर पहुंची, वह नहीं मिला। आरोपित का नाम रहीश खान है।
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक नयन सरकार, कांग्रेस के सुदीप रॉय बर्मन और टिपरा मोथा के तीन विधायकों को दिन भर के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।
सीधी जिले के कुबरी बाजार में मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति बैठा हुआ था तब प्रवेश शुक्ला ने नशे की हालत में उसके ऊपर पेशाब कर दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। लोग आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं।
बीजेपी विधायक दिबाकर ने बताया कि आज वह नामांकन जमा करने के लिए पार्टी उम्मीदवारों के साथ सोनमुखी बीडीओ कार्यालय गए तभी तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला बोल दिया।
आजकल शादियों का आयोजन बेहद खर्चीला हो गया है। शादियों का खर्चा कई परिवारों को कर्जदार भी बना देता है। ऐसे में सादगीपूर्ण ढंग से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करना अच्छी पहल है।
बीजेपी ईसाई मतदाताओं तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश कर रही है, जो तटीय राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा के पास अभी 11 ईसाई विधायक हैं। जोशुआ डी सूजा को छोड़कर, बाकी सभी विधायक कांग्रेस से भगवा पार्टी में आए हैं।
मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के खिलाफ भाजपा के विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। राज्य में मुख्यमंत्री से नाराज होकर दो विधायक कोई जिम्मेदारी नहीं दिए जाने की शिकायत करते हुए अपने-अपने सरकारी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।
कंपनी की तरफ से जांच में पता चला कि इंजेक्शन भारतीय लोगों के लिए नहीं था। कंपनी ने तुर्की के लोगों के लिए उसे बनाया था।
6 बार के विधायक गोपालकृष्ण पहले कांग्रेस में थे। वह चार बार चित्रदुर्ग जिले के मोलाकलमुरु विधानसभा क्षेत्र से और एक बार बेल्लारी सीट से विधायक चुने गए। भाजपा में शामिल होने के बाद वह कुदलिगी से विधायक बने।
राहुल गांधी की "मेरा नाम सावरकर नहीं है, मेरा नाम गांधी है और गांधी किसी से माफी नहीं मांगते" टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने नासिक में भी सावरकर गौरव यात्रा का आयोजन किया, जहां सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को भागुर गांव में हुआ था।
भाजपा विधायक मदल विरुपक्षप्पा को रिश्वत मामले में तुमकुरु में क्याथासंद्रा टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया गया है, उनके घर से रिश्वत के सात करोड़ रुपये बरामद हुए थे और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
दिल्ली बजट सत्र के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है कि बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता को अगले बजट सेशन तक के लिए सदन से बाहर कर दिया गया है। आप विधायक संजीव झा ने प्रस्ताव रखा था कि विजेंद्र गुप्ता बिना किसी कारण के सदन की कार्रवाई को बार- बार डिस्टर्ब करते हैं, ऐसे में उन्हें एक साल के लिए सदन से बाहर किया जाया।
आज जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को जमानत मिल चुकी है। लालू परिवार को बेल मिलने की खुशी में बंटे लड्डू को लेकर विधानसभा के बाहर जमकर बवाल हुआ।
कर्नाटक में करीब 13 फीसदी मुसलमान हैं। विधानसभा की 20 से 23 सीटों पर मुस्लिम वोट का बहुत ज्यादा अहम हैं। वहीं 60 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर अपना प्रभाव रखते हैं।
नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा विधानसभा में प्रेस ब्रीफिंग करने आए थे, इसी दौरान फ्रेम में आने के चक्कर में 2 बीजेपी विधायक आपस में ही भिड़ गए और उनके बीच बहस होने लगी। इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
आरोप हैं कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामदुलार ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बहन को डरा-धमका कर कई बार उसके साथ रेप किया है।
बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस इंस्पेक्टर आरएन चौधरी की वर्दी फाड़ने और वारंटी राजेश गुप्ता को जबरन छुड़ाने का केस धनबाद के कतरास थाने में दर्ज हुआ था।
