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नई दिल्ली. सावन का महीना धार्मिक महत्व से बड़ा ही पवित्र माना जाता है. सावन मुख्य तौर पर भगवान शिव की वंदना का महीना माना जाता है. कांवड़िये बाबा धाम आदि जगहों से पैदल कांवड़ लाकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इसे पुण्यकर्म माना गया है. माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि को सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाए तो हर मनोकामना पूरी होती है. इस बार की शिवरात्रि 9 अगस्त (गुरुवार) को पड़ रही है.
धर्मगुरूओं का कहना है कि इस साल शिवरात्रि पर एक शुभ संयोग बन रहा है. शुभ संयोग में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से शुभ फल प्राप्त होगा. धर्मगुरूओं के मुताबिक, साल में 12 शिवरात्रि होती हैं. लेकिन इनमें से महाशिवरात्रि और सावन की शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है. अगर कोई महिला या युवती 16 सोमवार के बाद शिवरात्रि का व्रत रखती है तो उसके कष्टों का निवारण होता है.
नौ अगस्त को शिवरात्रि के अलावा प्रदोष व्रत भी है. पुराणों में कहा गया है कि त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भोलेनाथ और पार्वती का व्रत रखा जाता है. दोनों का पूजन इस दिन शुभ माना जाता है. प्रदोष काल में मां पार्वती और भोलेनाथ का व्रत रखने से सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है.
जानकारों के मुताबिक, नौ अगस्त को शाम 7. 06 बजे सूर्यास्त से 9. 01 बजे तक प्रदोष का समय है. प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करना अति लाभकारी है. रात 10. 45 बजे त्रयोदशी की समाप्ति है. जलाभिषेक के लिए नौ अगस्त को सुबह चार से 8. 45 का समय शुभ माना गया है.
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नई दिल्ली. सावन का महीना धार्मिक महत्व से बड़ा ही पवित्र माना जाता है. सावन मुख्य तौर पर भगवान शिव की वंदना का महीना माना जाता है. कांवड़िये बाबा धाम आदि जगहों से पैदल कांवड़ लाकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इसे पुण्यकर्म माना गया है. माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि को सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाए तो हर मनोकामना पूरी होती है. इस बार की शिवरात्रि नौ अगस्त को पड़ रही है. धर्मगुरूओं का कहना है कि इस साल शिवरात्रि पर एक शुभ संयोग बन रहा है. शुभ संयोग में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से शुभ फल प्राप्त होगा. धर्मगुरूओं के मुताबिक, साल में बारह शिवरात्रि होती हैं. लेकिन इनमें से महाशिवरात्रि और सावन की शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है. अगर कोई महिला या युवती सोलह सोमवार के बाद शिवरात्रि का व्रत रखती है तो उसके कष्टों का निवारण होता है. नौ अगस्त को शिवरात्रि के अलावा प्रदोष व्रत भी है. पुराणों में कहा गया है कि त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भोलेनाथ और पार्वती का व्रत रखा जाता है. दोनों का पूजन इस दिन शुभ माना जाता है. प्रदोष काल में मां पार्वती और भोलेनाथ का व्रत रखने से सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है. जानकारों के मुताबिक, नौ अगस्त को शाम सात. छः बजे सूर्यास्त से नौ. एक बजे तक प्रदोष का समय है. प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करना अति लाभकारी है. रात दस. पैंतालीस बजे त्रयोदशी की समाप्ति है. जलाभिषेक के लिए नौ अगस्त को सुबह चार से आठ. पैंतालीस का समय शुभ माना गया है.
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अमेरिका के संघीय उड्डयन प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद जॉबी एविएशन जल्द ही अपनी उड़ने वाली इलेक्ट्रिक टैक्सी की टेस्टिंग शुरू करने की तैयारी में है। कैलिफोर्निया की कंपनी ने बयान में कहा कि अमेरिकी नियामक से मंजूरी मिलने के बाद वह अपने प्लांट में तैयार हुई फ्लाइंग कार की टेस्टिंग कर सकेगी। कंपनी पहले केवल हाथ से बने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन कर सकती थी। जॉबी ने एक कार्यक्रम में अपने प्लांट में बना पहला विमान भी दिखाया।
अमेरिकी कंपनी छोटे आकार की इलेक्ट्रिक हवाई टैक्सियों की एक नई श्रेणी तैयार करेगी, जो यात्रियों को भीड़-भाड़ से बचाते हुए सुगम यातायात की सुविधा प्रदान करेगी। कंपनी ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर की तरह टेकऑफ लेगी और फिर छोटे विमान की तरह उड़ेगी। यह फ्लाइंग टैक्सी 1,000 पाउंड का वजन उठाने में सक्षम है, लिहाजा यह 4 यात्रियों और एक पायलट को ले जाने में सक्षम होगी। कंपनी की 2025 में इसकी वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करने की योजना है।
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अमेरिका के संघीय उड्डयन प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद जॉबी एविएशन जल्द ही अपनी उड़ने वाली इलेक्ट्रिक टैक्सी की टेस्टिंग शुरू करने की तैयारी में है। कैलिफोर्निया की कंपनी ने बयान में कहा कि अमेरिकी नियामक से मंजूरी मिलने के बाद वह अपने प्लांट में तैयार हुई फ्लाइंग कार की टेस्टिंग कर सकेगी। कंपनी पहले केवल हाथ से बने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन कर सकती थी। जॉबी ने एक कार्यक्रम में अपने प्लांट में बना पहला विमान भी दिखाया। अमेरिकी कंपनी छोटे आकार की इलेक्ट्रिक हवाई टैक्सियों की एक नई श्रेणी तैयार करेगी, जो यात्रियों को भीड़-भाड़ से बचाते हुए सुगम यातायात की सुविधा प्रदान करेगी। कंपनी ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर की तरह टेकऑफ लेगी और फिर छोटे विमान की तरह उड़ेगी। यह फ्लाइंग टैक्सी एक,शून्य पाउंड का वजन उठाने में सक्षम है, लिहाजा यह चार यात्रियों और एक पायलट को ले जाने में सक्षम होगी। कंपनी की दो हज़ार पच्चीस में इसकी वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करने की योजना है।
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30 अप्रैल 1908 को खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चंद चाकी ने एक बम विस्फोट किया था। इस विस्फोट का निशाना जज किंग्सफोर्ड थे, लेकिन हमले में वो बच गए और दो ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई। अंग्रेजों ने उसी शाम खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर लिया और उन पर मुकदमा चलाया गया।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इन दोनों क्रांतिकारियों के पक्ष में अपने अखबार 'केसरी' में लिखा। इसी वजह से 3 जुलाई 1908 को अंग्रेजों ने तिलक को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें 6 साल की सजा सुनाई गई और जेल में डाल दिया गया। जेल में रहने के दौरान ही तिलक ने 400 पन्नों की किताब गीता रहस्य भी लिखी।
23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे तिलक आधुनिक कॉलेज शिक्षा पाने वाली पहली भारतीय पीढ़ी में से थे। उन्होंने कुछ समय तक स्कूल और कॉलेजों में गणित पढ़ाया। तिलक मानते थे कि अंग्रेजी शिक्षा भारतीय सभ्यता के प्रति अनादर सिखाती है, इसलिए उन्होंने दक्कन शिक्षा सोसाइटी की स्थापना की ताकि भारतीयों को अच्छी शिक्षा दी जा सके।
तिलक ने मराठी में 'मराठा दर्पण' और 'केसरी' नाम से दो अखबार शुरू किए थे, जिनमें वे अंग्रेजी शासन की क्रूरता के खिलाफ लिखा करते थे। ये दोनों ही अखबार लोगों में काफी पसंद किए जाते थे। लोकमान्य तिलक के प्रयासों से ही महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव को सामाजिक उत्सव का रूप मिला। इन त्योहारों के जरिए जनता को अंग्रेजों के अन्यायों के विरुद्ध जागरूक किया जाता था।
1896-97 में महाराष्ट्र में प्लेग महामारी फैली और इस दौरान तिलक ने खुद को राहत कार्यों में झोंक दिया, लेकिन वे महामारी के दौरान ब्रिटिश शासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से सख्त नाराज थे। इसके लिए उन्होंने अखबार में एक लेख लिखा, जिसमें गीता की पंक्तियों के जरिए कहा गया था कि जुल्म करने वालों को बेकसूर नहीं माना जा सकता।
कहा जाता है कि उनके इस लेख से प्रेरित होकर चापेकर बंधुओं ने वाल्टर चार्ल्स रैंड की हत्या कर दी थी। ब्रिटिश सरकार ने तिलक को हत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
1914 में जेल से रिहा होने के बाद तिलक ने 1916 में एनीबेसेंट के साथ होम रूल लीग की स्थापना की। इस आन्दोलन का उद्देश्य भारत में स्वराज स्थापित करना था। होम रूल आन्दोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक को काफी प्रसिद्धी मिली, जिस कारण उन्हें लोकमान्य की उपाधि मिली। देश के इस महान नेता ने 01 अगस्त 1920 को अंतिम सांस ली। महात्मा गांधी ने उन्हें आधुनिक भारत के निर्माता की उपाधि दी थी।
18वीं शताब्दी की शुरुआत में ही यूरोप में कई सेविंग बैंक खोले जा चुके थे और लाखों लोग उनकी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। जब अमेरिका के लोगों ने इन बैंकों का फायदा देखा तो उन्होंने भी इसी तरह का बैंक अमेरिका में खोलने की तैयारी की।
आज ही के दिन साल 1819 में अमेरिका के पहले सेविंग बैंक की शुरुआत हुई थी। ये अमेरिका का चौथा सार्वजनिक बैंक था। शुरुआत में अखबारों में इसे गरीबों का बैंक कहकर प्रचारित किया गया। इस बैंक को खोलने का उद्देश्य समाज के निचले तबके को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना और उनकी सेविंग को सुरक्षित करना था।
इस बैंक की शुरुआत का श्रेय थॉमस एडी को जाता है। थॉमस ने 25 नवंबर 1816 को इस बारे में पहली मीटिंग की। कई मीटिंग के बाद बैंक का एक लिखित संविधान तैयार किया गया और बैंक को सेविंग बैंक ऑफ न्यूयॉर्क नाम दिया गया।
तय किया गया कि 5 से 50 डॉलर तक के डिपॉजिट पर 5% सालाना ब्याज दिया जाएगा। इससे ज्यादा की राशि पर ब्याज दर 6% होगी। ग्राहकों को एक डायरी दी जाती थी जिसमें लेनदेन का सारा हिसाब-किताब होता था। आज ही के दिन 1819 में बैंक की शुरुआत हुई।
बैंक को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और महीनेभर में ही करीब 1 हजार अकाउंट खुल गए। कहा जाता है कि सिविल वॉर के दौरान जब अमेरिका के बाकी बैंक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे, तब भी इस बैंक में 11 मिलियन डॉलर का बैलेंस था।
1982 में इस बैंक को बफैलो सेविंग बैंक के साथ मर्ज कर दिया गया। 1991 में ये बैंक दिवालिया हो गया और सरकार ने इसे दो कंपनियों को बेच दिया।
1996: हिंदी फिल्मों के अभिनेता राजकुमार का निधन।
1928: जॉन लॉगी बेयर्ड ने लंदन में पहली बार रंगीन टेलिविजन के प्रसारण का डेमॉन्स्ट्रेशन किया।
1884: अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज डाउ जोंस ने दुनिया का पहला स्टॉक इंडेक्स जारी किया।
1661: पुर्तगाल ने बॉम्बे को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय को गिफ्ट में दे दिया।
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तीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ आठ को खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चंद चाकी ने एक बम विस्फोट किया था। इस विस्फोट का निशाना जज किंग्सफोर्ड थे, लेकिन हमले में वो बच गए और दो ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई। अंग्रेजों ने उसी शाम खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर लिया और उन पर मुकदमा चलाया गया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इन दोनों क्रांतिकारियों के पक्ष में अपने अखबार 'केसरी' में लिखा। इसी वजह से तीन जुलाई एक हज़ार नौ सौ आठ को अंग्रेजों ने तिलक को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें छः साल की सजा सुनाई गई और जेल में डाल दिया गया। जेल में रहने के दौरान ही तिलक ने चार सौ पन्नों की किताब गीता रहस्य भी लिखी। तेईस जुलाई एक हज़ार आठ सौ छप्पन को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे तिलक आधुनिक कॉलेज शिक्षा पाने वाली पहली भारतीय पीढ़ी में से थे। उन्होंने कुछ समय तक स्कूल और कॉलेजों में गणित पढ़ाया। तिलक मानते थे कि अंग्रेजी शिक्षा भारतीय सभ्यता के प्रति अनादर सिखाती है, इसलिए उन्होंने दक्कन शिक्षा सोसाइटी की स्थापना की ताकि भारतीयों को अच्छी शिक्षा दी जा सके। तिलक ने मराठी में 'मराठा दर्पण' और 'केसरी' नाम से दो अखबार शुरू किए थे, जिनमें वे अंग्रेजी शासन की क्रूरता के खिलाफ लिखा करते थे। ये दोनों ही अखबार लोगों में काफी पसंद किए जाते थे। लोकमान्य तिलक के प्रयासों से ही महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव को सामाजिक उत्सव का रूप मिला। इन त्योहारों के जरिए जनता को अंग्रेजों के अन्यायों के विरुद्ध जागरूक किया जाता था। एक हज़ार आठ सौ छियानवे-सत्तानवे में महाराष्ट्र में प्लेग महामारी फैली और इस दौरान तिलक ने खुद को राहत कार्यों में झोंक दिया, लेकिन वे महामारी के दौरान ब्रिटिश शासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से सख्त नाराज थे। इसके लिए उन्होंने अखबार में एक लेख लिखा, जिसमें गीता की पंक्तियों के जरिए कहा गया था कि जुल्म करने वालों को बेकसूर नहीं माना जा सकता। कहा जाता है कि उनके इस लेख से प्रेरित होकर चापेकर बंधुओं ने वाल्टर चार्ल्स रैंड की हत्या कर दी थी। ब्रिटिश सरकार ने तिलक को हत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। एक हज़ार नौ सौ चौदह में जेल से रिहा होने के बाद तिलक ने एक हज़ार नौ सौ सोलह में एनीबेसेंट के साथ होम रूल लीग की स्थापना की। इस आन्दोलन का उद्देश्य भारत में स्वराज स्थापित करना था। होम रूल आन्दोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक को काफी प्रसिद्धी मिली, जिस कारण उन्हें लोकमान्य की उपाधि मिली। देश के इस महान नेता ने एक अगस्त एक हज़ार नौ सौ बीस को अंतिम सांस ली। महात्मा गांधी ने उन्हें आधुनिक भारत के निर्माता की उपाधि दी थी। अट्ठारहवीं शताब्दी की शुरुआत में ही यूरोप में कई सेविंग बैंक खोले जा चुके थे और लाखों लोग उनकी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। जब अमेरिका के लोगों ने इन बैंकों का फायदा देखा तो उन्होंने भी इसी तरह का बैंक अमेरिका में खोलने की तैयारी की। आज ही के दिन साल एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में अमेरिका के पहले सेविंग बैंक की शुरुआत हुई थी। ये अमेरिका का चौथा सार्वजनिक बैंक था। शुरुआत में अखबारों में इसे गरीबों का बैंक कहकर प्रचारित किया गया। इस बैंक को खोलने का उद्देश्य समाज के निचले तबके को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना और उनकी सेविंग को सुरक्षित करना था। इस बैंक की शुरुआत का श्रेय थॉमस एडी को जाता है। थॉमस ने पच्चीस नवंबर एक हज़ार आठ सौ सोलह को इस बारे में पहली मीटिंग की। कई मीटिंग के बाद बैंक का एक लिखित संविधान तैयार किया गया और बैंक को सेविंग बैंक ऑफ न्यूयॉर्क नाम दिया गया। तय किया गया कि पाँच से पचास डॉलर तक के डिपॉजिट पर पाँच% सालाना ब्याज दिया जाएगा। इससे ज्यादा की राशि पर ब्याज दर छः% होगी। ग्राहकों को एक डायरी दी जाती थी जिसमें लेनदेन का सारा हिसाब-किताब होता था। आज ही के दिन एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में बैंक की शुरुआत हुई। बैंक को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और महीनेभर में ही करीब एक हजार अकाउंट खुल गए। कहा जाता है कि सिविल वॉर के दौरान जब अमेरिका के बाकी बैंक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे, तब भी इस बैंक में ग्यारह मिलियन डॉलर का बैलेंस था। एक हज़ार नौ सौ बयासी में इस बैंक को बफैलो सेविंग बैंक के साथ मर्ज कर दिया गया। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में ये बैंक दिवालिया हो गया और सरकार ने इसे दो कंपनियों को बेच दिया। एक हज़ार नौ सौ छियानवे: हिंदी फिल्मों के अभिनेता राजकुमार का निधन। एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस: जॉन लॉगी बेयर्ड ने लंदन में पहली बार रंगीन टेलिविजन के प्रसारण का डेमॉन्स्ट्रेशन किया। एक हज़ार आठ सौ चौरासी: अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज डाउ जोंस ने दुनिया का पहला स्टॉक इंडेक्स जारी किया। एक हज़ार छः सौ इकसठ: पुर्तगाल ने बॉम्बे को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय को गिफ्ट में दे दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हमेशा सकारात्मक विचारधारा अपनाएं, आशावादी बनें, क्योंकि निराशावादी विचारधारा ही इंसान को कुंठित कर असफलता की ओर धकेलती जाती है। आज के प्रगतिशील युग में विकलांग भी पीछे नहीं हैं। वे किसी भी कलात्मक हौबी को निखारकर अपने पैरों पर खडे हो सकते हैं। इस प्रकार वे परिवार में, समाज में आत्मसम्मान से जी सकते हैं। बस देर है सिर्फ अपनी योग्यता की पहचान कर उसमें सम्पूर्ण शक्ति से जुट जाने की। ऎसे लोगों से अपना सम्बन्ध बनायें, जो आपकी तहर महत्वाकांक्षी व परिश्रमी हों तथा सच्चो व दृढ इच्छाशक्ति वाले हों। निराश व्यक्ति का साथ निराशा ही देगा। निराशा सफलता की घोर दुश्मन है। किसी काम में असफल होने पर भाग्य को दोषी ना मानकर पूरी शक्ति व निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य की प्राçप्त में जुट जाइये। अपनी आंख अर्जुन की भांति सिर्फ अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रखिये।
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हमेशा सकारात्मक विचारधारा अपनाएं, आशावादी बनें, क्योंकि निराशावादी विचारधारा ही इंसान को कुंठित कर असफलता की ओर धकेलती जाती है। आज के प्रगतिशील युग में विकलांग भी पीछे नहीं हैं। वे किसी भी कलात्मक हौबी को निखारकर अपने पैरों पर खडे हो सकते हैं। इस प्रकार वे परिवार में, समाज में आत्मसम्मान से जी सकते हैं। बस देर है सिर्फ अपनी योग्यता की पहचान कर उसमें सम्पूर्ण शक्ति से जुट जाने की। ऎसे लोगों से अपना सम्बन्ध बनायें, जो आपकी तहर महत्वाकांक्षी व परिश्रमी हों तथा सच्चो व दृढ इच्छाशक्ति वाले हों। निराश व्यक्ति का साथ निराशा ही देगा। निराशा सफलता की घोर दुश्मन है। किसी काम में असफल होने पर भाग्य को दोषी ना मानकर पूरी शक्ति व निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य की प्राçप्त में जुट जाइये। अपनी आंख अर्जुन की भांति सिर्फ अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रखिये।
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कोरोना से जूझ रहे राजस्थान में एक बच्चे के बोरवेल में गिर जाने से हड़कंप मच गया है. घटना जोधपुर के जोइंतरा गांव की है. बताया जा रहा है कि 5 साल का रोहित सोमवार सुबह खेलते समय बोरवेल में गिर गया है. मौके पर एसडीएम समेत पुलिस फोर्स पहुंच गई है और बच्चे को निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. फिलहाल, बच्चे को ऑक्सीजन की सप्लाई दी जा रही है.
बताया जा रहा है कि रोहित अपने ननिहाल आया हुआ था. सोमवार सुबह खेलते-खेलते रोहित बोरवेल में गिर गया. बोरवेल ढका हुआ नहीं था. इस लापरवाही के चलते बच्चो बोरवेल में गिर गया. मौके पर पहुंची मेडिकल टीम ने बच्चे के लिए बोरवेल में ऑक्सीजन का पाइप पहुंचाया है. फिलहाल बच्चे की हालत ठीक बताई जा रही है.
इससे पहले पिछले साल जोधपुर के मेलाना गांव में 4 साल की बच्ची बोरवेल में गई थी. करीब 13 घंटे के रेस्क्यू के बाद भी 4 साल की बच्ची सीमा को नहीं बचाया जा सका. काफी मशक्कत के बाद 350 फीट गहरे बोरवेल से उसका शव बाहर निकाला गया था. पहले सीमा 130 फीट पर फंसी थी, लेकिन बाद वह काफी नीचे गिर गई थी.
सीमा के दादा करताराम ने बताया था कि खेत के बोरवेल का पंप खराब हो गया था, इसलिए उसे बाहर निकाल वायरिंग का काम किया जा रहा था, तब सीमा भी आसपास ही खेल रही थी. इस दौरान उसे चींटी ने काट लिया, तो वह दौड़कर मेरे पास आई, फिर जैसे ही पीछे जाने के लिए मुड़ी तब घास से उसका पांव फिसल गया और वह खुले बोरवेल में जा गिरी थी.
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कोरोना से जूझ रहे राजस्थान में एक बच्चे के बोरवेल में गिर जाने से हड़कंप मच गया है. घटना जोधपुर के जोइंतरा गांव की है. बताया जा रहा है कि पाँच साल का रोहित सोमवार सुबह खेलते समय बोरवेल में गिर गया है. मौके पर एसडीएम समेत पुलिस फोर्स पहुंच गई है और बच्चे को निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. फिलहाल, बच्चे को ऑक्सीजन की सप्लाई दी जा रही है. बताया जा रहा है कि रोहित अपने ननिहाल आया हुआ था. सोमवार सुबह खेलते-खेलते रोहित बोरवेल में गिर गया. बोरवेल ढका हुआ नहीं था. इस लापरवाही के चलते बच्चो बोरवेल में गिर गया. मौके पर पहुंची मेडिकल टीम ने बच्चे के लिए बोरवेल में ऑक्सीजन का पाइप पहुंचाया है. फिलहाल बच्चे की हालत ठीक बताई जा रही है. इससे पहले पिछले साल जोधपुर के मेलाना गांव में चार साल की बच्ची बोरवेल में गई थी. करीब तेरह घंटाटे के रेस्क्यू के बाद भी चार साल की बच्ची सीमा को नहीं बचाया जा सका. काफी मशक्कत के बाद तीन सौ पचास फीट गहरे बोरवेल से उसका शव बाहर निकाला गया था. पहले सीमा एक सौ तीस फीट पर फंसी थी, लेकिन बाद वह काफी नीचे गिर गई थी. सीमा के दादा करताराम ने बताया था कि खेत के बोरवेल का पंप खराब हो गया था, इसलिए उसे बाहर निकाल वायरिंग का काम किया जा रहा था, तब सीमा भी आसपास ही खेल रही थी. इस दौरान उसे चींटी ने काट लिया, तो वह दौड़कर मेरे पास आई, फिर जैसे ही पीछे जाने के लिए मुड़ी तब घास से उसका पांव फिसल गया और वह खुले बोरवेल में जा गिरी थी.
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Money9: 'अच्छे से अच्छा न तोड़ पाए', क्या ऐसा ही है इस शेयर का मुनाफे से जोड़?
Money9: आप इस कंपनी को भले न जानते हों, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि इसके फेमस ब्रैंड फेविकोल को न जानते हों. फेविकोल के समय-समय पर आने वाले अनूठे ऐड लोगों के दिलो-दिमाग में बस गए हैं. इस ब्रैंड की मालिक है Pidilite. लेकिन क्या इसके शेयर भी उसी तरह से मजबूती वाले हैं जैसा कि इसका फेविकोल.. आइए इसकी पड़ताल करते हैं.
- ये कंपनी एडहेसिव, सील करने वाले उत्पाद, वाटरप्रूफिंग से जुड़े उत्पाद, कंस्ट्रक्शन से जुड़े कैमिकल, इंडस्ट्रिल रेजिन, पॉलिमर जैसे उत्पाद बनाती है.
- एडहेसिव सेगमेंट में कंपनी मार्केट लीडर है. बिक्री के हिसाब से फेविकोल एशिया का सबसे बड़ा एडहेसिव ब्रांड है.
- कुल आठ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के जरिए कंपनी अमेरिका, सिंगापुर, मॉरिशस समेत कुल 71 देशों में कारोबार करती है.
- Fevicol, Dr Fixit, M-Seal, Araldite, Fevikwik, Fevistik, Fevigum, Fevibond जैसे मशहूर ब्रांड्स इसके पास हैं.
क्या है मनी9?
Money9 का OTT ऐप अब गूगल प्ले और IOS पर उपलब्ध है. यहां होती है सात भाषाओं में आपके पैसे से जुड़ी हर बात.. यह अपनी तरह का एक अनूठा प्रयोग है. यहां शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी, टैक्स, आर्थिक नीतियों आदि से जुड़ी वो बातें होती हैं जो आपकी जेब आपके बजट पर असर डालती हैं. तो देर किस बात की डाउनलोड कीजिए मनी9 का ऐप और अपनी वित्तीय समझ को बढ़ाइए क्योंकि Money9 कहता है कि समझ है तो सहज है.
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Moneyनौ: 'अच्छे से अच्छा न तोड़ पाए', क्या ऐसा ही है इस शेयर का मुनाफे से जोड़? Moneyनौ: आप इस कंपनी को भले न जानते हों, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि इसके फेमस ब्रैंड फेविकोल को न जानते हों. फेविकोल के समय-समय पर आने वाले अनूठे ऐड लोगों के दिलो-दिमाग में बस गए हैं. इस ब्रैंड की मालिक है Pidilite. लेकिन क्या इसके शेयर भी उसी तरह से मजबूती वाले हैं जैसा कि इसका फेविकोल.. आइए इसकी पड़ताल करते हैं. - ये कंपनी एडहेसिव, सील करने वाले उत्पाद, वाटरप्रूफिंग से जुड़े उत्पाद, कंस्ट्रक्शन से जुड़े कैमिकल, इंडस्ट्रिल रेजिन, पॉलिमर जैसे उत्पाद बनाती है. - एडहेसिव सेगमेंट में कंपनी मार्केट लीडर है. बिक्री के हिसाब से फेविकोल एशिया का सबसे बड़ा एडहेसिव ब्रांड है. - कुल आठ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के जरिए कंपनी अमेरिका, सिंगापुर, मॉरिशस समेत कुल इकहत्तर देशों में कारोबार करती है. - Fevicol, Dr Fixit, M-Seal, Araldite, Fevikwik, Fevistik, Fevigum, Fevibond जैसे मशहूर ब्रांड्स इसके पास हैं. क्या है मनीनौ? Moneyनौ का OTT ऐप अब गूगल प्ले और IOS पर उपलब्ध है. यहां होती है सात भाषाओं में आपके पैसे से जुड़ी हर बात.. यह अपनी तरह का एक अनूठा प्रयोग है. यहां शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी, टैक्स, आर्थिक नीतियों आदि से जुड़ी वो बातें होती हैं जो आपकी जेब आपके बजट पर असर डालती हैं. तो देर किस बात की डाउनलोड कीजिए मनीनौ का ऐप और अपनी वित्तीय समझ को बढ़ाइए क्योंकि Moneyनौ कहता है कि समझ है तो सहज है.
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औपनिवेशिक स्वराज्य से अधिक कुछ नहीं है, जो हम दे सकें । हमको आपने सार भगाया होता तो और बात थी, लेकिन मित्रताके साथ जानेमें यही तरीका श्रेष्ठ है ।'
वाइसरायने यह भी बताया कि 'हम इसलिए मित्रतापूर्वक जाते हैं कि हिंदुस्तानने हमें मारकर फेंकनेकी कोशिश नहीं की। सन् ४२ में रेल, तार आदि काटे सही; पर वे थोड़े आदमी थे, करोड़ोंने ऐसा नहीं किया; लेकिन आपने शराफत वरती । आपने हमरो इतना ही कहा, 'आप चले जाओो'; क्योंकि आपको यह बुरा लगा कि हमने हिंदमें जहर फैलाया है । लेकिन कांग्रेसने हमें जहर नहीं दिया । उसने केवल असहयोग किया और हम समझ गए कि विना मार्शल-लाके हम यहां नहीं रह सकते हैं, इसलिए हमने जाना स्वीकार किया ।'
अगर हमारा असहयोग पूरा-पूरा होता तो आजसे बहुत पहले और कहीं अच्छे तरीकेपर अंग्रेज चले गए होते । कांग्रेसने विद्यार्थियोंसे, नौकरोंसे और सिपाहियोंसे भी कहा था कि आप सब वहांसे निकल वें । लेकिन वे कमजोर रहे, उन्हें छोड़ नहीं सके । फिर भी आप लोगोंने यह नहीं कहा कि 'हम उन्हें मार डालेंगे। उन्हें जहर दे देंगे ।' हमारी इस शक्तिको अंग्रेजोंने परख लिया और इस कारण वे जा रहे हैं । लेकिन वाइसराय कहते हैं कि अब भी लोग हमपर भरोसा नहीं करते । एक अखवारवालेने लिखा है कि अंग्रेज यहां सत्ता जमाने आए हैं और भारतके दो टुकड़े करके जा रहे हैं, ताकि दोनों टुकड़े लड़ें और एक-नएक अंग्रेजका दामन पकड़े । तो उन्हें यहां रहना मिल जायगा ।'
यह तो दगा होगा और मुझे आशा है कि अंग्रेज इस वार दगा न करेंगे। अगर करें तो भी हम खुद दहांदुर वनें । बहादुर लोग धोखेसे क्यों डरेंगे ? जब वे मेरे साथ शराफतमे बात करते हैं तो मैं क्यों शंका करूं । मुझसे वाइसरायने पूछा, 'तुझे तो मुझपर विश्वास है या तुझे भी नहीं है ?" तब मैंने उनसे कहा कि मुझे विश्वास न होता तो मैं आपके पास आता ही नहीं। मैं सत्यवादी हूं, शरीफ हूं ।'
वाइसरायसे ऐसी हमारी दातें चलती रहीं और यह जो पाकिस्तान तया हिंदुस्तान बना दिया गया है उसके बारेमें मेरे दिलमें जो परेशानी है,
वह भी मैंने वाइसरायको सुना दो । तब उन्होंने मुझे बताया कि यह अंग्रेज किया हुआ नहीं है। कांग्रेस और लीगने मिलकर जो मांगा है वही दिया गया है। और हम तुरंत ही इसलिए नहीं चले जा सकते कि एक छोटे घरके सामानके बटवारेमें उसकी फेहरिस्त बनाने में कुछ देर लगती है, तो यह तो इतने बड़े मुल्कके बटवारेकी बात है। फिर भी मैंने उनसे कहा कि आराम करें। यह बटवारे आदिका काम
हम आपसमें मिलकर कर लें, यही अच्छा }
आप लोगोंके मार्फत दो-चार दिनसे मिन्नत कर रहा हूं और आज भी करता हूं कि आपको जो चाहिए था मिल गया - चाहे कुछ कम मिला; पर वह क्या है यह तो बताइए ! उसका नाम-ही-नाम गुलावका है, या उसमें खुशबू भी है ? सुंघाइए तो सही और यह तो बताइए कि आपके यहां सिखोंको और हिंदुओंको जगह है या उन्हें गुलाम रहना है ? और सोमाप्रांतमें जनमत लेकर आप क्या सीमाप्रांतके भी दो टुकड़े करना चाहते हैं ? और वलूचिस्तानके भो ?
क्या आप भी अपनी कार्रवाई नहीं बतायंगे कि आजतक मुसलमानोंने हिंदूको अपना दुश्मन माना, पर शव नहीं मानेंगे ? पठानका हिस्सा नहीं करेंगे ? वलूचका हिस्सा भी नहीं करेंगे और हिंदू-हिंदूका भी नहीं करेंगे ? हिंदुस्तान अखंड रहेगा, पर भाई-भाईके तौरपर हम उसमें बटवारा कर लेंगे और अंग्रेज विना हमारी गाड़ी चलेगी ।
मेरी इस वातपर वे मुझे गाली दें तो मुझे गम नहीं है। मुझे तो कल भी गाली मिली थी कि 'तू मर क्यों नहीं जाता।' पर वे खुलासा तो करें कि उनका मंशा क्या है ? अब भी मेरे पास क्यों नहीं आते ? आपके पास क्यों नहीं आते ? कांग्रेसी या गैर कांग्रेसीको अपने पास क्यों नहीं बुलाते ? एक जमाना था जब कांग्रेस-लीगका समझौता उन्होंने किया था । और पक्का और अटूट समझोता क्यों नहीं करते ?
हम सब मिलकर कोशिश करें कि दुश्मन न रहकर वनें । यह काम अकेले वाइसराय नहीं कर सकते, अकेली कांग्रेस भी नहीं कर सकती। सब मिलकर ही दोस्त बन सकते हैं ।
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औपनिवेशिक स्वराज्य से अधिक कुछ नहीं है, जो हम दे सकें । हमको आपने सार भगाया होता तो और बात थी, लेकिन मित्रताके साथ जानेमें यही तरीका श्रेष्ठ है ।' वाइसरायने यह भी बताया कि 'हम इसलिए मित्रतापूर्वक जाते हैं कि हिंदुस्तानने हमें मारकर फेंकनेकी कोशिश नहीं की। सन् बयालीस में रेल, तार आदि काटे सही; पर वे थोड़े आदमी थे, करोड़ोंने ऐसा नहीं किया; लेकिन आपने शराफत वरती । आपने हमरो इतना ही कहा, 'आप चले जाओो'; क्योंकि आपको यह बुरा लगा कि हमने हिंदमें जहर फैलाया है । लेकिन कांग्रेसने हमें जहर नहीं दिया । उसने केवल असहयोग किया और हम समझ गए कि विना मार्शल-लाके हम यहां नहीं रह सकते हैं, इसलिए हमने जाना स्वीकार किया ।' अगर हमारा असहयोग पूरा-पूरा होता तो आजसे बहुत पहले और कहीं अच्छे तरीकेपर अंग्रेज चले गए होते । कांग्रेसने विद्यार्थियोंसे, नौकरोंसे और सिपाहियोंसे भी कहा था कि आप सब वहांसे निकल वें । लेकिन वे कमजोर रहे, उन्हें छोड़ नहीं सके । फिर भी आप लोगोंने यह नहीं कहा कि 'हम उन्हें मार डालेंगे। उन्हें जहर दे देंगे ।' हमारी इस शक्तिको अंग्रेजोंने परख लिया और इस कारण वे जा रहे हैं । लेकिन वाइसराय कहते हैं कि अब भी लोग हमपर भरोसा नहीं करते । एक अखवारवालेने लिखा है कि अंग्रेज यहां सत्ता जमाने आए हैं और भारतके दो टुकड़े करके जा रहे हैं, ताकि दोनों टुकड़े लड़ें और एक-नएक अंग्रेजका दामन पकड़े । तो उन्हें यहां रहना मिल जायगा ।' यह तो दगा होगा और मुझे आशा है कि अंग्रेज इस वार दगा न करेंगे। अगर करें तो भी हम खुद दहांदुर वनें । बहादुर लोग धोखेसे क्यों डरेंगे ? जब वे मेरे साथ शराफतमे बात करते हैं तो मैं क्यों शंका करूं । मुझसे वाइसरायने पूछा, 'तुझे तो मुझपर विश्वास है या तुझे भी नहीं है ?" तब मैंने उनसे कहा कि मुझे विश्वास न होता तो मैं आपके पास आता ही नहीं। मैं सत्यवादी हूं, शरीफ हूं ।' वाइसरायसे ऐसी हमारी दातें चलती रहीं और यह जो पाकिस्तान तया हिंदुस्तान बना दिया गया है उसके बारेमें मेरे दिलमें जो परेशानी है, वह भी मैंने वाइसरायको सुना दो । तब उन्होंने मुझे बताया कि यह अंग्रेज किया हुआ नहीं है। कांग्रेस और लीगने मिलकर जो मांगा है वही दिया गया है। और हम तुरंत ही इसलिए नहीं चले जा सकते कि एक छोटे घरके सामानके बटवारेमें उसकी फेहरिस्त बनाने में कुछ देर लगती है, तो यह तो इतने बड़े मुल्कके बटवारेकी बात है। फिर भी मैंने उनसे कहा कि आराम करें। यह बटवारे आदिका काम हम आपसमें मिलकर कर लें, यही अच्छा } आप लोगोंके मार्फत दो-चार दिनसे मिन्नत कर रहा हूं और आज भी करता हूं कि आपको जो चाहिए था मिल गया - चाहे कुछ कम मिला; पर वह क्या है यह तो बताइए ! उसका नाम-ही-नाम गुलावका है, या उसमें खुशबू भी है ? सुंघाइए तो सही और यह तो बताइए कि आपके यहां सिखोंको और हिंदुओंको जगह है या उन्हें गुलाम रहना है ? और सोमाप्रांतमें जनमत लेकर आप क्या सीमाप्रांतके भी दो टुकड़े करना चाहते हैं ? और वलूचिस्तानके भो ? क्या आप भी अपनी कार्रवाई नहीं बतायंगे कि आजतक मुसलमानोंने हिंदूको अपना दुश्मन माना, पर शव नहीं मानेंगे ? पठानका हिस्सा नहीं करेंगे ? वलूचका हिस्सा भी नहीं करेंगे और हिंदू-हिंदूका भी नहीं करेंगे ? हिंदुस्तान अखंड रहेगा, पर भाई-भाईके तौरपर हम उसमें बटवारा कर लेंगे और अंग्रेज विना हमारी गाड़ी चलेगी । मेरी इस वातपर वे मुझे गाली दें तो मुझे गम नहीं है। मुझे तो कल भी गाली मिली थी कि 'तू मर क्यों नहीं जाता।' पर वे खुलासा तो करें कि उनका मंशा क्या है ? अब भी मेरे पास क्यों नहीं आते ? आपके पास क्यों नहीं आते ? कांग्रेसी या गैर कांग्रेसीको अपने पास क्यों नहीं बुलाते ? एक जमाना था जब कांग्रेस-लीगका समझौता उन्होंने किया था । और पक्का और अटूट समझोता क्यों नहीं करते ? हम सब मिलकर कोशिश करें कि दुश्मन न रहकर वनें । यह काम अकेले वाइसराय नहीं कर सकते, अकेली कांग्रेस भी नहीं कर सकती। सब मिलकर ही दोस्त बन सकते हैं ।
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मां अक्सर छोटे बच्चों के साथ सोती है। भारतीय परिवारों में यह एक आम चलन है। देखा जाए तो कोई भी अपने नवजात शिशु को अकेले सोने के लिए नहीं छोड़ेगा। लेकिन क्या आपको पता है बच्चों के साथ सोना कई बार उनके लिए खतरनाक हो सकता है। दरअसल, एक नई स्टडी इस ओर इशारा करती है कि नवजात शिशुओं के साथ सोना खतरनाक हो सकता है।
अमेरिका में हुई एक स्टडी के मुताबिक शिशुओं को अपने साथ सुलाने वाली महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या होती है। इसकी वजह बच्चों की नींद की समस्या रहती है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अमेरिका में बच्चों की आकस्मिक होने वाली मौत के पीछे यह भी एक वजह है।
दरअसल, यूरोप और अमेरिका में मौसम ठंडा होता है। ठंड यहां का मुख्य मौसम ही है ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें कंबल या चादर ओढ़ाया जाता है जिससे कई बार उनकी मौत दम घुटने के कारण होती है। ऐसे में यदि आप बच्चों को पास सुला रही हैं या रहे हैं तो उन्हें पूरी तरह ना ढकें।
हालांकि भारत में मौसम बदलता रहता है लिहाजा दम घुटने जैसी समस्या का सामना परिवारों में नहीं होता। लेकिन डॉक्टर और विशेष रूप से चाइल्ड एक्सपर्ट मानते हैं कि चार से पांच माह के शिशुओं को माता-पिता के बीच नहीं सुलाना चाहिए यह उनके लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार उन पर पैर रखने, उन पर पीठ या करवट का दबाव उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
दरअसल, डॉक्टर मानते हैं कि छोटे बच्चों विशेष रूप से नवजात शिशुओं को बिस्तर, पलंग और खटिया वगैरह पर सुलाते हुए भी बहुत ध्यान देने की जरूतर होती है। शुरुआती समय में बच्चों की गर्दन का विकास होता रहता है ऐसे में गर्दन के मुड़ने, टेढ़ा हो जाने या झटका-मोच लग जाने का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को पास सुलाते वक्त खास सावधानियां बरती जाएं।
नोटः यह लेख आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है। यदि आपके यहां नवजात शिशु है तो उसकी परिवरिश के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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मां अक्सर छोटे बच्चों के साथ सोती है। भारतीय परिवारों में यह एक आम चलन है। देखा जाए तो कोई भी अपने नवजात शिशु को अकेले सोने के लिए नहीं छोड़ेगा। लेकिन क्या आपको पता है बच्चों के साथ सोना कई बार उनके लिए खतरनाक हो सकता है। दरअसल, एक नई स्टडी इस ओर इशारा करती है कि नवजात शिशुओं के साथ सोना खतरनाक हो सकता है। अमेरिका में हुई एक स्टडी के मुताबिक शिशुओं को अपने साथ सुलाने वाली महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या होती है। इसकी वजह बच्चों की नींद की समस्या रहती है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अमेरिका में बच्चों की आकस्मिक होने वाली मौत के पीछे यह भी एक वजह है। दरअसल, यूरोप और अमेरिका में मौसम ठंडा होता है। ठंड यहां का मुख्य मौसम ही है ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें कंबल या चादर ओढ़ाया जाता है जिससे कई बार उनकी मौत दम घुटने के कारण होती है। ऐसे में यदि आप बच्चों को पास सुला रही हैं या रहे हैं तो उन्हें पूरी तरह ना ढकें। हालांकि भारत में मौसम बदलता रहता है लिहाजा दम घुटने जैसी समस्या का सामना परिवारों में नहीं होता। लेकिन डॉक्टर और विशेष रूप से चाइल्ड एक्सपर्ट मानते हैं कि चार से पांच माह के शिशुओं को माता-पिता के बीच नहीं सुलाना चाहिए यह उनके लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार उन पर पैर रखने, उन पर पीठ या करवट का दबाव उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दरअसल, डॉक्टर मानते हैं कि छोटे बच्चों विशेष रूप से नवजात शिशुओं को बिस्तर, पलंग और खटिया वगैरह पर सुलाते हुए भी बहुत ध्यान देने की जरूतर होती है। शुरुआती समय में बच्चों की गर्दन का विकास होता रहता है ऐसे में गर्दन के मुड़ने, टेढ़ा हो जाने या झटका-मोच लग जाने का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को पास सुलाते वक्त खास सावधानियां बरती जाएं। नोटः यह लेख आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है। यदि आपके यहां नवजात शिशु है तो उसकी परिवरिश के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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[भाग [I - खण्ड 3 (ii) ]
4. निर्यात के लिए जीवित मछली समय समय पर किसी राज्य या केन्द्रीय सरकार द्वारा वाणिज्यिक या पर्यावरणीय या संरक्षण उपायों के संबंध में अधिरोपित कानूनी निर्बंधनों के अधीन यथा अधिकथित शर्तों के अध्यधीन होगी ।
5. मछलियों को स्वास्थ्यकर अवस्थाओं में रखा जाएगा ।
6. जीवित मछलियों को भू- तत्व पर आने के दौरान और उसके पश्चात् उनका हथालन उपाबंध 1 के अधीन अपेक्षाओं के अनुसार होगा ।
7. उपाबंध 1 के अनुसार अनुमोदित स्थापनाओं में जीवित मछलियों का हथालन स्वास्थ्यकर रूप में होगा ।
8. प्रसंस्करणकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि जो व्यक्ति स्थापनों के लिए जिम्मेदार है ऐसे सभी आवश्यक उपाय अपनाएगा ताकि सभी विनिर्देशों का पालन किया जा सके ।
9. स्वयं का यह समाधान हो जाने पर कि स्थापन उन क्रियाकलापों की जो वे करते हैं प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाएं पूरी करते हैं ऐसे स्थापन द्वारा अभिकरण को दी गई प्रार्थना पत्र पर अनुमोदन प्रदान करेगा ।
10. अभिकरण समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संगम के प्रतिनिधियों से स्थापन के अनुमोदन के विषय में सहायता ले सकेगा ।
11. यदि अपेक्षाएं पूरी नहीं होती है तो अभिकरण आवश्यक उपाय करेगा ।
12. परिषद अनुमोदित स्थापन की एक सूची तैयार करेगा जिसमें से प्रत्येक का उसके द्वारा समनुदेशित एक शासकीय संख्यांक होगा ।
13. स्थापन का निरीक्षण एवं मानिटरिंग अभिकरण के उत्तरदायित्व के अधीन नियमित रुप से किया जाएगा जिसको इस अधिसूचना की अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने की दृष्टि से इस अधिसूचना के लागू होने से संबंधित स्थापनों के सभी भागों और अभिलेख तक सभी समयों पर स्वतंत्र रूप से पहुंच होगी ।
THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY
प्रमाणीकरणः- प्रसंस्करणकर्ता या निर्यातकर्ता की प्रार्थना पर अभिकरण स्वयं का समाधान होने के पश्चात् कि जीवित मछलियों का रखरखाव अनुमोदित स्थापनों में जिनके पास विधिमान्य अनुमोदन संख्या है होता है, और सुसंगत अपेक्षाएं पूरी होने के पश्चात् स्वास्थ्य या पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी करेगा ।
14.1 अभिकरण निर्यातक या प्रसंस्करणकर्ता के अनुरोध पर अपना यह समाधान कर लेने के पश्चात् की सुसंगत मानकों की अपेक्षाओं को पूरा किया गया है, प्रमाण पत्र जारी करेगा ।
15. फीसः- (i) खंड 9 के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ ( 2000 /- ) दो हजार रुपए की फीस स्थापन द्वारा संदत्त की जाएगी ।
(ii) अनुमोदन और मानीटरिंग प्रणाली के मामलों में निरीक्षण फीस 0.2 प्रतिशत एफ. ओ.बी. मूल्य होगा । प्रत्येक परेषण पर न्यूनतम फीस पांच सौ रुपए ( रुपए 500/-) निर्यातको द्वारा अभिकरण को भुगतान किया जाएगा ।
अपीलः (i) खंड 9 के अधीन अनुमोदन प्रमाण पत्र जारी करने से अभिकरण के इंकार किए जाने से व्यथित कोई निर्यातकर्ता ऐसी अस्वीकृति की संसूचना की प्राप्ति के दस दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त अपीली पैनल को अपील कर सकेगा जिसमें तीन से अन्यून किन्तु सात से अनधिक व्यक्ति होंगे ।
(ii) पैनल की कुल सदस्यता के दो तिहाई गैर सरकारी सदस्य होंगे । (i) पैनल गणपूर्ति
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[भाग [I - खण्ड तीन ] चार. निर्यात के लिए जीवित मछली समय समय पर किसी राज्य या केन्द्रीय सरकार द्वारा वाणिज्यिक या पर्यावरणीय या संरक्षण उपायों के संबंध में अधिरोपित कानूनी निर्बंधनों के अधीन यथा अधिकथित शर्तों के अध्यधीन होगी । पाँच. मछलियों को स्वास्थ्यकर अवस्थाओं में रखा जाएगा । छः. जीवित मछलियों को भू- तत्व पर आने के दौरान और उसके पश्चात् उनका हथालन उपाबंध एक के अधीन अपेक्षाओं के अनुसार होगा । सात. उपाबंध एक के अनुसार अनुमोदित स्थापनाओं में जीवित मछलियों का हथालन स्वास्थ्यकर रूप में होगा । आठ. प्रसंस्करणकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि जो व्यक्ति स्थापनों के लिए जिम्मेदार है ऐसे सभी आवश्यक उपाय अपनाएगा ताकि सभी विनिर्देशों का पालन किया जा सके । नौ. स्वयं का यह समाधान हो जाने पर कि स्थापन उन क्रियाकलापों की जो वे करते हैं प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाएं पूरी करते हैं ऐसे स्थापन द्वारा अभिकरण को दी गई प्रार्थना पत्र पर अनुमोदन प्रदान करेगा । दस. अभिकरण समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संगम के प्रतिनिधियों से स्थापन के अनुमोदन के विषय में सहायता ले सकेगा । ग्यारह. यदि अपेक्षाएं पूरी नहीं होती है तो अभिकरण आवश्यक उपाय करेगा । बारह. परिषद अनुमोदित स्थापन की एक सूची तैयार करेगा जिसमें से प्रत्येक का उसके द्वारा समनुदेशित एक शासकीय संख्यांक होगा । तेरह. स्थापन का निरीक्षण एवं मानिटरिंग अभिकरण के उत्तरदायित्व के अधीन नियमित रुप से किया जाएगा जिसको इस अधिसूचना की अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने की दृष्टि से इस अधिसूचना के लागू होने से संबंधित स्थापनों के सभी भागों और अभिलेख तक सभी समयों पर स्वतंत्र रूप से पहुंच होगी । THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY प्रमाणीकरणः- प्रसंस्करणकर्ता या निर्यातकर्ता की प्रार्थना पर अभिकरण स्वयं का समाधान होने के पश्चात् कि जीवित मछलियों का रखरखाव अनुमोदित स्थापनों में जिनके पास विधिमान्य अनुमोदन संख्या है होता है, और सुसंगत अपेक्षाएं पूरी होने के पश्चात् स्वास्थ्य या पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी करेगा । चौदह.एक अभिकरण निर्यातक या प्रसंस्करणकर्ता के अनुरोध पर अपना यह समाधान कर लेने के पश्चात् की सुसंगत मानकों की अपेक्षाओं को पूरा किया गया है, प्रमाण पत्र जारी करेगा । पंद्रह. फीसः- खंड नौ के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ दो हजार रुपए की फीस स्थापन द्वारा संदत्त की जाएगी । अनुमोदन और मानीटरिंग प्रणाली के मामलों में निरीक्षण फीस शून्य.दो प्रतिशत एफ. ओ.बी. मूल्य होगा । प्रत्येक परेषण पर न्यूनतम फीस पांच सौ रुपए निर्यातको द्वारा अभिकरण को भुगतान किया जाएगा । अपीलः खंड नौ के अधीन अनुमोदन प्रमाण पत्र जारी करने से अभिकरण के इंकार किए जाने से व्यथित कोई निर्यातकर्ता ऐसी अस्वीकृति की संसूचना की प्राप्ति के दस दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त अपीली पैनल को अपील कर सकेगा जिसमें तीन से अन्यून किन्तु सात से अनधिक व्यक्ति होंगे । पैनल की कुल सदस्यता के दो तिहाई गैर सरकारी सदस्य होंगे । पैनल गणपूर्ति
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• इंग्लैंड जाने से पूर्व के कार्य।
• इंग्लैंड में पाँच वर्ष रहकर किए गए कार्य।
• भारत लौटकर एक वर्ष में किए गए कार्य।
• कदाचित् अभी तक अप्राप्य उनके कार्य।इंग्लैंड जाने से पूर्व के कार्यः
सन् 1903 से 1914 तक, केंब्रिज जाने से पूर्व तक, उनके द्वारा निकाले गए सूत्र तीन खंडों में हैं। ये उनकी तीन 'नोट-बुक्स' में संगृहीत हैं। पहली नोट बुक में 16 अध्याय हैं और इसमें 134 पृष्ठ हैं। दूसरी नोट बुक को पहली नोट बुक का परिवर्धित रूप माना जा सकता है। इसमें 21 अध्याय तथा 254 पृष्ठ हैं। तीसरी नोट बुक में 33 पृष्ठ हैं। इसमें कार्य को पहली दो के अनुसार संयोजित नहीं किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 4000 से अधिक परिणाम अंकित हैं। परंतु प्रथम नोट-बुक के कुछ परिणाम किसी-न-किसी रूप में द्वितीय नोट बुक में आए हैं।
यदि इन दोहरे परिणामों को एक बार ही माना जाए तो एक गणना के अनुसार इन तीनों नोट-बुक्स में कुल मिलाकर 3,542 प्रमेय हैं। ये प्रमेय रामानुजन ने अंकित भर कर दिए हैं; इनकी उपपत्तियाँ (proofs) उन्होंने नोट-बुक्स में नहीं दी हैं।
वह अपने पाँच शोध-लेख 'जर्नल ऑफ इंडियन मैथेमेटिकल सोसाइटी' में प्रकाशित करा चुके थे एवं पाँच अन्य सन् 1915 में इसी जर्नल में इंग्लैंड जाने के बाद प्रकाशित हुए।
रामानुजन के इन परिणामों को देखने से सभी को आश्चर्य होता है। इनमें लंबी-लंबी राशियाँ तथा वर्गमूलों आदि के बड़े ही चौंका देने वाले चिह्न हैं। उदाहरण के लिए रामानुजन के तीन सरलतम निष्कर्षों को देखिए - 1.
सबके मन में एक प्रश्न स्वतः उठता है कि रामानुजन ने उन्हें कैसे लिख दिया? यह भी प्रश्न उठता है कि उन्होंने उन परिणामों अथवा प्रमेयों को क्यों खोजा?
पहले प्रश्न से चकित सभी व्यक्ति इस बात से सहमत हैं कि रामानुजन असाधारण प्रतिभा के व्यक्ति थे और गणितीय सूत्रों में उनकी दृष्टि अपरिमेय थी। परंतु अन्य धारणाओं में अंतर है। यह प्रश्न स्वयं रामानुजन से भी कतिपय व्यक्तियों ने पूछा था। उनके द्वारा दिए उत्तर के आधार पर कई व्यक्तियों की ऐसी धारणा बन गई है कि वह नामगिरी देवी से उनको प्राप्त हुए। प्रो. हार्डी इस बात से सहमत नहीं हैं। उन्होंने रामानुजन की तुलना अन्य गणितज्ञों से एक विशेष प्रकार से की थी। उनका कहना था कि यदि 0 से 100 तक विभिन्न व्यक्तियों को प्रतिभा के आधार पर अंक दिए जाएँ तो वह स्वयं को 25, लिटिलवुड को 30, जर्मनी के गणितज्ञ डी. हिल्वर्ट को 80 तथा रामानुजन को 100 अंक देंगे। इसमें विशेष देखने की बात यह है कि उन्होंने रामानुजन को पूरे के पूरे अंक दिए। अतः वह रामानुजन में पूरे गणितज्ञ की छवि देखते हैं।
रामानुजन के कार्य के मूल्य के बारे में एक और प्रश्न उठाया जा सकता है। उनका कार्य एकदम पुरातन तो नहीं है, जिसका आधुनिक अथवा प्रचलित गणित से कोई सरोकार ही न हो?
