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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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25 मई। आईसीसी विश्व कप में अफगानिस्तान क्या कर सकती है, उसने इस बात की झलक शुक्रवार को पाकिस्तान को अभ्यास मैच में तीन विकेट से हराकर दे दी।
अपने पहले अभ्यास मैच में अफगानिस्तान ने अपनी मजबूत गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तान को 47.5 ओवरों में 262 रनों पर ढेर कर दिया और फिर हसमातुल्लाह शाहिदी की नाबाद 74 रनों की पारी के दम पर 49.4 ओवरों में सात विकेट खोकर जीत हासिल कर ली।
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पच्चीस मई। आईसीसी विश्व कप में अफगानिस्तान क्या कर सकती है, उसने इस बात की झलक शुक्रवार को पाकिस्तान को अभ्यास मैच में तीन विकेट से हराकर दे दी। अपने पहले अभ्यास मैच में अफगानिस्तान ने अपनी मजबूत गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तान को सैंतालीस.पाँच ओवरों में दो सौ बासठ रनों पर ढेर कर दिया और फिर हसमातुल्लाह शाहिदी की नाबाद चौहत्तर रनों की पारी के दम पर उनचास.चार ओवरों में सात विकेट खोकर जीत हासिल कर ली।
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सकता जब तक कि दुनिया पूँजीवादी और साम्यवादी दो आपस में शत्रुतापूर्ण शिविरों में बँटी हुई है। जब जगत का एकीकरण होगा, और यह साम्यवाद के अधीन होगा, तभी विश्वविज्ञान भी होगा । तब तक मोर्चेबंदी के उस पार हाथ बढ़ाना निषिद्ध है ।
यह जो रुख है, वह दल के एक दूसरे रुख के सम्पूर्ण रूप से मेल. खाता है, जिस के अनुसार दुनिया के यदि सव नहीं तो अधिकांश आविष्कारों का श्रेय रूसी आविष्कारकों को प्राप्त है । ऐसे रूसी आनिष्कारक क्यों ख्याति प्राप्त न कर पा कर अँधेरे में ही मुरझा गये, इस का कारण यह बतलाया जाता है कि जार की नौकरशाही का भ्रष्टाचार ही इस के लिये जिम्मेदार है । यह कहा जाता है कि यह नौकरशाही विदेशी पूँजीपतियों के हाथ अपने देश के फुटकर तथा थोक ऐश्वर्य को बेच देती थी। इस का एक आंशिक कारण यह भी बताया जाता है कि विवेकहीन विदेशी गण रूसी जाति के विरुद्ध जान-बूझ कर एक चुप्पी का पड़यंत्र किये हुए थे।
सोवियट पत्रिका 'साहित्यिक गजट' का कहना है.. "इटालियन मार्कोनी ने रूसी वैज्ञानिक पोषांच के द्वारा आविष्कृत रेडियो को निर्लउजता पूर्वक अपना लिया। जर्मन जीमेन्स ने याकोबी से तार के संबंध में आविष्कार सम्बन्धी कागजात को आक्षरिक रूप से चुरा लिया. ( इसके सम्बन्ध में और कुछ कहा नहीं जाता ), राइट बन्धुओं ने मुजाइस्की के गौरव को गलत रूप से अपना लिया । ( मुजाइस्की के सम्बन्ध में यह दावा किया जाता है कि उन्होंने किटीहाक की घटना के २० साल पहले सेंटपीटर्स वर्ग में अपने हवाई जहाज पर उढ़ने का गौरव प्राप्त किया था ) ।
इस सूची को जारी रखते हुए एढीसन नहीं बल्कि याब्लोचकोव के
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सकता जब तक कि दुनिया पूँजीवादी और साम्यवादी दो आपस में शत्रुतापूर्ण शिविरों में बँटी हुई है। जब जगत का एकीकरण होगा, और यह साम्यवाद के अधीन होगा, तभी विश्वविज्ञान भी होगा । तब तक मोर्चेबंदी के उस पार हाथ बढ़ाना निषिद्ध है । यह जो रुख है, वह दल के एक दूसरे रुख के सम्पूर्ण रूप से मेल. खाता है, जिस के अनुसार दुनिया के यदि सव नहीं तो अधिकांश आविष्कारों का श्रेय रूसी आविष्कारकों को प्राप्त है । ऐसे रूसी आनिष्कारक क्यों ख्याति प्राप्त न कर पा कर अँधेरे में ही मुरझा गये, इस का कारण यह बतलाया जाता है कि जार की नौकरशाही का भ्रष्टाचार ही इस के लिये जिम्मेदार है । यह कहा जाता है कि यह नौकरशाही विदेशी पूँजीपतियों के हाथ अपने देश के फुटकर तथा थोक ऐश्वर्य को बेच देती थी। इस का एक आंशिक कारण यह भी बताया जाता है कि विवेकहीन विदेशी गण रूसी जाति के विरुद्ध जान-बूझ कर एक चुप्पी का पड़यंत्र किये हुए थे। सोवियट पत्रिका 'साहित्यिक गजट' का कहना है.. "इटालियन मार्कोनी ने रूसी वैज्ञानिक पोषांच के द्वारा आविष्कृत रेडियो को निर्लउजता पूर्वक अपना लिया। जर्मन जीमेन्स ने याकोबी से तार के संबंध में आविष्कार सम्बन्धी कागजात को आक्षरिक रूप से चुरा लिया. , राइट बन्धुओं ने मुजाइस्की के गौरव को गलत रूप से अपना लिया । । इस सूची को जारी रखते हुए एढीसन नहीं बल्कि याब्लोचकोव के
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एक कहावत है कि रोम में रहो तो वही करो जो रोमन करते हैं, लगता है एक्टर रनवीर सिंह कोलकाता में अपनी नई फिल्म की शूटिंग के दौरान इसे ही फॉलो कर रहे हैं। सेट से जुड़े एक सोर्स ने बताया, 'रनवीर इन दिनों अली अब्बास की फिल्म की शूटिंग कोलकाता में कर रहे हैं। एक शॉट के दौरान उन्हें लोकल लोगों को हंसाना था जिसके लिए उन्हें बंगाली चुटकुलों की हेल्प लेनी पड़ी. ' सोर्स ने बताया कि रनवीर का मानना है कि एक छोटे सीन के लिए भी बेहतर से बेहतर कोशिश करनी चाहिए। रनवीर इससे पहले भी विक्रमादित्य मोटवाने की फिल्म की शूटिंग के लिए कोलकाता आ चुके हैं और उन्हें यह शहर बहुत पसंद है।
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एक कहावत है कि रोम में रहो तो वही करो जो रोमन करते हैं, लगता है एक्टर रनवीर सिंह कोलकाता में अपनी नई फिल्म की शूटिंग के दौरान इसे ही फॉलो कर रहे हैं। सेट से जुड़े एक सोर्स ने बताया, 'रनवीर इन दिनों अली अब्बास की फिल्म की शूटिंग कोलकाता में कर रहे हैं। एक शॉट के दौरान उन्हें लोकल लोगों को हंसाना था जिसके लिए उन्हें बंगाली चुटकुलों की हेल्प लेनी पड़ी. ' सोर्स ने बताया कि रनवीर का मानना है कि एक छोटे सीन के लिए भी बेहतर से बेहतर कोशिश करनी चाहिए। रनवीर इससे पहले भी विक्रमादित्य मोटवाने की फिल्म की शूटिंग के लिए कोलकाता आ चुके हैं और उन्हें यह शहर बहुत पसंद है।
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सेनाए एकत्र करने लगा। उस समय स्पेन में पॉपी दल के कुछ सैनिक सरदारों ने उपद्रव खड़ा कर रक्खा था, इसलिये सीजर पहले उनकी तरफ बढ़ा। यद्यपि वह युद्ध थोड़े ही समय में समाप्त हो गया था, पर फिर भी उसका रूप भीषण हो गया था। इसके बाद पॉपी की ख़बर लेने के लिये सीजर यूनान की तरफ बढ़ा। पहले तो दोनो दलों के सैनिकों में लुक-छिपकर छोटी-मोटी लड़ाइयाँ होती रहीं पर अंत में, ई० ०४८ में, दोनो सेनाओं का फरसेबस नामक स्थान पर सामना हो गया। वहाँ पपी पूर्ण रूप से पराजित हुआ, और भागकर मिस्र चला गया, जहाँ वह मार डाला गया। फिर मी मित्र, एशिया, यूनान, आशिका और स्पेन में सीजर के जो थोड़े-से विरोधी बचे रह गए थे, उन्हें दो वर्षों में सीजर ने अपने अधीन कर लिया। इसके बाद ई०पू० ४९ में वह लौटकर रोम आया, और समस्त रोमन संसार का एकमात्र स्वामी हो
गया ।
इसके बाद जो कुछ हुआ, उसका वर्णन करने से पहले हम संक्षेप में यहाँ यह बतला देना आवश्यक समझते हैं कि इन अनेक सेनापतियों के कार्यों का एक बड़ा परिणाम यह हुआ था कि विदेशों में रोमनसाम्राज्य का विस्तार बहुत बढ़ गया था। इन सभी सैनिक नेताओं ने अपने-अपने समय में प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिये अपनो सेनाओं को बहुत कुछ शिक्षित किया था। इसमें उनका उद्देश्य यही रहता या कि इम इन सैनिकों को अपने साथ लेकर रोम पहुँचें, और वहीं सर्वश्रेष्ठ अधिकार प्राप्त करें। उनके इस प्रकार के कार्यों का फल यह होता था कि रोमन साम्राज्य में एक-एक करके नए प्रांत सम्मिलित होते जाते थे। मेरियस ने न्यूमीडियन तथा गानजातियों पर जो विजय प्राप्त की थी, उसके कारण आफ्रिका, जाइगुरिया और दक्षिणी गाल में रोमन राज्य का बहुत कुछ विस्तार हो
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सेनाए एकत्र करने लगा। उस समय स्पेन में पॉपी दल के कुछ सैनिक सरदारों ने उपद्रव खड़ा कर रक्खा था, इसलिये सीजर पहले उनकी तरफ बढ़ा। यद्यपि वह युद्ध थोड़े ही समय में समाप्त हो गया था, पर फिर भी उसका रूप भीषण हो गया था। इसके बाद पॉपी की ख़बर लेने के लिये सीजर यूनान की तरफ बढ़ा। पहले तो दोनो दलों के सैनिकों में लुक-छिपकर छोटी-मोटी लड़ाइयाँ होती रहीं पर अंत में, ईशून्य अड़तालीस में, दोनो सेनाओं का फरसेबस नामक स्थान पर सामना हो गया। वहाँ पपी पूर्ण रूप से पराजित हुआ, और भागकर मिस्र चला गया, जहाँ वह मार डाला गया। फिर मी मित्र, एशिया, यूनान, आशिका और स्पेन में सीजर के जो थोड़े-से विरोधी बचे रह गए थे, उन्हें दो वर्षों में सीजर ने अपने अधीन कर लिया। इसके बाद ईशून्यपूशून्य उनचास में वह लौटकर रोम आया, और समस्त रोमन संसार का एकमात्र स्वामी हो गया । इसके बाद जो कुछ हुआ, उसका वर्णन करने से पहले हम संक्षेप में यहाँ यह बतला देना आवश्यक समझते हैं कि इन अनेक सेनापतियों के कार्यों का एक बड़ा परिणाम यह हुआ था कि विदेशों में रोमनसाम्राज्य का विस्तार बहुत बढ़ गया था। इन सभी सैनिक नेताओं ने अपने-अपने समय में प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिये अपनो सेनाओं को बहुत कुछ शिक्षित किया था। इसमें उनका उद्देश्य यही रहता या कि इम इन सैनिकों को अपने साथ लेकर रोम पहुँचें, और वहीं सर्वश्रेष्ठ अधिकार प्राप्त करें। उनके इस प्रकार के कार्यों का फल यह होता था कि रोमन साम्राज्य में एक-एक करके नए प्रांत सम्मिलित होते जाते थे। मेरियस ने न्यूमीडियन तथा गानजातियों पर जो विजय प्राप्त की थी, उसके कारण आफ्रिका, जाइगुरिया और दक्षिणी गाल में रोमन राज्य का बहुत कुछ विस्तार हो
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लखनऊ। सुरेश प्रभु ने बुधवार दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही रेक्स्यू और राहत का कार्य शुरू करते हुए बोले- "मैं हादसे पर खुद नजर रख रहा हूं"।
प्रभु ने रेलवे के अफसरों को फौरन हादसे वाली जगह पर पहुंचने के ऑर्डर दिए गए हैं। जख्मी लोगों को मेडिकल फैसिलिटीज मुहैया कराई जा रही है। हादसे की वजह की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबरः
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लखनऊ। सुरेश प्रभु ने बुधवार दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही रेक्स्यू और राहत का कार्य शुरू करते हुए बोले- "मैं हादसे पर खुद नजर रख रहा हूं"। प्रभु ने रेलवे के अफसरों को फौरन हादसे वाली जगह पर पहुंचने के ऑर्डर दिए गए हैं। जख्मी लोगों को मेडिकल फैसिलिटीज मुहैया कराई जा रही है। हादसे की वजह की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबरः
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यूपी के महराजगंज में साइकिल से कम्प्यूटर सीखने जा रही एक नाबालिग लड़की की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। घात लगाकर बैठे बदमाशों ने लड़की को खींचकर दिनदहाड़े गला रेत दिया और शव को खेत में फेंक भाग गए।
साइकिल से कम्प्यूटर सीखने जा रही एक नाबालिग लड़की महराजगंज में दिन दहाड़े गला काटकर हत्या कर दी गई। लड़की कुशीनगर की रहने वाली थी जबकि वारदात सीमा से लगे महराजगंज जिले के घुघुली क्षेत्र के बारीगांव में हुई है।
कुशीनगर के गजरा गांव की इस लड़की का खून से लथपथ शव गांव के बगल के खेत में मिला। इस जघन्य वारदात की खबर आसपास के इलाकों में जंगल में आग की तरह फैल गई। क्षेत्र में सनसनी मच गई। मौके पर पुलिस के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। परिजनों ने किशोरी की पहचान कर ली है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
शनिवार दोपहर बाद कप्तानगंज क्षेत्र के ग्राम गजरा की एक किशोरी रोज की तरह साइकिल से घुघली के बारीगांव के राजी टोला स्थित मार्ग से होकर इंदरपुर चौराहे पर कम्प्यूटर सीखने जा रही थी। बताया जा रहा है कि पहले से किशोरी के इंतजार में छिपे हमलावरों ने राजी टोले के पास किशोरी के पहुंचते ही उसे पकड़ लिया। उसके गले पर धारदार हथियार से वार किया और गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। उसके शव को बगल के खेत में फेंककर हमलावर भाग निकले।
किशोरी का शव और साइकिल खेत में पड़ी मिली। किसी ने किशोरी का शव देखा तो शोर मचाया। शोर पर बहुत से लोग मौके पर पहुंच गए और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसकी पहचान कराई। परिजनों को बुलाया गया और परिजनों ने भी पहचान कर ली। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह व सीओ सदर अजय सिंह चौहान भी पहुंच गए थे। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ कर जांच शुरू कर दी। इस संबंध में एसओ देवेन्द्र कुमार सिंह का कहना रहा कि किशोरी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस कार्रवाई कर रही है।
घुघली के बारीगांव में किशोरी की हत्या की जानकारी मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शीघ्र इसका खुलासा कर दिया जाएगा।
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यूपी के महराजगंज में साइकिल से कम्प्यूटर सीखने जा रही एक नाबालिग लड़की की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। घात लगाकर बैठे बदमाशों ने लड़की को खींचकर दिनदहाड़े गला रेत दिया और शव को खेत में फेंक भाग गए। साइकिल से कम्प्यूटर सीखने जा रही एक नाबालिग लड़की महराजगंज में दिन दहाड़े गला काटकर हत्या कर दी गई। लड़की कुशीनगर की रहने वाली थी जबकि वारदात सीमा से लगे महराजगंज जिले के घुघुली क्षेत्र के बारीगांव में हुई है। कुशीनगर के गजरा गांव की इस लड़की का खून से लथपथ शव गांव के बगल के खेत में मिला। इस जघन्य वारदात की खबर आसपास के इलाकों में जंगल में आग की तरह फैल गई। क्षेत्र में सनसनी मच गई। मौके पर पुलिस के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। परिजनों ने किशोरी की पहचान कर ली है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शनिवार दोपहर बाद कप्तानगंज क्षेत्र के ग्राम गजरा की एक किशोरी रोज की तरह साइकिल से घुघली के बारीगांव के राजी टोला स्थित मार्ग से होकर इंदरपुर चौराहे पर कम्प्यूटर सीखने जा रही थी। बताया जा रहा है कि पहले से किशोरी के इंतजार में छिपे हमलावरों ने राजी टोले के पास किशोरी के पहुंचते ही उसे पकड़ लिया। उसके गले पर धारदार हथियार से वार किया और गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। उसके शव को बगल के खेत में फेंककर हमलावर भाग निकले। किशोरी का शव और साइकिल खेत में पड़ी मिली। किसी ने किशोरी का शव देखा तो शोर मचाया। शोर पर बहुत से लोग मौके पर पहुंच गए और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसकी पहचान कराई। परिजनों को बुलाया गया और परिजनों ने भी पहचान कर ली। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह व सीओ सदर अजय सिंह चौहान भी पहुंच गए थे। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ कर जांच शुरू कर दी। इस संबंध में एसओ देवेन्द्र कुमार सिंह का कहना रहा कि किशोरी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस कार्रवाई कर रही है। घुघली के बारीगांव में किशोरी की हत्या की जानकारी मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शीघ्र इसका खुलासा कर दिया जाएगा।
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तराई के चाय बागानों में कलकत्ता स्थित दो गैर सरकारी संगठनों के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और निवारण के लिए 10 साल पहले बने कानून को अभी तक चाय बागानों में लागू नहीं किया गया है।
यह पहली बार है कि इस क्षेत्र के ब्रू बेल्ट में इस तरह का सर्वेक्षण किया गया है। एनजीओ संहिता ने नागरीक मंच के सहयोग से तराई के 24 चाय बागानों में यह काम किया।
"हमने पिछले साल मई से सितंबर तक इन चाय बागानों में महिला श्रमिकों के बीच सर्वेक्षण किया था। आश्चर्य की बात यह है कि कार्यस्थल में शोषण के निवारण के लिए पारित अधिनियम किसी भी उद्यान में लागू नहीं किया गया है। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निषेध, रोकथाम और निवारण) अधिनियम, 2013 का जिक्र करते हुए, संहिता की कार्यक्रम अधिकारी सिरशा गुप्ता ने कहा, जिन महिला कर्मचारियों से हमने बात की, उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं है कि ऐसा कानून मौजूद है।
गुप्ता ने कहा कि चाय कंपनियों - इन महिलाओं के नियोक्ता - द्वारा अपने संबंधित बागानों में अधिनियम को लागू करने के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
"चार सदस्यीय समिति (अधिनियम में एक आंतरिक समिति के रूप में संदर्भित) का होना अनिवार्य है, जिसमें एक वरिष्ठ महिला कार्यकर्ता, एक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि, एक कानूनी विशेषज्ञ और प्रत्येक बगीचे में ट्रेड यूनियनों का एक प्रतिनिधि होना चाहिए। यौन उत्पीड़न की किसी घटना की सूचना मिलने या किसी महिला कार्यकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में यह समिति कार्रवाई करेगी। जिन बगीचों में हमने सर्वेक्षण किया था, वहां ऐसी कोई समिति मौजूद नहीं है, "गुप्ता ने कहा।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में, वे डूआर्स के कुछ चाय बागानों में इसी तरह का सर्वेक्षण करेंगे।
उन्होंने कहा, "सर्वे के बाद, हम अपने निष्कर्षों की एक अंतिम रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसे केंद्रीय श्रम मंत्रालय और राज्य श्रम विभाग को सौंपेंगे। "
"यह वास्तव में खतरनाक है कि अधिनियम को ऐसे उद्योग में लागू नहीं किया गया है जहां महिलाएं बहुसंख्यक कार्यबल का गठन करती हैं," उसने कहा। अभ्यास के दौरान, एनजीओ की टीम के सदस्यों ने महिला चाय श्रमिकों, राज्य श्रम विभाग के अधिकारियों, चाय बागान संघों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बात की।
एक सूत्र ने कहा, "आठ समूहों में 40 श्रमिकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई और सर्वेक्षण के दौरान 32 श्रमिकों के साक्षात्कारों को नोट किया गया। "
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तराई के चाय बागानों में कलकत्ता स्थित दो गैर सरकारी संगठनों के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और निवारण के लिए दस साल पहले बने कानून को अभी तक चाय बागानों में लागू नहीं किया गया है। यह पहली बार है कि इस क्षेत्र के ब्रू बेल्ट में इस तरह का सर्वेक्षण किया गया है। एनजीओ संहिता ने नागरीक मंच के सहयोग से तराई के चौबीस चाय बागानों में यह काम किया। "हमने पिछले साल मई से सितंबर तक इन चाय बागानों में महिला श्रमिकों के बीच सर्वेक्षण किया था। आश्चर्य की बात यह है कि कार्यस्थल में शोषण के निवारण के लिए पारित अधिनियम किसी भी उद्यान में लागू नहीं किया गया है। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, दो हज़ार तेरह का जिक्र करते हुए, संहिता की कार्यक्रम अधिकारी सिरशा गुप्ता ने कहा, जिन महिला कर्मचारियों से हमने बात की, उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं है कि ऐसा कानून मौजूद है। गुप्ता ने कहा कि चाय कंपनियों - इन महिलाओं के नियोक्ता - द्वारा अपने संबंधित बागानों में अधिनियम को लागू करने के लिए कोई पहल नहीं की गई है। "चार सदस्यीय समिति का होना अनिवार्य है, जिसमें एक वरिष्ठ महिला कार्यकर्ता, एक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि, एक कानूनी विशेषज्ञ और प्रत्येक बगीचे में ट्रेड यूनियनों का एक प्रतिनिधि होना चाहिए। यौन उत्पीड़न की किसी घटना की सूचना मिलने या किसी महिला कार्यकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में यह समिति कार्रवाई करेगी। जिन बगीचों में हमने सर्वेक्षण किया था, वहां ऐसी कोई समिति मौजूद नहीं है, "गुप्ता ने कहा। उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में, वे डूआर्स के कुछ चाय बागानों में इसी तरह का सर्वेक्षण करेंगे। उन्होंने कहा, "सर्वे के बाद, हम अपने निष्कर्षों की एक अंतिम रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसे केंद्रीय श्रम मंत्रालय और राज्य श्रम विभाग को सौंपेंगे। " "यह वास्तव में खतरनाक है कि अधिनियम को ऐसे उद्योग में लागू नहीं किया गया है जहां महिलाएं बहुसंख्यक कार्यबल का गठन करती हैं," उसने कहा। अभ्यास के दौरान, एनजीओ की टीम के सदस्यों ने महिला चाय श्रमिकों, राज्य श्रम विभाग के अधिकारियों, चाय बागान संघों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बात की। एक सूत्र ने कहा, "आठ समूहों में चालीस श्रमिकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई और सर्वेक्षण के दौरान बत्तीस श्रमिकों के साक्षात्कारों को नोट किया गया। "
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देशबंधु चित्तरजन दास
भव- ज्ञान प्राप्त करने के लिए उत्सुक थे । "दूसरे देश मे जो कुछ हो, पर इस देश का उद्धार तो शातिमार्ग से ही हो सकता है । मै यहां के नवयुवकों को दिखला दूगा कि हम शाति के रास्ते स्वराज्य प्राप्त कर सकते है ।" "यदि हम भले हो जायगे तो अग्रेजो को भला बना लेगे।" "इस अधकार और दभ मे मुझे सत्य के सिवा दूसरा कोई रास्ता नही दिखाई देता । दूसरे की हमे आवश्यकता भी नही ।" "मै तमाम दलो मे मेल कराना चाहता हू । बाधा सिर्फ इतनी ही है कि हमारे लोग भीरु है । उनको एकत्र करने के प्रयत्न मे होता क्या है कि हमे भीरु बनना पडता है । तुम जरूर सबको मिलाने की कोशिश करना और मिलना, पत्र-सपादको को समझाना कि मेरी और स्वराज्य-दल की ख्वामख्वा निदा करने से क्या लाभ ? मैने यदि भूल की हो तो मुझे बतावे । मै यदि उन्हे सतुष्ट न करू तो फिर शौक से पेट भर के मेरी निदा करे । " तुम्हारे चरखे का रहस्य मै दिन - दिन अधिक समझता जाता हू । मेरा कधा यदि दर्द न करता हो और इसमे मेरी गति कुठित न हो तो मै तुरत सीख लू । एक बार सीखने पर नियमपूर्वक कातने मे मेरा जी न ऊबेगा । पर सीखते हुए जी उकता उठता है । देखो न, तार टूटते ही जाते है ।" "पर आप ऐसा किस तरह कह सकते है ? स्वराज्य के लिए आप क्या नही कर सकते । " " हा-हा, यह तो ठीक ही है। मै कहा सीखने से नाही करता हूं ? मै तो अपनीनाई बताता हु। पूछो तो वासतीदेवी से कि ऐसे काम मे मै कितना मंदबुद्धि हू वासतीदेवी ने उनकी मदद की, " ये सच कहते है । अपना कलमदान खोलना हो तो ताला लगाने मुझे आना पडता है।" मैने कहा, "यह तो आपकी चालाकी है । इस तरह आपने देशबंधु को अपग बना रखा है, जिससे उन्हें सदा आपकी खुशामद करनी पडे और आप पर सहारा रखना पडे ।" हँसी से कमरा गूज उठा । देशवधु मध्यस्थ हुए । "एक महीने बाद मेरी परीक्षा लेना । उस समय मै रस्सियां निकालता न मिलूगा ।" मैने कहा, "ठीक है । आपके लिए सतीशबाबू शिक्षक भी भेजे देगे । आप जब पास
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देशबंधु चित्तरजन दास भव- ज्ञान प्राप्त करने के लिए उत्सुक थे । "दूसरे देश मे जो कुछ हो, पर इस देश का उद्धार तो शातिमार्ग से ही हो सकता है । मै यहां के नवयुवकों को दिखला दूगा कि हम शाति के रास्ते स्वराज्य प्राप्त कर सकते है ।" "यदि हम भले हो जायगे तो अग्रेजो को भला बना लेगे।" "इस अधकार और दभ मे मुझे सत्य के सिवा दूसरा कोई रास्ता नही दिखाई देता । दूसरे की हमे आवश्यकता भी नही ।" "मै तमाम दलो मे मेल कराना चाहता हू । बाधा सिर्फ इतनी ही है कि हमारे लोग भीरु है । उनको एकत्र करने के प्रयत्न मे होता क्या है कि हमे भीरु बनना पडता है । तुम जरूर सबको मिलाने की कोशिश करना और मिलना, पत्र-सपादको को समझाना कि मेरी और स्वराज्य-दल की ख्वामख्वा निदा करने से क्या लाभ ? मैने यदि भूल की हो तो मुझे बतावे । मै यदि उन्हे सतुष्ट न करू तो फिर शौक से पेट भर के मेरी निदा करे । " तुम्हारे चरखे का रहस्य मै दिन - दिन अधिक समझता जाता हू । मेरा कधा यदि दर्द न करता हो और इसमे मेरी गति कुठित न हो तो मै तुरत सीख लू । एक बार सीखने पर नियमपूर्वक कातने मे मेरा जी न ऊबेगा । पर सीखते हुए जी उकता उठता है । देखो न, तार टूटते ही जाते है ।" "पर आप ऐसा किस तरह कह सकते है ? स्वराज्य के लिए आप क्या नही कर सकते । " " हा-हा, यह तो ठीक ही है। मै कहा सीखने से नाही करता हूं ? मै तो अपनीनाई बताता हु। पूछो तो वासतीदेवी से कि ऐसे काम मे मै कितना मंदबुद्धि हू वासतीदेवी ने उनकी मदद की, " ये सच कहते है । अपना कलमदान खोलना हो तो ताला लगाने मुझे आना पडता है।" मैने कहा, "यह तो आपकी चालाकी है । इस तरह आपने देशबंधु को अपग बना रखा है, जिससे उन्हें सदा आपकी खुशामद करनी पडे और आप पर सहारा रखना पडे ।" हँसी से कमरा गूज उठा । देशवधु मध्यस्थ हुए । "एक महीने बाद मेरी परीक्षा लेना । उस समय मै रस्सियां निकालता न मिलूगा ।" मैने कहा, "ठीक है । आपके लिए सतीशबाबू शिक्षक भी भेजे देगे । आप जब पास
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Petrol-Diesel Price: सरकारी तेल कंपनियों ने आज लगातार तीसरे दिन पेट्रोल की कीमत में फिर से बढ़ोतरी कर दी है। आज, दिल्ली में पेट्रोल 17 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। पिछले महीने पेट्रोल के दाम स्थिर थे, वहीं डीजल के दाम में नियमित तौर पर बढ़ोतरी की जा रही थी।
इससे पहले जुलाई महीने में डीजल के दाम 10 बार बढ़ाए गए थे। जिसमें 1. 60 रुपये प्रति लीटर की बढोतरी दर्ज हुई थी। आपको बता दें कि पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है।
दिल्ली में आज पेट्रोल 80. 90 रुपये प्रति लीटर बिक रहा हैं। वहीं डीजल कल के भाव 73. 56 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। मुंबई में भी पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं। जबकि डीजल के दाम स्थिर हैं। पेट्रोल 14 पैसे महंगा होकर 87. 58 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। वहीं डीजल कल के दाम 80. 11 रुपये प्रति लीटर हैं।
कोलकाता में पेट्रोल के दाम 82. 43 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं और डीजल कल के भाव 77. 06 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 83. 87 से बढ़कर 83. 99 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं। जबकि डीजल बीते दिन यानि कल के भाव 78. 86 रुपये प्रति लीटर ही बिक रहा है।
रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर हर रोज तेल की कीमतों में बदलाव होता है। इसलिए तेल के भाव में आए दिन उठापठक दिखने को मिलती है।
पेट्रोल-डीजल का रोज़ का रेट आप SMS के जरिए भी जान सकते हैं । इंडियन ऑयल के कस्टमर RSP के साथ शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर और बीपीसीएल उपभोक्ता RSP लिखकर 9223112222 नंबर पर भेज जानकारी हासिल कर सकते हैं। वहीं, एचपीसीएल उपभोक्ता HPPrice लिखकर 9222201122 नंबर पर भेजकर भाव पता कर सकते हैं।
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Petrol-Diesel Price: सरकारी तेल कंपनियों ने आज लगातार तीसरे दिन पेट्रोल की कीमत में फिर से बढ़ोतरी कर दी है। आज, दिल्ली में पेट्रोल सत्रह पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। पिछले महीने पेट्रोल के दाम स्थिर थे, वहीं डीजल के दाम में नियमित तौर पर बढ़ोतरी की जा रही थी। इससे पहले जुलाई महीने में डीजल के दाम दस बार बढ़ाए गए थे। जिसमें एक. साठ रुपयापये प्रति लीटर की बढोतरी दर्ज हुई थी। आपको बता दें कि पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। दिल्ली में आज पेट्रोल अस्सी. नब्बे रुपयापये प्रति लीटर बिक रहा हैं। वहीं डीजल कल के भाव तिहत्तर. छप्पन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। मुंबई में भी पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं। जबकि डीजल के दाम स्थिर हैं। पेट्रोल चौदह पैसे महंगा होकर सत्तासी. अट्ठावन रुपयापये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। वहीं डीजल कल के दाम अस्सी. ग्यारह रुपयापये प्रति लीटर हैं। कोलकाता में पेट्रोल के दाम बयासी. तैंतालीस रुपयापये प्रति लीटर हो गए हैं और डीजल कल के भाव सतहत्तर. छः रुपयापये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत तिरासी. सत्तासी से बढ़कर तिरासी. निन्यानवे रुपयापये प्रति लीटर पर पहुंच गई हैं। जबकि डीजल बीते दिन यानि कल के भाव अठहत्तर. छियासी रुपयापये प्रति लीटर ही बिक रहा है। रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर हर रोज तेल की कीमतों में बदलाव होता है। इसलिए तेल के भाव में आए दिन उठापठक दिखने को मिलती है। पेट्रोल-डीजल का रोज़ का रेट आप SMS के जरिए भी जान सकते हैं । इंडियन ऑयल के कस्टमर RSP के साथ शहर का कोड लिखकर नौ दो दो चार नौ नौ दो दो चार नौ नंबर पर और बीपीसीएल उपभोक्ता RSP लिखकर नौ दो दो तीन एक एक दो दो दो दो नंबर पर भेज जानकारी हासिल कर सकते हैं। वहीं, एचपीसीएल उपभोक्ता HPPrice लिखकर नौ दो दो दो दो शून्य एक एक दो दो नंबर पर भेजकर भाव पता कर सकते हैं।
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असम न्यूज़ः ऊपरी असम में जहरीला मशरूम खाने से 13 लोगों की मौत के बाद एक बार फिर से पहाड़ी जिला डिमा हसाउ में जहरीला मशरूम खाने से सोमवार को एक व्यक्ति की मौत होने का मामला सामने आया है। साथ ही आठ लोगों का अस्पताल में गंभीर अवस्था में इलाज चल रहा है। जहरीला मशरूम खाने के बाद जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान उमरांग्सू निवासी मानिक कुर्मी (50) के रूप में हुई। डिमा हसाउ जिला में जहरीला मशरूम का सेवन करने के बाद हर साल इस तरह की मौतें होती हैं। इस बार यह घटना डिमा हासाउ जिला के उमरांग्सू में घटी है। 13 अप्रैल को यहां कुछ लोगों ने मशरूम पकाकर खाया था। इसके बाद से ही नौ लोगों की तबीयत खराब हो गयी। बीमार लोगों को पहले उमरांग्सू के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, छह की हालत गंभीर होने के कारण रविवार को उन्हें जिला मुख्यालय हाफलोंग सदर अस्पताल भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान हाफलोंग सदर अस्पताल में मानिक कुर्मी की मौत हो गई। अन्य पांच मरीजों का इलाज हाफलोंग अस्पताल में चल रहा है। हाफलोंग और उमरांग्सू के अस्पतालों में इलाज करा रहे लोगों की पहचान प्रेम बहादुर (60), प्रेमलाल कुर्मी (24), सूरज तमांग (36), सुरू लामा (22), माया लामा (45), राधा कुर्मी (50), डिंपी कुर्मी (22) और सुजाता तमांग (32) के रूप में की गयी है।
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असम न्यूज़ः ऊपरी असम में जहरीला मशरूम खाने से तेरह लोगों की मौत के बाद एक बार फिर से पहाड़ी जिला डिमा हसाउ में जहरीला मशरूम खाने से सोमवार को एक व्यक्ति की मौत होने का मामला सामने आया है। साथ ही आठ लोगों का अस्पताल में गंभीर अवस्था में इलाज चल रहा है। जहरीला मशरूम खाने के बाद जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान उमरांग्सू निवासी मानिक कुर्मी के रूप में हुई। डिमा हसाउ जिला में जहरीला मशरूम का सेवन करने के बाद हर साल इस तरह की मौतें होती हैं। इस बार यह घटना डिमा हासाउ जिला के उमरांग्सू में घटी है। तेरह अप्रैल को यहां कुछ लोगों ने मशरूम पकाकर खाया था। इसके बाद से ही नौ लोगों की तबीयत खराब हो गयी। बीमार लोगों को पहले उमरांग्सू के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, छह की हालत गंभीर होने के कारण रविवार को उन्हें जिला मुख्यालय हाफलोंग सदर अस्पताल भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान हाफलोंग सदर अस्पताल में मानिक कुर्मी की मौत हो गई। अन्य पांच मरीजों का इलाज हाफलोंग अस्पताल में चल रहा है। हाफलोंग और उमरांग्सू के अस्पतालों में इलाज करा रहे लोगों की पहचान प्रेम बहादुर , प्रेमलाल कुर्मी , सूरज तमांग , सुरू लामा , माया लामा , राधा कुर्मी , डिंपी कुर्मी और सुजाता तमांग के रूप में की गयी है।
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नई दिल्लीः निसान इंडिया (Nissan India) ने अभी भी अपनी माइक्रा की ग्लोबल मार्केट (Global Market) में मौजूद करंट जनरेशन को भारत (India) में पेश नहीं किया है, लेकिन यह यूरोपीय सुपरमिनी पांच साल से भी ज्यादा से ग्लोबल मार्केट अपने इस मौजूदा स्वरूप में है। लेकिन अब, इस जापानी कार निर्माता ने माइक्रा (Nissan Micra Replacement) की रिप्लेसमेंट का एक नया टीज़र जारी किया है जिसमें इस नई कार के इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric Vehicle) में रिप्लेसमेंट होने के संकेत मिलते हैं, जिसे ज्यादातर यूरोपय बाज़ार में बेचा जाएगा, और जिसमे बाजार के मुताबिक एक बिलकुल नई नेमप्लेट हो सकती है।
इस टीज़र की तस्वीरों में माइक्रा रिप्लेसमेंट अपनी कॉम्पैक्ट बॉडी स्टाइल के साथ ही जारी रहने के संकेत मिलते हैं। टीज़र में दिखाए गए गोल एलईडी लाइट क्लस्टर के साथ यह एक मिनी-कार जैसे व्यवहार को ही अपनाती हुई नज़र आती है। यह निसान की एक एंट्री-लेवल पेशकश ही होगी और यह CMF B-EV प्लेटफॉर्म पर आधारित हो सकती है। चूंकि यह द एलायंस के नए रोडमैप का हिस्सा है इसलिय रेनॉल्ट इस नई इलेक्ट्रिक हैचबैक के विकास में प्रमुख भूमिका निभाएगा, इसलिए इस नई माइक्रा के रिप्लेसमेंट के एक फ्रेंच संस्करण की भी उम्मीद की जा रही है।
अभी तक इस रिप्लेसमेंट की जो भी जानकारी सामने आईं हैं उनके हिसाब से नई निसान हैचबैक का उत्पादन फ्रांस में रेनॉल्ट के इलेक्ट्रीसिटी प्लांट में होने की संभावना है। इससे उम्मीद ये भी की जा सकती है की आने वाले वर्षों में निसान के और भी इलेक्ट्रिक मॉडल प्रोडक्शन लाइन में देखने को मिलेंगे। आने वाले महीनों में माइक्रा की रिप्लेसमेंट के डिटेल्स आधिकारिक तौर पर सामने आने की उम्मीद है।
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नई दिल्लीः निसान इंडिया ने अभी भी अपनी माइक्रा की ग्लोबल मार्केट में मौजूद करंट जनरेशन को भारत में पेश नहीं किया है, लेकिन यह यूरोपीय सुपरमिनी पांच साल से भी ज्यादा से ग्लोबल मार्केट अपने इस मौजूदा स्वरूप में है। लेकिन अब, इस जापानी कार निर्माता ने माइक्रा की रिप्लेसमेंट का एक नया टीज़र जारी किया है जिसमें इस नई कार के इलेक्ट्रिक व्हीकल में रिप्लेसमेंट होने के संकेत मिलते हैं, जिसे ज्यादातर यूरोपय बाज़ार में बेचा जाएगा, और जिसमे बाजार के मुताबिक एक बिलकुल नई नेमप्लेट हो सकती है। इस टीज़र की तस्वीरों में माइक्रा रिप्लेसमेंट अपनी कॉम्पैक्ट बॉडी स्टाइल के साथ ही जारी रहने के संकेत मिलते हैं। टीज़र में दिखाए गए गोल एलईडी लाइट क्लस्टर के साथ यह एक मिनी-कार जैसे व्यवहार को ही अपनाती हुई नज़र आती है। यह निसान की एक एंट्री-लेवल पेशकश ही होगी और यह CMF B-EV प्लेटफॉर्म पर आधारित हो सकती है। चूंकि यह द एलायंस के नए रोडमैप का हिस्सा है इसलिय रेनॉल्ट इस नई इलेक्ट्रिक हैचबैक के विकास में प्रमुख भूमिका निभाएगा, इसलिए इस नई माइक्रा के रिप्लेसमेंट के एक फ्रेंच संस्करण की भी उम्मीद की जा रही है। अभी तक इस रिप्लेसमेंट की जो भी जानकारी सामने आईं हैं उनके हिसाब से नई निसान हैचबैक का उत्पादन फ्रांस में रेनॉल्ट के इलेक्ट्रीसिटी प्लांट में होने की संभावना है। इससे उम्मीद ये भी की जा सकती है की आने वाले वर्षों में निसान के और भी इलेक्ट्रिक मॉडल प्रोडक्शन लाइन में देखने को मिलेंगे। आने वाले महीनों में माइक्रा की रिप्लेसमेंट के डिटेल्स आधिकारिक तौर पर सामने आने की उम्मीद है।
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लखनऊ। बदायूं जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक 2 लोगो की मौत गयी। एक युवक की आंखों की रोशनी चली गयी। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान पद के प्रत्याशी गांव में शराब बांट रहे हैं। जहरीली शराब से मौत के बाद प्रशसन में हड़कंप मचा है। शव को भेजा पोस्टमार्टम के लिये भेजा गया है।
आलाधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा है। मूसाझाग थाना क्षेत्र के तिगुला पुर गांव की वारदात।
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लखनऊ। बदायूं जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक दो लोगो की मौत गयी। एक युवक की आंखों की रोशनी चली गयी। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान पद के प्रत्याशी गांव में शराब बांट रहे हैं। जहरीली शराब से मौत के बाद प्रशसन में हड़कंप मचा है। शव को भेजा पोस्टमार्टम के लिये भेजा गया है। आलाधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा है। मूसाझाग थाना क्षेत्र के तिगुला पुर गांव की वारदात।
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- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
ALERT: ये 2017 का सबसे धमाकेदार सरप्राइज़ है. . . . नींद उड़ जाएगी!
अब अजय देवगन गोलमाल 4 के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्होंने फिल्म में एक और धमाका करने की ठानी है। दरअसल, फिल्म में अजय देवगन और काजोल एक सरप्राइज़ आईटम करने वाले हैं।
नहीं,
है,
जाएगा।
दरअसल,
देंगे।
गौरतलब है कि काजोल - अजय देवगन को एक साथ देखने में लोगों को काफी मज़ा आता है। उनकी केमिस्ट्री में एक अलग एक्स फैक्टर है। इश्क में उनकी जोड़ी को लोगों ने खासा पसंद भी किया था।
अब दोनों एक बार फिर गोलमाल अगेन में नज़र आएंगे। फिल्म के डायरेक्टर हैं रोहित शेट्टी जो अजय देवगन के तब से दोस्त हैं जब से अजय देवगन ने फिल्मों में डेब्यू किया था। उस दौरान रोहित शेट्टी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर हुआ करते थे।
यही कारण है कि काजोल और रोहित शेट्टी की बॉन्डिंग भी काफी तगड़ी है। इसलिए रोहित के साथ काजोल दिलवाले करने को राज़ी हो गई थी। गोलमाल के बारे में काजोल पहले ही कह चुकी हैं कि मैंने इतनी शानदार फिल्म आज तक नहीं देखी।
मलिक।
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Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? ALERT: ये दो हज़ार सत्रह का सबसे धमाकेदार सरप्राइज़ है. . . . नींद उड़ जाएगी! अब अजय देवगन गोलमाल चार के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्होंने फिल्म में एक और धमाका करने की ठानी है। दरअसल, फिल्म में अजय देवगन और काजोल एक सरप्राइज़ आईटम करने वाले हैं। नहीं, है, जाएगा। दरअसल, देंगे। गौरतलब है कि काजोल - अजय देवगन को एक साथ देखने में लोगों को काफी मज़ा आता है। उनकी केमिस्ट्री में एक अलग एक्स फैक्टर है। इश्क में उनकी जोड़ी को लोगों ने खासा पसंद भी किया था। अब दोनों एक बार फिर गोलमाल अगेन में नज़र आएंगे। फिल्म के डायरेक्टर हैं रोहित शेट्टी जो अजय देवगन के तब से दोस्त हैं जब से अजय देवगन ने फिल्मों में डेब्यू किया था। उस दौरान रोहित शेट्टी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर हुआ करते थे। यही कारण है कि काजोल और रोहित शेट्टी की बॉन्डिंग भी काफी तगड़ी है। इसलिए रोहित के साथ काजोल दिलवाले करने को राज़ी हो गई थी। गोलमाल के बारे में काजोल पहले ही कह चुकी हैं कि मैंने इतनी शानदार फिल्म आज तक नहीं देखी। मलिक।
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पैगम्बर मोहम्मद को इस्लामी मजहब का संस्थापक माना जाता है। पैगम्बर ने कई लड़ाइयों में भी हिस्सा लिया था, जिसके बारे में अलग-अलग इतिहासकारों ने कई पुस्तकों में जिक्र किया है। क़ुरान जैसे इस्लामिक साहित्य में भी जीसस का जिक्र है और माना जाता है कि अल्लाह द्वारा भेजे गए पैगम्बरों में मुहम्मद को इस्लाम की शिक्षा-दीक्षा देने के लिए धरती पर भेजा गया था। आजकल जब 'जिहाद' की बातें होती हैं, तब लोग इस्लाम के इतिहास में इसका मूल खोजने निकलते हैं। इस शब्द का प्रयोग आतंकियों द्वारा किया जाता रहा है। जम्मू कश्मीर में भारतीय नागरिकों का ख़ून बहाने वाले भी इसे जिहाद की ही संज्ञा देते हैं।
यहाँ हम पैगम्बर मुहम्मद से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं। इसका जिक्र कई ऐतिहासिक पुस्तकों में है। समय-समय पर कई इतिहासकारों ने इस घटना का जिक्र किया है और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की पुस्तक 'The Shade of Swords: Jihad and the Conflict between Islam and Christianity' में भी इसका जिक्र है। कहानी शुरू होती है खुसरो-II से, जो सातवीं सदी के पहले दशक में पर्सिया (फारस) पर राज करता था और उसके नेतृत्व में वह साम्राज्य अजेय नज़र आता था। यहाँ बाइजेंटाइन (पूर्वी रोमन) साम्राज्य के अधिपति हेराक्लियस का भी जिक्र आता है।
फारसियों ने तब जेरुसलम के चर्च में भी काफ़ी तोड़-फोड़ मचाई थी। मक्का में स्थानीय रूढ़िवादियों ने जेरुसलम पर कब्जे का जश्न मनाया था। और वो पैगम्बर मुहम्मद के विरोधी भी थे। उन्होंने पैगम्बर पर तंज कसते हुए कहा था कि अल्लाह जेरुसलम को बचाने में नाकाम सिद्ध हुआ। यह भी जानना ज़रूरी है कि हेराक्लियस के बाइजेंटाइन साम्राज्य को ही पूर्वी रोमन साम्राज्य के रूप में जाना जाता है। क़ुरान में भविष्यवाणी की गई थी कि रोमन साम्राज्य वापसी करेगा (मतलब तब का इस्लाम फारसियों के बजाय रोमन के ज्यादा नजदीक थे) और बाद में ऐसा ही हुआ। हेराक्लियस ने समुद्री युद्ध का प्रयोग किया और फारसियों को खदेड़ डाला। क़ुरान में लिखा गया था कि भले ही रोमन आज हार गए हों लेकिन अल्लाह की मर्जी से वे कुछ ही सालों में विजेता होंगे।
सन 628 में हेराक्लियस ने 'ट्रू क्रॉस' को वापस लाकर जेरुसलम में जीत का पताका फहराया। भारत ने भी उसकी इस उपलब्धि पर उसे बधाई दी थी। अब यहाँ पैगम्बर मुहम्मद की एंट्री होती है। जब रोमन साम्राज्य का अधिपति हेराक्लियस जेरुसलम में था, तब उसके पास एक चिट्ठी आई। वह चिट्ठी मदीना से आई थी, पैगम्बर मुहम्मद की तरफ़ से। रोमन इस चिट्ठी को पाने वाले अकेले नहीं थे। इसी प्रकार के पत्र पर्सिया, अबसीनिया, बहरीन, ओमान और मिस्र भी भेजे गए थे। पर्सिया के बादशाह खुसरो (राजाओं का राजा, जिसे मध्य फ़ारसी साम्राज्य में शहंशाह कहा गया) ने मुहम्मद के इस पत्र पर आपत्ति जताई।
पर्सिया के राजा ने आदेश दिया कि जिसने भी इस पत्र को भेजा है, उसे तुरंत गिरफ़्तार किया जाए। इतना ही नहीं, पर्सिया के राजा ने पैगम्बर मुहम्मद के भेजे उस पत्र को फाड़ कर फेंक दिया था। उसे इस बात से नाराज़गी थी कि इस पत्र में पैगम्बर की बात न मानने पर साम्राज्य के तबाह हो जाने की बात कही गई थी। जब पैगम्बर मुहम्मद को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने कहा कि इसी तरह साम्राज्य भी चिथड़े-चिथड़े हो जाएगा। मुहम्मद ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि उनका मजहब और सम्प्रभुता उन ऊँचाइयों को छुएगा, जहाँ तक फ़ारसी आज तक पहुँच भी नहीं पाए हैं। इसके बाद उन्होंने खुसरो को सीधी चुनौती दे डाली।
खुसरो इस बात से नाराज़ था कि किसी ने ख़ुद को उसके 'बराबर समझने की हिमाकत' की थी। उसने यमन के शासक को मुहम्मद को गिरफ़्तार करने के लिए भेजा। इसके बाद यमन का वह शासक ही मुस्लिम बन बैठा और उसने यमन को इस्लामी राज्य का हिस्सा बना लिया, जो पल-पल अपना विस्तार कर रहा था। अब आते हैं रोमन पर। पैगम्बर को ये बात पता थी कि रोमन साम्राज्य का राजा ऐसे किसी भी पत्र को भाव नहीं देता है, जो सीलबंद न हो। इसीलिए, उन्होंने एक चाँदी के अंगूठे को लिया और उसके माध्यम से ख़ुद की पहचान बताई। पैगम्बर मुहम्मद ने ख़ुद को अल्लाह का दूत बताया।
अब उस पत्र पर आते हैं। उस पत्र में चीजें संक्षेप और सीधी भाषा में लिखी हुई थीं। इस पत्र में लिखी बातों को पढ़ कर आज की दुनिया के हालात भी बयाँ हो जाते हैं। पैगम्बर मुहम्मद ने अपने इस पत्र में लिखा थाः
मुस्लिम मानते हैं कि एडम और जीसस की ही श्रृंखला में मुहम्मद भी आते हैं, जिन्हें अंतिम पैगम्बर भी कहा गया है। इस्लाम मानता है कि ईश्वर के हिस्से नहीं किए जा सकते और इसीलिए यह मजहब किसी को भी ईश्वर का पुत्र मानने से इनकार कर देता है। इसे तौहीद कहा गया है, जिसे आप एकेश्वरवाद की संज्ञा भी दे सकते हैं। ये पैगम्बर मुहम्मद और जिहाद को लेकर एक सच्ची कहानी थी, जिससे पता चलता है कि इस्लाम अपनाने और युद्ध के द्वारा इसका प्रचार-प्रसार करने की प्रक्रिया तभी शुरू हो गई थी, जब पैगम्बर मुहम्मद जीवित थे। उनके निधन के बाद ये प्रक्रिया और तेज़ हुई। ये आज भी चली आ रही है।
(यह लेख पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की पुस्तक और इस्लाम के पवित्र पुस्तक 'सहीह-अल-बुखारी' पर आधारित है। )
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पैगम्बर मोहम्मद को इस्लामी मजहब का संस्थापक माना जाता है। पैगम्बर ने कई लड़ाइयों में भी हिस्सा लिया था, जिसके बारे में अलग-अलग इतिहासकारों ने कई पुस्तकों में जिक्र किया है। क़ुरान जैसे इस्लामिक साहित्य में भी जीसस का जिक्र है और माना जाता है कि अल्लाह द्वारा भेजे गए पैगम्बरों में मुहम्मद को इस्लाम की शिक्षा-दीक्षा देने के लिए धरती पर भेजा गया था। आजकल जब 'जिहाद' की बातें होती हैं, तब लोग इस्लाम के इतिहास में इसका मूल खोजने निकलते हैं। इस शब्द का प्रयोग आतंकियों द्वारा किया जाता रहा है। जम्मू कश्मीर में भारतीय नागरिकों का ख़ून बहाने वाले भी इसे जिहाद की ही संज्ञा देते हैं। यहाँ हम पैगम्बर मुहम्मद से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं। इसका जिक्र कई ऐतिहासिक पुस्तकों में है। समय-समय पर कई इतिहासकारों ने इस घटना का जिक्र किया है और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की पुस्तक 'The Shade of Swords: Jihad and the Conflict between Islam and Christianity' में भी इसका जिक्र है। कहानी शुरू होती है खुसरो-II से, जो सातवीं सदी के पहले दशक में पर्सिया पर राज करता था और उसके नेतृत्व में वह साम्राज्य अजेय नज़र आता था। यहाँ बाइजेंटाइन साम्राज्य के अधिपति हेराक्लियस का भी जिक्र आता है। फारसियों ने तब जेरुसलम के चर्च में भी काफ़ी तोड़-फोड़ मचाई थी। मक्का में स्थानीय रूढ़िवादियों ने जेरुसलम पर कब्जे का जश्न मनाया था। और वो पैगम्बर मुहम्मद के विरोधी भी थे। उन्होंने पैगम्बर पर तंज कसते हुए कहा था कि अल्लाह जेरुसलम को बचाने में नाकाम सिद्ध हुआ। यह भी जानना ज़रूरी है कि हेराक्लियस के बाइजेंटाइन साम्राज्य को ही पूर्वी रोमन साम्राज्य के रूप में जाना जाता है। क़ुरान में भविष्यवाणी की गई थी कि रोमन साम्राज्य वापसी करेगा और बाद में ऐसा ही हुआ। हेराक्लियस ने समुद्री युद्ध का प्रयोग किया और फारसियों को खदेड़ डाला। क़ुरान में लिखा गया था कि भले ही रोमन आज हार गए हों लेकिन अल्लाह की मर्जी से वे कुछ ही सालों में विजेता होंगे। सन छः सौ अट्ठाईस में हेराक्लियस ने 'ट्रू क्रॉस' को वापस लाकर जेरुसलम में जीत का पताका फहराया। भारत ने भी उसकी इस उपलब्धि पर उसे बधाई दी थी। अब यहाँ पैगम्बर मुहम्मद की एंट्री होती है। जब रोमन साम्राज्य का अधिपति हेराक्लियस जेरुसलम में था, तब उसके पास एक चिट्ठी आई। वह चिट्ठी मदीना से आई थी, पैगम्बर मुहम्मद की तरफ़ से। रोमन इस चिट्ठी को पाने वाले अकेले नहीं थे। इसी प्रकार के पत्र पर्सिया, अबसीनिया, बहरीन, ओमान और मिस्र भी भेजे गए थे। पर्सिया के बादशाह खुसरो ने मुहम्मद के इस पत्र पर आपत्ति जताई। पर्सिया के राजा ने आदेश दिया कि जिसने भी इस पत्र को भेजा है, उसे तुरंत गिरफ़्तार किया जाए। इतना ही नहीं, पर्सिया के राजा ने पैगम्बर मुहम्मद के भेजे उस पत्र को फाड़ कर फेंक दिया था। उसे इस बात से नाराज़गी थी कि इस पत्र में पैगम्बर की बात न मानने पर साम्राज्य के तबाह हो जाने की बात कही गई थी। जब पैगम्बर मुहम्मद को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने कहा कि इसी तरह साम्राज्य भी चिथड़े-चिथड़े हो जाएगा। मुहम्मद ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि उनका मजहब और सम्प्रभुता उन ऊँचाइयों को छुएगा, जहाँ तक फ़ारसी आज तक पहुँच भी नहीं पाए हैं। इसके बाद उन्होंने खुसरो को सीधी चुनौती दे डाली। खुसरो इस बात से नाराज़ था कि किसी ने ख़ुद को उसके 'बराबर समझने की हिमाकत' की थी। उसने यमन के शासक को मुहम्मद को गिरफ़्तार करने के लिए भेजा। इसके बाद यमन का वह शासक ही मुस्लिम बन बैठा और उसने यमन को इस्लामी राज्य का हिस्सा बना लिया, जो पल-पल अपना विस्तार कर रहा था। अब आते हैं रोमन पर। पैगम्बर को ये बात पता थी कि रोमन साम्राज्य का राजा ऐसे किसी भी पत्र को भाव नहीं देता है, जो सीलबंद न हो। इसीलिए, उन्होंने एक चाँदी के अंगूठे को लिया और उसके माध्यम से ख़ुद की पहचान बताई। पैगम्बर मुहम्मद ने ख़ुद को अल्लाह का दूत बताया। अब उस पत्र पर आते हैं। उस पत्र में चीजें संक्षेप और सीधी भाषा में लिखी हुई थीं। इस पत्र में लिखी बातों को पढ़ कर आज की दुनिया के हालात भी बयाँ हो जाते हैं। पैगम्बर मुहम्मद ने अपने इस पत्र में लिखा थाः मुस्लिम मानते हैं कि एडम और जीसस की ही श्रृंखला में मुहम्मद भी आते हैं, जिन्हें अंतिम पैगम्बर भी कहा गया है। इस्लाम मानता है कि ईश्वर के हिस्से नहीं किए जा सकते और इसीलिए यह मजहब किसी को भी ईश्वर का पुत्र मानने से इनकार कर देता है। इसे तौहीद कहा गया है, जिसे आप एकेश्वरवाद की संज्ञा भी दे सकते हैं। ये पैगम्बर मुहम्मद और जिहाद को लेकर एक सच्ची कहानी थी, जिससे पता चलता है कि इस्लाम अपनाने और युद्ध के द्वारा इसका प्रचार-प्रसार करने की प्रक्रिया तभी शुरू हो गई थी, जब पैगम्बर मुहम्मद जीवित थे। उनके निधन के बाद ये प्रक्रिया और तेज़ हुई। ये आज भी चली आ रही है।
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यह ध्यान में रखें कि नए टैक्स फाइलिंग पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी वजह से आपको आईटीआर फॉर्म में पहले से भरी डिटेल्स को चेक कर लेना चाहिए. आइए उन दस्तावेजों को जानते हैं, जिन्हें आपको अपने आईटीआर को फाइल करने से पहले रखना चाहिए.
Income Tax Return Filing: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सभी जरूरी दस्तावेजों को अपने पास रखना महत्वपूर्ण है. ज्यादातर सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स आईटीआर-1 फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. और उसमें ज्यादातर जानकारी पहले से भरी होती है.
सरकार के नए लॉन्च किए गए ई-फाइलिंग पोर्टल में भी आईटीआर-1 में डेटा पहले से भरा रहता है. हालांकि, यह ध्यान में रखें कि नए टैक्स फाइलिंग पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी वजह से आपको आईटीआर फॉर्म में पहले से भरी डिटेल्स को चेक कर लेना चाहिए. आइए उन दस्तावेजों को जानते हैं, जिन्हें आपको अपने आईटीआर को फाइल करने से पहले रखना चाहिए.
फॉर्म 16 एक TDS सर्टिफिकेट है, जिसे आपको एंप्लॉयर आपको जारी करता है और इसमें आपको दी गई पूरी सैलरी की डिटेल्स दी हुई होती है. इसमें उस पर की गई टैक्स की कटौती भी होती है. इस बात को ध्यान में रखें कि एंप्लॉयर के लिए फॉर्म 16 जारी करना अनिवार्य होता है, अगर वित्त वर्ष के दौरान आपकी सैलरी पर टैक्स की कटौती की गई है. अगर आपकी सैलरी में से किसी TDS की कटौती नहीं की गई है, तो आप अपने एंप्लॉयर से आपको फॉर्म 16 देने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं.
फॉर्म 16 मिलने पर यह चेक कर लें, कि उस पर दिया पैन आपका है. अगर इसमें कोई गलती है, तो आपको इसके बारे में अपने एंप्लॉयर को जरूर जानकारी देनी चाहिए. आपका एंप्लॉयर फॉर्म 16 में गलतियों को ठीक कर देगा और रिवाइज्ड फॉर्म जारी करेगा.
लेटेस्ट आईटीआर फॉर्म में व्यक्ति को अलग-अलग स्रोतों से मिली ब्याज आय का ब्रेक अप देने के लिए कहा जाता है. इनमें सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि शामिल हैं. इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप बैंकों और पोस्ट ऑफिस में अपना इंट्रस्ट सर्टिफिकेट ले लें, जिससे आपको वित्त वर्ष के दौरान सेविंग्स अकाउंट्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिली कुल राशि का पता चल जाए. इसके अलावा वित्त वर्ष के लिए अपनी बैंक पासबुक को भी अपडेट और चेक कर लें, जिससे किसी दूसरी आय के बारे में जानकारी मिले, जैसे आरबीआई बॉन्ड्स से ब्याज, पीपीएफ ब्याज आदि.
अगर फिक्स्ड डिपॉजिट से मिली ब्याज पर टैक्स की कटौती हुई है, तो आपको कटौती करने वाले जैसे बैंक से फॉर्म 16A/ TDS सर्टिफिकेट भी लेना होगा.
अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो खरीदार आपको फॉर्म 16B जारी करेगा, जिसमें आपको दी गई राशि पर काटा गया TDS दिखेगा. इसके अलावा अगर आप मकान मालिक हैं, तो आपको अपने किरायेदार को फॉर्म 16C देने के लिए कहना चाहिए, जिससे आपको मिले किराये पर कटे TDS की डिटेल्स मिलें. मौजूदा कानून के मुताबिक, अगर महीने का किराया 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो व्यक्ति को TDS काटना होगा, इसके अलावा आप TDS डिटेल्स के लिए फॉर्म 26AS भी चेक कर सकते हैं.
इसके अलावा अगर पेमेंट 50 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कॉन्ट्रैक्टर या प्रोफेशनल को फॉर्म 16D जारी किया जाता है, जो एक TDS सर्टिफिकेट है. टैक्स कमीशन, ब्रोकरेज, कॉन्ट्रैक्चुअल पेमेंट या प्रोफेशन फी का भुगतान करते समय काटा जाता है.
फॉर्म 26AS आपकी कंसोलिडेटेड एनुअल टैक्स स्टेटमेंट है. यह एक तरह की आपकी टैक्स पासबुक है, जिसमें आपके पैन के अंगेस्ट डिपॉजिट हुए सभी टैक्स की जानकारी होती है. इनमें एंप्लॉयर द्वारा डिडक्ट किया गया TDS, बैंकों द्वारा काटा गया TDS, आपको किए गए भुगतान पर किसी दूसरी संस्था द्वारा काटा गया TDS, आपके द्वारा जमा किया गया एडवांस टैक्स और आपके द्वारा दिया गया सेल्फ असेसमेंट टैक्स शामिल होता है.
अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था के साथ जारी रख रहे हैं, तो आपको वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान अपने योग्य निवेश और खर्चों से संबंधित सभी दस्तावेजों को तैयार रखना चाहिए. अगर आपने सेक्शन 80C, सेक्शन 80D और HRA छूट आदि से संबंधित टैक्स सेविंग प्रूफ को सब्मिट किया है, तो ये डिटेल्स फॉर्म 16 में दिखेंगी. हालांकि, अगर आपने कोई टैक्स सेविंग प्रूफ नहीं घोषित किया है, तो आईटीआर फाइल करते समय इसे क्लेम किया जा सकता है.
वित्त वर्ष में भुगतान किए गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर सेक्शन 80D के तहत डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है. इसलिए, प्रीमियम की रसीद संभालकर रखें. अगर आपने किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से लोन लिया है, तो लोन स्टेटमेंट लेकर रख लें.
अगर आपने प्रॉपर्टी की बिक्री या म्यूचुअल फंड्स या इक्विटी शेयर से कैपिटल गेन्स कमाया है, तो आपको मुनाफे को आईटीआर में बताना होगा. कैपिटल गेन्स कैलकुलेट करने के लिए, आपको खरीदारी या सेल के दस्तावेज की जरूरत पड़ेगी. म्यूचुअल फंड्स की बिक्री पर कैपिटल गेन्स के मामले में, व्यक्ति को म्यूचुअल फंड्स हाउस या ब्रोकर से स्टेटमेंट की जरूरत होगी.
व्यक्ति को आईटीआर फाइल करते समय, अपना आधार नंबर भी बताना होता है. अगर आपके पास अभी तक अपना आधार नंबर मौजूद नहीं है, तो आपको अपने आईटीआर फॉर्म में एनरॉलमेंट आईडी देनी होगी.
अगर वित्त वर्ष के दौरान आपके पास अनलिस्टेड शेयर थे, तो आपको इसे अपने आईटीआर में घोषित करना होगा. इस मामले में, यह ध्यान में रखें कि आईटीआर-1 का इस्तेमाल करके आप टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर सकते हैं, अगर आपके इनकम के स्रोत सैलरी और बैंक अकाउंट पर कमाई गई ब्याज है, तो उस स्थिति में भी, आपको आईटीआर-2 का इस्तेमाल करना होगा.
व्यक्ति के लिए उसके बैंक अकाउंट की डिटेल्स देना भी जरूरी है. अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपना अकाउंट बंद कर दिया है, तो भी आपको उसे अपने आईटीआर में भरना होगा. आपको अपना बैंक का नाम, अकाउंट टाइप और IFS कोड देना होगा.
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यह ध्यान में रखें कि नए टैक्स फाइलिंग पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी वजह से आपको आईटीआर फॉर्म में पहले से भरी डिटेल्स को चेक कर लेना चाहिए. आइए उन दस्तावेजों को जानते हैं, जिन्हें आपको अपने आईटीआर को फाइल करने से पहले रखना चाहिए. Income Tax Return Filing: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, सभी जरूरी दस्तावेजों को अपने पास रखना महत्वपूर्ण है. ज्यादातर सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स आईटीआर-एक फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. और उसमें ज्यादातर जानकारी पहले से भरी होती है. सरकार के नए लॉन्च किए गए ई-फाइलिंग पोर्टल में भी आईटीआर-एक में डेटा पहले से भरा रहता है. हालांकि, यह ध्यान में रखें कि नए टैक्स फाइलिंग पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी वजह से आपको आईटीआर फॉर्म में पहले से भरी डिटेल्स को चेक कर लेना चाहिए. आइए उन दस्तावेजों को जानते हैं, जिन्हें आपको अपने आईटीआर को फाइल करने से पहले रखना चाहिए. फॉर्म सोलह एक TDS सर्टिफिकेट है, जिसे आपको एंप्लॉयर आपको जारी करता है और इसमें आपको दी गई पूरी सैलरी की डिटेल्स दी हुई होती है. इसमें उस पर की गई टैक्स की कटौती भी होती है. इस बात को ध्यान में रखें कि एंप्लॉयर के लिए फॉर्म सोलह जारी करना अनिवार्य होता है, अगर वित्त वर्ष के दौरान आपकी सैलरी पर टैक्स की कटौती की गई है. अगर आपकी सैलरी में से किसी TDS की कटौती नहीं की गई है, तो आप अपने एंप्लॉयर से आपको फॉर्म सोलह देने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं. फॉर्म सोलह मिलने पर यह चेक कर लें, कि उस पर दिया पैन आपका है. अगर इसमें कोई गलती है, तो आपको इसके बारे में अपने एंप्लॉयर को जरूर जानकारी देनी चाहिए. आपका एंप्लॉयर फॉर्म सोलह में गलतियों को ठीक कर देगा और रिवाइज्ड फॉर्म जारी करेगा. लेटेस्ट आईटीआर फॉर्म में व्यक्ति को अलग-अलग स्रोतों से मिली ब्याज आय का ब्रेक अप देने के लिए कहा जाता है. इनमें सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि शामिल हैं. इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप बैंकों और पोस्ट ऑफिस में अपना इंट्रस्ट सर्टिफिकेट ले लें, जिससे आपको वित्त वर्ष के दौरान सेविंग्स अकाउंट्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिली कुल राशि का पता चल जाए. इसके अलावा वित्त वर्ष के लिए अपनी बैंक पासबुक को भी अपडेट और चेक कर लें, जिससे किसी दूसरी आय के बारे में जानकारी मिले, जैसे आरबीआई बॉन्ड्स से ब्याज, पीपीएफ ब्याज आदि. अगर फिक्स्ड डिपॉजिट से मिली ब्याज पर टैक्स की कटौती हुई है, तो आपको कटौती करने वाले जैसे बैंक से फॉर्म सोलह एम्पीयर/ TDS सर्टिफिकेट भी लेना होगा. अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो खरीदार आपको फॉर्म सोलहB जारी करेगा, जिसमें आपको दी गई राशि पर काटा गया TDS दिखेगा. इसके अलावा अगर आप मकान मालिक हैं, तो आपको अपने किरायेदार को फॉर्म सोलह डिग्री सेल्सियस देने के लिए कहना चाहिए, जिससे आपको मिले किराये पर कटे TDS की डिटेल्स मिलें. मौजूदा कानून के मुताबिक, अगर महीने का किराया पचास,शून्य रुपयापये से ज्यादा है, तो व्यक्ति को TDS काटना होगा, इसके अलावा आप TDS डिटेल्स के लिए फॉर्म छब्बीसAS भी चेक कर सकते हैं. इसके अलावा अगर पेमेंट पचास लाख रुपये से ज्यादा है, तो कॉन्ट्रैक्टर या प्रोफेशनल को फॉर्म सोलहD जारी किया जाता है, जो एक TDS सर्टिफिकेट है. टैक्स कमीशन, ब्रोकरेज, कॉन्ट्रैक्चुअल पेमेंट या प्रोफेशन फी का भुगतान करते समय काटा जाता है. फॉर्म छब्बीसAS आपकी कंसोलिडेटेड एनुअल टैक्स स्टेटमेंट है. यह एक तरह की आपकी टैक्स पासबुक है, जिसमें आपके पैन के अंगेस्ट डिपॉजिट हुए सभी टैक्स की जानकारी होती है. इनमें एंप्लॉयर द्वारा डिडक्ट किया गया TDS, बैंकों द्वारा काटा गया TDS, आपको किए गए भुगतान पर किसी दूसरी संस्था द्वारा काटा गया TDS, आपके द्वारा जमा किया गया एडवांस टैक्स और आपके द्वारा दिया गया सेल्फ असेसमेंट टैक्स शामिल होता है. अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था के साथ जारी रख रहे हैं, तो आपको वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के दौरान अपने योग्य निवेश और खर्चों से संबंधित सभी दस्तावेजों को तैयार रखना चाहिए. अगर आपने सेक्शन अस्सी डिग्री सेल्सियस, सेक्शन अस्सीD और HRA छूट आदि से संबंधित टैक्स सेविंग प्रूफ को सब्मिट किया है, तो ये डिटेल्स फॉर्म सोलह में दिखेंगी. हालांकि, अगर आपने कोई टैक्स सेविंग प्रूफ नहीं घोषित किया है, तो आईटीआर फाइल करते समय इसे क्लेम किया जा सकता है. वित्त वर्ष में भुगतान किए गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर सेक्शन अस्सीD के तहत डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है. इसलिए, प्रीमियम की रसीद संभालकर रखें. अगर आपने किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से लोन लिया है, तो लोन स्टेटमेंट लेकर रख लें. अगर आपने प्रॉपर्टी की बिक्री या म्यूचुअल फंड्स या इक्विटी शेयर से कैपिटल गेन्स कमाया है, तो आपको मुनाफे को आईटीआर में बताना होगा. कैपिटल गेन्स कैलकुलेट करने के लिए, आपको खरीदारी या सेल के दस्तावेज की जरूरत पड़ेगी. म्यूचुअल फंड्स की बिक्री पर कैपिटल गेन्स के मामले में, व्यक्ति को म्यूचुअल फंड्स हाउस या ब्रोकर से स्टेटमेंट की जरूरत होगी. व्यक्ति को आईटीआर फाइल करते समय, अपना आधार नंबर भी बताना होता है. अगर आपके पास अभी तक अपना आधार नंबर मौजूद नहीं है, तो आपको अपने आईटीआर फॉर्म में एनरॉलमेंट आईडी देनी होगी. अगर वित्त वर्ष के दौरान आपके पास अनलिस्टेड शेयर थे, तो आपको इसे अपने आईटीआर में घोषित करना होगा. इस मामले में, यह ध्यान में रखें कि आईटीआर-एक का इस्तेमाल करके आप टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर सकते हैं, अगर आपके इनकम के स्रोत सैलरी और बैंक अकाउंट पर कमाई गई ब्याज है, तो उस स्थिति में भी, आपको आईटीआर-दो का इस्तेमाल करना होगा. व्यक्ति के लिए उसके बैंक अकाउंट की डिटेल्स देना भी जरूरी है. अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान अपना अकाउंट बंद कर दिया है, तो भी आपको उसे अपने आईटीआर में भरना होगा. आपको अपना बैंक का नाम, अकाउंट टाइप और IFS कोड देना होगा.
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पलवल, 28 मई (हप्र)
बाइक पर युवती को लिफ्ट देकर उससे दुष्कर्म के आरोप में महिला थाना पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। महिला थाना प्रभारी रेणु देवी ने बताया कि हथीन उपमंडल के एक गांव निवासी 28 वर्षीय विवाहिता ने दी अपनी शिकायत में कहा है कि वह बीमार थी। वह कोसीकलां (यूपी) से दवाई लेने के लिए एक ऑटो में बैठ गई। ऑटो कुछ दूर जाकर पंक्चर हो गया। वहां बाइक लेकर पहुंचे जुबेर व इमरान ने उसे बाइक पर लिफ्ट दे दी। होडल के नजदीक आरोपी उसे कोठरे के अंदर ले गए। आरोप है कि जुबेर ने उसका मुंह दबा लिया और इमरान ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके साथ मारपीट कर उसे जान से मारने की धमकी देकर आरोपी उसे वहीं छोड़कर भाग गये। महिला थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।
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पलवल, अट्ठाईस मई बाइक पर युवती को लिफ्ट देकर उससे दुष्कर्म के आरोप में महिला थाना पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। महिला थाना प्रभारी रेणु देवी ने बताया कि हथीन उपमंडल के एक गांव निवासी अट्ठाईस वर्षीय विवाहिता ने दी अपनी शिकायत में कहा है कि वह बीमार थी। वह कोसीकलां से दवाई लेने के लिए एक ऑटो में बैठ गई। ऑटो कुछ दूर जाकर पंक्चर हो गया। वहां बाइक लेकर पहुंचे जुबेर व इमरान ने उसे बाइक पर लिफ्ट दे दी। होडल के नजदीक आरोपी उसे कोठरे के अंदर ले गए। आरोप है कि जुबेर ने उसका मुंह दबा लिया और इमरान ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके साथ मारपीट कर उसे जान से मारने की धमकी देकर आरोपी उसे वहीं छोड़कर भाग गये। महिला थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।
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Braj Chaurasi Kos Yatra : वृंदावन जिसे ब्रज के नाम से जाना जाता है. यह वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने अपना पूरा बचपन बिताया था. यही कारण है कि यह हिंदुओं और वैष्णवों के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है.
भगवान और अर्ध-देवताओं को समर्पित लगभग 5,000 मंदिर हैं. भगवान के करीब आने के लिए कई तपस्याएं की जाती हैं. ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा ब्रज में सबसे अधिक चुने जाने वाले तीर्थों में से एक है.
तीर्थयात्रा के हिंदू वार्षिक कैलेंडर में सबसे दिव्य और पवित्र यात्राओं में से एक 84 कोस यात्रा है. एक 'कोस' लगभग 2. 25 मील या 3. 62 किलोमीटर है.
"84 कोस परिक्रमा" का तात्पर्य लगभग 300 किलोमीटर की परिक्रमा यात्रा या यमुना के किनारे वृंदावन के आसपास के पवित्र स्थानों की यात्रा से है.
सालों से लाखों भक्त या तीर्थयात्री (यात्री) इस यात्रा को इस विश्वास में करते हैं कि वे अपने सांसारिक पापों से मुक्त हो गए हैं और 'परलोक' या स्वर्ग में जगह पा सकते हैं.
84 कोस यात्रा को ब्रजभूमि यात्रा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह कृष्ण के जीवन और घटनाओं से जुड़े स्थानों और स्थलों को कवर करती है.
आगरा और मथुरा आने वाले पर्यटक कभी-कभी भगवान कृष्ण को समर्पण के रूप में उसी यात्रा पर ब्रजभूमि यात्रा पूरी करते हैं.
कई अन्य लोग विशेष रूप से 4 से 7 दिन की नियोजित यात्रा कार्यक्रम के रूप में ब्रजभूमि यात्रा करने के लिए आते हैं.
परंपरागत रूप से यात्रा मॉनसून या भादों के महीने के दौरान की जाती है. यहां बारिश के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि कृष्ण का जन्म मूसलाधार बारिश की रात में हुआ था जब यमुना में बाढ़ आ रही थी.
इसलिए सबसे अधिक श्रद्धालु इस तीर्थयात्रा को करते हैं. उनमें से कई बारिश के मौसम में पैदल ही जाते हैं. दूसरों के लिए यह एक प्रकार की तपस्या है जो किसी इच्छा या प्रार्थना की पूर्ति के लिए की जाती है.
मंदिर दर्शन ब्रज यात्रा या ब्रज परिक्रमा में 12 वन (जंगल), 24 उपवन (छोटे जंगल या उपवन), पवित्र गोवर्धन पहाड़ी, यमुना नदी और इसके किनारे के विभिन्न पवित्र स्थल और गार्डन शामिल हैं जो इतिहास और विरासत के साक्षी रहे हैं.
किवदंती है कि यशोदा मां और नंद बाबा (कृष्ण के पालक माता-पिता) तीर्थयात्रा (चार धाम यात्रा) पर जाने के इच्छुक थे और उन्होंने कृष्ण को यह इच्छा व्यक्त की. चार धाम का शाब्दिक अर्थ है चार निवास स्थान या हिंदू धर्म के चार शक्तिशाली पवित्र तीर्थ केंद्र - बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम और द्वारका.
मोटे तौर पर, भारत के उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम में ये चार स्थान हिंदू धर्म वैष्णव, शैव और मिश्रित हैं.
अपने वृद्ध माता-पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्तियों के साथ इन पूजा स्थलों के सभी दिव्य पहलुओं को बुलाया और उन्हें 300 किलोमीटर के दायरे में वृंदावन ले आए और भूमि को पवित्र स्थिति प्रदान करते हुए आशीर्वाद दिया, इस प्रकार इसे नाम दिया 'ब्रज भूमि'.
तब से, इस ब्रज भूमि की यात्रा को ब्रज चौरासी कोस यात्रा के रूप में जाना जाता है और इस यात्रा को करने वाला कोई भी व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त माना जाता है .
कई धार्मिक संगठन और समूह हैं जो हर साल धार्मिक गुरु और उनके सहायकों के नेतृत्व में समूहों में विभाजित लोगों के लिए यात्रा का आयोजन करते हैं. यात्रा के पहले दिन तीर्थयात्री श्री राधा वल्लभलाल की मंगला आरती में शामिल होते हैं.
भगवान कृष्ण की मूर्ति को दूध से स्नान (दुग्दाभिषेक) के साथ यमुना नदी में पूजा की जाती है. फिर तीर्थयात्री सामूहिक रूप से राधेश्याम के नाम का जाप करते हुए यात्रा को पूरा करने का संकल्प लेते हैं.
सबसे अधिक श्रद्धालु तीर्थयात्री इस यात्रा को पैदल ही करते हैं जिसमें पूरी दूरी को पूरा करने में लगभग एक महीने या उससे अधिक का समय लगता है और जहां से उन्होंने शुरू किया था वहां वापस आ जाते हैं.
कुछ लोगों का कहना है कि यात्रा 20-25 दिनों में की जा सकती है, लेकिन यह यात्रा के छोटे दिन के लिए हो सकती है.
बुजुर्गों को भी यात्रा में भाग लेने और अपनी मन्नतें पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए, संगठन जत्थों में समूहों को ले जाने के लिए वाहनों और कारों की व्यवस्था करते हैं ताकि रास्ते में रुकने के साथ यात्रा आरामदायक हो जहां बुनियादी सुविधाएं मिल सके.
इस यात्रा पर एक साधारण यात्री औसतन 8 से 10,000 रुपये खर्च करता है, जबकि अन्य जो अधिक महंगी सुविधाओं का उपयोग करते हैं. वे लगभग 25,000 रुपये खर्च करते हैं.
इस परिमाण की यात्रा करने के लिए, एक विश्वसनीय समूह या संगठन के साथ अग्रिम बुकिंग करना हमेशा बेहतर होता है, जिसे तीर्थयात्रियों, युवा और वृद्धों की यात्रा आवश्यकताओं को पूरा करने का व्यापक अनुभव हो, और किसी भी अप्रत्याशित सिचवेशन के लिए बैक-अप योजना हो.
