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बिहार में नए मंत्रियों के शपथग्रहण समारोह के दौरान राजभवन में अव्यवस्था देखने को मिली। इस वजह से समारोह के दौरान अफरातफरी का माहौल रहा।
बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार के 31 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के दौरान कई तरह की अव्यवस्था देखने को मिली। समारोह स्थल पर मेहमानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से कुर्सियां कम पड़ गईं। कई लोगों को खड़े रहना पड़ा। इससे शपथ ग्रहण के दौरान अफरातफरी का माहौल रहा। राजभवन के राजेंद्र मंडप में हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी अव्यवस्था हुई थी। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई। हालांकि, समारोह स्थल पर भीड़ ज्यादा होने की वजह से मंगलवार को भी अफरातफरी का माहौल बना रहा। व्यवस्थापकों ने इस बार मीडिया विंग को सबसे पिछली पंक्ति में शिफ्ट कर दिया। इस वजह से मीडियाकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान लोग बीच में खड़े हो रहे थे, इस कारण पत्रकारों को न मंच दिख रहा था और न ही नेता नजर आ रहे थे।
बता दें कि राज्यपाल फागू चौहान ने राजभवन में मंगलवार को 31 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें आरजेडी के 16, जेडीयू के 11, कांग्रेस के दो, हम के एक और एक निर्दलीय शामिल हैं। इससे पहले 10 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ था।
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बिहार में नए मंत्रियों के शपथग्रहण समारोह के दौरान राजभवन में अव्यवस्था देखने को मिली। इस वजह से समारोह के दौरान अफरातफरी का माहौल रहा। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार के इकतीस मंत्रियों के शपथ ग्रहण के दौरान कई तरह की अव्यवस्था देखने को मिली। समारोह स्थल पर मेहमानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से कुर्सियां कम पड़ गईं। कई लोगों को खड़े रहना पड़ा। इससे शपथ ग्रहण के दौरान अफरातफरी का माहौल रहा। राजभवन के राजेंद्र मंडप में हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी अव्यवस्था हुई थी। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई। हालांकि, समारोह स्थल पर भीड़ ज्यादा होने की वजह से मंगलवार को भी अफरातफरी का माहौल बना रहा। व्यवस्थापकों ने इस बार मीडिया विंग को सबसे पिछली पंक्ति में शिफ्ट कर दिया। इस वजह से मीडियाकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान लोग बीच में खड़े हो रहे थे, इस कारण पत्रकारों को न मंच दिख रहा था और न ही नेता नजर आ रहे थे। बता दें कि राज्यपाल फागू चौहान ने राजभवन में मंगलवार को इकतीस नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें आरजेडी के सोलह, जेडीयू के ग्यारह, कांग्रेस के दो, हम के एक और एक निर्दलीय शामिल हैं। इससे पहले दस अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ था।
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Covid-19: पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप झेल रही है। ऐसे में हर बार ये सवाल उठता रहता है कि आखिर कोरोना आया कहा से। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति (Brazilian President) जेयर बोल्सनारो (Jair Bolsonaro) ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी पर बड़ा बयान दिया है।
नई दिल्ली। पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप झेल रही है। ऐसे में हर बार ये सवाल उठता रहता है कि आखिर कोरोना आया कहा से। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति (Brazilian President) जेयर बोल्सनारो (Jair Bolsonaro) ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कोरोना को अप्रत्यक्ष रूप से चीन (China) की नई साजिश करार दिया। हालांकि, बाद में वो अपने बयान से पलट गए।
बोल्सनारो ने बिना नाम लिए आशंका जताई कि चीन ने कोरोना वायरस को अपने लैब में बनाया होगा और ये आर्थिक लाभ के लिए चीन द्वारा अपनाई गई बायलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये एक नया वायरस है और किसी को नहीं पता कि ये किसी लैब में बनाया गया है या फिर किसी व्यक्ति द्वारा किसी संक्रमित जानवर को खा लेने से मनुष्य तक पहुंच गया।
ब्राजीली राष्ट्रपति ने कहा- उनकी सेना को पता है कि ये एक केमिकल, बैक्टेरिओलॉजिकल या रेडियोलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा है। उन्होंने पूछा कि क्या हम नए युद्ध का सामना नहीं कर रहे हैं? साथ ही उन्होंने ये भी सवाल दागा कि इन सबके बीच कौन सा ऐसा देश है, जिसकी GDP सबसे ज्यादा बढ़ी है?
आपको बता दें कि पिछले साल जब पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी थी, चीन की GDP 2. 3% बढ़ गई। व्यापार के मामले में ब्राजील का चीन सबसे बड़ा आर्थिक पार्टनर है।
जेयर बोल्सनारो का ये बयान जब मीडिया में आया तो इसके लिए उन्होंने मीडिया को दोष दिया और कहा कि उन्होंने अपने किसी एशियाई देश (चीन) का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि मीडिया ब्राजील और चीन के बीच विवाद पैदा करना चाहता है।
आपको बता दें कि पिछले साल ब्राजीली राष्ट्रपति बोल्सनारो ने कोरोनावायरस के टीकों पर हमला किया था। उन्होंने Pfizer-BioNTech द्वारा विकसित कोरोनावायरस वैक्सीन की प्रभावशीलता को खारिज किया था और दावा किया था कि ये रोगियों को मगरमच्छ या दाढ़ी वाली महिलाओं में बदल सकता है। महामारी के उभरने के बाद से ही जेयर बोल्सोनारो को इसके बारे में संदेह है।
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Covid-उन्नीस: पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रही है। ऐसे में हर बार ये सवाल उठता रहता है कि आखिर कोरोना आया कहा से। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी पर बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली। पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रही है। ऐसे में हर बार ये सवाल उठता रहता है कि आखिर कोरोना आया कहा से। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कोरोना को अप्रत्यक्ष रूप से चीन की नई साजिश करार दिया। हालांकि, बाद में वो अपने बयान से पलट गए। बोल्सनारो ने बिना नाम लिए आशंका जताई कि चीन ने कोरोना वायरस को अपने लैब में बनाया होगा और ये आर्थिक लाभ के लिए चीन द्वारा अपनाई गई बायलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये एक नया वायरस है और किसी को नहीं पता कि ये किसी लैब में बनाया गया है या फिर किसी व्यक्ति द्वारा किसी संक्रमित जानवर को खा लेने से मनुष्य तक पहुंच गया। ब्राजीली राष्ट्रपति ने कहा- उनकी सेना को पता है कि ये एक केमिकल, बैक्टेरिओलॉजिकल या रेडियोलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा है। उन्होंने पूछा कि क्या हम नए युद्ध का सामना नहीं कर रहे हैं? साथ ही उन्होंने ये भी सवाल दागा कि इन सबके बीच कौन सा ऐसा देश है, जिसकी GDP सबसे ज्यादा बढ़ी है? आपको बता दें कि पिछले साल जब पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी थी, चीन की GDP दो. तीन% बढ़ गई। व्यापार के मामले में ब्राजील का चीन सबसे बड़ा आर्थिक पार्टनर है। जेयर बोल्सनारो का ये बयान जब मीडिया में आया तो इसके लिए उन्होंने मीडिया को दोष दिया और कहा कि उन्होंने अपने किसी एशियाई देश का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि मीडिया ब्राजील और चीन के बीच विवाद पैदा करना चाहता है। आपको बता दें कि पिछले साल ब्राजीली राष्ट्रपति बोल्सनारो ने कोरोनावायरस के टीकों पर हमला किया था। उन्होंने Pfizer-BioNTech द्वारा विकसित कोरोनावायरस वैक्सीन की प्रभावशीलता को खारिज किया था और दावा किया था कि ये रोगियों को मगरमच्छ या दाढ़ी वाली महिलाओं में बदल सकता है। महामारी के उभरने के बाद से ही जेयर बोल्सोनारो को इसके बारे में संदेह है।
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भोपालः मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष और कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं। इस बात की जानकारी शोभा ओझा ने खुद ट्वीट कर दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि कोरोना के हल्के लक्षणों के कारण उन्होंने अपने टेस्ट करवाया था जिसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। लिहाजा डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार वे घर पर ही आइसोलेट हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने अपील की है कि पिछले कुछ दिनों में जो भी बंधु उनके संपर्क में आए हैं, कृपया वे भी अपनी जांच जरुर करवा लें।
पिछले दो दिनों से मुझे COVID-19 के हल्के लक्षण महसूस हो रहे थे। मैंने कोविड टेस्ट करवाया, रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
मैं घर पर ही आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रही हूँ। मेरा अनुरोध है कि पिछले दिनों जो भी मेरे संपर्क में आए हैं, अपनी जाँच अवश्य कराएँ, शीघ्र स्वस्थ होकर फिर मिलेंगे।
त्योहारों के बाद शहर में फिर से संक्रमण फैलने लगा है। आज आए नए पॉजिटिव लोगों में सुखलिया और वीणा नगर क्षेत्र के 9 संक्रमित शामिल हैं। हालांकि किसी भी नए क्षेत्र में कोरोना का संक्रमण नहीं फैला है।
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भोपालः मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष और कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं। इस बात की जानकारी शोभा ओझा ने खुद ट्वीट कर दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि कोरोना के हल्के लक्षणों के कारण उन्होंने अपने टेस्ट करवाया था जिसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। लिहाजा डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार वे घर पर ही आइसोलेट हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। हालांकि अपने ट्वीट में उन्होंने अपील की है कि पिछले कुछ दिनों में जो भी बंधु उनके संपर्क में आए हैं, कृपया वे भी अपनी जांच जरुर करवा लें। पिछले दो दिनों से मुझे COVID-उन्नीस के हल्के लक्षण महसूस हो रहे थे। मैंने कोविड टेस्ट करवाया, रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं घर पर ही आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रही हूँ। मेरा अनुरोध है कि पिछले दिनों जो भी मेरे संपर्क में आए हैं, अपनी जाँच अवश्य कराएँ, शीघ्र स्वस्थ होकर फिर मिलेंगे। त्योहारों के बाद शहर में फिर से संक्रमण फैलने लगा है। आज आए नए पॉजिटिव लोगों में सुखलिया और वीणा नगर क्षेत्र के नौ संक्रमित शामिल हैं। हालांकि किसी भी नए क्षेत्र में कोरोना का संक्रमण नहीं फैला है।
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हूँ कि काम करने के उचित घण्टे होने चाहिये, इसलिये कि मशीनों से उत्पन्न हमारी आधुनिक सभ्यता में अधिकांश नागरिक अपने व्यक्तित्व की सम्पूर्णता अवकाश के समय में ही प्राप्त करते हैं, काम करने वाले समय में नहीं । जिस राज्य में, औद्योगिक क्रान्ति के प्रारम्भिक काल की भाँति मालिक को अपने कार्यकर्ताओं से विश्रामरहित परिश्रम लेने का अधिकार होता है, वहाँ सुख प्राप्ति की कोई सम्भावना उनके लिये नहीं रह जाती है । इसलिये अवकाश का अधिकार भी राज्य की ओर से निर्धारित वैध आवश्यक कर्त्तव्य होना चाहिये ।
किन्तु, यदि राज्य को मानव के वास्तविक रुख का विचार है तो व्यक्ति को ऊपर लिखे से कहीं अधिक अधिकार चाहिये । दूसरों के साथ अपने सम्बन्ध की उसे जानकारी होनी चाहिये और उसे इस योग्य होना चाहिये कि अपने इस सम्बन्ध से प्राप्त अनुभव को बतला सके । इस कार्य के लिये ज्ञान का होना जरूरी है । इसीलिये शिक्षा प्राप्त करना नागरिकता के मौलिक अधिकारों में से है । बिना शिक्षा, साधारणतः मनुष्य इस महान संसार को समझ नहीं सकता । वह उसमें खो जाता है । अपना सदुपयोग नहीं कर सकता । अपने अनुभवों से प्राप्त, जानकारी का आलोचक नहीं बन सकता । वर्त्तमान सभ्यता की विषमताओं में अपढ़ व्यक्ति उस अंधे के समान है जो कारण तथा कार्य, दोनों की जानकारी नहीं रखता। जिस राज्य में नागरिकों को शिक्षा की सुविधा नहीं है. वह राज्य उन्हें अपने व्यक्तित्व को प्राप्त करने के - साधनों से वंचित रख रहा है ।
किन्तु, केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है । मान लीजिये कि एक आदमी ने शिक्षा प्राप्त कर ली, फिर भी राज्य उसे अपने ज्ञान के उपयोग का अवसर नहीं देता । ऐसा अधिकार न मिलने का अर्थ है उससे लाभ उठाने का अधिकार न होना । इसलिये नागरिक के अधि
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हूँ कि काम करने के उचित घण्टे होने चाहिये, इसलिये कि मशीनों से उत्पन्न हमारी आधुनिक सभ्यता में अधिकांश नागरिक अपने व्यक्तित्व की सम्पूर्णता अवकाश के समय में ही प्राप्त करते हैं, काम करने वाले समय में नहीं । जिस राज्य में, औद्योगिक क्रान्ति के प्रारम्भिक काल की भाँति मालिक को अपने कार्यकर्ताओं से विश्रामरहित परिश्रम लेने का अधिकार होता है, वहाँ सुख प्राप्ति की कोई सम्भावना उनके लिये नहीं रह जाती है । इसलिये अवकाश का अधिकार भी राज्य की ओर से निर्धारित वैध आवश्यक कर्त्तव्य होना चाहिये । किन्तु, यदि राज्य को मानव के वास्तविक रुख का विचार है तो व्यक्ति को ऊपर लिखे से कहीं अधिक अधिकार चाहिये । दूसरों के साथ अपने सम्बन्ध की उसे जानकारी होनी चाहिये और उसे इस योग्य होना चाहिये कि अपने इस सम्बन्ध से प्राप्त अनुभव को बतला सके । इस कार्य के लिये ज्ञान का होना जरूरी है । इसीलिये शिक्षा प्राप्त करना नागरिकता के मौलिक अधिकारों में से है । बिना शिक्षा, साधारणतः मनुष्य इस महान संसार को समझ नहीं सकता । वह उसमें खो जाता है । अपना सदुपयोग नहीं कर सकता । अपने अनुभवों से प्राप्त, जानकारी का आलोचक नहीं बन सकता । वर्त्तमान सभ्यता की विषमताओं में अपढ़ व्यक्ति उस अंधे के समान है जो कारण तथा कार्य, दोनों की जानकारी नहीं रखता। जिस राज्य में नागरिकों को शिक्षा की सुविधा नहीं है. वह राज्य उन्हें अपने व्यक्तित्व को प्राप्त करने के - साधनों से वंचित रख रहा है । किन्तु, केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है । मान लीजिये कि एक आदमी ने शिक्षा प्राप्त कर ली, फिर भी राज्य उसे अपने ज्ञान के उपयोग का अवसर नहीं देता । ऐसा अधिकार न मिलने का अर्थ है उससे लाभ उठाने का अधिकार न होना । इसलिये नागरिक के अधि
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Jammu-Kashmir: इसके अलावा सलमान निजामी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के लिए जो चुनाव समीति बनाई थी। इसको लेकर उनसे राय मशवरा भी नहीं लिया गया है। सलमान निजामी के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आरएस चिब ने भी कांग्रेस की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वालों की लिस्ट में नाम जुड़ गया है। आरएस चिब ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे त्याग पत्र में पार्टी पर हमला बोला है।
नई दिल्ली। कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लगे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया हैं। त्याग पत्र में उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को लपटे में लिया। इतना ही नहीं आजाद ने राहुल गांधी अपरिपक्व बताया दिया। उन्होंने राहुल गांधी पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को अपमानित करने का भी आरोप लगाया। इसी बीच जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस पार्टी को जोरदार झटका लगा है। गुलाम नबी आजाद के समर्थन में कई कांग्रेस नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ा दिया है। आज़ाद के समर्थन में कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी लग गई है। खास बात ये है कि पार्टी का साथ छोड़ने वालों में वो 5 विधायक भी है जो भंग की गई विधानसभा में कांग्रेस से सदस्य थे।
इन पांच विधायकों के नाम है, जीएम सरूरी (GM Saroori), हाजी अब्दुल राशिद (Haji Abdul Rashid), मोहम्मद अमीन भट (Mohd Amin Bhat), गुलजार अहमद वानी (Gulzar Ahmad Wani) और चौधरी मोहम्मद अकरम (Choudhary Mohd Akram) के नाम शामिल है। कांग्रेस को भेजे इस्तीफे पत्र में इन पूर्व विधायकों ने साफ लिखा है कि उन्होंने गुलाम नबी आजाद के सपोर्ट में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे है।
इसके अलावा सलमान निजामी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के लिए जो चुनाव समीति बनाई थी। इसको लेकर उनसे राय मशवरा भी नहीं लिया गया है। सलमान निजामी के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आरएस चिब ने भी कांग्रेस की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वालों की लिस्ट में नाम जुड़ गया है। आरएस चिब ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे त्याग पत्र में पार्टी पर हमला बोला है।
इतना ही नहीं उन्होंने सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे पत्र में गुलाम नबी आजाद ने नेतृत्व पर आंतरिक चुनावों के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप भी लगाया है और ये भी कहा कि पार्टी को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
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Jammu-Kashmir: इसके अलावा सलमान निजामी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के लिए जो चुनाव समीति बनाई थी। इसको लेकर उनसे राय मशवरा भी नहीं लिया गया है। सलमान निजामी के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आरएस चिब ने भी कांग्रेस की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वालों की लिस्ट में नाम जुड़ गया है। आरएस चिब ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे त्याग पत्र में पार्टी पर हमला बोला है। नई दिल्ली। कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लगे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया हैं। त्याग पत्र में उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को लपटे में लिया। इतना ही नहीं आजाद ने राहुल गांधी अपरिपक्व बताया दिया। उन्होंने राहुल गांधी पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को अपमानित करने का भी आरोप लगाया। इसी बीच जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस पार्टी को जोरदार झटका लगा है। गुलाम नबी आजाद के समर्थन में कई कांग्रेस नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ा दिया है। आज़ाद के समर्थन में कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी लग गई है। खास बात ये है कि पार्टी का साथ छोड़ने वालों में वो पाँच विधायक भी है जो भंग की गई विधानसभा में कांग्रेस से सदस्य थे। इन पांच विधायकों के नाम है, जीएम सरूरी , हाजी अब्दुल राशिद , मोहम्मद अमीन भट , गुलजार अहमद वानी और चौधरी मोहम्मद अकरम के नाम शामिल है। कांग्रेस को भेजे इस्तीफे पत्र में इन पूर्व विधायकों ने साफ लिखा है कि उन्होंने गुलाम नबी आजाद के सपोर्ट में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे है। इसके अलावा सलमान निजामी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के लिए जो चुनाव समीति बनाई थी। इसको लेकर उनसे राय मशवरा भी नहीं लिया गया है। सलमान निजामी के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आरएस चिब ने भी कांग्रेस की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वालों की लिस्ट में नाम जुड़ गया है। आरएस चिब ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे त्याग पत्र में पार्टी पर हमला बोला है। इतना ही नहीं उन्होंने सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे पत्र में गुलाम नबी आजाद ने नेतृत्व पर आंतरिक चुनावों के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप भी लगाया है और ये भी कहा कि पार्टी को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
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बच्चे की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो परेशान कर देने वाली है। उसके हाथ बुरी तरह से सूजे हुए हैं। पूरे शरीर पर चोटों के निशान हैं। उसने बताया कि उसकी सौतेली मां उसे नियमित रूप से और बेरहमी से मारती थी। जब भी वह बाहर जाती थी तो उसे रस्सी से बांध देती थी। लड़के को बाहर जाने, किसी से मिलने की इजाजत नहीं थी। उसे फर्श पर सुलाया जाता था और भोजन भी ठीक से नहीं दिया जाता था। बच्चा काफी दयनीय स्थिति में रह रहा था।
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बच्चे की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो परेशान कर देने वाली है। उसके हाथ बुरी तरह से सूजे हुए हैं। पूरे शरीर पर चोटों के निशान हैं। उसने बताया कि उसकी सौतेली मां उसे नियमित रूप से और बेरहमी से मारती थी। जब भी वह बाहर जाती थी तो उसे रस्सी से बांध देती थी। लड़के को बाहर जाने, किसी से मिलने की इजाजत नहीं थी। उसे फर्श पर सुलाया जाता था और भोजन भी ठीक से नहीं दिया जाता था। बच्चा काफी दयनीय स्थिति में रह रहा था।
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यह सच है कि हमारे जीवन में आयु के चार चरण माने गए हैं। कुल मिलाकर आयु सौ वर्ष की मानी गयी है लेकिन आज के भौतिक युग में अगर किसी की उम्र 125 वर्ष तक पहुंच जाती है तो इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन 48 घंटे पहले दुनिया ने देखा कि कैसे वाराणसी का एक योग गुरु जिसकी उम्र 125 वर्ष है को राष्ट्रपति ने विशिष्ट पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह योग गुरु संस्कारों में भी अद्वितीय है। जब उनका नाम इस शीर्ष पुरस्कार के लिए पुकारा गया और वह हाल में प्रधानमंत्री श्री मोदी को देखकर भाव-विहल होकर उनकी तरफ बढ़े और घुटनों के बल बैठकर उन्हें दंडवत करने लगे। वह खुद चलकर आये थे और खुद ही उन्होंने चौकड़ी लेकर अपने आपको इस स्थिति में लाया कि वह श्री मोदी के पांव को छू सकें। परंतु मोदी जी ने उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए खुद उनके सम्मान में खड़े हो गये और जमीन की तरफ दोनों हाथ लहराकर उन्हें ऐसा करने से रोका। यह भावपूर्ण दृश्य देखकर हर तरफ तालियां गूंजने लगी। इतना बड़ा पुरस्कार लेने वाले इस योग गुरु शिवानंद की कहानी मैं समझती हूं पूरे देश और दुनिया विशेष रूप से वरिष्ठï नागरिक केसरी क्लब के हर सदस्य के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
यह योग गुरु 1896 में पैदा हुए और यूरोप के अलावा कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। इनका जीवन सादा है। इन्होंने अपने जीवन में कभी भी कोई चीज तली हुई नहीं खायी। सादी रोटी, सादे चावल और उबला हुआ भोजन के अलावा जीवन में हरी सब्जियां और सलाद खाते रहे। इसके अलावा वह प्रतिदिन योग करते हैं और कई कि. मी. पैदल चलते हैं। आज के जीवन में सिर्फ बुजुर्ग ही क्यों यूथ या अधेड़ उम्र के लोग भी उनके खानपान वाली जीवनशैली को अपने व्यक्तित्व में उतारकर खुद को निखार सकते हैं। सचमुच शिवानंद एक असाधारण व्यक्ति हैं। जीवन में यदि आप असाधारण बनने के लिए कुछ भी ठान लें तो सबकुछ संभव है। आज के जमाने में कोई घड़ी की सुईयां विपरीत दिशा में नहीं घुमा सकता परंतु एक योग है जिसे अगर आप नियमित रूप से करते जाएं तो अपने शरीर की व्यवस्था आप कम दर्शा सकते हैं। यदि कोई नियमित योग करता है और उसकी उम्र 60 वर्ष की है तो वह 40 की उम्र का दिखाई देगा। 80 की उम्र का व्यक्ति 60 साल का दिखाई दे सकता है। महान योगी के रूप में जिस भगवान शिव की चौकड़ी और उनके बैठने के अंदाज को कलेंडरों में दिखाया जाता है वह वैज्ञानिक रूप से हम सबके लिए प्रेरणादायी है कि कैसे कोई बीमारी नियमित योग करने वाले को छू भी नहीं सकती। महान शास्त्र योग विशिष्ठ में शिव चौकड़ी के बारे में और इसके गुणों के बारे में विस्तार से बहुत कुछ बताया गया है। अगर दुनिया को योग के बारे में किसी ने सिखाया है तो यह हमारा भारत देश है। हमारे यहां इसीलिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
जीवन में अगर बीमारियों से दूर रहना है तो आज सीनियर सीटीजन को यह संकल्प ले लेना चाहिए कि हमें प्रतिदिन योग करना है या फिर शारीरिक व्यायाम करना है या फिर ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना है। इसके अलावा खानपान भी ज्यादा बाजारी और फ्राईड से बचने के लिए उबला हुआ खाएं। फलों और हरी सब्जियों का सेवन वैज्ञानिक रूप से शरीर में ऊर्जा पैदा करता है। कितने ही फिल्मी सितारे योग के दम पर और अच्छे खानपान के लिए मशहूर है। शिल्पा शेट्टी, अनिल कपूर नियमित योग करते हैं और खानपान का बहुत ध्यान रखते हैं। अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी नियमित योग करते हैं इसीलिए फिट हैं। फिट रहने का सबसे बड़ा मंत्र शारीरिक व्यायाम है इसीलिए आप सबके समक्ष शिवानंद की कहानी प्रस्तुत की है। हम सबके जीवन का मंत्र यही होना चाहिए कि शारीरिक रूप से फिट रहें तो आप हिट हो सकते हैं। योग गुरु शिवानंद जो पद्मश्री विजेता हैं अपनी सादगी के दम पर इसी मंत्र के चलते सफल हैं।
अगर मैं अपनी सच्चाई बताऊं तो मैं योग, व्यायाम कुछ नहीं करती परन्तु शिवानंद जी को देखकर, सुनकर लगता है मुझे भी योग स्टार्ट करना चाहिए। वो एक प्रेरणा बनकर सामने आये हैं। ऐसे लोगों को पद्मश्री मिलना बहुत ही भाग्यशाली बात है। हमें ऐसे लोगों पर गर्व है।
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यह सच है कि हमारे जीवन में आयु के चार चरण माने गए हैं। कुल मिलाकर आयु सौ वर्ष की मानी गयी है लेकिन आज के भौतिक युग में अगर किसी की उम्र एक सौ पच्चीस वर्ष तक पहुंच जाती है तो इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन अड़तालीस घंटाटे पहले दुनिया ने देखा कि कैसे वाराणसी का एक योग गुरु जिसकी उम्र एक सौ पच्चीस वर्ष है को राष्ट्रपति ने विशिष्ट पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह योग गुरु संस्कारों में भी अद्वितीय है। जब उनका नाम इस शीर्ष पुरस्कार के लिए पुकारा गया और वह हाल में प्रधानमंत्री श्री मोदी को देखकर भाव-विहल होकर उनकी तरफ बढ़े और घुटनों के बल बैठकर उन्हें दंडवत करने लगे। वह खुद चलकर आये थे और खुद ही उन्होंने चौकड़ी लेकर अपने आपको इस स्थिति में लाया कि वह श्री मोदी के पांव को छू सकें। परंतु मोदी जी ने उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए खुद उनके सम्मान में खड़े हो गये और जमीन की तरफ दोनों हाथ लहराकर उन्हें ऐसा करने से रोका। यह भावपूर्ण दृश्य देखकर हर तरफ तालियां गूंजने लगी। इतना बड़ा पुरस्कार लेने वाले इस योग गुरु शिवानंद की कहानी मैं समझती हूं पूरे देश और दुनिया विशेष रूप से वरिष्ठï नागरिक केसरी क्लब के हर सदस्य के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह योग गुएक हज़ार आठ सौ छियानवे रुपया में पैदा हुए और यूरोप के अलावा कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। इनका जीवन सादा है। इन्होंने अपने जीवन में कभी भी कोई चीज तली हुई नहीं खायी। सादी रोटी, सादे चावल और उबला हुआ भोजन के अलावा जीवन में हरी सब्जियां और सलाद खाते रहे। इसके अलावा वह प्रतिदिन योग करते हैं और कई कि. मी. पैदल चलते हैं। आज के जीवन में सिर्फ बुजुर्ग ही क्यों यूथ या अधेड़ उम्र के लोग भी उनके खानपान वाली जीवनशैली को अपने व्यक्तित्व में उतारकर खुद को निखार सकते हैं। सचमुच शिवानंद एक असाधारण व्यक्ति हैं। जीवन में यदि आप असाधारण बनने के लिए कुछ भी ठान लें तो सबकुछ संभव है। आज के जमाने में कोई घड़ी की सुईयां विपरीत दिशा में नहीं घुमा सकता परंतु एक योग है जिसे अगर आप नियमित रूप से करते जाएं तो अपने शरीर की व्यवस्था आप कम दर्शा सकते हैं। यदि कोई नियमित योग करता है और उसकी उम्र साठ वर्ष की है तो वह चालीस की उम्र का दिखाई देगा। अस्सी की उम्र का व्यक्ति साठ साल का दिखाई दे सकता है। महान योगी के रूप में जिस भगवान शिव की चौकड़ी और उनके बैठने के अंदाज को कलेंडरों में दिखाया जाता है वह वैज्ञानिक रूप से हम सबके लिए प्रेरणादायी है कि कैसे कोई बीमारी नियमित योग करने वाले को छू भी नहीं सकती। महान शास्त्र योग विशिष्ठ में शिव चौकड़ी के बारे में और इसके गुणों के बारे में विस्तार से बहुत कुछ बताया गया है। अगर दुनिया को योग के बारे में किसी ने सिखाया है तो यह हमारा भारत देश है। हमारे यहां इसीलिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। जीवन में अगर बीमारियों से दूर रहना है तो आज सीनियर सीटीजन को यह संकल्प ले लेना चाहिए कि हमें प्रतिदिन योग करना है या फिर शारीरिक व्यायाम करना है या फिर ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना है। इसके अलावा खानपान भी ज्यादा बाजारी और फ्राईड से बचने के लिए उबला हुआ खाएं। फलों और हरी सब्जियों का सेवन वैज्ञानिक रूप से शरीर में ऊर्जा पैदा करता है। कितने ही फिल्मी सितारे योग के दम पर और अच्छे खानपान के लिए मशहूर है। शिल्पा शेट्टी, अनिल कपूर नियमित योग करते हैं और खानपान का बहुत ध्यान रखते हैं। अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी नियमित योग करते हैं इसीलिए फिट हैं। फिट रहने का सबसे बड़ा मंत्र शारीरिक व्यायाम है इसीलिए आप सबके समक्ष शिवानंद की कहानी प्रस्तुत की है। हम सबके जीवन का मंत्र यही होना चाहिए कि शारीरिक रूप से फिट रहें तो आप हिट हो सकते हैं। योग गुरु शिवानंद जो पद्मश्री विजेता हैं अपनी सादगी के दम पर इसी मंत्र के चलते सफल हैं। अगर मैं अपनी सच्चाई बताऊं तो मैं योग, व्यायाम कुछ नहीं करती परन्तु शिवानंद जी को देखकर, सुनकर लगता है मुझे भी योग स्टार्ट करना चाहिए। वो एक प्रेरणा बनकर सामने आये हैं। ऐसे लोगों को पद्मश्री मिलना बहुत ही भाग्यशाली बात है। हमें ऐसे लोगों पर गर्व है।
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))
मुंबईः
बिग बॉस 16 के कंटेस्टेंट शालीन भनोट शो को छोड़ना चाहते है। उन्होंने कहा कि वह बिग बॉस से बात करना चाहते हैं।
विकास मानकतला, अर्चना गौतम और प्रियंका चाहर चौधरी के बीच हुए विवाद के दौरान शालीन आग बबूला हो उठते है और घर के अंदर फर्नीचर में तोड़फोड़ करने लगते है।
विकास और अर्चना के बीच रसोई में बहस एक दूसरे को धक्का देने के साथ फिजिकल फाइट में बदल गई। प्रोमो में प्रियंका और विकास ने कहा कि पानी गर्म था, अर्चना ने दावा किया कि ऐसा नहीं था और उन्होंने कभी उन पर पानी नहीं फेंका। विकास और अर्चना की बहस जारी रही। इस बीच अर्चना उसे कुत्ते की तरह भौंक मत कहती है। विकास इस बात पर चिढ़ जाता है और कहता है कि वह यह शब्द अपने पिता से जाकर कहे।
अर्चना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, बाप पे मत जा! बाप भी नहीं बन सकता तू तो।
बाद में, विकास ने अर्चना को उसे मारने की चुनौती दी, लेकिन उसने यह कहकर जवाब दिया कि वह बिग बॉस का सम्मान करती है। प्रियंका की अर्चना से भी बहस हो गई और उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारने की धमकी दी।
सलमान खान वीकेंड का वार पर विकास और अर्चना के व्यवहार पर चर्चा करेंगे। साथ ही वह शालीन के शो से बाहर निकलने की इच्छा के बारे में भी बात कर सकते हैं।
बिग बॉस 16 कलर्स पर प्रसारित होता है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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) मुंबईः बिग बॉस सोलह के कंटेस्टेंट शालीन भनोट शो को छोड़ना चाहते है। उन्होंने कहा कि वह बिग बॉस से बात करना चाहते हैं। विकास मानकतला, अर्चना गौतम और प्रियंका चाहर चौधरी के बीच हुए विवाद के दौरान शालीन आग बबूला हो उठते है और घर के अंदर फर्नीचर में तोड़फोड़ करने लगते है। विकास और अर्चना के बीच रसोई में बहस एक दूसरे को धक्का देने के साथ फिजिकल फाइट में बदल गई। प्रोमो में प्रियंका और विकास ने कहा कि पानी गर्म था, अर्चना ने दावा किया कि ऐसा नहीं था और उन्होंने कभी उन पर पानी नहीं फेंका। विकास और अर्चना की बहस जारी रही। इस बीच अर्चना उसे कुत्ते की तरह भौंक मत कहती है। विकास इस बात पर चिढ़ जाता है और कहता है कि वह यह शब्द अपने पिता से जाकर कहे। अर्चना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, बाप पे मत जा! बाप भी नहीं बन सकता तू तो। बाद में, विकास ने अर्चना को उसे मारने की चुनौती दी, लेकिन उसने यह कहकर जवाब दिया कि वह बिग बॉस का सम्मान करती है। प्रियंका की अर्चना से भी बहस हो गई और उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारने की धमकी दी। सलमान खान वीकेंड का वार पर विकास और अर्चना के व्यवहार पर चर्चा करेंगे। साथ ही वह शालीन के शो से बाहर निकलने की इच्छा के बारे में भी बात कर सकते हैं। बिग बॉस सोलह कलर्स पर प्रसारित होता है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर तमाम साथियो को जिंदाबाद!
आज न तो सियापा करने का दिन है और न ही जश्न मनाने का। आज, अपने काम, लेखनी व बोली की वकत जानने और इसकी ज़रूरत को पहचाने का दिन है।
पत्रकारिता कॉरपोरेट की गुलाम है--हिंदी हो या अंग्रेजी, या कोई भी भारतीय भाषा। जैसा जिस समूह का मालिक है, वैसी वहां खबरें आती हैं,
इस नंगई में फर्क अभी बस डिग्री का है। मोदी सरकार जितना भी `हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान' का नारा उछालती रहे, सत्ता की डीलिंग की भाषा अंग्रेजी ही है। शायद इसकी वजह यह है कि वह भी कॉरपोरेट की भाषा है। यही कारण है कि जितनी बड़ी डील हुई हैं, जो सामने आई हैं, उसमें बाज़ी हिंदी के दलाल पत्रकारों के नाम नहीं रही हैं। इसके बस दो उदाहरण अभी साझा करूंगी- राडिया टेप्स और अर्नब गोस्वामी वाट्सऐप लीक।
अब देखिए, राडिया टेप्स हों (2007-09)--जिसमें मंत्रियों और पदों के खेल में किस तरह से दलालों की भूमिका होती है और पत्रकार कैसे डील कराते हैं, एजेंट बनते हैं, इसका पर्दाफाश हुआ था - इसमें डीलर पत्रकारों में हिंदी का एक बड़ा संपादक तक नहीं था। उस समय मैं आउटलुक पत्रिका में काम करती थी। हम उस समय बैठकर यह सोचते रहे कि हिंदी के तमाम पत्रकार-संपादक-मालिक जो दिन रात सत्ता के आगे पीछे घूमते हैं, उन्हें जब असली मलाई कटती है, तब पास तक नहीं फटकने दिया जाता। अंग्रेजी के नामचीन पत्रकार, एंकर मंत्री पद की डीलिंग से लेकर बाकी सारी सैटिंग करते रहते हैं। उस समय मेरे वरिष्ठ सहयोगी नीलाभ मिश्रा ने बताया, सत्ता की सारी डील अंग्रेजी में ही होती है, हिंदी का संपादक-मालिक ज़्यादा से ज्यादा राज्यसभा तक पहुंचता है। और, फिर खूब जोरदार ठहाका लगा था कमरे में।
इसी तरह से अभी अर्नब गोस्वामी का वाट्सऐप लीक (जनवरी,2021) भी यही बताता है कि बड़े खेल में किन पत्रकारों की भूमिका होती है। सत्ता किन दलाल पत्रकारों से अपने गोपनीय राज साझा करती है। अर्नब गोस्वामी का वाट्सऐप लीक (जनवरी, 2021) में यह सामने आया कि 2019 के शुरुआत में पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पहले और बाद में किस तरह से पत्रकार और सत्ता प्रतिष्ठान किस तरह से गोपनीय सैन्य जानकारियों का खेल टीआरपी के फायदे के लिए खेलते रहे। इसमें रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी बाकायदा गृहमंत्री अमित शाह तक का हवाला देते बेनकाब हुए।
ये दोनों घटनाएं बस यह बताने के लिए बड़े खेल की खिलाड़ी अभी हिंदी पत्रकारिता नहीं बन पाई है - दलाली है, सांप्रदायिक एजेंडा नंगई के साथ है, लेकिन वह पूरी पत्रकारिता को डस रहा है। साख गिर रही है।
साथ ही, एक बहुत अहम बात यह कि हिंदी पत्रकारिता को जिंदा रखने का बीड़ा जिन पत्रकारों ने उठा रखा है, आज उन्हें सलाम करने और उनका हौसला बढ़ाने का दिन है। ऐसे पत्रकारों की संख्या हजारों में हैं, जो जान को ज़ोखिम में डालकर गांव-देहात, छोटे-छोटे कस्बे, शहरों से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। मुझे यह सोच कर फख्र होता है कि इनमें से बहुत बड़ी संख्या हिंदी के पत्रकारों की है। इनमें बड़ी संख्या में महिला पत्रकार भी शामिल हैं, जो पित्तसत्ता से टकराते हुए बिंदास अंदाज में रिपोर्टिंग कर रही हैं, खबरों को तेवर के साथ सच्चाई से पेश कर रही हैं। दलित समाज की दावेदारी और उपस्थिति बहुत से जातिगत शिकंजे को नेस्तनाबूद करते हुए बुलंद हुई है। ऐसे तमाम पहलू सामने आए हैं, जिन्हें बड़े संस्थागत घरानों में कभी जगह नहीं मिल पाती। यूं कहिए कि उन्होंने ही पत्रकारिता को ज़िंदा रखने का बीड़ा उठा रखा है। अनगिनत वेबसाइट्स, यू-ट्यूब चैनल, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म, पत्रिकाएं, अखबार - आज के हिंदी पत्रकारिता का तेवर लिए मौजूद हैं। ये बहुत कम संसाधनों से निकल रहे हैं। इनकी पहुंच भी सीमित है, लेकिन असर है इनका। अगर असर न होता तो इन पर लगाम कसने के लिए मोदी सरकार नए कानून/हथियार न लाती।
जन-सरोकारी मीडिया, क़ॉरपोरेट मीडिया पर भी दबाव डालता है। उसे पत्रकारिता करने पर बाध्य करता है। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के लिए बाध्य करता है। कोरोना आपदा में मरघट बने देश में, शवदाहगृहों से खबरें हों, या लाशों से अटी गंगा की ख़बरें - ये सब हमारे हम-ज़ुबान, हमारे साथी पत्रकार ही देश के सामने लाए। जहां मृतकों की संख्या सरकारें छुपा रही हैं, वहीं मृतकों की संख्या, परिजनों की वेदना को कलमबंद करने, वीडियोग्राफ करने का साहस अपनी ज़ान को ज़ोखिम में डालकर पत्रकार साथी ही कर रहे थे, कर रहे हैं....और यही लोग जिंदा रख रहे हैं पत्रकारिता को, हिंदी पत्रकारिता को। गणेश शंकर विद्यार्थी की डगर तो कठिन है ही।
(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)
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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर तमाम साथियो को जिंदाबाद! आज न तो सियापा करने का दिन है और न ही जश्न मनाने का। आज, अपने काम, लेखनी व बोली की वकत जानने और इसकी ज़रूरत को पहचाने का दिन है। पत्रकारिता कॉरपोरेट की गुलाम है--हिंदी हो या अंग्रेजी, या कोई भी भारतीय भाषा। जैसा जिस समूह का मालिक है, वैसी वहां खबरें आती हैं, इस नंगई में फर्क अभी बस डिग्री का है। मोदी सरकार जितना भी `हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान' का नारा उछालती रहे, सत्ता की डीलिंग की भाषा अंग्रेजी ही है। शायद इसकी वजह यह है कि वह भी कॉरपोरेट की भाषा है। यही कारण है कि जितनी बड़ी डील हुई हैं, जो सामने आई हैं, उसमें बाज़ी हिंदी के दलाल पत्रकारों के नाम नहीं रही हैं। इसके बस दो उदाहरण अभी साझा करूंगी- राडिया टेप्स और अर्नब गोस्वामी वाट्सऐप लीक। अब देखिए, राडिया टेप्स हों --जिसमें मंत्रियों और पदों के खेल में किस तरह से दलालों की भूमिका होती है और पत्रकार कैसे डील कराते हैं, एजेंट बनते हैं, इसका पर्दाफाश हुआ था - इसमें डीलर पत्रकारों में हिंदी का एक बड़ा संपादक तक नहीं था। उस समय मैं आउटलुक पत्रिका में काम करती थी। हम उस समय बैठकर यह सोचते रहे कि हिंदी के तमाम पत्रकार-संपादक-मालिक जो दिन रात सत्ता के आगे पीछे घूमते हैं, उन्हें जब असली मलाई कटती है, तब पास तक नहीं फटकने दिया जाता। अंग्रेजी के नामचीन पत्रकार, एंकर मंत्री पद की डीलिंग से लेकर बाकी सारी सैटिंग करते रहते हैं। उस समय मेरे वरिष्ठ सहयोगी नीलाभ मिश्रा ने बताया, सत्ता की सारी डील अंग्रेजी में ही होती है, हिंदी का संपादक-मालिक ज़्यादा से ज्यादा राज्यसभा तक पहुंचता है। और, फिर खूब जोरदार ठहाका लगा था कमरे में। इसी तरह से अभी अर्नब गोस्वामी का वाट्सऐप लीक भी यही बताता है कि बड़े खेल में किन पत्रकारों की भूमिका होती है। सत्ता किन दलाल पत्रकारों से अपने गोपनीय राज साझा करती है। अर्नब गोस्वामी का वाट्सऐप लीक में यह सामने आया कि दो हज़ार उन्नीस के शुरुआत में पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पहले और बाद में किस तरह से पत्रकार और सत्ता प्रतिष्ठान किस तरह से गोपनीय सैन्य जानकारियों का खेल टीआरपी के फायदे के लिए खेलते रहे। इसमें रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी बाकायदा गृहमंत्री अमित शाह तक का हवाला देते बेनकाब हुए। ये दोनों घटनाएं बस यह बताने के लिए बड़े खेल की खिलाड़ी अभी हिंदी पत्रकारिता नहीं बन पाई है - दलाली है, सांप्रदायिक एजेंडा नंगई के साथ है, लेकिन वह पूरी पत्रकारिता को डस रहा है। साख गिर रही है। साथ ही, एक बहुत अहम बात यह कि हिंदी पत्रकारिता को जिंदा रखने का बीड़ा जिन पत्रकारों ने उठा रखा है, आज उन्हें सलाम करने और उनका हौसला बढ़ाने का दिन है। ऐसे पत्रकारों की संख्या हजारों में हैं, जो जान को ज़ोखिम में डालकर गांव-देहात, छोटे-छोटे कस्बे, शहरों से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। मुझे यह सोच कर फख्र होता है कि इनमें से बहुत बड़ी संख्या हिंदी के पत्रकारों की है। इनमें बड़ी संख्या में महिला पत्रकार भी शामिल हैं, जो पित्तसत्ता से टकराते हुए बिंदास अंदाज में रिपोर्टिंग कर रही हैं, खबरों को तेवर के साथ सच्चाई से पेश कर रही हैं। दलित समाज की दावेदारी और उपस्थिति बहुत से जातिगत शिकंजे को नेस्तनाबूद करते हुए बुलंद हुई है। ऐसे तमाम पहलू सामने आए हैं, जिन्हें बड़े संस्थागत घरानों में कभी जगह नहीं मिल पाती। यूं कहिए कि उन्होंने ही पत्रकारिता को ज़िंदा रखने का बीड़ा उठा रखा है। अनगिनत वेबसाइट्स, यू-ट्यूब चैनल, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म, पत्रिकाएं, अखबार - आज के हिंदी पत्रकारिता का तेवर लिए मौजूद हैं। ये बहुत कम संसाधनों से निकल रहे हैं। इनकी पहुंच भी सीमित है, लेकिन असर है इनका। अगर असर न होता तो इन पर लगाम कसने के लिए मोदी सरकार नए कानून/हथियार न लाती। जन-सरोकारी मीडिया, क़ॉरपोरेट मीडिया पर भी दबाव डालता है। उसे पत्रकारिता करने पर बाध्य करता है। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के लिए बाध्य करता है। कोरोना आपदा में मरघट बने देश में, शवदाहगृहों से खबरें हों, या लाशों से अटी गंगा की ख़बरें - ये सब हमारे हम-ज़ुबान, हमारे साथी पत्रकार ही देश के सामने लाए। जहां मृतकों की संख्या सरकारें छुपा रही हैं, वहीं मृतकों की संख्या, परिजनों की वेदना को कलमबंद करने, वीडियोग्राफ करने का साहस अपनी ज़ान को ज़ोखिम में डालकर पत्रकार साथी ही कर रहे थे, कर रहे हैं....और यही लोग जिंदा रख रहे हैं पत्रकारिता को, हिंदी पत्रकारिता को। गणेश शंकर विद्यार्थी की डगर तो कठिन है ही। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
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पंजाब नेशनल बैंक घोटाले (PNB Scam) में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के अहम सहयोगी सुभाष शंकर परब (Subhash Shankar Parab) को मिस्र से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सुभाष शंकर 2018 में नीरव मोदी के साथ देश छोड़कर भाग गया था। सीबीआई उसे लंबे समय से भारत वापस लाने की कोशिश में थी। अब उसे कोर्ट में पेश कर जाँच एजेंसी हिरासत की माँग करेगी।
नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर को मिस्त्र की राजधानी काहिरा से पकड़ा गया है। सीबीआई मंगलवार (12 अप्रैल 2022) सुबह उसे लेकर मुंबई आई। 2018 में दर्ज हुए केस के बाद से ही सुभाष शंकर फरार चल रहा था। 2018 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया था। जानकारी के मुुताबिक सुभाष शंकर फायरस्टार डायमंड में डिप्टी जनरल मैनेजर (फाइनेंस) था और वह 7000 करोड़ रुपए के नीरव मोदी बैंक फ्रॉड में एक मुख्य आरोपित है। इसके साथ ही उसने नीरव की फर्जी कंपनियों में फर्जी डायरेक्टर (Dummy Director) रखने में अहम भूमिका निभाई थी।
नीरव के भाई नेहल को जब पता चला कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ उन्हें ढूँढ रही है तो उन्होंने सुभाष परब को काहिरा में डमी निदेशकों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। ये डमी निदेशक हांगकांग में थे, जहाँ से वे धोखाधड़ी में शामिल नीरव की फर्जी कंपनियों के मामलों की देखरेख किया करते थे। सीबीआई और ईडी द्वारा केस दर्ज करने के बाद नीरव मोदी के सौतेले भाई नेहल मोदी ने सभी डमी निदेशकों के मोबाइल फोन नष्ट कर दिए और सुभाष परब की मदद से उन्हें काहिरा शिफ्ट कर दिया।
गौरतलब है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक को करीब 13,578 रुपए का लोन लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। नीरव मोदी लंदन भाग गया था। इसके बाद लंदन की अदालत ने उसे वहाँ की जेल में बंद करने का आदेश दिया। भारत की जाँच एजेंसी उसे लगातार देश वापस लाने की कोशिश कर रही है। ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण करने का आदेश दे चुकी है। हालाँकि नीरव मोदी ने मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का हवाला देते हुए इसे चुनौती दे रखी है।
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पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो को बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के अहम सहयोगी सुभाष शंकर परब को मिस्र से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सुभाष शंकर दो हज़ार अट्ठारह में नीरव मोदी के साथ देश छोड़कर भाग गया था। सीबीआई उसे लंबे समय से भारत वापस लाने की कोशिश में थी। अब उसे कोर्ट में पेश कर जाँच एजेंसी हिरासत की माँग करेगी। नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर को मिस्त्र की राजधानी काहिरा से पकड़ा गया है। सीबीआई मंगलवार सुबह उसे लेकर मुंबई आई। दो हज़ार अट्ठारह में दर्ज हुए केस के बाद से ही सुभाष शंकर फरार चल रहा था। दो हज़ार अट्ठारह में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। जानकारी के मुुताबिक सुभाष शंकर फायरस्टार डायमंड में डिप्टी जनरल मैनेजर था और वह सात हज़ार करोड़ रुपए के नीरव मोदी बैंक फ्रॉड में एक मुख्य आरोपित है। इसके साथ ही उसने नीरव की फर्जी कंपनियों में फर्जी डायरेक्टर रखने में अहम भूमिका निभाई थी। नीरव के भाई नेहल को जब पता चला कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ उन्हें ढूँढ रही है तो उन्होंने सुभाष परब को काहिरा में डमी निदेशकों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। ये डमी निदेशक हांगकांग में थे, जहाँ से वे धोखाधड़ी में शामिल नीरव की फर्जी कंपनियों के मामलों की देखरेख किया करते थे। सीबीआई और ईडी द्वारा केस दर्ज करने के बाद नीरव मोदी के सौतेले भाई नेहल मोदी ने सभी डमी निदेशकों के मोबाइल फोन नष्ट कर दिए और सुभाष परब की मदद से उन्हें काहिरा शिफ्ट कर दिया। गौरतलब है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक को करीब तेरह,पाँच सौ अठहत्तर रुपयापए का लोन लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। नीरव मोदी लंदन भाग गया था। इसके बाद लंदन की अदालत ने उसे वहाँ की जेल में बंद करने का आदेश दिया। भारत की जाँच एजेंसी उसे लगातार देश वापस लाने की कोशिश कर रही है। ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण करने का आदेश दे चुकी है। हालाँकि नीरव मोदी ने मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का हवाला देते हुए इसे चुनौती दे रखी है।
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Lathmar Holi Barsana: लठमार होली को लेकर बरसाना में आसमान से जमीन तक पुलिस की पैनी नजर रहेंगी. लठमार होली मेला का सुरक्षा चक्र पुलिस ने रविवार शाम तैयार कर लिया है, जिसके अनुसार मेला क्षेत्र के चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहेंगे. वहीं असामाजिक तत्वों पर गुंडा दमन दल पैनी नजर रखेगा.
रविवार शाम ब्रीफिंग के दौरान एसएसपी शैलेश पांडेय ने कहा कि श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करें. वहीं पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी डयूटी करें.
रविवार शाम को लठमार होली मेला को लेकर कस्बे के ब्रजेश्वरी बालिका इंटर कॉलेज में हुए ब्रीफिंग के दौरान डीएम पुलकित खरे व एसएसपी शैलेश पांडेय ने बरसाना को 6 जोन व 12 सेक्टरों में बांटा है. वहीं प्रत्येक जोन पर एडिशनल एसपी व जोनल मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे. प्रत्येक सेक्टरों पर सीओ व सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती रहेंगी.
एसएसपी शैलेश पांडेय ने बताया कि मेला क्षेत्र में 150 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तथा 12 वॉच टावर बनाए गए हैं. वहीं 5 ड्रोन कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र पर पैनी नजर रहेगी. सुरक्षा व्यवस्था में इस बार 8 एसपी, 19 सीओ, 70 थाना प्रभारी, 325 सब इंस्पेक्टर, 1215 कांस्टेबल, 36 महिला सब इंस्पेक्टर, 154 महिला कांस्टेबल, 3 ट्रैफिक निरीक्षक, 24 ट्रैफिक एसआई, 137 हैड कांस्टेबल, 250 होमगार्ड के जवान, 5 कम्पनी पीएसी, 10 गुंडा दमन दल की टीम, 4 गाड़ी फायर बिग्रेड, 5 घुड़सवार, बम स्क्वायड की टीम सहित जगह जगह सदा वर्दी में पुलिस के जवानों के साथ सामाजिक संगठनों की टीम भी तैनात रहेंगी.
ब्रीफिंग में जिलाधिकारी पुलकित खरे, एसएसपी शैलेश पांडेय, जॉइंट मजिस्ट्रेट ध्रुव कुमार, एसपी देहात त्रिगुण बिसेन, एसपी क्राइम, हरगोविंद शर्मा, एसपी सुरक्षा ज्ञानेंद्र कुमार, एसडीएम वित्त व फाइनेंस योगानन्द पांडेय, एसडीएम गोवर्धन कमलेश गोयल, एसडीएम छाता स्वाति सिंह, सीओ गोवर्धन राममोहन शर्मा, सीओ छाता गौरव त्रिपाठी सहित कई पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे.
लठामार होली के सुरक्षा व्यवस्था के चलते श्रीजी मंदिर मार्ग भी वनवे रहेगा. इस दौरान भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को जत्थों में मंदिर भेजा जाएगा. वहीं पूरे मंदिर परिसर व मार्गों पर पुलिस प्रशासन द्वारा बेरिकेड्स की गई है. श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में रुकने नहीं दिया जाएगा.
सीओ गोवर्धन राममोहन शर्मा ने बताया कि राधारानी मंदिर मार्ग वनवे रहेगा, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह जगह बैरियर लगाए गए हैं. परिक्रमा लगाने वाले श्रद्धालुओं को सीधे मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा. मंदिर में सिर्फ आने व जाने का मार्ग रहेगा.
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Lathmar Holi Barsana: लठमार होली को लेकर बरसाना में आसमान से जमीन तक पुलिस की पैनी नजर रहेंगी. लठमार होली मेला का सुरक्षा चक्र पुलिस ने रविवार शाम तैयार कर लिया है, जिसके अनुसार मेला क्षेत्र के चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहेंगे. वहीं असामाजिक तत्वों पर गुंडा दमन दल पैनी नजर रखेगा. रविवार शाम ब्रीफिंग के दौरान एसएसपी शैलेश पांडेय ने कहा कि श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करें. वहीं पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी डयूटी करें. रविवार शाम को लठमार होली मेला को लेकर कस्बे के ब्रजेश्वरी बालिका इंटर कॉलेज में हुए ब्रीफिंग के दौरान डीएम पुलकित खरे व एसएसपी शैलेश पांडेय ने बरसाना को छः जोन व बारह सेक्टरों में बांटा है. वहीं प्रत्येक जोन पर एडिशनल एसपी व जोनल मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे. प्रत्येक सेक्टरों पर सीओ व सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती रहेंगी. एसएसपी शैलेश पांडेय ने बताया कि मेला क्षेत्र में एक सौ पचास स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तथा बारह वॉच टावर बनाए गए हैं. वहीं पाँच ड्रोन कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र पर पैनी नजर रहेगी. सुरक्षा व्यवस्था में इस बार आठ एसपी, उन्नीस सीओ, सत्तर थाना प्रभारी, तीन सौ पच्चीस सब इंस्पेक्टर, एक हज़ार दो सौ पंद्रह कांस्टेबल, छत्तीस महिला सब इंस्पेक्टर, एक सौ चौवन महिला कांस्टेबल, तीन ट्रैफिक निरीक्षक, चौबीस ट्रैफिक एसआई, एक सौ सैंतीस हैड कांस्टेबल, दो सौ पचास होमगार्ड के जवान, पाँच कम्पनी पीएसी, दस गुंडा दमन दल की टीम, चार गाड़ी फायर बिग्रेड, पाँच घुड़सवार, बम स्क्वायड की टीम सहित जगह जगह सदा वर्दी में पुलिस के जवानों के साथ सामाजिक संगठनों की टीम भी तैनात रहेंगी. ब्रीफिंग में जिलाधिकारी पुलकित खरे, एसएसपी शैलेश पांडेय, जॉइंट मजिस्ट्रेट ध्रुव कुमार, एसपी देहात त्रिगुण बिसेन, एसपी क्राइम, हरगोविंद शर्मा, एसपी सुरक्षा ज्ञानेंद्र कुमार, एसडीएम वित्त व फाइनेंस योगानन्द पांडेय, एसडीएम गोवर्धन कमलेश गोयल, एसडीएम छाता स्वाति सिंह, सीओ गोवर्धन राममोहन शर्मा, सीओ छाता गौरव त्रिपाठी सहित कई पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे. लठामार होली के सुरक्षा व्यवस्था के चलते श्रीजी मंदिर मार्ग भी वनवे रहेगा. इस दौरान भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को जत्थों में मंदिर भेजा जाएगा. वहीं पूरे मंदिर परिसर व मार्गों पर पुलिस प्रशासन द्वारा बेरिकेड्स की गई है. श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में रुकने नहीं दिया जाएगा. सीओ गोवर्धन राममोहन शर्मा ने बताया कि राधारानी मंदिर मार्ग वनवे रहेगा, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह जगह बैरियर लगाए गए हैं. परिक्रमा लगाने वाले श्रद्धालुओं को सीधे मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा. मंदिर में सिर्फ आने व जाने का मार्ग रहेगा.
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1. ग्राम बेलरगांव में सामुदायिक भवन निर्माण किया जायेगा।
2. ग्राम सांकरा - घठुला -बेलरगांव-जैतपुरी सड़क मार्ग का चौड़ीकरण किया जायेगा ।
3. ग्राम राजपुर से कर्राघाटी तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जायेगा ।
4. मुरूमसिल्ली बांध की सुरक्षा हेतु प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण कराया जायेगा एवं डिस्टर्व पिंचिंग का सुधार करवाया जायेगा।
5. ग्राम सिरसिदा बालका नदी के कर्णेश्वर संगम मंदिर तक तटबंध निर्माण किया जायेगा।
6. बाजार कुर्रीडीह में धान खरीदी केन्द्र खोला जायेगा।
7. ग्राम खैरभरी में आमानाला नदी के किनारे तथा ग्राम गोविंदपुर में डोंगापथरा के पास पुल निर्माण किया जायेगा।
8. ग्राम पंचायत करैहा में (करैया से सारंगपुरी पहुंच मार्ग में) एवं (करैहा से आडमुड़ा पहुंच मार्ग में) पुलिया निर्माण किया जायेगा।
9. ग्राम पंचायत अमाली, ग्राम गुड़रापारा, मौहाबाहरा, राजपुर और लखनपुरी में मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना के तहत शेड का निर्माण करवाया जायेगा।
10. विकासखण्ड नगरी के 12 ग्राम पंचायतों (चनागांव, गेदरा उमरगांव, कांटाकुरीडीह, लखनपुरी, कसपुर, बनबगौद, परसापानी कल्लेमेटा, भड़सिवना, हिर्रीडीह, घठुला, खम्हरिया) में देवगुड़ी निर्माण एवं मरम्मत कार्य करवाया जायेगा।
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एक. ग्राम बेलरगांव में सामुदायिक भवन निर्माण किया जायेगा। दो. ग्राम सांकरा - घठुला -बेलरगांव-जैतपुरी सड़क मार्ग का चौड़ीकरण किया जायेगा । तीन. ग्राम राजपुर से कर्राघाटी तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जायेगा । चार. मुरूमसिल्ली बांध की सुरक्षा हेतु प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण कराया जायेगा एवं डिस्टर्व पिंचिंग का सुधार करवाया जायेगा। पाँच. ग्राम सिरसिदा बालका नदी के कर्णेश्वर संगम मंदिर तक तटबंध निर्माण किया जायेगा। छः. बाजार कुर्रीडीह में धान खरीदी केन्द्र खोला जायेगा। सात. ग्राम खैरभरी में आमानाला नदी के किनारे तथा ग्राम गोविंदपुर में डोंगापथरा के पास पुल निर्माण किया जायेगा। आठ. ग्राम पंचायत करैहा में एवं पुलिया निर्माण किया जायेगा। नौ. ग्राम पंचायत अमाली, ग्राम गुड़रापारा, मौहाबाहरा, राजपुर और लखनपुरी में मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना के तहत शेड का निर्माण करवाया जायेगा। दस. विकासखण्ड नगरी के बारह ग्राम पंचायतों में देवगुड़ी निर्माण एवं मरम्मत कार्य करवाया जायेगा।
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सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस पर पुलिस की छानबीन जारी है। लोगों ने पूछताछ की जा रही है, साथ ही सुशांत के घर की भी जांच की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने तलाशी में सुशांत के घर से उनकी 5 पर्सनल डायरी और एक फिल्म की स्क्रिप्ट पाई है। सुशांत अपने खुद के एक प्रोजेक्ट पर काम करने वाले थे। वे इस साल जनवरी से ही 'जीनियस एंड ड्रॉप आउट्स' नाम की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे। इस फिल्म का नाम '150 ड्रीम्स' भी रखा गया था।
पुलिस ने मंगलवार को सिद्धार्थ पिथानी और मुकेश छाबरा का बयान रिकॉर्ड किया है। सिद्धार्थ, सुशांत के दोस्त हैं और एक्टर के लिए क्रिएटिव कंटेंट मैनेजर के तौर पर काम कर चुके हैं। वहीं, मुकेश छाबरा ने सुशांत को 'दिल बेचारा' में डाइरेक्ट किया है।
पुलिस ने इसके अलावा सुशांत का मोबाइल फोन और कुछ सामान जब्त कर लिया है। साथ ही सुशांत के घर से पाई गई उनकी 5 पर्सनल डायरी की जांच भी की जा रही है। बता दें कि कुल 10 लोगों के बयान को अब तक सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में रिकॉर्ड किया गया है।
(यदि आपको या आपके जानकारी में किसी व्यक्ति को मदद की जरूरत हो, तो अपने नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। हेल्पलाइन- COOJ मेंटल हेल्थ फाउंडेशनः 0832-2252525, स्नेहा - 044-24640050/ 044-24640060, परिवर्तनः +91 7676 602 602 )
जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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बीसीसीआई (BCCI) ने न्यूजीलैंड (New Zealand) के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है. न्यूजीलैंड को भारत के दौरे पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है. सीरीज का पहला मुकाबला 25 नवंबर से कानपुर में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट मैच तीन दिसंबर से मुंबई में खेला जाएगा. भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) पहले टेस्ट के लिए वहीं रोहित शर्मा को पूरी सीरीज के लिए आराम दिया गया है. कोहली की गैरमौजूदगी में उपकप्तान रहाणे टीम की कमान संभालेंगे. वहीं अनुभवी और दिग्गज बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को उप-कप्तान बनाया गया है.
रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के अलावा बीसीसीआई (BCCI) ने ऋषभ पंत (Rishabh Pant), मोहम्मद शमी , जसप्रीत बुमराह और शार्दुल ठाकुर को भी आराम दिया है. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार खेल दिखाने वाले हनुमा विहारी को टीम से बाहर कर दिया गया है. वहीं सलामी बल्लेबाजी पृथ्वी शॉ और विस्फोटक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को भी मौका नहीं मिला है. शॉ और सूर्य़ कुमार श्रीलंका के दौरे पर टीम इंडिया के साथ थे जहां से उन्हें इंग्लैंड के दौरे पर भेजा गया था. हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में दोनों को ही मौका नहीं दिया गया है.
बीसीसीआई ने इस टेस्ट सीरीज के लिए लगभग पांच साल बाद जयंद यादव को टीम में मौका दिया है. जयंत ने अपनी आखिरी सीरीज साल 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी. इंजरी के कारण टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे श्रेयस अय्यर और आईपीएल में शानदार गेंदबाजी करने वाली प्रसिद्ध कृष्णा को पहली बार टेस्ट टीम में मौका में दिया गया है.
#TeamIndia squad for NZ Tests:
टीम - अजिंक्य रहाणे (कप्तान), चेतेश्वर पुजारा (उपकप्तान), केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर, ऋद्धिमान साहा, केएस भरत, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, आर अश्विन, जयंत यादव, इशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा.
इससे पहले BCCI ने मंगलवार (9 नवंबर) को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैच की T20 सीरीज के लिए टीम का ऐलान किया था. इस टीम का कप्तान रोहित शर्मा को बनाया गया था जबकि उपकप्तान की जिम्मेदारी केएल राहुल को सौंपी गई. विराट कोहली को इस सीरीज के लिए आराम दिया गया है.
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बीसीसीआई ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है. न्यूजीलैंड को भारत के दौरे पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है. सीरीज का पहला मुकाबला पच्चीस नवंबर से कानपुर में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट मैच तीन दिसंबर से मुंबई में खेला जाएगा. भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली पहले टेस्ट के लिए वहीं रोहित शर्मा को पूरी सीरीज के लिए आराम दिया गया है. कोहली की गैरमौजूदगी में उपकप्तान रहाणे टीम की कमान संभालेंगे. वहीं अनुभवी और दिग्गज बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को उप-कप्तान बनाया गया है. रोहित शर्मा के अलावा बीसीसीआई ने ऋषभ पंत , मोहम्मद शमी , जसप्रीत बुमराह और शार्दुल ठाकुर को भी आराम दिया है. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार खेल दिखाने वाले हनुमा विहारी को टीम से बाहर कर दिया गया है. वहीं सलामी बल्लेबाजी पृथ्वी शॉ और विस्फोटक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को भी मौका नहीं मिला है. शॉ और सूर्य़ कुमार श्रीलंका के दौरे पर टीम इंडिया के साथ थे जहां से उन्हें इंग्लैंड के दौरे पर भेजा गया था. हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में दोनों को ही मौका नहीं दिया गया है. बीसीसीआई ने इस टेस्ट सीरीज के लिए लगभग पांच साल बाद जयंद यादव को टीम में मौका दिया है. जयंत ने अपनी आखिरी सीरीज साल दो हज़ार सोलह में इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी. इंजरी के कारण टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे श्रेयस अय्यर और आईपीएल में शानदार गेंदबाजी करने वाली प्रसिद्ध कृष्णा को पहली बार टेस्ट टीम में मौका में दिया गया है. #TeamIndia squad for NZ Tests: टीम - अजिंक्य रहाणे , चेतेश्वर पुजारा , केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर, ऋद्धिमान साहा, केएस भरत, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, आर अश्विन, जयंत यादव, इशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा. इससे पहले BCCI ने मंगलवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैच की Tबीस सीरीज के लिए टीम का ऐलान किया था. इस टीम का कप्तान रोहित शर्मा को बनाया गया था जबकि उपकप्तान की जिम्मेदारी केएल राहुल को सौंपी गई. विराट कोहली को इस सीरीज के लिए आराम दिया गया है.