देखने में रामानुजन का कार्य अवश्य पुरातन लगता है, परंतु वह अपने समय से बहुत आगे थे। उनके द्वारा निकाले गए कितने ही परिणामों ने समय के साथ नए विषयों (थ्योरियों) की नींव डाली है, जिनमें 'एनालिटिक नंबर' थ्योरी विशेष है। उनके द्वारा प्राप्त नए परिणामों का प्रभाव केवल गणित में ही नए शोध पर नहीं हुआ, बल्कि अन्य क्षेत्रों, जैसे - भौतिकी, कंप्यूटर साइंस एवं सांख्यिकी (स्टेटिस्टिक्स) में भी हुआ है। बाद में उनके परिणामों का प्रयोग कैंसर रोग के निदान में भी हुआ। आज सूचना संचार (Information Technology) तथा कूट-संवाद (क्रिप्टोलॉजी) में उनके निकाले सूत्रों के अच्छे प्रयोग हैं।
'पालो आल्ट्रो में सिंबोलिक्स, इन्क' के विलियम गोस्पर ने कुछ वर्ष पहले एक नया कंप्यूटरी अलगोरिथम निकाला था, जिससे पाई के मान के 17.5 मिलियन अंक निकाले जा सकते हैं। परंतु उनके ही अनुसार उनके उत्कृष्ट विचार रामानुजन ने पहले ही खोज निकाले थे।
इस प्रश्न का कि रामानुजन को इन परिणामों, जो उन्होंने निकाले, में क्यों रुचि हुई, का उत्तर अभी तक ठीक से देना किसी के लिए भी संभव नहीं हुआ है। अवश्य ही संख्याओं से उनकी अभिन्न मित्रता थी और उन्होंने अपने कुछ सूत्रों के प्रयोग से पाई के मान निकालने में भी रुचि दिखाई।इंग्लैंड में पाँच वर्ष रहकर किया गया कार्यः
रामानुजन अपनी तीनों नोट-बुक्स को इंग्लैंड साथ ले गए थे। उन्होंने इन्हें प्रो. हार्डी और अन्य व्यक्तियों को दिखाया तथा अध्ययन के लिए दिया था। परंतु अपने एक मित्र को लिखे उनके पत्र से यह पता लगता है कि वहाँ उन्हें अपनी उन नोट-बुक्स को देखने का समय नहीं मिला और उन्होंने उनका कोई उपयोग नहीं किया। अतः वहाँ का कार्य अपने आप में अलग है और वह वहाँ से प्रकाशित शोध-लेखों में अथवा प्रो. हार्डी, लिटिलवुड, वाटसन आदि द्वारा उनकी मृत्यु के बाद के विविध लेखों, व्याख्यानों तथा संकलित साहित्य में उपलब्ध है।
प्रकाशित बीस शोध-लेख उनके अपने हैं तथा सात प्रो. हार्डी के साथ हैं। इनकी एक सारणी इस पुस्तक के अंत में दी गई है।
उनके प्रकाशित सैंतीस शोध-लेखों को एक साथ अलग 'कलेक्टेड पेपर्स बाई श्रीनिवास रामानुजन' में छापा गया है, जिसका संपादन प्रो. जी. एच. हार्डी, प्रो. पी. वी. शेषु अय्यर तथा बी. एम. विल्सन ने किया है। इसका प्रकाशन पहले सन् 1927 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से तथा बाद में 1962 में पुनः चेल्सिया से हुआ।
1940 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित हुई थी।
12. lli tic and modular functions.भारत लौटकर एक वर्ष के बीच किए गए कार्यः
भारत आकर रामानुजन बीमारी की अवस्था में भी शोध में सतत लगे रहते थे। चूँकि तब भी वह स्लेट का प्रयोग करते रहे, अतः प्रो. ब्रूस बर्नडट का ऊपर दिया गया यह तर्क कि आर्थिक रूप से समर्थ न होने के कारण स्लेट का प्रयोग करते थे, निरस्त्र हो जाता है। यहाँ आकर सीधा प्रकाश में आया कार्य मॉकथीटा फंक्शन का रहा, जो उन्होंने प्रो. हार्डी के पास भेजा था।
रामानुजन की खोई नोट बुकः
अचानक रामानुजन द्वारा किया कार्य, जो अज्ञात था, सन् 1976 में प्रकाश में आया। इसका श्रेय जॉर्ज एंडूज को जाता है। उन्होंने इस कार्य को 'लॉस्ट बुक ऑफ रामानुजन' का नाम दिया। इस कार्य का प्रकाश में आना एक अजीब संयोग ही है।
अप्रैल 1976 में जॉर्ज एंडूज, जो तब युवक ही थे, को एक सप्ताह की एक कॉन्फ्रेंस में विस्कोन्सिन से फ्रांस जाना था। उनके साथ उनकी पत्नी तथा दो बेटियों को भी जाना था। वह सस्ते हवाई टिकट की खोज में थे। उन्हें पता लगा कि यदि वह तीन सप्ताह के लिए जाएँगे तो हवाई यात्रा के टिकट का मूल्य एक सप्ताह के टिकट के मूल्य से काफी कम होगा। प्रश्न था कि दो सप्ताह का अतिरिक्त समय कैसे और कहाँ व्यतीत किया जाए। एक मित्र ने पहले उन्हें सुझाया था कि सन् 1965 में कैंब्रिज के प्रो. जी. एन. वाटसन की मृत्यु के पश्चात् उनके कुछ अप्रकाशित एवं अधूरे लेख पड़े हैं, वह कभी उनको देखने पर विचार करें। बस, जॉर्ज एंडूज ने कैंब्रिज जाने का निश्चय कर लिया।
वाटसन, जिन्होंने रामानुजन के शोध-लेखों पर कार्य किया था, रॉयल सोसाइटी के फेलो थे। जब सन् 1965 में उनकी मृत्यु हुई तो सोसाइटी ने उनकी जीवनी लिखने का आग्रह जे. एम. विटेकर से किया। ह्विटेकर ने वाटसन की पत्नी से उनके लेखों को देखने के लिए घर आने की अनुमति माँगी। वाटसन की पत्नी ने सहर्ष उन्हें दोपहर के भोजन पर बुलाया और बाद में वाटसन के अध्ययन-कक्ष में ले गईं।
वाटसन कभी कुछ फेंकते नहीं थे, चाहे वह कोई गणित का लेख हो, कोई पत्र, किसी की रसीद या फिर आयकर फॉर्म का पुराना ड्राफ्ट ही। वहाँ ह्विटेकर ने देखा कि फर्श पर बहुत से कागज बिखरे पड़े हैं, जिनकी मोटाई लगभग एक फुट की रही होगी। वास्तव में उनको जला देने के लिए ही वहाँ फेंक दिया गया था। ह्विटेकर को समझ में ही नहीं आया कि वह क्या देखें और क्या छोड़ें। खैर, भाग्य का खेल देखिए कि एक बार झुककर जो कागज उन्होंने उठाया तो वह 140 पृष्ठ की वह गड्डी थी, जो सन् 1923 में मद्रास विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री ड्यूसबरी ने प्रो. हार्डी के पास भेजी थी। यह किसी प्रकार वाटसन के पास पहुँच गई थी। ह्विटेकर ने कागजों की वह गड्डी रॉबर्ट रैंकिन को दे दी। ह्विटेकर तथा रैंकिन - दोनों ही अच्छे गणितज्ञ थे, परंतु इन कागजों पर किया गया कार्य उनके क्षेत्र का नहीं था। अतः उसपर कुछ भी निर्णय लिये बिना ही रैंकिन ने सन् 1968 में वे कागज ट्रिनिटी कॉलेज को दे दिए और वह हस्तलिखित सामग्री ट्रिनिटी कॉलेज के 'रेन पुस्तकालय' में सिमटकर रह गई।
जॉर्ज एंड्रूज सन् 1976 में वहाँ पहुँचे तो उनपर उनकी दृष्टि पड़ी। उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उनके पी.एच.डी. थीसिस में किए गए मॉकथीटा फंक्शन पर कुछ सूत्र वहाँ पर थे। लिखावट से तथा ड्यूसबरी के पत्र से उन्होंने जान लिया कि यह रामानुजन का अपने अंतिम दिनों में किया गया कार्य है। उनका मन बाँसों उछलने लगा।
एंड्रूज तत्काल पुस्तकालय की सेवा डेस्क पर पहुँचे और उस पांडुलिपि की फोटो कॉपी करने की बात कही।
"जी हाँ! मैं यह सब खर्च वहन करने के लिए तैयार हूँ।" एंड्रूज ने कहा।
एंड्रूज ने लिखा है कि वह इसको प्राप्त करने के लिए 7 पाउंड खर्च करने की बात तो दूर रही, अपना घर भी गिरवी रखने के लिए तैयार हो जाते। लगभग पचपन वर्ष पहले तैयार रामानुजन की यह धरोहर किसी प्रकार बची रहकर गणित-जगत् को मिली।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पृष्ठ रामानुजन के हस्तलिखित, ज्यों-के-त्यों ले लिये गए हैं। कई पृष्ठों पर आड़ी-तिरछी पंक्तियाँ हैं, कटे-फटे अंश हैं। इनसे रामानुजन के सोचने तथा काम करने की विधि का अनुमान लगाना संभव है। कई स्थानों पर रामानुजन के हस्ताक्षर हैं। कुछ पृष्ठों पर प्रो. हार्डी की हस्तलिखित टिप्पणियाँ हैं। अमेरिका के उन विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में, जहाँ शोध कार्य होता है, इसकी प्रति मिल जाती है।अभी तक अप्राप्य उनके कार्यः
रामानुजन के शताब्दी समारोह के अवसर पर उनकी पत्नी से हुए साक्षात्कार से ऐसा पता चलता है कि उनके अंतिम दिनों में किया गया कुछ कार्य मद्रास विश्वविद्यालय के पास नहीं पहुँचा। ब्रूस बर्नडट के अनुसार, उनकी पत्नी ने ब्रूस को बताया कि जब रामानुजन की चिता जल रही थी तब रामानुजन के गणित के एक अध्यापक मद्रास विश्वविद्यालय से उनके घर आए और सब कागज बटोरकर ले गए। ब्रूस का कहना है कि 'रामानुजन की मृत्यु के पश्चात् कहीं अधिक पेपर्स थे, जो अभी तक हमारे पास नहीं पहुँचे हैं।' उन्हें शंका है कि अवश्य इनमें से कुछ पत्र कहीं मद्रास विश्वविद्यालय में धूल में लिपटे, अनदेखे पड़े हैं। परंतु पुस्तकालय के कर्मचारियों का कहना है कि जहाँ तक उनकी समझ है, रामानुजन की लिखी कोई सामग्री अब उनके पास नहीं है। बहुत संभव है कि किसी दिन किसी स्थान पर दैवयोग से रामानुजन की लिखी कोई सामग्री प्रकाश में आ जाएँ। उनके कुछ काम के विलुप्त रहने की पूरी संभावना मानी जाती है।
यदि विलुप्त अथवा अप्राप्य सामग्री का विचार छोड़ भी दें तो प्राप्य कार्य को समझाने और उसे विस्तार देने की असीम संभावनाएँ स्पष्ट रूप से मानी जाती हैं।
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• इंग्लैंड जाने से पूर्व के कार्य। • इंग्लैंड में पाँच वर्ष रहकर किए गए कार्य। • भारत लौटकर एक वर्ष में किए गए कार्य। • कदाचित् अभी तक अप्राप्य उनके कार्य।इंग्लैंड जाने से पूर्व के कार्यः सन् एक हज़ार नौ सौ तीन से एक हज़ार नौ सौ चौदह तक, केंब्रिज जाने से पूर्व तक, उनके द्वारा निकाले गए सूत्र तीन खंडों में हैं। ये उनकी तीन 'नोट-बुक्स' में संगृहीत हैं। पहली नोट बुक में सोलह अध्याय हैं और इसमें एक सौ चौंतीस पृष्ठ हैं। दूसरी नोट बुक को पहली नोट बुक का परिवर्धित रूप माना जा सकता है। इसमें इक्कीस अध्याय तथा दो सौ चौवन पृष्ठ हैं। तीसरी नोट बुक में तैंतीस पृष्ठ हैं। इसमें कार्य को पहली दो के अनुसार संयोजित नहीं किया गया है। इनमें कुल मिलाकर चार हज़ार से अधिक परिणाम अंकित हैं। परंतु प्रथम नोट-बुक के कुछ परिणाम किसी-न-किसी रूप में द्वितीय नोट बुक में आए हैं। यदि इन दोहरे परिणामों को एक बार ही माना जाए तो एक गणना के अनुसार इन तीनों नोट-बुक्स में कुल मिलाकर तीन,पाँच सौ बयालीस प्रमेय हैं। ये प्रमेय रामानुजन ने अंकित भर कर दिए हैं; इनकी उपपत्तियाँ उन्होंने नोट-बुक्स में नहीं दी हैं। वह अपने पाँच शोध-लेख 'जर्नल ऑफ इंडियन मैथेमेटिकल सोसाइटी' में प्रकाशित करा चुके थे एवं पाँच अन्य सन् एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में इसी जर्नल में इंग्लैंड जाने के बाद प्रकाशित हुए। रामानुजन के इन परिणामों को देखने से सभी को आश्चर्य होता है। इनमें लंबी-लंबी राशियाँ तथा वर्गमूलों आदि के बड़े ही चौंका देने वाले चिह्न हैं। उदाहरण के लिए रामानुजन के तीन सरलतम निष्कर्षों को देखिए - एक. सबके मन में एक प्रश्न स्वतः उठता है कि रामानुजन ने उन्हें कैसे लिख दिया? यह भी प्रश्न उठता है कि उन्होंने उन परिणामों अथवा प्रमेयों को क्यों खोजा? पहले प्रश्न से चकित सभी व्यक्ति इस बात से सहमत हैं कि रामानुजन असाधारण प्रतिभा के व्यक्ति थे और गणितीय सूत्रों में उनकी दृष्टि अपरिमेय थी। परंतु अन्य धारणाओं में अंतर है। यह प्रश्न स्वयं रामानुजन से भी कतिपय व्यक्तियों ने पूछा था। उनके द्वारा दिए उत्तर के आधार पर कई व्यक्तियों की ऐसी धारणा बन गई है कि वह नामगिरी देवी से उनको प्राप्त हुए। प्रो. हार्डी इस बात से सहमत नहीं हैं। उन्होंने रामानुजन की तुलना अन्य गणितज्ञों से एक विशेष प्रकार से की थी। उनका कहना था कि यदि शून्य से एक सौ तक विभिन्न व्यक्तियों को प्रतिभा के आधार पर अंक दिए जाएँ तो वह स्वयं को पच्चीस, लिटिलवुड को तीस, जर्मनी के गणितज्ञ डी. हिल्वर्ट को अस्सी तथा रामानुजन को एक सौ अंक देंगे। इसमें विशेष देखने की बात यह है कि उन्होंने रामानुजन को पूरे के पूरे अंक दिए। अतः वह रामानुजन में पूरे गणितज्ञ की छवि देखते हैं। रामानुजन के कार्य के मूल्य के बारे में एक और प्रश्न उठाया जा सकता है। उनका कार्य एकदम पुरातन तो नहीं है, जिसका आधुनिक अथवा प्रचलित गणित से कोई सरोकार ही न हो? देखने में रामानुजन का कार्य अवश्य पुरातन लगता है, परंतु वह अपने समय से बहुत आगे थे। उनके द्वारा निकाले गए कितने ही परिणामों ने समय के साथ नए विषयों की नींव डाली है, जिनमें 'एनालिटिक नंबर' थ्योरी विशेष है। उनके द्वारा प्राप्त नए परिणामों का प्रभाव केवल गणित में ही नए शोध पर नहीं हुआ, बल्कि अन्य क्षेत्रों, जैसे - भौतिकी, कंप्यूटर साइंस एवं सांख्यिकी में भी हुआ है। बाद में उनके परिणामों का प्रयोग कैंसर रोग के निदान में भी हुआ। आज सूचना संचार तथा कूट-संवाद में उनके निकाले सूत्रों के अच्छे प्रयोग हैं। 'पालो आल्ट्रो में सिंबोलिक्स, इन्क' के विलियम गोस्पर ने कुछ वर्ष पहले एक नया कंप्यूटरी अलगोरिथम निकाला था, जिससे पाई के मान के सत्रह.पाँच मिलियन अंक निकाले जा सकते हैं। परंतु उनके ही अनुसार उनके उत्कृष्ट विचार रामानुजन ने पहले ही खोज निकाले थे। इस प्रश्न का कि रामानुजन को इन परिणामों, जो उन्होंने निकाले, में क्यों रुचि हुई, का उत्तर अभी तक ठीक से देना किसी के लिए भी संभव नहीं हुआ है। अवश्य ही संख्याओं से उनकी अभिन्न मित्रता थी और उन्होंने अपने कुछ सूत्रों के प्रयोग से पाई के मान निकालने में भी रुचि दिखाई।इंग्लैंड में पाँच वर्ष रहकर किया गया कार्यः रामानुजन अपनी तीनों नोट-बुक्स को इंग्लैंड साथ ले गए थे। उन्होंने इन्हें प्रो. हार्डी और अन्य व्यक्तियों को दिखाया तथा अध्ययन के लिए दिया था। परंतु अपने एक मित्र को लिखे उनके पत्र से यह पता लगता है कि वहाँ उन्हें अपनी उन नोट-बुक्स को देखने का समय नहीं मिला और उन्होंने उनका कोई उपयोग नहीं किया। अतः वहाँ का कार्य अपने आप में अलग है और वह वहाँ से प्रकाशित शोध-लेखों में अथवा प्रो. हार्डी, लिटिलवुड, वाटसन आदि द्वारा उनकी मृत्यु के बाद के विविध लेखों, व्याख्यानों तथा संकलित साहित्य में उपलब्ध है। प्रकाशित बीस शोध-लेख उनके अपने हैं तथा सात प्रो. हार्डी के साथ हैं। इनकी एक सारणी इस पुस्तक के अंत में दी गई है। उनके प्रकाशित सैंतीस शोध-लेखों को एक साथ अलग 'कलेक्टेड पेपर्स बाई श्रीनिवास रामानुजन' में छापा गया है, जिसका संपादन प्रो. जी. एच. हार्डी, प्रो. पी. वी. शेषु अय्यर तथा बी. एम. विल्सन ने किया है। इसका प्रकाशन पहले सन् एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से तथा बाद में एक हज़ार नौ सौ बासठ में पुनः चेल्सिया से हुआ। एक हज़ार नौ सौ चालीस में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित हुई थी। बारह. lli tic and modular functions.भारत लौटकर एक वर्ष के बीच किए गए कार्यः भारत आकर रामानुजन बीमारी की अवस्था में भी शोध में सतत लगे रहते थे। चूँकि तब भी वह स्लेट का प्रयोग करते रहे, अतः प्रो. ब्रूस बर्नडट का ऊपर दिया गया यह तर्क कि आर्थिक रूप से समर्थ न होने के कारण स्लेट का प्रयोग करते थे, निरस्त्र हो जाता है। यहाँ आकर सीधा प्रकाश में आया कार्य मॉकथीटा फंक्शन का रहा, जो उन्होंने प्रो. हार्डी के पास भेजा था। रामानुजन की खोई नोट बुकः अचानक रामानुजन द्वारा किया कार्य, जो अज्ञात था, सन् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में प्रकाश में आया। इसका श्रेय जॉर्ज एंडूज को जाता है। उन्होंने इस कार्य को 'लॉस्ट बुक ऑफ रामानुजन' का नाम दिया। इस कार्य का प्रकाश में आना एक अजीब संयोग ही है। अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में जॉर्ज एंडूज, जो तब युवक ही थे, को एक सप्ताह की एक कॉन्फ्रेंस में विस्कोन्सिन से फ्रांस जाना था। उनके साथ उनकी पत्नी तथा दो बेटियों को भी जाना था। वह सस्ते हवाई टिकट की खोज में थे। उन्हें पता लगा कि यदि वह तीन सप्ताह के लिए जाएँगे तो हवाई यात्रा के टिकट का मूल्य एक सप्ताह के टिकट के मूल्य से काफी कम होगा। प्रश्न था कि दो सप्ताह का अतिरिक्त समय कैसे और कहाँ व्यतीत किया जाए। एक मित्र ने पहले उन्हें सुझाया था कि सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में कैंब्रिज के प्रो. जी. एन. वाटसन की मृत्यु के पश्चात् उनके कुछ अप्रकाशित एवं अधूरे लेख पड़े हैं, वह कभी उनको देखने पर विचार करें। बस, जॉर्ज एंडूज ने कैंब्रिज जाने का निश्चय कर लिया। वाटसन, जिन्होंने रामानुजन के शोध-लेखों पर कार्य किया था, रॉयल सोसाइटी के फेलो थे। जब सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में उनकी मृत्यु हुई तो सोसाइटी ने उनकी जीवनी लिखने का आग्रह जे. एम. विटेकर से किया। ह्विटेकर ने वाटसन की पत्नी से उनके लेखों को देखने के लिए घर आने की अनुमति माँगी। वाटसन की पत्नी ने सहर्ष उन्हें दोपहर के भोजन पर बुलाया और बाद में वाटसन के अध्ययन-कक्ष में ले गईं। वाटसन कभी कुछ फेंकते नहीं थे, चाहे वह कोई गणित का लेख हो, कोई पत्र, किसी की रसीद या फिर आयकर फॉर्म का पुराना ड्राफ्ट ही। वहाँ ह्विटेकर ने देखा कि फर्श पर बहुत से कागज बिखरे पड़े हैं, जिनकी मोटाई लगभग एक फुट की रही होगी। वास्तव में उनको जला देने के लिए ही वहाँ फेंक दिया गया था। ह्विटेकर को समझ में ही नहीं आया कि वह क्या देखें और क्या छोड़ें। खैर, भाग्य का खेल देखिए कि एक बार झुककर जो कागज उन्होंने उठाया तो वह एक सौ चालीस पृष्ठ की वह गड्डी थी, जो सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस में मद्रास विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री ड्यूसबरी ने प्रो. हार्डी के पास भेजी थी। यह किसी प्रकार वाटसन के पास पहुँच गई थी। ह्विटेकर ने कागजों की वह गड्डी रॉबर्ट रैंकिन को दे दी। ह्विटेकर तथा रैंकिन - दोनों ही अच्छे गणितज्ञ थे, परंतु इन कागजों पर किया गया कार्य उनके क्षेत्र का नहीं था। अतः उसपर कुछ भी निर्णय लिये बिना ही रैंकिन ने सन् एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में वे कागज ट्रिनिटी कॉलेज को दे दिए और वह हस्तलिखित सामग्री ट्रिनिटी कॉलेज के 'रेन पुस्तकालय' में सिमटकर रह गई। जॉर्ज एंड्रूज सन् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में वहाँ पहुँचे तो उनपर उनकी दृष्टि पड़ी। उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उनके पी.एच.डी. थीसिस में किए गए मॉकथीटा फंक्शन पर कुछ सूत्र वहाँ पर थे। लिखावट से तथा ड्यूसबरी के पत्र से उन्होंने जान लिया कि यह रामानुजन का अपने अंतिम दिनों में किया गया कार्य है। उनका मन बाँसों उछलने लगा। एंड्रूज तत्काल पुस्तकालय की सेवा डेस्क पर पहुँचे और उस पांडुलिपि की फोटो कॉपी करने की बात कही। "जी हाँ! मैं यह सब खर्च वहन करने के लिए तैयार हूँ।" एंड्रूज ने कहा। एंड्रूज ने लिखा है कि वह इसको प्राप्त करने के लिए सात पाउंड खर्च करने की बात तो दूर रही, अपना घर भी गिरवी रखने के लिए तैयार हो जाते। लगभग पचपन वर्ष पहले तैयार रामानुजन की यह धरोहर किसी प्रकार बची रहकर गणित-जगत् को मिली। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पृष्ठ रामानुजन के हस्तलिखित, ज्यों-के-त्यों ले लिये गए हैं। कई पृष्ठों पर आड़ी-तिरछी पंक्तियाँ हैं, कटे-फटे अंश हैं। इनसे रामानुजन के सोचने तथा काम करने की विधि का अनुमान लगाना संभव है। कई स्थानों पर रामानुजन के हस्ताक्षर हैं। कुछ पृष्ठों पर प्रो. हार्डी की हस्तलिखित टिप्पणियाँ हैं। अमेरिका के उन विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में, जहाँ शोध कार्य होता है, इसकी प्रति मिल जाती है।अभी तक अप्राप्य उनके कार्यः रामानुजन के शताब्दी समारोह के अवसर पर उनकी पत्नी से हुए साक्षात्कार से ऐसा पता चलता है कि उनके अंतिम दिनों में किया गया कुछ कार्य मद्रास विश्वविद्यालय के पास नहीं पहुँचा। ब्रूस बर्नडट के अनुसार, उनकी पत्नी ने ब्रूस को बताया कि जब रामानुजन की चिता जल रही थी तब रामानुजन के गणित के एक अध्यापक मद्रास विश्वविद्यालय से उनके घर आए और सब कागज बटोरकर ले गए। ब्रूस का कहना है कि 'रामानुजन की मृत्यु के पश्चात् कहीं अधिक पेपर्स थे, जो अभी तक हमारे पास नहीं पहुँचे हैं।' उन्हें शंका है कि अवश्य इनमें से कुछ पत्र कहीं मद्रास विश्वविद्यालय में धूल में लिपटे, अनदेखे पड़े हैं। परंतु पुस्तकालय के कर्मचारियों का कहना है कि जहाँ तक उनकी समझ है, रामानुजन की लिखी कोई सामग्री अब उनके पास नहीं है। बहुत संभव है कि किसी दिन किसी स्थान पर दैवयोग से रामानुजन की लिखी कोई सामग्री प्रकाश में आ जाएँ। उनके कुछ काम के विलुप्त रहने की पूरी संभावना मानी जाती है। यदि विलुप्त अथवा अप्राप्य सामग्री का विचार छोड़ भी दें तो प्राप्य कार्य को समझाने और उसे विस्तार देने की असीम संभावनाएँ स्पष्ट रूप से मानी जाती हैं।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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बेगूसराय रेलवे स्टेशन पर एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने पत्थर उठाकर जीआरपी जवान पर हमला कर दिया। इस घटना में सिपाही संतोष कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना नगर थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन की है।
बताया जा रहा कि अचानक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने जीआरपी जवान के ऊपर पत्थर से हमला कर दिया। उस पत्थर के हमले से बचने के लिए सिपाही संतोष कुमार इधर-उधर भागने लगा। सिपाही को पीटता देख अन्य जवान दौड़कर आये एवं उस विक्षिप्त व्यक्ति को हिरासत में लिया।
लेकिन तब तक सिपाही संतोष कुमार का पत्थर से सिर फट गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल अवस्था में जवान को आनन-फानन में उस जगह से उठाकर इलाज के लिए बेगूसराय के सदर अस्पताल लाया। जहां घायल जवान संतोष कुमार इलाज चल रहा है। फिलहाल संतोष कुमार खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
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बेगूसराय रेलवे स्टेशन पर एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने पत्थर उठाकर जीआरपी जवान पर हमला कर दिया। इस घटना में सिपाही संतोष कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना नगर थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन की है। बताया जा रहा कि अचानक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने जीआरपी जवान के ऊपर पत्थर से हमला कर दिया। उस पत्थर के हमले से बचने के लिए सिपाही संतोष कुमार इधर-उधर भागने लगा। सिपाही को पीटता देख अन्य जवान दौड़कर आये एवं उस विक्षिप्त व्यक्ति को हिरासत में लिया। लेकिन तब तक सिपाही संतोष कुमार का पत्थर से सिर फट गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल अवस्था में जवान को आनन-फानन में उस जगह से उठाकर इलाज के लिए बेगूसराय के सदर अस्पताल लाया। जहां घायल जवान संतोष कुमार इलाज चल रहा है। फिलहाल संतोष कुमार खतरे से बाहर बताया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यू० एन० ओ० की सुरक्षा समितिके सामने रखा । समितिने एक 'काश्मीर कमीशन की नियुक्ति की । इस कमीशनने अपनी जाँच पर पाकिस्तानको दोषी और 'हमलावर' करार दिया। कमीशनने पाकिस्तानसे कहा कि वह अपने आदमी काश्मीरसे लौटा ले ।
सुरक्षा समितिने कमीशनकी रिपोर्ट पर कमीशनको आदेश दिया कि वह भारत और पाकके मध्य समझौता करानेकी कोशिश करता रहे। १९४९ में संयुक्त राष्ट्र-संघके द्वारा काश्मीरमें युद्धबन्दीकी घोषणा की गई । कमीशनने 'स्थायी शान्ति' के प्रयत्नमें दोनों सरकारोंके सैनिक अधिकारियोंसे कई वार परामर्श किया और एक स्थायी सन्धि रेखा खींच दी गई ।
दूसरा क़दम उठाया गया और संयुक्त राष्ट्र संघने घोषणा की कि एडमिरल चेस्टर निमिट्ज़को मतगणनाके लिए अधिकारी नियुक्त किया जाता है। मार्च २१, १९४९ की संघकी इस घोषणाके जवाबमें काश्मीरी जनताने भारतमें काश्मीरके सम्मिलन प्रस्तावको एक स्वरसे स्वीकार किया ।
इसके बाद, सुरक्षा समितिने कमीशनको रद्द कर एक मध्यस्थकी नियुक्ति की, फलतः सर ओवन डिक्सन नामक एक आस्ट्रेलियन मध्यस्थ बनाया गया । सर डिक्सन २८ मईको भारत आया और उसने पाक और भारतके प्रधान मन्त्रियोंसे लम्बी मुलाक़ातें लेकर यह प्रस्ताव रक्खा कि काश्मीरके लोगोंकी राय ली जाय, मतगणना हो। और संयुक्तराष्ट्रसंघ मतगणना कालके अस्थायी समयके लिए काश्मीरकी वागडोर अपने शासनके अन्तर्गत ले ले ! (और हमलेकी शिकायतका क्या हुआ ? ) भारतने इस सुझावका काले झंडोंसे 'स्वागत' किया अर्थात् अस्वीकार किया। डिक्सनको असफल होकर अगस्तमें लौट जाना पड़ा।
जनवरी १९५० में लन्दनमें कॉमनवेल्थके प्रधानमन्त्रियोंका महामिलन हुआ । उसमें जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली खांकी भेंट हुई। इस भेंटमें काश्मीर के मसलेपर दोनों मन्त्रियोंने चर्चा की।
इसी सालके मध्यकालमें एक नया मध्यस्थ खोज लिया गया। यह था मि० फेन्क ग्राहम नामक एक अमरीकन । जब तक ग्राहम साहवने
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यूशून्य एनशून्य ओशून्य की सुरक्षा समितिके सामने रखा । समितिने एक 'काश्मीर कमीशन की नियुक्ति की । इस कमीशनने अपनी जाँच पर पाकिस्तानको दोषी और 'हमलावर' करार दिया। कमीशनने पाकिस्तानसे कहा कि वह अपने आदमी काश्मीरसे लौटा ले । सुरक्षा समितिने कमीशनकी रिपोर्ट पर कमीशनको आदेश दिया कि वह भारत और पाकके मध्य समझौता करानेकी कोशिश करता रहे। एक हज़ार नौ सौ उनचास में संयुक्त राष्ट्र-संघके द्वारा काश्मीरमें युद्धबन्दीकी घोषणा की गई । कमीशनने 'स्थायी शान्ति' के प्रयत्नमें दोनों सरकारोंके सैनिक अधिकारियोंसे कई वार परामर्श किया और एक स्थायी सन्धि रेखा खींच दी गई । दूसरा क़दम उठाया गया और संयुक्त राष्ट्र संघने घोषणा की कि एडमिरल चेस्टर निमिट्ज़को मतगणनाके लिए अधिकारी नियुक्त किया जाता है। मार्च इक्कीस, एक हज़ार नौ सौ उनचास की संघकी इस घोषणाके जवाबमें काश्मीरी जनताने भारतमें काश्मीरके सम्मिलन प्रस्तावको एक स्वरसे स्वीकार किया । इसके बाद, सुरक्षा समितिने कमीशनको रद्द कर एक मध्यस्थकी नियुक्ति की, फलतः सर ओवन डिक्सन नामक एक आस्ट्रेलियन मध्यस्थ बनाया गया । सर डिक्सन अट्ठाईस मईको भारत आया और उसने पाक और भारतके प्रधान मन्त्रियोंसे लम्बी मुलाक़ातें लेकर यह प्रस्ताव रक्खा कि काश्मीरके लोगोंकी राय ली जाय, मतगणना हो। और संयुक्तराष्ट्रसंघ मतगणना कालके अस्थायी समयके लिए काश्मीरकी वागडोर अपने शासनके अन्तर्गत ले ले ! भारतने इस सुझावका काले झंडोंसे 'स्वागत' किया अर्थात् अस्वीकार किया। डिक्सनको असफल होकर अगस्तमें लौट जाना पड़ा। जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचास में लन्दनमें कॉमनवेल्थके प्रधानमन्त्रियोंका महामिलन हुआ । उसमें जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली खांकी भेंट हुई। इस भेंटमें काश्मीर के मसलेपर दोनों मन्त्रियोंने चर्चा की। इसी सालके मध्यकालमें एक नया मध्यस्थ खोज लिया गया। यह था मिशून्य फेन्क ग्राहम नामक एक अमरीकन । जब तक ग्राहम साहवने
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जकार्ता। एयर एशिया के लापता विमान की खोज में लगे इंडोनेशिया के बचाव एवं तलाशी दल को मंगलवार को बोर्निया के पास समुद्र से 40 शव और विमान का मलबा मिला। शवों के मिलते हुए लापता विमान के सही सलामत बचे रहने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई और इसके साथ विमान सवार यात्रियों के परिजन मातम मनाने लगे।
नौसेना ने अब तक कुल 40 शवों के बरामद होने की पुष्टि की है। नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि विमान का दरवाजा, आक्सीजन टैंक और एक यात्री के शव को हेलिक ाप्टर से जांच के लिए ले जाया गया है। विमान सवार शेष 122 लोगों तथा विमान के शेष हिस्सों की तलाश के लिए इंडोनेशिया के साथ साथ आस्ट्रेलिया, मलेशिया, सि ंगापुर, दक्षिण कोरिया ओर अमरीका के लगभग 30 जहाज और 2। विमान जुटे हैं।
एयरलाइन ने यहां जारी वक्तव्य में बताया कि वह विमान सवारयात्रियों के परिजनों को सूराबाया आमंत्रित कर रहा है, जहां हर परिवार की जरूरतों का ख्याल रखने के लिए समर्पित लोगों का एक दल तैनात होगा। एयरलाइन के प्रमुख टोनी फर्नाडिस ने ट्वीट किया कि मेरा दिल एयरएशिया के लापता एयरबस ए 320-200 पर सवार लोगों के परिजनों के दुख से द्रवित है। एयरएशिया की तरफ से उन सभी परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। मेरे दुख को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है।
तलाशी एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख फ्रांसिसकस बमबांग ने कहा कि तलाशी अभियान में सबसे अधिक मुश्किल समुद्र में तीन-तीन मीटर ऊंची लहरें खड़ी कर रही हैं। तलाशी अभियान रात भर जारी रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक गत रविवार को विमान के पायलट को खराब मौसम से बचने के लिए और अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई। यह अनुमति अतिव्यस्त हवाई यातायात के कारण नहीं दी गई थी।
विमान के पायलट ने खतरे का कोई सिग्नल नहीं दिया था और कुछ देर में लापता हो गया था। विमान पहले 32000 फुट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था और बाद में उसने 38000 फुट पर उड़ने की अनुमति मांगी थी। एयरलाइन के मुताबिक लापता विमान का पायलट अनुभवी था और नवंबर में विमान की मरम्मत की गई थी।
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जकार्ता। एयर एशिया के लापता विमान की खोज में लगे इंडोनेशिया के बचाव एवं तलाशी दल को मंगलवार को बोर्निया के पास समुद्र से चालीस शव और विमान का मलबा मिला। शवों के मिलते हुए लापता विमान के सही सलामत बचे रहने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई और इसके साथ विमान सवार यात्रियों के परिजन मातम मनाने लगे। नौसेना ने अब तक कुल चालीस शवों के बरामद होने की पुष्टि की है। नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि विमान का दरवाजा, आक्सीजन टैंक और एक यात्री के शव को हेलिक ाप्टर से जांच के लिए ले जाया गया है। विमान सवार शेष एक सौ बाईस लोगों तथा विमान के शेष हिस्सों की तलाश के लिए इंडोनेशिया के साथ साथ आस्ट्रेलिया, मलेशिया, सि ंगापुर, दक्षिण कोरिया ओर अमरीका के लगभग तीस जहाज और दो। विमान जुटे हैं। एयरलाइन ने यहां जारी वक्तव्य में बताया कि वह विमान सवारयात्रियों के परिजनों को सूराबाया आमंत्रित कर रहा है, जहां हर परिवार की जरूरतों का ख्याल रखने के लिए समर्पित लोगों का एक दल तैनात होगा। एयरलाइन के प्रमुख टोनी फर्नाडिस ने ट्वीट किया कि मेरा दिल एयरएशिया के लापता एयरबस ए तीन सौ बीस-दो सौ पर सवार लोगों के परिजनों के दुख से द्रवित है। एयरएशिया की तरफ से उन सभी परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। मेरे दुख को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है। तलाशी एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख फ्रांसिसकस बमबांग ने कहा कि तलाशी अभियान में सबसे अधिक मुश्किल समुद्र में तीन-तीन मीटर ऊंची लहरें खड़ी कर रही हैं। तलाशी अभियान रात भर जारी रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक गत रविवार को विमान के पायलट को खराब मौसम से बचने के लिए और अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई। यह अनुमति अतिव्यस्त हवाई यातायात के कारण नहीं दी गई थी। विमान के पायलट ने खतरे का कोई सिग्नल नहीं दिया था और कुछ देर में लापता हो गया था। विमान पहले बत्तीस हज़ार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था और बाद में उसने अड़तीस हज़ार फुट पर उड़ने की अनुमति मांगी थी। एयरलाइन के मुताबिक लापता विमान का पायलट अनुभवी था और नवंबर में विमान की मरम्मत की गई थी।
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लखनऊः यूपी की राजधानी लखनऊ में सरेआम फायरिंग करने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फायरिंग का जो वीडियो वायरल हुआ है वो लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में आने वाले फिनिक्स प्लासियो मॉल के पास का बताया जा रहा है जहां पर कुछ लड़के बर्थडे पार्टी मना रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने पिस्तौल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। हाथ में पिस्तौल लिए एक शख्स ने महज चार सेकेंड के भीतर एक के बाद एक 6 फायर किए।
जिस समय फायरिंग की गई वहां पर बहुत सारे लोग खड़े थे। सोचिए जरा सी भी चूक होती तो ये गोलियां किसी को भी लग सकती थी। इस वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा था।
जिस समय फायरिंग की गई वहां पर बहुत सारे लोग खड़े थे और ये गोलियां किसी को भी लग सकती थीं। इस वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा था लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद जब जांच की तो पता चला कि फायरिंग करने वाला समाजवादी पार्टी का जिला सचिव है जिसका नाम नीरज है। और जिस शख्स की जन्म दिन की पार्टी थी उसका नाम मनीष तिवारी है। अखिलेश ने ट्वीट कर कहा था- भाजपा 2. 0 के राज में~ यूपी डूबा अपराध मे आज का अपराधनामा।
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लखनऊः यूपी की राजधानी लखनऊ में सरेआम फायरिंग करने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फायरिंग का जो वीडियो वायरल हुआ है वो लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में आने वाले फिनिक्स प्लासियो मॉल के पास का बताया जा रहा है जहां पर कुछ लड़के बर्थडे पार्टी मना रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने पिस्तौल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। हाथ में पिस्तौल लिए एक शख्स ने महज चार सेकेंड के भीतर एक के बाद एक छः फायर किए। जिस समय फायरिंग की गई वहां पर बहुत सारे लोग खड़े थे। सोचिए जरा सी भी चूक होती तो ये गोलियां किसी को भी लग सकती थी। इस वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा था। जिस समय फायरिंग की गई वहां पर बहुत सारे लोग खड़े थे और ये गोलियां किसी को भी लग सकती थीं। इस वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा था लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद जब जांच की तो पता चला कि फायरिंग करने वाला समाजवादी पार्टी का जिला सचिव है जिसका नाम नीरज है। और जिस शख्स की जन्म दिन की पार्टी थी उसका नाम मनीष तिवारी है। अखिलेश ने ट्वीट कर कहा था- भाजपा दो. शून्य के राज में~ यूपी डूबा अपराध मे आज का अपराधनामा।
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान के अलावा तुर्की पर भी ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंध लगा दिए हैं। साक्ष्यों से पता चलता है कि अमरीका के प्रतिबंधों की आंच केवल ईरान व तुर्की तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी चपेट में अरब देशों की अर्थव्यवस्था भी आ रही है।
ट्रम्प के व्यापारिक व आर्थिक युद्ध का कोई अंत नहीं है। वस्तुतः उन्होंने अपनी नीतियों, रवैये और बयानों से व्यवहारिक रूप से संसार में कुव्यवस्था को बढ़ावा दिया है और वे आर्थिक हथकंडों से अन्य देशों पर दबाव डालने का काम ले रहे हैं। संसार विशेष कर मध्यपूर्व के क्षेत्र में उनकी इस नीति से अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। सच्चाई यह है कि देशों की अर्थव्यवस्थाएं न केवल एक दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं बल्कि वे एक दूसरे से जुड़ी हुई भी हैं। उदाहरण स्वरूप क़तर का राष्ट्रीय बैंक, तुर्की के फ़ायनेंस बैंक का मालिक है और इसी तरह से क़तर के व्यापारिक बैंक के पास तुर्की के अलटरनेटिव बैंक के सबसे अधिक शेयर हैं।
इसके अलावा अमरीका की ट्रम्प सरकार ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ जो आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है उसके उन अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे जो वाॅशिंग्टन के घटक हैं। मिसाल के तौर पर परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के कुछ ही दिन बाद एक अरब समाचारपत्र ने लिखा था कि अमरीका के इस क़दम से और ईरान पर प्रतिबंध बहाल करने से तेल के मूल्यों में वृद्धि होगी और चूंकि मिस्र तेल आयात करने वाला देश है इस लिए इस नीति से उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वास्तविकता यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति देशों के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ कर और प्रतिबंध लगाकर अपने घटक देशों के हितों को भी ध्यान में नहीं रख रहे हैं और वैश्विक राजनीति में ग़ुंडागर्दी पर उतारू दिखाई देते हैं। (HN)
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान के अलावा तुर्की पर भी ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंध लगा दिए हैं। साक्ष्यों से पता चलता है कि अमरीका के प्रतिबंधों की आंच केवल ईरान व तुर्की तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी चपेट में अरब देशों की अर्थव्यवस्था भी आ रही है। ट्रम्प के व्यापारिक व आर्थिक युद्ध का कोई अंत नहीं है। वस्तुतः उन्होंने अपनी नीतियों, रवैये और बयानों से व्यवहारिक रूप से संसार में कुव्यवस्था को बढ़ावा दिया है और वे आर्थिक हथकंडों से अन्य देशों पर दबाव डालने का काम ले रहे हैं। संसार विशेष कर मध्यपूर्व के क्षेत्र में उनकी इस नीति से अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। सच्चाई यह है कि देशों की अर्थव्यवस्थाएं न केवल एक दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं बल्कि वे एक दूसरे से जुड़ी हुई भी हैं। उदाहरण स्वरूप क़तर का राष्ट्रीय बैंक, तुर्की के फ़ायनेंस बैंक का मालिक है और इसी तरह से क़तर के व्यापारिक बैंक के पास तुर्की के अलटरनेटिव बैंक के सबसे अधिक शेयर हैं। इसके अलावा अमरीका की ट्रम्प सरकार ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ जो आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है उसके उन अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे जो वाॅशिंग्टन के घटक हैं। मिसाल के तौर पर परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के कुछ ही दिन बाद एक अरब समाचारपत्र ने लिखा था कि अमरीका के इस क़दम से और ईरान पर प्रतिबंध बहाल करने से तेल के मूल्यों में वृद्धि होगी और चूंकि मिस्र तेल आयात करने वाला देश है इस लिए इस नीति से उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वास्तविकता यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति देशों के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ कर और प्रतिबंध लगाकर अपने घटक देशों के हितों को भी ध्यान में नहीं रख रहे हैं और वैश्विक राजनीति में ग़ुंडागर्दी पर उतारू दिखाई देते हैं।
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चैत्रमास में उत्पन्न हुए व्यक्तियों का फलादेश
इस महीने में जन्मे व्यक्ति भावुक, मिलनसार, कार्यपरायण और उद्योगी होते हैं । विघ्न-बाधाओं को बात की बात में पार कर लेते हैं । यद्यपि इनका स्वभाव एकान्त प्रिय होता है, पर सार्वजनिक कार्यों में अधिक भाग लेने के कारण जल्द नेता बन जाते हैं। इनकी शिक्षा साधारण होने पर भी, ये अपनी कार्यपटुता से प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। यों तो इस मास के जन्मे व्यक्ति सैकड़े पचास शिक्षित होते है, तथा सैकड़े चौदह उच्च शिक्षित होते है । कला-कौशलों से इन्हें प्रेम होता है । कृष्णपक्ष की अपेक्षा शुक्लपक्ष में जन्मे व्यक्ति अधिक भाग्यवान्, मननशील और उत्तरदायी होते है। जिनका जन्म चैत्र सुदी पूर्णिमा को होता है, वे प्रायः धनी, कलापारखी और चलतेपुरजे होते है । चैत्रवदा १, २, ४ और ७ तिथियों को दोपहर के पश्चात् जन्म ग्रहण करनेवाले व्यक्ति कृषिकार्य मे विशेष निपुण होते है, परन्तु कुछ व्यक्ति व्यापार में भा प्रवीणता प्राप्त करते है । चैत्रसुदी ६, १३ को जन्म लेनेवाले महान् होते है ।
नारचन्द्र और नारदसंहिता के अनुसार इस मास के जन्मे व्यक्ति शिक्षक, मैनेजर, साधारण नौकर, जिलाधीश, पुलिसअफसर और साधारण चिकित्सक होते हैं। यदि ये व्यक्ति उद्योग-धन्धों के विकास में लग जाते हैं, तो इन्हें अच्छी सफलता मिलती है। व्यवसाय की बुद्धि जन्मजात होती है,
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चैत्रमास में उत्पन्न हुए व्यक्तियों का फलादेश इस महीने में जन्मे व्यक्ति भावुक, मिलनसार, कार्यपरायण और उद्योगी होते हैं । विघ्न-बाधाओं को बात की बात में पार कर लेते हैं । यद्यपि इनका स्वभाव एकान्त प्रिय होता है, पर सार्वजनिक कार्यों में अधिक भाग लेने के कारण जल्द नेता बन जाते हैं। इनकी शिक्षा साधारण होने पर भी, ये अपनी कार्यपटुता से प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। यों तो इस मास के जन्मे व्यक्ति सैकड़े पचास शिक्षित होते है, तथा सैकड़े चौदह उच्च शिक्षित होते है । कला-कौशलों से इन्हें प्रेम होता है । कृष्णपक्ष की अपेक्षा शुक्लपक्ष में जन्मे व्यक्ति अधिक भाग्यवान्, मननशील और उत्तरदायी होते है। जिनका जन्म चैत्र सुदी पूर्णिमा को होता है, वे प्रायः धनी, कलापारखी और चलतेपुरजे होते है । चैत्रवदा एक, दो, चार और सात तिथियों को दोपहर के पश्चात् जन्म ग्रहण करनेवाले व्यक्ति कृषिकार्य मे विशेष निपुण होते है, परन्तु कुछ व्यक्ति व्यापार में भा प्रवीणता प्राप्त करते है । चैत्रसुदी छः, तेरह को जन्म लेनेवाले महान् होते है । नारचन्द्र और नारदसंहिता के अनुसार इस मास के जन्मे व्यक्ति शिक्षक, मैनेजर, साधारण नौकर, जिलाधीश, पुलिसअफसर और साधारण चिकित्सक होते हैं। यदि ये व्यक्ति उद्योग-धन्धों के विकास में लग जाते हैं, तो इन्हें अच्छी सफलता मिलती है। व्यवसाय की बुद्धि जन्मजात होती है,
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- 56 min ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद!
Don't Miss!
Jr NTR Birthday: एनटीआर जूनियर आज अपना 40वां जन्मदिन मना रहे हैं। एसएस राजामौली की फिल्म RRR के साथ दुनियाभर में नाम कमा रहे इस सुपरस्टार का फिल्मी सफर काफी अद्भुत रहा है। इन्हें आज अपने फैंस के द्वारा प्यार से मैन ऑफ द मासेस (Man of the masses) कहा जाता है।
एनटीआर जूनियर ने सालों से अपना रास्ता बनाया है। अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन और लार्जर देन लाइफ किरदारों के साथ दर्शकों को उत्साहित किया है।
एनटीआर जूनियर ने गुनशेखर द्वारा निर्देशित रामायण में एक बाल कलाकार के रूप में अपनी शुरुआत की, जो 11 अप्रैल, 1997 को रिलीज़ हुई थी। इस समय वो महज 13 साल के थे, जब उन्होंने अपने प्रदर्शन से प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था। इससे पहले साल 1991 में वो फिल्म 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' में भरत की भूमिका में भी नजर आए थे।
बतौर लीड एक्टर एनटीआर जूनियर की शुरुआत 2001 में फिल्म "निन्नू चूडालानी" से हुई, जिसमें उन्होंने वी. आर. प्रताप द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और दर्शकों का ध्यान खींचा। यह फिल्म उद्योग में उनके समृद्ध करियर की शुरुआत थी।
मैन ऑफ द मासेस एनटीआर जूनियर और लक्ष्मी प्रणति ने 5 मई, 2011 को एक अरेंज मैरिज में शादी की। उनकी शादी की तस्वीरें वाकई बहुत प्यारी हैं। एक्टर एक पारिवारिक व्यक्ति हैं और फिल्मों से अलग अपनी फैमिली के साथ वक्त गुजारना पसंद करते हैं। नंदामुरी अभय राम और नंदमुरी भार्गव राम, एनटीआर जूनियर के बच्चे हैं। 2014 में अभय राम और 2018 में भार्गव राम का जन्म हुआ।
एनटीआर जूनियर और एसएस राजामौली ने सिनेमाई इतिहास रचा है। फिल्म "स्टूडेंट नंबर 1" के साथ अपने करियर की शुरुआत से, राजामौली ने अन्य सभी कलाकारों के मुकाबले एनटीआर जूनियर के लिए अपने प्यार का इज़हार किया। उनकी दोस्ती समय के साथ मजबूत हुई है, जिससे उनकी सफल टीम वर्क मजबूत हुई है। फिल्म RRR ने इन्हें ग्लोबल स्तर तक लोकप्रिय बना दिया है।
जूनियर एनटीआर की आने वाली फिल्मों पर अब सभी की नजर है। बीते इनकी फिल्म 'देवरा' की घोषणा हुई है, जिसमें उनके साथ जान्हवी कपूर और सैफ अली खान भी दिखेंगे। फिल्म 5 अप्रैल 2024 को रिलीज होगी। इसके अलावा, सुपरस्टार फिल्म वॉर 2 में ऋतिक रोशन के साथ भी नजर आने वाले हैं।
Delhi Metro में लड़की ने फिर कर डाली ऐसी हरकत, भड़के लोग बोले- 'इसको पागलखाने भेजो'
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- छप्पन मिनट ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Jr NTR Birthday: एनटीआर जूनियर आज अपना चालीसवां जन्मदिन मना रहे हैं। एसएस राजामौली की फिल्म RRR के साथ दुनियाभर में नाम कमा रहे इस सुपरस्टार का फिल्मी सफर काफी अद्भुत रहा है। इन्हें आज अपने फैंस के द्वारा प्यार से मैन ऑफ द मासेस कहा जाता है। एनटीआर जूनियर ने सालों से अपना रास्ता बनाया है। अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन और लार्जर देन लाइफ किरदारों के साथ दर्शकों को उत्साहित किया है। एनटीआर जूनियर ने गुनशेखर द्वारा निर्देशित रामायण में एक बाल कलाकार के रूप में अपनी शुरुआत की, जो ग्यारह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे को रिलीज़ हुई थी। इस समय वो महज तेरह साल के थे, जब उन्होंने अपने प्रदर्शन से प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था। इससे पहले साल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में वो फिल्म 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' में भरत की भूमिका में भी नजर आए थे। बतौर लीड एक्टर एनटीआर जूनियर की शुरुआत दो हज़ार एक में फिल्म "निन्नू चूडालानी" से हुई, जिसमें उन्होंने वी. आर. प्रताप द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और दर्शकों का ध्यान खींचा। यह फिल्म उद्योग में उनके समृद्ध करियर की शुरुआत थी। मैन ऑफ द मासेस एनटीआर जूनियर और लक्ष्मी प्रणति ने पाँच मई, दो हज़ार ग्यारह को एक अरेंज मैरिज में शादी की। उनकी शादी की तस्वीरें वाकई बहुत प्यारी हैं। एक्टर एक पारिवारिक व्यक्ति हैं और फिल्मों से अलग अपनी फैमिली के साथ वक्त गुजारना पसंद करते हैं। नंदामुरी अभय राम और नंदमुरी भार्गव राम, एनटीआर जूनियर के बच्चे हैं। दो हज़ार चौदह में अभय राम और दो हज़ार अट्ठारह में भार्गव राम का जन्म हुआ। एनटीआर जूनियर और एसएस राजामौली ने सिनेमाई इतिहास रचा है। फिल्म "स्टूडेंट नंबर एक" के साथ अपने करियर की शुरुआत से, राजामौली ने अन्य सभी कलाकारों के मुकाबले एनटीआर जूनियर के लिए अपने प्यार का इज़हार किया। उनकी दोस्ती समय के साथ मजबूत हुई है, जिससे उनकी सफल टीम वर्क मजबूत हुई है। फिल्म RRR ने इन्हें ग्लोबल स्तर तक लोकप्रिय बना दिया है। जूनियर एनटीआर की आने वाली फिल्मों पर अब सभी की नजर है। बीते इनकी फिल्म 'देवरा' की घोषणा हुई है, जिसमें उनके साथ जान्हवी कपूर और सैफ अली खान भी दिखेंगे। फिल्म पाँच अप्रैल दो हज़ार चौबीस को रिलीज होगी। इसके अलावा, सुपरस्टार फिल्म वॉर दो में ऋतिक रोशन के साथ भी नजर आने वाले हैं। Delhi Metro में लड़की ने फिर कर डाली ऐसी हरकत, भड़के लोग बोले- 'इसको पागलखाने भेजो'
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मुंबईः हाल ही में कार्तिक ने अपने फैन्स से एक इंस्टाग्राम लाइव के दौरान पूछा था कि क्या उन्हें अपनी दाढ़ी शेव करनी चाहिए या नहीं? एक्टर ने बताया कि बढ़ी दाढ़ी की वजह से मम्मी खाना नहीं दे रही हैं। कार्तिक के लाइव पर फैन्स की मिली जुली प्रतिक्रिया थी, किसी ने कहा करना चाहिए शेव किसी ने कहा नहीं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज उनके नन्हे प्रशंसकों ने उनकी क्वेरी का जवाब दिया है और शायद सबसे मधुर तरीके से बताया गया है।
जबकि कार्तिक की माँ और दीपिका पादुकोण हार्टथ्रोब के लिए 'गो क्लीन-शेव' के पक्ष में हैं, और उनके छोटे-फैन्स भी उसी सूची में शामिल होते हैं। कार्तिक आर्यन ने अपने कुछ युवा फैन्स का एक वीडियो साझा किया है, एक नन्हे फेन्स बैंड है और उनसे वे कह रहे है कि वह अपने प्यारे चेहरे से उस 'दाढ़ी' को साफ कर दे। पांच बच्चों का ग्रुप 'दिल चोरी साडा हो गया' (सोनू के टीटू की स्वीटी) की धुनों पर कुछ बेहतरीन लाइन्स को गा रहे है। वह कुछ इस तरह 'मुंह साधु जैसे हो गया है, की करिये की करिये . . . ' अब यह निश्चित रूप से सबसे प्यारी और सबसे अच्छी चीज है जो आज इंटरनेट पर दिखाई दी है।
अभिनेता कार्तिक आर्यन की लड़कियों के बीच बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है, वह बच्चों के बीच और उनके पसंदीदा हीरो में से एक हैं। कार्तिक ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर 'द क्यूट बीयर्ड कॉन्सर्ट 'के रूप में साझा किया ।
लॉकडाउन के चलते कार्तिक घर मे रहते हुए भी काफी व्यस्त हैं और वो लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक कर रहे हैं। कार्तिक ने यूट्यूब पर कोकी पूछेगा सीरीज शुरू की है जिसमें वो कोरोना फाइटर्स के इंटरव्यू लेते हैं। इस महामारी से लड़ने के लिए पीएम केयर रिलीफ फंड में कार्तिक 1 करोड़ की राशि भी डोनेट कर चुके हैं।
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मुंबईः हाल ही में कार्तिक ने अपने फैन्स से एक इंस्टाग्राम लाइव के दौरान पूछा था कि क्या उन्हें अपनी दाढ़ी शेव करनी चाहिए या नहीं? एक्टर ने बताया कि बढ़ी दाढ़ी की वजह से मम्मी खाना नहीं दे रही हैं। कार्तिक के लाइव पर फैन्स की मिली जुली प्रतिक्रिया थी, किसी ने कहा करना चाहिए शेव किसी ने कहा नहीं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज उनके नन्हे प्रशंसकों ने उनकी क्वेरी का जवाब दिया है और शायद सबसे मधुर तरीके से बताया गया है। जबकि कार्तिक की माँ और दीपिका पादुकोण हार्टथ्रोब के लिए 'गो क्लीन-शेव' के पक्ष में हैं, और उनके छोटे-फैन्स भी उसी सूची में शामिल होते हैं। कार्तिक आर्यन ने अपने कुछ युवा फैन्स का एक वीडियो साझा किया है, एक नन्हे फेन्स बैंड है और उनसे वे कह रहे है कि वह अपने प्यारे चेहरे से उस 'दाढ़ी' को साफ कर दे। पांच बच्चों का ग्रुप 'दिल चोरी साडा हो गया' की धुनों पर कुछ बेहतरीन लाइन्स को गा रहे है। वह कुछ इस तरह 'मुंह साधु जैसे हो गया है, की करिये की करिये . . . ' अब यह निश्चित रूप से सबसे प्यारी और सबसे अच्छी चीज है जो आज इंटरनेट पर दिखाई दी है। अभिनेता कार्तिक आर्यन की लड़कियों के बीच बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है, वह बच्चों के बीच और उनके पसंदीदा हीरो में से एक हैं। कार्तिक ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर 'द क्यूट बीयर्ड कॉन्सर्ट 'के रूप में साझा किया । लॉकडाउन के चलते कार्तिक घर मे रहते हुए भी काफी व्यस्त हैं और वो लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक कर रहे हैं। कार्तिक ने यूट्यूब पर कोकी पूछेगा सीरीज शुरू की है जिसमें वो कोरोना फाइटर्स के इंटरव्यू लेते हैं। इस महामारी से लड़ने के लिए पीएम केयर रिलीफ फंड में कार्तिक एक करोड़ की राशि भी डोनेट कर चुके हैं।
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नई दिल्ली. भारत के दिग्गज क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) और पूर्व पाकिस्तानी कप्तान आमिर सोहेल (Aamer Sohail) के बीच शारजाह का एक किस्सा दोनों के ही मुंह से कई बार सुना गया है. मगर आमिर सोहेल का मानना है कि सिद्धू इस किस्से को सही से नहीं बता रहे और पता नहीं वो इसमें क्या क्या जोड़ देते हैं. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस किस्से पर सफाई देते हुए इसकी पूरी कहानी बताई.
सोहेल ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि हर कोई जानाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू कौन हैं. वह क्रिकेट की दुनिया में बहुत बड़ा नाम हैं. मैं उनका सम्मान करता हूं और वह उन बल्लेबाजों में से एक हैं, जिनकी बल्लेबाजी देखने में मुझे मजा आता है. दुनिया के कई गेंदबाजों के खिलाफ उनका प्रदर्शन काफी शानदार है. सोहेल ने कहा कि एक कॉमेडी शो में उन्होंने इस किस्से के बारे में बताया. मैंने 2005 में एक न्यूज चैनल पर उनसे बात की. उन्होंने उस किस्से पर फिर वही बात की और मैंने उनसे कहा कि चीजें उस तरह से नहीं हुई थी, जैसा वो सोचते हैं.
सोहेल ने कहा कि मैंने उनसे कहा था कि अकीब जावेद भी शहर में हैं और हम तीनों साथ में बैठ सकते हैं और इस पर चर्चा कर सकते हैं. पिछली बार जब मैंने एशिया कप में कमेंट्री की थी तो ये मामला फिर उठा था और मैंने सफाई दी थी. मगर उन्होंने इस किस्से को एक अलग तरीके से बताया. इसीलिए मुझे लगता है कि मुझे इस पर सफाई देने की जरूरत है.
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने कहा कि 1996 में मैं भारत के खिलाफ शारजाह मैच में पाकिस्तान टीम की कप्तानी कर रहा था.