आकाश सक्सेना को दारुल शफा में मकान संख्या 34 बी आवंटित किया गया है। यह आवास पूर्व में आजम खान के पास था। इसमें आजम खान करीब चार दशकों तक रहे हैं।
विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी के एक और विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। BJP विधायक दीबचंद्र हरंगखवाल इस साल राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन से इस्तीफा देने वाले वह 7वें विधायक बन गए हैं।
शिवमोगा से विधायक ईश्वरप्पा ने इस साल की शुरुआत में उडुपी के एक होटल में बेलगावी के एक ठेकेदार संतोष पाटिल की आत्महत्या के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
बीजेपी विधायक ने कहा, यदि मुसलमान मेरे घर आएंगे तो मैं उन्हें कॉफी पेश करूंगा, लेकिन अगर आपने मुझे वोट नहीं दिया तो मैं आपकी जरूरत का कोई काम नहीं करूंगा।
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक नयन सरकार, कांग्रेस के सुदीप रॉय बर्मन और टिपरा मोथा के तीन विधायकों को दिन भर के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सीधी जिले के कुबरी बाजार में मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति बैठा हुआ था तब प्रवेश शुक्ला ने नशे की हालत में उसके ऊपर पेशाब कर दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। लोग आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं। बीजेपी विधायक दिबाकर ने बताया कि आज वह नामांकन जमा करने के लिए पार्टी उम्मीदवारों के साथ सोनमुखी बीडीओ कार्यालय गए तभी तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला बोल दिया। आजकल शादियों का आयोजन बेहद खर्चीला हो गया है। शादियों का खर्चा कई परिवारों को कर्जदार भी बना देता है। ऐसे में सादगीपूर्ण ढंग से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करना अच्छी पहल है। बीजेपी ईसाई मतदाताओं तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश कर रही है, जो तटीय राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा के पास अभी ग्यारह ईसाई विधायक हैं। जोशुआ डी सूजा को छोड़कर, बाकी सभी विधायक कांग्रेस से भगवा पार्टी में आए हैं। मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के खिलाफ भाजपा के विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। राज्य में मुख्यमंत्री से नाराज होकर दो विधायक कोई जिम्मेदारी नहीं दिए जाने की शिकायत करते हुए अपने-अपने सरकारी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। कंपनी की तरफ से जांच में पता चला कि इंजेक्शन भारतीय लोगों के लिए नहीं था। कंपनी ने तुर्की के लोगों के लिए उसे बनाया था। छः बार के विधायक गोपालकृष्ण पहले कांग्रेस में थे। वह चार बार चित्रदुर्ग जिले के मोलाकलमुरु विधानसभा क्षेत्र से और एक बार बेल्लारी सीट से विधायक चुने गए। भाजपा में शामिल होने के बाद वह कुदलिगी से विधायक बने। राहुल गांधी की "मेरा नाम सावरकर नहीं है, मेरा नाम गांधी है और गांधी किसी से माफी नहीं मांगते" टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने नासिक में भी सावरकर गौरव यात्रा का आयोजन किया, जहां सावरकर का जन्म अट्ठाईस मई, एक हज़ार आठ सौ तिरासी को भागुर गांव में हुआ था। भाजपा विधायक मदल विरुपक्षप्पा को रिश्वत मामले में तुमकुरु में क्याथासंद्रा टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया गया है, उनके घर से रिश्वत के सात करोड़ रुपये बरामद हुए थे और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। दिल्ली बजट सत्र के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है कि बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता को अगले बजट सेशन तक के लिए सदन से बाहर कर दिया गया है। आप विधायक संजीव झा ने प्रस्ताव रखा था कि विजेंद्र गुप्ता बिना किसी कारण के सदन की कार्रवाई को बार- बार डिस्टर्ब करते हैं, ऐसे में उन्हें एक साल के लिए सदन से बाहर किया जाया। आज जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को जमानत मिल चुकी है। लालू परिवार को बेल मिलने की खुशी में बंटे लड्डू को लेकर विधानसभा के बाहर जमकर बवाल हुआ। कर्नाटक में करीब तेरह फीसदी मुसलमान हैं। विधानसभा की बीस से तेईस सीटों पर मुस्लिम वोट का बहुत