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कोलकाताः पश्चिम बंगाल के हुगली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वे यहां के बैद्यबटी में मृत पाई गई नाबालिग लड़की के परिवार से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान प्रियांक के काफिले को काले झंडे दिखाए गए। उनके साथ शिकायतकर्ता व भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल भी मौजूद रहीं, उन्हें भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने लोगों को शांत कराया।
सत्तापक्ष के गुंडे रोक रहे रास्ता घटना के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि जब यह सरकार आयोग को सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती, तो हम बच्चों की सुरक्षा प्रदान करने में सरकार की विफलता के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, एक बच्चे की हत्या कर दी गई है। सत्ता पक्ष के गुंडे रास्ता रोक रहे हैं और हमें परिवार से मिलने से रोका जा रहा है। प्रियांक ने कहा, हम पीड़ित परिवार से मिलकर ही वापस जाएंगे।
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कोलकाताः पश्चिम बंगाल के हुगली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वे यहां के बैद्यबटी में मृत पाई गई नाबालिग लड़की के परिवार से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान प्रियांक के काफिले को काले झंडे दिखाए गए। उनके साथ शिकायतकर्ता व भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल भी मौजूद रहीं, उन्हें भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने लोगों को शांत कराया। सत्तापक्ष के गुंडे रोक रहे रास्ता घटना के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि जब यह सरकार आयोग को सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती, तो हम बच्चों की सुरक्षा प्रदान करने में सरकार की विफलता के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, एक बच्चे की हत्या कर दी गई है। सत्ता पक्ष के गुंडे रास्ता रोक रहे हैं और हमें परिवार से मिलने से रोका जा रहा है। प्रियांक ने कहा, हम पीड़ित परिवार से मिलकर ही वापस जाएंगे।
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पूनम पांडे (Poonam Pandey) की गिनती बॉलीवुड की हॉट हसीनाओं में होती है। वह बॉलीवुड फिल्मों में भले कम नजर आई हो लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है। कंगना रनौत के 'लॉकअप' शो में आने के बाद पूनम की लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ है। वह ये शो भले न जीत पाई हो लेकिन लोगों का दिल जीतने में जरूर कामयाब रही हैं।
पूनम अक्सर सोशल मीडिया पर अपने हॉट वीडियोज और फोटोज को लेकर छाई रहती है। लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग किया। जैसा कि आप जानते हैं मानसून की शुरुआत हो चुकी है। मुंबई में भी झमाझम बारिश हो रही है। ऐसे में किसी का भी इस सुहावने मौसम में भुट्टे खाने का मन कर जाएगा। पूनम का भी कुछ ऐसा ही मन हुआ। इसलिए वह कार से उतारकर सीधा भुट्टे के ठेले के पास गई।
यहां पूनम ने भुट्टे पर खुद अपने हाथों से नींबू और नमक लगाया। इसके बाद भुट्टे को हाथ में पकड़कर कई पोज भी दिए। इस दौरान पूनम को देखने के लिए लोगों और मीडिया की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई मोबाइल और कैमरा निकाल उनका वीडियो बनाने लगा।
बारिश में बाहर निकलते समय पूनम ने छोटी ड्रेस तो पहनी, लेकिन उसके ऊपर एक बड़ा सा ट्रांसपरेंट रेनकोट भी डाल लिया। इस लुक में वे काफी कूल लग रही थी।
काम की बात करें तो पूनम को हम सभी आखिरी बार ओटीटी रियलिटी शो लॉकअप में देख चुके हैं। बता दें कि इसके पहले पूनम फियर फेक्टर खतरों के खिलाड़ी में भी दिखाई दे चुकी हैं। वहीं बॉलीवुड में उन्होंने डेब्यू 2013 में नशा फिल्म से किया था। इसमें उन्होंने बहुत बोल्ड सीन दिए थे। इसके बाद वे द जर्नी ऑफ कर्मा नाम की फिल्म में भी दिखाई दी थी।
पूनम 31 साल की हैं। उनका जन्म 11 मार्च 1991 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। वे अपने हॉट फिगर और बोल्ड अवतार को लेकर अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं।
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पूनम पांडे की गिनती बॉलीवुड की हॉट हसीनाओं में होती है। वह बॉलीवुड फिल्मों में भले कम नजर आई हो लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है। कंगना रनौत के 'लॉकअप' शो में आने के बाद पूनम की लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ है। वह ये शो भले न जीत पाई हो लेकिन लोगों का दिल जीतने में जरूर कामयाब रही हैं। पूनम अक्सर सोशल मीडिया पर अपने हॉट वीडियोज और फोटोज को लेकर छाई रहती है। लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग किया। जैसा कि आप जानते हैं मानसून की शुरुआत हो चुकी है। मुंबई में भी झमाझम बारिश हो रही है। ऐसे में किसी का भी इस सुहावने मौसम में भुट्टे खाने का मन कर जाएगा। पूनम का भी कुछ ऐसा ही मन हुआ। इसलिए वह कार से उतारकर सीधा भुट्टे के ठेले के पास गई। यहां पूनम ने भुट्टे पर खुद अपने हाथों से नींबू और नमक लगाया। इसके बाद भुट्टे को हाथ में पकड़कर कई पोज भी दिए। इस दौरान पूनम को देखने के लिए लोगों और मीडिया की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई मोबाइल और कैमरा निकाल उनका वीडियो बनाने लगा। बारिश में बाहर निकलते समय पूनम ने छोटी ड्रेस तो पहनी, लेकिन उसके ऊपर एक बड़ा सा ट्रांसपरेंट रेनकोट भी डाल लिया। इस लुक में वे काफी कूल लग रही थी। काम की बात करें तो पूनम को हम सभी आखिरी बार ओटीटी रियलिटी शो लॉकअप में देख चुके हैं। बता दें कि इसके पहले पूनम फियर फेक्टर खतरों के खिलाड़ी में भी दिखाई दे चुकी हैं। वहीं बॉलीवुड में उन्होंने डेब्यू दो हज़ार तेरह में नशा फिल्म से किया था। इसमें उन्होंने बहुत बोल्ड सीन दिए थे। इसके बाद वे द जर्नी ऑफ कर्मा नाम की फिल्म में भी दिखाई दी थी। पूनम इकतीस साल की हैं। उनका जन्म ग्यारह मार्च एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। वे अपने हॉट फिगर और बोल्ड अवतार को लेकर अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं।
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जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) और आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) के बीच एक सहमति पत्र पर आज हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य जनजातीय लोगों की आजीविका के विकास के लिए औषधीय और सुगन्धित पौधों की खेती को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम ने कहा कि जनजातीय लोग औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं, लेकिन वे अब भी अपने उत्पादों की वास्तविक कीमत से अनजान हैं। इस समझौते से उन्हें अपने उत्पादों के महत्व के बारे में जानकारी मिलेगी और वे इनकी अच्छी कीमत हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों के जरिए सरकार का पूरा ध्यान वन-धन पर केन्द्रित हो गया है और इस समझौते से प्रधानमंत्री के विज़न को और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि योग, जो सदियों से भारत में प्रचलन में रहा है, को आज उचित तरीके से मार्केटिंग करने के बाद ही महत्व हासिल हो सका, इसी तरह अब समय आ गया है कि औषधीय और सुगन्धित पौधों की मार्केटिंग बेहतर तरीके की जाए ताकि जनजातीय लोगों के इन उत्पादों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। उन्होंने अनुमान लगाया कि सही कोशिशों के जरिए आने वाले समय में इस क्षेत्र में करोड़ों रुपये के निवेश आकर्षित हो सकते हैं और इन उत्पादों की पहुंच अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक संभव हो सकेगी।
आयुष राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि इस समझौते से रोजगार सृजन में मदद मिलेगी और जनजातीय लोगों का कौशल विकास होगा, जो उनके लिए लाभदायक साबित होगा। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री सुदर्शन भगत ने कहा कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के विज़न की दिशा में यह समझौता एक अगला कदम है। आयुष मंत्रालय में सचिव श्री वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह समझौता इन उत्पादों के सप्लाई चेन प्रबंधन को मजबूत करने में मददगार साबित होगा और जनजातीय कार्य मंत्रलाय के अंतर्गत ट्राइफेड तथा आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एनएमपीबी दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। जनजातीय मंत्रालय में सचिव श्री दीपक खांडेकर ने कहा कि इस समझौते से जनजातीय लोगों को उनके उत्पादों की अच्छी कीमत हासिल करने मदद मिलेगी।
- जनजातीय इलाकों में संभावित औषधीय पौधों की प्रजाति की पहचान करना।
- अच्छी कृषि प्रथाओं (जीएपी) और अच्छी कृषि संग्रह प्रथाओं पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम में सहयोग करना।
- कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण में मदद करना।
- वन-धन विकास केंद्र स्वयं सहायता समूहों के जरिए औषधीय और सुगन्धित पौधों के लिए पौधारोपण और नर्सरी विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- औषधीय और सुगन्धित पौधों के मानदंड मानकीकरण की सुविधा देना तथा अनुसंधान और परीक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सहायता प्रदान करना।
- प्राथमिक प्रसंस्करण और प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधा के लिए प्रशिक्षण सहित कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण तथा औषधीय पौधों एवं इसके उत्पादों के लिए 'वन-धन विकास केंद्र' की स्थापना।
- वन धन विकास केंद्र के तहत वन धन स्वयं सहायता समूहों का निर्माण।
- औषधीय एवं सुगन्धित पौधों के लिए प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधा, आधारभूत संरचना का निर्माण और मूल्यवर्धन सुविधा की स्थापना।
- छोटे वन उत्पादों (एमएफपी) के लिए आपूर्ति श्रृंखला।
- वित्तीय संस्थानों और अन्य संगठनों के साथ समझौता करके स्वयं सहायता समूहों के लिए पूंजी जुटाने का प्रावधान।
- वन धन विकास केंद्र में शामिल स्वयं सहायता समूहों के जरिए आम तौर पर उपलब्ध और अक्सर उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों की उपयोगिता को विकसित करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के हर्बल उद्यान की स्थापना करना।
- एनएमपीबी और टीआरआई के परामर्श से औषधीय पौधों पर अनुसंधान और विकास अध्ययन को बढ़ावा देना।
औषधीय और सुगन्धित पौधों के संग्रहण और बिक्री में शामिल जनजातीय लोगों को सशक्त करते हुए उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने में यह समझौता एक मील का पत्थर साबित होगा।
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जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया और आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के बीच एक सहमति पत्र पर आज हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य जनजातीय लोगों की आजीविका के विकास के लिए औषधीय और सुगन्धित पौधों की खेती को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम ने कहा कि जनजातीय लोग औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं, लेकिन वे अब भी अपने उत्पादों की वास्तविक कीमत से अनजान हैं। इस समझौते से उन्हें अपने उत्पादों के महत्व के बारे में जानकारी मिलेगी और वे इनकी अच्छी कीमत हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों के जरिए सरकार का पूरा ध्यान वन-धन पर केन्द्रित हो गया है और इस समझौते से प्रधानमंत्री के विज़न को और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि योग, जो सदियों से भारत में प्रचलन में रहा है, को आज उचित तरीके से मार्केटिंग करने के बाद ही महत्व हासिल हो सका, इसी तरह अब समय आ गया है कि औषधीय और सुगन्धित पौधों की मार्केटिंग बेहतर तरीके की जाए ताकि जनजातीय लोगों के इन उत्पादों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। उन्होंने अनुमान लगाया कि सही कोशिशों के जरिए आने वाले समय में इस क्षेत्र में करोड़ों रुपये के निवेश आकर्षित हो सकते हैं और इन उत्पादों की पहुंच अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक संभव हो सकेगी। आयुष राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि इस समझौते से रोजगार सृजन में मदद मिलेगी और जनजातीय लोगों का कौशल विकास होगा, जो उनके लिए लाभदायक साबित होगा। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री सुदर्शन भगत ने कहा कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के विज़न की दिशा में यह समझौता एक अगला कदम है। आयुष मंत्रालय में सचिव श्री वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह समझौता इन उत्पादों के सप्लाई चेन प्रबंधन को मजबूत करने में मददगार साबित होगा और जनजातीय कार्य मंत्रलाय के अंतर्गत ट्राइफेड तथा आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एनएमपीबी दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। जनजातीय मंत्रालय में सचिव श्री दीपक खांडेकर ने कहा कि इस समझौते से जनजातीय लोगों को उनके उत्पादों की अच्छी कीमत हासिल करने मदद मिलेगी। - जनजातीय इलाकों में संभावित औषधीय पौधों की प्रजाति की पहचान करना। - अच्छी कृषि प्रथाओं और अच्छी कृषि संग्रह प्रथाओं पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम में सहयोग करना। - कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण में मदद करना। - वन-धन विकास केंद्र स्वयं सहायता समूहों के जरिए औषधीय और सुगन्धित पौधों के लिए पौधारोपण और नर्सरी विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। - औषधीय और सुगन्धित पौधों के मानदंड मानकीकरण की सुविधा देना तथा अनुसंधान और परीक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सहायता प्रदान करना। - प्राथमिक प्रसंस्करण और प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधा के लिए प्रशिक्षण सहित कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण तथा औषधीय पौधों एवं इसके उत्पादों के लिए 'वन-धन विकास केंद्र' की स्थापना। - वन धन विकास केंद्र के तहत वन धन स्वयं सहायता समूहों का निर्माण। - औषधीय एवं सुगन्धित पौधों के लिए प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधा, आधारभूत संरचना का निर्माण और मूल्यवर्धन सुविधा की स्थापना। - छोटे वन उत्पादों के लिए आपूर्ति श्रृंखला। - वित्तीय संस्थानों और अन्य संगठनों के साथ समझौता करके स्वयं सहायता समूहों के लिए पूंजी जुटाने का प्रावधान। - वन धन विकास केंद्र में शामिल स्वयं सहायता समूहों के जरिए आम तौर पर उपलब्ध और अक्सर उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों की उपयोगिता को विकसित करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के हर्बल उद्यान की स्थापना करना। - एनएमपीबी और टीआरआई के परामर्श से औषधीय पौधों पर अनुसंधान और विकास अध्ययन को बढ़ावा देना। औषधीय और सुगन्धित पौधों के संग्रहण और बिक्री में शामिल जनजातीय लोगों को सशक्त करते हुए उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने में यह समझौता एक मील का पत्थर साबित होगा।
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- क्यों सभी महिला बेवकूफ हैं? - यह व्यक्ति मित्रों को पूछता है लेकिन कुछ लोग उसे जवाब दे सकते हैं, लेकिन हम कोशिश करेंगे।
यह अभिव्यक्ति प्राचीन समय में विकसित हुई, जबवास्तव में, लड़कियों को अध्ययन करने का अवसर नहीं था और उनके पति की तुलना में महिला केवल मूर्ख थी लेकिन समय बीत चुका है, और लड़कियों के लिए, विद्यालयों का निर्माण किया गया था। आज, निष्पक्ष सेक्स के किसी भी प्रतिनिधि किसी भी व्यक्ति की बौद्धिक लड़ाई में सिर शुरू कर सकते हैं।
यह याद रखना चाहिए कि एक आदमी खुद कभी नहींएक बुरे व्यक्ति न बनें वह परिस्थितियों के दबाव में बदलाव करता है जब एक महिला बताती है कि सभी लड़के बकर हैं, तो सबसे पहले उसे स्वयं के बारे में सोचना चाहिए। और क्या वह सही है? शायद उसका पति एक बुरे जीवन से पीता है? सुबह से रात तक एक महिला काम पर या गर्लफ्रेंड्स के साथ घूमती है, लेकिन उसके पास उसके समय के लिए पर्याप्त समय नहीं है। कैसे हो? यह बदलने के लिए जरूरी है आखिरकार, अगर उसके अनुभव पर एक महिला को लगता है कि उसका पति बकरी है, तो फिर एक और जिज्ञासु है जिसे अभी तक नहीं पता है।
बच्चा मां के विपरीत बन जाएगा, क्योंकियह मान लेगा कि सभी महिलाएं मूर्ख हैं यह सहपाठियों या सहपाठियों को पढ़ाने में सक्षम होगा। और महिलाओं को मूर्ख नहीं है क्योंकि वे मूर्ख हैं, लेकिन क्योंकि उन्होंने एक मजबूत दिमाग को स्थापित किया है।
एक और परिदृश्य, लड़का कर सकते हैंदादा या चाचा की पटकथा के तहत जाओ सामान्य तौर पर, उसके पास के किसी भी व्यक्ति अच्छा, सबसे अच्छा विकल्प - जवान आदमी अपना रास्ता चुन लेगा और अपनी लिपि लिखूंगा। यह इस मामले में है कि एक आदमी को जीवन में कुछ वाकई महान हासिल करने का मौका मिलता है।
लेकिन लोग आपसी दावों के कारण न केवल कसम खाता हैं। पुरुषों का आश्चर्य है कि क्यों सभी महिलाएं बेवकूफ हैं, हर बार एक महिला रंगे होने लगती है।
लेकिन आखिरकार, यदि आप इसके बारे में सोचते हैं, तो पुरुष भिन्न होते हैं, औरवे जिस स्त्री को बदलती हैं वह वही है तो क्या हम इस बात से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि बकरी एक आदमी नहीं है, लेकिन जो लड़की अपने पति को नहीं रख सकती वह समस्याएं हैं? शायद शादी के दौरान, वह बदतर दिखना शुरू कर दिया या जीवन का आनंद लेने और एक आदमी को खुशी लाने के लिए बंद हो गया। हमेशा आपको अपने लिए कारण देखना चाहिए, और फिर पूरे सफ़ेद प्रकाश को दोष दें।
इसी तरह, चीजें भी पुरुषों में हैं जोउनके प्रिय द्वारा बदल दिया अपनी पत्नी के प्रेमी को दोष न दें, कि वह अमीर, अच्छे और उसकी कार बेहतर है ये नुकसान नहीं हैं, लेकिन फायदे हैं लेकिन, सबसे ज्यादा संभावना है कि महिला ने भौतिक लाभों के लिए नहीं छोड़ा है, अर्थात् एक अन्य व्यक्ति जो स्नेही, चौकस और देखभाल कर रहे हैं।
यह अपने आप में गुस्सा जमा करने की आवश्यकता नहीं है,बस गुस्सा नहीं होना सीखना चाहिए। यदि फिल्म में 5 मिनट के लिए द्यूत देर हो गई तो कुछ भी भयानक नहीं होगा, लेकिन हॉल में महिला सबसे सुंदर होगी। रेस्तरां में आरक्षण 10 मिनट की देरी के लिए रद्द नहीं किया जाएगा। लेकिन पूरे शाम पति एक महान मूड में होंगे, क्योंकि वह जीतने में कामयाब रहे। इस तरह के trifles में, खुशी बना दिया है यह आवश्यक है, अगर आप किसी एक प्यार की सभी परेशानियों को समझ नहीं है, तो कम से कम उन्हें स्वीकार करने का प्रयास करें।
अगर एक महिला बेवकूफ़ है तो क्या करें, मैं उस पर बस क्यों हूंउन्होंने शादी कर ली? यही कई लोग सोचते हैं और वास्तव में, लोग परिवार क्यों बनाते हैं? यह कहा जाना चाहिए कि जब कोई व्यक्ति अपने चुने हुए एक से शादी करता है, तो वह शायद ही मूर्ख था। नवविवाह एक दूसरे की पूजा करते हैं और ईमानदारी से आशा करते हैं कि उनका खुश संघ हमेशा के लिए चलेगा। लेकिन एक वर्ष या दो पास और गलतफहमी पैदा होती है।
ठीक है, तो यह पहले क्यों नहीं हुआशादी? प्रेमी माफ कर देते हैं और अंदर देते हैं लेकिन जब भावनाओं का प्रवाह कम हो जाता है, तो एक व्यक्ति चरित्र दिखाना शुरू कर देता है, खुद से पूछता है और सामान्य रूप से असहनीय हो जाता है लेकिन फिर लोग परिवार क्यों बनाते हैं?
ये मुख्य कारण हैं लेकिन हर विवाहित या विवाहित पुरुष एक दर्जन से अधिक के साथ आ सकता है। लोग एक साथ रहना चाहते हैं, और उन्हें ऐसा करने के लिए, आपको अपनी स्वार्थ को कम करने और "मूर्ख" और "बकरी" शब्द के अर्थ को भूलने की ज़रूरत है।
यह समझना चाहिए कि आपके बगल में एक ही हैजिस व्यक्ति ने आपने चुना है, जिसका मतलब है कि उसे आपकी योग्यता है आखिरी शब्दों से उसे डांट मत करो। कोई भी प्रेमिका जो खुश शादी में है, वह एक महिला को बता सकती हैः "मूर्ख मत बनो, अपने पति का ख्याल रखना।"
मजबूत सेक्स के सभी सदस्य गर्मी और प्यार करते हैंस्नेह, भले ही वे इनकार करते हैं हर कोई घर में आना चाहता है जहां वे प्यार करते हैं और आपके लिए इंतजार करते हैं। यह एक आरामदायक घोंसला है और इसके लायक बना रहा है और अगर पति घर आती है और थ्रेसहोल्ड से एक परिचित गीत शुरू करने के लिए शुरू होता हैः "महिलाओं को मूर्ख क्यों है।" एक महत्वपूर्ण पुरुष दृश्य को निम्न तरीकों से कम किया जा सकता हैः
महिलाओं को ध्यान और देखभाल प्यार करता हूँ यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को सप्ताह में कम से कम 2-3 रातों देगा, तो परिवार में कोई असहमति नहीं होगी। यह समझना जरूरी है कि एक महिला काम करने जा रही है, एक बच्चा लाता है, तैयार करता है, हटाता है और जाहिर है, दिन के अंत में बहुत थका हुआ है। और अगर शाम को अपने प्यारे को निचले हिस्से में रोना पसंद है, तो आपको उसे स्नेही शब्दों के साथ खुश करने की आवश्यकता है, और वाक्यांश के साथ नहींः "रो मत, मूर्ख मत बनो।"
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- क्यों सभी महिला बेवकूफ हैं? - यह व्यक्ति मित्रों को पूछता है लेकिन कुछ लोग उसे जवाब दे सकते हैं, लेकिन हम कोशिश करेंगे। यह अभिव्यक्ति प्राचीन समय में विकसित हुई, जबवास्तव में, लड़कियों को अध्ययन करने का अवसर नहीं था और उनके पति की तुलना में महिला केवल मूर्ख थी लेकिन समय बीत चुका है, और लड़कियों के लिए, विद्यालयों का निर्माण किया गया था। आज, निष्पक्ष सेक्स के किसी भी प्रतिनिधि किसी भी व्यक्ति की बौद्धिक लड़ाई में सिर शुरू कर सकते हैं। यह याद रखना चाहिए कि एक आदमी खुद कभी नहींएक बुरे व्यक्ति न बनें वह परिस्थितियों के दबाव में बदलाव करता है जब एक महिला बताती है कि सभी लड़के बकर हैं, तो सबसे पहले उसे स्वयं के बारे में सोचना चाहिए। और क्या वह सही है? शायद उसका पति एक बुरे जीवन से पीता है? सुबह से रात तक एक महिला काम पर या गर्लफ्रेंड्स के साथ घूमती है, लेकिन उसके पास उसके समय के लिए पर्याप्त समय नहीं है। कैसे हो? यह बदलने के लिए जरूरी है आखिरकार, अगर उसके अनुभव पर एक महिला को लगता है कि उसका पति बकरी है, तो फिर एक और जिज्ञासु है जिसे अभी तक नहीं पता है। बच्चा मां के विपरीत बन जाएगा, क्योंकियह मान लेगा कि सभी महिलाएं मूर्ख हैं यह सहपाठियों या सहपाठियों को पढ़ाने में सक्षम होगा। और महिलाओं को मूर्ख नहीं है क्योंकि वे मूर्ख हैं, लेकिन क्योंकि उन्होंने एक मजबूत दिमाग को स्थापित किया है। एक और परिदृश्य, लड़का कर सकते हैंदादा या चाचा की पटकथा के तहत जाओ सामान्य तौर पर, उसके पास के किसी भी व्यक्ति अच्छा, सबसे अच्छा विकल्प - जवान आदमी अपना रास्ता चुन लेगा और अपनी लिपि लिखूंगा। यह इस मामले में है कि एक आदमी को जीवन में कुछ वाकई महान हासिल करने का मौका मिलता है। लेकिन लोग आपसी दावों के कारण न केवल कसम खाता हैं। पुरुषों का आश्चर्य है कि क्यों सभी महिलाएं बेवकूफ हैं, हर बार एक महिला रंगे होने लगती है। लेकिन आखिरकार, यदि आप इसके बारे में सोचते हैं, तो पुरुष भिन्न होते हैं, औरवे जिस स्त्री को बदलती हैं वह वही है तो क्या हम इस बात से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि बकरी एक आदमी नहीं है, लेकिन जो लड़की अपने पति को नहीं रख सकती वह समस्याएं हैं? शायद शादी के दौरान, वह बदतर दिखना शुरू कर दिया या जीवन का आनंद लेने और एक आदमी को खुशी लाने के लिए बंद हो गया। हमेशा आपको अपने लिए कारण देखना चाहिए, और फिर पूरे सफ़ेद प्रकाश को दोष दें। इसी तरह, चीजें भी पुरुषों में हैं जोउनके प्रिय द्वारा बदल दिया अपनी पत्नी के प्रेमी को दोष न दें, कि वह अमीर, अच्छे और उसकी कार बेहतर है ये नुकसान नहीं हैं, लेकिन फायदे हैं लेकिन, सबसे ज्यादा संभावना है कि महिला ने भौतिक लाभों के लिए नहीं छोड़ा है, अर्थात् एक अन्य व्यक्ति जो स्नेही, चौकस और देखभाल कर रहे हैं। यह अपने आप में गुस्सा जमा करने की आवश्यकता नहीं है,बस गुस्सा नहीं होना सीखना चाहिए। यदि फिल्म में पाँच मिनट के लिए द्यूत देर हो गई तो कुछ भी भयानक नहीं होगा, लेकिन हॉल में महिला सबसे सुंदर होगी। रेस्तरां में आरक्षण दस मिनट की देरी के लिए रद्द नहीं किया जाएगा। लेकिन पूरे शाम पति एक महान मूड में होंगे, क्योंकि वह जीतने में कामयाब रहे। इस तरह के trifles में, खुशी बना दिया है यह आवश्यक है, अगर आप किसी एक प्यार की सभी परेशानियों को समझ नहीं है, तो कम से कम उन्हें स्वीकार करने का प्रयास करें। अगर एक महिला बेवकूफ़ है तो क्या करें, मैं उस पर बस क्यों हूंउन्होंने शादी कर ली? यही कई लोग सोचते हैं और वास्तव में, लोग परिवार क्यों बनाते हैं? यह कहा जाना चाहिए कि जब कोई व्यक्ति अपने चुने हुए एक से शादी करता है, तो वह शायद ही मूर्ख था। नवविवाह एक दूसरे की पूजा करते हैं और ईमानदारी से आशा करते हैं कि उनका खुश संघ हमेशा के लिए चलेगा। लेकिन एक वर्ष या दो पास और गलतफहमी पैदा होती है। ठीक है, तो यह पहले क्यों नहीं हुआशादी? प्रेमी माफ कर देते हैं और अंदर देते हैं लेकिन जब भावनाओं का प्रवाह कम हो जाता है, तो एक व्यक्ति चरित्र दिखाना शुरू कर देता है, खुद से पूछता है और सामान्य रूप से असहनीय हो जाता है लेकिन फिर लोग परिवार क्यों बनाते हैं? ये मुख्य कारण हैं लेकिन हर विवाहित या विवाहित पुरुष एक दर्जन से अधिक के साथ आ सकता है। लोग एक साथ रहना चाहते हैं, और उन्हें ऐसा करने के लिए, आपको अपनी स्वार्थ को कम करने और "मूर्ख" और "बकरी" शब्द के अर्थ को भूलने की ज़रूरत है। यह समझना चाहिए कि आपके बगल में एक ही हैजिस व्यक्ति ने आपने चुना है, जिसका मतलब है कि उसे आपकी योग्यता है आखिरी शब्दों से उसे डांट मत करो। कोई भी प्रेमिका जो खुश शादी में है, वह एक महिला को बता सकती हैः "मूर्ख मत बनो, अपने पति का ख्याल रखना।" मजबूत सेक्स के सभी सदस्य गर्मी और प्यार करते हैंस्नेह, भले ही वे इनकार करते हैं हर कोई घर में आना चाहता है जहां वे प्यार करते हैं और आपके लिए इंतजार करते हैं। यह एक आरामदायक घोंसला है और इसके लायक बना रहा है और अगर पति घर आती है और थ्रेसहोल्ड से एक परिचित गीत शुरू करने के लिए शुरू होता हैः "महिलाओं को मूर्ख क्यों है।" एक महत्वपूर्ण पुरुष दृश्य को निम्न तरीकों से कम किया जा सकता हैः महिलाओं को ध्यान और देखभाल प्यार करता हूँ यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को सप्ताह में कम से कम दो-तीन रातों देगा, तो परिवार में कोई असहमति नहीं होगी। यह समझना जरूरी है कि एक महिला काम करने जा रही है, एक बच्चा लाता है, तैयार करता है, हटाता है और जाहिर है, दिन के अंत में बहुत थका हुआ है। और अगर शाम को अपने प्यारे को निचले हिस्से में रोना पसंद है, तो आपको उसे स्नेही शब्दों के साथ खुश करने की आवश्यकता है, और वाक्यांश के साथ नहींः "रो मत, मूर्ख मत बनो।"
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LagatarDesk : कलर्स टीवी का सबसे विवादित रियलटी शो बिग बॉस 15 का एलान हो चुका है. हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि इस बार घर में किसकी एंट्री होगी. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रिया चक्रवर्ती बिग बॉस 15 में नजर आ सकती है. रिपोर्ट्स की मानें तो मेकर्स ने रिया चक्रवर्ती और अंकिता लोखंडे को शो में बुलाया है.
बिग बॉस 15 में रिया चक्रवर्ती जरूर आयेंगी. लेकिन शो में वो बतौर कंटेस्टेंट शामिल होगी या फिर ग्रैंड प्रीमियर के दिन ही नजर आ सकती हैं. सोमवार को रिया को एक स्टूडियो के बाहर स्पॉट किया गया. उसी स्टूडियो में तेजस्वी प्रकाश और दलजीत कौर को भी स्पॉट किया गया था.
शो में कई पॉपुलर सेलेब्स शामिल होंगे. हालांकि अभी तक सभी कंटेस्टेंट के नाम सामने नहीं आये हैं. कई नामों पर तो मुहर भी लग चुकी हैं. शो में करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश, सिंबा नागपाल और अफसाना खान नजर आयेंगे. साथ ही निशांत भट्ट, शमिता शेट्टी, डोनल बिष्ट, प्रतीक सहजपाल और उमर रियाज की एंट्री पहले ही कंफर्म हो चुकी है.
बिग बॉस का 15वां सीजन अगले महीने 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा है. इस बार बिग बॉस की थीम जंगल है. जिसमें कंटेस्टेट की राह उतनी आसान नहीं होने वाली. सभी कंटेस्टेंट को जंगल को पार करना होगा. तब जाकर उनके लिए बिग बॉस 15 का द्वार खुलेगा.
2020 में रिया चक्रवर्ती सुर्खियों में थी. सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद रिया विवादों में आयी थी. सुशांत के परिवारवालों ने रिया पर कई आरोप लगाये थे. परिवार वालों का कहना था कि रिया ने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया और ड्रग्स का लत लगाया. इसकी वजह से रिया को जेल की जानी पड़ी थी. फिलहाल वो बेल पर हैं.
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LagatarDesk : कलर्स टीवी का सबसे विवादित रियलटी शो बिग बॉस पंद्रह का एलान हो चुका है. हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि इस बार घर में किसकी एंट्री होगी. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रिया चक्रवर्ती बिग बॉस पंद्रह में नजर आ सकती है. रिपोर्ट्स की मानें तो मेकर्स ने रिया चक्रवर्ती और अंकिता लोखंडे को शो में बुलाया है. बिग बॉस पंद्रह में रिया चक्रवर्ती जरूर आयेंगी. लेकिन शो में वो बतौर कंटेस्टेंट शामिल होगी या फिर ग्रैंड प्रीमियर के दिन ही नजर आ सकती हैं. सोमवार को रिया को एक स्टूडियो के बाहर स्पॉट किया गया. उसी स्टूडियो में तेजस्वी प्रकाश और दलजीत कौर को भी स्पॉट किया गया था. शो में कई पॉपुलर सेलेब्स शामिल होंगे. हालांकि अभी तक सभी कंटेस्टेंट के नाम सामने नहीं आये हैं. कई नामों पर तो मुहर भी लग चुकी हैं. शो में करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश, सिंबा नागपाल और अफसाना खान नजर आयेंगे. साथ ही निशांत भट्ट, शमिता शेट्टी, डोनल बिष्ट, प्रतीक सहजपाल और उमर रियाज की एंट्री पहले ही कंफर्म हो चुकी है. बिग बॉस का पंद्रहवां सीजन अगले महीने दो अक्टूबर से शुरू हो रहा है. इस बार बिग बॉस की थीम जंगल है. जिसमें कंटेस्टेट की राह उतनी आसान नहीं होने वाली. सभी कंटेस्टेंट को जंगल को पार करना होगा. तब जाकर उनके लिए बिग बॉस पंद्रह का द्वार खुलेगा. दो हज़ार बीस में रिया चक्रवर्ती सुर्खियों में थी. सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद रिया विवादों में आयी थी. सुशांत के परिवारवालों ने रिया पर कई आरोप लगाये थे. परिवार वालों का कहना था कि रिया ने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया और ड्रग्स का लत लगाया. इसकी वजह से रिया को जेल की जानी पड़ी थी. फिलहाल वो बेल पर हैं.
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सीओ देवेंद्र मिश्रा के कथित पत्र की चर्चा पर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, 'मीडिया में यह वायरल हो रहा है कि कानपुर एनकाउंटर में जान गंवाने वाले सीओ देवेंद्र मिश्रा ने एक लेटर लिखा है।
लखनऊः उत्तर प्रदेश के कानपुर में शूटआउट के बाद से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे अब भी फरार है। इसी बीच मंगलवार को यूपी पुलिस के ए़डीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा है कि जब तक विकास दुबे को ढूंढ नहीं लेंगे, तब तक चुप नहीं बैठेंगे। उन्हीने कहा, ' कानपुर मुठभेड़ में घायल हुए लोगों की स्थिति अब ठीक है,सब लोग खतरे से बाहर हैं। लेकिन जब तक हम विकास दुबे और उनके साथियों को गिरफ्तार नहीं कर लेते तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे। हमारी 40 टीमें और STF टीमें इसमें लगातार कार्य कर रही है।
सीओ देवेंद्र मिश्रा के कथित पत्र की चर्चा पर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, 'मीडिया में यह वायरल हो रहा है कि कानपुर एनकाउंटर में जान गंवाने वाले सीओ देवेंद्र मिश्रा ने एक लेटर लिखा है। डीजीपी ने इस मामले की जांच के लिए आईजी लेवल के अधिकारी को भेजा है। जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। '
उन्होंने आगे कहा, 'एक ऑडियो क्लिप भी जारी हुआ है लेकिन इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। तत्कालीन एसएसपी, पुलिस स्टेशन इंचार्ज और सर्कल ऑफिसर के बीच बातचीत चल रही है। इसकी सत्यता के बारे में जांच करा रहे हैं। अगर अवश्यक होगा तो सर्किल ऑफिसर के कंप्यूटर का फॉरेंसिक टेस्ट भी कराएंगे। '
यूपी पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की बहु, नौकरानी और पड़ोसी को गिरफ्तार किया है। विकास दुबे की बहु का नाम शमा, और नौकरानी का नाम रेखा है। वहीं हिस्ट्रीशीटर का साथ देने वाले पड़ोसी की पहचान सुरेश वर्मा के तौर पर की गई है। यूपी पुलिस के मुताबिक इन तीनों लोगों ने हिस्ट्रीशीट विकास दुबे का मुठभेड़ में साथ दिया था। तीनों को माती कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। 3 जुलाई की रात को उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम विकास दुबे के आवास पर छापा मारने गई थी। जिसके बाद वहां मुठभेड़ हुई जिसमें तीन अधिकारियों सहित आठ पुलिस वालों की की मौत हो गई थी। विकास दुबे घटना के बाद से फरार है।
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सीओ देवेंद्र मिश्रा के कथित पत्र की चर्चा पर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, 'मीडिया में यह वायरल हो रहा है कि कानपुर एनकाउंटर में जान गंवाने वाले सीओ देवेंद्र मिश्रा ने एक लेटर लिखा है। लखनऊः उत्तर प्रदेश के कानपुर में शूटआउट के बाद से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे अब भी फरार है। इसी बीच मंगलवार को यूपी पुलिस के ए़डीजी प्रशांत कुमार ने कहा है कि जब तक विकास दुबे को ढूंढ नहीं लेंगे, तब तक चुप नहीं बैठेंगे। उन्हीने कहा, ' कानपुर मुठभेड़ में घायल हुए लोगों की स्थिति अब ठीक है,सब लोग खतरे से बाहर हैं। लेकिन जब तक हम विकास दुबे और उनके साथियों को गिरफ्तार नहीं कर लेते तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे। हमारी चालीस टीमें और STF टीमें इसमें लगातार कार्य कर रही है। सीओ देवेंद्र मिश्रा के कथित पत्र की चर्चा पर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, 'मीडिया में यह वायरल हो रहा है कि कानपुर एनकाउंटर में जान गंवाने वाले सीओ देवेंद्र मिश्रा ने एक लेटर लिखा है। डीजीपी ने इस मामले की जांच के लिए आईजी लेवल के अधिकारी को भेजा है। जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। ' उन्होंने आगे कहा, 'एक ऑडियो क्लिप भी जारी हुआ है लेकिन इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। तत्कालीन एसएसपी, पुलिस स्टेशन इंचार्ज और सर्कल ऑफिसर के बीच बातचीत चल रही है। इसकी सत्यता के बारे में जांच करा रहे हैं। अगर अवश्यक होगा तो सर्किल ऑफिसर के कंप्यूटर का फॉरेंसिक टेस्ट भी कराएंगे। ' यूपी पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की बहु, नौकरानी और पड़ोसी को गिरफ्तार किया है। विकास दुबे की बहु का नाम शमा, और नौकरानी का नाम रेखा है। वहीं हिस्ट्रीशीटर का साथ देने वाले पड़ोसी की पहचान सुरेश वर्मा के तौर पर की गई है। यूपी पुलिस के मुताबिक इन तीनों लोगों ने हिस्ट्रीशीट विकास दुबे का मुठभेड़ में साथ दिया था। तीनों को माती कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। तीन जुलाई की रात को उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम विकास दुबे के आवास पर छापा मारने गई थी। जिसके बाद वहां मुठभेड़ हुई जिसमें तीन अधिकारियों सहित आठ पुलिस वालों की की मौत हो गई थी। विकास दुबे घटना के बाद से फरार है।
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'फ़िल्मों में जैसे स्पॉट बॉय होते हैं, मैं वैसा ही हूं. ये मुझसे सारा काम करवाता है. '
ये कहना है 'कौन बनेगा करोड़पति' में सात करोड़ जीतने वाले दो भाइयों में से सबसे छोटे भाई सार्थक नरूला का.
28 साल के अचिन एक मार्केटिंग मैनेजर हैं और 23 साल के सार्थक अभी पढ़ाई कर रहे हैं.
इन दोनों से बीबीसी ने की ख़ास बातचीत. जानिए इन दोनों भाइयों के बारे में सात ख़ास बातें.
1. 'फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट' के लिए अचिन अपने घर के नज़दीक लगे एटीएम में जाकर प्रैक्टिस किया करते थे.
2. अचिन के पिता मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े फैन हैं और उन्हीं के नाम पर 'अचिन' नाम रखा गया.
3. अचिन पांच बार 'फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट' से पहले वाले ऑडिशन के राउंड में पहुंचे पर आगे नहीं जा पाए.
4. अचिन ने अपने भाई सार्थक नरूला को अपनी मर्ज़ी से चुना क्योंकि वो एसएससी (शॉर्ट सर्विस कमीशन) के लिए तैयारी कर रहे हैं और उन्हें करंट अफ़ेयर्स का अच्छा ख़ासा ज्ञान है. अचिन के मुताबिक़ घर का पैसा घर में ही रहेगा.
5. सामान्य ज्ञान की जितनी भी किताबें अचिन ने पढ़ीं हैं वो सब की सब उनके छोटे भाई सार्थक नरूला लेकर आए थे.
6. दोनों भाई आपस में लड़ते रहते हैं और अचिन तो सार्थक से स्पॉट बॉय की तरह काम लेते हैं. दोनों के बीच पांच साल का फ़र्क़ है तो सार्थक कहते हैं कि हम दोनों के बीच एक सरकार का फ़र्क़ है.
7. सात करोड़ जीतने वाले दोनों भाइयों ने कभी नहीं सोचा था कि वो सात करोड़ जीत जाएंगे. वो सिर्फ 25 लाख जीतना चाहते थे और उन्हें ख़ुद से बस इतनी ही उम्मीद थी.
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केबीसीः दिल्ली के दो भाई बने 'महाकरोड़पति'
पहले एक, फिर दो. . तीन, फिर पांच और अब सात करोड़ रुपए. 'कौन बनेगा करोड़पति' में इस बार सात करोड़ की रक़म जीती है दो भाइयों ने.
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'फ़िल्मों में जैसे स्पॉट बॉय होते हैं, मैं वैसा ही हूं. ये मुझसे सारा काम करवाता है. ' ये कहना है 'कौन बनेगा करोड़पति' में सात करोड़ जीतने वाले दो भाइयों में से सबसे छोटे भाई सार्थक नरूला का. अट्ठाईस साल के अचिन एक मार्केटिंग मैनेजर हैं और तेईस साल के सार्थक अभी पढ़ाई कर रहे हैं. इन दोनों से बीबीसी ने की ख़ास बातचीत. जानिए इन दोनों भाइयों के बारे में सात ख़ास बातें. एक. 'फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट' के लिए अचिन अपने घर के नज़दीक लगे एटीएम में जाकर प्रैक्टिस किया करते थे. दो. अचिन के पिता मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े फैन हैं और उन्हीं के नाम पर 'अचिन' नाम रखा गया. तीन. अचिन पांच बार 'फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट' से पहले वाले ऑडिशन के राउंड में पहुंचे पर आगे नहीं जा पाए. चार. अचिन ने अपने भाई सार्थक नरूला को अपनी मर्ज़ी से चुना क्योंकि वो एसएससी के लिए तैयारी कर रहे हैं और उन्हें करंट अफ़ेयर्स का अच्छा ख़ासा ज्ञान है. अचिन के मुताबिक़ घर का पैसा घर में ही रहेगा. पाँच. सामान्य ज्ञान की जितनी भी किताबें अचिन ने पढ़ीं हैं वो सब की सब उनके छोटे भाई सार्थक नरूला लेकर आए थे. छः. दोनों भाई आपस में लड़ते रहते हैं और अचिन तो सार्थक से स्पॉट बॉय की तरह काम लेते हैं. दोनों के बीच पांच साल का फ़र्क़ है तो सार्थक कहते हैं कि हम दोनों के बीच एक सरकार का फ़र्क़ है. सात. सात करोड़ जीतने वाले दोनों भाइयों ने कभी नहीं सोचा था कि वो सात करोड़ जीत जाएंगे. वो सिर्फ पच्चीस लाख जीतना चाहते थे और उन्हें ख़ुद से बस इतनी ही उम्मीद थी. केबीसीः दिल्ली के दो भाई बने 'महाकरोड़पति' पहले एक, फिर दो. . तीन, फिर पांच और अब सात करोड़ रुपए. 'कौन बनेगा करोड़पति' में इस बार सात करोड़ की रक़म जीती है दो भाइयों ने.
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खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया हैं। साथ ही साथ किसानों को ऑनलाइन वेबसाइट पोर्टल पर जा कर ई-केवाईसी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपको बता दें की मैनपुरी, आगरा, गोरखपुर में अभी तक आधे किसानों ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया हैं। ऐसे में 11वीं क़िस्त का पैसा रूक सकता हैं। इसलिए अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया हैं तो जल्द से जल्द करें।
मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से ई-केवाईसी कराने की अपील की है। केंद्र सरकार ने किसानों को मई के अंत तक ई-केवाईसी कराने के लिए कहा हैं। ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसानों के बैंक अकाउंट में 2000 रुपये की राशि आएगी।
ऐसे करें ई-केवाईसी?
* सबसे पहले पीएम किसान पोर्टल https://pmkisan. gov. in/ पर जाएं।
* फार्मर कॉर्नर (Farmers corner) पर eKYC का लिंक दिखेगा, उसपर क्लिक करें।
* इसके बाद अपना आधार नंबर और कैप्चा डालकर सब्मिट करें।
* आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा उसे वेरिफाई करें।
* इतना करने के बाद आपका ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया हैं। साथ ही साथ किसानों को ऑनलाइन वेबसाइट पोर्टल पर जा कर ई-केवाईसी करने के निर्देश दिए गए हैं। आपको बता दें की मैनपुरी, आगरा, गोरखपुर में अभी तक आधे किसानों ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया हैं। ऐसे में ग्यारहवीं क़िस्त का पैसा रूक सकता हैं। इसलिए अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया हैं तो जल्द से जल्द करें। मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से ई-केवाईसी कराने की अपील की है। केंद्र सरकार ने किसानों को मई के अंत तक ई-केवाईसी कराने के लिए कहा हैं। ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसानों के बैंक अकाउंट में दो हज़ार रुपयापये की राशि आएगी। ऐसे करें ई-केवाईसी? * सबसे पहले पीएम किसान पोर्टल https://pmkisan. gov. in/ पर जाएं। * फार्मर कॉर्नर पर eKYC का लिंक दिखेगा, उसपर क्लिक करें। * इसके बाद अपना आधार नंबर और कैप्चा डालकर सब्मिट करें। * आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा उसे वेरिफाई करें। * इतना करने के बाद आपका ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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TV9 EXCLUSIVE: Antilia Case में वाजे ही क्यों, NIA ने ईमानदार जांच कर दी तो कई फंसेंगे!
इन तमाम हड़बड़ाहट वाले कदमों से साफ जाहिर है कि मुंबई पुलिस किस कदर खुद को चारों ओर से बुरी तरह से फंसा हुआ देख रही है. महाराष्ट्र पुलिस के ही एक पूर्व आला अफसर की मानें तो मामला उतना गंभीर था नहीं, जितना आज बना डाला गया है.
उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर के बाहर संदिग्ध हालातों में विस्फोटक लदी कार बरामदगी का मामला सुलझने के बजाए उलझता जा रहा है. जिस मुंबई पुलिस को संदिग्ध कार मामले की जांच करनी थी, वो खुद ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि NIA के निशाने पर है. उसके एक अधिकारी सचिन वाजे बीती रात (शनिवार-रविवार मध्य रात्रि) में एनआईए की तरफ से गिरफ्तार कर लिए गए.
जब तक संदिग्ध कार की सच्चाई सामने आती उससे पहले ही कार का असली मालिक यानि मनसुख हिरेन की लाश संदिग्ध हालातों में पानी में लावारिस हाल में तैरती मिल गई. एक संदिग्ध कार की जांच मुंबई पुलिस पूरी कर भी नहीं पाई थी कि वो विवादों में फंस गई. विवाद भी ऐसा कि पुलिस अफसर सचिन वाजे को एक दिन में दो-दो बार ट्रांसफर करना पड़ गया.
इन तमाम हड़बड़ाहट वाले कदमों से साफ जाहिर है कि मुंबई पुलिस किस कदर खुद को चारों ओर से बुरी तरह से फंसा हुआ देख रही है. महाराष्ट्र पुलिस के ही एक पूर्व आला अफसर की मानें तो मामला उतना गंभीर था नहीं, जितना आज बना डाला गया है. किसी को पता ही नहीं है कि आखिर एक स्टैंड लेकर करना क्या है? देखने से ऐसे लग रहा है कि जांच का कंट्रोल रूम मुंबई पुलिस नहीं कोई अप्रत्यक्ष शख्स या फिर ताकत है, जिसे खुद को नहीं पता है कि कानून क्या होता है और इस तरह के गंभीर मामलों में कैसे फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना होता है. इसका सबसे बड़ा नमूना है विस्फोटक लदी कार की जांच से शुरुआती दौर में जुड़े पुलिस अफसर सचिन वाजे, जिन्हें आनन-फानन में इधर से उधर ट्रांसफर करके असली आदमी खुद की गर्दन बचाने की जानी-अनजानी कोशिशें करता रहा.
मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी लावारिस कार में आखिर किसका स्वार्थ हो सकता है जो वो सचिन वाजे जैसे अफसरों को इधर से उधर घंटों में बदलवाता रहेगा. वो भी तब जब अब सचिन वाजे एनआईए की तरफ से गिरफ्तार किए जा चुके हैं. क्या आप ये कहना चाहते हैं कि सचिन वाजे निर्दोष हैं, पूछने पर इसी पूर्व आईपीएस अधिकारी ने खुद की पहचान उजागर ना करने की शर्त पर रविवार को टीवी9 भारतवर्ष से कहा कि नहीं मैं अब चूंकि महकमे में नहीं हूं. रिटायर हुए भी दस साल से ज्यादा हो चुके हैं, हालांकि मैं अगर महकमे (मुंबई पुलिस में) में होता तो भी, शायद नहीं बोलता. तब तक जब तक सीधे-सीधे इस घटना में मुझे इनवॉल्व नहीं किया गया होता. मैं तो आज इस मामले की जांच में दिन रात आ रहे बदलाव से हैरत में हूं. देखने से साफ लग रहा है, मुझे ही नहीं सबको लग रहा होगा कि केस एनआईए के पास भेजे जाने से पहले तक जांच की कोई दिशा ही तय नहीं थी.
टीवी9 भारतवर्ष के एक सवाल के जबाब में इसी पूर्व पुलिस अफसर ने कहा कि लगता है कि एनआईए के पास जांच पहुंचने के बाद कुछ नया निकल कर आ जाएगा. मुझे उम्मीद है कि एनआईए ने अगर बिना किसी दबाब के ईमानदार जांच कर ली तो एक सचिन वाजे ही क्यों, मुंबई पुलिस के और भी तमाम अफसर उलझ जाएंगे, क्योंकि आज इस मामले की दुर्गति के लिए मुंबई पुलिस के कई मौजूदा अफसर भी कम जिम्मेदार नहीं है. मैं जो देख-समझ रहा हूं कि अंबानी के (मुकेश अंबानी) घर के बाहर मिली विस्फोटक लदी लावारिस स्कॉर्पियो कार की जांच को जाने-अनजाने लंबा खींचा गया. जो जांच कार मालिक की लाश मिलने के बाद एनआईए को दी गई, वो जांच उसकी मौत से पहले ही क्यों नहीं एनआईए को वक्त रहते दे दी गई. अगर कार मालिक भी आज जीवित होता तो शायद. जांच की दशा और दिशा कुछ और ही हो सकती थी, जिस पर मैं फिलहाल कुछ नहीं बोलना चाहता.
ये भी पढ़ें- TV9 EXCLUSIVE: Ambani Bomb Scare Case में नंबर प्लेट का खेल! उलझ रहे हैं या उलझा रहे हैं वाजे?
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TVनौ EXCLUSIVE: Antilia Case में वाजे ही क्यों, NIA ने ईमानदार जांच कर दी तो कई फंसेंगे! इन तमाम हड़बड़ाहट वाले कदमों से साफ जाहिर है कि मुंबई पुलिस किस कदर खुद को चारों ओर से बुरी तरह से फंसा हुआ देख रही है. महाराष्ट्र पुलिस के ही एक पूर्व आला अफसर की मानें तो मामला उतना गंभीर था नहीं, जितना आज बना डाला गया है. उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर के बाहर संदिग्ध हालातों में विस्फोटक लदी कार बरामदगी का मामला सुलझने के बजाए उलझता जा रहा है. जिस मुंबई पुलिस को संदिग्ध कार मामले की जांच करनी थी, वो खुद ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि NIA के निशाने पर है. उसके एक अधिकारी सचिन वाजे बीती रात में एनआईए की तरफ से गिरफ्तार कर लिए गए. जब तक संदिग्ध कार की सच्चाई सामने आती उससे पहले ही कार का असली मालिक यानि मनसुख हिरेन की लाश संदिग्ध हालातों में पानी में लावारिस हाल में तैरती मिल गई. एक संदिग्ध कार की जांच मुंबई पुलिस पूरी कर भी नहीं पाई थी कि वो विवादों में फंस गई. विवाद भी ऐसा कि पुलिस अफसर सचिन वाजे को एक दिन में दो-दो बार ट्रांसफर करना पड़ गया. इन तमाम हड़बड़ाहट वाले कदमों से साफ जाहिर है कि मुंबई पुलिस किस कदर खुद को चारों ओर से बुरी तरह से फंसा हुआ देख रही है. महाराष्ट्र पुलिस के ही एक पूर्व आला अफसर की मानें तो मामला उतना गंभीर था नहीं, जितना आज बना डाला गया है. किसी को पता ही नहीं है कि आखिर एक स्टैंड लेकर करना क्या है? देखने से ऐसे लग रहा है कि जांच का कंट्रोल रूम मुंबई पुलिस नहीं कोई अप्रत्यक्ष शख्स या फिर ताकत है, जिसे खुद को नहीं पता है कि कानून क्या होता है और इस तरह के गंभीर मामलों में कैसे फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाना होता है. इसका सबसे बड़ा नमूना है विस्फोटक लदी कार की जांच से शुरुआती दौर में जुड़े पुलिस अफसर सचिन वाजे, जिन्हें आनन-फानन में इधर से उधर ट्रांसफर करके असली आदमी खुद की गर्दन बचाने की जानी-अनजानी कोशिशें करता रहा. मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी लावारिस कार में आखिर किसका स्वार्थ हो सकता है जो वो सचिन वाजे जैसे अफसरों को इधर से उधर घंटों में बदलवाता रहेगा. वो भी तब जब अब सचिन वाजे एनआईए की तरफ से गिरफ्तार किए जा चुके हैं. क्या आप ये कहना चाहते हैं कि सचिन वाजे निर्दोष हैं, पूछने पर इसी पूर्व आईपीएस अधिकारी ने खुद की पहचान उजागर ना करने की शर्त पर रविवार को टीवीनौ भारतवर्ष से कहा कि नहीं मैं अब चूंकि महकमे में नहीं हूं. रिटायर हुए भी दस साल से ज्यादा हो चुके हैं, हालांकि मैं अगर महकमे में होता तो भी, शायद नहीं बोलता. तब तक जब तक सीधे-सीधे इस घटना में मुझे इनवॉल्व नहीं किया गया होता. मैं तो आज इस मामले की जांच में दिन रात आ रहे बदलाव से हैरत में हूं. देखने से साफ लग रहा है, मुझे ही नहीं सबको लग रहा होगा कि केस एनआईए के पास भेजे जाने से पहले तक जांच की कोई दिशा ही तय नहीं थी. टीवीनौ भारतवर्ष के एक सवाल के जबाब में इसी पूर्व पुलिस अफसर ने कहा कि लगता है कि एनआईए के पास जांच पहुंचने के बाद कुछ नया निकल कर आ जाएगा. मुझे उम्मीद है कि एनआईए ने अगर बिना किसी दबाब के ईमानदार जांच कर ली तो एक सचिन वाजे ही क्यों, मुंबई पुलिस के और भी तमाम अफसर उलझ जाएंगे, क्योंकि आज इस मामले की दुर्गति के लिए मुंबई पुलिस के कई मौजूदा अफसर भी कम जिम्मेदार नहीं है. मैं जो देख-समझ रहा हूं कि अंबानी के घर के बाहर मिली विस्फोटक लदी लावारिस स्कॉर्पियो कार की जांच को जाने-अनजाने लंबा खींचा गया. जो जांच कार मालिक की लाश मिलने के बाद एनआईए को दी गई, वो जांच उसकी मौत से पहले ही क्यों नहीं एनआईए को वक्त रहते दे दी गई. अगर कार मालिक भी आज जीवित होता तो शायद. जांच की दशा और दिशा कुछ और ही हो सकती थी, जिस पर मैं फिलहाल कुछ नहीं बोलना चाहता. ये भी पढ़ें- TVनौ EXCLUSIVE: Ambani Bomb Scare Case में नंबर प्लेट का खेल! उलझ रहे हैं या उलझा रहे हैं वाजे?
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नोएडा के ग्रेंड ओमैक्स सोसायटी में महिला से अभद्रता करने के मामले में गिरफ्तार श्रीकांत त्यागी के केस में अपना नाम आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने नोएडा पुलिस आयुक्त अलोक सिंह को साढ़े 11 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। उन्होंने शनिवार को ट्वीट करते हुए लिखा, पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर ने विधानसभा पास को लेकर श्रीकांत त्यागी प्रकरण में बिना जांच-पड़ताल किए गैर जिम्मेदाराना हरकत कर प्रेस के माध्यम से पूरे देश में मेरी छवि-प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता को धूमिल करने का प्रयास किया। उसके परिप्रेक्ष्य में मानहानि करने संबंधी कानूनी नोटिस भेजी।
श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस आयुक्त अलोक सिंह ने आठ अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उसमें उन्होंने बताया था कि कैसे श्रीकांत पुलिस को इतने दिन तक चकमा देता रहा और फिर कैसे पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इस दौरान उन्होंने बताया था कि श्रीकांत की गिरफ्तारी के दौरान उसके पास पांच कार बरामद की गईं। इनमें से एक कार पर विधायक का स्टीकर लगा हुआ था, जिसके बारे में पूछने पर श्रीकांत ने बताया कि यह उसे स्वामी प्रसाद मौर्य की मदद से मिला है।
पुलिस आयुक्त ने बताया था कि हमारी टीमें इसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए थीं। नकुल त्यागी, संजय, ड्राइवर राहुल इसके मुख्य साथी हैं। ये सभी त्यागी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए थे। पुलिस आयुक्त ने जानकारी दी थी कि इसके पास से मिले वाहनों में 001 नंबर कॉमन है। आरोपी ने सभी गाड़ियों के नंबर के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं। गिरफ्तारी के दौरान दो फ्च्यूनर, दो सफारी और होंडा सिविक बरामद हुई थी।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता के मार्फत भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जानबूझकर और दुर्भावना से उनका नाम श्रीकांत त्यागी के साथ जोड़ा गया। नोटिस में अधिवक्ता जे एस कश्यप ने कहा है कि उनके मुवक्किल विधान परिषद में सदस्य हैं और छह बार विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। नौ अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेस में बिना किसी सबूत के कहा गया है कि श्रीकांत त्यागी को उन्होंने सचिवालय पास (वाहन पास) प्रदान किया था। इस कृत्य से न सिर्फ प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि राजनीतिक करियर को कलंकित करते हैं।
उन्होंने सामान्य नुकसान कुल 11 करोड़ 50 लाख 50 हजार (सामान्य और विशेष मुआवजे के रूप में) का नोटिस देते हुए 15 दिन का वक्त दिया है। इसके बाद कानून के अनुसार आपराधिक और दीवानी कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि महिला के साथ की गई अभद्रता के लिए वह खेद जताता है। उससे आवेश में गलती हो गई।
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नोएडा के ग्रेंड ओमैक्स सोसायटी में महिला से अभद्रता करने के मामले में गिरफ्तार श्रीकांत त्यागी के केस में अपना नाम आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने नोएडा पुलिस आयुक्त अलोक सिंह को साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। उन्होंने शनिवार को ट्वीट करते हुए लिखा, पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर ने विधानसभा पास को लेकर श्रीकांत त्यागी प्रकरण में बिना जांच-पड़ताल किए गैर जिम्मेदाराना हरकत कर प्रेस के माध्यम से पूरे देश में मेरी छवि-प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता को धूमिल करने का प्रयास किया। उसके परिप्रेक्ष्य में मानहानि करने संबंधी कानूनी नोटिस भेजी। श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस आयुक्त अलोक सिंह ने आठ अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उसमें उन्होंने बताया था कि कैसे श्रीकांत पुलिस को इतने दिन तक चकमा देता रहा और फिर कैसे पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इस दौरान उन्होंने बताया था कि श्रीकांत की गिरफ्तारी के दौरान उसके पास पांच कार बरामद की गईं। इनमें से एक कार पर विधायक का स्टीकर लगा हुआ था, जिसके बारे में पूछने पर श्रीकांत ने बताया कि यह उसे स्वामी प्रसाद मौर्य की मदद से मिला है। पुलिस आयुक्त ने बताया था कि हमारी टीमें इसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए थीं। नकुल त्यागी, संजय, ड्राइवर राहुल इसके मुख्य साथी हैं। ये सभी त्यागी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए थे। पुलिस आयुक्त ने जानकारी दी थी कि इसके पास से मिले वाहनों में एक नंबर कॉमन है। आरोपी ने सभी गाड़ियों के नंबर के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं। गिरफ्तारी के दौरान दो फ्च्यूनर, दो सफारी और होंडा सिविक बरामद हुई थी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता के मार्फत भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जानबूझकर और दुर्भावना से उनका नाम श्रीकांत त्यागी के साथ जोड़ा गया। नोटिस में अधिवक्ता जे एस कश्यप ने कहा है कि उनके मुवक्किल विधान परिषद में सदस्य हैं और छह बार विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। नौ अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेस में बिना किसी सबूत के कहा गया है कि श्रीकांत त्यागी को उन्होंने सचिवालय पास प्रदान किया था। इस कृत्य से न सिर्फ प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि राजनीतिक करियर को कलंकित करते हैं। उन्होंने सामान्य नुकसान कुल ग्यारह करोड़ पचास लाख पचास हजार का नोटिस देते हुए पंद्रह दिन का वक्त दिया है। इसके बाद कानून के अनुसार आपराधिक और दीवानी कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि महिला के साथ की गई अभद्रता के लिए वह खेद जताता है। उससे आवेश में गलती हो गई।
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पटना हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जहानाबाद जिले के बहुचर्चित सेनारी नरसंहार के सभी 13 दोषियों को बरी कर दिया है। साल 1999 की इस घटना में एक पूर्व माओवादी संगठन द्वारा बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित सेनारी गांव में 34 लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह एवं न्यायाधीश अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद करते हुए सभी 13 दोषियों को तुरंत रिहा करने का भी आदेश दिया।
बता दें कि 18 मार्च, 1999 की रात को प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसी के उग्रवादियों ने सेनारी गांव को चारों तरफ से घेर लिया था। इसके बाद एक जाति विशेष के 34 लोगों को उनके घरों से जबरन निकालकर ठाकुरवाड़ी के पास ले जाकर गला रेत कर हत्या कर दी थी। इस घटना के बिहार की राजनीति में भयानक भूचाल आया था। अब हाई कोर्ट ने 22 साल बाद इस घटना के आरोपियों को बरी कर दिया है। इसी मामले में जहानाबाद की जिला अदालत ने 15 नवंबर, 2016 को 10 अभियुक्तों को मौत की सजा सुनायी थी, जबकि तीन अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा दी थी और उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उस समय इस केस के दो दोषी फरार चल रहे थे। इसके अलावा निचली अदालत ने पीड़ितों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था।
मालूम हो कि इस केस के कुल 70 आरोपितों में से चार की मौत हो चुकी है। 2016 में निचली अदालत पहले ही 20 आरोपितों को बरी कर चुकी थी। कोर्ट ने 1. बचेश कुमार सिंह, 2. बुधन यादव, 3. गोपाल साव, 4. बुटइ यादव, 5. सतेंद्र दास, 6. ललन पासी, 7. द्वारिका पासवान, 8. करीमन पासवान, 9. गोरइ पासवान, 10. उमा पासवान, 11. मुंगेश्वर यादव, 12. विनय पासवान, 13. अरविंद पासवान को बरी कर दिया है।
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पटना हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जहानाबाद जिले के बहुचर्चित सेनारी नरसंहार के सभी तेरह दोषियों को बरी कर दिया है। साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे की इस घटना में एक पूर्व माओवादी संगठन द्वारा बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित सेनारी गांव में चौंतीस लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह एवं न्यायाधीश अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद करते हुए सभी तेरह दोषियों को तुरंत रिहा करने का भी आदेश दिया। बता दें कि अट्ठारह मार्च, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे की रात को प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसी के उग्रवादियों ने सेनारी गांव को चारों तरफ से घेर लिया था। इसके बाद एक जाति विशेष के चौंतीस लोगों को उनके घरों से जबरन निकालकर ठाकुरवाड़ी के पास ले जाकर गला रेत कर हत्या कर दी थी। इस घटना के बिहार की राजनीति में भयानक भूचाल आया था। अब हाई कोर्ट ने बाईस साल बाद इस घटना के आरोपियों को बरी कर दिया है। इसी मामले में जहानाबाद की जिला अदालत ने पंद्रह नवंबर, दो हज़ार सोलह को दस अभियुक्तों को मौत की सजा सुनायी थी, जबकि तीन अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा दी थी और उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उस समय इस केस के दो दोषी फरार चल रहे थे। इसके अलावा निचली अदालत ने पीड़ितों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। मालूम हो कि इस केस के कुल सत्तर आरोपितों में से चार की मौत हो चुकी है। दो हज़ार सोलह में निचली अदालत पहले ही बीस आरोपितों को बरी कर चुकी थी। कोर्ट ने एक. बचेश कुमार सिंह, दो. बुधन यादव, तीन. गोपाल साव, चार. बुटइ यादव, पाँच. सतेंद्र दास, छः. ललन पासी, सात. द्वारिका पासवान, आठ. करीमन पासवान, नौ. गोरइ पासवान, दस. उमा पासवान, ग्यारह. मुंगेश्वर यादव, बारह. विनय पासवान, तेरह. अरविंद पासवान को बरी कर दिया है।
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हमें अपने मालिक को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। इससे हमारा ही नुकसान होता है। जब हमे हमारा मालिक डाटता है त वह हमारे हित के लिए भी हो सकता है। अगर मालिक नाराज हो गया तो हमारा बड़ा नुकसान भी कर सकता है।
अगर आप यह बात सोचते है कि वह हमारा क्या बिगाड़ लेगा हम उसे डराकर हर काम करा सकते है, तो आप यह मत भूलिए कि वह आपके मालिक है। जब उसे मौका मिलेगा वह आपका नुकसान कर देगा। इसलिए यह काम करने से बचना चाहिए।
सांप को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। एक छोटा सा सांप भी बड़े सांप की तरह जहर वाला होता है। जिस तरह बड़ा सांप एक बार काट लेता है तो आपका जीवन मुश्किल में पड़ जाता है। उसी तरह छोटा सांप भी कर सकता है। जो आपकी मौत का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी सांप को छोटा यानी कमजोर नहीं समझना चाहिए।
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हमें अपने मालिक को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। इससे हमारा ही नुकसान होता है। जब हमे हमारा मालिक डाटता है त वह हमारे हित के लिए भी हो सकता है। अगर मालिक नाराज हो गया तो हमारा बड़ा नुकसान भी कर सकता है। अगर आप यह बात सोचते है कि वह हमारा क्या बिगाड़ लेगा हम उसे डराकर हर काम करा सकते है, तो आप यह मत भूलिए कि वह आपके मालिक है। जब उसे मौका मिलेगा वह आपका नुकसान कर देगा। इसलिए यह काम करने से बचना चाहिए। सांप को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। एक छोटा सा सांप भी बड़े सांप की तरह जहर वाला होता है। जिस तरह बड़ा सांप एक बार काट लेता है तो आपका जीवन मुश्किल में पड़ जाता है। उसी तरह छोटा सांप भी कर सकता है। जो आपकी मौत का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी सांप को छोटा यानी कमजोर नहीं समझना चाहिए।
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लखनऊ के सीआरपीएफ बिजनौर कैंप में शनिवार दोपहर फायरिंग हो गई. फायरिंग में एक हेड कांस्टेबल को गोली लग गई. घायल जवान को तुरंत निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार लखनऊ के सीआरपीएफ बिजनौर कैंप में शनिवार को फायरिंग हो गई. फायरिंग में हेड कांस्टेबल अरविंद कुमार को गोली लग गई. फायरिंग में एके 47 से हुई है. घायल हेड कांस्टेबल को तुरंत निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस के आलाधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है.
सूत्रों के मुताबिक फायरिंग के पीछे अफसरों से कहासुनी का मामला सामने आ रहा है. फिलहाल टना के पीछे की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. पुलिस के अधिकारी घटना की जांच में जुट गए है. इस मामले में पुलिस का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.
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लखनऊ के सीआरपीएफ बिजनौर कैंप में शनिवार दोपहर फायरिंग हो गई. फायरिंग में एक हेड कांस्टेबल को गोली लग गई. घायल जवान को तुरंत निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार लखनऊ के सीआरपीएफ बिजनौर कैंप में शनिवार को फायरिंग हो गई. फायरिंग में हेड कांस्टेबल अरविंद कुमार को गोली लग गई. फायरिंग में एके सैंतालीस से हुई है. घायल हेड कांस्टेबल को तुरंत निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस के आलाधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक फायरिंग के पीछे अफसरों से कहासुनी का मामला सामने आ रहा है. फिलहाल टना के पीछे की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. पुलिस के अधिकारी घटना की जांच में जुट गए है. इस मामले में पुलिस का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. .
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सोनू सूद (Sonu Sood) इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम है। हाल में ही वो नागपुर के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पहुंचे। खास बात ये है कि इसी कॉलेज से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सोनू सूद अपने काम के चलते नागपुर (Nagpur) में थे, लेकिन अपने शिक्षकों से मिलने के लिए उन्होंने कुछ समय निकाल लिया। जैसे ही वहां के छात्रों को पता चला कि बॉलीवुड एक्टर वहाँ पहुंचे हैं तो वो दौड़ कर उनके पास पहुंचे, कुछ तसवीरें ली और अपने अनुभव साझा किये। सोनू सूद से मिलकर छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।
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सोनू सूद इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम है। हाल में ही वो नागपुर के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पहुंचे। खास बात ये है कि इसी कॉलेज से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सोनू सूद अपने काम के चलते नागपुर में थे, लेकिन अपने शिक्षकों से मिलने के लिए उन्होंने कुछ समय निकाल लिया। जैसे ही वहां के छात्रों को पता चला कि बॉलीवुड एक्टर वहाँ पहुंचे हैं तो वो दौड़ कर उनके पास पहुंचे, कुछ तसवीरें ली और अपने अनुभव साझा किये। सोनू सूद से मिलकर छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।
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जालौन। बुंदेलखंड के जालौन में मौसम ने अचानक करवट बदलने के साथ ही तेज बारिश और ओले गिरने से किसानों के चेहरे पर मायूसी देखने को मिली ओले गिरने से किसानों की मटर, मसूर और चने की फसल को भारी नुकसान हुआ तो वहीं अच्छी फसल की आस लगाए किसान की सदमे से मौत हो गई।
बेमौसम बारिश और ओला गिरते देख एक किसान को फसल के नुकसान होने का डर सता गया। जिसे देख कर्ज के बोझ तले दबे किसान की खेत पर ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
जालौन कोतवाली के उरगांव गाँव के किसान मुन्ना पटेल (36 वर्ष) पर इलाहाबाद बैंक का तीन लाख रुपये से ऊपर का कर्ज था। वे गाँव के साहूकारों से अलग कर्ज लिए हुए थे। दो भाइयों के बीच मुन्ना पटेल के पास 28 बीघा खेती है, जिसमें उन्होंने इस बार मटर बोई थी। अच्छी फसल देख उन्हें काफी हद तक कर्ज उतार लेने की उम्मीद थी। लेकिन रविवार को बारिश के साथ ओला पड़ने से उनके सारे अरमान चकनाचूर हो गये। दोपहर बाद जब वे खेत देखने पहुंचे तो फसल की हालत देख उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
बुंदेलखंड का इलाका पिछले कई सालों से सूखे और बेमौसम बारिश से जूझ रहा है, जिससे यहां के किसान अपनी फसल की पैदावार नहीं बढ़ा पा रहे थे। इस बार किसानों को थोड़ी बहुत जरूर उम्मीद दिख रही थी कि उनकी फसल अच्छी होगी लेकिन आज अचानक मौसम ने करवट बदलकर किसानों को मायूस कर दिया। तेज बारिश और ओलों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आधे घंटे से अधिक तक ओले गिरने से किसानों की चना, मसूर, मटर करे फसल को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्हें हमेशा मौसम की मार झेलनी पड़ती है और इस बार ओले गिरने से उनकी फसल प्रभावित हुई है और 80 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है।
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जालौन। बुंदेलखंड के जालौन में मौसम ने अचानक करवट बदलने के साथ ही तेज बारिश और ओले गिरने से किसानों के चेहरे पर मायूसी देखने को मिली ओले गिरने से किसानों की मटर, मसूर और चने की फसल को भारी नुकसान हुआ तो वहीं अच्छी फसल की आस लगाए किसान की सदमे से मौत हो गई। बेमौसम बारिश और ओला गिरते देख एक किसान को फसल के नुकसान होने का डर सता गया। जिसे देख कर्ज के बोझ तले दबे किसान की खेत पर ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जालौन कोतवाली के उरगांव गाँव के किसान मुन्ना पटेल पर इलाहाबाद बैंक का तीन लाख रुपये से ऊपर का कर्ज था। वे गाँव के साहूकारों से अलग कर्ज लिए हुए थे। दो भाइयों के बीच मुन्ना पटेल के पास अट्ठाईस बीघा खेती है, जिसमें उन्होंने इस बार मटर बोई थी। अच्छी फसल देख उन्हें काफी हद तक कर्ज उतार लेने की उम्मीद थी। लेकिन रविवार को बारिश के साथ ओला पड़ने से उनके सारे अरमान चकनाचूर हो गये। दोपहर बाद जब वे खेत देखने पहुंचे तो फसल की हालत देख उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। बुंदेलखंड का इलाका पिछले कई सालों से सूखे और बेमौसम बारिश से जूझ रहा है, जिससे यहां के किसान अपनी फसल की पैदावार नहीं बढ़ा पा रहे थे। इस बार किसानों को थोड़ी बहुत जरूर उम्मीद दिख रही थी कि उनकी फसल अच्छी होगी लेकिन आज अचानक मौसम ने करवट बदलकर किसानों को मायूस कर दिया। तेज बारिश और ओलों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आधे घंटे से अधिक तक ओले गिरने से किसानों की चना, मसूर, मटर करे फसल को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्हें हमेशा मौसम की मार झेलनी पड़ती है और इस बार ओले गिरने से उनकी फसल प्रभावित हुई है और अस्सी फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है।
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MP News: मध्यप्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस हर संभव वो चीज कर रही है, जिससे बीजेपी को चुनाव में हराया जा सके। ऐसे में प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस भाजपा को घोटाले और भ्रष्टाचार पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में 24 जून को प्रदेश व्यापी धरना-प्रदर्शन करने जा रही है।
इस बारे में बात करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और संगठन प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जी के निर्देश पर आज प्रदेश के सभी जिलों में जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा सुबह 11 बजे से भाजपा सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मंडला में आयोजित जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन में पीसीसी चीफ कमलनाथ शामिल होंगे।
ये नेता इन जिलों में होंगे प्रदर्शन में शामिलः
आज होने वाले प्रदर्शन में AICC के जनरल सेक्रेटरी और मप्र के प्रभारी जेपी अग्रवाल-ग्वालियर में शामिल होंगे। वहीं पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह-दतिया, डॉ. गोविंद सिंह-उज्जैन, विवेक तन्खा और संजय कपूर जबलपुर, सुरेश पचौरी-भोपाल, अरूण यादव-बुरहानपुर, कांतिलाल भूरिया-झाबुआ, अजयसिंह-सीधी,सह प्रभारी सीपी मित्तल-सतना, सज्जन सिंह वर्मा-देवास, एनपी प्रजापति-नरसिंहपुर, जीतू पटवारी-इंदौर और कमलेश्वर पटेल-रतलाम में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होंगे।
इन मुद्दों को लेकर घेरेगी सरकारः
जानकारी के लिए बता दें कि, इस प्रदेशव्यापी जंगी प्रदर्शन में कांग्रेस भाजपा सरकार को बड़े पैमाने पर बार-बार बिजली कटौती, भीषण गर्मी में किसान एवं आमजनों को हो रही परेशानी सहित प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, घोटाले, बढ़ती महंगाई, रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल के दामों में भारी वृद्धि, बेरोजगारी, किसानों, महिलाओं और अबोध बालिकाओं पर हो रहे अत्याचार आदि मुद्दे धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से उठाए जायेंगे। धरना प्रदर्शन में जिला, विधानसभा, ब्लाक स्तर के पदाधिकारी, मण्डलम, सेक्टर के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं सहित कांग्रेस पक्ष के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय लोग शामिल होंगे।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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MP News: मध्यप्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस हर संभव वो चीज कर रही है, जिससे बीजेपी को चुनाव में हराया जा सके। ऐसे में प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस भाजपा को घोटाले और भ्रष्टाचार पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में चौबीस जून को प्रदेश व्यापी धरना-प्रदर्शन करने जा रही है। इस बारे में बात करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और संगठन प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जी के निर्देश पर आज प्रदेश के सभी जिलों में जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा सुबह ग्यारह बजे से भाजपा सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। मंडला में आयोजित जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन में पीसीसी चीफ कमलनाथ शामिल होंगे। ये नेता इन जिलों में होंगे प्रदर्शन में शामिलः आज होने वाले प्रदर्शन में AICC के जनरल सेक्रेटरी और मप्र के प्रभारी जेपी अग्रवाल-ग्वालियर में शामिल होंगे। वहीं पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह-दतिया, डॉ. गोविंद सिंह-उज्जैन, विवेक तन्खा और संजय कपूर जबलपुर, सुरेश पचौरी-भोपाल, अरूण यादव-बुरहानपुर, कांतिलाल भूरिया-झाबुआ, अजयसिंह-सीधी,सह प्रभारी सीपी मित्तल-सतना, सज्जन सिंह वर्मा-देवास, एनपी प्रजापति-नरसिंहपुर, जीतू पटवारी-इंदौर और कमलेश्वर पटेल-रतलाम में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होंगे। इन मुद्दों को लेकर घेरेगी सरकारः जानकारी के लिए बता दें कि, इस प्रदेशव्यापी जंगी प्रदर्शन में कांग्रेस भाजपा सरकार को बड़े पैमाने पर बार-बार बिजली कटौती, भीषण गर्मी में किसान एवं आमजनों को हो रही परेशानी सहित प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, घोटाले, बढ़ती महंगाई, रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल के दामों में भारी वृद्धि, बेरोजगारी, किसानों, महिलाओं और अबोध बालिकाओं पर हो रहे अत्याचार आदि मुद्दे धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से उठाए जायेंगे। धरना प्रदर्शन में जिला, विधानसभा, ब्लाक स्तर के पदाधिकारी, मण्डलम, सेक्टर के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं सहित कांग्रेस पक्ष के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय लोग शामिल होंगे। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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मन्दिर में पुजारी थे । मेरी माँ मन्दिर में देवदासी थी। अब सातवाहनों की हालत खराव है। मेरे पिताजी की यहाँ थोड़ी सम्पति थी, सन्वन्दी वगैरह गृहस्थी भी थी। उनकी एक और पत्नी हैं। हम वहिष्कृत से है । " हैं, तुम्हारा नाम क्या है ?"
"क्यों, मुझे मेरे नाम से पुकारोगे ? पुष्पवल्ली" "तुम्हें मेरा नाम कैसे पता लगा ?"
"जब किसी स्त्री की किसी पुरुष पर नजर पड़ जाती है तो नामपता मालूम कर लेना बड़ी बात नहीं है।"
"तुम धनंजय के साथ खेल-खिलवाड़ करती हो और मुझसे... "क्यों ? मनाई है. मनाई है तो जाऊँ" पुष्पवल्ली ने उउने का अभिनय किया ।
"नहीं, नहीं बैठो।"
पुष्पवल्ली धीमे-धीमे खिसियाने लगी ।
"तुम मूर्तियाँ खूब बनाते हो। तुम तो औरतों से ऐसे शमति हो, जैसे किसी औरत की शक्ल ही न देखी हो और उनकी मूर्तियाँ ऐसा बनायी हैं कि स्त्रियाँ भी शर्मा जाएँ ।" - पुष्पवल्ली हँसने लगी ।
"तुम बातें खूब करती हो ।"
"पेशा है, हमारा घर पास है यहीं टीले के पास । कभी-कभी ग्रा जाना मैं जाती हूँ । माँ खोज रही होगी ।"
पुष्पवल्ली उठी । जाने लगी । ग्रग्निवर्मा भी उसके पीछे-पीछे थोड़ी दूर तक पागल की भाँति चलने लगा ।
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मन्दिर में पुजारी थे । मेरी माँ मन्दिर में देवदासी थी। अब सातवाहनों की हालत खराव है। मेरे पिताजी की यहाँ थोड़ी सम्पति थी, सन्वन्दी वगैरह गृहस्थी भी थी। उनकी एक और पत्नी हैं। हम वहिष्कृत से है । " हैं, तुम्हारा नाम क्या है ?" "क्यों, मुझे मेरे नाम से पुकारोगे ? पुष्पवल्ली" "तुम्हें मेरा नाम कैसे पता लगा ?" "जब किसी स्त्री की किसी पुरुष पर नजर पड़ जाती है तो नामपता मालूम कर लेना बड़ी बात नहीं है।" "तुम धनंजय के साथ खेल-खिलवाड़ करती हो और मुझसे... "क्यों ? मनाई है. मनाई है तो जाऊँ" पुष्पवल्ली ने उउने का अभिनय किया । "नहीं, नहीं बैठो।" पुष्पवल्ली धीमे-धीमे खिसियाने लगी । "तुम मूर्तियाँ खूब बनाते हो। तुम तो औरतों से ऐसे शमति हो, जैसे किसी औरत की शक्ल ही न देखी हो और उनकी मूर्तियाँ ऐसा बनायी हैं कि स्त्रियाँ भी शर्मा जाएँ ।" - पुष्पवल्ली हँसने लगी । "तुम बातें खूब करती हो ।" "पेशा है, हमारा घर पास है यहीं टीले के पास । कभी-कभी ग्रा जाना मैं जाती हूँ । माँ खोज रही होगी ।" पुष्पवल्ली उठी । जाने लगी । ग्रग्निवर्मा भी उसके पीछे-पीछे थोड़ी दूर तक पागल की भाँति चलने लगा ।
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Farmers Income: महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, करनाल और धानुका के बीच हुए समझौते के तहत दोनों पक्ष फसल उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे.