सिद्धू पाजी करीब 90 रन पर खेल रहे थे. एक ओवर के बीच में वह गुस्से में मेरे पास आए और कहा कि आमिर अपने तेज गेंदबाजों को समझा लो. वह गलत कर रहे हैं. इस पर मैंने कहा कि पाजी क्या हुआ. उन्होंने कहा कि वह अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. मैंने उन्हें इसे नजरअंदाज करने को कहा. मैंने कहा कि वह तेज गेंदबाज है. उनकी बात करने की आदत है. इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, वो क्या चाहते हैं, वो बोले, मगर अपशब्द न कहे. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने कहा कि सिद्धू की बात सुनकर उन्होंने कहा कि मैं मैच के बाद उनसे बात करूंगा. आप जाएं और खेलें. उस मैच में ये सब हुआ था.
पाकिस्तान से छिनेगी एशिया कप की मेजबानी, इन 2 देशों के बीच मुकाबला!
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नई दिल्ली. भारत के दिग्गज क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू और पूर्व पाकिस्तानी कप्तान आमिर सोहेल के बीच शारजाह का एक किस्सा दोनों के ही मुंह से कई बार सुना गया है. मगर आमिर सोहेल का मानना है कि सिद्धू इस किस्से को सही से नहीं बता रहे और पता नहीं वो इसमें क्या क्या जोड़ देते हैं. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस किस्से पर सफाई देते हुए इसकी पूरी कहानी बताई. सोहेल ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि हर कोई जानाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू कौन हैं. वह क्रिकेट की दुनिया में बहुत बड़ा नाम हैं. मैं उनका सम्मान करता हूं और वह उन बल्लेबाजों में से एक हैं, जिनकी बल्लेबाजी देखने में मुझे मजा आता है. दुनिया के कई गेंदबाजों के खिलाफ उनका प्रदर्शन काफी शानदार है. सोहेल ने कहा कि एक कॉमेडी शो में उन्होंने इस किस्से के बारे में बताया. मैंने दो हज़ार पाँच में एक न्यूज चैनल पर उनसे बात की. उन्होंने उस किस्से पर फिर वही बात की और मैंने उनसे कहा कि चीजें उस तरह से नहीं हुई थी, जैसा वो सोचते हैं. सोहेल ने कहा कि मैंने उनसे कहा था कि अकीब जावेद भी शहर में हैं और हम तीनों साथ में बैठ सकते हैं और इस पर चर्चा कर सकते हैं. पिछली बार जब मैंने एशिया कप में कमेंट्री की थी तो ये मामला फिर उठा था और मैंने सफाई दी थी. मगर उन्होंने इस किस्से को एक अलग तरीके से बताया. इसीलिए मुझे लगता है कि मुझे इस पर सफाई देने की जरूरत है. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ छियानवे में मैं भारत के खिलाफ शारजाह मैच में पाकिस्तान टीम की कप्तानी कर रहा था. सिद्धू पाजी करीब नब्बे रन पर खेल रहे थे. एक ओवर के बीच में वह गुस्से में मेरे पास आए और कहा कि आमिर अपने तेज गेंदबाजों को समझा लो. वह गलत कर रहे हैं. इस पर मैंने कहा कि पाजी क्या हुआ. उन्होंने कहा कि वह अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. मैंने उन्हें इसे नजरअंदाज करने को कहा. मैंने कहा कि वह तेज गेंदबाज है. उनकी बात करने की आदत है. इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, वो क्या चाहते हैं, वो बोले, मगर अपशब्द न कहे. पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने कहा कि सिद्धू की बात सुनकर उन्होंने कहा कि मैं मैच के बाद उनसे बात करूंगा. आप जाएं और खेलें. उस मैच में ये सब हुआ था. पाकिस्तान से छिनेगी एशिया कप की मेजबानी, इन दो देशों के बीच मुकाबला! .
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कोलकाताः बांग्लादेश से लेकर देश भर के छोटे बड़े इलाकों में कोरोना वायरस तेजी से तबाही मचाता जा रहा है, हर दिन इस वायरस का संक्रमण और भी तेज होता जा रहा है. जिसके बाद से मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी होती जा रही है. इतना ही नहीं इस वायरस के कारण रोजाना हजारों लोगों की जान भी जा रही है.
बांग्लादेश के रक्षा सचिव की कोरोना से मौतः मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश के रक्षा सचिव अब्दुल्ला अल मोहसिन चौधरी की इस वायरस के चपेट में आने से मौत हो गई है. वह कोरोना से पीड़ित थे और ढाका के एक अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था.
तमिलनाडु के सीएम ने की चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ बैठकः वहीं चेन्नई में तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी ने राज्य में कोरोना की स्थिति को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मीटिंग की. रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में कोरोना के कुल 82,275 मामले हैं. जिनमें 45,537 ठीक हो चुके हैं और 35,656 सक्रिय मामले हैं. अभी तक 1,079 लोगों की जान जा चुकी है.
ओडिशा में 24 घंटे में कोरोना वायरस के 245 नए मामलेः इतना ही नहीं ओडिशा में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 245 नए मामले देखने को मिले हैं. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 6859 हो गई है. 2086 सक्रिय मामले हैं, 4743 मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि 21 लोगों की जाने जा चुकी है.
नागालैंड में कोरोना के 19 नए मामले सामने आएः वहीं नागालैंड में जारी कोरोना का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. जिसके कारण 19 नए मामले सामने आए हैं. नागालैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 434 हो गई है जिसमें 270 सक्रिय मामले पाए गए हैं. 164 लोग ठीक हो चुके हैं और अभी तक कोई मौत नहीं हुई है.
कर्नाटक में परीक्षा से पहले छात्रों की स्क्रीनिंगः कर्नाटक में कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच माध्यमिक स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएसएलसी) बोर्ड की परीक्षा में बैठने से पहले शिवमोग्गा के स्कूलों में छात्रों की स्क्रीनिंग की गई.
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कोलकाताः बांग्लादेश से लेकर देश भर के छोटे बड़े इलाकों में कोरोना वायरस तेजी से तबाही मचाता जा रहा है, हर दिन इस वायरस का संक्रमण और भी तेज होता जा रहा है. जिसके बाद से मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी होती जा रही है. इतना ही नहीं इस वायरस के कारण रोजाना हजारों लोगों की जान भी जा रही है. बांग्लादेश के रक्षा सचिव की कोरोना से मौतः मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश के रक्षा सचिव अब्दुल्ला अल मोहसिन चौधरी की इस वायरस के चपेट में आने से मौत हो गई है. वह कोरोना से पीड़ित थे और ढाका के एक अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था. तमिलनाडु के सीएम ने की चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ बैठकः वहीं चेन्नई में तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी ने राज्य में कोरोना की स्थिति को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मीटिंग की. रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में कोरोना के कुल बयासी,दो सौ पचहत्तर मामले हैं. जिनमें पैंतालीस,पाँच सौ सैंतीस ठीक हो चुके हैं और पैंतीस,छः सौ छप्पन सक्रिय मामले हैं. अभी तक एक,उन्यासी लोगों की जान जा चुकी है. ओडिशा में चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के दो सौ पैंतालीस नए मामलेः इतना ही नहीं ओडिशा में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के दो सौ पैंतालीस नए मामले देखने को मिले हैं. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या छः हज़ार आठ सौ उनसठ हो गई है. दो हज़ार छियासी सक्रिय मामले हैं, चार हज़ार सात सौ तैंतालीस मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि इक्कीस लोगों की जाने जा चुकी है. नागालैंड में कोरोना के उन्नीस नए मामले सामने आएः वहीं नागालैंड में जारी कोरोना का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. जिसके कारण उन्नीस नए मामले सामने आए हैं. नागालैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या चार सौ चौंतीस हो गई है जिसमें दो सौ सत्तर सक्रिय मामले पाए गए हैं. एक सौ चौंसठ लोग ठीक हो चुके हैं और अभी तक कोई मौत नहीं हुई है. कर्नाटक में परीक्षा से पहले छात्रों की स्क्रीनिंगः कर्नाटक में कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच माध्यमिक स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट बोर्ड की परीक्षा में बैठने से पहले शिवमोग्गा के स्कूलों में छात्रों की स्क्रीनिंग की गई.
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बुरहानपुर की तहसील खकनार के ग्राम बोरखेड़ा में गुरुवार शाम लगभग 7:00 बजे किराना दुकानदार सौरभ पिता जगदीश द्वारा उधारी के रुपए मांगने पर गणेश पिता रामा कोरकु नामक व्यक्ति ने वाद-विवाद हो रहा था।
तभी गांव के ही योगेश पिता रामसिंह कोली 17 साल बीच-बचाव करने पहुंचा, तो उसे गणेश पिता रामा ने अपनी कमर से चाकू निकाल कर मार दिया, जिससे योगेश घायल हो गया। उसे ग्रामीणों की मदद से खकनार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खकनार पहुंचाया गया।
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बुरहानपुर की तहसील खकनार के ग्राम बोरखेड़ा में गुरुवार शाम लगभग सात:शून्य बजे किराना दुकानदार सौरभ पिता जगदीश द्वारा उधारी के रुपए मांगने पर गणेश पिता रामा कोरकु नामक व्यक्ति ने वाद-विवाद हो रहा था। तभी गांव के ही योगेश पिता रामसिंह कोली सत्रह साल बीच-बचाव करने पहुंचा, तो उसे गणेश पिता रामा ने अपनी कमर से चाकू निकाल कर मार दिया, जिससे योगेश घायल हो गया। उसे ग्रामीणों की मदद से खकनार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खकनार पहुंचाया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Salman Khan and Shah Rukh Khan film? : सलमान खान और शाहरुख खान एक बार फिर से सिल्वर स्क्रीन पर नजर आने वाले हैं। दोनों पहले ही एक-दूसरे की 'पठान' और 'टाइगर 3' में कैमियो करने वाले हैं। अब खबर है कि यशराज फिल्म्स की एक नई फिल्म में ये दोनों स्टार नजर आएंगे, जिसे एआर मुरुगदास डायरेक्ट करेंगे। सबसे बड़ी बात ये है कि इस फिल्म में सलमान और शाहरुख को एक साथ लाने में आमिर खान ने अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, फिल्म को लेकर अभी शुरुआती तौर पर बात हो रही है। एआर मुरुगदास की हाल ही में सलमान खान और शाहरुख खान के साथ मीटिंग हुई है। दोनों स्टार्स को स्क्रिप्ट का आइडिया दिया गया जो उन्हें पसंद आया है। हालांकि, अभी डिटेल स्क्रिप्ट पर चर्चा बाद में की जाएगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आमिर खान भी मीटिंग के दौरान मौजूद थे। दरअसल, एआर मुरुगदास ने दो सुपरस्टार्स को एक साथ लाने की सोच के साथ आमिर खान से संपर्क किया था। आमिर खान ने इसे तुरंत सेट कर दिया।
पढ़ें- ब्रह्मास्त्र 2 में होगी दीपिका पादुकोण की एंट्री, रणबीर कपूर-आलिया भट्ट की फिल्म के सीक्वल में ऐसा होगा रोल!
Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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Salman Khan and Shah Rukh Khan film? : सलमान खान और शाहरुख खान एक बार फिर से सिल्वर स्क्रीन पर नजर आने वाले हैं। दोनों पहले ही एक-दूसरे की 'पठान' और 'टाइगर तीन' में कैमियो करने वाले हैं। अब खबर है कि यशराज फिल्म्स की एक नई फिल्म में ये दोनों स्टार नजर आएंगे, जिसे एआर मुरुगदास डायरेक्ट करेंगे। सबसे बड़ी बात ये है कि इस फिल्म में सलमान और शाहरुख को एक साथ लाने में आमिर खान ने अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, फिल्म को लेकर अभी शुरुआती तौर पर बात हो रही है। एआर मुरुगदास की हाल ही में सलमान खान और शाहरुख खान के साथ मीटिंग हुई है। दोनों स्टार्स को स्क्रिप्ट का आइडिया दिया गया जो उन्हें पसंद आया है। हालांकि, अभी डिटेल स्क्रिप्ट पर चर्चा बाद में की जाएगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आमिर खान भी मीटिंग के दौरान मौजूद थे। दरअसल, एआर मुरुगदास ने दो सुपरस्टार्स को एक साथ लाने की सोच के साथ आमिर खान से संपर्क किया था। आमिर खान ने इसे तुरंत सेट कर दिया। पढ़ें- ब्रह्मास्त्र दो में होगी दीपिका पादुकोण की एंट्री, रणबीर कपूर-आलिया भट्ट की फिल्म के सीक्वल में ऐसा होगा रोल! Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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आप पढ़े-लिखे लोगों तक हमारी आवाज पहुँचा दीजिए
- आचार्य पं. श्रीराम शर्मा
हमने विचार क्रान्ति अभियान को युग साहित्य के रूप में लिखना शुरू कर दिया है और हर आदमी को स्वाध्याय करने के लिए मजबूर किया है । हमारे विचारों को आप पढ़िए और हमारी आग की चिनगारी को लोगों में फैला दीजिए । आप जीवन की वास्तविकता के सिद्धान्तों को समझिए । ख्याली दुनियाँ में से निकलिए । आपके नजदीक जितने भी आदमी हैं उनमें आप हमारे विचारों को फैला दीजिए । यह काम आप अपने काम के साथ-साथ भी कर सकते हैं । आप युग साहित्य लेकर अपने पड़ोसियों को पढ़ाना शुरू कर दीजिए । उनको हमारे विचार दीजिए । हमको आगे बढ़ने दीजिए, सम्पर्क बनाने दीजिए ताकि हम उन विचारशीलों के पास, शिक्षितों के पास जाने में समर्थ हो सकें । इससे कम में हमारा काम बनने वाला नहीं । जो हमारा विचार पढ़ेगा-समझेगा वही हमारा शिष्य है । हमारे विचार बड़े पैने हैं । दुनियाँ को हम पलट देने का दावा जो करते हैं वह सिद्धियों से नहीं, बल्कि अपने सशक्त विचारों से करते हैं । आप इन विचारों को फैलाने में हमारी सहायता कीजिए ।
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आप पढ़े-लिखे लोगों तक हमारी आवाज पहुँचा दीजिए - आचार्य पं. श्रीराम शर्मा हमने विचार क्रान्ति अभियान को युग साहित्य के रूप में लिखना शुरू कर दिया है और हर आदमी को स्वाध्याय करने के लिए मजबूर किया है । हमारे विचारों को आप पढ़िए और हमारी आग की चिनगारी को लोगों में फैला दीजिए । आप जीवन की वास्तविकता के सिद्धान्तों को समझिए । ख्याली दुनियाँ में से निकलिए । आपके नजदीक जितने भी आदमी हैं उनमें आप हमारे विचारों को फैला दीजिए । यह काम आप अपने काम के साथ-साथ भी कर सकते हैं । आप युग साहित्य लेकर अपने पड़ोसियों को पढ़ाना शुरू कर दीजिए । उनको हमारे विचार दीजिए । हमको आगे बढ़ने दीजिए, सम्पर्क बनाने दीजिए ताकि हम उन विचारशीलों के पास, शिक्षितों के पास जाने में समर्थ हो सकें । इससे कम में हमारा काम बनने वाला नहीं । जो हमारा विचार पढ़ेगा-समझेगा वही हमारा शिष्य है । हमारे विचार बड़े पैने हैं । दुनियाँ को हम पलट देने का दावा जो करते हैं वह सिद्धियों से नहीं, बल्कि अपने सशक्त विचारों से करते हैं । आप इन विचारों को फैलाने में हमारी सहायता कीजिए ।
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देखें वीडियो.
नई दिल्लीः मणिपुर में बीते तीन मई से शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. पूर्वोत्तर राज्य में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मी लगातार प्रभावित इलाकों में गश्त कर रहे हैं.
मणिपुर में रह रहकर हिंसा हो रही है. राजधानी इंफाल में केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि ये घटना जिस वक्त हुई केंद्रीय मंत्री घर पर नहीं थे. इंफाल में कर्फ्यू के बावजूद भीड़ मंत्री आवास तक पहुंच गई. मंत्री के आवास पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात थे.
विदेश राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि मैं इस समय आधिकारिक काम के लिए केरल में हूं. शुक्र है कि कल रात मेरे इंफाल स्थित घर में कोई घायल नहीं हुआ. बदमाश पेट्रोल बम लेकर आए थे. मेरे घर के भूतल और पहली मंजिल को नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा कि मेरे गृह राज्य में जो हो रहा है उसे देखकर बहुत दुख होता है. मैं अब भी शांति की अपील करता रहूंगा. इस तरह की हिंसा में लिप्त लोग बिल्कुल अमानवीय हैं.
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देखें वीडियो. नई दिल्लीः मणिपुर में बीते तीन मई से शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. पूर्वोत्तर राज्य में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मी लगातार प्रभावित इलाकों में गश्त कर रहे हैं. मणिपुर में रह रहकर हिंसा हो रही है. राजधानी इंफाल में केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि ये घटना जिस वक्त हुई केंद्रीय मंत्री घर पर नहीं थे. इंफाल में कर्फ्यू के बावजूद भीड़ मंत्री आवास तक पहुंच गई. मंत्री के आवास पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात थे. विदेश राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि मैं इस समय आधिकारिक काम के लिए केरल में हूं. शुक्र है कि कल रात मेरे इंफाल स्थित घर में कोई घायल नहीं हुआ. बदमाश पेट्रोल बम लेकर आए थे. मेरे घर के भूतल और पहली मंजिल को नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा कि मेरे गृह राज्य में जो हो रहा है उसे देखकर बहुत दुख होता है. मैं अब भी शांति की अपील करता रहूंगा. इस तरह की हिंसा में लिप्त लोग बिल्कुल अमानवीय हैं.
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अगर गर्भवती महिला अपने डॉक्टर की सलाह के बाद, पांचवें महीने में केसर को दूध वगैरह के साथ लिया जाए तो कुछ फायदे हो सकते हैं। लेकिन केसर शुद्ध होनी चाहिए और इसकी मात्रा कम होनी चाहिए। मात्रा डॉक्टर से पूछकर तय करें।
केसर के सेवन से प्रेग्नेंसी में बीपी कंट्रोल रहता है, इससे मॉर्निंग सिकनेस में फायदा होता है, पाचन सही रहता है, आयरन का स्तर ठीक बना रहता है, मूड अच्छा रहता है, अच्छी नींद आने में मदद मिलती है।
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अगर गर्भवती महिला अपने डॉक्टर की सलाह के बाद, पांचवें महीने में केसर को दूध वगैरह के साथ लिया जाए तो कुछ फायदे हो सकते हैं। लेकिन केसर शुद्ध होनी चाहिए और इसकी मात्रा कम होनी चाहिए। मात्रा डॉक्टर से पूछकर तय करें। केसर के सेवन से प्रेग्नेंसी में बीपी कंट्रोल रहता है, इससे मॉर्निंग सिकनेस में फायदा होता है, पाचन सही रहता है, आयरन का स्तर ठीक बना रहता है, मूड अच्छा रहता है, अच्छी नींद आने में मदद मिलती है।
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पिछले करीब 2 महीने से लगातार जारी तेजी के कारण भारतीय पूंजी बाजार एक बार फिर दुनिया का 5वां सबसे बड़ा पूंजी बाजार बन गया है। भारतीय पूंजी बाजार का मार्केट कैप बढ़कर 3. 31 ट्रिलियन डॉलर यानी 3. 31 लाख करोड़ डॉलर हो गया है। इसके साथ ही घरेलू इक्विटी मार्केट ने फ्रांस के इक्विटी मार्केट को पीछे छोड़ कर टॉप 10 इक्विटी मार्केट में से 5वां स्थान हासिल कर लिया है।
आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में भारतीय पूंजी बाजार फ्रांस से पिछड़ कर छठे स्थान पर पहुंच गया था। लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार जारी तेजी के माहौल की वजह से घरेलू इक्विटी मार्केट ने एक बार फिर अपनी ग्लोबल रैंकिंग में सुधार कर लिया है। फ्रांस का इक्विटी मार्केट फिलहाल 3. 24 ट्रिलियन डॉलर यानी 3. 24 लाख करोड़ डॉलर का है, जिसकी वजह से वह भारत से पिछड़ कर एक बार फिर छठे स्थान पर आ गया है।
इक्विटी मार्केट के मार्केट कैप के लिहाज से टॉप 10 में शुमार देशों में फिलहाल अमेरिकी इक्विटी मार्केट 44. 54 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर 10. 26 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन का इक्विटी मार्केट है। जबकि 5. 68 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ जापान का इक्विटी मार्केट तीसरे स्थान पर और 5. 14 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप हांगकांग का इक्विटी मार्केट चौथे स्थान पर है।
स्टॉक एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक भारतीय पूंजी बाजार में 28 मार्च के बाद से लगातार जोश का माहौल बना रहा है। हालांकि बीच-बीच में कई बार वैश्विक दबाव की वजह से बाजार में गिरावट का रुख भी बना है। इसके बावजूद देश की माइक्रो इकोनॉमी की परिस्थितियों में लगातार सुधार होने की वजह से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार के प्रति लगातार रुझान बना रहा है। मार्च के अंतिम सप्ताह के बाद से लेकर अभी तक बीएसई का सेंसेक्स करीब 13 प्रतिशत तक मजबूत हो चुका है, वहीं बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 15 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है।
जानकारों का दावा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स में पिछले कुछ सालों के दौरान जिस तेजी से सुधार हुआ है, उसकी वजह से आने वाले 5 साल के समय में सेंसेक्स 90 हजार से लेकर 1 लाख तक के स्तर को छू सकता है। हालांकि ऐसा होना तभी संभव है, जब भारतीय पूंजी बाजार में प्रति शेयर आय (ईपीएस) में वार्षिक आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़त बनी रहे।
धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का मानना है कि पिछले 5 साल का जो ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, उसके आधार पर भारतीय पूंजी बाजार के लिए ईपीएस में 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि कोई कठिन लक्ष्य नहीं है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाला कोई बड़ा उलटफेर या भारतीय अर्थनीति में होने वाला कोई बड़ा परिवर्तन विपरीत परिणाम देने वाला भी हो सकता है।
(सौजन्य सिंडिकेट फीड)
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पिछले करीब दो महीने से लगातार जारी तेजी के कारण भारतीय पूंजी बाजार एक बार फिर दुनिया का पाँचवां सबसे बड़ा पूंजी बाजार बन गया है। भारतीय पूंजी बाजार का मार्केट कैप बढ़कर तीन. इकतीस ट्रिलियन डॉलर यानी तीन. इकतीस लाख करोड़ डॉलर हो गया है। इसके साथ ही घरेलू इक्विटी मार्केट ने फ्रांस के इक्विटी मार्केट को पीछे छोड़ कर टॉप दस इक्विटी मार्केट में से पाँचवां स्थान हासिल कर लिया है। आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में भारतीय पूंजी बाजार फ्रांस से पिछड़ कर छठे स्थान पर पहुंच गया था। लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार जारी तेजी के माहौल की वजह से घरेलू इक्विटी मार्केट ने एक बार फिर अपनी ग्लोबल रैंकिंग में सुधार कर लिया है। फ्रांस का इक्विटी मार्केट फिलहाल तीन. चौबीस ट्रिलियन डॉलर यानी तीन. चौबीस लाख करोड़ डॉलर का है, जिसकी वजह से वह भारत से पिछड़ कर एक बार फिर छठे स्थान पर आ गया है। इक्विटी मार्केट के मार्केट कैप के लिहाज से टॉप दस में शुमार देशों में फिलहाल अमेरिकी इक्विटी मार्केट चौंतालीस. चौवन ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर दस. छब्बीस ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन का इक्विटी मार्केट है। जबकि पाँच. अड़सठ ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ जापान का इक्विटी मार्केट तीसरे स्थान पर और पाँच. चौदह ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप हांगकांग का इक्विटी मार्केट चौथे स्थान पर है। स्टॉक एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक भारतीय पूंजी बाजार में अट्ठाईस मार्च के बाद से लगातार जोश का माहौल बना रहा है। हालांकि बीच-बीच में कई बार वैश्विक दबाव की वजह से बाजार में गिरावट का रुख भी बना है। इसके बावजूद देश की माइक्रो इकोनॉमी की परिस्थितियों में लगातार सुधार होने की वजह से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार के प्रति लगातार रुझान बना रहा है। मार्च के अंतिम सप्ताह के बाद से लेकर अभी तक बीएसई का सेंसेक्स करीब तेरह प्रतिशत तक मजबूत हो चुका है, वहीं बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब पंद्रह प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है। जानकारों का दावा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स में पिछले कुछ सालों के दौरान जिस तेजी से सुधार हुआ है, उसकी वजह से आने वाले पाँच साल के समय में सेंसेक्स नब्बे हजार से लेकर एक लाख तक के स्तर को छू सकता है। हालांकि ऐसा होना तभी संभव है, जब भारतीय पूंजी बाजार में प्रति शेयर आय में वार्षिक आधार पर पंद्रह प्रतिशत की बढ़त बनी रहे। धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का मानना है कि पिछले पाँच साल का जो ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, उसके आधार पर भारतीय पूंजी बाजार के लिए ईपीएस में पंद्रह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि कोई कठिन लक्ष्य नहीं है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाला कोई बड़ा उलटफेर या भारतीय अर्थनीति में होने वाला कोई बड़ा परिवर्तन विपरीत परिणाम देने वाला भी हो सकता है।
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ऐसा कभी होता नहीं था।
मम्मी इतनी सुबह उठ कर कभी आगोश को जगाने आती नहीं थीं।
इसीलिए जैसे ही मम्मी ने आगोश की चादर खींच कर उघाड़ी, वो अचकचा कर बोल पड़ीं- छी- छी... ये कैसे सो रहा है?
- बेटा, एसी तो बंद कर दिया कर... कहती हुई मम्मी जल्दी से कमरे से बाहर निकल गईं।
आगोश झटपट उठ कर पहले बाथरूम गया फिर कूदता हुआ मम्मी के पास आया।
- हां, ये तो बताओ जगाया क्यों?
- बेटा, तू दौड़ कर बाहर जा, ज़रा देख कर तो आ, अपने गैरेज के सामने ये पीली गाड़ी किसकी खड़ी है?
- पीली गाड़ी? आगोश ने आश्चर्य से कहा। फ़िर बोला- कोई आया होगा डैडी से मिलने।
... पर गाड़ी यहां क्यों पार्क करेगा? आगोश बाहर की तरफ़ भागा।
- उधर क्लिनिक वाले पार्किंग में जगह नहीं होगी, इसलिए कोई यहां गाड़ी खड़ी कर गया। मैं देखता हूं उधर, कौन है! पर गाड़ी है बड़ी शानदार! एकदम यूनिक।
- अच्छी है? मम्मी ज़ोर से हंसती हुई हाथ में मिठाई की एक प्लेट पकड़े आगोश की तरफ़ आईं।
मम्मी की खिलखिलाहट को आगोश अभी बौखलाया हुआ देख ही रहा था कि मम्मी बोलीं- अच्छी है न? तो ले, मुंह मीठा कर।
आगोश चौंका।
मम्मी ने बताया - ये तेरी है। कल रात को देर से आई। तू कल जल्दी ही सो गया था न, इसलिए मैंने जगाया नहीं। सोचा, सुबह- सुबह तुझे सरप्राइज़ दूंगी।
आगोश कुछ ज़्यादा ख़ुश नहीं दिखा। उसने मम्मी के हाथ से लेकर मीठे का टुकड़ा तो खा लिया पर कुछ विचित्र सी मुद्रा में डायनिंग टेबल पर जा बैठा। उसकी नींद भी अभी पूरी तरह खुली नहीं थी।
मम्मी बोलीं- मैं समझ गई। तुझे पसंद नहीं आई!
आगोश कुछ नहीं बोला।
मम्मी किसी अपराधी की भांति उसके करीब आईं और बोलीं- बेटा, सारी ग़लती मेरी ही है, तेरे डैडी तो कह रहे थे कि आगोश से ही चॉइस कराओ, पर मैंने ही कह दिया कि मुझे आगोश को सरप्राइज़ देना है। वो मेरी पसंद को रिजेक्ट थोड़े ही करेगा।
अब आगोश हंसा। बोला- ओहो मॉम, किसने कहा कि मुझे पसंद नहीं आई। शानदार है!
- कैसे? आगोश ने कुछ अचरज से कहा।
- क्यों, उस दिन तू नहीं कह रहा था कि आर्यन को एक बड़े टीवी सीरियल में काम मिल गया, अब तो वो थोड़े ही दिनों में गोल्डन- येलो कलर की गाड़ी में घूमेगा। मम्मी ने सफ़ाई दी।
मम्मी फ़िर से कुछ सीरियस होकर बोलीं- क्यों, तो क्या तू अपनी दुल्हन मेरी पसंद से नहीं लाएगा?
आगोश हंसने लगा।
- डैडी कहां हैं, उन्हें जाकर थैंक्स तो कह दूं। आगोश उठते हुए कहने लगा।
मम्मी एकदम से ख़ुश होकर बोलीं- हां - हां जा बेटा, कह दे, वो बहुत खुश होंगे, वो तो बेचारे तुझे कुछ गिफ्ट देते हुए भी डरते हैं... फ़ोन कर दे।
- फ़ोन क्यों? डैडी हैं कहां? क्या इतनी जल्दी क्लिनिक में जा बैठे?
मम्मी ने कुछ अचकचा कर धीरे से बताया- अरे बेटा, मैं तो तुझे बताना ही भूल गई। वो तो कल रात की फ्लाइट से एमस्टर्डम गए हैं।
आगोश का मूड एकाएक कुछ उखड़ गया। उसने फ़ोन हाथ में उठाया तो सही पर डैडी को किया नहीं। वह फ़ोन हाथ में पकड़े- पकड़े ही अपना लोअर उतार कर पटकता हुआ अपने कमरे के वाशरूम में घुस गया।
मम्मी भी कुछ मायूस सी होकर अपने कमरे में चली गईं।
आगोश ने लैट्रीन की सीट पर बैठे- बैठे ही आर्यन को फ़ोन मिलाया।
उधर से आर्यन की आवाज़ आई- इतनी सुबह- सुबह कैसे याद फरमाया ?
- हां यार, आज ज़रा जल्दी उठना पड़ा।
- क्यों?
- डॉन का तोहफ़ा कुबूल करना था।
- कैसा तोहफ़ा? कांग्रेचुलेशंस। बधाई हो।
- थैंक्स।
- मिला क्या तोहफ़े में?
- तेरे लिए गाड़ी।
- मेरे लिए? मेरे लिए क्यों? तुझे मिली है तो तेरे लिए होगी न। आर्यन ने कहा।
- मुझे मिली है तो क्या, जा मैंने तुझे दी। अब तेरी हो गई न। बस।
- पर ये तो बता, मिला किस बात के लिए तोहफ़ा? आर्यन ने पूछा।
- अरे यार छोड़ न, फ़िर किया होगा कोई गुल- गपाड़ा। और मुझे मेरा कमीशन दे दिया ताकि मैं मुंह बंद रखूं।
आर्यन हंसने लगा।
आगोश बोला- तू बता, कैसी रही यार तेरी मीटिंग कल वाली?
- स्टोरी- सैशन था। हम सब लोग एक साथ थे। आर्यन ने कहा।
- बाक़ी तो सब ठीक है, बस तू ज़रा उस बिल्ली से बचके रहना। आगोश ने कहा।
- बिल्ली? कौन बिल्ली? मैं कुछ समझा नहीं। आर्यन चौंका।
आर्यन ज़ोर से हंसने लगा। बोला- अबे, मैडम तो कभी अकेले में मिलती तक नहीं हैं किसी से.. सबकी मीटिंग एकसाथ ही लेती हैं, पूरी टीम होती है एकसाथ।
- चल तो मैं धोता हूं अब, बाय!
आर्यन की फ़िर खूब ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई। बोला- साले, अंदर भी फ़ोन लेकर बैठा है!
आगोश ने फ्रेश होकर पहले मम्मी के साथ डायनिंग टेबल पर बैठ कर जम कर ज़ोरदार नाश्ता किया फ़िर अपने कमरे में जाकर फ़ोन पर बैठ गया।
उसने सब दोस्तों को फ़ोन पर ही बताया कि उसने नई कार खरीदी है और इस ख़ुशी में शाम को रूफटॉप में हम सब एकसाथ खाना खायेंगे। पार्टी !
केवल मधुरिमा ने थोड़ी ना- नुकर की, बाक़ी सब मान गए। लेकिन थोड़ा ज़ोर देने पर मधुरिमा भी आने के लिए तैयार हो गई।
इस बार की पार्टी की एक ख़ास बात थी। सबको रस ले- लेकर आगोश ने बताया कि आज की पार्टी डिनर- कम- ड्राइव है। इसलिए अपनी नई गाड़ी से आगोश बारी- बारी से सबको उनके घर से लेने आयेगा, फ़िर पहले तो सब एक साथ में एक लॉन्गड्राइव पर जाएंगे और उसके बाद डिनर होगा।
आगोश ने सबको बता दिया कि पार्टी के बाद आगोश सबको उनके घर भी छोड़ेगा। मज़ा आ गया!
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ऐसा कभी होता नहीं था। मम्मी इतनी सुबह उठ कर कभी आगोश को जगाने आती नहीं थीं। इसीलिए जैसे ही मम्मी ने आगोश की चादर खींच कर उघाड़ी, वो अचकचा कर बोल पड़ीं- छी- छी... ये कैसे सो रहा है? - बेटा, एसी तो बंद कर दिया कर... कहती हुई मम्मी जल्दी से कमरे से बाहर निकल गईं। आगोश झटपट उठ कर पहले बाथरूम गया फिर कूदता हुआ मम्मी के पास आया। - हां, ये तो बताओ जगाया क्यों? - बेटा, तू दौड़ कर बाहर जा, ज़रा देख कर तो आ, अपने गैरेज के सामने ये पीली गाड़ी किसकी खड़ी है? - पीली गाड़ी? आगोश ने आश्चर्य से कहा। फ़िर बोला- कोई आया होगा डैडी से मिलने। ... पर गाड़ी यहां क्यों पार्क करेगा? आगोश बाहर की तरफ़ भागा। - उधर क्लिनिक वाले पार्किंग में जगह नहीं होगी, इसलिए कोई यहां गाड़ी खड़ी कर गया। मैं देखता हूं उधर, कौन है! पर गाड़ी है बड़ी शानदार! एकदम यूनिक। - अच्छी है? मम्मी ज़ोर से हंसती हुई हाथ में मिठाई की एक प्लेट पकड़े आगोश की तरफ़ आईं। मम्मी की खिलखिलाहट को आगोश अभी बौखलाया हुआ देख ही रहा था कि मम्मी बोलीं- अच्छी है न? तो ले, मुंह मीठा कर। आगोश चौंका। मम्मी ने बताया - ये तेरी है। कल रात को देर से आई। तू कल जल्दी ही सो गया था न, इसलिए मैंने जगाया नहीं। सोचा, सुबह- सुबह तुझे सरप्राइज़ दूंगी। आगोश कुछ ज़्यादा ख़ुश नहीं दिखा। उसने मम्मी के हाथ से लेकर मीठे का टुकड़ा तो खा लिया पर कुछ विचित्र सी मुद्रा में डायनिंग टेबल पर जा बैठा। उसकी नींद भी अभी पूरी तरह खुली नहीं थी। मम्मी बोलीं- मैं समझ गई। तुझे पसंद नहीं आई! आगोश कुछ नहीं बोला। मम्मी किसी अपराधी की भांति उसके करीब आईं और बोलीं- बेटा, सारी ग़लती मेरी ही है, तेरे डैडी तो कह रहे थे कि आगोश से ही चॉइस कराओ, पर मैंने ही कह दिया कि मुझे आगोश को सरप्राइज़ देना है। वो मेरी पसंद को रिजेक्ट थोड़े ही करेगा। अब आगोश हंसा। बोला- ओहो मॉम, किसने कहा कि मुझे पसंद नहीं आई। शानदार है! - कैसे? आगोश ने कुछ अचरज से कहा। - क्यों, उस दिन तू नहीं कह रहा था कि आर्यन को एक बड़े टीवी सीरियल में काम मिल गया, अब तो वो थोड़े ही दिनों में गोल्डन- येलो कलर की गाड़ी में घूमेगा। मम्मी ने सफ़ाई दी। मम्मी फ़िर से कुछ सीरियस होकर बोलीं- क्यों, तो क्या तू अपनी दुल्हन मेरी पसंद से नहीं लाएगा? आगोश हंसने लगा। - डैडी कहां हैं, उन्हें जाकर थैंक्स तो कह दूं। आगोश उठते हुए कहने लगा। मम्मी एकदम से ख़ुश होकर बोलीं- हां - हां जा बेटा, कह दे, वो बहुत खुश होंगे, वो तो बेचारे तुझे कुछ गिफ्ट देते हुए भी डरते हैं... फ़ोन कर दे। - फ़ोन क्यों? डैडी हैं कहां? क्या इतनी जल्दी क्लिनिक में जा बैठे? मम्मी ने कुछ अचकचा कर धीरे से बताया- अरे बेटा, मैं तो तुझे बताना ही भूल गई। वो तो कल रात की फ्लाइट से एमस्टर्डम गए हैं। आगोश का मूड एकाएक कुछ उखड़ गया। उसने फ़ोन हाथ में उठाया तो सही पर डैडी को किया नहीं। वह फ़ोन हाथ में पकड़े- पकड़े ही अपना लोअर उतार कर पटकता हुआ अपने कमरे के वाशरूम में घुस गया। मम्मी भी कुछ मायूस सी होकर अपने कमरे में चली गईं। आगोश ने लैट्रीन की सीट पर बैठे- बैठे ही आर्यन को फ़ोन मिलाया। उधर से आर्यन की आवाज़ आई- इतनी सुबह- सुबह कैसे याद फरमाया ? - हां यार, आज ज़रा जल्दी उठना पड़ा। - क्यों? - डॉन का तोहफ़ा कुबूल करना था। - कैसा तोहफ़ा? कांग्रेचुलेशंस। बधाई हो। - थैंक्स। - मिला क्या तोहफ़े में? - तेरे लिए गाड़ी। - मेरे लिए? मेरे लिए क्यों? तुझे मिली है तो तेरे लिए होगी न। आर्यन ने कहा। - मुझे मिली है तो क्या, जा मैंने तुझे दी। अब तेरी हो गई न। बस। - पर ये तो बता, मिला किस बात के लिए तोहफ़ा? आर्यन ने पूछा। - अरे यार छोड़ न, फ़िर किया होगा कोई गुल- गपाड़ा। और मुझे मेरा कमीशन दे दिया ताकि मैं मुंह बंद रखूं। आर्यन हंसने लगा। आगोश बोला- तू बता, कैसी रही यार तेरी मीटिंग कल वाली? - स्टोरी- सैशन था। हम सब लोग एक साथ थे। आर्यन ने कहा। - बाक़ी तो सब ठीक है, बस तू ज़रा उस बिल्ली से बचके रहना। आगोश ने कहा। - बिल्ली? कौन बिल्ली? मैं कुछ समझा नहीं। आर्यन चौंका। आर्यन ज़ोर से हंसने लगा। बोला- अबे, मैडम तो कभी अकेले में मिलती तक नहीं हैं किसी से.. सबकी मीटिंग एकसाथ ही लेती हैं, पूरी टीम होती है एकसाथ। - चल तो मैं धोता हूं अब, बाय! आर्यन की फ़िर खूब ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई। बोला- साले, अंदर भी फ़ोन लेकर बैठा है! आगोश ने फ्रेश होकर पहले मम्मी के साथ डायनिंग टेबल पर बैठ कर जम कर ज़ोरदार नाश्ता किया फ़िर अपने कमरे में जाकर फ़ोन पर बैठ गया। उसने सब दोस्तों को फ़ोन पर ही बताया कि उसने नई कार खरीदी है और इस ख़ुशी में शाम को रूफटॉप में हम सब एकसाथ खाना खायेंगे। पार्टी ! केवल मधुरिमा ने थोड़ी ना- नुकर की, बाक़ी सब मान गए। लेकिन थोड़ा ज़ोर देने पर मधुरिमा भी आने के लिए तैयार हो गई। इस बार की पार्टी की एक ख़ास बात थी। सबको रस ले- लेकर आगोश ने बताया कि आज की पार्टी डिनर- कम- ड्राइव है। इसलिए अपनी नई गाड़ी से आगोश बारी- बारी से सबको उनके घर से लेने आयेगा, फ़िर पहले तो सब एक साथ में एक लॉन्गड्राइव पर जाएंगे और उसके बाद डिनर होगा। आगोश ने सबको बता दिया कि पार्टी के बाद आगोश सबको उनके घर भी छोड़ेगा। मज़ा आ गया!
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GORAKHPUR: मौसम की सख्ती का असर बदस्तूर जारी है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। मौसम विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो आने वाले दिनों में भी लोगों को मौसम की इस उठा-पटक से राहत नहीं मिलने वाली है। बुधवार को भी गोरखपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है, वहीं इसके बाद कुछ बदली और धूप से लोगों को रूबरू होना पड़ेगा। आमतौर पर मौसम साफ रहने की उम्मीद है। मौसम के इस तेवर से मैक्सिमम टेंप्रेचर में अब इजाफा होगा, जबकि मिनिमम टेंप्रेचर में कोई खास फर्क देखने को नहीं मिलेगा।
मौसम की उठा-पटक के बीच मंगलवार को इसके रुख में काफी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को हुई घंघोर बरसात के बाद मंगलवार की सुबह भी यह सिलसिला जारी रहा। सुबह में काफी तेज बारिश हुई, वहीं दोपहर तक रुक-रुककर यह सिलसिला चलता रहा। दोपहर बाद बारिश तो थमी, लेकिन सर्द हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाती रहीं। मौसम के इस रुख की वजह से मैक्सिमम टेंप्रेचर करीब पांच डिग्री नीचे आ गया। जबकि मिनिमम टेंप्रेचर में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला। इसकी वजह से मैक्सिमम टेंप्रेचर 20. 7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि मिनिमम टेंप्रेचर 15. 4 डिग्री सेल्सियस रहा।
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GORAKHPUR: मौसम की सख्ती का असर बदस्तूर जारी है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। मौसम विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो आने वाले दिनों में भी लोगों को मौसम की इस उठा-पटक से राहत नहीं मिलने वाली है। बुधवार को भी गोरखपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है, वहीं इसके बाद कुछ बदली और धूप से लोगों को रूबरू होना पड़ेगा। आमतौर पर मौसम साफ रहने की उम्मीद है। मौसम के इस तेवर से मैक्सिमम टेंप्रेचर में अब इजाफा होगा, जबकि मिनिमम टेंप्रेचर में कोई खास फर्क देखने को नहीं मिलेगा। मौसम की उठा-पटक के बीच मंगलवार को इसके रुख में काफी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को हुई घंघोर बरसात के बाद मंगलवार की सुबह भी यह सिलसिला जारी रहा। सुबह में काफी तेज बारिश हुई, वहीं दोपहर तक रुक-रुककर यह सिलसिला चलता रहा। दोपहर बाद बारिश तो थमी, लेकिन सर्द हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाती रहीं। मौसम के इस रुख की वजह से मैक्सिमम टेंप्रेचर करीब पांच डिग्री नीचे आ गया। जबकि मिनिमम टेंप्रेचर में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला। इसकी वजह से मैक्सिमम टेंप्रेचर बीस. सात डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि मिनिमम टेंप्रेचर पंद्रह. चार डिग्री सेल्सियस रहा।
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क्रिकेट में बॉक्सिंग डे की परंपरा ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुई, जब घरेलू टीम विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) के बीच 26 दिसंबर, 1856 को मैच खेला गया था। वह मैच अपने आप में एक यादगार मैच बन गया, जब एनएसडब्ल्यू ने तीन विकेट से जीत दर्ज की थी।
भारत रविवार से सेंचुरियन में तीन टेस्ट मैचों की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करेगा। वहीं, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच तीसरा एशेज टेस्ट खेला जाएगा। यह टीमें बॉक्सिंग डे टेस्ट में एक-दूसरे से भिड़ती नजर आएंगी, क्योंकि दोनों ही मैच क्रिसमस के एक दिन बाद 26 दिसंबर से खेले जाएंगे। बॉक्सिंग डे पर स्पोटिर्ंग मैच (26 दिसंबर) को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में एक पारंपरिक मैच खेला जाता है। क्रिकेट के लिहाज से इस दिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट मैच खेले जाते हैं, जिसे बॉक्सिंग डे टेस्ट कहा जाता है।
जानकारी के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि क्रिसमस वाले दिन जो बिना छुट्टी लिए काम करते हैं, उन्हें अगले दिन बॉक्स के रूप में गिफ्ट दिया जाता है और साथ ही उन्हें इस दिन पर परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए अवकाश दिया जाता है। इसलिए बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच का आयोजन किया जाता है।
क्रिकेट में बॉक्सिंग डे की परंपरा ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुई, जब घरेलू टीम विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) के बीच 26 दिसंबर, 1856 को मैच खेला गया था। वह मैच अपने आप में एक यादगार मैच बन गया, जब एनएसडब्ल्यू ने तीन विकेट से जीत दर्ज की थी।
पहला बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच 1950 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में हुआ था। यह 1980 तक नहीं था कि मेलबर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को एमसीजी में हर साल बॉक्सिंग डे पर एक टेस्ट मैच आयोजित करने का अधिकार मिला।
बॉक्सिंग डे टेस्ट में भारत के रिकॉर्ड की बात करें तो अच्छा नहीं रहा है। भारत ने केवल तीन बॉक्सिंग डे टेस्ट जीते हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में पिछले दो बॉक्सिंग डे टेस्ट शामिल हैं, जबकि दो ड्रॉ हुए हैं।
भारत के खिलाफ प्रोटियाज ने 1992 से अभी तक चार बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच जीत चुके हैं।
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क्रिकेट में बॉक्सिंग डे की परंपरा ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुई, जब घरेलू टीम विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच छब्बीस दिसंबर, एक हज़ार आठ सौ छप्पन को मैच खेला गया था। वह मैच अपने आप में एक यादगार मैच बन गया, जब एनएसडब्ल्यू ने तीन विकेट से जीत दर्ज की थी। भारत रविवार से सेंचुरियन में तीन टेस्ट मैचों की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करेगा। वहीं, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच तीसरा एशेज टेस्ट खेला जाएगा। यह टीमें बॉक्सिंग डे टेस्ट में एक-दूसरे से भिड़ती नजर आएंगी, क्योंकि दोनों ही मैच क्रिसमस के एक दिन बाद छब्बीस दिसंबर से खेले जाएंगे। बॉक्सिंग डे पर स्पोटिर्ंग मैच को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में एक पारंपरिक मैच खेला जाता है। क्रिकेट के लिहाज से इस दिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट मैच खेले जाते हैं, जिसे बॉक्सिंग डे टेस्ट कहा जाता है। जानकारी के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि क्रिसमस वाले दिन जो बिना छुट्टी लिए काम करते हैं, उन्हें अगले दिन बॉक्स के रूप में गिफ्ट दिया जाता है और साथ ही उन्हें इस दिन पर परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए अवकाश दिया जाता है। इसलिए बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच का आयोजन किया जाता है। क्रिकेट में बॉक्सिंग डे की परंपरा ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुई, जब घरेलू टीम विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच छब्बीस दिसंबर, एक हज़ार आठ सौ छप्पन को मैच खेला गया था। वह मैच अपने आप में एक यादगार मैच बन गया, जब एनएसडब्ल्यू ने तीन विकेट से जीत दर्ज की थी। पहला बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच एक हज़ार नौ सौ पचास में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में हुआ था। यह एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक नहीं था कि मेलबर्न क्रिकेट क्लब और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को एमसीजी में हर साल बॉक्सिंग डे पर एक टेस्ट मैच आयोजित करने का अधिकार मिला। बॉक्सिंग डे टेस्ट में भारत के रिकॉर्ड की बात करें तो अच्छा नहीं रहा है। भारत ने केवल तीन बॉक्सिंग डे टेस्ट जीते हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में पिछले दो बॉक्सिंग डे टेस्ट शामिल हैं, जबकि दो ड्रॉ हुए हैं। भारत के खिलाफ प्रोटियाज ने एक हज़ार नौ सौ बानवे से अभी तक चार बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच जीत चुके हैं।
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तमिल फिल्म स्टार आर माधवन आज अपना 53वां बर्थडे मना रहे हैं। फिल्म स्टार ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में दी। जिसकी वजह से वो तमिल ही नहीं, हिंदी फिल्म दर्शकों के दिलों पर भी राज करते हैं। आर माधवन अपने काम की वजह से खूब चर्चा में रहते हैं। मगर उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते हैं। तमिल स्टार आर माधवन ने साल 1999 में अपनी प्रेमिका सरिता बिरजे संग शादी रचाई थी। आर माधवन की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक्टर ने अपनी स्टूडेंट को ही दिल दे दिया था। जानें कैसे परवान चढ़ा एक्टर का प्यार।
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तमिल फिल्म स्टार आर माधवन आज अपना तिरेपनवां बर्थडे मना रहे हैं। फिल्म स्टार ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में दी। जिसकी वजह से वो तमिल ही नहीं, हिंदी फिल्म दर्शकों के दिलों पर भी राज करते हैं। आर माधवन अपने काम की वजह से खूब चर्चा में रहते हैं। मगर उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते हैं। तमिल स्टार आर माधवन ने साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में अपनी प्रेमिका सरिता बिरजे संग शादी रचाई थी। आर माधवन की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक्टर ने अपनी स्टूडेंट को ही दिल दे दिया था। जानें कैसे परवान चढ़ा एक्टर का प्यार।
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राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर से आरंभ हो चुका है. इस सेशन के बीत कोविड नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए 1 सितंबर को सुबह 11 बजे से सत्र का शुभारंभ किया गया. वहीं सत्र का शुरुआत से पहले दिवंगत नेताओं को श्रद्धाजंलि दी गई.
ओडिशा विधानसभा (Odisha Legislative Assembly) में विपक्षी और बीजेपी कांग्रेस विधायकों के शोर-शराबे के बीच, राज्य विधानसभा ने बुधवार को ओडिशा पंचायत कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया, जिसमें ST, SC और OBC की तीन श्रेणियों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में सीटों के आरक्षण को 50 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान किया गया है.
ओडिशा सरकार ने उप-धारा 3 को प्रतिस्थापित करने के लिए नगर अधिनियम की धारा 11 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया है, जिसमें लिखा है, "सीटें BCC के पक्ष में आरक्षित की जाएंगी, जैसा कि प्रत्येक नगरपालिका में संविधान के अनुच्छेद 243T के खंड 6 में संदर्भित है.
यह उप-धारा (1) और बीसीसी के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों सहित ऐसी नगरपालिका की कुल सीटों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अधीन है और ऐसी सीटों को अलग-अलग वार्डों में रोटेशन द्वारा आवंटित किया जाएगा. प्रत्येक आम चुनाव में नगरपालिका क्षेत्र." इसी तरह का प्रावधान नगर निगम अधिनियम, 2003 की धारा 7 में भी प्रतिस्थापित किया गया है.
मालूम हो कि राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर से आरंभ हो चुका है. इस सेशन के बीत कोविड नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए 1 सितंबर को सुबह 11 बजे से सत्र का शुभारंभ किया गया. वहीं सत्र का शुरुआत से पहले दिवंगत नेताओं को श्रद्धाजंलि दी गई.
मॉनसून सत्र की शुरुआत में सीएम ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पूर्वमंत्री बिजयश्री राउतराय, कार्तिक तराई , पूर्व उप-मुख्य सचेतक विवेकानन्द मेहेर, पूर्व विधायक अरुण दे, चन्द्रामा सान्त्रा , कमलाकान्त नायक, उमाकांत मिश्र और बिक्रम केशरी बर्मा सहित शहिद हुए जवान अनील एक्का एवं हवलदार सुनील कुमार नायक को श्रद्धाजंलि दी.
(भाषा इनपुट के साथ)
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राज्य विधानसभा का मानसून सत्र एक सितंबर से आरंभ हो चुका है. इस सेशन के बीत कोविड नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए एक सितंबर को सुबह ग्यारह बजे से सत्र का शुभारंभ किया गया. वहीं सत्र का शुरुआत से पहले दिवंगत नेताओं को श्रद्धाजंलि दी गई. ओडिशा विधानसभा में विपक्षी और बीजेपी कांग्रेस विधायकों के शोर-शराबे के बीच, राज्य विधानसभा ने बुधवार को ओडिशा पंचायत कानून विधेयक, दो हज़ार इक्कीस पारित किया, जिसमें ST, SC और OBC की तीन श्रेणियों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में सीटों के आरक्षण को पचास प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान किया गया है. ओडिशा सरकार ने उप-धारा तीन को प्रतिस्थापित करने के लिए नगर अधिनियम की धारा ग्यारह में संशोधन करने का प्रस्ताव किया है, जिसमें लिखा है, "सीटें BCC के पक्ष में आरक्षित की जाएंगी, जैसा कि प्रत्येक नगरपालिका में संविधान के अनुच्छेद दो सौ तैंतालीसT के खंड छः में संदर्भित है. यह उप-धारा और बीसीसी के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों सहित ऐसी नगरपालिका की कुल सीटों की कुल संख्या के पचास प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अधीन है और ऐसी सीटों को अलग-अलग वार्डों में रोटेशन द्वारा आवंटित किया जाएगा. प्रत्येक आम चुनाव में नगरपालिका क्षेत्र." इसी तरह का प्रावधान नगर निगम अधिनियम, दो हज़ार तीन की धारा सात में भी प्रतिस्थापित किया गया है. मालूम हो कि राज्य विधानसभा का मानसून सत्र एक सितंबर से आरंभ हो चुका है. इस सेशन के बीत कोविड नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए एक सितंबर को सुबह ग्यारह बजे से सत्र का शुभारंभ किया गया. वहीं सत्र का शुरुआत से पहले दिवंगत नेताओं को श्रद्धाजंलि दी गई. मॉनसून सत्र की शुरुआत में सीएम ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पूर्वमंत्री बिजयश्री राउतराय, कार्तिक तराई , पूर्व उप-मुख्य सचेतक विवेकानन्द मेहेर, पूर्व विधायक अरुण दे, चन्द्रामा सान्त्रा , कमलाकान्त नायक, उमाकांत मिश्र और बिक्रम केशरी बर्मा सहित शहिद हुए जवान अनील एक्का एवं हवलदार सुनील कुमार नायक को श्रद्धाजंलि दी.