ज्यादा अहम हैं। वहीं साठ विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर अपना प्रभाव रखते हैं। नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा विधानसभा में प्रेस ब्रीफिंग करने आए थे, इसी दौरान फ्रेम में आने के चक्कर में दो बीजेपी विधायक आपस में ही भिड़ गए और उनके बीच बहस होने लगी। इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप हैं कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामदुलार ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बहन को डरा-धमका कर कई बार उसके साथ रेप किया है। बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस इंस्पेक्टर आरएन चौधरी की वर्दी फाड़ने और वारंटी राजेश गुप्ता को जबरन छुड़ाने का केस धनबाद के कतरास थाने में दर्ज हुआ था। आकाश सक्सेना को दारुल शफा में मकान संख्या चौंतीस बी आवंटित किया गया है। यह आवास पूर्व में आजम खान के पास था। इसमें आजम खान करीब चार दशकों तक रहे हैं। विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी के एक और विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। BJP विधायक दीबचंद्र हरंगखवाल इस साल राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन से इस्तीफा देने वाले वह सातवें विधायक बन गए हैं। शिवमोगा से विधायक ईश्वरप्पा ने इस साल की शुरुआत में उडुपी के एक होटल में बेलगावी के एक ठेकेदार संतोष पाटिल की आत्महत्या के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी विधायक ने कहा, यदि मुसलमान मेरे घर आएंगे तो मैं उन्हें कॉफी पेश करूंगा, लेकिन अगर आपने मुझे वोट नहीं दिया तो मैं आपकी जरूरत का कोई काम नहीं करूंगा।
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यशोदा जयंती का पर्व माता और संतान के प्रेम को दर्शाता है। ये दिन माताओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति की कामना के लिए करती हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार इस दिन माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और व्रत करने से संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
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यशोदा जयंती का पर्व माता और संतान के प्रेम को दर्शाता है। ये दिन माताओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति की कामना के लिए करती हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार इस दिन माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और व्रत करने से संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
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यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Lord Koughcure Syrup 450ml की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Lord Koughcure Syrup 450ml की खुराक अलग हो सकती है।
क्या Lord Koughcure Syrup 450ml का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
Lords Koughcure Syrup के सुरक्षा व हानि पहुंचाने वाले प्रभावों के विषय में किसी तरह की कोई रिसर्च नहीं हुई है। इसलिए इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है, आप इस दवा के सेवन से पूर्व अपने डॉक्टर से सलाह लें।
क्या Lord Koughcure Syrup 450ml का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
कुछ समय से स्तनपान कराने वाली महिला को Lords Koughcure Syrup से किस तरह के प्रभाव होंगे, इस विषय पर किसी भी विशेषज्ञ का कोई मत नहीं हैं। इसलिए डॉक्टर से परार्मश के बाद ही इसका सेवन करें।
Lord Koughcure Syrup 450ml का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Lords Koughcure Syrup के इस्तेमाल से किडनी को किसी प्रकार से हानि नहीं होती है।
Lord Koughcure Syrup 450ml का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Lords Koughcure Syrup का सेवन आप बिना डॉक्टर कि सलाह के भी कर सकते हैं और ये दवा आपके लीवर की सेहत को हानि नहीं पहुंचाएगी।
क्या ह्रदय पर Lord Koughcure Syrup 450ml का प्रभाव पड़ता है?
Lords Koughcure Syrup को बिना घबराए ले सकते हैं। यह पूरी से आपके हृदय के लिए सुरक्षित है।
क्या Lord Koughcure Syrup 450ml आदत या लत बन सकती है?
