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केट विंसलेट स्टेज पर गईं तो थीं बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड लेने। लेकिन स्टेज पर ऐसी स्पीच दे डाली जिससे सुनकर वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। इसी बीच मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसन जेनी स्टेज पर दौड़ती हुई आईं और वो कर दिया जिसे देखने के बाद लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ।
कैलिफोर्निया स्थित बेवरली हिल्स में 'हॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड्स 2017' का आयोजन किया गया। इस इवेंट में केट विंसलेट को उनकी फिल्म 'वंडर व्हील' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दिया गया। ट्रॉफी लेने के बाद वह माइक के पास जैसे ही पहुंचीं एक्ट्रेस और प्रेजेंटर एलिसन जेनी के लिए अपनी एक्साइटमेंट को काबू ना कर पाईं। उन्होंने बताया कि वह पॉलिटिकल ड्रामा 'द वेस्ट विंग' में एलिसन द्वारा निभाए गए व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी के किरदार से काफी प्रभावित हैं।
एलिसन की तारीफ करते हुए विंसलेट ने कहा, 'मुझे पता है कि मैं आपको नहीं जानती लेकिन ये मालूम है कि मैं आप जैसा बनना चाहती हूं। ' ऑस्कर विजेता विंसलेट ने आगे कहा, 'हम शायद किस कर सकते हैं. . . शायद। ' उनका इतना कहना था कि एलिसन उसी वक्त दौड़कर स्टेज पर आईं और दोनों ने एक दूसरे को स्टेज पर सबके सामने किस कर लिया।
वैसे दोनों का किस था तो माइक्रो-सेकेंड का लेकिन सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है।
फिल्म 'टाइटैनिक' फेम एक्ट्रेस केट विंसलेट ने 'हॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड्स 2017' में एली साब की काले रंग के जंपसूट में चार चांद लगाए। वहीं एलिसन भी काले रंग की फिशटेल स्कर्ट में खूबसूरत लग रही थीं। एलिसन को समारोह में दो अवॉर्ड्स मिले।
| केट विंसलेट स्टेज पर गईं तो थीं बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड लेने। लेकिन स्टेज पर ऐसी स्पीच दे डाली जिससे सुनकर वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। इसी बीच मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसन जेनी स्टेज पर दौड़ती हुई आईं और वो कर दिया जिसे देखने के बाद लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कैलिफोर्निया स्थित बेवरली हिल्स में 'हॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड्स दो हज़ार सत्रह' का आयोजन किया गया। इस इवेंट में केट विंसलेट को उनकी फिल्म 'वंडर व्हील' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दिया गया। ट्रॉफी लेने के बाद वह माइक के पास जैसे ही पहुंचीं एक्ट्रेस और प्रेजेंटर एलिसन जेनी के लिए अपनी एक्साइटमेंट को काबू ना कर पाईं। उन्होंने बताया कि वह पॉलिटिकल ड्रामा 'द वेस्ट विंग' में एलिसन द्वारा निभाए गए व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी के किरदार से काफी प्रभावित हैं। एलिसन की तारीफ करते हुए विंसलेट ने कहा, 'मुझे पता है कि मैं आपको नहीं जानती लेकिन ये मालूम है कि मैं आप जैसा बनना चाहती हूं। ' ऑस्कर विजेता विंसलेट ने आगे कहा, 'हम शायद किस कर सकते हैं. . . शायद। ' उनका इतना कहना था कि एलिसन उसी वक्त दौड़कर स्टेज पर आईं और दोनों ने एक दूसरे को स्टेज पर सबके सामने किस कर लिया। वैसे दोनों का किस था तो माइक्रो-सेकेंड का लेकिन सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है। फिल्म 'टाइटैनिक' फेम एक्ट्रेस केट विंसलेट ने 'हॉलीवुड फिल्म अवॉर्ड्स दो हज़ार सत्रह' में एली साब की काले रंग के जंपसूट में चार चांद लगाए। वहीं एलिसन भी काले रंग की फिशटेल स्कर्ट में खूबसूरत लग रही थीं। एलिसन को समारोह में दो अवॉर्ड्स मिले। |
थाना क्षेत्र के दो स्थानों पर अलग-अलग हुई सड़क दुर्घटनाओं में पुजारी समेत दो लोगों की मौत हो गई। जहां देवइत गांव स्थित यूबीआई बैंक के पास अंनियंत्रित बाइक ट्रैक्टर ट्राली में भिड़ गई जिसमें युवक की मौत हो गई वहीं, घिनहापुर गांव के समीप बाइक से धक्का लग जाने से पुजारी की जान चली गई। जाफरपुर गांव निवासी 40 वर्षीय सुजीत चौहान रविवार को दोपहर एक बजे देवइत गांव निवासी अपने साढू राजदेव चौहान की बिटिया की शादी में शामिल होने के लिए गया था। वह सामान के लिए बाइक से निकला था। मेंहनगर-छतवारा मार्ग के देवईत यूबीआई बैंक के पास बाइक अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसे जिला अस्पताल ले गए। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। वट ट्रक चालक था। उधर, मेंहनगर वाया खरिहानी मार्ग स्थित घिनहापुर गांव के समीप रविवार की शाम सड़क पार कर रहे 68 वर्षीय बुजुर्ग पुजारी रामकुंवर चौहान सुन्नर ग्राम घटिया (नोनरा) अनियंत्रित बाइक से धक्का लग गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रामकुंवर चौहान तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और कई वर्ष पूर्व से अध्यात्मिक रुप से जुड़कर मंदिर पर पूजा पाठ करते थे। रामकुंवर चौहान के तीन शादी शुदा पुत्र हैं। जिसमें दूसरा बेटा राम सिंह रोजी-रोटी के लिए बाहर है, राधे और घनश्याम घर रहते हैं।
| थाना क्षेत्र के दो स्थानों पर अलग-अलग हुई सड़क दुर्घटनाओं में पुजारी समेत दो लोगों की मौत हो गई। जहां देवइत गांव स्थित यूबीआई बैंक के पास अंनियंत्रित बाइक ट्रैक्टर ट्राली में भिड़ गई जिसमें युवक की मौत हो गई वहीं, घिनहापुर गांव के समीप बाइक से धक्का लग जाने से पुजारी की जान चली गई। जाफरपुर गांव निवासी चालीस वर्षीय सुजीत चौहान रविवार को दोपहर एक बजे देवइत गांव निवासी अपने साढू राजदेव चौहान की बिटिया की शादी में शामिल होने के लिए गया था। वह सामान के लिए बाइक से निकला था। मेंहनगर-छतवारा मार्ग के देवईत यूबीआई बैंक के पास बाइक अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसे जिला अस्पताल ले गए। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। वट ट्रक चालक था। उधर, मेंहनगर वाया खरिहानी मार्ग स्थित घिनहापुर गांव के समीप रविवार की शाम सड़क पार कर रहे अड़सठ वर्षीय बुजुर्ग पुजारी रामकुंवर चौहान सुन्नर ग्राम घटिया अनियंत्रित बाइक से धक्का लग गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रामकुंवर चौहान तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और कई वर्ष पूर्व से अध्यात्मिक रुप से जुड़कर मंदिर पर पूजा पाठ करते थे। रामकुंवर चौहान के तीन शादी शुदा पुत्र हैं। जिसमें दूसरा बेटा राम सिंह रोजी-रोटी के लिए बाहर है, राधे और घनश्याम घर रहते हैं। |
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ प्र के महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि प्रदेश के ऐसे सभी कार्मिकों जो कि 30 जून को सेवा निवृत्त होने वाले हैं, को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ अनुमन्य कराये जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े व एक वर्ष कार्य करने के उपरांत वार्षिक वेतन वृद्धि न मिलने से आर्थिक नुकसान से बच सके। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपना फैसला दे रखा है।
अतुल मिश्र ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा अपने कार्मिकों को प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान किया जाता है, उक्त लाभ ऐसे कार्मिकों को अनुमन्य होता है, जिनके द्वारा विगत वर्ष 1 जुलाई से इस वर्ष 30 जून तक अपनी संतोषजनक सेवाएं पूर्ण की गयी हों। परन्तु ऐसे कार्मिक जो कि 30 जून को अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवा निवृत्त हो जाते हैं उन्हें पूरे वर्ष संतोषजनक सेवाएं पूर्ण करने के पश्चात भी उक्त लाभ इसलिये प्राप्त नहीं हो पाता है, क्योंकि वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ जुलाई पेड इन अगस्त के वेतन से प्राप्त होता है।
इस विसंगति के विरुद्ध उच्च न्यायालय, मद्रास के समक्ष रिट याचिका सं0-18732/2017 पी0 अय्यमपेरूमल बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य योजित की गयी थी। इस याचिका में उच्च न्यायालय, मद्रास द्वारा 30 जून को ही सेवा निवृत्त हो गये कार्मिकों को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान किये जाने सम्बन्धी आदेश 15. 09. 2017 को पारित किये गये।
उच्च न्यायालय, मद्रास के उक्त आदेश के विरूद्ध भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुज्ञा याचिका (सि0) 22283/2018 यूनियन आफ इण्डिया बनाम पी0 अय्यमपेरूमल योजित की गयी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 23. 07. 2018 को सुनवाई के पश्चात विषयगत प्रकरण में उच्च न्यायालय, मद्रास के आदेश को यथावत रखते हुए विशेष अनुज्ञा याचिका को निरस्त कर दिया गया।
परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत व महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उच्च न्यायालय, मद्रास द्वारा पारित निर्णय एवं तत्क्रम में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के समादर में प्रदेश के ऐसे सभी कार्मिकों जो कि 30 जून को सेवा निवृत्त होने वाले हैं, को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ अनुमन्य करायें, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े व एक वर्ष कार्य करने के उपरांत वार्षिक वेतन वृद्धि न मिलने से आर्थिक नुकसान से बच सकें। वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ न मिल पाने से कर्मचारियों के पेंशन पर भी आर्थिक असर पड़ रहा है।
| लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ प्र के महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि प्रदेश के ऐसे सभी कार्मिकों जो कि तीस जून को सेवा निवृत्त होने वाले हैं, को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ अनुमन्य कराये जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े व एक वर्ष कार्य करने के उपरांत वार्षिक वेतन वृद्धि न मिलने से आर्थिक नुकसान से बच सके। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपना फैसला दे रखा है। अतुल मिश्र ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा अपने कार्मिकों को प्रत्येक वर्ष एक जुलाई को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान किया जाता है, उक्त लाभ ऐसे कार्मिकों को अनुमन्य होता है, जिनके द्वारा विगत वर्ष एक जुलाई से इस वर्ष तीस जून तक अपनी संतोषजनक सेवाएं पूर्ण की गयी हों। परन्तु ऐसे कार्मिक जो कि तीस जून को अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवा निवृत्त हो जाते हैं उन्हें पूरे वर्ष संतोषजनक सेवाएं पूर्ण करने के पश्चात भी उक्त लाभ इसलिये प्राप्त नहीं हो पाता है, क्योंकि वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ जुलाई पेड इन अगस्त के वेतन से प्राप्त होता है। इस विसंगति के विरुद्ध उच्च न्यायालय, मद्रास के समक्ष रिट याचिका संशून्य-अट्ठारह हज़ार सात सौ बत्तीस/दो हज़ार सत्रह पीशून्य अय्यमपेरूमल बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य योजित की गयी थी। इस याचिका में उच्च न्यायालय, मद्रास द्वारा तीस जून को ही सेवा निवृत्त हो गये कार्मिकों को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान किये जाने सम्बन्धी आदेश पंद्रह. नौ. दो हज़ार सत्रह को पारित किये गये। उच्च न्यायालय, मद्रास के उक्त आदेश के विरूद्ध भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुज्ञा याचिका बाईस हज़ार दो सौ तिरासी/दो हज़ार अट्ठारह यूनियन आफ इण्डिया बनाम पीशून्य अय्यमपेरूमल योजित की गयी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तेईस. सात. दो हज़ार अट्ठारह को सुनवाई के पश्चात विषयगत प्रकरण में उच्च न्यायालय, मद्रास के आदेश को यथावत रखते हुए विशेष अनुज्ञा याचिका को निरस्त कर दिया गया। परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत व महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उच्च न्यायालय, मद्रास द्वारा पारित निर्णय एवं तत्क्रम में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के समादर में प्रदेश के ऐसे सभी कार्मिकों जो कि तीस जून को सेवा निवृत्त होने वाले हैं, को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ अनुमन्य करायें, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े व एक वर्ष कार्य करने के उपरांत वार्षिक वेतन वृद्धि न मिलने से आर्थिक नुकसान से बच सकें। वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ न मिल पाने से कर्मचारियों के पेंशन पर भी आर्थिक असर पड़ रहा है। |
४. मोहनीय कर्म की प्रकृतियाँ - मोहनीय कर्म के मुख्य भेद हैं- (१) दर्शनमोहनीय (२) चारित्र मोहनीय । दर्शन मोहनीय की तीन प्रकृतियाँ हैं- मिथ्यात्व, सम्यंक्रमिथ्यात्व (मिथ) और सम्यक्त्वमोहनीय । चारित्र मोहनीय के दो भेद हैं- कपाय मो० और नोकपाय मो० । कपाय मो० के सोलह भेद हैं - अनन्तानुबन्धी का (१) क्रोध (२) मान ((३) माया (४) लोभ, अपत्याख्यानाचरण का (५) क्रोध (६) मान (७) मांया (८) लोभ,
(६), क्रोध, (१०) मान (११) माया (१२) लोभ संज्वलन का (१३) क्रोध (१४) मान (१५) माया (१६) लोभ । नोकपाय' के नौ भेद हैं - १ हास्य २ रति ३ अरति ४ भय ५ शोक ६ जुगुप्सा ७ स्त्रीवेद = पुरुषवेद ६ नपुंसकवेद । ये सब मिल कर अट्ठाईस भेद होते हैं ।
५ आयु कर्म की प्रकृतियाँ - १ नरकायु २ तिर्यश्चायु ३ मनुष्यायु ४ देवायु ।
६ नाम कर्म की प्रकृतियाँ - ४ चार गति ( नरक, तिर्यञ्च, मनुष्य, देव), ५ जाति (एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, पंचेन्द्रिय), ५. शरीर (औदारिक, वैक्रिय,
9 हास्य शादि करायों को उत्तेजित करते हैं और उनके सहचारी हैं इसलिए) काय कहते हैं यह भी कवाय ही ि | चार. मोहनीय कर्म की प्रकृतियाँ - मोहनीय कर्म के मुख्य भेद हैं- दर्शनमोहनीय चारित्र मोहनीय । दर्शन मोहनीय की तीन प्रकृतियाँ हैं- मिथ्यात्व, सम्यंक्रमिथ्यात्व और सम्यक्त्वमोहनीय । चारित्र मोहनीय के दो भेद हैं- कपाय मोशून्य और नोकपाय मोशून्य । कपाय मोशून्य के सोलह भेद हैं - अनन्तानुबन्धी का क्रोध मान माया लोभ, अपत्याख्यानाचरण का क्रोध मान मांया लोभ, , क्रोध, मान माया लोभ संज्वलन का क्रोध मान माया लोभ । नोकपाय' के नौ भेद हैं - एक हास्य दो रति तीन अरति चार भय पाँच शोक छः जुगुप्सा सात स्त्रीवेद = पुरुषवेद छः नपुंसकवेद । ये सब मिल कर अट्ठाईस भेद होते हैं । पाँच आयु कर्म की प्रकृतियाँ - एक नरकायु दो तिर्यश्चायु तीन मनुष्यायु चार देवायु । छः नाम कर्म की प्रकृतियाँ - चार चार गति , पाँच जाति , पाँच. शरीर काय कहते हैं यह भी कवाय ही ि |
North Korea Missile Test: उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल टेस्ट की पुष्टि कर दी है. इसे मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बताया गया है. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह अमेरिका तक मार करने में सक्षम है.
उत्तर कोरिया ने सोमवार को पुष्टि की कि उसने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (North Korea Ballistic Missile) का परीक्षण किया है, जो अमेरिका के ग्वाम क्षेत्र तक मार करने में सक्षम है. हाल के वर्षों में यह उत्तर कोरिया का सबसे शक्तिशाली मिसाइल परीक्षण (Missile Test) है. इस परीक्षण के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है. आधिकारिक 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' ने बताया कि रविवार को हुए हवासोंग-12 (Hwasong-12) मिसाइल के परीक्षण का उद्देश्य चुनिंदा रूप से बनाई और तैनात की जा रही इस मिसाइल का मूल्यांकन करना और इसकी सटीकता का सत्यापन करना था.
उसने बताया कि मिसाइल पर लगे कैमरे ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की एक तस्वीर कैद की और रक्षा विज्ञान अकादमी ने इस हथियार प्रणाली की सटीकता, सुरक्षा और प्रभाविता की पुष्टि की (Missile Test North Korea). उत्तर कोरिया ने बताया कि उसने मिसाइल को अपने पूर्वी तट की ओर दागा. उसने अतिरिक्त जानकारी नहीं दी. दक्षिण कोरिया और जापान के आकलन के अनुसार, मिसाइल अधिकतम 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंची और कोरियाई प्रायद्वीप और जापान के बीच समुद्र में गिरने से पहले उसने 800 किलोमीटर की दूरी तय की.
इन जानकारियों से पता चलता है कि उत्तर कोरिया ने 2017 के बाद से अपनी सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. उसने 2017 में तीन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जो अमेरिका के भीतर तक मार करने में सक्षम हैं. हवासोंग-12 जमीन से जमीन तक मार करने में सक्षम परमाणु संपन्न मिसाइल है. यह अधिकतम 4,500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है. अमेरिका के ग्वाम क्षेत्र तक पहुंचने के लिए यह दूरी पर्याप्त है. उत्तर कोरिया ने इस महीने में यह सातवां परीक्षण किया है. एक के बाद एक परीक्षण किए जाना लंबे समय से बाधित परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाने का संकेत देता है.
इसपर व्हाइट हाउस का क्या रिएक्शन है?
रविवार के परीक्षण के बाद व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि वह ताजा मिसाइल परीक्षण को पिछले कई महीनों से चल रहे उकसावे वाले कृत्यों को बढ़ाने के तौर पर देखते हैं. प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि बाइडेन प्रशासन की उत्तर कोरिया को यह दिखाने के मकसद से आने वाले दिनों में इस ताजा मिसाइल परीक्षण का जवाब देने की योजना है कि वह क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. बाइडेन प्रशासन ने उत्तर कोरिया से वार्ता बहाल करने की फिर से अपील की है. वहीं दक्षिण कोरिया और जापान के अधिकारियों ने भी रविवार को हुए परीक्षण की निंदा की है.
| North Korea Missile Test: उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल टेस्ट की पुष्टि कर दी है. इसे मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बताया गया है. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह अमेरिका तक मार करने में सक्षम है. उत्तर कोरिया ने सोमवार को पुष्टि की कि उसने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जो अमेरिका के ग्वाम क्षेत्र तक मार करने में सक्षम है. हाल के वर्षों में यह उत्तर कोरिया का सबसे शक्तिशाली मिसाइल परीक्षण है. इस परीक्षण के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है. आधिकारिक 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' ने बताया कि रविवार को हुए हवासोंग-बारह मिसाइल के परीक्षण का उद्देश्य चुनिंदा रूप से बनाई और तैनात की जा रही इस मिसाइल का मूल्यांकन करना और इसकी सटीकता का सत्यापन करना था. उसने बताया कि मिसाइल पर लगे कैमरे ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की एक तस्वीर कैद की और रक्षा विज्ञान अकादमी ने इस हथियार प्रणाली की सटीकता, सुरक्षा और प्रभाविता की पुष्टि की . उत्तर कोरिया ने बताया कि उसने मिसाइल को अपने पूर्वी तट की ओर दागा. उसने अतिरिक्त जानकारी नहीं दी. दक्षिण कोरिया और जापान के आकलन के अनुसार, मिसाइल अधिकतम दो,शून्य किलोग्राममीटर की ऊंचाई तक पहुंची और कोरियाई प्रायद्वीप और जापान के बीच समुद्र में गिरने से पहले उसने आठ सौ किलोग्राममीटर की दूरी तय की. इन जानकारियों से पता चलता है कि उत्तर कोरिया ने दो हज़ार सत्रह के बाद से अपनी सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. उसने दो हज़ार सत्रह में तीन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जो अमेरिका के भीतर तक मार करने में सक्षम हैं. हवासोंग-बारह जमीन से जमीन तक मार करने में सक्षम परमाणु संपन्न मिसाइल है. यह अधिकतम चार,पाँच सौ किलोग्राममीटर तक की दूरी तय कर सकती है. अमेरिका के ग्वाम क्षेत्र तक पहुंचने के लिए यह दूरी पर्याप्त है. उत्तर कोरिया ने इस महीने में यह सातवां परीक्षण किया है. एक के बाद एक परीक्षण किए जाना लंबे समय से बाधित परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाने का संकेत देता है. इसपर व्हाइट हाउस का क्या रिएक्शन है? रविवार के परीक्षण के बाद व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि वह ताजा मिसाइल परीक्षण को पिछले कई महीनों से चल रहे उकसावे वाले कृत्यों को बढ़ाने के तौर पर देखते हैं. प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि बाइडेन प्रशासन की उत्तर कोरिया को यह दिखाने के मकसद से आने वाले दिनों में इस ताजा मिसाइल परीक्षण का जवाब देने की योजना है कि वह क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. बाइडेन प्रशासन ने उत्तर कोरिया से वार्ता बहाल करने की फिर से अपील की है. वहीं दक्षिण कोरिया और जापान के अधिकारियों ने भी रविवार को हुए परीक्षण की निंदा की है. |
गुवाहाटीः यह महिला लगभग 40 वर्ष की है। 2011 में उसका निकाह माफिजुद्दीन के साथ हुआ था और दोनों के तीन बच्चे भी हैं। निकाह के बाद से अब तक वह अलग-अलग मर्दों के साथ 25 दफा घर छोड़कर भाग चुकी है। हर बार जब वह घर वापस आती है, तो शौहर उसे कबूल भी कर लेता है। हालाँकि उसे अफसोस भी है कि उसकी बीवी अब तक अपने वायदे पर टिकी नहीं रह सकी है। हैरान करने वाली यह घटना असम के नगाँव की है। महिला ढिंग की निवासी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम बार जब वह घर से भागी थी, तो अपने तीन माह के बच्चे को पड़ोसी के पास छोड़ गई थी। हर बार वापस लौटने पर शौहर ने उसे कबूल कर लिया। भागने के बाद वह जब भी वापस लौटती है, तो दोबारा ऐसा नहीं करने का वादा करती है, मगर बाद में फिर भाग जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला के तीन बच्चों में से सबसे छोटा महज तीन माह का है। अभी हाल ही में वो अपने ही गाँव के एक शख्स के साथ भाग गई थी। घर से भागते समय उसने अपने तीन माह के बच्चे को पड़ोसी के पास छोड़ दिया और कहा कि बकरियों के लिए चारा लेने जा रही है। जाते-जाते वह 22,000 रुपए और कुछ गहने भी अपने साथ ले गई। महिला के पति के अनुसार, 'आखिरी बार वो इसी माह 4 सितंबर को भागी थी। 2011 में हमारा निकाह होने के बाद 10 सालों में मेरी बीवी तक़रीबन 25 बार दूसरे मर्दों के साथ भाग चुकी है। हर बार परिवार में वापस लौटने के बाद उसने वादा किया कि वह फिर से ऐसा नहीं करेगी, किन्तु अब तक वह अपना वादा निभाने में नाकाम रही है। '
माफिजुद्दीन ने आगे कहा कि, 'कभी मेरी बीवी ने दावा किया कि वह अपने संबंधियों के घर गई थी। कभी उसने कहा कि वह अपने बीमार रिश्तेदारों को देखने के लिए गई थी। मैं उसे कबूल करूँगा, क्योंकि मैं उससे सच्चा प्यार करता हूँ और हमारे तीन छोटे बच्चे भी हैं। यदि मैं अपनी बीवी को कबूल नहीं करता, तो बच्चों की देखभाल कौन करेगा? मैंने कानूनी और अन्य समस्याओं से बचने के लिए पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की। ' महिला के दो नाबालिग बेटे और एक बेटी है। उसके सबसे छोटे बेटे की उम्र सिर्फ 3 महीने है और सबसे बड़ी बेटी की आयु 6 साल है। उसका दूसरा बेटा 3 साल का है। मुस्लिम बहुल सुदूर ढिंग लहकार गाँव के पड़ोसियों के अनुसार, महिला के गाँव के कई युवकों से नाज़ायज़ संबंध हैं और वह अलग-अलग प्रेमियों के साथ भाग जाती है। बाद में कुछ सप्ताह या महीनों के बाद वह वापस आ जाती है।
| गुवाहाटीः यह महिला लगभग चालीस वर्ष की है। दो हज़ार ग्यारह में उसका निकाह माफिजुद्दीन के साथ हुआ था और दोनों के तीन बच्चे भी हैं। निकाह के बाद से अब तक वह अलग-अलग मर्दों के साथ पच्चीस दफा घर छोड़कर भाग चुकी है। हर बार जब वह घर वापस आती है, तो शौहर उसे कबूल भी कर लेता है। हालाँकि उसे अफसोस भी है कि उसकी बीवी अब तक अपने वायदे पर टिकी नहीं रह सकी है। हैरान करने वाली यह घटना असम के नगाँव की है। महिला ढिंग की निवासी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम बार जब वह घर से भागी थी, तो अपने तीन माह के बच्चे को पड़ोसी के पास छोड़ गई थी। हर बार वापस लौटने पर शौहर ने उसे कबूल कर लिया। भागने के बाद वह जब भी वापस लौटती है, तो दोबारा ऐसा नहीं करने का वादा करती है, मगर बाद में फिर भाग जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला के तीन बच्चों में से सबसे छोटा महज तीन माह का है। अभी हाल ही में वो अपने ही गाँव के एक शख्स के साथ भाग गई थी। घर से भागते समय उसने अपने तीन माह के बच्चे को पड़ोसी के पास छोड़ दिया और कहा कि बकरियों के लिए चारा लेने जा रही है। जाते-जाते वह बाईस,शून्य रुपयापए और कुछ गहने भी अपने साथ ले गई। महिला के पति के अनुसार, 'आखिरी बार वो इसी माह चार सितंबर को भागी थी। दो हज़ार ग्यारह में हमारा निकाह होने के बाद दस सालों में मेरी बीवी तक़रीबन पच्चीस बार दूसरे मर्दों के साथ भाग चुकी है। हर बार परिवार में वापस लौटने के बाद उसने वादा किया कि वह फिर से ऐसा नहीं करेगी, किन्तु अब तक वह अपना वादा निभाने में नाकाम रही है। ' माफिजुद्दीन ने आगे कहा कि, 'कभी मेरी बीवी ने दावा किया कि वह अपने संबंधियों के घर गई थी। कभी उसने कहा कि वह अपने बीमार रिश्तेदारों को देखने के लिए गई थी। मैं उसे कबूल करूँगा, क्योंकि मैं उससे सच्चा प्यार करता हूँ और हमारे तीन छोटे बच्चे भी हैं। यदि मैं अपनी बीवी को कबूल नहीं करता, तो बच्चों की देखभाल कौन करेगा? मैंने कानूनी और अन्य समस्याओं से बचने के लिए पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की। ' महिला के दो नाबालिग बेटे और एक बेटी है। उसके सबसे छोटे बेटे की उम्र सिर्फ तीन महीने है और सबसे बड़ी बेटी की आयु छः साल है। उसका दूसरा बेटा तीन साल का है। मुस्लिम बहुल सुदूर ढिंग लहकार गाँव के पड़ोसियों के अनुसार, महिला के गाँव के कई युवकों से नाज़ायज़ संबंध हैं और वह अलग-अलग प्रेमियों के साथ भाग जाती है। बाद में कुछ सप्ताह या महीनों के बाद वह वापस आ जाती है। |
नई दिल्ली - देश में पेट्रोल-डीजल के दाम शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन घटते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए। सबसे बड़ी घरेलू तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत शुक्रवार को नौ पैसे कम होकर 71. 86 रुपए प्रति लीटर रह गई। डीजल के दाम भी छह पैसे घटकर 65. 14 रुपए प्रति लीटर पर आ गए। यह दोनों जीवाश्म ईंधनों का 23 अगस्त के बाद का निचला स्तर है। पेट्रोल की कीमत कोलकाता और मुंबई में आठ-आठ पैसे की गिरावट के साथ क्रमशः 74. 58 रुपए और 77. 54 रुपए प्रति लीटर रह गई।
| नई दिल्ली - देश में पेट्रोल-डीजल के दाम शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन घटते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए। सबसे बड़ी घरेलू तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत शुक्रवार को नौ पैसे कम होकर इकहत्तर. छियासी रुपयापए प्रति लीटर रह गई। डीजल के दाम भी छह पैसे घटकर पैंसठ. चौदह रुपयापए प्रति लीटर पर आ गए। यह दोनों जीवाश्म ईंधनों का तेईस अगस्त के बाद का निचला स्तर है। पेट्रोल की कीमत कोलकाता और मुंबई में आठ-आठ पैसे की गिरावट के साथ क्रमशः चौहत्तर. अट्ठावन रुपयापए और सतहत्तर. चौवन रुपयापए प्रति लीटर रह गई। |
आज अधिक मास का दूसरा और सावन मास का चौथा सोमवार व्रत है. अधिक श्रावण मास में भगवान शिव के इस पावन व्रत करने का किसे फल मिलता है और किसे नहीं, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.
हिंदू धर्म में जिस सोमवार के दिन को औढरदानी शिव की पूजा के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है, उसका महत्व महादेव के प्रिय मास में पड़ने पर और भी ज्यादा बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने पर शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं. इस साल अधिक मास के पड़ जाने के कारण श्रावण मास में चार या पांच सोमवार नहीं बल्कि आठ सोमवार पड़ रहे हैं. पंचांग के अनुसार आज अधिक श्रावण मास का दूसरा और श्रावण मास का चौथा सोमवार है. सावन के इस पावन व्रत को लेकर का किसे फल मिलेगा और किसे नहीं आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
अधिक मास में श्रावण सोमवार व्रत और शिव पूजा के अभिषेक आदि को लेकर बहुत से लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि क्या इसकी पूजा मान्य होगी कि नहीं? साथ ही इस बात की भी चिंता है कि इसका पुण्यफल मिलेगा या फिर नहीं? ऐसा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि मलमास को भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मलमास में कोई शुभ कार्य शुरु नहीं किया जाता है.
हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक मास में किसी भी शुभ चीज की शुरुआत नहीं की जाती है. ऐसे में यदि आप सावन सोमवार का अधिक मास में प्रारंभ करने की सोच रहे हैं तो आपको इसका पुण्यफल नहीं मिलेगा, लेकिन यदि आप श्रावण सोमवार का व्रत अधिक मास लगने से पहले ही करते चले आ रहे हैं तो आपको इस व्रत एवं भगवान शिव की पूजा एवं अभिषेक आदि का पूरा पुण्यफल मिलेगा.
आज अधिक सावन सोमवार व्रत के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद किसी शिवालय में अथवा अपने घर में स्थापित शिवलिंग को सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं उसके बाद उसका कच्चे दूध, घी, शहद, दही, पुष्प, अक्षत, बेलपत्र, शमीपत्र, भस्म, आदि से पूजन करें. इसके बाद सोमवार व्रत की कथा का पाठ और रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के मंत्र का जाप करें. सावन सोमवार व्रत की पूजा करने के बाद महादेव की आरती करना न भूलें.
| आज अधिक मास का दूसरा और सावन मास का चौथा सोमवार व्रत है. अधिक श्रावण मास में भगवान शिव के इस पावन व्रत करने का किसे फल मिलता है और किसे नहीं, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. हिंदू धर्म में जिस सोमवार के दिन को औढरदानी शिव की पूजा के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है, उसका महत्व महादेव के प्रिय मास में पड़ने पर और भी ज्यादा बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने पर शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं. इस साल अधिक मास के पड़ जाने के कारण श्रावण मास में चार या पांच सोमवार नहीं बल्कि आठ सोमवार पड़ रहे हैं. पंचांग के अनुसार आज अधिक श्रावण मास का दूसरा और श्रावण मास का चौथा सोमवार है. सावन के इस पावन व्रत को लेकर का किसे फल मिलेगा और किसे नहीं आइए इसे विस्तार से जानते हैं. अधिक मास में श्रावण सोमवार व्रत और शिव पूजा के अभिषेक आदि को लेकर बहुत से लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि क्या इसकी पूजा मान्य होगी कि नहीं? साथ ही इस बात की भी चिंता है कि इसका पुण्यफल मिलेगा या फिर नहीं? ऐसा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि मलमास को भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मलमास में कोई शुभ कार्य शुरु नहीं किया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक मास में किसी भी शुभ चीज की शुरुआत नहीं की जाती है. ऐसे में यदि आप सावन सोमवार का अधिक मास में प्रारंभ करने की सोच रहे हैं तो आपको इसका पुण्यफल नहीं मिलेगा, लेकिन यदि आप श्रावण सोमवार का व्रत अधिक मास लगने से पहले ही करते चले आ रहे हैं तो आपको इस व्रत एवं भगवान शिव की पूजा एवं अभिषेक आदि का पूरा पुण्यफल मिलेगा. आज अधिक सावन सोमवार व्रत के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद किसी शिवालय में अथवा अपने घर में स्थापित शिवलिंग को सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं उसके बाद उसका कच्चे दूध, घी, शहद, दही, पुष्प, अक्षत, बेलपत्र, शमीपत्र, भस्म, आदि से पूजन करें. इसके बाद सोमवार व्रत की कथा का पाठ और रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के मंत्र का जाप करें. सावन सोमवार व्रत की पूजा करने के बाद महादेव की आरती करना न भूलें. |
नई दिल्ली, : बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को शेयर बाजार (Stock Market Today) सकारात्मक नोट पर शुरू हुआ। कारोबार शुरू होने के कुछ ही देर के भीतर बेंचमार्क इंडेक्स 0. 8% ऊपर आ गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक बढ़कर 57,000 के ऊपर चला गया। निफ्टी में 130 अंक की उछाल आई और इसने 17,000 का लेवल फिर से हासिल कर लिया। मेटल और बैंक में सबसे ज्यादा बढ़त के साथ सभी सूचकांक हरे निशान में हैं।
बुधवार को वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और विदेशी कोष के ऑउटफ्लो को देखते हुए बेंचमार्क सूचकांक बुधवार को करीब एक प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 509. 24 अंक या 0. 89 प्रतिशत गिरकर 56,598. 28 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 148. 80 अंक या 0. 87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,858. 60 पर बंद हुआ।
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, इंडसइंड बैंक और एमएंडएम निफ्टी पर लाभ में थे, जबकि एशियन पेंट्स, सिप्ला, टीसीएस और हीरो मोटोकॉर्प के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में लगभग 1636 शेयर मजबूत हुए, 294 शेयरों में गिरावट आई और 75 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
30 शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, आईटीसी, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शुरुआती कारोबार में प्रमुख गेनर्स रहे। एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी इंडिया पिछड़ गए।
एशिया में सियोल, टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार हरे रंग में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजारों में भी बुधवार को तेजी आई और बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। हेम सिक्योरिटीज के पीएमएस प्रमुख मोहित निगम ने कहा कि पिछले कुछ सत्रों में बिकवाली के बाद बुधवार को अमेरिकी बाजार उच्च स्तर पर बंद हुए। यूरोपीय बाजार भी हरे रंग में बंद हुए। सभी प्रमुख एशियाई बाजार गुरुवार की शुरुआत में सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0. 45 प्रतिशत गिरकर 88. 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बीएसई के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 2,772. 49 करोड़ रुपये के शेयर उतारे।
निवेशक अब शुक्रवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव के कारण आरबीआइ 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की ताकत का अनुमान लगाता है, 0. 61 प्रतिशत बढ़कर 113. 28 हो गया। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 0. 46 प्रतिशत गिरकर 88. 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
डॉलर के ऊंचे स्तर से पीछे हटने से गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 35 पैसे बढ़कर 81. 58 पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा में रुपया डॉलर के मुकाबले 81. 60 पर खुला और 81. 58 का स्तर छू गया। पिछले बंद के मुकाबले यह 35 पैसे की बढ़त है। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे की गिरावट के साथ 81. 93 पर बंद होने से पहले इंट्राडे ट्रेड में पहली बार रुपया 82 से नीचे गिर गया।
| नई दिल्ली, : बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को शेयर बाजार सकारात्मक नोट पर शुरू हुआ। कारोबार शुरू होने के कुछ ही देर के भीतर बेंचमार्क इंडेक्स शून्य. आठ% ऊपर आ गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब पाँच सौ अंक बढ़कर सत्तावन,शून्य के ऊपर चला गया। निफ्टी में एक सौ तीस अंक की उछाल आई और इसने सत्रह,शून्य का लेवल फिर से हासिल कर लिया। मेटल और बैंक में सबसे ज्यादा बढ़त के साथ सभी सूचकांक हरे निशान में हैं। बुधवार को वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और विदेशी कोष के ऑउटफ्लो को देखते हुए बेंचमार्क सूचकांक बुधवार को करीब एक प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स पाँच सौ नौ. चौबीस अंक या शून्य. नवासी प्रतिशत गिरकर छप्पन,पाँच सौ अट्ठानवे. अट्ठाईस पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी एक सौ अड़तालीस. अस्सी अंक या शून्य. सत्तासी प्रतिशत की गिरावट के साथ सोलह,आठ सौ अट्ठावन. साठ पर बंद हुआ। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, इंडसइंड बैंक और एमएंडएम निफ्टी पर लाभ में थे, जबकि एशियन पेंट्स, सिप्ला, टीसीएस और हीरो मोटोकॉर्प के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में लगभग एक हज़ार छः सौ छत्तीस शेयर मजबूत हुए, दो सौ चौरानवे शेयरों में गिरावट आई और पचहत्तर शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। तीस शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, आईटीसी, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शुरुआती कारोबार में प्रमुख गेनर्स रहे। एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी इंडिया पिछड़ गए। एशिया में सियोल, टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार हरे रंग में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजारों में भी बुधवार को तेजी आई और बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। हेम सिक्योरिटीज के पीएमएस प्रमुख मोहित निगम ने कहा कि पिछले कुछ सत्रों में बिकवाली के बाद बुधवार को अमेरिकी बाजार उच्च स्तर पर बंद हुए। यूरोपीय बाजार भी हरे रंग में बंद हुए। सभी प्रमुख एशियाई बाजार गुरुवार की शुरुआत में सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शून्य. पैंतालीस प्रतिशत गिरकर अठासी. बानवे डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बीएसई के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को दो,सात सौ बहत्तर. उनचास करोड़ रुपये के शेयर उतारे। निवेशक अब शुक्रवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव के कारण आरबीआइ पचास आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की ताकत का अनुमान लगाता है, शून्य. इकसठ प्रतिशत बढ़कर एक सौ तेरह. अट्ठाईस हो गया। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा शून्य. छियालीस प्रतिशत गिरकर अठासी. इक्यानवे डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डॉलर के ऊंचे स्तर से पीछे हटने से गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पैंतीस पैसे बढ़कर इक्यासी. अट्ठावन पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा में रुपया डॉलर के मुकाबले इक्यासी. साठ पर खुला और इक्यासी. अट्ठावन का स्तर छू गया। पिछले बंद के मुकाबले यह पैंतीस पैसे की बढ़त है। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया चालीस पैसे की गिरावट के साथ इक्यासी. तिरानवे पर बंद होने से पहले इंट्राडे ट्रेड में पहली बार रुपया बयासी से नीचे गिर गया। |
वामदेवो महायोगी रुद्रःकालपिनाक । नारायणोऽपिभगवान्देवकीननयो हरिः ।। १३१ लर्जुनाय स्वयं साक्षाद्दत्तवानिदमुत्तमम् । यदाहं लब्धवान्द्राद्वामदेवादनुत्तमम् ।। १३२ विशेषागिरीशे भक्तिस्तम्मादारभ्य मेऽभवत् । शरप्य गिरीशरुनोहविपन ।।१३३
वह सम्वत्तं मनकुमार से ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करके सत्यत्व को प्राप्त हो गया था। योगोन्द्र सनन्दन ने भी महर्षि पुचह के लिये यह ज्ञान प्रदान किया था। पुलह प्रजापनि ने भी गौतम को दिया था। मङ्गिरा ने वेदो के महा विद्वान भरद्वाज को यही ज्ञान प्रदान किया था ।।१२७-१२८।। कपिल ने रोष तथा पञ्च शिख को दिया था। पराशर मुनि ने जो सभी तत्त्वों के दर्शक मेरे पिता थे इस ज्ञान को सनक से प्राप्त किया था। उनसे उम परम ज्ञान वाल्मीकि ने प्राप्त किया था। पहले मनो के देह से समुत्पन्न देव ने मुनको कहा था ॥१२६-१३०॥ वामदेव महायोगे रह काल पिनाक के धारण करने वाले हैं और नारायण भी भगवान् देवको के पुत्र हरि है। उन्होंने साझान् स्वयं इन उत्तम योग को अर्जुन के लिये दिया था। मैंने यह उत्तम ज्ञान वामदेव रव से प्राप्त किया था विशेष रूप से गिरीश में भक्ति तभी से प्रारम्भ करके मेरी हुई थोर विरोध रद्रदेव का में विशेष रूप से प्रपन्न हो गया था ।।१३१-१३३॥
भूतेश गिरीश स्थाणु देवदेव त्रिशुलिनम् । भवन्तोपि हि त देव शम्भु गोपवाहनम् ॥१३४ प्रपन्ना सपनोवा सपुना शरण शिवम् । वर्त्तध्वन्तत्प्रसादेनकर्मयोगेन शङ्करम् ॥१३५ पूजयध्व महादेव गोपनि व्यालभूषणम् । एवमुक्त पुनस्ते तु शोकाद्या महश्वरम् ॥१३६ प्रणेमु गाश्वत स्थाणु व्यास नत्यवतीसुतम् । हृवृपयन प्रभुम ।। | वामदेवो महायोगी रुद्रःकालपिनाक । नारायणोऽपिभगवान्देवकीननयो हरिः ।। एक सौ इकतीस लर्जुनाय स्वयं साक्षाद्दत्तवानिदमुत्तमम् । यदाहं लब्धवान्द्राद्वामदेवादनुत्तमम् ।। एक सौ बत्तीस विशेषागिरीशे भक्तिस्तम्मादारभ्य मेऽभवत् । शरप्य गिरीशरुनोहविपन ।।एक सौ तैंतीस वह सम्वत्तं मनकुमार से ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करके सत्यत्व को प्राप्त हो गया था। योगोन्द्र सनन्दन ने भी महर्षि पुचह के लिये यह ज्ञान प्रदान किया था। पुलह प्रजापनि ने भी गौतम को दिया था। मङ्गिरा ने वेदो के महा विद्वान भरद्वाज को यही ज्ञान प्रदान किया था ।।एक सौ सत्ताईस-एक सौ अट्ठाईस।। कपिल ने रोष तथा पञ्च शिख को दिया था। पराशर मुनि ने जो सभी तत्त्वों के दर्शक मेरे पिता थे इस ज्ञान को सनक से प्राप्त किया था। उनसे उम परम ज्ञान वाल्मीकि ने प्राप्त किया था। पहले मनो के देह से समुत्पन्न देव ने मुनको कहा था ॥एक सौ छब्बीस-एक सौ तीस॥ वामदेव महायोगे रह काल पिनाक के धारण करने वाले हैं और नारायण भी भगवान् देवको के पुत्र हरि है। उन्होंने साझान् स्वयं इन उत्तम योग को अर्जुन के लिये दिया था। मैंने यह उत्तम ज्ञान वामदेव रव से प्राप्त किया था विशेष रूप से गिरीश में भक्ति तभी से प्रारम्भ करके मेरी हुई थोर विरोध रद्रदेव का में विशेष रूप से प्रपन्न हो गया था ।।एक सौ इकतीस-एक सौ तैंतीस॥ भूतेश गिरीश स्थाणु देवदेव त्रिशुलिनम् । भवन्तोपि हि त देव शम्भु गोपवाहनम् ॥एक सौ चौंतीस प्रपन्ना सपनोवा सपुना शरण शिवम् । वर्त्तध्वन्तत्प्रसादेनकर्मयोगेन शङ्करम् ॥एक सौ पैंतीस पूजयध्व महादेव गोपनि व्यालभूषणम् । एवमुक्त पुनस्ते तु शोकाद्या महश्वरम् ॥एक सौ छत्तीस प्रणेमु गाश्वत स्थाणु व्यास नत्यवतीसुतम् । हृवृपयन प्रभुम ।। |
- वास्तुशास्त्र के अनुसार रोज सुबह सूर्य भगवान को जल अर्पित करें और पांच मिनट तक दोनों हांथ जोड़कर उगते सूरज पर ध्यान लगाएं। नियमित रूप से 'आदित्य हृदय स्त्रोत' का पाठ करें। इससे आपके आत्मविश्वास में तेजी से वृद्धि होगी और आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।
- रविवार के दिन सुबह उठकर सूर्यदेव को प्रणाम कर घर के बड़ों का आशीर्वाद लें और उन्हें मिठाई खिलाएं। इससे आपके आत्मविश्वास में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, अपने लिविंग रूम को उगते सूरज या दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर से सजाएं। इससे आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है और घर से नकारात्मकता भी दूर होती है। बता दें कि तस्वीर में घोड़ा अंदर की ओर दौड़ता लगना चाहिए। कभी भी खाली दीवार की ओर मुंह करके न बैठें क्योंकि इससे आपका आत्मविश्वास डगमगा सकता है।
- वास्तु के अनुसार, अपने घर की खिड़कियां खुली रखें। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सीधे खिड़की के सामने अपनी पीठ के बल न बैठें, क्योंकि इससे ऊर्जा बाहर चली जाती है और आत्मविश्वास कम होता है।
- सूरजमुखी के पौधे को पूर्व दिशा में रखें, इससे आपके आत्मशक्ति में बढ़ोत्तरी होगी। वास्तुशासात्र के अनुसार सूरजमुखी का फूल घर के पूर्व दिशा में लगाना आत्मविश्वास मजबूत बनाने के लिए सबसे कारगार उपाय है।
- वास्तु के अनुसार, घर में फिश अकुरियम रखें जिसमें कम से कम दो सुनहरी मछलियां जरूर हों। इन्हें नियमित रूप से खाना देते रहें। इससे आपके आत्मविश्वास में काफी हद तक वृद्धि होगी।
- सुबह गायत्री मंत्र का जप करें। अपनी सीट के ठीक पीछे किसी पहाड़ की तस्वीर लगाएं। अपना समय ऐसे लोगों के साथ बिताएं जो सकारात्मक ऊर्जा से भरे हों और उन लोगों से दूर रहें जो दूसरों में दोष ढूंढते हैं।
- अपने घर में शनि यंत्र रखें। इसके अलावा अपने घर के प्रवेश द्वार पर नींबू और हरी मिर्च लटकाएं। अगर नींबू सूख जाए तो इसे शनिवार के दिन ही बदल दें।
- वास्तुशास्त्र के मुताबिक भोजन करने के लिए पूर्व और उत्तर दिशा शुभ होता है। इस दिशा में मुख करके भोजन करने से आपका आत्मविश्वास मजबूत होता है। क्योंकि इस दिशा को अग्नि का स्थान माना गया है।
- दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में सोने का छल्ला पहनें। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आप आसानी से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।
- माना जाता है कि पक्षियों को भोजन और पानी देने से भी आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। इसलिए आप अपने घर की छत पर पक्षियों के लिए नियमित रूप से चारा डाले और पानी भरकर रखें।
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| - वास्तुशास्त्र के अनुसार रोज सुबह सूर्य भगवान को जल अर्पित करें और पांच मिनट तक दोनों हांथ जोड़कर उगते सूरज पर ध्यान लगाएं। नियमित रूप से 'आदित्य हृदय स्त्रोत' का पाठ करें। इससे आपके आत्मविश्वास में तेजी से वृद्धि होगी और आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। - रविवार के दिन सुबह उठकर सूर्यदेव को प्रणाम कर घर के बड़ों का आशीर्वाद लें और उन्हें मिठाई खिलाएं। इससे आपके आत्मविश्वास में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी। - वास्तु शास्त्र के अनुसार, अपने लिविंग रूम को उगते सूरज या दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर से सजाएं। इससे आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है और घर से नकारात्मकता भी दूर होती है। बता दें कि तस्वीर में घोड़ा अंदर की ओर दौड़ता लगना चाहिए। कभी भी खाली दीवार की ओर मुंह करके न बैठें क्योंकि इससे आपका आत्मविश्वास डगमगा सकता है। - वास्तु के अनुसार, अपने घर की खिड़कियां खुली रखें। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सीधे खिड़की के सामने अपनी पीठ के बल न बैठें, क्योंकि इससे ऊर्जा बाहर चली जाती है और आत्मविश्वास कम होता है। - सूरजमुखी के पौधे को पूर्व दिशा में रखें, इससे आपके आत्मशक्ति में बढ़ोत्तरी होगी। वास्तुशासात्र के अनुसार सूरजमुखी का फूल घर के पूर्व दिशा में लगाना आत्मविश्वास मजबूत बनाने के लिए सबसे कारगार उपाय है। - वास्तु के अनुसार, घर में फिश अकुरियम रखें जिसमें कम से कम दो सुनहरी मछलियां जरूर हों। इन्हें नियमित रूप से खाना देते रहें। इससे आपके आत्मविश्वास में काफी हद तक वृद्धि होगी। - सुबह गायत्री मंत्र का जप करें। अपनी सीट के ठीक पीछे किसी पहाड़ की तस्वीर लगाएं। अपना समय ऐसे लोगों के साथ बिताएं जो सकारात्मक ऊर्जा से भरे हों और उन लोगों से दूर रहें जो दूसरों में दोष ढूंढते हैं। - अपने घर में शनि यंत्र रखें। इसके अलावा अपने घर के प्रवेश द्वार पर नींबू और हरी मिर्च लटकाएं। अगर नींबू सूख जाए तो इसे शनिवार के दिन ही बदल दें। - वास्तुशास्त्र के मुताबिक भोजन करने के लिए पूर्व और उत्तर दिशा शुभ होता है। इस दिशा में मुख करके भोजन करने से आपका आत्मविश्वास मजबूत होता है। क्योंकि इस दिशा को अग्नि का स्थान माना गया है। - दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में सोने का छल्ला पहनें। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आप आसानी से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। - माना जाता है कि पक्षियों को भोजन और पानी देने से भी आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। इसलिए आप अपने घर की छत पर पक्षियों के लिए नियमित रूप से चारा डाले और पानी भरकर रखें। ये भी पढ़े : |
नव पदार्थ ज्ञानमार ] ( पूर ) प्रधानताना मारकी सन्ध्याक समान है। मोक्ष है, मनारा गुलाना ही जन्म मरणाति तोपरूप संसार है, अपनी आत्मसत्ताकालघन करनस चतुर्गनिम भटकना पडता है। नो आत्म मत्तार अनुभवम विराजमान है वही श्रेष्ट पुरुष है और ओ आत्मसत्तारी छोड पर अन्य सत्ताको प्रहण करता है और दस्यु है।
निर्विकल्प शुद्ध सत्ता
जिसम लौषिक रीनिओसरीन विधि हैन निषेध है न पाप पुण्यकाफ्लेशनरी मनाही है न राग द्वेष है नत्र मोक्ष है। 7 स्यामा हैन सेव है, न ऊथ नीचका हो कोइ मन है, न हो पुलाचार है, न हार जीत है, गुरु है न शिष्य हूँ, न चलना फिरना है, न बगाधम है न किसीका शरण है। एसी शुद्ध मत्ता अनुभव रूप भूमिपर पाई जाती है, मगर निसय हत्यम ममता नहीं है, जो मग शरीर आदि परपाथीम मन ही गया है तथा अपन आत्माको नहीं जानता व जीन निरन्तर अपराधी है, अपने आम स्वरूपको न जानत वाला अपराधी जीन मिथ्यावा है वह अपनी आत्मारा हिंसक है, हृदय अत्याबशीर आदि पर पआरमा मानता है, और मनन्धको बढ़ाता है, आत्मज्ञान बिना उसका माण मिया है. बसकी माल मुसको आमा वीमान बिना शक्ति अभवा वासत्व मिया हूँ ।
विपरीत वृत्ति
सोना चाढी जो कि पहाड़ोंकी मिट्टी है उन्हें निज सम्पत्ति कहता है, शुभ क्रियाको अमृत मानता है और ज्ञानको विप जानता है ।
अपने आत्मरूपको ग्रहण नहीं करता । शरीरादिको आत्मा मानता है, साताबेदनीय जनित लौकिक सुखमे आनन्द मानता है, और असाताके उदयको आपत् कहता है, क्रोधकी तलवार ले रक्खी है, मानकी मदिरा पीकर बैठा है, मनमें मायाकी वक्ता है, और लोभक कुचक्रमे पड़ा हुआ है। इस भाति अचेतनकी संगतिस चित्रप आत्मा सत्यसे परांमुख होकर असत्यमे ही उलझा हुआ है। संसारवर्तमान और भविष्यन कालका धारा प्रवाह चक्र चल रहा है भूत, उसे कहता है कि मेरा दिन मेरी रात, मेरी घड़ी मेरा पहर है, कूड़े किरकटका ढेर एकत्र करता है और कहता है कि यह मेरा मकान है जिस पृथ्वी-खण्ड पर निवास करके रहता है उसे अपना नगर बताता है, इस प्रकार अचेतनकी सगतिसं चिद्रूप आत्मा सत्यसे परामुख होकर असत्यमे उलझ रहा है ।
समदृष्टिका सद्विचार
जिन जीवोंकी कुमति नष्ट हो गई हैं, जिनके हृदयमे ज्ञानका प्रकाश है, जिन्हे आत्मस्वरूपकी पहिचान है वे ही निरपराधी और श्रेष्ट मनुष्य है । जिनकी धर्मध्यानरूप अग्निमे संशय, विमोह, विभ्रम ये तीनो वृक्ष जल गये हैं, जिनकी सुदृष्टिके सन्मुख उदय रूपी कुत्ते भोंकते २ चले जाते है, वे ज्ञानरूपी हाथी पर सवार हैं जिससे कर्म
[ मोक्ष तत्स
स्पी धूल उन तक नहीं पहुचतो जिनके निचारमें शास्त्रज्ञानकी तर उठती है जो सिद्धान्नमे प्रवाण हैं, जो आध्यात्मिक विद्यार पारगामी हैं। वही मोल मार्गी है वही परिज है। सदा आत्म अनुभवका रस दृढ करत है और आत्म अनुभनका पाठही पद्धत है। जिनकी बुद्धि गुण ग्रहण करनमे चिमटीके समान है निकथा सुनन के लिय जिनक कान नहर है, जिनका चित्त रिष्कपट है जो मृटु भाषण करत हैं, जिनकी नोधादि रहित सौम्य दृष्टि है, स्वभावा एस कोमल ह मानो मोममे इनकी रचना की गई है जिन्द आत्मध्यानकी शक्ति प्रगट हो गई है, और परम समाधि साधनको चिनका चित्त रत्साहित रहता है वे हो माझमार्गी ६, व हो पवित्र है, सन्य आत्मा द्दो की रटन लगी रहती है।
PAY A
आत्मा और आत्मानुभव य वहन मुननको ढो है जब आत्मध्यान प्रगट हो जाना है, तन आत्म रसिक और आत्म रसका कोई भेद नहीं रह जाता। वह आत्म प्रेमी जोन आत्म ज्ञानमें आनंद मानना है। मान छोट कर नमस्कार करता है, स्तनना करता है उपदेश मुनता है, ध्यान करता है जाप जपता है, पढ़ता है पढ़ाता है व्यास्थान देता है इसकी य शुभ नित्याएँ हैं इन नियाओंर करत करत जहा आत्माका शुद्ध अनुभव हो जाता है वहा शुभोपयोग नहीं रहता। शुभ किया कर्म कारण है और मोक्षी प्रामि आत्म अनुभवम है और जन मुनिराज प्रमाद दशाम रहत हैं तन शाम शुभ नियाका अवलम्बन लेना ही पड़ता है।
मेवं पदार्थ ज्ञानसार ]
मंगर जहां शुभ-अशुभं प्रवृत्ति रूप प्रमाद नहीं रहता है, वहा॑ स्वयंकी अपनी ही अवलम्बन अर्थात् शुद्धोपयोग होता है, इसमें स्पष्ट है कि ग्रॅमँढिकी उत्पत्तिं मौक्ष मार्गमे बाधक है और जो मुनि प्रमेदियुक्त होते हैं, वे गेंढकी तरह नीचसे ऊपरको चढ़ते हैं और फिर नीचे गिरते हैं, और जो प्रमादको छोड़करं स्वस्वरूपमें सावधान होते हैं, उनको आत्म-दृष्टिमें मीक्षं बिल्कुल पास ही दिखता है। साँधु दंशामें छठेवी गुणस्थान धर्मत्त मुनिका है और इंटसे सात सैतिवसे छठेवमें असंख्यात घरि ढनो गिरमा होता है। हेäयमे प्रमीढ रहता है तब तक जीव पराधीन रहता है, और अंबे प्रमोदकी शक्ति नष्टे हो जाती है तब शुद्ध अनुभवको उदय होता है। अत प्रमाद संसारका कारण है और अनुभव मोक्षकी कारण है. प्रमादी जीव ससारकी और देखते हैं और अप्रमादी जीव मोक्षकी और देखते हैं। जी जीव प्रमाटी और आलसी है, जिनके चित्तमे अनेक विकल्प उठते है, और जो आत्म-अनुभवम शिथिलं है, उनसे स्वरूपींचरण बहुते दूर रहती है। जी जीव प्रमोद सहित और अनुभवमें शिथिल है; वे शरीर आदिमें वृद्धि करते है और जो निर्विकल्प अनुभवमें रहते हैं उनके चित्तमें समतो रखें सैंदों भरी रहती हैं। जो महामुनि विकल्प रहित हैं, अनुभव और शुद्ध ज्ञानदर्शन सहित है, वे थोड़े ही समय में कर्म रहित होकर करते है ।
ज्ञानमें सब जीव एक प्रकार के भासते
जैसे पहाडपर चढ़े हुए मनुष्यको नीचेका मनुष्ये छोटा दीखता | नव पदार्थ ज्ञानमार ] प्रधानताना मारकी सन्ध्याक समान है। मोक्ष है, मनारा गुलाना ही जन्म मरणाति तोपरूप संसार है, अपनी आत्मसत्ताकालघन करनस चतुर्गनिम भटकना पडता है। नो आत्म मत्तार अनुभवम विराजमान है वही श्रेष्ट पुरुष है और ओ आत्मसत्तारी छोड पर अन्य सत्ताको प्रहण करता है और दस्यु है। निर्विकल्प शुद्ध सत्ता जिसम लौषिक रीनिओसरीन विधि हैन निषेध है न पाप पुण्यकाफ्लेशनरी मनाही है न राग द्वेष है नत्र मोक्ष है। सात स्यामा हैन सेव है, न ऊथ नीचका हो कोइ मन है, न हो पुलाचार है, न हार जीत है, गुरु है न शिष्य हूँ, न चलना फिरना है, न बगाधम है न किसीका शरण है। एसी शुद्ध मत्ता अनुभव रूप भूमिपर पाई जाती है, मगर निसय हत्यम ममता नहीं है, जो मग शरीर आदि परपाथीम मन ही गया है तथा अपन आत्माको नहीं जानता व जीन निरन्तर अपराधी है, अपने आम स्वरूपको न जानत वाला अपराधी जीन मिथ्यावा है वह अपनी आत्मारा हिंसक है, हृदय अत्याबशीर आदि पर पआरमा मानता है, और मनन्धको बढ़ाता है, आत्मज्ञान बिना उसका माण मिया है. बसकी माल मुसको आमा वीमान बिना शक्ति अभवा वासत्व मिया हूँ । विपरीत वृत्ति सोना चाढी जो कि पहाड़ोंकी मिट्टी है उन्हें निज सम्पत्ति कहता है, शुभ क्रियाको अमृत मानता है और ज्ञानको विप जानता है । अपने आत्मरूपको ग्रहण नहीं करता । शरीरादिको आत्मा मानता है, साताबेदनीय जनित लौकिक सुखमे आनन्द मानता है, और असाताके उदयको आपत् कहता है, क्रोधकी तलवार ले रक्खी है, मानकी मदिरा पीकर बैठा है, मनमें मायाकी वक्ता है, और लोभक कुचक्रमे पड़ा हुआ है। इस भाति अचेतनकी संगतिस चित्रप आत्मा सत्यसे परांमुख होकर असत्यमे ही उलझा हुआ है। संसारवर्तमान और भविष्यन कालका धारा प्रवाह चक्र चल रहा है भूत, उसे कहता है कि मेरा दिन मेरी रात, मेरी घड़ी मेरा पहर है, कूड़े किरकटका ढेर एकत्र करता है और कहता है कि यह मेरा मकान है जिस पृथ्वी-खण्ड पर निवास करके रहता है उसे अपना नगर बताता है, इस प्रकार अचेतनकी सगतिसं चिद्रूप आत्मा सत्यसे परामुख होकर असत्यमे उलझ रहा है । समदृष्टिका सद्विचार जिन जीवोंकी कुमति नष्ट हो गई हैं, जिनके हृदयमे ज्ञानका प्रकाश है, जिन्हे आत्मस्वरूपकी पहिचान है वे ही निरपराधी और श्रेष्ट मनुष्य है । जिनकी धर्मध्यानरूप अग्निमे संशय, विमोह, विभ्रम ये तीनो वृक्ष जल गये हैं, जिनकी सुदृष्टिके सन्मुख उदय रूपी कुत्ते भोंकते दो चले जाते है, वे ज्ञानरूपी हाथी पर सवार हैं जिससे कर्म [ मोक्ष तत्स स्पी धूल उन तक नहीं पहुचतो जिनके निचारमें शास्त्रज्ञानकी तर उठती है जो सिद्धान्नमे प्रवाण हैं, जो आध्यात्मिक विद्यार पारगामी हैं। वही मोल मार्गी है वही परिज है। सदा आत्म अनुभवका रस दृढ करत है और आत्म अनुभनका पाठही पद्धत है। जिनकी बुद्धि गुण ग्रहण करनमे चिमटीके समान है निकथा सुनन के लिय जिनक कान नहर है, जिनका चित्त रिष्कपट है जो मृटु भाषण करत हैं, जिनकी नोधादि रहित सौम्य दृष्टि है, स्वभावा एस कोमल ह मानो मोममे इनकी रचना की गई है जिन्द आत्मध्यानकी शक्ति प्रगट हो गई है, और परम समाधि साधनको चिनका चित्त रत्साहित रहता है वे हो माझमार्गी छः, व हो पवित्र है, सन्य आत्मा द्दो की रटन लगी रहती है। PAY A आत्मा और आत्मानुभव य वहन मुननको ढो है जब आत्मध्यान प्रगट हो जाना है, तन आत्म रसिक और आत्म रसका कोई भेद नहीं रह जाता। वह आत्म प्रेमी जोन आत्म ज्ञानमें आनंद मानना है। मान छोट कर नमस्कार करता है, स्तनना करता है उपदेश मुनता है, ध्यान करता है जाप जपता है, पढ़ता है पढ़ाता है व्यास्थान देता है इसकी य शुभ नित्याएँ हैं इन नियाओंर करत करत जहा आत्माका शुद्ध अनुभव हो जाता है वहा शुभोपयोग नहीं रहता। शुभ किया कर्म कारण है और मोक्षी प्रामि आत्म अनुभवम है और जन मुनिराज प्रमाद दशाम रहत हैं तन शाम शुभ नियाका अवलम्बन लेना ही पड़ता है। मेवं पदार्थ ज्ञानसार ] मंगर जहां शुभ-अशुभं प्रवृत्ति रूप प्रमाद नहीं रहता है, वहा॑ स्वयंकी अपनी ही अवलम्बन अर्थात् शुद्धोपयोग होता है, इसमें स्पष्ट है कि ग्रॅमँढिकी उत्पत्तिं मौक्ष मार्गमे बाधक है और जो मुनि प्रमेदियुक्त होते हैं, वे गेंढकी तरह नीचसे ऊपरको चढ़ते हैं और फिर नीचे गिरते हैं, और जो प्रमादको छोड़करं स्वस्वरूपमें सावधान होते हैं, उनको आत्म-दृष्टिमें मीक्षं बिल्कुल पास ही दिखता है। साँधु दंशामें छठेवी गुणस्थान धर्मत्त मुनिका है और इंटसे सात सैतिवसे छठेवमें असंख्यात घरि ढनो गिरमा होता है। हेäयमे प्रमीढ रहता है तब तक जीव पराधीन रहता है, और अंबे प्रमोदकी शक्ति नष्टे हो जाती है तब शुद्ध अनुभवको उदय होता है। अत प्रमाद संसारका कारण है और अनुभव मोक्षकी कारण है. प्रमादी जीव ससारकी और देखते हैं और अप्रमादी जीव मोक्षकी और देखते हैं। जी जीव प्रमाटी और आलसी है, जिनके चित्तमे अनेक विकल्प उठते है, और जो आत्म-अनुभवम शिथिलं है, उनसे स्वरूपींचरण बहुते दूर रहती है। जी जीव प्रमोद सहित और अनुभवमें शिथिल है; वे शरीर आदिमें वृद्धि करते है और जो निर्विकल्प अनुभवमें रहते हैं उनके चित्तमें समतो रखें सैंदों भरी रहती हैं। जो महामुनि विकल्प रहित हैं, अनुभव और शुद्ध ज्ञानदर्शन सहित है, वे थोड़े ही समय में कर्म रहित होकर करते है । ज्ञानमें सब जीव एक प्रकार के भासते जैसे पहाडपर चढ़े हुए मनुष्यको नीचेका मनुष्ये छोटा दीखता |
विदेशों से लौटने वाले भारतीयों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए घरेलू उड़ानें ( Domestic Flights) भी शुरू होंगी।
कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के चलते जहां देश के अन्य राज्यों में मजदूर समेत कई लोग फंसे हुए हैं तो वहीं विदेशों में भी कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। दोनों देश और विदेशों में फंसे लोगों को वापस लाने का काम तेजी से चल रहा है।
हालांकि इस बीच सबसे ज्यादा बेबसी की मार मजदूरों को झेलनी पड़ रही है। चाहे वह भूख की मार हो या पैदल चलने की मजबूरी या फिर हादसे में दर्दनाक मौत का शिकार होना। विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार वंदे भारत मिशन चला रही है।
इस मिशन के तहत एयर इंडिया की फ्लाइट को जोड़ी गई। हालांकि ये फ्लाइट की लैंडिग हर शहरों में छोड़कर केवल बड़े शहरों में ही दी गई है। यहां लैंड करने के बाद अपने-अपने शहरों में जाने के लिए दूसरे ट्रांसपोर्टेशन (Transportation) की सहायता लेनी पड़ती है।
इन परेशानियों को देखते हुए सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत एक और प्लान शुरू करने जा रही है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सरकार घरेलू उड़ानें (Domestic flights) शुरू करने जा रही है। हालांकि यह उड़ानें सीमित रूट के लिए जारी होगी।
उम्मीद की जा रही है कि जिस तरह से विदेशों से आने वाली उड़ानों को केवल बड़े शहरों में लैंडिग की जा रही है, उसी तरह घरेलू उड़ानें भी दिल्ली से कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, बैंगलोर, हैदराबाद, अमृतसर, कोच्चि, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए शुरू किया जा सकता है।
वंदे भारत मिशन का दूसरा फेज 16 मई से शुरू होने जा रहा है, जो 22 मई तक चलेगा। इस दौरान 31 देशों से 149 फ्लाइट्स आएंगी। इसमें अमेरिका, यूएई, कनाडा, सऊदी अरब, ब्रिटेन, मलेशिया, ओमान, कजाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, कतर, इंडोनेशिया, रूस, फिलीपींस, फ्रांस, सिंगापुर, आयरलैंड, किर्गिस्तान, कुवैत, जापान, जॉर्जिया, जर्मनी, तजाकिस्तान, बहरीन, अर्मेनिया, थाईलैंड, इटली, नेपाल, बेलारूस, नाइजीरिया, बांग्लादेश को शामिल किया गया है।
| विदेशों से लौटने वाले भारतीयों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए घरेलू उड़ानें भी शुरू होंगी। कोरोना संक्रमण के चलते जहां देश के अन्य राज्यों में मजदूर समेत कई लोग फंसे हुए हैं तो वहीं विदेशों में भी कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। दोनों देश और विदेशों में फंसे लोगों को वापस लाने का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि इस बीच सबसे ज्यादा बेबसी की मार मजदूरों को झेलनी पड़ रही है। चाहे वह भूख की मार हो या पैदल चलने की मजबूरी या फिर हादसे में दर्दनाक मौत का शिकार होना। विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार वंदे भारत मिशन चला रही है। इस मिशन के तहत एयर इंडिया की फ्लाइट को जोड़ी गई। हालांकि ये फ्लाइट की लैंडिग हर शहरों में छोड़कर केवल बड़े शहरों में ही दी गई है। यहां लैंड करने के बाद अपने-अपने शहरों में जाने के लिए दूसरे ट्रांसपोर्टेशन की सहायता लेनी पड़ती है। इन परेशानियों को देखते हुए सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत एक और प्लान शुरू करने जा रही है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सरकार घरेलू उड़ानें शुरू करने जा रही है। हालांकि यह उड़ानें सीमित रूट के लिए जारी होगी। उम्मीद की जा रही है कि जिस तरह से विदेशों से आने वाली उड़ानों को केवल बड़े शहरों में लैंडिग की जा रही है, उसी तरह घरेलू उड़ानें भी दिल्ली से कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, बैंगलोर, हैदराबाद, अमृतसर, कोच्चि, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए शुरू किया जा सकता है। वंदे भारत मिशन का दूसरा फेज सोलह मई से शुरू होने जा रहा है, जो बाईस मई तक चलेगा। इस दौरान इकतीस देशों से एक सौ उनचास फ्लाइट्स आएंगी। इसमें अमेरिका, यूएई, कनाडा, सऊदी अरब, ब्रिटेन, मलेशिया, ओमान, कजाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, कतर, इंडोनेशिया, रूस, फिलीपींस, फ्रांस, सिंगापुर, आयरलैंड, किर्गिस्तान, कुवैत, जापान, जॉर्जिया, जर्मनी, तजाकिस्तान, बहरीन, अर्मेनिया, थाईलैंड, इटली, नेपाल, बेलारूस, नाइजीरिया, बांग्लादेश को शामिल किया गया है। |
Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�..
अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
| Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल? कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�.. अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान! |
नई दिल्ली. NVS PGT Interview Admit Card 2019: नवोदय विद्यालय संगठन (NVS) ने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर पीजीटी (PGT) इंटरव्यू एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है. इच्छुक और अर्ह अभ्यर्थी विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर इंटरव्यू एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट navodaya. gov. in पर डाउनलोड कर सकते हैं. विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का पूरा स्टेप्स दिया गया है. विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थियों को रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ की जरूरत पड़ेगी.
नवोदय विद्यालय संगठन (NVS) की तरफ से पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) के पदों पर भर्तियों के लिए लिखित एग्जाम 10 और 13 जून को आयोजित किया गया था. परीक्षा 2 शिफ्टों में आयोजित की गई थी. पहली शिफ्ट 9 बजे से शुरू हुई थी. जबकि दूसरी शिफ्ट 2 बजे से शुरू होगी.
नवोदय विद्यालय संगठन (NVS) की तरफ से आयोजित होने वाले ग्रेजुएट टीचर (PGT) इंटरव्यू डेट एडमिट कार्ड में दिया गया है. इंटरव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को सलाह है कि वो विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें, क्योंकि बिना एडमिट कार्ड के किसी भी अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.
- एनवीएस पीजीटी इंटरव्यू एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थी सबसे पहले विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जायें.
- विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जानें के बाद एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें.
- अपना पर्सनल डिटेल्स इंटर कर सबमिट करें.
- एनवीएस पीजीटी इंटरव्यू एडमिट कार्ड डाउनलोड कर अपने पास रख लें, क्योंकि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ेगी.
| नई दिल्ली. NVS PGT Interview Admit Card दो हज़ार उन्नीस: नवोदय विद्यालय संगठन ने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर पीजीटी इंटरव्यू एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है. इच्छुक और अर्ह अभ्यर्थी विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर इंटरव्यू एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट navodaya. gov. in पर डाउनलोड कर सकते हैं. विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का पूरा स्टेप्स दिया गया है. विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थियों को रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ की जरूरत पड़ेगी. नवोदय विद्यालय संगठन की तरफ से पोस्ट ग्रेजुएट टीचर के पदों पर भर्तियों के लिए लिखित एग्जाम दस और तेरह जून को आयोजित किया गया था. परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित की गई थी. पहली शिफ्ट नौ बजे से शुरू हुई थी. जबकि दूसरी शिफ्ट दो बजे से शुरू होगी. नवोदय विद्यालय संगठन की तरफ से आयोजित होने वाले ग्रेजुएट टीचर इंटरव्यू डेट एडमिट कार्ड में दिया गया है. इंटरव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को सलाह है कि वो विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें, क्योंकि बिना एडमिट कार्ड के किसी भी अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. - एनवीएस पीजीटी इंटरव्यू एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थी सबसे पहले विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जायें. - विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जानें के बाद एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें. - अपना पर्सनल डिटेल्स इंटर कर सबमिट करें. - एनवीएस पीजीटी इंटरव्यू एडमिट कार्ड डाउनलोड कर अपने पास रख लें, क्योंकि भविष्य में इसकी जरूरत पड़ेगी. |
फुरुनकल स्टेफिलोडर्मा का एक गहरा रूप है, जिसे हेयरलाइन और अन्य सभी आस-पास के ऊतकों पर शुद्ध प्रकृति की सूजन से चिह्नित किया जाता है। यह अभिव्यक्ति त्वचा के नीचे गहराई से स्थित नोड्यूल से शुरू होने से काफी जल्दी बनती है, और एक पुण्य-नेक्रोटिक स्टेम बनाती है। सबसे पहले, उबाल की उपस्थिति के बाद, इसके चारों ओर छोटी सूजन देखी जाती है। इस प्रकृति का एक धमाका बैंगनी लाल है। कुछ दिनों बाद सूजन धीरे-धीरे कम हो जाती है, और इसके स्थान पर purulent necrotic rods हैं। अभिव्यक्ति के पहले दिन से तत्काल उपचार में औसतन 2 सप्ताह लगते हैं। इस अवधि के दौरान, उबाल का खुला रूप बंद बंद हो सकता है, यानी, सूजन सूख जाती है और कम दर्दनाक हो जाती है।
Ichthyol मलहम फोड़े के इलाज के लिए एक अच्छी तैयारी है। त्वचा से संक्रमण को खत्म करने के लिए यह एक अच्छा उपाय है, जिसमें एक गुणवत्ता एंटीसेप्टिक और कीटाणुनाशक शामिल है। इथिथोल मलम फोड़े में भी प्रभावी है, मूत्रविज्ञान की विभिन्न समस्याओं और अन्य त्वचा सूजन संक्रमण के साथ। यह दवा सीधे एंटीसेप्टिक्स के समूह से संबंधित सामयिक उपयोग के लिए प्रशासित होती है। पर्याप्त विरोधी भड़काऊ और एनाल्जेसिक प्रभाव।
इसलिए, इसका उपयोग बहुत ही उपयोगी है, फुरुनकल के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह उन चकत्ते हैं जो असुविधा का कारण बनते हैं और कुछ मामलों में, फैलाने के दौरान दर्द होता है।
चूंकि यह दवा विशेष रूप से बाह्य उपयोग के लिए बनाई गई है, इसलिए उपचार में कुछ सीमाओं को उजागर करना आवश्यक है। फोड़े के लिए इचिथोल मलम का उपयोग एक नई घटना नहीं है, लंबे समय तक इस दवा के सम्मान के हकदार हैं। इसकी उत्कृष्ट गुण जल्दी और बिना अतिरिक्त जटिलताओं के कई संक्रमणों का इलाज करने में मदद करते हैं। विशेष रूप से, furuncles का उपचार निम्नानुसार होता हैः
- सूजन त्वचा को थोड़ी मात्रा में मलम लगाया जाना चाहिए।
- प्रभावित क्षेत्र के बाद एक पतली कागज तौलिया से ढका हुआ है और 8 घंटे के लिए कार्रवाई के लिए छोड़ दें।
पहले आवेदन के बाद सुधार होता है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि इलाज के साथ इसे अधिक न करें। आखिरकार, मलम के लगातार आवेदन से, दुष्प्रभाव हो सकते हैं। Contraindications ichthyol मलहम पूरी तरह से प्रत्येक जीव की व्यक्तिगत सहिष्णुता पर निर्भर करता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह दवा contraindicated है। मलहम का उपयोग शुरू करने से पहले, अपने डॉक्टर से परामर्श करना और दवा के उन अन्य घटकों को एलर्जी प्रतिक्रियाओं की उपस्थिति का निर्धारण करना बेहतर है।
इचिथोल मलम कैसे काम करता है?
यह सवाल कुछ नहीं है जो हर कोई डॉक्टर से पूछ सकता है, क्योंकि हर कोई केवल एक त्वरित वसूली में रुचि रखता है। वास्तव में, कुछ भी जटिल नहीं है। सूजन त्वचा के लिए सीधे आवेदन के बाद, मलहम कीटाणुशोधन, सूजन को हटा देता है, जबकि त्वचा में गहराई से प्रवेश करता है। त्वचा की ऊपरी परतें। इस क्रिया के कुछ घंटों के भीतर, घाव बैक्टीरियल संरक्षित हो जाता है, जो अन्य सूक्ष्मजीवों को अंदर घुसना नहीं देता है। नियमित रूप से फोड़े के लिए आवेदन के साथ, मलम के विरोधी भड़काऊ प्रभाव होता है, संक्रमण आगे फैलता नहीं है और अन्य त्वचा क्षेत्रों को प्रभावित नहीं करता है। इस तरह के फायदे फोड़े के इलाज में बस अनिवार्य हैं, इसलिए इस मलम ने इसके उपयोग के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया अर्जित की है। इचिथोल मलम खरीदते समय, एक पर्चे की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका उपयोग किसी भी त्वचा संक्रमण के लिए किया जा सकता है। उपचार की शुरुआत से पहले डॉक्टर, विशेष रूप से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं से परामर्श करना आवश्यक है।
| फुरुनकल स्टेफिलोडर्मा का एक गहरा रूप है, जिसे हेयरलाइन और अन्य सभी आस-पास के ऊतकों पर शुद्ध प्रकृति की सूजन से चिह्नित किया जाता है। यह अभिव्यक्ति त्वचा के नीचे गहराई से स्थित नोड्यूल से शुरू होने से काफी जल्दी बनती है, और एक पुण्य-नेक्रोटिक स्टेम बनाती है। सबसे पहले, उबाल की उपस्थिति के बाद, इसके चारों ओर छोटी सूजन देखी जाती है। इस प्रकृति का एक धमाका बैंगनी लाल है। कुछ दिनों बाद सूजन धीरे-धीरे कम हो जाती है, और इसके स्थान पर purulent necrotic rods हैं। अभिव्यक्ति के पहले दिन से तत्काल उपचार में औसतन दो सप्ताह लगते हैं। इस अवधि के दौरान, उबाल का खुला रूप बंद बंद हो सकता है, यानी, सूजन सूख जाती है और कम दर्दनाक हो जाती है। Ichthyol मलहम फोड़े के इलाज के लिए एक अच्छी तैयारी है। त्वचा से संक्रमण को खत्म करने के लिए यह एक अच्छा उपाय है, जिसमें एक गुणवत्ता एंटीसेप्टिक और कीटाणुनाशक शामिल है। इथिथोल मलम फोड़े में भी प्रभावी है, मूत्रविज्ञान की विभिन्न समस्याओं और अन्य त्वचा सूजन संक्रमण के साथ। यह दवा सीधे एंटीसेप्टिक्स के समूह से संबंधित सामयिक उपयोग के लिए प्रशासित होती है। पर्याप्त विरोधी भड़काऊ और एनाल्जेसिक प्रभाव। इसलिए, इसका उपयोग बहुत ही उपयोगी है, फुरुनकल के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह उन चकत्ते हैं जो असुविधा का कारण बनते हैं और कुछ मामलों में, फैलाने के दौरान दर्द होता है। चूंकि यह दवा विशेष रूप से बाह्य उपयोग के लिए बनाई गई है, इसलिए उपचार में कुछ सीमाओं को उजागर करना आवश्यक है। फोड़े के लिए इचिथोल मलम का उपयोग एक नई घटना नहीं है, लंबे समय तक इस दवा के सम्मान के हकदार हैं। इसकी उत्कृष्ट गुण जल्दी और बिना अतिरिक्त जटिलताओं के कई संक्रमणों का इलाज करने में मदद करते हैं। विशेष रूप से, furuncles का उपचार निम्नानुसार होता हैः - सूजन त्वचा को थोड़ी मात्रा में मलम लगाया जाना चाहिए। - प्रभावित क्षेत्र के बाद एक पतली कागज तौलिया से ढका हुआ है और आठ घंटाटे के लिए कार्रवाई के लिए छोड़ दें। पहले आवेदन के बाद सुधार होता है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि इलाज के साथ इसे अधिक न करें। आखिरकार, मलम के लगातार आवेदन से, दुष्प्रभाव हो सकते हैं। Contraindications ichthyol मलहम पूरी तरह से प्रत्येक जीव की व्यक्तिगत सहिष्णुता पर निर्भर करता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह दवा contraindicated है। मलहम का उपयोग शुरू करने से पहले, अपने डॉक्टर से परामर्श करना और दवा के उन अन्य घटकों को एलर्जी प्रतिक्रियाओं की उपस्थिति का निर्धारण करना बेहतर है। इचिथोल मलम कैसे काम करता है? यह सवाल कुछ नहीं है जो हर कोई डॉक्टर से पूछ सकता है, क्योंकि हर कोई केवल एक त्वरित वसूली में रुचि रखता है। वास्तव में, कुछ भी जटिल नहीं है। सूजन त्वचा के लिए सीधे आवेदन के बाद, मलहम कीटाणुशोधन, सूजन को हटा देता है, जबकि त्वचा में गहराई से प्रवेश करता है। त्वचा की ऊपरी परतें। इस क्रिया के कुछ घंटों के भीतर, घाव बैक्टीरियल संरक्षित हो जाता है, जो अन्य सूक्ष्मजीवों को अंदर घुसना नहीं देता है। नियमित रूप से फोड़े के लिए आवेदन के साथ, मलम के विरोधी भड़काऊ प्रभाव होता है, संक्रमण आगे फैलता नहीं है और अन्य त्वचा क्षेत्रों को प्रभावित नहीं करता है। इस तरह के फायदे फोड़े के इलाज में बस अनिवार्य हैं, इसलिए इस मलम ने इसके उपयोग के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया अर्जित की है। इचिथोल मलम खरीदते समय, एक पर्चे की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका उपयोग किसी भी त्वचा संक्रमण के लिए किया जा सकता है। उपचार की शुरुआत से पहले डॉक्टर, विशेष रूप से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं से परामर्श करना आवश्यक है। |
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हैदराबाद, 06 जुलाई। जब स्थानीय प्रशासन आम लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करे तो आखिर आपके पास क्या विकल्प है। आप प्रशासन से इस बात की शिकायत करते हैं, लेकिन जब आपकी शिकायत भी अनसुनी कर दी जाए तो आपके पास समस्या का समाधान करने के लिए कोई विकल्प नहीं बचता है। जब प्रशासन ने तमाम शिकायतों को नजरअंदाज किया तो आंध्र प्रदेश के सत्ताधारी दल के विधायक कोट्टमरेड्डी श्रीधर रेड्डी सड़क पर बह रही नाली में ही खड़े हो गए। उन्हें प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपना विरोध नाली में खड़े होकर दर्ज कराया। वह अपने मसर्थकों के साथ नाली के बगल में ही पैर गंदे पानी में डालकर बैठ गए।
इसे भी पढ़ें- क्या है क्रिस पिंचर सेक्स स्कैंडल, जिसकी वजह से ऋषि सुनक, साजिद जाविद ने ब्रिटेश सरकार से इस्तीफा दे दिया?
दरअसल उमा रेड्डी गुंटा में काफी समय से नाली सड़क पर उफना रही है और इसका पानी सड़क पर बहता है, जिसकी वजह से यहां काफी बदबू आती है और लोगों को काफी असुविधा होती है। लेकिन जब इसकी शिकायत कई अधिकारियों से की गई और बावजूद इसके इसका समाधान नहीं हुआ तो विधायक खुद ही यहां प्रदर्शन करने पहुंचे और नाली के बीच में उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।
कोट्टमरेड्डी श्रीधर रेड्डी ने कहा कि अधिकारियों से मैंने कई बार इस नाली को साफ करने की गुजारिश की। लेकिन तमाम शिकायतों के बाद भी किसी ने इसकी सुनवाई नहीं की, लिहाजा हमारे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। हम प्रशासन के खिलाफ विरोध जाहिर कर सकते हैं और हमने वैसा ही किया। बता दें कि इस प्रदर्शन का वीडियो भी सामने आया है जिसमे देखा जा सकता है कि विधायक समर्थकों के साथ नाली में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
नेल्लोर से वाईएसआर कांग्रेस के विधायक कोट्टमरेड्डी जब उम्मरेड्डीगुंटा में मंगलवार को दौरा करने के लिए पहुंचे तो उन्होंने देखा कि यहां नाली सड़क पर बह रही है। यहां से आ रही बदबू के बावजूद अधिकारियों ने इसकी सफाई नहीं कराई। हालांकि रेड्डी के प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने उन्हें रेलवे और निकाय के अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया है जिसके बाद उन्होंने अपना प्रदर्शन वापस ले लिया। विधायक के प्रदर्शन के बाद रेलवे और निकाय के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने विधायक से इस बारे में चर्चा की कि वह 10 दिन के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह एक बार फिर से यहां प्रदर्शन करेंगे।
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ललितांशु, मुजफ्फरपुर. संयुक्त अरब अमीरात के शहरों के लोग भी मुजफ्फरपुर की शाही लीची का स्वाद ले सकेंगे. इस साल बिहार से करीब 3,000 किमी अरब के शारजाह में लीची भेजने की तैयारी शुरू हो गयी है. इसके लिए देश और दुनिया की सबसे बड़ी मॉल की कंपनी ( लुलु ) के प्रतिनिधियों ने बिहार लीची उत्पादक संघ से संपर्क किया है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि खाड़ी देशों से सटे शहरों के मॉल में मुजफ्फरपुर की लीची लोग खरीद सकते हैं.
कंपनी की ओर से ट्रायल के तौर पर पहले एक टन शाही लीची शारजाह ले जाने के लिए ऑर्डर किया है. इसको लेकर बुधवार को लखनऊ से कंपनी के दो प्रतिनिधि दोपहर मुजफ्फरपुर पहुंचे और लीची उत्पादक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बंदरा में लीची के बाग में पहुंचे. बाहर से आये प्रतिनिधियों को लीची का स्वाद काफी पसंद आया. बता दें जिले में 12 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती होती है. प्रति वर्ष एक लाख टन लीची का उत्पादन होता है.
कंपनी के ऑर्डर के अनुसार गुरुवार को मुजफ्फरपुर से शाही लीची पैक हो कर बनारस के लिए रवाना होगी. प्रतिनिधियों ने बताया कि बनारस से फ्लाइट के जरिये लीची को संयुक्त अरब अमीरात भेजा जायेगा. यह ऑर्डर सफल रहा, तो आने वाले समय में कंपनी की ओर से इससे कई गुणा अधिक ऑर्डर की उम्मीद जतायी गयी है. बताया गया कि संबंधित कंपनी का अलग-अलग देशों में मॉल के रूप में अपना बाजार है, जिसमें लीची को लेकर कंपनी के लोग खुद संपर्क कर रहे हैं.
इस बार थोड़े विलंब से लीची का प्रोग्रेस हुआ है. ऐसे में किसानों के अनुसार 30 मई तक शाही लीची मार्केट में चलेगी. बारिश होने के बाद लीची को काफी फायदा हुआ है. उम्मीद जतायी जा रही है कि दो-तीन दिन और इसी तरह का मौसम रहा ,तो लीची की मिठास भी बढ़ जायेगी. दूसरी ओर चाइना लीची बाजार में 10 जून तक रहेगी. बारिश के बाद अन्य राज्यों से भी लीची के लिए व्यापारियों ने किसानों से संपर्क करने के साथ बागों में पहुंचने लगे हैं. फिलहाल खुदरा में 150 से 200 रुपये सैकड़ा व एक हजार से बारह सौ रुपये पेटी लीची की बिक्री हो रही है.
बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि लखनऊ से मॉल की कंपनी (लुलु ) के प्रतिनिधियों ने बंदरा में निरीक्षण के बाद एक टन लीची उठाव के लिए ऑर्डर किया है, जो अरब के शहर शारजाह भेजा जायेगा. गुरुवार को लीची लोड कर बनारस के लिए रवाना होगी. वहां से फ्लाइट के जरिये लीची अरब के शहरों में पहुंचेगी. बीते 20 मई को कंपनी के लोगों ने लीची के लिए संपर्क किया था.
| ललितांशु, मुजफ्फरपुर. संयुक्त अरब अमीरात के शहरों के लोग भी मुजफ्फरपुर की शाही लीची का स्वाद ले सकेंगे. इस साल बिहार से करीब तीन,शून्य किमी अरब के शारजाह में लीची भेजने की तैयारी शुरू हो गयी है. इसके लिए देश और दुनिया की सबसे बड़ी मॉल की कंपनी के प्रतिनिधियों ने बिहार लीची उत्पादक संघ से संपर्क किया है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि खाड़ी देशों से सटे शहरों के मॉल में मुजफ्फरपुर की लीची लोग खरीद सकते हैं. कंपनी की ओर से ट्रायल के तौर पर पहले एक टन शाही लीची शारजाह ले जाने के लिए ऑर्डर किया है. इसको लेकर बुधवार को लखनऊ से कंपनी के दो प्रतिनिधि दोपहर मुजफ्फरपुर पहुंचे और लीची उत्पादक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बंदरा में लीची के बाग में पहुंचे. बाहर से आये प्रतिनिधियों को लीची का स्वाद काफी पसंद आया. बता दें जिले में बारह हजार हेक्टेयर में लीची की खेती होती है. प्रति वर्ष एक लाख टन लीची का उत्पादन होता है. कंपनी के ऑर्डर के अनुसार गुरुवार को मुजफ्फरपुर से शाही लीची पैक हो कर बनारस के लिए रवाना होगी. प्रतिनिधियों ने बताया कि बनारस से फ्लाइट के जरिये लीची को संयुक्त अरब अमीरात भेजा जायेगा. यह ऑर्डर सफल रहा, तो आने वाले समय में कंपनी की ओर से इससे कई गुणा अधिक ऑर्डर की उम्मीद जतायी गयी है. बताया गया कि संबंधित कंपनी का अलग-अलग देशों में मॉल के रूप में अपना बाजार है, जिसमें लीची को लेकर कंपनी के लोग खुद संपर्क कर रहे हैं. इस बार थोड़े विलंब से लीची का प्रोग्रेस हुआ है. ऐसे में किसानों के अनुसार तीस मई तक शाही लीची मार्केट में चलेगी. बारिश होने के बाद लीची को काफी फायदा हुआ है. उम्मीद जतायी जा रही है कि दो-तीन दिन और इसी तरह का मौसम रहा ,तो लीची की मिठास भी बढ़ जायेगी. दूसरी ओर चाइना लीची बाजार में दस जून तक रहेगी. बारिश के बाद अन्य राज्यों से भी लीची के लिए व्यापारियों ने किसानों से संपर्क करने के साथ बागों में पहुंचने लगे हैं. फिलहाल खुदरा में एक सौ पचास से दो सौ रुपयापये सैकड़ा व एक हजार से बारह सौ रुपये पेटी लीची की बिक्री हो रही है. बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि लखनऊ से मॉल की कंपनी के प्रतिनिधियों ने बंदरा में निरीक्षण के बाद एक टन लीची उठाव के लिए ऑर्डर किया है, जो अरब के शहर शारजाह भेजा जायेगा. गुरुवार को लीची लोड कर बनारस के लिए रवाना होगी. वहां से फ्लाइट के जरिये लीची अरब के शहरों में पहुंचेगी. बीते बीस मई को कंपनी के लोगों ने लीची के लिए संपर्क किया था. |
लाहौरः लाहौर प्रांतीय राजधानी को अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी नई दिल्ली से बहुत आगे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है। लाहौर का आधिकारिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 (औसतन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच) दर्ज किया गया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठनों ने स्कोर 397 रखा था। 187 के साथ, नई दिल्ली का प्रदूषण स्तर लाहौर के आधे से भी कम था। कोट लखपत (एक औद्योगिक क्षेत्र) 500 का आंकड़ा पार करने के साथ, लाहौर के अलग-अलग क्षेत्रों में, फतेहगढ़, जिसमें स्टील पिघलने वाले उद्योग का अधिकांश हिस्सा है, 400 के आसपास मंडरा रहा है, और 403 एक्यूआई पर रायविंड जैसे अपेक्षाकृत हरे क्षेत्र हैं।
1 नवंबर को, शहर में आर्द्रता का स्तर 60% था, जिससे कोहरा नहीं होता है। सोमवार की धुंध ने आंखों में जलन नहीं की, यह दर्शाता है कि यह स्मॉग नहीं था। यह इंगित करता है कि धुंध पूरी तरह से प्रदूषण के कारण हुई थी।
| लाहौरः लाहौर प्रांतीय राजधानी को अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी नई दिल्ली से बहुत आगे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है। लाहौर का आधिकारिक वायु गुणवत्ता सूचकांक दो सौ नवासी दर्ज किया गया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठनों ने स्कोर तीन सौ सत्तानवे रखा था। एक सौ सत्तासी के साथ, नई दिल्ली का प्रदूषण स्तर लाहौर के आधे से भी कम था। कोट लखपत पाँच सौ का आंकड़ा पार करने के साथ, लाहौर के अलग-अलग क्षेत्रों में, फतेहगढ़, जिसमें स्टील पिघलने वाले उद्योग का अधिकांश हिस्सा है, चार सौ के आसपास मंडरा रहा है, और चार सौ तीन एक्यूआई पर रायविंड जैसे अपेक्षाकृत हरे क्षेत्र हैं। एक नवंबर को, शहर में आर्द्रता का स्तर साठ% था, जिससे कोहरा नहीं होता है। सोमवार की धुंध ने आंखों में जलन नहीं की, यह दर्शाता है कि यह स्मॉग नहीं था। यह इंगित करता है कि धुंध पूरी तरह से प्रदूषण के कारण हुई थी। |
नई दिल्ली. आज से छठ पूजा महापर्व शुरू हो गया है. इस पर्व को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में रह रहे भारतीय भी धूमधाम से मनाते हैं. आज छठ पूजा का पहला दिन है. यानि आज छठ पूजा नहाय खाय है. इस दिन लोग अपने घर की साफ सफाई करते हैं. और सूर्योदय के बाद नदी, तालाब, पोखर या नहर में स्नान करने जाते हैं. वैसे तो छठ का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है. इस व्रत के करने के पीछे कई मान्यताएं प्रचलित है. कहा तो जाता है कि इस व्रत को माता सीता ने भी किया था. तभी से इस व्रत को करने की परंपरा चली आ रही है. साथ ही ये मान्यता भी है कि इस व्रत को द्रोपदी ने भी किया था. जब पांडव सारा राज-पाठ हार गये थे. ये पर्व चार दिन तक मनाया जाता है.
दिवाली के छह दिन बाद छठ महापर्व मनाया जाता है. कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को नहाय-खाय होता है. ये छठ पूजा का पहला चरण होता है. इसी दिन से छठ पूजा का आगाज होता है. इस दिन पूरे घर की साफ सफाई कर छठ वर्ती स्नान करते हैं. स्नान के लिए व्रती नदी तालाब, कुंआ, नहर, पोखर पर जाकर स्नान करते है और साफ सुथरे कपड़े पहनते हैं. खाने में शुद्ध अरवा चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी और कद्दू ग्रहण करते हैं. इसी दिन से व्रती बिस्तर पर सोना त्याग कर जमीन पर सोना शुरू कर देते हैं. और व्रत संपन्न होने तक बिस्तर पर नहीं सोते हैं. इन चार दिन तक व्रती के घर के सभी सदस्यों को शराब, मांस और अंडा का सेवन नहीं करना है.
| नई दिल्ली. आज से छठ पूजा महापर्व शुरू हो गया है. इस पर्व को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में रह रहे भारतीय भी धूमधाम से मनाते हैं. आज छठ पूजा का पहला दिन है. यानि आज छठ पूजा नहाय खाय है. इस दिन लोग अपने घर की साफ सफाई करते हैं. और सूर्योदय के बाद नदी, तालाब, पोखर या नहर में स्नान करने जाते हैं. वैसे तो छठ का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है. इस व्रत के करने के पीछे कई मान्यताएं प्रचलित है. कहा तो जाता है कि इस व्रत को माता सीता ने भी किया था. तभी से इस व्रत को करने की परंपरा चली आ रही है. साथ ही ये मान्यता भी है कि इस व्रत को द्रोपदी ने भी किया था. जब पांडव सारा राज-पाठ हार गये थे. ये पर्व चार दिन तक मनाया जाता है. दिवाली के छह दिन बाद छठ महापर्व मनाया जाता है. कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को नहाय-खाय होता है. ये छठ पूजा का पहला चरण होता है. इसी दिन से छठ पूजा का आगाज होता है. इस दिन पूरे घर की साफ सफाई कर छठ वर्ती स्नान करते हैं. स्नान के लिए व्रती नदी तालाब, कुंआ, नहर, पोखर पर जाकर स्नान करते है और साफ सुथरे कपड़े पहनते हैं. खाने में शुद्ध अरवा चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी और कद्दू ग्रहण करते हैं. इसी दिन से व्रती बिस्तर पर सोना त्याग कर जमीन पर सोना शुरू कर देते हैं. और व्रत संपन्न होने तक बिस्तर पर नहीं सोते हैं. इन चार दिन तक व्रती के घर के सभी सदस्यों को शराब, मांस और अंडा का सेवन नहीं करना है. |
निचले प्रदेशों में प्रोक प्राकृतिक वनों के रूप में विस्तृत क्षेत्रों में विद्यमान था जिसे सन् 1700 तक कृषि योग्य भूमि प्राप्त करने के चक्कर में साफ कर दिया गया। इसका प्रयोग जलयान निर्माण, चारकोल बनाने तथा लोहा गलाने के लिए भी होता था । अतः कटाई की गति काफी तीव्र रही। एश, मैपिल, एम, हैजेल श्रादि वृक्ष भी पर्याप्त प्रौद्योगिक महत्व के रहे है. औद्योगीकरण एवं यातायात के विकास के साथ लकड़ी की माँग बढ़ती गई जिसे पूरा करने में यहाँ के जंगल प्रसमर्थ हैं। प्रथम विश्व युद्ध में भी भारी मात्रा में जंगल काटे गये । युद्ध पश्चात् 1919 में जब वन आयोग की स्थापना की गई तो पाया गया कि केवल मात्र 7% घावश्यकता हो. देश के जंगलों से पूरी हो सकती है। शेप मावश्यकता की पूर्ति के लिए ब्रिटेन, कनाड़ा, स्वीडन, नावें आदि देशों से टिम्बरः पायात करता है। कटाई पर भी नियन्त्रण करके उसे वैज्ञानिक बनाने का प्रयास किया गया। क्षति पूर्ति के लिए नवीन उपयुक्त भागों में नये वन लगाए गए । चूँकि यहाँ कोणधारी वृक्षों से सम्बन्धित मुलायम लकड़ी का प्रायात ज्यादा होता है । अतः वेल्स एवं डेवोनियन पैनिनशुला के उपयुक्त (निचले, ग्रा) भागों में प्रस, नाव, पाइन, स्कॉट पाइन, लाचं आदि का वृक्षारोपण किया गया है। अन्य प्रदेशों में, जहाँ इस प्रकार का वृक्षारोपण किया गया है, स्कॉटिश उच्च प्रदेश, उत्तरी योर्क मूर क्षेत्र, पीनाइन तथा कम्बरलैण्ड मुख्य हैं । वेल्ड, बैकलैंड तथा कलबिन क्षेत्रों में रेतीलो मिट्टियों में भी इन वृक्षों को लगाया गया है। प्रथम विश्व युद्ध के तुरन्त बाद ही लगभग 1 मिलियन एकड़ भूमि पर वन आयोग द्वारा नए वृक्ष
लगाए गए।
उच्च प्रदेशों में मिट्टी एवं जल प्रवाह को भिन्नता ने वनस्पति के स्वरूप में भारी भिन्नता ला दी है। स्कालेस की या की पहाड़ियों, जहाँ दोमठ एवं चिकनी मिट्टी के अंश हैं, पर बीच के जंगल मिनते हैं । इनके बीच-बीच में एश के वृक्ष एवं झाड़ियाँ भी मिल जाती हैं। उत्तर में अधिकतर स्कॉटिश उच्च प्रदेश सम्भवतः स्कॉट पाइन से ढके थे। 2000 फोट की ऊंचाई तक इन्हीं वृक्षों का प्राधियं था परन्तु उनके स्थान पर वर्च के जंगल ज्यादा मिलते हैं। अब स्कॉपलैण्ड्स, लेक डिस्ट्रिक्ट, कम्बरलैण्ड, वेस्म के उच्च प्रदेश, पीनाईन्स, स्कॉटिश उच्च प्रदेश तथा दक्षिणी स्कॉटिंश उच्च प्रदेश - सभी में मर घास समान रूप से पाई जाती है। यह एक ऐमो वनस्पति है जो समस्त ब्रिटेन में मिलती है। अन्तर केवल ऊँचाई एवं स्थिति को है। यथा दक्षिण के उच्च प्रदेशों में 1500 फीट से ऊपर एवं उत्तर के उच्च प्रदेशों में 1000 फीट से ऊपर मूर पर्याप्त मात्रा में मिलती है । स्वरूप में कुछ स्थानीय भिन्नता है, कही एक्समूर का बाहुल्य है तो कहीं डार्टमूर का । पोनाइन श्रृंखला में पिट मूर का प्राधिक्य है। मूर के बीच-बीच में कुछ वृक्ष जैसे सिल्वर, मर्च, होयोनं मादि भी छितरे रूप में मिलते है। इस प्रकार दृश्य बड़ा मनोरम | निचले प्रदेशों में प्रोक प्राकृतिक वनों के रूप में विस्तृत क्षेत्रों में विद्यमान था जिसे सन् एक हज़ार सात सौ तक कृषि योग्य भूमि प्राप्त करने के चक्कर में साफ कर दिया गया। इसका प्रयोग जलयान निर्माण, चारकोल बनाने तथा लोहा गलाने के लिए भी होता था । अतः कटाई की गति काफी तीव्र रही। एश, मैपिल, एम, हैजेल श्रादि वृक्ष भी पर्याप्त प्रौद्योगिक महत्व के रहे है. औद्योगीकरण एवं यातायात के विकास के साथ लकड़ी की माँग बढ़ती गई जिसे पूरा करने में यहाँ के जंगल प्रसमर्थ हैं। प्रथम विश्व युद्ध में भी भारी मात्रा में जंगल काटे गये । युद्ध पश्चात् एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में जब वन आयोग की स्थापना की गई तो पाया गया कि केवल मात्र सात% घावश्यकता हो. देश के जंगलों से पूरी हो सकती है। शेप मावश्यकता की पूर्ति के लिए ब्रिटेन, कनाड़ा, स्वीडन, नावें आदि देशों से टिम्बरः पायात करता है। कटाई पर भी नियन्त्रण करके उसे वैज्ञानिक बनाने का प्रयास किया गया। क्षति पूर्ति के लिए नवीन उपयुक्त भागों में नये वन लगाए गए । चूँकि यहाँ कोणधारी वृक्षों से सम्बन्धित मुलायम लकड़ी का प्रायात ज्यादा होता है । अतः वेल्स एवं डेवोनियन पैनिनशुला के उपयुक्त भागों में प्रस, नाव, पाइन, स्कॉट पाइन, लाचं आदि का वृक्षारोपण किया गया है। अन्य प्रदेशों में, जहाँ इस प्रकार का वृक्षारोपण किया गया है, स्कॉटिश उच्च प्रदेश, उत्तरी योर्क मूर क्षेत्र, पीनाइन तथा कम्बरलैण्ड मुख्य हैं । वेल्ड, बैकलैंड तथा कलबिन क्षेत्रों में रेतीलो मिट्टियों में भी इन वृक्षों को लगाया गया है। प्रथम विश्व युद्ध के तुरन्त बाद ही लगभग एक मिलियन एकड़ भूमि पर वन आयोग द्वारा नए वृक्ष लगाए गए। उच्च प्रदेशों में मिट्टी एवं जल प्रवाह को भिन्नता ने वनस्पति के स्वरूप में भारी भिन्नता ला दी है। स्कालेस की या की पहाड़ियों, जहाँ दोमठ एवं चिकनी मिट्टी के अंश हैं, पर बीच के जंगल मिनते हैं । इनके बीच-बीच में एश के वृक्ष एवं झाड़ियाँ भी मिल जाती हैं। उत्तर में अधिकतर स्कॉटिश उच्च प्रदेश सम्भवतः स्कॉट पाइन से ढके थे। दो हज़ार फोट की ऊंचाई तक इन्हीं वृक्षों का प्राधियं था परन्तु उनके स्थान पर वर्च के जंगल ज्यादा मिलते हैं। अब स्कॉपलैण्ड्स, लेक डिस्ट्रिक्ट, कम्बरलैण्ड, वेस्म के उच्च प्रदेश, पीनाईन्स, स्कॉटिश उच्च प्रदेश तथा दक्षिणी स्कॉटिंश उच्च प्रदेश - सभी में मर घास समान रूप से पाई जाती है। यह एक ऐमो वनस्पति है जो समस्त ब्रिटेन में मिलती है। अन्तर केवल ऊँचाई एवं स्थिति को है। यथा दक्षिण के उच्च प्रदेशों में एक हज़ार पाँच सौ फीट से ऊपर एवं उत्तर के उच्च प्रदेशों में एक हज़ार फीट से ऊपर मूर पर्याप्त मात्रा में मिलती है । स्वरूप में कुछ स्थानीय भिन्नता है, कही एक्समूर का बाहुल्य है तो कहीं डार्टमूर का । पोनाइन श्रृंखला में पिट मूर का प्राधिक्य है। मूर के बीच-बीच में कुछ वृक्ष जैसे सिल्वर, मर्च, होयोनं मादि भी छितरे रूप में मिलते है। इस प्रकार दृश्य बड़ा मनोरम |
"एक जोड़े रोल करना चाहते हैं?"
मार्क Wahlberg पूछता है। वह बॉब मार्ले विशेष को चमकने के बारे में बात नहीं कर रहा है, हालांकि बस कुछ गोल्फ गेंदों को डालने के बारे में बात नहीं कर रहा है। मैं बेवर्ली हिल्स में बेवरली हिल्स में अपने घर पर बाहर निकल गया हूं- और मैंने उसे हरे रंग के डालने के लिए पालन करने से पहले कहा, जो बड़े घर और गेस्टहाउस के बीच है। यह अपने घर जिम (आपके स्थानीय सोने के स्क्वायर फुटेज के बारे में एक और इमारत) और आउटडोर बास्केटबॉल कोर्ट को केंद्र में चित्रित सेल्टिक्स लोगो के साथ अनदेखा करता है। सूरज पास के पूल से निकलता है, धुआं उठा लिया गया है, और 5 जून को 37 वर्ष की उम्र में वॉल्बर्ग, काम के लिए विस्तारित यात्राओं के बाद घर होने से खुश हैं।
वह कहते हैं, "मैं हमेशा एक महान लड़का अंतरिक्ष बनाना चाहता था," 30 फीट के भीतर 30 फीट खटखटाता है। "मैंने 2000 में जगह खरीदी और यह सिर्फ घर था। बाकी सब कुछ सिर्फ एक गंदगी पहाड़ी थी। मैं हमेशा जिम चाहता था, मेरी माँ के लिए गेस्टहाउस, पूल, यह हरा। इसमें कुछ ब्रेक हैं और यह बहुत सच है। "
वह सही है। मैं उसकी रेखा का पालन करता हूं और अपनी गेंद को उसके अंदर दबाता हूं। अगर वह नोटिस करता है, तो वह कुछ भी नहीं कहता है। हरे रंग से कुछ कदम ऊपर एक टी बॉक्स है जो जिम की छत पर बाहर निकलता है और एक जंगली घाटी में दिखता है। गेंदों को पकड़ने के लिए सामने एक बड़ा नेट लटकता है, लेकिन वह मुझे बताता है कि वह कभी-कभी घाटी में उतारने के लिए नेट को छोड़ देता है। मैं सोच रहा हूं, यह जगह परिभाषित करती है कि एक आदमी की जगह क्या होनी चाहिए।
यह अपने काम, फिटनेस और परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वॉल्बर्ग का इनाम है। उनके दो लड़कियां अब -4 वर्षीय एला और 2 वर्षीय माइकल हैं- उनकी लंबी प्रेमिका रिया डरहम के साथ। और, वह कहता है, वे "कुछ और चाहते हैं।" उनका परिवार यही कारण है कि वह बिल्कुल ध्यान केंद्रित करने में सक्षम है। वास्तव में, फिल्मों के दौरान उनके बच्चों को उनके दिमाग में इतनी प्रमुखता से लगा जो हो रहा है (नई एम। नाइट श्यामलन फिल्म जो इस महीने सिनेमाघरों को हिट करती है) कि उन्हें अपने प्रदर्शन को कम करना पड़ा। Wahlberg का चरित्र, एक विज्ञान शिक्षक, निश्चित रूप से शारीरिक नहीं है, लेकिन एक डूम्सडे परिदृश्य के दौरान एक बच्चे की रक्षा करनी चाहिए जिससे लोग आत्महत्या कर सकें। (यह सब साजिश खराब है जो आप हमसे निचोड़ लेंगे।) वाहल्बर्ग, जिसने खुद को अपने ही बच्चों के साथ उसी स्थिति में चित्रित किया, ग्रिन।
"हम चारों ओर मजाक करेंगे, और रात कहेंगे, 'आप इस स्थिति को कैसे संभालेंगे?' मैंने उससे कहा, 'जब यह जीवन और मृत्यु है और आप नहीं जानते कि क्या हो रहा है, तो आपको थोड़ा हिंसक होना शुरू करना होगा।' आपका पहला वृत्ति बच्चों है। मैं अतिसंवेदनशील हूं। मुझे 4 साल का एक 4 साल का शेव दिखता है और मैं दयालु हूं... "वह चकित करता है। "ठीक है, आप जानते हैं। आप अपने बच्चों में से किसी एक को मारने की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन आप उन्हें किसी अन्य बच्चे से बचाने में बुरा नहीं लगेगा।"
हॉलीवुड ए-लिस्टर्स के लिए बच्चे की सुरक्षा की डिग्री रिश्तेदार हैं, इसलिए यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि कुछ अभिनेता के बच्चे पापराज़ी का चुनाव शिकार बन गए हैं (पिट, ब्रैड और क्रूज़, टॉम भी देखें), वाहलबर्ग और उनके परिवार को काफी छोड़ दिया गया है अकेला। यह कोई दुर्घटना नहीं है। "हम कम कुंजी हैं," वह कहते हैं। "अगर मैं घर हूं, तो मैं या तो गोल्फ खेल रहा हूं या यहां लटक रहा हूं। मेरा जीवन उबाऊ है, इसलिए कहने की कोई कहानी नहीं है।"
वैसे भी नहीं। दिन में, बोस्टन में, बताने के लिए पूरी कहानी थी, और इसे अक्सर बताया गया है। विवाद, चोरी, और सामान्य कम जीवन जीने इतनी चरम थी कि 16 साल की उम्र में वेहल्बर्ग ने हमले के लिए जेल में समय बिताया था। और उसके बाद भी, जब उसके हिप-हॉप करियर और उसके बाद उनके अभिनय करियर को हटा दिया गया, तो उनकी प्रतिष्ठा कहानी बन गई और बाकी सब कुछ पर हावी रही। वह कहते हैं, "मेरे बच्चे वास्तव में मेरे-मेरे-चरण में हैं।" "लेकिन मुझे लगता है कि मैं तब तक ऐसा ही था जब तक कि वास्तव में मेरा बच्चा नहीं था।"
प्रेस्टोः कुछ क्लिक किया गया। Wahlberg एहसास हुआ कि वह वास्तव में केवल एक चीज बदलने की जरूरत है। "मैं अब रात में समय बर्बाद नहीं करता," वह कहता है। "आप 12 घंटे के दिन काम करते हैं, फिर रात के खाने के लिए जाते हैं, फिर 4 घंटों तक बाहर जाते हैं? तुम कर चुके हो। यही वह सामान है जो आपके गधे को मारता है।"
पुरुष, विशेष रूप से युवा पुरुष, सोचते हैं कि वे अपने ए-गेम समझौता किए बिना सब कुछ कर सकते हैं। Wahlberg कोशिश की; वह फ़ेल हो गया। कार्यालय में इसे मारने के एक दिन बाद शहर को मारना आसान है; यह कभी भी दूसरी तरफ आसान नहीं है। आप एक उपपर करियर के साथ समाप्त होते हैं जो जीवनशैली के लिए पिछवाड़े लेता है। वह कहता है कि उस गलती को खत्म करना आसान है। "मैं सुबह 6 बजे उठता हूं। मैंने अंडे डालकर खाया, जिम को मारा। मैं बस यह सब कर चुका हूं।"
वालबर्ग के पिछले कुछ सालों में सबूत हैं कि उन्हें एक नाली मिली हैः अभिनेता ने फिल्मों को खारिज कर दिया चार भाई, अजेय, स्वर्गवासी (जिसके लिए उन्होंने ऑस्कर नामांकन अर्जित किया) शूटर, रात हमारी है, तथा जो हो रहा है उस अवधि में। एचबीओ मेगाहिट के कार्यकारी उत्पादन का उल्लेख नहीं है घेरा (अपने जीवन पर ढीले रूप से आधारित) और गंभीर रूप से सराहना करने के लिए एक समान प्रतिबद्धता इलाजएचबीओ पर भी। एक पूर्ण स्लेट भी उसके लिए आगे है। Wahlberg बस लपेटा प्यारी हड्डियां पीटर जैक्सन के साथ और अब वीडियो गेम श्रृंखला के आधार पर मैक्स पायने फिल्म शूटिंग कर रहा है। एक अनुक्रम इटालियन काम कामों में भी है, साथ ही एक जंगली गहन मुक्केबाजी झटका भी कहा जाता है योद्धा, अगर वह्लबर्ग को बाद में उस पर अपनी इच्छा मिलती है। बाकी परिवार का समय, जिम और गोल्फ है। उन्होंने ऐसा कुछ बनाया है जो एक गंदगी पहाड़ी पर संरचनाओं से कहीं अधिक है। वास्तव में उसका उबाऊ जीवन।
"आओ भी!" Wahlberg छाल। "एक स्विंग लो!"
लड़का, ईरान, वह्लबर्ग के दोस्तों में से एक, नहीं है। तो वॉल्बर्ग ने उसे बंद कर दिया, शरीर के झटका बंदूक की तरह बंद हो जाने के बाद शरीर का झटका।हम अब जिम में हैं, और दस्ताने चालू हैं। तो गद्देदार हेडगियर है। और ईरान, एक भारी आदमी जो शायद पूरी तरह से यकीन नहीं कर रहा है कि वह खुद का आनंद ले रहा है, वह उन चोटों को लेने में सक्षम है क्योंकि वह शरीर कवच की एक मोटी, बैरलिक शीथ में घिरा हुआ है। Wahlberg अब सभी बॉक्सर। मैं उस आदमी के साथ रख सकता हूं, लेकिन इस क्षेत्र में वह मुझे एक कैडरवर विच्छेदन करने वाले कोरोनर की तरह अलग करेगा।
Wahlberg की कसरत की जगह अनिवार्य रूप से 18 फुट की छत के साथ एक गोदाम है, जो एक फुटबॉल टीम के लिए पर्याप्त उपकरण के साथ पैक किया जाता है। बाईं ओर, एक पावर प्लेट और लौह के रैक। दाईं ओर, एक विनियमन-आकार मुक्केबाजी की अंगूठी के साथ टर्नबकल के साथ पूर्ण पंचिंग बैग (भारी, गति, और अन्य) की एक सरणी। मोहम्मद अली के एक विशाल, तैयार पोस्टर, आसन्न दीवार पर, "मार्क करने के लिए" चित्रित किया गया। पूरी पिछली दीवार एक हल्की बास्केटबॉल कोर्ट को प्रकट करने के लिए लिफ्ट करती है। कैटवॉक पर ऊपर की ओर कार्डियो मशीन और ट्रेनर का कमरा है। एक मालिश टेबल आता है जब हम वहां हैं।
यह स्थान वहल्बर्ग के शरीर को बहुत अच्छा करता है, लेकिन यह सिर्फ फट जाने के लिए नहीं है। वॉल्बर्ग अब अपने क्राउन-गहने फिल्म प्रोजेक्ट के लिए प्रशिक्षण के साल 2 में बंद हो रहा है, योद्धा। वह सितंबर में शूटिंग शुरू करने की उम्मीद करता है, लेकिन चीजें अभी भी गिर सकती हैं, वह कहता है। और हाँ, आप सही ढंग से पढ़ते हैंः प्रशिक्षण के वर्ष 2। वह बाद में कहता है, "मैं निराश हो जाऊंगा [यदि ऐसा नहीं होता है], क्योंकि यह मेरा सपना रहा है।" "यह जिम का निर्माण करने का एक बड़ा हिस्सा है, मैंने उस अंगूठी को वहां क्यों रखा। बॉक्सिंग आपके सबसे कठिन कसरत में से एक है। मुझे लगता है कि मुझे मैराथन चलाने की ज़रूरत है, मैं कर सकता था।" फिर वह मुस्कुराता है। "आप अपनी निराशा से छुटकारा पा सकते हैं, यह निश्चित रूप से है।"
जब वह अन्य फिल्मों पर काम कर रहा है, तो वह रखरखाव के लिए रस्सी कूदता है और बैग और मिट्स (उन ओवरसीज कैचर की मिट्स जिन्हें आपने रॉकी पाउंड देखा है) को हिट करता है। लेकिन जब वह फिल्मों के बीच होता है, जैसा कि वह कहता है, "जब मुझे काले आंखों के साथ काम करने के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, तो वह गेंदबाजी करता है।
Wahlberg रस्सी कूदकर या पावर प्लेट पर एक squats के कुछ सेट कर (एक कंपन प्लेटफार्म के साथ एक मशीन है, जो अध्ययन दिखाया गया है, मांसपेशियों की गतिविधि में वृद्धि कर सकते हैं जैसे आप squats, deadlifts, और अन्य अभ्यास करते हैं)। फिर वह बैग लेता हैः स्पीड बैग के साथ 5 मिनट प्रत्येक, डबल-एंड बैग (यह वह है जो इसे मंजिल और छत पर संलग्न करने वाले केबल्स के साथ होता है), और भारी बैग। फिर मिट काम, पंच संयोजन अभ्यास। उसके बाद, शायद कुछ छेड़छाड़। "बोस्टन से मेरे दोस्त हमेशा मेरे सिर को लेने के लिए मर रहे हैं। एंडी और बिग बो की तरह वे बहुत कठिन हैं। अगर आप उन्हें देते हैं तो वे 10 राउंड जाएंगे।"
मुक्केबाजी लगभग 45 मिनट तक चलती है। मुक्केबाजी से पसीने से पहले भी वह्लबर्ग वजन कम करता है। "मैं 30 से 40 मिनट करता हूं," वह कहता है। "आराम नहीं। मैं सबकुछ सुपरसेट करता हूं।" वह दिन के आधार पर मांसपेशियों के समूहों को तोड़ देता हैः सोमवार पैरों, बाइसप्स और पीठ है। मंगलवार छाती, कंधे, triceps है। बुधवार फिर पैर और द्विआधारी है। वह 2 दिन आराम करेगा और शनिवार को फिर से शुरू होगा।
हालांकि, लोहा का काम उसके लिए पर्याप्त नहीं है। "मैं 35-पौंड भारित वेशभूषा पहने हुए सबकुछ करता हूं," वह कहता है।
"यह यहाँ बहुत आराम कर रहा है।" हमारे पीछे यार्ड में एक दीवार के नीचे एक 8-फुट लैंडस्केपिंग झरना धोया गया था। हम गेस्टहाउस के बगल में आंगन पर बैठते हैं जहां वाहल्बर्ग की मां थोड़ी देर तक रहती थी ("वह बोस्टन को बहुत ज्यादा याद करती थी।") और जहां दोस्तों और परिवार के सदस्य रहते हैं। यह वह जगह भी है जहां वह घास पर सेट एक बड़े रेडवुड खेल पर अपने बच्चों को रोशनी देखता है।
आप उसके चेहरे में छूट देख सकते हैं। कल पीस फिर से शुरू होता है। "सबसे कठिन हिस्सा दूर जा रहा है," वह कहता है। "हर बार जब मैं घर आ जाता हूं, तो बच्चे थोड़ा बदल जाते हैं। छोटा लड़का थोड़ा बड़ा हो जाता है। उसका व्यक्तित्व थोड़ा और दिखा रहा है। वह और बात कर रहा है। इसलिए मैं इसके बारे में चिंतित हूं।"
यह दिलचस्प हैः हां, वाहबर्ग एक ए-लिस्ट अभिनेता है, वह आदमी जिसने डिर्क डिग्लर को घरेलू नाम बनाया था। लेकिन इसे तोड़ दो और वह किसी भी अन्य पिता की तरह है जो काम के लिए यात्रा करता है, जो अच्छा पैसा कमाता है क्योंकि वह प्रेरित होता है और लंबे समय तक चलता है, जो समझता है कि जो कुछ भी आप चाहते हैं वह अब व्यापार-बंद मांगेगा। "यह निश्चित रूप से एक बलिदान है," वह कहते हैं। "लेकिन मैं ऐसी परिस्थिति में हूं जहां मैं अब चुनाव कर सकता हूं, इसलिए आप इसका लाभ उठाते हैं। जब वे बड़े हो जाते हैं तो मैं दूर नहीं रहना चाहता हूं। आखिरकार वे मेरे बीमार होने लगेंगे।" और वह्लबर्ग के लिए, यह एक काम अच्छी तरह से किया गया है।
वेहल्बर्ग कहते हैं, "मैं एक ट्रेनर जितना अच्छा नहीं हूं," लेकिन मुक्केबाजी वास्तव में परम कसरत है। मैं आगे बढ़ रहा हूं, मैं सतर्क हूं। बाद में मुझे आश्चर्यजनक लगता है। " मुक्केबाजी को गोद लेने के लिए यहां आपकी युक्तियां दी गई हैं जैसे कि पूर्ण-शरीर के कसरत।
अपने फिटनेस लाभों के लिए मुक्केबाजी का आनंद लें, और थोड़ा और उम्मीद करें। क्यूं कर? वह्लबर्ग कहते हैं, इसमें अच्छा होने में काफी समय लगता है। "मैं वास्तव में महसूस करता हूं कि पहली बार, साढ़े सालों के बाद भी, और मेरे जीवन के एक अच्छे हिस्से के लिए प्रशिक्षण और बंद, मैं किसी भी कोण से बिजली के साथ पेंच फेंक सकता हूं।"
वाल्बर्ग कहते हैं, "मेरे लिए कुंजी संतुलन है और फेंक रही है।" "आप इसे पांच चीजों से लेते हैंः कूद रस्सी, भारी बैग, स्पीड बैग, डबल-एंड बैग, और मिट्स मारना। यह दोहराव है, निरंतर संयोजन फेंक रहा है। मैं बस वहां कदम रखता हूं और करता हूं।"
"उन सभी पांच चीजों में अच्छा होना महत्वपूर्ण है," वे कहते हैं। "बहुत से लोगों को रस्सी कूदने या तुरंत स्पीड बैग काम करने की लटका नहीं मिलती है, इसलिए वे एक भी नहीं करते हैं। वे भारी बैग मारेंगे, क्योंकि यह आसान है। लेकिन आपको इसे करना है सब, या बिंदु क्या है? "
जैसा कि आप सीखते हैं, रस्सी-ए-डोप सामान और सरल रणनीतियों के साथ चिपकें। वाल्बर्ग कहते हैं, "एक अच्छा बुनियादीः" शरीर को कड़ी मेहनत करें और लड़के को अपने हाथ छोड़ने के लिए मजबूर करें ताकि आप उसके सिर पर हमला कर सकें। "
| "एक जोड़े रोल करना चाहते हैं?" मार्क Wahlberg पूछता है। वह बॉब मार्ले विशेष को चमकने के बारे में बात नहीं कर रहा है, हालांकि बस कुछ गोल्फ गेंदों को डालने के बारे में बात नहीं कर रहा है। मैं बेवर्ली हिल्स में बेवरली हिल्स में अपने घर पर बाहर निकल गया हूं- और मैंने उसे हरे रंग के डालने के लिए पालन करने से पहले कहा, जो बड़े घर और गेस्टहाउस के बीच है। यह अपने घर जिम और आउटडोर बास्केटबॉल कोर्ट को केंद्र में चित्रित सेल्टिक्स लोगो के साथ अनदेखा करता है। सूरज पास के पूल से निकलता है, धुआं उठा लिया गया है, और पाँच जून को सैंतीस वर्ष की उम्र में वॉल्बर्ग, काम के लिए विस्तारित यात्राओं के बाद घर होने से खुश हैं। वह कहते हैं, "मैं हमेशा एक महान लड़का अंतरिक्ष बनाना चाहता था," तीस फीट के भीतर तीस फीट खटखटाता है। "मैंने दो हज़ार में जगह खरीदी और यह सिर्फ घर था। बाकी सब कुछ सिर्फ एक गंदगी पहाड़ी थी। मैं हमेशा जिम चाहता था, मेरी माँ के लिए गेस्टहाउस, पूल, यह हरा। इसमें कुछ ब्रेक हैं और यह बहुत सच है। " वह सही है। मैं उसकी रेखा का पालन करता हूं और अपनी गेंद को उसके अंदर दबाता हूं। अगर वह नोटिस करता है, तो वह कुछ भी नहीं कहता है। हरे रंग से कुछ कदम ऊपर एक टी बॉक्स है जो जिम की छत पर बाहर निकलता है और एक जंगली घाटी में दिखता है। गेंदों को पकड़ने के लिए सामने एक बड़ा नेट लटकता है, लेकिन वह मुझे बताता है कि वह कभी-कभी घाटी में उतारने के लिए नेट को छोड़ देता है। मैं सोच रहा हूं, यह जगह परिभाषित करती है कि एक आदमी की जगह क्या होनी चाहिए। यह अपने काम, फिटनेस और परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वॉल्बर्ग का इनाम है। उनके दो लड़कियां अब -चार वर्षीय एला और दो वर्षीय माइकल हैं- उनकी लंबी प्रेमिका रिया डरहम के साथ। और, वह कहता है, वे "कुछ और चाहते हैं।" उनका परिवार यही कारण है कि वह बिल्कुल ध्यान केंद्रित करने में सक्षम है। वास्तव में, फिल्मों के दौरान उनके बच्चों को उनके दिमाग में इतनी प्रमुखता से लगा जो हो रहा है कि उन्हें अपने प्रदर्शन को कम करना पड़ा। Wahlberg का चरित्र, एक विज्ञान शिक्षक, निश्चित रूप से शारीरिक नहीं है, लेकिन एक डूम्सडे परिदृश्य के दौरान एक बच्चे की रक्षा करनी चाहिए जिससे लोग आत्महत्या कर सकें। वाहल्बर्ग, जिसने खुद को अपने ही बच्चों के साथ उसी स्थिति में चित्रित किया, ग्रिन। "हम चारों ओर मजाक करेंगे, और रात कहेंगे, 'आप इस स्थिति को कैसे संभालेंगे?' मैंने उससे कहा, 'जब यह जीवन और मृत्यु है और आप नहीं जानते कि क्या हो रहा है, तो आपको थोड़ा हिंसक होना शुरू करना होगा।' आपका पहला वृत्ति बच्चों है। मैं अतिसंवेदनशील हूं। मुझे चार साल का एक चार साल का शेव दिखता है और मैं दयालु हूं... "वह चकित करता है। "ठीक है, आप जानते हैं। आप अपने बच्चों में से किसी एक को मारने की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन आप उन्हें किसी अन्य बच्चे से बचाने में बुरा नहीं लगेगा।" हॉलीवुड ए-लिस्टर्स के लिए बच्चे की सुरक्षा की डिग्री रिश्तेदार हैं, इसलिए यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि कुछ अभिनेता के बच्चे पापराज़ी का चुनाव शिकार बन गए हैं , वाहलबर्ग और उनके परिवार को काफी छोड़ दिया गया है अकेला। यह कोई दुर्घटना नहीं है। "हम कम कुंजी हैं," वह कहते हैं। "अगर मैं घर हूं, तो मैं या तो गोल्फ खेल रहा हूं या यहां लटक रहा हूं। मेरा जीवन उबाऊ है, इसलिए कहने की कोई कहानी नहीं है।" वैसे भी नहीं। दिन में, बोस्टन में, बताने के लिए पूरी कहानी थी, और इसे अक्सर बताया गया है। विवाद, चोरी, और सामान्य कम जीवन जीने इतनी चरम थी कि सोलह साल की उम्र में वेहल्बर्ग ने हमले के लिए जेल में समय बिताया था। और उसके बाद भी, जब उसके हिप-हॉप करियर और उसके बाद उनके अभिनय करियर को हटा दिया गया, तो उनकी प्रतिष्ठा कहानी बन गई और बाकी सब कुछ पर हावी रही। वह कहते हैं, "मेरे बच्चे वास्तव में मेरे-मेरे-चरण में हैं।" "लेकिन मुझे लगता है कि मैं तब तक ऐसा ही था जब तक कि वास्तव में मेरा बच्चा नहीं था।" प्रेस्टोः कुछ क्लिक किया गया। Wahlberg एहसास हुआ कि वह वास्तव में केवल एक चीज बदलने की जरूरत है। "मैं अब रात में समय बर्बाद नहीं करता," वह कहता है। "आप बारह घंटाटे के दिन काम करते हैं, फिर रात के खाने के लिए जाते हैं, फिर चार घंटाटों तक बाहर जाते हैं? तुम कर चुके हो। यही वह सामान है जो आपके गधे को मारता है।" पुरुष, विशेष रूप से युवा पुरुष, सोचते हैं कि वे अपने ए-गेम समझौता किए बिना सब कुछ कर सकते हैं। Wahlberg कोशिश की; वह फ़ेल हो गया। कार्यालय में इसे मारने के एक दिन बाद शहर को मारना आसान है; यह कभी भी दूसरी तरफ आसान नहीं है। आप एक उपपर करियर के साथ समाप्त होते हैं जो जीवनशैली के लिए पिछवाड़े लेता है। वह कहता है कि उस गलती को खत्म करना आसान है। "मैं सुबह छः बजे उठता हूं। मैंने अंडे डालकर खाया, जिम को मारा। मैं बस यह सब कर चुका हूं।" वालबर्ग के पिछले कुछ सालों में सबूत हैं कि उन्हें एक नाली मिली हैः अभिनेता ने फिल्मों को खारिज कर दिया चार भाई, अजेय, स्वर्गवासी शूटर, रात हमारी है, तथा जो हो रहा है उस अवधि में। एचबीओ मेगाहिट के कार्यकारी उत्पादन का उल्लेख नहीं है घेरा और गंभीर रूप से सराहना करने के लिए एक समान प्रतिबद्धता इलाजएचबीओ पर भी। एक पूर्ण स्लेट भी उसके लिए आगे है। Wahlberg बस लपेटा प्यारी हड्डियां पीटर जैक्सन के साथ और अब वीडियो गेम श्रृंखला के आधार पर मैक्स पायने फिल्म शूटिंग कर रहा है। एक अनुक्रम इटालियन काम कामों में भी है, साथ ही एक जंगली गहन मुक्केबाजी झटका भी कहा जाता है योद्धा, अगर वह्लबर्ग को बाद में उस पर अपनी इच्छा मिलती है। बाकी परिवार का समय, जिम और गोल्फ है। उन्होंने ऐसा कुछ बनाया है जो एक गंदगी पहाड़ी पर संरचनाओं से कहीं अधिक है। वास्तव में उसका उबाऊ जीवन। "आओ भी!" Wahlberg छाल। "एक स्विंग लो!" लड़का, ईरान, वह्लबर्ग के दोस्तों में से एक, नहीं है। तो वॉल्बर्ग ने उसे बंद कर दिया, शरीर के झटका बंदूक की तरह बंद हो जाने के बाद शरीर का झटका।हम अब जिम में हैं, और दस्ताने चालू हैं। तो गद्देदार हेडगियर है। और ईरान, एक भारी आदमी जो शायद पूरी तरह से यकीन नहीं कर रहा है कि वह खुद का आनंद ले रहा है, वह उन चोटों को लेने में सक्षम है क्योंकि वह शरीर कवच की एक मोटी, बैरलिक शीथ में घिरा हुआ है। Wahlberg अब सभी बॉक्सर। मैं उस आदमी के साथ रख सकता हूं, लेकिन इस क्षेत्र में वह मुझे एक कैडरवर विच्छेदन करने वाले कोरोनर की तरह अलग करेगा। Wahlberg की कसरत की जगह अनिवार्य रूप से अट्ठारह फुट की छत के साथ एक गोदाम है, जो एक फुटबॉल टीम के लिए पर्याप्त उपकरण के साथ पैक किया जाता है। बाईं ओर, एक पावर प्लेट और लौह के रैक। दाईं ओर, एक विनियमन-आकार मुक्केबाजी की अंगूठी के साथ टर्नबकल के साथ पूर्ण पंचिंग बैग की एक सरणी। मोहम्मद अली के एक विशाल, तैयार पोस्टर, आसन्न दीवार पर, "मार्क करने के लिए" चित्रित किया गया। पूरी पिछली दीवार एक हल्की बास्केटबॉल कोर्ट को प्रकट करने के लिए लिफ्ट करती है। कैटवॉक पर ऊपर की ओर कार्डियो मशीन और ट्रेनर का कमरा है। एक मालिश टेबल आता है जब हम वहां हैं। यह स्थान वहल्बर्ग के शरीर को बहुत अच्छा करता है, लेकिन यह सिर्फ फट जाने के लिए नहीं है। वॉल्बर्ग अब अपने क्राउन-गहने फिल्म प्रोजेक्ट के लिए प्रशिक्षण के साल दो में बंद हो रहा है, योद्धा। वह सितंबर में शूटिंग शुरू करने की उम्मीद करता है, लेकिन चीजें अभी भी गिर सकती हैं, वह कहता है। और हाँ, आप सही ढंग से पढ़ते हैंः प्रशिक्षण के वर्ष दो। वह बाद में कहता है, "मैं निराश हो जाऊंगा [यदि ऐसा नहीं होता है], क्योंकि यह मेरा सपना रहा है।" "यह जिम का निर्माण करने का एक बड़ा हिस्सा है, मैंने उस अंगूठी को वहां क्यों रखा। बॉक्सिंग आपके सबसे कठिन कसरत में से एक है। मुझे लगता है कि मुझे मैराथन चलाने की ज़रूरत है, मैं कर सकता था।" फिर वह मुस्कुराता है। "आप अपनी निराशा से छुटकारा पा सकते हैं, यह निश्चित रूप से है।" जब वह अन्य फिल्मों पर काम कर रहा है, तो वह रखरखाव के लिए रस्सी कूदता है और बैग और मिट्स को हिट करता है। लेकिन जब वह फिल्मों के बीच होता है, जैसा कि वह कहता है, "जब मुझे काले आंखों के साथ काम करने के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, तो वह गेंदबाजी करता है। Wahlberg रस्सी कूदकर या पावर प्लेट पर एक squats के कुछ सेट कर । फिर वह बैग लेता हैः स्पीड बैग के साथ पाँच मिनट प्रत्येक, डबल-एंड बैग , और भारी बैग। फिर मिट काम, पंच संयोजन अभ्यास। उसके बाद, शायद कुछ छेड़छाड़। "बोस्टन से मेरे दोस्त हमेशा मेरे सिर को लेने के लिए मर रहे हैं। एंडी और बिग बो की तरह वे बहुत कठिन हैं। अगर आप उन्हें देते हैं तो वे दस राउंड जाएंगे।" मुक्केबाजी लगभग पैंतालीस मिनट तक चलती है। मुक्केबाजी से पसीने से पहले भी वह्लबर्ग वजन कम करता है। "मैं तीस से चालीस मिनट करता हूं," वह कहता है। "आराम नहीं। मैं सबकुछ सुपरसेट करता हूं।" वह दिन के आधार पर मांसपेशियों के समूहों को तोड़ देता हैः सोमवार पैरों, बाइसप्स और पीठ है। मंगलवार छाती, कंधे, triceps है। बुधवार फिर पैर और द्विआधारी है। वह दो दिन आराम करेगा और शनिवार को फिर से शुरू होगा। हालांकि, लोहा का काम उसके लिए पर्याप्त नहीं है। "मैं पैंतीस-पौंड भारित वेशभूषा पहने हुए सबकुछ करता हूं," वह कहता है। "यह यहाँ बहुत आराम कर रहा है।" हमारे पीछे यार्ड में एक दीवार के नीचे एक आठ-फुट लैंडस्केपिंग झरना धोया गया था। हम गेस्टहाउस के बगल में आंगन पर बैठते हैं जहां वाहल्बर्ग की मां थोड़ी देर तक रहती थी और जहां दोस्तों और परिवार के सदस्य रहते हैं। यह वह जगह भी है जहां वह घास पर सेट एक बड़े रेडवुड खेल पर अपने बच्चों को रोशनी देखता है। आप उसके चेहरे में छूट देख सकते हैं। कल पीस फिर से शुरू होता है। "सबसे कठिन हिस्सा दूर जा रहा है," वह कहता है। "हर बार जब मैं घर आ जाता हूं, तो बच्चे थोड़ा बदल जाते हैं। छोटा लड़का थोड़ा बड़ा हो जाता है। उसका व्यक्तित्व थोड़ा और दिखा रहा है। वह और बात कर रहा है। इसलिए मैं इसके बारे में चिंतित हूं।" यह दिलचस्प हैः हां, वाहबर्ग एक ए-लिस्ट अभिनेता है, वह आदमी जिसने डिर्क डिग्लर को घरेलू नाम बनाया था। लेकिन इसे तोड़ दो और वह किसी भी अन्य पिता की तरह है जो काम के लिए यात्रा करता है, जो अच्छा पैसा कमाता है क्योंकि वह प्रेरित होता है और लंबे समय तक चलता है, जो समझता है कि जो कुछ भी आप चाहते हैं वह अब व्यापार-बंद मांगेगा। "यह निश्चित रूप से एक बलिदान है," वह कहते हैं। "लेकिन मैं ऐसी परिस्थिति में हूं जहां मैं अब चुनाव कर सकता हूं, इसलिए आप इसका लाभ उठाते हैं। जब वे बड़े हो जाते हैं तो मैं दूर नहीं रहना चाहता हूं। आखिरकार वे मेरे बीमार होने लगेंगे।" और वह्लबर्ग के लिए, यह एक काम अच्छी तरह से किया गया है। वेहल्बर्ग कहते हैं, "मैं एक ट्रेनर जितना अच्छा नहीं हूं," लेकिन मुक्केबाजी वास्तव में परम कसरत है। मैं आगे बढ़ रहा हूं, मैं सतर्क हूं। बाद में मुझे आश्चर्यजनक लगता है। " मुक्केबाजी को गोद लेने के लिए यहां आपकी युक्तियां दी गई हैं जैसे कि पूर्ण-शरीर के कसरत। अपने फिटनेस लाभों के लिए मुक्केबाजी का आनंद लें, और थोड़ा और उम्मीद करें। क्यूं कर? वह्लबर्ग कहते हैं, इसमें अच्छा होने में काफी समय लगता है। "मैं वास्तव में महसूस करता हूं कि पहली बार, साढ़े सालों के बाद भी, और मेरे जीवन के एक अच्छे हिस्से के लिए प्रशिक्षण और बंद, मैं किसी भी कोण से बिजली के साथ पेंच फेंक सकता हूं।" वाल्बर्ग कहते हैं, "मेरे लिए कुंजी संतुलन है और फेंक रही है।" "आप इसे पांच चीजों से लेते हैंः कूद रस्सी, भारी बैग, स्पीड बैग, डबल-एंड बैग, और मिट्स मारना। यह दोहराव है, निरंतर संयोजन फेंक रहा है। मैं बस वहां कदम रखता हूं और करता हूं।" "उन सभी पांच चीजों में अच्छा होना महत्वपूर्ण है," वे कहते हैं। "बहुत से लोगों को रस्सी कूदने या तुरंत स्पीड बैग काम करने की लटका नहीं मिलती है, इसलिए वे एक भी नहीं करते हैं। वे भारी बैग मारेंगे, क्योंकि यह आसान है। लेकिन आपको इसे करना है सब, या बिंदु क्या है? " जैसा कि आप सीखते हैं, रस्सी-ए-डोप सामान और सरल रणनीतियों के साथ चिपकें। वाल्बर्ग कहते हैं, "एक अच्छा बुनियादीः" शरीर को कड़ी मेहनत करें और लड़के को अपने हाथ छोड़ने के लिए मजबूर करें ताकि आप उसके सिर पर हमला कर सकें। " |
द्दह्रक्त्रन्य॥ क्कक्त्र : ड्राइविंग लाइसेंस में अब मनमानी नहीं चलेगी। वहीं दलालों और फर्जीवाड़ा करने वालों पर भी अंकुश लगेगा। इसके लिए शासन ने नई पहल शुरू कर दी है। अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की चाह रखने वाले कैंडिडेट्स को फोटो और अड्रेस प्रूफ के साथ शपथ पत्र देना होगा। इसके बाद ही उसका लाइसेंस जारी होगा। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के रविंद्र नायक ने सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को दिशा-निर्देश और शपथ पत्र का फार्म जारी कर दिया है।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले कैंडिडेट को लर्निग और परमनेंट दोनों ही तरह के लाइसेंस बनवाने के लिए शपथपत्र देना होगा। इसके साथ ही दोनों ही पत्रों में सेल्फ अटेस्टेड रीसेंट फोटो लगाना भी जरूरी है। लर्निग लाइसेंस बनवाने वाले शपथ पत्र में 8 प्वाइंट्स निर्धारित किए गए हैं। इसमें नाम, पता और डेट ऑफ बर्थ की सही इंफॉर्मेशन के अलावा यह भी शपथ देना होगा कि अभ्यर्थी नशा नहीं करता है और उसने पूर्व में कोई ऐसा अपराध नहीं किया है जिससे आम जनता को खतरा हो। अड्रेस के लिए निवास प्रमाणपत्र की फोटो कापी लगानी होगी, साथ ही लास्ट में जिम्मेदारी भी तय की गई है।
परमनेंट लाइसेंस के लिए कैंडिडेट्स को 10 प्वाइंट्स पर फोकस रखना होगा। उन्हें यह शपथ देना होगा कि वह अपराधी प्रवृति के नहीं हैं और उन्होंने किसी भी अपराध में वाहन का प्रयोग नहीं किया है। नीचे पूरा पता, मोबाइल नंबर और सिग्नेचर भी जरूरी है। हालांकि, ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन बनना शुरू हो गया है, लेकिन फर्जीवाड़े को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने फिलहाल शपथ पत्र की अनिवार्यता शुरू करा दी है।
ड्राइविंग लाइसेंस तो स्मार्ट कार्ड के रूप में कंप्यूटराइज्ड बन रहा है। इसके बाद भी कैंपस में एक्टिव दलाल फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। फ्राइडे को गोरखपुर आरटीओ ऑफिस में लर्निग लाइसेंस बनवाने आया एक कैंडिडेट फर्जी अंक पत्र और पहचान पत्र के साथ पकड़ा गया। बिचौलिये उसी के आधार पर लाइसेंस बनवाने का दबाव बना रहे थे, लेकिन जब बाबुओं ने उसकी जांच कराई तो फर्जी निकला। उसके खिलाफ अभी कुछ कार्रवाई निश्चित की जाती कि वह फाइल छोड़कर फरार हो गया।
| द्दह्रक्त्रन्य॥ क्कक्त्र : ड्राइविंग लाइसेंस में अब मनमानी नहीं चलेगी। वहीं दलालों और फर्जीवाड़ा करने वालों पर भी अंकुश लगेगा। इसके लिए शासन ने नई पहल शुरू कर दी है। अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की चाह रखने वाले कैंडिडेट्स को फोटो और अड्रेस प्रूफ के साथ शपथ पत्र देना होगा। इसके बाद ही उसका लाइसेंस जारी होगा। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के रविंद्र नायक ने सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को दिशा-निर्देश और शपथ पत्र का फार्म जारी कर दिया है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले कैंडिडेट को लर्निग और परमनेंट दोनों ही तरह के लाइसेंस बनवाने के लिए शपथपत्र देना होगा। इसके साथ ही दोनों ही पत्रों में सेल्फ अटेस्टेड रीसेंट फोटो लगाना भी जरूरी है। लर्निग लाइसेंस बनवाने वाले शपथ पत्र में आठ प्वाइंट्स निर्धारित किए गए हैं। इसमें नाम, पता और डेट ऑफ बर्थ की सही इंफॉर्मेशन के अलावा यह भी शपथ देना होगा कि अभ्यर्थी नशा नहीं करता है और उसने पूर्व में कोई ऐसा अपराध नहीं किया है जिससे आम जनता को खतरा हो। अड्रेस के लिए निवास प्रमाणपत्र की फोटो कापी लगानी होगी, साथ ही लास्ट में जिम्मेदारी भी तय की गई है। परमनेंट लाइसेंस के लिए कैंडिडेट्स को दस प्वाइंट्स पर फोकस रखना होगा। उन्हें यह शपथ देना होगा कि वह अपराधी प्रवृति के नहीं हैं और उन्होंने किसी भी अपराध में वाहन का प्रयोग नहीं किया है। नीचे पूरा पता, मोबाइल नंबर और सिग्नेचर भी जरूरी है। हालांकि, ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन बनना शुरू हो गया है, लेकिन फर्जीवाड़े को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने फिलहाल शपथ पत्र की अनिवार्यता शुरू करा दी है। ड्राइविंग लाइसेंस तो स्मार्ट कार्ड के रूप में कंप्यूटराइज्ड बन रहा है। इसके बाद भी कैंपस में एक्टिव दलाल फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। फ्राइडे को गोरखपुर आरटीओ ऑफिस में लर्निग लाइसेंस बनवाने आया एक कैंडिडेट फर्जी अंक पत्र और पहचान पत्र के साथ पकड़ा गया। बिचौलिये उसी के आधार पर लाइसेंस बनवाने का दबाव बना रहे थे, लेकिन जब बाबुओं ने उसकी जांच कराई तो फर्जी निकला। उसके खिलाफ अभी कुछ कार्रवाई निश्चित की जाती कि वह फाइल छोड़कर फरार हो गया। |
घोटालों के आरोपों से घिरे लालू प्रसाद इन दिनों राजनीतिक तौर पर काफी सक्रिय हैं. हालांकि लालू की राजनीति को करीब से जानने वाले लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है. लालू के विरोधी जितनी ताकत से उन पर प्रहार करते हैं, लालू भी उन पर दोगुनी ताकत से हमला करते हैं. इन दिनों सुशील मोदी रोजाना लालू और उनके परिवार के सदस्यों पर घपले और घोटाले का आरोप लगा रहे हैं.