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लक्ष्मीपुर थाने की पुलिस गिरफ्तार नक्सली वीरेंद्र (Naxalite) के कारनामों की पड़ताल कर रही है। वहीं उसके अन्य साथी लालो दास को थानाध्यक्ष मृत्युंजय पंडित ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सांकेतिक तस्वीर।
बिहार के जमुई के लक्ष्मीपुर थानाक्षेत्र की पुलिस ने एक फरार नक्सली (Naxalite) को गिरफ्तार किया है। थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार पंडित के नेतृत्व में एसटीएफ झाझा की टीम ने गोबरदाहा निवासी नक्सली वीरेंद्र दास को मटिया बाजार से हिरासत में लिया। पुलिस गिरफ्त में आये नक्सली वीरेंद्र दास पर झाझा किऊल रेलखंड स्थित कुंदर हाल्ट पर धनबाद पटना इंटर सिटी ट्रेन पर हमला सहित कई संगीन मामले दर्ज हैं।
गौरतलब है कि 2017 में तत्कालीन लक्ष्मीपुर थानाध्यक्ष दुबे देव गुरु को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के तेतरिया धमनकुंडा जंगल मे नक्सली का जमावड़ा हो रहा है। सूचना पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशानुसार सीआरपीएफ 215 बटालियन और थाने के पुलिस बल की संयुक्त टीम द्वारा धमनकुंडा जंगल में सघन जांच शुरू किया गया। सर्च ऑपरेशन टीम जैसे ही उक्त जंगल के पास पहुंचा तो एक युवक हाथ में स्टील का डिब्बा लेकर भागता दिखा। पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने अपना नाम सुनील दास घर मोहनपुर बताया। साथ ही हाथ में लिए स्टील के डिब्बा को केन बम बताया। पूछताछ में सुनील ने पुलिस को बताया था कि केन बम को रास्ते में लगाकर पुलिस दल को नुकसान पहुंचाने की योजना थी। वहीं नक्सली सुनील (Naxalite) की तलाशी के दौरान कई और विस्फोटक सामग्री बरामद हुये थे।
पुलिस गिरफ्त में सुनील ने अपने साथियों के साथ कई घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की थी, जिसमें मटिया से गिरफ्तार साथी वीरेंद्र दास का भी नाम शामिल था। पुलिसिया पुछताछ में सुनील ने नक्सली वीरेंद्र (Naxalite) द्वारा ट्रेन पर हमला, आनंदपुर में मोबाइल के टावर में आग लगाने के साथ बरहट में जेसीबी जलाने जैसी कई अन्य घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकारी थी। तभी से पुलिस को वीरेंद्र दास की तलाश थी, लेकिन वो बार-बार चकमा देकर फरार हो जाता था, लेकिन इस बार भागने की उसकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं।
लक्ष्मीपुर थाने की पुलिस गिरफ्तार नक्सली वीरेंद्र (Naxalite) के कारनामों की पड़ताल कर रही है। वहीं उसके अन्य साथी लालो दास को थानाध्यक्ष मृत्युंजय पंडित ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं एक सप्ताह पहले फरार नक्सली पिंटू यादव को भी कोहबरवा मोड़ के समीप से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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लक्ष्मीपुर थाने की पुलिस गिरफ्तार नक्सली वीरेंद्र के कारनामों की पड़ताल कर रही है। वहीं उसके अन्य साथी लालो दास को थानाध्यक्ष मृत्युंजय पंडित ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सांकेतिक तस्वीर। बिहार के जमुई के लक्ष्मीपुर थानाक्षेत्र की पुलिस ने एक फरार नक्सली को गिरफ्तार किया है। थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार पंडित के नेतृत्व में एसटीएफ झाझा की टीम ने गोबरदाहा निवासी नक्सली वीरेंद्र दास को मटिया बाजार से हिरासत में लिया। पुलिस गिरफ्त में आये नक्सली वीरेंद्र दास पर झाझा किऊल रेलखंड स्थित कुंदर हाल्ट पर धनबाद पटना इंटर सिटी ट्रेन पर हमला सहित कई संगीन मामले दर्ज हैं। गौरतलब है कि दो हज़ार सत्रह में तत्कालीन लक्ष्मीपुर थानाध्यक्ष दुबे देव गुरु को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के तेतरिया धमनकुंडा जंगल मे नक्सली का जमावड़ा हो रहा है। सूचना पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशानुसार सीआरपीएफ दो सौ पंद्रह बटालियन और थाने के पुलिस बल की संयुक्त टीम द्वारा धमनकुंडा जंगल में सघन जांच शुरू किया गया। सर्च ऑपरेशन टीम जैसे ही उक्त जंगल के पास पहुंचा तो एक युवक हाथ में स्टील का डिब्बा लेकर भागता दिखा। पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने अपना नाम सुनील दास घर मोहनपुर बताया। साथ ही हाथ में लिए स्टील के डिब्बा को केन बम बताया। पूछताछ में सुनील ने पुलिस को बताया था कि केन बम को रास्ते में लगाकर पुलिस दल को नुकसान पहुंचाने की योजना थी। वहीं नक्सली सुनील की तलाशी के दौरान कई और विस्फोटक सामग्री बरामद हुये थे। पुलिस गिरफ्त में सुनील ने अपने साथियों के साथ कई घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की थी, जिसमें मटिया से गिरफ्तार साथी वीरेंद्र दास का भी नाम शामिल था। पुलिसिया पुछताछ में सुनील ने नक्सली वीरेंद्र द्वारा ट्रेन पर हमला, आनंदपुर में मोबाइल के टावर में आग लगाने के साथ बरहट में जेसीबी जलाने जैसी कई अन्य घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकारी थी। तभी से पुलिस को वीरेंद्र दास की तलाश थी, लेकिन वो बार-बार चकमा देकर फरार हो जाता था, लेकिन इस बार भागने की उसकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। लक्ष्मीपुर थाने की पुलिस गिरफ्तार नक्सली वीरेंद्र के कारनामों की पड़ताल कर रही है। वहीं उसके अन्य साथी लालो दास को थानाध्यक्ष मृत्युंजय पंडित ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं एक सप्ताह पहले फरार नक्सली पिंटू यादव को भी कोहबरवा मोड़ के समीप से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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Varanasi Pink Enamel: अमेरिकी व्हाइट हाउस की शोभा अब वाराणसी उत्पाद बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी पत्नी जिल बाइडन को काशी में बनने वाला पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग उपहार में देंगे। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी में हैं। वह वहां शलॉस एलमौ में होने वाले ग्रुप ऑफ सेवन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी आने वाले हैं। कारीगरों ने बताया कि, 850 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भट्टी में तापकर गुलाबी मीनकारी बनाया जाता है।
इसके रंग मेटल ऑक्साइड से बने होते हैं। गुलाबी रंग सोने से बनाया जाता है। यूपी हैंडीक्राफ्ट ने छह जून को संपर्क कर पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग भेजने के लिए कहा था। इसके बाद लखनऊ से उसका डिजाइन बनकर आया था। इसके बाद इसका निर्माण शुरू किया गया। यह 16 दिन में बन गया है।
राज्य पुरस्कार से सम्मानित रोहन विश्वकर्मा के मुताबिक, इस पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग का वजन काफी कम होता है। इसकी कीमत लाखों रुपए है। इसकी मांग देश भर के अलावा विदेशों में भी खूब है। यह उपहार पूरी तरह से हस्तनिर्मित है, क्योंकि हमें जानकारी थी कि, यह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन एवं उनकी पत्नी को प्रधानमंत्री द्वारा दिया जाना है। इसकी गुणवत्ता बेहद ख्याल रखा गया है।
यूपी हैंडीक्राफ्ट के अध्यक्ष नवनीत सहगल के माध्यम से उपहार को पीएमओ भेजा गया है। वाराणसी के गायघाट के बालीवीर की गली निवासी रमेश कुमार विश्वकर्मा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मीनाकारी कलाकार एवं बेटे रोहन, राज्य पुरस्कार प्राप्त वैभव विश्वकर्मा से विशेष ऑर्डर मिलने पर यह बनाया गया है। दोनों उपहारों को चांदी से बनाकर उस पर गुलाबी मीनकारी की सुंदर कलाकारी की गई है। कलाकारों ने पूरी उम्मीद जताई है कि, बाइडेन और उनकी पत्नी को यह उपहार बेहद पसंद आएगा और वह मोदी से इससे जुड़ी अन्य कलाकृति को भी भेजवाने की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा अन्य देशों के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को जानकारी होने पर उनके स्तर पर मांग की उम्मीद है।
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Varanasi Pink Enamel: अमेरिकी व्हाइट हाउस की शोभा अब वाराणसी उत्पाद बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी पत्नी जिल बाइडन को काशी में बनने वाला पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग उपहार में देंगे। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी में हैं। वह वहां शलॉस एलमौ में होने वाले ग्रुप ऑफ सेवन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी आने वाले हैं। कारीगरों ने बताया कि, आठ सौ पचास डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भट्टी में तापकर गुलाबी मीनकारी बनाया जाता है। इसके रंग मेटल ऑक्साइड से बने होते हैं। गुलाबी रंग सोने से बनाया जाता है। यूपी हैंडीक्राफ्ट ने छह जून को संपर्क कर पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग भेजने के लिए कहा था। इसके बाद लखनऊ से उसका डिजाइन बनकर आया था। इसके बाद इसका निर्माण शुरू किया गया। यह सोलह दिन में बन गया है। राज्य पुरस्कार से सम्मानित रोहन विश्वकर्मा के मुताबिक, इस पिकॉक ब्रोच एवं कॅफलिंग का वजन काफी कम होता है। इसकी कीमत लाखों रुपए है। इसकी मांग देश भर के अलावा विदेशों में भी खूब है। यह उपहार पूरी तरह से हस्तनिर्मित है, क्योंकि हमें जानकारी थी कि, यह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन एवं उनकी पत्नी को प्रधानमंत्री द्वारा दिया जाना है। इसकी गुणवत्ता बेहद ख्याल रखा गया है। यूपी हैंडीक्राफ्ट के अध्यक्ष नवनीत सहगल के माध्यम से उपहार को पीएमओ भेजा गया है। वाराणसी के गायघाट के बालीवीर की गली निवासी रमेश कुमार विश्वकर्मा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मीनाकारी कलाकार एवं बेटे रोहन, राज्य पुरस्कार प्राप्त वैभव विश्वकर्मा से विशेष ऑर्डर मिलने पर यह बनाया गया है। दोनों उपहारों को चांदी से बनाकर उस पर गुलाबी मीनकारी की सुंदर कलाकारी की गई है। कलाकारों ने पूरी उम्मीद जताई है कि, बाइडेन और उनकी पत्नी को यह उपहार बेहद पसंद आएगा और वह मोदी से इससे जुड़ी अन्य कलाकृति को भी भेजवाने की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा अन्य देशों के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को जानकारी होने पर उनके स्तर पर मांग की उम्मीद है।
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शिमला -हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा शहर में निजी टैक्सियों के संचालन के लिए आठ फरवरी को प्री-बिड निर्धारित की गई है। हालांकि निगम प्रबंधन ने टेंडर 25 फरवरी तक आमंत्रित किए हैं, यानी टैक्सी ऑपरेटर 25 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। इसी रोज टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शिमला में निजी टैक्सियों का संचालन आरंभ हो जाएगा। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा शहर के विभिन्न प्रतिबंधित मार्गों पर निजी टैक्सियों के संचालन के लिए हरी झंडी दी गई थी। एचआरटीसी द्वारा इन टैक्सियों के संचालन के लिए 26 रूट भी निर्धारित कर दिए गए हैं, मगर अब कुछ रूटों में बदलाव किया गया है। चूंकि अधिकतर टैक्सियों का रूट उपनगरों (क्षेत्रों) से सीटीओ तक था। ऐसे में सीटीओ में टै्रफिक बढ़ने की आशंका के मद्देनजर कुछ टैक्सियों के रूट सीटीओ के बजाय ओल्ड बस स्टैंड किए गए हैं। यह बदलाव उन रूटों पर किया गया है जहां से दो-दो टैक्सियां सीटीओ को टच कर रही थी। पथ परिवहन निगम ने नए रूट भी निर्धारित कर दिए हैं। फरवरी माह के अंत तक शहर में जनता को निजी टैक्सी सेवा उपलब्ध मिलेगी। पथ परिवहन निगम शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर साधारण व इलेक्ट्रानिक टैक्सियां चलाकर जनता को सेवा प्रदान कर रहा है। ऐसे में जल्द ही निजी टैक्सियांें का संचालन शुरू होने से जनता को बेहतर सुविधा मिलेगी। एचआरटीसी ने शहर में निजी टैक्सियों के संचालन के लिए 26 रूट निर्धारित किए हैं। इन पर 34 टैक्सियां चलेंगी।
इन क्षेत्रों में चलेगी टैक्सियां (प्रस्तावित रूट)
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शिमला -हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा शहर में निजी टैक्सियों के संचालन के लिए आठ फरवरी को प्री-बिड निर्धारित की गई है। हालांकि निगम प्रबंधन ने टेंडर पच्चीस फरवरी तक आमंत्रित किए हैं, यानी टैक्सी ऑपरेटर पच्चीस फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। इसी रोज टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शिमला में निजी टैक्सियों का संचालन आरंभ हो जाएगा। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा शहर के विभिन्न प्रतिबंधित मार्गों पर निजी टैक्सियों के संचालन के लिए हरी झंडी दी गई थी। एचआरटीसी द्वारा इन टैक्सियों के संचालन के लिए छब्बीस रूट भी निर्धारित कर दिए गए हैं, मगर अब कुछ रूटों में बदलाव किया गया है। चूंकि अधिकतर टैक्सियों का रूट उपनगरों से सीटीओ तक था। ऐसे में सीटीओ में टै्रफिक बढ़ने की आशंका के मद्देनजर कुछ टैक्सियों के रूट सीटीओ के बजाय ओल्ड बस स्टैंड किए गए हैं। यह बदलाव उन रूटों पर किया गया है जहां से दो-दो टैक्सियां सीटीओ को टच कर रही थी। पथ परिवहन निगम ने नए रूट भी निर्धारित कर दिए हैं। फरवरी माह के अंत तक शहर में जनता को निजी टैक्सी सेवा उपलब्ध मिलेगी। पथ परिवहन निगम शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर साधारण व इलेक्ट्रानिक टैक्सियां चलाकर जनता को सेवा प्रदान कर रहा है। ऐसे में जल्द ही निजी टैक्सियांें का संचालन शुरू होने से जनता को बेहतर सुविधा मिलेगी। एचआरटीसी ने शहर में निजी टैक्सियों के संचालन के लिए छब्बीस रूट निर्धारित किए हैं। इन पर चौंतीस टैक्सियां चलेंगी। इन क्षेत्रों में चलेगी टैक्सियां
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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भारदार विदेशनीति की बदलती अवधारणा
अमरिका ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव-विग्नार अपन औद्यागिक व्यापार में वृद्धि, मध्यपू के तल-भण्डारा पर प्रभुत्व सामरिक हिता की रक्षा, साम्राज्यवादी उपनिवेशवादी हिंतो में वृद्धि तथा सावियन प्रभाव क्षेत्र के नियंत्रित करने के प्रमुख उद्देश्यों में किया।
1968 में सोवियत संघ के नौ सैनिक जहाज भी इस क्षेत्र में रहने लग। यह मही है कि सोवियत संघ न हिन्द महासागर में किसी अड्ड का विस्तार नहीं किया है किन्तु उसने अपने हिता की रक्षा के लिये इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति अवश्य बढाई है साथ ही सदैव इस क्षेत्र को शान्त क्षत्र घोषित करने तथा अणुरहित क्षेत्र घोषित करने का समर्थक रहा है। अमेरिका की हठधर्मिता के कारण हिन्द महासागर में सैन्य शक्ति का निरन्तर विस्तार हो रहा है इससे इस क्षेत्र में लगभग 40 पृष्ठप्रदेशीय व तटवनीं राष्ट्रो के हितो व उनकी सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा उपस्थित हो गया है। कुछ विशेषज्ञों का तो यहा तक मत है कि तीसरे विश्वयुद्ध की ज्वालाए हिन्द महासागर की लहरों पर भड़क सकती है।
जहा तक हिन्द महासागर की इस समस्या के प्रति भारतीय नीति का प्रश्न है, स्पष्ट है कि भारत इस सैन्य - स्पर्धा के विरुद्ध है। विदेशनीति के क्षेत्र में भारत जिन सिद्धान्तों का अनुसरण करता है उसमें सैन्य स्पर्धा का विरोध सर्वोच्य प्राथमिकता रखता है। हिन्द महासागर के तटवर्ती राष्ट्रों में तो वैस भी भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जो भौगोलिक व जनसंख्या की दृष्टि से अन्य समम्न राष्ट्रों की तुलना में सर्वाधिक विशाल व सशक्त है। भारत के लिये राजनैतिक, सैन्य आर्थिक एवं औद्योगिक दृष्टियों से हिन्द महासागर की असाधारण उपादेयता है इसलिये इस क्षेत्र में महाशक्तियों की स्पर्धा के विरोध की नीति भारत ने प्रारम्भ से ही अपनाई है }
हिन्द महासागर में अमरिकी अड्ड की स्थापना पर तथा बाद में उसके विस्तार पर भारत द्वारा तीव्र प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जाती रही है।
नो सैनिक अड्डे की स्थापना के अमेरिकी निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए
कहा था कि
"हिन्द महासागर में इन सामरिक अड्डो की स्थापना से स्पष्ट यह अर्थ निकलता है कि नौसैनिक बेटा के आवागमन के कारण यह क्षेत्र तनाव ग्रस्त होगा और प्रतिता का वातावरण बनेगा, ऐसा वातावरण तटवनीय देशों के हित में विशेषतया घातक है।' 72
12 नवम्बर, 1973 को लोकसभा में अमेरिकी निर्णय पर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए भारतीय विदेशमन्त्री स्वर्गीसह ने कहा था कि
"हिन्द महासागर के संदर्भ में हमारा उद्देश्य यही है कि यह क्षेत्र शक्तियों सभी प्रकार की बाधाओं से निरापद रहे, यह महाशक्तियों की प्रतिद्वन्द्रिता का क्षेत्र न
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भारदार विदेशनीति की बदलती अवधारणा अमरिका ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव-विग्नार अपन औद्यागिक व्यापार में वृद्धि, मध्यपू के तल-भण्डारा पर प्रभुत्व सामरिक हिता की रक्षा, साम्राज्यवादी उपनिवेशवादी हिंतो में वृद्धि तथा सावियन प्रभाव क्षेत्र के नियंत्रित करने के प्रमुख उद्देश्यों में किया। एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में सोवियत संघ के नौ सैनिक जहाज भी इस क्षेत्र में रहने लग। यह मही है कि सोवियत संघ न हिन्द महासागर में किसी अड्ड का विस्तार नहीं किया है किन्तु उसने अपने हिता की रक्षा के लिये इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति अवश्य बढाई है साथ ही सदैव इस क्षेत्र को शान्त क्षत्र घोषित करने तथा अणुरहित क्षेत्र घोषित करने का समर्थक रहा है। अमेरिका की हठधर्मिता के कारण हिन्द महासागर में सैन्य शक्ति का निरन्तर विस्तार हो रहा है इससे इस क्षेत्र में लगभग चालीस पृष्ठप्रदेशीय व तटवनीं राष्ट्रो के हितो व उनकी सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा उपस्थित हो गया है। कुछ विशेषज्ञों का तो यहा तक मत है कि तीसरे विश्वयुद्ध की ज्वालाए हिन्द महासागर की लहरों पर भड़क सकती है। जहा तक हिन्द महासागर की इस समस्या के प्रति भारतीय नीति का प्रश्न है, स्पष्ट है कि भारत इस सैन्य - स्पर्धा के विरुद्ध है। विदेशनीति के क्षेत्र में भारत जिन सिद्धान्तों का अनुसरण करता है उसमें सैन्य स्पर्धा का विरोध सर्वोच्य प्राथमिकता रखता है। हिन्द महासागर के तटवर्ती राष्ट्रों में तो वैस भी भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जो भौगोलिक व जनसंख्या की दृष्टि से अन्य समम्न राष्ट्रों की तुलना में सर्वाधिक विशाल व सशक्त है। भारत के लिये राजनैतिक, सैन्य आर्थिक एवं औद्योगिक दृष्टियों से हिन्द महासागर की असाधारण उपादेयता है इसलिये इस क्षेत्र में महाशक्तियों की स्पर्धा के विरोध की नीति भारत ने प्रारम्भ से ही अपनाई है } हिन्द महासागर में अमरिकी अड्ड की स्थापना पर तथा बाद में उसके विस्तार पर भारत द्वारा तीव्र प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जाती रही है। नो सैनिक अड्डे की स्थापना के अमेरिकी निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि "हिन्द महासागर में इन सामरिक अड्डो की स्थापना से स्पष्ट यह अर्थ निकलता है कि नौसैनिक बेटा के आवागमन के कारण यह क्षेत्र तनाव ग्रस्त होगा और प्रतिता का वातावरण बनेगा, ऐसा वातावरण तटवनीय देशों के हित में विशेषतया घातक है।' बहत्तर बारह नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को लोकसभा में अमेरिकी निर्णय पर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए भारतीय विदेशमन्त्री स्वर्गीसह ने कहा था कि "हिन्द महासागर के संदर्भ में हमारा उद्देश्य यही है कि यह क्षेत्र शक्तियों सभी प्रकार की बाधाओं से निरापद रहे, यह महाशक्तियों की प्रतिद्वन्द्रिता का क्षेत्र न
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय पहली बार अपने कोरोना टीके का परीक्षण बच्चों पर कर रहा है। टीके के परीक्षण की घोषणा शनिवार को की गई। इसके लिए छह से 17 साल आयु वर्ग के 300 ऐसे लोगों की आवश्यकता होगी जो स्वेच्छा से टीका लगवाना चाहते हैं।
इनमें से 240 लोगों को कोरोना का और बाकी 60 लोगों को मेनिनजाइटिस का टीका लगाया जाएगा। ऑक्सफोर्ड टीका परीक्षण के मुख्य अनुसंधानकर्ता एंड्रयू पोलार्ड ने कहा कि ज्यादातर बच्चे कोरोना के कारण गंभीर रूप से बीमार नहीं होते हैं, लेकिन उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना जरूरी है, क्योंकि टीकाकरण से कुछ बच्चों को तो लाभ होगा ही।
दुनिया के 50 से ज्यादा देशों ने एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड के टीके को 18 साल से ज्यादा आयु के लोगों को लगाने की मंजूरी दे दी है। अन्य दवा कंपनियां भी बच्चों पर अपने टीके का परीक्षण कर रही है।
फाइजर और मॉडर्ना का परीक्षण जारीः
फाइजर के टीके फिलहाल 16 साल की उम्र से ज्यादा लोगों को लगाए जा रहे हैं, लेकिन उसने अक्तूबर 2020 से ही 12 साल तक के बच्चों पर परीक्षण शुरू कर दिया था। मॉडर्ना ने भी दिसंबर, 2020 से बच्चों पर टीके का परीक्षण शुरू कर दिया।
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय पहली बार अपने कोरोना टीके का परीक्षण बच्चों पर कर रहा है। टीके के परीक्षण की घोषणा शनिवार को की गई। इसके लिए छह से सत्रह साल आयु वर्ग के तीन सौ ऐसे लोगों की आवश्यकता होगी जो स्वेच्छा से टीका लगवाना चाहते हैं। इनमें से दो सौ चालीस लोगों को कोरोना का और बाकी साठ लोगों को मेनिनजाइटिस का टीका लगाया जाएगा। ऑक्सफोर्ड टीका परीक्षण के मुख्य अनुसंधानकर्ता एंड्रयू पोलार्ड ने कहा कि ज्यादातर बच्चे कोरोना के कारण गंभीर रूप से बीमार नहीं होते हैं, लेकिन उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना जरूरी है, क्योंकि टीकाकरण से कुछ बच्चों को तो लाभ होगा ही। दुनिया के पचास से ज्यादा देशों ने एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड के टीके को अट्ठारह साल से ज्यादा आयु के लोगों को लगाने की मंजूरी दे दी है। अन्य दवा कंपनियां भी बच्चों पर अपने टीके का परीक्षण कर रही है। फाइजर और मॉडर्ना का परीक्षण जारीः फाइजर के टीके फिलहाल सोलह साल की उम्र से ज्यादा लोगों को लगाए जा रहे हैं, लेकिन उसने अक्तूबर दो हज़ार बीस से ही बारह साल तक के बच्चों पर परीक्षण शुरू कर दिया था। मॉडर्ना ने भी दिसंबर, दो हज़ार बीस से बच्चों पर टीके का परीक्षण शुरू कर दिया।
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रिया चक्रवर्ती ने हाल ही में ये मल्टीकलर ड्रेस फोटोशूट की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की है।
फोटो में आप एक्ट्रेस बेहद किलर पोज दे रही हैं। जिसको फैंस बेहद पसंद कर रहे हैं।
रिया चक्रवर्ती की इन हॉट तस्वीरों पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे हैं।
सुशांत की मौत के बाद से रिया डिप्रेशन में चल रही थी। अब जाकर एक्ट्रेस थोड़ा नार्मल हुई हैं। वही फोटो के साथ भी एक्ट्रेस ने हैशटैग 'rhenew' कैप्शन लिखा है।
रिया चक्रवर्ती सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। उनकी फोटोज आते ही वायरल होने लगती हैं।
अभिनेत्री को आखिरी बार फिल्म चेहरे में देखा गया था। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी थे, हालांकि फिल्म फ्लॉप साबित हुई।
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रिया चक्रवर्ती ने हाल ही में ये मल्टीकलर ड्रेस फोटोशूट की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की है। फोटो में आप एक्ट्रेस बेहद किलर पोज दे रही हैं। जिसको फैंस बेहद पसंद कर रहे हैं। रिया चक्रवर्ती की इन हॉट तस्वीरों पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे हैं। सुशांत की मौत के बाद से रिया डिप्रेशन में चल रही थी। अब जाकर एक्ट्रेस थोड़ा नार्मल हुई हैं। वही फोटो के साथ भी एक्ट्रेस ने हैशटैग 'rhenew' कैप्शन लिखा है। रिया चक्रवर्ती सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। उनकी फोटोज आते ही वायरल होने लगती हैं। अभिनेत्री को आखिरी बार फिल्म चेहरे में देखा गया था। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी थे, हालांकि फिल्म फ्लॉप साबित हुई।
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दिल्ली, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि वर्षा के अनुमान सही साबित हुए तो वर्ष 2016-17 में अनाज उत्पादन बढ़ेगा और कुल मिला कर कृषि क्षेत्र की वृद्धि तेज होगी। निरंतर दो वर्ष तक सूखा पड़ने के कारण कृषि वृद्धि वित्तवर्ष 2015-16 में 1. 2 प्रतिशत रही जबकि 2014-15 में कृषि उत्पाद 0. 25 प्रतिशत घटा था।
भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसूनी वर्षा सामान्य से अधिक रहने की भविष्यवाणी की है। इससे अगले माह से धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का जोर बढ़ेगा। वैसे मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि मानूसन के आने में एक सप्ताह की देर हो सकती है।
मानसून इस वर्ष अच्छा रहने की भविष्यवाणियों को लेकर उत्साहित राधा मोहन सिंह ने कहा कि अगर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सच होती है, मुझे पूरा विश्वास है कि खाद्यान्न उत्पादन निश्चित तौर पर बढ़ेगा और कुल कृषि क्षेत्र की वृद्धि भी तेज होगी। उन्होंने कहा कि बेहतर बरसात के साथ साथ खरीफ फसलों के लिए जल्द घोषित किये जाने वाले बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से किसान प्रोत्साहित होंगे और बुवाई अभियान तेज होगा।
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दिल्ली, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि वर्षा के अनुमान सही साबित हुए तो वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में अनाज उत्पादन बढ़ेगा और कुल मिला कर कृषि क्षेत्र की वृद्धि तेज होगी। निरंतर दो वर्ष तक सूखा पड़ने के कारण कृषि वृद्धि वित्तवर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में एक. दो प्रतिशत रही जबकि दो हज़ार चौदह-पंद्रह में कृषि उत्पाद शून्य. पच्चीस प्रतिशत घटा था। भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसूनी वर्षा सामान्य से अधिक रहने की भविष्यवाणी की है। इससे अगले माह से धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का जोर बढ़ेगा। वैसे मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि मानूसन के आने में एक सप्ताह की देर हो सकती है। मानसून इस वर्ष अच्छा रहने की भविष्यवाणियों को लेकर उत्साहित राधा मोहन सिंह ने कहा कि अगर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सच होती है, मुझे पूरा विश्वास है कि खाद्यान्न उत्पादन निश्चित तौर पर बढ़ेगा और कुल कृषि क्षेत्र की वृद्धि भी तेज होगी। उन्होंने कहा कि बेहतर बरसात के साथ साथ खरीफ फसलों के लिए जल्द घोषित किये जाने वाले बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसान प्रोत्साहित होंगे और बुवाई अभियान तेज होगा।
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Agriculture Department: वर्तमान समय प्याज रोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है।
Agriculture: सहजन की खेती करने वालों को सरकार दे रही पैसा, जानिए!
Agriculture: सहजन एक ऐसी सब्जी है जिसमें सबसे ज्यादा पोषक तत्व पाये जाते है।
Income Tax Rules: अगर आपकी ऐसे होती है कमाई, तो नहीं लगेगा 1 रूपए भी इनकम टैक्स, जानिए!
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Agriculture Department: वर्तमान समय प्याज रोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। Agriculture: सहजन की खेती करने वालों को सरकार दे रही पैसा, जानिए! Agriculture: सहजन एक ऐसी सब्जी है जिसमें सबसे ज्यादा पोषक तत्व पाये जाते है। Income Tax Rules: अगर आपकी ऐसे होती है कमाई, तो नहीं लगेगा एक रूपए भी इनकम टैक्स, जानिए!
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वीडियो अब काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हम लोगों की प्रतिक्रिया को देखे तो ऐसा लगता है कि वे काफी खुश और मनोरंजन कर रहे थे। वीडियो को केवल एक दिन में 4. 6 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।
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वीडियो अब काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हम लोगों की प्रतिक्रिया को देखे तो ऐसा लगता है कि वे काफी खुश और मनोरंजन कर रहे थे। वीडियो को केवल एक दिन में चार. छः मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।
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रिमसिमरा जैसी कोई बरसे मुझ पर याद तो में मन को जनन उतार दूं ! में धुंधरे पंथ निखार दूं मैं मारा सफर गुजार दू !
सांगों को अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो...
मेरे गीतों में सागर की अनदेखी गहराई है मेरी रागों के सरगम में मौजों की तरुणाई है सुनेपन से सिहरी सिहरी बहके कोई नाव तो में मलयाई पतवार दू ! में हर क्षण फेनिल प्यार दू ! में कोई तोर उतार दूं !
सांसों की अंगुली थामे जो माए बवांरी साध तो गीतों से मांग सवार दू ! में रागों से सिंगार सकेतों की मनुहार
একম একট
उजली नजर बड़े सुई
सांसों की अंगुली थामे जो आए क्वांरो साध तो
गीतों से मांग संवार में रागों से सिंगार दूं संकेतों की मनुहार दूं !
गीतों के आखर को सुख दी है तोखी धूप ने रागों के स्वर को याकुलता दी लहरों के रूप में तट-सा मोनी सपना कोई चाहे मेरा साथ तो पीड़ा-सा उसे उभार दूं ! सौ आंसू उस पर वार दूं ! आशाओं के उपहार दूं ! सांसों को अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो...
मेरे गीतों को ढलुआने दो झुकते आकाश ने रागों को बढ़ना सिखलाया वनपायी की प्यास शूलों से बतियाते कोई आए मुझ तक पांव तो मैं बांहों को विस्तार दू ! में दो का भेद बिसार दू ! परछाई-सा आकार दूं !
मांतों की अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो...
मेरे गीतों को गदरामा मावन की सोगान ने रागों को गूजे दे दी है मेघों की बारात ने
85 / उनीहरको गुई
रिमझिम बरखा जैसी कोई बरसे मुझ पर याद तो में मन की जलन उतार दूं ! में घुंघले पंथ निखार दूं ! में सारा गफर गुजार दूं !
सांसों की अंगुली घामे जो आए क्वांरी साध तो...
मेरे गीतों में सागर की अनदेखी गहराई है मेरी रागों के सरगम में मौजों की तरुणाई है सूनेपन से शिहरो-सिहरी बहके कोई नाव तो में मलयाई पतवार दू ! मैं हर क्षण फेनिल प्यार दू ! में कोई तोर उतार दूं ! सांसों की अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो गीतों से मांग सवार दू ! में रागों से सिंगार दू सकेतों की मनुहार दू !
उजलो नजर की सुई / 8
तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है !
क्या हुआ जो रागिनी को पीर भा गई क्या हुआ जो चांदनी को नींद आ गई स्याह घाटियों में कोई बात खो गई क्या हुआ जो पांखरी पे रात रो गई कि हर घड़ी उदास है फिर भी एक आस है
कि लाल-लाल भोर की कि पंछियों के शोर की तेरे मेरे जागरण की रीत एक है ! तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है !
क्या हुआ कली जो अनमनी सी जी रही क्या हुआ जो धूप सच पराग पी रही अभी खिली अभी झुकी झुकी सो ढल रही क्या हुआ हवा रुकी रुकी-सी चल रही कि हर कदम पे आग है फिर भी एक राग है
कि सांझ के ढले ढले
कि एक नीड़ के तले तेरी मेरी मंजिलों की सीध एक है ! तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है ! आ कि तू-मैं दूरियों को साथ ले चलें आ कि तू-मैं बंधनों को बांधकर चलें क्या हुआ जो पंथ पर धुएं का आवरण
90/ उजली नजर को सुई
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रिमसिमरा जैसी कोई बरसे मुझ पर याद तो में मन को जनन उतार दूं ! में धुंधरे पंथ निखार दूं मैं मारा सफर गुजार दू ! सांगों को अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो... मेरे गीतों में सागर की अनदेखी गहराई है मेरी रागों के सरगम में मौजों की तरुणाई है सुनेपन से सिहरी सिहरी बहके कोई नाव तो में मलयाई पतवार दू ! में हर क्षण फेनिल प्यार दू ! में कोई तोर उतार दूं ! सांसों की अंगुली थामे जो माए बवांरी साध तो गीतों से मांग सवार दू ! में रागों से सिंगार सकेतों की मनुहार একম একট उजली नजर बड़े सुई सांसों की अंगुली थामे जो आए क्वांरो साध तो गीतों से मांग संवार में रागों से सिंगार दूं संकेतों की मनुहार दूं ! गीतों के आखर को सुख दी है तोखी धूप ने रागों के स्वर को याकुलता दी लहरों के रूप में तट-सा मोनी सपना कोई चाहे मेरा साथ तो पीड़ा-सा उसे उभार दूं ! सौ आंसू उस पर वार दूं ! आशाओं के उपहार दूं ! सांसों को अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो... मेरे गीतों को ढलुआने दो झुकते आकाश ने रागों को बढ़ना सिखलाया वनपायी की प्यास शूलों से बतियाते कोई आए मुझ तक पांव तो मैं बांहों को विस्तार दू ! में दो का भेद बिसार दू ! परछाई-सा आकार दूं ! मांतों की अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो... मेरे गीतों को गदरामा मावन की सोगान ने रागों को गूजे दे दी है मेघों की बारात ने पचासी / उनीहरको गुई रिमझिम बरखा जैसी कोई बरसे मुझ पर याद तो में मन की जलन उतार दूं ! में घुंघले पंथ निखार दूं ! में सारा गफर गुजार दूं ! सांसों की अंगुली घामे जो आए क्वांरी साध तो... मेरे गीतों में सागर की अनदेखी गहराई है मेरी रागों के सरगम में मौजों की तरुणाई है सूनेपन से शिहरो-सिहरी बहके कोई नाव तो में मलयाई पतवार दू ! मैं हर क्षण फेनिल प्यार दू ! में कोई तोर उतार दूं ! सांसों की अंगुली थामे जो आए क्वांरी साध तो गीतों से मांग सवार दू ! में रागों से सिंगार दू सकेतों की मनुहार दू ! उजलो नजर की सुई / आठ तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है ! क्या हुआ जो रागिनी को पीर भा गई क्या हुआ जो चांदनी को नींद आ गई स्याह घाटियों में कोई बात खो गई क्या हुआ जो पांखरी पे रात रो गई कि हर घड़ी उदास है फिर भी एक आस है कि लाल-लाल भोर की कि पंछियों के शोर की तेरे मेरे जागरण की रीत एक है ! तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है ! क्या हुआ कली जो अनमनी सी जी रही क्या हुआ जो धूप सच पराग पी रही अभी खिली अभी झुकी झुकी सो ढल रही क्या हुआ हवा रुकी रुकी-सी चल रही कि हर कदम पे आग है फिर भी एक राग है कि सांझ के ढले ढले कि एक नीड़ के तले तेरी मेरी मंजिलों की सीध एक है ! तेरी मेरी जिंदगी का गीत एक है ! आ कि तू-मैं दूरियों को साथ ले चलें आ कि तू-मैं बंधनों को बांधकर चलें क्या हुआ जो पंथ पर धुएं का आवरण नब्बे/ उजली नजर को सुई
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राम-भक्त छिनकू मुसलमानी रियासत बहावलपुर (पंजाब) के रहनेवाले छोटे-से दूकानदार थे । अपने सत्य व्यवहार के लिये प्रसिद्ध छिनकू की दुकान पवित्र वी का एकमात्र केंद्र थी । बहु शाम को केवल दो-तीन घंटे के लिये ही खुलती थी। शेष समय छिनकू राम नाम जपने में ही व्यतीत करते थे ।
एक दिन नवाब साहब का मुँहलगा मुसाहिब सबेरे ही श्री लेने आ पहुँचा, और निकू से दूकान खोलने को कहा । भक्त ने कहा--- "यह समय राम-राजन करने का है, शाम को ले
तामसी मियाँ अकड़ गए। राम को गाली देकर बकवास करने लगे। भगत ने डाँटा और कहा--"अगर कोई तुम्हें और तुम्हारे मुहम्मद साहब को गाली दे, तो कैसा लगे ?"
सुनते ही मुसाहिबजी गरम हो गए, और तुरंत दौड़े हुए पुलिस में गए। पुलिस भगतजी को पकड़ ले गई। लोगों ने समझाया कि साफ़ मुकर जाओ, छोड़ दिए जाओगे, परंतु भक्त छिनकू भला इस रास्ते क्यों चलते। कचहरी में स्पष्ट कह दिया- "मैंने पैगंबर को गाली देने की बात कही थी ।" क़ाजी ने 'संगसार' अर्थात् पत्थर मार-मारकर जान लेने की कठोर सज़ा सुना दी ।
राम का भक्त
अगले दिन भक्त को मैदान में खड़ा किया गया। जो मियाँ उधर से गुज़रता, वह उन्हें पत्थर मारता । चोट लगते ही छिनकू ऊँचे स्वर से कहते 'राम' । पत्थरों ने सिर, छाती, आँख, सारा शरीर घायल कर दिया । रक्त बहने लगा, फिर भी छिनकू बोले जा रहे थे- 'राम-राम' ।
शाम को एक मुसलमान मित्र से उनकी दशा न देखी गई, और उसने तलवार से उनका अंत कर देने के लिये कहा । भक्त ने कहा - "नहीं, प्यारे मित्र ! राजा की आज्ञा सबसे पहले हैं । उसी के अनुसार मुझे मरना चाहिए । मुझे तो कोई पीड़ा नहीं हो रही है । पीड़ा तो शरीर को हो रही है, जो आज नहीं, तो कल नष्ट होगा ही, फिर चिंता क्या ?"
किंतु मित्र न माना । उसने तलवार से सिर काट ही डाला । कहते हैं, कटे हुए सिर से भी देर तक 'राम-राम' की आवाज निकलती रही-निकलती रही ।
धार का नया मोड़
राष्ट्र-नायक शिवाजी उन दिनों दक्षिण भारत की बिखरी शक्तियों का संग्रह करके नए महाराष्ट्र का संगठन कर रहे थे । कोकण के कोने कोने से वीर नवयुवकों की टोलियाँ उनकी बानर सेना में भरती हो रही थीं। महावली सेनापति हनुगान् का आदर्श सामने रखकर वानर-नीति से युद्ध करना ही उस सेना का लक्ष्य था । जिस युद्ध - प्रथा को आज 'गोरिल्ला-बारफेयर' कहा जाता है, उसके अविष्कर्ता आर्य-नेता श्रीरामचंद्र के फ़ील्ड मार्शल जनरल हनुमान् थे। कपटी और अनैतिक शत्रु के विरुद्ध लड़ने के लिये उन्होंने आकस्मिक आक्रमण और पलायन, छद्म युद्ध आदि की पद्धति का आविष्कार किया था। उनकी इस वानर-पद्धति के कारण ही श्रीराम की सेना वानर सेना कहलाने लगी थी ।
हाँ, तो इस सेना के नायकत्व के लिये राष्ट्र-नायक शिवाजी दक्ष योद्धाओं की खोज में घर-घर घूमा करते थे । जहाँ भी उन्हें किसी स्वदेशाभिमानी योद्धा का पता लगता, वह तुरंत उसके पास जा पहुँचते, और उसे महाराष्ट्र के निर्माणहेतु, देश के उद्धार के हेतु, राष्ट्रीय सेना में सम्मिलित होने के लिये तैयार कर लेते थे। उनकी वाणी में इतना जोश होता, उनके शब्दों में ऐसा जादुई प्रभाव होता, और उनके
बार का नया मोड़
तेजस्वी मुख-मंडल पर निःस्वार्थ भावना की वह दीप्ति होती कि उससे प्रभावित होकर कोई भी स्वाभिमानी भारतीय उनसे इनकार न कर सकता था ।
इसी प्रकार के प्रयाण में शिवाजी ने सुना कि सतारा के देहातों का निवासी एक बीर युवक बजाजी निवालकर जीविका की खोज में सैकड़ों साथियों सहित बीजापुर की सेना में भर्ती होने जा रहा है। राष्ट्र-नायक इस समाचार से वेचैन हो उठे। पैसे के लिये स्वाभिमानी युवकों को अपनी आत्मा बेचना पड़े, यह उन्हें सहन नहीं हुआ। वह तुरंत सतारा गए, और बजाजी के पिता से मिले । वहाँ उन्हें मालूम हुआ, बजाजी बीजापुर चले गए हैं, और लगभग एक वर्ष से वहाँ नौकर है ।
बीजापुर जाकर बजाजी से मिलना सुगम न था । शत्रु के स्कंवावार में घुसकर उसके एक विशिष्ट सेना-नायक से भेंट करना और भी कठिन था । किंतु "कार्य वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्", का जीवनादर्श लेकर चलनेवाले महावीर शिवाजी अपने उद्देश्य से विमुख न हुए। अपने विश्वस्त साथी नेताजी पालकर को बीजापुर भेजकर बजाजी से भेंट करने के लिये उन्होंने आज्ञा दी । नेताजी पालकर महाराष्ट्र के निर्माण में शिवाजी के दाहने हाथ थे, और उनके हृदय में भी बीजापुर के अत्याचारी शासन को उखाड़ फेकने तथा जनता का राज्य स्थापित करने की प्रबल भावना उसी दिन से जाग्रत हो चुकी थी, जिस दिन १८ वर्ष की आयु में उन्हें अपनी बहन की ससुराल - यात्रा के समय बीजापुर सेना की टुकड़ी से चौक गाँव के
निकट एकाकी युद्ध करना पड़ा था, तथा उनकी बहन डोलेसमेत मुसलमान सैनिकों द्वारा अपहृत कर ली गई थी। नए महाराष्ट्र के निर्माण में शिवाजी की सहायता करना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गया था। इसीलिये नेताजी बजाजीजैसे वीर पुरुष को शिवाजी की सेवा में ले आने के लिये बड़े उत्साह से बीजापुर के लिये रवाना हुए।
मराठे घसियारे के वेप में जब नेताजी बीजापुर पहुँचे, तो प्रातःकाल हो रहा था। बहुत से मुसलमान सिपाही धोड़ों के लिये वास लेने बाज़ार आ रहे थे। उनके साथ आदिलशाही सेना की मराठा-टुकड़ियों के कुछ हिंदू-सिपाही भी थे । वातचीत के सिलसिले में नेताजी को पता चला कि किसी स्त्री के चक्कर में पड़कर बजाजी निंबालकर ने धर्म परिवर्तन कर दिया है, और वह अब मुसलमान-सेनानायक बनाकर सतारा भेज दिए गए और वहाँ के किले के किलेदार हैं ।
नेताजी निराश होकर लोहगढ़ लौटे। रास्ते में अकस्मात् 'पार' की घाटी में उन्हें बाजी शामराज के मुत्सद्दी अलीजान ने घेर लिया और अनेकों मुसलमानों की सहायता से बंदी बनाकर सतारा के किले में भेज दिया। बाजी शामराज बीजापुर का प्रतिनिधि था, और चंद्रराव मोरे जावली के राजा के पास रहकर उसे बीजापुर के प्रति बफादार बनाए रहना उसकी वृत्ति थी । नेताजी ने बाजी शामराव के उस षड्यंत्र को, जिसके द्वारा उसने शिवाजी की हत्या करने की चेष्टा की थी, अकस्मात् पहुँचकर विफल कर दिया था, और बाजी शामराव को अपने
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राम-भक्त छिनकू मुसलमानी रियासत बहावलपुर के रहनेवाले छोटे-से दूकानदार थे । अपने सत्य व्यवहार के लिये प्रसिद्ध छिनकू की दुकान पवित्र वी का एकमात्र केंद्र थी । बहु शाम को केवल दो-तीन घंटे के लिये ही खुलती थी। शेष समय छिनकू राम नाम जपने में ही व्यतीत करते थे । एक दिन नवाब साहब का मुँहलगा मुसाहिब सबेरे ही श्री लेने आ पहुँचा, और निकू से दूकान खोलने को कहा । भक्त ने कहा--- "यह समय राम-राजन करने का है, शाम को ले तामसी मियाँ अकड़ गए। राम को गाली देकर बकवास करने लगे। भगत ने डाँटा और कहा--"अगर कोई तुम्हें और तुम्हारे मुहम्मद साहब को गाली दे, तो कैसा लगे ?" सुनते ही मुसाहिबजी गरम हो गए, और तुरंत दौड़े हुए पुलिस में गए। पुलिस भगतजी को पकड़ ले गई। लोगों ने समझाया कि साफ़ मुकर जाओ, छोड़ दिए जाओगे, परंतु भक्त छिनकू भला इस रास्ते क्यों चलते। कचहरी में स्पष्ट कह दिया- "मैंने पैगंबर को गाली देने की बात कही थी ।" क़ाजी ने 'संगसार' अर्थात् पत्थर मार-मारकर जान लेने की कठोर सज़ा सुना दी । राम का भक्त अगले दिन भक्त को मैदान में खड़ा किया गया। जो मियाँ उधर से गुज़रता, वह उन्हें पत्थर मारता । चोट लगते ही छिनकू ऊँचे स्वर से कहते 'राम' । पत्थरों ने सिर, छाती, आँख, सारा शरीर घायल कर दिया । रक्त बहने लगा, फिर भी छिनकू बोले जा रहे थे- 'राम-राम' । शाम को एक मुसलमान मित्र से उनकी दशा न देखी गई, और उसने तलवार से उनका अंत कर देने के लिये कहा । भक्त ने कहा - "नहीं, प्यारे मित्र ! राजा की आज्ञा सबसे पहले हैं । उसी के अनुसार मुझे मरना चाहिए । मुझे तो कोई पीड़ा नहीं हो रही है । पीड़ा तो शरीर को हो रही है, जो आज नहीं, तो कल नष्ट होगा ही, फिर चिंता क्या ?" किंतु मित्र न माना । उसने तलवार से सिर काट ही डाला । कहते हैं, कटे हुए सिर से भी देर तक 'राम-राम' की आवाज निकलती रही-निकलती रही । धार का नया मोड़ राष्ट्र-नायक शिवाजी उन दिनों दक्षिण भारत की बिखरी शक्तियों का संग्रह करके नए महाराष्ट्र का संगठन कर रहे थे । कोकण के कोने कोने से वीर नवयुवकों की टोलियाँ उनकी बानर सेना में भरती हो रही थीं। महावली सेनापति हनुगान् का आदर्श सामने रखकर वानर-नीति से युद्ध करना ही उस सेना का लक्ष्य था । जिस युद्ध - प्रथा को आज 'गोरिल्ला-बारफेयर' कहा जाता है, उसके अविष्कर्ता आर्य-नेता श्रीरामचंद्र के फ़ील्ड मार्शल जनरल हनुमान् थे। कपटी और अनैतिक शत्रु के विरुद्ध लड़ने के लिये उन्होंने आकस्मिक आक्रमण और पलायन, छद्म युद्ध आदि की पद्धति का आविष्कार किया था। उनकी इस वानर-पद्धति के कारण ही श्रीराम की सेना वानर सेना कहलाने लगी थी । हाँ, तो इस सेना के नायकत्व के लिये राष्ट्र-नायक शिवाजी दक्ष योद्धाओं की खोज में घर-घर घूमा करते थे । जहाँ भी उन्हें किसी स्वदेशाभिमानी योद्धा का पता लगता, वह तुरंत उसके पास जा पहुँचते, और उसे महाराष्ट्र के निर्माणहेतु, देश के उद्धार के हेतु, राष्ट्रीय सेना में सम्मिलित होने के लिये तैयार कर लेते थे। उनकी वाणी में इतना जोश होता, उनके शब्दों में ऐसा जादुई प्रभाव होता, और उनके बार का नया मोड़ तेजस्वी मुख-मंडल पर निःस्वार्थ भावना की वह दीप्ति होती कि उससे प्रभावित होकर कोई भी स्वाभिमानी भारतीय उनसे इनकार न कर सकता था । इसी प्रकार के प्रयाण में शिवाजी ने सुना कि सतारा के देहातों का निवासी एक बीर युवक बजाजी निवालकर जीविका की खोज में सैकड़ों साथियों सहित बीजापुर की सेना में भर्ती होने जा रहा है। राष्ट्र-नायक इस समाचार से वेचैन हो उठे। पैसे के लिये स्वाभिमानी युवकों को अपनी आत्मा बेचना पड़े, यह उन्हें सहन नहीं हुआ। वह तुरंत सतारा गए, और बजाजी के पिता से मिले । वहाँ उन्हें मालूम हुआ, बजाजी बीजापुर चले गए हैं, और लगभग एक वर्ष से वहाँ नौकर है । बीजापुर जाकर बजाजी से मिलना सुगम न था । शत्रु के स्कंवावार में घुसकर उसके एक विशिष्ट सेना-नायक से भेंट करना और भी कठिन था । किंतु "कार्य वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्", का जीवनादर्श लेकर चलनेवाले महावीर शिवाजी अपने उद्देश्य से विमुख न हुए। अपने विश्वस्त साथी नेताजी पालकर को बीजापुर भेजकर बजाजी से भेंट करने के लिये उन्होंने आज्ञा दी । नेताजी पालकर महाराष्ट्र के निर्माण में शिवाजी के दाहने हाथ थे, और उनके हृदय में भी बीजापुर के अत्याचारी शासन को उखाड़ फेकने तथा जनता का राज्य स्थापित करने की प्रबल भावना उसी दिन से जाग्रत हो चुकी थी, जिस दिन अट्ठारह वर्ष की आयु में उन्हें अपनी बहन की ससुराल - यात्रा के समय बीजापुर सेना की टुकड़ी से चौक गाँव के निकट एकाकी युद्ध करना पड़ा था, तथा उनकी बहन डोलेसमेत मुसलमान सैनिकों द्वारा अपहृत कर ली गई थी। नए महाराष्ट्र के निर्माण में शिवाजी की सहायता करना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गया था। इसीलिये नेताजी बजाजीजैसे वीर पुरुष को शिवाजी की सेवा में ले आने के लिये बड़े उत्साह से बीजापुर के लिये रवाना हुए। मराठे घसियारे के वेप में जब नेताजी बीजापुर पहुँचे, तो प्रातःकाल हो रहा था। बहुत से मुसलमान सिपाही धोड़ों के लिये वास लेने बाज़ार आ रहे थे। उनके साथ आदिलशाही सेना की मराठा-टुकड़ियों के कुछ हिंदू-सिपाही भी थे । वातचीत के सिलसिले में नेताजी को पता चला कि किसी स्त्री के चक्कर में पड़कर बजाजी निंबालकर ने धर्म परिवर्तन कर दिया है, और वह अब मुसलमान-सेनानायक बनाकर सतारा भेज दिए गए और वहाँ के किले के किलेदार हैं । नेताजी निराश होकर लोहगढ़ लौटे। रास्ते में अकस्मात् 'पार' की घाटी में उन्हें बाजी शामराज के मुत्सद्दी अलीजान ने घेर लिया और अनेकों मुसलमानों की सहायता से बंदी बनाकर सतारा के किले में भेज दिया। बाजी शामराज बीजापुर का प्रतिनिधि था, और चंद्रराव मोरे जावली के राजा के पास रहकर उसे बीजापुर के प्रति बफादार बनाए रहना उसकी वृत्ति थी । नेताजी ने बाजी शामराव के उस षड्यंत्र को, जिसके द्वारा उसने शिवाजी की हत्या करने की चेष्टा की थी, अकस्मात् पहुँचकर विफल कर दिया था, और बाजी शामराव को अपने
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सीबीएसई के परिणाम इस बार काफी चौकाने वाले रहे। जहां एक तरफ पूरे देश में टॉप करने वाली मेघना श्रीवास्तव ने 499 अंक लाकर इतिहास रच दिया। हर तरफ मेघना के कामयाबी की चर्चा हो रही है। वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़कर बस ड्राइवर के बेटे ने दिल्ली में टॉप करके इतिहास रचा दिया है।
सीबीएसई के परिणाम इस बार काफी चौकाने वाले रहे। जहां एक तरफ पूरे देश में टॉप करने वाली मेघना श्रीवास्तव ने 499 अंक लाकर इतिहास रच दिया। हर तरफ मेघना के कामयाबी की चर्चा हो रही है। वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़कर बस ड्राइवर के बेटे ने दिल्ली में टॉप करके इतिहास रचा दिया है।
दिल्ली ट्रांसपोर्ट (डीटीसी) में बस चलाने वाले के बेटे प्रिंस कुमार ने 97 प्रतिशत अंक पाए है। 97 प्रतिशत अंक पाकर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 12वीं क्लास की परीक्षा में साइंस फैक्लटी में टॉप किया है। प्रिंस की इस कामयाबी पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उसकी कामयाबी के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह उनके लिए बहुत गर्व का मौका है।
इसके अलावा चित्रा कौशिक ने 95.6% अंक हासिल ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम में करके टॉप किया है। इसके अलावा प्राची प्रकाश ने 96.2% नंबर हासिल करके कॉमर्स स्ट्रीम में टॉप किया है। इस बारे में मनीष सिसौदिया ने एक और ट्वीट किया।
उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कॉमर्स फैक्लटी में पहला स्थान पर आने वाली प्राची प्रकाश को भी बधाई दी। प्राची के पिता एक निजी कम्पनी में छोटी नौकरी करके अपना परिवार चलाते हैं। बेटी की कामयाबी पर जहां पर परिवार को गर्व है तो वहीं सरकार ने भी पूरे परिवार को इस कामयाबी की बधाई दी है। प्राची ने इकॉनोमिक्स में 100/100, गणित में 99/100 अंक लाते हुए 96.2% हासिल किए।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों ने कमाल कर दिया है। इस बार अच्छे अंकों के साथ पास होकर टॉप किया है। 12वीं कक्षा में आर्ट्स स्ट्रीम में चित्रा कौशिक ने टॉप किया है। वह एक पुलिसकर्मी की बेटी हैं। वहीं चित्रा ने 95.6 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं। उन्हें हिस्ट्री में पूरे 100 मार्क्स मिले हैं और सामाजिक विज्ञान में 100 में 97 मार्क्स मिले हैं। मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर प्राची को भी बधाई दी है तथा उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी है।
दिल्ली के बेहतर परिणाम आने पर उप मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि इस बार दिल्ली के स्कूलों में जो कुछ भी हुआ है वह पिछले 112 सालों में नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इस बार 168 स्कूलों का परिणाम शत प्रतिशत रहा है। यही नहीं 638 स्कूलों का परिणाम 90 प्रतिशत रहा है जो कि अपने आप में एक इतिहास है। उन्होंने कहा कि इस परिणाम ये साबित होता है कि दिल्ली में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो रहा है।
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सीबीएसई के परिणाम इस बार काफी चौकाने वाले रहे। जहां एक तरफ पूरे देश में टॉप करने वाली मेघना श्रीवास्तव ने चार सौ निन्यानवे अंक लाकर इतिहास रच दिया। हर तरफ मेघना के कामयाबी की चर्चा हो रही है। वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़कर बस ड्राइवर के बेटे ने दिल्ली में टॉप करके इतिहास रचा दिया है। सीबीएसई के परिणाम इस बार काफी चौकाने वाले रहे। जहां एक तरफ पूरे देश में टॉप करने वाली मेघना श्रीवास्तव ने चार सौ निन्यानवे अंक लाकर इतिहास रच दिया। हर तरफ मेघना के कामयाबी की चर्चा हो रही है। वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़कर बस ड्राइवर के बेटे ने दिल्ली में टॉप करके इतिहास रचा दिया है। दिल्ली ट्रांसपोर्ट में बस चलाने वाले के बेटे प्रिंस कुमार ने सत्तानवे प्रतिशत अंक पाए है। सत्तानवे प्रतिशत अंक पाकर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बारहवीं क्लास की परीक्षा में साइंस फैक्लटी में टॉप किया है। प्रिंस की इस कामयाबी पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उसकी कामयाबी के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह उनके लिए बहुत गर्व का मौका है। इसके अलावा चित्रा कौशिक ने पचानवे.छः% अंक हासिल ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम में करके टॉप किया है। इसके अलावा प्राची प्रकाश ने छियानवे.दो% नंबर हासिल करके कॉमर्स स्ट्रीम में टॉप किया है। इस बारे में मनीष सिसौदिया ने एक और ट्वीट किया। उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कॉमर्स फैक्लटी में पहला स्थान पर आने वाली प्राची प्रकाश को भी बधाई दी। प्राची के पिता एक निजी कम्पनी में छोटी नौकरी करके अपना परिवार चलाते हैं। बेटी की कामयाबी पर जहां पर परिवार को गर्व है तो वहीं सरकार ने भी पूरे परिवार को इस कामयाबी की बधाई दी है। प्राची ने इकॉनोमिक्स में एक सौ/एक सौ, गणित में निन्यानवे/एक सौ अंक लाते हुए छियानवे.दो% हासिल किए। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों ने कमाल कर दिया है। इस बार अच्छे अंकों के साथ पास होकर टॉप किया है। बारहवीं कक्षा में आर्ट्स स्ट्रीम में चित्रा कौशिक ने टॉप किया है। वह एक पुलिसकर्मी की बेटी हैं। वहीं चित्रा ने पचानवे.छः प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं। उन्हें हिस्ट्री में पूरे एक सौ मार्क्स मिले हैं और सामाजिक विज्ञान में एक सौ में सत्तानवे मार्क्स मिले हैं। मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर प्राची को भी बधाई दी है तथा उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी है। दिल्ली के बेहतर परिणाम आने पर उप मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि इस बार दिल्ली के स्कूलों में जो कुछ भी हुआ है वह पिछले एक सौ बारह सालों में नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इस बार एक सौ अड़सठ स्कूलों का परिणाम शत प्रतिशत रहा है। यही नहीं छः सौ अड़तीस स्कूलों का परिणाम नब्बे प्रतिशत रहा है जो कि अपने आप में एक इतिहास है। उन्होंने कहा कि इस परिणाम ये साबित होता है कि दिल्ली में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो रहा है।
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मुंबई पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा अब एक बार फिर शानदार अंदाज में दिखीं तो देखने वाले दंग रह गए. स्टाइलिश पैंट सूट मे बॉस लेडी अवतार लोगों को खूब रास आ रहा है. प्रियंका चोपड़ा का अंदाज और भी जबरदस्त लग रहा है.
पिछले कुछ सालों में प्रियंका ने खुद के लुक्स के साथ काफी एक्सपेरीमेंट किया है. भारत आने के बाद ये हसीना अपने उसी अंदाज से हर किसी को इम्प्रेस करती दिख रही हैं.
बता दें कि प्रियंका चोपड़ा ने इंडिगो कलर की आउटफिट कैरी की है. प्रियंका चोपड़ा ने कोट-पैंट और ब्रालेट आउटफिट पहनी है. इसके साथ ही उन्होंने अपने बालों को खुला रखा है.
प्रियंका चोपड़ा की ये आउटफिट Ronny Kobo की वेबसाईट पर उपलब्ध है. इस आउटफिट की कीमत 1174 अमेरिकी डॉलर है. भारतीय करेंसी में बात करें तो इसकी कीमत 96 हजार 208 रुपए है.
V नेकलाइन वाली इस आउटफिट में प्रियंका चोपड़ा का ग्लैमरस अंदाज देखने को मिल रहा है. बता दें कि प्रियंका चोपड़ा अपने हेयर केयर ब्रांड को प्रमोट करने आई थीं.