रास्ते में घटित होने वाली घटनाएं या परिस्थितिया सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा में मौसम बहुत बड़ी भूमिका निभाता है, खासकर अगर यह मॉनसून के महीनों के दौरान किया जाता है, जैसा कि आमतौर पर होता है, और इसलिए ठहरने और भोजन में आराम के लिए अतिरिक्त ऐहतियाती उपाय करने पड़ते हैं.
याद रखने के लिए एक अतिरिक्त तथ्य यह है कि पारंपरिक यात्रा करने वालों के लिए केवल प्रकाश, पेयजल, स्नान की सुविधा और शिविर जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध हैं. जिला प्रशासन ने इनमें से कोई भी सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था नहीं की है और जो भी न्यूनतम सुविधाएं प्रदान की गई हैं, वह मंदिर ट्रस्टों और धर्मार्थ संगठनों की हैं.
तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे पंडितों या गाइडों के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें.
वृंदावन बहुत सारे विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है और उन्हें विशेष रूप से गाइड और संगठनों के साथ यात्रा करने के लिए सावधान किया जाता है और उनके ग्रुप के बाहर किसी के साथ संपर्क नहीं होता है.
क़ीमती सामान ले जाने से बचें. रास्ते में बंदर कॉलोनियों में बहुत देखने को मिलते है. चश्मा, फोन और यहां तक कि कपड़ों से भरे बैग जैसी दिखाई देने वाली किसी भी चीज़ को छीन लेते हैं.
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Braj Chaurasi Kos Yatra : वृंदावन जिसे ब्रज के नाम से जाना जाता है. यह वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने अपना पूरा बचपन बिताया था. यही कारण है कि यह हिंदुओं और वैष्णवों के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. भगवान और अर्ध-देवताओं को समर्पित लगभग पाँच,शून्य मंदिर हैं. भगवान के करीब आने के लिए कई तपस्याएं की जाती हैं. ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा ब्रज में सबसे अधिक चुने जाने वाले तीर्थों में से एक है. तीर्थयात्रा के हिंदू वार्षिक कैलेंडर में सबसे दिव्य और पवित्र यात्राओं में से एक चौरासी कोस यात्रा है. एक 'कोस' लगभग दो. पच्चीस मील या तीन. बासठ किलोग्राममीटर है. "चौरासी कोस परिक्रमा" का तात्पर्य लगभग तीन सौ किलोग्राममीटर की परिक्रमा यात्रा या यमुना के किनारे वृंदावन के आसपास के पवित्र स्थानों की यात्रा से है. सालों से लाखों भक्त या तीर्थयात्री इस यात्रा को इस विश्वास में करते हैं कि वे अपने सांसारिक पापों से मुक्त हो गए हैं और 'परलोक' या स्वर्ग में जगह पा सकते हैं. चौरासी कोस यात्रा को ब्रजभूमि यात्रा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह कृष्ण के जीवन और घटनाओं से जुड़े स्थानों और स्थलों को कवर करती है. आगरा और मथुरा आने वाले पर्यटक कभी-कभी भगवान कृष्ण को समर्पण के रूप में उसी यात्रा पर ब्रजभूमि यात्रा पूरी करते हैं. कई अन्य लोग विशेष रूप से चार से सात दिन की नियोजित यात्रा कार्यक्रम के रूप में ब्रजभूमि यात्रा करने के लिए आते हैं. परंपरागत रूप से यात्रा मॉनसून या भादों के महीने के दौरान की जाती है. यहां बारिश के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि कृष्ण का जन्म मूसलाधार बारिश की रात में हुआ था जब यमुना में बाढ़ आ रही थी. इसलिए सबसे अधिक श्रद्धालु इस तीर्थयात्रा को करते हैं. उनमें से कई बारिश के मौसम में पैदल ही जाते हैं. दूसरों के लिए यह एक प्रकार की तपस्या है जो किसी इच्छा या प्रार्थना की पूर्ति के लिए की जाती है. मंदिर दर्शन ब्रज यात्रा या ब्रज परिक्रमा में बारह वन , चौबीस उपवन , पवित्र गोवर्धन पहाड़ी, यमुना नदी और इसके किनारे के विभिन्न पवित्र स्थल और गार्डन शामिल हैं जो इतिहास और विरासत के साक्षी रहे हैं. किवदंती है कि यशोदा मां और नंद बाबा तीर्थयात्रा पर जाने के इच्छुक थे और उन्होंने कृष्ण को यह इच्छा व्यक्त की. चार धाम का शाब्दिक अर्थ है चार निवास स्थान या हिंदू धर्म के चार शक्तिशाली पवित्र तीर्थ केंद्र - बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम और द्वारका. मोटे तौर पर, भारत के उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम में ये चार स्थान हिंदू धर्म वैष्णव, शैव और मिश्रित हैं. अपने वृद्ध माता-पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्तियों के साथ इन पूजा स्थलों के सभी दिव्य पहलुओं को बुलाया और उन्हें तीन सौ किलोग्राममीटर के दायरे में वृंदावन ले आए और भूमि को पवित्र स्थिति प्रदान करते हुए आशीर्वाद दिया, इस प्रकार इसे नाम दिया 'ब्रज भूमि'. तब से, इस ब्रज भूमि की यात्रा को ब्रज चौरासी कोस यात्रा के रूप में जाना जाता है और इस यात्रा को करने वाला कोई भी व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त माना जाता है . कई धार्मिक संगठन और समूह हैं जो हर साल धार्मिक गुरु और उनके सहायकों के नेतृत्व में समूहों में विभाजित लोगों के लिए यात्रा का आयोजन करते हैं. यात्रा के पहले दिन तीर्थयात्री श्री राधा वल्लभलाल की मंगला आरती में शामिल होते हैं. भगवान कृष्ण की मूर्ति को दूध से स्नान के साथ यमुना नदी में पूजा की जाती है. फिर तीर्थयात्री सामूहिक रूप से राधेश्याम के नाम का जाप करते हुए यात्रा को पूरा करने का संकल्प लेते हैं. सबसे अधिक श्रद्धालु तीर्थयात्री इस यात्रा को पैदल ही करते हैं जिसमें पूरी दूरी को पूरा करने में लगभग एक महीने या उससे अधिक का समय लगता है और जहां से उन्होंने शुरू किया था वहां वापस आ जाते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यात्रा बीस-पच्चीस दिनों में की जा सकती है, लेकिन यह यात्रा के छोटे दिन के लिए हो सकती है. बुजुर्गों को भी यात्रा में भाग लेने और अपनी मन्नतें पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए, संगठन जत्थों में समूहों को ले जाने के लिए वाहनों और कारों की व्यवस्था करते हैं ताकि रास्ते में रुकने के साथ यात्रा आरामदायक हो जहां बुनियादी सुविधाएं मिल सके. इस यात्रा पर एक साधारण यात्री औसतन आठ से दस,शून्य रुपयापये खर्च करता है, जबकि अन्य जो अधिक महंगी सुविधाओं का उपयोग करते हैं. वे लगभग पच्चीस,शून्य रुपयापये खर्च करते हैं. इस परिमाण की यात्रा करने के लिए, एक विश्वसनीय समूह या संगठन के साथ अग्रिम बुकिंग करना हमेशा बेहतर होता है, जिसे तीर्थयात्रियों, युवा और वृद्धों की यात्रा आवश्यकताओं को पूरा करने का व्यापक अनुभव हो, और किसी भी अप्रत्याशित सिचवेशन के लिए बैक-अप योजना हो. रास्ते में घटित होने वाली घटनाएं या परिस्थितिया सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा में मौसम बहुत बड़ी भूमिका निभाता है, खासकर अगर यह मॉनसून के महीनों के दौरान किया जाता है, जैसा कि आमतौर पर होता है, और इसलिए ठहरने और भोजन में आराम के लिए अतिरिक्त ऐहतियाती उपाय करने पड़ते हैं. याद रखने के लिए एक अतिरिक्त तथ्य यह है कि पारंपरिक यात्रा करने वालों के लिए केवल प्रकाश, पेयजल, स्नान की सुविधा और शिविर जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध हैं. जिला प्रशासन ने इनमें से कोई भी सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था नहीं की है और जो भी न्यूनतम सुविधाएं प्रदान की गई हैं, वह मंदिर ट्रस्टों और धर्मार्थ संगठनों की हैं. तीर्थयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे पंडितों या गाइडों के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें. वृंदावन बहुत सारे विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है और उन्हें विशेष रूप से गाइड और संगठनों के साथ यात्रा करने के लिए सावधान किया जाता है और उनके ग्रुप के बाहर किसी के साथ संपर्क नहीं होता है. क़ीमती सामान ले जाने से बचें. रास्ते में बंदर कॉलोनियों में बहुत देखने को मिलते है. चश्मा, फोन और यहां तक कि कपड़ों से भरे बैग जैसी दिखाई देने वाली किसी भी चीज़ को छीन लेते हैं.
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सुशांत सिंह केस में सीबीआई ने चार दिन में रिया चक्रवर्ती से 35 घंटे पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इस दौरान जांच एजेंसी ने रिया से ड्रग्स कनेक्शन को लेकर सवाल किए। इस दौरान रिया ने ड्रग्स लेने के आरोपों को नकार दिया। रिया ने कहा, उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं ली। इतना ही नहीं पूछताछ में रिया ने कहा, सुशांत मरिजुआना लेते थे।
मुंबई. सुशांत सिंह केस में सीबीआई ने चार दिन में रिया चक्रवर्ती से 35 घंटे पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इस दौरान जांच एजेंसी ने रिया से ड्रग्स कनेक्शन को लेकर सवाल किए। इस दौरान रिया ने ड्रग्स लेने के आरोपों को नकार दिया। रिया ने कहा, उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं ली। इतना ही नहीं पूछताछ में रिया ने कहा, सुशांत मरिजुआना लेते थे।
सुशांत केस में सीबीआई जांच का आज 12वां दिन है। इस मामले में अब तक जांच एजेंसी सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती समेत 8 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। मंगलवार को रिया चक्रवर्ती के माता पिता को पूछताछ के लिए बुलाया गया। सीबीआई ने इस मामले में अब तक रिया, भाई शौविक चक्रवर्ती, सुशांत की बहन मीतू, कुक नीरज सिंह और सिद्धार्थ पिठानी समेत 8 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। उधर, ईडी होटल मालिक गौरव आर्या से लगातार दूसरे दिन पूछताछ कर रही है।
इससे पहले रिया चक्रवर्ती से सीबीआई पिछले 2 दिन से ड्रग्स को लेकर सवाल कर रही है। लेकिन रिया सही जवाब नहीं दे रही हैं। रविवार को तो वे एक सवाल पर भड़क भी गई थीं। रिया चक्रवर्ती ने कुछ सवालों पर सीबीआई अधिकारी नुपुर प्रसाद से बहस भी की थी। पूछताछ के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को भी बुलाया गया।
उनके भाई शोविक, सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा, फ्लैटमेट रहे सिद्धार्थ पिठानी, हाउसकीपर नीरज से भी सीबीआई सवाल-जवाब कर चुकी है।
14 जून को सुशांत सिंह का शव उनके अपार्टमेंट में मिला था। मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। हालांकि, सुशांत के करीबी और परिजन इसे हत्या बता रहे हैं। इसी को लेकर सुशांत के पिता ने रिया समेत 6 लोगों के खिलाफ पटना में मामला दर्ज कराया था। इसी शिकायत के आधार पर उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके अलावा सुशांत की मौत में आर्थिक पहलू की जांच कर रही ईडी भी रिया से दो बार पूछताछ कर चुकी है।
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सुशांत सिंह केस में सीबीआई ने चार दिन में रिया चक्रवर्ती से पैंतीस घंटाटे पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इस दौरान जांच एजेंसी ने रिया से ड्रग्स कनेक्शन को लेकर सवाल किए। इस दौरान रिया ने ड्रग्स लेने के आरोपों को नकार दिया। रिया ने कहा, उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं ली। इतना ही नहीं पूछताछ में रिया ने कहा, सुशांत मरिजुआना लेते थे। मुंबई. सुशांत सिंह केस में सीबीआई ने चार दिन में रिया चक्रवर्ती से पैंतीस घंटाटे पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इस दौरान जांच एजेंसी ने रिया से ड्रग्स कनेक्शन को लेकर सवाल किए। इस दौरान रिया ने ड्रग्स लेने के आरोपों को नकार दिया। रिया ने कहा, उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं ली। इतना ही नहीं पूछताछ में रिया ने कहा, सुशांत मरिजुआना लेते थे। सुशांत केस में सीबीआई जांच का आज बारहवां दिन है। इस मामले में अब तक जांच एजेंसी सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती समेत आठ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। मंगलवार को रिया चक्रवर्ती के माता पिता को पूछताछ के लिए बुलाया गया। सीबीआई ने इस मामले में अब तक रिया, भाई शौविक चक्रवर्ती, सुशांत की बहन मीतू, कुक नीरज सिंह और सिद्धार्थ पिठानी समेत आठ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। उधर, ईडी होटल मालिक गौरव आर्या से लगातार दूसरे दिन पूछताछ कर रही है। इससे पहले रिया चक्रवर्ती से सीबीआई पिछले दो दिन से ड्रग्स को लेकर सवाल कर रही है। लेकिन रिया सही जवाब नहीं दे रही हैं। रविवार को तो वे एक सवाल पर भड़क भी गई थीं। रिया चक्रवर्ती ने कुछ सवालों पर सीबीआई अधिकारी नुपुर प्रसाद से बहस भी की थी। पूछताछ के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को भी बुलाया गया। उनके भाई शोविक, सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा, फ्लैटमेट रहे सिद्धार्थ पिठानी, हाउसकीपर नीरज से भी सीबीआई सवाल-जवाब कर चुकी है। चौदह जून को सुशांत सिंह का शव उनके अपार्टमेंट में मिला था। मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। हालांकि, सुशांत के करीबी और परिजन इसे हत्या बता रहे हैं। इसी को लेकर सुशांत के पिता ने रिया समेत छः लोगों के खिलाफ पटना में मामला दर्ज कराया था। इसी शिकायत के आधार पर उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके अलावा सुशांत की मौत में आर्थिक पहलू की जांच कर रही ईडी भी रिया से दो बार पूछताछ कर चुकी है।
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारतीय सेना लगातार द्विपक्षीय समझौतों का उल्लघंन करती है. साथ ही सीमा को लेकर हुए विवाद पर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ती है. भारत को ये बात पुख्ता करनी चाहिए कि आगे से ऐसी घटना न हो. भारत चीन को कमजोर न समझे.
चीन का आरोप है कि भारतीय सेना ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control) को पार कर चीन के उन सैनिकों से संघर्ष किया था, जो सीमा पर बातचीत के लिए गए थे. ये बातें चीन की विदेश मंत्रालय ने कही हैं.
इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सीमा पर हुई घटना की निंदा करता है. उसे बातचीत से शांत करने की कोशिश करता है.
ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि एक्सपर्ट मानते हैं कि इस समय भारत का चीन, पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद है. अगर भारत तनाव बढ़ाता है, तो वह दो या तीन मोर्चों से सैन्य दबाव का सामना कर सकता है, इसलिए स्थिति आगे बढ़ने की संभावना नहीं है.
भारत के खिलाफ अब चीन के मीडिया संस्थान प्रोपेगैंडा चलाने लगे हैं. चीन के सरकार के इशारों पर खबरें लिखने वाले ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि इस समय भारत का चीन, पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद चल रहा है. अगर ऐसे में विवाद बढ़ा तो भारत को दो या तीन सीमाओं पर सैन्य दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
भारत की सीमा पर चीन के साथ विवाद को लेकर अमेरिका की साजिश है. भारत को लद्दाख के गलवान वैली में हुई सैन्य घटना की जांच करनी चाहिए. ताकि यह पता चले कि इस घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है. जिन्होंने गलत किया है भारत उन्हें जिम्मेदार ठहराए. साथ ही उकसाने वाली हरकतें बंद करे.
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारतीय सेना लगातार द्विपक्षीय समझौतों का उल्लघंन करती है. साथ ही सीमा को लेकर हुए विवाद पर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ती है. भारत को ये बात पुख्ता करनी चाहिए कि आगे से ऐसी घटना न हो. भारत चीन को कमजोर न समझे. चीन का आरोप है कि भारतीय सेना ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को पार कर चीन के उन सैनिकों से संघर्ष किया था, जो सीमा पर बातचीत के लिए गए थे. ये बातें चीन की विदेश मंत्रालय ने कही हैं. इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सीमा पर हुई घटना की निंदा करता है. उसे बातचीत से शांत करने की कोशिश करता है. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि एक्सपर्ट मानते हैं कि इस समय भारत का चीन, पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद है. अगर भारत तनाव बढ़ाता है, तो वह दो या तीन मोर्चों से सैन्य दबाव का सामना कर सकता है, इसलिए स्थिति आगे बढ़ने की संभावना नहीं है. भारत के खिलाफ अब चीन के मीडिया संस्थान प्रोपेगैंडा चलाने लगे हैं. चीन के सरकार के इशारों पर खबरें लिखने वाले ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि इस समय भारत का चीन, पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद चल रहा है. अगर ऐसे में विवाद बढ़ा तो भारत को दो या तीन सीमाओं पर सैन्य दबाव का सामना करना पड़ सकता है. भारत की सीमा पर चीन के साथ विवाद को लेकर अमेरिका की साजिश है. भारत को लद्दाख के गलवान वैली में हुई सैन्य घटना की जांच करनी चाहिए. ताकि यह पता चले कि इस घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है. जिन्होंने गलत किया है भारत उन्हें जिम्मेदार ठहराए. साथ ही उकसाने वाली हरकतें बंद करे.
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बंगलूर - कोलकाता के खिलाफ आईपीएल का सबसे कम स्कोर बनाकर मैच गंवाने वाली विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बंगलूर मंगलवार को अपने घरेलू मैदान पर जब सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उतरेगी तो उसका एकमात्र लक्ष्य पिछले शर्मनाक प्रदर्शन को पीछे छोड़ खोया मनेबल हासिल करना होगा। विराट ने ईडन गार्डन मैदान पर पूरी टीम के 49 रन पर ढेर हो जाने और मैच में 82 रन की करारी हार के बाद सभी खिलाडि़यों को काफी लताड़ा था और उन्हें जुझारुपन दिखाने की सलाह दी थी। बंगलूर आईपीएल के सबसे कम स्कोर पर आउट हुई और उसकी यह हार कप्तान सहित किसी के गले से नहीं उतर रही है, लेकिन यह साफ है कि टीम पूरी तरह से पिछड़ गई है और तालिका में सात में पांच मैच हारकर आखिरी स्थान पर है। बंगलूर के लिए यह फिलहाल अच्छी बात है कि वह अपना अगला मैच घरेलू मैदान पर खेलने उतरेगी और इन परिस्थितियों का फायदा लेकर वह फिर से अपनी स्थिति को सुधार खोया मनोबल भी वापस हासिल कर सकती है। हालांकि मौजूदा स्थिति में तो उसके लिए किसी भी टीम से भिड़ना चुनौती ही है और तीसरे नंबर की सनराइजर्स हैदराबाद निश्चित ही विराट की टीम से बेहतर स्थिति में है, जिसने सात में से चार मैच जीते हैं, लेकिन पिछले मैच में वार्नर की टीम को भी पुणे से छह विकेट से हार मिली थी और ऐसे में बंगलूर के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है कि वह जीत की पटरी पर लौट आए।
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बंगलूर - कोलकाता के खिलाफ आईपीएल का सबसे कम स्कोर बनाकर मैच गंवाने वाली विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बंगलूर मंगलवार को अपने घरेलू मैदान पर जब सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उतरेगी तो उसका एकमात्र लक्ष्य पिछले शर्मनाक प्रदर्शन को पीछे छोड़ खोया मनेबल हासिल करना होगा। विराट ने ईडन गार्डन मैदान पर पूरी टीम के उनचास रन पर ढेर हो जाने और मैच में बयासी रन की करारी हार के बाद सभी खिलाडि़यों को काफी लताड़ा था और उन्हें जुझारुपन दिखाने की सलाह दी थी। बंगलूर आईपीएल के सबसे कम स्कोर पर आउट हुई और उसकी यह हार कप्तान सहित किसी के गले से नहीं उतर रही है, लेकिन यह साफ है कि टीम पूरी तरह से पिछड़ गई है और तालिका में सात में पांच मैच हारकर आखिरी स्थान पर है। बंगलूर के लिए यह फिलहाल अच्छी बात है कि वह अपना अगला मैच घरेलू मैदान पर खेलने उतरेगी और इन परिस्थितियों का फायदा लेकर वह फिर से अपनी स्थिति को सुधार खोया मनोबल भी वापस हासिल कर सकती है। हालांकि मौजूदा स्थिति में तो उसके लिए किसी भी टीम से भिड़ना चुनौती ही है और तीसरे नंबर की सनराइजर्स हैदराबाद निश्चित ही विराट की टीम से बेहतर स्थिति में है, जिसने सात में से चार मैच जीते हैं, लेकिन पिछले मैच में वार्नर की टीम को भी पुणे से छह विकेट से हार मिली थी और ऐसे में बंगलूर के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है कि वह जीत की पटरी पर लौट आए।
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भारत को प्रथाओं और परम्पराओं का देश माना जाता है. क्योकि यहाँ ना केवल अलग-अलग धर्म बल्कि इसके साथ ही कई प्रथाएं भी देखने को मिलती है. आज हमको एक ऐसी ही प्रथा के बारे में बताने जा रहे है जो अपनेआप में एक अनोखी प्रथा कही जाती है. इस प्रथा के अंतर्गत लड़कियों और औरतों को खरीदने का काम किया जाता है. लेकिन अधिक अचरज की बात यह है कि यह खरीद केवल दस रुपए के स्टाम्प पर होती है. यह प्रथा या कहे कि कुप्रथा मध्य प्रदेश के शिवपुरी में बहुत अधिक प्रचलित है.
इसे यहाँ धड़ीचा प्रथा के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि यहाँ प्रथा की आड़ में दरअसल गरीब लड़कियों का सौदा किया जाता है. इसके बारे में यह भी सुना है कि यह सौदा स्थाई और अस्थाई दोनों तरह का होता है. एक तरह से प्रथा के नाम पर यहाँ एक तरह से औरतों की मंडी लगती है. यहाँ पुरुष अपनी पसंदीदा औरत का चयन करते है, इसके बाद सौदा तय होता है और बिकने वाली औरत और खरीदने वाले पुरुष के बीच एक अनुबन्ध किया जाता है.
इस अनुबंध के अनुसार 10 रुपये से लेकर 100 तक के स्टाम्प पर सौदा किया जाता है. इसके अंतर्गत यहां हर साल करीब 300 से ज्यादा महिलाओं को दस से 100 रूपये तक के स्टांप पर खरीदने और बेचने का काम किया जाता है. इस स्टांप पर शर्त के मुताबिक खरीदने वाले व्यक्ति को महिला या उसके परिवार को एक रकम अदा करनी पड़ती है. इसके बाद महिला एक निश्चित समय के लिए व्यक्ति की पत्नी बन जाती है.
यदि यह रकम मोटी होती है तो संबंधों को स्थाई माना जाता है अन्यथा संबंध समाप्त हो जाते है. इसके बाद या तो उसे उसके घर पहुंचा दिया जाता है या फिर उसकी दूसरी शादी कर दी जाती है. अनुबंध की राशि 50 हजार से 4 लाख रूपये तक भी हो सकती है. लेकिन कई मायनो में यदि देखा जाए तो यह एक कुप्रथा के रूप में यहाँ बढ़ती ही जा रही है. जिससे कि ढेर सारी सामाजिक बुराईंया जन्म लेती हैं. इसको लेकर यह भी सुनने में आया है कि सरकार इसको रोकने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है लेकिन पीड़ित महिलाए कभी सामने नहीं आती जिस कारण यह प्रथा नहीं रुक पा रही है.
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भारत को प्रथाओं और परम्पराओं का देश माना जाता है. क्योकि यहाँ ना केवल अलग-अलग धर्म बल्कि इसके साथ ही कई प्रथाएं भी देखने को मिलती है. आज हमको एक ऐसी ही प्रथा के बारे में बताने जा रहे है जो अपनेआप में एक अनोखी प्रथा कही जाती है. इस प्रथा के अंतर्गत लड़कियों और औरतों को खरीदने का काम किया जाता है. लेकिन अधिक अचरज की बात यह है कि यह खरीद केवल दस रुपए के स्टाम्प पर होती है. यह प्रथा या कहे कि कुप्रथा मध्य प्रदेश के शिवपुरी में बहुत अधिक प्रचलित है. इसे यहाँ धड़ीचा प्रथा के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि यहाँ प्रथा की आड़ में दरअसल गरीब लड़कियों का सौदा किया जाता है. इसके बारे में यह भी सुना है कि यह सौदा स्थाई और अस्थाई दोनों तरह का होता है. एक तरह से प्रथा के नाम पर यहाँ एक तरह से औरतों की मंडी लगती है. यहाँ पुरुष अपनी पसंदीदा औरत का चयन करते है, इसके बाद सौदा तय होता है और बिकने वाली औरत और खरीदने वाले पुरुष के बीच एक अनुबन्ध किया जाता है. इस अनुबंध के अनुसार दस रुपयापये से लेकर एक सौ तक के स्टाम्प पर सौदा किया जाता है. इसके अंतर्गत यहां हर साल करीब तीन सौ से ज्यादा महिलाओं को दस से एक सौ रूपये तक के स्टांप पर खरीदने और बेचने का काम किया जाता है. इस स्टांप पर शर्त के मुताबिक खरीदने वाले व्यक्ति को महिला या उसके परिवार को एक रकम अदा करनी पड़ती है. इसके बाद महिला एक निश्चित समय के लिए व्यक्ति की पत्नी बन जाती है. यदि यह रकम मोटी होती है तो संबंधों को स्थाई माना जाता है अन्यथा संबंध समाप्त हो जाते है. इसके बाद या तो उसे उसके घर पहुंचा दिया जाता है या फिर उसकी दूसरी शादी कर दी जाती है. अनुबंध की राशि पचास हजार से चार लाख रूपये तक भी हो सकती है. लेकिन कई मायनो में यदि देखा जाए तो यह एक कुप्रथा के रूप में यहाँ बढ़ती ही जा रही है. जिससे कि ढेर सारी सामाजिक बुराईंया जन्म लेती हैं. इसको लेकर यह भी सुनने में आया है कि सरकार इसको रोकने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है लेकिन पीड़ित महिलाए कभी सामने नहीं आती जिस कारण यह प्रथा नहीं रुक पा रही है.
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बंबई उच्च न्यायालय ने 2,600 से अधिक पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ गैर लाभकारी संगठनों की चार याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया था। इसके कुछ घंटों बाद मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड हरकत में आ गया और उसने 'मेट्रो कार शेड' के लिए पेड़ काटने शुरू कर दिए।
फरहान अख्तर, दिया मिर्जा, स्वरा भास्कर और उर्मिला मातोंडकर समेत बॉलीवुड के कई कलाकारों ने 'मेट्रो कार शेड' के लिये यहां आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई किये जाने की शनिवार को निंदा की। बंबई उच्च न्यायालय ने 2,600 से अधिक पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ गैर लाभकारी संगठनों की चार याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया था।
इसके कुछ घंटों बाद मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) हरकत में आ गया और उसने 'मेट्रो कार शेड' के लिए पेड़ काटने शुरू कर दिए। अख्तर ने ट्वीट किया, "रात में पेड़ काटना बहुत दुखद है जबकि ऐसा करने वाले लोग भी जानते हैं कि यह गलत है। " उन्होंने ट्विटर पर इसके साथ आरे, 'ग्रीन इज गोल्ड' और मुंबई हैशटैग का इस्तेमाल किया।
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बंबई उच्च न्यायालय ने दो,छः सौ से अधिक पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ गैर लाभकारी संगठनों की चार याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया था। इसके कुछ घंटों बाद मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड हरकत में आ गया और उसने 'मेट्रो कार शेड' के लिए पेड़ काटने शुरू कर दिए। फरहान अख्तर, दिया मिर्जा, स्वरा भास्कर और उर्मिला मातोंडकर समेत बॉलीवुड के कई कलाकारों ने 'मेट्रो कार शेड' के लिये यहां आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई किये जाने की शनिवार को निंदा की। बंबई उच्च न्यायालय ने दो,छः सौ से अधिक पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ गैर लाभकारी संगठनों की चार याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया था। इसके कुछ घंटों बाद मुंबई मेट्रो रेल कोरपोरेशन लिमिटेड हरकत में आ गया और उसने 'मेट्रो कार शेड' के लिए पेड़ काटने शुरू कर दिए। अख्तर ने ट्वीट किया, "रात में पेड़ काटना बहुत दुखद है जबकि ऐसा करने वाले लोग भी जानते हैं कि यह गलत है। " उन्होंने ट्विटर पर इसके साथ आरे, 'ग्रीन इज गोल्ड' और मुंबई हैशटैग का इस्तेमाल किया।
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Nirahua - Amrapali Hot Romance Video: भोजपुरी इंडस्टी के सुपरस्टार कहलाने वाले दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने इन दिनों सोशल मीडिया पर धमाल मचाया हुआ है। निरहुआ को उनके चाहने वालों द्वारा सबसे ज्यादा सर्च किया जाता है। निरहुआ की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोविंग दिनों दिन बढ़ती ही चली जा रही है। यदि आप निरहुआ के दीवाने हैं, तो आज हम निरहुआ (Nirahua) का एक ऐसा गाना आपके लिए लेकर आये हैं, जिसे देखने के बाद आप भी मदहोश हो जायेंगे।
भोजपुरी गाना ' Khole Di Kevadiya Bhail Bhor' में निरहुआ के साथ भोजपुरी जगत की मशहूर अदाकारा आम्रपाली बेडरूम में पलंगतोड़ रोमांस करती हुईं नजर आ रही हैं। आम्रपाली ने अपनी हॉटनेस और बोल्डनेस दिखाकर अपने ऑनस्क्रीन पति निरहुआ को बेकाबू कर दिया है।
ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और फैंस द्वारा इस गाने को खूब प्यार भी मिल रहा है। गाने के वीडियो में जैसा कि देखा जा सकता है निरहुआ और आम्रपाली बिस्तर पर लेटकर एक दूजे को खूब प्यार करते हुए नजर आ रहे हैं।
इस जोड़ी ने अपने रोमांस से इंटरनेट को हिला दिया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जब भी ये जोड़ी किसी फिल्म या फिर गाने में साथ नजर आती है, तो ये दोनों वाकई हदें पार कर देते हैं। इस गाने में दोनों एक दूसरे पर भयंकर प्यार लुटा रहे हैं। बंद कमरे में बिस्तर पर पलंगतोड़ रोमांस कर रहे हैं।
इस गाने को Kalpana और Rajnish ने सुनहरी आवाज दी है, जबकि गाने के बोल Shyam Dehati ने लिखें हैं और म्यूजिक से सजाया है Rajesh Rajnish ने। फिल्म में दिनेश लाल यादव (निरहुआ), आम्रपाली दुबे, सुशील सिंह, अंजना सिंह, संजय पांडे, मनोज टाइगर, प्रकाश जैस अहम भूमिका निभाते हुए नजर आये हैं। ये गाना फिल्म मोकामा 0 किलोमीटर का है।
- बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
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Nirahua - Amrapali Hot Romance Video: भोजपुरी इंडस्टी के सुपरस्टार कहलाने वाले दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने इन दिनों सोशल मीडिया पर धमाल मचाया हुआ है। निरहुआ को उनके चाहने वालों द्वारा सबसे ज्यादा सर्च किया जाता है। निरहुआ की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोविंग दिनों दिन बढ़ती ही चली जा रही है। यदि आप निरहुआ के दीवाने हैं, तो आज हम निरहुआ का एक ऐसा गाना आपके लिए लेकर आये हैं, जिसे देखने के बाद आप भी मदहोश हो जायेंगे। भोजपुरी गाना ' Khole Di Kevadiya Bhail Bhor' में निरहुआ के साथ भोजपुरी जगत की मशहूर अदाकारा आम्रपाली बेडरूम में पलंगतोड़ रोमांस करती हुईं नजर आ रही हैं। आम्रपाली ने अपनी हॉटनेस और बोल्डनेस दिखाकर अपने ऑनस्क्रीन पति निरहुआ को बेकाबू कर दिया है। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और फैंस द्वारा इस गाने को खूब प्यार भी मिल रहा है। गाने के वीडियो में जैसा कि देखा जा सकता है निरहुआ और आम्रपाली बिस्तर पर लेटकर एक दूजे को खूब प्यार करते हुए नजर आ रहे हैं। इस जोड़ी ने अपने रोमांस से इंटरनेट को हिला दिया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जब भी ये जोड़ी किसी फिल्म या फिर गाने में साथ नजर आती है, तो ये दोनों वाकई हदें पार कर देते हैं। इस गाने में दोनों एक दूसरे पर भयंकर प्यार लुटा रहे हैं। बंद कमरे में बिस्तर पर पलंगतोड़ रोमांस कर रहे हैं। इस गाने को Kalpana और Rajnish ने सुनहरी आवाज दी है, जबकि गाने के बोल Shyam Dehati ने लिखें हैं और म्यूजिक से सजाया है Rajesh Rajnish ने। फिल्म में दिनेश लाल यादव , आम्रपाली दुबे, सुशील सिंह, अंजना सिंह, संजय पांडे, मनोज टाइगर, प्रकाश जैस अहम भूमिका निभाते हुए नजर आये हैं। ये गाना फिल्म मोकामा शून्य किलोग्राममीटर का है। - बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
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पिछड़ी जातियों के अधिकारों को सरकारें किस तरह से कुचल सकती हैं, इसका जीता-जाता उदाहरण आज जिला कांगड़ा में देखने को मिला। हैरानी यह है कि जब हम प्रदेश के एक बड़े राजनेता चौधरी हरि राम की जयंती मना रहे हैं और उन्हीं के वर्ग के एक अधिकारी को एक सरकारी फरमान ने अर्श से फर्श पर ला खड़ा कर दिया है। अधिकारी की प्रताडऩा का यह मामला हिमाचल प्रदेश अग्निशमन सेवाएं विभाग से जुड़ा है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति को सेवा विस्तार दे दिया गया, जिसे 28 फरवरी को रिटायर होना था। ऐसे में अन्य पिछड़ा वर्ग का अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गया। होना तो यह चाहिए था कि जिस व्यक्ति को सेवा विस्तार दिया गया, उसे रिटायर करते हुए अगले अफसर को पदोन्नत किया जाता। मगर सरकार के इस एक्शन को देखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग बुरी तरह से भड़क उठा है। इस मामले को पिछड़े वर्ग की घोर उपेक्षा के तौर पर देखा जाने लगा है। यह बवाल उस समय मचा जब स्पेशल सेक्रेटरी होम की एक चिट्ठी सामने आई। इस चिट्ठी में फायर सर्विस डिपार्टमेंट को आदेश दिए गए हैं कि डिवीजनल फायर ऑफिसर शिमला, धर्मचंद शर्मा, जो कि 28 फरवरी को रिटायर हो रहे थे, को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया जाए। इसी पत्र के सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया और अब इसे अन्य पिछड़ा वर्ग के खिलाफ सरेआम भेदभाव के तौर पर देखा जाने लगा है।
वहीं धर्मचंद शर्मा की सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी पदोन्नति का सपना देख रहे अफसर को बिना प्रोमोशन ही रिटायर होना पड़ेगा, क्योंकि इस साल भर के सेवा विस्तार के दौरान ही उपेक्षित हुए अधिकारी की सेवानिवृत्ति भी हो जाएगी। ऐसे में अब अन्य पिछड़ा वर्ग जिला कांगड़ा महासभा का रुख काफी उग्र होने लगा है। घृत-बाहती-चाहंग महासभा के उपाध्यक्ष प्रभात चौधरी ने अपने वर्ग की सदियों की दास्तां का जिक्र करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया है। वह बताते हैं कि जब भी ओबीसी का कोई व्यक्ति तरक्की के रास्ते पर आगे बढऩे की कोशिश करता है, तो सरकारें उसकी टांग खींच लेती हैं। सरकार पर आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी को बिना विभागीय सिफारिश कमेटी के ही सेवा विस्तार दे दिया गया। जिस अधिकारी ने डिवीजनल अफसर बनना था, उसका हक इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह अन्य पिछड़ा वर्ग से है?
घृत-बाहती-चाहंग महासभा ने इस बावत मंत्री सरवीन चौधरी को भी पत्र लिखा है। उन्होने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। महासभा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया है कि इस मामले में वे स्वयं हस्तक्षेप करें और इस सेवा विस्तार को तुंरत प्रभाव से रद्द करके पात्र व्यक्ति को पदोन्नत करें।
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पिछड़ी जातियों के अधिकारों को सरकारें किस तरह से कुचल सकती हैं, इसका जीता-जाता उदाहरण आज जिला कांगड़ा में देखने को मिला। हैरानी यह है कि जब हम प्रदेश के एक बड़े राजनेता चौधरी हरि राम की जयंती मना रहे हैं और उन्हीं के वर्ग के एक अधिकारी को एक सरकारी फरमान ने अर्श से फर्श पर ला खड़ा कर दिया है। अधिकारी की प्रताडऩा का यह मामला हिमाचल प्रदेश अग्निशमन सेवाएं विभाग से जुड़ा है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति को सेवा विस्तार दे दिया गया, जिसे अट्ठाईस फरवरी को रिटायर होना था। ऐसे में अन्य पिछड़ा वर्ग का अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गया। होना तो यह चाहिए था कि जिस व्यक्ति को सेवा विस्तार दिया गया, उसे रिटायर करते हुए अगले अफसर को पदोन्नत किया जाता। मगर सरकार के इस एक्शन को देखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग बुरी तरह से भड़क उठा है। इस मामले को पिछड़े वर्ग की घोर उपेक्षा के तौर पर देखा जाने लगा है। यह बवाल उस समय मचा जब स्पेशल सेक्रेटरी होम की एक चिट्ठी सामने आई। इस चिट्ठी में फायर सर्विस डिपार्टमेंट को आदेश दिए गए हैं कि डिवीजनल फायर ऑफिसर शिमला, धर्मचंद शर्मा, जो कि अट्ठाईस फरवरी को रिटायर हो रहे थे, को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया जाए। इसी पत्र के सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया और अब इसे अन्य पिछड़ा वर्ग के खिलाफ सरेआम भेदभाव के तौर पर देखा जाने लगा है। वहीं धर्मचंद शर्मा की सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी पदोन्नति का सपना देख रहे अफसर को बिना प्रोमोशन ही रिटायर होना पड़ेगा, क्योंकि इस साल भर के सेवा विस्तार के दौरान ही उपेक्षित हुए अधिकारी की सेवानिवृत्ति भी हो जाएगी। ऐसे में अब अन्य पिछड़ा वर्ग जिला कांगड़ा महासभा का रुख काफी उग्र होने लगा है। घृत-बाहती-चाहंग महासभा के उपाध्यक्ष प्रभात चौधरी ने अपने वर्ग की सदियों की दास्तां का जिक्र करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया है। वह बताते हैं कि जब भी ओबीसी का कोई व्यक्ति तरक्की के रास्ते पर आगे बढऩे की कोशिश करता है, तो सरकारें उसकी टांग खींच लेती हैं। सरकार पर आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी को बिना विभागीय सिफारिश कमेटी के ही सेवा विस्तार दे दिया गया। जिस अधिकारी ने डिवीजनल अफसर बनना था, उसका हक इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह अन्य पिछड़ा वर्ग से है? घृत-बाहती-चाहंग महासभा ने इस बावत मंत्री सरवीन चौधरी को भी पत्र लिखा है। उन्होने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। महासभा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया है कि इस मामले में वे स्वयं हस्तक्षेप करें और इस सेवा विस्तार को तुंरत प्रभाव से रद्द करके पात्र व्यक्ति को पदोन्नत करें।
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चार साल पुराने एक आपराधिक मानहानि मामले में दो साल की सज़ा मिलने के एक दिन बाद शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई है.
लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी करके यह जानकारी दी है.
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चार साल पुराने एक आपराधिक मानहानि मामले में दो साल की सज़ा मिलने के एक दिन बाद शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई है. लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी करके यह जानकारी दी है.
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अभिनेता इरफान खान के निधन को लगभग ढाई महीने हो चुके हैं। वहीं इरफान खान के बड़े बेटे बाबिल ने इंस्टाग्राम पर उनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें साझा की है। एक तस्वीर उनके पिता इरफान खान और मां सुतापा की है। ब्लैक एंड व्हाइट इस थ्रोबैक तस्वीर में इरफान कुर्सी पर बैठे हुए हैं, जबकि सुतापा उनके बगल में खड़ी हैं। इसके कैप्शन में बाबिल ने पिता को याद करते हुए एक भावुक नोट भी लिखी है।
बाबिल ने लिखा-'पांच साल बहुत ज्यादा होते हैं और आप एक अजनबी हैं, प्यार में पांच साल। काश मैं आपके जूतों में फिट हो पाता। आप इतनी दूर चले गए हैं और मैं हमेशा थोड़ा बहुत देर से आता हूं। ' बाबिल आगे लिखते हैं-'जब मैं अपनी मां को रोते हुए देखता हूं तो मेरी लिए मुश्किल घड़ी होती है। मैं शायद कभी नहीं जीत सकता। '
सोशल मीडिया पर बाबिल का यह पोस्ट हर किसी का ध्यान खींच रहा है। बाबिल ने अपने इस पोस्ट के साथ तीन तस्वीरें साझा की हैं। एक अन्य तस्वीर में वो अपने भाई अयान के साथ नजर आ रहे हैं। वहीं इरफान खान की पत्नी सुतापा ने भी बाबिल द्वारा शेयर की गई अपनी और इरफान की तस्वीर को इंस्टाग्राम पर साझा किया है।
दिग्गज अभिनेता इरफान खान ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इरफान खान का 29 अप्रैल, 2020 को 54 साल की उम्र में निधन हो गया था। वह न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से पीड़ित थे। इरफान खान अपने पीछे अपनी पत्नी सुतापा और दो बेटों बाबिल और अयान को छोड़ गए। उनकी पत्नी सुतापा और उनके बड़े बेटे बाबिल उन्हें याद कर सोशल मीडिया पर अक्सर पोस्ट साझा करते रहते हैं। इरफान खान ऐसे नायाब अभिनता थे, जिन्होंने टीवी से लेकर बॉलीवुड और फिर हॉलीवुड में भी अपनी चमक दिखाई थी।
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अभिनेता इरफान खान के निधन को लगभग ढाई महीने हो चुके हैं। वहीं इरफान खान के बड़े बेटे बाबिल ने इंस्टाग्राम पर उनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें साझा की है। एक तस्वीर उनके पिता इरफान खान और मां सुतापा की है। ब्लैक एंड व्हाइट इस थ्रोबैक तस्वीर में इरफान कुर्सी पर बैठे हुए हैं, जबकि सुतापा उनके बगल में खड़ी हैं। इसके कैप्शन में बाबिल ने पिता को याद करते हुए एक भावुक नोट भी लिखी है। बाबिल ने लिखा-'पांच साल बहुत ज्यादा होते हैं और आप एक अजनबी हैं, प्यार में पांच साल। काश मैं आपके जूतों में फिट हो पाता। आप इतनी दूर चले गए हैं और मैं हमेशा थोड़ा बहुत देर से आता हूं। ' बाबिल आगे लिखते हैं-'जब मैं अपनी मां को रोते हुए देखता हूं तो मेरी लिए मुश्किल घड़ी होती है। मैं शायद कभी नहीं जीत सकता। ' सोशल मीडिया पर बाबिल का यह पोस्ट हर किसी का ध्यान खींच रहा है। बाबिल ने अपने इस पोस्ट के साथ तीन तस्वीरें साझा की हैं। एक अन्य तस्वीर में वो अपने भाई अयान के साथ नजर आ रहे हैं। वहीं इरफान खान की पत्नी सुतापा ने भी बाबिल द्वारा शेयर की गई अपनी और इरफान की तस्वीर को इंस्टाग्राम पर साझा किया है। दिग्गज अभिनेता इरफान खान ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इरफान खान का उनतीस अप्रैल, दो हज़ार बीस को चौवन साल की उम्र में निधन हो गया था। वह न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से पीड़ित थे। इरफान खान अपने पीछे अपनी पत्नी सुतापा और दो बेटों बाबिल और अयान को छोड़ गए। उनकी पत्नी सुतापा और उनके बड़े बेटे बाबिल उन्हें याद कर सोशल मीडिया पर अक्सर पोस्ट साझा करते रहते हैं। इरफान खान ऐसे नायाब अभिनता थे, जिन्होंने टीवी से लेकर बॉलीवुड और फिर हॉलीवुड में भी अपनी चमक दिखाई थी।
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द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट.
मॉब वायलेंस और मॉब लिंचिंग बिल, 2021 को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है, जो 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और संपत्ति ज़ब्त किए जाने के अलावा तीन साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है. इसके अलावा पीड़ितों के लिए प्रतिकूल माहौल बनाने के लिए जुर्माने और तीन साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है.
कृषि आंदोलन की सफलता को लेकर उत्तर प्रदेश के कैराना में आयोजित महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में लोगों से कहा कि वह कैराना पलायन जैसे मुद्दों से सतर्क रहें, क्योंकि यह उनके बीच में दरार पैदा करने की कोशिश है.
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि 1947 में देश को राजनीतिक आज़ादी मिली पर राम मंदिर आंदोलन के ज़रिये धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिली. जैन ने यह भी कहा कि चंदा अभियान ने पूरे देश को साथ लाकर बताया कि राम ही देश को एकजुट कर सकते हैं. धर्मनिरपेक्ष राजनीति ने सिर्फ देश को बांटा ही है.
जम्मू कश्मीर में कठुआ के रामकोट इलाके का मामला. भाजपा नेता नारायण दत्त त्रिपाठी पर दो पत्रकारों से मारपीट का आरोप है. यह घटना नौ दिसंबर को उस समय हुई, जब दैनिक शिव टाइम्स के पत्रकार कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ. मनोहर लाल शर्मा का साक्षात्कार ले रहे थे. अख़बार के कार्यकारी संपादक ने बताया कि इस संबंध में एक केस दर्ज कराया गया है, लेकिन पुलिस ने भाजपा नेता के ख़िलाफ़ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है.
कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों को स्पष्ट करना चाहिए कि वे सीबीआई पर भरोसा करती हैं या नहीं, क्या वे चुनिंदा तरीके से एजेंसी पर भरोसा करती हैं और उनके अनुरूप मामले को लेकर ही चुनिंदा सहमति देना जारी रखे हुए हैं.
स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा और मुनव्वर फ़ारूक़ी को अपने बेंगलुरु में किए जाने वाले कार्यक्रमों को अनुमति न मिलने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इन दोनों कलाकारों को अपने हास्य कार्यक्रम भाजपा शासित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित करने के लिए न्योता दिया है.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं कक्षा के अंग्रेज़ी पेपर में 'महिलाओं की मुक्ति ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को समाप्त कर दिया' और 'अपने पति के तौर-तरीके को स्वीकार करके ही एक मां अपने से छोटों से सम्मान पा सकती है', जैसे वाक्यों के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई गई है.
भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,46,97,860 हो गई है और मृतकों का आंकड़ा 4,75,636 है. विश्व में संक्रमण के मामले 27 करोड़ के पार कर गए हैं और 53. 06 लाख से अधिक लोग इस महामारी के कारण दम तोड़ चुके हैं.
यूनेस्को और यूनिसेफ के सहयोग से विश्व बैंक द्वारा तैयार एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पढ़ाई में कमज़ोर बच्चों का हिस्सा 53 प्रतिशत था, जो कोविड-19 महामारी के कारण लंबे समय तक स्कूल बंद होने के चलते 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
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द वायर बुलेटिनः आज की ज़रूरी ख़बरों का अपडेट. मॉब वायलेंस और मॉब लिंचिंग बिल, दो हज़ार इक्कीस को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है, जो सोलह दिसंबर से शुरू हो रहा है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और संपत्ति ज़ब्त किए जाने के अलावा तीन साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है. इसके अलावा पीड़ितों के लिए प्रतिकूल माहौल बनाने के लिए जुर्माने और तीन साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है. कृषि आंदोलन की सफलता को लेकर उत्तर प्रदेश के कैराना में आयोजित महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में लोगों से कहा कि वह कैराना पलायन जैसे मुद्दों से सतर्क रहें, क्योंकि यह उनके बीच में दरार पैदा करने की कोशिश है. विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में देश को राजनीतिक आज़ादी मिली पर राम मंदिर आंदोलन के ज़रिये धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिली. जैन ने यह भी कहा कि चंदा अभियान ने पूरे देश को साथ लाकर बताया कि राम ही देश को एकजुट कर सकते हैं. धर्मनिरपेक्ष राजनीति ने सिर्फ देश को बांटा ही है. जम्मू कश्मीर में कठुआ के रामकोट इलाके का मामला. भाजपा नेता नारायण दत्त त्रिपाठी पर दो पत्रकारों से मारपीट का आरोप है. यह घटना नौ दिसंबर को उस समय हुई, जब दैनिक शिव टाइम्स के पत्रकार कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ. मनोहर लाल शर्मा का साक्षात्कार ले रहे थे. अख़बार के कार्यकारी संपादक ने बताया कि इस संबंध में एक केस दर्ज कराया गया है, लेकिन पुलिस ने भाजपा नेता के ख़िलाफ़ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है. कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकारों को स्पष्ट करना चाहिए कि वे सीबीआई पर भरोसा करती हैं या नहीं, क्या वे चुनिंदा तरीके से एजेंसी पर भरोसा करती हैं और उनके अनुरूप मामले को लेकर ही चुनिंदा सहमति देना जारी रखे हुए हैं. स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा और मुनव्वर फ़ारूक़ी को अपने बेंगलुरु में किए जाने वाले कार्यक्रमों को अनुमति न मिलने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इन दोनों कलाकारों को अपने हास्य कार्यक्रम भाजपा शासित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित करने के लिए न्योता दिया है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा के अंग्रेज़ी पेपर में 'महिलाओं की मुक्ति ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को समाप्त कर दिया' और 'अपने पति के तौर-तरीके को स्वीकार करके ही एक मां अपने से छोटों से सम्मान पा सकती है', जैसे वाक्यों के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई गई है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर तीन,छियालीस,सत्तानवे,आठ सौ साठ हो गई है और मृतकों का आंकड़ा चार,पचहत्तर,छः सौ छत्तीस है. विश्व में संक्रमण के मामले सत्ताईस करोड़ के पार कर गए हैं और तिरेपन. छः लाख से अधिक लोग इस महामारी के कारण दम तोड़ चुके हैं. यूनेस्को और यूनिसेफ के सहयोग से विश्व बैंक द्वारा तैयार एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पढ़ाई में कमज़ोर बच्चों का हिस्सा तिरेपन प्रतिशत था, जो कोविड-उन्नीस महामारी के कारण लंबे समय तक स्कूल बंद होने के चलते सत्तर प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
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कर्नाटक के मैसूर में बच्चों में कोवैक्सिन वैक्सीनेशन को लेकर किए गए सीरो सर्वे और सामाजिक, भावनात्मक और पोषण संबंधी विकारों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने स्कूलों में ऑन-कैंपस कक्षाओं को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है।
सरकार ने पिछले साल मार्च में महामारी के बाद स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था। तब से लेकर स्कूल लगातार बंद चल रहे हैं और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही हैं।
मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के बाल रोग विभाग के असोसिएट प्रफेसर डॉ प्रदीप एन ने कहा कि सीरो-निगरानी अध्ययन से पता चला है कि 50 फीसदी से अधिक बच्चे पहले ही वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।
डॉ. प्रदीप ने कहा, 'हमारे पिडिआट्रिक कोवैक्सिन ट्रायल किया। हमने 200 से अधिक बच्चों पर स्क्रीनिंग की। उनका आईजीजी एंटीबॉडी परीक्षण किया। उनमें से केवल 88 ही वैक्सीन लेने के योग्य थे क्योंकि बाकी में एंटीबॉडी पॉजिटिव आई। हैरानी की बात यह है कि किसी भी पॉजिटिव बच्चे में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखे।
प्रफेसर ने कहा कि छह साल तक के बच्चों में पॉजिटिविटी दर अधिक है। यह शून्य से छह साल के बच्चों में लगभग 60 फीसदी, छह से 12 साल के बच्चों में 50 फीसदी और 12 से 18 साल के बच्चों में 40 फीसद मिली। उन्होंने कहा कि डेटा से पता चलता है कि अधिकांश बच्चे बिना लक्षणों वाले थे या उनमें हल्के लक्षण थे।
स्कूलों को फिर से खोलने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि न केवल बाल श्रम, बाल विवाह और कुपोषण में वृद्धि हुई है, बल्कि बच्चों को अवसाद, गुस्सा नखरे और अन्य व्यवहार संबंधी विकारों जैसे मनोवैज्ञानिक मुद्दों का भी सामना करना पड़ रहा है, जो उन्हें तनाव जैसी मानसिक बीमारियों की ओर ले जाते हैं।
डॉक्टर ने बताया कि इसके अलावा, मोटापा, अधिक वजन और कुपोषण जैसे पोषण संबंधी विकार बढ़ रहे हैं, और वे वयस्क होने पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी से प्रभावित होंगे। हालांकि, हमें उच्च जोखिम वाले बच्चों में कुछ सावधानी बरतने की ज़रूरत है जैसे कि जन्मजात हृदय रोग, पुरानी अस्थमा, पुरानी गुर्दे की बीमारी और अन्य पहले से हुई बीमारियां बच्चों में 1 फीसदी से कम में देखी जाती हैं।
प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले अश्विनी रंजन ने कहा कि स्कूलों को फिर से शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीजें कैसे चलती हैं, इसके आधार पर अन्य जगहों पर स्कूल फिर से खोले जा सकते हैं। यह एक वास्तविक तस्वीर देगा। सरकार को बड़े पैमाने पर माता-पिता और समुदाय को साथ लेकर निर्णय लेना चाहिए।
कर्नाटक के मैसूर में बच्चों में कोवैक्सिन वैक्सीनेशन को लेकर किए गए सीरो सर्वे और सामाजिक, भावनात्मक और पोषण संबंधी विकारों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने स्कूलों में ऑन-कैंपस कक्षाओं को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है।
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कर्नाटक के मैसूर में बच्चों में कोवैक्सिन वैक्सीनेशन को लेकर किए गए सीरो सर्वे और सामाजिक, भावनात्मक और पोषण संबंधी विकारों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने स्कूलों में ऑन-कैंपस कक्षाओं को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है। सरकार ने पिछले साल मार्च में महामारी के बाद स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था। तब से लेकर स्कूल लगातार बंद चल रहे हैं और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही हैं। मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के बाल रोग विभाग के असोसिएट प्रफेसर डॉ प्रदीप एन ने कहा कि सीरो-निगरानी अध्ययन से पता चला है कि पचास फीसदी से अधिक बच्चे पहले ही वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। डॉ. प्रदीप ने कहा, 'हमारे पिडिआट्रिक कोवैक्सिन ट्रायल किया। हमने दो सौ से अधिक बच्चों पर स्क्रीनिंग की। उनका आईजीजी एंटीबॉडी परीक्षण किया। उनमें से केवल अठासी ही वैक्सीन लेने के योग्य थे क्योंकि बाकी में एंटीबॉडी पॉजिटिव आई। हैरानी की बात यह है कि किसी भी पॉजिटिव बच्चे में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखे। प्रफेसर ने कहा कि छह साल तक के बच्चों में पॉजिटिविटी दर अधिक है। यह शून्य से छह साल के बच्चों में लगभग साठ फीसदी, छह से बारह साल के बच्चों में पचास फीसदी और बारह से अट्ठारह साल के बच्चों में चालीस फीसद मिली। उन्होंने कहा कि डेटा से पता चलता है कि अधिकांश बच्चे बिना लक्षणों वाले थे या उनमें हल्के लक्षण थे। स्कूलों को फिर से खोलने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि न केवल बाल श्रम, बाल विवाह और कुपोषण में वृद्धि हुई है, बल्कि बच्चों को अवसाद, गुस्सा नखरे और अन्य व्यवहार संबंधी विकारों जैसे मनोवैज्ञानिक मुद्दों का भी सामना करना पड़ रहा है, जो उन्हें तनाव जैसी मानसिक बीमारियों की ओर ले जाते हैं। डॉक्टर ने बताया कि इसके अलावा, मोटापा, अधिक वजन और कुपोषण जैसे पोषण संबंधी विकार बढ़ रहे हैं, और वे वयस्क होने पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी से प्रभावित होंगे। हालांकि, हमें उच्च जोखिम वाले बच्चों में कुछ सावधानी बरतने की ज़रूरत है जैसे कि जन्मजात हृदय रोग, पुरानी अस्थमा, पुरानी गुर्दे की बीमारी और अन्य पहले से हुई बीमारियां बच्चों में एक फीसदी से कम में देखी जाती हैं। प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले अश्विनी रंजन ने कहा कि स्कूलों को फिर से शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीजें कैसे चलती हैं, इसके आधार पर अन्य जगहों पर स्कूल फिर से खोले जा सकते हैं। यह एक वास्तविक तस्वीर देगा। सरकार को बड़े पैमाने पर माता-पिता और समुदाय को साथ लेकर निर्णय लेना चाहिए। कर्नाटक के मैसूर में बच्चों में कोवैक्सिन वैक्सीनेशन को लेकर किए गए सीरो सर्वे और सामाजिक, भावनात्मक और पोषण संबंधी विकारों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने स्कूलों में ऑन-कैंपस कक्षाओं को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है।
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मंडी, 31 अक्तूबर। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों, विचारों और चिंतन को देशहित में पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल आज मंडी स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय में 'सरदार वल्लभभाई पटेल की भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण में भूमिका' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
आर्लेकर ने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सरदार पटेल के जीवन व्यक्तित्व, विचारों एवं कार्यों को स्मरण करने की आवश्यकता है। देश को आजादी दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वे जीवन भर देशहित में संघर्ष करते रहे। उनका जीवन राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा।
राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल की जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया जिसके लिए उन्होंने अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना भी किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता की इस भावना को आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत जमीन का एक टुकड़ा मात्र नहीं है। राष्ट्रीयता की भावना हमारी संस्कृति व परंपरा से जुड़ी है, जिसे हमने कभी नहीं खोया। सरदार पटेल ने इस एकता को बनाए रखने का कार्य किया। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है तथा उनके विचारों को आगे ले जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को सरदार पटेल विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। इसलिए विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह सरदार पटेल के विचारों, चिंतन और संदेश को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान इन विचारों को अंगीकार कर विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के दौरान पढ़े जाने वाले 25 शोध पत्र निश्चित रूप से इस भाव को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय का यह ठोस प्रयास इसे आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करेगा।
उन्होंने इस अवसर पर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। राज्यपाल ने इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'सरदार वल्लभभाई पटेल जीवन दर्शन व राष्ट्र निर्माण में भूमिका', आचार्य ओम प्रकाश शर्मा की पुस्तक 'हिमाचली पहाड़ी भाषा लिपि व लोक साहित्य' तथा राजेश शर्मा द्वारा संपादित 'मंडी शहर के मंदिर' पुस्तकों का विमोचन किया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का न्यूज़लैटर 'मांडव क्रॉनिकल' भी जारी किया। इससे पूर्व, राज्यपाल ने 'अमृत महोत्सव सभागार' का उद्घाटन भी किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस राष्ट्र को जोड़ा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्र को मां का स्थान दिया है। भारत एक जीवंत आत्मा है, जिसे हमने भूगोल से जोड़ा है। उसी प्रकार संस्कृति व ज्ञान को भी जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने उसी भाव को मन में रखकर कार्य किया और देशवासियों का मनोबल बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने सरदार पटेल के त्याग के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उनके जीवन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आंतरिक ताकतों से लड़ने तथा अपनी भाषा एवं संस्कृति को स्थापित करने पर बल दिया।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा हम सबको प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने समाज को जो दर्शन दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि 'संस्थागत आत्मीयता' के कारण यह संस्थान तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर, विशिष्ट अतिथि एवं ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी, हमीरपुर के निदेशक चेत राम गर्ग ने कहा कि देश के महान लोगों के विचार और चिंतन से समाज को दिशा मिलती है। उन्होंने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन नायकों के बलिदान को नेपथ्य में डाल दिया गया था, उनके कार्यों को सामने लाने का प्रयास आजादी के अमृत महोत्सव में आयोजित संगोष्ठी के माध्यम से किया जा रहा है।
उन्होंने सरदार पटेल की स्पष्टवादिता और चिंतन पर विस्तृत जानकारी दी। बीज वक्ता एवं राजकीय लोहिया महाविद्यालय चुरू, बीकानेर विश्वविद्यालय के सह आचार्य डॉ. सुरेंद्र सोनी ने कहा कि सरदार पटेल ने असंभव को संभव कर दिखाया और राष्ट्र को संगठित करने का जो कार्य किया, वह उन्हें महान बनाता है। यही वजह है कि वे लोगों के दिलों में बस गए। उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिला प्रशासन के अधिकारीगण, प्राचार्यगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
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मंडी, इकतीस अक्तूबर। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों, विचारों और चिंतन को देशहित में पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल आज मंडी स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय में 'सरदार वल्लभभाई पटेल की भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण में भूमिका' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। आर्लेकर ने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सरदार पटेल के जीवन व्यक्तित्व, विचारों एवं कार्यों को स्मरण करने की आवश्यकता है। देश को आजादी दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वे जीवन भर देशहित में संघर्ष करते रहे। उनका जीवन राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा। राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल की जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया जिसके लिए उन्होंने अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना भी किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता की इस भावना को आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत जमीन का एक टुकड़ा मात्र नहीं है। राष्ट्रीयता की भावना हमारी संस्कृति व परंपरा से जुड़ी है, जिसे हमने कभी नहीं खोया। सरदार पटेल ने इस एकता को बनाए रखने का कार्य किया। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है तथा उनके विचारों को आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को सरदार पटेल विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। इसलिए विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह सरदार पटेल के विचारों, चिंतन और संदेश को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान इन विचारों को अंगीकार कर विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के दौरान पढ़े जाने वाले पच्चीस शोध पत्र निश्चित रूप से इस भाव को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय का यह ठोस प्रयास इसे आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने इस अवसर पर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। राज्यपाल ने इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'सरदार वल्लभभाई पटेल जीवन दर्शन व राष्ट्र निर्माण में भूमिका', आचार्य ओम प्रकाश शर्मा की पुस्तक 'हिमाचली पहाड़ी भाषा लिपि व लोक साहित्य' तथा राजेश शर्मा द्वारा संपादित 'मंडी शहर के मंदिर' पुस्तकों का विमोचन किया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का न्यूज़लैटर 'मांडव क्रॉनिकल' भी जारी किया। इससे पूर्व, राज्यपाल ने 'अमृत महोत्सव सभागार' का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस राष्ट्र को जोड़ा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्र को मां का स्थान दिया है। भारत एक जीवंत आत्मा है, जिसे हमने भूगोल से जोड़ा है। उसी प्रकार संस्कृति व ज्ञान को भी जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने उसी भाव को मन में रखकर कार्य किया और देशवासियों का मनोबल बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने सरदार पटेल के त्याग के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उनके जीवन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आंतरिक ताकतों से लड़ने तथा अपनी भाषा एवं संस्कृति को स्थापित करने पर बल दिया। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा हम सबको प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने समाज को जो दर्शन दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि 'संस्थागत आत्मीयता' के कारण यह संस्थान तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर, विशिष्ट अतिथि एवं ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी, हमीरपुर के निदेशक चेत राम गर्ग ने कहा कि देश के महान लोगों के विचार और चिंतन से समाज को दिशा मिलती है। उन्होंने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन नायकों के बलिदान को नेपथ्य में डाल दिया गया था, उनके कार्यों को सामने लाने का प्रयास आजादी के अमृत महोत्सव में आयोजित संगोष्ठी के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने सरदार पटेल की स्पष्टवादिता और चिंतन पर विस्तृत जानकारी दी। बीज वक्ता एवं राजकीय लोहिया महाविद्यालय चुरू, बीकानेर विश्वविद्यालय के सह आचार्य डॉ. सुरेंद्र सोनी ने कहा कि सरदार पटेल ने असंभव को संभव कर दिखाया और राष्ट्र को संगठित करने का जो कार्य किया, वह उन्हें महान बनाता है। यही वजह है कि वे लोगों के दिलों में बस गए। उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया। सरदार पटेल विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिला प्रशासन के अधिकारीगण, प्राचार्यगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
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Eid-ul-Fitr 2023: इस्लाम में रमजान मास का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसा, इसी महीने में पवित्र कुरान धरती पर आई थी। इसलिए इस महीने में मुस्लिम समाजजन रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। रमजान समाप्त होने पर ईद मनाई जाती है।
Shubh Yog April 2023: इस समय ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वह कुछ राशि के लोगों के लिए बहुत ही शुभ फल देने वाली है। शुक्र, शनि और गुरु की स्थिति से कुछ राशि के लोगों को जबरजस्त सफलता और धन लाभ के योग इस समय बन रहे हैं।
11 अप्रैल, मंगलवार को पहले ज्येष्ठा नक्षत्र होने से मुद्गर और उसके बाद मूल नक्षत्र होने से छत्र नाम के 2 योग बनेंगे। इसके अलावा वरियान और परिघ नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे। राहुकाल दोपहर 3:35 से शाम 5:08 तक रहेगा।
अंक शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह एक ग्रह का प्रतिनिधि है। उसके अनुसार अंक 1 सूर्य का, अंक 2 चंद्रमा का, अंक 3 देवगुरु बृहस्पति का, अंक 4 राहु का है। इसी तरह अन्य अंक भी किसी न किसी ग्रह से संबंधित हैं।
11 अप्रैल, मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पूरे दिन रहेगी। मंगलवार को पहले ज्येष्ठा नक्षत्र होने से मुद्गर और उसके बाद मूल नक्षत्र होने से छत्र नाम के 2 योग बनेंगे। इसके अलावा वरियान और परिघ नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे।
Mysterious Women Of Mahabharata: महाभारत की कथा बहुत ही रोचक है, इसमें कई ऐसे पात्र हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों का पता है। इनमें कई रहस्यमयी महिलाएं भी शामिल हैं। ये महिलाओं की महाभारत में खास भूमिका है।
dalai lama viral video: तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा का एक वीडियो हाल ही में काफी वायरल हो रहा है जिसमें वे एक बच्चे को होंठो पर किस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ ही वे बच्चे को अपनी टंग सक करने के लिए भी कह रहे हैं।
Hindu Traditions: हम कई बार शिवलिंग के ऊपर एक मटकी बंधी हुई देखते हैं, जिसमें से बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है। ये दृश्य अक्सर गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। इस परंपरा से जुड़ी कई बातें हैं, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
Surya Rashifal April 2023: सूर्य 14 अप्रैल को राशि बदलकर मीन से मेष में प्रवेश करने वाला है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन का असर सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में दिखाई देगा। सूर्य के मेष राशि में जाने से खर मास समाप्त हो जाएगा।
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Eid-ul-Fitr दो हज़ार तेईस: इस्लाम में रमजान मास का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसा, इसी महीने में पवित्र कुरान धरती पर आई थी। इसलिए इस महीने में मुस्लिम समाजजन रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। रमजान समाप्त होने पर ईद मनाई जाती है। Shubh Yog April दो हज़ार तेईस: इस समय ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वह कुछ राशि के लोगों के लिए बहुत ही शुभ फल देने वाली है। शुक्र, शनि और गुरु की स्थिति से कुछ राशि के लोगों को जबरजस्त सफलता और धन लाभ के योग इस समय बन रहे हैं। ग्यारह अप्रैल, मंगलवार को पहले ज्येष्ठा नक्षत्र होने से मुद्गर और उसके बाद मूल नक्षत्र होने से छत्र नाम के दो योग बनेंगे। इसके अलावा वरियान और परिघ नाम के दो अन्य योग भी इस दिन रहेंगे। राहुकाल दोपहर तीन:पैंतीस से शाम पाँच:आठ तक रहेगा। अंक शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह एक ग्रह का प्रतिनिधि है। उसके अनुसार अंक एक सूर्य का, अंक दो चंद्रमा का, अंक तीन देवगुरु बृहस्पति का, अंक चार राहु का है। इसी तरह अन्य अंक भी किसी न किसी ग्रह से संबंधित हैं। ग्यारह अप्रैल, मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पूरे दिन रहेगी। मंगलवार को पहले ज्येष्ठा नक्षत्र होने से मुद्गर और उसके बाद मूल नक्षत्र होने से छत्र नाम के दो योग बनेंगे। इसके अलावा वरियान और परिघ नाम के दो अन्य योग भी इस दिन रहेंगे। Mysterious Women Of Mahabharata: महाभारत की कथा बहुत ही रोचक है, इसमें कई ऐसे पात्र हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों का पता है। इनमें कई रहस्यमयी महिलाएं भी शामिल हैं। ये महिलाओं की महाभारत में खास भूमिका है। dalai lama viral video: तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा का एक वीडियो हाल ही में काफी वायरल हो रहा है जिसमें वे एक बच्चे को होंठो पर किस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ ही वे बच्चे को अपनी टंग सक करने के लिए भी कह रहे हैं। Hindu Traditions: हम कई बार शिवलिंग के ऊपर एक मटकी बंधी हुई देखते हैं, जिसमें से बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है। ये दृश्य अक्सर गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। इस परंपरा से जुड़ी कई बातें हैं, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। Surya Rashifal April दो हज़ार तेईस: सूर्य चौदह अप्रैल को राशि बदलकर मीन से मेष में प्रवेश करने वाला है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन का असर सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में दिखाई देगा। सूर्य के मेष राशि में जाने से खर मास समाप्त हो जाएगा।
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171. मध्य प्रदेश में शिक्षण के स्वीकृत माध्यम हिन्दी, उर्दू, मराठी और अंग्रेजी थीं। अन्य माध्यमों वाले स्कूलों को न तो मान्यता प्रदान की जाती है और न अनुदान ही । राज्य सरकार का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया गया कि केवल इस आधार पर शिक्षण का माध्यम माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा अमान्य अल्पसंख्यकों की भाषा थी, अल्पसंख्यकों की संस्कनुदान से वंचित रखना, संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध जाना प्रतीत होगा । पीछे राज्य सरकार ने सूचित किया कि बाद में शिक्षा परिषद् ने अष्टम अनुसूची में सम्मिलित सभी भाषाओं तथा सिन्धी को भी मान्यता दे दी और अल्पसंख्यकों की शिक्षा संस्थाओं को. अनुदान से वंचित रखने का प्रश्न भी नहीं उठेगा ।
172. आसाम के पहाड़ी जिलों में आदिम जातियों के भाषाओं के माध्यम से शिक्षण केवल मिडिल स्कूल तक ही हैं, क्योंकि ये उच्चस्तर पर शिक्षण के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होने के लिए पर्याप्त विकसित नहीं समझी जाती । असमिया, हिन्दी, उर्दू, बंगला और अंग्रेजी द्वारा माध्यमिक शिक्षा दी जाती हैं। बिहार में ऐसी सुविधाएं हिन्दी, उर्दू, वंगला, उड़िया और संथाली के लिए उपलब्ध हैं । पश्चिम बंगाल में शिक्षा के माध्यमिक स्तर पर शिक्षा बंगला, हिन्दी, उर्दू, नेपाली, तेलुगु, गुजराती और उड़िया के माध्यम से दी जाती है, उड़ीसा में उड़िया, हिन्दी, तेलुगु, उर्दू और वंगला के माध्यम से ।
173. दक्षिण क्षेत्र के राज्यों में, आंध्र प्रदेश में माध्यमिक स्तर की शिक्षा तेलुगु, तमिल, कन्नड़, उड़िया, उर्दू और हिन्दी के माध्यम से प्रदान करने की सुविधाओं की व्यवस्था है। केरल में ऐसी सुविधाएं मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेजी के लिए वर्तमान हैं । मद्रास में माध्यमिक स्तर पर शिक्षा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी के माध्यम से शिक्षा देने की सुविधाओं को व्यवस्था हैं । जब कि मैसूर में कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलुगू, उर्द और हिन्दी के माध्यम से शिक्षा दी जाती हैं ।
174. पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों में, एस० एस० एस० परीक्षा के माध्यम में गुजराती, मराठी, हिन्दी, उर्दू सिन्धी हैं। महाराष्ट्र में एस० एस० सी० परीक्षा के माध्यम मराठी, गुजराती, उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, तमिल, तेलगु, बंगला और सिन्धी हैं ।
175. पंजाब के कुछ विशेष क्षेत्रों में, माध्यमिक शिक्षा की सुविधाएं हिन्दी, पंजाबी और उर्दू के माध्यम से उपलब्ध हैं। राजस्थान में अभी ये सुविधाएं केवल प्रादेशिक भाषा में उपलब्ध हैं
176. सभी राज्यों में उपलब्ध सुविधाओं में और सुधार करने की काफी गुंजाइश हैं । देश के बढ़ते हुए ओद्योगीकरण और समय-समय पर निर्मित किए जाने वाले अनेक विकास कार्यों को दृष्टि में रखते हुए संचरणशील परिवारों की बड़ी संख्या को आश्रय देने तथा परिणाम स्वरूप भाषाजात अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सुविधाओं की मांग में वृद्धि के लिए सभी राज्यों को तैयार रहना चाहिए। सारे देश में भाषाजात अल्पसंख्यकों को उनकी भाषाओं के माध्यम से शिक्षा की विवेकपूर्ण तथा एकसी सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिए सभी राज्यों को शैक्षिक नीतियों में परिवर्तन करना पड़ सकता है ।
177. सिन्धी भाषियों ने एकाधिक बार प्रतिवेदन किया है कि 1961 में हुए मुख्य मंत्रियों के सम्मेलन द्वारा जारी किए गए वक्तव्य (ऊपर के परिच्छेद 169 में उद्धृत ) के परिच्छेद 3 ( ख ) से सिन्धी भाषा को छोड़ देना, सिन्धी भाषा के भविष्य को संकट में डाल देगा । चूंकि सिन्धी एक पर्याप्त विकसित आधनिक भाषा है, यह अनुरोध किया गया था
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एक सौ इकहत्तर. मध्य प्रदेश में शिक्षण के स्वीकृत माध्यम हिन्दी, उर्दू, मराठी और अंग्रेजी थीं। अन्य माध्यमों वाले स्कूलों को न तो मान्यता प्रदान की जाती है और न अनुदान ही । राज्य सरकार का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया गया कि केवल इस आधार पर शिक्षण का माध्यम माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा अमान्य अल्पसंख्यकों की भाषा थी, अल्पसंख्यकों की संस्कनुदान से वंचित रखना, संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध जाना प्रतीत होगा । पीछे राज्य सरकार ने सूचित किया कि बाद में शिक्षा परिषद् ने अष्टम अनुसूची में सम्मिलित सभी भाषाओं तथा सिन्धी को भी मान्यता दे दी और अल्पसंख्यकों की शिक्षा संस्थाओं को. अनुदान से वंचित रखने का प्रश्न भी नहीं उठेगा । एक सौ बहत्तर. आसाम के पहाड़ी जिलों में आदिम जातियों के भाषाओं के माध्यम से शिक्षण केवल मिडिल स्कूल तक ही हैं, क्योंकि ये उच्चस्तर पर शिक्षण के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होने के लिए पर्याप्त विकसित नहीं समझी जाती । असमिया, हिन्दी, उर्दू, बंगला और अंग्रेजी द्वारा माध्यमिक शिक्षा दी जाती हैं। बिहार में ऐसी सुविधाएं हिन्दी, उर्दू, वंगला, उड़िया और संथाली के लिए उपलब्ध हैं । पश्चिम बंगाल में शिक्षा के माध्यमिक स्तर पर शिक्षा बंगला, हिन्दी, उर्दू, नेपाली, तेलुगु, गुजराती और उड़िया के माध्यम से दी जाती है, उड़ीसा में उड़िया, हिन्दी, तेलुगु, उर्दू और वंगला के माध्यम से । एक सौ तिहत्तर. दक्षिण क्षेत्र के राज्यों में, आंध्र प्रदेश में माध्यमिक स्तर की शिक्षा तेलुगु, तमिल, कन्नड़, उड़िया, उर्दू और हिन्दी के माध्यम से प्रदान करने की सुविधाओं की व्यवस्था है। केरल में ऐसी सुविधाएं मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेजी के लिए वर्तमान हैं । मद्रास में माध्यमिक स्तर पर शिक्षा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी के माध्यम से शिक्षा देने की सुविधाओं को व्यवस्था हैं । जब कि मैसूर में कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलुगू, उर्द और हिन्दी के माध्यम से शिक्षा दी जाती हैं । एक सौ चौहत्तर. पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों में, एसशून्य एसशून्य एसशून्य परीक्षा के माध्यम में गुजराती, मराठी, हिन्दी, उर्दू सिन्धी हैं। महाराष्ट्र में एसशून्य एसशून्य सीशून्य परीक्षा के माध्यम मराठी, गुजराती, उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड़, तमिल, तेलगु, बंगला और सिन्धी हैं । एक सौ पचहत्तर. पंजाब के कुछ विशेष क्षेत्रों में, माध्यमिक शिक्षा की सुविधाएं हिन्दी, पंजाबी और उर्दू के माध्यम से उपलब्ध हैं। राजस्थान में अभी ये सुविधाएं केवल प्रादेशिक भाषा में उपलब्ध हैं एक सौ छिहत्तर. सभी राज्यों में उपलब्ध सुविधाओं में और सुधार करने की काफी गुंजाइश हैं । देश के बढ़ते हुए ओद्योगीकरण और समय-समय पर निर्मित किए जाने वाले अनेक विकास कार्यों को दृष्टि में रखते हुए संचरणशील परिवारों की बड़ी संख्या को आश्रय देने तथा परिणाम स्वरूप भाषाजात अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सुविधाओं की मांग में वृद्धि के लिए सभी राज्यों को तैयार रहना चाहिए। सारे देश में भाषाजात अल्पसंख्यकों को उनकी भाषाओं के माध्यम से शिक्षा की विवेकपूर्ण तथा एकसी सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिए सभी राज्यों को शैक्षिक नीतियों में परिवर्तन करना पड़ सकता है । एक सौ सतहत्तर. सिन्धी भाषियों ने एकाधिक बार प्रतिवेदन किया है कि एक हज़ार नौ सौ इकसठ में हुए मुख्य मंत्रियों के सम्मेलन द्वारा जारी किए गए वक्तव्य के परिच्छेद तीन से सिन्धी भाषा को छोड़ देना, सिन्धी भाषा के भविष्य को संकट में डाल देगा । चूंकि सिन्धी एक पर्याप्त विकसित आधनिक भाषा है, यह अनुरोध किया गया था
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नवादा में ट्रैक्टर एवं ई-रिक्शा की टक्कर में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय लोगों द्वारा आनन-फानन में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां एवं अन्य निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचने के दौरान मां-बेटे ने दम तोड़ दिया।
संवाद सूत्र, पकरीबरावां नवादा। पकरीबरावां प्रखंड मुख्यालय स्थित देवी स्थान के समीप ट्रैक्टर एवं ई-रिक्शा की टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय लोगों द्वारा आनन-फानन में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां एवं अन्य निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में मां-बेटे रामराती देवी और बूंदी रविदास शामिल है।
घटना शुक्रवार की संध्या करीब आठ बजे की है। जहां पकरीबरावां बाजार की ओर से जा रही ई-रिक्शा में विपरीत दिशा से आ रहे ट्रैक्टर ने सीधी टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बूंदी रविदास 50 वर्ष, रामरती देवी 70 वर्ष, सावित्री कुमारी 19 वर्ष समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां में प्राथमिक उपचार के बाद बूंदी रविदास, रामरती देवी एवं सावित्री कुमारी को चिंताजनक स्थिति में पावापुरी बिम्स रेफर कर दिया गया था। अस्पताल पहुंचते ही मां-बेटे रामराती देवी और बूंदी रविदास ने दम तोड़ दिया। वहीं, एक की हालत नाजुक है।
इधर, दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहा। घटना की सूचना मिलते ही पकरीबरावां पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच की। अस्पताल पहुंच घायलों के संबंध में जानकारी ली। इधर, दुर्घटना की सूचना मिलते ही परिजन में हाहाकार मच गया। लोग घायलों की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बूंदी के गांव के ही किसी शख्स ने थाने में केस दर्ज कराया था। इसी सिलसिले में परिवार थाने आया था। यहां से ई-रिक्शा से उकौड़ा लौट रहे थे, तभी रास्ते में ही दुर्घटना हो गई।
पकरीबरावां-वारिसलीगंज पथ पर सड़क दुर्घटना की वजह अतिक्रमण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि देवी स्थान के पास सीमेंट से बनें ह्यूम पाइप एवं मैजिक वाहन को सड़क किनारे रख दिया गया है। इससे वहां पर सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। नतीजतन यह दुर्घटना का कारण बन रहा है। लोगों ने बताया कि कम जगह होने के कारण ही पहले निकलने के चक्कर में टक्कर हुई है। लोगों ने थानाध्यक्ष व अंचलाधिकारी से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
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नवादा में ट्रैक्टर एवं ई-रिक्शा की टक्कर में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय लोगों द्वारा आनन-फानन में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां एवं अन्य निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचने के दौरान मां-बेटे ने दम तोड़ दिया। संवाद सूत्र, पकरीबरावां नवादा। पकरीबरावां प्रखंड मुख्यालय स्थित देवी स्थान के समीप ट्रैक्टर एवं ई-रिक्शा की टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय लोगों द्वारा आनन-फानन में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां एवं अन्य निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में मां-बेटे रामराती देवी और बूंदी रविदास शामिल है। घटना शुक्रवार की संध्या करीब आठ बजे की है। जहां पकरीबरावां बाजार की ओर से जा रही ई-रिक्शा में विपरीत दिशा से आ रहे ट्रैक्टर ने सीधी टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में बूंदी रविदास पचास वर्ष, रामरती देवी सत्तर वर्ष, सावित्री कुमारी उन्नीस वर्ष समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पकरीबरावां में प्राथमिक उपचार के बाद बूंदी रविदास, रामरती देवी एवं सावित्री कुमारी को चिंताजनक स्थिति में पावापुरी बिम्स रेफर कर दिया गया था। अस्पताल पहुंचते ही मां-बेटे रामराती देवी और बूंदी रविदास ने दम तोड़ दिया। वहीं, एक की हालत नाजुक है। इधर, दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहा। घटना की सूचना मिलते ही पकरीबरावां पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच की। अस्पताल पहुंच घायलों के संबंध में जानकारी ली। इधर, दुर्घटना की सूचना मिलते ही परिजन में हाहाकार मच गया। लोग घायलों की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बूंदी के गांव के ही किसी शख्स ने थाने में केस दर्ज कराया था। इसी सिलसिले में परिवार थाने आया था। यहां से ई-रिक्शा से उकौड़ा लौट रहे थे, तभी रास्ते में ही दुर्घटना हो गई। पकरीबरावां-वारिसलीगंज पथ पर सड़क दुर्घटना की वजह अतिक्रमण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि देवी स्थान के पास सीमेंट से बनें ह्यूम पाइप एवं मैजिक वाहन को सड़क किनारे रख दिया गया है। इससे वहां पर सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। नतीजतन यह दुर्घटना का कारण बन रहा है। लोगों ने बताया कि कम जगह होने के कारण ही पहले निकलने के चक्कर में टक्कर हुई है। लोगों ने थानाध्यक्ष व अंचलाधिकारी से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
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लॉ और बिजनेस में सफल करियर के बाद जूलिया बैंक्स 5 साल पहले जब ऑस्ट्रेलिया की संसद पहुंची तो वहां का माहौल देखकर लगा कि उन्हें 80 के दशक में धकेल दिया गया है। वहां शराब बह रही थी। पुरुष नेताओं से इसकी गंध भी आती थी। बैंक्स बताती हैं कि ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने महिलाओं के बारे में कभी नहीं सोचा।
उन्होंने जूनियर कर्मियों को खिलौनों की तरह देखा। एक बार एक नेता ने जूनियर का परिचय कराते वक्त अपना हाथ उसकी पीठ पर रगड़ दिया। उस लड़की से मेरी आंखे मिलीं। पर बिन कुछ कहे ही मैंने उसकी बात समझ ली, कि चुप रहिए वरना मैं नौकरी से हाथ धो बैठूंगी। ऑस्ट्रेलिया की संसद महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित कार्यस्थल है।
देर से ही सही पर ऑस्ट्रेलियाई संसद में 'मीटू' अभियान पहुंच गया है। ब्रिटनी हिंगिस ने अपने साथ हुए दुष्कर्म के मामले को उजागर कर भूचाल ला दिया है। इसके बाद हजारों महिलाएं अपनी कहानियां साझा कर रही हैं। जस्टिस मार्च निकालकर बदलाव की मांग कर रही हैं। इसे लेकर पीएम स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाला कंजर्वेटिव गठबंधन ऐतिहासिक विरोध का सामना कर रहा है।
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लॉ और बिजनेस में सफल करियर के बाद जूलिया बैंक्स पाँच साल पहले जब ऑस्ट्रेलिया की संसद पहुंची तो वहां का माहौल देखकर लगा कि उन्हें अस्सी के दशक में धकेल दिया गया है। वहां शराब बह रही थी। पुरुष नेताओं से इसकी गंध भी आती थी। बैंक्स बताती हैं कि ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने महिलाओं के बारे में कभी नहीं सोचा। उन्होंने जूनियर कर्मियों को खिलौनों की तरह देखा। एक बार एक नेता ने जूनियर का परिचय कराते वक्त अपना हाथ उसकी पीठ पर रगड़ दिया। उस लड़की से मेरी आंखे मिलीं। पर बिन कुछ कहे ही मैंने उसकी बात समझ ली, कि चुप रहिए वरना मैं नौकरी से हाथ धो बैठूंगी। ऑस्ट्रेलिया की संसद महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित कार्यस्थल है। देर से ही सही पर ऑस्ट्रेलियाई संसद में 'मीटू' अभियान पहुंच गया है। ब्रिटनी हिंगिस ने अपने साथ हुए दुष्कर्म के मामले को उजागर कर भूचाल ला दिया है। इसके बाद हजारों महिलाएं अपनी कहानियां साझा कर रही हैं। जस्टिस मार्च निकालकर बदलाव की मांग कर रही हैं। इसे लेकर पीएम स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाला कंजर्वेटिव गठबंधन ऐतिहासिक विरोध का सामना कर रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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WWE Raw में इस हफ्ते Rk-Bro यानि रैंडी ऑर्टन (Randy Orton) & रिडल (Riddle) ने चैड गेबल (Chad Gable) & ओटिस (Otis) के खिलाफ मैच में Raw टैग टीम चैंपियनशिप डिफेंड किया था। इस मैच में Rk-Bro को अल्फा अकादमी टीम से काफी टक्कर मिली थी। यही नहीं, इस मैच के अंत में अल्फा अकादमी के ओटिस ने ऑर्टन को पावरस्लैम देने के बाद उन्हें पिन करते हुए मैच जीत लिया था।
इस जीत के साथ ही अल्फा अकादमी नए Raw टैग टीम चैंपियंस बन चुके हैं। वहीं, रैंडी ऑर्टन और रिडल के टाइटल हारने के साथ ही इन दोनों सुपरस्टार्स (Superstars) के अलग होने का खतरा बढ़ गया है। अगर ये दोनों सुपरस्टार्स आने वाले समय में टाइटल वापस हासिल नहीं कर पाते हैं तो संभव है कि यह टीम टूट सकती है। इस आर्टिकल में हम ऐसे 2 कारणों का जिक्र करने वाले हैं कि क्यों WWE Raw में Rk-Bro का अलग होना सही रहेगा और 2 कारण क्यों यह गलत फैसला होगा।
WWE Raw में रैंडी ऑर्टन और रिडल के टीम बनाने के बाद से ही इस ब्रांड के टैग टीम डिवीजन को काफी फायदा हुआ है। देखा जाए तो रैंडी के टॉप स्टार होने की वजह से टैग टीम डिवीजन की ओर फैंस का ध्यान आकर्षित हुआ था। यही नहीं, ऑर्टन, रिडल के साथ टीम के रूप में कई बेहतरीन मैच लड़ते हुए दिखाई दे चुके हैं।
यह कहना गलत नहीं होगा कि Rk-Bro वर्तमान समय में Raw में मौजूद सबसे बड़ी टैग टीम है। यही कारण है कि अगर WWE में Rk-Bro की टीम टूटती है तो इससे रेड ब्रांड के टैग टीम डिवीजन को काफी नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि यह देखना रोचक होगा कि कंपनी आने वाले समय में Rk-Bro को अलग करने का फैसला करती है या नहीं।
WWE Raw में अगर Rk-Bro की टीम टूटती है तो रैंडी ऑर्टन और रिडल के बीच फ्यूड शुरू हो सकता है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि ऑर्टन के हाथों ही Rk-Bro टीम का अंत हो सकता है और इसके बाद इन दोनों सुपरस्टार्स के बीच फ्यूड की शुरूआत हो सकती है।
फैंस को इन दो टैग टीम पार्टनर्स के बीच फ्यूड देखने में काफी मजा आएगा। यही नहीं, रैंडी के टॉप सुपरस्टार होने की वजह से रिडल को उनके खिलाफ फ्यूड करने से सिंगल्स स्टार के रूप में काफी फायदा हो सकता है। अगर निकट भविष्य में Rk-Bro को अलग किया जाता है तो संभव है कि रैंडी ऑर्टन vs रिडल का मैच WrestleMania 38 में बुक किया जा सकता है।
WWE Raw में रैंडी ऑर्टन ने रिडल के साथ Rk-Bro नाम की टैग टीम बनाने के बाद से ही फैंस का काफी मनोरंजन किया है। फैंस को ऑर्टन & रिडल की जोड़ी काफी पसंद आ रही है और शायद Rk-Bro वर्तमान समय में कंपनी में मौजूद सबसे एंटरटेनिंग टैग टीम हैं।
अगर रेड ब्रांड में रैंडी ऑर्टन और रिडल अलग होते हैं तो कंपनी एक एंटरटेनिंग टैग टीम खो देगी और शायद फैंस को इस टैग टीम का अलग होना पसंद नहीं आ सकता है। यही कारण है कि Rk-Bro को अलग करना सही नहीं रहेगा।
भले ही, WWE सुपरस्टार रैंडी ऑर्टन का टैग टीम डिवीजन में रन काफी शानदार रहा हो लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि सिंगल्स डिवीजन में उनकी काफी कमी खल रही है। अगर ऑर्टन आने वाले समय में रिडल से अलग हो जाते हैं तो उनकी एक बार फिर सिंगल्स डिवीजन में वापसी हो पाएगी।
ऑर्टन के पास रिडल के साथ फ्यूड करने के बाद मेन इवेंट सीन में वापसी करने का मौका होगा। इस वक्त Raw में ब्रॉक लैसनर, ऐज जैसे सुपरस्टार्स मौजूद हैं जिनके खिलाफ उनका फ्यूड काफी शानदार साबित हो सकता है। इसके साथ ही ऑर्टन के पास अपने करियर में एक बार फिर WWE चैंपियन बनने का मौका होगा।
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WWE Raw में इस हफ्ते Rk-Bro यानि रैंडी ऑर्टन & रिडल ने चैड गेबल & ओटिस के खिलाफ मैच में Raw टैग टीम चैंपियनशिप डिफेंड किया था। इस मैच में Rk-Bro को अल्फा अकादमी टीम से काफी टक्कर मिली थी। यही नहीं, इस मैच के अंत में अल्फा अकादमी के ओटिस ने ऑर्टन को पावरस्लैम देने के बाद उन्हें पिन करते हुए मैच जीत लिया था। इस जीत के साथ ही अल्फा अकादमी नए Raw टैग टीम चैंपियंस बन चुके हैं। वहीं, रैंडी ऑर्टन और रिडल के टाइटल हारने के साथ ही इन दोनों सुपरस्टार्स के अलग होने का खतरा बढ़ गया है। अगर ये दोनों सुपरस्टार्स आने वाले समय में टाइटल वापस हासिल नहीं कर पाते हैं तो संभव है कि यह टीम टूट सकती है। इस आर्टिकल में हम ऐसे दो कारणों का जिक्र करने वाले हैं कि क्यों WWE Raw में Rk-Bro का अलग होना सही रहेगा और दो कारण क्यों यह गलत फैसला होगा। WWE Raw में रैंडी ऑर्टन और रिडल के टीम बनाने के बाद से ही इस ब्रांड के टैग टीम डिवीजन को काफी फायदा हुआ है। देखा जाए तो रैंडी के टॉप स्टार होने की वजह से टैग टीम डिवीजन की ओर फैंस का ध्यान आकर्षित हुआ था। यही नहीं, ऑर्टन, रिडल के साथ टीम के रूप में कई बेहतरीन मैच लड़ते हुए दिखाई दे चुके हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि Rk-Bro वर्तमान समय में Raw में मौजूद सबसे बड़ी टैग टीम है। यही कारण है कि अगर WWE में Rk-Bro की टीम टूटती है तो इससे रेड ब्रांड के टैग टीम डिवीजन को काफी नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि यह देखना रोचक होगा कि कंपनी आने वाले समय में Rk-Bro को अलग करने का फैसला करती है या नहीं। WWE Raw में अगर Rk-Bro की टीम टूटती है तो रैंडी ऑर्टन और रिडल के बीच फ्यूड शुरू हो सकता है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि ऑर्टन के हाथों ही Rk-Bro टीम का अंत हो सकता है और इसके बाद इन दोनों सुपरस्टार्स के बीच फ्यूड की शुरूआत हो सकती है। फैंस को इन दो टैग टीम पार्टनर्स के बीच फ्यूड देखने में काफी मजा आएगा। यही नहीं, रैंडी के टॉप सुपरस्टार होने की वजह से रिडल को उनके खिलाफ फ्यूड करने से सिंगल्स स्टार के रूप में काफी फायदा हो सकता है। अगर निकट भविष्य में Rk-Bro को अलग किया जाता है तो संभव है कि रैंडी ऑर्टन vs रिडल का मैच WrestleMania अड़तीस में बुक किया जा सकता है। WWE Raw में रैंडी ऑर्टन ने रिडल के साथ Rk-Bro नाम की टैग टीम बनाने के बाद से ही फैंस का काफी मनोरंजन किया है। फैंस को ऑर्टन & रिडल की जोड़ी काफी पसंद आ रही है और शायद Rk-Bro वर्तमान समय में कंपनी में मौजूद सबसे एंटरटेनिंग टैग टीम हैं। अगर रेड ब्रांड में रैंडी ऑर्टन और रिडल अलग होते हैं तो कंपनी एक एंटरटेनिंग टैग टीम खो देगी और शायद फैंस को इस टैग टीम का अलग होना पसंद नहीं आ सकता है। यही कारण है कि Rk-Bro को अलग करना सही नहीं रहेगा। भले ही, WWE सुपरस्टार रैंडी ऑर्टन का टैग टीम डिवीजन में रन काफी शानदार रहा हो लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि सिंगल्स डिवीजन में उनकी काफी कमी खल रही है। अगर ऑर्टन आने वाले समय में रिडल से अलग हो जाते हैं तो उनकी एक बार फिर सिंगल्स डिवीजन में वापसी हो पाएगी। ऑर्टन के पास रिडल के साथ फ्यूड करने के बाद मेन इवेंट सीन में वापसी करने का मौका होगा। इस वक्त Raw में ब्रॉक लैसनर, ऐज जैसे सुपरस्टार्स मौजूद हैं जिनके खिलाफ उनका फ्यूड काफी शानदार साबित हो सकता है। इसके साथ ही ऑर्टन के पास अपने करियर में एक बार फिर WWE चैंपियन बनने का मौका होगा।
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नयी दिल्ली/अमृतसर, 3 जून (एजेंसी/ट्रिन्यू)
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को शुक्रवार को 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा देने का ऐलान किया, लेकिन जत्थेदार ने इसे लेने से इनकार कर दिया। केंद्रीय अधिकारियों ने इससे पहले कहा कि उन पर बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की दूसरी सर्वोच्च श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जत्थेदार ने कहा, 'मुझे मीडिया के जरिए ही पता चला। यदि जेड श्रेणी की सुरक्षा का फैसला हुआ है तो मैं केंद्र का आभारी हूं, लेकिन मैं सरकार से इस निर्णय को वापस लेने का आग्रह करता हूं। मेरा कर्तव्य धार्मिक सभाओं में भाग लेना और सिख धर्म का प्रचार करना है। मुझे भी कई मौकों पर 'संगत' के साथ घुलना-मिलना पड़ता है। जेड-सुरक्षा मेरे काम में बाधक बनेगी। यह मुझे संगत से मिलने से रोकेगा।' अकाल तख्त जत्थेदार की सुरक्षा पंजाब में आप सरकार द्वारा वापस ले ली गई थी। हालांकि, बाद में सुरक्षा बहाल कर दी गई, लेकिन जत्थेदार ने सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था।
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नयी दिल्ली/अमृतसर, तीन जून केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को शुक्रवार को 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा देने का ऐलान किया, लेकिन जत्थेदार ने इसे लेने से इनकार कर दिया। केंद्रीय अधिकारियों ने इससे पहले कहा कि उन पर बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की दूसरी सर्वोच्च श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जत्थेदार ने कहा, 'मुझे मीडिया के जरिए ही पता चला। यदि जेड श्रेणी की सुरक्षा का फैसला हुआ है तो मैं केंद्र का आभारी हूं, लेकिन मैं सरकार से इस निर्णय को वापस लेने का आग्रह करता हूं। मेरा कर्तव्य धार्मिक सभाओं में भाग लेना और सिख धर्म का प्रचार करना है। मुझे भी कई मौकों पर 'संगत' के साथ घुलना-मिलना पड़ता है। जेड-सुरक्षा मेरे काम में बाधक बनेगी। यह मुझे संगत से मिलने से रोकेगा।' अकाल तख्त जत्थेदार की सुरक्षा पंजाब में आप सरकार द्वारा वापस ले ली गई थी। हालांकि, बाद में सुरक्षा बहाल कर दी गई, लेकिन जत्थेदार ने सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था।
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Loan against mutual fund: कोरोना के दौर में ऐसी कोई जरूरत आ पड़ी है जिसे पूरा करने के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं, तो क्या म्यूचुअल फंड से पैसा निकालना बेहतर होगा या उसी निवेश पर लोन लेना?