धानुका ग्रुप ने कृषि क्षेत्र में काम आने वाले केमिकल पर रिसर्च करने एवं ड्रोन (Drone) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी (MHU), करनाल के साथ एमओयू साईन किया है. इस समझौते के तहत दोनों पक्ष कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और फसल सुरक्षा रसायनों पर अनुसंधान का काम करेंगे. एमओयू के तहत क्रॉप प्रोटक्शन केमिकल के क्षेत्र में रिसर्च गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. साथ ही एग्री एक्सटेंशन सेवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इस साझेदारी के जरिए निजी कंपनी और यूनिवर्सिटी फसल उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय (Farmers Income) बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे.
समझौते के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे ड्रोन के उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और प्रेसीजन एग्रीकल्चर के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. एमओयू साइन करते वक्त धानुका एग्रीटेक के वाईस प्रेसीडेंट एवं हेड-आरएण्डडी डॉ. एएस तोमर एवं महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. समर सिंह मौजूद रहे.
महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. समर सिंह ने बताया कि कृषि (Agriculture) एवं संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एकेडमिक और रिसर्च संस्थानों के बीच आपसी सहयोग की आवश्यकता है. हमें विश्वास है कि आज की यह साझेदारी ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इस क्षेत्र में रिसर्च के लिए प्रेरित करेगी. जबकि धानुका एग्रीटेक के वाईस प्रेसीडेंट डॉ. एएस तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देकर किसानों की इनकम में वृद्धि की जा सकती है.
यूनिवर्सिटी अपने और किसानों के खेतों में धानुका के प्रोडक्ट्स, नए मॉलिक्यूल्स के लिए डेमोन्स्ट्रेशन ट्रायल करेगी. इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. साझेदारी के तहत किसानों को नई तकनीकों के उपयोग के लिए सलाह दी जाएगी. कृषि में ड्रोन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जाएगा. सेंटर ने हाल ही में कृषि रसायनों के छिड़काव के लिए ड्रोन के उपयोग के लिए एसओपी जारी की है.
समझौते के तहत धानुका ड्रोन के माध्यम से कीटों के नियंत्रण के लिए बायो-एफिकेसी एवं फाइटो-टॉक्सिसिटी प्रोजेक्ट्स को स्पॉन्सर करेगी. धानुका के आरएण्डडी डिवीजन में एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वस्रतीय प्रयोगशालाएं हैं. कंपनी ने यूएस, जापान और यूरोप सहित दुनिया की सात अग्रणी कृषि रसायन कंपनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां की हैं. जिसके माध्यम से भारतीय किसानों तक आधुनिक तकनीक उपलब्ध करवाई जाती है. नए समझौते से विश्वविद्यालय के जरिए किसानों को मिलेगा.
ये भी पढ़ेंः मिर्च उत्पादन और एक्सपोर्ट में भारी उछाल, इस सफलता के बावजूद क्यों हो रही किसानों की अनदेखी?
ये भी पढ़ेंः जलवायु परिवर्तन से सक्रिय हुआ खतरनाक कीट, हिल गया भारत का अनार हब, अब क्या करें किसान?
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Farmers Income: महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, करनाल और धानुका के बीच हुए समझौते के तहत दोनों पक्ष फसल उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे. धानुका ग्रुप ने कृषि क्षेत्र में काम आने वाले केमिकल पर रिसर्च करने एवं ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी , करनाल के साथ एमओयू साईन किया है. इस समझौते के तहत दोनों पक्ष कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और फसल सुरक्षा रसायनों पर अनुसंधान का काम करेंगे. एमओयू के तहत क्रॉप प्रोटक्शन केमिकल के क्षेत्र में रिसर्च गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. साथ ही एग्री एक्सटेंशन सेवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इस साझेदारी के जरिए निजी कंपनी और यूनिवर्सिटी फसल उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे. समझौते के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे ड्रोन के उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और प्रेसीजन एग्रीकल्चर के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. एमओयू साइन करते वक्त धानुका एग्रीटेक के वाईस प्रेसीडेंट एवं हेड-आरएण्डडी डॉ. एएस तोमर एवं महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. समर सिंह मौजूद रहे. महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. समर सिंह ने बताया कि कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एकेडमिक और रिसर्च संस्थानों के बीच आपसी सहयोग की आवश्यकता है. हमें विश्वास है कि आज की यह साझेदारी ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इस क्षेत्र में रिसर्च के लिए प्रेरित करेगी. जबकि धानुका एग्रीटेक के वाईस प्रेसीडेंट डॉ. एएस तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देकर किसानों की इनकम में वृद्धि की जा सकती है. यूनिवर्सिटी अपने और किसानों के खेतों में धानुका के प्रोडक्ट्स, नए मॉलिक्यूल्स के लिए डेमोन्स्ट्रेशन ट्रायल करेगी. इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. साझेदारी के तहत किसानों को नई तकनीकों के उपयोग के लिए सलाह दी जाएगी. कृषि में ड्रोन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जाएगा. सेंटर ने हाल ही में कृषि रसायनों के छिड़काव के लिए ड्रोन के उपयोग के लिए एसओपी जारी की है. समझौते के तहत धानुका ड्रोन के माध्यम से कीटों के नियंत्रण के लिए बायो-एफिकेसी एवं फाइटो-टॉक्सिसिटी प्रोजेक्ट्स को स्पॉन्सर करेगी. धानुका के आरएण्डडी डिवीजन में एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वस्रतीय प्रयोगशालाएं हैं. कंपनी ने यूएस, जापान और यूरोप सहित दुनिया की सात अग्रणी कृषि रसायन कंपनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां की हैं. जिसके माध्यम से भारतीय किसानों तक आधुनिक तकनीक उपलब्ध करवाई जाती है. नए समझौते से विश्वविद्यालय के जरिए किसानों को मिलेगा. ये भी पढ़ेंः मिर्च उत्पादन और एक्सपोर्ट में भारी उछाल, इस सफलता के बावजूद क्यों हो रही किसानों की अनदेखी? ये भी पढ़ेंः जलवायु परिवर्तन से सक्रिय हुआ खतरनाक कीट, हिल गया भारत का अनार हब, अब क्या करें किसान?
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राजस्थानः बाड़मेर में हुए भीषण सड़क हादसे में सोमवार देर रात आठ बारातियों की मौत हो गई. ये सभी सदस्य एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं और शादी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे. यह हादसा बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी थाने के बाटा फांटे के पास हुआ. पुलिस के अनुसार से कार में कुल 9 लोग सवार थे.
ये सभी बाड़मेर जिले के कांधी की ढाणी गुड़ामालानी जा रहे थे. इस दौरान रामजी की गोल से गुड़ामालानी हाईवे पर बाटा फांटे के पास कार और ट्रक के बीच भीषण भिड़ंत हो गई. हादसे में बोलेरो गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को कार से बाहर निकाला गया.
(SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
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राजस्थानः बाड़मेर में हुए भीषण सड़क हादसे में सोमवार देर रात आठ बारातियों की मौत हो गई. ये सभी सदस्य एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं और शादी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे. यह हादसा बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी थाने के बाटा फांटे के पास हुआ. पुलिस के अनुसार से कार में कुल नौ लोग सवार थे. ये सभी बाड़मेर जिले के कांधी की ढाणी गुड़ामालानी जा रहे थे. इस दौरान रामजी की गोल से गुड़ामालानी हाईवे पर बाटा फांटे के पास कार और ट्रक के बीच भीषण भिड़ंत हो गई. हादसे में बोलेरो गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को कार से बाहर निकाला गया.
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तब्बू (tabu) और नागार्जुन दोनों को शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है. एक वक्त ऐसा था जब शादीशुदा नागार्जुन पर तब्बू का दिल आया था. दोनों के इश्क के चर्चे खूब सुर्खियों में भी रहे थे.
बॉलीवुड स्टार्स अक्सर अपने कोस्टार्स को दिल दे बैठते हैं. इन कपल्स के इश्क के चर्चे भी खूब होते हैं. लेकिन कई बार लंबे समय तक इश्क में रहने के बाद भी इन स्टार्स को ब्रेकअप का दर्द सहना पड़ता है. इसी लिस्ट में शामिल हैं एक्ट्रेस तब्बू. लाखों दिलों पर राज करने वाली तब्बू के दिल पर करीब 10 साल तक साउथ सुपरस्टार नागार्जुन (nagarjuna) ने राज किया था.लेकिन फिर भी दोनों अलग हो गए थे.
तब्बू को प्यार के मामले में नाकामयाबी ही हासिल हुई. एक वक्त ऐसा आया जब उनका दिल शादीशुदा साउथ स्टार अक्किनेनी नागार्जुन पर आया था. नागार्जुन और तब्बू का अफेयर करीब 10 साल तक चला था. हालांकि दोनों ने कभी अपने रिश्ते पर खुलकर बात नहीं की थी. दोनों के अफेयर की खबरों ने खूब सुर्खियों बटोरी थीं, दोनों को बहुत बार साथ भी देखा गया था.
नागार्जुन और तब्बू की पहली मुलाकात फिल्म Ninne Pelladata में हुई थी. हालांकि दोनों की मुलाकात महज काम के सिलसिले में हुई थी. लेकिन धीरे धीरे दोनों एक दूसरे के करीब आ गए थे. कहते हैं कि जब इनका अफेयर शुरू हुआ तो एक्टर की वाइफ इससे अंजान थी. लेकिन धीरे धीरे जब इनका इश्क परवान चढ़ा तो ये खबर सबके कानों तक पहुंच गई थी.
दोनों एक दूसरे के प्यार में ऐसे डूबे थे कि अक्सर तब्बू हैदराबाद एक्टर से मिलने जाती थीं तो एक्टर भी मुंबई उनसे मिलने आते थे. इतना ही नहीं तब्बू ने नागार्जुन के साथ पास रहने के लिए मुंबई में काम होने के बाद भी हैदराबाद में घर ले लिया था. नागार्जुन भले तब्बू से बेपनाह प्यार करते हों लेकिन वह अपनी पत्नी को कभी छोड़ना नहीं चाहते थे. यही कारण है कि तब्बू ने ही खुद को एक्टर से दूर किया था. कहते हैं दोनों का 2012 में ब्रेकअप हुआ था.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' के इंटरव्यू नें नागार्जुन ने कहा था कि तब्बू हमेशा उनकी 'खूबसूरत दोस्त' रहेगी. एक्टर ने तब्बू को खुद की बहुत अच्छी दोस्त बताया था. इतना ही नहीं एक्टर की पत्नी अमला अक्किनेनी ने तब्बू के साथ अपने पति के संबंधों की अफवाहों के बारे में बात की थी. उन्होंने भी टीओआई से कहा था कि तब्बू और उनके पति बहुत अच्छे दोस्त हैं. हालांकि तब्बू ने कभी भी अपने इश्क और ब्रेकअप पर कुछ नहीं कहा. फैंस को तो ये तक लगता है कि नागार्जुन के कारण ही आज तक एक्ट्रेस ने किसी से शादी नहीं की है.
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तब्बू और नागार्जुन दोनों को शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है. एक वक्त ऐसा था जब शादीशुदा नागार्जुन पर तब्बू का दिल आया था. दोनों के इश्क के चर्चे खूब सुर्खियों में भी रहे थे. बॉलीवुड स्टार्स अक्सर अपने कोस्टार्स को दिल दे बैठते हैं. इन कपल्स के इश्क के चर्चे भी खूब होते हैं. लेकिन कई बार लंबे समय तक इश्क में रहने के बाद भी इन स्टार्स को ब्रेकअप का दर्द सहना पड़ता है. इसी लिस्ट में शामिल हैं एक्ट्रेस तब्बू. लाखों दिलों पर राज करने वाली तब्बू के दिल पर करीब दस साल तक साउथ सुपरस्टार नागार्जुन ने राज किया था.लेकिन फिर भी दोनों अलग हो गए थे. तब्बू को प्यार के मामले में नाकामयाबी ही हासिल हुई. एक वक्त ऐसा आया जब उनका दिल शादीशुदा साउथ स्टार अक्किनेनी नागार्जुन पर आया था. नागार्जुन और तब्बू का अफेयर करीब दस साल तक चला था. हालांकि दोनों ने कभी अपने रिश्ते पर खुलकर बात नहीं की थी. दोनों के अफेयर की खबरों ने खूब सुर्खियों बटोरी थीं, दोनों को बहुत बार साथ भी देखा गया था. नागार्जुन और तब्बू की पहली मुलाकात फिल्म Ninne Pelladata में हुई थी. हालांकि दोनों की मुलाकात महज काम के सिलसिले में हुई थी. लेकिन धीरे धीरे दोनों एक दूसरे के करीब आ गए थे. कहते हैं कि जब इनका अफेयर शुरू हुआ तो एक्टर की वाइफ इससे अंजान थी. लेकिन धीरे धीरे जब इनका इश्क परवान चढ़ा तो ये खबर सबके कानों तक पहुंच गई थी. दोनों एक दूसरे के प्यार में ऐसे डूबे थे कि अक्सर तब्बू हैदराबाद एक्टर से मिलने जाती थीं तो एक्टर भी मुंबई उनसे मिलने आते थे. इतना ही नहीं तब्बू ने नागार्जुन के साथ पास रहने के लिए मुंबई में काम होने के बाद भी हैदराबाद में घर ले लिया था. नागार्जुन भले तब्बू से बेपनाह प्यार करते हों लेकिन वह अपनी पत्नी को कभी छोड़ना नहीं चाहते थे. यही कारण है कि तब्बू ने ही खुद को एक्टर से दूर किया था. कहते हैं दोनों का दो हज़ार बारह में ब्रेकअप हुआ था. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के इंटरव्यू नें नागार्जुन ने कहा था कि तब्बू हमेशा उनकी 'खूबसूरत दोस्त' रहेगी. एक्टर ने तब्बू को खुद की बहुत अच्छी दोस्त बताया था. इतना ही नहीं एक्टर की पत्नी अमला अक्किनेनी ने तब्बू के साथ अपने पति के संबंधों की अफवाहों के बारे में बात की थी. उन्होंने भी टीओआई से कहा था कि तब्बू और उनके पति बहुत अच्छे दोस्त हैं. हालांकि तब्बू ने कभी भी अपने इश्क और ब्रेकअप पर कुछ नहीं कहा. फैंस को तो ये तक लगता है कि नागार्जुन के कारण ही आज तक एक्ट्रेस ने किसी से शादी नहीं की है.
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एक सौ सैंतीस का अध्याय
का निरन्तर चिन्तन करें, तो उन्हें भी वीर पुत्र की प्राप्ति हो । ऐसे वीरता पूर्ण आख्यानों का पाठ अलक्ष्मी का विनाश, ऐश्वर्य का प्रकाश और दानवीरता युद्धवीरता आदि अनेक गुणों का प्रादुर्भाव करता है ।
एक सौ सैंतीस का अध्याय कुन्ती का संदेश .
हे केशव ! जिस समय वीर अर्जुन गर्भ में था और मैं अनेक स्त्रियों से परिवेष्ठित हो कर ग़पशप कर रही थी, उस समय आकाशवाणी हुई - हे कुन्ति ! यह तेरा पुत्र इन्द्र के समान पराक्रमी हो कर संग्राम करने के लिये आये हुए सब कौरवों को जीत कर चक्रवर्ती राजा होगा । यह तेरा पुत्र वासुदेव की सहायता से अनेक शत्रुओं का संहार करेगा । इसके यश का स्वर्गलोक पर्यन्त विस्तार होगा। यह अपने भाइयों के साथ तीन अश्वमेध यज्ञ करेगा । हे केशव ! यह तो तुम स्वयं जानते ही हो कि, यह अर्जुन कैसा सत्यप्रतिज्ञ, शत्रु-संहार-कारी और बलवान है। इसको जीत लेना कोई सहज काम नहीं है। इस लिये हे कृष्ण ! मैं चाहती हूँ कि अब वह आकाशवाणी सत्य हो जाने और उसका सत्य करना आपके ही अधीन है। मुझे उस सत्य वाणी पर पूरा विश्वास है। मैं संसार की रक्षा करने वाले धर्म को प्रणाम करती हूँ। तुम भीम और अर्जुन से जा कर कह देना कि, वीरांगनाएं जिस दिन के लिये वीर पुत्रों का उत्पन्न करती हैं, वह समय अब शीघ्र ही उपस्थित होने वाला है । तुझे अपनी वीर-प्रसविनी माता के दूध की लाज रखनी चाहिये । उत्तम पुरुष विरोध हो जाने पर किसी से अपमानित होना नहीं चाहते। हे कृष्ण ! भीम जैसा दृढ़ वैर रखने हारा तो शायद ही कोई संसार में हो। वह जिसके साथ विरोध करता है, उसका सर्वनाश कर के ही छोड़ता है। हे माधव ! सौभाग्यवती बहू द्रौपदी से कहना कि, तूने मेरे पुत्रों के साथ धर्म का अच्छा पालन
किया, इस कारण मैं तुझसे बहुत प्रसन्न हूँ । माद्रीपुत्र नकुल और सहदेव के लिये भी मेरा यही संदेश है । बेटा ! तू प्राणों का मोह त्याग कर अपने नष्ट हुए ऐश्वर्य को प्राप्त करना । हे कृष्ण ! मुझे पाण्डवों की वीरता, धर्मपरायणता और सहनशीलता को देख कर बड़ी प्रसन्नता होती है। मुझे जुए की हार का, प्राणप्रिय पुत्रों के वनवास का तथा पाण्डवों के राज्य भ्रष्ट होने का भी कुछ शोक नहीं है, किन्तु यदि कोई मुझे दुःख है, तो इसी बात का है कि, मेरी प्यारी पतिव्रता पुत्रवधू देवी द्रौपदी का भरी सभा में अपमान किया गया। श्राह ! रजोधर्म में रहने वाली उस देवी की उस समय किसी ने भी रक्षा नहीं की। महाबली भीम और अर्जुन यदि क्रोध करें तो वे देवताओं को भी परास्त कर सकते हैं; किन्तु वे धर्मबन्धन में बँध कर, इन सब तिरस्कारों को सहते रहे। हे माधव ! एक बार फिर उन्हें इन सब बातों का ध्यान दिला देना और मेरी ओर से कुशल पूँछना ।
बस श्रीकृष्ण जी ने कुन्ती को प्रणाम कर राजमहल से बाहर भीष्म द्रोण आदि बड़े बड़े सब योद्धाओं को बिदा किया और स्वयं रथ में सवार हो कर वे चले गये। इधर कौरव लोग अपने स्थान पर आकर श्रीकृष्ण के सम्बन्ध में अनेक आश्चर्यमय बातें कहने लगे। उन्होंने कहा कि यह सारा संसार अज्ञान से छाया हुआ है। दुर्योधन की मूर्खता के कारण यह सारी प्रजा नष्ट हो जावेगी । श्रीकृष्ण जी भी कर्ण के साथ बातचीत करते करते धीरे धीरे बहुत दूर निकल गये । इसके उपरान्त भगवान् ने कर्ण को भी बिदा कर दिया, स्वयं आकाशचारी गरुड़ के समान वेगशाली घोड़ों वाले रथ से शीघ्र ही वे उपलब्य नामक पाण्डवों के निवासस्थान पर पहुँच गये ।
एक सौ अड़तीस का अध्याय
एक सौ अड़तीस का अध्याय भीष्म जी का पुनः उद्योग
महारथी भीष्म और द्रोण आदि ने दुर्योधन से कहा- हे पुरुषसिंह ! महारानी कुन्ती ने श्रीकृष्ण से पाण्डवों के लिये जो संदेश कहला भेजा है, वह धर्मार्थपूर्ण न्यायसङ्गत तथा अत्यन्त भयङ्कर है। पाण्डव भगवान् वासुदेव की सम्मति से वैसा ही करेंगे और बिना राज्य लिये शान्त न होंगे। देखो, पाण्डवों ने बड़े बड़े क्लेशों को और पाशविक अत्याचारों को भी खूब सहन किया है। जब कौरव-समाज में द्रौपदी का चीरहरण किया गया था, तब वे पाचों भाई धर्मबन्धन में बँधे हुए थे। इस कारण तुम्हारी सभी अनुचित बातों को सहते और सुनते रहे; किन्तु अब वह समय नहीं रहा । निश्चय ही धर्मराज अपने वीर इन्द्रसमान पराक्रमी आताओं की तथा वासुदेव श्रीकृष्ण की सहायता से तुम्हारा सर्वनाश कर डालेंगे । गोहरण के समय हम लोगों को परास्त करने वाले वीर अर्जुन के पराक्रम से तो तुम परिचित ही हो। उस धनुर्धारी वीर ने ही भयङ्कर रुद्राख निवात कवचों का नाश किया और घोषयात्रा में तो हे महाराज ! तुम्हें और तुम्हारे महामन्त्री कर्ण को भी उसी शक्तिशाली वीर अर्जुन ने गन्धवों के हाथ से छुड़ाया था। इस लिये इन सब बातों पर विचार करो और अपने भविष्य को सुखमय बनाओ। यह सारा का सारा ब्रह्माण्ड प्रलयकालीन महाकाल के कराल गाल में अब जाना ही चाहता है । हे राजन् ! इसकी रक्षा तुम्हीं कर सकते हो। पाण्डवों से सन्धि कर लेने ही में आपकी भलाई है। धर्मारमा परमकारुणिक महात्मा युधिष्ठिर के पास जा कर उन्हें प्रणाम करो। उनसे बैर कर के तुम्हें कभी सुख शान्ति न मिलेगी। जिस समय तुम छल कपट त्याग कर अपने मन्त्रियों सहित धर्मराज के चरणों में जा पड़ोगे, उस समय वे तुम्हें तुरन्त उठा कर अपनी छ
· से लगा लेंगे। भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव भी तुमसे प्रेम करेंगे और
संसार में तुम्हारा और पाण्डवों का जय जयकार होगा। इस अपूर्व सम्मेलन को देख कर समस्त राजमण्डली आनन्द के आँसू बहावेगी । इस लिये लड़ने लड़ाने की बात छोड़ो और अभिमान त्याग कर पाण्डवों से सन्धि कर लो । संग्राम में बड़े बड़े वीर योद्धाओं का संहार होगा और भूमण्डल निर्वीर हो जायगा । तुम्हारे सम्बन्धी तुम्हें समझा रहे हैं, उनका कहना मानो । आज कल क्षत्रिय जाति के सर्वनाश की सूचना देने वाले अनेक उत्पात रहे । प्रतिकूल नक्षत्रों का उदय होना, पशु पक्षियों का भयङ्कर स्वरूप दीखना, यह सब कुलक्षण क्षत्रियों के भावी सर्वनाश ही के सूचक हैं । तुम्हारी सेना में प्रति दिन उल्कापात हुआ करते हैं। हाथी घोड़े आदि वाहन अपनी अपनी शालाओं में बँधे आँसू बहाया करते हैं। सेना के चारों ओर गिद्ध मड़राया करते हैं। राजभवनों में वह श्रानन्द नहीं रहा । प्रज्वलित दिशाओं की ओर मुँह उठाये गीदड़ रोया करते हैं । हे राजन् ! यह सारे के सारे अशकुन किसी महान् आपत्ति ही के लक्षण हैं। इस लिये तुम अपने हितकारी सच्चे मित्रों की सम्मति से काम करो । संग्राम का नाम न लो और पाण्डवों से मेल कर लो । इतने पर भी यदि तुम हम लोगों की बात नहीं मानोगे तो याद रखो, रणचण्डी के चेतने पर भी और भीम अर्जुन के भयङ्कर बाणों की बौछार देख कर, तुम्हें पीछे पछताना पड़ेगा ।
एक सौ उन्तालीस का अध्याय द्रोण का हितोपदेश
राजा दुर्योधन की भौंहें इन बातों को सुन कर टेदी हो गयीं। क्रोध से मुँह तमतमा उठा । उसके चेहरे पर उदासी छा गयी और आँखें नीची हो गयीं। जवाब में इन सब बातों के उसके मुँह से कुछ भी न निकला।
एक सौ उन्तालीस का अध्यय
दुर्योधन की इस उदासी और चुप्पी को देख कर पितामह भीष्म ने कहा - भाई ! हमें तो यही बड़े क्लेश की बात मालूम होती है कि, अपनी सेवा करने वाले सत्यप्रतिज्ञ ब्राह्मणभक्त, एवं वीर अर्जुन से हमें लड़ना पड़ेगा ।
द्रोणाचार्य बोले - मुझे तो अर्जुन से बड़ा स्नेह है। मैं अपने पुत्र अश्वथामा से भी बढ़ कर उसे स्नेहदृष्टि से देखता हूँ । वह मेरा विनम्र हो कर सदा सम्मान किया करता है। आह ! आज इस क्षात्रधर्म को शतशः धिक्कार है जो प्राणों से भी प्रिय अर्जुन के साथ संग्राम करने की प्रेरणा कर रहा है। आज जो अर्जुन धनुर्धारियों में अनुपमेय माना जा रहा है यह सब मेरी ही कृपा का फल है। जैसे यज्ञ में मूर्खों का सरकार नहीं होता, वैसे ही दुष्ट दुराचारी और शठ मनुष्य का भी सज्जनों में आदर नहीं होता । पापी को पापकर्म से नहीं रोका जा सकता और पुण्यात्मा को कोई पुण्यमार्ग से विचलित कर देने की शक्ति नहीं रखता । दुर्योधन ! तूने अनेक प्रपञ्च रचनाओं द्वारा पाण्डवों को क्लेश पहुँचाया है किन्तु के धर्मात्मा सदा तेरा भला ही चाहते हैं। यह सब तेरे ही कर्मों का परिणाम प्रकट होने वाला है । तुझे तेरे पिता ने, महात्मा विदुर ने, श्रीकुष्ण ने, मैंने और भीष्म पितामह आदि अनेक हितैषी बन्धुओं ने समझाया; किन्तु, तू किसी की भी बात नहीं मानता । अपने पास बलवती सेना को देख कर तुझे घमंड हो गया है और तु यह चाहता है कि, मैं भयङ्कर ग्राह आदि जीवों से भरे हुए महासागर को स्वयं तैर कर पार कर जाऊँ । तूने समझ रखा है कि, मैं चारों ओर से सुरक्षित हूँ; किन्तु तुझे यह नहीं है कि, तू अपने चारों ओर रक्षक रूप से रहने वाले भक्षकों से घिरा हुआ है। तू इस अज्ञान के कारण ही अपने पराये को भूल गया है और धर्मराज के राज्य को अपना समझ उसे हड़प जाने का प्रयत्न कर रहा है। यद्यपि इस समय धर्मराज तपस्चियों की भाँति अपने परिवार के साथ वन में रहते हैं, तो भी उन्हें परास्त करने की किसी में भी सामर्थ्य
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एक सौ सैंतीस का अध्याय का निरन्तर चिन्तन करें, तो उन्हें भी वीर पुत्र की प्राप्ति हो । ऐसे वीरता पूर्ण आख्यानों का पाठ अलक्ष्मी का विनाश, ऐश्वर्य का प्रकाश और दानवीरता युद्धवीरता आदि अनेक गुणों का प्रादुर्भाव करता है । एक सौ सैंतीस का अध्याय कुन्ती का संदेश . हे केशव ! जिस समय वीर अर्जुन गर्भ में था और मैं अनेक स्त्रियों से परिवेष्ठित हो कर ग़पशप कर रही थी, उस समय आकाशवाणी हुई - हे कुन्ति ! यह तेरा पुत्र इन्द्र के समान पराक्रमी हो कर संग्राम करने के लिये आये हुए सब कौरवों को जीत कर चक्रवर्ती राजा होगा । यह तेरा पुत्र वासुदेव की सहायता से अनेक शत्रुओं का संहार करेगा । इसके यश का स्वर्गलोक पर्यन्त विस्तार होगा। यह अपने भाइयों के साथ तीन अश्वमेध यज्ञ करेगा । हे केशव ! यह तो तुम स्वयं जानते ही हो कि, यह अर्जुन कैसा सत्यप्रतिज्ञ, शत्रु-संहार-कारी और बलवान है। इसको जीत लेना कोई सहज काम नहीं है। इस लिये हे कृष्ण ! मैं चाहती हूँ कि अब वह आकाशवाणी सत्य हो जाने और उसका सत्य करना आपके ही अधीन है। मुझे उस सत्य वाणी पर पूरा विश्वास है। मैं संसार की रक्षा करने वाले धर्म को प्रणाम करती हूँ। तुम भीम और अर्जुन से जा कर कह देना कि, वीरांगनाएं जिस दिन के लिये वीर पुत्रों का उत्पन्न करती हैं, वह समय अब शीघ्र ही उपस्थित होने वाला है । तुझे अपनी वीर-प्रसविनी माता के दूध की लाज रखनी चाहिये । उत्तम पुरुष विरोध हो जाने पर किसी से अपमानित होना नहीं चाहते। हे कृष्ण ! भीम जैसा दृढ़ वैर रखने हारा तो शायद ही कोई संसार में हो। वह जिसके साथ विरोध करता है, उसका सर्वनाश कर के ही छोड़ता है। हे माधव ! सौभाग्यवती बहू द्रौपदी से कहना कि, तूने मेरे पुत्रों के साथ धर्म का अच्छा पालन किया, इस कारण मैं तुझसे बहुत प्रसन्न हूँ । माद्रीपुत्र नकुल और सहदेव के लिये भी मेरा यही संदेश है । बेटा ! तू प्राणों का मोह त्याग कर अपने नष्ट हुए ऐश्वर्य को प्राप्त करना । हे कृष्ण ! मुझे पाण्डवों की वीरता, धर्मपरायणता और सहनशीलता को देख कर बड़ी प्रसन्नता होती है। मुझे जुए की हार का, प्राणप्रिय पुत्रों के वनवास का तथा पाण्डवों के राज्य भ्रष्ट होने का भी कुछ शोक नहीं है, किन्तु यदि कोई मुझे दुःख है, तो इसी बात का है कि, मेरी प्यारी पतिव्रता पुत्रवधू देवी द्रौपदी का भरी सभा में अपमान किया गया। श्राह ! रजोधर्म में रहने वाली उस देवी की उस समय किसी ने भी रक्षा नहीं की। महाबली भीम और अर्जुन यदि क्रोध करें तो वे देवताओं को भी परास्त कर सकते हैं; किन्तु वे धर्मबन्धन में बँध कर, इन सब तिरस्कारों को सहते रहे। हे माधव ! एक बार फिर उन्हें इन सब बातों का ध्यान दिला देना और मेरी ओर से कुशल पूँछना । बस श्रीकृष्ण जी ने कुन्ती को प्रणाम कर राजमहल से बाहर भीष्म द्रोण आदि बड़े बड़े सब योद्धाओं को बिदा किया और स्वयं रथ में सवार हो कर वे चले गये। इधर कौरव लोग अपने स्थान पर आकर श्रीकृष्ण के सम्बन्ध में अनेक आश्चर्यमय बातें कहने लगे। उन्होंने कहा कि यह सारा संसार अज्ञान से छाया हुआ है। दुर्योधन की मूर्खता के कारण यह सारी प्रजा नष्ट हो जावेगी । श्रीकृष्ण जी भी कर्ण के साथ बातचीत करते करते धीरे धीरे बहुत दूर निकल गये । इसके उपरान्त भगवान् ने कर्ण को भी बिदा कर दिया, स्वयं आकाशचारी गरुड़ के समान वेगशाली घोड़ों वाले रथ से शीघ्र ही वे उपलब्य नामक पाण्डवों के निवासस्थान पर पहुँच गये । एक सौ अड़तीस का अध्याय एक सौ अड़तीस का अध्याय भीष्म जी का पुनः उद्योग महारथी भीष्म और द्रोण आदि ने दुर्योधन से कहा- हे पुरुषसिंह ! महारानी कुन्ती ने श्रीकृष्ण से पाण्डवों के लिये जो संदेश कहला भेजा है, वह धर्मार्थपूर्ण न्यायसङ्गत तथा अत्यन्त भयङ्कर है। पाण्डव भगवान् वासुदेव की सम्मति से वैसा ही करेंगे और बिना राज्य लिये शान्त न होंगे। देखो, पाण्डवों ने बड़े बड़े क्लेशों को और पाशविक अत्याचारों को भी खूब सहन किया है। जब कौरव-समाज में द्रौपदी का चीरहरण किया गया था, तब वे पाचों भाई धर्मबन्धन में बँधे हुए थे। इस कारण तुम्हारी सभी अनुचित बातों को सहते और सुनते रहे; किन्तु अब वह समय नहीं रहा । निश्चय ही धर्मराज अपने वीर इन्द्रसमान पराक्रमी आताओं की तथा वासुदेव श्रीकृष्ण की सहायता से तुम्हारा सर्वनाश कर डालेंगे । गोहरण के समय हम लोगों को परास्त करने वाले वीर अर्जुन के पराक्रम से तो तुम परिचित ही हो। उस धनुर्धारी वीर ने ही भयङ्कर रुद्राख निवात कवचों का नाश किया और घोषयात्रा में तो हे महाराज ! तुम्हें और तुम्हारे महामन्त्री कर्ण को भी उसी शक्तिशाली वीर अर्जुन ने गन्धवों के हाथ से छुड़ाया था। इस लिये इन सब बातों पर विचार करो और अपने भविष्य को सुखमय बनाओ। यह सारा का सारा ब्रह्माण्ड प्रलयकालीन महाकाल के कराल गाल में अब जाना ही चाहता है । हे राजन् ! इसकी रक्षा तुम्हीं कर सकते हो। पाण्डवों से सन्धि कर लेने ही में आपकी भलाई है। धर्मारमा परमकारुणिक महात्मा युधिष्ठिर के पास जा कर उन्हें प्रणाम करो। उनसे बैर कर के तुम्हें कभी सुख शान्ति न मिलेगी। जिस समय तुम छल कपट त्याग कर अपने मन्त्रियों सहित धर्मराज के चरणों में जा पड़ोगे, उस समय वे तुम्हें तुरन्त उठा कर अपनी छ · से लगा लेंगे। भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव भी तुमसे प्रेम करेंगे और संसार में तुम्हारा और पाण्डवों का जय जयकार होगा। इस अपूर्व सम्मेलन को देख कर समस्त राजमण्डली आनन्द के आँसू बहावेगी । इस लिये लड़ने लड़ाने की बात छोड़ो और अभिमान त्याग कर पाण्डवों से सन्धि कर लो । संग्राम में बड़े बड़े वीर योद्धाओं का संहार होगा और भूमण्डल निर्वीर हो जायगा । तुम्हारे सम्बन्धी तुम्हें समझा रहे हैं, उनका कहना मानो । आज कल क्षत्रिय जाति के सर्वनाश की सूचना देने वाले अनेक उत्पात रहे । प्रतिकूल नक्षत्रों का उदय होना, पशु पक्षियों का भयङ्कर स्वरूप दीखना, यह सब कुलक्षण क्षत्रियों के भावी सर्वनाश ही के सूचक हैं । तुम्हारी सेना में प्रति दिन उल्कापात हुआ करते हैं। हाथी घोड़े आदि वाहन अपनी अपनी शालाओं में बँधे आँसू बहाया करते हैं। सेना के चारों ओर गिद्ध मड़राया करते हैं। राजभवनों में वह श्रानन्द नहीं रहा । प्रज्वलित दिशाओं की ओर मुँह उठाये गीदड़ रोया करते हैं । हे राजन् ! यह सारे के सारे अशकुन किसी महान् आपत्ति ही के लक्षण हैं। इस लिये तुम अपने हितकारी सच्चे मित्रों की सम्मति से काम करो । संग्राम का नाम न लो और पाण्डवों से मेल कर लो । इतने पर भी यदि तुम हम लोगों की बात नहीं मानोगे तो याद रखो, रणचण्डी के चेतने पर भी और भीम अर्जुन के भयङ्कर बाणों की बौछार देख कर, तुम्हें पीछे पछताना पड़ेगा । एक सौ उन्तालीस का अध्याय द्रोण का हितोपदेश राजा दुर्योधन की भौंहें इन बातों को सुन कर टेदी हो गयीं। क्रोध से मुँह तमतमा उठा । उसके चेहरे पर उदासी छा गयी और आँखें नीची हो गयीं। जवाब में इन सब बातों के उसके मुँह से कुछ भी न निकला। एक सौ उन्तालीस का अध्यय दुर्योधन की इस उदासी और चुप्पी को देख कर पितामह भीष्म ने कहा - भाई ! हमें तो यही बड़े क्लेश की बात मालूम होती है कि, अपनी सेवा करने वाले सत्यप्रतिज्ञ ब्राह्मणभक्त, एवं वीर अर्जुन से हमें लड़ना पड़ेगा । द्रोणाचार्य बोले - मुझे तो अर्जुन से बड़ा स्नेह है। मैं अपने पुत्र अश्वथामा से भी बढ़ कर उसे स्नेहदृष्टि से देखता हूँ । वह मेरा विनम्र हो कर सदा सम्मान किया करता है। आह ! आज इस क्षात्रधर्म को शतशः धिक्कार है जो प्राणों से भी प्रिय अर्जुन के साथ संग्राम करने की प्रेरणा कर रहा है। आज जो अर्जुन धनुर्धारियों में अनुपमेय माना जा रहा है यह सब मेरी ही कृपा का फल है। जैसे यज्ञ में मूर्खों का सरकार नहीं होता, वैसे ही दुष्ट दुराचारी और शठ मनुष्य का भी सज्जनों में आदर नहीं होता । पापी को पापकर्म से नहीं रोका जा सकता और पुण्यात्मा को कोई पुण्यमार्ग से विचलित कर देने की शक्ति नहीं रखता । दुर्योधन ! तूने अनेक प्रपञ्च रचनाओं द्वारा पाण्डवों को क्लेश पहुँचाया है किन्तु के धर्मात्मा सदा तेरा भला ही चाहते हैं। यह सब तेरे ही कर्मों का परिणाम प्रकट होने वाला है । तुझे तेरे पिता ने, महात्मा विदुर ने, श्रीकुष्ण ने, मैंने और भीष्म पितामह आदि अनेक हितैषी बन्धुओं ने समझाया; किन्तु, तू किसी की भी बात नहीं मानता । अपने पास बलवती सेना को देख कर तुझे घमंड हो गया है और तु यह चाहता है कि, मैं भयङ्कर ग्राह आदि जीवों से भरे हुए महासागर को स्वयं तैर कर पार कर जाऊँ । तूने समझ रखा है कि, मैं चारों ओर से सुरक्षित हूँ; किन्तु तुझे यह नहीं है कि, तू अपने चारों ओर रक्षक रूप से रहने वाले भक्षकों से घिरा हुआ है। तू इस अज्ञान के कारण ही अपने पराये को भूल गया है और धर्मराज के राज्य को अपना समझ उसे हड़प जाने का प्रयत्न कर रहा है। यद्यपि इस समय धर्मराज तपस्चियों की भाँति अपने परिवार के साथ वन में रहते हैं, तो भी उन्हें परास्त करने की किसी में भी सामर्थ्य
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अगर आपका ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ जाता है या फिर गिर जाता है, तो इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
ब्लड शुगर लेवल का एकदम से घटना या बढ़ना सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता है। इससे व्यक्ति को सिरदर्द से लेकर चक्कर आना, बेहोशी व कमजोरी का अहसास होना, देखने में परेशानी होना आदि कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं, कुछ गंभीर स्थिति में व्यक्ति कोमा में जा सकता है। इसलिए, व्यक्ति को अपने ब्लड शुगर लेवल पर नजर बनाए रखनी चाहिए। खासतौर से, अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है तो ऐसे में उसका ब्लड शुगर लेवल एकदम से स्पाइक कर सकता है या फिर गिर सकता है।
अधिकतर लोग यही सोचते हैं कि ब्लड शुगर लेवल का संबंध केवल खान-पान से ही है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। कई बार आपका तनाव या चिंता भी ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकते हैं। जब आप तनाव में होते हैं तो शरीर से कुछ हार्मोन रिलीज होते हैं और इससे व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। कई बार तनाव के कारण व्यक्ति के खाने-पीने का ढंग भी प्रभावित होता है और इस स्थिति में भी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। इसलिए, हमेशा खुद को तनावमुक्त रखने की कोशिश करें और योग व मेडिटेशन के जरिए खुद को रिलैक्स करें।
पानी शरीर में कई मायनों में लाभदायक है। जब शरीर में हाइड्रेशन लेवल कम होता है तो इससे ब्लड में ग्लूकोज लेवल बढ़ सकता है। जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। जो लोग पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें हाइपरग्लेसेमिया अर्थात् हाई ब्लड शुगर की समस्या होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
जिन लोगों को डायबिटीज है और वे अपने खानपान को लेकर लापरवाही बरतते हैं तो इससे उनका ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। मसलन, अगर वे समय पर भोजन नहीं करते हैं या अपने मील को स्किप करते हैं तो इससे उनका ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है। इतना ही नहीं, अगर डायबिटीक पेशेंट अत्यधिक इंसुलिन लेता है तो इससे भी उनका ब्लड शुगर लेवल एकदम से गिर जाता है।
चीनी हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होती है, यह बात तो हम सभी जानते हैं। इसलिए, अधिकतर लोग अपनी हेल्थ को बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन करते हैं। इनमें कैलोरी काउंट भले ही कम हो, लेकिन इससे हेल्थ पर नेगेटिव असर ही पड़ता है।
यहां तक कि आर्टिफिशियल स्वीटनर के कारण ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, ये हार्ट डिसीज से लेकर स्ट्रोक तक के खतरे को भी बढ़ाते हैं। इसलिए, जहां तक संभव हो, आर्टिफिशियल स्वीटनर से बचें। इसके स्थान पर आप गुड़ या शहद का सेवन सीमित मात्रा में कर सकते हैं।
यह देखने में आता है कि बीमार होने पर भी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल स्पाइक कर जाता है। दरअसल, जब आपको शरीर इंफेक्शन से लड़ रहा होता है, तो ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान व्यक्ति कई तरह की दवाइयों का सेवन करता है और इससे भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ या घट सकता है।
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अगर आपका ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ जाता है या फिर गिर जाता है, तो इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। ब्लड शुगर लेवल का एकदम से घटना या बढ़ना सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता है। इससे व्यक्ति को सिरदर्द से लेकर चक्कर आना, बेहोशी व कमजोरी का अहसास होना, देखने में परेशानी होना आदि कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं, कुछ गंभीर स्थिति में व्यक्ति कोमा में जा सकता है। इसलिए, व्यक्ति को अपने ब्लड शुगर लेवल पर नजर बनाए रखनी चाहिए। खासतौर से, अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है तो ऐसे में उसका ब्लड शुगर लेवल एकदम से स्पाइक कर सकता है या फिर गिर सकता है। अधिकतर लोग यही सोचते हैं कि ब्लड शुगर लेवल का संबंध केवल खान-पान से ही है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। कई बार आपका तनाव या चिंता भी ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकते हैं। जब आप तनाव में होते हैं तो शरीर से कुछ हार्मोन रिलीज होते हैं और इससे व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। कई बार तनाव के कारण व्यक्ति के खाने-पीने का ढंग भी प्रभावित होता है और इस स्थिति में भी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। इसलिए, हमेशा खुद को तनावमुक्त रखने की कोशिश करें और योग व मेडिटेशन के जरिए खुद को रिलैक्स करें। पानी शरीर में कई मायनों में लाभदायक है। जब शरीर में हाइड्रेशन लेवल कम होता है तो इससे ब्लड में ग्लूकोज लेवल बढ़ सकता है। जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। जो लोग पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें हाइपरग्लेसेमिया अर्थात् हाई ब्लड शुगर की समस्या होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। जिन लोगों को डायबिटीज है और वे अपने खानपान को लेकर लापरवाही बरतते हैं तो इससे उनका ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। मसलन, अगर वे समय पर भोजन नहीं करते हैं या अपने मील को स्किप करते हैं तो इससे उनका ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है। इतना ही नहीं, अगर डायबिटीक पेशेंट अत्यधिक इंसुलिन लेता है तो इससे भी उनका ब्लड शुगर लेवल एकदम से गिर जाता है। चीनी हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होती है, यह बात तो हम सभी जानते हैं। इसलिए, अधिकतर लोग अपनी हेल्थ को बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन करते हैं। इनमें कैलोरी काउंट भले ही कम हो, लेकिन इससे हेल्थ पर नेगेटिव असर ही पड़ता है। यहां तक कि आर्टिफिशियल स्वीटनर के कारण ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, ये हार्ट डिसीज से लेकर स्ट्रोक तक के खतरे को भी बढ़ाते हैं। इसलिए, जहां तक संभव हो, आर्टिफिशियल स्वीटनर से बचें। इसके स्थान पर आप गुड़ या शहद का सेवन सीमित मात्रा में कर सकते हैं। यह देखने में आता है कि बीमार होने पर भी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल स्पाइक कर जाता है। दरअसल, जब आपको शरीर इंफेक्शन से लड़ रहा होता है, तो ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान व्यक्ति कई तरह की दवाइयों का सेवन करता है और इससे भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ या घट सकता है। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय भी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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दंतेवाड़ा, 12 मई । दंतेवाड़ा जिले में रासायनिक खादों का संग्रह एवं विक्रय किए जाने की शिकायतें मिली थी।
कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बचेली मार्केट स्थित साहू कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया। जिसमें प्रतिष्ठान से केमिकल इन्सेक्टीसाइड-61. 70 किलो, केमिकल फर्टिलाइजर-248 किलो, केमिकल हरबीसाइड-1. 1किलो, केमिकल फंगीसाइड-2 किलो, सहित रासायनिक सामग्री लगभग 312 किलो को जब्त किया गया। साथ ही कृषि केन्द्र के संचालक को शासन द्वारा निर्धारित कीमत पर ही विक्रय करने के निर्देश दिए गए है। इस मौके पर बचेली एसडीएम और कृषि विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।
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दंतेवाड़ा, बारह मई । दंतेवाड़ा जिले में रासायनिक खादों का संग्रह एवं विक्रय किए जाने की शिकायतें मिली थी। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बचेली मार्केट स्थित साहू कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया। जिसमें प्रतिष्ठान से केमिकल इन्सेक्टीसाइड-इकसठ. सत्तर किलो, केमिकल फर्टिलाइजर-दो सौ अड़तालीस किलो, केमिकल हरबीसाइड-एक. एककिलो, केमिकल फंगीसाइड-दो किलो, सहित रासायनिक सामग्री लगभग तीन सौ बारह किलो को जब्त किया गया। साथ ही कृषि केन्द्र के संचालक को शासन द्वारा निर्धारित कीमत पर ही विक्रय करने के निर्देश दिए गए है। इस मौके पर बचेली एसडीएम और कृषि विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।
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गवर्नमेंट पीजी कॉलेज झालावाड़ में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम की जांच एवं कार्य पूर्ण नहीं होने समेत अन्य मांगों को लेकर छात्रसंघ पदाधिकारियों और एबीवीपी की ओर से शुरू किया गया कार्मिक अनशन गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। स्टूडेंट धरना स्थल से रैली के रूप में प्रिंसिपल ऑफिस पहुंचे और प्रिंसिपल को अपनी मांगों से अवगत कराया।
छात्रसंघ अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कॉलेज में बन रहे ऑडिटोरियम की राशि स्वीकृति समेत अन्य मामले की जांच एवं कार्य समय पर पूर्ण नहीं होने पर पीडब्ल्यूडी अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद और एडीएम को बार-बार सूचित करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसको लेकर गुरुवार को कॉलेज प्रिंसिपल के माध्यम से उच्च शिक्षा आयुक्त और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई करने की मांग की है।
एबीवीपी के ऋषिराज सिंह नाथावत ने बताया कि कॉलेज में शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति, रिक्त सभी पदों पर शिक्षक लगाने, कॉलेज में चित्रकला विषय शुरू करने, NCC में 50 प्रतिशत पदों की बढ़ोतरी करने की मांग की। चित्रकला विषय में करीब झालावाड़ कॉलेज के 15 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऐसे हैं, जो इस विषय से वंचित है। कॉलेज में यह विषय अब तक शुरू नहीं होने से छात्र-छात्राएं या तो विषय बदल लेते हैं, या बाहर जाकर पढ़ाई करते हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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गवर्नमेंट पीजी कॉलेज झालावाड़ में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम की जांच एवं कार्य पूर्ण नहीं होने समेत अन्य मांगों को लेकर छात्रसंघ पदाधिकारियों और एबीवीपी की ओर से शुरू किया गया कार्मिक अनशन गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। स्टूडेंट धरना स्थल से रैली के रूप में प्रिंसिपल ऑफिस पहुंचे और प्रिंसिपल को अपनी मांगों से अवगत कराया। छात्रसंघ अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कॉलेज में बन रहे ऑडिटोरियम की राशि स्वीकृति समेत अन्य मामले की जांच एवं कार्य समय पर पूर्ण नहीं होने पर पीडब्ल्यूडी अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद और एडीएम को बार-बार सूचित करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसको लेकर गुरुवार को कॉलेज प्रिंसिपल के माध्यम से उच्च शिक्षा आयुक्त और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई करने की मांग की है। एबीवीपी के ऋषिराज सिंह नाथावत ने बताया कि कॉलेज में शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति, रिक्त सभी पदों पर शिक्षक लगाने, कॉलेज में चित्रकला विषय शुरू करने, NCC में पचास प्रतिशत पदों की बढ़ोतरी करने की मांग की। चित्रकला विषय में करीब झालावाड़ कॉलेज के पंद्रह प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऐसे हैं, जो इस विषय से वंचित है। कॉलेज में यह विषय अब तक शुरू नहीं होने से छात्र-छात्राएं या तो विषय बदल लेते हैं, या बाहर जाकर पढ़ाई करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Yanomami Tribe: ये सुनने में थोड़ा अजीब है, पर सच है. दुनिया में एक जनजाति ऐसी है जहां के लोग इंसान को जलाने के बाद बची हुई राख का सूप बनाकर पी जाते हैं. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? कहां होता है और कौन वो लोग हैं जो ऐसा करते हैं, ये स्टोरी उनके बारे में है.
कौन हैं ये लोग?
ये लोग दक्षिण अमेरिका के एक आदिवासी समुदाय यानोमामी (Yanomami Tribe) से आते हैं. उनकी अपनी रिवाज, अपनी परंपराएं हैं. यानोमामी जनजाति के लोग वेनेजुएला और ब्राजील के कुछ हिस्सों में रहते हैं. इन्हें यानम या सेनेमा के नाम से भी लोग जानते-पहचानते हैं.
क्या है परंपरा?
इस परंपरा के तहत यानोमामी जनजाति (Yanomami Tribe) के लोग मृत व्यक्ति की हड्डियों की राख का सूप बनाते हैं. इस जनजाति की कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं, जिनके तहत मृत व्यक्ति का मांस भी खाया जाता है. इसे अंग्रेजी में Cannibalism और Endocannibalism भी कहा जाता है. एंडोकैनिबेलिज्म, परंपरा के तहत ही ऐसा किया जाता है और ये इनकी परंपरा का हिस्सा है.
प्रक्रिया क्या है?
सूप बनाने की प्रक्रिया ये है कि जब इनके परिवार का कोई सदस्य मर जाता है, तो उसे जलाने के बाद बची हुई राख को केले से बनाए गए एक सूप जैसी चीज में डाल दिया जाता है. इस सूप की प्रक्रिया का ये मतलब कतई नहीं है कि ये लोग किसी अपने के जाने का दुख नहीं मनाते बल्कि दुख में रोते और शोक गीत भी गाते हैं. चूंकि जैसा हमने पहले बताया कि ये उनके अंतिम संस्कार की परंपरा है, तो बस उसी का पालन सदियों से करते हैं.
सवाल है ऐसा क्यों करते हैं?
आमतौर पर दुनिया के हर धर्म, हर समुदाय के लोगों की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है. यानोमामी जनजाति (Yanomami Tribe) का भी यही मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा की शांति होती है. साथ ही उसकी आत्मा की रक्षा होती है.
यह वेबसाइट कुकीज़ या इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करती है, ताकि आपके ब्राउजिंग अनुभव को बेहतर बनाया जा सके और व्यक्तिगतर तौर पर इसकी सिफारिश करती है. हमारी वेबसाइट के लगातार इस्तेमाल के लिए आप हमारी प्राइवेसी पॉलिसी से सहमत हों.
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Yanomami Tribe: ये सुनने में थोड़ा अजीब है, पर सच है. दुनिया में एक जनजाति ऐसी है जहां के लोग इंसान को जलाने के बाद बची हुई राख का सूप बनाकर पी जाते हैं. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? कहां होता है और कौन वो लोग हैं जो ऐसा करते हैं, ये स्टोरी उनके बारे में है. कौन हैं ये लोग? ये लोग दक्षिण अमेरिका के एक आदिवासी समुदाय यानोमामी से आते हैं. उनकी अपनी रिवाज, अपनी परंपराएं हैं. यानोमामी जनजाति के लोग वेनेजुएला और ब्राजील के कुछ हिस्सों में रहते हैं. इन्हें यानम या सेनेमा के नाम से भी लोग जानते-पहचानते हैं. क्या है परंपरा? इस परंपरा के तहत यानोमामी जनजाति के लोग मृत व्यक्ति की हड्डियों की राख का सूप बनाते हैं. इस जनजाति की कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं, जिनके तहत मृत व्यक्ति का मांस भी खाया जाता है. इसे अंग्रेजी में Cannibalism और Endocannibalism भी कहा जाता है. एंडोकैनिबेलिज्म, परंपरा के तहत ही ऐसा किया जाता है और ये इनकी परंपरा का हिस्सा है. प्रक्रिया क्या है? सूप बनाने की प्रक्रिया ये है कि जब इनके परिवार का कोई सदस्य मर जाता है, तो उसे जलाने के बाद बची हुई राख को केले से बनाए गए एक सूप जैसी चीज में डाल दिया जाता है. इस सूप की प्रक्रिया का ये मतलब कतई नहीं है कि ये लोग किसी अपने के जाने का दुख नहीं मनाते बल्कि दुख में रोते और शोक गीत भी गाते हैं. चूंकि जैसा हमने पहले बताया कि ये उनके अंतिम संस्कार की परंपरा है, तो बस उसी का पालन सदियों से करते हैं. सवाल है ऐसा क्यों करते हैं? आमतौर पर दुनिया के हर धर्म, हर समुदाय के लोगों की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है. यानोमामी जनजाति का भी यही मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा की शांति होती है. साथ ही उसकी आत्मा की रक्षा होती है. यह वेबसाइट कुकीज़ या इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करती है, ताकि आपके ब्राउजिंग अनुभव को बेहतर बनाया जा सके और व्यक्तिगतर तौर पर इसकी सिफारिश करती है. हमारी वेबसाइट के लगातार इस्तेमाल के लिए आप हमारी प्राइवेसी पॉलिसी से सहमत हों.
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नायकत्व और उत्पादन के प्रबन्ध के रूपो तथा कृषि मे सहकारिता के विभिन्न तरीकों में देखी जाती है, किन्तु सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व, उत्पादन के साधनो पर मे निजी स्वामित्व का उन्मूलन, कृषि मे सहकारिता, इत्यादि वे आवश्यक तत्व हैं जिनके बिना समाजवादी व्यवस्था का सफल विकास नही हो सकता ।
समाजवादी क्रान्ति और समाजवादी निर्माण के मुख्य वस्तुगत नियमों को त्याग देने के कारण तथा राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय विशेषताओ को बढा-चढ़ाकर रखने की वजह से समाजवाद के निर्माण के दौरान क्षति ही उठानी पड़ती है।
२. संक्रमण काल की अर्थव्यवस्था
सङ्क्रमण काल की अर्थव्यवस्था को न तो पूजीवादी कहा जा सकता है और न नमाजवादी । यह कई आर्थिक क्षेत्रो का मिला-जुला रूप है। आर्थिक क्षेत्र उत्पादन के साधनों के स्वामित्व के एक या दूसरे रूप पर आधारित हैं और प्रत्येक देश 'विशेष के विकास के एक निश्चित काल के लिए विशिष्ट है।
मक्रमण काल के दौरान हर देश की अर्थव्यवस्था में भिन्न आर्थिक क्षेत्र हो सकते है। यह समाजवाद के रास्ते पर उन्मुख देश की मूर्त आर्थिक स्थितियो पर निर्भर है, किन्तु पूजीवाद से समाजवाद को ओर संक्रमण काल में देश को " अर्थव्यवस्था में तीन मुख्य क्षेत्रो-समाजवादी, लघु वस्तु उत्पादक और पूजीवादी का होना लाजिमी है।
समाजवादी क्षेत्र
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में समाजवादी क्षेत्र की स्थापना उत्पादन के माधनों के समाजवादी समाजीकरण के द्वारा होती है।
सर्वहारा वर्ग के राज्य द्वारा इस दिशा में पहला और महत्वपूर्ण कदम समाजवादी राष्ट्रीयकरण का होता है। इसके द्वारा वह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपनी प्रमुख स्थिति बना लेता है।
समाजवादी राष्ट्रीयकरण का मतलब सर्वहारा वर्ग के राज्य द्वारा शोरक वर्गों की सम्पत्ति को क्रान्तिकारी तरीको से छोन कर राजकीय, समाजवादी सम्पति (सम्पूर्ण जनता की सम्पत्ति) में बदल देना है। पूजीपति वर्ग के सम्पूर्ण धन का सृजन मजदूर वर्ग को बई पुश्तो के द्वारा किया गया है। जब समाजवादी शान्ति के दौरान मजदूर वर्ग पूजीपतियों से उत्पादन के नाधन छीन लेता है, तब उसके इस व्यायपूर्ण कार्य द्वारा ऐतिहासिक न्याय प्रतिष्ठित होता है। जिसे जनता को मेहनत ने बनाया है, उस पर जनता का अधिकार होना ही चाहिए ।
उत्पादन के साधनों का समाजवादी राष्ट्रीयन रण पूजीवाद के बुनियादो अन्नविरोध-उत्पादन के सामाजिक चरित्र और पूजीपतियों द्वारा फल-प्राप्ति के
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नायकत्व और उत्पादन के प्रबन्ध के रूपो तथा कृषि मे सहकारिता के विभिन्न तरीकों में देखी जाती है, किन्तु सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व, उत्पादन के साधनो पर मे निजी स्वामित्व का उन्मूलन, कृषि मे सहकारिता, इत्यादि वे आवश्यक तत्व हैं जिनके बिना समाजवादी व्यवस्था का सफल विकास नही हो सकता । समाजवादी क्रान्ति और समाजवादी निर्माण के मुख्य वस्तुगत नियमों को त्याग देने के कारण तथा राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय विशेषताओ को बढा-चढ़ाकर रखने की वजह से समाजवाद के निर्माण के दौरान क्षति ही उठानी पड़ती है। दो. संक्रमण काल की अर्थव्यवस्था सङ्क्रमण काल की अर्थव्यवस्था को न तो पूजीवादी कहा जा सकता है और न नमाजवादी । यह कई आर्थिक क्षेत्रो का मिला-जुला रूप है। आर्थिक क्षेत्र उत्पादन के साधनों के स्वामित्व के एक या दूसरे रूप पर आधारित हैं और प्रत्येक देश 'विशेष के विकास के एक निश्चित काल के लिए विशिष्ट है। मक्रमण काल के दौरान हर देश की अर्थव्यवस्था में भिन्न आर्थिक क्षेत्र हो सकते है। यह समाजवाद के रास्ते पर उन्मुख देश की मूर्त आर्थिक स्थितियो पर निर्भर है, किन्तु पूजीवाद से समाजवाद को ओर संक्रमण काल में देश को " अर्थव्यवस्था में तीन मुख्य क्षेत्रो-समाजवादी, लघु वस्तु उत्पादक और पूजीवादी का होना लाजिमी है। समाजवादी क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में समाजवादी क्षेत्र की स्थापना उत्पादन के माधनों के समाजवादी समाजीकरण के द्वारा होती है। सर्वहारा वर्ग के राज्य द्वारा इस दिशा में पहला और महत्वपूर्ण कदम समाजवादी राष्ट्रीयकरण का होता है। इसके द्वारा वह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपनी प्रमुख स्थिति बना लेता है। समाजवादी राष्ट्रीयकरण का मतलब सर्वहारा वर्ग के राज्य द्वारा शोरक वर्गों की सम्पत्ति को क्रान्तिकारी तरीको से छोन कर राजकीय, समाजवादी सम्पति में बदल देना है। पूजीपति वर्ग के सम्पूर्ण धन का सृजन मजदूर वर्ग को बई पुश्तो के द्वारा किया गया है। जब समाजवादी शान्ति के दौरान मजदूर वर्ग पूजीपतियों से उत्पादन के नाधन छीन लेता है, तब उसके इस व्यायपूर्ण कार्य द्वारा ऐतिहासिक न्याय प्रतिष्ठित होता है। जिसे जनता को मेहनत ने बनाया है, उस पर जनता का अधिकार होना ही चाहिए । उत्पादन के साधनों का समाजवादी राष्ट्रीयन रण पूजीवाद के बुनियादो अन्नविरोध-उत्पादन के सामाजिक चरित्र और पूजीपतियों द्वारा फल-प्राप्ति के
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[PART III - SEC. 4]
इसी प्रकार एनएसआईसीटी का यह विचार कि रियायत करार में उत्पादकता स्थिति उसे दंडित करने के लिए पर्याप्त उपाय है, संभवत ईएलटी की सकल्पना को गलत समझने के कारण है । जहाँ रियायत करार में किए गए प्रावधान में केवल न्यूनतम अपेक्षा का ही निर्धारण है वही ईएलटी स्कीम प्राप्त उत्पादकता स्तरो के सदर्भ में प्रशुल्क पर प्रीमियम' और 'छूट' वाली एक सक्रिय स्कीम होगी । प्राधिकरण एनएसआईसीटी की सुविधा के लिए यह स्पष्ट करना चाहता है कि ईएलटीएस टर्मिनल प्रचालक को दंडित करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें उत्पादकता मे सुधार लाने हेतु अभिप्रेरित करने के लिए है । इसके अलावा यह एनएसआईसीटी को अपने प्रतिस्पर्द्धियो की तुलना में ऐसी अलाभकारी स्थिति में नहीं रखना चाहते जिसकी एनएसआईसीटी ने आशंका व्यक्त की है। बाजार में आमतौर पर ऐसे सेवा प्रदाता को अधिमान्यता दी जाती है जो उत्पादकता को सुनिश्चित करता है, और यदि उसके सेवा शुल्क को वास्तव में प्राप्त उत्पादकता से जोड़ दिया जाए तो इससे ग्राहक को प्रसन्नता होगी । सीमित प्रतिस्पर्द्धात्मक परिवेश मे, ईएलटी स्कीम यदि ग्राहक अधिक द्रुत सेवाएं चाहते है तो निस्सदेह अपने प्रतिस्पर्द्धियो से अधिक टर्मिनल उपलब्ध कराएगी ।
अंतरिम ईएलटी स्कीम के निर्धारण सबंधी आदेश मे जैसा कि बताया गया है कि यह व्यापक और अंतिम स्कीम नही है । इसके पीछे आशय कार्यवाहियो में तेजी लाना था क्योकि दक्षता-संबद्धप्रशुल्क स्कीम भारतीय पत्तन क्षेत्र मे एक आदर्श विचार है । एनएसआईसीटी ने जैसा कि इगित किया है कि जहाज़ के आकार जहाज़ के डिजाइन कटेनर नौभरण शुल्क, जलयानो का बेड़ा बनाना, मौसम कारक आदि विभिन्न कारको पर अतरिम ईएलटी स्कीम में विचार नहीं किया गया है । अतरिम स्कीम का निर्धारण तीन माह की बहुत ही कम अवधि के लिए किया गया है और यह हमेशा जारी नहीं रह सकती ।
(viii) ध्यान रहे कि इस प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित प्रशुल्क केवल महापत्तनो के भीतर कार्यरत निजी टर्मिनल प्रचालको के मामले में अधिकतम प्रशुल्क है । निजी टर्मिनल प्रचालको को इस प्राधिकरण द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर किसी भी दर पर प्रचालन करने की स्वतंत्रता है । निर्धारित अंतरिम ईएलटी स्कीम इस कानूनी स्थिति को कुछ-कुछ बदल देती है । यह प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दर को एनएसआईसीटी के लिए 'दर' बना देती है। प्राप्त उत्पादकता के संदर्भ में अधिसूचित प्रशुल्को में कमी या वृद्धि करने से एनएसआईसीटी के लिए अधिकतम निर्धारित दर से कम किसी भी दर पर बातचीत करने के लिए उपलब्ध लोचनीयता पर प्रभाव पड़ेगा ।
एनएसआईसीटी द्वारा प्रस्तावित ईएलटी स्कीम के विकल्प-1 को ईएलटी स्कीम बिल्कुल नही कहा जा सकता । अधिक से अधिक इसे टर्मिनल और लाइनो के बीच वाणिज्यिक बातचीत को औपचारिक बनाने का प्रयास माना जा सकता है । इस समय लाइनो और एनएसआईसीटी के बीच होने वाली बातचीत को पक्षकार बनने का प्राधिकरण का कोई इरादा भी नही है । अत प्रस्ताव के विकल्प - 1 को स्वीकार नही किया जा सकता ।
प्रस्ताव का विकल्प-2 अत्यधिक जटिल है और इसमें काफी अधिक अंकगणितीय एव लेखा समायोजन करने होगे । ईएलटी स्कीम को सरल, स्पष्ट बोधगम्य एव सरलतापूर्वक क्रियानवयन के योग्य बनाना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावित स्कीन के विकल्प - 2 को अनुमोदित नहीं किया जा सकता । महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी पत्तन प्रयोक्ताओं का सुस्पष्ट रूप से यह मानना है कि विकल्प-2 वाछित स्कीम नही है । इसके अलावा एनएसआईसीटी ने भी इस स्कीम के क्रियान्वयन के बारे में अपनी शर्ते अभिव्यक्त की है। विकल्प 2 के अधीन प्रस्तावित स्कीम
मे कई अस्वीकार्य धारणाएं एवं मान्यताएं हैं। चूंकि यह स्कीम अपने आप में अत्यधिक जटिल है और अस्वीकार किए जाने योग्य है अतः प्रस्ताव की इन अलग अलग मदो पर ब्यौरेवार चर्चा नहीं की गई है ।
सीएसएलए ने शिपिंग लाइनो की ओर से सुस्पष्ट रूप से कहा है कि वह उत्पादकता आधारित कीमत निर्धारण का समर्थन करता है परंतु वह स्वीकृत उच्चतम ( कट ऑफ) सीमा से अधिक उत्पादकता के स्तर के लिए कोई प्रीमियम नहीं देगा । इस कथन का अर्थ यह है कि वह केवल वास्तविक उत्पादकता के उच्चतम ( कट ऑफ) सीमा से कम होने पर प्रशुल्क मे छूट चाहता है । यह प्रस्ताव किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है । यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो टर्मिनल प्रचालको के लिए उत्पादकता में सुधार करने के लिए कोई अभिप्रेरणा नहीं होगी । उत्पादकता आधारित कीमत निर्धारण में वित्तीय प्रतिबद्धता दोतरफा अर्थात् वास्तविक निष्पादन से जुड़े दंड और पुरस्कार की होनी चाहिए ।
यहां तक कि पुनरावृत्ति लागत में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार द्वारा यथा अपेक्षित इस प्राधिकरण की कथित नीति प्रचालन दक्षता में सुधार लाने के लिए प्रशुल्क सतुलन का प्रयोग करने की रही है और यह प्राधिकरण दक्षता-सबद्ध-प्रशुल्को का निर्धारण करके इसे प्राप्त करने का प्रयास करना होगा। इस तथ्य के बावजूद कि एनएसआईसीटी के परिप्रेक्ष्य में यह प्रयास स्वीकृत दक्षता-संबद्ध-प्रशुल्क (ईएलटी) स्कीम के रूप मे फलदायक सिद्ध नही हुआ है, यह प्राधिकरण कंटेनर टर्मिनलो के लिए ईएलटी स्कीम बनाने का प्रयास करेगा और पत्तन न्यासों / टर्मिनल प्रचालको तथा पत्तन प्रयोक्ताओं से परामर्श करने के बाद सभी कटेनर टर्मिनलो मे अपनाए जाने हेतु ऐसी एक स्वीकार्य स्कीम निर्धारित की जा सकती है। ऐसी स्कीम बनाने मे इस प्राधिकरण की सहायता के लिए शीघ्र ही एक कार्यकारी दल का गठन किया जाएगा । कार्यकारी दल में पत्तनो, निजी टर्मिनलो, लाइनो और इस व्यापार के सदस्य शामिल होगे ।
(xii )
उपर्युक्त स्थिति के प्रकाश में यह एकदम स्पष्ट हो जाता है कि प्राधिकरण द्वारा अपने 7 नवबर 2000 के आदेश में निर्धारित अंतरिम ईएलटी स्कीम को निरस्त करना आवश्यक है ।
परिणामस्वरूप, और ऊपर दिए गए तर्को तथा समग्र विचार-विमर्श के आधार पर यह प्राधिकरण एनएसआईसीटी के प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय करता है । निर्धारित अतरिम दक्षता-सबद्ध-प्रशुल्क (ईएलटी) स्कीम को निरस्त किया जाता है। तदनुसार एनएसआईसीटी की दरो मे मोजूदा सामान्य नोट 10 को हटाया जाता है । परंतु इसका एनएसआईसीटी के जेएनपीटी के साथ हुए रियायत करार से होने वाले सविदात्मक दायित्वो के निर्वहन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
एस. सत्यम, अध्यक्ष [विज्ञापन III/IV/143/2001/असा. ]
TARIFF AUTHORITY FOR MAJOR PORTS
New Delhi, the 10th April, 2001
No. TAMP / 130/2000-JNPT. - In exercise of the powers conferred by Section 48 of the Major Port Trusts Act. 1963 ( 38 of 1963), the Tariff Authority for Major Ports hcreby disposes of the proposal submitted by the Nhava Sheva International Container Terminal Limited (NSICT) relating to an Efficiency Linked TarifT Schemc (ELTS) at its Terminal, as in the Order appended hercto.