Lord Koughcure Syrup 450ml की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें।
क्या Lord Koughcure Syrup 450ml को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
खाने के साथ Lord Koughcure Syrup 450ml को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
जब Lord Koughcure Syrup 450ml ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
Lord Koughcure Syrup 450ml के बुरे प्रभावों के बारे में जानकारी मौजूद नहीं है। क्योंकि इस विषय पर अभी रिसर्च नहीं हो पाई है। अतः डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस दवा को लें।
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यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर की खुराक अलग हो सकती है। क्या Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Lords Koughcure Syrup के सुरक्षा व हानि पहुंचाने वाले प्रभावों के विषय में किसी तरह की कोई रिसर्च नहीं हुई है। इसलिए इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है, आप इस दवा के सेवन से पूर्व अपने डॉक्टर से सलाह लें। क्या Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? कुछ समय से स्तनपान कराने वाली महिला को Lords Koughcure Syrup से किस तरह के प्रभाव होंगे, इस विषय पर किसी भी विशेषज्ञ का कोई मत नहीं हैं। इसलिए डॉक्टर से परार्मश के बाद ही इसका सेवन करें। Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Lords Koughcure Syrup के इस्तेमाल से किडनी को किसी प्रकार से हानि नहीं होती है। Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर का जिगर पर क्या असर होता है? Lords Koughcure Syrup का सेवन आप बिना डॉक्टर कि सलाह के भी कर सकते हैं और ये दवा आपके लीवर की सेहत को हानि नहीं पहुंचाएगी। क्या ह्रदय पर Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर का प्रभाव पड़ता है? Lords Koughcure Syrup को बिना घबराए ले सकते हैं। यह पूरी से आपके हृदय के लिए सुरक्षित है। क्या Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर आदत या लत बन सकती है? Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें। क्या Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने के साथ Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है। जब Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Lord Koughcure Syrup चार सौ पचास मिलीलीटर के बुरे प्रभावों के बारे में जानकारी मौजूद नहीं है। क्योंकि इस विषय पर अभी रिसर्च नहीं हो पाई है। अतः डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस दवा को लें।
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अनाया सोनी (Ananya Soni) टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस में से एक हैं. उन्होंने फेमस शो 'मेरे साईं' में अहम किरदार निभाकर लाखों लोगों का दिल जीता हैं. वहीं अब अनाया सोनी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही हैं कि हाल ही में उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई हैं. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
उन्होंने कहा , "मंज़िल बहुत दूर है. अभी हम एक किडनी की तलाश में हैं, जो बहुत कठिन प्रक्रिया है. यहां तक कि मुझे आर्थिक मदद की जरूरत है. कई बार लोगों को अंग मिल जाते हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण उनका ऑपरेशन नहीं हो पाता है. " बता दें कि अनाया नामकरण, क्राइम पेट्रोल और अदालत जैसे शो में काम कर चुकी हैं.
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अनाया सोनी टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस में से एक हैं. उन्होंने फेमस शो 'मेरे साईं' में अहम किरदार निभाकर लाखों लोगों का दिल जीता हैं. वहीं अब अनाया सोनी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही हैं कि हाल ही में उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई हैं. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. उन्होंने कहा , "मंज़िल बहुत दूर है. अभी हम एक किडनी की तलाश में हैं, जो बहुत कठिन प्रक्रिया है. यहां तक कि मुझे आर्थिक मदद की जरूरत है. कई बार लोगों को अंग मिल जाते हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण उनका ऑपरेशन नहीं हो पाता है. " बता दें कि अनाया नामकरण, क्राइम पेट्रोल और अदालत जैसे शो में काम कर चुकी हैं. बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः
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हुबली (एजेंसी/वार्ता): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को छात्रों को देश के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए देश को दुनिया में नंबर एक बनाने के लिए केंद्र द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का उपयोग करने की अपील की।
छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने आगे छात्रों को देश की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान के बारे में पढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल छात्रों के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देखा है क्योंकि इससे प्रौद्योगिकी का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए कई अवसर खुलेंगे।
श्री शाह ने बाद में अपने संबोधन में स्टार्टअप्स के बारे में भी बात की और रेखांकित किया कि कैसे श्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश आगे बढ़ने लगा है।
उन्होंने कहा कि 50,000 से 1,00,000 की आबादी वाले शहरों को टियर 2 शहरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है जबकि 20,000 से 50,000 की आबादी वाले शहरों को टियर 3 शहरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने पेटेंट आवेदन प्रपत्रों को रेखांकित किया और कहा कि 2013-14 तक, केंद्र को 3000 पेटेंट आवेदन प्राप्त होते थे, जिनमें से 211 का पंजीकरण प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता था।
गृह मंत्री ने छात्रों को पारंपरिक मानसिकता और ढांचे से बाहर निकलने की भी सलाह दी और उन्हें 'नया सोचने, बहादुर बनने और आगे बढ़ने' के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री शाह का कर्नाटक दौरा ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब इस साल यहां विधानसभा चुनाव के साथ-साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा सहित आठ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इन विधानसभा चुनावों को 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल बताया जा रहा है। कर्नाटक में चुनाव अप्रैल के मध्य या मई की शुरुआत में होने की संभावना है। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का ध्यान राज्य पर केंद्रित हो गया है।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ेंः- कीवी के अनगिनत फायदे जानकर आप हो जाएंगे हैरान, जानिए सेवन करने से क्या-क्या लाभ मिलेंगे!