म्यूचुअल फंड निवेश को बतौर कोलेट्रल रखकर, बैंक आपको कर्ज देते हैं. ये कर्ज ठीक उसी तरह काम करते हैं जैसे FD, शेयरों या किसी अन्य निवेश पर लिए गए लोन.
हालांकि, इन लोन की भी सीमाएं हैं. आपको पूरे निवेश रकम पर लोन नहीं मिलता. मसलन, ICICI बैंक और HDFC बैंक की वेबसाइट के मुताबिक आप इक्विटी फंड की वैल्यू के 50 फीसदी तक का कर्ज ले सकते हैं जबकि डेट स्कीम पर नेट ऐसेट वैल्यू के 80 फीसदी तक का कर्ज मिलेगा.
वहीं, SBI से म्यूचुअल फंड निवेश पर कम से कम 25 हजार रुपये का लोन लेना होगा. SBI इक्विटी से जुड़े फंड पर अधिकतम 20 लाख रुपये का कर्ज देता है जबकि डेट और फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान पर ज्यादा से ज्यादा 5 लाख रुपये का कर्ज लिया जा सकता है. SBI से म्युचुअल फंड निवेश पर लोन लेने पर आपको 9. 75 फीसदी का ब्याज देने होगा.
इस लोन को लेने पर प्रोसेसिंग फीस, रिन्युअल फीस, सर्विस टैक्स देना पड़ेगा.
इन लोन को आसानी से मंजूरी भी मिल जाती है. वहीं, म्यूचुअल फंड निवेश पर लिए लोन पर फोर-क्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता. इस लोन को आप EMI में भी चुका सकते हैं.
फुल सर्कल फाइनेंशियल प्लानर्स एंड एडवाइजर्स के कल्पेश आशर का कहना है कि हर परिस्थिति के लिए निवेश का फाइनेंशियल प्लान पहले से तैयार होना चाहिए ताकि लोन लेने की नौबत ना आए. अपने लक्ष्यों को पहले से ही तय कर निवेश करें ताकि उनके नजदीक आने पर लोन के जरिए उन्हें पूरा ना करना पड़े. साथ ही, अचानक पड़ी पैसों की जरूरत के लिए इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है. वक्त आने पर यही फंड सहारा बनेगा. इमरजेंसी फंड होगा तो आपको अपना निवेश तोड़ना नहीं पड़ेगा.
उनका कहना है कि लोगों को पर्सनल लोन से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए क्योंकि ये जेब पर काफी ज्यादा बोझ बनाते हैं.
वहीं, आशर मानते हैं कि अगर किसी परिस्थिति में आपके पास ना फाइनेंशियल प्लान तैयार है, ना ही इमरजेंसी फंड है, तो अपने निवेश को रिडीम करना लोन लेने से ज्यादा फायदेमंद होगा. म्यूचुअल फंड में से किसी भी समय पर पैसा निकाल सकते हैं और यही वजह है कि इस प्रोडक्ट में से पैसा निकालकर जरूरत पूरा करना बेहतर होगा.
डेट कैटेगरी में अभी ब्याज दरें घटी हैं. ऐसे में इनपर लोन लेने से कर्ज पर चुकाए जाने वाले ब्याज से निवेशक पर बोझ बढ़ेगा.
वे सलाह देते हैं कि निवेशक को अपनी जरूरत के मुताबिक फंड से युनीट रिडीम करनी चाहिए.
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Loan against mutual fund: कोरोना के दौर में ऐसी कोई जरूरत आ पड़ी है जिसे पूरा करने के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं, तो क्या म्यूचुअल फंड से पैसा निकालना बेहतर होगा या उसी निवेश पर लोन लेना? म्यूचुअल फंड निवेश को बतौर कोलेट्रल रखकर, बैंक आपको कर्ज देते हैं. ये कर्ज ठीक उसी तरह काम करते हैं जैसे FD, शेयरों या किसी अन्य निवेश पर लिए गए लोन. हालांकि, इन लोन की भी सीमाएं हैं. आपको पूरे निवेश रकम पर लोन नहीं मिलता. मसलन, ICICI बैंक और HDFC बैंक की वेबसाइट के मुताबिक आप इक्विटी फंड की वैल्यू के पचास फीसदी तक का कर्ज ले सकते हैं जबकि डेट स्कीम पर नेट ऐसेट वैल्यू के अस्सी फीसदी तक का कर्ज मिलेगा. वहीं, SBI से म्यूचुअल फंड निवेश पर कम से कम पच्चीस हजार रुपये का लोन लेना होगा. SBI इक्विटी से जुड़े फंड पर अधिकतम बीस लाख रुपये का कर्ज देता है जबकि डेट और फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान पर ज्यादा से ज्यादा पाँच लाख रुपये का कर्ज लिया जा सकता है. SBI से म्युचुअल फंड निवेश पर लोन लेने पर आपको नौ. पचहत्तर फीसदी का ब्याज देने होगा. इस लोन को लेने पर प्रोसेसिंग फीस, रिन्युअल फीस, सर्विस टैक्स देना पड़ेगा. इन लोन को आसानी से मंजूरी भी मिल जाती है. वहीं, म्यूचुअल फंड निवेश पर लिए लोन पर फोर-क्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता. इस लोन को आप EMI में भी चुका सकते हैं. फुल सर्कल फाइनेंशियल प्लानर्स एंड एडवाइजर्स के कल्पेश आशर का कहना है कि हर परिस्थिति के लिए निवेश का फाइनेंशियल प्लान पहले से तैयार होना चाहिए ताकि लोन लेने की नौबत ना आए. अपने लक्ष्यों को पहले से ही तय कर निवेश करें ताकि उनके नजदीक आने पर लोन के जरिए उन्हें पूरा ना करना पड़े. साथ ही, अचानक पड़ी पैसों की जरूरत के लिए इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है. वक्त आने पर यही फंड सहारा बनेगा. इमरजेंसी फंड होगा तो आपको अपना निवेश तोड़ना नहीं पड़ेगा. उनका कहना है कि लोगों को पर्सनल लोन से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए क्योंकि ये जेब पर काफी ज्यादा बोझ बनाते हैं. वहीं, आशर मानते हैं कि अगर किसी परिस्थिति में आपके पास ना फाइनेंशियल प्लान तैयार है, ना ही इमरजेंसी फंड है, तो अपने निवेश को रिडीम करना लोन लेने से ज्यादा फायदेमंद होगा. म्यूचुअल फंड में से किसी भी समय पर पैसा निकाल सकते हैं और यही वजह है कि इस प्रोडक्ट में से पैसा निकालकर जरूरत पूरा करना बेहतर होगा. डेट कैटेगरी में अभी ब्याज दरें घटी हैं. ऐसे में इनपर लोन लेने से कर्ज पर चुकाए जाने वाले ब्याज से निवेशक पर बोझ बढ़ेगा. वे सलाह देते हैं कि निवेशक को अपनी जरूरत के मुताबिक फंड से युनीट रिडीम करनी चाहिए.
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नौकरी के नाम पर विदेश भेजने को लेकर धोखाधड़ी के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नई पहल की है।
अगर कोई चाहता है कि वह रिक्रूटमेंट एजेंट की जालसाजी में न फंसे तो उसे एजेंट से डीलिंग करने से पहले सिर्फ एक कॉल करनी होगी। उसके बाद उसे सारी जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन लॉन्च की गई है।
राज्य सरकार के इंप्लायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग विभाग ने माइग्रेंट रिसोर्स सेंटर स्थापित किया है। इसी सेंटर ने यह खास हेल्पलाइन (0172-5087852) शुरू की है, जहां सुबह 10 से 12. 30 और दोपहर 2. 30 से 4 बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
पंजाब का कोई भी व्यक्ति वर्क वीजा पर विदेश जाने के लिए किसी एजेंट से डील करने से पहले इस पर संपर्क कर सकता है। यहां बताया जाएगा कि एजेंट भारत सरकार के पास रजिस्टर्ड है या नहीं। अगर रजिस्टर्ड है तो भी क्या सावधानियां बरती जानी चाहिएं। पैसे का लेन-देन कैसे करना है।
अगर विदेश जाने के बाद भी धोखे का खुलासा होता है तो क्या करना चाहिए। विभाग की डिप्टी डायरेक्टर परमिंदर शर्मा और इंप्लायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग अफसर सुरिंदर मोहन ने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय ने देश में दो हजार एक्टिव रिक्रूटिंग एजेंट को रजिस्टर्ड किया है। जिनमें से पंजाब में 80 और चंडीगढ़ में 40 हैं। वर्क वीजा पर विदेश भेजने का अधिकार सिर्फ इन्हीं के पास है।
पंजाब के युवाओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए खास जागरुकता मुहिम शुरू की गई है। इस कड़ी में यह हेल्पलाइन लॉन्च की गई है, जल्द इसमें एक इमिग्रेशन एक्सपर्ट को काउंसलर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा।
जरूरी जानकारी के पंफलेट शहरों के प्रमुख दफ्तरों और पंचायतों में रखे जाएंगे। इसके अलावा लोग जिलों के इंपलायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग दफ्तरों से भी जानकारी ले सकते हैं। जानकारी केअलावा कोई शिकायत आएगी तो उसे भी सेंटर गृह विभाग केपास भेजेगा।
कोई भी रिक्रूटमेंट एजेंट भारत के किसी युवा को विदेशी कंपनी में नौकरी दिलाने का ऑफर तभी दे सकता है, जब उसके पास विदेशी कंपनी की पॉवर ऑफ अटॉर्नी हो। पर होता यह है कि मुंबई का रिक्रूटर विदेश का दौरा कर नौकरी फाइनल करता है, उसे पॉवर ऑफ अटॉर्नी मिल जाती है।
वह आगे उसकी कॉपी दिल्ली के एजेंट को देता है। वह कॉपी पंजाब के एजेंट को देता है। जब वह एजेंट किसी नौजवान से डील करता है तो उसके पास अपने नाम की पॉवर ऑफ अटॉर्नी नहीं होती।
पंजाब सरकार ने विदेश भेजने के नाम पर ठगी रोकने के लिए पिछले दिनों नया कानून बनाया है। जिसकेतहत सभी ट्रैवल व रिक्रूटिंग एजेंटों को लाइसेंस लेना जरूरी है।
ट्रैवल एजेंटों की चार एसोसिएशनों केसाथ मीटिंग केबाद सरकार ने कानून के नाम और कुछ शर्तों में भी बदलाव किया है। लेकिन बगैर लाइसेंस अब कोई भी एजेंट काम नहीं कर सकेगा।
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नौकरी के नाम पर विदेश भेजने को लेकर धोखाधड़ी के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नई पहल की है। अगर कोई चाहता है कि वह रिक्रूटमेंट एजेंट की जालसाजी में न फंसे तो उसे एजेंट से डीलिंग करने से पहले सिर्फ एक कॉल करनी होगी। उसके बाद उसे सारी जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन लॉन्च की गई है। राज्य सरकार के इंप्लायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग विभाग ने माइग्रेंट रिसोर्स सेंटर स्थापित किया है। इसी सेंटर ने यह खास हेल्पलाइन शुरू की है, जहां सुबह दस से बारह. तीस और दोपहर दो. तीस से चार बजे तक संपर्क किया जा सकता है। पंजाब का कोई भी व्यक्ति वर्क वीजा पर विदेश जाने के लिए किसी एजेंट से डील करने से पहले इस पर संपर्क कर सकता है। यहां बताया जाएगा कि एजेंट भारत सरकार के पास रजिस्टर्ड है या नहीं। अगर रजिस्टर्ड है तो भी क्या सावधानियां बरती जानी चाहिएं। पैसे का लेन-देन कैसे करना है। अगर विदेश जाने के बाद भी धोखे का खुलासा होता है तो क्या करना चाहिए। विभाग की डिप्टी डायरेक्टर परमिंदर शर्मा और इंप्लायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग अफसर सुरिंदर मोहन ने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय ने देश में दो हजार एक्टिव रिक्रूटिंग एजेंट को रजिस्टर्ड किया है। जिनमें से पंजाब में अस्सी और चंडीगढ़ में चालीस हैं। वर्क वीजा पर विदेश भेजने का अधिकार सिर्फ इन्हीं के पास है। पंजाब के युवाओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए खास जागरुकता मुहिम शुरू की गई है। इस कड़ी में यह हेल्पलाइन लॉन्च की गई है, जल्द इसमें एक इमिग्रेशन एक्सपर्ट को काउंसलर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। जरूरी जानकारी के पंफलेट शहरों के प्रमुख दफ्तरों और पंचायतों में रखे जाएंगे। इसके अलावा लोग जिलों के इंपलायमेंट जेनरेशन व ट्रेनिंग दफ्तरों से भी जानकारी ले सकते हैं। जानकारी केअलावा कोई शिकायत आएगी तो उसे भी सेंटर गृह विभाग केपास भेजेगा। कोई भी रिक्रूटमेंट एजेंट भारत के किसी युवा को विदेशी कंपनी में नौकरी दिलाने का ऑफर तभी दे सकता है, जब उसके पास विदेशी कंपनी की पॉवर ऑफ अटॉर्नी हो। पर होता यह है कि मुंबई का रिक्रूटर विदेश का दौरा कर नौकरी फाइनल करता है, उसे पॉवर ऑफ अटॉर्नी मिल जाती है। वह आगे उसकी कॉपी दिल्ली के एजेंट को देता है। वह कॉपी पंजाब के एजेंट को देता है। जब वह एजेंट किसी नौजवान से डील करता है तो उसके पास अपने नाम की पॉवर ऑफ अटॉर्नी नहीं होती। पंजाब सरकार ने विदेश भेजने के नाम पर ठगी रोकने के लिए पिछले दिनों नया कानून बनाया है। जिसकेतहत सभी ट्रैवल व रिक्रूटिंग एजेंटों को लाइसेंस लेना जरूरी है। ट्रैवल एजेंटों की चार एसोसिएशनों केसाथ मीटिंग केबाद सरकार ने कानून के नाम और कुछ शर्तों में भी बदलाव किया है। लेकिन बगैर लाइसेंस अब कोई भी एजेंट काम नहीं कर सकेगा।
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पांचवें वर्ष की अहमियत में सत्ता पक्ष की बहारें और चांद सितारे तोड़ लाने की कवायद का शुक्रिया अदा करने का माहौल इस समय हिमाचल में व्याप्त है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूरे हाथ खोल दिए हैं और इस तरह प्रदेश जो कल तक सोच नहीं पा रहा था, आज होने लगा है। ऐसे में हम न बजट की बात करेंगे, न जीएसटी मुआवजे के 35 सौ करोड़ पर छाई अनिश्चितता और न ही केंद्र से किसी विशेष आर्थिक पैकेज की अपेक्षा करेंगे, लेकिन इन बहारों में उन कसीदों को सुनेंगे, जिन्हंे राजनीति हर बार गढ़ लेती है। अंतिम चरण के फैसले पवित्र जरूर हैं, लेकिन सत्ता का अंतिम वर्ष ही क्यों इतना नजदीक सुन पाता है। वर्षों से पंजाब की सीमा से सटे नूरपुर क्षेत्र के लिए अलग से पुलिस अधीक्षक की मांग हो रही थी, जिसे चुनाव की चुटकियों ने पूरा कर दिया। इसकी सराहना होनी चाहिए, लेकिन क्या एक एसपी की नियुक्ति से सीमा से सटे इलाके आपराधिक तंत्र, नशे की तस्करी और रेत माफिया के चुंगल से पूरे राज्य को बचा पाएंगे। शायद कोई निर्णय लेना आसान होता है, लेकिन नीति-नियम बना कर उन के ऊपर कार्यान्वयन करना उतना ही कठिन। होना तो यह चाहिए कि पांवटा साहिब से शुरू करके मैहतपुर और जसूर तक की पट्टी के लिए एक अलग तरह की पुलिस व्यवस्था चाहिए और इसके लिए अधिकार क्षेत्र, प्रशिक्षण तथा नियंत्रण की अलग से मानिटरिंग भी चाहिए।
यानी बीबीएन के बाद अगर नूरपुर को पुलिस जिला बनाया जा रहा है, तो इसी क्रम में पड़ोसी राज्यों की सीमा छूते समस्त जिलों के लिए भी अलग से पुलिस जिला चाहिए और बार्डर एरिया के लिए विशेष टॉस्क फोर्स बनाते हुए, इसका मुख्यालय किसी आईजी रेंज के तहत बीबीएन या ऊना में स्थापित किया जा सकता है। पुलिस व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से अब शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विंग तैयार करने पड़ेंगे। शिमला, धर्मशाला के साथ-साथ मंडी व सोलन नगर निगम क्षेत्रों के जुड़ने से पुलिस आयुक्तालयों और ग्रामीण पुलिस व्यवस्था की अलग से संभावना बढ़ जाती है। इसी के साथ प्रदेश की आर्थिकी तथा मानवीय प्रवृत्ति में आ रहे बदलावों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस का आचरण तथा बदोबस्त बदलने के साथ-साथ पर्यटन पुलिस की अलग से अवधारणा व संचालन जोड़ने की आवश्यकता पैदा हो चुकी है। बहरहाल अंतिम वर्ष की समीक्षा में बेहतर साबित होने की पूंजी सत्ता पक्ष के पास है और इसका बेहतर इस्तेमाल आंकड़ों में वृद्धि और पोस्टरों में उन्नति कर सकता है। पांचवें साल में लाभार्थी बढ़ जाते हैं। नए क्षेत्र पनप जाते हैं या सरकार के पैमाने बदल जाते हैं।
वीरभद्र सिंह इसी तरह चुनावी वर्ष की पूर्व रिहर्सल में बहुत कुछ बांटते रहे हैं, लेकिन कई फैसले आज तक अमल में नहीं आए। मसलन धर्मशाला को दूसरी राजधानी की घोषणा करना तो उनके लिए आसान रहा होगा, लेकिन हाई कोर्ट की बैंच की स्थापना पर सारी ड्रिल मौन रही। यहां भी पालमपुर अस्पताल का उदाहरण सामने है, जहां शिशुरोग विशेषज्ञ तब पहुंचता है, जब जनता गुस्से में आती है। यह स्थिति हर छोटे-बड़े अस्पताल की हो सकती है, लेकिन हम गिन सकते हैं कि राजनीतिक मुआयने में कितने नए सीएचसी, पीएचसी, सिविल अस्पताल बन गए या अस्पतालों की बिस्तर क्षमता में इजाफा हो गया। जनता भी अपनी श्रेणियों में विभक्त है। वह महिला होकर आधे किराए पर पूरा सफर करना चाहती है। वह सरकारी कर्मचारी बन कर हर सत्ता को धूल चटाना चाहती है। वह कभी सामान्य वर्ग बन कर आयोग की मांग कर सकती है, तो हर तरह के आरक्षण की पक्षधर बन कर निरंतर आगे बढ़ना चाहती है। जनता खुश होती है जब परिवहन मंत्री नए डिपो खोलते हैं, जब मुख्यमंत्री नए दफ्तर खोलते हैं या ऐसी फरमाइश पूरी कर देते हैं, जो औचित्यहीन ही क्यों न हो। चुनावी वर्ष पर डंके की चोट करने के लिए फिर कुछ यूनिट बिजली मुफ्त ही क्यों न दी जाए, यही तो उपलब्धि है जो हमें 'लो वोल्टेज', पावर कट या अनियमित आपूर्ति के खिलाफ आवाज उठाने से रोक देती है।
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पांचवें वर्ष की अहमियत में सत्ता पक्ष की बहारें और चांद सितारे तोड़ लाने की कवायद का शुक्रिया अदा करने का माहौल इस समय हिमाचल में व्याप्त है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूरे हाथ खोल दिए हैं और इस तरह प्रदेश जो कल तक सोच नहीं पा रहा था, आज होने लगा है। ऐसे में हम न बजट की बात करेंगे, न जीएसटी मुआवजे के पैंतीस सौ करोड़ पर छाई अनिश्चितता और न ही केंद्र से किसी विशेष आर्थिक पैकेज की अपेक्षा करेंगे, लेकिन इन बहारों में उन कसीदों को सुनेंगे, जिन्हंे राजनीति हर बार गढ़ लेती है। अंतिम चरण के फैसले पवित्र जरूर हैं, लेकिन सत्ता का अंतिम वर्ष ही क्यों इतना नजदीक सुन पाता है। वर्षों से पंजाब की सीमा से सटे नूरपुर क्षेत्र के लिए अलग से पुलिस अधीक्षक की मांग हो रही थी, जिसे चुनाव की चुटकियों ने पूरा कर दिया। इसकी सराहना होनी चाहिए, लेकिन क्या एक एसपी की नियुक्ति से सीमा से सटे इलाके आपराधिक तंत्र, नशे की तस्करी और रेत माफिया के चुंगल से पूरे राज्य को बचा पाएंगे। शायद कोई निर्णय लेना आसान होता है, लेकिन नीति-नियम बना कर उन के ऊपर कार्यान्वयन करना उतना ही कठिन। होना तो यह चाहिए कि पांवटा साहिब से शुरू करके मैहतपुर और जसूर तक की पट्टी के लिए एक अलग तरह की पुलिस व्यवस्था चाहिए और इसके लिए अधिकार क्षेत्र, प्रशिक्षण तथा नियंत्रण की अलग से मानिटरिंग भी चाहिए। यानी बीबीएन के बाद अगर नूरपुर को पुलिस जिला बनाया जा रहा है, तो इसी क्रम में पड़ोसी राज्यों की सीमा छूते समस्त जिलों के लिए भी अलग से पुलिस जिला चाहिए और बार्डर एरिया के लिए विशेष टॉस्क फोर्स बनाते हुए, इसका मुख्यालय किसी आईजी रेंज के तहत बीबीएन या ऊना में स्थापित किया जा सकता है। पुलिस व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से अब शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विंग तैयार करने पड़ेंगे। शिमला, धर्मशाला के साथ-साथ मंडी व सोलन नगर निगम क्षेत्रों के जुड़ने से पुलिस आयुक्तालयों और ग्रामीण पुलिस व्यवस्था की अलग से संभावना बढ़ जाती है। इसी के साथ प्रदेश की आर्थिकी तथा मानवीय प्रवृत्ति में आ रहे बदलावों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस का आचरण तथा बदोबस्त बदलने के साथ-साथ पर्यटन पुलिस की अलग से अवधारणा व संचालन जोड़ने की आवश्यकता पैदा हो चुकी है। बहरहाल अंतिम वर्ष की समीक्षा में बेहतर साबित होने की पूंजी सत्ता पक्ष के पास है और इसका बेहतर इस्तेमाल आंकड़ों में वृद्धि और पोस्टरों में उन्नति कर सकता है। पांचवें साल में लाभार्थी बढ़ जाते हैं। नए क्षेत्र पनप जाते हैं या सरकार के पैमाने बदल जाते हैं। वीरभद्र सिंह इसी तरह चुनावी वर्ष की पूर्व रिहर्सल में बहुत कुछ बांटते रहे हैं, लेकिन कई फैसले आज तक अमल में नहीं आए। मसलन धर्मशाला को दूसरी राजधानी की घोषणा करना तो उनके लिए आसान रहा होगा, लेकिन हाई कोर्ट की बैंच की स्थापना पर सारी ड्रिल मौन रही। यहां भी पालमपुर अस्पताल का उदाहरण सामने है, जहां शिशुरोग विशेषज्ञ तब पहुंचता है, जब जनता गुस्से में आती है। यह स्थिति हर छोटे-बड़े अस्पताल की हो सकती है, लेकिन हम गिन सकते हैं कि राजनीतिक मुआयने में कितने नए सीएचसी, पीएचसी, सिविल अस्पताल बन गए या अस्पतालों की बिस्तर क्षमता में इजाफा हो गया। जनता भी अपनी श्रेणियों में विभक्त है। वह महिला होकर आधे किराए पर पूरा सफर करना चाहती है। वह सरकारी कर्मचारी बन कर हर सत्ता को धूल चटाना चाहती है। वह कभी सामान्य वर्ग बन कर आयोग की मांग कर सकती है, तो हर तरह के आरक्षण की पक्षधर बन कर निरंतर आगे बढ़ना चाहती है। जनता खुश होती है जब परिवहन मंत्री नए डिपो खोलते हैं, जब मुख्यमंत्री नए दफ्तर खोलते हैं या ऐसी फरमाइश पूरी कर देते हैं, जो औचित्यहीन ही क्यों न हो। चुनावी वर्ष पर डंके की चोट करने के लिए फिर कुछ यूनिट बिजली मुफ्त ही क्यों न दी जाए, यही तो उपलब्धि है जो हमें 'लो वोल्टेज', पावर कट या अनियमित आपूर्ति के खिलाफ आवाज उठाने से रोक देती है।
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-अगर उन्हें आपके बारे में सब मालूम हैं और वह आपकी हर बात को ध्यान से सुनती हैं तो यह इस बात का इशारा है कि वह भी आपको पसंद करती हैं।
-दिन भर काम करके थक जाने के बावजूद अगर वह आपसे मिलने के लिए तैयार रहते हैं और आपका इंतजार करते हैं तो आप उनके लिए बेहद खास हैं।
-आप लोगों की पहली बार बात कब हुई, कब आपका जन्मदिन है, अगर यह सब बातें उन्हें याद है तो आप उन्हें पक्का पसंद हैं।
-दिन की शुरुआत और अंत में अगर वह आपको मैसेज करती हैं तो भी इस बात पर मुहर लगा दें कि उन्हें आप पसंद हैं।
-अगर वह बातचीत करते समय ऐसा जताती हैं कि वह आपको जानती हैं तो यह बात तय है कि आप दोनों के बीच कोई कनेक्शन है।
-अगर वह अपने हर प्लान में आपको शामिल करती हैं और आप भी हमेशा उनके साथ हर जगह जाने के लिए तैयार रहते हैं, तो आप उनके लिए खास हैं।
-जब सामने वाला आपकी हर छोटी बड़ी चीजों पर ध्यान देना करना शुरू कर दें तो यह बात पक्की है कि वह आपमें इंट्रेस्टेड है।
-जब कभी आपको देखने के बाद उनका अंदाज बदला-बदला हो जाए इसका मतलब है कि आप उनके लिए स्पेशल हैं।
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-अगर उन्हें आपके बारे में सब मालूम हैं और वह आपकी हर बात को ध्यान से सुनती हैं तो यह इस बात का इशारा है कि वह भी आपको पसंद करती हैं। -दिन भर काम करके थक जाने के बावजूद अगर वह आपसे मिलने के लिए तैयार रहते हैं और आपका इंतजार करते हैं तो आप उनके लिए बेहद खास हैं। -आप लोगों की पहली बार बात कब हुई, कब आपका जन्मदिन है, अगर यह सब बातें उन्हें याद है तो आप उन्हें पक्का पसंद हैं। -दिन की शुरुआत और अंत में अगर वह आपको मैसेज करती हैं तो भी इस बात पर मुहर लगा दें कि उन्हें आप पसंद हैं। -अगर वह बातचीत करते समय ऐसा जताती हैं कि वह आपको जानती हैं तो यह बात तय है कि आप दोनों के बीच कोई कनेक्शन है। -अगर वह अपने हर प्लान में आपको शामिल करती हैं और आप भी हमेशा उनके साथ हर जगह जाने के लिए तैयार रहते हैं, तो आप उनके लिए खास हैं। -जब सामने वाला आपकी हर छोटी बड़ी चीजों पर ध्यान देना करना शुरू कर दें तो यह बात पक्की है कि वह आपमें इंट्रेस्टेड है। -जब कभी आपको देखने के बाद उनका अंदाज बदला-बदला हो जाए इसका मतलब है कि आप उनके लिए स्पेशल हैं।
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तीमरे अंतर को हम कच्छप काल कहेंगे । इमी काल में धरती पर फूलनेवाले पौधे लगे और रीढ़वाले जनुओं का आरभ हुआ । इस काल में सबसे बड़ी बात यह हुई कि उभयचरों का भी इसी समय आरंभ हुआ। उस समय समुद्र में भयानक मछलिया उत्पन्न हो चुकी थी और उभयचारी पशुओं का विकास हो चुका था। मंढक आदि का यही समय था ।
५ स्थलचरों का विकास
जिम युग के पत्थर के कोयले की बड़ी-बड़ी विस्तृत चट्टाने भूगर्भ में पड़ी हुई है उसमें इस धरतीपर ऋतु बहुत ही अनुकुल थी । न अत्यत ढडा था न बड़ी कड़ी गरमी थी । धगतल पर निरंतर वसत ऋतु का सुहावना समा था । आज कल के मे पेड़ न
थे । घास-फूस के बड़े बड़े विशालकाय पौधे थे जिन से वन में घना धेरा रहा करता था । इन महायनों में जुड़े हुए पायांवाले सूखी धरती से चढाई करनेवाले कीड़े-मकोड़े भरे रहते थे। कनखजूरं, मकड़े, बिच्छू आदि की तरह के असख्य प्राणी थे और इन के भी भोजन कर जानेवाले, जल-स्थल दोनों में विचरनेवाले अनेक जीव थे । कोड़े-मकोड़े पौधों की बीजों को और फूलों के केशरी और परागों को मिलाने में बरावर सहायता किया करते थे जिस से नये पौधों की उत्पत्ति होती थी। इस तरह चरी और अचरी दोनों का विकास साथ साथ चलता था और दोनों परस्पर सहायक थे । इसी कोयली के युग में रंगीन फूलों की उत्पति और विकास का समय समझना चाहिये । इस समय के जल-स्थल या उभयचर आज-कल के गधों के से बड़े आकार के होते थे। इन्हीं बड़े-बड़े जगलां के दब जाने से और बड़वानल से झुलस जाने से पृथ्वी के गर्भ मे कोयले के विशाल स्तर हो गये । इसी युग के आरंभ में उभयचरी ने जल के अतिरिक्त, स्थल के लिए उपयुक्त इडियो का विकास किया। मास लेने के लिए फफड़े, तीन घरोवाला हृदय, हिलने-डोलनेवाली जीभ कान के ढोल और ांखों को ढकने के लिये पलके, उभयचारी के लिये आवश्यक हो गयीं। मेंढक के शरीर का विकास आज भी इन बातों का गवाह है। जल में रहते हुए शब्द की जो कमी थी वह पूरी हुई। स्वरयंत्र का विकास हुआ। ऐसा अनुमान किया जाता है कि पहले करोड़ों वरम तक इस धरातल पर बिजली, तूफान, जलप्रपात और लहरी के शब्दो को छोड़कर और किसी तरह का प्राणियों का शब्द सुनने में नहीं श्रा सकता था। कुछ कीड़ो के बजाने के शब्द के सिवाय इस युग में पहले शब्द उभयचारियों के थे। मेंढकों ने अपनी मेंढकियो को बुलाना आरंभ किया। फिर माता पिता ने बच्चों को जोखिम से सावधान करने के लिये शब्द निकाले। फिर बच्चे ने माता-पिता को पुकारना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे पक्षी चहचहाने लगे। भाबी का उदय हुआ और भाति-भांति के स्वर निकलने लगे। धीरे-धीरे स्वरों और व्यंजनों का विभाग हुआ और शब्द बनने लगे। "भोजन" "जोखिम" "घर" "मुम्ब" और "दुःख" का प्रकाश होने लगा। और भाषा का विकास
आरंभ हुआ। इसी काल में पतली या कटी कमरवाले कीड़े पैदा हुए और बड़े । श्रारभ में
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तीमरे अंतर को हम कच्छप काल कहेंगे । इमी काल में धरती पर फूलनेवाले पौधे लगे और रीढ़वाले जनुओं का आरभ हुआ । इस काल में सबसे बड़ी बात यह हुई कि उभयचरों का भी इसी समय आरंभ हुआ। उस समय समुद्र में भयानक मछलिया उत्पन्न हो चुकी थी और उभयचारी पशुओं का विकास हो चुका था। मंढक आदि का यही समय था । पाँच स्थलचरों का विकास जिम युग के पत्थर के कोयले की बड़ी-बड़ी विस्तृत चट्टाने भूगर्भ में पड़ी हुई है उसमें इस धरतीपर ऋतु बहुत ही अनुकुल थी । न अत्यत ढडा था न बड़ी कड़ी गरमी थी । धगतल पर निरंतर वसत ऋतु का सुहावना समा था । आज कल के मे पेड़ न थे । घास-फूस के बड़े बड़े विशालकाय पौधे थे जिन से वन में घना धेरा रहा करता था । इन महायनों में जुड़े हुए पायांवाले सूखी धरती से चढाई करनेवाले कीड़े-मकोड़े भरे रहते थे। कनखजूरं, मकड़े, बिच्छू आदि की तरह के असख्य प्राणी थे और इन के भी भोजन कर जानेवाले, जल-स्थल दोनों में विचरनेवाले अनेक जीव थे । कोड़े-मकोड़े पौधों की बीजों को और फूलों के केशरी और परागों को मिलाने में बरावर सहायता किया करते थे जिस से नये पौधों की उत्पत्ति होती थी। इस तरह चरी और अचरी दोनों का विकास साथ साथ चलता था और दोनों परस्पर सहायक थे । इसी कोयली के युग में रंगीन फूलों की उत्पति और विकास का समय समझना चाहिये । इस समय के जल-स्थल या उभयचर आज-कल के गधों के से बड़े आकार के होते थे। इन्हीं बड़े-बड़े जगलां के दब जाने से और बड़वानल से झुलस जाने से पृथ्वी के गर्भ मे कोयले के विशाल स्तर हो गये । इसी युग के आरंभ में उभयचरी ने जल के अतिरिक्त, स्थल के लिए उपयुक्त इडियो का विकास किया। मास लेने के लिए फफड़े, तीन घरोवाला हृदय, हिलने-डोलनेवाली जीभ कान के ढोल और ांखों को ढकने के लिये पलके, उभयचारी के लिये आवश्यक हो गयीं। मेंढक के शरीर का विकास आज भी इन बातों का गवाह है। जल में रहते हुए शब्द की जो कमी थी वह पूरी हुई। स्वरयंत्र का विकास हुआ। ऐसा अनुमान किया जाता है कि पहले करोड़ों वरम तक इस धरातल पर बिजली, तूफान, जलप्रपात और लहरी के शब्दो को छोड़कर और किसी तरह का प्राणियों का शब्द सुनने में नहीं श्रा सकता था। कुछ कीड़ो के बजाने के शब्द के सिवाय इस युग में पहले शब्द उभयचारियों के थे। मेंढकों ने अपनी मेंढकियो को बुलाना आरंभ किया। फिर माता पिता ने बच्चों को जोखिम से सावधान करने के लिये शब्द निकाले। फिर बच्चे ने माता-पिता को पुकारना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे पक्षी चहचहाने लगे। भाबी का उदय हुआ और भाति-भांति के स्वर निकलने लगे। धीरे-धीरे स्वरों और व्यंजनों का विभाग हुआ और शब्द बनने लगे। "भोजन" "जोखिम" "घर" "मुम्ब" और "दुःख" का प्रकाश होने लगा। और भाषा का विकास आरंभ हुआ। इसी काल में पतली या कटी कमरवाले कीड़े पैदा हुए और बड़े । श्रारभ में
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यूएनएससी (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में एक प्रस्ताव पारित करते हुए सोमालिया को बेचे जाने वाले उन उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिनका इस्तेमाल आतंकी आईईडी धमाकों में करते हैं। सोमालिया के आतंकी संगठन अल-शबाब पर ऐसे धमाके करने के आरोप हैं।
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यूएनएससी में एक प्रस्ताव पारित करते हुए सोमालिया को बेचे जाने वाले उन उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिनका इस्तेमाल आतंकी आईईडी धमाकों में करते हैं। सोमालिया के आतंकी संगठन अल-शबाब पर ऐसे धमाके करने के आरोप हैं। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
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भारत में जहां पिछले 2 वर्षों से करुणा संक्रमण के कारण हताशा निराशा के बादल छाए हुए थेl देशवासियों ने बड़ी हिम्मत और दिलेरी से करोना जैसे राक्षस का सामना कर उस पर काफी हद तक विजय पाई है। . हमारे देश के खिलाड़ियों ने जापान ओलंपिक 2020 में बड़ी ही वीरता के साथ खेल कर एक स्वर्ण दो रजत तथा चार कांस्य पदक जीतकर 7 ओलंपिक मेडल लाकर एक इतिहास रच दिया है. एवं स्वतंत्रता दिवस पर स्वर्णिम आभा फैला दी है। नीरज चोपड़ा ने तो कमाल कर भारत को 141 वर्षों बाद एथलेटिक में भाला फेंक में स्वर्ण लाकर दे दिया, ऐसे में भारत की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ में एक स्वर्णिम आभा ओलंपिक मेडल की छा गई है। और सही मायने में स्वतंत्रता दिवस मनाने का अमृत महोत्सव को गौरवान्वित किया है।
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
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भारत में जहां पिछले दो वर्षों से करुणा संक्रमण के कारण हताशा निराशा के बादल छाए हुए थेl देशवासियों ने बड़ी हिम्मत और दिलेरी से करोना जैसे राक्षस का सामना कर उस पर काफी हद तक विजय पाई है। . हमारे देश के खिलाड़ियों ने जापान ओलंपिक दो हज़ार बीस में बड़ी ही वीरता के साथ खेल कर एक स्वर्ण दो रजत तथा चार कांस्य पदक जीतकर सात ओलंपिक मेडल लाकर एक इतिहास रच दिया है. एवं स्वतंत्रता दिवस पर स्वर्णिम आभा फैला दी है। नीरज चोपड़ा ने तो कमाल कर भारत को एक सौ इकतालीस वर्षों बाद एथलेटिक में भाला फेंक में स्वर्ण लाकर दे दिया, ऐसे में भारत की स्वतंत्रता की पचहत्तर वीं वर्षगांठ में एक स्वर्णिम आभा ओलंपिक मेडल की छा गई है। और सही मायने में स्वतंत्रता दिवस मनाने का अमृत महोत्सव को गौरवान्वित किया है। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
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पृथ्वीपाल सिंह, पंजाब विश्वविद्यालय चन्डीगढ़ में पत्रकारिता विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहे। सेवानिवृत होकर वे भी दिल्ली की राजेन्द्रनगर कालोनी में आ बसे । उनकी पत्नी गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल दिल्ली में प्रधानाचार्या रही हैं। "दिल्ली कूर्मि क्षत्रिय समाज" का जब गठन किया गया तो वे उसके पहले अध्यक्ष बनाये गये ओर सीताराम बाजार दिल्ली के मेसर्स राय ट्वायज्र इण्डस्ट्रीज के मालिक श्री हरनारायन राय, महामंत्री बने । श्री पृथ्वीपाल सिंह की मृत्यु के पश्चात् पंजाब विश्वविद्यालय ने उनकी पत्रकारिता में की गई सेवाओं तथा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहने के नाते सन् 1992 में इस विधा में शोधकार्य कराने हेतु पीठ स्थापित करने की घोषणा की । तीसरे पुत्र श्री श्याम सिंह खीरी, उत्तर प्रदेश में अभिवक्ता थे, जिनकी कुछ वर्ष पूर्व हत्या कर दी गई। केवल राणा जंगबहादुर सिंह जिन्दा है। उनकी आयु 94 वर्ष की है ।
इस अधिवेशन में निम्नलिखित कुरमी रत्नों, महासभा के पूर्व अध्यक्ष के निधन पर शोक सन्तप्त प्रतिनिधियों ने उनकी दिवंगत् आत्मा की शान्ति के लिये प्रार्थना की तथा अध्यक्ष एवं अन्य वक्ताओं ने भी इन जाति उद्धारकों की महान् सेवाओं को स्मरण किया,
हिज हाईनेस सर श्री तुकोजीराव पंवार, के० सी० यस० आई०, देवास
वैरिस्टर विट्ठभाई पटेल, प्रेसीडेन्ट, केन्द्रीय असेम्बली, दिल्ली
श्री मिथिलाशरण सिंह, एडवोकेट, बांकेपुर (पटना)
महासभा के अध्यक्ष बैरिस्टर-एट-लॉ, बाबू बृजनन्दन लाल कटियार ने कहा कि, "कार्य को प्रारम्भ करने के पूर्व मेरा शोकपूर्ण कर्तव्य है कि हम लोग महासभा के स्थायी सभापति हिज हाइनेस सर तुकोजीराव पंवार के० सी० एस० ई०, उन्होंने जाति को संगठित करने के लिये बहुत कार्य किया था, उनकी मृत्यु पर हार्दिक दुःख प्रकट करें । मृत्यु से हमारी जाति को जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति असम्भव है । ( रजत जयन्ती स्मृति ग्रंथ पृष्ठ 354 )
महासभा के इस छपरा अधिदेशन में ऐसोसिएशन की नियमावाली में पूर्ण परिवर्तन कर दिया गया । नई नियमावली में एसोसिएशन का नाम "अखिल भारतवर्षीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा" रखा गया, अर्थात् नाम में शब्द कुर्मी का कूर्मि कर दिया गया । महासभा के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री गुप्तनाथ सिंह ने सन् 1958 में इसे पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया था । इस नियमावली के नियम 3 में वर्णन किया गया है कि "महासभा का प्रधान कार्यालय साधारणतः उसी स्थान पर होगा, जहां प्रधानमंत्री निवास करते हों परन्तु आवश्यकतानुसार किसी भी समय कार्यकारिणी समिति दूसरा स्थान भी नियत कर सकती है । "
इस तरह प्रधान कार्यालय के संचालन की जिम्मेदारी से स्थायी अध्यक्ष मुक्त हो गए और प्रधानमंत्री उसके संचालक बन गये । प्रधानमंत्री श्री बेचन सिंह 10 वर्ष तक पदासीन रहने पर भी इस अधिवेशन में उपस्थित नहीं हुए थे, अतः उनके स्थान पर ठाकुर श्यामसिंह, रिटायर्ड पोस्ट मास्टर, लाहौर (अब पाकिस्तान में) प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए ।
इसी वर्ष भारत ने अपने महान सपूत एवं विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक, सर जगदीश चन्द्र बोस को भी खो दिया था, जिस पर सम्पूर्ण विश्व ने खेद व्यक्त किया ।
श्री पृथ्वीपाल सिंह का भारत के गवर्नर जनरल को प्रार्थना-पत्र
बहराइच जिले (संयुक्त प्रान्त ) में सन् 1936 के दौरान जमीन का बन्दोबस्त कार्य हो रहा था । ऐसी शिकायतें मिली कि वहां कुछ शरारती आफीसर कुर्मियों की गणना निम्न जातियों में कर रहे थे ओर बन्दोवस्त के कागजातों में उन्हें क्षत्रिय लिखने को तैयार नहीं थे अतः अ० मा० कू० क्ष० महासभा के महामंत्री श्री श्याम सिंह, पोस्ट मास्टर लाहौर के सुपुत्र श्री पृथ्वीपाल सिंह बी० ए०, एल-एल० बी० एडवोकेट (बाद में पोलिटिकल
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पृथ्वीपाल सिंह, पंजाब विश्वविद्यालय चन्डीगढ़ में पत्रकारिता विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहे। सेवानिवृत होकर वे भी दिल्ली की राजेन्द्रनगर कालोनी में आ बसे । उनकी पत्नी गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल दिल्ली में प्रधानाचार्या रही हैं। "दिल्ली कूर्मि क्षत्रिय समाज" का जब गठन किया गया तो वे उसके पहले अध्यक्ष बनाये गये ओर सीताराम बाजार दिल्ली के मेसर्स राय ट्वायज्र इण्डस्ट्रीज के मालिक श्री हरनारायन राय, महामंत्री बने । श्री पृथ्वीपाल सिंह की मृत्यु के पश्चात् पंजाब विश्वविद्यालय ने उनकी पत्रकारिता में की गई सेवाओं तथा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहने के नाते सन् एक हज़ार नौ सौ बानवे में इस विधा में शोधकार्य कराने हेतु पीठ स्थापित करने की घोषणा की । तीसरे पुत्र श्री श्याम सिंह खीरी, उत्तर प्रदेश में अभिवक्ता थे, जिनकी कुछ वर्ष पूर्व हत्या कर दी गई। केवल राणा जंगबहादुर सिंह जिन्दा है। उनकी आयु चौरानवे वर्ष की है । इस अधिवेशन में निम्नलिखित कुरमी रत्नों, महासभा के पूर्व अध्यक्ष के निधन पर शोक सन्तप्त प्रतिनिधियों ने उनकी दिवंगत् आत्मा की शान्ति के लिये प्रार्थना की तथा अध्यक्ष एवं अन्य वक्ताओं ने भी इन जाति उद्धारकों की महान् सेवाओं को स्मरण किया, हिज हाईनेस सर श्री तुकोजीराव पंवार, केशून्य सीशून्य यसशून्य आईशून्य, देवास वैरिस्टर विट्ठभाई पटेल, प्रेसीडेन्ट, केन्द्रीय असेम्बली, दिल्ली श्री मिथिलाशरण सिंह, एडवोकेट, बांकेपुर महासभा के अध्यक्ष बैरिस्टर-एट-लॉ, बाबू बृजनन्दन लाल कटियार ने कहा कि, "कार्य को प्रारम्भ करने के पूर्व मेरा शोकपूर्ण कर्तव्य है कि हम लोग महासभा के स्थायी सभापति हिज हाइनेस सर तुकोजीराव पंवार केशून्य सीशून्य एसशून्य ईशून्य, उन्होंने जाति को संगठित करने के लिये बहुत कार्य किया था, उनकी मृत्यु पर हार्दिक दुःख प्रकट करें । मृत्यु से हमारी जाति को जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति असम्भव है । महासभा के इस छपरा अधिदेशन में ऐसोसिएशन की नियमावाली में पूर्ण परिवर्तन कर दिया गया । नई नियमावली में एसोसिएशन का नाम "अखिल भारतवर्षीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा" रखा गया, अर्थात् नाम में शब्द कुर्मी का कूर्मि कर दिया गया । महासभा के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री गुप्तनाथ सिंह ने सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में इसे पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया था । इस नियमावली के नियम तीन में वर्णन किया गया है कि "महासभा का प्रधान कार्यालय साधारणतः उसी स्थान पर होगा, जहां प्रधानमंत्री निवास करते हों परन्तु आवश्यकतानुसार किसी भी समय कार्यकारिणी समिति दूसरा स्थान भी नियत कर सकती है । " इस तरह प्रधान कार्यालय के संचालन की जिम्मेदारी से स्थायी अध्यक्ष मुक्त हो गए और प्रधानमंत्री उसके संचालक बन गये । प्रधानमंत्री श्री बेचन सिंह दस वर्ष तक पदासीन रहने पर भी इस अधिवेशन में उपस्थित नहीं हुए थे, अतः उनके स्थान पर ठाकुर श्यामसिंह, रिटायर्ड पोस्ट मास्टर, लाहौर प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए । इसी वर्ष भारत ने अपने महान सपूत एवं विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक, सर जगदीश चन्द्र बोस को भी खो दिया था, जिस पर सम्पूर्ण विश्व ने खेद व्यक्त किया । श्री पृथ्वीपाल सिंह का भारत के गवर्नर जनरल को प्रार्थना-पत्र बहराइच जिले में सन् एक हज़ार नौ सौ छत्तीस के दौरान जमीन का बन्दोबस्त कार्य हो रहा था । ऐसी शिकायतें मिली कि वहां कुछ शरारती आफीसर कुर्मियों की गणना निम्न जातियों में कर रहे थे ओर बन्दोवस्त के कागजातों में उन्हें क्षत्रिय लिखने को तैयार नहीं थे अतः अशून्य माशून्य कूशून्य क्षशून्य महासभा के महामंत्री श्री श्याम सिंह, पोस्ट मास्टर लाहौर के सुपुत्र श्री पृथ्वीपाल सिंह बीशून्य एशून्य, एल-एलशून्य बीशून्य एडवोकेट (बाद में पोलिटिकल
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फिर से मिले तमन्ना भाटिया-विजय वर्मा (फोटोः सोशल मीडिया) ( Image Source : Instagram )
Tamannaah Bhatia-Vijay Varma Video: अक्सर देखा जाता है कि बी टाउन में किसी न किसी नए सेलेब्स की जोड़ी बनती रहती है. मौजूदा समय में बॉलीवुड और साउथ की मशहूर एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) और एक्टर विजय वर्मा (Vijay Varma) का नाम डेटिंग की खबरों को लेकर चर्चा में बना हुआ है. न्यू सेलिब्रेशन के दौरान विजय और तमन्ना को एक साथ स्पॉट किया गया. तब से कयास लगने शुरू हो गए हैं विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में मौजूद हैं. इस बीच अब तमन्ना और विजय का एक और लेटेस्ट वीडियो सामने आया है.
दरअसल हाल ही में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा ऐले अवॉर्ड्स सेरेमनी के दौरान मिले हैं. इस मौके का एक लेटेस्ट वीडियो इंस्टेट बॉलीवुड ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि स्टाइलिश ब्लू कलर की थाई-हाई स्लिट में तमन्ना भाटिया बला की खूबसूरत लग रही हैं. वहीं विजय वर्मा फंकी लुक में नजर आ रहे हैं. वीडियो में ये साफ देखा जा सकता है कि तमन्ना भाटिया अपना फोटोशूट करा रही हैं, तभी पीछे से विजय वर्मा उनको कुछ बोलते हुए गुजरते हैं.
इसके बाद दोनों एक दूसरे से हाथ मिलाकर गले मिलते हुए देखे जा रहे हैं. इतना ही नहीं, बाद में इन दोनों को एक जगह बैठकर भी फोटोशूट कराते हुए भी देखा जा सकता है. ऐसे में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा के इस लेटेस्ट वीडियो ने इन दोनों के रिलेशनशिप में होने की खबर को और हवा दे दी है.
हाल ही में तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) और विजय वर्मा (Vijay Varma) ने नए साल का जश्न एक साथ गोवा में मनाया है. इस मौके पर इन दोनों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. एक वीडियो में ये दावा किया गया कि ये दोनों कलाकार एक दूसरे को किस कर रहे हैं. न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर वायरल हुए किसिंग वीडियो को लेकर तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा का नाम डेटिंग की खबरों को लेकर सुर्खियों में आ गया.
यह भी पढ़ें- मुंबई ट्रैफिक पर भड़कीं सोनम कपूर तो यूजर्स ने लगाई क्लास, कहा- 'पापा की परी उड़ के चली जाओ'
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फिर से मिले तमन्ना भाटिया-विजय वर्मा Tamannaah Bhatia-Vijay Varma Video: अक्सर देखा जाता है कि बी टाउन में किसी न किसी नए सेलेब्स की जोड़ी बनती रहती है. मौजूदा समय में बॉलीवुड और साउथ की मशहूर एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया और एक्टर विजय वर्मा का नाम डेटिंग की खबरों को लेकर चर्चा में बना हुआ है. न्यू सेलिब्रेशन के दौरान विजय और तमन्ना को एक साथ स्पॉट किया गया. तब से कयास लगने शुरू हो गए हैं विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में मौजूद हैं. इस बीच अब तमन्ना और विजय का एक और लेटेस्ट वीडियो सामने आया है. दरअसल हाल ही में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा ऐले अवॉर्ड्स सेरेमनी के दौरान मिले हैं. इस मौके का एक लेटेस्ट वीडियो इंस्टेट बॉलीवुड ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि स्टाइलिश ब्लू कलर की थाई-हाई स्लिट में तमन्ना भाटिया बला की खूबसूरत लग रही हैं. वहीं विजय वर्मा फंकी लुक में नजर आ रहे हैं. वीडियो में ये साफ देखा जा सकता है कि तमन्ना भाटिया अपना फोटोशूट करा रही हैं, तभी पीछे से विजय वर्मा उनको कुछ बोलते हुए गुजरते हैं. इसके बाद दोनों एक दूसरे से हाथ मिलाकर गले मिलते हुए देखे जा रहे हैं. इतना ही नहीं, बाद में इन दोनों को एक जगह बैठकर भी फोटोशूट कराते हुए भी देखा जा सकता है. ऐसे में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा के इस लेटेस्ट वीडियो ने इन दोनों के रिलेशनशिप में होने की खबर को और हवा दे दी है. हाल ही में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा ने नए साल का जश्न एक साथ गोवा में मनाया है. इस मौके पर इन दोनों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. एक वीडियो में ये दावा किया गया कि ये दोनों कलाकार एक दूसरे को किस कर रहे हैं. न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर वायरल हुए किसिंग वीडियो को लेकर तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा का नाम डेटिंग की खबरों को लेकर सुर्खियों में आ गया. यह भी पढ़ें- मुंबई ट्रैफिक पर भड़कीं सोनम कपूर तो यूजर्स ने लगाई क्लास, कहा- 'पापा की परी उड़ के चली जाओ'
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आज समाज डिजिटल, पानीपत :
पानीपत। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हरियाणा सरकार द्वारा खेती में जोखिमों को कम करने व खेती को जहर मुक्त बनाने के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की अनुदान योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने योजनाओं का विस्तार करते हुए अब स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले ऐसे किसान जिसके पास दो से पांच एकड़ भूमि है, उनको देसी गाय की खरीद पर अधिकतम 25 हजार रूपये की सब्सिडी देने की योजना की शुरुआत की है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने जानकारी देते हुए बताया कि उपरोक्त योजना का लाभ लेने वाले किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम निशुल्क दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रदेश में प्रदेश सरकार द्वारा 50 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कृषि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बाजार में बढ़ रही मांग के मद्देनजर किसानों द्वारा अधिक उपज प्राप्त करने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बनिक कार्बन में जबरदस्त कमी आई है।
मिट्टी तथा फसल उपज में हानिकारक रसायनों में वृद्धि हुई है। इन हानिकारक रसायनों के प्रभाव को कम करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे कि किसानों की आमदनी को दोगुना तथा खेती को जहर मुक्त बनाया जा सके। उपायुक्त ने जिले के किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि मुख्ममंत्री मनोहरलाल द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए शुरु की गई इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को खेती के लिए एक स्वच्छ तथा स्वस्थ उपजाऊ भूमि दे सकें। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की योजना लाने वाला हरियाणा प्रदेश पहला राज्य है।
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आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हरियाणा सरकार द्वारा खेती में जोखिमों को कम करने व खेती को जहर मुक्त बनाने के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की अनुदान योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने योजनाओं का विस्तार करते हुए अब स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले ऐसे किसान जिसके पास दो से पांच एकड़ भूमि है, उनको देसी गाय की खरीद पर अधिकतम पच्चीस हजार रूपये की सब्सिडी देने की योजना की शुरुआत की है। उपायुक्त सुशील सारवान ने जानकारी देते हुए बताया कि उपरोक्त योजना का लाभ लेने वाले किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम निशुल्क दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रदेश में प्रदेश सरकार द्वारा पचास हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कृषि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बाजार में बढ़ रही मांग के मद्देनजर किसानों द्वारा अधिक उपज प्राप्त करने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बनिक कार्बन में जबरदस्त कमी आई है। मिट्टी तथा फसल उपज में हानिकारक रसायनों में वृद्धि हुई है। इन हानिकारक रसायनों के प्रभाव को कम करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे कि किसानों की आमदनी को दोगुना तथा खेती को जहर मुक्त बनाया जा सके। उपायुक्त ने जिले के किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि मुख्ममंत्री मनोहरलाल द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए शुरु की गई इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को खेती के लिए एक स्वच्छ तथा स्वस्थ उपजाऊ भूमि दे सकें। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की योजना लाने वाला हरियाणा प्रदेश पहला राज्य है।
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भारतीय टीम के बांय हाथ के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनो अपनी खराब फॉर्म से जूझ रहे है। उनके इस प्रदर्शन के बाद विश्व कप में खेलने पर संशेय बना हुआ है। उनका खराब प्रदर्शन एशिया कप से लेकर टी20 विश्व कप में जारी है। पंत को अभी तक जितने भी मौके दिए है, वह उन्हें ठीक ढंग से भुना नहीं पाए है।
उनके इस प्रकार के प्रदर्शन के बाद उन्हें आलोचनाओ का सामना करना पढ़ रहा है। पंत ने इस साल न्यूजीलैंड में टीम इंडिया के लिए ओपनिंग की थी। लेकिन, वह इस मौके का भी सही से इस्तेमाल नही कर पाए थे। पंत ने इस साल 9 मुकाबले खेले है। इस दौरान उनके बल्ले से 532 रन आए है। हालांकि, इस दौरान उनका प्रदर्शन तो अच्छा रहा है, फिलहाल वह अपनी खराब फॉर्म से गुजर रहे है। उनके बल्ले से इस दौरान 3 अर्धशतकीय और 2 शतकीय पारी खेली है।
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भारतीय टीम के बांय हाथ के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनो अपनी खराब फॉर्म से जूझ रहे है। उनके इस प्रदर्शन के बाद विश्व कप में खेलने पर संशेय बना हुआ है। उनका खराब प्रदर्शन एशिया कप से लेकर टीबीस विश्व कप में जारी है। पंत को अभी तक जितने भी मौके दिए है, वह उन्हें ठीक ढंग से भुना नहीं पाए है। उनके इस प्रकार के प्रदर्शन के बाद उन्हें आलोचनाओ का सामना करना पढ़ रहा है। पंत ने इस साल न्यूजीलैंड में टीम इंडिया के लिए ओपनिंग की थी। लेकिन, वह इस मौके का भी सही से इस्तेमाल नही कर पाए थे। पंत ने इस साल नौ मुकाबले खेले है। इस दौरान उनके बल्ले से पाँच सौ बत्तीस रन आए है। हालांकि, इस दौरान उनका प्रदर्शन तो अच्छा रहा है, फिलहाल वह अपनी खराब फॉर्म से गुजर रहे है। उनके बल्ले से इस दौरान तीन अर्धशतकीय और दो शतकीय पारी खेली है।
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श्रीलंका के उच्चायुक्त अशोक मिलिंडा मोरागोडा ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर श्रीलंका और भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मध्य संबंधों को और प्रगाढ़ करने, सांस्कृतिक व पर्यटन के क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने पर विचार-विमर्श किया गया।
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श्रीलंका के उच्चायुक्त अशोक मिलिंडा मोरागोडा ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर श्रीलंका और भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मध्य संबंधों को और प्रगाढ़ करने, सांस्कृतिक व पर्यटन के क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने पर विचार-विमर्श किया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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"नहीं, तुम वतला रहे थे कि लंदन में किस विचित्र परिस्थिति मे तुम्हारी भेंट पंडितजी से हुई ।" - वीच ही मे घोप ने
बात काट कहा कहा ।
अरे बनर्जी मुसकरा उठा । प्रिन्सिपल के आने के समय जो कुछ वह कह रहा था, वह उसे अव भी याद था । किन्तु वह तो घोष के मन की थाह लेना चाहता था और इसमे उसे सफलता भी मिल गई ।
" हाँ, तो उसी समय मैं उर्मिला से मिला था " ~ यह कह कर बनर्जी कुछ रुका मानो किसी भूली हुई बात को याद कर रहा हो और इसके बाद आश्चर्य मे पड़े हुए घोप को अपनी रहस्यपूर्ण कथा सुनाने लगा ।
"स्कूल और कालेज में मैं सदा पढने में बहुत ही तेज था । विशेष प्रयत्न किए बिना ही इम्तहानो में मेरा नम्बर अञ्चल आता था । इसके सिवाय मेरे पिता के पास अट धन राशि थी और मेरे जैसे कुशाग्र बुद्धि पुत्र का पिता होने का अभिमान भी उन्हें कुछ कम न था । उन्हें राजनीति मे दिलचस्पी विलकुल न थी । अगरेजी सरकार उन्हें अपना धन उपभोग करने या संयुक्त पारिवारिक जीवन विताने में कोई बाधा उपस्थित नहीं करती थी इसलिए उसके विरुद्ध उन्हे कुछ भी शिकायत न थी ।
"पिताजी का ख्याल था कि मेरे जैसे तेज युवक के लिए सविल सर्विस में पहुँच कर चमक उठना कठिन न होगा । वे मेरे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और कमिश्नर ही नहीं, कि गवर्नर तक बनने का स्वप्न देसा करते। और वास्तव में उनका यह सोचना किसी प्रसम्भव वात की कल्पना वरना न था । हिन्दुस्तानी पहले भी प्रान्तों के गवर्नर हो चुके हैं। पिता जी का कहना
था कि आखिर उनका पुत्र उन भारतीयों की अपेक्षा सामाजिक स्थिति, धन या लियाक़त किस बात में कम है ?