इन आरोपों की जद में लालू, राबड़ी देवी, उनके दोनों मंत्री पुत्र तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव भी आ चुके हैं. बेटी और सांसद मीसा भारती और दामाद शैलेश भी चपेटे में हैं. मीसा और शैलेश से आयकर विभाग पूछताछ कर रही है और अब ये दोनों ईडी के निशाने पर हैं. चारा घोटाले के देवघर से जुड़े मामले में लालू प्रसाद को भी अदालत में पेश होना है.
लालूू परिवार के प्रस्तावित सबसे बड़े मॉल का निर्माण अधर में लटक गया है. नीतीश कुमार को लेकर भी लालू प्रसाद इस समय बहुत ज्यादा आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं. लालू प्रसाद भले ही सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि नीतीश की तरफ जो डोरा डालता है, हम उस डोरे को ही काट देते हैं लेकिन सवाल यह है कि जब नीतीश ही डोरे के नजदीक जाने लगेंगे तो फिर लालू प्रसाद क्या करेंगे? लालू परिवार पर लग रहे घोटालों के आरोप पर नीतीश कुमार और न ही उनकी पार्टी कुछ बचाव कर पा रही है. नीतीश कुमार सोनिया गांधी के बुलावे पर नहीं गए और अगले ही दिन नरेंद्र मोदी के साथ भोज में शामिल हुए.
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि यह बहुत ही ठोस संदेश है कि नीतीश कुमार आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. लालू खेमे को लगता है कि नीतीश कुमार अपने सभी विकल्प खुले रखना चाहते हैं और जब जिस तरह के हालात बनेंगे उस हिसाब से फैसला ले सकते हैं. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद को यह आभास है कि आने वाले दिन उनके लिए काफी कठिन होनेे वाले हैं.
अगर दोनों बेटों पर लगे आरोपों की कड़ी आगे बढ़ी तो चार्जशीट की भी नौबत आ सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने नौ महीने में चारा घोटाले से जुड़े सभी मामलों को निपटाने के लिए कहा है. अगर चारे में बात बिगड़ी तो लालू प्रसाद को फिर जमानत के लिए जद्दोजहद करनी पड़ सकती है. इसलिए इस दौर में लालू प्रसाद राजनीतिक तौर पर खुद को इतना मजबूत कर लेना चाहते हैं कि अगर कुछ बुरा भी हो तो कम से कम 2019 की लड़ाई में वे एक मजबूत ताकत बन कर उभर सकें.
लालू प्रसाद राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने के लिए 27 अगस्त को पटना में एक बड़ी रैली का ऐलान कर चुके हैं. वे इन दिनों पूरी पार्टी को इस रैली की तैयारी में झोंक चुके हैं. इस रैली के माध्यम से वे सूबे में अपनी राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन की हसरत तो रखते ही हैं, साथ ही यह भी चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी को आगामी लोेकसभा चुुनाव में पटकनी देने की कवायद में वे केंद्रीय भूमिका निभाएं. इसलिए इस रैली में अखिलेश यादव के साथ मायावती को भी न्योता दिया गया है. उनका पूरा प्रयास है कि अखिलेश और मायावती दोनों मिलकर यूपी का लोकसभा चुनाव लड़ें. मायावती को बिहार से राज्यसभा भेजने की बात भी कही जा रही है.
इससे लालू प्रसाद के दो हित एक साथ सधने वाले हैं. पहली बात तो यह होगी कि यूपी में विधानसभा चुनाव में जिस तरह वोटों का बंटवारा हुआ, वह रुक जाएगा. अगर अखिलेश, मायावती और कांग्रेस तीनों मिलकर यूपी में 2019 में उतरेंगे तो भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती है. इसके इतर मायावती के बहाने लालू प्रसाद राजद से छिटके दलित वोटों को भी अपने पाले में कर सकते हैं. अब माय समीकरण को विस्तार देते हुए लालू प्रसाद अपना जनाधार इतना मजबूत कर लेना चाहते हैं कि विपरीत राजनीतिक हालात में भी उनका परचम लहराता रहे. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद की नजर इस समय दलित व कुशवाहा वोटबैंक पर है.
सियासी जानकारों का मानना है कि अगर लालू प्रसाद को मायावती का खुला समर्थन मिल जाता है तो दलित वोटों को राजद के पाले में लाने में काफी आसानी होगी. लालू प्रसाद अगर मायावती को राजद कोटे से राज्यसभा भेजते हैं तो इससे दलितों में बहुत सकारात्मक संदेश जाएगा. बताते चलें कि इस समय दलितों के वोट पर सभी पार्टियों की नजर है. इस वोट बैंक पर भाजपा भी कड़ा होमवर्क कर रही है और इसका फायदा भी चुनावों में उसे मिला है.
नीतीश कुमार भी इस वोटबैंक में सेंधमारी कर चुके हैं. लालू प्रसाद चाहते हैं कि मायावती को आगे रखकर इस वोटबैंक का पूरा नहीं, तो कम से कम एक बड़ा हिस्सा अपने पाले में कर लें. बताया जाता है कि मायावती ने लालू प्रसाद की रैली में भाग लेने पर अपनी सहमति दे दी है. वहीं, कुशवाहा समाज के कई बड़े नेता भी लालू के संपर्क में हैं. इनमें कुछ नेताओं को सीधे राजद में लेने में पार्टी के अंदर परेशानी है, इसलिए रास्ता खोजा जा रहा है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.
जानकार बताते हैं कि राजनीतिक संभावनाओं को खुला रखते हुए उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से संपर्क साधा जा रहा है. दोनों ही पार्टी के कई नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने भी लालू पर लग रहे आरोपों पर कुछ खास टीका-टिप्पणी नहीं की है. नीतीश की तरह उपेंद्र कुशवाहा ने भी अंदरखाने अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं. 2019 की लड़ाई को देखते हुए पार्टियां वेट एंड वाच की नीति पर अमल कर रही हैं.
इस बीच सूत्र बताते हैं कि कुशवाहा समाज के कई बड़े नेता जल्द उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में शामिल होने वाले हैं. इनमें नागमणि और भगवान सिंह कुशवाहा का भी नाम लिया जा रहा है. कहा जाए तो कुशवाहा समाज की गोलबंदी करने में उपेंद्र कुशवाहा लगे हैं. अगर यह सफल होती है तो यह लालू के लिए सकून वाली घटना होगी. कहा जाए तो लालू प्रसाद अपने माय यानि मुसलमान और यादव समीकरण में अब दलित और कुशवाहा को जोड़ने में लगे हैं.
एक ऐसा वोट बैंक का हथियार जो हर राजनीतिक लड़ाई में अजेय हो. सूत्रों पर भरोसा करें तो लालू प्रसाद इस सियासी हथियार को पाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं और इंतजार केवल सही समय का हो रहा है. नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनके हुंकार की ताकत इसी हथियार से निकल रही है. लालू को जानने वाले बताते हैं कि वे अंतिम समय तक उम्मीद नहीं छोड़ते हैं और इस बार तो लड़ाई आर-पार की है. हालांकि अभी सब कुछ परदे के पीछे है, लेकिन जब परदा उठेगा तब बिहार के सियासी संग्राम की एक अलग तस्वीर देखने को मिलेगी.
| घोटालों के आरोपों से घिरे लालू प्रसाद इन दिनों राजनीतिक तौर पर काफी सक्रिय हैं. हालांकि लालू की राजनीति को करीब से जानने वाले लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है. लालू के विरोधी जितनी ताकत से उन पर प्रहार करते हैं, लालू भी उन पर दोगुनी ताकत से हमला करते हैं. इन दिनों सुशील मोदी रोजाना लालू और उनके परिवार के सदस्यों पर घपले और घोटाले का आरोप लगा रहे हैं. इन आरोपों की जद में लालू, राबड़ी देवी, उनके दोनों मंत्री पुत्र तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव भी आ चुके हैं. बेटी और सांसद मीसा भारती और दामाद शैलेश भी चपेटे में हैं. मीसा और शैलेश से आयकर विभाग पूछताछ कर रही है और अब ये दोनों ईडी के निशाने पर हैं. चारा घोटाले के देवघर से जुड़े मामले में लालू प्रसाद को भी अदालत में पेश होना है. लालूू परिवार के प्रस्तावित सबसे बड़े मॉल का निर्माण अधर में लटक गया है. नीतीश कुमार को लेकर भी लालू प्रसाद इस समय बहुत ज्यादा आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं. लालू प्रसाद भले ही सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि नीतीश की तरफ जो डोरा डालता है, हम उस डोरे को ही काट देते हैं लेकिन सवाल यह है कि जब नीतीश ही डोरे के नजदीक जाने लगेंगे तो फिर लालू प्रसाद क्या करेंगे? लालू परिवार पर लग रहे घोटालों के आरोप पर नीतीश कुमार और न ही उनकी पार्टी कुछ बचाव कर पा रही है. नीतीश कुमार सोनिया गांधी के बुलावे पर नहीं गए और अगले ही दिन नरेंद्र मोदी के साथ भोज में शामिल हुए. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि यह बहुत ही ठोस संदेश है कि नीतीश कुमार आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. लालू खेमे को लगता है कि नीतीश कुमार अपने सभी विकल्प खुले रखना चाहते हैं और जब जिस तरह के हालात बनेंगे उस हिसाब से फैसला ले सकते हैं. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद को यह आभास है कि आने वाले दिन उनके लिए काफी कठिन होनेे वाले हैं. अगर दोनों बेटों पर लगे आरोपों की कड़ी आगे बढ़ी तो चार्जशीट की भी नौबत आ सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने नौ महीने में चारा घोटाले से जुड़े सभी मामलों को निपटाने के लिए कहा है. अगर चारे में बात बिगड़ी तो लालू प्रसाद को फिर जमानत के लिए जद्दोजहद करनी पड़ सकती है. इसलिए इस दौर में लालू प्रसाद राजनीतिक तौर पर खुद को इतना मजबूत कर लेना चाहते हैं कि अगर कुछ बुरा भी हो तो कम से कम दो हज़ार उन्नीस की लड़ाई में वे एक मजबूत ताकत बन कर उभर सकें. लालू प्रसाद राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने के लिए सत्ताईस अगस्त को पटना में एक बड़ी रैली का ऐलान कर चुके हैं. वे इन दिनों पूरी पार्टी को इस रैली की तैयारी में झोंक चुके हैं. इस रैली के माध्यम से वे सूबे में अपनी राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन की हसरत तो रखते ही हैं, साथ ही यह भी चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी को आगामी लोेकसभा चुुनाव में पटकनी देने की कवायद में वे केंद्रीय भूमिका निभाएं. इसलिए इस रैली में अखिलेश यादव के साथ मायावती को भी न्योता दिया गया है. उनका पूरा प्रयास है कि अखिलेश और मायावती दोनों मिलकर यूपी का लोकसभा चुनाव लड़ें. मायावती को बिहार से राज्यसभा भेजने की बात भी कही जा रही है. इससे लालू प्रसाद के दो हित एक साथ सधने वाले हैं. पहली बात तो यह होगी कि यूपी में विधानसभा चुनाव में जिस तरह वोटों का बंटवारा हुआ, वह रुक जाएगा. अगर अखिलेश, मायावती और कांग्रेस तीनों मिलकर यूपी में दो हज़ार उन्नीस में उतरेंगे तो भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती है. इसके इतर मायावती के बहाने लालू प्रसाद राजद से छिटके दलित वोटों को भी अपने पाले में कर सकते हैं. अब माय समीकरण को विस्तार देते हुए लालू प्रसाद अपना जनाधार इतना मजबूत कर लेना चाहते हैं कि विपरीत राजनीतिक हालात में भी उनका परचम लहराता रहे. जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद की नजर इस समय दलित व कुशवाहा वोटबैंक पर है. सियासी जानकारों का मानना है कि अगर लालू प्रसाद को मायावती का खुला समर्थन मिल जाता है तो दलित वोटों को राजद के पाले में लाने में काफी आसानी होगी. लालू प्रसाद अगर मायावती को राजद कोटे से राज्यसभा भेजते हैं तो इससे दलितों में बहुत सकारात्मक संदेश जाएगा. बताते चलें कि इस समय दलितों के वोट पर सभी पार्टियों की नजर है. इस वोट बैंक पर भाजपा भी कड़ा होमवर्क कर रही है और इसका फायदा भी चुनावों में उसे मिला है. नीतीश कुमार भी इस वोटबैंक में सेंधमारी कर चुके हैं. लालू प्रसाद चाहते हैं कि मायावती को आगे रखकर इस वोटबैंक का पूरा नहीं, तो कम से कम एक बड़ा हिस्सा अपने पाले में कर लें. बताया जाता है कि मायावती ने लालू प्रसाद की रैली में भाग लेने पर अपनी सहमति दे दी है. वहीं, कुशवाहा समाज के कई बड़े नेता भी लालू के संपर्क में हैं. इनमें कुछ नेताओं को सीधे राजद में लेने में पार्टी के अंदर परेशानी है, इसलिए रास्ता खोजा जा रहा है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. जानकार बताते हैं कि राजनीतिक संभावनाओं को खुला रखते हुए उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से संपर्क साधा जा रहा है. दोनों ही पार्टी के कई नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने भी लालू पर लग रहे आरोपों पर कुछ खास टीका-टिप्पणी नहीं की है. नीतीश की तरह उपेंद्र कुशवाहा ने भी अंदरखाने अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं. दो हज़ार उन्नीस की लड़ाई को देखते हुए पार्टियां वेट एंड वाच की नीति पर अमल कर रही हैं. इस बीच सूत्र बताते हैं कि कुशवाहा समाज के कई बड़े नेता जल्द उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में शामिल होने वाले हैं. इनमें नागमणि और भगवान सिंह कुशवाहा का भी नाम लिया जा रहा है. कहा जाए तो कुशवाहा समाज की गोलबंदी करने में उपेंद्र कुशवाहा लगे हैं. अगर यह सफल होती है तो यह लालू के लिए सकून वाली घटना होगी. कहा जाए तो लालू प्रसाद अपने माय यानि मुसलमान और यादव समीकरण में अब दलित और कुशवाहा को जोड़ने में लगे हैं. एक ऐसा वोट बैंक का हथियार जो हर राजनीतिक लड़ाई में अजेय हो. सूत्रों पर भरोसा करें तो लालू प्रसाद इस सियासी हथियार को पाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं और इंतजार केवल सही समय का हो रहा है. नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनके हुंकार की ताकत इसी हथियार से निकल रही है. लालू को जानने वाले बताते हैं कि वे अंतिम समय तक उम्मीद नहीं छोड़ते हैं और इस बार तो लड़ाई आर-पार की है. हालांकि अभी सब कुछ परदे के पीछे है, लेकिन जब परदा उठेगा तब बिहार के सियासी संग्राम की एक अलग तस्वीर देखने को मिलेगी. |
दिल्ली के मायापुरी में मंगलवार शाम ट्रैफिक पुलिस ने स्कूटर सवाल महिला और पुरुष को हेलमेट नहीं पहनने के लिए रोका. इसके बाद आरोप है कि महिला और पुरूष ने ट्रैफिक पुलिस के साथ बदसलूकी की. ट्रैफिक पुलिस का आरोप है कि दोनों भारी नशे में थे. ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की शिकायत पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. वीडियो में "उसका भाई मर गया है" आवाज आ रही है. माना जा रहा है कि बाइक सवार पुरूष साथ जा रही महिला को लेकर यह बात बोल रहा है. वह महिला को जाने देने की बात कह रहा है. दुपहिया वाहन चालक अनिल पांडे और माधुरी को पुलिस से दुर्व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.
| दिल्ली के मायापुरी में मंगलवार शाम ट्रैफिक पुलिस ने स्कूटर सवाल महिला और पुरुष को हेलमेट नहीं पहनने के लिए रोका. इसके बाद आरोप है कि महिला और पुरूष ने ट्रैफिक पुलिस के साथ बदसलूकी की. ट्रैफिक पुलिस का आरोप है कि दोनों भारी नशे में थे. ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की शिकायत पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. वीडियो में "उसका भाई मर गया है" आवाज आ रही है. माना जा रहा है कि बाइक सवार पुरूष साथ जा रही महिला को लेकर यह बात बोल रहा है. वह महिला को जाने देने की बात कह रहा है. दुपहिया वाहन चालक अनिल पांडे और माधुरी को पुलिस से दुर्व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. |
अमिताभ बच्चन की नई फिल्म हाइट 11 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. सिद्धिविनायक मंदिर फिल्म की रिलीज के बाद अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन बप्पा का आशीर्वाद लेने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे।
बॉलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन और उनके बेटे शुक्रवार सुबह मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। अमिताभ बच्चन और अभिषेक हाथ जोड़कर बप्पा को नमन करते नजर आए। बच्चन परिवार शुभ दिन और त्योहार पर पिता का आशीर्वाद चाहता है। जहां पूरा बॉलीवुड गणपति बप्पा को नमन करता है, वहीं पिता-पुत्र की जोड़ी जब खुद को और अपने परिवार का अभिवादन करने आती है तो एक अलग ही रंग में नजर आती है।
अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन दोनों ही गणपति बप्पा को नमन करते नजर आ रहे हैं। सिद्धिविनायक मंदिर में बच्चन परिवार की गहरी आस्था है। ऐश्वर्या राय बच्चन भी अपने जन्मदिन पर बेटी आराध्या के साथ गणपति बप्पा से मिलने पहुंचीं।
अमिताभ बच्चन की फिल्म हाइट को अब तक अच्छे रिव्यू मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी से फिल्म को फायदा होगा। आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन की हाइट के साथ-साथ सामंथा रूथ प्रभु की यशोदा और मार्वल स्टूडियोज की ब्लैक पैंथर भी रिलीज हो चुकी है।
अमिताभ बच्चन ने हाल ही में दर्शकों से सिनेमाघरों में फिल्में देखने की अपील की थी। आपको बता दें कि कोविड महामारी के बाद अभिनेताओं और निर्माताओं दोनों के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाना मुश्किल हो गया है। बॉलीवुड की कई फिल्में बैक टू बैक फ्लॉप होने के बाद बिग बी भी फिल्म की सफलता को लेकर चिंतित हैं।
| अमिताभ बच्चन की नई फिल्म हाइट ग्यारह नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. सिद्धिविनायक मंदिर फिल्म की रिलीज के बाद अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन बप्पा का आशीर्वाद लेने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। बॉलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन और उनके बेटे शुक्रवार सुबह मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। अमिताभ बच्चन और अभिषेक हाथ जोड़कर बप्पा को नमन करते नजर आए। बच्चन परिवार शुभ दिन और त्योहार पर पिता का आशीर्वाद चाहता है। जहां पूरा बॉलीवुड गणपति बप्पा को नमन करता है, वहीं पिता-पुत्र की जोड़ी जब खुद को और अपने परिवार का अभिवादन करने आती है तो एक अलग ही रंग में नजर आती है। अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन दोनों ही गणपति बप्पा को नमन करते नजर आ रहे हैं। सिद्धिविनायक मंदिर में बच्चन परिवार की गहरी आस्था है। ऐश्वर्या राय बच्चन भी अपने जन्मदिन पर बेटी आराध्या के साथ गणपति बप्पा से मिलने पहुंचीं। अमिताभ बच्चन की फिल्म हाइट को अब तक अच्छे रिव्यू मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी से फिल्म को फायदा होगा। आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन की हाइट के साथ-साथ सामंथा रूथ प्रभु की यशोदा और मार्वल स्टूडियोज की ब्लैक पैंथर भी रिलीज हो चुकी है। अमिताभ बच्चन ने हाल ही में दर्शकों से सिनेमाघरों में फिल्में देखने की अपील की थी। आपको बता दें कि कोविड महामारी के बाद अभिनेताओं और निर्माताओं दोनों के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाना मुश्किल हो गया है। बॉलीवुड की कई फिल्में बैक टू बैक फ्लॉप होने के बाद बिग बी भी फिल्म की सफलता को लेकर चिंतित हैं। |
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एमएससी कृिष तथा एमवीएससी इत्यादि मास्टर्ज कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु तीन अक्तूबर को आयोजित प्रवेश परीक्षा-2021 का परिणाम घोषित कर दिया गया है। प्रवेश परीक्षा का परिणाम रोल नंबर के आधार पर विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर डाल दिया गया है।
प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एमएससी कृिष में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग 26 अक्तूबर सुबह 10. 00 बजे प्रारंभ होगी, जबकि एमवीएससी में प्रवेश हेतु काउंसिलिंग की तिथि बाद में अधिसूचित की जाएगी और तिथि का ब्योरा विश्वविद्यालय के वेबसाइट प्रदर्शित कर दिया जाएगा। एमएससी कृिष में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग के लिए अभ्यर्थियों को 26 अक्तूबर सुबह 10. 00 बजे अपने एडमिट कार्ड के साथ सभी मूल प्रमाण पत्र लाने होंगे। अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग प्रपत्र के साथ सभी प्रमाण पत्रों का एक अटेस्टेड सेट व वेबसाइट में दर्शित कोरोना संबंधी सेल्फ डिक्लेरेशेन प्रपत्र भी भरकर लाना होगा। अभ्यर्थी काउंसिलिंग संबंधी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय के वेबसाइट से ही प्राप्त कर सकते हैं।
| हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एमएससी कृिष तथा एमवीएससी इत्यादि मास्टर्ज कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु तीन अक्तूबर को आयोजित प्रवेश परीक्षा-दो हज़ार इक्कीस का परिणाम घोषित कर दिया गया है। प्रवेश परीक्षा का परिणाम रोल नंबर के आधार पर विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर डाल दिया गया है। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एमएससी कृिष में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग छब्बीस अक्तूबर सुबह दस. शून्य बजे प्रारंभ होगी, जबकि एमवीएससी में प्रवेश हेतु काउंसिलिंग की तिथि बाद में अधिसूचित की जाएगी और तिथि का ब्योरा विश्वविद्यालय के वेबसाइट प्रदर्शित कर दिया जाएगा। एमएससी कृिष में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग के लिए अभ्यर्थियों को छब्बीस अक्तूबर सुबह दस. शून्य बजे अपने एडमिट कार्ड के साथ सभी मूल प्रमाण पत्र लाने होंगे। अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग प्रपत्र के साथ सभी प्रमाण पत्रों का एक अटेस्टेड सेट व वेबसाइट में दर्शित कोरोना संबंधी सेल्फ डिक्लेरेशेन प्रपत्र भी भरकर लाना होगा। अभ्यर्थी काउंसिलिंग संबंधी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय के वेबसाइट से ही प्राप्त कर सकते हैं। |
सब मीठा दही लेकर उसे फेंट डाले। बाद को दो तोले राई, दो माशे दोनों ज़ीरे, एक तोला स्याह मिर्च, एः माशे लाल मिर्च, दो माशे तलाव हींग और दो तोले नमक में हींग को छोड़ बाकी मसाला पीस फर दही में मिला दे और ऊपर से शाक भी छोड़ दे। बाद को हींग का धुँगार देकर भोजन के काम में लाये ।
नरम नरम खीरा लेकर उसके मुँह पर से विपैलापन रगड़ कर निकाल डाले, बाद को लील डाले। फिर बिजाईकस में उसे चाहे लम्बे शकु में या खड़े बल में रगड़ कर महीन महीन ल बना ले। वारे को ही खीरे का रायता बनाये या एलका सा उबाल देकर दोनों ही तरह से बनाया जाता है। यदि षाध सेर खीरे के लच्छे हों, तो एक सेर षच्छा मीठा दही लेकर फेंट डाले। दोनों ज़ीरे दो माशे, बड़ी इलायची दो माशे, काली मिर्च एक तोला, लौंग एक माशा, राई ढाई तोले, तलाव हींग दो रत्ती और नमक दो तोले लेफर थोड़े से घी में भून फर पीस डाले। खीरा और पिसे हुए मसाले को दही में मिला कर कुछ देर तक ढाँक कर रख दे। इसके बाद भोजन के काम में लाये ।
अच्छी पुष्ट गाजर लेकर पानी से अच्छी तरह रगड़ फर धो डाले। उपरान्त बीच में जो उसके कड़ी रीद निकलती है, उसे फेंक कर बाकी बिलाईकस में कस डाले। बाद को पानी में उबाल कर ठण्ठा हो जाने पर उसका पानी निचोड़ कर फेंक दे। उबाली हुई गाजर यदि आाध सेर हो, तो एक सेर | सब मीठा दही लेकर उसे फेंट डाले। बाद को दो तोले राई, दो माशे दोनों ज़ीरे, एक तोला स्याह मिर्च, एः माशे लाल मिर्च, दो माशे तलाव हींग और दो तोले नमक में हींग को छोड़ बाकी मसाला पीस फर दही में मिला दे और ऊपर से शाक भी छोड़ दे। बाद को हींग का धुँगार देकर भोजन के काम में लाये । नरम नरम खीरा लेकर उसके मुँह पर से विपैलापन रगड़ कर निकाल डाले, बाद को लील डाले। फिर बिजाईकस में उसे चाहे लम्बे शकु में या खड़े बल में रगड़ कर महीन महीन ल बना ले। वारे को ही खीरे का रायता बनाये या एलका सा उबाल देकर दोनों ही तरह से बनाया जाता है। यदि षाध सेर खीरे के लच्छे हों, तो एक सेर षच्छा मीठा दही लेकर फेंट डाले। दोनों ज़ीरे दो माशे, बड़ी इलायची दो माशे, काली मिर्च एक तोला, लौंग एक माशा, राई ढाई तोले, तलाव हींग दो रत्ती और नमक दो तोले लेफर थोड़े से घी में भून फर पीस डाले। खीरा और पिसे हुए मसाले को दही में मिला कर कुछ देर तक ढाँक कर रख दे। इसके बाद भोजन के काम में लाये । अच्छी पुष्ट गाजर लेकर पानी से अच्छी तरह रगड़ फर धो डाले। उपरान्त बीच में जो उसके कड़ी रीद निकलती है, उसे फेंक कर बाकी बिलाईकस में कस डाले। बाद को पानी में उबाल कर ठण्ठा हो जाने पर उसका पानी निचोड़ कर फेंक दे। उबाली हुई गाजर यदि आाध सेर हो, तो एक सेर |
IPL 2023: इंडियन प्रिमियर लीग के 16 वें सीजन की शुरुआत 31 मार्च से हो रही है. दुनिया की सबसे मंहगी और लोकप्रिय इस टी 20 लीग में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर के बड़े और नामचीन खिलाड़ी भारत पहुँचना शुरु कर चुके हैं. लेकिन इसी बीच पाकिस्तान से बड़ी खबर आई है. पाकिस्तान इंडियन प्रिमियर लीग के बीच ही अपने देश में एक अंतराष्ट्रीय द्विपक्षिय सीरीज का आयोजन करने जा रहा है. पाकिस्तान की कोशिश IPL के दौरान अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का आयोजन कर क्रिकेट की दुनिया का अटेंशन अपनी ओर लेना है.
IPL के दौरान पाकिस्तान न्यूजीलैंड के साथ 5 वनडे और 5 टी 20 मैचों की सीरीज खेलेगा. ये सीरीज 14 अप्रैल से 7 मई के बीच खेली जाएगी. पहले टी 20 और फिर वनडे सीरीज खेली जानी है. पहला, दूसरा और तीसरा टी 20 14, 15 और 17 अप्रैल को लाहौर में जबकि चौथा और पांचवां टी 20 20 और 24 अप्रैल को रावलपिंडी में खेला जाएगा. 5 मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत 26 अप्रैल से होगी. 26 अप्रैल को पहला वनडे रावलपिंडी में खेला जाएगा. दूसरा (30 अप्रैल), तीसरा (3 मई), चौथा (5 मई) और 5वां वनडे (7 मई) कराची में खेला जाएगा.
IPL के दौरान पाकिस्तान ने बेशक न्यूजीलैंड के साथ वनडे और टी 20 सीरीज खेलने का निर्णय लिया है लेकिन कीवी खिलाड़ी IPL के जादु से बच नहीं पाए हैं. यही वजह है कि न्यूजीलैंड के तमाम बड़े खिलाड़ी पाकिस्तान दौरे की जगह IPL खेलने भारत आ रहे हैं. न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड को भी इससे कोई एतराज नहीं है. बता दें कि केन विलियमसन, ट्रेंट बोल्ड, माइकल ब्रेसवेल, टीम साउदी, डवेन कॉन्वे जैसे बड़े खिलाड़ी आईपीएल खेलने भारत आ रहे हैं.
IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एंट्री नहीं है. पाकिस्तान के खिलाड़ी सिर्फ IPL के पहले सीजन यानि IPL 2008 में खेले थे. इसी साल नंवबर में पाकिस्तान की तरफ से मुंबई में आतंकवादी हमला हो गया था. इस हमले के बाद BCCI ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के IPL खेलने पर रोक लगा दी थी.
| IPL दो हज़ार तेईस: इंडियन प्रिमियर लीग के सोलह वें सीजन की शुरुआत इकतीस मार्च से हो रही है. दुनिया की सबसे मंहगी और लोकप्रिय इस टी बीस लीटरग में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर के बड़े और नामचीन खिलाड़ी भारत पहुँचना शुरु कर चुके हैं. लेकिन इसी बीच पाकिस्तान से बड़ी खबर आई है. पाकिस्तान इंडियन प्रिमियर लीग के बीच ही अपने देश में एक अंतराष्ट्रीय द्विपक्षिय सीरीज का आयोजन करने जा रहा है. पाकिस्तान की कोशिश IPL के दौरान अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का आयोजन कर क्रिकेट की दुनिया का अटेंशन अपनी ओर लेना है. IPL के दौरान पाकिस्तान न्यूजीलैंड के साथ पाँच वनडे और पाँच टी बीस मैचों की सीरीज खेलेगा. ये सीरीज चौदह अप्रैल से सात मई के बीच खेली जाएगी. पहले टी बीस और फिर वनडे सीरीज खेली जानी है. पहला, दूसरा और तीसरा टी बीस चौदह, पंद्रह और सत्रह अप्रैल को लाहौर में जबकि चौथा और पांचवां टी बीस बीस और चौबीस अप्रैल को रावलपिंडी में खेला जाएगा. पाँच मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत छब्बीस अप्रैल से होगी. छब्बीस अप्रैल को पहला वनडे रावलपिंडी में खेला जाएगा. दूसरा , तीसरा , चौथा और पाँचवां वनडे कराची में खेला जाएगा. IPL के दौरान पाकिस्तान ने बेशक न्यूजीलैंड के साथ वनडे और टी बीस सीरीज खेलने का निर्णय लिया है लेकिन कीवी खिलाड़ी IPL के जादु से बच नहीं पाए हैं. यही वजह है कि न्यूजीलैंड के तमाम बड़े खिलाड़ी पाकिस्तान दौरे की जगह IPL खेलने भारत आ रहे हैं. न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड को भी इससे कोई एतराज नहीं है. बता दें कि केन विलियमसन, ट्रेंट बोल्ड, माइकल ब्रेसवेल, टीम साउदी, डवेन कॉन्वे जैसे बड़े खिलाड़ी आईपीएल खेलने भारत आ रहे हैं. IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एंट्री नहीं है. पाकिस्तान के खिलाड़ी सिर्फ IPL के पहले सीजन यानि IPL दो हज़ार आठ में खेले थे. इसी साल नंवबर में पाकिस्तान की तरफ से मुंबई में आतंकवादी हमला हो गया था. इस हमले के बाद BCCI ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के IPL खेलने पर रोक लगा दी थी. |
रोजगार के लिए बिहार से बढ़ते पलायन को रोकने लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। TCS के पटना में निवेश करने से वहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार (जून 22, 2019) को केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान रविशंकर प्रसाद और चंद्रशेखरन ने भारत के डिजिटल सेक्टर से जुड़े विषयों के साथ ही डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए नई पहलों पर भी चर्चा की।
बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि TCS जैसी बड़ी कंपनी का बिहार में निवेश एक अच्छी शुरुआत है। इससे प्रेरित हो कर अन्य आईटी कंपनियाँ भी राज्य में निवेश करने के लिए आगे आएँगी। इससे राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संभावना है कि जल्द ही टीसीएस के केंद्र का उद्घाटन होगा।
| रोजगार के लिए बिहार से बढ़ते पलायन को रोकने लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। TCS के पटना में निवेश करने से वहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार को केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान रविशंकर प्रसाद और चंद्रशेखरन ने भारत के डिजिटल सेक्टर से जुड़े विषयों के साथ ही डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए नई पहलों पर भी चर्चा की। बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि TCS जैसी बड़ी कंपनी का बिहार में निवेश एक अच्छी शुरुआत है। इससे प्रेरित हो कर अन्य आईटी कंपनियाँ भी राज्य में निवेश करने के लिए आगे आएँगी। इससे राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संभावना है कि जल्द ही टीसीएस के केंद्र का उद्घाटन होगा। |
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मुख्यालय, धरोहर भवन, नई दिल्ली में आज आयोजित एक समारोह में तमिलनाडु सरकार की मूर्ति शाखा को भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता की कांस्य मूर्तियां सौंप दी। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, एएसआई और तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इससे पहले, 15 सितंबर 2020 को लंदन में वहां की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने ये कांस्य मूर्तियां भारतीय उच्चायोग को सौंपी थीं। 1958 में किए गए फोटो प्रलेखन के अनुसार, ये मूर्तियाँ तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के आनंदमंगलम स्थित श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर (विजयनगर काल में निर्मित मंदिर) की हैं। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा द्वारा की गयी जांच के अनुसार, ये मूर्तियाँ 23/24 नवंबर 1978 को श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से चुरायी गयी थीं।
भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता की ये कांस्य मूर्तियां भारतीय धातु कला की उत्कृष्ट कृतियां हैं और इनकी लंबाई क्रमशः 90.5 सेमी, 78 सेमी और 74.5 सेमी है। शैली के हिसाब सेये मूर्तियां 13वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व की हैं।
मूर्तियां सौंपने के समारोह के दौरान मंत्री ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में2014 से अब तक विदेश से भारत में कुल 40 पुरावशेष वापस लाए गए हैं, जबकि 2014 से पहले, वर्ष 1976 के बाद से इस तरह के केवल 13 पुरावशेष वापस लाए गए थे।
उन्होंने इन मूर्तियों को देश में लाने की खातिर किए गए निरंतर प्रयासों के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, तमिलनाडु सरकार की विशेष मूर्ति शाखा,राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई)और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को बधाई दी।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारतीय स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह के एक हिस्से के रूप में, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, भारतीय परंपराएं, विरासत एवं संस्कृति, पर्यटन विकास और प्रोत्साहन तथा राष्ट्रीय महत्व से जुड़े अन्य विषयों जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों/आवेदकों को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती से शुरू होने वाली अवधि, 25 दिसंबर 2020 से 15 अगस्त 2021 तक, के दौरान एएसआईके विभिन्न स्मारकों (विश्व धरोहर स्थलों/प्रतिष्ठित स्थलों को छोड़कर) में शूटिंग/फोटोग्राफी के लिए शुल्क के भुगतान से छूट दी जाएगी। इस तरह की शूटिंग गतिविधियां करने की खातिर आवेदकों/एजेंसियों को मंजूरी पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने अगस्त 2019 में लंदन स्थितभारतीय उच्चायोग को सूचित किया कि तमिलनाडु में विजयनगर काल में बने एक मंदिर से चुरायी गयीं चार प्राचीन मूर्तियाँ (श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान) भारत से तस्करी करशायद ब्रिटेन लाया गयी थीं।
इन तीन धातु की मूर्तियों का फोटो प्रलेखन जून 1958 में तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के आनंदमंगलम में स्थित श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर (विजयनगर काल के दौरान बनाया गया था) में किया गया था। इस चित्र में चार मूर्तियाँ थीं - श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की। इसलिए, मूर्तियाँ कम से कम 1958 तक मंदिर में थीं और बाद में चोरी हो गयीं।
संबंधित रिकॉर्ड के साथ मूर्तियों का सत्यापन करने के बादयह मामला लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कला और प्राचीन इकाई के साथ-साथ तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा के सामने उठाया गया। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा ने एक व्यापक रिपोर्ट भेजी जिसमें पुष्टि की गई थी कि मूर्तियों की चोरी श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से 23/24 नवंबर 1978 को हुई थी और बाद में अपराधी भी पकड़े गए थे। तस्वीर के आधार पर, इन मूर्तियों की जांच की गयी और पाया गया कि ये सभी मूर्तियां श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से चुरायी गयी मूर्तियां ही थीं। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा ने आइएफपी फोटो संग्रह के साथ मूर्तियों का मैच करने को लेकर विशेषज्ञ राय भी प्रदान की। उचित जांच करने के बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के पास एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी गयी।
लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कला और प्राचीन इकाई ने मामले की जांच की और उन्हें प्रदान की गई जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर मूर्तियों के मालिक से संपर्क किया और मूर्तियों को वापस लौटाने के भारतीय उच्चायोग के अनुरोध से अवगत कराया, उन्हें बताया गया कि प्रथम दृष्टया ये मूर्तियां भारत के एक मंदिर से चोरी की गयी मूर्तियां लगती हैं। इसके बाद, मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने 15 सितंबर 2020 को भारतीय उच्चायोग को ये मूर्तियां सौंप दीं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, तमिलनाडु सरकार की विशेष मूर्ति शाखा, और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के निरंतर प्रयासों के कारणये मूर्तियाँ अब देश में वापस आ गयी हैं।
| केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्यालय, धरोहर भवन, नई दिल्ली में आज आयोजित एक समारोह में तमिलनाडु सरकार की मूर्ति शाखा को भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता की कांस्य मूर्तियां सौंप दी। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, एएसआई और तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इससे पहले, पंद्रह सितंबर दो हज़ार बीस को लंदन में वहां की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने ये कांस्य मूर्तियां भारतीय उच्चायोग को सौंपी थीं। एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में किए गए फोटो प्रलेखन के अनुसार, ये मूर्तियाँ तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के आनंदमंगलम स्थित श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर की हैं। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा द्वारा की गयी जांच के अनुसार, ये मूर्तियाँ तेईस/चौबीस नवंबर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से चुरायी गयी थीं। भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता की ये कांस्य मूर्तियां भारतीय धातु कला की उत्कृष्ट कृतियां हैं और इनकी लंबाई क्रमशः नब्बे.पाँच सेमी, अठहत्तर सेमी और चौहत्तर.पाँच सेमी है। शैली के हिसाब सेये मूर्तियां तेरहवीं शताब्दी ईस्वी पूर्व की हैं। मूर्तियां सौंपने के समारोह के दौरान मंत्री ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व मेंदो हज़ार चौदह से अब तक विदेश से भारत में कुल चालीस पुरावशेष वापस लाए गए हैं, जबकि दो हज़ार चौदह से पहले, वर्ष एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर के बाद से इस तरह के केवल तेरह पुरावशेष वापस लाए गए थे। उन्होंने इन मूर्तियों को देश में लाने की खातिर किए गए निरंतर प्रयासों के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, तमिलनाडु सरकार की विशेष मूर्ति शाखा,राजस्व आसूचना निदेशालय और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को बधाई दी। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारतीय स्वतंत्रता के पचहत्तरवें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह के एक हिस्से के रूप में, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, भारतीय परंपराएं, विरासत एवं संस्कृति, पर्यटन विकास और प्रोत्साहन तथा राष्ट्रीय महत्व से जुड़े अन्य विषयों जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों/आवेदकों को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती से शुरू होने वाली अवधि, पच्चीस दिसंबर दो हज़ार बीस से पंद्रह अगस्त दो हज़ार इक्कीस तक, के दौरान एएसआईके विभिन्न स्मारकों में शूटिंग/फोटोग्राफी के लिए शुल्क के भुगतान से छूट दी जाएगी। इस तरह की शूटिंग गतिविधियां करने की खातिर आवेदकों/एजेंसियों को मंजूरी पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने अगस्त दो हज़ार उन्नीस में लंदन स्थितभारतीय उच्चायोग को सूचित किया कि तमिलनाडु में विजयनगर काल में बने एक मंदिर से चुरायी गयीं चार प्राचीन मूर्तियाँ भारत से तस्करी करशायद ब्रिटेन लाया गयी थीं। इन तीन धातु की मूर्तियों का फोटो प्रलेखन जून एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के आनंदमंगलम में स्थित श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर में किया गया था। इस चित्र में चार मूर्तियाँ थीं - श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की। इसलिए, मूर्तियाँ कम से कम एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन तक मंदिर में थीं और बाद में चोरी हो गयीं। संबंधित रिकॉर्ड के साथ मूर्तियों का सत्यापन करने के बादयह मामला लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कला और प्राचीन इकाई के साथ-साथ तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा के सामने उठाया गया। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा ने एक व्यापक रिपोर्ट भेजी जिसमें पुष्टि की गई थी कि मूर्तियों की चोरी श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से तेईस/चौबीस नवंबर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को हुई थी और बाद में अपराधी भी पकड़े गए थे। तस्वीर के आधार पर, इन मूर्तियों की जांच की गयी और पाया गया कि ये सभी मूर्तियां श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर से चुरायी गयी मूर्तियां ही थीं। तमिलनाडु पुलिस की मूर्ति शाखा ने आइएफपी फोटो संग्रह के साथ मूर्तियों का मैच करने को लेकर विशेषज्ञ राय भी प्रदान की। उचित जांच करने के बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के पास एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी गयी। लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कला और प्राचीन इकाई ने मामले की जांच की और उन्हें प्रदान की गई जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर मूर्तियों के मालिक से संपर्क किया और मूर्तियों को वापस लौटाने के भारतीय उच्चायोग के अनुरोध से अवगत कराया, उन्हें बताया गया कि प्रथम दृष्टया ये मूर्तियां भारत के एक मंदिर से चोरी की गयी मूर्तियां लगती हैं। इसके बाद, मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने पंद्रह सितंबर दो हज़ार बीस को भारतीय उच्चायोग को ये मूर्तियां सौंप दीं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, तमिलनाडु सरकार की विशेष मूर्ति शाखा, और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के निरंतर प्रयासों के कारणये मूर्तियाँ अब देश में वापस आ गयी हैं। |
हिमाचल के कुल्लू स्थित BDO कार्यालय परिसर में खंड स्तरीय पुस्तकालय का संचालन किया जाएगा। पुस्तकालय सुबह 8 से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। पुस्तकालय का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इसमें 72 पाठकों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पुस्तकालय के संचालन के लिए प्राथमिकता के तौर पर स्वंय सहायता समूहों, 2 या 2 से अधिक स्वयंसेवियों को व्यवसायिक उद्देशयों से आवंटित किया जाएगा।
पुस्तकालय के साथ किराए की एक दुकान चलाने का भी प्रावधान रखा गया है। पुस्तकालय संचालकों को कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है। खंड विकास अधिकारी बबनेश चड्ढा का कहना है कि पुस्तकालय के लिए बिजली, पानी, फर्नीचर और कुछ पुस्तकों का प्रबंध विभाग द्वारा किया जा चुका है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्थानीय जनता स्वेच्छा से पुस्तकालय के संचालन हेतु 1 सप्ताह के भीतर BDO कार्यालय में अपना आवेदन दे सकते हैं।
BDO बबनेश चड्ढा ने पुस्तकालय के लिए नई या पुरानी पुस्तकें, स्टेशनरी इत्यादि स्वेच्छा से दान करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि पुस्तकालय के संचालन के लिए नियम व शर्तें BDO कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। पुस्तकालय संचालन में किसी भी प्रकार के अवरोध अथवा शिकायत होने की दशा में संचालक को हटाने का पूर्ण अधिकार BDO के पास होगा।
आवेदन प्राप्त होने के पश्चात ब्लॉक स्तर पर गठित समिति के द्वारा पुस्तकालय के संचालन हेतु आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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| हिमाचल के कुल्लू स्थित BDO कार्यालय परिसर में खंड स्तरीय पुस्तकालय का संचालन किया जाएगा। पुस्तकालय सुबह आठ से रात दस बजे तक खुला रहेगा। पुस्तकालय का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इसमें बहत्तर पाठकों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पुस्तकालय के संचालन के लिए प्राथमिकता के तौर पर स्वंय सहायता समूहों, दो या दो से अधिक स्वयंसेवियों को व्यवसायिक उद्देशयों से आवंटित किया जाएगा। पुस्तकालय के साथ किराए की एक दुकान चलाने का भी प्रावधान रखा गया है। पुस्तकालय संचालकों को कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है। खंड विकास अधिकारी बबनेश चड्ढा का कहना है कि पुस्तकालय के लिए बिजली, पानी, फर्नीचर और कुछ पुस्तकों का प्रबंध विभाग द्वारा किया जा चुका है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्थानीय जनता स्वेच्छा से पुस्तकालय के संचालन हेतु एक सप्ताह के भीतर BDO कार्यालय में अपना आवेदन दे सकते हैं। BDO बबनेश चड्ढा ने पुस्तकालय के लिए नई या पुरानी पुस्तकें, स्टेशनरी इत्यादि स्वेच्छा से दान करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि पुस्तकालय के संचालन के लिए नियम व शर्तें BDO कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। पुस्तकालय संचालन में किसी भी प्रकार के अवरोध अथवा शिकायत होने की दशा में संचालक को हटाने का पूर्ण अधिकार BDO के पास होगा। आवेदन प्राप्त होने के पश्चात ब्लॉक स्तर पर गठित समिति के द्वारा पुस्तकालय के संचालन हेतु आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
लखनऊ। यूपी में सातवें चरण के मतदान से 24 घंटे पहले बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया, जिसके बाद से प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। वहीं सातवें चरण के मतदान के बीच मयंक ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी में परिवारवाद का पैमाना एक छलावा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में परिवारवाद की अलग ही परिभाषा है। इस पार्टी में राजनाथ सिंह के बेटे को टिकट मिल सकता है। फागू चौहान के बेटे को टिकट मिल सकता है लेकिन रीता बहुगुणा जोशी के बेटे को नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा सपा सबसे प्रोगे्रसिव पार्टी है। बता दें कि 22 फरवरी को मयंक जोशी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। तब सोशल मीडिया पर अखिलेश ने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात का नाम दिया था, लेकिन तभी से मयंक के सपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे।
मयंक के सपा में शामिल होने पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं और उनको पूरा सम्मान मिला। विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़वाया। अगर मयंक जोशी सुशासन को छोड़कर कुशासन में जाना चाहते हैं, तो ये उनका अपना फैसला है। मयंक ने ये भी दावा किया कि उनकी मां 73 साल की हो चुकी हैं और उन्होंने लगभग राजनीति से संन्यास ले लिया है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी मां ने कई बार कहा भी है कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी। राजनीति से संन्यास लेने के बाद वो किताबें और संस्मरण लिखेंगी। मयंक ने आगे कहा कि ऐसा होता है कि एक ही परिवार के लोग एक पार्टी में हों और उसी परिवार के कुछ लोग दूसरी पार्टी में। इससे पहले कई बार रीता बहुगुणा जोशी बेटे मयंक को पार्टी से टिकट दिलाने की कोशिश कर चुकी हैं, उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मयंक को लखनऊ की कैंट सीट से टिकट मिल जाता है, तो वो सांसद पद छोड़ देंगी।
बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के मीडिया प्रभारी अभिषेक शुक्ला ने बताया कि सांसद त्रिपुरा में आयोजित संसदीय भाषा उप-समिति बैठक में भाग लेने गई हैं। उन्होंने कहा बेटे मयंक ने सपा क्यों ज्वाइन की उस बारे में मैं भी कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। मेरा स्टैंड पहले से ही क्लियर है। मैं भाजपा में हूं और भाजपा में ही रहूंगी।
मयंक जोशी ने बीजेपी हमला करते हुए कहा मैंने 13 साल भाजपा में लगाएं हैं लेकिन पार्टी ने कुछ नहीं दिया। अच्छा हुआ पार्टी ने मुझे टिकट नहीं दिया। अब मैं संतुष्ट हूं और मुझे लगता है कि समाजवादी पार्टी में युवाओं का भविष्य है और वह पार्टी सबसे प्रोग्रेसिव पार्टी है इसलिए मैं समाजवादी पार्टी में आकर खुश हूं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान में चुनाव प्रचार की समाप्ति से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। ओमप्रकाश राजभर ने अपने को भगवान का बिरादर होने का दावा किया है। राजभर ने सैदपुर की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह हनुमान जी के बिरादर हैं। जैसे हनुमान ने अशोक वाटिका उजाड़ी थी, वैसे ही उन्होंने बीजेपी की अशोक वाटिका उजाड़ दी और स्वामी प्रसाद मौर्य दारा सिंह चौहान को अपने साथ ले आए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की लंका जल रही है। राजभर ने दावा किया कि इस चुनाव में गाजीपुर, बलिया, मऊ में बीजेपी का खाता तक नहीं खुलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के रोड शो में बनारस के लोगों ने शिरकत की। वहीं पीएम मोदी की रोड शो के लिए गुजरात, हरियाणा और अन्य जगहों से लोग लाए गए थे।
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि यूपी में उपेक्षित लोग प्रदेश की तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि यूपी के नौ जिलों की 54 सीटों पर अंतिम चरण में आज हो रहे मतदान में गरीबी और बेरोजगारी के सताए हुए उपेक्षित लोग अपने वोट की ताकत से अपनी और प्रदेश की तकदीर बदल सकते हैं। इसके लिए बीएसपी की सरकार बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह जग जाहिर है कि विरोधी पार्टियों के लुभावने वादे वादा खिलाफी साबित हुए हैं। इनकी सरकारों में यूपी के लोगों की हालत बिगड़ती चली गई। इसलिए अब इनके बहकावे में नहीं आना ही होशियारी है। विरोधी पार्टियों ने धनबल सहित सभी हथकंडों को अपनाकर यूपी के चुनाव को अपने पक्ष में करने का खूब जतन किया, लेकिन महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर जनता डटी है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की 10 मार्च को होने वाली मतगणना को लेकर समाजवादी पार्टी चौकस हो गई है। पार्टी ने मतगणना स्थल पर कानूनी सलाह के लिए 2-2 वकीलों को तैनात करने का फैसला लिया है। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने सभी जिला और महानगर अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं। पार्टी के मुताबिक मतगणना के दौरान किसी कानूनी परामर्श के लिए वकील उपलब्ध रहेंगे। सपा के सभी जिला और महानगर अध्यक्षों को 9 मार्च तक अधिवक्ताओं के नाम देने के लिए कहा है। सूबे के पार्टी अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि विधानसभा चुनाव की मतगणना हर विधानसभा में 10 मार्च को होनी है।
मतगणना के समय हर काउंटिंग बूथ पर दो दो अधिववक्ता कानूनी सलाह के लिए रहने चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आप उनका उपयोग कर सकें। इसलिए दोनों अधिवक्ताओं के नाम और मोबाइल नंबर पार्टी प्रदेश कार्यालय में 9 मार्च तक जरूर उपलब्ध कराने का कष्ट करें। बता दें कि यूपी में के सभी 75 जिलों की सभी 403 विधानसभाओं में वोटो की गिनती 10 मार्च को होने जा रही है। राज्य में 7 चरणों में मतदान होना तय हुआ था, जिसमें आज आखिरी चरण के लिए वोट डाले जा रहे हैं।
| लखनऊ। यूपी में सातवें चरण के मतदान से चौबीस घंटाटे पहले बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया, जिसके बाद से प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। वहीं सातवें चरण के मतदान के बीच मयंक ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी में परिवारवाद का पैमाना एक छलावा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में परिवारवाद की अलग ही परिभाषा है। इस पार्टी में राजनाथ सिंह के बेटे को टिकट मिल सकता है। फागू चौहान के बेटे को टिकट मिल सकता है लेकिन रीता बहुगुणा जोशी के बेटे को नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा सपा सबसे प्रोगे्रसिव पार्टी है। बता दें कि बाईस फरवरी को मयंक जोशी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। तब सोशल मीडिया पर अखिलेश ने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात का नाम दिया था, लेकिन तभी से मयंक के सपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे। मयंक के सपा में शामिल होने पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं और उनको पूरा सम्मान मिला। विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़वाया। अगर मयंक जोशी सुशासन को छोड़कर कुशासन में जाना चाहते हैं, तो ये उनका अपना फैसला है। मयंक ने ये भी दावा किया कि उनकी मां तिहत्तर साल की हो चुकी हैं और उन्होंने लगभग राजनीति से संन्यास ले लिया है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी मां ने कई बार कहा भी है कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी। राजनीति से संन्यास लेने के बाद वो किताबें और संस्मरण लिखेंगी। मयंक ने आगे कहा कि ऐसा होता है कि एक ही परिवार के लोग एक पार्टी में हों और उसी परिवार के कुछ लोग दूसरी पार्टी में। इससे पहले कई बार रीता बहुगुणा जोशी बेटे मयंक को पार्टी से टिकट दिलाने की कोशिश कर चुकी हैं, उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मयंक को लखनऊ की कैंट सीट से टिकट मिल जाता है, तो वो सांसद पद छोड़ देंगी। बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के मीडिया प्रभारी अभिषेक शुक्ला ने बताया कि सांसद त्रिपुरा में आयोजित संसदीय भाषा उप-समिति बैठक में भाग लेने गई हैं। उन्होंने कहा बेटे मयंक ने सपा क्यों ज्वाइन की उस बारे में मैं भी कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। मेरा स्टैंड पहले से ही क्लियर है। मैं भाजपा में हूं और भाजपा में ही रहूंगी। मयंक जोशी ने बीजेपी हमला करते हुए कहा मैंने तेरह साल भाजपा में लगाएं हैं लेकिन पार्टी ने कुछ नहीं दिया। अच्छा हुआ पार्टी ने मुझे टिकट नहीं दिया। अब मैं संतुष्ट हूं और मुझे लगता है कि समाजवादी पार्टी में युवाओं का भविष्य है और वह पार्टी सबसे प्रोग्रेसिव पार्टी है इसलिए मैं समाजवादी पार्टी में आकर खुश हूं। लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान में चुनाव प्रचार की समाप्ति से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। ओमप्रकाश राजभर ने अपने को भगवान का बिरादर होने का दावा किया है। राजभर ने सैदपुर की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह हनुमान जी के बिरादर हैं। जैसे हनुमान ने अशोक वाटिका उजाड़ी थी, वैसे ही उन्होंने बीजेपी की अशोक वाटिका उजाड़ दी और स्वामी प्रसाद मौर्य दारा सिंह चौहान को अपने साथ ले आए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की लंका जल रही है। राजभर ने दावा किया कि इस चुनाव में गाजीपुर, बलिया, मऊ में बीजेपी का खाता तक नहीं खुलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के रोड शो में बनारस के लोगों ने शिरकत की। वहीं पीएम मोदी की रोड शो के लिए गुजरात, हरियाणा और अन्य जगहों से लोग लाए गए थे। लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि यूपी में उपेक्षित लोग प्रदेश की तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि यूपी के नौ जिलों की चौवन सीटों पर अंतिम चरण में आज हो रहे मतदान में गरीबी और बेरोजगारी के सताए हुए उपेक्षित लोग अपने वोट की ताकत से अपनी और प्रदेश की तकदीर बदल सकते हैं। इसके लिए बीएसपी की सरकार बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह जग जाहिर है कि विरोधी पार्टियों के लुभावने वादे वादा खिलाफी साबित हुए हैं। इनकी सरकारों में यूपी के लोगों की हालत बिगड़ती चली गई। इसलिए अब इनके बहकावे में नहीं आना ही होशियारी है। विरोधी पार्टियों ने धनबल सहित सभी हथकंडों को अपनाकर यूपी के चुनाव को अपने पक्ष में करने का खूब जतन किया, लेकिन महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर जनता डटी है। लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की दस मार्च को होने वाली मतगणना को लेकर समाजवादी पार्टी चौकस हो गई है। पार्टी ने मतगणना स्थल पर कानूनी सलाह के लिए दो-दो वकीलों को तैनात करने का फैसला लिया है। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने सभी जिला और महानगर अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं। पार्टी के मुताबिक मतगणना के दौरान किसी कानूनी परामर्श के लिए वकील उपलब्ध रहेंगे। सपा के सभी जिला और महानगर अध्यक्षों को नौ मार्च तक अधिवक्ताओं के नाम देने के लिए कहा है। सूबे के पार्टी अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि विधानसभा चुनाव की मतगणना हर विधानसभा में दस मार्च को होनी है। मतगणना के समय हर काउंटिंग बूथ पर दो दो अधिववक्ता कानूनी सलाह के लिए रहने चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आप उनका उपयोग कर सकें। इसलिए दोनों अधिवक्ताओं के नाम और मोबाइल नंबर पार्टी प्रदेश कार्यालय में नौ मार्च तक जरूर उपलब्ध कराने का कष्ट करें। बता दें कि यूपी में के सभी पचहत्तर जिलों की सभी चार सौ तीन विधानसभाओं में वोटो की गिनती दस मार्च को होने जा रही है। राज्य में सात चरणों में मतदान होना तय हुआ था, जिसमें आज आखिरी चरण के लिए वोट डाले जा रहे हैं। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
इस आर्टिकल में हम आपको किफायती कीमत में मिल रहे 5 बेहतरीन Bluetooth Speaker की जानकारी दे रहे हैं। इन स्पीकर्स को एक बार चार्ज करके लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह वायरलेस कनेक्टिविटी वाला Portable Mini Speaker है। ये ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के साथ आ रहा है। इसमें आपको वॉइस असिस्टेंट सपोर्ट भी मिल रहा है। यह साइज में साइज में भी काफी कॉम्पैक्ट है।
यह बेस्ट क्वालिटी वाला 16 वाट का दमदार ब्लूटूथ स्पीकर है। इसमें टाइप सी चार्जिंग पोर्ट मिलता है। यह रिचार्जेबल बैटरी के साथ आ रहा है। इसे आप इसे घर के बाहर भी बिना किसी दिक्कत के इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह 36 घंटे तक लंबा बैकअप देने वाला 5 वाट का बेहतरीन ब्लूटूथ स्पीकर है। इसे आप ट्रैवेल करते वक्त भी अपने साथ कैरी कर सकते हैं। इसमें ट्रू वायरलेस टेक्नोलॉजी और फोन कॉल पर बात करने के लिए इनबिल्ट माइक भी दिया गया है।
यह स्टीरियो साउंड क्वालिटी के साथ आने वाला boAt Bluetooth Speaker है। ये पोर्टेबल डिजाइन में आ रहा है और कहीं भी कैरी करने के लिए सूटेबल है। ये वॉटर और स्प्लैश रजिस्टेंट है।
ये शानदार वायरलेस स्पीकर साउंड बार की डिजाइन में आ रहा है। इसमें आपको रिचार्जेबल बैटरी मिल रही है, जो 10 घंटे तक का बैकअप देती है। इसे आप घर पर मौजूद मोबाइल और स्मार्ट टीवी से ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट कर सकते हैं।
- किफायती कीमत वाले ब्लूटूथ स्पीकर के शुरुआती प्राइज रेंज क्या है?
ऑनलाइन आपको मात्र ₹599 की शुरुआती कीमत से पोर्टेबल डिजाइन और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी वाले स्पीकर्स मिलने लग जाते हैं। क्वालिटी के हिसाब से इनकी कीमत बढ़ती जाती है।
- क्या सस्ते स्पीकर अच्छी साउंड क्वालिटी दे सकते हैं?
जी हां, बेहतर ड्राइवर और ज्यादा पावर के साथ आने वाले सस्ते ब्लूटूथ स्पीकर भी जबरदस्त साउंड क्वालिटी देते हैं। हालांकि महंगी प्राइस वाले स्पीकर्स की साउंड क्वालिटी हमेशा इनसे बेहतर होती है।
- पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर के फायदे क्या हैं?
पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर को कहीं भी आसानी से कैरी किया जा सकता है। इनमें रिचार्जेबल बैटरी होती है और यह बाहर भी गाना बजाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें हैंड्स फ्री कॉलिंग और जबरदस्त साउंड क्वालिटी मिलती है।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
| इस आर्टिकल में हम आपको किफायती कीमत में मिल रहे पाँच बेहतरीन Bluetooth Speaker की जानकारी दे रहे हैं। इन स्पीकर्स को एक बार चार्ज करके लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यह वायरलेस कनेक्टिविटी वाला Portable Mini Speaker है। ये ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के साथ आ रहा है। इसमें आपको वॉइस असिस्टेंट सपोर्ट भी मिल रहा है। यह साइज में साइज में भी काफी कॉम्पैक्ट है। यह बेस्ट क्वालिटी वाला सोलह वाट का दमदार ब्लूटूथ स्पीकर है। इसमें टाइप सी चार्जिंग पोर्ट मिलता है। यह रिचार्जेबल बैटरी के साथ आ रहा है। इसे आप इसे घर के बाहर भी बिना किसी दिक्कत के इस्तेमाल कर सकते हैं। यह छत्तीस घंटाटे तक लंबा बैकअप देने वाला पाँच वाट का बेहतरीन ब्लूटूथ स्पीकर है। इसे आप ट्रैवेल करते वक्त भी अपने साथ कैरी कर सकते हैं। इसमें ट्रू वायरलेस टेक्नोलॉजी और फोन कॉल पर बात करने के लिए इनबिल्ट माइक भी दिया गया है। यह स्टीरियो साउंड क्वालिटी के साथ आने वाला boAt Bluetooth Speaker है। ये पोर्टेबल डिजाइन में आ रहा है और कहीं भी कैरी करने के लिए सूटेबल है। ये वॉटर और स्प्लैश रजिस्टेंट है। ये शानदार वायरलेस स्पीकर साउंड बार की डिजाइन में आ रहा है। इसमें आपको रिचार्जेबल बैटरी मिल रही है, जो दस घंटाटे तक का बैकअप देती है। इसे आप घर पर मौजूद मोबाइल और स्मार्ट टीवी से ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट कर सकते हैं। - किफायती कीमत वाले ब्लूटूथ स्पीकर के शुरुआती प्राइज रेंज क्या है? ऑनलाइन आपको मात्र पाँच सौ निन्यानवे रुपया की शुरुआती कीमत से पोर्टेबल डिजाइन और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी वाले स्पीकर्स मिलने लग जाते हैं। क्वालिटी के हिसाब से इनकी कीमत बढ़ती जाती है। - क्या सस्ते स्पीकर अच्छी साउंड क्वालिटी दे सकते हैं? जी हां, बेहतर ड्राइवर और ज्यादा पावर के साथ आने वाले सस्ते ब्लूटूथ स्पीकर भी जबरदस्त साउंड क्वालिटी देते हैं। हालांकि महंगी प्राइस वाले स्पीकर्स की साउंड क्वालिटी हमेशा इनसे बेहतर होती है। - पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर के फायदे क्या हैं? पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर को कहीं भी आसानी से कैरी किया जा सकता है। इनमें रिचार्जेबल बैटरी होती है और यह बाहर भी गाना बजाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें हैंड्स फ्री कॉलिंग और जबरदस्त साउंड क्वालिटी मिलती है। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं। |
सैलेश कोलानु अपनी दूसरी फिल्म बॉलीवुड में डायरेक्ट करने जा रहे है, जो की उनकी ही पहली फिल्म की रीमेक है, जिसमे राजकुमार राव नज़र आयेंगे। हिंदी सिनेमा में सैलेश का इसी रीमेक फिल्म के साथ डेब्यू भी होने जा रहा है।
Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
| सैलेश कोलानु अपनी दूसरी फिल्म बॉलीवुड में डायरेक्ट करने जा रहे है, जो की उनकी ही पहली फिल्म की रीमेक है, जिसमे राजकुमार राव नज़र आयेंगे। हिंदी सिनेमा में सैलेश का इसी रीमेक फिल्म के साथ डेब्यू भी होने जा रहा है। Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी! |
पति -- ईश्वर करे, वह मिल जाए तो मैं दो पैसे का प्रसाद चढ़ाऊँ ।
वकील - "तुम्हारी उंगली रेल के किवाड़ से दब कर कट गई और इसके लिए तुम पचास हज़ार रुपये का हरजाने का दावा रेलवे वालों पर करना चाहती हो । मगर यह किस तरह साबित करोगी कि तुम्हारी उँगली की मालियत सचमुच पचास हजार रुपये की थी ?"