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मुंबई पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा अब एक बार फिर शानदार अंदाज में दिखीं तो देखने वाले दंग रह गए. स्टाइलिश पैंट सूट मे बॉस लेडी अवतार लोगों को खूब रास आ रहा है. प्रियंका चोपड़ा का अंदाज और भी जबरदस्त लग रहा है. पिछले कुछ सालों में प्रियंका ने खुद के लुक्स के साथ काफी एक्सपेरीमेंट किया है. भारत आने के बाद ये हसीना अपने उसी अंदाज से हर किसी को इम्प्रेस करती दिख रही हैं. बता दें कि प्रियंका चोपड़ा ने इंडिगो कलर की आउटफिट कैरी की है. प्रियंका चोपड़ा ने कोट-पैंट और ब्रालेट आउटफिट पहनी है. इसके साथ ही उन्होंने अपने बालों को खुला रखा है. प्रियंका चोपड़ा की ये आउटफिट Ronny Kobo की वेबसाईट पर उपलब्ध है. इस आउटफिट की कीमत एक हज़ार एक सौ चौहत्तर अमेरिकी डॉलर है. भारतीय करेंसी में बात करें तो इसकी कीमत छियानवे हजार दो सौ आठ रुपयापए है. V नेकलाइन वाली इस आउटफिट में प्रियंका चोपड़ा का ग्लैमरस अंदाज देखने को मिल रहा है. बता दें कि प्रियंका चोपड़ा अपने हेयर केयर ब्रांड को प्रमोट करने आई थीं.
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बलदेव पीजी कॉलेज बड़ागांव में चार दिसंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव की तैयारी रविवार को पूरी कर ली गई। इसमें फ्म्9ख् स्टूडेंट्स विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ रहे क्7 कैंडीडेट्स के भाग्य का फैसला करेंगे। निर्वाचन अधिकारी डॉ। बब्बन सिंह ने बताया कि कॉलेज में क्9म्ख् ब्वॉयज और क्7फ्0 गर्ल्स स्टूडेंट्स हैं। वोटिंग के लिए टोटल क्0 बूथ बनाए गए हैं। चुनाव में अध्यक्ष पद के पांच, उपाध्यक्ष के चार, महामंत्री और पुस्तकालय मंत्री के दो-दो कैंडीडेट्स मैदान में हैं। वोटिंग सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक होगी। दोपहर बाद तीन बजे काउंटिंग होगी। इसके बाद रिजल्ट की घोषणा और विनर्स कैंडीडेट्स को शपथ दिलाई जाएगी। मतदान के लिए स्टूडेंट्स को आई कार्ड व फीस रसीद की ओरिजनल कॉपी अनिवार्य रूप से लाना होगा। ये डॉक्यूमेंट साथ न लाने वाले वोट नहीं दे पाएंगे।
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बलदेव पीजी कॉलेज बड़ागांव में चार दिसंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव की तैयारी रविवार को पूरी कर ली गई। इसमें फ्म्नौख् स्टूडेंट्स विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ रहे क्सात कैंडीडेट्स के भाग्य का फैसला करेंगे। निर्वाचन अधिकारी डॉ। बब्बन सिंह ने बताया कि कॉलेज में क्नौम्ख् ब्वॉयज और क्सातफ्शून्य गर्ल्स स्टूडेंट्स हैं। वोटिंग के लिए टोटल क्शून्य बूथ बनाए गए हैं। चुनाव में अध्यक्ष पद के पांच, उपाध्यक्ष के चार, महामंत्री और पुस्तकालय मंत्री के दो-दो कैंडीडेट्स मैदान में हैं। वोटिंग सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक होगी। दोपहर बाद तीन बजे काउंटिंग होगी। इसके बाद रिजल्ट की घोषणा और विनर्स कैंडीडेट्स को शपथ दिलाई जाएगी। मतदान के लिए स्टूडेंट्स को आई कार्ड व फीस रसीद की ओरिजनल कॉपी अनिवार्य रूप से लाना होगा। ये डॉक्यूमेंट साथ न लाने वाले वोट नहीं दे पाएंगे।
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Budget 2023 : बजट को लेकरकेंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने अगले 25 साल के विकास का खाका खींचा है।
केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023-24 पेश किया। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट है। वहीं बजट को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि यह विकासपरक बजट है। इस बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले 25 साल के विकास का खाका खींचने का कार्य किया है। आयकर स्लैब में बदलाव बड़ा कदम है।
बालियान ने कहा कि किसानों, नौजवानों और महिलाओं के हितों का ध्यान रखा गया है। सबको घर देने के लिए 66 प्रतिशत बजट बढ़ाकर बड़ा कदम उठाया गया है। रेलवे रक्षा को लेकर सरकार गंभीर है, इस बार सबसे बड़ा आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लोक कल्याणकारी बजट पेश किया गया है। गांव, गरीब, किसान व्यापारी सभी की आवश्यकताओं को ध्यान मे रखते हुए विकास को चरितार्थ करता हुआ यह वार्षिक बजट निश्चित रूप से देश के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा।
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि अमृत काल में आने वाले 25 वर्ष को ध्यान में रखते हुए बजट मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य के आत्मनिर्भर भारत की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने एवं मध्यम वर्ग सहित समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4. 0 को अगले तीन वर्षों में लाखों युवाओं को कौशल संपन्न बनाने के लिए शुरुआत की जाएगी।
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Budget दो हज़ार तेईस : बजट को लेकरकेंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने अगले पच्चीस साल के विकास का खाका खींचा है। केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को केंद्रीय बजट दो हज़ार तेईस-चौबीस पेश किया। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट है। वहीं बजट को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि यह विकासपरक बजट है। इस बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले पच्चीस साल के विकास का खाका खींचने का कार्य किया है। आयकर स्लैब में बदलाव बड़ा कदम है। बालियान ने कहा कि किसानों, नौजवानों और महिलाओं के हितों का ध्यान रखा गया है। सबको घर देने के लिए छयासठ प्रतिशत बजट बढ़ाकर बड़ा कदम उठाया गया है। रेलवे रक्षा को लेकर सरकार गंभीर है, इस बार सबसे बड़ा आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लोक कल्याणकारी बजट पेश किया गया है। गांव, गरीब, किसान व्यापारी सभी की आवश्यकताओं को ध्यान मे रखते हुए विकास को चरितार्थ करता हुआ यह वार्षिक बजट निश्चित रूप से देश के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि अमृत काल में आने वाले पच्चीस वर्ष को ध्यान में रखते हुए बजट मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य के आत्मनिर्भर भारत की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने एवं मध्यम वर्ग सहित समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना चार. शून्य को अगले तीन वर्षों में लाखों युवाओं को कौशल संपन्न बनाने के लिए शुरुआत की जाएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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फ्रांस की ऑटो कंपनी रेनो (Renault) और जापान की कार कंपनी निसान (Nissan) ने इंडिया में बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है. खास बात यह है कि इसके लिए दोनों कंपनियों ने अगले 15 साल में देश में 60 करोड़ डॉलर (5,300 करोड़ रुपए) के निवेश का ऐलान किया है. इस बारे में निसान (Nissan) के ग्लोबल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) और अलायंस बोर्ड के सदस्य अश्विनी गुप्ता ने बाताया कि नए दौर के निवेश के साथ दोनों कंपनियां 6 नए मॉडल उतारेंगी. इनमें 4 कारे (फ्यूल) और 2 इलेक्ट्रिक गाडियां शामिल होंगी.
वर्तमान में टियागो ईवी भारत की एंट्री लेवल इलेक्ट्रिक कार है. जल्द ही इसका मुकाबला बड़ी कारों से होगा, लेकिन यह सिट्रोएन ईसी3 जितनी फीचर लोडेड नहीं होंगी. रेनो और निसान (Nissan) की कॉम्पेक्ट ईवी का मुकाबला भी इन मॉडल्स से ही रहेगा. अनुमान है कि इनकी रेंज 300 किलोमीटर के आसपास हो सकती है और इनकी शुरूआती कीमत 10 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) रखी जा सकती है.
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फ्रांस की ऑटो कंपनी रेनो और जापान की कार कंपनी निसान ने इंडिया में बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है. खास बात यह है कि इसके लिए दोनों कंपनियों ने अगले पंद्रह साल में देश में साठ करोड़ डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. इस बारे में निसान के ग्लोबल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और अलायंस बोर्ड के सदस्य अश्विनी गुप्ता ने बाताया कि नए दौर के निवेश के साथ दोनों कंपनियां छः नए मॉडल उतारेंगी. इनमें चार कारे और दो इलेक्ट्रिक गाडियां शामिल होंगी. वर्तमान में टियागो ईवी भारत की एंट्री लेवल इलेक्ट्रिक कार है. जल्द ही इसका मुकाबला बड़ी कारों से होगा, लेकिन यह सिट्रोएन ईसीतीन जितनी फीचर लोडेड नहीं होंगी. रेनो और निसान की कॉम्पेक्ट ईवी का मुकाबला भी इन मॉडल्स से ही रहेगा. अनुमान है कि इनकी रेंज तीन सौ किलोग्राममीटर के आसपास हो सकती है और इनकी शुरूआती कीमत दस लाख रुपए रखी जा सकती है.
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Agra. आगरा जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में 7 मरीज भर्ती है। भर्ती कुपोषित बच्चों का चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है तो वहीँ डायटीशियन उनके खानपान से संबंधित डायट का पूरा ध्यान रख रही है जिससे बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाया जा सके। सीएमएस डॉ. ए. के. अग्रवाल का कहना है कि वो खुद कुपोषित बच्चों की प्रतिदिन की रिपोर्ट देख रहे हैं। एक हफ्ते तक लगभग 18 कुपोषित बच्चे में भर्ती थे लेकिन अब उनकी संख्या 7 ही रह गई है।
सीएमएस एके अग्रवाल ने बताया कि पहले इस वार्ड में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए बेडो की संख्या कम थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 कर दिया है। इस वार्ड में मनोरंजन के लिए एक टीवी भी लगवा दिया गया है जिससे बच्चे बोर न हो और सही से अपना इलाज करवा सके।
सीएमएस डॉ. ए के अग्रवाल का कहना है कि कुपोषण केवल अच्छा और भरपूर खानपान मिलने से होता है। जिला अस्पताल में भर्ती हर कुपोषित मरीज को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। डायटीशियन खुद इन बच्चों की डायट तैयार कर रही है। जिससे जल्द से जल्द इंटरेस्ट स्वास्थ्य रिकवर हो।
सीएमएस ए के अग्रवाल का कहना है कि जो भी बच्चे कुपोषित हैं और जिला अस्पताल के एनआरसी डिपार्टमेंट में भर्ती हो रहे हैं। उन्हें भर्ती होने के 15 दिन बाद छुट्टी दी जा रही है। 15 दिन में बच्चों को उनके बेहतर स्वास्थ्य के साथ रिकवर किया जा रहा है। यह जिला अस्पताल की अच्छी उपलब्धि है। पौष्टिक आहार और चिकित्सकों की निगरानी में चल रहे इलाज के चलते बच्चे को 15 दिन छुट्टी दे दी जाती है।
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Agra. आगरा जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में सात मरीज भर्ती है। भर्ती कुपोषित बच्चों का चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है तो वहीँ डायटीशियन उनके खानपान से संबंधित डायट का पूरा ध्यान रख रही है जिससे बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाया जा सके। सीएमएस डॉ. ए. के. अग्रवाल का कहना है कि वो खुद कुपोषित बच्चों की प्रतिदिन की रिपोर्ट देख रहे हैं। एक हफ्ते तक लगभग अट्ठारह कुपोषित बच्चे में भर्ती थे लेकिन अब उनकी संख्या सात ही रह गई है। सीएमएस एके अग्रवाल ने बताया कि पहले इस वार्ड में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए बेडो की संख्या कम थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर पच्चीस कर दिया है। इस वार्ड में मनोरंजन के लिए एक टीवी भी लगवा दिया गया है जिससे बच्चे बोर न हो और सही से अपना इलाज करवा सके। सीएमएस डॉ. ए के अग्रवाल का कहना है कि कुपोषण केवल अच्छा और भरपूर खानपान मिलने से होता है। जिला अस्पताल में भर्ती हर कुपोषित मरीज को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। डायटीशियन खुद इन बच्चों की डायट तैयार कर रही है। जिससे जल्द से जल्द इंटरेस्ट स्वास्थ्य रिकवर हो। सीएमएस ए के अग्रवाल का कहना है कि जो भी बच्चे कुपोषित हैं और जिला अस्पताल के एनआरसी डिपार्टमेंट में भर्ती हो रहे हैं। उन्हें भर्ती होने के पंद्रह दिन बाद छुट्टी दी जा रही है। पंद्रह दिन में बच्चों को उनके बेहतर स्वास्थ्य के साथ रिकवर किया जा रहा है। यह जिला अस्पताल की अच्छी उपलब्धि है। पौष्टिक आहार और चिकित्सकों की निगरानी में चल रहे इलाज के चलते बच्चे को पंद्रह दिन छुट्टी दे दी जाती है।
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अक्षर पटेल और कुलदीप यादव ने आपस में चार विकेट साझा किए, जबकि शार्दुल ठाकुर ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ आईपीएल 4/36 का आंकड़ा चुना। दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को डीवाई पाटिल स्टेडियम में पंजाब किंग्स को 17 रन से हरा दिया। मिचेल मार्श ने 49 गेंदों में 63 रनों की पारी के बाद स्कोर 159/7 पर ले गए। पंजाब ने पीछा करने के आधे रास्ते तक पहुंचने से पहले छह विकेट खो दिए। हालांकि जितेश शर्मा ने 34 गेंदों में 44 रनों की पूरी कोशिश की, लेकिन पंजाब अपने 20 ओवरों में केवल 142/9 ही बना सका। यह जीत दिल्ली को टूर्नामेंट में पहली बार लगातार दो मैच जीतने और पंजाब पर डबल करने का भी प्रतीक है।
अपने टैली में 14 अंकों के साथ दिल्ली भी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को नेट रन रेट पर अंक तालिका में चौथे स्थान से विस्थापित करने में सफल रही है। 159 के अपने बचाव में, खलील अहमद और एनरिक नॉर्टजे ने पहले चार ओवरों में पांच चौके और एक छक्का लगाया, जिसमें जॉनी बेयरस्टो ने उनमें से पांच चौके लगाए। ठाकुर ने पावरप्ले की आखिरी गेंद पर शिखर धवन को आउट करके महत्वपूर्ण झटका दिया। पंजाब की परेशानी तब और बढ़ गई, जब लियाम लिविंगस्टोन ने कुलदीप को लॉन्ग ऑन पर आउट किया। लेकिन वह बाएं हाथ के कलाई-स्पिनर की गुगली से पूरी तरह चूक गए और पंत द्वारा आसानी से स्टंप कर दिए गए।
संक्षिप्त स्कोर : दिल्ली कैपिटल्स 159/7 (मिशेल मार्श 63, सरफराज खान 32, लियाम लिविंगस्टोन 3/27, अर्शदीप सिंह 3/37) ने 20 ओवरों में पंजाब किंग्स को 142/9 से हराया (जितेश शर्मा 44, जॉनी बेयरस्टो 28, शार्दुल ठाकुर 4 /36, अक्षर पटेल 2/14) 17 रन से।
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अक्षर पटेल और कुलदीप यादव ने आपस में चार विकेट साझा किए, जबकि शार्दुल ठाकुर ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ आईपीएल चार/छत्तीस का आंकड़ा चुना। दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को डीवाई पाटिल स्टेडियम में पंजाब किंग्स को सत्रह रन से हरा दिया। मिचेल मार्श ने उनचास गेंदों में तिरेसठ रनों की पारी के बाद स्कोर एक सौ उनसठ/सात पर ले गए। पंजाब ने पीछा करने के आधे रास्ते तक पहुंचने से पहले छह विकेट खो दिए। हालांकि जितेश शर्मा ने चौंतीस गेंदों में चौंतालीस रनों की पूरी कोशिश की, लेकिन पंजाब अपने बीस ओवरों में केवल एक सौ बयालीस/नौ ही बना सका। यह जीत दिल्ली को टूर्नामेंट में पहली बार लगातार दो मैच जीतने और पंजाब पर डबल करने का भी प्रतीक है। अपने टैली में चौदह अंकों के साथ दिल्ली भी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को नेट रन रेट पर अंक तालिका में चौथे स्थान से विस्थापित करने में सफल रही है। एक सौ उनसठ के अपने बचाव में, खलील अहमद और एनरिक नॉर्टजे ने पहले चार ओवरों में पांच चौके और एक छक्का लगाया, जिसमें जॉनी बेयरस्टो ने उनमें से पांच चौके लगाए। ठाकुर ने पावरप्ले की आखिरी गेंद पर शिखर धवन को आउट करके महत्वपूर्ण झटका दिया। पंजाब की परेशानी तब और बढ़ गई, जब लियाम लिविंगस्टोन ने कुलदीप को लॉन्ग ऑन पर आउट किया। लेकिन वह बाएं हाथ के कलाई-स्पिनर की गुगली से पूरी तरह चूक गए और पंत द्वारा आसानी से स्टंप कर दिए गए। संक्षिप्त स्कोर : दिल्ली कैपिटल्स एक सौ उनसठ/सात ने बीस ओवरों में पंजाब किंग्स को एक सौ बयालीस/नौ से हराया सत्रह रन से।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
भौतिकी में कार्य (work) होना तब माना जाता है जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाने से वह वस्तु बल की दिशा में कुछ विस्थापित हो। दूसरे शब्दों में, कोई बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन हो तो कहते हैं कि बल ने कार्य किया। कार्य, भौतिकी की सबसे महत्वपूर्ण राशियों में से एक है। कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। कार्य करने या कराने से वस्तुओं की ऊर्जा में परिवर्तन होता है। किसी वस्तु पर F बल लगाने पर वह वस्तु बल की दिशा में d दूरी विस्थापित हो जाय तो किया गया कार्य होगा। उदाहरणः 10 न्यूटन (F . नेतृत्व (leadership) की व्याख्या इस प्रकार दी गयी है "नेतृत्व एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति सामाजिक प्रभाव के द्वारा अन्य लोगों की सहायता लेते हुए एक सर्वनिष्ट (कॉमन) कार्य सिद्ध करता है। एक और परिभाषा एलन कीथ गेनेंटेक ने दी जिसके अधिक अनुयायी थे "नेतृत्व वह है जो अंततः लोगों के लिए एक ऐसा मार्ग बनाना जिसमें लोग अपना योगदान दे कर कुछ असाधारण कर सकें.
कार्य (भौतिकी) और नेतृत्व आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
कार्य (भौतिकी) 9 संबंध है और नेतृत्व 24 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (9 + 24)।
यह लेख कार्य (भौतिकी) और नेतृत्व के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। भौतिकी में कार्य होना तब माना जाता है जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाने से वह वस्तु बल की दिशा में कुछ विस्थापित हो। दूसरे शब्दों में, कोई बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन हो तो कहते हैं कि बल ने कार्य किया। कार्य, भौतिकी की सबसे महत्वपूर्ण राशियों में से एक है। कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। कार्य करने या कराने से वस्तुओं की ऊर्जा में परिवर्तन होता है। किसी वस्तु पर F बल लगाने पर वह वस्तु बल की दिशा में d दूरी विस्थापित हो जाय तो किया गया कार्य होगा। उदाहरणः दस न्यूटन की व्याख्या इस प्रकार दी गयी है "नेतृत्व एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति सामाजिक प्रभाव के द्वारा अन्य लोगों की सहायता लेते हुए एक सर्वनिष्ट कार्य सिद्ध करता है। एक और परिभाषा एलन कीथ गेनेंटेक ने दी जिसके अधिक अनुयायी थे "नेतृत्व वह है जो अंततः लोगों के लिए एक ऐसा मार्ग बनाना जिसमें लोग अपना योगदान दे कर कुछ असाधारण कर सकें. कार्य और नेतृत्व आम में शून्य बातें हैं । कार्य नौ संबंध है और नेतृत्व चौबीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख कार्य और नेतृत्व के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जीत के बाद बीजेपी दफ्तर में तोड़फोड़, आगजनी और उसके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। अब तमिलनाडु में भी ऐसा ही मामला सामने आया है।
विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बहाने राज्य में हिंसा, आगजनी और बर्बरता की घटनाओं ने न केवल देश को शर्मसार किया है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।
बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर भाजपा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर घटनाओं पर सीबीआई जाँच की माँग की गई है। ये याचिका भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं के साथ राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर दुःख जताया है। प्रधानमंत्री ने बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से फोन पर बात करते हुए हालात पर चिंता व्यक्त की है।
JNU में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर गोबर्धन दास बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार थे। उनके गाँव में कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को निशाना बनाया गया है।
खबर थी एबीवीपी के ऑफिस पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। भगवान हनुमान और माँ काली की मूर्ति क्षतिग्रस्त कर दी। NDTV पत्रकार ने लिखा- जैसी करनी, वैसी भरनी।
ABVP की महामंत्री निधि त्रिपाठी के अनुसार, माँ काली और भगवान हनुमान की प्रतिमाओं को नीचे गिरा कर उन्हें पैरों तले रौंदा भी गया।
बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं के बाद अब पार्टी की दो पोल एजेंट से गैंगरेप की खबर आ रही है। कई अन्य जगहों पर भी हिंसा की खबर है।
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पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जीत के बाद बीजेपी दफ्तर में तोड़फोड़, आगजनी और उसके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। अब तमिलनाडु में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बहाने राज्य में हिंसा, आगजनी और बर्बरता की घटनाओं ने न केवल देश को शर्मसार किया है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है। बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर भाजपा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर घटनाओं पर सीबीआई जाँच की माँग की गई है। ये याचिका भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं के साथ राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर दुःख जताया है। प्रधानमंत्री ने बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से फोन पर बात करते हुए हालात पर चिंता व्यक्त की है। JNU में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर गोबर्धन दास बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार थे। उनके गाँव में कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को निशाना बनाया गया है। खबर थी एबीवीपी के ऑफिस पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। भगवान हनुमान और माँ काली की मूर्ति क्षतिग्रस्त कर दी। NDTV पत्रकार ने लिखा- जैसी करनी, वैसी भरनी। ABVP की महामंत्री निधि त्रिपाठी के अनुसार, माँ काली और भगवान हनुमान की प्रतिमाओं को नीचे गिरा कर उन्हें पैरों तले रौंदा भी गया। बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं के बाद अब पार्टी की दो पोल एजेंट से गैंगरेप की खबर आ रही है। कई अन्य जगहों पर भी हिंसा की खबर है।
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बचपन से, हम सुन रहे हैं कि दूध पीने से हमें मजबूत हो जाता है. सभी आयु वर्ग के लोगों को दूध की सलाह दी जाती है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है. लेकिन गर्मियों में, अधिकांश लोग दूध से बचना शुरू करते हैं या अन्य अच्छे विकल्पों की तलाश करते हैं. कई बार, लोग गर्म या ठंडे दूध से भ्रमित हो जाते हैं, क्या दूध गर्मी के लिए उपयुक्त है? इसलिए, आइए जानते हैं कि आपको किस प्रकार का दूध पीना चाहिए, गर्मी में गर्म या ठंडा दूध, और सही समय और इसे बनाने का तरीका.
दूध हम सभी के लिए लाभदायक है. वसा प्राप्त करने से डरने वाले लोगों को भी टोनड मिल्क पीना चाहिए. कोई भी दूध पीना नहीं चाहिए चाहे मौसम हो, चाहे गर्मी हो या सर्दियों हो, या बरसात हो. आपको बस मौसम के अनुसार इसे पीने का तरीका बदलना होगा.
- एक ग्लास दूध के साथ अपना दिन शुरू करने से पूरे दिन आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में, गर्म दूध के स्थान पर आपके पास ठंडे दूध या मिल्कशेक हो सकते हैं.
- याद रखें, खाली पेट पर दूध न खाएं. ऐसा करने से आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है. सबसे पहले, कुछ हल्का और फिर दूध पीएं. दूध में कुछ नट्स जोड़ने से बादाम के दूध जैसे स्वाद, स्वाद और पोषण बढ़ जाता है.
- अगर आप जिमर हैं, तो दूध पीने का सही समय वर्कआउट के बाद आधे घंटे का होता है. यह आपके शरीर को पोषण देता है और वर्कआउट के दौरान खोए जाने वाले सभी आवश्यक पोषण की आपूर्ति करता है. अगर गर्मी में व्यायाम करते समय आपको डीहाइड्रेटेड महसूस होता है, तो आप उस समय ठंडे दूध पी सकते हैं. ठंडे दूध पीकर, आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी. सवेरे सवेरे ठंडे दूध पीने का सबसे अच्छा समय है.
- अगर आप सर्दी और फ्लू से पीड़ित हैं, तो ठंडे दूध पीने से बचें. आप गर्म के बजाय गर्म गर्म दूध ले सकते हैं. डॉक्टरों को यह भी लगता है कि गर्म दूध की तुलना में कोमल दूध पाचन करता है.
- दूध लैक्टोज से भरपूर है जो पाचन में समय लेता है. कई बार, इसका सेवन पेट में दर्द, अपच और एसिडिटी संबंधी समस्याओं का कारण बनता है. एसिडिटी से बचने के लिए आपको ठंडे दूध पीना चाहिए.
- खाली पेट लेने पर कुछ खाद्य पदार्थ और पेय किसी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. उनके उपभोग से शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है. दूध में मौजूद संतृप्त वसा और प्रोटीन पेट की मांसपेशियों को कमजोर करता है, इसलिए दूध को कभी खाली पेट पर नहीं खाना चाहिए.
- बिस्तर जाने से पहले कोई भी रात में थोड़ा गर्म दूध ले सकता है. लैक्टोज थोड़े गर्म दूध में कम हो जाता है, इस प्रकार यह दस्त और अपच जैसी समस्याओं को रोकता है. यह अच्छी रात की नींद में भी मदद करता है.
(डिस्क्लेमरः इस साइट पर उपलब्ध कंटेंट केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है, और इसे प्रोफेशनल मेडिकल सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. अपने स्वास्थ्य या मेडिकल स्थिति के संबंध में आपके किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल के मार्गदर्शन प्राप्त करें. )
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बचपन से, हम सुन रहे हैं कि दूध पीने से हमें मजबूत हो जाता है. सभी आयु वर्ग के लोगों को दूध की सलाह दी जाती है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है. लेकिन गर्मियों में, अधिकांश लोग दूध से बचना शुरू करते हैं या अन्य अच्छे विकल्पों की तलाश करते हैं. कई बार, लोग गर्म या ठंडे दूध से भ्रमित हो जाते हैं, क्या दूध गर्मी के लिए उपयुक्त है? इसलिए, आइए जानते हैं कि आपको किस प्रकार का दूध पीना चाहिए, गर्मी में गर्म या ठंडा दूध, और सही समय और इसे बनाने का तरीका. दूध हम सभी के लिए लाभदायक है. वसा प्राप्त करने से डरने वाले लोगों को भी टोनड मिल्क पीना चाहिए. कोई भी दूध पीना नहीं चाहिए चाहे मौसम हो, चाहे गर्मी हो या सर्दियों हो, या बरसात हो. आपको बस मौसम के अनुसार इसे पीने का तरीका बदलना होगा. - एक ग्लास दूध के साथ अपना दिन शुरू करने से पूरे दिन आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में, गर्म दूध के स्थान पर आपके पास ठंडे दूध या मिल्कशेक हो सकते हैं. - याद रखें, खाली पेट पर दूध न खाएं. ऐसा करने से आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है. सबसे पहले, कुछ हल्का और फिर दूध पीएं. दूध में कुछ नट्स जोड़ने से बादाम के दूध जैसे स्वाद, स्वाद और पोषण बढ़ जाता है. - अगर आप जिमर हैं, तो दूध पीने का सही समय वर्कआउट के बाद आधे घंटे का होता है. यह आपके शरीर को पोषण देता है और वर्कआउट के दौरान खोए जाने वाले सभी आवश्यक पोषण की आपूर्ति करता है. अगर गर्मी में व्यायाम करते समय आपको डीहाइड्रेटेड महसूस होता है, तो आप उस समय ठंडे दूध पी सकते हैं. ठंडे दूध पीकर, आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी. सवेरे सवेरे ठंडे दूध पीने का सबसे अच्छा समय है. - अगर आप सर्दी और फ्लू से पीड़ित हैं, तो ठंडे दूध पीने से बचें. आप गर्म के बजाय गर्म गर्म दूध ले सकते हैं. डॉक्टरों को यह भी लगता है कि गर्म दूध की तुलना में कोमल दूध पाचन करता है. - दूध लैक्टोज से भरपूर है जो पाचन में समय लेता है. कई बार, इसका सेवन पेट में दर्द, अपच और एसिडिटी संबंधी समस्याओं का कारण बनता है. एसिडिटी से बचने के लिए आपको ठंडे दूध पीना चाहिए. - खाली पेट लेने पर कुछ खाद्य पदार्थ और पेय किसी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. उनके उपभोग से शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है. दूध में मौजूद संतृप्त वसा और प्रोटीन पेट की मांसपेशियों को कमजोर करता है, इसलिए दूध को कभी खाली पेट पर नहीं खाना चाहिए. - बिस्तर जाने से पहले कोई भी रात में थोड़ा गर्म दूध ले सकता है. लैक्टोज थोड़े गर्म दूध में कम हो जाता है, इस प्रकार यह दस्त और अपच जैसी समस्याओं को रोकता है. यह अच्छी रात की नींद में भी मदद करता है.
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कोई सुई बिना बिना कर सकते हैंऑपरेशन के दौरान विशेष उपकरण रचनात्मकता के हर रूप में, और आज उनमें से कई दर्जन हैं, जिनमें से सबसे लोकप्रिय बुनाई, सिलाई, कढ़ाई, और सुई के काम के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इस लेख में, हम सबसे जरूरी उपकरण देखेंगे, जो कामगारों के लिए काम करना आसान बनाता है।
के लिए सबसे आम उपकरणनीली चप्पलें कैंची हैं वे अच्छी गुणवत्ता और अच्छे स्टील का होना चाहिए। यह उपकरण रचनात्मकता के कई रूपों में उपयोग किया जाता है कागज, कपड़े, धागे, यार्न के साथ काम करते समय उनका उपयोग किया जाता है। कैंची सीधे ब्लेड या लहराती लोगों के साथ हो सकता है ताकि सामग्री के किनारे को खूबसूरती से ट्रिम किया जा सके। इसके अलावा, कैंची का आकार काम के प्रकार पर निर्भर करता है - छोटे कटौती का धागा समाप्त होता है, बड़े, बदले में, कपड़े की मोटाई से मेल खाना चाहिए जिसके साथ वे काम करते हैं।
किसी भी कौशल में, ऐसे उपकरणों की आवश्यकता हैसुई के लिए, मार्कर के रूप में, crayons, पेंसिल, जो की मदद से प्रतीक, अंक, लाइनों लागू कर रहे हैं। इसके अलावा सुई का काम अक्सर सुईकाम में किया जाता है, और प्रत्येक प्रकार की रचनात्मकता के लिए विशेष उत्पादों का उत्पादन होता है जब कढ़ाई के साथ एक प्रकार की सुई सिलाई - दूसरे। सूखा भड़काते और रजाई के लिए विशेष उपकरण हैं।
कुशल श्रमिकों जो बुनाई के आदी रहे हैं, सुई और हुक के रूप में सीवन के लिए इस तरह के उपकरण का उपयोग कर, और साथ ही समर्थन उपकरण है कि अब हम बात करते हैं।
बुनाई सुई से किया जा सकता हैप्लास्टिक, लकड़ी, धातु, एक विशेष रूप से लागू कोटिंग के साथ बांस, ताकि यार्न अच्छी तरह से निकल जाता है सीधे प्रवचन एक उत्पाद के व्यक्तिगत भागों बुनना और बाद में उन्हें सीना। इन उपकरणों को बुनाई करते समय, पंक्तियों को बदलने की पद्धति का उपयोग किया जाता है। सर्कुलर प्रवक्ता हैं, जिनमें मछली पकड़ने की रेखा से एक-दूसरे से जुड़े दो धातु तत्व शामिल हैं। वे एक सर्कल में और बारी में दोनों बुना जा सकता है सभी प्रवक्ता अपने व्यास के अनुसार एक संख्या रखते हैं।
हुक का उपयोग नैपकिन बुनाई के लिए खुले काम के लिए किया जाता है,शॉल, ब्लाउज और सजावटी उत्पादों। बुनाई के दौरान वे लापता लूप को बढ़ाने के लिए भी सुविधाजनक हैं। हैंडल उत्पाद प्लास्टिक, धातु या बिल्कुल नहीं हो सकता है। टूल बार में भी उनकी संख्या होती है। अंक छोटा, हुक संकुचित।
मास्टर, निर्माता के काम को सुविधाजनक बनाने के लिएसुई के लिए विभिन्न अतिरिक्त सामग्रियों और उपकरणों की पेशकश करें। उदाहरण के लिए, एक जटिल पैटर्न के साथ एक बड़े कपड़े बुनाई करते समय, यह ट्रैक करना मुश्किल है कि कितनी पंक्तियां पहले ही बंधी हुई हैं। इसलिए, एक काउंटर है जो आपको एक अलग संबंध और पंक्तियों की कुल संख्या को ट्रैक करने में मदद करता है। एक सिलेंडर के रूप में डिवाइस में स्क्रॉलिंग ड्रम के साथ दो खिड़कियां होती हैं जो संख्याओं की एक श्रृंखला दिखाती हैं। प्रत्येक गठित पंक्ति के अंत में, पहिया बदल जाता है और इसी संख्या को इंगित करता है।
एक बहुत व्यावहारिक बात एक गेंद के लिए एक कटोरा है। विभिन्न आकार और विन्यास का हो सकता है। कंटेनर के अंदर, यार्न एम्बेडेड है, और विशेष छेद से धागा खींचा जाता है। ग्लोमेरुलस भाग नहीं जाता है, यह अनदेखा नहीं होता है, धागा मिश्रित नहीं होता है, कि काम पर घुटने आराम और सुविधा देता है।
इसके लिए विशेष उपकरण भी हैंहैंडवर्क (उनमें से फोटो लेख के अंत में दिया जाता है), जो एक को पूरा करने में मदद करता है, लेकिन कम महत्वपूर्ण जानकारी नहीं। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक से बने डिस्क, जिसके साथ पोम्प्स बनते हैं। ऐसा करने के लिए, यार्न एक डिस्क पर घायल हो जाता है, और फिर परिधि के साथ काटा जाता है, बीच कसकर कटा हुआ होता है। तारों के सिरों पर या ताज पर, बच्चे के टोपी बुनाते समय इस तरह के पोम्प्स अक्सर उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा आप एक नरम शिशु रग, या कुर्सी पर एक सीट सीवन कर सकते हैं।
तारों को बुनाई में कम महत्वपूर्ण नहीं हैहैंडबैग के लिए हैंडल के रूप में उपयोग करें, बच्चों के स्कर्ट और कपड़े में बेल्ट, हेडगियर टाई। इस तरह के तार बनाने के लिए, उनके बुनाई के लिए विशेष मशीनें बेची जाती हैं।
एक शासक प्रवक्ता या हुक के आकार को निर्धारित करने के साथ-साथ बाध्य नमूना को मापने में मदद करता है।
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कोई सुई बिना बिना कर सकते हैंऑपरेशन के दौरान विशेष उपकरण रचनात्मकता के हर रूप में, और आज उनमें से कई दर्जन हैं, जिनमें से सबसे लोकप्रिय बुनाई, सिलाई, कढ़ाई, और सुई के काम के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इस लेख में, हम सबसे जरूरी उपकरण देखेंगे, जो कामगारों के लिए काम करना आसान बनाता है। के लिए सबसे आम उपकरणनीली चप्पलें कैंची हैं वे अच्छी गुणवत्ता और अच्छे स्टील का होना चाहिए। यह उपकरण रचनात्मकता के कई रूपों में उपयोग किया जाता है कागज, कपड़े, धागे, यार्न के साथ काम करते समय उनका उपयोग किया जाता है। कैंची सीधे ब्लेड या लहराती लोगों के साथ हो सकता है ताकि सामग्री के किनारे को खूबसूरती से ट्रिम किया जा सके। इसके अलावा, कैंची का आकार काम के प्रकार पर निर्भर करता है - छोटे कटौती का धागा समाप्त होता है, बड़े, बदले में, कपड़े की मोटाई से मेल खाना चाहिए जिसके साथ वे काम करते हैं। किसी भी कौशल में, ऐसे उपकरणों की आवश्यकता हैसुई के लिए, मार्कर के रूप में, crayons, पेंसिल, जो की मदद से प्रतीक, अंक, लाइनों लागू कर रहे हैं। इसके अलावा सुई का काम अक्सर सुईकाम में किया जाता है, और प्रत्येक प्रकार की रचनात्मकता के लिए विशेष उत्पादों का उत्पादन होता है जब कढ़ाई के साथ एक प्रकार की सुई सिलाई - दूसरे। सूखा भड़काते और रजाई के लिए विशेष उपकरण हैं। कुशल श्रमिकों जो बुनाई के आदी रहे हैं, सुई और हुक के रूप में सीवन के लिए इस तरह के उपकरण का उपयोग कर, और साथ ही समर्थन उपकरण है कि अब हम बात करते हैं। बुनाई सुई से किया जा सकता हैप्लास्टिक, लकड़ी, धातु, एक विशेष रूप से लागू कोटिंग के साथ बांस, ताकि यार्न अच्छी तरह से निकल जाता है सीधे प्रवचन एक उत्पाद के व्यक्तिगत भागों बुनना और बाद में उन्हें सीना। इन उपकरणों को बुनाई करते समय, पंक्तियों को बदलने की पद्धति का उपयोग किया जाता है। सर्कुलर प्रवक्ता हैं, जिनमें मछली पकड़ने की रेखा से एक-दूसरे से जुड़े दो धातु तत्व शामिल हैं। वे एक सर्कल में और बारी में दोनों बुना जा सकता है सभी प्रवक्ता अपने व्यास के अनुसार एक संख्या रखते हैं। हुक का उपयोग नैपकिन बुनाई के लिए खुले काम के लिए किया जाता है,शॉल, ब्लाउज और सजावटी उत्पादों। बुनाई के दौरान वे लापता लूप को बढ़ाने के लिए भी सुविधाजनक हैं। हैंडल उत्पाद प्लास्टिक, धातु या बिल्कुल नहीं हो सकता है। टूल बार में भी उनकी संख्या होती है। अंक छोटा, हुक संकुचित। मास्टर, निर्माता के काम को सुविधाजनक बनाने के लिएसुई के लिए विभिन्न अतिरिक्त सामग्रियों और उपकरणों की पेशकश करें। उदाहरण के लिए, एक जटिल पैटर्न के साथ एक बड़े कपड़े बुनाई करते समय, यह ट्रैक करना मुश्किल है कि कितनी पंक्तियां पहले ही बंधी हुई हैं। इसलिए, एक काउंटर है जो आपको एक अलग संबंध और पंक्तियों की कुल संख्या को ट्रैक करने में मदद करता है। एक सिलेंडर के रूप में डिवाइस में स्क्रॉलिंग ड्रम के साथ दो खिड़कियां होती हैं जो संख्याओं की एक श्रृंखला दिखाती हैं। प्रत्येक गठित पंक्ति के अंत में, पहिया बदल जाता है और इसी संख्या को इंगित करता है। एक बहुत व्यावहारिक बात एक गेंद के लिए एक कटोरा है। विभिन्न आकार और विन्यास का हो सकता है। कंटेनर के अंदर, यार्न एम्बेडेड है, और विशेष छेद से धागा खींचा जाता है। ग्लोमेरुलस भाग नहीं जाता है, यह अनदेखा नहीं होता है, धागा मिश्रित नहीं होता है, कि काम पर घुटने आराम और सुविधा देता है। इसके लिए विशेष उपकरण भी हैंहैंडवर्क , जो एक को पूरा करने में मदद करता है, लेकिन कम महत्वपूर्ण जानकारी नहीं। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक से बने डिस्क, जिसके साथ पोम्प्स बनते हैं। ऐसा करने के लिए, यार्न एक डिस्क पर घायल हो जाता है, और फिर परिधि के साथ काटा जाता है, बीच कसकर कटा हुआ होता है। तारों के सिरों पर या ताज पर, बच्चे के टोपी बुनाते समय इस तरह के पोम्प्स अक्सर उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा आप एक नरम शिशु रग, या कुर्सी पर एक सीट सीवन कर सकते हैं। तारों को बुनाई में कम महत्वपूर्ण नहीं हैहैंडबैग के लिए हैंडल के रूप में उपयोग करें, बच्चों के स्कर्ट और कपड़े में बेल्ट, हेडगियर टाई। इस तरह के तार बनाने के लिए, उनके बुनाई के लिए विशेष मशीनें बेची जाती हैं। एक शासक प्रवक्ता या हुक के आकार को निर्धारित करने के साथ-साथ बाध्य नमूना को मापने में मदद करता है।
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अहत्या का अपना शिकार बनाने की चेष्टा में असफल होने पर कहते है 'बच्चा परमानद, एक भी गोती तून साथ म घरदी होती, तो शिकार न छिटक्ता वैसे तो साली दूसरी छोरीही तमचा थी, यहां मे एक पहाड़ी छोकरी को ले जाकर मैंने हृदराबाद म सात हजार में बेचा था। 187 साधना में निष्णात पवित्र शात अन्ततोगत्वा नायिका चदन के रूप की मनपर पिघल जाता है और उसे पाने के लिए प्रयत्नशील हो जाता है ।
दूसरी और यम की महिमा का प्रकट करते हुए 'मुझे माफ करना' का सेठ कहता है 'म और सत्य ही जीवन की आधारशिला है, उसी पर चलकर हम ससार की ऊची चाट तक पहुँच सकते है और उस अजानी दुनिया में भी इही के सहारे वहा का भी मार्ग प्रशस्त करते हैं 188 विथम एवं धार्मिक कृत्यों व प्रति इन पुरुषों म अधिक आक्षण नहीं है। स्वयं सेठजी यनोपवीत, सध्या आदि म ऊपरी तार पर रूचि लेते है । इसी प्रकार 'सूखी नदी का पुत' के राय साहब एवं उनके पुत्र पूजा आदि म रुचि न रखते हुए भी पारिवारिक पूजा अचनाओं में उपस्थित रहते है ।
धार्मिक सकोणता
इन उपयसा म कई पुरुपा म धार्मिक सवाणता के भी दशन होते है। 'अपनाघर' का मखाएल उस यही परिवार का सदस्य है जादा भौ वर्षों से भारत में रहता है लविन इजराट्रल बनने पर वह अपनी अथ धार्मिक आस्था के कारण परिवार तर वा छेड वर इजरायल चना जाता है 'उसको एक ही धुन थी- मैं उस पविन नगरी म जाऊँगा, उसके पुरातन मदिरा मे प्राथना करुँगा, उन गलियो म घूमवर देखगा जहाँ हमारे राजी रहा परत ये। यह देश दखूगा जो प्रभु ने अपने हाथो पर माशे वा दिमाया था। यह पवित्र सियान पवत देखूंगा जहा प्रभु ने मोशे को दशन दिए थे 189 'नया' पाचस्पति गोस्वामी के समय है और इस विचार के को पालने है कि महात्मा गाधी धम वा नाश करने पर तुले हुए है 'भारतवय म बाहर वर्णाश्रम घम वा लाप हो गया है, सिर्फ ब्रह्मावत क्षेत्र में धम की एक टाय बची है सो उस भी आप लोगों में गांधीजी वाट डालना चाहते है 190 इनम धार्मिक महिष्णुता वा सवथा अभाव है । हिदू मुस्लिम को एक करने के महात्मा गांधी के विचारों का विरोध परत हुए बहुत है 'म तो उनको निवाल मे भी महात्मा नही मान सकता । हिदू मुस्लिम नही एक हो सकत है। हि पूरव तो मुसलमान पश्चिम । सोय महाशय महत-हिंदू मुसलमान एक हो जाय म नमना जयपी को प्रेरणा से शिक्षित होकर इसाई धर्म की और कुक्ने लगती है ता उमक पनि शतावी के भडकान से स्वराज्य के लिए संघर्ष करने वाला वातिवाद्र भी बहता है 'नयना लाख मेहतर को बेटा हो, है तो हिंदू ही।
महिनाना व उपपासा म पुरुष व्यक्तिव
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अहत्या का अपना शिकार बनाने की चेष्टा में असफल होने पर कहते है 'बच्चा परमानद, एक भी गोती तून साथ म घरदी होती, तो शिकार न छिटक्ता वैसे तो साली दूसरी छोरीही तमचा थी, यहां मे एक पहाड़ी छोकरी को ले जाकर मैंने हृदराबाद म सात हजार में बेचा था। एक सौ सत्तासी साधना में निष्णात पवित्र शात अन्ततोगत्वा नायिका चदन के रूप की मनपर पिघल जाता है और उसे पाने के लिए प्रयत्नशील हो जाता है । दूसरी और यम की महिमा का प्रकट करते हुए 'मुझे माफ करना' का सेठ कहता है 'म और सत्य ही जीवन की आधारशिला है, उसी पर चलकर हम ससार की ऊची चाट तक पहुँच सकते है और उस अजानी दुनिया में भी इही के सहारे वहा का भी मार्ग प्रशस्त करते हैं एक सौ अठासी विथम एवं धार्मिक कृत्यों व प्रति इन पुरुषों म अधिक आक्षण नहीं है। स्वयं सेठजी यनोपवीत, सध्या आदि म ऊपरी तार पर रूचि लेते है । इसी प्रकार 'सूखी नदी का पुत' के राय साहब एवं उनके पुत्र पूजा आदि म रुचि न रखते हुए भी पारिवारिक पूजा अचनाओं में उपस्थित रहते है । धार्मिक सकोणता इन उपयसा म कई पुरुपा म धार्मिक सवाणता के भी दशन होते है। 'अपनाघर' का मखाएल उस यही परिवार का सदस्य है जादा भौ वर्षों से भारत में रहता है लविन इजराट्रल बनने पर वह अपनी अथ धार्मिक आस्था के कारण परिवार तर वा छेड वर इजरायल चना जाता है 'उसको एक ही धुन थी- मैं उस पविन नगरी म जाऊँगा, उसके पुरातन मदिरा मे प्राथना करुँगा, उन गलियो म घूमवर देखगा जहाँ हमारे राजी रहा परत ये। यह देश दखूगा जो प्रभु ने अपने हाथो पर माशे वा दिमाया था। यह पवित्र सियान पवत देखूंगा जहा प्रभु ने मोशे को दशन दिए थे एक सौ नवासी 'नया' पाचस्पति गोस्वामी के समय है और इस विचार के को पालने है कि महात्मा गाधी धम वा नाश करने पर तुले हुए है 'भारतवय म बाहर वर्णाश्रम घम वा लाप हो गया है, सिर्फ ब्रह्मावत क्षेत्र में धम की एक टाय बची है सो उस भी आप लोगों में गांधीजी वाट डालना चाहते है एक सौ नब्बे इनम धार्मिक महिष्णुता वा सवथा अभाव है । हिदू मुस्लिम को एक करने के महात्मा गांधी के विचारों का विरोध परत हुए बहुत है 'म तो उनको निवाल मे भी महात्मा नही मान सकता । हिदू मुस्लिम नही एक हो सकत है। हि पूरव तो मुसलमान पश्चिम । सोय महाशय महत-हिंदू मुसलमान एक हो जाय म नमना जयपी को प्रेरणा से शिक्षित होकर इसाई धर्म की और कुक्ने लगती है ता उमक पनि शतावी के भडकान से स्वराज्य के लिए संघर्ष करने वाला वातिवाद्र भी बहता है 'नयना लाख मेहतर को बेटा हो, है तो हिंदू ही। महिनाना व उपपासा म पुरुष व्यक्तिव
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एक्ट्रेस निकिता दत्ता की बोल्डनेस हमेशा चर्चा का विषय रही है। बेहद हर बार ही अपनी हॉटनेस से इंटरनेट का तापमान बढ़ा देती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस निकिता दत्ता ने इंस्टाग्राम पर गजब की तस्वीरें शेयर की हैं.
इन तस्वीरों में उनका सेक्सी लुक देखने को मिल रहा है. सेक्सी लुक देख फैंस पागल हो गए हैं. मोनोकनी में एक्ट्रेस सेक्सी फिगर फ्लॉन्ट कर रही हैं.
टीवी इंडस्ट्री से अपने करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस निकिता दत्ता अब बॉलीवुड इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल हो गई हैं।
एक्ट्रेस जब भी अपनी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करती हैं तो फैंस की नजर उनकी हॉटनेस से नहीं हटती है.
अब हाल ही में निकिता दत्ता की हॉट और सिजलिंग फोटोशूट की तस्वीरों ने एक बार फिर इंटरनेट पर तूफान ला दिया है।
इन तस्वीरों में एक्ट्रेस ने लाइट कलर के लुक में मोनोकिनी पहनी हुई है जिसमें वह अपने फिगर को फ्लॉन्ट कर रही हैं।
इन तस्वीरों में निकिता दत्ता बोल्ड पोज देती नजर आ रही हैं। खींच रहा फैन्स का ध्यान। (सभी तस्वीरें इंस्टाग्राम)
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एक्ट्रेस निकिता दत्ता की बोल्डनेस हमेशा चर्चा का विषय रही है। बेहद हर बार ही अपनी हॉटनेस से इंटरनेट का तापमान बढ़ा देती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस निकिता दत्ता ने इंस्टाग्राम पर गजब की तस्वीरें शेयर की हैं. इन तस्वीरों में उनका सेक्सी लुक देखने को मिल रहा है. सेक्सी लुक देख फैंस पागल हो गए हैं. मोनोकनी में एक्ट्रेस सेक्सी फिगर फ्लॉन्ट कर रही हैं. टीवी इंडस्ट्री से अपने करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस निकिता दत्ता अब बॉलीवुड इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल हो गई हैं। एक्ट्रेस जब भी अपनी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करती हैं तो फैंस की नजर उनकी हॉटनेस से नहीं हटती है. अब हाल ही में निकिता दत्ता की हॉट और सिजलिंग फोटोशूट की तस्वीरों ने एक बार फिर इंटरनेट पर तूफान ला दिया है। इन तस्वीरों में एक्ट्रेस ने लाइट कलर के लुक में मोनोकिनी पहनी हुई है जिसमें वह अपने फिगर को फ्लॉन्ट कर रही हैं। इन तस्वीरों में निकिता दत्ता बोल्ड पोज देती नजर आ रही हैं। खींच रहा फैन्स का ध्यान।
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अपने हर वीडियो में हाथ जोड़कर नमस्ते कहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान कभी कभी सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड फोटोज शेयर करते हुए इंटरनेट पर सनसनी मचा देती हैं. हाल ही में सारा अली खान ने शिमर ड्रेस में अपनी बेहद बोल्ड और खूबसूरत फोटोज शेयर की हैं.
इन फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन में सारा लिखती हैं कि, "Olive you so much". इन फोटोज में हम सारा को बेहद ग्लैमरस अंदाज में देख सकते हैं.
ऑलिव येलो रंग के शिमर शॉर्ट ट्यूब ड्रेस के साथ सारा ने हाई हील्स पहनी हुईं हैं. उन्होंने अपने बालों को खुला छोड़कर उन्हें वेवी स्टाइल दिया है. इस लुक के साथ उन्होंने न्यूड मेकअप किया है.
सोशल मीडिया पर सारा अली खान का ये लुक वायरल हो रहा है. अब तक इन फोटोज को 7 लाख से भी ज्यादा लोगों ने लाइक किया है.
आपको बता दें, सोशल मीडिया पर सारा अली खान के 41 मिलियन फैंस हैं. अपने फैंस के मनोरंजन के लिए सारा सोशल मीडिया पर दिलचस्प वीडियोज और फोटोज पोस्ट करती रहती हैं.
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अपने हर वीडियो में हाथ जोड़कर नमस्ते कहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान कभी कभी सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड फोटोज शेयर करते हुए इंटरनेट पर सनसनी मचा देती हैं. हाल ही में सारा अली खान ने शिमर ड्रेस में अपनी बेहद बोल्ड और खूबसूरत फोटोज शेयर की हैं. इन फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन में सारा लिखती हैं कि, "Olive you so much". इन फोटोज में हम सारा को बेहद ग्लैमरस अंदाज में देख सकते हैं. ऑलिव येलो रंग के शिमर शॉर्ट ट्यूब ड्रेस के साथ सारा ने हाई हील्स पहनी हुईं हैं. उन्होंने अपने बालों को खुला छोड़कर उन्हें वेवी स्टाइल दिया है. इस लुक के साथ उन्होंने न्यूड मेकअप किया है. सोशल मीडिया पर सारा अली खान का ये लुक वायरल हो रहा है. अब तक इन फोटोज को सात लाख से भी ज्यादा लोगों ने लाइक किया है. आपको बता दें, सोशल मीडिया पर सारा अली खान के इकतालीस मिलियन फैंस हैं. अपने फैंस के मनोरंजन के लिए सारा सोशल मीडिया पर दिलचस्प वीडियोज और फोटोज पोस्ट करती रहती हैं.