"इन्हीं विचारो की पूर्ति के उद्देश्य से सब प्रबंध किया गया और मैलंटन पहुॅचकर आई०सी० एस० परीक्षा के लिए तैयारी करने लगा । जीवन मे पहली बार मैने मेहनत की थी। पिताजी के मेरे सम्बन्ध में जो खयालात थे उनकी सचाई में साबित करके दिखाना चाहता था। इसके सिवाय मै यह भी जानता था कि यदि परीक्षा मे कही असफल हो गया तो इससे पिताजी को कितना दुस होगा । परीक्षा शुरू होने मे एक महीने की देर थी। मुझे अपने में पूरा विश्वास था और ८० उम्मेदवारों के बीच यदि मेरा नाम प्रथम २० मेश्रा जाता तो इसमे तनिक भी आश्चर्य की बात न होती । परन्तु, एक दिन सायंकाल के समय जीवन के प्रति मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण ही में परिवर्तन हो गया ।
"उस दिन काम समाप्त करके मैं कमरे मे अकेला बैठा हुआ था, न जाने बिना किसी कारण ही मेरा मन क्यो उदास हो रहा था । मेरा स्वास्थ्य उन दिनो विलकुल ठीक था, पढाई का कार्य भी ठीक चल रहा था और परीक्षा मे पूर्ण रूप से सफल होने की भी मुझे आशा थी । रुपये-पैसे की तंगी या अन्य किसी प्रकार की चिन्ता भी मेरे लिए न थी। फिर भी एक जीव किस्म की उदासी मेरे मन पर अधिकार करती जा रही थी । इससे वचने के लिये मैं पास ही के कमरे में एक मित्र के यहाँ चला गया । वही पंडितजी और उनकी पुत्री उर्मिला से मै प्रथम बार मिला । पडितजी की दृष्टि में न जाने कैसा था कि पहली बार ही मे मैं उनकी तरफ सिच गया । इसी तरह उर्मिला को देखते ही मेरे हृदय में उसके प्रति प्रेम का वोज जम गया ।"
उर्मिला से बनर्जी के प्रेम की बात सुनते ही चारपाई पर बैठा हुआ घोष चौंक पड़ा ।
"चौंको नही। मैं जानता हूँ कि तुम भी उर्मिला को प्रेम करते हो । मैंने तो प्रतिज्ञा की है जब तक काम पूरा न होगा तब तक प्रेम का एक शब्द भी मेरे मुँह से न निकलेगा ।"
बनर्जी को यह बात सुन कर घोष ने निश्चिन्तता की साँस ली और बनर्जी फिर अपना हाल सुनाने लगा ।
" उस दिन हम लोगों की बातें भारतीय राजनीति के सम्बन्ध मे हुई थीं । देश के लिए पंडितजो ने जो त्याग किये थे उनकी बावत मैं पहले ही सुन चुका था और उनका प्रशसक भी था परन्तु अपने पिता को तरह मैं भी सरकार को मान कर यह सोचने लगा था कि राजनीति में दखन देना मेरा काम नहीं है । परन्तु मेरा यह भ्रम शीघ्र ही दूर हो गया ।
"पडितजी ने मुझ से पूछा कि लदन में मैं क्या करता । मैंने सब बातें कह दीं और उनके मन पर प्रभाव डालने के लिये यह भी बतला दिया कि सिविल सर्विस परीक्षा के सफल व्यक्तियों में प्रथम दस में अपना नाम आने की भी मुझे पूर्ण है। मेरी इस बात से उनके मुख पर एक खेदपूर्ण मुसकराहट की रेखा खिंच गयी, जिसे देखकर मुझे अनुभव होने लगा कि मैं ऐसा काम कर रहा हूँ जो मेरे उपयुक्त कदापि नहीं है और जिसे पण्डिनजी भी पसन्द नहीं करते ।
" मैने उनसे पूछा भी कि क्या आपके खान मे मै उचित नहीं कर रहा हूँ । इसका उन्होंने जिन शान्ति और सादगी से भरा उत्तर दिया. उसे मै कभी नहीं भूल नक्ता । उन्होंने कहा कि तुम 'हत्या' कर रहे हो ।
अ० ट
"पंडितजी ने देखा कि उनके उत्तर ने मुझे मूक कर दिया। शायद उनकी उक्ति का उद्देश्य प्रभाव डाल कर मेरी उस आत्मतुष्टि की भावना का अन्त करना था । वे मुझसे देश के सम्बन्ध में बाते करते रहे और अपने दृष्टिकोण से भी बातो पर विचार करने का अनुरोध भी उन्होंने मुझमे किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने आगे एक उच्च आदर्श रखना चाहिये और इस समय हमारे आगे अपनी मातृभूमि की गुलामी को जजीरो को तोड़ने का प्रयत्न करने की कोई आदर्श उच्च नही हो सकता । देश को गुलामी मे बाँध रखने वाली जंजीरो मे सबसे मजबूत है भारतीय सिविल सर्विस और इसमे जाने वाला प्रत्येक भारतीय देश की स्वतंत्रता का जनाजा निकालने में मददगार बनता है ।
"तुम तो जानते ही हो कि पंडितजी के व्यक्तित्व में कितना है। उन्होने मुझे विलकुल अपना गुलाम बना लिया । मैंने उर्मिला की तरफ देखा - उसकी बड़ी वडी और सुन्दर आँखे मुझसे कुछ याचना कर रही थी। कुछ तो इस वजह से और कु पण्डितजी द्वारा पैदा किये जोश के कारण मैने उसी जगह और उसी समय सिविल सर्विस मे न बैठने का निश्चय कर लिया।"
एक क्षण के लिए ऐसा जान पडा मानो बनर्जी ने मे डूब गया हो । परन्तु घोप के हिलने से वह कुछ सँभल गया और कहने लगा - "यह मेरे लिये सदा आश्चर्य की बात रही है कि अपने जीवन का यह महत्वपूर्ण निर्णय मैने किस आसानी से कर डाला और इससे भी मुझे इस बात से होता है कि ऐसा करते ही जो उदासी मुझ पर छायी हुई थी वह न जाने एकाएक कहाँ चली गई ।
"पण्डित उस समय कितने ही राजनीतिक कार्यों में व्यस्त थे
इसलिये मुझे और उर्मिला को उन दिनों एक साथ रहने का काफी अवसर मिला करता था । उसके दिल मे देश के लिए जो जोश उसड़ा हुआ था उसका कुछ असर मुझ पर भी पड़ा और इस तरह हम दोन एक साथ रह कर अधिक आनन्द और स्वच्छन्दता का अनुभव करने लगे । उस समय परिस्थिति बड़ी शा पूर्ण जान पडती थी । ऐसा जान पड़ता था कि पण्डितजी जिन राजनीतिक सभाओं में भाग ले रहे थे, उनसे मानो भारतीय स्वतंत्रता के आन्दोलन की निकट भविष्य मे सफलता की पूर्वसूचना मिल रही हो ।
"एक दिन 'क्यू गार्डन' में हम लोग पास ही बैठे थे । लदन के हिसाब से उस दिन गरमी काफ़ी थी । नीले आसमान में सूरज चमक रहा था । आसपास का दृश्य वडा ही मनोरम था । प्रकृति की इस शान्त छटा का हम लोग पूरा आनन्द उठा रहे थे ।
"उर्मिला एकाएक वोल उठी - 'इस दृश्य को देख कर मुझे बचपन की याद उठ आई है। क्या तुम जानते हो कि एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और मेरे पिता मे बडी मित्रता थी। दोनों हेरो और आक्सफोर्ड मे साथ-साथ पढ़े थे । डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पुत्र का और मेरा वचपन साथ-साथ बीता था । हम लोग साथ हो घोडे की सवारी को जाते, टैनिस खेलते कभी बाग में बैठे हुए सुहावनी धूप का आनन्द लिया करते थे । वे कितने अच्छे दिन थे ।'
"इसके बाद वह पुछ देर के लिए रुकी और फिर नुसती हुई कहने लगी- 'आश्चर्य की बात तो यह थी कि एक भारतीय दालिका और यूरोपियन वालक मे सहसा स्नेह हो येने गया । मुझे अपनी विदाई का समय भी याद है, क्योंकि अपने जीवन में इतना दुख मुभो कभी न हुआ था। उसे इंगलैंड पटने के लिए
भेज दिया गया - अबकी बार जब वह रुकी तो उसकी मुद्रा कुछ गम्भीर हो गयी - 'मुझे विश्वास है कि कभी न कभी मै एकवार उससे अवश्य मिलूँगी । उसका शरीर कितना हृष्टपुष्ट था, किन्तु हृदय से उदारता और सहानुभूति वरसी पड़ती थी । भारत जाने वाले सभी यूरोपियन उसकी तरह होते तो कैसे होता ? तब राजनीतिक अशान्ति भारत मे कदापि न होती ?'
"उर्मिला के मुँह से यह सब बाते सुनकर उस यूरोपियन युवक के प्रति मेरे मन मे बडी ईर्पा उत्पन्न हो गई और यहाँ तक कि सभी यूरोपियनों से मै घृणा करने लगा। दूसरी तरफ जिन राजनीतिक समितियो और कार इतनी सफलता पूर्वक हुआ था वे कुछ ही समय मे छिन्न-भिन्न हो गयी । उर्मिला और मैं बड़े हतोत्साह हो गए । हम लोग सशस्त्र क्रान्ति और हिंसात्मक कार्यों की बातें करने लगे। पडितजी भी हमारे विचार जान गए। उन्होंने कहा कि इन कान्फरेंसो और समितियो को पूर्ण सफलता तो लगभग असम्भव सी बात थी। अभी इस तरह की कितनी ही कान्फरेंसों और धैर्य के साथ प्रचार करते रहने की आवश्यकता है। पंडितजी ने कहा कि यदि हिंसात्मक उपायो का किया गया तो भारतीय स्वतंत्रता का आन्दोलन १०० वर्ष के लिए पिछड़ जायगा ।
" इसके बाद पंडितजी और उर्मिला भारत वापस चले आये। मैं लंदन मे अकेला रह गया । एक दूसरे से विदा होने के पूर्व मैंने और उर्मिला ने जीवन भर देश सेवा करने का व्रत ग्रहण किया। मैंने पिता को लिख दिया कि मै सिविल सर्विस की परीक्षा में नही बैठ रहा हूँ । उन्हें सफाई देने की कोशिश भी मैने न की, क्योकि जानता था कि ऐसा करना बेकार है। मैंने लिखा कि रुपया भेजता बन्द कर दीजिए, क्योंकि मैंने अपने निराले
मार्ग पर चलने का निश्चय कर लिया है । उस दिन के बाद आज तक पिता से मेरा कभी पत्र व्यवहार नहीं हुआ। वे यह भी नहीं जानते कि मैं जीवित भी हूँ या नहीं ?"
पिता की याद ही वनर्जी फिर एक बार सोच मे पड़ गया । वह उन्हें हद से ज्यादा चाहता था, किन्तु देश प्रेम को भावना ने उसको भावुक प्रकृति पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिसका वीजारोपण पडितजी के आकर्षक व्यक्तित्व और उर्मिला के प्रेम के कारण हुआ था ।
घोष ने पूछा- "जब पिता ने खर्च भेजना वन्द कर दिया तव तुमने अपना कार्य कैसे चलाया ?"
बनर्जी ने कुछ हिचकिचाने के बाद कहा - "मेरे जीवन का यह भाग ऐसा है, जिसे भूल सकूँ तो मुझे खुशी ही होगो । हृदय में देश प्रेम की लहरें हिलोर ले रही थी, युवावस्था थी, और जोश भी कुछ कम न था । रुपया मिलना बन्द होने पर मुझे जोवन की यथार्थता से सामना पडा । सर्कस के प्रोग्राम मैंने चेंचे, डाक में कुलो का काम मैंने किया, भूखा मरा और सर्द रातें चेचो पर लेटकर चिता ढीं। किन्तु इस बीच में उर्मिला से पत्रव्यवहार वगवर जारी रहा । उसने नव-भारत समिति की स्थापना की और मुझसे उसकी शाखा लदन मे खोलने का अनुरोध किया ।
" इस समिति में आखिरकार दो दल हो गए । वैध आन्दोलन के पक्षपाती पंडितजी के अनुयायी बने रहे और विचार वाले भारत में हमारे प्रधान के सम्पर्क में आ गए । अपने ही अनुरोध के कारण मुझे इस जिले में भेजा गया । उर्मिला की सहानुभृति सदा उम्र विचार वालो की तरफ थी। वह हमारे ढल मे मिलने वाला हो थी कि इस बीच में उसके पुराने दोस्त और 'चहेने पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट कहीं से टपक पडे ।
वनर्जी ने 'चहेते' शब्द का प्रयोग जान बूझकर घोष को उत्तेजित करने के लिए किया था और तीर निशाने पर बैठ भी
गया ।
"क्या " - घोष चारपाई से उठ कर उत्तेजित होकर चिल्ला
उठा ।
"अरे चुप रहो" - बनर्जी ने धीरे से कहा- "शान्त होकर वैठ जाओ।"
घोप कुछ देर बाद फिर चारपाई पर अपने पूर्व के स्थान पर बैठ गया । वह उर्मिला पर मरता था । बनर्जी ने उसके हृदय मे अपने प्रति सम्मान और भय की भावना को जन्म देकर पहले ही अपना गुलाम बना लिया था । उर्मिला से प्रेम के उसका अनुसरण करने के लिए और भी तैयार हो गया ।
सुपरिन्टेन्डेन्ट पुलिस को आखिर उर्मिला के प्रति ऐसी भावना रखने का अधिकार ही क्या था ? भावुक प्रकृति का होने के कारण घोप के विचार ब्रायन की तरफ से बिलकुल बदल गए ।
वनर्जी चोला - "उर्मिला ब्रायन से प्रेम करती है। उस पर उनका प्रभाव बहुत अधिक है। वह जान बूझकर हमारे साथ विश्वासघात कभी न करेगी, पर जब तक पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट का प्रभाव उस पर रहेगा तब तक वह हमारे कार्यों मे पूरा योग न देगी। उनकी हत्या करके एक तरफ तो हम उर्मिला को बचा लेगे और दूसरी तरफ अपने एक प्रतिस्पर्धी का अन्त करके दल की गोपनीय स्थिति की रक्षा कर लेंगे। अब शायद तुम समझ गए होगे कि मैंने मिश्रोकले के बजाय ब्रायन को क्यों चुना था।"
घोष के अन्तर मे द्वन्द्व हो रहा था, सॉस जोरो से चल रही थी । उसके मुँह से "हाँ" के सिवाय और कुछ न निकल सका ।
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"नहीं, तुम वतला रहे थे कि लंदन में किस विचित्र परिस्थिति मे तुम्हारी भेंट पंडितजी से हुई ।" - वीच ही मे घोप ने बात काट कहा कहा । अरे बनर्जी मुसकरा उठा । प्रिन्सिपल के आने के समय जो कुछ वह कह रहा था, वह उसे अव भी याद था । किन्तु वह तो घोष के मन की थाह लेना चाहता था और इसमे उसे सफलता भी मिल गई । " हाँ, तो उसी समय मैं उर्मिला से मिला था " ~ यह कह कर बनर्जी कुछ रुका मानो किसी भूली हुई बात को याद कर रहा हो और इसके बाद आश्चर्य मे पड़े हुए घोप को अपनी रहस्यपूर्ण कथा सुनाने लगा । "स्कूल और कालेज में मैं सदा पढने में बहुत ही तेज था । विशेष प्रयत्न किए बिना ही इम्तहानो में मेरा नम्बर अञ्चल आता था । इसके सिवाय मेरे पिता के पास अट धन राशि थी और मेरे जैसे कुशाग्र बुद्धि पुत्र का पिता होने का अभिमान भी उन्हें कुछ कम न था । उन्हें राजनीति मे दिलचस्पी विलकुल न थी । अगरेजी सरकार उन्हें अपना धन उपभोग करने या संयुक्त पारिवारिक जीवन विताने में कोई बाधा उपस्थित नहीं करती थी इसलिए उसके विरुद्ध उन्हे कुछ भी शिकायत न थी । "पिताजी का ख्याल था कि मेरे जैसे तेज युवक के लिए सविल सर्विस में पहुँच कर चमक उठना कठिन न होगा । वे मेरे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और कमिश्नर ही नहीं, कि गवर्नर तक बनने का स्वप्न देसा करते। और वास्तव में उनका यह सोचना किसी प्रसम्भव वात की कल्पना वरना न था । हिन्दुस्तानी पहले भी प्रान्तों के गवर्नर हो चुके हैं। पिता जी का कहना था कि आखिर उनका पुत्र उन भारतीयों की अपेक्षा सामाजिक स्थिति, धन या लियाक़त किस बात में कम है ? "इन्हीं विचारो की पूर्ति के उद्देश्य से सब प्रबंध किया गया और मैलंटन पहुॅचकर आईशून्यसीशून्य एसशून्य परीक्षा के लिए तैयारी करने लगा । जीवन मे पहली बार मैने मेहनत की थी। पिताजी के मेरे सम्बन्ध में जो खयालात थे उनकी सचाई में साबित करके दिखाना चाहता था। इसके सिवाय मै यह भी जानता था कि यदि परीक्षा मे कही असफल हो गया तो इससे पिताजी को कितना दुस होगा । परीक्षा शुरू होने मे एक महीने की देर थी। मुझे अपने में पूरा विश्वास था और अस्सी उम्मेदवारों के बीच यदि मेरा नाम प्रथम बीस मेश्रा जाता तो इसमे तनिक भी आश्चर्य की बात न होती । परन्तु, एक दिन सायंकाल के समय जीवन के प्रति मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण ही में परिवर्तन हो गया । "उस दिन काम समाप्त करके मैं कमरे मे अकेला बैठा हुआ था, न जाने बिना किसी कारण ही मेरा मन क्यो उदास हो रहा था । मेरा स्वास्थ्य उन दिनो विलकुल ठीक था, पढाई का कार्य भी ठीक चल रहा था और परीक्षा मे पूर्ण रूप से सफल होने की भी मुझे आशा थी । रुपये-पैसे की तंगी या अन्य किसी प्रकार की चिन्ता भी मेरे लिए न थी। फिर भी एक जीव किस्म की उदासी मेरे मन पर अधिकार करती जा रही थी । इससे वचने के लिये मैं पास ही के कमरे में एक मित्र के यहाँ चला गया । वही पंडितजी और उनकी पुत्री उर्मिला से मै प्रथम बार मिला । पडितजी की दृष्टि में न जाने कैसा था कि पहली बार ही मे मैं उनकी तरफ सिच गया । इसी तरह उर्मिला को देखते ही मेरे हृदय में उसके प्रति प्रेम का वोज जम गया ।" उर्मिला से बनर्जी के प्रेम की बात सुनते ही चारपाई पर बैठा हुआ घोष चौंक पड़ा । "चौंको नही। मैं जानता हूँ कि तुम भी उर्मिला को प्रेम करते हो । मैंने तो प्रतिज्ञा की है जब तक काम पूरा न होगा तब तक प्रेम का एक शब्द भी मेरे मुँह से न निकलेगा ।" बनर्जी को यह बात सुन कर घोष ने निश्चिन्तता की साँस ली और बनर्जी फिर अपना हाल सुनाने लगा । " उस दिन हम लोगों की बातें भारतीय राजनीति के सम्बन्ध मे हुई थीं । देश के लिए पंडितजो ने जो त्याग किये थे उनकी बावत मैं पहले ही सुन चुका था और उनका प्रशसक भी था परन्तु अपने पिता को तरह मैं भी सरकार को मान कर यह सोचने लगा था कि राजनीति में दखन देना मेरा काम नहीं है । परन्तु मेरा यह भ्रम शीघ्र ही दूर हो गया । "पडितजी ने मुझ से पूछा कि लदन में मैं क्या करता । मैंने सब बातें कह दीं और उनके मन पर प्रभाव डालने के लिये यह भी बतला दिया कि सिविल सर्विस परीक्षा के सफल व्यक्तियों में प्रथम दस में अपना नाम आने की भी मुझे पूर्ण है। मेरी इस बात से उनके मुख पर एक खेदपूर्ण मुसकराहट की रेखा खिंच गयी, जिसे देखकर मुझे अनुभव होने लगा कि मैं ऐसा काम कर रहा हूँ जो मेरे उपयुक्त कदापि नहीं है और जिसे पण्डिनजी भी पसन्द नहीं करते । " मैने उनसे पूछा भी कि क्या आपके खान मे मै उचित नहीं कर रहा हूँ । इसका उन्होंने जिन शान्ति और सादगी से भरा उत्तर दिया. उसे मै कभी नहीं भूल नक्ता । उन्होंने कहा कि तुम 'हत्या' कर रहे हो । अशून्य ट "पंडितजी ने देखा कि उनके उत्तर ने मुझे मूक कर दिया। शायद उनकी उक्ति का उद्देश्य प्रभाव डाल कर मेरी उस आत्मतुष्टि की भावना का अन्त करना था । वे मुझसे देश के सम्बन्ध में बाते करते रहे और अपने दृष्टिकोण से भी बातो पर विचार करने का अनुरोध भी उन्होंने मुझमे किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने आगे एक उच्च आदर्श रखना चाहिये और इस समय हमारे आगे अपनी मातृभूमि की गुलामी को जजीरो को तोड़ने का प्रयत्न करने की कोई आदर्श उच्च नही हो सकता । देश को गुलामी मे बाँध रखने वाली जंजीरो मे सबसे मजबूत है भारतीय सिविल सर्विस और इसमे जाने वाला प्रत्येक भारतीय देश की स्वतंत्रता का जनाजा निकालने में मददगार बनता है । "तुम तो जानते ही हो कि पंडितजी के व्यक्तित्व में कितना है। उन्होने मुझे विलकुल अपना गुलाम बना लिया । मैंने उर्मिला की तरफ देखा - उसकी बड़ी वडी और सुन्दर आँखे मुझसे कुछ याचना कर रही थी। कुछ तो इस वजह से और कु पण्डितजी द्वारा पैदा किये जोश के कारण मैने उसी जगह और उसी समय सिविल सर्विस मे न बैठने का निश्चय कर लिया।" एक क्षण के लिए ऐसा जान पडा मानो बनर्जी ने मे डूब गया हो । परन्तु घोप के हिलने से वह कुछ सँभल गया और कहने लगा - "यह मेरे लिये सदा आश्चर्य की बात रही है कि अपने जीवन का यह महत्वपूर्ण निर्णय मैने किस आसानी से कर डाला और इससे भी मुझे इस बात से होता है कि ऐसा करते ही जो उदासी मुझ पर छायी हुई थी वह न जाने एकाएक कहाँ चली गई । "पण्डित उस समय कितने ही राजनीतिक कार्यों में व्यस्त थे इसलिये मुझे और उर्मिला को उन दिनों एक साथ रहने का काफी अवसर मिला करता था । उसके दिल मे देश के लिए जो जोश उसड़ा हुआ था उसका कुछ असर मुझ पर भी पड़ा और इस तरह हम दोन एक साथ रह कर अधिक आनन्द और स्वच्छन्दता का अनुभव करने लगे । उस समय परिस्थिति बड़ी शा पूर्ण जान पडती थी । ऐसा जान पड़ता था कि पण्डितजी जिन राजनीतिक सभाओं में भाग ले रहे थे, उनसे मानो भारतीय स्वतंत्रता के आन्दोलन की निकट भविष्य मे सफलता की पूर्वसूचना मिल रही हो । "एक दिन 'क्यू गार्डन' में हम लोग पास ही बैठे थे । लदन के हिसाब से उस दिन गरमी काफ़ी थी । नीले आसमान में सूरज चमक रहा था । आसपास का दृश्य वडा ही मनोरम था । प्रकृति की इस शान्त छटा का हम लोग पूरा आनन्द उठा रहे थे । "उर्मिला एकाएक वोल उठी - 'इस दृश्य को देख कर मुझे बचपन की याद उठ आई है। क्या तुम जानते हो कि एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और मेरे पिता मे बडी मित्रता थी। दोनों हेरो और आक्सफोर्ड मे साथ-साथ पढ़े थे । डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पुत्र का और मेरा वचपन साथ-साथ बीता था । हम लोग साथ हो घोडे की सवारी को जाते, टैनिस खेलते कभी बाग में बैठे हुए सुहावनी धूप का आनन्द लिया करते थे । वे कितने अच्छे दिन थे ।' "इसके बाद वह पुछ देर के लिए रुकी और फिर नुसती हुई कहने लगी- 'आश्चर्य की बात तो यह थी कि एक भारतीय दालिका और यूरोपियन वालक मे सहसा स्नेह हो येने गया । मुझे अपनी विदाई का समय भी याद है, क्योंकि अपने जीवन में इतना दुख मुभो कभी न हुआ था। उसे इंगलैंड पटने के लिए भेज दिया गया - अबकी बार जब वह रुकी तो उसकी मुद्रा कुछ गम्भीर हो गयी - 'मुझे विश्वास है कि कभी न कभी मै एकवार उससे अवश्य मिलूँगी । उसका शरीर कितना हृष्टपुष्ट था, किन्तु हृदय से उदारता और सहानुभूति वरसी पड़ती थी । भारत जाने वाले सभी यूरोपियन उसकी तरह होते तो कैसे होता ? तब राजनीतिक अशान्ति भारत मे कदापि न होती ?' "उर्मिला के मुँह से यह सब बाते सुनकर उस यूरोपियन युवक के प्रति मेरे मन मे बडी ईर्पा उत्पन्न हो गई और यहाँ तक कि सभी यूरोपियनों से मै घृणा करने लगा। दूसरी तरफ जिन राजनीतिक समितियो और कार इतनी सफलता पूर्वक हुआ था वे कुछ ही समय मे छिन्न-भिन्न हो गयी । उर्मिला और मैं बड़े हतोत्साह हो गए । हम लोग सशस्त्र क्रान्ति और हिंसात्मक कार्यों की बातें करने लगे। पडितजी भी हमारे विचार जान गए। उन्होंने कहा कि इन कान्फरेंसो और समितियो को पूर्ण सफलता तो लगभग असम्भव सी बात थी। अभी इस तरह की कितनी ही कान्फरेंसों और धैर्य के साथ प्रचार करते रहने की आवश्यकता है। पंडितजी ने कहा कि यदि हिंसात्मक उपायो का किया गया तो भारतीय स्वतंत्रता का आन्दोलन एक सौ वर्ष के लिए पिछड़ जायगा । " इसके बाद पंडितजी और उर्मिला भारत वापस चले आये। मैं लंदन मे अकेला रह गया । एक दूसरे से विदा होने के पूर्व मैंने और उर्मिला ने जीवन भर देश सेवा करने का व्रत ग्रहण किया। मैंने पिता को लिख दिया कि मै सिविल सर्विस की परीक्षा में नही बैठ रहा हूँ । उन्हें सफाई देने की कोशिश भी मैने न की, क्योकि जानता था कि ऐसा करना बेकार है। मैंने लिखा कि रुपया भेजता बन्द कर दीजिए, क्योंकि मैंने अपने निराले मार्ग पर चलने का निश्चय कर लिया है । उस दिन के बाद आज तक पिता से मेरा कभी पत्र व्यवहार नहीं हुआ। वे यह भी नहीं जानते कि मैं जीवित भी हूँ या नहीं ?" पिता की याद ही वनर्जी फिर एक बार सोच मे पड़ गया । वह उन्हें हद से ज्यादा चाहता था, किन्तु देश प्रेम को भावना ने उसको भावुक प्रकृति पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिसका वीजारोपण पडितजी के आकर्षक व्यक्तित्व और उर्मिला के प्रेम के कारण हुआ था । घोष ने पूछा- "जब पिता ने खर्च भेजना वन्द कर दिया तव तुमने अपना कार्य कैसे चलाया ?" बनर्जी ने कुछ हिचकिचाने के बाद कहा - "मेरे जीवन का यह भाग ऐसा है, जिसे भूल सकूँ तो मुझे खुशी ही होगो । हृदय में देश प्रेम की लहरें हिलोर ले रही थी, युवावस्था थी, और जोश भी कुछ कम न था । रुपया मिलना बन्द होने पर मुझे जोवन की यथार्थता से सामना पडा । सर्कस के प्रोग्राम मैंने चेंचे, डाक में कुलो का काम मैंने किया, भूखा मरा और सर्द रातें चेचो पर लेटकर चिता ढीं। किन्तु इस बीच में उर्मिला से पत्रव्यवहार वगवर जारी रहा । उसने नव-भारत समिति की स्थापना की और मुझसे उसकी शाखा लदन मे खोलने का अनुरोध किया । " इस समिति में आखिरकार दो दल हो गए । वैध आन्दोलन के पक्षपाती पंडितजी के अनुयायी बने रहे और विचार वाले भारत में हमारे प्रधान के सम्पर्क में आ गए । अपने ही अनुरोध के कारण मुझे इस जिले में भेजा गया । उर्मिला की सहानुभृति सदा उम्र विचार वालो की तरफ थी। वह हमारे ढल मे मिलने वाला हो थी कि इस बीच में उसके पुराने दोस्त और 'चहेने पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट कहीं से टपक पडे । वनर्जी ने 'चहेते' शब्द का प्रयोग जान बूझकर घोष को उत्तेजित करने के लिए किया था और तीर निशाने पर बैठ भी गया । "क्या " - घोष चारपाई से उठ कर उत्तेजित होकर चिल्ला उठा । "अरे चुप रहो" - बनर्जी ने धीरे से कहा- "शान्त होकर वैठ जाओ।" घोप कुछ देर बाद फिर चारपाई पर अपने पूर्व के स्थान पर बैठ गया । वह उर्मिला पर मरता था । बनर्जी ने उसके हृदय मे अपने प्रति सम्मान और भय की भावना को जन्म देकर पहले ही अपना गुलाम बना लिया था । उर्मिला से प्रेम के उसका अनुसरण करने के लिए और भी तैयार हो गया । सुपरिन्टेन्डेन्ट पुलिस को आखिर उर्मिला के प्रति ऐसी भावना रखने का अधिकार ही क्या था ? भावुक प्रकृति का होने के कारण घोप के विचार ब्रायन की तरफ से बिलकुल बदल गए । वनर्जी चोला - "उर्मिला ब्रायन से प्रेम करती है। उस पर उनका प्रभाव बहुत अधिक है। वह जान बूझकर हमारे साथ विश्वासघात कभी न करेगी, पर जब तक पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट का प्रभाव उस पर रहेगा तब तक वह हमारे कार्यों मे पूरा योग न देगी। उनकी हत्या करके एक तरफ तो हम उर्मिला को बचा लेगे और दूसरी तरफ अपने एक प्रतिस्पर्धी का अन्त करके दल की गोपनीय स्थिति की रक्षा कर लेंगे। अब शायद तुम समझ गए होगे कि मैंने मिश्रोकले के बजाय ब्रायन को क्यों चुना था।" घोष के अन्तर मे द्वन्द्व हो रहा था, सॉस जोरो से चल रही थी । उसके मुँह से "हाँ" के सिवाय और कुछ न निकल सका ।
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भारत कोविड-19 महामारी से उत्पन्न लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद इस सीजन में आम के निर्यात को बढ़ावा देने में सक्षम रहा है। खासतौर पर देश के गैर-पारंपरिक उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों से यह निर्यात सामान्य से ज्यादा हुआ है।
इस पहल के हिस्से के रूप में, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने भारतीय दूतावास और आयातक लुलु समूह के सहयोग से आज दुबई में उत्तर भारत के आम की किस्मों के लिए आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश मंडी बोर्ड के सहयोग से चौसा और लंगड़ा सहित रसदार किस्मों को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में प्रदर्शित किया जा रहा है।
हाल ही में, पूर्वी क्षेत्र से विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में आम निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से भौगोलिक पहचान (जीआई) प्रमाणित फाजिल आम की किस्म की एक खेप बहरीन को निर्यात की गई थी। एपीडा द्वारा पंजीकृत कोलकाता के डीएम इंटरप्राइजेस द्वारा फाजिल आम की खेप का निर्यात बहरीन के अल जज़ीरा समूह को किया गया।
एपीडा गैर-पारंपरिक क्षेत्रों और राज्यों से आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहा है। एपीडा आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठकें और उत्सव आयोजित करता रहा है।
एपीडा ने हाल ही में दोहा, कतर में एक आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया जहां पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से जीआई प्रमाणित सहित आम की नौ किस्मों को आयातक फैमिली फूड सेंटर के स्टोर पर प्रदर्शित किया गया।
जिन नौ किस्मों का निर्यात किया गया उनमें जीआई प्रमाणित खिरसापति (मालदा, पश्चिम बंगाल), लखनभोग (मालदा, पश्चिम बंगाल), फाजली (मालदा, पश्चिम बंगाल), दशहरी (मलीहाबाद, उत्तर प्रदेश), आम्रपाली और चौसा (मालदा, पश्चिम बंगाल) और लंगड़ा (नदिया, पश्चिम बंगाल) शामिल हैं।
जून, 2021 में, बहरीन में एक सप्ताह तक चलने वाले भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें तीन जीआई प्रमाणित खिरसापति और लक्ष्मणभोग (पश्चिम बंगाल), जरदालु (बिहार) सहित आम के फल की 16 किस्मों को प्रदर्शित किया गया था। बहरीन में समूह के 13 स्टोरों के माध्यम से आम की किस्में बेची गईं। एपीडा पंजीकृत निर्यातक द्वारा आमों को बंगाल और बिहार के किसानों से मंगवाया गया था।
एपीडा ने जर्मनी के बर्लिन में भी आम उत्सव का आयोजन किया।
दक्षिण कोरिया को आम का निर्यात बढ़ाने के लिए, एपीडा ने भारतीय दूतावास, सियोल और कोरिया में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से पहले एक वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया था।
इस सीजन में पहली बार, भारत ने आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तौड़ जिलों के किसानों से प्राप्त जीआई प्रमाणित बंगनपल्ली और अन्य किस्म के सुरवर्णरेखा आमों की 2.5 मीट्रिक टन (एमटी) की खेप दक्षिण कोरिया को भेजी है।
भारत में आम को 'फलों का राजा' भी कहा जाता है और प्राचीन शास्त्रों में इसे कल्पवृक्ष (इच्छा देने वाला पेड़) कहा गया है। हालांकि भारत के अधिकांश राज्यों में आम के बागान हैं मगर उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का आम के कुल उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा है।
अल्फांसो, केसर, तोतापुरी और बंगनपल्ली भारत से निर्यात की जाने वाली प्रमुख किस्में हैं। आम का निर्यात मुख्य रूप से तीन रूपों में होता हैः ताजा आम, मैंगो पल्प और मैंगो स्लाइस।
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भारत कोविड-उन्नीस महामारी से उत्पन्न लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद इस सीजन में आम के निर्यात को बढ़ावा देने में सक्षम रहा है। खासतौर पर देश के गैर-पारंपरिक उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों से यह निर्यात सामान्य से ज्यादा हुआ है। इस पहल के हिस्से के रूप में, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ने भारतीय दूतावास और आयातक लुलु समूह के सहयोग से आज दुबई में उत्तर भारत के आम की किस्मों के लिए आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश मंडी बोर्ड के सहयोग से चौसा और लंगड़ा सहित रसदार किस्मों को संयुक्त अरब अमीरात में प्रदर्शित किया जा रहा है। हाल ही में, पूर्वी क्षेत्र से विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में आम निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से भौगोलिक पहचान प्रमाणित फाजिल आम की किस्म की एक खेप बहरीन को निर्यात की गई थी। एपीडा द्वारा पंजीकृत कोलकाता के डीएम इंटरप्राइजेस द्वारा फाजिल आम की खेप का निर्यात बहरीन के अल जज़ीरा समूह को किया गया। एपीडा गैर-पारंपरिक क्षेत्रों और राज्यों से आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहा है। एपीडा आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठकें और उत्सव आयोजित करता रहा है। एपीडा ने हाल ही में दोहा, कतर में एक आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया जहां पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से जीआई प्रमाणित सहित आम की नौ किस्मों को आयातक फैमिली फूड सेंटर के स्टोर पर प्रदर्शित किया गया। जिन नौ किस्मों का निर्यात किया गया उनमें जीआई प्रमाणित खिरसापति , लखनभोग , फाजली , दशहरी , आम्रपाली और चौसा और लंगड़ा शामिल हैं। जून, दो हज़ार इक्कीस में, बहरीन में एक सप्ताह तक चलने वाले भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें तीन जीआई प्रमाणित खिरसापति और लक्ष्मणभोग , जरदालु सहित आम के फल की सोलह किस्मों को प्रदर्शित किया गया था। बहरीन में समूह के तेरह स्टोरों के माध्यम से आम की किस्में बेची गईं। एपीडा पंजीकृत निर्यातक द्वारा आमों को बंगाल और बिहार के किसानों से मंगवाया गया था। एपीडा ने जर्मनी के बर्लिन में भी आम उत्सव का आयोजन किया। दक्षिण कोरिया को आम का निर्यात बढ़ाने के लिए, एपीडा ने भारतीय दूतावास, सियोल और कोरिया में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से पहले एक वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया था। इस सीजन में पहली बार, भारत ने आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तौड़ जिलों के किसानों से प्राप्त जीआई प्रमाणित बंगनपल्ली और अन्य किस्म के सुरवर्णरेखा आमों की दो.पाँच मीट्रिक टन की खेप दक्षिण कोरिया को भेजी है। भारत में आम को 'फलों का राजा' भी कहा जाता है और प्राचीन शास्त्रों में इसे कल्पवृक्ष कहा गया है। हालांकि भारत के अधिकांश राज्यों में आम के बागान हैं मगर उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का आम के कुल उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा है। अल्फांसो, केसर, तोतापुरी और बंगनपल्ली भारत से निर्यात की जाने वाली प्रमुख किस्में हैं। आम का निर्यात मुख्य रूप से तीन रूपों में होता हैः ताजा आम, मैंगो पल्प और मैंगो स्लाइस।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
गणित में अनुपात (रेशियो) समान प्रकार की दो संख्याओं के बीच सम्बन्ध को कहते हैं। प्रायः इसे "a संबंध b" या a:b कहते हैं। उदाहरण के लिये यदि दो पेड़ों की उँचाइयों का अनुपात ३ः५ है तो इसका अर्थ यह है कि यदि पहले पेड़ की ऊंचाई ३ मीटर है तो दूसरे की ऊंचाई ५ मीटर होगी। अथवा पहले की उँचाई ९ मीटर हो तो दूसरे की १५ मीटर होगी। श्रेणीःप्रारम्भिक गणित श्रेणीःबीजगणित श्रेणीःचित्र जोड़ें. उत्पादकता (Productivity) उत्पादन के दक्षता की औसत माप है।उत्पादन प्रक्रिया में आउटपुट और इनपुट के अनुपात को उत्पादकता कह सकते हैं। उत्पादकता का विचार सर्वप्रथम 1766 में प्रकृतिवाद के संस्थापक क्वेसने के लेख में सामने आया। बहुत समय तक इसका अर्थ अस्पष्ट रहा। सम्पूर्ण उत्पादकता वस्तुओं एवं सेवाओं के रूप में उत्पाद तथा सम्पत्ति के उत्पादन और उत्पादन की प्रक्रिया में प्रयोग किये गये साधनों की लागत के मध्य अनुपात का द्योतक है। उत्पादन के अंतर्गत उन सभी वस्तुओं एवं सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है, जिनके अंतर्गत न केवल औद्योगीकरण एवं कृषि संबंधी उत्पाद पदार्थ सम्मिलित होते हैं, बल्कि चिकित्सकों, शिक्षकों, दुकानों, कार्यालयों, परिवहन संस्थानों तथा अन्य सेवा उद्योगों में रत व्यक्ति भी सम्मिलित होते हैं। लागत से हमारा अभिप्राय उत्पादन में सम्मिलित सभी प्रकार के प्रयासों अर्थात् प्रबंधकों, शिल्पियों एवं श्रमिकों क कार्य से है। इस प्रकार पूर्ण उत्पादकता की अवधारणा को स्पष्ट करने हेतु निम्न सूत्र को प्रयोग में लाया जा सकता है- .
अनुपात और उत्पादकता आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
अनुपात 1 संबंध नहीं है और उत्पादकता 5 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (1 + 5)।
यह लेख अनुपात और उत्पादकता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गणित में अनुपात समान प्रकार की दो संख्याओं के बीच सम्बन्ध को कहते हैं। प्रायः इसे "a संबंध b" या a:b कहते हैं। उदाहरण के लिये यदि दो पेड़ों की उँचाइयों का अनुपात तीनःपाँच है तो इसका अर्थ यह है कि यदि पहले पेड़ की ऊंचाई तीन मीटर है तो दूसरे की ऊंचाई पाँच मीटर होगी। अथवा पहले की उँचाई नौ मीटर हो तो दूसरे की पंद्रह मीटर होगी। श्रेणीःप्रारम्भिक गणित श्रेणीःबीजगणित श्रेणीःचित्र जोड़ें. उत्पादकता उत्पादन के दक्षता की औसत माप है।उत्पादन प्रक्रिया में आउटपुट और इनपुट के अनुपात को उत्पादकता कह सकते हैं। उत्पादकता का विचार सर्वप्रथम एक हज़ार सात सौ छयासठ में प्रकृतिवाद के संस्थापक क्वेसने के लेख में सामने आया। बहुत समय तक इसका अर्थ अस्पष्ट रहा। सम्पूर्ण उत्पादकता वस्तुओं एवं सेवाओं के रूप में उत्पाद तथा सम्पत्ति के उत्पादन और उत्पादन की प्रक्रिया में प्रयोग किये गये साधनों की लागत के मध्य अनुपात का द्योतक है। उत्पादन के अंतर्गत उन सभी वस्तुओं एवं सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है, जिनके अंतर्गत न केवल औद्योगीकरण एवं कृषि संबंधी उत्पाद पदार्थ सम्मिलित होते हैं, बल्कि चिकित्सकों, शिक्षकों, दुकानों, कार्यालयों, परिवहन संस्थानों तथा अन्य सेवा उद्योगों में रत व्यक्ति भी सम्मिलित होते हैं। लागत से हमारा अभिप्राय उत्पादन में सम्मिलित सभी प्रकार के प्रयासों अर्थात् प्रबंधकों, शिल्पियों एवं श्रमिकों क कार्य से है। इस प्रकार पूर्ण उत्पादकता की अवधारणा को स्पष्ट करने हेतु निम्न सूत्र को प्रयोग में लाया जा सकता है- . अनुपात और उत्पादकता आम में शून्य बातें हैं । अनुपात एक संबंध नहीं है और उत्पादकता पाँच है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख अनुपात और उत्पादकता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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सऊदी अरब ने 2060 तक ज़ीरो-नेट इमिशन का लक्ष्य रखा है. शनिवार को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव (एसजीआई) के प्रमुख के तौर पर एक पर्यावरण सम्मेलन में इसकी घोषणा की.
क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब हर साल 27 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए 186. 63 अरब डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी.
क्राउन प्रिंस ने कहा कि एसजीआई के तहत पहले चरण में साल 2030 तक हर साल कार्बन उत्सर्जन में 278 मेगा टन की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.
इस साल की शुरुआत के एसजीआई समिट में जो लक्ष्य रखा गया था, उसका यह दोगुना से भी ज़्यादा है.
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सऊदी अरब ने दो हज़ार साठ तक ज़ीरो-नेट इमिशन का लक्ष्य रखा है. शनिवार को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव के प्रमुख के तौर पर एक पर्यावरण सम्मेलन में इसकी घोषणा की. क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब हर साल सत्ताईस करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए एक सौ छियासी. तिरेसठ अरब डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी. क्राउन प्रिंस ने कहा कि एसजीआई के तहत पहले चरण में साल दो हज़ार तीस तक हर साल कार्बन उत्सर्जन में दो सौ अठहत्तर मेगा टन की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. इस साल की शुरुआत के एसजीआई समिट में जो लक्ष्य रखा गया था, उसका यह दोगुना से भी ज़्यादा है.
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जलकारोंवा स्वरूप विकास
चन भामह ने किया था। भामह की दृष्टि म अथ एवं उसको अभिव्यक्त करने वाले श्लेष के आधार है। आचार्यों न शब्एलेप एव अथलेप अलग-अलग तो माने हैं, परंतु उनकी क्सौटी पर सब सहमत नहीं हैं ।
शप एव अथश्लेप के अन्तर के कुछ स्थूल आधार हैं। शब्दले अनेकाथव शब्दाव प्रयोग पर निर्भर है अत पर्यायवाची शब्द बदलने पर श्लेष नहीं रहता। इसने विपरीत अथश्लेप एवाय शब्द प्रयोग पर निर्भर है और पर्यायवाची शब्द रख दन पर भी वह नष्ट नहीं होता। मम्मट ने भेदो का नहीं परंतु श्लेप के शाब् एव आथ रूपोवा प्रतिपादन किया है।
भामह, दण्डौ आदि प्राचीन एवं रुय्यक, जगनाथ आदि नवीन आचाय श्लेप को अर्थालकार भी मानते हैं । रुम्यक वे अनुसार समगपद श्लेष शब्दालकार है परन्तु अभगवद श्लेष केवल अर्थालवार । स्ट्रट ने शश्लेष एवं अथश्तेष वा विवेचन अलग-अलग अध्याया में किया है। व्रजभाषा के आचाय प्राथ शदश्लेष को ही महत्त्व देते रहे हैं, खडी चोली के आचार्यों ने शब्द श्लेप तथा जथश्लप अलवारी वा अलग-अलग विवेचन किया है यद्यपि महत्व शब्दश्लेप को हो प्रदान किया है ।
२५ अपह्नति
उपह, निम भूनाथ' (उपमय ) का निषेध रहता है इसमें कुछ उपमा-तत्त्व' अन्तर्निहित रहता है। उपमा का सौदय अपह्नुति के सौदस में विलीन हो जाता है। उदाहरण सरल तथा स्पष्ट है।
दण्डी के अनुसार प्रकृत के गुणकियादिरूप धम को छिपाकर धर्मान्तरस्पारोप्यमाण अय अथ का कथन अपह्न ति वा सामान्य रूप है जिसका उदाहरण हैन पञ्चेषु स्मरस्तस्य सहस्र परिणामिति ॥ २ ॥ ३०४।।
अपह्नु ुति के मुख्य भेद दो हैं - विषयापह्नुति तथा स्वरूपाह्नति । विषयाह्नतिम वर्ण्य के निषेध्य तथा आरोप्य दोनो धर्मों का वर्णन होता है, उदाहरण म - चादन आदि विरहिणी के लिए अग्निमय है, साथ ही अन्य जनो के लिए शीतल भी हैंचंदन चंद्रिका मन्दो गधवाहश्च दक्षिण । सेयमग्निमयी सृष्टिर्मयि शौता परान् प्रति ॥ २॥३०५।।
१ भूतार्थापह्नवादस्या क्रियते चामिधा यथा ॥ ३ ॥२१॥
२ प्रपह्न तिरमीष्टा च किचिदन्तगतोपमा ।।३।२१।।
३ अपह्न तिरपह्नत्य किचिन्त्यार्थदर्शनम् ॥ काव्यामो २।३०४॥
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जलकारोंवा स्वरूप विकास चन भामह ने किया था। भामह की दृष्टि म अथ एवं उसको अभिव्यक्त करने वाले श्लेष के आधार है। आचार्यों न शब्एलेप एव अथलेप अलग-अलग तो माने हैं, परंतु उनकी क्सौटी पर सब सहमत नहीं हैं । शप एव अथश्लेप के अन्तर के कुछ स्थूल आधार हैं। शब्दले अनेकाथव शब्दाव प्रयोग पर निर्भर है अत पर्यायवाची शब्द बदलने पर श्लेष नहीं रहता। इसने विपरीत अथश्लेप एवाय शब्द प्रयोग पर निर्भर है और पर्यायवाची शब्द रख दन पर भी वह नष्ट नहीं होता। मम्मट ने भेदो का नहीं परंतु श्लेप के शाब् एव आथ रूपोवा प्रतिपादन किया है। भामह, दण्डौ आदि प्राचीन एवं रुय्यक, जगनाथ आदि नवीन आचाय श्लेप को अर्थालकार भी मानते हैं । रुम्यक वे अनुसार समगपद श्लेष शब्दालकार है परन्तु अभगवद श्लेष केवल अर्थालवार । स्ट्रट ने शश्लेष एवं अथश्तेष वा विवेचन अलग-अलग अध्याया में किया है। व्रजभाषा के आचाय प्राथ शदश्लेष को ही महत्त्व देते रहे हैं, खडी चोली के आचार्यों ने शब्द श्लेप तथा जथश्लप अलवारी वा अलग-अलग विवेचन किया है यद्यपि महत्व शब्दश्लेप को हो प्रदान किया है । पच्चीस अपह्नति उपह, निम भूनाथ' का निषेध रहता है इसमें कुछ उपमा-तत्त्व' अन्तर्निहित रहता है। उपमा का सौदय अपह्नुति के सौदस में विलीन हो जाता है। उदाहरण सरल तथा स्पष्ट है। दण्डी के अनुसार प्रकृत के गुणकियादिरूप धम को छिपाकर धर्मान्तरस्पारोप्यमाण अय अथ का कथन अपह्न ति वा सामान्य रूप है जिसका उदाहरण हैन पञ्चेषु स्मरस्तस्य सहस्र परिणामिति ॥ दो ॥ तीन सौ चार।। अपह्नु ुति के मुख्य भेद दो हैं - विषयापह्नुति तथा स्वरूपाह्नति । विषयाह्नतिम वर्ण्य के निषेध्य तथा आरोप्य दोनो धर्मों का वर्णन होता है, उदाहरण म - चादन आदि विरहिणी के लिए अग्निमय है, साथ ही अन्य जनो के लिए शीतल भी हैंचंदन चंद्रिका मन्दो गधवाहश्च दक्षिण । सेयमग्निमयी सृष्टिर्मयि शौता परान् प्रति ॥ दो॥तीन सौ पाँच।। एक भूतार्थापह्नवादस्या क्रियते चामिधा यथा ॥ तीन ॥इक्कीस॥ दो प्रपह्न तिरमीष्टा च किचिदन्तगतोपमा ।।तीन।इक्कीस।। तीन अपह्न तिरपह्नत्य किचिन्त्यार्थदर्शनम् ॥ काव्यामो दो।तीन सौ चार॥
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Demands for Grants
करना चाहता हूं कि इस विषय पर भी गौर किया जाय ।
जहां तक हिन्दुस्तान में और हिन्दुस्तान से बाहर की जाने वाली खरीदो-फ़रोक्त का सवाल है, मैं यह कहना चाहता हूं कि इस सम्बन्ध में एक संयुक्त डिपार्टमेंट स्थापित किया जाना चाहिये, जो कि हर एक डिपार्टमेंट- चाहे वह डिफेन्स डिपार्टमेंट हो या रेलवे डिपार्टमेंट हो की खरीदीकरोस्त का काम करे। इस संस्था में फ़ाइनेंस मिनिस्ट्री का एक उच्च से उच्च अधिकारी रखा जाय, जो इस बात को देखे कि हमारे फाइनेंसिज को ठीक तरह से काम में लाया जाता है या नहीं। इस तरह की व्यवस्था करने पर आापको खरीदो-फ़रोस्त के कार्य में मदद मिल सकेगी मीर अलग अलग तरीकों पर खरीदो-फ़रोख्त करने से विदेशों में हमारा जो रुपया खर्च हो रहा है, उसको हम बहुत कुछ बचा सकेंगे ।
सबसिडाइज्ड इंडस्ट्रियल हाउसिंग स्कीम के अन्तर्गत फ़र्स्ट फ़ाइव यीभर प्लान में भिन्न भिन्न एजेन्सीज के जरिये-जैसे स्टेट गन्मेंट्स प्राइवेट एम्प्लायर्ज भर इंडस्ट्रियल वर्कर्ज की को-आपरेटिव्ज वगैरह -७८,०२६ मकान बनाने की तजवीज की गई थी, जिन पर कुल खर्चा २२.३२ करोड़ भाता । लेकिन मालूम नहीं किन कारणों से प्रथम पंचवर्षीय योजना में १३·२६ करोड़ रुपया बतौर कर्जा और सबसिडी के दिया गया और सिफ़ ४३,८३१ मकान बनाये था सके ।
दूसरी पंचवर्षीय योजना में ४५ करोड़ रुपये रखे जाने की तजवीज थी और १,२८,००० पर बनाये जाने का लक्ष्य सामने रखा गया, लेकिन बाद में मैटीरियल की कीमतें बढ़ थाने के कारण यह तय किया गया कि १,०५,००० घर बनाये जायेंगे । ४५ करोड़ बपये की रकम में से भिन्न भिन्न स्टेट सरकारों
२०६६ करोड़ रुपया दिया जाना है । इस रिपोर्ट के हमें यह पता नहीं चला कि
Demands for Grants 7472
स्टेट गवर्नमेंट्स को इस स्कीम में कितनी कामयाबी हासिल हुई है । कितना उन्होंने सर्च किया है और कितना रुपया खर्च नहीं किया है । उसके साथ ही साथ १९५६-५७ में जबकि आपके दूसरे प्लान का पहला वर्ष शुरू हुआ था आपने यह रखा था कि माप १२,१६७ मकान बनायेंगे जिनकी कुल लागत ३.१९ करोड़ रुपया होगी । मगर इस साल प्रापकी फिगर्स के मनुसार ही प्रापने ३.३२ करोड़ रुपया खर्च किया है। यदि भाप देखें तो आपको पता चलेगा कि जो बजिटिड एमाउंट इस वक्त है वह ७.६५ करोड़ पया है और कुल १०,५१६ मकान ही बन सके है। इस तरह से जो धीरे से काम हो रहा है, उस तरफ मैं प्रापका ध्यान दिलाता हूं भीर में चाहता हूं कि भ्राप जल्दी-जल्दी काम करें। अगर मापने इसी रफ्तार से काम किया तो मझे शक है कि आप इनको पूरा भी कर सकेंगे इस वास्ते में प्रार्थना करता हूं कि आप इस भोर ध्यान दें और जल्दी से इन स्कीमों को पूरा करने की कोशिश करें।
इसके साथ ही साथ यदि ग्राप १९५७-५८ के बजट को देखें तो आपको मालूम होगा कि हमने १०,३०० घर ३.६४ करोड़ रुपये की लागत पर बनाने की योजना की थी और कहा था कि १ अप्रैल १९५७ से १५ मार्च १६५८ तक हम इतने घर बना देंगे। दरअसल में आपने ३.१४ करोड़ पया खर्च किया है जबकि बजट एलाटमेंट ४०६५ करोड़ की थी। इस पये में से आप केवल १३,५५७ घर ही बना सके है ३१ दिसम्बर १६५७ तक । इस तरह से इन सब चीजों के देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि हमें अपनी स्कीमों को भ्रमली जामा पहनाने के लिए और भी तेजी लानी होगी और और भी शीघ्रता के साथ. उनको कार्यान्वित करना होगा ।
अब में अशोका होटल के सम्बन्ध में अपने विचार आपके सम्मुख रखना चाहता हूँ ? गवर्नमेंट ने इस होटल को बनाने के लिए
7473 Demands for Grante · · 31 MARCH 1938 Demänds för Org
[सरदार भ० डि० सहमन] १ करोड़ ७५ लास रुपया कम्पनी को एडवांस किया है और उस पर पांच प्रतिशत के हिसाब से ब्याज लिया जाएगा। इस तरह से कम्पनी के पास जो २०७५ करोड़ रुपया हो गया जिसमें से उसने २०५८ करोड़ रुपया कंस्ट्रक्शन पर खर्च कर दिया है। उसे अभी तक तकरीबन १७,००,००० रुपये के जो बिल है और जो पेंडिंग है उनकी पेमेंट करती है। जो बनाने का काम था वह ३१ अगस्त १९५७ को खत्म हो गया था, जो बिल पेंडिग हैं उन्हें शीघ्रतया करना चाहिये अब आप देखें तो आपको पता चलेगा कि ३१ जनवरी १९५८ तक २७,११५ लोग यहां पर रात्रि में भाकर ठहरे। अगर इसको वर्क भाउट किया जाए तो २२० की भोसत बैठती है । २२० लोग प्रोसतन हर रोज यहां पर प्राते जाते हैं। अब आप थोड़ी देर के लिए मान लें कि २४० या २५० लोग एक दिन में यहां पर भा जायें तो उस वक्त उस सूरत में ग्राप उनके लिए क्या व्यवस्था करेंगे, यह में प्रापसे जानना चाहूंगा । प्राप देखें कि ३० सितम्बर १६५७ को यहां पर १६,४९७ लोग भाये थे जिनमें अधिकतर विदेशी भाई थे। ग्राप कहते हैं कि ७३६७ प्रतिशत लोग जो कि विदेशी थे इस होटल में ठहरे। इसके लिए में प्रापको बधाई देता हूं कि इसकी व्यवस्था और ठीक तरह से चलेगी तथा इस होटल की प्रख्याति होगी ।
अब में उन फ्लैट्स की तरफ आपका ध्यान प्राकर्षित करना चाहता हूं जिनमें कि हम लोग रहते हैं। इन क्वार्टरों के भागे हैज की हालत खराब होने की वजह से बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बराबर दूसरे लोग हमारे मकानात के सामने से गुजरते रहते हैं । यदि हम बाहर भी बैठे होते हैं तो भी उनको रोकने की व्यवस्था हम नहीं कर पाते हैं और यदि इन फ्लैट्स में आकर देखें तो आपको सारी पोजीशन का पता लग जायेगा । मैं चाहता हूं कि आप इसमें एक दो दिन मकर रहें और आपको
सारी दिक्कतों का पता चल जाएगा। संबं आापको मालूम हो जाएगा कि बहुत से ताबाद में लोग यहां से निकलते रहते हैं और कोई प्राइवेसी नहीं रह जाती। हम लोग अपने घर वालों के साथ, बाल बच्चों के साथ बाहर बैठ नहीं सकते हैं और न अपने मित्रों के साथ बाहर भाकर बैठ सकते हैं। इसके बारे में तजवीज दी गई थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं भा है। यह कहा गया था कि यहां पर भाप कोई बाउंडरी रख दें और अगर मौर कुछ नहीं हो सकता तो तार की बाउंडरी रख दें। मैं चाहता हूं कि आप इस ओर ध्यान दें। साथ वहां पर जो घास का लान लगाया जाता है और अच्छी तरह से लगाया जाना चाहिए। जब हम मच्छे से खर्च करते हैं तो हमें देखना चाहिये कि काम भी अच्छा हो ।
अन्त में में इतना ही कहूंगा कि हमारे फ्लैट्स में श्राप कोई बाउंडरी बना दें या तार लगा ताकि बाहर के लोग वहां से न गुजर सकें। अगर आपने सकी व्यवस्था कर दी तो हम लोग वहां पर कि तरह से रह सकेंगे।
स मंत्रालय की जो मांगें हैं उनका समर्थन करता और जो का आपने प्रशोका होटल के बारे में किया है, उसके लिये मै आपको धन्यवाद देता हूं ।
Shri Easwara Iyer : Mr. Speaker, within the time limit prescribed, I shall confine myself to a few remarks regarding the housing schemes of the Central Government, the working conditions of the C.P.W.D. employees and also about the Asoka Hotel.
With regard to the housing schemes, I would like to submit before this House that there is a lack of planning with respect to office accommodation, or with respect to the colonies that have been built or with respect to the buildings for various residential quarters of government servants. With respect to thena colonies that have been built in Vinay Nagar or West Vinay Nagar,
Agents: 31 MARCH 1958 Demands for Grants 7475
attendance before 10 o'clock in the morning. So, if some of these multistoryed buildings can be built near about Vinay Nagar or East Vinay Nagar, it will not only relieve the congestion of traffic but also be conducive to their economic situation. That is a thing which I would place before the hon. Minister for his consideration in respect of the future building plans regarding office accommodation.
already drawn the attention of Minister, I believe, during the 'debate: in the last session, to the fact that the buildings are far from being habitable. There are not only cracks on the wall, but they are leaking, and the doors and windows there have lost their hinges.
Quite apart from that, if we take . for example, the G type quarters, what do we find? These quarters are called two-room tenements, but there is hardly any space for anybody to live there. With regard to the upstairs, it is seen there is great difficulty in getting water upstairs, because in the upstairs flats there is no water-tap provided. The persons living upstairs have to come down to drink water even in a summer night.
Mr. Speaker: There are no water taps at all?
Shri Easwara Iyer: Not in the upstairs. Now, there are about 12,000 persons living in that colony, and in the case of such colonies, even the ordinary amenities such as schools or recreation clubs are not provide In this case, a market also is not provided. Though I do not say that it is absolutely difficult, it is very difficult to live there, particularly when one finds that there are no amenities regarding recreation clubs or markets of or even the ordinary necessities life.
That is why I would like to bring to the attention of the Minister that we would have to think about office accommodation being provided near about the residences of these lowpaid employees. We find in Delhi several multi-storeyed buildings coming up one after the other round about Connaught Place. With regard to the highly-paid officers who have got automobiles like motor-cars or other means of transport of their own, the coming up of these multistoreyed buildings nearer their residencies may be quite welcome, but so far as the low-paid employees are concerned, the difficulty is they get no transport and they are not able to oame in time to office and give their
Another point that I would like to bring to the attention of this House is that a number of instances of corruption have been found out in respect of these private contracts. It is not very easy to enumerate or give specific instances of corruption garding private contracts, but the system of giving private contracts in a modern progressive society must be on the decrease. That is what I want to submit. We must give more and more work for the departmental employees and reduce the private contract and do away with private contract if possible.