मुवक्किला - "अरे ! इसी उँगली पर तो में अपने पति को नचाया करती थी ।"
एक बहुत पढ़े लिखे आदमी का विवाह एक ऐसी लड़की से हुआ जो पढ़ने लिखने के अलावा कोई दूसरा काम ही नहीं जानती थी ।
एक दिन पति महाशय ने अपनी पत्नी से कहा- "तुम्हें खाना बनाना बिलकुल नहीं आता, औरतों के लिए यह बड़ी लज्जा की बात है। औरतों को खाना बनाना तो अवश्य ही आना चाहिए।"
पत्नी- "मैंने पढ़ने लिखने के अलावा और कुछ नहीं जाना । भोजन पकाने का काम नौकर करते थे, मैं खाना खाने के अलावा और किसी समय रसोई में नहीं जाती थी, इसलिए पकते हुए भी नहीं देखा । परन्तु ज़रूरत पड़ने पर सब कुछ किया जा सकता है । "
पति - "बिना सीखे, बिना देखे, कोई कुछ नहीं कर सकता । " पत्नी - "यदि में भोजन बनाकर दिखा दूं तो ?"
पति- "यदि तुम बनाकर दिखा दो तो मै मान लूंगा । श्राज शाम को तुम्हीं बनाना ।"
पति महाशय यह कहकर कहीं चले गये। कुछ देर में जब लौटे तो देखा कि देवी जी एक पुस्तक खोले बैठी है और किसी विचार में डूबी हुई हैं । पति महाशय यह जान कर कि देवी जी कुछ सोच रही हैं, बोले- "क्यों, क्या सोच रही हो ? "
देवी जी ने कहा - "मैं ज़रा पाक-शास्त्र' देख रही थी। इसमें लिखा है कि किसी भी तरकारी को काटने के पश्चात् धो लेना चाहिए, पर यह नहीं बताया कि खाली पानी से धोना चाहिए या साबुन लगा कर ।"
मियाँ मिट्ठू - प्रौरतों को कोई अगर अपने कब्जे में रखना चाहे, तो मुझसे सीखे । मुझे एक ऐसा मंत्र याद है कि जिसके जपते ही कैसी ही लड़ाका औरत | पति -- ईश्वर करे, वह मिल जाए तो मैं दो पैसे का प्रसाद चढ़ाऊँ । वकील - "तुम्हारी उंगली रेल के किवाड़ से दब कर कट गई और इसके लिए तुम पचास हज़ार रुपये का हरजाने का दावा रेलवे वालों पर करना चाहती हो । मगर यह किस तरह साबित करोगी कि तुम्हारी उँगली की मालियत सचमुच पचास हजार रुपये की थी ?" मुवक्किला - "अरे ! इसी उँगली पर तो में अपने पति को नचाया करती थी ।" एक बहुत पढ़े लिखे आदमी का विवाह एक ऐसी लड़की से हुआ जो पढ़ने लिखने के अलावा कोई दूसरा काम ही नहीं जानती थी । एक दिन पति महाशय ने अपनी पत्नी से कहा- "तुम्हें खाना बनाना बिलकुल नहीं आता, औरतों के लिए यह बड़ी लज्जा की बात है। औरतों को खाना बनाना तो अवश्य ही आना चाहिए।" पत्नी- "मैंने पढ़ने लिखने के अलावा और कुछ नहीं जाना । भोजन पकाने का काम नौकर करते थे, मैं खाना खाने के अलावा और किसी समय रसोई में नहीं जाती थी, इसलिए पकते हुए भी नहीं देखा । परन्तु ज़रूरत पड़ने पर सब कुछ किया जा सकता है । " पति - "बिना सीखे, बिना देखे, कोई कुछ नहीं कर सकता । " पत्नी - "यदि में भोजन बनाकर दिखा दूं तो ?" पति- "यदि तुम बनाकर दिखा दो तो मै मान लूंगा । श्राज शाम को तुम्हीं बनाना ।" पति महाशय यह कहकर कहीं चले गये। कुछ देर में जब लौटे तो देखा कि देवी जी एक पुस्तक खोले बैठी है और किसी विचार में डूबी हुई हैं । पति महाशय यह जान कर कि देवी जी कुछ सोच रही हैं, बोले- "क्यों, क्या सोच रही हो ? " देवी जी ने कहा - "मैं ज़रा पाक-शास्त्र' देख रही थी। इसमें लिखा है कि किसी भी तरकारी को काटने के पश्चात् धो लेना चाहिए, पर यह नहीं बताया कि खाली पानी से धोना चाहिए या साबुन लगा कर ।" मियाँ मिट्ठू - प्रौरतों को कोई अगर अपने कब्जे में रखना चाहे, तो मुझसे सीखे । मुझे एक ऐसा मंत्र याद है कि जिसके जपते ही कैसी ही लड़ाका औरत |
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को प्रदेश के विकास का नया मॉडल विकसित करना चाहिए। हाइड्रो पावर क्रेज मॉडल, जो कि औद्योगिक प्रदूषण फैलाता है, के लिए बिना दिमाग की तलाश की जो हालिया परिपाटी है, उसे फेंक देने की जरूरत है। हिमाचल के मौसम, वातावरण व संस्कृति के संरक्षण के लिए जो विश्वव्यापी चिंता उभरी है, उसे संबोधित करने के लिए ऐसा करना बेहद जरूरी हो गया है। हिमाचली पर्वतों व बर्फ से संपन्न कुदरती नजारों को कायम रखना आज बेहद आवश्यक हो चुका है। प्रकृति ने हमें धूल रहित वातावरण दिया है, जिसे जॉब पैदा करने के नाम पर क्षति नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। पैसा कमाने के लिए सीमेंट प्लांट लगाने के नाम पर पर्यावरणीय प्रदूषण के आगे किसी सूरत में समर्पण भी नहीं होना चाहिए।
सरकार ने विकास के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करने को मापदंड बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की है। उसने संबंधित विधायकों से सलाह-मशविरा भी किया है, परंतु यह केवल लोकतंत्र का सलाहकारी पहलू है। विकास के लिए चेतनायुक्त नियोजन की जरूरत होती है, जो कि राज्य की शक्ति व कमजोरी पर आधारित होती है। विकास की योजना के लिए विशेषज्ञ अध्ययन व चेतनायुक्त होकर रणनीति का निर्माण भी जरूरी है। इसके लिए एक विशेषज्ञ कमेटी की भी जरूरत है, जो विकास चार्टर का प्रारूप प्रस्तावित करे। मैं ऐसे निकाय के समक्ष विचार के लिए छह स्तंभों वाला विकास दृष्टिकोण रखना चाहूंगा। हमें अपने विचारों में बदलाव लाते हुए परंपरागत नजरिए को बदलना होगा। हमें परंपरागत फसलों को उगाना बंद कर देना चाहिए तथा उच्च दामों वाली फसलों की बिजाई करनी चाहिए।
तीन कारणों के चलते हम गेहूं, मक्की इत्यादि परंपरागत फसलों को उगाने के कारण कृषि क्षेत्र में अवनति की ओर जा रहे हैं। प्रथम, हमारे पास पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं है तथा जलवायु परिवर्तन के इस दौर में वर्षा पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके कारण हमारी फसलें अकसर सूख जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण खेती योग्य जमीन की उपलब्धता भी कम है। दूसरे, प्रदेश में बंदरों का आतंक निरंतर जारी है, जो कि सभी फसलों व फलों को नष्ट कर रहे हैं। सरकार इस समस्या से निपटने को अब तक कोई ठोस योजना नहीं बना पाई है। अन्य जंगली जानवर भी फसलों को नष्ट करते हैं। तीसरे, लैंटाना घास व अन्य खरपतवार, जो फसलों के लिए हानिकारक हैं, को नियंत्रित नहीं किया जा सका है। इसलिए राज्य को ऐसी फसलों को बढ़ावा देना चाहिए, जो इन तीन कारकों के प्रभाव से मुक्त हों। बेशक ऊंचे इलाकों में पैदा होने वाला सेब सुरक्षित है, लेकिन उसे भी सुरक्षा की जरूरत है।
जहां पर सेब पट्टी नहीं है, उन क्षेत्रों में भी नकदी फसलों की जरूरत है। किसानों को ऐेसी फसलों का उत्पादन करना चाहिए जो उन्हें उच्च दाम दिलाती हों तथा जो यहां वर्णित की गई सिरदर्दी का भी इलाज करती हों। मिसाल के तौर पर हल्दी, अदरक, अखरोट, आंवला व इसी तरह की अन्य फसलें उगाई जा सकती हैं। ये फसलें आपदाओं से प्रभावित भी नहीं होतीं, साथ ही इनके दाम भी अच्छे मिल जाते हैं। कृषि व बागबानी विभाग ऐसी तालिका बना सकते हैं तथा किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं कि कैसे इन फसलों को उगाया जाए। साथ ही फसलों की विपणन व्यवस्था भी उन्हें सिखाई जा सकती है। कृषि क्षेत्र के बदले परिप्रेक्ष्य में जैविक खेती भविष्य की फसल रणनीति होनी चाहिए।
विकास के नए दृष्टिकोण का दूसरा स्तंभ यह है कि हाई एंड टूरिज्म के पक्ष में ट्रक टूरिज्म व धार्मिक पर्यटन पर फोकस करना छोड़ देना चाहिए। प्रदेश की ओर पर्यटकों को लुभाने के लिए पैकेज व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए, ताकि इस प्रदेश को विश्व मानचित्र पर उभारा जा सके। पर्यटन से जुड़ी योजनाएं बनाते समय सृजनात्मकता व कल्पनात्मकता को तरजीह दी जानी चाहिए। इससे प्रदेश को मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी। मैंने कई ऐसे देशों का अध्ययन किया, जिन्होंने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास किया है। पर्यटन पैकेज के तहत हमने थाईलैंड की कावाई नदी पर बने पुल का भ्रमण किया। यह जगह द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी पुरानी हालीवुड फिल्म का एक आकर्षक स्थल है, जहां इसे फिल्मांकित किया गया था। हम फाइव स्टार होटल में ठहरे तथा इस स्थल तक हम नौका में गए। रास्ते में हमने देखा कि मिश्री बनाने के लिए लोग सीधे पेड़ों से चीनी निकाल रहे थे। इसी तरह मैं फ्रांस के दक्षिण में स्थित एक प्रसिद्ध स्थल पर भी गया। वहां मैं यह देख कर हैरान रह गया कि गांवों पर बने पर्यटन पैकेज बेचे जा रहे थे। हमें फाइव स्टार होटल से पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक गांव में ले जाया गया। यह एक शांत गांव के अलावा कुछ भी नहीं था। इसी ओर जाते समय हमें एक परफ्यूम फैक्टरी भी दिखाई गई। हिमाचल में इतना कुछ है, लेकिन हम इसकी मार्केटिंग नहीं करते तथा इसे टूअर पैकेज के रूप में बेचते भी नहीं हैं। फाइव स्टार होटल्स से जुड़ा पर्यटन हमारे पास नहीं है। हमारे पास सड़कें भी नहीं हैं तथा कई आकर्षक स्थलों तक अभी तक पहुंच नहीं बन पाई है। मैंने मसरूर मंदिर की खोज की तथा इसके इतिहास पर लिखा। मैंने इसके लिए अनुसंधान किया। पुस्तक का नाम है-कारनेशन ऑफ शिवा ः रिडिस्कवरिंग मसरूर टैंपल। यह स्थल विश्व धरोहर स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था, लेकिन अब तक इसकी उपेक्षा ही हुई है। जब मैंने इस विषय पर किताब लिखी, तो कई पाठकों का ध्यान इस ओर गया तथा सरकार ने मुझे पे्रजेंटेशन बनाने को कहा। धर्मशाला में मैंने मंदिर का स्वरूप भेंट किया। इसकी खासियत यह है कि इसमें भगवान शिव का राज्याभिषेक दिखाया गया है, जबकि अन्य देवताओं के विपरीत अब तक उन्हें इस रूप में दिखाया नहीं गया था।
यह एक अद्वितीय मंदिर है, पर इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस मंदिर के विकास में रुचि दिखाई थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद इसकी ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। प्रेम कुमार धूमल ने इस मंदिर के प्रोजेक्ट को विकसित करना तथा इसे प्रचारित करना शुरू किया था। इस मंदिर के आसपास पौंग बांध के पक्षियों का डेरा इस स्थल को आकर्षक व एक बड़ा पर्यटक स्थल बनाता है, लेकिन इसे विकसित करने की जरूरत है। दुखद पहलू यह है कि हमारे पास यहां नजदीक में कोई कैफेटेरिया व शौचालय तक नहीं है। प्रदेश में कई ऐसे स्थल हैं, जिन्हें पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किया जा सकता है, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया अन्यथा कई रोजगार पैदा हो सकते थे और राजस्व भी कमाया जा सकता था।
सरकार को बहुत सारे पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं है, बस उसे कुछ सृजनात्मक सोच का परिचय देना होगा। हिमाचल में इतना कुछ होते हुए भी हम पर्यटन का विकास नहीं कर पाए, जबकि हरियाणा ने न कुछ होते हुए भी रोड साइड पर्यटन को पर्याप्त रूप से विकसित कर लिया। आज जब एक ओर विश्व में प्रदूषण बढ़ रहा है, तो प्रदूषण रहित हिमाचल में वातावरण पर आधारित पैकेज बना कर उन्हें आसानी से बेचा जा सकता है। इससे हमारा पर्यटन समृद्ध होगा।
| हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को प्रदेश के विकास का नया मॉडल विकसित करना चाहिए। हाइड्रो पावर क्रेज मॉडल, जो कि औद्योगिक प्रदूषण फैलाता है, के लिए बिना दिमाग की तलाश की जो हालिया परिपाटी है, उसे फेंक देने की जरूरत है। हिमाचल के मौसम, वातावरण व संस्कृति के संरक्षण के लिए जो विश्वव्यापी चिंता उभरी है, उसे संबोधित करने के लिए ऐसा करना बेहद जरूरी हो गया है। हिमाचली पर्वतों व बर्फ से संपन्न कुदरती नजारों को कायम रखना आज बेहद आवश्यक हो चुका है। प्रकृति ने हमें धूल रहित वातावरण दिया है, जिसे जॉब पैदा करने के नाम पर क्षति नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। पैसा कमाने के लिए सीमेंट प्लांट लगाने के नाम पर पर्यावरणीय प्रदूषण के आगे किसी सूरत में समर्पण भी नहीं होना चाहिए। सरकार ने विकास के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करने को मापदंड बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की है। उसने संबंधित विधायकों से सलाह-मशविरा भी किया है, परंतु यह केवल लोकतंत्र का सलाहकारी पहलू है। विकास के लिए चेतनायुक्त नियोजन की जरूरत होती है, जो कि राज्य की शक्ति व कमजोरी पर आधारित होती है। विकास की योजना के लिए विशेषज्ञ अध्ययन व चेतनायुक्त होकर रणनीति का निर्माण भी जरूरी है। इसके लिए एक विशेषज्ञ कमेटी की भी जरूरत है, जो विकास चार्टर का प्रारूप प्रस्तावित करे। मैं ऐसे निकाय के समक्ष विचार के लिए छह स्तंभों वाला विकास दृष्टिकोण रखना चाहूंगा। हमें अपने विचारों में बदलाव लाते हुए परंपरागत नजरिए को बदलना होगा। हमें परंपरागत फसलों को उगाना बंद कर देना चाहिए तथा उच्च दामों वाली फसलों की बिजाई करनी चाहिए। तीन कारणों के चलते हम गेहूं, मक्की इत्यादि परंपरागत फसलों को उगाने के कारण कृषि क्षेत्र में अवनति की ओर जा रहे हैं। प्रथम, हमारे पास पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं है तथा जलवायु परिवर्तन के इस दौर में वर्षा पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके कारण हमारी फसलें अकसर सूख जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण खेती योग्य जमीन की उपलब्धता भी कम है। दूसरे, प्रदेश में बंदरों का आतंक निरंतर जारी है, जो कि सभी फसलों व फलों को नष्ट कर रहे हैं। सरकार इस समस्या से निपटने को अब तक कोई ठोस योजना नहीं बना पाई है। अन्य जंगली जानवर भी फसलों को नष्ट करते हैं। तीसरे, लैंटाना घास व अन्य खरपतवार, जो फसलों के लिए हानिकारक हैं, को नियंत्रित नहीं किया जा सका है। इसलिए राज्य को ऐसी फसलों को बढ़ावा देना चाहिए, जो इन तीन कारकों के प्रभाव से मुक्त हों। बेशक ऊंचे इलाकों में पैदा होने वाला सेब सुरक्षित है, लेकिन उसे भी सुरक्षा की जरूरत है। जहां पर सेब पट्टी नहीं है, उन क्षेत्रों में भी नकदी फसलों की जरूरत है। किसानों को ऐेसी फसलों का उत्पादन करना चाहिए जो उन्हें उच्च दाम दिलाती हों तथा जो यहां वर्णित की गई सिरदर्दी का भी इलाज करती हों। मिसाल के तौर पर हल्दी, अदरक, अखरोट, आंवला व इसी तरह की अन्य फसलें उगाई जा सकती हैं। ये फसलें आपदाओं से प्रभावित भी नहीं होतीं, साथ ही इनके दाम भी अच्छे मिल जाते हैं। कृषि व बागबानी विभाग ऐसी तालिका बना सकते हैं तथा किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं कि कैसे इन फसलों को उगाया जाए। साथ ही फसलों की विपणन व्यवस्था भी उन्हें सिखाई जा सकती है। कृषि क्षेत्र के बदले परिप्रेक्ष्य में जैविक खेती भविष्य की फसल रणनीति होनी चाहिए। विकास के नए दृष्टिकोण का दूसरा स्तंभ यह है कि हाई एंड टूरिज्म के पक्ष में ट्रक टूरिज्म व धार्मिक पर्यटन पर फोकस करना छोड़ देना चाहिए। प्रदेश की ओर पर्यटकों को लुभाने के लिए पैकेज व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए, ताकि इस प्रदेश को विश्व मानचित्र पर उभारा जा सके। पर्यटन से जुड़ी योजनाएं बनाते समय सृजनात्मकता व कल्पनात्मकता को तरजीह दी जानी चाहिए। इससे प्रदेश को मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी। मैंने कई ऐसे देशों का अध्ययन किया, जिन्होंने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास किया है। पर्यटन पैकेज के तहत हमने थाईलैंड की कावाई नदी पर बने पुल का भ्रमण किया। यह जगह द्वितीय विश्वयुद्ध पर बनी पुरानी हालीवुड फिल्म का एक आकर्षक स्थल है, जहां इसे फिल्मांकित किया गया था। हम फाइव स्टार होटल में ठहरे तथा इस स्थल तक हम नौका में गए। रास्ते में हमने देखा कि मिश्री बनाने के लिए लोग सीधे पेड़ों से चीनी निकाल रहे थे। इसी तरह मैं फ्रांस के दक्षिण में स्थित एक प्रसिद्ध स्थल पर भी गया। वहां मैं यह देख कर हैरान रह गया कि गांवों पर बने पर्यटन पैकेज बेचे जा रहे थे। हमें फाइव स्टार होटल से पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक गांव में ले जाया गया। यह एक शांत गांव के अलावा कुछ भी नहीं था। इसी ओर जाते समय हमें एक परफ्यूम फैक्टरी भी दिखाई गई। हिमाचल में इतना कुछ है, लेकिन हम इसकी मार्केटिंग नहीं करते तथा इसे टूअर पैकेज के रूप में बेचते भी नहीं हैं। फाइव स्टार होटल्स से जुड़ा पर्यटन हमारे पास नहीं है। हमारे पास सड़कें भी नहीं हैं तथा कई आकर्षक स्थलों तक अभी तक पहुंच नहीं बन पाई है। मैंने मसरूर मंदिर की खोज की तथा इसके इतिहास पर लिखा। मैंने इसके लिए अनुसंधान किया। पुस्तक का नाम है-कारनेशन ऑफ शिवा ः रिडिस्कवरिंग मसरूर टैंपल। यह स्थल विश्व धरोहर स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था, लेकिन अब तक इसकी उपेक्षा ही हुई है। जब मैंने इस विषय पर किताब लिखी, तो कई पाठकों का ध्यान इस ओर गया तथा सरकार ने मुझे पे्रजेंटेशन बनाने को कहा। धर्मशाला में मैंने मंदिर का स्वरूप भेंट किया। इसकी खासियत यह है कि इसमें भगवान शिव का राज्याभिषेक दिखाया गया है, जबकि अन्य देवताओं के विपरीत अब तक उन्हें इस रूप में दिखाया नहीं गया था। यह एक अद्वितीय मंदिर है, पर इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस मंदिर के विकास में रुचि दिखाई थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद इसकी ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। प्रेम कुमार धूमल ने इस मंदिर के प्रोजेक्ट को विकसित करना तथा इसे प्रचारित करना शुरू किया था। इस मंदिर के आसपास पौंग बांध के पक्षियों का डेरा इस स्थल को आकर्षक व एक बड़ा पर्यटक स्थल बनाता है, लेकिन इसे विकसित करने की जरूरत है। दुखद पहलू यह है कि हमारे पास यहां नजदीक में कोई कैफेटेरिया व शौचालय तक नहीं है। प्रदेश में कई ऐसे स्थल हैं, जिन्हें पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किया जा सकता है, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया अन्यथा कई रोजगार पैदा हो सकते थे और राजस्व भी कमाया जा सकता था। सरकार को बहुत सारे पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं है, बस उसे कुछ सृजनात्मक सोच का परिचय देना होगा। हिमाचल में इतना कुछ होते हुए भी हम पर्यटन का विकास नहीं कर पाए, जबकि हरियाणा ने न कुछ होते हुए भी रोड साइड पर्यटन को पर्याप्त रूप से विकसित कर लिया। आज जब एक ओर विश्व में प्रदूषण बढ़ रहा है, तो प्रदूषण रहित हिमाचल में वातावरण पर आधारित पैकेज बना कर उन्हें आसानी से बेचा जा सकता है। इससे हमारा पर्यटन समृद्ध होगा। |
शमन मांस के थर्मल प्रसंस्करण का सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक माना जाता है। इस तरह से उत्पाद कार्सिनोजन शामिल नहीं है और अच्छी तरह से मानव शरीर द्वारा पचा पकाया। इन खाद्य पदार्थों की ऊर्जा मूल्य के लिए के रूप में, यह काफी हद तक इस्तेमाल किया मांस के प्रकार पर निर्भर करता है। इस प्रकार, प्याज और गाजर के साथ थर्मल सूअर का मांस स्टू, 235 से प्रति 100 ग्राम 350 किलो कैलोरी के लिए किया जाएगा।
प्रौद्योगिकी नीचे वर्णित के अनुसार बहुत, रसदार स्वादिष्ट और स्वस्थ मांस पता चला है। यह एक परिवार लंच या डिनर के लिए आवेदन कर सकते। और इस व्यंजन के लिए सबसे अच्छा गार्निश गोभी या ताजा सब्जियों की एक सलाद होगा। अपने परिवार के लिए पूर्व की जाँच वापस वहाँ आप सब कुछ आप अपनी उंगलियों पर की जरूरत है गाजर और प्याज के साथ एक सुगंधित सूअर का मांस स्टू कोशिश करने के लिए, सक्षम थे। इस मामले में, आप की आवश्यकता होगीः
- सुअर गूदे के 800 ग्राम।
- एक बड़ी गाजर।
- युगल प्याज बल्ब।
- 5 मटर allspice।
- परिष्कृत वनस्पति तेल के 3 बड़े चम्मच।
- नमक और मसालों।
प्याज और गाजर के साथ पोर्क स्टू तैयार करने के लिए, यह शव की एक पत्ती का उपयोग करने के लिए वांछनीय है। तब अंतिम पकवान कम पौष्टिक और अधिक निविदा बाहर हो जाएगा।
धोया और सूखे मांस अनाज भर में कट जाता है, और गर्म कड़ाही में भेजा मिटा दिया, नीचे, जिनमें से पहले से ही एक छोटे से वनस्पति तेल डाल दिया गया है। लगभग तुरंत wedges गाजर और प्याज आधा छल्ले के सिवा गयी। इन सभी कुछ नमक, मसालों के साथ और तला हुआ जोड़ने के लिए, समय-समय पर भूल नहीं है फ्राइंग पैन की सामग्री हलचल करने के लिए।
जैसे ही मांस के टुकड़े सुनहरे भूरे रंग का हो जाएगा, वे एक पैन में बदलाव और उबलते पानी इतना है कि यह पूरी तरह से सूअर का मांस और सब्जियों कवर डालना। यह सब बे लोमड़ी और मटर के साथ अनुभवी है allspice और एक प्लेट पर रखा। तैयार हो रहा है सूअर का मांस गाजर और प्याज, एक सील बंद कंटेनर में simmered साथ धीमी आंच पर पकाया। के बारे में एक घंटे के मांस के बाद पर्याप्त नरम, और यह रात के खाने को खिलाया जा सकता।
यह हार्दिक और स्वादिष्ट पकवान जश्न मनाने के अवसर के लिए एकदम सही है। यह जल्दी और ज्यादा परेशानी के बिना तैयार कर रहा है, इसलिए यह कार्य के साथ किसी भी नवागंतुक संभाल। के बाद से यह नुस्खा धीमी आंच पर पकाया प्याज और गाजर के साथ पोर्क एक विशेष उत्पाद सेट के उपयोग, पहले से शामिल है, यकीन है कि सब कुछ आप की जरूरत है कि वहाँ अपने रसोई घर में बनाते हैं। आप हाथ से यह होना चाहिए हैः
- किलो पोर्क कंधे।
- बड़े गाजर की एक जोड़ी।
- प्याज बल्ब।
- साढ़े रेड वाइन का कप।
- पानी की 100 मिलीलीटर।
- आधा चम्मच हॉप्स-suneli।
- 3 खाड़ी छोड़ देता है।
- नमक, सुगंधित मसालों और वनस्पति तेल।
धोया और obsushennoe मांस मध्यम टुकड़ों में काट और एक गहरी कच्चा लोहा पैन में भेज देते हैं। एक बार पर सूअर का मांस की सतह सुनहरे भूरे रंग का हो जाएगा, उसके, रेड वाइन और पानी डालना डेढ़ घंटे के लिए कम से कम गर्मी पर एक ढक्कन और थके हुए के साथ कवर किया।
गाजर और प्याज आधा छल्ले की एक अलग पैन तलना स्लाइस में। इस विधि मांस की एक नरम टुकड़े के साथ एक कंटेनर में फैल सब्जियों द्वारा तैयार। वहाँ भी तेज पत्ता, नमक और Khmeli suneli भेजा है। सभी अच्छी तरह से मिलाएं और पूर्ण तत्परता के लिए लाने के लिए। गाजर और प्याज, गर्म के साथ खिलाया सूअर का मांस स्टू। एक साइड डिश के रूप में अक्सर लंबे भुरभुरा चावल, मसले आलू और ताजा सब्जी सलाद का उपयोग करें।
| शमन मांस के थर्मल प्रसंस्करण का सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक माना जाता है। इस तरह से उत्पाद कार्सिनोजन शामिल नहीं है और अच्छी तरह से मानव शरीर द्वारा पचा पकाया। इन खाद्य पदार्थों की ऊर्जा मूल्य के लिए के रूप में, यह काफी हद तक इस्तेमाल किया मांस के प्रकार पर निर्भर करता है। इस प्रकार, प्याज और गाजर के साथ थर्मल सूअर का मांस स्टू, दो सौ पैंतीस से प्रति एक सौ ग्राम तीन सौ पचास किलो कैलोरी के लिए किया जाएगा। प्रौद्योगिकी नीचे वर्णित के अनुसार बहुत, रसदार स्वादिष्ट और स्वस्थ मांस पता चला है। यह एक परिवार लंच या डिनर के लिए आवेदन कर सकते। और इस व्यंजन के लिए सबसे अच्छा गार्निश गोभी या ताजा सब्जियों की एक सलाद होगा। अपने परिवार के लिए पूर्व की जाँच वापस वहाँ आप सब कुछ आप अपनी उंगलियों पर की जरूरत है गाजर और प्याज के साथ एक सुगंधित सूअर का मांस स्टू कोशिश करने के लिए, सक्षम थे। इस मामले में, आप की आवश्यकता होगीः - सुअर गूदे के आठ सौ ग्राम। - एक बड़ी गाजर। - युगल प्याज बल्ब। - पाँच मटर allspice। - परिष्कृत वनस्पति तेल के तीन बड़े चम्मच। - नमक और मसालों। प्याज और गाजर के साथ पोर्क स्टू तैयार करने के लिए, यह शव की एक पत्ती का उपयोग करने के लिए वांछनीय है। तब अंतिम पकवान कम पौष्टिक और अधिक निविदा बाहर हो जाएगा। धोया और सूखे मांस अनाज भर में कट जाता है, और गर्म कड़ाही में भेजा मिटा दिया, नीचे, जिनमें से पहले से ही एक छोटे से वनस्पति तेल डाल दिया गया है। लगभग तुरंत wedges गाजर और प्याज आधा छल्ले के सिवा गयी। इन सभी कुछ नमक, मसालों के साथ और तला हुआ जोड़ने के लिए, समय-समय पर भूल नहीं है फ्राइंग पैन की सामग्री हलचल करने के लिए। जैसे ही मांस के टुकड़े सुनहरे भूरे रंग का हो जाएगा, वे एक पैन में बदलाव और उबलते पानी इतना है कि यह पूरी तरह से सूअर का मांस और सब्जियों कवर डालना। यह सब बे लोमड़ी और मटर के साथ अनुभवी है allspice और एक प्लेट पर रखा। तैयार हो रहा है सूअर का मांस गाजर और प्याज, एक सील बंद कंटेनर में simmered साथ धीमी आंच पर पकाया। के बारे में एक घंटे के मांस के बाद पर्याप्त नरम, और यह रात के खाने को खिलाया जा सकता। यह हार्दिक और स्वादिष्ट पकवान जश्न मनाने के अवसर के लिए एकदम सही है। यह जल्दी और ज्यादा परेशानी के बिना तैयार कर रहा है, इसलिए यह कार्य के साथ किसी भी नवागंतुक संभाल। के बाद से यह नुस्खा धीमी आंच पर पकाया प्याज और गाजर के साथ पोर्क एक विशेष उत्पाद सेट के उपयोग, पहले से शामिल है, यकीन है कि सब कुछ आप की जरूरत है कि वहाँ अपने रसोई घर में बनाते हैं। आप हाथ से यह होना चाहिए हैः - किलो पोर्क कंधे। - बड़े गाजर की एक जोड़ी। - प्याज बल्ब। - साढ़े रेड वाइन का कप। - पानी की एक सौ मिलीलीटर। - आधा चम्मच हॉप्स-suneli। - तीन खाड़ी छोड़ देता है। - नमक, सुगंधित मसालों और वनस्पति तेल। धोया और obsushennoe मांस मध्यम टुकड़ों में काट और एक गहरी कच्चा लोहा पैन में भेज देते हैं। एक बार पर सूअर का मांस की सतह सुनहरे भूरे रंग का हो जाएगा, उसके, रेड वाइन और पानी डालना डेढ़ घंटे के लिए कम से कम गर्मी पर एक ढक्कन और थके हुए के साथ कवर किया। गाजर और प्याज आधा छल्ले की एक अलग पैन तलना स्लाइस में। इस विधि मांस की एक नरम टुकड़े के साथ एक कंटेनर में फैल सब्जियों द्वारा तैयार। वहाँ भी तेज पत्ता, नमक और Khmeli suneli भेजा है। सभी अच्छी तरह से मिलाएं और पूर्ण तत्परता के लिए लाने के लिए। गाजर और प्याज, गर्म के साथ खिलाया सूअर का मांस स्टू। एक साइड डिश के रूप में अक्सर लंबे भुरभुरा चावल, मसले आलू और ताजा सब्जी सलाद का उपयोग करें। |
राजस्थान में एक बार फिर से रफ्तार कहर (Speed havoc) देखने को मिला है। जयपुर जिले के विराटनगर कस्बे के बस स्टैंड के पास रविवार रात 8 बजे जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर शाहपुरा से अलवर की ओर जा रहे बेकाबू कंटेनर (Uncontrollable container) ने एक के बाद एक पांच वाहनों को भिड़न्त मार दी। इस दौरान कंटेनर ने एक बाइक सवार को भी अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद वह बाइक सवार को करीब 1 किलोमीटर तक घसीटता हुआ ले गया। हादसे में बाइक सवार की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना से गुस्साए लोगों ने जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर मृत शरीर रखकर जाम लगा दिया।
हादसे की सूचना पर विराटनगर डीएसपी संजीव चौधरी और थानाप्रभारी रामसिंह यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने समझाइश कर जाम खुलवाया। इस दौरान पुलिस ने करीब 5 किलोमीटर तक कंटेनर का पीछा करके एक ट्रेलर को आड़े लगवाकर कंटेनर को पकड़ा। डीएसपी संजीव कुमार चौधरी ने बताया कि शाहपुरा की ओर से आ रहे बेकाबू कंटेनर का चालक बस स्टैंड के पास सड़क किनारे खड़े दो ट्रैक्टरों समेत 5 वाहनों को भिड़न्त मारने के बाद अपने गाड़ी को तेज गति से अलवर की ओर ले गया।
इसी दौरान कंटेनर ने बिजली ग्रिड के सामने एक बाइक सवार को भी चपेट में ले लिया। बाइक और उस पर सवार पुरुष कंटेनर में फंस गए। करीब 1 किलोमीटर तक वे कंटेनर के साथ घसीटते रहे। घटना में बाइक सवार विराटनगर निवासी कैलाश यादव की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी कंटेनर चालक नहीं रूका। पुलिस ने कंटेनर का बस स्टैंड से पीछा करना प्रारम्भ किया लेकिन वह रूका नहीं। इस पर पुलिस ने कुहाड़ा मोड़ के पास एक ट्रेलर को सड़क पर आड़ा खड़ा करके उसे रुकवाया। पुलिस ने कंटेनर को बरामद कर उसके चालक को पकड़ लिया है।
घटना की सूचना पर जैसे ही पुलिस ने अपने गाड़ी से कंटेनर का पीछा किया तो कंटेनर चालक ने पुलिस गाड़ी को भी भिड़न्त मारने का कोशिश किया। घटना के बाद जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने मृत शरीर को सड़क पर रखकर रास्ता जाम कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों से समझाइश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। जाम से हाइवे पर वाहनों की 2 किलोमीटर तक कतार लग गई। करीब दो घंटे तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद जाम खोला गया।
| राजस्थान में एक बार फिर से रफ्तार कहर देखने को मिला है। जयपुर जिले के विराटनगर कस्बे के बस स्टैंड के पास रविवार रात आठ बजे जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर शाहपुरा से अलवर की ओर जा रहे बेकाबू कंटेनर ने एक के बाद एक पांच वाहनों को भिड़न्त मार दी। इस दौरान कंटेनर ने एक बाइक सवार को भी अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद वह बाइक सवार को करीब एक किलोग्राममीटर तक घसीटता हुआ ले गया। हादसे में बाइक सवार की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना से गुस्साए लोगों ने जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर मृत शरीर रखकर जाम लगा दिया। हादसे की सूचना पर विराटनगर डीएसपी संजीव चौधरी और थानाप्रभारी रामसिंह यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने समझाइश कर जाम खुलवाया। इस दौरान पुलिस ने करीब पाँच किलोग्राममीटर तक कंटेनर का पीछा करके एक ट्रेलर को आड़े लगवाकर कंटेनर को पकड़ा। डीएसपी संजीव कुमार चौधरी ने बताया कि शाहपुरा की ओर से आ रहे बेकाबू कंटेनर का चालक बस स्टैंड के पास सड़क किनारे खड़े दो ट्रैक्टरों समेत पाँच वाहनों को भिड़न्त मारने के बाद अपने गाड़ी को तेज गति से अलवर की ओर ले गया। इसी दौरान कंटेनर ने बिजली ग्रिड के सामने एक बाइक सवार को भी चपेट में ले लिया। बाइक और उस पर सवार पुरुष कंटेनर में फंस गए। करीब एक किलोग्राममीटर तक वे कंटेनर के साथ घसीटते रहे। घटना में बाइक सवार विराटनगर निवासी कैलाश यादव की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी कंटेनर चालक नहीं रूका। पुलिस ने कंटेनर का बस स्टैंड से पीछा करना प्रारम्भ किया लेकिन वह रूका नहीं। इस पर पुलिस ने कुहाड़ा मोड़ के पास एक ट्रेलर को सड़क पर आड़ा खड़ा करके उसे रुकवाया। पुलिस ने कंटेनर को बरामद कर उसके चालक को पकड़ लिया है। घटना की सूचना पर जैसे ही पुलिस ने अपने गाड़ी से कंटेनर का पीछा किया तो कंटेनर चालक ने पुलिस गाड़ी को भी भिड़न्त मारने का कोशिश किया। घटना के बाद जयपुर-अलवर सड़क मार्ग पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने मृत शरीर को सड़क पर रखकर रास्ता जाम कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों से समझाइश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। जाम से हाइवे पर वाहनों की दो किलोग्राममीटर तक कतार लग गई। करीब दो घंटे तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद जाम खोला गया। |
"दिखाओ तुमने कैसी तस्वीरें ली है।"जीत वफ़ाई की तरफ मुडा। वफ़ाई ने केमरा खोल दिया। तस्वीरें दिखने लगी.... जीत, चित्राधार, उस पर केनवास, केनवास पर चित्र, चित्र में बादल, गगन के रंग, दूर क्षितिज में सूरज।
चित्राधार के पीछे वास्तविक गगन एवं तस्वीर का गगन एक समान थे। यह बात अदभूत थी।
तस्वीरें जीत को पसंद तो आई किन्तु वह प्रसन्न नहीं था। उसने फिर से वफ़ाई से केमरा खींचा और सारी तस्वीरें केमरे से हटा कर लेपटोप में डाल दी। वफ़ाई ने ना तो विरोध किया ना विद्रोह। वह बस देखती रही। उसने मन में कुछ योजना बना ली।
जीत लौटा और खाली केमेरा वफ़ाई को दे दिया। वफ़ाई ने चुपचाप उसे ले लिया। वह कुछ क्षण मौन रही।
"जीत, मुझे मेरी सभी तस्वीरें लौटा दो। तुम चाहो तो वह सभी लेपटोप में भी रख सकते हो। पर मुझे वह सब दे दो।" वफ़ाई ने मौन से विद्रोह कर दिया।
जीत मन में हो रहे यूध्ध को शांत मन से देख रहा था। समय रहते वह यूध्ध समाप्त हो गया। ह्रदय विजयी हो गया। वफ़ाई का सान्निध्य बना रहे ऐसी वह योजना बनाने लगा।
दोनों ने खूब दलीलें की किन्तु जीत उन तस्वीरों को लौटाने को सहमत नहीं हुआ।
"बात स्पष्ट है।" जीत ने कहा।
"ठीक है, तुम्हारे साथ मुझे समय व्यर्थ नष्ट नहीं करना चाहिए, मैं चली जाती हूँ।" वफ़ाई जाने लगी।
"तो तुम क्या चाहते हो मुझ से?" वफ़ाई त्रस्त हो गई।
"मुझे कोई चिंता नहीं है।"वफ़ाई त्वरा से उठी और जीत का घर छोड़ गई। जीप की तरफ भागी। जीप का द्वार खोला और अंदर कूद पड़ी, सोये हुए जीप के एंजिन को जागृत किया। वफ़ाई अंधकार में लंबे, रेतमय और अज्ञात मार्ग पर निकल पड़ी।
जीत, उसे जाते हुए स्थिर सा देखता रहा। जीप और वफ़ाई उस से दूर होती जा रही थी। शांत मार्ग दौड़ती हुई जीप की ध्वनि से जाग उठा।
लंबे अंतराल तक जीत वहीं खड़ा रहा, अंततः कक्ष के अंदर चला गया।
समय बीत गया। शीतल रात्री ने मरुभूमि पर प्रवेश कर लिया। रात्रि सदा की भांति शीतल थी, किन्तु जीत के अंदर कुछ उष्ण बह रहा था।
सोने से पहले जीत सदैव दूसरे दिन की चित्रकारी की तैयारी कर लेता था। चित्र के विषय में विचार करता था, उसके मन में चित्र जन्म लेता था जो दूसरे दिन केनवास पर प्रकट होता था। अजन्मे चित्र जीत को स्वप्न में मार्ग दिखते थे।
किन्तु उस रात्रि भिन्न थी।
पाँच महीनों के बाद कोई उसके घर आया था और उसने बातें भी की थी। घर के मौन को अनेक बार उसने भंग किया था।
'मरुभूमि के मौन को मैं सदा पसंद करता रहा हूं। किन्तु लंबे समय के पश्चात आज मैंने ध्वनि सुनी है, मनुष्य के मुख से शब्द सुने है, जिनके कारण मेरा व्यक्तिगत और ज्ञात मौन अनेक टुकड़ों में बिखर गया है।
इन पाँच महीनों में किसी से भी बात करना मुझे पसंद नहीं था, स्वयम से भी नहीं। किन्तु, आज संध्या समय पर मैंने बातें की है, अधिक बातें की है, स्वयं के साथ भी, वफ़ाई के साथ भी। न केवल बातें किन्तु लड़ाई भी की है, दलीलें भी की है, क्रोध भी किया और स्मित भी।' जीत विचारता रहा।
स्मित !
एक ताजा स्मित जीत के अधरों पर आ गया। छाती के अंदर उसने कुछ अनुभव किया। कुछ उग रहा था उसके ह्रदय के अंदर। एक शीतल लहर कक्ष में प्रवेश कर गई, दूसरी जीत के ह्रदय में।
जीत ने आँखें बंध कर ली। उसे अपने सामने एक लड़की दिखाई दी जो उसे आमंत्रित कर रही थी, ह्रदय के द्वार खटखटा रही थी।
जीत ने अनायास स्मित किया। एक लड़की वफ़ाई नाम की कारण था उसके स्मित का।
जीत की आँखों के सामने पूरा घटनाक्रम आ गया जो आज संध्या को हुआ था। वह उसमें धूमिल हो गया। वह आनंदित हो उठा।
वफ़ाई के शब्द उसे मधुर संगीत जैसे लगने लगे।
जीत, वफ़ाई के स्वप्न को साथ लिए सो गया।
प्रभात में जब जीत अपने कार्य में व्यस्त था तब कोई भिन्न ध्वनि उसके कान पर पडी। वह मोबाइल की ध्वनि थी। जीत ने उसे देखा, विस्मय से।
"यह यदा-कदा ही बजता है। आज कौन याद कर रहा है मुझे?" जीत ने उसे उठाया और बात करने लगा।
| "दिखाओ तुमने कैसी तस्वीरें ली है।"जीत वफ़ाई की तरफ मुडा। वफ़ाई ने केमरा खोल दिया। तस्वीरें दिखने लगी.... जीत, चित्राधार, उस पर केनवास, केनवास पर चित्र, चित्र में बादल, गगन के रंग, दूर क्षितिज में सूरज। चित्राधार के पीछे वास्तविक गगन एवं तस्वीर का गगन एक समान थे। यह बात अदभूत थी। तस्वीरें जीत को पसंद तो आई किन्तु वह प्रसन्न नहीं था। उसने फिर से वफ़ाई से केमरा खींचा और सारी तस्वीरें केमरे से हटा कर लेपटोप में डाल दी। वफ़ाई ने ना तो विरोध किया ना विद्रोह। वह बस देखती रही। उसने मन में कुछ योजना बना ली। जीत लौटा और खाली केमेरा वफ़ाई को दे दिया। वफ़ाई ने चुपचाप उसे ले लिया। वह कुछ क्षण मौन रही। "जीत, मुझे मेरी सभी तस्वीरें लौटा दो। तुम चाहो तो वह सभी लेपटोप में भी रख सकते हो। पर मुझे वह सब दे दो।" वफ़ाई ने मौन से विद्रोह कर दिया। जीत मन में हो रहे यूध्ध को शांत मन से देख रहा था। समय रहते वह यूध्ध समाप्त हो गया। ह्रदय विजयी हो गया। वफ़ाई का सान्निध्य बना रहे ऐसी वह योजना बनाने लगा। दोनों ने खूब दलीलें की किन्तु जीत उन तस्वीरों को लौटाने को सहमत नहीं हुआ। "बात स्पष्ट है।" जीत ने कहा। "ठीक है, तुम्हारे साथ मुझे समय व्यर्थ नष्ट नहीं करना चाहिए, मैं चली जाती हूँ।" वफ़ाई जाने लगी। "तो तुम क्या चाहते हो मुझ से?" वफ़ाई त्रस्त हो गई। "मुझे कोई चिंता नहीं है।"वफ़ाई त्वरा से उठी और जीत का घर छोड़ गई। जीप की तरफ भागी। जीप का द्वार खोला और अंदर कूद पड़ी, सोये हुए जीप के एंजिन को जागृत किया। वफ़ाई अंधकार में लंबे, रेतमय और अज्ञात मार्ग पर निकल पड़ी। जीत, उसे जाते हुए स्थिर सा देखता रहा। जीप और वफ़ाई उस से दूर होती जा रही थी। शांत मार्ग दौड़ती हुई जीप की ध्वनि से जाग उठा। लंबे अंतराल तक जीत वहीं खड़ा रहा, अंततः कक्ष के अंदर चला गया। समय बीत गया। शीतल रात्री ने मरुभूमि पर प्रवेश कर लिया। रात्रि सदा की भांति शीतल थी, किन्तु जीत के अंदर कुछ उष्ण बह रहा था। सोने से पहले जीत सदैव दूसरे दिन की चित्रकारी की तैयारी कर लेता था। चित्र के विषय में विचार करता था, उसके मन में चित्र जन्म लेता था जो दूसरे दिन केनवास पर प्रकट होता था। अजन्मे चित्र जीत को स्वप्न में मार्ग दिखते थे। किन्तु उस रात्रि भिन्न थी। पाँच महीनों के बाद कोई उसके घर आया था और उसने बातें भी की थी। घर के मौन को अनेक बार उसने भंग किया था। 'मरुभूमि के मौन को मैं सदा पसंद करता रहा हूं। किन्तु लंबे समय के पश्चात आज मैंने ध्वनि सुनी है, मनुष्य के मुख से शब्द सुने है, जिनके कारण मेरा व्यक्तिगत और ज्ञात मौन अनेक टुकड़ों में बिखर गया है। इन पाँच महीनों में किसी से भी बात करना मुझे पसंद नहीं था, स्वयम से भी नहीं। किन्तु, आज संध्या समय पर मैंने बातें की है, अधिक बातें की है, स्वयं के साथ भी, वफ़ाई के साथ भी। न केवल बातें किन्तु लड़ाई भी की है, दलीलें भी की है, क्रोध भी किया और स्मित भी।' जीत विचारता रहा। स्मित ! एक ताजा स्मित जीत के अधरों पर आ गया। छाती के अंदर उसने कुछ अनुभव किया। कुछ उग रहा था उसके ह्रदय के अंदर। एक शीतल लहर कक्ष में प्रवेश कर गई, दूसरी जीत के ह्रदय में। जीत ने आँखें बंध कर ली। उसे अपने सामने एक लड़की दिखाई दी जो उसे आमंत्रित कर रही थी, ह्रदय के द्वार खटखटा रही थी। जीत ने अनायास स्मित किया। एक लड़की वफ़ाई नाम की कारण था उसके स्मित का। जीत की आँखों के सामने पूरा घटनाक्रम आ गया जो आज संध्या को हुआ था। वह उसमें धूमिल हो गया। वह आनंदित हो उठा। वफ़ाई के शब्द उसे मधुर संगीत जैसे लगने लगे। जीत, वफ़ाई के स्वप्न को साथ लिए सो गया। प्रभात में जब जीत अपने कार्य में व्यस्त था तब कोई भिन्न ध्वनि उसके कान पर पडी। वह मोबाइल की ध्वनि थी। जीत ने उसे देखा, विस्मय से। "यह यदा-कदा ही बजता है। आज कौन याद कर रहा है मुझे?" जीत ने उसे उठाया और बात करने लगा। |
Ranchi: बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगे माइंस लीज मामले में दिल्ली से रांची तक सत्ता पक्ष की ओर से एजेंडा सेट किया जा रहा है. साजिश के तहत एक सबज्यूडिश मामले में कोर्ट रूम के बाहर पब्लिक ओपिनियन बनाने की कोशिश हो रही है. कोर्ट में विचाराधीन मामले में कोर्ट के बाहर क्लीन चिट देना कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के दायरे में आता है. ये निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बातें कही.
जेएमएम सुदिव्य कुमार सोनू और सुप्रियो भट्टाचार्य के ओर से किये गये प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतुल ने कहा कि इन नेताओं ने वही बात कही हो जो गुरुवार को दिल्ली में रिटायर्ड जस्टिस एके गांगुली ने कहा था. जेएमएम नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के 1964 से लेकर 2006 तक के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 9 A में माइनिंग लीज का मामला नहीं आता. प्रतुल ने कहा कि दोनों नेताओं का बयान कोर्ट की अवमानना है. सबज्यूडिश मामले में उन्हें बोलने का हक नहीं है.
गौरतलब है कि एक टीवी चैनल में दिये इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि खनन लीज मामले में तकनीकी पहलुओं को देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि ऐसे मामलों में सरकार या कोई भी बर्खास्त नहीं हो सकता. इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजमेंट का हवाला दिया है. रिटायर्ड जस्टिस ने सीवीके राव V/S दत्तू भसकरा-1964 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 (A) के तहत माइनिंग लीज का मामला सप्लाई ऑफ गुड्स बिजनेस के तहत नहीं आता. वहीं 2001 में करतार सिंह भदाना V/S हरि सिंह नालवा और अन्य और 2006 में श्रीकांत V/S बसंत राव और अन्य मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह का निर्णय दिया था.
| Ranchi: बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगे माइंस लीज मामले में दिल्ली से रांची तक सत्ता पक्ष की ओर से एजेंडा सेट किया जा रहा है. साजिश के तहत एक सबज्यूडिश मामले में कोर्ट रूम के बाहर पब्लिक ओपिनियन बनाने की कोशिश हो रही है. कोर्ट में विचाराधीन मामले में कोर्ट के बाहर क्लीन चिट देना कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के दायरे में आता है. ये निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बातें कही. जेएमएम सुदिव्य कुमार सोनू और सुप्रियो भट्टाचार्य के ओर से किये गये प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतुल ने कहा कि इन नेताओं ने वही बात कही हो जो गुरुवार को दिल्ली में रिटायर्ड जस्टिस एके गांगुली ने कहा था. जेएमएम नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक हज़ार नौ सौ चौंसठ से लेकर दो हज़ार छः तक के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा नौ एम्पीयर में माइनिंग लीज का मामला नहीं आता. प्रतुल ने कहा कि दोनों नेताओं का बयान कोर्ट की अवमानना है. सबज्यूडिश मामले में उन्हें बोलने का हक नहीं है. गौरतलब है कि एक टीवी चैनल में दिये इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि खनन लीज मामले में तकनीकी पहलुओं को देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि ऐसे मामलों में सरकार या कोई भी बर्खास्त नहीं हो सकता. इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजमेंट का हवाला दिया है. रिटायर्ड जस्टिस ने सीवीके राव V/S दत्तू भसकरा-एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा नौ के तहत माइनिंग लीज का मामला सप्लाई ऑफ गुड्स बिजनेस के तहत नहीं आता. वहीं दो हज़ार एक में करतार सिंह भदाना V/S हरि सिंह नालवा और अन्य और दो हज़ार छः में श्रीकांत V/S बसंत राव और अन्य मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह का निर्णय दिया था. |
इंग्लैंड के युवा तेज गेंदबाज सैम करन ने इस आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है। पहले मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ वह शुरूआती ओवरों में महंगे साबित हुए थे, लेकिन अंतिम ओवर में अच्छी गेंदबाजी कर अपनी टीम को मैच में वापस ला दिया था। इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ उन्होंने बल्ले से प्रदर्शन करने के साथ ही हैट्रिक विकेट भी हासिल किया।
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| इंग्लैंड के युवा तेज गेंदबाज सैम करन ने इस आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है। पहले मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ वह शुरूआती ओवरों में महंगे साबित हुए थे, लेकिन अंतिम ओवर में अच्छी गेंदबाजी कर अपनी टीम को मैच में वापस ला दिया था। इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ उन्होंने बल्ले से प्रदर्शन करने के साथ ही हैट्रिक विकेट भी हासिल किया। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
भारतीय किसान यूनियन के पूर्व जिला प्रवक्ता चौधरी भयराज सिंह में तहसील समाधान दिवस में शिकायत करके लक्ष्मी शुगर मिल पर अवैध रूप से गन्ना खरीद फरोख्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बैलगाड़ी की पर्ची पर ट्राली की पर्ची बनाकर तौल की जा रही है, जो गन्ना एक्ट के नियम के विरुद्ध है। बैलगाड़ी की पर्ची-ट्रॉली में तौली है। वह किसानों की नहीं होकर गन्ना माफियाओं की है। आरोप लगाया कि मिल प्रशासन और गन्ना माफियाओं के बीच काफी समय से सांठगांठ चल रही है। मामले में मिल प्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई। अवैध गन्ने की खरीद रोकने की मांग भी की गई।
| भारतीय किसान यूनियन के पूर्व जिला प्रवक्ता चौधरी भयराज सिंह में तहसील समाधान दिवस में शिकायत करके लक्ष्मी शुगर मिल पर अवैध रूप से गन्ना खरीद फरोख्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बैलगाड़ी की पर्ची पर ट्राली की पर्ची बनाकर तौल की जा रही है, जो गन्ना एक्ट के नियम के विरुद्ध है। बैलगाड़ी की पर्ची-ट्रॉली में तौली है। वह किसानों की नहीं होकर गन्ना माफियाओं की है। आरोप लगाया कि मिल प्रशासन और गन्ना माफियाओं के बीच काफी समय से सांठगांठ चल रही है। मामले में मिल प्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई। अवैध गन्ने की खरीद रोकने की मांग भी की गई। |
चंबा -जिला पंचायत कार्यालय की ओेर से चंबा की 283 पंचाययों में वर्ष 2020 में होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया गया है। चंबा के सात ब्लॉकों के तहत आने वाली पंचायतों में 20 जनवरी से शुरू हुई ग्राम सभाएं कि 29 जनवरी तक चलेंगी। जिला पंचायत कार्यालय की ओर से सभी ब्लॉकों को एडवांस में पंचायतों में तय तिथि को होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल प्रेषित कर दिया है। हर दो माह बाद आयोजित होने वाली यह ग्राम सभाएं जनवरी, अप्रैल, जुलाई एवं अक्तूबर माह में आयोजित की जाएंगी। जनवरी के बाद आगामी अप्रैल माह में होने वाली ग्राम सभाओं को लेकर सात से 14 अप्रैल तक की तिथियां निर्धारित की है। इसके अलावा जुलाई एवं अक्तूबर माह में भी अप्रैल माह में होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल फॉलो किया जाएगा। कोरम पूरा न होने के साथ ही किसी अन्य बधाओं के चलते अगर निर्धारित की गई तारीख को ग्राम सभा का आयोजित नहीं की जाती तो उसके 15 दिनों बाद ग्राम सभा काआयोजन अनिवार्र्य है। पंचायत कार्यालय से प्रेषित करने के बाद खंड कार्यालय की ओर ने भी उनके अर्न्तगत आने वाली पंचायतों को ग्राम सभा का शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया है ताकि वह लोगों को अवगत करवा सकें। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पंचायतों की विशेष ग्राम सभा भी बुलाई जा सकती है। उधर जिला पंचायत अधिकारी का कहना है जिला की पंचायतों में इस वर्ष हर दो माह बाद आयोजित होने वाली ग्राम सभाओें को लेकर तिथियों का निर्धारण कर दिया गया है।
पंचातयों में होने वाली सभी तरह के विकास कायर्ोें को ग्राम पंचायत डिवेलमेंट प्लान (जीपीडीपी) में शामिल किया जाएगा। जीपीडीपी में शामिल होने के बाद उसमें फेरबदल की गुजाईश बहुत कम होगी। हालांकि मेजर परिस्थितियों में इसमें फेरबदल किया जा सकता है। उधर, वर्ष भर पंचायतों में होने वाले विभिन्न तरह के कार्य जीपीडीपी फार्मेट के तहत होंगे।
| चंबा -जिला पंचायत कार्यालय की ओेर से चंबा की दो सौ तिरासी पंचाययों में वर्ष दो हज़ार बीस में होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया गया है। चंबा के सात ब्लॉकों के तहत आने वाली पंचायतों में बीस जनवरी से शुरू हुई ग्राम सभाएं कि उनतीस जनवरी तक चलेंगी। जिला पंचायत कार्यालय की ओर से सभी ब्लॉकों को एडवांस में पंचायतों में तय तिथि को होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल प्रेषित कर दिया है। हर दो माह बाद आयोजित होने वाली यह ग्राम सभाएं जनवरी, अप्रैल, जुलाई एवं अक्तूबर माह में आयोजित की जाएंगी। जनवरी के बाद आगामी अप्रैल माह में होने वाली ग्राम सभाओं को लेकर सात से चौदह अप्रैल तक की तिथियां निर्धारित की है। इसके अलावा जुलाई एवं अक्तूबर माह में भी अप्रैल माह में होने वाली ग्राम सभाओं का शेड्यूल फॉलो किया जाएगा। कोरम पूरा न होने के साथ ही किसी अन्य बधाओं के चलते अगर निर्धारित की गई तारीख को ग्राम सभा का आयोजित नहीं की जाती तो उसके पंद्रह दिनों बाद ग्राम सभा काआयोजन अनिवार्र्य है। पंचायत कार्यालय से प्रेषित करने के बाद खंड कार्यालय की ओर ने भी उनके अर्न्तगत आने वाली पंचायतों को ग्राम सभा का शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया है ताकि वह लोगों को अवगत करवा सकें। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पंचायतों की विशेष ग्राम सभा भी बुलाई जा सकती है। उधर जिला पंचायत अधिकारी का कहना है जिला की पंचायतों में इस वर्ष हर दो माह बाद आयोजित होने वाली ग्राम सभाओें को लेकर तिथियों का निर्धारण कर दिया गया है। पंचातयों में होने वाली सभी तरह के विकास कायर्ोें को ग्राम पंचायत डिवेलमेंट प्लान में शामिल किया जाएगा। जीपीडीपी में शामिल होने के बाद उसमें फेरबदल की गुजाईश बहुत कम होगी। हालांकि मेजर परिस्थितियों में इसमें फेरबदल किया जा सकता है। उधर, वर्ष भर पंचायतों में होने वाले विभिन्न तरह के कार्य जीपीडीपी फार्मेट के तहत होंगे। |
पंजाब नेशनल बैंक से करोड़ो रूपये लेकर फरार हुए नीरव मोदी लंदन के एक आलीशान अपार्टमेंट में रह रहा है और आराम से हीरा कारोबार चला रहा है। ब्रितानी अखबार के द्वारा रिलीज वीडियो के अनुसार उसने करीब नौ लाख रुपये की स्पोर्ट जैकेट पहन रखी था और पत्रकारों के सवाल पर टिप्पणी नही कर रहा था।
नीरव मोदी लंदन में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट में रह रहा है। ब्रिटेन के वरिष्ठ अधिकारियों के सूत्रों के हवाले से द टेलीग्राफ ने बताया कि नीरव मोदी को डिपार्टमेंट फ़ॉर वर्क एंड पेंशन की तरफ से एक इंश्योरेंस नंबर भी दिया गया है, भारत की वांटेड सूची में होने के बावजूद वह बेरोकटोक ऑनलाइन खाता संचालित कर सकता है।
जून में विदेश मंत्रालय ने कई यूरोपीय देशों को नीरव मोदी का पता लगाने में मदद करने को कहा था। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के केस में संलिप्त है।
नीरव मोदी एक भारतीय व्यापारी है, जो 2010 में स्थापित 'नीरव मोदी ग्लोबल डायमंड जेवेलरी हाउस' के संस्थापक है।उसकी इस कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है। नीरव मोदी 'क्रिस्टी' और 'सोथेबीस कैटलॉग' पत्रिकाओं के कवर पर प्रदर्शित होने वाला पहला भारतीय जोहरी हैं।
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में $1.8 बिलियन के एक धोखाधड़ी मामले में फिलहाल उस पर जांच चल रही है।नीरव मोदी को भारत सरकार ने 11000 करोड रु फ़्रॉड केस में भगोड़ा घोषित किया है। सीबीआई ने उसकी अहमदनगर की फैक्ट्री भी जब्त कर ली है।
| पंजाब नेशनल बैंक से करोड़ो रूपये लेकर फरार हुए नीरव मोदी लंदन के एक आलीशान अपार्टमेंट में रह रहा है और आराम से हीरा कारोबार चला रहा है। ब्रितानी अखबार के द्वारा रिलीज वीडियो के अनुसार उसने करीब नौ लाख रुपये की स्पोर्ट जैकेट पहन रखी था और पत्रकारों के सवाल पर टिप्पणी नही कर रहा था। नीरव मोदी लंदन में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट में रह रहा है। ब्रिटेन के वरिष्ठ अधिकारियों के सूत्रों के हवाले से द टेलीग्राफ ने बताया कि नीरव मोदी को डिपार्टमेंट फ़ॉर वर्क एंड पेंशन की तरफ से एक इंश्योरेंस नंबर भी दिया गया है, भारत की वांटेड सूची में होने के बावजूद वह बेरोकटोक ऑनलाइन खाता संचालित कर सकता है। जून में विदेश मंत्रालय ने कई यूरोपीय देशों को नीरव मोदी का पता लगाने में मदद करने को कहा था। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के केस में संलिप्त है। नीरव मोदी एक भारतीय व्यापारी है, जो दो हज़ार दस में स्थापित 'नीरव मोदी ग्लोबल डायमंड जेवेलरी हाउस' के संस्थापक है।उसकी इस कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है। नीरव मोदी 'क्रिस्टी' और 'सोथेबीस कैटलॉग' पत्रिकाओं के कवर पर प्रदर्शित होने वाला पहला भारतीय जोहरी हैं। पंजाब नेशनल बैंक में एक दशमलव आठ डॉलर बिलियन के एक धोखाधड़ी मामले में फिलहाल उस पर जांच चल रही है।नीरव मोदी को भारत सरकार ने ग्यारह हज़ार करोड रु फ़्रॉड केस में भगोड़ा घोषित किया है। सीबीआई ने उसकी अहमदनगर की फैक्ट्री भी जब्त कर ली है। |
यूएसएसआर के समय से अप्रचलित फील्ड बैग जल्द ही यूक्रेनी सशस्त्र बलों में उपयोग से गायब हो जाएंगे। यूक्रेन के सशस्त्र बल नए प्रशासनिक बैगों के साथ इन सोवियत "प्लंचेट" की जगह लेंगे, जिनमें न केवल आधुनिक रूप है, बल्कि सुविधाजनक कार्यक्षमता भी है।
उत्पाद यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सामग्री समर्थन के विकास और रखरखाव के लिए मुख्य निदेशालय द्वारा विकसित किया गया था।
एक छलावरण पैटर्न MM-14 के साथ पहनने के लिए प्रतिरोधी पॉलियामाइड कपड़े को यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सैन्य कर्मियों के लिए बैग के आधार के रूप में चुना गया था। सैन्य गौण में एक नोटबुक, टैबलेट या कागजात के लिए कई डिब्बे हैं, साथ ही एक लैपटॉप को समायोजित करने के लिए एक अतिरिक्त जेब भी है। इसके आयाम आपको किंकिंग और कर्लिंग के बिना किसी भी डिब्बे में मानक ए 4 प्रारूप में सैन्य दस्तावेजों को ले जाने की अनुमति देते हैं।
फ्लैप कवर, जो "फास्टेक्स" प्रकार के दो फास्टनरों के साथ बंद हो जाता है, मज़बूती से बैग के मुख्य डिब्बे की सुरक्षा करता है और अंदर एक कार्ड के लिए एक पारदर्शी जेब और बाहर की तरफ एक ज़िप के साथ एक अतिरिक्त जेब है।
सैन्य गौण के पहले उपयोगकर्ता सैन्य संस्थान के कैडेट होंगे टैंक खार्कोव में सेना।
सच है, हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि यूक्रेनी सेना नए उत्पाद की सकारात्मक रूप से सराहना करेगी।
कक्षा! एक और बेकार कुछ! और 2021 में एक पेपर कार्ड के लिए एक जेब। जैसे उन्होंने विमानों को बदलने का फैसला किया। 2015 की गर्मियों के बाद से (युद्ध में और पीछे), मुझे गोलियों वाले विभागों के कैडेट्स के अलावा किसी से भी कभी नहीं मिला।
- टिप्पणियों में लिखा समाचार यूक्रेनी सैन्य कर्मियों में से एक।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
| यूएसएसआर के समय से अप्रचलित फील्ड बैग जल्द ही यूक्रेनी सशस्त्र बलों में उपयोग से गायब हो जाएंगे। यूक्रेन के सशस्त्र बल नए प्रशासनिक बैगों के साथ इन सोवियत "प्लंचेट" की जगह लेंगे, जिनमें न केवल आधुनिक रूप है, बल्कि सुविधाजनक कार्यक्षमता भी है। उत्पाद यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सामग्री समर्थन के विकास और रखरखाव के लिए मुख्य निदेशालय द्वारा विकसित किया गया था। एक छलावरण पैटर्न MM-चौदह के साथ पहनने के लिए प्रतिरोधी पॉलियामाइड कपड़े को यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सैन्य कर्मियों के लिए बैग के आधार के रूप में चुना गया था। सैन्य गौण में एक नोटबुक, टैबलेट या कागजात के लिए कई डिब्बे हैं, साथ ही एक लैपटॉप को समायोजित करने के लिए एक अतिरिक्त जेब भी है। इसके आयाम आपको किंकिंग और कर्लिंग के बिना किसी भी डिब्बे में मानक ए चार प्रारूप में सैन्य दस्तावेजों को ले जाने की अनुमति देते हैं। फ्लैप कवर, जो "फास्टेक्स" प्रकार के दो फास्टनरों के साथ बंद हो जाता है, मज़बूती से बैग के मुख्य डिब्बे की सुरक्षा करता है और अंदर एक कार्ड के लिए एक पारदर्शी जेब और बाहर की तरफ एक ज़िप के साथ एक अतिरिक्त जेब है। सैन्य गौण के पहले उपयोगकर्ता सैन्य संस्थान के कैडेट होंगे टैंक खार्कोव में सेना। सच है, हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि यूक्रेनी सेना नए उत्पाद की सकारात्मक रूप से सराहना करेगी। कक्षा! एक और बेकार कुछ! और दो हज़ार इक्कीस में एक पेपर कार्ड के लिए एक जेब। जैसे उन्होंने विमानों को बदलने का फैसला किया। दो हज़ार पंद्रह की गर्मियों के बाद से , मुझे गोलियों वाले विभागों के कैडेट्स के अलावा किसी से भी कभी नहीं मिला। - टिप्पणियों में लिखा समाचार यूक्रेनी सैन्य कर्मियों में से एक। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः |
Types of Roti: (Photo Credit: Social Media)
नई दिल्लीः
Type of Roti: अगर आपके घर में रोटी का नाम सुनते ही सबके मुंह बनने लगते हैं तो ये स्टोरी आपके बहुत काम की है. भारत में इतनी तरह की रोटियां बनायी जाती हैं कि आपका महीना गुजर जाएगा लेकिन नई रोटियों का नंबर खत्म नहीं होगा. हम आपको कुछ ऐसी कॉमन रोटियों के बारे में बता रहे हैं जो आप आसानी से अपने घर पर ना सकते हैं. ये रोटियां आपके घर में बनने वाली किसी भी रेग्यूलर सब्जी के स्वाद को दोगुना कर देगी. यकीन मानिए खाने में ये छोटा सा बदलाव आपके घर वालों के खाने की इच्छा बढ़ा देगा और आप जब उनसे कहेंगे कि लंच या डिनर कर लो तो वो आपसे यही पूछेंगे कि आज आपने कौन सी रोटी बनायी है.
अगर आप कुछ लाइड लंच या डिनर का प्लान कर रहे हैं और बहुत स्वादिष्ट ग्रेवी वाली सब्जी है तो आप उस दिन अपने घर पर रुमाली रोटी बनाएं. रुमाली रोटी घर पर बनाना मुश्किल नहीं है.
घर पर खाने में मिस्सी रोटी अगर आप बनाएंगे तो आपकी सादी सी सब्जी भी आपके खाने का स्वाद बढ़ा देगी. मिस्सी रोटी के लिए गेहू के आटे में थोड़ा सा बेसन और नमक, मसाले मिलाकर बनाएं, ऐसा करने से आपके पूरे खाने का स्वाद अच्छा हो जाएगा.
मक्के की रोटी का असली स्वाद तो सर्दियों में आता है. अगर आपके घर में सरसों का साग खाने वाले लोग हैं या उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियां खाना पसंद है तो आप उन्हें सफेद मक्खन के साथ मक्के की रोटी ही खाने में परोसें.
तंदूरी रोटी बनाने के लिए आपको घर में तंदूर की जरूरत नहीं है बल्कि आप तवे पर भी आसानी से तंदूरी रोटी बना सकते हैं. घर में अगर खास मेहमान आ रहे हैं तब भी आप उन्हें तंदूरी रोटी खिलाकर अपने खाने का स्वाद डबल कर सकते हैं. गर्मागरम तंदूरी रोटी तो दाल के साथ भी बहुत स्वाद लगती है.