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[PART III - SEC. चार] इसी प्रकार एनएसआईसीटी का यह विचार कि रियायत करार में उत्पादकता स्थिति उसे दंडित करने के लिए पर्याप्त उपाय है, संभवत ईएलटी की सकल्पना को गलत समझने के कारण है । जहाँ रियायत करार में किए गए प्रावधान में केवल न्यूनतम अपेक्षा का ही निर्धारण है वही ईएलटी स्कीम प्राप्त उत्पादकता स्तरो के सदर्भ में प्रशुल्क पर प्रीमियम' और 'छूट' वाली एक सक्रिय स्कीम होगी । प्राधिकरण एनएसआईसीटी की सुविधा के लिए यह स्पष्ट करना चाहता है कि ईएलटीएस टर्मिनल प्रचालक को दंडित करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें उत्पादकता मे सुधार लाने हेतु अभिप्रेरित करने के लिए है । इसके अलावा यह एनएसआईसीटी को अपने प्रतिस्पर्द्धियो की तुलना में ऐसी अलाभकारी स्थिति में नहीं रखना चाहते जिसकी एनएसआईसीटी ने आशंका व्यक्त की है। बाजार में आमतौर पर ऐसे सेवा प्रदाता को अधिमान्यता दी जाती है जो उत्पादकता को सुनिश्चित करता है, और यदि उसके सेवा शुल्क को वास्तव में प्राप्त उत्पादकता से जोड़ दिया जाए तो इससे ग्राहक को प्रसन्नता होगी । सीमित प्रतिस्पर्द्धात्मक परिवेश मे, ईएलटी स्कीम यदि ग्राहक अधिक द्रुत सेवाएं चाहते है तो निस्सदेह अपने प्रतिस्पर्द्धियो से अधिक टर्मिनल उपलब्ध कराएगी । अंतरिम ईएलटी स्कीम के निर्धारण सबंधी आदेश मे जैसा कि बताया गया है कि यह व्यापक और अंतिम स्कीम नही है । इसके पीछे आशय कार्यवाहियो में तेजी लाना था क्योकि दक्षता-संबद्धप्रशुल्क स्कीम भारतीय पत्तन क्षेत्र मे एक आदर्श विचार है । एनएसआईसीटी ने जैसा कि इगित किया है कि जहाज़ के आकार जहाज़ के डिजाइन कटेनर नौभरण शुल्क, जलयानो का बेड़ा बनाना, मौसम कारक आदि विभिन्न कारको पर अतरिम ईएलटी स्कीम में विचार नहीं किया गया है । अतरिम स्कीम का निर्धारण तीन माह की बहुत ही कम अवधि के लिए किया गया है और यह हमेशा जारी नहीं रह सकती । ध्यान रहे कि इस प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित प्रशुल्क केवल महापत्तनो के भीतर कार्यरत निजी टर्मिनल प्रचालको के मामले में अधिकतम प्रशुल्क है । निजी टर्मिनल प्रचालको को इस प्राधिकरण द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर किसी भी दर पर प्रचालन करने की स्वतंत्रता है । निर्धारित अंतरिम ईएलटी स्कीम इस कानूनी स्थिति को कुछ-कुछ बदल देती है । यह प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दर को एनएसआईसीटी के लिए 'दर' बना देती है। प्राप्त उत्पादकता के संदर्भ में अधिसूचित प्रशुल्को में कमी या वृद्धि करने से एनएसआईसीटी के लिए अधिकतम निर्धारित दर से कम किसी भी दर पर बातचीत करने के लिए उपलब्ध लोचनीयता पर प्रभाव पड़ेगा । एनएसआईसीटी द्वारा प्रस्तावित ईएलटी स्कीम के विकल्प-एक को ईएलटी स्कीम बिल्कुल नही कहा जा सकता । अधिक से अधिक इसे टर्मिनल और लाइनो के बीच वाणिज्यिक बातचीत को औपचारिक बनाने का प्रयास माना जा सकता है । इस समय लाइनो और एनएसआईसीटी के बीच होने वाली बातचीत को पक्षकार बनने का प्राधिकरण का कोई इरादा भी नही है । अत प्रस्ताव के विकल्प - एक को स्वीकार नही किया जा सकता । प्रस्ताव का विकल्प-दो अत्यधिक जटिल है और इसमें काफी अधिक अंकगणितीय एव लेखा समायोजन करने होगे । ईएलटी स्कीम को सरल, स्पष्ट बोधगम्य एव सरलतापूर्वक क्रियानवयन के योग्य बनाना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावित स्कीन के विकल्प - दो को अनुमोदित नहीं किया जा सकता । महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी पत्तन प्रयोक्ताओं का सुस्पष्ट रूप से यह मानना है कि विकल्प-दो वाछित स्कीम नही है । इसके अलावा एनएसआईसीटी ने भी इस स्कीम के क्रियान्वयन के बारे में अपनी शर्ते अभिव्यक्त की है। विकल्प दो के अधीन प्रस्तावित स्कीम मे कई अस्वीकार्य धारणाएं एवं मान्यताएं हैं। चूंकि यह स्कीम अपने आप में अत्यधिक जटिल है और अस्वीकार किए जाने योग्य है अतः प्रस्ताव की इन अलग अलग मदो पर ब्यौरेवार चर्चा नहीं की गई है । सीएसएलए ने शिपिंग लाइनो की ओर से सुस्पष्ट रूप से कहा है कि वह उत्पादकता आधारित कीमत निर्धारण का समर्थन करता है परंतु वह स्वीकृत उच्चतम सीमा से अधिक उत्पादकता के स्तर के लिए कोई प्रीमियम नहीं देगा । इस कथन का अर्थ यह है कि वह केवल वास्तविक उत्पादकता के उच्चतम सीमा से कम होने पर प्रशुल्क मे छूट चाहता है । यह प्रस्ताव किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है । यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो टर्मिनल प्रचालको के लिए उत्पादकता में सुधार करने के लिए कोई अभिप्रेरणा नहीं होगी । उत्पादकता आधारित कीमत निर्धारण में वित्तीय प्रतिबद्धता दोतरफा अर्थात् वास्तविक निष्पादन से जुड़े दंड और पुरस्कार की होनी चाहिए । यहां तक कि पुनरावृत्ति लागत में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार द्वारा यथा अपेक्षित इस प्राधिकरण की कथित नीति प्रचालन दक्षता में सुधार लाने के लिए प्रशुल्क सतुलन का प्रयोग करने की रही है और यह प्राधिकरण दक्षता-सबद्ध-प्रशुल्को का निर्धारण करके इसे प्राप्त करने का प्रयास करना होगा। इस तथ्य के बावजूद कि एनएसआईसीटी के परिप्रेक्ष्य में यह प्रयास स्वीकृत दक्षता-संबद्ध-प्रशुल्क स्कीम के रूप मे फलदायक सिद्ध नही हुआ है, यह प्राधिकरण कंटेनर टर्मिनलो के लिए ईएलटी स्कीम बनाने का प्रयास करेगा और पत्तन न्यासों / टर्मिनल प्रचालको तथा पत्तन प्रयोक्ताओं से परामर्श करने के बाद सभी कटेनर टर्मिनलो मे अपनाए जाने हेतु ऐसी एक स्वीकार्य स्कीम निर्धारित की जा सकती है। ऐसी स्कीम बनाने मे इस प्राधिकरण की सहायता के लिए शीघ्र ही एक कार्यकारी दल का गठन किया जाएगा । कार्यकारी दल में पत्तनो, निजी टर्मिनलो, लाइनो और इस व्यापार के सदस्य शामिल होगे । उपर्युक्त स्थिति के प्रकाश में यह एकदम स्पष्ट हो जाता है कि प्राधिकरण द्वारा अपने सात नवबर दो हज़ार के आदेश में निर्धारित अंतरिम ईएलटी स्कीम को निरस्त करना आवश्यक है । परिणामस्वरूप, और ऊपर दिए गए तर्को तथा समग्र विचार-विमर्श के आधार पर यह प्राधिकरण एनएसआईसीटी के प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय करता है । निर्धारित अतरिम दक्षता-सबद्ध-प्रशुल्क स्कीम को निरस्त किया जाता है। तदनुसार एनएसआईसीटी की दरो मे मोजूदा सामान्य नोट दस को हटाया जाता है । परंतु इसका एनएसआईसीटी के जेएनपीटी के साथ हुए रियायत करार से होने वाले सविदात्मक दायित्वो के निर्वहन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा । एस. सत्यम, अध्यक्ष [विज्ञापन III/IV/एक सौ तैंतालीस/दो हज़ार एक/असा. ] TARIFF AUTHORITY FOR MAJOR PORTS New Delhi, the दस अप्रैलil, दो हज़ार एक No. TAMP / एक सौ तीस/दो हज़ार-JNPT. - In exercise of the powers conferred by Section अड़तालीस of the Major Port Trusts Act. एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ , the Tariff Authority for Major Ports hcreby disposes of the proposal submitted by the Nhava Sheva International Container Terminal Limited relating to an Efficiency Linked TarifT Schemc at its Terminal, as in the Order appended hercto.
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मंगलवार को पश्चिम बंगाल में तीन पब्लिक मीटिंग और एक रोड शो करने पहुंचे। बता दें कि पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी घमासान का आधा दौर निकल चुका है। यहां 8 चरणों में चुनाव प्रक्रिया होना है। पांचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को रायसीना डायलॉग के 6th संस्करण का उद्घाटन करेंगे। यह संवाद 13 से 16 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। हर साल होने वाले इस संवाद में भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर विभिन्न देश सलाह-मश्वरा करते हैं। इस बार कोरोना महामारी से निपटने लोग अपने सुझाव देंगे।
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कैम्पेन चल रहा है। जनसंख्या के लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती है। बावजूद भारत ने 85 दिनों में 10 करोड़ डोज देकर एक दुनिया के सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत इस आंकड़े को 10 अप्रैल को क्रॉस कर चुका है। यानी भारत सबसे कम समय में इतने डोज लगाने वाला देश बन गया है। भारत ने इस मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया। अमेरिका को इतने डोज लगाने में 89 दिन, जबकि चीन को 106 दिन लगे थे।
जलियावाला बाग हत्याकांड। इतिहास के पन्नों के वो 10 मिनट जहां से शुरूआत हुई ब्रिटिश साम्राज्य के अंत की। उस दिन बैसाखी थी, मेला लगा था लोग चहक रहे थे, खुश थे। तभी ब्रिटिश आर्मी का ब्रिगेडियर जनरल रेजिनैल्ड डायर 90 सैनिकों को लेकर जलियांवाल बाग पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के निहत्थे हिंदुस्तानियों पर गोलियां बरसाना शरू कर दिया। जानिए 13 अप्रैल 1919 के दिन हुए इस नरसंहार की 10 बातें।
कोरोना संक्रमण को रोकने विभिन्न राज्यों में कड़ी सख्ती के चलते पिछले 24 घंटे में केस घटे हैं। हालांकि यह आंकड़ा अब भी डेढ़ लाख के पार है। पिछले 24 घंटे में देश में +1,61,736 नए केस मिले हैं, जबकि इससे एक दिन पहले +1,69,914 नए केस सामने आए थे। महाराष्ट्र में भी नए केस कम हुए हैं। यहां +51,751 नए केस मिले हैं, जबकि इससे एक दिन पहले +63,294 नए केस मिले थे। यूपी में भी केस घटे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में केस बढ़े हैं। इस बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने स्पुतनिक-V वैक्सीन (रूस में विकसित COVID-19 वैक्सीन) के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी है।
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सोमवार को एक मिनी बस के खाई में जाकर नदी में गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हुए हैं। हादसा किश्तवाड़ नेशनल हाइवे पर ठाठरी गंदो लिंक मार्ग पर हुआ। हादसे में घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। इनका जम्मू के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जाता है कि ड्राइवर ने स्टीयरिंग से कंट्रोल खो दिया था।
कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। भारत में साहित्य, आध्यात्मिकता, संगीत और सिनेमा की बहुत सी विभूतियां यहां से निकली है। जानकार बताते हैं कि कोलकाता में शुरू हुई बंगाली पुनर्जागरण काल से ही इस शहर में शानदार बदलाव हुए हैं। सती प्रथा के उन्मूलन जैसे सामाजिक सुधारों की बात हो या विधवा पुनर्विवाह को वैध बनाने का अभियान, कोलकाता महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए इन कदमों का गवाह रहा है। देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाली भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन के अलावा यह क्षेत्र कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया।
भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर कार्रवाई करते हुए 24 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया है।
सुशील चंद्रा को निर्वाचन आयोग का मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया है। चंद्रा वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा की जगह लेंगे।
भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर जारी विवाद अभी पूरी तरह से थमा नहीं है। ऐसे में भारतीय सुरक्षा एजेंसी पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तैनात चीनी सेना की जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मंगलवार को पश्चिम बंगाल में तीन पब्लिक मीटिंग और एक रोड शो करने पहुंचे। बता दें कि पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी घमासान का आधा दौर निकल चुका है। यहां आठ चरणों में चुनाव प्रक्रिया होना है। पांचवें चरण में पैंतालीस सीटों पर सत्रह अप्रैल को, छठे चरण में तैंतालीस सीटों पर बाईस अप्रैल को, सातवें चरण में छत्तीस सीटों पर छब्बीस अप्रैल को और आठवें चरण में पैंतीस सीटों पर उनतीस अप्रैल को वोटिंग होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को रायसीना डायलॉग के छःth संस्करण का उद्घाटन करेंगे। यह संवाद तेरह से सोलह अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। हर साल होने वाले इस संवाद में भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर विभिन्न देश सलाह-मश्वरा करते हैं। इस बार कोरोना महामारी से निपटने लोग अपने सुझाव देंगे। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कैम्पेन चल रहा है। जनसंख्या के लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती है। बावजूद भारत ने पचासी दिनों में दस करोड़ डोज देकर एक दुनिया के सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत इस आंकड़े को दस अप्रैल को क्रॉस कर चुका है। यानी भारत सबसे कम समय में इतने डोज लगाने वाला देश बन गया है। भारत ने इस मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया। अमेरिका को इतने डोज लगाने में नवासी दिन, जबकि चीन को एक सौ छः दिन लगे थे। जलियावाला बाग हत्याकांड। इतिहास के पन्नों के वो दस मिनट जहां से शुरूआत हुई ब्रिटिश साम्राज्य के अंत की। उस दिन बैसाखी थी, मेला लगा था लोग चहक रहे थे, खुश थे। तभी ब्रिटिश आर्मी का ब्रिगेडियर जनरल रेजिनैल्ड डायर नब्बे सैनिकों को लेकर जलियांवाल बाग पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के निहत्थे हिंदुस्तानियों पर गोलियां बरसाना शरू कर दिया। जानिए तेरह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ उन्नीस के दिन हुए इस नरसंहार की दस बातें। कोरोना संक्रमण को रोकने विभिन्न राज्यों में कड़ी सख्ती के चलते पिछले चौबीस घंटाटे में केस घटे हैं। हालांकि यह आंकड़ा अब भी डेढ़ लाख के पार है। पिछले चौबीस घंटाटे में देश में +एक,इकसठ,सात सौ छत्तीस नए केस मिले हैं, जबकि इससे एक दिन पहले +एक,उनहत्तर,नौ सौ चौदह नए केस सामने आए थे। महाराष्ट्र में भी नए केस कम हुए हैं। यहां +इक्यावन,सात सौ इक्यावन नए केस मिले हैं, जबकि इससे एक दिन पहले +तिरेसठ,दो सौ चौरानवे नए केस मिले थे। यूपी में भी केस घटे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में केस बढ़े हैं। इस बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने स्पुतनिक-V वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सोमवार को एक मिनी बस के खाई में जाकर नदी में गिरने से छः लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। हादसा किश्तवाड़ नेशनल हाइवे पर ठाठरी गंदो लिंक मार्ग पर हुआ। हादसे में घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। इनका जम्मू के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जाता है कि ड्राइवर ने स्टीयरिंग से कंट्रोल खो दिया था। कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। भारत में साहित्य, आध्यात्मिकता, संगीत और सिनेमा की बहुत सी विभूतियां यहां से निकली है। जानकार बताते हैं कि कोलकाता में शुरू हुई बंगाली पुनर्जागरण काल से ही इस शहर में शानदार बदलाव हुए हैं। सती प्रथा के उन्मूलन जैसे सामाजिक सुधारों की बात हो या विधवा पुनर्विवाह को वैध बनाने का अभियान, कोलकाता महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए इन कदमों का गवाह रहा है। देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाली भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन के अलावा यह क्षेत्र कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर कार्रवाई करते हुए चौबीस घंटाटे का प्रतिबंध लगा दिया है। सुशील चंद्रा को निर्वाचन आयोग का मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया है। चंद्रा वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा की जगह लेंगे। भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर जारी विवाद अभी पूरी तरह से थमा नहीं है। ऐसे में भारतीय सुरक्षा एजेंसी पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तैनात चीनी सेना की जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।
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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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महापुराण मे व आचार्य दामनन्दी ने पुराणसारसंग्रह" मे दस भवो का निरूपण किया है। अन्य दिगम्बर विज्ञो ने भी उन्ही का किया है । श्वेताम्बराचार्यों ने श्री धन्ना सार्थवाह के भव से भवो की परिगणना की है और दिगम्बराचार्यों ने महावल के भव से उल्लेख किया है । इनके अतिरिक्त अनेक जीवनप्रसगो मे भी अन्तर है ।
यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि इन भवो की जो परिगणना की गई है वह सम्यक्त्व उपलब्धि के पश्चात् की है । " श्री ऋषभदेव के जीव को अनादि काल के मिथ्यात्व रूपी निविड अन्धकार मे से सर्वप्रथम धन्ना (धन) सार्थवाह के भव मे मुक्ति मिली थी और सम्यग्दर्शन के अमित लोक के दर्शन हुए थे ।
[१] धन्ना सार्थवाह
भगवान श्री ऋषभदेव का जीव एक बार अपर महाविदेह क्षेत्र के क्षितिप्रतिष्ठ नगर मे धन्ना सार्थवाह बनता है। उसके पास विपुल
आयो महावलो ज्ञेयो ललिताङ्गस्ततोऽपर । वचजहस्तथाऽऽर्यश्च श्रीवर सुविधिस्तथा ॥ अच्युतो वज्रनाभोऽहमिन्द्रश्च वृषभस्तथा । दशैतानि पुराणानि पुरुदेवाऽऽश्रितानि वै ॥
- पुराणमार संग्रह सर्ग० ५, इनो० ५-६ पृ० ७४ सम्प्रति यथा भगवता सम्यक्त्वमवाप्त यावतो वा भवानवाप्तनम्यक्त्व मसार पयंटितवान् ।
- आवश्यक मल० वृत्ति १५७/२ १२. तेरा कालेरण तेग समएण अवरविदेहवासे धणो नाम नत्यवाही होत्या । - आवश्यक हारिभद्रीया वृत्ति, पृ० ११५
(ख) आवश्यक मल० वृत्ति, पृ० १५८/१
(ग) आवश्यक पूर्णि पृ० १३१
तत्र चाश्नीत् सार्थवाहो, धनी नाम यशोधन ।
आस्पद सम्पदामेक, नरितामिव
नागर ॥
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महापुराण मे व आचार्य दामनन्दी ने पुराणसारसंग्रह" मे दस भवो का निरूपण किया है। अन्य दिगम्बर विज्ञो ने भी उन्ही का किया है । श्वेताम्बराचार्यों ने श्री धन्ना सार्थवाह के भव से भवो की परिगणना की है और दिगम्बराचार्यों ने महावल के भव से उल्लेख किया है । इनके अतिरिक्त अनेक जीवनप्रसगो मे भी अन्तर है । यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि इन भवो की जो परिगणना की गई है वह सम्यक्त्व उपलब्धि के पश्चात् की है । " श्री ऋषभदेव के जीव को अनादि काल के मिथ्यात्व रूपी निविड अन्धकार मे से सर्वप्रथम धन्ना सार्थवाह के भव मे मुक्ति मिली थी और सम्यग्दर्शन के अमित लोक के दर्शन हुए थे । [एक] धन्ना सार्थवाह भगवान श्री ऋषभदेव का जीव एक बार अपर महाविदेह क्षेत्र के क्षितिप्रतिष्ठ नगर मे धन्ना सार्थवाह बनता है। उसके पास विपुल आयो महावलो ज्ञेयो ललिताङ्गस्ततोऽपर । वचजहस्तथाऽऽर्यश्च श्रीवर सुविधिस्तथा ॥ अच्युतो वज्रनाभोऽहमिन्द्रश्च वृषभस्तथा । दशैतानि पुराणानि पुरुदेवाऽऽश्रितानि वै ॥ - पुराणमार संग्रह सर्गशून्य पाँच, इनोशून्य पाँच-छः पृशून्य चौहत्तर सम्प्रति यथा भगवता सम्यक्त्वमवाप्त यावतो वा भवानवाप्तनम्यक्त्व मसार पयंटितवान् । - आवश्यक मलशून्य वृत्ति एक सौ सत्तावन/दो बारह. तेरा कालेरण तेग समएण अवरविदेहवासे धणो नाम नत्यवाही होत्या । - आवश्यक हारिभद्रीया वृत्ति, पृशून्य एक सौ पंद्रह आवश्यक मलशून्य वृत्ति, पृशून्य एक सौ अट्ठावन/एक आवश्यक पूर्णि पृशून्य एक सौ इकतीस तत्र चाश्नीत् सार्थवाहो, धनी नाम यशोधन । आस्पद सम्पदामेक, नरितामिव नागर ॥
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Uttarakhand Government Job 1506 पदों पर भर्ती की राह खुलने जा रही है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड आचार संहिता लगने से पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। चिकित्सकों स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए एक सप्ताह के भीतर विज्ञप्ति भी निकाल दी जाएगी।
जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Government Job स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आयुर्वेद विभाग में 1506 पदों पर भर्ती की राह खुलने जा रही है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड आचार संहिता लगने से पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। चिकित्सकों, स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए एक सप्ताह के भीतर विज्ञप्ति भी निकाल दी जाएगी।
चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डा डीएस रावत ने बताया कि इन पदों के लिए विभागों की ओ से पूर्व में अधियाचन आए हुए हैं और विज्ञप्ति प्रकाशित होने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह के दौरान इन पदों के लिए विज्ञप्ति जारी कर भर्ती शुरू की जाएगी।
डा रावत ने कहा कि पहले से आए अधियाचन के आधार पर भर्ती की प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन फिर भी यदि जरूरत पड़ी तो इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग से इजाजत भी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है ऐसे में चिकित्सकों, मेडिकल फैकल्टी व अन्य पदों पर भर्ती की जरूरत होगी। डा रावत ने बताया कि भर्ती की प्रक्रिया के तहत परिणाम आचार सहिंता समाप्त होने के बाद जारी किया जाएगा।
आकाश ग्रामीण स्वास्थ्य संस्था की ओर से वाल्मीकि बस्ती में जरूरतमंद बच्चों को लेखन सामग्री वितरित की गई। संस्था अध्यक्ष प्रीति भट्टï ने कहा कि प्रत्येक वर्ष संस्था की ओर से जरूरतमंदों को जरूरत की सामग्री वितरित की जाती है। कहा इस बार बच्चों को लेखन सामग्री का वितरण किया गया। इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री डा. बबीता सहोत्रा आनंद, ज्योति भट्ट, अनीता भट्ट, मीना शर्मा आदि मौजूद रहीं।
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Uttarakhand Government Job एक हज़ार पाँच सौ छः पदों पर भर्ती की राह खुलने जा रही है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड आचार संहिता लगने से पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। चिकित्सकों स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए एक सप्ताह के भीतर विज्ञप्ति भी निकाल दी जाएगी। जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Government Job स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आयुर्वेद विभाग में एक हज़ार पाँच सौ छः पदों पर भर्ती की राह खुलने जा रही है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड आचार संहिता लगने से पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। चिकित्सकों, स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के पदों पर होने वाली भर्ती के लिए एक सप्ताह के भीतर विज्ञप्ति भी निकाल दी जाएगी। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डा डीएस रावत ने बताया कि इन पदों के लिए विभागों की ओ से पूर्व में अधियाचन आए हुए हैं और विज्ञप्ति प्रकाशित होने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह के दौरान इन पदों के लिए विज्ञप्ति जारी कर भर्ती शुरू की जाएगी। डा रावत ने कहा कि पहले से आए अधियाचन के आधार पर भर्ती की प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन फिर भी यदि जरूरत पड़ी तो इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग से इजाजत भी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है ऐसे में चिकित्सकों, मेडिकल फैकल्टी व अन्य पदों पर भर्ती की जरूरत होगी। डा रावत ने बताया कि भर्ती की प्रक्रिया के तहत परिणाम आचार सहिंता समाप्त होने के बाद जारी किया जाएगा। आकाश ग्रामीण स्वास्थ्य संस्था की ओर से वाल्मीकि बस्ती में जरूरतमंद बच्चों को लेखन सामग्री वितरित की गई। संस्था अध्यक्ष प्रीति भट्टï ने कहा कि प्रत्येक वर्ष संस्था की ओर से जरूरतमंदों को जरूरत की सामग्री वितरित की जाती है। कहा इस बार बच्चों को लेखन सामग्री का वितरण किया गया। इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री डा. बबीता सहोत्रा आनंद, ज्योति भट्ट, अनीता भट्ट, मीना शर्मा आदि मौजूद रहीं।
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शादियों के सीजन में असली जेवर की जगह नकली जेवरों को मुहैया कराकर ठगी करने की कई वारदाते आपने कई बार सुनी होगी. ब्रांडेड कपड़ों के नकली लेबल लगाकर घटिया कपड़ों को ग्राहकों को बेच देने जैसे धोखाधड़ी के मामले भी सामने आये हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा में ऐसा मामला सामने आया, जिसने धोखाधड़ी के सारे मामले पीछे छोड़ दिया हैं.
यहां दुल्हन को उसके मनपसंद दूल्हे के बजाए दूल्हे के बड़े भाई को मंडप में सात फेरे लेने के लिए भेज दिया गया. इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब फोटो सेशन के लिए दूल्हे का सेहरा हटाया गया. खुल जा सिमसिम की तरह जैसे ही दूल्हे के मुंह से फूलों की माला हटी दुल्हन के पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने दूल्हे का चेहरा देखते ही उसे पहचान लिया.
शादी के मंडप में रस्म अदाएगी कर रहा शख्स वो नहीं था, जिसके साथ उसकी सगाई हुई थी. लड़की ने फौरन अपने परिजनों को बताया. इसके बाद शादी मंडप में हंगामा शुरू हो गया. कई बाराती मौके से फरार हो गए. दोनों पक्ष के लोगों ने थाने में पहुंचकर अपना-अपना पक्ष रखा. पुलिस ने दूल्हे और उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है.
जानकारी के मुताबिक, कोरबा जिले के रामपुर गांव में हीराराम साहू के नाते रिश्तेदारों समेत पूरा गांव बारातियों के स्वागत में जुटा था. बारात पड़ोस के गांव परसाभाठा से आई थी. पूरे स्वागत सत्कार के साथ बारातियों को सामुदायिक भवन में रुकवाया गया था. रात में शादी की रस्म अदाएगी शुरू की गई, लेकिन कम बाराती को देखकर हीराराम आश्चर्य में थे.
इसी बीच वरमाला के लिए दुल्हन स्टेज पर आई. दूल्हे की कद काठी को देखकर दुल्हन को शक हुआ. इस बीच फोटोग्राफर ने दूल्हे का सेहरा हटाने की गुजारिश की, लेकिन दूल्हा सेहरा सहित फोटो खिंचवाने पर जोर देता रहा. आखिरकर उसे चेहरे से सेहरा हटाना पड़ा. इसके बाद दुल्हन ने पहचान लिया कि वह उसका बड़ा भाई रंजीत साहू (32) है.
पीड़ित लड़की ने दूल्हे के बड़े भाई से शादी करने से इंकार कर दिया. उसके मुताबिक दिनेश साहू सामान्य कद काठी का था, जबकि रंजीत काफी तगड़ा था. सगाई के बाद उसने कई बार दिनेश से बातचीत की थी, लेकिन उसने ये कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वो उसके साथ धोखाधड़ी करने वाला है. दिनेश बाल्को कंपनी में नौकरी करता है, जबकि रंजीत ठेकेदार है.
दिनेश ने सगाई के दौरान होने वाली रस्म अदाएगी में पूरे परिवार के साथ फोटो भी खिंचवाई थी. दुल्हन के पिता ने पुलिस को तमाम सबूत सौंपे. उन्होंने बताया कि दूल्हे को बतौर तिलक एक लाख दस हजार रुपये भी दिए थे. इसकी भी फोटो उन्होंने पुलिस को दी. पुलिस ने दिनेश, रंजीत और उसके पिता कृष्णा साहू के खिलाफ केस दर्ज किया है.
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शादियों के सीजन में असली जेवर की जगह नकली जेवरों को मुहैया कराकर ठगी करने की कई वारदाते आपने कई बार सुनी होगी. ब्रांडेड कपड़ों के नकली लेबल लगाकर घटिया कपड़ों को ग्राहकों को बेच देने जैसे धोखाधड़ी के मामले भी सामने आये हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा में ऐसा मामला सामने आया, जिसने धोखाधड़ी के सारे मामले पीछे छोड़ दिया हैं. यहां दुल्हन को उसके मनपसंद दूल्हे के बजाए दूल्हे के बड़े भाई को मंडप में सात फेरे लेने के लिए भेज दिया गया. इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब फोटो सेशन के लिए दूल्हे का सेहरा हटाया गया. खुल जा सिमसिम की तरह जैसे ही दूल्हे के मुंह से फूलों की माला हटी दुल्हन के पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने दूल्हे का चेहरा देखते ही उसे पहचान लिया. शादी के मंडप में रस्म अदाएगी कर रहा शख्स वो नहीं था, जिसके साथ उसकी सगाई हुई थी. लड़की ने फौरन अपने परिजनों को बताया. इसके बाद शादी मंडप में हंगामा शुरू हो गया. कई बाराती मौके से फरार हो गए. दोनों पक्ष के लोगों ने थाने में पहुंचकर अपना-अपना पक्ष रखा. पुलिस ने दूल्हे और उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. जानकारी के मुताबिक, कोरबा जिले के रामपुर गांव में हीराराम साहू के नाते रिश्तेदारों समेत पूरा गांव बारातियों के स्वागत में जुटा था. बारात पड़ोस के गांव परसाभाठा से आई थी. पूरे स्वागत सत्कार के साथ बारातियों को सामुदायिक भवन में रुकवाया गया था. रात में शादी की रस्म अदाएगी शुरू की गई, लेकिन कम बाराती को देखकर हीराराम आश्चर्य में थे. इसी बीच वरमाला के लिए दुल्हन स्टेज पर आई. दूल्हे की कद काठी को देखकर दुल्हन को शक हुआ. इस बीच फोटोग्राफर ने दूल्हे का सेहरा हटाने की गुजारिश की, लेकिन दूल्हा सेहरा सहित फोटो खिंचवाने पर जोर देता रहा. आखिरकर उसे चेहरे से सेहरा हटाना पड़ा. इसके बाद दुल्हन ने पहचान लिया कि वह उसका बड़ा भाई रंजीत साहू है. पीड़ित लड़की ने दूल्हे के बड़े भाई से शादी करने से इंकार कर दिया. उसके मुताबिक दिनेश साहू सामान्य कद काठी का था, जबकि रंजीत काफी तगड़ा था. सगाई के बाद उसने कई बार दिनेश से बातचीत की थी, लेकिन उसने ये कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वो उसके साथ धोखाधड़ी करने वाला है. दिनेश बाल्को कंपनी में नौकरी करता है, जबकि रंजीत ठेकेदार है. दिनेश ने सगाई के दौरान होने वाली रस्म अदाएगी में पूरे परिवार के साथ फोटो भी खिंचवाई थी. दुल्हन के पिता ने पुलिस को तमाम सबूत सौंपे. उन्होंने बताया कि दूल्हे को बतौर तिलक एक लाख दस हजार रुपये भी दिए थे. इसकी भी फोटो उन्होंने पुलिस को दी. पुलिस ने दिनेश, रंजीत और उसके पिता कृष्णा साहू के खिलाफ केस दर्ज किया है.
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Mahindra Electric Thar Concept: महिंद्रा एंड महिंद्रा अपनी सबसे फेमस Of Road SUV यानी THAR का इलेक्ट्रिक वर्जन तैयार कर रही है. कंपनी ने Electric Thar Concept Teaser लॉन्च कर अपनी THAR.e को इंट्रोड्यूस किया है. Electric THAR Concept को 15 अगस्त के दिन दुनिया के सामने पेश किया जाएगा, THAR.e को साउथ अफ्रीका के केपटाउन में होने वाले 'Futurescape' में दिखाया जाएगा। इलेक्ट्रिक थार का नाम THAR.e रखा गया है.
Mahindra Electric Thar Concept यानी THAR.e के टीजर में इस कार के लुक्स को दिखाया गया है मगर पूरी तरह रिवील नहीं किया गया. वीडियो में THAR.e का बैज दिखाया गया है. THAR.e में मौजूदा थार की टेल लाइट दिखाई गई है और इसका डिज़ाइन भी मौजूदा थार की तरह ही है. इसमें सिर्फ कॉस्मिक बदलाव नज़र आते हैं जैसा इसका पेंट वर्क।
'इलेक्ट्रिक विजन के साथ एक लीजेंड ने फिर से जन्म लिया। फ्यूचर में आपका स्वागत है।' महिंद्रा ने अगली पोस्ट में कहा, 'हमारी इंक्रेडेबल जर्नी का नेक्स्ट स्टेप इस स्वतंत्रता दिवस पर महिंद्रा 'फ्यूचर स्केप' इवेंट में पेश किया जाएगा, जो हमारे गो ग्लोबल विजन का एक ऑटो और फार्म शोकेस है।'
Electric THAR को भी ऑफ़ रोडिंग SUV की तरह पेश किया जाएगा, यह 4X4 Electric SUV होगी। इसे पावरफुल बनाने के लिए इसमें ड्यूल मोटर का इस्तेमाल होगा या हो सकता है कि हर व्हील के लिए एक मोटर लगे.
फ़िलहाल इस मॉडल को 'Futurescape' में बतौर कांसेप्ट पेश किया जा रहा है. कंपनी अभी इसे कॉमर्शियली मैन्युफैक्चर नहीं कर रही है. लेकिन ऐसी उम्मीद है कि THAR.e की कीमत 20 लाख रुपए से शुरू हो सकती है.
15 अगस्त को THAR.e 'Futurescape' में पेश होगी, लेकिन इसे मार्केट में आते-आते दो साल का समय लग सकता है.
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Mahindra Electric Thar Concept: महिंद्रा एंड महिंद्रा अपनी सबसे फेमस Of Road SUV यानी THAR का इलेक्ट्रिक वर्जन तैयार कर रही है. कंपनी ने Electric Thar Concept Teaser लॉन्च कर अपनी THAR.e को इंट्रोड्यूस किया है. Electric THAR Concept को पंद्रह अगस्त के दिन दुनिया के सामने पेश किया जाएगा, THAR.e को साउथ अफ्रीका के केपटाउन में होने वाले 'Futurescape' में दिखाया जाएगा। इलेक्ट्रिक थार का नाम THAR.e रखा गया है. Mahindra Electric Thar Concept यानी THAR.e के टीजर में इस कार के लुक्स को दिखाया गया है मगर पूरी तरह रिवील नहीं किया गया. वीडियो में THAR.e का बैज दिखाया गया है. THAR.e में मौजूदा थार की टेल लाइट दिखाई गई है और इसका डिज़ाइन भी मौजूदा थार की तरह ही है. इसमें सिर्फ कॉस्मिक बदलाव नज़र आते हैं जैसा इसका पेंट वर्क। 'इलेक्ट्रिक विजन के साथ एक लीजेंड ने फिर से जन्म लिया। फ्यूचर में आपका स्वागत है।' महिंद्रा ने अगली पोस्ट में कहा, 'हमारी इंक्रेडेबल जर्नी का नेक्स्ट स्टेप इस स्वतंत्रता दिवस पर महिंद्रा 'फ्यूचर स्केप' इवेंट में पेश किया जाएगा, जो हमारे गो ग्लोबल विजन का एक ऑटो और फार्म शोकेस है।' Electric THAR को भी ऑफ़ रोडिंग SUV की तरह पेश किया जाएगा, यह चारXचार Electric SUV होगी। इसे पावरफुल बनाने के लिए इसमें ड्यूल मोटर का इस्तेमाल होगा या हो सकता है कि हर व्हील के लिए एक मोटर लगे. फ़िलहाल इस मॉडल को 'Futurescape' में बतौर कांसेप्ट पेश किया जा रहा है. कंपनी अभी इसे कॉमर्शियली मैन्युफैक्चर नहीं कर रही है. लेकिन ऐसी उम्मीद है कि THAR.e की कीमत बीस लाख रुपए से शुरू हो सकती है. पंद्रह अगस्त को THAR.e 'Futurescape' में पेश होगी, लेकिन इसे मार्केट में आते-आते दो साल का समय लग सकता है.
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इक़बाल को अपने पूर्व-पुरुषों से जो प्रेरणाएँ मिलीं, वे ये थीं कि इस्लाम दुरवस्था में है और उसके पुनरुद्धार के लिए बहुत बड़े प्रयास और बहुत बड़ी कुरबानी की जरूरत है। उद्धार के रास्ते दो बताये गये थे। एक तो यह कि मुसलमान यूरोप से विज्ञान और बुद्धिवाद को ग्रहण करें एवं पारलौकिक चिन्ताओं को छोड़ कर इसी लोक में विजयी होने के लिए साहस और सूरता से काम लें। और दूसरा यह कि इन गुणों को पाने के लिए उसको यूरोप की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। इस्लाम का अपना इतिहास ही इतना समृद्ध है कि उसमें से ये सारी शिक्षाएँ निकाली जा सकती हैं। इस पिछली बात को प्रमाणित करने के लिए मौलाना शिवली ने इस्लाम के सारे गारंमाक इतिहास को उर्दू में बिसेर दिया था और जिस युग या समाज ने इक़बाल को जन्म दिया, वह इस इतिहास को पढ़ कर, भीतर ही भीतर गौरव और जोश से भरा हुआ था। इस पृष्ठभूमि पर देखने से इक़बाल के सिद्धान्त काफी स्वाभाविक हो जाते हैं और सब यह भी आश्चर्य नहीं होता कि उन्होंने खुवी की अहंकारयुक्त फिलासफी क्यों निकाली और क्यों उन्होंने रहस्यवाद का तिरस्कार किया।
सर मुहम्मद इक़बाल का जन्म सन् १८७३६० में और मृत्यु सन् १९३८६० में हुई। वे स्यालकोट (पंजाब) के रहनेवाले थे। लाहौर से उन्होंने एम० ए० पास किया था और केजि में उन्होंने दर्शन का अध्ययन किया तथा म्युनिख से उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उनके डॉक्टरेट का विषय ईरानी रहस्यबाद था। १९०८६० में वे भारत लौटे और लाहौर में उन्होंने अपनी बैरिस्टरी आरम्भ की किन्तु, समय उनका कविता और दर्शन में ही जाता रहा । सन् १९२२६० में उन्हें सरकार की ओर से 'सर' का खिताब मिला एवं सन् १९३०६० में वे मुस्लिम लीग के सभापति चुने गये। सन् १९२८-२९६० में मद्रास में उन्होंने इस्लाम पर छह व्याख्यान दिये थे। उन व्याख्यानों से प्रभावित होकर लार्ड इरविन ने उन्हें धर्म और दर्शन पर व्याख्यान देने को आक्सफोर्ड भिजवाया । ये व्याख्यान ही उनके गद्य-लेख हैं। बाकी उन्होंने जो कुछ कहा, कविताओं में ही कहा । इकबाल राउण्ड-टेबिल-कांफ्रेंस में भी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने को बुलाये गये थे।
राष्ट्रीयता का स्वर
बारम्भ में इक़बाल भी उर्दू के अन्य कवियों के समान राजलें लिखा करते थे और कभी-कभी मुशायरों में भी जाते थे। इस्लाम की जागृति पर उनकी श्रद्धा अवश्य थी, किन्तु, तब तक उनके विचारों में राष्ट्रीयता भी भरपूर थी। वे हिन्दू मुस्लिम एकता के हामी और भारतीय स्वतंत्रता के समर्थक थे। तब तक मुसलमानों में यह भाव जोर से नहीं फैला था कि इस्लाम की उन्नति और भारत की स्वतंत्रता परस्पर विरोधी बातें हैं। उनका 'तरानए-हिन्दी' (सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा) और 'नया शिवालय' (सच कह दूं जय बिरहमन, पर तू बुरा न माने) उन्ही दिनों की रचनाएँ हैं। बल्कि,
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इक़बाल को अपने पूर्व-पुरुषों से जो प्रेरणाएँ मिलीं, वे ये थीं कि इस्लाम दुरवस्था में है और उसके पुनरुद्धार के लिए बहुत बड़े प्रयास और बहुत बड़ी कुरबानी की जरूरत है। उद्धार के रास्ते दो बताये गये थे। एक तो यह कि मुसलमान यूरोप से विज्ञान और बुद्धिवाद को ग्रहण करें एवं पारलौकिक चिन्ताओं को छोड़ कर इसी लोक में विजयी होने के लिए साहस और सूरता से काम लें। और दूसरा यह कि इन गुणों को पाने के लिए उसको यूरोप की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। इस्लाम का अपना इतिहास ही इतना समृद्ध है कि उसमें से ये सारी शिक्षाएँ निकाली जा सकती हैं। इस पिछली बात को प्रमाणित करने के लिए मौलाना शिवली ने इस्लाम के सारे गारंमाक इतिहास को उर्दू में बिसेर दिया था और जिस युग या समाज ने इक़बाल को जन्म दिया, वह इस इतिहास को पढ़ कर, भीतर ही भीतर गौरव और जोश से भरा हुआ था। इस पृष्ठभूमि पर देखने से इक़बाल के सिद्धान्त काफी स्वाभाविक हो जाते हैं और सब यह भी आश्चर्य नहीं होता कि उन्होंने खुवी की अहंकारयुक्त फिलासफी क्यों निकाली और क्यों उन्होंने रहस्यवाद का तिरस्कार किया। सर मुहम्मद इक़बाल का जन्म सन् एक लाख सत्तासी हज़ार तीन सौ साठ में और मृत्यु सन् एक लाख तिरानवे हज़ार आठ सौ साठ में हुई। वे स्यालकोट के रहनेवाले थे। लाहौर से उन्होंने एमशून्य एशून्य पास किया था और केजि में उन्होंने दर्शन का अध्ययन किया तथा म्युनिख से उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उनके डॉक्टरेट का विषय ईरानी रहस्यबाद था। एक लाख नब्बे हज़ार आठ सौ साठ में वे भारत लौटे और लाहौर में उन्होंने अपनी बैरिस्टरी आरम्भ की किन्तु, समय उनका कविता और दर्शन में ही जाता रहा । सन् एक लाख बानवे हज़ार दो सौ साठ में उन्हें सरकार की ओर से 'सर' का खिताब मिला एवं सन् एक लाख तिरानवे हज़ार साठ में वे मुस्लिम लीग के सभापति चुने गये। सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस-दो हज़ार नौ सौ साठ में मद्रास में उन्होंने इस्लाम पर छह व्याख्यान दिये थे। उन व्याख्यानों से प्रभावित होकर लार्ड इरविन ने उन्हें धर्म और दर्शन पर व्याख्यान देने को आक्सफोर्ड भिजवाया । ये व्याख्यान ही उनके गद्य-लेख हैं। बाकी उन्होंने जो कुछ कहा, कविताओं में ही कहा । इकबाल राउण्ड-टेबिल-कांफ्रेंस में भी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने को बुलाये गये थे। राष्ट्रीयता का स्वर बारम्भ में इक़बाल भी उर्दू के अन्य कवियों के समान राजलें लिखा करते थे और कभी-कभी मुशायरों में भी जाते थे। इस्लाम की जागृति पर उनकी श्रद्धा अवश्य थी, किन्तु, तब तक उनके विचारों में राष्ट्रीयता भी भरपूर थी। वे हिन्दू मुस्लिम एकता के हामी और भारतीय स्वतंत्रता के समर्थक थे। तब तक मुसलमानों में यह भाव जोर से नहीं फैला था कि इस्लाम की उन्नति और भारत की स्वतंत्रता परस्पर विरोधी बातें हैं। उनका 'तरानए-हिन्दी' और 'नया शिवालय' उन्ही दिनों की रचनाएँ हैं। बल्कि,
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Success Story: रिजल्ट आने के बाद से ही उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है.
Success Story, SDM Jyoti Chaurasiya: इंसान अगर ठान ले कि उसे कुछ हासिल करना ही है, तो मुश्किल से मुश्किल हालातों पर भी विजय मिल जाती है. ऐसा ही कर दिखाया है, उत्तर प्रदेश की बेटी ज्योति चौरसिया ने. जिन्होंने मुश्किल आर्थिक हालात में भी अपनी लगन और मेहनत से पढ़ाई जारी रखी और आज एसजीएम बनकर अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया.
बता दें कि ज्योति गोंडा जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में उनके पिता ने बताया है कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इस वजह से उनके बेटे को पढ़ाई छोड़कर दुकान पर काम करना पड़ा. लेकिन बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए परिवार ने उसे हमेशा सपोर्ट किया.
घरवालों के सपोर्ट से ज्योति को भी मेहनत की प्रेरणा मिली और उन्होंने हाल ही में जारी हुए यूपी पीसीएएस रिजल्ट में 21वीं रैंक हासिल की. ज्योति को एसडीएम का पद मिला है. यह उनका पहला प्रयास नहीं था, इससे पहले वे 5 बार और प्रयास कर चुकी हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी. ऐसे में उनके परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया और छठे प्रयास में उन्होंने परीक्षा निकाल ली.
रिजल्ट आने के बाद से ही उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है. लोग दूर-दूर से बधाइयां लेकर आ रहे हैं. ज्योति के पिता का भी कहना है कि, उनकी बेटी ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
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Apple का फोन चलाने की मनोकामना सबकी होगी पूरी, iPhone 14 मिलेगा इतने सस्ते में, बस कुछ दिन का है इंतजार!
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Success Story: रिजल्ट आने के बाद से ही उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है. Success Story, SDM Jyoti Chaurasiya: इंसान अगर ठान ले कि उसे कुछ हासिल करना ही है, तो मुश्किल से मुश्किल हालातों पर भी विजय मिल जाती है. ऐसा ही कर दिखाया है, उत्तर प्रदेश की बेटी ज्योति चौरसिया ने. जिन्होंने मुश्किल आर्थिक हालात में भी अपनी लगन और मेहनत से पढ़ाई जारी रखी और आज एसजीएम बनकर अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया. बता दें कि ज्योति गोंडा जिले की रहने वाली हैं. उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में उनके पिता ने बताया है कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इस वजह से उनके बेटे को पढ़ाई छोड़कर दुकान पर काम करना पड़ा. लेकिन बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए परिवार ने उसे हमेशा सपोर्ट किया. घरवालों के सपोर्ट से ज्योति को भी मेहनत की प्रेरणा मिली और उन्होंने हाल ही में जारी हुए यूपी पीसीएएस रिजल्ट में इक्कीसवीं रैंक हासिल की. ज्योति को एसडीएम का पद मिला है. यह उनका पहला प्रयास नहीं था, इससे पहले वे पाँच बार और प्रयास कर चुकी हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी. ऐसे में उनके परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया और छठे प्रयास में उन्होंने परीक्षा निकाल ली. रिजल्ट आने के बाद से ही उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है. लोग दूर-दूर से बधाइयां लेकर आ रहे हैं. ज्योति के पिता का भी कहना है कि, उनकी बेटी ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. . Apple का फोन चलाने की मनोकामना सबकी होगी पूरी, iPhone चौदह मिलेगा इतने सस्ते में, बस कुछ दिन का है इंतजार!
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17 जनवरी 2023 में शनि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में ये 29 मार्च 2025 तक विराजमान रहेंगे।
2023 में शनि मेष, वृषभ, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों पर मेहरबान रहेंगे। इन राशियों के लोगों को हर काम में सफलता प्राप्त होगी। धन लाभ के योग बनेंगे।
शनि के राशि बदलते ही मिथुन और तुला राशि वालों को शनि ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी।
2023 में कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या शुरू हो जायेगी।
2023 में मकर, कुंभ और मीन वालों पर शनि साढ़े साती रहेगी।
17 जनवरी 2023 में धनु राशि वालों को शनि साढ़े साती से मुक्ति मिल जाएगी।
शनि को मजबूत करने के लिए हर शनिवार शनि चालीसा का पाठ करें और शनि देव की पूजा करें।
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सत्रह जनवरी दो हज़ार तेईस में शनि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में ये उनतीस मार्च दो हज़ार पच्चीस तक विराजमान रहेंगे। दो हज़ार तेईस में शनि मेष, वृषभ, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों पर मेहरबान रहेंगे। इन राशियों के लोगों को हर काम में सफलता प्राप्त होगी। धन लाभ के योग बनेंगे। शनि के राशि बदलते ही मिथुन और तुला राशि वालों को शनि ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी। दो हज़ार तेईस में कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या शुरू हो जायेगी। दो हज़ार तेईस में मकर, कुंभ और मीन वालों पर शनि साढ़े साती रहेगी। सत्रह जनवरी दो हज़ार तेईस में धनु राशि वालों को शनि साढ़े साती से मुक्ति मिल जाएगी। शनि को मजबूत करने के लिए हर शनिवार शनि चालीसा का पाठ करें और शनि देव की पूजा करें।
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पैदल सिर्फ तलवारें खींचकर धावा मारते हुए ग्राम मण करते थे । व्यमीरके सवारोंने ध्यगरेजोंके सोपखानेपर व्याक्रमण किया। तोपखानेने गोले मार भारकर स्याते हुए। सवार उड़ाना व्यारम्भ किये । व्यधिकांश सवार उड गये व्यन्त जो बचे, वह तोपखानेतक पहुंचे। उन लोगोंने वच, पहु चते ही तोपखानेके सिपाहियोंके टुकडे टुकडे उडा दिये । इसके उपरान्त वही सवार ग्रङ्गरेजोंकी शिक्षित मैन्यपर टूट पडे । यमरेनी सैन्य सङ्गोनों और तपश्योंसे भवारोंको मारने लगी। इसी व्यवसमें अमीरकी सैन्य व्यङ्गरेजी फोनपर पीछे और पागेसे व्याक्रमण किया। उस समय व्यरेजी फौज बहुत चिन्तित हुई। फौजने अपने खजानेके कोई पैतीस लाख रुपये नदीमें फेंक दिये और वह भागकर एक पर्वतपर च गई। ग्रमोरकी फौजने व्यङ्गरेजी फौजका पडाव लूट लिया । व्यमीर भी दूसरे पहाडपर चला गया और अपने घायलोंकी औषधि करने लगा ।
* व्यव व्यमीरने दृढ़ सङ्कल्प किया, कि मैं फाइलमर व्यवश्य ही आक्रमण करूगा । इधर व्यङ्गरेजी मैन्यके सेनापति बहुत चिन्तित थे। उन्होंने रात्रिके समय कप्तान बाकरको उस व्यङ्ग रेजी फौणमें भेजा, जो युद्धस्थल और काबुलके बीच में पड़ी थी । यह कमको फौन थी। कमान वाकरने कमकी सैन्यके सेनाप तिसे जाकर कहा, कि जो सैन्य अमीरसे लड रही है, वह व्याधी मारी जा चुकी है। जो बची है, घायल
हम लोग अपना खजाना पानी में डाल चुके है।
ग्रमोर मनुष्य
नहीं, वरच दैत्य जान पडता है। गोला गोलीकी दृष्टि में बेघ-
डक घुम बाता है। यही दशा उनके तुरकी मिनायिक दे 1 लड ईते समय वह व्यपनो दाढ़िया सहा लेते और तलवारे खोचकर हमारी फौजपर या टटते है। घोर युद्ध करते है। हम लोगोने दो सप्ताहतक युद्ध किया । तो वन्दुरुसे खूब काम लिया। पर लडाईने अमीर होका पक्षा. भारी रहा। प्रत्येक वार उसने हमारे सिपाहियों और अफ सरोंको मारा। व्यव हम सिपाहियोका छोटामा झुण्ड लिये दो पहाडोंके बीचमें पडे हुए हैं। उन्होंने आपके पास
भेजा है। ग्राम शीघ्र ही कुमकी फौज बेकर चलिये । म चलियेगा तो हमारी घोडीसी फौज मारी जायगी । कप्तान धाकरको बात सुनकर कामको सैन्य के सेनापतिको चिन्ता हुई । उसने इस घटनाका समाचार काइल भेजा।
"इपरमपरी छोटोसो फोन गौर नाममात्रके खना नेपर माह की । खयाल किया कि इस दशा में काबुल कैसे महु च सगा। किन्तु वह ग्रपनो जिन्दगीसे हाथ घो चुका था। इस लिये सिर्फ दो हजार सवार लेकर काबुलको रवाना हो गया। राहमें उनको यशद नामे नगर मिला। सय्यद ममनिदी गिरका हाकिम था। वह वन करके अमीरको व्यपो किनमें ले गया। वहा ग्रमीरकी दावतें कौं । हाकिमको इटसे ग्रमौर कर दितिक किये रहा। सेनापति काटन साहनको पात्र यह छाल मालूम हुआ, तो उन्होंने मयद ममजिदीके पास अपना एक दृत भेजा। दूतको भारफ्त मम्मदको कहलाया, कि मौरको गिरफ्तार करके मेरे पास भेज दो। भेज दोगे तो पारितोषिक पायोगे, न भेजोगे, '
तो ग्राफ फँसोगे । नय्यद मसनदीने दूतको जवाब दिया कि महकी इस बातका जवाब में तलवार और खञ्जर दे चाहता है। दूत यह सुनकर चला गया। दूसरे दिन यमीर दोस्त मुहम्मद गौर सय्यद मसनदी तुरकी फौज लेकर काट नको फौजके सामने पहुचे । सामने पहुचते ही नियमानुसार व्यमरकी फौजने वादशाही फौनपर व्याक्रमण किया। दोनो चोर मङ्गने तलवारें चलने लगीं। कहीं कहीं सिपाही इतने भिड गये, कि आपसमें कुणती होने लगी। एकको हमरेकी खबर नही थी । यह नहीं मालूम, कि काटन माहब कहां मारे गये । रेट साहव गुम हो गये । रेजी सैन्य कुल सिपाही हताहत हुए । अमीरने रेजी फौजका कुल माज सामान लूट लिया। इसके बाद यमीर मय्यद मस गिदीके माथ अपने डेरेपर वापस ग्राया । जब सेनापति सीलको यह हाल मालूम हुग्रा, तो वह स्वयं व्यपनी फौज लेकर ग्रमीरसे लडने और ग्रपनी फौजको सहायता करनेके लिये चला । राहमें उसको अपनी फौनके परास्त होने और दोन च्यफसरोंके मारे जानेका हाल मालूम हव्या । इस समाधारसे उसे बहुत दुःख हुया । लारेस, माहव हिन्दूकुश पर्वतपर फोज लिये पड़ा था। सोलने उसको सैन्यसहित अपने पास बुला लिया। व्यगरेनो फौज में बहुत सिपाही हो गये । इस फौजने आगे बढकर यइट किबेको घेर लिया। किवेयर इतने गोले नरसाये, कि किरोके बुर्न व्यादि टूट गये । यह देख कर ग्रमीर गौर मय्यद ममनिदी चिन्तित हुए। डाको भन हुगा, कि किसी समय अगरेजी फोन किलेमे घुस यावेगी ।
"एक दिन यमीर और मध्यद मसनिदीने किलेका खजाना अपने साथ लिया और बाकी सामान फूक दिया। इसके उपरान्त वह फौजके साथ किबेके बाहर निकले और व्यङ्गोजी फौज से लड भिडकर निकल गये । एक महाड़पर चढ़कर दम लिया। रात्रिके समय युद्ध नही हुआ । ग्रनरेजी फौजने यह नगर व्याग लगाकर उसको भरम कर दिया । प्रांत काल सम्पद मसलिदी भव्वतपरसे उतरा और गश्ती मिपाहियों को माग्जर सीलकी सैन्यपर आक्रमण करनेके लिये वढा । किन्तु कर न सका। कारण, सौषको सध्यदके, व्यानेका समाचार पहले हो मिल चुका था । उमने तोप लगवा दी थी और एक किलामावावा लिया था। इसके उपरान्त फिर यह न मालूम हुआ कि मम्यद मसविदोका क्या हुया । वह मारा गया वा किमी गोर चला गया। प्रातः काल यमीर भी पहाडसे उतरा प्योर रेजोको फोनमें लड़कर फिर पहाडभर चढ़ गया । एक सप्ताहतक धमीर इसी प्रकार लडता रहा। किन्तु रात्रिके व्याक्रमयके डरसे एक जगह नहीं ठहरता था। एक पर्वतसे
मरेपर चला जाता था। इधर अरेगी फौज रातिके व्याक मसे डरतो थी । उसका अधिकाश रातभर कमर कसे तय्यार
था। अन अमीरने देखा कि उसके मिपाधी इस तरह सड़क गये हैं, तो यह अपने सिपाहियोको लेकर साहिगार नामे कियेर्ने महु था। आजीहिमारकै हाकिमने प्रत्यच नागोरका बहुत सम्मा। रिया । ग्रमीरको जियाफत को- मामा र किये और दिनरात की तरह परमे पगा। किन्तु उसका यह सर्व काम
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पैदल सिर्फ तलवारें खींचकर धावा मारते हुए ग्राम मण करते थे । व्यमीरके सवारोंने ध्यगरेजोंके सोपखानेपर व्याक्रमण किया। तोपखानेने गोले मार भारकर स्याते हुए। सवार उड़ाना व्यारम्भ किये । व्यधिकांश सवार उड गये व्यन्त जो बचे, वह तोपखानेतक पहुंचे। उन लोगोंने वच, पहु चते ही तोपखानेके सिपाहियोंके टुकडे टुकडे उडा दिये । इसके उपरान्त वही सवार ग्रङ्गरेजोंकी शिक्षित मैन्यपर टूट पडे । यमरेनी सैन्य सङ्गोनों और तपश्योंसे भवारोंको मारने लगी। इसी व्यवसमें अमीरकी सैन्य व्यङ्गरेजी फोनपर पीछे और पागेसे व्याक्रमण किया। उस समय व्यरेजी फौज बहुत चिन्तित हुई। फौजने अपने खजानेके कोई पैतीस लाख रुपये नदीमें फेंक दिये और वह भागकर एक पर्वतपर च गई। ग्रमोरकी फौजने व्यङ्गरेजी फौजका पडाव लूट लिया । व्यमीर भी दूसरे पहाडपर चला गया और अपने घायलोंकी औषधि करने लगा । * व्यव व्यमीरने दृढ़ सङ्कल्प किया, कि मैं फाइलमर व्यवश्य ही आक्रमण करूगा । इधर व्यङ्गरेजी मैन्यके सेनापति बहुत चिन्तित थे। उन्होंने रात्रिके समय कप्तान बाकरको उस व्यङ्ग रेजी फौणमें भेजा, जो युद्धस्थल और काबुलके बीच में पड़ी थी । यह कमको फौन थी। कमान वाकरने कमकी सैन्यके सेनाप तिसे जाकर कहा, कि जो सैन्य अमीरसे लड रही है, वह व्याधी मारी जा चुकी है। जो बची है, घायल हम लोग अपना खजाना पानी में डाल चुके है। ग्रमोर मनुष्य नहीं, वरच दैत्य जान पडता है। गोला गोलीकी दृष्टि में बेघ- डक घुम बाता है। यही दशा उनके तुरकी मिनायिक दे एक लड ईते समय वह व्यपनो दाढ़िया सहा लेते और तलवारे खोचकर हमारी फौजपर या टटते है। घोर युद्ध करते है। हम लोगोने दो सप्ताहतक युद्ध किया । तो वन्दुरुसे खूब काम लिया। पर लडाईने अमीर होका पक्षा. भारी रहा। प्रत्येक वार उसने हमारे सिपाहियों और अफ सरोंको मारा। व्यव हम सिपाहियोका छोटामा झुण्ड लिये दो पहाडोंके बीचमें पडे हुए हैं। उन्होंने आपके पास भेजा है। ग्राम शीघ्र ही कुमकी फौज बेकर चलिये । म चलियेगा तो हमारी घोडीसी फौज मारी जायगी । कप्तान धाकरको बात सुनकर कामको सैन्य के सेनापतिको चिन्ता हुई । उसने इस घटनाका समाचार काइल भेजा। "इपरमपरी छोटोसो फोन गौर नाममात्रके खना नेपर माह की । खयाल किया कि इस दशा में काबुल कैसे महु च सगा। किन्तु वह ग्रपनो जिन्दगीसे हाथ घो चुका था। इस लिये सिर्फ दो हजार सवार लेकर काबुलको रवाना हो गया। राहमें उनको यशद नामे नगर मिला। सय्यद ममनिदी गिरका हाकिम था। वह वन करके अमीरको व्यपो किनमें ले गया। वहा ग्रमीरकी दावतें कौं । हाकिमको इटसे ग्रमौर कर दितिक किये रहा। सेनापति काटन साहनको पात्र यह छाल मालूम हुआ, तो उन्होंने मयद ममजिदीके पास अपना एक दृत भेजा। दूतको भारफ्त मम्मदको कहलाया, कि मौरको गिरफ्तार करके मेरे पास भेज दो। भेज दोगे तो पारितोषिक पायोगे, न भेजोगे, ' तो ग्राफ फँसोगे । नय्यद मसनदीने दूतको जवाब दिया कि महकी इस बातका जवाब में तलवार और खञ्जर दे चाहता है। दूत यह सुनकर चला गया। दूसरे दिन यमीर दोस्त मुहम्मद गौर सय्यद मसनदी तुरकी फौज लेकर काट नको फौजके सामने पहुचे । सामने पहुचते ही नियमानुसार व्यमरकी फौजने वादशाही फौनपर व्याक्रमण किया। दोनो चोर मङ्गने तलवारें चलने लगीं। कहीं कहीं सिपाही इतने भिड गये, कि आपसमें कुणती होने लगी। एकको हमरेकी खबर नही थी । यह नहीं मालूम, कि काटन माहब कहां मारे गये । रेट साहव गुम हो गये । रेजी सैन्य कुल सिपाही हताहत हुए । अमीरने रेजी फौजका कुल माज सामान लूट लिया। इसके बाद यमीर मय्यद मस गिदीके माथ अपने डेरेपर वापस ग्राया । जब सेनापति सीलको यह हाल मालूम हुग्रा, तो वह स्वयं व्यपनी फौज लेकर ग्रमीरसे लडने और ग्रपनी फौजको सहायता करनेके लिये चला । राहमें उसको अपनी फौनके परास्त होने और दोन च्यफसरोंके मारे जानेका हाल मालूम हव्या । इस समाधारसे उसे बहुत दुःख हुया । लारेस, माहव हिन्दूकुश पर्वतपर फोज लिये पड़ा था। सोलने उसको सैन्यसहित अपने पास बुला लिया। व्यगरेनो फौज में बहुत सिपाही हो गये । इस फौजने आगे बढकर यइट किबेको घेर लिया। किवेयर इतने गोले नरसाये, कि किरोके बुर्न व्यादि टूट गये । यह देख कर ग्रमीर गौर मय्यद ममनिदी चिन्तित हुए। डाको भन हुगा, कि किसी समय अगरेजी फोन किलेमे घुस यावेगी । "एक दिन यमीर और मध्यद मसनिदीने किलेका खजाना अपने साथ लिया और बाकी सामान फूक दिया। इसके उपरान्त वह फौजके साथ किबेके बाहर निकले और व्यङ्गोजी फौज से लड भिडकर निकल गये । एक महाड़पर चढ़कर दम लिया। रात्रिके समय युद्ध नही हुआ । ग्रनरेजी फौजने यह नगर व्याग लगाकर उसको भरम कर दिया । प्रांत काल सम्पद मसलिदी भव्वतपरसे उतरा और गश्ती मिपाहियों को माग्जर सीलकी सैन्यपर आक्रमण करनेके लिये वढा । किन्तु कर न सका। कारण, सौषको सध्यदके, व्यानेका समाचार पहले हो मिल चुका था । उमने तोप लगवा दी थी और एक किलामावावा लिया था। इसके उपरान्त फिर यह न मालूम हुआ कि मम्यद मसविदोका क्या हुया । वह मारा गया वा किमी गोर चला गया। प्रातः काल यमीर भी पहाडसे उतरा प्योर रेजोको फोनमें लड़कर फिर पहाडभर चढ़ गया । एक सप्ताहतक धमीर इसी प्रकार लडता रहा। किन्तु रात्रिके व्याक्रमयके डरसे एक जगह नहीं ठहरता था। एक पर्वतसे मरेपर चला जाता था। इधर अरेगी फौज रातिके व्याक मसे डरतो थी । उसका अधिकाश रातभर कमर कसे तय्यार था। अन अमीरने देखा कि उसके मिपाधी इस तरह सड़क गये हैं, तो यह अपने सिपाहियोको लेकर साहिगार नामे कियेर्ने महु था। आजीहिमारकै हाकिमने प्रत्यच नागोरका बहुत सम्मा। रिया । ग्रमीरको जियाफत को- मामा र किये और दिनरात की तरह परमे पगा। किन्तु उसका यह सर्व काम
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कार्यक्रम का आयोजन जवाहर मैदान में एक फाउंडेशन ने किया था।
इस कार्यक्रम में कम से कम 551 लड़कियां शादी के बंधन में बंधीं। इन लड़कियों के पिताओं की मृत्यु हो चुकी है।
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने नव विवाहित जोड़ों से आग्रह किया कि वे घर पहुंचने के बाद रिश्तेदारों के दबाव में एक अलग विवाह समारोह आयोजित न करें और इसके बजाय अपने बच्चों के लिए पैसे बचाएं।
मोदी गुजरात के दौरे पर हैं, जहां दिसंबर में विधानसभा चुनाव होंगे।
इससे पहले दिन में उन्होंने वलसाड जिले में एक रैली को संबोधित किया।
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कार्यक्रम का आयोजन जवाहर मैदान में एक फाउंडेशन ने किया था। इस कार्यक्रम में कम से कम पाँच सौ इक्यावन लड़कियां शादी के बंधन में बंधीं। इन लड़कियों के पिताओं की मृत्यु हो चुकी है। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने नव विवाहित जोड़ों से आग्रह किया कि वे घर पहुंचने के बाद रिश्तेदारों के दबाव में एक अलग विवाह समारोह आयोजित न करें और इसके बजाय अपने बच्चों के लिए पैसे बचाएं। मोदी गुजरात के दौरे पर हैं, जहां दिसंबर में विधानसभा चुनाव होंगे। इससे पहले दिन में उन्होंने वलसाड जिले में एक रैली को संबोधित किया।
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रामपुर बुशहर-रामपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के सभी दावे हवा साबित हो रहे है। कई स्कूलों में मुख्य विषयों के शिक्षकों की कमी छात्रों के पलायन का का कारण बन रही है। ऐसा ही हाल रामपुर उपंडल के अंतर्गत आने वाले वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नरैण का भी है। इस स्कूल में वर्ष 2016 में फिजिक्स और केमिस्ट्री के पद स्वीकृत हुए थेए लेिकन आज चार वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूल में दोनों विषयों के अध्यापकों की नियुिक्त नही हो पाई है। जिसके चलते इस स्कूल से लाभानिव्त होने वाले विद्यार्थियों को बाहरी स्कूलों की ओर रूख करना पड़ रहा है। जो समय के साथ साथ अभिभावकों की आर्थिकी पर भी भारी पड़ रहा है। हालांकि अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर कई मर्तबा सरकार व संबंधित विभाग से गुहार लगाई है, लेिकन अभी तक हालत जस की तस बनी हुई है। इस समस्या के समाधान को लेकर अब युवा कांग्रेस आगे आई है। इसको लेकर प्रदेश युवा कांग्रेस के सह सचिव की अगुआई में अभिभावकों ने उपमंडलाधिकारी रामपुर नरेंद्र चौहान को ज्ञापन सौंप स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति करने की गुहार लगाई। इस दौरान युंका ने साफ किया कि यदि जल्द से जल्द नरैण स्कूल में वर्षो से खाल चल रहे अध्यापकों के पदो को न भरा गए तो वे इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आएगें। प्रदेश युंका सह सचिव पवन चौहान ने बताया कि स्वीकृति के करीब चार वर्ष बीत जाने के बाद भी नरैण स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री के अध्यापकों की नियुक्ति नही हो पा रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल में अध्यापकों के न होने के इन विषयों की पढ़ाई करने वाले बच्चों को बाहर के स्कूलों में पढ़ाई करने पहुंचना पड़ रहा है। जिससे बाहरी स्कूलों में आने जाने में बच्चों का काफी समय नष्ट हो रहा है। साथ ही अभिभावकों को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। गौर रहे कि स्कूल में शिक्षकों के पदों के अलावा वर्ष 2018 से प्रिंसिपल का पद भी रिक्त चल रहा है। साथ ही उक्त स्कूल में न आईटी लैब है और न ही अन्य सुविधाऐं। युंका ने स्थानीय प्रशासन व प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द नरैण स्कूल में दोनो विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों अपने घर द्वार पर ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था मुहैया हो सके।
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रामपुर बुशहर-रामपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के सभी दावे हवा साबित हो रहे है। कई स्कूलों में मुख्य विषयों के शिक्षकों की कमी छात्रों के पलायन का का कारण बन रही है। ऐसा ही हाल रामपुर उपंडल के अंतर्गत आने वाले वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नरैण का भी है। इस स्कूल में वर्ष दो हज़ार सोलह में फिजिक्स और केमिस्ट्री के पद स्वीकृत हुए थेए लेिकन आज चार वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूल में दोनों विषयों के अध्यापकों की नियुिक्त नही हो पाई है। जिसके चलते इस स्कूल से लाभानिव्त होने वाले विद्यार्थियों को बाहरी स्कूलों की ओर रूख करना पड़ रहा है। जो समय के साथ साथ अभिभावकों की आर्थिकी पर भी भारी पड़ रहा है। हालांकि अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर कई मर्तबा सरकार व संबंधित विभाग से गुहार लगाई है, लेिकन अभी तक हालत जस की तस बनी हुई है। इस समस्या के समाधान को लेकर अब युवा कांग्रेस आगे आई है। इसको लेकर प्रदेश युवा कांग्रेस के सह सचिव की अगुआई में अभिभावकों ने उपमंडलाधिकारी रामपुर नरेंद्र चौहान को ज्ञापन सौंप स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति करने की गुहार लगाई। इस दौरान युंका ने साफ किया कि यदि जल्द से जल्द नरैण स्कूल में वर्षो से खाल चल रहे अध्यापकों के पदो को न भरा गए तो वे इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आएगें। प्रदेश युंका सह सचिव पवन चौहान ने बताया कि स्वीकृति के करीब चार वर्ष बीत जाने के बाद भी नरैण स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री के अध्यापकों की नियुक्ति नही हो पा रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल में अध्यापकों के न होने के इन विषयों की पढ़ाई करने वाले बच्चों को बाहर के स्कूलों में पढ़ाई करने पहुंचना पड़ रहा है। जिससे बाहरी स्कूलों में आने जाने में बच्चों का काफी समय नष्ट हो रहा है। साथ ही अभिभावकों को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। गौर रहे कि स्कूल में शिक्षकों के पदों के अलावा वर्ष दो हज़ार अट्ठारह से प्रिंसिपल का पद भी रिक्त चल रहा है। साथ ही उक्त स्कूल में न आईटी लैब है और न ही अन्य सुविधाऐं। युंका ने स्थानीय प्रशासन व प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द नरैण स्कूल में दोनो विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों अपने घर द्वार पर ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था मुहैया हो सके।
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केरल लिटरेचर फेस्टिवल में कांग्रेस नेता शशि थरूर का बड़ा दावा. (Photo Credit: न्यूज नेशन)
कोझिकोडः
कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता शशि (Shashi Tharoor) थरूर ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए 2019 की चुनावी जीत को 2024 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में दोहराना असंभव होगा. केरल साहित्य महोत्सव में बोल रहे तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कहा कि वह भाजपा के प्रभुत्व को स्वीकार जरूर करते हैं, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि बीजेपी ने कई राज्यों को खोया है. ऐसे में केंद्र में सत्ता खोना बीजेपी के लिए भी असंभव नहीं है. इंडिया @ 75: ए वॉक थ्रू द डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस सत्र में अपनी बात को आंकड़ों के आधार पर समझाते हुए शशि थरूर ने कहा, 'यदि आप देखें तो भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बेहद अच्छा प्रदर्शन किया था. उन्हें चुनाव में हरियाणा, गुजरात, राजस्थान की हर लोकसभा सीट मिली थी. बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी जीते और बंगाल में भी केसरिया पार्टी ने 18 सीटें थीं. अब 2024 लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2024) में उन सभी परिणामों को दोहराना असंभव है. साथ ही संभव है कि बीजेपी 2024 चुनाव में बहुमत (Majority) के आंकड़े से भी पीछे रह जाए. '
पुलवामा हमलों और उसकी प्रतिक्रियास्वरूप बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में उन्होंने कहा कि इससे चुनाव के अंतिम समय में एक जबर्दस्त लहर बनी. अब यह भी 2024 लोकसभा चुनाव में दोहराया नहीं जाएगा. 66 वर्षीय इस कांग्रेसी नेता ने कहा कि बीजेपी 50 सीटें कम पा सकती है और इस वजह से विपक्षी दलों को मिलने वाला फायदा पूरी तरह से कल्पनीय है. हालांकि उनकी भविष्यवाणी के अनुरूप बीजेपी को बहुमत के आंकड़े से दूर रखने वाली विपक्षी पार्टियां क्या एक साथ रहेंगी? इस सवाल पर शशि थरूर ने कहा, 'इसका जवाब देना असंभव है. ' उन्होंने आगे कहा कि अगर बीजेपी 250 पर आती है और अन्य के पास 290 का आंकड़ा है, तो क्या 290 सीटों के साथ विपक्षी दलों एकमत होंगे या बीजेपी केंद्र सरकार से समर्थन चाहने वाले दलों से 20 और 10 वहां से चुन कर केंद्र में फिर सरकार बना ले. . . यह आज हम नहीं जानते हैं. ' गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 543 में से 303 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल 52 सीट ही जीत सकी थी.