Now, with regard to ordinary maintenance work such as repair, electric wiring, etc., these things could have been very well done by the departmental employees like the CPWD employees. If we give this work to the private contractors, what happens? As I have already mentioned, these private contractors have got an unwritten code and with this unwritten code they have been able to get at the officers. It is a matter which is well known. How can a contractor give a tender which is lower than the estimated one? For example, in respect of a contract, if the lowest tender is to be accepted, sometimes, or more often than not, if I may say so, the tender comes below the estimated rate. How can the lowest tender come below even the estimated rate? That will lead only to one conclusion. Either the officers who have given the estimate are incompetent or incapable of preparing the estimate or they are cheating the Government. Otherwise, the contractor is not doing his work properly according to the specifica
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Demands for Grants करना चाहता हूं कि इस विषय पर भी गौर किया जाय । जहां तक हिन्दुस्तान में और हिन्दुस्तान से बाहर की जाने वाली खरीदो-फ़रोक्त का सवाल है, मैं यह कहना चाहता हूं कि इस सम्बन्ध में एक संयुक्त डिपार्टमेंट स्थापित किया जाना चाहिये, जो कि हर एक डिपार्टमेंट- चाहे वह डिफेन्स डिपार्टमेंट हो या रेलवे डिपार्टमेंट हो की खरीदीकरोस्त का काम करे। इस संस्था में फ़ाइनेंस मिनिस्ट्री का एक उच्च से उच्च अधिकारी रखा जाय, जो इस बात को देखे कि हमारे फाइनेंसिज को ठीक तरह से काम में लाया जाता है या नहीं। इस तरह की व्यवस्था करने पर आापको खरीदो-फ़रोस्त के कार्य में मदद मिल सकेगी मीर अलग अलग तरीकों पर खरीदो-फ़रोख्त करने से विदेशों में हमारा जो रुपया खर्च हो रहा है, उसको हम बहुत कुछ बचा सकेंगे । सबसिडाइज्ड इंडस्ट्रियल हाउसिंग स्कीम के अन्तर्गत फ़र्स्ट फ़ाइव यीभर प्लान में भिन्न भिन्न एजेन्सीज के जरिये-जैसे स्टेट गन्मेंट्स प्राइवेट एम्प्लायर्ज भर इंडस्ट्रियल वर्कर्ज की को-आपरेटिव्ज वगैरह -अठहत्तर,छब्बीस मकान बनाने की तजवीज की गई थी, जिन पर कुल खर्चा बाईस.बत्तीस करोड़ भाता । लेकिन मालूम नहीं किन कारणों से प्रथम पंचवर्षीय योजना में तेरह·छब्बीस करोड़ रुपया बतौर कर्जा और सबसिडी के दिया गया और सिफ़ तैंतालीस,आठ सौ इकतीस मकान बनाये था सके । दूसरी पंचवर्षीय योजना में पैंतालीस करोड़ रुपये रखे जाने की तजवीज थी और एक,अट्ठाईस,शून्य पर बनाये जाने का लक्ष्य सामने रखा गया, लेकिन बाद में मैटीरियल की कीमतें बढ़ थाने के कारण यह तय किया गया कि एक,पाँच,शून्य घर बनाये जायेंगे । पैंतालीस करोड़ बपये की रकम में से भिन्न भिन्न स्टेट सरकारों दो हज़ार छयासठ करोड़ रुपया दिया जाना है । इस रिपोर्ट के हमें यह पता नहीं चला कि Demands for Grants सात हज़ार चार सौ बहत्तर स्टेट गवर्नमेंट्स को इस स्कीम में कितनी कामयाबी हासिल हुई है । कितना उन्होंने सर्च किया है और कितना रुपया खर्च नहीं किया है । उसके साथ ही साथ एक हज़ार नौ सौ छप्पन-सत्तावन में जबकि आपके दूसरे प्लान का पहला वर्ष शुरू हुआ था आपने यह रखा था कि माप बारह,एक सौ सरसठ मकान बनायेंगे जिनकी कुल लागत तीन.उन्नीस करोड़ रुपया होगी । मगर इस साल प्रापकी फिगर्स के मनुसार ही प्रापने तीन.बत्तीस करोड़ रुपया खर्च किया है। यदि भाप देखें तो आपको पता चलेगा कि जो बजिटिड एमाउंट इस वक्त है वह सात.पैंसठ करोड़ पया है और कुल दस,पाँच सौ सोलह मकान ही बन सके है। इस तरह से जो धीरे से काम हो रहा है, उस तरफ मैं प्रापका ध्यान दिलाता हूं भीर में चाहता हूं कि भ्राप जल्दी-जल्दी काम करें। अगर मापने इसी रफ्तार से काम किया तो मझे शक है कि आप इनको पूरा भी कर सकेंगे इस वास्ते में प्रार्थना करता हूं कि आप इस भोर ध्यान दें और जल्दी से इन स्कीमों को पूरा करने की कोशिश करें। इसके साथ ही साथ यदि ग्राप एक हज़ार नौ सौ सत्तावन-अट्ठावन के बजट को देखें तो आपको मालूम होगा कि हमने दस,तीन सौ घर तीन.चौंसठ करोड़ रुपये की लागत पर बनाने की योजना की थी और कहा था कि एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ सत्तावन से पंद्रह मार्च एक हज़ार छः सौ अट्ठावन तक हम इतने घर बना देंगे। दरअसल में आपने तीन.चौदह करोड़ पया खर्च किया है जबकि बजट एलाटमेंट चार हज़ार पैंसठ करोड़ की थी। इस पये में से आप केवल तेरह,पाँच सौ सत्तावन घर ही बना सके है इकतीस दिसम्बर एक हज़ार छः सौ सत्तावन तक । इस तरह से इन सब चीजों के देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि हमें अपनी स्कीमों को भ्रमली जामा पहनाने के लिए और भी तेजी लानी होगी और और भी शीघ्रता के साथ. उनको कार्यान्वित करना होगा । अब में अशोका होटल के सम्बन्ध में अपने विचार आपके सम्मुख रखना चाहता हूँ ? गवर्नमेंट ने इस होटल को बनाने के लिए सात हज़ार चार सौ तिहत्तर Demands for Grante · · इकतीस MARCH एक हज़ार नौ सौ अड़तीस Demänds för Org [सरदार भशून्य डिशून्य सहमन] एक करोड़ पचहत्तर लास रुपया कम्पनी को एडवांस किया है और उस पर पांच प्रतिशत के हिसाब से ब्याज लिया जाएगा। इस तरह से कम्पनी के पास जो दो हज़ार पचहत्तर करोड़ रुपया हो गया जिसमें से उसने दो हज़ार अट्ठावन करोड़ रुपया कंस्ट्रक्शन पर खर्च कर दिया है। उसे अभी तक तकरीबन सत्रह,शून्य,शून्य रुपयापये के जो बिल है और जो पेंडिंग है उनकी पेमेंट करती है। जो बनाने का काम था वह इकतीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ सत्तावन को खत्म हो गया था, जो बिल पेंडिग हैं उन्हें शीघ्रतया करना चाहिये अब आप देखें तो आपको पता चलेगा कि इकतीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन तक सत्ताईस,एक सौ पंद्रह लोग यहां पर रात्रि में भाकर ठहरे। अगर इसको वर्क भाउट किया जाए तो दो सौ बीस की भोसत बैठती है । दो सौ बीस लोग प्रोसतन हर रोज यहां पर प्राते जाते हैं। अब आप थोड़ी देर के लिए मान लें कि दो सौ चालीस या दो सौ पचास लोग एक दिन में यहां पर भा जायें तो उस वक्त उस सूरत में ग्राप उनके लिए क्या व्यवस्था करेंगे, यह में प्रापसे जानना चाहूंगा । प्राप देखें कि तीस सितम्बर एक हज़ार छः सौ सत्तावन को यहां पर सोलह,चार सौ सत्तानवे लोग भाये थे जिनमें अधिकतर विदेशी भाई थे। ग्राप कहते हैं कि सात हज़ार तीन सौ सरसठ प्रतिशत लोग जो कि विदेशी थे इस होटल में ठहरे। इसके लिए में प्रापको बधाई देता हूं कि इसकी व्यवस्था और ठीक तरह से चलेगी तथा इस होटल की प्रख्याति होगी । अब में उन फ्लैट्स की तरफ आपका ध्यान प्राकर्षित करना चाहता हूं जिनमें कि हम लोग रहते हैं। इन क्वार्टरों के भागे हैज की हालत खराब होने की वजह से बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बराबर दूसरे लोग हमारे मकानात के सामने से गुजरते रहते हैं । यदि हम बाहर भी बैठे होते हैं तो भी उनको रोकने की व्यवस्था हम नहीं कर पाते हैं और यदि इन फ्लैट्स में आकर देखें तो आपको सारी पोजीशन का पता लग जायेगा । मैं चाहता हूं कि आप इसमें एक दो दिन मकर रहें और आपको सारी दिक्कतों का पता चल जाएगा। संबं आापको मालूम हो जाएगा कि बहुत से ताबाद में लोग यहां से निकलते रहते हैं और कोई प्राइवेसी नहीं रह जाती। हम लोग अपने घर वालों के साथ, बाल बच्चों के साथ बाहर बैठ नहीं सकते हैं और न अपने मित्रों के साथ बाहर भाकर बैठ सकते हैं। इसके बारे में तजवीज दी गई थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं भा है। यह कहा गया था कि यहां पर भाप कोई बाउंडरी रख दें और अगर मौर कुछ नहीं हो सकता तो तार की बाउंडरी रख दें। मैं चाहता हूं कि आप इस ओर ध्यान दें। साथ वहां पर जो घास का लान लगाया जाता है और अच्छी तरह से लगाया जाना चाहिए। जब हम मच्छे से खर्च करते हैं तो हमें देखना चाहिये कि काम भी अच्छा हो । अन्त में में इतना ही कहूंगा कि हमारे फ्लैट्स में श्राप कोई बाउंडरी बना दें या तार लगा ताकि बाहर के लोग वहां से न गुजर सकें। अगर आपने सकी व्यवस्था कर दी तो हम लोग वहां पर कि तरह से रह सकेंगे। स मंत्रालय की जो मांगें हैं उनका समर्थन करता और जो का आपने प्रशोका होटल के बारे में किया है, उसके लिये मै आपको धन्यवाद देता हूं । Shri Easwara Iyer : Mr. Speaker, within the time limit prescribed, I shall confine myself to a few remarks regarding the housing schemes of the Central Government, the working conditions of the C.P.W.D. employees and also about the Asoka Hotel. With regard to the housing schemes, I would like to submit before this House that there is a lack of planning with respect to office accommodation, or with respect to the colonies that have been built or with respect to the buildings for various residential quarters of government servants. With respect to thena colonies that have been built in Vinay Nagar or West Vinay Nagar, Agents: इकतीस MARCH एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन Demands for Grants सात हज़ार चार सौ पचहत्तर attendance before दस o'clock in the morning. So, if some of these multistoryed buildings can be built near about Vinay Nagar or East Vinay Nagar, it will not only relieve the congestion of traffic but also be conducive to their economic situation. That is a thing which I would place before the hon. Minister for his consideration in respect of the future building plans regarding office accommodation. already drawn the attention of Minister, I believe, during the 'debate: in the last session, to the fact that the buildings are far from being habitable. There are not only cracks on the wall, but they are leaking, and the doors and windows there have lost their hinges. Quite apart from that, if we take . for example, the G type quarters, what do we find? These quarters are called two-room tenements, but there is hardly any space for anybody to live there. With regard to the upstairs, it is seen there is great difficulty in getting water upstairs, because in the upstairs flats there is no water-tap provided. The persons living upstairs have to come down to drink water even in a summer night. Mr. Speaker: There are no water taps at all? Shri Easwara Iyer: Not in the upstairs. Now, there are about बारह,शून्य persons living in that colony, and in the case of such colonies, even the ordinary amenities such as schools or recreation clubs are not provide In this case, a market also is not provided. Though I do not say that it is absolutely difficult, it is very difficult to live there, particularly when one finds that there are no amenities regarding recreation clubs or markets of or even the ordinary necessities life. That is why I would like to bring to the attention of the Minister that we would have to think about office accommodation being provided near about the residences of these lowpaid employees. We find in Delhi several multi-storeyed buildings coming up one after the other round about Connaught Place. With regard to the highly-paid officers who have got automobiles like motor-cars or other means of transport of their own, the coming up of these multistoreyed buildings nearer their residencies may be quite welcome, but so far as the low-paid employees are concerned, the difficulty is they get no transport and they are not able to oame in time to office and give their Another point that I would like to bring to the attention of this House is that a number of instances of corruption have been found out in respect of these private contracts. It is not very easy to enumerate or give specific instances of corruption garding private contracts, but the system of giving private contracts in a modern progressive society must be on the decrease. That is what I want to submit. We must give more and more work for the departmental employees and reduce the private contract and do away with private contract if possible. Now, with regard to ordinary maintenance work such as repair, electric wiring, etc., these things could have been very well done by the departmental employees like the CPWD employees. If we give this work to the private contractors, what happens? As I have already mentioned, these private contractors have got an unwritten code and with this unwritten code they have been able to get at the officers. It is a matter which is well known. How can a contractor give a tender which is lower than the estimated one? For example, in respect of a contract, if the lowest tender is to be accepted, sometimes, or more often than not, if I may say so, the tender comes below the estimated rate. How can the lowest tender come below even the estimated rate? That will lead only to one conclusion. Either the officers who have given the estimate are incompetent or incapable of preparing the estimate or they are cheating the Government. Otherwise, the contractor is not doing his work properly according to the specifica
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केंद्र सरकार ने बजट सत्र से पहले बड़ा फैसला करते हुए संसद की कैंटीन में सांसदों को भोजन पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त कर दिया है। इससे अब सांसदों को कैंटीन में भोजन के लिए बाजार की कीमत के अनुसार भुगतान करना होगा। बता दें कि कैंटीन में सांसदों को सब्सिडी पर दिया जाने वाला भोजन सालों से विवाद का विषय रहा है। इसमें सांसदों को बहुत कम कीमत पर खाना मुहैया कराया जाता था।
संसद की ओर से जारी की गई नई मूल्य सूची के अनुसार अब सांसदों को खाने के लिए बाजार भाव का भुगतान करना होगा। इसके तहत अब हैदराबादी मटन बिरयानी 65 की जगह 150 रुपये में मिलेगी। इसी तरह एक चपाती के लिए दो की जगह तीन रुपये चुकाने होंगे। समोसे के लिए 10 रुपये, दाल तड़का 20 रुपये, आचार-खिचड़ी 50 रुपये, वेज थाली 100 रुपये और वेज बुफे 500 तथा नॉनवेज बुफे के लिए 700 रुपये चुकाने होंगे।
बता दें कि एक RTI में सामने आया था कि साल 2017-18 तक संसद की कैंटीन में चिकन करी 50 रुपये में, फ्रूट सलाद 10 रुपये में, वेज थाली 35 रुपये, मसाला डोसा 20 रुपये, ब्रेड बटर छह रुपये, ब्रेड पकौड़ा 14 रुपये और चीज सैंडविच 24 रुपये में मिलता था। इसी तरह चिकन कटलेट 41 रुपये, चिकन तंदूरी 60 रुपये, कॉफी पांच रुपये, डोसा प्लेन 12 में मिलता था। यह कीमत केवल सांसदों के लिए थी।
बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने पिछले सप्ताह घोषणा संसद कैंटीन में परोसे जाने वाले भोजन पर मिलने वाली सब्सिडी को जल्द ही समाप्त करने की घोषणा की थी। हालांकि, बिड़ला ने इस कदम के वित्तीय फायदे के बाद में स्पष्ट नहीं किया था। सूत्रों का हवाला देते हुए, PTI ने बताया था कि सब्सिडी वाले भोजन से लोकसभा सचिवालय सालाना आठ करोड़ रुपये का नुकसान होता था। नई दरें 29 जनवरी से लागू होंगी।
आगामी संसद सत्र की जानकारी देते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने यह भी कहा था कि नए सत्र से संसद की कैंटीन का संचालन भारतीय पर्यटन विकास निगम (ITDC) द्वारा किया जाएगा। ITDC पांच सितारा होटल अशोक का संचालन भी करती है।
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केंद्र सरकार ने बजट सत्र से पहले बड़ा फैसला करते हुए संसद की कैंटीन में सांसदों को भोजन पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त कर दिया है। इससे अब सांसदों को कैंटीन में भोजन के लिए बाजार की कीमत के अनुसार भुगतान करना होगा। बता दें कि कैंटीन में सांसदों को सब्सिडी पर दिया जाने वाला भोजन सालों से विवाद का विषय रहा है। इसमें सांसदों को बहुत कम कीमत पर खाना मुहैया कराया जाता था। संसद की ओर से जारी की गई नई मूल्य सूची के अनुसार अब सांसदों को खाने के लिए बाजार भाव का भुगतान करना होगा। इसके तहत अब हैदराबादी मटन बिरयानी पैंसठ की जगह एक सौ पचास रुपयापये में मिलेगी। इसी तरह एक चपाती के लिए दो की जगह तीन रुपये चुकाने होंगे। समोसे के लिए दस रुपयापये, दाल तड़का बीस रुपयापये, आचार-खिचड़ी पचास रुपयापये, वेज थाली एक सौ रुपयापये और वेज बुफे पाँच सौ तथा नॉनवेज बुफे के लिए सात सौ रुपयापये चुकाने होंगे। बता दें कि एक RTI में सामने आया था कि साल दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह तक संसद की कैंटीन में चिकन करी पचास रुपयापये में, फ्रूट सलाद दस रुपयापये में, वेज थाली पैंतीस रुपयापये, मसाला डोसा बीस रुपयापये, ब्रेड बटर छह रुपये, ब्रेड पकौड़ा चौदह रुपयापये और चीज सैंडविच चौबीस रुपयापये में मिलता था। इसी तरह चिकन कटलेट इकतालीस रुपयापये, चिकन तंदूरी साठ रुपयापये, कॉफी पांच रुपये, डोसा प्लेन बारह में मिलता था। यह कीमत केवल सांसदों के लिए थी। बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने पिछले सप्ताह घोषणा संसद कैंटीन में परोसे जाने वाले भोजन पर मिलने वाली सब्सिडी को जल्द ही समाप्त करने की घोषणा की थी। हालांकि, बिड़ला ने इस कदम के वित्तीय फायदे के बाद में स्पष्ट नहीं किया था। सूत्रों का हवाला देते हुए, PTI ने बताया था कि सब्सिडी वाले भोजन से लोकसभा सचिवालय सालाना आठ करोड़ रुपये का नुकसान होता था। नई दरें उनतीस जनवरी से लागू होंगी। आगामी संसद सत्र की जानकारी देते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने यह भी कहा था कि नए सत्र से संसद की कैंटीन का संचालन भारतीय पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जाएगा। ITDC पांच सितारा होटल अशोक का संचालन भी करती है।
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सुशांत सिंह राजपूत मामले में सामने आए ड्रग कनेक्शन के बाद एनसीबी बॉलीवुड की बड़ी चैन तोड़ने में लगी हुई है। इस मामलें में अब तक कई लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और ऐसी सम्भावना है कि आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस मामले में बॉलीवुड की एक और टॉप एक्ट्रेस का नाम सामने आया है।
बीते दिन एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर जया साहा से पूछताछ की। इसमें D और K के बीच की ड्रग्स को लेकर चैट का खुलासा हुआ है। चैट में D, K से माल मंगाती नजर आ रही हैं। दरअसल एनसीबी की इस इंवेस्टिगेशन में जया साहा की मैनेजर करिश्मा से दीपिका पादुकोण की बातचीत के चैट्स सामने आई है।
कंगना के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चैट में D और K के बीच Hash और गांजे को लेकर चर्चा की बात कही जा रही है।
बता दें कि, सुशांत की गर्लफ्रेंड और बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ड्रग कनेक्शन को लेकर एनसीबी अब तक कई सेलिब्रिटीज को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला चुकी है।
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सुशांत सिंह राजपूत मामले में सामने आए ड्रग कनेक्शन के बाद एनसीबी बॉलीवुड की बड़ी चैन तोड़ने में लगी हुई है। इस मामलें में अब तक कई लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और ऐसी सम्भावना है कि आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस मामले में बॉलीवुड की एक और टॉप एक्ट्रेस का नाम सामने आया है। बीते दिन एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर जया साहा से पूछताछ की। इसमें D और K के बीच की ड्रग्स को लेकर चैट का खुलासा हुआ है। चैट में D, K से माल मंगाती नजर आ रही हैं। दरअसल एनसीबी की इस इंवेस्टिगेशन में जया साहा की मैनेजर करिश्मा से दीपिका पादुकोण की बातचीत के चैट्स सामने आई है। कंगना के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चैट में D और K के बीच Hash और गांजे को लेकर चर्चा की बात कही जा रही है। बता दें कि, सुशांत की गर्लफ्रेंड और बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ड्रग कनेक्शन को लेकर एनसीबी अब तक कई सेलिब्रिटीज को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला चुकी है।
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लोग बीमारी और मौत को भूर्ती की कृपा मानते हैं। और पीपल के पेड़ के नीचे सुर की बलि र मदिरा चढ़ाकर उन्हें तृप्त करने को काशिश करते हैं । इनके जाति देवता वनस्पति माने जाते हैं लेकिन यह लोग हनुमान भगत और घनश्याम की भी पूजा करते हैं।
मुसहर लोग शगुन अपशगुन का बहुत विचार करते हैं। शुक्रवार पाँच की संख्या शुभ मानी जाती हैं। मार्ग में लोमड़ी मिले तो सियार मिले तो अशुभ, यह लोग बाघ र बनस्पति की को सौगन्ध खाते हैं । इन लोगों में जल परीक्षा भी होती हैं। दों आदमीजल के भीतर गोता लगाते हैं जो पहले निकलता है वह हारा माना जाता है । स्त्रियांनी कलाई गाल और नाक पर गुदना गुदाती हैं। उनका विचार है कि स्त्री जो गुदना नहीं गुदाती उसे मरने के पश्चात् परमेश्वर दंड देते हैं। गांव में रहने बाले देहाती मुसहर
गाय का मांस नहीं खाते । मुसहर छोटे भाई की स्त्री, बड़ी सलहज और समधिन को नहीं छूते हैं । पहाड़ी मुसहर गाय और भैंस का मांस खाते हैं। और इसीलिये अक्सर गाय की चोरी करते हैं । यह लोग केबल लंगोटी लगा कर रहते हैं । मि० नेस्फील्ड ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि यह लोग पेड़ों की छाल से अपने तन ढकते हैं। लेकिन यह बात सत्य है ।
मुसहर जाति विशेषतः अपराधी जाति नहीं है । मि० शेरिन्ग और मि० कुक्स की पुस्तकों में इनके अपराधी होने का बर्णन नहीं है। मेहनत मज़दूरी करके जैसे तैसे यह लोग अपना पोषण करते हैं। कुछ लोग डोली उठाने पर धनी व्यक्तियों के यहां नौकर हो जाते हैं। कुछ
लोग शहद, गोंद, जड़ी बूटियां जंगल से एकत्रित करके बेचते हैं । स्त्रियां पत्तल दोने बनाती और बेचती हैं । ईंटों के भठ्ठों में भी काम करती हैं। गाज़ीपुर जिले के मुमहर के पास निश्चित घर नहीं है । गाँव के बाहर पड़ों में रहते हैं और देहातों का चक्कर लगाते हैं । चोरो, नकबजनी, राजन करते हैं। इनके पास जीवन निर्वाह करने के लिये कोई उचित साधन नहीं है और इसलिये गाज़ीपुर, बलिया, आजमगढ़, बनारस और शाहाबाद के जिला में अपराध करते फिरते हैं । अपराध करने में भी निपुग्ण नहीं है। इधर उधर घूमते हैं यदि कोई मुसाफिर अकेला मिलता है सो उसे लूट लेते हैं । यदि कोई घर बिना मालिक के बन्द मिलता तो उसे नकबजनी करके खोल डालते हैं ।
उत्पत्ति - करवल एक
जाति है जो प्रान्त के पूर्वीय जिलों
में रहती है। करवाल शब्द प्रायः अरबी के करबल शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसके अर्थ शिकारी के होते हैं। पुराने ज़माने में बादशाह के शिकारी करवल कहलाते थे । करवल लोग उन्हीं शिकारी लोगों के वंशज हैं। थोड़े दिनों बाद बादशाह के यहां से उनकी नौकरी छूट गई और उन्हें अपने जीवन निर्वाह के लिये अन्य उपाय ढूंढ़ने पड़े। चूंकि इन लोगों की श्रादत घूमने घामने की पड़ चुकी थी यह लोग देश में इधर उधर घूमने लगे। चिड़ियों और जानवरों को जंगलों से यह लोग पकड़ लाते थे और उन्हीं को बेच कर अपना निर्वाह करने लगे । कभी २ यह लोग बस कर खेती भी करने लगे थे। लेकिन खेती बारी की मेहनत से यह लोग जल्द ही ऊब गये और जंगलों में ही रहना और घूमना प्रारम्भ कर दिया । इनकी जाति का नाम करबाल, करबल करोल पड़ गया और इन्हीं नामों से यह लोग अभी तक पुकारे जाते हैं । अपराधी जाति कानून के अन्तर्गत इनकी गिनती सांसियों के साथ ही कर ली गई है।
सामाजिक रीति रवाज करवालों के रीति रिवाजों का वर्णन करना कठिन है । यह जाति हाबूड़ा, बेड़िया सांसिया, से इतनी मिश्रित हैं कि इस जाति का निजी व्यक्तित्व लोप सा हो गया है । इन्होंने अन्य जातियों के रीति रिवाज़ अपना लिये हैं । करबाल
कहीं २ तो बड़े ही रुढ़िी
को क्षत्रिय बताते हैं ।
इनकी जाति में भी एक पंचायत है । इनकी उपजातियों में पारस्परिक विवाह सम्बन्ध हो सकता है। अन्य जातियों से इनका
कोई सम्बन्ध नहीं है। केवल अपराध करने के लिये मेल हो जाता है।
पश्चिमी ज़िले में यह लोग अपने को कोल से सम्बन्धित बताते हैं गोकि कोल लोग इनसे अपना कोई सम्बन्ध नहीं मानते हैं । करवालों के विवाह सम्बन्ध बेड़ियों से हो जाते हैं । किन्तु यह लोग बेड़ियों की तरह स्त्रियों से व्यभिचार नहीं कराते हैं । हेड़िया, बहेलिया, भंगी और एक उपजाति है जो करवाल कहलाती है इससे इस जाति का मिश्रित होना सिद्ध होता है ।
करबलों में भी पंचायत होती है जो जाति के समस्त झगड़े नहीं तय करती है। विवाह सम्बन्धों की स्वीकृति भी पंचायत हो करती है । तलाक की प्रथा है। विधवा परित्यक्ता स्त्रियाँ पुनर्विवाह
कर सकती हैं। विधवा से होने पर ३० रुपया और कुमारो से बिवाह करने पर ६० रुपया वर को देना पड़ता है । पंचायत को २४ रुपया देकर और पति को पहिले विवाह का ६० रुपया खर्च देकर एक पुरुष दूसरे पुरुष की पत्नो खरोद सकता है। पति के देहान्त पर स्त्री अपने देवर के साथ रह सकती है। आम तौर पर शब गाड़े जाते हैं किन्तु जिनको मृत्यु चेचक से होती है उनका दाह कर्म किया जाता है । यह लोग ज़हीर पीर की पूजा करते हैं जिनकी कब्र कहा जाता है कि ताजमहल के पास है। इसके अतिरिक्त पाँचों पीर, मदार साहब,
गाज़ी मियां, काली माई, गंगाजी की पूजा करते हैं । यह लोग बकरी, भेड़, सुश्रर, स्याहो, छिपकली, मुगीं कबूतर इत्यादि खाते हैं । चमार भंगी घोबी डोम कोरी और धानुकों की जूठन को छोड़ कर अन्य जातियों को जूठन भी ले लेते हैं। पीपल की शपथ लेते हैं । कंजड़ और सांसियों की तरह अग्निपरीक्षा को मानते हैं । यदि किसी स्त्रो पर दुश्चरित्र होने का अभियोग हो और वह अभियोग स्वीकार न करे तो उसे अग्नि परीक्षा स्वीकार करनी पड़ती है । उसके हाथ पर कुछ पोपल के पत्ते रख दिये जाते हैं और उस पर एक गर्म लोहे का टुकड़ा रक्खा जाता है और पांच क़दम चलने को कहा जाता है । यदि उसके हाथ नहीं जलते हैं तो वह निर्दोष मानी जाती है । जल परोक्षा भो यह लोग मानते हैं। अभियुक्त को जल के अन्दर पर रखना पड़ता है जब तक कि दूसरा पुरुष दो सौ कदम न दौड़ ले यदि सिर उसके पहिले ही निकाल ले तो बह दोषो माना जाता है ।
अपराध करने को रीति- बहेलियों की तरह करबाल भो प्रारम्भ में शिकारो थे लेकिन इनकी आवारागर्द ज़िन्दगी ने इनको अपराध करने में प्रेरणा दी। अब यह एक भयानक अपराधी जाति समझी जाती है। कुछ लोग अब मी केवल शिकार करते हैं और ईमानदारी से जीवन व्यतीत करते हैं। कुछ लोग खेती करते हैं मज़दूरी करते हैं । किन्तु अधिकतर लोग आवारागर्द और संयुक्त प्रान्त और बंगाल का चक्कर लगाते हैं । यह लोग गिरोह बना कर चलते हैं, अपने को फ़कीर बताते हैं और
राध करने की धुन में रहते हैं। इस प्रान्त मे सबसे पहिले इनकी ओर १८८६ में ध्यान आकर्षित हुआ जबकि इनके गिरोह बाराबंकी, गोंडा, गोरखपुर, जौनपुर, और सुल्तानपुर में चक्कर लगाते पाये गये । १६०५ में करवालों के दल प्रान्त के पूर्वीय जिलों में चोरों के साथ डकैती और राहजुनी करने लगे। इनके विरुद्ध सख्त कार्यगई। और जिन लोगों पर पूरी तौर पर अपराध सिद्ध न
हो सका उनसे दफा १०६ व ११० में ज़मानतें मांगी गई इसका परिणाम यह हुआ कि करबाल लोग बंगाल को भाग गये और दो वर्ष तक वहाँ पर करते रहे । समस्या यहाँ तक बढी कि
१६११ में बंगाल सरकार ने एक ही रोज़ में प्रान्त भर के घूमने वाले करबालों को पकड़ने का निश्चय किया और गिरफ्तार कर लिया । पुलिस की जांच पड़ताल से पता चला कि केवल पांच दलों ने ३४६ अपराध किये थे । इन लोगों पर मुकदमा चला और काफी आद मियों को दंड मिला मुकदमें के दौरान में अजीब २ बातों का पता चला । जो लोग अपने को करवाल बताते थे वे यथार्थ में हबूड़ा, कंजड़, नट, सांसिये थे। यह भी साबित हुआ कि इनके दलों की स्त्रियां भीख मांगती थीं, भीव देने से इनकार किया जाता था तो गाली बकती थी और मैला घरों में फेंकती थीं। आदमी एक दिन में बहुत दूर तक पैदल चले जाते थे । दलों के सदस्य बराबर बदलते रहते थे । सियारकी बोली दलों का गुप्त चिह्न था । हमले कियेजाने बाले व्यक्ति या व्यक्तियों पर पहिले पत्थरों की बौछार की जाती और फिर उन्हें पेड़ों से बांध दिया जाता था। इन दलों का मुख्य काम बकरी की चोरी
करना था । जब इन करवलों के अंगूठों के निशानों की जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि उनमें बहुत से ऐसे थे कि जिन्हें पहिले मज़ा मिल चुकी थी और जिन्होंने पहिली सजा के समय अपनी जाति हवूड़ा, सांसिया, नट, इत्यादि बताई थी । इसलिये यह निश्चयात्मक रूप से नहीं कहा जा सकता कि करबल जाति में कितने लोग अपराध करते हैं। उन दिनों पश्चिमी जिलों में हब्रूड़ों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही थी। वे लोग नैगल को तराई के जंगलों में घुस कर फिर बृटिश राज्य में बस्ती के जिले में घुस प्राये और पूर्वीय जिले में करबलों के गिरोह में सम्मिलित होगये । मिस्टर हालिन्मने अपनी किताब में लिखा है कि १६११ तक पन्द्रह वर्ष के दौरान में ८३६ करबलों को सजायें मिलीं। किन्तु इस संख्या में उन हबूड़ों, कंजड़ों, नटों इत्यादि की भी संख्या सम्मिलित है जिन्होंने जाकिरवल बताई थी इस कारण सजायाफ्ता कम्वलों की संख्या बनाना सम्भव नहीं है ।
उत्पत्ति - दुसाध संयुक्त प्रांत के पूर्वीय जिलों में बसने वाली एक हरिजन जाति है । इनका रहन सहन बहेलियों और पासियों से मिलता जुलता है। यह लोग अपने को धृतराष्ट्र के पुत्र दुश्शासन का वंशज बतलाते हैं। कुछ दुसाध अपने को भीमसेन का वंशज बताते है । जाति में एक कहावत है कि दुसाघों की उत्पत्ति ब्राह्मण और एक नीच जाति की स्त्री के सम्बन्ध से हुई है। इस जाति में भी बहुत सी उपजातियाँ हैं जिनमें ढाड़ी, गोंडर, कनौजिया, खटिक और कुर्बानिया मुख्य हैं । इन उपजातियों के नामों से विदित विदित होता है कि इस जाति में दूसरी जातियों की उपजातियों से काफी मिश्रण हुआ है।
सामाजिक रीति रिवाज - जाति में एक पंचायत है जो जाति के सभी मुख्य विषयों पर निर्णय देती है। एक पुरुष एक पत्नी के होते हुये दूसरा विवाह कर सकता है यदि वह निःसंतान हो, किन्तु दूसरी पत्नी की सन्तान को पिता की सम्पत्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता। दूसरी जाति की स्त्री को भी पत्नी की तरह रक्खा जा सकता है और यदि स्त्री दुसाधों से ऊँची जाति की हो तो उसकी सन्तान को जाति के पूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। विधाओं तथा परित्यक्ता स्त्रियों को पुनर्विवाह करने का हक है । दत्तक पुत्र गोद लेने की प्रथा है किन्तु दत्तक पुत्र किसी निकट सम्बन्धी ही का पुत्र
होता है। मृतकों के शब की दाइ क्रिया होती है किन्तु अविवाहित और मृतकों के शव को गाड़ दिया जाता है। दुसाध अपने को सनातनी हिन्दू कहते हैं और यह लोग राहु की पूजा करते हैं । यह लोग छटबादी और मुनखादेव की भी पूजा करते हैं ।
प्लासी की लड़ाई में क्लाइब को सेना में अधिकतर दुसाध थे किन्तु अब इस जाति के लोग नीच काम ही करते हैं । यह लोग या तो हल चलाते हैं या चौकीदारी करते हैं किन्तु इस जाति ने मदिरा सेवन की आदत होने के कारण कोई उन्नति नहीं की। यह लोग कोई हुनर नहीं जानते । कुछ लोग लकड़ी काट कर और जंगलो वस्तुयें इकट्ठा करके अपना जीवन व्यतीत करते हैं । इस जाति के कुछ लोग जिन्हें बलिया जिले में पलषर दुसाध कहते हैं आवारागर्द हैं । चोरी, बदमाशी, डकैती और राइजनी करने में उनका नाम निकल गया है । १८६३ तक इनके लिये मशहूर था कि यह लोग बंगाल के जिलों में जाकर डाका डाला करते थे। १८८७ में जब मिस्टर बार्नर बलिया जिले के पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट थे तब उन्होंने पता लगाया था कि पलवर दुसाघों के गिरोह प्रति वर्ष बंगाल में डाका डालने र चोरी करने जाते हैं और कई महीने बाद बहुत सा चोरी और डाके का माल लेकर वापस आते हैं ।
अपराध करने की रीति - पलवर दुसाघों की चोरी डकैती रोकने का प्रबन्ध करने के लिये १८६८ में एक कमेटी बनाई गई थी जिसमें बलिया जिले के कलेक्टर, पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट और डिप्टो इन्सपेक्टर, जेनरल पुलिस सदस्य थे । इन लोगों ने अपनी रिपोर्ट में
निस्सन्देह बलिया के पलवर दुमाध नकः बजनी और राहजनी व डकैती करने के लिये जिना छोड़कर चले जाते हैं । दक्षिण बंगाल के जिलों में जाकर डकैती इत्यादि डालते हैं । जलपाईगिरी ओर कुचबिहार तक में इनकी पहुँच हो गई है। कुछ अपराधों में इन पर आमाम और नैपाल रियासत में भी सन्देह किया जाता है । यह लोग अपनी जाति के लोगों को इन जिलों में बस देते हैं। यह लोग चोरी का माल लेते हैं और उसे बेचने का प्रबन्ध करते हैं साथ ही इस बात की सूचना देते रहते हैं कि किसके यहां चोरी की जाये या डाका डाला जाये ।
मिस्टर होलिम ने अपनी पुस्तक में वर्णन किया है कि अभीतक पलवर दुमाधों का यही हाल है। बहुत दुसाधने घरों से गायब है और बंगाल में नक्कर लगा रहे हैं । चोरी से लेकर डकैतो तक सभी प्रकार के अपराध यह लोग करते हैं । यदि केले होते हैं तो चोरी या उठाईगिरी करते हैं। यदि गिरोह में हुये तो राहजनी या डकैती करते है। यह लोग अपने साथ वापसी में चारों का बहुत सा माल लेकर और मज़े से मदिरा पान करके कुछ महीने स्वच्छन्दता से बिता देते हैं ।
कानून के अन्तर्गत कई बार इन जाति की घोषणा किये जाने पर विचार हुआ, परन्तु उस समय यह समझा जाता था कि यह सम्भव नहीं है क्योंकि इस जाति के लोग स्थाई तौर से रहते हैं और जीवन निर्वाह करने के लिये उचित साधनों का प्रयोग करते हैं । किन्तु यह सभी ने स्वीकार किया कि जीवन निर्वाह का उनका साधन
अपराध करने के लिये केबल बहाना मात्र होता है । अपराध करने में इस जाति की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है ।
दुसाधों में भी पंचायत की प्रथा है। पंचायत में एक सरदार होता है जो पंचायत की सभा में भापति का काम करता है । उसकी मातहती में एक छड़ीदार होता है जो पंचायत का बुलावा लगाता है । जाति का प्रत्येक बालिग़ सदस्य पंचायत का सदस्य होता है । नाबालिग़ व्यक्ति पंचायत की सभा में उपस्थित नहीं हो सकता है । पंचायत चारी, व्यभिचार, पर जाति के साथ खान पान, पुत्री को रखना या बिंदा न करना या दूसरी स्त्री को बहका लाना, इत्यादि अपगधों का फैसला करती है। को पांच से पचीस रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है। जुर्माने के रुपये मे पंचायत के लिये मदिरा मंगा जाता है । यदि अपराधी निर्धन होता है और जुर्माना नहीं दे सकता तो उसे जूते पड़ते हैं। पंचायत के सरदार का के स्थान पुश्तैनी होता है ।
दुसाध लोग जल में खड़े होकर और अपने लड़के के सर पर हाथ रख कर शपथ खाते हैं । यह लोग गाय का मांस नहीं खाते किन्तु अन्य मांस खाने में परहेज़ नहीं करते। मदिरा पान खूब करते है। ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय के हाथ की पकी पक्की रसोई खा लेते हैं किन्तु डोम इत्यादि का हुआ नहीं खाते ।
उत्पत्ति - दलेरा शब्द प्रायः डलिया शब्द से बना है। इस जाति का पेशा डलिया बनाना, मज़दूरी करना, एवं चोरी करना है । यह लोग मुख्यतः बरेली जिले में बसते हैं। कुछ लोग बुलन्दशहर जिले में भी हैं । इस जाति की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कहा जाता है कि एक बार एक गूज़र ठाकुर ने एक कहार की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और इस कारण जातिच्युत कर दिया गया। उसकी सन्तान दलेरा है । बरेली के दलेरा अपने को मेरठ और बुलन्दशहर जिले के पुराने रहने बाले बताते हैं जो अकाल के कारण बरेली आकर बस गये । दलेरों की बहुत सी उपजातियां हैं।
अपराध करने की रीति - दलेरे केवल दिन की चोरी करते हैं. रात को चोरी नहीं करते। मेले, घाट इत्यादि पर ही चोरी करते हैं । दलेरा ऐसे स्थानपर किसी यात्री के पास बैठ जाता है और खाना पकाने का बहाना करता है। जब उस यात्री का ध्यान इधर उधर होता है तो दलेरा उसके बर्तन या अन्य सामान चुरा लेता है । यदि पीतल का बर्तन चुराता है तो उसे पानी के नीचे ले जाकर उसमें छेद कर देता है ताकि पहिचाना न जा सके। कभी कभी यह लोग बाज़ार में झूठ मूठ का झगड़ा कर डालते हैं और उसी गड़बड़ी में दूकानों से सामान लूट या उठा लेते हैं और जल्दी से अपने साथियों
को देदेते हैं। कभी २ यह लोग ब्राह्मण या क्षत्री का भेष बना लेते हैं और कपड़े पहन कर बाजार में जाते हैं। अपने साथ छोटे लड़कों को भी ले जाते हैं, स्वयं दूकानदार को बातों में लगा लेते हैं और लड़कों से चोरी कराते हैं । यदि चोरी में लड़का पकड़ा जाता है तो स्वयं कह सुन कर छुड़ा लते हैं । लड़का यदि पकड़ा जाता है तो
ठीक नाम, पता नहीं बताता है । चोरी करने वाले को दूना हिस्सा मिलता है और चोरो का रुपया मदिरापान में उड़ाया जाता है अपराध करने के तरीकों में यह लोग बखार और सौनाहरियों से मिलते जुलते हैं ।
दलेरे अक्तूबर के महीने में अपना घर छोड़कर चोरी करने के लिये बाहर चले जाते हैं और मई में वापस लौटते हैं। यह लोग आठ दस आदमियों के गिरोह में बाहर जाते हैं। इन गिरोहों को सोहबत कहते हैं। और गिरोह के सरदार को मुकद्दम कहते हैं । यह लोग चोरी करने के लिये बंगाल तक पहुँच जाते हैं। चोरी का माल जाति में बांटा जाता है ।
[अन्तर्प्रान्तीय अपराध कमेटी की रिपोर्ट में १६०४ में मिस्टर ब्रेमाले ने इस जाति के विषय में लिखा है।
'दलेरा बर्णशंकर कारों की एक छोटी जाति है जो बरेली जिले में रहती है । इन लोगों का मुख्य स्थान गुड़गांव ग्राम, सिरौली थाना जिला बरेली है । यह सम्भव है कि यह चैन, चाँई या बखारों की सम्बन्धित जाति हो क्योंकि इनके राध करने का तरीका उन लोगों हे बहुत मिलता जुलता है।'
बरेली के जिले अधिकारियों ने १८६० में प्रयत्न किया कि इस जाति की घोषणा जाति में कर दी जाये किन्तु प्रान्तीय सरकार ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया । १८६६ ई० में गुड़गांव में एक हेड कॉन्स्टेबल और चार कान्स्टेबिलों की अतिरिक्त तैनाती की गई क्योंकि इस गांव के दलेरे बहुत उत्पात कर रहे थे । इस जाति के व्यक्तियों की काफी संख्या मज़ाया है और उस समय ८७ ग्रादमी अपने घरों से भगे हुये थे । इस जाति को अप राध करने से रोकने के लिये जाति के व्यक्तियों की निगरानी और अपराधियों को उचित दण्ड दिया जाना बहुत ही आवश्यक था । यह लोग भी बरवारों की भांति बंगाल तक अपराध करने के लिये धावा मारते थे ।
१६१० ई० मै ७६ दलेरों को अपने घरों से अनुपस्थित पाया गया और अनुपस्थित व्यक्तियों में से ७२ व्यक्तियों को ३६० मर्तबा दंड दिया जा चुका था ।
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लोग बीमारी और मौत को भूर्ती की कृपा मानते हैं। और पीपल के पेड़ के नीचे सुर की बलि र मदिरा चढ़ाकर उन्हें तृप्त करने को काशिश करते हैं । इनके जाति देवता वनस्पति माने जाते हैं लेकिन यह लोग हनुमान भगत और घनश्याम की भी पूजा करते हैं। मुसहर लोग शगुन अपशगुन का बहुत विचार करते हैं। शुक्रवार पाँच की संख्या शुभ मानी जाती हैं। मार्ग में लोमड़ी मिले तो सियार मिले तो अशुभ, यह लोग बाघ र बनस्पति की को सौगन्ध खाते हैं । इन लोगों में जल परीक्षा भी होती हैं। दों आदमीजल के भीतर गोता लगाते हैं जो पहले निकलता है वह हारा माना जाता है । स्त्रियांनी कलाई गाल और नाक पर गुदना गुदाती हैं। उनका विचार है कि स्त्री जो गुदना नहीं गुदाती उसे मरने के पश्चात् परमेश्वर दंड देते हैं। गांव में रहने बाले देहाती मुसहर गाय का मांस नहीं खाते । मुसहर छोटे भाई की स्त्री, बड़ी सलहज और समधिन को नहीं छूते हैं । पहाड़ी मुसहर गाय और भैंस का मांस खाते हैं। और इसीलिये अक्सर गाय की चोरी करते हैं । यह लोग केबल लंगोटी लगा कर रहते हैं । मिशून्य नेस्फील्ड ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि यह लोग पेड़ों की छाल से अपने तन ढकते हैं। लेकिन यह बात सत्य है । मुसहर जाति विशेषतः अपराधी जाति नहीं है । मिशून्य शेरिन्ग और मिशून्य कुक्स की पुस्तकों में इनके अपराधी होने का बर्णन नहीं है। मेहनत मज़दूरी करके जैसे तैसे यह लोग अपना पोषण करते हैं। कुछ लोग डोली उठाने पर धनी व्यक्तियों के यहां नौकर हो जाते हैं। कुछ लोग शहद, गोंद, जड़ी बूटियां जंगल से एकत्रित करके बेचते हैं । स्त्रियां पत्तल दोने बनाती और बेचती हैं । ईंटों के भठ्ठों में भी काम करती हैं। गाज़ीपुर जिले के मुमहर के पास निश्चित घर नहीं है । गाँव के बाहर पड़ों में रहते हैं और देहातों का चक्कर लगाते हैं । चोरो, नकबजनी, राजन करते हैं। इनके पास जीवन निर्वाह करने के लिये कोई उचित साधन नहीं है और इसलिये गाज़ीपुर, बलिया, आजमगढ़, बनारस और शाहाबाद के जिला में अपराध करते फिरते हैं । अपराध करने में भी निपुग्ण नहीं है। इधर उधर घूमते हैं यदि कोई मुसाफिर अकेला मिलता है सो उसे लूट लेते हैं । यदि कोई घर बिना मालिक के बन्द मिलता तो उसे नकबजनी करके खोल डालते हैं । उत्पत्ति - करवल एक जाति है जो प्रान्त के पूर्वीय जिलों में रहती है। करवाल शब्द प्रायः अरबी के करबल शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसके अर्थ शिकारी के होते हैं। पुराने ज़माने में बादशाह के शिकारी करवल कहलाते थे । करवल लोग उन्हीं शिकारी लोगों के वंशज हैं। थोड़े दिनों बाद बादशाह के यहां से उनकी नौकरी छूट गई और उन्हें अपने जीवन निर्वाह के लिये अन्य उपाय ढूंढ़ने पड़े। चूंकि इन लोगों की श्रादत घूमने घामने की पड़ चुकी थी यह लोग देश में इधर उधर घूमने लगे। चिड़ियों और जानवरों को जंगलों से यह लोग पकड़ लाते थे और उन्हीं को बेच कर अपना निर्वाह करने लगे । कभी दो यह लोग बस कर खेती भी करने लगे थे। लेकिन खेती बारी की मेहनत से यह लोग जल्द ही ऊब गये और जंगलों में ही रहना और घूमना प्रारम्भ कर दिया । इनकी जाति का नाम करबाल, करबल करोल पड़ गया और इन्हीं नामों से यह लोग अभी तक पुकारे जाते हैं । अपराधी जाति कानून के अन्तर्गत इनकी गिनती सांसियों के साथ ही कर ली गई है। सामाजिक रीति रवाज करवालों के रीति रिवाजों का वर्णन करना कठिन है । यह जाति हाबूड़ा, बेड़िया सांसिया, से इतनी मिश्रित हैं कि इस जाति का निजी व्यक्तित्व लोप सा हो गया है । इन्होंने अन्य जातियों के रीति रिवाज़ अपना लिये हैं । करबाल कहीं दो तो बड़े ही रुढ़िी को क्षत्रिय बताते हैं । इनकी जाति में भी एक पंचायत है । इनकी उपजातियों में पारस्परिक विवाह सम्बन्ध हो सकता है। अन्य जातियों से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है। केवल अपराध करने के लिये मेल हो जाता है। पश्चिमी ज़िले में यह लोग अपने को कोल से सम्बन्धित बताते हैं गोकि कोल लोग इनसे अपना कोई सम्बन्ध नहीं मानते हैं । करवालों के विवाह सम्बन्ध बेड़ियों से हो जाते हैं । किन्तु यह लोग बेड़ियों की तरह स्त्रियों से व्यभिचार नहीं कराते हैं । हेड़िया, बहेलिया, भंगी और एक उपजाति है जो करवाल कहलाती है इससे इस जाति का मिश्रित होना सिद्ध होता है । करबलों में भी पंचायत होती है जो जाति के समस्त झगड़े नहीं तय करती है। विवाह सम्बन्धों की स्वीकृति भी पंचायत हो करती है । तलाक की प्रथा है। विधवा परित्यक्ता स्त्रियाँ पुनर्विवाह कर सकती हैं। विधवा से होने पर तीस रुपयापया और कुमारो से बिवाह करने पर साठ रुपयापया वर को देना पड़ता है । पंचायत को चौबीस रुपयापया देकर और पति को पहिले विवाह का साठ रुपयापया खर्च देकर एक पुरुष दूसरे पुरुष की पत्नो खरोद सकता है। पति के देहान्त पर स्त्री अपने देवर के साथ रह सकती है। आम तौर पर शब गाड़े जाते हैं किन्तु जिनको मृत्यु चेचक से होती है उनका दाह कर्म किया जाता है । यह लोग ज़हीर पीर की पूजा करते हैं जिनकी कब्र कहा जाता है कि ताजमहल के पास है। इसके अतिरिक्त पाँचों पीर, मदार साहब, गाज़ी मियां, काली माई, गंगाजी की पूजा करते हैं । यह लोग बकरी, भेड़, सुश्रर, स्याहो, छिपकली, मुगीं कबूतर इत्यादि खाते हैं । चमार भंगी घोबी डोम कोरी और धानुकों की जूठन को छोड़ कर अन्य जातियों को जूठन भी ले लेते हैं। पीपल की शपथ लेते हैं । कंजड़ और सांसियों की तरह अग्निपरीक्षा को मानते हैं । यदि किसी स्त्रो पर दुश्चरित्र होने का अभियोग हो और वह अभियोग स्वीकार न करे तो उसे अग्नि परीक्षा स्वीकार करनी पड़ती है । उसके हाथ पर कुछ पोपल के पत्ते रख दिये जाते हैं और उस पर एक गर्म लोहे का टुकड़ा रक्खा जाता है और पांच क़दम चलने को कहा जाता है । यदि उसके हाथ नहीं जलते हैं तो वह निर्दोष मानी जाती है । जल परोक्षा भो यह लोग मानते हैं। अभियुक्त को जल के अन्दर पर रखना पड़ता है जब तक कि दूसरा पुरुष दो सौ कदम न दौड़ ले यदि सिर उसके पहिले ही निकाल ले तो बह दोषो माना जाता है । अपराध करने को रीति- बहेलियों की तरह करबाल भो प्रारम्भ में शिकारो थे लेकिन इनकी आवारागर्द ज़िन्दगी ने इनको अपराध करने में प्रेरणा दी। अब यह एक भयानक अपराधी जाति समझी जाती है। कुछ लोग अब मी केवल शिकार करते हैं और ईमानदारी से जीवन व्यतीत करते हैं। कुछ लोग खेती करते हैं मज़दूरी करते हैं । किन्तु अधिकतर लोग आवारागर्द और संयुक्त प्रान्त और बंगाल का चक्कर लगाते हैं । यह लोग गिरोह बना कर चलते हैं, अपने को फ़कीर बताते हैं और राध करने की धुन में रहते हैं। इस प्रान्त मे सबसे पहिले इनकी ओर एक हज़ार आठ सौ छियासी में ध्यान आकर्षित हुआ जबकि इनके गिरोह बाराबंकी, गोंडा, गोरखपुर, जौनपुर, और सुल्तानपुर में चक्कर लगाते पाये गये । एक हज़ार छः सौ पाँच में करवालों के दल प्रान्त के पूर्वीय जिलों में चोरों के साथ डकैती और राहजुनी करने लगे। इनके विरुद्ध सख्त कार्यगई। और जिन लोगों पर पूरी तौर पर अपराध सिद्ध न हो सका उनसे दफा एक सौ छः व एक सौ दस में ज़मानतें मांगी गई इसका परिणाम यह हुआ कि करबाल लोग बंगाल को भाग गये और दो वर्ष तक वहाँ पर करते रहे । समस्या यहाँ तक बढी कि एक हज़ार छः सौ ग्यारह में बंगाल सरकार ने एक ही रोज़ में प्रान्त भर के घूमने वाले करबालों को पकड़ने का निश्चय किया और गिरफ्तार कर लिया । पुलिस की जांच पड़ताल से पता चला कि केवल पांच दलों ने तीन सौ छियालीस अपराध किये थे । इन लोगों पर मुकदमा चला और काफी आद मियों को दंड मिला मुकदमें के दौरान में अजीब दो बातों का पता चला । जो लोग अपने को करवाल बताते थे वे यथार्थ में हबूड़ा, कंजड़, नट, सांसिये थे। यह भी साबित हुआ कि इनके दलों की स्त्रियां भीख मांगती थीं, भीव देने से इनकार किया जाता था तो गाली बकती थी और मैला घरों में फेंकती थीं। आदमी एक दिन में बहुत दूर तक पैदल चले जाते थे । दलों के सदस्य बराबर बदलते रहते थे । सियारकी बोली दलों का गुप्त चिह्न था । हमले कियेजाने बाले व्यक्ति या व्यक्तियों पर पहिले पत्थरों की बौछार की जाती और फिर उन्हें पेड़ों से बांध दिया जाता था। इन दलों का मुख्य काम बकरी की चोरी करना था । जब इन करवलों के अंगूठों के निशानों की जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि उनमें बहुत से ऐसे थे कि जिन्हें पहिले मज़ा मिल चुकी थी और जिन्होंने पहिली सजा के समय अपनी जाति हवूड़ा, सांसिया, नट, इत्यादि बताई थी । इसलिये यह निश्चयात्मक रूप से नहीं कहा जा सकता कि करबल जाति में कितने लोग अपराध करते हैं। उन दिनों पश्चिमी जिलों में हब्रूड़ों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही थी। वे लोग नैगल को तराई के जंगलों में घुस कर फिर बृटिश राज्य में बस्ती के जिले में घुस प्राये और पूर्वीय जिले में करबलों के गिरोह में सम्मिलित होगये । मिस्टर हालिन्मने अपनी किताब में लिखा है कि एक हज़ार छः सौ ग्यारह तक पन्द्रह वर्ष के दौरान में आठ सौ छत्तीस करबलों को सजायें मिलीं। किन्तु इस संख्या में उन हबूड़ों, कंजड़ों, नटों इत्यादि की भी संख्या सम्मिलित है जिन्होंने जाकिरवल बताई थी इस कारण सजायाफ्ता कम्वलों की संख्या बनाना सम्भव नहीं है । उत्पत्ति - दुसाध संयुक्त प्रांत के पूर्वीय जिलों में बसने वाली एक हरिजन जाति है । इनका रहन सहन बहेलियों और पासियों से मिलता जुलता है। यह लोग अपने को धृतराष्ट्र के पुत्र दुश्शासन का वंशज बतलाते हैं। कुछ दुसाध अपने को भीमसेन का वंशज बताते है । जाति में एक कहावत है कि दुसाघों की उत्पत्ति ब्राह्मण और एक नीच जाति की स्त्री के सम्बन्ध से हुई है। इस जाति में भी बहुत सी उपजातियाँ हैं जिनमें ढाड़ी, गोंडर, कनौजिया, खटिक और कुर्बानिया मुख्य हैं । इन उपजातियों के नामों से विदित विदित होता है कि इस जाति में दूसरी जातियों की उपजातियों से काफी मिश्रण हुआ है। सामाजिक रीति रिवाज - जाति में एक पंचायत है जो जाति के सभी मुख्य विषयों पर निर्णय देती है। एक पुरुष एक पत्नी के होते हुये दूसरा विवाह कर सकता है यदि वह निःसंतान हो, किन्तु दूसरी पत्नी की सन्तान को पिता की सम्पत्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता। दूसरी जाति की स्त्री को भी पत्नी की तरह रक्खा जा सकता है और यदि स्त्री दुसाधों से ऊँची जाति की हो तो उसकी सन्तान को जाति के पूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। विधाओं तथा परित्यक्ता स्त्रियों को पुनर्विवाह करने का हक है । दत्तक पुत्र गोद लेने की प्रथा है किन्तु दत्तक पुत्र किसी निकट सम्बन्धी ही का पुत्र होता है। मृतकों के शब की दाइ क्रिया होती है किन्तु अविवाहित और मृतकों के शव को गाड़ दिया जाता है। दुसाध अपने को सनातनी हिन्दू कहते हैं और यह लोग राहु की पूजा करते हैं । यह लोग छटबादी और मुनखादेव की भी पूजा करते हैं । प्लासी की लड़ाई में क्लाइब को सेना में अधिकतर दुसाध थे किन्तु अब इस जाति के लोग नीच काम ही करते हैं । यह लोग या तो हल चलाते हैं या चौकीदारी करते हैं किन्तु इस जाति ने मदिरा सेवन की आदत होने के कारण कोई उन्नति नहीं की। यह लोग कोई हुनर नहीं जानते । कुछ लोग लकड़ी काट कर और जंगलो वस्तुयें इकट्ठा करके अपना जीवन व्यतीत करते हैं । इस जाति के कुछ लोग जिन्हें बलिया जिले में पलषर दुसाध कहते हैं आवारागर्द हैं । चोरी, बदमाशी, डकैती और राइजनी करने में उनका नाम निकल गया है । एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ तक इनके लिये मशहूर था कि यह लोग बंगाल के जिलों में जाकर डाका डाला करते थे। एक हज़ार आठ सौ सत्तासी में जब मिस्टर बार्नर बलिया जिले के पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट थे तब उन्होंने पता लगाया था कि पलवर दुसाघों के गिरोह प्रति वर्ष बंगाल में डाका डालने र चोरी करने जाते हैं और कई महीने बाद बहुत सा चोरी और डाके का माल लेकर वापस आते हैं । अपराध करने की रीति - पलवर दुसाघों की चोरी डकैती रोकने का प्रबन्ध करने के लिये एक हज़ार आठ सौ अड़सठ में एक कमेटी बनाई गई थी जिसमें बलिया जिले के कलेक्टर, पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट और डिप्टो इन्सपेक्टर, जेनरल पुलिस सदस्य थे । इन लोगों ने अपनी रिपोर्ट में निस्सन्देह बलिया के पलवर दुमाध नकः बजनी और राहजनी व डकैती करने के लिये जिना छोड़कर चले जाते हैं । दक्षिण बंगाल के जिलों में जाकर डकैती इत्यादि डालते हैं । जलपाईगिरी ओर कुचबिहार तक में इनकी पहुँच हो गई है। कुछ अपराधों में इन पर आमाम और नैपाल रियासत में भी सन्देह किया जाता है । यह लोग अपनी जाति के लोगों को इन जिलों में बस देते हैं। यह लोग चोरी का माल लेते हैं और उसे बेचने का प्रबन्ध करते हैं साथ ही इस बात की सूचना देते रहते हैं कि किसके यहां चोरी की जाये या डाका डाला जाये । मिस्टर होलिम ने अपनी पुस्तक में वर्णन किया है कि अभीतक पलवर दुमाधों का यही हाल है। बहुत दुसाधने घरों से गायब है और बंगाल में नक्कर लगा रहे हैं । चोरी से लेकर डकैतो तक सभी प्रकार के अपराध यह लोग करते हैं । यदि केले होते हैं तो चोरी या उठाईगिरी करते हैं। यदि गिरोह में हुये तो राहजनी या डकैती करते है। यह लोग अपने साथ वापसी में चारों का बहुत सा माल लेकर और मज़े से मदिरा पान करके कुछ महीने स्वच्छन्दता से बिता देते हैं । कानून के अन्तर्गत कई बार इन जाति की घोषणा किये जाने पर विचार हुआ, परन्तु उस समय यह समझा जाता था कि यह सम्भव नहीं है क्योंकि इस जाति के लोग स्थाई तौर से रहते हैं और जीवन निर्वाह करने के लिये उचित साधनों का प्रयोग करते हैं । किन्तु यह सभी ने स्वीकार किया कि जीवन निर्वाह का उनका साधन अपराध करने के लिये केबल बहाना मात्र होता है । अपराध करने में इस जाति की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है । दुसाधों में भी पंचायत की प्रथा है। पंचायत में एक सरदार होता है जो पंचायत की सभा में भापति का काम करता है । उसकी मातहती में एक छड़ीदार होता है जो पंचायत का बुलावा लगाता है । जाति का प्रत्येक बालिग़ सदस्य पंचायत का सदस्य होता है । नाबालिग़ व्यक्ति पंचायत की सभा में उपस्थित नहीं हो सकता है । पंचायत चारी, व्यभिचार, पर जाति के साथ खान पान, पुत्री को रखना या बिंदा न करना या दूसरी स्त्री को बहका लाना, इत्यादि अपगधों का फैसला करती है। को पांच से पचीस रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है। जुर्माने के रुपये मे पंचायत के लिये मदिरा मंगा जाता है । यदि अपराधी निर्धन होता है और जुर्माना नहीं दे सकता तो उसे जूते पड़ते हैं। पंचायत के सरदार का के स्थान पुश्तैनी होता है । दुसाध लोग जल में खड़े होकर और अपने लड़के के सर पर हाथ रख कर शपथ खाते हैं । यह लोग गाय का मांस नहीं खाते किन्तु अन्य मांस खाने में परहेज़ नहीं करते। मदिरा पान खूब करते है। ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय के हाथ की पकी पक्की रसोई खा लेते हैं किन्तु डोम इत्यादि का हुआ नहीं खाते । उत्पत्ति - दलेरा शब्द प्रायः डलिया शब्द से बना है। इस जाति का पेशा डलिया बनाना, मज़दूरी करना, एवं चोरी करना है । यह लोग मुख्यतः बरेली जिले में बसते हैं। कुछ लोग बुलन्दशहर जिले में भी हैं । इस जाति की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कहा जाता है कि एक बार एक गूज़र ठाकुर ने एक कहार की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और इस कारण जातिच्युत कर दिया गया। उसकी सन्तान दलेरा है । बरेली के दलेरा अपने को मेरठ और बुलन्दशहर जिले के पुराने रहने बाले बताते हैं जो अकाल के कारण बरेली आकर बस गये । दलेरों की बहुत सी उपजातियां हैं। अपराध करने की रीति - दलेरे केवल दिन की चोरी करते हैं. रात को चोरी नहीं करते। मेले, घाट इत्यादि पर ही चोरी करते हैं । दलेरा ऐसे स्थानपर किसी यात्री के पास बैठ जाता है और खाना पकाने का बहाना करता है। जब उस यात्री का ध्यान इधर उधर होता है तो दलेरा उसके बर्तन या अन्य सामान चुरा लेता है । यदि पीतल का बर्तन चुराता है तो उसे पानी के नीचे ले जाकर उसमें छेद कर देता है ताकि पहिचाना न जा सके। कभी कभी यह लोग बाज़ार में झूठ मूठ का झगड़ा कर डालते हैं और उसी गड़बड़ी में दूकानों से सामान लूट या उठा लेते हैं और जल्दी से अपने साथियों को देदेते हैं। कभी दो यह लोग ब्राह्मण या क्षत्री का भेष बना लेते हैं और कपड़े पहन कर बाजार में जाते हैं। अपने साथ छोटे लड़कों को भी ले जाते हैं, स्वयं दूकानदार को बातों में लगा लेते हैं और लड़कों से चोरी कराते हैं । यदि चोरी में लड़का पकड़ा जाता है तो स्वयं कह सुन कर छुड़ा लते हैं । लड़का यदि पकड़ा जाता है तो ठीक नाम, पता नहीं बताता है । चोरी करने वाले को दूना हिस्सा मिलता है और चोरो का रुपया मदिरापान में उड़ाया जाता है अपराध करने के तरीकों में यह लोग बखार और सौनाहरियों से मिलते जुलते हैं । दलेरे अक्तूबर के महीने में अपना घर छोड़कर चोरी करने के लिये बाहर चले जाते हैं और मई में वापस लौटते हैं। यह लोग आठ दस आदमियों के गिरोह में बाहर जाते हैं। इन गिरोहों को सोहबत कहते हैं। और गिरोह के सरदार को मुकद्दम कहते हैं । यह लोग चोरी करने के लिये बंगाल तक पहुँच जाते हैं। चोरी का माल जाति में बांटा जाता है । [अन्तर्प्रान्तीय अपराध कमेटी की रिपोर्ट में एक हज़ार छः सौ चार में मिस्टर ब्रेमाले ने इस जाति के विषय में लिखा है। 'दलेरा बर्णशंकर कारों की एक छोटी जाति है जो बरेली जिले में रहती है । इन लोगों का मुख्य स्थान गुड़गांव ग्राम, सिरौली थाना जिला बरेली है । यह सम्भव है कि यह चैन, चाँई या बखारों की सम्बन्धित जाति हो क्योंकि इनके राध करने का तरीका उन लोगों हे बहुत मिलता जुलता है।' बरेली के जिले अधिकारियों ने एक हज़ार आठ सौ साठ में प्रयत्न किया कि इस जाति की घोषणा जाति में कर दी जाये किन्तु प्रान्तीय सरकार ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया । एक हज़ार आठ सौ छयासठ ईशून्य में गुड़गांव में एक हेड कॉन्स्टेबल और चार कान्स्टेबिलों की अतिरिक्त तैनाती की गई क्योंकि इस गांव के दलेरे बहुत उत्पात कर रहे थे । इस जाति के व्यक्तियों की काफी संख्या मज़ाया है और उस समय सत्तासी ग्रादमी अपने घरों से भगे हुये थे । इस जाति को अप राध करने से रोकने के लिये जाति के व्यक्तियों की निगरानी और अपराधियों को उचित दण्ड दिया जाना बहुत ही आवश्यक था । यह लोग भी बरवारों की भांति बंगाल तक अपराध करने के लिये धावा मारते थे । एक हज़ार छः सौ दस ईशून्य मै छिहत्तर दलेरों को अपने घरों से अनुपस्थित पाया गया और अनुपस्थित व्यक्तियों में से बहत्तर व्यक्तियों को तीन सौ साठ मर्तबा दंड दिया जा चुका था ।
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Makhana Kheer Recipe: महाशिवरात्रि के व्रत में सेंधा नमक या सफेद नमक के सेवन से बचना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसमें आप कुछ भी नहीं खा सकते हैं बल्कि मीठा व फलाहार का सेवन कर सकते हैं। तो ऐसे में आप टेस्टी और हेल्दी मखाने की खीर बनाकर अपनी भूख तुरंत मिटा सकते हैं।
Makhana Kheer Recipe : इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 18 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन को लेकर भक्तों के बीच एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती के साथ भगवान शिव का विवाह हुआ था। इसलिए इसे हिंदू धर्म में बेहद पवित्र दिन माना जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा-आराधना करने के साथ ही लोग व्रत भी रखते हैं। भूख मिटाने के साथ-साथ अगर आप हेल्थ को भी फिट रखना चाहते हैं तो मखाने की खीर ट्राई कर सकते हैं। जानते हैं कैसे बनती है ये आसान रेसिपी।
Milk Benefits: सिर्फ कैल्शियम ही नहीं इन पोषक तत्वों का भी खजाना है दूध, एक्सपर्ट से जानिए क्या कच्चा दूध पीना चाहिए ?
मखाना खीर बनाने के लिए दो कप मखाने, आधा किलो दूध, देसी घी, इलायची पाउडर, ड्राई फ्रूट्स और दो से तीन चम्मच चीनी की जरूरत होती है।
- महाशिवरात्रि व्रत के लिए मखाना खीर बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक पैन में देसी घी गर्म करें और इस में मखानों को लगातार चमचे की मदद से चलाते रहें।
- जब मखाने भून जाएं तो इसे एक प्लेट में निकालकर ठंडा करने के लिए रख दें। अब गैस पर एक गहरे बर्तन में दूध डालकर गरम करने के लिए रखें।
- जब दूध उबलने लगे तो इसमें क्रश किए हुए मखानों को डालकर मिलाएं और इसके बाद इसमें चीनी भी डाल दें। इसे 15 मिनट तक उबलने दें लेकिन याद रखें कि इस दौरान गैस की फ्लेम धीमी ही रखनी है।
- अब जब दूध गाढ़ा होने लगे तो थोड़ी देर और पकाने के बाद गैस बंद कर दे। अब आपकी मीठी रेसिपी बनकर तैयार है। तो अब इसमें इलायची पाउडर, केसर के रेशे और ड्राई फ्रूट्स डालकर सर्व करें।
मखाना को धार्मिक त्योहारों में उपवास में सबसे अधिक खाया जाता है। पौष्टिकता से भरपूर मखाना में पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर, जिंक पाया जाता है। आयुर्वेद में भी इसके गुणों के बारे में बताया गया है। व्रत में इसे खाने से इंस्टैंट एनर्जी मिलती है।
(डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। )
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Makhana Kheer Recipe: महाशिवरात्रि के व्रत में सेंधा नमक या सफेद नमक के सेवन से बचना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसमें आप कुछ भी नहीं खा सकते हैं बल्कि मीठा व फलाहार का सेवन कर सकते हैं। तो ऐसे में आप टेस्टी और हेल्दी मखाने की खीर बनाकर अपनी भूख तुरंत मिटा सकते हैं। Makhana Kheer Recipe : इस साल महाशिवरात्रि का पर्व अट्ठारह फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन को लेकर भक्तों के बीच एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती के साथ भगवान शिव का विवाह हुआ था। इसलिए इसे हिंदू धर्म में बेहद पवित्र दिन माना जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा-आराधना करने के साथ ही लोग व्रत भी रखते हैं। भूख मिटाने के साथ-साथ अगर आप हेल्थ को भी फिट रखना चाहते हैं तो मखाने की खीर ट्राई कर सकते हैं। जानते हैं कैसे बनती है ये आसान रेसिपी। Milk Benefits: सिर्फ कैल्शियम ही नहीं इन पोषक तत्वों का भी खजाना है दूध, एक्सपर्ट से जानिए क्या कच्चा दूध पीना चाहिए ? मखाना खीर बनाने के लिए दो कप मखाने, आधा किलो दूध, देसी घी, इलायची पाउडर, ड्राई फ्रूट्स और दो से तीन चम्मच चीनी की जरूरत होती है। - महाशिवरात्रि व्रत के लिए मखाना खीर बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक पैन में देसी घी गर्म करें और इस में मखानों को लगातार चमचे की मदद से चलाते रहें। - जब मखाने भून जाएं तो इसे एक प्लेट में निकालकर ठंडा करने के लिए रख दें। अब गैस पर एक गहरे बर्तन में दूध डालकर गरम करने के लिए रखें। - जब दूध उबलने लगे तो इसमें क्रश किए हुए मखानों को डालकर मिलाएं और इसके बाद इसमें चीनी भी डाल दें। इसे पंद्रह मिनट तक उबलने दें लेकिन याद रखें कि इस दौरान गैस की फ्लेम धीमी ही रखनी है। - अब जब दूध गाढ़ा होने लगे तो थोड़ी देर और पकाने के बाद गैस बंद कर दे। अब आपकी मीठी रेसिपी बनकर तैयार है। तो अब इसमें इलायची पाउडर, केसर के रेशे और ड्राई फ्रूट्स डालकर सर्व करें। मखाना को धार्मिक त्योहारों में उपवास में सबसे अधिक खाया जाता है। पौष्टिकता से भरपूर मखाना में पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर, जिंक पाया जाता है। आयुर्वेद में भी इसके गुणों के बारे में बताया गया है। व्रत में इसे खाने से इंस्टैंट एनर्जी मिलती है। ट्रेंडिंगः
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इतने पर भी राजा संजय का मन शान्त नहीं हुआ, क्योंकि अपने पोता-पोती के प्रति उसे बहुत स्नेह था । अतः एक बार फिर वन के दुःखों की, राजवैभव के जिस सुख में उनका पालन हो रहा था उससे, तुलना की और माद्री से आग्रह किया कि उन्हें राजमहल में ही छोड़ जाय । परन्तु माद्री ने यही जवाब दिया- "आर्य ! आप इनकी ज़रा भी चिन्ता न करें। आपके पोता-पोती की मैं अच्छी. तरह देखभाल रक्खूँगी। मुझे जो भी खाने-पीने और पहरने-ओढ़ने को मिलेगा वह पहले इन्हें देकर तब अपने लिए लूँगी । इन्हें किसी भी तरह की तकलीफ़ न हो, इसका मैं ख़ास तौर पर ध्यान रक्खूँगी ।"
ससुर राजा संजय और पुत्रवधू माद्री के बीच इस प्रकार वार्तालाप होते-होते सारी रात बीत गई और प्रभात होने लगा । चार घोड़ों से जुता हुआ रथ महल के दरवाज़े पर आकर राजकुमार की प्रतीक्षा करने लगा। तत्र माद्री ने विनीत-भाव से सास-समुर के पेर छूकर उनसे विदा मांगी और दास-दासियों के साथ विदाई की थोड़ी मधुर बातें करके बालकों के साथ वेस्सन्तर से भी पहले रथ में जा बैठी। पश्चात् राजकुमार वेस्सन्तर भी बड़ी इज्जत के साथ अपने जनक- जननी की प्रदक्षिणा करके रथ में बैठा और रथ यंकपर्वत की ओर चल दिया ।
माद्री के जीवन का उत्तरार्ध भी बोधप्रद है । प्रातः स्मरणीया सीताजी के महान् चरित्र से पतिभक्ति का कैसा सुन्दर और उज्ज्वल आदर्श आर्य स्त्रियों के सामने उपस्थित हुआ है और संस्कारवान पति
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इतने पर भी राजा संजय का मन शान्त नहीं हुआ, क्योंकि अपने पोता-पोती के प्रति उसे बहुत स्नेह था । अतः एक बार फिर वन के दुःखों की, राजवैभव के जिस सुख में उनका पालन हो रहा था उससे, तुलना की और माद्री से आग्रह किया कि उन्हें राजमहल में ही छोड़ जाय । परन्तु माद्री ने यही जवाब दिया- "आर्य ! आप इनकी ज़रा भी चिन्ता न करें। आपके पोता-पोती की मैं अच्छी. तरह देखभाल रक्खूँगी। मुझे जो भी खाने-पीने और पहरने-ओढ़ने को मिलेगा वह पहले इन्हें देकर तब अपने लिए लूँगी । इन्हें किसी भी तरह की तकलीफ़ न हो, इसका मैं ख़ास तौर पर ध्यान रक्खूँगी ।" ससुर राजा संजय और पुत्रवधू माद्री के बीच इस प्रकार वार्तालाप होते-होते सारी रात बीत गई और प्रभात होने लगा । चार घोड़ों से जुता हुआ रथ महल के दरवाज़े पर आकर राजकुमार की प्रतीक्षा करने लगा। तत्र माद्री ने विनीत-भाव से सास-समुर के पेर छूकर उनसे विदा मांगी और दास-दासियों के साथ विदाई की थोड़ी मधुर बातें करके बालकों के साथ वेस्सन्तर से भी पहले रथ में जा बैठी। पश्चात् राजकुमार वेस्सन्तर भी बड़ी इज्जत के साथ अपने जनक- जननी की प्रदक्षिणा करके रथ में बैठा और रथ यंकपर्वत की ओर चल दिया । माद्री के जीवन का उत्तरार्ध भी बोधप्रद है । प्रातः स्मरणीया सीताजी के महान् चरित्र से पतिभक्ति का कैसा सुन्दर और उज्ज्वल आदर्श आर्य स्त्रियों के सामने उपस्थित हुआ है और संस्कारवान पति
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जिला जेल की शिकायत पर सिटी पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध नारकोटिक्स अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।
नसीबपुर जेल में हवालाती बंदी प्रदीप उर्फ तुररी निवासी कोहारड (कोसली) को पुलिस जब कोसली कोर्ट में पेश के बाद वापस लेकर आई तो तलाशी में उसकी चप्पलों से सुल्फा एवं अफीम बरामद हुए। यह सुल्फा एवं अफीम पॉलीथीन में पैकेट बनाकर चप्पल की ऐडि़यां काटकर उसमें छुपाकर रखी गई थी। जिला जेल की शिकायत पर सिटी पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध नारकोटिक्स अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।
जानकारी मुताबिक नसीबपुर में कोसली उपमंडल के गांव कोहारड निवासी प्रदीफ उर्फ तुररी नसीबपुर जेल में बंदी है। पुलिस उसे आठ जुलाई को एक केस के सिलसिल में कोसली अदालत में लेकर गई थी, जहां से आते-आते पुलिस को शाम हो गई। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे जब उसे नसीबपुर जेल लाया गया तो जेल के ब्लॉक नंबर दो में ब्लॉक इंचार्ज बलजीत ने उसकी तलाशी लेना शुरू की। इसी तलाशी के दौरान तुररी की चप्पलों को चेक किया तो उसमें दो पॉलीथीन पैकिंग के अंदर सुल्फा एवं अफीम पदार्थ बरामद हुआ। उक्त हवालाती बंदी से गहनता से पूछताद करने पर उसने बताया कि वह ये चप्पल कोसली न्यायालय में पेशी के दौरान बदलकर लाया है तथा यह सुल्फा और अफीम जेल में बंद अनिल उर्फ मोनू निवासी हांडाहेड़ा (पटौदी) जिला गुरुग्राम ने मंगवाया था तथा उसके कहने पर ही यह लेकर आया है। यह सुल्फा एवं अफीम पॉलीथीन के अंदर पैकेट बनाकर छुपा रखी थी। जिनका इलेक्ट्रानिक कांटे से वजन कराने पर अफीम 26. 04 ग्राम तथा सुल्फा 17. 03 ग्राम पाया या। दोनों नशीले पदार्थों के अलग-अलग डिब्बियों में सील बंद करके पुलिस ने पुलिंदा तैयार कर दिया। पुलिस ने दोनों विचाराधीन बंदियों के विरुद्ध जुर्म जेर धारा 17, 20 नारकोटिक्स अधिनियम एवं 42 जेल एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
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जिला जेल की शिकायत पर सिटी पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध नारकोटिक्स अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। नसीबपुर जेल में हवालाती बंदी प्रदीप उर्फ तुररी निवासी कोहारड को पुलिस जब कोसली कोर्ट में पेश के बाद वापस लेकर आई तो तलाशी में उसकी चप्पलों से सुल्फा एवं अफीम बरामद हुए। यह सुल्फा एवं अफीम पॉलीथीन में पैकेट बनाकर चप्पल की ऐडि़यां काटकर उसमें छुपाकर रखी गई थी। जिला जेल की शिकायत पर सिटी पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध नारकोटिक्स अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। जानकारी मुताबिक नसीबपुर में कोसली उपमंडल के गांव कोहारड निवासी प्रदीफ उर्फ तुररी नसीबपुर जेल में बंदी है। पुलिस उसे आठ जुलाई को एक केस के सिलसिल में कोसली अदालत में लेकर गई थी, जहां से आते-आते पुलिस को शाम हो गई। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे जब उसे नसीबपुर जेल लाया गया तो जेल के ब्लॉक नंबर दो में ब्लॉक इंचार्ज बलजीत ने उसकी तलाशी लेना शुरू की। इसी तलाशी के दौरान तुररी की चप्पलों को चेक किया तो उसमें दो पॉलीथीन पैकिंग के अंदर सुल्फा एवं अफीम पदार्थ बरामद हुआ। उक्त हवालाती बंदी से गहनता से पूछताद करने पर उसने बताया कि वह ये चप्पल कोसली न्यायालय में पेशी के दौरान बदलकर लाया है तथा यह सुल्फा और अफीम जेल में बंद अनिल उर्फ मोनू निवासी हांडाहेड़ा जिला गुरुग्राम ने मंगवाया था तथा उसके कहने पर ही यह लेकर आया है। यह सुल्फा एवं अफीम पॉलीथीन के अंदर पैकेट बनाकर छुपा रखी थी। जिनका इलेक्ट्रानिक कांटे से वजन कराने पर अफीम छब्बीस. चार ग्राम तथा सुल्फा सत्रह. तीन ग्राम पाया या। दोनों नशीले पदार्थों के अलग-अलग डिब्बियों में सील बंद करके पुलिस ने पुलिंदा तैयार कर दिया। पुलिस ने दोनों विचाराधीन बंदियों के विरुद्ध जुर्म जेर धारा सत्रह, बीस नारकोटिक्स अधिनियम एवं बयालीस जेल एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
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करोड़ों किसानों को सौगात मिली है। आपको बताते कि, लंबे समय से इंतजार कर रहे 12 करोड़ से ज्यादा किसानों के खाते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की 11वीं किस्त ट्रांसफर कर दी। इसके तहत लाभार्थी किसानों के खाते में 2000 रुपये आए 10 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ मिला है।
शिमला में आयोजित 'गरीब कल्याण सम्मेलन' कार्यक्रम में पीएम मोदी ने किसानों से बातचीत भी की। यह कार्यक्रम सालभर तक चलने वाले 'आजादी का अमृत महोत्सव' केके तहत आयोजित किया गया था। पीएम किसान योजना के तहत किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। ज्यादातर किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये आ चुके हैं, लेकिन यदि कोई किसान है जिसके खाते में पैसा नहीं आया है तो वह हेल्पलाइन की मदद ले सकता है।
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करोड़ों किसानों को सौगात मिली है। आपको बताते कि, लंबे समय से इंतजार कर रहे बारह करोड़ से ज्यादा किसानों के खाते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की ग्यारहवीं किस्त ट्रांसफर कर दी। इसके तहत लाभार्थी किसानों के खाते में दो हज़ार रुपयापये आए दस करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ मिला है। शिमला में आयोजित 'गरीब कल्याण सम्मेलन' कार्यक्रम में पीएम मोदी ने किसानों से बातचीत भी की। यह कार्यक्रम सालभर तक चलने वाले 'आजादी का अमृत महोत्सव' केके तहत आयोजित किया गया था। पीएम किसान योजना के तहत किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। ज्यादातर किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये आ चुके हैं, लेकिन यदि कोई किसान है जिसके खाते में पैसा नहीं आया है तो वह हेल्पलाइन की मदद ले सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों में रामनवमी और हनुमान जयंती समारोह के मौके पर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की न्यायिक जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि रामनवमी और हनुमान जयंती पर हुई हिंसक घटनाओं के जांच के सम्बन्ध में कोर्ट दिशानिर्देश दे।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अधिवक्ता विशाल तिवारी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि, "आप चाहते हैं कि जांच की अध्यक्षता पूर्व सीजेआई करें? क्या कोई खाली बैठा है? पता करें कि यह किस तरह की राहत है। " विशाल तिवारी ने अपनी याचिका में रामनवमी के दौरान राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई झड़पों की जांच कराने का निर्देश देने की मांग की थी।
जनहित याचिका में मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 'बुलडोजर न्याय' की मनमानी कार्रवाई की जांच के लिए भी एक समान समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है और लोकतंत्र और कानून के शासन की धारणा में फिट नहीं बैठती है।
पिछले बुधवार को बुलडोजर से दिल्ली के जहांगीरपुरी में कार्रवाई की गई थी और कई झुग्गियों और दुकानों को तोड़ दिया गया था। ये कार्रवाई अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बताकर की गई थी। हालांकि कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा था क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आ गया था। जमीयत-उलमा-ए-हिंद ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शुरू की गई बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी और तर्क दिया था कि लोगों के घर और दुकानें गिराने से पहले नोटिस तक नहीं दी गई।
बता दें कि हनुमान जयंती के मौके पर दिल्ली के जहांगीरपुरी में शोभा यात्रा निकाली गई थी, जिसमें दो पक्षों में विवाद हुआ और फिर हिंसा भड़क गई। इस घटना में कुल 9 लोग घायल हुए थे जिसमें 8 पुलिसकर्मी शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 2 दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की है। वहीं दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात समेत अन्य राज्यों में भी हिंसा हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों में रामनवमी और हनुमान जयंती समारोह के मौके पर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की न्यायिक जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि रामनवमी और हनुमान जयंती पर हुई हिंसक घटनाओं के जांच के सम्बन्ध में कोर्ट दिशानिर्देश दे। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अधिवक्ता विशाल तिवारी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि, "आप चाहते हैं कि जांच की अध्यक्षता पूर्व सीजेआई करें? क्या कोई खाली बैठा है? पता करें कि यह किस तरह की राहत है। " विशाल तिवारी ने अपनी याचिका में रामनवमी के दौरान राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई झड़पों की जांच कराने का निर्देश देने की मांग की थी। जनहित याचिका में मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 'बुलडोजर न्याय' की मनमानी कार्रवाई की जांच के लिए भी एक समान समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है और लोकतंत्र और कानून के शासन की धारणा में फिट नहीं बैठती है। पिछले बुधवार को बुलडोजर से दिल्ली के जहांगीरपुरी में कार्रवाई की गई थी और कई झुग्गियों और दुकानों को तोड़ दिया गया था। ये कार्रवाई अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बताकर की गई थी। हालांकि कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा था क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आ गया था। जमीयत-उलमा-ए-हिंद ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शुरू की गई बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी और तर्क दिया था कि लोगों के घर और दुकानें गिराने से पहले नोटिस तक नहीं दी गई। बता दें कि हनुमान जयंती के मौके पर दिल्ली के जहांगीरपुरी में शोभा यात्रा निकाली गई थी, जिसमें दो पक्षों में विवाद हुआ और फिर हिंसा भड़क गई। इस घटना में कुल नौ लोग घायल हुए थे जिसमें आठ पुलिसकर्मी शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की है। वहीं दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात समेत अन्य राज्यों में भी हिंसा हुई थी।
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नई दिल्ली : सेल्फी मैंने ले ली आज वाला गाना तो आपने सुना होगा. इस गाने के पीछे धिनचैक पूजा का हाथ है. जहाँ इस गाने ने धिनचैक पूजा को पूरे इंडिया में फेमस कर दिया है वहीँ कुछ लोग तो इस गाने को झेल ही नहीं पा रहे हैं. लेकिन अब आपको ये बात जानकार थोड़ी राहत मिलेगी कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी लोग ऐसे ही एक खुराफाती सिंगर की आवाज़ को बर्दाश्त करने के लिए मजबूर है.
दरअसल भारत में धिनचैक पूजा के पॉप्युलर होने के बाद अब पाकिस्तान में भी एक सिंगर ने जन्म ले लिया है जो बिल्कुल धिनचैक पूजा के नक़्शे कदम पर चल रहा है बस फर्क सिर्फ इतना है कि ये सिंगर एक लड़का है.
पाकिस्तानी सिंगर हनी किंग, ने 'ढिंचैंक आइटम' की भी नकल कर ली, लेकिन अपने अंदाज में। हनी किंग ने 25 जून 2017 को यूट्यूब पर अपने अंदाज में गाया ढिंचैक पूजा का गाना 'सेल्फी मैंने ले ली आज' अपलोड किया, जिसे खबर लिखे जाने तक महज 6 हजार 459 लोगों ने देखा था। यानी म्यूजिक लवर्स एक और सदमा बर्दाश्त करने के लिए तैयार मालूम नहीं होते हैं।
हनी किंग ने अपनी गाने में ढिंचैक पूजा की तस्वीरों का इस्तेमाल कर उन्हें अजीब ढंग से क्रेडिट दी है।
उधर ढिंचैक पूजा का ऑरिजनल वर्जन सेल्फी 'मैंने ले ली आज' को यूट्यूब पर अब तक करीब 2 करोड़ लोग देख चुके हैं। ढिंचैक के गानों ने संगीत की दुनिया में कई बहसें छेड़ दी हैं, जिनका कोई सिर-पैर नहीं हैं!
धिनचैक पूजा के गाने जहाँ कुछ लोगों को वाहियात लगते हैं वहीँ पर कुछ लोगों के लिए ये गाने किसी प्रेरणा से कम नहीं होते हैं. इसी का नतीजा है कि अब पाकिस्तान में भी धिनचैक पूजा के मेल वर्जन ने जन्म ले लिया है हालाकि इस मेल वर्जन की लोकप्रियता पूजा जितनी नहीं है लेकिन पाकिस्तान के हिसाब से हनी किंग को काफी लोकप्रियता मिल चुकी है.
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नई दिल्ली : सेल्फी मैंने ले ली आज वाला गाना तो आपने सुना होगा. इस गाने के पीछे धिनचैक पूजा का हाथ है. जहाँ इस गाने ने धिनचैक पूजा को पूरे इंडिया में फेमस कर दिया है वहीँ कुछ लोग तो इस गाने को झेल ही नहीं पा रहे हैं. लेकिन अब आपको ये बात जानकार थोड़ी राहत मिलेगी कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी लोग ऐसे ही एक खुराफाती सिंगर की आवाज़ को बर्दाश्त करने के लिए मजबूर है. दरअसल भारत में धिनचैक पूजा के पॉप्युलर होने के बाद अब पाकिस्तान में भी एक सिंगर ने जन्म ले लिया है जो बिल्कुल धिनचैक पूजा के नक़्शे कदम पर चल रहा है बस फर्क सिर्फ इतना है कि ये सिंगर एक लड़का है. पाकिस्तानी सिंगर हनी किंग, ने 'ढिंचैंक आइटम' की भी नकल कर ली, लेकिन अपने अंदाज में। हनी किंग ने पच्चीस जून दो हज़ार सत्रह को यूट्यूब पर अपने अंदाज में गाया ढिंचैक पूजा का गाना 'सेल्फी मैंने ले ली आज' अपलोड किया, जिसे खबर लिखे जाने तक महज छः हजार चार सौ उनसठ लोगों ने देखा था। यानी म्यूजिक लवर्स एक और सदमा बर्दाश्त करने के लिए तैयार मालूम नहीं होते हैं। हनी किंग ने अपनी गाने में ढिंचैक पूजा की तस्वीरों का इस्तेमाल कर उन्हें अजीब ढंग से क्रेडिट दी है। उधर ढिंचैक पूजा का ऑरिजनल वर्जन सेल्फी 'मैंने ले ली आज' को यूट्यूब पर अब तक करीब दो करोड़ लोग देख चुके हैं। ढिंचैक के गानों ने संगीत की दुनिया में कई बहसें छेड़ दी हैं, जिनका कोई सिर-पैर नहीं हैं! धिनचैक पूजा के गाने जहाँ कुछ लोगों को वाहियात लगते हैं वहीँ पर कुछ लोगों के लिए ये गाने किसी प्रेरणा से कम नहीं होते हैं. इसी का नतीजा है कि अब पाकिस्तान में भी धिनचैक पूजा के मेल वर्जन ने जन्म ले लिया है हालाकि इस मेल वर्जन की लोकप्रियता पूजा जितनी नहीं है लेकिन पाकिस्तान के हिसाब से हनी किंग को काफी लोकप्रियता मिल चुकी है.
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PATNA: बिहार में जातिगत जनगणना का दूसरा चरण 15 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। 15 अप्रैल से होने वाले दूसरे चरण के जातिगत जनगणना के लिए हर जाति की पहचान के लिए सरकार ने एक खास कोड जारी किया है हालांकि इसी बीच जाति आधारित जनगणना के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक साथ तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं और हाई कोर्ट से जाति आधारित जनगणना को रद्द करने की मांग की गई है।
इन याचिकाओं में याचिकाकर्ता ने कहा है कि जाति आधारित गणना से समाज में भेदभाव उत्पन्न हो सकता है। शुभम नाम के शख्स ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सामान्य प्रशासन विभाग के उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है, जिसमें बिहार में जातिगत जनगणना कराने की बात कही गई थी। इस मामले पर हाई कोर्ट में 18 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है।
याचिकाकर्ता शुभम का कहना है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए बिहार की सरकार मनमाने तरीके से जाति आधारित जनगणना करा रही है, जिसके कारण भेदभाव बढ़ने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा है कि जब केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने से इंकार कर दिया है तो बिहार सरकार पांच सौ करोड़ रुपए खर्च कर बिहार में जाति आधारित जनगणना क्यों करा रही है।
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PATNA: बिहार में जातिगत जनगणना का दूसरा चरण पंद्रह अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। पंद्रह अप्रैल से होने वाले दूसरे चरण के जातिगत जनगणना के लिए हर जाति की पहचान के लिए सरकार ने एक खास कोड जारी किया है हालांकि इसी बीच जाति आधारित जनगणना के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक साथ तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं और हाई कोर्ट से जाति आधारित जनगणना को रद्द करने की मांग की गई है। इन याचिकाओं में याचिकाकर्ता ने कहा है कि जाति आधारित गणना से समाज में भेदभाव उत्पन्न हो सकता है। शुभम नाम के शख्स ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सामान्य प्रशासन विभाग के उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है, जिसमें बिहार में जातिगत जनगणना कराने की बात कही गई थी। इस मामले पर हाई कोर्ट में अट्ठारह अप्रैल को सुनवाई हो सकती है। याचिकाकर्ता शुभम का कहना है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए बिहार की सरकार मनमाने तरीके से जाति आधारित जनगणना करा रही है, जिसके कारण भेदभाव बढ़ने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा है कि जब केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने से इंकार कर दिया है तो बिहार सरकार पांच सौ करोड़ रुपए खर्च कर बिहार में जाति आधारित जनगणना क्यों करा रही है।
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PATNA : बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा है कि नीतीश मुसलमानों के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं। तेजस्वी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून( CAA) पर जब संसद में समर्थन कर रहे थे तो उनका ये दर्द कहा चला गया था।
वहीं नीतीश कुमार के मुस्लिमों को भड़काने के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होनें कहा कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। नीतीश पहले अपने पार्टी के रुदाली को बुला कर रुलवाएं। अब तो खुद नीतीश कुमार रुदाली की भूमिका में आ गए हैं।
बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं से लेकर राजद के निशाने पर आये नीतीश कुमार ने आज कहा कि उनके रहते कोई मुसलमानों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। नीतीश ने कहा कि वे इसकी गारंटी लेते हैं कि कोई मुसलमानों की उपेक्षा भी नहीं कर सकता।
वहीं तेजस्वी यादव ने 21 दिसंबर को आरजेडी के बुलाए गये बंद के पहले सरकार को चेतावनी भरे में लहजे में कह दिया है कि हम CAA के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से बंद करेंगे, लेकिन इस दौरान अगर हमारे किसी कार्यकर्ता पर कोई पुलिसिया जुल्म किया गया तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे ।
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PATNA : बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा है कि नीतीश मुसलमानों के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं। तेजस्वी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून पर जब संसद में समर्थन कर रहे थे तो उनका ये दर्द कहा चला गया था। वहीं नीतीश कुमार के मुस्लिमों को भड़काने के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होनें कहा कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। नीतीश पहले अपने पार्टी के रुदाली को बुला कर रुलवाएं। अब तो खुद नीतीश कुमार रुदाली की भूमिका में आ गए हैं। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं से लेकर राजद के निशाने पर आये नीतीश कुमार ने आज कहा कि उनके रहते कोई मुसलमानों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। नीतीश ने कहा कि वे इसकी गारंटी लेते हैं कि कोई मुसलमानों की उपेक्षा भी नहीं कर सकता। वहीं तेजस्वी यादव ने इक्कीस दिसंबर को आरजेडी के बुलाए गये बंद के पहले सरकार को चेतावनी भरे में लहजे में कह दिया है कि हम CAA के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से बंद करेंगे, लेकिन इस दौरान अगर हमारे किसी कार्यकर्ता पर कोई पुलिसिया जुल्म किया गया तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे ।
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आप भी वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और आपका वजन कम नहीं हो रहा है तो आज मैं आपको एक ऐसी सब्जी के बारे में बताने जा रहा हूं जो आपका वजन कम करने में मदद करेगी। वैसे यह गर्मियों में आसानी से मिल भी जाती है और वह है परवल की सब्जी.
- तेल गर्म करें और उसमें राई और करी पत्ता डालें. इसके बाद इसमें परवल डालें. - अब हल्दी पाउडर, नमक और 1/4 कप पानी डालें. इसे नरम होने तक पकाते रहें. - इसके बाद बची हुई सामग्री डालकर खाएं.