बाजरे की रोटी खाने में सबसे ज्यादा हेल्दी होती है. अगर आपके घर में सूखी सब्जी बन रही है तो साथ में बाजरे की रोटी बनाएं. आपके खाने का स्वाद और भी बेहतर हो जाएगा. बाजरे का आटा गर्मियों के मौसम के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है.
| Types of Roti: नई दिल्लीः Type of Roti: अगर आपके घर में रोटी का नाम सुनते ही सबके मुंह बनने लगते हैं तो ये स्टोरी आपके बहुत काम की है. भारत में इतनी तरह की रोटियां बनायी जाती हैं कि आपका महीना गुजर जाएगा लेकिन नई रोटियों का नंबर खत्म नहीं होगा. हम आपको कुछ ऐसी कॉमन रोटियों के बारे में बता रहे हैं जो आप आसानी से अपने घर पर ना सकते हैं. ये रोटियां आपके घर में बनने वाली किसी भी रेग्यूलर सब्जी के स्वाद को दोगुना कर देगी. यकीन मानिए खाने में ये छोटा सा बदलाव आपके घर वालों के खाने की इच्छा बढ़ा देगा और आप जब उनसे कहेंगे कि लंच या डिनर कर लो तो वो आपसे यही पूछेंगे कि आज आपने कौन सी रोटी बनायी है. अगर आप कुछ लाइड लंच या डिनर का प्लान कर रहे हैं और बहुत स्वादिष्ट ग्रेवी वाली सब्जी है तो आप उस दिन अपने घर पर रुमाली रोटी बनाएं. रुमाली रोटी घर पर बनाना मुश्किल नहीं है. घर पर खाने में मिस्सी रोटी अगर आप बनाएंगे तो आपकी सादी सी सब्जी भी आपके खाने का स्वाद बढ़ा देगी. मिस्सी रोटी के लिए गेहू के आटे में थोड़ा सा बेसन और नमक, मसाले मिलाकर बनाएं, ऐसा करने से आपके पूरे खाने का स्वाद अच्छा हो जाएगा. मक्के की रोटी का असली स्वाद तो सर्दियों में आता है. अगर आपके घर में सरसों का साग खाने वाले लोग हैं या उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियां खाना पसंद है तो आप उन्हें सफेद मक्खन के साथ मक्के की रोटी ही खाने में परोसें. तंदूरी रोटी बनाने के लिए आपको घर में तंदूर की जरूरत नहीं है बल्कि आप तवे पर भी आसानी से तंदूरी रोटी बना सकते हैं. घर में अगर खास मेहमान आ रहे हैं तब भी आप उन्हें तंदूरी रोटी खिलाकर अपने खाने का स्वाद डबल कर सकते हैं. गर्मागरम तंदूरी रोटी तो दाल के साथ भी बहुत स्वाद लगती है. बाजरे की रोटी खाने में सबसे ज्यादा हेल्दी होती है. अगर आपके घर में सूखी सब्जी बन रही है तो साथ में बाजरे की रोटी बनाएं. आपके खाने का स्वाद और भी बेहतर हो जाएगा. बाजरे का आटा गर्मियों के मौसम के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. |
मौनी रॉय टीवी इंडस्ट्री की पॉपुलर एक्ट्रेस है जिन्होंने कई शो में किरदार किये है। बता दे मौनी रॉय नागिन नाम से भी जानी जाती है, नागिन सीरियल में बहुत शानदार किरदार अदा किया था। मौनी अपनी अदाओ के वजह से सोशल मीडिया पर रहती है सुर्खियों में। बता दे मौनी ने बॉलीवुड में भी अपनी एक जगह बना की है।
मौनी ने अक्षय कुमार के अपोजिट फिल्म गोल्ड से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। पहली ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुयी थी ऑडियंस द्वारा काफी पसंद की गयी थी मौनी रॉय। फिल्म रोमियो अकबर वॉटर में जॉन अब्राहम के अपोजिट नज़र आयी थी। हालही में मौनी फिल्म मेड इन चाइना में, को स्टार बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव (Rajkummar Rao) के साथ नज़र आयी है कुछ खास सफल नहीं हुआ ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर।
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) की फिल्म बोले चूड़ियां में काम न करने की घोसना से काफी चर्चो में थी मौनी। हालही में मौनी ने NGO के अनाथ बच्चो के साथ क्रिसमस सेलिब्रेट करते स्पॉट की गयी थी बच्चो के लिए संता बानी थी मौनी। वाइट क्रॉप टॉप और ब्लू डेनिम जीन्स की लिबाज़ में बेहद खुबसूरत लग रही थी। मौनी संता कि टोपी पहनकर बच्चो के साथ बहुत मस्ती और बहुत खुश नज़र आयी।
बच्चे भी अपनी संता के साथ बहुत मज़े किये और बहुत खुश नज़र आये। मौनी बच्चो को तब तक बाय कर रही थी जबतक वो अपनी गाडी में नहीं बैठ गयी। मौनी अपने ग्लैमर लुक और ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती है।
जल्द ही मौनी स्टार अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ फिल्म ब्रह्माश्त्र में नज़र आएँगी।
| मौनी रॉय टीवी इंडस्ट्री की पॉपुलर एक्ट्रेस है जिन्होंने कई शो में किरदार किये है। बता दे मौनी रॉय नागिन नाम से भी जानी जाती है, नागिन सीरियल में बहुत शानदार किरदार अदा किया था। मौनी अपनी अदाओ के वजह से सोशल मीडिया पर रहती है सुर्खियों में। बता दे मौनी ने बॉलीवुड में भी अपनी एक जगह बना की है। मौनी ने अक्षय कुमार के अपोजिट फिल्म गोल्ड से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। पहली ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुयी थी ऑडियंस द्वारा काफी पसंद की गयी थी मौनी रॉय। फिल्म रोमियो अकबर वॉटर में जॉन अब्राहम के अपोजिट नज़र आयी थी। हालही में मौनी फिल्म मेड इन चाइना में, को स्टार बॉलीवुड एक्टर राजकुमार राव के साथ नज़र आयी है कुछ खास सफल नहीं हुआ ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म बोले चूड़ियां में काम न करने की घोसना से काफी चर्चो में थी मौनी। हालही में मौनी ने NGO के अनाथ बच्चो के साथ क्रिसमस सेलिब्रेट करते स्पॉट की गयी थी बच्चो के लिए संता बानी थी मौनी। वाइट क्रॉप टॉप और ब्लू डेनिम जीन्स की लिबाज़ में बेहद खुबसूरत लग रही थी। मौनी संता कि टोपी पहनकर बच्चो के साथ बहुत मस्ती और बहुत खुश नज़र आयी। बच्चे भी अपनी संता के साथ बहुत मज़े किये और बहुत खुश नज़र आये। मौनी बच्चो को तब तक बाय कर रही थी जबतक वो अपनी गाडी में नहीं बैठ गयी। मौनी अपने ग्लैमर लुक और ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती है। जल्द ही मौनी स्टार अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ फिल्म ब्रह्माश्त्र में नज़र आएँगी। |
अंब - अंब थाना क्षेत्र के तहत पड़ते एक गांव की 18 वर्षीय युवती ने फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया है। हालांकि समय पर परिजन वहां पहंुच गए और उसे फंदे से मुक्त करवा लिया, अन्यथा कोई अनहोनी हो सकती थी। इसके उपरांत युवती को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल पहंुचाया गया, जहां से उसे क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के लिए रैफर कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार युवती बीमार रहती है और उसका पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार चल रहा था। इसी के चलते उसने रविवार को फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया। इसी दौरान परिजनों ने उसे देख लिया और उसे फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद उसे उपचार के लिए अंब अस्पताल पहंुचाया गया, जहां पर चिकित्सकों ने उसे उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना को रैफर कर दिया है। डीएसपी मनोज जम्वाल ने बताया कि पुलिस ने मामले को लेकर कार्रवाई आरंभ कर दी है।
| अंब - अंब थाना क्षेत्र के तहत पड़ते एक गांव की अट्ठारह वर्षीय युवती ने फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया है। हालांकि समय पर परिजन वहां पहंुच गए और उसे फंदे से मुक्त करवा लिया, अन्यथा कोई अनहोनी हो सकती थी। इसके उपरांत युवती को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल पहंुचाया गया, जहां से उसे क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के लिए रैफर कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार युवती बीमार रहती है और उसका पीजीआई चंडीगढ़ में उपचार चल रहा था। इसी के चलते उसने रविवार को फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया। इसी दौरान परिजनों ने उसे देख लिया और उसे फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद उसे उपचार के लिए अंब अस्पताल पहंुचाया गया, जहां पर चिकित्सकों ने उसे उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना को रैफर कर दिया है। डीएसपी मनोज जम्वाल ने बताया कि पुलिस ने मामले को लेकर कार्रवाई आरंभ कर दी है। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
जिले में बढते कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉक डाउन में रविवार को बाजारों को सैनेटाईज करने के लिए कोतवाली पुलिस ने बंद कराया, लेकिन सैनेटाईजेशन न होने से दुकानदारों ने दोबारा दुकाने खोल लिए जाने से कई दुकानों पर सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही हो सका।
जिले में बढते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन से सवेरे 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक जरूरतों का सामान खरीदने के लिए छूट दी है, लेकिन उसके बाद पूर्ण रूप से लॉक डाउन घोषित किया गया है। जिसका पालन जिलाधिकारी से सख्ती के साथ कराये जाने के आदेश भी दिये है। रविवार को वैसे तो साप्ताहिक बंदी रहती है, लेकिन लॉक डाउन के दौरान साप्ताहिक बंदी बेहसर है। जिसमें सवेरे किरयाना की दुकाने खोली जाती है। सवेरे कोतवाली पुलिस ने उक्त दुकानों को बंद करा दिया, जिसमें पुलिस ने बाजारों को सैनेटाईजेशन कराये जाने की बात कही, लेकिन बाद में बाजारो ंमें सैनटाईजेशन न होने की जानकारी पाकर किराना दुकानदारों ने दोबारा दुकानों को खोल लिया और ग्राहकों की भीड दुकानों पर लगी रही। जहां सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही किया गया और लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा और अधिक बना हुआ था। पुलिस के आदेश पर रविवार को सब्जी मंडी पूरी तरह से बंद रही।
| जिले में बढते कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉक डाउन में रविवार को बाजारों को सैनेटाईज करने के लिए कोतवाली पुलिस ने बंद कराया, लेकिन सैनेटाईजेशन न होने से दुकानदारों ने दोबारा दुकाने खोल लिए जाने से कई दुकानों पर सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही हो सका। जिले में बढते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन से सवेरे सात बजे से दोपहर बारह बजे तक जरूरतों का सामान खरीदने के लिए छूट दी है, लेकिन उसके बाद पूर्ण रूप से लॉक डाउन घोषित किया गया है। जिसका पालन जिलाधिकारी से सख्ती के साथ कराये जाने के आदेश भी दिये है। रविवार को वैसे तो साप्ताहिक बंदी रहती है, लेकिन लॉक डाउन के दौरान साप्ताहिक बंदी बेहसर है। जिसमें सवेरे किरयाना की दुकाने खोली जाती है। सवेरे कोतवाली पुलिस ने उक्त दुकानों को बंद करा दिया, जिसमें पुलिस ने बाजारों को सैनेटाईजेशन कराये जाने की बात कही, लेकिन बाद में बाजारो ंमें सैनटाईजेशन न होने की जानकारी पाकर किराना दुकानदारों ने दोबारा दुकानों को खोल लिया और ग्राहकों की भीड दुकानों पर लगी रही। जहां सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही किया गया और लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा और अधिक बना हुआ था। पुलिस के आदेश पर रविवार को सब्जी मंडी पूरी तरह से बंद रही। |
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 : इस धारा के तहत अनुविभागीय दंडाधिकारी को यह अधिकार दिए गए हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, सरपंच आदि को पद से हटा सकते हैं।
इसके अलावा धारा 92 के तहत शासकीय राशि गबन करने या अतिरिक्त रकम निकालने पर वसूली की कार्रवाई होती है। इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों-पदाधिकारियों को पद से हटाए जाने की कार्रवाई धारा 40 के तहत की जाती है। धारा 40 की उपधारा 1 के तहत पद से हटाए जाने के बाद 6 साल तक इसे पंचायत प्रतिनिधि नहीं बनाया जा सकता है।
| मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम एक हज़ार नौ सौ तिरानवे की धारा चालीस : इस धारा के तहत अनुविभागीय दंडाधिकारी को यह अधिकार दिए गए हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, सरपंच आदि को पद से हटा सकते हैं। इसके अलावा धारा बानवे के तहत शासकीय राशि गबन करने या अतिरिक्त रकम निकालने पर वसूली की कार्रवाई होती है। इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों-पदाधिकारियों को पद से हटाए जाने की कार्रवाई धारा चालीस के तहत की जाती है। धारा चालीस की उपधारा एक के तहत पद से हटाए जाने के बाद छः साल तक इसे पंचायत प्रतिनिधि नहीं बनाया जा सकता है। |
BAREILLY: सीबीगंज थाना अंतर्गत एक ऑटो ड्राइवर किशोरी व दो वर्ष के बच्चे को लेकर रामगंगा के खादर में जाने लगा। बच्ची के शोर मचाने पर पब्लिक ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो वह झगड़ा करने लगा। जिसके बाद यूपी 100 को सूचना दी गई तो मौके पर पहुंची पीआरवी ने उसे पकड़कर सीबीगंज थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
नेकपुर निवासी 13 वर्षीय किशोरी अपनी बहन के घर चंदन नगर किला जा रही थी। उसकी बहन एक दिन पहले उसके घर आयी थी और अपने दो वर्ष के बच्चे को छोड़कर चली गई थी। वह इसी बच्चे को छोड़ने के लिए जा रही थी। वह सुभाषनगर से ऑटो में बैठी। रास्ते में ऑटो वाले ने सभी सवारियां उतार दीं। उस वक्त सिर्फ बच्ची और उसके साथ बच्चा ऑटो में रह गया। इस पर ऑटो ड्राइवर ने ऑटो को सराय तल्फी के खादर की ओर ऑटो मोड़ दिया और तेजी से ले जाने लगा। गलत रास्ते पर जाने पर किशोरी ने शोर मचाना शुरू कर दिया। पुलिस पूछताछ में ऑटो ड्राइवर की पहचान अमन निवासी भरतौल के रूप में हुई है। ऑटो ड्राइवर पुलिस चेकिंग की वजह से दूसरे रास्ते पर ले जाने की कहानी गढ़ रहा है।
ऑटो ड्राइवर किशोरी को दूसरे रास्ते पर लेकर जा रहा था। पब्लिक ने पकड़कर उसे सौंपा है। रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
| BAREILLY: सीबीगंज थाना अंतर्गत एक ऑटो ड्राइवर किशोरी व दो वर्ष के बच्चे को लेकर रामगंगा के खादर में जाने लगा। बच्ची के शोर मचाने पर पब्लिक ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो वह झगड़ा करने लगा। जिसके बाद यूपी एक सौ को सूचना दी गई तो मौके पर पहुंची पीआरवी ने उसे पकड़कर सीबीगंज थाना पुलिस के हवाले कर दिया। नेकपुर निवासी तेरह वर्षीय किशोरी अपनी बहन के घर चंदन नगर किला जा रही थी। उसकी बहन एक दिन पहले उसके घर आयी थी और अपने दो वर्ष के बच्चे को छोड़कर चली गई थी। वह इसी बच्चे को छोड़ने के लिए जा रही थी। वह सुभाषनगर से ऑटो में बैठी। रास्ते में ऑटो वाले ने सभी सवारियां उतार दीं। उस वक्त सिर्फ बच्ची और उसके साथ बच्चा ऑटो में रह गया। इस पर ऑटो ड्राइवर ने ऑटो को सराय तल्फी के खादर की ओर ऑटो मोड़ दिया और तेजी से ले जाने लगा। गलत रास्ते पर जाने पर किशोरी ने शोर मचाना शुरू कर दिया। पुलिस पूछताछ में ऑटो ड्राइवर की पहचान अमन निवासी भरतौल के रूप में हुई है। ऑटो ड्राइवर पुलिस चेकिंग की वजह से दूसरे रास्ते पर ले जाने की कहानी गढ़ रहा है। ऑटो ड्राइवर किशोरी को दूसरे रास्ते पर लेकर जा रहा था। पब्लिक ने पकड़कर उसे सौंपा है। रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। |
इस्कीसिर यूनाइटेड ट्रांसपोर्ट एम्प्लॉइज यूनियन (बीटीएस) के सदस्यों ने रेलवे के उदारीकरण के संबंध में मसौदा कानून का विरोध किया।
बीटीएस शाखा के अध्यक्ष एरसिन केम पराली, जिन्होंने इस्कीसिर ट्रेन स्टेशन के सामने एकत्रित यूनियन सदस्यों की ओर से एक प्रेस बयान दिया, ने रेलवे के उदारीकरण के संबंध में परिवहन, समुद्री मामलों और संचार मंत्री बिनाली येल्ड्रिम के मसौदा बिल के बारे में कहाः " कुछ लोग इसे निजीकरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन यहां कोई निजीकरण नहीं है, यह एकमात्र ऐसी चीज है जिसका हमने उदारीकरण नहीं किया है।" उन्होंने याद दिलाया कि "क्षेत्र में रेलवे बना हुआ है।" यह दावा करते हुए कि विधेयक का उद्देश्य निजीकरण है, पराली ने कहा, "तुर्की के रेलवे परिवहन के उदारीकरण पर मसौदा कानून 6 मार्च, 2013 को तुर्की ग्रैंड नेशनल असेंबली को प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कहा, "मसौदा कानून में नव-उदारवादी नीतियों के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली सभी नकारात्मकताएं शामिल हैं।"
यह कहते हुए कि मसौदा कानून में सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य रेलवे सेवा को सार्वजनिक सेवा से हटाकर इसका व्यावसायीकरण करना है, पराली ने कहा, "यह लक्ष्य परिवहन के अधिकार के स्थायी वस्तुकरण को इंगित करता है, जिसे मानवता मौलिक अधिकारों में से एक मानती है, और जिनके पास इस सेवा से लाभ उठाने के लिए पैसा है। उन्होंने कहा, "हम अपने सभी नागरिकों से रेलवे परिवहन के अधिकार की रक्षा के लिए रेलवे के निजीकरण के खिलाफ एक साथ लड़ने का आह्वान करते हैं, जो एक सार्वजनिक अधिकार है।"
बयान के बाद समूह चुपचाप तितर-बितर हो गया।
| इस्कीसिर यूनाइटेड ट्रांसपोर्ट एम्प्लॉइज यूनियन के सदस्यों ने रेलवे के उदारीकरण के संबंध में मसौदा कानून का विरोध किया। बीटीएस शाखा के अध्यक्ष एरसिन केम पराली, जिन्होंने इस्कीसिर ट्रेन स्टेशन के सामने एकत्रित यूनियन सदस्यों की ओर से एक प्रेस बयान दिया, ने रेलवे के उदारीकरण के संबंध में परिवहन, समुद्री मामलों और संचार मंत्री बिनाली येल्ड्रिम के मसौदा बिल के बारे में कहाः " कुछ लोग इसे निजीकरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन यहां कोई निजीकरण नहीं है, यह एकमात्र ऐसी चीज है जिसका हमने उदारीकरण नहीं किया है।" उन्होंने याद दिलाया कि "क्षेत्र में रेलवे बना हुआ है।" यह दावा करते हुए कि विधेयक का उद्देश्य निजीकरण है, पराली ने कहा, "तुर्की के रेलवे परिवहन के उदारीकरण पर मसौदा कानून छः मार्च, दो हज़ार तेरह को तुर्की ग्रैंड नेशनल असेंबली को प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कहा, "मसौदा कानून में नव-उदारवादी नीतियों के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली सभी नकारात्मकताएं शामिल हैं।" यह कहते हुए कि मसौदा कानून में सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य रेलवे सेवा को सार्वजनिक सेवा से हटाकर इसका व्यावसायीकरण करना है, पराली ने कहा, "यह लक्ष्य परिवहन के अधिकार के स्थायी वस्तुकरण को इंगित करता है, जिसे मानवता मौलिक अधिकारों में से एक मानती है, और जिनके पास इस सेवा से लाभ उठाने के लिए पैसा है। उन्होंने कहा, "हम अपने सभी नागरिकों से रेलवे परिवहन के अधिकार की रक्षा के लिए रेलवे के निजीकरण के खिलाफ एक साथ लड़ने का आह्वान करते हैं, जो एक सार्वजनिक अधिकार है।" बयान के बाद समूह चुपचाप तितर-बितर हो गया। |
चंडीगढ़ : पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने शहीद भगत सिंह नगर जिले के बंगा में तैनात राजस्व विभाग के पटवारी गुरदेव दास और उसके एजेंट अनिल कुमार को पांच हजार रूपये रिश्वत लेने के आरोप में आज गिरफ्तार कर लिया। ब्यूरो ने प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने रिश्वत की यह राशि शिकायतकर्ता जिदोवाला निवासी जगन्नाथ से उसके भूमि रिकार्ड की फर्द ठीक करने के बदले में ली थी।
इन्हें ब्यूरो के निरीक्षक रमेश सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने रिश्वत की राशि सहित रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दो अभियुक्तों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत ब्यूरो जालंधर थाने में मामला दर्ज किया गया है। इनसे पूछताछ जारी है।
| चंडीगढ़ : पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने शहीद भगत सिंह नगर जिले के बंगा में तैनात राजस्व विभाग के पटवारी गुरदेव दास और उसके एजेंट अनिल कुमार को पांच हजार रूपये रिश्वत लेने के आरोप में आज गिरफ्तार कर लिया। ब्यूरो ने प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने रिश्वत की यह राशि शिकायतकर्ता जिदोवाला निवासी जगन्नाथ से उसके भूमि रिकार्ड की फर्द ठीक करने के बदले में ली थी। इन्हें ब्यूरो के निरीक्षक रमेश सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने रिश्वत की राशि सहित रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दो अभियुक्तों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत ब्यूरो जालंधर थाने में मामला दर्ज किया गया है। इनसे पूछताछ जारी है। |
14 जेंडर
निवेदिता मेनन
प्रकृति से 'सेक्स' का वही रिश्ता है जो संस्कृति से 'जेंडर' का है + पश्चिम के अलावा दूसरे समाजों में पुरुष / नारी की अवधारणा नारीवादी सिद्धांत में सेक्स / जेंडर अंतर का विकास
नारीवादी राजनीति का एक प्रमुख योगदान यह है कि इसने इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि 'सेक्स' और 'जेंडर' के बीच अंतर है। नारीवादी चिंतन की विविध धाराओं ने सेक्स/जेंडर के बीच इस अंतर का अलग-अलग तरीक़े से विकास किया है । इस अध्याय की शुरुआत में इस बुनियादी अंतर और इसके महत्व को रेखांकित किया गया है। इसके बाद, संक्षेप में इस बात की विवेचना की गई है कि पुरुष / नारी (male/female) के बीच गहरा अंतर आधुनिकता और पश्चिमी संस्कृति की विशिष्टता है। सेक्स / जेंडर के बीच के अंतर पर अलग-अलग तरीक़े से विचार किया गया है। अध्याय के अगले भाग में सेक्स / जेंडर के बीच के अंतर को देखने के चार तरीकों पर विचार किया गया है। अध्याय के अंत में नारीवादी राजनीति के उभरते क्षेत्र अर्थात् पुरुषत्व (masculanity) की संक्षेप में विवेचना की गई है। इस भाग में इस बात पर विचार किया गया है कि पुरुषत्व का निर्माण कैसे होता है और पित्तृसत्तात्मक समाज में पुरुषों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता
प्रकृति से 'सेक्स' का वही रिश्ता है जो संस्कृति से 'जेंडर' का है
शुरू में, सेक्स (या लिंग) शब्द का उपयोग पुरुषों और महिलाओं में जैविक अंतर बताने के लिए किया जाता था। इसी तरह, जेंडर शब्द का उपयोग इस बुनियादी अंतर से संबंधित व्यापक सांस्कृतिक अर्थ को बताने के लिए किया गया। नारीवाद द्वारा इन दोनों के बीच में अंतर करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच जैविक अंतर के आधार पर ही महिलाओं की अधीनता को बुनियादी रूप से सही माना जाता रहा है। बहुत सारे दार्शनिक तर्कों के सहारे महिलाओं के दमन को प्रकृति प्रदत मानते हुए इसे वैधता दी जाती रही है। माना जाता रहा है कि चूंकि ये स्थितियाँ प्राकृतिक हैं, इसलिए इनसे बचा नहीं जा सकता। इसके लिए यह तर्क दिया गया कि इस तरह के दमन प्राकृतिक और अपरिवर्तनशील कारकों के कारण होते हैं। इन कारकों के प्रभाव
को जैविक-निर्धारणवाद (biological determinism) की संज्ञा दी गई। नस्लवाद और जाति-व्यवस्था इसके अच्छे उदाहरण हैं। ये विचारधाराएँ भी इस मान्यता पर आधारित हैं कि लोगों के कुछ ख़ास समूह जन्म से ही उच्चतर और बेहतर होते हैं। इन विचारधाराओं में यह माना जाता है कि कुछ ख़ास समूहों के सदस्यों में जन्म से ही ज़्यादा बुद्धिमानी और विशेष दक्षताएँ होती हैं। इस कारण, समाज में इन समूहों को विशिष्ट और शक्तिशाली स्थान देने को सही माना जाता रहा है। पिछली कई सदियों से महिलाओं के दमन को वैधता दिलाने में जैविक-निर्धारणवाद ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तरह, नारीवादी राजनीति के लिए जैविक - निर्धारणवाद की चुनौती बहुत ही महत्वपूर्ण है।
नारीवादी-मानवशास्त्रियों (feminist anthropologists), ख़ासतौर पर, मार्गरेट मीड ने यह दिखाया है कि विभिन्न संस्कृतियों में पुरुषत्व और नारीत्व (masculanity and femininity) को अलग-अलग तरीक़े से समझा जाता रहा है। विभिन्न समाजों में पुरुषत्व और नारीत्व की अलग-अलग विशेषताएँ स्वीकार की जाती रही हैं। इसका अर्थ है कि यह मुमकिन है कि किसी समाज में पुरुषत्व की किसी एक विशेषता को स्वीकार किया जाता हो, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि दूसरे समाज में भी इसी विशेषता को स्वीकार किया जाए। यही बात नारीत्व के बारे में भी सच है। इसलिए, नारीवादियों ने यह तर्क दिया है कि यह ज़रूरी नहीं कि पुरुषों और महिलाओं की जैविक संरचना और पुरुषत्व और नारीत्व की विशेषताओं में कोई सीधा जुड़ाव हो । दरअसल, बचपन में पालन-पोषण के समय से ही पुरुषों और महिलाओं के बीच कुछ ख़ास तरह के अंतरों की नींव डालने की कोशिश जाती है और उन्हें बरकरार रखा जाता है। बचपन से ही लड़कों और लड़कियों को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि उनके बीच व्यवहार, खेलकूद, पहनावे आदि के आधार पर जेंडर - आधारित अंतर क़ायम हो जाए। यह प्रशिक्षण नियमित रूप से चलता रहता है और अधिकांश मौकों पर यह अप्रत्यक्ष और रोज़मर्रा की जिंदगी के हिस्से के रूप में होता है। लेकिन ज़रूरत पड़ने पर इसके लिए सज़ा और ज़ोर-ज़बर्दस्ती का भी प्रयोग होता है। इसके पीछे मुख्य लक्ष्य यही होता है कि हर लड़का या लड़की खुद को अपने लिए पहले से तय जेंडर की भूमिका में ही ढाले । इसलिए, नारीवादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ख़ास तौर पर सेक्स - आधारित गुण (मसलन, विश्वास और साहस के रूप में 'पुरुषत्व' और संवेदनशीलता और शर्मीलेपन के रूप में 'नारीत्व') विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और मान्यताओं के कारण होते हैं। ये सामाजिक संस्थाएँ और मान्यताएँ इन सेक्स - आधारित गुणों का महत्व तय करती हैं और इन्हीं के कारण लड़कों और लड़कियों का अलग-अलग तरीक़े से सामाजीकरण किया जाता है। सिमोन द बुआ ने इस संदर्भ में लिखा है कि 'कोई जन्म से ही औरत नहीं होती है, बल्कि औरत बना दी जाती है।'
इसके अलावा, आमतौर पर समाज में 'पुरुषत्व' से जुड़ी विशेषताओं को 'नारीत्व' से जुड़ी विशेषताओं की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि जो पुरुष या महिला तय मानक के अनुसार व्यवहार नहीं करते हैं, उन्हें निरंतर 'समुचित' व्यवहार करने के साँचे में ढालने की प्रक्रिया चलती रहे। मसलन, जब एक पुरुष सार्वजनिक रूप से रोकर अपना दुःख व्यक्त करता है, तो यह व्यंग्य - वाक्य कहकर उसकी बेइज़्ज़ती की जाती है कि 'औरतों जैसे रो रहे हो?' इस संदर्भ में सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई ये पंक्तियाँ भी प्रसिद्ध हैं कि 'खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी।' इस पंक्ति का क्या अर्थ है? इसका मतलब यह कि किसी महिला द्वारा बहादुरी दिखाने के बावजूद बहादुरी को नारी का गुण नहीं माना जा सकता है। इसे अब भी एक पुरुषवादी सद्गुण के रूप में देखा जाता है। बहुत सी महिलाओं द्वारा बहादुरी दिखाने पर भी यह मान्यता क़ायम रहती है। इसी तरह, बहुत से पुरुषों द्वारा पीठ दिखाकर भाग जाने पर भी यह मान्यता क़ायम रहती है।
श्रम के सेक्शुअल या लैंगिक विभाजन को किसी भी आधार पर 'प्राकृतिक' नहीं माना जा सकता है। घर के भीतर और घर के बाहर पुरुष और महिला द्वारा अलग-अलग काम किया जाता है। लेकिन इसका पुरुषों और महिलाओं की जैविक संरचना से बहुत कम लेना-देना है। दरअसल, यह मसला समाज में पुरुषों और महिलाओं की स्थिति के बारे में विचारधारात्मक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। सिर्फ़ गर्भ धारण की वास्तविक प्रक्रिया ही जैविक होती है। इसके अलावा, घर के सारे काम पुरुषों द्वारा भी किए जा सकते हैं। इन कामों में खाना बनाना, सफ़ाई करना, बच्चों की देखभाल करना आदि जैसे काम शामिल होते हैं (दूसरे शब्दों में इसमें ऐसे काम शामिल होते हैं जिन्हें 'घरेलू श्रम' [domestic labour] कहा जा सकता है)। इन कामों को 'औरतों का काम' माना जाता है।
224 निवेदिता मेनन
सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन वाले कामों में भी श्रम का सेक्शुअल विभाजन देखा जा सकता है। निश्चित रूप से, इसका सेक्स यानी जैविक संरचना से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरा मसला जेंडर यानी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। इसीलिए से कुछ निश्चित कामों को 'महिलाओं का काम' माना जाता है, और अन्य कामों को पुरुषों का काम। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले कामों को कम महत्व दिया जाता है और इसके लिए उन्हें कम वेतन भी दिया जाता है। मसलन, नर्स और छोटे बच्चों को पढ़ाने के काम को मुख्य रूप से महिलाओं का काम माना जाता है और इनके लिए महिलाओं को कम वेतन दिया जाता है। इसकी तुलना में, मुख्य रूप से मध्य-वर्ग द्वारा की जाने वाली 'व्हाइट कॉलर' या सफ़ेदफोश नौकरियों में ज़्यादा वेतन दिया जाता है। नारीवादियों की यह दलील है कि छोटे बच्चों को पढ़ाने और नर्स के काम के 'नारीकरण' (feminization) का कारण यह मान्यता है कि इस तरह के काम महिलाओं द्वारा घर के भीतर किए जाने वाले बच्चों के पालन-पोषण के काम का ही विस्तार हैं। एक ओर, यह माना जाता है कि महिलाएँ शारीरिक रूप से कमज़ोर होती हैं और ऐसे काम नहीं कर सकतीं, जिनमें बहुत ज़्यादा शारीरिक श्रम लगता हो । दूसरी ओर, उन्हें घर में और घर के बाहर इसी तरह का काम करना पड़ता है; मसलन, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ बहुत दूर से पानी और जलावन की लकड़ियाँ लाने, अनाज पीसने, धान को रोपने और कई जगहों पर हो रहे निर्माण कार्य में भारी-भरकम सामान ढोने का काम करती हैं। लेकिन जब महिलाओं द्वारा किए जाने वाले शारीरिक श्रम का मशीनीकरण हो गया, तो इन कामों को ज़्यादा ऊँचा माना जाने लगा और इसके लिए अच्छा वेतन भी दिया जाने लगा। इस कारण, अब पुरुष प्रशिक्षण लेकर मशीनों पर काम करने लगे और महिलाओं को इन कामों से बाहर कर दिया गया। ऐसा सिर्फ़ कारखानों में ही नहीं हुआ है, बल्कि समुदायों में पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले काम के संबंध में भी यही बात सच है। मसलन, जब हाथ से धान की कुटाई करने की जगह मिलों ने ले ली, तो पुरुषों को यह काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाने लगा। इसी तरह, पहले मछली पकड़ने के लिए पारंपरिक जाल महिलाओं द्वारा बनाया जाता था। लेकिन जब मशीन द्वारा नॉयलॉन के जाल बनने लगे तो कारख़ानों में यह काम पुरुषों द्वारा किया जाने लगा। साफ़ तौर पर, महिलाओं को इन कामों से हटाकर उन्हें ऐसे कामों में लगाया गया, जिनमें ज़्यादा शारीरिक श्रम लगता है और कम वेतन या कम मज़दूरी मिलती है।
इससे यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि महिलाओं की वर्तमान अधीनता की शुरुआत अपरिवर्तनशील जैविक अंतरों यानी सेक्स से नहीं हुई है। दरअसल, यह अधीनता सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों, विचारधाराओं और संस्थाओं की उपज है, जो महिलाओं की भौतिक और विचारधारात्मक अधीनता यानी जेंडर के प्रभुत्व को सुनिश्चित करती हैं। इसलिए, नारीवादी सेक्स - विभेदीकृत काम ( sex differentiated work) और श्रम के सेक्शुअल विभाजन पर सवाल खड़ा करती हैं। नारीवादी सेक्शुअलिटी (या यौनिकता) और प्रजनन के मुद्दों को 'जीव-विज्ञान' से बाहर निकालने पर जोर देती हैं। इन मसलों को जीव विज्ञान के दायरे में रखा जाता है और इन्हें प्राकृतिक और अपरिवर्तनीय माना जाता है। नारीवादी एजेंडा यह है कि इन मसलों को 'राजनीतिक' दायरे में वापस लाया जाए, जिसका मतलब यह है कि इनमें बदलाव हो सकता है और इनमें बदलाव होना ही चाहिए।
पश्चिम के अलावा दूसरे समाजों में पुरुष / नारी की अवधारणा
इस संदर्भ में एक रुचिकर बात यह है कि कुछ विद्वानों का यह मानना है कि पुरुषत्व / नारीत्व के बीच का कठोर द्विध्रुवीय मॉडल सिर्फ़ आधुनिक पश्चिमी सभ्यता की विशेषता है। ये विद्वान इस बात पर भी जोर देते हैं कि आधुनिक पश्चिमी सभ्यता ने ही नारीत्व से जुड़े पहलुओं के महत्व को कमतर किया है। दरअसल, पश्चिमी सभ्यता में भी आधुनिकता के आने के बाद ही क़ानून और राज्य द्वारा दो सेक्स या द्वि-लिंगी मॉडल (two sex model) को अपनाया गया। ऐन फाउस्टो स्टर्लिंग (Anne Fausto Sterling) (2002: 469) के अनुसार, यूरोप में भी सिर्फ़ मध्य युग के अंत से ही जैविक-उभयलिंगी (अर्थात् जिसका जन्म एक वृषण [testis] और एक अंडाशय [ovary] के साथ हुआ हो) व्यक्ति को किसी एक स्थापित जेंडर - भूमिका को चुनने और उसी रूप में जिंदगी गुज़ारने के लिए मज़बूर किया जाने लगा। उनके अनुसार, अमूमन इस तरह की भूमिका से पीछे हटने की सज़ा मौत होती थी। इस दौर के पहले तक लोगों का सेक्स पूरी तरह से द्वि-लिंगी मॉडल में नहीं बंधा था। इसलिए, फाउस्टो स्टर्लिंग यह तर्क देती हैं कि | चौदह जेंडर निवेदिता मेनन प्रकृति से 'सेक्स' का वही रिश्ता है जो संस्कृति से 'जेंडर' का है + पश्चिम के अलावा दूसरे समाजों में पुरुष / नारी की अवधारणा नारीवादी सिद्धांत में सेक्स / जेंडर अंतर का विकास नारीवादी राजनीति का एक प्रमुख योगदान यह है कि इसने इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि 'सेक्स' और 'जेंडर' के बीच अंतर है। नारीवादी चिंतन की विविध धाराओं ने सेक्स/जेंडर के बीच इस अंतर का अलग-अलग तरीक़े से विकास किया है । इस अध्याय की शुरुआत में इस बुनियादी अंतर और इसके महत्व को रेखांकित किया गया है। इसके बाद, संक्षेप में इस बात की विवेचना की गई है कि पुरुष / नारी के बीच गहरा अंतर आधुनिकता और पश्चिमी संस्कृति की विशिष्टता है। सेक्स / जेंडर के बीच के अंतर पर अलग-अलग तरीक़े से विचार किया गया है। अध्याय के अगले भाग में सेक्स / जेंडर के बीच के अंतर को देखने के चार तरीकों पर विचार किया गया है। अध्याय के अंत में नारीवादी राजनीति के उभरते क्षेत्र अर्थात् पुरुषत्व की संक्षेप में विवेचना की गई है। इस भाग में इस बात पर विचार किया गया है कि पुरुषत्व का निर्माण कैसे होता है और पित्तृसत्तात्मक समाज में पुरुषों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता प्रकृति से 'सेक्स' का वही रिश्ता है जो संस्कृति से 'जेंडर' का है शुरू में, सेक्स शब्द का उपयोग पुरुषों और महिलाओं में जैविक अंतर बताने के लिए किया जाता था। इसी तरह, जेंडर शब्द का उपयोग इस बुनियादी अंतर से संबंधित व्यापक सांस्कृतिक अर्थ को बताने के लिए किया गया। नारीवाद द्वारा इन दोनों के बीच में अंतर करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच जैविक अंतर के आधार पर ही महिलाओं की अधीनता को बुनियादी रूप से सही माना जाता रहा है। बहुत सारे दार्शनिक तर्कों के सहारे महिलाओं के दमन को प्रकृति प्रदत मानते हुए इसे वैधता दी जाती रही है। माना जाता रहा है कि चूंकि ये स्थितियाँ प्राकृतिक हैं, इसलिए इनसे बचा नहीं जा सकता। इसके लिए यह तर्क दिया गया कि इस तरह के दमन प्राकृतिक और अपरिवर्तनशील कारकों के कारण होते हैं। इन कारकों के प्रभाव को जैविक-निर्धारणवाद की संज्ञा दी गई। नस्लवाद और जाति-व्यवस्था इसके अच्छे उदाहरण हैं। ये विचारधाराएँ भी इस मान्यता पर आधारित हैं कि लोगों के कुछ ख़ास समूह जन्म से ही उच्चतर और बेहतर होते हैं। इन विचारधाराओं में यह माना जाता है कि कुछ ख़ास समूहों के सदस्यों में जन्म से ही ज़्यादा बुद्धिमानी और विशेष दक्षताएँ होती हैं। इस कारण, समाज में इन समूहों को विशिष्ट और शक्तिशाली स्थान देने को सही माना जाता रहा है। पिछली कई सदियों से महिलाओं के दमन को वैधता दिलाने में जैविक-निर्धारणवाद ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तरह, नारीवादी राजनीति के लिए जैविक - निर्धारणवाद की चुनौती बहुत ही महत्वपूर्ण है। नारीवादी-मानवशास्त्रियों , ख़ासतौर पर, मार्गरेट मीड ने यह दिखाया है कि विभिन्न संस्कृतियों में पुरुषत्व और नारीत्व को अलग-अलग तरीक़े से समझा जाता रहा है। विभिन्न समाजों में पुरुषत्व और नारीत्व की अलग-अलग विशेषताएँ स्वीकार की जाती रही हैं। इसका अर्थ है कि यह मुमकिन है कि किसी समाज में पुरुषत्व की किसी एक विशेषता को स्वीकार किया जाता हो, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि दूसरे समाज में भी इसी विशेषता को स्वीकार किया जाए। यही बात नारीत्व के बारे में भी सच है। इसलिए, नारीवादियों ने यह तर्क दिया है कि यह ज़रूरी नहीं कि पुरुषों और महिलाओं की जैविक संरचना और पुरुषत्व और नारीत्व की विशेषताओं में कोई सीधा जुड़ाव हो । दरअसल, बचपन में पालन-पोषण के समय से ही पुरुषों और महिलाओं के बीच कुछ ख़ास तरह के अंतरों की नींव डालने की कोशिश जाती है और उन्हें बरकरार रखा जाता है। बचपन से ही लड़कों और लड़कियों को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि उनके बीच व्यवहार, खेलकूद, पहनावे आदि के आधार पर जेंडर - आधारित अंतर क़ायम हो जाए। यह प्रशिक्षण नियमित रूप से चलता रहता है और अधिकांश मौकों पर यह अप्रत्यक्ष और रोज़मर्रा की जिंदगी के हिस्से के रूप में होता है। लेकिन ज़रूरत पड़ने पर इसके लिए सज़ा और ज़ोर-ज़बर्दस्ती का भी प्रयोग होता है। इसके पीछे मुख्य लक्ष्य यही होता है कि हर लड़का या लड़की खुद को अपने लिए पहले से तय जेंडर की भूमिका में ही ढाले । इसलिए, नारीवादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ख़ास तौर पर सेक्स - आधारित गुण विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और मान्यताओं के कारण होते हैं। ये सामाजिक संस्थाएँ और मान्यताएँ इन सेक्स - आधारित गुणों का महत्व तय करती हैं और इन्हीं के कारण लड़कों और लड़कियों का अलग-अलग तरीक़े से सामाजीकरण किया जाता है। सिमोन द बुआ ने इस संदर्भ में लिखा है कि 'कोई जन्म से ही औरत नहीं होती है, बल्कि औरत बना दी जाती है।' इसके अलावा, आमतौर पर समाज में 'पुरुषत्व' से जुड़ी विशेषताओं को 'नारीत्व' से जुड़ी विशेषताओं की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि जो पुरुष या महिला तय मानक के अनुसार व्यवहार नहीं करते हैं, उन्हें निरंतर 'समुचित' व्यवहार करने के साँचे में ढालने की प्रक्रिया चलती रहे। मसलन, जब एक पुरुष सार्वजनिक रूप से रोकर अपना दुःख व्यक्त करता है, तो यह व्यंग्य - वाक्य कहकर उसकी बेइज़्ज़ती की जाती है कि 'औरतों जैसे रो रहे हो?' इस संदर्भ में सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई ये पंक्तियाँ भी प्रसिद्ध हैं कि 'खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी।' इस पंक्ति का क्या अर्थ है? इसका मतलब यह कि किसी महिला द्वारा बहादुरी दिखाने के बावजूद बहादुरी को नारी का गुण नहीं माना जा सकता है। इसे अब भी एक पुरुषवादी सद्गुण के रूप में देखा जाता है। बहुत सी महिलाओं द्वारा बहादुरी दिखाने पर भी यह मान्यता क़ायम रहती है। इसी तरह, बहुत से पुरुषों द्वारा पीठ दिखाकर भाग जाने पर भी यह मान्यता क़ायम रहती है। श्रम के सेक्शुअल या लैंगिक विभाजन को किसी भी आधार पर 'प्राकृतिक' नहीं माना जा सकता है। घर के भीतर और घर के बाहर पुरुष और महिला द्वारा अलग-अलग काम किया जाता है। लेकिन इसका पुरुषों और महिलाओं की जैविक संरचना से बहुत कम लेना-देना है। दरअसल, यह मसला समाज में पुरुषों और महिलाओं की स्थिति के बारे में विचारधारात्मक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। सिर्फ़ गर्भ धारण की वास्तविक प्रक्रिया ही जैविक होती है। इसके अलावा, घर के सारे काम पुरुषों द्वारा भी किए जा सकते हैं। इन कामों में खाना बनाना, सफ़ाई करना, बच्चों की देखभाल करना आदि जैसे काम शामिल होते हैं । इन कामों को 'औरतों का काम' माना जाता है। दो सौ चौबीस निवेदिता मेनन सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन वाले कामों में भी श्रम का सेक्शुअल विभाजन देखा जा सकता है। निश्चित रूप से, इसका सेक्स यानी जैविक संरचना से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरा मसला जेंडर यानी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। इसीलिए से कुछ निश्चित कामों को 'महिलाओं का काम' माना जाता है, और अन्य कामों को पुरुषों का काम। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले कामों को कम महत्व दिया जाता है और इसके लिए उन्हें कम वेतन भी दिया जाता है। मसलन, नर्स और छोटे बच्चों को पढ़ाने के काम को मुख्य रूप से महिलाओं का काम माना जाता है और इनके लिए महिलाओं को कम वेतन दिया जाता है। इसकी तुलना में, मुख्य रूप से मध्य-वर्ग द्वारा की जाने वाली 'व्हाइट कॉलर' या सफ़ेदफोश नौकरियों में ज़्यादा वेतन दिया जाता है। नारीवादियों की यह दलील है कि छोटे बच्चों को पढ़ाने और नर्स के काम के 'नारीकरण' का कारण यह मान्यता है कि इस तरह के काम महिलाओं द्वारा घर के भीतर किए जाने वाले बच्चों के पालन-पोषण के काम का ही विस्तार हैं। एक ओर, यह माना जाता है कि महिलाएँ शारीरिक रूप से कमज़ोर होती हैं और ऐसे काम नहीं कर सकतीं, जिनमें बहुत ज़्यादा शारीरिक श्रम लगता हो । दूसरी ओर, उन्हें घर में और घर के बाहर इसी तरह का काम करना पड़ता है; मसलन, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ बहुत दूर से पानी और जलावन की लकड़ियाँ लाने, अनाज पीसने, धान को रोपने और कई जगहों पर हो रहे निर्माण कार्य में भारी-भरकम सामान ढोने का काम करती हैं। लेकिन जब महिलाओं द्वारा किए जाने वाले शारीरिक श्रम का मशीनीकरण हो गया, तो इन कामों को ज़्यादा ऊँचा माना जाने लगा और इसके लिए अच्छा वेतन भी दिया जाने लगा। इस कारण, अब पुरुष प्रशिक्षण लेकर मशीनों पर काम करने लगे और महिलाओं को इन कामों से बाहर कर दिया गया। ऐसा सिर्फ़ कारखानों में ही नहीं हुआ है, बल्कि समुदायों में पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले काम के संबंध में भी यही बात सच है। मसलन, जब हाथ से धान की कुटाई करने की जगह मिलों ने ले ली, तो पुरुषों को यह काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाने लगा। इसी तरह, पहले मछली पकड़ने के लिए पारंपरिक जाल महिलाओं द्वारा बनाया जाता था। लेकिन जब मशीन द्वारा नॉयलॉन के जाल बनने लगे तो कारख़ानों में यह काम पुरुषों द्वारा किया जाने लगा। साफ़ तौर पर, महिलाओं को इन कामों से हटाकर उन्हें ऐसे कामों में लगाया गया, जिनमें ज़्यादा शारीरिक श्रम लगता है और कम वेतन या कम मज़दूरी मिलती है। इससे यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि महिलाओं की वर्तमान अधीनता की शुरुआत अपरिवर्तनशील जैविक अंतरों यानी सेक्स से नहीं हुई है। दरअसल, यह अधीनता सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों, विचारधाराओं और संस्थाओं की उपज है, जो महिलाओं की भौतिक और विचारधारात्मक अधीनता यानी जेंडर के प्रभुत्व को सुनिश्चित करती हैं। इसलिए, नारीवादी सेक्स - विभेदीकृत काम और श्रम के सेक्शुअल विभाजन पर सवाल खड़ा करती हैं। नारीवादी सेक्शुअलिटी और प्रजनन के मुद्दों को 'जीव-विज्ञान' से बाहर निकालने पर जोर देती हैं। इन मसलों को जीव विज्ञान के दायरे में रखा जाता है और इन्हें प्राकृतिक और अपरिवर्तनीय माना जाता है। नारीवादी एजेंडा यह है कि इन मसलों को 'राजनीतिक' दायरे में वापस लाया जाए, जिसका मतलब यह है कि इनमें बदलाव हो सकता है और इनमें बदलाव होना ही चाहिए। पश्चिम के अलावा दूसरे समाजों में पुरुष / नारी की अवधारणा इस संदर्भ में एक रुचिकर बात यह है कि कुछ विद्वानों का यह मानना है कि पुरुषत्व / नारीत्व के बीच का कठोर द्विध्रुवीय मॉडल सिर्फ़ आधुनिक पश्चिमी सभ्यता की विशेषता है। ये विद्वान इस बात पर भी जोर देते हैं कि आधुनिक पश्चिमी सभ्यता ने ही नारीत्व से जुड़े पहलुओं के महत्व को कमतर किया है। दरअसल, पश्चिमी सभ्यता में भी आधुनिकता के आने के बाद ही क़ानून और राज्य द्वारा दो सेक्स या द्वि-लिंगी मॉडल को अपनाया गया। ऐन फाउस्टो स्टर्लिंग के अनुसार, यूरोप में भी सिर्फ़ मध्य युग के अंत से ही जैविक-उभयलिंगी व्यक्ति को किसी एक स्थापित जेंडर - भूमिका को चुनने और उसी रूप में जिंदगी गुज़ारने के लिए मज़बूर किया जाने लगा। उनके अनुसार, अमूमन इस तरह की भूमिका से पीछे हटने की सज़ा मौत होती थी। इस दौर के पहले तक लोगों का सेक्स पूरी तरह से द्वि-लिंगी मॉडल में नहीं बंधा था। इसलिए, फाउस्टो स्टर्लिंग यह तर्क देती हैं कि |
उचित पोषण अनिवार्य परिस्थितियों में से एक हैएक स्लिम फिगर और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए। दुर्भाग्य से, कई dieters अच्छे पोषण के सिद्धांतों का पालन नहीं करते हैंः एक कठोर आहार और यहां तक कि भूख पर बैठने के बजाय सही आहार की आदतों में विकसित करने के लिए।
शायद सबसे विवादास्पद भोजन हैरात के खाने के। कुछ फैशनेबल आहार में, इसे छोड़ने की सिफारिश की जाती है, लेकिन पेशेवर पोषण विशेषज्ञ इतना स्पष्ट नहीं हैं, विश्वास करते हैं कि रात का खाना आसान होना चाहिए। और यहां तक कि जापानी के उदाहरण के लिए आगे बढ़ें, जो परंपरागत रूप से छोटे भागों में कम-कैलोरी भोजन पर रात के भोजन परोसते हैं।
इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह के बाद, शाम का रिसेप्शनभोजन को सोने से 4 घंटे पहले शुरू करना चाहिए और उन खाद्य पदार्थों से युक्त होना चाहिए, जिनमें वयस्कों के लिए 20% से अधिक दैनिक कैलोरी न हो। एक वयस्क की दैनिक कैलोरी दर 2500-4500000 कैलोरी के बीच होती है (किसी व्यक्ति के लिंग, आयु और जीवनशैली पर निर्भर करती है)
एक शाम के भोजन के लिए सबसे अच्छा यह उन लोगों के हैंउत्पाद है कि पेट में देर तक रुके नहीं है, और जब तक सोने से वे सुरक्षित रूप से आंत में चले जाते हैं। एक या दो घंटे पर पेट में रहते हैंः डेयरी उत्पाद, नरम उबले अंडे, उच्च गुणवत्ता वाले दही (प्राकृतिक), मीठा फल। दुबला उबला हुआ मांस, मछली, चावल, आलू, सब्जियों (बीन्स नहीं), चावल, मीठा फलः तीन या चार घंटे पेट में फंस के लिए। "अंतरण" वसायुक्त और तला हुआ मांस, मछली, सेम, साथ ही अनाज, पास्ता, आलू के साथ उनके संभव संयोजनों, रोटी 4 घंटे से ज्यादा जगह लेता है।
इस प्रकार, एक उपयोगी रात्रिभोज में उबला हुआ या बेक्ड मांस (मछली), ताजी सब्जियां, खट्टा-दूध उत्पादों या वैकल्पिक रूप से, इस सबके बजाय एक फल मिश्रण शामिल हो सकते हैं।
एक आसान भोजन के रूप में, एक आमलेटपनीर या समुद्री खाने के साथ-साथ ताजा जड़ी बूटियों या टमाटर से भरे एक आमलेट के साथ। सामान्यतः, स्वादिष्ट और उपयोगी सलाद के लिए कई व्यंजन हैं, जिनमें एक बहुत ही रोचक उपस्थिति है। उदाहरण के लिए, मूल vinaigrette "क्यूब-रूबिक", वनस्पति तेल के साथ अनुभवी और सामग्री का एक मानक सेट होनेः उबले हुए आलू, चुकंदर, गाजर और मसालेदार खीरे। यह सलाद एक विशेष के साथ खाना बनाना बहुत सुविधाजनक है डाइसिंग क्यूब्स के लिए सब्जी कटर। यह अद्भुत उपकरण किसी भी सलाद को तैयार करना आसान बनाता है, जिससे इसे कई बार अधिक सुखद बना दिया जाता है!
रात के खाने के लिए मांस उत्पादों के प्रेमियों के लिए, आप कर सकते हैंएक बर्तन में एक खरगोश या चिकन पकाओ। ऐसा करने के लिए, लहसुन से भरा लहसुन, कई टुकड़ों में काटा, नीचे पॉट, थोड़ा नमक और काली मिर्च डाल दिया। शीर्ष पर, हम प्याज के छल्ले और गाजर, साथ ही साथ स्वाद के लिए अजवाइन डालते हैं। फिर 1-2 चम्मच कम वसा वाले खट्टे क्रीम और डाइस टमाटर जोड़ें, जिसके बाद हम 2/3 पानी के साथ पॉट भरें और इसे पहले से गरम करें फ्राइंग अलमारी 40-50 मिनट के लिए। सुगंधित और पौष्टिक, और, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक आहार पकवान तैयार है! आदर्श रूप से, उनके लिए, मांस खाने के "सुनहरे नियम" के बाद, वे सेम और आलू को छोड़कर, किसी भी सब्जियों की सेवा करते हैं।
अंत में, मैं महत्व के बारे में जोड़ना चाहता हूंजिस मूड के साथ हम खाते हैं। इसे निराश न होने दें, भले ही आप स्वस्थ रात्रिभोज, उत्पाद के दृष्टिकोण से वांछित, लेकिन हानिकारक के एक छोटे टुकड़े की अनुमति दें।
| उचित पोषण अनिवार्य परिस्थितियों में से एक हैएक स्लिम फिगर और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए। दुर्भाग्य से, कई dieters अच्छे पोषण के सिद्धांतों का पालन नहीं करते हैंः एक कठोर आहार और यहां तक कि भूख पर बैठने के बजाय सही आहार की आदतों में विकसित करने के लिए। शायद सबसे विवादास्पद भोजन हैरात के खाने के। कुछ फैशनेबल आहार में, इसे छोड़ने की सिफारिश की जाती है, लेकिन पेशेवर पोषण विशेषज्ञ इतना स्पष्ट नहीं हैं, विश्वास करते हैं कि रात का खाना आसान होना चाहिए। और यहां तक कि जापानी के उदाहरण के लिए आगे बढ़ें, जो परंपरागत रूप से छोटे भागों में कम-कैलोरी भोजन पर रात के भोजन परोसते हैं। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह के बाद, शाम का रिसेप्शनभोजन को सोने से चार घंटाटे पहले शुरू करना चाहिए और उन खाद्य पदार्थों से युक्त होना चाहिए, जिनमें वयस्कों के लिए बीस% से अधिक दैनिक कैलोरी न हो। एक वयस्क की दैनिक कैलोरी दर दो हज़ार पाँच सौ-पैंतालीस लाख कैलोरी के बीच होती है एक शाम के भोजन के लिए सबसे अच्छा यह उन लोगों के हैंउत्पाद है कि पेट में देर तक रुके नहीं है, और जब तक सोने से वे सुरक्षित रूप से आंत में चले जाते हैं। एक या दो घंटे पर पेट में रहते हैंः डेयरी उत्पाद, नरम उबले अंडे, उच्च गुणवत्ता वाले दही , मीठा फल। दुबला उबला हुआ मांस, मछली, चावल, आलू, सब्जियों , चावल, मीठा फलः तीन या चार घंटे पेट में फंस के लिए। "अंतरण" वसायुक्त और तला हुआ मांस, मछली, सेम, साथ ही अनाज, पास्ता, आलू के साथ उनके संभव संयोजनों, रोटी चार घंटाटे से ज्यादा जगह लेता है। इस प्रकार, एक उपयोगी रात्रिभोज में उबला हुआ या बेक्ड मांस , ताजी सब्जियां, खट्टा-दूध उत्पादों या वैकल्पिक रूप से, इस सबके बजाय एक फल मिश्रण शामिल हो सकते हैं। एक आसान भोजन के रूप में, एक आमलेटपनीर या समुद्री खाने के साथ-साथ ताजा जड़ी बूटियों या टमाटर से भरे एक आमलेट के साथ। सामान्यतः, स्वादिष्ट और उपयोगी सलाद के लिए कई व्यंजन हैं, जिनमें एक बहुत ही रोचक उपस्थिति है। उदाहरण के लिए, मूल vinaigrette "क्यूब-रूबिक", वनस्पति तेल के साथ अनुभवी और सामग्री का एक मानक सेट होनेः उबले हुए आलू, चुकंदर, गाजर और मसालेदार खीरे। यह सलाद एक विशेष के साथ खाना बनाना बहुत सुविधाजनक है डाइसिंग क्यूब्स के लिए सब्जी कटर। यह अद्भुत उपकरण किसी भी सलाद को तैयार करना आसान बनाता है, जिससे इसे कई बार अधिक सुखद बना दिया जाता है! रात के खाने के लिए मांस उत्पादों के प्रेमियों के लिए, आप कर सकते हैंएक बर्तन में एक खरगोश या चिकन पकाओ। ऐसा करने के लिए, लहसुन से भरा लहसुन, कई टुकड़ों में काटा, नीचे पॉट, थोड़ा नमक और काली मिर्च डाल दिया। शीर्ष पर, हम प्याज के छल्ले और गाजर, साथ ही साथ स्वाद के लिए अजवाइन डालते हैं। फिर एक-दो चम्मच कम वसा वाले खट्टे क्रीम और डाइस टमाटर जोड़ें, जिसके बाद हम दो/तीन पानी के साथ पॉट भरें और इसे पहले से गरम करें फ्राइंग अलमारी चालीस-पचास मिनट के लिए। सुगंधित और पौष्टिक, और, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक आहार पकवान तैयार है! आदर्श रूप से, उनके लिए, मांस खाने के "सुनहरे नियम" के बाद, वे सेम और आलू को छोड़कर, किसी भी सब्जियों की सेवा करते हैं। अंत में, मैं महत्व के बारे में जोड़ना चाहता हूंजिस मूड के साथ हम खाते हैं। इसे निराश न होने दें, भले ही आप स्वस्थ रात्रिभोज, उत्पाद के दृष्टिकोण से वांछित, लेकिन हानिकारक के एक छोटे टुकड़े की अनुमति दें। |
कोरबा। लैंको पावर प्लांट के पीआरओ और एचआर हेड पर एक महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला की शिकायत पर उरगा थाने में कंपनी के दोनों अफसरों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
घटना के संबंध में पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि महिला भविष्य निधि की राशि के संबंध में अक्सर दफ्तर आती थी। इसी दौरान उसके साथ यह घटना हुई है। महिला की शिकायत पर पूरे मामले की जांच जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ यह खबर भी है कि अपराध दर्ज होते ही दोनों आरोपी अधिकारी फरार बताये जा रहे हैं।
| कोरबा। लैंको पावर प्लांट के पीआरओ और एचआर हेड पर एक महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला की शिकायत पर उरगा थाने में कंपनी के दोनों अफसरों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। घटना के संबंध में पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि महिला भविष्य निधि की राशि के संबंध में अक्सर दफ्तर आती थी। इसी दौरान उसके साथ यह घटना हुई है। महिला की शिकायत पर पूरे मामले की जांच जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ यह खबर भी है कि अपराध दर्ज होते ही दोनों आरोपी अधिकारी फरार बताये जा रहे हैं। |
Amazon Great Indian Festival Sale में आपको Red Tape से लेकर Puma तक के Women Shoes बंपर डिस्काउंट पर मिल रहे हैं। यह जूते आपको अच्छा स्पोर्टी लुक दे सकते हैं।
वर्कआउट के लिए फुटवियर कंफर्टेबल होने चाहिए नहीं तो पैरों में गंभीर समस्याएं हो सकती है। अगर आपके स्पोर्ट्स शूज पुराने हो गए हैं और आप नया खरीदने की प्लानिंग कर रही हैं तो Amazon Great Indian Festival Sale में आपको Red Tape से लेकर Puma तक के Women Shoes पर हैवी डिस्काउंट मिलेगा। यह बहुत ही मजबूत और कंफर्टेबल जूते हैं। इन्हें पहनकर आप रनिंग, वॉकिंग, साइकिलिंग आदि कर सकती हैं।
यह जूते आपको अच्छा स्पोर्टी लुक दे सकते हैं। इन जूतों के एक से बढ़कर एक रंग और डिजाइन यहां आपको मिलेंगे। अगर आप एसबीआई के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से शॉपिंग करती है तो आपको 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा।
| Amazon Great Indian Festival Sale में आपको Red Tape से लेकर Puma तक के Women Shoes बंपर डिस्काउंट पर मिल रहे हैं। यह जूते आपको अच्छा स्पोर्टी लुक दे सकते हैं। वर्कआउट के लिए फुटवियर कंफर्टेबल होने चाहिए नहीं तो पैरों में गंभीर समस्याएं हो सकती है। अगर आपके स्पोर्ट्स शूज पुराने हो गए हैं और आप नया खरीदने की प्लानिंग कर रही हैं तो Amazon Great Indian Festival Sale में आपको Red Tape से लेकर Puma तक के Women Shoes पर हैवी डिस्काउंट मिलेगा। यह बहुत ही मजबूत और कंफर्टेबल जूते हैं। इन्हें पहनकर आप रनिंग, वॉकिंग, साइकिलिंग आदि कर सकती हैं। यह जूते आपको अच्छा स्पोर्टी लुक दे सकते हैं। इन जूतों के एक से बढ़कर एक रंग और डिजाइन यहां आपको मिलेंगे। अगर आप एसबीआई के क्रेडिट या डेबिट कार्ड से शॉपिंग करती है तो आपको दस% का इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा। |
वानखेड़े स्टेडियम में जब भारत टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी तो लगा कि वह मेहमान आस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़ा स्कोर टांगेगी, लेकिन एक बार फिर मध्य क्रम और निचले क्रम की विफलता के कारण मेजबान कम स्कोर तक ही सीमित रह गई। आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने भारत को 49.1 ओवरों में 255 रनों पर ऑल आउट कर बड़ा स्कोर नहीं करने दिया।
भारतीय बल्लेबाजों की बात की जाए तो सिर्फ शिखर धवन ही अर्धशतक जमा सके। उन्होंने 91 गेंदों पर नौ चौके और एक छक्के की मदद से 74 रनों की पारी खेली। उनके सलामी जोड़ीदार रोहित शर्मा सिर्फ 10 रन ही बना पाए। मिशेल स्टार्क ने रोहित को 13 के कुल स्कोर पर डेविड वार्नर के हाथों कैच कराया।
रोहित की वापसी से लोकेश राहुल को नंबर-3 पर भेजा गया। राहुल और धवन ने टीम के स्कोरबोर्ड को अच्छे से चलाते हुए दूसरे विकेट के लिए 121 रनों की साझेदारी की। राहुल अर्धशतक पूरा करने से तीन रन पहले ही एश्टन अगर की गेंद पर स्टीव स्मिथ को कैच देकर पवेलियन लौट लिए। उन्होंने 61 गेंदों का सामना कर चार चौके मारे। कुछ देर बाद पैट कमिंस ने धवन को आउट कर भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 140 रन कर दिया।
लेग स्पिनर एडम जाम्पा ने चौथे नंबर पर आए कप्तान विराट कोहली को 16 के निजी स्कोर से आगे नहीं जाने दिया। कोहली के जाने के बाद एक बार फिर भारतीय मध्य क्रम और निचले क्रम की परीक्षा थी जिसमें वो पूरी तरह से विफल रहा।
श्रेयस अय्यर चार, रवींद्र जडेजा 25, ऋषभ पंत 28 अंतिम ओवरों में तेजी से रन नहीं जुटा पाए सस्ते में आउट हो लिए। कुलदीप यादव ने 17, शार्दूल ठाकुर ने 13 और मोहम्मद शमी ने 10 रनों का योगदान देते हुए भारत को ढाई सौ पार पहुंचा।
आस्ट्रेलिया के लिए स्टार्क ने सबसे ज्यादा तीन विकेट लिए। कमिंस और रिचर्डसन को दो-दो सफलताएं मिलीं। जाम्पा और एश्टन के हिस्से एक-एक विकेट आया।
| वानखेड़े स्टेडियम में जब भारत टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी तो लगा कि वह मेहमान आस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़ा स्कोर टांगेगी, लेकिन एक बार फिर मध्य क्रम और निचले क्रम की विफलता के कारण मेजबान कम स्कोर तक ही सीमित रह गई। आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने भारत को उनचास.एक ओवरों में दो सौ पचपन रनों पर ऑल आउट कर बड़ा स्कोर नहीं करने दिया। भारतीय बल्लेबाजों की बात की जाए तो सिर्फ शिखर धवन ही अर्धशतक जमा सके। उन्होंने इक्यानवे गेंदों पर नौ चौके और एक छक्के की मदद से चौहत्तर रनों की पारी खेली। उनके सलामी जोड़ीदार रोहित शर्मा सिर्फ दस रन ही बना पाए। मिशेल स्टार्क ने रोहित को तेरह के कुल स्कोर पर डेविड वार्नर के हाथों कैच कराया। रोहित की वापसी से लोकेश राहुल को नंबर-तीन पर भेजा गया। राहुल और धवन ने टीम के स्कोरबोर्ड को अच्छे से चलाते हुए दूसरे विकेट के लिए एक सौ इक्कीस रनों की साझेदारी की। राहुल अर्धशतक पूरा करने से तीन रन पहले ही एश्टन अगर की गेंद पर स्टीव स्मिथ को कैच देकर पवेलियन लौट लिए। उन्होंने इकसठ गेंदों का सामना कर चार चौके मारे। कुछ देर बाद पैट कमिंस ने धवन को आउट कर भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ चालीस रन कर दिया। लेग स्पिनर एडम जाम्पा ने चौथे नंबर पर आए कप्तान विराट कोहली को सोलह के निजी स्कोर से आगे नहीं जाने दिया। कोहली के जाने के बाद एक बार फिर भारतीय मध्य क्रम और निचले क्रम की परीक्षा थी जिसमें वो पूरी तरह से विफल रहा। श्रेयस अय्यर चार, रवींद्र जडेजा पच्चीस, ऋषभ पंत अट्ठाईस अंतिम ओवरों में तेजी से रन नहीं जुटा पाए सस्ते में आउट हो लिए। कुलदीप यादव ने सत्रह, शार्दूल ठाकुर ने तेरह और मोहम्मद शमी ने दस रनों का योगदान देते हुए भारत को ढाई सौ पार पहुंचा। आस्ट्रेलिया के लिए स्टार्क ने सबसे ज्यादा तीन विकेट लिए। कमिंस और रिचर्डसन को दो-दो सफलताएं मिलीं। जाम्पा और एश्टन के हिस्से एक-एक विकेट आया। |
PRAYAGRAJ: 'मैं अतीक का शूटर तोता बोल रहा हूं। अशोक त्रिपाठी से मामला हला-भला कर लो नहीं तो घर से उठाकर 24 घंटे के भीतर मार देंगे. ' कुछ इसी अंदाज में अधिवक्ता संतोष कुमार शुक्ला को फोन पर धमकी दी गई है। इससे परेशान अधिवक्ता ने कर्नलगंज थाने में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (यूपी आरएनएसएल) के पूर्व परियोजना अभियंता अशोक कुमार त्रिपाठी व शूटर तोता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस नंबर के आधार पर धमकी देने वाले के बारे में पता लगा रही है।
थरवई थाना क्षेत्र के सहसों निवासी संतोष शुक्ला जिला अदालत में वकालत करते हैं। उनका आरोप है कि यूपी आरएनएसएल की ओर से काल्विन अस्पताल में कई जगह पर निर्माण कार्य करवाया जा रहा था। उसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था, जिसकी शिकायत उन्होंने कमिश्नर से लेकर अन्य अधिकारियों से की थी। ठेकेदार आनंद सेठ की ओर से भी शाहगंज थाने में अशोक त्रिपाठी समेत कई अन्य के खिलाफ एफआइआर कराई गई थी। अधिवक्ता का दावा है कि जांच के बाद अशोक त्रिपाठी का डिमोशन कर दिया गया और प्रयागराज से हटाकर वाराणसी भेज दिया गया। मंगलवार को उनके पास एक अंजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को अतीक का शूटर तोता बताया और गाली-गलौज करते हुए धमकी दी। धमकाने वाले ने ठेकेदार आनंद सेठ को मारने की बात कह रहा था। इस पर अधिवक्ता ने एसएसपी से शिकायत की। फिर उनके आदेश पर कर्नलगंज थाने में अशोक त्रिपाठी व शूटर के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। इंस्पेक्टर कर्नलगंज अवन दीक्षित का कहना है कि जल्द ही धमकी देने वाले के बारे में पता लगा लिया जाएगा।
| PRAYAGRAJ: 'मैं अतीक का शूटर तोता बोल रहा हूं। अशोक त्रिपाठी से मामला हला-भला कर लो नहीं तो घर से उठाकर चौबीस घंटाटे के भीतर मार देंगे. ' कुछ इसी अंदाज में अधिवक्ता संतोष कुमार शुक्ला को फोन पर धमकी दी गई है। इससे परेशान अधिवक्ता ने कर्नलगंज थाने में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड के पूर्व परियोजना अभियंता अशोक कुमार त्रिपाठी व शूटर तोता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस नंबर के आधार पर धमकी देने वाले के बारे में पता लगा रही है। थरवई थाना क्षेत्र के सहसों निवासी संतोष शुक्ला जिला अदालत में वकालत करते हैं। उनका आरोप है कि यूपी आरएनएसएल की ओर से काल्विन अस्पताल में कई जगह पर निर्माण कार्य करवाया जा रहा था। उसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था, जिसकी शिकायत उन्होंने कमिश्नर से लेकर अन्य अधिकारियों से की थी। ठेकेदार आनंद सेठ की ओर से भी शाहगंज थाने में अशोक त्रिपाठी समेत कई अन्य के खिलाफ एफआइआर कराई गई थी। अधिवक्ता का दावा है कि जांच के बाद अशोक त्रिपाठी का डिमोशन कर दिया गया और प्रयागराज से हटाकर वाराणसी भेज दिया गया। मंगलवार को उनके पास एक अंजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को अतीक का शूटर तोता बताया और गाली-गलौज करते हुए धमकी दी। धमकाने वाले ने ठेकेदार आनंद सेठ को मारने की बात कह रहा था। इस पर अधिवक्ता ने एसएसपी से शिकायत की। फिर उनके आदेश पर कर्नलगंज थाने में अशोक त्रिपाठी व शूटर के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। इंस्पेक्टर कर्नलगंज अवन दीक्षित का कहना है कि जल्द ही धमकी देने वाले के बारे में पता लगा लिया जाएगा। |
अमेरिका में अब तक लगभग दस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा चुकी है.