आजादी के 75 साल बाद भारत के सामने विद्यमान चुनौतियों के बारे में बात करते हुए थरूर ने यह स्वीकार किया कि लोकतंत्र में वंशवाद एक चुनौती है. हालांकि उन्होंने कहा कि वंशवाद के लिए महज उनकी पार्टी यानी कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वालों को अपने चारों ओर भी देखना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया, 'कम्युनिस्टों और भाजपा के एकमात्र अपवाद के साथ विडंबना यह है कि भारतीय राजनीति के ध्रुवीय छोरों पर हर पार्टी में वंशवादी राजनीति होती है. जब हम उंगली उठाते हैं और कहते हैं कांग्रेस वंश. . . तो आपको अपने चारों ओर भी देखना चाहिए. मुलायम सिंह और लालू प्रसाद यादव के बेटे उनके उत्तराधिकारी हैं. करुणानिधि और बाल ठाकरे के बेटे ही उत्तराधिकारी बने. शरद पवार भी इस श्रेणी में आते हैं, लेकिन उनका उत्तराधिकारी उनकी बेटी और भतीजे हैं. '
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केरल लिटरेचर फेस्टिवल में कांग्रेस नेता शशि थरूर का बड़ा दावा. कोझिकोडः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए दो हज़ार उन्नीस की चुनावी जीत को दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में दोहराना असंभव होगा. केरल साहित्य महोत्सव में बोल रहे तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कहा कि वह भाजपा के प्रभुत्व को स्वीकार जरूर करते हैं, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि बीजेपी ने कई राज्यों को खोया है. ऐसे में केंद्र में सत्ता खोना बीजेपी के लिए भी असंभव नहीं है. इंडिया @ पचहत्तर: ए वॉक थ्रू द डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस सत्र में अपनी बात को आंकड़ों के आधार पर समझाते हुए शशि थरूर ने कहा, 'यदि आप देखें तो भाजपा ने दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में बेहद अच्छा प्रदर्शन किया था. उन्हें चुनाव में हरियाणा, गुजरात, राजस्थान की हर लोकसभा सीट मिली थी. बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी जीते और बंगाल में भी केसरिया पार्टी ने अट्ठारह सीटें थीं. अब दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में उन सभी परिणामों को दोहराना असंभव है. साथ ही संभव है कि बीजेपी दो हज़ार चौबीस चुनाव में बहुमत के आंकड़े से भी पीछे रह जाए. ' पुलवामा हमलों और उसकी प्रतिक्रियास्वरूप बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में उन्होंने कहा कि इससे चुनाव के अंतिम समय में एक जबर्दस्त लहर बनी. अब यह भी दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में दोहराया नहीं जाएगा. छयासठ वर्षीय इस कांग्रेसी नेता ने कहा कि बीजेपी पचास सीटें कम पा सकती है और इस वजह से विपक्षी दलों को मिलने वाला फायदा पूरी तरह से कल्पनीय है. हालांकि उनकी भविष्यवाणी के अनुरूप बीजेपी को बहुमत के आंकड़े से दूर रखने वाली विपक्षी पार्टियां क्या एक साथ रहेंगी? इस सवाल पर शशि थरूर ने कहा, 'इसका जवाब देना असंभव है. ' उन्होंने आगे कहा कि अगर बीजेपी दो सौ पचास पर आती है और अन्य के पास दो सौ नब्बे का आंकड़ा है, तो क्या दो सौ नब्बे सीटों के साथ विपक्षी दलों एकमत होंगे या बीजेपी केंद्र सरकार से समर्थन चाहने वाले दलों से बीस और दस वहां से चुन कर केंद्र में फिर सरकार बना ले. . . यह आज हम नहीं जानते हैं. ' गौरतलब है कि दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने पाँच सौ तैंतालीस में से तीन सौ तीन सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल बावन सीट ही जीत सकी थी. आजादी के पचहत्तर साल बाद भारत के सामने विद्यमान चुनौतियों के बारे में बात करते हुए थरूर ने यह स्वीकार किया कि लोकतंत्र में वंशवाद एक चुनौती है. हालांकि उन्होंने कहा कि वंशवाद के लिए महज उनकी पार्टी यानी कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वालों को अपने चारों ओर भी देखना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया, 'कम्युनिस्टों और भाजपा के एकमात्र अपवाद के साथ विडंबना यह है कि भारतीय राजनीति के ध्रुवीय छोरों पर हर पार्टी में वंशवादी राजनीति होती है. जब हम उंगली उठाते हैं और कहते हैं कांग्रेस वंश. . . तो आपको अपने चारों ओर भी देखना चाहिए. मुलायम सिंह और लालू प्रसाद यादव के बेटे उनके उत्तराधिकारी हैं. करुणानिधि और बाल ठाकरे के बेटे ही उत्तराधिकारी बने. शरद पवार भी इस श्रेणी में आते हैं, लेकिन उनका उत्तराधिकारी उनकी बेटी और भतीजे हैं. '
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हमीरपुरः हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में कोरोना का कहर लगातार जारी है। जिला में मंगलवार के दिन जहां पहले 4 केस सामने आ चुके हैं वहीं अब 4 और नए केस सामने आए हैं। यानि जिला में एक घंटे के भीतर 8 केस सामने आ चुके हैं। डीसी हरिकेश मीणा ने इस बात की पुष्टि है। इन मामलों के साथ जिला में कोरोना के कुल मामले 71 पहुंच गए हैं जबकि एक्टिव केस 64 हो गए हैं। वहीं पूरे प्रदेश की बात करें तो अभी तक कोरोना के मरीजों का आंकड़ा 233 पहुंच गया है और 161 एक्टिव केस हैं।
Breaking: हमीरपुर में कोरोना के 4 और नए केस, एक घंटे में 8 केस Reviewed by Himachal Fast News on 26 May Rating:
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हमीरपुरः हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में कोरोना का कहर लगातार जारी है। जिला में मंगलवार के दिन जहां पहले चार केस सामने आ चुके हैं वहीं अब चार और नए केस सामने आए हैं। यानि जिला में एक घंटे के भीतर आठ केस सामने आ चुके हैं। डीसी हरिकेश मीणा ने इस बात की पुष्टि है। इन मामलों के साथ जिला में कोरोना के कुल मामले इकहत्तर पहुंच गए हैं जबकि एक्टिव केस चौंसठ हो गए हैं। वहीं पूरे प्रदेश की बात करें तो अभी तक कोरोना के मरीजों का आंकड़ा दो सौ तैंतीस पहुंच गया है और एक सौ इकसठ एक्टिव केस हैं। Breaking: हमीरपुर में कोरोना के चार और नए केस, एक घंटे में आठ केस Reviewed by Himachal Fast News on छब्बीस मई Rating:
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खंडवा। अवैध मछलियों का परिवहन करने के मामले में कोतवाली पुलिस ने एक वाहन चालक के खिलाफ फिशरीज एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार मुखबिर की शिकायत पर लोहारी नाका क्षेत्र में मछलियों से भरा वाहन (एमपी-12 जीए-2532) पकड़ा। वाहन में 40 बाक्स में 1 लाख 60 हजार 800 रुपए कीमत की मछलियां भरी मिली। जिसे जब्त कर ड्राइवर समीर पिता इकबाल मंसूरी (25) निवासी खानशाहवली को पकड़ लिया।
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खंडवा। अवैध मछलियों का परिवहन करने के मामले में कोतवाली पुलिस ने एक वाहन चालक के खिलाफ फिशरीज एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार मुखबिर की शिकायत पर लोहारी नाका क्षेत्र में मछलियों से भरा वाहन पकड़ा। वाहन में चालीस बाक्स में एक लाख साठ हजार आठ सौ रुपयापए कीमत की मछलियां भरी मिली। जिसे जब्त कर ड्राइवर समीर पिता इकबाल मंसूरी निवासी खानशाहवली को पकड़ लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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के निष्कर्ष सिद्धांत है। अनुकरण काव्य का घनिष्ठ संबंध सदा से काव्य-महाकाव्य के साथ रहता आया है। यह व्यापार देवताओं के साथ करने के बराबर है :"
अनुकरणाधिकृत विषयों के संबंध में यही कहा गया है कि धार्मिक काग्यों भथवा इदय के गंभीर मार्मिक भावों ( Sentiments ) का अनुकरण करना सवैधा धनुपयुक्त है। दृष्टांततः अँगरेज़ी-साहित्य में लार्ड टेनिसन की अंतिम कविता "Crossing the Bar" को अनुकरणतिर्गत विषयों से बाहर गिनाया है। इसी प्रकार हमारी समझ में; कालिदास के घुवश और कुमारसंभव, जगन्नाथ पंडितराज की गंगारी रवींद्र की गोतांजलि और साधनन, तुलसीदासजी की रामायण, सूरदासजी के प्रेमपावर और प्राधुनिक हिंदी कवियों में 'हरिऔध'जो के मियप्रवासांतर्गत गंभीर मार्मिक और धर्मविषयक भावों का उपहासात्मक अनुकरण करना सवैया धनुपयुक्त और वृथा है ।
[व] पश्न यह होता है कि ऐसे पवित्र और आदर्श साहित्य को परिपूरित करने का अधिकारी जेखक कौन हो सकता है १ स्वाभाविकतः उत्तर यही है कि वही जिसके हृदय में साहित्य-सेवा की सघी, स्वर्गीय ह धारणा विद्यमान है। जो मूल-लेखक के काव्य से पूर्णतया अवगत है और जिसे साहित्य के सच्चे हिताहित की शान है। यह अनुकरण-काव्य की कत्रा को शान सकता है। यही विवेचन कर सकता है की रचना का प्रशंसा गर्मित अनुकरण करके उसकी ख्याति प्रसारित करनी चाहिए और कौनसे का दमन ।
अनुकरण-काव्य के प्रकार, भेद
अँगरेजी में अनुकाल काम्प के सीन अंग माने गए हैं। या
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के निष्कर्ष सिद्धांत है। अनुकरण काव्य का घनिष्ठ संबंध सदा से काव्य-महाकाव्य के साथ रहता आया है। यह व्यापार देवताओं के साथ करने के बराबर है :" अनुकरणाधिकृत विषयों के संबंध में यही कहा गया है कि धार्मिक काग्यों भथवा इदय के गंभीर मार्मिक भावों का अनुकरण करना सवैधा धनुपयुक्त है। दृष्टांततः अँगरेज़ी-साहित्य में लार्ड टेनिसन की अंतिम कविता "Crossing the Bar" को अनुकरणतिर्गत विषयों से बाहर गिनाया है। इसी प्रकार हमारी समझ में; कालिदास के घुवश और कुमारसंभव, जगन्नाथ पंडितराज की गंगारी रवींद्र की गोतांजलि और साधनन, तुलसीदासजी की रामायण, सूरदासजी के प्रेमपावर और प्राधुनिक हिंदी कवियों में 'हरिऔध'जो के मियप्रवासांतर्गत गंभीर मार्मिक और धर्मविषयक भावों का उपहासात्मक अनुकरण करना सवैया धनुपयुक्त और वृथा है । [व] पश्न यह होता है कि ऐसे पवित्र और आदर्श साहित्य को परिपूरित करने का अधिकारी जेखक कौन हो सकता है एक स्वाभाविकतः उत्तर यही है कि वही जिसके हृदय में साहित्य-सेवा की सघी, स्वर्गीय ह धारणा विद्यमान है। जो मूल-लेखक के काव्य से पूर्णतया अवगत है और जिसे साहित्य के सच्चे हिताहित की शान है। यह अनुकरण-काव्य की कत्रा को शान सकता है। यही विवेचन कर सकता है की रचना का प्रशंसा गर्मित अनुकरण करके उसकी ख्याति प्रसारित करनी चाहिए और कौनसे का दमन । अनुकरण-काव्य के प्रकार, भेद अँगरेजी में अनुकाल काम्प के सीन अंग माने गए हैं। या
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डिजिटल मार्केटिंग सीखने के बाद आप कई कंपनी में जॉब पा सकती हैं और सालाना लाखों रुपए कमा सकती हैं। तो चलिए जानते हैं कि डिजिटल मार्केटिंग में कैसे आप अपना करियर बना सकती हैं।
डिजिटल मार्केटिंग का क्षेत्र समय के साथ-साथ तेजी से विकसित होता जा रहा है। डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में आपको अच्छे पैकेज पर जॉब मिल सकती है। यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है, जो इंटरनेट, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ईमेल और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके कंपनियों को अपनी सेवाओं का प्रचार करने में मदद करता है। डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र में कई प्रकार की नौकरियां हैं जैसे कि सोशल मीडिया मैनेजर, डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट, वेब डिजाइनर और डेवलपर, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट आदि। चलिए जानते हैं कि आप कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकती हैं।
इस टेक्नोलॉजी के दौर में कंपनियां डिजिटल मार्केटिंग का इस्तेमाल कई चीजों के लिए करती हैं। अगर बात करें सोशल मीडिया मार्केटिंग कि तो यह बहुत अहम डिजिटल मार्केटिंग ट्रेंड है। सोशल मीडिया पर एड दिखाने के अलावा प्रोडक्ट या सर्विस की जानकारी को लोगों तक पहुंचाने काम डिजिटल मार्केटिंग की मदद से किया जाता है। इसके लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है। वहीं वीडियो मार्केटिंग की मदद से कंपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोग और कंपनियों के द्वारा अपने प्रोडक्ट्स और सर्विस का विज्ञापन करते हैं। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में कंपनियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों लाखों फॉलोअर्स के साथ अकाउंट चला रहे इन्फ्लुएंसर्स से अपने प्रोडक्ट्स या सर्विस का प्रचार करवाती हैं, ताकि उनकी कंपनी ग्रो कर सकें। डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करने से पहले आपको अपने इंटरेस्ट के अनुसार किसी एक डिजिटल मार्केटिंग में अपना करियर बनाने पर विचार करना चाहिए।
आप डिजिटल मार्केटिंग में एक दो महीने के कोर्स से लेकर डिप्लोमा और डिग्री भी ले सकती हैं। इस कोर्स को आप udemy, coursera, upgrad आदि में रजिस्टर करके पूरा कर सकती हैं। इस क्षेत्र में नौकरी करने के कई फायदे हैं। (सफल बिजनेस वुमन बनने के लिए फॉलो करें ये टिप्स)
इसमें आपको काम के साथ-साथ कई नए-नए अवसर आपके काम से जुड़े हुए मिलते रहते हैं। साथ ही इस क्षेत्र में काम करने से आपको अपनी क्रिएटिविटी का उपयोग करने का मौका मिलता है। यह कोर्स या फिर डिग्री हासिल करने के बाद आप किसी भी इंडस्ट्रीज में काम कर सकती हैं। आप वेब डिजाइनिंग फील्ड से लेकर एफिलिएट मार्केटिंग करके भी हजारों पैसे कमा घर पर बैठे-बैठे भी कमा सकती हैं।
तो ये थी जानकारी डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी हुई। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय भी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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डिजिटल मार्केटिंग सीखने के बाद आप कई कंपनी में जॉब पा सकती हैं और सालाना लाखों रुपए कमा सकती हैं। तो चलिए जानते हैं कि डिजिटल मार्केटिंग में कैसे आप अपना करियर बना सकती हैं। डिजिटल मार्केटिंग का क्षेत्र समय के साथ-साथ तेजी से विकसित होता जा रहा है। डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में आपको अच्छे पैकेज पर जॉब मिल सकती है। यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है, जो इंटरनेट, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ईमेल और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके कंपनियों को अपनी सेवाओं का प्रचार करने में मदद करता है। डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र में कई प्रकार की नौकरियां हैं जैसे कि सोशल मीडिया मैनेजर, डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट, वेब डिजाइनर और डेवलपर, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट आदि। चलिए जानते हैं कि आप कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकती हैं। इस टेक्नोलॉजी के दौर में कंपनियां डिजिटल मार्केटिंग का इस्तेमाल कई चीजों के लिए करती हैं। अगर बात करें सोशल मीडिया मार्केटिंग कि तो यह बहुत अहम डिजिटल मार्केटिंग ट्रेंड है। सोशल मीडिया पर एड दिखाने के अलावा प्रोडक्ट या सर्विस की जानकारी को लोगों तक पहुंचाने काम डिजिटल मार्केटिंग की मदद से किया जाता है। इसके लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है। वहीं वीडियो मार्केटिंग की मदद से कंपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोग और कंपनियों के द्वारा अपने प्रोडक्ट्स और सर्विस का विज्ञापन करते हैं। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में कंपनियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों लाखों फॉलोअर्स के साथ अकाउंट चला रहे इन्फ्लुएंसर्स से अपने प्रोडक्ट्स या सर्विस का प्रचार करवाती हैं, ताकि उनकी कंपनी ग्रो कर सकें। डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करने से पहले आपको अपने इंटरेस्ट के अनुसार किसी एक डिजिटल मार्केटिंग में अपना करियर बनाने पर विचार करना चाहिए। आप डिजिटल मार्केटिंग में एक दो महीने के कोर्स से लेकर डिप्लोमा और डिग्री भी ले सकती हैं। इस कोर्स को आप udemy, coursera, upgrad आदि में रजिस्टर करके पूरा कर सकती हैं। इस क्षेत्र में नौकरी करने के कई फायदे हैं। इसमें आपको काम के साथ-साथ कई नए-नए अवसर आपके काम से जुड़े हुए मिलते रहते हैं। साथ ही इस क्षेत्र में काम करने से आपको अपनी क्रिएटिविटी का उपयोग करने का मौका मिलता है। यह कोर्स या फिर डिग्री हासिल करने के बाद आप किसी भी इंडस्ट्रीज में काम कर सकती हैं। आप वेब डिजाइनिंग फील्ड से लेकर एफिलिएट मार्केटिंग करके भी हजारों पैसे कमा घर पर बैठे-बैठे भी कमा सकती हैं। तो ये थी जानकारी डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी हुई। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय भी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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निर्मल उप्रेती (अल्मोड़ा)
अल्मोड़ाः मुजफ्फरनगर कांड की 27वीं वर्षगांठ पर आज अल्मोड़ा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने शहीदों को नमन करते हुए उनके बलिदान को याद किया। बता दें कि यहां चौघानपाटा गांधी पार्क में उपपा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाया।
इस दौरान उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि 27 साल पहले आज ही के दिन उत्तराखंड के इतिहास में काला अध्याय जुड़ा था। मुजफ्फरनगर कांड में कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। जबकि कई निहत्थे आंदोनकारियों पर गोलियां चलाई गई।
इतना ही नहीं अध्यक्ष पीसी तिवारी ने आगे कहा कि राज्य बनने के 21 साल बाद भी आज तक शहीदों को न्याय नहीं मिला है, और आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे है। दोषियों को सजा नहीं मिलना शहीदों का अपमान है।
इस दौरान उपपा कार्यकर्ताओं ने जनगीत गाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वही, सरकार से दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।
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निर्मल उप्रेती अल्मोड़ाः मुजफ्फरनगर कांड की सत्ताईसवीं वर्षगांठ पर आज अल्मोड़ा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने शहीदों को नमन करते हुए उनके बलिदान को याद किया। बता दें कि यहां चौघानपाटा गांधी पार्क में उपपा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि सत्ताईस साल पहले आज ही के दिन उत्तराखंड के इतिहास में काला अध्याय जुड़ा था। मुजफ्फरनगर कांड में कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। जबकि कई निहत्थे आंदोनकारियों पर गोलियां चलाई गई। इतना ही नहीं अध्यक्ष पीसी तिवारी ने आगे कहा कि राज्य बनने के इक्कीस साल बाद भी आज तक शहीदों को न्याय नहीं मिला है, और आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे है। दोषियों को सजा नहीं मिलना शहीदों का अपमान है। इस दौरान उपपा कार्यकर्ताओं ने जनगीत गाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वही, सरकार से दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।
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ठंड शुरू होते ही कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार की सुरम्य वादियां सैलानियों को लुभाने लगी हैं। यहां देशभर से सैलानियों का आना शुरू हो गया है।
नेपाल से निकलकर कतर्नियाघाट तक कल-कल निनाद कर बहने वाली गिरवा (गेरुवा) नदी में र्बोंटग करना, सुबह होने वाला विविध पक्षियों का कलरव, खुले जंगल में भ्रमण के दौरान बाघ व अन्य खूंखार जानवरों का दिखना, सैलानियों के लिए अत्यन्त रोमांचकारी दृश्य होता है। इन दिनों प्रवासी पक्षी भी यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं। 10 दिसम्बर को इंग्लैंड के सैलानियों की टीम यहां आने वाली है।
इंडो-नेपाल बार्डर पर स्थित कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में बाघों की दहाड़ से थर्राए जंगल में वृक्षों की शाखाओं पर आराम फर्माते तेंदुए, कुलाचें भरते चीतल, पाढ़ा, बार्रांसघा, सांभर, काकड़ तथा लम्बे थूथन से वन भूमि खोदते जंगली सुअर, वृक्षों की डालों पर झूलते विविध प्रजाति के बन्दर व लंगूरों का अवलोकन करने से नैसर्गिक अनुभूति होती है। शीतकाल में प्रवासी तथा अप्रवासी जलीय पक्षियों का बसेरा गिरवा नदी के साथ ही गिरजा बैराज के जल में शुरू हो गया है। जिससे कतर्निया की सुन्दरता और बढ़ गई है। इन दिनों सुर्खाब, लालसर, नीलसर जैसे कई प्रवासी पक्षी भी सैलानियों को काफी लुभा रहे हैं। यह वन प्रभाग 551 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। जैव विविधता एवं बाघों के संरक्षण को वर्ष 2003 मेंं इसे प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया है।
कतर्नियाघाट में सैलानियों के ठहरने की व्यवस्थाः बहराइच। कतर्नियाघाट में वन विभाग की ओर से मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, रमपुरवा व कतर्नियाघाट में केवल विभागीय व सरकारी कार्य के लिए अन्य विभागों को उपलब्ध कराया जाता है। खाली रहने पर इसकी र्बुंकग डीएफओ या फील्ड डायरेक्टर निर्धारित शुल्क 510 रुपए लेकर कर सकते हैं। कतर्नियाघाट रेंज में दो तथा घड़ियाल सेंटर में पांच थारूहट हैं। जिनकी र्बुंकग भी 510 रुपए में होती है। वन निगम की ओर से मोतीपुर में चार थारूहट हैं, जिसमें 12 ड्रामेट्री मोतीपुर, चार थारुहट ककरहा, चार लेपर्ड हट कतर्नियाघाट, दो टाइगर हट कतर्नियाघाट में उपलब्ध हैं। थारू व लेपर्ड हट 2650 रुपए में डबल, 1525 रुपए र्में ंसगल व 3650 रुपए ट्रिपल बेड मिलता है। ड्रामेट्री का शुल्क 1000 रुपए बेड है।
कतर्नियाघाट की इंट्री फीस प्रति व्यक्ति 50 रुपए व वाहन शुल्क प्रति वाहन 100 रुपए है। जिप्सी से जंगल सफारी अधिकतम 6 लोगों के लिए गाइडसुदा शुल्क 1750 रुपए है। वन विभाग की ओर से ही बोट सफारी की व्यवस्था है, जिसका शुल्क 450 रुपए व 350 रुपए पेट्रोल का मूल्य अदा कर प्रति राइड आधे घंटे अधिकतम 6 सवारी के साथ र्बोंटग की जा सकती है। वन निगम की ओर से बोट सफारी का किराया 2100 रुपए है, जिसमें 6 सवारी बैठ सकती हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन बताते हैं कि इको टूरिज्म में स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके, इसका प्रयास किया जा रहा है। जिससे यहां के युवा नेचर गाइड, जिप्सी परिचालक, कैंटीन में भोजन उपलब्ध कराने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराकर रोजगार प्राप्त कर सकें।
इको विकास समितियों में रोजगार दिलाने की कोशिश की जा रही है। सरकार की ओर से होम स्टे योजना शुरू की गई है, जिसमें यहां आने वाले पर्यटक वन विभाग व इको टूरिज्म की ओर से की जाने वाली ठहरने की व्यवस्था पर ही आश्रित न रहें, इससे इतर भी लोग होम स्टे के तहत गांव में ठहर सकें। नेपाल के बर्दिया राष्ट्रीय निकुंज में यह व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। जिसे देखने के लिए यहां के कुछ लोगों को नेपाल के बर्दिया जंगल में भेजा गया था। वहां से लौटकर आए लोग वहां चल रही व्यवस्था से काफी प्रभावित हैं।
ऐसे पहुंचें कतर्नियाघाटः जिला मुख्यालय से लगभग 120 किमी पर स्थित इस वन्यजीव प्रभाग की सीमा यहां से 50 किमी दूर गायघाट से शुरू हो जाती है। बहराइच से प्राइवेट बसों या निजी साधनों से तथा छोटी लाइन की ट्रेन से बिछिया स्टेशन पर उतरकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। लखनऊ से-बाराबंकी, बहराइच, नानपारा व मिहींपुरवा होकर यहां की दूरी 240 किमी तथा लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर शारदानगर व बिछिया होते हुए लगभग 200 किमी है। लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, मैलानी, पलिया, दुधवा, बेलरायां, बिछिया तक सैलानी ट्रेन से पहुंचने के बाद 4 किमी की दूरी बस से तय कर कतर्नियाघाट पहुंच सकते हैं। लखनऊ से इस रूट से होकर दूरी 340 किमी पड़ती है।
स्थानीय स्तर पर इको विकास समितियों के बेरोजगार सदस्यों को कैंटीन संचालन के लिए अधिकृत किया गया है, जहां पर शाकाहारी भोजन उपलब्ध होता है। कतर्नियाघाट रेंज, घड़ियाल सेंटर, ककरहा एवं मोतीपुर में कैंटीन स्थित है। सामान्य तौर पर प्रति थाल भोजन 250 रुपए में उपलब्ध कराया जाता है। शराब व मांसाहारी भोजन पूरी तरह वर्जित है।
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ठंड शुरू होते ही कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार की सुरम्य वादियां सैलानियों को लुभाने लगी हैं। यहां देशभर से सैलानियों का आना शुरू हो गया है। नेपाल से निकलकर कतर्नियाघाट तक कल-कल निनाद कर बहने वाली गिरवा नदी में र्बोंटग करना, सुबह होने वाला विविध पक्षियों का कलरव, खुले जंगल में भ्रमण के दौरान बाघ व अन्य खूंखार जानवरों का दिखना, सैलानियों के लिए अत्यन्त रोमांचकारी दृश्य होता है। इन दिनों प्रवासी पक्षी भी यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं। दस दिसम्बर को इंग्लैंड के सैलानियों की टीम यहां आने वाली है। इंडो-नेपाल बार्डर पर स्थित कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में बाघों की दहाड़ से थर्राए जंगल में वृक्षों की शाखाओं पर आराम फर्माते तेंदुए, कुलाचें भरते चीतल, पाढ़ा, बार्रांसघा, सांभर, काकड़ तथा लम्बे थूथन से वन भूमि खोदते जंगली सुअर, वृक्षों की डालों पर झूलते विविध प्रजाति के बन्दर व लंगूरों का अवलोकन करने से नैसर्गिक अनुभूति होती है। शीतकाल में प्रवासी तथा अप्रवासी जलीय पक्षियों का बसेरा गिरवा नदी के साथ ही गिरजा बैराज के जल में शुरू हो गया है। जिससे कतर्निया की सुन्दरता और बढ़ गई है। इन दिनों सुर्खाब, लालसर, नीलसर जैसे कई प्रवासी पक्षी भी सैलानियों को काफी लुभा रहे हैं। यह वन प्रभाग पाँच सौ इक्यावन किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। जैव विविधता एवं बाघों के संरक्षण को वर्ष दो हज़ार तीन मेंं इसे प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया है। कतर्नियाघाट में सैलानियों के ठहरने की व्यवस्थाः बहराइच। कतर्नियाघाट में वन विभाग की ओर से मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, रमपुरवा व कतर्नियाघाट में केवल विभागीय व सरकारी कार्य के लिए अन्य विभागों को उपलब्ध कराया जाता है। खाली रहने पर इसकी र्बुंकग डीएफओ या फील्ड डायरेक्टर निर्धारित शुल्क पाँच सौ दस रुपयापए लेकर कर सकते हैं। कतर्नियाघाट रेंज में दो तथा घड़ियाल सेंटर में पांच थारूहट हैं। जिनकी र्बुंकग भी पाँच सौ दस रुपयापए में होती है। वन निगम की ओर से मोतीपुर में चार थारूहट हैं, जिसमें बारह ड्रामेट्री मोतीपुर, चार थारुहट ककरहा, चार लेपर्ड हट कतर्नियाघाट, दो टाइगर हट कतर्नियाघाट में उपलब्ध हैं। थारू व लेपर्ड हट दो हज़ार छः सौ पचास रुपयापए में डबल, एक हज़ार पाँच सौ पच्चीस रुपयापए र्में ंसगल व तीन हज़ार छः सौ पचास रुपयापए ट्रिपल बेड मिलता है। ड्रामेट्री का शुल्क एक हज़ार रुपयापए बेड है। कतर्नियाघाट की इंट्री फीस प्रति व्यक्ति पचास रुपयापए व वाहन शुल्क प्रति वाहन एक सौ रुपयापए है। जिप्सी से जंगल सफारी अधिकतम छः लोगों के लिए गाइडसुदा शुल्क एक हज़ार सात सौ पचास रुपयापए है। वन विभाग की ओर से ही बोट सफारी की व्यवस्था है, जिसका शुल्क चार सौ पचास रुपयापए व तीन सौ पचास रुपयापए पेट्रोल का मूल्य अदा कर प्रति राइड आधे घंटे अधिकतम छः सवारी के साथ र्बोंटग की जा सकती है। वन निगम की ओर से बोट सफारी का किराया दो हज़ार एक सौ रुपयापए है, जिसमें छः सवारी बैठ सकती हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन बताते हैं कि इको टूरिज्म में स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके, इसका प्रयास किया जा रहा है। जिससे यहां के युवा नेचर गाइड, जिप्सी परिचालक, कैंटीन में भोजन उपलब्ध कराने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराकर रोजगार प्राप्त कर सकें। इको विकास समितियों में रोजगार दिलाने की कोशिश की जा रही है। सरकार की ओर से होम स्टे योजना शुरू की गई है, जिसमें यहां आने वाले पर्यटक वन विभाग व इको टूरिज्म की ओर से की जाने वाली ठहरने की व्यवस्था पर ही आश्रित न रहें, इससे इतर भी लोग होम स्टे के तहत गांव में ठहर सकें। नेपाल के बर्दिया राष्ट्रीय निकुंज में यह व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। जिसे देखने के लिए यहां के कुछ लोगों को नेपाल के बर्दिया जंगल में भेजा गया था। वहां से लौटकर आए लोग वहां चल रही व्यवस्था से काफी प्रभावित हैं। ऐसे पहुंचें कतर्नियाघाटः जिला मुख्यालय से लगभग एक सौ बीस किमी पर स्थित इस वन्यजीव प्रभाग की सीमा यहां से पचास किमी दूर गायघाट से शुरू हो जाती है। बहराइच से प्राइवेट बसों या निजी साधनों से तथा छोटी लाइन की ट्रेन से बिछिया स्टेशन पर उतरकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। लखनऊ से-बाराबंकी, बहराइच, नानपारा व मिहींपुरवा होकर यहां की दूरी दो सौ चालीस किमी तथा लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर शारदानगर व बिछिया होते हुए लगभग दो सौ किमी है। लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, मैलानी, पलिया, दुधवा, बेलरायां, बिछिया तक सैलानी ट्रेन से पहुंचने के बाद चार किमी की दूरी बस से तय कर कतर्नियाघाट पहुंच सकते हैं। लखनऊ से इस रूट से होकर दूरी तीन सौ चालीस किमी पड़ती है। स्थानीय स्तर पर इको विकास समितियों के बेरोजगार सदस्यों को कैंटीन संचालन के लिए अधिकृत किया गया है, जहां पर शाकाहारी भोजन उपलब्ध होता है। कतर्नियाघाट रेंज, घड़ियाल सेंटर, ककरहा एवं मोतीपुर में कैंटीन स्थित है। सामान्य तौर पर प्रति थाल भोजन दो सौ पचास रुपयापए में उपलब्ध कराया जाता है। शराब व मांसाहारी भोजन पूरी तरह वर्जित है।
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घर में रुपये नहीं हैं पापा,
चलो कहीं से क्रय कर लाएँ।
सौ रुपये कितने में मिलते,
मंडी चलकर पता लगाएँ।
यह तो पता करो पापाजी,
पाँच रुपये कितने में आते,
एक रुपये की कीमत क्या है,
क्यों इसका न पता लगाते।
नोट पाँच सौ का लेना हो,
तो हमको क्या करना होगा।
दस का नोट खरीदेंगे तो,
धन कितना व्यय करना होगा।
पापा बोले बाजारों में,
रुपये नहीं बिका करते हैं।
रुपये के बल पर दुनिया के,
सब बाजार चला करते हैं।
श्रम शक्ति के व्यय करने पर,
रुपये हमको मिल जाते हैं।
कड़े परिश्रम के वृक्षों पर,
रुपये फूलकर फल जाते हैं।
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घर में रुपये नहीं हैं पापा, चलो कहीं से क्रय कर लाएँ। सौ रुपये कितने में मिलते, मंडी चलकर पता लगाएँ। यह तो पता करो पापाजी, पाँच रुपये कितने में आते, एक रुपये की कीमत क्या है, क्यों इसका न पता लगाते। नोट पाँच सौ का लेना हो, तो हमको क्या करना होगा। दस का नोट खरीदेंगे तो, धन कितना व्यय करना होगा। पापा बोले बाजारों में, रुपये नहीं बिका करते हैं। रुपये के बल पर दुनिया के, सब बाजार चला करते हैं। श्रम शक्ति के व्यय करने पर, रुपये हमको मिल जाते हैं। कड़े परिश्रम के वृक्षों पर, रुपये फूलकर फल जाते हैं।
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भाेपाल की अगली महापाैर ओबीसी महिला वर्ग से हाेगी। इंदाैर और जबलपुर में सामान्य वर्ग के प्रत्याशियाें के लिए माैका रहेगा। ग्वालियर में भी अगली मेयर महिला ही हाेगी। नगर निगम के महापाैर और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए बुधवार काे हुए आरक्षण में यह साफ हाे गया है। भाेपाल में 1999 के बाद महापाैर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है। पिछले तीन में से दाे बार अनारक्षित और एक बार महिला के लिए आरक्षित था, इसलिए चक्रानुक्रम में इसका ओबीसी हाेना तय था। भाेपाल सहित दाे निगम ओबीसी महिला, जबकि दाे ओबीसी के लिए रिजर्व हुई हैं। उज्जैन एससी और मुरैना एससी महिला के लिए आरक्षित है।
छिंदवाड़ा नगर निगम की सीमा वृद्धि के कारण उसमें अनुसूचित जनजाति आबादी बढ़ने से महापाैर का पद एसटी के लिए रिजर्व हुआ है। पिछली बार एसटी महिला के लिए आरक्षित सिंगराैली अब अनारक्षित हाे गया है। इंदौर, जबलपुर, रीवा और सिंगरौली इस बार अनारक्षित हैं, जबकि पिछली बार पांच निगमों के महापौर पद अनारक्षित थे। कुल 16 नगर निगम में से अलग-अलग श्रेणी में आठ महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इनके साथ 99 नगर पालिकाओं और 292 नगर परिषदाें के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया की गई। नगर पालिकाओं में 50 सीट अलग-अलग श्रेणी में महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। इनमें 26 महिला, 13 ओबीसी महिला, आठ एससी महिला और तीन एसटी महिला के लिए रिजर्व की गईं। अन्य पालिकाओं में 27 अनारक्षित, 12 ओबीसी, सात एससी और तीन एसटी के खाते गई हैं।
मंडीदीप और बैरसिया नगर पालिका में अगली अध्यक्ष महिला हाेगी। बुधवार काे हुए आरक्षण में ये दाेनाें सीटें महिला के खाते में गईं हैं। भाेपाल संभाग में भाेपाल नगर निगम सहित कुल 23 निकायाें में अलग-अलग श्रेणी में महिलाओं काे महापाैर व अध्यक्ष पद के लिए माैका मिलना तय है। इसके अलावा 20 निकायाें में से पांच ओबीसी और दाे एससी के लिए रिजर्व रहेंगी। अन्य निकाय में अध्यक्ष पद अनारक्षित हाेगा। नगर पालिकाओं में मंडीदीप व बैरसिया के साथ विदिशा व राजगढ़ महिला, रायसेन, आष्टा व ब्यावरा ओबीसी महिला और सिराेंज ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। गंजबसाैदा, बेगमगंज, सीहाेर, सारंगपुर व नरसिंहगढ़ अनारक्षित हैं।
अनारक्षित : सारंगपुर, सिवनीमालवा, बेगमगंज, टीकमगढ़, नौगांव, पोरसा, अशोकनगर, डोंगर परासिया, कोतमा, सिहोरा, पसान, सीधी, बड़नगर, गंजबासोदा, नरसिंहगढ़, सिहोर, पीथमपुर, बड़वाह, सेंधवा, नरसिंहपुर, आगर, शाजापुर, दमोह, खाचरोद, उमरिया, गाडरवारा, अनूपपुर।
महिला : बैतूल, विदिशा, राजगढ़, पिपरिया, पन्ना, खरगोन, गढ़ाकोटा, बालाघाट, नैनपुर, धनपुरी, महिदपुर, शिवपुरी, बैरसिया, मुलताई, देवरी, दतिया, गुना, वारासिवनी, चौरई, सौंसर, अमरवाड़ा, करेली, नीमच, अम्बाह, मंडीदीप, शुजालपुर।
ओबीसी महिला : जावरा, छतरपुर, धार, सनावद, नेपानगर, आष्टा, ब्यावरा, हरदा, पांढुर्ना, श्योपुर कला, होशंगाबाद, रायसेन, मंदसौर।
ओबीसी : सबलगढ़, सिरोंज, शहडोल, पनागर, राघोगढ़, जुन्नारदेव, मनावर, मैहर, सिवनी, मंडला, रहली, इटारसी।
भोपाल महापौर के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा शुरू हो जाएगी। कहा जा रहा है कि इस आरक्षण में कांग्रेस से पूर्व महापौर विभा पटेल और भाजपा से विधायक व पूर्व महापौर कृष्णा गौर के रास्ते खुल गए हैं। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा है कि महापाैर पद के लिए विधायक प्राथमिकता में नहीं हैं। साफ है कि कृष्णा गाैर के लिए सहमति के आसार कम ही हैं। यदि राजनीतिक दलों के आंतरिक समीकरणों के कारण इन्हें टिकट नहीं मिले तो नए चेहरे सामने आएंगे। विभा पटेल 1999 में महापौर बनीं थीं। वे भोपाल की पहली महिला महापौर थीं। उन्होंने भाजपा की राजो मालवीय को हराया था।
दिसंबर 2003 में भाजपा सरकार आने पर कार्यकाल पूरा होने से कुछ माह पहले उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर 2009 में भोपाल की महापौर बनीं। खास बात यह है कि भाजपा ने कृष्णा गौर को अनारक्षित महिला सीट होने पर महापौर का टिकट दिया था। उन्होंने कांग्रेस की आभा सिंह को चुनाव हराया था। बाबूलाल गौर के निधन के बाद कृष्णा गौर गोविंदपुरा क्षेत्र से विधायक हैं। तकनीकी तौर पर विधायक के महापौर निर्वाचन में कोई कानूनी बाधा नहीं हैं। इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड़ दोनों ही इसके उदाहरण हैं।
एक चर्चा यह भी है कि भाजपा संघ परिवार के किसी अनुषांगिक संगठन में सक्रिय किसी कम चर्चित महिला को उम्मीदवार बना सकती है। 1999 में विभा पटेल के खिलाफ राजो मालवीय भी दुर्गा वाहिनी से आईं थीं, हालांकि वे चुनाव जीत नहीं सकीं। कांग्रेस में संतोष कंसाना, शबिस्ता जकी और रईसा मलिक को जरूर दावेदार माना जा रहा है।
भोपाल महापौर का चुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए आसान नहीं रहा है। 1994 में भाजपा के उमाशंकर गुप्ता पार्षदों के बीच से महापौर चुने गए थे। उसके बाद 1999 से महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से शुरू हुआ तो 1999 और 2004 में यह पद कांग्रेस के खाते में चला गया। 2009 और फरवरी 2015 में भाजपा ने जीत दर्ज कराई। इस बार राजधानी की छह विधानसभा सीटों में से तीन भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य और भोपाल दक्षिण-पश्चिम से कांग्रेस के विधायक हैं। इसलिए भाजपा के लिए राह बहुत आसान नहीं कही जा सकती।
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भाेपाल की अगली महापाैर ओबीसी महिला वर्ग से हाेगी। इंदाैर और जबलपुर में सामान्य वर्ग के प्रत्याशियाें के लिए माैका रहेगा। ग्वालियर में भी अगली मेयर महिला ही हाेगी। नगर निगम के महापाैर और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए बुधवार काे हुए आरक्षण में यह साफ हाे गया है। भाेपाल में एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के बाद महापाैर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ है। पिछले तीन में से दाे बार अनारक्षित और एक बार महिला के लिए आरक्षित था, इसलिए चक्रानुक्रम में इसका ओबीसी हाेना तय था। भाेपाल सहित दाे निगम ओबीसी महिला, जबकि दाे ओबीसी के लिए रिजर्व हुई हैं। उज्जैन एससी और मुरैना एससी महिला के लिए आरक्षित है। छिंदवाड़ा नगर निगम की सीमा वृद्धि के कारण उसमें अनुसूचित जनजाति आबादी बढ़ने से महापाैर का पद एसटी के लिए रिजर्व हुआ है। पिछली बार एसटी महिला के लिए आरक्षित सिंगराैली अब अनारक्षित हाे गया है। इंदौर, जबलपुर, रीवा और सिंगरौली इस बार अनारक्षित हैं, जबकि पिछली बार पांच निगमों के महापौर पद अनारक्षित थे। कुल सोलह नगर निगम में से अलग-अलग श्रेणी में आठ महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इनके साथ निन्यानवे नगर पालिकाओं और दो सौ बानवे नगर परिषदाें के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया की गई। नगर पालिकाओं में पचास सीट अलग-अलग श्रेणी में महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। इनमें छब्बीस महिला, तेरह ओबीसी महिला, आठ एससी महिला और तीन एसटी महिला के लिए रिजर्व की गईं। अन्य पालिकाओं में सत्ताईस अनारक्षित, बारह ओबीसी, सात एससी और तीन एसटी के खाते गई हैं। मंडीदीप और बैरसिया नगर पालिका में अगली अध्यक्ष महिला हाेगी। बुधवार काे हुए आरक्षण में ये दाेनाें सीटें महिला के खाते में गईं हैं। भाेपाल संभाग में भाेपाल नगर निगम सहित कुल तेईस निकायाें में अलग-अलग श्रेणी में महिलाओं काे महापाैर व अध्यक्ष पद के लिए माैका मिलना तय है। इसके अलावा बीस निकायाें में से पांच ओबीसी और दाे एससी के लिए रिजर्व रहेंगी। अन्य निकाय में अध्यक्ष पद अनारक्षित हाेगा। नगर पालिकाओं में मंडीदीप व बैरसिया के साथ विदिशा व राजगढ़ महिला, रायसेन, आष्टा व ब्यावरा ओबीसी महिला और सिराेंज ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। गंजबसाैदा, बेगमगंज, सीहाेर, सारंगपुर व नरसिंहगढ़ अनारक्षित हैं। अनारक्षित : सारंगपुर, सिवनीमालवा, बेगमगंज, टीकमगढ़, नौगांव, पोरसा, अशोकनगर, डोंगर परासिया, कोतमा, सिहोरा, पसान, सीधी, बड़नगर, गंजबासोदा, नरसिंहगढ़, सिहोर, पीथमपुर, बड़वाह, सेंधवा, नरसिंहपुर, आगर, शाजापुर, दमोह, खाचरोद, उमरिया, गाडरवारा, अनूपपुर। महिला : बैतूल, विदिशा, राजगढ़, पिपरिया, पन्ना, खरगोन, गढ़ाकोटा, बालाघाट, नैनपुर, धनपुरी, महिदपुर, शिवपुरी, बैरसिया, मुलताई, देवरी, दतिया, गुना, वारासिवनी, चौरई, सौंसर, अमरवाड़ा, करेली, नीमच, अम्बाह, मंडीदीप, शुजालपुर। ओबीसी महिला : जावरा, छतरपुर, धार, सनावद, नेपानगर, आष्टा, ब्यावरा, हरदा, पांढुर्ना, श्योपुर कला, होशंगाबाद, रायसेन, मंदसौर। ओबीसी : सबलगढ़, सिरोंज, शहडोल, पनागर, राघोगढ़, जुन्नारदेव, मनावर, मैहर, सिवनी, मंडला, रहली, इटारसी। भोपाल महापौर के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा शुरू हो जाएगी। कहा जा रहा है कि इस आरक्षण में कांग्रेस से पूर्व महापौर विभा पटेल और भाजपा से विधायक व पूर्व महापौर कृष्णा गौर के रास्ते खुल गए हैं। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा है कि महापाैर पद के लिए विधायक प्राथमिकता में नहीं हैं। साफ है कि कृष्णा गाैर के लिए सहमति के आसार कम ही हैं। यदि राजनीतिक दलों के आंतरिक समीकरणों के कारण इन्हें टिकट नहीं मिले तो नए चेहरे सामने आएंगे। विभा पटेल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में महापौर बनीं थीं। वे भोपाल की पहली महिला महापौर थीं। उन्होंने भाजपा की राजो मालवीय को हराया था। दिसंबर दो हज़ार तीन में भाजपा सरकार आने पर कार्यकाल पूरा होने से कुछ माह पहले उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर दो हज़ार नौ में भोपाल की महापौर बनीं। खास बात यह है कि भाजपा ने कृष्णा गौर को अनारक्षित महिला सीट होने पर महापौर का टिकट दिया था। उन्होंने कांग्रेस की आभा सिंह को चुनाव हराया था। बाबूलाल गौर के निधन के बाद कृष्णा गौर गोविंदपुरा क्षेत्र से विधायक हैं। तकनीकी तौर पर विधायक के महापौर निर्वाचन में कोई कानूनी बाधा नहीं हैं। इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड़ दोनों ही इसके उदाहरण हैं। एक चर्चा यह भी है कि भाजपा संघ परिवार के किसी अनुषांगिक संगठन में सक्रिय किसी कम चर्चित महिला को उम्मीदवार बना सकती है। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में विभा पटेल के खिलाफ राजो मालवीय भी दुर्गा वाहिनी से आईं थीं, हालांकि वे चुनाव जीत नहीं सकीं। कांग्रेस में संतोष कंसाना, शबिस्ता जकी और रईसा मलिक को जरूर दावेदार माना जा रहा है। भोपाल महापौर का चुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए आसान नहीं रहा है। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में भाजपा के उमाशंकर गुप्ता पार्षदों के बीच से महापौर चुने गए थे। उसके बाद एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे से महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से शुरू हुआ तो एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे और दो हज़ार चार में यह पद कांग्रेस के खाते में चला गया। दो हज़ार नौ और फरवरी दो हज़ार पंद्रह में भाजपा ने जीत दर्ज कराई। इस बार राजधानी की छह विधानसभा सीटों में से तीन भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य और भोपाल दक्षिण-पश्चिम से कांग्रेस के विधायक हैं। इसलिए भाजपा के लिए राह बहुत आसान नहीं कही जा सकती। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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भारतीय फिल्म जगत में देव आनंद का नाम उन चंद चर्चित कलाकारों में शामिल है, जिन पर फिल्माए गए गीत मील का पत्थर साबित हुए। अपने खास अंदाज के लिए पहचाने वाले देव आनंद अभिनीत फिल्में के गीत जब कानों पर पड़ते हैं तो सुनने वाले आनंदित हो जाते हैं।
देव आनंद अभिनीत फिल्मों में हेमंत कुमार तथा किशोर कुमार की आवाज में जो गीत फिल्माए गए उनकी कोई सानी नहीं है। पार्श्वगायक मोहम्मद रफी ने जब देव साहब के लिए गाना शुरू किया तो वह सोने में सुहागा हो गया। 'न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जाने' गीत हो या फिर र्आज पंछी अकेला है', जैसे गीत उस दौर के फिल्मी गानों के मिठास का खुद बखुद बखान करते हैं। 'अपने भरोसा है तो ये दांव लगा ले' गीत भी अपने दौर मे काफी सराहा गया। टैक्सी ड्रायवर, घर नं 44, फंटूश, नो दो ग्यारह, गाइड, ज्वेल थीफ, बंबई का बाबू जैसी फिल्मों के गीत आज मी जब कानों पर पड़ते हैं, तो सुनने वाले कहते हैं वाह क्या गाना है। 'आज पंछी अकेला है', 'जब किसी से प्यार होता ह'ै फिल्म का गीत 'तेरी जुल्फों में' या फिर 'असली-नकली' फिल्म का तुझे जीवन की डोर से बांध लिया है', जैसे गीत जैसे ही बजते हैं, शरीर में अलग सी थिरकत पैदा हो जाती है। दुनिया नामक फिल्म का 'फलसफा प्यार का' चर्चित गीतोंमें शुमार है। "गाता रहे मेरा दिल" कहने वाले देव आनंद 'जिदंगी का साथ निभाता चला गया' कहकर सचमुच चले गए। उनका जाना उन्हें चाहने वालों को हर पल सालता रहेगा, लेकिन उनके फिल्माएं गीतों को जब गुनगुनाया जाएगा, उनका चेहरा हम सब के सामने आ जाएगा। अपने अभिनय के साथ-साथ भारतीय फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ गीतों की सुमधुरता ने देव आनंद की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ाने में अहम योगदान दिया। देव आनंद अभिनीत फिल्मों के लिए सी रामचंद्र (बारिश, अमरदीप, जयदेव (हम दोनो किनारे-किनारे), लक्ष्मीकांत प्यारेलाल (अमीर-गरीब और जानेमन), ओ. पी. नैयर (सी आई डी, जाली नोट), अनिल बिश्वास (जीत) राजेश रोशन (देश-परदेश, मनपसंद) नेे संगीत देकर उन सभी गीतों को अमर बना दिया।
19 फिल्मों में खुद्द निर्देशन करनेवाले देव आनंद की फिल्मों में अभिनय की यात्रा देश आजाद होने से एक वर्ष पहले यानी 1946 में 'हम एक हैं' फिल्म से शुरू हुई और इस फिल्म अभियन निर्देशन यात्रा का सभापन सन् 2005 में 'प्राइम मिनिस्टर' के बाद हुआ। बॉक्स ऑफिस में सफलता के झंडे गाड़ने वाले इस उम्दा कलाकार पर फिल्माए गए गीत खुद्द ही बोल देते हैं कि वे कितना गंभीर अर्थ लिए हुए हैं। 'याद किया दिल' ने जैसा गीत हो या फिर 'मुसाफिर जाएगा कहां' गीत अपने आप ही बता देता है कि इस गीत के माध्यम से देव आनंद ने दर्शकों के बीच नया संदेश पहुंचाया है। अपनी नटखट नायिका, नाराज नायिका, शोख नायिका को मनाने के लिए देव आनंद पर फिल्माए गीत का भाव अपनी खास शैली में प्रस्तुत करने का जो हुनर देव आनंद ने अपने अभिनय में दिखाया, उसकी जितनी तारीफ की जा कम ही कही जाएगी। बॉम्बे टॉकिज की फिल्म 'जिद्दी' (1983) से अपने फिल्म करिअर में स्थायित्व पाने वाले देव आनंद के लटके-झटके जब किसी गीत के बीच आते थे तो उसे दर्शक खूब सराहते थे। दर्शकों ने उनके हर अंदाज को तो सराहा ही, साथ ही गीतों के माध्यम से अपनी नायिका को मनाने का अलहदा अंदाज दर्शकों को खूब भाता था। प्रेम का अंदाज-ए-बयां तो मत पूछिए। उनके इस अंदाज से ही नाराज नायिका पलभर में हंसने के लिए बाध्य हो जाती थी। अपने यह दशकीय फिल्मी करिअर में देव आनंद जिन-जिन नायिकाओं के नायक रहे, वे भी इस बात की कायल रहीं कि देव आनंद अभिनीत फिल्मों के गानो को देव साहब ने अपने अलग अंदाज के कारण अमर कर दिया है। 'अपना दिल तो आवारा' गीत जब सुनने वालों के कानों पर पड़ा तो दर्शकों को देव आनंद के पागलप्रेमी के रूप का दर्शन हो गया। बतौर अभिनेता देव आनंद को चाहने वाले लोगों की सूची भी कम नहीं है, साथ ही उन पर फिल्माए गए गीत यह बताने में भी सफल रहे हैं कि अच्छे गीतों के लिए अच्छे अभिनय की भी जरूरत रहती है। इस तरह देव आनंद अभिनीत फिल्मों तथा उनके गीतों का तुलनात्मक अध्ययन करने से यह ज्ञात होगा कि देव आनंद ने जिस भी फिल्म में अभिनय किया, वह यादगार तो रहा ही, साथ ही उनके द्वारा अभिनीत प्रत्येक फिल्म के हर गानों को अमरता ही प्राप्त हो गई।
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भारतीय फिल्म जगत में देव आनंद का नाम उन चंद चर्चित कलाकारों में शामिल है, जिन पर फिल्माए गए गीत मील का पत्थर साबित हुए। अपने खास अंदाज के लिए पहचाने वाले देव आनंद अभिनीत फिल्में के गीत जब कानों पर पड़ते हैं तो सुनने वाले आनंदित हो जाते हैं। देव आनंद अभिनीत फिल्मों में हेमंत कुमार तथा किशोर कुमार की आवाज में जो गीत फिल्माए गए उनकी कोई सानी नहीं है। पार्श्वगायक मोहम्मद रफी ने जब देव साहब के लिए गाना शुरू किया तो वह सोने में सुहागा हो गया। 'न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जाने' गीत हो या फिर र्आज पंछी अकेला है', जैसे गीत उस दौर के फिल्मी गानों के मिठास का खुद बखुद बखान करते हैं। 'अपने भरोसा है तो ये दांव लगा ले' गीत भी अपने दौर मे काफी सराहा गया। टैक्सी ड्रायवर, घर नं चौंतालीस, फंटूश, नो दो ग्यारह, गाइड, ज्वेल थीफ, बंबई का बाबू जैसी फिल्मों के गीत आज मी जब कानों पर पड़ते हैं, तो सुनने वाले कहते हैं वाह क्या गाना है। 'आज पंछी अकेला है', 'जब किसी से प्यार होता ह'ै फिल्म का गीत 'तेरी जुल्फों में' या फिर 'असली-नकली' फिल्म का तुझे जीवन की डोर से बांध लिया है', जैसे गीत जैसे ही बजते हैं, शरीर में अलग सी थिरकत पैदा हो जाती है। दुनिया नामक फिल्म का 'फलसफा प्यार का' चर्चित गीतोंमें शुमार है। "गाता रहे मेरा दिल" कहने वाले देव आनंद 'जिदंगी का साथ निभाता चला गया' कहकर सचमुच चले गए। उनका जाना उन्हें चाहने वालों को हर पल सालता रहेगा, लेकिन उनके फिल्माएं गीतों को जब गुनगुनाया जाएगा, उनका चेहरा हम सब के सामने आ जाएगा। अपने अभिनय के साथ-साथ भारतीय फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ गीतों की सुमधुरता ने देव आनंद की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ाने में अहम योगदान दिया। देव आनंद अभिनीत फिल्मों के लिए सी रामचंद्र , लक्ष्मीकांत प्यारेलाल , ओ. पी. नैयर , अनिल बिश्वास राजेश रोशन नेे संगीत देकर उन सभी गीतों को अमर बना दिया। उन्नीस फिल्मों में खुद्द निर्देशन करनेवाले देव आनंद की फिल्मों में अभिनय की यात्रा देश आजाद होने से एक वर्ष पहले यानी एक हज़ार नौ सौ छियालीस में 'हम एक हैं' फिल्म से शुरू हुई और इस फिल्म अभियन निर्देशन यात्रा का सभापन सन् दो हज़ार पाँच में 'प्राइम मिनिस्टर' के बाद हुआ। बॉक्स ऑफिस में सफलता के झंडे गाड़ने वाले इस उम्दा कलाकार पर फिल्माए गए गीत खुद्द ही बोल देते हैं कि वे कितना गंभीर अर्थ लिए हुए हैं। 'याद किया दिल' ने जैसा गीत हो या फिर 'मुसाफिर जाएगा कहां' गीत अपने आप ही बता देता है कि इस गीत के माध्यम से देव आनंद ने दर्शकों के बीच नया संदेश पहुंचाया है। अपनी नटखट नायिका, नाराज नायिका, शोख नायिका को मनाने के लिए देव आनंद पर फिल्माए गीत का भाव अपनी खास शैली में प्रस्तुत करने का जो हुनर देव आनंद ने अपने अभिनय में दिखाया, उसकी जितनी तारीफ की जा कम ही कही जाएगी। बॉम्बे टॉकिज की फिल्म 'जिद्दी' से अपने फिल्म करिअर में स्थायित्व पाने वाले देव आनंद के लटके-झटके जब किसी गीत के बीच आते थे तो उसे दर्शक खूब सराहते थे। दर्शकों ने उनके हर अंदाज को तो सराहा ही, साथ ही गीतों के माध्यम से अपनी नायिका को मनाने का अलहदा अंदाज दर्शकों को खूब भाता था। प्रेम का अंदाज-ए-बयां तो मत पूछिए। उनके इस अंदाज से ही नाराज नायिका पलभर में हंसने के लिए बाध्य हो जाती थी। अपने यह दशकीय फिल्मी करिअर में देव आनंद जिन-जिन नायिकाओं के नायक रहे, वे भी इस बात की कायल रहीं कि देव आनंद अभिनीत फिल्मों के गानो को देव साहब ने अपने अलग अंदाज के कारण अमर कर दिया है। 'अपना दिल तो आवारा' गीत जब सुनने वालों के कानों पर पड़ा तो दर्शकों को देव आनंद के पागलप्रेमी के रूप का दर्शन हो गया। बतौर अभिनेता देव आनंद को चाहने वाले लोगों की सूची भी कम नहीं है, साथ ही उन पर फिल्माए गए गीत यह बताने में भी सफल रहे हैं कि अच्छे गीतों के लिए अच्छे अभिनय की भी जरूरत रहती है। इस तरह देव आनंद अभिनीत फिल्मों तथा उनके गीतों का तुलनात्मक अध्ययन करने से यह ज्ञात होगा कि देव आनंद ने जिस भी फिल्म में अभिनय किया, वह यादगार तो रहा ही, साथ ही उनके द्वारा अभिनीत प्रत्येक फिल्म के हर गानों को अमरता ही प्राप्त हो गई।
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हल्की से मध्यम बारिश होगी व तेज हवाएं चलने की संभावना है।
19 जून को बुलाया गया था लेकिन तब किसी कारण वह आ नहीं सके थे।
लुधियाना में एक ICE क्रीम पार्लर पर हंगामा होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि लुधियाना में एक ICE क्रीम पार्लर पर एक ग्राहक ने खूब हंगामा किया।
वहीं सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई, जिनके द्वारा जांच शुरू कर दी गई है।
वारदात के वक्त कार मालिक दुकान के अंदर परिवार समेत कुछ खाने गया हुआ था।
महानगर में आगजनी की एक बड़ी घटना सामने आई है।
नगर निगम द्वारा तोड़ने के कुछ देर बाद अवैध रूप से बन रही बिल्डिंगों का निर्माण दोबारा शुरू होने के मामलों की लिस्ट दिन-ब-दिन लंबी हो रही है।
मौके पर डिवीजन नंबर. 4 की पुलिस पहुंच चुकी है, जिन्होंने घटनास्थल से एक खोल बरामद कर जांच शुरू कर दी है।
सी. एम. एस. कंपनी में 8. 49 करोड़ की लूट में एक नया मोड़ सामने आया है।
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हल्की से मध्यम बारिश होगी व तेज हवाएं चलने की संभावना है। उन्नीस जून को बुलाया गया था लेकिन तब किसी कारण वह आ नहीं सके थे। लुधियाना में एक ICE क्रीम पार्लर पर हंगामा होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि लुधियाना में एक ICE क्रीम पार्लर पर एक ग्राहक ने खूब हंगामा किया। वहीं सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई, जिनके द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। वारदात के वक्त कार मालिक दुकान के अंदर परिवार समेत कुछ खाने गया हुआ था। महानगर में आगजनी की एक बड़ी घटना सामने आई है। नगर निगम द्वारा तोड़ने के कुछ देर बाद अवैध रूप से बन रही बिल्डिंगों का निर्माण दोबारा शुरू होने के मामलों की लिस्ट दिन-ब-दिन लंबी हो रही है। मौके पर डिवीजन नंबर. चार की पुलिस पहुंच चुकी है, जिन्होंने घटनास्थल से एक खोल बरामद कर जांच शुरू कर दी है। सी. एम. एस. कंपनी में आठ. उनचास करोड़ की लूट में एक नया मोड़ सामने आया है। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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Latest Jokes: आजकल की भागभागम भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग काम के बढ़ते दबाव की वजह से उदास रहने लगे। इसकी वजह से लोग चिड़चिड़ेपन और अनिद्रा जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं। हम सभी को इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सुबह और शाम हंसने की आदत डाल लेनी चाहिए। अगर हम हंसते रहते हैं, तो मानसिक तनाव से होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। इसीलिए हम आपको हंसाने के लिए कुछ चुटकुले लेकर आए हैं जिन्हें पढ़ने के बाद आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।
सोनू का पांव केले के छिलके पर पड़ा और वो फिसल कर गिर गया. . . !
सोनू उठा और फिर आगे चला, तो दूसरे छिलके में पांव पड़ा और फिर फिसल कर गिर गया. . . !
सोनू फिर उठा और थोड़ा आगे और चला, तो उसे तीसरा छिलका दिख गया. . . !
सोनू रोते- रोते बोला - धत तेरे की, अब फिर से फिसलना पड़ेगा. . . !
चिंटू- दुनिया में दो तरह के नेटवर्क ही सबसे तेज हैं।
मिंटू- कौन-कौन से?
चिंटू- एक ईमेल और दूसरा फीमेल, एक मिनट में इधर की बात उधर पहुंचा देती हैं।
पत्नी- मैं अपने पुराने कपड़े दान कर दूं क्या ?
पति- नहीं फेंक दे, क्या दान करना. .
पत्नी- नहीं जी, दुनिया में बहुत सी गरीब और भूखी प्यासी औरते हैं, किसी के काम आ जाएंगे. .
बाप- बेटा तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते. . ?
बेटा- बंदा दो ही वजह से कुछ करता एक है डर और दूसरा है शौक. .
अब बेटा डर के मारे कोने में बैठकर चुपचाप पढ़ रहा है।
बच्चा- मम्मी क्या मैं भगवान की तरह दिखता हूं?
मम्मी- नहीं , पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा?
सब यही कहते हैं हे भगवान फिर आ गया।
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Latest Jokes: आजकल की भागभागम भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग काम के बढ़ते दबाव की वजह से उदास रहने लगे। इसकी वजह से लोग चिड़चिड़ेपन और अनिद्रा जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं। हम सभी को इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सुबह और शाम हंसने की आदत डाल लेनी चाहिए। अगर हम हंसते रहते हैं, तो मानसिक तनाव से होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। इसीलिए हम आपको हंसाने के लिए कुछ चुटकुले लेकर आए हैं जिन्हें पढ़ने के बाद आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। सोनू का पांव केले के छिलके पर पड़ा और वो फिसल कर गिर गया. . . ! सोनू उठा और फिर आगे चला, तो दूसरे छिलके में पांव पड़ा और फिर फिसल कर गिर गया. . . ! सोनू फिर उठा और थोड़ा आगे और चला, तो उसे तीसरा छिलका दिख गया. . . ! सोनू रोते- रोते बोला - धत तेरे की, अब फिर से फिसलना पड़ेगा. . . ! चिंटू- दुनिया में दो तरह के नेटवर्क ही सबसे तेज हैं। मिंटू- कौन-कौन से? चिंटू- एक ईमेल और दूसरा फीमेल, एक मिनट में इधर की बात उधर पहुंचा देती हैं। पत्नी- मैं अपने पुराने कपड़े दान कर दूं क्या ? पति- नहीं फेंक दे, क्या दान करना. . पत्नी- नहीं जी, दुनिया में बहुत सी गरीब और भूखी प्यासी औरते हैं, किसी के काम आ जाएंगे. . बाप- बेटा तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते. . ? बेटा- बंदा दो ही वजह से कुछ करता एक है डर और दूसरा है शौक. . अब बेटा डर के मारे कोने में बैठकर चुपचाप पढ़ रहा है। बच्चा- मम्मी क्या मैं भगवान की तरह दिखता हूं? मम्मी- नहीं , पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा? सब यही कहते हैं हे भगवान फिर आ गया।
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मुंबई एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने फर्स्ट ऑफिसर्स को पायलट-इन-कमांड को 'सर' के रूप में नहीं, बल्कि उनके पहले नाम से या केवल "कैप्टन" के रूप में संबोधित करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में ऑपरेशन सर्कुलर शुक्रवार को जारी किया गया। सर्कुलर में अक्टूबर 2018 में त्रिची दुर्घटना का उल्लेख किया गया है। इस दुर्घटना में एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान ने पीछे की तरफ से जमीन पर टकरा गया था। दुबई के लिए उड़ान भरने से पहले इस प्लेन ने एयरपोर्ट की चारदीवारी को भी तोड़ दिया था।
एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की तरफ से पिछले महीने इस दुर्घटना की फाइनल जांच रिपोर्ट जारी की गई थी। इसके अनुसार, ट्रिगर टेक ऑफ रोल के दौरान कमांडर की सीट का अचानक और अप्रत्याशित रूप से झुकना था। जैसे ही सीट झुकी, कमांडर ने अनजाने में थ्रस्ट लीवर को वापस खींच लिया। इससे इंजनों की पॉवर कम हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पायलटों ने फॉल इन थ्रस्ट रिकॉर्ड नहीं किया। इसके बदले सुधारात्मक कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह चालक दल के बीच कोऑर्डिनेशन की कमी और कम्युनिकेशन का फेल होना रहा।
केरल एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे के चलते हुआ प्लेन क्रैश, समझें पूरी वजह एयर सेफ्टी एक्सपर्ट कैप्टन अमित सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में, किसी सीनियर को उसके पहले नाम से बुलाना आम तौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसे संगठनों में। एक 55 वर्षीय पूर्व-इंडियान एयरफोर्स का कमांडर यह पसंद नहीं करेगा कि एक 25 वर्षीय सह-पायलट उसे उसके पहले नाम से बुलाए। यह एक बड़ा बदलाव है लेकिन PIC को 'कैप्टन' कहना कारगर होगा। इसके लिए पूरे ऑर्गनाइजेशन के कल्चर को बदलना होगा।
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मुंबई एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने फर्स्ट ऑफिसर्स को पायलट-इन-कमांड को 'सर' के रूप में नहीं, बल्कि उनके पहले नाम से या केवल "कैप्टन" के रूप में संबोधित करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में ऑपरेशन सर्कुलर शुक्रवार को जारी किया गया। सर्कुलर में अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह में त्रिची दुर्घटना का उल्लेख किया गया है। इस दुर्घटना में एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान ने पीछे की तरफ से जमीन पर टकरा गया था। दुबई के लिए उड़ान भरने से पहले इस प्लेन ने एयरपोर्ट की चारदीवारी को भी तोड़ दिया था। एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की तरफ से पिछले महीने इस दुर्घटना की फाइनल जांच रिपोर्ट जारी की गई थी। इसके अनुसार, ट्रिगर टेक ऑफ रोल के दौरान कमांडर की सीट का अचानक और अप्रत्याशित रूप से झुकना था। जैसे ही सीट झुकी, कमांडर ने अनजाने में थ्रस्ट लीवर को वापस खींच लिया। इससे इंजनों की पॉवर कम हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पायलटों ने फॉल इन थ्रस्ट रिकॉर्ड नहीं किया। इसके बदले सुधारात्मक कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह चालक दल के बीच कोऑर्डिनेशन की कमी और कम्युनिकेशन का फेल होना रहा। केरल एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे के चलते हुआ प्लेन क्रैश, समझें पूरी वजह एयर सेफ्टी एक्सपर्ट कैप्टन अमित सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में, किसी सीनियर को उसके पहले नाम से बुलाना आम तौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसे संगठनों में। एक पचपन वर्षीय पूर्व-इंडियान एयरफोर्स का कमांडर यह पसंद नहीं करेगा कि एक पच्चीस वर्षीय सह-पायलट उसे उसके पहले नाम से बुलाए। यह एक बड़ा बदलाव है लेकिन PIC को 'कैप्टन' कहना कारगर होगा। इसके लिए पूरे ऑर्गनाइजेशन के कल्चर को बदलना होगा।
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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव जय शाह यह साफ कर दिया है कि टीम इंडिया पाकिस्तान में जाकर एशिया कप में हिस्सा नहीं लेगी। इस बयान के सामने आने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज रजा को मिर्ची लगी और उन्होंने भारत में होने वाले 2023 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की धमकी दे डाली। अब पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर ने इसी बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज ने अपने बयान से काफी सुर्खियां बटोरी है। अलग अलग मंच पर वह अपनी भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की बात को दोहरा रहे हैं। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा, अगर भारतीय टीम पाकिस्तान में एशिया कप खेलने नहीं आती है तो उनकी टीम भी भारत में अगले साल होने वाले आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप में खेलने नहीं जाएगी। जब पाकिस्तान की टीम विश्व कप में नहीं खेलने जाएगी तो फिर देखते हैं कौन टूर्नामेंट को देखता है।
पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। खुलकर दिल की बात रखने वाले गंभीर ने ANI से कहा, यह फैसला बीसीसीआई और पीसीबी को मिलकर लेना है। वो जो भी फैसला लेंगे, उसे वो आपस में साथ मिलकर ही लेंगे।
भारत के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी रमीज के बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, सही वक्त का इंतजार कीजिए, भारत विश्व क्रिकेट में एक बड़ी शक्ति है और कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की गलती नहीं कर सकता।
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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव जय शाह यह साफ कर दिया है कि टीम इंडिया पाकिस्तान में जाकर एशिया कप में हिस्सा नहीं लेगी। इस बयान के सामने आने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ रमीज रजा को मिर्ची लगी और उन्होंने भारत में होने वाले दो हज़ार तेईस वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की धमकी दे डाली। अब पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर ने इसी बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज ने अपने बयान से काफी सुर्खियां बटोरी है। अलग अलग मंच पर वह अपनी भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की बात को दोहरा रहे हैं। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा, अगर भारतीय टीम पाकिस्तान में एशिया कप खेलने नहीं आती है तो उनकी टीम भी भारत में अगले साल होने वाले आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप में खेलने नहीं जाएगी। जब पाकिस्तान की टीम विश्व कप में नहीं खेलने जाएगी तो फिर देखते हैं कौन टूर्नामेंट को देखता है। पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर ने इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। खुलकर दिल की बात रखने वाले गंभीर ने ANI से कहा, यह फैसला बीसीसीआई और पीसीबी को मिलकर लेना है। वो जो भी फैसला लेंगे, उसे वो आपस में साथ मिलकर ही लेंगे। भारत के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी रमीज के बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, सही वक्त का इंतजार कीजिए, भारत विश्व क्रिकेट में एक बड़ी शक्ति है और कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की गलती नहीं कर सकता।
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रेवाड़ी, 3 नवंबर (निस)
घर के ताले तोड़कर 8 लाख रुपये की नकदी चुराने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उनसे 1.65 लाख रुपये बरामद किए हैं। उनकी पहचान जिला भरतपुर राजस्थान निवासी राजू व गुरुग्राम के पथरेड़ी निवासी वीरबहादुर उर्फ कुल्हाड़ के रूप में हुई है। बुधवार को उन्हें अदालत में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। बावल के आनंद नगर वार्ड-13 निवासी नवीन ने बावल पुलिस को शिकायत में घर से लाखों की चोरी होने की सूचना दी थी।
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रेवाड़ी, तीन नवंबर घर के ताले तोड़कर आठ लाख रुपये की नकदी चुराने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उनसे एक.पैंसठ लाख रुपये बरामद किए हैं। उनकी पहचान जिला भरतपुर राजस्थान निवासी राजू व गुरुग्राम के पथरेड़ी निवासी वीरबहादुर उर्फ कुल्हाड़ के रूप में हुई है। बुधवार को उन्हें अदालत में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। बावल के आनंद नगर वार्ड-तेरह निवासी नवीन ने बावल पुलिस को शिकायत में घर से लाखों की चोरी होने की सूचना दी थी।
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बॉलीवुड हीरोइन - भारत पाकिस्तान की लड़ाई और आतंकाद से जुड़ी बातें तो आप हमेशा सुनते ही होंगे लेेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार पाकिस्तान ने कश्मीर के बदले क्या मांगा था, सुनकर शायद आपको यकीन न हो, मगर ये सच है.
जी हां, हमारे पड़ोसी मुल्क ने कश्मीर के बदले बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दिक्षित की मांग की थी.
बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित की गिनती बॉलीवुड की सबसे सुंदर और सफल अभिनेत्रियों में होती है. उनकी मुस्कान पर आज भी लाखों फिदा हो जाते हैं, इस उम्र में भी माधुरी के चेहरे की चमक और सुंदरता कम हीं हुई है.
आज हम आपको बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं.
नब्बे के दशक में माधुरी दीक्षित की लोकप्रियता अपने चरम पर थीं. माधुरी को चाहने वाले भारत में ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी थे. ये किस्सा भारत और पाकिस्तान की लड़ाई के समय का है. माधुरी दीक्षित से जुड़ा एक किस्सा मीडिया में काफी फेमस है कि भारत और पाकिस्तान के युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से कहा गया था कि हम कश्मीर छोड़ देंगे, अगर तुम हमें माधुरी दीक्षित को दे दो.
आपको ये सुनकर हंसी आ रही होगी, मगर ये बात सच है. इस बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि माधुरी कितनी पॉप्युलर थीं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के समय बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित के किसी पाकिस्तानी फैन ने यह बात कही थी.
एक ऐसी ही एक और दिलचस्प घटना माधुरी दीक्षित के साथ जुड़ी हुई है. बताया जाता है कि माधुरी के एक फैन ने भारत सरकार से यह मांग की थी कि माधुरी के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए.
माधुरी दीक्षित का बॉलीवुड डेब्यू साल 1984 में आई फिल्म 'अबोध' से हुआ था.
हिरेन नाग के निर्देशन में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी. 'अबोध' के बाद माधुरी की कुछ और फिल्में आईं, जो असफल रहीं. साल 1988 में आई फिल्म 'तेजाब' से माधुरी ने पहली बार बॉलीवुड में सफलता का स्वाद चखा. एन. चन्द्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में माधुरी के अपोजिट लीड रोल में अनिल कपूर थे. 'तेजाब' से माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी इतनी सुपरहिट हुई कि आगे चलकर इन दोनों ने तकरीबन 20 और फिल्मों में साथ काम किया. तेजाब, त्रिदेव, राम-लखन, हम आपके हैं कौन, हम तुम्हारे हैं सनम, दिल तो पागल है, देवदास, बेटा, दिल, राजा, और लज्जा जैसी बहुत सी फिल्में हैं, जिनमें काम करके माधुरी दीक्षित बहुत लोकप्रिय हुईं.
माधुरी दीक्षित बेहतरीन अभिनेत्री होने के साथ ही गजब की डांसर भी हैं और आज भी वो बेहतरीन डांस कर लेती हैं. उन्हें बचपन से ही डांस का शौक था, लेकिन बचपन में वो एक्ट्रेस नहीं डॉक्टर बनना चाहती. माधुरी भले ही डॉक्टर नहीं बन पाई हों, लेकिन शादी उन्होंने एक डॉट्कर से की. उनके पति डॉक्टर नेने अमेरिका में डॉक्टर हैं. माधुरी के दो बेटे हैं.
बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित जिस मुकाम तक पहुंची वहां कम ही अभनेत्रियां पहुंच पाती हैं. आज के दौर में उनकी टक्कर की शायद ही कोई अभिनेत्री होगी. माधुरी को ऑल राउंडर कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि वो जितनी सुंदर है उतनी ही अच्छी एक्ट्रेस और डांसर भी हैं.