परवल का सेवन करने से आपका वजन नियंत्रित रहेगा। इसमें कम कैलोरी, उच्च फाइबर, विटामिन ए, विटामिन बी6, विटामिन सी, विटामिन ई पाया जाता है। इससे न सिर्फ शरीर को पोषण मिलेगा बल्कि वजन भी कम होगा।
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आप भी वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और आपका वजन कम नहीं हो रहा है तो आज मैं आपको एक ऐसी सब्जी के बारे में बताने जा रहा हूं जो आपका वजन कम करने में मदद करेगी। वैसे यह गर्मियों में आसानी से मिल भी जाती है और वह है परवल की सब्जी. - तेल गर्म करें और उसमें राई और करी पत्ता डालें. इसके बाद इसमें परवल डालें. - अब हल्दी पाउडर, नमक और एक/चार कप पानी डालें. इसे नरम होने तक पकाते रहें. - इसके बाद बची हुई सामग्री डालकर खाएं. परवल का सेवन करने से आपका वजन नियंत्रित रहेगा। इसमें कम कैलोरी, उच्च फाइबर, विटामिन ए, विटामिन बीछः, विटामिन सी, विटामिन ई पाया जाता है। इससे न सिर्फ शरीर को पोषण मिलेगा बल्कि वजन भी कम होगा।
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दर्शक रेसलमेनिया 36 के लिए उत्साहित थे क्योंकि ये पिछले कुछ इवेंट्स से अलग रहने वाला था। WWE ने रेसलमेनिया को दो दिन आयोजित किया था और ये बड़ा इवेंट बिना दर्शकों के हुआ था। इतनी मुश्किलों के बाद भी कंपनी ने रेसलमेनिया को फैंस लिए कैंसिल नहीं किया।
इस साल रेसलमेनिया के दूसरे दिन हुए मेन इवेंट में ब्रॉक लैसनर का सामना WWE चैंपियनशिप के लिए रॉयल रंबल विजेता ड्रू मैकइंटायर के साथ हुआ था। इस धमाकेदार मैच में ड्रू ने कई सारी क्लेमोर किक का उपयोग किया और जीत दर्ज की। अब ब्रॉक से चैंपियनशिप छीन ली गयी है।
खैर, बेल्ट गंवाने का ये अर्थ नहीं है कि द बीस्ट अब WWE में लंबे समय तक नजर नहीं आएंगे बल्कि अगले कुछ महीनों में लैसनर फिर एक्शन में नजर आ सकते हैं। इस दौरान उन्हें कुछ अच्छे अपोनेंट्स की जरूरत होगी।
इसलिए हम बात करने वाले हैं रेसलमेनिया के बाद ब्रॉक लैसनर के 5 संभावित प्रतिद्वंदी के बारे में।
रिकोशे और ब्रॉक लैसनर के बीच कुछ महीनों पहले दुश्मनी देखने को मिली थी। इस दौरान दोनों के बीच सुपर शोडाउन में मैच भी हुआ था जहां द बीस्ट ने बड़ी आसानी से रिकोशे को हराया था।
इसके अलावा रॉ के कुछ एपिसोड्स में भी ब्रॉक लैसनर और रिकोशे का आमना-सामना हुआ था और लगभग हर बार लैसनर का पलड़ा भारी रहता था। ये बात तो तय है कि रिकोशे जरूर ही बदला लेना चाहेंगे और इस वजह से भविष्य में दोनों बड़े स्टार्स के बीच फिर एक मैच हो सकता है।
ब्रॉक लैसनर और एजे स्टाइल्स के बीच सर्वाइवर सीरीज में एक मैच हुआ था और ये मुकाबला काफी बढ़िया साबित हुआ था। द बीस्ट को रेसलमेनिया 36 के बाद तगड़े प्रतिद्वंदी की तलाश होगी और स्टाइल्स एक अच्छा विकल्प है।
अंडरटेकर ने एजे को अपने मैच के दौरान दफना दिया था और इससे साफ होता है कि वे कुछ समय के लिए आराम कर सकते हैं। कुछ समय बाद बतौर फेस सुपरस्टार वापसी करने के बाद दोनों स्टार्स फिर समरस्लैम में एक क्लासिक मैच दे सकते हैं।
ब्रॉक लैसनर को समरस्लैम में एक अच्छे प्रतिद्वंदी की तलाश रहेगी और केविन ओवेंस शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं। केविन रॉ के सबसे बड़े बेबीफेस में से एक माने जाते हैं और उन्हें जबरदस्त रिएक्शन मिलता है।
इसके अलावा ब्रॉक लैसनर रॉ और पूरी कंपनी के बड़े हील है। इस कारण से अगर उन्हें टॉप बेबीफेस के साथ बुक किया जाए तो एक शानदार स्टोरीलाइन तैयार हो सकती है।
ब्रॉक लैसनर अपनी मर्जी से ब्रांड बदल लेते हैं और ऐसा ही कुछ समय पहले हुआ था। लैसनर को स्मैकडाउन में ड्राफ्ट किया गया था लेकिन मिस्टीरियो से बदला लेने के लिए वे रॉ में आ गए थे।
द फीन्ड के गिमिक को जबरदस्त तरीके से पुश मिल रहा है। इस वजह से ही उन्हें गोल्डबर्ग और जॉन सीना जैसे दिग्गजों का सामना करने का मौका मिला है। फैंस लैसनर को द फीन्ड के खिलाफ देखना भी काफी पसंद करेंगे।
ब्रॉक लैसनर और बॉबी लैश्ले के ड्रीम मैच का फैंस सालों से इंतजार कर रहे हैं। खुद लैश्ले ने भी बताया है कि उन्होंने ब्रॉक लैसनर से मैच लड़ने के लिए मुख्य रूप से WWE में वापसी की है।
रेसलमेनिया में इस बड़े मैच के संकेत मिले जब लाना की वजह से लैश्ले को हार मिली। अगले कुछ महीनों में लैश्ले, लाना से अलग होकर फेस बन सकते हैं और इसके बाद ये बड़ा मैच संभव हो पाएगा।
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दर्शक रेसलमेनिया छत्तीस के लिए उत्साहित थे क्योंकि ये पिछले कुछ इवेंट्स से अलग रहने वाला था। WWE ने रेसलमेनिया को दो दिन आयोजित किया था और ये बड़ा इवेंट बिना दर्शकों के हुआ था। इतनी मुश्किलों के बाद भी कंपनी ने रेसलमेनिया को फैंस लिए कैंसिल नहीं किया। इस साल रेसलमेनिया के दूसरे दिन हुए मेन इवेंट में ब्रॉक लैसनर का सामना WWE चैंपियनशिप के लिए रॉयल रंबल विजेता ड्रू मैकइंटायर के साथ हुआ था। इस धमाकेदार मैच में ड्रू ने कई सारी क्लेमोर किक का उपयोग किया और जीत दर्ज की। अब ब्रॉक से चैंपियनशिप छीन ली गयी है। खैर, बेल्ट गंवाने का ये अर्थ नहीं है कि द बीस्ट अब WWE में लंबे समय तक नजर नहीं आएंगे बल्कि अगले कुछ महीनों में लैसनर फिर एक्शन में नजर आ सकते हैं। इस दौरान उन्हें कुछ अच्छे अपोनेंट्स की जरूरत होगी। इसलिए हम बात करने वाले हैं रेसलमेनिया के बाद ब्रॉक लैसनर के पाँच संभावित प्रतिद्वंदी के बारे में। रिकोशे और ब्रॉक लैसनर के बीच कुछ महीनों पहले दुश्मनी देखने को मिली थी। इस दौरान दोनों के बीच सुपर शोडाउन में मैच भी हुआ था जहां द बीस्ट ने बड़ी आसानी से रिकोशे को हराया था। इसके अलावा रॉ के कुछ एपिसोड्स में भी ब्रॉक लैसनर और रिकोशे का आमना-सामना हुआ था और लगभग हर बार लैसनर का पलड़ा भारी रहता था। ये बात तो तय है कि रिकोशे जरूर ही बदला लेना चाहेंगे और इस वजह से भविष्य में दोनों बड़े स्टार्स के बीच फिर एक मैच हो सकता है। ब्रॉक लैसनर और एजे स्टाइल्स के बीच सर्वाइवर सीरीज में एक मैच हुआ था और ये मुकाबला काफी बढ़िया साबित हुआ था। द बीस्ट को रेसलमेनिया छत्तीस के बाद तगड़े प्रतिद्वंदी की तलाश होगी और स्टाइल्स एक अच्छा विकल्प है। अंडरटेकर ने एजे को अपने मैच के दौरान दफना दिया था और इससे साफ होता है कि वे कुछ समय के लिए आराम कर सकते हैं। कुछ समय बाद बतौर फेस सुपरस्टार वापसी करने के बाद दोनों स्टार्स फिर समरस्लैम में एक क्लासिक मैच दे सकते हैं। ब्रॉक लैसनर को समरस्लैम में एक अच्छे प्रतिद्वंदी की तलाश रहेगी और केविन ओवेंस शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं। केविन रॉ के सबसे बड़े बेबीफेस में से एक माने जाते हैं और उन्हें जबरदस्त रिएक्शन मिलता है। इसके अलावा ब्रॉक लैसनर रॉ और पूरी कंपनी के बड़े हील है। इस कारण से अगर उन्हें टॉप बेबीफेस के साथ बुक किया जाए तो एक शानदार स्टोरीलाइन तैयार हो सकती है। ब्रॉक लैसनर अपनी मर्जी से ब्रांड बदल लेते हैं और ऐसा ही कुछ समय पहले हुआ था। लैसनर को स्मैकडाउन में ड्राफ्ट किया गया था लेकिन मिस्टीरियो से बदला लेने के लिए वे रॉ में आ गए थे। द फीन्ड के गिमिक को जबरदस्त तरीके से पुश मिल रहा है। इस वजह से ही उन्हें गोल्डबर्ग और जॉन सीना जैसे दिग्गजों का सामना करने का मौका मिला है। फैंस लैसनर को द फीन्ड के खिलाफ देखना भी काफी पसंद करेंगे। ब्रॉक लैसनर और बॉबी लैश्ले के ड्रीम मैच का फैंस सालों से इंतजार कर रहे हैं। खुद लैश्ले ने भी बताया है कि उन्होंने ब्रॉक लैसनर से मैच लड़ने के लिए मुख्य रूप से WWE में वापसी की है। रेसलमेनिया में इस बड़े मैच के संकेत मिले जब लाना की वजह से लैश्ले को हार मिली। अगले कुछ महीनों में लैश्ले, लाना से अलग होकर फेस बन सकते हैं और इसके बाद ये बड़ा मैच संभव हो पाएगा।
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सिंडिकेटेड ऋण एक से ज्यादा कुछ नहीं हैएक विशेष प्रकार का उधार, जो एक औसत तात्कालिकता की विशेषता है, उधारकर्ताओं को केवल एक ही नहीं बल्कि कई बैंकिंग संरचनाओं को दिया गया है। इसका अर्थ है कि इन बैंकिंग संरचनाओं के धन को जमा किया गया है।
सिंडिकेटेड ऋण को ऋण देने के एक अलग तरीके के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। वास्तव में, यह उधारकर्ताओं और लेनदारों दोनों के लिए उपयुक्त कई रूपों में से केवल एक है।
इस ऋण की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि,कि यह बहुत बड़े पैमाने पर जारी किया गया है। कुछ मामलों में, ऋण की राशि बीस करोड़ यूएस डॉलर तक पहुंच सकती है। यह इस कारण से है कि केवल कानूनी संस्थाओं को इसे प्राप्त करने का अधिकार है उधारकर्ताओं होल्डिंग्स, कंपनियों, बड़े उद्यमों, विभिन्न वित्तीय संरचनाओं हो सकता है अक्सर उधारकर्ता बैंकों के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे मामलों में जब राज्य द्वारा इसका उपयोग किया गया था।
सिंडिकेटेड ऋण के कई रूप हैं यहां उनमें से मुख्य और सबसे लोकप्रिय हैंः
- साझा करें इसकी ख़ासियत यह है कि यह कई बैंकों द्वारा एक साथ जारी किया जाता है जो संयुक्त रूप से ऋण समझौते को लागू करते हैं। इस मामले में, वे लेनदेन में उनकी भागीदारी को बेच सकते हैं;
- क्लब निधि पूरी तरह से बैंकों के प्रबंधन समूह द्वारा प्रदान की जाती हैं।
सिंडिकेटेड ऋण मोटे तौर पर विशिष्ट हैं उनके मुख्य लाभ इस प्रकार हैंः
- जब यह प्राप्त होता है, तो एक निश्चित कार्यक्रम तैयार होता है। यह शेड्यूल सबसे पहले, उधारकर्ता के लिए सुविधाजनक होना चाहिए। उस पर आगे भुगतान किया जाएगा;
- एक उधारकर्ता एक बहु-मुद्रा ऋण प्राप्त कर सकता है यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी भी समय मुद्रा परिवर्तित किया जा सकता है;
- सभी बैंक जो ऋण देने में भाग लेते हैं, वे उसी स्थिति में हैं इसका मतलब यह है कि ऋण की लागत काफी कम हो सकती है;
- एक विशेष संघ समूह बनाया है। वह दस्तावेजों के पैकेज को तैयार करती है, सभी क्रेडिट आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करती है, संभावित जोखिमों को निर्धारित करता है यह सब ऋण प्राप्त करने की शर्तों को छोटा करता है रिसेप्शन सर्किट को भी सरल बनाया गया है;
- जैसा कि पहले ही ऊपर वर्णित है, आयामसिंडिकेटेड ऋण बहुत बड़ी है इसके साथ जारी की गई राशि किसी एकल बैंक द्वारा जारी नहीं की जा सकती है। कुछ मामलों में, बड़े उद्यम एक बार में केवल कुछ बैंकों के आगे के विकास और पुनर्गठन के लिए आवश्यक धनराशि ले सकते हैं।
बेशक, सिंडिकेटेड ऋण के मुद्दे परकेवल विशेष बैंक शामिल हैं वे एक संगठित समूह के कुछ हैं जो विभिन्न कार्यों का प्रदर्शन करते हैं हम मुख्य, संगठनात्मक, प्रशासनिक कार्यों के बारे में बात कर रहे हैं। भुगतान प्रशासन बैंक के माध्यम से किया जाता है।
ऐसे सभी बैंक जो कि जारी करने में भाग लेते हैंक्रेडिट, कई फायदे हैं वित्तीय बैंकिंग ढांचे के लिए सिंडिकेट सुविधाजनक है क्योंकि प्रत्येक बैंक के जोखिम काफी कम हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बैंक द्वारा बनाई गई कंसोर्टियम स्थायी नहीं है, लेकिन कुछ परियोजनाओं के ढांचे के भीतर ही मौजूद है।
आवश्यक चेक और राशि के निर्धारण के बादसिंडिकेटेड ऋण, एक बैठक आयोजित की जाती है जिसमें सभी इच्छुक बैंकों के प्रतिनिधियों में भाग लेना चाहिए। आगे काम के लिए सभी स्थितियां ठीक से निर्धारित की जाती हैं।
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सिंडिकेटेड ऋण एक से ज्यादा कुछ नहीं हैएक विशेष प्रकार का उधार, जो एक औसत तात्कालिकता की विशेषता है, उधारकर्ताओं को केवल एक ही नहीं बल्कि कई बैंकिंग संरचनाओं को दिया गया है। इसका अर्थ है कि इन बैंकिंग संरचनाओं के धन को जमा किया गया है। सिंडिकेटेड ऋण को ऋण देने के एक अलग तरीके के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। वास्तव में, यह उधारकर्ताओं और लेनदारों दोनों के लिए उपयुक्त कई रूपों में से केवल एक है। इस ऋण की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि,कि यह बहुत बड़े पैमाने पर जारी किया गया है। कुछ मामलों में, ऋण की राशि बीस करोड़ यूएस डॉलर तक पहुंच सकती है। यह इस कारण से है कि केवल कानूनी संस्थाओं को इसे प्राप्त करने का अधिकार है उधारकर्ताओं होल्डिंग्स, कंपनियों, बड़े उद्यमों, विभिन्न वित्तीय संरचनाओं हो सकता है अक्सर उधारकर्ता बैंकों के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे मामलों में जब राज्य द्वारा इसका उपयोग किया गया था। सिंडिकेटेड ऋण के कई रूप हैं यहां उनमें से मुख्य और सबसे लोकप्रिय हैंः - साझा करें इसकी ख़ासियत यह है कि यह कई बैंकों द्वारा एक साथ जारी किया जाता है जो संयुक्त रूप से ऋण समझौते को लागू करते हैं। इस मामले में, वे लेनदेन में उनकी भागीदारी को बेच सकते हैं; - क्लब निधि पूरी तरह से बैंकों के प्रबंधन समूह द्वारा प्रदान की जाती हैं। सिंडिकेटेड ऋण मोटे तौर पर विशिष्ट हैं उनके मुख्य लाभ इस प्रकार हैंः - जब यह प्राप्त होता है, तो एक निश्चित कार्यक्रम तैयार होता है। यह शेड्यूल सबसे पहले, उधारकर्ता के लिए सुविधाजनक होना चाहिए। उस पर आगे भुगतान किया जाएगा; - एक उधारकर्ता एक बहु-मुद्रा ऋण प्राप्त कर सकता है यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी भी समय मुद्रा परिवर्तित किया जा सकता है; - सभी बैंक जो ऋण देने में भाग लेते हैं, वे उसी स्थिति में हैं इसका मतलब यह है कि ऋण की लागत काफी कम हो सकती है; - एक विशेष संघ समूह बनाया है। वह दस्तावेजों के पैकेज को तैयार करती है, सभी क्रेडिट आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करती है, संभावित जोखिमों को निर्धारित करता है यह सब ऋण प्राप्त करने की शर्तों को छोटा करता है रिसेप्शन सर्किट को भी सरल बनाया गया है; - जैसा कि पहले ही ऊपर वर्णित है, आयामसिंडिकेटेड ऋण बहुत बड़ी है इसके साथ जारी की गई राशि किसी एकल बैंक द्वारा जारी नहीं की जा सकती है। कुछ मामलों में, बड़े उद्यम एक बार में केवल कुछ बैंकों के आगे के विकास और पुनर्गठन के लिए आवश्यक धनराशि ले सकते हैं। बेशक, सिंडिकेटेड ऋण के मुद्दे परकेवल विशेष बैंक शामिल हैं वे एक संगठित समूह के कुछ हैं जो विभिन्न कार्यों का प्रदर्शन करते हैं हम मुख्य, संगठनात्मक, प्रशासनिक कार्यों के बारे में बात कर रहे हैं। भुगतान प्रशासन बैंक के माध्यम से किया जाता है। ऐसे सभी बैंक जो कि जारी करने में भाग लेते हैंक्रेडिट, कई फायदे हैं वित्तीय बैंकिंग ढांचे के लिए सिंडिकेट सुविधाजनक है क्योंकि प्रत्येक बैंक के जोखिम काफी कम हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बैंक द्वारा बनाई गई कंसोर्टियम स्थायी नहीं है, लेकिन कुछ परियोजनाओं के ढांचे के भीतर ही मौजूद है। आवश्यक चेक और राशि के निर्धारण के बादसिंडिकेटेड ऋण, एक बैठक आयोजित की जाती है जिसमें सभी इच्छुक बैंकों के प्रतिनिधियों में भाग लेना चाहिए। आगे काम के लिए सभी स्थितियां ठीक से निर्धारित की जाती हैं।
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वैश्विक वित्तीय संकट से 'ब्रांड इंडिया' को जोरदार झटका लगा है। जैसा कि पहले माना जा रहा था उससे भी बढ़कर भारत में वित्तीय एकता देखने को मिली है और यही वजह है कि इस वित्तीय संक्रमण का देश पर असर उम्मीद से भी अधिक दिख रहा है।
देश पर इस वित्तीय संकट का खतरा इसलिए भी अधिक लग रहा है क्योंकि अगर एक भी नीतिगत फैसला गलत जाता है तो यह बीमारी और खतरनाक शक्ल अख्तियार कर सकती है। वैश्विक संकट के इस दौर में विभिन्न देशों को यह सबक मिल रहा है कि नीति निर्माताओं को बाजार को भरोसा दिलाने के लिए पहल करने की जरूरत है, उन्हें पहले खुद में विश्वास पैदा करने की जरूरत है।
सरकारों को अब यह पता चल गया है कि लचर नीतिगत फैसलों से बाजार में विश्वास पैदा नहीं किया जा सकता और न ही वित्तीय संकट के झटकों से देश को उबारा जा सकता है। अगर बाजारों में फिर से विश्वास पैदा करना है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लानी है तो इसके लिए जरूरी है कि कड़े नीतिगत फैसले लिए जाएं, सख्त मौद्रिक नीतियां तैयार की जाएं।
पश्चिमी वित्तीय बाजारों में धीरे धीरे भरोसा लौटने लगा है और इसकी वजह रही है एक एक कर महत्त्वाकांक्षी कदम उठाना। इसकी शुरुआत ब्रिटेन में देखने को मिली थी और उसके बाद यूरोप और फिर अमेरिका भी इस दौड़ में शामिल हो लिए।
गत सोमवार को भारतीय नीति निर्माताओं ने भी ब्याज दरों में कटौती कर वित्तीय प्रणाली में जान फूंकने की शुरुआत कर दी। इस कदम के बाद यह कहा जा सकता है कि भारत ने भी इस चुनौती का सामना करने के लिए कमर कस ली है और अब वह भी सख्त कदम उठाने से नहीं चूकेगा।
पर सवाल यह है कि क्या इतने भर से काम चल जाएगा? संकट से निपटने के लिए भारत को और कौन कौन से कदम उठाने होंगे? अगर सरकार मौद्रिक नीतियों के मोर्चे पर बहुत सख्त कदम उठाना नहीं चाहती तो फिर इसका एक ही तरीका है कि वित्तीय क्षेत्र में कुछ अधिक कदम उठाने पड़ेंगे।
इसे दूसरे शब्दों में समझने की कोशिश करते हैं, अगर वित्तीय प्रणाली में विश्वास मजबूत नहीं है तो मौद्रिक नीतियों में जरा सी भी ढील न केवल वित्तीय संकट से उबारने में विफल रहेंगी बल्कि अर्थव्यवस्था को जोखिम में भी डाल सकती हैं। सबसे पहले जरूरी है कि हरेक वित्तीय संस्थान की समस्याओं को सुलझाया जाए।
कोशिश यह होनी चाहिए कि किसी भी भारतीय बैंक का क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) 300 आधार अंकों से ज्यादा न होने पाए। सीडीएस के बढ़ने से यह अपने आप ही साफ हो जाता है कि विदेशी निवेश को लेकर संकट उत्पन्न हो चुका है।
इस वजह से आरबीआई के रिजर्व में से विदेशी मुद्रा संसाधन पैदा करना वरीयता सूची में शामिल होगा। आरबीआई ने बाजार में रुपये की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाए हैं पर अब उसे यह कोशिश भी करनी पड़ेगी कि विदेशी मुद्रा की उपलब्धता भी बढ़े।
इसका एक तरीका है कि घरेलू वित्तीय संस्थानों के लिए विदेशी मुद्रा की नीलामी की जाए ताकि वे या तो खुद की जरूरतें पूरी कर सकें या फिर अपने ग्राहकों की मदद कर सकें जिन्हें विदेशी मुद्रा फंडिंग का दबाव झेलना पड़ रहा है। जब यूरोप में डॉली की कमी आई तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कदम उठाए और बड़े पैमाने पर स्वैप योजनाएं शुरू की जिससे यूरोपीय बाजारों में डॉलर की कमी खत्म हो गई।
आरबीआई को भी जल्द ही कुछ ऐसा ही कदम उठाना चाहिए ताकि नकदी की कमी न होने दी जाए। आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मुश्किल के दिनों के लिए बचा कर रखा था और शायद इससे ज्यादा मुश्किल हालात पैदा नहीं हो सकते, कहने का मतलब है कि अब उस भंडार का इस्तेमाल का वक्त आ गया है।
अगर ये कदम भी पर्याप्त नहीं जान पड़ते तो सरकार को घरेलू वित्त संस्थानों के विदेशी मुद्रा ऋण की गारंटी लेनी पड़ सकती है। भारत इस समय में वित्तीय संस्थानों के नुकसान के तले दबे होने का खतरा नहीं उठा सकता है।
हर वित्तीय संस्थान को संकट से उबारने के बाद और बाजार में विश्वास पैदा करने के बाद बैंकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे जल्द ही अपने पूंजी पर्याप्तता अनुपात को बढ़ाकर 15 से 18 फीसदी तक ले जाएं। अगर इस अनुपात को इस सीमा तक पहुंचाने के लिए सरकार को अतिरिक्त पूंजी की व्यवस्था करनी पड़े तो उस पर भी शीघ्र ही गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
जब इस संकट से निपट लिया जाता है तो सरकार को इस पूंजी को विभिन्न तरीकों से वापस करने की कोशिशें की जा सकती हैं। अर्थव्यवस्था के कमजोर होने की स्थिति में तय है कि बैंकों की गैर निष्पादित संपत्ति भी बढ़ेगी और इस वजह से जरूरी है कि बाजार में विश्वास पैदा करने के अलावा पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाया जाना भी जरूरी है।
अगला कदम यह होना चाहिए कि सभी प्रमुख बैंक निवेशकों और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश करें। एक तो बाजार का विश्वास पहले से ही कमजोर हो चुका है और ऐसे में अगर अनिश्चितता भी बनी रहती है तो इससे ज्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता।
बैंकों को चाहिए कि जिन विषयों को लेकर सबसे अधिक फिक्रमंदी है वे उनके बारे में आम लोगों को जानकारियां उपलब्ध कराएं जैसे विदेशी मुद्रा की स्थिति, बैंक की जिम्मेदारियां, होलसेल फंडिंग की स्थितियां आदि। आरबीआई के निरीक्षण में अगर इन विषयों पर बैंक पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश करें तो ऐसे संकट की घड़ी में यह बहुत फायदेमंद हो सकता है।
और आखिर में विनिमय दर और मौद्रिक नीतियों का जिक्र करते हैं। आरबीआई को विनिमय दरों में किसी तरह की छेड़छाड़ से परहेज करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से बड़ी तेजी से बाजार में नकदी की कमी पैदा हो सकती है।
और वह भी ऐसे समय में जब आरबीआई अर्थव्यवस्था में नकदी की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिशें कर रही है। बेहतर तो यही होगा कि ऐसे समय में आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल का रास्ता अपनाए न की रुपये को संभालने की कोशिश करे।
मौद्रिक नीतियों की बात करें तो आरबीआई ने ब्याज दरें कम की हैं और बाजार में नकदी बढ़ाने (रुपये के संदंर्भ में) की कोशिशें की जा रही हैं। कोशिश यह भी है कि देश में पूंजी निवेश को बढ़ाया जाए और देश से पूंजी की निकासी कम से कम हो। इसके लिए विदेशी मुद्रा के जमा खातों पर ब्याज दरों को भी बढ़ाया गया है।
हालांकि मौजूदा समय में डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकार्ड गिरावट से जूझ रहा है जो कि चिंता का विषय है, पर फिलहाल इस विषय में कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। वित्तीय संस्थानों और वित्तीय प्रणालियों में विश्वास लौटाना वरीयता सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए।
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वैश्विक वित्तीय संकट से 'ब्रांड इंडिया' को जोरदार झटका लगा है। जैसा कि पहले माना जा रहा था उससे भी बढ़कर भारत में वित्तीय एकता देखने को मिली है और यही वजह है कि इस वित्तीय संक्रमण का देश पर असर उम्मीद से भी अधिक दिख रहा है। देश पर इस वित्तीय संकट का खतरा इसलिए भी अधिक लग रहा है क्योंकि अगर एक भी नीतिगत फैसला गलत जाता है तो यह बीमारी और खतरनाक शक्ल अख्तियार कर सकती है। वैश्विक संकट के इस दौर में विभिन्न देशों को यह सबक मिल रहा है कि नीति निर्माताओं को बाजार को भरोसा दिलाने के लिए पहल करने की जरूरत है, उन्हें पहले खुद में विश्वास पैदा करने की जरूरत है। सरकारों को अब यह पता चल गया है कि लचर नीतिगत फैसलों से बाजार में विश्वास पैदा नहीं किया जा सकता और न ही वित्तीय संकट के झटकों से देश को उबारा जा सकता है। अगर बाजारों में फिर से विश्वास पैदा करना है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लानी है तो इसके लिए जरूरी है कि कड़े नीतिगत फैसले लिए जाएं, सख्त मौद्रिक नीतियां तैयार की जाएं। पश्चिमी वित्तीय बाजारों में धीरे धीरे भरोसा लौटने लगा है और इसकी वजह रही है एक एक कर महत्त्वाकांक्षी कदम उठाना। इसकी शुरुआत ब्रिटेन में देखने को मिली थी और उसके बाद यूरोप और फिर अमेरिका भी इस दौड़ में शामिल हो लिए। गत सोमवार को भारतीय नीति निर्माताओं ने भी ब्याज दरों में कटौती कर वित्तीय प्रणाली में जान फूंकने की शुरुआत कर दी। इस कदम के बाद यह कहा जा सकता है कि भारत ने भी इस चुनौती का सामना करने के लिए कमर कस ली है और अब वह भी सख्त कदम उठाने से नहीं चूकेगा। पर सवाल यह है कि क्या इतने भर से काम चल जाएगा? संकट से निपटने के लिए भारत को और कौन कौन से कदम उठाने होंगे? अगर सरकार मौद्रिक नीतियों के मोर्चे पर बहुत सख्त कदम उठाना नहीं चाहती तो फिर इसका एक ही तरीका है कि वित्तीय क्षेत्र में कुछ अधिक कदम उठाने पड़ेंगे। इसे दूसरे शब्दों में समझने की कोशिश करते हैं, अगर वित्तीय प्रणाली में विश्वास मजबूत नहीं है तो मौद्रिक नीतियों में जरा सी भी ढील न केवल वित्तीय संकट से उबारने में विफल रहेंगी बल्कि अर्थव्यवस्था को जोखिम में भी डाल सकती हैं। सबसे पहले जरूरी है कि हरेक वित्तीय संस्थान की समस्याओं को सुलझाया जाए। कोशिश यह होनी चाहिए कि किसी भी भारतीय बैंक का क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप तीन सौ आधार अंकों से ज्यादा न होने पाए। सीडीएस के बढ़ने से यह अपने आप ही साफ हो जाता है कि विदेशी निवेश को लेकर संकट उत्पन्न हो चुका है। इस वजह से आरबीआई के रिजर्व में से विदेशी मुद्रा संसाधन पैदा करना वरीयता सूची में शामिल होगा। आरबीआई ने बाजार में रुपये की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाए हैं पर अब उसे यह कोशिश भी करनी पड़ेगी कि विदेशी मुद्रा की उपलब्धता भी बढ़े। इसका एक तरीका है कि घरेलू वित्तीय संस्थानों के लिए विदेशी मुद्रा की नीलामी की जाए ताकि वे या तो खुद की जरूरतें पूरी कर सकें या फिर अपने ग्राहकों की मदद कर सकें जिन्हें विदेशी मुद्रा फंडिंग का दबाव झेलना पड़ रहा है। जब यूरोप में डॉली की कमी आई तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कदम उठाए और बड़े पैमाने पर स्वैप योजनाएं शुरू की जिससे यूरोपीय बाजारों में डॉलर की कमी खत्म हो गई। आरबीआई को भी जल्द ही कुछ ऐसा ही कदम उठाना चाहिए ताकि नकदी की कमी न होने दी जाए। आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मुश्किल के दिनों के लिए बचा कर रखा था और शायद इससे ज्यादा मुश्किल हालात पैदा नहीं हो सकते, कहने का मतलब है कि अब उस भंडार का इस्तेमाल का वक्त आ गया है। अगर ये कदम भी पर्याप्त नहीं जान पड़ते तो सरकार को घरेलू वित्त संस्थानों के विदेशी मुद्रा ऋण की गारंटी लेनी पड़ सकती है। भारत इस समय में वित्तीय संस्थानों के नुकसान के तले दबे होने का खतरा नहीं उठा सकता है। हर वित्तीय संस्थान को संकट से उबारने के बाद और बाजार में विश्वास पैदा करने के बाद बैंकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे जल्द ही अपने पूंजी पर्याप्तता अनुपात को बढ़ाकर पंद्रह से अट्ठारह फीसदी तक ले जाएं। अगर इस अनुपात को इस सीमा तक पहुंचाने के लिए सरकार को अतिरिक्त पूंजी की व्यवस्था करनी पड़े तो उस पर भी शीघ्र ही गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। जब इस संकट से निपट लिया जाता है तो सरकार को इस पूंजी को विभिन्न तरीकों से वापस करने की कोशिशें की जा सकती हैं। अर्थव्यवस्था के कमजोर होने की स्थिति में तय है कि बैंकों की गैर निष्पादित संपत्ति भी बढ़ेगी और इस वजह से जरूरी है कि बाजार में विश्वास पैदा करने के अलावा पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाया जाना भी जरूरी है। अगला कदम यह होना चाहिए कि सभी प्रमुख बैंक निवेशकों और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश करें। एक तो बाजार का विश्वास पहले से ही कमजोर हो चुका है और ऐसे में अगर अनिश्चितता भी बनी रहती है तो इससे ज्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता। बैंकों को चाहिए कि जिन विषयों को लेकर सबसे अधिक फिक्रमंदी है वे उनके बारे में आम लोगों को जानकारियां उपलब्ध कराएं जैसे विदेशी मुद्रा की स्थिति, बैंक की जिम्मेदारियां, होलसेल फंडिंग की स्थितियां आदि। आरबीआई के निरीक्षण में अगर इन विषयों पर बैंक पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश करें तो ऐसे संकट की घड़ी में यह बहुत फायदेमंद हो सकता है। और आखिर में विनिमय दर और मौद्रिक नीतियों का जिक्र करते हैं। आरबीआई को विनिमय दरों में किसी तरह की छेड़छाड़ से परहेज करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से बड़ी तेजी से बाजार में नकदी की कमी पैदा हो सकती है। और वह भी ऐसे समय में जब आरबीआई अर्थव्यवस्था में नकदी की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिशें कर रही है। बेहतर तो यही होगा कि ऐसे समय में आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल का रास्ता अपनाए न की रुपये को संभालने की कोशिश करे। मौद्रिक नीतियों की बात करें तो आरबीआई ने ब्याज दरें कम की हैं और बाजार में नकदी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। कोशिश यह भी है कि देश में पूंजी निवेश को बढ़ाया जाए और देश से पूंजी की निकासी कम से कम हो। इसके लिए विदेशी मुद्रा के जमा खातों पर ब्याज दरों को भी बढ़ाया गया है। हालांकि मौजूदा समय में डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकार्ड गिरावट से जूझ रहा है जो कि चिंता का विषय है, पर फिलहाल इस विषय में कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है। वित्तीय संस्थानों और वित्तीय प्रणालियों में विश्वास लौटाना वरीयता सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए।
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दवा के अलावा जीने की चाह, सकारात्मक सोच और अपने डॉक्टर पर विश्वास किसी भी गंभीर बीमारी से जल्दी ठीक होने के लिए बेहद जरूरी है। कई बार ये बातें मेडिकल विज्ञान में चमत्कार की वजह भी बन जाती हैं। एम्स की रुमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉक्टर उमा कुमार ने ये बातें ट्विटर अकाउंट पर लिखी।
उन्होंने यह एक ऐसे मरीज के बारे में जानकारी देते हुए लिखी जो 12 वर्ष से गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी ल्यूपस से पीड़ित थी और मेडिकल साइंस के हिसाब से डॉक्टरों के उसके ठीक होने की उम्मीद बेहद कम थी। लेकिन वह अब ठीक हैं। हरियाणा की रहने वाली 27 वर्षीय अंकिता (बदला नाम) ऑटो इम्यून बीमारी ल्यूपस से पीड़ित थी। ल्यूपस की वजह से फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित हुए। वह इतनी बीमार हो गई थी कि उसे महीनों तक वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने उसकी ट्रेकियोस्टोमी की ताकि लंबे समय वेंटिलेटर पर रखा जाए। कुछ समय बाद घर पर ही वेंटिलेटर की व्यवस्था कर दी गई।
एम्स की डॉक्टर उमा ने बताया कि एक बार इलाज के दौरान अंकिता ने उनका हाथ पकड़ा और इशारा किया कि वह कुछ लिखकर बोलना चाहती है। वह बेहद कमजोर और बीमार होने के बाद भले ही बोल न पाती हो, लेकिन उन्होंने पेन और पेपर मंगवाया और लिखा कि डॉक्टर देखना मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी। उनकी सकारात्मक सोच और जीने की चाह ने कमाल कर दिया। वह ठीक हो गई और अब वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है।
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दवा के अलावा जीने की चाह, सकारात्मक सोच और अपने डॉक्टर पर विश्वास किसी भी गंभीर बीमारी से जल्दी ठीक होने के लिए बेहद जरूरी है। कई बार ये बातें मेडिकल विज्ञान में चमत्कार की वजह भी बन जाती हैं। एम्स की रुमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉक्टर उमा कुमार ने ये बातें ट्विटर अकाउंट पर लिखी। उन्होंने यह एक ऐसे मरीज के बारे में जानकारी देते हुए लिखी जो बारह वर्ष से गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी ल्यूपस से पीड़ित थी और मेडिकल साइंस के हिसाब से डॉक्टरों के उसके ठीक होने की उम्मीद बेहद कम थी। लेकिन वह अब ठीक हैं। हरियाणा की रहने वाली सत्ताईस वर्षीय अंकिता ऑटो इम्यून बीमारी ल्यूपस से पीड़ित थी। ल्यूपस की वजह से फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित हुए। वह इतनी बीमार हो गई थी कि उसे महीनों तक वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने उसकी ट्रेकियोस्टोमी की ताकि लंबे समय वेंटिलेटर पर रखा जाए। कुछ समय बाद घर पर ही वेंटिलेटर की व्यवस्था कर दी गई। एम्स की डॉक्टर उमा ने बताया कि एक बार इलाज के दौरान अंकिता ने उनका हाथ पकड़ा और इशारा किया कि वह कुछ लिखकर बोलना चाहती है। वह बेहद कमजोर और बीमार होने के बाद भले ही बोल न पाती हो, लेकिन उन्होंने पेन और पेपर मंगवाया और लिखा कि डॉक्टर देखना मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी। उनकी सकारात्मक सोच और जीने की चाह ने कमाल कर दिया। वह ठीक हो गई और अब वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है।
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पटना : वित्त मंत्रालय ने फरवरी और अप्रैल, 2020 के बीच सेवानिवृत्त हुए लोगों के लिए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) में निवेश की समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी है. इस योजना में 60 साल या इससे अधिक का कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है.
मगर दूसरे नियम के अनुसार अगर कोई 55 से 60 साल का व्यक्ति वृद्धावस्था के कारण कार्य की अयोग्यता या वीआरएस के तहत सेवानिवृत्त हुआ, तो वह भी इसमें निवेश कर सकता है. लेकिन ऐसे व्यक्ति को इस स्कीम में एक माह के अंदर आवेदन करना होता है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की गयी अधिसूचना के अनुसार 55 से 60 साल के वे लोग जो फरवरी और अप्रैल के दौरान सेवानिवृत्त हुए हैं.
वे एससीएसएस में 30 जून तक आवेदन कर सकते हैं. ब्याज के रूप में होती है नियमित आयरक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए लोग भी इस स्कीम में 30 जून, 2020 तक खाता खोल सकते हैं. एससीएसएस केंद्र सरकार की एक स्कीम है, जिसमें सेवानिवृत्त लोगों को ब्याज के रूप में नियमित आय होती है.
वरिष्ठ नागरिक और जल्दी सेवानिवृत्त होने वाले लोग स्कीम में अधिकतम 15 लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं. इस वक्त इस स्कीम में अप्रैल से जून 2020 की तिमाही के लिए 7. 4 फीसदी ब्याज दर मिलेगी.
इस स्कीम में खाता खोलने के लिए आवश्यक न्यूनतम राशि एक हजार रुपये है, जबकि अधिकतम राशि 15 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. मेच्योरिटी अवधि पांच साल है.
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पटना : वित्त मंत्रालय ने फरवरी और अप्रैल, दो हज़ार बीस के बीच सेवानिवृत्त हुए लोगों के लिए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश की समय सीमा तीस जून तक बढ़ा दी है. इस योजना में साठ साल या इससे अधिक का कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है. मगर दूसरे नियम के अनुसार अगर कोई पचपन से साठ साल का व्यक्ति वृद्धावस्था के कारण कार्य की अयोग्यता या वीआरएस के तहत सेवानिवृत्त हुआ, तो वह भी इसमें निवेश कर सकता है. लेकिन ऐसे व्यक्ति को इस स्कीम में एक माह के अंदर आवेदन करना होता है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की गयी अधिसूचना के अनुसार पचपन से साठ साल के वे लोग जो फरवरी और अप्रैल के दौरान सेवानिवृत्त हुए हैं. वे एससीएसएस में तीस जून तक आवेदन कर सकते हैं. ब्याज के रूप में होती है नियमित आयरक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए लोग भी इस स्कीम में तीस जून, दो हज़ार बीस तक खाता खोल सकते हैं. एससीएसएस केंद्र सरकार की एक स्कीम है, जिसमें सेवानिवृत्त लोगों को ब्याज के रूप में नियमित आय होती है. वरिष्ठ नागरिक और जल्दी सेवानिवृत्त होने वाले लोग स्कीम में अधिकतम पंद्रह लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं. इस वक्त इस स्कीम में अप्रैल से जून दो हज़ार बीस की तिमाही के लिए सात. चार फीसदी ब्याज दर मिलेगी. इस स्कीम में खाता खोलने के लिए आवश्यक न्यूनतम राशि एक हजार रुपये है, जबकि अधिकतम राशि पंद्रह लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. मेच्योरिटी अवधि पांच साल है.
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Chaibasa: जुमे की नमाज को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरीके से अलर्ट मोड में है. सदर थाना और मुफस्सिल थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है. स्वयं एसडीपीओ एवं अनुमंडल पदाधिकारी लगातार स्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं. बड़ी बाजार में एसडीपीओ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जवानों ने मोटरसाइकिल से मार्च किया. कहीं भी कोई अप्रिय घटना ना घटित हो इसलिए हर चौक चौराहे पर जवानों को तैनात किया गया है.
पुलिस द्वारा क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है सदर बाजार के मस्जिद के पास स्थित सदर थाना के मुख्य द्वार के सामने बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है. जिसका नेतृत्व पुलिस के वरीय पदाधिकारी कर रहे हैं. सदर थाना से मुफस्सिल थाना तक के बीच में पुलिस की गश्त लगातार जारी है. पुलिस की कोशिश है कि सभी कुछ अच्छे तरीके से निपट जाए.
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Chaibasa: जुमे की नमाज को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरीके से अलर्ट मोड में है. सदर थाना और मुफस्सिल थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है. स्वयं एसडीपीओ एवं अनुमंडल पदाधिकारी लगातार स्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं. बड़ी बाजार में एसडीपीओ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जवानों ने मोटरसाइकिल से मार्च किया. कहीं भी कोई अप्रिय घटना ना घटित हो इसलिए हर चौक चौराहे पर जवानों को तैनात किया गया है. पुलिस द्वारा क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है सदर बाजार के मस्जिद के पास स्थित सदर थाना के मुख्य द्वार के सामने बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है. जिसका नेतृत्व पुलिस के वरीय पदाधिकारी कर रहे हैं. सदर थाना से मुफस्सिल थाना तक के बीच में पुलिस की गश्त लगातार जारी है. पुलिस की कोशिश है कि सभी कुछ अच्छे तरीके से निपट जाए.
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ऐसा तो भगवान से ही संभव है !
मंत्र दीक्षा मैंने सन् १९७२ में ही ले ली थी । अपने पैतृक गाँव खीर भोजना, वारसलीगंज, नवादा (बिहार) में ही वह संस्कार सम्पन्न हुआ था। १९७६ में बोकारो में गायत्री यज्ञ हुआ । आदरणीय रमेश चन्द्र शुक्ल जी वहाँ केन्द्रीय प्रतिनिधि के रूप में थे। उनसे पत्र लेकर पू. गुरुदेव के दर्शन हेतु शान्तिकुञ्ज आया। अप्रैल का महीना था । लेकिन वसन्त पूरे वातावरण में अभी तक व्याप्त था । ब्रह्ममुहूर्त में गुलाबी जाड़े की सुखद अनुभूति होती थी । यहाँ पाँच दिनों तक के शिविर में ही मेरे विचार और चिन्तन में आमूलचूल परिवर्त्तन होता चला गया ।
दर्शन शास्त्र का विद्यार्थी होने के नाते अध्यात्म की थोड़ी बहुत जानकारी तो थी, पर कर्मकाण्डी पंडितों की तिकड़मों के कारण उस पर आस्था नहीं जम पाती । यहाँ आकर अध्यात्म को लेकर अविश्वास का वह भाव बिल्कुल खत्म हो गया। एक दृढ़ आस्था मन में पनपने लगी, कोई सत्ता अवश्य है जिसके अनुसार सब कुछ अपने समय से चलता रहता है ।
मिशन के विषय में मैं अधिक से अधिक जानना चाहता था । सेवा कार्य में सहयोग देने की भी इच्छा होती। मैंने आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय भाई साहब से परामर्श किया और उनके बताए अनुसार अगले वर्ष मई, १९७७ में शान्तिकुञ्ज आकर एक मासीय सत्र किया । उसी समय संकल्प लिया कि वर्ष में छुट्टी के दो माह मैं यहाँ के कार्य में लगाऊँगा । स्थानीय समय दान के अलावा केन्द्र में समयदान १९७८ से देने लगा।
पहले छुट्टियों में घर जाता था । खेती-बाड़ी के काम में पिताजी की मदद करता था। वह सिलसिला बंद हो गया, तो पिताजी नाराज़ हुए। घर भेजी जाने वाली मासिक राशि में भी कटौती होती गई। अपने गाँव या आस-पास के गाँव के कोई परिचित मिल जाते, तो कहते- पिताजी तुमसे बहुत नाराज रहते हैं। कहते हैं, पता नहीं किस साधु महात्मा के चक्कर में पड़ गया है। न घर आता है, न ही पैसा दे पाता है। उसका नाम मत लीजिये । यह सब सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगता।
मैं असमंजस में था। पिताजी को मैं इस तरह से नाराज नहीं करना चाहता था । सेवा कार्य के संदर्भ में मैंने पिताजी को विश्वास में लेने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे रत्ती भर भी नहीं पिघले । अन्त में थक हार कर मैंने मन ही मन गुरुदेव से प्रार्थना की। मुझे पूर्ण विश्वास था कि इसका वे ही कुछ समाधान निकालेंगे । १९७९ में पिताजी बद्रीनाथ जाने के लिए राजी हुए। पहले शान्तिकुञ्ज आकर सामान रखने की व्यवस्था बनाई गई । फिर पिताजी को साथ लेकर पूज्य गुरुदेव से मिलने गया । गुरुदेव बोले- बेटा, इन्हें बद्रीनाथ घुमा लाओ। पूज्य गुरुदेव की बातें सुनकर पिताजी को आश्चर्य हुआ । नीचे आकर वे हमसे पूछने लगे- इन्हें कैसे मालूम हुआ कि हम बद्रीनाथ जा रहे हैं? मैंने कहा- मुझे क्या मालूम ? मैं तो आपके साथ ही हूँ।
बद्रीनाथ से लौटकर शान्तिकुञ्ज में दोएक दिन रुकने के लिए पिताजी से पूछा, तो वे राजी हो गए। शान्तिकुञ्ज के स्नेहिल वातावरण ने उनका मन मोह लिया था । बोले मुझे यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है। जब तक चाहो, रुको । इसी बीच एक दिन अपने कमरे में ही आश्चर्य से उत्तेजना पूर्ण स्वर में कहने लगे- अरे ? गुरुजी तुम लोगों को बुड़बक (मूर्ख) बना कर रखे हुए हैं। ये आदमी नहीं हैं। ये भगवान के सिवा कुछ हो ही नहीं सकते। साश्चर्य मैंने पूछा- क्या हुआ, ऐसा क्यों कह रहे हैं? उन्होंने कहा- आज एक लड़का, जिसको मरे हुए घंटे भर से ज्यादा हो गया था, उसे उन्होंने जिन्दा कर दिया ।
घटना को पूरे विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा - मरे हुए उस लड़के को लेकर कुछ लोग गुरुजी के पास गए। गुरुजी पश्चिम वाले कमरे से निकल रहे थे। शोर सुनकर पूरब वाले कमरे में गए । आकर लोगों से पूछा- क्या बात है? लोगों ने बताया'से एक बच्चा मर गया है। बच्चा जमीन पर लेटा था । बच्चे की माँ छाती पीटकर रो रही थी । गुरुजी बोले- कुछ नहीं हुआ है। इतना कहते हुए उन्होंने झटके से बच्चे का हाथ पकड़कर उठा दिया। बोले- जा, इसे माता जी के पास ले जाकर प्रसाद खिला दे। सभी आश्चर्यचकित थे । मरे हुए को जिन्दा कर देना ऐसा तो मात्र भगवान ही कर सकते हैं!
इस घटना के बाद पिताजी की दृष्टि बदल गई। इसके बाद वे हमेशा मेरे सेवा कार्य को सराहते रहे- मेरा नाम लेते ही भावुक होकर कहते- वह जो कर रहा है, करता रहे, मुझे उसके पैसे और समय की जरूरत नहीं है। वह भगवान का काम कर रहा है, वह स्वयं तो तरेगा ही, हमारे सारे खानदान को भी तार देगा।
- प्रस्तुतिः रामनरेश प्रसाद, बोकारो (झारखण्ड)
विचार परिवर्त्तन की आवश्यकता
मनःस्थिति परिस्थितियों की जन्मदात्री है। विचार कार्य का रूप धारण करता है। आकांक्षा अग्रगामी योजना बनाती है और साहसपुरुषार्थ में जुट पड़ता है। इन दिनों यह प्रयोग विध्वंस के लिए हो रहा है । तात्कालिक लाभ को ही सर्वोपरि मानने की यह परिणति है । इसे प्रतिभाओं का भटकाव कहा जा सकता है। यदि प्रतिभाओं को सही दिशा दी जा सके, उनकी शक्ति को सुनिश्चित किया जा सके तो पुनः सतयुगी परिस्थितियाँ अवतरित कर पाना संभव है। यह सुनियोजन यदि सुनिशचित हो सके, तो उज्वल संभावनाएँ अगले ही दिनों देखी जा सकेंगी।
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ऐसा तो भगवान से ही संभव है ! मंत्र दीक्षा मैंने सन् एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में ही ले ली थी । अपने पैतृक गाँव खीर भोजना, वारसलीगंज, नवादा में ही वह संस्कार सम्पन्न हुआ था। एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में बोकारो में गायत्री यज्ञ हुआ । आदरणीय रमेश चन्द्र शुक्ल जी वहाँ केन्द्रीय प्रतिनिधि के रूप में थे। उनसे पत्र लेकर पू. गुरुदेव के दर्शन हेतु शान्तिकुञ्ज आया। अप्रैल का महीना था । लेकिन वसन्त पूरे वातावरण में अभी तक व्याप्त था । ब्रह्ममुहूर्त में गुलाबी जाड़े की सुखद अनुभूति होती थी । यहाँ पाँच दिनों तक के शिविर में ही मेरे विचार और चिन्तन में आमूलचूल परिवर्त्तन होता चला गया । दर्शन शास्त्र का विद्यार्थी होने के नाते अध्यात्म की थोड़ी बहुत जानकारी तो थी, पर कर्मकाण्डी पंडितों की तिकड़मों के कारण उस पर आस्था नहीं जम पाती । यहाँ आकर अध्यात्म को लेकर अविश्वास का वह भाव बिल्कुल खत्म हो गया। एक दृढ़ आस्था मन में पनपने लगी, कोई सत्ता अवश्य है जिसके अनुसार सब कुछ अपने समय से चलता रहता है । मिशन के विषय में मैं अधिक से अधिक जानना चाहता था । सेवा कार्य में सहयोग देने की भी इच्छा होती। मैंने आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय भाई साहब से परामर्श किया और उनके बताए अनुसार अगले वर्ष मई, एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में शान्तिकुञ्ज आकर एक मासीय सत्र किया । उसी समय संकल्प लिया कि वर्ष में छुट्टी के दो माह मैं यहाँ के कार्य में लगाऊँगा । स्थानीय समय दान के अलावा केन्द्र में समयदान एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर से देने लगा। पहले छुट्टियों में घर जाता था । खेती-बाड़ी के काम में पिताजी की मदद करता था। वह सिलसिला बंद हो गया, तो पिताजी नाराज़ हुए। घर भेजी जाने वाली मासिक राशि में भी कटौती होती गई। अपने गाँव या आस-पास के गाँव के कोई परिचित मिल जाते, तो कहते- पिताजी तुमसे बहुत नाराज रहते हैं। कहते हैं, पता नहीं किस साधु महात्मा के चक्कर में पड़ गया है। न घर आता है, न ही पैसा दे पाता है। उसका नाम मत लीजिये । यह सब सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगता। मैं असमंजस में था। पिताजी को मैं इस तरह से नाराज नहीं करना चाहता था । सेवा कार्य के संदर्भ में मैंने पिताजी को विश्वास में लेने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे रत्ती भर भी नहीं पिघले । अन्त में थक हार कर मैंने मन ही मन गुरुदेव से प्रार्थना की। मुझे पूर्ण विश्वास था कि इसका वे ही कुछ समाधान निकालेंगे । एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में पिताजी बद्रीनाथ जाने के लिए राजी हुए। पहले शान्तिकुञ्ज आकर सामान रखने की व्यवस्था बनाई गई । फिर पिताजी को साथ लेकर पूज्य गुरुदेव से मिलने गया । गुरुदेव बोले- बेटा, इन्हें बद्रीनाथ घुमा लाओ। पूज्य गुरुदेव की बातें सुनकर पिताजी को आश्चर्य हुआ । नीचे आकर वे हमसे पूछने लगे- इन्हें कैसे मालूम हुआ कि हम बद्रीनाथ जा रहे हैं? मैंने कहा- मुझे क्या मालूम ? मैं तो आपके साथ ही हूँ। बद्रीनाथ से लौटकर शान्तिकुञ्ज में दोएक दिन रुकने के लिए पिताजी से पूछा, तो वे राजी हो गए। शान्तिकुञ्ज के स्नेहिल वातावरण ने उनका मन मोह लिया था । बोले मुझे यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है। जब तक चाहो, रुको । इसी बीच एक दिन अपने कमरे में ही आश्चर्य से उत्तेजना पूर्ण स्वर में कहने लगे- अरे ? गुरुजी तुम लोगों को बुड़बक बना कर रखे हुए हैं। ये आदमी नहीं हैं। ये भगवान के सिवा कुछ हो ही नहीं सकते। साश्चर्य मैंने पूछा- क्या हुआ, ऐसा क्यों कह रहे हैं? उन्होंने कहा- आज एक लड़का, जिसको मरे हुए घंटे भर से ज्यादा हो गया था, उसे उन्होंने जिन्दा कर दिया । घटना को पूरे विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा - मरे हुए उस लड़के को लेकर कुछ लोग गुरुजी के पास गए। गुरुजी पश्चिम वाले कमरे से निकल रहे थे। शोर सुनकर पूरब वाले कमरे में गए । आकर लोगों से पूछा- क्या बात है? लोगों ने बताया'से एक बच्चा मर गया है। बच्चा जमीन पर लेटा था । बच्चे की माँ छाती पीटकर रो रही थी । गुरुजी बोले- कुछ नहीं हुआ है। इतना कहते हुए उन्होंने झटके से बच्चे का हाथ पकड़कर उठा दिया। बोले- जा, इसे माता जी के पास ले जाकर प्रसाद खिला दे। सभी आश्चर्यचकित थे । मरे हुए को जिन्दा कर देना ऐसा तो मात्र भगवान ही कर सकते हैं! इस घटना के बाद पिताजी की दृष्टि बदल गई। इसके बाद वे हमेशा मेरे सेवा कार्य को सराहते रहे- मेरा नाम लेते ही भावुक होकर कहते- वह जो कर रहा है, करता रहे, मुझे उसके पैसे और समय की जरूरत नहीं है। वह भगवान का काम कर रहा है, वह स्वयं तो तरेगा ही, हमारे सारे खानदान को भी तार देगा। - प्रस्तुतिः रामनरेश प्रसाद, बोकारो विचार परिवर्त्तन की आवश्यकता मनःस्थिति परिस्थितियों की जन्मदात्री है। विचार कार्य का रूप धारण करता है। आकांक्षा अग्रगामी योजना बनाती है और साहसपुरुषार्थ में जुट पड़ता है। इन दिनों यह प्रयोग विध्वंस के लिए हो रहा है । तात्कालिक लाभ को ही सर्वोपरि मानने की यह परिणति है । इसे प्रतिभाओं का भटकाव कहा जा सकता है। यदि प्रतिभाओं को सही दिशा दी जा सके, उनकी शक्ति को सुनिश्चित किया जा सके तो पुनः सतयुगी परिस्थितियाँ अवतरित कर पाना संभव है। यह सुनियोजन यदि सुनिशचित हो सके, तो उज्वल संभावनाएँ अगले ही दिनों देखी जा सकेंगी।
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VIDEO HTP: क्या अलगाववादियों का खुला विरोध कर महिलाओं ने कश्मीर में बदलाव का मोर्चा खोला है?
क्या अलगाववादियों का खुला विरोध कर महिलाओं ने कश्मीर में बदलाव का मोर्चा खोल दिया है? इसी सवाल पर हम तो पूछेंगे की बड़ी बहस में हमारे साथ जुड़े AIMPLB के सदस्य मुफ़्ती एजाज़ अरशद क़ासमी, मेजर (रि) जनरल जीडी बख्शी, वकील सैयद बाबर क़ादरी, लाल चौक पर वंदे मातरम का नारा लगाने वाली बहादुर महिला सुनीता अरोड़ा, फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित, वकील नीलोफ़र मसूद और वकील डॉ सैयद रिज़वान अहमद. देखें वीडियो.
HTP: विनाश की 'बाढ़ लीला'
क्या बाढ़ से बर्बादी के ज़िम्मेदार हमारा सिस्टम है?
जिहाद का नाम, मज़हब बदनाम!
जायरा वसीम के एक्टिंग छोड़ने पर शबाना आजमी क्यों चुप रहीं?
ममता बंगाल के हिन्दुओं को लुभा रही हैं?
कट्टरपंथी सोच मुसलमानों को पिछड़ा बना रही है?
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VIDEO HTP: क्या अलगाववादियों का खुला विरोध कर महिलाओं ने कश्मीर में बदलाव का मोर्चा खोला है? क्या अलगाववादियों का खुला विरोध कर महिलाओं ने कश्मीर में बदलाव का मोर्चा खोल दिया है? इसी सवाल पर हम तो पूछेंगे की बड़ी बहस में हमारे साथ जुड़े AIMPLB के सदस्य मुफ़्ती एजाज़ अरशद क़ासमी, मेजर जनरल जीडी बख्शी, वकील सैयद बाबर क़ादरी, लाल चौक पर वंदे मातरम का नारा लगाने वाली बहादुर महिला सुनीता अरोड़ा, फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित, वकील नीलोफ़र मसूद और वकील डॉ सैयद रिज़वान अहमद. देखें वीडियो. HTP: विनाश की 'बाढ़ लीला' क्या बाढ़ से बर्बादी के ज़िम्मेदार हमारा सिस्टम है? जिहाद का नाम, मज़हब बदनाम! जायरा वसीम के एक्टिंग छोड़ने पर शबाना आजमी क्यों चुप रहीं? ममता बंगाल के हिन्दुओं को लुभा रही हैं? कट्टरपंथी सोच मुसलमानों को पिछड़ा बना रही है?
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वैयक्तिक उपादान की प्रधानता की ओर संकेत करता है --काव्य रचयिता के, व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है, रचयिता अपने व्यक्तिगत गुण, दोष तथा साधन को लेकर ही अपने भावों का प्रकाशन काव्य में करता है। 'साहित्य' शब्द कवि रचना के कथाशरीर की ओर संकेत करता है । 'साहित्य' पद शब्द तथा अर्थ के निर्वैयक्तिक उपादान की अभिव्यञ्जना करता है । 'साहित्य' पद, घोतित करता है कि कवि की रचना शब्द तथा अर्थ के परस्पर समन्वय तथा सामञ्जस्य का परिणत फल होती है । 'काव्य' शब्द कर्तृ पक्ष का प्राधान्य उद्घोषित करता है, तो 'साहित्य' पद कृतिपक्ष के सामरस्य का उन्मोलन करता है। हे दोनों ही समानार्थक कवि के द्वारा निर्मित कमनीय कृति के अर्थ में, परन्तु व्युत्पत्ति की दृष्टि से दोनों में यह सूक्ष्म विभेद निर्दिष्ट किया जा सकता है ।
साहित्य का रूप
कुन्तक के काव्यलक्षण की समीक्षा से हम उनकी साहित्य-विषयक विचारधारा से पूर्णतः अवगत हो जाते हैं। शब्द तथा अर्थ को काव्य के रूप में परिणत होने के लिये दो पदार्थों की विशेष आवश्यकता रहती है जिनमें एक है गुणरूप 'साहित्य' और दूसरा है अलंकाररूपा 'वक्रोक्ति' । 'साहित्य' शब्द तथा अर्थ के सहभाव- सम्यक योग का ही अपर नाम है। प्रश्न यह है कि शब्द तथा अर्थ के परस्पर नैसर्गिक नित्य सम्बन्ध के विद्यमान रहने पर इस 'साहित्य' की आवश्यकता कौन-सी है । गो शब्द के उच्चारण मात्र से श्रोता के नेत्रों के सामने सारनादिमान् पदार्थ की उपस्थिति सः हो जाती है । 'घट' शब्द के भवनमात्र से सुननेवाला जल के आनयन में उपादेय पदार्थ विशेष का बोध कर लेता है। ऐसी दशा में साहित्य तो सर्वत्र विद्यमान रहता है। भाषा के माध्यम द्वारा जो कोई भी वस्तु प्रकटित होती है, वह साहित्य से विरहित हो ही नहीं सकती। यह दशा समस्त वाव्यय की है। ऐसो अवस्था में काम में 'साहित्य' की सचापर आग्रह दिखलाने का स्वारस्य क्या हो सकता है । किसी भी वाक्य से अर्थावगति होनेपर उसमें पद की सत्ता रहती है, वाक्यगत नाना पदों की स्थिति रहती है तथा उनमें परस्पर युक्तियुक्तता अथवा परस्पर सामध्ये का भी स्थान रहता है। अतः 'साहित्य' पदवास्यप्रमाग के अन्तर्गत ही समग्र वानिर्मिति में स्वतः सिद्ध होता है, फिर काम्य में उनकी
तात्पर्य क्या है ? इसके उत्तर में कुन्तक का उत्तर है - पूर्वोक कथन बिल्कुल ठीक है, परन्तु यह तो है सामान्य साहित्य । कान्य में विशिष्ट साहित्य की आवश्यकता होती है -
शब्दार्थो सहितावेव प्रतीतौ स्फुरतः सदा । सहिताविति तावेव किमपूर्व विधीयते ॥
मनु घ वाघ्यवाचकसम्बन्धस्य विद्यमानत्वाद् एतयोर्न कथंचिदपि साहित्यविरहः । सत्यमेतत्, किन्तु विशिष्टमेवेह साहित्यमभिप्रेतम् । कीदृशम् ? वक्रताविचित्रगुणालंकारसम्पदां परस्परस्पर्धाधिरोहः ॥
प्रश्न - वाच्यवाचक सम्बन्ध के
विद्यमान रहने के कारण शब्द और अर्थ
में साहित्य का विरह किसी प्रकार से हो ही नहीं सकता ? उत्तर- ठीक है, परन्तु काव्य में विशिष्ट साहित्य अभीष्ट होता है । वक्रता से विचित्र गुण तथा अलंकार की सम्पत्ति का परस्पर स्पर्धा अधिरूढ़ होना ।
साहित्य शब्द तथा अर्थ का परस्पर मिलन है, परन्तु यह मिलन किस प्रकार का होता है ! न्यूनता तथा अतिरिक्तता से शून्य मनोहर मिलन अर्थात् शब्द और अर्थ किसी की अपेक्षा कम नहीं होते और न बड़ा या उत्कृष्ट ही होते हैं। दोनों संतुलित रहते हैं। वे होते हैं 'परस्पर स्पर्धित्व रमणीय' अर्थात् एक दूसरे की स्पर्धा कर के परस्पर समानभाव से बड़े होते हैं और अनन्तर परस्पर संयोग से रमणीय होते हैं । अतः कृन्तक की सम्मति में केवल फ.विकौशल कल्पित कमनीयता पूर्ण शब्द न तो काव्य होता है और न केवल 'रचना वैचित्र्य चमत्कारकारी' अर्थ ही काव्य होता है । काव्य तो परस्पर स्पर्धा से उत्पन्न रमणीयता सम्पन्न शब्दार्थ युगल का ही प्रख्यात अभिधान हैवाचको वाच्यं चेति हो सम्मिलितो काव्यम् ।
व० जी०, पृ० ७
शब्द तथा अर्थ, दोनों के बीच आनन्द का बीज निहित रहता है । उस आनन्द को एक ही अधिकरण में सीमावद्ध कर देना आलोचना की हत्या
है। तेल को सत्ता प्रतितिल में होती है। उसी प्रकार सहृदयों के माह्लाद तथा आनन्द का कारण शब्द तथा अर्थ दोनों में विद्यमान रहता है-द्वयोरपि प्रतितिलमिव तैलं तद्विदाहदकारिकत्वं वर्तते न पुनरेकस्मिन् । -व० जी० पृ० ७
इस प्रकार कुन्तक की समीक्षा से काव्य में रहने वाला 'साहित्य' सामान्य न होकर विशिष्ट रूप रहता है। इस वैशिष्ट्य का रूप है-परस्परस्पर्धाधिरोहः या परस्परस्पर्धित्वम् । यह स्पर्धिता प्रतियोगितामूलक होने पर शत्रु भाषापन्न नहीं है, प्रत्युत मित्रभावापन्न है । जिस प्रकार दो मित्र आपस में स्पर्धा कर उन्नति के शिखर पर पहुँच जाते हैं और आपस में सहयोग से एक आदर्श व्यक्तित्व की रचना करते हैं, उसी प्रकार शब्द तथा अर्थ भी आपस में सौन्दर्यप्राप्ति के निमित्त स्पर्धा करते हुए अपने सहयोग से नितान्त ललित वस्तु की उत्पत्ति करते हैं जो 'काव्य' नाम से अभिहित किया जाता है । कुन्तक की दृष्टि में शब्द तथा अर्थ दो मित्रों के समान संयुक्त रहते हैसमसर्वगुण सन्तौ सुद्धदावेव संगठ परस्परस्य शोभायै शब्दार्थो भवतो यया ।।
वैष्णवे कवि पराशरमट्ट ( ११२३- ११५१ ई० ) की सम्मति में शब्दार्थ को सम्बन्ध 'सौभ्रात्र' सम्बन्ध होता है - शब्द तथा अर्थ भाई भाई के समान परस्पर मिले रहते हैअनाघातावधं बहुगुणवरोणादि मनसो हुहानं सौहार्द परिचिवमिवाथापि गहनम् । पदानां सौभ्रानाद् अनिमिपनिमेश्य श्रवणयोः स्वमेव श्रीर्मह्यं बहुमुखर वाणीविलसितम् ।।
-श्रीगुणरत्नकोश, श्लो० ८ सौहार्द तथा सौभ्रात्र सम्बन्ध एक ही पदार्थ है। इस सम्बन्ध में दोनों व्यक्तियों को समकक्षता या तुव्ययोगिता सम्पन्न रहती है। यदि शब्द तथा अर्थ में से कोई भी किसी से अपकृष्ट या उत्कृष्ट हो, हीन या अधिक हो, तो वह सामञ्जस्य नहीं बनता जो काव्य के लिये नितान्त उपादेय तथा आवश्यक
साधन होता है। इस दृष्टि से कुन्तक का 'साहित्य' औचित्य के समान ही आवश्यक कान्य-तथ्य प्रतीत होता है। अपने अन्य के द्वितीय उन्मेष में अलंकार-योजना के अवसर पर कुन्तक ने इस तथ्य को स्पष्टतया अभिव्यक्त किया है। उनका कथन है - अलंकारों की योजना के लिये कवि को निर्वन्ध, हठ या आग्रह करने की आवश्यकता न होनी चाहिए ( नातिनिर्बन्ध विहिता, व० जी० २।४ ) । बिना प्रयत्न से ही जो अलंकार स्वतः उद्भूत हो जायँ, उनकी योजना इलाघनीय तथा आदरणीय होती है । अत्यन्त हठ करने पर प्रयत्न से अलंकार योग करने पर प्रस्तुत औचित्य की हानि होने से वाच्य तथा वाचक में 'साहित्य' का अभाव हो जाता है । अतः शब्द तथा अर्थ के संतुलन का काव्य में एकान्त महत्त्व हैव्यसनितया प्रयग्नविरचिते हि प्रस्तुतौचित्यपरिहाणेर्वाच्यवाचकयोः परस्परस्पर्धित्वलक्षण साहित्यविरहः पर्यवस्यति ।
शब्द तथा अर्थ का साहित्य
कृन्तक ने काव्य में त्रिविध साहित्य का सम्यक निर्देश अपने ग्रन्थ में किया है । प्रथम साहित्य का आधार होता है शब्द तथा अर्थ । कवि के शब्द तथा तद्गम्य अर्थ साधारण जन के शब्दार्थ के समान निःस्फीत तथा निर्जीव न होकर एक अद्भुत चमत्कृति से स्फुरित होते हैं। इन दोनों की न विशिष्टता कुन्तक के शब्दों में ही देखिएशब्दो विवक्षितार्थंकवाचकोऽन्येषु
अर्थः सहृदयाह्लादकारिस्वस्पन्दसुन्दरः ॥
सरस्वपि ।
अन्य वाचक पदों के विद्यमान रहने पर भी कवि के द्वारा अभीष्ट अर्थ का जो एकमात्र वाचक होता है वही तो होता है शब्द । सहृदय को आनन्द देनेवाले अपने स्पन्द ( स्वभाव ) से रमणीय होता है अर्थ । इन्हीं शब्द तथा अर्थ का पूर्ण साहित्य काव्य में सर्वत्र अभिलषित होता है।
(ग) काव्य में शब्द - वैशिष्ट्य
काव्यगत शब्द की विशिष्टता होती है कि वह कवि के द्वारा विवक्षित अर्थ का एक मात्र बोधक होता है। कवि किसी विशिष्ट अर्थ के प्रकाशन के लिये शब्दों का प्रयोग करता है, परन्तु उस पदार्थ के पर्यायवाची समस्त शब्दो में उस अर्थ के प्रकाशन की योग्यता नहीं रहती। भाषा के शब्दभण्डार में कोई एक ही शब्द ऐसा होता है जो कवि के अमीष्ट अर्थ की अभिव्यक्ति यथार्थता के साथ कर सकता है ।
कविविवक्षित विशेषाभिधानक्षमध्वमेव वाचकध्वलक्षणम् (व० जी० १७)
बादल के अर्थ के पर्यायवाची अनेक शब्द है - बलद, पयोधर, बलमुच्, बलाइक, मेघ, पयोद, आदि; परन्तु सामान्यतः अभिषेय अर्थ की एकता होने पर भी प्रसंग विशेष में ही इनका प्रयोग औचित्यपूर्ण हो सकता है । सन्तप्त जगत् को जलधारा से आप्यायित करने की क्षमता की जो द्योतना 'जलद' शब्द में है वह जलधारण करने से हृष्टपुष्ट श्यामरंग 'पयोधर' शब्द में नहीं है । कवि के हृदय में जिस मनोरम अर्थ की स्फूर्ति होती है उसका बाहर प्रकाशन एक ही शब्द कर सकता है और वही शब्द वस्तुतः काव्य में प्रयोजनीय होता है। काशी के प्रौढ़ संस्कृत कवि तथा काव्य मर्मश महामहोपाध्याय पण्डित गंगाघर शास्त्रीजी कहा करते थे कि कविता की रचना के अवसर पर अर्थ विशेष के प्रकाशन के लिये हमारे सामने शब्दों का एक महान् यूथ आकर खड़ा हो जाता है और कविता में प्रयोग करने के लिये गिड़गिड़ाने लगता है । परन्तु हम लोग सन्दर्भ तथा भाव के अनुसार एक ही उपयुक्त शब्द चुनकर रख लेते हैं तथा अन्य शब्दों का तिरस्कार कर देते हैं। शास्त्रीजी के इन शब्दों में काव्यगत शब्दों का वैशिष्ट्य भलीमोति प्रदर्शित किया गया है।
चान्टर पेटर
अंग्रेजी के मान्य आलोचक वाल्टर पेदर की सम्मति इस कथन से पूर्णतः मिलती है । कुन्तक के अनुसार 'विशिष्ट शब्द' पेटर के अनुसार The unique word' ही है जो विशिष्ट भाव के प्रकाशन में एकमात्र सक्षम होता है। उनके कथन पर ध्यान देना आवश्यक है-The one word for the one thing, the one thought, amid the multitude of words, terms that might
just do ;.........the unique word, olause, sentence, paragraph, essay or song, absolutely proper to the single presentation or vision within,
- Appreciations, Style P. 29. आशय हे काम चलानेवाली अनेक शब्द राशि तथा पर्दों के मध्य में एक ही वस्तु तथा एक ही चिन्ता के लिये एक ही उपयुक्त शब्द होता हैअद्वितीय शब्द, जो वाक्यांश, वाक्य, अनुच्छेद, प्रबन्ध अथवा गान सकल मानसिक व्यापार अथवा आन्तरिक प्रतिभान के लिये सर्वथा उपयुक्त होता है ।
इस शब्द में संगीत की माधुरी भी विद्यमान रहती है, क्योंकि कुन्तक की उक्ति के अनुसारगीतवद् हृदयाह्लादं तद्विदां विदधाति यत्
यह शब्द काव्य के मर्मज्ञों के हृदय में गीत के समान आनन्द उत्पन्न करता है । काव्य शब्द की गीतधर्मिता के पक्षपाती आलोचकों ने ही काव्य में शब्दपक्ष की प्रधानता पर इतना आग्रह दिखलाया है। काव्य के शब्द में संगीत के समान मनोज्ञता का निवास रहता है और चित्र के समान नेत्ररक्षक चाकचिक्यका । इसीलिये चालक से वृद्ध तक समानभावेन काव्य शब्द से हृदयानुरञ्जन करते हैं ।
लैमबार्न की यह उक्ति इस तथ्य को पुष्ट करती हैःPoetry is formal beauty. So far as words will take us we may call it an atmosphere, a glamour investing the verse a kind of dream-light not orea. ted but proceeding; it stills in us a sense of some mysterious meaning not expressed by the words themselves, not even consciously intended by the poet.
Lamborn:The Rudiments of criticism P. 117. शब्द की गीतधर्मिता के विषय में कार्लाइल तथा लेइण्ड की यह उक्ति बड़ी ही अनुरूप है । कार्लाइल का कथन है(४४३ )
"All speech, even the commonest speech, has something of song in it... Poetry therefore, we will call, musical thought."
-The Hero : A Poet.
अर्थात् सब काव्य, और क्या साधारणतम वाक्य में भी संगीत का कुछ अंश रहता ही है। इसीलिये कविता को हम लोग संगीतमय चिन्ता कहते हैं । कार्लाइल का 'संगीतमय-चिन्ता' पद काव्य में मधुरिमा सम्पन्न 'साहित्य' का ही बोधक है। इसमें संगीत द्योतक है काव्यगत शब्द का और चिन्ता बोधक है तद्गत अर्थ का ।
लेहण्ट भी काव्य में शब्द माधुरी के प्रबल समर्थक हैंPoetry includes whatsever of painting can made visible to mind's eye, and whatso ever of music can be conveyed by sound and proportion without singing and instrumentation. - What is Poetry ?
कविता के मध्य में निबद्ध होता है चित्र का जो कुछ भी अंश मानस मक्षु का गोचर हो सकता है वह और गीत तथा वाद्य के बिना गीत का जो कुछ भी अंघ ध्वनि तथा सौषम्य के द्वारा संचारित किया जा सकता है वह पदार्थ ।
लेहण्ट के इस कथन में काव्य में चित्र होता है शब्दार्थ युगल का अर्थगत धर्म और संगीत होता है ध्वनिगत धर्म । उमय धर्म का सम्मेलन काव्य का निजी सर्वस्व है ।
काध्य-शब्द के चमत्कार के निमित्त कालिदास को इस कमनीय कविता को
हम प्रस्तुत कर सकते हैंद्वयं गतं सम्प्रति शोधनीयर्ता
समागमप्रार्थनया कपालिनः ।
कळा च सा कान्तिमती कळावत.
श्वमस्य लोकस्य च नेत्रकौमुदो ॥
कुमारसम्भव (५१०१ )
कपाल धारण करनेवाले व्यक्ति के साथ समागम की प्रार्थना के कारण इस समय दो व्यक्तियों की दशा अत्यन्त शोचनीय बन गई है। एक तो है कलाघारी चन्द्रमा की कान्तिमती कला और दूसरी है इस संसार के नेत्रों के लिए कौमुदीरूपा पार्वती स्वयम् । इस पद्य के शब्दों का परस्पर साहित्य नितान्त मञ्जुल तथा रमणीय है। नरमुण्डों की माला से सज्जित व्यक्ति घृणा का पात्र होता है। उससे यदि अगत्या अनिच्छया समागम हो भी जाय, तो समागमकारी व्यक्ति हमारी क्षमा का पात्र होता है, परन्तु यहाँ तो टूट पड़ी है उससे समागम की प्रार्थना, आग्रह तथा हठ । कपाली की संगति वर्जनीय होती है, स्पृहणीय नहीं, परन्तु जो सुन्दरी उससे समागम के निमित्त प्रार्थना करती है वह सचमुच शोचनीयता की पराकाष्ठापर पहुँच चुकी है !!!