लेकिन वहां के अफ़्रीकी अमेरिकी समुदाय के लोग और कई रिपब्लिकन सपोर्टर वैक्सीन लेने में परहेज़ कर रहे हैं.
एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उनकी बातों को पहले सुनना और समझाना सबसे ज़रूरी है. वैक्सीन लगाने के काम के जुटे कुछ स्वास्थ्यकर्मी अब उन तक पहुंचने की कोशिश रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
| अमेरिका में अब तक लगभग दस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा चुकी है. लेकिन वहां के अफ़्रीकी अमेरिकी समुदाय के लोग और कई रिपब्लिकन सपोर्टर वैक्सीन लेने में परहेज़ कर रहे हैं. एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उनकी बातों को पहले सुनना और समझाना सबसे ज़रूरी है. वैक्सीन लगाने के काम के जुटे कुछ स्वास्थ्यकर्मी अब उन तक पहुंचने की कोशिश रहे हैं. |
हिन्दी के राजनीतिक उपन्यासो, का अनुशीलन
रमय्या ने इसे बहुमुखी राष्ट्रीय उम्पति को अभिव्यक्ति निरूपित किया है। उनके शब्दो मे 'पिछले बारह बरसो मे जो मार्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सास्कृतिक उन्नति हुई थी, उसकी यह अभिव्यक्ति थी। जरा सो देर मे एक विशुद्ध खेतिहर देश, संसार को भन्युन्नत शक्तियों में गिना जाने लगा था और वही खेती के साथ उद्योगो का भी समान रूप से विकास हो गया था ।" सोवियत रूस की सफलता से एक तरफ मजदूरो और किसानो के अधिकारी पर जोर दिया जाने लगा, दूसरी तरफ फासिस्वाद भोर साम्राज्यवाद का विरोध किया जाने लगा ।
फँजपुर अधिवेशन (१९३७) मे काप्रेस ने विश्वयुद्ध होने पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद को युद्ध सम्बधी सहायता ग देने तथा सीमा से लगे राष्ट्रो से मैत्री सम्बन्धी प्रस्ताव पारित किया था। फेजपुर अधिवेशन के बाद ही चुनाव हुए भौर मद्रास, संयुक्त प्राप्त, मध्यप्रात, बिहार और उड़ीसा मे काग्रेस का बहुमत रहा और पंजाब और सिंघ में वह अल्प संख्यक थी । बगाल, बम्बई प्रासाम मौर सोमाप्रान्त मे कांग्रेस सब से बडो पार्टी थी ।
चुनाव के उपरांत मंत्रिमंडल बने और राष्ट्रीय जीवन में एक नई प्रक्रिया प्रारम्भ हुई ।
वाग्रेस मत्रिमंडल स्थापित होने पर किसानो और मजदूरों की स्थिति में कोई अन्तर नहीं भाया और किसानो ने अपना संगठन कायम किया। इस बार उन्होंने हसिया हथौडा वाला लाल रंग का सोवियत भडा अपनाया और किसानो और कम्यु निस्टो मे यह झड़ा अधिकाधिक चल पडा और पं० जवाहर लाल नेहरू के लगातार कहने सुनने पर भी स्थिति में सुधार नही हुमा १ कुछ प्रान्तो में समाजवादियों ने कम्युनिस्टो का साथ देना शुरू कर दिया और कुछ मे वे राष्ट्रवादियों में मिल गये । हिंसा और महिमा के बोध पुन सघर्ष उठ खडा हुभा । जनता में मंत्रिमडलो के प्रति गहरा भ्रमतोष व्याप्त हो गया। भोर 'जनता पाश्चर्य से पूछने लगी कि यह जमीदार किस तरह भव भी कायम है, पुलिस के जुल्म क्यो बदस्तूर जारी हैं, किसानो के कष्ट और दुख भव भी क्यो दूर नहीं हो पाते, हिंसा के अभियोगो मे दण्डिन लोग अब भी क्यो जेलो मे सह रहे हैं "
सत्ता पाकर कांग्रेस के कार्यकर्तामो कांग्रेस महासमिति ने एक प्रस्ताव मे महा कुछ छाप्रेमजन भी - कागजी सूटपाट
{ डॉ० पट्टाभि सोतारमैय्या-'कांग्रेस का इतिहास, पृष्ठ ३१८
का भी नैतिक पतन होने लगा था। सम 'नागरिक स्वतन्त्रता के नाम पर लोगऔर हिंसात्मक वर्गयुद्ध का प्रचार करते | हिन्दी के राजनीतिक उपन्यासो, का अनुशीलन रमय्या ने इसे बहुमुखी राष्ट्रीय उम्पति को अभिव्यक्ति निरूपित किया है। उनके शब्दो मे 'पिछले बारह बरसो मे जो मार्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सास्कृतिक उन्नति हुई थी, उसकी यह अभिव्यक्ति थी। जरा सो देर मे एक विशुद्ध खेतिहर देश, संसार को भन्युन्नत शक्तियों में गिना जाने लगा था और वही खेती के साथ उद्योगो का भी समान रूप से विकास हो गया था ।" सोवियत रूस की सफलता से एक तरफ मजदूरो और किसानो के अधिकारी पर जोर दिया जाने लगा, दूसरी तरफ फासिस्वाद भोर साम्राज्यवाद का विरोध किया जाने लगा । फँजपुर अधिवेशन मे काप्रेस ने विश्वयुद्ध होने पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद को युद्ध सम्बधी सहायता ग देने तथा सीमा से लगे राष्ट्रो से मैत्री सम्बन्धी प्रस्ताव पारित किया था। फेजपुर अधिवेशन के बाद ही चुनाव हुए भौर मद्रास, संयुक्त प्राप्त, मध्यप्रात, बिहार और उड़ीसा मे काग्रेस का बहुमत रहा और पंजाब और सिंघ में वह अल्प संख्यक थी । बगाल, बम्बई प्रासाम मौर सोमाप्रान्त मे कांग्रेस सब से बडो पार्टी थी । चुनाव के उपरांत मंत्रिमंडल बने और राष्ट्रीय जीवन में एक नई प्रक्रिया प्रारम्भ हुई । वाग्रेस मत्रिमंडल स्थापित होने पर किसानो और मजदूरों की स्थिति में कोई अन्तर नहीं भाया और किसानो ने अपना संगठन कायम किया। इस बार उन्होंने हसिया हथौडा वाला लाल रंग का सोवियत भडा अपनाया और किसानो और कम्यु निस्टो मे यह झड़ा अधिकाधिक चल पडा और पंशून्य जवाहर लाल नेहरू के लगातार कहने सुनने पर भी स्थिति में सुधार नही हुमा एक कुछ प्रान्तो में समाजवादियों ने कम्युनिस्टो का साथ देना शुरू कर दिया और कुछ मे वे राष्ट्रवादियों में मिल गये । हिंसा और महिमा के बोध पुन सघर्ष उठ खडा हुभा । जनता में मंत्रिमडलो के प्रति गहरा भ्रमतोष व्याप्त हो गया। भोर 'जनता पाश्चर्य से पूछने लगी कि यह जमीदार किस तरह भव भी कायम है, पुलिस के जुल्म क्यो बदस्तूर जारी हैं, किसानो के कष्ट और दुख भव भी क्यो दूर नहीं हो पाते, हिंसा के अभियोगो मे दण्डिन लोग अब भी क्यो जेलो मे सह रहे हैं " सत्ता पाकर कांग्रेस के कार्यकर्तामो कांग्रेस महासमिति ने एक प्रस्ताव मे महा कुछ छाप्रेमजन भी - कागजी सूटपाट { डॉशून्य पट्टाभि सोतारमैय्या-'कांग्रेस का इतिहास, पृष्ठ तीन सौ अट्ठारह का भी नैतिक पतन होने लगा था। सम 'नागरिक स्वतन्त्रता के नाम पर लोगऔर हिंसात्मक वर्गयुद्ध का प्रचार करते |
प्रोकबड्डी सीजन 7 अप्रैल को होने वाली ऑक्शन्स में फ्रेंचाइजी द्वारा खिलाड़ियों के रिटेंशन किए जा रहे हैं। दबंग दिल्ली के कार्नर में जोगिंदर नरवाल और रविंदर पहल सबसे अनुभवी और कौशल से भरे डिफेंडर हैं और दोनों ही श्रेणी ए के खिलाड़ी हैं जो दबंग दिल्ली के लिए मुश्किल हैं, बरकरार रखना।
पिछले 3 टूर्नामेंट में पीकेएल के बाहर, रेलवे इंटरजोन, सीनियर नेशनल और पंडित दीन दयाल उपाध्याय चैम्पियनशिप रविंदर पहल अविश्वसनीय रूप से अच्छा था। उनके प्रदर्शन को देखते हुए दबंग दिल्ली को उन्हें बरकरार रखना चाहिए।
जोगिंदर नरवाल दबंग दिल्ली के लिए रिटेंशन चॉइस हो सकते हैं, उन्होंने 111 टैकल प्रयासों में 22 मैच खेले, जिसमें 2.13 के औसत के साथ 51 अंक हासिल किए और एक कप्तान के रूप में टीम पर अच्छा नियंत्रण था। दबंग दिल्ली ने जोगिंदर नरवाल को 33 लाख में खरीदा और 10-12% वेतन वृद्धि के साथ 36-38 लाख में वह मूल्यवान है।
हमले में युवा रेडर नवीन पहले होंगे, जिन्हें दबंग दिल्ली रिटेन करना चाहेगी। नवीन ने 22 मैच खेले, 307 रेड के प्रयासों में प्रति मैच 7.81 अंक के औसत के साथ 177 अंक बनाए। प्रतिधारण मूल्य में संभावित बदलाव के साथ, एनवोईपी (NYP) नवीन के रूप में एक लाभार्थी होगा क्योंकि उसकी प्रतिधारण कीमत 25-30 लाख की सीमा में हो सकती है। इस कीमत पर नवीन दबंग दिल्ली के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है।
दबंग दिल्ली मैट ने 2 में से 1 रेडर मेराज शेख और चंद्रन रंजीत को बनाए रखा, हालांकि दोनों खिलाड़ियों की रिटेंशन कॉस्ट 71-75 लाख की रेंज में थोड़ी ज्यादा है। दबंग दिल्ली ऑक्शन में एक और आरटीएम दूसरे को बनाए रख सकती है।
7 और 8 अप्रैल को प्रो कबड्डी सीजन 7 की ऑक्शन, अधिक अपडेट के लिए कबड्डी अड्डा के साथ बने रहें।
| प्रोकबड्डी सीजन सात अप्रैल को होने वाली ऑक्शन्स में फ्रेंचाइजी द्वारा खिलाड़ियों के रिटेंशन किए जा रहे हैं। दबंग दिल्ली के कार्नर में जोगिंदर नरवाल और रविंदर पहल सबसे अनुभवी और कौशल से भरे डिफेंडर हैं और दोनों ही श्रेणी ए के खिलाड़ी हैं जो दबंग दिल्ली के लिए मुश्किल हैं, बरकरार रखना। पिछले तीन टूर्नामेंट में पीकेएल के बाहर, रेलवे इंटरजोन, सीनियर नेशनल और पंडित दीन दयाल उपाध्याय चैम्पियनशिप रविंदर पहल अविश्वसनीय रूप से अच्छा था। उनके प्रदर्शन को देखते हुए दबंग दिल्ली को उन्हें बरकरार रखना चाहिए। जोगिंदर नरवाल दबंग दिल्ली के लिए रिटेंशन चॉइस हो सकते हैं, उन्होंने एक सौ ग्यारह टैकल प्रयासों में बाईस मैच खेले, जिसमें दो.तेरह के औसत के साथ इक्यावन अंक हासिल किए और एक कप्तान के रूप में टीम पर अच्छा नियंत्रण था। दबंग दिल्ली ने जोगिंदर नरवाल को तैंतीस लाख में खरीदा और दस-बारह% वेतन वृद्धि के साथ छत्तीस-अड़तीस लाख में वह मूल्यवान है। हमले में युवा रेडर नवीन पहले होंगे, जिन्हें दबंग दिल्ली रिटेन करना चाहेगी। नवीन ने बाईस मैच खेले, तीन सौ सात रेड के प्रयासों में प्रति मैच सात.इक्यासी अंक के औसत के साथ एक सौ सतहत्तर अंक बनाए। प्रतिधारण मूल्य में संभावित बदलाव के साथ, एनवोईपी नवीन के रूप में एक लाभार्थी होगा क्योंकि उसकी प्रतिधारण कीमत पच्चीस-तीस लाख की सीमा में हो सकती है। इस कीमत पर नवीन दबंग दिल्ली के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है। दबंग दिल्ली मैट ने दो में से एक रेडर मेराज शेख और चंद्रन रंजीत को बनाए रखा, हालांकि दोनों खिलाड़ियों की रिटेंशन कॉस्ट इकहत्तर-पचहत्तर लाख की रेंज में थोड़ी ज्यादा है। दबंग दिल्ली ऑक्शन में एक और आरटीएम दूसरे को बनाए रख सकती है। सात और आठ अप्रैल को प्रो कबड्डी सीजन सात की ऑक्शन, अधिक अपडेट के लिए कबड्डी अड्डा के साथ बने रहें। |
Shehzada Collection Day 2: इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर तीन फिल्मों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां शाहरुख खान की 'पठान' पर्दे पर राज कर रही है तो वहीं 17 फरवरी को रिलीज हुई कार्तिक आर्यन की फिल्म 'शहजादा' भी मैदान में उतर गई है। इसके अलावा मार्वल्स की 'एंट मैन एंड द वास्पः क्वांटोमेनिया' भी 'शहजादा' के साथ रिलीज हुई है।
बता दें फिल्म 'शहजादा' मेकर्स को बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में काफी उम्मीद थी लेकिन फिल्म का पहले दिन ही बॉक्स ऑफिस पर खरा उतरना मुश्किल हो गया। वहीं दूसरे दिन भी इसकी कमाई में कुछ खास इजाफा नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन ने भारत में सिर्फ 7 करोड़ रुपये कमाए।
वहीं कई रिपोर्ट्स में इसे 7 से 9 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है। हालांकि वीकेंड और 'महा शिवरात्रि' की वजह से फिल्म को थोड़ा हाइप मिला है, लेकिन मेकर्स इसकी ज्यादा उम्मीद लगा रहे थे। मेकर्स को उम्मीद थी कि शायद वीकेंड के लालच में ऑडियंस फिल्म देखने आ सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मालूम हो फिल्म 'शहजादा' सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म 'अला वैकुण्ठपुरामुलू' का हिंदी रिमेक है। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन और कृति सेनन के अलावा परेश रावल, मनीषा कोइराला, रोनित रॉय समेत कई सितारे हैं। फिल्म को रोहित धवन ने डायरेक्ट किया है।
| Shehzada Collection Day दो: इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर तीन फिल्मों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां शाहरुख खान की 'पठान' पर्दे पर राज कर रही है तो वहीं सत्रह फरवरी को रिलीज हुई कार्तिक आर्यन की फिल्म 'शहजादा' भी मैदान में उतर गई है। इसके अलावा मार्वल्स की 'एंट मैन एंड द वास्पः क्वांटोमेनिया' भी 'शहजादा' के साथ रिलीज हुई है। बता दें फिल्म 'शहजादा' मेकर्स को बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में काफी उम्मीद थी लेकिन फिल्म का पहले दिन ही बॉक्स ऑफिस पर खरा उतरना मुश्किल हो गया। वहीं दूसरे दिन भी इसकी कमाई में कुछ खास इजाफा नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन ने भारत में सिर्फ सात करोड़ रुपये कमाए। वहीं कई रिपोर्ट्स में इसे सात से नौ करोड़ रुपये के बीच बताया गया है। हालांकि वीकेंड और 'महा शिवरात्रि' की वजह से फिल्म को थोड़ा हाइप मिला है, लेकिन मेकर्स इसकी ज्यादा उम्मीद लगा रहे थे। मेकर्स को उम्मीद थी कि शायद वीकेंड के लालच में ऑडियंस फिल्म देखने आ सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मालूम हो फिल्म 'शहजादा' सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म 'अला वैकुण्ठपुरामुलू' का हिंदी रिमेक है। इस फिल्म में कार्तिक आर्यन और कृति सेनन के अलावा परेश रावल, मनीषा कोइराला, रोनित रॉय समेत कई सितारे हैं। फिल्म को रोहित धवन ने डायरेक्ट किया है। |
दिल्ली के सुभाष मैदान में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा के अवसर पर रावण दहन किया गया। इस पर मौके पर कुछ समय के लिए दिग्गज नेताओं के बीच सियासी दूरियां भी कम नजर आयी।
यहां रावण दहन के मौके पर राष्ट्रपति की मौजूदगी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व मुख्मंत्री मनमोहन सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन सिंह एक ही मंच पर नजर आए।
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने भाषण में देशवासियों को दशहरा की शुभकामनाएं दी और देश के विकास और एकता के लिए काम करने की अपील की।
राष्ट्रपति ने रावण के माध्यम से बुराई और अच्छाई के वर्तमान परिदृश्य को समझाते हुए एकता का संदेश दिया।
राष्ट्रपति को अपहार के तौर पर त्रिशुल से सम्मानित किया गया।
| दिल्ली के सुभाष मैदान में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा के अवसर पर रावण दहन किया गया। इस पर मौके पर कुछ समय के लिए दिग्गज नेताओं के बीच सियासी दूरियां भी कम नजर आयी। यहां रावण दहन के मौके पर राष्ट्रपति की मौजूदगी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व मुख्मंत्री मनमोहन सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन सिंह एक ही मंच पर नजर आए। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने भाषण में देशवासियों को दशहरा की शुभकामनाएं दी और देश के विकास और एकता के लिए काम करने की अपील की। राष्ट्रपति ने रावण के माध्यम से बुराई और अच्छाई के वर्तमान परिदृश्य को समझाते हुए एकता का संदेश दिया। राष्ट्रपति को अपहार के तौर पर त्रिशुल से सम्मानित किया गया। |
सोशल मीडिया पर एक विडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है। दावा किया जा रहा है कि विडियो एक गुजराती परिवार का है, जो लड़की-लड़के का रोका करवा रहे हैं। लेकिन विडियो कॉल पर। जी हां, आप विडियो में देख सकते हैं कि कैसे दोनों के स्थान पर स्मार्टफोन को विराजमान करवाया गया है, जिसमें वे विडियो कॉल के जरिए कनेक्ट हैं।
हालांकि, अभी तक इस परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन यह विडियो लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो गया है। इस विडियो को राहुल निनगोट नाम के ट्विटर यूजर ने बुधवार को शेयर किया था, जो अब सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर शेयर हो रहा है।
विडियो में एक गुजराती परिवार 'विडियो कॉल' पर रस्में निभाता दिख रहा है, जो रोका सेरेमनी जैसा है। लकड़ी के दो स्टूल्स पर स्टील के डिब्बे के सहारे स्मार्टफोन रखे हैं। लड़की और लड़के को विडियो कॉल के जरिए कनेक्ट किया गया है। इतना ही नहीं, रस्में निभाते हुए एक महिला लड़की वाले मोबाइल को चुन्नी पहनाती है। जबकि दूसरी महिला मोबाइल स्क्रीन पर टीका भी लगाती है।
| सोशल मीडिया पर एक विडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है। दावा किया जा रहा है कि विडियो एक गुजराती परिवार का है, जो लड़की-लड़के का रोका करवा रहे हैं। लेकिन विडियो कॉल पर। जी हां, आप विडियो में देख सकते हैं कि कैसे दोनों के स्थान पर स्मार्टफोन को विराजमान करवाया गया है, जिसमें वे विडियो कॉल के जरिए कनेक्ट हैं। हालांकि, अभी तक इस परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन यह विडियो लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो गया है। इस विडियो को राहुल निनगोट नाम के ट्विटर यूजर ने बुधवार को शेयर किया था, जो अब सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर शेयर हो रहा है। विडियो में एक गुजराती परिवार 'विडियो कॉल' पर रस्में निभाता दिख रहा है, जो रोका सेरेमनी जैसा है। लकड़ी के दो स्टूल्स पर स्टील के डिब्बे के सहारे स्मार्टफोन रखे हैं। लड़की और लड़के को विडियो कॉल के जरिए कनेक्ट किया गया है। इतना ही नहीं, रस्में निभाते हुए एक महिला लड़की वाले मोबाइल को चुन्नी पहनाती है। जबकि दूसरी महिला मोबाइल स्क्रीन पर टीका भी लगाती है। |
Best Foods To Keep Liver Healthy: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लिवर का खयाल रखना बेहद जरूरी है. लिवर को बॉडी का पावरहाउस कहा जा सकता है. लिवर में गड़बड़ी होने पर पूरे शरीर की फंक्शनिंग बिगड़ जाती है. गलत खान-पान का असर लिवर पर बुरी तरह पड़ता है. ऐसे में हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए. आज आपको 5 ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन करने से लिवर हेल्दी रहता है और बीमारियों से राहत मिलती है.
कॉफी को लिवर के लिए अच्छा माना जाता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कॉफी पीने से फैटी लिवर डिजीज से बचाव हो सकता है. साल 2014 की एक स्टडी में पता चला कि प्रतिदिन कॉफी का सेवन करने से क्रोनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर का जोखिम कम हो सकता है. कॉफी लिवर में फैट के निर्माण को कम करती है और सुरक्षात्मक एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाती है. कॉफी में मौजूद यौगिक लिवर को स्वस्थ रखते हैं. (Image- Canva)
ओटमील यानी दलिया का सेवन करने से लिवर को मजबूती मिलती है. डाइट में फाइबर जोड़ने के लिए दलिया अच्छा सोर्स है. फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. इसमें मौजूद तत्व लिवर के लिए भी सहायक हो सकते हैं. जई और दलिया में बीटा-ग्लूकेन्स नामक यौगिक उच्च मात्रा में होते हैं. बीटा-ग्लूकेन्स इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने और सूजन से लड़ने में मदद करते हैं. बीटा-ग्लूकेन्स लिवर में जमे फैट को कम कर सकते हैं. (Image- Canva)
साल 2016 की एक स्टडी में पता चला कि लहसुन का सेवन करने से लिवर को हेल्दी रखा जा सकता है. लहसुन का सेवन करने से नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज वाले लोगों के शरीर के वजन और फैट को कम किया जा सकता है. वजन ज्यादा होने से लिवर को नुकसान होता है. लहसुन के कैप्सूल और सप्लीमेंट भी लिवर को कई तरीकों से फायदा पहुंचा सकते हैं, लेकिन इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए. (Image- Canva)
चुकंदर का रस लिवर को ऑक्सीडेटिव डैमेज और सूजन से बचाने में मदद करता है. कई स्टडीज से पता चला है कि जैतून के तेल का सेवन लिवर में फैट के स्तर को कम करने, ब्लड फ्लो बढ़ाने और लिवर एंजाइम के स्तर में सुधार करने में मदद करता है. आप खाना बनाते समय जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपको और भी कई फायदे होंगे. (Image- Canva)
खट्टे फलों का सेवन करना लिवर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. खट्टे फल लिवर को स्टिम्युलेट करते हैं और टॉक्सिक पदार्थों को पानी द्वारा अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट लिवर को इंजरी से बचाने में मदद करते हैं. नींबू और संतरा के अलावा अंगूर को लिवर के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है. अंगूर में नैरिंगिन और नैरिनजेनिन होते हैं, जो पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट हैं. ये लिवर को बीमारियों से बचाते हैं. (Image- Canva)
कॉफी को लिवर के लिए अच्छा माना जाता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कॉफी पीने से फैटी लिवर डिजीज से बचाव हो सकता है. साल 2014 की एक स्टडी में पता चला कि प्रतिदिन कॉफी का सेवन करने से क्रोनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर का जोखिम कम हो सकता है. कॉफी लिवर में फैट के निर्माण को कम करती है और सुरक्षात्मक एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाती है. कॉफी में मौजूद यौगिक लिवर को स्वस्थ रखते हैं. (Image- Canva)
| Best Foods To Keep Liver Healthy: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लिवर का खयाल रखना बेहद जरूरी है. लिवर को बॉडी का पावरहाउस कहा जा सकता है. लिवर में गड़बड़ी होने पर पूरे शरीर की फंक्शनिंग बिगड़ जाती है. गलत खान-पान का असर लिवर पर बुरी तरह पड़ता है. ऐसे में हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए. आज आपको पाँच ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन करने से लिवर हेल्दी रहता है और बीमारियों से राहत मिलती है. कॉफी को लिवर के लिए अच्छा माना जाता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कॉफी पीने से फैटी लिवर डिजीज से बचाव हो सकता है. साल दो हज़ार चौदह की एक स्टडी में पता चला कि प्रतिदिन कॉफी का सेवन करने से क्रोनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर का जोखिम कम हो सकता है. कॉफी लिवर में फैट के निर्माण को कम करती है और सुरक्षात्मक एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाती है. कॉफी में मौजूद यौगिक लिवर को स्वस्थ रखते हैं. ओटमील यानी दलिया का सेवन करने से लिवर को मजबूती मिलती है. डाइट में फाइबर जोड़ने के लिए दलिया अच्छा सोर्स है. फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. इसमें मौजूद तत्व लिवर के लिए भी सहायक हो सकते हैं. जई और दलिया में बीटा-ग्लूकेन्स नामक यौगिक उच्च मात्रा में होते हैं. बीटा-ग्लूकेन्स इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने और सूजन से लड़ने में मदद करते हैं. बीटा-ग्लूकेन्स लिवर में जमे फैट को कम कर सकते हैं. साल दो हज़ार सोलह की एक स्टडी में पता चला कि लहसुन का सेवन करने से लिवर को हेल्दी रखा जा सकता है. लहसुन का सेवन करने से नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज वाले लोगों के शरीर के वजन और फैट को कम किया जा सकता है. वजन ज्यादा होने से लिवर को नुकसान होता है. लहसुन के कैप्सूल और सप्लीमेंट भी लिवर को कई तरीकों से फायदा पहुंचा सकते हैं, लेकिन इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए. चुकंदर का रस लिवर को ऑक्सीडेटिव डैमेज और सूजन से बचाने में मदद करता है. कई स्टडीज से पता चला है कि जैतून के तेल का सेवन लिवर में फैट के स्तर को कम करने, ब्लड फ्लो बढ़ाने और लिवर एंजाइम के स्तर में सुधार करने में मदद करता है. आप खाना बनाते समय जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपको और भी कई फायदे होंगे. खट्टे फलों का सेवन करना लिवर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. खट्टे फल लिवर को स्टिम्युलेट करते हैं और टॉक्सिक पदार्थों को पानी द्वारा अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट लिवर को इंजरी से बचाने में मदद करते हैं. नींबू और संतरा के अलावा अंगूर को लिवर के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है. अंगूर में नैरिंगिन और नैरिनजेनिन होते हैं, जो पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट हैं. ये लिवर को बीमारियों से बचाते हैं. कॉफी को लिवर के लिए अच्छा माना जाता है. मेडिकल न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कॉफी पीने से फैटी लिवर डिजीज से बचाव हो सकता है. साल दो हज़ार चौदह की एक स्टडी में पता चला कि प्रतिदिन कॉफी का सेवन करने से क्रोनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर का जोखिम कम हो सकता है. कॉफी लिवर में फैट के निर्माण को कम करती है और सुरक्षात्मक एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाती है. कॉफी में मौजूद यौगिक लिवर को स्वस्थ रखते हैं. |
राज एक्सप्रेस। डायरेक्टर एसएस राजमौली की फिल्म 'आरआरआर' (RRR) जिसका डंका पूरे हॉलीवुड में बज रहा है। इस फिल्म ने ऑस्कर 2023 की नॉमिनेशन लिस्ट में जगह पाई है। अभी ऑस्कर अवॉर्ड्स आने में समय है, लेकिन उससे पहले ही RRR ने एक नया इतिहास रचा है। बता दें, ऑस्कर 2023 (Oscars 2023) से पहले RRR ने हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन अवॉर्ड्स 2023 में चार अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिये है।
बता दें कि, बीते दिन शुक्रवार रात को हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन अवॉर्ड्स 2023 की घोषणा की गई। राम चरण और जूनियर एनटीआर की एपिक एक्शन-ड्रामा फिल्म ने इतिहास रचते हुए एक-दो नहीं बल्कि चार अवॉर्ड्स अपने नाम किए है। निर्देशक एसएस राजामौली ने अवॉर्ड एक्सेप्ट करते हुए भावुक स्पीच भी दी। इसे बेस्ट एक्शन फिल्म, बेस्ट स्टंट्स, बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म और नाटू नाटू गाने को बेस्ट सॉन्ग का एचसीए फिल्म अवॉर्ड दिया गया है। इस अवॉर्ड सेरेमनी में डायरेक्टर राजमौली और मेगा पावर स्टार राम चरण मौजूद थे।
राम चरण ने प्रेजेंट किया अवॉर्डः
जानकारी के लिए बता दें कि, हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोसिएशन अवॉर्ड्स 2023 में राम चरण ने अवॉर्ड भी प्रेजेंट किया। वो प्रेजेंटर्स की लिस्ट में इकलौते भारतीय एक्टर थे। फिल्म RRR को HCA Film Awards में बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्शन फिल्म, बेस्ट स्टंट्स, बेस्ट सॉन्ग, बेस्ट एडिटिंग, बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था।
राजामौली ने दी इमोशनल स्पीचः
बेस्ट स्टंट्स का अवॉर्ड लेते हुए राजामौली ने अपनी स्पीच में अपनी पूरी टीम को धन्यवाद कहा। राजामौली ने इस दौरान कहा कि, "हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन के सभी सदस्यों को धन्यवाद जिन्हें लगा कि, RRR में सबसे अच्छे स्टंट्स थे। बहुत धन्यवाद, मैं अपने कोरियग्राफ़र को धन्यवाद कहना चाहूंगा, जिन्होंने स्टंट्स में बहुत ज़्यादा मेहनत की और बाकी कोरियोग्राफ़र्स को भी जो भारत आए और हमारा विज़न समझा। उन्होंने हमारे वर्किंग स्टाइल के अनुसार अपना वर्किंग स्टाइल बदला।
इन फिल्मों ने भी जीता अवॉर्डः
वहीं, अगर बाकी फिल्मों की बात करें, तो HCA Film Awards 2023 में सबसे ज्यादा नॉमिनेशन हॉलीवुड फिल्म एव्रीथिंग एवरीव्हेयर ऑल एट वन्स को मिले थे। इस फिल्म को 16 कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था, इसे बेस्ट एडिटिंग का अवॉर्ड मिला। साथ ही फिल्म के एक्टर Ke Huy Quan ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड जीता।
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| राज एक्सप्रेस। डायरेक्टर एसएस राजमौली की फिल्म 'आरआरआर' जिसका डंका पूरे हॉलीवुड में बज रहा है। इस फिल्म ने ऑस्कर दो हज़ार तेईस की नॉमिनेशन लिस्ट में जगह पाई है। अभी ऑस्कर अवॉर्ड्स आने में समय है, लेकिन उससे पहले ही RRR ने एक नया इतिहास रचा है। बता दें, ऑस्कर दो हज़ार तेईस से पहले RRR ने हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन अवॉर्ड्स दो हज़ार तेईस में चार अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिये है। बता दें कि, बीते दिन शुक्रवार रात को हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन अवॉर्ड्स दो हज़ार तेईस की घोषणा की गई। राम चरण और जूनियर एनटीआर की एपिक एक्शन-ड्रामा फिल्म ने इतिहास रचते हुए एक-दो नहीं बल्कि चार अवॉर्ड्स अपने नाम किए है। निर्देशक एसएस राजामौली ने अवॉर्ड एक्सेप्ट करते हुए भावुक स्पीच भी दी। इसे बेस्ट एक्शन फिल्म, बेस्ट स्टंट्स, बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म और नाटू नाटू गाने को बेस्ट सॉन्ग का एचसीए फिल्म अवॉर्ड दिया गया है। इस अवॉर्ड सेरेमनी में डायरेक्टर राजमौली और मेगा पावर स्टार राम चरण मौजूद थे। राम चरण ने प्रेजेंट किया अवॉर्डः जानकारी के लिए बता दें कि, हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोसिएशन अवॉर्ड्स दो हज़ार तेईस में राम चरण ने अवॉर्ड भी प्रेजेंट किया। वो प्रेजेंटर्स की लिस्ट में इकलौते भारतीय एक्टर थे। फिल्म RRR को HCA Film Awards में बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्शन फिल्म, बेस्ट स्टंट्स, बेस्ट सॉन्ग, बेस्ट एडिटिंग, बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था। राजामौली ने दी इमोशनल स्पीचः बेस्ट स्टंट्स का अवॉर्ड लेते हुए राजामौली ने अपनी स्पीच में अपनी पूरी टीम को धन्यवाद कहा। राजामौली ने इस दौरान कहा कि, "हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोशिएशन के सभी सदस्यों को धन्यवाद जिन्हें लगा कि, RRR में सबसे अच्छे स्टंट्स थे। बहुत धन्यवाद, मैं अपने कोरियग्राफ़र को धन्यवाद कहना चाहूंगा, जिन्होंने स्टंट्स में बहुत ज़्यादा मेहनत की और बाकी कोरियोग्राफ़र्स को भी जो भारत आए और हमारा विज़न समझा। उन्होंने हमारे वर्किंग स्टाइल के अनुसार अपना वर्किंग स्टाइल बदला। इन फिल्मों ने भी जीता अवॉर्डः वहीं, अगर बाकी फिल्मों की बात करें, तो HCA Film Awards दो हज़ार तेईस में सबसे ज्यादा नॉमिनेशन हॉलीवुड फिल्म एव्रीथिंग एवरीव्हेयर ऑल एट वन्स को मिले थे। इस फिल्म को सोलह कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था, इसे बेस्ट एडिटिंग का अवॉर्ड मिला। साथ ही फिल्म के एक्टर Ke Huy Quan ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड जीता। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें। |
आधुनिक लोगों ने छोड़ना शुरू कियाचश्मा का उपयोग, उन्हें संपर्क लेंस के साथ जगह एक असामान्य और उज्ज्वल छाया की आंखें किसी के ध्यान को आकर्षित करती हैं यह इस कारण से है कि हम में से कुछ समय के लिए कम से कम, लेकिन अपनी प्राकृतिक छाया बदलने की कोशिश करें। एड्रिया रंग के रूप में इस तरह के लेंस, इस मामले में प्रभावी रूप से मदद करते हैं, जिससे आपको हल्की छाया को अंधेरे में बदलने की अनुमति मिलती है, और इसके विपरीत।
Adria रंगीन लेंस बहुत नरम हैं, उनके लिएएक विशेष हाइड्रोगेल का उपयोग किया जाता है उन्हें हर 3 महीनों में बदला जाना चाहिए उत्पादन के लिए, नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है - हाई डेफिनेशन। कई परतों द्वारा एक विशेष रंग बनाने की प्रक्रिया में, आंखों के कॉर्निया रंजक के संपर्क में नहीं आते हैं यह आपको संभावित एलर्जी की प्रतिक्रिया को रोकने और रोके जाने की अनुमति देता है। विशेष विनिर्माण प्रौद्योगिकी प्रत्येक उत्पाद की अच्छी दृष्टि और उच्च गुणवत्ता की गारंटी देता है।
लेंस हर दिन उपयोग किया जाता है, आधार त्रिज्या 8.6 मिमी है, और व्यास 14.2 है। तरल सामग्री के लिए, यह 38% है पैकेज में, उपयोगकर्ता को दो लेंस की पेशकश की जाती है।
आज तक, निर्माता ऑफर करता हैनीलमणि और शहद, नीलम और अखरोट, फ़िरोज़ा जैसे रंग कोई फर्क नहीं पड़ता कि उपयोगकर्ता के पास क्या आंख का रंग है, हर कोई ऐड्रिया रंग लेंस बदल सकता है। नियमित ग्राहकों से प्रतिक्रिया की पुष्टि की है।
Adria रंग लेंस के लिए धन्यवाद, उपयोगकर्ताकिसी भी प्रकाश में अच्छी दृष्टि प्राप्त करने के लिए गारंटी यदि आप उनकी देखभाल ठीक से करते हैं, तो हर तिमाही में बदलाव करते हैं और देखभाल के लिए एक बहुउद्देश्यीय समाधान का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, आँख स्वस्थ और सुंदर हो जाएंगे, और आसपास के लोग अपने नए आकर्षक रंगों से आश्चर्यचकित होंगे और आकर्षक होंगे।
निर्माता ने यह सुनिश्चित कर लिया है किउपयोगकर्ता का विकल्प था यह रंग के बारे में है लेंस ऐड्रिया रंग की कोई भी श्रृंखला आंखों की प्राकृतिक छाया पूरी तरह बदल देती है, उन्हें चमक देती है, और देखो सबसे अभिव्यंजक बनाता है।
संपर्क लेंस एड्रिया कलर सीरीज 1 टोन आँखों की गहन प्राकृतिक छाया बनाती है।
टोन 2 सीरीज के परिवर्तन के हल्के रंगों के उत्पादों, चमक और अंधेरे प्राकृतिक रंगों के लिए गहरा व्यक्तित्व दें।
3 श्रृंखला टोन सहायता के संपर्क लेंसस्वाभाविक रूप से प्राकृतिक प्रकाश और काले रंग के रंगों को बदलें। लेंस की सामने की सतह एक एस्फेरिकल शैली में बनाई जाती है, इसलिए इस प्रकार के उत्पाद पतले होते हैं। यह स्पष्ट और विपरीत दृष्टि प्रदान करता है, साथ ही जटिल विकृतियों में सुधार, जिसे गोलाकार aberrations कहा जाता है।
एड्रिया कलर लेंस का मूल रंग होता है, इसलिए वे रंग बदलते हैं और एक छाया को हल्के और काले आँखों में अधिक संतृप्त करते हैं।
लेंस की सतह पर चित्रण तीन टन से बना है, लेकिन एक ही रंग में।
- हल्के रंग के अंदर के साथ समोच्च चमक देता है।
- मुख्य स्वर आईरिस के क्षेत्र में प्राकृतिक छवि को पुनः उत्पन्न करता है।
- अंधेरे छाया जो बाहर फैलती है वह स्पष्ट दिखती है।
आंखों का रंग प्राकृतिक और प्राकृतिक बना रहता हैइस तथ्य के कारण कि एक स्वर से दूसरे स्वर में मुलायम संक्रमण मनाया जाता है। आस-पास के लोगों को यह भी अनुमान नहीं लगाया जाता कि यह रंग एड्रिया के उत्पादों के लिए धन्यवाद प्राप्त किया गया था।
उत्पादों का मुख्य लाभ हैन केवल आंखों के रंग को बदलने की क्षमता, बल्कि उन्हें दृष्टि से बढ़ाएं। एड्रिया रंगीन लेंस एक मजबूत छाप छोड़ने में मदद करेंगे, क्योंकि वे पूरी तरह से अलग छाया या पैटर्न के साथ आंखों के प्राकृतिक रंग को कवर करते हैं।
उत्पाद का रंग हिस्सा केवल आईरिस को कवर करता है, औरछात्र क्षेत्र में लेंस रंगहीन रहता है, इसलिए प्रकाश आंखों को स्वतंत्र रूप से प्रवेश करता है। अगर कोई तस्वीर है, तो यह दृष्टि की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता है, भले ही कमरा अंधेरा हो।
Adria उत्पादों में diopters नहीं है, तोयह उन सभी द्वारा उपयोग किया जा सकता है जो चाहते हैं। सभी एड्रिया रंगीन लेंस यूवी संरक्षित हैं। उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री में सोडियम होता है, इससे लेंस को यथासंभव आरामदायक और सुविधाजनक उपयोग किया जाता है।
देखभाल नियमों को देखा जाना चाहिए ताकि एड्रिया रंग संपर्क लेंस लंबे समय तक और बिना किसी समस्या के सेवा कर सकें।
लेंस डालने या हटाने से पहले, आपको चाहिएअपने हाथ धोना और उन्हें सूखा साफ करना अच्छा होता है। सबसे पहले, एक विशेष समाधान के साथ दोनों तरफ प्रत्येक उत्पाद की सतह को गीला करें, धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को कुल्लाएं और कुल्लाएं। हेरफेर के बाद, लेंस को कंटेनर में छोड़ा जाना चाहिए ताकि वे पूरी तरह तरल में डुबोए जाएं।
उपयोग करने से पहले, दोहरानासंपर्क लेंस एड्रिया रंग के साथ समान ऑपरेशन, और उपयोग के बाद उन्हें एक कंटेनर में हटा दें और पैक करें, इसे अच्छी तरह से बंद करें। एड्रिया उत्पादों की सफाई के लिए, विभिन्न समाधानों का उपयोग किया जा सकता है, उदाहरण के लिए वे जो लेंस की सतह से सबसे छोटी गंदगी को हटाते हैं। नतीजतन, दृष्टि स्पष्ट हो जाती है, और आंखें इतनी जल्दी थक जाती नहीं हैं, और लेंस लंबे समय तक चलते हैं।
| आधुनिक लोगों ने छोड़ना शुरू कियाचश्मा का उपयोग, उन्हें संपर्क लेंस के साथ जगह एक असामान्य और उज्ज्वल छाया की आंखें किसी के ध्यान को आकर्षित करती हैं यह इस कारण से है कि हम में से कुछ समय के लिए कम से कम, लेकिन अपनी प्राकृतिक छाया बदलने की कोशिश करें। एड्रिया रंग के रूप में इस तरह के लेंस, इस मामले में प्रभावी रूप से मदद करते हैं, जिससे आपको हल्की छाया को अंधेरे में बदलने की अनुमति मिलती है, और इसके विपरीत। Adria रंगीन लेंस बहुत नरम हैं, उनके लिएएक विशेष हाइड्रोगेल का उपयोग किया जाता है उन्हें हर तीन महीनों में बदला जाना चाहिए उत्पादन के लिए, नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है - हाई डेफिनेशन। कई परतों द्वारा एक विशेष रंग बनाने की प्रक्रिया में, आंखों के कॉर्निया रंजक के संपर्क में नहीं आते हैं यह आपको संभावित एलर्जी की प्रतिक्रिया को रोकने और रोके जाने की अनुमति देता है। विशेष विनिर्माण प्रौद्योगिकी प्रत्येक उत्पाद की अच्छी दृष्टि और उच्च गुणवत्ता की गारंटी देता है। लेंस हर दिन उपयोग किया जाता है, आधार त्रिज्या आठ.छः मिमी है, और व्यास चौदह.दो है। तरल सामग्री के लिए, यह अड़तीस% है पैकेज में, उपयोगकर्ता को दो लेंस की पेशकश की जाती है। आज तक, निर्माता ऑफर करता हैनीलमणि और शहद, नीलम और अखरोट, फ़िरोज़ा जैसे रंग कोई फर्क नहीं पड़ता कि उपयोगकर्ता के पास क्या आंख का रंग है, हर कोई ऐड्रिया रंग लेंस बदल सकता है। नियमित ग्राहकों से प्रतिक्रिया की पुष्टि की है। Adria रंग लेंस के लिए धन्यवाद, उपयोगकर्ताकिसी भी प्रकाश में अच्छी दृष्टि प्राप्त करने के लिए गारंटी यदि आप उनकी देखभाल ठीक से करते हैं, तो हर तिमाही में बदलाव करते हैं और देखभाल के लिए एक बहुउद्देश्यीय समाधान का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, आँख स्वस्थ और सुंदर हो जाएंगे, और आसपास के लोग अपने नए आकर्षक रंगों से आश्चर्यचकित होंगे और आकर्षक होंगे। निर्माता ने यह सुनिश्चित कर लिया है किउपयोगकर्ता का विकल्प था यह रंग के बारे में है लेंस ऐड्रिया रंग की कोई भी श्रृंखला आंखों की प्राकृतिक छाया पूरी तरह बदल देती है, उन्हें चमक देती है, और देखो सबसे अभिव्यंजक बनाता है। संपर्क लेंस एड्रिया कलर सीरीज एक टोन आँखों की गहन प्राकृतिक छाया बनाती है। टोन दो सीरीज के परिवर्तन के हल्के रंगों के उत्पादों, चमक और अंधेरे प्राकृतिक रंगों के लिए गहरा व्यक्तित्व दें। तीन श्रृंखला टोन सहायता के संपर्क लेंसस्वाभाविक रूप से प्राकृतिक प्रकाश और काले रंग के रंगों को बदलें। लेंस की सामने की सतह एक एस्फेरिकल शैली में बनाई जाती है, इसलिए इस प्रकार के उत्पाद पतले होते हैं। यह स्पष्ट और विपरीत दृष्टि प्रदान करता है, साथ ही जटिल विकृतियों में सुधार, जिसे गोलाकार aberrations कहा जाता है। एड्रिया कलर लेंस का मूल रंग होता है, इसलिए वे रंग बदलते हैं और एक छाया को हल्के और काले आँखों में अधिक संतृप्त करते हैं। लेंस की सतह पर चित्रण तीन टन से बना है, लेकिन एक ही रंग में। - हल्के रंग के अंदर के साथ समोच्च चमक देता है। - मुख्य स्वर आईरिस के क्षेत्र में प्राकृतिक छवि को पुनः उत्पन्न करता है। - अंधेरे छाया जो बाहर फैलती है वह स्पष्ट दिखती है। आंखों का रंग प्राकृतिक और प्राकृतिक बना रहता हैइस तथ्य के कारण कि एक स्वर से दूसरे स्वर में मुलायम संक्रमण मनाया जाता है। आस-पास के लोगों को यह भी अनुमान नहीं लगाया जाता कि यह रंग एड्रिया के उत्पादों के लिए धन्यवाद प्राप्त किया गया था। उत्पादों का मुख्य लाभ हैन केवल आंखों के रंग को बदलने की क्षमता, बल्कि उन्हें दृष्टि से बढ़ाएं। एड्रिया रंगीन लेंस एक मजबूत छाप छोड़ने में मदद करेंगे, क्योंकि वे पूरी तरह से अलग छाया या पैटर्न के साथ आंखों के प्राकृतिक रंग को कवर करते हैं। उत्पाद का रंग हिस्सा केवल आईरिस को कवर करता है, औरछात्र क्षेत्र में लेंस रंगहीन रहता है, इसलिए प्रकाश आंखों को स्वतंत्र रूप से प्रवेश करता है। अगर कोई तस्वीर है, तो यह दृष्टि की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता है, भले ही कमरा अंधेरा हो। Adria उत्पादों में diopters नहीं है, तोयह उन सभी द्वारा उपयोग किया जा सकता है जो चाहते हैं। सभी एड्रिया रंगीन लेंस यूवी संरक्षित हैं। उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री में सोडियम होता है, इससे लेंस को यथासंभव आरामदायक और सुविधाजनक उपयोग किया जाता है। देखभाल नियमों को देखा जाना चाहिए ताकि एड्रिया रंग संपर्क लेंस लंबे समय तक और बिना किसी समस्या के सेवा कर सकें। लेंस डालने या हटाने से पहले, आपको चाहिएअपने हाथ धोना और उन्हें सूखा साफ करना अच्छा होता है। सबसे पहले, एक विशेष समाधान के साथ दोनों तरफ प्रत्येक उत्पाद की सतह को गीला करें, धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को कुल्लाएं और कुल्लाएं। हेरफेर के बाद, लेंस को कंटेनर में छोड़ा जाना चाहिए ताकि वे पूरी तरह तरल में डुबोए जाएं। उपयोग करने से पहले, दोहरानासंपर्क लेंस एड्रिया रंग के साथ समान ऑपरेशन, और उपयोग के बाद उन्हें एक कंटेनर में हटा दें और पैक करें, इसे अच्छी तरह से बंद करें। एड्रिया उत्पादों की सफाई के लिए, विभिन्न समाधानों का उपयोग किया जा सकता है, उदाहरण के लिए वे जो लेंस की सतह से सबसे छोटी गंदगी को हटाते हैं। नतीजतन, दृष्टि स्पष्ट हो जाती है, और आंखें इतनी जल्दी थक जाती नहीं हैं, और लेंस लंबे समय तक चलते हैं। |
नयी दिल्ली, 19 अप्रैल पूंजी बाजार नियामक सेबी ने इक्विकॉम फाइनेंशियल रिसर्च प्राइवेट लि. और दो व्यक्तियों पर प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। अपने निवेश उत्पादों पर उच्च रिटर्न का वादा कर भोले-भाले निवेशकों को निवेश के लिये प्रेरित करने को लेकर यह प्रतिबंध लगाया गया है।
नियामक ने पिछले साल जनवरी में कंपनी और व्यक्तियों के खिलाफ अंतरिम अदेश जारी करते हुए उन्हें निवेश सलाहकार के काम से दूर रहने का निर्देश दिया था और पूंजी बाजार में लेन-देन पर रोक लगा दी थी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने ताजा आदेश में उन्हें प्रतिभूति बाजार से तीन साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया है।
सेबी के अनुसार हालांकि अंतरिम आदेश के कारण जो पाबंदी पहले से चल रही है, उसका समायोजन ताजा आदेश में किया जाएगा।
नियामक ने इक्विकॉम फाइनेंशियल रिसर्च के खिलाफ एक अप्रैल, 2015 से 20 मार्च, 2017 की अवधि की जांच की थी।
जांच के दौरान, पाया गया कि इक्विकॉम अपने ग्राहकों को उच्च रिटर्न का वादा कर उन्हें उत्पाद बेच रही थी। इस तरह से वह निवेशकों को निवेश के लिये लुभाया।
सेबी के अनुसार कंपनी ने एक जाल बुना जिसमें भोले-भाले निवेशकों को निवेश के लिये लुभाया गया। साथ ही कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बेचे गये निवेश उत्पादों के लिये शुल्क लिया गया।
नियामक ने कहा कि इन सबके दौरान निवेशकों के हितों की अनदेखी की गयी।
जिन दो लोगों पर पाबंदी लगायी गयी है, वे अमित कुकदा और अखिलेश रघुवंशी हैं। वे उस दौरान एक्विकॉम फाइनेंशियल के निदेशक थे।
कंपनी तथा दोनों व्यक्तियों को धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार गतिविधियां निरोधक नियमन और निवेश परामर्श नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, उन्नीस अप्रैल पूंजी बाजार नियामक सेबी ने इक्विकॉम फाइनेंशियल रिसर्च प्राइवेट लि. और दो व्यक्तियों पर प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। अपने निवेश उत्पादों पर उच्च रिटर्न का वादा कर भोले-भाले निवेशकों को निवेश के लिये प्रेरित करने को लेकर यह प्रतिबंध लगाया गया है। नियामक ने पिछले साल जनवरी में कंपनी और व्यक्तियों के खिलाफ अंतरिम अदेश जारी करते हुए उन्हें निवेश सलाहकार के काम से दूर रहने का निर्देश दिया था और पूंजी बाजार में लेन-देन पर रोक लगा दी थी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने अपने ताजा आदेश में उन्हें प्रतिभूति बाजार से तीन साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी के अनुसार हालांकि अंतरिम आदेश के कारण जो पाबंदी पहले से चल रही है, उसका समायोजन ताजा आदेश में किया जाएगा। नियामक ने इक्विकॉम फाइनेंशियल रिसर्च के खिलाफ एक अप्रैल, दो हज़ार पंद्रह से बीस मार्च, दो हज़ार सत्रह की अवधि की जांच की थी। जांच के दौरान, पाया गया कि इक्विकॉम अपने ग्राहकों को उच्च रिटर्न का वादा कर उन्हें उत्पाद बेच रही थी। इस तरह से वह निवेशकों को निवेश के लिये लुभाया। सेबी के अनुसार कंपनी ने एक जाल बुना जिसमें भोले-भाले निवेशकों को निवेश के लिये लुभाया गया। साथ ही कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बेचे गये निवेश उत्पादों के लिये शुल्क लिया गया। नियामक ने कहा कि इन सबके दौरान निवेशकों के हितों की अनदेखी की गयी। जिन दो लोगों पर पाबंदी लगायी गयी है, वे अमित कुकदा और अखिलेश रघुवंशी हैं। वे उस दौरान एक्विकॉम फाइनेंशियल के निदेशक थे। कंपनी तथा दोनों व्यक्तियों को धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार गतिविधियां निरोधक नियमन और निवेश परामर्श नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती घोटाले की जारी जांच की स्थिति की बुधवार को समीक्षा करने के दौरान ये आदेश दिए । बैठक में मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधु, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार तथा अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी मौजूद थीं।
आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में हुई धांधली की जांच कर रहे विशेष कार्यबल (एसटीएफ) से उन्होंने जांच में तेजी लाने, दोषियों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार करने तथा उनकी अवैध संपत्ति जब्त करने को कहा ।
धामी ने दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम तथा धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को भी कहा । उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की भ्रष्ट या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परीक्षाएं जिनमें गड़बड़ी हुई,के जरिए भर्ती किए गए लोगों की नियुक्ति को भी रद्द किया जाए तथा उनके खिलाफ भी कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाए ।
धामी ने कहा कि नई परीक्षाओं को समय पर संपन्न कराया जाए।
उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के रिक्त चल रहे अध्यक्ष पद पर जल्द नियुक्ति की जाएगी । भर्ती परीक्षाओं में लगे अनियमितताओं के आरोपों के बीच पांच अगस्त को आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एस राजू ने इस्तीफा दे दिया था ।
धामी ने कहा कि विभिन्न विभागों में रिक्तियों पर भर्ती निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए ।
चयन आयोग द्वारा पिछले साल चार और पांच दिसंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में हुए घोटाले में एसटीएफ अब तक आठ सरकारी कर्मचारियों समेत 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है । तीन पालियों में आयोजित परीक्षा में 160000 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था और इसमें 916 अभ्यर्थी चयनित हुये थे।
| मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती घोटाले की जारी जांच की स्थिति की बुधवार को समीक्षा करने के दौरान ये आदेश दिए । बैठक में मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधु, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार तथा अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी मौजूद थीं। आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में हुई धांधली की जांच कर रहे विशेष कार्यबल से उन्होंने जांच में तेजी लाने, दोषियों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार करने तथा उनकी अवैध संपत्ति जब्त करने को कहा । धामी ने दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम तथा धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को भी कहा । उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की भ्रष्ट या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परीक्षाएं जिनमें गड़बड़ी हुई,के जरिए भर्ती किए गए लोगों की नियुक्ति को भी रद्द किया जाए तथा उनके खिलाफ भी कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाए । धामी ने कहा कि नई परीक्षाओं को समय पर संपन्न कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के रिक्त चल रहे अध्यक्ष पद पर जल्द नियुक्ति की जाएगी । भर्ती परीक्षाओं में लगे अनियमितताओं के आरोपों के बीच पांच अगस्त को आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एस राजू ने इस्तीफा दे दिया था । धामी ने कहा कि विभिन्न विभागों में रिक्तियों पर भर्ती निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए । चयन आयोग द्वारा पिछले साल चार और पांच दिसंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में हुए घोटाले में एसटीएफ अब तक आठ सरकारी कर्मचारियों समेत बाईस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है । तीन पालियों में आयोजित परीक्षा में एक लाख साठ हज़ार अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था और इसमें नौ सौ सोलह अभ्यर्थी चयनित हुये थे। |
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। हर शख्स की इच्छा होती है कि अगर वो किसी रिलेशनशिप (relationship) में है तो उसका पार्टनर उसे पूरी तवज्जो दे। रिश्ते की शुरुआत में ऐसा होता भी है, लेकिन जैसे जैसे आगे बढ़ते है जिंदगी की जद्दोजहद में उलझ जाते हैं। अक्सर किसी एक पार्टनर को लगता है कि अब दोनों अच्छे से एक दूसरे को समझने लगे हैं इसलिए जरुरी नहीं कि हर समय अटेंशन दी जाए। लेकिन दूसरा पार्टनर ऐसे में अपने आपको उपेक्षित महसूस करने लगता है और ऐसे में रिश्ते में दरार आने की आशंका होती है। इसलिए अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है और हम कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें आज़माने पर आपका साथी फिर आपको अटेंशन देने लगेगा।
- सबसे जरूरी है जीवन में नयापन। जैसे ही हम रुटीन के आदी हो जाते हैं, रिश्ते और जीवन में बोरियत आ जाती है। इसलिए नएपन को बरकरार रखने की कोशिश कीजिए।
- आजकल हमारा ज्यादा समय फोन पर ही बीतता है। लेकिन जब आप दोनों साथ हों तो अपना फोन किनारे रख दीजिए और उनसे बातें कीजिए। ऐसे में उनका भी सारा ध्यान आपपर ही रहेगा।
- हफ्ते में एक बार रोजमर्रा के काम से हटकर कुछ और कीजिए। जैसे लॉन्ग ड्राइव, फिल्म देखना, किसी एग्जीबिशन में जाना, कॉमन दोस्तों के साथ मिलना जुलना या फिर साथ में कुकिंग करना।
- अपने पार्टनर की पसंद की चीज करिए। उनके पसंद का रंग पहनिये या फिर म्यूजिक चलाइये। इससे उनका मूड एकदम लिफ्ट होगा।
- साथ में कुकिंग करना बहुत अच्छा होता है। इस दौरान आप क्वालिटी टाइम स्टेंड करते हैं और एक दूसरे से आपकी ट्यूनिंग भी बढ़ती है।
- आप दोनों के लिए एक ट्रिप प्लान कीजिए। जब आप अपनी जगह से बाहर जाते हैं तो सारा ध्यान एक दूसरे पर ही होता है।
- कभी कभी उनके पैरेंट्स से मिलने जाइये या उन्हें अपने घर इनवाइट कीजिए। इससे वो आपके और करीब आएंगे।
- उनके दोस्तों की तारीफ कीजिए और उन्हें अपने दोस्तों के साथ थोड़ा 'मी टाइम' दीजिए। इसके बाद जब वो आपसे मिलेंगे तो उनका पूरा अटेंशन आपपर ही होगा।
- कभी भी किसी लड़ाई को लंबा मत खींजिये। बात करने की पहल करें।
- किसी भी रिश्ते में संवाद सबसे जरुरी है। अपने साथी से खूब बातें कीजिए। इससे आप दोनों के बीच शेयरिंग बढ़ेगी और वो आपका खास खयाल रखेंगे।
| भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। हर शख्स की इच्छा होती है कि अगर वो किसी रिलेशनशिप में है तो उसका पार्टनर उसे पूरी तवज्जो दे। रिश्ते की शुरुआत में ऐसा होता भी है, लेकिन जैसे जैसे आगे बढ़ते है जिंदगी की जद्दोजहद में उलझ जाते हैं। अक्सर किसी एक पार्टनर को लगता है कि अब दोनों अच्छे से एक दूसरे को समझने लगे हैं इसलिए जरुरी नहीं कि हर समय अटेंशन दी जाए। लेकिन दूसरा पार्टनर ऐसे में अपने आपको उपेक्षित महसूस करने लगता है और ऐसे में रिश्ते में दरार आने की आशंका होती है। इसलिए अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है और हम कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें आज़माने पर आपका साथी फिर आपको अटेंशन देने लगेगा। - सबसे जरूरी है जीवन में नयापन। जैसे ही हम रुटीन के आदी हो जाते हैं, रिश्ते और जीवन में बोरियत आ जाती है। इसलिए नएपन को बरकरार रखने की कोशिश कीजिए। - आजकल हमारा ज्यादा समय फोन पर ही बीतता है। लेकिन जब आप दोनों साथ हों तो अपना फोन किनारे रख दीजिए और उनसे बातें कीजिए। ऐसे में उनका भी सारा ध्यान आपपर ही रहेगा। - हफ्ते में एक बार रोजमर्रा के काम से हटकर कुछ और कीजिए। जैसे लॉन्ग ड्राइव, फिल्म देखना, किसी एग्जीबिशन में जाना, कॉमन दोस्तों के साथ मिलना जुलना या फिर साथ में कुकिंग करना। - अपने पार्टनर की पसंद की चीज करिए। उनके पसंद का रंग पहनिये या फिर म्यूजिक चलाइये। इससे उनका मूड एकदम लिफ्ट होगा। - साथ में कुकिंग करना बहुत अच्छा होता है। इस दौरान आप क्वालिटी टाइम स्टेंड करते हैं और एक दूसरे से आपकी ट्यूनिंग भी बढ़ती है। - आप दोनों के लिए एक ट्रिप प्लान कीजिए। जब आप अपनी जगह से बाहर जाते हैं तो सारा ध्यान एक दूसरे पर ही होता है। - कभी कभी उनके पैरेंट्स से मिलने जाइये या उन्हें अपने घर इनवाइट कीजिए। इससे वो आपके और करीब आएंगे। - उनके दोस्तों की तारीफ कीजिए और उन्हें अपने दोस्तों के साथ थोड़ा 'मी टाइम' दीजिए। इसके बाद जब वो आपसे मिलेंगे तो उनका पूरा अटेंशन आपपर ही होगा। - कभी भी किसी लड़ाई को लंबा मत खींजिये। बात करने की पहल करें। - किसी भी रिश्ते में संवाद सबसे जरुरी है। अपने साथी से खूब बातें कीजिए। इससे आप दोनों के बीच शेयरिंग बढ़ेगी और वो आपका खास खयाल रखेंगे। |
भी एक परम्परा है । इस विषय में अनेक ग्रन्थ लिखे जा चुके है, अतएव प्रस्तुत रचना में इस परम्परा पर विशेष प्रकाश डालने की आवश्यकता नही समझी गई ।। केवल अलकारशास्त्रीय प्रकरणों में ही सक्षिप्त परिचय दे दिया गया है और उसके आधार पर बिहारी के योगदान की मीमासा की गई है। दूसरी परम्परा है वस्तु - मूलक परम्परा । इस पर अभी तक कोई भी अनुसंधानात्मक ग्रन्थ नही लिखा गया । अतएव प्रस्तुत रचना के प्रथम खण्ड में इसी वस्तु - मूलक परम्परा का परिचय देने की चेष्टा की गई है ।
अब तक समुपलब्ध होने वाला सबसे प्राचीन मुक्तक - सकलन ऋग्वेद ही है । ऋग्वेद के देखने से अवगत होता है कि इसकी विचारधारा के विकास में अनेक परम्पराए कारण हुई होगी, जिनके प्रभाव से ऋग्वेद के समय में इतने प्रौढ काव्य की रचना सम्भव हो सकी । किन्तु आज के युग में इन प्राचीन परम्पराओ के अध्ययन का न तो कोई साधन है प्रौर न आज के युग में यह सम्भव ही है । अतएव ऋग्वेद ही सर्वप्रथम मुक्तक-काव्य ठहरता है, जिसमें अनेक कवियो ( ऋषियो) की रचनाए सगृहीत हैं । ऋग्वेद का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि इसमें रचनाओ के पाच प्रवृत्ति - निमित्त विद्यमान है - (१) रसात्मक मुक्तक, (२) धार्मिक-मुक्तक, ( ३ ) सूक्ति-मुक्तक, (४) प्रशस्ति-मुक्तक और ( ५ ) चित्र - मुक्तक । चित्र-मुक्तक को परवर्ती साहित्य में काव्य सीमा से बाह्य कर दिया गया है और बिहारी ने भी अपने काव्य में चित्र - मुक्तक को प्रश्रय नही दिया है । अतएव चार प्रकार की मुक्तक परम्पराओं का प्रस्तुत रचना में अध्ययन किया गया है क्योकि इससे हमारी प्राचीनतम काव्य पद्धति पर स्पष्ट प्रकाश पडता है । यह देखकर आश्चर्य होता है कि काव्यप्रकाश इत्यादि में प्रौढतम काव्य के जो उदाहरण प्रस्तुत किये गये है उनसे मिलते-जुलते उदाहरण ऋग्वेद में विद्यमान है । अर्थ-शक्तिमूलक ध्वनियों की सत्ता तो एक सामान्य सी बात है । शब्द-शक्तिमूलक ध्वनियो के मन्तव्य से लिखे हुए सूक्त भी ऋग्वेद में पाये जाते है । श्लेषमयी उच्चकोटि की रचनाये भी ऋग्वेद में अधिगत होती है । इन सब पर प्रकाश डालने के लिये ऋग्वेद का शास्त्रीय विवेचन भी प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है ।
मुक्तक की दिशा में प्रधानता रसात्मक मुक्तको की ही है। रसात्मक मुक्तको की दृष्टि से ऋग्वेद से बिहारी के समय तक मुक्तक-काव्य के सम्पूर्ण इतिहास को तीन कालो में विभक्त किया गया है - (१) आदिकाल-काल । इस काल में प्रकृति पर आरोपित रसमयता ही प्रास्वादन में निमित्त हुई है । (२) मध्यकाल अथवा प्राकृत काव्य-काल । प्राकृत व्यक्तियों के विषय में मानव प्रेम का इस काल में प्राधान्य रहा । इस काले का प्रारम्भ हाल के समय से हुआ और यह काल जयदेव के समय तक चलता रहा । इस काल की राजनैतिक, सामाजिक इत्यादि १. साहित्य - इर्पण, दशम परिच्छेद ।
'परिस्थितियों का भी अध्ययन किया गया है । (३) उत्तर काल या भक्ति काल । यह काल जयदेव के समय से बिहारी के समय तक चलता रहा। इसमें निर्दिष्ट "विभावों के विषय में प्रेम का वर्णन प्रधान रहा । इन कालो के विभिन्न कलाकारों का सक्षिप्त परिचय दिया गया है। किन्तु प्रधानता सामयिक परिस्थितियो सामान्य विशेषताओ के अध्ययन के लिये ही दी गई है । दूसरे प्रकार की प्रवृत्ति धार्मिक प्रवृति थी । ऋग्वेद से स्तोत्ररचना-प्रवृत्ति पुराणों में आई और बौद्धो तथा जैनो के द्वारा भी अपनाई गई । मुक्तक-काव्य परम्परा में इन स्तोत्रो का भी पर्याप्त महत्त्व है। इनके अध्ययन में भी कवियो की अपेक्षा सामान्य विशेषताओं को प्रमुखता प्रदान की गई है। तीसरे प्रकार की प्रवृत्ति सूक्ति-काव्य सम्बन्धिनी है । सूक्तियों को तीन भागों में विभक्त किया गया है - (१) धार्मिक सूक्ति ( २ ) आर्थिकसूक्ति और ( ३ ) कामसम्बन्धी सुक्ति । इन सभी प्रकार की सूक्तियो और इनके प्रमुख कवियो का परिचय दिया गया है । यद्यपि सूक्ति-काव्य में चमत्कारमात्र उपास्य होता है । रस - विकलता के कारण उसे हम प्रधान मुक्तको की सीमा में नहीं ले सकते । तथापि अपने विस्तार तथा महत्त्व के कारण उनका परित्याग भी नही किया जा सकता । चौथे प्रकार की प्रवृत्ति प्रशस्ति-काव्यसम्बन्धिनी है । प्रशस्ति काव्य में हृदय तत्त्व की न्यूनता होने के कारण न तो उच्चकोटि का साहित्य ही निर्मित होता है और मात्रा में अधिक होते हुए भी सुरक्षित नहीं रहता । इस प्रकार की कृतिया अपना कुछ स्थान अवश्य रखती है, अतएव इन पर भी सक्षेप में विचार किया गया है। मुक्तक काव्य खड का यही संक्षिप्त परिचय है । यह खड तीन अध्यायों में विभक्त है ।
प्रस्तुत रचना का दूसरा खण्ड बिहारी के विशेष अध्ययनपरक है। इसमें ७ अध्याय है। प्रथम अध्याय में बिहारी की सामयिक परिस्थितियों का चित्रण किया गया है। बिहारी की रचना में राजनैतिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत परिस्थितियों का गहरा प्रभाव लक्षित होता है । उस समय की राजनैतिक अवस्था चिन्ताजनक थी, और राज सत्ता प्रायः सघर्ष का कारण बन जाती थी । सामाजिक जीवन भी गिरता जा रहा था । इन सब परिस्थितियों का विस्तृत विवेचन तथा उनसे बिहारी पर लक्षित होने वाला प्रभाव इस अध्याय का मुख्य विषय है ।
दूसरे अध्याय से मुक्तक काव्य परम्परा के आधार पर बिहारी का अध्ययन प्रारम्भ होता है । यह परम्परा दो भागो में बाटी गई है, शास्त्रीय परम्परा और वस्तु-मूलक परम्परा । काव्य-शास्त्र में अनेक सिद्धान्तो का प्रवर्तन लक्ष्य-ग्रन्थों के आधार पर ही हुआ है । आनन्दवर्धन ने स्वीकार किया है कि लक्ष्य परीक्षा के आधार पर ही ध्वनि सिद्धान्त का प्रवर्तन हुआ है। यही बात दूसरे सम्प्रदायों के
१. इस काल के मुक्तकों में किसा कल्पित नायक-नायिकाओं की कल्पित घटना का चित्रण किया जाता है, जोकि किसी के भी विषय में लागू हो सकता है । | भी एक परम्परा है । इस विषय में अनेक ग्रन्थ लिखे जा चुके है, अतएव प्रस्तुत रचना में इस परम्परा पर विशेष प्रकाश डालने की आवश्यकता नही समझी गई ।। केवल अलकारशास्त्रीय प्रकरणों में ही सक्षिप्त परिचय दे दिया गया है और उसके आधार पर बिहारी के योगदान की मीमासा की गई है। दूसरी परम्परा है वस्तु - मूलक परम्परा । इस पर अभी तक कोई भी अनुसंधानात्मक ग्रन्थ नही लिखा गया । अतएव प्रस्तुत रचना के प्रथम खण्ड में इसी वस्तु - मूलक परम्परा का परिचय देने की चेष्टा की गई है । अब तक समुपलब्ध होने वाला सबसे प्राचीन मुक्तक - सकलन ऋग्वेद ही है । ऋग्वेद के देखने से अवगत होता है कि इसकी विचारधारा के विकास में अनेक परम्पराए कारण हुई होगी, जिनके प्रभाव से ऋग्वेद के समय में इतने प्रौढ काव्य की रचना सम्भव हो सकी । किन्तु आज के युग में इन प्राचीन परम्पराओ के अध्ययन का न तो कोई साधन है प्रौर न आज के युग में यह सम्भव ही है । अतएव ऋग्वेद ही सर्वप्रथम मुक्तक-काव्य ठहरता है, जिसमें अनेक कवियो की रचनाए सगृहीत हैं । ऋग्वेद का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि इसमें रचनाओ के पाच प्रवृत्ति - निमित्त विद्यमान है - रसात्मक मुक्तक, धार्मिक-मुक्तक, सूक्ति-मुक्तक, प्रशस्ति-मुक्तक और चित्र - मुक्तक । चित्र-मुक्तक को परवर्ती साहित्य में काव्य सीमा से बाह्य कर दिया गया है और बिहारी ने भी अपने काव्य में चित्र - मुक्तक को प्रश्रय नही दिया है । अतएव चार प्रकार की मुक्तक परम्पराओं का प्रस्तुत रचना में अध्ययन किया गया है क्योकि इससे हमारी प्राचीनतम काव्य पद्धति पर स्पष्ट प्रकाश पडता है । यह देखकर आश्चर्य होता है कि काव्यप्रकाश इत्यादि में प्रौढतम काव्य के जो उदाहरण प्रस्तुत किये गये है उनसे मिलते-जुलते उदाहरण ऋग्वेद में विद्यमान है । अर्थ-शक्तिमूलक ध्वनियों की सत्ता तो एक सामान्य सी बात है । शब्द-शक्तिमूलक ध्वनियो के मन्तव्य से लिखे हुए सूक्त भी ऋग्वेद में पाये जाते है । श्लेषमयी उच्चकोटि की रचनाये भी ऋग्वेद में अधिगत होती है । इन सब पर प्रकाश डालने के लिये ऋग्वेद का शास्त्रीय विवेचन भी प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है । मुक्तक की दिशा में प्रधानता रसात्मक मुक्तको की ही है। रसात्मक मुक्तको की दृष्टि से ऋग्वेद से बिहारी के समय तक मुक्तक-काव्य के सम्पूर्ण इतिहास को तीन कालो में विभक्त किया गया है - आदिकाल-काल । इस काल में प्रकृति पर आरोपित रसमयता ही प्रास्वादन में निमित्त हुई है । मध्यकाल अथवा प्राकृत काव्य-काल । प्राकृत व्यक्तियों के विषय में मानव प्रेम का इस काल में प्राधान्य रहा । इस काले का प्रारम्भ हाल के समय से हुआ और यह काल जयदेव के समय तक चलता रहा । इस काल की राजनैतिक, सामाजिक इत्यादि एक. साहित्य - इर्पण, दशम परिच्छेद । 'परिस्थितियों का भी अध्ययन किया गया है । उत्तर काल या भक्ति काल । यह काल जयदेव के समय से बिहारी के समय तक चलता रहा। इसमें निर्दिष्ट "विभावों के विषय में प्रेम का वर्णन प्रधान रहा । इन कालो के विभिन्न कलाकारों का सक्षिप्त परिचय दिया गया है। किन्तु प्रधानता सामयिक परिस्थितियो सामान्य विशेषताओ के अध्ययन के लिये ही दी गई है । दूसरे प्रकार की प्रवृत्ति धार्मिक प्रवृति थी । ऋग्वेद से स्तोत्ररचना-प्रवृत्ति पुराणों में आई और बौद्धो तथा जैनो के द्वारा भी अपनाई गई । मुक्तक-काव्य परम्परा में इन स्तोत्रो का भी पर्याप्त महत्त्व है। इनके अध्ययन में भी कवियो की अपेक्षा सामान्य विशेषताओं को प्रमुखता प्रदान की गई है। तीसरे प्रकार की प्रवृत्ति सूक्ति-काव्य सम्बन्धिनी है । सूक्तियों को तीन भागों में विभक्त किया गया है - धार्मिक सूक्ति आर्थिकसूक्ति और कामसम्बन्धी सुक्ति । इन सभी प्रकार की सूक्तियो और इनके प्रमुख कवियो का परिचय दिया गया है । यद्यपि सूक्ति-काव्य में चमत्कारमात्र उपास्य होता है । रस - विकलता के कारण उसे हम प्रधान मुक्तको की सीमा में नहीं ले सकते । तथापि अपने विस्तार तथा महत्त्व के कारण उनका परित्याग भी नही किया जा सकता । चौथे प्रकार की प्रवृत्ति प्रशस्ति-काव्यसम्बन्धिनी है । प्रशस्ति काव्य में हृदय तत्त्व की न्यूनता होने के कारण न तो उच्चकोटि का साहित्य ही निर्मित होता है और मात्रा में अधिक होते हुए भी सुरक्षित नहीं रहता । इस प्रकार की कृतिया अपना कुछ स्थान अवश्य रखती है, अतएव इन पर भी सक्षेप में विचार किया गया है। मुक्तक काव्य खड का यही संक्षिप्त परिचय है । यह खड तीन अध्यायों में विभक्त है । प्रस्तुत रचना का दूसरा खण्ड बिहारी के विशेष अध्ययनपरक है। इसमें सात अध्याय है। प्रथम अध्याय में बिहारी की सामयिक परिस्थितियों का चित्रण किया गया है। बिहारी की रचना में राजनैतिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत परिस्थितियों का गहरा प्रभाव लक्षित होता है । उस समय की राजनैतिक अवस्था चिन्ताजनक थी, और राज सत्ता प्रायः सघर्ष का कारण बन जाती थी । सामाजिक जीवन भी गिरता जा रहा था । इन सब परिस्थितियों का विस्तृत विवेचन तथा उनसे बिहारी पर लक्षित होने वाला प्रभाव इस अध्याय का मुख्य विषय है । दूसरे अध्याय से मुक्तक काव्य परम्परा के आधार पर बिहारी का अध्ययन प्रारम्भ होता है । यह परम्परा दो भागो में बाटी गई है, शास्त्रीय परम्परा और वस्तु-मूलक परम्परा । काव्य-शास्त्र में अनेक सिद्धान्तो का प्रवर्तन लक्ष्य-ग्रन्थों के आधार पर ही हुआ है । आनन्दवर्धन ने स्वीकार किया है कि लक्ष्य परीक्षा के आधार पर ही ध्वनि सिद्धान्त का प्रवर्तन हुआ है। यही बात दूसरे सम्प्रदायों के एक. इस काल के मुक्तकों में किसा कल्पित नायक-नायिकाओं की कल्पित घटना का चित्रण किया जाता है, जोकि किसी के भी विषय में लागू हो सकता है । |
नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर में वायरल फीवर तेजी के साथ पांव पसार रहा है। अस्पतालों में वायरल, डेंगू और स्वाइन फ्लू से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। कई अस्पतालों के ओपीडी में वायरल के मामले 50 फीसदी से ज्यादा सामने आ रहे हैं। दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में बीमार बच्चों की भीड़ है। माता पिता बच्चों को दिखाने के लिए पर्ची के इंतज़ार में खड़े दिखें। ओपीडी मरीज़ों से भरी है। डॉक्टर भी मरीजों की बढ़ रही संख्या से चिंतित है।
ऐसे समय में जब दिल्ली कोरोना वायरस को धीरे-धीरे मात देती दिख रही है, वायरल फीवर और डेंगू के मामले बढ़ते हैं तो यह निश्चित तौर पर चिंता की बात होगी। पूर्वी दिल्ली सहित राजधानी के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इन दिनों काफी भीड़ देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, वायरल बुखार के मामले ऐसे समय में बेहद चिंताजनक हैं जब राज्यों में कोरोना के केसों में भी उछाल देखने को मिल रहा है।
यूपी में भी हालात चिंताजनक है। हर शहर के अस्पतालों में बुखार से बच्चे कराह रहे हैं। अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं। खासकर पश्चिमी यूपी में हालात ज्यादा खराब है। हालांकि सरकारें एक्शन मूड में है और इस बीमारी से निजात पाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है। डॉक्टरों की एक्सपर्ट कमेटी लगातार नजरें बनाई हुई है। इसके साथ ही लोगों से सफाई बरतने और आस पास मच्छरों को न पनपने देने की अपील की जा रही है।
| नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर में वायरल फीवर तेजी के साथ पांव पसार रहा है। अस्पतालों में वायरल, डेंगू और स्वाइन फ्लू से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। कई अस्पतालों के ओपीडी में वायरल के मामले पचास फीसदी से ज्यादा सामने आ रहे हैं। दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में बीमार बच्चों की भीड़ है। माता पिता बच्चों को दिखाने के लिए पर्ची के इंतज़ार में खड़े दिखें। ओपीडी मरीज़ों से भरी है। डॉक्टर भी मरीजों की बढ़ रही संख्या से चिंतित है। ऐसे समय में जब दिल्ली कोरोना वायरस को धीरे-धीरे मात देती दिख रही है, वायरल फीवर और डेंगू के मामले बढ़ते हैं तो यह निश्चित तौर पर चिंता की बात होगी। पूर्वी दिल्ली सहित राजधानी के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इन दिनों काफी भीड़ देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, वायरल बुखार के मामले ऐसे समय में बेहद चिंताजनक हैं जब राज्यों में कोरोना के केसों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। यूपी में भी हालात चिंताजनक है। हर शहर के अस्पतालों में बुखार से बच्चे कराह रहे हैं। अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं। खासकर पश्चिमी यूपी में हालात ज्यादा खराब है। हालांकि सरकारें एक्शन मूड में है और इस बीमारी से निजात पाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है। डॉक्टरों की एक्सपर्ट कमेटी लगातार नजरें बनाई हुई है। इसके साथ ही लोगों से सफाई बरतने और आस पास मच्छरों को न पनपने देने की अपील की जा रही है। |
दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में लाखों गाड़ी मालिकों के लिए बुरी खबर सामने आई है। अब 10 साल पुरानी डीजल (Old Diesel Vehicle) वाहनों और 15 साल पुरानी पेट्रोल वाहनों को (Old Petrol Vehicle) नहीं चला सकेंगे। क्योंकि दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने एक विज्ञापन के माध्यम से इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पुरानी गाड़ियों को चलाने पर रोक लगाई जा रही है। जिसकी पुष्टि दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग (Transport Department) की ओर से की गई है। इस निर्देश में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और नेशनल ग्रीन ट्रायब्यूनल (NGT) के आदेश का हवाला दिया गया है।
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को सड़कों पर नहीं चलाया जा सकेगा। इसमें एनजीटी के आदेश के बारे में भी बताया गया है। आदेश के अनुसार, अब दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पाबंदी लगा दी गई है। वहीं वाहन मालिकों को सलाह दी गई कि इस कैटगरी की गाड़ियों को स्क्रेप कर दें।
इस आदेश का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त की जा सकती हैं। इस आदेश को हाल में जारी स्क्रेपेज पॉलिसी से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें पुरानी गाड़ियों को सड़कों से हटाना होगा जिसमें 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां हैं। इस पॉलिसी के तहत निजी गाड़ी 20 साल बाद और कमर्शियल गाड़ी को 15 साल बाद ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट कराना होगा। इस टेस्ट को पास न करने वाले वाहनों को चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
नई स्क्रेपेज पॉलिसी के तहत वाहनों की फिटनेस टेस्ट करानी जरूरी है। यह नियम पुराने वाहनों के लिए लागू होगा और नई गाड़ियों पर नहीं। वहीं अगर गाड़ी 15 साल से पुरानी हो गई है तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। इसके लिए देशभर में कई जगहों पर फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे। फिटनेस टेस्ट में जो गाड़ी पास हो जाएगी, उसके लिए दुबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा। लेकिन री-रजिस्ट्रेशन की फीस अभी के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा देनी होगी।
| दिल्ली-एनसीआर में लाखों गाड़ी मालिकों के लिए बुरी खबर सामने आई है। अब दस साल पुरानी डीजल वाहनों और पंद्रह साल पुरानी पेट्रोल वाहनों को नहीं चला सकेंगे। क्योंकि दिल्ली सरकार ने एक विज्ञापन के माध्यम से इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पुरानी गाड़ियों को चलाने पर रोक लगाई जा रही है। जिसकी पुष्टि दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग की ओर से की गई है। इस निर्देश में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रायब्यूनल के आदेश का हवाला दिया गया है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दस साल पुरानी डीजल गाड़ियां और पंद्रह साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को सड़कों पर नहीं चलाया जा सकेगा। इसमें एनजीटी के आदेश के बारे में भी बताया गया है। आदेश के अनुसार, अब दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर दस साल पुरानी डीजल गाड़ियों और पंद्रह साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पाबंदी लगा दी गई है। वहीं वाहन मालिकों को सलाह दी गई कि इस कैटगरी की गाड़ियों को स्क्रेप कर दें। इस आदेश का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त की जा सकती हैं। इस आदेश को हाल में जारी स्क्रेपेज पॉलिसी से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें पुरानी गाड़ियों को सड़कों से हटाना होगा जिसमें दस साल पुरानी डीजल और पंद्रह साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां हैं। इस पॉलिसी के तहत निजी गाड़ी बीस साल बाद और कमर्शियल गाड़ी को पंद्रह साल बाद ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट कराना होगा। इस टेस्ट को पास न करने वाले वाहनों को चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नई स्क्रेपेज पॉलिसी के तहत वाहनों की फिटनेस टेस्ट करानी जरूरी है। यह नियम पुराने वाहनों के लिए लागू होगा और नई गाड़ियों पर नहीं। वहीं अगर गाड़ी पंद्रह साल से पुरानी हो गई है तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। इसके लिए देशभर में कई जगहों पर फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे। फिटनेस टेस्ट में जो गाड़ी पास हो जाएगी, उसके लिए दुबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा। लेकिन री-रजिस्ट्रेशन की फीस अभी के मुकाबले दस गुना तक ज्यादा देनी होगी। |
इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति और भारत में डेटा संरक्षण कानून की आवश्यकता से उत्पन्न मुद्दों और इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सएप ने अपनी गोपनीयता नीति का अद्यतन या अपडेटेड संस्करण जारी किया है और इसके अनुसार, व्हाट्सएप द्वारा उपयोगकर्त्ताओं के डेटा को अपने समूह की अन्य कंपनियों (जैसे-फेसबुक) के साथ साझा किया जा सकता है। व्हाट्सएप के नए अपडेट ने इस एप का उपयोग करने वाले लोगों के समक्ष गोपनीयता संबंधी चिंता उत्पन्न कर दी है। कई गोपनीयता विशेषज्ञों और निकायों ने व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के संदर्भ में आशंकाएँ व्यक्त की हैं। इसके अतिरिक्त वर्तमान में देश में किसी भी डेटा सुरक्षा कानून के अभाव में भारतीय उपभोक्ता इस नीति परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सुभेद्य हैं ।
गौरतलब है कि के.एस. पुत्तास्वामी बनाम भारतीय संघ मामले के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और वर्तमान में व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति में हुए इस परिवर्तन ने भारत में एक मज़बूत डेटा सुरक्षा कानून की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया है।
व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति से संबंधित मुद्देः
- डेटा स्वामित्वः वे जानकारियाँ जो व्हाट्सएप अपने उपभोक्ताओं से एकत्र करता है और इस नीति के लागू होने के बाद जिसे वह फेसबुक के साथ साझा करेगा, उनमें शामिल हैं- मोबाइल फोन नंबर, उपयोगकर्त्ता गतिविधि और व्हाट्सएप खाते की अन्य बुनियादी जानकारियाँ आदि।
- फेसबुक के साथ उपयोगकर्त्ता का डेटा साझा करने के व्यावसायिक उद्देश्य से व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति का हालिया परिवर्तन यह स्थापित करता है कि अब व्हाट्सएप मात्र एक मध्यस्थ होने के बजाय उपभोक्ताओं के डेटा का मालिक भी है।
- यह नीति मूल रूप से उपभोक्ताओं को अब तक प्राप्त उस विकल्प को समाप्त कर देती है जिसके तहत उन्हें अपने डेटा को फेसबुक के स्वामित्त्व वाले या किसी तीसरे पक्ष के एप के साथ साझा करने का अधिकार था।
- इंटरनेट के क्षेत्र में मध्यस्थ या बिचौलियों की मूल परिभाषा यह है कि इन प्लेटफाॅर्मों के पास किसी कंटेंट या सामग्री का स्वामित्त्व नहीं होता है बल्कि ये मात्र एक ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जहाँ तृतीय पक्ष की संस्थाएँ अपनी सामग्री या कंटेंट प्रस्तुत करती हैं।
- यदि इन प्लेटफाॅर्मों पर कोई गैर-कानूनी गतिविधि या सामग्री देखी जाती है तो यह विशेष दर्जा ही उन्हें इसके किसी भी उत्तरदायित्व से बचाता है।
- इस तरह के मामलों में सरकार संबंधित मध्यस्थ को एक निर्दिष्ट अवधि के भीतर गैर-कानूनी सामग्री को हटाने का निर्देश देती है।
- यदि व्हाट्सएप स्वचालित रूप से डेटा साझा करता है, तो इसे एक मध्यस्थ नहीं माना जा सकता है।
- ऐसी स्थिति में यह कभी भी अपने मंच पर पाई जाने वाली किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के प्रति उत्तरदायित्व के संबंध में प्राप्त प्रतिरक्षा को खो सकता है।
- श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट के खिलाफः व्हाट्सएप की नई नीति 'श्रीकृष्ण समिति ' की रिपोर्ट की सिफारिशों, जो कि 'डेटा संरक्षण विधेयक, 2019' को आधार प्रदान करती है, की अवहेलना करती है। उदाहरण के लियेः
- डेटा स्थानीयकरण के सिद्धांत का उद्देश्य देश के बाहर निजी डेटा के हस्तांतरण पर अंकुश लगाना है, अतः यह व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के साथ विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
- इस रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी कंपनी द्वारा एक उपभोक्ता के डेटा को सिर्फ उसी उद्देश्य के लिये उपयोग किया जा सकता है जिसके लिये उसे साझा किया जाता है। हालाँकि व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति को डेटा के व्यावसायिक दोहन और राजनीतिक अभियानों द्वारा सूक्ष्म लक्ष्यीकरण (जैसे- कैम्ब्रिज एनालिटिका मामला) का माध्यम उपलब्ध कराने के कदम के रूप में देखा जा सकता है।
- मेटाडेटा का साझाकरणः व्हाट्सएप के अनुसार, नई गोपनीयता नीति में 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' (End-to-End Encryption) का प्रावधान अभी भी बरकरार है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि व्हाट्सएप उपभोक्ताओं के संदेशों को नहीं देख सकेगा और न ही उन्हें किसी के साथ साझा कर सकेगा।
- हालाँकि नई गोपनीयता नीति के लागू होने के बाद अब व्हाट्सएप किसी उपभोक्ता का मेटाडेटा भी साझा कर सकता है, जिसका अर्थ है कि बातचीत के मूल संदेशों के अतिरिक्त सबकुछ साझा किया जा सकता है।
- यह वस्तुतः किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत (360-डिग्री) जानकारी/ब्योरा उपलब्ध कराता है।
- वर्तमान में किसी व्यक्ति की निजी और व्यक्तिगत गतिविधियों में इस स्तर का हस्तक्षेप एक व्यवस्थित नियामकीय पर्यवेक्षण या सरकारी निरीक्षण के बगैर ही किया जाता है।
- 'टेक इट ऑर लीव इट' की नीतिः यदि उपयोगकर्त्ता व्हाट्सएप की अद्यतन गोपनीयता नीति से असहमत हैं, तो इस नई नीति लागू होने के बाद उनके पास व्हाट्सएप छोड़ने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं होगा।
आगे की राहः
- डेटा संरक्षण कानून निर्माण प्रक्रिया में तेज़ी लानाः भारत के डेटा सुरक्षा कानून की प्रक्रिया कई वर्षों से सुस्त पड़ी है, यदि वर्तमान में भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप शुरुआत में ही इस अपडेट के साथ आगे नहीं बढ़ पाता।
- उदाहरण के लिये यूरोपीय क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ताओं पर व्हाट्सएप की इस अद्यतन गोपनीयता नीति के दिशा-निर्देश नहीं लागू होंगे, क्योंकि वहाँ पहले से ही एक मज़बूत डेटा संरक्षण कानून [जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (General Data Protection Regulation- GDPR)] लागू है।
- अतः भारत को अपने डेटा सुरक्षा कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेज़ी लानी चाहिये।
- इसके अतिरिक्त भारत द्वारा मौजूदा व्हाट्सएप मुद्दे का उपयोग प्रक्रियाधीन मध्यस्थ दिशा-निर्देशों को अद्यतन करने के लिये भी किया जाना चाहिये।
- जन-जागरूकताः कई विशेषज्ञों के अनुसार, जन सामान्य के लिये गोपनीयता नीतियों को समझने की जटिलता के कारण भारत में व्हाट्सएप के अधिकांश उपभोक्ताओं पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इस बात की संभावना अधिक है कि वे बगैर किसी प्रश्न के व्हाट्सएप का प्रयोग जारी रखेंगे।
- ऐसे में सरकार और नागरिक समाज द्वारा डिजिटल गोपनीयता के महत्त्व से जनता को अवगत कराने के लिये जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
लगभग एक अरब नागरिकों की गोपनीयता, एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है जिसे व्यावसायिक उद्यम की गतिविधियों के लिये छोड़ दिया जाना तर्कसंगत नहीं होगा। अतः इस संदर्भ में एक मज़बूत कानून का निर्माण बहुत ही आवश्यक है जो उपभोक्ताओं को सुरक्षा की गारंटी प्रदान कर सके।
अभ्यास प्रश्नः हाल ही में व्हाट्सएप द्वारा जारी नई गोपनीयता नीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए भारत में डेटा सुरक्षा कानून को लागू किये जाने की आवश्यकता की समीक्षा कीजिये।
| इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति और भारत में डेटा संरक्षण कानून की आवश्यकता से उत्पन्न मुद्दों और इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सएप ने अपनी गोपनीयता नीति का अद्यतन या अपडेटेड संस्करण जारी किया है और इसके अनुसार, व्हाट्सएप द्वारा उपयोगकर्त्ताओं के डेटा को अपने समूह की अन्य कंपनियों के साथ साझा किया जा सकता है। व्हाट्सएप के नए अपडेट ने इस एप का उपयोग करने वाले लोगों के समक्ष गोपनीयता संबंधी चिंता उत्पन्न कर दी है। कई गोपनीयता विशेषज्ञों और निकायों ने व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के संदर्भ में आशंकाएँ व्यक्त की हैं। इसके अतिरिक्त वर्तमान में देश में किसी भी डेटा सुरक्षा कानून के अभाव में भारतीय उपभोक्ता इस नीति परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सुभेद्य हैं । गौरतलब है कि के.एस. पुत्तास्वामी बनाम भारतीय संघ मामले के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और वर्तमान में व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति में हुए इस परिवर्तन ने भारत में एक मज़बूत डेटा सुरक्षा कानून की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया है। व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति से संबंधित मुद्देः - डेटा स्वामित्वः वे जानकारियाँ जो व्हाट्सएप अपने उपभोक्ताओं से एकत्र करता है और इस नीति के लागू होने के बाद जिसे वह फेसबुक के साथ साझा करेगा, उनमें शामिल हैं- मोबाइल फोन नंबर, उपयोगकर्त्ता गतिविधि और व्हाट्सएप खाते की अन्य बुनियादी जानकारियाँ आदि। - फेसबुक के साथ उपयोगकर्त्ता का डेटा साझा करने के व्यावसायिक उद्देश्य से व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति का हालिया परिवर्तन यह स्थापित करता है कि अब व्हाट्सएप मात्र एक मध्यस्थ होने के बजाय उपभोक्ताओं के डेटा का मालिक भी है। - यह नीति मूल रूप से उपभोक्ताओं को अब तक प्राप्त उस विकल्प को समाप्त कर देती है जिसके तहत उन्हें अपने डेटा को फेसबुक के स्वामित्त्व वाले या किसी तीसरे पक्ष के एप के साथ साझा करने का अधिकार था। - इंटरनेट के क्षेत्र में मध्यस्थ या बिचौलियों की मूल परिभाषा यह है कि इन प्लेटफाॅर्मों के पास किसी कंटेंट या सामग्री का स्वामित्त्व नहीं होता है बल्कि ये मात्र एक ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जहाँ तृतीय पक्ष की संस्थाएँ अपनी सामग्री या कंटेंट प्रस्तुत करती हैं। - यदि इन प्लेटफाॅर्मों पर कोई गैर-कानूनी गतिविधि या सामग्री देखी जाती है तो यह विशेष दर्जा ही उन्हें इसके किसी भी उत्तरदायित्व से बचाता है। - इस तरह के मामलों में सरकार संबंधित मध्यस्थ को एक निर्दिष्ट अवधि के भीतर गैर-कानूनी सामग्री को हटाने का निर्देश देती है। - यदि व्हाट्सएप स्वचालित रूप से डेटा साझा करता है, तो इसे एक मध्यस्थ नहीं माना जा सकता है। - ऐसी स्थिति में यह कभी भी अपने मंच पर पाई जाने वाली किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के प्रति उत्तरदायित्व के संबंध में प्राप्त प्रतिरक्षा को खो सकता है। - श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट के खिलाफः व्हाट्सएप की नई नीति 'श्रीकृष्ण समिति ' की रिपोर्ट की सिफारिशों, जो कि 'डेटा संरक्षण विधेयक, दो हज़ार उन्नीस' को आधार प्रदान करती है, की अवहेलना करती है। उदाहरण के लियेः - डेटा स्थानीयकरण के सिद्धांत का उद्देश्य देश के बाहर निजी डेटा के हस्तांतरण पर अंकुश लगाना है, अतः यह व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के साथ विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। - इस रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी कंपनी द्वारा एक उपभोक्ता के डेटा को सिर्फ उसी उद्देश्य के लिये उपयोग किया जा सकता है जिसके लिये उसे साझा किया जाता है। हालाँकि व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति को डेटा के व्यावसायिक दोहन और राजनीतिक अभियानों द्वारा सूक्ष्म लक्ष्यीकरण का माध्यम उपलब्ध कराने के कदम के रूप में देखा जा सकता है। - मेटाडेटा का साझाकरणः व्हाट्सएप के अनुसार, नई गोपनीयता नीति में 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' का प्रावधान अभी भी बरकरार है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि व्हाट्सएप उपभोक्ताओं के संदेशों को नहीं देख सकेगा और न ही उन्हें किसी के साथ साझा कर सकेगा। - हालाँकि नई गोपनीयता नीति के लागू होने के बाद अब व्हाट्सएप किसी उपभोक्ता का मेटाडेटा भी साझा कर सकता है, जिसका अर्थ है कि बातचीत के मूल संदेशों के अतिरिक्त सबकुछ साझा किया जा सकता है। - यह वस्तुतः किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत जानकारी/ब्योरा उपलब्ध कराता है। - वर्तमान में किसी व्यक्ति की निजी और व्यक्तिगत गतिविधियों में इस स्तर का हस्तक्षेप एक व्यवस्थित नियामकीय पर्यवेक्षण या सरकारी निरीक्षण के बगैर ही किया जाता है। - 'टेक इट ऑर लीव इट' की नीतिः यदि उपयोगकर्त्ता व्हाट्सएप की अद्यतन गोपनीयता नीति से असहमत हैं, तो इस नई नीति लागू होने के बाद उनके पास व्हाट्सएप छोड़ने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं होगा। आगे की राहः - डेटा संरक्षण कानून निर्माण प्रक्रिया में तेज़ी लानाः भारत के डेटा सुरक्षा कानून की प्रक्रिया कई वर्षों से सुस्त पड़ी है, यदि वर्तमान में भारत में डेटा सुरक्षा कानून होता, तो व्हाट्सएप शुरुआत में ही इस अपडेट के साथ आगे नहीं बढ़ पाता। - उदाहरण के लिये यूरोपीय क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ताओं पर व्हाट्सएप की इस अद्यतन गोपनीयता नीति के दिशा-निर्देश नहीं लागू होंगे, क्योंकि वहाँ पहले से ही एक मज़बूत डेटा संरक्षण कानून [जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन ] लागू है। - अतः भारत को अपने डेटा सुरक्षा कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेज़ी लानी चाहिये। - इसके अतिरिक्त भारत द्वारा मौजूदा व्हाट्सएप मुद्दे का उपयोग प्रक्रियाधीन मध्यस्थ दिशा-निर्देशों को अद्यतन करने के लिये भी किया जाना चाहिये। - जन-जागरूकताः कई विशेषज्ञों के अनुसार, जन सामान्य के लिये गोपनीयता नीतियों को समझने की जटिलता के कारण भारत में व्हाट्सएप के अधिकांश उपभोक्ताओं पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इस बात की संभावना अधिक है कि वे बगैर किसी प्रश्न के व्हाट्सएप का प्रयोग जारी रखेंगे। - ऐसे में सरकार और नागरिक समाज द्वारा डिजिटल गोपनीयता के महत्त्व से जनता को अवगत कराने के लिये जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। लगभग एक अरब नागरिकों की गोपनीयता, एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है जिसे व्यावसायिक उद्यम की गतिविधियों के लिये छोड़ दिया जाना तर्कसंगत नहीं होगा। अतः इस संदर्भ में एक मज़बूत कानून का निर्माण बहुत ही आवश्यक है जो उपभोक्ताओं को सुरक्षा की गारंटी प्रदान कर सके। अभ्यास प्रश्नः हाल ही में व्हाट्सएप द्वारा जारी नई गोपनीयता नीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए भारत में डेटा सुरक्षा कानून को लागू किये जाने की आवश्यकता की समीक्षा कीजिये। |
रायगढ़, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। उप-संचालक पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, जिला रायग्व छत्तीसगमें कलापथक कलाकार के पद पर पदस्थ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि मरणोपरान्त मेरे देह दान से चिकित्सा विज्ञान के छात्र-छात्राओं को शोध अनुसंधान पयोग कर नई-नई तकनीक के माध्यम से बीमारियों का उपचार कर सकेंगे और उन्हें नई जानकारी मिल सकेगी। जिस पकार नेत्र दान से दूसरों को रोशनी मिलती है और एक व्यक्पि के रक्प दान से चार व्यक्पियों को जीवन दान मिलता है। ठीक इसी पकार मेरे देहदान से जूनियर डॉक्टरों को नई जानकारियाँ मिलेगी। श्री सिंह के देहदान के कारण गत माह अम्sडकर सम्मान से धमतरी में और पबुद्धजन सम्मान से रायग्व मे सम्मानित किया गया है। सुशील कुमार सिंह ने कहा कि चिकित्सालय एक मंदिर के समान है, इसलिए चिकित्सालय में आने वाले मरीज का आधा दुःख दर्द चिकित्सकों के व्यवहार और वहाँ कि व्यवस्था और सुविधा से दूर हो जाती है। चिकित्सक के उपचार से मरीज को रोग से मुक्पि मिलने से वह खुले मन से चिकित्सक की सेवाभाव के लिए दुआ देता है। चिकित्सक रोग, पीड़ा से पीड़ित व्यक्पि के दुःख दर्द दूर करने में मदद करता है। चिकित्सा का व्यवसाय सबसे अच्छा और मान्यता पाप्त है यह मानवता की सेवा का पेशा है। उन्होंने कलेक्टर श्री अशोक कुमार अग्रवाल की नेत्रदान की अपील से पभावित होकर देहदान की घोषणा की और अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए मृत्यु पश्चात् देहदान का आवेदन कलेक्टर दिया, जिसे कलेक्टर श्री अग्रवाल ने आवश्यक औपचारिकता पूरी करने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच. एस. रूंराव को निर्देश दिए। श्री कलेक्अर श्री अग्रवाल ने कहा कि श्री सिंह के देहदान से नवचार का संचार हुआ यह कार्य समज के लिए परेणादी औद आदर्श की मिशाल है। किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द जो अपनाए उसे इंसान कहते हैं। ये बातें जिंदगी में समझ आती है, जिंदगी के बाद भी समाज के काम आए उसे इंसान कहते हैं और मरणोपरांत समाज के काम आने का जज्बा कोई बिरला ही दिखाता है। ऐसा ही एक नाम है, सुशीलकुमार सिंह । समाज सेवा के लिए तैयार हो रहे डॉक्टरों की टीम को रिसर्च के लिए अपना शरीर मुहैया कराने की चाहत पाल रखे सुशील कुमार सिंह का सपना है कि मरने के बाद उनके मृत शरीर को अनुसंधान कर रहे डॉक्टरों को मुहैया कराई जाए, जिससे सांसों के टूटने के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके। श्री सुशीलकुमार सिंह का जन्म सन् 1965 को सिविल लाईन जबलपुर म. प. में हुआ। आपके पिता श्री मुन्नालाल सिंह आर्डिनेंस फैक्ट्री गन कैरेज एवं आर्डिनेंस व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर मे पदस्थ थे और माता श्रीमती कस्तुरी देवी कुशल गृहणी। सुशील जी की शिक्षा जी. सी. एफ. एच. एस. एस. जबलपुर से मिडिल तथा व्ही. एफ. जे. एच. एस. एस. जबलपुर से हायर सेकेण्ड्री तथा महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर से बी. काम. किया। आप छात्रसंघ के अध्यक्ष भी चुने गये। हिन्दी नाटकों में आपकी विशेष रूचि रही है जैसे `आजादी के दीवाने' `काजूरी गांव की एक रात' `मुर्गीवाला' इत्यादि दर्जनों नाटकों में अभिनय के साथ-साथ आपने कई नाटकों जैसे `आदमी का गोश्त' `शहीद भगतसिंह' बिखरे सपने' रोटी' `कफन' `आगत की पतीक्षा' `अगर यही रफ्तार रही तो' `अंधें का हाथी' `अंधे-काने' इत्यादि और दर्जनों नाटकों में निर्देशन कार्य भी सफलतापूर्वक किया। आर्डिनेंस फैक्ट्री जबलपुर की रामलीला में सात वर्ष तक `भरत' का अभिनय सफलतापूर्वक किया, जिससे त्याग, समर्पण और भाईचारे की भावना और भी पबल हुई। श्री सिंह ने समाज के काम आने के उद्देश्य से सन् 1989 में पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग जिला रायग्व में कलापथक कलाकार के पद पर कार्यभार ग्रहण किया और इन्हीं भावनाओं से ओत-पोत श्री सिंह ने एक जनवरी 1992 को एक पोलियोग्रस्त निःशक्प महिला से बिना किसी दहेज के गायत्री मंदिर में विधि-विधान से विवाह किया, आज उनका जीवन सुखमय है। उनका कहना है कि, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुमनसिंह ठाकुर भी समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं वे शरीर से निःशक्प हैं लेकिन उनकी भावनाएं सबल एवं सशक्प हैं। वे कार्यालयीन कार्यों के साथ-साथ गृहस्थी के सभी कार्यों को बखूबी निभाती हैं। उनकी निःशक्पता का कभी भी एहसास नही होता। हमारी एक पुत्री है जिसे हमे ईश्वर ने शरद पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा के रूप में 11 अक्टूबर 1992 को दिया, जो वर्तमान में बी. आर्पिटेक्चर कर रही है। उन्होने एक पुत्री की पाप्ति के बाद ही जनसंख्या वृद्धि को विशेष दृष्टिगत रखते हुए कन्या भूण हत्या जैसी अमानवीय कृत्य से लोगों को बचने के लिए स्वयं पेरक बनकर परिवार नियोजन करवा लिये। श्री सिंह ने बताया कि उन्हें देहदान की पेरणा रायगकलेक्टर अशोक अग्रवाल से मिली है। श्री सिंह के ज्येष्ठ भ्राता अनिलकुमार सिंह भी समाज सेवा एवं जनसेवक के रूप में स्वयं नेत्रदान (मरणोपरांत) करने संकल्पित हैं। एक समारोह में श्री अग्रवाल का कथन `नेत्रदान महादान' से पेरित होकर सुशीलकुमार सिंह ने नेत्रदान का मंसूबा बनाया। इसके बाद उनके मन मे विचार आया कि, नेत्रांsं के साथ-साथ क्यें न पूरे शरीर को ही चिकित्सा विज्ञान के जूनियर डॉक्टरों की टीम को रिसर्च के लिए दे दूँ। ताकि मृत शरीर भी किसी का काम आ सके।
| रायगढ़, । उप-संचालक पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, जिला रायग्व छत्तीसगमें कलापथक कलाकार के पद पर पदस्थ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि मरणोपरान्त मेरे देह दान से चिकित्सा विज्ञान के छात्र-छात्राओं को शोध अनुसंधान पयोग कर नई-नई तकनीक के माध्यम से बीमारियों का उपचार कर सकेंगे और उन्हें नई जानकारी मिल सकेगी। जिस पकार नेत्र दान से दूसरों को रोशनी मिलती है और एक व्यक्पि के रक्प दान से चार व्यक्पियों को जीवन दान मिलता है। ठीक इसी पकार मेरे देहदान से जूनियर डॉक्टरों को नई जानकारियाँ मिलेगी। श्री सिंह के देहदान के कारण गत माह अम्sडकर सम्मान से धमतरी में और पबुद्धजन सम्मान से रायग्व मे सम्मानित किया गया है। सुशील कुमार सिंह ने कहा कि चिकित्सालय एक मंदिर के समान है, इसलिए चिकित्सालय में आने वाले मरीज का आधा दुःख दर्द चिकित्सकों के व्यवहार और वहाँ कि व्यवस्था और सुविधा से दूर हो जाती है। चिकित्सक के उपचार से मरीज को रोग से मुक्पि मिलने से वह खुले मन से चिकित्सक की सेवाभाव के लिए दुआ देता है। चिकित्सक रोग, पीड़ा से पीड़ित व्यक्पि के दुःख दर्द दूर करने में मदद करता है। चिकित्सा का व्यवसाय सबसे अच्छा और मान्यता पाप्त है यह मानवता की सेवा का पेशा है। उन्होंने कलेक्टर श्री अशोक कुमार अग्रवाल की नेत्रदान की अपील से पभावित होकर देहदान की घोषणा की और अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए मृत्यु पश्चात् देहदान का आवेदन कलेक्टर दिया, जिसे कलेक्टर श्री अग्रवाल ने आवश्यक औपचारिकता पूरी करने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच. एस. रूंराव को निर्देश दिए। श्री कलेक्अर श्री अग्रवाल ने कहा कि श्री सिंह के देहदान से नवचार का संचार हुआ यह कार्य समज के लिए परेणादी औद आदर्श की मिशाल है। किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द जो अपनाए उसे इंसान कहते हैं। ये बातें जिंदगी में समझ आती है, जिंदगी के बाद भी समाज के काम आए उसे इंसान कहते हैं और मरणोपरांत समाज के काम आने का जज्बा कोई बिरला ही दिखाता है। ऐसा ही एक नाम है, सुशीलकुमार सिंह । समाज सेवा के लिए तैयार हो रहे डॉक्टरों की टीम को रिसर्च के लिए अपना शरीर मुहैया कराने की चाहत पाल रखे सुशील कुमार सिंह का सपना है कि मरने के बाद उनके मृत शरीर को अनुसंधान कर रहे डॉक्टरों को मुहैया कराई जाए, जिससे सांसों के टूटने के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके। श्री सुशीलकुमार सिंह का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को सिविल लाईन जबलपुर म. प. में हुआ। आपके पिता श्री मुन्नालाल सिंह आर्डिनेंस फैक्ट्री गन कैरेज एवं आर्डिनेंस व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर मे पदस्थ थे और माता श्रीमती कस्तुरी देवी कुशल गृहणी। सुशील जी की शिक्षा जी. सी. एफ. एच. एस. एस. जबलपुर से मिडिल तथा व्ही. एफ. जे. एच. एस. एस. जबलपुर से हायर सेकेण्ड्री तथा महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर से बी. काम. किया। आप छात्रसंघ के अध्यक्ष भी चुने गये। हिन्दी नाटकों में आपकी विशेष रूचि रही है जैसे `आजादी के दीवाने' `काजूरी गांव की एक रात' `मुर्गीवाला' इत्यादि दर्जनों नाटकों में अभिनय के साथ-साथ आपने कई नाटकों जैसे `आदमी का गोश्त' `शहीद भगतसिंह' बिखरे सपने' रोटी' `कफन' `आगत की पतीक्षा' `अगर यही रफ्तार रही तो' `अंधें का हाथी' `अंधे-काने' इत्यादि और दर्जनों नाटकों में निर्देशन कार्य भी सफलतापूर्वक किया। आर्डिनेंस फैक्ट्री जबलपुर की रामलीला में सात वर्ष तक `भरत' का अभिनय सफलतापूर्वक किया, जिससे त्याग, समर्पण और भाईचारे की भावना और भी पबल हुई। श्री सिंह ने समाज के काम आने के उद्देश्य से सन् एक हज़ार नौ सौ नवासी में पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग जिला रायग्व में कलापथक कलाकार के पद पर कार्यभार ग्रहण किया और इन्हीं भावनाओं से ओत-पोत श्री सिंह ने एक जनवरी एक हज़ार नौ सौ बानवे को एक पोलियोग्रस्त निःशक्प महिला से बिना किसी दहेज के गायत्री मंदिर में विधि-विधान से विवाह किया, आज उनका जीवन सुखमय है। उनका कहना है कि, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुमनसिंह ठाकुर भी समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं वे शरीर से निःशक्प हैं लेकिन उनकी भावनाएं सबल एवं सशक्प हैं। वे कार्यालयीन कार्यों के साथ-साथ गृहस्थी के सभी कार्यों को बखूबी निभाती हैं। उनकी निःशक्पता का कभी भी एहसास नही होता। हमारी एक पुत्री है जिसे हमे ईश्वर ने शरद पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा के रूप में ग्यारह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ बानवे को दिया, जो वर्तमान में बी. आर्पिटेक्चर कर रही है। उन्होने एक पुत्री की पाप्ति के बाद ही जनसंख्या वृद्धि को विशेष दृष्टिगत रखते हुए कन्या भूण हत्या जैसी अमानवीय कृत्य से लोगों को बचने के लिए स्वयं पेरक बनकर परिवार नियोजन करवा लिये। श्री सिंह ने बताया कि उन्हें देहदान की पेरणा रायगकलेक्टर अशोक अग्रवाल से मिली है। श्री सिंह के ज्येष्ठ भ्राता अनिलकुमार सिंह भी समाज सेवा एवं जनसेवक के रूप में स्वयं नेत्रदान करने संकल्पित हैं। एक समारोह में श्री अग्रवाल का कथन `नेत्रदान महादान' से पेरित होकर सुशीलकुमार सिंह ने नेत्रदान का मंसूबा बनाया। इसके बाद उनके मन मे विचार आया कि, नेत्रांsं के साथ-साथ क्यें न पूरे शरीर को ही चिकित्सा विज्ञान के जूनियर डॉक्टरों की टीम को रिसर्च के लिए दे दूँ। ताकि मृत शरीर भी किसी का काम आ सके। |
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर (Jammu And Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) समाप्त हुए एक महीने से ज्यादा हो चुका है। 5 अगस्त को केंद्र सरकार (Central Government) ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला किया था। अब केंद्र ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के सेब की सीधी खरीद करने और उत्पादकों को उनका भुगतान सीधे बैंक खाते के जरिए करने की घोषणा की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सेब के किसानों से खरीद का काम भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) द्वारा किया जाएगा। खरीद का काम 15 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। सरकार ने यह कदम इन खबरों के बाद उठाया है कि कुछ आतंकवादियों ने सेब उत्पादकों से अपने उत्पादन को बाजार में नहीं बेचने की धमकी दी है। सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को धारा 370 के तहत मिले विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने और राज्य को दो संघ शासित प्रदेशों में बांटने के बाद आतंकवादियों द्वारा सेब किसानों को धमकी दी जा रही है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने चालू सीजन 2019 में जम्मू-कश्मीर के किसानों से सेब की खरीद करने की घोषणा की है। नाफेड द्वारा राज्य सरकार की अधिकृत एजेंसियों के जरिए खरीद का काम 15 दिसंबर तक पूरा किया जाएगा। ' अधिकारी ने कहा कि सही सेब उत्पादकों से खरीद सीधे की जाएगी और राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिये उनका भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाए।
अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी सेब उत्पाद जिलों में सब श्रेणियों के सेब. . . ए, बी, सी की खरीद की जाएगी। इसके अलावा सोपोर, शोपियां और श्रीनगर के थोक बाजारों से भी सीधी खरीद की जाएगी। विभिन्न श्रेणियों के सेब का दाम मूल्य समिति द्वारा तय किया जाएगा। इस समिति में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से भी सदस्य होगा। गुणवत्ता समिति यह सेब की उचित ग्रेडिंग सुनिश्चित करेगी।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव राज्य स्तर की क्रियान्वयन एवं संयोजन समिति के प्रमुख होंगे। वहीं केंद्रीय कृषि, गृह मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों इस योजना का सुगमता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने शनिवार को कहा था कि घाटी से प्रतिदिन 750 ट्रक सेब देश के अन्य हिस्सों के लिए जाते हैं। पिछले शुक्रवार को आतंकवादियों ने सोपोर में एक प्रमुख फल कारोबारी के परिवार के सदस्यों पर हमला किया था। इस हमले में व्यापारी का 25 वर्षीय पुत्र और ढाई साल की पोती घायल हुए थे।
| नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर समाप्त हुए एक महीने से ज्यादा हो चुका है। पाँच अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को खत्म करने का फैसला किया था। अब केंद्र ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के सेब की सीधी खरीद करने और उत्पादकों को उनका भुगतान सीधे बैंक खाते के जरिए करने की घोषणा की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सेब के किसानों से खरीद का काम भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ द्वारा किया जाएगा। खरीद का काम पंद्रह दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। सरकार ने यह कदम इन खबरों के बाद उठाया है कि कुछ आतंकवादियों ने सेब उत्पादकों से अपने उत्पादन को बाजार में नहीं बेचने की धमकी दी है। सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को धारा तीन सौ सत्तर के तहत मिले विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने और राज्य को दो संघ शासित प्रदेशों में बांटने के बाद आतंकवादियों द्वारा सेब किसानों को धमकी दी जा रही है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने चालू सीजन दो हज़ार उन्नीस में जम्मू-कश्मीर के किसानों से सेब की खरीद करने की घोषणा की है। नाफेड द्वारा राज्य सरकार की अधिकृत एजेंसियों के जरिए खरीद का काम पंद्रह दिसंबर तक पूरा किया जाएगा। ' अधिकारी ने कहा कि सही सेब उत्पादकों से खरीद सीधे की जाएगी और राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिये उनका भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाए। अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी सेब उत्पाद जिलों में सब श्रेणियों के सेब. . . ए, बी, सी की खरीद की जाएगी। इसके अलावा सोपोर, शोपियां और श्रीनगर के थोक बाजारों से भी सीधी खरीद की जाएगी। विभिन्न श्रेणियों के सेब का दाम मूल्य समिति द्वारा तय किया जाएगा। इस समिति में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से भी सदस्य होगा। गुणवत्ता समिति यह सेब की उचित ग्रेडिंग सुनिश्चित करेगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव राज्य स्तर की क्रियान्वयन एवं संयोजन समिति के प्रमुख होंगे। वहीं केंद्रीय कृषि, गृह मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों इस योजना का सुगमता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने शनिवार को कहा था कि घाटी से प्रतिदिन सात सौ पचास ट्रक सेब देश के अन्य हिस्सों के लिए जाते हैं। पिछले शुक्रवार को आतंकवादियों ने सोपोर में एक प्रमुख फल कारोबारी के परिवार के सदस्यों पर हमला किया था। इस हमले में व्यापारी का पच्चीस वर्षीय पुत्र और ढाई साल की पोती घायल हुए थे। |
महाराष्ट्र के श्रमायुक्त श्री केरूरे ने राज्य के प्रमुख श्रम अधिकारीयों की बैठक आयोजित की और कहा कि जल्द सर्वे पूरा करके इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भुगतान न करने वाले अख़बारों के मैनेजमेंट के खिलाफ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा। उधर पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन भत्ते तथा प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त कार्यालय की मजीठिया जाँच टीम ने गुजराती दैनिक गुजरात समाचार और हिंदी दैनिक प्रातःकाल के कार्यालय पहुंच कर कागजातों की जांच पड़ताल की।
इन दोनों समाचार पत्रों के प्रतिष्ठान में कागजातों का सर्वे सहायक कामगार आयुक्त सी जे किनिगे और सरकारी कामगार अधिकारी स्वप्निल अखडमल और सरकारी कामगार अधिकारी अनघा छीरसागर ने किया। इस सर्वे के कार्य से मुम्बई सहित पूरे महाराष्ट्र के समाचार पत्र प्रबंधन में हडक़म्प का माहौल है। यह जाँच टीम अब तक मिड डे, सामना, अम्बिका प्रिंटर्स के समाचार पत्रों यशोभूमि, मुम्बई चौफेर, पुण्यनगरी, वार्ताहर और कर्नाटक मल्ला का सर्वे कर चुकी है।
पत्रकार व गैर पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतन और एरियर देने संबंधी सर्वे का काम 25 जून तक पूरा किया जाएगा। महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त श्री केरूरे ने शुक्रवार को कामगार भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ये निर्देश दिए। नागपुर, औरंगाबाद, पुणे समेत सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रम आयुक्त ने कहा कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गंभीरता से लिया है।
| महाराष्ट्र के श्रमायुक्त श्री केरूरे ने राज्य के प्रमुख श्रम अधिकारीयों की बैठक आयोजित की और कहा कि जल्द सर्वे पूरा करके इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भुगतान न करने वाले अख़बारों के मैनेजमेंट के खिलाफ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा। उधर पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन भत्ते तथा प्रमोशन से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त कार्यालय की मजीठिया जाँच टीम ने गुजराती दैनिक गुजरात समाचार और हिंदी दैनिक प्रातःकाल के कार्यालय पहुंच कर कागजातों की जांच पड़ताल की। इन दोनों समाचार पत्रों के प्रतिष्ठान में कागजातों का सर्वे सहायक कामगार आयुक्त सी जे किनिगे और सरकारी कामगार अधिकारी स्वप्निल अखडमल और सरकारी कामगार अधिकारी अनघा छीरसागर ने किया। इस सर्वे के कार्य से मुम्बई सहित पूरे महाराष्ट्र के समाचार पत्र प्रबंधन में हडक़म्प का माहौल है। यह जाँच टीम अब तक मिड डे, सामना, अम्बिका प्रिंटर्स के समाचार पत्रों यशोभूमि, मुम्बई चौफेर, पुण्यनगरी, वार्ताहर और कर्नाटक मल्ला का सर्वे कर चुकी है। पत्रकार व गैर पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतन और एरियर देने संबंधी सर्वे का काम पच्चीस जून तक पूरा किया जाएगा। महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त श्री केरूरे ने शुक्रवार को कामगार भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ये निर्देश दिए। नागपुर, औरंगाबाद, पुणे समेत सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रम आयुक्त ने कहा कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गंभीरता से लिया है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पर्दा एक कपड़ा होता है जो घर की खिड़कियों एवं दरवाजों पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य बाहर से आने वाले प्रकाश, हवा और पानी को अन्दर आने से रोकना है। इसको लगाने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निजता (प्रायवेसी) की रक्षा करना भी होता है।. मखमल का परिधान मखमल (फ्रेंचः Velours, जर्मनः Samt, अंग्रेजीः Velvet, स्पेनिशः Terciopelo) हलकी बुनाई के रोयेंदार रेशमी कपड़े को कहते हैं। यह साधारण रेशम (silk) या प्लश (plush) की रोएँदार सतह पर बनाया जाता है। यह सतह बुनाई करते समय ऐंठे हुए रेशमी धागों को पृथक्-पृथक् करने से विकसित होती है। अलग-अलग होने पर यह धागे गुच्छे के रूप में रेशमी, सूती या किसी भी बुने कपड़े के दृढ़ आधार पर सीधे खड़े रहते है। प्राचीन काल में मखमल पोशाकों के लिये काफी लोकप्रिय रहा है। राजकीय, सामाजिक तथा धार्मिक अवसरों पर मखमल के परिधानों का विशेष रूप से उपयोग होता था। इसके कई उपयोग भी हैं, जैसे पर्दे के रूप में एवं शोभा के लिये, सोफे के गद्दे तथा लिहाफों के खोल के रूप में। .
पर्दा और मखमल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
पर्दा 5 संबंध है और मखमल 9 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (5 + 9)।
यह लेख पर्दा और मखमल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पर्दा एक कपड़ा होता है जो घर की खिड़कियों एवं दरवाजों पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य बाहर से आने वाले प्रकाश, हवा और पानी को अन्दर आने से रोकना है। इसको लगाने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निजता की रक्षा करना भी होता है।. मखमल का परिधान मखमल हलकी बुनाई के रोयेंदार रेशमी कपड़े को कहते हैं। यह साधारण रेशम या प्लश की रोएँदार सतह पर बनाया जाता है। यह सतह बुनाई करते समय ऐंठे हुए रेशमी धागों को पृथक्-पृथक् करने से विकसित होती है। अलग-अलग होने पर यह धागे गुच्छे के रूप में रेशमी, सूती या किसी भी बुने कपड़े के दृढ़ आधार पर सीधे खड़े रहते है। प्राचीन काल में मखमल पोशाकों के लिये काफी लोकप्रिय रहा है। राजकीय, सामाजिक तथा धार्मिक अवसरों पर मखमल के परिधानों का विशेष रूप से उपयोग होता था। इसके कई उपयोग भी हैं, जैसे पर्दे के रूप में एवं शोभा के लिये, सोफे के गद्दे तथा लिहाफों के खोल के रूप में। . पर्दा और मखमल आम में शून्य बातें हैं । पर्दा पाँच संबंध है और मखमल नौ है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख पर्दा और मखमल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
मेरठ मेडिकल कॉलेज से मरीजों के फरार होने की सूचना पर हड़कंप मच गया। छानबीन हुई तो पता चला कि इनमें से नौ मरीज जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बिना बताए घर पहुंच चले गए थे, जबकि एक मेडिकल में ही क्वारंटीन है और एक अन्य को सुभारती मेडिकल कॉलेज भेजा जा चुका है। वहीं, एक के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
| मेरठ मेडिकल कॉलेज से मरीजों के फरार होने की सूचना पर हड़कंप मच गया। छानबीन हुई तो पता चला कि इनमें से नौ मरीज जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बिना बताए घर पहुंच चले गए थे, जबकि एक मेडिकल में ही क्वारंटीन है और एक अन्य को सुभारती मेडिकल कॉलेज भेजा जा चुका है। वहीं, एक के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
केरल के इडुक्की जिले के मूलमट्टम में 26 मार्च की रात एक आदमी ने बीफ न मिलने पर भीड़ पर गोली चला दी। घटना में एक व्यक्ति की मौत और दो के घायल होने की खबर है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उसके साथियों को भी पड़ताल के लिए हिरासत में लिया गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फिलिप मार्टिन नाम का 26 साल का लड़का रोड पर बने इटिंग प्वाइंट पर खाना खाने गया। जहाँ दुकान की मालकिन ने बताया कि उनका पसंदीदा बीफ करी खत्म हो गया है। इतना कहने के साथ ही मार्टिन महिला को गाली देने लगा। जब वहाँ बैठे ग्राहकों ने इसका विरोध किया तो वह उनसे लड़ने लगा। थोड़ी देर बाद वह उस जगह से चला गया और रिवॉल्वर लेकर आया। इसके बाद उसने पाँच राउंड गोलियाँ चलाईं। इन्हीं में से एक बुलेट जाकर सनाल बाबू के सिर में लगी। वह पेशे से बस कंडक्टर थे जो घटना के समय दुकान के बाहर खड़े थे। फायरिंग में गोली उनकी गर्दन पर लगी और अस्पताल ले जाते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। दो अन्य जो घायल हुए थे उनकी हालत खतरे से बाहर है।
इटिंग प्वाइंट की मालकिन ने बताया, "रात के 10 बजे नशे में धुत होकर वो हमारी दुकान पर आए और बीफ की माँग करी। उन्होंने स्टाफ को गाली देना शुरू किया। कुछ ग्राहकों ने आपत्ति जताई कि ये दुकान महिला चलाती है तो इस तरह की गाली न दी जाएँ। इसी के बाद वे लोग दुकान से गए और दोबारा कार में आकर अंधाधुंध फायरिंग की। शुरू में कुछ गोलियाँ हवा में मारी गई और बाद में ये गोली भीड़ पर चला दी गई।
बता दें कि केरल पुलिस ने आरोपित को पकड़ लिया है। वो रिवॉल्वर भी जब्त कर ली गई है जिससे गोलियाँ चलीं। मार्टिन पर मर्डर और अन्य आरोपों के तहत केस चलेगा। उसके दोस्त भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए हैं। ये जानकारी स्टेशन ऑफिसर ई के सोली मोन की ओर से दी गई है। उल्लेखनीय है कि केरल बीफ के कारण अक्सर विवादों में रहा है। वहाँ आधी से ज्यादा आबादी बीफ सेवन करती है। जब नॉर्थ इंडिया के राज्यों में बीफ बैन किया गया था जब वामपंथी छात्रों ने बीफ फेस्टिवल का आयोजन किया था।
| केरल के इडुक्की जिले के मूलमट्टम में छब्बीस मार्च की रात एक आदमी ने बीफ न मिलने पर भीड़ पर गोली चला दी। घटना में एक व्यक्ति की मौत और दो के घायल होने की खबर है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उसके साथियों को भी पड़ताल के लिए हिरासत में लिया गया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फिलिप मार्टिन नाम का छब्बीस साल का लड़का रोड पर बने इटिंग प्वाइंट पर खाना खाने गया। जहाँ दुकान की मालकिन ने बताया कि उनका पसंदीदा बीफ करी खत्म हो गया है। इतना कहने के साथ ही मार्टिन महिला को गाली देने लगा। जब वहाँ बैठे ग्राहकों ने इसका विरोध किया तो वह उनसे लड़ने लगा। थोड़ी देर बाद वह उस जगह से चला गया और रिवॉल्वर लेकर आया। इसके बाद उसने पाँच राउंड गोलियाँ चलाईं। इन्हीं में से एक बुलेट जाकर सनाल बाबू के सिर में लगी। वह पेशे से बस कंडक्टर थे जो घटना के समय दुकान के बाहर खड़े थे। फायरिंग में गोली उनकी गर्दन पर लगी और अस्पताल ले जाते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। दो अन्य जो घायल हुए थे उनकी हालत खतरे से बाहर है। इटिंग प्वाइंट की मालकिन ने बताया, "रात के दस बजे नशे में धुत होकर वो हमारी दुकान पर आए और बीफ की माँग करी। उन्होंने स्टाफ को गाली देना शुरू किया। कुछ ग्राहकों ने आपत्ति जताई कि ये दुकान महिला चलाती है तो इस तरह की गाली न दी जाएँ। इसी के बाद वे लोग दुकान से गए और दोबारा कार में आकर अंधाधुंध फायरिंग की। शुरू में कुछ गोलियाँ हवा में मारी गई और बाद में ये गोली भीड़ पर चला दी गई। बता दें कि केरल पुलिस ने आरोपित को पकड़ लिया है। वो रिवॉल्वर भी जब्त कर ली गई है जिससे गोलियाँ चलीं। मार्टिन पर मर्डर और अन्य आरोपों के तहत केस चलेगा। उसके दोस्त भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए हैं। ये जानकारी स्टेशन ऑफिसर ई के सोली मोन की ओर से दी गई है। उल्लेखनीय है कि केरल बीफ के कारण अक्सर विवादों में रहा है। वहाँ आधी से ज्यादा आबादी बीफ सेवन करती है। जब नॉर्थ इंडिया के राज्यों में बीफ बैन किया गया था जब वामपंथी छात्रों ने बीफ फेस्टिवल का आयोजन किया था। |
Quick Weight Loss Tips: हममें से कई लोग वजन बढ़ने से परेशान हैं. वजन कम करने के लिए हम कई तरह के उपाय करते हैं। हम में से कई लोग अतिरिक्त पाउंड खोने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन आप कितनी भी कोशिश कर लें, आप वांछित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकते। हालांकि, आप व्यायाम के साथ-साथ कुछ प्राकृतिक तरीकों से आसानी से वजन कम कर सकते हैं। ऐसा ही एक प्राकृतिक तरीका इस पोस्ट में मिल सकता है।
नियमित वजन घटाने के लिए एक उचित स्वस्थ आहार और व्यायाम आवश्यक है। लेकिन कुछ घरेलू नुस्खे वजन घटाने में बेहद कारगर होते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण सौंफ है। सौंफ वजन घटाने में मदद करती है। इसका सेवन करने से शरीर को शेप में रखने में भी मदद मिलती है। सौंफ के फायदे अनेक हैं। लेकिन इसका सही तरीके से सेवन करना भी बहुत जरूरी है।
रोजाना अधिकतम दो चम्मच सौंफ का सेवन करना चाहिए। भोजन के बाद सौंफ का सेवन किया जा सकता है या इसे पानी में भिगोकर भी पिया जा सकता है। सौंफ का सेवन सिर्फ वजन घटाने के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। तेजी से वजन घटाने के लिए सौंफ का सेवन कैसे करें इस पोस्ट में जान सकते हैं।
एक मुट्ठी सौंफ लें और इसे पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को आप किसी भी ड्रिंक जैसे दही, चाशनी, चाय या कॉफी में मिला सकते हैं। मेथी दाना, काला नमक, शतावरी और चीनी स्वादानुसार डालें। इससे पेय का स्वाद तो बढ़ता ही है साथ ही इसके स्वास्थ्य लाभ भी बढ़ जाते हैं। इस चूर्ण के नियमित सेवन से पाचन में सुधार होता है और वजन कम होता है।
सौंफ को पानी में मिलाकर पीने से पेट में ऐंठन और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने का एक सामान्य तरीका माना जाता है। मुट्ठी भर सौंफ के बीज लें और उन्हें एक गिलास पानी में भिगो दें। इसे रातभर के लिए रख दें और सुबह इसे पी लें। यह शरीर में विटामिन और खनिजों के अधिकतम अवशोषण में मदद करता है। यह वजन घटाने में भी मदद करता है। वजन घटाने के लिए दो गिलास सौंफ के पानी का सेवन एक अच्छा उपाय है। यह मोटापा कम करने में मदद करता है । आप एक गिलास सुबह और एक गिलास शाम को पीने की आदत बना सकते हैं।
सौंफ के बीजों की चाय बनाना एक बहुत ही सरल लेकिन लाभकारी उपाय है। इसका अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इसे रोजाना पिएं। शाम की चाय बनाते समय उबलते पानी में एक चम्मच सौंफ डालें। इसके अलावा आप इस लाजवाब चाय का स्वाद लेने के लिए सौंफ के बीज के साथ आधा चम्मच गुड़ भी मिला सकते हैं। यह पाचन में सुधार करता है, दर्द से राहत देता है, मुंह में स्वाद बढ़ाता है और शरीर को ठंडा करता है।
एक बड़े चम्मच में सौंफ के बीज लें और उन्हें मध्यम आंच पर गैस पर भून लें। यदि आवश्यक हो तो इसे मीठा करने के लिए इसमें थोड़ी चीनी या गुड़ मिलाएं और पाचन में सुधार के लिए हर भोजन के बाद इस मिश्रण को खाएं। साथ ही इसमें मीठा मिलाने से मीठे स्वाद के कारण बार-बार लगने वाली भूख भी नियंत्रित रहती है। भुनी हुई सौंफ को पीसकर पीसकर रोजाना सेवन किया जा सकता है।
| Quick Weight Loss Tips: हममें से कई लोग वजन बढ़ने से परेशान हैं. वजन कम करने के लिए हम कई तरह के उपाय करते हैं। हम में से कई लोग अतिरिक्त पाउंड खोने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन आप कितनी भी कोशिश कर लें, आप वांछित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकते। हालांकि, आप व्यायाम के साथ-साथ कुछ प्राकृतिक तरीकों से आसानी से वजन कम कर सकते हैं। ऐसा ही एक प्राकृतिक तरीका इस पोस्ट में मिल सकता है। नियमित वजन घटाने के लिए एक उचित स्वस्थ आहार और व्यायाम आवश्यक है। लेकिन कुछ घरेलू नुस्खे वजन घटाने में बेहद कारगर होते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण सौंफ है। सौंफ वजन घटाने में मदद करती है। इसका सेवन करने से शरीर को शेप में रखने में भी मदद मिलती है। सौंफ के फायदे अनेक हैं। लेकिन इसका सही तरीके से सेवन करना भी बहुत जरूरी है। रोजाना अधिकतम दो चम्मच सौंफ का सेवन करना चाहिए। भोजन के बाद सौंफ का सेवन किया जा सकता है या इसे पानी में भिगोकर भी पिया जा सकता है। सौंफ का सेवन सिर्फ वजन घटाने के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। तेजी से वजन घटाने के लिए सौंफ का सेवन कैसे करें इस पोस्ट में जान सकते हैं। एक मुट्ठी सौंफ लें और इसे पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को आप किसी भी ड्रिंक जैसे दही, चाशनी, चाय या कॉफी में मिला सकते हैं। मेथी दाना, काला नमक, शतावरी और चीनी स्वादानुसार डालें। इससे पेय का स्वाद तो बढ़ता ही है साथ ही इसके स्वास्थ्य लाभ भी बढ़ जाते हैं। इस चूर्ण के नियमित सेवन से पाचन में सुधार होता है और वजन कम होता है। सौंफ को पानी में मिलाकर पीने से पेट में ऐंठन और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने का एक सामान्य तरीका माना जाता है। मुट्ठी भर सौंफ के बीज लें और उन्हें एक गिलास पानी में भिगो दें। इसे रातभर के लिए रख दें और सुबह इसे पी लें। यह शरीर में विटामिन और खनिजों के अधिकतम अवशोषण में मदद करता है। यह वजन घटाने में भी मदद करता है। वजन घटाने के लिए दो गिलास सौंफ के पानी का सेवन एक अच्छा उपाय है। यह मोटापा कम करने में मदद करता है । आप एक गिलास सुबह और एक गिलास शाम को पीने की आदत बना सकते हैं। सौंफ के बीजों की चाय बनाना एक बहुत ही सरल लेकिन लाभकारी उपाय है। इसका अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इसे रोजाना पिएं। शाम की चाय बनाते समय उबलते पानी में एक चम्मच सौंफ डालें। इसके अलावा आप इस लाजवाब चाय का स्वाद लेने के लिए सौंफ के बीज के साथ आधा चम्मच गुड़ भी मिला सकते हैं। यह पाचन में सुधार करता है, दर्द से राहत देता है, मुंह में स्वाद बढ़ाता है और शरीर को ठंडा करता है। एक बड़े चम्मच में सौंफ के बीज लें और उन्हें मध्यम आंच पर गैस पर भून लें। यदि आवश्यक हो तो इसे मीठा करने के लिए इसमें थोड़ी चीनी या गुड़ मिलाएं और पाचन में सुधार के लिए हर भोजन के बाद इस मिश्रण को खाएं। साथ ही इसमें मीठा मिलाने से मीठे स्वाद के कारण बार-बार लगने वाली भूख भी नियंत्रित रहती है। भुनी हुई सौंफ को पीसकर पीसकर रोजाना सेवन किया जा सकता है। |
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) ने साफ शब्दों में तालिबानी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जैसे आतंकवाद से निपटा जाता है, वैसे ही मुकाबला होगा।
अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद पहली बार भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) ने साफ शब्दों में तालिबान को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जैसे आतंकवाद से निपटा जाता है, वैसे ही मुकाबला होगा। अगर वहां की परिस्थितियों का भारत पर कोई असर होता है। हमें पहले से ही आशंका थी।
बिपिन रावत ने कहा कि हमें इस बात का पहले से ही अंदेशा था कि अफगानिस्तान में तालिबान की हुकुमत आने वाली है। जिसके लिए हमें एक प्लान तैयार किया था। जिसका नाम 'कंटिंजेंसी-प्लान है। लेकिन इस प्लान का इस्तेमाल तभी होगा, जब अफगानिस्तान के हालातों का भारत पर कोई असर होता है। भारत तैयार है। किसी भी तरह के आतंकवादी हमले को लेकर। अफगान से आने वाली हर समस्या से हम उसी तरह निपटेंगे। जैसे भारत में आतंकवाद से अभी तक निपटता रहा है।
बिपिन रावत ने द इंडिया-यूएस पार्टनरशिपः सिक्योरिंग द सेंचुरी प्रोग्राम के दौरान कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर युद्ध के खिलाफ लड़ने की बात होगी तो हम इसका स्वागत करते हैं। एक दूसरे के सहयोग से ही आतंकवादियों की पहचान होगी। हम लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि अफगान की आतंकवादी गतिविधियां भारत में कैसे फैल सकती हैं और इससे निपटने के लिए हम तैयार हैं। तालिबान ने कई हाईटेक हथियारों और विमानों पर भी तालिबान ने अपना कब्जा कर लिया है।
| चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने साफ शब्दों में तालिबानी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जैसे आतंकवाद से निपटा जाता है, वैसे ही मुकाबला होगा। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पहली बार भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने साफ शब्दों में तालिबान को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जैसे आतंकवाद से निपटा जाता है, वैसे ही मुकाबला होगा। अगर वहां की परिस्थितियों का भारत पर कोई असर होता है। हमें पहले से ही आशंका थी। बिपिन रावत ने कहा कि हमें इस बात का पहले से ही अंदेशा था कि अफगानिस्तान में तालिबान की हुकुमत आने वाली है। जिसके लिए हमें एक प्लान तैयार किया था। जिसका नाम 'कंटिंजेंसी-प्लान है। लेकिन इस प्लान का इस्तेमाल तभी होगा, जब अफगानिस्तान के हालातों का भारत पर कोई असर होता है। भारत तैयार है। किसी भी तरह के आतंकवादी हमले को लेकर। अफगान से आने वाली हर समस्या से हम उसी तरह निपटेंगे। जैसे भारत में आतंकवाद से अभी तक निपटता रहा है। बिपिन रावत ने द इंडिया-यूएस पार्टनरशिपः सिक्योरिंग द सेंचुरी प्रोग्राम के दौरान कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर युद्ध के खिलाफ लड़ने की बात होगी तो हम इसका स्वागत करते हैं। एक दूसरे के सहयोग से ही आतंकवादियों की पहचान होगी। हम लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि अफगान की आतंकवादी गतिविधियां भारत में कैसे फैल सकती हैं और इससे निपटने के लिए हम तैयार हैं। तालिबान ने कई हाईटेक हथियारों और विमानों पर भी तालिबान ने अपना कब्जा कर लिया है। |
अमित शाह (फाइल फोटो) ( Image Source : PTI )
West Bengal Violence News: पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार सख्त नजर आ रही है. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मंगलवार (4 अप्रैल) को रामनवमी पर हुए दंगे और खराब कानून व्यवस्था पर ममता सरकार से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी से 3 दिनों के अंदर पूरी घटना पर रिपोर्ट भेजने को कहा है. बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार (Sukanta Majumdar) ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को लगातार बंगाल में निशाना बनाया जा रहा है.
इस चिट्ठी के बाद गृह मंत्रालय ने ये रिपोर्ट मांगी है. इससे पहले गुरुवार को हावड़ा में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच झड़प के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस और राज्य बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार से बात की और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति का आंकलन किया था.