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बॉलीवुड हीरोइन - भारत पाकिस्तान की लड़ाई और आतंकाद से जुड़ी बातें तो आप हमेशा सुनते ही होंगे लेेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार पाकिस्तान ने कश्मीर के बदले क्या मांगा था, सुनकर शायद आपको यकीन न हो, मगर ये सच है. जी हां, हमारे पड़ोसी मुल्क ने कश्मीर के बदले बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दिक्षित की मांग की थी. बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित की गिनती बॉलीवुड की सबसे सुंदर और सफल अभिनेत्रियों में होती है. उनकी मुस्कान पर आज भी लाखों फिदा हो जाते हैं, इस उम्र में भी माधुरी के चेहरे की चमक और सुंदरता कम हीं हुई है. आज हम आपको बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. नब्बे के दशक में माधुरी दीक्षित की लोकप्रियता अपने चरम पर थीं. माधुरी को चाहने वाले भारत में ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी थे. ये किस्सा भारत और पाकिस्तान की लड़ाई के समय का है. माधुरी दीक्षित से जुड़ा एक किस्सा मीडिया में काफी फेमस है कि भारत और पाकिस्तान के युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से कहा गया था कि हम कश्मीर छोड़ देंगे, अगर तुम हमें माधुरी दीक्षित को दे दो. आपको ये सुनकर हंसी आ रही होगी, मगर ये बात सच है. इस बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि माधुरी कितनी पॉप्युलर थीं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के समय बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित के किसी पाकिस्तानी फैन ने यह बात कही थी. एक ऐसी ही एक और दिलचस्प घटना माधुरी दीक्षित के साथ जुड़ी हुई है. बताया जाता है कि माधुरी के एक फैन ने भारत सरकार से यह मांग की थी कि माधुरी के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए. माधुरी दीक्षित का बॉलीवुड डेब्यू साल एक हज़ार नौ सौ चौरासी में आई फिल्म 'अबोध' से हुआ था. हिरेन नाग के निर्देशन में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी. 'अबोध' के बाद माधुरी की कुछ और फिल्में आईं, जो असफल रहीं. साल एक हज़ार नौ सौ अठासी में आई फिल्म 'तेजाब' से माधुरी ने पहली बार बॉलीवुड में सफलता का स्वाद चखा. एन. चन्द्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में माधुरी के अपोजिट लीड रोल में अनिल कपूर थे. 'तेजाब' से माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी इतनी सुपरहिट हुई कि आगे चलकर इन दोनों ने तकरीबन बीस और फिल्मों में साथ काम किया. तेजाब, त्रिदेव, राम-लखन, हम आपके हैं कौन, हम तुम्हारे हैं सनम, दिल तो पागल है, देवदास, बेटा, दिल, राजा, और लज्जा जैसी बहुत सी फिल्में हैं, जिनमें काम करके माधुरी दीक्षित बहुत लोकप्रिय हुईं. माधुरी दीक्षित बेहतरीन अभिनेत्री होने के साथ ही गजब की डांसर भी हैं और आज भी वो बेहतरीन डांस कर लेती हैं. उन्हें बचपन से ही डांस का शौक था, लेकिन बचपन में वो एक्ट्रेस नहीं डॉक्टर बनना चाहती. माधुरी भले ही डॉक्टर नहीं बन पाई हों, लेकिन शादी उन्होंने एक डॉट्कर से की. उनके पति डॉक्टर नेने अमेरिका में डॉक्टर हैं. माधुरी के दो बेटे हैं. बॉलीवुड हीरोइन माधुरी दीक्षित जिस मुकाम तक पहुंची वहां कम ही अभनेत्रियां पहुंच पाती हैं. आज के दौर में उनकी टक्कर की शायद ही कोई अभिनेत्री होगी. माधुरी को ऑल राउंडर कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि वो जितनी सुंदर है उतनी ही अच्छी एक्ट्रेस और डांसर भी हैं.
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फर्रुखाबाद। धनतेरस पर मंगलवार को बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से शाम तक किराना, इलेक्ट्रानिक्स, बर्तन, सराफा, डेकोरोशन सामग्री और वाहन के शोरूम समेत सभी दुकानों में जमकर खरीदारी हुई। देर रात तक 50 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ।
शहर में लोहाई रोड स्थित बर्तन का बाजार में सबसे ज्यादा रौकन रही। यहां दुकानें फुटपाथ तक सजाई गईं। दोपहर से दूरदराज गांवों के लोग पहुंचे लगे। शहर के लोग शाम को निकले। सर्राफा बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री चांदी के सिक्कों की हुई। नौकरपेशा लोगों ने जेवरात भी खरीदे। भीड़ की वजह से कई बार जाम भी लगा। पुलिस के पुख्ता प्रबंध के चलते तुरंत ही जाम को खुलवा दिया गया। बढ़पुर स्थित एक एजेंसी पर करीब 200 और दूसरी पर करीब 350 बाइकों की बिक्री होना बताया गया। अन्य एजेंसियों पर भी देर रात तक ग्राहकों को चाबियां सौंपने सिलसिला चलता रहा। कमालगंज, कायमगंज, मोहम्मदाबाद, अमृतपुर, नवाबगंज समेत करीब 1500 दोपहिया वाहनों की बिक्री का अनुमान है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी शुभ माना गया है। इससे फूल की झाड़ूू और नारियल की भी खूब खरीदारी की गई। दिवाली पूजन के लिए अन्य सामान भी खरीदा।
कायमगंज संवाद के अनुसार धनतेरस पर सुबह से देर रात बाजार गुलजार रहे। महंगाई के बावजूद जमकर खरीदारी हुई। लोगों ने सोने-चांदी के जेवर, बर्तन, और सिक्के खरीदे। गणेश-लक्ष्मी की और कुबेर की मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक रहे। बाईपास रोड स्थित ऑटो बाजार में भी भीड़ रही। खील और खिलौनों से भी खूब बिक्री हुई। भीड़ को देखते हुए बाजार में बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था।
कमालगंज संवाद के अनुसार बारिश व बाढ़ के प्रकोप से फसल चौपट होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक तंगी का असर धनतेरस बाजार पर भी छाया रहा। उस पर बर्तनों की 40 प्रतिशत तक महंगाई देख ग्राहक दंग रह गए। पिछले साल 10 रुपये में मिला स्टील का गिलास 15 व 50 वाली थाली 80 रुपये में थी। पीतल व तांबे के बर्तनों में भी 150 से 200 रुपये किलो महंगाई रही। बर्तन व्यापारी गौरव गुप्ता का कहना है कि गत वर्षों की अपेक्षा 35 से 40 प्रतिशत ही बर्तनों की बिक्री हुई। व्यापारी सुमित पालीवाल ने कहा कि ग्राहकों का कहना था कि इस बार बीमारी में भी बहुत पैसा चला गया। इसलिए किसी ने कटोरी व तश्तरी से ही काम चलाया। स्टील, पीतल के बर्तनों का भाव बढ़ने से भी लोगों ने छोटे व हल्के बर्तन खरीदे।
फर्रुखाबाद। ज्योतिषाचार्य योगीराज दवे ने बताया कि बुधवार को नरक चौदस है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरका सुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी पर इसका नाम नरक चौदस पड़ा। गुरुवार को दिवाली पूजन होगा। कारोबारियों के लिए सुबह 7:07 से 9:22 बजे तक और दोपहर 1:10 से 2:45 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। घरों पर शाम 5:52 बजे से रात 8:38 बजे तक पूजन कर सकते हैं। दिन रात्रि में श्री सूक्त का पाठ कर हवन-पूजन श्रेष्ठ रहता है। मां लक्ष्मी को कमल गट्टा जरूर चढ़ाएं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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फर्रुखाबाद। धनतेरस पर मंगलवार को बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से शाम तक किराना, इलेक्ट्रानिक्स, बर्तन, सराफा, डेकोरोशन सामग्री और वाहन के शोरूम समेत सभी दुकानों में जमकर खरीदारी हुई। देर रात तक पचास करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। शहर में लोहाई रोड स्थित बर्तन का बाजार में सबसे ज्यादा रौकन रही। यहां दुकानें फुटपाथ तक सजाई गईं। दोपहर से दूरदराज गांवों के लोग पहुंचे लगे। शहर के लोग शाम को निकले। सर्राफा बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री चांदी के सिक्कों की हुई। नौकरपेशा लोगों ने जेवरात भी खरीदे। भीड़ की वजह से कई बार जाम भी लगा। पुलिस के पुख्ता प्रबंध के चलते तुरंत ही जाम को खुलवा दिया गया। बढ़पुर स्थित एक एजेंसी पर करीब दो सौ और दूसरी पर करीब तीन सौ पचास बाइकों की बिक्री होना बताया गया। अन्य एजेंसियों पर भी देर रात तक ग्राहकों को चाबियां सौंपने सिलसिला चलता रहा। कमालगंज, कायमगंज, मोहम्मदाबाद, अमृतपुर, नवाबगंज समेत करीब एक हज़ार पाँच सौ दोपहिया वाहनों की बिक्री का अनुमान है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी शुभ माना गया है। इससे फूल की झाड़ूू और नारियल की भी खूब खरीदारी की गई। दिवाली पूजन के लिए अन्य सामान भी खरीदा। कायमगंज संवाद के अनुसार धनतेरस पर सुबह से देर रात बाजार गुलजार रहे। महंगाई के बावजूद जमकर खरीदारी हुई। लोगों ने सोने-चांदी के जेवर, बर्तन, और सिक्के खरीदे। गणेश-लक्ष्मी की और कुबेर की मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक रहे। बाईपास रोड स्थित ऑटो बाजार में भी भीड़ रही। खील और खिलौनों से भी खूब बिक्री हुई। भीड़ को देखते हुए बाजार में बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। कमालगंज संवाद के अनुसार बारिश व बाढ़ के प्रकोप से फसल चौपट होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक तंगी का असर धनतेरस बाजार पर भी छाया रहा। उस पर बर्तनों की चालीस प्रतिशत तक महंगाई देख ग्राहक दंग रह गए। पिछले साल दस रुपयापये में मिला स्टील का गिलास पंद्रह व पचास वाली थाली अस्सी रुपयापये में थी। पीतल व तांबे के बर्तनों में भी एक सौ पचास से दो सौ रुपयापये किलो महंगाई रही। बर्तन व्यापारी गौरव गुप्ता का कहना है कि गत वर्षों की अपेक्षा पैंतीस से चालीस प्रतिशत ही बर्तनों की बिक्री हुई। व्यापारी सुमित पालीवाल ने कहा कि ग्राहकों का कहना था कि इस बार बीमारी में भी बहुत पैसा चला गया। इसलिए किसी ने कटोरी व तश्तरी से ही काम चलाया। स्टील, पीतल के बर्तनों का भाव बढ़ने से भी लोगों ने छोटे व हल्के बर्तन खरीदे। फर्रुखाबाद। ज्योतिषाचार्य योगीराज दवे ने बताया कि बुधवार को नरक चौदस है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरका सुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी पर इसका नाम नरक चौदस पड़ा। गुरुवार को दिवाली पूजन होगा। कारोबारियों के लिए सुबह सात:सात से नौ:बाईस बजे तक और दोपहर एक:दस से दो:पैंतालीस बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। घरों पर शाम पाँच:बावन बजे से रात आठ:अड़तीस बजे तक पूजन कर सकते हैं। दिन रात्रि में श्री सूक्त का पाठ कर हवन-पूजन श्रेष्ठ रहता है। मां लक्ष्मी को कमल गट्टा जरूर चढ़ाएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो 19 नवंबर से कुछ राशियों की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे उन राशियों के लोगों का मंगल ही मंगल हो सकता हैं तथा उनके दैनिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आ सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के लोगों के जीवन में मंगलकारी संयोग के प्रभाव से मंगल ही मंगल हो सकता हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से।
मेष और मिथुन राशि, 19 नवंबर से मेष और मिथुन राशि की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकता हैं। इस राशि के जातक एक सफल जीवन एन्जॉय कर सकते हैं। इनके जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इनके दैनिक जीवन में अच्छे दिन आ सकते हैं। इस राशि के जातक को चारों ओर से खुशियां मिल सकती हैं। हनुमान जी की आराधना करना इनके लिए शुभ रहेगा।
वृश्चिक और तुला राशि, शास्त्रों के अनुसार 19 नवंबर से मंगलकारी संयोग बन रहा हैं। जिससे वृश्चिक और तुला राशि की जिंदगी संवर सकती हैं। इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकते हैं। इन्हे हर कार्य में तरक्की मिल सकती हैं। बिजनेस व्यापार में अपार सफलता प्राप्त हो सकता हैं। बुद्धि और विवेक में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं। इस राशि के जातक एक कामयाब जीवन जी सकते हैं। इन्हे मेहनत का फल मिल सकता हैं। हनुमान जी की उपासना करना इनके लिए उत्तम रहेगा।
धनु और मकर राशि, 19 नवंबर से धनु और मकर राशि की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकते हैं। इनकी जिंदगी अचानक से संवर सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। इस राशि के जातक एक सफल जीवन सेलिब्रेट कर सकते हैं। इनके घरों में खुशियों की दस्तक हो सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। प्यार और पैसों में इन्हे तरक्की मिल सकती हैं। आप हनुमान जी को याद करें।
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डेस्कः शास्त्रों की बात करें तो उन्नीस नवंबर से कुछ राशियों की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे उन राशियों के लोगों का मंगल ही मंगल हो सकता हैं तथा उनके दैनिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आ सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के लोगों के जीवन में मंगलकारी संयोग के प्रभाव से मंगल ही मंगल हो सकता हैं। तो आइये जानते हैं विस्तार से। मेष और मिथुन राशि, उन्नीस नवंबर से मेष और मिथुन राशि की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकता हैं। इस राशि के जातक एक सफल जीवन एन्जॉय कर सकते हैं। इनके जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इनके दैनिक जीवन में अच्छे दिन आ सकते हैं। इस राशि के जातक को चारों ओर से खुशियां मिल सकती हैं। हनुमान जी की आराधना करना इनके लिए शुभ रहेगा। वृश्चिक और तुला राशि, शास्त्रों के अनुसार उन्नीस नवंबर से मंगलकारी संयोग बन रहा हैं। जिससे वृश्चिक और तुला राशि की जिंदगी संवर सकती हैं। इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकते हैं। इन्हे हर कार्य में तरक्की मिल सकती हैं। बिजनेस व्यापार में अपार सफलता प्राप्त हो सकता हैं। बुद्धि और विवेक में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं। इस राशि के जातक एक कामयाब जीवन जी सकते हैं। इन्हे मेहनत का फल मिल सकता हैं। हनुमान जी की उपासना करना इनके लिए उत्तम रहेगा। धनु और मकर राशि, उन्नीस नवंबर से धनु और मकर राशि की कुंडली में मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा हैं। जिससे इनके जीवन में मंगल ही मंगल हो सकते हैं। इनकी जिंदगी अचानक से संवर सकती हैं। इनके धन दौलत में वृद्धि हो सकती हैं। इस राशि के जातक एक सफल जीवन सेलिब्रेट कर सकते हैं। इनके घरों में खुशियों की दस्तक हो सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। प्यार और पैसों में इन्हे तरक्की मिल सकती हैं। आप हनुमान जी को याद करें।
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(literary dialect) लिखने वालों की वास्तविक बोली से निरपेक्ष होकर आलेख के लिए मुस्थापित तथा अपरिहार्य बन सकती है।
समय के साथ ही वह रुढवादिता अन्य दिशा में भी काम करती है । भाषण रूप में भाषाई परिवर्तन हो जाने पर भी लेखन परम्परा अपरिवर्तित बनी रहती है। उदाहरण के लिए लैटिन लेखन मे C वर्ण ( 1 ) स्वनिम का बोध कराता था । जव आयरिश और अंग्रेजी लिखने वालों ने लैटिन वर्णमाला अपनाई तो वे इस प्रतीक का प्रयोग अपने (b) "स्वनिमो" के लिए करने लगे । प्राचीन अंग्रेजी मे cu ( hu :) 'गाय' की "cinn (kinn)
की वर्तनी थी । वाद मे लैटिन की अनेक बोलियो मे स्वनिम K मे विशेष परिवर्तन हुए । इटली मे अग्रस्वरी के पूर्व ( 1 ), (t ) बन गया। उदाहरण के लिए लैटिन / ('kentum) "सी" इटैलियन मे (t / ento ) वन गया । रोमन लोग इसे centum लिखते थे । इटैलियन अभी भी cento लिखते हे । फॉर्म मे अग्रस्वर के पूर्व लैटिन ( 1 ), (s ) , बन जाता था यथा (sā ) "सो" मे, ) किन्तु फ्रेंच में आज भी cent लिखा जाता है । अग्रेजी मे (s ) उच्चारण के साथ विदेशी शब्द फ्रेंच ने लिए गए है किन्तु साथ ही परस्परागत वर्तनी मे (c) के साथ यथा cent ( sent ) भी । लैटिन मे वर्ण A, E, I, O, U का प्रयोग स्वनिमात्मक ( a, c, 1, o, u) प्रतिरूप के लिए हुआ था तथा वे अग्रेजी मे इसी प्रतिमान के साथ ले लिए गए थे । इस प्रकार मध्यकालीन अंग्रेजी लेखन मे लेख name से ( na:me ) "नाम" का बोध होता था । 15वी शती मे अंग्रेजी वर्तनी परम्परागत रूप में स्थिर हो गई । फिर भी, तभी से अंग्रेजी के स्वर स्वनिमो में बहुत परिवर्तन हुआ है । परिणाम यह हुआ है कि अंग्रेजी मे लैटिन में स्वर वर्णों का प्रयोग बिल्कुल नए मूल्य के साथ नहीं करते है यद्यपि इसमे कुछ क्षति नहीं होगी - बल्कि असम्बद्ध ढग से करते है । अंग्रेजी मे वर्ण A का प्रयोग name, hat, all, far लेखो मे होता जा रहा है । यद्यपि अब इन शब्दों में विरकुल ही भिन्न आक्षरिक स्वनिम प्रयुक्त होते हैं। वे ध्वनियाँ जो अंग्रेजी वर्तनी मे स्वाभाविक बनते समय तक उपस्थित थी, किन्तु भाषाई परिवर्तन के कारण लुप्त हो गई है, अब भी अंग्रेजी मे म्क वर्णों द्वारा लिखी जाती हैं यथा name, know, gnat bought, would मे ।
यदि एक बार वर्तनी व्यवस्था, उच्चारित ध्वनियो के सबन्ध में पुरानी
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लिखने वालों की वास्तविक बोली से निरपेक्ष होकर आलेख के लिए मुस्थापित तथा अपरिहार्य बन सकती है। समय के साथ ही वह रुढवादिता अन्य दिशा में भी काम करती है । भाषण रूप में भाषाई परिवर्तन हो जाने पर भी लेखन परम्परा अपरिवर्तित बनी रहती है। उदाहरण के लिए लैटिन लेखन मे C वर्ण स्वनिम का बोध कराता था । जव आयरिश और अंग्रेजी लिखने वालों ने लैटिन वर्णमाला अपनाई तो वे इस प्रतीक का प्रयोग अपने "स्वनिमो" के लिए करने लगे । प्राचीन अंग्रेजी मे cu 'गाय' की "cinn की वर्तनी थी । वाद मे लैटिन की अनेक बोलियो मे स्वनिम K मे विशेष परिवर्तन हुए । इटली मे अग्रस्वरी के पूर्व , बन गया। उदाहरण के लिए लैटिन / "सी" इटैलियन मे वन गया । रोमन लोग इसे centum लिखते थे । इटैलियन अभी भी cento लिखते हे । फॉर्म मे अग्रस्वर के पूर्व लैटिन , , बन जाता था यथा "सो" मे, ) किन्तु फ्रेंच में आज भी cent लिखा जाता है । अग्रेजी मे उच्चारण के साथ विदेशी शब्द फ्रेंच ने लिए गए है किन्तु साथ ही परस्परागत वर्तनी मे के साथ यथा cent भी । लैटिन मे वर्ण A, E, I, O, U का प्रयोग स्वनिमात्मक प्रतिरूप के लिए हुआ था तथा वे अग्रेजी मे इसी प्रतिमान के साथ ले लिए गए थे । इस प्रकार मध्यकालीन अंग्रेजी लेखन मे लेख name से "नाम" का बोध होता था । पंद्रहवी शती मे अंग्रेजी वर्तनी परम्परागत रूप में स्थिर हो गई । फिर भी, तभी से अंग्रेजी के स्वर स्वनिमो में बहुत परिवर्तन हुआ है । परिणाम यह हुआ है कि अंग्रेजी मे लैटिन में स्वर वर्णों का प्रयोग बिल्कुल नए मूल्य के साथ नहीं करते है यद्यपि इसमे कुछ क्षति नहीं होगी - बल्कि असम्बद्ध ढग से करते है । अंग्रेजी मे वर्ण A का प्रयोग name, hat, all, far लेखो मे होता जा रहा है । यद्यपि अब इन शब्दों में विरकुल ही भिन्न आक्षरिक स्वनिम प्रयुक्त होते हैं। वे ध्वनियाँ जो अंग्रेजी वर्तनी मे स्वाभाविक बनते समय तक उपस्थित थी, किन्तु भाषाई परिवर्तन के कारण लुप्त हो गई है, अब भी अंग्रेजी मे म्क वर्णों द्वारा लिखी जाती हैं यथा name, know, gnat bought, would मे । यदि एक बार वर्तनी व्यवस्था, उच्चारित ध्वनियो के सबन्ध में पुरानी
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अमृतसर। पंजाब के बठिंडा की रहने वाली 12वीं क्लास की छात्रा की किस्मत ऐसी चमकी कि वो रातों रात करोड़पति बन गई। दरअसल, बठिंडा के एक गांव की रहने वाली 12वीं की छात्रा लखविंदर कौर ने पंजाब सरकार द्वारा आयोजित करवाई गई दिवाली बंपर लॉटरी के 200 रुपये के एक लॉटरी टिकट से डेढ़ करोड़ रुपये का बंपर इनाम जीता है लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है।
लखविंदर बताती हैं कि, 'मैं अपनी मां के साथ दिवाली से एक दिन पहले खरीदारी करने के लिए बाजार गई थी और मैंने देखा कि एक स्टॉल पर खड़े होकर बहुत सारे लोग लॉटरी टिकट खरीद रहे थे। मैंने भी अपनी मां को कहा कि हमें भी लॉटरी टिकट खरीदनी चाहिए क्योंकि सिर्फ 200 रुपये की ही तो बात है। ' इसके बाद उन्होंने लाटरी की टिकट खरीद ली। बाद में इसी लॉटरी के टिकट से उनकी डेढ़ करोड़ की लॉटरी लग गई।
लखविंदर कहती हैं कि वह लॉटरी के पैसों से सबसे पहले जमीन खरीदकर एक अच्छा घर बनवाएंगी और उसके बाद शहर जाकर पढ़ाई करेंगी। वह बैंक अफसर बनना चाहती हैं।
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अमृतसर। पंजाब के बठिंडा की रहने वाली बारहवीं क्लास की छात्रा की किस्मत ऐसी चमकी कि वो रातों रात करोड़पति बन गई। दरअसल, बठिंडा के एक गांव की रहने वाली बारहवीं की छात्रा लखविंदर कौर ने पंजाब सरकार द्वारा आयोजित करवाई गई दिवाली बंपर लॉटरी के दो सौ रुपयापये के एक लॉटरी टिकट से डेढ़ करोड़ रुपये का बंपर इनाम जीता है लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। लखविंदर बताती हैं कि, 'मैं अपनी मां के साथ दिवाली से एक दिन पहले खरीदारी करने के लिए बाजार गई थी और मैंने देखा कि एक स्टॉल पर खड़े होकर बहुत सारे लोग लॉटरी टिकट खरीद रहे थे। मैंने भी अपनी मां को कहा कि हमें भी लॉटरी टिकट खरीदनी चाहिए क्योंकि सिर्फ दो सौ रुपयापये की ही तो बात है। ' इसके बाद उन्होंने लाटरी की टिकट खरीद ली। बाद में इसी लॉटरी के टिकट से उनकी डेढ़ करोड़ की लॉटरी लग गई। लखविंदर कहती हैं कि वह लॉटरी के पैसों से सबसे पहले जमीन खरीदकर एक अच्छा घर बनवाएंगी और उसके बाद शहर जाकर पढ़ाई करेंगी। वह बैंक अफसर बनना चाहती हैं।
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प्रशांत किशोर बीते करीब 9 महीनों से बिहार के गांव-गांव घूमकर पदयात्रा कर रहे हैं. फिलहाल वह समस्तीपुर में अपनी यात्रा को लेकर भ्रमण कर रहे हैं. इस दौरान वह राजनेताओं और पार्टियों पर खूब जमकर निशाना साधते हुए लोगों को सही प्रतिनिधि चुनने की निवेदन भी कर रहे हैं. इसी कड़ी में इन्होंने गुरुवार (13 जुलाई) को जनता की मूलभूत समस्याओं को लेकर सरकार को खूब जमकर कोसा. प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. जहां बिल्डिंग है वहां शिक्षक नहीं हैं, जहां शिक्षक हैं वहां बिल्डिंग नहीं है. जहां दोनों है वहां शिक्षा नहीं है. मैं 9 महीने से गांव-गांव घूम रहा हूं बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. नीतीश कुमार जैसे पढ़े-लिखे व्यक्ति 17 वर्ष से शासन कर रहे हैं, इनका शासनकाल काले अध्याय के समान है. बिहार में शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हुई है. बिहार में दो पीढ़ियां अब नहीं सुधरेंगी. वे पढ़े-लिखे लोगों की बराबरी नहीं कर सकते हैं. पीके ने बोला कि बिहार में जो शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हुई ह वो समतामूलक शिक्षा नीति बनाने के चक्कर में हुई है.
स्कूलों में पढ़ाई हो रही है या नहीं इसकी सरकार को फिक्र नहीं है.
सरकार ने सिर्फ गांव-गांव में स्कूलों को खोल दिया है. जहां नए विद्यालय नहीं खोले हैं, वहां स्कूलों को उत्क्रमित कर दिया है. बिहार में पूरी शिक्षा बंदोबस्त नियोजित शिक्षकों और उत्क्रमित विद्यालयों के चक्कर में चल रहा है. अंत में प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार में सिर्फ स्कूली शिक्षा ही नहीं कॉलेज की शिक्षा का भी यही हाल है. जिन्हें लगता है कि बिहार में नियोजित शिक्षकों के वजह से शिक्षा बंदोबस्त बदहाल है, उन्हें कॉलेजों को भी देखना चाहिए. इन कॉलेजों को नियोजित शिक्षक तो नहीं चला रहे. कॉलेजों में तो पढ़ाई भी नहीं हो रही. स्कूलों में जहां खिचड़ी बंट रही है तो वहीं कॉलेजों में डिग्री बंट रही है. बता दें कि प्रशांत किशोर 237 दिनों से पदयात्रा कर रहे हैं. बिहार में 2500 किलोमीटर से भी अधिक का सफर तय कर गांव-गांव घूम रहे हैं. गुरुवार को वे सरायरंजन और उजियारपुर के 8 गांवों में गए. इस दौरान कुल 12 किलोमीटर तक का सफर तय किया. ग्रामीण जनता को मतदान की ताकत का एहसास दिलाया.
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प्रशांत किशोर बीते करीब नौ महीनों से बिहार के गांव-गांव घूमकर पदयात्रा कर रहे हैं. फिलहाल वह समस्तीपुर में अपनी यात्रा को लेकर भ्रमण कर रहे हैं. इस दौरान वह राजनेताओं और पार्टियों पर खूब जमकर निशाना साधते हुए लोगों को सही प्रतिनिधि चुनने की निवेदन भी कर रहे हैं. इसी कड़ी में इन्होंने गुरुवार को जनता की मूलभूत समस्याओं को लेकर सरकार को खूब जमकर कोसा. प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. जहां बिल्डिंग है वहां शिक्षक नहीं हैं, जहां शिक्षक हैं वहां बिल्डिंग नहीं है. जहां दोनों है वहां शिक्षा नहीं है. मैं नौ महीने से गांव-गांव घूम रहा हूं बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. नीतीश कुमार जैसे पढ़े-लिखे व्यक्ति सत्रह वर्ष से शासन कर रहे हैं, इनका शासनकाल काले अध्याय के समान है. बिहार में शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हुई है. बिहार में दो पीढ़ियां अब नहीं सुधरेंगी. वे पढ़े-लिखे लोगों की बराबरी नहीं कर सकते हैं. पीके ने बोला कि बिहार में जो शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हुई ह वो समतामूलक शिक्षा नीति बनाने के चक्कर में हुई है. स्कूलों में पढ़ाई हो रही है या नहीं इसकी सरकार को फिक्र नहीं है. सरकार ने सिर्फ गांव-गांव में स्कूलों को खोल दिया है. जहां नए विद्यालय नहीं खोले हैं, वहां स्कूलों को उत्क्रमित कर दिया है. बिहार में पूरी शिक्षा बंदोबस्त नियोजित शिक्षकों और उत्क्रमित विद्यालयों के चक्कर में चल रहा है. अंत में प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार में सिर्फ स्कूली शिक्षा ही नहीं कॉलेज की शिक्षा का भी यही हाल है. जिन्हें लगता है कि बिहार में नियोजित शिक्षकों के वजह से शिक्षा बंदोबस्त बदहाल है, उन्हें कॉलेजों को भी देखना चाहिए. इन कॉलेजों को नियोजित शिक्षक तो नहीं चला रहे. कॉलेजों में तो पढ़ाई भी नहीं हो रही. स्कूलों में जहां खिचड़ी बंट रही है तो वहीं कॉलेजों में डिग्री बंट रही है. बता दें कि प्रशांत किशोर दो सौ सैंतीस दिनों से पदयात्रा कर रहे हैं. बिहार में दो हज़ार पाँच सौ किलोग्राममीटर से भी अधिक का सफर तय कर गांव-गांव घूम रहे हैं. गुरुवार को वे सरायरंजन और उजियारपुर के आठ गांवों में गए. इस दौरान कुल बारह किलोग्राममीटर तक का सफर तय किया. ग्रामीण जनता को मतदान की ताकत का एहसास दिलाया.
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नई दिल्लीः हिन्दुओं की सबसे पवित्र त्योहार शारदीय नवरात्र 2017 कल से यानि 21 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. हिन्दू परंपरा के अनुसार इन 9 दिनों का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि 2017 का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है.
नवरात्रों 2017 में सबसे अहम माता की चौकी होती है. जिसे शुभ मुहूर्त देखकर लगाया जाता है. माता की चौकी लगाना के लिए भक्तों के पास 21 सितंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से लेकर 08 बजकर 22 मिनट तक का समय है.
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हुए उनके लिए व्रत रखा जाता है. अधिकांश लोग पूरे 9 दिन तक व्रत करते हैं, लेकिन 9 दिन तक व्रत रखने के बाद उनकी सेहत पर काफी फर्क पड़ता है.
मेषः मेष राशि के लोग अगर स्कंद माता की पूजा करे तो जल्द ही उनकी सारे सपने पूरे हो सकते हैं.
वृषभः वृषभ राशि के लोग मा दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना करें, इससे उन्हें मनचाहा फल मिलेगा.
मिथुनः मिथुन राशि के लोगों को ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान प्रदाता, विद्या के अवरोध दूर करती हैं.
कर्कः इस राशि के लोगों को शैलपुत्री की आराधना करनी चाहिए.
सिंहः सिंह राशि के लिए मां कूष्मांडा की साधना विशेष फल करने वाली है. दुर्गा मंत्रों का जाप करें.
कन्याः कन्या राशि के लोगों को ब्रह्मचारिणी का पूजन करना चाहिए.
तुलाः इस राशि के लोगों को महागौरी की पूजा-आराधना से विशेष फल प्राप्त होते हैं.
वृश्चिकः वृश्चिक राशि के लोग स्कंदमाता की उपासना करें, इससे उन्हें उचित फल मिलेगा.
धनुः धनु राशि के लोग चंद्रघंटा की उपासना करें.
मकरः मकर राशि के लोगों के लिए कालरात्रि की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है.
कुंभः कुंभ राशि के लोगों कालरात्रि की उपासना करें.
मीनः मीन राशि के लोगों को चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए.
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नई दिल्लीः हिन्दुओं की सबसे पवित्र त्योहार शारदीय नवरात्र दो हज़ार सत्रह कल से यानि इक्कीस सितंबर से शुरू हो रहे हैं. नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. हिन्दू परंपरा के अनुसार इन नौ दिनों का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि दो हज़ार सत्रह का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है. नवरात्रों दो हज़ार सत्रह में सबसे अहम माता की चौकी होती है. जिसे शुभ मुहूर्त देखकर लगाया जाता है. माता की चौकी लगाना के लिए भक्तों के पास इक्कीस सितंबर को सुबह छः बजकर तीन मिनट से लेकर आठ बजकर बाईस मिनट तक का समय है. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हुए उनके लिए व्रत रखा जाता है. अधिकांश लोग पूरे नौ दिन तक व्रत करते हैं, लेकिन नौ दिन तक व्रत रखने के बाद उनकी सेहत पर काफी फर्क पड़ता है. मेषः मेष राशि के लोग अगर स्कंद माता की पूजा करे तो जल्द ही उनकी सारे सपने पूरे हो सकते हैं. वृषभः वृषभ राशि के लोग मा दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना करें, इससे उन्हें मनचाहा फल मिलेगा. मिथुनः मिथुन राशि के लोगों को ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान प्रदाता, विद्या के अवरोध दूर करती हैं. कर्कः इस राशि के लोगों को शैलपुत्री की आराधना करनी चाहिए. सिंहः सिंह राशि के लिए मां कूष्मांडा की साधना विशेष फल करने वाली है. दुर्गा मंत्रों का जाप करें. कन्याः कन्या राशि के लोगों को ब्रह्मचारिणी का पूजन करना चाहिए. तुलाः इस राशि के लोगों को महागौरी की पूजा-आराधना से विशेष फल प्राप्त होते हैं. वृश्चिकः वृश्चिक राशि के लोग स्कंदमाता की उपासना करें, इससे उन्हें उचित फल मिलेगा. धनुः धनु राशि के लोग चंद्रघंटा की उपासना करें. मकरः मकर राशि के लोगों के लिए कालरात्रि की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है. कुंभः कुंभ राशि के लोगों कालरात्रि की उपासना करें. मीनः मीन राशि के लोगों को चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए.
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स्मॉग का ग्राफ खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद डीएम ने कक्षा एक से पांच तक सभी स्कूलों की दो दिन के लिए छुटटी कर दी है। कक्षा छह से 12 तक स्कूल कालेजों के टाइम शेड्यूल में बदलाव किया गया है। ये स्कूल सुबह नौ बजे से एक बजे तक खुलेंगे।
दीवाली की आतिशबाजी और खेतों में जलाए गए पुऑल से निकले धुए के कारण आसमान में धुंध छा गई है। खासतौर पर बुजुर्ग और मासूम बच्चों का सांस लेना दुभर हो गया है। बुजुर्ग और बच्चों के सामने और परेशानी न आए इसलिए डीएम ने कक्षा एक से कक्षा पांच तक सभी स्कूल (सरकारी और गैर सरकारी) दो दिन के लिए बंद कर दिए हैं।
आठ नवंबर के बाद यदि धुंध नहीं छटी तो छुटटी आगे बढ़ाई जा सकती हैं। डीएम ने कक्षा छह से 12 तक के स्कूल कालेजों का टाइम टेबिल बदल दिया है। जब तक धुंध नहीं छंटती तक तक ये स्कूल सुबह नौ बजे खुलेंगे और एक बजे बंद हो जाएंगे।
खेतों में पुआल जलाने पर डीएम सख्त हो गए हैं। डीएम ने रविवार को कृषि विभाग के अफसरों को खूब फटकारा। डीएम ने कहा जो किसान खेत में पुआल जलाकर वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मनमानी करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाना भी शुरू किया जाए। वहीं, कृषि एक्सपर्ट विजय गोयल ने बताया कि मौसम में नहीं होने के कारण पटाखे और पुआल से निकला धुंआ नीचली सतह पर ही रम गया है।
आसमान में छाए स्मॉग ने दूसरे दिन भी लोगों को बेचैन रखा। हाइवे सहित जिले के अन्य मार्गों पर वाहनों की गति धीमी रही और चालकों को दिन में भी लाइट जलानी पड़ी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही राहत संभव है।
बता दें कि दिवाली पर आतिशबाजी और हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उप्र में धान की पुआल जलाने से बने धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। जिले में इसका असर शनिवार को शुरू हुआ। सांस लेने में दिक्कत के साथ आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया।
स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते दिन के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलानी पड़ी। स्मॉग के बीच रविवार को अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
सोमवार को अधिकतम तापमान 30 और न्यूनतम 15 व मंगलवार को अधिकतम तापमान 29 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। उधर, मौसम विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि हवा में स्मॉग का असर जारी रहेगा।
तेज हवा चलने के बाद ही इससे छुटकारा मिलेगा। स्मॉग से सांस और अस्थमा के रोगियों को बचाव की जरूरत है। आंखों की जलन और त्वचा रोग से निजात पाने के लिए भी उपाय जरूरी है। बारिश के चांस बहुत कम हैं और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।
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स्मॉग का ग्राफ खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद डीएम ने कक्षा एक से पांच तक सभी स्कूलों की दो दिन के लिए छुटटी कर दी है। कक्षा छह से बारह तक स्कूल कालेजों के टाइम शेड्यूल में बदलाव किया गया है। ये स्कूल सुबह नौ बजे से एक बजे तक खुलेंगे। दीवाली की आतिशबाजी और खेतों में जलाए गए पुऑल से निकले धुए के कारण आसमान में धुंध छा गई है। खासतौर पर बुजुर्ग और मासूम बच्चों का सांस लेना दुभर हो गया है। बुजुर्ग और बच्चों के सामने और परेशानी न आए इसलिए डीएम ने कक्षा एक से कक्षा पांच तक सभी स्कूल दो दिन के लिए बंद कर दिए हैं। आठ नवंबर के बाद यदि धुंध नहीं छटी तो छुटटी आगे बढ़ाई जा सकती हैं। डीएम ने कक्षा छह से बारह तक के स्कूल कालेजों का टाइम टेबिल बदल दिया है। जब तक धुंध नहीं छंटती तक तक ये स्कूल सुबह नौ बजे खुलेंगे और एक बजे बंद हो जाएंगे। खेतों में पुआल जलाने पर डीएम सख्त हो गए हैं। डीएम ने रविवार को कृषि विभाग के अफसरों को खूब फटकारा। डीएम ने कहा जो किसान खेत में पुआल जलाकर वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मनमानी करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाना भी शुरू किया जाए। वहीं, कृषि एक्सपर्ट विजय गोयल ने बताया कि मौसम में नहीं होने के कारण पटाखे और पुआल से निकला धुंआ नीचली सतह पर ही रम गया है। आसमान में छाए स्मॉग ने दूसरे दिन भी लोगों को बेचैन रखा। हाइवे सहित जिले के अन्य मार्गों पर वाहनों की गति धीमी रही और चालकों को दिन में भी लाइट जलानी पड़ी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही राहत संभव है। बता दें कि दिवाली पर आतिशबाजी और हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उप्र में धान की पुआल जलाने से बने धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। जिले में इसका असर शनिवार को शुरू हुआ। सांस लेने में दिक्कत के साथ आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया। स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते दिन के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलानी पड़ी। स्मॉग के बीच रविवार को अधिकतम तापमान तैंतीस और न्यूनतम सोलह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार को अधिकतम तापमान तीस और न्यूनतम पंद्रह व मंगलवार को अधिकतम तापमान उनतीस और न्यूनतम चौदह डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। उधर, मौसम विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि हवा में स्मॉग का असर जारी रहेगा। तेज हवा चलने के बाद ही इससे छुटकारा मिलेगा। स्मॉग से सांस और अस्थमा के रोगियों को बचाव की जरूरत है। आंखों की जलन और त्वचा रोग से निजात पाने के लिए भी उपाय जरूरी है। बारिश के चांस बहुत कम हैं और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।
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PATNA : गवर्नमेंट ने कई आईएएस ऑफिसर्स का ट्रांसफर करने के साथ ही कई को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। सुशील कुमार, बिहार प्रशासनिक सेवा (औरंगाबाद), कमिश्नर के सेके्रटरी, दरभंगा कमिश्नरी दरभंगा का ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें अब प्रबंध निदेशक बिहार राज्य भंडार निगम पटना बनाया गया। नई दिल्ली स्थित बिहार भवन के अपर स्थानिक आयुक्त को उसी जगह स्थानिक आयुक्त के रूप में नई नियुक्तिदी गई। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव आर लक्ष्मणन को इंडस्ट्री के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। उनके पास पहले से ही अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी है। सामान्य प्रशासन डिपार्टमेंट की ज्वाइंट सेक्रेटरी अश्रि्वनी दत्तात्रेय ठाकरे को बिहार राज्य बिवरेजेज कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के निदेशक (खाद्य प्रसंस्करण) दिनेश कुमार को हस्तकरघा और रेशम निदेशालय का डायरेक्टर बनाया गया। वह इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
जल संसाधन विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी मो सुहैल को राज्य पर्यटन विकास निगम के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। स्टेट वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक दिलीप कुमार को बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक अनुपम कुमार सुमन को वित्त विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी नियुक्त किया गया। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के डायरेक्टर शैलेश ठाकुर को इंडस्ट्री डिपार्टमेंट में ही निदेशक (खाद्य प्रसंस्करण) की नई जवाबदेही दी गई। बहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के निदेशक वित्त का काम अतिरिक्त प्रभार के रूप में देखेंगे। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध निदेशक जेकेपी सिंह को बिहार स्थानीय क्षेत्र विकास अभिकरण (योजना एवं विकास विभाग) का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
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PATNA : गवर्नमेंट ने कई आईएएस ऑफिसर्स का ट्रांसफर करने के साथ ही कई को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। सुशील कुमार, बिहार प्रशासनिक सेवा , कमिश्नर के सेके्रटरी, दरभंगा कमिश्नरी दरभंगा का ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें अब प्रबंध निदेशक बिहार राज्य भंडार निगम पटना बनाया गया। नई दिल्ली स्थित बिहार भवन के अपर स्थानिक आयुक्त को उसी जगह स्थानिक आयुक्त के रूप में नई नियुक्तिदी गई। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव आर लक्ष्मणन को इंडस्ट्री के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। उनके पास पहले से ही अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी है। सामान्य प्रशासन डिपार्टमेंट की ज्वाइंट सेक्रेटरी अश्रि्वनी दत्तात्रेय ठाकरे को बिहार राज्य बिवरेजेज कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के निदेशक दिनेश कुमार को हस्तकरघा और रेशम निदेशालय का डायरेक्टर बनाया गया। वह इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। जल संसाधन विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी मो सुहैल को राज्य पर्यटन विकास निगम के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। स्टेट वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक दिलीप कुमार को बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक अनुपम कुमार सुमन को वित्त विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी नियुक्त किया गया। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के डायरेक्टर शैलेश ठाकुर को इंडस्ट्री डिपार्टमेंट में ही निदेशक की नई जवाबदेही दी गई। बहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के निदेशक वित्त का काम अतिरिक्त प्रभार के रूप में देखेंगे। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध निदेशक जेकेपी सिंह को बिहार स्थानीय क्षेत्र विकास अभिकरण का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
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हो गया कि परम अणु (परमाणु) ही अविभाज्य है अर्थात अणु मे प्रोटोन, इलेक्ट्रोन, न्यूट्रोन आदि भी है। एक अणु पूरे सौर मंडल का रूप है। इसमे एक न्यूक्लियस होता है और इसके चारो और इलेक्ट्रोन प्रोटोन आदि चक्कर लगाते है । अन्य शब्दो मे कहे तो सूक्ष्मतय इकाई परमाणु है जो सक्ष्यगति सक्ष्य होते हुए भी शक्तिपुन्ज है। ऐसे अन्त परमाणुओ के बन्ध से एटम बम्ब व हाईड्रोजन बम का रूप प्रकट होता है।
जैन तीर्थकरो ने शताब्दियो पूर्व अपने आध्यात्म ज्ञान को यथार्थ से जोडकर एक नवीन विचार शैली प्रस्तुत की है। उनके अनुसार परमाणु उसकी जड (पदार्थमेटर) का सक्ष्यतम रूप है, जो अविभाज्य, अच्छेदय, अदाह्य एव अग्राह्य है । (11) अर्थात पुदगल की अतिम इकाई परमाणु है। ज्ञातव्य है कि जैन परमाणु सिद्धात मे स्वय परमाणु के दो भेद बताये गये है - सूक्ष्म परमाणु और व्यावहारिक परमाणु ( 12 ) अर्थात जिस परमाणु को आज विज्ञान ने विभाजित किया है वह व्यावहारिक परमाणु से सवधित है, क्योकि व्यावहारिक परमाणु स्वय अनन्त सूक्ष्म परमाणुओ का समुदाय है जैसाकि अनुयोगद्धार सूत्र मे वर्णित है।
परमाणु दुविहे, पणने, तजहा सुहुमेव नवहारिमेव । अणताण सुहुम परमाणु योग्गलाण समुदय समिति समागयेण, व्यवहारिए परमाणु योग्गले निष्पाजति ।
परमाणु की सूक्ष्मता आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से ज्ञान करे तो बीस शख परमाणुओ का भार एक तोला है और इसका व्यास एक इच का दस करोड़वा भाग है। इसी प्रकार सिगरेट को लपेटने वाले कागज की मोटाई एक से एक सटाकर एक लाख परमाणु आ सकते है अर्थात इन्हे केवल ज्ञानी ही जान सकते है, इन्द्रिय प्रत्यक्ष व्यक्ति उसे जान ही नहीं सकता।
प्रसिद्ध भौतिक शास्त्री डब्ल्यू सी डेम्पीयर ने भी विज्ञान की सीमितता को अपने ग्रथ विज्ञान का इतिहास मे स्वीकार करते हुए लिखा है
'परमाणु परिक्षण के समय बाईस उपकरण किसी न किसी रूप मे प्रभावित करता है और उसमे परिवर्तन ला देता है और इस प्रकार हम वही परिवर्तित परमाणु देख पाते हैं, वास्तविक परमाणु नहीं"
(13) परमाणु अप्रतिघाती
परमाणु सूक्ष्मतम होने पर भी अप्रतिघाती है अर्थात इसे पकड़ कर रोका नहीं जा सकता इस पर प्रतिघात नहीं कर सकते या इसे बाधित नहीं किया जा सकता । मोटी लोह - दिवार, अगाध सागर, महान पर्वत का वज्रवत पदार्थ के आरपार जाने मे परमाणु समर्थ है। आधुनिक विज्ञान मे न्यूट्रोन नामक एक ऐसे अणु की कल्पना की गई है जिसे पृथ्वी के आरपार कराया जाय तो भी वह किसी परमाणु से टकराये बिना निकल जायेगा । (14) अप्रतिघातित्व को निम्नाकित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है -
भगवती सूत्र के अनुसार (5-7-869) परमाणु का चरम स्वरूप इन्द्रिय ज्ञान का विषय ही नहीं बन सकता। यह इन्द्रिय ग्राह्य नहीं है तथापि अमूर्त नही क्योकि स्कन्ध रूप मे यह मूर्त या रूपी ही है। आज विज्ञान ने परमाणु को दृश्य बताने का दावा इस आधार पर बताया है कि उसे लाखो गुना बढाकर देखा जाना
हीरक जयन्ती 56
1 परमाणु की गति व क्रिया को कोई भी भौतिक पदार्थ अथवा जीव रोक नहीं सकता अर्थात गतिशील परमाणु अपने मार्ग मे किसी भी प्रकार की बाधा पार कर सकता है।
2. एक आकाश प्रदेश जिसमें अन्य स्कन्ध या जीव हो, परमाणु रह सकता है।
3. एक आकाश प्रदेश में अन्य के रहते हुए भी परमाणु स्वयं गति प्रारम्भ कर चालू रख सकता है।
4. अन्य की बाधा के बिना परमाणु अपना स्थान छोड़ सकता है ।
13 भगवती सूत्र एक वैज्ञानिक अध्ययन - डॉ महावीर सिह मुर्डिया ( श्रमणोपासक 25 जून 1982 ) 14 विज्ञान लोक फरवरी 1965 (33) 15 लेखक की पुस्तक पुदमल एक अध्ययन पृ 14
कतिपय अवस्थाएं इसकी अपवाद हैं जिनमें परमाणु प्रतिघात ( बाधा) से प्रभावित भी होता है । वे निम्नानुसार है
1. माध्यम की अनुपस्थिति - परमाणु लोक की सीमा को लांघकर अलोक में नहीं जा सकता क्योंकि गति का माध्यम धर्मान्तिकाय लोक के चरम अंत तक ही है।
2. बंधन परिणाम - परमाणु किसी अन्य परमाणु के साथ मिलकर स्कन्ध बन जाता है जो कुछ समय के लिये अपनी क्रियाशीलता खो देता है ।
3. अतिवेग प्रतिघात - दो स्व- क्रियाशील परमाणु, जो अतिवेग से घूम रहे हों, पारचर को गति में प्रतिघात उत्पन्न करते हैं ।
परमाणु एक सत्ता
परमाणु एक सत्ता है जो निम्न एवं अवस्थित है कोई एकाकी परमाणु न तो नष्ट होता है और न नया बनता है न कोई परमाणु किसी संबंध में मिल जाने पर अपनी वैयक्तिकता ही खोता है इसके गुण और पर्याय अवश्य ही परिवर्तित होते हैं। परन्तु अस्तित्व अर्थात
नित्मत्व, ध्रुवत्व, शाश्वतत्व बना रहेगा । चूंकि परमाणु परिगमनशील है इसके गुणों के वृद्धि हानि का होना स्वाभाविक है। मूल गुण चार (वर्ण, गन्ध, रस, स्पर्श) हैं पर पर्याय अनन्त है ।
चतुःस्पर्शी एवं अष्ट स्पर्शी परमाणु
परमाणुओं से बने सूक्ष्म स्कन्ध का व्यवहार विचित्र है । यह अष्ट स्पर्शी परमाणु भारहीन होते हैं जबकि अष्ट स्पर्शी स्कन्ध बननें पर इनमें भार का गुण होता है । इस प्रकार जैन दर्शन द्वारा पुदगल के गुणों में भारहीनता की गणना उल्लेखनीय है । ऐसे भारहीन (सहंति शून्य) परमाणु की गति अत्यन्त वेगशील होती है ।
इस स्कन्ध में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. सुरुति एवं रूसी वैज्ञानिक चिरन्को का मानना है कि ऐसे कण भी संभव है जिनकी गति प्रकाश की गति से भी अधिक है । इसी को आईन्स्टीन ने अपने समीकरण में सिद्ध किया कि संहति कला पदार्थ में भार नहीं है (संहति शून्य ) उसके लिये यह प्रतिबन्ध नहीं अर्थात ऐसे पदार्थ प्रकाश की गति से भी तेज ( 3, 10, 450 कि.मी. प्रति सैकन्ड) गति कर सकते हैं। इसी कारण परमाणु एक "समय" में लोक के चरम अन्त तक जा सकता है (16) अर्थात अधिकतम गति पूर्व, पश्चिम, उत्तर दक्षिण, अधो एवं अथर्व चलान्त है ।
1 भगवती सूत्र एक वैज्ञानिक अध्ययन
( श्रमणोपासक 25 जून "82" डॉ महावीरसिह मुर्डिया) 2 भग सू श 26, उददे 8 सू 7
इसी का दूसरा पहलू अल्पतम गति है जिसके अनुसार परमाणु एक प्रदेश में अपने निकटतम दूसरे प्रदेश में जा सकता है। फिर भी स्वयं में गति बनी रहती है जो आज इलेक्ट्रान को अपने कक्ष में भ्रमणशीलता, हीने के अणुओं में गति, टेलीपैथी (विचार प्रेषण पद्धति)
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हो गया कि परम अणु ही अविभाज्य है अर्थात अणु मे प्रोटोन, इलेक्ट्रोन, न्यूट्रोन आदि भी है। एक अणु पूरे सौर मंडल का रूप है। इसमे एक न्यूक्लियस होता है और इसके चारो और इलेक्ट्रोन प्रोटोन आदि चक्कर लगाते है । अन्य शब्दो मे कहे तो सूक्ष्मतय इकाई परमाणु है जो सक्ष्यगति सक्ष्य होते हुए भी शक्तिपुन्ज है। ऐसे अन्त परमाणुओ के बन्ध से एटम बम्ब व हाईड्रोजन बम का रूप प्रकट होता है। जैन तीर्थकरो ने शताब्दियो पूर्व अपने आध्यात्म ज्ञान को यथार्थ से जोडकर एक नवीन विचार शैली प्रस्तुत की है। उनके अनुसार परमाणु उसकी जड का सक्ष्यतम रूप है, जो अविभाज्य, अच्छेदय, अदाह्य एव अग्राह्य है । अर्थात पुदगल की अतिम इकाई परमाणु है। ज्ञातव्य है कि जैन परमाणु सिद्धात मे स्वय परमाणु के दो भेद बताये गये है - सूक्ष्म परमाणु और व्यावहारिक परमाणु अर्थात जिस परमाणु को आज विज्ञान ने विभाजित किया है वह व्यावहारिक परमाणु से सवधित है, क्योकि व्यावहारिक परमाणु स्वय अनन्त सूक्ष्म परमाणुओ का समुदाय है जैसाकि अनुयोगद्धार सूत्र मे वर्णित है। परमाणु दुविहे, पणने, तजहा सुहुमेव नवहारिमेव । अणताण सुहुम परमाणु योग्गलाण समुदय समिति समागयेण, व्यवहारिए परमाणु योग्गले निष्पाजति । परमाणु की सूक्ष्मता आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से ज्ञान करे तो बीस शख परमाणुओ का भार एक तोला है और इसका व्यास एक इच का दस करोड़वा भाग है। इसी प्रकार सिगरेट को लपेटने वाले कागज की मोटाई एक से एक सटाकर एक लाख परमाणु आ सकते है अर्थात इन्हे केवल ज्ञानी ही जान सकते है, इन्द्रिय प्रत्यक्ष व्यक्ति उसे जान ही नहीं सकता। प्रसिद्ध भौतिक शास्त्री डब्ल्यू सी डेम्पीयर ने भी विज्ञान की सीमितता को अपने ग्रथ विज्ञान का इतिहास मे स्वीकार करते हुए लिखा है 'परमाणु परिक्षण के समय बाईस उपकरण किसी न किसी रूप मे प्रभावित करता है और उसमे परिवर्तन ला देता है और इस प्रकार हम वही परिवर्तित परमाणु देख पाते हैं, वास्तविक परमाणु नहीं" परमाणु अप्रतिघाती परमाणु सूक्ष्मतम होने पर भी अप्रतिघाती है अर्थात इसे पकड़ कर रोका नहीं जा सकता इस पर प्रतिघात नहीं कर सकते या इसे बाधित नहीं किया जा सकता । मोटी लोह - दिवार, अगाध सागर, महान पर्वत का वज्रवत पदार्थ के आरपार जाने मे परमाणु समर्थ है। आधुनिक विज्ञान मे न्यूट्रोन नामक एक ऐसे अणु की कल्पना की गई है जिसे पृथ्वी के आरपार कराया जाय तो भी वह किसी परमाणु से टकराये बिना निकल जायेगा । अप्रतिघातित्व को निम्नाकित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है - भगवती सूत्र के अनुसार परमाणु का चरम स्वरूप इन्द्रिय ज्ञान का विषय ही नहीं बन सकता। यह इन्द्रिय ग्राह्य नहीं है तथापि अमूर्त नही क्योकि स्कन्ध रूप मे यह मूर्त या रूपी ही है। आज विज्ञान ने परमाणु को दृश्य बताने का दावा इस आधार पर बताया है कि उसे लाखो गुना बढाकर देखा जाना हीरक जयन्ती छप्पन एक परमाणु की गति व क्रिया को कोई भी भौतिक पदार्थ अथवा जीव रोक नहीं सकता अर्थात गतिशील परमाणु अपने मार्ग मे किसी भी प्रकार की बाधा पार कर सकता है। दो. एक आकाश प्रदेश जिसमें अन्य स्कन्ध या जीव हो, परमाणु रह सकता है। तीन. एक आकाश प्रदेश में अन्य के रहते हुए भी परमाणु स्वयं गति प्रारम्भ कर चालू रख सकता है। चार. अन्य की बाधा के बिना परमाणु अपना स्थान छोड़ सकता है । तेरह भगवती सूत्र एक वैज्ञानिक अध्ययन - डॉ महावीर सिह मुर्डिया चौदह विज्ञान लोक फरवरी एक हज़ार नौ सौ पैंसठ पंद्रह लेखक की पुस्तक पुदमल एक अध्ययन पृ चौदह कतिपय अवस्थाएं इसकी अपवाद हैं जिनमें परमाणु प्रतिघात से प्रभावित भी होता है । वे निम्नानुसार है एक. माध्यम की अनुपस्थिति - परमाणु लोक की सीमा को लांघकर अलोक में नहीं जा सकता क्योंकि गति का माध्यम धर्मान्तिकाय लोक के चरम अंत तक ही है। दो. बंधन परिणाम - परमाणु किसी अन्य परमाणु के साथ मिलकर स्कन्ध बन जाता है जो कुछ समय के लिये अपनी क्रियाशीलता खो देता है । तीन. अतिवेग प्रतिघात - दो स्व- क्रियाशील परमाणु, जो अतिवेग से घूम रहे हों, पारचर को गति में प्रतिघात उत्पन्न करते हैं । परमाणु एक सत्ता परमाणु एक सत्ता है जो निम्न एवं अवस्थित है कोई एकाकी परमाणु न तो नष्ट होता है और न नया बनता है न कोई परमाणु किसी संबंध में मिल जाने पर अपनी वैयक्तिकता ही खोता है इसके गुण और पर्याय अवश्य ही परिवर्तित होते हैं। परन्तु अस्तित्व अर्थात नित्मत्व, ध्रुवत्व, शाश्वतत्व बना रहेगा । चूंकि परमाणु परिगमनशील है इसके गुणों के वृद्धि हानि का होना स्वाभाविक है। मूल गुण चार हैं पर पर्याय अनन्त है । चतुःस्पर्शी एवं अष्ट स्पर्शी परमाणु परमाणुओं से बने सूक्ष्म स्कन्ध का व्यवहार विचित्र है । यह अष्ट स्पर्शी परमाणु भारहीन होते हैं जबकि अष्ट स्पर्शी स्कन्ध बननें पर इनमें भार का गुण होता है । इस प्रकार जैन दर्शन द्वारा पुदगल के गुणों में भारहीनता की गणना उल्लेखनीय है । ऐसे भारहीन परमाणु की गति अत्यन्त वेगशील होती है । इस स्कन्ध में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. सुरुति एवं रूसी वैज्ञानिक चिरन्को का मानना है कि ऐसे कण भी संभव है जिनकी गति प्रकाश की गति से भी अधिक है । इसी को आईन्स्टीन ने अपने समीकरण में सिद्ध किया कि संहति कला पदार्थ में भार नहीं है उसके लिये यह प्रतिबन्ध नहीं अर्थात ऐसे पदार्थ प्रकाश की गति से भी तेज गति कर सकते हैं। इसी कारण परमाणु एक "समय" में लोक के चरम अन्त तक जा सकता है अर्थात अधिकतम गति पूर्व, पश्चिम, उत्तर दक्षिण, अधो एवं अथर्व चलान्त है । एक भगवती सूत्र एक वैज्ञानिक अध्ययन दो भग सू श छब्बीस, उददे आठ सू सात इसी का दूसरा पहलू अल्पतम गति है जिसके अनुसार परमाणु एक प्रदेश में अपने निकटतम दूसरे प्रदेश में जा सकता है। फिर भी स्वयं में गति बनी रहती है जो आज इलेक्ट्रान को अपने कक्ष में भ्रमणशीलता, हीने के अणुओं में गति, टेलीपैथी
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उत्तर पश्चिम सीरिया में अमेरिकी ड्रोन हमले में अलकायदा का सीनियर आतंकी मारे जाने की खबर है. जिस वक्त ये हमला हुआ है उस वक्त वो बाइक से जा रहा था. ये घटना सोमवार की बताई जा रही है. मारे गए आतंकी का नाम अबु हमजा अल येमनी है.
पूरी खबर देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
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उत्तर पश्चिम सीरिया में अमेरिकी ड्रोन हमले में अलकायदा का सीनियर आतंकी मारे जाने की खबर है. जिस वक्त ये हमला हुआ है उस वक्त वो बाइक से जा रहा था. ये घटना सोमवार की बताई जा रही है. मारे गए आतंकी का नाम अबु हमजा अल येमनी है. पूरी खबर देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
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RANCHI: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की आंतरिक बैठक सोमवार से रांची के सरला बिरला पब्लिक स्कूल कैंपस में शुरू हो गई है। फ्0. फ्क् अक्टूबर व क् नवंबर की बैठक में हिस्सा लेने सर संघचालक मोहन भागवत रविवार शाम को ही रांची पहुंच चुके हैं। उनके साथ सर संघ कार्यवाह मनमोहन वैद्य भी रांची पहुंचे हैं। ख्म् नवंबर को संघ की अखिल भारतीय टीम की बैठक हुई, इसमें प्रमुख बैठक में लाए जाने वाले प्रस्तावों के बिन्दुओं पर चर्चा हुई।
संघ की स्थापना के 90 सालों के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक रांची झारखंड में हो रही है। इसमें किन मुद्दों पर चर्चा होगी और झारखंड के संदर्भ में क्या चर्चा होगी, इस पर संघ की ओर से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
तीन दिनों के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में भाग लेने सोमवार से ही डेलिगेट्स रांची पहुंचने लगे हैं। इसमें अखिल भारतीय टीम के अलावा देशभर के सभी क्षेत्र प्रचारक, क्षेत्र संघचालक, क्षेत्र कार्यवाह, प्रांत प्रचारक, प्रांत कार्यवाह, प्रांत संघचालक मौजूद रहेंगे। फ्0, फ्क् और क् नवंबर को कार्यकारी मंडल की बैठक शुरू होगी। इसमें संघ के विविध क्षेत्र के सभी राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय महामंत्री उपस्थित रहेंगे। भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल, राममाधव, वी सतीश, शिव प्रकाश, सौदान सिंह भी बैठक में शामिल होंगे। बिहार चुनाव में व्यस्त होने के कारण भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बैठक में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। बैठक में विहिप की ओर से प्रवीण तोगडि़या, चंपत राय व दिनेश के आने की सूचना है। अस्वस्थता के कारण अशोक सिंघल नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा एबीवीपी, भारतीय मजदूर संघ, विद्या भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ, सेवा भारती के पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे।
झारखंड में संघ की बैठक हो रही है, तो धर्मातरण के मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावनाएं अधिक हैं। झारखंड में शुरू से ही धर्मातरण बड़े पैमाने पर होता रहा है। यहां के आदिवासियों का धर्मातरण हमेशा कराया गया है। आदिवासी धर्मातरण के सॉफ्ट टारगेट रहे हैं। अभी हाल ही में गुमला में बड़ी संख्या में आदिवासियों का धर्मातरण कराया गया है। झारखंड में बैठक कर संघ यह संदेश देना चाहता है कि उसकी नजर में झारखंड है। इसलिए धर्मातरण को रोकने के लिए बैठक में चर्चा होना जरूरी माना जा रहा है।
झारखंड में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भूमिका शुरू से ही मजबूत रही है। गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, पलामू, चतरा, हजारीबाग जिले में संघ की मजबूत पकड़ है। अपनी पकड़ पूरे राज्य पर बनाने और संगठन की धार को और मजबूत करने के उद्देश्य से भी झारखंड में संघ की बैठक हो रही है। झारखंड के अपने स्वयं सेवकों को और जोश भरने के उद्देश्य से भी यह बैठक हो रही है।
संघ की राष्ट्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक रांची में होने से झारखंड से सटे राज्यों में भी मैसेज जाएगा। अभी बिहार में चुनाव हो रहा है, यह भी एक मकसद है। अगले साल पश्चिम बंगाल में भी चुनाव होना है। ऐसे में अपना संदेश भी झारखंड से संघ दूसरे राज्यों को देना चाह रहा है।
इस बैठक में संघ के जितने भी फ्भ् आनुषांगिक संगठन हैं, उसके बड़े पदाधिकारी पहुंच रहे हैं। बैठक में अनुषांगिक संगठनों के विस्तार और उनके काम पर भी चर्चा होगी। झारखंड में अभी सरकार भी बीजेपी की है। ऐसे में राज्य के आनुषांगिक संगठनों को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में भी आनुषांगिक संगठनों को मजबूत करने में बल मिलेगा।
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RANCHI: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की आंतरिक बैठक सोमवार से रांची के सरला बिरला पब्लिक स्कूल कैंपस में शुरू हो गई है। फ्शून्य. फ्क् अक्टूबर व क् नवंबर की बैठक में हिस्सा लेने सर संघचालक मोहन भागवत रविवार शाम को ही रांची पहुंच चुके हैं। उनके साथ सर संघ कार्यवाह मनमोहन वैद्य भी रांची पहुंचे हैं। ख्म् नवंबर को संघ की अखिल भारतीय टीम की बैठक हुई, इसमें प्रमुख बैठक में लाए जाने वाले प्रस्तावों के बिन्दुओं पर चर्चा हुई। संघ की स्थापना के नब्बे सालों के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक रांची झारखंड में हो रही है। इसमें किन मुद्दों पर चर्चा होगी और झारखंड के संदर्भ में क्या चर्चा होगी, इस पर संघ की ओर से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। तीन दिनों के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में भाग लेने सोमवार से ही डेलिगेट्स रांची पहुंचने लगे हैं। इसमें अखिल भारतीय टीम के अलावा देशभर के सभी क्षेत्र प्रचारक, क्षेत्र संघचालक, क्षेत्र कार्यवाह, प्रांत प्रचारक, प्रांत कार्यवाह, प्रांत संघचालक मौजूद रहेंगे। फ्शून्य, फ्क् और क् नवंबर को कार्यकारी मंडल की बैठक शुरू होगी। इसमें संघ के विविध क्षेत्र के सभी राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय महामंत्री उपस्थित रहेंगे। भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल, राममाधव, वी सतीश, शिव प्रकाश, सौदान सिंह भी बैठक में शामिल होंगे। बिहार चुनाव में व्यस्त होने के कारण भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बैठक में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। बैठक में विहिप की ओर से प्रवीण तोगडि़या, चंपत राय व दिनेश के आने की सूचना है। अस्वस्थता के कारण अशोक सिंघल नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा एबीवीपी, भारतीय मजदूर संघ, विद्या भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ, सेवा भारती के पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे। झारखंड में संघ की बैठक हो रही है, तो धर्मातरण के मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावनाएं अधिक हैं। झारखंड में शुरू से ही धर्मातरण बड़े पैमाने पर होता रहा है। यहां के आदिवासियों का धर्मातरण हमेशा कराया गया है। आदिवासी धर्मातरण के सॉफ्ट टारगेट रहे हैं। अभी हाल ही में गुमला में बड़ी संख्या में आदिवासियों का धर्मातरण कराया गया है। झारखंड में बैठक कर संघ यह संदेश देना चाहता है कि उसकी नजर में झारखंड है। इसलिए धर्मातरण को रोकने के लिए बैठक में चर्चा होना जरूरी माना जा रहा है। झारखंड में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भूमिका शुरू से ही मजबूत रही है। गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, पलामू, चतरा, हजारीबाग जिले में संघ की मजबूत पकड़ है। अपनी पकड़ पूरे राज्य पर बनाने और संगठन की धार को और मजबूत करने के उद्देश्य से भी झारखंड में संघ की बैठक हो रही है। झारखंड के अपने स्वयं सेवकों को और जोश भरने के उद्देश्य से भी यह बैठक हो रही है। संघ की राष्ट्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक रांची में होने से झारखंड से सटे राज्यों में भी मैसेज जाएगा। अभी बिहार में चुनाव हो रहा है, यह भी एक मकसद है। अगले साल पश्चिम बंगाल में भी चुनाव होना है। ऐसे में अपना संदेश भी झारखंड से संघ दूसरे राज्यों को देना चाह रहा है। इस बैठक में संघ के जितने भी फ्भ् आनुषांगिक संगठन हैं, उसके बड़े पदाधिकारी पहुंच रहे हैं। बैठक में अनुषांगिक संगठनों के विस्तार और उनके काम पर भी चर्चा होगी। झारखंड में अभी सरकार भी बीजेपी की है। ऐसे में राज्य के आनुषांगिक संगठनों को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में भी आनुषांगिक संगठनों को मजबूत करने में बल मिलेगा।
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प्रयागराज में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के आवास पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का मॉडल ऑफ गवर्नेंस यही है कि उन सब लोगों को जो उनके लिए खतरा बन सकते हैं।
कहा कि यह भी शंका है कि मनीष सिसोदिया को आम आदमी पार्टी ने अकेला छोड़ दिया है। उमेश पाल हत्याकांड में कहा कि अपराधियों का कोई जाति और धर्म नहीं होता। इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व सीएम ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकार बनाएगी।
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प्रयागराज में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के आवास पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का मॉडल ऑफ गवर्नेंस यही है कि उन सब लोगों को जो उनके लिए खतरा बन सकते हैं। कहा कि यह भी शंका है कि मनीष सिसोदिया को आम आदमी पार्टी ने अकेला छोड़ दिया है। उमेश पाल हत्याकांड में कहा कि अपराधियों का कोई जाति और धर्म नहीं होता। इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व सीएम ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकार बनाएगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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चाँदी की तेजी मन्दी
(कर्क चन्द्र-४)
जिस समय चन्द्रमा अकेला कर्क राशि पर २।। दिन रहता है, तब तेजी आती है और यदि सूर्य या गुरू संग हो जाय या चन्द्रमा पर गुरु या सूर्य की दृष्टी पुरण होगी तो और भी अधिक तेजी आयेगी किन्तु कर्क राशि पर अन्तिम समय में कुछ मन्दी का योग बनता है । और यदि शनी मंगल राहु या केतू चन्द्रमा के साथ हो तो कुछ तेजी कुछ मांदी आती है और शनी या मंगल की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो भी कुछ तेजी या मन्दी और चन्द्रमा के साथ यदि शक्र बुध कोई होगा, या चंद्रमा को देखता होगा तो समान्य तेजी रहेगी।
( सिंह चन्द्र - ५ )
जिस समय चन्द्रमा अकेला सिंह राशि पर २ ।। दिन रहता है उस समय तेज है और यदि चन्द्रमा के साथ मंगल या गुरु या सूर्य हों या यह तीनों ग्रहों में से कोई भी चन्द्रमा को पूर्ण दृष्टी से देख रहे हों तो ओर अधिक तेजी आयोकि तु यदि शनी राहू केतू इनका किसी का साथ होगा या शनि की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो तेजो होने में रुकावट पड़ जायगी किन्तु यदि बुध या शुक्र चन्द्रमा के साथ हों या चन्द्रमा को देख रहे हों, तो सामान्य तेजो रहेगी।
( कन्या चन्द्र -६)
जिस समय चन्द्रमा अकेला कन्या राशि पर २।। दिन रहता है उस समय मन्दी आती है और यदि गुरू मांगल सूर्य, बुध, इन चार ग्रहों में से किसी की चद्रमा पर दृष्टि होय या इनमें से किसी ग्रह का साथ हो तो तेजी भी आ जाती है और यदि श.क्रया इनमें से किसी की भी दृष्टि चंद्रमा पर पूर्ण हो तो अधिक मंदी आती है।
चाँदी की तेजी
(तुला चन्द्र - ७)
जिस समय अकेला चन्द्र तुला राशि पर २।। दिन रहता है, तब तेजी आती है किन्तु यदि चन्द्रमा के साथ में शनी गुरू, मंगल, शुक्र, इन चारों में से कोई ग्रह होगा या इनमें से किसी की दृष्टि चन्द्रमा पर होगी तो तेजी की प्रधानता ही रहेगी और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य बुध, राहू, केतू इन चार ग्रहों में से कोई होगा या सूर्य या बुध की दृष्टि होगी तो मन्दी आयगी किन्तु इस जगह सूर्य का साथ होना या सूर्य दृष्टि होना मन्दी का खास कारण बनता है ।
( वृश्चिक चन्द्र - ८)
जित समय अकेला चन्द्र वृश्चिक राशि पर २ दिन रहता है, तब है किन्तु दो दिन के बाद तेजी शुरू हो जाते हैं और शनी या राहू या केतू या बुध इनसे कोई भी चन्द्रमा के साथ हों या चन्द्रमा पर शनी की दृष्टि हो तो अधिक मन्दी है और यदि चन्द्रमा के साथ गुरू या मङ्गल या सूर्य या शुक्र कोई भी इनमें से होगा या गुरू या मंगल सूर्य इन तीनों में से किसी भी ग्रह की पूर्ण दृष्टि चन्द्रमा पर होगी तो तेजीं भी आवेगी और थोड़ी मन्दी आयेगी ।
( धन चन्द्र ६ )
जिस समय अकेला चन्द्र धन राशि पर २ ।। दिन रहता हैं, तब तेजी आती है और यदि चन्द्रमा के राहू, गुरू, मंगल, सूर्य, शुक्र पर इनमें से कोई भी होगा या गु० म ० सू० इनमें से किसी का भी चंद्रमा पर पूर्णदृष्टी होगी तो और भी अधिक तेजी आवेगी और यदि चंद्रमा के साथ केतू, शनी, बुध इनमें से किसी का भी साथ होगा या चन्द्रमा पर शनी या बुध की दृष्टी होगी, तो तेजी में कुछ रुकावट पड़ती रहेगी किन्तु फिर भी तेजी की प्रधानता रहेंगी।
चांदी की मन्दी
( मकर चन्द्र - १० )
जिस समय अकेला चन्द्र मकर राशि पर २।। दिन रहता है, तब मन्दी की प्रधानता रहती है ! और जिस दिन चन्द्रमा के साथ सूर्य मंगल गुरू में से कोई भी होंगे या इनमें से कोई चन्द्रमा को देखते होंगे तो कुछ तेजी भी आ जायगी और यदि चन्द्रमा के साथ शुक्र, बुध बैठे होंगे या देखते होंगे तो कुछ मन्दी के योगों में सामान्यतया रुकावटें पड़ेगी ओर यदि चन्द्रमा के साथ राहूँ या केतू शनी इनमें कोई होगा तो अधिक सदी आयेगी और यदि शनी की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टि होगी तो भी अधिक सन्दी का सा योग बनता है ।
(कुम्भ चन्द्र - १२ )
जिस समय कुम्भ राशि पर अकेला चन्द्रमा २॥ दिन ठहरता है तब प्रायः तेजी आती है और कभी २ थोड़ी सी मन्दी भी आ जाया करती है। और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य, मंगल, गुरू शुक्रइन चार ग्रहों में से कोई देखता हो तो तेजी का योग ही प्रधान रहता है और यदि चन्द्रमा के साथ शनी, राहु, केतू इनमें से कोई भी बैठा हो या चन्द्रमा पर या शनी की पूर्ण दृष्टी होय तो कुछ मन्दी कुछ तेजी भी आती है !