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हुबली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को छात्रों को देश के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए देश को दुनिया में नंबर एक बनाने के लिए केंद्र द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का उपयोग करने की अपील की। छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने आगे छात्रों को देश की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान के बारे में पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल छात्रों के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देखा है क्योंकि इससे प्रौद्योगिकी का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए कई अवसर खुलेंगे। श्री शाह ने बाद में अपने संबोधन में स्टार्टअप्स के बारे में भी बात की और रेखांकित किया कि कैसे श्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश आगे बढ़ने लगा है। उन्होंने कहा कि पचास,शून्य से एक,शून्य,शून्य की आबादी वाले शहरों को टियर दो शहरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है जबकि बीस,शून्य से पचास,शून्य की आबादी वाले शहरों को टियर तीन शहरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने पेटेंट आवेदन प्रपत्रों को रेखांकित किया और कहा कि दो हज़ार तेरह-चौदह तक, केंद्र को तीन हज़ार पेटेंट आवेदन प्राप्त होते थे, जिनमें से दो सौ ग्यारह का पंजीकरण प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता था। गृह मंत्री ने छात्रों को पारंपरिक मानसिकता और ढांचे से बाहर निकलने की भी सलाह दी और उन्हें 'नया सोचने, बहादुर बनने और आगे बढ़ने' के लिए प्रोत्साहित किया। श्री शाह का कर्नाटक दौरा ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब इस साल यहां विधानसभा चुनाव के साथ-साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा सहित आठ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन विधानसभा चुनावों को दो हज़ार चौबीस में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल बताया जा रहा है। कर्नाटक में चुनाव अप्रैल के मध्य या मई की शुरुआत में होने की संभावना है। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का ध्यान राज्य पर केंद्रित हो गया है। - यह भी पढ़ेंः- कीवी के अनगिनत फायदे जानकर आप हो जाएंगे हैरान, जानिए सेवन करने से क्या-क्या लाभ मिलेंगे!
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अजित पवार के महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बाद राज्य में सियासी हलचल मची हुई. लोगों की नजरें अब तीन अलग-अलग घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं. इसी बीच एनसीपी नेता अजित पवार ने दक्षिण मुंबई में स्थित नए पार्टी कार्यालय का उद्घाटन किया. यह मंत्रालय के ठीक सामने है. लेकिन जब अजित पवार गुट के पार्टी कार्यकर्ताओं को चाबियां नहीं मिली तो वे नाराज हो गए.
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अजित पवार के महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बाद राज्य में सियासी हलचल मची हुई. लोगों की नजरें अब तीन अलग-अलग घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं. इसी बीच एनसीपी नेता अजित पवार ने दक्षिण मुंबई में स्थित नए पार्टी कार्यालय का उद्घाटन किया. यह मंत्रालय के ठीक सामने है. लेकिन जब अजित पवार गुट के पार्टी कार्यकर्ताओं को चाबियां नहीं मिली तो वे नाराज हो गए.
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