राज्यपाल ने अमित शाह को हिंसा और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी थी. हावड़ा में भीड़ की ओर से उत्पात मचाने, वाहनों को जलाने, पथराव करने और दुकानों में तोड़फोड़ करने के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. इस दौरान पुलिस के कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे. हावड़ा के बाद रविवार को हुगली में भी हिंसा हुई थी.
सुकांत मजूमदार ने अपने पत्र में लिखा था कि हुगली जिले में भी बीजेपी की शोभायात्रा में बवाल किया गया. फिर रेलवे स्टेशनों पर भारी पथराव हुआ. जिसके बाद ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था और इसे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी यानी टीएमसी और उसके समर्थन के बिना जारी नहीं रखा जा सकता था. बीजेपी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्य में हिंसा की हालिया घटनाओं के मामले में राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात भी की.
"बीजेपी नेताओं को दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोका"
बीजेपी प्रमुख ने राज्य प्रशासन की ओर से पार्टी नेताओं और सांसदों को दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोकने के बारे में भी लिखा. उन्होंने लिखा कि हमारे वरिष्ठ नेताओं और संसद सदस्यों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति नहीं है जबकि टीएमसी नेता और मंत्री क्षेत्रों में घूम रहे हैं. यहां तक कि मुझे रिषड़ा से पांच किलोमीटर दूर राजमार्ग पर रोक दिया गया और दिलीप घोष पर हमला किया गया.
West Bengal Violence: ममता बनर्जी का BJP पर हमला, 'वे बाहर से गुंडे लाए, मुझे हर वक्त अलर्ट रहना होता है क्योंकि. . . '
| अमित शाह West Bengal Violence News: पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार सख्त नजर आ रही है. गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को रामनवमी पर हुए दंगे और खराब कानून व्यवस्था पर ममता सरकार से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी से तीन दिनों के अंदर पूरी घटना पर रिपोर्ट भेजने को कहा है. बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को लगातार बंगाल में निशाना बनाया जा रहा है. इस चिट्ठी के बाद गृह मंत्रालय ने ये रिपोर्ट मांगी है. इससे पहले गुरुवार को हावड़ा में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच झड़प के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस और राज्य बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार से बात की और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति का आंकलन किया था. राज्यपाल ने अमित शाह को हिंसा और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी थी. हावड़ा में भीड़ की ओर से उत्पात मचाने, वाहनों को जलाने, पथराव करने और दुकानों में तोड़फोड़ करने के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. इस दौरान पुलिस के कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे. हावड़ा के बाद रविवार को हुगली में भी हिंसा हुई थी. सुकांत मजूमदार ने अपने पत्र में लिखा था कि हुगली जिले में भी बीजेपी की शोभायात्रा में बवाल किया गया. फिर रेलवे स्टेशनों पर भारी पथराव हुआ. जिसके बाद ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था और इसे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी यानी टीएमसी और उसके समर्थन के बिना जारी नहीं रखा जा सकता था. बीजेपी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्य में हिंसा की हालिया घटनाओं के मामले में राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात भी की. "बीजेपी नेताओं को दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोका" बीजेपी प्रमुख ने राज्य प्रशासन की ओर से पार्टी नेताओं और सांसदों को दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोकने के बारे में भी लिखा. उन्होंने लिखा कि हमारे वरिष्ठ नेताओं और संसद सदस्यों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति नहीं है जबकि टीएमसी नेता और मंत्री क्षेत्रों में घूम रहे हैं. यहां तक कि मुझे रिषड़ा से पांच किलोमीटर दूर राजमार्ग पर रोक दिया गया और दिलीप घोष पर हमला किया गया. West Bengal Violence: ममता बनर्जी का BJP पर हमला, 'वे बाहर से गुंडे लाए, मुझे हर वक्त अलर्ट रहना होता है क्योंकि. . . ' |
सबसे पहले, हम पकड़े गए जर्मनों की संरचना से फासीवाद-विरोधी संगठन के गठन की उत्पत्ति पर ध्यान देंगे। इस पर ढेरों राय हैं। सोवियत काल के आधिकारिक प्रचार ने कहा कि पहल जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी और यूएसएसआर में इसके सदस्यों से हुई। उसी समय, फासीवाद-विरोधी लोगों ने अवैध पूर्व-युद्ध ब्रुसेल्स (1935) और बर्न (1939) सम्मेलनों के फैसले किए, जिसमें फासीवाद के खिलाफ लड़ाई के सिद्धांत की घोषणा की गई थी। वैसे, सम्मेलनों को भेस के लिए कहा जाता था - पहला मॉस्को में आयोजित किया गया था, और बर्नीस पेरिस में। वास्तव में, जोसेफ स्टालिन के इशारे पर सीधे राष्ट्रीय समिति "फ्री जर्मनी" के उद्भव का सबसे प्रशंसनीय संस्करण। जून 1943 में, नेता ने ऑल-यूनियन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ बोल्शेविक की केंद्रीय समिति के सचिव, लाल सेना के मुख्य राजनीतिक प्रशासन के प्रमुख, अलेक्जेंडर शार्बाकोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत कीः
हालाँकि, यह केवल एक प्रशंसनीय धारणा है - इसका कोई लिखित दस्तावेजी प्रमाण नहीं है।
साथ में, संस्थापक सम्मेलन ने "फ्री जर्मनी" का पहला घोषणापत्र अपनाया, जिसने समिति की दिशा को रेखांकित किया। हिटलर का खात्मा, युद्ध के शुरुआती अंत तक, जब तक वेहरमाच ने अपनी ताकत नहीं खोई, तब तक युद्धविराम का निष्कर्ष, रीच की पुरानी सीमाओं पर जर्मन सैनिकों की वापसी और राष्ट्रीय सरकार का गठन - ये प्रावधान सबसे आगे थे। इसके अलावा, अगर हिटलर को हिटलर-विरोधी गठबंधन द्वारा उखाड़ फेंका गया, तो राज्य की किसी भी स्वतंत्रता की कोई बात नहीं हो सकती है। फ़ुहरर को स्वयं जर्मनों द्वारा समाप्त किया जाना था, तभी हम किसी संप्रभुता को बनाए रखने की बात कर सकते थे। प्रकट, विशेष रूप से, ने कहाः
"जर्मनी के! घटनाओं को हमें तुरंत हल करने की आवश्यकता है। हमारे देश पर मौत का खतरा मंडरा रहा है और इसके अस्तित्व को खतरे में डालते हुए, निः शुल्क जर्मनी राष्ट्रीय समिति का आयोजन किया गया।
जर्मनी के रहने के लिए हिटलर को कटिंग के साथ घोषणापत्र का पूरा पाठ देखना होगा। एक स्वतंत्र और स्वतंत्र जर्मनी के लिए! " सितंबर 1943 तक, वे तुरंत दुश्मन के पक्ष में कास्टिंग के लिए आठ मिलियन परिसंचरण के साथ मुद्रित हुए। सम्मेलन ने "फ्री जर्मनी" के झंडे को भी मंजूरी दे दी - एक काला-और-सफेद-लाल तिरंगा, जो फासीवाद-विरोधी अखबार फ्रीज Deutschland ("फ्री जर्मनी") का एक पहचानने वाला तत्व बन गया। कुछ महीनों बाद, फ्रेइज़ Deutschland im Bild पूरक चित्र के साथ जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य जर्मन सेना की रैंक और फ़ाइल के लिए था। प्रकाशनों ने समिति के सदस्यों, गतिविधि रिपोर्टों और प्रचार विषयक चित्रों की तस्वीरें प्रकाशित कीं।
यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि लाल सेना के मुख्य राजनीतिक निदेशालय ने अपने स्वयं के प्रचार और "फ्री जर्मनी" की गतिविधियों के बीच स्पष्ट रूप से "जिम्मेदारी के क्षेत्रों" को विभाजित किया है। फासीवाद-विरोधी जर्मनों के विपरीत, राजनीतिक प्रशासन का 7 वाँ विभाग, जो दुश्मन सेनाओं के विघटन के लिए जिम्मेदार था, जर्मनों के साथ आगे के युद्ध की निरर्थकता की छवि बनाने में लगा हुआ था, हार की अनिवार्यता और आत्मसमर्पण करने की इच्छा। यही है, लाल सेना के विशेषज्ञों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण करने के लिए दुश्मन को बुलाया, और फासीवाद-विरोधी जर्मनों ने एक हल्के विकल्प की वकालत की - इकाइयों की वापसी और सभी के लिए फायदेमंद दुनिया। इस मामले के लिए भी अजीबोगरीब एक्शन कार्यक्रम विकसित किए गए थे। इसलिए, 43 वें वर्ष के सितंबर में, आधा मिलियन से अधिक पत्रक "पूर्वी मोर्चे पर सैनिकों को निर्देश संख्या 1" मुद्रित किए गए थे, जिसके अनुसार एक सैन्य तख्तापलट की योजना बनाई गई थी।
मोर्चों पर प्रचार गतिविधियों की अवधारणा में कुछ अंतरों के बावजूद, स्वतंत्र जर्मनी के अधिकृत कार्यकर्ताओं ने पर्यवेक्षण के तहत और सातवें विभागों के साथ निकट संबंध में काम किया। जून 1943 के अंत तक, सबसे भरोसेमंद फ़ासीवादी मोर्चों पर अपने पूर्व-भाइयों के साथ "व्याख्यात्मक" बातचीत करने के लिए पहुंचे। बाहों को। और सितंबर के अंत तक, सोवियत-जर्मन मोर्चे पर लगभग 200 विरोधी फासीवादी थे - औसत प्रति एक विभाजन या सेना। इन लोगों को क्रासनोगोर्स्क सेंट्रल एंटी-फासिस्ट स्कूल और तालित्स्की एंटी-फासिस्ट स्कूल के आधार पर प्रशिक्षित किया गया था। युद्ध के अंत तक, फ्रंट-लाइन, सेना और डिवीजनल कमिश्नरों की संख्या, सेवा कर्मियों (प्रिंटर, टाइपसेट, प्रूफरीडर, इलेक्ट्रीशियन, रेडियो यांत्रिकी) के साथ 2000 से अधिक लोगों की थी।
विभिन्न रैंकों के आयुक्तों की जिम्मेदारियों में वेहरमाच सैनिकों के विघटन, फासीवाद विरोधी प्रचार और जर्मन सैनिकों और अधिकारियों को राज्य विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने पर काम शामिल था। इसके अलावा, "फ्री जर्मनी" के सदस्यों ने (7 वें डिवीजन और एनकेवीडी के पर्यवेक्षण के तहत), फ्रंट लाइन के पीछे गैरकानूनी गतिविधियों और यहां तक कि जर्मन रियर में तोड़फोड़ समूहों को फेंक दिया। हालांकि, सबसे महत्वाकांक्षी और, जाहिर है, सबसे प्रभावी दुश्मन के मनोबल को कमजोर करने के लिए पत्रक का उत्पादन था। सामग्री में जोर जर्मन सैनिकों के सामने के जीवन पर, पारस्परिक संबंधों पर, साथ ही सूचना की उपस्थिति की दक्षता पर रखा गया था। इसी समय, सैनिकों से अपील में, उन्होंने सीधे सामने की ओर बड़े नुकसान के दोषियों को इंगित किया - विशिष्ट कर्नल, मेज़र और जैसे। प्रकाशन में "सैन्यऐतिहासिक पत्रिका "कॉर्पोरल रूडी स्कोल्ज़ द्वारा संकलित" 357 वें इन्फैंट्री डिवीजन का अंत "पत्रक का एक उदाहरण प्रदान करता है। वह 1 यूक्रेनी मोर्चे पर मुक्त जर्मनी का विश्वासपात्र था। बिना किसी अतिरिक्त संवेदना और अमूर्त के, शोलज़ ने आसानी से और यूनिट के भारी नुकसान के बारे में बात की, युद्ध की निरर्थकता के बारे में, उसे फूहर के लिए न मरने और जर्मन पक्ष में समिति की कोशिकाओं को व्यवस्थित करने का आग्रह किया। रूसियों को संक्रमण के लिए पासवर्ड थाः "जनरल वॉन सीडलिट्ज़", जिस पर थोड़ी देर बाद चर्चा की जाएगी।
ऐसे पर्चे आमतौर पर मोर्टार का उपयोग करके वितरित किए जाते थे, विमानन और गुब्बारे, और "व्याख्यात्मक" बातचीत के लिए, अधिकृत समिति ने शक्तिशाली लाउड-स्पीकिंग इंस्टॉलेशन (MSU) और ट्रेंच लाउडस्पीकर (OSU) का इस्तेमाल किया। 3-4 मिनट के लिए औसतन 30-1 किलोमीटर के लिए पहला प्रसारण, और 2-15 किलोमीटर की दूरी पर दूसरा धोया मस्तिष्क दिमाग। अक्सर मेगाफोन और साधारण वक्ताओं का भी उपयोग किया जाता है। एक ओर, उन्होंने वेहरमाच सैनिकों के साथ लगभग दृश्य संपर्क स्थापित करना संभव बना दिया, और दूसरी ओर, उन्होंने अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया और आग के नीचे गिर गए। 1944 मार्च 1 से 1945 मई 1616 तक जर्मन में XNUMX ध्वनि प्रसारण करने वाले कॉर्पोरल हंस गोसेन की गतिविधि का उदाहरण दिखाता है कि इस दिशा में दुश्मन के साथ काम कितना घना था। ये प्रति दिन लगभग चार विषयगत "प्रसारण" हैं।
हिटलर का मार्शल या जर्मन लोगों का मार्शल?
मुक्त जर्मनी समिति के काम का सबसे महत्वपूर्ण चरण कट्टर विरोधी फासीवादियों में जर्मन अधिकारियों के संघ की भागीदारी थी। उन्होंने अगस्त 1943 में समिति की ओर से बाद में इसका आयोजन किया, और तोपखाने के जनरल वाल्टर वॉन सीडलिट्ज़-कुर्ज़बाक का नेतृत्व किया, जिन्हें स्टालिनग्राद के पास भी सोवियत संघ द्वारा कब्जा कर लिया गया था। सेडलिट्ज़ संघ के नेता बन गए, मोटे तौर पर निराशा के कारण - फील्ड मार्शल फ्रेडरिक पॉलस ने न केवल सिर से इनकार कर दिया, बल्कि "जर्मन अधिकारियों के संघ" में भी शामिल हो गए। और यूनियन को वेहरमाच के अधिकारियों और सैनिकों की आंखों में फासीवाद विरोधी आंदोलन को वजन देने के लिए लाल सेना के प्रचार की जरूरत थी। पॉलस, यह महसूस करते हुए कि रूस में उसके लिए इंतजार नहीं कर रहे थे, बहुत ही आक्रामक व्यवहार करना शुरू कर दिया। 1 सितंबर, 1943 को, उन्होंने सोवियत नेतृत्व के लिए एक याचिका का आयोजन किया जो संघ के हिस्से के रूप में अपने पूर्व अधीनस्थों के व्यवहार की निंदा करता था। इस ग्रंथ के तहत, जिसमें संघ के अधिकारियों और जनरलों को मातृभूमि के लिए गद्दार कहा जाता था, युद्ध के अन्य 17 उच्च-श्रेणी के कैदियों ने उनके नाम पर हस्ताक्षर किए। यह गंभीर रूप से सिडलिट्ज़ के पॉलस के साथ संबंध को परेशान करता है, और बाद में, तोपखाने के जनरल के आग्रह पर, मास्को के पास एक डाचा के लिए निष्कासित कर दिया गया था। मुझे कहना होगा कि फील्ड मार्शल के पास सोवियत कैद में हार्दिक भोजन की स्थिति थी - हार्दिक भोजन, सिगरेट, एडजुटेंट एडम, अर्दली शुल्ते और पर्सनल कुक जॉर्जेस। और जब पॉल्यूस में विकिरण तंत्रिका को उकसाया गया, तो इवानोवो मेडिकल इंस्टीट्यूट के प्रमुख न्यूरोसर्जन, प्रोफेसर कार्तशोव को ऑपरेशन के लिए बुलाया गया। और बाकी जर्मन जनरलों ने यूएसएसआर में बहुत संतोषजनक ढंग से रहते हुए नियमित रूप से हमवतन-राजनीतिक प्रवासियों के साथ शराबी पेय के साथ विरोधी फासीवादी बयानबाजी को आगे बढ़ाया। यह सब विरोधी फासीवादियों के साथ सहयोग के लिए युद्ध के एक उच्च-श्रेणी के कैदी की स्वैच्छिक प्रेरण के लिए सोवियत विशेष सेवाओं की योजना का हिस्सा था। 44 वें वर्ष के शुरुआती अगस्त में, ऐसा लगता है, चरम उपायों की बारी आ गई है। पॉलस एक विकल्प के साथ सामना किया गया थाः या तो वह हिटलर के मार्शल थे और जीत के बाद उन्हें बाकी शीर्ष रैह की तरह न्याय दिया जाएगा, या वह जर्मन लोगों के मार्शल थे और "जर्मन अधिकारियों के संघ" के साथ पक्ष लेने के लिए बाध्य थे। कार्य का प्रभाव 20 जुलाई, 1944 को हिटलर के प्रयास और उसके बाद 8 अगस्त को फील्ड मार्शल एरविन वॉन विटलेबेन, पॉलस के करीबी दोस्त के निष्पादन पर पड़ा। उसके बाद जर्मनों ("जर्मन लोगों और युद्ध अधिकारियों और यूएसएसआर में स्थित सैनिकों के कैदियों"), और संघ में आधिकारिक प्रविष्टि, और यहां तक कि 17 जनरलों के दुर्भाग्यपूर्ण पत्र को वापस बुलाने की अपील की गई।
फ्री जर्मनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा (जर्मन अधिकारियों का संघ 1943 के पतन में समिति में शामिल हो गया) जनरल वॉन सीडलिट्ज़ थे, जिन्होंने शुरुआत से ही नए जर्मनी में अपनी जगह के लिए बड़ी योजनाएं बनाई थीं। पहले तो उसने वलासोव की इकाइयों के साथ समानता से युद्ध के कैदियों से अपनी सेना बनाने की कोशिश की। बाद में, यह जानकर कि यूएसएसआर, यूएसए और ग्रेट ब्रिटेन फासीवादी जर्मनी के पूर्ण आत्मसमर्पण को प्राप्त करेंगे, उन्होंने निर्वासन में खुद को राष्ट्रपति के रूप में प्रस्तावित किया, और फ्री जर्मनी समिति के शीर्ष को कैबिनेट द्वारा नियुक्त किया गया था। उनका कहना है कि ज़ेडलिट्ज़ के प्रत्यक्ष क्यूरेटर, युद्ध निदेशालय के प्रथम उप-प्रमुख और एनकेवीडी के प्रशिक्षु जनरल निकोलाई मेलनिकोव को इस तरह के अभिशापों के कारण खुद को गोली मारने के लिए मजबूर होना पड़ा। सभी सिडलिट्ज़ की पहल को सोवियत नेतृत्व के बीच समझ नहीं मिली, और पूर्व सहयोगियों के साथ संपर्क विशेष रूप से स्थापित नहीं किया गया था। जनवरी 1 में, जनरल ने अधिकारियों और सैनिकों के मनोवैज्ञानिक उपचार में भाग लिया जो कोरसून-शेवकोवस्की शहर से घिरे थे। सीडलिट्ज़ ने 1944 जर्मन डिवीजनों को आत्मसमर्पण करने के लिए मनाने की कोशिश की - उन्होंने सैन्य कमांडरों को 10 व्यक्तिगत पत्र लिखे, 49 बार रेडियो पर उन्होंने विरोध न करने की अपील की, लेकिन सब कुछ व्यर्थ हो गया। जनरल स्टैमरमैन के नेतृत्व में जर्मनों ने एक सफलता का आयोजन किया, बहुत सारे सैनिकों को खो दिया, और स्वयं सेडलिट्ज़ को "फ़ेटलैंड" में अनुपस्थित मौत की सजा सुनाई गई।
1944 में समिति की गतिविधियों में एक नया अध्याय शुरू हुआ, जब यह स्पष्ट हो गया कि जर्मनी की सीमाओं पर सैनिकों की एक सरल वापसी से कोई भी संतुष्ट नहीं होगा। "फ्री जर्मनी" की बयानबाजी सोवियत पक्ष के प्रभाव के बिना नहीं बदली और समिति के पक्ष में बड़े पैमाने पर बदलाव का आह्वान किया। कोई कहेगा कि इसका मतलब वास्तविक आत्मसमर्पण था, लेकिन सब कुछ कुछ अलग था। पूर्वी मोर्चे पर जर्मनों को नए जर्मनी में लोकतंत्र और स्वतंत्रता की बहाली के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपनी बाहों को बिछाने, सामने की रेखा को पार करने और पहले से ही सोवियत की ओर से आमंत्रित किया गया था।
युद्ध के कैदियों के हिटलर-विरोधी संघ की कॉल निर्णायक नहीं थीं, और फ़्यूहर को अपने ही लोगों द्वारा युद्ध के अंत तक उखाड़ फेंका नहीं गया था। जर्मनी में लोकतंत्र सोवियत सैनिकों और सहयोगियों के संगीनों पर पेश किया जाना था।
- लेखकः
| सबसे पहले, हम पकड़े गए जर्मनों की संरचना से फासीवाद-विरोधी संगठन के गठन की उत्पत्ति पर ध्यान देंगे। इस पर ढेरों राय हैं। सोवियत काल के आधिकारिक प्रचार ने कहा कि पहल जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी और यूएसएसआर में इसके सदस्यों से हुई। उसी समय, फासीवाद-विरोधी लोगों ने अवैध पूर्व-युद्ध ब्रुसेल्स और बर्न सम्मेलनों के फैसले किए, जिसमें फासीवाद के खिलाफ लड़ाई के सिद्धांत की घोषणा की गई थी। वैसे, सम्मेलनों को भेस के लिए कहा जाता था - पहला मॉस्को में आयोजित किया गया था, और बर्नीस पेरिस में। वास्तव में, जोसेफ स्टालिन के इशारे पर सीधे राष्ट्रीय समिति "फ्री जर्मनी" के उद्भव का सबसे प्रशंसनीय संस्करण। जून एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में, नेता ने ऑल-यूनियन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ बोल्शेविक की केंद्रीय समिति के सचिव, लाल सेना के मुख्य राजनीतिक प्रशासन के प्रमुख, अलेक्जेंडर शार्बाकोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत कीः हालाँकि, यह केवल एक प्रशंसनीय धारणा है - इसका कोई लिखित दस्तावेजी प्रमाण नहीं है। साथ में, संस्थापक सम्मेलन ने "फ्री जर्मनी" का पहला घोषणापत्र अपनाया, जिसने समिति की दिशा को रेखांकित किया। हिटलर का खात्मा, युद्ध के शुरुआती अंत तक, जब तक वेहरमाच ने अपनी ताकत नहीं खोई, तब तक युद्धविराम का निष्कर्ष, रीच की पुरानी सीमाओं पर जर्मन सैनिकों की वापसी और राष्ट्रीय सरकार का गठन - ये प्रावधान सबसे आगे थे। इसके अलावा, अगर हिटलर को हिटलर-विरोधी गठबंधन द्वारा उखाड़ फेंका गया, तो राज्य की किसी भी स्वतंत्रता की कोई बात नहीं हो सकती है। फ़ुहरर को स्वयं जर्मनों द्वारा समाप्त किया जाना था, तभी हम किसी संप्रभुता को बनाए रखने की बात कर सकते थे। प्रकट, विशेष रूप से, ने कहाः "जर्मनी के! घटनाओं को हमें तुरंत हल करने की आवश्यकता है। हमारे देश पर मौत का खतरा मंडरा रहा है और इसके अस्तित्व को खतरे में डालते हुए, निः शुल्क जर्मनी राष्ट्रीय समिति का आयोजन किया गया। जर्मनी के रहने के लिए हिटलर को कटिंग के साथ घोषणापत्र का पूरा पाठ देखना होगा। एक स्वतंत्र और स्वतंत्र जर्मनी के लिए! " सितंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस तक, वे तुरंत दुश्मन के पक्ष में कास्टिंग के लिए आठ मिलियन परिसंचरण के साथ मुद्रित हुए। सम्मेलन ने "फ्री जर्मनी" के झंडे को भी मंजूरी दे दी - एक काला-और-सफेद-लाल तिरंगा, जो फासीवाद-विरोधी अखबार फ्रीज Deutschland का एक पहचानने वाला तत्व बन गया। कुछ महीनों बाद, फ्रेइज़ Deutschland im Bild पूरक चित्र के साथ जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य जर्मन सेना की रैंक और फ़ाइल के लिए था। प्रकाशनों ने समिति के सदस्यों, गतिविधि रिपोर्टों और प्रचार विषयक चित्रों की तस्वीरें प्रकाशित कीं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि लाल सेना के मुख्य राजनीतिक निदेशालय ने अपने स्वयं के प्रचार और "फ्री जर्मनी" की गतिविधियों के बीच स्पष्ट रूप से "जिम्मेदारी के क्षेत्रों" को विभाजित किया है। फासीवाद-विरोधी जर्मनों के विपरीत, राजनीतिक प्रशासन का सात वाँ विभाग, जो दुश्मन सेनाओं के विघटन के लिए जिम्मेदार था, जर्मनों के साथ आगे के युद्ध की निरर्थकता की छवि बनाने में लगा हुआ था, हार की अनिवार्यता और आत्मसमर्पण करने की इच्छा। यही है, लाल सेना के विशेषज्ञों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण करने के लिए दुश्मन को बुलाया, और फासीवाद-विरोधी जर्मनों ने एक हल्के विकल्प की वकालत की - इकाइयों की वापसी और सभी के लिए फायदेमंद दुनिया। इस मामले के लिए भी अजीबोगरीब एक्शन कार्यक्रम विकसित किए गए थे। इसलिए, तैंतालीस वें वर्ष के सितंबर में, आधा मिलियन से अधिक पत्रक "पूर्वी मोर्चे पर सैनिकों को निर्देश संख्या एक" मुद्रित किए गए थे, जिसके अनुसार एक सैन्य तख्तापलट की योजना बनाई गई थी। मोर्चों पर प्रचार गतिविधियों की अवधारणा में कुछ अंतरों के बावजूद, स्वतंत्र जर्मनी के अधिकृत कार्यकर्ताओं ने पर्यवेक्षण के तहत और सातवें विभागों के साथ निकट संबंध में काम किया। जून एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस के अंत तक, सबसे भरोसेमंद फ़ासीवादी मोर्चों पर अपने पूर्व-भाइयों के साथ "व्याख्यात्मक" बातचीत करने के लिए पहुंचे। बाहों को। और सितंबर के अंत तक, सोवियत-जर्मन मोर्चे पर लगभग दो सौ विरोधी फासीवादी थे - औसत प्रति एक विभाजन या सेना। इन लोगों को क्रासनोगोर्स्क सेंट्रल एंटी-फासिस्ट स्कूल और तालित्स्की एंटी-फासिस्ट स्कूल के आधार पर प्रशिक्षित किया गया था। युद्ध के अंत तक, फ्रंट-लाइन, सेना और डिवीजनल कमिश्नरों की संख्या, सेवा कर्मियों के साथ दो हज़ार से अधिक लोगों की थी। विभिन्न रैंकों के आयुक्तों की जिम्मेदारियों में वेहरमाच सैनिकों के विघटन, फासीवाद विरोधी प्रचार और जर्मन सैनिकों और अधिकारियों को राज्य विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने पर काम शामिल था। इसके अलावा, "फ्री जर्मनी" के सदस्यों ने , फ्रंट लाइन के पीछे गैरकानूनी गतिविधियों और यहां तक कि जर्मन रियर में तोड़फोड़ समूहों को फेंक दिया। हालांकि, सबसे महत्वाकांक्षी और, जाहिर है, सबसे प्रभावी दुश्मन के मनोबल को कमजोर करने के लिए पत्रक का उत्पादन था। सामग्री में जोर जर्मन सैनिकों के सामने के जीवन पर, पारस्परिक संबंधों पर, साथ ही सूचना की उपस्थिति की दक्षता पर रखा गया था। इसी समय, सैनिकों से अपील में, उन्होंने सीधे सामने की ओर बड़े नुकसान के दोषियों को इंगित किया - विशिष्ट कर्नल, मेज़र और जैसे। प्रकाशन में "सैन्यऐतिहासिक पत्रिका "कॉर्पोरल रूडी स्कोल्ज़ द्वारा संकलित" तीन सौ सत्तावन वें इन्फैंट्री डिवीजन का अंत "पत्रक का एक उदाहरण प्रदान करता है। वह एक यूक्रेनी मोर्चे पर मुक्त जर्मनी का विश्वासपात्र था। बिना किसी अतिरिक्त संवेदना और अमूर्त के, शोलज़ ने आसानी से और यूनिट के भारी नुकसान के बारे में बात की, युद्ध की निरर्थकता के बारे में, उसे फूहर के लिए न मरने और जर्मन पक्ष में समिति की कोशिकाओं को व्यवस्थित करने का आग्रह किया। रूसियों को संक्रमण के लिए पासवर्ड थाः "जनरल वॉन सीडलिट्ज़", जिस पर थोड़ी देर बाद चर्चा की जाएगी। ऐसे पर्चे आमतौर पर मोर्टार का उपयोग करके वितरित किए जाते थे, विमानन और गुब्बारे, और "व्याख्यात्मक" बातचीत के लिए, अधिकृत समिति ने शक्तिशाली लाउड-स्पीकिंग इंस्टॉलेशन और ट्रेंच लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया। तीन-चार मिनट के लिए औसतन तीस-एक किलोग्राममीटर के लिए पहला प्रसारण, और दो-पंद्रह किलोग्राममीटर की दूरी पर दूसरा धोया मस्तिष्क दिमाग। अक्सर मेगाफोन और साधारण वक्ताओं का भी उपयोग किया जाता है। एक ओर, उन्होंने वेहरमाच सैनिकों के साथ लगभग दृश्य संपर्क स्थापित करना संभव बना दिया, और दूसरी ओर, उन्होंने अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया और आग के नीचे गिर गए। एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस मार्च एक से एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस मई एक हज़ार छः सौ सोलह तक जर्मन में XNUMX ध्वनि प्रसारण करने वाले कॉर्पोरल हंस गोसेन की गतिविधि का उदाहरण दिखाता है कि इस दिशा में दुश्मन के साथ काम कितना घना था। ये प्रति दिन लगभग चार विषयगत "प्रसारण" हैं। हिटलर का मार्शल या जर्मन लोगों का मार्शल? मुक्त जर्मनी समिति के काम का सबसे महत्वपूर्ण चरण कट्टर विरोधी फासीवादियों में जर्मन अधिकारियों के संघ की भागीदारी थी। उन्होंने अगस्त एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में समिति की ओर से बाद में इसका आयोजन किया, और तोपखाने के जनरल वाल्टर वॉन सीडलिट्ज़-कुर्ज़बाक का नेतृत्व किया, जिन्हें स्टालिनग्राद के पास भी सोवियत संघ द्वारा कब्जा कर लिया गया था। सेडलिट्ज़ संघ के नेता बन गए, मोटे तौर पर निराशा के कारण - फील्ड मार्शल फ्रेडरिक पॉलस ने न केवल सिर से इनकार कर दिया, बल्कि "जर्मन अधिकारियों के संघ" में भी शामिल हो गए। और यूनियन को वेहरमाच के अधिकारियों और सैनिकों की आंखों में फासीवाद विरोधी आंदोलन को वजन देने के लिए लाल सेना के प्रचार की जरूरत थी। पॉलस, यह महसूस करते हुए कि रूस में उसके लिए इंतजार नहीं कर रहे थे, बहुत ही आक्रामक व्यवहार करना शुरू कर दिया। एक सितंबर, एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस को, उन्होंने सोवियत नेतृत्व के लिए एक याचिका का आयोजन किया जो संघ के हिस्से के रूप में अपने पूर्व अधीनस्थों के व्यवहार की निंदा करता था। इस ग्रंथ के तहत, जिसमें संघ के अधिकारियों और जनरलों को मातृभूमि के लिए गद्दार कहा जाता था, युद्ध के अन्य सत्रह उच्च-श्रेणी के कैदियों ने उनके नाम पर हस्ताक्षर किए। यह गंभीर रूप से सिडलिट्ज़ के पॉलस के साथ संबंध को परेशान करता है, और बाद में, तोपखाने के जनरल के आग्रह पर, मास्को के पास एक डाचा के लिए निष्कासित कर दिया गया था। मुझे कहना होगा कि फील्ड मार्शल के पास सोवियत कैद में हार्दिक भोजन की स्थिति थी - हार्दिक भोजन, सिगरेट, एडजुटेंट एडम, अर्दली शुल्ते और पर्सनल कुक जॉर्जेस। और जब पॉल्यूस में विकिरण तंत्रिका को उकसाया गया, तो इवानोवो मेडिकल इंस्टीट्यूट के प्रमुख न्यूरोसर्जन, प्रोफेसर कार्तशोव को ऑपरेशन के लिए बुलाया गया। और बाकी जर्मन जनरलों ने यूएसएसआर में बहुत संतोषजनक ढंग से रहते हुए नियमित रूप से हमवतन-राजनीतिक प्रवासियों के साथ शराबी पेय के साथ विरोधी फासीवादी बयानबाजी को आगे बढ़ाया। यह सब विरोधी फासीवादियों के साथ सहयोग के लिए युद्ध के एक उच्च-श्रेणी के कैदी की स्वैच्छिक प्रेरण के लिए सोवियत विशेष सेवाओं की योजना का हिस्सा था। चौंतालीस वें वर्ष के शुरुआती अगस्त में, ऐसा लगता है, चरम उपायों की बारी आ गई है। पॉलस एक विकल्प के साथ सामना किया गया थाः या तो वह हिटलर के मार्शल थे और जीत के बाद उन्हें बाकी शीर्ष रैह की तरह न्याय दिया जाएगा, या वह जर्मन लोगों के मार्शल थे और "जर्मन अधिकारियों के संघ" के साथ पक्ष लेने के लिए बाध्य थे। कार्य का प्रभाव बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को हिटलर के प्रयास और उसके बाद आठ अगस्त को फील्ड मार्शल एरविन वॉन विटलेबेन, पॉलस के करीबी दोस्त के निष्पादन पर पड़ा। उसके बाद जर्मनों , और संघ में आधिकारिक प्रविष्टि, और यहां तक कि सत्रह जनरलों के दुर्भाग्यपूर्ण पत्र को वापस बुलाने की अपील की गई। फ्री जर्मनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा जनरल वॉन सीडलिट्ज़ थे, जिन्होंने शुरुआत से ही नए जर्मनी में अपनी जगह के लिए बड़ी योजनाएं बनाई थीं। पहले तो उसने वलासोव की इकाइयों के साथ समानता से युद्ध के कैदियों से अपनी सेना बनाने की कोशिश की। बाद में, यह जानकर कि यूएसएसआर, यूएसए और ग्रेट ब्रिटेन फासीवादी जर्मनी के पूर्ण आत्मसमर्पण को प्राप्त करेंगे, उन्होंने निर्वासन में खुद को राष्ट्रपति के रूप में प्रस्तावित किया, और फ्री जर्मनी समिति के शीर्ष को कैबिनेट द्वारा नियुक्त किया गया था। उनका कहना है कि ज़ेडलिट्ज़ के प्रत्यक्ष क्यूरेटर, युद्ध निदेशालय के प्रथम उप-प्रमुख और एनकेवीडी के प्रशिक्षु जनरल निकोलाई मेलनिकोव को इस तरह के अभिशापों के कारण खुद को गोली मारने के लिए मजबूर होना पड़ा। सभी सिडलिट्ज़ की पहल को सोवियत नेतृत्व के बीच समझ नहीं मिली, और पूर्व सहयोगियों के साथ संपर्क विशेष रूप से स्थापित नहीं किया गया था। जनवरी एक में, जनरल ने अधिकारियों और सैनिकों के मनोवैज्ञानिक उपचार में भाग लिया जो कोरसून-शेवकोवस्की शहर से घिरे थे। सीडलिट्ज़ ने एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस जर्मन डिवीजनों को आत्मसमर्पण करने के लिए मनाने की कोशिश की - उन्होंने सैन्य कमांडरों को दस व्यक्तिगत पत्र लिखे, उनचास बार रेडियो पर उन्होंने विरोध न करने की अपील की, लेकिन सब कुछ व्यर्थ हो गया। जनरल स्टैमरमैन के नेतृत्व में जर्मनों ने एक सफलता का आयोजन किया, बहुत सारे सैनिकों को खो दिया, और स्वयं सेडलिट्ज़ को "फ़ेटलैंड" में अनुपस्थित मौत की सजा सुनाई गई। एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में समिति की गतिविधियों में एक नया अध्याय शुरू हुआ, जब यह स्पष्ट हो गया कि जर्मनी की सीमाओं पर सैनिकों की एक सरल वापसी से कोई भी संतुष्ट नहीं होगा। "फ्री जर्मनी" की बयानबाजी सोवियत पक्ष के प्रभाव के बिना नहीं बदली और समिति के पक्ष में बड़े पैमाने पर बदलाव का आह्वान किया। कोई कहेगा कि इसका मतलब वास्तविक आत्मसमर्पण था, लेकिन सब कुछ कुछ अलग था। पूर्वी मोर्चे पर जर्मनों को नए जर्मनी में लोकतंत्र और स्वतंत्रता की बहाली के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपनी बाहों को बिछाने, सामने की रेखा को पार करने और पहले से ही सोवियत की ओर से आमंत्रित किया गया था। युद्ध के कैदियों के हिटलर-विरोधी संघ की कॉल निर्णायक नहीं थीं, और फ़्यूहर को अपने ही लोगों द्वारा युद्ध के अंत तक उखाड़ फेंका नहीं गया था। जर्मनी में लोकतंत्र सोवियत सैनिकों और सहयोगियों के संगीनों पर पेश किया जाना था। - लेखकः |
अगर आप भी कुछ ऐसा ही सब सोच रहे हैं, तो आज हम आपके लिए आईआरसीटीसी का शानदार तौहफा लेकर आएं हैं। शायद इस ऑफर से आपका वैलेंटाइन डे शानदार बन जाए। चलिए जानते हैं IRCTC के गोवा पैकेज के बारे में।
(सभी फोटो साभार : unsplash. com)
आईआरसीटीसी का ये पैकेज 5 दिन और 4 रात का होगा। अगर आप इस पैकेज में अकेले जाना चाहते हैं, तो इसकी कीमत 51 हजार रुपए पड़ेगी। वहीं अगर दो व्यक्ति जाते हैं तो उन्हें 40,500 रुपए देने पड़ेंगे। तीन लोगों के लिए बुकिंग कराने पर 38,150 रुपए प्रति व्यक्ति कीमत पड़ेगी।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट के अनुसार, गोवा के लिए इस टूर की शुरुआत 11 फरवरी से है, जो 7 मार्च तक चलेगी। कम बजट में गोवा घूमने का ये बेहद ही शानदार मौका है।
इस पैकेज में आपको न केवल नार्थ बल्कि साऊथ गोवा भी घुमाया जाएगा। लोगों को फ्लाइट से भुवनेश्वर, चंडीगढ़, इंदौर और पटना जैसी जगहों से गोवा ले जाया जाएगा। यात्रियों को आने-जाने के लिए टिकट से लेकर 5 ब्रेकफास्ट और 5 डिनर जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।
Winter Destination Wedding: ठंड की शादी में फुल फैशन मारना है तो दिल्ली नहीं,
साऊथ गोवा में मीरामार बीच, मांडवी नदी पर क्रूज, नॉर्थ गोवा में बागा बीच, स्नो पार्क जैसी जगहों पर घुमाया जाएगा। इसके अलावा खाने में आपको सी फूड रेस्तरां भी ले जा सकते हैं, और वाटर स्पोर्ट्स में की जाने वाली एक्टिविटीज भी इस पैकेज में शामिल हैं।
अगर आप इस टूर पैकेज में दिलचस्पी रखते हैं, तो आईआरसीटीसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर यहां के लिए बुकिंग कर सकते हैं। इसके अलावा, आईआरसीटीसी पर्यटक सुविधा केंद्र, क्षेत्रीय कार्यलय में भी बुकिंग का लाभ उठा सकते हैं। पैकेज से जुड़ी अगर और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आईआरसीटीसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें।
| अगर आप भी कुछ ऐसा ही सब सोच रहे हैं, तो आज हम आपके लिए आईआरसीटीसी का शानदार तौहफा लेकर आएं हैं। शायद इस ऑफर से आपका वैलेंटाइन डे शानदार बन जाए। चलिए जानते हैं IRCTC के गोवा पैकेज के बारे में। आईआरसीटीसी का ये पैकेज पाँच दिन और चार रात का होगा। अगर आप इस पैकेज में अकेले जाना चाहते हैं, तो इसकी कीमत इक्यावन हजार रुपए पड़ेगी। वहीं अगर दो व्यक्ति जाते हैं तो उन्हें चालीस,पाँच सौ रुपयापए देने पड़ेंगे। तीन लोगों के लिए बुकिंग कराने पर अड़तीस,एक सौ पचास रुपयापए प्रति व्यक्ति कीमत पड़ेगी। आईआरसीटीसी की वेबसाइट के अनुसार, गोवा के लिए इस टूर की शुरुआत ग्यारह फरवरी से है, जो सात मार्च तक चलेगी। कम बजट में गोवा घूमने का ये बेहद ही शानदार मौका है। इस पैकेज में आपको न केवल नार्थ बल्कि साऊथ गोवा भी घुमाया जाएगा। लोगों को फ्लाइट से भुवनेश्वर, चंडीगढ़, इंदौर और पटना जैसी जगहों से गोवा ले जाया जाएगा। यात्रियों को आने-जाने के लिए टिकट से लेकर पाँच ब्रेकफास्ट और पाँच डिनर जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। Winter Destination Wedding: ठंड की शादी में फुल फैशन मारना है तो दिल्ली नहीं, साऊथ गोवा में मीरामार बीच, मांडवी नदी पर क्रूज, नॉर्थ गोवा में बागा बीच, स्नो पार्क जैसी जगहों पर घुमाया जाएगा। इसके अलावा खाने में आपको सी फूड रेस्तरां भी ले जा सकते हैं, और वाटर स्पोर्ट्स में की जाने वाली एक्टिविटीज भी इस पैकेज में शामिल हैं। अगर आप इस टूर पैकेज में दिलचस्पी रखते हैं, तो आईआरसीटीसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर यहां के लिए बुकिंग कर सकते हैं। इसके अलावा, आईआरसीटीसी पर्यटक सुविधा केंद्र, क्षेत्रीय कार्यलय में भी बुकिंग का लाभ उठा सकते हैं। पैकेज से जुड़ी अगर और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आईआरसीटीसी की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें। |
अबूधाबी। अफगानिस्तान ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप के एक मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
अफगानिस्तान की टीम में चोट से उबरने के बाद स्पिनर मुजीब उर रहमान की वापसी हुई है, जबकि न्यूजीलैंड ने अंतिम एकादश कोई बदलाव नहीं किया है।
न्यूजीलैंड यह मैच जीतकर फाइनल में प्रवेश करने उतरेगी। न्यूजीलैंड की जीत के साथ ही भारत का इस विश्व कप में सफर यही थम जाएगा। अफगानिस्तान के मैच जीतने पर भारत के सेमीफाइनल में प्रवेश की संभावनाएं बढ़ जाएगी।
अगर अफगानिस्तान यह मैच जीत जाता है तो सारी बात नेट रन रेट पर आ जाएगी। फिर भारतीय टीम भी नामीबिया के खिलाफ अपने आखिरी मैच को उसी हिसाब से खेलेगी।
अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में ग्रुप दो के इस मुकाबले में मैदान पर तो दो टीमें खेलने उतरेंगी, लेकिन स्टेडियम में अफगानिस्तान टीम को भारतीय प्रशंसकों का भरपूर समर्थन मिलेगा।
दोनों के बीच यह पहला टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। रिकॉर्ड की बात करें न्यूजीलैंड ने जहां अबू धाबी के मैदान पर केवल एक ही टी-20 मैच हारा है, वहीं अफगानिस्तान ने यहां खेले 12 मुकाबलों में से नौ जीते हैं और तीन हारे हैं। अफगानिस्तान के पास अबू धाबी में खेलने का काफी अनुभव है।
अफगानिस्तानः मोहम्मद नबी (कप्तान), राशिद ख़ान, मुजीब-उर-रहमान, रहमानउल्लाह गुरबाज़ (विकेटकीपर), करीम जनत, हज़रतउल्लाह ज़ज़ई, गुलबदीन नईब, उस्मान घनी, नवीन-उल-हक़, शराफुद्दीन अशरफ, हामिद हसन, नजीबउल्लाह ज़दरान, हशमतउल्लाह शाहिदी, मोहम्मद शहज़ाद (विकेटकीपर), फ़रीद अहमद।
न्यूजीलैंड : केन विलियमसन (कप्तान), टॉड एस्टल, ट्रेंट बोल्ट, मार्क चैपमैन, डेवोन कोंवे, एडम मिल्ने, मार्टिन गुप्टिल, काइल जैमीसन, डेरिल मिशेल, जिम्मी नीशाम, ग्लेन फिलिप्स, मिशेल सेंटनेर, टिम सीफर्ट, ईश सोढी, टिम साउदी।
| अबूधाबी। अफगानिस्तान ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ टीबीस विश्व कप के एक मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। अफगानिस्तान की टीम में चोट से उबरने के बाद स्पिनर मुजीब उर रहमान की वापसी हुई है, जबकि न्यूजीलैंड ने अंतिम एकादश कोई बदलाव नहीं किया है। न्यूजीलैंड यह मैच जीतकर फाइनल में प्रवेश करने उतरेगी। न्यूजीलैंड की जीत के साथ ही भारत का इस विश्व कप में सफर यही थम जाएगा। अफगानिस्तान के मैच जीतने पर भारत के सेमीफाइनल में प्रवेश की संभावनाएं बढ़ जाएगी। अगर अफगानिस्तान यह मैच जीत जाता है तो सारी बात नेट रन रेट पर आ जाएगी। फिर भारतीय टीम भी नामीबिया के खिलाफ अपने आखिरी मैच को उसी हिसाब से खेलेगी। अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में ग्रुप दो के इस मुकाबले में मैदान पर तो दो टीमें खेलने उतरेंगी, लेकिन स्टेडियम में अफगानिस्तान टीम को भारतीय प्रशंसकों का भरपूर समर्थन मिलेगा। दोनों के बीच यह पहला टी-बीस अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। रिकॉर्ड की बात करें न्यूजीलैंड ने जहां अबू धाबी के मैदान पर केवल एक ही टी-बीस मैच हारा है, वहीं अफगानिस्तान ने यहां खेले बारह मुकाबलों में से नौ जीते हैं और तीन हारे हैं। अफगानिस्तान के पास अबू धाबी में खेलने का काफी अनुभव है। अफगानिस्तानः मोहम्मद नबी , राशिद ख़ान, मुजीब-उर-रहमान, रहमानउल्लाह गुरबाज़ , करीम जनत, हज़रतउल्लाह ज़ज़ई, गुलबदीन नईब, उस्मान घनी, नवीन-उल-हक़, शराफुद्दीन अशरफ, हामिद हसन, नजीबउल्लाह ज़दरान, हशमतउल्लाह शाहिदी, मोहम्मद शहज़ाद , फ़रीद अहमद। न्यूजीलैंड : केन विलियमसन , टॉड एस्टल, ट्रेंट बोल्ट, मार्क चैपमैन, डेवोन कोंवे, एडम मिल्ने, मार्टिन गुप्टिल, काइल जैमीसन, डेरिल मिशेल, जिम्मी नीशाम, ग्लेन फिलिप्स, मिशेल सेंटनेर, टिम सीफर्ट, ईश सोढी, टिम साउदी। |
पथरी की समस्या आजकल आम हो गई है. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक किसी भी उम्र के व्यक्ति को पथरी की समस्या हो जाती है. पथरी होने पर बहुत दर्द होता है. पथरी से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन करवाने की सलाह देते हैं. लेकिन आप कुछ घरेलू उपाय करके भी पथरी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.
तुलसी और शहद आपकी मदद कर सकता है. तुलसी के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. हालांकि तुलसी के पत्तों को चबाकर नहीं खाना चाहिए. इससे दांतों को नुकसान होता है. इसके अलावा शहद भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप तुलसी के पत्तों और शहद को मिलाकर खाते हैं तो पथरी की समस्या में बहुत आराम मिलता है. ऐसा करने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है. इसके अलावा शहद और तुलसी के पत्ते खाने से कई और फायदे होते हैं.
पथरी की समस्या से हमेशा छुटकारा पाने के लिए ट्राई करे ये घरेलु नुस्खे Reviewed by News pari on November 27, 2019 Rating:
| पथरी की समस्या आजकल आम हो गई है. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक किसी भी उम्र के व्यक्ति को पथरी की समस्या हो जाती है. पथरी होने पर बहुत दर्द होता है. पथरी से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन करवाने की सलाह देते हैं. लेकिन आप कुछ घरेलू उपाय करके भी पथरी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. तुलसी और शहद आपकी मदद कर सकता है. तुलसी के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. हालांकि तुलसी के पत्तों को चबाकर नहीं खाना चाहिए. इससे दांतों को नुकसान होता है. इसके अलावा शहद भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप तुलसी के पत्तों और शहद को मिलाकर खाते हैं तो पथरी की समस्या में बहुत आराम मिलता है. ऐसा करने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है. इसके अलावा शहद और तुलसी के पत्ते खाने से कई और फायदे होते हैं. पथरी की समस्या से हमेशा छुटकारा पाने के लिए ट्राई करे ये घरेलु नुस्खे Reviewed by News pari on November सत्ताईस, दो हज़ार उन्नीस Rating: |
इनडोर और बगीचे के पौधों को प्रसंस्करण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला "ग्रीन साबुन" औद्योगिक उत्पादन के कुछ पर्यावरण अनुकूल उत्पादों में से एक है। इसकी मदद से, फूल उत्पादक स्पाइडर पतंग , एफिड्स और अन्य हानिकारक कीड़ों से सफलतापूर्वक लड़ रहे हैं। आइए जानें कि पौधों के लिए "ग्रीन साबुन" में क्या शामिल है और इसे सही तरीके से कैसे लागू किया जाए।
इसलिए, इस उत्पाद की संरचना में फैटी एसिड, वनस्पति तेल और प्राकृतिक वसा, साथ ही पानी के पोटेशियम लवण शामिल हैं।
निर्देश के मुताबिक, कीटों से "ग्रीन साबुन" न केवल पहले से दिखाई देने वाली कीड़ों का मुकाबला करने के लिए बल्कि निवारक उद्देश्यों के लिए भी प्रयोग किया जाता है। बाद के मामले में, रोकथाम अनुसूची निम्नानुसार हैः प्रत्येक 7 दिनों में ब्रेक के साथ छिड़काव तीन बार किया जाता है।
पौधों की प्रसंस्करण "ग्रीन साबुन" निम्नानुसार बनाई गई हैः
- नीचे से प्राकृतिक तलछट बढ़ाने के लिए दवा के साथ बोतल हिलाओ।
- पानी के साथ साबुन की सही मात्रा को मिलाकर कामकाजी समाधान तैयार करें। आम तौर पर दवा के 200-300 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। अनुपात जितना अधिक होगा, उपचार प्रभाव जितना मजबूत होगा। वैसे, 1 बड़ा चमचा "ग्रीन साबुन" का 50 ग्राम रखा जाता है।
- फंगल रोगों के खिलाफ दो समाधानों का मिश्रण उपयोग किया जाता हैः 10 लीटर पानी और साबुन के 200 ग्राम + 2 लीटर पानी और 25 ग्राम तांबा सल्फेट। उन्हें विभिन्न कंटेनरों में तैयार होने की आवश्यकता है, और फिर मिश्रित किया जाना चाहिए।
- शुरुआती वसंत में पेड़ फेंकने के लिए, एक पायस का उपयोग करेंः "ग्रीन साबुन" का 40-50 ग्राम उबलते पानी के 1 लीटर में भंग कर दिया जाता है, जिसके बाद मिश्रण 50 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है, और इसमें 2 लीटर केरोसिन डाला जाता है। इस पायसनी में खट्टा क्रीम की स्थिरता होती है और इसे कई दिनों तक संग्रहित किया जाता है।
साबुन समाधान अक्सर कीटनाशकों का उपयोग करने के बाद फूलों के साथ छिड़काव किया जाता है। इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए, अपने कामकाजी समाधानों के लिए, अधिकतर सटीक, कीटनाशकों की तैयारी में "ग्रीन साबुन" जोड़ने की अनुमति है। अक्सर साबुन और लोक उपचार - शोरबा और infusions जोड़ें। साबुन और phytohormones, साथ ही उर्वरकों के साथ छिड़काव गठबंधन मत करो।
| इनडोर और बगीचे के पौधों को प्रसंस्करण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला "ग्रीन साबुन" औद्योगिक उत्पादन के कुछ पर्यावरण अनुकूल उत्पादों में से एक है। इसकी मदद से, फूल उत्पादक स्पाइडर पतंग , एफिड्स और अन्य हानिकारक कीड़ों से सफलतापूर्वक लड़ रहे हैं। आइए जानें कि पौधों के लिए "ग्रीन साबुन" में क्या शामिल है और इसे सही तरीके से कैसे लागू किया जाए। इसलिए, इस उत्पाद की संरचना में फैटी एसिड, वनस्पति तेल और प्राकृतिक वसा, साथ ही पानी के पोटेशियम लवण शामिल हैं। निर्देश के मुताबिक, कीटों से "ग्रीन साबुन" न केवल पहले से दिखाई देने वाली कीड़ों का मुकाबला करने के लिए बल्कि निवारक उद्देश्यों के लिए भी प्रयोग किया जाता है। बाद के मामले में, रोकथाम अनुसूची निम्नानुसार हैः प्रत्येक सात दिनों में ब्रेक के साथ छिड़काव तीन बार किया जाता है। पौधों की प्रसंस्करण "ग्रीन साबुन" निम्नानुसार बनाई गई हैः - नीचे से प्राकृतिक तलछट बढ़ाने के लिए दवा के साथ बोतल हिलाओ। - पानी के साथ साबुन की सही मात्रा को मिलाकर कामकाजी समाधान तैयार करें। आम तौर पर दवा के दो सौ-तीन सौ ग्राम प्रति दस लीटरटर पानी का उपयोग किया जाता है। अनुपात जितना अधिक होगा, उपचार प्रभाव जितना मजबूत होगा। वैसे, एक बड़ा चमचा "ग्रीन साबुन" का पचास ग्राम रखा जाता है। - फंगल रोगों के खिलाफ दो समाधानों का मिश्रण उपयोग किया जाता हैः दस लीटरटर पानी और साबुन के दो सौ ग्राम + दो लीटरटर पानी और पच्चीस ग्राम तांबा सल्फेट। उन्हें विभिन्न कंटेनरों में तैयार होने की आवश्यकता है, और फिर मिश्रित किया जाना चाहिए। - शुरुआती वसंत में पेड़ फेंकने के लिए, एक पायस का उपयोग करेंः "ग्रीन साबुन" का चालीस-पचास ग्राम उबलते पानी के एक लीटरटर में भंग कर दिया जाता है, जिसके बाद मिश्रण पचास डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है, और इसमें दो लीटरटर केरोसिन डाला जाता है। इस पायसनी में खट्टा क्रीम की स्थिरता होती है और इसे कई दिनों तक संग्रहित किया जाता है। साबुन समाधान अक्सर कीटनाशकों का उपयोग करने के बाद फूलों के साथ छिड़काव किया जाता है। इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए, अपने कामकाजी समाधानों के लिए, अधिकतर सटीक, कीटनाशकों की तैयारी में "ग्रीन साबुन" जोड़ने की अनुमति है। अक्सर साबुन और लोक उपचार - शोरबा और infusions जोड़ें। साबुन और phytohormones, साथ ही उर्वरकों के साथ छिड़काव गठबंधन मत करो। |
यह इयरफोंस Rs 799 की कीमत में मिल रहा है। इयर फोन को ब्लूटूथ के ज़रिए कनेक्ट कर सकते हैं और इसकी बैटरी लाइफ 6 घंटे की है। हेडफोन के साथ ही चार्जिंग USB केबल, इयर टिप्स भी शामिल हैं।
Bass का यह हेडफोन केवल Rs 999 में मिल रहा है और इसे ऑन-इयर टाइप डिज़ाइन दिया गया है। हेडफोन को ब्लूटूथ 5.0 सपोर्ट दिया गया है और डिवाइस में 10 मीटर की वायरलेस रेंज मिल रही है। हेडफोन में माइक भी दिया गया है।
Rs 999 की कीमत में आने वाला यह हेडफोन ब्लूटूथ सपोर्ट करता है और डिवाइस में FM रेडियो भी दिया गया है। इस हेडफोन को नेकबैंड डिज़ाइन दिया गया है। इसका वज़न 299 ग्राम है।
Zebronics का यह हेडफोन Rs 799 में मिल रहा है। इस हेडफोन को औक्स कनेक्टिविटी और SD कार्ड इनपुट के साथ खरीदा जा सकता है। इसकी फ्रीक्वेंसी रेंज 40Hz - 20kHz है। हेडफोन को Over Ear डिज़ाइन दिया गया है।
हज़ार रूपये से कम की कीमत में आने वाला यह हेडफोन भी ब्लूटूथ सपोर्ट करता है और साथ ही माइक सपोर्ट भी दिया गया है। अमेज़न पर इस हेडफोन को केवल Rs 899 की कीमत में बेचा जा रहा है।
| यह इयरफोंस सात सौ निन्यानवे रुपया की कीमत में मिल रहा है। इयर फोन को ब्लूटूथ के ज़रिए कनेक्ट कर सकते हैं और इसकी बैटरी लाइफ छः घंटाटे की है। हेडफोन के साथ ही चार्जिंग USB केबल, इयर टिप्स भी शामिल हैं। Bass का यह हेडफोन केवल नौ सौ निन्यानवे रुपया में मिल रहा है और इसे ऑन-इयर टाइप डिज़ाइन दिया गया है। हेडफोन को ब्लूटूथ पाँच.शून्य सपोर्ट दिया गया है और डिवाइस में दस मीटर की वायरलेस रेंज मिल रही है। हेडफोन में माइक भी दिया गया है। नौ सौ निन्यानवे रुपया की कीमत में आने वाला यह हेडफोन ब्लूटूथ सपोर्ट करता है और डिवाइस में FM रेडियो भी दिया गया है। इस हेडफोन को नेकबैंड डिज़ाइन दिया गया है। इसका वज़न दो सौ निन्यानवे ग्राम है। Zebronics का यह हेडफोन सात सौ निन्यानवे रुपया में मिल रहा है। इस हेडफोन को औक्स कनेक्टिविटी और SD कार्ड इनपुट के साथ खरीदा जा सकता है। इसकी फ्रीक्वेंसी रेंज चालीस हर्ट्ज़ - बीसkHz है। हेडफोन को Over Ear डिज़ाइन दिया गया है। हज़ार रूपये से कम की कीमत में आने वाला यह हेडफोन भी ब्लूटूथ सपोर्ट करता है और साथ ही माइक सपोर्ट भी दिया गया है। अमेज़न पर इस हेडफोन को केवल आठ सौ निन्यानवे रुपया की कीमत में बेचा जा रहा है। |
एल्यूमीनियम मुखौटा शहर को कैसे बदलता है?
क्या मैं मरम्मत के दौरान टाइलों पर टाइल लगा सकता हूं?
आपकी साइट पर डैफोडील्स की देखभाल कैसे करें?
क्या मुझे तारों टर्मिनलों का उपयोग करना चाहिए?
| एल्यूमीनियम मुखौटा शहर को कैसे बदलता है? क्या मैं मरम्मत के दौरान टाइलों पर टाइल लगा सकता हूं? आपकी साइट पर डैफोडील्स की देखभाल कैसे करें? क्या मुझे तारों टर्मिनलों का उपयोग करना चाहिए? |
Shah rukh's Mannat Value: बात जब बॉलीवुड की हो और शाहरुख़ और उनके घर 'मन्नत' की बात ना हो ये हो नहीं सकता। मुंबई जाने वाला आदमी सबसे पहले शाहरुख़ खान के बंगले को देखना चाहता है और उसके सामने फोटो खिचवाना चाहता है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब शाहरुख़ के मन्नत के बहार फैंस की भीड़ ना मची हो।
इसमें कोई शक नहीं है कि किंग खान और उनकी पत्नी गौरी ने अपने खूबसूरत घर को तहे दिल से सजाया है। मन्नत जितना खूबसरत बाहर से दीखता है उससे कई ज़्यादा भव्य उसका इंटीरियर है। लेकिन क्या आप जानते हैं मन्नत का नाम पहले मन्नत नहीं था, और इसका मालिक भी पहले कोई और था जिसे बाद में शाहरुख़ ने अपने नाम कर लिया।
अपने घर मन्नत का नाम मन्नत शाहरुख़ ने ही रखा है। इससे पहले इस आलीशान बंगले का नाम Villa Vienna था। शाहरुख़ से पहले इस संपत्ति के मालिक केकु गांधी नाम के एक शिल्पकार थे, जो एक गुजरती मूल के पारसी व्यक्ति थे। मन्नत के बगल में मौजूद Kekee Manzil के मालिक भी वही थे। Villa Vienna में केकु की मां रहती थी।
केकु के नाना मानेकजी बाटलीवाला ने बिज़नेस लॉस के कारण Villa Vienna को लीज पर दे दिया था और उनका पूरा परिवार Kekee Manzil में शिफ्ट हो गया था। इसके बाद Villa Vienna नरिमन दुबाश के नाम हो गया और वो वहाँ रहने लगे.
| Shah rukh's Mannat Value: बात जब बॉलीवुड की हो और शाहरुख़ और उनके घर 'मन्नत' की बात ना हो ये हो नहीं सकता। मुंबई जाने वाला आदमी सबसे पहले शाहरुख़ खान के बंगले को देखना चाहता है और उसके सामने फोटो खिचवाना चाहता है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब शाहरुख़ के मन्नत के बहार फैंस की भीड़ ना मची हो। इसमें कोई शक नहीं है कि किंग खान और उनकी पत्नी गौरी ने अपने खूबसूरत घर को तहे दिल से सजाया है। मन्नत जितना खूबसरत बाहर से दीखता है उससे कई ज़्यादा भव्य उसका इंटीरियर है। लेकिन क्या आप जानते हैं मन्नत का नाम पहले मन्नत नहीं था, और इसका मालिक भी पहले कोई और था जिसे बाद में शाहरुख़ ने अपने नाम कर लिया। अपने घर मन्नत का नाम मन्नत शाहरुख़ ने ही रखा है। इससे पहले इस आलीशान बंगले का नाम Villa Vienna था। शाहरुख़ से पहले इस संपत्ति के मालिक केकु गांधी नाम के एक शिल्पकार थे, जो एक गुजरती मूल के पारसी व्यक्ति थे। मन्नत के बगल में मौजूद Kekee Manzil के मालिक भी वही थे। Villa Vienna में केकु की मां रहती थी। केकु के नाना मानेकजी बाटलीवाला ने बिज़नेस लॉस के कारण Villa Vienna को लीज पर दे दिया था और उनका पूरा परिवार Kekee Manzil में शिफ्ट हो गया था। इसके बाद Villa Vienna नरिमन दुबाश के नाम हो गया और वो वहाँ रहने लगे. |
Sonipat Murder News गोहाना में खटीक बस्ती में विवाहिता की उसके पति ने तेजधार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। पति उसके चरित्र पर शक करता था। सास जब गोहाना में रैली में गई तो वारदात को अंजाम दिया। सास घर लौटी तो उसे वारदात का पता चला।
सोनीपत, जागरण संवाददाता। गोहाना में खटीक बस्ती में विवाहिता की उसके पति ने तेजधार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। पति उसके चरित्र पर शक करता था। सास जब गोहाना में रैली में गई तो वारदात को अंजाम दिया। सास घर लौटी तो उसे वारदात का पता चला।
महिला के लहूलुहान हालात में मिलने पर स्वजन और पड़ोसी उसे बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल लेकर गए। वहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया।
खटीक बस्ती के शिक्षा ने पुलिस को बताया कि उसका लड़का आशकरण उर्फ बिट्टू लगभग पांच साल पहले कुंडली में एक फैक्ट्री में काम करता था। वहां पर उसने उत्तरप्रदेश में फैजाबाद की रुकिया उर्फ पूजा से शादी की थी। पूजा भी फैक्ट्री में काम करती थी। उनका दो वर्ष का बेटा कार्तिक है। दोनों लगभग एक सप्ताह पहले गोहाना में अपने घर आए थे।
बिट्टू शराब पीने का आदी है और वह अपनी पत्नी पूजा के चरित्र पर शक करता है। बिट्टू ने रविवार सुबह ही शराब पीनी शुरू कर दी थी। वह बिट्टू और पूजा को घर पर छोड़कर गोहाना में सब्जी मंडी में भाजपा की रैली में चली गई थी। रात को जब वह घर वापस आई तो पूजा घर में चारपाई पर लहूलुहान पड़ी थी।
उसके शोर मचाने पर पड़ोसी पहुंचे और पूजा को बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिक्षा ने पुलिस को बताया कि किसी के बहकावे में आकर बिट्टू ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है।
शहर थाना गोहाना की पुलिस सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची। उसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
| Sonipat Murder News गोहाना में खटीक बस्ती में विवाहिता की उसके पति ने तेजधार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। पति उसके चरित्र पर शक करता था। सास जब गोहाना में रैली में गई तो वारदात को अंजाम दिया। सास घर लौटी तो उसे वारदात का पता चला। सोनीपत, जागरण संवाददाता। गोहाना में खटीक बस्ती में विवाहिता की उसके पति ने तेजधार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। पति उसके चरित्र पर शक करता था। सास जब गोहाना में रैली में गई तो वारदात को अंजाम दिया। सास घर लौटी तो उसे वारदात का पता चला। महिला के लहूलुहान हालात में मिलने पर स्वजन और पड़ोसी उसे बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल लेकर गए। वहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया। खटीक बस्ती के शिक्षा ने पुलिस को बताया कि उसका लड़का आशकरण उर्फ बिट्टू लगभग पांच साल पहले कुंडली में एक फैक्ट्री में काम करता था। वहां पर उसने उत्तरप्रदेश में फैजाबाद की रुकिया उर्फ पूजा से शादी की थी। पूजा भी फैक्ट्री में काम करती थी। उनका दो वर्ष का बेटा कार्तिक है। दोनों लगभग एक सप्ताह पहले गोहाना में अपने घर आए थे। बिट्टू शराब पीने का आदी है और वह अपनी पत्नी पूजा के चरित्र पर शक करता है। बिट्टू ने रविवार सुबह ही शराब पीनी शुरू कर दी थी। वह बिट्टू और पूजा को घर पर छोड़कर गोहाना में सब्जी मंडी में भाजपा की रैली में चली गई थी। रात को जब वह घर वापस आई तो पूजा घर में चारपाई पर लहूलुहान पड़ी थी। उसके शोर मचाने पर पड़ोसी पहुंचे और पूजा को बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कालेज के अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिक्षा ने पुलिस को बताया कि किसी के बहकावे में आकर बिट्टू ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। शहर थाना गोहाना की पुलिस सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची। उसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। |
आईपीएल सीजन 11 में मंगलवार को मुंबई इंडियन्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को 46 रन से हराकर आईपीएल में अपना खाता खोलने में सफल रहा।
आईपीएल सीजन 11 में मंगलवार को मुंबई इंडियन्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को 46 रन से हराकर आईपीएल में अपना खाता खोलने में सफल रहा। मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने 94 रनों की पारी खेली जिसके जवाब में आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने 62 गेंदों पर दस चौकों और पांच छक्कों की मदद से 92 रनों की पारी खेली।
हालांकि आरसीबी यह मैच हार गई लेकिन कोहली ने जबरदस्त पारी खेली। कोहली की इस पारी से बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी। उनकी तारीफ में अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए रवीना ने लिखा- मेरा दिल विराट के लिए बाहर आया जा रहा है। किसी इकलौते योद्धा की तरह उसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए लड़ाई की है। बहुत शानदार खेला।
रोहित शर्मा ने 52 गेंदों पर दस चौकों और पांच छक्कों की मदद से 94 और एविन लुईस (42 गेंदों पर 65 रन) ने तीसरे विकेट के लिए 108 रनों की साझेदारी निभाई। इन दोनों बल्लेबाजों की शानदार साझेदारी की मदद से मुंबई इंडियन्स ने पहली दो गेंदों पर लगे दो झटकों से उबरकर छह विकेट के नुकसान पर 213 रनों का पहाड़ सा स्कोर खड़ा किया था।
इसके जवाब में आरसीबी ने खराब प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट के नुकसान पर सिर्फ 167 रन ही बना सकी। कप्तान विराट कोहली (नाबाद 92 ) के अलावा उनका कोई भी बल्लेबाज कोहली का साथ नहीं दे पाया।
| आईपीएल सीजन ग्यारह में मंगलवार को मुंबई इंडियन्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को छियालीस रन से हराकर आईपीएल में अपना खाता खोलने में सफल रहा। आईपीएल सीजन ग्यारह में मंगलवार को मुंबई इंडियन्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को छियालीस रन से हराकर आईपीएल में अपना खाता खोलने में सफल रहा। मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने चौरानवे रनों की पारी खेली जिसके जवाब में आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने बासठ गेंदों पर दस चौकों और पांच छक्कों की मदद से बानवे रनों की पारी खेली। हालांकि आरसीबी यह मैच हार गई लेकिन कोहली ने जबरदस्त पारी खेली। कोहली की इस पारी से बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी। उनकी तारीफ में अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए रवीना ने लिखा- मेरा दिल विराट के लिए बाहर आया जा रहा है। किसी इकलौते योद्धा की तरह उसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए लड़ाई की है। बहुत शानदार खेला। रोहित शर्मा ने बावन गेंदों पर दस चौकों और पांच छक्कों की मदद से चौरानवे और एविन लुईस ने तीसरे विकेट के लिए एक सौ आठ रनों की साझेदारी निभाई। इन दोनों बल्लेबाजों की शानदार साझेदारी की मदद से मुंबई इंडियन्स ने पहली दो गेंदों पर लगे दो झटकों से उबरकर छह विकेट के नुकसान पर दो सौ तेरह रनों का पहाड़ सा स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में आरसीबी ने खराब प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट के नुकसान पर सिर्फ एक सौ सरसठ रन ही बना सकी। कप्तान विराट कोहली के अलावा उनका कोई भी बल्लेबाज कोहली का साथ नहीं दे पाया। |
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