(मीन चन्द्र - २२)
जिस समय मीन राशि पर चन्द्रमा २।। दिन रहता है उस समय तेजीं और मन्दी के दोनों योग बनते हैं और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य गुरू, मंगल, शुक्र इन चारों में से कोई होगा या इन चारों में से किसी की भी चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो तेजी का योग अच्छा विशेष रूप से बनता है और यदि चन्द्रमा के साथ शनी राहू केतू, बुध इनमें से कोई भी होगा या चन्द्रमा पर शनी या बुध की दृष्टी पूर्ण होगी तो मन्दी का योग बनता है । और अमावस के पहले दिन व दूसरे दिन अक्सर चांदी में कुछ है।
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चाँदी की तेजी मन्दी जिस समय चन्द्रमा अकेला कर्क राशि पर दो।। दिन रहता है, तब तेजी आती है और यदि सूर्य या गुरू संग हो जाय या चन्द्रमा पर गुरु या सूर्य की दृष्टी पुरण होगी तो और भी अधिक तेजी आयेगी किन्तु कर्क राशि पर अन्तिम समय में कुछ मन्दी का योग बनता है । और यदि शनी मंगल राहु या केतू चन्द्रमा के साथ हो तो कुछ तेजी कुछ मांदी आती है और शनी या मंगल की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो भी कुछ तेजी या मन्दी और चन्द्रमा के साथ यदि शक्र बुध कोई होगा, या चंद्रमा को देखता होगा तो समान्य तेजी रहेगी। जिस समय चन्द्रमा अकेला सिंह राशि पर दो ।। दिन रहता है उस समय तेज है और यदि चन्द्रमा के साथ मंगल या गुरु या सूर्य हों या यह तीनों ग्रहों में से कोई भी चन्द्रमा को पूर्ण दृष्टी से देख रहे हों तो ओर अधिक तेजी आयोकि तु यदि शनी राहू केतू इनका किसी का साथ होगा या शनि की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो तेजो होने में रुकावट पड़ जायगी किन्तु यदि बुध या शुक्र चन्द्रमा के साथ हों या चन्द्रमा को देख रहे हों, तो सामान्य तेजो रहेगी। जिस समय चन्द्रमा अकेला कन्या राशि पर दो।। दिन रहता है उस समय मन्दी आती है और यदि गुरू मांगल सूर्य, बुध, इन चार ग्रहों में से किसी की चद्रमा पर दृष्टि होय या इनमें से किसी ग्रह का साथ हो तो तेजी भी आ जाती है और यदि श.क्रया इनमें से किसी की भी दृष्टि चंद्रमा पर पूर्ण हो तो अधिक मंदी आती है। चाँदी की तेजी जिस समय अकेला चन्द्र तुला राशि पर दो।। दिन रहता है, तब तेजी आती है किन्तु यदि चन्द्रमा के साथ में शनी गुरू, मंगल, शुक्र, इन चारों में से कोई ग्रह होगा या इनमें से किसी की दृष्टि चन्द्रमा पर होगी तो तेजी की प्रधानता ही रहेगी और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य बुध, राहू, केतू इन चार ग्रहों में से कोई होगा या सूर्य या बुध की दृष्टि होगी तो मन्दी आयगी किन्तु इस जगह सूर्य का साथ होना या सूर्य दृष्टि होना मन्दी का खास कारण बनता है । जित समय अकेला चन्द्र वृश्चिक राशि पर दो दिन रहता है, तब है किन्तु दो दिन के बाद तेजी शुरू हो जाते हैं और शनी या राहू या केतू या बुध इनसे कोई भी चन्द्रमा के साथ हों या चन्द्रमा पर शनी की दृष्टि हो तो अधिक मन्दी है और यदि चन्द्रमा के साथ गुरू या मङ्गल या सूर्य या शुक्र कोई भी इनमें से होगा या गुरू या मंगल सूर्य इन तीनों में से किसी भी ग्रह की पूर्ण दृष्टि चन्द्रमा पर होगी तो तेजीं भी आवेगी और थोड़ी मन्दी आयेगी । जिस समय अकेला चन्द्र धन राशि पर दो ।। दिन रहता हैं, तब तेजी आती है और यदि चन्द्रमा के राहू, गुरू, मंगल, सूर्य, शुक्र पर इनमें से कोई भी होगा या गुशून्य म शून्य सूशून्य इनमें से किसी का भी चंद्रमा पर पूर्णदृष्टी होगी तो और भी अधिक तेजी आवेगी और यदि चंद्रमा के साथ केतू, शनी, बुध इनमें से किसी का भी साथ होगा या चन्द्रमा पर शनी या बुध की दृष्टी होगी, तो तेजी में कुछ रुकावट पड़ती रहेगी किन्तु फिर भी तेजी की प्रधानता रहेंगी। चांदी की मन्दी जिस समय अकेला चन्द्र मकर राशि पर दो।। दिन रहता है, तब मन्दी की प्रधानता रहती है ! और जिस दिन चन्द्रमा के साथ सूर्य मंगल गुरू में से कोई भी होंगे या इनमें से कोई चन्द्रमा को देखते होंगे तो कुछ तेजी भी आ जायगी और यदि चन्द्रमा के साथ शुक्र, बुध बैठे होंगे या देखते होंगे तो कुछ मन्दी के योगों में सामान्यतया रुकावटें पड़ेगी ओर यदि चन्द्रमा के साथ राहूँ या केतू शनी इनमें कोई होगा तो अधिक सदी आयेगी और यदि शनी की चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टि होगी तो भी अधिक सन्दी का सा योग बनता है । जिस समय कुम्भ राशि पर अकेला चन्द्रमा दो॥ दिन ठहरता है तब प्रायः तेजी आती है और कभी दो थोड़ी सी मन्दी भी आ जाया करती है। और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य, मंगल, गुरू शुक्रइन चार ग्रहों में से कोई देखता हो तो तेजी का योग ही प्रधान रहता है और यदि चन्द्रमा के साथ शनी, राहु, केतू इनमें से कोई भी बैठा हो या चन्द्रमा पर या शनी की पूर्ण दृष्टी होय तो कुछ मन्दी कुछ तेजी भी आती है ! जिस समय मीन राशि पर चन्द्रमा दो।। दिन रहता है उस समय तेजीं और मन्दी के दोनों योग बनते हैं और यदि चन्द्रमा के साथ सूर्य गुरू, मंगल, शुक्र इन चारों में से कोई होगा या इन चारों में से किसी की भी चन्द्रमा पर पूर्ण दृष्टी होगी तो तेजी का योग अच्छा विशेष रूप से बनता है और यदि चन्द्रमा के साथ शनी राहू केतू, बुध इनमें से कोई भी होगा या चन्द्रमा पर शनी या बुध की दृष्टी पूर्ण होगी तो मन्दी का योग बनता है । और अमावस के पहले दिन व दूसरे दिन अक्सर चांदी में कुछ है।
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Eye Care: बरसात के दिनों में आंखों में लाली होना, पानी आना और पलकों में सूजन की समस्या बढ़ जाती है. इसकी मुख्य वजह है कंजक्टिवाइटिस वायरल बैक्टेरियल इंफेक्शन और एलर्जी. इससे बचने के लिए मानसून में अपनी आंखों की सेहत को नजरअंदाज ना करें. अगर बारिश में भींग गए तो तुरंत आंखों को साफ पानी से जरूर धोएं. आंखों पर जमी धूल, गंदगी आंखों में चले जाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता हैं. आंखों को अगर पोछना हो तो हमेशा साफ कपड़े का प्रयोग करें. केवल तेज गर्मी से आंखों को नुकसान नहीं पहुंचता अधिक नमी से भी आंखों में समस्याएं उत्पन्न होती है. मानसून की नमी से हमारी आंखों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता हैं. आंखों में बारिश का पानी जाने से भी कई प्रकार के इंफेक्शंस हो सकते हैं.
बरसात में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना चाहिए.
हैंडवाश को अपनी आदत में शामिल करें.
हाथों को हमेशा साफ और सूखा रखिए.
बार - बार अपनी आंखों को छूने से बचिए.
दिनभर में दो से तीन बार अपनी आंखों को साफ और ठंडे पानी से धोएं.
रूमाल, तौलिया और अन्य दैनिक उपयोगी चीजों को साफ रखें.
मेकअप का सामान जैसी पर्सनल चीजें दूसरों से शेयर ना करें.
जलजमाव वाले इलाकों में रहने से वायरस और जीवाणु के संपर्क में आने से आप बीमार हो सकते हैं.
रेनी सीजन में कॉन्टैक्ट लेंस की बजाय चश्मे का इस्तेमाल करें .
आंखों को धूल भरी आंधी से बचाएं .
बरसात में बच्चों को पानी से भरे गड्ढों दूर रखें, क्योंकि इन्हीं स्थानों पर बैक्टीरिया पनपते हैं.
अगर समस्या बहुत अधिक परेशान करने लगे तो बिना देरी आई स्पेशलिस्ट से मिलें. अक्सर बरसात में लोग हॉट फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड अधिक खाने लगते हैं. जिसके कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. इस कारण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी अधिक होने लगती हैं इसलिए मौसम चेंज होने के साथ मौसमी फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें साथ ही पानी भी खूब पीएं.
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Eye Care: बरसात के दिनों में आंखों में लाली होना, पानी आना और पलकों में सूजन की समस्या बढ़ जाती है. इसकी मुख्य वजह है कंजक्टिवाइटिस वायरल बैक्टेरियल इंफेक्शन और एलर्जी. इससे बचने के लिए मानसून में अपनी आंखों की सेहत को नजरअंदाज ना करें. अगर बारिश में भींग गए तो तुरंत आंखों को साफ पानी से जरूर धोएं. आंखों पर जमी धूल, गंदगी आंखों में चले जाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता हैं. आंखों को अगर पोछना हो तो हमेशा साफ कपड़े का प्रयोग करें. केवल तेज गर्मी से आंखों को नुकसान नहीं पहुंचता अधिक नमी से भी आंखों में समस्याएं उत्पन्न होती है. मानसून की नमी से हमारी आंखों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता हैं. आंखों में बारिश का पानी जाने से भी कई प्रकार के इंफेक्शंस हो सकते हैं. बरसात में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना चाहिए. हैंडवाश को अपनी आदत में शामिल करें. हाथों को हमेशा साफ और सूखा रखिए. बार - बार अपनी आंखों को छूने से बचिए. दिनभर में दो से तीन बार अपनी आंखों को साफ और ठंडे पानी से धोएं. रूमाल, तौलिया और अन्य दैनिक उपयोगी चीजों को साफ रखें. मेकअप का सामान जैसी पर्सनल चीजें दूसरों से शेयर ना करें. जलजमाव वाले इलाकों में रहने से वायरस और जीवाणु के संपर्क में आने से आप बीमार हो सकते हैं. रेनी सीजन में कॉन्टैक्ट लेंस की बजाय चश्मे का इस्तेमाल करें . आंखों को धूल भरी आंधी से बचाएं . बरसात में बच्चों को पानी से भरे गड्ढों दूर रखें, क्योंकि इन्हीं स्थानों पर बैक्टीरिया पनपते हैं. अगर समस्या बहुत अधिक परेशान करने लगे तो बिना देरी आई स्पेशलिस्ट से मिलें. अक्सर बरसात में लोग हॉट फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड अधिक खाने लगते हैं. जिसके कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. इस कारण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी अधिक होने लगती हैं इसलिए मौसम चेंज होने के साथ मौसमी फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें साथ ही पानी भी खूब पीएं.
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हर आम आदमी लोकपाल से साथ है , हर कोई भ्रष्टाचार से परेसान है , लेकिन एक दोहरी स्थिति पैदा हो गयी है , दिल पुरे तरीके से लोकपाल से साथ है , दिमाग में ये ही आता है , इसे तो सरकार के साथ एक और सरकार पैदा हो जाएगी- हमारा देश लोकतन्त है , हमारी आदते भी ऐसी हो चुकी है की बड़ा बदलाव से हमेसा डर लगता है , बड़ा बदलाव बड़ा रिस्क , हम तो हमेसा एक के बाद एक सीड़ी चड़ने वाले है.
कुल मिलाकर हमें एक बीच का रास्ता ढूंढ़ना पड़ेगा . लोकपाल का एक ऐसा रूप तेयार करे , जिसमे जनता की सक्ति हो और उसका रोल भी . पूरी तरहे से पारदर्शिता भी , सिस्टेमेटिक भी , सरकार और अन्ना जी तो बेठ कर एक बीच का रास्ता निकलना पड़ेगा , राष्ट्रीय हित में , जनता के लिए , जिससे हमारा दिल और दिमाग तो संतोष मिल सके .
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हर आम आदमी लोकपाल से साथ है , हर कोई भ्रष्टाचार से परेसान है , लेकिन एक दोहरी स्थिति पैदा हो गयी है , दिल पुरे तरीके से लोकपाल से साथ है , दिमाग में ये ही आता है , इसे तो सरकार के साथ एक और सरकार पैदा हो जाएगी- हमारा देश लोकतन्त है , हमारी आदते भी ऐसी हो चुकी है की बड़ा बदलाव से हमेसा डर लगता है , बड़ा बदलाव बड़ा रिस्क , हम तो हमेसा एक के बाद एक सीड़ी चड़ने वाले है. कुल मिलाकर हमें एक बीच का रास्ता ढूंढ़ना पड़ेगा . लोकपाल का एक ऐसा रूप तेयार करे , जिसमे जनता की सक्ति हो और उसका रोल भी . पूरी तरहे से पारदर्शिता भी , सिस्टेमेटिक भी , सरकार और अन्ना जी तो बेठ कर एक बीच का रास्ता निकलना पड़ेगा , राष्ट्रीय हित में , जनता के लिए , जिससे हमारा दिल और दिमाग तो संतोष मिल सके .
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कार्यालय संवाददाता-बिलासपुर-जिला बिलासपुर में कोरोना विस्फोट हुआ है। जिला में एक साथ 17 कोरोना संक्रमित मामले पाए गए हैं। इनमें 15 मामले बिलासपुर के कोठीपुरा में निर्माणाधीन एम्स के मजदूरों के हैं। वहीं, एक मामला बिलासपुर शहर की हाउसिंग बोर्ड कालोनी का है। इसके अलावा एक अन्य मामला झंडूता क्षेत्र के तहत बड़गांव में 11 माह के बच्चे से संबधित है। जिला में अब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 173 पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोठीपुरा में निर्माणाधीन एम्स में कार्यरत मजूदरों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से पहले दिन पांच मजदूर और दूसरे दिन दस मजदूर संक्रमित पाए गए। बताया जा रहा है कि यह सभी मजदूर साईट क्वारंटाइन थे। वहीं, एक अन्य मामला बिलासपुर शहर की हाउसिंग बोर्ड कालोनी में आया हुआ है। इसमें 48 वर्षीय व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है।
इसके अलावा झंडूता विधानसभा क्षेत्र के तहत 11 माह का मासूम संक्रमित भी पाया गया है। जिला में लगातारा कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां पर भी कोरोना महामारी के मामले सामने आ रहे हैं। वहां पर उन क्षेत्रों को सेनेटाइज करवाया जा रहा है। इसके अलावा कंटेनमेंट जोन और बफर जोन भी बनाए जा रहे हैं। हालांकि कोरोना महामारी को लेकर समय-समय पर प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं। बता दें कि अभी तक जिला में 173 लोगों की रिपार्ट पॉजिटिव आई है। 107 लोग अभी तक कोरोना से निजात पा चुके हैं और 66 का इलाज चल रहा है।
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कार्यालय संवाददाता-बिलासपुर-जिला बिलासपुर में कोरोना विस्फोट हुआ है। जिला में एक साथ सत्रह कोरोना संक्रमित मामले पाए गए हैं। इनमें पंद्रह मामले बिलासपुर के कोठीपुरा में निर्माणाधीन एम्स के मजदूरों के हैं। वहीं, एक मामला बिलासपुर शहर की हाउसिंग बोर्ड कालोनी का है। इसके अलावा एक अन्य मामला झंडूता क्षेत्र के तहत बड़गांव में ग्यारह माह के बच्चे से संबधित है। जिला में अब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक सौ तिहत्तर पहुंच गई है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोठीपुरा में निर्माणाधीन एम्स में कार्यरत मजूदरों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से पहले दिन पांच मजदूर और दूसरे दिन दस मजदूर संक्रमित पाए गए। बताया जा रहा है कि यह सभी मजदूर साईट क्वारंटाइन थे। वहीं, एक अन्य मामला बिलासपुर शहर की हाउसिंग बोर्ड कालोनी में आया हुआ है। इसमें अड़तालीस वर्षीय व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है। इसके अलावा झंडूता विधानसभा क्षेत्र के तहत ग्यारह माह का मासूम संक्रमित भी पाया गया है। जिला में लगातारा कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां पर भी कोरोना महामारी के मामले सामने आ रहे हैं। वहां पर उन क्षेत्रों को सेनेटाइज करवाया जा रहा है। इसके अलावा कंटेनमेंट जोन और बफर जोन भी बनाए जा रहे हैं। हालांकि कोरोना महामारी को लेकर समय-समय पर प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं। बता दें कि अभी तक जिला में एक सौ तिहत्तर लोगों की रिपार्ट पॉजिटिव आई है। एक सौ सात लोग अभी तक कोरोना से निजात पा चुके हैं और छयासठ का इलाज चल रहा है।
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लखनऊ। भारत में आज कल हर बात को लेकर फतवा देना आम बात होगी है। कभी महिलाओं के खिलाफ किसी भी बात को लेकर फतवा जारी कर दिया जाता है। देवबंद को जो बात पसंद नहीं आती है वह अक्सर किसी को भी इस्लाम से खारिज कर सकता है। अब खबर है कि पूर्व विदेश तथा कानून मंत्र सलमान खुर्शीद ने संभल में कल्कि महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान भगवान राम की आरती करना तब काफी महंगा पड़ा जब देवबंद ने उनको इस्लाम से खारिज कर दिया। खबरों की मानें तो सलमान खुर्शीद ने संभल में कल्कि महोत्सव के दौरान भगवान राम की आरती की थी।
इसके बाद उनकी यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में आ गई थी। सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सलमान खुर्शीद को इस्लाम से बाहर का रास्ता दिखाया। पूर्व कानून मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से सांसद रहे सलमान खुर्शीद का एक वीडियो सामने आया है।
इस वीडियो में सलमान खुर्शीद कल्कि महोत्सव के दौरान भगवान राम की आरती लेते दिखाया गया है। इसके बाद उनके खिलाफ देवबंद ने मोर्चा खोलते हुए मुफ्ती तारिक क़ासमी ने सलमान खुर्शीद को तौबा करने की हिदायत दी है। मुफ्ती तारिक क़ासमी इस बारे में दलील देते हुए कहा कि इस्लाम में किसी और की इबादत नहीं की जा सकती। मुफ्ती के अनुसार सलमान खुर्शीद को दोबारा कलमा पढऩा होगा। इससे पूर्व दीपावली के दिन कुछ महिलाओं ने भगवान राम की आरती की थी।
इसके बाद देवबंद ने इन महिलाओं के खिलाफ तगड़ा फरमान जारी करते हुए इस्लाम से बाहर कर दिया था। कुल मिलाकर देवबंद फतवों के मामले में लगातार चर्चा में रहता है।
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लखनऊ। भारत में आज कल हर बात को लेकर फतवा देना आम बात होगी है। कभी महिलाओं के खिलाफ किसी भी बात को लेकर फतवा जारी कर दिया जाता है। देवबंद को जो बात पसंद नहीं आती है वह अक्सर किसी को भी इस्लाम से खारिज कर सकता है। अब खबर है कि पूर्व विदेश तथा कानून मंत्र सलमान खुर्शीद ने संभल में कल्कि महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान भगवान राम की आरती करना तब काफी महंगा पड़ा जब देवबंद ने उनको इस्लाम से खारिज कर दिया। खबरों की मानें तो सलमान खुर्शीद ने संभल में कल्कि महोत्सव के दौरान भगवान राम की आरती की थी। इसके बाद उनकी यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में आ गई थी। सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सलमान खुर्शीद को इस्लाम से बाहर का रास्ता दिखाया। पूर्व कानून मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से सांसद रहे सलमान खुर्शीद का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में सलमान खुर्शीद कल्कि महोत्सव के दौरान भगवान राम की आरती लेते दिखाया गया है। इसके बाद उनके खिलाफ देवबंद ने मोर्चा खोलते हुए मुफ्ती तारिक क़ासमी ने सलमान खुर्शीद को तौबा करने की हिदायत दी है। मुफ्ती तारिक क़ासमी इस बारे में दलील देते हुए कहा कि इस्लाम में किसी और की इबादत नहीं की जा सकती। मुफ्ती के अनुसार सलमान खुर्शीद को दोबारा कलमा पढऩा होगा। इससे पूर्व दीपावली के दिन कुछ महिलाओं ने भगवान राम की आरती की थी। इसके बाद देवबंद ने इन महिलाओं के खिलाफ तगड़ा फरमान जारी करते हुए इस्लाम से बाहर कर दिया था। कुल मिलाकर देवबंद फतवों के मामले में लगातार चर्चा में रहता है।
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आधुनिक वैज्ञानिक उन्नति ने सृष्टि के रहस्यों का उद्घाटन नहीं किया है, वरन् वास्तव में सृष्टि कितनी रहस्यमय है, इसका भास कराया है। इस रहस्योद्घाटन में तथा विशेषकर ज्योतिषीय ज्ञान की प्रगति से मनुष्य ताराओं तथा नीहारिकाओं में होनेवाले आणविक विस्फोट को पृथ्वी पर संभव कर सके हैं। इससे कुछ मनुष्यों का नाश हुआ तो क्या ? स्रष्टा की सृष्टि सत्य, शिव एवं सुन्दर है तथा आइन्स्टाइन के सापेक्षता सिद्धान्त ने भौतिक जगत् के नियमों को भी सत्यं, शिवं, सुन्दरं का रूप दे डाला है। विश्व निरपेक्ष है, अतः सत्य है। अवलोकक विश्व को अपनी सीमित चेतना रूपी ऐनक से देखकर इसे अपने ही रँग में रंग डालता है। देशकाल का सम्मिलित विश्व व से परे शिव है । भौतिक संज्ञाएँ (Physical Entities ) सरलता (Simplicity) तथा सम्मिति (Symmetry) के सुन्दर नियमों से सम्बद्ध हैं। आइन्सटाइन की पद्धति में न सूर्य केन्द्र है, न पृथ्वी और न उनके आकर्षण का ही कोई स्वतः अस्तित्व है । देशकाल (Space-time) का विकुंचन ही सूर्य तथा पृथ्वी है, एवं उनकाकर्षण भी है तथा उनकी गति का कारण है । सूर्यसिद्धान्त के लेखक ने भी 'अदृश्य रूपाः कालस्य मूर्त्तयो' (अदृश्य काल के मूर्ति स्वरूप) शीघ्रोच्च, मन्दोच्च (Perigee Apogee) तथा पर (Nodes) को ही ग्रहों की गति का कारण माना था (सूर्य सि० २ / १ ) । ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी अदृश्य अज्ञेय ईश्वर के ही समीप पहुँचने की चेष्टा है।
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आधुनिक वैज्ञानिक उन्नति ने सृष्टि के रहस्यों का उद्घाटन नहीं किया है, वरन् वास्तव में सृष्टि कितनी रहस्यमय है, इसका भास कराया है। इस रहस्योद्घाटन में तथा विशेषकर ज्योतिषीय ज्ञान की प्रगति से मनुष्य ताराओं तथा नीहारिकाओं में होनेवाले आणविक विस्फोट को पृथ्वी पर संभव कर सके हैं। इससे कुछ मनुष्यों का नाश हुआ तो क्या ? स्रष्टा की सृष्टि सत्य, शिव एवं सुन्दर है तथा आइन्स्टाइन के सापेक्षता सिद्धान्त ने भौतिक जगत् के नियमों को भी सत्यं, शिवं, सुन्दरं का रूप दे डाला है। विश्व निरपेक्ष है, अतः सत्य है। अवलोकक विश्व को अपनी सीमित चेतना रूपी ऐनक से देखकर इसे अपने ही रँग में रंग डालता है। देशकाल का सम्मिलित विश्व व से परे शिव है । भौतिक संज्ञाएँ सरलता तथा सम्मिति के सुन्दर नियमों से सम्बद्ध हैं। आइन्सटाइन की पद्धति में न सूर्य केन्द्र है, न पृथ्वी और न उनके आकर्षण का ही कोई स्वतः अस्तित्व है । देशकाल का विकुंचन ही सूर्य तथा पृथ्वी है, एवं उनकाकर्षण भी है तथा उनकी गति का कारण है । सूर्यसिद्धान्त के लेखक ने भी 'अदृश्य रूपाः कालस्य मूर्त्तयो' शीघ्रोच्च, मन्दोच्च तथा पर को ही ग्रहों की गति का कारण माना था । ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी अदृश्य अज्ञेय ईश्वर के ही समीप पहुँचने की चेष्टा है।
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Ranchi : जिस विभाग के पास राज्यभर की खुफिया सूचना जुटाने की जिम्मेवारी है वो वर्तमान में प्रभार के भरोसे चल रहा है. झारखंड पुलिस की आंख और कान मानी जानेवाली स्पेशल ब्रांच ( विशेष शाखा) प्रभार के भरोसे चल है. आईजी प्रोविजन को स्पेशल ब्रांच आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. गौरतलब है कि स्पेशल ब्रांच एडीजी का पद पिछले पांच महीने से खाली चल रहा है. बीते 20 अक्टूबर 2021 को एडीजी स्पेशल ब्रांच के पद पर पदस्थापित मुरारी लाल मीणा का तबादला कर दिया गया था. तब से स्पेशल ब्रांच एडीजी का पद खाली चल रहा है.
स्पेशल ब्रांच झारखंड पुलिस की आंख और कान मानी जाती है. इसका काम धरने और प्रदर्शनों की सही रिपोर्ट जुटाना होता है. इसके अलावा पॉलिटिकल, नक्सल, आपराधिक गतिविधियों पर खुफिया नजर रखी जाती है. साथ ही रणनीति के लिए लोकल पुलिस को अलर्ट करने का भी काम है.
झारखंड की पुलिस में आइपीएस अधिकारियों की भारी कमी है. राज्य में आइपीएस अधिकारियों के 26 ऐसे महत्वपूर्ण पद हैं, जो अतिरिक्त प्रभार में चल रहे हैं. इसी तरह 22 ऐसे पद हैं, जो पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं. बल की कमी का असर प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन पर सीधा पड़ रहा है. सुपरविजन में विलंब होने से लंबित कांडों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसका असर प्रदेश में विधि-व्यवस्था से लेकर नक्सल अभियान तक में पड़ रहा है.
जानकारी के मुताबिक झारखंड में आइपीएस अधिकारियों का स्वीकृत पद 149 है, जिसमें आठ नए पद हाल में जोड़े गए हैं. यानी राज्य में कुल 157 सृजित पद के सापेक्ष झारखंड कैडर में कुल 104 आइपीएस अधिकारी हैं. इन 104 आइपीएस अधिकारियों में 19 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. तीन आइपीएस अधिकारी नेशनल पुलिस एकेडमी हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं. यानी वर्तमान में 82 आइपीएस अधिकारी ही कार्यरत हैं.
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Ranchi : जिस विभाग के पास राज्यभर की खुफिया सूचना जुटाने की जिम्मेवारी है वो वर्तमान में प्रभार के भरोसे चल रहा है. झारखंड पुलिस की आंख और कान मानी जानेवाली स्पेशल ब्रांच प्रभार के भरोसे चल है. आईजी प्रोविजन को स्पेशल ब्रांच आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. गौरतलब है कि स्पेशल ब्रांच एडीजी का पद पिछले पांच महीने से खाली चल रहा है. बीते बीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को एडीजी स्पेशल ब्रांच के पद पर पदस्थापित मुरारी लाल मीणा का तबादला कर दिया गया था. तब से स्पेशल ब्रांच एडीजी का पद खाली चल रहा है. स्पेशल ब्रांच झारखंड पुलिस की आंख और कान मानी जाती है. इसका काम धरने और प्रदर्शनों की सही रिपोर्ट जुटाना होता है. इसके अलावा पॉलिटिकल, नक्सल, आपराधिक गतिविधियों पर खुफिया नजर रखी जाती है. साथ ही रणनीति के लिए लोकल पुलिस को अलर्ट करने का भी काम है. झारखंड की पुलिस में आइपीएस अधिकारियों की भारी कमी है. राज्य में आइपीएस अधिकारियों के छब्बीस ऐसे महत्वपूर्ण पद हैं, जो अतिरिक्त प्रभार में चल रहे हैं. इसी तरह बाईस ऐसे पद हैं, जो पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं. बल की कमी का असर प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन पर सीधा पड़ रहा है. सुपरविजन में विलंब होने से लंबित कांडों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसका असर प्रदेश में विधि-व्यवस्था से लेकर नक्सल अभियान तक में पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक झारखंड में आइपीएस अधिकारियों का स्वीकृत पद एक सौ उनचास है, जिसमें आठ नए पद हाल में जोड़े गए हैं. यानी राज्य में कुल एक सौ सत्तावन सृजित पद के सापेक्ष झारखंड कैडर में कुल एक सौ चार आइपीएस अधिकारी हैं. इन एक सौ चार आइपीएस अधिकारियों में उन्नीस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. तीन आइपीएस अधिकारी नेशनल पुलिस एकेडमी हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं. यानी वर्तमान में बयासी आइपीएस अधिकारी ही कार्यरत हैं.
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बड़बोले नेताओं को राहुल की चेतावनी, 'संभलकर बोलें, वरना होगी कड़ी कार्रवाई'
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संपर्क से समर्थन अभियान के तहत रविवार को मुंबई में गायिका लता मंगेशकर से मुलाकात की. वहीं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हामिद करजई इंटरनेशल एयरपोर्ट के बाहर फिदायीन हमले में 11 लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि मारे गए ज्यादातर लोग पुलिस वाले थे. वहीं रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की पहली बैठक हुई. इस बैठक के दौरान राहुल ने बड़बोले नेताओं कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी फोरम के अंदर सभी कांग्रेसी अपनी बात रखने के लिए मुक्त हैं लेकिन यदि वे गलत बयानबाजी करते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस बैठक में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए रोडमैप किया. इस दौरान पार्टी को आगामी चुनावों के मद्देनजर गठबंधन के सवाल से भी दो-चार होना पड़ा.
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बड़बोले नेताओं को राहुल की चेतावनी, 'संभलकर बोलें, वरना होगी कड़ी कार्रवाई' बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संपर्क से समर्थन अभियान के तहत रविवार को मुंबई में गायिका लता मंगेशकर से मुलाकात की. वहीं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हामिद करजई इंटरनेशल एयरपोर्ट के बाहर फिदायीन हमले में ग्यारह लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि मारे गए ज्यादातर लोग पुलिस वाले थे. वहीं रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली बैठक हुई. इस बैठक के दौरान राहुल ने बड़बोले नेताओं कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी फोरम के अंदर सभी कांग्रेसी अपनी बात रखने के लिए मुक्त हैं लेकिन यदि वे गलत बयानबाजी करते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस बैठक में उन्होंने दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव के लिए रोडमैप किया. इस दौरान पार्टी को आगामी चुनावों के मद्देनजर गठबंधन के सवाल से भी दो-चार होना पड़ा.
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प्रकार के अरुचिकर द्रव्य) जो प्राय अरुचिकर होते है उनको साने या पीने के पहले इसके २-४ फूलो को मुह मे थोड़ी देर चबा लेने से मुंह मे थोड़ी देर के लिए हल्की शून्यता हो जाने से अरुचिकर द्रव्य का प्रभाव विल्कुल ही नही पता लगता है ।
( कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि इसे मुँह मे चवा लेने के बाद माग रस लेने पर भी पता नहीं लगतापरन्तु मुझे ऐसा अनुभव नहीं हुआ कारण हो सकता है वह ठीक अकरकरा न रहा हो ।)
प्रसिद्ध योग - वैसे तो अकरकरा के अनेको योग मिलते है परन्तु यहां कुछ प्रसिद्ध योगो का वर्णन किया जा रहा है
(१) आकारकरभादि चूर्ण - यह बहुत प्रसिद्ध योग है और साथ ही इसकी यह विशेषता है कि यह आकारकरम के योगो मे सर्व प्रथम योग भी है जो अपने गुणो के कारण आज भी अपनी प्राथमिकता को स्थिर रक्से है । अत इसका पाठ भी यहा देना आवश्यक मालूम पडता है।
आकार करम. शुण्ठी ककोल कुकुम कणा । जातिफल लवङ्ग च चन्दन चेति कार्यिकार ।। चूणानि मानत कुर्यादहिफेन पलोन्मित । सर्वमेकी कृत चूर्ण मापैक मधुनालिहेतू ।। शुक्र स्तम्भकर चूर्ण पुंसामानन्दकारकम् । नारीणा प्रीतिजनन सेवेत निशि कामुक
- शा. स. म ६ अकरकरा, माँठ, ककोल केशर, पीपर, जायफल, लोग, सफेदचन्दन प्रत्येक १-१ तौला, सव मिलाकर तौला, शुद्ध अफीम ४ तोला ।
होगा । (हो सकता है उस जमाने मे लोग दृढ शक्ति वाले रहे हो और वरदास्त कर लेते हो, परन्तु आज डालडा मे भी डालडा के जमाने में इतनी मात्रा मे अफोम का प्रयोग सामान्य व्यक्ति क्या अच्छे साधन सम्पन व्यक्ति के लिए भी सरासर अनुचित है । अत इसमे अफीम की मात्रा कम करना आवश्यक है । साथ ही उसका प्रयोग भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए )
दूसरी चीज हम पाते है कि केशर की मात्रा भी आज के युग मे इतना वरदास्त करना सबके लिए सम्भव नही कारण इसमे एक खुराक मे करीव पोन रत्ती केशर हो जाता है । आज ५-७ पत्ती केशर ही काफी हो जाता है अतः इसकी मात्रा भी विवेक के अनुसार प्रयोग करनी चाहिए ।
मात्रा १ माशा, अनुपान - शहद, शुरू के को चूर्ण कर अन्त मे अफीम मिला चूर्ण रख ले ।
जब हम इस योग पर ध्यान देते हैं तो पाते हैं कि यह अफीम - मादक द्रव्य प्रधान योग है- इसमे इसकी (अफीम) मात्रा मी एक खुराक मे २१।। - २।। रत्ती के करीव वैठता है जो कि अनम्यासी व्यक्ति के लिए बहुत वडी मात्रा है। और इतनी बड़ी मात्रा मे अफीम का प्रयोग चाहे सद्य कुछ फायदेमन्द दिखलाई पडे परन्तु अधिक दिनो तक उसका प्रयोग अवश्य ही हानिकारक
तीसरी बात १ माशा चूर्ण को फाकना उसमे भी जिसमे इतनी मात्रा मे अफीम हो अरुचि पैदा करेगा अत इसकी गोली शहद या जल में ही बनाकर प्रयोग करने मे अच्छा होगा ।
चौथी बात इसका प्रयोग रात में ही करना चाहिए ।
इसी प्रकार अन्य रोगो पर भी ध्यान देना चाहिए । और समय के अनुसार विवेक से काम लेना ज्यादा श्रेयस् कर होगा ।
उदाहरण स्वरूप-अकरकरा को हम मानते है कि इससे चमड़े पर स्फोट होता है अत इसका प्रयोग बडी ही सावधानी से सोमित मात्रा मे एवम् सीमित समय तक ही करना चाहिए, परन्तु हम पाते हैं कि विद्वत् वृन्द इसका प्रयोग शिश्न पर लेप करने के लिए मात्रा २तोला लिखते है -- २ तोला अकरकरा का प्रयोग इतने कोमल अग को स्तम्भन तो बाद मे करेगा, परन्तु स्फोट पहले कर देगा ।
अत प्रसङ्गानुसार हम यहा कुछ योगो का नाम लिख देते है । परन्तु प्रयोग विवेक के अनुसार ही की सलाह करते हुए दूंगा - ( कमी आगे प्रत्येक योगो का विवेचन अलग लेख ही लिखूंगा ।)
(२) कुछ विद्वान (वापालालजी) - लिखने हैं कि भाव प्रकाश मे केवल एक ही योग लिया है वह है फिरग रोगे आकारकरभ - जो निम्न है4
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प्रकार के अरुचिकर द्रव्य) जो प्राय अरुचिकर होते है उनको साने या पीने के पहले इसके दो-चार फूलो को मुह मे थोड़ी देर चबा लेने से मुंह मे थोड़ी देर के लिए हल्की शून्यता हो जाने से अरुचिकर द्रव्य का प्रभाव विल्कुल ही नही पता लगता है । प्रसिद्ध योग - वैसे तो अकरकरा के अनेको योग मिलते है परन्तु यहां कुछ प्रसिद्ध योगो का वर्णन किया जा रहा है आकारकरभादि चूर्ण - यह बहुत प्रसिद्ध योग है और साथ ही इसकी यह विशेषता है कि यह आकारकरम के योगो मे सर्व प्रथम योग भी है जो अपने गुणो के कारण आज भी अपनी प्राथमिकता को स्थिर रक्से है । अत इसका पाठ भी यहा देना आवश्यक मालूम पडता है। आकार करम. शुण्ठी ककोल कुकुम कणा । जातिफल लवङ्ग च चन्दन चेति कार्यिकार ।। चूणानि मानत कुर्यादहिफेन पलोन्मित । सर्वमेकी कृत चूर्ण मापैक मधुनालिहेतू ।। शुक्र स्तम्भकर चूर्ण पुंसामानन्दकारकम् । नारीणा प्रीतिजनन सेवेत निशि कामुक - शा. स. म छः अकरकरा, माँठ, ककोल केशर, पीपर, जायफल, लोग, सफेदचन्दन प्रत्येक एक-एक तौला, सव मिलाकर तौला, शुद्ध अफीम चार तोला । होगा । दूसरी चीज हम पाते है कि केशर की मात्रा भी आज के युग मे इतना वरदास्त करना सबके लिए सम्भव नही कारण इसमे एक खुराक मे करीव पोन रत्ती केशर हो जाता है । आज पाँच-सात पत्ती केशर ही काफी हो जाता है अतः इसकी मात्रा भी विवेक के अनुसार प्रयोग करनी चाहिए । मात्रा एक माशा, अनुपान - शहद, शुरू के को चूर्ण कर अन्त मे अफीम मिला चूर्ण रख ले । जब हम इस योग पर ध्यान देते हैं तो पाते हैं कि यह अफीम - मादक द्रव्य प्रधान योग है- इसमे इसकी मात्रा मी एक खुराक मे इक्कीस।। - दो।। रत्ती के करीव वैठता है जो कि अनम्यासी व्यक्ति के लिए बहुत वडी मात्रा है। और इतनी बड़ी मात्रा मे अफीम का प्रयोग चाहे सद्य कुछ फायदेमन्द दिखलाई पडे परन्तु अधिक दिनो तक उसका प्रयोग अवश्य ही हानिकारक तीसरी बात एक माशा चूर्ण को फाकना उसमे भी जिसमे इतनी मात्रा मे अफीम हो अरुचि पैदा करेगा अत इसकी गोली शहद या जल में ही बनाकर प्रयोग करने मे अच्छा होगा । चौथी बात इसका प्रयोग रात में ही करना चाहिए । इसी प्रकार अन्य रोगो पर भी ध्यान देना चाहिए । और समय के अनुसार विवेक से काम लेना ज्यादा श्रेयस् कर होगा । उदाहरण स्वरूप-अकरकरा को हम मानते है कि इससे चमड़े पर स्फोट होता है अत इसका प्रयोग बडी ही सावधानी से सोमित मात्रा मे एवम् सीमित समय तक ही करना चाहिए, परन्तु हम पाते हैं कि विद्वत् वृन्द इसका प्रयोग शिश्न पर लेप करने के लिए मात्रा दोतोला लिखते है -- दो तोला अकरकरा का प्रयोग इतने कोमल अग को स्तम्भन तो बाद मे करेगा, परन्तु स्फोट पहले कर देगा । अत प्रसङ्गानुसार हम यहा कुछ योगो का नाम लिख देते है । परन्तु प्रयोग विवेक के अनुसार ही की सलाह करते हुए दूंगा - कुछ विद्वान - लिखने हैं कि भाव प्रकाश मे केवल एक ही योग लिया है वह है फिरग रोगे आकारकरभ - जो निम्न हैचार
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नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की मजबूती से भारती एयरटेल, आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशंस, GMR इंफ्रा के शेयरों में फिर से खरीदारी लौटने की उम्मीद है, क्योंकि इन कंपनियों पर विदेशी कर्ज काफी ज्यादा है और अब कंपनियों को डॉलर में कम भुगातान करना पड़ेगा। ऐसे में कंपनियों के मुनाफे पर से ब्याज का एक बड़ा बोझ कम हो जाएगा। ऐसे में ये शेयर छोटी अवधी में बड़े रिटर्न दे सकते हैं।
- उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी BJP के शानदार प्रदर्शन के बाद देश में आर्थिक रिकवरी तेज होने की उम्मीद के चलते रुपए में जोरदार तेजी आई है। फिलहाल एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 65. 80 के नीचे आ गया है।
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि BJP अब संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भी बहुमत हासिल कर लेगी। लिहाजा देश की आर्थिक ग्रोथ तेज होगी। इसीलिए दुनियाभर के निवेशक घरेलू बाजार में डॉलर बेचकर रुपए को खरीद रहे हैं।
- मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपए में मजबूती से इंडियन ऑयल, टाटा स्टील और टाटा पावर सहित कई एनबीएफसी के लिए कर्ज जुटाना सस्ता हो जाएगा। लिहाजा इन कंपनियों की डेट रेटिंग में भी सुधार होने की उम्मीद है।
मायस्टॉकरिसर्च के हेड लोकेश उप्पल का कहना है कि रुपया मजबूत होने से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में लिए जाने वाले कर्ज सस्त हो जाएंगे और कंपनियों की बैलेंसशीट से ब्याज बोझ भी कम हो जाएगा। लिहाजा आने वाले समय में इन कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आएगी।
- देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल, आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने विदेशों से बड़ा कर्ज लिया हुआ है।
- 31 मार्च 2015 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारती एयरटेल पर कंसॉलिडेटेड नेट डेट पिछले फिस्कल ईयर के 10. 07 अरब डॉलर से बढ़कर 10. 67 अरब डॉलर हो गया।
- कंपनियां अपने कारोबार विस्तार और कामकाज के लिए विदेश से डॉलर में कर्ज लेती हैं।
- कंपनियों को कर्ज के बदले ब्याज का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है।
- जब एक डॉलर खरीदने के लिए कंपनियों को 65 रुपए देने होंगे तो उनको पहले की तुलना में कम ब्याज चुकाना होगा।
- कर्ज सस्ता होगा तो लागत घटेगी। इससे आनी वाली तिमाही में कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी होगी।
- सिटी ने रिलायंस पर खरीद की राय कायम रखते हुए लक्ष्य 1195 से बढ़ाकर 1490 रुपए का तय किया है।
- ट्रेड स्विफ्ट ब्रोकिंग के संदीप जैन के मुताबिक टेलीकॉम सेक्टर में भारती एयरटेल पर निवेश की सलाह होगी।
- वहीं भारती इंफ्राटेल पर भी बुलिश नजरिया बना हुआ है।
- लंबी अवधि में ये दोनों कंपनियां अच्छा प्रदर्शन दिखा सकती है। निवेशक भारती एयरटेल और भारती इंफ्राटेल में लंबी अवधि के लिए खरीदारी कर सकते हैं।
- मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा के मौजूदा बाजार में ब्रिटानिया, अंबुजा सीमेंट और टीटागढ़ वैगंस पसंदीदा शेयर हैं।
- उन्होंने ब्रिटानिया के लिए 3400-3450 रुपए, अंबुजा सीमेंट के लिए 250-260 रुपए और टीटागढ़ वैगंस के लिए 135-140 रुपए का लक्ष्य तय किया है।
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नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की मजबूती से भारती एयरटेल, आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशंस, GMR इंफ्रा के शेयरों में फिर से खरीदारी लौटने की उम्मीद है, क्योंकि इन कंपनियों पर विदेशी कर्ज काफी ज्यादा है और अब कंपनियों को डॉलर में कम भुगातान करना पड़ेगा। ऐसे में कंपनियों के मुनाफे पर से ब्याज का एक बड़ा बोझ कम हो जाएगा। ऐसे में ये शेयर छोटी अवधी में बड़े रिटर्न दे सकते हैं। - उत्तर प्रदेश समेत पाँच राज्यों में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी BJP के शानदार प्रदर्शन के बाद देश में आर्थिक रिकवरी तेज होने की उम्मीद के चलते रुपए में जोरदार तेजी आई है। फिलहाल एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पैंसठ. अस्सी के नीचे आ गया है। - एक्सपर्ट्स कहते हैं कि BJP अब संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भी बहुमत हासिल कर लेगी। लिहाजा देश की आर्थिक ग्रोथ तेज होगी। इसीलिए दुनियाभर के निवेशक घरेलू बाजार में डॉलर बेचकर रुपए को खरीद रहे हैं। - मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपए में मजबूती से इंडियन ऑयल, टाटा स्टील और टाटा पावर सहित कई एनबीएफसी के लिए कर्ज जुटाना सस्ता हो जाएगा। लिहाजा इन कंपनियों की डेट रेटिंग में भी सुधार होने की उम्मीद है। मायस्टॉकरिसर्च के हेड लोकेश उप्पल का कहना है कि रुपया मजबूत होने से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में लिए जाने वाले कर्ज सस्त हो जाएंगे और कंपनियों की बैलेंसशीट से ब्याज बोझ भी कम हो जाएगा। लिहाजा आने वाले समय में इन कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आएगी। - देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल, आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने विदेशों से बड़ा कर्ज लिया हुआ है। - इकतीस मार्च दो हज़ार पंद्रह तक के आंकड़ों के अनुसार, भारती एयरटेल पर कंसॉलिडेटेड नेट डेट पिछले फिस्कल ईयर के दस. सात अरब डॉलर से बढ़कर दस. सरसठ अरब डॉलर हो गया। - कंपनियां अपने कारोबार विस्तार और कामकाज के लिए विदेश से डॉलर में कर्ज लेती हैं। - कंपनियों को कर्ज के बदले ब्याज का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। - जब एक डॉलर खरीदने के लिए कंपनियों को पैंसठ रुपयापए देने होंगे तो उनको पहले की तुलना में कम ब्याज चुकाना होगा। - कर्ज सस्ता होगा तो लागत घटेगी। इससे आनी वाली तिमाही में कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी होगी। - सिटी ने रिलायंस पर खरीद की राय कायम रखते हुए लक्ष्य एक हज़ार एक सौ पचानवे से बढ़ाकर एक हज़ार चार सौ नब्बे रुपयापए का तय किया है। - ट्रेड स्विफ्ट ब्रोकिंग के संदीप जैन के मुताबिक टेलीकॉम सेक्टर में भारती एयरटेल पर निवेश की सलाह होगी। - वहीं भारती इंफ्राटेल पर भी बुलिश नजरिया बना हुआ है। - लंबी अवधि में ये दोनों कंपनियां अच्छा प्रदर्शन दिखा सकती है। निवेशक भारती एयरटेल और भारती इंफ्राटेल में लंबी अवधि के लिए खरीदारी कर सकते हैं। - मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा के मौजूदा बाजार में ब्रिटानिया, अंबुजा सीमेंट और टीटागढ़ वैगंस पसंदीदा शेयर हैं। - उन्होंने ब्रिटानिया के लिए तीन हज़ार चार सौ-तीन हज़ार चार सौ पचास रुपयापए, अंबुजा सीमेंट के लिए दो सौ पचास-दो सौ साठ रुपयापए और टीटागढ़ वैगंस के लिए एक सौ पैंतीस-एक सौ चालीस रुपयापए का लक्ष्य तय किया है।
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जैन तत्त्व सामानाकी
चित मद्रु भी हैं। कथचित भेदाभे रूप भी है। अत. वस्तुका भेदरूप कथन करने वाला व्यवहार नय है तथा वस्तुका अभेदरूप कथन करने वाला निश्चय नम है । और वस्तुका भेदाभेदरूप कथन करने वाला प्रमाण है इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि तीनों ही नय प्रमाण वस्तुकं सामान्य विशेष का ही प्रतिपादक है वस्तुके सामान्य विशेष को छोडकर भिन्न पदार्थका प्रतिपादक नहीं है इसलिये वे सव नय प्रमाण सम्यक रूप है इनको मिथ्या समझना हो मिथ्या है ।
जो नय और प्रमाण परस्पर की मापेक्षाको छोडकर वस्तु स्वरूपका कथन करता है तो वह वस्तुस्वरूप भी मिथ्या है और उसका प्रतिपादन करने वाला नय और प्रमाण भी मिथ्या है यद्यपि निरपेक्ष नय भी वस्तु के स्वरूप का आशिक रुपमे दर्शन करता है तथापि वह मिथ्या इसलिये है कि अपर नय निरपेक्ष आशिक कथनकरनेसे आशिकरूप ही वस्तु स्वरूप समझा जाते लगेगा। क्योंकि अपर नय निरपेक्षतामे यह बात नही रहती कि अपर नय क्या कहता है किन्तु सापेक्ष नयके कथन मे अपर नय की अपेक्षा रहती है जिससे यह वात स्पष्ट रूप से समझमे श्राजाती है कि वस्तु स्वरूप इतना ही नहीं है और भी कुछ हे इसलिए सापेक्ष नयका जितना कहना है उतना सत्य है तथा जो नय एक के गुणों को दूसरे के गुण वताया करता है वह नच ही नहीं है वह नयाभास है इसलिये वह नय अपरमार्थभूतही है, मिथ्या है । उस से नयका लक्षण ही घटित नहीं होता क्योंकि नयका लक्षण ही ऐसा है कि वह लक्ष्यभूत वस्तुके सामान्य और विशेष वर्मोंका ही विवेचन करता है । वह अन्य अलक्ष्य वस्तुके गुणधर्मका विवेचन नहीं करता वस्तुमे सामान्य और विशेष यह दो धर्म रहते है उन दोय धर्मोका प्रतिपादन करने वाली भी दोय नय है । वस्तुके सामान्य धर्मका कहने वाला द्रव्यार्थिक (निश्चय ) नय है । और
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जैन तत्त्व सामानाकी चित मद्रु भी हैं। कथचित भेदाभे रूप भी है। अत. वस्तुका भेदरूप कथन करने वाला व्यवहार नय है तथा वस्तुका अभेदरूप कथन करने वाला निश्चय नम है । और वस्तुका भेदाभेदरूप कथन करने वाला प्रमाण है इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि तीनों ही नय प्रमाण वस्तुकं सामान्य विशेष का ही प्रतिपादक है वस्तुके सामान्य विशेष को छोडकर भिन्न पदार्थका प्रतिपादक नहीं है इसलिये वे सव नय प्रमाण सम्यक रूप है इनको मिथ्या समझना हो मिथ्या है । जो नय और प्रमाण परस्पर की मापेक्षाको छोडकर वस्तु स्वरूपका कथन करता है तो वह वस्तुस्वरूप भी मिथ्या है और उसका प्रतिपादन करने वाला नय और प्रमाण भी मिथ्या है यद्यपि निरपेक्ष नय भी वस्तु के स्वरूप का आशिक रुपमे दर्शन करता है तथापि वह मिथ्या इसलिये है कि अपर नय निरपेक्ष आशिक कथनकरनेसे आशिकरूप ही वस्तु स्वरूप समझा जाते लगेगा। क्योंकि अपर नय निरपेक्षतामे यह बात नही रहती कि अपर नय क्या कहता है किन्तु सापेक्ष नयके कथन मे अपर नय की अपेक्षा रहती है जिससे यह वात स्पष्ट रूप से समझमे श्राजाती है कि वस्तु स्वरूप इतना ही नहीं है और भी कुछ हे इसलिए सापेक्ष नयका जितना कहना है उतना सत्य है तथा जो नय एक के गुणों को दूसरे के गुण वताया करता है वह नच ही नहीं है वह नयाभास है इसलिये वह नय अपरमार्थभूतही है, मिथ्या है । उस से नयका लक्षण ही घटित नहीं होता क्योंकि नयका लक्षण ही ऐसा है कि वह लक्ष्यभूत वस्तुके सामान्य और विशेष वर्मोंका ही विवेचन करता है । वह अन्य अलक्ष्य वस्तुके गुणधर्मका विवेचन नहीं करता वस्तुमे सामान्य और विशेष यह दो धर्म रहते है उन दोय धर्मोका प्रतिपादन करने वाली भी दोय नय है । वस्तुके सामान्य धर्मका कहने वाला द्रव्यार्थिक नय है । और
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शिमला - प्रदेश विश्वविद्यालय के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान का इंटर डिसिप्लिनरी विभाग बनने का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा है। एक ओर जहां संस्थान विभाग का दर्जा मिलने का इंतजार कर रहा है तो वहीं संस्थान में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र संस्थान में मिलने वाली सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। संस्थान और छात्रों को मात्र इसी बात का इंतजार है कि विभाग की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर राज्यपाल की ओर से मंजूरी की मुहर लगाई जा सके। राज्यपाल के निर्देशों के बाद विवि प्रशासन की ओर से संस्थान मामले में रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट को राज्यपाल को सौंपे हुए दो माह के करीब का समय बीत गया है, लेकिन इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई फैसला संस्थान को लेकर नहीं आया है। हालांकि संस्थान को इंटर डिसिप्लिनरी विभाग सहित और फैकल्टी का दर्जा तो प्राप्त कर दिया गया है, पर इसके लिए जो अधिनियम की फाइल है, वह राजभवन में अटकी पड़ी है। जब तक इस पर फैसला नहीं आता है, तब तक संस्थान पर विभाग की मुहर नहीं लग पाएगी और न ही छात्रों को विभाग की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया हो पाएंगी। रिपोर्ट पर फैसला न हो पाने के चलते एक ओर जहां छात्र पीएचडी कोर्स में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे हैं, वहीं क्लास रूम जैसी सामान्य सुविधाएं भी छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं। अस्थायी तौर पर जिन कमरों की व्यवस्था विवि प्रशासन की ओर से की गई है, उन्हीं में छात्रों की कक्षाएं चल रही हैं। विभाग में चल रहे एमएससी एन्वायइनमेंट साइंस के साथ ही एमबीएआरडी कोर्स में किस फैकल्टी में छात्रों को डिग्रियां दी जानी हैं, यह भी तय नहीं है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संस्थान को इंटर डिसिप्लिनरी विभाग का दर्जा देकर, इसमें तीन अलग-अलग फैकल्टी स्कूल तय किए गए हैं। इन्हीं फैकल्टी के तहत छात्रों को उनकी डिग्रियां दी जानी हैं, परंतु अभी तक अधिनियम के तहत लाने की प्रक्रिया पूरी न होने के चलते इस अहम फैसले पर भी अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। संस्थान अभी भी उसी आधार पर चल रहा है, जिस पर पहले चल रहा था। संस्थान के भीतर छात्रों के समक्ष आ रही समस्याओं और मूलभूत सुविधाआें के अभावों को लेकर छात्रों ने विवि परिसर में आमरण अनशन कर अपना आंदोलन शुरू किया था। छात्रों के इस आंदोलन को वापस करने में विवि प्रशासन भी असफल रहा तो कुलाधिपति राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने छात्रों को संस्थान में जाकर अपनी कक्षाएं लगाने की बात कहते हुए संस्थान को विभाग और फैकल्टी देने का आश्वासन दिया था। राज्यपाल ने छात्रों को संस्थान में हर मूलभूत सुविधा देने का आश्वासान दिया था, लेकिन दिसंबर माह तक हालात न सुधरने से छात्र परेशान हैं। छात्र अब यही मांग कर रहे हैं कि राज्यपाल सौपीं गई रिपोर्ट पर जल्द से जल्द फैसला लें, जिससे की संस्थान को विभाग का दर्जा मिलने के साथ ही छात्रों को अन्य सुविधाएं भी मिल सकें।
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शिमला - प्रदेश विश्वविद्यालय के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान का इंटर डिसिप्लिनरी विभाग बनने का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा है। एक ओर जहां संस्थान विभाग का दर्जा मिलने का इंतजार कर रहा है तो वहीं संस्थान में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र संस्थान में मिलने वाली सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। संस्थान और छात्रों को मात्र इसी बात का इंतजार है कि विभाग की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर राज्यपाल की ओर से मंजूरी की मुहर लगाई जा सके। राज्यपाल के निर्देशों के बाद विवि प्रशासन की ओर से संस्थान मामले में रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट को राज्यपाल को सौंपे हुए दो माह के करीब का समय बीत गया है, लेकिन इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई फैसला संस्थान को लेकर नहीं आया है। हालांकि संस्थान को इंटर डिसिप्लिनरी विभाग सहित और फैकल्टी का दर्जा तो प्राप्त कर दिया गया है, पर इसके लिए जो अधिनियम की फाइल है, वह राजभवन में अटकी पड़ी है। जब तक इस पर फैसला नहीं आता है, तब तक संस्थान पर विभाग की मुहर नहीं लग पाएगी और न ही छात्रों को विभाग की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया हो पाएंगी। रिपोर्ट पर फैसला न हो पाने के चलते एक ओर जहां छात्र पीएचडी कोर्स में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे हैं, वहीं क्लास रूम जैसी सामान्य सुविधाएं भी छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं। अस्थायी तौर पर जिन कमरों की व्यवस्था विवि प्रशासन की ओर से की गई है, उन्हीं में छात्रों की कक्षाएं चल रही हैं। विभाग में चल रहे एमएससी एन्वायइनमेंट साइंस के साथ ही एमबीएआरडी कोर्स में किस फैकल्टी में छात्रों को डिग्रियां दी जानी हैं, यह भी तय नहीं है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संस्थान को इंटर डिसिप्लिनरी विभाग का दर्जा देकर, इसमें तीन अलग-अलग फैकल्टी स्कूल तय किए गए हैं। इन्हीं फैकल्टी के तहत छात्रों को उनकी डिग्रियां दी जानी हैं, परंतु अभी तक अधिनियम के तहत लाने की प्रक्रिया पूरी न होने के चलते इस अहम फैसले पर भी अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। संस्थान अभी भी उसी आधार पर चल रहा है, जिस पर पहले चल रहा था। संस्थान के भीतर छात्रों के समक्ष आ रही समस्याओं और मूलभूत सुविधाआें के अभावों को लेकर छात्रों ने विवि परिसर में आमरण अनशन कर अपना आंदोलन शुरू किया था। छात्रों के इस आंदोलन को वापस करने में विवि प्रशासन भी असफल रहा तो कुलाधिपति राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने छात्रों को संस्थान में जाकर अपनी कक्षाएं लगाने की बात कहते हुए संस्थान को विभाग और फैकल्टी देने का आश्वासन दिया था। राज्यपाल ने छात्रों को संस्थान में हर मूलभूत सुविधा देने का आश्वासान दिया था, लेकिन दिसंबर माह तक हालात न सुधरने से छात्र परेशान हैं। छात्र अब यही मांग कर रहे हैं कि राज्यपाल सौपीं गई रिपोर्ट पर जल्द से जल्द फैसला लें, जिससे की संस्थान को विभाग का दर्जा मिलने के साथ ही छात्रों को अन्य सुविधाएं भी मिल सकें।
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सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉन्गकॉन्ग मुक्त विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2021 के तहत संस्थान के चीनी और अंग्रेजी शीर्षकों को बदलने के लिए हांगकांग के मुक्त विश्वविद्यालय अध्यादेश (कैप 1145) में संशोधन करना चाहता है।
विधेयक को शुक्रवार को राजपत्रित किया गया था और इसे 23 जून को विधान परिषद में पेश किया जाएगा। यदि विधेयक पारित हो जाता है, तो विश्वविद्यालय का नया नाम 1 सितंबर से प्रभावी होगा।
पिछले साल दिसंबर में विश्वविद्यालय की परिषद ने नए शीर्षक को मंजूरी दी, जो इस विचार को व्यक्त करता है कि शिक्षण और अनुसंधान आधुनिक और अग्रगामी हैं और हॉन्गकॉन्ग और आसपास के इलाकों की समकालीन जरूरतों को पूरा करते हैं।
सन 1989 में स्थापित हॉन्गकॉन्ग का मुक्त विश्वविद्यालय माध्यमिक विद्यालय के स्नातकों और कामकाजी वयस्कों को विभिन्न स्तरों पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर एक पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ है। वर्तमान में इसमें अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या 9,600 है।
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सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉन्गकॉन्ग मुक्त विश्वविद्यालय विधेयक दो हज़ार इक्कीस के तहत संस्थान के चीनी और अंग्रेजी शीर्षकों को बदलने के लिए हांगकांग के मुक्त विश्वविद्यालय अध्यादेश में संशोधन करना चाहता है। विधेयक को शुक्रवार को राजपत्रित किया गया था और इसे तेईस जून को विधान परिषद में पेश किया जाएगा। यदि विधेयक पारित हो जाता है, तो विश्वविद्यालय का नया नाम एक सितंबर से प्रभावी होगा। पिछले साल दिसंबर में विश्वविद्यालय की परिषद ने नए शीर्षक को मंजूरी दी, जो इस विचार को व्यक्त करता है कि शिक्षण और अनुसंधान आधुनिक और अग्रगामी हैं और हॉन्गकॉन्ग और आसपास के इलाकों की समकालीन जरूरतों को पूरा करते हैं। सन एक हज़ार नौ सौ नवासी में स्थापित हॉन्गकॉन्ग का मुक्त विश्वविद्यालय माध्यमिक विद्यालय के स्नातकों और कामकाजी वयस्कों को विभिन्न स्तरों पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर एक पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ है। वर्तमान में इसमें अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या नौ,छः सौ है।
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वीडियो डेस्क। लखनऊ की थप्पड़ गर्ल याद है। जिसने कैब ड्राइवर को अनिगिनत थप्पड़ मारे। जिसका वीडियो भा वायरल हुआ था। मजे की बात तो ये है कि जिस लड़की को लोग सहानभूति दे रहे थे बाद में कैब ड्राइवर की बात सुनकर लोगों ने उतना ही गुस्सा किया। अब एक ऐसा ही वीडियो दिल्ली एनसीआर का वायरल हुआ है।
नई दिल्ली. सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) को पांच साल पूरे हो चुके हैं। 28-29 सितंबर 2016 की रात का समय था। भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मनों को ऐसा जख्म दिया, जो उन्हें ताउम्र याद रहेगा। 4 घंटे के अंदर पाकिस्तान (pakistan) में घुसकर आतंकियों के कैंपों को नेस्तानाबूत कर दिया था। फिर वापस अपने देश में भी चले आए। लेकिन सेना ने ऐसी प्लानिंग क्यों की? दरअसल, इस हमले की नींव 18 सितंबर को ही पड़ गई थी। जब आतंकियों ने कश्मीर के उरी में आर्मी कैम्प पर हमला किया, जिसमें सेना के 18 जवान शहीद हो गए। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ बताते हैं कि तीन घंटे में हमें सर्जिकल स्ट्राइक करने की इजाजत मिल गई थी। इस मिशन में बहुत बारीक से बारीक चीज का भी ध्यान रखा गया था। जानें कैसे तेंदुए के मल-मूत्र से दुश्मन को धोखा दिया गया था. . . ?
वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जिन्हें देखकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाते। एक ऐसा ही वीडियो एक स्कूटी चलाती लड़की का वायरल हो रहा है। जहां जैसे ही लड़की ने स्कूटी चलाने की कोशिश की स्कूटी का बैलेंस बिगड़ा और लड़की गिर गई।
वीडियो डेस्क। दूल्हा दुल्हन (Bride Groom) का वायरल हो रहा ये वीडियो आपको खुश कर देगा। शादी में दूल्हा लंबा और दुल्हन नाटी थी। कम हाइट की वजह से दुल्हन को दूल्हे के गले में वरमाला डालने में परेशानी हुई। दुल्हन की कोशिश जब नाकाम हो गई तो दूल्हे ने कुछ ऐसा किया जो सबको हैरान कर गया।
वीडियो डेस्क। अगले साल उत्तराखंड और यूपी समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उत्तराखंड में एक कार्यक्रम में आम आदमी की कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंचे आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने मंच से राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।
सूरत पुलिस ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- गलत साइड से गाड़ी चलाने से न सिर्फ आपको बल्कि सड़क पर चल रहे बाकी लोगो को भी खतरा हो सकता है।
वीडियो डेस्क। दोस्तों की मस्ती के कई वीडियो आपने देखे होंगे। लेकिन ये वीडियो देख आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। दरअसल एक पार्टी में कुछ दोस्तों ने अपने की नखरे दिखाने वाले दोस्त के साथ ऐसा प्रैंक किया जो वायरल हो गया।
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वीडियो डेस्क। लखनऊ की थप्पड़ गर्ल याद है। जिसने कैब ड्राइवर को अनिगिनत थप्पड़ मारे। जिसका वीडियो भा वायरल हुआ था। मजे की बात तो ये है कि जिस लड़की को लोग सहानभूति दे रहे थे बाद में कैब ड्राइवर की बात सुनकर लोगों ने उतना ही गुस्सा किया। अब एक ऐसा ही वीडियो दिल्ली एनसीआर का वायरल हुआ है। नई दिल्ली. सर्जिकल स्ट्राइक को पांच साल पूरे हो चुके हैं। अट्ठाईस-उनतीस सितंबर दो हज़ार सोलह की रात का समय था। भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मनों को ऐसा जख्म दिया, जो उन्हें ताउम्र याद रहेगा। चार घंटाटे के अंदर पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के कैंपों को नेस्तानाबूत कर दिया था। फिर वापस अपने देश में भी चले आए। लेकिन सेना ने ऐसी प्लानिंग क्यों की? दरअसल, इस हमले की नींव अट्ठारह सितंबर को ही पड़ गई थी। जब आतंकियों ने कश्मीर के उरी में आर्मी कैम्प पर हमला किया, जिसमें सेना के अट्ठारह जवान शहीद हो गए। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ बताते हैं कि तीन घंटे में हमें सर्जिकल स्ट्राइक करने की इजाजत मिल गई थी। इस मिशन में बहुत बारीक से बारीक चीज का भी ध्यान रखा गया था। जानें कैसे तेंदुए के मल-मूत्र से दुश्मन को धोखा दिया गया था. . . ? वीडियो डेस्क। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जिन्हें देखकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाते। एक ऐसा ही वीडियो एक स्कूटी चलाती लड़की का वायरल हो रहा है। जहां जैसे ही लड़की ने स्कूटी चलाने की कोशिश की स्कूटी का बैलेंस बिगड़ा और लड़की गिर गई। वीडियो डेस्क। दूल्हा दुल्हन का वायरल हो रहा ये वीडियो आपको खुश कर देगा। शादी में दूल्हा लंबा और दुल्हन नाटी थी। कम हाइट की वजह से दुल्हन को दूल्हे के गले में वरमाला डालने में परेशानी हुई। दुल्हन की कोशिश जब नाकाम हो गई तो दूल्हे ने कुछ ऐसा किया जो सबको हैरान कर गया। वीडियो डेस्क। अगले साल उत्तराखंड और यूपी समेत पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उत्तराखंड में एक कार्यक्रम में आम आदमी की कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंचे आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने मंच से राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। सूरत पुलिस ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- गलत साइड से गाड़ी चलाने से न सिर्फ आपको बल्कि सड़क पर चल रहे बाकी लोगो को भी खतरा हो सकता है। वीडियो डेस्क। दोस्तों की मस्ती के कई वीडियो आपने देखे होंगे। लेकिन ये वीडियो देख आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। दरअसल एक पार्टी में कुछ दोस्तों ने अपने की नखरे दिखाने वाले दोस्त के साथ ऐसा प्रैंक किया जो वायरल हो गया।
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कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन जहां आरपार की लड़ाई का ऐलान कर 26 नवंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं, दिल्ली पुलिस से अभी तक प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली है, लेकिन किसान दिल्ली कूच को तैयार हैं..