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लखनऊ के स्ट्रीटफूड में कबाब बहुत फेमस है, इसके अलावा यहां की चाट भी काफी मशहूर है।
दिल्ली के छोले भटूरे देशभर में प्रसिद्ध हैं, इस पंजाबी खाने को अधिकांश लोग खाना पसंद करते हैं।
महाराष्ट्र के सबसे फेमस स्ट्रीट फूड में वड़ा पाव है, जिसे चटनी और तली हरी मिर्च के साथ सर्व किया जाता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का मशहूर लिट्टी चोखा राजस्थानी बाटी जैसी होती है, जिसे सत्तू के आटे से बनाया जाता है।
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लखनऊ के स्ट्रीटफूड में कबाब बहुत फेमस है, इसके अलावा यहां की चाट भी काफी मशहूर है। दिल्ली के छोले भटूरे देशभर में प्रसिद्ध हैं, इस पंजाबी खाने को अधिकांश लोग खाना पसंद करते हैं। महाराष्ट्र के सबसे फेमस स्ट्रीट फूड में वड़ा पाव है, जिसे चटनी और तली हरी मिर्च के साथ सर्व किया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का मशहूर लिट्टी चोखा राजस्थानी बाटी जैसी होती है, जिसे सत्तू के आटे से बनाया जाता है।
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डॉ. भाटिया ने बताया की इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र जयपुर के क्षेत्रांतर्गत 20 जिलों के विद्यार्थियों के लिए महारानी कॉलेज, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। विद्यार्थी प्रवेश पत्र इग्नू की वेबसाइट www. ignou. ac. in से डाउनलोड कर सकते हैं। विद्यार्थी को प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में परेशानी हो तो वे क्षेत्रीय केंद्र जयपुर से संपर्क कर सकते हैं।
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डॉ. भाटिया ने बताया की इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र जयपुर के क्षेत्रांतर्गत बीस जिलों के विद्यार्थियों के लिए महारानी कॉलेज, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। विद्यार्थी प्रवेश पत्र इग्नू की वेबसाइट www. ignou. ac. in से डाउनलोड कर सकते हैं। विद्यार्थी को प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में परेशानी हो तो वे क्षेत्रीय केंद्र जयपुर से संपर्क कर सकते हैं।
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सोमवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2023 में IIT मद्रास को भारत में नंबर एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थान दिया गया। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलूरु और IIT दिल्ली का स्थान है। मूल रूप से रैंकिंग की चार सामान्य कैटेगरी थीं, ओवरऑल, विश्वविद्यालय, कॉलेज और रिसर्च। आठ विषय-विशिष्ट रैंकिंग के साथ, कैटेगरी की कुल संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है। नई कैटेगरी में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, कानून, मेडिकल, आर्किटेक्चर और डेंटल शामिल हैं। इस साल कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की एक नई कैटेगरी जोड़ी गई है।
विश्वविद्यालय कैटेगरी में, IISc बेंगलूरु पहले स्थान पर है, उसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और जामिया मिलिया इस्लामिया हैं। रिसर्च कैटेगरी में, IISc बैंगलोर ही पहले स्थान पर है, इसके बाद IIT मद्रास और IIT दिल्ली हैं।
कॉलेज कैटेगरी में, दिल्ली विश्वविद्यालय का मिरांडा कॉलेज लिस्ट में सबसे ऊपर है, उसके बाद हिंदू कॉलेज और चेन्नई का प्रेसीडेंसी कॉलेज है। IIT मद्रास देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों की लिस्ट में सबसे ऊपर है, इसके बाद IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे का स्थान है। IIT मद्रास ने लगातार आठवें साल सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है।
मैनेजमेंट कैटेगरी में, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अहमदाबाद रैंकिंग में सबसे ऊपर है। इसके बाद IIM बैंगलोर और IIM कोझिकोड का स्थान रहा। आर्किटेक्चर में, IIT रुड़की ने NIRF रैंकिंग 2023 में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) कैवोर और IIT खड़गपुर का स्थान रहा।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली मेडिकल कैटेगिरी में सबसे ऊपर है, इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर हैं।
कानून की कैटेगरी में बेंगलूरु स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) पहले नंबर पर है। NLU दिल्ली और हैदराबाद में नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
नए जोड़े गए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की कैटेगरी में, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली रैंकिंग में सबसे ऊपर है। इसके बाद राष्ट्रीय डेयरी संस्थान, करनाल और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना का स्थान रहा। मंत्रालय ने भारत में अधिक नवीन शैक्षणिक संस्थानों के आधार पर एक रैंकिंग भी जारी की। IIT कानपुर रैंकिंग में सबसे ऊपर है, उसके बाद IIT मद्रास और IIT हैदराबाद हैं।
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सोमवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क दो हज़ार तेईस में IIT मद्रास को भारत में नंबर एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थान दिया गया। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलूरु और IIT दिल्ली का स्थान है। मूल रूप से रैंकिंग की चार सामान्य कैटेगरी थीं, ओवरऑल, विश्वविद्यालय, कॉलेज और रिसर्च। आठ विषय-विशिष्ट रैंकिंग के साथ, कैटेगरी की कुल संख्या अब बढ़कर बारह हो गई है। नई कैटेगरी में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, कानून, मेडिकल, आर्किटेक्चर और डेंटल शामिल हैं। इस साल कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की एक नई कैटेगरी जोड़ी गई है। विश्वविद्यालय कैटेगरी में, IISc बेंगलूरु पहले स्थान पर है, उसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया हैं। रिसर्च कैटेगरी में, IISc बैंगलोर ही पहले स्थान पर है, इसके बाद IIT मद्रास और IIT दिल्ली हैं। कॉलेज कैटेगरी में, दिल्ली विश्वविद्यालय का मिरांडा कॉलेज लिस्ट में सबसे ऊपर है, उसके बाद हिंदू कॉलेज और चेन्नई का प्रेसीडेंसी कॉलेज है। IIT मद्रास देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों की लिस्ट में सबसे ऊपर है, इसके बाद IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे का स्थान है। IIT मद्रास ने लगातार आठवें साल सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। मैनेजमेंट कैटेगरी में, भारतीय प्रबंधन संस्थान , अहमदाबाद रैंकिंग में सबसे ऊपर है। इसके बाद IIM बैंगलोर और IIM कोझिकोड का स्थान रहा। आर्किटेक्चर में, IIT रुड़की ने NIRF रैंकिंग दो हज़ार तेईस में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कैवोर और IIT खड़गपुर का स्थान रहा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान , दिल्ली मेडिकल कैटेगिरी में सबसे ऊपर है, इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर हैं। कानून की कैटेगरी में बेंगलूरु स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पहले नंबर पर है। NLU दिल्ली और हैदराबाद में नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। नए जोड़े गए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की कैटेगरी में, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली रैंकिंग में सबसे ऊपर है। इसके बाद राष्ट्रीय डेयरी संस्थान, करनाल और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना का स्थान रहा। मंत्रालय ने भारत में अधिक नवीन शैक्षणिक संस्थानों के आधार पर एक रैंकिंग भी जारी की। IIT कानपुर रैंकिंग में सबसे ऊपर है, उसके बाद IIT मद्रास और IIT हैदराबाद हैं।
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नई दिल्लीः दुनिया का सबसे वफादार जीव यानी कुत्ता है, बहुत गिने चुने लोग है जिन्हे डॉगी पसंद नहीं है, लेकिन इस दुनिया में डॉग लवर्स की भी कोई कमी नहीं है। जी हां वैसे तो डॉग्स से जुड़े कई सारे वीडियो अब तक आपने सोशल मीडिया पर देखे होंगे, लेकिन आज डॉग का जो अनोखा अंदाज आपको दिखने जा रहे है शायद ऐसा अनोखा नजारा अब तक आपने नहीं देखा होगा। जी हां हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक कुत्ते की नवाबी अंदाज एंट्री हो रही है, जिसे देखकर लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई।
जैसा कि हमने आपको बताया वायरल हो रहे वीडियो (Trending Video) में एक कुत्ते का अंदाज देखकर लोग दंग रह गए। वीडियो (Dog Viral Video) में आप देख सकते हैं गली के अंदर एक कार घूम रही है। कार के अंदर कुछ लोग बैठे हैं, जबकि एक कुत्ता कार की छत पर मजे से खड़ा है। कुत्ते का स्वैग देखकर ऐसा लगता है जैसे वो मुआयना करने के लिए निकला हो। बड़ी बात ये है कि कुत्ता भी काफी सीरियस नजर आ रहा है, जिसे देखकर लोग और भी ज्यादा आश्चर्यचकित हो गए। किसी ने इस नजारे को कैमरे में कैद कर लिया और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
इस अनोखे वीडियो को देखकर आप भी जरूर दंग रह गए होंगे। आपको बता दें कि अब ये इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को 'johnnylaal' नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। जबकि, हजारों लोगों ने वीडियो को पसंद किए हैं। वहीं, चटकारे लेते हुए लोग वीडियो पर कमेंट कर रहे हैं। किसी का कहना है कि कुत्ते का तो गजब भौकाल है भाई। कुछ का कहना है कि लगता है इलाके का गुंडा है ये। इस तरह वीडियो पर लोगो ने अलग-अलग कमेंट्स किए है।
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नई दिल्लीः दुनिया का सबसे वफादार जीव यानी कुत्ता है, बहुत गिने चुने लोग है जिन्हे डॉगी पसंद नहीं है, लेकिन इस दुनिया में डॉग लवर्स की भी कोई कमी नहीं है। जी हां वैसे तो डॉग्स से जुड़े कई सारे वीडियो अब तक आपने सोशल मीडिया पर देखे होंगे, लेकिन आज डॉग का जो अनोखा अंदाज आपको दिखने जा रहे है शायद ऐसा अनोखा नजारा अब तक आपने नहीं देखा होगा। जी हां हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक कुत्ते की नवाबी अंदाज एंट्री हो रही है, जिसे देखकर लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई। जैसा कि हमने आपको बताया वायरल हो रहे वीडियो में एक कुत्ते का अंदाज देखकर लोग दंग रह गए। वीडियो में आप देख सकते हैं गली के अंदर एक कार घूम रही है। कार के अंदर कुछ लोग बैठे हैं, जबकि एक कुत्ता कार की छत पर मजे से खड़ा है। कुत्ते का स्वैग देखकर ऐसा लगता है जैसे वो मुआयना करने के लिए निकला हो। बड़ी बात ये है कि कुत्ता भी काफी सीरियस नजर आ रहा है, जिसे देखकर लोग और भी ज्यादा आश्चर्यचकित हो गए। किसी ने इस नजारे को कैमरे में कैद कर लिया और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। इस अनोखे वीडियो को देखकर आप भी जरूर दंग रह गए होंगे। आपको बता दें कि अब ये इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को 'johnnylaal' नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। जबकि, हजारों लोगों ने वीडियो को पसंद किए हैं। वहीं, चटकारे लेते हुए लोग वीडियो पर कमेंट कर रहे हैं। किसी का कहना है कि कुत्ते का तो गजब भौकाल है भाई। कुछ का कहना है कि लगता है इलाके का गुंडा है ये। इस तरह वीडियो पर लोगो ने अलग-अलग कमेंट्स किए है।
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।असलुटा (Asluta)
मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। असलुटा नाम की लड़कियों के जन्म लेने का मौसम काफी सुहावना होता है। असलुटा नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियों में चेहरे की हड्डियों, मस्तिष्क, पीयूष ग्रंथि (पिट्युटरी ग्लैंड) और जबड़े से सम्बंधित बीमारियां होने का खतरा रहता है। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियों का अपने मन पर नियंत्रण नहीं होता जिस कारण ये खुद को खाने से रोक नहीं पाते और पेट की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियाँ नयी पहल करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और काम के इतने शौक़ीन होते हैं कि लंबे समय तक काम करके भी थकते नहीं हैं।
अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को असलुटा नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। असलुटा नाम का मतलब लालची, सर्वव्यापी होता है। असलुटा नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब लालची, सर्वव्यापी है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को असलुटा नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। जैसा कि हमने बताया कि असलुटा का अर्थ लालची, सर्वव्यापी होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप असलुटा नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। यह माना जाता है कि यदि आपका नाम असलुटा है और इसका अर्थ लालची, सर्वव्यापी है, तो इसका गहरा प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव पर भी पड़ता है। नीचे असलुटा नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं लालची, सर्वव्यापी के बारे में विस्तार से बताया गया है।
जिनका नाम असलुटा होता है, उनका ग्रह स्वामी मंगल और लकी नंबर 9 होता है। 9 लकी नंबर वाली लड़कियां दिमागी तौर पर स्वस्थ होती हैं और उनमें मुसीबतों से लड़ने का जुनून होता है। किसी भी काम की शुरुआत के पहले भले ही कई अड़चनें आएंं लेकिन असलुटा नाम की महिलाएं अपने जुनून से सफलता हासिल जरूर करती हैं। जिनका नाम असलुटा होता है वह किसी भी व्यक्ति या परिस्थति से नहीं डरती हैं, कभी-कभी यही बात इनके लिए परेशानी का सबब बन जाती है। असलुटा नाम की महिलाओं में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता होती है। ये भविष्य में नेता बन सकती हैं। 9 अंक वाली असलुटा नाम की लड़कियों को दोस्ती ही नहीं, दुश्मनी भी अच्छी तरह निभानी आती है।
असलुटा नाम की राशि मेष होती है। इनमें हिम्मत और आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है। ये महत्वाकांक्षी और जिज्ञासु भी होते हैं। असलुटा नाम की लड़कियों को मुसीबतों से बिलकुल डर नहीं लगता। असलुटा नाम की लड़कियां नए काम के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। असलुटा नाम की महिलाएं हमेशा जोश से भरी रहती हैं। इन्हें चुनौतियों का सामना करना अच्छा लगता है। मेष राशि से सम्बंधित असलुटा नाम की महिलाएं हठी और घमंडी किस्म की होती हैं। असलुटा नाम महिलाओं को अपने करियर से समझौता करना पसंद नहीं होता है। पैसों के मामले में भी ये किसी पर भरोसा नहीं करती।
।सफल, अपराजेय, अजेय (अजीत)
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।असलुटा मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। असलुटा नाम की लड़कियों के जन्म लेने का मौसम काफी सुहावना होता है। असलुटा नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियों में चेहरे की हड्डियों, मस्तिष्क, पीयूष ग्रंथि और जबड़े से सम्बंधित बीमारियां होने का खतरा रहता है। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियों का अपने मन पर नियंत्रण नहीं होता जिस कारण ये खुद को खाने से रोक नहीं पाते और पेट की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। मेष राशि के असलुटा नाम की लड़कियाँ नयी पहल करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और काम के इतने शौक़ीन होते हैं कि लंबे समय तक काम करके भी थकते नहीं हैं। अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को असलुटा नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। असलुटा नाम का मतलब लालची, सर्वव्यापी होता है। असलुटा नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब लालची, सर्वव्यापी है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को असलुटा नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। जैसा कि हमने बताया कि असलुटा का अर्थ लालची, सर्वव्यापी होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप असलुटा नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। यह माना जाता है कि यदि आपका नाम असलुटा है और इसका अर्थ लालची, सर्वव्यापी है, तो इसका गहरा प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव पर भी पड़ता है। नीचे असलुटा नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं लालची, सर्वव्यापी के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिनका नाम असलुटा होता है, उनका ग्रह स्वामी मंगल और लकी नंबर नौ होता है। नौ लकी नंबर वाली लड़कियां दिमागी तौर पर स्वस्थ होती हैं और उनमें मुसीबतों से लड़ने का जुनून होता है। किसी भी काम की शुरुआत के पहले भले ही कई अड़चनें आएंं लेकिन असलुटा नाम की महिलाएं अपने जुनून से सफलता हासिल जरूर करती हैं। जिनका नाम असलुटा होता है वह किसी भी व्यक्ति या परिस्थति से नहीं डरती हैं, कभी-कभी यही बात इनके लिए परेशानी का सबब बन जाती है। असलुटा नाम की महिलाओं में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता होती है। ये भविष्य में नेता बन सकती हैं। नौ अंक वाली असलुटा नाम की लड़कियों को दोस्ती ही नहीं, दुश्मनी भी अच्छी तरह निभानी आती है। असलुटा नाम की राशि मेष होती है। इनमें हिम्मत और आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है। ये महत्वाकांक्षी और जिज्ञासु भी होते हैं। असलुटा नाम की लड़कियों को मुसीबतों से बिलकुल डर नहीं लगता। असलुटा नाम की लड़कियां नए काम के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। असलुटा नाम की महिलाएं हमेशा जोश से भरी रहती हैं। इन्हें चुनौतियों का सामना करना अच्छा लगता है। मेष राशि से सम्बंधित असलुटा नाम की महिलाएं हठी और घमंडी किस्म की होती हैं। असलुटा नाम महिलाओं को अपने करियर से समझौता करना पसंद नहीं होता है। पैसों के मामले में भी ये किसी पर भरोसा नहीं करती। ।सफल, अपराजेय, अजेय
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यदि सच पूछा जाय, तो मुझमें शारीरिक साहस की कमी कभी नहीं रही है । वह अफ़सर कितना ही बड़ा पहलवान क्यों न रहा हो, मैं अवश्य ही उससे उलझ पड़ता । पर मुझ में नैतिक साहस का सदा अभाव रहा है । मैं इस बात से नहीं डरता था कि उसे खरी-खोटी सुनाने पर वह मुझे बुरी तरह पीटेगा, अथवा उठाकर खिड़की के रास्ते से बाहर फेंक देगा । मुझे डर इस बात का था कि मैं उसे जब साहित्यिक भाषा में डाँट 'बताऊँगा, तो उससे वह क्रुद्ध न होकर एक अच्छा विनोद समझकर हँस पड़ेगा । उसी हँसी से मेरा जो अपमान होता, वह गलधक्के के अपमान से भी अधिक तीव्र और मार्मिक होता । ये
लोग साहित्यिक गर्जना का महत्त्व तनिक भी नहीं समझते, इसलिये मैं उनकी आँखों में एक विदूषक से अधिक महत्व न रखता । ; कुछ भी हो, तब से उस अफ़सर के प्रति मेरे मन में विशेष का भाव दिन पर दिन बढ़ता चला गया, और जब-जब मैं उसे रास्ते में चलते हुए देखता, तो मन ही मन कुढ़कर रह जाता । मुझे विश्वास है कि मेरी ओर देखने पर भी वह मुझे कभी पहचान न पाता । पर मैं उसे अच्छी तरह पहचानता था, और वह किन-किन रास्तों से होकर कहाँ जाता है, इस बात का भी पूरा पता मुझे लग गया था । कई वर्ष बीत गये, पर मैं उस अफसर द्वारा अपमानित होने की बात को न भूला । बल्कि मेरे मन में उसके विरुद्ध प्रतिहिंसा की भावना समय के साथ उग्र से उंग्रतर होती चली गयी । उसका नाम क्या है, वह किस
में काम करता है, कहाँ रहता है या कोई और भी उसके साथ है, आदि सब बातों का ठीक-ठीक पता मैंने मालूम कर लिया था, और
दो की श्रात्मकथा
निरन्तर इस चिंता में मग्न रहता था कि किस अवसर पर, किस स्थान में और किस समय, उससे अपने अपमान का बदला चुकाया जाय ।
बहुत सोचने के बाद अन्त में एक उपाय मुझे सुझा। मैंने उन अफसर को कहानी का एक पात्र बनाकर शब्दों द्वारा उसका एक ऐसा कार्टूननुमाँचित्र किया जो मेरी राय में निश्चय ही उसका मर्मच्छेद करने में समर्थ होता । पात्र का नाम मैंने ऐसा रखा जो उस अफ़सर के नाम से मिलता-जुलता था, और घटनाओं का ऐसा क्रम रखा जिनमें उसे यह भ्रम नहीं हो सकता था कि वह कहानी उसी को लक्ष्य करके लिखी गयी है। मैंने बड़े उत्साह से वह कहानी लिखी, और जब - वह तैयार हो गयी, तो मैंने उसे एक पत्र में प्रकाशनार्थ भेज दिया । पर पत्र के सम्पादक ने उसे नहीं छापा । इससे मेरे क्रोध ने भीतर ही भीतर रुद्ध गर्जन के आवेग से और अधिक भयंकर रूप धारण कर लिया। जब यह प्रयत्न भी सफल हुआ, तो मैंने एक लम्बा चौड़ा पत्र उस अफसर के नाम लिखा, जिसमें सुन्दर और शिष्ट साहित्यिक भाषा द्वारा उसे 'लजित करने की पूर्ण चेष्टा करके मैंने यह इंगित भी कर दिया कि यदि वह अपने व्यवहार के लिये क्षमा नहीं माँगेगा, तो मुझे विवश होकर उसे युद्ध के लिए ललकारना होगा। मैंने इतने सुन्दर काव्यात्मक रूप से वह पत्र लिखा था, उसमें 'सत्यं शिवं सुन्दरम् का ऐसा अच्छा प्रयोग किया था कि मैं सोचने लगा - 'यदि उस अफ़सर में कुछ भी समझ होगी तो वह उसे पढ़ते ही स्वयम् मेरे पास आकर मुझसे क्षमा चाहते हुए गले मिलेगा । मैं उसे क्षमा कर दूंगा, और वह मेरे गुणों । का कायल होकर मेरा सच्चा मित्र वन जायगा । वह अपने उच्च पद का
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यदि सच पूछा जाय, तो मुझमें शारीरिक साहस की कमी कभी नहीं रही है । वह अफ़सर कितना ही बड़ा पहलवान क्यों न रहा हो, मैं अवश्य ही उससे उलझ पड़ता । पर मुझ में नैतिक साहस का सदा अभाव रहा है । मैं इस बात से नहीं डरता था कि उसे खरी-खोटी सुनाने पर वह मुझे बुरी तरह पीटेगा, अथवा उठाकर खिड़की के रास्ते से बाहर फेंक देगा । मुझे डर इस बात का था कि मैं उसे जब साहित्यिक भाषा में डाँट 'बताऊँगा, तो उससे वह क्रुद्ध न होकर एक अच्छा विनोद समझकर हँस पड़ेगा । उसी हँसी से मेरा जो अपमान होता, वह गलधक्के के अपमान से भी अधिक तीव्र और मार्मिक होता । ये लोग साहित्यिक गर्जना का महत्त्व तनिक भी नहीं समझते, इसलिये मैं उनकी आँखों में एक विदूषक से अधिक महत्व न रखता । ; कुछ भी हो, तब से उस अफ़सर के प्रति मेरे मन में विशेष का भाव दिन पर दिन बढ़ता चला गया, और जब-जब मैं उसे रास्ते में चलते हुए देखता, तो मन ही मन कुढ़कर रह जाता । मुझे विश्वास है कि मेरी ओर देखने पर भी वह मुझे कभी पहचान न पाता । पर मैं उसे अच्छी तरह पहचानता था, और वह किन-किन रास्तों से होकर कहाँ जाता है, इस बात का भी पूरा पता मुझे लग गया था । कई वर्ष बीत गये, पर मैं उस अफसर द्वारा अपमानित होने की बात को न भूला । बल्कि मेरे मन में उसके विरुद्ध प्रतिहिंसा की भावना समय के साथ उग्र से उंग्रतर होती चली गयी । उसका नाम क्या है, वह किस में काम करता है, कहाँ रहता है या कोई और भी उसके साथ है, आदि सब बातों का ठीक-ठीक पता मैंने मालूम कर लिया था, और दो की श्रात्मकथा निरन्तर इस चिंता में मग्न रहता था कि किस अवसर पर, किस स्थान में और किस समय, उससे अपने अपमान का बदला चुकाया जाय । बहुत सोचने के बाद अन्त में एक उपाय मुझे सुझा। मैंने उन अफसर को कहानी का एक पात्र बनाकर शब्दों द्वारा उसका एक ऐसा कार्टूननुमाँचित्र किया जो मेरी राय में निश्चय ही उसका मर्मच्छेद करने में समर्थ होता । पात्र का नाम मैंने ऐसा रखा जो उस अफ़सर के नाम से मिलता-जुलता था, और घटनाओं का ऐसा क्रम रखा जिनमें उसे यह भ्रम नहीं हो सकता था कि वह कहानी उसी को लक्ष्य करके लिखी गयी है। मैंने बड़े उत्साह से वह कहानी लिखी, और जब - वह तैयार हो गयी, तो मैंने उसे एक पत्र में प्रकाशनार्थ भेज दिया । पर पत्र के सम्पादक ने उसे नहीं छापा । इससे मेरे क्रोध ने भीतर ही भीतर रुद्ध गर्जन के आवेग से और अधिक भयंकर रूप धारण कर लिया। जब यह प्रयत्न भी सफल हुआ, तो मैंने एक लम्बा चौड़ा पत्र उस अफसर के नाम लिखा, जिसमें सुन्दर और शिष्ट साहित्यिक भाषा द्वारा उसे 'लजित करने की पूर्ण चेष्टा करके मैंने यह इंगित भी कर दिया कि यदि वह अपने व्यवहार के लिये क्षमा नहीं माँगेगा, तो मुझे विवश होकर उसे युद्ध के लिए ललकारना होगा। मैंने इतने सुन्दर काव्यात्मक रूप से वह पत्र लिखा था, उसमें 'सत्यं शिवं सुन्दरम् का ऐसा अच्छा प्रयोग किया था कि मैं सोचने लगा - 'यदि उस अफ़सर में कुछ भी समझ होगी तो वह उसे पढ़ते ही स्वयम् मेरे पास आकर मुझसे क्षमा चाहते हुए गले मिलेगा । मैं उसे क्षमा कर दूंगा, और वह मेरे गुणों । का कायल होकर मेरा सच्चा मित्र वन जायगा । वह अपने उच्च पद का
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नई दिल्ली/वेब डेस्क। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश के तीन प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नई दिल्ली, अहमदाबाद और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के भारतीय रेलवे के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस परियोजना में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इससे 35,744 नये रोजगार सृजित होंगे। 20 लाख से अधिक यात्रियों के दैनिक अनुभव में सुधार आयेगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन बस, मेट्रो और निजी वाहनों के साथ ट्रेन सेवाओं को एकीकृत करेगा। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन का नया स्वरूप मोडेरा के सूर्य मंदिर से प्रेरित होगा। सीएसएमटी के हेरिटेज भवन को छुआ नहीं जाएगा, लेकिन आसपास की इमारतों को फिर से विकसित किया जाएगा।
रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार स्टेशन शहर का एक अविभाज्य स्थान होता है। इसलिए उसका विकास शहर के साथ एकीकृत रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्टेशन को शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने वाली कड़ी बनना चाहिए। स्टेशन अगले 50 साल की जरूरतों के अनुसार तैयार होना चाहिए। स्टेशनों के रूफ प्लाजा में अनेक सुविधाएं बनाई जाएंगी। दिव्यांगों की सुविधा के अनुकूल हो।
उन्होंने कहा कि देश में कुल 199 रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। इसमें से 47 स्टेशन के टेंडर जारी हो चुके हैं और 32 स्टेशनों पर काम चल रहा है। इसमें ऐसे स्टेशनों को शामिल किया गया है जहां सालभर में 50 लाख से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है। अगले चरण में 10 लाख फुटफाल वाले स्टेशनों को शामिल किया जाएगा।
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नई दिल्ली/वेब डेस्क। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश के तीन प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना में लगभग दस हजार करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नई दिल्ली, अहमदाबाद और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस , मुंबई रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के भारतीय रेलवे के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस परियोजना में लगभग दस हजार करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इससे पैंतीस,सात सौ चौंतालीस नये रोजगार सृजित होंगे। बीस लाख से अधिक यात्रियों के दैनिक अनुभव में सुधार आयेगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन बस, मेट्रो और निजी वाहनों के साथ ट्रेन सेवाओं को एकीकृत करेगा। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन का नया स्वरूप मोडेरा के सूर्य मंदिर से प्रेरित होगा। सीएसएमटी के हेरिटेज भवन को छुआ नहीं जाएगा, लेकिन आसपास की इमारतों को फिर से विकसित किया जाएगा। रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अनुसार स्टेशन शहर का एक अविभाज्य स्थान होता है। इसलिए उसका विकास शहर के साथ एकीकृत रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्टेशन को शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने वाली कड़ी बनना चाहिए। स्टेशन अगले पचास साल की जरूरतों के अनुसार तैयार होना चाहिए। स्टेशनों के रूफ प्लाजा में अनेक सुविधाएं बनाई जाएंगी। दिव्यांगों की सुविधा के अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि देश में कुल एक सौ निन्यानवे रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। इसमें से सैंतालीस स्टेशन के टेंडर जारी हो चुके हैं और बत्तीस स्टेशनों पर काम चल रहा है। इसमें ऐसे स्टेशनों को शामिल किया गया है जहां सालभर में पचास लाख से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है। अगले चरण में दस लाख फुटफाल वाले स्टेशनों को शामिल किया जाएगा।
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दिल्लीः वर्ष 2023 (Union Budget 2023) का बजट पेश करने की लगभग पूरी तैयारी कर ली गई है। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) 1 फरवरी 2023 को संसद में नया बजट पेश करेंगी। हर बार की तरह बजट सुबह 11 बजे से शुरू होगा। यदि आप बजट से संबंधित नवीनतम अपडेट प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इसे कहाँ सुनना या देखना है, तो हम आपको विवरण देने के लिए यहां हैं।
बजट 2023 भाषण को पार्लियामेंट टीवी (Parliament TV) के आधिकारिक चैनल पर देखा जा सकता है। साथ ही इसके अपडेट आप राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन (Doordarshan) पर भी देख सकते हैं। निर्मला सीतारमण का भाषण दूरदर्शन के यूट्यूब चैनल (Youtube Channal) पर भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा पीआईबी ऑनलाइन बजट पेश करेगा।
बजट अपडेट मोबाइल पर भी मिलेगा। वित्त मंत्री का भाषण समाप्त होते ही केंद्रीय बजट को मोबाइल ऐप (Mobile App) पर अपलोड कर दिया जाएगा। भाषण Android और Apple OS दोनों प्लेटफार्मों पर डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अपडेट संसद के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर भी उपलब्ध रहेंगे।
बजट 2023 भाषण आमतौर पर दो घंटे लंबा होता है। हालाँकि, कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। बजट जमा करने में अधिक समय लग सकता है। वित्त वर्ष 2022 का बजट पेश करने में करीब 1. 5 घंटे का समय लगा। वहीं 2021 का बजट भाषण 2 घंटे 40 मिनट तक चला। यह भाषण भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा था।
इस साल का बजट सत्र 10 फरवरी तक चलने की संभावना है। इस बीच, बजट सत्र का दूसरा चरण 6 मार्च से शुरू हो सकता है और 6 अप्रैल को समाप्त होने की संभावना है।
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दिल्लीः वर्ष दो हज़ार तेईस का बजट पेश करने की लगभग पूरी तैयारी कर ली गई है। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी दो हज़ार तेईस को संसद में नया बजट पेश करेंगी। हर बार की तरह बजट सुबह ग्यारह बजे से शुरू होगा। यदि आप बजट से संबंधित नवीनतम अपडेट प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इसे कहाँ सुनना या देखना है, तो हम आपको विवरण देने के लिए यहां हैं। बजट दो हज़ार तेईस भाषण को पार्लियामेंट टीवी के आधिकारिक चैनल पर देखा जा सकता है। साथ ही इसके अपडेट आप राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन पर भी देख सकते हैं। निर्मला सीतारमण का भाषण दूरदर्शन के यूट्यूब चैनल पर भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा पीआईबी ऑनलाइन बजट पेश करेगा। बजट अपडेट मोबाइल पर भी मिलेगा। वित्त मंत्री का भाषण समाप्त होते ही केंद्रीय बजट को मोबाइल ऐप पर अपलोड कर दिया जाएगा। भाषण Android और Apple OS दोनों प्लेटफार्मों पर डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अपडेट संसद के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर भी उपलब्ध रहेंगे। बजट दो हज़ार तेईस भाषण आमतौर पर दो घंटे लंबा होता है। हालाँकि, कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। बजट जमा करने में अधिक समय लग सकता है। वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस का बजट पेश करने में करीब एक. पाँच घंटाटे का समय लगा। वहीं दो हज़ार इक्कीस का बजट भाषण दो घंटाटे चालीस मिनट तक चला। यह भाषण भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा था। इस साल का बजट सत्र दस फरवरी तक चलने की संभावना है। इस बीच, बजट सत्र का दूसरा चरण छः मार्च से शुरू हो सकता है और छः अप्रैल को समाप्त होने की संभावना है।
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मुंबईःबॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर डीआईडी सुपर मॉम्स की प्रतियोगी सादिका खान शेख के प्यार तूने क्या किया गाने पर डांस परफॉर्मेंस देखकर हैरान रह गईं।
उन्होंने बताया कि, कैसे डांस परफॉर्मेंस ने उन्हें उस समय की याद दिला दी जब स्वर्गीय फिरोज खान ने उन्हें फिल्म प्यार तूने क्या किया में उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की थी।
उर्मिला ने कहा, यह अभिनय इतना सुंदर था कि मेरी आंखों में आंसू आ गए। वास्तव में, इस अभिनय के दौरान, मैं भावनाओं के रोलरकोस्टर से गुजर रही थी।
उन्होंने आगे कहा, मुझे अब भी याद है, इस फिल्म के लॉन्च से पहले, हमने फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग रखी थी। मैं स्क्रीनिंग पर नहीं जा सकी क्योंकि मैं कहीं और शूटिंग कर रही थी, लेकिन मुझे उस रात फिरोज खान का फोन आया और उन्होंने कहा, तुमने मुझे रोने वाली लड़की बना दिया और मुझे रोना पसंद नहीं है। इस प्रदर्शन ने मुझे उस पल की याद दिला दी, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
रेमो डिसूजा, भाग्यश्री दासानी और उर्मिला मातोंडकर द्वारा जज किया गया डांस रियलिटी शो, डीआईडी सुपर मॉम्स जी टीवी पर प्रसारित होता है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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मुंबईःबॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर डीआईडी सुपर मॉम्स की प्रतियोगी सादिका खान शेख के प्यार तूने क्या किया गाने पर डांस परफॉर्मेंस देखकर हैरान रह गईं। उन्होंने बताया कि, कैसे डांस परफॉर्मेंस ने उन्हें उस समय की याद दिला दी जब स्वर्गीय फिरोज खान ने उन्हें फिल्म प्यार तूने क्या किया में उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की थी। उर्मिला ने कहा, यह अभिनय इतना सुंदर था कि मेरी आंखों में आंसू आ गए। वास्तव में, इस अभिनय के दौरान, मैं भावनाओं के रोलरकोस्टर से गुजर रही थी। उन्होंने आगे कहा, मुझे अब भी याद है, इस फिल्म के लॉन्च से पहले, हमने फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग रखी थी। मैं स्क्रीनिंग पर नहीं जा सकी क्योंकि मैं कहीं और शूटिंग कर रही थी, लेकिन मुझे उस रात फिरोज खान का फोन आया और उन्होंने कहा, तुमने मुझे रोने वाली लड़की बना दिया और मुझे रोना पसंद नहीं है। इस प्रदर्शन ने मुझे उस पल की याद दिला दी, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। रेमो डिसूजा, भाग्यश्री दासानी और उर्मिला मातोंडकर द्वारा जज किया गया डांस रियलिटी शो, डीआईडी सुपर मॉम्स जी टीवी पर प्रसारित होता है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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मन का मौन - कल्पना जाल से निकल कर किसी एक विषय पर मन को एकाग्र करना । साधारणतया वाणी के सवरण का नाम मौन है ।
मौन के तीन भेद
1 -- आकार मौन 2-काष्टा मौन 3- अन्तमौन ।
आकार मौन - सकेत, लेखन आदि बाहूय साधनों के द्वारा भावाभिव्यक्ति करना, किन्तु मुंह से कुछ नही बोलना । यह वाक्निरोध का प्रथम चरण है ।
काष्टा मौन-वाणी, श्राकार, सकेत तथा लेखन आदि के द्वारा प्रगट होने की इच्छा का विवेकपूर्वक विसर्जन करना। यहां तक इन्द्रियां प्रतिसंलीन (आत्मोन्मुख) नहीं होतीं, मन विकल्पों से भरा रहता है । क्रमिक आत्मोन्मुखता के लिए चित्तवृत्तियों का अनासक्त होना जरूरी है आसक्तियां नित्य नए संस्कारों को जन्म देती है। जब तक मन को बाहर ले जाने वाली इन्द्रियां मौन नही होती तब तक अन्तर्मोन और समाधि के लिये ललचाना व्यर्थ है । आप जानते है -- उर्वर खेत मे पड़ा हुआ विना प्रतीक्षा के भी समय पर अंकुरित हो जाता है। साधना उसी लहलाती जीवन-खेती का बीज है, जिसके अकुरित होने में आत्मविश्वास की खाद, श्रम और संकल्परूप मेघ अपेक्षित है । इसके बाद साधना पल्लवित और पुष्पित होकर परिपक्व दशा में पहुंच जाती है। यहाँ पहुँचने के बाद ही यह निर्णय होता है --~-आत्मोन्मुखता गति का साधन है और आत्मोपलब्धि उसका अन्तिम परिणाम । यह प्रज्ञा अन्तर्मोन से उत्पन्न होती है। अन्तर्मोन-~अन्तर्मोन मौन का तृतीय चरण है। यहां चेतना जागृत होने लगती है, इन्द्रियो और मन को स्थिर - क्रिया शून्य देखकर वह कुछ समय तक ठहरती भी है। यहा संकल्प विकल्प नहीं होते। विचारो के बहते निर्झरेको धीरे-धीरे मा जाता है। चित्तवृत्तियों के प्रति अन्तर की जागरूकता होती है । इस अन्तर जागरूकता (वृत्तियों की का नाम ही सर्वोत्तम मौन है । आचार्य यशोविजयजी ने को उत्तम माना है। उन्होने कहा-चाग्निरोध रूप मौन को तो हम क्या, एकेन्द्रिय जीव भी निभाते है, किन्तु तोनो योगों ( मन, वचन, कर्म) का विषयों मे प्रवृत्त न होना अनासक्त योग है। इसी योग का दूसरा नाम अन्तर्मोन है । जैसे-
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मन का मौन - कल्पना जाल से निकल कर किसी एक विषय पर मन को एकाग्र करना । साधारणतया वाणी के सवरण का नाम मौन है । मौन के तीन भेद एक -- आकार मौन दो-काष्टा मौन तीन- अन्तमौन । आकार मौन - सकेत, लेखन आदि बाहूय साधनों के द्वारा भावाभिव्यक्ति करना, किन्तु मुंह से कुछ नही बोलना । यह वाक्निरोध का प्रथम चरण है । काष्टा मौन-वाणी, श्राकार, सकेत तथा लेखन आदि के द्वारा प्रगट होने की इच्छा का विवेकपूर्वक विसर्जन करना। यहां तक इन्द्रियां प्रतिसंलीन नहीं होतीं, मन विकल्पों से भरा रहता है । क्रमिक आत्मोन्मुखता के लिए चित्तवृत्तियों का अनासक्त होना जरूरी है आसक्तियां नित्य नए संस्कारों को जन्म देती है। जब तक मन को बाहर ले जाने वाली इन्द्रियां मौन नही होती तब तक अन्तर्मोन और समाधि के लिये ललचाना व्यर्थ है । आप जानते है -- उर्वर खेत मे पड़ा हुआ विना प्रतीक्षा के भी समय पर अंकुरित हो जाता है। साधना उसी लहलाती जीवन-खेती का बीज है, जिसके अकुरित होने में आत्मविश्वास की खाद, श्रम और संकल्परूप मेघ अपेक्षित है । इसके बाद साधना पल्लवित और पुष्पित होकर परिपक्व दशा में पहुंच जाती है। यहाँ पहुँचने के बाद ही यह निर्णय होता है --~-आत्मोन्मुखता गति का साधन है और आत्मोपलब्धि उसका अन्तिम परिणाम । यह प्रज्ञा अन्तर्मोन से उत्पन्न होती है। अन्तर्मोन-~अन्तर्मोन मौन का तृतीय चरण है। यहां चेतना जागृत होने लगती है, इन्द्रियो और मन को स्थिर - क्रिया शून्य देखकर वह कुछ समय तक ठहरती भी है। यहा संकल्प विकल्प नहीं होते। विचारो के बहते निर्झरेको धीरे-धीरे मा जाता है। चित्तवृत्तियों के प्रति अन्तर की जागरूकता होती है । इस अन्तर जागरूकता का विषयों मे प्रवृत्त न होना अनासक्त योग है। इसी योग का दूसरा नाम अन्तर्मोन है । जैसे-
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नई दिल्लीः टीम इंडिया के बैटिंग कोच संजय बांगड़ का जाना तय माना जा रहा है। उनसे इस पद के लिए हुए इंटरव्यू में भी काफी कड़े प्रश्न पूछे गए। मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद की अगुआई वाली चयन समिति ने संजय बांगड़ से डेढ़ घंटे तक सवाल-जवाब किए। बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार, सपोर्ट स्टाफ का चुनाव चयन समिति को ही करना है। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के तौर पर रवि शास्त्री कोच की तलाश है।
सूत्रों के मुताबिक, संजय बांगड़ की छुट्टी तय है और उनकी जगह विक्रम राठौड़ को बल्लेबाजी कोच बनाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। बैटिंग कोच के लिए इंटरव्यू में संजय बांगड़ से करीब 90 मिनट तक प्रश्न पूछे गए। विश्व कप के सेमीफाइनल में मिली हार के बाद से ही संजय बांगड़ के लिए हालात सही नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बांगड़ से सवाल पूछा गया कि आखिर वह टीम के बल्लेबाजी क्रम को सेट क्यों नहीं कर सके. साथ ही दो साल के कार्यकाल में वे सीमित ओवर के प्रारूप में भारतीय टीम की चौथे नंबर की बड़ी समस्या का भी समाधान नहीं तलाश सके।
इतना ही नहीं, वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में महेंद्र सिंह धोनी को सातवें नंबर पर भेजने के फैसले को लेकर भी वे आलोचकों के निशाने पर हैं। बीते वर्ष केपटाउन टेस्ट में भारतीय टीम 208 रन के लक्ष्य का पीछा करने में असफल रही थी। बांगड़ से इसे लेकर भी सवाल पूछे गए. इसके अलावा 2018 में एजबेस्टन टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा को न खिलाने को लेकर भी बांगड़ से जवाब तलब किया गया. यह मैच भारतीय टीम 31 रन से हारी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, संजय बांगड़ इंटरव्यू में पूछे गए अधिकतर सवालों के सही जवाब नहीं दे सके।
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नई दिल्लीः टीम इंडिया के बैटिंग कोच संजय बांगड़ का जाना तय माना जा रहा है। उनसे इस पद के लिए हुए इंटरव्यू में भी काफी कड़े प्रश्न पूछे गए। मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद की अगुआई वाली चयन समिति ने संजय बांगड़ से डेढ़ घंटे तक सवाल-जवाब किए। बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार, सपोर्ट स्टाफ का चुनाव चयन समिति को ही करना है। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के तौर पर रवि शास्त्री कोच की तलाश है। सूत्रों के मुताबिक, संजय बांगड़ की छुट्टी तय है और उनकी जगह विक्रम राठौड़ को बल्लेबाजी कोच बनाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। बैटिंग कोच के लिए इंटरव्यू में संजय बांगड़ से करीब नब्बे मिनट तक प्रश्न पूछे गए। विश्व कप के सेमीफाइनल में मिली हार के बाद से ही संजय बांगड़ के लिए हालात सही नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बांगड़ से सवाल पूछा गया कि आखिर वह टीम के बल्लेबाजी क्रम को सेट क्यों नहीं कर सके. साथ ही दो साल के कार्यकाल में वे सीमित ओवर के प्रारूप में भारतीय टीम की चौथे नंबर की बड़ी समस्या का भी समाधान नहीं तलाश सके। इतना ही नहीं, वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में महेंद्र सिंह धोनी को सातवें नंबर पर भेजने के फैसले को लेकर भी वे आलोचकों के निशाने पर हैं। बीते वर्ष केपटाउन टेस्ट में भारतीय टीम दो सौ आठ रन के लक्ष्य का पीछा करने में असफल रही थी। बांगड़ से इसे लेकर भी सवाल पूछे गए. इसके अलावा दो हज़ार अट्ठारह में एजबेस्टन टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा को न खिलाने को लेकर भी बांगड़ से जवाब तलब किया गया. यह मैच भारतीय टीम इकतीस रन से हारी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, संजय बांगड़ इंटरव्यू में पूछे गए अधिकतर सवालों के सही जवाब नहीं दे सके।
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Sagar News: सागर के रैपुरा में 7 दलित परिवारों के घर तोड़ने के मामले में मायावती का बयान, जानिए क्या कहा ?
सागर। जिले के रैपुरा में वन विभाग ने कार्रवार्ई के नाम पर दलित परिवारों के घरों को गिरा दिया। विभाग की ओर से कहा गया है कि यह सभी घर वन विभाग की जमीन पर बने थें। इस मामले पर अब मायाबती ने ट्वीट करके प्रदेश सरकार की आलोचना की है उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की विध्वंसकारी - द्वेषपूर्ण बुलडोजर राजनीति लोगों के घर और स्कूल तोड़ते-तोड़ते अब PM आवास योजना के अंतर्गत बने गरीबों के मकान भी तोड़ने लगी है, जो अति निंदयनी है।
गुरुवार को दिग्विजय सिंह ने पीड़ित परिवार वालों से मिलाकात की। उन्होंने परिवाहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटना मंत्री राजपूत के इशारे पर हुई है। रैपुरा गांव सुरखी विधानसभा के अन्तगर्त आता यहीं से मंत्री राजपूत विधायक है। जो बात पूर्व सीएम दिग्विजय ने कही वही बात पीड़ित परिवार के लोग भी कह रहे है।
दिग्विजय सिंह के बायन पर प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा है कि 'दिग्विजय सिंह राजनीतिक रोटियां सेकने का काम करते हैं। उन्होंने जिन लोगों के मकान गिराए गए है उनको नए मकान दिए जाने का काम चल रहा है। कांग्रेस को जनता आजमा चुकी है। ये कुछ भी कर लें, अब कुछ होने वाला नहीं है।
दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जवाब देते हुए लिखा- दिग्विजय सिंह जी आप वरिष्ठ नेता हैं। आपके द्वारा इतनी हल्की और झूठी बात लिखना शोभा नहीं देती कि मेरे भाई ने दबाव देकर ग्रामीणों से VIDEO बनवाया। आपने सारी जिंदगी झूठ बोला है, कम से कम इस उम्र में तो सच बोलना शुरू कर दें।
दिग्विजय सिंह के आरोपों पर परिवाहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जवाब दिया उन्होंने कहा दिग्विजय सिंह जी आप वरिष्ठ नेता हैं। आपके द्वारा इतनी हल्की और झूठी बात लिखना शोभा नहीं देती कि मेरे भाई ने दबाव देकर ग्रामीणों से VIDEO बनवाया। आपने सारी जिंदगी झूठ बोला है, कम से कम इस उम्र में तो सच बोलना शुरू कर दें।
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Sagar News: सागर के रैपुरा में सात दलित परिवारों के घर तोड़ने के मामले में मायावती का बयान, जानिए क्या कहा ? सागर। जिले के रैपुरा में वन विभाग ने कार्रवार्ई के नाम पर दलित परिवारों के घरों को गिरा दिया। विभाग की ओर से कहा गया है कि यह सभी घर वन विभाग की जमीन पर बने थें। इस मामले पर अब मायाबती ने ट्वीट करके प्रदेश सरकार की आलोचना की है उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की विध्वंसकारी - द्वेषपूर्ण बुलडोजर राजनीति लोगों के घर और स्कूल तोड़ते-तोड़ते अब PM आवास योजना के अंतर्गत बने गरीबों के मकान भी तोड़ने लगी है, जो अति निंदयनी है। गुरुवार को दिग्विजय सिंह ने पीड़ित परिवार वालों से मिलाकात की। उन्होंने परिवाहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटना मंत्री राजपूत के इशारे पर हुई है। रैपुरा गांव सुरखी विधानसभा के अन्तगर्त आता यहीं से मंत्री राजपूत विधायक है। जो बात पूर्व सीएम दिग्विजय ने कही वही बात पीड़ित परिवार के लोग भी कह रहे है। दिग्विजय सिंह के बायन पर प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा है कि 'दिग्विजय सिंह राजनीतिक रोटियां सेकने का काम करते हैं। उन्होंने जिन लोगों के मकान गिराए गए है उनको नए मकान दिए जाने का काम चल रहा है। कांग्रेस को जनता आजमा चुकी है। ये कुछ भी कर लें, अब कुछ होने वाला नहीं है। दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जवाब देते हुए लिखा- दिग्विजय सिंह जी आप वरिष्ठ नेता हैं। आपके द्वारा इतनी हल्की और झूठी बात लिखना शोभा नहीं देती कि मेरे भाई ने दबाव देकर ग्रामीणों से VIDEO बनवाया। आपने सारी जिंदगी झूठ बोला है, कम से कम इस उम्र में तो सच बोलना शुरू कर दें। दिग्विजय सिंह के आरोपों पर परिवाहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जवाब दिया उन्होंने कहा दिग्विजय सिंह जी आप वरिष्ठ नेता हैं। आपके द्वारा इतनी हल्की और झूठी बात लिखना शोभा नहीं देती कि मेरे भाई ने दबाव देकर ग्रामीणों से VIDEO बनवाया। आपने सारी जिंदगी झूठ बोला है, कम से कम इस उम्र में तो सच बोलना शुरू कर दें।
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Don't Miss!
संजय दत्त ने मुंबई के एक स्थानीय विधायक के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित समारोह में कहा कि वे अगले साल लोकसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। यदि उन्हें टिकट दिया गया तो वे चुनाव लडेंगे।
संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से सांसद है। सन 2009 में लोकसभा चुनाव होंगे और यदि संजय दत्त चुनाव लड़ते हैं तो प्रिया भी चुनाव लडे़गीं कि नहीं, इसमें संदेह है।
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Don't Miss! संजय दत्त ने मुंबई के एक स्थानीय विधायक के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित समारोह में कहा कि वे अगले साल लोकसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। यदि उन्हें टिकट दिया गया तो वे चुनाव लडेंगे। संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से सांसद है। सन दो हज़ार नौ में लोकसभा चुनाव होंगे और यदि संजय दत्त चुनाव लड़ते हैं तो प्रिया भी चुनाव लडे़गीं कि नहीं, इसमें संदेह है।
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Hand Sanitizer: कोविड-19 इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए हैंड सैनिटाइज़र्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी हैंड सैनिटाइज़र के उपयोग की सलाह देते हैं। यहां तक कि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (World Health Organization) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry of India) की तरफ से भी 60 प्रतिशत अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी है।
क्योंकि, स्वच्छ हाथों (Hand Washing) की मदद से ही कोरोना से जंग जीती जा सकती है। खासकर, साबुन और पानी उपलब्ध होने पर सैनिटाइज़र का प्रयोग बहुत ही ज़रूरी हो जाता है। इसीलिए, लोग अब अपने ऑफिस बैग, वर्क डेस्क पर सैनिटाइज़र की बॉटल रखते ही हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को भी उनके साथ सैनिटाइज़र की एक छोटी बोतल रखने के लिए उनके माता-पिता इन दिनों दे रहे हैं। लेकिन, बच्चों के लिए सैनिटाइजर का बहुत अधिक प्रयोग नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसीलिए, बच्चों को सैनिटिज़र के इस्तेमाल से जुड़ी कुछ सावधानियां आपको बरतनी चाहिए।
दरअसल, बच्चों के इम्यून सिस्टम पर हैंड सैनिटाइज़र का बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हैंड सैनिटाइज़र के अधिक इस्तेमाल से गुड बैक्टेरिया को नुकसान पहुंचता है। जिससे, इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। जिससे, उनकी इम्यूनिटी कमज़ोर होने लगती है।
बार-बार या बहुत अधिक मात्रा में हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने से बच्चों को एलर्जी की परेशानी हो सकती है। कमर्शियल हैंड सैनिटाइजर्स में कई प्रकार के केमिकल्स होते हैं। जिससे, बच्चों में एलर्जिक रिएक्शन्स हो सकते हैं। इसी तरह अगर आप किसी ऑर्गेनिक या बच्चों के लिए खासतौर पर बनाए गए सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं। तो, भी थोड़ी सावधानी बरतें। जब पानी और साबुन उपलब्ध हो तो बच्चों का हाथ धुलाएं और उन्हें हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल ना करने दें।
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Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Hand Sanitizer: कोविड-उन्नीस इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए हैंड सैनिटाइज़र्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी हैंड सैनिटाइज़र के उपयोग की सलाह देते हैं। यहां तक कि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से भी साठ प्रतिशत अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी है। क्योंकि, स्वच्छ हाथों की मदद से ही कोरोना से जंग जीती जा सकती है। खासकर, साबुन और पानी उपलब्ध होने पर सैनिटाइज़र का प्रयोग बहुत ही ज़रूरी हो जाता है। इसीलिए, लोग अब अपने ऑफिस बैग, वर्क डेस्क पर सैनिटाइज़र की बॉटल रखते ही हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को भी उनके साथ सैनिटाइज़र की एक छोटी बोतल रखने के लिए उनके माता-पिता इन दिनों दे रहे हैं। लेकिन, बच्चों के लिए सैनिटाइजर का बहुत अधिक प्रयोग नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसीलिए, बच्चों को सैनिटिज़र के इस्तेमाल से जुड़ी कुछ सावधानियां आपको बरतनी चाहिए। दरअसल, बच्चों के इम्यून सिस्टम पर हैंड सैनिटाइज़र का बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हैंड सैनिटाइज़र के अधिक इस्तेमाल से गुड बैक्टेरिया को नुकसान पहुंचता है। जिससे, इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। जिससे, उनकी इम्यूनिटी कमज़ोर होने लगती है। बार-बार या बहुत अधिक मात्रा में हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने से बच्चों को एलर्जी की परेशानी हो सकती है। कमर्शियल हैंड सैनिटाइजर्स में कई प्रकार के केमिकल्स होते हैं। जिससे, बच्चों में एलर्जिक रिएक्शन्स हो सकते हैं। इसी तरह अगर आप किसी ऑर्गेनिक या बच्चों के लिए खासतौर पर बनाए गए सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं। तो, भी थोड़ी सावधानी बरतें। जब पानी और साबुन उपलब्ध हो तो बच्चों का हाथ धुलाएं और उन्हें हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल ना करने दें।
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IPL 2022: Lucknow Super Giants vs Rajasthan Royals, predicted 11, कौन जीतेगा match?
दूसरी ओर आरआर ने कुछ अच्छा क्रिकेट भी खेला है और अंक तालिका में तीसरे स्थान पर है। रॉयल्स ने अब तक सनराइजर्स हैदराबाद और पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को हराया है! हलाकि उनको अपने आखरी मुकलबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था ।
महाबलेश्वर। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को IPL 2023 में चैंपियन बनाने वाले ओपनर बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ शादी के बंधन में बंध गए हैं। ऋतुराज गायकवाड़ ने अपनी गर्लफ्रेंड उत्कर्षा पवार से शादी रचाई है। उत्कर्षा भी एक क्रिकेटर हैं। वह महाराष्ट्र महिला क्रिकेट टीम की सदस्य हैं।
आईपीएल फाइनल जीतने के बाद ऋतुराज ने पहली बार अपने होने वाली पत्नी उत्कर्षा का दीदार कराया था। उत्कर्षा के साथ शादी के कारण रुतुराज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी हिस्सा नहीं लिए। गायकवाड़ ने बीसीसीआई को सूचित किया था कि वह अपनी शादी के कारण उपलब्ध नहीं रहेंगे।
बता दें कि 24 साल की उत्कर्षा मूल रूप से पुणे की रहने की वाली हैं। शुरू में वह फुटबॉल और बैडमिंटन खेला करती थीं लेकिन 11 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट को चुन लिया। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र महिला क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला। इसके अलावा उत्कर्षा ने न्यूट्रिशन और फिटनेस साइंस की पढ़ाई की है।
उत्कर्षा एक ऑलराउंडर हैं। वह बल्लेबाजी के साथ मीडियम पेस गेंदबाजी भी कर सकती हैं। उत्कर्षा के क्रिकेटिंग करियर की बात करें तो वह महाराष्ट्र अंडर-19 टीम में 2012-13 और 2017-18 सेशन में शामिल रही थी। इसके अलावा उन्हें वेस्ट जोन के अंडर-19 टीम में भी खेलने का मौका मिला। इसके बाद उनका चयन महाराष्ट्र के सीनियर टीम में भी हुआ।
उत्कर्षा ने महाराष्ट्र के लिए अपना आखिरी मैच नवंबर 2021 में खेला था। वह 24 साल की हैं और मध्यम गति की गेंदबाज हैं। उत्कर्षा और ऋतुराज लंबे समय में से एक दूसरे को जानते हैं। वे दोनों अपने कॉमन फ्रेंड के साथ एक दूसरे से मिले थे।
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IPL दो हज़ार बाईस: Lucknow Super Giants vs Rajasthan Royals, predicted ग्यारह, कौन जीतेगा match? दूसरी ओर आरआर ने कुछ अच्छा क्रिकेट भी खेला है और अंक तालिका में तीसरे स्थान पर है। रॉयल्स ने अब तक सनराइजर्स हैदराबाद और पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को हराया है! हलाकि उनको अपने आखरी मुकलबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था । महाबलेश्वर। चेन्नई सुपर किंग्स को IPL दो हज़ार तेईस में चैंपियन बनाने वाले ओपनर बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ शादी के बंधन में बंध गए हैं। ऋतुराज गायकवाड़ ने अपनी गर्लफ्रेंड उत्कर्षा पवार से शादी रचाई है। उत्कर्षा भी एक क्रिकेटर हैं। वह महाराष्ट्र महिला क्रिकेट टीम की सदस्य हैं। आईपीएल फाइनल जीतने के बाद ऋतुराज ने पहली बार अपने होने वाली पत्नी उत्कर्षा का दीदार कराया था। उत्कर्षा के साथ शादी के कारण रुतुराज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी हिस्सा नहीं लिए। गायकवाड़ ने बीसीसीआई को सूचित किया था कि वह अपनी शादी के कारण उपलब्ध नहीं रहेंगे। बता दें कि चौबीस साल की उत्कर्षा मूल रूप से पुणे की रहने की वाली हैं। शुरू में वह फुटबॉल और बैडमिंटन खेला करती थीं लेकिन ग्यारह साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट को चुन लिया। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र महिला क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला। इसके अलावा उत्कर्षा ने न्यूट्रिशन और फिटनेस साइंस की पढ़ाई की है। उत्कर्षा एक ऑलराउंडर हैं। वह बल्लेबाजी के साथ मीडियम पेस गेंदबाजी भी कर सकती हैं। उत्कर्षा के क्रिकेटिंग करियर की बात करें तो वह महाराष्ट्र अंडर-उन्नीस टीम में दो हज़ार बारह-तेरह और दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह सेशन में शामिल रही थी। इसके अलावा उन्हें वेस्ट जोन के अंडर-उन्नीस टीम में भी खेलने का मौका मिला। इसके बाद उनका चयन महाराष्ट्र के सीनियर टीम में भी हुआ। उत्कर्षा ने महाराष्ट्र के लिए अपना आखिरी मैच नवंबर दो हज़ार इक्कीस में खेला था। वह चौबीस साल की हैं और मध्यम गति की गेंदबाज हैं। उत्कर्षा और ऋतुराज लंबे समय में से एक दूसरे को जानते हैं। वे दोनों अपने कॉमन फ्रेंड के साथ एक दूसरे से मिले थे।
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मुंबई : नीरव मोदी के 13 हजार करोड़ के बैंक घोटाले से बदनाम हो चुके पंजाब नेशनल बैंक के आर्थिक अनुशासन की पोल तो पहले ही खुल गई थी, लेकिन अब बैंक का ऐसा निर्मम चेहरा सामने आया है, जिसमें उसने मानवीयता को ताक में रख दिया. बिस्तर पर लकवाग्रस्त होकर पड़े जरूरतमंद खातेदार को समय पर उसके खाते में जमा 25 हजार की राशि नहीं पहुंचाई और उसकी मौत हो गई. बैंकों के पेचीदा नियम कैसे किसी व्यक्ति की जान ले लेते हैं. यह उसकी मिसाल है . विरोधस्वरूप परिजन मृतक के शव को लेकर बैंक पहुँच गए.
मानवीय संवेदनाओं के शुष्क होने की यह घटना मुंबई के उल्हासनगर की है . पंजाब नेशनल बैंक के खाताधारक गणेश कांबले को दिसंबर में लकवा लगने पर दो महीने पहले केईएम अस्पताल में भर्ती किया गया था. कांबले की बहन महानंदा यादव ने बताया कि बैंक से उनके खाते में जमा 25 हजार रुपए निकालने के लिए बार -बार बैंक के चक्कर काट रहे थे, क्योंकि इलाज के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी. जबकि बैंक वालों ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कांबले का व्यक्तिगत खाता है और उसके बिना कोई उसके खाते के पैसे कोई नहीं निकाल सकता.
बता दें कि बैंक वाले खाताधारक के हस्ताक्षर की मांग करते रहे जबकि वह तो अस्पताल में बेहोश पड़ा था. सबूत के तौर पर परिवार वालों ने की फोटो खींच कर भी बैंक अधिकारियों को दिखाई तो उन्होंने अस्पताल आकर उसके हस्ताक्षर लेने की बात कही, लेकिन नहीं आए. गणेश कांबले की मौत हो गई. इसके बाद परिजन बैंक वालों की आत्मा को झकझोरने के लिए अपने भाई के शव को लेकर पीएनबी की शाखा पहुँच गए. वह यह दिखाना चाहते थे कि अगर वे समय पर राशि दे देते,तो हम अपने भाई को बचाने के लिए कुछ कर सकते थे. जबकि दूसरी ओर पीएनबी बैंक के अधिकारी सोमनाथ सरोडे ने कहा कि हम खाताधारक के अलावा और किसी को पैसे नहीं दे सकते. मानवता के नाते हम उससे मिलने अस्पताल तक जा सकते थे लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई. मृतक के नॉमिनी को उक्त राशि सौंप दी है.
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मुंबई : नीरव मोदी के तेरह हजार करोड़ के बैंक घोटाले से बदनाम हो चुके पंजाब नेशनल बैंक के आर्थिक अनुशासन की पोल तो पहले ही खुल गई थी, लेकिन अब बैंक का ऐसा निर्मम चेहरा सामने आया है, जिसमें उसने मानवीयता को ताक में रख दिया. बिस्तर पर लकवाग्रस्त होकर पड़े जरूरतमंद खातेदार को समय पर उसके खाते में जमा पच्चीस हजार की राशि नहीं पहुंचाई और उसकी मौत हो गई. बैंकों के पेचीदा नियम कैसे किसी व्यक्ति की जान ले लेते हैं. यह उसकी मिसाल है . विरोधस्वरूप परिजन मृतक के शव को लेकर बैंक पहुँच गए. मानवीय संवेदनाओं के शुष्क होने की यह घटना मुंबई के उल्हासनगर की है . पंजाब नेशनल बैंक के खाताधारक गणेश कांबले को दिसंबर में लकवा लगने पर दो महीने पहले केईएम अस्पताल में भर्ती किया गया था. कांबले की बहन महानंदा यादव ने बताया कि बैंक से उनके खाते में जमा पच्चीस हजार रुपए निकालने के लिए बार -बार बैंक के चक्कर काट रहे थे, क्योंकि इलाज के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी. जबकि बैंक वालों ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कांबले का व्यक्तिगत खाता है और उसके बिना कोई उसके खाते के पैसे कोई नहीं निकाल सकता. बता दें कि बैंक वाले खाताधारक के हस्ताक्षर की मांग करते रहे जबकि वह तो अस्पताल में बेहोश पड़ा था. सबूत के तौर पर परिवार वालों ने की फोटो खींच कर भी बैंक अधिकारियों को दिखाई तो उन्होंने अस्पताल आकर उसके हस्ताक्षर लेने की बात कही, लेकिन नहीं आए. गणेश कांबले की मौत हो गई. इसके बाद परिजन बैंक वालों की आत्मा को झकझोरने के लिए अपने भाई के शव को लेकर पीएनबी की शाखा पहुँच गए. वह यह दिखाना चाहते थे कि अगर वे समय पर राशि दे देते,तो हम अपने भाई को बचाने के लिए कुछ कर सकते थे. जबकि दूसरी ओर पीएनबी बैंक के अधिकारी सोमनाथ सरोडे ने कहा कि हम खाताधारक के अलावा और किसी को पैसे नहीं दे सकते. मानवता के नाते हम उससे मिलने अस्पताल तक जा सकते थे लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई. मृतक के नॉमिनी को उक्त राशि सौंप दी है.