(घ) अर्थ का वैशिष्टय
कुन्तक के अनुसार अर्थ की विशेषता है - सहृदयाह्लाद स्वस्पन्द सुन्दरता । अर्थात् सहृदयों के चित्त को आनन्दित करनेवाले अपने स्वरूप ( स्पन्द ) से सौन्दर्य की सम्पत्ति । आचार्यकृत व्याख्या इस शब्द को स्पष्ट कर रही है - किसी भी पदार्थ को नाना धर्मों से चित्रित होने की सम्भावना होती है, परन्तु उसी धर्म से उसका सम्बन्ध ख्यापित किया जाता है जो रसिकों को आनन्दित करने में समर्थ होता है । इस का उन्मीलन ही काव्य का मुख्य प्रयोजन टहरा, अतः जो अर्थ इस रसपोप का अंग बनकर आनन्दोदय में क्षमता रखता है, वही अर्थ वस्तुतः काव्य में आदरणीय होता हैयद्यपि पदार्थस्य नानाविधधर्मसचिवस्वं सम्भवति, तथापि तथाविधेन धर्मेण सम्वन्धः समाख्यायते यः सहृदय हृदयाह्लादमाधातुं क्षमते । तस्म म्य तदाहादसामर्थ्य सम्भाव्यते येन कदाचिदेव स्वभावमहता रसपरिपोषांगटचं वा व्यक्तिमासादयति ।
-व० जी० पृ० १९ अथ की इसी विलक्षणता की व्याख्या कुन्तक ने अन्यत्र भी की हैप्रतिभायां तरकालोल्लिखितेन फेनचित् परिस्पन्देन परिस्फुरन्तः पदार्थाः प्रकृतप्रस्तावसमुचितेन केनचिदू सरकर्पेण समच्छादिवस्वभावाः सन्तो विवक्षा(४४५)
विधेयरवेन अभिधेयतापदवीमवतरन्तः तथाविधविशेषत्र तिपादनसमर्थेन अभि धानेन अभिघीयमानाथ तेन चमरकारितामापद्यन्ते ।
पद का अर्थ प्रतिभा में तत्काल उल्लिखित होने वाले किसी स्वभाव से स्कुरित होता है । तदनन्तर प्रकृत सन्दर्भ के अनुकूल किसी उत्कर्ष के द्वारा उसका स्वरूप हो जाता है और तब वह कवि की अभिलाषा के वश में आकर अमिधेय की योग्यता प्राप्त करता है। उस विशेष अर्थ के प्रतिपादन करने वाले शब्दों के द्वारा प्रकट किये जाने पर ही वह चेतन सहृदयों के हृदय में चमत्कार उत्पन्न करता है ।
वाच्य का विभावरूप
कुस्तक का यह वाक्य मनोविज्ञान की दृष्टि से बड़े ही महत्व तथा सम्मान का पात्र है । बाह्य अर्ध किस प्रकार विभाव के रूप में परिणत होकर चमत्कारी बनता है, इसकी क्रमबद्ध व्याख्या इस महनीय वाक्य में विद्यमान है। पदार्थ की विभावरूप में परिणति क्रमिक तथा व्यवस्थित रूप से होती है। प्रथमतः पदार्थ कवि की प्रतिभा में प्रतिभासित होता है। अर्थ के साक्षात्कार
समय उसका को मनोहर रूप प्रतिभासित होता है उसी रूप में वह कवि की प्रतिमा का विषय बनता है। प्रतिभा उसके ऊपर अपना व्यापार करती है । वक्र व्यापार के प्रभाव से उस पदार्थ में प्रकृत सन्दर्भ तथा प्रस्ताव के अनुरूप एक नवीन उत्कर्ष उत्पन्न हो जाता है जिससे उसका निजी रूप भावृत हो जाता है । पदार्थ के रूप में एक मज्जुल परिवर्तन संघटित होता है। कवि के द्वारा प्रत्यक्षीकृत पदार्थ और कवि के द्वारा निर्मित पदार्थ परस्पर नितान्त भिन्न होते हैं । उसका प्रथम रूप आच्छादित हो जाता है तथा अब बस्त एक नवीन उत्कृष्ट रूप से भूषित बन जाती है- यही है अर्थ का विभाव रूप में आविर्भाव । उस विशिष्ट अर्थ की अभिव्यक्ति की योग्यता
भी विशिष्ट शब्द के द्वारा होती है । शब्दों के द्वारा प्रकटित किये जानेपर भी वह पदार्थ अब सहृदयों के चित्त में आह्लाद उत्पन्न करता है । प्रत्येक कविता में अर्थ के चमत्कारी होने का यही क्रम है।
कुन्तक को ऐसे ही शब्द तथा अर्थ का परस्पर साहित्य अभीष्ट है स्वस्पन्द सुन्दर अर्थ ही प्रथमतः कवि के अन्तलोंक में और अनन्तर बहिर्लोक में अनुरूप प्रतिस्पर्धा शब्द का संचार करता है। अर्थ जिस प्रकार भावमय होता है शब्द भी उसी प्रकार भावमय होता है। रसमय शब्द तथा रसमय
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वैयक्तिक उपादान की प्रधानता की ओर संकेत करता है --काव्य रचयिता के, व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है, रचयिता अपने व्यक्तिगत गुण, दोष तथा साधन को लेकर ही अपने भावों का प्रकाशन काव्य में करता है। 'साहित्य' शब्द कवि रचना के कथाशरीर की ओर संकेत करता है । 'साहित्य' पद शब्द तथा अर्थ के निर्वैयक्तिक उपादान की अभिव्यञ्जना करता है । 'साहित्य' पद, घोतित करता है कि कवि की रचना शब्द तथा अर्थ के परस्पर समन्वय तथा सामञ्जस्य का परिणत फल होती है । 'काव्य' शब्द कर्तृ पक्ष का प्राधान्य उद्घोषित करता है, तो 'साहित्य' पद कृतिपक्ष के सामरस्य का उन्मोलन करता है। हे दोनों ही समानार्थक कवि के द्वारा निर्मित कमनीय कृति के अर्थ में, परन्तु व्युत्पत्ति की दृष्टि से दोनों में यह सूक्ष्म विभेद निर्दिष्ट किया जा सकता है । साहित्य का रूप कुन्तक के काव्यलक्षण की समीक्षा से हम उनकी साहित्य-विषयक विचारधारा से पूर्णतः अवगत हो जाते हैं। शब्द तथा अर्थ को काव्य के रूप में परिणत होने के लिये दो पदार्थों की विशेष आवश्यकता रहती है जिनमें एक है गुणरूप 'साहित्य' और दूसरा है अलंकाररूपा 'वक्रोक्ति' । 'साहित्य' शब्द तथा अर्थ के सहभाव- सम्यक योग का ही अपर नाम है। प्रश्न यह है कि शब्द तथा अर्थ के परस्पर नैसर्गिक नित्य सम्बन्ध के विद्यमान रहने पर इस 'साहित्य' की आवश्यकता कौन-सी है । गो शब्द के उच्चारण मात्र से श्रोता के नेत्रों के सामने सारनादिमान् पदार्थ की उपस्थिति सः हो जाती है । 'घट' शब्द के भवनमात्र से सुननेवाला जल के आनयन में उपादेय पदार्थ विशेष का बोध कर लेता है। ऐसी दशा में साहित्य तो सर्वत्र विद्यमान रहता है। भाषा के माध्यम द्वारा जो कोई भी वस्तु प्रकटित होती है, वह साहित्य से विरहित हो ही नहीं सकती। यह दशा समस्त वाव्यय की है। ऐसो अवस्था में काम में 'साहित्य' की सचापर आग्रह दिखलाने का स्वारस्य क्या हो सकता है । किसी भी वाक्य से अर्थावगति होनेपर उसमें पद की सत्ता रहती है, वाक्यगत नाना पदों की स्थिति रहती है तथा उनमें परस्पर युक्तियुक्तता अथवा परस्पर सामध्ये का भी स्थान रहता है। अतः 'साहित्य' पदवास्यप्रमाग के अन्तर्गत ही समग्र वानिर्मिति में स्वतः सिद्ध होता है, फिर काम्य में उनकी तात्पर्य क्या है ? इसके उत्तर में कुन्तक का उत्तर है - पूर्वोक कथन बिल्कुल ठीक है, परन्तु यह तो है सामान्य साहित्य । कान्य में विशिष्ट साहित्य की आवश्यकता होती है - शब्दार्थो सहितावेव प्रतीतौ स्फुरतः सदा । सहिताविति तावेव किमपूर्व विधीयते ॥ मनु घ वाघ्यवाचकसम्बन्धस्य विद्यमानत्वाद् एतयोर्न कथंचिदपि साहित्यविरहः । सत्यमेतत्, किन्तु विशिष्टमेवेह साहित्यमभिप्रेतम् । कीदृशम् ? वक्रताविचित्रगुणालंकारसम्पदां परस्परस्पर्धाधिरोहः ॥ प्रश्न - वाच्यवाचक सम्बन्ध के विद्यमान रहने के कारण शब्द और अर्थ में साहित्य का विरह किसी प्रकार से हो ही नहीं सकता ? उत्तर- ठीक है, परन्तु काव्य में विशिष्ट साहित्य अभीष्ट होता है । वक्रता से विचित्र गुण तथा अलंकार की सम्पत्ति का परस्पर स्पर्धा अधिरूढ़ होना । साहित्य शब्द तथा अर्थ का परस्पर मिलन है, परन्तु यह मिलन किस प्रकार का होता है ! न्यूनता तथा अतिरिक्तता से शून्य मनोहर मिलन अर्थात् शब्द और अर्थ किसी की अपेक्षा कम नहीं होते और न बड़ा या उत्कृष्ट ही होते हैं। दोनों संतुलित रहते हैं। वे होते हैं 'परस्पर स्पर्धित्व रमणीय' अर्थात् एक दूसरे की स्पर्धा कर के परस्पर समानभाव से बड़े होते हैं और अनन्तर परस्पर संयोग से रमणीय होते हैं । अतः कृन्तक की सम्मति में केवल फ.विकौशल कल्पित कमनीयता पूर्ण शब्द न तो काव्य होता है और न केवल 'रचना वैचित्र्य चमत्कारकारी' अर्थ ही काव्य होता है । काव्य तो परस्पर स्पर्धा से उत्पन्न रमणीयता सम्पन्न शब्दार्थ युगल का ही प्रख्यात अभिधान हैवाचको वाच्यं चेति हो सम्मिलितो काव्यम् । वशून्य जीशून्य, पृशून्य सात शब्द तथा अर्थ, दोनों के बीच आनन्द का बीज निहित रहता है । उस आनन्द को एक ही अधिकरण में सीमावद्ध कर देना आलोचना की हत्या है। तेल को सत्ता प्रतितिल में होती है। उसी प्रकार सहृदयों के माह्लाद तथा आनन्द का कारण शब्द तथा अर्थ दोनों में विद्यमान रहता है-द्वयोरपि प्रतितिलमिव तैलं तद्विदाहदकारिकत्वं वर्तते न पुनरेकस्मिन् । -वशून्य जीशून्य पृशून्य सात इस प्रकार कुन्तक की समीक्षा से काव्य में रहने वाला 'साहित्य' सामान्य न होकर विशिष्ट रूप रहता है। इस वैशिष्ट्य का रूप है-परस्परस्पर्धाधिरोहः या परस्परस्पर्धित्वम् । यह स्पर्धिता प्रतियोगितामूलक होने पर शत्रु भाषापन्न नहीं है, प्रत्युत मित्रभावापन्न है । जिस प्रकार दो मित्र आपस में स्पर्धा कर उन्नति के शिखर पर पहुँच जाते हैं और आपस में सहयोग से एक आदर्श व्यक्तित्व की रचना करते हैं, उसी प्रकार शब्द तथा अर्थ भी आपस में सौन्दर्यप्राप्ति के निमित्त स्पर्धा करते हुए अपने सहयोग से नितान्त ललित वस्तु की उत्पत्ति करते हैं जो 'काव्य' नाम से अभिहित किया जाता है । कुन्तक की दृष्टि में शब्द तथा अर्थ दो मित्रों के समान संयुक्त रहते हैसमसर्वगुण सन्तौ सुद्धदावेव संगठ परस्परस्य शोभायै शब्दार्थो भवतो यया ।। वैष्णवे कवि पराशरमट्ट की सम्मति में शब्दार्थ को सम्बन्ध 'सौभ्रात्र' सम्बन्ध होता है - शब्द तथा अर्थ भाई भाई के समान परस्पर मिले रहते हैअनाघातावधं बहुगुणवरोणादि मनसो हुहानं सौहार्द परिचिवमिवाथापि गहनम् । पदानां सौभ्रानाद् अनिमिपनिमेश्य श्रवणयोः स्वमेव श्रीर्मह्यं बहुमुखर वाणीविलसितम् ।। -श्रीगुणरत्नकोश, श्लोशून्य आठ सौहार्द तथा सौभ्रात्र सम्बन्ध एक ही पदार्थ है। इस सम्बन्ध में दोनों व्यक्तियों को समकक्षता या तुव्ययोगिता सम्पन्न रहती है। यदि शब्द तथा अर्थ में से कोई भी किसी से अपकृष्ट या उत्कृष्ट हो, हीन या अधिक हो, तो वह सामञ्जस्य नहीं बनता जो काव्य के लिये नितान्त उपादेय तथा आवश्यक साधन होता है। इस दृष्टि से कुन्तक का 'साहित्य' औचित्य के समान ही आवश्यक कान्य-तथ्य प्रतीत होता है। अपने अन्य के द्वितीय उन्मेष में अलंकार-योजना के अवसर पर कुन्तक ने इस तथ्य को स्पष्टतया अभिव्यक्त किया है। उनका कथन है - अलंकारों की योजना के लिये कवि को निर्वन्ध, हठ या आग्रह करने की आवश्यकता न होनी चाहिए । बिना प्रयत्न से ही जो अलंकार स्वतः उद्भूत हो जायँ, उनकी योजना इलाघनीय तथा आदरणीय होती है । अत्यन्त हठ करने पर प्रयत्न से अलंकार योग करने पर प्रस्तुत औचित्य की हानि होने से वाच्य तथा वाचक में 'साहित्य' का अभाव हो जाता है । अतः शब्द तथा अर्थ के संतुलन का काव्य में एकान्त महत्त्व हैव्यसनितया प्रयग्नविरचिते हि प्रस्तुतौचित्यपरिहाणेर्वाच्यवाचकयोः परस्परस्पर्धित्वलक्षण साहित्यविरहः पर्यवस्यति । शब्द तथा अर्थ का साहित्य कृन्तक ने काव्य में त्रिविध साहित्य का सम्यक निर्देश अपने ग्रन्थ में किया है । प्रथम साहित्य का आधार होता है शब्द तथा अर्थ । कवि के शब्द तथा तद्गम्य अर्थ साधारण जन के शब्दार्थ के समान निःस्फीत तथा निर्जीव न होकर एक अद्भुत चमत्कृति से स्फुरित होते हैं। इन दोनों की न विशिष्टता कुन्तक के शब्दों में ही देखिएशब्दो विवक्षितार्थंकवाचकोऽन्येषु अर्थः सहृदयाह्लादकारिस्वस्पन्दसुन्दरः ॥ सरस्वपि । अन्य वाचक पदों के विद्यमान रहने पर भी कवि के द्वारा अभीष्ट अर्थ का जो एकमात्र वाचक होता है वही तो होता है शब्द । सहृदय को आनन्द देनेवाले अपने स्पन्द से रमणीय होता है अर्थ । इन्हीं शब्द तथा अर्थ का पूर्ण साहित्य काव्य में सर्वत्र अभिलषित होता है। काव्य में शब्द - वैशिष्ट्य काव्यगत शब्द की विशिष्टता होती है कि वह कवि के द्वारा विवक्षित अर्थ का एक मात्र बोधक होता है। कवि किसी विशिष्ट अर्थ के प्रकाशन के लिये शब्दों का प्रयोग करता है, परन्तु उस पदार्थ के पर्यायवाची समस्त शब्दो में उस अर्थ के प्रकाशन की योग्यता नहीं रहती। भाषा के शब्दभण्डार में कोई एक ही शब्द ऐसा होता है जो कवि के अमीष्ट अर्थ की अभिव्यक्ति यथार्थता के साथ कर सकता है । कविविवक्षित विशेषाभिधानक्षमध्वमेव वाचकध्वलक्षणम् बादल के अर्थ के पर्यायवाची अनेक शब्द है - बलद, पयोधर, बलमुच्, बलाइक, मेघ, पयोद, आदि; परन्तु सामान्यतः अभिषेय अर्थ की एकता होने पर भी प्रसंग विशेष में ही इनका प्रयोग औचित्यपूर्ण हो सकता है । सन्तप्त जगत् को जलधारा से आप्यायित करने की क्षमता की जो द्योतना 'जलद' शब्द में है वह जलधारण करने से हृष्टपुष्ट श्यामरंग 'पयोधर' शब्द में नहीं है । कवि के हृदय में जिस मनोरम अर्थ की स्फूर्ति होती है उसका बाहर प्रकाशन एक ही शब्द कर सकता है और वही शब्द वस्तुतः काव्य में प्रयोजनीय होता है। काशी के प्रौढ़ संस्कृत कवि तथा काव्य मर्मश महामहोपाध्याय पण्डित गंगाघर शास्त्रीजी कहा करते थे कि कविता की रचना के अवसर पर अर्थ विशेष के प्रकाशन के लिये हमारे सामने शब्दों का एक महान् यूथ आकर खड़ा हो जाता है और कविता में प्रयोग करने के लिये गिड़गिड़ाने लगता है । परन्तु हम लोग सन्दर्भ तथा भाव के अनुसार एक ही उपयुक्त शब्द चुनकर रख लेते हैं तथा अन्य शब्दों का तिरस्कार कर देते हैं। शास्त्रीजी के इन शब्दों में काव्यगत शब्दों का वैशिष्ट्य भलीमोति प्रदर्शित किया गया है। चान्टर पेटर अंग्रेजी के मान्य आलोचक वाल्टर पेदर की सम्मति इस कथन से पूर्णतः मिलती है । कुन्तक के अनुसार 'विशिष्ट शब्द' पेटर के अनुसार The unique word' ही है जो विशिष्ट भाव के प्रकाशन में एकमात्र सक्षम होता है। उनके कथन पर ध्यान देना आवश्यक है-The one word for the one thing, the one thought, amid the multitude of words, terms that might just do ;.........the unique word, olause, sentence, paragraph, essay or song, absolutely proper to the single presentation or vision within, - Appreciations, Style P. उनतीस. आशय हे काम चलानेवाली अनेक शब्द राशि तथा पर्दों के मध्य में एक ही वस्तु तथा एक ही चिन्ता के लिये एक ही उपयुक्त शब्द होता हैअद्वितीय शब्द, जो वाक्यांश, वाक्य, अनुच्छेद, प्रबन्ध अथवा गान सकल मानसिक व्यापार अथवा आन्तरिक प्रतिभान के लिये सर्वथा उपयुक्त होता है । इस शब्द में संगीत की माधुरी भी विद्यमान रहती है, क्योंकि कुन्तक की उक्ति के अनुसारगीतवद् हृदयाह्लादं तद्विदां विदधाति यत् यह शब्द काव्य के मर्मज्ञों के हृदय में गीत के समान आनन्द उत्पन्न करता है । काव्य शब्द की गीतधर्मिता के पक्षपाती आलोचकों ने ही काव्य में शब्दपक्ष की प्रधानता पर इतना आग्रह दिखलाया है। काव्य के शब्द में संगीत के समान मनोज्ञता का निवास रहता है और चित्र के समान नेत्ररक्षक चाकचिक्यका । इसीलिये चालक से वृद्ध तक समानभावेन काव्य शब्द से हृदयानुरञ्जन करते हैं । लैमबार्न की यह उक्ति इस तथ्य को पुष्ट करती हैःPoetry is formal beauty. So far as words will take us we may call it an atmosphere, a glamour investing the verse a kind of dream-light not orea. ted but proceeding; it stills in us a sense of some mysterious meaning not expressed by the words themselves, not even consciously intended by the poet. Lamborn:The Rudiments of criticism P. एक सौ सत्रह. शब्द की गीतधर्मिता के विषय में कार्लाइल तथा लेइण्ड की यह उक्ति बड़ी ही अनुरूप है । कार्लाइल का कथन है "All speech, even the commonest speech, has something of song in it... Poetry therefore, we will call, musical thought." -The Hero : A Poet. अर्थात् सब काव्य, और क्या साधारणतम वाक्य में भी संगीत का कुछ अंश रहता ही है। इसीलिये कविता को हम लोग संगीतमय चिन्ता कहते हैं । कार्लाइल का 'संगीतमय-चिन्ता' पद काव्य में मधुरिमा सम्पन्न 'साहित्य' का ही बोधक है। इसमें संगीत द्योतक है काव्यगत शब्द का और चिन्ता बोधक है तद्गत अर्थ का । लेहण्ट भी काव्य में शब्द माधुरी के प्रबल समर्थक हैंPoetry includes whatsever of painting can made visible to mind's eye, and whatso ever of music can be conveyed by sound and proportion without singing and instrumentation. - What is Poetry ? कविता के मध्य में निबद्ध होता है चित्र का जो कुछ भी अंश मानस मक्षु का गोचर हो सकता है वह और गीत तथा वाद्य के बिना गीत का जो कुछ भी अंघ ध्वनि तथा सौषम्य के द्वारा संचारित किया जा सकता है वह पदार्थ । लेहण्ट के इस कथन में काव्य में चित्र होता है शब्दार्थ युगल का अर्थगत धर्म और संगीत होता है ध्वनिगत धर्म । उमय धर्म का सम्मेलन काव्य का निजी सर्वस्व है । काध्य-शब्द के चमत्कार के निमित्त कालिदास को इस कमनीय कविता को हम प्रस्तुत कर सकते हैंद्वयं गतं सम्प्रति शोधनीयर्ता समागमप्रार्थनया कपालिनः । कळा च सा कान्तिमती कळावत. श्वमस्य लोकस्य च नेत्रकौमुदो ॥ कुमारसम्भव कपाल धारण करनेवाले व्यक्ति के साथ समागम की प्रार्थना के कारण इस समय दो व्यक्तियों की दशा अत्यन्त शोचनीय बन गई है। एक तो है कलाघारी चन्द्रमा की कान्तिमती कला और दूसरी है इस संसार के नेत्रों के लिए कौमुदीरूपा पार्वती स्वयम् । इस पद्य के शब्दों का परस्पर साहित्य नितान्त मञ्जुल तथा रमणीय है। नरमुण्डों की माला से सज्जित व्यक्ति घृणा का पात्र होता है। उससे यदि अगत्या अनिच्छया समागम हो भी जाय, तो समागमकारी व्यक्ति हमारी क्षमा का पात्र होता है, परन्तु यहाँ तो टूट पड़ी है उससे समागम की प्रार्थना, आग्रह तथा हठ । कपाली की संगति वर्जनीय होती है, स्पृहणीय नहीं, परन्तु जो सुन्दरी उससे समागम के निमित्त प्रार्थना करती है वह सचमुच शोचनीयता की पराकाष्ठापर पहुँच चुकी है !!! अर्थ का वैशिष्टय कुन्तक के अनुसार अर्थ की विशेषता है - सहृदयाह्लाद स्वस्पन्द सुन्दरता । अर्थात् सहृदयों के चित्त को आनन्दित करनेवाले अपने स्वरूप से सौन्दर्य की सम्पत्ति । आचार्यकृत व्याख्या इस शब्द को स्पष्ट कर रही है - किसी भी पदार्थ को नाना धर्मों से चित्रित होने की सम्भावना होती है, परन्तु उसी धर्म से उसका सम्बन्ध ख्यापित किया जाता है जो रसिकों को आनन्दित करने में समर्थ होता है । इस का उन्मीलन ही काव्य का मुख्य प्रयोजन टहरा, अतः जो अर्थ इस रसपोप का अंग बनकर आनन्दोदय में क्षमता रखता है, वही अर्थ वस्तुतः काव्य में आदरणीय होता हैयद्यपि पदार्थस्य नानाविधधर्मसचिवस्वं सम्भवति, तथापि तथाविधेन धर्मेण सम्वन्धः समाख्यायते यः सहृदय हृदयाह्लादमाधातुं क्षमते । तस्म म्य तदाहादसामर्थ्य सम्भाव्यते येन कदाचिदेव स्वभावमहता रसपरिपोषांगटचं वा व्यक्तिमासादयति । -वशून्य जीशून्य पृशून्य उन्नीस अथ की इसी विलक्षणता की व्याख्या कुन्तक ने अन्यत्र भी की हैप्रतिभायां तरकालोल्लिखितेन फेनचित् परिस्पन्देन परिस्फुरन्तः पदार्थाः प्रकृतप्रस्तावसमुचितेन केनचिदू सरकर्पेण समच्छादिवस्वभावाः सन्तो विवक्षा विधेयरवेन अभिधेयतापदवीमवतरन्तः तथाविधविशेषत्र तिपादनसमर्थेन अभि धानेन अभिघीयमानाथ तेन चमरकारितामापद्यन्ते । पद का अर्थ प्रतिभा में तत्काल उल्लिखित होने वाले किसी स्वभाव से स्कुरित होता है । तदनन्तर प्रकृत सन्दर्भ के अनुकूल किसी उत्कर्ष के द्वारा उसका स्वरूप हो जाता है और तब वह कवि की अभिलाषा के वश में आकर अमिधेय की योग्यता प्राप्त करता है। उस विशेष अर्थ के प्रतिपादन करने वाले शब्दों के द्वारा प्रकट किये जाने पर ही वह चेतन सहृदयों के हृदय में चमत्कार उत्पन्न करता है । वाच्य का विभावरूप कुस्तक का यह वाक्य मनोविज्ञान की दृष्टि से बड़े ही महत्व तथा सम्मान का पात्र है । बाह्य अर्ध किस प्रकार विभाव के रूप में परिणत होकर चमत्कारी बनता है, इसकी क्रमबद्ध व्याख्या इस महनीय वाक्य में विद्यमान है। पदार्थ की विभावरूप में परिणति क्रमिक तथा व्यवस्थित रूप से होती है। प्रथमतः पदार्थ कवि की प्रतिभा में प्रतिभासित होता है। अर्थ के साक्षात्कार समय उसका को मनोहर रूप प्रतिभासित होता है उसी रूप में वह कवि की प्रतिमा का विषय बनता है। प्रतिभा उसके ऊपर अपना व्यापार करती है । वक्र व्यापार के प्रभाव से उस पदार्थ में प्रकृत सन्दर्भ तथा प्रस्ताव के अनुरूप एक नवीन उत्कर्ष उत्पन्न हो जाता है जिससे उसका निजी रूप भावृत हो जाता है । पदार्थ के रूप में एक मज्जुल परिवर्तन संघटित होता है। कवि के द्वारा प्रत्यक्षीकृत पदार्थ और कवि के द्वारा निर्मित पदार्थ परस्पर नितान्त भिन्न होते हैं । उसका प्रथम रूप आच्छादित हो जाता है तथा अब बस्त एक नवीन उत्कृष्ट रूप से भूषित बन जाती है- यही है अर्थ का विभाव रूप में आविर्भाव । उस विशिष्ट अर्थ की अभिव्यक्ति की योग्यता भी विशिष्ट शब्द के द्वारा होती है । शब्दों के द्वारा प्रकटित किये जानेपर भी वह पदार्थ अब सहृदयों के चित्त में आह्लाद उत्पन्न करता है । प्रत्येक कविता में अर्थ के चमत्कारी होने का यही क्रम है। कुन्तक को ऐसे ही शब्द तथा अर्थ का परस्पर साहित्य अभीष्ट है स्वस्पन्द सुन्दर अर्थ ही प्रथमतः कवि के अन्तलोंक में और अनन्तर बहिर्लोक में अनुरूप प्रतिस्पर्धा शब्द का संचार करता है। अर्थ जिस प्रकार भावमय होता है शब्द भी उसी प्रकार भावमय होता है। रसमय शब्द तथा रसमय
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UP जल निगम का सरकारी विभागों पर 2100 करोड़ का बकाया, 4 महीने से वेतन-पेंशन के लिए मोहताज़ हुए कर्मचारीUP (विपिन तिवारी ): उत्तर प्रदेश जल निगम की आर्थिक स्थिति लगातार खराब है। पिछले चार महीनों से निगम के 11 हजार कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। यही नहीं 14 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का भी भुगतान नहीं हुआ है। एक महीने का वेतन और पेंशन बांटने के लिए निगम प्रबंधन को करीब 70 करोड़ रुपये की दरकार होती है। यह नौबत तब है जब इस निगम का विभिन्न सरकारी विभागों पर करीब 2100 करोड़ रुपये बकाया हैं।
भ्रष्टाचार की थकी-हारी लड़ाई, घूस लेते पकड़े जाओ, रिश्वत देकर बच जाओ...जल निगम समन्वय समिति के संयोजक इंजीनियर वाई.एन.उपाध्याय के अनुसार सबसे ज्यादा बकाएदारी नगर विकास विभाग पर हैं। नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सृजित परिसम्पत्तियों के संचालन व रख रखाव के लिए वर्ष 2011-12 से 2018-19 की 409 करोड़ रुपये, ग्रामीण क्षेत्र में अनुरक्षण कार्यो के तहत पाइप पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच का 1165 करोड़, झांसी जल संस्थान की बबीना पेयजल परियोजना का 1968 से जून 2020 का 389 करोड़ रुपये मुख्य बकाएदारी है। उन्होंने बताया कि 1975 में जल निगम की स्थापना से ही इसकी आय का स्रोत निगम द्वारा कार्यदायी संस्था के रूप में करवाये गये कार्यों पर अर्जित की गई सेण्टेज की धनराशि ही होती है। पहले यह परियोजना की कुल लागत का 22 प्रतिशत हुआ करती थी जो बाद में 12.50 प्रतिशत कर दी गई।
उत्तरप्रदेश में तीन दरिंदों ने एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ किया, फिर लड़की ने उठाया खौफनाक कदम..उपाध्याय के अनुसार अगर यही बकाया राशि ही निगम प्रबंधन को मिल जाए तो कुछ समय के लिए तो आर्थिक संकट दूर हो ही सकता है। उधर, जल निगम-जल संस्थान मजदूर यूनियन ने जल निगम की बदहाल वित्तीय स्थिति दूर किए जाने, समय से वेतन व पेंशन आदि का भुगतान करवाए जाने आदि मांगों को लेकर आगामी 19 सितम्बर से जल निगम मुख्यालय पर घेरा डालो-डेरा डालो आन्दोलन का एलान कर दिया है। तब तक अगर हालात न सुधरे तो जल निगम समन्वय समिति भी इस आन्दोलन में शामिल होने पर विचार कर सकती है।
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UP जल निगम का सरकारी विभागों पर दो हज़ार एक सौ करोड़ का बकाया, चार महीने से वेतन-पेंशन के लिए मोहताज़ हुए कर्मचारीUP : उत्तर प्रदेश जल निगम की आर्थिक स्थिति लगातार खराब है। पिछले चार महीनों से निगम के ग्यारह हजार कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। यही नहीं चौदह हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का भी भुगतान नहीं हुआ है। एक महीने का वेतन और पेंशन बांटने के लिए निगम प्रबंधन को करीब सत्तर करोड़ रुपये की दरकार होती है। यह नौबत तब है जब इस निगम का विभिन्न सरकारी विभागों पर करीब दो हज़ार एक सौ करोड़ रुपये बकाया हैं। भ्रष्टाचार की थकी-हारी लड़ाई, घूस लेते पकड़े जाओ, रिश्वत देकर बच जाओ...जल निगम समन्वय समिति के संयोजक इंजीनियर वाई.एन.उपाध्याय के अनुसार सबसे ज्यादा बकाएदारी नगर विकास विभाग पर हैं। नदी प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सृजित परिसम्पत्तियों के संचालन व रख रखाव के लिए वर्ष दो हज़ार ग्यारह-बारह से दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस की चार सौ नौ करोड़ रुपये, ग्रामीण क्षेत्र में अनुरक्षण कार्यो के तहत पाइप पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से दो हज़ार उन्नीस-बीस के बीच का एक हज़ार एक सौ पैंसठ करोड़, झांसी जल संस्थान की बबीना पेयजल परियोजना का एक हज़ार नौ सौ अड़सठ से जून दो हज़ार बीस का तीन सौ नवासी करोड़ रुपये मुख्य बकाएदारी है। उन्होंने बताया कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में जल निगम की स्थापना से ही इसकी आय का स्रोत निगम द्वारा कार्यदायी संस्था के रूप में करवाये गये कार्यों पर अर्जित की गई सेण्टेज की धनराशि ही होती है। पहले यह परियोजना की कुल लागत का बाईस प्रतिशत हुआ करती थी जो बाद में बारह.पचास प्रतिशत कर दी गई। उत्तरप्रदेश में तीन दरिंदों ने एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ किया, फिर लड़की ने उठाया खौफनाक कदम..उपाध्याय के अनुसार अगर यही बकाया राशि ही निगम प्रबंधन को मिल जाए तो कुछ समय के लिए तो आर्थिक संकट दूर हो ही सकता है। उधर, जल निगम-जल संस्थान मजदूर यूनियन ने जल निगम की बदहाल वित्तीय स्थिति दूर किए जाने, समय से वेतन व पेंशन आदि का भुगतान करवाए जाने आदि मांगों को लेकर आगामी उन्नीस सितम्बर से जल निगम मुख्यालय पर घेरा डालो-डेरा डालो आन्दोलन का एलान कर दिया है। तब तक अगर हालात न सुधरे तो जल निगम समन्वय समिति भी इस आन्दोलन में शामिल होने पर विचार कर सकती है।
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बॉलीवुड की सबसे धमाकेदार फिल्मों में से एक 'कुछ कुछ होता है' ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। न केवल फिल्म की कहानी बल्कि इसके किरदारों ने भी धमाल मचाकर रख दिया था। फिल्म में काजोल, शाहरुख खान और ऐक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिका अदा की थी। लेकिन जहां एक तरफ दर्शकों को फिल्म बहुत पसंद आई थी तो वहीं ऐक्ट्रेस शबाना आजमी इसे देखने के बाद भड़क गई थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने फोन करके निर्माता करण जौहर को खरी-खोटी भी सुनाई थी।
करण जौहर ने इस बारे में आगे कहा था, "जो कुछ भी हुआ था वो इसलिए, क्योंकि लोग उसे धकेल रहे थे। उसके आकर्षण, उसके बड़े दिल और शाहरुख खान के व्यक्तिगत करिश्मे ने ही उस किरदार को सबसे खास बना दिया था। " इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि 'कुछ कुछ होता है' में कोई लॉजिक नहीं था।
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बॉलीवुड की सबसे धमाकेदार फिल्मों में से एक 'कुछ कुछ होता है' ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। न केवल फिल्म की कहानी बल्कि इसके किरदारों ने भी धमाल मचाकर रख दिया था। फिल्म में काजोल, शाहरुख खान और ऐक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिका अदा की थी। लेकिन जहां एक तरफ दर्शकों को फिल्म बहुत पसंद आई थी तो वहीं ऐक्ट्रेस शबाना आजमी इसे देखने के बाद भड़क गई थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने फोन करके निर्माता करण जौहर को खरी-खोटी भी सुनाई थी। करण जौहर ने इस बारे में आगे कहा था, "जो कुछ भी हुआ था वो इसलिए, क्योंकि लोग उसे धकेल रहे थे। उसके आकर्षण, उसके बड़े दिल और शाहरुख खान के व्यक्तिगत करिश्मे ने ही उस किरदार को सबसे खास बना दिया था। " इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि 'कुछ कुछ होता है' में कोई लॉजिक नहीं था।
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बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के तहत कुवारी गांव के पास पिंडर की सहायक नदी शंभू में पहाड़ से मलबा गिरने से झील बन गयी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि झील से किसी तरह का खतरा नहीं है।
बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के तहत कुवारी गांव के पास पिंडर की सहायक नदी शंभू में पहाड़ से मलबा गिरने से झील बन गयी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि झील से किसी तरह का खतरा नहीं है। नदी में पानी का बहाव जारी है। कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा ने भी रविवार देर रात बताया कि भूस्खलन के मलबे से नदी का बहाव थोड़ा सा प्रभावित हुआ है और खतरे की कोई बात नहीं है।
उन्होंने बताया कि कुवारी गांव में वर्ष 2013 की आपदा के समय से ही भूस्खलन हो रहा है, इससे पिंडारी नदी की सहायक नदी शंभू के थोड़े से क्षेत्र में पानी जमा हो गया है। वर्मा ने कहा, भूस्खलन का मलबा नदी में गिर रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरी नदी रुक गयी है। मलबे ने नदी के बहाव को थोड़ा बाधित किया है और थोड़े से क्षेत्र में पानी एकत्र हो गया है।
शंभू नदी इस स्थान कुछ दूरी पर पिंडर नदी में मिल जाती है। उन्होंने कहा कि झील से गांव को खतरा नहीं है, क्योंकि गांव काफी ऊपर है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लगातार भूस्खलन होने से गांव से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसडीएम ने बताया कि अतिसंवेदनशील रूप में चिह्नित 18 परिवारों के विस्थापित करने का धन प्रशासन के पास आ गया है और उनमें से 10-12 परिवारों ने विस्थापन शुरू भी कर दिया है। बताया कि कुवारी गांव के 70-75 परिवारों को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया है।
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बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के तहत कुवारी गांव के पास पिंडर की सहायक नदी शंभू में पहाड़ से मलबा गिरने से झील बन गयी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि झील से किसी तरह का खतरा नहीं है। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के तहत कुवारी गांव के पास पिंडर की सहायक नदी शंभू में पहाड़ से मलबा गिरने से झील बन गयी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि झील से किसी तरह का खतरा नहीं है। नदी में पानी का बहाव जारी है। कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा ने भी रविवार देर रात बताया कि भूस्खलन के मलबे से नदी का बहाव थोड़ा सा प्रभावित हुआ है और खतरे की कोई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि कुवारी गांव में वर्ष दो हज़ार तेरह की आपदा के समय से ही भूस्खलन हो रहा है, इससे पिंडारी नदी की सहायक नदी शंभू के थोड़े से क्षेत्र में पानी जमा हो गया है। वर्मा ने कहा, भूस्खलन का मलबा नदी में गिर रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरी नदी रुक गयी है। मलबे ने नदी के बहाव को थोड़ा बाधित किया है और थोड़े से क्षेत्र में पानी एकत्र हो गया है। शंभू नदी इस स्थान कुछ दूरी पर पिंडर नदी में मिल जाती है। उन्होंने कहा कि झील से गांव को खतरा नहीं है, क्योंकि गांव काफी ऊपर है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लगातार भूस्खलन होने से गांव से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसडीएम ने बताया कि अतिसंवेदनशील रूप में चिह्नित अट्ठारह परिवारों के विस्थापित करने का धन प्रशासन के पास आ गया है और उनमें से दस-बारह परिवारों ने विस्थापन शुरू भी कर दिया है। बताया कि कुवारी गांव के सत्तर-पचहत्तर परिवारों को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया है।
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Gorakhpur के गोरक्षपीठाधीश्वर में सीएम योगी (CM Yogi Adityanath) ने पूचा-अर्चना की, जिसके बाद गाय की भी पूजा करते हुए नजर आए। आप इस वीडियो में देख सकते है कि कैसे गौ-माता के लिए सीएम योगी सेवा और भाव से पूजा कर रहे है। मुख्यमंत्री योगी ने गाय को तिलक लगाते हुए फूल माला अर्पित की। साथ ही भोजन भी कराया।
आप इस वीडियो में देख सकते है कि कैसे गौ-माता के लिए सीएम योगी CM Yogi Adityanath सेवा और भाव से पूजा कर रहे है।
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Gorakhpur के गोरक्षपीठाधीश्वर में सीएम योगी ने पूचा-अर्चना की, जिसके बाद गाय की भी पूजा करते हुए नजर आए। आप इस वीडियो में देख सकते है कि कैसे गौ-माता के लिए सीएम योगी सेवा और भाव से पूजा कर रहे है। मुख्यमंत्री योगी ने गाय को तिलक लगाते हुए फूल माला अर्पित की। साथ ही भोजन भी कराया। आप इस वीडियो में देख सकते है कि कैसे गौ-माता के लिए सीएम योगी CM Yogi Adityanath सेवा और भाव से पूजा कर रहे है।
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Women's T20 WC 2023: वर्ल्ड कप में जीत की 2 बार हैट्रिक...ऑस्ट्रेलिया टीम ने बना डाला अनोखा रिकॉर्ड....
Samsung Galaxy Flip Phone की लॉन्च से पहले प्री-बुकिंग शुरू, जानें कैसे और कहां से करें रिजर्व?
B. A. G Convergence Pvt. Ltd. 2022 : All Rights Reserved.
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Women's Tबीस WC दो हज़ार तेईस: वर्ल्ड कप में जीत की दो बार हैट्रिक...ऑस्ट्रेलिया टीम ने बना डाला अनोखा रिकॉर्ड.... Samsung Galaxy Flip Phone की लॉन्च से पहले प्री-बुकिंग शुरू, जानें कैसे और कहां से करें रिजर्व? B. A. G Convergence Pvt. Ltd. दो हज़ार बाईस : All Rights Reserved.
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सरकार ने प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह अवसर हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए वास्तविक एवं सम्भावित खतरों का सामना करने हेतु हमारे राष्ट्र की अंतर्निहित शक्ति और लचीलेपन को पुष्ट करने का एक अवसर उपलब्ध कराएगा।
सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य सार्वजनिक संस्थान राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन करेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से यह अनुरोध किया गया है कि वे स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को देश की एकता और अखंडता को बनाये रखने के प्रयास करने के लिए प्रेरित करने हेतु राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ दिलाने के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करें।
भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों और सभी राज्य सरकारों/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासकों से इस अवसर पर 'शपथ ग्रहण समारोह', समाज के सभी वर्गों के लोगों को शामिल करते हुए 'एकता के लिए दौड़', संध्या में पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य संगठनों जैसे राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), स्काउट एवं गाइड और होम गार्ड द्वारा मार्च पास्ट आदि सहित उचित तरीकों से उपयुक्त कार्यक्रमों का आयोजन करने का अनुरोध किया गया है।
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सरकार ने प्रत्येक वर्ष इकतीस अक्टूबर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह अवसर हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए वास्तविक एवं सम्भावित खतरों का सामना करने हेतु हमारे राष्ट्र की अंतर्निहित शक्ति और लचीलेपन को पुष्ट करने का एक अवसर उपलब्ध कराएगा। सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य सार्वजनिक संस्थान राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन करेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से यह अनुरोध किया गया है कि वे स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को देश की एकता और अखंडता को बनाये रखने के प्रयास करने के लिए प्रेरित करने हेतु राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ दिलाने के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करें। भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों और सभी राज्य सरकारों/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासकों से इस अवसर पर 'शपथ ग्रहण समारोह', समाज के सभी वर्गों के लोगों को शामिल करते हुए 'एकता के लिए दौड़', संध्या में पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य संगठनों जैसे राष्ट्रीय कैडेट कोर , राष्ट्रीय सेवा योजना , स्काउट एवं गाइड और होम गार्ड द्वारा मार्च पास्ट आदि सहित उचित तरीकों से उपयुक्त कार्यक्रमों का आयोजन करने का अनुरोध किया गया है।
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Gautam Adani family office: भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडाणी जल्द ही दुबई या न्यूयॉर्क में अपना फैमिली ऑफिस खोल सकते हैं। अडानी फैमली ऑफिस से अपने एसेट्स मैनेजमेंट को हैंडल करेंगे। गौतम अडानी के अडानी ग्रुप का बिजनेस लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की माने तो गौतम अडानी से जुड़े लोगों ने इस खबर को कंन्फर्म किया है। खबर के अनुसार फैमिली ऑफिस में अडाणी फैमिली के वेल्थ मैनेजमेंट को मैनेज करने का काम किया जाएगा।
खबर के मुताबिक अडानी फैमिली ऑफिस (Adani family office) को संचालित करने के लिए स्पेशलाइज्ड फैमिली ऑफिस मैनेजर्स को हायर करेगी।
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि गौतम अडानी के फैमिली ऑफिस से अडाणी फैमिली के पर्सनल फंड्स को इन्वेस्ट करने की स्ट्रेटजी पर काम किया जाएगा। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अडाणी ग्रुप ने फैमिली ऑफिस के लिए स्पेशलाइज्ड फैमिली ऑफिस मैनेजर्स की पूरी टीम को हॉयर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अडाणी भी फैमिली ऑफिस और उसको मैनेज करने के लिए अपने कंसल्टेंट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स से गहन चर्चा कर रहे हैं। खबर में बताया गया है कि फैमिली ऑफिस के प्लान को लेकर अडाणी अपने कंसल्टेंट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स से सलाह ले रहे हैं। ऑफिस की लोकेशन अभी तय नहीं है। अडाणी एक्सपर्ट्स की एडवाइस और रिसोर्सेज की उपलब्धता के मुताबिक अपने फैमिली ऑफिस का लोकेश चेंज भी कर सकते हैं।
हाल ही में जारी ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार इस साल गौतम अडाणी की पर्सनल पूंजी में 58 बिलियन डॉलर (4. 73 लाख करोड़ रुपए) की बेसुमार बढ़ोतरी हुई है। अडानी ने दुनिया के टॉप बिलियनेयर्स को इस मामले में पिछे छोड़ दिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार अडाणी की नेटवर्थ 135 बिलियन डॉलर (11. 02 लाख करोड़ रुपए) है। अडानी अभी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी है।
गौतम अडाणी अगर फैमिली ऑफिस खोलते हैं तो, वह दुनिया के कुछ अल्ट्रा-रिच लोगों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे, जिनके पास वेल्थ मैनेज करने के लिए फैमिली ऑफिस है। मुकेश अंबादी ने पिछले महीने ही सिंगापूर में अपना फैमिली ऑफिस खोलने की घोषणा की थी।
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Gautam Adani family office: भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडाणी जल्द ही दुबई या न्यूयॉर्क में अपना फैमिली ऑफिस खोल सकते हैं। अडानी फैमली ऑफिस से अपने एसेट्स मैनेजमेंट को हैंडल करेंगे। गौतम अडानी के अडानी ग्रुप का बिजनेस लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की माने तो गौतम अडानी से जुड़े लोगों ने इस खबर को कंन्फर्म किया है। खबर के अनुसार फैमिली ऑफिस में अडाणी फैमिली के वेल्थ मैनेजमेंट को मैनेज करने का काम किया जाएगा। खबर के मुताबिक अडानी फैमिली ऑफिस को संचालित करने के लिए स्पेशलाइज्ड फैमिली ऑफिस मैनेजर्स को हायर करेगी। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि गौतम अडानी के फैमिली ऑफिस से अडाणी फैमिली के पर्सनल फंड्स को इन्वेस्ट करने की स्ट्रेटजी पर काम किया जाएगा। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अडाणी ग्रुप ने फैमिली ऑफिस के लिए स्पेशलाइज्ड फैमिली ऑफिस मैनेजर्स की पूरी टीम को हॉयर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अडाणी भी फैमिली ऑफिस और उसको मैनेज करने के लिए अपने कंसल्टेंट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स से गहन चर्चा कर रहे हैं। खबर में बताया गया है कि फैमिली ऑफिस के प्लान को लेकर अडाणी अपने कंसल्टेंट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स से सलाह ले रहे हैं। ऑफिस की लोकेशन अभी तय नहीं है। अडाणी एक्सपर्ट्स की एडवाइस और रिसोर्सेज की उपलब्धता के मुताबिक अपने फैमिली ऑफिस का लोकेश चेंज भी कर सकते हैं। हाल ही में जारी ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार इस साल गौतम अडाणी की पर्सनल पूंजी में अट्ठावन बिलियन डॉलर की बेसुमार बढ़ोतरी हुई है। अडानी ने दुनिया के टॉप बिलियनेयर्स को इस मामले में पिछे छोड़ दिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार अडाणी की नेटवर्थ एक सौ पैंतीस बिलियन डॉलर है। अडानी अभी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी है। गौतम अडाणी अगर फैमिली ऑफिस खोलते हैं तो, वह दुनिया के कुछ अल्ट्रा-रिच लोगों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे, जिनके पास वेल्थ मैनेज करने के लिए फैमिली ऑफिस है। मुकेश अंबादी ने पिछले महीने ही सिंगापूर में अपना फैमिली ऑफिस खोलने की घोषणा की थी।
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224 - 1 है। अब इसमें इन 2 को हम ओमीट (omit) कर रहे हैं यानी सभी o बिट्स जो होस्ट ऐड्रेस
पार्ट में होते हैं तथा सभी 1 बिट्स जो कि नेटवर्क एड्रेस पार्ट में होते हैं हम इन्हें ओमीट कर रहे हैं। (Refer Slide Time 18:35 )
क्लास A आईपी एड्रेस में हम सभी o बिट्स और सभी 1 बिट्स को ओमीट (Omit ) कर रहे हैं। तो
हमारे पास क्लास A आईपी एड्रेस में 224 - 1 वैलिड होस्ट की संख्या है।
(Refer Slide Time: 19:09)
Class B IP address
all 115 → Netrwash
16 bits a hosts
all ones.
8 bits - a host
all ones
28 Xall zanes
Class CIP address
इसी प्रकार से अगर आप क्लास B आईपी एड्रेस में देखते हैं तो क्लास B आईपी एड्रेस में आपके पास
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दो सौ चौबीस - एक है। अब इसमें इन दो को हम ओमीट कर रहे हैं यानी सभी o बिट्स जो होस्ट ऐड्रेस पार्ट में होते हैं तथा सभी एक बिट्स जो कि नेटवर्क एड्रेस पार्ट में होते हैं हम इन्हें ओमीट कर रहे हैं। क्लास A आईपी एड्रेस में हम सभी o बिट्स और सभी एक बिट्स को ओमीट कर रहे हैं। तो हमारे पास क्लास A आईपी एड्रेस में दो सौ चौबीस - एक वैलिड होस्ट की संख्या है। Class B IP address all एक सौ पंद्रह → Netrwash सोलह bits a hosts all ones. आठ bits - a host all ones अट्ठाईस Xall zanes Class CIP address इसी प्रकार से अगर आप क्लास B आईपी एड्रेस में देखते हैं तो क्लास B आईपी एड्रेस में आपके पास
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१ बजभाषा और सूर की भाषा के अध्ययन का इतिहास
विषय प्रवेशप्रामाणिक पाठ के अभाव में प्राचीन कवियों की कृतियों के विधिवत् अध्ययन में कठिनाई पड़ती है। स्थूल रूप से यह अभाव उन सभी बातो की जानकारी में बाधक सिद्ध होता है जिनका संबंध अत माध्य से है। पाठ की अप्रामाणिकता के दो रूप होते हैं । एक, पाठ को अशुद्ध और दूसरा, प्रक्षिप्त अश । कषि के दृष्टिकोण, उद्देश्य, आदर्श, पाहित्य आदि से अवगत विज्ञ आलोचक को किसी ग्रंथ के प्रक्षिप्त अथवा अप्रामाणिक भागों का पता लगाने में अधिक कठिनाई नहीं होती। अतएव सदेहात्मक अंशो को निकाल देने के बाद शेष भाग में केवल पाठ की अशुद्धता का दोष रह जाता है, जिसके बने रहने पर भी भाषा-अध्ययन-वार्य किसी सीमा तक किया जा सकता है । भाषा के अध्ययन के प्रमुख पक्ष, उसका इतिहास, तत्कालीन स्थिति का प्रभाव, शब्दभांडार, साहित्यिक और आलकारिक विशेषताएं, वाक्य-विन्याम, व्याकरण के नियमों का निर्वाह आदि हैं। इनमें से प्रथम पाँच विषयों का अध्येता, प्रामाणिक पाठ के अभाव में भी, किसी न किसी प्रकार अपना काम चला लेता है, परन्तु अतिम अर्थान् व्याकरण विषयक अध्ययन के कुछ पक्षों के सूक्ष्म अध्ययन में, वैसी स्थिति में कुछ बाधा अवश्य पडतो के है। आज से लगभग पद्रह वर्ष पूर्व तक, सूर काव्य का सर्वमान्य प्रामाणिक पाठ सुलभ न होने के कारण उनकी भाषा का अध्ययन उचित रीति से नहीं हो सका । फिर भी, हिंदी के विद्वानों ने इस दिशा में जो कार्य किया, उसका मूल्यांकन करने के पूर्व उक्त कठिनाई को ध्यान में रखना आवश्यक है।
सूर-साहित्य के आलोचकों ने उनकी काव्य-कला के विभिन्न अंगो पर प्रकाश डालते समय भाषा के संवध में, प्रसंगवश ही विचार किया है। स्वतंत्र रूप से और विस्तार के साथ सूरदास की भाषा के विषय में किसी भी विद्वान ने अपने विचार प्रकट नही किये हैं। व्रजभाषा और उसके व्याकरण की विवेचना एवं सूरदास और उनके काव्य को आलोचना के रूप में जो सामग्री आज तक प्रकाश में आयी है, स्थूल रूप से उमे तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है
क. हिंदी भाषा के इतिहास और ब्रजभाषा के व्याकरण । ख. सूर काव्य के भूमिका सहित स्फुट संकलन
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एक बजभाषा और सूर की भाषा के अध्ययन का इतिहास विषय प्रवेशप्रामाणिक पाठ के अभाव में प्राचीन कवियों की कृतियों के विधिवत् अध्ययन में कठिनाई पड़ती है। स्थूल रूप से यह अभाव उन सभी बातो की जानकारी में बाधक सिद्ध होता है जिनका संबंध अत माध्य से है। पाठ की अप्रामाणिकता के दो रूप होते हैं । एक, पाठ को अशुद्ध और दूसरा, प्रक्षिप्त अश । कषि के दृष्टिकोण, उद्देश्य, आदर्श, पाहित्य आदि से अवगत विज्ञ आलोचक को किसी ग्रंथ के प्रक्षिप्त अथवा अप्रामाणिक भागों का पता लगाने में अधिक कठिनाई नहीं होती। अतएव सदेहात्मक अंशो को निकाल देने के बाद शेष भाग में केवल पाठ की अशुद्धता का दोष रह जाता है, जिसके बने रहने पर भी भाषा-अध्ययन-वार्य किसी सीमा तक किया जा सकता है । भाषा के अध्ययन के प्रमुख पक्ष, उसका इतिहास, तत्कालीन स्थिति का प्रभाव, शब्दभांडार, साहित्यिक और आलकारिक विशेषताएं, वाक्य-विन्याम, व्याकरण के नियमों का निर्वाह आदि हैं। इनमें से प्रथम पाँच विषयों का अध्येता, प्रामाणिक पाठ के अभाव में भी, किसी न किसी प्रकार अपना काम चला लेता है, परन्तु अतिम अर्थान् व्याकरण विषयक अध्ययन के कुछ पक्षों के सूक्ष्म अध्ययन में, वैसी स्थिति में कुछ बाधा अवश्य पडतो के है। आज से लगभग पद्रह वर्ष पूर्व तक, सूर काव्य का सर्वमान्य प्रामाणिक पाठ सुलभ न होने के कारण उनकी भाषा का अध्ययन उचित रीति से नहीं हो सका । फिर भी, हिंदी के विद्वानों ने इस दिशा में जो कार्य किया, उसका मूल्यांकन करने के पूर्व उक्त कठिनाई को ध्यान में रखना आवश्यक है। सूर-साहित्य के आलोचकों ने उनकी काव्य-कला के विभिन्न अंगो पर प्रकाश डालते समय भाषा के संवध में, प्रसंगवश ही विचार किया है। स्वतंत्र रूप से और विस्तार के साथ सूरदास की भाषा के विषय में किसी भी विद्वान ने अपने विचार प्रकट नही किये हैं। व्रजभाषा और उसके व्याकरण की विवेचना एवं सूरदास और उनके काव्य को आलोचना के रूप में जो सामग्री आज तक प्रकाश में आयी है, स्थूल रूप से उमे तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है क. हिंदी भाषा के इतिहास और ब्रजभाषा के व्याकरण । ख. सूर काव्य के भूमिका सहित स्फुट संकलन
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जयपुर। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने भारी गड़बड़ी के चलते अजमेर की निजी भगवन्त यूनिवर्सिटी को निजी विश्वविद्यालय एक्ट की धारा 44(1) के तहत कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया है। अब भगवन्त यूनिवर्सिटी को नोटिस मिलने के बाद 45 दिन के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा, इसके बाद राज्य सरकार एक समिति बनाकर यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर फैसला करेगी। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. नाथू लाल सुमन ने खास खबर डॉट कॉम को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में 8 निजी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के खिलाफ जांच बैठा रखी है, जिसमें से भगवन्त यूनिवर्सिटी अजमेर के खिलाफ जांच रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में भगवन्त यूनिवर्सिटी में भारी अनियमितताएं पाई गई है। उच्च शिक्षा विभाग को मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक भगवंत यूनिवर्सिटी में प्रवेश प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण में अनियमितताएं पाई गई है। इसके अलावा जांच कमेटी को एमफिल और पीएचडी के मामले में गाइड और छात्रों के अनुपात में भारी अंतर देखने को मिला है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक एमफिल और पीएचडी के मामले में यूजीसी के नियमों का उल्लंघन किया गया है। वहीं भगवन्त यूनिवर्सिटी में कई पाठ्यक्रम बिना फैकल्टी के चलते हुए पाए गए है। साथ ही कृषि पाठ्यक्रम के संचालन में आईसीएआर के मापदंडों की अनुपालना नहीं की गई है। जांच कमेटी को भगवन्त यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के नियमित उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच में अनियमिताएं मिली है।
भगवन्त यूनिवर्सिटी के अलावा अभी ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू, श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, चुडेला, झुंझुनूं, सिंघानियां विश्वविद्यालय, पचेरी बडी, झुंझुनूं, श्रीधर विश्वविद्यालय, बिगोदना, झुंझुनूं, निम्स विश्वविद्यालय, राजस्थान, जयपुर, पेसिफिक एकेडमी ऑफ हायर एज्यूकेशन एवं रिसर्च विश्वविद्यालय, उदयपुर, माधव विश्वविद्यालय, पिंडवाडा, सिरोही के खिलाफ जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। उच्च शिक्षा विभाग के मुताबिक भगवन्त यूनिवर्सिटी से पहले जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी को धारा 44(1) के तहत नोटिस दिया गया था और जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी का परिसमापन हो चुका है, और अब भगवन्त यूनिवर्सिटी को भी इसी तरह का नोटिस भेजा गया है। वहीं सूत्रोें के मुताबिक झुंझुनूं की सिंघानिया यूनिवर्सिटी ने उच्च शिक्षा विभाग की जांच कमेटी से जांच कराने से मना कर दिया है। इसके चलते उच्च शिक्षा विभाग सिंघानिया यूनिवर्सिटी को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
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जयपुर। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने भारी गड़बड़ी के चलते अजमेर की निजी भगवन्त यूनिवर्सिटी को निजी विश्वविद्यालय एक्ट की धारा चौंतालीस के तहत कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया है। अब भगवन्त यूनिवर्सिटी को नोटिस मिलने के बाद पैंतालीस दिन के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा, इसके बाद राज्य सरकार एक समिति बनाकर यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर फैसला करेगी। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. नाथू लाल सुमन ने खास खबर डॉट कॉम को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में आठ निजी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के खिलाफ जांच बैठा रखी है, जिसमें से भगवन्त यूनिवर्सिटी अजमेर के खिलाफ जांच रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में भगवन्त यूनिवर्सिटी में भारी अनियमितताएं पाई गई है। उच्च शिक्षा विभाग को मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक भगवंत यूनिवर्सिटी में प्रवेश प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण में अनियमितताएं पाई गई है। इसके अलावा जांच कमेटी को एमफिल और पीएचडी के मामले में गाइड और छात्रों के अनुपात में भारी अंतर देखने को मिला है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक एमफिल और पीएचडी के मामले में यूजीसी के नियमों का उल्लंघन किया गया है। वहीं भगवन्त यूनिवर्सिटी में कई पाठ्यक्रम बिना फैकल्टी के चलते हुए पाए गए है। साथ ही कृषि पाठ्यक्रम के संचालन में आईसीएआर के मापदंडों की अनुपालना नहीं की गई है। जांच कमेटी को भगवन्त यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के नियमित उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच में अनियमिताएं मिली है। भगवन्त यूनिवर्सिटी के अलावा अभी ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू, श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, चुडेला, झुंझुनूं, सिंघानियां विश्वविद्यालय, पचेरी बडी, झुंझुनूं, श्रीधर विश्वविद्यालय, बिगोदना, झुंझुनूं, निम्स विश्वविद्यालय, राजस्थान, जयपुर, पेसिफिक एकेडमी ऑफ हायर एज्यूकेशन एवं रिसर्च विश्वविद्यालय, उदयपुर, माधव विश्वविद्यालय, पिंडवाडा, सिरोही के खिलाफ जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। उच्च शिक्षा विभाग के मुताबिक भगवन्त यूनिवर्सिटी से पहले जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी को धारा चौंतालीस के तहत नोटिस दिया गया था और जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी का परिसमापन हो चुका है, और अब भगवन्त यूनिवर्सिटी को भी इसी तरह का नोटिस भेजा गया है। वहीं सूत्रोें के मुताबिक झुंझुनूं की सिंघानिया यूनिवर्सिटी ने उच्च शिक्षा विभाग की जांच कमेटी से जांच कराने से मना कर दिया है। इसके चलते उच्च शिक्षा विभाग सिंघानिया यूनिवर्सिटी को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
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अमरीकन सैनिक अधिकारी अमरीका की ओर से नियुक्त हैं। उन्हें क्या पाकिस्तान के इन शस्त्रों के दुरुपयोग का ज्ञान नहीं था ? यदि था, तो उन्होंने अपनी सरकार को सूचित किया या नहीं, और यदि किया ( जैसा कि होना चाहिए ) तो अमरीकन सरकार ने इस दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या किया ? जलविवाद को निबटाने के लिए संसार बैंक (वर्ल्ड बैंक ) के द्वारा समझौता कराया गया और हमसे पाकिस्तान में नहरें बनाने के लिए करोड़ों रुपये दिलाये गये । इस बैंक का अध्यक्ष अमरीकन है । इच्छोगिल नहर केवल सिंचाई के लिए नहीं, लाहौर की सुरक्षा की दृष्टि से बनायी गयी और उसमें करोड़ों रुपये उसे सैनिक कार्रवाई के लिए उपयुक्त बनाने में लगाये गये । वह बैंक ही उसकी रूपरेखा, व्यय के अनुमान आदि स्वीकृत करता है । क्या यह भारत विरोधी कार्य अमरीकन अधिकारियों की जानकारी में न था ? यदि था तो उसके लिए भारत से रुपया क्यों दिलाया गया ? क्या पाकिस्तान स्थित अमरीकन सैनिक अधिकारियों को यह नहीं मालूम था कि भारतीय सीमा से लाहौर तक खेतों, खलिहानों और गाँवों में असंख्य छिपे हुए सीमेंट कांक्रीट के अत्यन्त सुदृढ़ तोपघर बनाये गये हैं ? ये सब किसके विरुद्ध थे ? मालूम पड़ता है कि पाकिस्तान में अपने अड्डे बनाये रखने के लिए अमरीका ने पाकिस्तान की इन सब भारत विरोधी तैयारियों और अमरीका-प्रदत्त हथियारों के दुरुपयोग की ओर से आँखें मूँद ली हैं । यह भी संभव है कि १९५४ की अमरीकन-पाकिस्तानी सैनिक संधि में कोई ऐसी गोपनीय धाराएँ भी हों जिनसे पाकिस्तान को अमरीका-प्रदत्त हथियारों का भारत के विरुद्ध मनमाना उपयोग करने की छूट हो । अमरीकन इतने भोले नहीं हैं कि वे यह न समझते हों कि पाकिस्तान को दिये गये टैंक आदि स्थलीय हथियार चीन के विरुद्ध काम में नहीं लाये जा सकते । जब भारत ने चीनी आक्रमण के बाद अमरीका से विशेष प्रकार के शक्तिशाली बमवर्षक वायुयान माँगे (जो उसने पाकिस्तान को दे रखे थे) तो अमरीका ने यह कहकर उन्हें देने से इनकार कर दिया कि भारत को उनकी आवश्यकता नहीं है । तब क्या अमरीका को यह विश्वास हो गया था कि पाकिस्तान को चीन के विरुद्ध उपयोग करने के लिए पेटन टैंकों की आवश्यकता है ? बात यह है कि अमरीका पाकिस्तान के गिलगिट, पेशावर, सरगोधा आदि में अपने अड्डे बनाये रखने को इतना उत्सुक है कि वह पाकिस्तान की उचित अनुचित सभी प्रकार की माँगें मानने को विवश है । वह जानता है, और उसे जानना चाहिए कि पाकिस्तान का एकमात्र उद्देश्य भारत पर आक्रमण करने का है, और वह अमरीकन शस्त्रास्त्रों का उपयोग उसीके लिए करेगा । यदि पहिले यह बात संदिग्ध और विवादास्पद रही भी हो, तो आज वह स्पष्ट है । अमरीका अपने को भारत का मित्र और शुभैषी कहता है । उसने भारत की बड़ी आर्थिक सहायता की है और चीन के आक्रमण के अवसर पर उसने जिस तत्परता से भारत की सहायता की, वह हम नहीं भूल सकते । किन्तु अब दो नावों पर एक साथ सवारी नहीं की सकती । अब अमरीका को अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी । वह पाकिस्तान का सैनिक बल बढ़ाते हुए भारत का मित्र नहीं रह सकता ।
इस युद्ध में इंगलैण्ड का बर्ताव बड़ा निराशापूर्ण रहा । वहाँ आजकल लेबर दल का शासन है । भारत इस दल को सदैव अपना हितचिन्तक समझता रहा है । शायद इसीलिए उसके व्यवहार से भारत की निराशा और भी तीव्र हो गयी है । कच्छ के रण के युद्ध में इंगलैण्ड के प्रधान मंत्री श्री विलसन ने बीच-बिचाव करके युद्धविराम करा दिया था । उसकी कुछ शर्तों का देश में कड़ा विरोध भी हुआ, किन्तु भारत सरकार ने श्री विलसन की सद्भावना में विश्वास कर उसे मान लिया । इसके बाद जब पाकिस्तान ने छिपाकर अपने सैनिकों और गुर्गों को कश्मीर में उपद्रव और तोड़-फोड़ करने को भेजा तब श्री विलसन चुप रहे । प्रायः एक महीने तक कश्मीर में इन आततायियों के उपद्रव होते रहे किन्तु विलसन साहब चुप रहे । जब पहिली सितम्बर को पाकिस्तानी सेना अंतर्राष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन कर छम्ब में घुस पड़ी तब भी वे चुप रहे ।
अमरीका और इंगलैंड का पाकिस्तानी पोषण :: २११
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अमरीकन सैनिक अधिकारी अमरीका की ओर से नियुक्त हैं। उन्हें क्या पाकिस्तान के इन शस्त्रों के दुरुपयोग का ज्ञान नहीं था ? यदि था, तो उन्होंने अपनी सरकार को सूचित किया या नहीं, और यदि किया तो अमरीकन सरकार ने इस दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या किया ? जलविवाद को निबटाने के लिए संसार बैंक के द्वारा समझौता कराया गया और हमसे पाकिस्तान में नहरें बनाने के लिए करोड़ों रुपये दिलाये गये । इस बैंक का अध्यक्ष अमरीकन है । इच्छोगिल नहर केवल सिंचाई के लिए नहीं, लाहौर की सुरक्षा की दृष्टि से बनायी गयी और उसमें करोड़ों रुपये उसे सैनिक कार्रवाई के लिए उपयुक्त बनाने में लगाये गये । वह बैंक ही उसकी रूपरेखा, व्यय के अनुमान आदि स्वीकृत करता है । क्या यह भारत विरोधी कार्य अमरीकन अधिकारियों की जानकारी में न था ? यदि था तो उसके लिए भारत से रुपया क्यों दिलाया गया ? क्या पाकिस्तान स्थित अमरीकन सैनिक अधिकारियों को यह नहीं मालूम था कि भारतीय सीमा से लाहौर तक खेतों, खलिहानों और गाँवों में असंख्य छिपे हुए सीमेंट कांक्रीट के अत्यन्त सुदृढ़ तोपघर बनाये गये हैं ? ये सब किसके विरुद्ध थे ? मालूम पड़ता है कि पाकिस्तान में अपने अड्डे बनाये रखने के लिए अमरीका ने पाकिस्तान की इन सब भारत विरोधी तैयारियों और अमरीका-प्रदत्त हथियारों के दुरुपयोग की ओर से आँखें मूँद ली हैं । यह भी संभव है कि एक हज़ार नौ सौ चौवन की अमरीकन-पाकिस्तानी सैनिक संधि में कोई ऐसी गोपनीय धाराएँ भी हों जिनसे पाकिस्तान को अमरीका-प्रदत्त हथियारों का भारत के विरुद्ध मनमाना उपयोग करने की छूट हो । अमरीकन इतने भोले नहीं हैं कि वे यह न समझते हों कि पाकिस्तान को दिये गये टैंक आदि स्थलीय हथियार चीन के विरुद्ध काम में नहीं लाये जा सकते । जब भारत ने चीनी आक्रमण के बाद अमरीका से विशेष प्रकार के शक्तिशाली बमवर्षक वायुयान माँगे तो अमरीका ने यह कहकर उन्हें देने से इनकार कर दिया कि भारत को उनकी आवश्यकता नहीं है । तब क्या अमरीका को यह विश्वास हो गया था कि पाकिस्तान को चीन के विरुद्ध उपयोग करने के लिए पेटन टैंकों की आवश्यकता है ? बात यह है कि अमरीका पाकिस्तान के गिलगिट, पेशावर, सरगोधा आदि में अपने अड्डे बनाये रखने को इतना उत्सुक है कि वह पाकिस्तान की उचित अनुचित सभी प्रकार की माँगें मानने को विवश है । वह जानता है, और उसे जानना चाहिए कि पाकिस्तान का एकमात्र उद्देश्य भारत पर आक्रमण करने का है, और वह अमरीकन शस्त्रास्त्रों का उपयोग उसीके लिए करेगा । यदि पहिले यह बात संदिग्ध और विवादास्पद रही भी हो, तो आज वह स्पष्ट है । अमरीका अपने को भारत का मित्र और शुभैषी कहता है । उसने भारत की बड़ी आर्थिक सहायता की है और चीन के आक्रमण के अवसर पर उसने जिस तत्परता से भारत की सहायता की, वह हम नहीं भूल सकते । किन्तु अब दो नावों पर एक साथ सवारी नहीं की सकती । अब अमरीका को अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी । वह पाकिस्तान का सैनिक बल बढ़ाते हुए भारत का मित्र नहीं रह सकता । इस युद्ध में इंगलैण्ड का बर्ताव बड़ा निराशापूर्ण रहा । वहाँ आजकल लेबर दल का शासन है । भारत इस दल को सदैव अपना हितचिन्तक समझता रहा है । शायद इसीलिए उसके व्यवहार से भारत की निराशा और भी तीव्र हो गयी है । कच्छ के रण के युद्ध में इंगलैण्ड के प्रधान मंत्री श्री विलसन ने बीच-बिचाव करके युद्धविराम करा दिया था । उसकी कुछ शर्तों का देश में कड़ा विरोध भी हुआ, किन्तु भारत सरकार ने श्री विलसन की सद्भावना में विश्वास कर उसे मान लिया । इसके बाद जब पाकिस्तान ने छिपाकर अपने सैनिकों और गुर्गों को कश्मीर में उपद्रव और तोड़-फोड़ करने को भेजा तब श्री विलसन चुप रहे । प्रायः एक महीने तक कश्मीर में इन आततायियों के उपद्रव होते रहे किन्तु विलसन साहब चुप रहे । जब पहिली सितम्बर को पाकिस्तानी सेना अंतर्राष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन कर छम्ब में घुस पड़ी तब भी वे चुप रहे । अमरीका और इंगलैंड का पाकिस्तानी पोषण :: दो सौ ग्यारह
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झारखंड में सब्जी,फल और दूध उत्पादन करने वाले किसानों व पशुपालकों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार पहले चरण में 46 प्रखंडों में 30 मीट्रिक टन का 46 कोल्ड रूम खोलेगी. इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में सिमडेगा, चाईबासा, गोड्डा और गढ़वा में 5 हजार मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज खोला जाएगा.
कृषिमंत्री रणधीर सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत है और सरकार की नजर राज्य में हो रही कम बारिश पर भी है. एक अगस्त को मुख्यमंत्री फिर इस मुद्दे पर बैठक कर किसान के हित में फैसला लेंगे.
कृषि मंत्री ने कहा कि देवघर, गिरिडीह, रांची और गुमला में कोल्ड स्टोरेज के निर्माण का काम चल रहा है. जबकि 6 कोल्ड स्टोरेज के निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया भवन निगम के द्वारा पूरी की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजना है कि सूबे के हर जिले में एक कोल्ड स्टोरेज बने. साथ ही आने वाले समय में बाकी बचे 50 प्रखंडों में भी कोल्ड रूम बनाया जाएगा.
कृषि मंत्री की माने तो ये सब कृषि उत्पादों की भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम है. इससे आने वाले समय में सूबे के किसानों को लाभ मिलेगा.
(उपेन्द्र कुमार की रिपोर्ट)
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
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झारखंड में सब्जी,फल और दूध उत्पादन करने वाले किसानों व पशुपालकों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार पहले चरण में छियालीस प्रखंडों में तीस मीट्रिक टन का छियालीस कोल्ड रूम खोलेगी. इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में सिमडेगा, चाईबासा, गोड्डा और गढ़वा में पाँच हजार मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज खोला जाएगा. कृषिमंत्री रणधीर सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत है और सरकार की नजर राज्य में हो रही कम बारिश पर भी है. एक अगस्त को मुख्यमंत्री फिर इस मुद्दे पर बैठक कर किसान के हित में फैसला लेंगे. कृषि मंत्री ने कहा कि देवघर, गिरिडीह, रांची और गुमला में कोल्ड स्टोरेज के निर्माण का काम चल रहा है. जबकि छः कोल्ड स्टोरेज के निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया भवन निगम के द्वारा पूरी की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की योजना है कि सूबे के हर जिले में एक कोल्ड स्टोरेज बने. साथ ही आने वाले समय में बाकी बचे पचास प्रखंडों में भी कोल्ड रूम बनाया जाएगा. कृषि मंत्री की माने तो ये सब कृषि उत्पादों की भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम है. इससे आने वाले समय में सूबे के किसानों को लाभ मिलेगा. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
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कश्मीर में कोरोना महामारी की वजह से करीब एक साल से बंद स्कूल सोमवार को दोबारा खुल गए। गौरतलब है कि पिछले साल नौ मार्च को आखिरी बार नौवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी स्कूल गए थे।
प्रशासन ने हालांकि उन्हीं विद्यार्थियों को स्कूल आने की अनुमति दी है जिनके माता-पिता ने लिखित में इसकी मंजूरी दी है।
अधिकतर निजी स्कूल अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले रहे हैं, ताकि प्रबंधन पर स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर आरोप न लगे। पहले दिन कई स्कूलों ने विद्यार्थियों को स्वस्थ होने का चिकित्सा प्रमाण पत्र लेकर आने को कहा है। सरकारी आदेश के मुताबिक, छठी से आठवीं तक की कक्षाएं आठ मार्च से खुलेंगी, जबकि बाकी कक्षाएं 18 मार्च से खुलेंगी।
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कश्मीर में कोरोना महामारी की वजह से करीब एक साल से बंद स्कूल सोमवार को दोबारा खुल गए। गौरतलब है कि पिछले साल नौ मार्च को आखिरी बार नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी स्कूल गए थे। प्रशासन ने हालांकि उन्हीं विद्यार्थियों को स्कूल आने की अनुमति दी है जिनके माता-पिता ने लिखित में इसकी मंजूरी दी है। अधिकतर निजी स्कूल अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले रहे हैं, ताकि प्रबंधन पर स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर आरोप न लगे। पहले दिन कई स्कूलों ने विद्यार्थियों को स्वस्थ होने का चिकित्सा प्रमाण पत्र लेकर आने को कहा है। सरकारी आदेश के मुताबिक, छठी से आठवीं तक की कक्षाएं आठ मार्च से खुलेंगी, जबकि बाकी कक्षाएं अट्ठारह मार्च से खुलेंगी।
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वनप्लस ने अपना सबसे बड़ा स्टोर हैदराबाद में खोल दिया है. स्टोर इस दुनिया का सबसे बड़ा स्टोर है जो 16,000 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है. कंपनी ने इस नए एक्सपीरियंस स्टोर का नाम वनप्लस निजाम पैलेस रखा गया है. कहा है कि भारत में ऑफ़लाइन स्ट्रैटिजी के तहत कंपनी 100 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. हाल ही में लॉन्च किया गया वनप्लस 8T स्मार्टफोन 5 नवंबर से यहां उपलब्ध होगा.
वनप्लस निजाम पैलेस हैदराबाद के हिमायत नगर में खोला गया है और यहाँ शहर के कल्चर और हेरिटेज का ही थीम रखा गया है. स्टोर में खास तरह के इंटरएक्टिव डेस्क लगाए गए हैं, जहां प्रोडक्ट कैटलॉग होंगे. कंपनी ने स्टोर के दीवारों पर LED वॉल्स लगाई हैं वहीं जिन यूजर्स ने अपने वनप्लस से तस्वीरें खींची हैं उन्हें इस स्टोर में रखा जाएगा. यूजर्स यहां आकर नए प्रोडक्ट्स का अनुभव कर सकते हैं.
वनप्लस इंडिया के जनरल मैनेजर विकास अग्रवाल ने कहा कि, हमने कंपनी के भविष्य को देखते हुए इस स्टोर को बनाया है. हमने इस शहर को देखते हुए अपना पहला RD स्टोर खोला जहां अब दुनिया के सबसे बड़े स्टोर के साथ वापसी कर रहे हैं.
वनप्लस के अभी देशभर में लगभग 5,000 ऑफलाइन स्टोर मौजूद हैं. इनमें वो स्टोर भी शामिल हैं, जिन्हें कंपनी किसी दूसरे के साथ पार्टनरशिप में चला रही है. कंपनी अब इन स्टोर्स की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी अगले एक साल में देशभर में 100 शहरों में सर्विस सेंटर नेटवर्क का विस्तार करेगी.
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वनप्लस ने अपना सबसे बड़ा स्टोर हैदराबाद में खोल दिया है. स्टोर इस दुनिया का सबसे बड़ा स्टोर है जो सोलह,शून्य स्क्वायर फीट में फैला हुआ है. कंपनी ने इस नए एक्सपीरियंस स्टोर का नाम वनप्लस निजाम पैलेस रखा गया है. कहा है कि भारत में ऑफ़लाइन स्ट्रैटिजी के तहत कंपनी एक सौ करोड़ रुपये का निवेश करेगी. हाल ही में लॉन्च किया गया वनप्लस आठT स्मार्टफोन पाँच नवंबर से यहां उपलब्ध होगा. वनप्लस निजाम पैलेस हैदराबाद के हिमायत नगर में खोला गया है और यहाँ शहर के कल्चर और हेरिटेज का ही थीम रखा गया है. स्टोर में खास तरह के इंटरएक्टिव डेस्क लगाए गए हैं, जहां प्रोडक्ट कैटलॉग होंगे. कंपनी ने स्टोर के दीवारों पर LED वॉल्स लगाई हैं वहीं जिन यूजर्स ने अपने वनप्लस से तस्वीरें खींची हैं उन्हें इस स्टोर में रखा जाएगा. यूजर्स यहां आकर नए प्रोडक्ट्स का अनुभव कर सकते हैं. वनप्लस इंडिया के जनरल मैनेजर विकास अग्रवाल ने कहा कि, हमने कंपनी के भविष्य को देखते हुए इस स्टोर को बनाया है. हमने इस शहर को देखते हुए अपना पहला RD स्टोर खोला जहां अब दुनिया के सबसे बड़े स्टोर के साथ वापसी कर रहे हैं. वनप्लस के अभी देशभर में लगभग पाँच,शून्य ऑफलाइन स्टोर मौजूद हैं. इनमें वो स्टोर भी शामिल हैं, जिन्हें कंपनी किसी दूसरे के साथ पार्टनरशिप में चला रही है. कंपनी अब इन स्टोर्स की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी अगले एक साल में देशभर में एक सौ शहरों में सर्विस सेंटर नेटवर्क का विस्तार करेगी.
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है. 19 जनवरी को कोलकाता में ममता बनर्जी की रैली को अब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का भी साथ मिल गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को पत्र लिख कर समर्थन की बात कही है. बता दें कि ममता आगामी 19 जनवरी को कोलकाता में विशाल रैली को संबोधित करने वाली हैं. माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की यह रैली निर्णायक भूमिका निभाएगी. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ममता बनर्जी की रैली से एक दिन पहले समर्थन में चिट्ठी लिखी है. पत्र में कहा गया है कि पूरा विपक्ष एकजुट है. मैं एकता के इस शो पर ममता तृणमूल कांग्रेस की विपक्ष की रैली से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी एकजुटता के ममता बनर्जी के प्रयास का समर्थन करते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि इस रैली से एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा विपक्ष इस विश्वास के प्रति एकजुट है कि सच्चे राष्ट्रवाद और विकास की रक्षा लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे उन मूल्यों के आधार पर करनी है जिनको नरेंद्र मोदी सरकार नष्ट कर रही है.
उन्होंने ममता को भेजे सन्देश में कहा, " हम बंगाल के लोगों की सराहना करते हैं जो ऐतिहासिक रूप से हमारे इन मूल्यों की रक्षा करने में आगे रहे हैं. " उन्होंने कहा, "मैं यह एकजुटता दिखाने पर ममता दी का समर्थन करता हूं और आशा करता हूं कि हम एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश देंगे. गौरतलब है कि शनिवार को कोलकाता में ममता ने विपक्ष की रैली का आयोजन किया है जिसमें कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे भाग लेंगे.
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है. उन्नीस जनवरी को कोलकाता में ममता बनर्जी की रैली को अब राहुल गांधी का भी साथ मिल गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को पत्र लिख कर समर्थन की बात कही है. बता दें कि ममता आगामी उन्नीस जनवरी को कोलकाता में विशाल रैली को संबोधित करने वाली हैं. माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की यह रैली निर्णायक भूमिका निभाएगी. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ममता बनर्जी की रैली से एक दिन पहले समर्थन में चिट्ठी लिखी है. पत्र में कहा गया है कि पूरा विपक्ष एकजुट है. मैं एकता के इस शो पर ममता तृणमूल कांग्रेस की विपक्ष की रैली से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी एकजुटता के ममता बनर्जी के प्रयास का समर्थन करते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि इस रैली से एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा विपक्ष इस विश्वास के प्रति एकजुट है कि सच्चे राष्ट्रवाद और विकास की रक्षा लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे उन मूल्यों के आधार पर करनी है जिनको नरेंद्र मोदी सरकार नष्ट कर रही है. उन्होंने ममता को भेजे सन्देश में कहा, " हम बंगाल के लोगों की सराहना करते हैं जो ऐतिहासिक रूप से हमारे इन मूल्यों की रक्षा करने में आगे रहे हैं. " उन्होंने कहा, "मैं यह एकजुटता दिखाने पर ममता दी का समर्थन करता हूं और आशा करता हूं कि हम एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश देंगे. गौरतलब है कि शनिवार को कोलकाता में ममता ने विपक्ष की रैली का आयोजन किया है जिसमें कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे भाग लेंगे.
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नई दिल्ली। तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आज बिपरजॉय तूफान भयानक रूप ले सकता है। विभाग के अनुसार अगले 6 घंटों के अंदर ये खतरनाक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। बताया जा रहा है इस तूफान का असर कई तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। इस दौरान यहां तूफान और तेज बारिश होन की उम्मीद है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व मध्य अरब सागर के ऊपर स्थित बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजॉय अगले 6 घंटों के भीतर एक खतरनाक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इसका असर पाकिस्तान तक देखा जाएगा। 15 जून तक ये खतरनाक बिपरजॉय पाकिस्तान और उसके तटीय इलाकों तक पहुंच जाएगा।
तूफान को देखते हुए मौसम विभाग ने गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और अन्य तटीय क्षेत्रों को शनिवार को अलर्ट पर रखा गया था। इसके अलावा अरब सागर तट पर वलसाड के तीथल बीच पर ऊंची लहरें देखने के बाद इसे 14 जून तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वही विभाग ने मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में अगले 24 घंटों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।
हवा की रफ्तार के हिसाब से इन चक्रवातों को पांच श्रेणियों में बांटा जाता है। श्रेणी एक में 119 किलोमीटर प्रति घंटा से 153 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार तक, श्रेणी दो में 154 से 177 किलोमीटर प्रति घंटा, श्रेणी तीन में 178 से 208 किलोमीटर प्रति घंटा, श्रेणी चार में 209 से 251 किलोमीटर प्रति घंटा और श्रेणी पांच में 252 किलोमीटर प्रति घंटा और उससे अधिक रफ्तार के तूफान आते हैं।
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नई दिल्ली। तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आज बिपरजॉय तूफान भयानक रूप ले सकता है। विभाग के अनुसार अगले छः घंटाटों के अंदर ये खतरनाक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। बताया जा रहा है इस तूफान का असर कई तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। इस दौरान यहां तूफान और तेज बारिश होन की उम्मीद है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व मध्य अरब सागर के ऊपर स्थित बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजॉय अगले छः घंटाटों के भीतर एक खतरनाक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इसका असर पाकिस्तान तक देखा जाएगा। पंद्रह जून तक ये खतरनाक बिपरजॉय पाकिस्तान और उसके तटीय इलाकों तक पहुंच जाएगा। तूफान को देखते हुए मौसम विभाग ने गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और अन्य तटीय क्षेत्रों को शनिवार को अलर्ट पर रखा गया था। इसके अलावा अरब सागर तट पर वलसाड के तीथल बीच पर ऊंची लहरें देखने के बाद इसे चौदह जून तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वही विभाग ने मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में अगले चौबीस घंटाटों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। हवा की रफ्तार के हिसाब से इन चक्रवातों को पांच श्रेणियों में बांटा जाता है। श्रेणी एक में एक सौ उन्नीस किलोग्राममीटर प्रति घंटा से एक सौ तिरेपन किलोग्राममीटर प्रति घंटा रफ्तार तक, श्रेणी दो में एक सौ चौवन से एक सौ सतहत्तर किलोग्राममीटर प्रति घंटा, श्रेणी तीन में एक सौ अठहत्तर से दो सौ आठ किलोग्राममीटर प्रति घंटा, श्रेणी चार में दो सौ नौ से दो सौ इक्यावन किलोग्राममीटर प्रति घंटा और श्रेणी पांच में दो सौ बावन किलोग्राममीटर प्रति घंटा और उससे अधिक रफ्तार के तूफान आते हैं।
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दो महानगरों लखनऊ और कानपुर के बीच मे बसा उन्नाव जिसमे दर्जनों बूचड़खाने और दर्जनों चमड़े की फैक्ट्री चल रही है जो कि सिर्फ जिले के वासियों को मौत परोसने का काम कर रही है.