तीनों नए कृषि कानूनों के विरोध में देश के कई राज्यों के किसान संगठनों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया है। इस मोर्चे की अगुवाई में ही किसान 26 नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे। संविधान दिवस के मौके पर किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान किया है।
चंढ़ीगढ़ में बृहस्पतिवार को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई के लिए बनाए गए संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की दूसरी बैठक हुई। जिसमें कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में तय किया गया है केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर लादे गए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है ऐसे में सबको मिलकर लड़ना होगा और आरपार के लिए चलो दिल्ली के आह्वान पर राष्ट्रीय राजधानी में अनिश्चितकालीन संघर्ष शुरू होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा की पहली बैठक 7 नवंबर को दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई थी। मोर्चा के संचालन और देशभर के किसान संगठनों से तालमेल के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सरदार बलबीर सिंह राजेवाल, शिवकुमार कक्काजी, सरदार जगजीत सिंह दल्लेवाल, सरदार गुरनाम सिंह चढूनी, सरदार वीएम सिंह, योगेंद्र यादव और राजू शेट्टी (उनकी अनुपस्थिति में हन्नान मौल्ला) शामिल हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि 26 नवंबर को दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के किसान पांच मार्गों से राजधानी पहुंचेंगे। अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (कुंडली बॉर्डर), हिसार-दिल्ली राजमार्ग (बहादुरगढ़), जयपुर-दिल्ली राजमार्ग (धारूहेड़ा), बरेली-दिल्ली राजमार्ग (हापुड़), आगरा-दिल्ली राजमार्ग (बल्लभगढ़) पर एकत्रित होकर किसान दिल्ली के लिए मार्च करेंगे।
राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, " पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचेगे बाकि आसपास राज्यों (हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के किसान सड़क और रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचेगे। ये प्रदर्शन शांति पूर्वक होगा।"
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना के दौरान 6 जून को विधेयक के रुप में कृषि सुधार के लिए तीन नए बिल लाई थी। इनमें खुला बाजार मंडी और समझौता खेती और खाद्य वस्तुओं के भंडारण आदि से जुड़े कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल ( Farmers' Produce Trade & Commerce (Promotion & Facilitation) Bill 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 Farmers (Empowerment & Protection) Agreement on Price Assurance & Farm Services Bill 2020 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 (The Essential Commodities (Amendment) Bill) 2020 शामिल थे, जिन्हें भारी विरोध के बीच संसद में पास कराया गया और 27 सितंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देशभर में कानून बनकर लागू हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान संगठन और किसानों हितों के पैरोंकार लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। पंजाब में एक अक्टूबर से ट्रेन सेवाएं बंद हैं। 13 नवंबर को पंजाब की 29 किसान यूनियन के संगठन दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल से मिले थे लेकिन कोई बात नहीं बन पाई।
किसान संगठन तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाने और प्रस्ताविक बिजली बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि नए कृषि कानून किसानों की भलाई और कृषि में अमूलचूल लाने वाले हैं इसलिए इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। वहीं दिल्ली कूच का ऐलान कर चुके किसान संगठन दिल्ली में निर्याणक लड़ाई के लिए अनिश्चित कालीन प्रदर्शन के लिए तैयार हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के तहत दिल्ली कूच के प्रमुख आयोजकों में राष्ट्रीय किसान महासंघ, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी), भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, स्वराज अभियान, शेतकरी संघटन समेत देश के कई राज्यों से किसान संगठन शामिल हैं। अभिमन्यु कोहाड़ के मुताबिक दिल्ली कूच में पंजाब की 30 कृषि संगठन के अलावा पूरे देश से करीब 500 संगठन शामिल होंगे।
अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को बताया, "कोरोना और आवागमन को देखते हुए किसान संगठनों से सामूहिक रुप से निर्णय लिया है कि दिल्ली के करीबी राज्यों के किसान दिल्ली आएंगे जबकि दक्षिण के राज्य स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। जैसे कर्नाटक में गन्ना किसान एसोसिएशन 27 नवंबर को जेलभरो आंदोलन करेगी।'
बृहस्पतिवार को हुई बैठक में पंजाब में केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक नाकेबंदी खोलने, मालगाड़ियों को तुरंत शुरु करने और किसान आंदोलन के दौरान देश में जहां भी किसानों पर मुकदमें दर्ज किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।
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कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन जहां आरपार की लड़ाई का ऐलान कर छब्बीस नवंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं, दिल्ली पुलिस से अभी तक प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली है, लेकिन किसान दिल्ली कूच को तैयार हैं.. तीनों नए कृषि कानूनों के विरोध में देश के कई राज्यों के किसान संगठनों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया है। इस मोर्चे की अगुवाई में ही किसान छब्बीस नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे। संविधान दिवस के मौके पर किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान किया है। चंढ़ीगढ़ में बृहस्पतिवार को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई के लिए बनाए गए संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की दूसरी बैठक हुई। जिसमें कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में तय किया गया है केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर लादे गए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है ऐसे में सबको मिलकर लड़ना होगा और आरपार के लिए चलो दिल्ली के आह्वान पर राष्ट्रीय राजधानी में अनिश्चितकालीन संघर्ष शुरू होगा। संयुक्त किसान मोर्चा की पहली बैठक सात नवंबर को दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई थी। मोर्चा के संचालन और देशभर के किसान संगठनों से तालमेल के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सरदार बलबीर सिंह राजेवाल, शिवकुमार कक्काजी, सरदार जगजीत सिंह दल्लेवाल, सरदार गुरनाम सिंह चढूनी, सरदार वीएम सिंह, योगेंद्र यादव और राजू शेट्टी शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि छब्बीस नवंबर को दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के किसान पांच मार्गों से राजधानी पहुंचेंगे। अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग , हिसार-दिल्ली राजमार्ग , जयपुर-दिल्ली राजमार्ग , बरेली-दिल्ली राजमार्ग , आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर एकत्रित होकर किसान दिल्ली के लिए मार्च करेंगे। राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, " पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचेगे बाकि आसपास राज्यों के किसान सड़क और रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचेगे। ये प्रदर्शन शांति पूर्वक होगा।" केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना के दौरान छः जून को विधेयक के रुप में कृषि सुधार के लिए तीन नए बिल लाई थी। इनमें खुला बाजार मंडी और समझौता खेती और खाद्य वस्तुओं के भंडारण आदि से जुड़े कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य बिल Bill दो हज़ार बीस, कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, दो हज़ार बीस Farmers Agreement on Price Assurance & Farm Services Bill दो हज़ार बीस और आवश्यक वस्तु अधिनियम दो हज़ार बीस Bill) दो हज़ार बीस शामिल थे, जिन्हें भारी विरोध के बीच संसद में पास कराया गया और सत्ताईस सितंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देशभर में कानून बनकर लागू हैं। पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान संगठन और किसानों हितों के पैरोंकार लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। पंजाब में एक अक्टूबर से ट्रेन सेवाएं बंद हैं। तेरह नवंबर को पंजाब की उनतीस किसान यूनियन के संगठन दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल से मिले थे लेकिन कोई बात नहीं बन पाई। किसान संगठन तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाने और प्रस्ताविक बिजली बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि नए कृषि कानून किसानों की भलाई और कृषि में अमूलचूल लाने वाले हैं इसलिए इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। वहीं दिल्ली कूच का ऐलान कर चुके किसान संगठन दिल्ली में निर्याणक लड़ाई के लिए अनिश्चित कालीन प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के तहत दिल्ली कूच के प्रमुख आयोजकों में राष्ट्रीय किसान महासंघ, भारतीय किसान यूनियन , भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, स्वराज अभियान, शेतकरी संघटन समेत देश के कई राज्यों से किसान संगठन शामिल हैं। अभिमन्यु कोहाड़ के मुताबिक दिल्ली कूच में पंजाब की तीस कृषि संगठन के अलावा पूरे देश से करीब पाँच सौ संगठन शामिल होंगे। अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को बताया, "कोरोना और आवागमन को देखते हुए किसान संगठनों से सामूहिक रुप से निर्णय लिया है कि दिल्ली के करीबी राज्यों के किसान दिल्ली आएंगे जबकि दक्षिण के राज्य स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। जैसे कर्नाटक में गन्ना किसान एसोसिएशन सत्ताईस नवंबर को जेलभरो आंदोलन करेगी।' बृहस्पतिवार को हुई बैठक में पंजाब में केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक नाकेबंदी खोलने, मालगाड़ियों को तुरंत शुरु करने और किसान आंदोलन के दौरान देश में जहां भी किसानों पर मुकदमें दर्ज किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।
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शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय बालाघाट में परीक्षा की गोपनीयता भंग करना [तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]
58. ( क्र. 1013 ) डॉ. योगेन्द्र निर्मल : क्या राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आर.जी.पी.वी. भोपाल के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा में एक्सटरनल एवं इंटरनल द्वारा दिये गये परिणाम को क्या प्राचार्य द्वारा परिवर्तित करने का कोई नियम है? (ख) क्या म.प्र. परीक्षा अधिनियम में परीक्षा परिणाम आने के पूर्व प्रायोगिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिका का पुनःमूल्याकंन किया जा सकता है? यदि नहीं, तो शासकीय पॉलीटेकनिक महाविद्यालय, बालाघाट में तत्कालीन प्राचार्य आर.एम.सोनबे द्वारा प्रायोगिक परीक्षा के 40 दिन पश्चात अंतिम परिणाम के पूर्व बंद लिफाफे खुलवाकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग अंतिम सेमेस्टर की एक छात्रा एवं एक छात्र के परिणाम परिवर्तित किये गये? क्या यह नियम एवं कानून संगत हैं? यदि नहीं, तो उक्त संबंध में व्याख्याता श्रीमती दीप्ति हनवत द्वारा दिनांक 03/07/2017 को संचालक तकनीकी शिक्षा के समक्ष की गई शिकायत आर.एम.सोनबे तत्कालीन प्राचार्य को निलंबित क्यों नहीं किया गया? (ग) यदि इस संबंध में कोई जाँच कमेटी गठित की गई है, तो क्या कोई प्रतिवेदन शासन को प्राप्त हुआ है? यदि प्रतिवेदन में कमेटी ने माना कि यह विश्वविद्यालय के नियमों के अनुकूल नहीं है, तो तत्कालीन प्राचार्य को अब तक निलंबित क्यो नहीं किया गया एवं उनके विरूद्ध विभागीय जाँच क्यो नहीं करवाई गई? क्या उक्त प्राचार्य को निलंबित किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक कैलाश जोशी ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। जी हाँ । जी नहीं। संबंधित प्राचार्य को संचालनालय के पत्र दिनांक 21.11.2017 द्वारा चेतावनी पत्र जारी किया गया तथा विभागीय आदेश दिनांक 26.09.2017 के द्वारा श्री आर.एम.सोनवे के स्थान पर श्री अनिल कुमार सिंघई को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा जाँच समिति का गठन किया गया तथा समिति का जाँच प्रतिवेदन पत्र दिनांक 03.11.2017 द्वारा संचालनालय तकनीकी शिक्षा को भेजा गया है। जाँच प्रतिवेदन के आधार पर संचालक द्वारा श्री आर.एम.सोनवे को चेतावनी पत्र दिनांक 21.11.2017 को जारी किया गया है शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
पुलिस विभाग द्वारा की जा रही ई-नोटिस कार्यवाही [गृह]
59. ( क्र. 1023 ) श्री राजेश सोनकर : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पुलिस विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के किन-किन शहरों में यातायात नियम के उल्लंघन पर वाहन चालक को ई-नोटिस भेजे जा रहे हैं? ईनोटिस कार्यवाही प्रदेश में कब से प्रारंभ की गई है? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में प्रदेश में पुलिस विभाग द्वारा कितने वाहन चालकों को ई-नोटिस भेजे गये है? ई-नोटिस किस नियम व आदेश के तहत भेजे गये स्पष्ट करें व किस सक्षम अधिकारी को ई-नोटिस पर हस्ताक्षर करके ई-नोटिस जारी करने के अधिकारी हैं? (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में ई-नोटिसों द्वारा प्रश्न दिनांक तक विभिन्न शहरों में कितनी राशि शमन शुल्क के रूप में वसूली गई? कितनी राशि वसूल की जाना शेष है वसूली के लिये न्यायालय में कितने प्रकरण प्रस्तुत किये गये व कितने ई-नोटिस न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये और क्यों नहीं किये गये कारण बतायें? (घ) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में ई-नोटिस कार्यवाही के लिये शासन द्वारा कब नोटिफिकेशन कराया गया एवं माननीय कोर्ट द्वारा क्या कोई आदेश जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो नोटिफिकेशन व कोर्ट आदेश की प्रति उपलब्ध करायें?
गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जिला भोपाल एवं जिला इन्दौर शहरों में यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-नोटिस भेजे जा रहे है। ई-नोटिस कार्यवाही जिला भोपाल में दिनांक 01.01.2013 एवं जिला इन्दौर में दिनांक 27.01.2015 से प्रारम्भ की गई । (ख) यातायात शाखा भोपाल में दिनांक 01.01.2013 से 14.11.2017 तक 1,51,325 एवं यातायात शाखा इंदौर में दिनांक 27.01.2015 से 09.11.2017 तक 5,71,799 वाहन चालकों को ईनोटिस भेजे गये। ई-नोटिस मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 51/177, 119/177, 128/177, 129/177 के तहत भेजे जा रहे है। थाना प्रभारी यातायात के हस्ताक्षर उपरान्त ई-नोटिस जारी किये जा रहे है। (ग) यातायात शाखा भोपाल द्वारा ई-नोटिस से दिनांक 14.11.2017 तक कुल राशि रू. 1,95,11,450/- एवं यातायात शाखा इंदौर द्वारा ई-नोटिस से दिनांक 09.11.2017 तक कुल राशि रू. 7,79,68,750/- समन शुल्क प्राप्त किया गया। यातायात शाखा भोपाल द्वारा शेष 91,107 एवं यातायात शाखा इंदौर द्वारा शेष 2,94,068 ई-नोटिस पर निराकरण शेष है, इस
संबंध में कार्यवाही की जा रही है। चूकि ई-नोटिस का निराकरण अंतिम रूप से माननीय न्यायालय द्वारा किया जाता है, अथवा यातायात थाने में समन शुल्क का भुगतान प्राप्त किया जाता है, अतः शेष ई-नोटिस से समन शुल्क के रूप में प्राप्त होने वाली राशि का आंकलन नहीं किया जा सकता। यातायात शाखा भोपाल द्वारा ई-नोटिस स्मरण की कार्यवाही किये जाने के कारण माननीय न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये है। यातायात शाखा इंदौर से वर्तमान में माननीय न्यायालय में ई-नोटिस संबंधी कोई प्रकरण लंबित नहीं है। यातायात शाखा इंदौर द्वारा 1,46,172 ई-नोटिस का समन शुल्क का भुगतान यातायात थाने में प्राप्त होने के कारण माननीय न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये है। (घ) ई-नोटिस कार्यवाही के संबंध में म.प्र. शासन द्वारा म.प्र. राजपत्र क्रमांक-100 दिनांक 03.03.2016 में उल्लेख है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। माननीय न्यायालय द्वारा कोई आदेश इस संबंध में नहीं है।
सांवेर विधानसभा क्षेत्र में स्थित सांवेर रोड जेल का अधूरा निर्माण कार्य प्रारंभ कराना [जेल ]
60. ( क्र. 1024 ) श्री राजेश सोनकर : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि तारांकित प्रश्न (क्र.467) दिनांक 22.07.2015 के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन द्वारा सांवेर विधानसभा क्षेत्र में स्थित सांवेर रोड जेल को अधूरा निर्माण कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु पूर्व प्रश्न दिनांक से आज प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही कि गई? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या जेल विभाग द्वारा इन्दौर कि जेलों में कैदियों की अधिकता होने से जेल में बदं कैदियों को परेशानी के सम्बंध में जेलरों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया? क्या इन्दौर की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी परिरूद्ध है? (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में अधूरी पड़ी जेल के निर्माण कार्यों को कब तक पूर्ण कराया जायेगा व किस एजेन्सी द्वारा कार्य को फिर से प्रारंभ कराया जायेगा? समय-सीमा बतायें?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) भारत सरकार द्वारा 14 वें वित्त आयोग में धनराशि की मांग अमान्य किये जाने के कारण अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण कराने हेतु राज्य योजना में धनराशि उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही वर्ष 2017-18 के बजट में राशि रूपये 30.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके पश्चात् आधुनिक एवं सुरक्षित जेल भवन के नक्शे, विस्तृत प्राक्कलन लोक निर्माण विभाग (पी.आई.यू.) से तकनीकी स्वीकृति उपरांत प्राप्त किये गए, जिन्हें राज्य मंत्रि-परिषद् के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया है। (ख) जी हाँ। इंदौर की जेलों में कैदियों की अधिकता विभाग के संज्ञान में है। (ग) निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) द्वारा किया जायेगा, जिसमें लगभग 03 वर्षों का समय लगना संभावित है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है । उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा में मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय विद्यालय भवन निर्माण
61. ( क्र. 1043 ) श्री तरूण भनोत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अधो हस्ताक्षरी ने अपने पत्र क्र.2933 एवं 2934 दिनांक 23.10.2017 को कलेक्टर जबलपुर एवं प्रमुख सचिव राजस्व एवं आयुक्त नगर निगम जबलपुर को गढ़ा क्षेत्र जबलपुर में शासकीय रिक्त भूमि के संबंध में खसरा एवं नक्शा प्रदाय कर मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय स्कूल भवन निर्माण हेतु लेख किया था? (ख) यदि हाँ, तो उप नगरीय क्षेत्र गढ़ा में स्थित शासकीय रिक्त भूमि पर शासन की मंशा अनुसार मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय विद्यालय भवन निर्माण हेतु प्रकिया कब तक पूर्ण कर ली जावेगी? (ग) क्या वर्णित (क) हेतु उपलब्ध शासकीय भूमि पर भू-माफियों द्वारा कब्जा किया जा रहा है? क्या जिला प्रशासन उक्त भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करवा कर वर्णित (क) का निर्माण कार्य सुनिश्चित करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ । प्रथम पत्र में भूमि के खसरा नंबर इत्यादि का उल्लेख है परन्तु द्वितीय पत्र में किसी खसरे नंबर का उल्लेख नहीं है। प्रथम पत्र में दिये गये प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है। द्वितीय पत्र के संबंध में उल्लेखित भूमि पूर्व से आवंटित है, परन्तु मान. उच्च न्यायालय में प्रकरण प्रचलित है। (ख) मिनी स्टेडियम का प्रस्ताव अभी परीक्षणा धीन है। केन्द्रीय विद्यालय हेतु ग्राम गढ़ा स्थित भूमि खसरा नंबर 117/2 एवं खसरा नंबर 118 में से 2.9 हेक्टे. भूमि आवंटित की जा चुकी है। परन्तु माननीय उच्च न्यायालय में उक्त भूमि के संबंध में एक डब्ल्यू.पी. 618/2008 लं बित है। जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा यथा स्थिति का आदेश दिया गया है। प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने से कार्यवाही पूर्ण होने में तिथि बतायी जाना संभव नहीं है। (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित प्रथम पत्र में उल्लेखित भूमि के संबंध में परीक्षण कराया जा रहा है, जाँच उपरान्त
अतिक्रमण पाये जाने पर मुक्त कराने की कार्यवाही की जावेगी। द्वितीय पत्र के संबंध में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने से समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है।
असाधारण पारिवारिक पेंशन का पुनरीक्षण [गृह]
62. ( क्र. 1044 ) श्री तरूण भनोत : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश सरकार ने असाधारण पारिवारिक पेंशन के नियमों में बदलाव कर दिया है? अब शहीद की पत्नी को प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर समय-समय पर बढ़ने वाला मंहगाई भत्ता व वेतन पुनरीक्षण का लाभ प्राप्त होने का प्रावधान कर दिया है? (ख) यदि वर्णित (क) हाँ, तो क्या यह सही है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में कार्यरत शहीद स्व. राजेश तिवारी प्र.आर. क्र. 298 की पत्नी सुनीता तिवारी निवासी 1517, नवनिवेश कालोनी, गढ़ा जबलपुर को असाधारण पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी, जो आज दिनांक तक किसी भी वेतनमान आने पर पुनरीक्षण नहीं की गयी ? (ग) क्या उक्त शहीद की पत्नी की असाधारण पारिवारिक पेंशन पुनरीक्षण हेतु अधोहस्ताक्षरी द्वारा मान. गृह मंत्री एवं पुलिस महानिदेशक भोपाल को भी पत्रों के माध्यम से अवगत कराया था? (घ) यदि वर्णित (क) से (ग) सही है तो कब तक शहीद की पत्नी को पाँचवे एवं छठवें वेतनमान के अनुसार असाधारण पेंशन का पुनरीक्षण कब तक कर दिया जावेगा?
गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। अब असाधारण परिवार पेंशन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के पीड़ित परिवार को समय-समय पर बढ़ने वाला मंहगाई भत्ता प्राप्त होने का प्रावधान वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 29.09.2017 जारी कर शासकीय सेवकों के लिए स्वीकृत मंहगाई भत्ते का लाभ, समान रूप से प्रदान किये जाने का लाभ दिया गया है। वेतन पुनरीक्षण के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। (ख) वेतन पुनरीक्षण के संबंध में कोई प्रावधान न होने से कार्यवाही नहीं की गई। (ग) जी हाँ । (घ) प्रश्नांश (क) और (ख) के उत्तर के संदर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
चाही गई जानकारी न देने के लिए दोषियों पर कार्यवाही
63. ( क्र. 1082 ) श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा प्रश्न क्र. 94 (7010) दिनांक 31.03.2016, प्रश्न क्र. 71 (1399) दिनांक 22.07.2016, प्रश्न क्र. 25 (436) दिनांक 19.07.2017 प्रश्न क्र. 74 (6264) दिनांक 27.03.2017 एवं ध्यानाकर्षण सूचना दिनांक 14.07.2017 के माध्यम से रीवा शहर की जमीनों से संबंधित जानकारियां चाही गई थी, जो अप्राप्त हैं? अगर जानकारी संकलित की जा चुकी हो तो जानकारी की प्रति देते हुए बतावें कि दिनांक 27.03.2017 के बाद नगरपालिका निगम रीवा की शासकीय एवं नजूल की भूमियों को किन-किन संविदाकारों/ठेकेदारों को किन शर्तों एवं अवधि के लिए आवंटित की गई प्रति पृथक से देते हुए बतावें? (ख) प्रश्नांश (क) की जानकारी संबंधितों द्वारा बार-बार प्रश्न लगाने पर नहीं दी जा रही तो इसके लिए कौन-कौन जवाबदार है, जवाबदारों के ऊपर क्या कार्यवाही प्रस्तावित करेंगे, अगर नहीं तो क्यों?
राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) 1- नगर पालिक निगम रीवा क्षेत्रान्तर्गत चूना भट्ठा, बस स्टैण्ड समान रकवा 5.97 एकड़ में शासन द्वारा स्वीकृत PPP- योजना के तहत 1.29 एकड़ भूमि व्यवसायिक कॉम्पलेक्स/मल्टीप्लेक्स निर्माण हेतु स्वीकृत निविदा के तहत प्रीमियम राशि रूपये 8,53,00,999=00 एवं रूपये 1.50 लाख मासिक किराया पर मे. समदडिया बिल्डर्स जबलपुर को दी गई है जिसमें व्यवसायिक काम्पलेक्स/मल्टीपलेक्स एवं आवासीय फ्लैट निर्मित किये गये है। उक्त योजना के तहत 30 वर्षों तक बस स्टैण्ड/व्यवसायिक कॉम्पलेक्स का रख-रखाव समदडिया बिल्डर्स द्वारा किये जाने का प्रावधान है। 2- नगर पालिका निगम रीवा क्षेत्रान्तर्गत म.प्र. शासन की पुर्नघनत्वीकरण योजना अन्तर्गत दो शासकीय भूमियों का व्ययन किया गया है। (i) बालभारती स्कूल के सामने स्थित 15000 वर्गमीटर शासकीय भूमि का व्ययन-योजना के बिड की स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन की साधिकार समिति की बैठक दिनांक 13.06.12 से हुई। बिड मेसर्स समदडिया बिल्डर्स प्रा.लि. जबलपुर के पक्ष में स्वीकृत हुई। आफर राशि रूपये 36,99,99,999.00 है। योजना के अनुबंध का निष्पादन दिनांक 05.12.2012 को किया गया है। इसके तहत बिल्डर्स को 15000 वर्गमीटर भूमि व्यवसायिक उपयोग हेतु दिया जाना एवं बिल्डर्स द्वारा शासकीय संपत्ति के निर्माण के तहत नवीन कलेक्ट्रेट भवन, 54 शासकीय आवास सिविल लाईन एवं हाकर्स मार्केट का निर्माण किया जाना है। शासकीय निर्माण कार्य की लागत रूपये 18.60 करोड़ है। शेष राशि शासन
के खाते में जमा किया जाना है। (ii) एस. पी. बंगले के सामने स्थित 4718.45 वर्गमीटर शासकीय भूमि का व्ययनयोजना के बिड की स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन साधिकार समिति की बैठक दिनांक 04.04.15 से हुई। बिड मेसर्स समदडिया बिल्डर्स प्रा. लि. जबलपुर के पक्ष में स्वीकृत हुई। आफर राशि रूपये 24,23,99,999/- है। योजना के अनुबंध का निष्पादन दिनांक 27.05.2015 को किया गया है। इसके तहत बिल्डर को 471845 वर्गमीटर भूमि व्यवसायिक उपयोग हेतु दिया जाना एवं बिल्डर द्वारा शासकीय संपत्ति के निर्माण के तहत आडिटोरियम एवं कुलपति आवास का निर्माण किया जाना है। शासकीय निर्माण कार्य की लागत रूपये 18.38 करोड़ है। शेष राशि शासन के खाते में जमा किया जाना है। उक्त दोनों भूमियां 30 वर्षों की लीज पर दी जानी है। दोनों योजनाओं के तहत शासकीय संपत्ति का निर्माण प्रगति पर है। (ख) किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं की गई है। अतः दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही का प्रश्न ही नहीं उठता।
मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करना
[राजस्व ]
64. ( क्र. 1092 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में किन-किन ग्रामों में मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित किये जाने की प्रक्रिया शासन द्वारा की जा रही है? ग्राम का नाम सहित जानकारी उपलब्ध करावें? (ख) प्रश्न की कंडिका (क) की जानकारी अनुसार जिन ग्रामों में मजरों टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है, उनको कब तक राजस्व ग्राम घोषित किया जावेगा?
राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ग्राम- हिनोत्या के मजरे भरतगढ़ को राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। (ख) ग्राम हिनोत्या के मजरे भरतगढ़ को प्र.क्र. 013/बी-121/1617 में आदेश क्रमांक 27/प्रवा./2016 दिनांक 1.12.2016 से राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। म.प्र. शासन की अधिसूचना दिनांक 24.10.17 को अधिकार अभिलेख बनाने हेतु आदेश जारी किये गये हैं।
सागर जिले में रतौना फार्म पर डेरी व्यवसाय का विस्थापन
65. ( क्र. 1102 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सागर नगर से दुधारू पशुओं (डेरी विस्थापन) को रतौना कृषि फार्म विस्थापित किये जाने एवं गोकुल ग्राम बनाये जाने हेतु कोई कार्ययोजना बनायी गयी है? (ख) यदि हाँ, तो इस कार्ययोजना में कौन-कौन से कार्य किये जाना प्रस्तावित हैं? इस संबंध में शासन द्वारा अब तक क्या कार्यवाही की गयी है? (ग) प्रश्नाधीन कार्य योजना पर कब तक कार्य प्रारंभ किया जावेगा?
पशुपालन मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) सागर नगर से दुधारू पशुओं (डेयरी विस्थापन) को रतौना कृषि फार्म विस्थापित किए जाने संबंधी पशुपालन विभाग की कोई कार्य योजना नहीं है। रतौना में गोकुल ग्राम स्थापना की राज्य शासन द्वारा कोई कार्य योजना नहीं बनाई गई है। इस संदर्भ में भारत सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के वेस्ट (कचरा) निष्पादन [पर्यावरण]
66. ( क्र. 1103 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासकीय चिकित्सालयों में मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने का विशिष्ट प्रावधान है? (ख) जिला चिकित्सालय सागर एवं बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज सागर के मेडिकल वेस्ट को एकत्रित करने की क्या व्यवस्था, प्रक्रिया हैं? इस वेस्ट को नष्ट करने की प्रक्रिया से अवगत करायें। (ग) क्या उक्त चिकित्सालयों के मेडिकल कचरे को खुले में फेंके जाने से प्रदूषण एवं जन सामान्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर होने से जन असंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है? इस गंभीर त्रुटि के लिए कौन उत्तरदायी है? विभाग इस संबंध में क्या कार्यवाही कर रहा है? (घ) विभाग इन चिकित्सालयों के मेडिकल वेस्ट को एकत्रित एवं नष्ट करने के लिये क्या व्यवस्था करेगा?
पशुपालन मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) जी नहीं। (ख) चिकित्सालयों के मेडिकल वेस्ट के एकत्रीकरण एवं विनिष्टीकरण हेतु जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 की अनुसूची-1 में प्रक्रिया निर्धारित की गई है तथा प्रश्नाधीन चिकित्सालयों द्वारा प्रक्रिया अनुसार वेस्ट का एकत्रण स्वतः तथा वेस्ट का विनिष्टीकरण साझा जैव चिकित्सा अपशिष्ट शोधन सुविधा (सी.बी.डब्ल्यू.टी.एफ.) के माध्यम से किया जाता है। (ग) प्रश्नाधीन चिकित्सालयों द्वारा मेडिकल कचरे को खुले में नहीं फेका जाता है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्नांश (ख) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में व्यवस्था विद्यमान है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण [तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]
67. ( क्र. 1162 ) श्री नारायण सिंह कुशवाह : क्या राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) डॉ. भीमराव अम्बेडकर पॉलिटेक्निक महाविद्यालय ग्वालियर में कुल कितने अधिकारी/कर्मचारी स्थाई/अस्थाई में व संविदा नियुक्ति पर विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत कार्य कर रहे हैं? इन सबको कितना - कितना वेतन किस किस मद से मिलता है? क्रमानुसार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांकित कौन-कौन अधिकारी / कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से संविदा नियुक्ति पर अनुबंध 03 माह, 06 माह में करके लगातार कार्य कर रहे हैं, उन्हें केवल 3000 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है? (ग) प्रश्नांकित में संविदा पर ऐसे पदस्थ कर्मियों को वेतन कलेक्टर वेतन दर पर किये जाने व शासन के नियम आदेश के अनुसार स्थाई नियुक्ति प्रदान करेंगे?
राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक कैलाश जोशी ) : (क) डॉ. भीमराव अम्बेडकर पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, ग्वालियर में ए.आई.सी.टी.ई. द्वारा स्वीकृत ई.एम.डी. परियोजना में पारिश्रमिक के रूप में अनुबंध के आधार पर ऑफिस अस्सिटेंट के रूप में श्रीमती संध्या शुक्ला एवं हेल्पर के रूप में श्री संजय पाल नियुक्त है। जिन्हें क्रमशः रूपये 3000/- एवं 2000/- प्रतिमाह पारिश्रमिक योजना की गाईड लाईन के अनुसार प्रदान किया जाता है । (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर में उल्लेखित श्रीमती संख्या शुक्ला (ऑफिस अस्सिटेंस) के अतिरिक्त इस तरह की कोई अन्य नियुक्ति संख्या में नहीं की गई है। (ग) परियोजना ई.एम.डी. भारत सरकार की वित्तीय सहायता एवं मार्गदर्शिका के अनुसार प्रारंभ की गई है। परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति के राज्य शासन के कोई प्रावधान नहीं है।
मत्स्य बीज उत्पादन
[मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास]
68. ( क्र. 1163 ) श्री नारायण सिंह कुशवाह : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर शहर में गोला का मंदिर भिंड रोड पर विभाग का कार्यालय व भूमि एवं मत्स्य बीज उत्पादन मछली पालने के कितने टेंक बने हैं वर्तमान में कितनी मछली व बीज का उत्पादन हो रहा है? (ख) क्या उपरोक्त सभी टेंकों में पानी भरने का पर्याप्त साधन है? अगर पानी का साधन नहीं है, तब पानी की व्यवस्था के लिए क्या कार्यवाही की गई? (ग) क्या उपरोक्त विभाग की भूमि पर अतिक्रमण है? अगर अतिक्रमण है तब हटाने की क्या कार्यवाही की गई ?
पशुपालन मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) 10 नर्सरी पोण्ड एवं 02 ब्रीडर्स पोण्ड बने है। इस प्रक्षेत्र से मछली का उत्पादन नहीं होता। इस प्रक्षेत्र से मछली का बीज उत्पादन हो रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 1.35 लाख का उत्पादन किया गया है। (ख) जी हाँ। इस वर्ष पर्याप्त बारिश न होने के कारण उपयोगी टयूबवेल्स में पानी की उपलब्धता न होने से नवीन ट्यूबवेल्स का खनन कराया गया उसमें पानी उपलब्ध न होने से पानी की उपलब्धता हेतु हाईडो फेक्चरिंग की कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) जी नहीं। अतः शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता।
ग्रामीण पेयजल योजना स्वीकृति
[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]
69. ( क्र. 1164 ) श्री अनिल जैन : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी की समस्त ग्राम पंचायतों में ग्रामीण पेयजल योजना स्वीकृत की गयी है, यदि हाँ, तो इस योजना में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम एवं स्वीकृत राशि बताई जावे? (ख) उक्त योजना के यदि कार्य आदेश
जारी नहीं किये गये हैं, तो कब तक जारी किये जायेंगे तथा यदि कार्य आदेश जारी किये जा चुके हैं तो निर्माण कार्य कब तक प्रारम्भ हो सकेगा?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी नहीं। निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 34 ग्रामों की निवाड़ी समूह जल प्रदाय योजना लागत रू. 72.66 करोड़ एवं 145 ग्रामों की निवाड़ी - पृथ्वीपुर- (प्रथम) समूह योजना लागत रू. 194.20 करोड़ (जिसमें निवाड़ी विधानसभा के 128 ग्राम, शामिल हैं) की प्रशासकीय स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 एवं 2 अनुसार है। (ख) 34 ग्रामों की निवाड़ी समूह जलप्रदाय योजना के कार्यादेश जारी किये जाकर कार्य प्रगति पर है तथा 145 ग्रामों की निवाड़ीपृथ्वीपुर (प्रथम) समूह जलप्रदाय योजना की निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, निर्माण कार्य प्रारंभ होने की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
हत्यारों एवं उनके आंतक के विरूद्ध कार्यवाही
70. ( क्र. 1173 ) श्री केदारनाथ शुक्ल : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शिवकुमार कोल, ग्राम तेन्दुआ, पुलिस चौकी- जमोड़ी, थाना सीधी की हत्या दिनांक 05.07.2017 को की गई थी? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित व्यक्ति हत्या से एक दिन पूर्व मजदूरी करने एवं अन्य मजदूरों के साथ शाम की छुट्टी के उपरांत किनकिन व्यक्तियों से मिला? क्या उसके मजदूर साथियों एवं अन्य साथियों से गहन पूछताछ की गई? यदि हाँ, तो हत्यारों के नाम बताएं? (ग) यदि नहीं, तो क्या उक्त हत्या का आज तक कोई सुराग नहीं मिला है? यदि हाँ, तो क्या इसकी सी.बी.आई. जाँच कराई जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक?
गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ । (ख) मृतक हत्या से एक दिन पूर्व कमलेश उर्फ पोकवा सेन, अरविन्द उर्फ डब्बू, अर्जुन, चंदन, राजेश तथा उसकी पत्नी से मिला था। जी हाँ, मजदूर साथियों एवं अन्य साथियों से गहन पूछताछ की गई है। उक्त हत्या के आरोपियों के नाम अरविन्द सिंह एवं राजेश सिंह हैं। (ग) प्रकरण में पतारसी उपरांत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, अतः प्रकरण की सी.बी.आई. जाँच कराएं जाने की आवश्यकता नहीं है। तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करना
71. ( क्र. 1177 ) श्री रामनिवास रावत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2017 में अल्पवर्षा एवं कीट प्रकोप के कारण खरीफ की फसलों में नुकसान हुआ है व रबी फसल की बोवनी के क्षेत्रफल में कमी आई है? यदि हाँ, तो खरीफ की फसलों के नुकसान व रबी की बोवनी के रकवे की कमी को जिलेवार बतावें? श्योपुर जिले की जानकारी तहसीलवार बतावें? (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में क्या श्योपुर जिले में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया गया है? यदि हाँ, तो कितने किसानों की कितनी फसल को कितना प्रतिशत नुकसान हुआ है? ग्रामवार, तहसीलवार बतावें? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्य में फसलों को हुए नुकसान के आंकलन उपरांत नुकसानी का मुआवजा दिए जाने एवं फसल बीमा की दावा राशि वितरण के सम्बंध में अभी तक क्या कार्यवाही की है? (घ) प्रश्नांश (क) से (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न दिनांक तक किन-किन जिलों की किन-किन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है? किन-किन तहसीलों को जिला कलेक्टरों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बावजूद सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है? कब तक शेष तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जायेगा? प्रदेश सरकार द्वारा सूखाग्रस्त जिलों में राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से कितनी राशि की मांग कब कब की है एवं मांग के विरुद्ध अभी तक कितनी राशि प्राप्त हुई है?
राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। रबी फसल की बोवनी के क्षेत्रफल में कमी आई है। पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - 1 व 2 अनुसार है। (ख) जी हाँ। श्योपुर जिले में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया गया है। फसलों की 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। जो पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। (ग) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 के कॉलम क्रमांक 19 के अनुसार राशि की मांग की गई है। खरीफ फसल बीमा 2017 के दावे अप्राप्त है। (घ) म.प्र. शासन राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक एफ 6-2/2017/सात-3/1522 भोपाल दिनांक 02.11.2017 सूचना के तहत श्योपुर जिले की सभी तहसीले श्योपुर / बडौदा / कराहल / विजयपुर / वीरपुर को
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शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय बालाघाट में परीक्षा की गोपनीयता भंग करना [तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास] अट्ठावन. डॉ. योगेन्द्र निर्मल : क्या राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि आर.जी.पी.वी. भोपाल के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा में एक्सटरनल एवं इंटरनल द्वारा दिये गये परिणाम को क्या प्राचार्य द्वारा परिवर्तित करने का कोई नियम है? क्या म.प्र. परीक्षा अधिनियम में परीक्षा परिणाम आने के पूर्व प्रायोगिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिका का पुनःमूल्याकंन किया जा सकता है? यदि नहीं, तो शासकीय पॉलीटेकनिक महाविद्यालय, बालाघाट में तत्कालीन प्राचार्य आर.एम.सोनबे द्वारा प्रायोगिक परीक्षा के चालीस दिन पश्चात अंतिम परिणाम के पूर्व बंद लिफाफे खुलवाकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग अंतिम सेमेस्टर की एक छात्रा एवं एक छात्र के परिणाम परिवर्तित किये गये? क्या यह नियम एवं कानून संगत हैं? यदि नहीं, तो उक्त संबंध में व्याख्याता श्रीमती दीप्ति हनवत द्वारा दिनांक तीन जुलाई दो हज़ार सत्रह को संचालक तकनीकी शिक्षा के समक्ष की गई शिकायत आर.एम.सोनबे तत्कालीन प्राचार्य को निलंबित क्यों नहीं किया गया? यदि इस संबंध में कोई जाँच कमेटी गठित की गई है, तो क्या कोई प्रतिवेदन शासन को प्राप्त हुआ है? यदि प्रतिवेदन में कमेटी ने माना कि यह विश्वविद्यालय के नियमों के अनुकूल नहीं है, तो तत्कालीन प्राचार्य को अब तक निलंबित क्यो नहीं किया गया एवं उनके विरूद्ध विभागीय जाँच क्यो नहीं करवाई गई? क्या उक्त प्राचार्य को निलंबित किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा : जी नहीं। जी नहीं। जी हाँ । जी नहीं। संबंधित प्राचार्य को संचालनालय के पत्र दिनांक इक्कीस.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह द्वारा चेतावनी पत्र जारी किया गया तथा विभागीय आदेश दिनांक छब्बीस.नौ.दो हज़ार सत्रह के द्वारा श्री आर.एम.सोनवे के स्थान पर श्री अनिल कुमार सिंघई को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी हाँ। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा जाँच समिति का गठन किया गया तथा समिति का जाँच प्रतिवेदन पत्र दिनांक तीन.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह द्वारा संचालनालय तकनीकी शिक्षा को भेजा गया है। जाँच प्रतिवेदन के आधार पर संचालक द्वारा श्री आर.एम.सोनवे को चेतावनी पत्र दिनांक इक्कीस.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह को जारी किया गया है शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। पुलिस विभाग द्वारा की जा रही ई-नोटिस कार्यवाही [गृह] उनसठ. श्री राजेश सोनकर : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि पुलिस विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के किन-किन शहरों में यातायात नियम के उल्लंघन पर वाहन चालक को ई-नोटिस भेजे जा रहे हैं? ईनोटिस कार्यवाही प्रदेश में कब से प्रारंभ की गई है? प्रश्नांश के संदर्भ में प्रदेश में पुलिस विभाग द्वारा कितने वाहन चालकों को ई-नोटिस भेजे गये है? ई-नोटिस किस नियम व आदेश के तहत भेजे गये स्पष्ट करें व किस सक्षम अधिकारी को ई-नोटिस पर हस्ताक्षर करके ई-नोटिस जारी करने के अधिकारी हैं? प्रश्नांश के संदर्भ में ई-नोटिसों द्वारा प्रश्न दिनांक तक विभिन्न शहरों में कितनी राशि शमन शुल्क के रूप में वसूली गई? कितनी राशि वसूल की जाना शेष है वसूली के लिये न्यायालय में कितने प्रकरण प्रस्तुत किये गये व कितने ई-नोटिस न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये और क्यों नहीं किये गये कारण बतायें? प्रश्नांश के संदर्भ में ई-नोटिस कार्यवाही के लिये शासन द्वारा कब नोटिफिकेशन कराया गया एवं माननीय कोर्ट द्वारा क्या कोई आदेश जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो नोटिफिकेशन व कोर्ट आदेश की प्रति उपलब्ध करायें? गृह मंत्री : जिला भोपाल एवं जिला इन्दौर शहरों में यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-नोटिस भेजे जा रहे है। ई-नोटिस कार्यवाही जिला भोपाल में दिनांक एक.एक.दो हज़ार तेरह एवं जिला इन्दौर में दिनांक सत्ताईस.एक.दो हज़ार पंद्रह से प्रारम्भ की गई । यातायात शाखा भोपाल में दिनांक एक.एक.दो हज़ार तेरह से चौदह.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह तक एक,इक्यावन,तीन सौ पच्चीस एवं यातायात शाखा इंदौर में दिनांक सत्ताईस.एक.दो हज़ार पंद्रह से नौ.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह तक पाँच,इकहत्तर,सात सौ निन्यानवे वाहन चालकों को ईनोटिस भेजे गये। ई-नोटिस मोटर व्हीकल एक्ट, एक हज़ार नौ सौ अठासी की धारा इक्यावन/एक सौ सतहत्तर, एक सौ उन्नीस/एक सौ सतहत्तर, एक सौ अट्ठाईस/एक सौ सतहत्तर, एक सौ उनतीस/एक सौ सतहत्तर के तहत भेजे जा रहे है। थाना प्रभारी यातायात के हस्ताक्षर उपरान्त ई-नोटिस जारी किये जा रहे है। यातायात शाखा भोपाल द्वारा ई-नोटिस से दिनांक चौदह.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह तक कुल राशि रू. एक,पचानवे,ग्यारह,चार सौ पचास/- एवं यातायात शाखा इंदौर द्वारा ई-नोटिस से दिनांक नौ.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह तक कुल राशि रू. सात,उन्यासी,अड़सठ,सात सौ पचास/- समन शुल्क प्राप्त किया गया। यातायात शाखा भोपाल द्वारा शेष इक्यानवे,एक सौ सात एवं यातायात शाखा इंदौर द्वारा शेष दो,चौरानवे,अड़सठ ई-नोटिस पर निराकरण शेष है, इस संबंध में कार्यवाही की जा रही है। चूकि ई-नोटिस का निराकरण अंतिम रूप से माननीय न्यायालय द्वारा किया जाता है, अथवा यातायात थाने में समन शुल्क का भुगतान प्राप्त किया जाता है, अतः शेष ई-नोटिस से समन शुल्क के रूप में प्राप्त होने वाली राशि का आंकलन नहीं किया जा सकता। यातायात शाखा भोपाल द्वारा ई-नोटिस स्मरण की कार्यवाही किये जाने के कारण माननीय न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये है। यातायात शाखा इंदौर से वर्तमान में माननीय न्यायालय में ई-नोटिस संबंधी कोई प्रकरण लंबित नहीं है। यातायात शाखा इंदौर द्वारा एक,छियालीस,एक सौ बहत्तर ई-नोटिस का समन शुल्क का भुगतान यातायात थाने में प्राप्त होने के कारण माननीय न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये है। ई-नोटिस कार्यवाही के संबंध में म.प्र. शासन द्वारा म.प्र. राजपत्र क्रमांक-एक सौ दिनांक तीन.तीन.दो हज़ार सोलह में उल्लेख है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। माननीय न्यायालय द्वारा कोई आदेश इस संबंध में नहीं है। सांवेर विधानसभा क्षेत्र में स्थित सांवेर रोड जेल का अधूरा निर्माण कार्य प्रारंभ कराना [जेल ] साठ. श्री राजेश सोनकर : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि तारांकित प्रश्न दिनांक बाईस.सात.दो हज़ार पंद्रह के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन द्वारा सांवेर विधानसभा क्षेत्र में स्थित सांवेर रोड जेल को अधूरा निर्माण कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु पूर्व प्रश्न दिनांक से आज प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही कि गई? प्रश्नांश के संदर्भ में क्या जेल विभाग द्वारा इन्दौर कि जेलों में कैदियों की अधिकता होने से जेल में बदं कैदियों को परेशानी के सम्बंध में जेलरों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया? क्या इन्दौर की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी परिरूद्ध है? प्रश्नांश के संदर्भ में अधूरी पड़ी जेल के निर्माण कार्यों को कब तक पूर्ण कराया जायेगा व किस एजेन्सी द्वारा कार्य को फिर से प्रारंभ कराया जायेगा? समय-सीमा बतायें? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : भारत सरकार द्वारा चौदह वें वित्त आयोग में धनराशि की मांग अमान्य किये जाने के कारण अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण कराने हेतु राज्य योजना में धनराशि उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के बजट में राशि रूपये तीस.शून्य करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके पश्चात् आधुनिक एवं सुरक्षित जेल भवन के नक्शे, विस्तृत प्राक्कलन लोक निर्माण विभाग से तकनीकी स्वीकृति उपरांत प्राप्त किये गए, जिन्हें राज्य मंत्रि-परिषद् के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया है। जी हाँ। इंदौर की जेलों में कैदियों की अधिकता विभाग के संज्ञान में है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जायेगा, जिसमें लगभग तीन वर्षों का समय लगना संभावित है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है । उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा में मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय विद्यालय भवन निर्माण इकसठ. श्री तरूण भनोत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या अधो हस्ताक्षरी ने अपने पत्र क्र.दो हज़ार नौ सौ तैंतीस एवं दो हज़ार नौ सौ चौंतीस दिनांक तेईस.दस.दो हज़ार सत्रह को कलेक्टर जबलपुर एवं प्रमुख सचिव राजस्व एवं आयुक्त नगर निगम जबलपुर को गढ़ा क्षेत्र जबलपुर में शासकीय रिक्त भूमि के संबंध में खसरा एवं नक्शा प्रदाय कर मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय स्कूल भवन निर्माण हेतु लेख किया था? यदि हाँ, तो उप नगरीय क्षेत्र गढ़ा में स्थित शासकीय रिक्त भूमि पर शासन की मंशा अनुसार मिनी स्टेडियम एवं केन्द्रीय विद्यालय भवन निर्माण हेतु प्रकिया कब तक पूर्ण कर ली जावेगी? क्या वर्णित हेतु उपलब्ध शासकीय भूमि पर भू-माफियों द्वारा कब्जा किया जा रहा है? क्या जिला प्रशासन उक्त भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करवा कर वर्णित का निर्माण कार्य सुनिश्चित करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? राजस्व मंत्री : जी हाँ । प्रथम पत्र में भूमि के खसरा नंबर इत्यादि का उल्लेख है परन्तु द्वितीय पत्र में किसी खसरे नंबर का उल्लेख नहीं है। प्रथम पत्र में दिये गये प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है। द्वितीय पत्र के संबंध में उल्लेखित भूमि पूर्व से आवंटित है, परन्तु मान. उच्च न्यायालय में प्रकरण प्रचलित है। मिनी स्टेडियम का प्रस्ताव अभी परीक्षणा धीन है। केन्द्रीय विद्यालय हेतु ग्राम गढ़ा स्थित भूमि खसरा नंबर एक सौ सत्रह/दो एवं खसरा नंबर एक सौ अट्ठारह में से दो.नौ हेक्टे. भूमि आवंटित की जा चुकी है। परन्तु माननीय उच्च न्यायालय में उक्त भूमि के संबंध में एक डब्ल्यू.पी. छः सौ अट्ठारह/दो हज़ार आठ लं बित है। जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा यथा स्थिति का आदेश दिया गया है। प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने से कार्यवाही पूर्ण होने में तिथि बतायी जाना संभव नहीं है। प्रश्नांश में वर्णित प्रथम पत्र में उल्लेखित भूमि के संबंध में परीक्षण कराया जा रहा है, जाँच उपरान्त अतिक्रमण पाये जाने पर मुक्त कराने की कार्यवाही की जावेगी। द्वितीय पत्र के संबंध में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने से समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है। असाधारण पारिवारिक पेंशन का पुनरीक्षण [गृह] बासठ. श्री तरूण भनोत : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या प्रदेश सरकार ने असाधारण पारिवारिक पेंशन के नियमों में बदलाव कर दिया है? अब शहीद की पत्नी को प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर समय-समय पर बढ़ने वाला मंहगाई भत्ता व वेतन पुनरीक्षण का लाभ प्राप्त होने का प्रावधान कर दिया है? यदि वर्णित हाँ, तो क्या यह सही है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में कार्यरत शहीद स्व. राजेश तिवारी प्र.आर. क्र. दो सौ अट्ठानवे की पत्नी सुनीता तिवारी निवासी एक हज़ार पाँच सौ सत्रह, नवनिवेश कालोनी, गढ़ा जबलपुर को असाधारण पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी, जो आज दिनांक तक किसी भी वेतनमान आने पर पुनरीक्षण नहीं की गयी ? क्या उक्त शहीद की पत्नी की असाधारण पारिवारिक पेंशन पुनरीक्षण हेतु अधोहस्ताक्षरी द्वारा मान. गृह मंत्री एवं पुलिस महानिदेशक भोपाल को भी पत्रों के माध्यम से अवगत कराया था? यदि वर्णित से सही है तो कब तक शहीद की पत्नी को पाँचवे एवं छठवें वेतनमान के अनुसार असाधारण पेंशन का पुनरीक्षण कब तक कर दिया जावेगा? गृह मंत्री : जी हाँ। अब असाधारण परिवार पेंशन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के पीड़ित परिवार को समय-समय पर बढ़ने वाला मंहगाई भत्ता प्राप्त होने का प्रावधान वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक उनतीस.नौ.दो हज़ार सत्रह जारी कर शासकीय सेवकों के लिए स्वीकृत मंहगाई भत्ते का लाभ, समान रूप से प्रदान किये जाने का लाभ दिया गया है। वेतन पुनरीक्षण के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। वेतन पुनरीक्षण के संबंध में कोई प्रावधान न होने से कार्यवाही नहीं की गई। जी हाँ । प्रश्नांश और के उत्तर के संदर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। चाही गई जानकारी न देने के लिए दोषियों पर कार्यवाही तिरेसठ. श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधानसभा प्रश्न क्र. चौरानवे दिनांक इकतीस.तीन.दो हज़ार सोलह, प्रश्न क्र. इकहत्तर दिनांक बाईस.सात.दो हज़ार सोलह, प्रश्न क्र. पच्चीस दिनांक उन्नीस.सात.दो हज़ार सत्रह प्रश्न क्र. चौहत्तर दिनांक सत्ताईस.तीन.दो हज़ार सत्रह एवं ध्यानाकर्षण सूचना दिनांक चौदह.सात.दो हज़ार सत्रह के माध्यम से रीवा शहर की जमीनों से संबंधित जानकारियां चाही गई थी, जो अप्राप्त हैं? अगर जानकारी संकलित की जा चुकी हो तो जानकारी की प्रति देते हुए बतावें कि दिनांक सत्ताईस.तीन.दो हज़ार सत्रह के बाद नगरपालिका निगम रीवा की शासकीय एवं नजूल की भूमियों को किन-किन संविदाकारों/ठेकेदारों को किन शर्तों एवं अवधि के लिए आवंटित की गई प्रति पृथक से देते हुए बतावें? प्रश्नांश की जानकारी संबंधितों द्वारा बार-बार प्रश्न लगाने पर नहीं दी जा रही तो इसके लिए कौन-कौन जवाबदार है, जवाबदारों के ऊपर क्या कार्यवाही प्रस्तावित करेंगे, अगर नहीं तो क्यों? राजस्व मंत्री : एक- नगर पालिक निगम रीवा क्षेत्रान्तर्गत चूना भट्ठा, बस स्टैण्ड समान रकवा पाँच.सत्तानवे एकड़ में शासन द्वारा स्वीकृत PPP- योजना के तहत एक.उनतीस एकड़ भूमि व्यवसायिक कॉम्पलेक्स/मल्टीप्लेक्स निर्माण हेतु स्वीकृत निविदा के तहत प्रीमियम राशि रूपये आठ,तिरेपन,शून्य,नौ सौ निन्यानवे=शून्य एवं रूपये एक.पचास लाख मासिक किराया पर मे. समदडिया बिल्डर्स जबलपुर को दी गई है जिसमें व्यवसायिक काम्पलेक्स/मल्टीपलेक्स एवं आवासीय फ्लैट निर्मित किये गये है। उक्त योजना के तहत तीस वर्षों तक बस स्टैण्ड/व्यवसायिक कॉम्पलेक्स का रख-रखाव समदडिया बिल्डर्स द्वारा किये जाने का प्रावधान है। दो- नगर पालिका निगम रीवा क्षेत्रान्तर्गत म.प्र. शासन की पुर्नघनत्वीकरण योजना अन्तर्गत दो शासकीय भूमियों का व्ययन किया गया है। बालभारती स्कूल के सामने स्थित पंद्रह हज़ार वर्गमीटर शासकीय भूमि का व्ययन-योजना के बिड की स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन की साधिकार समिति की बैठक दिनांक तेरह.छः.बारह से हुई। बिड मेसर्स समदडिया बिल्डर्स प्रा.लि. जबलपुर के पक्ष में स्वीकृत हुई। आफर राशि रूपये छत्तीस,निन्यानवे,निन्यानवे,नौ सौ निन्यानवे.शून्य है। योजना के अनुबंध का निष्पादन दिनांक पाँच.बारह.दो हज़ार बारह को किया गया है। इसके तहत बिल्डर्स को पंद्रह हज़ार वर्गमीटर भूमि व्यवसायिक उपयोग हेतु दिया जाना एवं बिल्डर्स द्वारा शासकीय संपत्ति के निर्माण के तहत नवीन कलेक्ट्रेट भवन, चौवन शासकीय आवास सिविल लाईन एवं हाकर्स मार्केट का निर्माण किया जाना है। शासकीय निर्माण कार्य की लागत रूपये अट्ठारह.साठ करोड़ है। शेष राशि शासन के खाते में जमा किया जाना है। एस. पी. बंगले के सामने स्थित चार हज़ार सात सौ अट्ठारह.पैंतालीस वर्गमीटर शासकीय भूमि का व्ययनयोजना के बिड की स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन साधिकार समिति की बैठक दिनांक चार.चार.पंद्रह से हुई। बिड मेसर्स समदडिया बिल्डर्स प्रा. लि. जबलपुर के पक्ष में स्वीकृत हुई। आफर राशि रूपये चौबीस,तेईस,निन्यानवे,नौ सौ निन्यानवे/- है। योजना के अनुबंध का निष्पादन दिनांक सत्ताईस.पाँच.दो हज़ार पंद्रह को किया गया है। इसके तहत बिल्डर को चार लाख इकहत्तर हज़ार आठ सौ पैंतालीस वर्गमीटर भूमि व्यवसायिक उपयोग हेतु दिया जाना एवं बिल्डर द्वारा शासकीय संपत्ति के निर्माण के तहत आडिटोरियम एवं कुलपति आवास का निर्माण किया जाना है। शासकीय निर्माण कार्य की लागत रूपये अट्ठारह.अड़तीस करोड़ है। शेष राशि शासन के खाते में जमा किया जाना है। उक्त दोनों भूमियां तीस वर्षों की लीज पर दी जानी है। दोनों योजनाओं के तहत शासकीय संपत्ति का निर्माण प्रगति पर है। किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं की गई है। अतः दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही का प्रश्न ही नहीं उठता। मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करना [राजस्व ] चौंसठ. श्री गिरीश भंडारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में किन-किन ग्रामों में मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित किये जाने की प्रक्रिया शासन द्वारा की जा रही है? ग्राम का नाम सहित जानकारी उपलब्ध करावें? प्रश्न की कंडिका की जानकारी अनुसार जिन ग्रामों में मजरों टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है, उनको कब तक राजस्व ग्राम घोषित किया जावेगा? राजस्व मंत्री : राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ग्राम- हिनोत्या के मजरे भरतगढ़ को राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। ग्राम हिनोत्या के मजरे भरतगढ़ को प्र.क्र. तेरह/बी-एक सौ इक्कीस/एक हज़ार छः सौ सत्रह में आदेश क्रमांक सत्ताईस/प्रवा./दो हज़ार सोलह दिनांक एक.बारह.दो हज़ार सोलह से राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। म.प्र. शासन की अधिसूचना दिनांक चौबीस.दस.सत्रह को अधिकार अभिलेख बनाने हेतु आदेश जारी किये गये हैं। सागर जिले में रतौना फार्म पर डेरी व्यवसाय का विस्थापन पैंसठ. श्री शैलेन्द्र जैन : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सागर नगर से दुधारू पशुओं को रतौना कृषि फार्म विस्थापित किये जाने एवं गोकुल ग्राम बनाये जाने हेतु कोई कार्ययोजना बनायी गयी है? यदि हाँ, तो इस कार्ययोजना में कौन-कौन से कार्य किये जाना प्रस्तावित हैं? इस संबंध में शासन द्वारा अब तक क्या कार्यवाही की गयी है? प्रश्नाधीन कार्य योजना पर कब तक कार्य प्रारंभ किया जावेगा? पशुपालन मंत्री : सागर नगर से दुधारू पशुओं को रतौना कृषि फार्म विस्थापित किए जाने संबंधी पशुपालन विभाग की कोई कार्य योजना नहीं है। रतौना में गोकुल ग्राम स्थापना की राज्य शासन द्वारा कोई कार्य योजना नहीं बनाई गई है। इस संदर्भ में भारत सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के वेस्ट निष्पादन [पर्यावरण] छयासठ. श्री शैलेन्द्र जैन : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या शासकीय चिकित्सालयों में मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने का विशिष्ट प्रावधान है? जिला चिकित्सालय सागर एवं बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज सागर के मेडिकल वेस्ट को एकत्रित करने की क्या व्यवस्था, प्रक्रिया हैं? इस वेस्ट को नष्ट करने की प्रक्रिया से अवगत करायें। क्या उक्त चिकित्सालयों के मेडिकल कचरे को खुले में फेंके जाने से प्रदूषण एवं जन सामान्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर होने से जन असंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है? इस गंभीर त्रुटि के लिए कौन उत्तरदायी है? विभाग इस संबंध में क्या कार्यवाही कर रहा है? विभाग इन चिकित्सालयों के मेडिकल वेस्ट को एकत्रित एवं नष्ट करने के लिये क्या व्यवस्था करेगा? पशुपालन मंत्री : जी नहीं। चिकित्सालयों के मेडिकल वेस्ट के एकत्रीकरण एवं विनिष्टीकरण हेतु जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, दो हज़ार सोलह की अनुसूची-एक में प्रक्रिया निर्धारित की गई है तथा प्रश्नाधीन चिकित्सालयों द्वारा प्रक्रिया अनुसार वेस्ट का एकत्रण स्वतः तथा वेस्ट का विनिष्टीकरण साझा जैव चिकित्सा अपशिष्ट शोधन सुविधा के माध्यम से किया जाता है। प्रश्नाधीन चिकित्सालयों द्वारा मेडिकल कचरे को खुले में नहीं फेका जाता है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में व्यवस्था विद्यमान है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण [तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास] सरसठ. श्री नारायण सिंह कुशवाह : क्या राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर पॉलिटेक्निक महाविद्यालय ग्वालियर में कुल कितने अधिकारी/कर्मचारी स्थाई/अस्थाई में व संविदा नियुक्ति पर विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत कार्य कर रहे हैं? इन सबको कितना - कितना वेतन किस किस मद से मिलता है? क्रमानुसार जानकारी देवें। प्रश्नांकित कौन-कौन अधिकारी / कर्मचारी पिछले दस वर्षों से संविदा नियुक्ति पर अनुबंध तीन माह, छः माह में करके लगातार कार्य कर रहे हैं, उन्हें केवल तीन हज़ार हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है? प्रश्नांकित में संविदा पर ऐसे पदस्थ कर्मियों को वेतन कलेक्टर वेतन दर पर किये जाने व शासन के नियम आदेश के अनुसार स्थाई नियुक्ति प्रदान करेंगे? राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा : डॉ. भीमराव अम्बेडकर पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, ग्वालियर में ए.आई.सी.टी.ई. द्वारा स्वीकृत ई.एम.डी. परियोजना में पारिश्रमिक के रूप में अनुबंध के आधार पर ऑफिस अस्सिटेंट के रूप में श्रीमती संध्या शुक्ला एवं हेल्पर के रूप में श्री संजय पाल नियुक्त है। जिन्हें क्रमशः रूपये तीन हज़ार/- एवं दो हज़ार/- प्रतिमाह पारिश्रमिक योजना की गाईड लाईन के अनुसार प्रदान किया जाता है । प्रश्नांश के उत्तर में उल्लेखित श्रीमती संख्या शुक्ला के अतिरिक्त इस तरह की कोई अन्य नियुक्ति संख्या में नहीं की गई है। परियोजना ई.एम.डी. भारत सरकार की वित्तीय सहायता एवं मार्गदर्शिका के अनुसार प्रारंभ की गई है। परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति के राज्य शासन के कोई प्रावधान नहीं है। मत्स्य बीज उत्पादन [मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास] अड़सठ. श्री नारायण सिंह कुशवाह : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि ग्वालियर शहर में गोला का मंदिर भिंड रोड पर विभाग का कार्यालय व भूमि एवं मत्स्य बीज उत्पादन मछली पालने के कितने टेंक बने हैं वर्तमान में कितनी मछली व बीज का उत्पादन हो रहा है? क्या उपरोक्त सभी टेंकों में पानी भरने का पर्याप्त साधन है? अगर पानी का साधन नहीं है, तब पानी की व्यवस्था के लिए क्या कार्यवाही की गई? क्या उपरोक्त विभाग की भूमि पर अतिक्रमण है? अगर अतिक्रमण है तब हटाने की क्या कार्यवाही की गई ? पशुपालन मंत्री : दस नर्सरी पोण्ड एवं दो ब्रीडर्स पोण्ड बने है। इस प्रक्षेत्र से मछली का उत्पादन नहीं होता। इस प्रक्षेत्र से मछली का बीज उत्पादन हो रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में एक.पैंतीस लाख का उत्पादन किया गया है। जी हाँ। इस वर्ष पर्याप्त बारिश न होने के कारण उपयोगी टयूबवेल्स में पानी की उपलब्धता न होने से नवीन ट्यूबवेल्स का खनन कराया गया उसमें पानी उपलब्ध न होने से पानी की उपलब्धता हेतु हाईडो फेक्चरिंग की कार्यवाही प्रचलन में है। जी नहीं। अतः शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। ग्रामीण पेयजल योजना स्वीकृति [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] उनहत्तर. श्री अनिल जैन : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि क्या विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी की समस्त ग्राम पंचायतों में ग्रामीण पेयजल योजना स्वीकृत की गयी है, यदि हाँ, तो इस योजना में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम एवं स्वीकृत राशि बताई जावे? उक्त योजना के यदि कार्य आदेश जारी नहीं किये गये हैं, तो कब तक जारी किये जायेंगे तथा यदि कार्य आदेश जारी किये जा चुके हैं तो निर्माण कार्य कब तक प्रारम्भ हो सकेगा? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : जी नहीं। निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चौंतीस ग्रामों की निवाड़ी समूह जल प्रदाय योजना लागत रू. बहत्तर.छयासठ करोड़ एवं एक सौ पैंतालीस ग्रामों की निवाड़ी - पृथ्वीपुर- समूह योजना लागत रू. एक सौ चौरानवे.बीस करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक एवं दो अनुसार है। चौंतीस ग्रामों की निवाड़ी समूह जलप्रदाय योजना के कार्यादेश जारी किये जाकर कार्य प्रगति पर है तथा एक सौ पैंतालीस ग्रामों की निवाड़ीपृथ्वीपुर समूह जलप्रदाय योजना की निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, निर्माण कार्य प्रारंभ होने की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। हत्यारों एवं उनके आंतक के विरूद्ध कार्यवाही सत्तर. श्री केदारनाथ शुक्ल : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या शिवकुमार कोल, ग्राम तेन्दुआ, पुलिस चौकी- जमोड़ी, थाना सीधी की हत्या दिनांक पाँच.सात.दो हज़ार सत्रह को की गई थी? प्रश्नांश में उल्लेखित व्यक्ति हत्या से एक दिन पूर्व मजदूरी करने एवं अन्य मजदूरों के साथ शाम की छुट्टी के उपरांत किनकिन व्यक्तियों से मिला? क्या उसके मजदूर साथियों एवं अन्य साथियों से गहन पूछताछ की गई? यदि हाँ, तो हत्यारों के नाम बताएं? यदि नहीं, तो क्या उक्त हत्या का आज तक कोई सुराग नहीं मिला है? यदि हाँ, तो क्या इसकी सी.बी.आई. जाँच कराई जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक? गृह मंत्री : जी हाँ । मृतक हत्या से एक दिन पूर्व कमलेश उर्फ पोकवा सेन, अरविन्द उर्फ डब्बू, अर्जुन, चंदन, राजेश तथा उसकी पत्नी से मिला था। जी हाँ, मजदूर साथियों एवं अन्य साथियों से गहन पूछताछ की गई है। उक्त हत्या के आरोपियों के नाम अरविन्द सिंह एवं राजेश सिंह हैं। प्रकरण में पतारसी उपरांत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, अतः प्रकरण की सी.बी.आई. जाँच कराएं जाने की आवश्यकता नहीं है। तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करना इकहत्तर. श्री रामनिवास रावत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या वर्ष दो हज़ार सत्रह में अल्पवर्षा एवं कीट प्रकोप के कारण खरीफ की फसलों में नुकसान हुआ है व रबी फसल की बोवनी के क्षेत्रफल में कमी आई है? यदि हाँ, तो खरीफ की फसलों के नुकसान व रबी की बोवनी के रकवे की कमी को जिलेवार बतावें? श्योपुर जिले की जानकारी तहसीलवार बतावें? प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में क्या श्योपुर जिले में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया गया है? यदि हाँ, तो कितने किसानों की कितनी फसल को कितना प्रतिशत नुकसान हुआ है? ग्रामवार, तहसीलवार बतावें? प्रश्नांश एवं के परिप्रेक्ष्य में फसलों को हुए नुकसान के आंकलन उपरांत नुकसानी का मुआवजा दिए जाने एवं फसल बीमा की दावा राशि वितरण के सम्बंध में अभी तक क्या कार्यवाही की है? प्रश्नांश से के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न दिनांक तक किन-किन जिलों की किन-किन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है? किन-किन तहसीलों को जिला कलेक्टरों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बावजूद सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है? कब तक शेष तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जायेगा? प्रदेश सरकार द्वारा सूखाग्रस्त जिलों में राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से कितनी राशि की मांग कब कब की है एवं मांग के विरुद्ध अभी तक कितनी राशि प्राप्त हुई है? राजस्व मंत्री : जी हाँ। रबी फसल की बोवनी के क्षेत्रफल में कमी आई है। पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - एक व दो अनुसार है। जी हाँ। श्योपुर जिले में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया गया है। फसलों की तैंतीस प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। जो पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक के कॉलम क्रमांक उन्नीस के अनुसार राशि की मांग की गई है। खरीफ फसल बीमा दो हज़ार सत्रह के दावे अप्राप्त है। म.प्र. शासन राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक एफ छः फ़रवरी दो हज़ार सत्रह/सात-तीन/एक हज़ार पाँच सौ बाईस भोपाल दिनांक दो.ग्यारह.दो हज़ार सत्रह सूचना के तहत श्योपुर जिले की सभी तहसीले श्योपुर / बडौदा / कराहल / विजयपुर / वीरपुर को
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बॉलीवुड की पंगा गर्ल कंगना रनौत आज अपना 34वां बर्थडे मना रही हैं। बर्थडे के मौके पर कंगना ने अपनी फीलिंग्स फैंस के साथ शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी एक फोटो भी शेयर की है। जिसके साथ उन्होंने एक लंबा इमोशन कैप्शन लिखा।
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बॉलीवुड की पंगा गर्ल कंगना रनौत आज अपना चौंतीसवां बर्थडे मना रही हैं। बर्थडे के मौके पर कंगना ने अपनी फीलिंग्स फैंस के साथ शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी एक फोटो भी शेयर की है। जिसके साथ उन्होंने एक लंबा इमोशन कैप्शन लिखा।
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हरियाणा में गन्ने के दाम 450 रुपए करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे चढ़ूनी ग्रुप ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को कुरुक्षेत्र की सैनी धर्मशाला में हुई राज्यस्तरीय मीटिंग में BKU अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इसकी घोषणा की। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के विरोध में चल रहे चढ़ूनी ने उनका समर्थन करने की बात कही है। हालांकि, चढ़ूनी ने पहले पत्र लिख SKM पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार ने संतोषजनक रेट नहीं बढ़ाए, फिर भी इसे किसानों की जीत कह सकते हैं क्योंकि आंदोलन करके 10 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने के दाम उन्होंने बढ़वाए हैं। किसानों का आंदोलन आज से खत्म हो रहा है। किसान लंबे समय तक गन्ना नहीं रोक सकता, इसलिए आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया है।
उधर, गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्त किसान मोर्चा को समर्थन देने का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त किसान मोर्चा गन्ने के दाम को लेकर कोई भी फैसला लेगा तो BKU चढ़ूनी ग्रुप उसका समर्थन करेगी। इस मौके पर चढ़ूनी ने हरियाणा में विधानसभा के चुनावों में BJP का विरोध करने का ऐलान किया है। बता दें कि सैनी धर्मशाला कुरुक्षेत्र में प्रदेशभर के किसानों की गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अध्यक्षता में मीटिंग हुई।
यही नहीं, पिछली मीटिंग में लिए गए फैसलों को भी चढ़ूनी ने वापस ले लिया है। चढ़ूनी ने कहा कि 27 जनवरी को सड़क जाम करनी तथा 29 जनवरी को सोनीपत के गोहाना अनाज मंडी में होने वाली गृह मंत्री अमित शाह की रैली में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने का जो प्रोग्राम था वह वापस ले लिया है। अब किसान शाह की रैली का विरोध नहीं करेंगे।
बुधवार को किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ CM के पुतले की शव यात्रा निकालकर विरोध जताया। साथ ही किसान चौधरी छोटू राम की जयंती पर शुगर मिलों पर गन्ने की होली जलाई गई। बता दें कि हरियाणा में किसान गन्ने का रेट बढ़ाने को लेकर पिछले कई दिनों से शुगर मिलों के गेट पर ताला जड़ धरने पर बैठे थे।
पंजाब में 380 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने के दाम है, जबकि हरियाणा में 10 रुपए दाम बढ़ाने के बाद भी 372 रुपए पहुंचा है। जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में गन्ने के दाम 193 रुपए बढ़े थे। कांग्रेस की सरकार में उस वक्त गन्ने के दाम 117 से 310 रुपए तक पहुंच गए थे, लेकिन BJP सरकार ने पिछले 8 सालों में मात्र 62 रुपए की बढ़ोतरी की है। जबकि महंगाई सालाना 7 फीसदी से अधिक बढ़ रही है।
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हरियाणा में गन्ने के दाम चार सौ पचास रुपयापए करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे चढ़ूनी ग्रुप ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को कुरुक्षेत्र की सैनी धर्मशाला में हुई राज्यस्तरीय मीटिंग में BKU अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इसकी घोषणा की। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के विरोध में चल रहे चढ़ूनी ने उनका समर्थन करने की बात कही है। हालांकि, चढ़ूनी ने पहले पत्र लिख SKM पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार ने संतोषजनक रेट नहीं बढ़ाए, फिर भी इसे किसानों की जीत कह सकते हैं क्योंकि आंदोलन करके दस रुपयापए प्रति क्विंटल गन्ने के दाम उन्होंने बढ़वाए हैं। किसानों का आंदोलन आज से खत्म हो रहा है। किसान लंबे समय तक गन्ना नहीं रोक सकता, इसलिए आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया है। उधर, गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्त किसान मोर्चा को समर्थन देने का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त किसान मोर्चा गन्ने के दाम को लेकर कोई भी फैसला लेगा तो BKU चढ़ूनी ग्रुप उसका समर्थन करेगी। इस मौके पर चढ़ूनी ने हरियाणा में विधानसभा के चुनावों में BJP का विरोध करने का ऐलान किया है। बता दें कि सैनी धर्मशाला कुरुक्षेत्र में प्रदेशभर के किसानों की गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अध्यक्षता में मीटिंग हुई। यही नहीं, पिछली मीटिंग में लिए गए फैसलों को भी चढ़ूनी ने वापस ले लिया है। चढ़ूनी ने कहा कि सत्ताईस जनवरी को सड़क जाम करनी तथा उनतीस जनवरी को सोनीपत के गोहाना अनाज मंडी में होने वाली गृह मंत्री अमित शाह की रैली में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने का जो प्रोग्राम था वह वापस ले लिया है। अब किसान शाह की रैली का विरोध नहीं करेंगे। बुधवार को किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ CM के पुतले की शव यात्रा निकालकर विरोध जताया। साथ ही किसान चौधरी छोटू राम की जयंती पर शुगर मिलों पर गन्ने की होली जलाई गई। बता दें कि हरियाणा में किसान गन्ने का रेट बढ़ाने को लेकर पिछले कई दिनों से शुगर मिलों के गेट पर ताला जड़ धरने पर बैठे थे। पंजाब में तीन सौ अस्सी रुपयापए प्रति क्विंटल गन्ने के दाम है, जबकि हरियाणा में दस रुपयापए दाम बढ़ाने के बाद भी तीन सौ बहत्तर रुपयापए पहुंचा है। जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में गन्ने के दाम एक सौ तिरानवे रुपयापए बढ़े थे। कांग्रेस की सरकार में उस वक्त गन्ने के दाम एक सौ सत्रह से तीन सौ दस रुपयापए तक पहुंच गए थे, लेकिन BJP सरकार ने पिछले आठ सालों में मात्र बासठ रुपयापए की बढ़ोतरी की है। जबकि महंगाई सालाना सात फीसदी से अधिक बढ़ रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इस प्लेटफॉर्म पर एक रुपये वाले नोट की कीमत 49,999 रुपये ऑफर की जा रही है। हालांकि, छूट के उपरांत जिसका मूल्य 44,999 रुपये रखा गया है। आज से 26 वर्ष पहले ही इंडियन गवर्नमेंट की तरफ से एक रुपये के नोट की छपाई को बंद किया जा चला है।
साल 2015 में जिसकी छपाई फिर से शुरू की गई और एक रुपये का नोट फिर से मार्केट में प्रचलन में आ गया। हालांकि, बहुत से लोगों के पास एक रुपये के पुराने नोट पड़े रहते हैं, जिसे वेबसाइट पर जाकर बेचकर अधिक पैसे बना सकते हैं।
लेकिन जिसके लिए कुछ शर्तें हैं। 5 रुपये के इस नोट में ट्रैक्टर बना हुआ होना चाहिए। यह नोट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गया हो। साथ ही इस पर 786 नंबर लिखा होना चाहिए।
अगर आपके पास इस फीचर वाला नोट है तो आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर उसकी बोली लगा पाएंगे जिसमें आपको कई गुना पैसा मिलने की पूरी संभावना है।
अगर आपके पास यह 5 रुपये का पुराना नोट पड़ा है तो आपके पास बहुत ही शानदार अवसर आया है जिसमें आप घर बैठे ही उसके बदले बहुत अधिक पैसे पा सकते हैं।
सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि 5 रुपये के बदले 30,000 रुपये कैसे मिलेंगे, लेकिन यह बात 100 प्रतिशत सच है। कुछ मिनटों में ही आप घर बैठे उसके बदले में इतनी बड़ी राशि हासिल कर सकते है। जिसके लिए आपको कहीं जाने की आवश्यक भी नहीं है। आप केवल दो वेबसाइट्स पर जा सकते हैं। वहां पर आपको यह सूचना मिल जाएगी कि आपको किस वेबसाइट पर अधिक ऑफर मिल रहा है।
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इस प्लेटफॉर्म पर एक रुपये वाले नोट की कीमत उनचास,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये ऑफर की जा रही है। हालांकि, छूट के उपरांत जिसका मूल्य चौंतालीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये रखा गया है। आज से छब्बीस वर्ष पहले ही इंडियन गवर्नमेंट की तरफ से एक रुपये के नोट की छपाई को बंद किया जा चला है। साल दो हज़ार पंद्रह में जिसकी छपाई फिर से शुरू की गई और एक रुपये का नोट फिर से मार्केट में प्रचलन में आ गया। हालांकि, बहुत से लोगों के पास एक रुपये के पुराने नोट पड़े रहते हैं, जिसे वेबसाइट पर जाकर बेचकर अधिक पैसे बना सकते हैं। लेकिन जिसके लिए कुछ शर्तें हैं। पाँच रुपयापये के इस नोट में ट्रैक्टर बना हुआ होना चाहिए। यह नोट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गया हो। साथ ही इस पर सात सौ छियासी नंबर लिखा होना चाहिए। अगर आपके पास इस फीचर वाला नोट है तो आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर उसकी बोली लगा पाएंगे जिसमें आपको कई गुना पैसा मिलने की पूरी संभावना है। अगर आपके पास यह पाँच रुपयापये का पुराना नोट पड़ा है तो आपके पास बहुत ही शानदार अवसर आया है जिसमें आप घर बैठे ही उसके बदले बहुत अधिक पैसे पा सकते हैं। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि पाँच रुपयापये के बदले तीस,शून्य रुपयापये कैसे मिलेंगे, लेकिन यह बात एक सौ प्रतिशत सच है। कुछ मिनटों में ही आप घर बैठे उसके बदले में इतनी बड़ी राशि हासिल कर सकते है। जिसके लिए आपको कहीं जाने की आवश्यक भी नहीं है। आप केवल दो वेबसाइट्स पर जा सकते हैं। वहां पर आपको यह सूचना मिल जाएगी कि आपको किस वेबसाइट पर अधिक ऑफर मिल रहा है।
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