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दिल्ली एमसीडी स्कूल के एक शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत हो गई. सैलरी ना मिल पाने की वजह से परेशान थे. लोन की किस्त नहीं चुका पा रहे थे, इस वजह से घर पर वॉरंट पहुंचा था.
44 वर्ष के शिक्षक खेमचंद एमसीडी के सिटी जोन के चौंसठ खंबा प्राइमरी स्कूल में पढ़ाते थे. बुधवार सुबह तड़के हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. वह अपने पीछे वह 5 बच्चों को छोड़ गए हैं. सभी बच्चे अभी स्कूल में ही पढ़ते हैं, जिसमें 4 लड़कियां और एक लड़का है.
खेमचंद मुख्य रूप से अलवर के रहने वाले थे, लेकिन दिल्ली के शास्त्री पार्क की एमसीडी कॉलोनी में परिवार समेत रहते थे. बीते 3 महीनों से एमसीडी के शिक्षकों को सैलरी नहीं मिली है. इस वजह से खेमचंद परेशान रहते थे. इनके परिवार पर कई लोन चल रहे थे, जिसकी वह किस्त अदा नहीं कर पा रहे थे. बीते दिनों उनके पास लोन चुकाने का वॉरंट भी आ गया था, जिसके बाद से वह और तनाव में रहने लगे थे.
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दिल्ली एमसीडी स्कूल के एक शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत हो गई. सैलरी ना मिल पाने की वजह से परेशान थे. लोन की किस्त नहीं चुका पा रहे थे, इस वजह से घर पर वॉरंट पहुंचा था. चौंतालीस वर्ष के शिक्षक खेमचंद एमसीडी के सिटी जोन के चौंसठ खंबा प्राइमरी स्कूल में पढ़ाते थे. बुधवार सुबह तड़के हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. वह अपने पीछे वह पाँच बच्चों को छोड़ गए हैं. सभी बच्चे अभी स्कूल में ही पढ़ते हैं, जिसमें चार लड़कियां और एक लड़का है. खेमचंद मुख्य रूप से अलवर के रहने वाले थे, लेकिन दिल्ली के शास्त्री पार्क की एमसीडी कॉलोनी में परिवार समेत रहते थे. बीते तीन महीनों से एमसीडी के शिक्षकों को सैलरी नहीं मिली है. इस वजह से खेमचंद परेशान रहते थे. इनके परिवार पर कई लोन चल रहे थे, जिसकी वह किस्त अदा नहीं कर पा रहे थे. बीते दिनों उनके पास लोन चुकाने का वॉरंट भी आ गया था, जिसके बाद से वह और तनाव में रहने लगे थे.
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पूर्व रेल होल्ड टिलिंग नामक एक और वैज्ञानिकने सकूफ ईंधनद्वारा चलनेवाला राकेट बनाया था । यह राकेट ६०० मील फी घंटेकी रफ्तार से छह मीलकी ऊँचाई तक पहुँचा भी था । परन्तु बादमें रेल होल्डकी हनोवर के पास अपनी प्रयोगशालामें प्रयोग करते समय आकस्मिक धड़ाकेसे मृत्यु हो गई । उसके तीन सहायक थे । इनमें एक तरुणी थी । वह भी उसके साथ ही धड़ाकेसे मृत्युको प्राप्त हो गई । इस तरह चन्द्रलोकके मार्गको प्रशस्त करनेवालोंको अब तक अनेक बार हँसते हँसते अपने प्राणों की आहुतियाँ दे देनी पड़ी हैं ।
कुछ वर्ष पूर्व डा० जार्ज हेरेट रेडियम के सम्बन्धमें खोज करते करते स्वर्ग सिधार गये । डा० हेरेट लेरी वोज़िर अस्पताल (Lari boisiere Hospital ) के रेडियोग्राफिक विभाग ( Radiographic department ) के अध्यक्ष थे । रेडियमके सम्बन्धमें खोज करतें करते वे रोग-प्रसित हो गये थे। अपनी मृत्युसे पहले भी ऐसे ही कार्यो बहुत से कष्ट और यातनाएँ सहन कर चुके थे । सन् १९०२ में उन्होंने एक्स-किरणों ( X - Rays ) पर कार्य आरम्भ किया था। इसमें उनके दाहिने हाथकी एक उँगली जल गई और उस उँगलीको उन्हें कटवा देना पड़ा । उस समय वे युद्ध क्षेत्रमें सैनिकोंकी सेवा कर रहेः थे । युद्धके बाद उनको और भी अधिक भीषण यातनाएँ सहन करनी पड़ीं। दो सालके बाद उनकी एक बाँह जाती रही, परन्तु वें फिर भी काम करते ही रहे । उनकी दशा भी बिगड़ती हीं गई । मृत्युकें दस मास पूर्व उन्हें महत्त्वपूर्ण सैनिक सम्मान ( Cross of theLegion of Honour ) से विभूषित किया गया था.।.
विज्ञानकी वेदीपर.
डा० हेरेटका सारा जीवन आत्म-त्याग और बलिदानके उदाहरणोंसे भरा हुआ है। उन्होंने रेडियमके अन्वेषण में अपने को न्यौछावर कर दिया । रेडियमकी किरणोंसे आहत होनेपर भी उन्होंने अपनी उद्देश्य पूर्तिसे मुख नहीं मोड़ा । बार बार आपरेशन होने पर भी वे पीछे नहीं हटे । कहा जाता है कि उनके जितने ही आपरेशन हुए, उनका उत्साह भी उतना ही अधिक बढ़ता गया और वे मानवसमाजके कल्याण के लिए निरन्तर कार्य करते रहे । रेडियमके आविष्कार मेडम क्यूरीके साथ काम करते हुए उनके पति पीयरी क्यूरीकी उँगलियाँ बिलकुल गल गई थीं । क्यूरीदम्पतिके अतिरिक्त और भी बहुतसे वैज्ञानिकोंको रेडियम-सम्बन्धी सन्धानमें शारीरिक कष्ट सहन करने पड़े हैं ।
भारतीय विद्यार्थी
एक समय था जब भारतका विज्ञान-भाण्डार परिपूर्ण था, भारतमें उच्च कोटिके वैज्ञानिकों की कमी न थी; परन्तु बीचमें हमने विज्ञानकी घोर अवहेलना की जिसका परिणाम हमारी वर्तमान अधोगति है ।
भारतमें भी लोग विज्ञानकी ओर अग्रसर होने लगे हैं और थोड़ेसे ही समयमें भारतीय वैज्ञानिकोंने अपने महत्त्वपूर्ण आविष्कारों और अन्वेषण समस्त संसारको आश्चर्यचकित कर दिया है। भारतीयोंने भी यथाशक्ति विज्ञानकी सेवा की है । यद्यपि इन लोगोंकी संख्या उँगलियोंपर गिनी जा सकती है, पर इन्होंने जो कुछ कार्य किये हैं, उनके बलपर हम संसारमें गर्वसे अपना मस्तक ऊपर उठा सकते हैं । • तीन-चार वर्ष पूर्व कलकत्तेके प्रभातकुमार मित्र नामक विद्यार्थीने विज्ञान के लिए प्रदान करके संसारके सम्मुख इस बातको प्रमाणित
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पूर्व रेल होल्ड टिलिंग नामक एक और वैज्ञानिकने सकूफ ईंधनद्वारा चलनेवाला राकेट बनाया था । यह राकेट छः सौ मील फी घंटेकी रफ्तार से छह मीलकी ऊँचाई तक पहुँचा भी था । परन्तु बादमें रेल होल्डकी हनोवर के पास अपनी प्रयोगशालामें प्रयोग करते समय आकस्मिक धड़ाकेसे मृत्यु हो गई । उसके तीन सहायक थे । इनमें एक तरुणी थी । वह भी उसके साथ ही धड़ाकेसे मृत्युको प्राप्त हो गई । इस तरह चन्द्रलोकके मार्गको प्रशस्त करनेवालोंको अब तक अनेक बार हँसते हँसते अपने प्राणों की आहुतियाँ दे देनी पड़ी हैं । कुछ वर्ष पूर्व डाशून्य जार्ज हेरेट रेडियम के सम्बन्धमें खोज करते करते स्वर्ग सिधार गये । डाशून्य हेरेट लेरी वोज़िर अस्पताल के रेडियोग्राफिक विभाग के अध्यक्ष थे । रेडियमके सम्बन्धमें खोज करतें करते वे रोग-प्रसित हो गये थे। अपनी मृत्युसे पहले भी ऐसे ही कार्यो बहुत से कष्ट और यातनाएँ सहन कर चुके थे । सन् एक हज़ार नौ सौ दो में उन्होंने एक्स-किरणों पर कार्य आरम्भ किया था। इसमें उनके दाहिने हाथकी एक उँगली जल गई और उस उँगलीको उन्हें कटवा देना पड़ा । उस समय वे युद्ध क्षेत्रमें सैनिकोंकी सेवा कर रहेः थे । युद्धके बाद उनको और भी अधिक भीषण यातनाएँ सहन करनी पड़ीं। दो सालके बाद उनकी एक बाँह जाती रही, परन्तु वें फिर भी काम करते ही रहे । उनकी दशा भी बिगड़ती हीं गई । मृत्युकें दस मास पूर्व उन्हें महत्त्वपूर्ण सैनिक सम्मान से विभूषित किया गया था.।. विज्ञानकी वेदीपर. डाशून्य हेरेटका सारा जीवन आत्म-त्याग और बलिदानके उदाहरणोंसे भरा हुआ है। उन्होंने रेडियमके अन्वेषण में अपने को न्यौछावर कर दिया । रेडियमकी किरणोंसे आहत होनेपर भी उन्होंने अपनी उद्देश्य पूर्तिसे मुख नहीं मोड़ा । बार बार आपरेशन होने पर भी वे पीछे नहीं हटे । कहा जाता है कि उनके जितने ही आपरेशन हुए, उनका उत्साह भी उतना ही अधिक बढ़ता गया और वे मानवसमाजके कल्याण के लिए निरन्तर कार्य करते रहे । रेडियमके आविष्कार मेडम क्यूरीके साथ काम करते हुए उनके पति पीयरी क्यूरीकी उँगलियाँ बिलकुल गल गई थीं । क्यूरीदम्पतिके अतिरिक्त और भी बहुतसे वैज्ञानिकोंको रेडियम-सम्बन्धी सन्धानमें शारीरिक कष्ट सहन करने पड़े हैं । भारतीय विद्यार्थी एक समय था जब भारतका विज्ञान-भाण्डार परिपूर्ण था, भारतमें उच्च कोटिके वैज्ञानिकों की कमी न थी; परन्तु बीचमें हमने विज्ञानकी घोर अवहेलना की जिसका परिणाम हमारी वर्तमान अधोगति है । भारतमें भी लोग विज्ञानकी ओर अग्रसर होने लगे हैं और थोड़ेसे ही समयमें भारतीय वैज्ञानिकोंने अपने महत्त्वपूर्ण आविष्कारों और अन्वेषण समस्त संसारको आश्चर्यचकित कर दिया है। भारतीयोंने भी यथाशक्ति विज्ञानकी सेवा की है । यद्यपि इन लोगोंकी संख्या उँगलियोंपर गिनी जा सकती है, पर इन्होंने जो कुछ कार्य किये हैं, उनके बलपर हम संसारमें गर्वसे अपना मस्तक ऊपर उठा सकते हैं । • तीन-चार वर्ष पूर्व कलकत्तेके प्रभातकुमार मित्र नामक विद्यार्थीने विज्ञान के लिए प्रदान करके संसारके सम्मुख इस बातको प्रमाणित
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हमारे गांजाँका पुननिर्माण
७ आम तौर पर दमकमानेसे पहले
आनकी देवानी
मिल जाया करती है। बगर ऐसे मामार दिलाई प्रोत-सेना महक उठनेका इन्तजार करके भीम परिस्थितिको साम सुरू कर देमी जबसे उसकी संभावना दिखाई दे।
८ बदर यह आयोजन बढ़ वो पूरे समय काम करनेवाले कार्याइसके लिए रहता बच्छा होगा कि यह बिरूरी मीकि ऐसा हो ही। बाक यह है कि जितने भी अच्छे स्त्री-पुरूप मि सरसे काम किन तभी मिल सकते है जब कि स्वयसेवक ऐसे सेमि जो जीवन के विविध कार्यों में इस हाँ पर उनको पास इतना अवकास हो कि अपने इसाको रहनेवाले साथ मित्रताने समय पैदा कर सकेमा मे सब योन्मतायें रखते हो जो कि सात सदस्य होनी चाहिये ।
९ इसके बाकी एक बास पोशाक होनी चाहिये जिससे लावर बिना किसी कटियाकि पहचाना जा सके।
मे सिर्फ नाम सूचनायें हैं। इनके आधार पर एक केला अपना विवान बना सकता है ।
हिसभासनमें भी एक मर्माबित इस स्थान होगा। यह माम्यता मेरी अपूर्ण साका बिना में काम चला सकूमा यह कहनेकी मेरी यह कहकी हिम्मत है कि बिना फौज में काम कागा। मैं जरूर ऐसी स्थिति का करताप की मौत नही होगी। पर इसका सुन्दा पता वो अनुभबसे ही कम है। यह बायकी पुत्र हो प्रकारको होगी। उसमें बहिसा विश्वास रखनेवालकी सी होगी। मे कोगो संब होगे सरकार नहीं । कोम उनकी मदद करते होने और रोज-रो कम होतेजानेका मे बाधानीसे मुकाबला कर स
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हमारे गांजाँका पुननिर्माण सात आम तौर पर दमकमानेसे पहले आनकी देवानी मिल जाया करती है। बगर ऐसे मामार दिलाई प्रोत-सेना महक उठनेका इन्तजार करके भीम परिस्थितिको साम सुरू कर देमी जबसे उसकी संभावना दिखाई दे। आठ बदर यह आयोजन बढ़ वो पूरे समय काम करनेवाले कार्याइसके लिए रहता बच्छा होगा कि यह बिरूरी मीकि ऐसा हो ही। बाक यह है कि जितने भी अच्छे स्त्री-पुरूप मि सरसे काम किन तभी मिल सकते है जब कि स्वयसेवक ऐसे सेमि जो जीवन के विविध कार्यों में इस हाँ पर उनको पास इतना अवकास हो कि अपने इसाको रहनेवाले साथ मित्रताने समय पैदा कर सकेमा मे सब योन्मतायें रखते हो जो कि सात सदस्य होनी चाहिये । नौ इसके बाकी एक बास पोशाक होनी चाहिये जिससे लावर बिना किसी कटियाकि पहचाना जा सके। मे सिर्फ नाम सूचनायें हैं। इनके आधार पर एक केला अपना विवान बना सकता है । हिसभासनमें भी एक मर्माबित इस स्थान होगा। यह माम्यता मेरी अपूर्ण साका बिना में काम चला सकूमा यह कहनेकी मेरी यह कहकी हिम्मत है कि बिना फौज में काम कागा। मैं जरूर ऐसी स्थिति का करताप की मौत नही होगी। पर इसका सुन्दा पता वो अनुभबसे ही कम है। यह बायकी पुत्र हो प्रकारको होगी। उसमें बहिसा विश्वास रखनेवालकी सी होगी। मे कोगो संब होगे सरकार नहीं । कोम उनकी मदद करते होने और रोज-रो कम होतेजानेका मे बाधानीसे मुकाबला कर स
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BOX OFFICE धमाका.. जब हुआ शाहरूख- सलमान- अक्षय- सनी में जोरदार भिड़ंत!
जब सलमान खान, शाहरूख खान, अक्षय कुमार, आमिर खान की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टकराई। तो ऐसा रहा नतीजा।
शाहरूख खान की 'रईस' और ऋतिक रोशन की 'काबिल' का धमाकेदार क्लैश अभी लोग भूले ही हैं कि एक बार फिर शाहरूख- अक्षय की फिल्मों की टक्कर खबरें बना रही है। माना जा रहा है कि दोनों की फिल्में अगस्त 2017 में क्लैश करेगी।
बहरहाल, यह पहली बार नहीं है बॉलीवुड के दो सुपरस्टार आमने सामने आने वाले हैं। बल्कि सालों से कभी सलमान- शाहरूख, कभी अक्षय कुमार तो कभी अजय देवगन की फिल्में टकराती रही हैं। कई बार दोनों ही फिल्में ऐवरेज रह जाती हैं, तो कई बार होता है बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कलेक्शन।
वैसे बता दें, शाहरूख खान को क्लैश किंग कहा जाता है। दिलवाले को छोड़कर शायद ही कभी शाहरूख की फिल्म, दूसरी फिल्मों से प्रभावित हुई हो! लेकिन अगस्त में होने वाला यह क्लैश किसे विनर बनाएगा.. देखते हैं।
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Don't Miss! BOX OFFICE धमाका.. जब हुआ शाहरूख- सलमान- अक्षय- सनी में जोरदार भिड़ंत! जब सलमान खान, शाहरूख खान, अक्षय कुमार, आमिर खान की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टकराई। तो ऐसा रहा नतीजा। शाहरूख खान की 'रईस' और ऋतिक रोशन की 'काबिल' का धमाकेदार क्लैश अभी लोग भूले ही हैं कि एक बार फिर शाहरूख- अक्षय की फिल्मों की टक्कर खबरें बना रही है। माना जा रहा है कि दोनों की फिल्में अगस्त दो हज़ार सत्रह में क्लैश करेगी। बहरहाल, यह पहली बार नहीं है बॉलीवुड के दो सुपरस्टार आमने सामने आने वाले हैं। बल्कि सालों से कभी सलमान- शाहरूख, कभी अक्षय कुमार तो कभी अजय देवगन की फिल्में टकराती रही हैं। कई बार दोनों ही फिल्में ऐवरेज रह जाती हैं, तो कई बार होता है बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कलेक्शन। वैसे बता दें, शाहरूख खान को क्लैश किंग कहा जाता है। दिलवाले को छोड़कर शायद ही कभी शाहरूख की फिल्म, दूसरी फिल्मों से प्रभावित हुई हो! लेकिन अगस्त में होने वाला यह क्लैश किसे विनर बनाएगा.. देखते हैं।
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बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में वाट्सएप ग्रुप पर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला मैसेज डालने वाले विहिप उपाध्यक्ष संजय भवसार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सेंधवा क्षेत्र के पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) सुनील जौली ने बुधवार को बताया कि भवसार ने मंगलवार को वाट्सएप के जरिये धार्मिक भावनाएं भड़काने का एक संदेश जारी किया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर देर रात भवसार को गिरफ्तार कर लिया।
विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष संजय भवसार बलवाड़ी गांव के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में विहिप ने बलवाड़ी गांव में बुधवार को बाजार बंद का ऐलान किया। एसडीओ के अनुसार, बंद की घोषणा जरूर की थी, लेकिन बंद सफल नहीं रहा।
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बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में वाट्सएप ग्रुप पर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला मैसेज डालने वाले विहिप उपाध्यक्ष संजय भवसार को गिरफ्तार कर लिया गया है। सेंधवा क्षेत्र के पुलिस अनुविभागीय अधिकारी सुनील जौली ने बुधवार को बताया कि भवसार ने मंगलवार को वाट्सएप के जरिये धार्मिक भावनाएं भड़काने का एक संदेश जारी किया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर देर रात भवसार को गिरफ्तार कर लिया। विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष संजय भवसार बलवाड़ी गांव के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में विहिप ने बलवाड़ी गांव में बुधवार को बाजार बंद का ऐलान किया। एसडीओ के अनुसार, बंद की घोषणा जरूर की थी, लेकिन बंद सफल नहीं रहा।
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सुप्रीम कोर्ट हरिद्वार धर्म संसद में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाले अभद्र भाषा के खिलाफ जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर कल सुनवाई करेगा। [कुर्बान अली और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य]।
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की तीन जजों की बेंच बुधवार को सुबह 10:30 बजे पहले आइटम के रूप में करेगी।
पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने याचिका दायर कर विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के निर्देश देने की मांग की है।
इससे पहले सोमवार (10 जनवरी) को, सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया था जब मामले का उल्लेख भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने किया था, जिन्होंने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय को मामले का संज्ञान लेने की आवश्यकता है।
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सुप्रीम कोर्ट हरिद्वार धर्म संसद में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाले अभद्र भाषा के खिलाफ जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर कल सुनवाई करेगा। [कुर्बान अली और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य]। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की तीन जजों की बेंच बुधवार को सुबह दस:तीस बजे पहले आइटम के रूप में करेगी। पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने याचिका दायर कर विशेष जांच दल द्वारा मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के निर्देश देने की मांग की है। इससे पहले सोमवार को, सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया था जब मामले का उल्लेख भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने किया था, जिन्होंने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय को मामले का संज्ञान लेने की आवश्यकता है।
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फिलहाल शेखर कपूर अब हो गए हैं पूरी तरह से व्यस्त अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर। इसके लिए इन दिनों वह बिजी हैं इस श्रृंखला के लिए कलाकारों का चुनाव करने में। फिल्म को लेकर अपने उत्साह को वास्तविक रूप में बयां करने के लिए इन्होंने भी लिया है सोशल मीडिया का सहारा। सोशल मीडिया के जरिए ही इन्होंने इस बात की जानकारी दी है।
टि्वटर पर इन्होंने पोस्ट किया है कि क्रेग पीयर्स की ओर से शेक्सपीयर पर लिखी गई बेहतरीन श्रृंखला फिल्म बनाने के लिए 'एलिजाबेथ' के अपने सहयोगियों के साथ एक बार फिर मिलकर काम करना बेहद अद्भुत अनुभव है। बता दें कि कुल मिलाकर बाफ्टा पुरस्कार जीत चुके ये निर्देशक फिल्म के लिए मशहूर हॉलीवुड लेखक क्रेग पीयर्स के साथ काम कर रहे हैं। क्रेस पीयर्स के बारे में बता दें कि इन्होंने 'द ग्रेट गैट्सबाई' और 'रोमियो जूलियट' जैसी फिल्मों की पटकथा तैयार की है। फिल्म दर्शकों के बीच काफी हिट भी रही है।
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फिलहाल शेखर कपूर अब हो गए हैं पूरी तरह से व्यस्त अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर। इसके लिए इन दिनों वह बिजी हैं इस श्रृंखला के लिए कलाकारों का चुनाव करने में। फिल्म को लेकर अपने उत्साह को वास्तविक रूप में बयां करने के लिए इन्होंने भी लिया है सोशल मीडिया का सहारा। सोशल मीडिया के जरिए ही इन्होंने इस बात की जानकारी दी है। टि्वटर पर इन्होंने पोस्ट किया है कि क्रेग पीयर्स की ओर से शेक्सपीयर पर लिखी गई बेहतरीन श्रृंखला फिल्म बनाने के लिए 'एलिजाबेथ' के अपने सहयोगियों के साथ एक बार फिर मिलकर काम करना बेहद अद्भुत अनुभव है। बता दें कि कुल मिलाकर बाफ्टा पुरस्कार जीत चुके ये निर्देशक फिल्म के लिए मशहूर हॉलीवुड लेखक क्रेग पीयर्स के साथ काम कर रहे हैं। क्रेस पीयर्स के बारे में बता दें कि इन्होंने 'द ग्रेट गैट्सबाई' और 'रोमियो जूलियट' जैसी फिल्मों की पटकथा तैयार की है। फिल्म दर्शकों के बीच काफी हिट भी रही है।
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पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान एक और नई मुसीबत में फंस गए हैं। इस बार जो मुसीबत आई, वह खुद उनके लिए, उनकी पार्टी के लिए और पार्टी के कुछ नेताओंं के लिए भारी पड़ सकती है।
इस्लामाबाद। इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद की कुर्सी क्या छोड़ी, उनके दुर्दिन शुरू हो गए। हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान की महिला जज के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस मामले में उनके खिलाफ अवमानना का केस दर्ज हुआ। मगर इसके पहले और इसके बाद भी उन पर केस दर्ज हुए। इसके पहले उन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का केस दर्ज हुआ, तो बाद में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सार्वजनिक सभा के आयोजन पर प्रतिबंध होने के बाद भी एक रैली करने को लेकर केस दर्ज हो गया है।
दरअसल, इमरान खान ने बीते 20 अगस्त को इस्लामाबाद में एक रैली को संबोधित किया। अब स्थानीय पुलिस का कहना है कि यहां धारा 144 लगी हुई थी। बावजूद इसके इमरान खान, उनकी पार्टी के नेताओं ने भारी भीड़ जुटाई। इस मामले में इमरान खान पर, उनकी पार्टी पीटीआई और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ एक और नया केस दर्ज किया गया है।
बता दें कि इमरान खान की पार्टी का नाम पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई है। पाकिस्तान पुलिस ने इमरान खान के अलावा, उनकी पार्टी और इसके कई नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद हाल ही में उन पर आतंकवाद से जुड़े एक मामले में केस दर्ज हुआ और बाद में उन्होंने एक महिला जज के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी। इस पर भी उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया। इस मामले में तो उन्हें 31 अगस्त तक कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है।
इससे पहले, इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी और उनकी गिरफ्तारी पर 25 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गई थी। इमरान खान के खिलाफ आतंकवाद निरोधी अधिनियम के तहत पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इमरान खान ने रैली में महिला जज के साथ-साथ पुलिस के कुछ अधिकारियों को भी धमकाया था।
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पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान एक और नई मुसीबत में फंस गए हैं। इस बार जो मुसीबत आई, वह खुद उनके लिए, उनकी पार्टी के लिए और पार्टी के कुछ नेताओंं के लिए भारी पड़ सकती है। इस्लामाबाद। इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद की कुर्सी क्या छोड़ी, उनके दुर्दिन शुरू हो गए। हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान की महिला जज के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस मामले में उनके खिलाफ अवमानना का केस दर्ज हुआ। मगर इसके पहले और इसके बाद भी उन पर केस दर्ज हुए। इसके पहले उन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का केस दर्ज हुआ, तो बाद में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सार्वजनिक सभा के आयोजन पर प्रतिबंध होने के बाद भी एक रैली करने को लेकर केस दर्ज हो गया है। दरअसल, इमरान खान ने बीते बीस अगस्त को इस्लामाबाद में एक रैली को संबोधित किया। अब स्थानीय पुलिस का कहना है कि यहां धारा एक सौ चौंतालीस लगी हुई थी। बावजूद इसके इमरान खान, उनकी पार्टी के नेताओं ने भारी भीड़ जुटाई। इस मामले में इमरान खान पर, उनकी पार्टी पीटीआई और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ एक और नया केस दर्ज किया गया है। बता दें कि इमरान खान की पार्टी का नाम पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई है। पाकिस्तान पुलिस ने इमरान खान के अलावा, उनकी पार्टी और इसके कई नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद हाल ही में उन पर आतंकवाद से जुड़े एक मामले में केस दर्ज हुआ और बाद में उन्होंने एक महिला जज के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी। इस पर भी उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया। इस मामले में तो उन्हें इकतीस अगस्त तक कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। इससे पहले, इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी और उनकी गिरफ्तारी पर पच्चीस अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गई थी। इमरान खान के खिलाफ आतंकवाद निरोधी अधिनियम के तहत पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इमरान खान ने रैली में महिला जज के साथ-साथ पुलिस के कुछ अधिकारियों को भी धमकाया था।
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ब्लादीमिर इत्योच अपने लकवाग्रस्त दायें हाथ को क्वल वे ऊपर रखे हुए निश्चल पडे थे । तपते माथे पर ठडी पट्टी रखी हुई थी।
शाम का समय था। मेज पर हल्के प्रकाशवाला लैम्प जल रहा था। ब्लादीमिर इल्पीच को भोजन के बाद श्राराम करने को कहा गया था । मगर वह किसी तरह सो नहीं पा रहे थे ।
क्ल मास्को मे सोवियत समाजवादी जनतल सघ की सोवियता की पहली काग्रेस शुरू हुई थी । क्ल ३० दिसबर १९२२ को काग्रेस न सोवियत समाजवादी जनतत्र सघ की स्थापना से सबंधित संधि की पुष्टि की थी । ब्लादीमिर इल्यीच इस ऐतिहासिक दिन की बहुत समय से तयारी करते रहे थे ।
सभी लोग एक्दम नही समझ पाये कि सोवियत संघ की स्थापना इतनी महत्त्वपूर्ण क्यो है, व्लादीमिर इल्यीच इसके लिये इतने जोश और दढता के साथ प्रयत्न क्या कर रहे है।
लेनिन चाहते थे कि सोवियत समाजवादी जनतन सघ एक सवथा नवीन राज्य, जारशाही रूम से एक सवथा भिन्न राज्य हो । जारशाही के काल मे क्या था ? एकमात्र रूस था । उकइना और बेलोरूस वा मानो अस्तित्व हो नही था । और ग्रामनिया आजरवजान तथा जाजिया को मा श्रग मात्र ही माना जाता था । गरम्सी जातिया का विमो भी तरह की ग्राजादी नहीं थी । स्कूलो मे इनके बच्चे अपनी मातभाषा म शिक्षा नहीं पा सकते थे। बहुत सी जातिया का अपना साहित्य और यहा तक वि अपना लिखित भाषा भी नहीं थी। छाटी जातिया वा विकास या वाई मौका नही दिया जाता था। उन्ह निवृष्ट माना जाता था। लेनिन को हम प्रकार की श्रममानता से घार नफरत थी ।
वह विचारा में गहर खा गये थे। पर आयी और वान लगावर मुनन नगी
नास्तातीनाना दग्याजे " मा गय है ?"
"म सा नहीं रहा हू, नाघूशा राम की तैयारी कर रहा ह । । " वह बिना वाई माहट विय कमरे में दाखिल हुई। हले उजालवानी
बत्ती बुझाकर उन्होंने दूमरी बत्ती जला दी। मारा कमरा प्रकाश से नहा उठा । तकिये पर टिवा ब्लादीमिर त्योच वा पीला चेहरा भी भारारित हो गया ।
खाने वे कमरे म दीवार घडी ने छह वा घटा बजाया। ठीक उसी समय व्लादीमिर इल्यीच की स्टेना मरीया अवीमोला वोलोदिचेवा न कमरे मे प्रवेश किया। वह दुबली पतली कोई तीस एक वर्ष की बुद्धिमत्ती और समझदार युवती थी । वह वागज-पैसिल लेकर चारपाई के करीब रखी मेज़ व पास बैठ गयो ।
"हा, तो, " व्लादीमिर इल्यीच बोले ।
आज डाक्टरा न उहे चालीस मिनट तक डिक्टेशन दन की अनुमति दे दी थी। चालीस मिनट बहुत वाफो है। इसलिए भी कि नख उनके मस्तिष्क म लगभग पूरी तरह तयार है ।
अगर ब्लादीमिर इल्योच वाग्रेस में उपस्थित हात, तो वही कहते, जा इस समय लिखा रहे थे। यह साथिया के लिए उनका निर्देश था । साथी उह सुनेंगे, उनका निर्देश मानेंगे और उसके अनुसार सोवियत संघ वा निर्माण वरगे। लेनिन का एक सख्त निर्देश यह था कि छाटी जातिया को किसी भी अधिकार से वंचित न किया जाये। जानिया की उपक्षा, अवमानना ठोक नही। सभी मोवियत जनतत्ता का समान होना चाहिये । हलमेल से रहना चाहिये। भार तब सोवियत सघ एक शक्तिशाली और यायपूर्ण राज्य बन जायेगा । और सारे विश्व में साम्राज्यवाद वे जूए तले दबे हुए राष्ट्रो मे चेतना का सचार हा जायेगा
नादेज्दा कोन्स्तान्तीनोव्जा पास के कमरे में बठी हुई उनकी परिचित, प्रिय आवाज को सुन रही थी । वह एक दूसर में फसी हुई अगुलिया पर ठोडी टिकाये बैठी थी। उनका दुबल चेहरा चिन्तामिश्रित प्रेम की भा से चमव रहा था ।
डिक्टेशन खत्म होने पर वोलादिचेवा चली गयी, तो नादज्दा कोन्स्ता तीनोव्ना उसकी जगह पर रोगी की शय्या के पास आकर बैठ गयी । उनके चेहरे पर मुस्कान खेल रही थी। ब्लादीमिर इत्योच को उनकी आखा में दुख या भय की कोई छाया नही दीखो। नादेज्दा वोन्स्तान्तीनोव्ना की शान्त-सौम्य मुद्रा ने ब्लादीमिर इल्यीच के मन की हलचल को भी शात कर दिया ।
भाद्या जानती हो, मुझे क्या याद आ रहा है ?" विचारमग्न मुद्रा मे ब्लादीमिर इत्यीच बोले । "मुझे याद आ रहा है कि पिताजी सिम्बीस्व
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ब्लादीमिर इत्योच अपने लकवाग्रस्त दायें हाथ को क्वल वे ऊपर रखे हुए निश्चल पडे थे । तपते माथे पर ठडी पट्टी रखी हुई थी। शाम का समय था। मेज पर हल्के प्रकाशवाला लैम्प जल रहा था। ब्लादीमिर इल्पीच को भोजन के बाद श्राराम करने को कहा गया था । मगर वह किसी तरह सो नहीं पा रहे थे । क्ल मास्को मे सोवियत समाजवादी जनतल सघ की सोवियता की पहली काग्रेस शुरू हुई थी । क्ल तीस दिसबर एक हज़ार नौ सौ बाईस को काग्रेस न सोवियत समाजवादी जनतत्र सघ की स्थापना से सबंधित संधि की पुष्टि की थी । ब्लादीमिर इल्यीच इस ऐतिहासिक दिन की बहुत समय से तयारी करते रहे थे । सभी लोग एक्दम नही समझ पाये कि सोवियत संघ की स्थापना इतनी महत्त्वपूर्ण क्यो है, व्लादीमिर इल्यीच इसके लिये इतने जोश और दढता के साथ प्रयत्न क्या कर रहे है। लेनिन चाहते थे कि सोवियत समाजवादी जनतन सघ एक सवथा नवीन राज्य, जारशाही रूम से एक सवथा भिन्न राज्य हो । जारशाही के काल मे क्या था ? एकमात्र रूस था । उकइना और बेलोरूस वा मानो अस्तित्व हो नही था । और ग्रामनिया आजरवजान तथा जाजिया को मा श्रग मात्र ही माना जाता था । गरम्सी जातिया का विमो भी तरह की ग्राजादी नहीं थी । स्कूलो मे इनके बच्चे अपनी मातभाषा म शिक्षा नहीं पा सकते थे। बहुत सी जातिया का अपना साहित्य और यहा तक वि अपना लिखित भाषा भी नहीं थी। छाटी जातिया वा विकास या वाई मौका नही दिया जाता था। उन्ह निवृष्ट माना जाता था। लेनिन को हम प्रकार की श्रममानता से घार नफरत थी । वह विचारा में गहर खा गये थे। पर आयी और वान लगावर मुनन नगी नास्तातीनाना दग्याजे " मा गय है ?" "म सा नहीं रहा हू, नाघूशा राम की तैयारी कर रहा ह । । " वह बिना वाई माहट विय कमरे में दाखिल हुई। हले उजालवानी बत्ती बुझाकर उन्होंने दूमरी बत्ती जला दी। मारा कमरा प्रकाश से नहा उठा । तकिये पर टिवा ब्लादीमिर त्योच वा पीला चेहरा भी भारारित हो गया । खाने वे कमरे म दीवार घडी ने छह वा घटा बजाया। ठीक उसी समय व्लादीमिर इल्यीच की स्टेना मरीया अवीमोला वोलोदिचेवा न कमरे मे प्रवेश किया। वह दुबली पतली कोई तीस एक वर्ष की बुद्धिमत्ती और समझदार युवती थी । वह वागज-पैसिल लेकर चारपाई के करीब रखी मेज़ व पास बैठ गयो । "हा, तो, " व्लादीमिर इल्यीच बोले । आज डाक्टरा न उहे चालीस मिनट तक डिक्टेशन दन की अनुमति दे दी थी। चालीस मिनट बहुत वाफो है। इसलिए भी कि नख उनके मस्तिष्क म लगभग पूरी तरह तयार है । अगर ब्लादीमिर इल्योच वाग्रेस में उपस्थित हात, तो वही कहते, जा इस समय लिखा रहे थे। यह साथिया के लिए उनका निर्देश था । साथी उह सुनेंगे, उनका निर्देश मानेंगे और उसके अनुसार सोवियत संघ वा निर्माण वरगे। लेनिन का एक सख्त निर्देश यह था कि छाटी जातिया को किसी भी अधिकार से वंचित न किया जाये। जानिया की उपक्षा, अवमानना ठोक नही। सभी मोवियत जनतत्ता का समान होना चाहिये । हलमेल से रहना चाहिये। भार तब सोवियत सघ एक शक्तिशाली और यायपूर्ण राज्य बन जायेगा । और सारे विश्व में साम्राज्यवाद वे जूए तले दबे हुए राष्ट्रो मे चेतना का सचार हा जायेगा नादेज्दा कोन्स्तान्तीनोव्जा पास के कमरे में बठी हुई उनकी परिचित, प्रिय आवाज को सुन रही थी । वह एक दूसर में फसी हुई अगुलिया पर ठोडी टिकाये बैठी थी। उनका दुबल चेहरा चिन्तामिश्रित प्रेम की भा से चमव रहा था । डिक्टेशन खत्म होने पर वोलादिचेवा चली गयी, तो नादज्दा कोन्स्ता तीनोव्ना उसकी जगह पर रोगी की शय्या के पास आकर बैठ गयी । उनके चेहरे पर मुस्कान खेल रही थी। ब्लादीमिर इत्योच को उनकी आखा में दुख या भय की कोई छाया नही दीखो। नादेज्दा वोन्स्तान्तीनोव्ना की शान्त-सौम्य मुद्रा ने ब्लादीमिर इल्यीच के मन की हलचल को भी शात कर दिया । भाद्या जानती हो, मुझे क्या याद आ रहा है ?" विचारमग्न मुद्रा मे ब्लादीमिर इत्यीच बोले । "मुझे याद आ रहा है कि पिताजी सिम्बीस्व
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रिजलैंड, 14 जून (एजेंसी)
भारतीय गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी यहां पालमेटियो चैम्पियनशिप के आखिरी दौर में चार अंडर 67 के शानदार कार्ड के साथ संयुक्त रूप से 25वें स्थान पर रहे। चौथे दौर में शुरू के पांच होल में से चार में बर्डी लगाकर उन्होंने शानदार शुरूआत की। 4 अंडर के कार्ड से उनका कुल स्कोर पांच अंडर 279 रहा। इससे पहले उन्होंन शुरूआती तीन दौर में 69-73-70 का स्कोर किया था। इस प्रदर्शन से हालांकि भारतीय खिलाड़ी को राहत मिली होगी क्योंकि इससे पहले वह तीन टूर्नामेंटों में कट हासिल करने में नाकाम रहे थे। इससे वह सात स्थान के सुधार के साथ 115 वें स्थान पर पहुंच गये है।
सत्र के आखिर में इस रैंकिंग के शीर्ष 125 खिलाड़ी फेडएक्सकप प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करेंगे।
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रिजलैंड, चौदह जून भारतीय गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी यहां पालमेटियो चैम्पियनशिप के आखिरी दौर में चार अंडर सरसठ के शानदार कार्ड के साथ संयुक्त रूप से पच्चीसवें स्थान पर रहे। चौथे दौर में शुरू के पांच होल में से चार में बर्डी लगाकर उन्होंने शानदार शुरूआत की। चार अंडर के कार्ड से उनका कुल स्कोर पांच अंडर दो सौ उन्यासी रहा। इससे पहले उन्होंन शुरूआती तीन दौर में उनहत्तर तिहत्तर सत्तर का स्कोर किया था। इस प्रदर्शन से हालांकि भारतीय खिलाड़ी को राहत मिली होगी क्योंकि इससे पहले वह तीन टूर्नामेंटों में कट हासिल करने में नाकाम रहे थे। इससे वह सात स्थान के सुधार के साथ एक सौ पंद्रह वें स्थान पर पहुंच गये है। सत्र के आखिर में इस रैंकिंग के शीर्ष एक सौ पच्चीस खिलाड़ी फेडएक्सकप प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करेंगे।
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APPENDIX ȚI
or A.D. 1879. Place of deposit - Thākura Jai Baksha Sirbha, Mithaurā Post Office Kesarāgañja, District Bahraich ( Oudh ). Note- उद्धरण व विषय No. 363 ( f ) के अनुसार ।
तिथि- संवत १९३६ शाके १८०१ चैत्र मासे कृपक्षे तिथे । दुइज साम बासरे हस्त नक्षत्रे लिषतं दलजीत सिंह रैकवार के ।
No. 363 (h). Dröna Parva by Sabala Simha Chauhāna. Substance-Country-made paper. Leaves - 32. Size - 122 × 57 inches. Lines per page - 22. Extent - 1,100 Anushtup Slokas. Appearance - Old. Character - Nāgari. Date manuscript - Samvat 1900 or A. ]). 1843. Place of deposit Babu Padma Baksha Simha, Lavedapur, District Bahraich.
Beginning - श्री गणेशायनमः ॥ रथ दोनपर्व लिष्यते ॥ चौपाई ॥ श्रो गुरु चरन दंडवत करिये । जा प्रसाद भवसागर तरिष ॥ वन्दा रामचन्द्र ग्धु नन्दन महावीर दसकंध निकंदन । दोग्घ वाहु कमल दल लोचन ।। गनिका व्याध अहिल्या मोचन । व्यास देव कलि पातक हरता । चारिवेद श्री भारथ करता ।। श्रोता जनमेजय गुन सागर । महावीर कुरु वंम उजागर ॥ उत्तम नगर चंडूगढ़ साजा । भूपति मित्रसेन तहं राजा ।। डाहा ।। रघुपति चरन मनाइ के व्यास देव धरि ध्यान । द्वोन पर्व भाषा रचत सबल सिंह चौहान ॥ १ ॥ चौ० ॥ तब भोषम सर सेज्या लीन्हेउ । दुर्जोधन तब अति दुख कोन्हेउ ।।
End - दोनबंधु जाके रथ सारथ । मारि सकै को रन में पारथ ॥ कुरुपति लरत सैनवल कारन । मेरे वल तुमही जगतारन ।। सो सुनि कृष्ण बहुत सुख मानो । नृप की परम साधु करि जान्यै ।। दुर्योधन तब करन बुलाया ।
तुम बल हम यह भारथ ठाना । मित्र से समै आइ नियराना ॥ मुकुट बांधि सैनप पै लरिष । सो सुनि करन कहन प्रसनागे। दुर्योधन राजा के आगे ॥ नृप निरषहु मेरा पुरुषाग्थ । पंडा सैन बधैौ रन पारथ ॥ दुई दिन रन मेरो सिर भारा ।। निश्चै अर्जुन करौं संहारा । सो सुनि दुर्योधन सुख पायो । सैनापति करि मुकुट बंधाया ।। दोहा ।। दोपवें भाषा रचा सवन सिंह चौहान । पंडव के रक्षक सदा भक्त वस्य भगवाना ॥ इति श्री महाभारते दोनपर्व भाषा कृते ग्रष्टमा अध्याय ८ संपूर्ण मस्तु । पुसमासे कृष्ण पछे द्वादस्यंग तिथा सम्बत् १९०० श्री राम ।।
Subject - पृ॰ १-१२ तक । भोष्म के मारे जाने पर द्रोण को सेनापति बनाना और चक्रव्यूह युद्ध व अभिमन्यु वध वर्णन।
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APPENDIX ȚI or A.D. एक हज़ार आठ सौ उन्यासी. Place of deposit - Thākura Jai Baksha Sirbha, Mithaurā Post Office Kesarāgañja, District Bahraich . Note- उद्धरण व विषय No. तीन सौ तिरेसठ के अनुसार । तिथि- संवत एक हज़ार नौ सौ छत्तीस शाके एक हज़ार आठ सौ एक चैत्र मासे कृपक्षे तिथे । दुइज साम बासरे हस्त नक्षत्रे लिषतं दलजीत सिंह रैकवार के । No. तीन सौ तिरेसठ . Dröna Parva by Sabala Simha Chauhāna. Substance-Country-made paper. Leaves - बत्तीस. Size - एक सौ बाईस × सत्तावन inches. Lines per page - बाईस. Extent - एक,एक सौ Anushtup Slokas. Appearance - Old. Character - Nāgari. Date manuscript - Samvat एक हज़ार नौ सौ or A. ]). एक हज़ार आठ सौ तैंतालीस. Place of deposit Babu Padma Baksha Simha, Lavedapur, District Bahraich. Beginning - श्री गणेशायनमः ॥ रथ दोनपर्व लिष्यते ॥ चौपाई ॥ श्रो गुरु चरन दंडवत करिये । जा प्रसाद भवसागर तरिष ॥ वन्दा रामचन्द्र ग्धु नन्दन महावीर दसकंध निकंदन । दोग्घ वाहु कमल दल लोचन ।। गनिका व्याध अहिल्या मोचन । व्यास देव कलि पातक हरता । चारिवेद श्री भारथ करता ।। श्रोता जनमेजय गुन सागर । महावीर कुरु वंम उजागर ॥ उत्तम नगर चंडूगढ़ साजा । भूपति मित्रसेन तहं राजा ।। डाहा ।। रघुपति चरन मनाइ के व्यास देव धरि ध्यान । द्वोन पर्व भाषा रचत सबल सिंह चौहान ॥ एक ॥ चौशून्य ॥ तब भोषम सर सेज्या लीन्हेउ । दुर्जोधन तब अति दुख कोन्हेउ ।। End - दोनबंधु जाके रथ सारथ । मारि सकै को रन में पारथ ॥ कुरुपति लरत सैनवल कारन । मेरे वल तुमही जगतारन ।। सो सुनि कृष्ण बहुत सुख मानो । नृप की परम साधु करि जान्यै ।। दुर्योधन तब करन बुलाया । तुम बल हम यह भारथ ठाना । मित्र से समै आइ नियराना ॥ मुकुट बांधि सैनप पै लरिष । सो सुनि करन कहन प्रसनागे। दुर्योधन राजा के आगे ॥ नृप निरषहु मेरा पुरुषाग्थ । पंडा सैन बधैौ रन पारथ ॥ दुई दिन रन मेरो सिर भारा ।। निश्चै अर्जुन करौं संहारा । सो सुनि दुर्योधन सुख पायो । सैनापति करि मुकुट बंधाया ।। दोहा ।। दोपवें भाषा रचा सवन सिंह चौहान । पंडव के रक्षक सदा भक्त वस्य भगवाना ॥ इति श्री महाभारते दोनपर्व भाषा कृते ग्रष्टमा अध्याय आठ संपूर्ण मस्तु । पुसमासे कृष्ण पछे द्वादस्यंग तिथा सम्बत् एक हज़ार नौ सौ श्री राम ।। Subject - पृ॰ एक-बारह तक । भोष्म के मारे जाने पर द्रोण को सेनापति बनाना और चक्रव्यूह युद्ध व अभिमन्यु वध वर्णन।
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Tesla को भारत में 3 और नए मॉडल्स को लाने की अनुमति मिल गयी है, कंपनी के पास अब कुल 7 नए मॉडल लाने की अनुमति हो चुकी है। हालांकि यह अलग अलग कार ना होकर मॉडल 3 व मॉडल वाय के अलग-अलग वैरिएंट हो सकती है। दोनों ही मॉडल को कई बार भारत में टेस्ट करते देखा जा चुका है, साथ ही कंपनी के अधिक पॉवर वाले चार्जर को भी देखा जा चुका है।
Tesla के जिस मॉडल वाय को मनाली में देखा गया था अब उसे भी वापस मुंबई लाया जा चुका है और कंपनी टाटा के सीसीएस2 चार्जर से इस कार को चार्ज कर रही है जो कि 25 kW की क्षमता रखता है। अभी तक टेस्ला ने इन कारों के बारें में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, कंपनी के यह दोनों ही वाहन एंट्री लेवल है जिस वजह से भारतीय बाजार में इन्हें पहले लाया जा रहा है।
Tesla वर्तमानअ में विदेशी बाजार में मॉडल एस व एक्स की भी बिक्री करती है लेकिन यह दोनों ही बड़े और प्रीमियम वाहन है जो कि भारतीय बाजार के लिहाज से बहुत ही महंगे और आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकते हैं। इसके साथ ही इन कारों पर और भी अधिक इम्पोर्ट टैक्स लगने वाला है जो कि वाहनों की कीमत को और भी अधिक कर देगी।
भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी समान इम्पोर्ट टैक्स वसूल करती है जिस वजह से एलोन मस्क लगातार सरकार से टैक्स कम करने की आग्रह कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर मांग पर्याप्त होती है तो कंपनी भारत में फैक्ट्री भी स्थापित कर सकती है। हालांकि नीति आयोग ने टेस्ला के मांग को खारिज कर दिया है और कहा है कि टैक्स कम चाहिए तो उन्हें भारत में कारों का उत्पादन करना होगा।
टेस्ला भारत में अपने डीलरशिप भी खोलने वाली है, सबसे पहले कंपनी मेट्रो शहरों में दस्तक देने वाली है। इन डीलरशिप को दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई जैसे शहरों में खोला जाएगा, कंपनी ने भारत में अपना रजिस्ट्रेशन बैंगलोर में टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कराया है। कंपनी सबसे पहले भारत में वाहनों कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट के रूप में लाने वाली है।
भारत में 40,000 डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60% का आयात शुल्क और 40,000 डॉलर से अधिक कीमत वाले वाहनों पर 100% आयात शुल्क लगाया जाता है। इन दरों पर टेस्ला कारें भारत में खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी जिससे उनकी बिक्री सीमित हो जाएगी। बता दें कि टेस्ला ने जुलाई, 2021 में परिवहन मंत्रालय और उद्योग मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कंपनी ने इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क (Import Duty) को घटाकार 40 फीसदी करने का आग्रह किया था।
अभी भारत में इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क 60 से लेकर 100 फीसदी है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मार्च में कहा था कि अगर टेस्ला भारत में स्थानीय तौर पर इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार होगी, तो सरकार कंपनी को प्रोत्साहन दे सकती है ताकि चीन के मुकाबले भारत में इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन सस्ता हो सके।
टेस्ला के सुपरचार्जर को भारत लाया जा रहा है। कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक कारों के लिए 150kW के चार्जिंग स्टेशन मंगा रही है जिसमें दो चार्जिंग सॉकेट, Type 2 और CCS2 मिलते हैं। टेस्ला के चार्जिंग स्टेशन कहां उपलब्ध होंगे, इसकी भी जानकारी साझा नहीं की गई है। आपको बता दें कि टेस्ला भारत में 'मॉडल 3' और 'मॉडल Y' इलेक्ट्रिक कारों की टेस्टिंग कर रही है।
टेस्ला के भारत में प्रवेश किये जाने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है और कंपनी कई वैरिएंट लाने वाली है। ऐसे में कंपनी भारतीय बाजार के हिसाब से अपने वाहन के कुछ सस्ते वैरिएंट भी उपलब्ध करा सकती है जो कि अब तक बाजार में मौजूद नहीं है।
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Don't Miss! Tesla को भारत में तीन और नए मॉडल्स को लाने की अनुमति मिल गयी है, कंपनी के पास अब कुल सात नए मॉडल लाने की अनुमति हो चुकी है। हालांकि यह अलग अलग कार ना होकर मॉडल तीन व मॉडल वाय के अलग-अलग वैरिएंट हो सकती है। दोनों ही मॉडल को कई बार भारत में टेस्ट करते देखा जा चुका है, साथ ही कंपनी के अधिक पॉवर वाले चार्जर को भी देखा जा चुका है। Tesla के जिस मॉडल वाय को मनाली में देखा गया था अब उसे भी वापस मुंबई लाया जा चुका है और कंपनी टाटा के सीसीएसदो चार्जर से इस कार को चार्ज कर रही है जो कि पच्चीस किलोवाट की क्षमता रखता है। अभी तक टेस्ला ने इन कारों के बारें में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, कंपनी के यह दोनों ही वाहन एंट्री लेवल है जिस वजह से भारतीय बाजार में इन्हें पहले लाया जा रहा है। Tesla वर्तमानअ में विदेशी बाजार में मॉडल एस व एक्स की भी बिक्री करती है लेकिन यह दोनों ही बड़े और प्रीमियम वाहन है जो कि भारतीय बाजार के लिहाज से बहुत ही महंगे और आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकते हैं। इसके साथ ही इन कारों पर और भी अधिक इम्पोर्ट टैक्स लगने वाला है जो कि वाहनों की कीमत को और भी अधिक कर देगी। भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी समान इम्पोर्ट टैक्स वसूल करती है जिस वजह से एलोन मस्क लगातार सरकार से टैक्स कम करने की आग्रह कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर मांग पर्याप्त होती है तो कंपनी भारत में फैक्ट्री भी स्थापित कर सकती है। हालांकि नीति आयोग ने टेस्ला के मांग को खारिज कर दिया है और कहा है कि टैक्स कम चाहिए तो उन्हें भारत में कारों का उत्पादन करना होगा। टेस्ला भारत में अपने डीलरशिप भी खोलने वाली है, सबसे पहले कंपनी मेट्रो शहरों में दस्तक देने वाली है। इन डीलरशिप को दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई जैसे शहरों में खोला जाएगा, कंपनी ने भारत में अपना रजिस्ट्रेशन बैंगलोर में टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कराया है। कंपनी सबसे पहले भारत में वाहनों कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट के रूप में लाने वाली है। भारत में चालीस,शून्य डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर साठ% का आयात शुल्क और चालीस,शून्य डॉलर से अधिक कीमत वाले वाहनों पर एक सौ% आयात शुल्क लगाया जाता है। इन दरों पर टेस्ला कारें भारत में खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी जिससे उनकी बिक्री सीमित हो जाएगी। बता दें कि टेस्ला ने जुलाई, दो हज़ार इक्कीस में परिवहन मंत्रालय और उद्योग मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कंपनी ने इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क को घटाकार चालीस फीसदी करने का आग्रह किया था। अभी भारत में इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क साठ से लेकर एक सौ फीसदी है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मार्च में कहा था कि अगर टेस्ला भारत में स्थानीय तौर पर इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार होगी, तो सरकार कंपनी को प्रोत्साहन दे सकती है ताकि चीन के मुकाबले भारत में इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन सस्ता हो सके। टेस्ला के सुपरचार्जर को भारत लाया जा रहा है। कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक कारों के लिए एक सौ पचास किलोवाट के चार्जिंग स्टेशन मंगा रही है जिसमें दो चार्जिंग सॉकेट, Type दो और CCSदो मिलते हैं। टेस्ला के चार्जिंग स्टेशन कहां उपलब्ध होंगे, इसकी भी जानकारी साझा नहीं की गई है। आपको बता दें कि टेस्ला भारत में 'मॉडल तीन' और 'मॉडल Y' इलेक्ट्रिक कारों की टेस्टिंग कर रही है। टेस्ला के भारत में प्रवेश किये जाने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है और कंपनी कई वैरिएंट लाने वाली है। ऐसे में कंपनी भारतीय बाजार के हिसाब से अपने वाहन के कुछ सस्ते वैरिएंट भी उपलब्ध करा सकती है जो कि अब तक बाजार में मौजूद नहीं है।
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लुधियाना- तलवंडी साबो : अमेरिका में पिछले दिनों कुछ-एक सिख पंथक धड़ों द्वारा घोषित किए गए ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' को सरबत खालसा द्वारा नियुक्त किए गए सिंह साहिबान भाई ध्यान सिंह मंड कार्यकारिणी जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब और भाई बलजीत सिंह दादूवाल जत्थेदार तख्त श्री दमदमा साहिब ने सहमति प्रकट नहीं की और कहा कि इसमें समस्त पंथक धड़ों की शमूलियत नहीं की जाती तब तक इसको परवान नहीं किया जा सकता। एक संयुक्त प्रैस विज्ञिप्त में उन्होंने कहा कि ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' सरबत खालसा 2015 का प्रस्ताव है और इसको बनाने की जिम्मेदारी चब्बे की धरती पर हुए सरबत खालसा द्वारा नियुक्त किए गए चार सिंह साहिबान की है। किसी भी अकेले व्यक्ति की नहीं और जो भी सरबत खालसा को मानता ही नहीं, जबकि वे सरबत खालसा और उसके 13 प्रस्तावों को पानी पी पीकर कोसते हुए विरोध करते रहे है, उनको बिल्कुल इजाजत नही दी जा सकती।
जत्थेदार मंड और जत्थेदार दादूवाल ने कहा कि पंथ के भले के लिए कोई भी जत्थेबंदी या व्यक्ति काम करें, हमारी शुभकामनाएं उनके साथ है परंतु सांझे मुददों पर कोई भी मनमर्जी, जल्दबाजी या गलत निर्णय करें, उसको हमारा समर्थन नहीं। उन्होंने कहा कि पहले भी फतेहगढ़ साहिब से 150 सदस्यी कमेटी की घोषणा हुई फिर इंगलैंड में 15 सदस्यी कमेटी का ऐलान हुआ, जिसके साथ हमने सहमति प्रगट नहीं की और उन कमेटियों को रदद किया, अब अमेरिका की कमेटी ने भी सबको भरोसे में लिए बिना ही कुछ लोगों ने जल्दबाजी में ऐलान कर दिया है। इसीलिए हमें आखिर बयान जारी करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उक्त लोगों ने ऐसा करके पंथ में दुविधा बढ़ाई है, जो बर्दाश्तयोग नहीं। जत्थेदारों ने कहा कि ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' बनाने के लिए बहुत काम किए है और बहुत संगठनों के आगुओं से मिले परंतु अभी सहमति नहीं बन रही थी, जिस कारण सांझे ऐलान में देरी हो रही है। अगर इसी प्रकार दो-चार सौ सिख इकटठा होकर एक समूह ऐसी संस्था ऐलान करती है तो हम हजारों सिख इकटठा करके कभी भी घोषणा कर देते लेकिन यह महान संस्था एक धड़े या समूह की नहीं बल्कि समूह पंथक दॢदयों की सांझा दर्द है, जो जल्द ही एकता बनाकर घोषित की जाएंगी।
स्मरण रहे कि जिन धड़ों ने अनेक मुश्किलों के बावजूद सरबत खालसा 2015 किया, जहां लाखों देश-विदेश के सिखों ने शमूलियत की, उस सरबत खालसा समूह का कोई भी प्रतिनिधि इन कमेटियों के इकटठ में शामिल नहीं, इसलिए इसको मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था सिखों को गुमराह ना करें और संयुक्त व महान संस्था बनाने का कार्य सर्व सहमति किया जाएंगा।
अन्य विशेष खबरों के लिए पढ़िये पंजाब केसरी की अन्य रिपोर्ट।
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लुधियाना- तलवंडी साबो : अमेरिका में पिछले दिनों कुछ-एक सिख पंथक धड़ों द्वारा घोषित किए गए ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' को सरबत खालसा द्वारा नियुक्त किए गए सिंह साहिबान भाई ध्यान सिंह मंड कार्यकारिणी जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब और भाई बलजीत सिंह दादूवाल जत्थेदार तख्त श्री दमदमा साहिब ने सहमति प्रकट नहीं की और कहा कि इसमें समस्त पंथक धड़ों की शमूलियत नहीं की जाती तब तक इसको परवान नहीं किया जा सकता। एक संयुक्त प्रैस विज्ञिप्त में उन्होंने कहा कि ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' सरबत खालसा दो हज़ार पंद्रह का प्रस्ताव है और इसको बनाने की जिम्मेदारी चब्बे की धरती पर हुए सरबत खालसा द्वारा नियुक्त किए गए चार सिंह साहिबान की है। किसी भी अकेले व्यक्ति की नहीं और जो भी सरबत खालसा को मानता ही नहीं, जबकि वे सरबत खालसा और उसके तेरह प्रस्तावों को पानी पी पीकर कोसते हुए विरोध करते रहे है, उनको बिल्कुल इजाजत नही दी जा सकती। जत्थेदार मंड और जत्थेदार दादूवाल ने कहा कि पंथ के भले के लिए कोई भी जत्थेबंदी या व्यक्ति काम करें, हमारी शुभकामनाएं उनके साथ है परंतु सांझे मुददों पर कोई भी मनमर्जी, जल्दबाजी या गलत निर्णय करें, उसको हमारा समर्थन नहीं। उन्होंने कहा कि पहले भी फतेहगढ़ साहिब से एक सौ पचास सदस्यी कमेटी की घोषणा हुई फिर इंगलैंड में पंद्रह सदस्यी कमेटी का ऐलान हुआ, जिसके साथ हमने सहमति प्रगट नहीं की और उन कमेटियों को रदद किया, अब अमेरिका की कमेटी ने भी सबको भरोसे में लिए बिना ही कुछ लोगों ने जल्दबाजी में ऐलान कर दिया है। इसीलिए हमें आखिर बयान जारी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उक्त लोगों ने ऐसा करके पंथ में दुविधा बढ़ाई है, जो बर्दाश्तयोग नहीं। जत्थेदारों ने कहा कि ' वल्र्ड सिख पार्लीमेंट ' बनाने के लिए बहुत काम किए है और बहुत संगठनों के आगुओं से मिले परंतु अभी सहमति नहीं बन रही थी, जिस कारण सांझे ऐलान में देरी हो रही है। अगर इसी प्रकार दो-चार सौ सिख इकटठा होकर एक समूह ऐसी संस्था ऐलान करती है तो हम हजारों सिख इकटठा करके कभी भी घोषणा कर देते लेकिन यह महान संस्था एक धड़े या समूह की नहीं बल्कि समूह पंथक दॢदयों की सांझा दर्द है, जो जल्द ही एकता बनाकर घोषित की जाएंगी। स्मरण रहे कि जिन धड़ों ने अनेक मुश्किलों के बावजूद सरबत खालसा दो हज़ार पंद्रह किया, जहां लाखों देश-विदेश के सिखों ने शमूलियत की, उस सरबत खालसा समूह का कोई भी प्रतिनिधि इन कमेटियों के इकटठ में शामिल नहीं, इसलिए इसको मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था सिखों को गुमराह ना करें और संयुक्त व महान संस्था बनाने का कार्य सर्व सहमति किया जाएंगा। अन्य विशेष खबरों के लिए पढ़िये पंजाब केसरी की अन्य रिपोर्ट।
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हिसार। लक्ष्य निर्धारित कर दृढ़ संकल्प के साथ जब कोई आगे बढ़ता है तो उसे मंजिल अवश्य मिलती है। उसके रास्ते में आने वाली हर बाधा अपने आप रास्ता छोड़ देती है। ऐसा ही एक उदाहरण नारनौंद की बेटी व हिसार की बहू ममता सैनी ने पेश किया है। हरियाणा सिविल सर्विसेज (ज्यूडिशियल) में चयन पर ममता ने अपना जज बनने का सपना साकार किया है।
ममता सैनी का लक्ष्य बचपन से ही जज बनने का था। वर्ष 2013 में एक सड़क दुर्घटना में ममता के पिता व बहन का निधन हो गया। सिर से पिता का साया उठने के बाद ममता के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम डगमगाने लगे लेकिन ममता के बुलंद हौसले के चलते इस बाधा को भी उसने पार कर लिया। ममता सैनी ने इस सफलता का श्रेय अपने मां संतोष देवी, पिता राजेंद्र कुमार के अलावा सास शकुंतला देवी, ससुर पूर्णचंद, पति जतिन व गुरुजनों को दिया है। नारनौंद में जन्मी ममता ने हिसार के नूर निवास स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद फतेहचंद स्कूल से 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण की। ममता ने बीकॉम की डिग्री एफसी कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ममता ने एलएलबी की और हिसार की ओम यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया। एलएलबी करने के बाद ममता ने परीक्षा दी और जज बनने का मुकाम हासिल किया।
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हिसार। लक्ष्य निर्धारित कर दृढ़ संकल्प के साथ जब कोई आगे बढ़ता है तो उसे मंजिल अवश्य मिलती है। उसके रास्ते में आने वाली हर बाधा अपने आप रास्ता छोड़ देती है। ऐसा ही एक उदाहरण नारनौंद की बेटी व हिसार की बहू ममता सैनी ने पेश किया है। हरियाणा सिविल सर्विसेज में चयन पर ममता ने अपना जज बनने का सपना साकार किया है। ममता सैनी का लक्ष्य बचपन से ही जज बनने का था। वर्ष दो हज़ार तेरह में एक सड़क दुर्घटना में ममता के पिता व बहन का निधन हो गया। सिर से पिता का साया उठने के बाद ममता के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम डगमगाने लगे लेकिन ममता के बुलंद हौसले के चलते इस बाधा को भी उसने पार कर लिया। ममता सैनी ने इस सफलता का श्रेय अपने मां संतोष देवी, पिता राजेंद्र कुमार के अलावा सास शकुंतला देवी, ससुर पूर्णचंद, पति जतिन व गुरुजनों को दिया है। नारनौंद में जन्मी ममता ने हिसार के नूर निवास स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद फतेहचंद स्कूल से बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण की। ममता ने बीकॉम की डिग्री एफसी कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ममता ने एलएलबी की और हिसार की ओम यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया। एलएलबी करने के बाद ममता ने परीक्षा दी और जज बनने का मुकाम हासिल किया।
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मेरठ/लखनऊ। इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजनीति में भगवान हनुमान एक राजनीति का विषय बने हुए हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रेंड नेता विनीत अग्रवाल शारदा तो दो कदम आगे निकल गए. उन्होंने भगवान श्रीराम और हनुमान को वैश्य समाज के बता दिया. विनीत अग्रवाल शारदा ने कहा भगवान श्री राम और हनुमान दोनों ही वैश्य समाज से हैं.