उसके बावजूद भी जिले के आलाधिकारी अपनी आँखों पर। काली पट्टी बांध के बैठे है इन मौत परोसने वाली फैक्ट्रियों पर कार्यवाही के नाम शून्य है.
क्योकि अधिकारियों को मौत परोशने वाली फैक्ट्रियों से मोटी रकम मिलती है जिसके कारण आला अधिकारी भी इन मौत के संचालको के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कतराते रहते है.
आये दिन इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की मौत का तमाशा देखने के बाद भी आला अधिकारी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ और सिर्फ जीरो बटे सन्नाटा करते हुए नजर आते है. आज भी एक मजदूर की मौत सुपर हाउस बन्धर यूनिट 3 फैक्ट्री की लापरवाही के चलते हुए हुई जिसके बाद मृतक मजदूर के परिजनों ने फैक्ट्री में जबरदस्त हंगामा काटा.
हंगामे को देख मौके पे एसडीएम सदर सीओ सदर और अचलगंज थाने की फोर्स मौके पर पहुँची और फैक्ट्री के मालिक के ऊपर कोई कार्यवाही करने के बजाए उस मृतक मजदूर के परिजनों को समझा बुझाकर मुआवजा की राशि दिलवाके इस मामले को रफा दफा कर दिया।
उन्नाव में उस समय हड़कम्प मच गया जब एक चमड़े फैक्ट्री सुपर हाउस बंधर यूनिट 3 में काम करने वाले मजदूर ने पहले तो अपना खाना खाया और फिर पानी पीने के लिए बोतल उठाई और बोतल में पानी जैसा ही रखा कैमिकल पी लिया.
उस मजदूर को तो यह भी जानकारी नही थी कि जो मैं पी रहा हूँ वो पानी नही जो मेरी प्यास बुझा देगा बल्कि उस बोतल में तो हमेशा के लिए जीवन को समाप्त करने वाला कैमिकल रखा हुआ है.
जब इसकी जानकारी हुई उस मजदूर को हुुवी जो मैंने पिया है वह पानी नही बल्कि मेरी मौत का सामान था तो वह बहुत घबरा गया और वही पर काम करने वाले अपने भाई के पास पहुचता है अपनी पूरी आप बीती बताता है जिसके बाद मृतक मजदूर के भाई द्वारा फैक्ट्री मैनेजर को जानकारी दी.
उसके बावजूद भी उस मैनेजर का दिल नही पिघला कोई साधन देने के बजाए उसको और उसके भाई को फैक्ट्री से बाहर भेज दिया. जिसके बाद मृतक मजदूर के भाई ने अस्पताल में भर्ती किया जहाँ पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
जिसके बाद गुस्साये परिजनों ने मृतक के शव को फैक्ट्री लेकर पहुँच गए जहाँ पे देखा कि फैक्ट्री का गेट बन्द करवा दिया गया है. . यह देख परिजनों के साथ आये लोगो ने गुस्से में आकर गेट को तोड़ कर फैक्ट्री के अंदर शव को लेकर घुस गए और हंगामा करने लगे.
जब इस पूरी घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली तो पुलिस बल के साथ एसडीएम सदर और क्षेत्राधिकारी भी मौके पे पहुँचे. पहुँचने के बाद फैक्ट्री मालिक पे कार्यवाही के बजाय मृतक मजदूर के परिजनों को समझा बुझाकर फैक्ट्री मालिक के साथ मजदूर की जिंदगी की कीमत को 7 लाख 50 हजार रुपये लगाते हुए फैक्ट्री मालिक और मृतक मजदूर के परिजनों का समझौता कर दिया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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दो महानगरों लखनऊ और कानपुर के बीच मे बसा उन्नाव जिसमे दर्जनों बूचड़खाने और दर्जनों चमड़े की फैक्ट्री चल रही है जो कि सिर्फ जिले के वासियों को मौत परोसने का काम कर रही है. उसके बावजूद भी जिले के आलाधिकारी अपनी आँखों पर। काली पट्टी बांध के बैठे है इन मौत परोसने वाली फैक्ट्रियों पर कार्यवाही के नाम शून्य है. क्योकि अधिकारियों को मौत परोशने वाली फैक्ट्रियों से मोटी रकम मिलती है जिसके कारण आला अधिकारी भी इन मौत के संचालको के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कतराते रहते है. आये दिन इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की मौत का तमाशा देखने के बाद भी आला अधिकारी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ और सिर्फ जीरो बटे सन्नाटा करते हुए नजर आते है. आज भी एक मजदूर की मौत सुपर हाउस बन्धर यूनिट तीन फैक्ट्री की लापरवाही के चलते हुए हुई जिसके बाद मृतक मजदूर के परिजनों ने फैक्ट्री में जबरदस्त हंगामा काटा. हंगामे को देख मौके पे एसडीएम सदर सीओ सदर और अचलगंज थाने की फोर्स मौके पर पहुँची और फैक्ट्री के मालिक के ऊपर कोई कार्यवाही करने के बजाए उस मृतक मजदूर के परिजनों को समझा बुझाकर मुआवजा की राशि दिलवाके इस मामले को रफा दफा कर दिया। उन्नाव में उस समय हड़कम्प मच गया जब एक चमड़े फैक्ट्री सुपर हाउस बंधर यूनिट तीन में काम करने वाले मजदूर ने पहले तो अपना खाना खाया और फिर पानी पीने के लिए बोतल उठाई और बोतल में पानी जैसा ही रखा कैमिकल पी लिया. उस मजदूर को तो यह भी जानकारी नही थी कि जो मैं पी रहा हूँ वो पानी नही जो मेरी प्यास बुझा देगा बल्कि उस बोतल में तो हमेशा के लिए जीवन को समाप्त करने वाला कैमिकल रखा हुआ है. जब इसकी जानकारी हुई उस मजदूर को हुुवी जो मैंने पिया है वह पानी नही बल्कि मेरी मौत का सामान था तो वह बहुत घबरा गया और वही पर काम करने वाले अपने भाई के पास पहुचता है अपनी पूरी आप बीती बताता है जिसके बाद मृतक मजदूर के भाई द्वारा फैक्ट्री मैनेजर को जानकारी दी. उसके बावजूद भी उस मैनेजर का दिल नही पिघला कोई साधन देने के बजाए उसको और उसके भाई को फैक्ट्री से बाहर भेज दिया. जिसके बाद मृतक मजदूर के भाई ने अस्पताल में भर्ती किया जहाँ पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद गुस्साये परिजनों ने मृतक के शव को फैक्ट्री लेकर पहुँच गए जहाँ पे देखा कि फैक्ट्री का गेट बन्द करवा दिया गया है. . यह देख परिजनों के साथ आये लोगो ने गुस्से में आकर गेट को तोड़ कर फैक्ट्री के अंदर शव को लेकर घुस गए और हंगामा करने लगे. जब इस पूरी घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली तो पुलिस बल के साथ एसडीएम सदर और क्षेत्राधिकारी भी मौके पे पहुँचे. पहुँचने के बाद फैक्ट्री मालिक पे कार्यवाही के बजाय मृतक मजदूर के परिजनों को समझा बुझाकर फैक्ट्री मालिक के साथ मजदूर की जिंदगी की कीमत को सात लाख पचास हजार रुपये लगाते हुए फैक्ट्री मालिक और मृतक मजदूर के परिजनों का समझौता कर दिया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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स्पोर्ट्स डेस्क । भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और इंडिया टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली आज अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। सौरव गांगुली के क्रिकेट करियर की तरह ही उनकी पर्सनल लाइफ भी काफी इंट्रेस्टिंग रही है। इसका खुलासा कुछ सालों पहले दिए एक इंटरव्यू के दौरान खुद किया था। इतना ही नहीं गांगुली ने अपनी शादी को सबसे अच्छी गलती बताया था। जी हां, उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाली डोना के साथ लव मैरिज की थी। आज हम आपको उनकी लव स्टोरी ही बता रहे हैं। जिसमें कैसे परिवार वालों ने पहले विरोध और फिर दोबारा शादी कराई।
सौरव गांगुली आज 48 साल के हो गए हैं। महाराज, दादा और द प्राइड ऑफ कोलकाता के उपनाम से मशहूर क्रिकेटर की यात्रा दिलचस्प है। बेहतरीन बल्लेबाजी करने वाले इस पूर्व खिलाड़ी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि वो शुरू में दाएं हाथ से खेलते थे।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और स्टार क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। धोनी भले ही सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन उनकी पत्नी साक्षी धोनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं।
स्पोर्ट्स डेस्क। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की उनसे अलग रह रही वाइफ हसीन जहां अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें डालती रहती हैं। उनकी तस्वीरों पर लोग भद्दे कमेंट भी करते हैं, लेकिन हसीन जहां को इसकी कोई परवाह नहीं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी एक बोल्ड पिक शेयर की। इस तस्वीर पर मोहम्मद शमी के फैन्स ने रिएक्ट करते हुए यहां तक कहा कि अब कुछ भी कर लो, शमी भाई तुम्हारे फरेब में आने वाले नहीं हैं। कोलकाता में रह कर मॉडलिंग में फिर से करियर बनाने की कोशिश कर रही है हसीन जहां पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अपनी एक न्यूड पिक डालने की वजह से भी काफी विवादों में रही हैं।
538 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके पूर्व भारतीय कप्तान और अनुभवी विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी आज ही के दिन यानी 7 जुलाई 1981 में पैदा हुए थे। दिसंबर 2004 में धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में डेब्यू किया। एक साल बाद चेन्नई में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने टेस्ट में डेब्यू किया था। धोनी ने लगभग एक दशक से भी ज्यादा समय तक विकेटकीपर, बल्लेबाज, कप्तान हर तरह की भूमिका को बहुत ही जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनके जन्मदिन पर आइए उनके रिकॉर्ड्स और स्टैट्स पर डालते हैं एक नजर।
वीडियो डेस्क। आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स और वेस्टइंडीज के ऑल राउंडर ड्वेन ब्रावो ने अपने वादा पूरा करते हुए महेंद्र सिंह धोनी के जन्मदिन पर उनके लिए बनाया स्पेशल गाना रिलीज कर दिया है। धोनी आज यानी 7 जुलाई 2020 को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। ब्रावो ने धोनी के 39वें जन्मदिन पर उन्हें यह खास तोहफा देते हुए इस गाने को रिलीज कर दिया है। धोनी के लिए बनाए गए इस स्पेशल गाने में धोनी के रांची से वर्ल्ड कप विजेता के सफर को बयां किया गया है। ब्रावो ने इस गाने को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा है कि उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिया है।
स्पोर्ट्स डेस्क. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी 7 जुलाई को 39 साल के हो गए। कैप्टन कूल माही के फैंस का क्रेज कैसा है यह सभी जानते हैं। धौनी के जन्मदिन से एक दिन पहले ही फैंस ने अपने चहेते स्टार को जन्मदिन की बधाई संदेश देना शुरू कर दीवानगी की हद पार कर दी। सोशल मीडिया पर धौनी को विश करने वालों की ऐसी भीड़ लगी की शाम से ही HAPPY BIRTHDAY DHONI ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। आज हम आपको महेंद्र सिंह धोनी की बचपन से लेकर अब तक की 10 खास तस्वीरों को शेयर करने जा रहे हैं।
स्पोर्टस डेस्क । पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज 39 साल के हो गए हैं। कैप्टन कूल धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड (तब बिहार) के रांची में हुआ था। इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी ऐसे कई रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें तोड़ना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद मुश्किल होगा। जिनके बारे में हम आपको 10 बड़ी अनजानी बातें बता रहे हैं। जिनके बारे में आज हम आपको बता रहे हैं।
स्पोर्ट्स डेस्क. रविवार को हुआ जब टीम इंडिया के उप कप्तान व स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपनी पत्नी रीतिका सजदेह के साथ इंस्टा पर एक तस्वीर पोस्ट की। रोहित ने इसके बाद कैप्शन लिखा, 'हमेशा उसे पकड़कर रखें जिसे आप प्यार करते हैं। इसके तुरंत बाद युवराज सिंह ने मुंबई के इस बल्लेबाज के लिए अपना प्यार जताया और कमेंट कर कहा कि, आपके गाल मुझे बहुत पसंद है, क्या मैं उन्हें पकड़कर रख सकता हूं।
गांगुली से मीडिया वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में सवाल पूछा गया, 'जब आप वनडे में पारी की शुरुआत करते थे तो क्या सचिन पाजी आपको हमेशा पहली गेंद खेलने के लिए कहते थे? '
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स्पोर्ट्स डेस्क । भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और इंडिया टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली आज अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। सौरव गांगुली के क्रिकेट करियर की तरह ही उनकी पर्सनल लाइफ भी काफी इंट्रेस्टिंग रही है। इसका खुलासा कुछ सालों पहले दिए एक इंटरव्यू के दौरान खुद किया था। इतना ही नहीं गांगुली ने अपनी शादी को सबसे अच्छी गलती बताया था। जी हां, उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाली डोना के साथ लव मैरिज की थी। आज हम आपको उनकी लव स्टोरी ही बता रहे हैं। जिसमें कैसे परिवार वालों ने पहले विरोध और फिर दोबारा शादी कराई। सौरव गांगुली आज अड़तालीस साल के हो गए हैं। महाराज, दादा और द प्राइड ऑफ कोलकाता के उपनाम से मशहूर क्रिकेटर की यात्रा दिलचस्प है। बेहतरीन बल्लेबाजी करने वाले इस पूर्व खिलाड़ी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि वो शुरू में दाएं हाथ से खेलते थे। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और स्टार क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी अपना उनतालीसवां जन्मदिन मना रहे हैं। धोनी भले ही सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन उनकी पत्नी साक्षी धोनी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। स्पोर्ट्स डेस्क। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की उनसे अलग रह रही वाइफ हसीन जहां अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें डालती रहती हैं। उनकी तस्वीरों पर लोग भद्दे कमेंट भी करते हैं, लेकिन हसीन जहां को इसकी कोई परवाह नहीं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी एक बोल्ड पिक शेयर की। इस तस्वीर पर मोहम्मद शमी के फैन्स ने रिएक्ट करते हुए यहां तक कहा कि अब कुछ भी कर लो, शमी भाई तुम्हारे फरेब में आने वाले नहीं हैं। कोलकाता में रह कर मॉडलिंग में फिर से करियर बनाने की कोशिश कर रही है हसीन जहां पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अपनी एक न्यूड पिक डालने की वजह से भी काफी विवादों में रही हैं। पाँच सौ अड़तीस अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके पूर्व भारतीय कप्तान और अनुभवी विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी आज ही के दिन यानी सात जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में पैदा हुए थे। दिसंबर दो हज़ार चार में धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में डेब्यू किया। एक साल बाद चेन्नई में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने टेस्ट में डेब्यू किया था। धोनी ने लगभग एक दशक से भी ज्यादा समय तक विकेटकीपर, बल्लेबाज, कप्तान हर तरह की भूमिका को बहुत ही जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनके जन्मदिन पर आइए उनके रिकॉर्ड्स और स्टैट्स पर डालते हैं एक नजर। वीडियो डेस्क। आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स और वेस्टइंडीज के ऑल राउंडर ड्वेन ब्रावो ने अपने वादा पूरा करते हुए महेंद्र सिंह धोनी के जन्मदिन पर उनके लिए बनाया स्पेशल गाना रिलीज कर दिया है। धोनी आज यानी सात जुलाई दो हज़ार बीस को अपना उनतालीसवां जन्मदिन मना रहे हैं। ब्रावो ने धोनी के उनतालीसवें जन्मदिन पर उन्हें यह खास तोहफा देते हुए इस गाने को रिलीज कर दिया है। धोनी के लिए बनाए गए इस स्पेशल गाने में धोनी के रांची से वर्ल्ड कप विजेता के सफर को बयां किया गया है। ब्रावो ने इस गाने को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा है कि उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिया है। स्पोर्ट्स डेस्क. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी सात जुलाई को उनतालीस साल के हो गए। कैप्टन कूल माही के फैंस का क्रेज कैसा है यह सभी जानते हैं। धौनी के जन्मदिन से एक दिन पहले ही फैंस ने अपने चहेते स्टार को जन्मदिन की बधाई संदेश देना शुरू कर दीवानगी की हद पार कर दी। सोशल मीडिया पर धौनी को विश करने वालों की ऐसी भीड़ लगी की शाम से ही HAPPY BIRTHDAY DHONI ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। आज हम आपको महेंद्र सिंह धोनी की बचपन से लेकर अब तक की दस खास तस्वीरों को शेयर करने जा रहे हैं। स्पोर्टस डेस्क । पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज उनतालीस साल के हो गए हैं। कैप्टन कूल धोनी का जन्म सात जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यासी को झारखंड के रांची में हुआ था। इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग में भी ऐसे कई रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें तोड़ना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद मुश्किल होगा। जिनके बारे में हम आपको दस बड़ी अनजानी बातें बता रहे हैं। जिनके बारे में आज हम आपको बता रहे हैं। स्पोर्ट्स डेस्क. रविवार को हुआ जब टीम इंडिया के उप कप्तान व स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपनी पत्नी रीतिका सजदेह के साथ इंस्टा पर एक तस्वीर पोस्ट की। रोहित ने इसके बाद कैप्शन लिखा, 'हमेशा उसे पकड़कर रखें जिसे आप प्यार करते हैं। इसके तुरंत बाद युवराज सिंह ने मुंबई के इस बल्लेबाज के लिए अपना प्यार जताया और कमेंट कर कहा कि, आपके गाल मुझे बहुत पसंद है, क्या मैं उन्हें पकड़कर रख सकता हूं। गांगुली से मीडिया वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में सवाल पूछा गया, 'जब आप वनडे में पारी की शुरुआत करते थे तो क्या सचिन पाजी आपको हमेशा पहली गेंद खेलने के लिए कहते थे? '
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भारत समेत विश्व के इतिहास में 13 जून का दिन काफी महत्व रखता है। तस्वीरों से जानिये, इस दिन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में. .
कोरोना की वैश्विक महामारी के चलते लंबे समय से पर्यटकों के लिये बंद जिम कार्बेट नेशनल पार्क को प्रशासन द्वारा जल्द खोला जा सकता है। पढिये, पूरी खबर. .
भारत समेत विश्व इतिहास में 12 जून का दिन काफी महत्व रखता है। तस्वीरों से जानिये, इस दिन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में. .
देश के चार धामों में से प्रमुख धाम भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिये प्रशासन द्वारा नये आदेश जारी कर दिये गये हैं। जानिये, अब कौन लोग कर सकेंगे दर्शन. .
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भारत समेत विश्व के इतिहास में तेरह जून का दिन काफी महत्व रखता है। तस्वीरों से जानिये, इस दिन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में. . कोरोना की वैश्विक महामारी के चलते लंबे समय से पर्यटकों के लिये बंद जिम कार्बेट नेशनल पार्क को प्रशासन द्वारा जल्द खोला जा सकता है। पढिये, पूरी खबर. . भारत समेत विश्व इतिहास में बारह जून का दिन काफी महत्व रखता है। तस्वीरों से जानिये, इस दिन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में. . देश के चार धामों में से प्रमुख धाम भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिये प्रशासन द्वारा नये आदेश जारी कर दिये गये हैं। जानिये, अब कौन लोग कर सकेंगे दर्शन. .
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उज्जैन : आगामी 11 अक्टूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने और शहर में कार्यक्रम के प्रति आमजन में उत्साह और हर्षोल्लास के वातावरण का निर्माण करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उज्जैन स्मार्ट सिटी के माध्यम से रामघाट पर 11 अक्टूबर तक प्रतिसंध्या भव्य शिप्रा आरती महोत्सव का आयोजन किया जायेगा।
मंगलवार 11 अक्टूबर को महाकाल लोक के लोकार्पण के अवसर पर 21 पंडितों के द्वारा मां शिप्रा की आरती की जायेगी। इस दौरान दो से तीन घंटे तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। पॉवर मल्लखंब की हैरतअंगेज प्रस्तुति दी जायेगी। साथ ही आकर्षक आतिशबाजी भी होगी। मां शिप्रा की आरती में विशेष प्रभाव डाले जायेंगे, जिसमें गुलाल, धुंध, दीपक और लेंटर्न भी शामिल होंगे। 11 अक्टूबर को मां शिप्रा की महाआरती की जायेगी। इसके अलावा रामघाट पर इस दिन भजन संध्या का आयोजन भी किया जायेगा।
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उज्जैन : आगामी ग्यारह अक्टूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने और शहर में कार्यक्रम के प्रति आमजन में उत्साह और हर्षोल्लास के वातावरण का निर्माण करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उज्जैन स्मार्ट सिटी के माध्यम से रामघाट पर ग्यारह अक्टूबर तक प्रतिसंध्या भव्य शिप्रा आरती महोत्सव का आयोजन किया जायेगा। मंगलवार ग्यारह अक्टूबर को महाकाल लोक के लोकार्पण के अवसर पर इक्कीस पंडितों के द्वारा मां शिप्रा की आरती की जायेगी। इस दौरान दो से तीन घंटे तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। पॉवर मल्लखंब की हैरतअंगेज प्रस्तुति दी जायेगी। साथ ही आकर्षक आतिशबाजी भी होगी। मां शिप्रा की आरती में विशेष प्रभाव डाले जायेंगे, जिसमें गुलाल, धुंध, दीपक और लेंटर्न भी शामिल होंगे। ग्यारह अक्टूबर को मां शिप्रा की महाआरती की जायेगी। इसके अलावा रामघाट पर इस दिन भजन संध्या का आयोजन भी किया जायेगा।
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हाल के दिनों में जीतने भी अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी में लगे हुए हैं उन सभी लोगों के लिए यह बहुत ही अच्छी खबर है, आपको बताते चलें की ताज़ा जानकरी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलग अलग श्रेणी के कुल 3495 पदों पर भर्ती निकली है जिसके लिए सभी अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए यह भी बट्टे चलें की हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट, पेड अप्रेंटिस, ड्राइवर, अर्दली, चौकीदार तथा ऐसे ही तमाम पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए है और इन सभी पदों पर नियुक्ति उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला न्यायालयों में सीधी भर्ती के आधार पर की जाएंगी।
आपकी जानकारी के लिए यह भी बताते चलें की इन सभी पदों के लिए इच्छुक और योग्य अभ्यर्थियों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना पड़ेगा और आवेदन की प्रक्रिया नोटिफिकेशन के अनुसार 06 दिसंबर से शुरू होगी और इसकी आवेदन की अंतिम तिथि 26 दिसंबर 2018 है। अगर आप भी इन सभी पदों में से किसी पद पर आवेदन करना चाहते हैं तो यहाँ पर पूरी जानकारी दी गयी है उसे ध्यानपूर्वक पढ़ लीजिये और अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन करने के लिए तैयार हो जाइए। आपको यह भी बता दें की येन सभी पदों पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ तभी मिलेगा जब वो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होंगे अन्यथा उन्हे सामान्य श्रेणी में माना जाएगा।
पद का नाम ( सी कैटेगरी )
योग्यता :
- किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।
- साथ ही साथ स्टेनोग्राफी में डिप्लोमा या फिर सर्टिफिकेट प्राप्त होने के साथ DOEACC कम्प्युटर कोर्स किया हुआ हो।
वेतन : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये वेतन मान्य हैं और इनका ग्रेड-पे 2,800 रुपये रहेगा।
योग्यता :
- किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान/स्कूल से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण हो।
- DOEACC कम्प्युटर कोर्स किया हुआ हो।
- इसके अलावा कंप्यूटर पर हिंदी भाषा में 25 शब्द प्रति मिनट या फिर अंग्रेजी भाषा में 30 शब्द प्रति मिनट की गति से टाइपिंग आनी चाहिए।
वेतनमान : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये वेतन मान्य है और इनका ग्रेड-पे 2,000 रुपये रहेगा।
योग्यता :
- इस पद पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से दसवीं की परीक्षा में पास होना चाहिए।
- साथ ही साथ अभ्यर्थी के पास उसका खुद का वैध ड्राइविंग का लाइसेंस होना चाहिए और तथा कम से कम तीन वर्षों का वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
वेतनमान : स पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे 1,900 रुपये होगा।
पद का नाम ( डी कैटेगरी )
योग्यता :
- मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की हो।
- इसके साथ ही पद संबंधित ट्रेड में आईटीआई या समकक्ष संस्थान से डिप्लोमा/सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो।
वेतनमान : स पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे 1,00 रुपये होगा।
योग्यता : इस पद के लिए अभ्यर्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से दसवीं की परीक्षा पास होना अनिवार्य है।
वेतनमान : इस पद के लिए नियुक्त अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे 1,00 रुपये होगा।
योग्यता : इस पद पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से जूनियर हाईस्कूल/आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए।
वेतनमान : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 5,200 रुपये से 20,200 रुपये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे 1,00 रुपये होगा।
योग्यता : मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से कम से कम छठवीं पास होना चाहिए।
वेतन : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को 6,000 रुपये देय मान्य होगा।
आयु सीमा (उपरोक्त सभी पद)
बता दें की इन सभी पदों पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 18 तथा अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए तथा आयु की गणना 01 जुलाई 2018 के आधार पर की जाएगी।
- सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा।
- एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए 400 रुपये शुल्क तय किया गया है।
- इन सभी पदों पर आवेदन करने के लिए सभी योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
- जो जो अभ्यर्थी स्टेनोग्राफर और जूनियर असिस्टेंट के पद के लिए आवेदन कर रहे है उन्हे हिन्दी/अंग्रेजी स्टेनोग्राफी टेस्ट और कम्प्यूटर टाइप टेस्ट में पास होना अनिवार्य होगा।
- यह भी बताते चलें की जिन अभ्यर्थियों ने ड्राइवर के पद के लिए आवेदन करेंगे उन्हे ड्राइविंग टेस्ट देना होगा।
नियुक्ति से जुड़ी जानकारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट www. allahabadhighcourt. in पर भी जा सकते हैं।
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हाल के दिनों में जीतने भी अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी में लगे हुए हैं उन सभी लोगों के लिए यह बहुत ही अच्छी खबर है, आपको बताते चलें की ताज़ा जानकरी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलग अलग श्रेणी के कुल तीन हज़ार चार सौ पचानवे पदों पर भर्ती निकली है जिसके लिए सभी अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए यह भी बट्टे चलें की हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट, पेड अप्रेंटिस, ड्राइवर, अर्दली, चौकीदार तथा ऐसे ही तमाम पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए है और इन सभी पदों पर नियुक्ति उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला न्यायालयों में सीधी भर्ती के आधार पर की जाएंगी। आपकी जानकारी के लिए यह भी बताते चलें की इन सभी पदों के लिए इच्छुक और योग्य अभ्यर्थियों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना पड़ेगा और आवेदन की प्रक्रिया नोटिफिकेशन के अनुसार छः दिसंबर से शुरू होगी और इसकी आवेदन की अंतिम तिथि छब्बीस दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह है। अगर आप भी इन सभी पदों में से किसी पद पर आवेदन करना चाहते हैं तो यहाँ पर पूरी जानकारी दी गयी है उसे ध्यानपूर्वक पढ़ लीजिये और अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन करने के लिए तैयार हो जाइए। आपको यह भी बता दें की येन सभी पदों पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ तभी मिलेगा जब वो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होंगे अन्यथा उन्हे सामान्य श्रेणी में माना जाएगा। पद का नाम योग्यता : - किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। - साथ ही साथ स्टेनोग्राफी में डिप्लोमा या फिर सर्टिफिकेट प्राप्त होने के साथ DOEACC कम्प्युटर कोर्स किया हुआ हो। वेतन : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये वेतन मान्य हैं और इनका ग्रेड-पे दो,आठ सौ रुपयापये रहेगा। योग्यता : - किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान/स्कूल से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण हो। - DOEACC कम्प्युटर कोर्स किया हुआ हो। - इसके अलावा कंप्यूटर पर हिंदी भाषा में पच्चीस शब्द प्रति मिनट या फिर अंग्रेजी भाषा में तीस शब्द प्रति मिनट की गति से टाइपिंग आनी चाहिए। वेतनमान : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये वेतन मान्य है और इनका ग्रेड-पे दो,शून्य रुपयापये रहेगा। योग्यता : - इस पद पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से दसवीं की परीक्षा में पास होना चाहिए। - साथ ही साथ अभ्यर्थी के पास उसका खुद का वैध ड्राइविंग का लाइसेंस होना चाहिए और तथा कम से कम तीन वर्षों का वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए। वेतनमान : स पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे एक,नौ सौ रुपयापये होगा। पद का नाम योग्यता : - मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की हो। - इसके साथ ही पद संबंधित ट्रेड में आईटीआई या समकक्ष संस्थान से डिप्लोमा/सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। वेतनमान : स पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे एक,शून्य रुपयापये होगा। योग्यता : इस पद के लिए अभ्यर्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से दसवीं की परीक्षा पास होना अनिवार्य है। वेतनमान : इस पद के लिए नियुक्त अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे एक,शून्य रुपयापये होगा। योग्यता : इस पद पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से जूनियर हाईस्कूल/आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। वेतनमान : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पाँच,दो सौ रुपयापये से बीस,दो सौ रुपयापये मान्य है तथा इनका ग्रेड पे एक,शून्य रुपयापये होगा। योग्यता : मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड से कम से कम छठवीं पास होना चाहिए। वेतन : इस पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को छः,शून्य रुपयापये देय मान्य होगा। आयु सीमा बता दें की इन सभी पदों पर आवेदन के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु अट्ठारह तथा अधिकतम आयु चालीस वर्ष होनी चाहिए तथा आयु की गणना एक जुलाई दो हज़ार अट्ठारह के आधार पर की जाएगी। - सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए पाँच सौ रुपयापये शुल्क देना होगा। - एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए चार सौ रुपयापये शुल्क तय किया गया है। - इन सभी पदों पर आवेदन करने के लिए सभी योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। - जो जो अभ्यर्थी स्टेनोग्राफर और जूनियर असिस्टेंट के पद के लिए आवेदन कर रहे है उन्हे हिन्दी/अंग्रेजी स्टेनोग्राफी टेस्ट और कम्प्यूटर टाइप टेस्ट में पास होना अनिवार्य होगा। - यह भी बताते चलें की जिन अभ्यर्थियों ने ड्राइवर के पद के लिए आवेदन करेंगे उन्हे ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। नियुक्ति से जुड़ी जानकारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट www. allahabadhighcourt. in पर भी जा सकते हैं। यह भी पढ़ें :
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महाराष्ट्र की महा विकास आघाड़ी सरकार में किसी तरह की अंदरूनी कलह से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा. .
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बुधवार को चिट्ठी लिखकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) लागू करने की मांग की है।
महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के साकी नाका बलात्कार-हत्या मामले पर महाराष्ट विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता विश्वबंधु राय ने महाराष्ट्र के राज्यपाल को पत्र लिखा है।
मुंबई के साकीनाका में एक टेम्पो के भीतर एक महिला के साथ दुष्कर्म एवं उसपर हमले के मामले में भाजपा की प्रदेश इकाई ने आरोपी के लिए मृत्यु दंड की मांग शनिवार को की और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर शिवसेना नीत महा विकास आघाड़ी सरकार को घेरा।
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महाराष्ट्र की महा विकास आघाड़ी सरकार में किसी तरह की अंदरूनी कलह से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा. . महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बुधवार को चिट्ठी लिखकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम लागू करने की मांग की है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के साकी नाका बलात्कार-हत्या मामले पर महाराष्ट विकास अघाड़ी सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता विश्वबंधु राय ने महाराष्ट्र के राज्यपाल को पत्र लिखा है। मुंबई के साकीनाका में एक टेम्पो के भीतर एक महिला के साथ दुष्कर्म एवं उसपर हमले के मामले में भाजपा की प्रदेश इकाई ने आरोपी के लिए मृत्यु दंड की मांग शनिवार को की और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर शिवसेना नीत महा विकास आघाड़ी सरकार को घेरा।
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मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आज आयोजित अपनी बैठक में वर्तमान और उभरती समष्टि आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर निर्णय लिया है किः
- चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के नीति रेपो दर 6.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाए।
परिणामस्वरूप, चलनिधि समायोजना सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत प्रतिवर्ती रेपो दर 5.75 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर तथा बैंक दर 6.75 पर अपरिवर्तित रहेंगी।
एमपीसी का निर्णय मौद्रिक नीति के उदार रुख के अनुरूप है जो वृद्धि को सहारा देते हुए वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति का 5 प्रतिशत का उद्देश्य हासिल करने और +/- 2 प्रतिशत के बैंड के अंदर 4 प्रतिशत के मध्यावधि लक्ष्य के अनुरूप है। इस निर्णय को रेखांकित करने वाले मुख्य विचारों को नीचे वक्तव्य में दिया गया है।
2. वर्ष 2016 की पहली छमाही में कमजोरी के बाद वैश्विक वृद्धि ने दूसरी छमाही में गति पकड़ी। अमेरिका में स्थिति के उल्टा होने से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं (एई) में गतिविधि में झिझक के साथ सुधार हुआ। उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) में वृद्धि नरम रही किंतु चीन में नीतिगत प्रोत्साहन और बड़े पण्य-वस्तु निर्यातकों में दबाव के कुछ सहज होने से गति में मजबूती आई। विश्व व्यापार गर्त से बाहर आना शुरू हो रहा है जो जुलाई-अगस्त में निम्न स्तर पर पहुंच गया था और स्थिर होने का संकेत दिखा रहा है। कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओँ में मुद्रास्फीति बढ़ गई है, हालांकि यह लक्ष्य से नीचे ही है और कई उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में सहज हो रही है। अमेरिका, जापान और चीन में प्रत्यवस्फीति (रिफ्लेशनरी) राजकोषीय नीतियों की संभावनाओं और मंदी के समय में उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर नीचे की ओर दबावों के कम होने की गति यूरो क्षेत्र और यूके में वर्तमान में व्याप्त राजनीतिक जोखिमों से धीमी हो गई है, इन जोखिमों से भौगोलिक-राजनीतिक जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं और वित्तीय बाजार अस्थिरता छायी हुई है।
3. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार पर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव और आगामी आंकड़ों के परिणाम का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा जिन्होंने फेडरल रिज़र्व द्वारा कड़ा मौद्रिक रुख अपनाने की संभावना बढ़ा दी। चूंकि अस्थिरता के झटकों से अमेरिकी इक्विटी में जोखिम मुक्त उछाल बढ़ गया और स्थायी आय बाजारों से जोखिम भरी हड़बड़ी ने उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं से पूंजीगत प्रवाह बाहर कर दिया, इससे मुद्रा का मूल्य कम हो रहा है और इक्विटी बाजार अपने हाल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हालांकि बॉन्ड प्रतिफल अमेरिकी प्रतिफलों के साथ मिलकर सख्त हो गए। चुनाव के परिणामों के बाद अक्टूबर के उत्तरार्द्ध से अमेरिकी डॉलर में वृद्धि तेज हो गई और विश्वभर की मुद्राओं में काफी मूल्यह्रास शुरू हो गया। अमेरिकी चुनाव के परिणामों के मद्देनजर मांग संभावना में सुधार होने से नवंबर के मध्य से सभी जगह स्वर्ण को छोड़कर पण्य-वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई, स्वर्ण की सुरक्षित आश्रय वाली चमक मजबूत अमेरिकी डॉलर में गुम हो गई। उत्पादन कम करने के ओपेक के निर्णय के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई।
5. तीसरी तिमाही पर बात करते हुए, समिति ने महसूस किया कि विनिर्दिष्ट बैंक नोटों (एसबीएन) के वापस लेने से अभी भी प्रकट प्रभावों द्वारा किए गए आकलन पर बादल छाए हुए हैं। प्रमुख फसलों में रबी की बुआई के अंतर्गत रकबे में स्थिर विस्तार होने से पिछले वर्ष की तुलना में दूसरी तिमाही में कृषि का मजबूत निष्पादन होना चाहिए। इसके विपरीत, औद्योगिक गतिविधि कमजोर बनी हुई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में मुख्य उद्योगों में, कोयले के उत्पादन में मंद मांग के कारण अक्टूबर में कमी आई जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में संरचनागत बाधाओं के बाध्यकारी प्रतिबंध के कारण कमी आई। सीमेंट, उर्वरकों और विद्युत के उत्पादन में गिरावट जारी रही, जो आधारभूत आर्थिक गतिविधि में सुस्ती दर्शाती है। दूसरी तरफ, प्रतिकारी शुल्कों के लागू होने से इस्पात के उत्पादन में निरंतर विस्तार दर्ज किया गया है। निर्यात में वृद्धि और क्षमता संवर्धन के सहारे रिफानरी उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। विनिर्दिष्ट बैंक नोटों (एसबीएन) के वापस लेने से मजदूरी और इनपुटों की खरीद के भुगतान में विलंब के कारण नवंबर-दिसंबर में औद्योगिक गतिविधि के कुछ हिस्से पर कुछ समय के लिए अड़चन आ सकती है, हालांकि पूरा आकलन करना बाकी है। सेवा क्षेत्र में, मिश्रित संभावना है जिसमें निर्माण, व्यापार, परिवहन, होटल और संचार पर एसबीएन का अस्थायी प्रभाव पड़ा है जबकि लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) अवार्ड और वन रैंक वन पेंशन से उत्साहित हैं। वित्तीय सेवाओं द्वारा जीवीए में छोटी लागत की जमाराशियों के बड़े अंतर्वाह से लघुकालिक प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
6. सब्ज़ियों की प्रत्याशित से अधिक तेज़ अपस्फीति के परिणामस्वरूप हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक द्वारा आकलित खुदरा मुद्रास्फीति लगातार तीसरे माह अक्तूबर में अपेक्षा से अधिक कम हो गई है। तथापि इस कमतर मात्रा के बावजूद विभिन्न स्तरों पर माह-दर-माह मूल्य बढ़ने के कारण इसकी गति में एक उछाल आया। अनाज, दलहन तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमतों के साथ चीनी तथा प्रोटीनयुक्त उत्पादों की अभी भी ऊंची कीमतों से खाद्य पदार्थों की कीमतों की गति में उछाल आया जिसने सुदृढ़ अनुकूल आधार प्रभाव से खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में आई नरमी को आंशिक रूप से बराबर कर दिया। एल.पी.जी. के मूल्यों में वार्षिक अधार पर हुई गिरावटों के कारण और एक माह पहले बिजली की कीमतों में गिरावट के कारण ईंधन की श्रेणी में कमी आई है। खाद्य पदार्थों तथा ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति निरंतर जारी है। हालांकि आवासीय तथा व्यक्तिगत देखभाल से संबंधित मुद्रास्फीति अत्यल्प कम हुई है, शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन तथा संचार में मुद्रास्फीति की निरंतर तेजी ने इस श्रेणी की मुद्रास्फीति में स्थिरता प्रदान की है।
7. तीसरी तिमाही में अब तक चलनिधि स्थिति में भारी परिवर्तन हुए हैं। अक्तूबर में तथा नवंबर के शुरुआत में अधिशेष की स्थिति पर 9 नवंबर से विनिर्दिष्ट बैंक नोटों को वापस लेने के कारण प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। दिनांक 2 दिसंबर तक प्रचलन में मुद्रा में ₹7.4 ट्रिलियन की गिरावट आई। उसके बाद नोट बदलने से और बैंकिंग प्रणाली में जमा की तेज़ बढ़त से अतिरिक्त आरक्षित निधि में भारी वृद्धि हुई। रिज़र्व बैंक ने ओवरनाइट से लेकर 90 दिनों तक की व्यापक अवधियों की परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती रेपो की नीलामियों के माध्यम से अपने चलनिधि परिचालन में वृद्धि की जिसमें ₹5.2 ट्रिलियन (निवल) चलनिधि को कम किया गया। रिज़र्व बैंक ने सरकार द्वारा जारी तेल बांडों को एलएएफ के अंतर्गत पात्र प्रतिभूति की अनुमति दी। प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि के निकास के लिए अस्थाई उपाय के रूप में 16 सितंबर 2016 से 11 नवंबर 2016 के बीच निवल मांग तथा मियादी देयता (एन.डी.टी.एल) में वृद्धि पर 26 नवंबर को प्रारंभ पखवाडे से 100 प्रतिशत वृद्धिशील सी.आर.आर. लागू की गई। दिनांक 28 नवंबर से चलनिधि के अवशोषण में गिरावट आई और रिज़र्व बैंक ने 28 नवंबर को ₹3.3 ट्रिलियन के परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती नीलामी की। जैसा कि अपेक्षित था, इसके बाद मुद्रा बाज़ार संकुचित हो गए और भारित औसत कॉल दर का 30 नवंबर की नीति रेपो दर के स्तर तक आने से पहले उस दिन एलएएफ कोरिडॉर की उच्चतम सीमा के निकट कारोबार किया गया। प्रणाली की अन्य सभी दरें इसके सहयोग में बढ़ने लगी और सावधि प्रीमियमों में धीरे-धीरे सुधार हुआ। इस घटना से सक्रिय चलनिधि प्रबंधन ने डब्ल्यू.ए.सी.आर को स्थिर दर प्रतिवर्ती रेपो दर तक गिरने से रोका जो कि एल.ए.एफ. कॉरिडॉर की निचली सीमा है। बाज़ार स्थिरता योजना (एम.एस.एस.) के अंतर्गत प्रतिभूति की सीमा में 29 नवंबर को ₹0.3 ट्रिलियन से ₹6 ट्रिलियन वृद्धि के कारण चलनिधि प्रबंधन को सहारा मिला। एम.एस.एस. के अंतर्गत 06 दिसंबर 2016 को ₹1.4 ट्रिलियन के लिए नकद प्रबंधन बिल का तीन बार निर्गम हुआ।
8. बाहरी क्षेत्र में, भारत का उत्पाद निर्यात सितंबर तथा अक्तूबर में बढ़ा। दोनों पी.ओ.एल तथा गैर-पी.ओ.एल आयातों की मदद से सकारात्मक स्थिति में वापसी हुई। 22 महीनों की लंबी गिरावट के बाद, सोने के आयात की मात्रा में तीव्र वृद्धि तथा पी.ओ.एल आयात के लिए बढ़े हुए भुगतान के बाद अक्तूबर में आयात में वृद्धि हुई। गैर-तेल गैर-स्वर्ण आयात में वृद्धि ने भी सात माह के अंतराल के बाद सकारात्मक मोड़ लिया। अप्रैल-अक्तूबर की अवधि के लिए उत्पाद व्यापार घाटा गत वर्ष की तुलना में अपने स्तर से 25 बिलियन यू.एस. डॉलर कम रहा। तदनुसार प्रेषणों में कुछ हानि और सॉफ्टवेयर निर्यात के अदृश्य मदों में होने के बावजूद चालू खाता घाटा मंदा रहने की संभावना है। निवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश समुचित रूप से मजबूत रहा जिसमें से आधे से अधिक विनिर्माण, संचार तथा वित्तीय सेवाओं को गया। इसके विपरीत, ऋण और इक्विटी बाजारों से अक्टूबर-नवंबर में 7.3 बिलियन का पोर्टफोलियो निवेश बहिर्वाह हुआ जैसा समान ईएमईजी में हुआ है, जो यू.एस. राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम से सक्रिय स्वदेशी झुकाव और यू.एस. की मौद्रिक नीति के कड़े होने की निकट निश्चितता दर्शाता है। दिनांक 02 दिसंबर 2016 को विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधि का स्तर 364 बिलियन यू.एस. डॉलर रहा।
9. समिति ने कई वस्तुओं में कीमतों की बढ़त को नोट किया जो अक्तूबर के दौरान आधार प्रभाव पर मुद्रास्फीति कम होने के कारण प्रभावित हुईं। कतिपय आपूर्ति कमियों के बावजूद एस.बी.एन. के वापस ले लेने के कारण नवंबर में मांग के आकस्मिक संकुचन दिसंबर के लिए उपलब्ध होने वाले आकलित विकारी खाद्य की कीमतों में गिरावट लाएगा। दूसरी ओर, गेहूँ, चना तथा चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। जबकि खाद्य तथा ईंधन को छोड़कर सी.पी.आई. में उत्पाद तथा सेवाओं पर विवेकपूर्ण व्यय -जिसमें सी.पी.आई. बास्केट का 16 प्रतिशत शामिल है- को नकद की सीमित पहुँच से प्रभावित किया जा सकता था, इन वस्तुओं की कीमत इन अस्थाई प्रभावों को बदल सकती है क्योंकि सामान्यतः इन्हें पूर्व नियोजित चक्रों के अनुसार संशोधित किया जाता है। आवास, ईंधन तथा बिजली, स्वास्थ्य, परिवहन तथा संचार, पान, तंबाखू और मादक वस्तुओं, और शिक्षा की कीमतें-एक साथ मिलाकर सी.पी.आई. बास्केट का 38 प्रतिशत हैं - मुख्यतः अप्रभावित रहेंगी। इसके अलावा संभावना है कि दिसंबर और फरवरी में आधार प्रभाव परिवर्तित होगा और प्रतिकूल हो जाएगा। यदि कमियों के कारण सामान्य शीत ऋतु का अनुकूलन नहीं होता है तो खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति का दबाव वापस आ सकता है। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों तथा ईंधन को छोड़कर सी.पी.आई. मुद्रास्फीति गिरावटी प्रवर्तनों के प्रति प्रतिरोधी ही रहा है और मुद्रास्फीति के शीर्ष के लिए सीमा निर्धारित कर सकता है। उत्पादन कम करने के ओपेक करार के साथ आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है। वैश्विक गतिविधियों, विशेषकर यू.एस. मौद्रिक एवं राजस्व नीति के भावी रवैये में वित्तीय बाज़ारों का प्रभावित होना, विदेशी विनिमय दर को अस्थिरता प्रदान करा सकती है जिससे मुद्रास्फिति को बल मिल सकता है। एस.बी.एन वापस ले लेने के कारण तिसरी तिमाही में मुद्रास्फिति में 10-15 आधार अंक संभावित अस्थाई गिरावट हो सकती है। इन मदों को ध्यान में रखते हुए, 2016-17 के तिमाही 4 में शीर्ष मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत संभावित है जिसमें जोखिम ऊपर की ओर हैं मगर अक्तूबर की मौद्रिक समीक्षा से कम हैं। सातवें सी.पी.सी. अवार्ड के आवास भत्ते का आकलन, लंबित कार्यान्वयन का पूर्ण प्रभाव अभी बाकी है और मुद्रास्फीति कार्यप्रणाली की बेसलाइन में इसका आकलन नहीं किया गया है (चार्ट 1)।
10. 2016-17 के लिए जीवीए वृद्धि का आउटलुक दूसरी तिमाही में 50 आधार अंक गति की अप्रत्याशित कमी और एसबीएन की वापसी, जो अभी भी बाहर बनी हुई हैं के प्रभाव से अनिश्चित बदल गया है। निकट भविष्य में नकारात्मक जोखिम दो प्रमुख चैनलों के माध्यम से आ सकते हैंः (ए) नकदी गहन क्षेत्रों में जैसे कि खुदरा व्यापार, होटल और रेस्तरां और परिवहन, और असंगठित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में कम अवरोधों; (बी) प्रतिकूल धन प्रभाव के साथ जुड़े कुल मांग दवाब। पहले चैनल का प्रभाव बहरहाल, और अर्थव्यवस्था में नए नोटों के संचलन और गैर नकद भुगतान आधारित लिखतों का अधिक से अधिक उपयोग से प्रगतिशील वृद्धि, जबकि दूसरे चैनल के प्रभाव का सीमित होने की संभावना है। अक्तूबर 2016 में, एच 2 में जीवीए वृद्धि 7.7 प्रतिशत और पूरे वर्ष के लिए 7.6 प्रतिशत अनुमानित की गई थी। तीसरी तिमाही में वृद्धि की में अपेक्षित हानि को शामिल करते हुए और उच्च कृषि उत्पादन और 7वें सीपीसी फैसले के कार्यान्वयन से खपत मांग को बढ़ावा देने के साथ-साथ चौथी तिमाही में ढलते प्रभाव के कारण, 2016-17 के लिए जीवीए वृद्धि 7.6 प्रतिशत से 7.1 प्रतिशत तक नीचे परिशोधित की गई, समान रूप से संतुलित जोखिम (चार्ट 2) के साथ।
11. चलनिधि प्रबंधन ढांचे को अप्रैल में परिष्कृत किया गया जिसका उद्देश्य नियमित सुविधाओं के माध्यम से अल्पकालिक चलनिधि जरूरतों, उत्कृष्ट ट्यूनिंग संचालन के माध्यम से अवरोधी और मौसमी बेमेल और सकल विदेशी आस्तियों और सकल घरेलू आस्तियों के नियमन द्वारा वृद्धि को सुविधाजनक बनाने के लिए और अधिक टिकाऊ चलनिधि की आवश्यकता को पूरा करना है। रिजर्व बैंक ने इस ढांचे के साथ चलनिधि प्रबंधन को संचालित किया, उत्तरोत्तर पूर्व चलनिधि स्थिति के स्तर को तटस्थता के समीप पहुंचाया। तीसरी तिमाही में नवंबर के पहले तक, चलनिधि की स्थिति हल्के अधिशेष मोड में बनी रही। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष के दौरान ओएमओ खरीद के माध्यम से अब तक ₹1.1 ट्रिलियन की चलनिधि डाली, जिसमें अक्टूबर में ₹100 बिलियन की ओएमओ खरीद नीलामी भी शामिल है।हालांकि एसबीएन के प्रतिस्थापन ने बड़ी अधिशेष चलनिधि को इकठ्टा किया है जिसके लिए असाधारण संचालन की आवश्यकता है, इसे अस्थायी रूप से देखें जाने की जरूरत है। रिजर्व बैंक अप्रैल में बनाए गए संशोधित ढांचे के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए चलनिधि संचालन का आयोजन करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि अधिशेष चलनिधि के दबाव कम होने पर सिस्टम के स्तर में तटस्थता की स्थिति तक चलनिधि को बहाल रखा जा सके।
12. समिति के विचार में, यह द्विमासिक समीक्षा बढ़ी अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में बनाई गयी है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका में मौद्रिक नीति के आसन्न कसाव से वित्तीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति ट्रिगर हो सकती है, जिसमें बड़े फैलाव की संभावना है जिसका ईएमई पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। जबकि भारत में,मुद्रा प्रतिस्थापन की लहर से आपूर्ति अवरोधों के कारण इस साल वृद्धि दर नीचे आ सकती है। उनके पूर्ण प्रभाव और उनकी दृढ़ता -अल्पकालिक घटनाएं जो मौद्रिक नीति के रुख की स्थापना के संबंध में आउटलुक अनुपातहीन वारंट सतर्कता को प्रभावित करती है को पहचानने से पहले अधिक जानकारी और अनुभव का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है। व्यापक उम्मीद के अनुसार यदि प्रभाव क्षणिक है,तो वृद्धि में मजबूती से पलटाव होना चाहिए। मुद्रास्फीति की ओर मुड़ते हुए, सब्जियों के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में मजबूती दिख रही है और इसमें गति आ रही है। हाल की घटनाओं का एक चिंताजनक विषय खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति में कड़ी गिरावट है जो हेडलाईन में भविष्य की निचली गतिविधियों के लिए एक प्रतिरोध स्तर सेट कर सकता है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वित्तीय बाजार अशांति में वृद्धि 2016-17 की चौथी तिमाही के मुद्रास्फीति लक्ष्य को कुछ जोखिम में डाल सकता। अंतर्निहित मुद्रास्फीति के इन संकेतकों को देखते हुए, इसे अस्थायी माध्यम के रूप है परंतु मौद्रिक नीति के रुख को बनाते समय एसबीएन की वापसी के अस्पष्ट प्रयास में देखना उपयुक्त है। इसलिए, इसके संतुलन के लिए, इंतजार करना और यह देखना आवश्यक है कि कैसे यह कारक आउटलुक पर प्रभाव डालता है और उससे टकराता है। तदनुसार, इस समीक्षा में नीति रेपो दर को रोक कर रखा गया है,जबकि एक उदार नीति के रुख को बनाए रखा गया है।
13. मौद्रिक नीति निर्णय के पक्ष में छह सदस्यों ने मतदान किया। एमपीसी की बैठक का कार्यवृत्त 21 दिसंबर 2016 को प्रकाशित किया जाएगा। एमपीसी की अगली बैठक 7 और 8 फरवरी 2017 को होनी निर्धारित है और उसके संकल्प को 8 फरवरी 2017 को रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर डाला जाएगा।
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मौद्रिक नीति समिति ने आज आयोजित अपनी बैठक में वर्तमान और उभरती समष्टि आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर निर्णय लिया है किः - चलनिधि समायोजन सुविधा के नीति रेपो दर छः.पच्चीस प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी जाए। परिणामस्वरूप, चलनिधि समायोजना सुविधा के अंतर्गत प्रतिवर्ती रेपो दर पाँच.पचहत्तर प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा दर तथा बैंक दर छः.पचहत्तर पर अपरिवर्तित रहेंगी। एमपीसी का निर्णय मौद्रिक नीति के उदार रुख के अनुरूप है जो वृद्धि को सहारा देते हुए वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह की चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति का पाँच प्रतिशत का उद्देश्य हासिल करने और +/- दो प्रतिशत के बैंड के अंदर चार प्रतिशत के मध्यावधि लक्ष्य के अनुरूप है। इस निर्णय को रेखांकित करने वाले मुख्य विचारों को नीचे वक्तव्य में दिया गया है। दो. वर्ष दो हज़ार सोलह की पहली छमाही में कमजोरी के बाद वैश्विक वृद्धि ने दूसरी छमाही में गति पकड़ी। अमेरिका में स्थिति के उल्टा होने से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में गतिविधि में झिझक के साथ सुधार हुआ। उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि नरम रही किंतु चीन में नीतिगत प्रोत्साहन और बड़े पण्य-वस्तु निर्यातकों में दबाव के कुछ सहज होने से गति में मजबूती आई। विश्व व्यापार गर्त से बाहर आना शुरू हो रहा है जो जुलाई-अगस्त में निम्न स्तर पर पहुंच गया था और स्थिर होने का संकेत दिखा रहा है। कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओँ में मुद्रास्फीति बढ़ गई है, हालांकि यह लक्ष्य से नीचे ही है और कई उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में सहज हो रही है। अमेरिका, जापान और चीन में प्रत्यवस्फीति राजकोषीय नीतियों की संभावनाओं और मंदी के समय में उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर नीचे की ओर दबावों के कम होने की गति यूरो क्षेत्र और यूके में वर्तमान में व्याप्त राजनीतिक जोखिमों से धीमी हो गई है, इन जोखिमों से भौगोलिक-राजनीतिक जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं और वित्तीय बाजार अस्थिरता छायी हुई है। तीन. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार पर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव और आगामी आंकड़ों के परिणाम का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा जिन्होंने फेडरल रिज़र्व द्वारा कड़ा मौद्रिक रुख अपनाने की संभावना बढ़ा दी। चूंकि अस्थिरता के झटकों से अमेरिकी इक्विटी में जोखिम मुक्त उछाल बढ़ गया और स्थायी आय बाजारों से जोखिम भरी हड़बड़ी ने उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं से पूंजीगत प्रवाह बाहर कर दिया, इससे मुद्रा का मूल्य कम हो रहा है और इक्विटी बाजार अपने हाल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हालांकि बॉन्ड प्रतिफल अमेरिकी प्रतिफलों के साथ मिलकर सख्त हो गए। चुनाव के परिणामों के बाद अक्टूबर के उत्तरार्द्ध से अमेरिकी डॉलर में वृद्धि तेज हो गई और विश्वभर की मुद्राओं में काफी मूल्यह्रास शुरू हो गया। अमेरिकी चुनाव के परिणामों के मद्देनजर मांग संभावना में सुधार होने से नवंबर के मध्य से सभी जगह स्वर्ण को छोड़कर पण्य-वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई, स्वर्ण की सुरक्षित आश्रय वाली चमक मजबूत अमेरिकी डॉलर में गुम हो गई। उत्पादन कम करने के ओपेक के निर्णय के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई। पाँच. तीसरी तिमाही पर बात करते हुए, समिति ने महसूस किया कि विनिर्दिष्ट बैंक नोटों के वापस लेने से अभी भी प्रकट प्रभावों द्वारा किए गए आकलन पर बादल छाए हुए हैं। प्रमुख फसलों में रबी की बुआई के अंतर्गत रकबे में स्थिर विस्तार होने से पिछले वर्ष की तुलना में दूसरी तिमाही में कृषि का मजबूत निष्पादन होना चाहिए। इसके विपरीत, औद्योगिक गतिविधि कमजोर बनी हुई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मुख्य उद्योगों में, कोयले के उत्पादन में मंद मांग के कारण अक्टूबर में कमी आई जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में संरचनागत बाधाओं के बाध्यकारी प्रतिबंध के कारण कमी आई। सीमेंट, उर्वरकों और विद्युत के उत्पादन में गिरावट जारी रही, जो आधारभूत आर्थिक गतिविधि में सुस्ती दर्शाती है। दूसरी तरफ, प्रतिकारी शुल्कों के लागू होने से इस्पात के उत्पादन में निरंतर विस्तार दर्ज किया गया है। निर्यात में वृद्धि और क्षमता संवर्धन के सहारे रिफानरी उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। विनिर्दिष्ट बैंक नोटों के वापस लेने से मजदूरी और इनपुटों की खरीद के भुगतान में विलंब के कारण नवंबर-दिसंबर में औद्योगिक गतिविधि के कुछ हिस्से पर कुछ समय के लिए अड़चन आ सकती है, हालांकि पूरा आकलन करना बाकी है। सेवा क्षेत्र में, मिश्रित संभावना है जिसमें निर्माण, व्यापार, परिवहन, होटल और संचार पर एसबीएन का अस्थायी प्रभाव पड़ा है जबकि लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं सातवें केंद्रीय वेतन आयोग अवार्ड और वन रैंक वन पेंशन से उत्साहित हैं। वित्तीय सेवाओं द्वारा जीवीए में छोटी लागत की जमाराशियों के बड़े अंतर्वाह से लघुकालिक प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। छः. सब्ज़ियों की प्रत्याशित से अधिक तेज़ अपस्फीति के परिणामस्वरूप हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक द्वारा आकलित खुदरा मुद्रास्फीति लगातार तीसरे माह अक्तूबर में अपेक्षा से अधिक कम हो गई है। तथापि इस कमतर मात्रा के बावजूद विभिन्न स्तरों पर माह-दर-माह मूल्य बढ़ने के कारण इसकी गति में एक उछाल आया। अनाज, दलहन तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमतों के साथ चीनी तथा प्रोटीनयुक्त उत्पादों की अभी भी ऊंची कीमतों से खाद्य पदार्थों की कीमतों की गति में उछाल आया जिसने सुदृढ़ अनुकूल आधार प्रभाव से खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में आई नरमी को आंशिक रूप से बराबर कर दिया। एल.पी.जी. के मूल्यों में वार्षिक अधार पर हुई गिरावटों के कारण और एक माह पहले बिजली की कीमतों में गिरावट के कारण ईंधन की श्रेणी में कमी आई है। खाद्य पदार्थों तथा ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति निरंतर जारी है। हालांकि आवासीय तथा व्यक्तिगत देखभाल से संबंधित मुद्रास्फीति अत्यल्प कम हुई है, शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन तथा संचार में मुद्रास्फीति की निरंतर तेजी ने इस श्रेणी की मुद्रास्फीति में स्थिरता प्रदान की है। सात. तीसरी तिमाही में अब तक चलनिधि स्थिति में भारी परिवर्तन हुए हैं। अक्तूबर में तथा नवंबर के शुरुआत में अधिशेष की स्थिति पर नौ नवंबर से विनिर्दिष्ट बैंक नोटों को वापस लेने के कारण प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। दिनांक दो दिसंबर तक प्रचलन में मुद्रा में सात दशमलव चार रुपया ट्रिलियन की गिरावट आई। उसके बाद नोट बदलने से और बैंकिंग प्रणाली में जमा की तेज़ बढ़त से अतिरिक्त आरक्षित निधि में भारी वृद्धि हुई। रिज़र्व बैंक ने ओवरनाइट से लेकर नब्बे दिनों तक की व्यापक अवधियों की परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती रेपो की नीलामियों के माध्यम से अपने चलनिधि परिचालन में वृद्धि की जिसमें पाँच दशमलव दो रुपया ट्रिलियन चलनिधि को कम किया गया। रिज़र्व बैंक ने सरकार द्वारा जारी तेल बांडों को एलएएफ के अंतर्गत पात्र प्रतिभूति की अनुमति दी। प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि के निकास के लिए अस्थाई उपाय के रूप में सोलह सितंबर दो हज़ार सोलह से ग्यारह नवंबर दो हज़ार सोलह के बीच निवल मांग तथा मियादी देयता में वृद्धि पर छब्बीस नवंबर को प्रारंभ पखवाडे से एक सौ प्रतिशत वृद्धिशील सी.आर.आर. लागू की गई। दिनांक अट्ठाईस नवंबर से चलनिधि के अवशोषण में गिरावट आई और रिज़र्व बैंक ने अट्ठाईस नवंबर को तीन दशमलव तीन रुपया ट्रिलियन के परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती नीलामी की। जैसा कि अपेक्षित था, इसके बाद मुद्रा बाज़ार संकुचित हो गए और भारित औसत कॉल दर का तीस नवंबर की नीति रेपो दर के स्तर तक आने से पहले उस दिन एलएएफ कोरिडॉर की उच्चतम सीमा के निकट कारोबार किया गया। प्रणाली की अन्य सभी दरें इसके सहयोग में बढ़ने लगी और सावधि प्रीमियमों में धीरे-धीरे सुधार हुआ। इस घटना से सक्रिय चलनिधि प्रबंधन ने डब्ल्यू.ए.सी.आर को स्थिर दर प्रतिवर्ती रेपो दर तक गिरने से रोका जो कि एल.ए.एफ. कॉरिडॉर की निचली सीमा है। बाज़ार स्थिरता योजना के अंतर्गत प्रतिभूति की सीमा में उनतीस नवंबर को शून्य दशमलव तीन रुपया ट्रिलियन से छः रुपया ट्रिलियन वृद्धि के कारण चलनिधि प्रबंधन को सहारा मिला। एम.एस.एस. के अंतर्गत छः दिसंबर दो हज़ार सोलह को एक दशमलव चार रुपया ट्रिलियन के लिए नकद प्रबंधन बिल का तीन बार निर्गम हुआ। आठ. बाहरी क्षेत्र में, भारत का उत्पाद निर्यात सितंबर तथा अक्तूबर में बढ़ा। दोनों पी.ओ.एल तथा गैर-पी.ओ.एल आयातों की मदद से सकारात्मक स्थिति में वापसी हुई। बाईस महीनों की लंबी गिरावट के बाद, सोने के आयात की मात्रा में तीव्र वृद्धि तथा पी.ओ.एल आयात के लिए बढ़े हुए भुगतान के बाद अक्तूबर में आयात में वृद्धि हुई। गैर-तेल गैर-स्वर्ण आयात में वृद्धि ने भी सात माह के अंतराल के बाद सकारात्मक मोड़ लिया। अप्रैल-अक्तूबर की अवधि के लिए उत्पाद व्यापार घाटा गत वर्ष की तुलना में अपने स्तर से पच्चीस बिलियन यू.एस. डॉलर कम रहा। तदनुसार प्रेषणों में कुछ हानि और सॉफ्टवेयर निर्यात के अदृश्य मदों में होने के बावजूद चालू खाता घाटा मंदा रहने की संभावना है। निवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश समुचित रूप से मजबूत रहा जिसमें से आधे से अधिक विनिर्माण, संचार तथा वित्तीय सेवाओं को गया। इसके विपरीत, ऋण और इक्विटी बाजारों से अक्टूबर-नवंबर में सात.तीन बिलियन का पोर्टफोलियो निवेश बहिर्वाह हुआ जैसा समान ईएमईजी में हुआ है, जो यू.एस. राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम से सक्रिय स्वदेशी झुकाव और यू.एस. की मौद्रिक नीति के कड़े होने की निकट निश्चितता दर्शाता है। दिनांक दो दिसंबर दो हज़ार सोलह को विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधि का स्तर तीन सौ चौंसठ बिलियन यू.एस. डॉलर रहा। नौ. समिति ने कई वस्तुओं में कीमतों की बढ़त को नोट किया जो अक्तूबर के दौरान आधार प्रभाव पर मुद्रास्फीति कम होने के कारण प्रभावित हुईं। कतिपय आपूर्ति कमियों के बावजूद एस.बी.एन. के वापस ले लेने के कारण नवंबर में मांग के आकस्मिक संकुचन दिसंबर के लिए उपलब्ध होने वाले आकलित विकारी खाद्य की कीमतों में गिरावट लाएगा। दूसरी ओर, गेहूँ, चना तथा चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। जबकि खाद्य तथा ईंधन को छोड़कर सी.पी.आई. में उत्पाद तथा सेवाओं पर विवेकपूर्ण व्यय -जिसमें सी.पी.आई. बास्केट का सोलह प्रतिशत शामिल है- को नकद की सीमित पहुँच से प्रभावित किया जा सकता था, इन वस्तुओं की कीमत इन अस्थाई प्रभावों को बदल सकती है क्योंकि सामान्यतः इन्हें पूर्व नियोजित चक्रों के अनुसार संशोधित किया जाता है। आवास, ईंधन तथा बिजली, स्वास्थ्य, परिवहन तथा संचार, पान, तंबाखू और मादक वस्तुओं, और शिक्षा की कीमतें-एक साथ मिलाकर सी.पी.आई. बास्केट का अड़तीस प्रतिशत हैं - मुख्यतः अप्रभावित रहेंगी। इसके अलावा संभावना है कि दिसंबर और फरवरी में आधार प्रभाव परिवर्तित होगा और प्रतिकूल हो जाएगा। यदि कमियों के कारण सामान्य शीत ऋतु का अनुकूलन नहीं होता है तो खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति का दबाव वापस आ सकता है। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों तथा ईंधन को छोड़कर सी.पी.आई. मुद्रास्फीति गिरावटी प्रवर्तनों के प्रति प्रतिरोधी ही रहा है और मुद्रास्फीति के शीर्ष के लिए सीमा निर्धारित कर सकता है। उत्पादन कम करने के ओपेक करार के साथ आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है। वैश्विक गतिविधियों, विशेषकर यू.एस. मौद्रिक एवं राजस्व नीति के भावी रवैये में वित्तीय बाज़ारों का प्रभावित होना, विदेशी विनिमय दर को अस्थिरता प्रदान करा सकती है जिससे मुद्रास्फिति को बल मिल सकता है। एस.बी.एन वापस ले लेने के कारण तिसरी तिमाही में मुद्रास्फिति में दस-पंद्रह आधार अंक संभावित अस्थाई गिरावट हो सकती है। इन मदों को ध्यान में रखते हुए, दो हज़ार सोलह-सत्रह के तिमाही चार में शीर्ष मुद्रास्फीति पाँच प्रतिशत संभावित है जिसमें जोखिम ऊपर की ओर हैं मगर अक्तूबर की मौद्रिक समीक्षा से कम हैं। सातवें सी.पी.सी. अवार्ड के आवास भत्ते का आकलन, लंबित कार्यान्वयन का पूर्ण प्रभाव अभी बाकी है और मुद्रास्फीति कार्यप्रणाली की बेसलाइन में इसका आकलन नहीं किया गया है । दस. दो हज़ार सोलह-सत्रह के लिए जीवीए वृद्धि का आउटलुक दूसरी तिमाही में पचास आधार अंक गति की अप्रत्याशित कमी और एसबीएन की वापसी, जो अभी भी बाहर बनी हुई हैं के प्रभाव से अनिश्चित बदल गया है। निकट भविष्य में नकारात्मक जोखिम दो प्रमुख चैनलों के माध्यम से आ सकते हैंः नकदी गहन क्षेत्रों में जैसे कि खुदरा व्यापार, होटल और रेस्तरां और परिवहन, और असंगठित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में कम अवरोधों; प्रतिकूल धन प्रभाव के साथ जुड़े कुल मांग दवाब। पहले चैनल का प्रभाव बहरहाल, और अर्थव्यवस्था में नए नोटों के संचलन और गैर नकद भुगतान आधारित लिखतों का अधिक से अधिक उपयोग से प्रगतिशील वृद्धि, जबकि दूसरे चैनल के प्रभाव का सीमित होने की संभावना है। अक्तूबर दो हज़ार सोलह में, एच दो में जीवीए वृद्धि सात.सात प्रतिशत और पूरे वर्ष के लिए सात.छः प्रतिशत अनुमानित की गई थी। तीसरी तिमाही में वृद्धि की में अपेक्षित हानि को शामिल करते हुए और उच्च कृषि उत्पादन और सातवें सीपीसी फैसले के कार्यान्वयन से खपत मांग को बढ़ावा देने के साथ-साथ चौथी तिमाही में ढलते प्रभाव के कारण, दो हज़ार सोलह-सत्रह के लिए जीवीए वृद्धि सात.छः प्रतिशत से सात.एक प्रतिशत तक नीचे परिशोधित की गई, समान रूप से संतुलित जोखिम के साथ। ग्यारह. चलनिधि प्रबंधन ढांचे को अप्रैल में परिष्कृत किया गया जिसका उद्देश्य नियमित सुविधाओं के माध्यम से अल्पकालिक चलनिधि जरूरतों, उत्कृष्ट ट्यूनिंग संचालन के माध्यम से अवरोधी और मौसमी बेमेल और सकल विदेशी आस्तियों और सकल घरेलू आस्तियों के नियमन द्वारा वृद्धि को सुविधाजनक बनाने के लिए और अधिक टिकाऊ चलनिधि की आवश्यकता को पूरा करना है। रिजर्व बैंक ने इस ढांचे के साथ चलनिधि प्रबंधन को संचालित किया, उत्तरोत्तर पूर्व चलनिधि स्थिति के स्तर को तटस्थता के समीप पहुंचाया। तीसरी तिमाही में नवंबर के पहले तक, चलनिधि की स्थिति हल्के अधिशेष मोड में बनी रही। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष के दौरान ओएमओ खरीद के माध्यम से अब तक एक दशमलव एक रुपया ट्रिलियन की चलनिधि डाली, जिसमें अक्टूबर में एक सौ रुपया बिलियन की ओएमओ खरीद नीलामी भी शामिल है।हालांकि एसबीएन के प्रतिस्थापन ने बड़ी अधिशेष चलनिधि को इकठ्टा किया है जिसके लिए असाधारण संचालन की आवश्यकता है, इसे अस्थायी रूप से देखें जाने की जरूरत है। रिजर्व बैंक अप्रैल में बनाए गए संशोधित ढांचे के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए चलनिधि संचालन का आयोजन करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि अधिशेष चलनिधि के दबाव कम होने पर सिस्टम के स्तर में तटस्थता की स्थिति तक चलनिधि को बहाल रखा जा सके। बारह. समिति के विचार में, यह द्विमासिक समीक्षा बढ़ी अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में बनाई गयी है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका में मौद्रिक नीति के आसन्न कसाव से वित्तीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति ट्रिगर हो सकती है, जिसमें बड़े फैलाव की संभावना है जिसका ईएमई पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। जबकि भारत में,मुद्रा प्रतिस्थापन की लहर से आपूर्ति अवरोधों के कारण इस साल वृद्धि दर नीचे आ सकती है। उनके पूर्ण प्रभाव और उनकी दृढ़ता -अल्पकालिक घटनाएं जो मौद्रिक नीति के रुख की स्थापना के संबंध में आउटलुक अनुपातहीन वारंट सतर्कता को प्रभावित करती है को पहचानने से पहले अधिक जानकारी और अनुभव का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है। व्यापक उम्मीद के अनुसार यदि प्रभाव क्षणिक है,तो वृद्धि में मजबूती से पलटाव होना चाहिए। मुद्रास्फीति की ओर मुड़ते हुए, सब्जियों के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में मजबूती दिख रही है और इसमें गति आ रही है। हाल की घटनाओं का एक चिंताजनक विषय खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति में कड़ी गिरावट है जो हेडलाईन में भविष्य की निचली गतिविधियों के लिए एक प्रतिरोध स्तर सेट कर सकता है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वित्तीय बाजार अशांति में वृद्धि दो हज़ार सोलह-सत्रह की चौथी तिमाही के मुद्रास्फीति लक्ष्य को कुछ जोखिम में डाल सकता। अंतर्निहित मुद्रास्फीति के इन संकेतकों को देखते हुए, इसे अस्थायी माध्यम के रूप है परंतु मौद्रिक नीति के रुख को बनाते समय एसबीएन की वापसी के अस्पष्ट प्रयास में देखना उपयुक्त है। इसलिए, इसके संतुलन के लिए, इंतजार करना और यह देखना आवश्यक है कि कैसे यह कारक आउटलुक पर प्रभाव डालता है और उससे टकराता है। तदनुसार, इस समीक्षा में नीति रेपो दर को रोक कर रखा गया है,जबकि एक उदार नीति के रुख को बनाए रखा गया है। तेरह. मौद्रिक नीति निर्णय के पक्ष में छह सदस्यों ने मतदान किया। एमपीसी की बैठक का कार्यवृत्त इक्कीस दिसंबर दो हज़ार सोलह को प्रकाशित किया जाएगा। एमपीसी की अगली बैठक सात और आठ फरवरी दो हज़ार सत्रह को होनी निर्धारित है और उसके संकल्प को आठ फरवरी दो हज़ार सत्रह को रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर डाला जाएगा।
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दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (DMC) के मेयर के चुनाव की तारीख आखिरकार फाइनल हो गई। भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच खींचतान के कारण 3 बार टल चुका यह चुनाव अब 22 फरवरी को सुबह 11 बजे से होगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दोपहर 2 बजे उप राज्यपाल (LG) विनय सक्सेना को चुनाव की तारीख का प्रस्ताव भेजा और 2 घंटे बाद ही इसे मंजूरी मिल गई।
बता दें कि AAP की मेयर प्रत्याशी शैली ओबेरॉय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने मनोनीत पार्षदों को मेयर चुनाव में वोटिंग राइट देने के उपराज्यपाल के फैसले को चुनौती दी थी। शैली ने कोर्ट से मांग की थी कि मेयर का चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को मामले पर सुनवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर नोटिस जारी करने और पहली बैठक में ही मेयर का चुनाव करवाने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि नॉमिनेटेड मेंबर्स को वोटिंग देने का अधिकार नहीं है। इसके बाद शनिवार को CM केजरीवाल ने 22 फरवरी को चुनाव करवाने का प्रस्ताव भेजा, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया।
दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में 250 सीटों पर पिछले साल दिसंबर में चुनाव हुए थे और रिजल्ट 5 जनवरी को आया था। इसमें AAP के 134, भाजपा के 105, कांग्रेस के 9 जबकि 2 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते थे। इस दौरान मेयर का चुनाव तीन बार 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को तय किया गया लेकिन AAP और भाजपा के बीच टकराव की वजह से इसे टालना पड़ा। आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शुक्रवार को कोर्ट ने इसे पहली बैठक में कराने का निर्देश दिया।
मेयर चुनाव में 250 निर्वाचित पार्षद, दिल्ली से 10 सांसद (सात लोकसभा और तीन राज्यसभा) और 14 विधायक वोट करेंगे। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने AAP के 13 और भाजपा के एक विधायक को नॉमिनेट किया है। मेयर चुनाव के लिए कुल वोट 274 हैं। AAP के पास 134 पार्षद, 3 सांसद और 13 विधायकों के वोट हैं, जबकि भाजपा के पास 105 पार्षद, 7 सांसद और एक विधायक का वोट है। कांग्रेस के नौ पार्षद हैं जबकि दो निर्दलीय हैं। मुंडका के पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे।
इसके पहले केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली मेयर चुनाव मामले में LG सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में सच्चाई बताने से रोकने की कोशिश की। LG ने वकील को लेकर सेक्रेटरी को आदेश दिए और SC में दोनों पक्षों के वकील तय किए। LG ने वकील तुषार मेहता को वकील बनाया, जबकि वह पहले से ही हमारी सरकार का केस लड़ रहे थे।
केजरीवाल ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक ही वकील को दिल्ली सरकार और LG का वकील नियुक्त किया गया। LG संविधान को कुचल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उपराज्यपाल के साथ दिल्ली कैसे चलेगी।
दिल्ली में मेयर चुनाव की नई तारिख की घोषणा हो गई है। अब 16 फरवरी को चुनाव होंगे। इसके लिए LG विनय कुमार सक्सेना ने मंजूरी दे दी है। दिल्ली सरकार ने LG को 16 फरवरी को सदन का सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे LG ने रविवार को स्वीकार किया। इससे पहले तीन बार सदन की बैठक हो चुकी है, लेकिन भाजपा और आप नेताओं के हंगामे के चलते चुनाव नहीं हो पाए। पढ़ें पूरी खबर. .
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दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेयर के चुनाव की तारीख आखिरकार फाइनल हो गई। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच खींचतान के कारण तीन बार टल चुका यह चुनाव अब बाईस फरवरी को सुबह ग्यारह बजे से होगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दोपहर दो बजे उप राज्यपाल विनय सक्सेना को चुनाव की तारीख का प्रस्ताव भेजा और दो घंटाटे बाद ही इसे मंजूरी मिल गई। बता दें कि AAP की मेयर प्रत्याशी शैली ओबेरॉय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने मनोनीत पार्षदों को मेयर चुनाव में वोटिंग राइट देने के उपराज्यपाल के फैसले को चुनौती दी थी। शैली ने कोर्ट से मांग की थी कि मेयर का चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को मामले पर सुनवाई करते हुए चौबीस घंटाटे के अंदर नोटिस जारी करने और पहली बैठक में ही मेयर का चुनाव करवाने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि नॉमिनेटेड मेंबर्स को वोटिंग देने का अधिकार नहीं है। इसके बाद शनिवार को CM केजरीवाल ने बाईस फरवरी को चुनाव करवाने का प्रस्ताव भेजा, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया। दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में दो सौ पचास सीटों पर पिछले साल दिसंबर में चुनाव हुए थे और रिजल्ट पाँच जनवरी को आया था। इसमें AAP के एक सौ चौंतीस, भाजपा के एक सौ पाँच, कांग्रेस के नौ जबकि दो निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते थे। इस दौरान मेयर का चुनाव तीन बार छः जनवरी, चौबीस जनवरी और छः फरवरी को तय किया गया लेकिन AAP और भाजपा के बीच टकराव की वजह से इसे टालना पड़ा। आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शुक्रवार को कोर्ट ने इसे पहली बैठक में कराने का निर्देश दिया। मेयर चुनाव में दो सौ पचास निर्वाचित पार्षद, दिल्ली से दस सांसद और चौदह विधायक वोट करेंगे। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने AAP के तेरह और भाजपा के एक विधायक को नॉमिनेट किया है। मेयर चुनाव के लिए कुल वोट दो सौ चौहत्तर हैं। AAP के पास एक सौ चौंतीस पार्षद, तीन सांसद और तेरह विधायकों के वोट हैं, जबकि भाजपा के पास एक सौ पाँच पार्षद, सात सांसद और एक विधायक का वोट है। कांग्रेस के नौ पार्षद हैं जबकि दो निर्दलीय हैं। मुंडका के पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके पहले केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली मेयर चुनाव मामले में LG सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में सच्चाई बताने से रोकने की कोशिश की। LG ने वकील को लेकर सेक्रेटरी को आदेश दिए और SC में दोनों पक्षों के वकील तय किए। LG ने वकील तुषार मेहता को वकील बनाया, जबकि वह पहले से ही हमारी सरकार का केस लड़ रहे थे। केजरीवाल ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक ही वकील को दिल्ली सरकार और LG का वकील नियुक्त किया गया। LG संविधान को कुचल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उपराज्यपाल के साथ दिल्ली कैसे चलेगी। दिल्ली में मेयर चुनाव की नई तारिख की घोषणा हो गई है। अब सोलह फरवरी को चुनाव होंगे। इसके लिए LG विनय कुमार सक्सेना ने मंजूरी दे दी है। दिल्ली सरकार ने LG को सोलह फरवरी को सदन का सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे LG ने रविवार को स्वीकार किया। इससे पहले तीन बार सदन की बैठक हो चुकी है, लेकिन भाजपा और आप नेताओं के हंगामे के चलते चुनाव नहीं हो पाए। पढ़ें पूरी खबर. . This website follows the DNPA Code of Ethics.
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