दरअसल विनीत अग्रवाल शारदा अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. वहीं राम मंदिर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसने कहा कि राम मंदिर का निर्माण नहीं हो रहा वहां तो लगातार राम मंदिर का काम चल रहा है. जल्द ही भगवान श्रीराम तंबू से निकल कर अपने भव्य मंदिर में रहेंगे.
दरअसल यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में एक रैली के दौरान हनुमान जी को दलित बता दिया था. इसके बाद केद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा था कि हनुमान आर्य थे. अनूसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने हनुमान को आदिवासी बताया था.
इस विवाद में भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर ने दलितों से हनुमान मंदिरों पर कब्जा करने को कहा था. कई हनुमान मंदिरों के बाहर काफी बवाल भी हुआ था. ऐसी खबरें पूरे प्रदेश से सामने आई थीं.
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मेरठ/लखनऊ। इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजनीति में भगवान हनुमान एक राजनीति का विषय बने हुए हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रेंड नेता विनीत अग्रवाल शारदा तो दो कदम आगे निकल गए. उन्होंने भगवान श्रीराम और हनुमान को वैश्य समाज के बता दिया. विनीत अग्रवाल शारदा ने कहा भगवान श्री राम और हनुमान दोनों ही वैश्य समाज से हैं. दरअसल विनीत अग्रवाल शारदा अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. वहीं राम मंदिर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसने कहा कि राम मंदिर का निर्माण नहीं हो रहा वहां तो लगातार राम मंदिर का काम चल रहा है. जल्द ही भगवान श्रीराम तंबू से निकल कर अपने भव्य मंदिर में रहेंगे. दरअसल यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में एक रैली के दौरान हनुमान जी को दलित बता दिया था. इसके बाद केद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा था कि हनुमान आर्य थे. अनूसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने हनुमान को आदिवासी बताया था. इस विवाद में भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर ने दलितों से हनुमान मंदिरों पर कब्जा करने को कहा था. कई हनुमान मंदिरों के बाहर काफी बवाल भी हुआ था. ऐसी खबरें पूरे प्रदेश से सामने आई थीं.
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कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच मुंबई के बाइकुला सब्जी बाजार में लोगों ने खरीदारी की, यहां पुलिस टीम तैनात दिखी साथ ही पुलिसकर्मी लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देकर अलर्ट कर रहे थे।
मुंबईः कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच मुंबई के बाइकुला सब्जी बाजार में लोगों ने खरीदारी की, यहां पुलिस टीम तैनात दिखी साथ ही पुलिसकर्मी लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देकर अलर्ट कर रहे थे।
गौरतलब है कि कोरोना संकट से सर्वाधिक पीड़ित दिख रही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई ने बुधवार को थोड़ी राहत की सांस ली। पिछले कुछ दिनों की तुलना में आज कोरोना के रोगी भी कम मिले और मौतें भी कम हुईं। बुधवार को महाराष्ट्र में कोरोना से नौ लोगों की मृत्यु हुई, जिसमें सिर्फ दो व्यक्ति मुंबई के हैं। पुणे में कोरोना से मरने वालों की संख्या पांच रही।
पिछले शुक्रवार तक मुंबई में मौत का आंकड़ा डबल डिजिट में देखने को मिला था। मुंबई में बुधवार को 65 साल की महिला की मौत हुई जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन की शिकायत भी थी। इसके अलावा एक 50 साल की महिला की भी मौत हो गई।
इसके अलावा बुधवार को पूरे महाराष्ट्र में भी कोरोना वायरस मरीजों के आंकड़ों में भी कमी देखने को मिली। बुधवार को महाराष्ट्र में 232 नए केस आए। मंगलवार की तुलना में बुधवार को महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों के नए मामलों में 34 फीसदी गिरावट आई। इसके अलावा 9 की मौत हुई जो पिछले 6 दिनों में सबसे कम थी। महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या अब बढ़कर 2,916 हो गई है।
महाराष्ट्र में कोरोना से 187 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निजामुद्दीन के मरकज में शामिल हुए 50 लोग राज्य में कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें 14 पॉजिटिव मरीज मुंबई में मिले हैं।
मरीजों के उपचार के साथ ही उनके संपर्क में आने वाले लोगों की खोज के लिए भी विशेष मुहिम चलाई गई है। इसके तहत केवल एक दिन में 76 कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। वहीं, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के जरिए अब तक 857 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। जिन स्थानों पर पॉजिटिव मरीज मिले हैं, उनकी इमारत के साथ करीब की 33,636 इमारतों को सैनेटाइज किया जा चुका है।
बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 17 मरीजों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इसके बाद महानगर में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 164 से बढ़कर 181 हो गई है।
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कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच मुंबई के बाइकुला सब्जी बाजार में लोगों ने खरीदारी की, यहां पुलिस टीम तैनात दिखी साथ ही पुलिसकर्मी लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देकर अलर्ट कर रहे थे। मुंबईः कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच मुंबई के बाइकुला सब्जी बाजार में लोगों ने खरीदारी की, यहां पुलिस टीम तैनात दिखी साथ ही पुलिसकर्मी लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देकर अलर्ट कर रहे थे। गौरतलब है कि कोरोना संकट से सर्वाधिक पीड़ित दिख रही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई ने बुधवार को थोड़ी राहत की सांस ली। पिछले कुछ दिनों की तुलना में आज कोरोना के रोगी भी कम मिले और मौतें भी कम हुईं। बुधवार को महाराष्ट्र में कोरोना से नौ लोगों की मृत्यु हुई, जिसमें सिर्फ दो व्यक्ति मुंबई के हैं। पुणे में कोरोना से मरने वालों की संख्या पांच रही। पिछले शुक्रवार तक मुंबई में मौत का आंकड़ा डबल डिजिट में देखने को मिला था। मुंबई में बुधवार को पैंसठ साल की महिला की मौत हुई जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन की शिकायत भी थी। इसके अलावा एक पचास साल की महिला की भी मौत हो गई। इसके अलावा बुधवार को पूरे महाराष्ट्र में भी कोरोना वायरस मरीजों के आंकड़ों में भी कमी देखने को मिली। बुधवार को महाराष्ट्र में दो सौ बत्तीस नए केस आए। मंगलवार की तुलना में बुधवार को महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों के नए मामलों में चौंतीस फीसदी गिरावट आई। इसके अलावा नौ की मौत हुई जो पिछले छः दिनों में सबसे कम थी। महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या अब बढ़कर दो,नौ सौ सोलह हो गई है। महाराष्ट्र में कोरोना से एक सौ सत्तासी लोगों की जान जा चुकी है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निजामुद्दीन के मरकज में शामिल हुए पचास लोग राज्य में कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें चौदह पॉजिटिव मरीज मुंबई में मिले हैं। मरीजों के उपचार के साथ ही उनके संपर्क में आने वाले लोगों की खोज के लिए भी विशेष मुहिम चलाई गई है। इसके तहत केवल एक दिन में छिहत्तर कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। वहीं, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के जरिए अब तक आठ सौ सत्तावन पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। जिन स्थानों पर पॉजिटिव मरीज मिले हैं, उनकी इमारत के साथ करीब की तैंतीस,छः सौ छत्तीस इमारतों को सैनेटाइज किया जा चुका है। बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सत्रह मरीजों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इसके बाद महानगर में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या एक सौ चौंसठ से बढ़कर एक सौ इक्यासी हो गई है।
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मारुति सुजुकी स्विफ्ट क्रैश टेस्ट में खराब रेटिंग मिली है. (Global NCAP)
नई दिल्ली. ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Global NCAP) ने सोमवार को #SaferCarsForIndia अभियान के तहत नए और अधिक मांग वाले क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल के परिणामों के दूसरे सेट की घोषणा की है. टेस्ट के परिणामों में मारुति सुजुकी के तीन मॉडल स्विफ्ट, एस-प्रेसो और इग्निस शामिल हैं, जिन्हें दो फ्रंटल एयरबैग और एबीएस के साथ उनके बेसिक सेफ्टी स्पेसिफिकेशन के साथ टेस्ट किया गया था.
सभी तीन मॉडलों ने क्रैश टेस्ट में काफी खराब प्रदर्शन किया है. एडल्ट पैसेंजर सेफ्टी कैटेगरी में प्रत्येक कार को सिर्फ एक ही स्टार मिला है, जबकि चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन कैटेगरी में स्विफ्ट को एक स्टार और इग्निस और एस-प्रेसो को जीरो स्टार मिला है. किसी भी मारुति मॉडल में स्टैंडर्ड या ऑप्शनल इक्विपमेंट के रूप में ESC या साइड कर्टन एयरबैग नहीं दिया जाता है. इस प्रकार, फ्रंटल क्रैश टेस्टिंग के दौरान पाया गया कि तीनों कार में अनस्टेबल स्ट्रक्चर है.
ये भी पढ़ें- Scorpio-N का क्रैश टेस्ट में हुआ ये हाल, देखें कितने सेफ्टी स्टार लाई दमदार SUV?
मारुति सुजुकी स्विफ्ट ने ड्राइवर और पैसेंजर के सिर और गर्दन को दी जाने वाली अच्छी सुरक्षा के साथ अच्छा फ्रंट इफेक्ट दिखाया, लेकिन इस दौरान ड्राइवर की छाती के लिए कमजोर सुरक्षा देखने को मिली, हालांकि, यात्रियों की छाती के लिए पर्याप्त सेफ्टी देखने को मिली. ड्राइवर के घुटनों और यात्री के दाहिने घुटने के लिए मामूली सुरक्षा दिखाई दी, क्योंकि घुटने फ्रंट स्ट्रक्चर के पीछे खतरनाक तरीके से प्रभावित हो सकते हैं.
₹50 लाख की Fortuner बेचने पर कंपनी कमाती है सिर्फ ₹50 हजार, आखिर कहां जाता है बाकी पैसा?
इस मॉडल ने ड्राइवर और यात्री के सिर और गर्दन पर अच्छा फ्रंटल इम्पैक्ट दिया, जबकि ड्राइवर की छाती ने खराब सुरक्षा दिखाई, जिसके कारण एक स्टार कैपिंग हुई और यात्रियों की छाती के लिए मामूली सुरक्षा ही दिखाई दी. कार में ड्राइवर के घुटनों के लिए मामूली सुरक्षा की देखने को मिली, क्योंकि घुटने फ्रंट के पीछे खतरनाक स्ट्रक्चर से प्रभावित हो सकते हैं.
इस मॉडल में भी ड्राइवर और पैसेंजर के सिर और गर्दन के लिए पर्याप्त सेफ्टी देखने को मिली है. ड्राइवर की छाती के लिए कमजोर सेफ्टी देखने को मिली और यात्रियों की छाती के लिए पर्याप्त सुरक्षा दिखाई दी. कार में ड्राइवर और यात्रियों के घुटनों के लिए मामूली सुरक्षा रही, क्योंकि फ्रंट की टक्कर में बुरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं.
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मारुति सुजुकी स्विफ्ट क्रैश टेस्ट में खराब रेटिंग मिली है. नई दिल्ली. ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम ने सोमवार को #SaferCarsForIndia अभियान के तहत नए और अधिक मांग वाले क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल के परिणामों के दूसरे सेट की घोषणा की है. टेस्ट के परिणामों में मारुति सुजुकी के तीन मॉडल स्विफ्ट, एस-प्रेसो और इग्निस शामिल हैं, जिन्हें दो फ्रंटल एयरबैग और एबीएस के साथ उनके बेसिक सेफ्टी स्पेसिफिकेशन के साथ टेस्ट किया गया था. सभी तीन मॉडलों ने क्रैश टेस्ट में काफी खराब प्रदर्शन किया है. एडल्ट पैसेंजर सेफ्टी कैटेगरी में प्रत्येक कार को सिर्फ एक ही स्टार मिला है, जबकि चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन कैटेगरी में स्विफ्ट को एक स्टार और इग्निस और एस-प्रेसो को जीरो स्टार मिला है. किसी भी मारुति मॉडल में स्टैंडर्ड या ऑप्शनल इक्विपमेंट के रूप में ESC या साइड कर्टन एयरबैग नहीं दिया जाता है. इस प्रकार, फ्रंटल क्रैश टेस्टिंग के दौरान पाया गया कि तीनों कार में अनस्टेबल स्ट्रक्चर है. ये भी पढ़ें- Scorpio-N का क्रैश टेस्ट में हुआ ये हाल, देखें कितने सेफ्टी स्टार लाई दमदार SUV? मारुति सुजुकी स्विफ्ट ने ड्राइवर और पैसेंजर के सिर और गर्दन को दी जाने वाली अच्छी सुरक्षा के साथ अच्छा फ्रंट इफेक्ट दिखाया, लेकिन इस दौरान ड्राइवर की छाती के लिए कमजोर सुरक्षा देखने को मिली, हालांकि, यात्रियों की छाती के लिए पर्याप्त सेफ्टी देखने को मिली. ड्राइवर के घुटनों और यात्री के दाहिने घुटने के लिए मामूली सुरक्षा दिखाई दी, क्योंकि घुटने फ्रंट स्ट्रक्चर के पीछे खतरनाक तरीके से प्रभावित हो सकते हैं. पचास रुपया लाख की Fortuner बेचने पर कंपनी कमाती है सिर्फ पचास रुपया हजार, आखिर कहां जाता है बाकी पैसा? इस मॉडल ने ड्राइवर और यात्री के सिर और गर्दन पर अच्छा फ्रंटल इम्पैक्ट दिया, जबकि ड्राइवर की छाती ने खराब सुरक्षा दिखाई, जिसके कारण एक स्टार कैपिंग हुई और यात्रियों की छाती के लिए मामूली सुरक्षा ही दिखाई दी. कार में ड्राइवर के घुटनों के लिए मामूली सुरक्षा की देखने को मिली, क्योंकि घुटने फ्रंट के पीछे खतरनाक स्ट्रक्चर से प्रभावित हो सकते हैं. इस मॉडल में भी ड्राइवर और पैसेंजर के सिर और गर्दन के लिए पर्याप्त सेफ्टी देखने को मिली है. ड्राइवर की छाती के लिए कमजोर सेफ्टी देखने को मिली और यात्रियों की छाती के लिए पर्याप्त सुरक्षा दिखाई दी. कार में ड्राइवर और यात्रियों के घुटनों के लिए मामूली सुरक्षा रही, क्योंकि फ्रंट की टक्कर में बुरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं. .
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लोरमी। आरोपियों को धमकाने के आरोप में लोरमी के टीआई और एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया है।
आरोपियों ने लोरमी टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे के खिलाफ पैसे मांगने का आरोप लगाया है।
आरोपियों ने लोरमी के टीआई और एएसआई पर धारा बढ़ाकर पैसे मांगने का भी आरोप लगाया है। आरोपियों की शिकायत पर एसपी अरविंद कुजूर ने टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे को सस्पेंड कर दिया गया है।
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लोरमी। आरोपियों को धमकाने के आरोप में लोरमी के टीआई और एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया है। आरोपियों ने लोरमी टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे के खिलाफ पैसे मांगने का आरोप लगाया है। आरोपियों ने लोरमी के टीआई और एएसआई पर धारा बढ़ाकर पैसे मांगने का भी आरोप लगाया है। आरोपियों की शिकायत पर एसपी अरविंद कुजूर ने टीआई केसर पराग और एएसआई चित गोविंद दुबे को सस्पेंड कर दिया गया है।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में 70 देशों के 6600 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और आयोजक खेल गांव को हर संभव पूरी सुविधा से लैस करने की तैयारी में हैं।
नई दिल्ली, 2 अप्रैलः ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में बुधवार से शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान 225,000 कॉन्डम, 17,000 टॉयलेट रोल्स और फ्री आईसक्रीम भी बांटे जाएंगे। इन खेलों का आगाज 4 अप्रैल को होना है और उससे पहले हजारों एथलीटों, सपोर्ट स्टाफ और दुनिया भर के दर्शकों का ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर आना शुरू हो गया है।
इन खेलों में इस बार करीब 70 देशों के 6600 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और आयोजक खेल गांव को हर संभव पूरी सुविधा से लैस करने की तैयारी में हैं। आंकड़ों के अनुसार 11 दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में मुफ्त कॉन्डम की जो व्यवस्था की गई है वो 34 कॉन्डम प्रति व्यक्ति है।
पिछले ही साल दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलंपिक में आयोजकों ने 110,000 मुफ्त कॉन्डम बांटे थे। वहीं, रियो ओलंपिक में 450,000 कॉन्डम बांटे गए थे। (और पढ़ें- कॉमनवेल्थ गेम्स 2018: सीरिंज विवाद में शक के घेरे में भारतीय दल, मामले की जांच शुरू)
उस समय ब्राजील में यौन संक्रमण से भी फैलने वाले रोग 'जिका' का खतरा था और इस कारण तब ये संख्या 42 कॉन्डम प्रति व्यक्ति थी।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में सत्तर देशों के छः हज़ार छः सौ एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और आयोजक खेल गांव को हर संभव पूरी सुविधा से लैस करने की तैयारी में हैं। नई दिल्ली, दो अप्रैलः ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में बुधवार से शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दो सौ पच्चीस,शून्य कॉन्डम, सत्रह,शून्य टॉयलेट रोल्स और फ्री आईसक्रीम भी बांटे जाएंगे। इन खेलों का आगाज चार अप्रैल को होना है और उससे पहले हजारों एथलीटों, सपोर्ट स्टाफ और दुनिया भर के दर्शकों का ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर आना शुरू हो गया है। इन खेलों में इस बार करीब सत्तर देशों के छः हज़ार छः सौ एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और आयोजक खेल गांव को हर संभव पूरी सुविधा से लैस करने की तैयारी में हैं। आंकड़ों के अनुसार ग्यारह दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में मुफ्त कॉन्डम की जो व्यवस्था की गई है वो चौंतीस कॉन्डम प्रति व्यक्ति है। पिछले ही साल दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलंपिक में आयोजकों ने एक सौ दस,शून्य मुफ्त कॉन्डम बांटे थे। वहीं, रियो ओलंपिक में चार सौ पचास,शून्य कॉन्डम बांटे गए थे। उस समय ब्राजील में यौन संक्रमण से भी फैलने वाले रोग 'जिका' का खतरा था और इस कारण तब ये संख्या बयालीस कॉन्डम प्रति व्यक्ति थी।
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सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार के बाद भी टीम के धाकड़ बल्लेबाज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने खेल के कारण जमकर तारीफ बटोर रहे हैं और उनके फैन्स के अलावा कई दिग्गज क्रिकेटर भी उनकी तारीफ में लगे हुए हैं. बता दें कि इसी कड़ी में एक बड़ा नाम अब जुड़ गया है. यह नाम है दुनिया के सबसे खतरनाक विकेटकीपर का.
आपसे यहां हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट के बारे में. गिलक्रिस्ट ने धोनी के खेल और आत्मविश्वास के लिए उनकी जमकर सराहना की है. एडम द्वारा ट्वीट कर कहा गया है कि, 'आप आगे खेलेंगे या नहीं, इसकी जानकारी तो नहीं है, हालांकि आपने क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है. आपका शांत स्वभाव और आत्म-विश्वास सराहनीय है. '
2019 वर्ल्डकप के पहले सेमीफाइनल में धोनी ने शानदार पारी खेले थी. अपने 350वें मैच में धोनी ने 50 रनों की बेहतरीन पारी खेल टीम को जीत के नजदीक पहुंचा दिया था, हालांकि वे अंतिम समय पर आउट हो गए थे. आपको ज्ञाता हो कि उन्होंने आईसीसी विश्व कप-2019 में हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा के साथ मिलकर न्यूजीलैंड के खिलाफ सातवें विकेट के लिए विश्व कप में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड बनाया है और यह साझेदारी हालांकि भारत को जीत नहीं दिला सकी और कीवी टीम 18 रनों से मैच को गंवा बैठी.
जन्मदिन विशेष : 35 रु रोज कमाकर इस गेंदबाज ने जिताया था वर्ल्डकप, जाने ख़ास बातें. .
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सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार के बाद भी टीम के धाकड़ बल्लेबाज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने खेल के कारण जमकर तारीफ बटोर रहे हैं और उनके फैन्स के अलावा कई दिग्गज क्रिकेटर भी उनकी तारीफ में लगे हुए हैं. बता दें कि इसी कड़ी में एक बड़ा नाम अब जुड़ गया है. यह नाम है दुनिया के सबसे खतरनाक विकेटकीपर का. आपसे यहां हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट के बारे में. गिलक्रिस्ट ने धोनी के खेल और आत्मविश्वास के लिए उनकी जमकर सराहना की है. एडम द्वारा ट्वीट कर कहा गया है कि, 'आप आगे खेलेंगे या नहीं, इसकी जानकारी तो नहीं है, हालांकि आपने क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है. आपका शांत स्वभाव और आत्म-विश्वास सराहनीय है. ' दो हज़ार उन्नीस वर्ल्डकप के पहले सेमीफाइनल में धोनी ने शानदार पारी खेले थी. अपने तीन सौ पचासवें मैच में धोनी ने पचास रनों की बेहतरीन पारी खेल टीम को जीत के नजदीक पहुंचा दिया था, हालांकि वे अंतिम समय पर आउट हो गए थे. आपको ज्ञाता हो कि उन्होंने आईसीसी विश्व कप-दो हज़ार उन्नीस में हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा के साथ मिलकर न्यूजीलैंड के खिलाफ सातवें विकेट के लिए विश्व कप में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड बनाया है और यह साझेदारी हालांकि भारत को जीत नहीं दिला सकी और कीवी टीम अट्ठारह रनों से मैच को गंवा बैठी. जन्मदिन विशेष : पैंतीस रुपया रोज कमाकर इस गेंदबाज ने जिताया था वर्ल्डकप, जाने ख़ास बातें. .
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Boult Rover Smartwatch Launch Price in India: भारत की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी बोल्ट ने अपनी नई स्मार्टवॉच भारतीय मार्केट में उतार दी है। इसका नाम बोल्ट रोवर (Boult Rover) है जो दमदार बैटरी और अन्य फीचर्स के साथ है। इस स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग और 50 से अधिक क्लाउड आधारित वॉचफेसेस सपोर्ट मिलता है। आइए आपको बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच के बारे में विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले बात करें अगर बोल्ट रोवर के स्पेसिफिकेशन्स की तो इसमें 1. 3 इंच का एचडी एमोलेड डिस्प्ले मिलता है। इसकी स्क्रीन 150 से अधिक क्लाउड आधारित वॉचफेसेस और 600 निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ है। इस स्मार्टवॉच में एक फिजिकल बटन भी दिया गया है जो नेविगेशन को सपोर्ट करता है। वॉच में इनबिल्ट स्पीकर्स, माइक और ब्लूटूथ कॉलिंग का सपोर्ट दिया गया है।
जिंक एलॉय की बिल्ड क्वालिटी के साथ आने वाली बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच में कई अन्य फीचर्स भी दिए गए हैं। इसके जरिए यूजर अपना हेल्थ ट्रैक कर सकता है। इसमें स्लीप मॉनिटर, हार्ट रेट सेंसर और SpO2 सेंसर का सपोर्ट मिलता है। महिलाओं के लिए वॉच में पीरियड्स ट्रैकर फीचर भी शामिल है।
इसके अलावा स्पोर्ट से संबंधित फीचर्स भी दिए गए हैं। वॉच में वॉकिंग, स्विमिंग, रनिंग और योगा जैसे कई मल्टिपल स्पोर्ट्स मोड मिलते हैं। बात करें बैटरी की तो इसमें 10 दिनों का बैटरी बैकअप सपोर्ट मिलता है। फोन में पानी से बचाव और डस्ट रेसिस्टेंट के लिए IP68 की रेटिंग मिलती है।
और पढ़िए -Vivo S16 Series चोरी-छिपे लॉन्च, मिलेगा 12GB तक रैम और तगड़ी बैटरी!
भारत में बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच का दो वर्जन- क्लासिक स्विच और फ्लिप लॉन्च किया गया है। इसके फ्लिप वर्जन के साथ स्टैंडर्ड ब्लैक स्ट्रैप, ग्रीन और ब्लू कलर के कलर स्ट्रैप ऑप्शन्स हैं। जबकि, इसका क्लासिक स्विच वर्जन, प्राइमरी स्ट्रैप के ब्राउन लेदर और सेकेंडरी स्ट्रैप में ओरेंज लेदर के साथ है। दोनों वर्जन की कीमत एक ही है। भारत में बोल्ट रोवर की कीमत 2,999 रुपये है। आप इसे कंपनी की आधिकारिक साइट या फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं।
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Boult Rover Smartwatch Launch Price in India: भारत की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी बोल्ट ने अपनी नई स्मार्टवॉच भारतीय मार्केट में उतार दी है। इसका नाम बोल्ट रोवर है जो दमदार बैटरी और अन्य फीचर्स के साथ है। इस स्मार्टवॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग और पचास से अधिक क्लाउड आधारित वॉचफेसेस सपोर्ट मिलता है। आइए आपको बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच के बारे में विस्तार से बताते हैं। सबसे पहले बात करें अगर बोल्ट रोवर के स्पेसिफिकेशन्स की तो इसमें एक. तीन इंच का एचडी एमोलेड डिस्प्ले मिलता है। इसकी स्क्रीन एक सौ पचास से अधिक क्लाउड आधारित वॉचफेसेस और छः सौ निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ है। इस स्मार्टवॉच में एक फिजिकल बटन भी दिया गया है जो नेविगेशन को सपोर्ट करता है। वॉच में इनबिल्ट स्पीकर्स, माइक और ब्लूटूथ कॉलिंग का सपोर्ट दिया गया है। जिंक एलॉय की बिल्ड क्वालिटी के साथ आने वाली बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच में कई अन्य फीचर्स भी दिए गए हैं। इसके जरिए यूजर अपना हेल्थ ट्रैक कर सकता है। इसमें स्लीप मॉनिटर, हार्ट रेट सेंसर और SpOदो सेंसर का सपोर्ट मिलता है। महिलाओं के लिए वॉच में पीरियड्स ट्रैकर फीचर भी शामिल है। इसके अलावा स्पोर्ट से संबंधित फीचर्स भी दिए गए हैं। वॉच में वॉकिंग, स्विमिंग, रनिंग और योगा जैसे कई मल्टिपल स्पोर्ट्स मोड मिलते हैं। बात करें बैटरी की तो इसमें दस दिनों का बैटरी बैकअप सपोर्ट मिलता है। फोन में पानी से बचाव और डस्ट रेसिस्टेंट के लिए IPअड़सठ की रेटिंग मिलती है। और पढ़िए -Vivo Sसोलह Series चोरी-छिपे लॉन्च, मिलेगा बारहGB तक रैम और तगड़ी बैटरी! भारत में बोल्ट रोवर स्मार्टवॉच का दो वर्जन- क्लासिक स्विच और फ्लिप लॉन्च किया गया है। इसके फ्लिप वर्जन के साथ स्टैंडर्ड ब्लैक स्ट्रैप, ग्रीन और ब्लू कलर के कलर स्ट्रैप ऑप्शन्स हैं। जबकि, इसका क्लासिक स्विच वर्जन, प्राइमरी स्ट्रैप के ब्राउन लेदर और सेकेंडरी स्ट्रैप में ओरेंज लेदर के साथ है। दोनों वर्जन की कीमत एक ही है। भारत में बोल्ट रोवर की कीमत दो,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। आप इसे कंपनी की आधिकारिक साइट या फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं।
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उर्वशी रौतेला के इस पोस्ट के बाद उनके फैंस फोन नंबर के अंतिम 2 अंक जानने के लिए हुए क्रेजी !
बॉलीवुड क्वीन उर्वशी रौतेला, विशाल मिश्रा के साथ आगामी परियोजना के साथ फिर से तैयार हैं। हाल ही में, अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर आने वाले संगीत वीडियो के लिए एक पोस्ट शेयर किया है ,जिसके बाद उनके प्रशंसकों और फॉलोवर कई तरह कमैंट्स देखने को मिल रहे है। म्यूजिक का लॉन्च वायरल ओरिजिनल से किया जायेगा और एक रेट्रो विंटेज मिक्स गीत 'वो चाँद कहाँ से लाओगी ' से है। और यह कई दिनों से सुर्खियां में बना हुआ है जिसमें उर्वशी रौतेला और मोहसिन खान ने अभिनय किया है। उर्वशी ने खुलासा किया कि यह गीत उनके दिल के बहुत करीब है और यह एक छोटे शहर की लड़की पर केंद्रित है, जो अपने अभिनेता बनने के लिए मुंबई पहुंचती है और एक अभिनेता के रूप में स्टारडम तक पहुंचने के लिए किस तरह का संघर्ष का सामना करना पड़ता है, यह दिखाया गया है। अपने सोशल मीडिया पर उर्वशी के न्यू अपडेट से प्रशंसकों को उनके फोन नंबर के अंतिम 2 अंकों को जानने के लिए बहुत मश्कत करनी पड़ है। प्रशंसकों और फॉलोवर उनका नम्बर जानने की कोशिश में लगे हुए है , और कांटेक्ट नम्बर का खुलासा करने का अनुरोध कर रहे हैं। सांग का फर्स्ट लुक के लिए दर्शकों को 4 दिनों तक का इंतज़ार करना पड़ सकता है।
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उर्वशी रौतेला के इस पोस्ट के बाद उनके फैंस फोन नंबर के अंतिम दो अंक जानने के लिए हुए क्रेजी ! बॉलीवुड क्वीन उर्वशी रौतेला, विशाल मिश्रा के साथ आगामी परियोजना के साथ फिर से तैयार हैं। हाल ही में, अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर आने वाले संगीत वीडियो के लिए एक पोस्ट शेयर किया है ,जिसके बाद उनके प्रशंसकों और फॉलोवर कई तरह कमैंट्स देखने को मिल रहे है। म्यूजिक का लॉन्च वायरल ओरिजिनल से किया जायेगा और एक रेट्रो विंटेज मिक्स गीत 'वो चाँद कहाँ से लाओगी ' से है। और यह कई दिनों से सुर्खियां में बना हुआ है जिसमें उर्वशी रौतेला और मोहसिन खान ने अभिनय किया है। उर्वशी ने खुलासा किया कि यह गीत उनके दिल के बहुत करीब है और यह एक छोटे शहर की लड़की पर केंद्रित है, जो अपने अभिनेता बनने के लिए मुंबई पहुंचती है और एक अभिनेता के रूप में स्टारडम तक पहुंचने के लिए किस तरह का संघर्ष का सामना करना पड़ता है, यह दिखाया गया है। अपने सोशल मीडिया पर उर्वशी के न्यू अपडेट से प्रशंसकों को उनके फोन नंबर के अंतिम दो अंकों को जानने के लिए बहुत मश्कत करनी पड़ है। प्रशंसकों और फॉलोवर उनका नम्बर जानने की कोशिश में लगे हुए है , और कांटेक्ट नम्बर का खुलासा करने का अनुरोध कर रहे हैं। सांग का फर्स्ट लुक के लिए दर्शकों को चार दिनों तक का इंतज़ार करना पड़ सकता है।
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पिछले बजट में सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए सरकार ने 180 करोड़, बीएचयू में वैदिक विज्ञान केंद्र के लिए 18 करोड़ और काशी विश्वनाथ सुंदरीकरण व विस्तारीकरण परियोजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। धनराशि आने के बाद पिंडरा में सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गयी है। पर्यटन विभाग ने 250 में से 238 एकड़ जमीन खरीद ली है। आगे की कार्ययोजना के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से अनुमति का इंतजार हो रहा है।
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अविनाश मिश्र ने बताया कि सरकार की मंशा है कि एक ही जगह विभिन्न संस्कृतियों से जुड़े आयोजनों के लिए केंद्र बनाया जाये। इसके साथ ही पार्क, शहर के विभिन्न धरोहर और पारम्परिक उत्सवों का आयोजन कराया जाने की व्यवस्था हो। सांस्कृतिक केंद्र में फिल्म सिटी निर्माण पर भी सरकार तैयार कर रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। चूंकि यह सांस्कृतिक केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाना है। लिहाजा, इसकी कार्ययोजना पर संस्कृति विभाग से भी सुझाव मांगा गया है। कोरोना के कारण पिछला एक साल ब्रेक लगने से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। यहां की प्रगति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। आगे के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पिछले बजट में बीएचयू परिसर में स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र के लिए आवंटित 18 करोड़ रुपये की धनराशि का अबतक विभाग इंतजार कर रहा है। केंद्र के प्रभारी डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि आठ करोड़ रुपये प्रयोगशाला में उपकरण सहित विभिन्न संसाधन और 10 करोड़ रुपये कार्पस फंड की डिमांड प्रस्ताव भेजा गया था। जिसके आधार पर बजट में सरकार ने धन आवंटित किया था। हालांकि विभिन्न प्रक्रियाओं में उलझने के कारण अभी खाते में बजट की धनराशि नहीं आ सकी है।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए मिले 200 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। जिसका परिणाम है कि कॉरिडोर भव्य आकार लेने लगा है। कई भवनों पर कंक्रीट का काम पूरा होने के बाद अब टाइल्स लगाने और फीनिशिंग का कार्य जारी है।
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पिछले बजट में सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए सरकार ने एक सौ अस्सी करोड़, बीएचयू में वैदिक विज्ञान केंद्र के लिए अट्ठारह करोड़ और काशी विश्वनाथ सुंदरीकरण व विस्तारीकरण परियोजना के लिए दो सौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। धनराशि आने के बाद पिंडरा में सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गयी है। पर्यटन विभाग ने दो सौ पचास में से दो सौ अड़तीस एकड़ जमीन खरीद ली है। आगे की कार्ययोजना के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से अनुमति का इंतजार हो रहा है। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अविनाश मिश्र ने बताया कि सरकार की मंशा है कि एक ही जगह विभिन्न संस्कृतियों से जुड़े आयोजनों के लिए केंद्र बनाया जाये। इसके साथ ही पार्क, शहर के विभिन्न धरोहर और पारम्परिक उत्सवों का आयोजन कराया जाने की व्यवस्था हो। सांस्कृतिक केंद्र में फिल्म सिटी निर्माण पर भी सरकार तैयार कर रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। चूंकि यह सांस्कृतिक केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाना है। लिहाजा, इसकी कार्ययोजना पर संस्कृति विभाग से भी सुझाव मांगा गया है। कोरोना के कारण पिछला एक साल ब्रेक लगने से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। यहां की प्रगति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। आगे के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पिछले बजट में बीएचयू परिसर में स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र के लिए आवंटित अट्ठारह करोड़ रुपये की धनराशि का अबतक विभाग इंतजार कर रहा है। केंद्र के प्रभारी डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि आठ करोड़ रुपये प्रयोगशाला में उपकरण सहित विभिन्न संसाधन और दस करोड़ रुपये कार्पस फंड की डिमांड प्रस्ताव भेजा गया था। जिसके आधार पर बजट में सरकार ने धन आवंटित किया था। हालांकि विभिन्न प्रक्रियाओं में उलझने के कारण अभी खाते में बजट की धनराशि नहीं आ सकी है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए मिले दो सौ करोड़ रुपये से निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। जिसका परिणाम है कि कॉरिडोर भव्य आकार लेने लगा है। कई भवनों पर कंक्रीट का काम पूरा होने के बाद अब टाइल्स लगाने और फीनिशिंग का कार्य जारी है।
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मुंबई, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर इन दिनों अपनी शादी को लेकर खूब चर्चा में हैं. फैंस हो या प्रशंसक या फिर आलोचक सभी की नज़र इन दिनों इस कपल पर है. जहां दोनों की बॉन्डिंग से जुडी एक पुरानी तस्वीर काफी सुर्खियां बटोर रही है. इस तस्वीर से जुडी कहानी हम आपको बताते हैं.
शादी के बंधन में बंध चुके आलिया और रणबीर एक-दूसरे के साथ अपनी पहली फिल्म ब्रह्मास्त्र में ही नज़र आएंगी. लेकिन आपको ये जानकार काफी हैरानी होगी कि दोनों स्टार्स बॉलीवुड में अपना डेब्यू ही एक साथ करने वाले थे. इस बात का खुलासा करती एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है. जिसमें आलिया महज़ 11 साल और रणबीर 21 के हैं. इस तस्वीर की कहानी से बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक संजय लीला भंसाली का भी नाम जुड़ा हुआ है.
संजय लीला भंसाली एक समय में अपनी बाल विवाह पर बेस्ड फिल्म को आलिया और रणबीर के साथ बनाने वाले थे. इस फिल्म के लिए उन्होंने आलिया और रणबीर का एक फोटोशूट भी करवाया था. जिसमें आलिया की उम्र महज़ 11 साल की थी. इस कहानी से जुड़ी फिल्म तो दर्शकों के बीच नहीं आ पायी लेकिन ये कहानी ज़रूर कपल के फैंस के सामने आ गयी है.
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मुंबई, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर इन दिनों अपनी शादी को लेकर खूब चर्चा में हैं. फैंस हो या प्रशंसक या फिर आलोचक सभी की नज़र इन दिनों इस कपल पर है. जहां दोनों की बॉन्डिंग से जुडी एक पुरानी तस्वीर काफी सुर्खियां बटोर रही है. इस तस्वीर से जुडी कहानी हम आपको बताते हैं. शादी के बंधन में बंध चुके आलिया और रणबीर एक-दूसरे के साथ अपनी पहली फिल्म ब्रह्मास्त्र में ही नज़र आएंगी. लेकिन आपको ये जानकार काफी हैरानी होगी कि दोनों स्टार्स बॉलीवुड में अपना डेब्यू ही एक साथ करने वाले थे. इस बात का खुलासा करती एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है. जिसमें आलिया महज़ ग्यारह साल और रणबीर इक्कीस के हैं. इस तस्वीर की कहानी से बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक संजय लीला भंसाली का भी नाम जुड़ा हुआ है. संजय लीला भंसाली एक समय में अपनी बाल विवाह पर बेस्ड फिल्म को आलिया और रणबीर के साथ बनाने वाले थे. इस फिल्म के लिए उन्होंने आलिया और रणबीर का एक फोटोशूट भी करवाया था. जिसमें आलिया की उम्र महज़ ग्यारह साल की थी. इस कहानी से जुड़ी फिल्म तो दर्शकों के बीच नहीं आ पायी लेकिन ये कहानी ज़रूर कपल के फैंस के सामने आ गयी है. यह भी पढ़ेंः
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यह ध्यान दिया जा सकता है कि पिछले वर्ष नवंबर में, कोरोना, ओमिक्रोन का एक नया प्रकार पाया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के इस नए प्रकार को समस्या के रूप में घोषित किया था. अब, यह वेरिएंट विश्व के 128 देशों तक पहुंच गया है और इसका संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. भारत में ओमाइक्रॉन इन्फेक्शन को ध्यान में रखते हुए, कई राज्यों में सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं और यह माना जाता है कि अगर कोरोना इन्फेक्शन इस तरह बढ़ता जाता है, तो देश फिर से लॉकडाउन की स्थिति में जा सकता है.
15 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान भी जनवरी 3 से शुरू किया गया है. विशेषज्ञ लगातार टीका लगवाने, मास्क पहनने और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं.
AIIMS के मुख्य ने कहा कि इस बीमारी के लक्षण हल्के हैं लेकिन लोगों को इसके प्रति असर नहीं होना चाहिए.
देश के ओमाइक्रॉन वेरिएंट के संबंध में, एम्स के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि लोगों को इसके बारे में डरना या भयभीत नहीं होना चाहिए. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ओमाइक्रॉन वेरिएंट अधिक खतरनाक नहीं है क्योंकि इसके कारण होने वाली बीमारी में केवल हल्के लक्षण देखे गए हैं. लेकिन, लोगों को सावधान रहना होगा. AIIMS के मुख्य ने कहा कि लोगों को Kovid-19 प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए, लोगों को कोविड वैक्सीन लेना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए. इसके अलावा, सामाजिक दूरी का पालन करें और भीड़ से दूर रहें क्योंकि यद्यपि इस बीमारी के लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन लोगों को इसके प्रति अनिवार्य नहीं होना चाहिए.
हम आपको बताते हैं कि डॉ. गुलेरिया ने कुछ समय पहले कहा था कि देश में टीकाकरण के आंकड़ों के कारण, लोगों में इम्युनिटी बहुत बढ़ गई है. इसी प्रकार, स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से अधिक बेहतर स्थिति में हैं. देश में कोविड इन्फेक्शन से लड़ने की तैयारी बेहतर है और कोविड सेंटर और हॉस्पिटल में पर्याप्त बेड और ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध है.
कोरोनावायरस के नए प्रकारों के बारे में कई बातें बात की जा रही हैं और लोगों में डर का वातावरण बनाया जा रहा है. लेकिन, AIIMS डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोनावायरस का यह नया वेरिएंट ऐसा नहीं है कि भयभीत होने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ओमाइक्रॉन वेरिएंट के कारण होने वाली बीमारी इन्फेक्शन के बहुत हल्के लक्षण दिखा रही है. इसका फेफड़ों पर कोई खराब प्रभाव नहीं पड़ता है. इन्फेक्शन में देखे गए लक्षणों में सर्दी और खांसी, बुखार या शरीर में दर्द शामिल हैं, जो बहुत छोटे होते हैं.
(डिस्क्लेमरः इस साइट पर उपलब्ध कंटेंट केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है, और इसे प्रोफेशनल मेडिकल सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. अपने स्वास्थ्य या मेडिकल स्थिति के संबंध में आपके किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल के मार्गदर्शन प्राप्त करें. )
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यह ध्यान दिया जा सकता है कि पिछले वर्ष नवंबर में, कोरोना, ओमिक्रोन का एक नया प्रकार पाया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के इस नए प्रकार को समस्या के रूप में घोषित किया था. अब, यह वेरिएंट विश्व के एक सौ अट्ठाईस देशों तक पहुंच गया है और इसका संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. भारत में ओमाइक्रॉन इन्फेक्शन को ध्यान में रखते हुए, कई राज्यों में सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं और यह माना जाता है कि अगर कोरोना इन्फेक्शन इस तरह बढ़ता जाता है, तो देश फिर से लॉकडाउन की स्थिति में जा सकता है. पंद्रह वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान भी जनवरी तीन से शुरू किया गया है. विशेषज्ञ लगातार टीका लगवाने, मास्क पहनने और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं. AIIMS के मुख्य ने कहा कि इस बीमारी के लक्षण हल्के हैं लेकिन लोगों को इसके प्रति असर नहीं होना चाहिए. देश के ओमाइक्रॉन वेरिएंट के संबंध में, एम्स के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि लोगों को इसके बारे में डरना या भयभीत नहीं होना चाहिए. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ओमाइक्रॉन वेरिएंट अधिक खतरनाक नहीं है क्योंकि इसके कारण होने वाली बीमारी में केवल हल्के लक्षण देखे गए हैं. लेकिन, लोगों को सावधान रहना होगा. AIIMS के मुख्य ने कहा कि लोगों को Kovid-उन्नीस प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए, लोगों को कोविड वैक्सीन लेना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए. इसके अलावा, सामाजिक दूरी का पालन करें और भीड़ से दूर रहें क्योंकि यद्यपि इस बीमारी के लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन लोगों को इसके प्रति अनिवार्य नहीं होना चाहिए. हम आपको बताते हैं कि डॉ. गुलेरिया ने कुछ समय पहले कहा था कि देश में टीकाकरण के आंकड़ों के कारण, लोगों में इम्युनिटी बहुत बढ़ गई है. इसी प्रकार, स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से अधिक बेहतर स्थिति में हैं. देश में कोविड इन्फेक्शन से लड़ने की तैयारी बेहतर है और कोविड सेंटर और हॉस्पिटल में पर्याप्त बेड और ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध है. कोरोनावायरस के नए प्रकारों के बारे में कई बातें बात की जा रही हैं और लोगों में डर का वातावरण बनाया जा रहा है. लेकिन, AIIMS डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोनावायरस का यह नया वेरिएंट ऐसा नहीं है कि भयभीत होने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ओमाइक्रॉन वेरिएंट के कारण होने वाली बीमारी इन्फेक्शन के बहुत हल्के लक्षण दिखा रही है. इसका फेफड़ों पर कोई खराब प्रभाव नहीं पड़ता है. इन्फेक्शन में देखे गए लक्षणों में सर्दी और खांसी, बुखार या शरीर में दर्द शामिल हैं, जो बहुत छोटे होते हैं.
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(प्रतीकात्मक फोटो) ( Image Source : PTI )
Uttarakhand Accident: उत्तराखंड में बीते 24 घंटों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में 10 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में कार चालक के अलावा दो परिवारों के नौ सदस्य शामिल हैं. पुलिस के अनुसार पहली घटना टिहरी जिले के भिलंगना क्षेत्र के बालगंगा में शुक्रवार शाम हुई जहां एक परिवार के पांच सदस्यों को लेकर जा रही कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी. ये लोग अपने रिश्तेदार के यहां शोक संवेदना व्यक्त कर गांव लौट रहे थे.
बालगंगा के तहसीलदार एस पी ममगाई ने बताया कि इस दुर्घटना में पांचों व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गयी. उन्होंने बताया कि होल्टा गांव के रहने वाले गबर सिंह अपने परिवार के साथ अपनी बहू के मायके राजगांव में किसी रिश्तेदार की मृत्यु की शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद वापस लौट रहे थे और तभी रास्ते में सेंदुल-पटुड गांव मोटर मार्ग पर कार पीछे करते समय वह अनियंत्रित होकर लगभग 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई.
ममगाई ने बताया कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और पुलिस तथा स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों का खाई से बाहर निकाला. पुलिस के अनुसार मृतकों में गबर सिंह (63) के अलावा उनकी पत्नी बबली देवी (59), तुलसी देवी (65), सोना देवी (55) और उर्मिला देवी (50) शामिल हैं.
एक अन्य घटना में, ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा में लोहिया हेड पावर चैनल के पास एक कार शारदा नहर में जा गिरी, जि ससे उसमें सवार एक परिवार के चार सदस्यों समेत पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी. मरने वालों में कार चालक भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक यह हादसा बृहस्पतिवार देर शाम हुआ जब द्रोपदी नाम की महिला अपनी पुत्री और अपने भाई के दो बच्चों को लेकर अपने भाई मोहन चंद के अंजनिया स्थित घर से अपने लोहिया हेड पावर हाउस स्थित अपने घर लौट रही थी.
दुर्घटना का पता तब चला जब द्रोपदी के घर न पहुंचने तथा उसका फोन बंद मिलने पर मोहन चंद अपने स्कूटर से उन्हें ढूंढने निकले. रास्ते में उन्होंने कार नहर में गिरी देखी तो पुलिस को सूचना दी. गोताखारों की मदद से नहर से शव बाहर निकाले गए . मृतकों में द्रोपदी (34), उसकी पुत्री ज्योति, भाई की पुत्री दीपिका(सात), भाई का पुत्र सोनू (पांच) तथा कार चालक मोहन सिंह धामी शामिल हैं. द्रोपदी विधवा थी और लोहिया हेड पावर हाउस में काम करती थी.
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Uttarakhand Accident: उत्तराखंड में बीते चौबीस घंटाटों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में दस लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में कार चालक के अलावा दो परिवारों के नौ सदस्य शामिल हैं. पुलिस के अनुसार पहली घटना टिहरी जिले के भिलंगना क्षेत्र के बालगंगा में शुक्रवार शाम हुई जहां एक परिवार के पांच सदस्यों को लेकर जा रही कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी. ये लोग अपने रिश्तेदार के यहां शोक संवेदना व्यक्त कर गांव लौट रहे थे. बालगंगा के तहसीलदार एस पी ममगाई ने बताया कि इस दुर्घटना में पांचों व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गयी. उन्होंने बताया कि होल्टा गांव के रहने वाले गबर सिंह अपने परिवार के साथ अपनी बहू के मायके राजगांव में किसी रिश्तेदार की मृत्यु की शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद वापस लौट रहे थे और तभी रास्ते में सेंदुल-पटुड गांव मोटर मार्ग पर कार पीछे करते समय वह अनियंत्रित होकर लगभग दो सौ मीटर गहरी खाई में गिर गई. ममगाई ने बताया कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और पुलिस तथा स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों का खाई से बाहर निकाला. पुलिस के अनुसार मृतकों में गबर सिंह के अलावा उनकी पत्नी बबली देवी , तुलसी देवी , सोना देवी और उर्मिला देवी शामिल हैं. एक अन्य घटना में, ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा में लोहिया हेड पावर चैनल के पास एक कार शारदा नहर में जा गिरी, जि ससे उसमें सवार एक परिवार के चार सदस्यों समेत पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी. मरने वालों में कार चालक भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक यह हादसा बृहस्पतिवार देर शाम हुआ जब द्रोपदी नाम की महिला अपनी पुत्री और अपने भाई के दो बच्चों को लेकर अपने भाई मोहन चंद के अंजनिया स्थित घर से अपने लोहिया हेड पावर हाउस स्थित अपने घर लौट रही थी. दुर्घटना का पता तब चला जब द्रोपदी के घर न पहुंचने तथा उसका फोन बंद मिलने पर मोहन चंद अपने स्कूटर से उन्हें ढूंढने निकले. रास्ते में उन्होंने कार नहर में गिरी देखी तो पुलिस को सूचना दी. गोताखारों की मदद से नहर से शव बाहर निकाले गए . मृतकों में द्रोपदी , उसकी पुत्री ज्योति, भाई की पुत्री दीपिका, भाई का पुत्र सोनू तथा कार चालक मोहन सिंह धामी शामिल हैं. द्रोपदी विधवा थी और लोहिया हेड पावर हाउस में काम करती थी.
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